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IND vs SA: गंभीर ने स्टार स्पोर्ट्स से कहा, "कोहली बहुत अपरिपक्व हैं। किसी भारतीय कप्तान के लिए स्टंप्स में ऐसा कहना सबसे बुरा है। ऐसा करने से आप कभी भी युवाओं के आदर्श नहीं बनेंगे। "
Kerala: उन्हें 16 अक्टूबर, 2018 को जमानत मिली थी। चार्जशीट में 83 गवाहों के नाम हैं, जिनमें सिरो-मालाबार कैथोलिक चर्च के कार्डिनल, मार जॉर्ज एलेनचेरी, तीन बिशप, 11 पुजारी और 22 नन शामिल हैं। 83 गवाहों में से 39 को बुलाया गया और उन्हें सुना गया।
OTT: सिड मक्कड़, न्यारा बनर्जी और प्रियांशु चटर्जी के साथ ब्रिटिश अभिनेता टोनी रिचर्डसन, जॉर्ज डॉसन, एम्मा गैलियानो अभिनीत मनोवैज्ञानिक हॉरर श्रृंखला 'बरुन राय एंड द हाउस ऑन द क्लिफ' 28 जनवरी से स्ट्रीम करने के लिए तैयार है।
Bengal Train Accident: रेल दुर्घटना के बाद मलबे में फंसे यात्रियों की परेशान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, अभी भी कई यात्रियों के पटरी से उतरे डिब्बों के अंदर फंसे होने की आशंका है और क्षतिग्रस्त डिब्बों को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
Rishabh Pant Century: उनके इस शानदार पारी से पहले, पूर्व कप्तान एमएस धोनी का 2010/11 के दौरे में सेंचुरियन में 90 रन दक्षिण अफ्रीका में किसी भारतीय विकेटकीपर द्वारा सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था।
UP Election 2022: सपा ने गाजियाबाद के साहिबाबाद से अमर पाल शर्मा और मुजफ्फनगर की खतौली विधानसभा से रूपेश सैनी अपना प्रत्याशी घोषित किया है। कैराना से नाहिद हसन, मेरठ से रफीक अंसारी, धलौना से असलम चौधरी, कोल से सलमान सईद, अलीगढ़ से जफर आलम, आगरा कैंट से कुंवर सिंह वकील, आगरा बाह से मधुसूदन शर्मा को सपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है।
Guwahati-Bikaner Express derailed: जानकारी के मुताबिक, ट्रेन के 4 से 5 डिब्बे पटरी से उतर गए और ट्रैक के पास ही पलट गए। बताया जा रहा है कि इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है जबकि कई लोगों के घायल होने की आशंका बताई जा रही है। ये हादसा आज शाम करीब पांच बजे हुआ है।
UP Election 2022: इससे पहले संजय राउत ने बुधवार को मीडिया से बात करते ने कहा था कि भाजपा को सावधान रहने की आवश्कता है। अभी लहरों की चाल धीमी है लेकिन तेज लहरों से भाजपा का जहाज डगमगा सकता है।
UP Election 2022: वहीं टिकट मिलने पर पंखुड़ी पाठक ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का आभार जताया है। पंखुड़ी पाठक ने ट्वीट कर लिखा, "मैं लड़की हूँ , एक लड़की की माँ हूँ . . और मेरा यह संघर्ष भारत की सभी लड़कियों को समर्पित है। मुझे नोएडा से कांग्रेस का प्रत्याशी बनाने के लिए धन्यवाद @priyankagandhiदीदी।
Prabhu Deva Movie 'Theal': 'वलीमाई' और 'आरआरआर' जैसी बड़े बजट की फिल्मों के निर्माताओं ने कोविड -19 की तीसरी लहर को रोकने के लिए सरकारों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के मद्देनजर अपनी फिल्म रिलीज को स्थगित करने का विकल्प चुना है, वहीं छोटे और मध्यम बजट की फिल्मों के निर्माता अपनी फिल्मों को रिलीज करके मौके का फायदा उठा रहे हैं।
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IND vs SA: गंभीर ने स्टार स्पोर्ट्स से कहा, "कोहली बहुत अपरिपक्व हैं। किसी भारतीय कप्तान के लिए स्टंप्स में ऐसा कहना सबसे बुरा है। ऐसा करने से आप कभी भी युवाओं के आदर्श नहीं बनेंगे। " Kerala: उन्हें सोलह अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह को जमानत मिली थी। चार्जशीट में तिरासी गवाहों के नाम हैं, जिनमें सिरो-मालाबार कैथोलिक चर्च के कार्डिनल, मार जॉर्ज एलेनचेरी, तीन बिशप, ग्यारह पुजारी और बाईस नन शामिल हैं। तिरासी गवाहों में से उनतालीस को बुलाया गया और उन्हें सुना गया। OTT: सिड मक्कड़, न्यारा बनर्जी और प्रियांशु चटर्जी के साथ ब्रिटिश अभिनेता टोनी रिचर्डसन, जॉर्ज डॉसन, एम्मा गैलियानो अभिनीत मनोवैज्ञानिक हॉरर श्रृंखला 'बरुन राय एंड द हाउस ऑन द क्लिफ' अट्ठाईस जनवरी से स्ट्रीम करने के लिए तैयार है। Bengal Train Accident: रेल दुर्घटना के बाद मलबे में फंसे यात्रियों की परेशान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, अभी भी कई यात्रियों के पटरी से उतरे डिब्बों के अंदर फंसे होने की आशंका है और क्षतिग्रस्त डिब्बों को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। Rishabh Pant Century: उनके इस शानदार पारी से पहले, पूर्व कप्तान एमएस धोनी का दो हज़ार दस/ग्यारह के दौरे में सेंचुरियन में नब्बे रन दक्षिण अफ्रीका में किसी भारतीय विकेटकीपर द्वारा सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था। UP Election दो हज़ार बाईस: सपा ने गाजियाबाद के साहिबाबाद से अमर पाल शर्मा और मुजफ्फनगर की खतौली विधानसभा से रूपेश सैनी अपना प्रत्याशी घोषित किया है। कैराना से नाहिद हसन, मेरठ से रफीक अंसारी, धलौना से असलम चौधरी, कोल से सलमान सईद, अलीगढ़ से जफर आलम, आगरा कैंट से कुंवर सिंह वकील, आगरा बाह से मधुसूदन शर्मा को सपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। Guwahati-Bikaner Express derailed: जानकारी के मुताबिक, ट्रेन के चार से पाँच डिब्बे पटरी से उतर गए और ट्रैक के पास ही पलट गए। बताया जा रहा है कि इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है जबकि कई लोगों के घायल होने की आशंका बताई जा रही है। ये हादसा आज शाम करीब पांच बजे हुआ है। UP Election दो हज़ार बाईस: इससे पहले संजय राउत ने बुधवार को मीडिया से बात करते ने कहा था कि भाजपा को सावधान रहने की आवश्कता है। अभी लहरों की चाल धीमी है लेकिन तेज लहरों से भाजपा का जहाज डगमगा सकता है। UP Election दो हज़ार बाईस: वहीं टिकट मिलने पर पंखुड़ी पाठक ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का आभार जताया है। पंखुड़ी पाठक ने ट्वीट कर लिखा, "मैं लड़की हूँ , एक लड़की की माँ हूँ . . और मेरा यह संघर्ष भारत की सभी लड़कियों को समर्पित है। मुझे नोएडा से कांग्रेस का प्रत्याशी बनाने के लिए धन्यवाद @priyankagandhiदीदी। Prabhu Deva Movie 'Theal': 'वलीमाई' और 'आरआरआर' जैसी बड़े बजट की फिल्मों के निर्माताओं ने कोविड -उन्नीस की तीसरी लहर को रोकने के लिए सरकारों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के मद्देनजर अपनी फिल्म रिलीज को स्थगित करने का विकल्प चुना है, वहीं छोटे और मध्यम बजट की फिल्मों के निर्माता अपनी फिल्मों को रिलीज करके मौके का फायदा उठा रहे हैं।
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Highlights अपनी नयी किताब 'ऑन फायर' में स्टोक्स ने कहा कि वह वार्नर ही थे जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया। इंग्लैंड की विश्व कप विजेता टीम के नायक रहे बेन स्टोक्स ने दो महीने बाद खुलासा किया है।
इंग्लैंड की विश्व कप विजेता टीम के नायक रहे बेन स्टोक्स ने खुलासा किया कि हेडिंग्ले में एशेज टेस्ट में उनके अकेले दम पर टीम को जीत दिलाने का श्रेय डेविड वार्नर के उन्हें परेशान करने के प्रयासों को जाता है जिन्होंने मैदान पर फब्तियां कसकर इस करिश्माई ऑलराउंडर को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। अपनी नयी किताब 'ऑन फायर' में स्टोक्स ने कहा कि वह वार्नर ही थे जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया और उनकी टीम को बचाया जिससे उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई टीम को ट्रॉफी रखने से रोक दिया था।
बता दें कि एशेज सीरीज के दौरान इंग्लैंड की टीम एजबेस्टन टेस्ट हारने के बाद 1-0 से पीछे थी। इसके बाद हेडिंग्ले टेस्ट की पहली पारी में भी मेजबान टीम 67 रन पर सिमट गई तो लगा कि उसके हाथ से एशेज सीरीज निकल गई। ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के सामने इस टेस्ट में 359 रन का लक्ष्य रखा।
इंग्लैंड की टीम इसका पीछा करते हुए लड़खड़ा रही थी। इसके बाद चौथे दिन बेन स्टोक्स ने आखिरी विकेट के लिए जैक लीच के साथ 76 रन की साझेदारी की और जीत दिला दी। इस पार्टनरशिप में लीच का योगदान केवल एक रन था।
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Highlights अपनी नयी किताब 'ऑन फायर' में स्टोक्स ने कहा कि वह वार्नर ही थे जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया। इंग्लैंड की विश्व कप विजेता टीम के नायक रहे बेन स्टोक्स ने दो महीने बाद खुलासा किया है। इंग्लैंड की विश्व कप विजेता टीम के नायक रहे बेन स्टोक्स ने खुलासा किया कि हेडिंग्ले में एशेज टेस्ट में उनके अकेले दम पर टीम को जीत दिलाने का श्रेय डेविड वार्नर के उन्हें परेशान करने के प्रयासों को जाता है जिन्होंने मैदान पर फब्तियां कसकर इस करिश्माई ऑलराउंडर को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। अपनी नयी किताब 'ऑन फायर' में स्टोक्स ने कहा कि वह वार्नर ही थे जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया और उनकी टीम को बचाया जिससे उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई टीम को ट्रॉफी रखने से रोक दिया था। बता दें कि एशेज सीरीज के दौरान इंग्लैंड की टीम एजबेस्टन टेस्ट हारने के बाद एक-शून्य से पीछे थी। इसके बाद हेडिंग्ले टेस्ट की पहली पारी में भी मेजबान टीम सरसठ रन पर सिमट गई तो लगा कि उसके हाथ से एशेज सीरीज निकल गई। ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के सामने इस टेस्ट में तीन सौ उनसठ रन का लक्ष्य रखा। इंग्लैंड की टीम इसका पीछा करते हुए लड़खड़ा रही थी। इसके बाद चौथे दिन बेन स्टोक्स ने आखिरी विकेट के लिए जैक लीच के साथ छिहत्तर रन की साझेदारी की और जीत दिला दी। इस पार्टनरशिप में लीच का योगदान केवल एक रन था।
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इंग्लैंड के टूर्नामेंट टी-20 ब्लास्ट में शुक्रवार (2 जुलाई) को तीन गेंदबाजों ने हैट्रिक लेकर धमाल मचा दिया। यह कमाल किया कीवी गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन (Lockie Ferguson),एडम मिल्ने (Adam Milne) और इंग्लैंड के गेंदबाज ब्लेक क्लन (Blake Cullen) ने।
मिडलसेक्स के लिए खेल रहे इंग्लिश खिलाड़ी ब्लेक कलन ने समरसेट के खिलाफ हैट्रिक चटकाई। क्लन ने 14वें ओवर की आखिरी गेंद पर लुईस गोल्ड्सवर्थी, इसके बाद 18वें ओवर की पहली गेंद पर बेन ग्रीन और दूसरी गेंद पर मर्चेंट डी लैंग को अपना शिकार बनाया।
क्लन ने इस मुकाबले में 32 रन देकर 4 विकेट हासिल किए। हालांकि उनकी टीम डकवर्थ लुईस नियम के अनुसार 5 रन से हार गई।
इसके अलावा न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन और एडम मिल्ने भी हैट्रिक ली। यॉर्कशायर के लिए खेलते हुए फर्ग्यूसन ने लंकाशायर के खिलाफ 4 ओवर में 24 रन देकर 4 विकेट हासिल किए। आखिरी ओवर के आखिरी 3 गेंद पर उन्होंने ल्यूक वेल्स, ल्यूक वुड और टॉम हार्टली को अपना शिकार बनाकर हैट्रिक पूरी की। जिसके चलते उनकी टीम यह मुकाबला 9 रन से जीत गई।
दिन की तीसरी हैट्रिक आईर कैंट और सर्रे के बीच हुए मुकाबले में। जिसमें कैंट के लिए खेल रहे एडम मिल्ने ने भी आखिरी ओवर के आखिरी तीन गेंद में हैट्रिक पूरी की। मिल्ने ने क्रमशः ओली पोप, काइल जैमीसन और लौरी इवांस को आउट कर सर्रे को जीत हासिल करने से रोक दिया।
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इंग्लैंड के टूर्नामेंट टी-बीस ब्लास्ट में शुक्रवार को तीन गेंदबाजों ने हैट्रिक लेकर धमाल मचा दिया। यह कमाल किया कीवी गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन ,एडम मिल्ने और इंग्लैंड के गेंदबाज ब्लेक क्लन ने। मिडलसेक्स के लिए खेल रहे इंग्लिश खिलाड़ी ब्लेक कलन ने समरसेट के खिलाफ हैट्रिक चटकाई। क्लन ने चौदहवें ओवर की आखिरी गेंद पर लुईस गोल्ड्सवर्थी, इसके बाद अट्ठारहवें ओवर की पहली गेंद पर बेन ग्रीन और दूसरी गेंद पर मर्चेंट डी लैंग को अपना शिकार बनाया। क्लन ने इस मुकाबले में बत्तीस रन देकर चार विकेट हासिल किए। हालांकि उनकी टीम डकवर्थ लुईस नियम के अनुसार पाँच रन से हार गई। इसके अलावा न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन और एडम मिल्ने भी हैट्रिक ली। यॉर्कशायर के लिए खेलते हुए फर्ग्यूसन ने लंकाशायर के खिलाफ चार ओवर में चौबीस रन देकर चार विकेट हासिल किए। आखिरी ओवर के आखिरी तीन गेंद पर उन्होंने ल्यूक वेल्स, ल्यूक वुड और टॉम हार्टली को अपना शिकार बनाकर हैट्रिक पूरी की। जिसके चलते उनकी टीम यह मुकाबला नौ रन से जीत गई। दिन की तीसरी हैट्रिक आईर कैंट और सर्रे के बीच हुए मुकाबले में। जिसमें कैंट के लिए खेल रहे एडम मिल्ने ने भी आखिरी ओवर के आखिरी तीन गेंद में हैट्रिक पूरी की। मिल्ने ने क्रमशः ओली पोप, काइल जैमीसन और लौरी इवांस को आउट कर सर्रे को जीत हासिल करने से रोक दिया।
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बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (BEST) की एक टीम ने रति के घर का दौरा करने पर गड़बड़ी का पता लगाया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक इजीनियर ने पाया कि दंपति ने मीटर में छेड़छाड़ कर चार अप्रैल, 2013 से 1,77,647 यूनिट बिजली के लिए कथित रूप से भुगतान नहीं किया था।
लखनऊ : अपने समय की जानी मानी एक्ट्रेस रति अग्निहोत्री और उनके पति अनिल वीरवानी के खिलाफ एक संगीन आरोप लगाया गया है। दोनों के खिलाफ 48. 96 लाख रुपए की बिजली चोरी करने के आरोप में एक मामला दर्ज किया गया है।
'कूली' फिल्म की अभिनेत्री और उनके पति वर्ली इलाके में नेहरू प्लेनेटेरियम के पास स्टर्लिंग सी फेस अपार्टमेंट में रहते हैं।
-पुलिस के मुताबिक़ दोनों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने घर में बिजली के मीटर में छेड़छाड़ की थी।
बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (BEST) की एक टीम ने रति के घर का दौरा करने पर गड़बड़ी का पता लगाया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक इजीनियर ने पाया कि दंपति ने मीटर में छेड़छाड़ कर चार अप्रैल, 2013 से 1,77,647 यूनिट बिजली के लिए कथित रूप से भुगतान नहीं किया था।
रति और उनके पति के खिलाफ वर्ली पुलिस थाने में भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत 48. 96 लाख रुपए की बिजली की चोरी का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन की एक टीम ने रति के घर का दौरा करने पर गड़बड़ी का पता लगाया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक इजीनियर ने पाया कि दंपति ने मीटर में छेड़छाड़ कर चार अप्रैल, दो हज़ार तेरह से एक,सतहत्तर,छः सौ सैंतालीस यूनिट बिजली के लिए कथित रूप से भुगतान नहीं किया था। लखनऊ : अपने समय की जानी मानी एक्ट्रेस रति अग्निहोत्री और उनके पति अनिल वीरवानी के खिलाफ एक संगीन आरोप लगाया गया है। दोनों के खिलाफ अड़तालीस. छियानवे लाख रुपए की बिजली चोरी करने के आरोप में एक मामला दर्ज किया गया है। 'कूली' फिल्म की अभिनेत्री और उनके पति वर्ली इलाके में नेहरू प्लेनेटेरियम के पास स्टर्लिंग सी फेस अपार्टमेंट में रहते हैं। -पुलिस के मुताबिक़ दोनों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने घर में बिजली के मीटर में छेड़छाड़ की थी। बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन की एक टीम ने रति के घर का दौरा करने पर गड़बड़ी का पता लगाया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक इजीनियर ने पाया कि दंपति ने मीटर में छेड़छाड़ कर चार अप्रैल, दो हज़ार तेरह से एक,सतहत्तर,छः सौ सैंतालीस यूनिट बिजली के लिए कथित रूप से भुगतान नहीं किया था। रति और उनके पति के खिलाफ वर्ली पुलिस थाने में भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा एक सौ पैंतीस के तहत अड़तालीस. छियानवे लाख रुपए की बिजली की चोरी का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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विवेकानमा साहित्य
मूर्तिपूजक बनाने की पेष्टा की गमी की और इसकी जितना की जान गई कम है। प्रत्येक व्यक्ति की उपासना करनी चाहिए अथवा किसी को सहायता से उपासना करनी चाहिए यह बात बोर से या हुक्म से कराने की क्या पड़ी थी ? यह बात अन्य कोई कैसे बन सकता है कि कौन गावमी किस वस्तु के सहारे उमति कर सकता है? कोई प्रतिमापूजा द्वारा कोई अग्निपूजा द्वारा यहाँ तक कि कोई केवल एक के सहारे उपासना
की सिद्धि प्राप्त कर सकता है, यह किसी और को कैसे मारूम हो सकता है ? इन बातो का निर्णय अपने अपने गुरूत्रों के द्वारा ही होना चाहिए। भक्ति विपक प्रमो मे इष्टवेब सम्बन्धी नियम है उन्होंने इस बात की व्याख्या देखने में बावी है-वर्षात् व्यक्तिविशेष को अपनी विशिष्ट उपासना पद्धति से अपने इष्ट देव के पास पहुँचने के लिए माना पड़ेगा और वह जिस निर्वाचित रास्ते से मागे पड़ेगा नही उसका इष्ट है। मनुष्य को तो चाहिए अपनी ही उपासना पद्धति के मार्ग से पर साथ ही जन्म मागों की ओर भी सहानुभूति की दृष्टि से बेचना चाहिए। और इस मार्ग का जबलम्बन उसको तब तक करना पड़ेगा अब तक वह अपने निर्दिष्ट स्थान पर नहीं पहुँच जाता-चब तक यह उस केन्द्रसमस पर नही पहुँच जाता ह बस्तु की सहायता की कोई बता ही नहीं है।
इसी प्रसग मे भारतवर्ष के बहुतेरे स्थानों में प्रतिमा के पिय मे जो एक प्रकार से मत मुस्माई की तरह हो पमी है, साबधान कर देना आवश्यक है। हम प्यास्त्र में पढ़ते हैं जो बेजों का सारतत्व समझते है जो निष्पाप है बोन के छोम से और किसी प्रकार के स्वार्थ से छोपो की शिक्षा नहीं देते जिनकी से नही प्राप्त होती बसन्त ऋतु जिस प्रकार पेड़-भौगों कृपा गौर लता-पुस्मो से बदले मे शुक न चाहते हुए सभी पेड़ों में नया जीवन उम्हें इरा-भरा कर देती है, उनमे नयी नयी कोपले कि आती है, उसी प्रकार जिनका स्वभाष ही कोपों का काम करनेबाबा है जिनका सारा जीवन ही दूसरों के हित के लिए है जो इसके बदके छोपों से कुछ भी नही चाहऐसे महान् व्यक्ति ही गुरु कहलाने योग्य हैं दूसरे नही जसद्गुरु के पास दो शाम-काम की माहीमही है उनकी शिक्षा से पति की ही सम्भावना रहती है क्योकि केवल शिक्षक या उपरीक्षक ही नहीं है, शिक्षा देता तो उनके वर्तव्य का एक बहुत ही मामूमी अस है। हिन्दुओं का वास है कि ही सिप्प मे का संचार करते हैं। इस बात को समझने के लिए जड़ जगत् का ही एक सेको। मानो किसी ने रोग निवारक ठोका नहीं किया ऐसी अवस्था में उसके शरीर के अन्दर रोग के इपित मौटाबुओं के प्रवेश कर जाने की बहुत का है।
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विवेकानमा साहित्य मूर्तिपूजक बनाने की पेष्टा की गमी की और इसकी जितना की जान गई कम है। प्रत्येक व्यक्ति की उपासना करनी चाहिए अथवा किसी को सहायता से उपासना करनी चाहिए यह बात बोर से या हुक्म से कराने की क्या पड़ी थी ? यह बात अन्य कोई कैसे बन सकता है कि कौन गावमी किस वस्तु के सहारे उमति कर सकता है? कोई प्रतिमापूजा द्वारा कोई अग्निपूजा द्वारा यहाँ तक कि कोई केवल एक के सहारे उपासना की सिद्धि प्राप्त कर सकता है, यह किसी और को कैसे मारूम हो सकता है ? इन बातो का निर्णय अपने अपने गुरूत्रों के द्वारा ही होना चाहिए। भक्ति विपक प्रमो मे इष्टवेब सम्बन्धी नियम है उन्होंने इस बात की व्याख्या देखने में बावी है-वर्षात् व्यक्तिविशेष को अपनी विशिष्ट उपासना पद्धति से अपने इष्ट देव के पास पहुँचने के लिए माना पड़ेगा और वह जिस निर्वाचित रास्ते से मागे पड़ेगा नही उसका इष्ट है। मनुष्य को तो चाहिए अपनी ही उपासना पद्धति के मार्ग से पर साथ ही जन्म मागों की ओर भी सहानुभूति की दृष्टि से बेचना चाहिए। और इस मार्ग का जबलम्बन उसको तब तक करना पड़ेगा अब तक वह अपने निर्दिष्ट स्थान पर नहीं पहुँच जाता-चब तक यह उस केन्द्रसमस पर नही पहुँच जाता ह बस्तु की सहायता की कोई बता ही नहीं है। इसी प्रसग मे भारतवर्ष के बहुतेरे स्थानों में प्रतिमा के पिय मे जो एक प्रकार से मत मुस्माई की तरह हो पमी है, साबधान कर देना आवश्यक है। हम प्यास्त्र में पढ़ते हैं जो बेजों का सारतत्व समझते है जो निष्पाप है बोन के छोम से और किसी प्रकार के स्वार्थ से छोपो की शिक्षा नहीं देते जिनकी से नही प्राप्त होती बसन्त ऋतु जिस प्रकार पेड़-भौगों कृपा गौर लता-पुस्मो से बदले मे शुक न चाहते हुए सभी पेड़ों में नया जीवन उम्हें इरा-भरा कर देती है, उनमे नयी नयी कोपले कि आती है, उसी प्रकार जिनका स्वभाष ही कोपों का काम करनेबाबा है जिनका सारा जीवन ही दूसरों के हित के लिए है जो इसके बदके छोपों से कुछ भी नही चाहऐसे महान् व्यक्ति ही गुरु कहलाने योग्य हैं दूसरे नही जसद्गुरु के पास दो शाम-काम की माहीमही है उनकी शिक्षा से पति की ही सम्भावना रहती है क्योकि केवल शिक्षक या उपरीक्षक ही नहीं है, शिक्षा देता तो उनके वर्तव्य का एक बहुत ही मामूमी अस है। हिन्दुओं का वास है कि ही सिप्प मे का संचार करते हैं। इस बात को समझने के लिए जड़ जगत् का ही एक सेको। मानो किसी ने रोग निवारक ठोका नहीं किया ऐसी अवस्था में उसके शरीर के अन्दर रोग के इपित मौटाबुओं के प्रवेश कर जाने की बहुत का है।
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भगवान विष्णु के नौ अवतारों के दर्शन तो आपने किए ही होंगे. उनके दसवें अवतार कल्कि के बारे में सुना भी होगा. लेकिन क्या कभी उनके सभी अवतारों को एक साथ देखा है आपने. नर्मदा में मौजूद है एक ऐसा ही मंदिर जहां नारायण के दसों रूप के एक मूर्ति में दर्शन करने का सौभाग्य आप पा सकते हैं. क्या है इस मंदिर की कहानी?
