raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
( ओम् ) यह ओंकार शब्द परमेश्वर का सर्वोत्तम नाम हैं, क्योंकि इस में जो "अ" "कु" और "म्" तीन अक्षर मिल कर एक ( ओ३म् ) समुदाय हुआ है। इस एक नाम से परमेश्वर के बहुत नाम आ जाते हैं। जैसे --अकार से विराट् 1 अग्नि २ और विश्वादि ३ प्रकार से हिरण्यगर्भ ४, वायु ५ और तैजसादि ६ प्रकार से ईश्वर ७, आदित्य और अज्ञादि नामों का बांचक और ग्राहक है। प्रकरणानुकूल ये सब नाम परमेश्वर ही के हैं।"
हम उपनिषद के प्रमाण से अभी वतला 'चुके है कि 'ओम्' 'पर' और 'अपर' ब्रह्म का वाचक है । प्राकृतिक जगत् के सम्बंध से जब ब्रह्म का वर्णन किया जाता है, अर्थात जब यह बतलाया जाता है, कि यह सारा जगत् ब्रह्म का शरीर है और वह आप इस का अन्तर आत्मा है तो ब्रह्म के इस स्वरूप को 'अपर' चा शवल ब्रह्म का नाम दिया जाता है। किंतु इसके अतिरिक्त उस ब्रह्म का एक शुद्ध स्वरूप है जिसको इस बाह्म जगत की अपेक्षा नहीं वह 'पर ब्रह्म' का शुद्ध ब्रह्म कहलाता है । अर्थात् प्राकृतिक जगत के सम्बंध का ख्याल न करते हुए वह ब्रह्म अपने अरूप में कैसा है ? उसका निज स्वरूप जो इस बाह्य जगत् पर निर्भर
( १ ) स्वप्रकाश ( २ ) ज्ञान स्वरूप, सर्वज्ञ, जानने, प्राप्त होने और पूजा करने योग्य । ( ३ ) जिसमें भाकाशादि सब भूत प्रवेश करते है अथवा जो इन में व्याप्त होके प्रविष्ट हो रहा है । ( ४ ) सूर्यादि तेजस्वी पदार्थों का गर्भ नाम उत्पत्ति और निवास स्थान ( ५ ) चराचर जगत् का धाग्ण, जीवन और मलयकर्ता और सब बलवानों से बलवान ( ३ ) स्वयं प्रकाश और सूर्यादि तेजस्वी लोकों का प्रकाशक ( ७ ) ऐश्वर्य का स्वामी (८) अविनाशी ( ९ ) निर्भ्रान्त ज्ञान युक्त, घर जगत के व्यवहार को यथावत् जानने वाला ।
|
यह ओंकार शब्द परमेश्वर का सर्वोत्तम नाम हैं, क्योंकि इस में जो "अ" "कु" और "म्" तीन अक्षर मिल कर एक समुदाय हुआ है। इस एक नाम से परमेश्वर के बहुत नाम आ जाते हैं। जैसे --अकार से विराट् एक अग्नि दो और विश्वादि तीन प्रकार से हिरण्यगर्भ चार, वायु पाँच और तैजसादि छः प्रकार से ईश्वर सात, आदित्य और अज्ञादि नामों का बांचक और ग्राहक है। प्रकरणानुकूल ये सब नाम परमेश्वर ही के हैं।" हम उपनिषद के प्रमाण से अभी वतला 'चुके है कि 'ओम्' 'पर' और 'अपर' ब्रह्म का वाचक है । प्राकृतिक जगत् के सम्बंध से जब ब्रह्म का वर्णन किया जाता है, अर्थात जब यह बतलाया जाता है, कि यह सारा जगत् ब्रह्म का शरीर है और वह आप इस का अन्तर आत्मा है तो ब्रह्म के इस स्वरूप को 'अपर' चा शवल ब्रह्म का नाम दिया जाता है। किंतु इसके अतिरिक्त उस ब्रह्म का एक शुद्ध स्वरूप है जिसको इस बाह्म जगत की अपेक्षा नहीं वह 'पर ब्रह्म' का शुद्ध ब्रह्म कहलाता है । अर्थात् प्राकृतिक जगत के सम्बंध का ख्याल न करते हुए वह ब्रह्म अपने अरूप में कैसा है ? उसका निज स्वरूप जो इस बाह्य जगत् पर निर्भर स्वप्रकाश ज्ञान स्वरूप, सर्वज्ञ, जानने, प्राप्त होने और पूजा करने योग्य । जिसमें भाकाशादि सब भूत प्रवेश करते है अथवा जो इन में व्याप्त होके प्रविष्ट हो रहा है । सूर्यादि तेजस्वी पदार्थों का गर्भ नाम उत्पत्ति और निवास स्थान चराचर जगत् का धाग्ण, जीवन और मलयकर्ता और सब बलवानों से बलवान स्वयं प्रकाश और सूर्यादि तेजस्वी लोकों का प्रकाशक ऐश्वर्य का स्वामी अविनाशी निर्भ्रान्त ज्ञान युक्त, घर जगत के व्यवहार को यथावत् जानने वाला ।
|
राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में शनिवार को दिनभर बारिश होती रही। बारिश के बीच बिजली गिरने से 3 महिलाओं की मौत हो गई। 8 लोग गंभीर झुलस गए। झुलसे लोगों को जोधपुर रेफर किया गया है। घटना पाली में आज दोपहर रोहट थाना क्षेत्र में हुई।
SHO उदय सिंह ने बताया कि चोटिला गांव के पास जसंवत सिंह का खेत है। खेत में शनिवार को मूंग की फसल की कटाई की जा रही थी। दोपहर करीब साढ़े 3 बजे बरसात आने पर काम कर रहे किसान एक पेड़ के नीचे जाकर खड़े हो गए। इस दौरान पेड़ पर बिजली गिर गई।
(फोटो-वीडियो : शुभम कंसारा, रोहट)
बिजली गिरने से पेड़ के नीचे खड़ी 27 साल की रुकमा देवी, 52 साल की प्रेमी देवी और 35 साल की रूपी देवी की मौके पर ही मौत हो गई।
20 साल के रघुवीर सरगरा, 19 साल के दुर्गाराम सरगरा, 40 साल के मानाराम सरगरा, 29 साल के कृष्णपाल सिंह और 18 साल के पूरण सरगरा, 31 साल के कैलाश गिरी, 58 साल के हनुवंत सिंह और 21 साल के दिनेश गिरी झुलस गए। सूचना पर विधायक ज्ञानचंद पारख और कांग्रेस नेता महावीर सिंह सुकरलाई भी रोहट हॉस्पिटल पहुंचे।
दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है, जहां से वह गुजर सके। यह आकाशीय बिजली, बिजली के पोल के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसके संपर्क में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है।
आकाशीय बिजली का तापमान सूर्य के ऊपरी सतह से भी ज्यादा होता है। इसकी क्षमता तीन सौ किलोवॉट मतलब 12. 5 करोड़ वॉट से ज्यादा चार्ज की होती है। यह बिजली मिली सेकेंड से भी कम समय के लिए ठहरती है। यह लोगों के सिर, गले और कंधों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। दोपहर के वक्त इसके गिरने की आशंका ज्यादा होती है।
ये भी पढ़ेंः
चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र के गांव जोधा पटेल की खेड़ी में भी शनिवार दोपहर करीब 2. 30 बजे तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरी। इस दौरान बारिश से बचाव के लिए बड़ के पेड़ नीचे बैठे दो युवक और एक बच्चा झुलस गए। तीनों को बेगूं सीएचसी लाया गया। इलाज के दौरान 32 साल के सूड़ा पुत्र बाबू लाल की मौत हो गई। वहीं मृतक का 7 साल का बेटा अंकित और 24 साल का विनोद पुत्र मदनलाल को बेगूं से चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल रैफर किया गया।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में शनिवार को दिनभर बारिश होती रही। बारिश के बीच बिजली गिरने से तीन महिलाओं की मौत हो गई। आठ लोग गंभीर झुलस गए। झुलसे लोगों को जोधपुर रेफर किया गया है। घटना पाली में आज दोपहर रोहट थाना क्षेत्र में हुई। SHO उदय सिंह ने बताया कि चोटिला गांव के पास जसंवत सिंह का खेत है। खेत में शनिवार को मूंग की फसल की कटाई की जा रही थी। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे बरसात आने पर काम कर रहे किसान एक पेड़ के नीचे जाकर खड़े हो गए। इस दौरान पेड़ पर बिजली गिर गई। बिजली गिरने से पेड़ के नीचे खड़ी सत्ताईस साल की रुकमा देवी, बावन साल की प्रेमी देवी और पैंतीस साल की रूपी देवी की मौके पर ही मौत हो गई। बीस साल के रघुवीर सरगरा, उन्नीस साल के दुर्गाराम सरगरा, चालीस साल के मानाराम सरगरा, उनतीस साल के कृष्णपाल सिंह और अट्ठारह साल के पूरण सरगरा, इकतीस साल के कैलाश गिरी, अट्ठावन साल के हनुवंत सिंह और इक्कीस साल के दिनेश गिरी झुलस गए। सूचना पर विधायक ज्ञानचंद पारख और कांग्रेस नेता महावीर सिंह सुकरलाई भी रोहट हॉस्पिटल पहुंचे। दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है, जहां से वह गुजर सके। यह आकाशीय बिजली, बिजली के पोल के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसके संपर्क में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। आकाशीय बिजली का तापमान सूर्य के ऊपरी सतह से भी ज्यादा होता है। इसकी क्षमता तीन सौ किलोवॉट मतलब बारह. पाँच करोड़ वॉट से ज्यादा चार्ज की होती है। यह बिजली मिली सेकेंड से भी कम समय के लिए ठहरती है। यह लोगों के सिर, गले और कंधों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। दोपहर के वक्त इसके गिरने की आशंका ज्यादा होती है। ये भी पढ़ेंः चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र के गांव जोधा पटेल की खेड़ी में भी शनिवार दोपहर करीब दो. तीस बजे तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरी। इस दौरान बारिश से बचाव के लिए बड़ के पेड़ नीचे बैठे दो युवक और एक बच्चा झुलस गए। तीनों को बेगूं सीएचसी लाया गया। इलाज के दौरान बत्तीस साल के सूड़ा पुत्र बाबू लाल की मौत हो गई। वहीं मृतक का सात साल का बेटा अंकित और चौबीस साल का विनोद पुत्र मदनलाल को बेगूं से चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल रैफर किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
गर्मियों में पैरों में रुखापन आ जाता हैं। गर्मियों में एड़िया फटना आम परेशानी होती है। स्प्रिंग सीजन में पैरों का ख्याल रखने के लिए महीने में एक बार पैडीक्योर करवाना चाहिए।
घर पर क्रीम, पैरों को मॉइस्चराइज करके पैरों का ख्याल रख सकते हैं। पैरों का ख्याल रखने के लिए पैरों पर स्क्रब करें। स्क्रब करने से त्वचा कोमल रहेगी।
पैरों की सफाई करने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। ध्यान रखना चाहिए कि पैरों को ज्यादा गर्म पानी में नहीं डालना चाहिए। क्योंकि गर्म पानी से पैर की त्वचा रुखी हो जाती हैं। पैर को साफ करने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करना चाहिए।
पैरों की सफाई के लिए हफ्ते में एक बार पैर की उंगलियों को साफ करना चाहिए। पैरो की सफाई करते समय नाखूनों में क्यूटिकल ऑयल रगड़ें और 10 मिनट के लिए पैरों को गुनगुने पानी में रखें। हफ्ते में दो बार पेडीक्योर करवा सकती हैं।
पैरों को कोमल बनाने के लिए पैरों को अच्छे से मॉइश्चराइज करना चाहिए। रात को पैर पर क्रीम लगाकर सोना चाहिए। क्रीम लगाने से पैर मुलायम हो जाते हैं। फुट क्रीम से उंगुलियों की मसाज करनी चाहिए।
|
गर्मियों में पैरों में रुखापन आ जाता हैं। गर्मियों में एड़िया फटना आम परेशानी होती है। स्प्रिंग सीजन में पैरों का ख्याल रखने के लिए महीने में एक बार पैडीक्योर करवाना चाहिए। घर पर क्रीम, पैरों को मॉइस्चराइज करके पैरों का ख्याल रख सकते हैं। पैरों का ख्याल रखने के लिए पैरों पर स्क्रब करें। स्क्रब करने से त्वचा कोमल रहेगी। पैरों की सफाई करने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। ध्यान रखना चाहिए कि पैरों को ज्यादा गर्म पानी में नहीं डालना चाहिए। क्योंकि गर्म पानी से पैर की त्वचा रुखी हो जाती हैं। पैर को साफ करने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करना चाहिए। पैरों की सफाई के लिए हफ्ते में एक बार पैर की उंगलियों को साफ करना चाहिए। पैरो की सफाई करते समय नाखूनों में क्यूटिकल ऑयल रगड़ें और दस मिनट के लिए पैरों को गुनगुने पानी में रखें। हफ्ते में दो बार पेडीक्योर करवा सकती हैं। पैरों को कोमल बनाने के लिए पैरों को अच्छे से मॉइश्चराइज करना चाहिए। रात को पैर पर क्रीम लगाकर सोना चाहिए। क्रीम लगाने से पैर मुलायम हो जाते हैं। फुट क्रीम से उंगुलियों की मसाज करनी चाहिए।
|
खसरा और रूबेला (Eliminate MR) दोनों ही बीमारियां छोटे बच्चों में मृत्यु और विकलांगता का कारण बनती हैं। यह दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए एक बड़ी चिंता है। इससे हर साल हजारों बच्चे अपने जीवन में कई परेशानियों का सामना करने को मजबूर होते हैं। इससे निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ (WHO) ने इसे 2023 तक इस क्षेत्र (Eliminate MR) से पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।
ज्यादातर बच्चों को प्रभावित करने वाले संक्रमण खसरा और रूबेला (Eliminate MR) उनके लिए जीवन भर की जटिलताएं पैदा कर देते हैं। इसमें न सिर्फ उनका जीवन जटिल हो जाता है, बल्कि कई बार ये उनकी मृत्यु का भी कारण बनते हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सदस्य देशों ने 2023 तक इन दोनों बीमारियों को खत्म करने का संकल्प लिया है।
डब्ल्यूएचओ में दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह का कहना है कि दोनों (Eliminate MR) बीमारियों को खत्म करने का नया लक्ष्य मौजूदा सरकार की राजनीतिक प्रतिबद्धता, इस बीमारी से निपटने के उनके प्रयासों और विभिन्न माध्यमों से इस दिशा में की गई प्रगति पर निर्भर करता है। नई दिल्ली में डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रीय समिति के 72वें सेशन में इन दोनों बीमारियों (Eliminate MR) को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित करना इस दिशा में ही एक कदम है।
- बेलगावी में रूबेला की वैक्सीन लगने के बाद 3 बच्चों की मौत, जानिए आखिर बच्चों को क्यों दी जाती है रूबेला की वैक्सीन?
खसरा और रूबेला (Eliminate MR) का उन्मूलन 2014 से ही प्राथमिकता रही है। इस क्षेत्र के पांच देशों ने खसरे को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है। इनमें भूटान, डीपीआर कोरिया, मालदीव, श्रीलंका और तिमोर-लेस्ते शामिल हैं। दूसरी और रूबेला को छह देशों बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका और तिमोर-लेस्ते ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।
लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, सदस्य देशों ने अपने-अपने देशों में टीकाकरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए संकल्प लिया। इसमें पहले से भी अधिक सक्रिय लैब टेस्टिंग और केस-आधारित मॉनीटरिंग सिस्टम शामिल है। साथ ही इसके लिए अधिकारियों को भी इन दोनों बीमारियों के प्रकोप और प्रतिक्रिया पर अधिक सक्रिय रूप से तैयार होना होगा। डब्लूएचओ के अनुसार, सदस्य देशों ने "खसरा और रूबेला उन्मूलन 2020-2024 के लिए रणनीतिक योजना" को अपनाया, जो क्षेत्र के उन्मूलन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रोड मैप और फ़ोकस क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है।
क्षेत्रीय निदेशक ने कहा, "खसरा को खत्म करने से रूबेला/सीआरएस को खत्म करने के दौरान क्षेत्र में एक साल में होने वाली 500,000 मौतों को रोका जा सकेगा। वहीं रूबेला से होने वाली लगभग 55,000 मौतों को रोककर गर्भवती महिला और शिशुओं के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देगा। "
रुबेला की शुरूआत हल्के बुखार और लाल दानों के साथ होती है। यह दाने चेहरे और गर्दन से शुरू होते हैं और फिर पूरे शरीर में फैल जाते हैं। रुबेला एक व्यक्ति के खांसने या छींकने से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। रुबेला तेजी से फैलने वाली बीमारी है। इसका डर उन लोगों में ज्यादा होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। यह छोटे बच्चों और गर्भस्थ शिशुओं को जल्दी प्रभावित करता है।
बच्चों की दो आम बीमारियां खसरा और रूबेला से एम आर (MR vaccine) के वैक्सीन के द्वारा बचा सकते हैं। खसरा में शिशु को बुखार, त्वचा पे चकत्ते, खांसी, नाक का बहना और आँखों में पानी के लक्षण देखने को मिलते हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति में शिशु को कान का संक्रमण, दस्त, निमोनिया, मस्तिष्क को छती और अंतिम चरण में मृत्यु भी हो सकती है।
Total Wellness is now just a click away.
|
खसरा और रूबेला दोनों ही बीमारियां छोटे बच्चों में मृत्यु और विकलांगता का कारण बनती हैं। यह दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए एक बड़ी चिंता है। इससे हर साल हजारों बच्चे अपने जीवन में कई परेशानियों का सामना करने को मजबूर होते हैं। इससे निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ ने इसे दो हज़ार तेईस तक इस क्षेत्र से पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। ज्यादातर बच्चों को प्रभावित करने वाले संक्रमण खसरा और रूबेला उनके लिए जीवन भर की जटिलताएं पैदा कर देते हैं। इसमें न सिर्फ उनका जीवन जटिल हो जाता है, बल्कि कई बार ये उनकी मृत्यु का भी कारण बनते हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र से विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने दो हज़ार तेईस तक इन दोनों बीमारियों को खत्म करने का संकल्प लिया है। डब्ल्यूएचओ में दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह का कहना है कि दोनों बीमारियों को खत्म करने का नया लक्ष्य मौजूदा सरकार की राजनीतिक प्रतिबद्धता, इस बीमारी से निपटने के उनके प्रयासों और विभिन्न माध्यमों से इस दिशा में की गई प्रगति पर निर्भर करता है। नई दिल्ली में डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रीय समिति के बहत्तरवें सेशन में इन दोनों बीमारियों को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित करना इस दिशा में ही एक कदम है। - बेलगावी में रूबेला की वैक्सीन लगने के बाद तीन बच्चों की मौत, जानिए आखिर बच्चों को क्यों दी जाती है रूबेला की वैक्सीन? खसरा और रूबेला का उन्मूलन दो हज़ार चौदह से ही प्राथमिकता रही है। इस क्षेत्र के पांच देशों ने खसरे को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है। इनमें भूटान, डीपीआर कोरिया, मालदीव, श्रीलंका और तिमोर-लेस्ते शामिल हैं। दूसरी और रूबेला को छह देशों बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका और तिमोर-लेस्ते ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, सदस्य देशों ने अपने-अपने देशों में टीकाकरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए संकल्प लिया। इसमें पहले से भी अधिक सक्रिय लैब टेस्टिंग और केस-आधारित मॉनीटरिंग सिस्टम शामिल है। साथ ही इसके लिए अधिकारियों को भी इन दोनों बीमारियों के प्रकोप और प्रतिक्रिया पर अधिक सक्रिय रूप से तैयार होना होगा। डब्लूएचओ के अनुसार, सदस्य देशों ने "खसरा और रूबेला उन्मूलन दो हज़ार बीस-दो हज़ार चौबीस के लिए रणनीतिक योजना" को अपनाया, जो क्षेत्र के उन्मूलन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रोड मैप और फ़ोकस क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है। क्षेत्रीय निदेशक ने कहा, "खसरा को खत्म करने से रूबेला/सीआरएस को खत्म करने के दौरान क्षेत्र में एक साल में होने वाली पाँच सौ,शून्य मौतों को रोका जा सकेगा। वहीं रूबेला से होने वाली लगभग पचपन,शून्य मौतों को रोककर गर्भवती महिला और शिशुओं के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देगा। " रुबेला की शुरूआत हल्के बुखार और लाल दानों के साथ होती है। यह दाने चेहरे और गर्दन से शुरू होते हैं और फिर पूरे शरीर में फैल जाते हैं। रुबेला एक व्यक्ति के खांसने या छींकने से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। रुबेला तेजी से फैलने वाली बीमारी है। इसका डर उन लोगों में ज्यादा होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। यह छोटे बच्चों और गर्भस्थ शिशुओं को जल्दी प्रभावित करता है। बच्चों की दो आम बीमारियां खसरा और रूबेला से एम आर के वैक्सीन के द्वारा बचा सकते हैं। खसरा में शिशु को बुखार, त्वचा पे चकत्ते, खांसी, नाक का बहना और आँखों में पानी के लक्षण देखने को मिलते हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति में शिशु को कान का संक्रमण, दस्त, निमोनिया, मस्तिष्क को छती और अंतिम चरण में मृत्यु भी हो सकती है। Total Wellness is now just a click away.
|
मेलबर्न, (एएफपी)। आस्ट्रेलिया ने श्रीलंका के खिलाफ बाक्सिंग डे टेस्ट के लिये जैकसन बर्ड को टीम में शामिल किया है जबकि कप्तान माइकल क्लार्क को फिटनेस साबित करने के लिये अभी और समय दिया गया है। बर्ड और पीटर सिडल गेंदबाजी का जिम्मा संभालेंगे जबकि मिशेल स्टार्क को रोटेशन नीति के तहत आराम दिया गया है। मिशेल जानसन ने घायल बेन हिलफेनहास की जगह ली है जबकि स्पिनर नाथन लियोन ने टीम में जगह बरकरार रखी है। आस्ट्रेलिया ने तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला का पहला टेस्ट पिछले सप्ताह होबर्ट में 137 रन से जीता था। क्लार्क को टीम का कप्तान बनाया गया है लेकिन उनकी फिटनेस पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं। होबर्ट टेस्ट में उनकी मांसपेशी में खिंचाव आ गया था। टीम - माइकल क्लार्क (कप्तान), डेविड वार्नर, एड कोवान, फिल ह्यूजेस, शेन वाटसन, माइक हसी, मैट वेड, पीटर सिडल, मिशेल जानसन, नाथन लियोन, जैकसन बर्ड, उस्मान ख्वाजा।
|
मेलबर्न, । आस्ट्रेलिया ने श्रीलंका के खिलाफ बाक्सिंग डे टेस्ट के लिये जैकसन बर्ड को टीम में शामिल किया है जबकि कप्तान माइकल क्लार्क को फिटनेस साबित करने के लिये अभी और समय दिया गया है। बर्ड और पीटर सिडल गेंदबाजी का जिम्मा संभालेंगे जबकि मिशेल स्टार्क को रोटेशन नीति के तहत आराम दिया गया है। मिशेल जानसन ने घायल बेन हिलफेनहास की जगह ली है जबकि स्पिनर नाथन लियोन ने टीम में जगह बरकरार रखी है। आस्ट्रेलिया ने तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला का पहला टेस्ट पिछले सप्ताह होबर्ट में एक सौ सैंतीस रन से जीता था। क्लार्क को टीम का कप्तान बनाया गया है लेकिन उनकी फिटनेस पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं। होबर्ट टेस्ट में उनकी मांसपेशी में खिंचाव आ गया था। टीम - माइकल क्लार्क , डेविड वार्नर, एड कोवान, फिल ह्यूजेस, शेन वाटसन, माइक हसी, मैट वेड, पीटर सिडल, मिशेल जानसन, नाथन लियोन, जैकसन बर्ड, उस्मान ख्वाजा।
|
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के दिन राशि के अनुसार इन उपायों को करने से माता नौकरी में उन्नति और धन दौलत का वरदान देती हैं। अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विधान है।
चैत्र नवरात्रि का अष्टमी के दिन माँ दुर्गा के महागौरी के स्वरूप की पूजा की जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार अष्टमी के दिन विशेष शुभ योग बन रहा है।
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विधान है। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी इस बार 25 मार्च 2018 (रविवार) के दिन पड़ रही है। ज्योतिषी पंडित धनंजय पाण्डेय के अनुसार इस दिन राशि के अनुसार कन्या पूजन के बाद इन चीजों को देने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि की अष्टमी के दिन राशि के अनुसार इन उपायों को करने से माता नौकरी में उन्नति और धन दौलत का वरदान देती हैं। अगली स्लाइड्स में राशि के अनुसार किस कन्या पूजन प्रकार करें।
|
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के दिन राशि के अनुसार इन उपायों को करने से माता नौकरी में उन्नति और धन दौलत का वरदान देती हैं। अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विधान है। चैत्र नवरात्रि का अष्टमी के दिन माँ दुर्गा के महागौरी के स्वरूप की पूजा की जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार अष्टमी के दिन विशेष शुभ योग बन रहा है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विधान है। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी इस बार पच्चीस मार्च दो हज़ार अट्ठारह के दिन पड़ रही है। ज्योतिषी पंडित धनंजय पाण्डेय के अनुसार इस दिन राशि के अनुसार कन्या पूजन के बाद इन चीजों को देने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। नवरात्रि की अष्टमी के दिन राशि के अनुसार इन उपायों को करने से माता नौकरी में उन्नति और धन दौलत का वरदान देती हैं। अगली स्लाइड्स में राशि के अनुसार किस कन्या पूजन प्रकार करें।
|
यूपी में आम चीजों को तो छोड़ ही दें, कुछ खास संपत्तियां भी महफूज नहीं हैं। वाराणसी स्थित पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यालय को ओएलएक्स (OLX) के जरिये बदमाश बचने का प्रयास कर रहे थे। जिनको यूपी पुलिस ने धर दबोचा है।
यूपी में राम राज्य पर एक फिर सवाल उठ गये हैं। इस बार कुछ शराती तत्वों की हरकत को लेकर प्रदेश का राम राज्य चर्चाओं में है। पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हाल में ही नया संसदीय ऑफिस बनाया गया। जो एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। जो वाराणसी की गुरुधाम कॉलोनी में स्थित है।
जानकारी के मुताबिक वाराणसी में स्थित पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यालय को 7. 30 करोड़ रुपये में कुछ शरारती तत्वों ने बेचने का प्रयास किया है। मामला सामने आने पर पुलिस ने चार लोगों को दबोच लिया है। पीएम मोदी के कार्यालय को किसी शरारती तत्त्व ने बिक्री के लिए ऑनलाइन खरीदो बेचो साइट ओएलएक्स (OLX) पर बिक्री के लिए डाल दिया। जसके बाद चर्चायें तेज हो गई कि आखिर वाराणसी स्थित पीएम का कार्यालय किस वजह से बेचा जा रहा है। शरारती तत्त्वों ने पीएम मोदी के कार्यालय कीमत करीब साढ़े सात करोड़ लगाई। बताया जा रहा है कि ओएलएक्स साइड पर पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय की बिक्री का विज्ञापन लक्ष्मीकांत ओझा नाम के यूजर की आईडी से जारी किया गया।
घटना को लेकर वाराणसी के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि थाना भेलूपुर स्थित जवाहर नगर कॉलोनी में प्रधानमंत्री कार्यालय की फोटो खींचकर ओएलएक्स पर डाली गई थी। एसएसपी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि ओएलएक्स पर दिए गए कार्यालय बेचने के विज्ञापन को तुरंत हटा दिया गया है। साथ ही पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
एसएसपी के अनुसार मामले के संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। साथ ही गिरफ्तार चार आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार जिस शख्स ने पीएम मोदी के ऑफिस की तस्वीर खींचकर ओएलएक्स पर डाली थी। वह अरोपी भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
|
यूपी में आम चीजों को तो छोड़ ही दें, कुछ खास संपत्तियां भी महफूज नहीं हैं। वाराणसी स्थित पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यालय को ओएलएक्स के जरिये बदमाश बचने का प्रयास कर रहे थे। जिनको यूपी पुलिस ने धर दबोचा है। यूपी में राम राज्य पर एक फिर सवाल उठ गये हैं। इस बार कुछ शराती तत्वों की हरकत को लेकर प्रदेश का राम राज्य चर्चाओं में है। पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हाल में ही नया संसदीय ऑफिस बनाया गया। जो एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। जो वाराणसी की गुरुधाम कॉलोनी में स्थित है। जानकारी के मुताबिक वाराणसी में स्थित पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यालय को सात. तीस करोड़ रुपये में कुछ शरारती तत्वों ने बेचने का प्रयास किया है। मामला सामने आने पर पुलिस ने चार लोगों को दबोच लिया है। पीएम मोदी के कार्यालय को किसी शरारती तत्त्व ने बिक्री के लिए ऑनलाइन खरीदो बेचो साइट ओएलएक्स पर बिक्री के लिए डाल दिया। जसके बाद चर्चायें तेज हो गई कि आखिर वाराणसी स्थित पीएम का कार्यालय किस वजह से बेचा जा रहा है। शरारती तत्त्वों ने पीएम मोदी के कार्यालय कीमत करीब साढ़े सात करोड़ लगाई। बताया जा रहा है कि ओएलएक्स साइड पर पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय की बिक्री का विज्ञापन लक्ष्मीकांत ओझा नाम के यूजर की आईडी से जारी किया गया। घटना को लेकर वाराणसी के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि थाना भेलूपुर स्थित जवाहर नगर कॉलोनी में प्रधानमंत्री कार्यालय की फोटो खींचकर ओएलएक्स पर डाली गई थी। एसएसपी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि ओएलएक्स पर दिए गए कार्यालय बेचने के विज्ञापन को तुरंत हटा दिया गया है। साथ ही पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। एसएसपी के अनुसार मामले के संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। साथ ही गिरफ्तार चार आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार जिस शख्स ने पीएम मोदी के ऑफिस की तस्वीर खींचकर ओएलएक्स पर डाली थी। वह अरोपी भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
|
नई दिल्लीः कहते है क्रिकेट जुनूनी खेल है. लेकिन इस खेल में कई बार ऐसे वाकिये हो जाते है कि हमारी सोच-समझ सब कुछ धोखा खा जाती है. अगर सरल शब्दों में बयां किया जाए तो हम इसे अजूबा कहते है. ऐसा ही एक कारनामा हाल ही में देखने को मिला है. दरअसल, पूर्व स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने अपने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें एक गेंदबाज बॉल फेंकने से पहले 360 डिग्री घूमता है और उसी गति से बॉल फेंकता है, जो सीधी बल्लेबाज के पास जाती है.
बेदी द्वारा शेयर किए गए वीडियो में उत्तर प्रदेश के युवा बायें हाथ के स्पिनर शिव सिंह है. उन्होंने बंगाल के खिलाफ सीके नायुडू ट्राफी मैच के दौरान 360 डिग्री घूमकर सीधे गेंद स्टंप पर फेकी. जिससे बैट्समैन में हलका सा छुआ. हलांकि इसे अंपायरों ने 'डेड बॉल' करार दिया. लेकिन उनका यह अजीबोगरीब एक्शन चर्चा का विषय बन गया.
जानकारी के मुताबिक पृथ्वी साव की अगुवाई वाली भारतीय अंडर-19 विश्व कप चैम्पियन टीम का सदस्य रहे शिव बंगाल की दूसरी पारी के दौरान गेंद फेंकने से पहले अचानक घूम गये और फिर उन्होंने गेंद फेंकी. हालांकि शिव के इस गेंद को फेंकने से पहले ही अंपायर विनोद सेशन ने इसे डेड बॉल करार दिया था जिसके बाद यह गेंदबाज हताश हो गया.
बताया जा रहा है मैच थोड़ी देर के लिये रूक गया क्योंकि अंपायर ने शिव को बताया कि क्रिकेट के नियमों के अनुसार यह गेंद अवैध कैसे थी. मैच कल्याणी में बंगाल क्रिकेट अकादमी मैदान पर खेला जा रहा था.
भारत के बायें हाथ के स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने इसकी वीडियो ट्वीट कर इसे 'अजीब' करार किया जिसके बाद 50 सेकेंड का यह वीडियो वायरल हो गया है.
|
नई दिल्लीः कहते है क्रिकेट जुनूनी खेल है. लेकिन इस खेल में कई बार ऐसे वाकिये हो जाते है कि हमारी सोच-समझ सब कुछ धोखा खा जाती है. अगर सरल शब्दों में बयां किया जाए तो हम इसे अजूबा कहते है. ऐसा ही एक कारनामा हाल ही में देखने को मिला है. दरअसल, पूर्व स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने अपने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें एक गेंदबाज बॉल फेंकने से पहले तीन सौ साठ डिग्री घूमता है और उसी गति से बॉल फेंकता है, जो सीधी बल्लेबाज के पास जाती है. बेदी द्वारा शेयर किए गए वीडियो में उत्तर प्रदेश के युवा बायें हाथ के स्पिनर शिव सिंह है. उन्होंने बंगाल के खिलाफ सीके नायुडू ट्राफी मैच के दौरान तीन सौ साठ डिग्री घूमकर सीधे गेंद स्टंप पर फेकी. जिससे बैट्समैन में हलका सा छुआ. हलांकि इसे अंपायरों ने 'डेड बॉल' करार दिया. लेकिन उनका यह अजीबोगरीब एक्शन चर्चा का विषय बन गया. जानकारी के मुताबिक पृथ्वी साव की अगुवाई वाली भारतीय अंडर-उन्नीस विश्व कप चैम्पियन टीम का सदस्य रहे शिव बंगाल की दूसरी पारी के दौरान गेंद फेंकने से पहले अचानक घूम गये और फिर उन्होंने गेंद फेंकी. हालांकि शिव के इस गेंद को फेंकने से पहले ही अंपायर विनोद सेशन ने इसे डेड बॉल करार दिया था जिसके बाद यह गेंदबाज हताश हो गया. बताया जा रहा है मैच थोड़ी देर के लिये रूक गया क्योंकि अंपायर ने शिव को बताया कि क्रिकेट के नियमों के अनुसार यह गेंद अवैध कैसे थी. मैच कल्याणी में बंगाल क्रिकेट अकादमी मैदान पर खेला जा रहा था. भारत के बायें हाथ के स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने इसकी वीडियो ट्वीट कर इसे 'अजीब' करार किया जिसके बाद पचास सेकेंड का यह वीडियो वायरल हो गया है.
|
शहर में दिसंबर में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है उससे चिंता गहराती जा रही है। गुरुवार को भी 43 नए मरीज मिले हैं। इसके अलावा एक ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्ति मिला है जो UAE से लौटा था। जिस तरह से अभी मरीजों की संख्या बढ़ रही है, ऐसी ही कुछ स्थिति फरवरी के दूसरे हफ्ते में शुरू हुई थी। तब सैम्पलिंग कम थी लेकिन संक्रमण की दर 2. 62 फीसदी थी जबकि अभी सैम्पलिंग चार गुना ज्यादा है जबकि संक्रमण की दर 0. 42 फीसदी बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अभी खतरा टला नहीं बल्कि चिंताजनक है। लोग कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें।
गुरुवार को जो 43 पॉजिटिव पाए गए उनमें सबसे ज्यादा राजेंद्र नगर में 5, लसूडिया में 4, कनाडिया में 4 पाए गए हैं। इनके अलावा रविदास नगर, कालिंदी, स्नेह नगर, बाणगंगा, एयरपोर्ट, सुखलिया चौराहा, कल्पना लोक, प्रेम नगर, द्वारकापुरी, राऊ, प्रकाश नगर, गोपाल बाग, बीसीएम हाईट्स, सिलीकॉन सिटी, महू, खातीवाला टैंक, संजना पार्क, बिचौली हप्सी, तुकोगंज, खजराना, तिलक नगर, पलासिया, चंदन नगर, तेजाजी नगर, रावजी बाजार, एमआईजी, मल्हारगंज, द्वारकापुरी, भंवरकुआ, अन्नपूर्णा में पॉजिटिव पाए गए हैं।
गुरुवार को एक ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्ति की पुष्टि की गई है। वह कुछ दिन पहले UAE से लौटा था। उसकी हालत ठीक है। CMHO डॉ. बीएस सेत्या का कहना है कि इसके सहित अब तक विदेश से लौटे 9 लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट मिला है। इसके पूर्व 26 दिसम्बर को प्रभारी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने 8 लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट पाए जाने की पुष्टि की थी। इसके बाद शाम को एक और मिला था। इस तरह 9 में ओमिक्रॉन वैरिएंट मिला था। अब गुरुवार को जो एक और मिला है, उसके सहित विदेश से लौटे 10 लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट पाया गया लेकिन विभाग ने 9 की पुष्टि की है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
शहर में दिसंबर में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है उससे चिंता गहराती जा रही है। गुरुवार को भी तैंतालीस नए मरीज मिले हैं। इसके अलावा एक ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्ति मिला है जो UAE से लौटा था। जिस तरह से अभी मरीजों की संख्या बढ़ रही है, ऐसी ही कुछ स्थिति फरवरी के दूसरे हफ्ते में शुरू हुई थी। तब सैम्पलिंग कम थी लेकिन संक्रमण की दर दो. बासठ फीसदी थी जबकि अभी सैम्पलिंग चार गुना ज्यादा है जबकि संक्रमण की दर शून्य. बयालीस फीसदी बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अभी खतरा टला नहीं बल्कि चिंताजनक है। लोग कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें। गुरुवार को जो तैंतालीस पॉजिटिव पाए गए उनमें सबसे ज्यादा राजेंद्र नगर में पाँच, लसूडिया में चार, कनाडिया में चार पाए गए हैं। इनके अलावा रविदास नगर, कालिंदी, स्नेह नगर, बाणगंगा, एयरपोर्ट, सुखलिया चौराहा, कल्पना लोक, प्रेम नगर, द्वारकापुरी, राऊ, प्रकाश नगर, गोपाल बाग, बीसीएम हाईट्स, सिलीकॉन सिटी, महू, खातीवाला टैंक, संजना पार्क, बिचौली हप्सी, तुकोगंज, खजराना, तिलक नगर, पलासिया, चंदन नगर, तेजाजी नगर, रावजी बाजार, एमआईजी, मल्हारगंज, द्वारकापुरी, भंवरकुआ, अन्नपूर्णा में पॉजिटिव पाए गए हैं। गुरुवार को एक ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्ति की पुष्टि की गई है। वह कुछ दिन पहले UAE से लौटा था। उसकी हालत ठीक है। CMHO डॉ. बीएस सेत्या का कहना है कि इसके सहित अब तक विदेश से लौटे नौ लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट मिला है। इसके पूर्व छब्बीस दिसम्बर को प्रभारी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने आठ लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट पाए जाने की पुष्टि की थी। इसके बाद शाम को एक और मिला था। इस तरह नौ में ओमिक्रॉन वैरिएंट मिला था। अब गुरुवार को जो एक और मिला है, उसके सहित विदेश से लौटे दस लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट पाया गया लेकिन विभाग ने नौ की पुष्टि की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
नेशनल कांग्रेस(नेकां) उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हिरासत में रखे गए प्रदेश के सभी नेताओं की ईद से पहले रिहाई की मांग की है। उमर ने अपने ट्वीट में लिखा है कि नरेंद्र मोदी जी ईद अब कुछ ही दिनों की दूरी पर है।
ऐसे में आपको प्रदेश के विभिन्न इलाकों और अपने घरों में भी नजरबंद किए गए उन लोगों को रिहा कर देना चाहिए, जिन्हें प्रशासन ने हिरासत में ले रखा है।
इन लोगों ने ऐसा कुछ नहीं किया जिसके लिए उन्हें रिहा नहीं किया जा सकता।
मालूम हो कि पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के साथ विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करने की घोषणा से कुछ घंटे पहले उमर के पिता नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, नेकां महासचिव अली मोहम्मद सागर को पीएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था।
उमर और फारूक की रिहाई हो चुकी है जबकि अन्य नेता अभी नजरबंद हैं।
|
नेशनल कांग्रेस उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाए जाने के बाद हिरासत में रखे गए प्रदेश के सभी नेताओं की ईद से पहले रिहाई की मांग की है। उमर ने अपने ट्वीट में लिखा है कि नरेंद्र मोदी जी ईद अब कुछ ही दिनों की दूरी पर है। ऐसे में आपको प्रदेश के विभिन्न इलाकों और अपने घरों में भी नजरबंद किए गए उन लोगों को रिहा कर देना चाहिए, जिन्हें प्रशासन ने हिरासत में ले रखा है। इन लोगों ने ऐसा कुछ नहीं किया जिसके लिए उन्हें रिहा नहीं किया जा सकता। मालूम हो कि पांच अगस्त दो हज़ार उन्नीस को जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद तीन सौ सत्तर की समाप्ति के साथ विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करने की घोषणा से कुछ घंटे पहले उमर के पिता नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, नेकां महासचिव अली मोहम्मद सागर को पीएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था। उमर और फारूक की रिहाई हो चुकी है जबकि अन्य नेता अभी नजरबंद हैं।
|
GORAKHPUR: चिलुआताल एरिया के डोहरिया बाजार में चोरों ने दो दुकानों से लाखों का माल उड़ा दिया। चोरों ने एक दुकान में सेंध लगाने की कोशिश की। सैटर्डे मार्निग चोरी की सूचना पर पब्लिक गुस्सा हो गई। लोगों ने चौराहे पर जमा होकर प्रदर्शन भी किया। पब्लिक ने आरोप लगाया कि एक माह में पांचवीं बार चोरी हुई। मामले की जानकारी के बाद भी पुलिस सो रही है। उधर खोराबार एरिया के शिवाजी नगर मोहल्ले में एक मकान से चोरी की कोशिश की गई।
डोहरिया बाजार निवासी दिनेश सिंह ने कटरा बनवाया है। उनके कटरे में मोहम्मदपुर माफी निवासी राजेश कुमार ने मोबाइल शाप खोला है। राजेश के बगल में लल्ला सिंह की इलेक्ट्रानिक्स की शाप है। फ्राइडे इवनिंग शाप कीपर्स दुकान बंद करके घर चले गए। सैटर्डे मार्निग पता लगा कि उनकी दुकानों का ताला टूटा है। मोबाइल शाप का ताला तोड़कर चोर ख्0 हजार नकदी सहित करीब एक लाख मोबाइल सहित कई सामान उठा ले गए थे। इलेक्ट्रानिक्स शॉप से चोरों ने टीवी, डीवीडी सहित कई सामान गायब कर दिया था। पब्लिक का कहना है कि इसके पहले जीवन वर्मा की ज्वेलरी शॉप और विजय गुप्ता के मिठाई की दुकान से चोरी हुई थी।
चोरी रोकने के लिए हाक दस्ता को गश्त बढ़ाने को कहा गया है। पुलिस गश्त की मानीटरिंग भी की जा रही है।
|
GORAKHPUR: चिलुआताल एरिया के डोहरिया बाजार में चोरों ने दो दुकानों से लाखों का माल उड़ा दिया। चोरों ने एक दुकान में सेंध लगाने की कोशिश की। सैटर्डे मार्निग चोरी की सूचना पर पब्लिक गुस्सा हो गई। लोगों ने चौराहे पर जमा होकर प्रदर्शन भी किया। पब्लिक ने आरोप लगाया कि एक माह में पांचवीं बार चोरी हुई। मामले की जानकारी के बाद भी पुलिस सो रही है। उधर खोराबार एरिया के शिवाजी नगर मोहल्ले में एक मकान से चोरी की कोशिश की गई। डोहरिया बाजार निवासी दिनेश सिंह ने कटरा बनवाया है। उनके कटरे में मोहम्मदपुर माफी निवासी राजेश कुमार ने मोबाइल शाप खोला है। राजेश के बगल में लल्ला सिंह की इलेक्ट्रानिक्स की शाप है। फ्राइडे इवनिंग शाप कीपर्स दुकान बंद करके घर चले गए। सैटर्डे मार्निग पता लगा कि उनकी दुकानों का ताला टूटा है। मोबाइल शाप का ताला तोड़कर चोर ख्शून्य हजार नकदी सहित करीब एक लाख मोबाइल सहित कई सामान उठा ले गए थे। इलेक्ट्रानिक्स शॉप से चोरों ने टीवी, डीवीडी सहित कई सामान गायब कर दिया था। पब्लिक का कहना है कि इसके पहले जीवन वर्मा की ज्वेलरी शॉप और विजय गुप्ता के मिठाई की दुकान से चोरी हुई थी। चोरी रोकने के लिए हाक दस्ता को गश्त बढ़ाने को कहा गया है। पुलिस गश्त की मानीटरिंग भी की जा रही है।
|
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद (Farrukhabad) जिले में गोरक्षकों ने शुक्रवार की सुबह घेराबंदी करके गोमांस सहित गोतस्कर नफीस (Cow Smuggler Nafees) को धर दबोचा है। राष्ट्रीय गोरक्षक दल तहसील कायमगंज के अध्यक्ष दानवीर सिंह ने अन्य पदाधिकारियों के साथ थाना कंपिल के गांव बिल्सडी में घेराबंदी कर बाइक सवार गोतस्कर नफीस को पकड़ा। गोतस्कर की पिटाई और पूछताछ के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
नफीस बाइक के जरिए झोलों में गोमांस को पॉलीथीन में छिपाकर बेचने जा रहा था। पूछताछ करने पर गोतस्कर ने गोरक्षकों को बताया कि यह गाय का मांस है। गोरक्षक दानवीर सिंह ने आरोप लगाया कि हल्का इंचार्ज उदयवीर सिंह के संरक्षण में गायें काटी जा रही हैं और उनका मांस पूरे इलाके में बेचा जा रहा है। दानवीर सिंह ने आरोप लगाया कि उदय वीर सिंह चंद पैसों के लालच में ऐसा घिनौना कार्य करवा रहे हैं। उन्होंने पुलिस को गोकशी कार्य में लिप्त लोगों को गिरफ्तार किए जाने की चेतावनी दी है।
थाने के उपनिरीक्षक इंचार्ज मंगल सिंह ने बताया कि थाना कंपिल के ग्राम कटिया निवासी नफीस पुत्र दौलत शेर बाइक में गोमांस छिपाकर बेचने ले जा रहा था। बाइक से करीब 100 किलो गोमांस बरामद किया गया है। गोरक्षकों का कहना है कि थाना क्षेत्र के ग्राम कटिया निजा मुद्दीनपुर आदि गांव में चोरी-छिपे गायें काटकर उनका मांस बेचा जा रहा है।
सीओ सोहराब आलम ने बताया कि थाना पुलिस को सुबह 6 बजे सूचना मिली की प्लैटिना बाइक सवार युवक जनपद कासगंज के ग्राम भरगैन से गोमांस लाकर बेचने जा रहा था, जिसे गोरक्षकों ने ग्राम बिल्सडी में पकड़ लिया है। पुलिस ने मौके पर जाकर गोतस्कर को हिरासत में ले लिया। गोरक्षक दानवीर की ओर से गौतम मांस तस्कर के विरुद्ध गोवध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
This website uses cookies.
|
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में गोरक्षकों ने शुक्रवार की सुबह घेराबंदी करके गोमांस सहित गोतस्कर नफीस को धर दबोचा है। राष्ट्रीय गोरक्षक दल तहसील कायमगंज के अध्यक्ष दानवीर सिंह ने अन्य पदाधिकारियों के साथ थाना कंपिल के गांव बिल्सडी में घेराबंदी कर बाइक सवार गोतस्कर नफीस को पकड़ा। गोतस्कर की पिटाई और पूछताछ के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है। नफीस बाइक के जरिए झोलों में गोमांस को पॉलीथीन में छिपाकर बेचने जा रहा था। पूछताछ करने पर गोतस्कर ने गोरक्षकों को बताया कि यह गाय का मांस है। गोरक्षक दानवीर सिंह ने आरोप लगाया कि हल्का इंचार्ज उदयवीर सिंह के संरक्षण में गायें काटी जा रही हैं और उनका मांस पूरे इलाके में बेचा जा रहा है। दानवीर सिंह ने आरोप लगाया कि उदय वीर सिंह चंद पैसों के लालच में ऐसा घिनौना कार्य करवा रहे हैं। उन्होंने पुलिस को गोकशी कार्य में लिप्त लोगों को गिरफ्तार किए जाने की चेतावनी दी है। थाने के उपनिरीक्षक इंचार्ज मंगल सिंह ने बताया कि थाना कंपिल के ग्राम कटिया निवासी नफीस पुत्र दौलत शेर बाइक में गोमांस छिपाकर बेचने ले जा रहा था। बाइक से करीब एक सौ किलो गोमांस बरामद किया गया है। गोरक्षकों का कहना है कि थाना क्षेत्र के ग्राम कटिया निजा मुद्दीनपुर आदि गांव में चोरी-छिपे गायें काटकर उनका मांस बेचा जा रहा है। सीओ सोहराब आलम ने बताया कि थाना पुलिस को सुबह छः बजे सूचना मिली की प्लैटिना बाइक सवार युवक जनपद कासगंज के ग्राम भरगैन से गोमांस लाकर बेचने जा रहा था, जिसे गोरक्षकों ने ग्राम बिल्सडी में पकड़ लिया है। पुलिस ने मौके पर जाकर गोतस्कर को हिरासत में ले लिया। गोरक्षक दानवीर की ओर से गौतम मांस तस्कर के विरुद्ध गोवध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। This website uses cookies.
|
JugJugg Jeeyo Public Review: दर्शकों के दिल में उतर गई वरुण धवन की 'जुगजुग जियो'
फिल्म 'जुगजुग जियो' में अनिल कपूर, वरुण धवन, कियारा आडवाणी, नीतू कपूर, मनीष पॉल और प्राजक्ता कोहली जैसे कलाकार अहम किरदारों में हैं. इसका निर्देशक राज मेहता ने किया है, जबकि धर्मा प्रोडक्शंस और वायकॉम 18 स्टूडियोज ने मिलकर प्रोड्यूस किया है. फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों की तरफ से बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है.
वरुण धवन और कियारा आडवाणी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जुगजुग जियो' 24 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. इसको लेकर शानदार सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. कई फिल्म समीक्षकों ने इसे फैमिली एंटरटेनर बताते हुए पांच में से चार स्टार तक दिए हैं. फिल्म में इमोशन, ह्यूमर और ड्रामा का जबरदस्त तड़का लगाया गया है. इतना ही नहीं फिल्म की स्टारकास्ट अनिल कपूर, वरुण धवन, कियारा आडवाणी, नीतू कपूर, मनीष पॉल और प्राजक्ता कोहली के अभिनय की भी हर कोई तारीफ कर रहा है. धर्मा प्रोडक्शंस और वायकॉम 18 स्टूडियोज के बैनर तले बनी इस फिल्म को सोशल मीडिया पर कुछ लोग भले ही बायकॉट कर रहे हैं, लेकिन उससे बड़ी संख्या में लोग पसंद भी कर रहे हैं.
फिल्म 'जुगजुग जियो' को बहुत ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है.
वरिष्ठ फिल्म समीक्षक तरण आदर्श फिल्म को पांच में से चार स्टार देते हुए लिखते हैं, "अब कुछ गुड न्यूज आई है. जुगजुग जियो एक फैमिली एंटरटेनर फिल्म है. ड्रामा, ह्यूमर, इमोशन का बैलेंस है. खासकर के सेकंड हॉफ में इतना जबरदस्त इमोशन है कि दर्शकों को आनंद आ जाएगा. यह निश्चित रूप से बड़ी संख्या में परिवारों को आकर्षित करता है. डायरेक्टर राज मेहता ने फिर अच्छा काम किया है. इससे पहले फिल्म गुड न्यूज में उनके शानदार काम को देखा जा चुका है. इस बार भी उन्होंने दर्शकों को निराश नहीं किया है. उनका निष्पादन सरल, लेकिन प्रभावी है. सभी कलाकारों ने जबरदस्त अभिनय प्रदर्शन किया है. आप अपने परिजनों और चहेतों के साथ इस फिल्म को देख सकते हैं. "
ओवरसीज सेंसर बोर्ड के सदस्य उमैर संधू ने फिल्म 'जुगजुग जियो' को देखने के बाद इसकी बहुत ज्यादा तारीफ की है. उन्होंने फिल्म को पांच में से 3. 5 स्टार दिया है. इसके साथ ट्विटर पर लिखा है, "फिल्म जुगजुग जिओ निश्चित रूप से हिट होने वाली है. स्मार्ट लेखन, शानदार ह्यूमर और दिल छू लेने वाली भावनाएं, इस बेहतरीन फिल्म के तीन पिलर्स हैं. चौथा पिलर फिल्म के कलाकारों का अभिनय प्रदर्शन है. साल 2022 की बेस्ट फैमिली एंटरटेनर फिल्म है. ये अपने टाइटल को पूरी तरह से जीता है और इन्वेस्टर्स को अच्छी खबर देगा. यह अनिल कपूर, वरुण धवन, कियारा आडवाणी, मनीष पॉल के ईमानदार और उल्लेखनीय अभिनय प्रदर्शन से सजा है. फुल पैसा वसूल फैमिली एंटरटेनर फिल्म. '
अमेरिका में भारतीय फिल्मों का डिस्ट्रीब्यूशन करने वाले फिल्म क्रिटिक शिवम तलरेजा ने भी फिल्म 'जुगजुग जियो' को पांच में से तीन स्टार दिया है. उन्होंने लिखा है, "कोरोना महामारी के बाद की अब तक की सबसे मनोरंजक फिल्म है. सुंदर गीत, उत्तम निष्पादन. वरुण धवन और कियारा आडवाणी की जोड़ी ने कमाल किया है. मनीष पॉल की कॉमेडी गजब लग रही है. अनिल जी और नीतू मैम भी बहुत अच्छे लग रहे हैं. ऐसी उम्मीद है कि फिल्म संयुक्त राज्य अमेरिका में अच्छा कारोबर करेगी. " फिल्म समीक्षक रोहित जायसवाल लिखते हैं, "एक संपूर्ण पारिवारिक मनोरंजक फिल्म. इसमें जबरदस्त कॉमेडी के साथ भयंकर इमोशन है. एक के बाद एक ह्यूमरस सीन देखने को मिलेगा. सुंदर फिल्म बनाई गई है. "
एंटरटेनमेंट वेबसाइट पिंकविला के लिए हिमेश मनकद ने लिखा है, "फिल्म जुगजुग जीयो ड्रामा, इमोशन और कॉमेडी के साथ एक फुल ऑन पैकेज है, जो कि दर्शकों का जबरदस्त मनोरंजन करता है. फिल्म में कुछ कमियां भी हैं, लेकिन अंत भला तो सब भला जैसा मामला है. फिल्म के आखिर हर कोई अपने चेहरे पर मुस्कान लेकर सिनेमाघर से बाहर निकलता है. ये एक मनोरंजक फिल्म है, जिसमें कलाकारों ने अविश्वसनीय अभिनय प्रदर्शन किया है. संगीत शीर्ष पायदान पर है, जो कहानी में समां जाता है. सेकंड हॉफ में 'नाच पंजाबन' गाने पर हर कोई थिरकने पर मजबूर होने लगता है. फिल्म की कहानी ओरिजनल और बिल्कुल फ्रेश है. " यहां फिल्म को पांच में से 3. 5 स्टार दिया गया है.
|
JugJugg Jeeyo Public Review: दर्शकों के दिल में उतर गई वरुण धवन की 'जुगजुग जियो' फिल्म 'जुगजुग जियो' में अनिल कपूर, वरुण धवन, कियारा आडवाणी, नीतू कपूर, मनीष पॉल और प्राजक्ता कोहली जैसे कलाकार अहम किरदारों में हैं. इसका निर्देशक राज मेहता ने किया है, जबकि धर्मा प्रोडक्शंस और वायकॉम अट्ठारह स्टूडियोज ने मिलकर प्रोड्यूस किया है. फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों की तरफ से बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है. वरुण धवन और कियारा आडवाणी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जुगजुग जियो' चौबीस जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. इसको लेकर शानदार सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. कई फिल्म समीक्षकों ने इसे फैमिली एंटरटेनर बताते हुए पांच में से चार स्टार तक दिए हैं. फिल्म में इमोशन, ह्यूमर और ड्रामा का जबरदस्त तड़का लगाया गया है. इतना ही नहीं फिल्म की स्टारकास्ट अनिल कपूर, वरुण धवन, कियारा आडवाणी, नीतू कपूर, मनीष पॉल और प्राजक्ता कोहली के अभिनय की भी हर कोई तारीफ कर रहा है. धर्मा प्रोडक्शंस और वायकॉम अट्ठारह स्टूडियोज के बैनर तले बनी इस फिल्म को सोशल मीडिया पर कुछ लोग भले ही बायकॉट कर रहे हैं, लेकिन उससे बड़ी संख्या में लोग पसंद भी कर रहे हैं. फिल्म 'जुगजुग जियो' को बहुत ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है. वरिष्ठ फिल्म समीक्षक तरण आदर्श फिल्म को पांच में से चार स्टार देते हुए लिखते हैं, "अब कुछ गुड न्यूज आई है. जुगजुग जियो एक फैमिली एंटरटेनर फिल्म है. ड्रामा, ह्यूमर, इमोशन का बैलेंस है. खासकर के सेकंड हॉफ में इतना जबरदस्त इमोशन है कि दर्शकों को आनंद आ जाएगा. यह निश्चित रूप से बड़ी संख्या में परिवारों को आकर्षित करता है. डायरेक्टर राज मेहता ने फिर अच्छा काम किया है. इससे पहले फिल्म गुड न्यूज में उनके शानदार काम को देखा जा चुका है. इस बार भी उन्होंने दर्शकों को निराश नहीं किया है. उनका निष्पादन सरल, लेकिन प्रभावी है. सभी कलाकारों ने जबरदस्त अभिनय प्रदर्शन किया है. आप अपने परिजनों और चहेतों के साथ इस फिल्म को देख सकते हैं. " ओवरसीज सेंसर बोर्ड के सदस्य उमैर संधू ने फिल्म 'जुगजुग जियो' को देखने के बाद इसकी बहुत ज्यादा तारीफ की है. उन्होंने फिल्म को पांच में से तीन. पाँच स्टार दिया है. इसके साथ ट्विटर पर लिखा है, "फिल्म जुगजुग जिओ निश्चित रूप से हिट होने वाली है. स्मार्ट लेखन, शानदार ह्यूमर और दिल छू लेने वाली भावनाएं, इस बेहतरीन फिल्म के तीन पिलर्स हैं. चौथा पिलर फिल्म के कलाकारों का अभिनय प्रदर्शन है. साल दो हज़ार बाईस की बेस्ट फैमिली एंटरटेनर फिल्म है. ये अपने टाइटल को पूरी तरह से जीता है और इन्वेस्टर्स को अच्छी खबर देगा. यह अनिल कपूर, वरुण धवन, कियारा आडवाणी, मनीष पॉल के ईमानदार और उल्लेखनीय अभिनय प्रदर्शन से सजा है. फुल पैसा वसूल फैमिली एंटरटेनर फिल्म. ' अमेरिका में भारतीय फिल्मों का डिस्ट्रीब्यूशन करने वाले फिल्म क्रिटिक शिवम तलरेजा ने भी फिल्म 'जुगजुग जियो' को पांच में से तीन स्टार दिया है. उन्होंने लिखा है, "कोरोना महामारी के बाद की अब तक की सबसे मनोरंजक फिल्म है. सुंदर गीत, उत्तम निष्पादन. वरुण धवन और कियारा आडवाणी की जोड़ी ने कमाल किया है. मनीष पॉल की कॉमेडी गजब लग रही है. अनिल जी और नीतू मैम भी बहुत अच्छे लग रहे हैं. ऐसी उम्मीद है कि फिल्म संयुक्त राज्य अमेरिका में अच्छा कारोबर करेगी. " फिल्म समीक्षक रोहित जायसवाल लिखते हैं, "एक संपूर्ण पारिवारिक मनोरंजक फिल्म. इसमें जबरदस्त कॉमेडी के साथ भयंकर इमोशन है. एक के बाद एक ह्यूमरस सीन देखने को मिलेगा. सुंदर फिल्म बनाई गई है. " एंटरटेनमेंट वेबसाइट पिंकविला के लिए हिमेश मनकद ने लिखा है, "फिल्म जुगजुग जीयो ड्रामा, इमोशन और कॉमेडी के साथ एक फुल ऑन पैकेज है, जो कि दर्शकों का जबरदस्त मनोरंजन करता है. फिल्म में कुछ कमियां भी हैं, लेकिन अंत भला तो सब भला जैसा मामला है. फिल्म के आखिर हर कोई अपने चेहरे पर मुस्कान लेकर सिनेमाघर से बाहर निकलता है. ये एक मनोरंजक फिल्म है, जिसमें कलाकारों ने अविश्वसनीय अभिनय प्रदर्शन किया है. संगीत शीर्ष पायदान पर है, जो कहानी में समां जाता है. सेकंड हॉफ में 'नाच पंजाबन' गाने पर हर कोई थिरकने पर मजबूर होने लगता है. फिल्म की कहानी ओरिजनल और बिल्कुल फ्रेश है. " यहां फिल्म को पांच में से तीन. पाँच स्टार दिया गया है.
|
हर इंसान खूबसूरत और अच्छा दिखने के लिए कई तरह के नुस्खे अपनाता हैं। दरअसल हर कोई अच्छा दिखने के लिए अपने चेहरे का खास ख्याल रखता हैं और इसके लिए वह हर तरह की वस्तुओं का इस्तेमाल करता हैं। चेहरे के अलावा लोग अपने दांतों की सफाई करते हैं। लेकिन दांतों के अलावा वो अपनी जीभ का सफाई करना भूल जाते हैं। बता दें कि जीभ की सफाई ना होने के कारण ही मुंह से बदबू आता हैं। इसके अलावा जीभ के ऊपर एक सफ़ेद सी परत जम जाती हैं और उसकी वजह से आपके जीभ पर बहुत सारे किटाणु पनप जाते हैं।
इतना ही नहीं कई बार सफ़ेद जीभ ही आपके बीमारी का कारण बन जाते हैं। दरअसल जब हम डॉक्टर के पास दवा लेने के लिए जाते हैं तो वो हमारे जीभ जरूर देखते हैं क्योंकि इससे ही वो हमारे बीमारी का पता लगा लेते हैं। ऐसे में यदि आपके जीभ पर भी सफ़ेद परत जम गयी हैं तो उस सफ़ेद परत को हटाने के लिए आज हम आपको कुछ उपाय बताने जा रहे हैं, जिसे अपना कर आप अपने सफ़ेद जीभ को साफ कर सकते हैं।
1. अपने जीभ के ऊपर जमी सफ़ेद परत को हटाने के लिए थोड़ा सा नमक ले और फिर टूथब्रश की सहायता से कुछ देर इसे अपने जीभ पर रगड़े। ऐसा आप कुछ दिनों तक करने से आपके जीभ पर जमी सफेद परत हट जाएगी।
2. आप रोज टूथब्रश करते हैं और उसमें आगे वाले हिस्से से अपने दांतों का साफ करे और पीछे वाले हिस्से से अपने जीभ को साफ करे क्योंकि टूथब्रश के पीछे वाले हिस्से को जीभ साफ करने के लिए बनाया गया होता हैं।
|
हर इंसान खूबसूरत और अच्छा दिखने के लिए कई तरह के नुस्खे अपनाता हैं। दरअसल हर कोई अच्छा दिखने के लिए अपने चेहरे का खास ख्याल रखता हैं और इसके लिए वह हर तरह की वस्तुओं का इस्तेमाल करता हैं। चेहरे के अलावा लोग अपने दांतों की सफाई करते हैं। लेकिन दांतों के अलावा वो अपनी जीभ का सफाई करना भूल जाते हैं। बता दें कि जीभ की सफाई ना होने के कारण ही मुंह से बदबू आता हैं। इसके अलावा जीभ के ऊपर एक सफ़ेद सी परत जम जाती हैं और उसकी वजह से आपके जीभ पर बहुत सारे किटाणु पनप जाते हैं। इतना ही नहीं कई बार सफ़ेद जीभ ही आपके बीमारी का कारण बन जाते हैं। दरअसल जब हम डॉक्टर के पास दवा लेने के लिए जाते हैं तो वो हमारे जीभ जरूर देखते हैं क्योंकि इससे ही वो हमारे बीमारी का पता लगा लेते हैं। ऐसे में यदि आपके जीभ पर भी सफ़ेद परत जम गयी हैं तो उस सफ़ेद परत को हटाने के लिए आज हम आपको कुछ उपाय बताने जा रहे हैं, जिसे अपना कर आप अपने सफ़ेद जीभ को साफ कर सकते हैं। एक. अपने जीभ के ऊपर जमी सफ़ेद परत को हटाने के लिए थोड़ा सा नमक ले और फिर टूथब्रश की सहायता से कुछ देर इसे अपने जीभ पर रगड़े। ऐसा आप कुछ दिनों तक करने से आपके जीभ पर जमी सफेद परत हट जाएगी। दो. आप रोज टूथब्रश करते हैं और उसमें आगे वाले हिस्से से अपने दांतों का साफ करे और पीछे वाले हिस्से से अपने जीभ को साफ करे क्योंकि टूथब्रश के पीछे वाले हिस्से को जीभ साफ करने के लिए बनाया गया होता हैं।
|
Quick links:
पिछले दिनों रिलीज हुई फिल्म बार्बी को दुनियाभर में जबरदस्त रिस्पांस मिला। फिल्म ने भारत में भी शानदार प्रदर्शन किया। फिल्मी सितारों से लेकर आम लोग तक, हर कोई ने बार्बी के रंग में रंगा नजर आया। हाल ही में श्रद्धा कपूर ने एक फोटो पोस्ट की, जिसके बाद यूजर ने उन्हें बार्बी से कंपेयर किया। यूजर के कमेंट का एक्ट्रेस ने शानदार तरीके से जवाब दिया, जो लोगों का दिल जीत रहा है।
श्रद्धा कपूर ने Indian Couture Week में अपना जलवा बिखेरा। सिल्वर कलर की सीक्वन फ्लोरल ड्रेस में वह काफी खूबसूरत लग रही थीं। हर किसी की नजरें बस श्रद्धा पर जाकर ठहर रही थी। एक्ट्रेस ने इवेंट की कुछ फोटोज इंस्टाग्राम पर फैंस के साथ भी शेयर की। फोटोज में श्रद्धा अलग-अलग पोज में पिक्चर्स क्लिक कराती नजर आईं।
श्रद्धा का पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया। फैंस को उनका अवतार काफी पसंद आया। यूजर्स पोस्ट पर लगातार लाइक और कमेंट करने लगे। इसी बीच एक यूजर ने लिखा, "इन 4 तस्वीरों से ये साफ हो जाता है कि अगर भारत में बार्बी फिल्म बनेगी तो उसकी कास्ट कौन होगी।" यूजर का कहना है कि श्रद्धा कपूर इंडियन बार्बी बनने के लिए पूरी तरह परफेक्ट है।
'हाफ गर्लफ्रेंड' एक्ट्रेस का ध्यान यूजर के कमेंट पर गया और उन्होंने रिप्लाई देने का फैसला किया। श्रद्धा ने लिखा, "भारत में स्त्री ही बार्बी है।" अभिनेत्री का यह कमेंट फैंस को काफी पसंद आ रहा है। सोशल मीडिया पर लोग श्रद्धा के कमेंट की चर्चा भी कर रहे हैं।
वर्कफ्रंट की बात करें तो श्रद्धा कपूर आखिरी बार फिल्म 'तू झूठी मैं मक्कार' में नजर आई थीं। फिल्म में रणबीर कपूर के साथ उनकी केमिस्ट्री को काफी पसंद किया गया था। फिलहाल वह फिल्म 'स्त्री 2' की शूटिंग में व्यस्त चल रही हैं। इस फिल्म में वह राजकुमार राव के साथ नजर आएंगी।
|
Quick links: पिछले दिनों रिलीज हुई फिल्म बार्बी को दुनियाभर में जबरदस्त रिस्पांस मिला। फिल्म ने भारत में भी शानदार प्रदर्शन किया। फिल्मी सितारों से लेकर आम लोग तक, हर कोई ने बार्बी के रंग में रंगा नजर आया। हाल ही में श्रद्धा कपूर ने एक फोटो पोस्ट की, जिसके बाद यूजर ने उन्हें बार्बी से कंपेयर किया। यूजर के कमेंट का एक्ट्रेस ने शानदार तरीके से जवाब दिया, जो लोगों का दिल जीत रहा है। श्रद्धा कपूर ने Indian Couture Week में अपना जलवा बिखेरा। सिल्वर कलर की सीक्वन फ्लोरल ड्रेस में वह काफी खूबसूरत लग रही थीं। हर किसी की नजरें बस श्रद्धा पर जाकर ठहर रही थी। एक्ट्रेस ने इवेंट की कुछ फोटोज इंस्टाग्राम पर फैंस के साथ भी शेयर की। फोटोज में श्रद्धा अलग-अलग पोज में पिक्चर्स क्लिक कराती नजर आईं। श्रद्धा का पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया। फैंस को उनका अवतार काफी पसंद आया। यूजर्स पोस्ट पर लगातार लाइक और कमेंट करने लगे। इसी बीच एक यूजर ने लिखा, "इन चार तस्वीरों से ये साफ हो जाता है कि अगर भारत में बार्बी फिल्म बनेगी तो उसकी कास्ट कौन होगी।" यूजर का कहना है कि श्रद्धा कपूर इंडियन बार्बी बनने के लिए पूरी तरह परफेक्ट है। 'हाफ गर्लफ्रेंड' एक्ट्रेस का ध्यान यूजर के कमेंट पर गया और उन्होंने रिप्लाई देने का फैसला किया। श्रद्धा ने लिखा, "भारत में स्त्री ही बार्बी है।" अभिनेत्री का यह कमेंट फैंस को काफी पसंद आ रहा है। सोशल मीडिया पर लोग श्रद्धा के कमेंट की चर्चा भी कर रहे हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो श्रद्धा कपूर आखिरी बार फिल्म 'तू झूठी मैं मक्कार' में नजर आई थीं। फिल्म में रणबीर कपूर के साथ उनकी केमिस्ट्री को काफी पसंद किया गया था। फिलहाल वह फिल्म 'स्त्री दो' की शूटिंग में व्यस्त चल रही हैं। इस फिल्म में वह राजकुमार राव के साथ नजर आएंगी।
|
किआ (KIA) ने अपनी मोस्ट अवेटेड सेल्टोस SUV का अपडेटेड मॉडल अमेरिका बाजार में लॉन्च कर दिया है। नए मॉडल के एक्सटीरियर और इंटीरियर दोनों में कई चेंजेस किए गए हैं। इसमें 13 कलर ऑप्शन मिलेंगे।
किआ (KIA) ने अपनी मोस्ट अवेटेड सेल्टोस SUV का अपडेटेड मॉडल अमेरिका बाजार में लॉन्च कर दिया है। नए मॉडल के एक्सटीरियर और इंटीरियर दोनों में कई चेंजेस किए गए हैं। अब इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 20 लाख से रुपए से लेकर 24. 61 लाख रुपए तक है। किआ ने सेल्टोस को 5 ट्रिम और 2 पावरट्रेन ऑप्शन के साथ लॉन्च किया है। इसमें LX, EX, S, X-Line और SX ट्रिम शामिल हैं। कंपनी दोनों पावरट्रेन के साथ AWD ऑप्शन भी दे रही है। इसके अलावा इसे 13 कलर ऑप्शन में खरीदा जा सकता है।
नई सेल्टोस अपने मौजूदा मॉडल की तुलना में ज्यादा अट्रैक्टिव नजर आती है। अब इस SUV में नया ग्रिल, स्लीक हेडलाइट्स, लोअर बंपर में वर्टिकली आउट आइस-क्यूब इफेक्ट LED एलिमेंट्स और बुल हॉर्न इफेक्ट फॉक्स स्किड प्लेट्स मिलती हैं। किआ की फेमस टाइगर नोज अब पहले से ज्यादा स्लीक और पहले से बेहतर दिखने वाली है। टॉप-स्पेक ट्रिम्स में नया 18-इंच एलॉय मिलता है। टेलुराइड और सोरेंटो से इंस्पायर्ड LED कनेक्टिंग टेल लाइट्स अट्रैक्ट करती है। अंदर की तरफ, नई सेल्टोस में पैनोरमिक डिस्प्ले दिया है, जो दो हॉरिजॉन्टल स्क्रीन हैं। एक इंफोटेनमेंट और दूसरा इंस्ट्रूमेंटेशन स्क्रीन है।
न्यू सेल्टोस में मल्टी-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, हीटेड फ्रंट सीट्स, बोस प्रीमियम ऑडियो सिस्टम, वायरलेस चार्जिंग, किआ कनेक्ट टेलीमैटिक्स सुइट और बहुत कुछ शामिल हैं। अन्य ऑप्शन के तौर पर इसमें वेंटीलेटेड फ्रंट सीट, स्मार्ट पावर टेलगेट, सनरूफ और डिजिटल की जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। हालांकि, इसके लिए ग्राहकों को अलग से पैसे खर्च करने होंगे। अब इसमें ADAS सुइट भी मिलता है। जो ऑटो इमरजेंसी ब्रेकिंग, ब्लाइंडस्पॉट डिटेक्शन, स्मार्ट एडेप्टिव क्रूज कंट्रोल, फ्रंट और रियर ट्रैफिक डिटेक्शन और अवॉइडेंस, लेन कीप असिस्ट और हाई बीम असिस्ट जैसे फीचर्स से लैस है।
न्यू किआ सेल्टोस में कुल पांच ट्रिम लेवल हैं। ये LX, EX, S, X-Line और SX हैं। बेस LX में 17-इंच एलॉय, AWD, एपल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो, ADAS फंक्शंस और स्टैंडर्ड फिटमेंट जैसे फीचर्स मिलते हैं। EX और S ट्रिम लेवल में AWD ऑप्शन है। इसमें 1. 6-लीटर टर्बो इंजन ऑप्शन नहीं मिलता है। 1. 6-लीटर टर्बो इंजन 195 bhp की पावर और 264. 4 Nm का टार्क जनरेट करता है। इस 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है।
X-लाइन और SX ट्रिम दोनों में स्टैंडर्ड तौर पर 1. 6-लीटर टर्बो इंजन और AWD मिलता है। कलर्स की बात करें तो इसमें स्टील ग्रे, फ्यूजन ब्लैक, ग्रेविटी ग्रे, स्नो व्हाइट पर्ल, मार्स ऑरेंज, नेप्च्यून ब्लू, डार्क ओशन ब्लू, प्लूटन ब्लू, वैलेस ग्रीन, क्लियर व्हाइट/फ्यूजन ब्लैक रूफ, डार्क ओशन ब्लू/क्लियर व्हाइट रूफ, प्लूटन ब्लू/फ्यूजन ब्लैक रूफ और वैलेस ग्रीन/फ्यूजन ब्लैक रूफ समेत कुल 13 कलर ऑप्शन मिलते हैं।
|
किआ ने अपनी मोस्ट अवेटेड सेल्टोस SUV का अपडेटेड मॉडल अमेरिका बाजार में लॉन्च कर दिया है। नए मॉडल के एक्सटीरियर और इंटीरियर दोनों में कई चेंजेस किए गए हैं। इसमें तेरह कलर ऑप्शन मिलेंगे। किआ ने अपनी मोस्ट अवेटेड सेल्टोस SUV का अपडेटेड मॉडल अमेरिका बाजार में लॉन्च कर दिया है। नए मॉडल के एक्सटीरियर और इंटीरियर दोनों में कई चेंजेस किए गए हैं। अब इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब बीस लाख से रुपए से लेकर चौबीस. इकसठ लाख रुपए तक है। किआ ने सेल्टोस को पाँच ट्रिम और दो पावरट्रेन ऑप्शन के साथ लॉन्च किया है। इसमें LX, EX, S, X-Line और SX ट्रिम शामिल हैं। कंपनी दोनों पावरट्रेन के साथ AWD ऑप्शन भी दे रही है। इसके अलावा इसे तेरह कलर ऑप्शन में खरीदा जा सकता है। नई सेल्टोस अपने मौजूदा मॉडल की तुलना में ज्यादा अट्रैक्टिव नजर आती है। अब इस SUV में नया ग्रिल, स्लीक हेडलाइट्स, लोअर बंपर में वर्टिकली आउट आइस-क्यूब इफेक्ट LED एलिमेंट्स और बुल हॉर्न इफेक्ट फॉक्स स्किड प्लेट्स मिलती हैं। किआ की फेमस टाइगर नोज अब पहले से ज्यादा स्लीक और पहले से बेहतर दिखने वाली है। टॉप-स्पेक ट्रिम्स में नया अट्ठारह-इंच एलॉय मिलता है। टेलुराइड और सोरेंटो से इंस्पायर्ड LED कनेक्टिंग टेल लाइट्स अट्रैक्ट करती है। अंदर की तरफ, नई सेल्टोस में पैनोरमिक डिस्प्ले दिया है, जो दो हॉरिजॉन्टल स्क्रीन हैं। एक इंफोटेनमेंट और दूसरा इंस्ट्रूमेंटेशन स्क्रीन है। न्यू सेल्टोस में मल्टी-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, हीटेड फ्रंट सीट्स, बोस प्रीमियम ऑडियो सिस्टम, वायरलेस चार्जिंग, किआ कनेक्ट टेलीमैटिक्स सुइट और बहुत कुछ शामिल हैं। अन्य ऑप्शन के तौर पर इसमें वेंटीलेटेड फ्रंट सीट, स्मार्ट पावर टेलगेट, सनरूफ और डिजिटल की जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। हालांकि, इसके लिए ग्राहकों को अलग से पैसे खर्च करने होंगे। अब इसमें ADAS सुइट भी मिलता है। जो ऑटो इमरजेंसी ब्रेकिंग, ब्लाइंडस्पॉट डिटेक्शन, स्मार्ट एडेप्टिव क्रूज कंट्रोल, फ्रंट और रियर ट्रैफिक डिटेक्शन और अवॉइडेंस, लेन कीप असिस्ट और हाई बीम असिस्ट जैसे फीचर्स से लैस है। न्यू किआ सेल्टोस में कुल पांच ट्रिम लेवल हैं। ये LX, EX, S, X-Line और SX हैं। बेस LX में सत्रह-इंच एलॉय, AWD, एपल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो, ADAS फंक्शंस और स्टैंडर्ड फिटमेंट जैसे फीचर्स मिलते हैं। EX और S ट्रिम लेवल में AWD ऑप्शन है। इसमें एक. छः-लीटर टर्बो इंजन ऑप्शन नहीं मिलता है। एक. छः-लीटर टर्बो इंजन एक सौ पचानवे bhp की पावर और दो सौ चौंसठ. चार Nm का टार्क जनरेट करता है। इस आठ-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है। X-लाइन और SX ट्रिम दोनों में स्टैंडर्ड तौर पर एक. छः-लीटर टर्बो इंजन और AWD मिलता है। कलर्स की बात करें तो इसमें स्टील ग्रे, फ्यूजन ब्लैक, ग्रेविटी ग्रे, स्नो व्हाइट पर्ल, मार्स ऑरेंज, नेप्च्यून ब्लू, डार्क ओशन ब्लू, प्लूटन ब्लू, वैलेस ग्रीन, क्लियर व्हाइट/फ्यूजन ब्लैक रूफ, डार्क ओशन ब्लू/क्लियर व्हाइट रूफ, प्लूटन ब्लू/फ्यूजन ब्लैक रूफ और वैलेस ग्रीन/फ्यूजन ब्लैक रूफ समेत कुल तेरह कलर ऑप्शन मिलते हैं।
|
टीवी पर एक नया ट्रेंड चल रहा है जिसका नाम है स्पिन ऑफ. वहीं स्पिन ऑफ का मतलब है सीरियल की कहानी के दूसरे किरदार के अगले पहलु को दिखाना. वहीं अब तक कई सीरियल्स के स्पिन ऑफ आ चुके हैं. जैसे की स्टार प्लस का सीरियल 'ये रिश्ते हैं प्यार के', 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' का स्पिन ऑफ है. साथ ही अब जी टीवी के सीरियल 'तुझसे है राब्ता' का स्पिन ऑफ भी आने के लिए तैयार है. वहीं इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म जी 5 पर ब्रॉडकास्ट किया जाएगा जो की एक लॉकडाउन स्पेशल है. वहीं इस स्पिन ऑफ में नच बलिए 8 में अपनी सिजलिंग केमिस्ट्री से सबका दिल जीतने वाली जोड़ी अबीगैल पाण्डे और सनम जौहर नजर आएंगे. इसमें अबीगैल और सनम, प्रिया और शरद के किरदार में नजर आएंगे.