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भगवान विष्णु के नौ अवतारों के दर्शन तो आपने किए ही होंगे. उनके दसवें अवतार कल्कि के बारे में सुना भी होगा. लेकिन क्या कभी उनके सभी अवतारों को एक साथ देखा है आपने. नर्मदा में मौजूद है एक ऐसा ही मंदिर जहां नारायण के दसों रूप के एक मूर्ति में दर्शन करने का सौभाग्य आप पा सकते हैं. क्या है इस मंदिर की कहानी?
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India News(इंडिया न्यूज़), उत्तराखंड "UK Board Result 2023" : इस साल प्रदेश भर के 2,59,439 विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षा दी थी, जिनको बेसब्री से परीक्षाफल का इंतजार है। रामनगर स्तिथ बोर्ड कार्यालय से परिणाम घोषित किया जाएगा। हाईस्कूल में एक लाख 32 हजार और इंटरमीडिएट की परीक्षा में एक लाख 27 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे। आज माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी बोर्ड सभागार में सुबह 11 बजे परीक्षाफल जारी करेंगी।
इस बार हाईस्कूल की परीक्षा में 1,32,115 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। वहीं, परीक्षाफल 85. 17 प्रतिशत रहा।
इसके साथ ही हाई स्कूल में 85. 17 % छात्र-छात्राएं पास हुए है। वहीं, इस बार हाईस्कूल में लड़कों ने बाजी मारी है।
टिहरी गढ़वाल के सुशांत चंद्रवंशी ने 99% अंक प्राप्त कर प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।
उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने परीक्षाफल जारी किया।
परीक्षार्थी अपना रिजल्ट उत्तराखंड बोर्ड की वेबसाइट uaresult. nic. in में देख सकते हैं। वहीं, इसके आलावा ubse. uk. gov. in पर भी छात्र अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं।
उत्तराखंड में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित करने की बोर्ड प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। इस वर्ष बोर्ड की परीक्षा 16 मार्च से शुरू हो कर 6 अप्रैल को सम्पन्न हुई थी। शिक्षा बोर्ड परिषद की सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि 25 मई को सुबह 11 बजे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा। बता दें, इस वर्ष हाईस्कूल में परीक्षार्थियों की संख्या एक लाख बत्तीस हजार और इंटरमीडिएट में एक लाख सत्ताईस हजार परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी।
इस वर्ष प्रदेश भर के 2,59,439 विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षाएं दी थी। जिनमे से हाईस्कूल में एक लाख 32 हजार और इंटरमीडिएट की परीक्षा में एक लाख 27 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे। वहीं उत्तराखंड में 16 मार्च से 10वीं, 12वीं की परीक्षाएं शुरू हुईं, जो 6 अप्रैल तक चलीं। 15 अप्रैल से 29 अप्रैल तक 14. 22 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हुआ। प्रदेश में 14. 22 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को 4500 शिक्षकों ने प्रदेश भर के 29 मूल्यांकन केंद्र पर जांचा।
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India News, उत्तराखंड "UK Board Result दो हज़ार तेईस" : इस साल प्रदेश भर के दो,उनसठ,चार सौ उनतालीस विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षा दी थी, जिनको बेसब्री से परीक्षाफल का इंतजार है। रामनगर स्तिथ बोर्ड कार्यालय से परिणाम घोषित किया जाएगा। हाईस्कूल में एक लाख बत्तीस हजार और इंटरमीडिएट की परीक्षा में एक लाख सत्ताईस हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे। आज माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी बोर्ड सभागार में सुबह ग्यारह बजे परीक्षाफल जारी करेंगी। इस बार हाईस्कूल की परीक्षा में एक,बत्तीस,एक सौ पंद्रह छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। वहीं, परीक्षाफल पचासी. सत्रह प्रतिशत रहा। इसके साथ ही हाई स्कूल में पचासी. सत्रह % छात्र-छात्राएं पास हुए है। वहीं, इस बार हाईस्कूल में लड़कों ने बाजी मारी है। टिहरी गढ़वाल के सुशांत चंद्रवंशी ने निन्यानवे% अंक प्राप्त कर प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। उत्तराखंड बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने परीक्षाफल जारी किया। परीक्षार्थी अपना रिजल्ट उत्तराखंड बोर्ड की वेबसाइट uaresult. nic. in में देख सकते हैं। वहीं, इसके आलावा ubse. uk. gov. in पर भी छात्र अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। उत्तराखंड में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित करने की बोर्ड प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। इस वर्ष बोर्ड की परीक्षा सोलह मार्च से शुरू हो कर छः अप्रैल को सम्पन्न हुई थी। शिक्षा बोर्ड परिषद की सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि पच्चीस मई को सुबह ग्यारह बजे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा। बता दें, इस वर्ष हाईस्कूल में परीक्षार्थियों की संख्या एक लाख बत्तीस हजार और इंटरमीडिएट में एक लाख सत्ताईस हजार परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। इस वर्ष प्रदेश भर के दो,उनसठ,चार सौ उनतालीस विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षाएं दी थी। जिनमे से हाईस्कूल में एक लाख बत्तीस हजार और इंटरमीडिएट की परीक्षा में एक लाख सत्ताईस हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे। वहीं उत्तराखंड में सोलह मार्च से दसवीं, बारहवीं की परीक्षाएं शुरू हुईं, जो छः अप्रैल तक चलीं। पंद्रह अप्रैल से उनतीस अप्रैल तक चौदह. बाईस लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हुआ। प्रदेश में चौदह. बाईस लाख उत्तर पुस्तिकाओं को चार हज़ार पाँच सौ शिक्षकों ने प्रदेश भर के उनतीस मूल्यांकन केंद्र पर जांचा।
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बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को पटना ग्राम पंचायत का उद्घाटन करने के बाद कहा कि ग्राम स्वराज की जो कल्पना महात्मा गांधी ने रखी थी, उसको वैचारिक पृष्ठभूमि पर अमलीजामा पहनाते हुए एक रूप देने का काम भारतीय जनसंघ और बीजेपी के नेताओं ने किया है.
वहीं उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस ने कभी कोऑपरेटिव फार्मिंग की बात की, कभी कलेक्टिव फार्मिंग की, लेकिन किसान, गांव, गरीब की अन्तरात्मा को पहचानने के विषय में उसकी सोच पीछे रह गई इसीलिए वह ग्राम स्वराज की कल्पना को साकार करने में असफल रहे.
जेपी नड्डा ने कहा,"मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि हमारी विचारधारा की उत्पत्ति श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक मजबूत राष्ट्र की कल्पना को लेकर की थी, वहीं वैचारिक पृष्ठभूमि पर दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद को जन्म दिया.
उन्होंने कहा कि अंत्योदय की कल्पना को पहली बार धरती पर उतारने का काम बीजेपी और जनसंघ ने किया था. उसी को आगे बढ़ाते हुए हमारे नानाजी देशमुख ने ग्रामोदय का विषय उठाया. 1. 77 लाख ग्राम पंचायत फाइबर इंटरनेट से जुड़ गए हैं, जिससे अब डिजिटल और डायरेक्ट पेमेंट शुरू हो गई है.
नड्डा ने बताया कि देश भर में 10,000 किमी. लंबी सड़कें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई हैं. आज पूरे देश में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है. अटल सरकार के बाद 10 साल तक यूपीए सरकार ने इस योजना को रोक दिया.
उन्होंने बताया कि हमारी पंचायतों को पुनर्जीवित करने के लिए एक एकल इंटरफेस बनाया गया है. 2. 63 लाख से अधिक पंचायत प्रोफाइल पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं. और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के लिए 5. 9 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
पटना में बीजेपी संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक शनिवार को शुरू हुई. इस बैठक में जेपी नड्डा पहुंच पटना पहुंचे और उन्होंने एक रोड शो किया. इस बैठक में बिहार में 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर सीएम नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच गठबंधन का भी मुद्दा उठा.
इस पर पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद ने स्पष्ट कर दिया कि 2024 में बीजेपी और जेडीयू साथ में चुनाव लड़ेगी और इसमें कोई परेशानी नहीं है. मोतिहारी से बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह ने भी जेडीयू के साथ बीजेपी के संबंध को प्राकृतिक और पुराना बताया.
मालूम हो कि तीन दिन पहले ही जनता दल यूनाइटेड पार्टी बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने यह बयान देकर राजनीतिक खलबली मचा दी थी कि 2024 लोकसभा चुनाव में या फिर 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी और जदयू साथ में चुनाव लड़ेंगे इसकी कोई गारंटी कैसे दे सकता है?
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बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को पटना ग्राम पंचायत का उद्घाटन करने के बाद कहा कि ग्राम स्वराज की जो कल्पना महात्मा गांधी ने रखी थी, उसको वैचारिक पृष्ठभूमि पर अमलीजामा पहनाते हुए एक रूप देने का काम भारतीय जनसंघ और बीजेपी के नेताओं ने किया है. वहीं उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस ने कभी कोऑपरेटिव फार्मिंग की बात की, कभी कलेक्टिव फार्मिंग की, लेकिन किसान, गांव, गरीब की अन्तरात्मा को पहचानने के विषय में उसकी सोच पीछे रह गई इसीलिए वह ग्राम स्वराज की कल्पना को साकार करने में असफल रहे. जेपी नड्डा ने कहा,"मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि हमारी विचारधारा की उत्पत्ति श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक मजबूत राष्ट्र की कल्पना को लेकर की थी, वहीं वैचारिक पृष्ठभूमि पर दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद को जन्म दिया. उन्होंने कहा कि अंत्योदय की कल्पना को पहली बार धरती पर उतारने का काम बीजेपी और जनसंघ ने किया था. उसी को आगे बढ़ाते हुए हमारे नानाजी देशमुख ने ग्रामोदय का विषय उठाया. एक. सतहत्तर लाख ग्राम पंचायत फाइबर इंटरनेट से जुड़ गए हैं, जिससे अब डिजिटल और डायरेक्ट पेमेंट शुरू हो गई है. नड्डा ने बताया कि देश भर में दस,शून्य किमी. लंबी सड़कें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई हैं. आज पूरे देश में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है. अटल सरकार के बाद दस साल तक यूपीए सरकार ने इस योजना को रोक दिया. उन्होंने बताया कि हमारी पंचायतों को पुनर्जीवित करने के लिए एक एकल इंटरफेस बनाया गया है. दो. तिरेसठ लाख से अधिक पंचायत प्रोफाइल पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं. और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के लिए पाँच. नौ हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. पटना में बीजेपी संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक शनिवार को शुरू हुई. इस बैठक में जेपी नड्डा पहुंच पटना पहुंचे और उन्होंने एक रोड शो किया. इस बैठक में बिहार में दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव को लेकर सीएम नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच गठबंधन का भी मुद्दा उठा. इस पर पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद ने स्पष्ट कर दिया कि दो हज़ार चौबीस में बीजेपी और जेडीयू साथ में चुनाव लड़ेगी और इसमें कोई परेशानी नहीं है. मोतिहारी से बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह ने भी जेडीयू के साथ बीजेपी के संबंध को प्राकृतिक और पुराना बताया. मालूम हो कि तीन दिन पहले ही जनता दल यूनाइटेड पार्टी बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने यह बयान देकर राजनीतिक खलबली मचा दी थी कि दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव में या फिर दो हज़ार पच्चीस बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी और जदयू साथ में चुनाव लड़ेंगे इसकी कोई गारंटी कैसे दे सकता है?
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Womens Junior Asia Cup 2023 Hockey: इससे पहले भारत 2012 में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए फाइनल में पहुंची थी लेकिन बैंकॉक से 2-5 से हार का सामना करना पड़ा।
Women Junior Asia Cup 2023 Hockey: भारत की महिला जूनियर हांकी टीम ने इतिहास रचते हुए एशिया कप अपने नाम कर लिया है। टीम इंडिया नें फाइनल में चार बार की चैंपियन रही दिक्षिण कोरिया टीम को 2-1 से हाराया। इससे पहले भारत 2012 में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए फाइनल में पहुंची थी लेकिन बैंकॉक से 2-5 से हार का सामना करना पड़ा। बेटियों द्वारा इतिहास रचने के बाद बधाई देने वालों का तांता लग गया। अइए जानते हैं किसने क्या कहा।
महिला जूनियर एशिया कप-2023 जीतकर स्वर्णिम इतिहास रचने वाली भारतीय हॉकी टीम को हार्दिक बधाई!
देश को गौरवभूषित करती यह उपलब्धि आप सभी की दक्षता, प्रतिबद्धता, समर्पण और टीम भावना का प्रतिफल है।
Many congratulations to our Women's Junior Hockey ? team for winning the first ever Asia Cup title ?
We are extremely proud of this monumental achievement.
भारतीय महिला हॉकी टीम ने पहली बार जूनियर एशिया कप जीतकर इतिहास रचा है।
पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई। देश को आप सभी पर बेहद गर्व है।
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Womens Junior Asia Cup दो हज़ार तेईस Hockey: इससे पहले भारत दो हज़ार बारह में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए फाइनल में पहुंची थी लेकिन बैंकॉक से दो-पाँच से हार का सामना करना पड़ा। Women Junior Asia Cup दो हज़ार तेईस Hockey: भारत की महिला जूनियर हांकी टीम ने इतिहास रचते हुए एशिया कप अपने नाम कर लिया है। टीम इंडिया नें फाइनल में चार बार की चैंपियन रही दिक्षिण कोरिया टीम को दो-एक से हाराया। इससे पहले भारत दो हज़ार बारह में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए फाइनल में पहुंची थी लेकिन बैंकॉक से दो-पाँच से हार का सामना करना पड़ा। बेटियों द्वारा इतिहास रचने के बाद बधाई देने वालों का तांता लग गया। अइए जानते हैं किसने क्या कहा। महिला जूनियर एशिया कप-दो हज़ार तेईस जीतकर स्वर्णिम इतिहास रचने वाली भारतीय हॉकी टीम को हार्दिक बधाई! देश को गौरवभूषित करती यह उपलब्धि आप सभी की दक्षता, प्रतिबद्धता, समर्पण और टीम भावना का प्रतिफल है। Many congratulations to our Women's Junior Hockey ? team for winning the first ever Asia Cup title ? We are extremely proud of this monumental achievement. भारतीय महिला हॉकी टीम ने पहली बार जूनियर एशिया कप जीतकर इतिहास रचा है। पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई। देश को आप सभी पर बेहद गर्व है।
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बलिया/रामगढ़, हिन्दुस्तान संवाद। जिले में जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) का मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। विभागीय अधिकारियों ने संक्रमित मरीज के परिवार व संपर्क में आए 30 लोगों की सैपलिंग करायी है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में साफ सफाई व छिड़काव के कार्य शुरू कर दिए हैं। सैंपलिंग करने वाले संदिग्धों की रिपोर्ट तीन दिन बाद आएगी।
आलमराय के टोला निवासी 24 वर्षीय युवक परिवार के मुंडन संस्कार में शामिल होने 28 अप्रैल को गांव आया। पांच मई को मुंडन के बाद 10 मई को युवक की तबियत अचानक खराब हो गयी। तेज बुखार के साथ ही शरीर मे चकते निकलने के साथ ही खुजलाहट होने लगी। परिजन जिला अस्पताल से लगायत छपरा में इलाज कराये। फायदा नहीं होने के बाद जून में लखनऊ के डॉ राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय मे भर्ती कराया गया। 28 जून को पीड़ित का सैम्पल जांच के लिये मेडिकल कालेज भेजा गया। रिपोर्ट में तीन जुलाई को पीड़ित जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित पाया गया। इससूचना जिले के स्वास्थ्य विभाग को भी भेजी गयी।
लखनऊ की सूचना पर हरकत में आए स्वास्थ्य महकमे ने तत्काल मरीज के परिजनों और आसपास के करीब 30 लोगों के ब्लड के नमूने लेकर उन्हे जांच के लिए आरटीपीसीआर लैब में भेज दिए। इसके अलावा आसपास में साफ सफाई व छिड़काव के माकूल इंतजाम की व्यवस्था के लिए ग्राम प्रधान को निर्देशित किया।
इस बावत जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ अभिषेक मिश्रा ने बताया कि जेई को लेकर स्वास्थ्य महकमा पूरे तरह अलर्ट पर है। संक्रमित मरीज सामने आने के बाद से विभागीय कार्रवाई पूरी कर ली गई है। तीन दिन बाद रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग आगे की रणनीति तैयार करेगा।
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बलिया/रामगढ़, हिन्दुस्तान संवाद। जिले में जेई का मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। विभागीय अधिकारियों ने संक्रमित मरीज के परिवार व संपर्क में आए तीस लोगों की सैपलिंग करायी है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में साफ सफाई व छिड़काव के कार्य शुरू कर दिए हैं। सैंपलिंग करने वाले संदिग्धों की रिपोर्ट तीन दिन बाद आएगी। आलमराय के टोला निवासी चौबीस वर्षीय युवक परिवार के मुंडन संस्कार में शामिल होने अट्ठाईस अप्रैल को गांव आया। पांच मई को मुंडन के बाद दस मई को युवक की तबियत अचानक खराब हो गयी। तेज बुखार के साथ ही शरीर मे चकते निकलने के साथ ही खुजलाहट होने लगी। परिजन जिला अस्पताल से लगायत छपरा में इलाज कराये। फायदा नहीं होने के बाद जून में लखनऊ के डॉ राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय मे भर्ती कराया गया। अट्ठाईस जून को पीड़ित का सैम्पल जांच के लिये मेडिकल कालेज भेजा गया। रिपोर्ट में तीन जुलाई को पीड़ित जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित पाया गया। इससूचना जिले के स्वास्थ्य विभाग को भी भेजी गयी। लखनऊ की सूचना पर हरकत में आए स्वास्थ्य महकमे ने तत्काल मरीज के परिजनों और आसपास के करीब तीस लोगों के ब्लड के नमूने लेकर उन्हे जांच के लिए आरटीपीसीआर लैब में भेज दिए। इसके अलावा आसपास में साफ सफाई व छिड़काव के माकूल इंतजाम की व्यवस्था के लिए ग्राम प्रधान को निर्देशित किया। इस बावत जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ अभिषेक मिश्रा ने बताया कि जेई को लेकर स्वास्थ्य महकमा पूरे तरह अलर्ट पर है। संक्रमित मरीज सामने आने के बाद से विभागीय कार्रवाई पूरी कर ली गई है। तीन दिन बाद रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग आगे की रणनीति तैयार करेगा।
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इंडिया न्यूज, वाराणसी।
Akhilesh Watching like Munri Lal : भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रदेश ज्वाइनिंग कमेटी के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं। वो देखते रहे इससे हमें कोई आपत्ति नही है। वाराणसी के रोहनिया स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से कहा कि 2022 में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।
आजम ने जमीन कब्जाया (Akhilesh Watching like Munri Lal)
वाजपेयी ने कहा कि अखिलेश अपनी जेब में अन्न की पोटली लेकर घूम रहे हैं। लेकिन जिस आजम खां ने किसानों की जमीन पर कब्जा किया उसी आजम खां को अपनी पार्टी सपा से टिकट देकर किसानों का कौन सा भला कर रहे हैं, ये समझ से परे है। उन्होंने कहा कि अन्य दलों में इस वक्त भगदड़ की स्थिति बनी हुई है। सपा-बसपा-कांग्रेस सहित छोटे बड़े दलों के लोग भाजपा की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।
अखिलेश-जयंत जोड़ी को नकार देगी जनता (Akhilesh Watching like Munri Lal)
भाजपा एक मात्र ऐसा दल है जिसमें अन्य दलों से शामिल होने वाले हर व्यक्ति के बैकग्राउंड की जांच के बाद ही उन्हें पार्टी में शामिल किया जा रहा है। जयंत चौधरी की रालोद और सपा के गठबंधन के सवाल पर कहा कि यूपी की जनता ने जब राहुल-अखिलेश, माया-अखिलेश की जोड़ी को नकार दिया तो जयंत-अखिलेश की जोड़ी को कैसे स्वीकार कर लेगी, यह सोचने वाली बात है।
(Akhilesh Watching like Munri Lal)
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इंडिया न्यूज, वाराणसी। Akhilesh Watching like Munri Lal : भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रदेश ज्वाइनिंग कमेटी के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं। वो देखते रहे इससे हमें कोई आपत्ति नही है। वाराणसी के रोहनिया स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से कहा कि दो हज़ार बाईस में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। आजम ने जमीन कब्जाया वाजपेयी ने कहा कि अखिलेश अपनी जेब में अन्न की पोटली लेकर घूम रहे हैं। लेकिन जिस आजम खां ने किसानों की जमीन पर कब्जा किया उसी आजम खां को अपनी पार्टी सपा से टिकट देकर किसानों का कौन सा भला कर रहे हैं, ये समझ से परे है। उन्होंने कहा कि अन्य दलों में इस वक्त भगदड़ की स्थिति बनी हुई है। सपा-बसपा-कांग्रेस सहित छोटे बड़े दलों के लोग भाजपा की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। अखिलेश-जयंत जोड़ी को नकार देगी जनता भाजपा एक मात्र ऐसा दल है जिसमें अन्य दलों से शामिल होने वाले हर व्यक्ति के बैकग्राउंड की जांच के बाद ही उन्हें पार्टी में शामिल किया जा रहा है। जयंत चौधरी की रालोद और सपा के गठबंधन के सवाल पर कहा कि यूपी की जनता ने जब राहुल-अखिलेश, माया-अखिलेश की जोड़ी को नकार दिया तो जयंत-अखिलेश की जोड़ी को कैसे स्वीकार कर लेगी, यह सोचने वाली बात है।
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सलमान खान और ऐश्वर्या राय की फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' को आखिर कोई कैसे भूल सकता है. डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की इस फिल्म को देशभर के दर्शकों ने पसंद किया था.
कैसे हुई थी फिल्म की शूटिंग?
सलमान और ऐश्वर्या की जोड़ी को तो इस फिल्म में पसंद किया ही गया था, साथ ही बाकी एक्टर्स की भी खूब तारीफ हुई थी. इस फिल्म में एक्ट्रेस स्मिता जयकर भी नजर आई थीं.
इस फिल्म में स्मिता ने ऐश्वर्या के किरदार नंदिनी की मां का किरदार निभाया था. अब उन्होंने बताया है कि भंसाली के साथ काम करने का उनका एक्सपीरियंस कैसा था और फिल्म की शूटिंग कैसे हुई थी.
स्मिता बताती हैं कि 'हम दिल दे चुके सनम' फिल्म के गाने 'ढील दे ढील दे दे भैया' की शूटिंग 10 दिनों में पूरी हुई थी. गाने में दिन का समय दिखाया गया था तो शाम 4 बजे के बाद इसकी शूटिंग नहीं होती थी.
वो बताती हैं कि एक बार शूटिंग के लिए वो मेकअप करके गई थीं, तब डायरेक्टर भंसाली ने उनके मेकअप आर्टिस्ट और हेयर स्टाइलिस्ट को बुलाकर उनके लुक की बारीकियों को ठीक करने के लिए कहा था.
स्मिता ने कहा, 'उन्होंने कहा कि मैडम की लिपस्टिक का कलर अलग है. उनके बाल पहले से ज्यादा फूले दिख रहे हैं. बल्श ज्यादा हो गया है. इसको फिक्स करो. ये देखकर हम सब चौंक गए थे कि जिन चीजों पर हमारा ध्यान नहीं गया उन्हें संजय जी ने पकड़ लिया. '
एक्ट्रेस बताती हैं कि भंसाली अपने सीन्स को इस तरह कोरियोग्राफ करते थे कि उसमें दिखने वाला एक्टर निखर कर सामने आता था. साथ ही सीन का असर दर्शकों पर गहरा होता था.
स्मिता ने ये भी बताया कि एक बार उनका चेहरा थका हुआ और सूजा होने की वजह से भंसाली ने उनका क्लोज अप लेने से मना कर दिया था. डायरेक्टर ने उन्हें आराम करने के लिए कहा था, जिससे वो काफी इमोशनल हो गई थीं.
'हम दिल दे चुके सनम' के साथ-साथ 'देवदास' में भी स्मिता जयकर ने भंसाली संग काम किया था. इसमें वो शाहरुख के किरदार देवदास की मां बनी थीं.
उन्होंने कहा कि संजय लीला भंसाली जितना ख्याल कोई डायरेक्टर अपने एक्टर का नहीं रखता है. इस बात के लिए वो भंसाली को बेहद पसंद करती हैं.
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सलमान खान और ऐश्वर्या राय की फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' को आखिर कोई कैसे भूल सकता है. डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की इस फिल्म को देशभर के दर्शकों ने पसंद किया था. कैसे हुई थी फिल्म की शूटिंग? सलमान और ऐश्वर्या की जोड़ी को तो इस फिल्म में पसंद किया ही गया था, साथ ही बाकी एक्टर्स की भी खूब तारीफ हुई थी. इस फिल्म में एक्ट्रेस स्मिता जयकर भी नजर आई थीं. इस फिल्म में स्मिता ने ऐश्वर्या के किरदार नंदिनी की मां का किरदार निभाया था. अब उन्होंने बताया है कि भंसाली के साथ काम करने का उनका एक्सपीरियंस कैसा था और फिल्म की शूटिंग कैसे हुई थी. स्मिता बताती हैं कि 'हम दिल दे चुके सनम' फिल्म के गाने 'ढील दे ढील दे दे भैया' की शूटिंग दस दिनों में पूरी हुई थी. गाने में दिन का समय दिखाया गया था तो शाम चार बजे के बाद इसकी शूटिंग नहीं होती थी. वो बताती हैं कि एक बार शूटिंग के लिए वो मेकअप करके गई थीं, तब डायरेक्टर भंसाली ने उनके मेकअप आर्टिस्ट और हेयर स्टाइलिस्ट को बुलाकर उनके लुक की बारीकियों को ठीक करने के लिए कहा था. स्मिता ने कहा, 'उन्होंने कहा कि मैडम की लिपस्टिक का कलर अलग है. उनके बाल पहले से ज्यादा फूले दिख रहे हैं. बल्श ज्यादा हो गया है. इसको फिक्स करो. ये देखकर हम सब चौंक गए थे कि जिन चीजों पर हमारा ध्यान नहीं गया उन्हें संजय जी ने पकड़ लिया. ' एक्ट्रेस बताती हैं कि भंसाली अपने सीन्स को इस तरह कोरियोग्राफ करते थे कि उसमें दिखने वाला एक्टर निखर कर सामने आता था. साथ ही सीन का असर दर्शकों पर गहरा होता था. स्मिता ने ये भी बताया कि एक बार उनका चेहरा थका हुआ और सूजा होने की वजह से भंसाली ने उनका क्लोज अप लेने से मना कर दिया था. डायरेक्टर ने उन्हें आराम करने के लिए कहा था, जिससे वो काफी इमोशनल हो गई थीं. 'हम दिल दे चुके सनम' के साथ-साथ 'देवदास' में भी स्मिता जयकर ने भंसाली संग काम किया था. इसमें वो शाहरुख के किरदार देवदास की मां बनी थीं. उन्होंने कहा कि संजय लीला भंसाली जितना ख्याल कोई डायरेक्टर अपने एक्टर का नहीं रखता है. इस बात के लिए वो भंसाली को बेहद पसंद करती हैं.
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दौसा जिले से गुजर रहे दिल्ली - मुंबई एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं 9 लोग घायल हो गए। हादसा बीती रात बेडा की ढाणी के पास ट्रक व कंटेनर की भिड़ंत से हुआ।
जिसमें भेड - बकरियों की भी मौत हो गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को दौसा जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद 9 लोगों को गंभीर हालत में जयपुर रेफर कर दिया गया। मृतक का शव जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है।
पुलिस ने बताया कि सरसों से भरा ट्रक दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस-वे के किनारे खड़ा था इसी दौरान पीछे से भेड़ - बकरियों से भरे एक कंटेनर ने तेज रफ्तार में वहां पहले से खड़े ट्रक में टक्कर मार दी। जिसके चलते कंटेनर में सवार एक जने की मौके पर ही मौत हो गई।
कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शव को क्षतिग्रस्त वाहन से बाहर निकाला गया।
पुलिस ने बताया कि हादसे में भरतपुर जिले के पापड़ा निवासी शाहबुद्दीन (35) की मौत हो गई। वहीं पहाड़ी निवासी हसीन, कामिल, सलाउद्दीन, जुनैद, राशिद, अरशद, साकिर, जाकिर, अकल व नवाब घायल हो गए, साथ ही कंटेनर में भरी भेड़-बकरियों में से 60 भेड़ - बकरियों की भी मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है।
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दौसा जिले से गुजर रहे दिल्ली - मुंबई एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं नौ लोग घायल हो गए। हादसा बीती रात बेडा की ढाणी के पास ट्रक व कंटेनर की भिड़ंत से हुआ। जिसमें भेड - बकरियों की भी मौत हो गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को दौसा जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद नौ लोगों को गंभीर हालत में जयपुर रेफर कर दिया गया। मृतक का शव जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है। पुलिस ने बताया कि सरसों से भरा ट्रक दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस-वे के किनारे खड़ा था इसी दौरान पीछे से भेड़ - बकरियों से भरे एक कंटेनर ने तेज रफ्तार में वहां पहले से खड़े ट्रक में टक्कर मार दी। जिसके चलते कंटेनर में सवार एक जने की मौके पर ही मौत हो गई। कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शव को क्षतिग्रस्त वाहन से बाहर निकाला गया। पुलिस ने बताया कि हादसे में भरतपुर जिले के पापड़ा निवासी शाहबुद्दीन की मौत हो गई। वहीं पहाड़ी निवासी हसीन, कामिल, सलाउद्दीन, जुनैद, राशिद, अरशद, साकिर, जाकिर, अकल व नवाब घायल हो गए, साथ ही कंटेनर में भरी भेड़-बकरियों में से साठ भेड़ - बकरियों की भी मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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MP Railway:- एमपी के इन जिलों में बिछाई जाएगी नई रेलवे लाइन, 3 घंटे का सफर होगा तब डेढ़ घंटे में आपको बता दे की एमपी में साल 2024 तक एक नई रेल लाइन शुरू होने जा रही है। इस रेल लाइन का कार्य चालू हो चूका है। इसके शुरू होने से मध्यप्रदेश से राजस्थान सफर करने वाले लोगों का समय तो बचेगा ही, किराया भी कम लगेगा। भोपाल-रामगंजमंडी रेल लाइन प्रदेश की राजधानी भोपाल, राजगढ़ में श्यामपुर, दोराहा, ब्यावरा, नरसिंहगढ़, कुरावर, मुबारकगंज, निशातपुरा से होते हुए गुजरेगी।
आज के समय में यदि ब्यावरा से लोगों को भोपाल जाना है तो लोग बस से जाते है। जिसमें दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है। बस से करीब 3 से साढ़े तीन घंटे का समय लग जाता है। नई रेल लाइन शुरू होने के बाद यह समय घट कर 1. 5 घंटे हो जाएगा। साथ ही यह रेल लाइन राजगढ़ से खिलचीपुर होते हुए भोजपुर, घाटोली, इकलेरा, जूना खेड़ा, झालरापाटन से रामगंजमंडी जाएगी और यही वजह है कि इस रेल लाइन से राजस्थान के लोगों को काफी लाभ होगा।
नई रेल का किराया भी काफी कम होगा इसका किराया महज 70 से 80 रुपये हो सकता है। मध्य प्रदेश से राजस्थान जाने में कम समय लगेगा साथ ही रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को सुविधा हो जाएगी। यात्रा आरामदायक हो सकेगी और किराया कम लगेगा। लोकल उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकारी कार्यों से भोपाल जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत। राजगढ़ का भोपाल से सीधे कनेक्शन हो जाएगा और सुविधाएं बढ़ेंगी।
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MP Railway:- एमपी के इन जिलों में बिछाई जाएगी नई रेलवे लाइन, तीन घंटाटे का सफर होगा तब डेढ़ घंटे में आपको बता दे की एमपी में साल दो हज़ार चौबीस तक एक नई रेल लाइन शुरू होने जा रही है। इस रेल लाइन का कार्य चालू हो चूका है। इसके शुरू होने से मध्यप्रदेश से राजस्थान सफर करने वाले लोगों का समय तो बचेगा ही, किराया भी कम लगेगा। भोपाल-रामगंजमंडी रेल लाइन प्रदेश की राजधानी भोपाल, राजगढ़ में श्यामपुर, दोराहा, ब्यावरा, नरसिंहगढ़, कुरावर, मुबारकगंज, निशातपुरा से होते हुए गुजरेगी। आज के समय में यदि ब्यावरा से लोगों को भोपाल जाना है तो लोग बस से जाते है। जिसमें दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है। बस से करीब तीन से साढ़े तीन घंटे का समय लग जाता है। नई रेल लाइन शुरू होने के बाद यह समय घट कर एक. पाँच घंटाटे हो जाएगा। साथ ही यह रेल लाइन राजगढ़ से खिलचीपुर होते हुए भोजपुर, घाटोली, इकलेरा, जूना खेड़ा, झालरापाटन से रामगंजमंडी जाएगी और यही वजह है कि इस रेल लाइन से राजस्थान के लोगों को काफी लाभ होगा। नई रेल का किराया भी काफी कम होगा इसका किराया महज सत्तर से अस्सी रुपयापये हो सकता है। मध्य प्रदेश से राजस्थान जाने में कम समय लगेगा साथ ही रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को सुविधा हो जाएगी। यात्रा आरामदायक हो सकेगी और किराया कम लगेगा। लोकल उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकारी कार्यों से भोपाल जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत। राजगढ़ का भोपाल से सीधे कनेक्शन हो जाएगा और सुविधाएं बढ़ेंगी।
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भोपाल। नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट इन आर्किटेक्चर 2016 (नाटा) के लिए रजिस्ट्रेशन 18 अगस्त तक चलेगा। इस बार रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन है। आवेदन के लिए स्टूडेंट्स को 1250 रुपए फीस जमा करना होगी। आवेदन www. nata. in की वेबसाइट से किए जा सकते हैं।
इस TEST को पास करने के बाद IIT, NIT, सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूट और डीम्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलता है। जिन स्टूडेंट्स की डिजाइनिंग, स्केचिंग और पेंटिंग जैसी विधा में रुचि है, वे इस फील्ड में करियर बना सकते हैं। इसके अलावा स्टूडेंट्स टेस्ट की प्रैक्टिस के लिए पिछले सालों के पेपर्स देख सकते हैं। वेबसाइट से इसका इंफॉर्मेशन ब्रोशर डाउनलोड किया जा सकता है।
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भोपाल। नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट इन आर्किटेक्चर दो हज़ार सोलह के लिए रजिस्ट्रेशन अट्ठारह अगस्त तक चलेगा। इस बार रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन है। आवेदन के लिए स्टूडेंट्स को एक हज़ार दो सौ पचास रुपयापए फीस जमा करना होगी। आवेदन www. nata. in की वेबसाइट से किए जा सकते हैं। इस TEST को पास करने के बाद IIT, NIT, सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूट और डीम्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलता है। जिन स्टूडेंट्स की डिजाइनिंग, स्केचिंग और पेंटिंग जैसी विधा में रुचि है, वे इस फील्ड में करियर बना सकते हैं। इसके अलावा स्टूडेंट्स टेस्ट की प्रैक्टिस के लिए पिछले सालों के पेपर्स देख सकते हैं। वेबसाइट से इसका इंफॉर्मेशन ब्रोशर डाउनलोड किया जा सकता है।
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हाल ही में, पारिस्थितिक रूप से साफ घरों के निर्माण की प्रवृत्ति अधिक लोकप्रिय हो रही है। यदि आप फैशन के रुझानों का भी पालन करना चाहते हैं, तो छत वाली छत आपके घर का पूरक हो सकती है।
कुछ साल पहले यह आश्चर्यजनक होगाअभिजात वर्ग की इमारतों पर भूसे की छत देखने के लिए, लेकिन आज यह अब दुर्लभता नहीं है। कई उपभोक्ताओं की इस तरह की पसंद पर्यावरणीय मित्रता, उत्कृष्ट थर्मल इन्सुलेशन और सामग्री की आसानी के कारण है। छत वाली छत वाले घरों में, एक आरामदायक वातावरण हमेशा बनाए रखा जाता है और धूल जमा नहीं होता है। सामग्री गर्मी अच्छी तरह से बनाए रखने में सक्षम है और आधुनिक छत से भी बदतर नहीं है।
इस तथ्य के बावजूद कि छत की छत हैकाफी प्रभावशाली मोटाई, जो 30 सेंटीमीटर तक पहुंचती है, इसका वजन थोड़ा सा होता है। वर्ग मीटर केवल 40 किलोग्राम है। काम पूरा होने के बाद, अंडर-छत की जगह को मौसम संबंधी स्थितियों से विश्वसनीय रूप से संरक्षित किया जाता है। संरचना की नमी प्रतिरोध को बढ़ाने के लिए, सामग्री बिछाने से पहले पानी-प्रतिरोधी रचनाओं के साथ प्रजनन की जाती है। मास्टर्स को हाइड्रो- और वाष्प-इन्सुलेटिंग परतों को लैस करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि स्ट्रॉ उत्कृष्ट हाइग्रोस्कोपिक गुणों द्वारा विशेषता है।
एक घर बनाने शुरू करने से पहले औरछत की छत लगाने, आपको इसकी विशेषताओं के बारे में अधिक जानने की जरूरत है। सकारात्मक में, सस्तीता को ध्यान में रखा जा सकता है, जो उपभोक्ताओं के बीच इतनी लोकप्रिय बनाती है। छत की एक महत्वपूर्ण ढलान के कारण, जो 50 डिग्री है, पानी और अन्य प्राकृतिक वर्षा सतह पर नहीं रहती है। इसमें उनके प्रवेश को शामिल नहीं किया गया है। इस तरह के कोटिंग्स का जीवन काफी लंबा है, छत का उपयोग 30 साल और उससे अधिक तक किया जा सकता है, और इसे मरम्मत की आवश्यकता नहीं होगी।
छिद्रित छत के बीच कुछ नुकसान हैंउन्हें आग के खतरे पर ध्यान देना चाहिए। आकस्मिक इग्निशन की संभावना से बचने के लिए, सामग्री को बिछाने से पहले लौ retardants के साथ इलाज किया जाता है। वे स्वामी जो पहले से ही स्थापना कार्यों में लगे थे, जहां वर्णित सामग्री शामिल थी, उच्च श्रम इनपुट नोट करें। अन्य चीजों के अलावा, यदि आप समय-समय पर छत के आकार और रंग को बदलने के आदी हैं, तो स्ट्रॉ सबसे अच्छा विकल्प नहीं होगा।
उपयोगकर्ताओं के अनुसार, फूस की छतमूल रूप से राई के भूसे से बना है। आज आप जंगली-उगने वाली घास से बने डिजाइनों को पा सकते हैं, जैसे कि, fescue, कैम्प फायर, टिमोथी, रीड घास, लेफ्टफेल और इसी तरह। नरकट से बनी छतें काफी आम हैं, जो उपभोक्ताओं के अनुसार, उपजी लंबाई और उनके लचीलेपन के कारण अक्सर उपयोग की जाती हैं।
घर के कारीगरों को यह याद रखने की सलाह दी जाती हैस्थापना कार्य की जटिलता स्वतंत्र रूप से फसल सामग्री की आवश्यकता के पूरक होगी। इसके लिए, पौधों को एक सिकल के साथ काटा जाता है, और यदि उपकरण नहीं मिला है, तो आप काफी तेज चाकू का उपयोग कर सकते हैं। कैनवास को आवश्यक मोड़ देने के लिए, इसे एक चक्की के साथ संसाधित किया जाना चाहिए। कुछ अच्छी तरह से ब्लेड को हराते हैं, जो आपको स्टेम को काटने में मदद करने के लिए notches प्राप्त करने की अनुमति देता है। यदि आप एक फूस की छत के नीचे एक घर बनाना चाहते हैं, तो गर्मी के बीच में शुष्क मौसम में छत के लिए सामग्री तैयार की जानी चाहिए। जब ईख का उपयोग करने की योजना बनाई जाती है, तो इसके साथ घास का मैदान अनाज तैयार करना संभव है, जिसका उपयोग सहायक छत सामग्री के रूप में किया जा सकता है।
थीचड रूफ हट पर लगाया जा सकता हैकई योजनाओं, उनमें से एक में तार प्रौद्योगिकी का उपयोग शामिल है। दूसरे में शिकंजा का अतिरिक्त उपयोग शामिल है। नाखून या बैनर के उपयोग के साथ निम्नलिखित तकनीकें हैं। पहले मामले में, एक विशेष सुई का उपयोग किया जाना चाहिए जिसमें तार पारित किया जाता है। यदि शेवर एक छत और छत के रूप में कार्य करता है, तो एक दूसरे व्यक्ति की मदद से जोड़तोड़ किया जाना चाहिए। एक मास्टर अंदर से सुई का मार्गदर्शन करेगा, जबकि दूसरा बाहर से फर्मवेयर में व्यस्त हो जाएगा। यदि भवन में छत है, तो विधि अधिक श्रमसाध्य हो सकती है। अंदर से छत तक पहुंच को बाहर रखा जाएगा, इसलिए आप एक गोल प्रकार की सुई का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें विशेष छल्ले हैं। अंतिम और निश्चित तार तक।
इससे पहले कि आप एक फूस की छत बनाते हैं, आपको चाहिएतय करें कि कौन सी स्टैकिंग योजना का उपयोग किया जाएगा। इसमें वायर स्क्रू का उपयोग शामिल हो सकता है। यह तकनीक न केवल सरल है, बल्कि तेज भी है। शिकंजा का उपयोग करके शीथिंग या बीम को शीश तय किया जाना चाहिए। इस मामले में, छत के नीचे स्ट्रैपिंग का निपटान किया जा सकता है, क्योंकि इसकी आवश्यकता नहीं होगी। पहले से तार को शिकंजा से जुड़ा होना चाहिए, जो सामग्री की वांछित लंबाई प्रदान करेगा। यदि आप दूसरे मास्टर की मदद का उपयोग करने में असमर्थ हैं, तो आपको ऐसी विधि चुननी चाहिए, क्योंकि बन्धन अकेले किया जा सकता है।
थीचड-छत कॉटेज अक्सर पर्याप्त होते हैंनाखूनों के साथ छत में सिले। इस पद्धति का उपयोग उन प्रणालियों पर विशेष रूप से किया जा सकता है जो एक ठोस टोकरा से लैस हैं। इसे फास्टनरों के अतिरिक्त वजन का सामना करना होगा, इसलिए इसके लिए आवश्यकताएं विशेष रूप से कठोर हैं। तीन प्रकार के नाखूनों को काम के लिए तैयार किया जाना चाहिए, पहले एक की लंबाई 300 मिलीमीटर होनी चाहिए, इसका उपयोग छत के बीच से शीशों को ठीक करने के लिए किया जाना चाहिए। दूसरे प्रकार के नाखूनों की लंबाई 250 मिलीमीटर है और यह मध्य से जुड़ा हुआ है। तीसरा प्रकार सबसे छोटा है, इसकी लंबाई 200 मिलीमीटर है, इन फास्टनरों का उपयोग बाज के लिए किया जाना चाहिए।
नाखूनों का चयन किया जाता है ताकि आकारयह सभी आकारों के लिए समान था, तत्व के एक छोर को इंगित किया जाना चाहिए, जबकि दूसरे छोर को हुक के रूप में होना चाहिए। छत की सजावट के रूप में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली योजना फर्मवेयर बैनर है। तार, लकड़ी या बांस के डंठल के छोटे टुकड़ों के माध्यम से इन कार्यों को पूरा करना आवश्यक है।
जब पुआल की छत बसी हैहाथ, काम को शीव की तैयारी के साथ शुरू करना चाहिए। वे पुआल से बने हार्नेस का उपयोग करके बुना हुआ हैं, जिन्हें "सिवास्लो" कहा जाता है। ये तत्व तैयार सामग्री को बैंडेज कर रहे हैं। कोटिंग के लिए सौंदर्यवादी और साफ-सुथरा होने के लिए, शीशों का आकार समान होना चाहिए। वे मुट्ठी भर द्वारा मापा जाता है, घर की छत के लिए लगभग 8 मेहमानों की आवश्यकता होगी। यदि गज़ेबो या पोर्च ओवरलैप होता है, तो संख्या 2 गुना कम होनी चाहिए। भूसे के तैयार और अच्छी तरह से मापा बंडलों को एक सपाट सतह पर बिछाया जाना चाहिए, और फिर एक गीला कॉर्ड के साथ बांधा जाना चाहिए। स्थापना कार्य को शांत मौसम में शुरू करने की सिफारिश की जाती है। कार्य को सरल बनाने के लिए, सामग्री को पानी से छिड़का जा सकता है। पहली पंक्ति से बिछाने शुरू करना आवश्यक है, एकल शीशियों को इसमें ढेर किया जाता है, लेकिन तत्वों को एक दूसरे से दो में जोड़ा जा सकता है। वे घनत्व और ताकत में भिन्न होंगे। छत पर फिट काफी मजबूत और सौंदर्यवादी है।
इस तरह से आर्बर ओवरलैप भी कर सकता हैएक ही समय में पुआल की छत को एक ही टिकाऊ और जलरोधी मिलता है। इससे पहले कि आप छत पर सामग्री को माउंट करें, यह तैयार है। ऐसा करने के लिए, प्रत्येक शेफ को एक ठोस नींव पर रखा जाना चाहिए ताकि बट का हिस्सा किनारे से बाहर निकल जाए। अगला, सामग्री को एक प्लेट का उपयोग करके कंघी किया जाना चाहिए जिसमें नाखून भरा हुआ हो। शीफ से इन जोड़तोड़ की प्रक्रिया में टूटे हुए तिनके और विभिन्न शाखाओं, साथ ही साथ अन्य मलबे को हटाने में सक्षम हो जाएगा। एक विशेष स्पैटुला का उपयोग करते हुए, किनारे को छोरों पर टैप किया जाना चाहिए और समतल किया जाना चाहिए। इसके बाद ही इसे छत तक उठाया जा सकता है।