एक मिडिया रिपोर्टर के साथ बातचीत के दौरान अबीगैल ने बताया कि इस स्पिन ऑफ की शूटिंग घर से ही की जा रही है. वहीं उन्होंने कहा," कहानी बहुत ही मजेदार है, इसके बारे में मैं ज़्यादा नहीं बात सकती परन्तु जो एक्सपीरियंस है घर से शूट करना वो सबसे ज़्यादा मज़ेदार रहा है. वहीं सनम और मैं एक दूसरे के शॉट्स ले रहे हैं, फिर कैमरा सेट करके हम दोनों के साथ में शॉट्स लेना, फ़िलहाल हमारे जो डायरेक्टर्स हैं वो ऑन कॉल थे शूटिंग की दौरान. वहीं रोल, एक्शन सब उन्हीं ने किया परन्तु सेट पर शूटिंग के दौरान जब एक सीन हो जाता है तो लाइट सेट करते वक्त आर्टिस्ट को 10-15 मिनट मिल जाते हैं. पर यहां ये सब हमने किया, लाइट हो गया, मेकअप हो गया, कपड़े हो गए. वहीं देखा जाए तो बहुत ही थका देने वाला था परन्तु कुछ नया सीखने को मिला. " वहीं अबीगैल ने अपने और सनम के किरदार में बताते हुए कहा कि," प्रिया बहुत ही सिमिलर है अबीगैल से.
वहीं इनफैक्ट सनम का किरदार जो है शरद का वो काफी सिमिलर है. इसके अलावा जब हम स्क्रिप्ट भी पढ़ रहे थे और शूट कर रहे थे, हमें कुछ ऐसे अलग एक्टिंग टाइप का नहीं लगा रहा था क्योंकि ज्यादातर हम वैसे ही बात करते हैं. वहीं प्रिया का जो रिलेशन है शरद के साथ वो मेरे और सनम के रिलेशनशिप जैसा ही है. वहीं काफी चीजें सेम है, हमारी केमिस्ट्री काफी सिमिलर है. बस इसमें एक ही चीज अलग है और वो ये की रियल लाइफ में हमारी फैमली बहुत ही सपोर्टिव है, और प्रिया-शरद की फैमली भी सपोर्टिव है परन्तु वो काफी स्ट्रिक्ट और रूढ़िवादी हैं.
|
टीवी पर एक नया ट्रेंड चल रहा है जिसका नाम है स्पिन ऑफ. वहीं स्पिन ऑफ का मतलब है सीरियल की कहानी के दूसरे किरदार के अगले पहलु को दिखाना. वहीं अब तक कई सीरियल्स के स्पिन ऑफ आ चुके हैं. जैसे की स्टार प्लस का सीरियल 'ये रिश्ते हैं प्यार के', 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' का स्पिन ऑफ है. साथ ही अब जी टीवी के सीरियल 'तुझसे है राब्ता' का स्पिन ऑफ भी आने के लिए तैयार है. वहीं इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म जी पाँच पर ब्रॉडकास्ट किया जाएगा जो की एक लॉकडाउन स्पेशल है. वहीं इस स्पिन ऑफ में नच बलिए आठ में अपनी सिजलिंग केमिस्ट्री से सबका दिल जीतने वाली जोड़ी अबीगैल पाण्डे और सनम जौहर नजर आएंगे. इसमें अबीगैल और सनम, प्रिया और शरद के किरदार में नजर आएंगे. एक मिडिया रिपोर्टर के साथ बातचीत के दौरान अबीगैल ने बताया कि इस स्पिन ऑफ की शूटिंग घर से ही की जा रही है. वहीं उन्होंने कहा," कहानी बहुत ही मजेदार है, इसके बारे में मैं ज़्यादा नहीं बात सकती परन्तु जो एक्सपीरियंस है घर से शूट करना वो सबसे ज़्यादा मज़ेदार रहा है. वहीं सनम और मैं एक दूसरे के शॉट्स ले रहे हैं, फिर कैमरा सेट करके हम दोनों के साथ में शॉट्स लेना, फ़िलहाल हमारे जो डायरेक्टर्स हैं वो ऑन कॉल थे शूटिंग की दौरान. वहीं रोल, एक्शन सब उन्हीं ने किया परन्तु सेट पर शूटिंग के दौरान जब एक सीन हो जाता है तो लाइट सेट करते वक्त आर्टिस्ट को दस-पंद्रह मिनट मिल जाते हैं. पर यहां ये सब हमने किया, लाइट हो गया, मेकअप हो गया, कपड़े हो गए. वहीं देखा जाए तो बहुत ही थका देने वाला था परन्तु कुछ नया सीखने को मिला. " वहीं अबीगैल ने अपने और सनम के किरदार में बताते हुए कहा कि," प्रिया बहुत ही सिमिलर है अबीगैल से. वहीं इनफैक्ट सनम का किरदार जो है शरद का वो काफी सिमिलर है. इसके अलावा जब हम स्क्रिप्ट भी पढ़ रहे थे और शूट कर रहे थे, हमें कुछ ऐसे अलग एक्टिंग टाइप का नहीं लगा रहा था क्योंकि ज्यादातर हम वैसे ही बात करते हैं. वहीं प्रिया का जो रिलेशन है शरद के साथ वो मेरे और सनम के रिलेशनशिप जैसा ही है. वहीं काफी चीजें सेम है, हमारी केमिस्ट्री काफी सिमिलर है. बस इसमें एक ही चीज अलग है और वो ये की रियल लाइफ में हमारी फैमली बहुत ही सपोर्टिव है, और प्रिया-शरद की फैमली भी सपोर्टिव है परन्तु वो काफी स्ट्रिक्ट और रूढ़िवादी हैं.
|
नगरपालिका परिषद के ईओ का कार्यभार देख रहे एसडीएम को पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर और उसके पति से अपनी और अपने परिवार की जान का खतरा पैदा हो गया है। एसडीएम ने यह बयान शहला ताहिर के वीडियो वायरल करके उनके ऊपर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाने के बाद जारी किया है। उन्होंने शहला ताहिर का रवैया अड़ियल बताया।
पिछले 15 दिनों से पालिकाध्यक्ष शहला और एसडीएम वेदप्रकाश मिश्रा आमने-सामने हैं। एसडीएम वेद प्रकाश मिश्रा ने नगर पालिका परिषद के विकास कार्यों के लिए पारित किए गए प्रस्तावों की पत्रावली को हस्ताक्षर के लिए पालिकाध्यक्ष के पास भेजा था। लेकिन शहला ने उन पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इसके बाद एसडीएम ने नगर पालिका परिषद की दुकानों में बिना किसी अभिलेख के कब्जा जमाए दुकानदारों को नोटिस जारी कर उन्हें कार्यवाही की चेतावनी दी थी। वहीं होली नजदीक होने के बाद भी पालिका कर्मियों को वेतन न मिलने पर सोमवार को एसडीएम वेद प्रकाश मिश्रा ने नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों के वेतन प्रपत्र और चेक पर हस्ताक्षर करने के लिए पालिकाध्यक्ष को पत्र भेज उनसे हस्ताक्षर करने को कहा था। साथ ही इस पत्र को उनके आवास पर भी चस्पा करा दिया था।
इसके बाद मंगलवार को पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर ने एक वीडियो वायरल कर आरोप लगाया कि एसडीएम उनके कार्यालय में उनकी कुर्सी के ऊपर बैठ कर उल्टे सीधे फैसले करते है। एसडीएम उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। इससे उनका स्वास्थ्य खराब हो गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी यह वीडियो ट्वीट किया है। यह वीडियो वायरल होने के बाद शहला ताहिर एक बार फिर चर्चा में आ गयी हैं।
इसके बाद मंगलवार देर शाम एसडीएम वेद प्रकाश मिश्रा ने प्रेस नोट जारी कर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर और उनके पति से खुद को और अपने परिवार को जान माल का खतरा बताया है। इसके साथ ही उन्होंने चेयरमैन शहला और उनके पति के अड़ियल रवैये से कस्बे का विकास न होने व उनके ऊपर कई मुकदमे दर्ज होने और मुकदमों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल होने की बात कही है। जिसके बाद दोनों के बीच विवाद गहराता जा रहा है।
|
नगरपालिका परिषद के ईओ का कार्यभार देख रहे एसडीएम को पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर और उसके पति से अपनी और अपने परिवार की जान का खतरा पैदा हो गया है। एसडीएम ने यह बयान शहला ताहिर के वीडियो वायरल करके उनके ऊपर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाने के बाद जारी किया है। उन्होंने शहला ताहिर का रवैया अड़ियल बताया। पिछले पंद्रह दिनों से पालिकाध्यक्ष शहला और एसडीएम वेदप्रकाश मिश्रा आमने-सामने हैं। एसडीएम वेद प्रकाश मिश्रा ने नगर पालिका परिषद के विकास कार्यों के लिए पारित किए गए प्रस्तावों की पत्रावली को हस्ताक्षर के लिए पालिकाध्यक्ष के पास भेजा था। लेकिन शहला ने उन पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इसके बाद एसडीएम ने नगर पालिका परिषद की दुकानों में बिना किसी अभिलेख के कब्जा जमाए दुकानदारों को नोटिस जारी कर उन्हें कार्यवाही की चेतावनी दी थी। वहीं होली नजदीक होने के बाद भी पालिका कर्मियों को वेतन न मिलने पर सोमवार को एसडीएम वेद प्रकाश मिश्रा ने नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों के वेतन प्रपत्र और चेक पर हस्ताक्षर करने के लिए पालिकाध्यक्ष को पत्र भेज उनसे हस्ताक्षर करने को कहा था। साथ ही इस पत्र को उनके आवास पर भी चस्पा करा दिया था। इसके बाद मंगलवार को पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर ने एक वीडियो वायरल कर आरोप लगाया कि एसडीएम उनके कार्यालय में उनकी कुर्सी के ऊपर बैठ कर उल्टे सीधे फैसले करते है। एसडीएम उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। इससे उनका स्वास्थ्य खराब हो गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी यह वीडियो ट्वीट किया है। यह वीडियो वायरल होने के बाद शहला ताहिर एक बार फिर चर्चा में आ गयी हैं। इसके बाद मंगलवार देर शाम एसडीएम वेद प्रकाश मिश्रा ने प्रेस नोट जारी कर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर और उनके पति से खुद को और अपने परिवार को जान माल का खतरा बताया है। इसके साथ ही उन्होंने चेयरमैन शहला और उनके पति के अड़ियल रवैये से कस्बे का विकास न होने व उनके ऊपर कई मुकदमे दर्ज होने और मुकदमों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल होने की बात कही है। जिसके बाद दोनों के बीच विवाद गहराता जा रहा है।
|
कुम्भ कोरोना जांच फर्जीवाड़े में नया मोड़ आया है. कुंभ के दौरान जांच का ठेका पाने वाली नलवा लैब ने कुंभ के समय कोई भी जांच करने से ही इनकार कर दिया है. लैब ने हाई कोर्ट में कहा कि उसने एक भी जांच कुम्भ में नहीं की. लिहाज़ा उनको इस मामले से अलग किया जाए. हालांकि सुनवाई के बाद कोर्ट ने कुम्भ में कोरोना जांच फर्जीवाड़े में आरोपी नलवा लैब संचालक को कोर्ट ने राहत नहीं दी है. यह ज़रूर है कि हाई कोर्ट से अगले 18 दिनों के लिए लैब को जो मोहलत मिली है, इस दौरान गिरफ्तारी नहीं होगी.
जस्टिस नारायण सिंह धनिक की कोर्ट ने लैब संचालक नवतेज नलवा को निचली अदालत में 17 अगस्त तक अग्रिम ज़मानत की याचिका दाखिल करने का आदेश दिया. कुम्भ में कोरोना टेस्टिंग फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 17 जून को सीएमओ हरिद्वार ने हरिद्वार कोतवाली में मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज समेत लाल चंदानी व नलवा लैब के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. हालांकि सभी की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी, लेकिन जांच के दौरान पुलिस द्वारा धाराएं बढ़ाने से नलवा लैब समेत सभी पर गिरफ्तारी का खतरा बन गया.
नलवा लैब संचालक ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उन्हें इस मामले में गलत फंसाया जा रहा है. याचिका में गिरफ्तारी पर रोक के साथ एफआईआर निरस्त करने की मांग कोर्ट से की गई थी. वहीं, नलवा लैब के वकील परीक्षित सैनी ने न्यूज़18 से फ़ोन पर बातचीत में कहा कि 17 अगस्त तक वो निचली अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल करेंगे. इस दौरान गिरफ्तारी नहीं होगी.
|
कुम्भ कोरोना जांच फर्जीवाड़े में नया मोड़ आया है. कुंभ के दौरान जांच का ठेका पाने वाली नलवा लैब ने कुंभ के समय कोई भी जांच करने से ही इनकार कर दिया है. लैब ने हाई कोर्ट में कहा कि उसने एक भी जांच कुम्भ में नहीं की. लिहाज़ा उनको इस मामले से अलग किया जाए. हालांकि सुनवाई के बाद कोर्ट ने कुम्भ में कोरोना जांच फर्जीवाड़े में आरोपी नलवा लैब संचालक को कोर्ट ने राहत नहीं दी है. यह ज़रूर है कि हाई कोर्ट से अगले अट्ठारह दिनों के लिए लैब को जो मोहलत मिली है, इस दौरान गिरफ्तारी नहीं होगी. जस्टिस नारायण सिंह धनिक की कोर्ट ने लैब संचालक नवतेज नलवा को निचली अदालत में सत्रह अगस्त तक अग्रिम ज़मानत की याचिका दाखिल करने का आदेश दिया. कुम्भ में कोरोना टेस्टिंग फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सत्रह जून को सीएमओ हरिद्वार ने हरिद्वार कोतवाली में मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज समेत लाल चंदानी व नलवा लैब के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. हालांकि सभी की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी, लेकिन जांच के दौरान पुलिस द्वारा धाराएं बढ़ाने से नलवा लैब समेत सभी पर गिरफ्तारी का खतरा बन गया. नलवा लैब संचालक ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उन्हें इस मामले में गलत फंसाया जा रहा है. याचिका में गिरफ्तारी पर रोक के साथ एफआईआर निरस्त करने की मांग कोर्ट से की गई थी. वहीं, नलवा लैब के वकील परीक्षित सैनी ने न्यूज़अट्ठारह से फ़ोन पर बातचीत में कहा कि सत्रह अगस्त तक वो निचली अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल करेंगे. इस दौरान गिरफ्तारी नहीं होगी.
|
पर्थ स्टेडियम में रविवार को खेले गए टी20 विश्व कप के सुपर 12 मैच में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 5 विकेट से शिकस्त दी.
पर्थ. ऑस्ट्रेलिया में जारी टी20 विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पर्थ में करीबी मुकाबले में हार का स्वाद चखने के बाद भारत की जीत का सिलसिला टूट गया. रविवार (30 अक्टूबर) को तेज गेंदबाजों के दबदबे वाले खेल में अफ्रीकी टीम ने रोहित शर्मा की अगुवाई वाले टीम इंडिया को पांच विकेट से हरा दिया. इस बीच, पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह को लगता है कि भारत को हार के बाद कुछ कड़े फैसले लेने चाहिए.
हालांकि, मैच में भारतीय गेंदबाजों ने विरोधी टीम को बांधकर रखा और एक-एक रन के लिए जूझने पर मजबूर कर दिया. भारत के सलामी बल्लेबाज केएल राहुल एक बार फिर बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके. स्टाइलिश सलामी बल्लेबाज, प्रतियोगिता में अपनी अब तक की तीन पारियों में, दोहरे आंकड़े तक पहुंचने में भी नाकाम रहे हैं. आईसीसी टूर्नामेंट में उनका खराब फॉर्म भारतीय टीम के लिए चिंता का विषय है.
पूर्व भारतीय दिग्गज हरभजन सिंह को लगता है कि 'मेन इन ब्लू' को कुछ कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं, जिसमें राहुल को शुरुआती ग्यारह से बाहर करना भी शामिल है. हरभजन ने माना कि विस्फोटक विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को टीम में शामिल किया जा सकता है, खासकर दिनेश कार्तिक के प्रोटियाज के खिलाफ चोटिल होने की वजह से.
रोहित शर्मा के गेंदबाजों ने अपने कप्तान को निराश नहीं किया और बोर्ड पर औसत स्कोर के बावजूद दक्षिण अफ्रीका को पूरी तरह से कंट्रोल में रखा, लेकिन अनुभवी स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन के साथ बने रहने के भारत के फैसले का खेल में उलटा असर पड़ा क्योंकि उन्हें अपने चार ओवरों में 43 रन लुटाए. उनके महंगे गेंदबाजी स्पैल ने अफ्रीकी बल्लेबाजों पर दबाव कम करने का काम किया.
.
|
पर्थ स्टेडियम में रविवार को खेले गए टीबीस विश्व कप के सुपर बारह मैच में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को पाँच विकेट से शिकस्त दी. पर्थ. ऑस्ट्रेलिया में जारी टीबीस विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पर्थ में करीबी मुकाबले में हार का स्वाद चखने के बाद भारत की जीत का सिलसिला टूट गया. रविवार को तेज गेंदबाजों के दबदबे वाले खेल में अफ्रीकी टीम ने रोहित शर्मा की अगुवाई वाले टीम इंडिया को पांच विकेट से हरा दिया. इस बीच, पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह को लगता है कि भारत को हार के बाद कुछ कड़े फैसले लेने चाहिए. हालांकि, मैच में भारतीय गेंदबाजों ने विरोधी टीम को बांधकर रखा और एक-एक रन के लिए जूझने पर मजबूर कर दिया. भारत के सलामी बल्लेबाज केएल राहुल एक बार फिर बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके. स्टाइलिश सलामी बल्लेबाज, प्रतियोगिता में अपनी अब तक की तीन पारियों में, दोहरे आंकड़े तक पहुंचने में भी नाकाम रहे हैं. आईसीसी टूर्नामेंट में उनका खराब फॉर्म भारतीय टीम के लिए चिंता का विषय है. पूर्व भारतीय दिग्गज हरभजन सिंह को लगता है कि 'मेन इन ब्लू' को कुछ कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं, जिसमें राहुल को शुरुआती ग्यारह से बाहर करना भी शामिल है. हरभजन ने माना कि विस्फोटक विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को टीम में शामिल किया जा सकता है, खासकर दिनेश कार्तिक के प्रोटियाज के खिलाफ चोटिल होने की वजह से. रोहित शर्मा के गेंदबाजों ने अपने कप्तान को निराश नहीं किया और बोर्ड पर औसत स्कोर के बावजूद दक्षिण अफ्रीका को पूरी तरह से कंट्रोल में रखा, लेकिन अनुभवी स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन के साथ बने रहने के भारत के फैसले का खेल में उलटा असर पड़ा क्योंकि उन्हें अपने चार ओवरों में तैंतालीस रन लुटाए. उनके महंगे गेंदबाजी स्पैल ने अफ्रीकी बल्लेबाजों पर दबाव कम करने का काम किया. .
|
प्रेग्नेंसी के दौरान स्वास्थ्य का खास ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि यह समय बहुत नाजुक होता है और एक छोटी सी भी गलती बच्चे और मां दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। सबसे ज्यादा ध्यान खाने का रखना होता है क्योंकि मां जो भी खाती है उसका सीधा प्रभाव उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है।
अक्सर गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को खाने की क्रेविंग होती है जैसे- कभी नमक वाले खाने की क्रेविंग होती है तो कभी मीठा तो कभी मसालेदार खाने की क्रेविंग। ऐसा तब अधिक होता है, जब गर्भावस्था के दौरान शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी हो जाती है। ऐसे में खाने की क्रेविंग को कम करने के लिए आप कुछ आसान टिप्स अपना सकती हैं।
नाश्ते में हमेशा स्वस्थ और हेल्दी खाएं। ऐसे खाद्य पदार्थो का सेवन करने की कोशिश करें जिनमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और फाइबर मौजूद हों ताकि आपका पेट लंबे समय तक भरा हुआ रहे और आपको अधिक खाने की क्रेविंग ना हो।
खाने की क्रेविंग को कम करने के लिए आपको थोड़-थोड़े समय में कुछ खाना चाहिए। कोशिश करें कि हेल्दी चीजें ही खाएं जो बच्चे और मां दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हों। ऐसा करने से आपकी क्रेविंग कम हो जाएगी।
जंक फूड्स का सेवन मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है क्योंकि उनमें अधिक मात्रा में फैट्स मौजूद होते हैं। इसलिए इन चीजों को खाने के बजाय आपका जूस या फिर फलों का सेवन करें।
जब भी अस्वस्थ चीजों को खाने की क्रेविंग हो तो अपने दिमाग को भटकाएं। उन चीजों को करने की कोशिश करें जिनमें आपका मन लगता हो जैसे- किताब पढे़ं, मूवी देखें या फिर एक छोटी वॉक पर चलें जाएं। ऐसा करने से आपकी क्रेविंग कम हो सकती है।
Total Wellness is now just a click away.
|
प्रेग्नेंसी के दौरान स्वास्थ्य का खास ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि यह समय बहुत नाजुक होता है और एक छोटी सी भी गलती बच्चे और मां दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। सबसे ज्यादा ध्यान खाने का रखना होता है क्योंकि मां जो भी खाती है उसका सीधा प्रभाव उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। अक्सर गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को खाने की क्रेविंग होती है जैसे- कभी नमक वाले खाने की क्रेविंग होती है तो कभी मीठा तो कभी मसालेदार खाने की क्रेविंग। ऐसा तब अधिक होता है, जब गर्भावस्था के दौरान शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी हो जाती है। ऐसे में खाने की क्रेविंग को कम करने के लिए आप कुछ आसान टिप्स अपना सकती हैं। नाश्ते में हमेशा स्वस्थ और हेल्दी खाएं। ऐसे खाद्य पदार्थो का सेवन करने की कोशिश करें जिनमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और फाइबर मौजूद हों ताकि आपका पेट लंबे समय तक भरा हुआ रहे और आपको अधिक खाने की क्रेविंग ना हो। खाने की क्रेविंग को कम करने के लिए आपको थोड़-थोड़े समय में कुछ खाना चाहिए। कोशिश करें कि हेल्दी चीजें ही खाएं जो बच्चे और मां दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हों। ऐसा करने से आपकी क्रेविंग कम हो जाएगी। जंक फूड्स का सेवन मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है क्योंकि उनमें अधिक मात्रा में फैट्स मौजूद होते हैं। इसलिए इन चीजों को खाने के बजाय आपका जूस या फिर फलों का सेवन करें। जब भी अस्वस्थ चीजों को खाने की क्रेविंग हो तो अपने दिमाग को भटकाएं। उन चीजों को करने की कोशिश करें जिनमें आपका मन लगता हो जैसे- किताब पढे़ं, मूवी देखें या फिर एक छोटी वॉक पर चलें जाएं। ऐसा करने से आपकी क्रेविंग कम हो सकती है। Total Wellness is now just a click away.
|
चंडीगढ़, 24 अक्टूबरः
पंजाब सरकार ने सभी सरकारी और निजी सैकटरों को आदेश जारी करते हुये कहा है कि प्रत्येक रिक्त पड़े पदों को भरने संबंधी सूचना रोजग़ार उत्पत्ति और प्रशिक्षण विभाग को यकीनी तौर पर दी जाये।
इस संबंधी जानकारी देते हुये एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि सूबे में रोजग़ार के अवसरों को प्रौत्साहन देने के लिए प्रत्येक रिक्त पड़े पद की सूचना रोजग़ार कार्यालय को दी जाये। उन्होंने बताया कि खाली पड़े पदो संबंधी 'कम्पल्सरी नोटीफीकाशन एक्ट 1959' के अंतर्गत यह यकीनी बनाया जाये कि किसी भी सरकारी या निजी क्षेत्र से सम्बन्धित किसी भी वर्ग या श्रेणी की खाली पड़ी असामी को भरने से पहले रोजग़ार कार्यालय को सूचित किया जाये। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की पालन सही ढंग से नहीं किया जा रहा और अधिकतर नौकरियों संबंधित जानकारी भी रोजग़ार उत्पत्ति विभाग को नहीं दी जा रही है।
प्रवक्ता ने आगे कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1996 के फ़ैसले मुताबिक यह लाजि़मी है कि हरेक असामी को भरने संबंधी इश्तिहार अखबारों में प्रकाशित करने के साथ रोजग़ार कार्यालय को भी रिक्तियों संबंधी सूचित किया जाये। उन्होंने कहा कि अधिकतर संस्थान अखबारों और प्रिंट मीडिया क ा तो प्रयोग ही करते हैं परन्तु रोजग़ार कार्यालय को रिक्तियों सम्बन्धित सूचित नहीं करते। इसलिए सूबा सरकार ने अब सभी सरकारी और निजी सैकटरों को रिक्तियों या नौकरियों संबंधी हर जानकारी /इश्तिहार सम्बन्धित विभाग / संस्था (ठेका, पक्के पदों ) की सूचना सयुंक्त डायरैक्टर रोजग़ार उत्पत्ति और प्रशिक्षण कार्यालय, एस.सी.ओ. नंबर 47 /1, सैक्टर -17 ई, चण्डीगढ़ को देने के आदेश जारी किये हैं।
|
चंडीगढ़, चौबीस अक्टूबरः पंजाब सरकार ने सभी सरकारी और निजी सैकटरों को आदेश जारी करते हुये कहा है कि प्रत्येक रिक्त पड़े पदों को भरने संबंधी सूचना रोजग़ार उत्पत्ति और प्रशिक्षण विभाग को यकीनी तौर पर दी जाये। इस संबंधी जानकारी देते हुये एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि सूबे में रोजग़ार के अवसरों को प्रौत्साहन देने के लिए प्रत्येक रिक्त पड़े पद की सूचना रोजग़ार कार्यालय को दी जाये। उन्होंने बताया कि खाली पड़े पदो संबंधी 'कम्पल्सरी नोटीफीकाशन एक्ट एक हज़ार नौ सौ उनसठ' के अंतर्गत यह यकीनी बनाया जाये कि किसी भी सरकारी या निजी क्षेत्र से सम्बन्धित किसी भी वर्ग या श्रेणी की खाली पड़ी असामी को भरने से पहले रोजग़ार कार्यालय को सूचित किया जाये। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की पालन सही ढंग से नहीं किया जा रहा और अधिकतर नौकरियों संबंधित जानकारी भी रोजग़ार उत्पत्ति विभाग को नहीं दी जा रही है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक हज़ार नौ सौ छियानवे के फ़ैसले मुताबिक यह लाजि़मी है कि हरेक असामी को भरने संबंधी इश्तिहार अखबारों में प्रकाशित करने के साथ रोजग़ार कार्यालय को भी रिक्तियों संबंधी सूचित किया जाये। उन्होंने कहा कि अधिकतर संस्थान अखबारों और प्रिंट मीडिया क ा तो प्रयोग ही करते हैं परन्तु रोजग़ार कार्यालय को रिक्तियों सम्बन्धित सूचित नहीं करते। इसलिए सूबा सरकार ने अब सभी सरकारी और निजी सैकटरों को रिक्तियों या नौकरियों संबंधी हर जानकारी /इश्तिहार सम्बन्धित विभाग / संस्था की सूचना सयुंक्त डायरैक्टर रोजग़ार उत्पत्ति और प्रशिक्षण कार्यालय, एस.सी.ओ. नंबर सैंतालीस /एक, सैक्टर -सत्रह ई, चण्डीगढ़ को देने के आदेश जारी किये हैं।
|
RANCHI : इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाते हुए झारखंड ने सोमवार को अपना क्लाउड सर्वर हासिल कर लिया। मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा झारखंड स्टेट डेटा सेंटर का उद्घाटन करते ही यह सर्वर काम करने लगा है, जिसे पिछले छह वर्षो से स्थापित करने की कोशिश की जा रही थी। अब सभी गवर्नमेंट वेबसाइट और एप्लीकेशन के अलावा हर सरकार के सरकारी पोर्टल इसी क्लाउड सर्वर से जुड़ जाएंगे। झारखंड एजेंसी फोर प्रोमोशन ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (जैप आईटी) ने इसे तैयार किया है।
सोमवार को स्टेट सर्विस डेलिवरी गेटवे और सड़क निर्माण विभाग के पोर्टल इस सर्वर से जोड़ दिये गये। झारखंड सरकार के आईटी और ई-गवर्नेस से जुड़े सभी डेटा अब इसी सर्वर में स्टोर भी होंगे और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध सभी डेटा रिट्रीव भी किये जा सकेंगे।
राज्य का अपना डाटा सेंटर हो जाने से अब थर्ड पार्टी होस्टिंग की जरूरत खत्म हो जाएगी। इससे सरकारी वेबसाइट के हैंग होने या फिर स्लो स्पीड की समस्या से निजात मिलेगी। ऑन लाइन उपलब्ध सभी सरकारी सेवाएं अब चार गुना ज्यादा रफ्तार से इस्तेमाल की जा सकेंगी।
डाटा सेंटर 6000 वर्ग फीट में स्थापित किया गया है। 1500 वर्ग फीट एरिया में केवल सर्वर लगाया गया है। इसके लिए दो अलग-अलग फीडर से 750 केवीए पावर सप्लाई की व्यवस्था की गयी है। यह कभी बंद नहीं होगा। सर्वर की सुरक्षा मल्टी लेयर रखी गयी है, ताकि इसे हैकर्स से बचाया जा सके। इसे नेशनल नॉलेज नेटवर्क, स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क के साथ-साथ वोडाफोन के लीज लाइन से जोड़ा गया है। इस सर्वर की 24 घंटे निगरानी होती रहेगी।
|
RANCHI : इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाते हुए झारखंड ने सोमवार को अपना क्लाउड सर्वर हासिल कर लिया। मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा झारखंड स्टेट डेटा सेंटर का उद्घाटन करते ही यह सर्वर काम करने लगा है, जिसे पिछले छह वर्षो से स्थापित करने की कोशिश की जा रही थी। अब सभी गवर्नमेंट वेबसाइट और एप्लीकेशन के अलावा हर सरकार के सरकारी पोर्टल इसी क्लाउड सर्वर से जुड़ जाएंगे। झारखंड एजेंसी फोर प्रोमोशन ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने इसे तैयार किया है। सोमवार को स्टेट सर्विस डेलिवरी गेटवे और सड़क निर्माण विभाग के पोर्टल इस सर्वर से जोड़ दिये गये। झारखंड सरकार के आईटी और ई-गवर्नेस से जुड़े सभी डेटा अब इसी सर्वर में स्टोर भी होंगे और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध सभी डेटा रिट्रीव भी किये जा सकेंगे। राज्य का अपना डाटा सेंटर हो जाने से अब थर्ड पार्टी होस्टिंग की जरूरत खत्म हो जाएगी। इससे सरकारी वेबसाइट के हैंग होने या फिर स्लो स्पीड की समस्या से निजात मिलेगी। ऑन लाइन उपलब्ध सभी सरकारी सेवाएं अब चार गुना ज्यादा रफ्तार से इस्तेमाल की जा सकेंगी। डाटा सेंटर छः हज़ार वर्ग फीट में स्थापित किया गया है। एक हज़ार पाँच सौ वर्ग फीट एरिया में केवल सर्वर लगाया गया है। इसके लिए दो अलग-अलग फीडर से सात सौ पचास केवीए पावर सप्लाई की व्यवस्था की गयी है। यह कभी बंद नहीं होगा। सर्वर की सुरक्षा मल्टी लेयर रखी गयी है, ताकि इसे हैकर्स से बचाया जा सके। इसे नेशनल नॉलेज नेटवर्क, स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क के साथ-साथ वोडाफोन के लीज लाइन से जोड़ा गया है। इस सर्वर की चौबीस घंटाटे निगरानी होती रहेगी।
|
वालो देवता । बाह्मी उणिक । ऋषभः ॥
भा० - जिस प्रकार ( वातः ) वायु. ( इषिरः ) तीव्र वेगवान्, ( विश्वष्यचाः ) और समस्त विश्व में व्यापक एवं (गन्धर्वः ) गो नाम दृथिवी, मध्यम वाली और विद्युत् को अन्तरिक्ष में करण पोषण करता ( तस्य ) उसके श्राश्रय पर ( श्राप ) जल ही ( अप्सरसः ) अन्तरिक्ष में गतिमान् होकर मेव रूप में विचरते हैं। वे अन्न द्वारा विश्व के बलकारक होने से (ऊर्जः नाम) 'ऊर्ज' नाम से कहते हैं। उसी प्रकार (ऋतः) वायु के समान प्रवल राजा ( इषिरः ) अति वेगवान्, सबका प्रेरक और सब के इच्छा योग्य, ( विश्वध्यचाः ) समस्त राष्ट्र में प्राण के समान व्यापक, सर्वनिय पुरुष ( गंधर्वः ) पृथ्वी को धारण पोषण करने में समर्थ है। ( तस्य ) उसके ( आपः ) प्राप्त जन ही ( अप्सरसः ) ज्ञान और कर्म में निउ ज्ञानी और प्रजा में व्यापक और ( ऊर्जः नाम ) राष्ट्र में बल उत्पन्न करने वाले होने से 'ऊर्जू' नाम से कहे जाते हैं। (स्वःबः० इत्यादि पूर्ववत् ।
भ॒ज्यु॑ः सुपर्णो यज्ञो गन्धर्वस्तस्य॒ दक्षिणा अन्स॒रसे स्वा नाम॑ । सन ऽदं ब्रह्म॑ क्षमे पोतु तस्मै॒ स्वाहातभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥४२॥
यशो देवता । धार्थी पक्तिः । पञ्चमः
भा० - जिस प्रकार (बज्ञः) पज्ञ, प्रजापति (मुज्युः) सबका पालक सबको भोग्य फल का देने वाला, ( सुपर्ण ) उत्तम पालन सामय से युक्त, ( गन्धर्वः ) वेद बाणी को अपने भीतर धारण करने से " है। ( सस्य ) उसकी ( अप्सरस ) मजा पा कार्यकर्ताओं को प्राप होने पाली ( दक्षिणाः ) कार्य से दक्षता की उत्पादक दक्षिणायें (स्लाजा ) सुपात्र में दी जाकर बझकर्ता और यज्ञ दोनों की स्तुति के कारण होने से के 'इताबा' नामक है उसी प्रकार ( यशः ) राष्ट्र पाक्षक, प्रजाप से राजो भी
स्वतः ( भुज्युः ) प्रजा का पालक और राष्ट्र का भोका, (सुपर्णः) श्रादित्य के समान उत्तम पालन सामयों और उत्तम स्थवाहनों से सम्पन्न, ( यज्ञः ) सबका संगतिकारक ( गंधवः ) पृथ्वी का धारण पोषक है। (तस्य ) उसकी (अप्सरसः ) ज्ञान और कर्म में व्याप्त ( दक्षिणाः ) राष्ट्र कार्य में बल उत्पन्न करनेवाली प्रजाएं ( स्तावाः नाम ) स्तुति योग्य होने से 'स्तावा' नाम से कहाती हैं । ( स० नः इ० इत्यादि पूर्ववत् ) प्र॒जाप॑तिवि॒िश्वकर्मा मनो गन्ध॒स्तस्य॑ ऽॠसामान्य॑प्स॒रस॒ ऽपष्ट॑यो नाम॑ । सन॑ ऽइ॒दं ब्रह्म क्षत्रं पातु॑ तस्मै॒ स्वाहा बाटू ताभ्यः॒ स्वाहा॑
विश्वकर्मा मनो देवता । विराडार्थी जगती । निषादः ॥
मा० - ( मनः ) ज्ञानवान् ( विश्वकर्मा ) समस्त विश्व का कर्ता, ( प्रजापतिः ) प्रजा का पालक राजा ( विश्वकर्मा ) सब राज्य के हितकर कर्मों को करनेहारा ( मनः ) शरीर में मन के समान सब का ज्ञाता, ममनशील, ( गन्धर्वः ) पृथ्वी का पोषक है । (तस्य ) उसके (बटक् सामानि अप्सरसः पुष्टयः नाम ) ज्ञानानुकूल या स्तुत्य 'साम' शत्रुनाशक उपाय ही सब इए कार्यों की साधक एवं प्रना की प्रेरक आशाएं 'पुष्टिः' कहाती है । ( सः न० इत्यादि ) पूर्ववत् ।
स नो भुवनस्य पते प्रजावते यस्येत ऽउ॒परि॑ गृ॒हा यस्य॑ वे॒ह । अ॒स्मै ब्रह्म॑णे॒ऽमैत्रह शर्म यच्छ स्वाहा॑ ॥ ४४ ॥
प्रजापतिर्देवता । विगार्थी पंक्तिः । पम्पमः ॥
भा० - हे ( भुवनस्य पते ) समस्त मुब, उत्पन्न प्राणियों और लोकों के पालक ! स्वामिन् ! हे ( प्रजापसे ) प्रजा के पालक । ( यस्त्र ) जिस ( से ) तेरे (उपरि ) ऊपर, संरे आश्रम पर ( गृहाः ) गृह. गृहस्व रुप (वा) और (यस्थ ) जिसके ऊपर ( इह ) इसरार लोक के
अन्य प्राण भी माश्रित हैं वह तू ( अस्मै ) इस ( ब्रह्मणे ) ब्रह्म, वेद और ईश्वर के जानने वाले और (अस्मैत्राय ) राष्ट्र को क्षति से बचाने वाले इस क्षत्रिय वर्ग को ( स्वाहा ) उत्तम रीति से ( महि शर्म) बढ़ा सुख और शान्ति ( यच्छ ) प्रदान कर
स॒मु॒द्रोऽसि॒ नभ॑स्वाना॒ार्द्रनुः शम्भूम॑यो॒ोभूर॒भि म वाहि॒ स्वाहा॑ । मारु॒तोऽजसे म॒रुतो॑ ग॒णः श॒म्भूम॑य॒ोभूर॒भिमा॑ वाहि॒ स्वाहा॑ । ऋ॒व॒स्यूर॑सि॒ दुव॑स्वाञ्छ॒म्भूम॑य॒ोभूर॒भि मा॑ वाहि॒ स्वाहा॑ ॥ ४५ ॥ प्रजापतिर्देवता । निच॒दष्टिः मध्यमः ॥
भा० - हे (प्रजापते ) प्रजा के पालक ! राजन् तू (समुदः असि) समुद के बड़ा गम्भीर, सब रत्नैश्वर्यों का श्राकर, सब ऐश्वर्यों का उत्पादक है। तू ( नभस्वान्) श्राकाश में व्यापक वायु के समान सबका प्राणाधार और वायु के समान तीव्र वेगवान् है । तू ( भाईदानु ) जलद मेघ के समान श्राद भाव से प्रजा पर ऐश्वर्यो का त्याग करने हारा है । तू ( शंभू : ) जल के समान शान्तिदायक, ( मयो भूः ) तू परमेश्वर या श्रात्मा क समान परम-श्रानन्द जनक है। तू ( मा ) मुक प्रजाजन को । अभि वाहि ) साक्षात् रूप से प्राप्त हो । तू ( मारुतः असिः) प्राणों में श्रेष्ठ प्रात्मा के समान मरुत् अर्थात् वायु के समान तीव्रगामी शत्रुमारक सैनिकों सेनापतियों का भी स्वामी है । तू (मरुतां गणः) प्राणों के गण के समान स्वयं विद्वानों के समूह का श्राश्रय, उनके बीच में मुख्य रूप से गणना करने योग्य है । तू ( अवस्यूः ) अपनी और अपनी प्रजा का रक्षा करने का इच्छुक और ( दुवस्वान्) उत्तम द्याचरण और सेवा वा परिचरण करने योग्य है । तू (शंभूः) शान्ति का जनक ( मयांभूः ) सुखों का उत्पादक होकर ( मा अभि वाहि ) मुझे साक्षात् प्राप्त हो । (स्वाहा ) हमारी यही उत्तम प्रार्थना स्वीकार हो । परमेश्वर के विषय में विशेषण स्पष्ट है ।
|
वालो देवता । बाह्मी उणिक । ऋषभः ॥ भाशून्य - जिस प्रकार वायु. तीव्र वेगवान्, और समस्त विश्व में व्यापक एवं गो नाम दृथिवी, मध्यम वाली और विद्युत् को अन्तरिक्ष में करण पोषण करता उसके श्राश्रय पर जल ही अन्तरिक्ष में गतिमान् होकर मेव रूप में विचरते हैं। वे अन्न द्वारा विश्व के बलकारक होने से 'ऊर्ज' नाम से कहते हैं। उसी प्रकार वायु के समान प्रवल राजा अति वेगवान्, सबका प्रेरक और सब के इच्छा योग्य, समस्त राष्ट्र में प्राण के समान व्यापक, सर्वनिय पुरुष पृथ्वी को धारण पोषण करने में समर्थ है। उसके प्राप्त जन ही ज्ञान और कर्म में निउ ज्ञानी और प्रजा में व्यापक और राष्ट्र में बल उत्पन्न करने वाले होने से 'ऊर्जू' नाम से कहे जाते हैं। पज्ञ, प्रजापति सबका पालक सबको भोग्य फल का देने वाला, उत्तम पालन सामय से युक्त, वेद बाणी को अपने भीतर धारण करने से " है। उसकी मजा पा कार्यकर्ताओं को प्राप होने पाली कार्य से दक्षता की उत्पादक दक्षिणायें सुपात्र में दी जाकर बझकर्ता और यज्ञ दोनों की स्तुति के कारण होने से के 'इताबा' नामक है उसी प्रकार राष्ट्र पाक्षक, प्रजाप से राजो भी स्वतः प्रजा का पालक और राष्ट्र का भोका, श्रादित्य के समान उत्तम पालन सामयों और उत्तम स्थवाहनों से सम्पन्न, सबका संगतिकारक पृथ्वी का धारण पोषक है। उसकी ज्ञान और कर्म में व्याप्त राष्ट्र कार्य में बल उत्पन्न करनेवाली प्रजाएं स्तुति योग्य होने से 'स्तावा' नाम से कहाती हैं । प्र॒जाप॑तिवि॒िश्वकर्मा मनो गन्ध॒स्तस्य॑ ऽॠसामान्य॑प्स॒रस॒ ऽपष्ट॑यो नाम॑ । सन॑ ऽइ॒दं ब्रह्म क्षत्रं पातु॑ तस्मै॒ स्वाहा बाटू ताभ्यः॒ स्वाहा॑ विश्वकर्मा मनो देवता । विराडार्थी जगती । निषादः ॥ माशून्य - ज्ञानवान् समस्त विश्व का कर्ता, प्रजा का पालक राजा सब राज्य के हितकर कर्मों को करनेहारा शरीर में मन के समान सब का ज्ञाता, ममनशील, पृथ्वी का पोषक है । उसके ज्ञानानुकूल या स्तुत्य 'साम' शत्रुनाशक उपाय ही सब इए कार्यों की साधक एवं प्रना की प्रेरक आशाएं 'पुष्टिः' कहाती है । पूर्ववत् । स नो भुवनस्य पते प्रजावते यस्येत ऽउ॒परि॑ गृ॒हा यस्य॑ वे॒ह । अ॒स्मै ब्रह्म॑णे॒ऽमैत्रह शर्म यच्छ स्वाहा॑ ॥ चौंतालीस ॥ प्रजापतिर्देवता । विगार्थी पंक्तिः । पम्पमः ॥ भाशून्य - हे समस्त मुब, उत्पन्न प्राणियों और लोकों के पालक ! स्वामिन् ! हे प्रजा के पालक । जिस तेरे ऊपर, संरे आश्रम पर गृह. गृहस्व रुप और जिसके ऊपर इसरार लोक के अन्य प्राण भी माश्रित हैं वह तू इस ब्रह्म, वेद और ईश्वर के जानने वाले और राष्ट्र को क्षति से बचाने वाले इस क्षत्रिय वर्ग को उत्तम रीति से बढ़ा सुख और शान्ति प्रदान कर स॒मु॒द्रोऽसि॒ नभ॑स्वाना॒ार्द्रनुः शम्भूम॑यो॒ोभूर॒भि म वाहि॒ स्वाहा॑ । मारु॒तोऽजसे म॒रुतो॑ ग॒णः श॒म्भूम॑य॒ोभूर॒भिमा॑ वाहि॒ स्वाहा॑ । ऋ॒व॒स्यूर॑सि॒ दुव॑स्वाञ्छ॒म्भूम॑य॒ोभूर॒भि मा॑ वाहि॒ स्वाहा॑ ॥ पैंतालीस ॥ प्रजापतिर्देवता । निच॒दष्टिः मध्यमः ॥ भाशून्य - हे प्रजा के पालक ! राजन् तू समुद के बड़ा गम्भीर, सब रत्नैश्वर्यों का श्राकर, सब ऐश्वर्यों का उत्पादक है। तू श्राकाश में व्यापक वायु के समान सबका प्राणाधार और वायु के समान तीव्र वेगवान् है । तू जलद मेघ के समान श्राद भाव से प्रजा पर ऐश्वर्यो का त्याग करने हारा है । तू जल के समान शान्तिदायक, तू परमेश्वर या श्रात्मा क समान परम-श्रानन्द जनक है। तू मुक प्रजाजन को । अभि वाहि ) साक्षात् रूप से प्राप्त हो । तू प्राणों में श्रेष्ठ प्रात्मा के समान मरुत् अर्थात् वायु के समान तीव्रगामी शत्रुमारक सैनिकों सेनापतियों का भी स्वामी है । तू प्राणों के गण के समान स्वयं विद्वानों के समूह का श्राश्रय, उनके बीच में मुख्य रूप से गणना करने योग्य है । तू अपनी और अपनी प्रजा का रक्षा करने का इच्छुक और उत्तम द्याचरण और सेवा वा परिचरण करने योग्य है । तू शान्ति का जनक सुखों का उत्पादक होकर मुझे साक्षात् प्राप्त हो । हमारी यही उत्तम प्रार्थना स्वीकार हो । परमेश्वर के विषय में विशेषण स्पष्ट है ।
|
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
वलोडिमिर ज़ेलेंस्की 2022 के लिए टाइम पत्रिका के "पर्सन ऑफ द ईयर" हैं। रूसी सेना के शहर से पीछे हटने के बाद टाइम पत्रिका खेरसॉन की यात्रा पर उनके साथ गई थी। टाइम ने यूक्रेन के झंडे के नीले और पीले रंग से घिरे ज़ेलेंस्की के साथ अपने फ्रंट कवर की एक तस्वीर शेयर करते हुए अपने पर्सन ऑफ द ईयर की घोषणा की। टाइम ने पूरे रूस के आक्रमण के दौरान ज़ेलेंस्की के अपने देश के नेतृत्व का उल्लेख किया, जो इस साल फरवरी में शुरू हुआ था।
वलोडिमिर ज़ेलेंस्की कौन है?
राजनीति में प्रवेश करने से पहले, 44 साल के ज़ेलेंस्की एक लोकप्रिय कॉमेडियन थे, जिन्होंने "सर्वेंट ऑफ़ द पीपल" में यूक्रेनी राष्ट्रपति की भूमिका निभाई थी। अब यूक्रेन के राज्य प्रमुख हैं। उनका जन्म मीड यूक्रेन के औद्योगिक शहर क्रीवी रिह में हुआ था और उनका पालन-पोषण एक "साधारण सोवियत यहूदी परिवार" में हुआ था। लेकिन उनके नेतृत्व में तीन साल से भी कम समय में, ज़ेलेंस्की का नाम पूरी दुनिया में सुर्खियों आ गया, क्योंकि रूसी सेना ने यूक्रेन में प्रवेश कर लिया था।
ज़ेलेंस्की ने 2000 में कीव नेशनल इकनॉमिक यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री के साथ स्नातक किया। लेकिन जल्द ही उन्होंने कॉमेडी कॉन्सर्ट में भाग लेना और टेलीविजन पर दिखना शुरू कर दिया। उन्होंने एक प्रोडक्शन कंपनी की सह-स्थापना की और 2015 में प्रीमियर हुई एक हिट सरकास्टिक टेलीविजन सीरीज "सर्वेंट ऑफ द पीपल" पर यूक्रेन के राष्ट्रपति के रूप में अपनी भूमिका से प्रसिद्धि पाई।
टाइम के रिपोर्टर साइमन शस्टर ने देखा कि जब रूस ने आक्रमण किया तो ज़ेलेंस्की ने विदेश भागने से इनकार कर दिया। वो जमीन पर बने रहे और अपने सैनिकों के साथ-साथ यूक्रेनी लोगों के मनोबल को बढ़ाने के लिए बॉर्डर एरिया में अत्यधिक जोखिम भरा दौरा किया।
शस्टर ने लिखा, "एक युद्धकालीन नेता के रूप में ज़ेलेंस्की की सफलता इस फैक्ट पर निर्भर करती है कि साहस का कोई नाम और रंग नही होता। ये आक्रमण के पहले दिनों में यूक्रेन के राजनीतिक नेतृत्व के माध्यम से फैल गया, जैसा कि सभी ने महसूस किया कि राष्ट्रपति चारों ओर फंस गए थे,"
ज़ेलेंस्की एडाप्टेपल थे, उन्हें दबाव में अपनी हिम्मत नहीं खोने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। वो जानते थे कि भीड़ को कैसे पढ़ना है और उसके मूड और उम्मीदों पर प्रतिक्रिया कैसे करनी है। अब उनका दर्शक संसार था। वो उन्हें निराश नहीं करने के लिए दृढ़ थे, "शस्टर ने लिखा।
रूस के अटैक से कुछ समय पहले उनके भाषण के लिए उनकी व्यापक रूप से प्रशंसा की गई थी, जिसमें रूसी नागरिकों से युद्ध को रोकने में मदद करने की अपील की गई थी। उन्होंने कहा, "इससे सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा? इसे कौन रोक सकता है? जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ता गया, ज़ेलेंस्की के सोशल मीडिया के मास यूज ने उनके राष्ट्र को प्रेरित करने में मदद की। उन्होंने राजधानी कीव में पहचानने योग्य इमारतों के बाहर क्लिप को फिल्माया।
उन्होंने कहा कि मैं यहां हूं। हम हथियार नहीं डाल रहे हैं," उन्होंने 19 मिलियन से अधिक बार चलाए गए एक ट्विटर वीडियो में कहा। "बस इतना ही। बस इतना ही मैं आपको बताना चाहता था। यूक्रेन की शान है।
|
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? वलोडिमिर ज़ेलेंस्की दो हज़ार बाईस के लिए टाइम पत्रिका के "पर्सन ऑफ द ईयर" हैं। रूसी सेना के शहर से पीछे हटने के बाद टाइम पत्रिका खेरसॉन की यात्रा पर उनके साथ गई थी। टाइम ने यूक्रेन के झंडे के नीले और पीले रंग से घिरे ज़ेलेंस्की के साथ अपने फ्रंट कवर की एक तस्वीर शेयर करते हुए अपने पर्सन ऑफ द ईयर की घोषणा की। टाइम ने पूरे रूस के आक्रमण के दौरान ज़ेलेंस्की के अपने देश के नेतृत्व का उल्लेख किया, जो इस साल फरवरी में शुरू हुआ था। वलोडिमिर ज़ेलेंस्की कौन है? राजनीति में प्रवेश करने से पहले, चौंतालीस साल के ज़ेलेंस्की एक लोकप्रिय कॉमेडियन थे, जिन्होंने "सर्वेंट ऑफ़ द पीपल" में यूक्रेनी राष्ट्रपति की भूमिका निभाई थी। अब यूक्रेन के राज्य प्रमुख हैं। उनका जन्म मीड यूक्रेन के औद्योगिक शहर क्रीवी रिह में हुआ था और उनका पालन-पोषण एक "साधारण सोवियत यहूदी परिवार" में हुआ था। लेकिन उनके नेतृत्व में तीन साल से भी कम समय में, ज़ेलेंस्की का नाम पूरी दुनिया में सुर्खियों आ गया, क्योंकि रूसी सेना ने यूक्रेन में प्रवेश कर लिया था। ज़ेलेंस्की ने दो हज़ार में कीव नेशनल इकनॉमिक यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री के साथ स्नातक किया। लेकिन जल्द ही उन्होंने कॉमेडी कॉन्सर्ट में भाग लेना और टेलीविजन पर दिखना शुरू कर दिया। उन्होंने एक प्रोडक्शन कंपनी की सह-स्थापना की और दो हज़ार पंद्रह में प्रीमियर हुई एक हिट सरकास्टिक टेलीविजन सीरीज "सर्वेंट ऑफ द पीपल" पर यूक्रेन के राष्ट्रपति के रूप में अपनी भूमिका से प्रसिद्धि पाई। टाइम के रिपोर्टर साइमन शस्टर ने देखा कि जब रूस ने आक्रमण किया तो ज़ेलेंस्की ने विदेश भागने से इनकार कर दिया। वो जमीन पर बने रहे और अपने सैनिकों के साथ-साथ यूक्रेनी लोगों के मनोबल को बढ़ाने के लिए बॉर्डर एरिया में अत्यधिक जोखिम भरा दौरा किया। शस्टर ने लिखा, "एक युद्धकालीन नेता के रूप में ज़ेलेंस्की की सफलता इस फैक्ट पर निर्भर करती है कि साहस का कोई नाम और रंग नही होता। ये आक्रमण के पहले दिनों में यूक्रेन के राजनीतिक नेतृत्व के माध्यम से फैल गया, जैसा कि सभी ने महसूस किया कि राष्ट्रपति चारों ओर फंस गए थे," ज़ेलेंस्की एडाप्टेपल थे, उन्हें दबाव में अपनी हिम्मत नहीं खोने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। वो जानते थे कि भीड़ को कैसे पढ़ना है और उसके मूड और उम्मीदों पर प्रतिक्रिया कैसे करनी है। अब उनका दर्शक संसार था। वो उन्हें निराश नहीं करने के लिए दृढ़ थे, "शस्टर ने लिखा। रूस के अटैक से कुछ समय पहले उनके भाषण के लिए उनकी व्यापक रूप से प्रशंसा की गई थी, जिसमें रूसी नागरिकों से युद्ध को रोकने में मदद करने की अपील की गई थी। उन्होंने कहा, "इससे सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा? इसे कौन रोक सकता है? जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ता गया, ज़ेलेंस्की के सोशल मीडिया के मास यूज ने उनके राष्ट्र को प्रेरित करने में मदद की। उन्होंने राजधानी कीव में पहचानने योग्य इमारतों के बाहर क्लिप को फिल्माया। उन्होंने कहा कि मैं यहां हूं। हम हथियार नहीं डाल रहे हैं," उन्होंने उन्नीस मिलियन से अधिक बार चलाए गए एक ट्विटर वीडियो में कहा। "बस इतना ही। बस इतना ही मैं आपको बताना चाहता था। यूक्रेन की शान है।
|
महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास लेने को लेकर सस्पेंस बढ़ता ही जा रहा है. क्या वो वेस्टइंडीज़ दौरे पर जाएंगे? क्या वो तुंरत संन्यास लेंगे? या फिर क्या वो अगले साल टी-20 वर्ल्ड कप तक खेलेंगे? ये वो सवाल हैं जिसका जवाब अगले दो दिनों में मिल सकता है.
वेस्टइंडीज़ दौरे के लिए टीम इंडिया का चयन रविवार को होना है. पहले टीम का ऐलान शुक्रवार को होना था, लेकिन अब ये दो दिनों के लिए टाल दिया गया है. इसी दिन चीफ सेलेक्टर धोनी के भविष्य के बारे में खुलासा कर सकते हैं. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक टीम के चयन से पहले चीफ सलेक्टर एमएसके प्रसाद धोनी से बात कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने गुरुवार शाम तक उनसे बात नहीं की थी.
धोनी 38 साल के हो गए हैं. ऐसे में ये साफ है कि अगले वर्ल्ड कप यानी 2023 तक उनके लिए खेलना खासा मुश्किल होगा. ऐसी संभावना जताई जा रही है कि धोनी अगले साल टी-20 वर्ल्ड कप में खेल सकते हैं. लेकिन इस तरह के संकेत मिल रहे हैं कि चयनकर्ता अब भविष्य पर ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में धोनी को नजरअंदाज किया जा सकता है. सेलेक्टर्स चाहते हैं कि ऋषभ पंत को अगले टी-20 और वनडे वर्ल्ड कप तक ज्यादा से ज्यादा मौका मिले.
टी-20 वर्ल्ड कप अगले साल ऑस्ट्रेलिया में खेला जाना है. आमतौर पर सेलेक्टर्सआईपीएल के फॉर्म के आधार पर टी-20 टीम का चयन करते हैं. धोनी अगले साल भी आईपीएल में खेलेंगे. वो टी-20 के मंझे हुए बल्लेबाज़ हैं. इस साल भी धोनी ने आईपीएल में चेन्नई के लिए सबसे ज्यादा 416 रन बनाए थे. उनकी स्ट्राइक रेट 134 की थी. ऐसे में टी-20 के लिए उन्हें नजरअंदाज करना चयनकर्ताओं के लिए आसान नहीं होगा.
क्या कहना है विराट का?
पिछले दिनों वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में हार के बाद कप्तान विराट कोहली से प्रेस कॉन्फ्रेंस में धोनी के भविष्य को लेकर सवाल पूछा गया था. इसके जवाब में विराट ने कहा था कि उन्हें धोनी ने आगे के प्लान के बारे में कुछ भी नहीं बताया है.
.
|
महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास लेने को लेकर सस्पेंस बढ़ता ही जा रहा है. क्या वो वेस्टइंडीज़ दौरे पर जाएंगे? क्या वो तुंरत संन्यास लेंगे? या फिर क्या वो अगले साल टी-बीस वर्ल्ड कप तक खेलेंगे? ये वो सवाल हैं जिसका जवाब अगले दो दिनों में मिल सकता है. वेस्टइंडीज़ दौरे के लिए टीम इंडिया का चयन रविवार को होना है. पहले टीम का ऐलान शुक्रवार को होना था, लेकिन अब ये दो दिनों के लिए टाल दिया गया है. इसी दिन चीफ सेलेक्टर धोनी के भविष्य के बारे में खुलासा कर सकते हैं. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक टीम के चयन से पहले चीफ सलेक्टर एमएसके प्रसाद धोनी से बात कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने गुरुवार शाम तक उनसे बात नहीं की थी. धोनी अड़तीस साल के हो गए हैं. ऐसे में ये साफ है कि अगले वर्ल्ड कप यानी दो हज़ार तेईस तक उनके लिए खेलना खासा मुश्किल होगा. ऐसी संभावना जताई जा रही है कि धोनी अगले साल टी-बीस वर्ल्ड कप में खेल सकते हैं. लेकिन इस तरह के संकेत मिल रहे हैं कि चयनकर्ता अब भविष्य पर ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में धोनी को नजरअंदाज किया जा सकता है. सेलेक्टर्स चाहते हैं कि ऋषभ पंत को अगले टी-बीस और वनडे वर्ल्ड कप तक ज्यादा से ज्यादा मौका मिले. टी-बीस वर्ल्ड कप अगले साल ऑस्ट्रेलिया में खेला जाना है. आमतौर पर सेलेक्टर्सआईपीएल के फॉर्म के आधार पर टी-बीस टीम का चयन करते हैं. धोनी अगले साल भी आईपीएल में खेलेंगे. वो टी-बीस के मंझे हुए बल्लेबाज़ हैं. इस साल भी धोनी ने आईपीएल में चेन्नई के लिए सबसे ज्यादा चार सौ सोलह रन बनाए थे. उनकी स्ट्राइक रेट एक सौ चौंतीस की थी. ऐसे में टी-बीस के लिए उन्हें नजरअंदाज करना चयनकर्ताओं के लिए आसान नहीं होगा. क्या कहना है विराट का? पिछले दिनों वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में हार के बाद कप्तान विराट कोहली से प्रेस कॉन्फ्रेंस में धोनी के भविष्य को लेकर सवाल पूछा गया था. इसके जवाब में विराट ने कहा था कि उन्हें धोनी ने आगे के प्लान के बारे में कुछ भी नहीं बताया है. .
|
गोण्डा। उत्तर प्रदेश में गोण्डा जिले के तरबगंज क्षेत्र में एक किशोरी के साथ दो सगे भाइयों ने सामूहिक दुष्कर्म किया।
पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पाण्डेय ने शुक्रवार को बताया कि क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 17 वर्षीय किशोरी ने गांव के ही रहने वाले शफीक (32) और तौफीक (25) नामक दो शादीशुदा सगे भाइयों पर गुरुवार को जबरन अपने घर मे ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया हैं।
उन्होने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर एक आरोपी को हिरासत मे लेकर पूछताछ की जा रही हैं। पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया हैं। पुलिस मामले की गहन पड़ताल मे जुटी हैं।
|
गोण्डा। उत्तर प्रदेश में गोण्डा जिले के तरबगंज क्षेत्र में एक किशोरी के साथ दो सगे भाइयों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पाण्डेय ने शुक्रवार को बताया कि क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली सत्रह वर्षीय किशोरी ने गांव के ही रहने वाले शफीक और तौफीक नामक दो शादीशुदा सगे भाइयों पर गुरुवार को जबरन अपने घर मे ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया हैं। उन्होने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर एक आरोपी को हिरासत मे लेकर पूछताछ की जा रही हैं। पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया हैं। पुलिस मामले की गहन पड़ताल मे जुटी हैं।
|
नयी दिल्ली,27 दिसंबर (भाषा) कोविड-19 महामारी से निपटने के लक्ष्य के साथ, 2021 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का मुख्य कार्य क्षेत्र अनुसंधानकर्ताओं, अकादमिक एवं अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप तथा उद्योग की भागीदारी वाली समूची नवोन्मेष श्रृंखला को बढ़ावा देना रहा।
मंत्रालय की नेशनल सुपरमॉडल कमेटी ने एक ओर जहां समय-समय पर महामारी के उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाया, वहीं दूसरी ओर नवोन्मेष विकास एवं दोहन के लिए राष्ट्रीय पहल (नेशनल इनिशि्एटिव फॉर डेवलपिंग एंड हारनेसिंग इन्नोवेशंस) ने अपने नेटवर्क और स्टार्टअप के जरिए संकट का हल करने की कोशिश की।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले इन संस्थानों ने महामारी का मुकाबला करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2021 के दौरान भी अनुसंधानकताओं, अकादमिक एवं अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग की भागीदारी वाली भारत की समूची नवोन्मेष श्रृंखला पर मुख्य रूप ध्यान दिया गया।
देश में कोविड-19 के नये स्वरूप ओमीक्रोन के मामले सामने आने पर, इंडियन सार्स-कोवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) ने विस्फोटक तरीके से संक्रमण बढ़ाने वाले कार्यक्रमों, संक्रमण के प्रसार को समझने और संक्रमण की चेन (कड़ी) को तोड़ने में मदद प्राप्त करने के लिए जनस्वास्थ्य ढांचा को मजबूत करने को लेकर 80,000 से अधिक जीनोम सीक्वेंस का अध्ययन किया।
इस साल, मंत्रालय ने नयी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा नवोन्मेष नीति का मसौदा भी जारी किया। इस नीति का लक्ष्य व्यक्ति एवं संगठन की ओर से अनुसंधान एवं नवोन्मेष को बढ़ावा देने पाला परिवेश बनाने के लिए संक्षिप्त अवधि की, मध्यम अवधि की तथा दीर्घकालीन 'मिशन आधारित' परियोजनाओं के जरिए महत्वपूर्ण बदलाव लाना है।
विज्ञान के क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़े, इस पर जोर देने के लिए विज्ञान ज्योति कार्यक्रम का दूसरा चरण अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस के अवसर पर आरंभ किया गया। कार्यक्रम का लक्ष्य बालिकाओं को विज्ञान में रुचि लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
मंत्रालय ने राष्ट्रीय नवाचार पोर्टल (एनआईपी) की भी शुरूआत की, जिन पर वर्तमान में देश के आम आदमी के करीब 1. 15 लाख नवोन्मेष उपलब्ध हैं जो इंजीनियरिंग, कृषि, पशु चिकित्सा और मानव स्वास्थ्य के क्षेत्रों से संबद्ध हैं।
महामारी की दूसरी लहर के दौरान टीका उत्पादन बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने मिशन कोविड सुरक्षा के तहत अनुदान के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ उपक्रमों की सहायता की।
मंत्रालय के तहत आने वाले संस्थानों एवं मंत्रालय से सहयोग प्राप्त परियोजनाओं द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) संचालित संपर्क रहित स्वास्थ्य निगरानी, कोविड-19 की जांच के लिए आरटी-पीसीआर किट, सलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर पद्धति, वायरस रोधी रसायन लेपित 3डी-प्रिंटेड मास्क और उच्च शुद्धता वाले ऑक्सीजन सकेंद्रक विकसित किये गये।
केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल के बाद, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का प्रभार संभाला।
अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय का लक्ष्य साझा, पेशेवर तरीके से प्रबंधित और मजबूत सूचना एवं प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा, अकादमिक क्षेत्र की पहुंच के दायरे वाला, स्टार्टअप, विर्निर्माण, उद्योग तथा अनुंसधान एवं विकास ढांचों का निर्माण करना है ताकि महामारी जैसी स्थिति से निपटने के लिए बेहतर तैयारी की जा सके और देश के नवोन्मेष एवं विज्ञान क्षेत्र को बढ़ावा मिल सके।
|
नयी दिल्ली,सत्ताईस दिसंबर कोविड-उन्नीस महामारी से निपटने के लक्ष्य के साथ, दो हज़ार इक्कीस में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का मुख्य कार्य क्षेत्र अनुसंधानकर्ताओं, अकादमिक एवं अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप तथा उद्योग की भागीदारी वाली समूची नवोन्मेष श्रृंखला को बढ़ावा देना रहा। मंत्रालय की नेशनल सुपरमॉडल कमेटी ने एक ओर जहां समय-समय पर महामारी के उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाया, वहीं दूसरी ओर नवोन्मेष विकास एवं दोहन के लिए राष्ट्रीय पहल ने अपने नेटवर्क और स्टार्टअप के जरिए संकट का हल करने की कोशिश की। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले इन संस्थानों ने महामारी का मुकाबला करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दो हज़ार इक्कीस के दौरान भी अनुसंधानकताओं, अकादमिक एवं अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग की भागीदारी वाली भारत की समूची नवोन्मेष श्रृंखला पर मुख्य रूप ध्यान दिया गया। देश में कोविड-उन्नीस के नये स्वरूप ओमीक्रोन के मामले सामने आने पर, इंडियन सार्स-कोवी-दो जीनोमिक्स कंसोर्टियम ने विस्फोटक तरीके से संक्रमण बढ़ाने वाले कार्यक्रमों, संक्रमण के प्रसार को समझने और संक्रमण की चेन को तोड़ने में मदद प्राप्त करने के लिए जनस्वास्थ्य ढांचा को मजबूत करने को लेकर अस्सी,शून्य से अधिक जीनोम सीक्वेंस का अध्ययन किया। इस साल, मंत्रालय ने नयी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा नवोन्मेष नीति का मसौदा भी जारी किया। इस नीति का लक्ष्य व्यक्ति एवं संगठन की ओर से अनुसंधान एवं नवोन्मेष को बढ़ावा देने पाला परिवेश बनाने के लिए संक्षिप्त अवधि की, मध्यम अवधि की तथा दीर्घकालीन 'मिशन आधारित' परियोजनाओं के जरिए महत्वपूर्ण बदलाव लाना है। विज्ञान के क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़े, इस पर जोर देने के लिए विज्ञान ज्योति कार्यक्रम का दूसरा चरण अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस के अवसर पर आरंभ किया गया। कार्यक्रम का लक्ष्य बालिकाओं को विज्ञान में रुचि लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। मंत्रालय ने राष्ट्रीय नवाचार पोर्टल की भी शुरूआत की, जिन पर वर्तमान में देश के आम आदमी के करीब एक. पंद्रह लाख नवोन्मेष उपलब्ध हैं जो इंजीनियरिंग, कृषि, पशु चिकित्सा और मानव स्वास्थ्य के क्षेत्रों से संबद्ध हैं। महामारी की दूसरी लहर के दौरान टीका उत्पादन बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने मिशन कोविड सुरक्षा के तहत अनुदान के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ उपक्रमों की सहायता की। मंत्रालय के तहत आने वाले संस्थानों एवं मंत्रालय से सहयोग प्राप्त परियोजनाओं द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित संपर्क रहित स्वास्थ्य निगरानी, कोविड-उन्नीस की जांच के लिए आरटी-पीसीआर किट, सलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर पद्धति, वायरस रोधी रसायन लेपित तीनडी-प्रिंटेड मास्क और उच्च शुद्धता वाले ऑक्सीजन सकेंद्रक विकसित किये गये। केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल के बाद, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का प्रभार संभाला। अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय का लक्ष्य साझा, पेशेवर तरीके से प्रबंधित और मजबूत सूचना एवं प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा, अकादमिक क्षेत्र की पहुंच के दायरे वाला, स्टार्टअप, विर्निर्माण, उद्योग तथा अनुंसधान एवं विकास ढांचों का निर्माण करना है ताकि महामारी जैसी स्थिति से निपटने के लिए बेहतर तैयारी की जा सके और देश के नवोन्मेष एवं विज्ञान क्षेत्र को बढ़ावा मिल सके।
|
उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले के भुसावल, सावदा और फैजपुर नगर निकायों के कम से कम 32 भाजपा पार्षद शुक्रवार को राकांपा में शामिल हो गए। पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि यहां महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौजूदगी में पार्षद राकांपा में शामिल हुए हैं। माना जाता है कि ये नगरसेवक खडसे के समर्थक थे, जिन्होंने खुद पिछले अक्तूबर में भाजपा छोड़कर और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए।
एकनाथ खडसे ने इस मौके पर कहा, यह तो सिर्फ ट्रेलर है। जिले में भाजपा का एक बड़ा तबका राकांपा में शामिल हो जाएगा। इनमें से 21 पार्षद भुसावल नगर परिषद से हैं। आठ और तीन नगरसेवक क्रमशः सावदा और फैजपुर नगर पालिका से हैं।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले के भुसावल, सावदा और फैजपुर नगर निकायों के कम से कम बत्तीस भाजपा पार्षद शुक्रवार को राकांपा में शामिल हो गए। पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यहां महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौजूदगी में पार्षद राकांपा में शामिल हुए हैं। माना जाता है कि ये नगरसेवक खडसे के समर्थक थे, जिन्होंने खुद पिछले अक्तूबर में भाजपा छोड़कर और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। एकनाथ खडसे ने इस मौके पर कहा, यह तो सिर्फ ट्रेलर है। जिले में भाजपा का एक बड़ा तबका राकांपा में शामिल हो जाएगा। इनमें से इक्कीस पार्षद भुसावल नगर परिषद से हैं। आठ और तीन नगरसेवक क्रमशः सावदा और फैजपुर नगर पालिका से हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
दोस्त के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड हुई है.