अनुभवी बिल्डर ऐसे कवर करने का दावा करते हैंछत, बाहर की मदद का उपयोग नहीं, काम नहीं करेगा। एक मास्टर को नीचे से शीशों को खिलाना चाहिए, और बाकी उन्हें छत पर ठीक करना चाहिए। सामग्री को यथासंभव कसकर रखा जाना चाहिए, जिस पंक्ति पर बाकी उन्मुख होगा वह बहुत ही समान होना चाहिए। त्रुटियों को खत्म करने के लिए, आप छत को चिह्नित कर सकते हैं या रस्सी को खींच सकते हैं। छत पर बिछाने के लिए आवश्यक शीशों की संख्या आसानी से गणना की जा सकती है। ऐसा करने के लिए, जमीन पर एक मीटर मापा जाता है, उस पर शीशम बिछाए जाते हैं, जिससे यह गणना करना संभव होगा कि कितने तत्व बाहर निकले। आपके द्वारा छत की लंबाई को मापने के बाद, आप सही मात्रा में सामग्री निर्धारित कर सकते हैं।
बाद की सभी पंक्तियों में रखी जानी चाहिएअछूता गुच्छा जो कि slats-prutygami द्वारा दबाया जाता है। उन्हें आधार तक ठीक करने के लिए, आप रस्सियों या विलो छड़ का उपयोग कर सकते हैं। कुछ मामलों में, नरम एल्यूमीनियम तार का उपयोग किया जाता है। ईख की परत के नीचे प्रणाली को एक विशेष शक्ति और विश्वसनीयता देने के लिए मैदानी अनाज रखा जा सकता है।
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हाल ही में, पारिस्थितिक रूप से साफ घरों के निर्माण की प्रवृत्ति अधिक लोकप्रिय हो रही है। यदि आप फैशन के रुझानों का भी पालन करना चाहते हैं, तो छत वाली छत आपके घर का पूरक हो सकती है। कुछ साल पहले यह आश्चर्यजनक होगाअभिजात वर्ग की इमारतों पर भूसे की छत देखने के लिए, लेकिन आज यह अब दुर्लभता नहीं है। कई उपभोक्ताओं की इस तरह की पसंद पर्यावरणीय मित्रता, उत्कृष्ट थर्मल इन्सुलेशन और सामग्री की आसानी के कारण है। छत वाली छत वाले घरों में, एक आरामदायक वातावरण हमेशा बनाए रखा जाता है और धूल जमा नहीं होता है। सामग्री गर्मी अच्छी तरह से बनाए रखने में सक्षम है और आधुनिक छत से भी बदतर नहीं है। इस तथ्य के बावजूद कि छत की छत हैकाफी प्रभावशाली मोटाई, जो तीस सेंटीमीटर तक पहुंचती है, इसका वजन थोड़ा सा होता है। वर्ग मीटर केवल चालीस किलोग्रामग्राम है। काम पूरा होने के बाद, अंडर-छत की जगह को मौसम संबंधी स्थितियों से विश्वसनीय रूप से संरक्षित किया जाता है। संरचना की नमी प्रतिरोध को बढ़ाने के लिए, सामग्री बिछाने से पहले पानी-प्रतिरोधी रचनाओं के साथ प्रजनन की जाती है। मास्टर्स को हाइड्रो- और वाष्प-इन्सुलेटिंग परतों को लैस करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि स्ट्रॉ उत्कृष्ट हाइग्रोस्कोपिक गुणों द्वारा विशेषता है। एक घर बनाने शुरू करने से पहले औरछत की छत लगाने, आपको इसकी विशेषताओं के बारे में अधिक जानने की जरूरत है। सकारात्मक में, सस्तीता को ध्यान में रखा जा सकता है, जो उपभोक्ताओं के बीच इतनी लोकप्रिय बनाती है। छत की एक महत्वपूर्ण ढलान के कारण, जो पचास डिग्री है, पानी और अन्य प्राकृतिक वर्षा सतह पर नहीं रहती है। इसमें उनके प्रवेश को शामिल नहीं किया गया है। इस तरह के कोटिंग्स का जीवन काफी लंबा है, छत का उपयोग तीस साल और उससे अधिक तक किया जा सकता है, और इसे मरम्मत की आवश्यकता नहीं होगी। छिद्रित छत के बीच कुछ नुकसान हैंउन्हें आग के खतरे पर ध्यान देना चाहिए। आकस्मिक इग्निशन की संभावना से बचने के लिए, सामग्री को बिछाने से पहले लौ retardants के साथ इलाज किया जाता है। वे स्वामी जो पहले से ही स्थापना कार्यों में लगे थे, जहां वर्णित सामग्री शामिल थी, उच्च श्रम इनपुट नोट करें। अन्य चीजों के अलावा, यदि आप समय-समय पर छत के आकार और रंग को बदलने के आदी हैं, तो स्ट्रॉ सबसे अच्छा विकल्प नहीं होगा। उपयोगकर्ताओं के अनुसार, फूस की छतमूल रूप से राई के भूसे से बना है। आज आप जंगली-उगने वाली घास से बने डिजाइनों को पा सकते हैं, जैसे कि, fescue, कैम्प फायर, टिमोथी, रीड घास, लेफ्टफेल और इसी तरह। नरकट से बनी छतें काफी आम हैं, जो उपभोक्ताओं के अनुसार, उपजी लंबाई और उनके लचीलेपन के कारण अक्सर उपयोग की जाती हैं। घर के कारीगरों को यह याद रखने की सलाह दी जाती हैस्थापना कार्य की जटिलता स्वतंत्र रूप से फसल सामग्री की आवश्यकता के पूरक होगी। इसके लिए, पौधों को एक सिकल के साथ काटा जाता है, और यदि उपकरण नहीं मिला है, तो आप काफी तेज चाकू का उपयोग कर सकते हैं। कैनवास को आवश्यक मोड़ देने के लिए, इसे एक चक्की के साथ संसाधित किया जाना चाहिए। कुछ अच्छी तरह से ब्लेड को हराते हैं, जो आपको स्टेम को काटने में मदद करने के लिए notches प्राप्त करने की अनुमति देता है। यदि आप एक फूस की छत के नीचे एक घर बनाना चाहते हैं, तो गर्मी के बीच में शुष्क मौसम में छत के लिए सामग्री तैयार की जानी चाहिए। जब ईख का उपयोग करने की योजना बनाई जाती है, तो इसके साथ घास का मैदान अनाज तैयार करना संभव है, जिसका उपयोग सहायक छत सामग्री के रूप में किया जा सकता है। थीचड रूफ हट पर लगाया जा सकता हैकई योजनाओं, उनमें से एक में तार प्रौद्योगिकी का उपयोग शामिल है। दूसरे में शिकंजा का अतिरिक्त उपयोग शामिल है। नाखून या बैनर के उपयोग के साथ निम्नलिखित तकनीकें हैं। पहले मामले में, एक विशेष सुई का उपयोग किया जाना चाहिए जिसमें तार पारित किया जाता है। यदि शेवर एक छत और छत के रूप में कार्य करता है, तो एक दूसरे व्यक्ति की मदद से जोड़तोड़ किया जाना चाहिए। एक मास्टर अंदर से सुई का मार्गदर्शन करेगा, जबकि दूसरा बाहर से फर्मवेयर में व्यस्त हो जाएगा। यदि भवन में छत है, तो विधि अधिक श्रमसाध्य हो सकती है। अंदर से छत तक पहुंच को बाहर रखा जाएगा, इसलिए आप एक गोल प्रकार की सुई का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें विशेष छल्ले हैं। अंतिम और निश्चित तार तक। इससे पहले कि आप एक फूस की छत बनाते हैं, आपको चाहिएतय करें कि कौन सी स्टैकिंग योजना का उपयोग किया जाएगा। इसमें वायर स्क्रू का उपयोग शामिल हो सकता है। यह तकनीक न केवल सरल है, बल्कि तेज भी है। शिकंजा का उपयोग करके शीथिंग या बीम को शीश तय किया जाना चाहिए। इस मामले में, छत के नीचे स्ट्रैपिंग का निपटान किया जा सकता है, क्योंकि इसकी आवश्यकता नहीं होगी। पहले से तार को शिकंजा से जुड़ा होना चाहिए, जो सामग्री की वांछित लंबाई प्रदान करेगा। यदि आप दूसरे मास्टर की मदद का उपयोग करने में असमर्थ हैं, तो आपको ऐसी विधि चुननी चाहिए, क्योंकि बन्धन अकेले किया जा सकता है। थीचड-छत कॉटेज अक्सर पर्याप्त होते हैंनाखूनों के साथ छत में सिले। इस पद्धति का उपयोग उन प्रणालियों पर विशेष रूप से किया जा सकता है जो एक ठोस टोकरा से लैस हैं। इसे फास्टनरों के अतिरिक्त वजन का सामना करना होगा, इसलिए इसके लिए आवश्यकताएं विशेष रूप से कठोर हैं। तीन प्रकार के नाखूनों को काम के लिए तैयार किया जाना चाहिए, पहले एक की लंबाई तीन सौ मिलीमीटर होनी चाहिए, इसका उपयोग छत के बीच से शीशों को ठीक करने के लिए किया जाना चाहिए। दूसरे प्रकार के नाखूनों की लंबाई दो सौ पचास मिलीमीटर है और यह मध्य से जुड़ा हुआ है। तीसरा प्रकार सबसे छोटा है, इसकी लंबाई दो सौ मिलीमीटर है, इन फास्टनरों का उपयोग बाज के लिए किया जाना चाहिए। नाखूनों का चयन किया जाता है ताकि आकारयह सभी आकारों के लिए समान था, तत्व के एक छोर को इंगित किया जाना चाहिए, जबकि दूसरे छोर को हुक के रूप में होना चाहिए। छत की सजावट के रूप में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली योजना फर्मवेयर बैनर है। तार, लकड़ी या बांस के डंठल के छोटे टुकड़ों के माध्यम से इन कार्यों को पूरा करना आवश्यक है। जब पुआल की छत बसी हैहाथ, काम को शीव की तैयारी के साथ शुरू करना चाहिए। वे पुआल से बने हार्नेस का उपयोग करके बुना हुआ हैं, जिन्हें "सिवास्लो" कहा जाता है। ये तत्व तैयार सामग्री को बैंडेज कर रहे हैं। कोटिंग के लिए सौंदर्यवादी और साफ-सुथरा होने के लिए, शीशों का आकार समान होना चाहिए। वे मुट्ठी भर द्वारा मापा जाता है, घर की छत के लिए लगभग आठ मेहमानों की आवश्यकता होगी। यदि गज़ेबो या पोर्च ओवरलैप होता है, तो संख्या दो गुना कम होनी चाहिए। भूसे के तैयार और अच्छी तरह से मापा बंडलों को एक सपाट सतह पर बिछाया जाना चाहिए, और फिर एक गीला कॉर्ड के साथ बांधा जाना चाहिए। स्थापना कार्य को शांत मौसम में शुरू करने की सिफारिश की जाती है। कार्य को सरल बनाने के लिए, सामग्री को पानी से छिड़का जा सकता है। पहली पंक्ति से बिछाने शुरू करना आवश्यक है, एकल शीशियों को इसमें ढेर किया जाता है, लेकिन तत्वों को एक दूसरे से दो में जोड़ा जा सकता है। वे घनत्व और ताकत में भिन्न होंगे। छत पर फिट काफी मजबूत और सौंदर्यवादी है। इस तरह से आर्बर ओवरलैप भी कर सकता हैएक ही समय में पुआल की छत को एक ही टिकाऊ और जलरोधी मिलता है। इससे पहले कि आप छत पर सामग्री को माउंट करें, यह तैयार है। ऐसा करने के लिए, प्रत्येक शेफ को एक ठोस नींव पर रखा जाना चाहिए ताकि बट का हिस्सा किनारे से बाहर निकल जाए। अगला, सामग्री को एक प्लेट का उपयोग करके कंघी किया जाना चाहिए जिसमें नाखून भरा हुआ हो। शीफ से इन जोड़तोड़ की प्रक्रिया में टूटे हुए तिनके और विभिन्न शाखाओं, साथ ही साथ अन्य मलबे को हटाने में सक्षम हो जाएगा। एक विशेष स्पैटुला का उपयोग करते हुए, किनारे को छोरों पर टैप किया जाना चाहिए और समतल किया जाना चाहिए। इसके बाद ही इसे छत तक उठाया जा सकता है। अनुभवी बिल्डर ऐसे कवर करने का दावा करते हैंछत, बाहर की मदद का उपयोग नहीं, काम नहीं करेगा। एक मास्टर को नीचे से शीशों को खिलाना चाहिए, और बाकी उन्हें छत पर ठीक करना चाहिए। सामग्री को यथासंभव कसकर रखा जाना चाहिए, जिस पंक्ति पर बाकी उन्मुख होगा वह बहुत ही समान होना चाहिए। त्रुटियों को खत्म करने के लिए, आप छत को चिह्नित कर सकते हैं या रस्सी को खींच सकते हैं। छत पर बिछाने के लिए आवश्यक शीशों की संख्या आसानी से गणना की जा सकती है। ऐसा करने के लिए, जमीन पर एक मीटर मापा जाता है, उस पर शीशम बिछाए जाते हैं, जिससे यह गणना करना संभव होगा कि कितने तत्व बाहर निकले। आपके द्वारा छत की लंबाई को मापने के बाद, आप सही मात्रा में सामग्री निर्धारित कर सकते हैं। बाद की सभी पंक्तियों में रखी जानी चाहिएअछूता गुच्छा जो कि slats-prutygami द्वारा दबाया जाता है। उन्हें आधार तक ठीक करने के लिए, आप रस्सियों या विलो छड़ का उपयोग कर सकते हैं। कुछ मामलों में, नरम एल्यूमीनियम तार का उपयोग किया जाता है। ईख की परत के नीचे प्रणाली को एक विशेष शक्ति और विश्वसनीयता देने के लिए मैदानी अनाज रखा जा सकता है।
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गुरुद्वारा व चर्च को मिले अनुदान को लेकर अमृतसर के एक गांव में सिख व ईसाईयों में विवाद हो गया है। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में ईंट-पत्थर चल गए। हालांकि किसी के घायल होने का समाचार नहीं है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात पर काबू पाया। दूसरी तरफ निहंग संगठन भी गांव पहुंच रहे हैं, जिसके चलते गांव में तनाव का महौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार अमृतसर के अजनाला में गांव शेख पट्टी में यह विवाद शुरू हुआ। गांव की सरपंच सर्बजीत कौर के पास दो लाख रुपए का अनुदान आया था। सरपंच ने 1 लाख रुपए गुरुद्वारा शहीद जीवन सिंह साहिब और 1 लाख रुपए गिरजाघर को दे दिए। सिखों का कहना है कि ईसार्ईयों ने पूरे दो लाख रुपए गिरजाघर को देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
बताया जाता है कि इस बात को लेकर बीते दिनों ईसाई लोगों ने गांव को घेर लिया और गुरुघर पर ईंटें बरसाना शुरू कर दिया। ईंटें दोनों पक्षों के बीच चली। सरपंच व गुरुद्वारा साहिब के पाठी ने जब ऐसा करने से रोका तो दोनों के साथ मारपीट भी शुरू कर दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों पर मामला दर्ज कर दिया।
घटना के बाद गांव में निहंग जत्थेबंदियां पहुंच गई हैं। निहंग सिखों द्वारा गांव में डेरा डाले जाने के बाद तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। फिलहाल पुलिस ने मौके पर पहुंच दोनों पक्षों को शांत रहने के लिए कहा है। अतिरिक्त सुरक्षा बल लगाया गया है, ताकि स्थिति पर काबू पाया जा सके।
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गुरुद्वारा व चर्च को मिले अनुदान को लेकर अमृतसर के एक गांव में सिख व ईसाईयों में विवाद हो गया है। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में ईंट-पत्थर चल गए। हालांकि किसी के घायल होने का समाचार नहीं है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात पर काबू पाया। दूसरी तरफ निहंग संगठन भी गांव पहुंच रहे हैं, जिसके चलते गांव में तनाव का महौल बना हुआ है। जानकारी के अनुसार अमृतसर के अजनाला में गांव शेख पट्टी में यह विवाद शुरू हुआ। गांव की सरपंच सर्बजीत कौर के पास दो लाख रुपए का अनुदान आया था। सरपंच ने एक लाख रुपए गुरुद्वारा शहीद जीवन सिंह साहिब और एक लाख रुपए गिरजाघर को दे दिए। सिखों का कहना है कि ईसार्ईयों ने पूरे दो लाख रुपए गिरजाघर को देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि इस बात को लेकर बीते दिनों ईसाई लोगों ने गांव को घेर लिया और गुरुघर पर ईंटें बरसाना शुरू कर दिया। ईंटें दोनों पक्षों के बीच चली। सरपंच व गुरुद्वारा साहिब के पाठी ने जब ऐसा करने से रोका तो दोनों के साथ मारपीट भी शुरू कर दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों पर मामला दर्ज कर दिया। घटना के बाद गांव में निहंग जत्थेबंदियां पहुंच गई हैं। निहंग सिखों द्वारा गांव में डेरा डाले जाने के बाद तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। फिलहाल पुलिस ने मौके पर पहुंच दोनों पक्षों को शांत रहने के लिए कहा है। अतिरिक्त सुरक्षा बल लगाया गया है, ताकि स्थिति पर काबू पाया जा सके।
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बिलासपुर (निप्र)। पुराना बसस्टैंड से कार मालिक को अगुवा कर हत्या करने के मामले की जांच में जुटी पुलिस पूरे दिन केंवची के जंगलों में लाश की तलाश करते रहे। इस दौरान सर्चिंग टीम को कार मालिक के बजाए भालू, सियार व भैंस की ला. . . chhattisgarhThu, 20 Feb 2014 12:13 AM (IST)
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बिलासपुर । पुराना बसस्टैंड से कार मालिक को अगुवा कर हत्या करने के मामले की जांच में जुटी पुलिस पूरे दिन केंवची के जंगलों में लाश की तलाश करते रहे। इस दौरान सर्चिंग टीम को कार मालिक के बजाए भालू, सियार व भैंस की ला. . . chhattisgarhThu, बीस फ़रवरी दो हज़ार चौदह बारह:तेरह AM
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पालमपुर - चिकित्सा के क्षेत्र में महारत हासिल कर चुके विवेकानंद ट्रस्ट के कायाकल्प संस्थान में रविवार को एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर पद्म श्री विजेता निदेशक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने बतौर मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत की, जबकि स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार की अध्यक्षता में यह समारोह आयोजित किया गया। समारोह में विवेकानंद ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं सांसद शांता कुमार कायाकल्प संस्थान को आगे बढ़ाने के लिए नई रिसर्च किए जाने का हवाला दिया है । उन्होंने बताया कि कायाकल्प को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है । शांता कुमार ने बताया कि योगा एनेचुरोपैथी के अतिरिक्त आयुर्वेदिक के तौर तरीकों से भी कायाकल्प में बिना सुई बिना रुई के इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर के 40 देशों से हजारों लोग यहां अपना उपचार करवा चुके हैं। इस मौके पर उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्वेदिक आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया सम्मानित किया। प्रदेश के मंत्रियों विक्रम ठाकुर, सरवीण चौधरी व किशन कपूर भी इस समारोह में विशेष रूप से उपस्थित रहे । इसके अतिरिक्त ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला, देहरा से होशियार सिंह, रीता धीमान, अरुण मेहरा, अर्जुन सिंह, मुल्खराज प्रेमी, रवि धीमान, आशीष बुटेल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल व राज्यसभा सांसद विप्लव ठाकुर भी इस समारोह में हिस्सा लेने आई थी। इस समारोह में जिला भाजपा के अध्यक्ष विनय शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता हिमांशु मिश्रा, दूलो राम , प्रदेश महिला मोर्चा के अध्यक्ष इंदु गोस्वामी, अमर शहीदों शौरभ कालिया व परमवीर चक्र विजेता विक्रम बतरा के पिता भी मौजूद रहे।
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पालमपुर - चिकित्सा के क्षेत्र में महारत हासिल कर चुके विवेकानंद ट्रस्ट के कायाकल्प संस्थान में रविवार को एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर पद्म श्री विजेता निदेशक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने बतौर मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत की, जबकि स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार की अध्यक्षता में यह समारोह आयोजित किया गया। समारोह में विवेकानंद ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं सांसद शांता कुमार कायाकल्प संस्थान को आगे बढ़ाने के लिए नई रिसर्च किए जाने का हवाला दिया है । उन्होंने बताया कि कायाकल्प को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है । शांता कुमार ने बताया कि योगा एनेचुरोपैथी के अतिरिक्त आयुर्वेदिक के तौर तरीकों से भी कायाकल्प में बिना सुई बिना रुई के इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर के चालीस देशों से हजारों लोग यहां अपना उपचार करवा चुके हैं। इस मौके पर उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्वेदिक आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया सम्मानित किया। प्रदेश के मंत्रियों विक्रम ठाकुर, सरवीण चौधरी व किशन कपूर भी इस समारोह में विशेष रूप से उपस्थित रहे । इसके अतिरिक्त ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला, देहरा से होशियार सिंह, रीता धीमान, अरुण मेहरा, अर्जुन सिंह, मुल्खराज प्रेमी, रवि धीमान, आशीष बुटेल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल व राज्यसभा सांसद विप्लव ठाकुर भी इस समारोह में हिस्सा लेने आई थी। इस समारोह में जिला भाजपा के अध्यक्ष विनय शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता हिमांशु मिश्रा, दूलो राम , प्रदेश महिला मोर्चा के अध्यक्ष इंदु गोस्वामी, अमर शहीदों शौरभ कालिया व परमवीर चक्र विजेता विक्रम बतरा के पिता भी मौजूद रहे।
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सहल नहीं था । राजमहल की ड्योढ़ी से लेकर उनके दरवार तक सैकड़ों सशस्त्र सिपाही पहर पर तैनात थे। सैकड़ों स्वाजासरा तलवारें खींचे उन के हरम की ड्योढ़ियों पर मुस्तैद रहते थे, इसलिये शहनशाह ने हुक्म दिया कि महल में उनकी आरामगाह की खिड़की से नीचे जमीन तक एक बड़ा घण्टा लटका दिया जाये ।
शहर में वादशाह सलामत के हुक्म से डौंडी पिटवा दी गई - 'खलक खुदा का, मुलक बादशाह का; हर खासो-आम को इत्तला दी जाती है कि साहिवेआलम, जहांपनाह, शहंशाहेमुअज्जम की आरामगाह की खिड़की से एक घन्टा लटका दिया गया है। जिस किसी बशर को इन्साफ तलब हो, इस घन्टे को बजा कर साहिवेआलम के हुजूर में अपनी फरियाद हाज़िर कर सकता है ।'
शहनशाह की नौकरशाही, काजियों, मुल्लाओं और दारोगाओं ने जहाँपनाह का यह ऐलान सुना तो वे चिंतित हो गये। उन्होंने प्रधान काजी के सम्मुख जाकर दुहाई दी - "अगर इंसाफ जहांपनाह खुद करेंगे तो काजी, मुल्ला और दारोगा क्या करेंगे ?"
प्रधान काजी मुस्करा दिये । उन्हें अपनी मातहत नौकरशाही की बुद्धि पर तरस आया । वे बोले - "बादशाह के न्याय का घन्टा बजाने देने का मौका किस के हाथ में है ? इस घन्टे की रक्षा करना किसका कर्त्तव्य है ? ... बादशाह सलामत की नौकरशाही का ! बादशाह सलामत देश की रक्षा करते हैं इसलिये देश के मालिक हैं । बादशाह सलामत की नौकरशाही, बादशाह सलामत की जात और उनके घन्टे की रक्षा करती है इसलिये.. ......समझ लो !" शहर भर के काजियों, मुल्लाओं और दारोगाओं ने प्रधान काजी की बुद्धिमानी और नीतिज्ञता को स्वीकार करने के लिये सिर झुका कर उन्हें
आदाब किया ।
वादशाह सलामत के हुक्म से न्याय की पुकार के लिये लटकाये गये घन्टे की रक्षा के लिये सशस्त्र सिपाही तैनात कर दिये गये । शहनशाह आरामगाह में वेगम नूरेहरम के हाथ से वरफ में दबी 'मय अर्ग़बानी' और 'मय शीराज़ी' बिल्लौरी प्यालों में पीते हुये अपने न्याय के घन्टे की टंकोर सुनने के लिये प्रतीक्षा करते रहते । दिन वीते, हफ्ते वीते और महीने बीत गये । न्याय के घन्टे ने न्याय के लिये दुहाई न दी । वादशाह सलामत को संतोप होता गया कि उनके राज्य में अन्याय नहीं है ।
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सहल नहीं था । राजमहल की ड्योढ़ी से लेकर उनके दरवार तक सैकड़ों सशस्त्र सिपाही पहर पर तैनात थे। सैकड़ों स्वाजासरा तलवारें खींचे उन के हरम की ड्योढ़ियों पर मुस्तैद रहते थे, इसलिये शहनशाह ने हुक्म दिया कि महल में उनकी आरामगाह की खिड़की से नीचे जमीन तक एक बड़ा घण्टा लटका दिया जाये । शहर में वादशाह सलामत के हुक्म से डौंडी पिटवा दी गई - 'खलक खुदा का, मुलक बादशाह का; हर खासो-आम को इत्तला दी जाती है कि साहिवेआलम, जहांपनाह, शहंशाहेमुअज्जम की आरामगाह की खिड़की से एक घन्टा लटका दिया गया है। जिस किसी बशर को इन्साफ तलब हो, इस घन्टे को बजा कर साहिवेआलम के हुजूर में अपनी फरियाद हाज़िर कर सकता है ।' शहनशाह की नौकरशाही, काजियों, मुल्लाओं और दारोगाओं ने जहाँपनाह का यह ऐलान सुना तो वे चिंतित हो गये। उन्होंने प्रधान काजी के सम्मुख जाकर दुहाई दी - "अगर इंसाफ जहांपनाह खुद करेंगे तो काजी, मुल्ला और दारोगा क्या करेंगे ?" प्रधान काजी मुस्करा दिये । उन्हें अपनी मातहत नौकरशाही की बुद्धि पर तरस आया । वे बोले - "बादशाह के न्याय का घन्टा बजाने देने का मौका किस के हाथ में है ? इस घन्टे की रक्षा करना किसका कर्त्तव्य है ? ... बादशाह सलामत की नौकरशाही का ! बादशाह सलामत देश की रक्षा करते हैं इसलिये देश के मालिक हैं । बादशाह सलामत की नौकरशाही, बादशाह सलामत की जात और उनके घन्टे की रक्षा करती है इसलिये.. ......समझ लो !" शहर भर के काजियों, मुल्लाओं और दारोगाओं ने प्रधान काजी की बुद्धिमानी और नीतिज्ञता को स्वीकार करने के लिये सिर झुका कर उन्हें आदाब किया । वादशाह सलामत के हुक्म से न्याय की पुकार के लिये लटकाये गये घन्टे की रक्षा के लिये सशस्त्र सिपाही तैनात कर दिये गये । शहनशाह आरामगाह में वेगम नूरेहरम के हाथ से वरफ में दबी 'मय अर्ग़बानी' और 'मय शीराज़ी' बिल्लौरी प्यालों में पीते हुये अपने न्याय के घन्टे की टंकोर सुनने के लिये प्रतीक्षा करते रहते । दिन वीते, हफ्ते वीते और महीने बीत गये । न्याय के घन्टे ने न्याय के लिये दुहाई न दी । वादशाह सलामत को संतोप होता गया कि उनके राज्य में अन्याय नहीं है ।
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जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज बाराबंकी में शुक्रवार को अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद की एलएलबी परीक्षा होने थी। दोपहर की पाली में होने वाली परीक्षा देने के लिए छात्र व छात्राएं पहुंचे तो उन्हें टेंट के नीचे मेज कुर्सी पर बैठाया गया। जिसे देख छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। परीक्षा का बहिष्कार कर के छात्रों ने जमकर तोड़फोड़ की।
डिप्टी सीएम के आदेश तक परः उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने बीते दिनों सभी प्रकार की परीक्षाओं को सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में कराने की बात कही थी। शुक्रवार से डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद की एलएलबी एमसीए व बीसीए की परीक्षा शुरू होने थी। जिले के सभी कॉलेजों के लिए जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज को सेंटर बनाया गया था। करीब 4000 छात्र-छात्राओं को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक परीक्षा देनी थी। जनेस्मा को परीक्षा केंद्र तो बना दिया गया मगर वहां ना तो इतने बच्चों के बैठने के लिए कमरे थे और ना ही फर्नीचर। सारे नियम कानून को ताक पर रखकर टेंट लगाया गया और मेज कुर्सी किराए पर मंगा कर परीक्षा की तैयारी पूरी कर दी गई।
भड़के छात्र छात्राएं, टेंट फाड़ा, कुर्सियां तोड़ीः दोपहर एक बजे से परीक्षार्थियों का आना शुरू हो गया था। छात्र-छात्राओं को टेंट के नीचे बैठाया गया तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। परीक्षा का बहिष्कार करते हुए छात्रों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। परीक्षा के लिए लगाए गए टेंट को उखाड़ फेंका और कुर्सियों को तोड़ डाला। कॉलेज में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। छात्राएं खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागती दिखीं। इस माहौल में पूरे केंद्र की परीक्षा नहीं हो सकी। कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि पूरी सूचना विश्वविद्यालय को दे दी गई है। कुलपति के निर्णय आने के बाद ही इस पर कोई फैसला हो सकेगा।
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जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज बाराबंकी में शुक्रवार को अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद की एलएलबी परीक्षा होने थी। दोपहर की पाली में होने वाली परीक्षा देने के लिए छात्र व छात्राएं पहुंचे तो उन्हें टेंट के नीचे मेज कुर्सी पर बैठाया गया। जिसे देख छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। परीक्षा का बहिष्कार कर के छात्रों ने जमकर तोड़फोड़ की। डिप्टी सीएम के आदेश तक परः उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने बीते दिनों सभी प्रकार की परीक्षाओं को सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में कराने की बात कही थी। शुक्रवार से डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद की एलएलबी एमसीए व बीसीए की परीक्षा शुरू होने थी। जिले के सभी कॉलेजों के लिए जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज को सेंटर बनाया गया था। करीब चार हज़ार छात्र-छात्राओं को दोपहर दो:शून्य बजे से शाम पाँच:शून्य बजे तक परीक्षा देनी थी। जनेस्मा को परीक्षा केंद्र तो बना दिया गया मगर वहां ना तो इतने बच्चों के बैठने के लिए कमरे थे और ना ही फर्नीचर। सारे नियम कानून को ताक पर रखकर टेंट लगाया गया और मेज कुर्सी किराए पर मंगा कर परीक्षा की तैयारी पूरी कर दी गई। भड़के छात्र छात्राएं, टेंट फाड़ा, कुर्सियां तोड़ीः दोपहर एक बजे से परीक्षार्थियों का आना शुरू हो गया था। छात्र-छात्राओं को टेंट के नीचे बैठाया गया तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। परीक्षा का बहिष्कार करते हुए छात्रों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। परीक्षा के लिए लगाए गए टेंट को उखाड़ फेंका और कुर्सियों को तोड़ डाला। कॉलेज में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। छात्राएं खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागती दिखीं। इस माहौल में पूरे केंद्र की परीक्षा नहीं हो सकी। कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि पूरी सूचना विश्वविद्यालय को दे दी गई है। कुलपति के निर्णय आने के बाद ही इस पर कोई फैसला हो सकेगा।
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मेघालय विधानसभा के लिए हुए मतदान की गिनती के शुरुआती रुझानों में इस बार त्रिशंकु विधानसभा की तस्वीर उभर रही है. मेघालय में कुल 60 सीट हैं, लेकिन एक सीट पर प्रत्याशी का निधन हो जाने की वजह से चुनाव स्थगित कर दिये गये थे. इस बार कुल 59 सीट पर मतदान हुए हैं.
आजतक के अनुसार एनपीपी 24 सीटों पर आगे है, उसे चार सीट का फायदा हो रहा है. भाजपा 6 सीटों पर आगे है. टीएमसी को पांच सीट पर बढ़त है जबकि कांग्रेस भी 5 सीट पर आगे है और अन्य को 19 सीटों पर बढ़त हासिल है. वहीं चुनाव आयोग के अनुसार नेशनल पीपुल्स पार्टी 24 स्थान पर आगे चल रही है, जिसमें से एक सीट पर उसने जीत दर्ज कर ली है. भाजपा पांच सीटों पर आगे चल रही है. वहीं टीएमसी मेघालय में पहली बार चुनाव लड़कर 5 सीटों पर आगे चल रही है.
मेघालय में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह आठ बजे मतों की गिनती शुरू हुई. मतगणना 13 केंद्रों पर जारी है. मेघालय में सोहियोंग सीट पर एक उम्मीदवार के निधन के कारण इस सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया गया है. एग्जिट पोल में भी मेघालय में त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान लगाया गया था. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने मंगलवार रात असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से मुलाकात की, जिससे चुनाव के बाद गठजोड़ की अटकलों को बल मिला है.
संगमा की एनपीपी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मेघालय लोकतांत्रिक गठबंधन (एमडीए) के तहत पिछली सरकार को एक साथ चलाया, लेकिन चुनाव से पहले इनके बीच विरोध हुआ और दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा.
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मेघालय विधानसभा के लिए हुए मतदान की गिनती के शुरुआती रुझानों में इस बार त्रिशंकु विधानसभा की तस्वीर उभर रही है. मेघालय में कुल साठ सीट हैं, लेकिन एक सीट पर प्रत्याशी का निधन हो जाने की वजह से चुनाव स्थगित कर दिये गये थे. इस बार कुल उनसठ सीट पर मतदान हुए हैं. आजतक के अनुसार एनपीपी चौबीस सीटों पर आगे है, उसे चार सीट का फायदा हो रहा है. भाजपा छः सीटों पर आगे है. टीएमसी को पांच सीट पर बढ़त है जबकि कांग्रेस भी पाँच सीट पर आगे है और अन्य को उन्नीस सीटों पर बढ़त हासिल है. वहीं चुनाव आयोग के अनुसार नेशनल पीपुल्स पार्टी चौबीस स्थान पर आगे चल रही है, जिसमें से एक सीट पर उसने जीत दर्ज कर ली है. भाजपा पांच सीटों पर आगे चल रही है. वहीं टीएमसी मेघालय में पहली बार चुनाव लड़कर पाँच सीटों पर आगे चल रही है. मेघालय में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह आठ बजे मतों की गिनती शुरू हुई. मतगणना तेरह केंद्रों पर जारी है. मेघालय में सोहियोंग सीट पर एक उम्मीदवार के निधन के कारण इस सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया गया है. एग्जिट पोल में भी मेघालय में त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान लगाया गया था. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने मंगलवार रात असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से मुलाकात की, जिससे चुनाव के बाद गठजोड़ की अटकलों को बल मिला है. संगमा की एनपीपी और भारतीय जनता पार्टी ने मेघालय लोकतांत्रिक गठबंधन के तहत पिछली सरकार को एक साथ चलाया, लेकिन चुनाव से पहले इनके बीच विरोध हुआ और दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा.
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- लौकी को छीलकर साफ़ पानी से धोएं और कद्दूकस कर लें.
- एक बड़े बाउल में आटे को छान लें. अब उसमें जीरा, नमक, हरी मिर्च, हरी धनिया, गरम मसाला और थोड़ा घी डालें. अच्छी तरह से मिलाएं. कद्दूकस की हुई लौकी डालें और उसे भी मिला लें.
- इसके बाद आवश्यकतानुसार पानी डालें और आटा गूंध कर आधे घंटे के लिए सेट होने रख दें.
- अब आटे से लोइयां बना लें और उससे गोल या त्रिकोण परांठे तैयार करें.
- मीडियम फ़्लेम पर एक पैन गर्म करें. सभी परांठों को एक-एक करके बनाएं और घी लगाकर क्रिस्पी होने तक सेंक लें.
- दही को एक बाउल में डालें.
- उसमें भूना जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालें.
- मिलाएं.
अपनी थाली में सलाद की एक प्लेट रखें और आपकी लंच थाली तैयार है.
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- लौकी को छीलकर साफ़ पानी से धोएं और कद्दूकस कर लें. - एक बड़े बाउल में आटे को छान लें. अब उसमें जीरा, नमक, हरी मिर्च, हरी धनिया, गरम मसाला और थोड़ा घी डालें. अच्छी तरह से मिलाएं. कद्दूकस की हुई लौकी डालें और उसे भी मिला लें. - इसके बाद आवश्यकतानुसार पानी डालें और आटा गूंध कर आधे घंटे के लिए सेट होने रख दें. - अब आटे से लोइयां बना लें और उससे गोल या त्रिकोण परांठे तैयार करें. - मीडियम फ़्लेम पर एक पैन गर्म करें. सभी परांठों को एक-एक करके बनाएं और घी लगाकर क्रिस्पी होने तक सेंक लें. - दही को एक बाउल में डालें. - उसमें भूना जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालें. - मिलाएं. अपनी थाली में सलाद की एक प्लेट रखें और आपकी लंच थाली तैयार है.