हरिद्वारः देहरादून में रहकर नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की तैयारी कर रहा छात्र हरिद्वार में गंगा नदी में डूब गया. दोस्तों के सामने ही वह गंगा नदी में समा गया. पूरी घटना उसके दोस्त के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड हुई है. ओम पुल से तेज धार गंगा के जल में छलांग लगाने के बाद वह किनारे पर नहीं आ सका और कुछ सेकेंंड में पानी में समा गया.
घटना के बाद से छात्र की डेड बॉडी नहीं मिली है. उसके शव की तलाश की जा रही है. मृतक छात्र का नाम आयुष पटवाल था और वह यूपी के गाजियाबाद का रहने वाला था. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.
जानकारी के मुताबिक यूपी के गाजियाबाद के प्रताप विहार के रहने वाला आयुष पटवाल पुत्र अनूप सिंह पटवाल देहरादून में रहकर एनडीए की तैयारी कर रहा था. छुट्टी होने के चलते वह अपने दोस्तों के साथ शनिवार को हरिद्वार घूमने के लिए आया हुआ था. दोपहर के वक्त सभी दोस्त ओम पुल के पास गंगा नदी में नहा रहे थे.
आयुष पुल से नदी में गोता लगा रहा था. उसके गोता लगाने का वीडियो एक दोस्त अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर रहा था. घटना का जो वीडियो सामने आया है उसमें देखा जा सकता है कि ओम पुल से आयुष गंगा नदी में छलांग लगाता है. पानी के तेज बहाव के साथ वह कुछ दूरी पर तैरता हुआ जाता है, लेकिन किनारे नहीं आ पाता.
इसी बीच वीडियो में आवाज सुनाई देती है 'डूब गया. . डूब गया' और कुछ सेकेंड बाद आयुष गंगा में समा जाता है. मौके पर मौजूद जल पुलिस को जैसे ही छात्र के डूबने की जानकारी मिलती है वह आयुष के सर्च ऑपरेशन में जुट जाती है. स्थानीय पुलिस भी घटना स्थल पर पहुंची थी.
बताया गया है कि घटना को 24 घंटे पूरे होने को हैं. मगर, आयुष के शव अभी तक नहीं मिला है. जल पुलिस सहित कई टीमें सर्च ऑपरशेन में जुटी हुई हैं. आयुष के परिवार को भी घटना की जानकारी दी गई है वह लोग भी हरिद्वार पहुंचे हैं.
मामले पर हरिद्वार सिटी एसपी स्वतंत्र कुमार सिंह का कहना है कि देहरादून में रहकर एनडीए की तैयारी कर रहे यूपी गायिजाबाद का छात्र गंगा नदी में डूब गया है. घटना के बाद से उसके शव की तलाश के लिए टीमें प्रयास कर रही हैं. फिलहाल छात्र का शव बरामद नहीं हुआ है.
एसपी ने आगे कहा कि पहले भी ऐसा हादसा हुआ था, जिसमें तैरते हुए थकने के बाद युवक पानी में डूब गया था. हमारी लोगों से अपील है कि यदि उन्हें तैरना नहीं आता है तो नदी में न उतरें. ऐसा करने में बहुत खतरा है. स्नान करने के लिए रेलिंग का सहारा लें.
|
दोस्त के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड हुई है. हरिद्वारः देहरादून में रहकर नेशनल डिफेंस एकेडमी की तैयारी कर रहा छात्र हरिद्वार में गंगा नदी में डूब गया. दोस्तों के सामने ही वह गंगा नदी में समा गया. पूरी घटना उसके दोस्त के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड हुई है. ओम पुल से तेज धार गंगा के जल में छलांग लगाने के बाद वह किनारे पर नहीं आ सका और कुछ सेकेंंड में पानी में समा गया. घटना के बाद से छात्र की डेड बॉडी नहीं मिली है. उसके शव की तलाश की जा रही है. मृतक छात्र का नाम आयुष पटवाल था और वह यूपी के गाजियाबाद का रहने वाला था. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. जानकारी के मुताबिक यूपी के गाजियाबाद के प्रताप विहार के रहने वाला आयुष पटवाल पुत्र अनूप सिंह पटवाल देहरादून में रहकर एनडीए की तैयारी कर रहा था. छुट्टी होने के चलते वह अपने दोस्तों के साथ शनिवार को हरिद्वार घूमने के लिए आया हुआ था. दोपहर के वक्त सभी दोस्त ओम पुल के पास गंगा नदी में नहा रहे थे. आयुष पुल से नदी में गोता लगा रहा था. उसके गोता लगाने का वीडियो एक दोस्त अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर रहा था. घटना का जो वीडियो सामने आया है उसमें देखा जा सकता है कि ओम पुल से आयुष गंगा नदी में छलांग लगाता है. पानी के तेज बहाव के साथ वह कुछ दूरी पर तैरता हुआ जाता है, लेकिन किनारे नहीं आ पाता. इसी बीच वीडियो में आवाज सुनाई देती है 'डूब गया. . डूब गया' और कुछ सेकेंड बाद आयुष गंगा में समा जाता है. मौके पर मौजूद जल पुलिस को जैसे ही छात्र के डूबने की जानकारी मिलती है वह आयुष के सर्च ऑपरेशन में जुट जाती है. स्थानीय पुलिस भी घटना स्थल पर पहुंची थी. बताया गया है कि घटना को चौबीस घंटाटे पूरे होने को हैं. मगर, आयुष के शव अभी तक नहीं मिला है. जल पुलिस सहित कई टीमें सर्च ऑपरशेन में जुटी हुई हैं. आयुष के परिवार को भी घटना की जानकारी दी गई है वह लोग भी हरिद्वार पहुंचे हैं. मामले पर हरिद्वार सिटी एसपी स्वतंत्र कुमार सिंह का कहना है कि देहरादून में रहकर एनडीए की तैयारी कर रहे यूपी गायिजाबाद का छात्र गंगा नदी में डूब गया है. घटना के बाद से उसके शव की तलाश के लिए टीमें प्रयास कर रही हैं. फिलहाल छात्र का शव बरामद नहीं हुआ है. एसपी ने आगे कहा कि पहले भी ऐसा हादसा हुआ था, जिसमें तैरते हुए थकने के बाद युवक पानी में डूब गया था. हमारी लोगों से अपील है कि यदि उन्हें तैरना नहीं आता है तो नदी में न उतरें. ऐसा करने में बहुत खतरा है. स्नान करने के लिए रेलिंग का सहारा लें.
|
नारनौल 22 फरवरी 2019 :दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के पूर्व निदेशक एवं इनेलो पार्टी के जिला प्रवक्ता रहे बजरंगलाल अग्रवाल का जननायक जनता पार्टी में शामिल होने पर शुक्रवार को फूल मालाओं से स्वागत किया गया। जजपा पार्टी के जिला कार्यालय में हुए सम्मान समारोह की अध्यक्षता जिला प्रधान सत्यवीर यादव नौताना ने की।
इस अवसर पर बजरंगलाल अग्रवाल को पार्टी में शामिल किए जाने पर पूर्व विधायक चौधरी मूलाराम, डीएन यादव, अमरसिंह ब्रह्मचारी, हजारीलाल लंबोरिया, भीम सहरावत, महाराम गुर्जर, महेंद्रगढ़ से राव रमेश पालड़ी, लक्खी सोनी, राजेश अग्रवाल, पूर्व जिला प्रमुख जगदीश यादव, सुरेंद्र यादव पटीकरा, महिला सेल की जिला अध्यक्ष सिलोचना ढिल्लो, बिल्लू चेयरमैन सिलारपुर, अजय चौधरी एडवोकेट, राजकुमार महता, सुरेश यादव पटीकरा, कमलेश सैनी, धर्मवीर यादव, युवा नेता सिकंदर गहली, नवीन राव, विरेंद्र यादव घाटासेर, उषा नांगल शालू, रविशंकर बडग़ुर्जर, केशव वर्मा, सत्तू खटीक, सूरज ढिल्लो, सुरेंद्र एडवोकेट, कांशीराम गुर्जर व विरेंद्र बनीहाड़ी सहित पार्टी के अनेक नेताओं ने स्वागत किया है।
इस दौरान जिला प्रधान ने कहा कि बजरंगलाल अग्रवाल को लंबा राजनीतिक अनुभव है। इसका जजपा पार्टी को भविष्य में लाभ मिलेगा। डा. अजय सिंह चौटाला के साथ पार्टी को मजबूत करने के लिए लंबे समय तक कार्य किया है। खासतौर पर प्रदेशभर के व्यापारी वर्ग में बजरंगलाल अग्रवाल की एक अलग पहचान है। वह फिलहाल हरियाणा व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्य करते हुए व्यापारियों के हकों की लड़ाई लड़ रहे है। कार्यक्रम में बजरंगलाल अग्रवाल ने पूर्व सांसद डा. अजयसिंह चौटाला, लोकसभा सांसद एवं जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला, प्रदेश अध्यक्ष सरदार निशान सिंह, डा. केसी बांगड़ एवं पार्टी के शीर्ष नेताओं का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी में पूरी निष्ठा से पार्टी के लिए कार्य करेंगे।
|
नारनौल बाईस फरवरी दो हज़ार उन्नीस :दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के पूर्व निदेशक एवं इनेलो पार्टी के जिला प्रवक्ता रहे बजरंगलाल अग्रवाल का जननायक जनता पार्टी में शामिल होने पर शुक्रवार को फूल मालाओं से स्वागत किया गया। जजपा पार्टी के जिला कार्यालय में हुए सम्मान समारोह की अध्यक्षता जिला प्रधान सत्यवीर यादव नौताना ने की। इस अवसर पर बजरंगलाल अग्रवाल को पार्टी में शामिल किए जाने पर पूर्व विधायक चौधरी मूलाराम, डीएन यादव, अमरसिंह ब्रह्मचारी, हजारीलाल लंबोरिया, भीम सहरावत, महाराम गुर्जर, महेंद्रगढ़ से राव रमेश पालड़ी, लक्खी सोनी, राजेश अग्रवाल, पूर्व जिला प्रमुख जगदीश यादव, सुरेंद्र यादव पटीकरा, महिला सेल की जिला अध्यक्ष सिलोचना ढिल्लो, बिल्लू चेयरमैन सिलारपुर, अजय चौधरी एडवोकेट, राजकुमार महता, सुरेश यादव पटीकरा, कमलेश सैनी, धर्मवीर यादव, युवा नेता सिकंदर गहली, नवीन राव, विरेंद्र यादव घाटासेर, उषा नांगल शालू, रविशंकर बडग़ुर्जर, केशव वर्मा, सत्तू खटीक, सूरज ढिल्लो, सुरेंद्र एडवोकेट, कांशीराम गुर्जर व विरेंद्र बनीहाड़ी सहित पार्टी के अनेक नेताओं ने स्वागत किया है। इस दौरान जिला प्रधान ने कहा कि बजरंगलाल अग्रवाल को लंबा राजनीतिक अनुभव है। इसका जजपा पार्टी को भविष्य में लाभ मिलेगा। डा. अजय सिंह चौटाला के साथ पार्टी को मजबूत करने के लिए लंबे समय तक कार्य किया है। खासतौर पर प्रदेशभर के व्यापारी वर्ग में बजरंगलाल अग्रवाल की एक अलग पहचान है। वह फिलहाल हरियाणा व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्य करते हुए व्यापारियों के हकों की लड़ाई लड़ रहे है। कार्यक्रम में बजरंगलाल अग्रवाल ने पूर्व सांसद डा. अजयसिंह चौटाला, लोकसभा सांसद एवं जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला, प्रदेश अध्यक्ष सरदार निशान सिंह, डा. केसी बांगड़ एवं पार्टी के शीर्ष नेताओं का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी में पूरी निष्ठा से पार्टी के लिए कार्य करेंगे।
|
Sharanpur: निर्वाचन आयोग की वेबसाइट हैक करने के मामले में आरोपी युवक को दबोच लिया गया है. यूपी की सहारनपुर पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार किया है. सहारनपुर के एसएसपी एस चेनप्पा ने बताया कि आरोपी विपुल सैनी ने नकुड़ इलाके में अपनी कम्प्यूटर की दुकान से इस हैकिंग को अंजाम दिया. इस मामले में चुनाव आयोग में काम करने वाले डाटा एंट्री ऑपरेटर को भी पकड़ा गया है.
आयोग को वेबसाइट पर कुछ गड़बड़ी का अंदेशा होने पर जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी दी. एजेंसियों की जांच के दौरान आरोपी विपुल सैनी शक के दायरे में आया. एजेंसियों ने सहारनपुर पुलिस को सैनी के बारे में जानकारी दी. इसके बाद उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई. पुलिस ने विपुल सैनी के घर पर छापा मारा और गिरफ्तार कर लिया.
इस मामले में चुनाव आयोग का आधिकारिक बयान आया है. आयोग के मुताबिक असिस्टेंट इलेक्टोरल रोल ऑफिसर्स नागरिक सेवाओं को मुहैया कराने के लिए कृतसंकल्पित हैं. 'कोई भी वोटर ना छूटने पाए' की थीम के साथ वोटर आईडी की प्रिंटिंग और तय समय के अंदर उनका वितरण किया जा रहा है.
एसएसपी चेनप्पा ने बताया कि, पूछताछ के दौरान विपुल सैनी ने बताया कि वह मध्यप्रदेश के हरदा निवासी अरमान मलिक के इशारे पर ये काम कर रहा था और उसने तीन माह में करीब दस हजार से ज्यादा फर्जी मतदाता पहचान पत्र बना लिए थे. साइबर सेल और सहारनपुर अपराध शाखा के संयुक्त दल ने गुरुवार को विपुल सैनी को गिरफ्तार कर लिया. एसएसपी ने बताया कि विपुल सैनी के पिता किसान हैं. विपुल सैनी सहारनपुर के एक कॉलेज से बीसीए कर रखा है.
सहारनपुर एसएसपी ने बताया कि जांच में सैनी के बैंक खाते में 60 लाख रुपये पाए गए, जिसके बाद खाते से लेन-देन पर तत्काल रोक लगा दी गई है. उन्होंने कहा कि सैनी के खाते में इतनी रकम कहां से आई इसकी जांच की जाएगी. पूछताछ में आरोपी विपुल सैनी ने पुलिस को बताया कि एक पहचान पत्र के एवज में उसे 100 से 200 रुपये मिलते हैं. उसके घर से पुलिस ने दो कम्प्यूटर भी जब्त किया है. जांच एजेंसी उसे अदालत में पेश करके उसकी न्यायिक हिरासत की अपील करेगी.
|
Sharanpur: निर्वाचन आयोग की वेबसाइट हैक करने के मामले में आरोपी युवक को दबोच लिया गया है. यूपी की सहारनपुर पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार किया है. सहारनपुर के एसएसपी एस चेनप्पा ने बताया कि आरोपी विपुल सैनी ने नकुड़ इलाके में अपनी कम्प्यूटर की दुकान से इस हैकिंग को अंजाम दिया. इस मामले में चुनाव आयोग में काम करने वाले डाटा एंट्री ऑपरेटर को भी पकड़ा गया है. आयोग को वेबसाइट पर कुछ गड़बड़ी का अंदेशा होने पर जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी दी. एजेंसियों की जांच के दौरान आरोपी विपुल सैनी शक के दायरे में आया. एजेंसियों ने सहारनपुर पुलिस को सैनी के बारे में जानकारी दी. इसके बाद उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई. पुलिस ने विपुल सैनी के घर पर छापा मारा और गिरफ्तार कर लिया. इस मामले में चुनाव आयोग का आधिकारिक बयान आया है. आयोग के मुताबिक असिस्टेंट इलेक्टोरल रोल ऑफिसर्स नागरिक सेवाओं को मुहैया कराने के लिए कृतसंकल्पित हैं. 'कोई भी वोटर ना छूटने पाए' की थीम के साथ वोटर आईडी की प्रिंटिंग और तय समय के अंदर उनका वितरण किया जा रहा है. एसएसपी चेनप्पा ने बताया कि, पूछताछ के दौरान विपुल सैनी ने बताया कि वह मध्यप्रदेश के हरदा निवासी अरमान मलिक के इशारे पर ये काम कर रहा था और उसने तीन माह में करीब दस हजार से ज्यादा फर्जी मतदाता पहचान पत्र बना लिए थे. साइबर सेल और सहारनपुर अपराध शाखा के संयुक्त दल ने गुरुवार को विपुल सैनी को गिरफ्तार कर लिया. एसएसपी ने बताया कि विपुल सैनी के पिता किसान हैं. विपुल सैनी सहारनपुर के एक कॉलेज से बीसीए कर रखा है. सहारनपुर एसएसपी ने बताया कि जांच में सैनी के बैंक खाते में साठ लाख रुपये पाए गए, जिसके बाद खाते से लेन-देन पर तत्काल रोक लगा दी गई है. उन्होंने कहा कि सैनी के खाते में इतनी रकम कहां से आई इसकी जांच की जाएगी. पूछताछ में आरोपी विपुल सैनी ने पुलिस को बताया कि एक पहचान पत्र के एवज में उसे एक सौ से दो सौ रुपयापये मिलते हैं. उसके घर से पुलिस ने दो कम्प्यूटर भी जब्त किया है. जांच एजेंसी उसे अदालत में पेश करके उसकी न्यायिक हिरासत की अपील करेगी.
|
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के खिलाफ पुलिस में दो शिकायतें दर्ज की गईं हैं। यह शिकायत उनके सीएए को लेकर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर दर्ज कराई गईं हैं। इनमें से एक शिकायत टीएमसी नेता कृष्णेन्दू बनर्जी द्वारा नादिया में दर्ज कराई गई है।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के खिलाफ पुलिस में दो शिकायतें दर्ज की गईं हैं। यह शिकायत उनके सीएए को लेकर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर दर्ज कराई गईं हैं। इनमें से एक शिकायत टीएमसी नेता कृष्णेन्दू बनर्जी द्वारा नादिया में दर्ज कराई गई है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला चार दिवसीय यात्रा पर भारत पहुँच गए हैं.
यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच रिश्ते मज़बूत करना और नेपाल के लिए आर्थिक मदद पर बात करना बताया जा रहा है.
अप्रैल में सत्ता में लौटने के बाद से गिरिजा प्रसाद कोइराला की ये पहली विदेश यात्रा है.
अप्रैल में नेपाल में व्यापक स्तर पर जनआंदोलन हुआ था जिसके बाद नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने सत्ता छोड़ने का फ़ैसला किया था.
भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अगर गिरिजा प्रसाद कोइराला भारत के प्रधानमंत्री से आर्थिक मदद की बात करते हैं, तो भारत इस पर सकारात्मक क़दम उठाना चाहेगा.
बीबीसी संवाददाता संजीव श्रीवास्तव के अनुसार नेपाल की मदद करने के पीछे अतीत में दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध होना ही एकमात्र कारण नहीं है.
संवाददाता के मुताबिक बदले हुए परिदृश्य के बाद भारत चाहता है कि उसे एक सहयाक पड़ोसी देश के तौर पर देखा जाए. नेपाल में माओवादी और सरकार संविधान सभा के लिए चुनाव करवाने पर सहमत हो चुके हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कोइराला की यात्रा के दौरान भारत बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा कर सकता है- खा़सकर शिक्षा, बिजली और यातायात के संबंध में.
भारत नेपाल को आर्थिक और सैन्य सहायता देता रहा है.
संवाददाता के मुताबिक नेपाल में माओवादी नेताओं ने गिरिजा प्रसाद कोइराला से ये भी कहा है कि वे भारतीय जेलों में बंद माओवादी कार्यकर्ताओं की रिहाई की माँग करे.
लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में ये एक संवेदनशील मामला माना जाता है.
|
नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला चार दिवसीय यात्रा पर भारत पहुँच गए हैं. यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच रिश्ते मज़बूत करना और नेपाल के लिए आर्थिक मदद पर बात करना बताया जा रहा है. अप्रैल में सत्ता में लौटने के बाद से गिरिजा प्रसाद कोइराला की ये पहली विदेश यात्रा है. अप्रैल में नेपाल में व्यापक स्तर पर जनआंदोलन हुआ था जिसके बाद नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने सत्ता छोड़ने का फ़ैसला किया था. भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अगर गिरिजा प्रसाद कोइराला भारत के प्रधानमंत्री से आर्थिक मदद की बात करते हैं, तो भारत इस पर सकारात्मक क़दम उठाना चाहेगा. बीबीसी संवाददाता संजीव श्रीवास्तव के अनुसार नेपाल की मदद करने के पीछे अतीत में दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध होना ही एकमात्र कारण नहीं है. संवाददाता के मुताबिक बदले हुए परिदृश्य के बाद भारत चाहता है कि उसे एक सहयाक पड़ोसी देश के तौर पर देखा जाए. नेपाल में माओवादी और सरकार संविधान सभा के लिए चुनाव करवाने पर सहमत हो चुके हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कोइराला की यात्रा के दौरान भारत बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा कर सकता है- खा़सकर शिक्षा, बिजली और यातायात के संबंध में. भारत नेपाल को आर्थिक और सैन्य सहायता देता रहा है. संवाददाता के मुताबिक नेपाल में माओवादी नेताओं ने गिरिजा प्रसाद कोइराला से ये भी कहा है कि वे भारतीय जेलों में बंद माओवादी कार्यकर्ताओं की रिहाई की माँग करे. लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में ये एक संवेदनशील मामला माना जाता है.
|
Posted On:
भारत में साइबर सुरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता महसूस करते हुए तथा माननीय प्रधानमंत्री जी के 'डिजिटल इंडिया' के विजन के अनुरूप, इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने आज दिल्ली में एक समारोह में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिविजन (एनईजीडी) एवं उद्योग जगत के सहयोग से साइबर सुरक्षित भारत पहल की घोषणा की। इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिक राज्य मंत्री तथा पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री के.जे. अल्फोंस ने इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय में सचिव श्री अजय प्रकाश साहनी, विधि एवं न्याय मंत्रालय में सचिव श्री सुरेश चंद्रा, डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं सीईओ श्री संजीव गुप्ता, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के अध्यक्ष श्री अनंत महेश्वरी, नास्कॉम की नामित अध्यक्ष सुश्री देबजानी घोष, इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के समूह समन्वयक (साइबर सुरक्षा), विप्रो के इंडिया प्रैक्टिस हेड (सीआरएस) श्री जयेश वारियर एवं डाइमेंशन डाटा, इंडिया के विक्रय निदेशक श्री रघुवीर एचआर की उपस्थिति में इस पहल का उद्घाटन किया।
सभी सरकारी विभागों में मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) एवं अग्रिम पंक्ति के आईटी कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपायों हेतु क्षमता निर्माण करने एवं साइबर अपराध के बारे में जागरुकता फैलाने के मिशन की संकल्पना के साथ, साइबर सुरक्षित भारत का परिचालन जागरुकता, शिक्षा एवं सक्षमता के तीन सिद्धांतों पर किया जाएगा। इसमें साइबर सुरक्षा के महत्व पर एक जागरुकता कार्यक्रम, सर्वश्रेष्ठ प्रचलनों पर कार्यक्रम की एक श्रृंखला तथा साइबर खतरों को प्रबंधित करने तथा इसमें कमी लाने के लिए साइबर सुरक्षा हेल्थ टूल किट्स के साथ अधिकारियों की सक्षमता शामिल है। साइबर सुरक्षित भारत अपनी तरह की पहली सार्वजनिक- निजी साझीदारी है और यह साइबर सुरक्षा में आईटी उद्योग की विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा। इस सहायता संघ के संस्थापक साझीदारों में आईटी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल, विप्रो, रेडहैट एवं डाइमेंशन डाटा शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, नॉलेज साझीदारों में सर्ट-इन, एनआईसी, नॉस्कॉम एवं एफआईडीओ अलायंस तथा कंसल्टेंसी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां डेलॉयट एवं ईवाई शामिल हैं।
अपने उद्घाटन संबोधन में डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं सीईओ श्री संजीव गुप्ता ने सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के संस्थानों में सीआईओ एवं सीआईएसओ की भूमिका की पहचान करने के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।
|
Posted On: भारत में साइबर सुरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता महसूस करते हुए तथा माननीय प्रधानमंत्री जी के 'डिजिटल इंडिया' के विजन के अनुरूप, इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय ने आज दिल्ली में एक समारोह में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिविजन एवं उद्योग जगत के सहयोग से साइबर सुरक्षित भारत पहल की घोषणा की। इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिक राज्य मंत्री तथा पर्यटन राज्य मंत्री श्री के.जे. अल्फोंस ने इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय में सचिव श्री अजय प्रकाश साहनी, विधि एवं न्याय मंत्रालय में सचिव श्री सुरेश चंद्रा, डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं सीईओ श्री संजीव गुप्ता, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के अध्यक्ष श्री अनंत महेश्वरी, नास्कॉम की नामित अध्यक्ष सुश्री देबजानी घोष, इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय के समूह समन्वयक , विप्रो के इंडिया प्रैक्टिस हेड श्री जयेश वारियर एवं डाइमेंशन डाटा, इंडिया के विक्रय निदेशक श्री रघुवीर एचआर की उपस्थिति में इस पहल का उद्घाटन किया। सभी सरकारी विभागों में मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों एवं अग्रिम पंक्ति के आईटी कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपायों हेतु क्षमता निर्माण करने एवं साइबर अपराध के बारे में जागरुकता फैलाने के मिशन की संकल्पना के साथ, साइबर सुरक्षित भारत का परिचालन जागरुकता, शिक्षा एवं सक्षमता के तीन सिद्धांतों पर किया जाएगा। इसमें साइबर सुरक्षा के महत्व पर एक जागरुकता कार्यक्रम, सर्वश्रेष्ठ प्रचलनों पर कार्यक्रम की एक श्रृंखला तथा साइबर खतरों को प्रबंधित करने तथा इसमें कमी लाने के लिए साइबर सुरक्षा हेल्थ टूल किट्स के साथ अधिकारियों की सक्षमता शामिल है। साइबर सुरक्षित भारत अपनी तरह की पहली सार्वजनिक- निजी साझीदारी है और यह साइबर सुरक्षा में आईटी उद्योग की विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा। इस सहायता संघ के संस्थापक साझीदारों में आईटी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल, विप्रो, रेडहैट एवं डाइमेंशन डाटा शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, नॉलेज साझीदारों में सर्ट-इन, एनआईसी, नॉस्कॉम एवं एफआईडीओ अलायंस तथा कंसल्टेंसी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां डेलॉयट एवं ईवाई शामिल हैं। अपने उद्घाटन संबोधन में डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं सीईओ श्री संजीव गुप्ता ने सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के संस्थानों में सीआईओ एवं सीआईएसओ की भूमिका की पहचान करने के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।
|
अन्य लोगों में भी निर्बलता पाई जाती है । इसके विपक्ष में भी बहुत कुछ कहा जा सकता है । यदि मनुष्यों का निर्णय उनके दावे के अनुसार न्याय संगत होता है और वे निर्णय पर अधिकढ़ता से स्थिर रह सकते हैं तो किसी प्रकार आंशिक
में इसका कारण यह बतलाया जा सकता है कि वे अपनी इन शक्तियों को अनवरत व्यवहार में लाते हैं और वे सब बातों की जानकारी रखते रहते हैं । व्यवहार के कारण ही मनुष्य पूर्ण बनता है। इसी प्रकार स्त्री भी पूर्ण बन सकती है। संपत्ति कार और प्रबन्ध कार्य से अधिक संसर्ग तथा जीवन में अधिक उलट-फेरों से अधिक अनुभव होता है और स्त्रियों तथा पुरुषों को इससे इस सर्व-विदित सिद्धान्त के अनुसार शिक्षा मिलती है कि मनुष्य भूलों से सीखता है इस कारण यह अच्छा है कि स्त्रियाँ अपना उसी प्रकार परिचय प्राप्त करें जैसा दूसरे उनसे परिचय रखते हैं और वे आत्मतुष्टि के संसार में संतुष्ट बनकर ही न पड़ीं रहें । हम
स्त्रियों को समय पर ही एक चेतावनी दे देना चाहते हैं जिसका सम्बन्ध प्रत्येक परिवार के अर्द्ध दुखद रूप । से है हम चाहे जो कुछ कहें किन्तु हमें यह बात चिन्तापूर्वक वा शोकपूर्वक स्वीकार करती ही पड़ेगी कि हमारी स्त्रियाँ अपने बच्चों के साथ कुछ क्रूरता का उपयोग करती हैं। यह बात नहीं है कि पुरुष भी जब तब क्रूर नहीं होजाते किन्तु स्त्रियाँ अपने बच्चों के रात दिन के नटखटपन के कारण तंग आजाने के
|
अन्य लोगों में भी निर्बलता पाई जाती है । इसके विपक्ष में भी बहुत कुछ कहा जा सकता है । यदि मनुष्यों का निर्णय उनके दावे के अनुसार न्याय संगत होता है और वे निर्णय पर अधिकढ़ता से स्थिर रह सकते हैं तो किसी प्रकार आंशिक में इसका कारण यह बतलाया जा सकता है कि वे अपनी इन शक्तियों को अनवरत व्यवहार में लाते हैं और वे सब बातों की जानकारी रखते रहते हैं । व्यवहार के कारण ही मनुष्य पूर्ण बनता है। इसी प्रकार स्त्री भी पूर्ण बन सकती है। संपत्ति कार और प्रबन्ध कार्य से अधिक संसर्ग तथा जीवन में अधिक उलट-फेरों से अधिक अनुभव होता है और स्त्रियों तथा पुरुषों को इससे इस सर्व-विदित सिद्धान्त के अनुसार शिक्षा मिलती है कि मनुष्य भूलों से सीखता है इस कारण यह अच्छा है कि स्त्रियाँ अपना उसी प्रकार परिचय प्राप्त करें जैसा दूसरे उनसे परिचय रखते हैं और वे आत्मतुष्टि के संसार में संतुष्ट बनकर ही न पड़ीं रहें । हम स्त्रियों को समय पर ही एक चेतावनी दे देना चाहते हैं जिसका सम्बन्ध प्रत्येक परिवार के अर्द्ध दुखद रूप । से है हम चाहे जो कुछ कहें किन्तु हमें यह बात चिन्तापूर्वक वा शोकपूर्वक स्वीकार करती ही पड़ेगी कि हमारी स्त्रियाँ अपने बच्चों के साथ कुछ क्रूरता का उपयोग करती हैं। यह बात नहीं है कि पुरुष भी जब तब क्रूर नहीं होजाते किन्तु स्त्रियाँ अपने बच्चों के रात दिन के नटखटपन के कारण तंग आजाने के
|
सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय अध्यक्षोंके भाषण
दोनों ही व्याख्यान मनन करने लायक थे । स्वामी श्री श्रद्धानन्दजीके भाषण में उनकी धार्मिकताकी छाप थी । हम अंग्रेजोंका अपमान कैसे कर सकते हैं? उन्होंने हमें एन्ड्रयूज, ह्यूम, वेडरबर्न जैसे लोग दिये हैं। इस तरह उन्होंने हमें प्रेमकी झाँकी दिखाई है। पण्डित मोतीलालजीके भाषण में तीखापन था । उन्होंने पंजाबके दुःखका अनुभव किया है। उनकी आत्मा उससे बहुत दुःखी हुई है और इसे उन्होंने अपने व्याख्यानमें प्रकट किया। स्वामीजीका भाषण हिन्दी में होनेके कारण लोगोंने उसे ठीकसे ध्यान देकर सुना । यद्यपि बादमें लोग कुछ थक-से गये थे। मोतीलालजीका भाषण अंग्रेजीमें पढ़े जानेके कारण कोई उसे सुननेको ही तैयार नहीं था। पहले तो बहुत ही शोर-गुल होता रहा, परन्तु पण्डित मालवीयजीके आग्रहपर कुछ शान्ति हुई । भाषणका बहुत-सा अंश तो विना पढ़े ही छोड़ देना पड़ा ।
सन्नाका आभार
कांग्रेसके प्रस्ताव बहुत महत्त्वपूर्ण थे । प्रथम प्रस्ताव सम्राट्का आभार माननेसे सम्बन्धित था । उस प्रस्तावपर बहस तो काफी हुई परन्तु आखिरमें वह पास हो गया । साम्राज्यीय घोषणामें जैसी उदारता दिखाई गई है वैसी उससे पहले की विज्ञप्ति आदिमें नहीं थी। उसके बाद हमने देखा कि बहुत से लोग जो केवल सन्देहवश परेशान किये जा रहे थे, उससे छुटकारा पा गये हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है। इन सबको कैद करना यदि अन्याय था तो उन्हें मुक्त करने में उदारता बरती गई है, इसमें सन्देह, नहीं । अतः इस कामके लिए धन्यवाद देना हमारा कर्त्तव्य था ।
भूलोंकी स्वीकृति और निन्दा
परन्तु प्रस्तावों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव तो हमारी जितनी भूलें थीं उनपर नजर डालना और उनकी निन्दा करना था। इन प्रस्तावोंको मंजूर करनेमें जो आनाकानी हो रही थी, वह समझमें न आने लायक थी । अहमदाबाद, वीरमगाँव, अमृतसर, गुजरांवाला, कसुर आदि स्थानों में हमारे अपने ही लोगोंने मकान जलाय, आदमियोंको मार डाला, पुल फूंके, पटरियाँ उखाड़ीं, तार काटे; इसके लिए किसी प्रमाणकी आवश्यकता नहीं। इसके पीछे सी० आई० डी० वालोंका हाथ था, यदि ऐसा कोई कहे और वह सच हो, तो भी हमारे कितने ही लोग उनकी बातोंमें फँस गये और न करने लायक काम किये । इसकी निन्दा होनी ही चाहिए। जो व्यक्ति अथवा समाज अपने दोषोंको देखनेकी इच्छा नहीं रखता अथवा उन्हें स्वीकार करने में डरता है, वह आगे बढ़ ही नहीं सकता। जबतक हम अपने आसपास विद्यमान गन्दगीको नहीं देख पाते तबतक हममें उसे दूर करने की शक्ति नहीं आ सकती। गन्दगी जमकर बैठ जाती है । इसके सिवाय जो गलतियाँ हमने की हैं जबतक हम उनकी समुचित निन्दा नहीं करते तंबतक दूसरोंके दोष देखने और बतानेका हमें कोई अधिकार ही प्राप्त नहीं होता । हमने सरकारी इमारतों आदिमें आग लगाई । यदि हम इन घटनाओंपर पश्चात्ताप न
|
सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय अध्यक्षोंके भाषण दोनों ही व्याख्यान मनन करने लायक थे । स्वामी श्री श्रद्धानन्दजीके भाषण में उनकी धार्मिकताकी छाप थी । हम अंग्रेजोंका अपमान कैसे कर सकते हैं? उन्होंने हमें एन्ड्रयूज, ह्यूम, वेडरबर्न जैसे लोग दिये हैं। इस तरह उन्होंने हमें प्रेमकी झाँकी दिखाई है। पण्डित मोतीलालजीके भाषण में तीखापन था । उन्होंने पंजाबके दुःखका अनुभव किया है। उनकी आत्मा उससे बहुत दुःखी हुई है और इसे उन्होंने अपने व्याख्यानमें प्रकट किया। स्वामीजीका भाषण हिन्दी में होनेके कारण लोगोंने उसे ठीकसे ध्यान देकर सुना । यद्यपि बादमें लोग कुछ थक-से गये थे। मोतीलालजीका भाषण अंग्रेजीमें पढ़े जानेके कारण कोई उसे सुननेको ही तैयार नहीं था। पहले तो बहुत ही शोर-गुल होता रहा, परन्तु पण्डित मालवीयजीके आग्रहपर कुछ शान्ति हुई । भाषणका बहुत-सा अंश तो विना पढ़े ही छोड़ देना पड़ा । सन्नाका आभार कांग्रेसके प्रस्ताव बहुत महत्त्वपूर्ण थे । प्रथम प्रस्ताव सम्राट्का आभार माननेसे सम्बन्धित था । उस प्रस्तावपर बहस तो काफी हुई परन्तु आखिरमें वह पास हो गया । साम्राज्यीय घोषणामें जैसी उदारता दिखाई गई है वैसी उससे पहले की विज्ञप्ति आदिमें नहीं थी। उसके बाद हमने देखा कि बहुत से लोग जो केवल सन्देहवश परेशान किये जा रहे थे, उससे छुटकारा पा गये हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है। इन सबको कैद करना यदि अन्याय था तो उन्हें मुक्त करने में उदारता बरती गई है, इसमें सन्देह, नहीं । अतः इस कामके लिए धन्यवाद देना हमारा कर्त्तव्य था । भूलोंकी स्वीकृति और निन्दा परन्तु प्रस्तावों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव तो हमारी जितनी भूलें थीं उनपर नजर डालना और उनकी निन्दा करना था। इन प्रस्तावोंको मंजूर करनेमें जो आनाकानी हो रही थी, वह समझमें न आने लायक थी । अहमदाबाद, वीरमगाँव, अमृतसर, गुजरांवाला, कसुर आदि स्थानों में हमारे अपने ही लोगोंने मकान जलाय, आदमियोंको मार डाला, पुल फूंके, पटरियाँ उखाड़ीं, तार काटे; इसके लिए किसी प्रमाणकी आवश्यकता नहीं। इसके पीछे सीशून्य आईशून्य डीशून्य वालोंका हाथ था, यदि ऐसा कोई कहे और वह सच हो, तो भी हमारे कितने ही लोग उनकी बातोंमें फँस गये और न करने लायक काम किये । इसकी निन्दा होनी ही चाहिए। जो व्यक्ति अथवा समाज अपने दोषोंको देखनेकी इच्छा नहीं रखता अथवा उन्हें स्वीकार करने में डरता है, वह आगे बढ़ ही नहीं सकता। जबतक हम अपने आसपास विद्यमान गन्दगीको नहीं देख पाते तबतक हममें उसे दूर करने की शक्ति नहीं आ सकती। गन्दगी जमकर बैठ जाती है । इसके सिवाय जो गलतियाँ हमने की हैं जबतक हम उनकी समुचित निन्दा नहीं करते तंबतक दूसरोंके दोष देखने और बतानेका हमें कोई अधिकार ही प्राप्त नहीं होता । हमने सरकारी इमारतों आदिमें आग लगाई । यदि हम इन घटनाओंपर पश्चात्ताप न
|
सामाजिक उत्थान के लिए कुर्मी समाज के मुखिया लगातार काम कर रहे हैं और उसे आगे बढ़ाने का बीड़ा केंद्रीय अध्यक्ष चोवा वर्मा ने उठाया है। उनके इस मुहिम में हम सब साथ हैं। कुर्मी समाज हमेशा से राष्ट्रीयता की भावनाओं के साथ काम करता आ रहा है। हमारे समाज के पुरोधा डॉ. खूबचंद बघेल ने समाज में भेदभाव को दूर करने का काम किया है। ये बातें ग्राम जर्वे में रविवार को आयोजित छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज पलारी राज के 76वें वार्षिक अधिवेशन में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कही।
उन्होंने कहा आज समाज में होने वाले सामूहिक विवाह के लिए शासन स्तर से जो भी सहयोग की जरूरत होगी उसे पूरा किया जाएगा। उसके लिए समाज कोई चिंता न करें। मुख्यमंत्री ने कहा समाज में लोगों ने शिक्षा को बढ़ावा दिया और उसी कारण आज सामाजिक विकास हो रहा है। इस अवसर पर विधायक शकुंतला साहू, हितेंद्र ठाकुर जिला अध्यक्ष, मोनू वर्मा अध्यक्ष नगर पंचायत पलारी, बिपिन बिहारी वर्मा, रघुनंदन लाल वर्मा, खोडास कश्यप, महेंद्र वर्मा, अश्वनी वर्मा, महेश वर्मा, गज्जू वर्मा, कपिल कश्यप, खिलेंद्र वर्मा जनपद अध्यक्ष, राकेश वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष, मुन्नी ओम प्रकाश वर्मा सरपंच, राज प्रधान भुनेश्वर वर्मा, दशरथ वर्मा, चंद्रशेखर, जागेश्वर रामकुमार वर्मा, दुलारी, भारती वर्मा, तरुण वर्मा , गोपी साहू , झड़ीराम कनोजे, सुमित्रा घृतलहरे, शेखर वर्मा, बिसेसर वर्मा, नरेश टिकेश्वरी वर्मा, प्रवीण धुरंधर आदि मौजूद रहे।
सामाजिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और केंद्रीय अध्यक्ष चोवा राम वर्मा ने समाज के प्रतिभावान लोगों का सम्मान किया तो वहीं बलौदाबाजार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक झा को मुख्यमंत्री ने जिले में करीब 300 बेटियों के गुमशुदगी के बाद सकुशल घर वापसी के लिए उनका सम्मान किया। सीएम ने कहा कि हर जिले के कप्तान को आपके कार्यों का अनुसरण करना चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते केंद्रीय अध्यक्ष चोवा राम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का सपना देखने वाला व्यक्ति कुर्मी समाज का सपूत खूबचंद बघेल है। छत्तीसगढ़ राज्य बने 22 साल जरूर हो गए मगर आज हमको गर्व हो रहा है कि हमारे मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की संस्कृती, भाषा और बोली जो विलुप्त हो रहा था उसे जीवित कर दिया। छत्तीसगढ़ के तीज त्योहार के लिए सरकार छुट्टी देकर छत्तीसगढ़ी का मान बढ़ाया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि समाज में होने वाले सामूहिक विवाह के लिए अपना सहयोग प्रशासन की ओर से करें। महामंत्री रघुनंदन लाल वर्मा ने कहा कुर्मी समाज में महिलाओं और युवाओं के आगे आने से समाज में नई ऊर्जा का संचार हुआ है, जो हर समाज के लिए अच्छा संदेश है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
सामाजिक उत्थान के लिए कुर्मी समाज के मुखिया लगातार काम कर रहे हैं और उसे आगे बढ़ाने का बीड़ा केंद्रीय अध्यक्ष चोवा वर्मा ने उठाया है। उनके इस मुहिम में हम सब साथ हैं। कुर्मी समाज हमेशा से राष्ट्रीयता की भावनाओं के साथ काम करता आ रहा है। हमारे समाज के पुरोधा डॉ. खूबचंद बघेल ने समाज में भेदभाव को दूर करने का काम किया है। ये बातें ग्राम जर्वे में रविवार को आयोजित छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज पलारी राज के छिहत्तरवें वार्षिक अधिवेशन में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कही। उन्होंने कहा आज समाज में होने वाले सामूहिक विवाह के लिए शासन स्तर से जो भी सहयोग की जरूरत होगी उसे पूरा किया जाएगा। उसके लिए समाज कोई चिंता न करें। मुख्यमंत्री ने कहा समाज में लोगों ने शिक्षा को बढ़ावा दिया और उसी कारण आज सामाजिक विकास हो रहा है। इस अवसर पर विधायक शकुंतला साहू, हितेंद्र ठाकुर जिला अध्यक्ष, मोनू वर्मा अध्यक्ष नगर पंचायत पलारी, बिपिन बिहारी वर्मा, रघुनंदन लाल वर्मा, खोडास कश्यप, महेंद्र वर्मा, अश्वनी वर्मा, महेश वर्मा, गज्जू वर्मा, कपिल कश्यप, खिलेंद्र वर्मा जनपद अध्यक्ष, राकेश वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष, मुन्नी ओम प्रकाश वर्मा सरपंच, राज प्रधान भुनेश्वर वर्मा, दशरथ वर्मा, चंद्रशेखर, जागेश्वर रामकुमार वर्मा, दुलारी, भारती वर्मा, तरुण वर्मा , गोपी साहू , झड़ीराम कनोजे, सुमित्रा घृतलहरे, शेखर वर्मा, बिसेसर वर्मा, नरेश टिकेश्वरी वर्मा, प्रवीण धुरंधर आदि मौजूद रहे। सामाजिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और केंद्रीय अध्यक्ष चोवा राम वर्मा ने समाज के प्रतिभावान लोगों का सम्मान किया तो वहीं बलौदाबाजार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक झा को मुख्यमंत्री ने जिले में करीब तीन सौ बेटियों के गुमशुदगी के बाद सकुशल घर वापसी के लिए उनका सम्मान किया। सीएम ने कहा कि हर जिले के कप्तान को आपके कार्यों का अनुसरण करना चाहिए। कार्यक्रम को संबोधित करते केंद्रीय अध्यक्ष चोवा राम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का सपना देखने वाला व्यक्ति कुर्मी समाज का सपूत खूबचंद बघेल है। छत्तीसगढ़ राज्य बने बाईस साल जरूर हो गए मगर आज हमको गर्व हो रहा है कि हमारे मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की संस्कृती, भाषा और बोली जो विलुप्त हो रहा था उसे जीवित कर दिया। छत्तीसगढ़ के तीज त्योहार के लिए सरकार छुट्टी देकर छत्तीसगढ़ी का मान बढ़ाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि समाज में होने वाले सामूहिक विवाह के लिए अपना सहयोग प्रशासन की ओर से करें। महामंत्री रघुनंदन लाल वर्मा ने कहा कुर्मी समाज में महिलाओं और युवाओं के आगे आने से समाज में नई ऊर्जा का संचार हुआ है, जो हर समाज के लिए अच्छा संदेश है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
भारत-वेस्टइंडीज के बीच बुधवार को 3 वनडे की सीरीज का तीसरा और आखिरी मैच खेला जाएगा. इससे पहले, कोच फिल सिमंस ने खिलाड़ियों को जीत का मंत्र दिया है. (West Indies cricket instagram)
नई दिल्ली. वेस्टइंडीज की टीम भारत से पहले 2 मैच हारकर 3 वनडे की सीरीज पहले ही गंवा चुकी है. अब उस पर क्लीन स्वीप का खतरा मंडरा रहा है. दोनों देशों के बीच तीसरा और आखिरी वनडे 27 जुलाई को खेला जाएगा. ऐसे में कोच फिल सिमंस लगातार हार झेल रही कैरेबियाई टीम में जान फूंकने की कोशिशों में जुट गए हैं और इसके लिए उन्होंने किताब का सहारा लिया है. उन्होंने भारत के खिलाफ तीसरे वनडे से पहले वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों को प्रेरित करने के लिए पूर्व दिग्गज पेसर माइकल होल्डिंग की किताब 'Why we Kneel - How we rise' दी है. यह किताब 2021 में रिलीज हुई थी. इस किताब में होल्डिंग ने नस्लभेद को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं.
वेस्टइंडीज टीम के खिलाड़ियों को माइकल होल्डिंग की किताब देने का यह आइडिया क्रिकेट वेस्टइंडीज के उपाध्यक्ष डॉक्टर किशोर शैलो ने दिया. उन्हें लगा कि इस वक्त खराब दौर से गुजर रही है वेस्टइंडीज की टीम को मोटिवेट करने के लिए इससे अच्छा कोई दूसरा तरीका नहीं हो सकता. वैसे तो होल्डिंग की इस किताब का ज्यादातर हिस्सा नस्लभेद पर आधारित है. लेकिन इसमें वेस्टइंडीज के इतिहास की भी बात की गई है.
वेस्टइंडीज जून से अब तक लगातार 8 वनडे गंवा चुका है. भारत से दो वनडे हारने से पहले उसे अपने घर में बांग्लादेश ने 3 वनडे की सीरीज में क्लीन स्वीप किया था और पाकिस्तान में भी उसे तीन वनडे गंवाने पड़े थे. हालांकि, इससे पहले भी वेस्टइंडीज टीम वनडे में इस तरह के खराब दौर से गुजर चुकी है. 2005 में भी वेस्टइंडीज की टीम अपने घर में पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका से लगातार 8 वनडे हारी थी. वेस्टइंडीज ने पिछली पांच में से सिर्फ एक वनडे सीरीज जीती है. वो भी नीदरलैंड के खिलाफ. इस दौरान उसे अपने से कमजोर बांग्लादेश और आयरलैंड से भी हार झेलनी पड़ी.
निकोलस पूरन की अगुआई वाली टीम ने भारत के खिलाफ पहले 2 वनडे में अच्छा खेल दिखाया है. जहां बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज में वेस्टइंडीज की टीम 200 रन रन का आकंड़ा तक नहीं पार कर पाई थी. वहीं, भारत के खिलाफ पहले दोनों वनडे में कैरेबियाई टीम ने 300 से अधिक रन बनाए और यह दोनों ही मैच उसने करीबी अंतर से हारे. ऐसे में अगर तीसरे वनडे में कैरेबियाई भारत पर भारी पड़े तो शायद ही किसी को हैरानी होगी.
.
Jawan में 57 साल के Shah Rukh संग 38 की Nayanthara का रोमांस, हीरोइन के पति बोले, मैंने सुना आप दोनों के बीच. .
|
भारत-वेस्टइंडीज के बीच बुधवार को तीन वनडे की सीरीज का तीसरा और आखिरी मैच खेला जाएगा. इससे पहले, कोच फिल सिमंस ने खिलाड़ियों को जीत का मंत्र दिया है. नई दिल्ली. वेस्टइंडीज की टीम भारत से पहले दो मैच हारकर तीन वनडे की सीरीज पहले ही गंवा चुकी है. अब उस पर क्लीन स्वीप का खतरा मंडरा रहा है. दोनों देशों के बीच तीसरा और आखिरी वनडे सत्ताईस जुलाई को खेला जाएगा. ऐसे में कोच फिल सिमंस लगातार हार झेल रही कैरेबियाई टीम में जान फूंकने की कोशिशों में जुट गए हैं और इसके लिए उन्होंने किताब का सहारा लिया है. उन्होंने भारत के खिलाफ तीसरे वनडे से पहले वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों को प्रेरित करने के लिए पूर्व दिग्गज पेसर माइकल होल्डिंग की किताब 'Why we Kneel - How we rise' दी है. यह किताब दो हज़ार इक्कीस में रिलीज हुई थी. इस किताब में होल्डिंग ने नस्लभेद को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं. वेस्टइंडीज टीम के खिलाड़ियों को माइकल होल्डिंग की किताब देने का यह आइडिया क्रिकेट वेस्टइंडीज के उपाध्यक्ष डॉक्टर किशोर शैलो ने दिया. उन्हें लगा कि इस वक्त खराब दौर से गुजर रही है वेस्टइंडीज की टीम को मोटिवेट करने के लिए इससे अच्छा कोई दूसरा तरीका नहीं हो सकता. वैसे तो होल्डिंग की इस किताब का ज्यादातर हिस्सा नस्लभेद पर आधारित है. लेकिन इसमें वेस्टइंडीज के इतिहास की भी बात की गई है. वेस्टइंडीज जून से अब तक लगातार आठ वनडे गंवा चुका है. भारत से दो वनडे हारने से पहले उसे अपने घर में बांग्लादेश ने तीन वनडे की सीरीज में क्लीन स्वीप किया था और पाकिस्तान में भी उसे तीन वनडे गंवाने पड़े थे. हालांकि, इससे पहले भी वेस्टइंडीज टीम वनडे में इस तरह के खराब दौर से गुजर चुकी है. दो हज़ार पाँच में भी वेस्टइंडीज की टीम अपने घर में पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका से लगातार आठ वनडे हारी थी. वेस्टइंडीज ने पिछली पांच में से सिर्फ एक वनडे सीरीज जीती है. वो भी नीदरलैंड के खिलाफ. इस दौरान उसे अपने से कमजोर बांग्लादेश और आयरलैंड से भी हार झेलनी पड़ी. निकोलस पूरन की अगुआई वाली टीम ने भारत के खिलाफ पहले दो वनडे में अच्छा खेल दिखाया है. जहां बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज में वेस्टइंडीज की टीम दो सौ रन रन का आकंड़ा तक नहीं पार कर पाई थी. वहीं, भारत के खिलाफ पहले दोनों वनडे में कैरेबियाई टीम ने तीन सौ से अधिक रन बनाए और यह दोनों ही मैच उसने करीबी अंतर से हारे. ऐसे में अगर तीसरे वनडे में कैरेबियाई भारत पर भारी पड़े तो शायद ही किसी को हैरानी होगी. . Jawan में सत्तावन साल के Shah Rukh संग अड़तीस की Nayanthara का रोमांस, हीरोइन के पति बोले, मैंने सुना आप दोनों के बीच. .
|
- 1 hr ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स!
- 1 hr ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह!
Don't Miss!
- Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate?
- Automobiles एलन मस्कः इस साल आ सकती है टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग कारें - क्या हो पायेगा मुमकिन?
बिग बॉस सलमान ने किया भगवान शिव का अपमान, रिपोर्ट दर्ज!
सलमान खान के बिग बॉस 7 के खिलाफ जिसने केस दर्ज कराया है उसका नाम है हेमंत पाटिल और हेमंत एक एक्टिविस्ट है। हेमंत के अनुसार सलमान खान के इस तरह से त्रिशूल को लेकर जहन्नुम को रिप्रेसेंट करने से हिन्दू धर्म की भावनाएं आहत हुई हैं। हेमंत ने बिग बॉस के प्रोड्यूसर्स और सलमान खान के खिलाफ इस केस को दर्ज कराया है। अब देखना ये है कि सलमान खान और शो के प्रोड्यूसर्स इस रिपोर्ट के जवाब में क्या करते हैं। फिल्हाल तो बिग बॉस को इस पुलिस रिपोर्ट के चलते भी काफी पब्लिसिटी मिल रही है। वैसे भी बिग बॉस को लेकर हर साल कुछ ना कुछ तो पंगे होते ही हैं और इसी बहाने बिग बॉस की फ्री पब्लिसिटी भी होती है।
बिग बॉस 7 अभी तक तो सभी रियैलिटी शो में नंबर वन पोजीशन में है और इस तरह की लगातार कॉंट्रोवर्सीज होती रहीं तो ये शो इस साल का सबसे हिट शो बन जाएगा। क्योंकि विवादों के चलते ही शो की टीआरपी भी बढ़ती है और व्यूवरशिप भी। सलमान खान फिल्हाल इस केस पर चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन शो के प्रोड्यूसर्स का कहना है कि वो जल्द से जल्द इसपर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
|
- एक hr ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! - एक hr ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह! Don't Miss! - Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? - Automobiles एलन मस्कः इस साल आ सकती है टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग कारें - क्या हो पायेगा मुमकिन? बिग बॉस सलमान ने किया भगवान शिव का अपमान, रिपोर्ट दर्ज! सलमान खान के बिग बॉस सात के खिलाफ जिसने केस दर्ज कराया है उसका नाम है हेमंत पाटिल और हेमंत एक एक्टिविस्ट है। हेमंत के अनुसार सलमान खान के इस तरह से त्रिशूल को लेकर जहन्नुम को रिप्रेसेंट करने से हिन्दू धर्म की भावनाएं आहत हुई हैं। हेमंत ने बिग बॉस के प्रोड्यूसर्स और सलमान खान के खिलाफ इस केस को दर्ज कराया है। अब देखना ये है कि सलमान खान और शो के प्रोड्यूसर्स इस रिपोर्ट के जवाब में क्या करते हैं। फिल्हाल तो बिग बॉस को इस पुलिस रिपोर्ट के चलते भी काफी पब्लिसिटी मिल रही है। वैसे भी बिग बॉस को लेकर हर साल कुछ ना कुछ तो पंगे होते ही हैं और इसी बहाने बिग बॉस की फ्री पब्लिसिटी भी होती है। बिग बॉस सात अभी तक तो सभी रियैलिटी शो में नंबर वन पोजीशन में है और इस तरह की लगातार कॉंट्रोवर्सीज होती रहीं तो ये शो इस साल का सबसे हिट शो बन जाएगा। क्योंकि विवादों के चलते ही शो की टीआरपी भी बढ़ती है और व्यूवरशिप भी। सलमान खान फिल्हाल इस केस पर चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन शो के प्रोड्यूसर्स का कहना है कि वो जल्द से जल्द इसपर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
|
मुंबईः दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट (Billionaires List) में मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने Facebook के मालिक मार्क जुकरबर्ग को पीछे छोड़ दिया है। 13वें स्थान से 12वें स्थान पर पहुंच चुके हैं।
ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स (Bloomberg Billionaire Index) के मुताबिक एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की नेटवर्थ एक दिन में 5. 06 मिलियन डॉलर बढ़ी है। इस बढ़ोतरी के साथ मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति 85. 8 अरब डॉलर हो चुकी है।
वहीं मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग की कुल संपत्ति में 24 घंटे के दौरान 35. 1 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है और इनकी कुल संपत्ति 85. 5 अरब डॉलर है।
मार्क जुकरबर्ग ब्लूमबर्ग (Mark Zuckerberg Bloomberg) बिलिनेयर लिस्ट में 13वें स्थान पर हैं। वहीं भारत के दूसरे अमीर गौतम अडानी की संपत्ति पिछले 24 घंटे के दौरान अच्छी गिरावट हुई है और यह 21वें स्थान से खिसकर 23वें स्थान पर पहुंच चुके हैं।
एक दिन में Gautam Adani को 704 मिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। इनकी कुल संपत्ति 56. 4 अरब डॉलर रह गई है।
बता दें कि हिंडनबर्ग (Hindenburg) की रिपोर्ट आने के बाद गौतम अडानी की संपत्ति में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। गौतम अडानी अमीरों की लिस्ट में 36वें स्थान पर पहुंच चुके थे।
हालांकि बाद में अरबपति ने अच्छी रिकवरी की है और अब अमीरों की लिस्ट में 23 स्थान पर आ चुके हैं। इस साल जनवरी से लेकर अभी तक गौतम अडानी (Gautam Adani) की संपत्ति में 64. 2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।
|
मुंबईः दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में मुकेश अंबानी ने Facebook के मालिक मार्क जुकरबर्ग को पीछे छोड़ दिया है। तेरहवें स्थान से बारहवें स्थान पर पहुंच चुके हैं। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की नेटवर्थ एक दिन में पाँच. छः मिलियन डॉलर बढ़ी है। इस बढ़ोतरी के साथ मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति पचासी. आठ अरब डॉलर हो चुकी है। वहीं मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग की कुल संपत्ति में चौबीस घंटाटे के दौरान पैंतीस. एक मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है और इनकी कुल संपत्ति पचासी. पाँच अरब डॉलर है। मार्क जुकरबर्ग ब्लूमबर्ग बिलिनेयर लिस्ट में तेरहवें स्थान पर हैं। वहीं भारत के दूसरे अमीर गौतम अडानी की संपत्ति पिछले चौबीस घंटाटे के दौरान अच्छी गिरावट हुई है और यह इक्कीसवें स्थान से खिसकर तेईसवें स्थान पर पहुंच चुके हैं। एक दिन में Gautam Adani को सात सौ चार मिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। इनकी कुल संपत्ति छप्पन. चार अरब डॉलर रह गई है। बता दें कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद गौतम अडानी की संपत्ति में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। गौतम अडानी अमीरों की लिस्ट में छत्तीसवें स्थान पर पहुंच चुके थे। हालांकि बाद में अरबपति ने अच्छी रिकवरी की है और अब अमीरों की लिस्ट में तेईस स्थान पर आ चुके हैं। इस साल जनवरी से लेकर अभी तक गौतम अडानी की संपत्ति में चौंसठ. दो अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।
|
आपको 'क्रोनिक फ़टीग सिंड्रोम' तो नहीं?
वैज्ञानिकों का कहना है कि थकान के बावजूद लगातार काम करते रहने वाले व्यक्तियों के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव देखने को मिले हैं.
वैज्ञानिक भाषा में इसे क्रोनिक फ़टीग सिंड्रोम (सीएफ़एस) या मियालजिक एंसेफेलोपेथी (एमई) कहा जाता है.
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक शोध के मुताबिक़ इससे शरीर में साइटोकाइनेस नामक इम्यून मॉलिक्यूल बढ़ जाते हैं.
'साइंस एडवांसेज़' नामक पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि जो लोग तीन साल से अधिक सीएफ़एस से ग्रस्त रहते हैं उनमें बाद में कोई बड़ी बीमारी हो सकती है.
सीएफ़एस यानी ज़बरदस्त थकान, जो सोने या शरीर को आराम देने के बावजूद भी नहीं जा पाती.
ऐसे लोगों में मासपेशियों में दर्द, वायरल इंफेक्शंस और ध्यान संबंधी समस्याएं होने की भी संभावना अधिक होती है.
एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में करीब ढाई लाख़ लोग एमई से ग्रस्त हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं. )
|
आपको 'क्रोनिक फ़टीग सिंड्रोम' तो नहीं? वैज्ञानिकों का कहना है कि थकान के बावजूद लगातार काम करते रहने वाले व्यक्तियों के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव देखने को मिले हैं. वैज्ञानिक भाषा में इसे क्रोनिक फ़टीग सिंड्रोम या मियालजिक एंसेफेलोपेथी कहा जाता है. कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक शोध के मुताबिक़ इससे शरीर में साइटोकाइनेस नामक इम्यून मॉलिक्यूल बढ़ जाते हैं. 'साइंस एडवांसेज़' नामक पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि जो लोग तीन साल से अधिक सीएफ़एस से ग्रस्त रहते हैं उनमें बाद में कोई बड़ी बीमारी हो सकती है. सीएफ़एस यानी ज़बरदस्त थकान, जो सोने या शरीर को आराम देने के बावजूद भी नहीं जा पाती. ऐसे लोगों में मासपेशियों में दर्द, वायरल इंफेक्शंस और ध्यान संबंधी समस्याएं होने की भी संभावना अधिक होती है. एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में करीब ढाई लाख़ लोग एमई से ग्रस्त हैं.
|
'Bhaiaji Superhit' trailer: ये पहली बार होगा कि दर्शक प्रीति जिंटा को देसी महिला के रोल में साथ ही एक्शन करते दिखेंगे।
नई दिल्ली, 25 अक्टूबरः अभिनेता सन्नी, देओल और प्रीति जिंटा अभिनीत फिल्म 'भैयाजी सुपरहिट' का ट्रेलर आ गया है। साथ ही इस फिल्म के रिलीज डेट भी सामने आ गई है। काफी दिनों से अधर में लटकी ये फिल्म 23 नवंबर को रिलीज होने जा रही है। फिल्म के ट्रेलर से साफ है कि ये एक एक्शन-कॉमेडी फिल्म है। इस फिल्म में जहां सन्नी देओल बनारस के भैयाजी (गैंगस्टर) बने हैं, जो कि हीरो बनाना चाहता है। ट्रेलर में आपको सन्नी देओल के एक्शन के साथ उनकी कॉमेडी भी देखने को मिलेगी। साथ ही पहली बार सन्नी देओल दर्शकों डबल रोल में दिखेंगे।
वहीं अभिनेत्री प्रीति जिंटा 'भैयाजी सुपरहिट' में सन्नी देओल की पत्नी का रोल निभा रही हैं। जो कि अपनी पति की तरह ही एक्शन करती है। बंदूक चलाती है। ये पहली बार होगा कि दर्शक प्रीति जिंटा को देसी महिला के रोल में साथ ही एक्शन करते दिखेंगे। इसके अलावा अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइम के लिए जाने जाने वाले संजय मिश्रा, अरशद वारसी भी ट्रेलर में आपको हंसता नजर आएंगे।
भैयाजी सुपरहिट' में दर्शक अमीषा पटेल, बृजेंद्र काला, जयदीप अहलावत, पंकज त्रिपाठी और मुकुल देव भी हैं। गौरतलब है कि अमीषा लंबे समय ये बड़े पर्दे से गायब हैं। इस फिल्म के जरिए वो बॉलीवुड में एक बार फिर से कमबैक करने जा रही हैं। इस फिल्म को डायरेक्टर नीरज पाठक हैं।
यह फिल्म लंबे समय से अटकी पड़ी थी। करीब चार साल पहले ही फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई थी। लेकिन अब जाकर फिल्म फ्लोर पर आ पाई है।
|
'Bhaiaji Superhit' trailer: ये पहली बार होगा कि दर्शक प्रीति जिंटा को देसी महिला के रोल में साथ ही एक्शन करते दिखेंगे। नई दिल्ली, पच्चीस अक्टूबरः अभिनेता सन्नी, देओल और प्रीति जिंटा अभिनीत फिल्म 'भैयाजी सुपरहिट' का ट्रेलर आ गया है। साथ ही इस फिल्म के रिलीज डेट भी सामने आ गई है। काफी दिनों से अधर में लटकी ये फिल्म तेईस नवंबर को रिलीज होने जा रही है। फिल्म के ट्रेलर से साफ है कि ये एक एक्शन-कॉमेडी फिल्म है। इस फिल्म में जहां सन्नी देओल बनारस के भैयाजी बने हैं, जो कि हीरो बनाना चाहता है। ट्रेलर में आपको सन्नी देओल के एक्शन के साथ उनकी कॉमेडी भी देखने को मिलेगी। साथ ही पहली बार सन्नी देओल दर्शकों डबल रोल में दिखेंगे। वहीं अभिनेत्री प्रीति जिंटा 'भैयाजी सुपरहिट' में सन्नी देओल की पत्नी का रोल निभा रही हैं। जो कि अपनी पति की तरह ही एक्शन करती है। बंदूक चलाती है। ये पहली बार होगा कि दर्शक प्रीति जिंटा को देसी महिला के रोल में साथ ही एक्शन करते दिखेंगे। इसके अलावा अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइम के लिए जाने जाने वाले संजय मिश्रा, अरशद वारसी भी ट्रेलर में आपको हंसता नजर आएंगे। भैयाजी सुपरहिट' में दर्शक अमीषा पटेल, बृजेंद्र काला, जयदीप अहलावत, पंकज त्रिपाठी और मुकुल देव भी हैं। गौरतलब है कि अमीषा लंबे समय ये बड़े पर्दे से गायब हैं। इस फिल्म के जरिए वो बॉलीवुड में एक बार फिर से कमबैक करने जा रही हैं। इस फिल्म को डायरेक्टर नीरज पाठक हैं। यह फिल्म लंबे समय से अटकी पड़ी थी। करीब चार साल पहले ही फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई थी। लेकिन अब जाकर फिल्म फ्लोर पर आ पाई है।
|
सूरमागर में प्रतीक योजना
मार गोत्री जीवोकामनायें (मान) कृष्ण रूपी परमात्मा की ओर ही उन्मुख होनी चाहिए। यदि वह माग्वन कृष्ण मे न समाकर संसार में स्थान पावे तो उन अवस्था में जीव पुष्टि-जीव न होकर प्रवाह - जीव या मर्यादा- जीव की ही वोटि मे श्रा जावेगा । अतः पुष्टिमार्ग के अनुसार व्रज की समस्त गोपियों के संपूर्ण माग्वन को कृष्ण के उदर में जाना ही है और इस रहस्य को गोपियां समझ नहीं पायी और इसीलिए कृष्ण को चोरी का ढंग अपनाना पड़ामन में यह विचार करत हरि, ब्रज घर घर सब जाउँ । गोकुल जनम लियी सुख-कारन, नवकै माखन खाउँ ।1
2. गोचारण लीला
कृष्ण नित्य वलराम तथा गोपवालों के साथ गोचारण के लिए जाते थे । जहाँ-जहाँ गायें चरती थी, वहाँ-वहाँ वे वाली के साथ दौड़ते थे । वे ग्वाल वालों के साथ हॉक बांटकर खा लेते थे। संत्र्या को वे गोरज लपटाये घर लौटते थे । 4 गोचार्ग के समय ही उन्होंने बकासुर, अवासुर आदि को मारा ।
गोचारण लोना की प्रतीकात्मकता की ओर वृहदारण्यकोपनिषद् में संकेत मिलता है । उसमे कहा गया है "वाक् रूप धेनु की उपासना करे। उसके चार स्तन है - स्वाहाकार, वषट्कार, हन्तकार और स्वधाकार । उसके दो स्तन स्वाहा - कार और वपट्कार के उपजीवी देवगरण है; हन्तकार के उपजीवी मनुष्य हैं और स्वधाकार के पितृगा। उस धेनु का प्राण वृषभ है और मन बछड़ा ।" यहाँ वाक् धेनु, वाक् वा प्राण वृषभ और मन बछड़ा बताया गया है । जिस प्रकार प्रारण के द्वारा वाक् प्रसव करती है उसी प्रकार धेनु के जनन का कारण वृषभ है । अतएव वृषभ वाक् का प्राणु बताया गया है ।
वाक्, प्राण और मन का समावेश 'धेनु' में किया गया है और यही धेनु कृष्ण चाहते है । अतः वाक्, प्राण और मन रूपी गायों को चरानेवाले कृष्ण ब्रह्म के प्रतीक हैं क्योकि वाक्, प्राण और मन का उपासक या रक्षक ब्रह्मभाव को ही
प्राप्त करता है । मानवीय दृष्टि से इस लीला की व्याख्या इस प्रकार की जा सकती है कि बाकू, प्राण और मन को जीतकर ही ग्रात्मज्ञान की ओर उन्मुख हुआ जा सकता है । इस प्रक्रिया में (गोचारण लीला के संदर्भ में) होनेवाली तामसी वृत्तियाँ और बाधायें ही वे राक्षस हैं जिन्हें कृष्ण ने गाय चराते हुए समाप्त किया । अतः यह संपूर्ण लीला सात्विक तत्त्वों का पोषण और तामसिक वृत्तियों के निराकरण का प्रतीकात्मक अर्थ ही देती है ।
3. चीर-हररण-लीला
मूस ने चीर-हरण-लीला का वर्णन इस प्रकार किया है --- गोपियों का कृष्ण के प्रति पेम दिन-ब-दिन बढ़ने लगता है। जप, तप, व्रत, संग्रम ग्रादि जिन साधनों से भी कृष्ण अपने पति बन सकें, उनको अपनाने का वे संकल्प करती हैं। वे बड़े नियम से महादेव की पूजा करती हैंः रवि से विनय करती हैंः गीत को सहन करती हैं : शरीर के क्षीण होने पर भी उसकी परवाह नहीं करतीं । प्रेम की परीक्षा में गोपियों को सफल पाकर कृष्ण उनकी मनोकामना को पूरा करना चाहते हैं। इसके पहले वे चीर-हरण-लीला द्वारा उनके संकोच तथा लोक-लज्जा, जो गोपियों को अपने से मिलने में अवरोध बनी हुई है, को दूर करना चाहते हैं ।
एक दिन जब गोपियाँ चीर तथा आभूषण यमुना के किनारे रखकर जल में नग्न ही स्नान करने लगती हैं तो कृष्ण मौका पाकर उन्हें लेकर कदंब वृक्ष पर चढ़ जाते हैं। बाद में गोपियाँ कृष्ण की करतूत समझ लेती हैं । लज्जा तथा संकोच के कारण वे जल से बाहर नहीं या पातीं । कृष्ण उनको समझाते हैं-व्रत तुम्हारी भयो पूरन, को नंद कुमार ।। गनिल नै सत्र निकमि ग्रावहु, वृथा सहतिं तुपार । देत हीँ किन लेहु मोमों, चीर, चोली हार ।। वह टेकि विने करो मोहिं कहन वारंवार । सूर प्रभु के प्राइ श्रा, करहु सत्र सिंगार । 1 किन्तु गोपियाँ अपने परंपरागत संस्कार के कारण कहती हैं1 सा०, 1404
|
सूरमागर में प्रतीक योजना मार गोत्री जीवोकामनायें कृष्ण रूपी परमात्मा की ओर ही उन्मुख होनी चाहिए। यदि वह माग्वन कृष्ण मे न समाकर संसार में स्थान पावे तो उन अवस्था में जीव पुष्टि-जीव न होकर प्रवाह - जीव या मर्यादा- जीव की ही वोटि मे श्रा जावेगा । अतः पुष्टिमार्ग के अनुसार व्रज की समस्त गोपियों के संपूर्ण माग्वन को कृष्ण के उदर में जाना ही है और इस रहस्य को गोपियां समझ नहीं पायी और इसीलिए कृष्ण को चोरी का ढंग अपनाना पड़ामन में यह विचार करत हरि, ब्रज घर घर सब जाउँ । गोकुल जनम लियी सुख-कारन, नवकै माखन खाउँ ।एक दो. गोचारण लीला कृष्ण नित्य वलराम तथा गोपवालों के साथ गोचारण के लिए जाते थे । जहाँ-जहाँ गायें चरती थी, वहाँ-वहाँ वे वाली के साथ दौड़ते थे । वे ग्वाल वालों के साथ हॉक बांटकर खा लेते थे। संत्र्या को वे गोरज लपटाये घर लौटते थे । चार गोचार्ग के समय ही उन्होंने बकासुर, अवासुर आदि को मारा । गोचारण लोना की प्रतीकात्मकता की ओर वृहदारण्यकोपनिषद् में संकेत मिलता है । उसमे कहा गया है "वाक् रूप धेनु की उपासना करे। उसके चार स्तन है - स्वाहाकार, वषट्कार, हन्तकार और स्वधाकार । उसके दो स्तन स्वाहा - कार और वपट्कार के उपजीवी देवगरण है; हन्तकार के उपजीवी मनुष्य हैं और स्वधाकार के पितृगा। उस धेनु का प्राण वृषभ है और मन बछड़ा ।" यहाँ वाक् धेनु, वाक् वा प्राण वृषभ और मन बछड़ा बताया गया है । जिस प्रकार प्रारण के द्वारा वाक् प्रसव करती है उसी प्रकार धेनु के जनन का कारण वृषभ है । अतएव वृषभ वाक् का प्राणु बताया गया है । वाक्, प्राण और मन का समावेश 'धेनु' में किया गया है और यही धेनु कृष्ण चाहते है । अतः वाक्, प्राण और मन रूपी गायों को चरानेवाले कृष्ण ब्रह्म के प्रतीक हैं क्योकि वाक्, प्राण और मन का उपासक या रक्षक ब्रह्मभाव को ही प्राप्त करता है । मानवीय दृष्टि से इस लीला की व्याख्या इस प्रकार की जा सकती है कि बाकू, प्राण और मन को जीतकर ही ग्रात्मज्ञान की ओर उन्मुख हुआ जा सकता है । इस प्रक्रिया में होनेवाली तामसी वृत्तियाँ और बाधायें ही वे राक्षस हैं जिन्हें कृष्ण ने गाय चराते हुए समाप्त किया । अतः यह संपूर्ण लीला सात्विक तत्त्वों का पोषण और तामसिक वृत्तियों के निराकरण का प्रतीकात्मक अर्थ ही देती है । तीन. चीर-हररण-लीला मूस ने चीर-हरण-लीला का वर्णन इस प्रकार किया है --- गोपियों का कृष्ण के प्रति पेम दिन-ब-दिन बढ़ने लगता है। जप, तप, व्रत, संग्रम ग्रादि जिन साधनों से भी कृष्ण अपने पति बन सकें, उनको अपनाने का वे संकल्प करती हैं। वे बड़े नियम से महादेव की पूजा करती हैंः रवि से विनय करती हैंः गीत को सहन करती हैं : शरीर के क्षीण होने पर भी उसकी परवाह नहीं करतीं । प्रेम की परीक्षा में गोपियों को सफल पाकर कृष्ण उनकी मनोकामना को पूरा करना चाहते हैं। इसके पहले वे चीर-हरण-लीला द्वारा उनके संकोच तथा लोक-लज्जा, जो गोपियों को अपने से मिलने में अवरोध बनी हुई है, को दूर करना चाहते हैं । एक दिन जब गोपियाँ चीर तथा आभूषण यमुना के किनारे रखकर जल में नग्न ही स्नान करने लगती हैं तो कृष्ण मौका पाकर उन्हें लेकर कदंब वृक्ष पर चढ़ जाते हैं। बाद में गोपियाँ कृष्ण की करतूत समझ लेती हैं । लज्जा तथा संकोच के कारण वे जल से बाहर नहीं या पातीं । कृष्ण उनको समझाते हैं-व्रत तुम्हारी भयो पूरन, को नंद कुमार ।। गनिल नै सत्र निकमि ग्रावहु, वृथा सहतिं तुपार । देत हीँ किन लेहु मोमों, चीर, चोली हार ।। वह टेकि विने करो मोहिं कहन वारंवार । सूर प्रभु के प्राइ श्रा, करहु सत्र सिंगार । एक किन्तु गोपियाँ अपने परंपरागत संस्कार के कारण कहती हैंएक साशून्य, एक हज़ार चार सौ चार
|
उत्तराखंड में वर्ष 2015 दरोगा भर्ती मामले में विजिलेंस की ओर से पहला मुकदमा दर्ज हुआ है। विजिलेंस की ओर से पहले चरण में अधिकृत संस्थान के दो कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
उत्तराखंड में वर्ष 2015 दरोगा भर्ती मामले में विजिलेंस की ओर से पहला मुकदमा दर्ज हुआ है। पहली कार्रवाई में यह परीक्षा कराने के लिए अधिकृत किये गए संस्थान के कुछ कार्मिकों और नकल सिंडिकेट आरोपियों को नामजद किया गया है, लेकिन विजिलेंस के पास भर्ती हुए उन लोगों की सूची भी है, जो नियम-कायदे ताक पर रखकर पुलिस विभाग में दरोगा की नौकरी पा गए।
विजिलेंस की ओर से पहले चरण में अधिकृत संस्थान के दो कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि नकल सिंडिकेट के 10 लोगों को भी इनके साथ मुकदमे में नामजद किया गया है। बताया जा रहा है कि विजिलेंस के पास 2015 में भर्ती हुए 30 से 35 एसआई के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।
विजिलेंस जांच में सामने आया है कि ये अभ्यर्थी अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर भर्ती होने में सफल हुए थे। इसके अलावा करीब 10 नाम ऐसे हैं, जो अपने नाते-रिश्तेदारों की पहुंच से एसआई बनने में कामयाब हुए। सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ जांच में पाया गया है कि कई अभ्यर्थियों को एसआई पद पर भर्ती कराने में हाकम सिंह, सादिक मूसा, चंदन मनराल आदि का हाथ रहा।
विजिलेंस की ओर से भर्ती की जांच के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है। जल्द ही फर्जी तरीके से भर्ती हुए एसआई के नाम भी सामने आने की उम्मीद है। फूंक-फूंककर कदम रख रही है विजिलेंसः दरोगा भर्ती में अनुचित साधनों से एसआई पद पाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विजिलेंस जल्दबाजी के मूड में नहीं है। फिलहाल विजिलेंस ने अभी 12 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है।
अनुचित रूप में भर्ती होने में सफल रहने वाले दरोगाओं के खिलाफ कार्रवाई से पहले विजिलेंस पुख्ता सबूत जुटा लेना चाहती है, जिससे भविष्य में आरोपी को बचने का मौका न मिल सके। इसके अलावा विजिलेंस भर्ती घोटाले में शामिल कुछ सफेदपोश भी विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं।
यूकेएसएसएससी भर्ती के बाद अब दरोगा भर्ती में भी जसपुर लिंक सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि दरोगा भर्ती में भी जसपुर के कुछ लोगों की संलिप्तता हो सकती है। वर्ष 2015 में हुई दरोगा भर्ती में अकेले जसपुर से ही 20 अभ्यर्थियों के दरोगा पद पर चयनित होने से जसपुर चर्चा में है।
यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में उत्तराखंड एसटीएफ ने जसपुर के एक पैरामेडिकल कॉलेज के मालिक संदीप शर्मा को गिरफ्तार किया था। अब दरोगा भर्ती में भी एक ही क्षेत्र से इतनी संख्या में सफल अभ्यर्थियों के नाम सामने आने पर जसपुर फिर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि 2015 में हुई दरोगा भर्ती में चयनित होने वाले 20 अभ्यर्थी जसपुर से ही थे। इतनी बड़ी संख्या में एक ही क्षेत्र से दरोगाओं की भर्ती होना जांच एजेंसी का ध्यान इस ओर खींच रहा है।
वर्ष 2015 दरोगा भर्ती में चयनित दरोगा वर्तमान में अपने-अपने तैनाती स्थल में कार्यरत हैं। सबसे अधिक 46 एसआई ऊधमसिंह नगर जिले में तैनात हैं, नैनीताल जिले में 38 को तैनाती मिली है। पिथौरागढ़ में 15, चम्पावत, बागेश्वर और अल्मोड़ा में सात-सात एसआई तैनात हैं।
वर्ष 2015 में हुई दरोगा भर्ती में कुल 339 एसआई चयनित किये गए थे। इनमें से 210 गढ़वाल और 129 कुमाऊं के शामिल थे। इसके बाद कई दरोगा इधर से उधर भी हुए। वर्तमान में वर्ष 2015 की भर्ती के 120 दरोगा कुमाऊं में तैनात हैं, जबकि 219 गढ़वाल मंडल में सेवा दे रहे हैं।
तो दरोगा भर्ती घोटाले का भी सूत्रधार रहा हाकम गैंग!
यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले के बाद दरोगा भर्ती मामले में भी हाकम सिंह को सूत्रधार माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2015 की दरोगा भर्ती में भी हाकम सिंह और साथियों की भूमिका रही। विजिलेंस की ओर से दर्ज किए गए मुकदमे में जीबी पंत विवि के कार्मिकों नरेंद्र सिंह जादौन, दिनेश चंद्र जोशी के अलावा नकल सिंडिकेट में शामिल हाकम सिंह, चंदन मनराल, केंद्र पाल, सादिक मूसा, रूपेश जायसवाल, राजेश कुमार चौहान, संजीव कुमार चौहान, राजेश पाल, विपिन बिहारी, नीतीश गुप्ता के नाम हैं।
इनमें से हाकम सिंह और सादिक मूसा सबसे चर्चित नाम हैं, जिन्हें यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले का सूत्रधार माना जाता है। बताया जा रहा है कि दरोगा भर्ती में भी इन दोनों की भूमिका रही। इसके अलावा यूकेएसएसएससी परीक्षा में आरोपी बनाए गए जीबी पंत विवि के रिटायर कार्मिक दिनेश चंद्र जोशी की भी दरोगा भर्ती परीक्षा में भूमिका बताई जा रही है।
साथ ही केंद्र पाल, चंदन मनराल और विपिन बिहारी का नाम दोनों भर्तियों के घोटाले में सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि यूकेएसएसएससी भर्ती की तरह ही दरोगा भर्ती के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। इसमें छह आरोपी जेल में बताए जा रहे हैं।
|
उत्तराखंड में वर्ष दो हज़ार पंद्रह दरोगा भर्ती मामले में विजिलेंस की ओर से पहला मुकदमा दर्ज हुआ है। विजिलेंस की ओर से पहले चरण में अधिकृत संस्थान के दो कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उत्तराखंड में वर्ष दो हज़ार पंद्रह दरोगा भर्ती मामले में विजिलेंस की ओर से पहला मुकदमा दर्ज हुआ है। पहली कार्रवाई में यह परीक्षा कराने के लिए अधिकृत किये गए संस्थान के कुछ कार्मिकों और नकल सिंडिकेट आरोपियों को नामजद किया गया है, लेकिन विजिलेंस के पास भर्ती हुए उन लोगों की सूची भी है, जो नियम-कायदे ताक पर रखकर पुलिस विभाग में दरोगा की नौकरी पा गए। विजिलेंस की ओर से पहले चरण में अधिकृत संस्थान के दो कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि नकल सिंडिकेट के दस लोगों को भी इनके साथ मुकदमे में नामजद किया गया है। बताया जा रहा है कि विजिलेंस के पास दो हज़ार पंद्रह में भर्ती हुए तीस से पैंतीस एसआई के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। विजिलेंस जांच में सामने आया है कि ये अभ्यर्थी अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर भर्ती होने में सफल हुए थे। इसके अलावा करीब दस नाम ऐसे हैं, जो अपने नाते-रिश्तेदारों की पहुंच से एसआई बनने में कामयाब हुए। सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ जांच में पाया गया है कि कई अभ्यर्थियों को एसआई पद पर भर्ती कराने में हाकम सिंह, सादिक मूसा, चंदन मनराल आदि का हाथ रहा। विजिलेंस की ओर से भर्ती की जांच के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है। जल्द ही फर्जी तरीके से भर्ती हुए एसआई के नाम भी सामने आने की उम्मीद है। फूंक-फूंककर कदम रख रही है विजिलेंसः दरोगा भर्ती में अनुचित साधनों से एसआई पद पाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विजिलेंस जल्दबाजी के मूड में नहीं है। फिलहाल विजिलेंस ने अभी बारह लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। अनुचित रूप में भर्ती होने में सफल रहने वाले दरोगाओं के खिलाफ कार्रवाई से पहले विजिलेंस पुख्ता सबूत जुटा लेना चाहती है, जिससे भविष्य में आरोपी को बचने का मौका न मिल सके। इसके अलावा विजिलेंस भर्ती घोटाले में शामिल कुछ सफेदपोश भी विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं। यूकेएसएसएससी भर्ती के बाद अब दरोगा भर्ती में भी जसपुर लिंक सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि दरोगा भर्ती में भी जसपुर के कुछ लोगों की संलिप्तता हो सकती है। वर्ष दो हज़ार पंद्रह में हुई दरोगा भर्ती में अकेले जसपुर से ही बीस अभ्यर्थियों के दरोगा पद पर चयनित होने से जसपुर चर्चा में है। यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में उत्तराखंड एसटीएफ ने जसपुर के एक पैरामेडिकल कॉलेज के मालिक संदीप शर्मा को गिरफ्तार किया था। अब दरोगा भर्ती में भी एक ही क्षेत्र से इतनी संख्या में सफल अभ्यर्थियों के नाम सामने आने पर जसपुर फिर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि दो हज़ार पंद्रह में हुई दरोगा भर्ती में चयनित होने वाले बीस अभ्यर्थी जसपुर से ही थे। इतनी बड़ी संख्या में एक ही क्षेत्र से दरोगाओं की भर्ती होना जांच एजेंसी का ध्यान इस ओर खींच रहा है। वर्ष दो हज़ार पंद्रह दरोगा भर्ती में चयनित दरोगा वर्तमान में अपने-अपने तैनाती स्थल में कार्यरत हैं। सबसे अधिक छियालीस एसआई ऊधमसिंह नगर जिले में तैनात हैं, नैनीताल जिले में अड़तीस को तैनाती मिली है। पिथौरागढ़ में पंद्रह, चम्पावत, बागेश्वर और अल्मोड़ा में सात-सात एसआई तैनात हैं। वर्ष दो हज़ार पंद्रह में हुई दरोगा भर्ती में कुल तीन सौ उनतालीस एसआई चयनित किये गए थे। इनमें से दो सौ दस गढ़वाल और एक सौ उनतीस कुमाऊं के शामिल थे। इसके बाद कई दरोगा इधर से उधर भी हुए। वर्तमान में वर्ष दो हज़ार पंद्रह की भर्ती के एक सौ बीस दरोगा कुमाऊं में तैनात हैं, जबकि दो सौ उन्नीस गढ़वाल मंडल में सेवा दे रहे हैं। तो दरोगा भर्ती घोटाले का भी सूत्रधार रहा हाकम गैंग! यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले के बाद दरोगा भर्ती मामले में भी हाकम सिंह को सूत्रधार माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वर्ष दो हज़ार पंद्रह की दरोगा भर्ती में भी हाकम सिंह और साथियों की भूमिका रही। विजिलेंस की ओर से दर्ज किए गए मुकदमे में जीबी पंत विवि के कार्मिकों नरेंद्र सिंह जादौन, दिनेश चंद्र जोशी के अलावा नकल सिंडिकेट में शामिल हाकम सिंह, चंदन मनराल, केंद्र पाल, सादिक मूसा, रूपेश जायसवाल, राजेश कुमार चौहान, संजीव कुमार चौहान, राजेश पाल, विपिन बिहारी, नीतीश गुप्ता के नाम हैं। इनमें से हाकम सिंह और सादिक मूसा सबसे चर्चित नाम हैं, जिन्हें यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले का सूत्रधार माना जाता है। बताया जा रहा है कि दरोगा भर्ती में भी इन दोनों की भूमिका रही। इसके अलावा यूकेएसएसएससी परीक्षा में आरोपी बनाए गए जीबी पंत विवि के रिटायर कार्मिक दिनेश चंद्र जोशी की भी दरोगा भर्ती परीक्षा में भूमिका बताई जा रही है। साथ ही केंद्र पाल, चंदन मनराल और विपिन बिहारी का नाम दोनों भर्तियों के घोटाले में सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि यूकेएसएसएससी भर्ती की तरह ही दरोगा भर्ती के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। इसमें छह आरोपी जेल में बताए जा रहे हैं।
|
विश्व चैम्पियन ब्राज़ील ने कन्फ़ेडरेशंस कप फ़ुटबॉल में शानदार शुरुआत की है. जर्मनी में हो रही इस प्रतियोगिता में ब्राज़ील ने ग्रुप बी के एक मैच में यूरोपीय चैम्पियन ग्रीस को 3-0 से हराया.
एक अन्य मैच में मैक्सिको ने एशियाई चैम्पियन जापान को 2-1 से हरा दिया. ब्राज़ील की जीत में प्रमुख भूमिका निभाई एड्रियानो, रॉबिन्हो और जुनिन्हो.
पहले हाफ़ में ब्राज़ील को गोल करने के कई शानदार मौक़े मिले लेकिन 41वें मिनट के पहले उन्हें कोई सफलता नहीं मिल पाई.
41वें मिनट में एड्रियानो ने बाएँ पैर से एक ज़बरदस्त शॉट लगाया. ऐसा शॉट जिससे ग्रीस के गोलकीपर भी चकमा खा गए और गेंद हवा में घूमती हुई गोल में चली गई.
लिपज़िग के नए स्टेडियम में क़रीब 42 हज़ार दर्शकों की उपस्थिति में हुए इस मैच के पहले हाफ़ में ब्राज़ील 1-0 से आगे था.
दूसरे हाफ़ में आई बारी रॉबिन्हो की. रोनाल्डो की अनुपस्थिति में स्ट्राईकर की भूमिका निभा रहे रॉबिन्हो ने प्रबंधन को निराश नहीं किया.
46वें मिनट में गिलबर्टो के पास पर रॉबिन्हो के गोल से ब्राज़ील ने ग्रीस पर 2-0 की बढ़त हासिल कर ली.
81 मिनट में काका की जगह मैदान पर उतरे जुनिन्हो ने 20 मीटर दूर से लिए फ़्री किक से गोल करके अपनी टीम को 3-0 से जीत दिला दी.
मैच के दौरान अपने शानदार प्रदर्शन और एक बेहतरीन गोल से दिल जीतने वाले रॉबिन्हो को मैन ऑफ़ द मैच चुना गया.
21 वर्षीय रॉबिन्हो के लिए टीम के कोच कार्लोस अल्बर्टो परेरा के पास भी प्रशंसा के शब्द थे. उन्होंने कहा कि रॉबिन्हो टीम के लिए बहुमूल्य हैं.
एक अन्य मैच में मैक्सिको ने पिछड़ने के बावजूद जापान को 2-1 से हरा दिया. अब ग्रुप बी में मैक्सिको और ब्राज़ील 3-3 अंक के साथ शीर्ष पर हैं. ब्राज़ील का अगला मैच रविवार को मैक्सिको से होगा जबकि जापान ग्रीस से भिड़ेगा.
ग्रुप ए में मेजबान जर्मनी और अर्जेंटीना भी 3-3 अंक के साथ शीर्ष पर हैं. ग्रुप ए की बाक़ी टीमें हैं- ऑस्ट्रेलिया और ट्यूनीशिया.
कन्फ़ेडरेशंस कप में छह कन्फ़ेडरेशन की चैम्पियन टीमें शामिल होती हैं जबकि मेजबान देश और विश्व कप चैम्पियन को प्रतियोगिता में सीधे प्रवेश मिलता है.
इस प्रतियोगिता में अफ़्रीकी ज़ोन से ट्यूनीशिया, एशियाई ज़ोन से जापान, उत्तरी, केंद्रीय और कैरेबियाई ज़ोन से मैक्सिको, यूरोपीय ज़ोन से ग्रीस, दक्षिण अमरीका ज़ोन से अर्जेंटीना और ओसियाना ज़ोन से ऑस्ट्रेलिया की टीमें भाग ले रही हैं.
जर्मनी को मेजबान देश होने के नाते और ब्राज़ील को विश्व कप चैम्पियन होने के नाते सीधे प्रवेश मिला है. हालाँकि ब्राज़ील की टीम कोपा अमरीका कप चैम्पियन भी है इस कारण उप विजेता अर्जेंटीना को दक्षिण अमरीकी ज़ोन से प्रवेश मिला.
|
विश्व चैम्पियन ब्राज़ील ने कन्फ़ेडरेशंस कप फ़ुटबॉल में शानदार शुरुआत की है. जर्मनी में हो रही इस प्रतियोगिता में ब्राज़ील ने ग्रुप बी के एक मैच में यूरोपीय चैम्पियन ग्रीस को तीन-शून्य से हराया. एक अन्य मैच में मैक्सिको ने एशियाई चैम्पियन जापान को दो-एक से हरा दिया. ब्राज़ील की जीत में प्रमुख भूमिका निभाई एड्रियानो, रॉबिन्हो और जुनिन्हो. पहले हाफ़ में ब्राज़ील को गोल करने के कई शानदार मौक़े मिले लेकिन इकतालीसवें मिनट के पहले उन्हें कोई सफलता नहीं मिल पाई. इकतालीसवें मिनट में एड्रियानो ने बाएँ पैर से एक ज़बरदस्त शॉट लगाया. ऐसा शॉट जिससे ग्रीस के गोलकीपर भी चकमा खा गए और गेंद हवा में घूमती हुई गोल में चली गई. लिपज़िग के नए स्टेडियम में क़रीब बयालीस हज़ार दर्शकों की उपस्थिति में हुए इस मैच के पहले हाफ़ में ब्राज़ील एक-शून्य से आगे था. दूसरे हाफ़ में आई बारी रॉबिन्हो की. रोनाल्डो की अनुपस्थिति में स्ट्राईकर की भूमिका निभा रहे रॉबिन्हो ने प्रबंधन को निराश नहीं किया. छियालीसवें मिनट में गिलबर्टो के पास पर रॉबिन्हो के गोल से ब्राज़ील ने ग्रीस पर दो-शून्य की बढ़त हासिल कर ली. इक्यासी मिनट में काका की जगह मैदान पर उतरे जुनिन्हो ने बीस मीटर दूर से लिए फ़्री किक से गोल करके अपनी टीम को तीन-शून्य से जीत दिला दी. मैच के दौरान अपने शानदार प्रदर्शन और एक बेहतरीन गोल से दिल जीतने वाले रॉबिन्हो को मैन ऑफ़ द मैच चुना गया. इक्कीस वर्षीय रॉबिन्हो के लिए टीम के कोच कार्लोस अल्बर्टो परेरा के पास भी प्रशंसा के शब्द थे. उन्होंने कहा कि रॉबिन्हो टीम के लिए बहुमूल्य हैं. एक अन्य मैच में मैक्सिको ने पिछड़ने के बावजूद जापान को दो-एक से हरा दिया. अब ग्रुप बी में मैक्सिको और ब्राज़ील तीन-तीन अंक के साथ शीर्ष पर हैं. ब्राज़ील का अगला मैच रविवार को मैक्सिको से होगा जबकि जापान ग्रीस से भिड़ेगा. ग्रुप ए में मेजबान जर्मनी और अर्जेंटीना भी तीन-तीन अंक के साथ शीर्ष पर हैं. ग्रुप ए की बाक़ी टीमें हैं- ऑस्ट्रेलिया और ट्यूनीशिया. कन्फ़ेडरेशंस कप में छह कन्फ़ेडरेशन की चैम्पियन टीमें शामिल होती हैं जबकि मेजबान देश और विश्व कप चैम्पियन को प्रतियोगिता में सीधे प्रवेश मिलता है. इस प्रतियोगिता में अफ़्रीकी ज़ोन से ट्यूनीशिया, एशियाई ज़ोन से जापान, उत्तरी, केंद्रीय और कैरेबियाई ज़ोन से मैक्सिको, यूरोपीय ज़ोन से ग्रीस, दक्षिण अमरीका ज़ोन से अर्जेंटीना और ओसियाना ज़ोन से ऑस्ट्रेलिया की टीमें भाग ले रही हैं. जर्मनी को मेजबान देश होने के नाते और ब्राज़ील को विश्व कप चैम्पियन होने के नाते सीधे प्रवेश मिला है. हालाँकि ब्राज़ील की टीम कोपा अमरीका कप चैम्पियन भी है इस कारण उप विजेता अर्जेंटीना को दक्षिण अमरीकी ज़ोन से प्रवेश मिला.
|
चाचार्य जीवन
पालने आदि के नियम रखने का अनुरोध किया। जैन और जैनेवर जनता ने आपके उपदेश को आदेश को तरह पालन किया।
पूज्यश्री ने सत्याग्रह के अवसर पर जनता को यह जो उपदेश दिया है, इसे पढ़-सुनकर साधारण बुद्धि वाला कह सकता है कि इन बातों से सत्याग्रह का क्या संबंध है ? मगर सूक्ष्म बुद्धि से विचार किया जाय तो इनका मारी महत्व मालूम होगा। गांधीजी ने राजनीतिक क्षेत्र में सर्व प्रथम अहिंसा का प्रयोग किया, मगर पूज्यश्री के तो समग्र जीवन की साधना घहिंसा ही थी । उन्होंने अहिंसा की बारीकियों को, अहिंसा के तेज को, घहिंसा की श्रमोघता को न केवल समझा ही था, वरन् अपने प्रत्येक व्यवहार में उसका अनुसरण किया था। यही कारण है कि ये हिंसा रमक उपायों द्वारा ही सत्याग्रह में योग देने की प्रेरणा कर सकते थे। उन्होंने सप-त्याग का जो उपदेश दिया है, इससे सत्याग्रह के प्रति सहयोग की भावना और सत्याग्रहियों के साथ सहानु भूति की भावना उत्पन्न होती है। और मजा की सहानुभूति ही सत्याग्रही का सर्वोत्तम बल है। इस प्रकार प्रजा के मानस में सत्याग्रह और सत्याग्रहियों के प्रति महानुभूति उत्पन्न करके पूज्यश्री ने सत्याप्रद्दियां को बलवान् और सत्याग्रह को प्रभावशाली बनाने का महत्त्वपूर्ण कौशलपूर्ण, और व्यवहाय उपाय खोज निकाला है। पूज्यश्री ने यह उपदेश देकर साधारण राज नीतिज्ञ की बुद्धि से भी परे की राजनीतिपटुवा प्रकट की है। यह उनकी प्रतिभाशालिसा का प्रमाण है। सत्याग्रह के विषय में पूज्यश्री की धारणा मनन करने योग्य है। आपके यह शब्द किसने प्रभावशाली है
'सत्याग्रह के चल की तुलना कोई बल नहीं कर सकता। इस बल के सामने, मनुष्यशक्ति सो क्या, दवशक्ति भी हार मान जाती है। कामदेव श्रावक पर देवता में अपना सारी शक्ति का प्रयोग किया लकिन कामदेव ने अपनी रक्षा के लिए किसी अन्य शक्ति का श्राश्रय न लेकर केवल सस्योपार्जित आरमयक्ष से ही उस देवता की सारी शक्ति को परास्त कर दिया ।
प्रहलाद के जीवनका इतिहास भी सत्याग्रह का महत्वपूर्ण दृष्टान्त है। प्रसाद ने अपने पिता की धनुचित माज्ञा नहीं मानी। इस कारण उस पर कितने ही अत्याचार किये गए, लेकिन अन्य में सत्याग्रह के सामने अभ्याचारी पिता को ही परास्त होना पड़ा ।
भगवान् महावीर ने सत्याग्रह का प्रयोग पहले अपन ऊपर कर लिया था। इससे ये घरद कौशिक ऐसे विषधर सर्प के स्थान पर, लोगों के मना करने पर भी निर्भयतापूर्वक चल गए ।'
जिस प्रकार धम सिद्धान्त के लिए मनुष्य को असहयोग करना आवश्यक उसी प्रकार लौकिक नीतिमय व्यवहारों में राज्यशासन की ओर से धन्याय मिलता हो तो ऐसी दशा में राज्य मक्ति युक्त सयिमय असहकार असहयोग करमा प्रजा का मुख्य धर्म है। यह प्रजा नपुंसक है जा चुपचाप अपाय को सहन कर लेती है और उसक विरुद्ध चू तक नहीं करती। ऐसी मजा अपना ही नाश नहीं करती परन्तु उस राजा के नाश का भी कारण बनती है जिसकी यह मना ई जिस प्रजा में अन्याय के प्रतीकार का सामर्थ्य नहीं है उसे कम-से-कम इतना सो प्रकट कर ही देना चाहिए कि अमुक कानून या कार्य हमें दिवकर नहीं है और हम उसे नापसंद करते है ।"
अन्याय के प्रति असहयोग न करने से यदा भारी अनर्थ हो जाता है। इस कपन का पुष्टि के लिए महाभारत के युद्ध पर हो हन्टि डालिए। धगर भीष्म और द्रोण आदि महारथियों न
|
चाचार्य जीवन पालने आदि के नियम रखने का अनुरोध किया। जैन और जैनेवर जनता ने आपके उपदेश को आदेश को तरह पालन किया। पूज्यश्री ने सत्याग्रह के अवसर पर जनता को यह जो उपदेश दिया है, इसे पढ़-सुनकर साधारण बुद्धि वाला कह सकता है कि इन बातों से सत्याग्रह का क्या संबंध है ? मगर सूक्ष्म बुद्धि से विचार किया जाय तो इनका मारी महत्व मालूम होगा। गांधीजी ने राजनीतिक क्षेत्र में सर्व प्रथम अहिंसा का प्रयोग किया, मगर पूज्यश्री के तो समग्र जीवन की साधना घहिंसा ही थी । उन्होंने अहिंसा की बारीकियों को, अहिंसा के तेज को, घहिंसा की श्रमोघता को न केवल समझा ही था, वरन् अपने प्रत्येक व्यवहार में उसका अनुसरण किया था। यही कारण है कि ये हिंसा रमक उपायों द्वारा ही सत्याग्रह में योग देने की प्रेरणा कर सकते थे। उन्होंने सप-त्याग का जो उपदेश दिया है, इससे सत्याग्रह के प्रति सहयोग की भावना और सत्याग्रहियों के साथ सहानु भूति की भावना उत्पन्न होती है। और मजा की सहानुभूति ही सत्याग्रही का सर्वोत्तम बल है। इस प्रकार प्रजा के मानस में सत्याग्रह और सत्याग्रहियों के प्रति महानुभूति उत्पन्न करके पूज्यश्री ने सत्याप्रद्दियां को बलवान् और सत्याग्रह को प्रभावशाली बनाने का महत्त्वपूर्ण कौशलपूर्ण, और व्यवहाय उपाय खोज निकाला है। पूज्यश्री ने यह उपदेश देकर साधारण राज नीतिज्ञ की बुद्धि से भी परे की राजनीतिपटुवा प्रकट की है। यह उनकी प्रतिभाशालिसा का प्रमाण है। सत्याग्रह के विषय में पूज्यश्री की धारणा मनन करने योग्य है। आपके यह शब्द किसने प्रभावशाली है 'सत्याग्रह के चल की तुलना कोई बल नहीं कर सकता। इस बल के सामने, मनुष्यशक्ति सो क्या, दवशक्ति भी हार मान जाती है। कामदेव श्रावक पर देवता में अपना सारी शक्ति का प्रयोग किया लकिन कामदेव ने अपनी रक्षा के लिए किसी अन्य शक्ति का श्राश्रय न लेकर केवल सस्योपार्जित आरमयक्ष से ही उस देवता की सारी शक्ति को परास्त कर दिया । प्रहलाद के जीवनका इतिहास भी सत्याग्रह का महत्वपूर्ण दृष्टान्त है। प्रसाद ने अपने पिता की धनुचित माज्ञा नहीं मानी। इस कारण उस पर कितने ही अत्याचार किये गए, लेकिन अन्य में सत्याग्रह के सामने अभ्याचारी पिता को ही परास्त होना पड़ा । भगवान् महावीर ने सत्याग्रह का प्रयोग पहले अपन ऊपर कर लिया था। इससे ये घरद कौशिक ऐसे विषधर सर्प के स्थान पर, लोगों के मना करने पर भी निर्भयतापूर्वक चल गए ।' जिस प्रकार धम सिद्धान्त के लिए मनुष्य को असहयोग करना आवश्यक उसी प्रकार लौकिक नीतिमय व्यवहारों में राज्यशासन की ओर से धन्याय मिलता हो तो ऐसी दशा में राज्य मक्ति युक्त सयिमय असहकार असहयोग करमा प्रजा का मुख्य धर्म है। यह प्रजा नपुंसक है जा चुपचाप अपाय को सहन कर लेती है और उसक विरुद्ध चू तक नहीं करती। ऐसी मजा अपना ही नाश नहीं करती परन्तु उस राजा के नाश का भी कारण बनती है जिसकी यह मना ई जिस प्रजा में अन्याय के प्रतीकार का सामर्थ्य नहीं है उसे कम-से-कम इतना सो प्रकट कर ही देना चाहिए कि अमुक कानून या कार्य हमें दिवकर नहीं है और हम उसे नापसंद करते है ।" अन्याय के प्रति असहयोग न करने से यदा भारी अनर्थ हो जाता है। इस कपन का पुष्टि के लिए महाभारत के युद्ध पर हो हन्टि डालिए। धगर भीष्म और द्रोण आदि महारथियों न
|
"स्कन्दक ! मेरे धर्मगुरु धर्माचार्य श्रमण भगवान् महावीर स्वामी सर्वज्ञ-सर्वदर्शी हैं । उनसे किसी भी प्रकार का रहस्य छुपा नहीं है। उन्हीं ने मुझ से अभी कहा ।"
स्कन्दक गौतम स्वामी के साथ भगवान् के निकट आये । तीर्थंकर नामकर्म के उदय से भगवान् का शरीर शोभायमान् और प्रभावशाली था ही और उस समय भगवान् के तपस्या भी नहीं चल रही थी । इसलिये विशेष प्रभावशाली था । स्कन्दक प्रथम-दर्शन में ही आकर्षित हो गये । उनके हृदय में प्रीति उत्पन्न हुई । वे आनन्दित हो उठे और अपने आप झुक गए। उन्होंने भगवान् की वन्दना की । भगवान् ने उनके आगमन का उद्देश्य प्रकट किया और पिंगल निग्रंथ के प्रश्नों के उत्तर बताने लगे;
स्कन्दक ! लोक चार प्रकार का है -- १ द्रव्य २ क्षेत्र ३ काल और ४ भाव लोक । १ द्रव्यदृष्टि से लोक एक है और अंत सहित है।
२ क्षेत्र से असंख्येय योजन प्रमाण है और अंतयुक्त है ।
३ कालापेक्षा भूतकाल में था, वर्तमान में है और भविष्य में भी रहेगा। ऐसा कोई भी काल नहीं कि जब लोक का अभाव हो । लोक सदाकाल शाश्वत है, ध्रुव है, नित्य है, अक्षय है, अव्यय है यावत् अंत-रहित है ।
४. भाव से लोक अनन्त वर्ण- पर्यव, गन्ध-रस-स्पर्श-संस्थानादि पर्याय से युक्त है और अनन्त है । अर्थात् द्रव्य और क्षेत्र की अपेक्षा सान्त और काल तथा भाव दृष्टि से अनन्त है ।
..इसी प्रकार एक जीव, द्रव्य और क्षेत्र की अपेक्षा अन्त वाला और काल और भाव से अन्त रहित है । सिद्धि और सिद्ध तथा वाल-मरण, पंडितमरण सम्वन्धी भगवान् के उत्तर सुन कर स्कन्दक प्रतिबोध पाये । भगवान् का धर्मोपदेश सुना और अपने परिव्राजक के उपकरणों का त्याग कर निग्रंथ -श्रमण हो गये । वे सर्वसाधक हो, साधना करने लगे । उन्होंने एकादशगत पढ़ा, द्वादश भिक्षुप्रतिमा का आराधन किया, गुणरत्न सम्वत्सर तप किया और अनेक प्रकार की तपस्या की । तपस्या से उनका शरीर रुक्ष, शुष्क, दुर्बल, जर्जर और अशक्त हो गया । एक रात्रि जागरणा में उन्होंने सोचा- "अब मुझ में शारीरिक शक्ति नहीं रही । मैं धर्माचार्य भगवान् महावीर की विद्यमानता में ही अंतिम साधना पूरी कर लूं । " प्रातःकाल भगवान् की अनुमति प्राप्त कर और साधुसाध्वियों से क्षमायाचना कर, कडाई स्थविर के साथ विपुलाचल पर्वत पर चढ़े और पादपोपगमन संथारा किया । एक मास का संथारा पाला और आयु पूर्ण कर अच्युत (वारहवें ) स्वर्ग में देव हुए। वहीं
|
"स्कन्दक ! मेरे धर्मगुरु धर्माचार्य श्रमण भगवान् महावीर स्वामी सर्वज्ञ-सर्वदर्शी हैं । उनसे किसी भी प्रकार का रहस्य छुपा नहीं है। उन्हीं ने मुझ से अभी कहा ।" स्कन्दक गौतम स्वामी के साथ भगवान् के निकट आये । तीर्थंकर नामकर्म के उदय से भगवान् का शरीर शोभायमान् और प्रभावशाली था ही और उस समय भगवान् के तपस्या भी नहीं चल रही थी । इसलिये विशेष प्रभावशाली था । स्कन्दक प्रथम-दर्शन में ही आकर्षित हो गये । उनके हृदय में प्रीति उत्पन्न हुई । वे आनन्दित हो उठे और अपने आप झुक गए। उन्होंने भगवान् की वन्दना की । भगवान् ने उनके आगमन का उद्देश्य प्रकट किया और पिंगल निग्रंथ के प्रश्नों के उत्तर बताने लगे; स्कन्दक ! लोक चार प्रकार का है -- एक द्रव्य दो क्षेत्र तीन काल और चार भाव लोक । एक द्रव्यदृष्टि से लोक एक है और अंत सहित है। दो क्षेत्र से असंख्येय योजन प्रमाण है और अंतयुक्त है । तीन कालापेक्षा भूतकाल में था, वर्तमान में है और भविष्य में भी रहेगा। ऐसा कोई भी काल नहीं कि जब लोक का अभाव हो । लोक सदाकाल शाश्वत है, ध्रुव है, नित्य है, अक्षय है, अव्यय है यावत् अंत-रहित है । चार. भाव से लोक अनन्त वर्ण- पर्यव, गन्ध-रस-स्पर्श-संस्थानादि पर्याय से युक्त है और अनन्त है । अर्थात् द्रव्य और क्षेत्र की अपेक्षा सान्त और काल तथा भाव दृष्टि से अनन्त है । ..इसी प्रकार एक जीव, द्रव्य और क्षेत्र की अपेक्षा अन्त वाला और काल और भाव से अन्त रहित है । सिद्धि और सिद्ध तथा वाल-मरण, पंडितमरण सम्वन्धी भगवान् के उत्तर सुन कर स्कन्दक प्रतिबोध पाये । भगवान् का धर्मोपदेश सुना और अपने परिव्राजक के उपकरणों का त्याग कर निग्रंथ -श्रमण हो गये । वे सर्वसाधक हो, साधना करने लगे । उन्होंने एकादशगत पढ़ा, द्वादश भिक्षुप्रतिमा का आराधन किया, गुणरत्न सम्वत्सर तप किया और अनेक प्रकार की तपस्या की । तपस्या से उनका शरीर रुक्ष, शुष्क, दुर्बल, जर्जर और अशक्त हो गया । एक रात्रि जागरणा में उन्होंने सोचा- "अब मुझ में शारीरिक शक्ति नहीं रही । मैं धर्माचार्य भगवान् महावीर की विद्यमानता में ही अंतिम साधना पूरी कर लूं । " प्रातःकाल भगवान् की अनुमति प्राप्त कर और साधुसाध्वियों से क्षमायाचना कर, कडाई स्थविर के साथ विपुलाचल पर्वत पर चढ़े और पादपोपगमन संथारा किया । एक मास का संथारा पाला और आयु पूर्ण कर अच्युत स्वर्ग में देव हुए। वहीं
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। इसके तने, पत्तियों, फूलों और जड़ों का उपयोग शरीर के कई विकारों को दूर करने में किया जाता है। गिलोय को संस्कृत में अमृता कहा जाता है।
गिलोय की पत्तियां पान के आकार की होती है और चिकित्कीय गुणों से भरपूर होती हैं। यह आमतौर पर भारत के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है और इसके कई औषधीय लाभ हैं। बाजार में गिलोय पाउडर, पेस्ट, जूस और कैप्सूल के रुप में उपलब्ध है। वैसे तो कई बीमारियों के इलाज के लिए गिलोय का उपयोग किया जाता है लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की वजन घटाने में भी गिलोय बहुत फायदेमंद है।
गिलोय के जूस में सबसे महत्वपूर्ण औषधीय गुण पाया जाता है जो वजन घटाने में सहायक होता है। वास्तव में गिलोय का जूस शरीर की इम्यूनिटी और मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है जिसके कारण वजन बहुत तेजी से घटता है। इसके अलावा गिलोय का रस पाचन तंत्र को भी ठीक रखता है जिसके कारण शरीर पर अतिरिक्त फैट नहीं जमा होता है और वजन घटता है।
यह समझना सबसे महत्वपूर्ण है कि गिलोय को एलोवेरा या शिलाजीत के साथ मिलाकर लिया जाता है। गिलोय और एलोवेरा या शिलाजीत का मिश्रण पाचन को बेहतर रखता है और वजन घटाने में मदद करता है। जल्दी वजन घटाने के लिए आपको आधा ग्राम गिलोय के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर नियमित रुप से सेवन करना चाहिए। इसे रोजाना सुबह खाली पेट भी पीया जा सकता है।
|
गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। इसके तने, पत्तियों, फूलों और जड़ों का उपयोग शरीर के कई विकारों को दूर करने में किया जाता है। गिलोय को संस्कृत में अमृता कहा जाता है। गिलोय की पत्तियां पान के आकार की होती है और चिकित्कीय गुणों से भरपूर होती हैं। यह आमतौर पर भारत के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है और इसके कई औषधीय लाभ हैं। बाजार में गिलोय पाउडर, पेस्ट, जूस और कैप्सूल के रुप में उपलब्ध है। वैसे तो कई बीमारियों के इलाज के लिए गिलोय का उपयोग किया जाता है लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की वजन घटाने में भी गिलोय बहुत फायदेमंद है। गिलोय के जूस में सबसे महत्वपूर्ण औषधीय गुण पाया जाता है जो वजन घटाने में सहायक होता है। वास्तव में गिलोय का जूस शरीर की इम्यूनिटी और मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है जिसके कारण वजन बहुत तेजी से घटता है। इसके अलावा गिलोय का रस पाचन तंत्र को भी ठीक रखता है जिसके कारण शरीर पर अतिरिक्त फैट नहीं जमा होता है और वजन घटता है। यह समझना सबसे महत्वपूर्ण है कि गिलोय को एलोवेरा या शिलाजीत के साथ मिलाकर लिया जाता है। गिलोय और एलोवेरा या शिलाजीत का मिश्रण पाचन को बेहतर रखता है और वजन घटाने में मदद करता है। जल्दी वजन घटाने के लिए आपको आधा ग्राम गिलोय के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर नियमित रुप से सेवन करना चाहिए। इसे रोजाना सुबह खाली पेट भी पीया जा सकता है।
|
अंतरिक्ष की दुनिया में एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) नई कामयाबियां गढ़ रही है। हाल ही में इसने दुनिया के पहले प्राइवेट स्पेस मिशन को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक पहुंचाया। अब एक बार फिर यह रॉकेट कंपनी ISS के लिए एक लंबे वक्त के अंतरिक्ष यात्री क्रू को लॉन्च करने वाली है। यह लॉन्च अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के लिए किया जाना है। इस मिशन में डॉक्टर से स्पेसवॉकर बने शख्स और एक जियोलॉजिस्ट शामिल हैं।
सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से आज दोपहर करीब डेढ़ बजे तीन अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री उड़ान भरेंगे। उनके साथ यूरोपी अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का उनका एक साथी भी होगा। ये सभी अगले 6 महीने के लिए मिशन पर जाएंगे और 17 घंटे का सफर करके इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पहुंचेंगे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन्हें स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से ले जाया जाएगा।
क्रू 4 नाम का यह मिशन नासा का ऐसा चौथा मिशन है, जिसमें वह स्पेसएक्स के रॉकेट का इस्तेमाल करके अंतरिक्ष यात्रियों को ISS पर भेज रही है। स्पेसएक्स ने साल 2020 में पहली बार अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के यात्रियों को उड़ाना शुरू किया था। अबतक इसने 6 मानव उड़ानें अंतरिक्ष के लिए पूरी की हैं।
हालिया मिशन को लेकर नासा के अधिकारियों ने कहा है कि लिफ्ट ऑफ का जो समय रखा गया है, उस वक्त मौसम बेहतर होने की 90 फीसदी संभावना है। नासा की कैथरीन लाइडर्स ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हम अपने चालक दल को सुरक्षित रूप से कक्षा में ले जाएंगे।
क्रू4 मिशन के कमांडर 49 साल के डॉ केजेल लिंडग्रेन हैं। वह इमरजेंसी मेडिसन फिजिशियन भी हैं। ISS पर यह उनकी दूसरी यात्रा है। इससे पहले साल 2015 में उन्होंने 141 दिन वहां बिताए थे। उस अभियान के दौरान उन्होंने दो स्पेसवॉक किए थे। करीब 100 से ज्यादा साइंस प्रोजेक्ट्स में भी हिस्सा लिया था।
मिशन एक्सपर्ट के रूप में अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान पर जा रहीं जेसिका वाटकिंस एक भूविज्ञानी हैं। 33 साल की जेसिका ने मंगल और पृथ्वी पर होने वाले भूस्खलन की वजहों का अध्ययन करते हुए डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है। इस मिशन के पायलट बॉब हाइन्स हैं। 47 साल के बॉब अमेरिकी एयरफोर्स में पायलट रहे चुके हैं। उनके पास 3500 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव है।
|
अंतरिक्ष की दुनिया में एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स नई कामयाबियां गढ़ रही है। हाल ही में इसने दुनिया के पहले प्राइवेट स्पेस मिशन को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुंचाया। अब एक बार फिर यह रॉकेट कंपनी ISS के लिए एक लंबे वक्त के अंतरिक्ष यात्री क्रू को लॉन्च करने वाली है। यह लॉन्च अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लिए किया जाना है। इस मिशन में डॉक्टर से स्पेसवॉकर बने शख्स और एक जियोलॉजिस्ट शामिल हैं। सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से आज दोपहर करीब डेढ़ बजे तीन अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री उड़ान भरेंगे। उनके साथ यूरोपी अंतरिक्ष एजेंसी का उनका एक साथी भी होगा। ये सभी अगले छः महीने के लिए मिशन पर जाएंगे और सत्रह घंटाटे का सफर करके इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पहुंचेंगे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन्हें स्पेसएक्स के फाल्कन नौ रॉकेट से ले जाया जाएगा। क्रू चार नाम का यह मिशन नासा का ऐसा चौथा मिशन है, जिसमें वह स्पेसएक्स के रॉकेट का इस्तेमाल करके अंतरिक्ष यात्रियों को ISS पर भेज रही है। स्पेसएक्स ने साल दो हज़ार बीस में पहली बार अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के यात्रियों को उड़ाना शुरू किया था। अबतक इसने छः मानव उड़ानें अंतरिक्ष के लिए पूरी की हैं। हालिया मिशन को लेकर नासा के अधिकारियों ने कहा है कि लिफ्ट ऑफ का जो समय रखा गया है, उस वक्त मौसम बेहतर होने की नब्बे फीसदी संभावना है। नासा की कैथरीन लाइडर्स ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हम अपने चालक दल को सुरक्षित रूप से कक्षा में ले जाएंगे। क्रूचार मिशन के कमांडर उनचास साल के डॉ केजेल लिंडग्रेन हैं। वह इमरजेंसी मेडिसन फिजिशियन भी हैं। ISS पर यह उनकी दूसरी यात्रा है। इससे पहले साल दो हज़ार पंद्रह में उन्होंने एक सौ इकतालीस दिन वहां बिताए थे। उस अभियान के दौरान उन्होंने दो स्पेसवॉक किए थे। करीब एक सौ से ज्यादा साइंस प्रोजेक्ट्स में भी हिस्सा लिया था। मिशन एक्सपर्ट के रूप में अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान पर जा रहीं जेसिका वाटकिंस एक भूविज्ञानी हैं। तैंतीस साल की जेसिका ने मंगल और पृथ्वी पर होने वाले भूस्खलन की वजहों का अध्ययन करते हुए डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है। इस मिशन के पायलट बॉब हाइन्स हैं। सैंतालीस साल के बॉब अमेरिकी एयरफोर्स में पायलट रहे चुके हैं। उनके पास तीन हज़ार पाँच सौ घंटाटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव है।
|
सुहाना खान, खुशी कपूर और अगस्त्य नंदा फिल्मों में डेब्यू करने जा रहे हैं। इस वक्त उनकी फिल्म 'द आर्चीज' की शूटिंग चल रही है।
सुहाना खान, खुशी कपूर और अगस्त्य नंदा फिल्मों में डेब्यू करने जा रहे हैं। इस वक्त उनकी फिल्म 'द आर्चीज' की शूटिंग चल रही है। खासकर सुहाना को लेकर फैन्स के बीच काफी उत्साह है। इन स्टारकिड के अलावा काफी समय से इब्राहिम अली खान के डेब्यू के कयास लगाए जा रहे हैं।
सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान पहले ही धमाल मचा रही हैं। अब इब्राहिम की पहली फिल्म को लेकर जानकारी सामने आई है। इब्राहिम एक्टिंग के क्षेत्र में कदम रखने से पहले असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं।
अब वह एक्टिंग में जलवा बिखेरेंगे। इब्राहिम मलयालम फिल्म 'हृदयम' के हिंदी रीमेक में काम करेंगे। इस फिल्म में मोहनलाल के बेटे प्रणव मोहनलाल थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इब्राहिम का फिल्म में लीड रोल है।
'हृदयम' के हिंदी रीमेक को करण जौहर और स्टार स्टूडियोज बनाएगी। बॉलीवुड हंगामा को एक करीबी सूत्र ने बताया, 'इब्राहिम के लॉन्च के लिए यह बेस्ट प्रोजेक्ट है। पिछले कुछ समय से करण, इब्राहिम के लॉन्च के लिए एक फिल्म की कहानी तलाश रहे थे। वह इस किरदार के लिए बिल्कुल सही हैं।
|
सुहाना खान, खुशी कपूर और अगस्त्य नंदा फिल्मों में डेब्यू करने जा रहे हैं। इस वक्त उनकी फिल्म 'द आर्चीज' की शूटिंग चल रही है। सुहाना खान, खुशी कपूर और अगस्त्य नंदा फिल्मों में डेब्यू करने जा रहे हैं। इस वक्त उनकी फिल्म 'द आर्चीज' की शूटिंग चल रही है। खासकर सुहाना को लेकर फैन्स के बीच काफी उत्साह है। इन स्टारकिड के अलावा काफी समय से इब्राहिम अली खान के डेब्यू के कयास लगाए जा रहे हैं। सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान पहले ही धमाल मचा रही हैं। अब इब्राहिम की पहली फिल्म को लेकर जानकारी सामने आई है। इब्राहिम एक्टिंग के क्षेत्र में कदम रखने से पहले असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अब वह एक्टिंग में जलवा बिखेरेंगे। इब्राहिम मलयालम फिल्म 'हृदयम' के हिंदी रीमेक में काम करेंगे। इस फिल्म में मोहनलाल के बेटे प्रणव मोहनलाल थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इब्राहिम का फिल्म में लीड रोल है। 'हृदयम' के हिंदी रीमेक को करण जौहर और स्टार स्टूडियोज बनाएगी। बॉलीवुड हंगामा को एक करीबी सूत्र ने बताया, 'इब्राहिम के लॉन्च के लिए यह बेस्ट प्रोजेक्ट है। पिछले कुछ समय से करण, इब्राहिम के लॉन्च के लिए एक फिल्म की कहानी तलाश रहे थे। वह इस किरदार के लिए बिल्कुल सही हैं।
|
नवांशहर : थाना औड़ की पुलिस ने झाड़ियों में हेरोइन का नशा ले रहे 4 युवकों को 5 ग्राम हेरोइन तथा नशा लेने के लिए प्रयुक्त उपकरणों सहित गिरफ्तार किया है। मामले संबंधी जानकारी देते हुए ए. एस. आई. मनोहर लाल ने बताया कि एस. एस. पी. भागीरथ सिंह मीना के दिशा-निर्देशों पर नशा तस्करों के खिलाफ चलाई जा रही विशेष मुहिम के तहत उनकी पुलिस पार्टी दौराने गश्त संदिग्ध लोगों तथा वाहनों की तलाश में गांव औड़ से गुडपुड की ओर जा रही थी कि मार्ग में पुलिस को झाड़ियों के बीच में कुछ हरकत होती दिखाई दी। पुलिस ने कर्मचारियों की मदद से घेराबंदी करके जब उक्त स्थान की जांच की तो वहां 22 से 25 वर्ष के 3 तथा 38 वर्ष की आयु का एक युवक स्मोकिंग करते हुए दिखाई दिए।
ए. एस. आई. ने बताया कि उक्त युवकों को काबू करके उनके कब्जे से एक लाइटर, प्लास्टिक की खाली बोतल, पाइप नुमा 10 रुपए का नोट तथा 5 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। थानेदार ने बताया कि गिरफ्तार युवकों की पहचान सुखजिन्दर सिंह उर्फ काका निवासी मल्लपुर, दीपक उर्फ दीपू निवासी गांव भूता, गगनदीप कुमार उर्फ लभू निवासी झिंगडा तथा जसकरन राम उर्फ जस्सी निवासी झिंगडा के तौर पर हुई है। थानेदार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ एन. डी. पी. एस. तहत मामला दर्ज करके आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
|
नवांशहर : थाना औड़ की पुलिस ने झाड़ियों में हेरोइन का नशा ले रहे चार युवकों को पाँच ग्राम हेरोइन तथा नशा लेने के लिए प्रयुक्त उपकरणों सहित गिरफ्तार किया है। मामले संबंधी जानकारी देते हुए ए. एस. आई. मनोहर लाल ने बताया कि एस. एस. पी. भागीरथ सिंह मीना के दिशा-निर्देशों पर नशा तस्करों के खिलाफ चलाई जा रही विशेष मुहिम के तहत उनकी पुलिस पार्टी दौराने गश्त संदिग्ध लोगों तथा वाहनों की तलाश में गांव औड़ से गुडपुड की ओर जा रही थी कि मार्ग में पुलिस को झाड़ियों के बीच में कुछ हरकत होती दिखाई दी। पुलिस ने कर्मचारियों की मदद से घेराबंदी करके जब उक्त स्थान की जांच की तो वहां बाईस से पच्चीस वर्ष के तीन तथा अड़तीस वर्ष की आयु का एक युवक स्मोकिंग करते हुए दिखाई दिए। ए. एस. आई. ने बताया कि उक्त युवकों को काबू करके उनके कब्जे से एक लाइटर, प्लास्टिक की खाली बोतल, पाइप नुमा दस रुपयापए का नोट तथा पाँच ग्राम हेरोइन बरामद हुई। थानेदार ने बताया कि गिरफ्तार युवकों की पहचान सुखजिन्दर सिंह उर्फ काका निवासी मल्लपुर, दीपक उर्फ दीपू निवासी गांव भूता, गगनदीप कुमार उर्फ लभू निवासी झिंगडा तथा जसकरन राम उर्फ जस्सी निवासी झिंगडा के तौर पर हुई है। थानेदार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ एन. डी. पी. एस. तहत मामला दर्ज करके आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
|
गग. पावरग्रिड के हाथ में इस समय कुछ बड़ी निर्माण परियोजनाएं हैं जिन्हें शीघ्र पूरा करना देश की पारेषण अवसंरचना की जरूरत की पूर्ति हेतु अपेक्षित है । इसके लिए पावरग्रिड विविध संविदाएं देती है । भविष्य में इंसुलेटरों की जरूरत में आगे और लगभग 50 लाख की वृद्धि होने की आशा है । जिनमें से अधिकांश भाग का उपयोग 765 के०वी० पारेषण लाइन में किया जाना है ।
घघ. भारतीय उत्पादकों के पास पावरग्रिड की उच्च जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक क्षमता नहीं है । इसके अलावा, इंसुलेटर खरीद निविदा संविदाओं को सौंपने के लिए पावरग्रिड द्वारा आयोजित बोली में भारतीय उत्पादकों की भागीदारी भी सीमित है ।
ड.ड. इस वर्ष जुलाई में लगभग 40 लाख इंसुलेटरों के लिए आयोजित बोली के दौरान केवल दो भारतीय उत्पादकों अर्थात आदित्य नूवो और बीएचईएल ने भाग लिया था । इन दो में से भी बीएचईएल क्षमता संबंधी अड़चन का सामना कर रही है और उसकी स्वीकारोक्ति के अनुसार वह उसे प्रदत्त ऑर्डर को पूरा करने में समर्थ नहीं रही है । बीएचईएल को दिए गए ऑर्डर के एक भाग की पूर्ति अन्य स्थानों से की गई थी। इससे आदित्य नूवो एकमात्र प्रतिस्पर्धी बोलीदाता रह जाती है और इसे पाटनरोधी शुल्क लगाए जाने के बाद सभी ऑर्डर दे दिए गए हैं ऑर्डरों का कुल मूल्य पाटनरोधी शुल्क के कारण 50 करोड़ रु. तक के अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव के साथ 120 करोड़ रु. से अधिक का है ।
चच. एक ही पक्षकार द्वारा सभी ऑर्डर लिए जाने से न केवल प्रतिस्पर्धा अभाव का पता चलता है अपितु यह अत्यंत जोखिम भरा भी है । यदि यह एकमात्र आपूर्तिकर्ता तकनीकी दोषों अथवा किसी अन्य कारण से प्रचालन बंद कर देता है तो सभी चल रही पारेषण अवसंरचना परियोजनाएं ठप पड़ जाएंगी । यह जोखिम उबरने के विकल्प के बिना आसन्नवर्ती है ।
छछ. जिन घरेलू विनिर्माताओं ने पाटनरोधी शुल्क लगाने के लिए वर्तमान याचिका दायर की है, उन्होंने आज तक किसी बोली में भाग नहीं लिया है। अतः इस याचिका पर शुल्क लगाए जाने से केवल एक या दो पक्षकारों को लाभ मिलेगा । सबसे अधिक नुकसान जनता को होगा जो अतिरिक्त टैरिफ के बोझ को सहन करेगी ।
जज. प्रारंभिक जांच परिणाम में भारतीय उत्पादकों के लिए क्षति मार्जिन के निर्धारण हेतु वोल्टेज वर्ग पर ध्यान दिए बिना यूनिट दर (प्रति मी.ट.) की गणना हेतु एक केएन से 420 केएन तक के इंसुलेटरों का समूहन तकनीकी रूप से सही कार्यप्रणाली नहीं है । प्रारंभिक जांच परिणाम में दिए गए आंकड़ों से जहां तक उच्चतर रेटिंग हेतु इंसुलेटरों का संबंध है, वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलता है । इसके अलावा, वास्तविक लागत प्रारंभिक जांच परिणाम में विचारित लागत से 1.5 गुना अधिक है । एक अधिक उपयुक्त कार्यप्रणाली उच्चतर तथा न्यूनतर वोल्टेज के इंसुलेटरों के श्रेणीकरण और पृथक निर्धारण और इसके बाद एक तुलनात्मक विश्लेषण की होगी । चूंकि उच्च यांत्रिक क्षमता और उच्च वोल्टेज स्तर के इंसुलेटरों, जिनके लिए जांच, गुणवत्ता और निष्पादन के उच्च मानकों की जरूरत होती है, और अधिक महंगे बन जाएंगे यदि यूनिट कीमत की गणना प्रति मीट्रिक टन के आधार पर की जाती है ।
झझ. पाटनरोधी शुल्क के उद्ग्रहण से पूर्व प्रदान की गई संविदाओं के मामले में डिलीवरी पाटनरोधी शुल्क लगाए जाने के बाद होगी, वहां पाटनरोधी शुल्क घरेलू उद्योग के लिए संरक्षणात्मक उपाय के रूप में कार्य नहीं करेगा, इसके बजाए यह पावरग्रिड के लिए आयात की लागत को बढ़ाएगा और बाद में इसका प्रभाव जनता पर पड़ेगा जो सवर्धित टैरिफ के कारण प्रभावित होंगे । इस बात को ध्यान में रखते हुए निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा छूट प्रमाण पत्र जारी कर पावरग्रिड को इस पाटनरोधी शुल्क से छूट प्रदान की जानी चाहिए ।
टट. घरेलू उद्योग के संरक्षण और विकास हेतु तरीके तैयार करते समय निम्नलिखित पर जोर दिया जाना चाहिए :
किसी विशेष प्रकार (वोल्टेज ) के इंसुलेटरों की मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उद्योग की क्षमता संबंधी सीमाएं पाटनरोधी शुल्क की मात्रा का निर्धारण करते समय इंसुलेटरों का पृथक श्रेणीकरण क्षति मार्जिन का उचित मूल्य
ठठ. इसके अलावा, घरेलू उद्योग को क्षमता वृद्धि करनी चाहिए और सभी संविदाएं एक ही आपूर्तिकर्ता द्वारा लिए जाने की स्थिति के बजाए और अधिक घरेलू उत्पादकों को पावरग्रिड द्वारा आयोजित बोली में भाग लेना चाहिए ।
डड. यद्यपि, इंसुलेटरों के विभिन्न प्रकारों को उत्पादों की एक व्यापक श्रेणी के अंतर्गत पाया जाता है तथापि, तकनीकी एवं वाणिज्यिक अंतरों और लागत अंतरों को ध्यान में रखते हुए तुलना की कार्य प्रणाली पर विचार किया जाना चाहिए तथा समान वस्तु की जांच के प्रयोजनार्थ उन्हें तुलनीय बनाने के लिए उचित समायोजन किये जाने चाहिए ।
ढढ. याचिकाकर्ताओं के इन दावों की पुष्टि करने के लिए किसी मजबूत साक्ष्य द्वारा समर्थन नहीं किया गया है कि उनके पास विचाराधीन वस्तु के सभी प्रकारों का उत्पादन करने और उनकी बिक्री करने की क्षमता है । इस प्रकार, घरेलू उद्योग के याचिकाकर्ता को इस दावे की सत्यता की पुष्टि करने के लिए संगत साक्ष्य का अगोपनीय रूपांतरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाना चाहिए ।
णण. घरेलू उद्योग स्पष्ट तौर पर भारतीय उपभोक्ता उद्योग की मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं है।
तत. सीमित क्षमताओं के कारण घरेलू उद्योग के सदस्य (बीएचईएल को छोड़कर) सीमा तक 765 के. वी. और उसके अधिक के वोल्टेज के उच्च के.वी. इंसुलेटरों अर्थात 420 के. एन और उससे अधिक की इलैक्ट्रो मेकेनिकल क्षमता का उत्पादन करने में असमर्थ हैं । यद्यपि, 420 के.एन.