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अधिकतर माता-पिता अपने बच्चे को शहमत नाम देना चाहते हैं लेकिन इससे पहले वो इसका मतलब जानने का प्रयास नहीं करते हैं। शहमत नाम का मतलब बहादुरी, वीरता होता है। शहमत नाम का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब बहादुरी, वीरता है जिसे काफी अच्छा माना जाता है। शहमत नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि शहमत नाम का मतलब बहादुरी, वीरता होता है और इस अर्थ का प्रभाव शहमत नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। वेदों में भी ये बात कही गई कि शिशु को शहमत देने से पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। कुछ सामाजिक अवधारणाओं के अनुसार शहमत नाम का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा होता है, यानी कि शहमत नाम का अर्थ बहादुरी, वीरता है तो आपके स्वभाव में भी इसकी झलक दिखेगी। आगे शहमत नाम की राशि व लकी नंबर अथवा शहमत नाम के बहादुरी, वीरता अर्थ के बारे में विस्तार से बताया गया है।
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अधिकतर माता-पिता अपने बच्चे को शहमत नाम देना चाहते हैं लेकिन इससे पहले वो इसका मतलब जानने का प्रयास नहीं करते हैं। शहमत नाम का मतलब बहादुरी, वीरता होता है। शहमत नाम का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब बहादुरी, वीरता है जिसे काफी अच्छा माना जाता है। शहमत नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि शहमत नाम का मतलब बहादुरी, वीरता होता है और इस अर्थ का प्रभाव शहमत नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। वेदों में भी ये बात कही गई कि शिशु को शहमत देने से पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। कुछ सामाजिक अवधारणाओं के अनुसार शहमत नाम का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा होता है, यानी कि शहमत नाम का अर्थ बहादुरी, वीरता है तो आपके स्वभाव में भी इसकी झलक दिखेगी। आगे शहमत नाम की राशि व लकी नंबर अथवा शहमत नाम के बहादुरी, वीरता अर्थ के बारे में विस्तार से बताया गया है।
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पतरातू। पतरातू और आसपास के क्षेत्र में देर से बारिश होने की सूरत में टंडहन खेती नहीं के बराबर लगे हैं। किंतु अब हो रहे बारिश के कारण किसान मकई की बुआई करने में जुट गए हैं। साथ ही धान के बिचड़े लगाने के लिए खेत तैयार कर रहे हैं। जबकि खेतों में किसान बरसाती फसल गोड़ा, गुंदली, उड़द और बरई अभी तक नहीं लगा पाए हैं। किसान बताते हैं कि माह जुलाई पहुंच गया है। फिर भी क्षेत्र में सही तौर पर वर्षा नहीं हुई है। ना ही धान के बीचड़ा के लिए उपयुक्त वर्षा हुई है। जिसके कारण धान के बीचड़े के लिए धान की छिटाई नहीं हो पा रहा है। फिर भी किसान खेती के लिए कमर कस चुके हैं। किसान हल बैल और ट्रेक्टर से खेतों की जुताई आदि में लगे हुए हैं। खेतों में मकई और बिचड़ा आदि के लिए खेत तैयार कर रहे हैं।
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पतरातू। पतरातू और आसपास के क्षेत्र में देर से बारिश होने की सूरत में टंडहन खेती नहीं के बराबर लगे हैं। किंतु अब हो रहे बारिश के कारण किसान मकई की बुआई करने में जुट गए हैं। साथ ही धान के बिचड़े लगाने के लिए खेत तैयार कर रहे हैं। जबकि खेतों में किसान बरसाती फसल गोड़ा, गुंदली, उड़द और बरई अभी तक नहीं लगा पाए हैं। किसान बताते हैं कि माह जुलाई पहुंच गया है। फिर भी क्षेत्र में सही तौर पर वर्षा नहीं हुई है। ना ही धान के बीचड़ा के लिए उपयुक्त वर्षा हुई है। जिसके कारण धान के बीचड़े के लिए धान की छिटाई नहीं हो पा रहा है। फिर भी किसान खेती के लिए कमर कस चुके हैं। किसान हल बैल और ट्रेक्टर से खेतों की जुताई आदि में लगे हुए हैं। खेतों में मकई और बिचड़ा आदि के लिए खेत तैयार कर रहे हैं।
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भावनाहीन को मे समान सुख नहीं और भावनानीत कोदा के समान कोई दुख नहीं। उसके लिए भावना ही जीवन के है--उसमें निहित हो उसे जोवन के साथ खलाबद्ध करती है। इस दावे नष्ट होते ही वह प्रधा बन जाता है। जड़ हो जाना है--फिर उसे मृत्यु के प्रतिषित दूसरा रास्ता दिखाई नहीं देता। आइस्क्या मृत्यु से भयभीत नहीं हुप्रा पर पिता के पविश्वास के कपाल से यह दुखी रहने लगा। गौवाजी उसके स्पक्ष वा अनुभव करने से कठिन सपश्चर्या द्वारा प्राण त्यागने के लिए तयार हो जाता है ।
श्रद्धा के सुधार से घवराये हुए सुदर्शन का मस्तिष्क ठिकाने नही रहा उसका शरीर पसीने-पसीने हो गया। उसको भाँखें देख रही थों पर उसे कुछ दिखाई न देता था। परिचित रास्ते से उसके पर उसे कादावाडी ले गये। वह चान को सीडियो पर चढ़ा। उसके ब अन्तर से निराशा की शप-उसके प्राण साथ सेकर--बाहर निकलने की सवारी करने लगी ।
उसके पर रुके प्रवासाल की कोठरी को देहली पर दोवन पर बठी हुई पनी को उसने सूरत से प्रकाशित होने वाले पत्र वारिस बड़े पढ़ते हुए देखा उसको गर्दन एक अद्भुत छटास कृषी हुई पो उसने मुख पर तेश-जैसे देवी हो ऐसा-दोप्त हो रहा था ।
पनो वहिन ! क्या कर रही हो ? दास पढ़ रही हूँ ।
सुदान घोडी देर सड़ा रहा, फिर जसे उसके हृदय का सार टूट रहा हो इस प्रकार निराधा भरे स्वर में उसने पूछा धनी वहिन । मां स्वतन्त्र होगी ? "
घनी ने कर देखा तो सुनको घराहट की दशा में पाया । स्त्री हृदय को स्वामायिक समझ से उसने सुदशन की ओर सहानुभूति से देखा और उठकर पास थाई ।
'मदुमाई । क्या पूछ रहे हो? क्या होगा ? यह 'माँ' को स्व
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भावनाहीन को मे समान सुख नहीं और भावनानीत कोदा के समान कोई दुख नहीं। उसके लिए भावना ही जीवन के है--उसमें निहित हो उसे जोवन के साथ खलाबद्ध करती है। इस दावे नष्ट होते ही वह प्रधा बन जाता है। जड़ हो जाना है--फिर उसे मृत्यु के प्रतिषित दूसरा रास्ता दिखाई नहीं देता। आइस्क्या मृत्यु से भयभीत नहीं हुप्रा पर पिता के पविश्वास के कपाल से यह दुखी रहने लगा। गौवाजी उसके स्पक्ष वा अनुभव करने से कठिन सपश्चर्या द्वारा प्राण त्यागने के लिए तयार हो जाता है । श्रद्धा के सुधार से घवराये हुए सुदर्शन का मस्तिष्क ठिकाने नही रहा उसका शरीर पसीने-पसीने हो गया। उसको भाँखें देख रही थों पर उसे कुछ दिखाई न देता था। परिचित रास्ते से उसके पर उसे कादावाडी ले गये। वह चान को सीडियो पर चढ़ा। उसके ब अन्तर से निराशा की शप-उसके प्राण साथ सेकर--बाहर निकलने की सवारी करने लगी । उसके पर रुके प्रवासाल की कोठरी को देहली पर दोवन पर बठी हुई पनी को उसने सूरत से प्रकाशित होने वाले पत्र वारिस बड़े पढ़ते हुए देखा उसको गर्दन एक अद्भुत छटास कृषी हुई पो उसने मुख पर तेश-जैसे देवी हो ऐसा-दोप्त हो रहा था । पनो वहिन ! क्या कर रही हो ? दास पढ़ रही हूँ । सुदान घोडी देर सड़ा रहा, फिर जसे उसके हृदय का सार टूट रहा हो इस प्रकार निराधा भरे स्वर में उसने पूछा धनी वहिन । मां स्वतन्त्र होगी ? " घनी ने कर देखा तो सुनको घराहट की दशा में पाया । स्त्री हृदय को स्वामायिक समझ से उसने सुदशन की ओर सहानुभूति से देखा और उठकर पास थाई । 'मदुमाई । क्या पूछ रहे हो? क्या होगा ? यह 'माँ' को स्व
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युगांडा पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल टूर्नामेंट 2021 सहरसा ही नहीं बल्कि पूरे बिहार और भाारत लिए आज गौरव भरा दिन यह रहा है कि यहां के एक लाल अरबाज अंसारी ने गोल्ड मेडल जीत लिया है। उनकी यह उपलब्धि पर सहरसा में खुशी की लहर है।
आनलाइन डेस्क, भागलपुर। युगांडा पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल टूर्नामेंट 2021 में भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। एक भारतीय खिलाड़ी ने यहां स्वर्ण पदक जीत लिया है। बिहार के सहरसा निवासी अरबाज अंसारी ने गोल्ड मेडल मेडल जीतकर ना सिर्फ अपना बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। पदक जीतने की सूचना जैसे ही सहरसा पहुंची, लोग जश्न मनाने लगे। सभी ओर से अरबाज को बधाई मिलनी शुरू हो गई है। भागलपुर के भी खेल प्रेमियों ने उन्हें बधाई दी है।
दक्षिण अफ्रीका के युगांडा में रविवार को सहरसा के लाल से जीत का झंडा गाड़ दिया। युगांडा पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल टूर्नामेंट 2021 के फाइनल में सहरसा के अरबाज ने डबल्स में जीत हासिल की है। अरबाज की इस उपलब्धि की सूचना जैसे ही मिली मीर टोला में जश्न का माहाैल बन गया। लाेग घरों से निकल कर एक-दूसरे को बधाई देने लगे।
मीर टोला निवासी मो. निसार के पुत्र अरबाज 15 से 21 नवंबर तक चले इस प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। विगत कई वर्षों से वो अंतर्राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में खेल रहे हैं। इसमें उसे कई महत्वपूर्ण सफलता भी मिली। उसे विधानसभा चुनाव में दिव्यांग मतदाताओं का आइकन बनाया गया। जिले का नाम रोशन करने के लिए उसे स्थानीय प्रशासन द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।
इससे पहले मंगलवार को युगांडा में उसके होटल के महज सौ मीटर की दूरी पर बल विस्फोट की खबर से उसके परिजन, रिश्तेदार चिंतित हो गये थे। अरबाज के रिश्तेदार खुर्शीद आलम ने बताया कि कोसी जैसे पिछड़े क्षेत्र से अरबाज लगातार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी काबिलियत दिखा रहा है। अरबाज की जीत पर मीर टोला निवासी सर्जन डा. तारीख, अनुप रंजन, संपूर्ण, शाहीन अख्तर, कृष्णा, श्रेयस, जैनब, रूमा, अलिसा, दीपक कुमार, खुर्शीद अंसारी, आशीष गुप्ता, ताबीस मेहर सहित अन्य ने प्रसन्नता जतायी है।
अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज श्रेयसी सिंह ने अरबाज अंसारी को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है। खेल के क्षेत्र में यहां के लोग और बेहतर करेंगे। श्रेयसी सिंह जमुई विधानसभा के भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। वे लगातार बिहार में खेल-कूद को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं।
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युगांडा पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल टूर्नामेंट दो हज़ार इक्कीस सहरसा ही नहीं बल्कि पूरे बिहार और भाारत लिए आज गौरव भरा दिन यह रहा है कि यहां के एक लाल अरबाज अंसारी ने गोल्ड मेडल जीत लिया है। उनकी यह उपलब्धि पर सहरसा में खुशी की लहर है। आनलाइन डेस्क, भागलपुर। युगांडा पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल टूर्नामेंट दो हज़ार इक्कीस में भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। एक भारतीय खिलाड़ी ने यहां स्वर्ण पदक जीत लिया है। बिहार के सहरसा निवासी अरबाज अंसारी ने गोल्ड मेडल मेडल जीतकर ना सिर्फ अपना बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। पदक जीतने की सूचना जैसे ही सहरसा पहुंची, लोग जश्न मनाने लगे। सभी ओर से अरबाज को बधाई मिलनी शुरू हो गई है। भागलपुर के भी खेल प्रेमियों ने उन्हें बधाई दी है। दक्षिण अफ्रीका के युगांडा में रविवार को सहरसा के लाल से जीत का झंडा गाड़ दिया। युगांडा पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल टूर्नामेंट दो हज़ार इक्कीस के फाइनल में सहरसा के अरबाज ने डबल्स में जीत हासिल की है। अरबाज की इस उपलब्धि की सूचना जैसे ही मिली मीर टोला में जश्न का माहाैल बन गया। लाेग घरों से निकल कर एक-दूसरे को बधाई देने लगे। मीर टोला निवासी मो. निसार के पुत्र अरबाज पंद्रह से इक्कीस नवंबर तक चले इस प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। विगत कई वर्षों से वो अंतर्राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में खेल रहे हैं। इसमें उसे कई महत्वपूर्ण सफलता भी मिली। उसे विधानसभा चुनाव में दिव्यांग मतदाताओं का आइकन बनाया गया। जिले का नाम रोशन करने के लिए उसे स्थानीय प्रशासन द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। इससे पहले मंगलवार को युगांडा में उसके होटल के महज सौ मीटर की दूरी पर बल विस्फोट की खबर से उसके परिजन, रिश्तेदार चिंतित हो गये थे। अरबाज के रिश्तेदार खुर्शीद आलम ने बताया कि कोसी जैसे पिछड़े क्षेत्र से अरबाज लगातार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी काबिलियत दिखा रहा है। अरबाज की जीत पर मीर टोला निवासी सर्जन डा. तारीख, अनुप रंजन, संपूर्ण, शाहीन अख्तर, कृष्णा, श्रेयस, जैनब, रूमा, अलिसा, दीपक कुमार, खुर्शीद अंसारी, आशीष गुप्ता, ताबीस मेहर सहित अन्य ने प्रसन्नता जतायी है। अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज श्रेयसी सिंह ने अरबाज अंसारी को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है। खेल के क्षेत्र में यहां के लोग और बेहतर करेंगे। श्रेयसी सिंह जमुई विधानसभा के भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। वे लगातार बिहार में खेल-कूद को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं।
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संकटग्रस्त अफ्रीकी देश सूडान से 200 से अधिक गुजरात निवासी मंगलवार को स्वदेश लौट आए हैं।
ऑपरेशन कावेरी के तहत भारत सरकार ने 231 लोगों को सूडान से स्वदेश लाने के लिए एक विशेष फ्लाइट भेजी थी। फ्लाइट अहमदाबाद में सरदार पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंची। इस फ्लाइट में 208 गुजराती थे।
यहां हावई अड्डे पर गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने लोगों का अभिवादन किया। पिछले हफ्ते ऑपरेशन कावेरी के तहत पहले दौर में 56 गुजराती मुंबई एयरपोर्ट लौटे थे।
10 बीमार लोगों के लिए एक चिकित्सा दल की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा 15 अतिरिक्त काउंटर स्थापित किए गए थे ताकि आप्रवासन प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। ऑपरेशन कावेरी के जरिए कुल 360 गुजरातियों को सूडान से वापस लाया गया है।
गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी के अनुसार, एसवीपीआई हवाई अड्डे पर उतरने वाले 231 लोगों में से 208 गुजरात, 13 पंजाब और 10 राजस्थान के निवासी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर राजकोट की यात्रा करने के इच्छुक लोगों के लिए 5 वातानुकूलित वोल्वो बसों की व्यवस्था की थी।
भारत ने हिंसा से प्रभावित सूडान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए पिछले सप्ताह 'ऑपरेशन कावेरी' शुरू किया था। ज्ञात हो कि सोमवार को इस अभियान के तहत 186 भारतीय कोच्चि पहुंचे थे जबकि रविवार को 229 भारतीय बेंगलूरू पहुंचे थे। इसके एक दिन पहले 365 भारतीय नागरिक दिल्ली आए। वहीं, इस निकासी अभियान के तहत शुक्रवार को दो जत्थों में 754 नागरिक भारत लौटे थे।
'ऑपरेशन कावेरी' के तहत भारत ने जेद्दा में पारगमन सुविधा स्थापित की है। सूडान से निकाले जाने के बाद भारतीय नागरिकों को सऊदी अरब के इस शहर में लाया जा रहा है। भारत ने सऊदी अरब के शहर जेद्दा में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है ताकि सूडान से भारतीय नागरिकों को निकालने में सुविधा हो सके।
सूडान में करीब 3,000 भारतीयों को निकालने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सूडान से निकासी अभियान में भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सुमेधा, आईएनएस तेग और आईएनएस तरकश शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय वायु सेना का विमान भी इसमें शामिल है। इस अभियान के तहत पोर्ट सूडान और जेद्दा में जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार किया गया है। सूडान में सेना और एक अर्द्धसैनिक समूह के बीच सत्ता हासिल करने के लिए भीषण संघर्ष जारी है।
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संकटग्रस्त अफ्रीकी देश सूडान से दो सौ से अधिक गुजरात निवासी मंगलवार को स्वदेश लौट आए हैं। ऑपरेशन कावेरी के तहत भारत सरकार ने दो सौ इकतीस लोगों को सूडान से स्वदेश लाने के लिए एक विशेष फ्लाइट भेजी थी। फ्लाइट अहमदाबाद में सरदार पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंची। इस फ्लाइट में दो सौ आठ गुजराती थे। यहां हावई अड्डे पर गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने लोगों का अभिवादन किया। पिछले हफ्ते ऑपरेशन कावेरी के तहत पहले दौर में छप्पन गुजराती मुंबई एयरपोर्ट लौटे थे। दस बीमार लोगों के लिए एक चिकित्सा दल की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा पंद्रह अतिरिक्त काउंटर स्थापित किए गए थे ताकि आप्रवासन प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। ऑपरेशन कावेरी के जरिए कुल तीन सौ साठ गुजरातियों को सूडान से वापस लाया गया है। गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी के अनुसार, एसवीपीआई हवाई अड्डे पर उतरने वाले दो सौ इकतीस लोगों में से दो सौ आठ गुजरात, तेरह पंजाब और दस राजस्थान के निवासी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर राजकोट की यात्रा करने के इच्छुक लोगों के लिए पाँच वातानुकूलित वोल्वो बसों की व्यवस्था की थी। भारत ने हिंसा से प्रभावित सूडान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए पिछले सप्ताह 'ऑपरेशन कावेरी' शुरू किया था। ज्ञात हो कि सोमवार को इस अभियान के तहत एक सौ छियासी भारतीय कोच्चि पहुंचे थे जबकि रविवार को दो सौ उनतीस भारतीय बेंगलूरू पहुंचे थे। इसके एक दिन पहले तीन सौ पैंसठ भारतीय नागरिक दिल्ली आए। वहीं, इस निकासी अभियान के तहत शुक्रवार को दो जत्थों में सात सौ चौवन नागरिक भारत लौटे थे। 'ऑपरेशन कावेरी' के तहत भारत ने जेद्दा में पारगमन सुविधा स्थापित की है। सूडान से निकाले जाने के बाद भारतीय नागरिकों को सऊदी अरब के इस शहर में लाया जा रहा है। भारत ने सऊदी अरब के शहर जेद्दा में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है ताकि सूडान से भारतीय नागरिकों को निकालने में सुविधा हो सके। सूडान में करीब तीन,शून्य भारतीयों को निकालने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सूडान से निकासी अभियान में भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सुमेधा, आईएनएस तेग और आईएनएस तरकश शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय वायु सेना का विमान भी इसमें शामिल है। इस अभियान के तहत पोर्ट सूडान और जेद्दा में जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार किया गया है। सूडान में सेना और एक अर्द्धसैनिक समूह के बीच सत्ता हासिल करने के लिए भीषण संघर्ष जारी है।
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अगरतला - जातीय संघर्ष के बाद त्रिपुरा से लगी भारतीय सीमा पर पहुंचे १५०० से अधिक बांग्लादेशी आदिवासियों ने भारत से शरण मांगी है। इन लोगों ने शनिवार शाम भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया जिन्हें सीमा पर ही रोक दिया गया।
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के उपमहानिरीक्षक भास्कर रावत ने बताया, १५०० बांग्लादेशी आदिवासी जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट कारबुक गांव में शरण लिए हैं। बीएसएफ इन लोगों को भोजन और अन्य सामग्री मुहैया करा रही है। आदिवासी बांग्लादेश के खागराचारी जिले के रहने वाले हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक स्थानीय नेता को अगवा किए जाने की खबरों के बाद क्षेत्र में संघर्ष हो गया और आदिवासी घर छोड़ने पर विवश हो गए। पलायन करने वालों में अधिकतर बौद्ध और हिंदू हैं।
त्रिपुरा गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस बारे में राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को सूचित किया है। १९८६ में गैर आदिवासियों द्वारा आदिवासियों पर हमलों के बाद ७४ हजार बौद्ध चकमा आदिवासियों ने दक्षिण त्रिपुरा में शरण ली थी। १९९७-९८ में बांग्लादेश सरकार और अलगाववादी संगठन शांति वाहिनी के बीच समझौते के बाद शरणार्थी स्वदेश लौट गए थे।
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अगरतला - जातीय संघर्ष के बाद त्रिपुरा से लगी भारतीय सीमा पर पहुंचे एक हज़ार पाँच सौ से अधिक बांग्लादेशी आदिवासियों ने भारत से शरण मांगी है। इन लोगों ने शनिवार शाम भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया जिन्हें सीमा पर ही रोक दिया गया। सीमा सुरक्षा बल के उपमहानिरीक्षक भास्कर रावत ने बताया, एक हज़ार पाँच सौ बांग्लादेशी आदिवासी जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट कारबुक गांव में शरण लिए हैं। बीएसएफ इन लोगों को भोजन और अन्य सामग्री मुहैया करा रही है। आदिवासी बांग्लादेश के खागराचारी जिले के रहने वाले हैं। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एक स्थानीय नेता को अगवा किए जाने की खबरों के बाद क्षेत्र में संघर्ष हो गया और आदिवासी घर छोड़ने पर विवश हो गए। पलायन करने वालों में अधिकतर बौद्ध और हिंदू हैं। त्रिपुरा गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस बारे में राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को सूचित किया है। एक हज़ार नौ सौ छियासी में गैर आदिवासियों द्वारा आदिवासियों पर हमलों के बाद चौहत्तर हजार बौद्ध चकमा आदिवासियों ने दक्षिण त्रिपुरा में शरण ली थी। एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे-अट्ठानवे में बांग्लादेश सरकार और अलगाववादी संगठन शांति वाहिनी के बीच समझौते के बाद शरणार्थी स्वदेश लौट गए थे।