और उससे अधिक के इंसुलेटरों का उत्पादन करने की क्षमता है । तथापि, यह देश की मांग को पूरा करने के लिए किसी दृष्टि से पर्याप्त नहीं है ।
थथ. घरेलू उद्योग के इन दावों कि ग्लास इंसुलेटर और सिरेमिक इंसुलेटर समान उत्पाद हैं, के प्रतिकूल सुनवाई के लिए उपस्थित दोनों प्रयोक्ताओं ने स्पष्ट तौर पर यह बताया कि सिरेमिक और ग्लास इंसुलेटर पूर्णतः भिन्न हैं । वस्तुतः भारत में सबसे बड़े प्रयोक्ता पीजीसीआईएल ने यह स्पष्ट किया कि वह ग्लास इंसुलेटरों की खरीद को तरजीह देगा क्योंकि उनकी प्रचालन और रख-रखाव लागत कम होती है । तथापि, घरेलू उद्योग के लाभार्थ प्रयोक्ता अपनी निविदा अपेक्षाओं में सिरेमिक इंसुलेटर को भी शामिल कर लेते हैं ।
दद. पोर्सिलेन और ग्लास इंसुलेटरों से संबद्ध लागत और प्रचालन व्यय में भारी अंतर है । उदाहरणार्थ ग्लास इंसुलेटर दोषपूर्ण सामग्री के रूप में प्रयोग किए जाने के लिए अत्यंत कम उपयुक्त होते हैं क्योंकि इंसुलेटरों में छोटी सी भी क्षति से इंसुलेटर ग्लास शैल स्वतः विखंडित हो जाती है। इसका तात्पर्य यह है कि दोषपूर्ण इंसुलेटरों को किसी स्थापना में प्रयोग किए जाने की संभावना नितांत कम है । इसके अलावा, ग्लास इंसुलेटरों में पोर्सिलेन इंसुलेटरों की तुलना में लाभ निहित होता है क्योंकि व्यवहारिक रूप से ग्लास इंसुलेटरों के लिए डिकैपिंग की कोई घटना नहीं होती है । तुलनात्मक रूप से पोर्सिलेन इंसुलेटरों में नियमित आधार पर अपेक्षित कई डिकैपिंग होती हैं । इससे न केवल रख-रखाव की लागत में भारी वृद्धि होती है अपितु विद्युत आपूर्ति अवसंरचना के कार्यचालन में भी बाधा आती है । इसके अलावा, यह प्रचालन एवं रख-रखाव लागत में अंतर के कारण सिरेमिक इंसुलेटरों की तुलना में ग्लास इंसुलेटर लगाने के लिए प्रयोक्ताओं हेतु सस्ता है
धध. एच कोर्ड के वर्गीकरण में उत्पाद क्षेत्र के पृथक्करण की जरूरत नहीं हो सकती है अपितु, उपभोक्ता अवधारणा और प्रचालन लागत में अंतर को जोड़ा जा सकता है, एच एस वर्गीकरण में अंतर इतना पर्याप्त होना चाहिए जिससे यह पता चल सके कि पाटन और क्षति हेतु सिरेमिक तथा ग्लास इंसुलेटरों की तुलना करते समय आवश्यक समायोजन किया जाना चाहिए ।
नन. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि कंपोजिट इंसुलेटरों को अलग रखा जाए । वर्तमान मामले में निर्यातकों ने प्रश्नावली दायर करते समय और माननीय निर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा निर्देश दिए जाने पर पीसीएन से संबंधित बिक्री और लागत के लिए समस्त संगत सूचना उपलब्ध कराई है । अतः निर्यातकों के पास किसी सूचना उपलब्ध न होने से मना करने अथवा उसे उपलब्ध न कराने का कोई बहाना नहीं है और न ही उन्होंने सूचना रोककर जांच में बाधा डाली है ।
पप. याचिकाकर्ताओं का तर्क कच्ची सामग्री, उत्पादन लागत, बिक्री कीमत आदि जैसे विभिन्न कारकों पर आधारित है; तथापि, ग्लास और सिरेमिक इंसुलेटरों में भी अलग - अलग कच्ची सामग्री और उत्पादन प्रक्रिया / बिक्री कीमत आदि शामिल होती है परंतु याचिकाकर्ताओं ने अपनी सुविधानुसार यह पाया है कि वे तुलनीय हैं जबकि कंपोजिट इंसुलेटर तुलनीय नहीं हैं।
फफ. याचिकाकर्ताओं के लिए यह दावा करना गलत और अप्रतिनिधिक है कि निर्यातकों द्वारा कोई उचित उत्पाद कोडिंग सूचना प्रदान नहीं की गई थी । निर्यातकों ने उत्पाद प्रकारों, उत्पाद कोडों और विशेषताओं से संबंधित पूर्ण सूचना के साथ परिशिष्ट-1,2,8,8क और 8ख दायर की थी । इसके अतिरिक्त निर्यातकों ने निर्यातकों की आंतरिक कोडिंग प्रणाली के अनुसार विभिन्न उत्पाद कोडों को स्पष्ट करते हुए एक विस्तृत शीट भी दायर की थी ।
बब. याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया है कि निर्यातकों ने संगत सूचना प्रदान करने में कोताही बरती है । वर्तमान मामले में निर्यातकों ने प्रश्नावलियों के उत्तर दायर करते समय और पीसीएन से जुड़ी बिक्री और लागत हेतु समस्त संगत सूचना प्रदान की है । निर्यातकों ने केवल वर्तमान जांच में अपनाई गई प्रक्रिया और प्रोसेस पर ही आपत्तियां उठाई हैं जिनमें भारी खामियां अभी भी विद्यमान हैं ।
भभ. लगभग 87 प्रतिशत आयात ग्लास इंसुलेटर का होता है जिसका विनिर्माण घरेलू उद्योग द्वारा भी नहीं किया जाता । घरेलू उद्योग द्वारा एक ऐसे उत्पाद के आयातों के खिलाफ सुरक्षा मांगने का प्रयास किया जा रहा है जिसका वह स्वयं उत्पादन नहीं करता है ।
मम. हितबद्ध पक्षकारों द्वारा आयात किए जा रहे ग्लास इंसुलेटर अपेक्षित कच्ची सामग्री, उत्पादन प्रक्रिया और समय आदि जैसे विभिन्न मापदंडों के संबंध में पोर्सिलेन इंसुलेटरों से पूर्णतः भिन्न हैं । आयातों के घरेलू प्रयोक्ताओ पावरग्रिड तथा एबीबी लि. ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है कि दोनों अलग-अलग हैं लेकिन घरेलू उद्योग को समर्थन देने के लिए दोनों प्रयोक्ताओं ने ग्लास और पोर्सिलेन इंसुलेटरों को एक ही निविदा में रखा है । दोनों प्रमुख घरेलू प्रयोक्ताओं ने आगे यह स्पष्ट किया है कि आयातित ग्लास इंसुलेटर घरेलू रूप से उत्पादित वस्तु की तुलना में बेहतर गुणवत्ता का है और घरेलू उद्योग ने ग्लास इंसुलेटर के विनिर्माण में सक्षम बनने के लिए अपनी विनिर्माण सुविधाओं का उन्नयन नहीं किया है ।
यय. घरेलू उद्योग में से केवल एक उत्पादक, बीएचईएल द्वारा 765 के. वी. एच वी ए सी और 800 के.वी. एच वी डी सी इलैक्ट्रिकल इंसुलेटरों और 420 के.एन. तथा उससे अधिक की यांत्रिक क्षमता के इलैक्ट्रिकल इंसुलेटरों का विनिर्माण किया जाता है । परंतु बीएचईएल के पास भारतीय बाजार की समूची मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं है । बीएचईएल उपर्युक्त विर्निदेशनों वाले इंसुलेटरों से संबंधित बोली में भाग लेती है जबकि शेष घरेलू उद्योग इस तथ्य की वजह से निविदा बोली में भाग नहीं लेता है कि संबद्ध वस्तु का उत्पादन शेष घरेलू उद्योग (बीएचईएल को छोड़कर) द्वारा नहीं किया जाता है । इस प्रकार बीएचईएल, जिसे एक निविदा प्रदान की जा चुकी है और जो पावर ग्रिड को उसकी आपूर्ति करने के चरण में है, को छोड़कर घरेलू उद्योग द्वारा ऐसे उत्पाद के आयात हेतु क्षति का दावा किया जा रहा है जिसका वह उत्पादन ही नहीं करता है । अतः यदि बीएचईएल को पाटन से कोई शिकायत नहीं है और वह संबद्ध वस्तु की आपूर्ति करने में सक्षम है, तो शेष घरेलू उद्योग इस पर आपूर्ति का दावा नहीं कर सकता ।
|
गग. पावरग्रिड के हाथ में इस समय कुछ बड़ी निर्माण परियोजनाएं हैं जिन्हें शीघ्र पूरा करना देश की पारेषण अवसंरचना की जरूरत की पूर्ति हेतु अपेक्षित है । इसके लिए पावरग्रिड विविध संविदाएं देती है । भविष्य में इंसुलेटरों की जरूरत में आगे और लगभग पचास लाख की वृद्धि होने की आशा है । जिनमें से अधिकांश भाग का उपयोग सात सौ पैंसठ केशून्यवीशून्य पारेषण लाइन में किया जाना है । घघ. भारतीय उत्पादकों के पास पावरग्रिड की उच्च जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक क्षमता नहीं है । इसके अलावा, इंसुलेटर खरीद निविदा संविदाओं को सौंपने के लिए पावरग्रिड द्वारा आयोजित बोली में भारतीय उत्पादकों की भागीदारी भी सीमित है । ड.ड. इस वर्ष जुलाई में लगभग चालीस लाख इंसुलेटरों के लिए आयोजित बोली के दौरान केवल दो भारतीय उत्पादकों अर्थात आदित्य नूवो और बीएचईएल ने भाग लिया था । इन दो में से भी बीएचईएल क्षमता संबंधी अड़चन का सामना कर रही है और उसकी स्वीकारोक्ति के अनुसार वह उसे प्रदत्त ऑर्डर को पूरा करने में समर्थ नहीं रही है । बीएचईएल को दिए गए ऑर्डर के एक भाग की पूर्ति अन्य स्थानों से की गई थी। इससे आदित्य नूवो एकमात्र प्रतिस्पर्धी बोलीदाता रह जाती है और इसे पाटनरोधी शुल्क लगाए जाने के बाद सभी ऑर्डर दे दिए गए हैं ऑर्डरों का कुल मूल्य पाटनरोधी शुल्क के कारण पचास करोड़ रु. तक के अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव के साथ एक सौ बीस करोड़ रु. से अधिक का है । चच. एक ही पक्षकार द्वारा सभी ऑर्डर लिए जाने से न केवल प्रतिस्पर्धा अभाव का पता चलता है अपितु यह अत्यंत जोखिम भरा भी है । यदि यह एकमात्र आपूर्तिकर्ता तकनीकी दोषों अथवा किसी अन्य कारण से प्रचालन बंद कर देता है तो सभी चल रही पारेषण अवसंरचना परियोजनाएं ठप पड़ जाएंगी । यह जोखिम उबरने के विकल्प के बिना आसन्नवर्ती है । छछ. जिन घरेलू विनिर्माताओं ने पाटनरोधी शुल्क लगाने के लिए वर्तमान याचिका दायर की है, उन्होंने आज तक किसी बोली में भाग नहीं लिया है। अतः इस याचिका पर शुल्क लगाए जाने से केवल एक या दो पक्षकारों को लाभ मिलेगा । सबसे अधिक नुकसान जनता को होगा जो अतिरिक्त टैरिफ के बोझ को सहन करेगी । जज. प्रारंभिक जांच परिणाम में भारतीय उत्पादकों के लिए क्षति मार्जिन के निर्धारण हेतु वोल्टेज वर्ग पर ध्यान दिए बिना यूनिट दर की गणना हेतु एक केएन से चार सौ बीस केएन तक के इंसुलेटरों का समूहन तकनीकी रूप से सही कार्यप्रणाली नहीं है । प्रारंभिक जांच परिणाम में दिए गए आंकड़ों से जहां तक उच्चतर रेटिंग हेतु इंसुलेटरों का संबंध है, वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलता है । इसके अलावा, वास्तविक लागत प्रारंभिक जांच परिणाम में विचारित लागत से एक.पाँच गुना अधिक है । एक अधिक उपयुक्त कार्यप्रणाली उच्चतर तथा न्यूनतर वोल्टेज के इंसुलेटरों के श्रेणीकरण और पृथक निर्धारण और इसके बाद एक तुलनात्मक विश्लेषण की होगी । चूंकि उच्च यांत्रिक क्षमता और उच्च वोल्टेज स्तर के इंसुलेटरों, जिनके लिए जांच, गुणवत्ता और निष्पादन के उच्च मानकों की जरूरत होती है, और अधिक महंगे बन जाएंगे यदि यूनिट कीमत की गणना प्रति मीट्रिक टन के आधार पर की जाती है । झझ. पाटनरोधी शुल्क के उद्ग्रहण से पूर्व प्रदान की गई संविदाओं के मामले में डिलीवरी पाटनरोधी शुल्क लगाए जाने के बाद होगी, वहां पाटनरोधी शुल्क घरेलू उद्योग के लिए संरक्षणात्मक उपाय के रूप में कार्य नहीं करेगा, इसके बजाए यह पावरग्रिड के लिए आयात की लागत को बढ़ाएगा और बाद में इसका प्रभाव जनता पर पड़ेगा जो सवर्धित टैरिफ के कारण प्रभावित होंगे । इस बात को ध्यान में रखते हुए निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा छूट प्रमाण पत्र जारी कर पावरग्रिड को इस पाटनरोधी शुल्क से छूट प्रदान की जानी चाहिए । टट. घरेलू उद्योग के संरक्षण और विकास हेतु तरीके तैयार करते समय निम्नलिखित पर जोर दिया जाना चाहिए : किसी विशेष प्रकार के इंसुलेटरों की मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उद्योग की क्षमता संबंधी सीमाएं पाटनरोधी शुल्क की मात्रा का निर्धारण करते समय इंसुलेटरों का पृथक श्रेणीकरण क्षति मार्जिन का उचित मूल्य ठठ. इसके अलावा, घरेलू उद्योग को क्षमता वृद्धि करनी चाहिए और सभी संविदाएं एक ही आपूर्तिकर्ता द्वारा लिए जाने की स्थिति के बजाए और अधिक घरेलू उत्पादकों को पावरग्रिड द्वारा आयोजित बोली में भाग लेना चाहिए । डड. यद्यपि, इंसुलेटरों के विभिन्न प्रकारों को उत्पादों की एक व्यापक श्रेणी के अंतर्गत पाया जाता है तथापि, तकनीकी एवं वाणिज्यिक अंतरों और लागत अंतरों को ध्यान में रखते हुए तुलना की कार्य प्रणाली पर विचार किया जाना चाहिए तथा समान वस्तु की जांच के प्रयोजनार्थ उन्हें तुलनीय बनाने के लिए उचित समायोजन किये जाने चाहिए । ढढ. याचिकाकर्ताओं के इन दावों की पुष्टि करने के लिए किसी मजबूत साक्ष्य द्वारा समर्थन नहीं किया गया है कि उनके पास विचाराधीन वस्तु के सभी प्रकारों का उत्पादन करने और उनकी बिक्री करने की क्षमता है । इस प्रकार, घरेलू उद्योग के याचिकाकर्ता को इस दावे की सत्यता की पुष्टि करने के लिए संगत साक्ष्य का अगोपनीय रूपांतरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाना चाहिए । णण. घरेलू उद्योग स्पष्ट तौर पर भारतीय उपभोक्ता उद्योग की मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं है। तत. सीमित क्षमताओं के कारण घरेलू उद्योग के सदस्य सीमा तक सात सौ पैंसठ के. वी. और उसके अधिक के वोल्टेज के उच्च के.वी. इंसुलेटरों अर्थात चार सौ बीस के. एन और उससे अधिक की इलैक्ट्रो मेकेनिकल क्षमता का उत्पादन करने में असमर्थ हैं । यद्यपि, चार सौ बीस के.एन. और उससे अधिक के इंसुलेटरों का उत्पादन करने की क्षमता है । तथापि, यह देश की मांग को पूरा करने के लिए किसी दृष्टि से पर्याप्त नहीं है । थथ. घरेलू उद्योग के इन दावों कि ग्लास इंसुलेटर और सिरेमिक इंसुलेटर समान उत्पाद हैं, के प्रतिकूल सुनवाई के लिए उपस्थित दोनों प्रयोक्ताओं ने स्पष्ट तौर पर यह बताया कि सिरेमिक और ग्लास इंसुलेटर पूर्णतः भिन्न हैं । वस्तुतः भारत में सबसे बड़े प्रयोक्ता पीजीसीआईएल ने यह स्पष्ट किया कि वह ग्लास इंसुलेटरों की खरीद को तरजीह देगा क्योंकि उनकी प्रचालन और रख-रखाव लागत कम होती है । तथापि, घरेलू उद्योग के लाभार्थ प्रयोक्ता अपनी निविदा अपेक्षाओं में सिरेमिक इंसुलेटर को भी शामिल कर लेते हैं । दद. पोर्सिलेन और ग्लास इंसुलेटरों से संबद्ध लागत और प्रचालन व्यय में भारी अंतर है । उदाहरणार्थ ग्लास इंसुलेटर दोषपूर्ण सामग्री के रूप में प्रयोग किए जाने के लिए अत्यंत कम उपयुक्त होते हैं क्योंकि इंसुलेटरों में छोटी सी भी क्षति से इंसुलेटर ग्लास शैल स्वतः विखंडित हो जाती है। इसका तात्पर्य यह है कि दोषपूर्ण इंसुलेटरों को किसी स्थापना में प्रयोग किए जाने की संभावना नितांत कम है । इसके अलावा, ग्लास इंसुलेटरों में पोर्सिलेन इंसुलेटरों की तुलना में लाभ निहित होता है क्योंकि व्यवहारिक रूप से ग्लास इंसुलेटरों के लिए डिकैपिंग की कोई घटना नहीं होती है । तुलनात्मक रूप से पोर्सिलेन इंसुलेटरों में नियमित आधार पर अपेक्षित कई डिकैपिंग होती हैं । इससे न केवल रख-रखाव की लागत में भारी वृद्धि होती है अपितु विद्युत आपूर्ति अवसंरचना के कार्यचालन में भी बाधा आती है । इसके अलावा, यह प्रचालन एवं रख-रखाव लागत में अंतर के कारण सिरेमिक इंसुलेटरों की तुलना में ग्लास इंसुलेटर लगाने के लिए प्रयोक्ताओं हेतु सस्ता है धध. एच कोर्ड के वर्गीकरण में उत्पाद क्षेत्र के पृथक्करण की जरूरत नहीं हो सकती है अपितु, उपभोक्ता अवधारणा और प्रचालन लागत में अंतर को जोड़ा जा सकता है, एच एस वर्गीकरण में अंतर इतना पर्याप्त होना चाहिए जिससे यह पता चल सके कि पाटन और क्षति हेतु सिरेमिक तथा ग्लास इंसुलेटरों की तुलना करते समय आवश्यक समायोजन किया जाना चाहिए । नन. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि कंपोजिट इंसुलेटरों को अलग रखा जाए । वर्तमान मामले में निर्यातकों ने प्रश्नावली दायर करते समय और माननीय निर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा निर्देश दिए जाने पर पीसीएन से संबंधित बिक्री और लागत के लिए समस्त संगत सूचना उपलब्ध कराई है । अतः निर्यातकों के पास किसी सूचना उपलब्ध न होने से मना करने अथवा उसे उपलब्ध न कराने का कोई बहाना नहीं है और न ही उन्होंने सूचना रोककर जांच में बाधा डाली है । पप. याचिकाकर्ताओं का तर्क कच्ची सामग्री, उत्पादन लागत, बिक्री कीमत आदि जैसे विभिन्न कारकों पर आधारित है; तथापि, ग्लास और सिरेमिक इंसुलेटरों में भी अलग - अलग कच्ची सामग्री और उत्पादन प्रक्रिया / बिक्री कीमत आदि शामिल होती है परंतु याचिकाकर्ताओं ने अपनी सुविधानुसार यह पाया है कि वे तुलनीय हैं जबकि कंपोजिट इंसुलेटर तुलनीय नहीं हैं। फफ. याचिकाकर्ताओं के लिए यह दावा करना गलत और अप्रतिनिधिक है कि निर्यातकों द्वारा कोई उचित उत्पाद कोडिंग सूचना प्रदान नहीं की गई थी । निर्यातकों ने उत्पाद प्रकारों, उत्पाद कोडों और विशेषताओं से संबंधित पूर्ण सूचना के साथ परिशिष्ट-एक,दो,आठ,आठक और आठख दायर की थी । इसके अतिरिक्त निर्यातकों ने निर्यातकों की आंतरिक कोडिंग प्रणाली के अनुसार विभिन्न उत्पाद कोडों को स्पष्ट करते हुए एक विस्तृत शीट भी दायर की थी । बब. याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया है कि निर्यातकों ने संगत सूचना प्रदान करने में कोताही बरती है । वर्तमान मामले में निर्यातकों ने प्रश्नावलियों के उत्तर दायर करते समय और पीसीएन से जुड़ी बिक्री और लागत हेतु समस्त संगत सूचना प्रदान की है । निर्यातकों ने केवल वर्तमान जांच में अपनाई गई प्रक्रिया और प्रोसेस पर ही आपत्तियां उठाई हैं जिनमें भारी खामियां अभी भी विद्यमान हैं । भभ. लगभग सत्तासी प्रतिशत आयात ग्लास इंसुलेटर का होता है जिसका विनिर्माण घरेलू उद्योग द्वारा भी नहीं किया जाता । घरेलू उद्योग द्वारा एक ऐसे उत्पाद के आयातों के खिलाफ सुरक्षा मांगने का प्रयास किया जा रहा है जिसका वह स्वयं उत्पादन नहीं करता है । मम. हितबद्ध पक्षकारों द्वारा आयात किए जा रहे ग्लास इंसुलेटर अपेक्षित कच्ची सामग्री, उत्पादन प्रक्रिया और समय आदि जैसे विभिन्न मापदंडों के संबंध में पोर्सिलेन इंसुलेटरों से पूर्णतः भिन्न हैं । आयातों के घरेलू प्रयोक्ताओ पावरग्रिड तथा एबीबी लि. ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है कि दोनों अलग-अलग हैं लेकिन घरेलू उद्योग को समर्थन देने के लिए दोनों प्रयोक्ताओं ने ग्लास और पोर्सिलेन इंसुलेटरों को एक ही निविदा में रखा है । दोनों प्रमुख घरेलू प्रयोक्ताओं ने आगे यह स्पष्ट किया है कि आयातित ग्लास इंसुलेटर घरेलू रूप से उत्पादित वस्तु की तुलना में बेहतर गुणवत्ता का है और घरेलू उद्योग ने ग्लास इंसुलेटर के विनिर्माण में सक्षम बनने के लिए अपनी विनिर्माण सुविधाओं का उन्नयन नहीं किया है । यय. घरेलू उद्योग में से केवल एक उत्पादक, बीएचईएल द्वारा सात सौ पैंसठ के. वी. एच वी ए सी और आठ सौ के.वी. एच वी डी सी इलैक्ट्रिकल इंसुलेटरों और चार सौ बीस के.एन. तथा उससे अधिक की यांत्रिक क्षमता के इलैक्ट्रिकल इंसुलेटरों का विनिर्माण किया जाता है । परंतु बीएचईएल के पास भारतीय बाजार की समूची मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं है । बीएचईएल उपर्युक्त विर्निदेशनों वाले इंसुलेटरों से संबंधित बोली में भाग लेती है जबकि शेष घरेलू उद्योग इस तथ्य की वजह से निविदा बोली में भाग नहीं लेता है कि संबद्ध वस्तु का उत्पादन शेष घरेलू उद्योग द्वारा नहीं किया जाता है । इस प्रकार बीएचईएल, जिसे एक निविदा प्रदान की जा चुकी है और जो पावर ग्रिड को उसकी आपूर्ति करने के चरण में है, को छोड़कर घरेलू उद्योग द्वारा ऐसे उत्पाद के आयात हेतु क्षति का दावा किया जा रहा है जिसका वह उत्पादन ही नहीं करता है । अतः यदि बीएचईएल को पाटन से कोई शिकायत नहीं है और वह संबद्ध वस्तु की आपूर्ति करने में सक्षम है, तो शेष घरेलू उद्योग इस पर आपूर्ति का दावा नहीं कर सकता ।
|
बिहार के बेगूसराय में एक विदेशी महिला पर्यटक का शव कुत्तों ने नोच डाले। दरअसल, सड़क दुर्घटना में भूटान की रहने वाली महिला की मौत हो गई थी। पुलिस द्वारा महिला का शव पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया था। जिसके लिए चार पुलिस के जवानों की ड्यूटी भी लगाई गई थी। लेकिन शव पोस्टमार्टम हाउस के सामने पड़ा रहा और लापरवाही ऐसी कि कुता आकर शव को नोंच डाले। हालांकि, बाद में शव को वहां से हटा दिया गया।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
बिहार के बेगूसराय में एक विदेशी महिला पर्यटक का शव कुत्तों ने नोच डाले। दरअसल, सड़क दुर्घटना में भूटान की रहने वाली महिला की मौत हो गई थी। पुलिस द्वारा महिला का शव पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया था। जिसके लिए चार पुलिस के जवानों की ड्यूटी भी लगाई गई थी। लेकिन शव पोस्टमार्टम हाउस के सामने पड़ा रहा और लापरवाही ऐसी कि कुता आकर शव को नोंच डाले। हालांकि, बाद में शव को वहां से हटा दिया गया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
चेहरे की सुंदरता पर ध्यान देते - देते लोग पैरों की सुंदरता का ख्याल नहीं रखते । पैरों में दरारें पड़ना या जिसे क्रैक हील्स कहा जाता है काफी कॉमन दिक्कत है । यह समस्या किसी को भी हो सकती है । अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं फटी एड़ियों से ज्यादा परेशान रहती हैं । चाहें आप कितना भी सुन्दर और महंगा चप्पल पहने यह आपके पैरों की खूबसूरती को बिगड़ देती है । अापने इसके लिए कई सारे क्रीम्स भी लगाए होंगे । पर आज हम आपको कुछ घरेलु नुस्खे बताएंगे जिससे आप यह आसानी से ठीक कर सकते हैं।
अगर आप घरेलु उपचार नहीं करना चाहते तो आप हील बाम का इस्तेमाल कर सकते हैं । मार्किट में ऐसे कई सारी क्रीम्स हैं जिनसे आप अपने क्रैक हील्स को ठीक कर सकते है । कुछ हील बाम से आपको हल्की सी जलन का एहसासहो सकता है और यह पूरी तरह से नॉर्मल है । लेकिन अगर हील बाम लगाने के बाद कोई रिएक्शन होता है तो इसके लिए आप डॉक्टर से संपर्क करें।
जब हमारे हील्स में क्रैक पड़ते हैं तो उसके आस पास की स्किन ड्राई और मोटी हो जाती है । इसके बाद जब हम अपनी स्किन में प्रेशर डालते हैं तो यह स्किन अलग हो जाती है । इसे ठीक करने के लिए आप गुनगुने पानी में पैरों को भीगा कर रखें । इसके बाद अपने पैरों को अच्छी तरह से स्क्रब करें और फुट क्रीम लगाकर इसे डे होने से बचाएं ।
शहद में एंटीबैक्टीरियसल और एंटीमाइक्रोबियल (रोगाणुरोधी) गुण पाए जाते हैं जो स्किन को मॉइश्चराइज और हाइड्रेट रखते हैं । क्रैक हील्स को जल्दी ठीक करने के लिए आप केला और शहद का मास्क लगाएं । इसके लिए आप एक पके हुए केले को मैश कर उसमें 2 चम्मच शहद मिलाएं । इसे आप अपनी फटी हुई एड़ियों पर लगाएं और 30 मिनट तक छोड़ दें । यह नेचुरल मॉइश्चराइजर की तरह काम करेगा और आपके पैरों को मुलायम बनाएगा ।
फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए आप पैरों को मिल्क बाथ भी दे सकते हैं । इससे आपके पैर मुलायम बनेंगे और एड़ियां भी जल्द ठीक हो जाएंगी । इसके लिए आप हल्के गर्म पानी में थोड़ा सा दूध डालें और गुलाब की या नीम की पंखुड़िया डालें । अपनी एड़ियो को 20 से 25 मिनट तक पानी में भीगा कर रखें। यह आपकी फटी एड़ियों की डेड स्किन को हटाकर एड़ियों को मुलायम बनाने में मदद करेगा ।
कोकोनट तेल ड्राई स्किन के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है । रात को सोने से पहले आप अपने पैरों में कोकोनट ऑइल से जरूर मसाज करें ।
जब आपकी एड़ियां फटी हो तो आपकी चप्पल का प्रयोग करना चाहिए। बहुत से लोग घर के अंदर चप्पल नहीं पहनते । ज़मीन सख्त होने की वजह से यह आपकी एड़ियों पर और दबाव डालता है । इसलिए आप घर के अंदर भी चप्पल जरूर पहने इससे आपके पैर नहीं फटेंगे ।
|
चेहरे की सुंदरता पर ध्यान देते - देते लोग पैरों की सुंदरता का ख्याल नहीं रखते । पैरों में दरारें पड़ना या जिसे क्रैक हील्स कहा जाता है काफी कॉमन दिक्कत है । यह समस्या किसी को भी हो सकती है । अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं फटी एड़ियों से ज्यादा परेशान रहती हैं । चाहें आप कितना भी सुन्दर और महंगा चप्पल पहने यह आपके पैरों की खूबसूरती को बिगड़ देती है । अापने इसके लिए कई सारे क्रीम्स भी लगाए होंगे । पर आज हम आपको कुछ घरेलु नुस्खे बताएंगे जिससे आप यह आसानी से ठीक कर सकते हैं। अगर आप घरेलु उपचार नहीं करना चाहते तो आप हील बाम का इस्तेमाल कर सकते हैं । मार्किट में ऐसे कई सारी क्रीम्स हैं जिनसे आप अपने क्रैक हील्स को ठीक कर सकते है । कुछ हील बाम से आपको हल्की सी जलन का एहसासहो सकता है और यह पूरी तरह से नॉर्मल है । लेकिन अगर हील बाम लगाने के बाद कोई रिएक्शन होता है तो इसके लिए आप डॉक्टर से संपर्क करें। जब हमारे हील्स में क्रैक पड़ते हैं तो उसके आस पास की स्किन ड्राई और मोटी हो जाती है । इसके बाद जब हम अपनी स्किन में प्रेशर डालते हैं तो यह स्किन अलग हो जाती है । इसे ठीक करने के लिए आप गुनगुने पानी में पैरों को भीगा कर रखें । इसके बाद अपने पैरों को अच्छी तरह से स्क्रब करें और फुट क्रीम लगाकर इसे डे होने से बचाएं । शहद में एंटीबैक्टीरियसल और एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं जो स्किन को मॉइश्चराइज और हाइड्रेट रखते हैं । क्रैक हील्स को जल्दी ठीक करने के लिए आप केला और शहद का मास्क लगाएं । इसके लिए आप एक पके हुए केले को मैश कर उसमें दो चम्मच शहद मिलाएं । इसे आप अपनी फटी हुई एड़ियों पर लगाएं और तीस मिनट तक छोड़ दें । यह नेचुरल मॉइश्चराइजर की तरह काम करेगा और आपके पैरों को मुलायम बनाएगा । फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए आप पैरों को मिल्क बाथ भी दे सकते हैं । इससे आपके पैर मुलायम बनेंगे और एड़ियां भी जल्द ठीक हो जाएंगी । इसके लिए आप हल्के गर्म पानी में थोड़ा सा दूध डालें और गुलाब की या नीम की पंखुड़िया डालें । अपनी एड़ियो को बीस से पच्चीस मिनट तक पानी में भीगा कर रखें। यह आपकी फटी एड़ियों की डेड स्किन को हटाकर एड़ियों को मुलायम बनाने में मदद करेगा । कोकोनट तेल ड्राई स्किन के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है । रात को सोने से पहले आप अपने पैरों में कोकोनट ऑइल से जरूर मसाज करें । जब आपकी एड़ियां फटी हो तो आपकी चप्पल का प्रयोग करना चाहिए। बहुत से लोग घर के अंदर चप्पल नहीं पहनते । ज़मीन सख्त होने की वजह से यह आपकी एड़ियों पर और दबाव डालता है । इसलिए आप घर के अंदर भी चप्पल जरूर पहने इससे आपके पैर नहीं फटेंगे ।
|
२१ श परिः ]
वह रूप ब्रज निवास प्रभुता माधुर्थ्य रास दिव्य गुण समूहन को रत्नालय सोय । औरनि वैभव हि सत्ता कृष्णदत्त भगवत्ता सर्वांसी सर्वाश्रय नंद सुवन जोय ।। श्रीलज्जा दया कीर्ति धैर्य मति विसारदी सु येई गुण नित्य सदा कृष्ण में निवासी । मृदु सुसील औ वदान्य कृष्णकी न तुल्य अन्य जगतको हित करें कृष्ण विविध रस बिलासी ।। नाना जन हरिहि देखि कीनें निंदन निमेष ब्रजहि मधि विधिहि निँदे गोगण सनेही । तेई सब पदय पढ़ि के करिकें अर्थ महाप्रभु करें बदन माधुरीको पान मगन जेही ।। अथ तथाहि -
तस्याननं मकरकुडलचारु कर्णभ्राजकपोलसुभगं सविलासहासं । नित्योत्सवं न ततृपुर्व शिभिः पिवन्त्यो नार्यो नराध मुदिताः कुपिता निमेश्च ॥ पदय - जसनि कृष्ण बदन राजै द्विजराज राजरी ।
कृष्ण देह सिंहासन बैठि करें राज तेज तै सोई रंग भरयो संग ससि समाजरी ॥ मनसिज गायत्री मंत्ररूप है स्वरूप कृष्ण साढ़े चौबीस बरण ताके है जेई ।। इन्दुनको रूप धरि कैं कृष्ण देह उदै करिकै काममय त्रिलोक कीनौ छाय हृदय तेई ।। चीकनें कपोल जुग जीतें मनि मुकुर बिमल तेई विवि पूर्णचंद्र जानौं सुखदाई । अलिक अर्द्ध इंदु आहि चंदन की बिंदु ताहि सोऊ एक पूर्णचंद्र सीतल अघिकाई ।। करनख रजनी सु ठाठ करैं बंशी उपरि नाट तिनको है गान मधुर मुरली की तानरी । पद नख ससियूथ सोई तरें करें नृत्य जोई नूपुर की रुनक भुनक धुनि है तिनकौ गानरी ॥ नृत्य करें मकर कुंडल नेत्र विमल नील कमल सदाई न चावँ तिन्है तृपति अति विलासी । भृकुटी धनु जैसे बान ताके गुणजमल कान नारी मन लक्ष ताहि वेधे सुखरासी ॥ विधु को यह नृत्यघाट फैलाई ससिनि हाट अमृत निज लुटावै सबनि बिना लियें मोलहीं। मुसकि चन्द्रिका सुधाहि काहूको अधरामृत प्याय तृप्तकरें सवनि मधुर वचन बोल हीं ॥ आयत अनुराग न घूमरी मद छकी सेन, पैसे जुग नैन जाके मंत्री लागे कानरी । क्रीड़ा लावण्य सदन रसके अयन नयन जहां सुखमय गोविंदवदन मधुररस निधानरी ।। पुन्य पुंज फलै जाहि ताकौ दरस मिलै ताहि कहौ दोय नेंन ही सौं कितौ करें पानरी । बढ़ दुनी तृषा लोभ पिय न सकै हियें क्षोभ, दुख करि तब निंदे कहें विधिको नहि ज्ञानरी ॥ दिये नहि कोटि लक्ष सबसे किय दोय अक्ष, तिनहूं में दिय निमेष ओट दुख अपारा । विधि जड़ धनसुतप जाहि रस के रहित हियो ताहि जानें नहि जोग्यसृजन कमल सुत बिचार । दरसि हैं जे कृष्णबदन तिनके कहां दोय नयन है कै विधि अवधि करें ऐसौ अविचारा । मोहि जो बुलाय पूछें कोटिन्हें उचितसृष्टि ताकी तव जानें निरधारा ॥
हरितनु माधुर्थ्यसिंधु है सुमधुर बन्दु अतिही मधुर स्मित करन मन प्रकासा । लागे ये तीन हियै स्वादै तीन लोभ किये पढ़े हस्तचालन जुत पद्य हिय हुलासा ।। तथाहि
मधुरं मधुरं बपुरस्य विभो मधुरं मधुरं वदनं मधुरं । मधुगन्धि मृदु स्मितमेतद्हो मधुरं मधुरं मधुरं मधुरं ॥
यथारागहे सनातन कृष्ण मथुररस निधान ।
मेरो मन संनपाती सत्रही पियौ चाहँ ताहि अपनी दुइँव वैद्य देय नही कन प्रमान ।। हरितन लावण्यपूर मधुरते अतिसुमधुर तामें जो वदन सुधानिधि है सुखकी रासरी । मधुरतें परममधुर ताते है अतिसुमधुर ताकी जो मुसकनि पर चन्द्रिका प्रकासरी ।। मधुर सृष्ट मधुर तातें है सुमधुर जोई । कहकर व्याप सब तीन लोक दसौदिसा वह जाकौं पूर सोई ।। हसनि किरनि सितंकपूर पैत्रिभुवनको मत्त करें व मधु सुवास जो । वंशीको छिद्र सुनभ तार्के गुण सब्द प्रविस ध्वनि के स्वरूप है केँ तब पावै परिनाम सौ ।। सो धुनि चहुं ओर धाय भेद जग वैकुण्ठ जाइ वल करि सब जगत हीके पैठि जाय कानरी । सबकौं मतवारी करिचिवलस घरि घरि ताहूमें अतिविशेष जुवतिगण सुजानरी ।। सो सतिनुके व्रत तोर जोई, पतिनके निज कंहू काढ़ि लेत नारी । परव्योम लक्ष्मीगणहि जो करावै आकर्षण, आगे तिहि गोपीगण कौंन धौ विचारी ॥ पति ढिग निवी खिसावै गृहके काजनि छुटावै वलसौं गहि कृष्ण निकट जुवतिनिकौं लांबई । लोक धर्म लज्या भय सबहि ज्ञान नास होय, नारीगण सबै जिती तिन्है ये नचांबई । श्रवननि में करें वास तहां सदा निज प्रकास, पैठन नहि देय जहां और सब्द कोई । और न कछु सुनें कान कहतें कछु कहँ आन, यहँ कृष्ण वंशी कौ चरित जगत भोई ।। फेरि क वाह्य ज्ञान कहते हैं न, तुम पर श्री कृष्ण जू की कृपा
मेर चित भ्रम कराय प्रभुता निज माधुरी पुनि, तुम ही श्रवन कराई मेरे मुख ताही ॥ मैं तो अति बड़ौ चौर और कहत और कयौ हरि की माधुर्यपूर लखि गयौ वहि क 1 तब तौ प्रभु एक छिनहि मौन करिकें रहे फेरि कहैं यौं सनातन सौं मनहि धैर्य गहिकेँ । कृष्ण माधुरी अपार पुनि किय प्रभु मुख प्रचार जोई सुनै लहै प्रेम सुख प्रकास । रूप श्री सनातन रघुनाथ चरण जाको वास, गौरचन्द्र चरितामृत कहै कृष्णदास ।। को गौरवंद्र चरित वृंदावन दास जोई फेरि कै उचारयौ कविराज राज जाहि । इनहीं की चरण धूरि मूरि है सजीवन जिहि भाषा निज प्रगट कियौ वेंनी कृष्ण ताहि ॥ इति श्री चैतन्यचरितामृते मध्यखण्डे श्रीकृष्ण ऐश्वर्य माधुर्थ्यवर्णनं नाम एकविंशति परिच्छेदः ॥
|
इक्कीस श परिः ] वह रूप ब्रज निवास प्रभुता माधुर्थ्य रास दिव्य गुण समूहन को रत्नालय सोय । औरनि वैभव हि सत्ता कृष्णदत्त भगवत्ता सर्वांसी सर्वाश्रय नंद सुवन जोय ।। श्रीलज्जा दया कीर्ति धैर्य मति विसारदी सु येई गुण नित्य सदा कृष्ण में निवासी । मृदु सुसील औ वदान्य कृष्णकी न तुल्य अन्य जगतको हित करें कृष्ण विविध रस बिलासी ।। नाना जन हरिहि देखि कीनें निंदन निमेष ब्रजहि मधि विधिहि निँदे गोगण सनेही । तेई सब पदय पढ़ि के करिकें अर्थ महाप्रभु करें बदन माधुरीको पान मगन जेही ।। अथ तथाहि - तस्याननं मकरकुडलचारु कर्णभ्राजकपोलसुभगं सविलासहासं । नित्योत्सवं न ततृपुर्व शिभिः पिवन्त्यो नार्यो नराध मुदिताः कुपिता निमेश्च ॥ पदय - जसनि कृष्ण बदन राजै द्विजराज राजरी । कृष्ण देह सिंहासन बैठि करें राज तेज तै सोई रंग भरयो संग ससि समाजरी ॥ मनसिज गायत्री मंत्ररूप है स्वरूप कृष्ण साढ़े चौबीस बरण ताके है जेई ।। इन्दुनको रूप धरि कैं कृष्ण देह उदै करिकै काममय त्रिलोक कीनौ छाय हृदय तेई ।। चीकनें कपोल जुग जीतें मनि मुकुर बिमल तेई विवि पूर्णचंद्र जानौं सुखदाई । अलिक अर्द्ध इंदु आहि चंदन की बिंदु ताहि सोऊ एक पूर्णचंद्र सीतल अघिकाई ।। करनख रजनी सु ठाठ करैं बंशी उपरि नाट तिनको है गान मधुर मुरली की तानरी । पद नख ससियूथ सोई तरें करें नृत्य जोई नूपुर की रुनक भुनक धुनि है तिनकौ गानरी ॥ नृत्य करें मकर कुंडल नेत्र विमल नील कमल सदाई न चावँ तिन्है तृपति अति विलासी । भृकुटी धनु जैसे बान ताके गुणजमल कान नारी मन लक्ष ताहि वेधे सुखरासी ॥ विधु को यह नृत्यघाट फैलाई ससिनि हाट अमृत निज लुटावै सबनि बिना लियें मोलहीं। मुसकि चन्द्रिका सुधाहि काहूको अधरामृत प्याय तृप्तकरें सवनि मधुर वचन बोल हीं ॥ आयत अनुराग न घूमरी मद छकी सेन, पैसे जुग नैन जाके मंत्री लागे कानरी । क्रीड़ा लावण्य सदन रसके अयन नयन जहां सुखमय गोविंदवदन मधुररस निधानरी ।। पुन्य पुंज फलै जाहि ताकौ दरस मिलै ताहि कहौ दोय नेंन ही सौं कितौ करें पानरी । बढ़ दुनी तृषा लोभ पिय न सकै हियें क्षोभ, दुख करि तब निंदे कहें विधिको नहि ज्ञानरी ॥ दिये नहि कोटि लक्ष सबसे किय दोय अक्ष, तिनहूं में दिय निमेष ओट दुख अपारा । विधि जड़ धनसुतप जाहि रस के रहित हियो ताहि जानें नहि जोग्यसृजन कमल सुत बिचार । दरसि हैं जे कृष्णबदन तिनके कहां दोय नयन है कै विधि अवधि करें ऐसौ अविचारा । मोहि जो बुलाय पूछें कोटिन्हें उचितसृष्टि ताकी तव जानें निरधारा ॥ हरितनु माधुर्थ्यसिंधु है सुमधुर बन्दु अतिही मधुर स्मित करन मन प्रकासा । लागे ये तीन हियै स्वादै तीन लोभ किये पढ़े हस्तचालन जुत पद्य हिय हुलासा ।। तथाहि मधुरं मधुरं बपुरस्य विभो मधुरं मधुरं वदनं मधुरं । मधुगन्धि मृदु स्मितमेतद्हो मधुरं मधुरं मधुरं मधुरं ॥ यथारागहे सनातन कृष्ण मथुररस निधान । मेरो मन संनपाती सत्रही पियौ चाहँ ताहि अपनी दुइँव वैद्य देय नही कन प्रमान ।। हरितन लावण्यपूर मधुरते अतिसुमधुर तामें जो वदन सुधानिधि है सुखकी रासरी । मधुरतें परममधुर ताते है अतिसुमधुर ताकी जो मुसकनि पर चन्द्रिका प्रकासरी ।। मधुर सृष्ट मधुर तातें है सुमधुर जोई । कहकर व्याप सब तीन लोक दसौदिसा वह जाकौं पूर सोई ।। हसनि किरनि सितंकपूर पैत्रिभुवनको मत्त करें व मधु सुवास जो । वंशीको छिद्र सुनभ तार्के गुण सब्द प्रविस ध्वनि के स्वरूप है केँ तब पावै परिनाम सौ ।। सो धुनि चहुं ओर धाय भेद जग वैकुण्ठ जाइ वल करि सब जगत हीके पैठि जाय कानरी । सबकौं मतवारी करिचिवलस घरि घरि ताहूमें अतिविशेष जुवतिगण सुजानरी ।। सो सतिनुके व्रत तोर जोई, पतिनके निज कंहू काढ़ि लेत नारी । परव्योम लक्ष्मीगणहि जो करावै आकर्षण, आगे तिहि गोपीगण कौंन धौ विचारी ॥ पति ढिग निवी खिसावै गृहके काजनि छुटावै वलसौं गहि कृष्ण निकट जुवतिनिकौं लांबई । लोक धर्म लज्या भय सबहि ज्ञान नास होय, नारीगण सबै जिती तिन्है ये नचांबई । श्रवननि में करें वास तहां सदा निज प्रकास, पैठन नहि देय जहां और सब्द कोई । और न कछु सुनें कान कहतें कछु कहँ आन, यहँ कृष्ण वंशी कौ चरित जगत भोई ।। फेरि क वाह्य ज्ञान कहते हैं न, तुम पर श्री कृष्ण जू की कृपा मेर चित भ्रम कराय प्रभुता निज माधुरी पुनि, तुम ही श्रवन कराई मेरे मुख ताही ॥ मैं तो अति बड़ौ चौर और कहत और कयौ हरि की माधुर्यपूर लखि गयौ वहि क एक तब तौ प्रभु एक छिनहि मौन करिकें रहे फेरि कहैं यौं सनातन सौं मनहि धैर्य गहिकेँ । कृष्ण माधुरी अपार पुनि किय प्रभु मुख प्रचार जोई सुनै लहै प्रेम सुख प्रकास । रूप श्री सनातन रघुनाथ चरण जाको वास, गौरचन्द्र चरितामृत कहै कृष्णदास ।। को गौरवंद्र चरित वृंदावन दास जोई फेरि कै उचारयौ कविराज राज जाहि । इनहीं की चरण धूरि मूरि है सजीवन जिहि भाषा निज प्रगट कियौ वेंनी कृष्ण ताहि ॥ इति श्री चैतन्यचरितामृते मध्यखण्डे श्रीकृष्ण ऐश्वर्य माधुर्थ्यवर्णनं नाम एकविंशति परिच्छेदः ॥
|
यह तो जानकार बताते ही हैं कि माणिक्य यानी रुबी सूर्य का रत्न है जो कि बेहद ताकतवर रत्न है और नीलम की तरह ही इसका भी बहुत जल्दी प्रभाव दिखता है। पर यह कम लोग बताते हैं कि माणिक्य कुरुन्दम समूह का रत्न है और एल्युमिनियम ऑक्साइड इसका प्रमुख तत्व है।
चूंकि सूर्य प्रमुख रूप से अग्नि प्रधान ग्रह है और सूर्य का रत्न माणिक्य होता है, इसलिए इसे धारण करने वाला चरम सफलता को प्राप्त करता है। माणिक्य रत्न धन-दौलत, मान-सम्मान और यश दिलाता है। इसलिए सलाह दी जाती है कि जो लोग राजनेता, अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर जैसे बड़े पदों के अधिकारी बनने की लालसा रखते हैं उन्हें माणिक्य धारण करना चाहिए।
सूर्य के लिए गुलाबी रंग का माणिक्य सर्वोत्तम माना जाता है। चूंकि माणिक्य सूर्य का रत्न है और सूर्य ग्रहों का राजा है इसीलिए उसका रत्न भी राजयोग दिलाता है। राजा-महाराजाओं के जमाने में तो राजा अपने मुकुट में माणिक्य रत्न धारण करते थे। फिर भी सलाह यही दी जाती है कि माणिक्य रत्न को धारण करने से पहले ज्योतिषी को कुंडली दिखाना चाहिए इसके बाद ही माणिक धारण करना चाहिए।
आज कल रत्न के नाम पर लोग ठगे जाते हैं, इसलिए जरुरी है कि जब आप माणिक्य लें तो उसे परख लें। माणिक्य रत्न अनार के दाने के समान होता है। रत्न गाढ़े रंग का होता है। यह वजनी और ठंडा होता है। इसकी पहचान यही है कि जब आप इसे आंखों में रखते हैं तो ठंडक महसूस होती है।
|
यह तो जानकार बताते ही हैं कि माणिक्य यानी रुबी सूर्य का रत्न है जो कि बेहद ताकतवर रत्न है और नीलम की तरह ही इसका भी बहुत जल्दी प्रभाव दिखता है। पर यह कम लोग बताते हैं कि माणिक्य कुरुन्दम समूह का रत्न है और एल्युमिनियम ऑक्साइड इसका प्रमुख तत्व है। चूंकि सूर्य प्रमुख रूप से अग्नि प्रधान ग्रह है और सूर्य का रत्न माणिक्य होता है, इसलिए इसे धारण करने वाला चरम सफलता को प्राप्त करता है। माणिक्य रत्न धन-दौलत, मान-सम्मान और यश दिलाता है। इसलिए सलाह दी जाती है कि जो लोग राजनेता, अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर जैसे बड़े पदों के अधिकारी बनने की लालसा रखते हैं उन्हें माणिक्य धारण करना चाहिए। सूर्य के लिए गुलाबी रंग का माणिक्य सर्वोत्तम माना जाता है। चूंकि माणिक्य सूर्य का रत्न है और सूर्य ग्रहों का राजा है इसीलिए उसका रत्न भी राजयोग दिलाता है। राजा-महाराजाओं के जमाने में तो राजा अपने मुकुट में माणिक्य रत्न धारण करते थे। फिर भी सलाह यही दी जाती है कि माणिक्य रत्न को धारण करने से पहले ज्योतिषी को कुंडली दिखाना चाहिए इसके बाद ही माणिक धारण करना चाहिए। आज कल रत्न के नाम पर लोग ठगे जाते हैं, इसलिए जरुरी है कि जब आप माणिक्य लें तो उसे परख लें। माणिक्य रत्न अनार के दाने के समान होता है। रत्न गाढ़े रंग का होता है। यह वजनी और ठंडा होता है। इसकी पहचान यही है कि जब आप इसे आंखों में रखते हैं तो ठंडक महसूस होती है।
|
ऊना-मैसर्ज होटल न्यू यॉर्क प्लाजा रक्कड़ ऊना द्वारा विभिन्न श्रेणियों के लिए 24 पद अधिसूचित किए गए है। इन पदों के लिए आठ से दस जुलाई को प्रातः 11 बजे होटल न्यू यॉर्क प्लाजा, नजदीक दुर्गा कालोनी में साक्षात्कार लिया जाएगा। जिला रोजगार अधिकारी अनिता गौतम ने बताया कि इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता होटल मेनेजमेंट या संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा या डिग्री होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि इन पदों में मुख्य शेफ, हाउस कीपींग, बेल्ल वॉय, पैंटरी, फ्रंट आफिस व रिसेप्शनिस्ट के 2-2 पद जबकि तंदूर शेफ का एक पद, स्टीवर्ड के पांच पद तथा सेकंड शेफ और हेल्पर के 3-3 पद शामिल है। उन्होंने बताया कि हेड शेफ के लिए दस वर्ष का अनुभव, सेकंड शेफ के लिए तीन वर्ष का अनुभव, बेल्ल वॉय के लिए 1 वर्ष का अनुभव जबकि हेल्पर, हाउस कीपींग, पैंटरी, स्टीवर्ड, फ्रंट आफिस और रिसेप्शनिस्ट के लिए अपनी-अपनी फील्ड में दो वर्ष को अनुभव होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि हेड शेफ के लिए आयु सीमा 30 से 55, तंदूर शेफ के लिए 25 से 35, सेकंड शेफ के लिए 25 से 30, हेल्पर व पैंटरी के लिए 20 ये 25, हॉऊस कीपींग के लिए 18 ये 28, बेल्ल वॉय के लिए 18 ये 25, स्टीवर्ड के लिए 20 से 28, जबकि फ्रंट ऑफिस और रिसेप्शनिस्ट के लिए 22 से 25 आयु निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि योग्य तथा इच्छुक आवेदक अपनी योग्यता प्रमाण पत्र, जन्म तिथि, आधार कार्ड, हिमाचली बोनाफाइड, बायोडाटा सहित 8 जुलाई से 10 जुलाई प्रातः 11 बजे होटल न्यूयॉर्क प्लाजा, नजदीकी दुर्गा कालोनी रक्कड़ ऊना में उपस्थित हो सकते है। आवेदक अधिक जानकारी के लिए 94185-13765, 83508-03400 दूरभाष नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
|
ऊना-मैसर्ज होटल न्यू यॉर्क प्लाजा रक्कड़ ऊना द्वारा विभिन्न श्रेणियों के लिए चौबीस पद अधिसूचित किए गए है। इन पदों के लिए आठ से दस जुलाई को प्रातः ग्यारह बजे होटल न्यू यॉर्क प्लाजा, नजदीक दुर्गा कालोनी में साक्षात्कार लिया जाएगा। जिला रोजगार अधिकारी अनिता गौतम ने बताया कि इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता होटल मेनेजमेंट या संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा या डिग्री होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि इन पदों में मुख्य शेफ, हाउस कीपींग, बेल्ल वॉय, पैंटरी, फ्रंट आफिस व रिसेप्शनिस्ट के दो-दो पद जबकि तंदूर शेफ का एक पद, स्टीवर्ड के पांच पद तथा सेकंड शेफ और हेल्पर के तीन-तीन पद शामिल है। उन्होंने बताया कि हेड शेफ के लिए दस वर्ष का अनुभव, सेकंड शेफ के लिए तीन वर्ष का अनुभव, बेल्ल वॉय के लिए एक वर्ष का अनुभव जबकि हेल्पर, हाउस कीपींग, पैंटरी, स्टीवर्ड, फ्रंट आफिस और रिसेप्शनिस्ट के लिए अपनी-अपनी फील्ड में दो वर्ष को अनुभव होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि हेड शेफ के लिए आयु सीमा तीस से पचपन, तंदूर शेफ के लिए पच्चीस से पैंतीस, सेकंड शेफ के लिए पच्चीस से तीस, हेल्पर व पैंटरी के लिए बीस ये पच्चीस, हॉऊस कीपींग के लिए अट्ठारह ये अट्ठाईस, बेल्ल वॉय के लिए अट्ठारह ये पच्चीस, स्टीवर्ड के लिए बीस से अट्ठाईस, जबकि फ्रंट ऑफिस और रिसेप्शनिस्ट के लिए बाईस से पच्चीस आयु निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि योग्य तथा इच्छुक आवेदक अपनी योग्यता प्रमाण पत्र, जन्म तिथि, आधार कार्ड, हिमाचली बोनाफाइड, बायोडाटा सहित आठ जुलाई से दस जुलाई प्रातः ग्यारह बजे होटल न्यूयॉर्क प्लाजा, नजदीकी दुर्गा कालोनी रक्कड़ ऊना में उपस्थित हो सकते है। आवेदक अधिक जानकारी के लिए चौरानवे हज़ार एक सौ पचासी-तेरह हज़ार सात सौ पैंसठ, तिरासी हज़ार पाँच सौ आठ-तीन हज़ार चार सौ दूरभाष नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
|
रूस की रहने वाली 29 वर्षीय एथलीट कैटरीना लिसीना की टांगों की लंबाई को लेकर सुर्खियां छाई हुई है। कैटरीना का कद 6 फीट 9 इंच है और वो रूस की सबसे लंबी महिला घोषित की जा चुकी हैं। कैटरीना का दावा है कि उनके 52. 4 इंच लंबे पैर दुनिया में सबसे लंबे हैं, लेकिन अब वो दुनिया की सबसे लंबी मॉडल का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करना चाहती हैं।
यूपी के एक हनुमान मंदिर में भक्तों के लिए 'ड्रेस कोड'
|
रूस की रहने वाली उनतीस वर्षीय एथलीट कैटरीना लिसीना की टांगों की लंबाई को लेकर सुर्खियां छाई हुई है। कैटरीना का कद छः फीट नौ इंच है और वो रूस की सबसे लंबी महिला घोषित की जा चुकी हैं। कैटरीना का दावा है कि उनके बावन. चार इंच लंबे पैर दुनिया में सबसे लंबे हैं, लेकिन अब वो दुनिया की सबसे लंबी मॉडल का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करना चाहती हैं। यूपी के एक हनुमान मंदिर में भक्तों के लिए 'ड्रेस कोड'
|
पालमपुर के गांव रंझू में एक सनसनी खेज मामला सामने आया है। जहां मौसी के घर जाने से मना करने पर एक मां ने अपनी ही 15 साल की बेटी की हत्या कर दी। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कोमल मेहता पुत्र शक्ति चंद निवासी गांव चीडन ने पुलिस में बयान दर्ज करवाया है।
उसने कहा कि मीनाक्षी (15) अपनी मां अनुराधा के साथ मौसी के घर जाने के लिए मना कर रही थी। जिस पर मां अनुराधा ने मीनाक्षी को पीटा और ढांक से धक्का दे दिया। वह घायल हो गई। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया। पर उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। अस्पताल में डॉक्टर ने मीनाक्षी को मृत घोषित कर दिया। मामले की पुष्टि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष पटियाल ने की है। उन्होंने कहा कि हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
|
पालमपुर के गांव रंझू में एक सनसनी खेज मामला सामने आया है। जहां मौसी के घर जाने से मना करने पर एक मां ने अपनी ही पंद्रह साल की बेटी की हत्या कर दी। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कोमल मेहता पुत्र शक्ति चंद निवासी गांव चीडन ने पुलिस में बयान दर्ज करवाया है। उसने कहा कि मीनाक्षी अपनी मां अनुराधा के साथ मौसी के घर जाने के लिए मना कर रही थी। जिस पर मां अनुराधा ने मीनाक्षी को पीटा और ढांक से धक्का दे दिया। वह घायल हो गई। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया। पर उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। अस्पताल में डॉक्टर ने मीनाक्षी को मृत घोषित कर दिया। मामले की पुष्टि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष पटियाल ने की है। उन्होंने कहा कि हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
|
हेल्थकेयर प्रबंधन में आमतौर पर छात्रों को स्वास्थ्य देखभाल वितरण प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन के लिए आवश्यक ज्ञान और आलोचनात्मक सोच कौशल प्रदान करता है। प्रबंधकों ने चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं सीधे और समन्वयित की है। छात्र खुद को पूरी सुविधाएं, विशिष्ट विभागों या चिकित्सा अभ्यास में चिकित्सकों के एक समूह के प्रबंधन के पदों में पा सकते हैं।
कई देशों और द्वीप प्रदेशों में फैले दक्षिण अमेरिका में कई स्पेनिश बोलने वाले देशों के लिए घर है। इधर, छात्रों का शाब्दिक वर्ग के लिए अपने रास्ते पर इतिहास के माध्यम से चलने के लिए और प्राचीन समाज की संस्कृति सोख सकता है।
एसोसिएट डिग्री छात्रों को अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने और कुछ विषयों के बारे में अधिक जानने के कर सकते हैं। कार्यक्रम के इस प्रकार के साख बेहतर बनाने में मदद और महत्वपूर्ण अवधारणाओं की समझ को मजबूत कर सकते हैं। कई विविध कार्यक्रमों और अध्ययन के क्षेत्रों के इच्छुक छात्रों के लिए उपलब्ध हैं।
|
हेल्थकेयर प्रबंधन में आमतौर पर छात्रों को स्वास्थ्य देखभाल वितरण प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन के लिए आवश्यक ज्ञान और आलोचनात्मक सोच कौशल प्रदान करता है। प्रबंधकों ने चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं सीधे और समन्वयित की है। छात्र खुद को पूरी सुविधाएं, विशिष्ट विभागों या चिकित्सा अभ्यास में चिकित्सकों के एक समूह के प्रबंधन के पदों में पा सकते हैं। कई देशों और द्वीप प्रदेशों में फैले दक्षिण अमेरिका में कई स्पेनिश बोलने वाले देशों के लिए घर है। इधर, छात्रों का शाब्दिक वर्ग के लिए अपने रास्ते पर इतिहास के माध्यम से चलने के लिए और प्राचीन समाज की संस्कृति सोख सकता है। एसोसिएट डिग्री छात्रों को अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने और कुछ विषयों के बारे में अधिक जानने के कर सकते हैं। कार्यक्रम के इस प्रकार के साख बेहतर बनाने में मदद और महत्वपूर्ण अवधारणाओं की समझ को मजबूत कर सकते हैं। कई विविध कार्यक्रमों और अध्ययन के क्षेत्रों के इच्छुक छात्रों के लिए उपलब्ध हैं।
|
होते हैं। पर यूरोप- निवासी आबाज सुनने जाते हैं। यहाँ ग को महत्व नहीं है, किन्तु कमाई हुई आवाज को है।
ब्रागटन में भी मैंने यही देखा । गाने और सरकम में मुं कुछ भी अन्तर दिखलाई नहीं पड़ा। यद्यपि वहाँ उस गाने मैंने प्रशंसा की थी; परन्तु उसका स्वाद मुझे कुछ नहीं आज कोई-कोई आलाप तो मुझे पक्षियों की किलकारी के सम प्रतीत होता था । उस समय मैं अपनी हँसी नहीं रोका मैं इसे मानवीय आवाज का दुरुपयोग समग्रता था। गायिका के बाद एक गवैये ने गाया। वह मुझे कुछ ठोक मा हुआ। उस गायन में मुझे मध्यम सप्तक का स्वर विशेष कवि मालूम पढ़ा, क्योंकि वही कुछ मनुष्य की आवा
इसके बाद ज्योज्यों में यूरोपियन संगीत सुनने लगा, श्यो त्यों उसका मर्ग मुझे मालूम होने लगा। परन्तु आज भी यही धारणा है कि यूरोप का संगीत और भारतीय संगीत ए दूसरे से सर्वमा भिन्न है और वे दोनों एक ही मार्ग मे भार हृदुग तक नहीं पहुँच सकते ।
यूरोपियन लोगों के आधिभौतिक प्रायः एकमेक हो गया है। उनके नाना
से उनका सं जीवन
के समान दी गायन-माधी विग भी नाना प्रकार के है । प हमारे यहाँ, यह बात नहीं है। यदि हम चाहे जिस दिय गानें बनाकर अपनी रागिनी में गाने जॉय
होगी। इसका कारख यह है कि हमारी रामशगनियाँ द्वाराती है। नियनैमिनिक व्यवहार इन्हें मारादीनपार
होते हैं । इसीलिये वे ( राग-रागनियाँ ) कारुण्य जसी उदार भावनाओं को जन्म दे सकती हैं। उनका कार्य आत्मा के अव्यक्त, अज्ञेय और दुर्मेध रहस्य का चित्र तैयार करना है। हमारे रागों को गाते-गाते गवैये का मन इतना वल्लीन हो जाता है कि उसे फिर बनवास ही सुना है और संकट-प्रस्त मनुष्य समझने लगता है कि मेरी विनती से परमात्मा रोक गया और मुझे प्राप्त हो गया है। हमारी राग रागनियों में ऐसी-ऐसी भावनाओं को बहुत सुभीता प्राप्त है और उनमें से इन्हों का आलाप निकजाता है । हाँ, उनमें यदि किसी को स्थान प्राप्त नहीं है, तो काम-काज में गढ़े हुए मात्र ससारी मनुष्य को ।
यह बात मंजूर नहीं कर सकता कि मुझे यूरोपियन, संगीत के अतिरिक्त का परिचय प्राप्त हो चुका है। यद्यपि मैं उसके हृदय में प्रवेश नहीं कर सका, तो भी वाह्य-रूप पर से मैं जो कुछ ज्ञान प्राप्त कर सका, उसने मुझे एक बात में तो मोहित ही कर लिया है। यूरोपियन संगीत मुझे अद्भुत रस प्रचुर मालूम । जिस कारण से मैंने यहाँ "अद्भुत रस प्रचुर" शब्द का उपयोग किया है उसका स्पष्टीकरण करना कठिन है। मैं अधिक यह कहता हूँ कि यूरोपियन गायन के अमुकअङ्ग हैं। बहु-विता, विपुलता और संसार-सागरों की रूप से आन्दोलित होनेवाले पूर पर फैले हुए परिवर्तनशील प्रकाश और छाया, यह उसका एक है। इसके साथ-साथ दूसरा अङ्ग है जो इससे सर्वथा हो भिन्न है है आआकाश उसका नीला रङ्ग, दूर पर दिखलाई पड़नेवाले क्षितिज की चतुलाकृति और उसका चुपचाप विश्व की अनन्तता की ओर इशारा। मेरे इस फथन में संदिग्धता
का दोप भले ही हो, पर मैं यह कह सकता है कि जब-जब यूरोपियन गायन से मनोवृत्तियाँ घाल हो बठती थो, वमन्तब में मन-हो-मन कहने लगता था कि यह संगीत अद्भुत र प्रचुर है, जीवन की क्षणभंगुरता को गायन में जमा रा है।"
मेरा यह प्रयोजन नहीं है कि हमारे गायन में ऐसा प्रयत्न नहीं दिखलाई पड़ेगा। हमारे गायन के भी किसी भेद-प्रभेद में इसप्रकार का प्रयत्न थोड़े बहुत शो में दिखलाई पड़ेगा। अन्तर इतना ही है कि हमारे यहाँ यूरोपियन संगीत के समान इन बातों को अधिक महत्व नहीं दिया गया है। हमारे यहाँ इन बातों का बहुत कम उल्लेख है और जितना भी उल्लेख किया गया है, इसमें सफलता नहीं मिली है। तारागयों के प्राग से प्रवाशित रात्रि में और सूर्य-किरणों से भ
हमारे राग गाए जाते हैं। मेघों को कृष्ण छाया में विलीन हो जानेवाले और सम्पूर्ण आकाश फैले हुए दुका और निम वन में धवन्धय करके बहनेवाले मरनों के निशब्द और मोदित कर लेनेवाले मार्य का कमर आलाप उससे नि करता है ।
|
होते हैं। पर यूरोप- निवासी आबाज सुनने जाते हैं। यहाँ ग को महत्व नहीं है, किन्तु कमाई हुई आवाज को है। ब्रागटन में भी मैंने यही देखा । गाने और सरकम में मुं कुछ भी अन्तर दिखलाई नहीं पड़ा। यद्यपि वहाँ उस गाने मैंने प्रशंसा की थी; परन्तु उसका स्वाद मुझे कुछ नहीं आज कोई-कोई आलाप तो मुझे पक्षियों की किलकारी के सम प्रतीत होता था । उस समय मैं अपनी हँसी नहीं रोका मैं इसे मानवीय आवाज का दुरुपयोग समग्रता था। गायिका के बाद एक गवैये ने गाया। वह मुझे कुछ ठोक मा हुआ। उस गायन में मुझे मध्यम सप्तक का स्वर विशेष कवि मालूम पढ़ा, क्योंकि वही कुछ मनुष्य की आवा इसके बाद ज्योज्यों में यूरोपियन संगीत सुनने लगा, श्यो त्यों उसका मर्ग मुझे मालूम होने लगा। परन्तु आज भी यही धारणा है कि यूरोप का संगीत और भारतीय संगीत ए दूसरे से सर्वमा भिन्न है और वे दोनों एक ही मार्ग मे भार हृदुग तक नहीं पहुँच सकते । यूरोपियन लोगों के आधिभौतिक प्रायः एकमेक हो गया है। उनके नाना से उनका सं जीवन के समान दी गायन-माधी विग भी नाना प्रकार के है । प हमारे यहाँ, यह बात नहीं है। यदि हम चाहे जिस दिय गानें बनाकर अपनी रागिनी में गाने जॉय होगी। इसका कारख यह है कि हमारी रामशगनियाँ द्वाराती है। नियनैमिनिक व्यवहार इन्हें मारादीनपार होते हैं । इसीलिये वे कारुण्य जसी उदार भावनाओं को जन्म दे सकती हैं। उनका कार्य आत्मा के अव्यक्त, अज्ञेय और दुर्मेध रहस्य का चित्र तैयार करना है। हमारे रागों को गाते-गाते गवैये का मन इतना वल्लीन हो जाता है कि उसे फिर बनवास ही सुना है और संकट-प्रस्त मनुष्य समझने लगता है कि मेरी विनती से परमात्मा रोक गया और मुझे प्राप्त हो गया है। हमारी राग रागनियों में ऐसी-ऐसी भावनाओं को बहुत सुभीता प्राप्त है और उनमें से इन्हों का आलाप निकजाता है । हाँ, उनमें यदि किसी को स्थान प्राप्त नहीं है, तो काम-काज में गढ़े हुए मात्र ससारी मनुष्य को । यह बात मंजूर नहीं कर सकता कि मुझे यूरोपियन, संगीत के अतिरिक्त का परिचय प्राप्त हो चुका है। यद्यपि मैं उसके हृदय में प्रवेश नहीं कर सका, तो भी वाह्य-रूप पर से मैं जो कुछ ज्ञान प्राप्त कर सका, उसने मुझे एक बात में तो मोहित ही कर लिया है। यूरोपियन संगीत मुझे अद्भुत रस प्रचुर मालूम । जिस कारण से मैंने यहाँ "अद्भुत रस प्रचुर" शब्द का उपयोग किया है उसका स्पष्टीकरण करना कठिन है। मैं अधिक यह कहता हूँ कि यूरोपियन गायन के अमुकअङ्ग हैं। बहु-विता, विपुलता और संसार-सागरों की रूप से आन्दोलित होनेवाले पूर पर फैले हुए परिवर्तनशील प्रकाश और छाया, यह उसका एक है। इसके साथ-साथ दूसरा अङ्ग है जो इससे सर्वथा हो भिन्न है है आआकाश उसका नीला रङ्ग, दूर पर दिखलाई पड़नेवाले क्षितिज की चतुलाकृति और उसका चुपचाप विश्व की अनन्तता की ओर इशारा। मेरे इस फथन में संदिग्धता का दोप भले ही हो, पर मैं यह कह सकता है कि जब-जब यूरोपियन गायन से मनोवृत्तियाँ घाल हो बठती थो, वमन्तब में मन-हो-मन कहने लगता था कि यह संगीत अद्भुत र प्रचुर है, जीवन की क्षणभंगुरता को गायन में जमा रा है।" मेरा यह प्रयोजन नहीं है कि हमारे गायन में ऐसा प्रयत्न नहीं दिखलाई पड़ेगा। हमारे गायन के भी किसी भेद-प्रभेद में इसप्रकार का प्रयत्न थोड़े बहुत शो में दिखलाई पड़ेगा। अन्तर इतना ही है कि हमारे यहाँ यूरोपियन संगीत के समान इन बातों को अधिक महत्व नहीं दिया गया है। हमारे यहाँ इन बातों का बहुत कम उल्लेख है और जितना भी उल्लेख किया गया है, इसमें सफलता नहीं मिली है। तारागयों के प्राग से प्रवाशित रात्रि में और सूर्य-किरणों से भ हमारे राग गाए जाते हैं। मेघों को कृष्ण छाया में विलीन हो जानेवाले और सम्पूर्ण आकाश फैले हुए दुका और निम वन में धवन्धय करके बहनेवाले मरनों के निशब्द और मोदित कर लेनेवाले मार्य का कमर आलाप उससे नि करता है ।
|
६६३ श्रीमद्रामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ।
नोट - १ 'त्रिविध ताप त्रासक तिमुहानी' इति । ( क ) जैसे तीन मुँहवाले मनुष्यको देखने से डर लगे वैसे ही तीन नदियोंके संगमपर तीव्र धारा भयावन लगती है। इसीसे 'त्रासक' कहा । त्रिविध = तीन प्रकारका अर्थात् दैहिक, दैविक और भौतिक यथा- 'दैहिक दैविक भौतिक तापा । ७ । २१ । १ ।। शारीरिक कष्ट जैसे ज्वर, खाँसी, फोड़ा, फुंसी इत्यादि रोग तथा काम, क्रोधादि मानसरोग दैहिक ताप है । देवताओं अर्थात् प्राकृतिक शक्तियों ग्रहादि द्वारा जो क्लेश होता है उसे दैविक ताप कहते हैं जैसे अतिवृष्टि, अनावृष्टि, विजली गिरना, पाला इत्यादि । सर्प, बिच्छू, पशु इत्यादि द्वारा जो दुःख हो वह भौतिक ताप हैं। इन्हींका दूसरा नाम आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक हैं ।
( ख ) रघुवंश सर्ग ८ में श्रीसरयूगङ्गासंगम के प्रभावका उल्लेख मिलता है। उस प्रसंगकी कथा इस प्रकार है - 'श्री दशरथजी महाराजकी माता इन्दुमती थीं जिनको 'अ' महाराज स्वयंवर में जीतकर लाये थे । राजा दशरथकी बाल्यावस्था में एक दिन नारद मुनि वीणा बजाते हुए निकले, वीणापरसे एक पुष्पमाला खिसकी और श्री इन्दुमतीजीके हृदयपर गिरी जिससे उनके प्राण निकल गए। अज महाराज बहुत शोकातुर हुए तब वसिष्ठजीने शिष्य द्वारा उनको उपदेश कहला भेजा और बताया कि रानी इन्दुमती पूर्व जन्मकी अप्सरा है जो तृणबिन्दुऋषिका तपोभंग करनेको गई थी। ऋपिने मनुष्ययोनिमें जन्म लेनेका शाप दिया और प्रार्थना करनेपर देवपुष्पदर्शनतक शापकी अवधि नियुक्त कर दी । देवपुष्पके दर्शनसे उसका शाप समाप्त हुआ। उस समय दशरथजी बहुत छोटे थे। आठ वर्षके पश्चात् श्रीदशरथजीको राज्यपर बिठाके राजा अज उसी शोकसे व्याकुल श्रीसरयू-गंगा संगमपर आए और वहाँ प्रायोपवेशन करके उन्होंने अपना प्राण त्याग दिया। स्वर्ग में पहुँचनेपर इंदुमतीकी वहाँ प्राप्ति हुई जो पूर्वअधिक सुन्दर थी । "तीर्थे तोय व्यतिकरभवे जह्नु कन्या सरथ्वोदँहत्यागादमरगणनालेख्यामासाद्य सद्यः पूर्वाकारांधिकतररुचा संगतः कान्तयासौ लीलागारेश्वरमत पुनर्नन्दनाभ्यन्तरेषु ।। ६५ ।।" इस तीर्थका महात्म्य स्कंदपुराण में यह लिखा है कि इस तीर्थ में किसी प्रकारभी जं देह त्याग करता है उसको अपने इष्ट वस्तुकी प्राप्ति होती है और आत्मघातका दोष नहीं लगता । यथा - "यथाकथंचित्तीर्थेऽस्मिन्देहत्यागं करोति यः । तस्यात्मघातदोषो न प्राप्नुयादीप्सितान्यपि । " ( मल्लिनाथटीका से ) ।
त्रिपाठीजी - जैसे कोई राजमार्ग पश्चिमसे पूर्वको जा रहा हो, उसमें एक मार्ग उत्तरसे आकर मिल जाय, और एक दक्षिण से आकर मिल जाय तो उन सङ्गमों के बीचके स्थलको तिमुहानी कहते हैं। इसी भाँति माधुर्ग्य गुणों के अनुध्यानसे भी भक्ति की प्राप्ति होती है, तथा ऐश्वर्थ्य गुणोंके अनुव्यानसे भी भक्तिकी ही प्राप्ति होती है, अतः रामसुयश, तथा 'सानुज रामसमरयश' दोनोंका भक्तिरूपी राजपथमेंही मिलना कहा । साधु और ऐश्वर्य्यका बिराग विचारयुक्त भक्ति में मिल जाने से यहाँ भी तिमुहानी हो गई ।
यहाँ पर श्रीगोस्वामीजीने हिन्दी संसारकी सीमाभी दिखला दी । हिन्दी भाषा-भाषी संसार के पश्चिमी सीमा यमुना नदी है, पूर्वकी सीमा गङ्गाशोणसङ्गम है । उत्तरकी सीमा सरयूनदी और दक्षिणकी सीमा शोष हैं। इन्हीं प्रान्तों में हिन्दी बोली जाती है । अतः इतने में ही श्रीगोस्वामीजीन अपने काव्यका रूपक बाँधा हूँ ।
टिप्पणी - १ ( क ) गङ्गा- सरयू सोनका सङ्गम 'तिमुहानी' हैं । त्रिविध तापकी त्रास करनेवाली तीनों नदियाँ हैं। जब ये तीनों त्रिमुहानी हुई तब रामस्वरूप सिन्धुके सम्मुख चलीं। भाव यह है कि जैसे इनका सङ्गम होनेपर समुद्रकी प्राप्ति होती हैं, वैसेही ज्ञान, वैराग्य और भक्ति होनेसे श्रीरामजी मिज़ते हैं । ( ३ ) 'सिंधु' कहनेका भाव यह है कि तीनों नदियोंका पर्यवसान समुद्र है और ज्ञान, वैराग्य, भक्ति प्रर्यवसान श्री रामजी हैं । ( ग ) गङ्गाजी में सोन और सरयका संगम कइकर तब समुद्र के सम्मुख चलन का अर्थात दोनोंको लेकर गङ्गाजी समुद्र में मिलीं । समुद्रके मिलने में गङ्गाजी मुख्य हैं, इसी तरह ज्ञान-वैराग्य-सहित श्रीरामजी की प्राप्ति करने में भक्ति मुख्य है ।
६६४ । श्रीमतेरामचन्द्राय नमः ।
नोट-२ (क) श्रीजानकीदासजा लिखते हैं कि 'सरयू, सोन और गङ्गा तीनों मिलकर समुद्रको चलीं। सरों समुहमें मिल वहाँ तिमुहानी गंगाकी धारा कुछ दूर समुद्र के भीतरतक चली गयी है। वैसेही यहाँ कैलाश.
दोदा ११५ से कीर्ति सरयू चलकर मनुशतरूपाजीकी अनन्य रामभक्ति में मिली फिर इसमें सानुज राम. समरा ( जो मारीच-सुपादु के समर में हुआ ) रूपी शोण मिला । ये तीनों श्रीरामचन्द्र के राजसिंहासन पर विमान स्वरूपके सम्मुख चलीं और मिलीं। इसके पश्चात् जो चरित 'प्रथम तिलक बसिष्ठ मुनि कीन्हा । ऋ० १६ । से लेकर शीतल अमराई के प्रसंग दोहा ५१ तक वर्णित है वह नित्य चरितफा हैं । यह निय पत्रिका वर्णन स्वरूप-सिंधुमें पहुँचकर धाराका कुछ दूरतक चला जाना है' । ( मा० प्र० ) । ( ख ) समुद्रके समीगंगाका चलना कहकरपले सरयू-शोण-गंगाळा संगम कहकर फिर समुद्र की ओर चलना क और संगमका फल कहा। केवल सरयका वर्णन करेंगे - ( मा० द० )
वीरकवि-यहाँ 'उक्तविषया गम्यवस्तूत्प्रेक्षा है क्योंकि बिना वाचक पदके उत्प्रेक्षा की गयी है। यहाँ अनुस, उत्प्रेक्षा और रूपक तीनोंकी संसृष्टि है।
मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही ॥ ५ ॥ अर्थ - इस कीर्ति-सरयूका मूल (उत्पत्तिस्थान ) मानस है और यह गंगाजी में मिली है । ( इस लिये ) इसके सुनने से सुजनोंका मन पवित्र हागा ॥ ५ ॥
नोट - १ यहाँसे सिंहावलोकन-न्याय काव्यरचना है अर्थात् जैसे सिंह चलकर फिर खड़ा होकर अगलयगल दृष्टि डालता है वैसेहो ऊपर राजतिलक प्रसंग कहकर फिर पीछेका प्रसंग मानस, गंगा और सरयूका वर्णन उठा और बीचके प्रसंग कहेंगे। समुद्र-संगम और संगमका माहात्म्य दो० ४० ( ४ ) में कहा, अब फिर सरयूका वर्णन करते हैं और माहात्म्य कहते हैं । यहाँ से आगे सरयूजी और कीतिसरयूका रूपक चला। टिप्पणी - १ ( क ) नदी कहकर अब नदी का मूल कहते हैं। इसका मूल मानस हैं । ( ख ) नदीका संगम समुद्रसे कहना चाहिये जैसे अन्य अन्य स्थानों में कहा है। यथा - ( क ) 'रिधि-सिधि-संपति नदी सुहाई । उमगि व बुधि फहँ आई ।२।१।। ( ख ) 'ढाइत भूप रूप तक भूला । चली त्रिपति बारिधि अनुकूला । २।३४ ।' तथा यहाँ भी समुद्र में मिलना कहा, यथा - 'त्रिविध ताप त्रासक तिमुहानी । रामसरूप सिंधु समुद्दानी ॥' (ग ) मल और संगम कहकर इस कीर्ति नदीका आदि और अन्त दोनों शुद्ध बतायं, सुनते ही सुजन बना देता है और मनको पावन करती है । अथवा यहाँ यह दिखाया कि श्रोता सुजन हैं इससे सुजनके मनको पवित्र करती है, आप पवित्र है और अपने श्रोताको पवित्र करती है। मनकी मलिनता विषय है; यथा - 'काई विषय मुकुर मन लागी । १।११५ । सुजनके मनको भी विषय मलिन करता है; यथा - 'विषय बस्य सुर नर मुनि स्वामी । में पौरपतु कपि प्रतिकामी ।। कि० २१ । (घ ) 'पावन करिही' कहनेका भाव यह है कि अभी तो चली है, आगे पावन करेगी।
नोट-पाँडेजी भी यही भाव कहते हैं अर्थात 'सुननेवालेको सुजन और उसके मनको पावन करेगी। 'सुजन = अपने जन= मुन्दर जन ।' इस अर्धाली में 'अधिक अभेदरूपक' का भाव है । त्रिपाठीजी लिखते हैं कि गोस्वामीजीके दो श्रोता है, एक सुजन दूसरा मन । अतः यहाँ 'सुजन और मन' दोनोंका ग्रहण है ।
विच विच कथा विचित्र विभागा । जनु सरि तीर तीर बनु वागा ॥ ६॥
* उत्तररामचरित में कहा है कि जिसकी उत्पत्ति ही पवित्र है, उसे और कोई क्या पवित्र करेगा ? जैसे तीर्थोके जल और श्रमिको पवित्र करनेवाला दूसरा नहीं है, यथा- 'उत्पत्तिः परिपूतायाः किमस्याः पावनान्तरैः । तोपदकं च वह्निम नान्यतः शुद्धिमतः ॥'
|
छः सौ तिरेसठ श्रीमद्रामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये । नोट - एक 'त्रिविध ताप त्रासक तिमुहानी' इति । जैसे तीन मुँहवाले मनुष्यको देखने से डर लगे वैसे ही तीन नदियोंके संगमपर तीव्र धारा भयावन लगती है। इसीसे 'त्रासक' कहा । त्रिविध = तीन प्रकारका अर्थात् दैहिक, दैविक और भौतिक यथा- 'दैहिक दैविक भौतिक तापा । सात । इक्कीस । एक ।। शारीरिक कष्ट जैसे ज्वर, खाँसी, फोड़ा, फुंसी इत्यादि रोग तथा काम, क्रोधादि मानसरोग दैहिक ताप है । देवताओं अर्थात् प्राकृतिक शक्तियों ग्रहादि द्वारा जो क्लेश होता है उसे दैविक ताप कहते हैं जैसे अतिवृष्टि, अनावृष्टि, विजली गिरना, पाला इत्यादि । सर्प, बिच्छू, पशु इत्यादि द्वारा जो दुःख हो वह भौतिक ताप हैं। इन्हींका दूसरा नाम आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक हैं । रघुवंश सर्ग आठ में श्रीसरयूगङ्गासंगम के प्रभावका उल्लेख मिलता है। उस प्रसंगकी कथा इस प्रकार है - 'श्री दशरथजी महाराजकी माता इन्दुमती थीं जिनको 'अ' महाराज स्वयंवर में जीतकर लाये थे । राजा दशरथकी बाल्यावस्था में एक दिन नारद मुनि वीणा बजाते हुए निकले, वीणापरसे एक पुष्पमाला खिसकी और श्री इन्दुमतीजीके हृदयपर गिरी जिससे उनके प्राण निकल गए। अज महाराज बहुत शोकातुर हुए तब वसिष्ठजीने शिष्य द्वारा उनको उपदेश कहला भेजा और बताया कि रानी इन्दुमती पूर्व जन्मकी अप्सरा है जो तृणबिन्दुऋषिका तपोभंग करनेको गई थी। ऋपिने मनुष्ययोनिमें जन्म लेनेका शाप दिया और प्रार्थना करनेपर देवपुष्पदर्शनतक शापकी अवधि नियुक्त कर दी । देवपुष्पके दर्शनसे उसका शाप समाप्त हुआ। उस समय दशरथजी बहुत छोटे थे। आठ वर्षके पश्चात् श्रीदशरथजीको राज्यपर बिठाके राजा अज उसी शोकसे व्याकुल श्रीसरयू-गंगा संगमपर आए और वहाँ प्रायोपवेशन करके उन्होंने अपना प्राण त्याग दिया। स्वर्ग में पहुँचनेपर इंदुमतीकी वहाँ प्राप्ति हुई जो पूर्वअधिक सुन्दर थी । "तीर्थे तोय व्यतिकरभवे जह्नु कन्या सरथ्वोदँहत्यागादमरगणनालेख्यामासाद्य सद्यः पूर्वाकारांधिकतररुचा संगतः कान्तयासौ लीलागारेश्वरमत पुनर्नन्दनाभ्यन्तरेषु ।। पैंसठ ।।" इस तीर्थका महात्म्य स्कंदपुराण में यह लिखा है कि इस तीर्थ में किसी प्रकारभी जं देह त्याग करता है उसको अपने इष्ट वस्तुकी प्राप्ति होती है और आत्मघातका दोष नहीं लगता । यथा - "यथाकथंचित्तीर्थेऽस्मिन्देहत्यागं करोति यः । तस्यात्मघातदोषो न प्राप्नुयादीप्सितान्यपि । " । त्रिपाठीजी - जैसे कोई राजमार्ग पश्चिमसे पूर्वको जा रहा हो, उसमें एक मार्ग उत्तरसे आकर मिल जाय, और एक दक्षिण से आकर मिल जाय तो उन सङ्गमों के बीचके स्थलको तिमुहानी कहते हैं। इसी भाँति माधुर्ग्य गुणों के अनुध्यानसे भी भक्ति की प्राप्ति होती है, तथा ऐश्वर्थ्य गुणोंके अनुव्यानसे भी भक्तिकी ही प्राप्ति होती है, अतः रामसुयश, तथा 'सानुज रामसमरयश' दोनोंका भक्तिरूपी राजपथमेंही मिलना कहा । साधु और ऐश्वर्य्यका बिराग विचारयुक्त भक्ति में मिल जाने से यहाँ भी तिमुहानी हो गई । यहाँ पर श्रीगोस्वामीजीने हिन्दी संसारकी सीमाभी दिखला दी । हिन्दी भाषा-भाषी संसार के पश्चिमी सीमा यमुना नदी है, पूर्वकी सीमा गङ्गाशोणसङ्गम है । उत्तरकी सीमा सरयूनदी और दक्षिणकी सीमा शोष हैं। इन्हीं प्रान्तों में हिन्दी बोली जाती है । अतः इतने में ही श्रीगोस्वामीजीन अपने काव्यका रूपक बाँधा हूँ । टिप्पणी - एक गङ्गा- सरयू सोनका सङ्गम 'तिमुहानी' हैं । त्रिविध तापकी त्रास करनेवाली तीनों नदियाँ हैं। जब ये तीनों त्रिमुहानी हुई तब रामस्वरूप सिन्धुके सम्मुख चलीं। भाव यह है कि जैसे इनका सङ्गम होनेपर समुद्रकी प्राप्ति होती हैं, वैसेही ज्ञान, वैराग्य और भक्ति होनेसे श्रीरामजी मिज़ते हैं । 'सिंधु' कहनेका भाव यह है कि तीनों नदियोंका पर्यवसान समुद्र है और ज्ञान, वैराग्य, भक्ति प्रर्यवसान श्री रामजी हैं । गङ्गाजी में सोन और सरयका संगम कइकर तब समुद्र के सम्मुख चलन का अर्थात दोनोंको लेकर गङ्गाजी समुद्र में मिलीं । समुद्रके मिलने में गङ्गाजी मुख्य हैं, इसी तरह ज्ञान-वैराग्य-सहित श्रीरामजी की प्राप्ति करने में भक्ति मुख्य है । छः सौ चौंसठ । श्रीमतेरामचन्द्राय नमः । नोट-दो श्रीजानकीदासजा लिखते हैं कि 'सरयू, सोन और गङ्गा तीनों मिलकर समुद्रको चलीं। सरों समुहमें मिल वहाँ तिमुहानी गंगाकी धारा कुछ दूर समुद्र के भीतरतक चली गयी है। वैसेही यहाँ कैलाश. दोदा एक सौ पंद्रह से कीर्ति सरयू चलकर मनुशतरूपाजीकी अनन्य रामभक्ति में मिली फिर इसमें सानुज राम. समरा रूपी शोण मिला । ये तीनों श्रीरामचन्द्र के राजसिंहासन पर विमान स्वरूपके सम्मुख चलीं और मिलीं। इसके पश्चात् जो चरित 'प्रथम तिलक बसिष्ठ मुनि कीन्हा । ऋशून्य सोलह । से लेकर शीतल अमराई के प्रसंग दोहा इक्यावन तक वर्णित है वह नित्य चरितफा हैं । यह निय पत्रिका वर्णन स्वरूप-सिंधुमें पहुँचकर धाराका कुछ दूरतक चला जाना है' । । समुद्रके समीगंगाका चलना कहकरपले सरयू-शोण-गंगाळा संगम कहकर फिर समुद्र की ओर चलना क और संगमका फल कहा। केवल सरयका वर्णन करेंगे - वीरकवि-यहाँ 'उक्तविषया गम्यवस्तूत्प्रेक्षा है क्योंकि बिना वाचक पदके उत्प्रेक्षा की गयी है। यहाँ अनुस, उत्प्रेक्षा और रूपक तीनोंकी संसृष्टि है। मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही ॥ पाँच ॥ अर्थ - इस कीर्ति-सरयूका मूल मानस है और यह गंगाजी में मिली है । इसके सुनने से सुजनोंका मन पवित्र हागा ॥ पाँच ॥ नोट - एक यहाँसे सिंहावलोकन-न्याय काव्यरचना है अर्थात् जैसे सिंह चलकर फिर खड़ा होकर अगलयगल दृष्टि डालता है वैसेहो ऊपर राजतिलक प्रसंग कहकर फिर पीछेका प्रसंग मानस, गंगा और सरयूका वर्णन उठा और बीचके प्रसंग कहेंगे। समुद्र-संगम और संगमका माहात्म्य दोशून्य चालीस में कहा, अब फिर सरयूका वर्णन करते हैं और माहात्म्य कहते हैं । यहाँ से आगे सरयूजी और कीतिसरयूका रूपक चला। टिप्पणी - एक नदी कहकर अब नदी का मूल कहते हैं। इसका मूल मानस हैं । नदीका संगम समुद्रसे कहना चाहिये जैसे अन्य अन्य स्थानों में कहा है। यथा - 'रिधि-सिधि-संपति नदी सुहाई । उमगि व बुधि फहँ आई ।दो।एक।। 'ढाइत भूप रूप तक भूला । चली त्रिपति बारिधि अनुकूला । दो।चौंतीस ।' तथा यहाँ भी समुद्र में मिलना कहा, यथा - 'त्रिविध ताप त्रासक तिमुहानी । रामसरूप सिंधु समुद्दानी ॥' मल और संगम कहकर इस कीर्ति नदीका आदि और अन्त दोनों शुद्ध बतायं, सुनते ही सुजन बना देता है और मनको पावन करती है । अथवा यहाँ यह दिखाया कि श्रोता सुजन हैं इससे सुजनके मनको पवित्र करती है, आप पवित्र है और अपने श्रोताको पवित्र करती है। मनकी मलिनता विषय है; यथा - 'काई विषय मुकुर मन लागी । एक।एक सौ पंद्रह । सुजनके मनको भी विषय मलिन करता है; यथा - 'विषय बस्य सुर नर मुनि स्वामी । में पौरपतु कपि प्रतिकामी ।। किशून्य इक्कीस । 'पावन करिही' कहनेका भाव यह है कि अभी तो चली है, आगे पावन करेगी। नोट-पाँडेजी भी यही भाव कहते हैं अर्थात 'सुननेवालेको सुजन और उसके मनको पावन करेगी। 'सुजन = अपने जन= मुन्दर जन ।' इस अर्धाली में 'अधिक अभेदरूपक' का भाव है । त्रिपाठीजी लिखते हैं कि गोस्वामीजीके दो श्रोता है, एक सुजन दूसरा मन । अतः यहाँ 'सुजन और मन' दोनोंका ग्रहण है । विच विच कथा विचित्र विभागा । जनु सरि तीर तीर बनु वागा ॥ छः॥ * उत्तररामचरित में कहा है कि जिसकी उत्पत्ति ही पवित्र है, उसे और कोई क्या पवित्र करेगा ? जैसे तीर्थोके जल और श्रमिको पवित्र करनेवाला दूसरा नहीं है, यथा- 'उत्पत्तिः परिपूतायाः किमस्याः पावनान्तरैः । तोपदकं च वह्निम नान्यतः शुद्धिमतः ॥'
|
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई है। दोनों राजनेताओं ने कोविड-19 महामारी से उत्पन्न स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियों पर अपने-अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। इसके साथ ही दोनों राजनेताओं ने अपने-अपने देशों में महामारी और इसके आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावों से निपटने के लिए अपनाए जा रहे उपायों पर एक-दूसरे को अपडेट किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चिकित्सा उत्पादों सहित आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सिंगापुर को हरसंभव सहयोग देने का वादा किया। पीएम मोदी ने सिंगापुर में भारतीय नागरिकों को दिए जा रहे व्यापक सहयोग के लिए भी सराहना की।
दोनों राजनेताओं ने वर्तमान संदर्भ में भारत-सिंगापुर रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर विशेष बल दिया। दोनों राजनेता कोविड-19 से उत्पन्न वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का समाधान करने के लिए आपसी सहयोग से काम करने पर सहमत हुए।
As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
|
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई है। दोनों राजनेताओं ने कोविड-उन्नीस महामारी से उत्पन्न स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियों पर अपने-अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। इसके साथ ही दोनों राजनेताओं ने अपने-अपने देशों में महामारी और इसके आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावों से निपटने के लिए अपनाए जा रहे उपायों पर एक-दूसरे को अपडेट किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चिकित्सा उत्पादों सहित आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सिंगापुर को हरसंभव सहयोग देने का वादा किया। पीएम मोदी ने सिंगापुर में भारतीय नागरिकों को दिए जा रहे व्यापक सहयोग के लिए भी सराहना की। दोनों राजनेताओं ने वर्तमान संदर्भ में भारत-सिंगापुर रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर विशेष बल दिया। दोनों राजनेता कोविड-उन्नीस से उत्पन्न वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का समाधान करने के लिए आपसी सहयोग से काम करने पर सहमत हुए। As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
|
रिश्ते की खूबसूरती कायम रखने के लिए भी कुछ चीजों पर अनिवार्य रूप से ध्यान देना जरूरी है। खुशी पाने का एक ही रास्ता है कि आप दूसरों को कराएं इसका एहसास। एक दूसरे को तभी पूरी तरह से अपना पायेंगे जब आप उनके गुणों के साथ उनकी खामियों को भी स्वीकरातें हैं, इससे एकदूसरे के प्रति सम्मान बढता है, जिससे आपका रिश्ता और करीबी हो जाता है। आप जब अपने पार्टनर का सम्मान करेंगे, तभी वो, भी आपको उतनी ही रिस्पेक्ट देगा। कैसे महकती रहे आपके दांपत्य की बगिया, जानिए कुछ खास बातें।
|
रिश्ते की खूबसूरती कायम रखने के लिए भी कुछ चीजों पर अनिवार्य रूप से ध्यान देना जरूरी है। खुशी पाने का एक ही रास्ता है कि आप दूसरों को कराएं इसका एहसास। एक दूसरे को तभी पूरी तरह से अपना पायेंगे जब आप उनके गुणों के साथ उनकी खामियों को भी स्वीकरातें हैं, इससे एकदूसरे के प्रति सम्मान बढता है, जिससे आपका रिश्ता और करीबी हो जाता है। आप जब अपने पार्टनर का सम्मान करेंगे, तभी वो, भी आपको उतनी ही रिस्पेक्ट देगा। कैसे महकती रहे आपके दांपत्य की बगिया, जानिए कुछ खास बातें।
|
सुनील ग्रोवर की हार्ट अटैक के बाद पिछले साल बाईपास सर्जरी हुई थी. (फोटो साभारः Instagram@whosunilgrover)
नई दिल्लीः सुनील ग्रोवर को पिछले साल हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद शायद ही वे किसी बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बने. 'द कपिल शर्मा शो' से निकलने के बाद उनकी किस्मत ऐसी बदली कि वे कभी आलू-टमाटर बेचते नजर आते हैं, तो कभी दूध. उन्हें जब बैटरी रिक्शा चलाते हुए देखा गया, तो लोग हैरान रह गए. अब सवाल उठता है कि इतने मशहूर और टैलेंटेड एक्टर को फिल्म इंडस्ट्री में कोई काम क्यों नहीं दे रहा है? क्या उनकी हालत अब इतनी खराब है कि उन्हें बैटरी रिक्शा चलाना पड़ रहा है?
सुनील ग्रोवर के फैंस को लगता है कि अगर उन्होंने 'द कपिल शर्मा शो' न छोड़ा होता, तो उन्हें यह दिन न देखने पड़ते. एक्टर को ऑटो चलाते हुए देखकर लग सकता है कि उनका फिल्म इंडस्ट्री से मोहभंग हो गया है, हालांकि ऐसा भी हो सकता है कि वे जिंदगी को आम लोगों की नजरों से देखना और महसूस करना चाहते हों. एक्टर की लेटेस्ट फोटोज से यही लगता है कि उन्हें आम लोगों की तरह जीना और उनकी तरह वक्त बिताना पसंद आ रहा है. उन्होंने बैटरी रिक्शा चलाते हुए जो फोटो शेयर की है, उसके कैप्शन में लिखा है- 'बैठो. ' एक्टर के फैंस तस्वीर पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं.
सुनील ग्रोवर का ऐसा हाल देखकर एक यूजर लिखता है, 'द कपिल शर्मा शो में रहे होते, तो रिक्शा न चलाना पड़ता. ' एक दूसरा यूजर उनका मजाक उड़ाते हुए कह रहा है, 'आगे से लेफ्ट लेकर द कपिल शर्मा शो छोड़ देना. ' तीसरा यूजर लिखता है, '10 रुपये सवारी हल्का हो या भारी जनहित में जारी. ' चौथे यूजर ने लिखा, 'भैया पीरागढ़ी के कितने? सही सही लगा लो, नहीं तो मैट्रो ले लूंगा. ' पाचवां यूजर लिखता है, 'भैया जी ऑनलाइन पैसे दें तो चलेगा, क्यूआर कोड लगाए हैं? ' फोटो में सुनील के शीशों पर 2 प्रतिबिंब दिख रहे हैं, जिसे लेकर एक अन्य यूजर लिखता है, 'मुझे 3 सुनील ग्रोवर दिख रहे हैं, कहीं मुझे चढ़ तो नहीं गई? ' कुछ यूजर्स उनकी सादगी की तरीफ कर रहे हैं. ऐसा ही एक यूजर लिखता है, 'आप इतने साधारण हैं कि इससे आपका व्यक्तित्व और निखरता है. ' एक्टर के एक फैन ने पूछा कि क्या कपिल शर्मा छोड़ने के बाद कोई काम नहीं दे रहा है?
सुनील के कुछ फैंस उनकी पिछली वेब सीरीज और शो का जिक्र कर रहे हैं. एक फैन पूछता है, 'क्या हम आपको 'सनफ्लॉवर' के सीजन 2 में देख पाएंगे? ' वहीं दूसरा फैन पूछता है, 'सर 'तांडव' का सीजन 2 कब आ रहा है? ' काम की बात करें, तो एक्टर पिछले साल रिलीज हुई फिल्म 'गुडबाय' में नजर आए थे, जिसमें वे पंडित जी के रोल में दिखे थे. 45 साल के सुनील ग्रोवर को असली पहचान 'द कपिल शर्मा शो' से मिली थी, जिसमें उन्हें 'गुत्थी', 'डॉक्टर मशहूर गुलाटी' और 'रिंकू देवी' के रोल में देखा गया था. कपिल शर्मा से लड़ाई होने के बाद उन्होंने कॉमेडी शो छोड़ दिया था, जिससे दर्शक काफी निराश हो गए थे.
हार्ट अटैक आने के बाद जिंदगी को लेकर बदला नजरिया?
सुनील ग्रोवर 'गब्बर इज बैक', 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' और 'भारत' जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के सिरसा जिले के कस्बे में जन्मे सुनील ग्रोवर ने पंजाब यूनिवर्सिटी से थियेटर में मास्टर की पढ़ाई की है. वे अपनी पत्नी आरती और बेटे मोहन के साथ रहते हैं. उन्हें पिछले साल फरवरी में हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी.
.
|
सुनील ग्रोवर की हार्ट अटैक के बाद पिछले साल बाईपास सर्जरी हुई थी. नई दिल्लीः सुनील ग्रोवर को पिछले साल हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद शायद ही वे किसी बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बने. 'द कपिल शर्मा शो' से निकलने के बाद उनकी किस्मत ऐसी बदली कि वे कभी आलू-टमाटर बेचते नजर आते हैं, तो कभी दूध. उन्हें जब बैटरी रिक्शा चलाते हुए देखा गया, तो लोग हैरान रह गए. अब सवाल उठता है कि इतने मशहूर और टैलेंटेड एक्टर को फिल्म इंडस्ट्री में कोई काम क्यों नहीं दे रहा है? क्या उनकी हालत अब इतनी खराब है कि उन्हें बैटरी रिक्शा चलाना पड़ रहा है? सुनील ग्रोवर के फैंस को लगता है कि अगर उन्होंने 'द कपिल शर्मा शो' न छोड़ा होता, तो उन्हें यह दिन न देखने पड़ते. एक्टर को ऑटो चलाते हुए देखकर लग सकता है कि उनका फिल्म इंडस्ट्री से मोहभंग हो गया है, हालांकि ऐसा भी हो सकता है कि वे जिंदगी को आम लोगों की नजरों से देखना और महसूस करना चाहते हों. एक्टर की लेटेस्ट फोटोज से यही लगता है कि उन्हें आम लोगों की तरह जीना और उनकी तरह वक्त बिताना पसंद आ रहा है. उन्होंने बैटरी रिक्शा चलाते हुए जो फोटो शेयर की है, उसके कैप्शन में लिखा है- 'बैठो. ' एक्टर के फैंस तस्वीर पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. सुनील ग्रोवर का ऐसा हाल देखकर एक यूजर लिखता है, 'द कपिल शर्मा शो में रहे होते, तो रिक्शा न चलाना पड़ता. ' एक दूसरा यूजर उनका मजाक उड़ाते हुए कह रहा है, 'आगे से लेफ्ट लेकर द कपिल शर्मा शो छोड़ देना. ' तीसरा यूजर लिखता है, 'दस रुपयापये सवारी हल्का हो या भारी जनहित में जारी. ' चौथे यूजर ने लिखा, 'भैया पीरागढ़ी के कितने? सही सही लगा लो, नहीं तो मैट्रो ले लूंगा. ' पाचवां यूजर लिखता है, 'भैया जी ऑनलाइन पैसे दें तो चलेगा, क्यूआर कोड लगाए हैं? ' फोटो में सुनील के शीशों पर दो प्रतिबिंब दिख रहे हैं, जिसे लेकर एक अन्य यूजर लिखता है, 'मुझे तीन सुनील ग्रोवर दिख रहे हैं, कहीं मुझे चढ़ तो नहीं गई? ' कुछ यूजर्स उनकी सादगी की तरीफ कर रहे हैं. ऐसा ही एक यूजर लिखता है, 'आप इतने साधारण हैं कि इससे आपका व्यक्तित्व और निखरता है. ' एक्टर के एक फैन ने पूछा कि क्या कपिल शर्मा छोड़ने के बाद कोई काम नहीं दे रहा है? सुनील के कुछ फैंस उनकी पिछली वेब सीरीज और शो का जिक्र कर रहे हैं. एक फैन पूछता है, 'क्या हम आपको 'सनफ्लॉवर' के सीजन दो में देख पाएंगे? ' वहीं दूसरा फैन पूछता है, 'सर 'तांडव' का सीजन दो कब आ रहा है? ' काम की बात करें, तो एक्टर पिछले साल रिलीज हुई फिल्म 'गुडबाय' में नजर आए थे, जिसमें वे पंडित जी के रोल में दिखे थे. पैंतालीस साल के सुनील ग्रोवर को असली पहचान 'द कपिल शर्मा शो' से मिली थी, जिसमें उन्हें 'गुत्थी', 'डॉक्टर मशहूर गुलाटी' और 'रिंकू देवी' के रोल में देखा गया था. कपिल शर्मा से लड़ाई होने के बाद उन्होंने कॉमेडी शो छोड़ दिया था, जिससे दर्शक काफी निराश हो गए थे. हार्ट अटैक आने के बाद जिंदगी को लेकर बदला नजरिया? सुनील ग्रोवर 'गब्बर इज बैक', 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' और 'भारत' जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के सिरसा जिले के कस्बे में जन्मे सुनील ग्रोवर ने पंजाब यूनिवर्सिटी से थियेटर में मास्टर की पढ़ाई की है. वे अपनी पत्नी आरती और बेटे मोहन के साथ रहते हैं. उन्हें पिछले साल फरवरी में हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी. .
|
म्यूनिख/नई दिल्ली, 27 जून (वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सुझाव दिया कि वैश्विक स्तर (global scale) पर खाद्य सुरक्षा के विषय से निपटने के लिए जी -7 के सदस्य देश उर्वरक उत्पादन बढ़ाने के भारत के प्रयासों में सहयोग कर सकते हैं। इसी संदर्भ में मोदी ने यह भी कहा कि जी-7 समूह के देशों में भारतीय कृषि प्रतिभा के व्यापक उपयोग के लिए कोई प्रणाली भी बनायी सकता है। प्रधानमंत्री ने समूह को पौष्टिक आहार के एक विकल्प के रूप में बाजरा की खेती और इसके उपभोग को प्रोत्साहित करने के अभियान में मदद करने का भी सुझाव दिया। मोदी जर्मनी में आयोजित जी 7 शिखर सम्मेलन में सोमवार को ' मिल-जुल कर और सशक्तः खाद्य सुरक्षा (food security) और स्त्री-पुरुष समानता का संवर्धन' विषय पर एक सत्र को संबोधित कर रहे थे।
मोदी ने "क्या जी7 अपने सदस्य देशों में भारतीय कृषि प्रतिभा के व्यापक उपयोग के लिए कोई सुसंगठित प्रणाली बना सकता है" श्री मोदी का कहना था कि भारत के किसानों की पारंपरिक प्रतिभा की मदद से जी7 देशों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
बाजरा को पौष्टिक आहार के रूप में प्रोत्साहित किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि दुनिया वर्ष 2023 को 'अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष" के रूप में मनाने जा रही है।
उन्होंने भारत में हो रही 'प्राकृतिक खेती' क्रांति का उल्लेख किया और कहा कि जी7 विशेषज्ञ इस प्रयोग का अध्ययन कर सकते हैं और कहा कि भारत ने इस विषय पर सदस्यों के साथ एक गैर-पत्र साझा किया है।
प्रधानमंत्री ने स्त्री पुरूष समानता के मुद्दे पर कहा कि भारत की सोच 'महिला विकास' से 'महिलाओं के नेतृत्व में विकास' की ओर बढ़ रही है। देश में 60 लाख से अधिक भारतीय महिला फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं ने महामारी के दौरान हमारे नागरिकों को सुरक्षित रखा। हमारी महिला वैज्ञानिकों ने भारत में टीके और परीक्षण किट विकसित करने में बड़ा योगदान दिया है।
"इससे पता चलता है कि भारतीय महिलाएं आज वास्तविक निर्णय लेने में पूरी तरह से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगले साल भारत जी20 की अध्यक्षता करने जा रहा है। हम जी20 प्लेटफॉर्म के तहत कोविड के बाद रिकवरी समेत अन्य मुद्दों पर जी7 देशों के साथ करीबी संवाद बनाए रखेंगे।
|
म्यूनिख/नई दिल्ली, सत्ताईस जून । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सुझाव दिया कि वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा के विषय से निपटने के लिए जी -सात के सदस्य देश उर्वरक उत्पादन बढ़ाने के भारत के प्रयासों में सहयोग कर सकते हैं। इसी संदर्भ में मोदी ने यह भी कहा कि जी-सात समूह के देशों में भारतीय कृषि प्रतिभा के व्यापक उपयोग के लिए कोई प्रणाली भी बनायी सकता है। प्रधानमंत्री ने समूह को पौष्टिक आहार के एक विकल्प के रूप में बाजरा की खेती और इसके उपभोग को प्रोत्साहित करने के अभियान में मदद करने का भी सुझाव दिया। मोदी जर्मनी में आयोजित जी सात शिखर सम्मेलन में सोमवार को ' मिल-जुल कर और सशक्तः खाद्य सुरक्षा और स्त्री-पुरुष समानता का संवर्धन' विषय पर एक सत्र को संबोधित कर रहे थे। मोदी ने "क्या जीसात अपने सदस्य देशों में भारतीय कृषि प्रतिभा के व्यापक उपयोग के लिए कोई सुसंगठित प्रणाली बना सकता है" श्री मोदी का कहना था कि भारत के किसानों की पारंपरिक प्रतिभा की मदद से जीसात देशों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। बाजरा को पौष्टिक आहार के रूप में प्रोत्साहित किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि दुनिया वर्ष दो हज़ार तेईस को 'अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष" के रूप में मनाने जा रही है। उन्होंने भारत में हो रही 'प्राकृतिक खेती' क्रांति का उल्लेख किया और कहा कि जीसात विशेषज्ञ इस प्रयोग का अध्ययन कर सकते हैं और कहा कि भारत ने इस विषय पर सदस्यों के साथ एक गैर-पत्र साझा किया है। प्रधानमंत्री ने स्त्री पुरूष समानता के मुद्दे पर कहा कि भारत की सोच 'महिला विकास' से 'महिलाओं के नेतृत्व में विकास' की ओर बढ़ रही है। देश में साठ लाख से अधिक भारतीय महिला फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं ने महामारी के दौरान हमारे नागरिकों को सुरक्षित रखा। हमारी महिला वैज्ञानिकों ने भारत में टीके और परीक्षण किट विकसित करने में बड़ा योगदान दिया है। "इससे पता चलता है कि भारतीय महिलाएं आज वास्तविक निर्णय लेने में पूरी तरह से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगले साल भारत जीबीस की अध्यक्षता करने जा रहा है। हम जीबीस प्लेटफॉर्म के तहत कोविड के बाद रिकवरी समेत अन्य मुद्दों पर जीसात देशों के साथ करीबी संवाद बनाए रखेंगे।
|
उन्हें। मोरोज़ोव।
इसमें रुचि आकस्मिक नहीं थीः प्रदर्शनी से ठीक एक सप्ताह पहले पोलिश और यूक्रेनी मीडिया ने बताया कि यह मशीन लाइसेंस के तहत पोलैंड में निर्मित की जाएगी। DozoraB के पोलिश संस्करण को ऑन्सीला कहा गया और बैलिस्टिक और खदान संरक्षण के लिए नाटो मानकों के पूर्ण अनुपालन में यूक्रेनी मूल से अलग है। इसके अलावा, इस मशीन का पहला प्रोटोटाइप पोलिश निर्माता द्वारा इस वर्ष के जुलाई के अंत में पहले से ही इकट्ठा किया गया था, हालांकि अब तक यूक्रेनी-निर्मित घटकों का उपयोग कर रहा है।
ऐसा लगता है कि मामला अभूतपूर्व हैः एक नाटो सदस्य देश लाइसेंस के तहत यूक्रेनी बख्तरबंद वाहनों का उत्पादन करने की तैयारी कर रहा है! क्या वास्तव में पश्चिमी देशों में इतनी दिलचस्पी है हथियारक्या आप लाइसेंस के तहत इसका उत्पादन करने के लिए तैयार हैं? हालांकि, इस तरह के अचानक निष्कर्ष बनाने से पहले, यह समझने लायक है। चूंकि, करीबी परीक्षा में, स्थिति इतनी आशावादी नहीं लगती है।
कीव और वॉरसॉ के बीच दोस्ती के लंबे समय के आश्वासन के साथ शुरू करने के लिए, उनके सैन्य-तकनीकी सहयोग कभी भी विशेष रूप से सफल नहीं रहे हैं। इसके अलावा, अगर यूक्रेनी और पोलिश बंदूकधारियों ने विश्व हथियारों के बाजार पर मुलाकात की, तो शायद प्रत्यक्ष प्रतियोगियों के रूप में। इसके अलावा, एक नियम के रूप में, ये बैठकें हमारी हार के साथ समाप्त हुईं, लेकिन मुख्य रूप से राजनीतिक कारणों से। और यह बख्तरबंद वाहनों की बिक्री का क्षेत्र था जो मुख्य टकराव का दृश्य बन गया।
एक क्लासिक उदाहरण बन गया है कहानी यूक्रेनी की खरीद के लिए एक निविदा के साथ टैंक 2002 में मलेशिया, जिसमें विशेषज्ञों ने या तो कीव के लिए एक जीत की भविष्यवाणी की, T84 टैंक के साथ T90 टैंक या मास्को का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा, यूक्रेनी विशेषज्ञों ने आश्वस्त कियाः T84 अन्य निर्माताओं की कारों की तुलना में मलेशिया की जलवायु परिस्थितियों के लिए अधिक उपयुक्त है। और RT91 "Tvarda" टैंक को टेंडर के लिए पोल को प्रस्तुत किया गया था, इसे किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया। यूक्रेनी और रूसी अल्ट्रामोडर्न वाहनों की पृष्ठभूमि के खिलाफ, बल्कि फीका लग रहा था, क्योंकि यह नया नहीं था - यह पिछली सदी के 72 के दशक के उत्तरार्ध में विकसित एक आधुनिक सोवियत T60 टैंक से ज्यादा कुछ नहीं था।
लेकिन डंडे जीत गए! इसके अलावा, मलेशिया ने पुराने सोवियत टैंक के पोलिश आधुनिकीकरण के लिए स्वेच्छा से कुल 250 मिलियन डॉलर - 3,9 मिलियन प्रति यूनिट की लागत रखी। यह इस तथ्य के बावजूद है कि Ukrainians ने 2,5 मिलियन डॉलर के बारे में एक नए टैंक के लिए अनुरोध किया। जैसा कि हमारे "रक्षकों" ने कहा, मलेशियाई निविदा में ऐसा अप्रत्याशित मोड़ पूरी तरह से यूक्रेनी राजनयिकों के विवेक पर था, जिन्होंने हमारे देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर ध्यान नहीं दिया था। हालांकि, यह मामला, जाहिर है, अभी भी अलग थाः मलेशिया में, पश्चिमी हथियार लॉबी ने यूक्रेनी डिजाइन विचारों और प्रौद्योगिकियों का विरोध किया। और निश्चित रूप से वह जीत गई।
इस घटना ने यूक्रेनी टैंक बिल्डरों को सतर्क कर दिया। तथ्य यह है कि पोलैंड, अपने स्वयं के मूल बख्तरबंद वाहनों के विकास और उत्पादन में भिन्न नहीं है, फिर भी सोवियत मॉडल का सक्रिय रूप से आधुनिकीकरण कर रहा है, जिसमें यूक्रेन में भी शामिल हैं। उनके कथित RT91 के अलावा, जो वास्तव में T72 टैंक से "रीमेक" हैं, डंडे सोवियत-नाटो "संकर" की एक पूरी श्रृंखला की पेशकश कर सकते हैं जो पूर्व समाजवादी शिविर के देशों के लिए प्रासंगिक हैं। उदाहरण के लिए, BWO40 बख्तरबंद वाहन जो वे पेश करते हैं वह एक एमटीएलबी बहुउद्देश्यीय बख्तरबंद ट्रैक्टर है जिसे खार्कोव में 40mm स्वीडिश बंदूक से डिजाइन और निर्मित किया गया है। इसी समय, पोलैंड में "अपने" बख्तरबंद वाहनों के उत्पादन के लिए पर्याप्त से अधिक "सामग्री" बनी हुई है, इसके आधार पर - यूक्रेनी MTLBs सहित 700 बख्तरबंद वाहनों से अधिक संग्रहीत हैं। सबसे लगातार सिकुड़ती पोलिश सेना यह सब अच्छा है बस बेकार है।
हालांकि, सभी अच्छी चीजें जल्द या बाद में समाप्त हो जाती हैं। गंभीर खरीदारों के बीच आधुनिक उपकरणों की सफलता भी कम हो रही है। क्योंकि अब पोलैंड नए हथियारों के उत्पादन और हथियारों के बाजार पर उनके प्रचार पर दांव लगा रहा है। और भागीदारों के रूप में, Ukrainians को भी आमंत्रित किया गया था। विशेष रूप से, इस साल मई में, यूक्रेन के रक्षा मंत्री अर्तुरो बबेंको, जिन्होंने वारसॉ में रक्षा उद्योग के मुद्दों पर यूक्रेनी-पोलिश मंच में भाग लिया, ने खुशी से कीव में अपनी वापसी की घोषणा की कि हम संयुक्त रूप से तीसरे देशों में हथियारों और सैन्य उपकरणों को विकसित करेंगे और बढ़ावा देंगे।
तथ्य यह है कि यूक्रेनी टैंक बिल्डरों में एक शक्तिशाली क्षमता है और डंडे के लिए दिलचस्प है जो अपने स्वयं के विकास के साथ चमकते नहीं हैं, किसी को भी संदेह नहीं है। लेकिन तथ्य यह है कि पोलैंड, नाटो के एक सदस्य के रूप में, वास्तव में नए हथियार बनाने के लिए तैयार है और उन्हें समान साझेदार के रूप में Ukrainians के साथ व्यापार करना मुश्किल है, विश्वास करना मुश्किल है।
यूक्रेनी के साथ वर्तमान स्थिति के रूप में पोलैंड में लाइसेंस प्राप्त BBM DozorB लाइसेंस के साथ, ये संदेह उचित थे। क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय का नेतृत्व वारसॉ में क्या सहमत है, लेकिन हम तीसरे देशों के लिए बख्तरबंद वाहनों के विकास और संयुक्त बिक्री में किसी भी समान भागीदारी के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। DozorB यूक्रेनी रक्षा उद्योग का नवीनतम विकास है (कार को पहली बार 24 पर यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस पर कीव में Khreshchatyk में प्रस्तुत किया गया था)। जैसा कि यह पता चला है, इसे अपनी सेना की आवश्यकता नहीं है - Yanukovych की सत्ता में आने के साथ, यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के पास इसे खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। डंडे ने तुरंत इस स्थिति का लाभ उठाया, उन्हें इस विकास के लिए लाइसेंस बेचने की पेशकश की। इस तथ्य को देखते हुए कि यूक्रेनी डेवलपर्स पूरी तरह से अनुबंध की राशि देने से इनकार करते हैं, हम बहुत कम पैसे के बारे में बात कर रहे हैं। वास्तव में, ऐसी स्थिति में पोलिश निर्माता गंभीर मात्रा में लेट जाएंगे?
सबसे दिलचस्प बात यह है कि पोलैंड में लाइसेंस प्राप्त डोज़ोराबी का उत्पादन मिस्टा कंपनी द्वारा संभाला जाएगा, जो रक्षा उद्योग परिसर से संबंधित नहीं हैः यह खुदाई और सड़क कार्यों के लिए मशीनों में माहिर है। यही है, वास्तव में, न केवल पश्चिमी "रक्षा उद्योग", जैसा कि पहले था, यूक्रेनी सैन्य-औद्योगिक परिसर से प्रौद्योगिकियों को पंप कर रहे हैं, साथ ही निर्माताओं . . . ग्रेडर।
एक ओर, विदेशों में अपने वंश के लिए लाइसेंस बेचने वाले यूक्रेनी डिजाइनर समझ सकते हैंः यदि सेना और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा नए हथियारों और उपकरणों की आवश्यकता नहीं है, तो इसके उत्पादन के लिए लाइसेंस क्यों नहीं बेचते हैं? दूसरों को बाहर जाने दो, अगर वे हमारे अपने मूल्य नहीं रखते हैं। आप डंडे को समझ सकते हैंः यूक्रेनी विकास का उपयोग न करना एक पाप है, क्योंकि वे स्वयं यूक्रेन में उपयोगी नहीं थे।
|
उन्हें। मोरोज़ोव। इसमें रुचि आकस्मिक नहीं थीः प्रदर्शनी से ठीक एक सप्ताह पहले पोलिश और यूक्रेनी मीडिया ने बताया कि यह मशीन लाइसेंस के तहत पोलैंड में निर्मित की जाएगी। DozoraB के पोलिश संस्करण को ऑन्सीला कहा गया और बैलिस्टिक और खदान संरक्षण के लिए नाटो मानकों के पूर्ण अनुपालन में यूक्रेनी मूल से अलग है। इसके अलावा, इस मशीन का पहला प्रोटोटाइप पोलिश निर्माता द्वारा इस वर्ष के जुलाई के अंत में पहले से ही इकट्ठा किया गया था, हालांकि अब तक यूक्रेनी-निर्मित घटकों का उपयोग कर रहा है। ऐसा लगता है कि मामला अभूतपूर्व हैः एक नाटो सदस्य देश लाइसेंस के तहत यूक्रेनी बख्तरबंद वाहनों का उत्पादन करने की तैयारी कर रहा है! क्या वास्तव में पश्चिमी देशों में इतनी दिलचस्पी है हथियारक्या आप लाइसेंस के तहत इसका उत्पादन करने के लिए तैयार हैं? हालांकि, इस तरह के अचानक निष्कर्ष बनाने से पहले, यह समझने लायक है। चूंकि, करीबी परीक्षा में, स्थिति इतनी आशावादी नहीं लगती है। कीव और वॉरसॉ के बीच दोस्ती के लंबे समय के आश्वासन के साथ शुरू करने के लिए, उनके सैन्य-तकनीकी सहयोग कभी भी विशेष रूप से सफल नहीं रहे हैं। इसके अलावा, अगर यूक्रेनी और पोलिश बंदूकधारियों ने विश्व हथियारों के बाजार पर मुलाकात की, तो शायद प्रत्यक्ष प्रतियोगियों के रूप में। इसके अलावा, एक नियम के रूप में, ये बैठकें हमारी हार के साथ समाप्त हुईं, लेकिन मुख्य रूप से राजनीतिक कारणों से। और यह बख्तरबंद वाहनों की बिक्री का क्षेत्र था जो मुख्य टकराव का दृश्य बन गया। एक क्लासिक उदाहरण बन गया है कहानी यूक्रेनी की खरीद के लिए एक निविदा के साथ टैंक दो हज़ार दो में मलेशिया, जिसमें विशेषज्ञों ने या तो कीव के लिए एक जीत की भविष्यवाणी की, Tचौरासी टैंक के साथ Tनब्बे टैंक या मास्को का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा, यूक्रेनी विशेषज्ञों ने आश्वस्त कियाः Tचौरासी अन्य निर्माताओं की कारों की तुलना में मलेशिया की जलवायु परिस्थितियों के लिए अधिक उपयुक्त है। और RTइक्यानवे "Tvarda" टैंक को टेंडर के लिए पोल को प्रस्तुत किया गया था, इसे किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया। यूक्रेनी और रूसी अल्ट्रामोडर्न वाहनों की पृष्ठभूमि के खिलाफ, बल्कि फीका लग रहा था, क्योंकि यह नया नहीं था - यह पिछली सदी के बहत्तर के दशक के उत्तरार्ध में विकसित एक आधुनिक सोवियत Tसाठ टैंक से ज्यादा कुछ नहीं था। लेकिन डंडे जीत गए! इसके अलावा, मलेशिया ने पुराने सोवियत टैंक के पोलिश आधुनिकीकरण के लिए स्वेच्छा से कुल दो सौ पचास मिलियन डॉलर - तीन,नौ मिलियन प्रति यूनिट की लागत रखी। यह इस तथ्य के बावजूद है कि Ukrainians ने दो,पाँच मिलियन डॉलर के बारे में एक नए टैंक के लिए अनुरोध किया। जैसा कि हमारे "रक्षकों" ने कहा, मलेशियाई निविदा में ऐसा अप्रत्याशित मोड़ पूरी तरह से यूक्रेनी राजनयिकों के विवेक पर था, जिन्होंने हमारे देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर ध्यान नहीं दिया था। हालांकि, यह मामला, जाहिर है, अभी भी अलग थाः मलेशिया में, पश्चिमी हथियार लॉबी ने यूक्रेनी डिजाइन विचारों और प्रौद्योगिकियों का विरोध किया। और निश्चित रूप से वह जीत गई। इस घटना ने यूक्रेनी टैंक बिल्डरों को सतर्क कर दिया। तथ्य यह है कि पोलैंड, अपने स्वयं के मूल बख्तरबंद वाहनों के विकास और उत्पादन में भिन्न नहीं है, फिर भी सोवियत मॉडल का सक्रिय रूप से आधुनिकीकरण कर रहा है, जिसमें यूक्रेन में भी शामिल हैं। उनके कथित RTइक्यानवे के अलावा, जो वास्तव में Tबहत्तर टैंक से "रीमेक" हैं, डंडे सोवियत-नाटो "संकर" की एक पूरी श्रृंखला की पेशकश कर सकते हैं जो पूर्व समाजवादी शिविर के देशों के लिए प्रासंगिक हैं। उदाहरण के लिए, BWOचालीस बख्तरबंद वाहन जो वे पेश करते हैं वह एक एमटीएलबी बहुउद्देश्यीय बख्तरबंद ट्रैक्टर है जिसे खार्कोव में चालीस मिलीमीटर स्वीडिश बंदूक से डिजाइन और निर्मित किया गया है। इसी समय, पोलैंड में "अपने" बख्तरबंद वाहनों के उत्पादन के लिए पर्याप्त से अधिक "सामग्री" बनी हुई है, इसके आधार पर - यूक्रेनी MTLBs सहित सात सौ बख्तरबंद वाहनों से अधिक संग्रहीत हैं। सबसे लगातार सिकुड़ती पोलिश सेना यह सब अच्छा है बस बेकार है। हालांकि, सभी अच्छी चीजें जल्द या बाद में समाप्त हो जाती हैं। गंभीर खरीदारों के बीच आधुनिक उपकरणों की सफलता भी कम हो रही है। क्योंकि अब पोलैंड नए हथियारों के उत्पादन और हथियारों के बाजार पर उनके प्रचार पर दांव लगा रहा है। और भागीदारों के रूप में, Ukrainians को भी आमंत्रित किया गया था। विशेष रूप से, इस साल मई में, यूक्रेन के रक्षा मंत्री अर्तुरो बबेंको, जिन्होंने वारसॉ में रक्षा उद्योग के मुद्दों पर यूक्रेनी-पोलिश मंच में भाग लिया, ने खुशी से कीव में अपनी वापसी की घोषणा की कि हम संयुक्त रूप से तीसरे देशों में हथियारों और सैन्य उपकरणों को विकसित करेंगे और बढ़ावा देंगे। तथ्य यह है कि यूक्रेनी टैंक बिल्डरों में एक शक्तिशाली क्षमता है और डंडे के लिए दिलचस्प है जो अपने स्वयं के विकास के साथ चमकते नहीं हैं, किसी को भी संदेह नहीं है। लेकिन तथ्य यह है कि पोलैंड, नाटो के एक सदस्य के रूप में, वास्तव में नए हथियार बनाने के लिए तैयार है और उन्हें समान साझेदार के रूप में Ukrainians के साथ व्यापार करना मुश्किल है, विश्वास करना मुश्किल है। यूक्रेनी के साथ वर्तमान स्थिति के रूप में पोलैंड में लाइसेंस प्राप्त BBM DozorB लाइसेंस के साथ, ये संदेह उचित थे। क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय का नेतृत्व वारसॉ में क्या सहमत है, लेकिन हम तीसरे देशों के लिए बख्तरबंद वाहनों के विकास और संयुक्त बिक्री में किसी भी समान भागीदारी के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। DozorB यूक्रेनी रक्षा उद्योग का नवीनतम विकास है । जैसा कि यह पता चला है, इसे अपनी सेना की आवश्यकता नहीं है - Yanukovych की सत्ता में आने के साथ, यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के पास इसे खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। डंडे ने तुरंत इस स्थिति का लाभ उठाया, उन्हें इस विकास के लिए लाइसेंस बेचने की पेशकश की। इस तथ्य को देखते हुए कि यूक्रेनी डेवलपर्स पूरी तरह से अनुबंध की राशि देने से इनकार करते हैं, हम बहुत कम पैसे के बारे में बात कर रहे हैं। वास्तव में, ऐसी स्थिति में पोलिश निर्माता गंभीर मात्रा में लेट जाएंगे? सबसे दिलचस्प बात यह है कि पोलैंड में लाइसेंस प्राप्त डोज़ोराबी का उत्पादन मिस्टा कंपनी द्वारा संभाला जाएगा, जो रक्षा उद्योग परिसर से संबंधित नहीं हैः यह खुदाई और सड़क कार्यों के लिए मशीनों में माहिर है। यही है, वास्तव में, न केवल पश्चिमी "रक्षा उद्योग", जैसा कि पहले था, यूक्रेनी सैन्य-औद्योगिक परिसर से प्रौद्योगिकियों को पंप कर रहे हैं, साथ ही निर्माताओं . . . ग्रेडर। एक ओर, विदेशों में अपने वंश के लिए लाइसेंस बेचने वाले यूक्रेनी डिजाइनर समझ सकते हैंः यदि सेना और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा नए हथियारों और उपकरणों की आवश्यकता नहीं है, तो इसके उत्पादन के लिए लाइसेंस क्यों नहीं बेचते हैं? दूसरों को बाहर जाने दो, अगर वे हमारे अपने मूल्य नहीं रखते हैं। आप डंडे को समझ सकते हैंः यूक्रेनी विकास का उपयोग न करना एक पाप है, क्योंकि वे स्वयं यूक्रेन में उपयोगी नहीं थे।
|
कॉलिंग वाली स्मार्टवॉच खरीदने का प्लान है, तो बौल्ट ऑडियो की नई वॉच आपके लिए एक बढ़िया ऑप्शन हो सकती है। कंपनी ने अपने नई वॉच के तौर पर Boult Audio Drift Pro को लॉन्च कर दिया है।
बौल्ट ऑडियो ड्रिफ्ट प्रो एक स्क्वायर डायल और एक डिजिटल क्राउन के साथ आती है जो इसे ऐप्पल वॉच का लुक देता है। यह IP67 रेटेड वॉटर रेसिस्टेंट है। स्मार्टवॉच में 1. 78-इंच एमोलेड डिस्प्ले है जिसका रिजॉल्यूशन 368x448 पिक्सेल और 800 निट्स पीक ब्राइटनेस है। नई वॉच में ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले फंक्शन और कस्टमाइजेबल वॉच फेस भी मिलते हैं।
हेल्थ फीचर्स की बात करें तो, नई Boult Audio Drift Pro में हार्ट रेट मॉनिटर, SpO2 मॉनिटर, पीरियड ट्रैकर और स्लीप मॉनिटर जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसके अलावा, वॉच में सेडेंटरी और हाइड्रेशन रिमाइंडर की सुविधा भी मिलती है। वॉच में 120 से अधिक स्पोर्ट्स मोड का सपोर्ट मिलता है, जैसे क्रिकेट, योग, रनिंग, साइकिलिंग आदि।
कॉलिंग वाली बौल्ट ड्रिफ्ट प्रो वॉच में एक बिल्ट-इन माइक्रोफोन और स्पीकर मिलता है। इसके अलावा, वॉच में डायल पैड, कॉन्टैक्ट्स सिंक जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। इतना ही नहीं, अगर आप बोर हो रहे हैं तो वॉच में इन-बिल्ट गेम्स भी मिलते हैं। वॉच के अन्य खास फीचर्स में ई-कार्ड, कैलकुलेटर, टॉर्च, स्मार्ट नोटिफिकेशन और डीएनडी मोड शामिल है। कंपनी का दावा है कि वॉच फुल चार्ज में 10 दिनों तक चलती है।
बौल्ट ऑडियो ड्रिफ्ट प्रो की कीमत 1,999 रुपये है और यह ब्लैक, ब्लू और क्रीम कलर में उपलब्ध है। इसे आज से फ्लिपकार्ट और कंपनी की वेबसाइट से खरीदा जा सकता है।
|
कॉलिंग वाली स्मार्टवॉच खरीदने का प्लान है, तो बौल्ट ऑडियो की नई वॉच आपके लिए एक बढ़िया ऑप्शन हो सकती है। कंपनी ने अपने नई वॉच के तौर पर Boult Audio Drift Pro को लॉन्च कर दिया है। बौल्ट ऑडियो ड्रिफ्ट प्रो एक स्क्वायर डायल और एक डिजिटल क्राउन के साथ आती है जो इसे ऐप्पल वॉच का लुक देता है। यह IPसरसठ रेटेड वॉटर रेसिस्टेंट है। स्मार्टवॉच में एक. अठहत्तर-इंच एमोलेड डिस्प्ले है जिसका रिजॉल्यूशन तीन सौ अड़सठxचार सौ अड़तालीस पिक्सेल और आठ सौ निट्स पीक ब्राइटनेस है। नई वॉच में ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले फंक्शन और कस्टमाइजेबल वॉच फेस भी मिलते हैं। हेल्थ फीचर्स की बात करें तो, नई Boult Audio Drift Pro में हार्ट रेट मॉनिटर, SpOदो मॉनिटर, पीरियड ट्रैकर और स्लीप मॉनिटर जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसके अलावा, वॉच में सेडेंटरी और हाइड्रेशन रिमाइंडर की सुविधा भी मिलती है। वॉच में एक सौ बीस से अधिक स्पोर्ट्स मोड का सपोर्ट मिलता है, जैसे क्रिकेट, योग, रनिंग, साइकिलिंग आदि। कॉलिंग वाली बौल्ट ड्रिफ्ट प्रो वॉच में एक बिल्ट-इन माइक्रोफोन और स्पीकर मिलता है। इसके अलावा, वॉच में डायल पैड, कॉन्टैक्ट्स सिंक जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। इतना ही नहीं, अगर आप बोर हो रहे हैं तो वॉच में इन-बिल्ट गेम्स भी मिलते हैं। वॉच के अन्य खास फीचर्स में ई-कार्ड, कैलकुलेटर, टॉर्च, स्मार्ट नोटिफिकेशन और डीएनडी मोड शामिल है। कंपनी का दावा है कि वॉच फुल चार्ज में दस दिनों तक चलती है। बौल्ट ऑडियो ड्रिफ्ट प्रो की कीमत एक,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है और यह ब्लैक, ब्लू और क्रीम कलर में उपलब्ध है। इसे आज से फ्लिपकार्ट और कंपनी की वेबसाइट से खरीदा जा सकता है।
|
यह ध्यान देने योग्य है कि स्केटबोर्ड और पैनी बोर्ड पर आंदोलन का सिद्धांत अलग नहीं है। समेकन की संरचना और निर्माण भी समान हैं, लेकिन इसमें शामिल सामग्रियों की विशेषताओं में महत्वपूर्ण अंतर हैं।
यह एक बार में नहीं कहा जा सकता है कि यह यात्रा के उपरोक्त साधनों में से प्रत्येक का प्रतिनिधित्व करने के बिना स्केटबोर्ड या पैनी बोर्ड के लिए बेहतर है।
स्केटबोर्ड डेक 70 सेमी लंबा लकड़ी से बना है। शीर्ष से यह एक दृढ़ कवर के साथ कवर किया गया है। निलंबन एल्यूमीनियम मिश्र धातु से बना है, और पहिये पॉलीयूरेथेन से बने होते हैं। यह इस रूप में है कि हम सभी क्लासिक स्केटबोर्ड देखने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
एक स्केटबोर्ड से एक पैसा बोर्ड के बीच मुख्य ध्यान देने योग्य अंतर, अक्सर, यह है कि डेक छोटा है। यदि आप अपने हाथ में दो बोर्ड लेते हैं, तो एक पैसा बोर्ड आसान होगा। डेक मजबूत पॉली कार्बोनेट से बना है, जो बदले में, आपको इस बोर्ड पर सबसे कठिन चाल भी करने की अनुमति देता है, इस तथ्य से डर नहीं कि यह आसानी से टूट जाता है। यह भी है कि एक पेनी बोर्ड के पहियों में स्केटबोर्ड (35 मिमी) से बड़ा आकार (60 मिमी) होता है।
क्या चुनना है?
एक पेनी बोर्ड और ऊपर दिखाए गए स्केटबोर्ड के बीच क्या अंतर है, और यह स्पष्ट है कि एक पैसा बोर्ड अलग-अलग चाल के लिए अधिक उपयुक्त है। यह एक उन्नत डेक और एक बड़े व्हील आकार के माध्यम से हासिल किया जाता है।
इसलिए, यदि आपको इस खेल के शुरुआती व्यक्ति के लिए कुछ चुनना है, तो आप अपना स्केटबोर्ड चुन सकते हैं, और यदि आप अपने प्रयोग जारी रखना चाहते हैं, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक पैसा बोर्ड चुनें। डर के साथ, आप अंतिम विकल्प चुन सकते हैं, क्योंकि इसे अधिक सार्वभौमिक माना जाता है, और यह दोनों बच्चों और पेशेवरों के लिए उपयुक्त है।
|
यह ध्यान देने योग्य है कि स्केटबोर्ड और पैनी बोर्ड पर आंदोलन का सिद्धांत अलग नहीं है। समेकन की संरचना और निर्माण भी समान हैं, लेकिन इसमें शामिल सामग्रियों की विशेषताओं में महत्वपूर्ण अंतर हैं। यह एक बार में नहीं कहा जा सकता है कि यह यात्रा के उपरोक्त साधनों में से प्रत्येक का प्रतिनिधित्व करने के बिना स्केटबोर्ड या पैनी बोर्ड के लिए बेहतर है। स्केटबोर्ड डेक सत्तर सेमी लंबा लकड़ी से बना है। शीर्ष से यह एक दृढ़ कवर के साथ कवर किया गया है। निलंबन एल्यूमीनियम मिश्र धातु से बना है, और पहिये पॉलीयूरेथेन से बने होते हैं। यह इस रूप में है कि हम सभी क्लासिक स्केटबोर्ड देखने के लिए उपयोग किए जाते हैं। एक स्केटबोर्ड से एक पैसा बोर्ड के बीच मुख्य ध्यान देने योग्य अंतर, अक्सर, यह है कि डेक छोटा है। यदि आप अपने हाथ में दो बोर्ड लेते हैं, तो एक पैसा बोर्ड आसान होगा। डेक मजबूत पॉली कार्बोनेट से बना है, जो बदले में, आपको इस बोर्ड पर सबसे कठिन चाल भी करने की अनुमति देता है, इस तथ्य से डर नहीं कि यह आसानी से टूट जाता है। यह भी है कि एक पेनी बोर्ड के पहियों में स्केटबोर्ड से बड़ा आकार होता है। क्या चुनना है? एक पेनी बोर्ड और ऊपर दिखाए गए स्केटबोर्ड के बीच क्या अंतर है, और यह स्पष्ट है कि एक पैसा बोर्ड अलग-अलग चाल के लिए अधिक उपयुक्त है। यह एक उन्नत डेक और एक बड़े व्हील आकार के माध्यम से हासिल किया जाता है। इसलिए, यदि आपको इस खेल के शुरुआती व्यक्ति के लिए कुछ चुनना है, तो आप अपना स्केटबोर्ड चुन सकते हैं, और यदि आप अपने प्रयोग जारी रखना चाहते हैं, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक पैसा बोर्ड चुनें। डर के साथ, आप अंतिम विकल्प चुन सकते हैं, क्योंकि इसे अधिक सार्वभौमिक माना जाता है, और यह दोनों बच्चों और पेशेवरों के लिए उपयुक्त है।
|
ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या ने अपने चयन को सही साबित करते हुए शनिवार को यहां दूसरे दिन बड़ी अर्धशतकीय पारी खेलने के बाद साउथ अफ्रीका के दोनों सलामी बल्लेबाजों को भी पविलियन भेजा और भारत की पहले टेस्ट क्रिकेट मैच में वापसी की उम्मीदों को बरकरार रखा। भारत के मुख्य बल्लेबाजों का फीका प्रदर्शन जारी रहा, लेकिन अगर टीम 200 रन के पार पहुंच पाई, तो उसका पूरा श्रेय पंड्या को जाता है। उन्होंने 95 गेंदों पर 93 रन की आकर्षक पारी खेली और भुवनेश्वर कुमार (86 गेंदों पर 25 रन) के साथ 8वें विकेट के लिये 99 रन जोडे़।
इससे पहले एक समय 7 विकेट पर 92 रन के स्कोर पर संघर्ष कर रही भारतीय टीम 209 रन तक पहुंचने में सफल रही। अपनी पहली पारी में 286 रन बनाने वाले साउथ अफ्रीका ने इस तरह से 77 रन की बढ़त बनाई। उसने दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक दो विकेट पर 65 रन बनाए हैं। इस तरह से उसकी कुल बढ़त 142 रन की हो गई है। भारत की तरफ से दोनों विकेट पंड्या ने लिए। सही मायनों में खेल का दूसरा दिन पंड्या का नाम रहा। उन्होंने भारत के महान ऑलराउंडर कपिल देव के 59वें जन्मदिन पर दिखाया कि वह वास्तव में देश का दूसरा कपिल देव बनने की क्षमता रखते हैं।
बल्लेबाजी में उन्होंने कपिल देव की तरह बेपरवाह बल्लेबाजी करके 14 चौके और 1 छक्का लगाया और इसके बाद गेंदबाजी में कमाल दिखाकर दक्षिण अफ्रीका के दोनों सलामी बल्लेबाजों को पविलियन भेजा। उन्होंने अब तक चार ओवर में 17 रन देकर 2 विकेट लिए हैं। दक्षिण अफ्रीका ने दूसरी पारी में सहज शुरुआत की। एडेन मार्कराम (34) ने रन बनाने का बीड़ा उठाया, जबकि पहली पारी में तीसरी गेंद पर आउट होने वाले डीन एल्गर (25) ने विकेट बचाए रखने को तरजीह दी।
|
ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या ने अपने चयन को सही साबित करते हुए शनिवार को यहां दूसरे दिन बड़ी अर्धशतकीय पारी खेलने के बाद साउथ अफ्रीका के दोनों सलामी बल्लेबाजों को भी पविलियन भेजा और भारत की पहले टेस्ट क्रिकेट मैच में वापसी की उम्मीदों को बरकरार रखा। भारत के मुख्य बल्लेबाजों का फीका प्रदर्शन जारी रहा, लेकिन अगर टीम दो सौ रन के पार पहुंच पाई, तो उसका पूरा श्रेय पंड्या को जाता है। उन्होंने पचानवे गेंदों पर तिरानवे रन की आकर्षक पारी खेली और भुवनेश्वर कुमार के साथ आठवें विकेट के लिये निन्यानवे रन जोडे़। इससे पहले एक समय सात विकेट पर बानवे रन के स्कोर पर संघर्ष कर रही भारतीय टीम दो सौ नौ रन तक पहुंचने में सफल रही। अपनी पहली पारी में दो सौ छियासी रन बनाने वाले साउथ अफ्रीका ने इस तरह से सतहत्तर रन की बढ़त बनाई। उसने दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक दो विकेट पर पैंसठ रन बनाए हैं। इस तरह से उसकी कुल बढ़त एक सौ बयालीस रन की हो गई है। भारत की तरफ से दोनों विकेट पंड्या ने लिए। सही मायनों में खेल का दूसरा दिन पंड्या का नाम रहा। उन्होंने भारत के महान ऑलराउंडर कपिल देव के उनसठवें जन्मदिन पर दिखाया कि वह वास्तव में देश का दूसरा कपिल देव बनने की क्षमता रखते हैं। बल्लेबाजी में उन्होंने कपिल देव की तरह बेपरवाह बल्लेबाजी करके चौदह चौके और एक छक्का लगाया और इसके बाद गेंदबाजी में कमाल दिखाकर दक्षिण अफ्रीका के दोनों सलामी बल्लेबाजों को पविलियन भेजा। उन्होंने अब तक चार ओवर में सत्रह रन देकर दो विकेट लिए हैं। दक्षिण अफ्रीका ने दूसरी पारी में सहज शुरुआत की। एडेन मार्कराम ने रन बनाने का बीड़ा उठाया, जबकि पहली पारी में तीसरी गेंद पर आउट होने वाले डीन एल्गर ने विकेट बचाए रखने को तरजीह दी।
|
लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी के पेट्रोल पंपों पर रोजाना आपकी गाढ़ी कमाई धड़ल्ले से लूटी जा रही थी. एक लीटर तेल में अपने ढ़ाई रुपए कमीशन के लिए हड़ताल तक करने वाले पंप संचालक ग्राहकों को लाखों का चूना लगा रहे थे.
ग्राहक को एक लीटर पेट्रोल की रकम अदा करने पर करीब 900 मिली लीटर तेल ही मिल रहा था. मशीन में इलेक्ट्रानिक चिप व रिमोट सेंसर के जरिये यह गोरखधंधा कुछ इस तरह हो रहा था कि ग्राहक को इसकी कोई भनक नहीं लगती थी. गुरुवार रात एसटीएफ व प्रशासन की संयुक्त टीम की छापेमारी में इस बड़े गोरखधंधे का राजफाश हुआ.
इस गोरखधंधे में यूपी पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन शुक्ल का पेट्रोल पंप भी शामिल है. एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक ने बताया कि पकड़े गए इलेक्ट्रीशियन राजेंद्र के मुताबिक राजधानी के अलावा अन्य जिलों के सैकड़ों पेट्रोल पंप में भी यह गड़बड़ी की गई है.
शहीद कैप्टन आयुष यादव के पिता ने केंद्र सरकार से पूछा-"आखिर कब तक ऐसे ही सैनिक मरवाते रहोगे?
आरोपी राजेंद्र के मुताबिक पेट्रोल पंप में नोजल के नीचे चिप लगाई जाती थी जिसका एक सर्किट मशीन में लगा होता था. चिप रिमोट के जरिए संचालित होती थी. छापे के बाद सभी सात पेट्रोल पंपों पर बिक्री रोक दी गई है और स्टॉक का मिलान किया जा रहा है. इन पेट्रोल पंपों पर हो रही थी चोरी.
बाबरी ढांचा गिराने के आरोपी ने किया, बड़ा खुलासा ?
|
लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी के पेट्रोल पंपों पर रोजाना आपकी गाढ़ी कमाई धड़ल्ले से लूटी जा रही थी. एक लीटर तेल में अपने ढ़ाई रुपए कमीशन के लिए हड़ताल तक करने वाले पंप संचालक ग्राहकों को लाखों का चूना लगा रहे थे. ग्राहक को एक लीटर पेट्रोल की रकम अदा करने पर करीब नौ सौ मिली लीटर तेल ही मिल रहा था. मशीन में इलेक्ट्रानिक चिप व रिमोट सेंसर के जरिये यह गोरखधंधा कुछ इस तरह हो रहा था कि ग्राहक को इसकी कोई भनक नहीं लगती थी. गुरुवार रात एसटीएफ व प्रशासन की संयुक्त टीम की छापेमारी में इस बड़े गोरखधंधे का राजफाश हुआ. इस गोरखधंधे में यूपी पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन शुक्ल का पेट्रोल पंप भी शामिल है. एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक ने बताया कि पकड़े गए इलेक्ट्रीशियन राजेंद्र के मुताबिक राजधानी के अलावा अन्य जिलों के सैकड़ों पेट्रोल पंप में भी यह गड़बड़ी की गई है. शहीद कैप्टन आयुष यादव के पिता ने केंद्र सरकार से पूछा-"आखिर कब तक ऐसे ही सैनिक मरवाते रहोगे? आरोपी राजेंद्र के मुताबिक पेट्रोल पंप में नोजल के नीचे चिप लगाई जाती थी जिसका एक सर्किट मशीन में लगा होता था. चिप रिमोट के जरिए संचालित होती थी. छापे के बाद सभी सात पेट्रोल पंपों पर बिक्री रोक दी गई है और स्टॉक का मिलान किया जा रहा है. इन पेट्रोल पंपों पर हो रही थी चोरी. बाबरी ढांचा गिराने के आरोपी ने किया, बड़ा खुलासा ?
|
लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने ज़ायोनी शासन के साथ संबंधों को सामान्य करने के बचने की देशों की प्रतिबद्धता की अपील की है।
इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार सैयद हसन नसरुल्लाह ने शुक्रवार को दक्षिणी बैरूत में सीरिया के क़ुनैतरा में शहीद होने को श्रद्धांजलि पेश करने के लिए आयोजित कार्यक्रम को वीडियो कांफ़्रेंसिंग द्वारा संबोधित करते हुए कहा कि ज़ायोनी शासन के साथ हर प्रकार के संबंधों को सामान्य न करने का प्रस्ताव अरब संघ ने पारित किया है जिस पर कुछ अरब अधिकारी अमल नहीं कर रहे हैं।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि लेबनान, ज़ायोनी शासन के साथ संबंधों को सामान्य करने से परहेज़ के अपने वादे पर अमल कर रहा है और इस देश की जनता ज़ायोनी शासन के साथ संबंध समान्य करने पर कभी चुप नहीं बैठेगी।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने सीरिया के क़ुनैतरा में शहीद होने वालों को श्रद्धांजलि पेश करते हुए कहा कि यदि प्रतिरोधकर्ताओं का बलिदान न होता तो लेबनान में जो शांति और स्थिरता है वह न होती।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने हाल ही में अमरीका द्वारा हिज़्बुल्लाह पर मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपों को निराधार बताया और इसे अमरीकी षड्यंत्र बताया और कहा कि हिज़्बुल्लाह की नज़र में मादक पदार्थों की तस्करी हराम है।
उन्होंने इराक़ और सीरिया में अमरीकी सैनिकों के बाक़ी रहने पर अधारित अमरीकी अधिकारियों के हालिया बयान को मिथ्याचार और वाशिंग्टन का दोग़लापन क़रार दिया। (AK)
|
लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने ज़ायोनी शासन के साथ संबंधों को सामान्य करने के बचने की देशों की प्रतिबद्धता की अपील की है। इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार सैयद हसन नसरुल्लाह ने शुक्रवार को दक्षिणी बैरूत में सीरिया के क़ुनैतरा में शहीद होने को श्रद्धांजलि पेश करने के लिए आयोजित कार्यक्रम को वीडियो कांफ़्रेंसिंग द्वारा संबोधित करते हुए कहा कि ज़ायोनी शासन के साथ हर प्रकार के संबंधों को सामान्य न करने का प्रस्ताव अरब संघ ने पारित किया है जिस पर कुछ अरब अधिकारी अमल नहीं कर रहे हैं। सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि लेबनान, ज़ायोनी शासन के साथ संबंधों को सामान्य करने से परहेज़ के अपने वादे पर अमल कर रहा है और इस देश की जनता ज़ायोनी शासन के साथ संबंध समान्य करने पर कभी चुप नहीं बैठेगी। सैयद हसन नसरुल्लाह ने सीरिया के क़ुनैतरा में शहीद होने वालों को श्रद्धांजलि पेश करते हुए कहा कि यदि प्रतिरोधकर्ताओं का बलिदान न होता तो लेबनान में जो शांति और स्थिरता है वह न होती। सैयद हसन नसरुल्लाह ने हाल ही में अमरीका द्वारा हिज़्बुल्लाह पर मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपों को निराधार बताया और इसे अमरीकी षड्यंत्र बताया और कहा कि हिज़्बुल्लाह की नज़र में मादक पदार्थों की तस्करी हराम है। उन्होंने इराक़ और सीरिया में अमरीकी सैनिकों के बाक़ी रहने पर अधारित अमरीकी अधिकारियों के हालिया बयान को मिथ्याचार और वाशिंग्टन का दोग़लापन क़रार दिया।
|
इस प्रकार तीन वर्ण, एक गध, तीन रस, और चार स्पर्श के भेदो को मिलाने से वर्णचतुष्क के ग्यारह भेद शुभ प्रकृतियों मे माने जाते हैं ।
अव आगे की गाथा मे आनुपूर्वी नामकर्म के भेद, नरकद्विक आदि सज्ञाए और विहायोगति नामकर्म के भेदो को कहते हैं । चउह गइव्वणुपुथ्वी गइपुव्विदुग तिगं नियाउजुय । पुथ्वीउदओ वक्के सुहअसुह वसुट्ट विहगगई ॥४३॥ गायार्थ -- गति नामकर्म के चार भेदो के समान आनुपूर्वी नामकर्म के भी चार भेद होते है और आनुपूर्वी नामकर्म का उदय विग्रहगति मे होता है । गति और आनुपूर्वी को मिलाने से गतिद्विक और इस द्विक मे आयु को जोडने से गतित्रिक सज्ञाए बनती हैं । बैल और ऊट की चाल की तरह शुभ और अशुभ के भेद से विहायोगति नामकर्म के दो भेद हैं ।
विशेषार्थ-नामकर्म की पिड प्रकृतियो मे से शेप रही आनुपूर्वी और विहायोगति प्रकृतियो के भेदो और आनुपूर्वी नामकर्म के भेदो से वनने वाली नरकद्विक आदि सज्ञाओ का कथन गाथा मे किया गया है
आनुपूर्वी नामकर्म के भेद और स्वरूप आदि का वर्णन क्रमश इस प्रकार है ---
गति नामकर्म के चार भेदो की तरह आनुपूर्वीनामकर्म के भी चार भेद हैं --
-(१) देवानुपूर्वी,
(३) तिर्यचानुपूर्वी
(२) मनुष्यानुपूर्वी, और (४) नरकानुपूर्वी ।
जिस कर्म के उदय से विग्रहगति मे रहा हुआ जीव आकाशप्रदेशो की श्रेणी के अनुसार गमन कर उत्पत्ति स्थान पर पहुँचता है, उसे आनुपूर्वी नामकर्म कहते है ।
गति करने की शक्ति जीव और पुद्गल मे है । अत निमित्त मिलने पर ये दोनो गतिक्रिया में परिणत होकर गति करने लगते है । किन्तु यहाँ मुख्यतया जीव की गति के बारे मे विचार किया जा रहा है ।
जीव की स्वाभाविक गति श्रेणी के अनुसार होती है । आकाशप्रदेशो की पक्ति को श्रेणी कहते हैं । जीव की यह गति दो प्रकार की होती है - ऋजु और वक्र । ऋजुगति से स्थानान्तर जाते समय जीव को किसी प्रकार का नवीन प्रयत्न नही करना पड़ता है, क्योकि जब वह पूर्व शरीर छोडता है, तब उसे पूर्व शरीरजन्य वेग मिलता है और उसी के वेग से दूसरे प्रयत्न के बिना धनुष से छूटे वाण के समान सीधा अपने नवीन स्थान पर पहुँच जाता है। दूसरी गति वक्र घुमाव वाली होती है । इसलिए इस गति से जाते हुए जीव को नये प्रयत्न की अपेक्षा होती है । क्योकि पूर्व शरीरजन्य प्रयत्न वहाँ तक ही कार्य करता है, जहाँ से जीव को घूमना पड़े। इन दोनो प्रकार की गतियो मे मुक्त जीव की गति ऋजु गति ही होती है और ससारी जीव की ऋजु और वक्र - दोनो प्रकार की गति होती है ।
एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर को धारण करने, अर्थात् इस भव-सम्बन्धी शरीर को छोड़कर भवान्तर सम्वन्धी शरीर को धारण करने के लिए जब ससारी जीव की गति होती है, यानी विग्रहगति मे रहा हुआ जीव गति करता है तो आकाश प्रदेशो की श्रेणी के अनुसार गति करता हुआ उत्पत्ति स्थान पर पहुँचता है । इसमे आनु१३४
पूर्वी नामकर्म कारण है। जो समश्रेणी से अपने उत्पत्ति स्थान के प्रति जाने वाले ससारी जीव को उसके विश्रेणी पतित उत्पत्ति स्थान पर पहुँचा देता है। यदि जीव का उत्पत्ति स्थान समश्रेणी मे हो तो आनुपूर्वी नामकर्म का उदय नही होता है । वक्रगति मे आनुपूर्वी नामकर्म का उदय होता है, ऋजुगति मे नही होता है ।
इसी सदर्भ में प्रयोग में आने वाली गतिद्विक, गतित्रिक आदि सज्ञाओ के सकेत का अर्थ यह है कि जहाँ गतिटिक ऐसा नकेत हो, वहाँ गति और अनुपूर्वी नामकर्म यह दो प्रकृतियाँ लेना चाहिए और जहाँ गतित्रिक सकेत हो, वहां गति, आनुपूर्वी ओर आयु इन तीन प्रकृतियो का ग्रहण करना चाहिए । सामान्य मे ये सज्ञाएँ कही गई है । विशेष से सजाओ को इस प्रकार समझना चाहिए, जैसे'नरकविक' मे नरकगति और नरकानुपूर्वी का ग्रहण होगा । यदि नरकत्रिक सज्ञा का सकेत हो तो उसमे नरकगति, नरकानुपूर्वी और नरकायु का ग्रहण होगा । इसी प्रकार तिर्यचद्विक, तिर्यचत्रिक, मनुष्यद्विक, मनुष्यत्रिक, देवद्विक, देवत्रिक सज्ञाओं के लिए समझ लेना चाहिए । अपने अपने नामवाली गति, ग्रहण करने से द्विक, और आयु को ग्रहण करने पर त्रिक सज्ञाएं वनती हैं ।
विहायोगति नामकर्म के भेद और लक्षण इस प्रकार हैं(१) शुभविहायोगति, (२) अशुभविहायोगति ।
जिस कर्म के उदय से जीव का चाल हाथी, बैल की चाल की तरह शुभ हो, वह शुभविहायोगति नामकर्म है ।
जिस कर्म के उदय से जीव की चाल ऊँट, गधे आदि की चाल की तरह अशुभ हो, वह अशुभविहायोगति नामकर्म है ।
|
इस प्रकार तीन वर्ण, एक गध, तीन रस, और चार स्पर्श के भेदो को मिलाने से वर्णचतुष्क के ग्यारह भेद शुभ प्रकृतियों मे माने जाते हैं । अव आगे की गाथा मे आनुपूर्वी नामकर्म के भेद, नरकद्विक आदि सज्ञाए और विहायोगति नामकर्म के भेदो को कहते हैं । चउह गइव्वणुपुथ्वी गइपुव्विदुग तिगं नियाउजुय । पुथ्वीउदओ वक्के सुहअसुह वसुट्ट विहगगई ॥तैंतालीस॥ गायार्थ -- गति नामकर्म के चार भेदो के समान आनुपूर्वी नामकर्म के भी चार भेद होते है और आनुपूर्वी नामकर्म का उदय विग्रहगति मे होता है । गति और आनुपूर्वी को मिलाने से गतिद्विक और इस द्विक मे आयु को जोडने से गतित्रिक सज्ञाए बनती हैं । बैल और ऊट की चाल की तरह शुभ और अशुभ के भेद से विहायोगति नामकर्म के दो भेद हैं । विशेषार्थ-नामकर्म की पिड प्रकृतियो मे से शेप रही आनुपूर्वी और विहायोगति प्रकृतियो के भेदो और आनुपूर्वी नामकर्म के भेदो से वनने वाली नरकद्विक आदि सज्ञाओ का कथन गाथा मे किया गया है आनुपूर्वी नामकर्म के भेद और स्वरूप आदि का वर्णन क्रमश इस प्रकार है --- गति नामकर्म के चार भेदो की तरह आनुपूर्वीनामकर्म के भी चार भेद हैं -- - देवानुपूर्वी, तिर्यचानुपूर्वी मनुष्यानुपूर्वी, और नरकानुपूर्वी । जिस कर्म के उदय से विग्रहगति मे रहा हुआ जीव आकाशप्रदेशो की श्रेणी के अनुसार गमन कर उत्पत्ति स्थान पर पहुँचता है, उसे आनुपूर्वी नामकर्म कहते है । गति करने की शक्ति जीव और पुद्गल मे है । अत निमित्त मिलने पर ये दोनो गतिक्रिया में परिणत होकर गति करने लगते है । किन्तु यहाँ मुख्यतया जीव की गति के बारे मे विचार किया जा रहा है । जीव की स्वाभाविक गति श्रेणी के अनुसार होती है । आकाशप्रदेशो की पक्ति को श्रेणी कहते हैं । जीव की यह गति दो प्रकार की होती है - ऋजु और वक्र । ऋजुगति से स्थानान्तर जाते समय जीव को किसी प्रकार का नवीन प्रयत्न नही करना पड़ता है, क्योकि जब वह पूर्व शरीर छोडता है, तब उसे पूर्व शरीरजन्य वेग मिलता है और उसी के वेग से दूसरे प्रयत्न के बिना धनुष से छूटे वाण के समान सीधा अपने नवीन स्थान पर पहुँच जाता है। दूसरी गति वक्र घुमाव वाली होती है । इसलिए इस गति से जाते हुए जीव को नये प्रयत्न की अपेक्षा होती है । क्योकि पूर्व शरीरजन्य प्रयत्न वहाँ तक ही कार्य करता है, जहाँ से जीव को घूमना पड़े। इन दोनो प्रकार की गतियो मे मुक्त जीव की गति ऋजु गति ही होती है और ससारी जीव की ऋजु और वक्र - दोनो प्रकार की गति होती है । एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर को धारण करने, अर्थात् इस भव-सम्बन्धी शरीर को छोड़कर भवान्तर सम्वन्धी शरीर को धारण करने के लिए जब ससारी जीव की गति होती है, यानी विग्रहगति मे रहा हुआ जीव गति करता है तो आकाश प्रदेशो की श्रेणी के अनुसार गति करता हुआ उत्पत्ति स्थान पर पहुँचता है । इसमे आनुएक सौ चौंतीस पूर्वी नामकर्म कारण है। जो समश्रेणी से अपने उत्पत्ति स्थान के प्रति जाने वाले ससारी जीव को उसके विश्रेणी पतित उत्पत्ति स्थान पर पहुँचा देता है। यदि जीव का उत्पत्ति स्थान समश्रेणी मे हो तो आनुपूर्वी नामकर्म का उदय नही होता है । वक्रगति मे आनुपूर्वी नामकर्म का उदय होता है, ऋजुगति मे नही होता है । इसी सदर्भ में प्रयोग में आने वाली गतिद्विक, गतित्रिक आदि सज्ञाओ के सकेत का अर्थ यह है कि जहाँ गतिटिक ऐसा नकेत हो, वहाँ गति और अनुपूर्वी नामकर्म यह दो प्रकृतियाँ लेना चाहिए और जहाँ गतित्रिक सकेत हो, वहां गति, आनुपूर्वी ओर आयु इन तीन प्रकृतियो का ग्रहण करना चाहिए । सामान्य मे ये सज्ञाएँ कही गई है । विशेष से सजाओ को इस प्रकार समझना चाहिए, जैसे'नरकविक' मे नरकगति और नरकानुपूर्वी का ग्रहण होगा । यदि नरकत्रिक सज्ञा का सकेत हो तो उसमे नरकगति, नरकानुपूर्वी और नरकायु का ग्रहण होगा । इसी प्रकार तिर्यचद्विक, तिर्यचत्रिक, मनुष्यद्विक, मनुष्यत्रिक, देवद्विक, देवत्रिक सज्ञाओं के लिए समझ लेना चाहिए । अपने अपने नामवाली गति, ग्रहण करने से द्विक, और आयु को ग्रहण करने पर त्रिक सज्ञाएं वनती हैं । विहायोगति नामकर्म के भेद और लक्षण इस प्रकार हैं शुभविहायोगति, अशुभविहायोगति । जिस कर्म के उदय से जीव का चाल हाथी, बैल की चाल की तरह शुभ हो, वह शुभविहायोगति नामकर्म है । जिस कर्म के उदय से जीव की चाल ऊँट, गधे आदि की चाल की तरह अशुभ हो, वह अशुभविहायोगति नामकर्म है ।
|
जबलपुर, यशभारत। पनागर के मनियारी में शुक्रवार को उस समय भगदड़ मच गई जब क्राइम ब्रांच और पनागर थाना के पुलिस ने सरकारी गेहूं बिकने की खबर पर अमित किराना और कृष्ण कुमार पटेल के घर में रेड कर दी। दोनों बिचौलियों के पास 85 हजार 500 का 95 बोरी गेहंू जप्त किया गया है।
शुक्रवार को क्राइम ब्रांच को सूचना प्राप्त हुई कि पनागरके ग्राम मनियारी निवासी कृष्ण कुमार पटेल के द्वारा अमित किराना दुकान के सामने परछी मे एवं बृजेश पटेल अपने घर के आंगन में शासकीय राशन दुकान का गेहंू बेचने के लिये रखे हुये हैं। सूचना से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुये क्राइम ब्रांच एंव थाना पनागर पुलिस के द्वारा मुखबिर के बताये ुहये दोनों स्थानों पर संयुक्त रूप से दबिश दी गयी, कृष्ण कुमार पटेल किराना दुकान के सामने परछी में 53 बोरियॉ एवं ब्रजेश पटेल अपने घर के अंागन मे 42 बोरियॉ गेहूॅ से भरी हुई रखे हुये मिले, प्रत्येक बोरी पर एस. सी. एस. सी. व मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन लिमिटेड आर. एन. एस. 2020-21 उचित मूल्य की दुकान भारत सरकार के सौजन्य से लिखा हुआ है एवं महात्मा गांधी जी का चश्मा बंना हुआ था, तौल करने पर 95 बोरियों में 4750 किलो गेहूॅ जिसकी कीमती 85 हजार 500 रूपये है भरा हुआ मिला, जिसे जप्त करते हुये दोनों आरोपियो के विरूद्ध प्रथक-प्रथक धारा 3, 7 ईसी एक्ट के तहत कायज़्वाही करते हुये उक्त गेहूॅ कहॉ से और कैसे प्राप्त किया के सम्बंध में पूछताछ की जा रही है।
उल्लेखनीय भूमिका - शासकीय राशन की कालाबाजारी मे लिप्त आरोपियों को पकडने में थाना प्रभारी पनागर श्री आर. के. सोनी क्राईम बा्रंच के सहायक उप निरीक्षक राजेश शुक्ला, वीरेन्द्र सिंह प्रधान आरक्षक सुग्रीव तिवारी, सादिकअली, आरक्षक नीरज तिवारी, जितेन्द्र दुबे एवं थाना प्रभारी के सहायक उप निरीक्षक तान सिंह, आरक्षक कुलदीप साहू, मोनू करारे की सराहनीय भूमिका रही।
|
जबलपुर, यशभारत। पनागर के मनियारी में शुक्रवार को उस समय भगदड़ मच गई जब क्राइम ब्रांच और पनागर थाना के पुलिस ने सरकारी गेहूं बिकने की खबर पर अमित किराना और कृष्ण कुमार पटेल के घर में रेड कर दी। दोनों बिचौलियों के पास पचासी हजार पाँच सौ का पचानवे बोरी गेहंू जप्त किया गया है। शुक्रवार को क्राइम ब्रांच को सूचना प्राप्त हुई कि पनागरके ग्राम मनियारी निवासी कृष्ण कुमार पटेल के द्वारा अमित किराना दुकान के सामने परछी मे एवं बृजेश पटेल अपने घर के आंगन में शासकीय राशन दुकान का गेहंू बेचने के लिये रखे हुये हैं। सूचना से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुये क्राइम ब्रांच एंव थाना पनागर पुलिस के द्वारा मुखबिर के बताये ुहये दोनों स्थानों पर संयुक्त रूप से दबिश दी गयी, कृष्ण कुमार पटेल किराना दुकान के सामने परछी में तिरेपन बोरियॉ एवं ब्रजेश पटेल अपने घर के अंागन मे बयालीस बोरियॉ गेहूॅ से भरी हुई रखे हुये मिले, प्रत्येक बोरी पर एस. सी. एस. सी. व मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन लिमिटेड आर. एन. एस. दो हज़ार बीस-इक्कीस उचित मूल्य की दुकान भारत सरकार के सौजन्य से लिखा हुआ है एवं महात्मा गांधी जी का चश्मा बंना हुआ था, तौल करने पर पचानवे बोरियों में चार हज़ार सात सौ पचास किलो गेहूॅ जिसकी कीमती पचासी हजार पाँच सौ रूपये है भरा हुआ मिला, जिसे जप्त करते हुये दोनों आरोपियो के विरूद्ध प्रथक-प्रथक धारा तीन, सात ईसी एक्ट के तहत कायज़्वाही करते हुये उक्त गेहूॅ कहॉ से और कैसे प्राप्त किया के सम्बंध में पूछताछ की जा रही है। उल्लेखनीय भूमिका - शासकीय राशन की कालाबाजारी मे लिप्त आरोपियों को पकडने में थाना प्रभारी पनागर श्री आर. के. सोनी क्राईम बा्रंच के सहायक उप निरीक्षक राजेश शुक्ला, वीरेन्द्र सिंह प्रधान आरक्षक सुग्रीव तिवारी, सादिकअली, आरक्षक नीरज तिवारी, जितेन्द्र दुबे एवं थाना प्रभारी के सहायक उप निरीक्षक तान सिंह, आरक्षक कुलदीप साहू, मोनू करारे की सराहनीय भूमिका रही।
|
नैनीताल हाईकोर्ट ने महेंद्र भाटी हत्याकांड मामले में सजा काट रहे आरोपी डीपी यादव की शार्ट टर्म बेल प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार 13 सितंबर 1992 को दादरी क्षेत्र के विधायक महेंद्र भाटी की हत्या कर दी गई थी। सुनवाई के बाद इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी डीपी यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपी डीपी यादव ने हाईकोर्ट में अपने इलाज के लिए शार्ट टर्म बेल प्रार्थना पत्र दायर कर कहा था कि वह हार्ट पेशेंट है और उसे इलाज के लिए दिल्ली एम्स जाना है इसलिए उसे शार्ट टर्म बेल दी जाए।
सीबीआई की ओर से कहा गया कि पुलिस टीम की ओर से डीपी यादव को इलाज के लिए देहरादून दिखाया गया था और पूरी सुविधा दी जा रही है, इसलिए शार्ट टर्म बेल नहीं दी जानी चाहिए। पक्षों को सुनने के बाद हाईकेर्ट की खंडपीठ ने डीपी यादव के शार्ट टर्म बेल प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।
|
नैनीताल हाईकोर्ट ने महेंद्र भाटी हत्याकांड मामले में सजा काट रहे आरोपी डीपी यादव की शार्ट टर्म बेल प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार तेरह सितंबर एक हज़ार नौ सौ बानवे को दादरी क्षेत्र के विधायक महेंद्र भाटी की हत्या कर दी गई थी। सुनवाई के बाद इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी डीपी यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपी डीपी यादव ने हाईकोर्ट में अपने इलाज के लिए शार्ट टर्म बेल प्रार्थना पत्र दायर कर कहा था कि वह हार्ट पेशेंट है और उसे इलाज के लिए दिल्ली एम्स जाना है इसलिए उसे शार्ट टर्म बेल दी जाए। सीबीआई की ओर से कहा गया कि पुलिस टीम की ओर से डीपी यादव को इलाज के लिए देहरादून दिखाया गया था और पूरी सुविधा दी जा रही है, इसलिए शार्ट टर्म बेल नहीं दी जानी चाहिए। पक्षों को सुनने के बाद हाईकेर्ट की खंडपीठ ने डीपी यादव के शार्ट टर्म बेल प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।
|
राजेश ताईलैंग एक भारतीय एक्टर हैं। वह फिल्म सिद्दार्थ अपने अपनी बेहतरीन भूमिका के लिए अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच खासा प्रसिद्ध हैं। राजेश ने इस फिल्म में सिर्फ एक्टिंग ही नहीं की, बल्कि उन्होंने इस फिल्म के डायलाग भी लिखे।
इसके अलावा राजेश फिल्म फेंटम, देव, हजार चौरासी की मां, तक्षक, अमाल,उम्रिका,द सेकेंड बेस्ट एक्सोटिक मैरीगोल्ड होटल और टेलीविजन श्रृंखला शांति में भी दिखाई दिए हैं।
|
राजेश ताईलैंग एक भारतीय एक्टर हैं। वह फिल्म सिद्दार्थ अपने अपनी बेहतरीन भूमिका के लिए अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच खासा प्रसिद्ध हैं। राजेश ने इस फिल्म में सिर्फ एक्टिंग ही नहीं की, बल्कि उन्होंने इस फिल्म के डायलाग भी लिखे। इसके अलावा राजेश फिल्म फेंटम, देव, हजार चौरासी की मां, तक्षक, अमाल,उम्रिका,द सेकेंड बेस्ट एक्सोटिक मैरीगोल्ड होटल और टेलीविजन श्रृंखला शांति में भी दिखाई दिए हैं।
|
अमेरिका के पेन्सिलवेनिया एक फ्युनरल के दौरान अंधाधुंध फायरिंग की घटना सामने आई है. फायरिंग में 6 घायल हैं और 1 की मौत हो गई है.