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अनिल कुंबले, जिनका कॉन्ट्रैक्ट चैंपियंस ट्रॉफी के बाद समाप्त हो रहा है, वह भी टीम इंडिया के कोच की दौड़ में शामिल हैं। भारतीयों में पूर्व तेज गेंदबाज डोडा गणेश और भारत ए के पूर्व कोच लालचंद राजपूत भी हैं। उनके अलावा ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ऑलराउंडर टॉम मूडी और इंग्लैंड के रिचर्ड पायबस भी रेस में हैं। पायबस पहले पाकिस्तान के भी कोच रह चुके हैं। वैसे सहवाग के शामिल होने से यह मुकाबला रोचक हो गया है। माना जा रहा है कि बीसीसीआई के आला अधिकारियों ने उन्हें आवेदन करने के लिये राजी किया।
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अनिल कुंबले, जिनका कॉन्ट्रैक्ट चैंपियंस ट्रॉफी के बाद समाप्त हो रहा है, वह भी टीम इंडिया के कोच की दौड़ में शामिल हैं। भारतीयों में पूर्व तेज गेंदबाज डोडा गणेश और भारत ए के पूर्व कोच लालचंद राजपूत भी हैं। उनके अलावा ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ऑलराउंडर टॉम मूडी और इंग्लैंड के रिचर्ड पायबस भी रेस में हैं। पायबस पहले पाकिस्तान के भी कोच रह चुके हैं। वैसे सहवाग के शामिल होने से यह मुकाबला रोचक हो गया है। माना जा रहा है कि बीसीसीआई के आला अधिकारियों ने उन्हें आवेदन करने के लिये राजी किया।
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समभावभावित होने से वीतराग कहा जाता है। उक्त कथन का साराश यह है कि शब्द का ग्राहक क्षेत्र ही है, यही उसका लक्षण है तथा शब्द यह श्रोत्र का विषय होने से उसके द्वारा ग्रहण किया जाता है, परन्तु शब्द का ग्रहण होने के अनन्तर उसका अच्छा या बुरा प्रभाव आत्मा पर पड़ता है, जहा पर कि राग-द्वेष की परिणति होती है। इस विचार को लेकर ही प्रिय और अप्रिय शब्द को क्रमशः राग और द्वेष का हेतु बताया गया है, परन्तु जिस आत्मा में भावो की सम परिणति होती है, उस पर शब्द की प्रियता और अप्रियता का कोई प्रभाव नही पडता अर्थात् वह प्रिय शब्द को सुनकर उसमें अनुरक्त नहीं होता और अप्रिय शब्द से उसमें द्वेष की उत्पत्ति नहीं होती। इस हेतु से उसको वीतराग कहा गया है इत्यादि।
अब इसी विषय को पल्लवित करते हुए फिर कहते हैंसदस्स सोयं गहणं वयंति, सोयस्स सदं गहणं वयंति । रागस्स हेउं समणुन्नमाहु, दोसस्स हेडं अमणुन्नमाहु ॥ ३६ ॥
शब्दस्य श्रोत्रं ग्राहकं वदन्ति, श्रोत्रस्य शब्दं ग्राह्यं वदन्ति । रागस्य हेतुं समनोज्ञमाहुः, द्वेषस्य हेतुममनोज्ञमाहुः ॥ ३६ ॥ पदार्थान्वयः - सद्दस्स - शब्द का, सोय - श्रोत्र को, गहणं- ग्राहक, वयंति- कहते हैं- और, सोयस्स - श्रोत्र का, सद्द - शब्द को, गहणं - ग्राह्य वयंति कहते हैं, रागस्सराग का, हेडं हेतु, समणुन्नं - मनोज्ञ को, आहु-कहा है, दोसस्स-द्वेष का, हेउं - - हेतु, अमणुन्नं - अमनोज को, आहु-कहा गया है।
मूलार्थ - श्रोत्र - इन्द्रिय को शब्द का ग्राहक और शब्द को श्रोत्र का ग्राह्य कहते हैं। जो मनोज्ञ शब्द है वह राग का हेतु है और अमनोज्ञ शब्द को द्वेष का कारण बताया गया है।
टीका - तीर्थकर ने शब्द और श्रोत्र - इन्द्रिय का परस्पर ग्राह्य ग्राहक सम्बन्ध प्रतिपादन किया है, अर्थात् श्रोत्र - इन्द्रिय शब्द का ग्रहण करती है और शब्द उसके द्वारा ग्रहण किया जाता है, परन्तु इनमे जो प्रिय शब्द है, वह राग का उत्पादक है जो कटु शब्द है उससे द्वेष की उत्पत्ति होती है। इस विषय की उपयोगी अधिक व्याख्या पूर्व गाथाओं मे-चक्षु- इन्द्रिय के प्रकरण मे कर दी गई है, इसलिए यहां पर नहीं की गई ।
प्रिय शब्द में आसक्त होने से जो हानि होती है, अब उसका वर्णन करते हुए
कहते हैं
सद्देसु जो गिद्धिमुवेइ तिव्वं, अकालियं पावइ से विणासं । रागाउरे हरिणमिगे व मुद्धे, सद्दे अतित्ते समुवेइ मच्चुं ॥ ३७ ॥ शब्देषु यो गृद्धिमुपैति तीव्राम्, अकालिकं प्राप्नोति स विनाशम् । रागातुरो हरिणमृग इव मुग्धः, शब्देऽतृप्तः समुपैति मृत्युम् ॥ ३७ ॥
उत्तराध्ययन सूत्रम् तृतीय भाग [ २४२] पमायट्ठाणं बत्तीसइमं अज्झयणं
पदार्थान्वयः - सद्देसु - शब्दों में, जो-जो, तिव्वं तीव्र, गिद्धिं - गृद्धि-मूर्च्छा - को, उवेड़- प्राप्त होता है, से वह, अकालियं अकाल में ही, विणासं - विनाश को, पावइ - प्राप्त होता है, रागाउरे - राग में आसक्त हुआ, हरिणमिगे- हरिण - मृग, व- की तरह, मुद्धे - मुग्ध, सद्दे - शब्द से, अतित्ते- अतृप्त हुआ, मच्चुं - मृत्यु को, समुवेइ प्राप्त होता है।
मूलार्थ- शब्दों के विषय में अत्यन्त मूर्छित होने वाला जीव अकाल में ही विनाश अर्थात् मृत्यु को प्राप्त हो जाता है, जैसे राग में आसक्त हुआ हरिण-मृग मुग्ध होकर शब्द के श्रवण में सन्तोष को न प्राप्त होता हुआ मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।
टीका - प्रस्तुत गाथा में शब्दविषयक बढ़े हुए राग से उत्पन्न होने वाली हानि का दिग्दर्शन कराया गया है। जैसे राग में मस्त हुआ हरिण- मृग (कस्तूरी मृग) अपने प्राणों को दे देता है, अर्थात् नाद- माधुर्य के लोभ में वह अपने प्राणो को खो बैठता है, ठीक उसी प्रकार से शब्दों के श्रवण में अत्यन्त मूर्च्छित आसक्त होने वाला जीव अकाल में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। यद्यपि मृग शब्द हरिण के अर्थ में भी प्रसिद्ध है, तथापि हरिण शब्द का पृथक् प्रयोग होने से वह यहां पर कस्तूरी मृग का वाचक बन जाता है।
अब द्वेष के विषय में कहते हैंजे यावि दोसं समुवेइ तिव्वं, तंसि क्खणे से उ उवेइ दुक्खं । दुद्दंतदोसेण सएण जंतू, न किंचि सद्दं अवरज्झई से ॥ ३८ ॥ यश्चापि द्वेषं समुपैति तीव्रं, तस्मिन् क्षणे स तूपैति दुःखम् । दुर्दान्तदोषेण स्वकेन जन्तु, न किञ्चिच्छब्दोऽपराध्यति तस्य ॥ ३८ ॥ पदार्थान्वय. - जे-जो कोई - अमनोज्ञ शब्द में, तिव्वं तीव्र, दोसं - द्वेष, समुवेइ करता है, से वह, तंसि क्खणे- उसी क्षण मे, दुक्ख दुःख को, उवेइ प्राप्त हो जाता है, सएण-स्वकृत, दुद्दंतेण- दुर्दान्त, दोसेण-दोष से, जंतू - जीव, परच, से उसका, सद्द - शब्द, किंचि - किचिन्मात्र भी, न अवरज्झई- अपराध नही करता।
मूलार्थ- जो कोई जीव अप्रिय शब्द में तीव्र द्वेष करता है, वह स्वकृत दुर्दान्त दोष से उसी क्षण में दुःख को प्राप्त हो जाता है, परन्तु वह अप्रिय शब्द उस जीव का कुछ भी अपराध नहीं करता, अर्थात् वह शब्द उसको दुःख देने वाला नहीं होता।
टीका - प्रस्तुत गाथा में शब्द - विषयक द्वेष करने का फल बताते हुए शास्त्रकार कहते है कि शब्दविषयक द्वेष करने से अर्थात् अप्रिय शब्द को सुनकर मन में द्वेष उत्पन्न करने से यह जीव उसी दुःख का अनुभव करने लग जाता है, परन्तु इस दुःख का कारण उसका अपना दोष है न कि
किसी भाषा के कवि ने इस विषय मे क्या ही अच्छा कहा है
नाद के लोभ दहे मृग प्राणन,
बीन सुने अहि आप बधावे।
उत्तराध्ययन सूत्रम् - तृतीय भाग [ २४३] पमायट्ठाणं बत्तीसइमं अज्झयणं
- अप्रिय शब्द का इसमें कोई अपराध है। कारण यह है कि दुःख का हेतु अन्तःकरण में उत्पन्न होने वाला द्वेषमूलक निकृष्ट अध्यवसाय है। उसी के कारण यह जीव दुःख का संवेदन करता है। इसलिए श्रोत्र - इन्द्रिय का दमन करना ही मुमुक्षु पुरुष का सबसे पहला कर्त्तव्य है।
अब राग और द्वेष को अनर्थ का कारण बताते हुए फिर कहते हैं
एगंतरते रुइरंसि सदे, अतालिसे से कुणई पओसं । दुक्खस्स संपीलमुवेइ बाले, न लिप्पई तेण मुणी विरागो ॥ ३९ ॥
एकान्तरक्तो रुचिरे शब्दे, अतादृशे सः कुरुते प्रद्वेषम् । दुःखस्य सम्पीडामुपैति बाल., न लिप्यते तेन मुनिर्विरागः ॥ ३९ ॥ पदार्थान्वयःएगंतरत्ते - एकान्त रक्त, रुइरंसि - मनोहर, सद्दे - शब्द में, अतालिसे- अमनोहर शब्द में, पओसं - प्रद्वेष, कुणई करता है, बाले- अज्ञानी, दुक्खस्स - दुःख की, संपीलं- पीडा को, उवेइ - प्राप्त होता है, तेण- उस पीडा से, विरागो-वैराग्ययुक्त, मुणी- मुनि, न- नही, लिप्पई - लिप्त
मूलार्थ - जो जीव एकान्त मनोहर शब्द में तो अनुरक्त होता है और अमनोहर शब्द में द्वेष - करता है वह अज्ञानी जीव दुःख की पीड़ा को प्राप्त होता है, परन्तु जो विरक्त मुनि है वह उससे लिप्त नहीं होता।
टीका - प्रस्तुत गाथा मे राग-द्वेष की परिणति और उसके त्याग का फल बताते हुए शास्त्रकार कहते है कि जो जीव प्रिय शब्द मे राग और अप्रिय मे द्वेष करता है, वह दु.ख सम्बन्धी वेदना का अवश्य अनुभव करता है, अतएव वह बाल अर्थात् अज्ञानी जीव है, परन्तु जो मुनि विरक्त है अर्थात् जिसकी आत्मा में प्रिय और अप्रिय शब्द को सुनकर राग-द्वेष के भाव उत्पन्न नही होते उसको दुःख का सम्पर्क नहीं होता, अर्थात् वह सुखी है। इससे स्पष्ट सिद्ध है कि दुःख रूप व्याधि का मूल कारण राग-द्वेष की परिणतिविशेष ही है, अत सुख की इच्छा रखने वाले को इसके परित्याग में ही उद्यम करना चाहिए।
अब राग को हिंसादि आस्त्रवों का कारण बताते हुए शास्त्रकार कहते हैं, किसद्दाणुगासाणुगए य जीवे, चराचरे हिंसइ णेगरूवे । चित्तेहि ते परितावेइ बाले, पीलेइ अत्तट्ठगुरू किलिट्ठे ॥ ४० ॥
चराचरान् हिनस्त्यनेकारूपान् । चित्रैस्तान् परितापयति बालः, पीडयत्यात्मार्थगुरुः क्लिष्ट ॥ ४० ॥
पदार्थान्वयः- सद्दाणुगासा- शब्द की आशा से, अणुगए- अनुगत जीवे- जीव, य-फिर, चराचरे-चर और अचर, अणेगरूवे अनेक प्रकार के जीवो की, हिंसइ हिंसा करता है, बाले- अज्ञानी,
उत्तराध्ययन सूत्रम् - तृतीय भाग [ २४४] पमायट्ठाण बत्तीसइम अज्झयण
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समभावभावित होने से वीतराग कहा जाता है। उक्त कथन का साराश यह है कि शब्द का ग्राहक क्षेत्र ही है, यही उसका लक्षण है तथा शब्द यह श्रोत्र का विषय होने से उसके द्वारा ग्रहण किया जाता है, परन्तु शब्द का ग्रहण होने के अनन्तर उसका अच्छा या बुरा प्रभाव आत्मा पर पड़ता है, जहा पर कि राग-द्वेष की परिणति होती है। इस विचार को लेकर ही प्रिय और अप्रिय शब्द को क्रमशः राग और द्वेष का हेतु बताया गया है, परन्तु जिस आत्मा में भावो की सम परिणति होती है, उस पर शब्द की प्रियता और अप्रियता का कोई प्रभाव नही पडता अर्थात् वह प्रिय शब्द को सुनकर उसमें अनुरक्त नहीं होता और अप्रिय शब्द से उसमें द्वेष की उत्पत्ति नहीं होती। इस हेतु से उसको वीतराग कहा गया है इत्यादि। अब इसी विषय को पल्लवित करते हुए फिर कहते हैंसदस्स सोयं गहणं वयंति, सोयस्स सदं गहणं वयंति । रागस्स हेउं समणुन्नमाहु, दोसस्स हेडं अमणुन्नमाहु ॥ छत्तीस ॥ शब्दस्य श्रोत्रं ग्राहकं वदन्ति, श्रोत्रस्य शब्दं ग्राह्यं वदन्ति । रागस्य हेतुं समनोज्ञमाहुः, द्वेषस्य हेतुममनोज्ञमाहुः ॥ छत्तीस ॥ पदार्थान्वयः - सद्दस्स - शब्द का, सोय - श्रोत्र को, गहणं- ग्राहक, वयंति- कहते हैं- और, सोयस्स - श्रोत्र का, सद्द - शब्द को, गहणं - ग्राह्य वयंति कहते हैं, रागस्सराग का, हेडं हेतु, समणुन्नं - मनोज्ञ को, आहु-कहा है, दोसस्स-द्वेष का, हेउं - - हेतु, अमणुन्नं - अमनोज को, आहु-कहा गया है। मूलार्थ - श्रोत्र - इन्द्रिय को शब्द का ग्राहक और शब्द को श्रोत्र का ग्राह्य कहते हैं। जो मनोज्ञ शब्द है वह राग का हेतु है और अमनोज्ञ शब्द को द्वेष का कारण बताया गया है। टीका - तीर्थकर ने शब्द और श्रोत्र - इन्द्रिय का परस्पर ग्राह्य ग्राहक सम्बन्ध प्रतिपादन किया है, अर्थात् श्रोत्र - इन्द्रिय शब्द का ग्रहण करती है और शब्द उसके द्वारा ग्रहण किया जाता है, परन्तु इनमे जो प्रिय शब्द है, वह राग का उत्पादक है जो कटु शब्द है उससे द्वेष की उत्पत्ति होती है। इस विषय की उपयोगी अधिक व्याख्या पूर्व गाथाओं मे-चक्षु- इन्द्रिय के प्रकरण मे कर दी गई है, इसलिए यहां पर नहीं की गई । प्रिय शब्द में आसक्त होने से जो हानि होती है, अब उसका वर्णन करते हुए कहते हैं सद्देसु जो गिद्धिमुवेइ तिव्वं, अकालियं पावइ से विणासं । रागाउरे हरिणमिगे व मुद्धे, सद्दे अतित्ते समुवेइ मच्चुं ॥ सैंतीस ॥ शब्देषु यो गृद्धिमुपैति तीव्राम्, अकालिकं प्राप्नोति स विनाशम् । रागातुरो हरिणमृग इव मुग्धः, शब्देऽतृप्तः समुपैति मृत्युम् ॥ सैंतीस ॥ उत्तराध्ययन सूत्रम् तृतीय भाग [ दो सौ बयालीस] पमायट्ठाणं बत्तीसइमं अज्झयणं पदार्थान्वयः - सद्देसु - शब्दों में, जो-जो, तिव्वं तीव्र, गिद्धिं - गृद्धि-मूर्च्छा - को, उवेड़- प्राप्त होता है, से वह, अकालियं अकाल में ही, विणासं - विनाश को, पावइ - प्राप्त होता है, रागाउरे - राग में आसक्त हुआ, हरिणमिगे- हरिण - मृग, व- की तरह, मुद्धे - मुग्ध, सद्दे - शब्द से, अतित्ते- अतृप्त हुआ, मच्चुं - मृत्यु को, समुवेइ प्राप्त होता है। मूलार्थ- शब्दों के विषय में अत्यन्त मूर्छित होने वाला जीव अकाल में ही विनाश अर्थात् मृत्यु को प्राप्त हो जाता है, जैसे राग में आसक्त हुआ हरिण-मृग मुग्ध होकर शब्द के श्रवण में सन्तोष को न प्राप्त होता हुआ मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। टीका - प्रस्तुत गाथा में शब्दविषयक बढ़े हुए राग से उत्पन्न होने वाली हानि का दिग्दर्शन कराया गया है। जैसे राग में मस्त हुआ हरिण- मृग अपने प्राणों को दे देता है, अर्थात् नाद- माधुर्य के लोभ में वह अपने प्राणो को खो बैठता है, ठीक उसी प्रकार से शब्दों के श्रवण में अत्यन्त मूर्च्छित आसक्त होने वाला जीव अकाल में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। यद्यपि मृग शब्द हरिण के अर्थ में भी प्रसिद्ध है, तथापि हरिण शब्द का पृथक् प्रयोग होने से वह यहां पर कस्तूरी मृग का वाचक बन जाता है। अब द्वेष के विषय में कहते हैंजे यावि दोसं समुवेइ तिव्वं, तंसि क्खणे से उ उवेइ दुक्खं । दुद्दंतदोसेण सएण जंतू, न किंचि सद्दं अवरज्झई से ॥ अड़तीस ॥ यश्चापि द्वेषं समुपैति तीव्रं, तस्मिन् क्षणे स तूपैति दुःखम् । दुर्दान्तदोषेण स्वकेन जन्तु, न किञ्चिच्छब्दोऽपराध्यति तस्य ॥ अड़तीस ॥ पदार्थान्वय. - जे-जो कोई - अमनोज्ञ शब्द में, तिव्वं तीव्र, दोसं - द्वेष, समुवेइ करता है, से वह, तंसि क्खणे- उसी क्षण मे, दुक्ख दुःख को, उवेइ प्राप्त हो जाता है, सएण-स्वकृत, दुद्दंतेण- दुर्दान्त, दोसेण-दोष से, जंतू - जीव, परच, से उसका, सद्द - शब्द, किंचि - किचिन्मात्र भी, न अवरज्झई- अपराध नही करता। मूलार्थ- जो कोई जीव अप्रिय शब्द में तीव्र द्वेष करता है, वह स्वकृत दुर्दान्त दोष से उसी क्षण में दुःख को प्राप्त हो जाता है, परन्तु वह अप्रिय शब्द उस जीव का कुछ भी अपराध नहीं करता, अर्थात् वह शब्द उसको दुःख देने वाला नहीं होता। टीका - प्रस्तुत गाथा में शब्द - विषयक द्वेष करने का फल बताते हुए शास्त्रकार कहते है कि शब्दविषयक द्वेष करने से अर्थात् अप्रिय शब्द को सुनकर मन में द्वेष उत्पन्न करने से यह जीव उसी दुःख का अनुभव करने लग जाता है, परन्तु इस दुःख का कारण उसका अपना दोष है न कि किसी भाषा के कवि ने इस विषय मे क्या ही अच्छा कहा है नाद के लोभ दहे मृग प्राणन, बीन सुने अहि आप बधावे। उत्तराध्ययन सूत्रम् - तृतीय भाग [ दो सौ तैंतालीस] पमायट्ठाणं बत्तीसइमं अज्झयणं - अप्रिय शब्द का इसमें कोई अपराध है। कारण यह है कि दुःख का हेतु अन्तःकरण में उत्पन्न होने वाला द्वेषमूलक निकृष्ट अध्यवसाय है। उसी के कारण यह जीव दुःख का संवेदन करता है। इसलिए श्रोत्र - इन्द्रिय का दमन करना ही मुमुक्षु पुरुष का सबसे पहला कर्त्तव्य है। अब राग और द्वेष को अनर्थ का कारण बताते हुए फिर कहते हैं एगंतरते रुइरंसि सदे, अतालिसे से कुणई पओसं । दुक्खस्स संपीलमुवेइ बाले, न लिप्पई तेण मुणी विरागो ॥ उनतालीस ॥ एकान्तरक्तो रुचिरे शब्दे, अतादृशे सः कुरुते प्रद्वेषम् । दुःखस्य सम्पीडामुपैति बाल., न लिप्यते तेन मुनिर्विरागः ॥ उनतालीस ॥ पदार्थान्वयःएगंतरत्ते - एकान्त रक्त, रुइरंसि - मनोहर, सद्दे - शब्द में, अतालिसे- अमनोहर शब्द में, पओसं - प्रद्वेष, कुणई करता है, बाले- अज्ञानी, दुक्खस्स - दुःख की, संपीलं- पीडा को, उवेइ - प्राप्त होता है, तेण- उस पीडा से, विरागो-वैराग्ययुक्त, मुणी- मुनि, न- नही, लिप्पई - लिप्त मूलार्थ - जो जीव एकान्त मनोहर शब्द में तो अनुरक्त होता है और अमनोहर शब्द में द्वेष - करता है वह अज्ञानी जीव दुःख की पीड़ा को प्राप्त होता है, परन्तु जो विरक्त मुनि है वह उससे लिप्त नहीं होता। टीका - प्रस्तुत गाथा मे राग-द्वेष की परिणति और उसके त्याग का फल बताते हुए शास्त्रकार कहते है कि जो जीव प्रिय शब्द मे राग और अप्रिय मे द्वेष करता है, वह दु.ख सम्बन्धी वेदना का अवश्य अनुभव करता है, अतएव वह बाल अर्थात् अज्ञानी जीव है, परन्तु जो मुनि विरक्त है अर्थात् जिसकी आत्मा में प्रिय और अप्रिय शब्द को सुनकर राग-द्वेष के भाव उत्पन्न नही होते उसको दुःख का सम्पर्क नहीं होता, अर्थात् वह सुखी है। इससे स्पष्ट सिद्ध है कि दुःख रूप व्याधि का मूल कारण राग-द्वेष की परिणतिविशेष ही है, अत सुख की इच्छा रखने वाले को इसके परित्याग में ही उद्यम करना चाहिए। अब राग को हिंसादि आस्त्रवों का कारण बताते हुए शास्त्रकार कहते हैं, किसद्दाणुगासाणुगए य जीवे, चराचरे हिंसइ णेगरूवे । चित्तेहि ते परितावेइ बाले, पीलेइ अत्तट्ठगुरू किलिट्ठे ॥ चालीस ॥ चराचरान् हिनस्त्यनेकारूपान् । चित्रैस्तान् परितापयति बालः, पीडयत्यात्मार्थगुरुः क्लिष्ट ॥ चालीस ॥ पदार्थान्वयः- सद्दाणुगासा- शब्द की आशा से, अणुगए- अनुगत जीवे- जीव, य-फिर, चराचरे-चर और अचर, अणेगरूवे अनेक प्रकार के जीवो की, हिंसइ हिंसा करता है, बाले- अज्ञानी, उत्तराध्ययन सूत्रम् - तृतीय भाग [ दो सौ चौंतालीस] पमायट्ठाण बत्तीसइम अज्झयण
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मुंगेर विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रश्न पत्रों के रखरखाव में लापरवाही बरतने के आरोप में श्रीकृष्ण राम रुचि महाविद्यालय बरबीघा के प्रभारी प्राचार्य डॉ नवल प्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं निलंबन की अवधि के दौरान उनका मुख्यालय रामाधीन महाविद्यालय शेखपुरा कर दिया है।
जबकि, मुंगेर विश्व विद्यालय प्रशासन ने महा विद्यालय के ही वाणिज्य विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ राजमनोहर कुमार को एसकेआर कॉलेज बरबीघा का नया प्रभारी प्राचार्य सह केंद्राधीक्षक नियुक्त किया है। इसको लेकर कुलपति प्रो. श्यामा राय के आदेश पर प्रभारी कुलसचिव सह डीएसडब्बल्यू डॉ अनूप कुमार ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ नवल प्रसाद के निलंबन को लेकर प्रभारी कुलसचिव ने कहा कि एसकेआर क़ॉलेज बरबीघा के केंद्राधीक्षक सह कॉलेज प्रिंसिपल को स्नातक पार्ट वन और टू की परीक्षा के दौरान पाली में प्रश्न पत्र को लेकर हुई गड़बड़ी के मामले में अगले आदेश तक निलंबित किया जाता है।
हालांकि, इस मामले में प्राचार्य अपनी गलती पहले ही स्वीकार कर ली थी और खुद ही विश्व विद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर इस बारे में अवगत कराया था। उधर विश्व विद्यालय प्रशासन की इस सख्ती के बाद कॉलेजों में गड़बड़ी बरतने वालों में भय देखा जा रहा है।
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मुंगेर विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रश्न पत्रों के रखरखाव में लापरवाही बरतने के आरोप में श्रीकृष्ण राम रुचि महाविद्यालय बरबीघा के प्रभारी प्राचार्य डॉ नवल प्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं निलंबन की अवधि के दौरान उनका मुख्यालय रामाधीन महाविद्यालय शेखपुरा कर दिया है। जबकि, मुंगेर विश्व विद्यालय प्रशासन ने महा विद्यालय के ही वाणिज्य विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ राजमनोहर कुमार को एसकेआर कॉलेज बरबीघा का नया प्रभारी प्राचार्य सह केंद्राधीक्षक नियुक्त किया है। इसको लेकर कुलपति प्रो. श्यामा राय के आदेश पर प्रभारी कुलसचिव सह डीएसडब्बल्यू डॉ अनूप कुमार ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ नवल प्रसाद के निलंबन को लेकर प्रभारी कुलसचिव ने कहा कि एसकेआर क़ॉलेज बरबीघा के केंद्राधीक्षक सह कॉलेज प्रिंसिपल को स्नातक पार्ट वन और टू की परीक्षा के दौरान पाली में प्रश्न पत्र को लेकर हुई गड़बड़ी के मामले में अगले आदेश तक निलंबित किया जाता है। हालांकि, इस मामले में प्राचार्य अपनी गलती पहले ही स्वीकार कर ली थी और खुद ही विश्व विद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर इस बारे में अवगत कराया था। उधर विश्व विद्यालय प्रशासन की इस सख्ती के बाद कॉलेजों में गड़बड़ी बरतने वालों में भय देखा जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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आईसीसी विश्व कप 2019 के चौथे अभ्यास मैच में भारत का मुकाबला न्यूजीलैंड से होने वाला है। यह मुकाबला लंदन के द ओवल के मैदान पर खेला जायेगा। भारतीय टीम ने इस मैच से टूर्नामेंट शुरू होने से पहले अपने बेस्ट प्लेइंग इलेवन की तलाश करना चाहेगी। वहीं न्यूजीलैंड के इरादेस भी कुछ इसे ही होंगे।
भारतीय टीम विश्व कप के अभ्यास मैच से पहले चोट से जूझ रही है। टीम को अभ्यास मैच से ठीक एक दिन पहले दो बड़े झटके लगे हैं। सलामी बल्लेबाज शिखर धवन के हेलमेट की ग्रिल पर गेंद लगी और उनके मुंह से खून आने लगा।
वह इस मैच में खेलेंगे या नहीं इसपर अभी स्थिति साफ़ नहीं है। वहीं ऑलराउंडर विजय शंकर भी चोटिल हो गये हैं। खलील अहमद की बाउंसर को पुल करने के क्रम में गेंद उनके कंधे पर लगी है। अभी तक उनकी चोट पर भी कोई रिपोर्ट नहीं आया है।
अभ्यास मैच में भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। इस मैच में दोनों टीमों अपने सभी खिलाड़ियों को मौका दे सकती है।
किसी भी टूर्नामेंट से पहले दोनों वाले अभ्यास मैचों में टीम अपने सभी खिलाड़ियों को मौका दे सकती है। ओवल में आज बादल छाये हुए हैं और इसी वजह से तेज गेंदबाजों को काफी मदद मिल सकती है। न्यूजीलैंड के पास ट्रेंट बोल्ट और टिम सऊदी जैसे गेंदबाज हैं और टीम इंडिया को उनसे सचेत रहने की जरूरत है।
चोट को ध्यान में रखकर विराट कोहली ने केदार जाधव और विजय शंकर को अभ्यास मैच से बाहर रखा है.