अमेरिका (America) में पेन्सिलवेनिया (Pennsylvania) के चर्च (Church) में फायरिंग की घटना सामने आई है. फायरिंग की यह घटना एक फ्युनरल में शामिल लोगों पर हुई है. बताया जा रहा है कि कुछ लोग पेन्सिलवेनिया के पिट्सबर्ग में एक फ्युनरल के लिए चर्च में जमा थे तभी ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगी. चर्च में हुए फायरिंग में में 6 लोग घायल हो गए और 1 की हालत गंभीर बताई जा रही है. पुलिस घटनास्थल पर पहुंच कर मामले की जांच कर रही है.
|
अमेरिका के पेन्सिलवेनिया एक फ्युनरल के दौरान अंधाधुंध फायरिंग की घटना सामने आई है. फायरिंग में छः घायल हैं और एक की मौत हो गई है. अमेरिका में पेन्सिलवेनिया के चर्च में फायरिंग की घटना सामने आई है. फायरिंग की यह घटना एक फ्युनरल में शामिल लोगों पर हुई है. बताया जा रहा है कि कुछ लोग पेन्सिलवेनिया के पिट्सबर्ग में एक फ्युनरल के लिए चर्च में जमा थे तभी ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगी. चर्च में हुए फायरिंग में में छः लोग घायल हो गए और एक की हालत गंभीर बताई जा रही है. पुलिस घटनास्थल पर पहुंच कर मामले की जांच कर रही है.
|
बॉलीवुड के साथ ही साथ साऊथ की भी एक चर्चित अभिनेत्रियों में शुमार अभिनेत्री तापसी पन्नू एक बार फिर से अपने बयान को लेकर सुर्खियों में है. बता दे की यह अभिनेत्री हमे अपनी पूर्व की सफतलम फिल्म 'पिंक' में भी अपने शानदार अभिनय के चलते नजर आ चुकी है.
तापसी को इसके लिए काफी सराहना भी मिल चुकी है. अभी तो वैसे तापसी अपनी फिल्मो में खासा व्यस्त है तथा इसी के तहत तापसी हमे अपनी आगामी फिल्म 'द गाजी अटैक' व 'रनिंग शादी डॉट कॉम' के चलते सुर्खियों में बनी हुई है जी हाँ, अबकी बार अभिनेत्री तापसी पन्नू ने कहा है की वह बॉलीवुड के दो अभिनेताओ पर फ़िदा है.
तापसी का कहना है की उन्हें जॉन अब्राहम और रितिक रोशन हमेशा ही बेहद आकर्षक लगे हैं और वो इन दोनों पर ही फिदा थीं. तापसी ने कहा कि जब से वह फिल्में देखती आ रही हैं, तब से वह जॉन अब्राहम और रितिक रोशन पर फिदा हैं. वह इन दोनों अभिनेताओं को काफी आकर्षक मानती हैं.
|
बॉलीवुड के साथ ही साथ साऊथ की भी एक चर्चित अभिनेत्रियों में शुमार अभिनेत्री तापसी पन्नू एक बार फिर से अपने बयान को लेकर सुर्खियों में है. बता दे की यह अभिनेत्री हमे अपनी पूर्व की सफतलम फिल्म 'पिंक' में भी अपने शानदार अभिनय के चलते नजर आ चुकी है. तापसी को इसके लिए काफी सराहना भी मिल चुकी है. अभी तो वैसे तापसी अपनी फिल्मो में खासा व्यस्त है तथा इसी के तहत तापसी हमे अपनी आगामी फिल्म 'द गाजी अटैक' व 'रनिंग शादी डॉट कॉम' के चलते सुर्खियों में बनी हुई है जी हाँ, अबकी बार अभिनेत्री तापसी पन्नू ने कहा है की वह बॉलीवुड के दो अभिनेताओ पर फ़िदा है. तापसी का कहना है की उन्हें जॉन अब्राहम और रितिक रोशन हमेशा ही बेहद आकर्षक लगे हैं और वो इन दोनों पर ही फिदा थीं. तापसी ने कहा कि जब से वह फिल्में देखती आ रही हैं, तब से वह जॉन अब्राहम और रितिक रोशन पर फिदा हैं. वह इन दोनों अभिनेताओं को काफी आकर्षक मानती हैं.
|
(दरोगा के द्वारा नीरज वनवासी के मोबाइल से उसकी पत्नी से दोस्त बनकर बातचीत करने के दौरान लालदेई ने बताया वो अलवर जिले के कोट काशी गांव में एक जगह घर मे पड़ी है,)
जनज्वार। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के अहरौरा बेलखरा गांव की मुसहर बस्ती की महिला को हाल ही में राजस्थान में देने का मामला सामने आया था। महिला को पैसा निकलवाने का लालच दिया गया था। जनज्वार ने इस खबर को प्रमुखता से दिखाया था, वहीं अब खबर प्रखासित होने के चौबीस घंटों के बाद चंदौली जिला प्रशासन और घटनकारित थाने ने मामले को गंभीरता से लिया है और आरोपियों की तलाश में जुट गयी है।
जालसाजों द्वारा बेची गयी युवती लालदेई के पति नीरज बनवासी ने बताया पूर्व में थानों का चक्कर लगाता रहा, लेकिन किसी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, साढ़े तीन महीने बीत जाने के बाद जब खबर जनज्वार पर चली तो स्वयं थाने के दरोगा ने हमसे संपर्क किया और दूसरे ही दिन आरोपियों को दबोचने के लिए छानबीन शुरू कर दी।
नीरज बनवासी ने बताया 22 जुलाई 2021 को फिर पत्नी से बात हुई तो वो कह रही थीं कि एक लाख रुपये इनको देकर हमें छुड़ा लो, जबतक पैसे नहीं दोगे, ये लोग आने नही देंगे। अब मामला कुछ भी हो जब लालदेई जालसाजों के चंगुल से छूटकर आएगी तो पूरे घटनाक्रम का सही पता चल सकेगा।
शनिवार 24 जुलाई को थाना चकिया की पुलिस ने पीड़ित पति की तहरीर के आधार पर संदिग्ध युवक, जिसका इस प्रकरण में नाम आ रहा है, को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ कर रही है।
वहीं दरोगा के द्वारा नीरज वनवासी के मोबाइल से उसकी पत्नी से दोस्त बनकर बातचीत करने के दौरान लालदेई ने बताया वो अलवर जिले के कोट काशी गांव में एक जगह घर मे पड़ी है, उसे जल्द से यहां से छुड़ा ले जाएं।
नीरज ने बताया कि मेरे पास एक लाख रुपये नहीं हैं, ऐसे में मेरी पत्नी को राजस्थान के युवक के चंगुल से छुड़ाने में प्रशासन मदद कर रहा है। दरोगा ने नीरज को कहा है कि आप राजस्थान पहुँचकर वहां के थानेदार से मेरी बात करा देना वो तुम्हारी मदद करेंगे।
|
जनज्वार। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के अहरौरा बेलखरा गांव की मुसहर बस्ती की महिला को हाल ही में राजस्थान में देने का मामला सामने आया था। महिला को पैसा निकलवाने का लालच दिया गया था। जनज्वार ने इस खबर को प्रमुखता से दिखाया था, वहीं अब खबर प्रखासित होने के चौबीस घंटों के बाद चंदौली जिला प्रशासन और घटनकारित थाने ने मामले को गंभीरता से लिया है और आरोपियों की तलाश में जुट गयी है। जालसाजों द्वारा बेची गयी युवती लालदेई के पति नीरज बनवासी ने बताया पूर्व में थानों का चक्कर लगाता रहा, लेकिन किसी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, साढ़े तीन महीने बीत जाने के बाद जब खबर जनज्वार पर चली तो स्वयं थाने के दरोगा ने हमसे संपर्क किया और दूसरे ही दिन आरोपियों को दबोचने के लिए छानबीन शुरू कर दी। नीरज बनवासी ने बताया बाईस जुलाई दो हज़ार इक्कीस को फिर पत्नी से बात हुई तो वो कह रही थीं कि एक लाख रुपये इनको देकर हमें छुड़ा लो, जबतक पैसे नहीं दोगे, ये लोग आने नही देंगे। अब मामला कुछ भी हो जब लालदेई जालसाजों के चंगुल से छूटकर आएगी तो पूरे घटनाक्रम का सही पता चल सकेगा। शनिवार चौबीस जुलाई को थाना चकिया की पुलिस ने पीड़ित पति की तहरीर के आधार पर संदिग्ध युवक, जिसका इस प्रकरण में नाम आ रहा है, को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ कर रही है। वहीं दरोगा के द्वारा नीरज वनवासी के मोबाइल से उसकी पत्नी से दोस्त बनकर बातचीत करने के दौरान लालदेई ने बताया वो अलवर जिले के कोट काशी गांव में एक जगह घर मे पड़ी है, उसे जल्द से यहां से छुड़ा ले जाएं। नीरज ने बताया कि मेरे पास एक लाख रुपये नहीं हैं, ऐसे में मेरी पत्नी को राजस्थान के युवक के चंगुल से छुड़ाने में प्रशासन मदद कर रहा है। दरोगा ने नीरज को कहा है कि आप राजस्थान पहुँचकर वहां के थानेदार से मेरी बात करा देना वो तुम्हारी मदद करेंगे।
|
क्या जीएम सरसों की किस्म डीएमएच 11 मल्टीनेशनल कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए हर्बीसाइड के इस्तेमाल को बढ़ावा देगी?
30 दिसम्बर 2022, नई दिल्लीः क्या जीएम सरसों की किस्म डीएमएच 11 मल्टीनेशनल कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए हर्बीसाइड के इस्तेमाल को बढ़ावा देगी? - भारत में GM विरोधियों द्वारा लगाया गया एक आरोप यह है कि सरसों की किस्म DMH 11 शाकनाशी के उपयोग को बढ़ावा देगी, इस प्रकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों को शाकनाशी (हर्बीसाइड) के निर्माण में मदद मिलेगी।
यह स्पष्ट किया गया है कि जीएम सरसों में हर्बीसाइड ग्लूफ़ोसिनेट के लिए प्रतिरोध प्रदान करने वाले बार जीन का उपयोग किया गया है। यह दो कारणों से किया गया है, सबसे पहले विकास प्रक्रिया के दौरान टिशू कल्चर में चयन योग्य मार्कर के रूप में। दूसरा कारण यह है कि बार्नेज मादा और बरस्टार नर वंश की शाकनाशी सहनशीलता विशेषता का दोहन केवल संकर बीज उत्पादन कार्यक्रम में किया जाना है न कि हाइब्रिड की व्यावसायिक खेती में।
इसलिए जीईएसी (GEAC) ने मौजूदा नियमों के अनुसार लेबल दावे का विस्तार प्राप्त करने के बाद ही केवल संकर बीज उत्पादन के लिए शाकनाशी के उपयोग की मंजूरी दी है और अनुमोदन में इसका विशेष रूप से उल्लेख करना आवश्यक है।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हर्बीसाइड टोलरैंस के बिना भी, भारतीय कृषि में चावल, गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलों में लगभग 7000 करोड़ रुपये के मूल्य का 15000 टन तकनीकी ग्रेड शाकनाशियों का उपयोग किया जा रहा है।
महत्वपूर्ण खबरः कपास मंडी रेट (28 दिसम्बर 2022 के अनुसार)
(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े - गूगल न्यूज़, टेलीग्राम )
|
क्या जीएम सरसों की किस्म डीएमएच ग्यारह मल्टीनेशनल कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए हर्बीसाइड के इस्तेमाल को बढ़ावा देगी? तीस दिसम्बर दो हज़ार बाईस, नई दिल्लीः क्या जीएम सरसों की किस्म डीएमएच ग्यारह मल्टीनेशनल कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए हर्बीसाइड के इस्तेमाल को बढ़ावा देगी? - भारत में GM विरोधियों द्वारा लगाया गया एक आरोप यह है कि सरसों की किस्म DMH ग्यारह शाकनाशी के उपयोग को बढ़ावा देगी, इस प्रकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों को शाकनाशी के निर्माण में मदद मिलेगी। यह स्पष्ट किया गया है कि जीएम सरसों में हर्बीसाइड ग्लूफ़ोसिनेट के लिए प्रतिरोध प्रदान करने वाले बार जीन का उपयोग किया गया है। यह दो कारणों से किया गया है, सबसे पहले विकास प्रक्रिया के दौरान टिशू कल्चर में चयन योग्य मार्कर के रूप में। दूसरा कारण यह है कि बार्नेज मादा और बरस्टार नर वंश की शाकनाशी सहनशीलता विशेषता का दोहन केवल संकर बीज उत्पादन कार्यक्रम में किया जाना है न कि हाइब्रिड की व्यावसायिक खेती में। इसलिए जीईएसी ने मौजूदा नियमों के अनुसार लेबल दावे का विस्तार प्राप्त करने के बाद ही केवल संकर बीज उत्पादन के लिए शाकनाशी के उपयोग की मंजूरी दी है और अनुमोदन में इसका विशेष रूप से उल्लेख करना आवश्यक है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हर्बीसाइड टोलरैंस के बिना भी, भारतीय कृषि में चावल, गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलों में लगभग सात हज़ार करोड़ रुपये के मूल्य का पंद्रह हज़ार टन तकनीकी ग्रेड शाकनाशियों का उपयोग किया जा रहा है। महत्वपूर्ण खबरः कपास मंडी रेट
|
Driving Licence के प्रकारः
- ड्राइविंग लाइसेंस फॉर मोटरसाइकिल विदआउट गियर (Driving License for Motorcycle Without Gear)
- ड्राइविंग लाइसेंस इश्यू फॉर लाइट मोटर व्हीकल (Driving License Issued for Light Motor Vehicles)
- ड्राइविंग लाइसेंस इश्यू फॉर ट्रासपोर्ट व्हीकल (Driving License Issued for Transport Vehicles)
लर्नर लाइसेंस के लिए कैसे करें आवेदनः
- आवेदन करने के लिए सबसे पहले आपको RTO की वेबसाइट पर जाना है।
- यहां पर आपको उस सुविधा का चयन करना है, जिसके लिए आप आवेदन करना चाहते हैं जैसे कि आप ड्राइवर्स/ लर्नर लाइसेंस ऑप्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं, अगर आपको लर्नर के लिए आवेदन करना है।
- उसके बाद आपको स्टेट का चयन करना है। अब आपको यह देखना है कि आपका शहर पूरी तरह ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध करवा रहा है या नहीं।
- ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए सबसे पहले आपको www. transport. delhi. gov. in और ऐप्लिकेशन फॉर्म निकालना होगा और उसे प्रिंट करवाना होगा।
- उसके बाद आपको पूरी तरह से भरे हुए फॉर्म को अपने नजदीकी RTO में जमा करवाना है।
- उसके साथ में आपको सभी जरूरी दस्तावेजों को भी जमा करवाना है।
- उसके बाद आपको ड्राइविंग टेस्ट के लिए स्लॉट दिया जाएगा।
- टेस्ट को पास करने के दो से तीन हफ्ते के बाद ड्राइविंग लाइसेंस घर के पते पर पहुंच जाएगा।
ड्राइविंग लाइसेंस के लिए जरूरी दस्तावेजः
आयु के लिए प्रूफः (कोई एक)
- अगर कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई करना है तो फॉर्म 5 की भी जरूरत होगी।
|
Driving Licence के प्रकारः - ड्राइविंग लाइसेंस फॉर मोटरसाइकिल विदआउट गियर - ड्राइविंग लाइसेंस इश्यू फॉर लाइट मोटर व्हीकल - ड्राइविंग लाइसेंस इश्यू फॉर ट्रासपोर्ट व्हीकल लर्नर लाइसेंस के लिए कैसे करें आवेदनः - आवेदन करने के लिए सबसे पहले आपको RTO की वेबसाइट पर जाना है। - यहां पर आपको उस सुविधा का चयन करना है, जिसके लिए आप आवेदन करना चाहते हैं जैसे कि आप ड्राइवर्स/ लर्नर लाइसेंस ऑप्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं, अगर आपको लर्नर के लिए आवेदन करना है। - उसके बाद आपको स्टेट का चयन करना है। अब आपको यह देखना है कि आपका शहर पूरी तरह ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध करवा रहा है या नहीं। - ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए सबसे पहले आपको www. transport. delhi. gov. in और ऐप्लिकेशन फॉर्म निकालना होगा और उसे प्रिंट करवाना होगा। - उसके बाद आपको पूरी तरह से भरे हुए फॉर्म को अपने नजदीकी RTO में जमा करवाना है। - उसके साथ में आपको सभी जरूरी दस्तावेजों को भी जमा करवाना है। - उसके बाद आपको ड्राइविंग टेस्ट के लिए स्लॉट दिया जाएगा। - टेस्ट को पास करने के दो से तीन हफ्ते के बाद ड्राइविंग लाइसेंस घर के पते पर पहुंच जाएगा। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए जरूरी दस्तावेजः आयु के लिए प्रूफः - अगर कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई करना है तो फॉर्म पाँच की भी जरूरत होगी।
|
गुरू गोविंद सिंह तेगबहादुर हाई स्कूल के छात्रों के लिए मुंबई में बुधवार का दिन सपना साकार होने वाला रहा जब उन्होंने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से मुलाकात और बात की.
राज्य सभा के सदस्य के रूप में तेंदुलकर ने दक्षिण मुंबई के सेवरी में स्थित इस स्कूल में कक्षाओं के निर्माण और उनके नवीनीकरण के लिए कोष स्वीकृत किया.
पीटीआई के मुताबिक सचिन ने बच्चों के साथ बातचीत करने के अलावा उन्हें बल्ले, गेंद और फुटबाल बांटे और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाई. स्कूल के दौरे के बाद तेंदुलकर ने संवाददाताओं के साथ बात करते हुए कहा कि वह भी शिक्षक के बेटे हैं.
|
गुरू गोविंद सिंह तेगबहादुर हाई स्कूल के छात्रों के लिए मुंबई में बुधवार का दिन सपना साकार होने वाला रहा जब उन्होंने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से मुलाकात और बात की. राज्य सभा के सदस्य के रूप में तेंदुलकर ने दक्षिण मुंबई के सेवरी में स्थित इस स्कूल में कक्षाओं के निर्माण और उनके नवीनीकरण के लिए कोष स्वीकृत किया. पीटीआई के मुताबिक सचिन ने बच्चों के साथ बातचीत करने के अलावा उन्हें बल्ले, गेंद और फुटबाल बांटे और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाई. स्कूल के दौरे के बाद तेंदुलकर ने संवाददाताओं के साथ बात करते हुए कहा कि वह भी शिक्षक के बेटे हैं.
|
मुंबईः कोरोना (Corona Virus) की तीनों लहरों के दौरान देश के सबसे अधिक प्रभावित शहरों में से एक रहे मुंबई (Mumbai) में हालात अब बेहतर हो रहे हैं। मुंबई में लगातार कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ रही है। ऐसे में मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर (Mayor Kishori Pednekar) ने बुधवार को बताया कि, मुंबई में कोरोना के मामले अब कम आ रहे हैं, कल शाम (मंगलवार शाम) तक मुंबई में 135 मामले सामने आए जिसमें 20 सिम्टोमेटिक हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है और बाकी लोग घर में आइसोलेशन में हैं। मुंबईकर नियमों का पालन कर रहे हैं और इस तरह वो जल्द ही तीसरी लहर को रोकने में कामयाब होंगे।
वैसे खबर है कि, मुंबई में लगातार कम हो रहे कोरोना मामलों को देखते हुए आने वाले दिनों में मौजूदा कोरोना नियमों में सरकार और भी ढ़ील दे सकती है। इससे पहले लगातार कम होते कोरोना मामलों को देखते हुए पेडनेकर ने इस बात के संकेत भी दिए थे। फरवरी की शुरुआत में मेयर ने बताया बताया था कि, मुंबईकरों के लिए एक अच्छी खबर है। इस महीने के अंत तक मुंबई को अनलॉक कर दिया जाएगा। हमने अपना मन बना लिया है, लेकिन लोगों के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है।
गौरतलब है कि, मुंबई में बीते 24 घंटों में कोरोना के 135 नए केस दर्ज किए गए हैं। अब शहर में रिकवरी रेट 98% हो गई है। इस दौरान 233 मरीजों ने इस संक्रमण पर जीत हासिल की है। अब मुंबई में कुल 1315 कोरोना केस एक्टिव हैं।
वहीं महाराष्ट्र में कोरोना महामारी के दौरान अब तक 78 लाख 60 हजार 317 लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 76 लाख 99 हजार 623 कोरोना संक्रमित ठीक हो चुके हैं। साथ ही अब तक इस बीमारी से 1 लाख 43 हजार 633 मौतें भी हो चुकी हैं।
|
मुंबईः कोरोना की तीनों लहरों के दौरान देश के सबसे अधिक प्रभावित शहरों में से एक रहे मुंबई में हालात अब बेहतर हो रहे हैं। मुंबई में लगातार कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ रही है। ऐसे में मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने बुधवार को बताया कि, मुंबई में कोरोना के मामले अब कम आ रहे हैं, कल शाम तक मुंबई में एक सौ पैंतीस मामले सामने आए जिसमें बीस सिम्टोमेटिक हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है और बाकी लोग घर में आइसोलेशन में हैं। मुंबईकर नियमों का पालन कर रहे हैं और इस तरह वो जल्द ही तीसरी लहर को रोकने में कामयाब होंगे। वैसे खबर है कि, मुंबई में लगातार कम हो रहे कोरोना मामलों को देखते हुए आने वाले दिनों में मौजूदा कोरोना नियमों में सरकार और भी ढ़ील दे सकती है। इससे पहले लगातार कम होते कोरोना मामलों को देखते हुए पेडनेकर ने इस बात के संकेत भी दिए थे। फरवरी की शुरुआत में मेयर ने बताया बताया था कि, मुंबईकरों के लिए एक अच्छी खबर है। इस महीने के अंत तक मुंबई को अनलॉक कर दिया जाएगा। हमने अपना मन बना लिया है, लेकिन लोगों के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है। गौरतलब है कि, मुंबई में बीते चौबीस घंटाटों में कोरोना के एक सौ पैंतीस नए केस दर्ज किए गए हैं। अब शहर में रिकवरी रेट अट्ठानवे% हो गई है। इस दौरान दो सौ तैंतीस मरीजों ने इस संक्रमण पर जीत हासिल की है। अब मुंबई में कुल एक हज़ार तीन सौ पंद्रह कोरोना केस एक्टिव हैं। वहीं महाराष्ट्र में कोरोना महामारी के दौरान अब तक अठहत्तर लाख साठ हजार तीन सौ सत्रह लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें छिहत्तर लाख निन्यानवे हजार छः सौ तेईस कोरोना संक्रमित ठीक हो चुके हैं। साथ ही अब तक इस बीमारी से एक लाख तैंतालीस हजार छः सौ तैंतीस मौतें भी हो चुकी हैं।
|
समस्तीपुर में पोखर में नहाने गए तीन साथी में से एक की मौत डूबने से हो गई। ताजा मामला ताजपुर थाना क्षेत्र के चकमोतीपुर की है। मृतक की पहचान चकमोतीपुर निवासी उमाशंकर दास के पुत्र शिवम कुमार (19 वर्ष) के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिजनों सहित पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
घटना को लेकर ग्रामीणों का बताना है कि मृतक शिवम कुमार अपने तीन साथियों के साथ जल जीवन हरियाली पोखर में नहाने गया हुआ था। दो साथी पोखर किनारे ही स्नान कर रहे थे। वहीं शिवम नहाने के क्रम में तैरते-तैरते बीच पोखर तक जा पहुंचा। इसी दौरान सांस रुकने की वजह से वह बीच पानी में जाकर डूबने लगा। शिवम को डूबते देख उसके अन्य साथियों ने शोर मचाना शुरू किया। शोर सुनकर पहुंचे लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे पानी से बाहर निकाला। स्थानीय लोगों ने शिवम को आननफानन में इलाज के लिए जीवन सहारा नर्सिंग होम ले गए। जहां चिकित्सको ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने घटना की जानकारी स्थानीय थाना की पुलिस को दी गई। सूचना मिलने के बाद दारोगा अलख नारायण तिवारी सदलबल मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल समस्तीपुर भेज दिया। इस संबंध में थानाध्यक्ष ब्रज किशोर सिंह ने बताया कि पुलिस अग्रेत्तर कार्रवाई में जुटी है।
इधर, घटना को लेकर भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, खेग्रामस के रंजन गुप्ता, किसान नेता ब्रहमदेव प्रसाद सिंह, अजय दास, जयनारायण दास, अशोक राय, डा. गणेश प्रसाद सिंह, रक्टू सिंह आदि ने जीवन सहारा अस्पताल जाकर मृतक के प्रति शोक संवेदना व्यक्त किया। साथ ही सभी ने मृतक के परिजन को आपदा राहत कोष से 5 लाख रूपए मुआवजा सहित अन्य सरकारी लाभ देने की मांग प्रशासन से की है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
समस्तीपुर में पोखर में नहाने गए तीन साथी में से एक की मौत डूबने से हो गई। ताजा मामला ताजपुर थाना क्षेत्र के चकमोतीपुर की है। मृतक की पहचान चकमोतीपुर निवासी उमाशंकर दास के पुत्र शिवम कुमार के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिजनों सहित पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। घटना को लेकर ग्रामीणों का बताना है कि मृतक शिवम कुमार अपने तीन साथियों के साथ जल जीवन हरियाली पोखर में नहाने गया हुआ था। दो साथी पोखर किनारे ही स्नान कर रहे थे। वहीं शिवम नहाने के क्रम में तैरते-तैरते बीच पोखर तक जा पहुंचा। इसी दौरान सांस रुकने की वजह से वह बीच पानी में जाकर डूबने लगा। शिवम को डूबते देख उसके अन्य साथियों ने शोर मचाना शुरू किया। शोर सुनकर पहुंचे लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे पानी से बाहर निकाला। स्थानीय लोगों ने शिवम को आननफानन में इलाज के लिए जीवन सहारा नर्सिंग होम ले गए। जहां चिकित्सको ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने घटना की जानकारी स्थानीय थाना की पुलिस को दी गई। सूचना मिलने के बाद दारोगा अलख नारायण तिवारी सदलबल मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल समस्तीपुर भेज दिया। इस संबंध में थानाध्यक्ष ब्रज किशोर सिंह ने बताया कि पुलिस अग्रेत्तर कार्रवाई में जुटी है। इधर, घटना को लेकर भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, खेग्रामस के रंजन गुप्ता, किसान नेता ब्रहमदेव प्रसाद सिंह, अजय दास, जयनारायण दास, अशोक राय, डा. गणेश प्रसाद सिंह, रक्टू सिंह आदि ने जीवन सहारा अस्पताल जाकर मृतक के प्रति शोक संवेदना व्यक्त किया। साथ ही सभी ने मृतक के परिजन को आपदा राहत कोष से पाँच लाख रूपए मुआवजा सहित अन्य सरकारी लाभ देने की मांग प्रशासन से की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
मेडिकल के लिए लाए जा रहे अतीक और अशरफ की कॉल्विन हॉस्पिटल में 15 अप्रैल की रात पुलिस अभिरक्षा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मौके से ही शूटर लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्या को गिरफ्तार किया था। तीनों हमलावर पत्रकार बनकर आए थे।
प्रयागराजः अतीक अहमद और अशरफ हत्याकांड में शामिल तीनों शूटरों ने किसके इशारे या किस मकसद से इस घटना को अंजाम दिया था, इस बात का पता लगाने में विशेष जांच दल को अब तक सफलता नहीं मिली है। एसआईटी ने अब तीनों शूटरों का नार्को टेस्ट कराने का फैसला लिया है।
मेडिकल के लिए लाए जा रहे अतीक और अशरफ की कॉल्विन हॉस्पिटल में 15 अप्रैल की रात पुलिस अभिरक्षा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मौके से ही शूटर लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्या को गिरफ्तार किया था। तीनों हमलावर पत्रकार बनकर आए थे।
अपराध से राजनीति की दुनिया में पहुंचा अतीक अहमद पांच बार विधायक और एक बार सांसद भी रहा। हत्या से कुछ दिन पहले ही अतीक को गुजरात की साबरमती जेल से यूपी के प्रयागराज लाया गया था। पुलिस उससे उमेश पाल हत्याकांड में पूछताछ के लिए गुजरात से यूपी लेकर आई थी और वह जेल में बंद था।
अतीक की हत्या सियासी सरगमी का कारण भी बनी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज अरविंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में गठित आयोग इस मामले की जांच कर रहा है जिसमें पूर्व डीजीपी सुबेश कुमार सिंह व पूर्व जज बृजेश कुमार सोनी शामिल हैं। जांच के दौरान आयोग पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ करेगा। 2 महीने में इस केस की जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। हत्या की जांच के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के द्वारा न्यायिक आयोग का गठन किया गया था। फिलहाल आयोग द्वारा मामले की जाँच की जा रही है। हालांकि घटना को एक महीने हो गए लेकिन अब तक आयोग को खास सफलता नहीं मिली है।
मामले की जाँच कर रहे न्यायिक आयोग के सदस्यों ने मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय काल्विन के गेट पर जाकर क्राइम सीन भी दोहराया था। तीनों शूटरों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की गई थी। पूछताछ में पुलिस को पता चला की सनी सिंह को दिल्ली के गैंगस्टर गोगी ने तुर्की की जिगाना पिस्टल रखने के लिए दी थी।
|
मेडिकल के लिए लाए जा रहे अतीक और अशरफ की कॉल्विन हॉस्पिटल में पंद्रह अप्रैल की रात पुलिस अभिरक्षा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मौके से ही शूटर लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्या को गिरफ्तार किया था। तीनों हमलावर पत्रकार बनकर आए थे। प्रयागराजः अतीक अहमद और अशरफ हत्याकांड में शामिल तीनों शूटरों ने किसके इशारे या किस मकसद से इस घटना को अंजाम दिया था, इस बात का पता लगाने में विशेष जांच दल को अब तक सफलता नहीं मिली है। एसआईटी ने अब तीनों शूटरों का नार्को टेस्ट कराने का फैसला लिया है। मेडिकल के लिए लाए जा रहे अतीक और अशरफ की कॉल्विन हॉस्पिटल में पंद्रह अप्रैल की रात पुलिस अभिरक्षा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मौके से ही शूटर लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्या को गिरफ्तार किया था। तीनों हमलावर पत्रकार बनकर आए थे। अपराध से राजनीति की दुनिया में पहुंचा अतीक अहमद पांच बार विधायक और एक बार सांसद भी रहा। हत्या से कुछ दिन पहले ही अतीक को गुजरात की साबरमती जेल से यूपी के प्रयागराज लाया गया था। पुलिस उससे उमेश पाल हत्याकांड में पूछताछ के लिए गुजरात से यूपी लेकर आई थी और वह जेल में बंद था। अतीक की हत्या सियासी सरगमी का कारण भी बनी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज अरविंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में गठित आयोग इस मामले की जांच कर रहा है जिसमें पूर्व डीजीपी सुबेश कुमार सिंह व पूर्व जज बृजेश कुमार सोनी शामिल हैं। जांच के दौरान आयोग पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ करेगा। दो महीने में इस केस की जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। हत्या की जांच के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के द्वारा न्यायिक आयोग का गठन किया गया था। फिलहाल आयोग द्वारा मामले की जाँच की जा रही है। हालांकि घटना को एक महीने हो गए लेकिन अब तक आयोग को खास सफलता नहीं मिली है। मामले की जाँच कर रहे न्यायिक आयोग के सदस्यों ने मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय काल्विन के गेट पर जाकर क्राइम सीन भी दोहराया था। तीनों शूटरों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की गई थी। पूछताछ में पुलिस को पता चला की सनी सिंह को दिल्ली के गैंगस्टर गोगी ने तुर्की की जिगाना पिस्टल रखने के लिए दी थी।
|
बीते दिनों जम्मू-कश्मीर स्थित कुपवाड़ा में सुरक्षा बलों ने नियमित जांच के दौरान एक वाहन से सात किलोग्राम मादक पदार्थ और दो आईईडी बरामद कीं। इस दौरान एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
खबरों के अनुसार इलाके के साधना टॉप पर नियमित जांच के दौरान पुलिस और सेना के जवानों को एक ट्रक आता दिखा। जिसे चित्तरकोट करनाह निवासी हबीबुल्ला खां का बेटा इम्तियाज अहमद चला रहा था। जांच टीम ने इसे रुकने के लिए कहा। किसी तरह सुरक्षा बलों ने वाहन को रोककर जब जांच की तो उसमें हेरोइन जैसे दिखने वाले मादक पदार्थ के सात पैकेट और दो आईईडी बरामद हुईं। इसके बाद पुलिस ने इम्तियाज अहमद, गुलाम नबी पुत्र आशिक अली और शम्स बेगम पत्नी जाकिर हुसैन को गिरफ्तार कर लिया। तीनों चित्तरकोट करनाह के रहने वाले हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि तीनों आरोपी आतंकवादी घटनाओं में सहयोग करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए हेरोइन जैसे दिखने वाले मादक पदार्थ और आईईडी को घाटी के अन्य हिस्सों में ले जा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और घटना के विभिन्न पहलुओं को लेते हुए जांच की जा रही है।
|
बीते दिनों जम्मू-कश्मीर स्थित कुपवाड़ा में सुरक्षा बलों ने नियमित जांच के दौरान एक वाहन से सात किलोग्राम मादक पदार्थ और दो आईईडी बरामद कीं। इस दौरान एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। खबरों के अनुसार इलाके के साधना टॉप पर नियमित जांच के दौरान पुलिस और सेना के जवानों को एक ट्रक आता दिखा। जिसे चित्तरकोट करनाह निवासी हबीबुल्ला खां का बेटा इम्तियाज अहमद चला रहा था। जांच टीम ने इसे रुकने के लिए कहा। किसी तरह सुरक्षा बलों ने वाहन को रोककर जब जांच की तो उसमें हेरोइन जैसे दिखने वाले मादक पदार्थ के सात पैकेट और दो आईईडी बरामद हुईं। इसके बाद पुलिस ने इम्तियाज अहमद, गुलाम नबी पुत्र आशिक अली और शम्स बेगम पत्नी जाकिर हुसैन को गिरफ्तार कर लिया। तीनों चित्तरकोट करनाह के रहने वाले हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि तीनों आरोपी आतंकवादी घटनाओं में सहयोग करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए हेरोइन जैसे दिखने वाले मादक पदार्थ और आईईडी को घाटी के अन्य हिस्सों में ले जा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और घटना के विभिन्न पहलुओं को लेते हुए जांच की जा रही है।
|
Taliban vs Pakistan: जवाहिरी की हत्या के बाद तालिबान और पाकिस्तान में ठनी, कैसे एयर स्पेस को लेकर दोस्ती दुश्मनी में बदली?
Taliban vs Pakistan ऐसे में सवाल उठता है कि तालिबान का समर्थक पाकिस्तान ने ऐसा क्यों किया। इस क्रम में पाकिस्तान और तालिबान के रिश्तों पर भी रोशनी डालेंगे। क्या इस घटना का दोनों पर कोई असर पड़ेगा। आखिर अल-जवाहिरी की हत्या के बाद यह सवाल क्यों अहम हुआ।
नई दिल्ली, जेएनएन। Taliban vs Pakistan: अल-कायदा सरगना अयमान अल-जवाहिरी की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत के बाद अब तालिबान और पाकिस्तान में ठन गई है। तालिबान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ने रविवार को आरोप लगाया था कि हमले के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका को अपना हवाई क्षेत्र मुहैया कराया था। इस पर पाकिस्तान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि तालिबान का समर्थक पाकिस्तान ने ऐसा क्यों किया। इस क्रम में पाकिस्तान और तालिबान के रिश्तों पर भी रोशनी डालेंगे। क्या इस घटना का दोनों पर कोई असर पड़ेगा। आखिर अल-जवाहिरी की हत्या के बाद यह सवाल क्यों अहम हुआ।
1- विदेश मामलों के जानकार प्रो हर्ष वी पंत का कहना है कि तालिबान और पाकिस्तान के संबंधों में कई बार उतार-चढ़ाव देखे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली दफा नहीं है जब तालिबान ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया है। पूर्व में भी तालिबान सरकार ने इस तरह के आरोप लगाए हैं। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तानी सेना पर आरोप लगाया था कि उसने कुनार व खोस्त में बमबारी की है। तालिबान का दावा था कि पाक सेना के इस हमले में 40 लोगों की मौत हो गई थी। तालिबान के इस आरोप पर पाकिस्तान हुकूमत ने कहा था कि आतंकवादी पाकिस्तान में आतंकी वारदात के लिए अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर रहे हैं। उस समय तालिबान और पाकिस्तान के संबंध काफी तल्ख हो गए थे। पाकिस्तान की इस प्रतिक्रिया के बाद तालिबान हुकूमत ने पाकिस्तान को परिणाम भुगतने तक की चेतावनी दे डाली थी।
2- उन्होंने कहा कि तालिबान और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा को लेकर भी गहरा विवाद रहा है। डूरंड लाइन को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद कायम है। हालांकि, अफगानिस्तान की किसी हुकूमत ने इस सीमा रेखा को कभी भी मान्यता नहीं दी है। बता दें कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा को डूरंड लाइन के नाम से जाना जाता है। ब्रिटिश सरकार ने तत्कालीन भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए 1893 में अफगानिस्तान के साथ 2640 किमी लंबी सीमा रेखा खींची थी। यह रेखा अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अलग करती है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान काबुल में ब्रिटिश इंडिया के तत्कालीन विदेश सचिव सर मॉर्टिमर डूरंड और अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच यह समझौता हुआ था। हालांकि, अफगानिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं मानता है।
A- तालिबान ने पाकिस्तान पर लगाए . आरोप. .
तालिबान सरकार के रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब का आरोप था कि अमेरिकी ड्रोन अभी भी पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान में प्रवेश कर रहे हैं। तालिबान के रक्षा मंत्री ने कहा कि अमेरिकी ड्रोन अफगनिस्तान के हवाई क्षेत्र में वाया पाकिस्तान प्रवेश कर रहे हैं जो कि देश की सम्प्रभुता की अवहेलना करना है। अल-कायदा प्रमुख अल-जवाहिरी की काबुल में मौत के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है। जवाहिरी की मौत की खबर खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने दी थी। उन्होंने कहा था कि एक ड्रोन अभियान के जरिए जवाहिरी की काबुल में हत्या कर दी गई। इस हमले के बाद इस तरह के आरोप थे कि इस हमले के लिए पाकिस्तान के एयर-स्पेस का इस्तेमाल किया गया।
पाकिस्तान का कहना है कि तालिबान सरकार के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ने अमेरिकी ड्रोन के पाकिस्तान के एयर स्पेस का इस्तेमाल करने की बात कही है जो कि राजनयिक शिष्टाचार के विरुद्ध है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बिना किसी सुबूत के इतने गंभीर आरोप लगाना बेहद आपत्तिजनक है। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि यह आरोप इसलिए और गंभीर हैं क्योंकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के एक नेता की ओर से यह बयान दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनका मुल्क सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को बरकरार रखने में विश्वास करता है। साथ ही आतंकवाद के हर प्रारूप की निंदा करता है।
|
Taliban vs Pakistan: जवाहिरी की हत्या के बाद तालिबान और पाकिस्तान में ठनी, कैसे एयर स्पेस को लेकर दोस्ती दुश्मनी में बदली? Taliban vs Pakistan ऐसे में सवाल उठता है कि तालिबान का समर्थक पाकिस्तान ने ऐसा क्यों किया। इस क्रम में पाकिस्तान और तालिबान के रिश्तों पर भी रोशनी डालेंगे। क्या इस घटना का दोनों पर कोई असर पड़ेगा। आखिर अल-जवाहिरी की हत्या के बाद यह सवाल क्यों अहम हुआ। नई दिल्ली, जेएनएन। Taliban vs Pakistan: अल-कायदा सरगना अयमान अल-जवाहिरी की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत के बाद अब तालिबान और पाकिस्तान में ठन गई है। तालिबान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ने रविवार को आरोप लगाया था कि हमले के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका को अपना हवाई क्षेत्र मुहैया कराया था। इस पर पाकिस्तान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि तालिबान का समर्थक पाकिस्तान ने ऐसा क्यों किया। इस क्रम में पाकिस्तान और तालिबान के रिश्तों पर भी रोशनी डालेंगे। क्या इस घटना का दोनों पर कोई असर पड़ेगा। आखिर अल-जवाहिरी की हत्या के बाद यह सवाल क्यों अहम हुआ। एक- विदेश मामलों के जानकार प्रो हर्ष वी पंत का कहना है कि तालिबान और पाकिस्तान के संबंधों में कई बार उतार-चढ़ाव देखे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली दफा नहीं है जब तालिबान ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया है। पूर्व में भी तालिबान सरकार ने इस तरह के आरोप लगाए हैं। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तानी सेना पर आरोप लगाया था कि उसने कुनार व खोस्त में बमबारी की है। तालिबान का दावा था कि पाक सेना के इस हमले में चालीस लोगों की मौत हो गई थी। तालिबान के इस आरोप पर पाकिस्तान हुकूमत ने कहा था कि आतंकवादी पाकिस्तान में आतंकी वारदात के लिए अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर रहे हैं। उस समय तालिबान और पाकिस्तान के संबंध काफी तल्ख हो गए थे। पाकिस्तान की इस प्रतिक्रिया के बाद तालिबान हुकूमत ने पाकिस्तान को परिणाम भुगतने तक की चेतावनी दे डाली थी। दो- उन्होंने कहा कि तालिबान और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा को लेकर भी गहरा विवाद रहा है। डूरंड लाइन को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद कायम है। हालांकि, अफगानिस्तान की किसी हुकूमत ने इस सीमा रेखा को कभी भी मान्यता नहीं दी है। बता दें कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा को डूरंड लाइन के नाम से जाना जाता है। ब्रिटिश सरकार ने तत्कालीन भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में अफगानिस्तान के साथ दो हज़ार छः सौ चालीस किमी लंबी सीमा रेखा खींची थी। यह रेखा अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अलग करती है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान काबुल में ब्रिटिश इंडिया के तत्कालीन विदेश सचिव सर मॉर्टिमर डूरंड और अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच यह समझौता हुआ था। हालांकि, अफगानिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं मानता है। A- तालिबान ने पाकिस्तान पर लगाए . आरोप. . तालिबान सरकार के रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब का आरोप था कि अमेरिकी ड्रोन अभी भी पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान में प्रवेश कर रहे हैं। तालिबान के रक्षा मंत्री ने कहा कि अमेरिकी ड्रोन अफगनिस्तान के हवाई क्षेत्र में वाया पाकिस्तान प्रवेश कर रहे हैं जो कि देश की सम्प्रभुता की अवहेलना करना है। अल-कायदा प्रमुख अल-जवाहिरी की काबुल में मौत के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है। जवाहिरी की मौत की खबर खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने दी थी। उन्होंने कहा था कि एक ड्रोन अभियान के जरिए जवाहिरी की काबुल में हत्या कर दी गई। इस हमले के बाद इस तरह के आरोप थे कि इस हमले के लिए पाकिस्तान के एयर-स्पेस का इस्तेमाल किया गया। पाकिस्तान का कहना है कि तालिबान सरकार के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ने अमेरिकी ड्रोन के पाकिस्तान के एयर स्पेस का इस्तेमाल करने की बात कही है जो कि राजनयिक शिष्टाचार के विरुद्ध है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बिना किसी सुबूत के इतने गंभीर आरोप लगाना बेहद आपत्तिजनक है। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि यह आरोप इसलिए और गंभीर हैं क्योंकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के एक नेता की ओर से यह बयान दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनका मुल्क सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को बरकरार रखने में विश्वास करता है। साथ ही आतंकवाद के हर प्रारूप की निंदा करता है।
|
[विपाकसूत्र - प्रथम श्रु तस्कन्ध
पगल त पूयरुहिर लालापगल तकण्णनास श्रभिवखण अभिवखण पूयकवले य रुहिरकवले य किमियकवले य वममाण कट्ठाइ कलुणाइ विसराइ कूयमाण मच्छ्यिाचडगरपहकरेण श्रन्निज्जमाणमग्ग फुट्टहडाहडसोस दण्डिखडवसण खडमल्ल-खडघड-हत्यगय गेहे-गेहे देह बलियाए वित्ति कप्पेमाण पासइ । तथा भगव गोयमे उच्च-नीय-मज्झिम-कुलाइ जाव श्रडमाणे ग्रहापज्जत्त समुदाण गिण्हइ, गिरिहत्ता पाडलिसडाम्रो पडिनिक्खमइ, पडिनिक्खमित्ता जेणेव समणे भगव महावोरे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता भत्तपाण आलोएड, भत्तपाण पडिदसेइ, पडिदसित्ता समणेण श्रव्मणुन्नाए समाणे जाव बिलमिव पन्नगभूएण प्राण प्राहारमाहारेइ, सजमेण तवसा प्रप्पाण भावेमाणे विहरइ ।
४ - उस काल तथा उस समय भगवान् गौतम स्वामी पष्ठतप-वैले के पारणे के निमित्त भिक्षा के लिये पाटलिपण्ड नगर मे जाते है । उस पाटलिपण्ड नगर में पूर्वदिशा के द्वार से प्रवेश करते है । वहाँ एक पुरुष को देखते है, जिसका वर्णन निम्न प्रकार हैवह पुरुष कण्डू - खुजली के रोग से युक्त, कोढ के रोगवाला, जलोदर, भगन्दर तथा बवासीर - अर्श के रोग से ग्रस्त था । उसे खासी, श्वास व सूजन का रोग भी हो रहा था । उसका मुख सूजा हुआ था । हाथ और पैर भी सूजे हुए थे। हाथ और पैर की अङ्ग लिया सडी हुई थी, नाक और कान गले हुए थे । व्रणो (घावो) से निकलते सफेद गन्दे पानी तथा पीव से वह 'थिव थिव' शब्द कर रहा था । ( अथवा विलविलाते हुए) कृमियो से अत्यन्त ही पीडित तथा गिरते हुए पीव और रुचिरवाले व्रगमुखा से युक्त या । उसके कान और नाक क्ले-फोड़े के बहाव के तारो से गल चुके थे। वारवार वह पोव के कवलो ग्रासो का, रुधिर के कवलो का तथा कृमियों के कवलो का वमन कर रहा था। वह कष्टोत्पादक, करुणाजनक एव दीनतापूर्ण शब्द कर रहा था । उसके पीछे-पीछे मक्षिकाओ के झुण्ड के झुण्ड चले जा रहे थे । उसके सिर के वाल अस्तव्यस्त थे । उसने थिगलीवाले वस्त्रखड धारण कर रक्खे थे। फूटे हुए घडे का टुकडा उसका भिक्षापात्र था । सिकोरे का खड उसका जल-पात्र था, जिसे वह हाथ में लिए हुए घर-घर मे भिक्षावृत्ति के द्वारा आजीविका
कर रहा था ।
इधर भगवान् गौतम स्वामी ऊँच, नीच और मध्यम घरो मे भिक्षार्थ भ्रमण करते हुए और यथेष्ट भिक्षा लेकर पाटलिषण्ड नगर से निकलकर जहाँ श्रमण भगवान् महावीर स्वामी विराजमान थे, वहाँ पर आये । आकर भक्तपान की अलोचना की और लाया हुआ आहार- पानी भगवान् को दिखाया । दिखलाकर उनकी आज्ञा मिल जाने पर बिल मे प्रवेश करते हुए सर्प की भाति - विना रस लिये ही - आहार करते हैं और सयम तथा तप से अपनी आत्मा को भावित करते हुए विचरण करने लगे ।
५ - तए ण से भगव गोयमे दोच्च पि छट्टक्खमणपारणगसि पढमाए पोरिसीए सज्झाय जाव पाडलिसड नयर दाहिणिल्लेण दुवारेण प्रणुष्पविसइ, त चेव पुरिस पासइ-कच्छुल्लं तहेब जाव सजमेण तवसा विहरइ ।
५ - उसके बाद भगवान् गौतम स्वामी ने दूसरी बार बेले के पारणे के निमित्त प्रथम प्रहर मे स्वाध्याय किया यावत् भिक्षार्थ गमन करते हुए पाटलिषण्ड नगर मे दक्षिण दिशा के द्वार से प्रवेश किया तो वहा पर भी उन्होने कडू आदि रोगो से युक्त उसी पुरुप को देखा और वे भिक्षा लेकर वापिस आये । यावत् तप व सयम से आत्मा को भावित करते हुए विचरने लगे ।
|
[विपाकसूत्र - प्रथम श्रु तस्कन्ध पगल त पूयरुहिर लालापगल तकण्णनास श्रभिवखण अभिवखण पूयकवले य रुहिरकवले य किमियकवले य वममाण कट्ठाइ कलुणाइ विसराइ कूयमाण मच्छ्यिाचडगरपहकरेण श्रन्निज्जमाणमग्ग फुट्टहडाहडसोस दण्डिखडवसण खडमल्ल-खडघड-हत्यगय गेहे-गेहे देह बलियाए वित्ति कप्पेमाण पासइ । तथा भगव गोयमे उच्च-नीय-मज्झिम-कुलाइ जाव श्रडमाणे ग्रहापज्जत्त समुदाण गिण्हइ, गिरिहत्ता पाडलिसडाम्रो पडिनिक्खमइ, पडिनिक्खमित्ता जेणेव समणे भगव महावोरे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता भत्तपाण आलोएड, भत्तपाण पडिदसेइ, पडिदसित्ता समणेण श्रव्मणुन्नाए समाणे जाव बिलमिव पन्नगभूएण प्राण प्राहारमाहारेइ, सजमेण तवसा प्रप्पाण भावेमाणे विहरइ । चार - उस काल तथा उस समय भगवान् गौतम स्वामी पष्ठतप-वैले के पारणे के निमित्त भिक्षा के लिये पाटलिपण्ड नगर मे जाते है । उस पाटलिपण्ड नगर में पूर्वदिशा के द्वार से प्रवेश करते है । वहाँ एक पुरुष को देखते है, जिसका वर्णन निम्न प्रकार हैवह पुरुष कण्डू - खुजली के रोग से युक्त, कोढ के रोगवाला, जलोदर, भगन्दर तथा बवासीर - अर्श के रोग से ग्रस्त था । उसे खासी, श्वास व सूजन का रोग भी हो रहा था । उसका मुख सूजा हुआ था । हाथ और पैर भी सूजे हुए थे। हाथ और पैर की अङ्ग लिया सडी हुई थी, नाक और कान गले हुए थे । व्रणो से निकलते सफेद गन्दे पानी तथा पीव से वह 'थिव थिव' शब्द कर रहा था । कृमियो से अत्यन्त ही पीडित तथा गिरते हुए पीव और रुचिरवाले व्रगमुखा से युक्त या । उसके कान और नाक क्ले-फोड़े के बहाव के तारो से गल चुके थे। वारवार वह पोव के कवलो ग्रासो का, रुधिर के कवलो का तथा कृमियों के कवलो का वमन कर रहा था। वह कष्टोत्पादक, करुणाजनक एव दीनतापूर्ण शब्द कर रहा था । उसके पीछे-पीछे मक्षिकाओ के झुण्ड के झुण्ड चले जा रहे थे । उसके सिर के वाल अस्तव्यस्त थे । उसने थिगलीवाले वस्त्रखड धारण कर रक्खे थे। फूटे हुए घडे का टुकडा उसका भिक्षापात्र था । सिकोरे का खड उसका जल-पात्र था, जिसे वह हाथ में लिए हुए घर-घर मे भिक्षावृत्ति के द्वारा आजीविका कर रहा था । इधर भगवान् गौतम स्वामी ऊँच, नीच और मध्यम घरो मे भिक्षार्थ भ्रमण करते हुए और यथेष्ट भिक्षा लेकर पाटलिषण्ड नगर से निकलकर जहाँ श्रमण भगवान् महावीर स्वामी विराजमान थे, वहाँ पर आये । आकर भक्तपान की अलोचना की और लाया हुआ आहार- पानी भगवान् को दिखाया । दिखलाकर उनकी आज्ञा मिल जाने पर बिल मे प्रवेश करते हुए सर्प की भाति - विना रस लिये ही - आहार करते हैं और सयम तथा तप से अपनी आत्मा को भावित करते हुए विचरण करने लगे । पाँच - तए ण से भगव गोयमे दोच्च पि छट्टक्खमणपारणगसि पढमाए पोरिसीए सज्झाय जाव पाडलिसड नयर दाहिणिल्लेण दुवारेण प्रणुष्पविसइ, त चेव पुरिस पासइ-कच्छुल्लं तहेब जाव सजमेण तवसा विहरइ । पाँच - उसके बाद भगवान् गौतम स्वामी ने दूसरी बार बेले के पारणे के निमित्त प्रथम प्रहर मे स्वाध्याय किया यावत् भिक्षार्थ गमन करते हुए पाटलिषण्ड नगर मे दक्षिण दिशा के द्वार से प्रवेश किया तो वहा पर भी उन्होने कडू आदि रोगो से युक्त उसी पुरुप को देखा और वे भिक्षा लेकर वापिस आये । यावत् तप व सयम से आत्मा को भावित करते हुए विचरने लगे ।
|
मनोहर पर्रिकर के बगैर गोवा के पहले चुनाव में भाजपा के लिए कठिन चुनौती है. (फाइल फोटो)
चंडीगढ़. पंजाब की राजनीति (Politics of Punjab) में दलित (Dalits) केंद्र बिंदु में आ गए हैं. इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पंजाब की 32 फीसदी दलितों की आबादी (Dalit population) की मांग पर चुनाव आयोग का मतदान की तिथि 14 फरवरी से 20 फरवरी करनी पड़ी. द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक से पंजाब यूनिवर्सिटी (Punjab University) में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रोनकी राम कहते हैं कि पंजाब में दलित 39 जातियों में बंटे हैं.
रोनकी राम ने कहा कि इनमें रामदासी, मज़हबी, राय सिख और सांसी, सिख धर्म का पालन करते हैं. वाल्मीकि मुख्य रूप से हिन्दू हैं. रविदासिया और आद-धर्मियों ने हाल ही में दलितों के लिए रविदसिया धर्म बनाया है. हालांकि इनके अलग धर्म बनाने के बावजूद इनमें से ज्यादातर लोग सिख धर्म के रीति-रिवाजों को मानते हैं. इसके साथ ही ये रविदसिया पहचान के साथ डेराओं से भी जुड़े हैं. ये ज्यादातर दोआब इलाकों में हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक गुरु रविदास की जयंती 16 फरवरी को है. कई सामाजिक संगठनों ने भी चुनाव की तारीख बदलने की मांग की थी. 10 फरवरी से 16 फरवरी के बीच गुरु रविदास को मानने वाले बड़ी संख्या में लोग पंजाब से बनारस जाते हैं. ऐसे में 14 फरवरी को मतदान होता तो इनके लिए दिक्कत होती.
बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) और सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने 10 जनवरी को मतदान की तारीख बदलने की सबसे पहले मांग की थी. इसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charajit Singh Channi) ने चुनाव आयोग को ख़त लिखा था. इसके बाद बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियां- पंजाब लोक कांग्रेस के साथ एसएडी (संयुक्त) ने भी मतदान की तारीख बदलने की मांग की. इन मांगों के बाद चुनाव आयोग ने तारीख़ बदलने की घोषणा बीते सोमवार को कर दी. चुनाव आयोग की घोषणा के बाद राजनीतिक दलों में इस बदलाव का श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई.
.
|
मनोहर पर्रिकर के बगैर गोवा के पहले चुनाव में भाजपा के लिए कठिन चुनौती है. चंडीगढ़. पंजाब की राजनीति में दलित केंद्र बिंदु में आ गए हैं. इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पंजाब की बत्तीस फीसदी दलितों की आबादी की मांग पर चुनाव आयोग का मतदान की तिथि चौदह फरवरी से बीस फरवरी करनी पड़ी. द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक से पंजाब यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रोनकी राम कहते हैं कि पंजाब में दलित उनतालीस जातियों में बंटे हैं. रोनकी राम ने कहा कि इनमें रामदासी, मज़हबी, राय सिख और सांसी, सिख धर्म का पालन करते हैं. वाल्मीकि मुख्य रूप से हिन्दू हैं. रविदासिया और आद-धर्मियों ने हाल ही में दलितों के लिए रविदसिया धर्म बनाया है. हालांकि इनके अलग धर्म बनाने के बावजूद इनमें से ज्यादातर लोग सिख धर्म के रीति-रिवाजों को मानते हैं. इसके साथ ही ये रविदसिया पहचान के साथ डेराओं से भी जुड़े हैं. ये ज्यादातर दोआब इलाकों में हैं. रिपोर्ट के मुताबिक गुरु रविदास की जयंती सोलह फरवरी को है. कई सामाजिक संगठनों ने भी चुनाव की तारीख बदलने की मांग की थी. दस फरवरी से सोलह फरवरी के बीच गुरु रविदास को मानने वाले बड़ी संख्या में लोग पंजाब से बनारस जाते हैं. ऐसे में चौदह फरवरी को मतदान होता तो इनके लिए दिक्कत होती. बहुजन समाज पार्टी और सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने दस जनवरी को मतदान की तारीख बदलने की सबसे पहले मांग की थी. इसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने चुनाव आयोग को ख़त लिखा था. इसके बाद बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियां- पंजाब लोक कांग्रेस के साथ एसएडी ने भी मतदान की तारीख बदलने की मांग की. इन मांगों के बाद चुनाव आयोग ने तारीख़ बदलने की घोषणा बीते सोमवार को कर दी. चुनाव आयोग की घोषणा के बाद राजनीतिक दलों में इस बदलाव का श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई. .
|
Godda: जिले में एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत आयुष चिकित्सक अब अपनी वेतन मांग को लेकर विरोध करने लगे हैं. मंगलवार को पौड़ेयाहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत आयुष चिकित्सकों ने समान काम समान वेतन को लेकर काला बिल्ला लगाकर सांकेतिक हड़ताल किया. पोड़ैयाहाट में पदस्थापित आयुष चिकित्सक डॉक्टरों ने बताया कि यह सांकेतिक हड़ताल समान कार्य समान वेतन की मांग को लेकर है. यह हड़ताल 12 जून तक चलेगा. पथरगामा में भी मंगलवार को पथरगामा सीएचसी में आयुष चिकित्सकों ने काला बिल्ला लगाकर कार्य किया और सरकार के प्रति विरोध जताया.
डॉक्टरों का कहना है कि एक वर्ष पूर्व भी हड़ताल किया गया था उस समय सरकार ने आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाएगा. लेकिन एक साल बाद भी सरकार हमारी मांगों पर कुछ भी नहीं कर रही है. ऐसे में सांकेतिक हड़ताल पर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.
• पड़ोसी राज्य बिहार की तरह समान काम समान वेतन की तर्ज पर एनएचएम में कार्यरत एमबीबीएस चिकित्सकों के समतुल्य मानदेय दिया जाए.
• प्रतिवर्ष 10 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर किया जाए.
• सेवानिवृत्ति उम्र 67 वर्ष किया जाए.
• सभी आयुष चिकित्सकों के स्थाई रिक्त पदों पर बिना शर्त सीधी नियुक्ति की प्रक्रिया को अपनाते हुए समायोजन किया जाए.
• नियमित चिकित्सकों की तरह आयुष चिकित्सकों को भी अन्य सुविधाएं प्रदान की जाए.
• इपीएफ एवं सेवा पुस्तिका खोलने पर सरकार विचार करें.
• 50 लाख का बीमा तथा कोरोना योद्धा के रूप में पंजीकृत करने पर सरकार विचार करें.
• सभी स्वास्थ्य केंद्र पर आयुष चिकित्सकों की अलग ओपीडी की भी व्यवस्था हो.
|
Godda: जिले में एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत आयुष चिकित्सक अब अपनी वेतन मांग को लेकर विरोध करने लगे हैं. मंगलवार को पौड़ेयाहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत आयुष चिकित्सकों ने समान काम समान वेतन को लेकर काला बिल्ला लगाकर सांकेतिक हड़ताल किया. पोड़ैयाहाट में पदस्थापित आयुष चिकित्सक डॉक्टरों ने बताया कि यह सांकेतिक हड़ताल समान कार्य समान वेतन की मांग को लेकर है. यह हड़ताल बारह जून तक चलेगा. पथरगामा में भी मंगलवार को पथरगामा सीएचसी में आयुष चिकित्सकों ने काला बिल्ला लगाकर कार्य किया और सरकार के प्रति विरोध जताया. डॉक्टरों का कहना है कि एक वर्ष पूर्व भी हड़ताल किया गया था उस समय सरकार ने आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाएगा. लेकिन एक साल बाद भी सरकार हमारी मांगों पर कुछ भी नहीं कर रही है. ऐसे में सांकेतिक हड़ताल पर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. • पड़ोसी राज्य बिहार की तरह समान काम समान वेतन की तर्ज पर एनएचएम में कार्यरत एमबीबीएस चिकित्सकों के समतुल्य मानदेय दिया जाए. • प्रतिवर्ष दस फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर किया जाए. • सेवानिवृत्ति उम्र सरसठ वर्ष किया जाए. • सभी आयुष चिकित्सकों के स्थाई रिक्त पदों पर बिना शर्त सीधी नियुक्ति की प्रक्रिया को अपनाते हुए समायोजन किया जाए. • नियमित चिकित्सकों की तरह आयुष चिकित्सकों को भी अन्य सुविधाएं प्रदान की जाए. • इपीएफ एवं सेवा पुस्तिका खोलने पर सरकार विचार करें. • पचास लाख का बीमा तथा कोरोना योद्धा के रूप में पंजीकृत करने पर सरकार विचार करें. • सभी स्वास्थ्य केंद्र पर आयुष चिकित्सकों की अलग ओपीडी की भी व्यवस्था हो.
|
हूँ, इससे मुझे मुक्त होना चाहिए, ऐसी जिसको मुक्ति की प्रबल इच्छा हुई है एवं जो अत्यन्त अज्ञानी नहीं है और जो अत्यन्त ज्ञानी भी नहीं है, वही इस शास्त्र के श्रवण में अधिकारी है ॥२॥
भाव यह है कि न अत्यन्त ज्ञानी और न अत्यन्त अज्ञानी इस शास्त्र का अधिकारी है, यह कहना ठीक है, किन्तु मैं कारागार में हथकड़ियों से बँधे हुए कैदी की नाई अनादिकाल से बद्ध होकर परवशता, परिच्छिन्नता, जन्म, जरा, मरण आदि दुःख सागर में डूबा हुआ हूँ, इस दुःख की आत्यान्तिक निवृत्ति का उपाय एकमात्र आत्मज्ञान ही है, क्योंकि 'तरति शोकमात्मवित्' (आत्मा को जाननेवाला पुरुष ही दुःख से विमुक्त होता है।) यह श्रुति आत्मज्ञान ही मुक्ति का उपाय है, ऐसा कहती है। इसलिए मैं उस आत्मज्ञान का लाभ कर मुक्त होऊँ, इस प्रकार की उत्कट जिज्ञासा से युक्त जिसका निश्चय है, वह इस शास्त्र का अधिकारी है, ऐसे ही पुरुष को इस शास्त्र के श्रवण का फल मिलता है । निष्कर्ष यह निकला कि अनेक पुण्यों से जिसके राग आदि दोष क्षीण हो गये हैं और विवेक से जिसे आत्मा की जिज्ञासा हुई है, ऐसे विशेषरूप से आत्मा को न जाननेवाले अज्ञानी का ही इस शास्त्र में अधिकार है।
शंका - जिसके राग आदि दोष नष्ट हो गये हैं, ऐसा त्रैवर्णिक इस योगवासिष्टरूप शास्त्र में अधिकारी है, ऐसा यदि मानो, तो यह संन्यासपूर्वक वेदान्त श्रवण में ही अधिकारी है, ऐसा अवश्य स्वीकार करना पड़ेगा, क्योंकि पूर्वकाण्ड के ( कर्मकाण्ड के) अनुष्ठान से चित्त के शुद्ध होने पर ही उत्तरकाण्ड में (वेदान्त में) अधिकार प्राप्त होता है, ऐसा 'तमेतं वेदानुवचनेन' इत्यादि श्रुति से सिद्ध है । और जो त्रैवर्णिक नहीं है, उसका अधिकार भी इसमें नहीं हो सकता, क्योंकि 'नावेदविन्मनुते तं बृहन्तम्' इत्यादि श्रुति से उसके अधिकार का निषेध किया गया है। इस परिस्थिति में इस शास्त्र का अधिकारी कैसे सुलभ होगा ?
आकाश में, बहीः बहिःप्रज्ञ द्वारा भोग्य जाग्रत् में, अंतः अन्तःप्रज्ञ द्वारा भोग्य स्वप्न में एवं मरण, मूर्च्छा आदि अवस्थाओं में जो स्थूल सूक्ष्म कारणों के अभिमानी रूप से, भोक्तृत्वरूप से, साक्षीरूप से और निष्प्रपंचपूर्णानन्दचिन्मात्रस्वभाव से नाना प्रकार का प्रतीत होता है, पर वस्तुतः चैतन्यस्वभाव ही है, उस सर्वात्मा परब्रह्म को नमस्कार है । अथवा कारणोपाधि में, कर्मबीज के उद्भवस्थान कार्योपाधि में, जीवन्मुक्तिदशा में, निरुपाधि स्वरूप में एवं माया और अन्तःकरण की वृत्तियों में जो ज्ञानस्वभाव प्रकाशित होता है, उस सर्वोपाधि शून्य परमात्मा को नमस्कार है । अथवा दिविप्रकाशस्वरूप तेज में, भूमौ - पृथिवी में, व्योन्मि-आकाश में, अन्त-अन्तरालस्थ जल और पवन में, बहिः बहिर्भूत अव्याकृत में तथा निरुपाधिक परमार्थरूप में जो अनुवृत्त होकर सन्मात्रस्वभाव परमात्मा भासता है, उस अवभासात्मक परमात्मा को नमस्कार है । अथवा बाहर तटस्थरूप को धारण कर पूज्य देवता आदि के रूप से देवलोक में देह के मध्य में रहकर पूजकरूप से भूलोक में और क्रिया, फल, साधन आदि के रूप से अन्तराल में स्वरूप की अज्ञानावस्था में परिच्छिन्नरूप से अन्यथा प्रतीत होकर भी तत्त्वदृष्टि के उदित होने पर जो परिच्छेद रहित प्रतीत होता है, उस सर्वात्मा त्रिविधपरिच्छेदशून्य परमात्मा को नमस्कार है । अथवा ऊपर, नीचे, मध्य में, पूर्व आदि दिशाओं में, शरीर के भीतर, भूत और भविष्यत् काल में जो अवभासात्मा मुझ तत्त्वज्ञानी को प्रतीत होता है, उस सम्पूर्ण प्रपंच के बाध के आश्रयभूत परमात्मा को नमस्कार है।
समाधान - आपका कथन ठीक नहीं है, क्योंकि जैसे त्रैवर्णिकका त्रेताग्निसाध्य (आहवनीय, गार्हपत्य और दक्षिणाग्नि- इन तीन अग्नियों से साध्य) कर्म में अधिकार होने पर भी जो अनाहिताग्नि (जिन्होंने अग्न्याधान नहीं किया है) हैं, ऐसे पुरुषों द्वारा अनुष्ठेय स्मार्त कर्म में भी अधिकार है ही, वैसे ही श्रौतज्ञान के अधिकारी का भी असंन्यासी मुमुक्षु पुरुषों के अधिकार के समान इस ग्रन्थ में भी अधिकार है । और यह अधिकार तभी तक है, जब तक अज्ञान रहता है, क्योंकि यह योगवासिष्ठ शास्त्र स्मृति के समान वेदार्थ को ही विशद करता है ।
वेदवेद्यो परे पुंसि जाते दशरथात्मजे । वेदः प्राचेतसादासीत् साक्षाद् रामायणात्मना ॥
अर्थात् केवल वेदों से जानने योग्य दशरथनन्दन परमपुरुष भगवान् रामचन्द्रजी के आविर्भूत होने पर वाल्मीकि महर्षि द्वारा रामायण के रूप में साक्षात् वेद का ही आविर्भाव हुआ । उसमें श्रीरामचन्द्रजी की कथा द्वारा पूर्वरामायण में उत्तरकाण्डसहित छः काण्डों से कर्मकाण्ड का निरूपण किया है और इस उत्तररामायण में याने योगवासिष्ठ में छः प्रकरणों द्वारा ज्ञानकाण्ड का निरूपण किया है। इस परिस्थिति में यह निष्कर्ष निकला कि जैसे कुछ स्मार्त कर्मों में - त्रैवर्णिकों के साथ स्त्री शूद्र आदि का भी अधिकार देखा जाता है, वैसे ही इस ग्रन्थ के श्रवण में भी पुराणश्रवण के समान त्रैवर्णिक और अत्रैवर्णिकसाधारण मुमुक्षुओं का अधिकार है। इस अर्थ में प्रमाणभूत 'श्रावयेच्चतुरो वर्णान् कृत्वा ब्राह्मणमग्रतः' (ब्राह्मण को मुख्य श्रोता बनाकर चारों वर्णों को (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र-इन चारों वर्गों को) पुराण सुनावे), 'नावेदविन्मनुते तं बृहन्तम्' (वेद को न जाननेवाला उस बड़ी वस्तु को परमात्मा को- नहीं पा सकता), 'तंव त्वौपनिषदं पुरुषं पृच्छामि' (उस उपनिषदेकगम्य पुरुष के विषय में पूछता हूँ) इत्यादि वचनों का 'वेद को न जाननेवाले का श्रौत ज्ञान में अधिकार नहीं है, इसी अर्थ में तात्पर्य है, ऐसा कुछ लोग कहते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि 'वेद को न जाननेवाले को अपरोक्ष साक्षात्कार नहीं होता' इस अर्थ में उनका तात्पर्य है। कुछ लोगों का अभिप्राय यह है कि वेदपूर्वक प्राप्त हुआ आत्मज्ञान प्रशस्त होता है, यही उन वाक्यों से प्राप्त होता है। जो भी हो, परन्तु स हि सर्वैर्विजिज्ञास्य आत्म वर्णैस्तथाऽऽश्रमैः' इत्यादि अनेक वचनों से ज्ञात होता है कि पुराण श्रवण से उत्पन्न साधारण ज्ञान में औरों का भी (त्रैवर्णिकेतरों का भी) अधिकार है। अधिकार के सिद्ध होने पर श्रौत आत्मज्ञान में जैसे कर्मकाण्ड में प्रतिपादित कर्मों के अनुष्ठान से उत्पन्न चित्त की शुद्धि हेतु है, वैसे ही यहाँ पर भी पूर्वरामायण में प्रदर्शित स्व-स्व वर्ण और आश्रम के कर्मों के अनुष्ठान से होनेवाली चित्त की शुद्धि जिज्ञासा के उत्पादन द्वारा हेतु है, यों पूर्व और उत्तररामायण में हेतु हेतुमद्भावसंगति का प्रदर्शन करते हुए सम्पूर्ण अनर्थ की निवृत्तिरूप अन्य प्रयोजन दिखलाते हैं।
पहले जिसमें कथारूप उपाय है उस रामचरितवर्णनात्मक पूर्वरामायण का विचार कर जो मोक्ष के उपायभूत इन छः प्रकरणों का विचार करता है, वह बुद्धिमान् इस संसार में पुनः जन्म आदि दुःख को प्राप्त नहीं होता ॥३॥
तात्पर्य यह है कि पूर्वरामायण में जिस मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्रजी की कथा का वर्णन किया गया है, वह कथा ही ज्ञानाधिकार को प्राप्त करानेवाले धर्म-तत्त्वज्ञान, धर्म का अनुष्ठान और
[ वैराग्य
ईश्वर में विश्वास के उपाय हेतु है अर्थात् सारी रामायण की कथा सुनने के बाद मनुष्य को धर्म का यथार्थ ज्ञान होता है, फिर वह उसका अनुष्ठान करता है और अनुष्ठान से निर्मल चित्त होने पर ईश्वर में उसे विश्वास होता है, इन तीनों के होने पर वह ब्रह्मज्ञान का अधिकारी होता है। अतः जिससे भगवान् की कथा का सविस्तर वर्णन किया है, उस पूर्वरामायण का पहले खूब अभ्यास और परिशीलन करने के बाद जो पुरुष इस योगवासिष्ठ में मोक्ष के लिए बतलाये गये छः प्रकरणों का विचार करेगा उसका फिर इस अनेकविध दुःखों से भरे हुए संसार में आगमन नहीं होगा अर्थात् वह मुक्त हो जायेगा । (8)
हे शत्रुनाशक, पहले छप्पन हजार श्लोकपरिमित पूर्व और उत्तर दो खण्डों से युक्त इस रामायण के अनादिकाल से अभ्यस्त राग, द्वेष आदि दोषों को दूर करनेवाले उत्तम- उत्तम उपदेशों से पूर्ण होने के कारण महाबलवान् (महासामर्थ्य से युक्त) रामकथारूप (रामचरितवर्णनरूप) पूर्वखण्ड की (चौबीस हजार श्लोक परिमित उत्तरकाण्ड सहित छः काण्डों की) रचना कर मैंने उसे अनुग्रह और प्रेम से एकाग्रचित्त होकर जैसे सागर रत्नार्थी को रत्न देता है, वैसे ही विनीत और मेघावी अपने प्रिय शिष्य भरद्वाज को दिया ॥४,५॥ मेघावी भरद्वाज ने मुझसे पूर्वरामायण को प्राप्त कर सुमेरु पर्वतस्थ किसी वन में उसे ब्रह्मा को सुनाया ॥६॥ उसे सुनकर सबके पितामह भगवान् ब्रह्मा भरद्वाज के ऊपर बड़े प्रसन्न हुए और वरदान के बहाने जगत् के उद्धार के साधन मोक्षशास्त्र की रचना करनी चाहिये, यों उत्तम आशयवाले ब्रह्मा ने भरद्वाज से कहा : हे पुत्र, वर माँगो ॥७॥ भरद्वाज ने कहा : हे भगवन् हे भूत, भविष्यत् और वर्तमान के स्वामी, जिससे यह जनता दुःख से मुक्त हो जाय, वह उपाय मुझसे कहिये । इसी वर में मेरी अभिरुचि है ॥८॥ श्री ब्रह्माजी ने कहाः वत्स भरद्वाज, जो तुमने मुझसे पूछा है इस विषय में अपने गुरु श्रीवाल्मीकिजी के निकट जाकर उनसे प्रयत्न से विनयपूर्वक प्रार्थना करो। उन्होंने जिस अनिन्दित (निर्दोष) रामायण का आरम्भ किया है, उसी का श्रवण करने पर अधिकारी मनुष्य सम्पूर्ण मोह को (अनादि अविद्याजन्य अज्ञान को) पार कर जायेंगे । जैसे लोग महागुणशाली रामसेतु ( ) द्वारा महापापसागर को पार कर जाते हैं वैसे ही महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित उत्तररामायण के श्रवण से ही दुस्तर मोहसागर अर्थात् इस संसारमहासागर को अनायास तर जायेंगे ॥९, १०॥ वाल्मीकिजी ने कहा : भगवन् ब्रह्मा भरद्वाज से यह कहकर उसके साथ मेरे आश्रम में आये। मैंने शीघ्र ही देवाधिदेव
(3) मूल में जो कथोपायशब्द आया है, उसका अर्थ सप्तकाण्डयुक्त पूर्वरामायण (बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड इत्यादि क्रम से सात काण्डों से युक्त रामायण) है । यह अर्थ 'जिस ग्रन्थ की कथा में महर्षि वाल्मीकिजी ने धर्मतत्त्वज्ञान, धर्मानुष्ठान और ईश्वरप्रपत्ति का निर्वाणज्ञान के उपायरूप से वर्णन किया है यह कथोपाय है इस व्युत्पत्ति के द्वारा लब्ध होता है। पहले सात काण्डों से युक्त पूर्वरामायण का श्रवण और उसके अर्थ या उसके उद्देश्य का विचार किया जाता है। उससे शम, दम आदि सिद्धि और सगुण ब्रह्म का आपाततः ज्ञान होता है तदनन्तर मनुष्य निर्गुण तत्त्व का अधिकारी होता है । वैसे अधिकारी के लिए ही वेदान्तवेद्य परब्रह्मप्रतिपादक इस ग्रन्थ का उपदेश है।
(~) श्रीरामचन्द्रनिर्मित सेतु, जो सेतुबन्ध रामेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है। शास्त्र में लिखा है कि रामसेतु का दर्शन करके जीव के ब्रह्महत्या आदि सब पाप छूट जाते हैं। 'सेतुं दृष्ट्वा समुद्रस्य ब्रह्महत्यां व्यपोहति।' चूँकि रामसेतु सब पापों को छुड़ाता है, इसलिए वह महागुणशाली कहा गया है।
ब्रह्माजी की अभ्युत्थान, अर्घ्य, पाद्य आदि द्वारा पूजा की। तदनन्तर सब प्राणियों के हितैषी अतः सत्त्वगुणसम्पन्न (D) ब्रह्माजी मुझसे कहने लगे ।।११, १२॥ हे मुनिश्रेष्ठ, पवित्र निर्दोष रामचरितवर्णनरूप रामायण का आरम्भ करके (यद्यपि आपको विस्तृत ग्रन्थ की रचना में बड़ा क्लेश होगा तथापि) जब तक उसकी समाप्ति न हो तब तक उसे न छोड़ दीजिए, उसे अवश्य ही पूरा कर डालिए ॥१३॥ हे महर्षे जैसे शीघ्रगामी जहाज द्वारा दुर्लंघ्य महासागर अनायास उत्तीर्ण हो जाता है वैसे ही सब लोग इस उत्तररामायण द्वारा इस संसाररूप संकट (Y) से छुटकारा पा जायेंगे ॥१४।। इसीलिए हमारा अनुरोध है, आप लोगों के हित के लिए इस रामायण महाशास्त्र को शीघ्र प्रकाशित कीजिए। यह कहने के लिए (8) ही मैं (2) आपके पास आया हूँ ॥१५॥ जैसे क्षणभर के लिए जलराशि से उठी ऊँची लहर उसी क्षण में जल में लीन हो जाती है वैसे ही भगवान् ब्रह्मा यह कह कर उसी क्षण में मेरे उस पवित्र आश्रम से अन्तर्हित हो गये ॥१६॥ ब्रह्माजी के आने पर मुझे अत्यन्त विस्मय हो गया था, इसलिए उस समय मैं उनके वाक्य का मर्म नहीं समझ सका । उनके चले जानेपर मैंने चित्त में स्वस्थता प्राप्त कर स्वस्थ बुद्धि से वहाँ पर स्थित भरद्वाज से पूछा ॥१७॥ वत्स भरद्वाज, ब्रह्माजी ने यह क्या कहा ? उसे मुझसे शीघ्र कहो । मेरे यों पूछने पर भरद्वाज ने मुझसे फिर कहा : महर्षे, भगवान् ब्रह्मा ने कहा कि आपने जैसे पहले चित्त को विशुद्ध करनेवाले रामायण की रचना की, इस समय भी वैसे ही सब लोगों के हित के लिए संसाररूपी समुद्र से तारने के लिए नौकारूप उत्तर रामायण की रचना कीजिए ॥१८,१९॥
(पूर्वरामायण चित्तशुद्धिजनक होने के कारण लोकहितकारी है, उत्तररामायण मुक्तिप्रद होने के कारण लोकहितकारी है, इसलिए लोक हितार्थत्व दोनों में समान है।)
भगवन् ! इस विषय में मेरी भी एक प्रार्थना है कि महामना रामचन्द्रजी, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, यशस्विनी सीता, महाबुद्धि रामानुयायी मन्त्रिपुत्र आदि अन्यान्य परिवार के लोगों ने इस संसारसंकट में किस प्रकार व्यवहार किया ? उसको कहिये। उन लोगों ने अज्ञानी जीव की तरह शोकयुक्त होकर कालयापन किया था या वे मुक्त जीव की तरह असंग रहे थे ?॥२०, २१॥ भगवन्, किस प्रकार उन्होंने दुःखमार्ग का अतिक्रमण किया था, मुझे उसका विशदरूप से उपदेश दीजिए। मैं और संसार के अन्य मानव (आपके उपदेशश्रवण से कृतार्थ जनता ) हम सभी वैसे ही आचरण करेंगे और वैसे आचरण कर संसारसंकट से मुक्ति प्राप्त करेंगे ॥२२॥ महाराज, भरद्वाज ने बड़े आदर के साथ मुझसे कहने के लिए अनुरोध किया तब मैं भगवान् ब्रह्मा की आज्ञानुसार उससे कहने के लिए प्रवृत्त हुआ । मैंने
(m) यद्यपि सृष्टि के समय ब्रह्मा में रजोगुण की अधिकता रहती है तथापि उस समय जगत् के उद्धार के लिए करुणायुक्त होने के कारण उनमें सत्त्वगुण की प्रचुरता हो गई, इसीलिए उन्हें 'महासत्त्व'
(५) 'संसारसंकटात्' इस अपादान पंचमी से, जिसने इसे पार कर लिया, उसके संसार का अत्यन्त विच्छेद हो जाता है, उसे फिर संसारप्राप्ति नहीं होती, यह सूचित होता है।
(8) भाव यह है कि भरद्वाज के द्वारा आदेश या सन्देश भेजा जा सकता था, पर यह मैंने उचित नहीं समझा। कार्य की गुरुताका ध्यान रखते हुए मैं स्वयं ही आपके पास आया हूँ।
(B) जगत्पूज्य ब्रह्मा ।
कहा : वत्स भरद्वाज, जो तुमने मुझसे पूछा है, उसे मैं विस्तार से तुमसे कहता हूँ, सावधान होकर सुनो। उसे सुनने से तुम्हारा आत्मतत्त्व का अज्ञानरूप मल दूर हो जायेगा और मन की वृत्ति निर्मल हो जायेगी ॥२३,२४॥ महामते भरद्वाज, कमलनयन राम सम्पूर्ण विषयों को मिथ्या समझ कर उनमें आसक्ति का त्यागकर जैसे लोकयात्रा का निर्वाह करने से सुखी हुए थे, तुम भी वैसे ही व्यवहार करो, वैसा करने से सुखी हो सकोगे ॥२५॥
महामना लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, कौशल्या, सुमित्रा, सीता, दशरथ एवं राम के मित्र कृतास्त्र और अविरोध, पुरोहित वसिष्ठ, वामदेव, ये सभी परमज्ञानी थे। रामचन्द्रजी के धृष्टि, जयन्त, भास, सत्य अर्थात् सत्यवक्ता विजय, विभीषण, सुषेण, हनुमान् और सुग्रीव का अमात्य इन्द्रजित् ये आठ मन्त्री भी महामना, जितेन्द्रिय, समदर्शी, विषयों में आसक्ति से रहित, प्राप्त प्रारब्ध कर्मो के नाश की प्रतीक्षा करनेवाले एवं जीवन्मुक्त थे । हे वत्स भरद्वाज, ये लोग जिस प्रकार और जिस भाव से श्रुति और स्मृति में कहे गये होम, दान आदि श्रौत-स्मार्त कर्म, आदान प्रदान आदि लौकिक सब व्यवहार और इष्टचिन्तन आदि विहित कर्म का अनुष्ठान करते थे, तुम भी यदि वैसे ही कर सको, तो तुम भी अनायास संसाररूपी संकट से मुक्त हो जाओगे ॥२६-३०॥ अधिक क्या कहूँ, उत्कृष्ट ज्ञानबल से युक्त व्यक्ति अपार संसारसागर में गिरने पर भी इस परम योग को प्राप्त कर इष्टवियोग से उत्पन्न शोक, दुःख, दीनता आदि संकटों से मुक्त हो कर नित्य तृप्त हो जाता है ॥३१॥
दृश्य के मार्जन के उपाय, वासनाभेद-निरूपण पूर्वक उनके लक्षण तथा श्रीरामचन्द्रजी की तीर्थ यात्रा का विस्तार से वर्णन ।
जैसे जीवन्मुक्त श्रीरामचन्द्र आदि ने व्यवहार किया था वैसे ही तुम भी व्यवहार करो, ऐसा पूर्व सर्ग में कहा । भरद्वाज जीवन्मुक्तस्थिति की प्राप्ति के क्रम के वर्णन के श्रवण द्वारा ही श्रीरामजी की जीवन्मुक्तस्थिति-प्राप्ति के उपाय की जिज्ञासा करते हुए पूछते हैं ।
भरद्वाज ने कहा : हे ब्रह्मन्, आप रामचन्द्रजी की कथा का अवलम्बन कर जीवन्मुक्त की स्थिति का अर्थात् लक्षण और लौकिक - वैदिक व्यवहार का वर्णन कीजिए, उसका श्रवण करके मैं परम सुखी होऊँगा ()।।१।।
(m) टीकाकारों ने इस श्लोक के और प्रकार से भी अर्थ किये हैं। जैसे हे ब्रह्मन्, श्रीरामचन्द्रजी क्रम से जीवन्मुक्त हुए थे, ऐसी कल्पना कर मुझसे पहले से कहिये, जिस क्रम से मैं नित्य सुखी होऊँ । अथवा संवाद-कथा में श्रीरामचन्द्रजी को पहले से प्रश्नकर्ता और श्रीवसिष्ठजी को वक्ता बनाकर जैसे श्रुति जनक और याज्ञवल्क्य की कल्पना करके स्वयं ही संवादरूप से तत्त्व का बोध कराती है वैसे ही आप भी मुझे तत्त्वज्ञान कराइए। इस प्रकार तत्त्वज्ञरूप से कल्पित दशरथ आदि की पूर्वरामायण में मूढचर्या और मुक्ति का अभाव देखने एवं नित्यमुक्त श्रीरामचन्द्रजी के 'तस्य ह न देवाश्च नाभूत्या ईशते' इत्यादि श्रुति से विरुद्ध शापमूलक अज्ञत्व आदि के वर्णन से भी कोई क्षति नहीं है, क्योंकि जैसे
भरद्वाज के यों पूछने पर महर्षि वाल्मीकिजी जीवन्मुक्ति का लक्षण, स्वरूप, साधन और फल द्वारा जीवन्मुक्तस्थिति का विस्तार करने की इच्छा से सुखपूर्वक ज्ञान होने के लिए पहले संक्षेप से मुक्ति का लक्षण और स्वरूप दिखलाते हैं।
श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : वत्स भरद्वाज, जैसे भ्रमवश रुपरहित आकाश में नीले, पीले आदि रंगों का भान होता है वैसे ही अज्ञानवश ब्रह्म में जगत् का भ्रम होता है। इसलिए प्रमाण और अनुभव से मैंने निश्चय किया है कि नीरूप आकाश में नीले, पीले आदि रंगों की भाँति ब्रह्म में कल्पित अत्यन्त असम्भावित जगत् का समूल अविद्या और उसके संस्कार के नाश द्वारा जैसे फिर स्मरण ही न हो उस प्रकार विस्मरण होना ही सबसे उत्कृष्ट मुक्ति का लक्षण और स्वरूप है (5) ॥२॥
पूर्व श्लोक में मुक्ति के लक्षण और स्वरूप स्वानुभवसिद्ध दिखलाये, उनका अनुभव हमें क्यों नहीं होता ? ऐसी शंका होने पर कहते हैं।
भरद्वाज, जब तक दृश्य के अत्यन्त अभाव का ज्ञान नहीं होता अर्थात् सम्पूर्ण दृश्य प्रपंच भ्रान्तिकल्पित है, अतएव अत्यन्त असत् है, यह ज्ञान जब तक दृढ़तापूर्वक नहीं होता तब तक कोई भी किसी प्रकार मुक्ति के लक्षण और स्वरूप का ज्ञान प्राप्त करने में समर्थ नहीं हो सकता । सम्पूर्ण जगत् के अधिष्ठान प्रत्यगभिन्न आत्मतत्त्वके साक्षात् से ही दृश्य का अत्यन्त बाध हो सकता है। इसलिए अविसंवादी आत्मज्ञान को उपाय से प्राप्त करो ॥३॥
उसकी प्राप्ति का क्या उपाय है ? इस पर कहते हैं ।
वत्स, इस योगवासिष्टरूप शास्त्र के ज्ञात होने पर उक्त ज्ञान असम्भव नहीं है, बल्कि संभव ही
अनादि जीव को ब्रह्म अभेद बोध कराने के लिए श्रुति में ब्रह्म में कार्योपाधिप्रवेश द्वारा आगन्तुक जीवभाव की कल्पना की गई है वैसे ही यहाँ पर भी समझना चाहिये, इसलिए कोई विरोध नहीं है।
() यद्यपि परोक्षज्ञानी को भी सुषुप्ति में और निर्विकल्प समाधि में दृश्य का विस्मरण होता है तथापि वह विस्मरण पुनःस्मरण नहीं है अर्थात् उसे सुषुप्ति और समाधि के अनन्तर फिर ब्रह्म में जगत् का भ्रम होता है। अथवा पुनःस्मरण का अर्थ 'पुनः स्मर्यतेऽनेन - फिर जिससे स्मरण किया जाय' इस व्युत्पत्ति से अन्तःकरण है । उक्त अन्तःकरण जिसमें नहीं है ऐसा विस्मरण - स्मरण का अभाव । यह द्वैत के प्रतिभासमात्र के अभाव का उपलक्षण है । अथवा विस्मरण के समान विस्मरण यह अर्थ है । जैसे विस्मृत विषय की अनुभवकर्ता के रहने पर भी प्रतीति नहीं होती वैसे ही चैतन्य के रहते हुए ही दृश्य की अप्रतीति विस्मरण है ।
शंका : क्या परमार्थ सत्य दृश्य की ही जैसे सांख्यों की अभिमत मुक्ति में अप्रतीति होती है वैसे ही आपके अभिमत मुक्ति में भी अप्रतीति होती है ? समाधान : नहीं, हमारे मत में जगत् परमार्थ सत्य नहीं है, वह ब्रह्म में अध्यस्त है । शंका : वह भ्रम कैसे है, क्योंकि वह संस्कार से जन्य नहीं है। समाधान : वह पूर्व पूर्व जगत् के व्यवहार से उत्पन्न संस्कार से जन्य है । शंका : दोष से उत्पन्न न होने और अधिष्ठानशून्य होने से वह भ्रम नहीं है। समाधानः जैसे दूरत्व और अविचाररूप दोष से आकाश में नीले रंग का भ्रम होता है वैसे ही अविद्यारूप दोष से ब्रह्म में जगत् का भ्रम होता है । दृश्य का आत्यन्तिक उच्छेद मुक्ति का लक्षण है और आत्यन्तिक दृश्यविनाश से उपलक्षित चिन्मात्र में अवस्थान मुक्ति का स्वरूप है, यह निष्कर्ष निकला ।
|
हूँ, इससे मुझे मुक्त होना चाहिए, ऐसी जिसको मुक्ति की प्रबल इच्छा हुई है एवं जो अत्यन्त अज्ञानी नहीं है और जो अत्यन्त ज्ञानी भी नहीं है, वही इस शास्त्र के श्रवण में अधिकारी है ॥दो॥ भाव यह है कि न अत्यन्त ज्ञानी और न अत्यन्त अज्ञानी इस शास्त्र का अधिकारी है, यह कहना ठीक है, किन्तु मैं कारागार में हथकड़ियों से बँधे हुए कैदी की नाई अनादिकाल से बद्ध होकर परवशता, परिच्छिन्नता, जन्म, जरा, मरण आदि दुःख सागर में डूबा हुआ हूँ, इस दुःख की आत्यान्तिक निवृत्ति का उपाय एकमात्र आत्मज्ञान ही है, क्योंकि 'तरति शोकमात्मवित्' यह श्रुति आत्मज्ञान ही मुक्ति का उपाय है, ऐसा कहती है। इसलिए मैं उस आत्मज्ञान का लाभ कर मुक्त होऊँ, इस प्रकार की उत्कट जिज्ञासा से युक्त जिसका निश्चय है, वह इस शास्त्र का अधिकारी है, ऐसे ही पुरुष को इस शास्त्र के श्रवण का फल मिलता है । निष्कर्ष यह निकला कि अनेक पुण्यों से जिसके राग आदि दोष क्षीण हो गये हैं और विवेक से जिसे आत्मा की जिज्ञासा हुई है, ऐसे विशेषरूप से आत्मा को न जाननेवाले अज्ञानी का ही इस शास्त्र में अधिकार है। शंका - जिसके राग आदि दोष नष्ट हो गये हैं, ऐसा त्रैवर्णिक इस योगवासिष्टरूप शास्त्र में अधिकारी है, ऐसा यदि मानो, तो यह संन्यासपूर्वक वेदान्त श्रवण में ही अधिकारी है, ऐसा अवश्य स्वीकार करना पड़ेगा, क्योंकि पूर्वकाण्ड के अनुष्ठान से चित्त के शुद्ध होने पर ही उत्तरकाण्ड में अधिकार प्राप्त होता है, ऐसा 'तमेतं वेदानुवचनेन' इत्यादि श्रुति से सिद्ध है । और जो त्रैवर्णिक नहीं है, उसका अधिकार भी इसमें नहीं हो सकता, क्योंकि 'नावेदविन्मनुते तं बृहन्तम्' इत्यादि श्रुति से उसके अधिकार का निषेध किया गया है। इस परिस्थिति में इस शास्त्र का अधिकारी कैसे सुलभ होगा ? आकाश में, बहीः बहिःप्रज्ञ द्वारा भोग्य जाग्रत् में, अंतः अन्तःप्रज्ञ द्वारा भोग्य स्वप्न में एवं मरण, मूर्च्छा आदि अवस्थाओं में जो स्थूल सूक्ष्म कारणों के अभिमानी रूप से, भोक्तृत्वरूप से, साक्षीरूप से और निष्प्रपंचपूर्णानन्दचिन्मात्रस्वभाव से नाना प्रकार का प्रतीत होता है, पर वस्तुतः चैतन्यस्वभाव ही है, उस सर्वात्मा परब्रह्म को नमस्कार है । अथवा कारणोपाधि में, कर्मबीज के उद्भवस्थान कार्योपाधि में, जीवन्मुक्तिदशा में, निरुपाधि स्वरूप में एवं माया और अन्तःकरण की वृत्तियों में जो ज्ञानस्वभाव प्रकाशित होता है, उस सर्वोपाधि शून्य परमात्मा को नमस्कार है । अथवा दिविप्रकाशस्वरूप तेज में, भूमौ - पृथिवी में, व्योन्मि-आकाश में, अन्त-अन्तरालस्थ जल और पवन में, बहिः बहिर्भूत अव्याकृत में तथा निरुपाधिक परमार्थरूप में जो अनुवृत्त होकर सन्मात्रस्वभाव परमात्मा भासता है, उस अवभासात्मक परमात्मा को नमस्कार है । अथवा बाहर तटस्थरूप को धारण कर पूज्य देवता आदि के रूप से देवलोक में देह के मध्य में रहकर पूजकरूप से भूलोक में और क्रिया, फल, साधन आदि के रूप से अन्तराल में स्वरूप की अज्ञानावस्था में परिच्छिन्नरूप से अन्यथा प्रतीत होकर भी तत्त्वदृष्टि के उदित होने पर जो परिच्छेद रहित प्रतीत होता है, उस सर्वात्मा त्रिविधपरिच्छेदशून्य परमात्मा को नमस्कार है । अथवा ऊपर, नीचे, मध्य में, पूर्व आदि दिशाओं में, शरीर के भीतर, भूत और भविष्यत् काल में जो अवभासात्मा मुझ तत्त्वज्ञानी को प्रतीत होता है, उस सम्पूर्ण प्रपंच के बाध के आश्रयभूत परमात्मा को नमस्कार है। समाधान - आपका कथन ठीक नहीं है, क्योंकि जैसे त्रैवर्णिकका त्रेताग्निसाध्य कर्म में अधिकार होने पर भी जो अनाहिताग्नि हैं, ऐसे पुरुषों द्वारा अनुष्ठेय स्मार्त कर्म में भी अधिकार है ही, वैसे ही श्रौतज्ञान के अधिकारी का भी असंन्यासी मुमुक्षु पुरुषों के अधिकार के समान इस ग्रन्थ में भी अधिकार है । और यह अधिकार तभी तक है, जब तक अज्ञान रहता है, क्योंकि यह योगवासिष्ठ शास्त्र स्मृति के समान वेदार्थ को ही विशद करता है । वेदवेद्यो परे पुंसि जाते दशरथात्मजे । वेदः प्राचेतसादासीत् साक्षाद् रामायणात्मना ॥ अर्थात् केवल वेदों से जानने योग्य दशरथनन्दन परमपुरुष भगवान् रामचन्द्रजी के आविर्भूत होने पर वाल्मीकि महर्षि द्वारा रामायण के रूप में साक्षात् वेद का ही आविर्भाव हुआ । उसमें श्रीरामचन्द्रजी की कथा द्वारा पूर्वरामायण में उत्तरकाण्डसहित छः काण्डों से कर्मकाण्ड का निरूपण किया है और इस उत्तररामायण में याने योगवासिष्ठ में छः प्रकरणों द्वारा ज्ञानकाण्ड का निरूपण किया है। इस परिस्थिति में यह निष्कर्ष निकला कि जैसे कुछ स्मार्त कर्मों में - त्रैवर्णिकों के साथ स्त्री शूद्र आदि का भी अधिकार देखा जाता है, वैसे ही इस ग्रन्थ के श्रवण में भी पुराणश्रवण के समान त्रैवर्णिक और अत्रैवर्णिकसाधारण मुमुक्षुओं का अधिकार है। इस अर्थ में प्रमाणभूत 'श्रावयेच्चतुरो वर्णान् कृत्वा ब्राह्मणमग्रतः' पुराण सुनावे), 'नावेदविन्मनुते तं बृहन्तम्' , 'तंव त्वौपनिषदं पुरुषं पृच्छामि' इत्यादि वचनों का 'वेद को न जाननेवाले का श्रौत ज्ञान में अधिकार नहीं है, इसी अर्थ में तात्पर्य है, ऐसा कुछ लोग कहते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि 'वेद को न जाननेवाले को अपरोक्ष साक्षात्कार नहीं होता' इस अर्थ में उनका तात्पर्य है। कुछ लोगों का अभिप्राय यह है कि वेदपूर्वक प्राप्त हुआ आत्मज्ञान प्रशस्त होता है, यही उन वाक्यों से प्राप्त होता है। जो भी हो, परन्तु स हि सर्वैर्विजिज्ञास्य आत्म वर्णैस्तथाऽऽश्रमैः' इत्यादि अनेक वचनों से ज्ञात होता है कि पुराण श्रवण से उत्पन्न साधारण ज्ञान में औरों का भी अधिकार है। अधिकार के सिद्ध होने पर श्रौत आत्मज्ञान में जैसे कर्मकाण्ड में प्रतिपादित कर्मों के अनुष्ठान से उत्पन्न चित्त की शुद्धि हेतु है, वैसे ही यहाँ पर भी पूर्वरामायण में प्रदर्शित स्व-स्व वर्ण और आश्रम के कर्मों के अनुष्ठान से होनेवाली चित्त की शुद्धि जिज्ञासा के उत्पादन द्वारा हेतु है, यों पूर्व और उत्तररामायण में हेतु हेतुमद्भावसंगति का प्रदर्शन करते हुए सम्पूर्ण अनर्थ की निवृत्तिरूप अन्य प्रयोजन दिखलाते हैं। पहले जिसमें कथारूप उपाय है उस रामचरितवर्णनात्मक पूर्वरामायण का विचार कर जो मोक्ष के उपायभूत इन छः प्रकरणों का विचार करता है, वह बुद्धिमान् इस संसार में पुनः जन्म आदि दुःख को प्राप्त नहीं होता ॥तीन॥ तात्पर्य यह है कि पूर्वरामायण में जिस मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्रजी की कथा का वर्णन किया गया है, वह कथा ही ज्ञानाधिकार को प्राप्त करानेवाले धर्म-तत्त्वज्ञान, धर्म का अनुष्ठान और [ वैराग्य ईश्वर में विश्वास के उपाय हेतु है अर्थात् सारी रामायण की कथा सुनने के बाद मनुष्य को धर्म का यथार्थ ज्ञान होता है, फिर वह उसका अनुष्ठान करता है और अनुष्ठान से निर्मल चित्त होने पर ईश्वर में उसे विश्वास होता है, इन तीनों के होने पर वह ब्रह्मज्ञान का अधिकारी होता है। अतः जिससे भगवान् की कथा का सविस्तर वर्णन किया है, उस पूर्वरामायण का पहले खूब अभ्यास और परिशीलन करने के बाद जो पुरुष इस योगवासिष्ठ में मोक्ष के लिए बतलाये गये छः प्रकरणों का विचार करेगा उसका फिर इस अनेकविध दुःखों से भरे हुए संसार में आगमन नहीं होगा अर्थात् वह मुक्त हो जायेगा । हे शत्रुनाशक, पहले छप्पन हजार श्लोकपरिमित पूर्व और उत्तर दो खण्डों से युक्त इस रामायण के अनादिकाल से अभ्यस्त राग, द्वेष आदि दोषों को दूर करनेवाले उत्तम- उत्तम उपदेशों से पूर्ण होने के कारण महाबलवान् रामकथारूप पूर्वखण्ड की रचना कर मैंने उसे अनुग्रह और प्रेम से एकाग्रचित्त होकर जैसे सागर रत्नार्थी को रत्न देता है, वैसे ही विनीत और मेघावी अपने प्रिय शिष्य भरद्वाज को दिया ॥चार,पाँच॥ मेघावी भरद्वाज ने मुझसे पूर्वरामायण को प्राप्त कर सुमेरु पर्वतस्थ किसी वन में उसे ब्रह्मा को सुनाया ॥छः॥ उसे सुनकर सबके पितामह भगवान् ब्रह्मा भरद्वाज के ऊपर बड़े प्रसन्न हुए और वरदान के बहाने जगत् के उद्धार के साधन मोक्षशास्त्र की रचना करनी चाहिये, यों उत्तम आशयवाले ब्रह्मा ने भरद्वाज से कहा : हे पुत्र, वर माँगो ॥सात॥ भरद्वाज ने कहा : हे भगवन् हे भूत, भविष्यत् और वर्तमान के स्वामी, जिससे यह जनता दुःख से मुक्त हो जाय, वह उपाय मुझसे कहिये । इसी वर में मेरी अभिरुचि है ॥आठ॥ श्री ब्रह्माजी ने कहाः वत्स भरद्वाज, जो तुमने मुझसे पूछा है इस विषय में अपने गुरु श्रीवाल्मीकिजी के निकट जाकर उनसे प्रयत्न से विनयपूर्वक प्रार्थना करो। उन्होंने जिस अनिन्दित रामायण का आरम्भ किया है, उसी का श्रवण करने पर अधिकारी मनुष्य सम्पूर्ण मोह को पार कर जायेंगे । जैसे लोग महागुणशाली रामसेतु द्वारा महापापसागर को पार कर जाते हैं वैसे ही महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित उत्तररामायण के श्रवण से ही दुस्तर मोहसागर अर्थात् इस संसारमहासागर को अनायास तर जायेंगे ॥नौ, दस॥ वाल्मीकिजी ने कहा : भगवन् ब्रह्मा भरद्वाज से यह कहकर उसके साथ मेरे आश्रम में आये। मैंने शीघ्र ही देवाधिदेव मूल में जो कथोपायशब्द आया है, उसका अर्थ सप्तकाण्डयुक्त पूर्वरामायण है । यह अर्थ 'जिस ग्रन्थ की कथा में महर्षि वाल्मीकिजी ने धर्मतत्त्वज्ञान, धर्मानुष्ठान और ईश्वरप्रपत्ति का निर्वाणज्ञान के उपायरूप से वर्णन किया है यह कथोपाय है इस व्युत्पत्ति के द्वारा लब्ध होता है। पहले सात काण्डों से युक्त पूर्वरामायण का श्रवण और उसके अर्थ या उसके उद्देश्य का विचार किया जाता है। उससे शम, दम आदि सिद्धि और सगुण ब्रह्म का आपाततः ज्ञान होता है तदनन्तर मनुष्य निर्गुण तत्त्व का अधिकारी होता है । वैसे अधिकारी के लिए ही वेदान्तवेद्य परब्रह्मप्रतिपादक इस ग्रन्थ का उपदेश है। श्रीरामचन्द्रनिर्मित सेतु, जो सेतुबन्ध रामेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है। शास्त्र में लिखा है कि रामसेतु का दर्शन करके जीव के ब्रह्महत्या आदि सब पाप छूट जाते हैं। 'सेतुं दृष्ट्वा समुद्रस्य ब्रह्महत्यां व्यपोहति।' चूँकि रामसेतु सब पापों को छुड़ाता है, इसलिए वह महागुणशाली कहा गया है। ब्रह्माजी की अभ्युत्थान, अर्घ्य, पाद्य आदि द्वारा पूजा की। तदनन्तर सब प्राणियों के हितैषी अतः सत्त्वगुणसम्पन्न ब्रह्माजी मुझसे कहने लगे ।।ग्यारह, बारह॥ हे मुनिश्रेष्ठ, पवित्र निर्दोष रामचरितवर्णनरूप रामायण का आरम्भ करके जब तक उसकी समाप्ति न हो तब तक उसे न छोड़ दीजिए, उसे अवश्य ही पूरा कर डालिए ॥तेरह॥ हे महर्षे जैसे शीघ्रगामी जहाज द्वारा दुर्लंघ्य महासागर अनायास उत्तीर्ण हो जाता है वैसे ही सब लोग इस उत्तररामायण द्वारा इस संसाररूप संकट से छुटकारा पा जायेंगे ॥चौदह।। इसीलिए हमारा अनुरोध है, आप लोगों के हित के लिए इस रामायण महाशास्त्र को शीघ्र प्रकाशित कीजिए। यह कहने के लिए ही मैं आपके पास आया हूँ ॥पंद्रह॥ जैसे क्षणभर के लिए जलराशि से उठी ऊँची लहर उसी क्षण में जल में लीन हो जाती है वैसे ही भगवान् ब्रह्मा यह कह कर उसी क्षण में मेरे उस पवित्र आश्रम से अन्तर्हित हो गये ॥सोलह॥ ब्रह्माजी के आने पर मुझे अत्यन्त विस्मय हो गया था, इसलिए उस समय मैं उनके वाक्य का मर्म नहीं समझ सका । उनके चले जानेपर मैंने चित्त में स्वस्थता प्राप्त कर स्वस्थ बुद्धि से वहाँ पर स्थित भरद्वाज से पूछा ॥सत्रह॥ वत्स भरद्वाज, ब्रह्माजी ने यह क्या कहा ? उसे मुझसे शीघ्र कहो । मेरे यों पूछने पर भरद्वाज ने मुझसे फिर कहा : महर्षे, भगवान् ब्रह्मा ने कहा कि आपने जैसे पहले चित्त को विशुद्ध करनेवाले रामायण की रचना की, इस समय भी वैसे ही सब लोगों के हित के लिए संसाररूपी समुद्र से तारने के लिए नौकारूप उत्तर रामायण की रचना कीजिए ॥अट्ठारह,उन्नीस॥ भगवन् ! इस विषय में मेरी भी एक प्रार्थना है कि महामना रामचन्द्रजी, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, यशस्विनी सीता, महाबुद्धि रामानुयायी मन्त्रिपुत्र आदि अन्यान्य परिवार के लोगों ने इस संसारसंकट में किस प्रकार व्यवहार किया ? उसको कहिये। उन लोगों ने अज्ञानी जीव की तरह शोकयुक्त होकर कालयापन किया था या वे मुक्त जीव की तरह असंग रहे थे ?॥बीस, इक्कीस॥ भगवन्, किस प्रकार उन्होंने दुःखमार्ग का अतिक्रमण किया था, मुझे उसका विशदरूप से उपदेश दीजिए। मैं और संसार के अन्य मानव हम सभी वैसे ही आचरण करेंगे और वैसे आचरण कर संसारसंकट से मुक्ति प्राप्त करेंगे ॥बाईस॥ महाराज, भरद्वाज ने बड़े आदर के साथ मुझसे कहने के लिए अनुरोध किया तब मैं भगवान् ब्रह्मा की आज्ञानुसार उससे कहने के लिए प्रवृत्त हुआ । मैंने यद्यपि सृष्टि के समय ब्रह्मा में रजोगुण की अधिकता रहती है तथापि उस समय जगत् के उद्धार के लिए करुणायुक्त होने के कारण उनमें सत्त्वगुण की प्रचुरता हो गई, इसीलिए उन्हें 'महासत्त्व' 'संसारसंकटात्' इस अपादान पंचमी से, जिसने इसे पार कर लिया, उसके संसार का अत्यन्त विच्छेद हो जाता है, उसे फिर संसारप्राप्ति नहीं होती, यह सूचित होता है। भाव यह है कि भरद्वाज के द्वारा आदेश या सन्देश भेजा जा सकता था, पर यह मैंने उचित नहीं समझा। कार्य की गुरुताका ध्यान रखते हुए मैं स्वयं ही आपके पास आया हूँ। जगत्पूज्य ब्रह्मा । कहा : वत्स भरद्वाज, जो तुमने मुझसे पूछा है, उसे मैं विस्तार से तुमसे कहता हूँ, सावधान होकर सुनो। उसे सुनने से तुम्हारा आत्मतत्त्व का अज्ञानरूप मल दूर हो जायेगा और मन की वृत्ति निर्मल हो जायेगी ॥तेईस,चौबीस॥ महामते भरद्वाज, कमलनयन राम सम्पूर्ण विषयों को मिथ्या समझ कर उनमें आसक्ति का त्यागकर जैसे लोकयात्रा का निर्वाह करने से सुखी हुए थे, तुम भी वैसे ही व्यवहार करो, वैसा करने से सुखी हो सकोगे ॥पच्चीस॥ महामना लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, कौशल्या, सुमित्रा, सीता, दशरथ एवं राम के मित्र कृतास्त्र और अविरोध, पुरोहित वसिष्ठ, वामदेव, ये सभी परमज्ञानी थे। रामचन्द्रजी के धृष्टि, जयन्त, भास, सत्य अर्थात् सत्यवक्ता विजय, विभीषण, सुषेण, हनुमान् और सुग्रीव का अमात्य इन्द्रजित् ये आठ मन्त्री भी महामना, जितेन्द्रिय, समदर्शी, विषयों में आसक्ति से रहित, प्राप्त प्रारब्ध कर्मो के नाश की प्रतीक्षा करनेवाले एवं जीवन्मुक्त थे । हे वत्स भरद्वाज, ये लोग जिस प्रकार और जिस भाव से श्रुति और स्मृति में कहे गये होम, दान आदि श्रौत-स्मार्त कर्म, आदान प्रदान आदि लौकिक सब व्यवहार और इष्टचिन्तन आदि विहित कर्म का अनुष्ठान करते थे, तुम भी यदि वैसे ही कर सको, तो तुम भी अनायास संसाररूपी संकट से मुक्त हो जाओगे ॥छब्बीस-तीस॥ अधिक क्या कहूँ, उत्कृष्ट ज्ञानबल से युक्त व्यक्ति अपार संसारसागर में गिरने पर भी इस परम योग को प्राप्त कर इष्टवियोग से उत्पन्न शोक, दुःख, दीनता आदि संकटों से मुक्त हो कर नित्य तृप्त हो जाता है ॥इकतीस॥ दृश्य के मार्जन के उपाय, वासनाभेद-निरूपण पूर्वक उनके लक्षण तथा श्रीरामचन्द्रजी की तीर्थ यात्रा का विस्तार से वर्णन । जैसे जीवन्मुक्त श्रीरामचन्द्र आदि ने व्यवहार किया था वैसे ही तुम भी व्यवहार करो, ऐसा पूर्व सर्ग में कहा । भरद्वाज जीवन्मुक्तस्थिति की प्राप्ति के क्रम के वर्णन के श्रवण द्वारा ही श्रीरामजी की जीवन्मुक्तस्थिति-प्राप्ति के उपाय की जिज्ञासा करते हुए पूछते हैं । भरद्वाज ने कहा : हे ब्रह्मन्, आप रामचन्द्रजी की कथा का अवलम्बन कर जीवन्मुक्त की स्थिति का अर्थात् लक्षण और लौकिक - वैदिक व्यवहार का वर्णन कीजिए, उसका श्रवण करके मैं परम सुखी होऊँगा ।।एक।। टीकाकारों ने इस श्लोक के और प्रकार से भी अर्थ किये हैं। जैसे हे ब्रह्मन्, श्रीरामचन्द्रजी क्रम से जीवन्मुक्त हुए थे, ऐसी कल्पना कर मुझसे पहले से कहिये, जिस क्रम से मैं नित्य सुखी होऊँ । अथवा संवाद-कथा में श्रीरामचन्द्रजी को पहले से प्रश्नकर्ता और श्रीवसिष्ठजी को वक्ता बनाकर जैसे श्रुति जनक और याज्ञवल्क्य की कल्पना करके स्वयं ही संवादरूप से तत्त्व का बोध कराती है वैसे ही आप भी मुझे तत्त्वज्ञान कराइए। इस प्रकार तत्त्वज्ञरूप से कल्पित दशरथ आदि की पूर्वरामायण में मूढचर्या और मुक्ति का अभाव देखने एवं नित्यमुक्त श्रीरामचन्द्रजी के 'तस्य ह न देवाश्च नाभूत्या ईशते' इत्यादि श्रुति से विरुद्ध शापमूलक अज्ञत्व आदि के वर्णन से भी कोई क्षति नहीं है, क्योंकि जैसे भरद्वाज के यों पूछने पर महर्षि वाल्मीकिजी जीवन्मुक्ति का लक्षण, स्वरूप, साधन और फल द्वारा जीवन्मुक्तस्थिति का विस्तार करने की इच्छा से सुखपूर्वक ज्ञान होने के लिए पहले संक्षेप से मुक्ति का लक्षण और स्वरूप दिखलाते हैं। श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : वत्स भरद्वाज, जैसे भ्रमवश रुपरहित आकाश में नीले, पीले आदि रंगों का भान होता है वैसे ही अज्ञानवश ब्रह्म में जगत् का भ्रम होता है। इसलिए प्रमाण और अनुभव से मैंने निश्चय किया है कि नीरूप आकाश में नीले, पीले आदि रंगों की भाँति ब्रह्म में कल्पित अत्यन्त असम्भावित जगत् का समूल अविद्या और उसके संस्कार के नाश द्वारा जैसे फिर स्मरण ही न हो उस प्रकार विस्मरण होना ही सबसे उत्कृष्ट मुक्ति का लक्षण और स्वरूप है ॥दो॥ पूर्व श्लोक में मुक्ति के लक्षण और स्वरूप स्वानुभवसिद्ध दिखलाये, उनका अनुभव हमें क्यों नहीं होता ? ऐसी शंका होने पर कहते हैं। भरद्वाज, जब तक दृश्य के अत्यन्त अभाव का ज्ञान नहीं होता अर्थात् सम्पूर्ण दृश्य प्रपंच भ्रान्तिकल्पित है, अतएव अत्यन्त असत् है, यह ज्ञान जब तक दृढ़तापूर्वक नहीं होता तब तक कोई भी किसी प्रकार मुक्ति के लक्षण और स्वरूप का ज्ञान प्राप्त करने में समर्थ नहीं हो सकता । सम्पूर्ण जगत् के अधिष्ठान प्रत्यगभिन्न आत्मतत्त्वके साक्षात् से ही दृश्य का अत्यन्त बाध हो सकता है। इसलिए अविसंवादी आत्मज्ञान को उपाय से प्राप्त करो ॥तीन॥ उसकी प्राप्ति का क्या उपाय है ? इस पर कहते हैं । वत्स, इस योगवासिष्टरूप शास्त्र के ज्ञात होने पर उक्त ज्ञान असम्भव नहीं है, बल्कि संभव ही अनादि जीव को ब्रह्म अभेद बोध कराने के लिए श्रुति में ब्रह्म में कार्योपाधिप्रवेश द्वारा आगन्तुक जीवभाव की कल्पना की गई है वैसे ही यहाँ पर भी समझना चाहिये, इसलिए कोई विरोध नहीं है। यद्यपि परोक्षज्ञानी को भी सुषुप्ति में और निर्विकल्प समाधि में दृश्य का विस्मरण होता है तथापि वह विस्मरण पुनःस्मरण नहीं है अर्थात् उसे सुषुप्ति और समाधि के अनन्तर फिर ब्रह्म में जगत् का भ्रम होता है। अथवा पुनःस्मरण का अर्थ 'पुनः स्मर्यतेऽनेन - फिर जिससे स्मरण किया जाय' इस व्युत्पत्ति से अन्तःकरण है । उक्त अन्तःकरण जिसमें नहीं है ऐसा विस्मरण - स्मरण का अभाव । यह द्वैत के प्रतिभासमात्र के अभाव का उपलक्षण है । अथवा विस्मरण के समान विस्मरण यह अर्थ है । जैसे विस्मृत विषय की अनुभवकर्ता के रहने पर भी प्रतीति नहीं होती वैसे ही चैतन्य के रहते हुए ही दृश्य की अप्रतीति विस्मरण है । शंका : क्या परमार्थ सत्य दृश्य की ही जैसे सांख्यों की अभिमत मुक्ति में अप्रतीति होती है वैसे ही आपके अभिमत मुक्ति में भी अप्रतीति होती है ? समाधान : नहीं, हमारे मत में जगत् परमार्थ सत्य नहीं है, वह ब्रह्म में अध्यस्त है । शंका : वह भ्रम कैसे है, क्योंकि वह संस्कार से जन्य नहीं है। समाधान : वह पूर्व पूर्व जगत् के व्यवहार से उत्पन्न संस्कार से जन्य है । शंका : दोष से उत्पन्न न होने और अधिष्ठानशून्य होने से वह भ्रम नहीं है। समाधानः जैसे दूरत्व और अविचाररूप दोष से आकाश में नीले रंग का भ्रम होता है वैसे ही अविद्यारूप दोष से ब्रह्म में जगत् का भ्रम होता है । दृश्य का आत्यन्तिक उच्छेद मुक्ति का लक्षण है और आत्यन्तिक दृश्यविनाश से उपलक्षित चिन्मात्र में अवस्थान मुक्ति का स्वरूप है, यह निष्कर्ष निकला ।
|
वाराणसी (ब्यूरो)। कुपोषण की जद से मुक्ति दिलाकर बच्चों को सुपोषित बनाने में जुटा है पं। दीन दयाल उपाध्याय चिकित्सालय स्थित 'पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी)। सात वर्ष के भीतर एक हजार कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाकर उन्हें नया जीवन दे चुका है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा। संदीप चौधरी ने बताया कि कुपोषण की रोकथाम आज के समाज में एक बड़ी चुनौती है। सरकार इसके लिए लगातार प्रयासरत है। कुपोषण के खिलाफ शुरू की गई जंग के तहत ही वर्ष 2015 में पं। दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में 'पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई थी। वर्तमान में पोषण पुनर्वास केंद्र अस्पताल परिसर में नवनिर्मित एमसीएच विंग में चल रहा है.
पं। दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा। आरके सिंह कहते हैं कि दस बेड वाले इस विशेष केंद्र में कुपोषित पांच वर्ष तक के बच्चों का निःशुल्क उपचार किया जाता है। कुपोषित इन बच्चों को 14 दिनों तक इस केंद्र में रखकर सुपोषित बनाने का प्रयास किया जाता है। पोषण पुनर्वास केंद्र के प्रभारी डा। सौरभ सिंह बताते हैं कि वर्ष 2021 में इस केंद्र में 73 बच्चे भर्ती हुए। इस वर्ष माह जनवरी से जुलाई तक कुल 102 बच्चे यहां भर्ती कराए गए। इनमे जनवरी में एक, फरवरी में 20, मार्च में सात, अप्रैल में 14, मई में 26, जून में 18, जुलाई में 16 बच्चे यहां भर्ती किये गए। वर्तमान में यहां 6 बच्चे भर्ती हैं। भर्ती हुए बच्चे को दवाओं के साथ-साथ उचित मात्रा में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन व खनिज तत्वों से भरपूर आहार प्रदान किया जाता है। आहार पर केंद्र की आहार परामर्शदाता (डायटीशियन) विदिशा शर्मा नजर रखती हैं.
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों का मन बहलाने की भी पूरी व्यवस्था है। यहां बच्चों के लिए तरह-तरह के खिलौने भी रखे गए हैं। एनआरसी में भर्ती पांच माह की जाह्नवी की मां रेनू बताती हैं कि उनकी बेटी कुपोषित होने पर उसे एनआरसी में भर्ती कराया गया। भर्ती कराते समय बच्ची का वजन महज दो किलो 920 ग्राम था, छह दिनों में ही उसकी सेहत में सुधार होकर वजन तीन किलो 70 ग्राम हो चुका है। चौबेपुर निवासी रीना ने बताया कि कुपोषण का शिकार होने के कारण उन्होंने अपने बेटे आयुष (11 माह) को एनआरसी में भर्ती कराया है। यहां दवा व उपचार निःशुल्क हो रहा है.
|
वाराणसी । कुपोषण की जद से मुक्ति दिलाकर बच्चों को सुपोषित बनाने में जुटा है पं। दीन दयाल उपाध्याय चिकित्सालय स्थित 'पोषण पुनर्वास केंद्र । सात वर्ष के भीतर एक हजार कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाकर उन्हें नया जीवन दे चुका है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा। संदीप चौधरी ने बताया कि कुपोषण की रोकथाम आज के समाज में एक बड़ी चुनौती है। सरकार इसके लिए लगातार प्रयासरत है। कुपोषण के खिलाफ शुरू की गई जंग के तहत ही वर्ष दो हज़ार पंद्रह में पं। दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में 'पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई थी। वर्तमान में पोषण पुनर्वास केंद्र अस्पताल परिसर में नवनिर्मित एमसीएच विंग में चल रहा है. पं। दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा। आरके सिंह कहते हैं कि दस बेड वाले इस विशेष केंद्र में कुपोषित पांच वर्ष तक के बच्चों का निःशुल्क उपचार किया जाता है। कुपोषित इन बच्चों को चौदह दिनों तक इस केंद्र में रखकर सुपोषित बनाने का प्रयास किया जाता है। पोषण पुनर्वास केंद्र के प्रभारी डा। सौरभ सिंह बताते हैं कि वर्ष दो हज़ार इक्कीस में इस केंद्र में तिहत्तर बच्चे भर्ती हुए। इस वर्ष माह जनवरी से जुलाई तक कुल एक सौ दो बच्चे यहां भर्ती कराए गए। इनमे जनवरी में एक, फरवरी में बीस, मार्च में सात, अप्रैल में चौदह, मई में छब्बीस, जून में अट्ठारह, जुलाई में सोलह बच्चे यहां भर्ती किये गए। वर्तमान में यहां छः बच्चे भर्ती हैं। भर्ती हुए बच्चे को दवाओं के साथ-साथ उचित मात्रा में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन व खनिज तत्वों से भरपूर आहार प्रदान किया जाता है। आहार पर केंद्र की आहार परामर्शदाता विदिशा शर्मा नजर रखती हैं. पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों का मन बहलाने की भी पूरी व्यवस्था है। यहां बच्चों के लिए तरह-तरह के खिलौने भी रखे गए हैं। एनआरसी में भर्ती पांच माह की जाह्नवी की मां रेनू बताती हैं कि उनकी बेटी कुपोषित होने पर उसे एनआरसी में भर्ती कराया गया। भर्ती कराते समय बच्ची का वजन महज दो किलो नौ सौ बीस ग्राम था, छह दिनों में ही उसकी सेहत में सुधार होकर वजन तीन किलो सत्तर ग्राम हो चुका है। चौबेपुर निवासी रीना ने बताया कि कुपोषण का शिकार होने के कारण उन्होंने अपने बेटे आयुष को एनआरसी में भर्ती कराया है। यहां दवा व उपचार निःशुल्क हो रहा है.
|
Latehar : अवैध कोयला तस्कर लगातार क्षेत्र में तस्करी का काला धंधा कर रहे हैं. बिना पुलिस प्रशासन के भय के उनकी गाड़ियां सड़क पर फर्राटा दौड़ लगाती रहती है. पुलिस प्रशासन को इस मामले में गुप्त सूचना मिली. इसके बाद गुरुवार की रात्रि पुलिस गश्ती के दल ने अवैध कोयला लदा हाईवा जब्त किया. हाईवा कुंडी से अवैध कोयला लेकर बड़की चांपी लोहरदगा ले जाया जा रहा था.
अवैध कोयला लदा हाईवा का तस्कर बिना नंबर के कार से स्कॉट भी कर रहे थे. पुलिस गश्ती दल को जैसे ही उन्होंने देखा सभी तस्कर भागने में सफल रहे. चंदवा पुलिस ने गश्ती के दौरान चतरा रांची मुख्य सड़क पर सुभाष चौक के नजदीक से अवैध कोयला लदा हाईवा के साथ चालक जितेंद्र गंझू को गिरफ्तार किया है.
|
Latehar : अवैध कोयला तस्कर लगातार क्षेत्र में तस्करी का काला धंधा कर रहे हैं. बिना पुलिस प्रशासन के भय के उनकी गाड़ियां सड़क पर फर्राटा दौड़ लगाती रहती है. पुलिस प्रशासन को इस मामले में गुप्त सूचना मिली. इसके बाद गुरुवार की रात्रि पुलिस गश्ती के दल ने अवैध कोयला लदा हाईवा जब्त किया. हाईवा कुंडी से अवैध कोयला लेकर बड़की चांपी लोहरदगा ले जाया जा रहा था. अवैध कोयला लदा हाईवा का तस्कर बिना नंबर के कार से स्कॉट भी कर रहे थे. पुलिस गश्ती दल को जैसे ही उन्होंने देखा सभी तस्कर भागने में सफल रहे. चंदवा पुलिस ने गश्ती के दौरान चतरा रांची मुख्य सड़क पर सुभाष चौक के नजदीक से अवैध कोयला लदा हाईवा के साथ चालक जितेंद्र गंझू को गिरफ्तार किया है.
|
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि 29 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के समय मुख्य पुजारी समेत 16 लोग ही मौजूद रहें।
रुद्रप्रयाग, जेएनएन। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि 29 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के समय मुख्य पुजारी समेत 16 लोग ही मौजूद रहें। वहीं, भक्तों के लिए दर्शन की अनुमति मंदिर में नहीं दी जाएगी। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन व सामाजिक दूरी के पालन को लेकर यह निर्णय लिया गया है। साथ ही डोली कार्यक्रम के दौरान भी लोगों से ऊखीमठ से गौरीकुंड तक सड़क पर नहीं आने की अपील की गई है।
केदारनाथ पैदल मार्ग मंदिर तक खोल दिया गया है। 16 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग गौरीकुंड से केदारनाथ तक आवाजाही शुरू हो गई है। घोड़े खच्चर भी पैदल मार्ग पर आ जा सकते हैं। अब केदारनाथ में मूलभूत सुविधाएं प्रशासन द्वारा बहाल की जाएंगी। विद्युत आपूर्ति सुचारू हो चुकी है। वुड स्टोन कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा पैदल मार्ग से बर्फ हटाने का कार्य किया गया।
पंचगद्दी स्थल ओंकोरश्वर मंदिर ऊखीमठ में देवस्थानम बोर्ड के साथ हुई हक-हकूकधारियों की पंचगाई समिति व तीर्थ पुरोहितों की बैठक में निर्णय लिया गया कि पूर्व में तय तिथि 29 अप्रैल को ही केदारनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी इसकी पुष्टि की है। महाराज के अनुसार हक-हकूकधारियों व तीर्थ पुरोहितों ने विश्वास दिलाया है कि इस दौरान लॉकडाउन के नियमों का अक्षरशः पालन किया जाएगा। साथ ही कपाट खुलने के मौके पर रावल की जगह उनके प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।
कोरोना महामारी के चलते सोमवार को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि बदले जाने के बाद केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि में भी बदलाव की उम्मीद की जा रही थी। इस सिलसिले में मंगलवार को ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में देवस्थानम बोर्ड के पदाधिकारियों के साथ पंचगाई समिति व तीर्थ पुरोहितों की बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। सभी ने एक स्वर में कहा कि पौराणिक परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि पर्व पर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय हो चुकी है। इसे बदला जाना किसी भी स्थिति में संभव नहीं। ऐसा करने पर द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ केदार के कपाट खोलने की तिथियों में भी बदलाव करना पड़ेगा।
पंचगाई समिति के सदस्य लक्ष्मीप्रसाद भट्ट ने कहा कि केदारनाथ के कपाट खुलने की परंपरा और पूजा पद्धति बदरीनाथ से भिन्न है। यहां रावल के प्रतिनिधि के रूप में मुख्य पुजारी पूजा करते हैं। इसके बाद देवस्थानम बोर्ड के अधिकारी बीडी सिंह ने घोषणा की कपाट खुलने की तिथि में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा रहा है। कपाट पूर्व घोषित तिथि 29 अप्रैल को सुबह 6. 10 बजे ही खोले जाएंगे। उधर, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पंचगाई समिति व तीर्थ पुरोहितों से कपाट खुलने की तिथि बदलने का अनुरोध किया गया था।
लेकिन, उनका कहना था कि इससे पंच केदार श्रृंखला के अन्य मंदिरों के कपाट खुलने की तिथियां भी बदलनी पड़ेंगी। लिहाजा, सरकार ने भी 29 अप्रैल को ही कपाट खोले जाने पर सहमति दे दी है। बता दें कि सोमवार को शासन में हुई बैठक के बाद बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 15 मई किए जाने की घोषणा की गई थी। साथ ही केदारनाथ के कपाट खोलने की संभावित तिथि 14 मई बताई गई थी।
|
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि उनतीस अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के समय मुख्य पुजारी समेत सोलह लोग ही मौजूद रहें। रुद्रप्रयाग, जेएनएन। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि उनतीस अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के समय मुख्य पुजारी समेत सोलह लोग ही मौजूद रहें। वहीं, भक्तों के लिए दर्शन की अनुमति मंदिर में नहीं दी जाएगी। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन व सामाजिक दूरी के पालन को लेकर यह निर्णय लिया गया है। साथ ही डोली कार्यक्रम के दौरान भी लोगों से ऊखीमठ से गौरीकुंड तक सड़क पर नहीं आने की अपील की गई है। केदारनाथ पैदल मार्ग मंदिर तक खोल दिया गया है। सोलह किलोग्राममीटर लंबे पैदल मार्ग गौरीकुंड से केदारनाथ तक आवाजाही शुरू हो गई है। घोड़े खच्चर भी पैदल मार्ग पर आ जा सकते हैं। अब केदारनाथ में मूलभूत सुविधाएं प्रशासन द्वारा बहाल की जाएंगी। विद्युत आपूर्ति सुचारू हो चुकी है। वुड स्टोन कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा पैदल मार्ग से बर्फ हटाने का कार्य किया गया। पंचगद्दी स्थल ओंकोरश्वर मंदिर ऊखीमठ में देवस्थानम बोर्ड के साथ हुई हक-हकूकधारियों की पंचगाई समिति व तीर्थ पुरोहितों की बैठक में निर्णय लिया गया कि पूर्व में तय तिथि उनतीस अप्रैल को ही केदारनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी इसकी पुष्टि की है। महाराज के अनुसार हक-हकूकधारियों व तीर्थ पुरोहितों ने विश्वास दिलाया है कि इस दौरान लॉकडाउन के नियमों का अक्षरशः पालन किया जाएगा। साथ ही कपाट खुलने के मौके पर रावल की जगह उनके प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। कोरोना महामारी के चलते सोमवार को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि बदले जाने के बाद केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि में भी बदलाव की उम्मीद की जा रही थी। इस सिलसिले में मंगलवार को ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में देवस्थानम बोर्ड के पदाधिकारियों के साथ पंचगाई समिति व तीर्थ पुरोहितों की बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। सभी ने एक स्वर में कहा कि पौराणिक परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि पर्व पर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय हो चुकी है। इसे बदला जाना किसी भी स्थिति में संभव नहीं। ऐसा करने पर द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ केदार के कपाट खोलने की तिथियों में भी बदलाव करना पड़ेगा। पंचगाई समिति के सदस्य लक्ष्मीप्रसाद भट्ट ने कहा कि केदारनाथ के कपाट खुलने की परंपरा और पूजा पद्धति बदरीनाथ से भिन्न है। यहां रावल के प्रतिनिधि के रूप में मुख्य पुजारी पूजा करते हैं। इसके बाद देवस्थानम बोर्ड के अधिकारी बीडी सिंह ने घोषणा की कपाट खुलने की तिथि में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा रहा है। कपाट पूर्व घोषित तिथि उनतीस अप्रैल को सुबह छः. दस बजे ही खोले जाएंगे। उधर, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पंचगाई समिति व तीर्थ पुरोहितों से कपाट खुलने की तिथि बदलने का अनुरोध किया गया था। लेकिन, उनका कहना था कि इससे पंच केदार श्रृंखला के अन्य मंदिरों के कपाट खुलने की तिथियां भी बदलनी पड़ेंगी। लिहाजा, सरकार ने भी उनतीस अप्रैल को ही कपाट खोले जाने पर सहमति दे दी है। बता दें कि सोमवार को शासन में हुई बैठक के बाद बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तीस अप्रैल से बढ़ाकर पंद्रह मई किए जाने की घोषणा की गई थी। साथ ही केदारनाथ के कपाट खोलने की संभावित तिथि चौदह मई बताई गई थी।
|
वाशिंगटन : अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने एक किताब के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि नई दिल्ली की तरफ से मिले दान के कारण भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु संधि को लेकर वह बतौर सीनेटर अपने रुख पर कायम नहीं रह पाई थीं।
पोलिटिको के मुताबिक, 'क्लिंटन कैशः द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ हाउ एंड व्हाई फॉरेन गवर्मेट्स एंड बिजनसेस हेल्प मेक बिल एंड हिलेरी रिच' में भारत को संदर्भ कर एक अध्याय लिखा गया है। यह किताब पीटर स्कवीजर ने लिखी है।
अध्याय 'इंडियन न्यूक्स : हाउ टू विन ए मेडल बाय चेंजिंग हिलेरीज माइंड' में भारत की तरफ से दिए गए दानों और संदेशों को शामिल किया गया।
पोलिटिको का कहना है कि हिलेरी ने वास्तव में सार्वजनिक रूप से 2006 में संधि को लेकर समर्थन जाहिर किया था और उन्होंने संशोधन के खिलाफ वोट किया था।
लेकिन उसी साल जून में हिलेरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विधेयक के खिलाफ समर्थन की घोषणा की और सीनेटरों रिचर्ड लुगार और जो बाइडन की प्रशंसन की, जिन्होंने हिलेरी के मुताबिक बुश प्रशासन के शुरुआती प्रस्ताव में सुधार किया था।
पोलिटिको भारतवंशी होटल व्यवसायी संत चटवाल की गतिविधि की व्याख्या करते हुए कहता है कि परमाणु संधि के समर्थन के लिए प्रभावशाली भारतियों ने हिलेरी को दान दिया था।
चटवाल ने पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की लंदन में सार्वजनिक सभा आयोजित की थी, जिसमें 4. 5 लाख डॉलर खर्च हुआ था।
|
वाशिंगटन : अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने एक किताब के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि नई दिल्ली की तरफ से मिले दान के कारण भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु संधि को लेकर वह बतौर सीनेटर अपने रुख पर कायम नहीं रह पाई थीं। पोलिटिको के मुताबिक, 'क्लिंटन कैशः द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ हाउ एंड व्हाई फॉरेन गवर्मेट्स एंड बिजनसेस हेल्प मेक बिल एंड हिलेरी रिच' में भारत को संदर्भ कर एक अध्याय लिखा गया है। यह किताब पीटर स्कवीजर ने लिखी है। अध्याय 'इंडियन न्यूक्स : हाउ टू विन ए मेडल बाय चेंजिंग हिलेरीज माइंड' में भारत की तरफ से दिए गए दानों और संदेशों को शामिल किया गया। पोलिटिको का कहना है कि हिलेरी ने वास्तव में सार्वजनिक रूप से दो हज़ार छः में संधि को लेकर समर्थन जाहिर किया था और उन्होंने संशोधन के खिलाफ वोट किया था। लेकिन उसी साल जून में हिलेरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विधेयक के खिलाफ समर्थन की घोषणा की और सीनेटरों रिचर्ड लुगार और जो बाइडन की प्रशंसन की, जिन्होंने हिलेरी के मुताबिक बुश प्रशासन के शुरुआती प्रस्ताव में सुधार किया था। पोलिटिको भारतवंशी होटल व्यवसायी संत चटवाल की गतिविधि की व्याख्या करते हुए कहता है कि परमाणु संधि के समर्थन के लिए प्रभावशाली भारतियों ने हिलेरी को दान दिया था। चटवाल ने पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की लंदन में सार्वजनिक सभा आयोजित की थी, जिसमें चार. पाँच लाख डॉलर खर्च हुआ था।
|
उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के इलाज के नाम पर मरीजों से ज्यादा पैसे वसूलने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने कई अस्पतालों से मरीजों के पैसे वापस कराए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर पहले गौतम बुद्ध नगर में और अब हापुड़ एवं मेरठ में भी प्रशासन ने अस्पतालों से कई मरीजों के पैसे वापस कराए हैं।
उत्तर प्रदेश में कोविड अस्पतालों में कोरोना वायरस संक्रमण के लिए दर निर्धारित की गई थी। इसके अंतर्गत आइसोलेशन में भर्ती मरीजों के लिए प्रतिदिन 4800 रुपए, आईसीयू के 7800 रुपए और आईसीयू वेंटीलेंटर के 9000 रुपए तय किए थे। इसमें अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड, भोजन, नर्सिंग सर्विस, चिकित्सकीय जाँच एवं कंसल्टेशन भी शामिल था। इसके अतिरिक्त अस्पताल मरीज से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकते थे।
हालाँकि शासन द्वारा इलाज दरें निर्धारित करने के बाद भी मरीजों से अतिरिक्त शुल्क लेने की खबरें सामने आ रही थीं। लगातार शिकायतों के बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को निर्देशित किया था कि अस्पतालों के खिलाफ ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई की जाए।
ऐसी ही कुछ शिकायतें हापुड़ और मेरठ से भी प्रशासन तक पहुँची। शासन के निर्देश पर हापुड़ के डीएम ने 2 कोविड अस्पतालों को नोटिस दिया। वहीं 5 अस्पतालों से तय सीमा से अधिक शुल्क वसूल करने पर मरीजों के पैसे लौटाने के लिए कहा गया। बिल से असन्तुष्ट होने वाले मरीजों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए हापुड़ प्रशासन ने देव नंदिनी अस्पताल में भर्ती 30 मरीजों, आरोग्य अस्पताल में भर्ती 12 मरीजों , जीएस अस्पताल में 2 मरीजों और रामा अस्पताल में 2 मरीजों से तय दर से अधिक लिए गए शुल्क को लौटाने को कहा। इस पर देव नंदिनी अस्पताल ने मरीजों को 3. 50 लाख रुपए वापस भी कर दिए।
लाइव हिंदुस्तान की खबर के अनुसार मेरठ में भी ऐसी 49 शिकायतें प्रशासन को प्राप्त हुईं, जिनमें 18 शिकायतें सही पाई गईं। मेरठ प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 2 अस्पतालों से 4 लाख रुपए वापस कराए और जबकि तीन बड़े अस्पतालों के लायसेन्स रद्द किए गए हैं।
इससे पहले गौतम बुद्ध नगर में भी मरीजों से तय दर से अधिक पैसे वसूलने का मामला सामने आया था। सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर निर्धारित दरों से अधिक वसूली गई राशि मरीजों को वापस कराई गई थी। गौतम बुद्ध नगर में तीन मरीजों को क्रमशः 150000 रुपए, 28400 रुपए और 31247 रुपए वापस कराए गए थे। जबकि एक मरीज के अंतिम बिल में 325000 रुपए की छूट अस्पताल से प्रदान कराई गई।
Covid-19 महामारी के दौरान अस्पतालों में मरीजों से मनमानी दरों पर पैसे वसूलने के कई मामले सामने आए थे, जिन पर संज्ञान लेते हुए सीएम आदित्यनाथ ने प्रशासन को यह निर्देशित किया था कि इन शिकायतों की जाँच कर ऐसे अस्पतालों का डेटा तैयार करें। इसके लिए मरीजों और उनके परिजनों को भी यह सुविधा दी गई थी कि मरीज या उनके परिजन निजी कोविड अस्पतालों के द्वारा निर्धारित दरों से अधिक राशि वसूलने से असन्तुष्ट हैं तो वे लिखित में डीएम के पास शिकायत कर सकते हैं।
|
उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के इलाज के नाम पर मरीजों से ज्यादा पैसे वसूलने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने कई अस्पतालों से मरीजों के पैसे वापस कराए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर पहले गौतम बुद्ध नगर में और अब हापुड़ एवं मेरठ में भी प्रशासन ने अस्पतालों से कई मरीजों के पैसे वापस कराए हैं। उत्तर प्रदेश में कोविड अस्पतालों में कोरोना वायरस संक्रमण के लिए दर निर्धारित की गई थी। इसके अंतर्गत आइसोलेशन में भर्ती मरीजों के लिए प्रतिदिन चार हज़ार आठ सौ रुपयापए, आईसीयू के सात हज़ार आठ सौ रुपयापए और आईसीयू वेंटीलेंटर के नौ हज़ार रुपयापए तय किए थे। इसमें अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड, भोजन, नर्सिंग सर्विस, चिकित्सकीय जाँच एवं कंसल्टेशन भी शामिल था। इसके अतिरिक्त अस्पताल मरीज से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकते थे। हालाँकि शासन द्वारा इलाज दरें निर्धारित करने के बाद भी मरीजों से अतिरिक्त शुल्क लेने की खबरें सामने आ रही थीं। लगातार शिकायतों के बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को निर्देशित किया था कि अस्पतालों के खिलाफ ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई की जाए। ऐसी ही कुछ शिकायतें हापुड़ और मेरठ से भी प्रशासन तक पहुँची। शासन के निर्देश पर हापुड़ के डीएम ने दो कोविड अस्पतालों को नोटिस दिया। वहीं पाँच अस्पतालों से तय सीमा से अधिक शुल्क वसूल करने पर मरीजों के पैसे लौटाने के लिए कहा गया। बिल से असन्तुष्ट होने वाले मरीजों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए हापुड़ प्रशासन ने देव नंदिनी अस्पताल में भर्ती तीस मरीजों, आरोग्य अस्पताल में भर्ती बारह मरीजों , जीएस अस्पताल में दो मरीजों और रामा अस्पताल में दो मरीजों से तय दर से अधिक लिए गए शुल्क को लौटाने को कहा। इस पर देव नंदिनी अस्पताल ने मरीजों को तीन. पचास लाख रुपए वापस भी कर दिए। लाइव हिंदुस्तान की खबर के अनुसार मेरठ में भी ऐसी उनचास शिकायतें प्रशासन को प्राप्त हुईं, जिनमें अट्ठारह शिकायतें सही पाई गईं। मेरठ प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दो अस्पतालों से चार लाख रुपए वापस कराए और जबकि तीन बड़े अस्पतालों के लायसेन्स रद्द किए गए हैं। इससे पहले गौतम बुद्ध नगर में भी मरीजों से तय दर से अधिक पैसे वसूलने का मामला सामने आया था। सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर निर्धारित दरों से अधिक वसूली गई राशि मरीजों को वापस कराई गई थी। गौतम बुद्ध नगर में तीन मरीजों को क्रमशः एक लाख पचास हज़ार रुपयापए, अट्ठाईस हज़ार चार सौ रुपयापए और इकतीस हज़ार दो सौ सैंतालीस रुपयापए वापस कराए गए थे। जबकि एक मरीज के अंतिम बिल में तीन लाख पच्चीस हज़ार रुपयापए की छूट अस्पताल से प्रदान कराई गई। Covid-उन्नीस महामारी के दौरान अस्पतालों में मरीजों से मनमानी दरों पर पैसे वसूलने के कई मामले सामने आए थे, जिन पर संज्ञान लेते हुए सीएम आदित्यनाथ ने प्रशासन को यह निर्देशित किया था कि इन शिकायतों की जाँच कर ऐसे अस्पतालों का डेटा तैयार करें। इसके लिए मरीजों और उनके परिजनों को भी यह सुविधा दी गई थी कि मरीज या उनके परिजन निजी कोविड अस्पतालों के द्वारा निर्धारित दरों से अधिक राशि वसूलने से असन्तुष्ट हैं तो वे लिखित में डीएम के पास शिकायत कर सकते हैं।
|
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें।
भोजपुरी गाना बबी के छबी 16 जुलाई को रिलीज हुआ था। इस गाने को अभी तक 268,872 व्यूज मिले हैं। गाने को प्रमोद प्रेमी यादव और बबिता बंदना ने अपनी आवाज दी है। गाने के बोल कृष्णा बेदर्दी ने लिखे हैं। गाने का म्यूजिक आर्या शर्मा ने दिया है। फैन्स इस गाने को पसंद कर रहे हैं।
|
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। भोजपुरी गाना बबी के छबी सोलह जुलाई को रिलीज हुआ था। इस गाने को अभी तक दो सौ अड़सठ,आठ सौ बहत्तर व्यूज मिले हैं। गाने को प्रमोद प्रेमी यादव और बबिता बंदना ने अपनी आवाज दी है। गाने के बोल कृष्णा बेदर्दी ने लिखे हैं। गाने का म्यूजिक आर्या शर्मा ने दिया है। फैन्स इस गाने को पसंद कर रहे हैं।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.