इस प्रकार हैं दोनों टीमेंः
न्यूजीलैंडः केन विलियमसन (कप्तान), टॉम ब्लंडेल (विकेटकीपर), ट्रेंट बोल्ट, रॉस टेलर, कॉलिन डी ग्रैंडहोमे, लॉकी फर्ग्यूसन, मार्टिन गुप्टिल, मैट हेनरी, टॉम लाथम (विकेटकीपर), कॉलिन मुनरो, जिमी नीशम, हेनरी निकोल्स, मिशेल सेंटनर, ईश सोढ़ी, टिम साउथी (उपकप्तान)
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आईसीसी विश्व कप दो हज़ार उन्नीस के चौथे अभ्यास मैच में भारत का मुकाबला न्यूजीलैंड से होने वाला है। यह मुकाबला लंदन के द ओवल के मैदान पर खेला जायेगा। भारतीय टीम ने इस मैच से टूर्नामेंट शुरू होने से पहले अपने बेस्ट प्लेइंग इलेवन की तलाश करना चाहेगी। वहीं न्यूजीलैंड के इरादेस भी कुछ इसे ही होंगे। भारतीय टीम विश्व कप के अभ्यास मैच से पहले चोट से जूझ रही है। टीम को अभ्यास मैच से ठीक एक दिन पहले दो बड़े झटके लगे हैं। सलामी बल्लेबाज शिखर धवन के हेलमेट की ग्रिल पर गेंद लगी और उनके मुंह से खून आने लगा। वह इस मैच में खेलेंगे या नहीं इसपर अभी स्थिति साफ़ नहीं है। वहीं ऑलराउंडर विजय शंकर भी चोटिल हो गये हैं। खलील अहमद की बाउंसर को पुल करने के क्रम में गेंद उनके कंधे पर लगी है। अभी तक उनकी चोट पर भी कोई रिपोर्ट नहीं आया है। अभ्यास मैच में भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। इस मैच में दोनों टीमों अपने सभी खिलाड़ियों को मौका दे सकती है। किसी भी टूर्नामेंट से पहले दोनों वाले अभ्यास मैचों में टीम अपने सभी खिलाड़ियों को मौका दे सकती है। ओवल में आज बादल छाये हुए हैं और इसी वजह से तेज गेंदबाजों को काफी मदद मिल सकती है। न्यूजीलैंड के पास ट्रेंट बोल्ट और टिम सऊदी जैसे गेंदबाज हैं और टीम इंडिया को उनसे सचेत रहने की जरूरत है। चोट को ध्यान में रखकर विराट कोहली ने केदार जाधव और विजय शंकर को अभ्यास मैच से बाहर रखा है. इस प्रकार हैं दोनों टीमेंः न्यूजीलैंडः केन विलियमसन , टॉम ब्लंडेल , ट्रेंट बोल्ट, रॉस टेलर, कॉलिन डी ग्रैंडहोमे, लॉकी फर्ग्यूसन, मार्टिन गुप्टिल, मैट हेनरी, टॉम लाथम , कॉलिन मुनरो, जिमी नीशम, हेनरी निकोल्स, मिशेल सेंटनर, ईश सोढ़ी, टिम साउथी
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गाजीपुर बोर्डर पर रैपिड एक्शन फोर्स खड़ी है. बोर्डर खाली करवाने के लिए कभी भी कार्रवाई शूरू की जा सकती है. किसान नेता राकेश टिकैत के लोगों को विरोध प्रदर्शन जारी है. राकेश टिकैत ने रोते - रोते आंदोलन जारी रखने की बात कही है. बोर्डर पर पुलिस तैनात है.
राकेश टिकैत ने कहा, यहां भाजपा के सांसद मौजूद हैं, उनके साथ बंदूक, डंडे लेकर मौजूद है किसानों की हत्या की जा सकती है. मैं किसानों के साथ गलत नहीं होने दूंगा. राकेश टिकैत ने कहा, अगर तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो मैं आत्महत्या कर लूंगा. मैं किसानों के साथ बुरा होता हुआ नहीं देख सकता.
गणतंत्र दिवस में हुई हिंसा के बाद अब किसान आंदोलन कमजोर पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश दिया है कि दिल्ली यूपी बोर्डर खाली कराया जाये. बोर्डर पर पुलिस तैनात है. गणतंत्र दिवस में हुई हिंसा के बाद कई किसान संगठन आंदोलन से बाहर आ चुके हैं.
राकेश टिकैत गाजीपुर बोर्डर पर मौजूद हैं उन्होंने कहा, मैं अनशन करूंगा और तबतक पानी नहीं पीऊंगा जबतक मेरे गांव वाले मुझे पानी नहीं लाकर देते. मैंने देश के लोगों से तिरंगा मांगा था मुझे मिला था. अब पानी भी गांव वाले ही पिलायेंगे.
राकेश टिकैत अपने समर्थकों के साथ अब भी गाजीपुर बोर्डर पर मौजूद हैं उनके समर्थकों ने भी कहा है कि हम अपने नेता के साथ हैं औऱ इस आंदोलन को जारी रखेंगे. दूसरी तरफ दूसरे किसान संगठनों ने भी अपील की है कि इस आंदोलन की वजह से देश का अपमान हुआ है, हम नहीं चाहते कि हिंसा हो, हम नहीं चाहते अपने ही लोगों को नुकसान पहुंचे इसलिए आंदोलन वापस ले लेना चाहिए.
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गाजीपुर बोर्डर पर रैपिड एक्शन फोर्स खड़ी है. बोर्डर खाली करवाने के लिए कभी भी कार्रवाई शूरू की जा सकती है. किसान नेता राकेश टिकैत के लोगों को विरोध प्रदर्शन जारी है. राकेश टिकैत ने रोते - रोते आंदोलन जारी रखने की बात कही है. बोर्डर पर पुलिस तैनात है. राकेश टिकैत ने कहा, यहां भाजपा के सांसद मौजूद हैं, उनके साथ बंदूक, डंडे लेकर मौजूद है किसानों की हत्या की जा सकती है. मैं किसानों के साथ गलत नहीं होने दूंगा. राकेश टिकैत ने कहा, अगर तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो मैं आत्महत्या कर लूंगा. मैं किसानों के साथ बुरा होता हुआ नहीं देख सकता. गणतंत्र दिवस में हुई हिंसा के बाद अब किसान आंदोलन कमजोर पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश दिया है कि दिल्ली यूपी बोर्डर खाली कराया जाये. बोर्डर पर पुलिस तैनात है. गणतंत्र दिवस में हुई हिंसा के बाद कई किसान संगठन आंदोलन से बाहर आ चुके हैं. राकेश टिकैत गाजीपुर बोर्डर पर मौजूद हैं उन्होंने कहा, मैं अनशन करूंगा और तबतक पानी नहीं पीऊंगा जबतक मेरे गांव वाले मुझे पानी नहीं लाकर देते. मैंने देश के लोगों से तिरंगा मांगा था मुझे मिला था. अब पानी भी गांव वाले ही पिलायेंगे. राकेश टिकैत अपने समर्थकों के साथ अब भी गाजीपुर बोर्डर पर मौजूद हैं उनके समर्थकों ने भी कहा है कि हम अपने नेता के साथ हैं औऱ इस आंदोलन को जारी रखेंगे. दूसरी तरफ दूसरे किसान संगठनों ने भी अपील की है कि इस आंदोलन की वजह से देश का अपमान हुआ है, हम नहीं चाहते कि हिंसा हो, हम नहीं चाहते अपने ही लोगों को नुकसान पहुंचे इसलिए आंदोलन वापस ले लेना चाहिए.
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मेवाड़ के प्रमुख शक्ति पीठ ईडाणा माता मंदिर में सोमवार देर शाम दो दर्जन से अधिक लोगों ने धावा बोला और मंदिर में लूटपाट की। इस दौरान इन बदमाशों ने कर्मचारियों के साथ मारपीट करते हुए मोबाईल छीन लिए और दानपात्रों पर ताले लगा दिए। करीब एक घंटे तक मंदिर परिसर में हुड़दंग किया। घटना की जानकारी मिलने मौके पर गींगला थाने से जाब्ता, उच्चाधिकारी भी पहुंचे और मौका-मुआयना किया।
ईडाणा माता शक्तिपीठ पर सोमवार शाम ग्रामीणों ने वहां कें कर्मचारियों को धमकाते हुए दानपात्र, कमरों के ताले लगा दिए। सूचना पर गींगला थाना पुलिस मौके पर पहुंची तब वहां कोई नहीं मिला। गार्ड की रिर्पोट पर मामला दर्ज किया गया है। ईडाणा माताजी ट्रस्ट के सिक्योरिटी गार्ड हरिसिंह ने बताया कि गांव के 40-50 लोग एक साथ शाम मंदिरा पहुंचे और कर्मचारियों को धमकाते हुए मोबाइल छीन लिए और कमरों के ताले लगा दिए। बाद में सीसीटीवी कैमरे, डीवीआर को भी नुकसान पहुंचाया गया। एक साथ दर्जनों की संख्या में लोगों के आने पर वहां पर आफरा-तफरी मच गई।
ट्रस्ट प्रबंधक लच्छीराम को सूचना मिलने पर संरक्षक लवदेवकुमार सिंह कृष्णावत, अध्यक्ष डॉ. कमलेन्द्र सिंह को सूचना दी। जिस पर इस घटना की जानकारी एसपी को दी। एसपी के निर्देश पर सलूम्बर डिप्टी सुधा पालावत, थानाधिकारी तेजकरण सिंह मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों से घटना की जानकारी ली। पुलिस प्रकरण की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि ट्रस्ट को लेकर ग्रामीणों और सदस्यों के बीच लंबे समय से विवाद है, ऐसे में आरोपो की जांच की जा रही है।
इनपुट - नारायण मेघवाल।
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मेवाड़ के प्रमुख शक्ति पीठ ईडाणा माता मंदिर में सोमवार देर शाम दो दर्जन से अधिक लोगों ने धावा बोला और मंदिर में लूटपाट की। इस दौरान इन बदमाशों ने कर्मचारियों के साथ मारपीट करते हुए मोबाईल छीन लिए और दानपात्रों पर ताले लगा दिए। करीब एक घंटे तक मंदिर परिसर में हुड़दंग किया। घटना की जानकारी मिलने मौके पर गींगला थाने से जाब्ता, उच्चाधिकारी भी पहुंचे और मौका-मुआयना किया। ईडाणा माता शक्तिपीठ पर सोमवार शाम ग्रामीणों ने वहां कें कर्मचारियों को धमकाते हुए दानपात्र, कमरों के ताले लगा दिए। सूचना पर गींगला थाना पुलिस मौके पर पहुंची तब वहां कोई नहीं मिला। गार्ड की रिर्पोट पर मामला दर्ज किया गया है। ईडाणा माताजी ट्रस्ट के सिक्योरिटी गार्ड हरिसिंह ने बताया कि गांव के चालीस-पचास लोग एक साथ शाम मंदिरा पहुंचे और कर्मचारियों को धमकाते हुए मोबाइल छीन लिए और कमरों के ताले लगा दिए। बाद में सीसीटीवी कैमरे, डीवीआर को भी नुकसान पहुंचाया गया। एक साथ दर्जनों की संख्या में लोगों के आने पर वहां पर आफरा-तफरी मच गई। ट्रस्ट प्रबंधक लच्छीराम को सूचना मिलने पर संरक्षक लवदेवकुमार सिंह कृष्णावत, अध्यक्ष डॉ. कमलेन्द्र सिंह को सूचना दी। जिस पर इस घटना की जानकारी एसपी को दी। एसपी के निर्देश पर सलूम्बर डिप्टी सुधा पालावत, थानाधिकारी तेजकरण सिंह मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों से घटना की जानकारी ली। पुलिस प्रकरण की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि ट्रस्ट को लेकर ग्रामीणों और सदस्यों के बीच लंबे समय से विवाद है, ऐसे में आरोपो की जांच की जा रही है। इनपुट - नारायण मेघवाल। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Chhattisgarh News: BJP ने किए बदलाव, तो Congress . भी एक्शन मोड में । Breaking News । Latest News Chhattisgarh assembly election को कुछ महीने ही बचे है. ऐसे में सभी पार्टी प्रचार करने में लगी हुई है साथ ही सभी दल एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहें है. सभी राजनीतिक पार्टियों ने संगठनात्मक रूप से रणनीति लगभग बना ली है.
सीमा हैदर के लिए क्या कानूनी मुसीबतें हो सकती हैं. . . वापस भेजी जाएंगी पाक?
भाजपा को 'चित' करने की कवायद, नीतीश-तेजस्वी के लिए ललन ने चला यह 'दांव'
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Chhattisgarh News: BJP ने किए बदलाव, तो Congress . भी एक्शन मोड में । Breaking News । Latest News Chhattisgarh assembly election को कुछ महीने ही बचे है. ऐसे में सभी पार्टी प्रचार करने में लगी हुई है साथ ही सभी दल एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहें है. सभी राजनीतिक पार्टियों ने संगठनात्मक रूप से रणनीति लगभग बना ली है. सीमा हैदर के लिए क्या कानूनी मुसीबतें हो सकती हैं. . . वापस भेजी जाएंगी पाक? भाजपा को 'चित' करने की कवायद, नीतीश-तेजस्वी के लिए ललन ने चला यह 'दांव'
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आज समाज डिजिटल, Share Market On Budget Day : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण थोड़ी ही देर में अपना 5वां बजट संसद में पेश करेंगी। बजट से पहले सभी की निगाहें शेयर बाजार पर भी टिकी है। हालांकि बजट से पहले से भारतीय शेयर बाजार बढ़त में खुला है। सेंसेक्स में 500 से ज्यादा अंकों की तेजी है तो वहीं निफ्टी भी 150 अंक बढ़कर कारोबार कर रहा है। आज बैंक और आईटी शेयरों में अच्छी खरीदारी है। ग्लोबल संकेत भी बेहतर हैं। मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में अच्छी बढ़त देखने को मिली है।
बीते 7 सालों में बजट के दिन औसतन 0. 9 प्रतिशत का पॉजिटिव मूवमेंट आया है। पिछले 3 बजट में 1. 5% का उतार-चढ़ाव रहा है। 2021 में बजट के दिन बाजार में 5% की तेजी आई थी।
हर सेक्टर में तेजी (Share Market On Budget Day)
सेंसेक्स 30 के 29 शेयर हरे निशान में हैं। आज के टॉप गेनर्स में ICICI BANK, KOTAK BANK, HDFC BANK, SBI, TATASTEEL, TECHM, HDFC, HUL, WIPRO शामिल हैं। लगभग हर सेक्टर में खरीदारी है। निफ्टी पर बैंक और फाइनेंशियल इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा मजबूत हुए हैं। वहीं रियल्टी इंडेक्स भी 1 फीसदी मजबूत हुआ है। मेटल इंडेक्स में करीब 1 फीसदी और ऑटा इंडेक्स में आधा फीसदी बढ़त है। फार्मा, एफएमसीजी समेत अन्य इंडेक्स भी हरे निशान में हैं। आज हैवीवेट शेयरों में खरीदारी देखने को मिल रही है।
उतार चढ़ाव के बीच ब्रेंट क्रूड में हल्की तेजी आई है। क्रूड इंटरनेशनल मार्केट में 85 डॉलर प्रति बैरल के पार है। जबकि अमेरिकी क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल पर है।
बीते दिन भी बढ़त में बंद हुआ था बाजार (Budget 2023)
शेयर बाजार में बीते दिन मंगलवार (31 जनवरी) को भी बढ़त में बंद हुआ था। तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 49 अंकों की तेजी के साथ 59,549 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 13 अंकों की तेजी के साथ 17,662 के स्तर पर पहुंच गया। लगातार दूसरे कारोबारी दिन मार्केट में यह तेजी आई। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 15 में तेजी और 15 शेयरों में ही गिरावट रही थी।
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आज समाज डिजिटल, Share Market On Budget Day : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण थोड़ी ही देर में अपना पाँचवां बजट संसद में पेश करेंगी। बजट से पहले सभी की निगाहें शेयर बाजार पर भी टिकी है। हालांकि बजट से पहले से भारतीय शेयर बाजार बढ़त में खुला है। सेंसेक्स में पाँच सौ से ज्यादा अंकों की तेजी है तो वहीं निफ्टी भी एक सौ पचास अंक बढ़कर कारोबार कर रहा है। आज बैंक और आईटी शेयरों में अच्छी खरीदारी है। ग्लोबल संकेत भी बेहतर हैं। मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में अच्छी बढ़त देखने को मिली है। बीते सात सालों में बजट के दिन औसतन शून्य. नौ प्रतिशत का पॉजिटिव मूवमेंट आया है। पिछले तीन बजट में एक. पाँच% का उतार-चढ़ाव रहा है। दो हज़ार इक्कीस में बजट के दिन बाजार में पाँच% की तेजी आई थी। हर सेक्टर में तेजी सेंसेक्स तीस के उनतीस शेयर हरे निशान में हैं। आज के टॉप गेनर्स में ICICI BANK, KOTAK BANK, HDFC BANK, SBI, TATASTEEL, TECHM, HDFC, HUL, WIPRO शामिल हैं। लगभग हर सेक्टर में खरीदारी है। निफ्टी पर बैंक और फाइनेंशियल इंडेक्स एक फीसदी से ज्यादा मजबूत हुए हैं। वहीं रियल्टी इंडेक्स भी एक फीसदी मजबूत हुआ है। मेटल इंडेक्स में करीब एक फीसदी और ऑटा इंडेक्स में आधा फीसदी बढ़त है। फार्मा, एफएमसीजी समेत अन्य इंडेक्स भी हरे निशान में हैं। आज हैवीवेट शेयरों में खरीदारी देखने को मिल रही है। उतार चढ़ाव के बीच ब्रेंट क्रूड में हल्की तेजी आई है। क्रूड इंटरनेशनल मार्केट में पचासी डॉलर प्रति बैरल के पार है। जबकि अमेरिकी क्रूड उन्यासी डॉलर प्रति बैरल पर है। बीते दिन भी बढ़त में बंद हुआ था बाजार शेयर बाजार में बीते दिन मंगलवार को भी बढ़त में बंद हुआ था। तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स उनचास अंकों की तेजी के साथ उनसठ,पाँच सौ उनचास के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी तेरह अंकों की तेजी के साथ सत्रह,छः सौ बासठ के स्तर पर पहुंच गया। लगातार दूसरे कारोबारी दिन मार्केट में यह तेजी आई। सेंसेक्स के तीस शेयरों में से पंद्रह में तेजी और पंद्रह शेयरों में ही गिरावट रही थी।
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पतलीकूहल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने सोमवार को अस्पताल में चौबीस घंटे मिलने वाली आपातकालीन सेवा का विधिवत रूप से शुभारंभ किया। 30 बिस्तर वाले इस सीएचसी में पुरुष, स्त्री व जनरल वार्ड की सुविधा हो गई है। वहीं पर सीएचसी में कृष्णा डायग्रोस्टिक लैब सोमवार से आधुनिक टेस्ट की सुविधा से लैस हो गई है। इसमें पेशाब विश्लेषण की सुविधा होगी जो नग्गर खंड के किसी भी अस्पताल में नहीं हैं। मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने अस्पताल में सर्वप्रथम आपातकालीन सेवाओं का विधिवत रूप से पूजा-अर्चना से इसका शुभारंभ किया। उसके पश्चात आधुनिक उपकरणों के लैस कृष्णा डायग्रोस्टिक लैब का भी रिबन काटकर इस कार्य के लिए एनजीओ को आभार जताया।
अस्पताल के सभागार कक्ष में सभी गणमान्यों व्यक्तियों का स्वास्थ्य एवं कल्याण विभाग के कुल्लू में तैनात मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. नागराज पवार ने विधायक का पारंपारिक रूप से टोपी व मफलर पहनाकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यातिथि विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व चिकित्सकों व पूरे सीएचसी स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि दो महीनों के अंदर ही जिस तरह से इस सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं देने के साथ चौबीस घंटे आपातकालीन सेवाएं क्षेत्रों के लोगों को पिछले दो महीनों से अधिक समय से मिल रही है। उन्होंने कहा कि जिला कुल्लू के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. नागराज पवार ने जिस तरह से इस सीएचसी में स्वास्थ्य बेहतर सवाओं को मुहैया करवाने के लिए प्रयास किए हैं, आज वह लोगों के समक्ष हैं। उन्होंने कहा कि सीएचसी में एक्स-रे मशीन, सिटीस्कैन व रेडियोलोजिस्ट की कमी को भी शीघ्र पूरा करने के प्रयास किए जाएंगें ताकि यह सीएचसी कुल्लू व मनाली का केंद्र स्थल होने पर यहां पर सारी सुविधाएंं लोगों को मिलें। इस अवसर पर मैडिकल आफिसर डा. दोरजे, डा. धनंजय ठाकुर, आईपीएच अधिशाषी अभियंता अनूप शर्मा, ग्राम पंचायत हलाण-2 की प्रधान सीमा देवी, नग्गर पंचायत के प्रधान प्रदीप कुमार और समाजसेवी कृष्णलाल संकल्प, अमित शर्मा, मिथुन, डिंपल नेगी सहित क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने इस समारोह में शिरकत की।
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पतलीकूहल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने सोमवार को अस्पताल में चौबीस घंटे मिलने वाली आपातकालीन सेवा का विधिवत रूप से शुभारंभ किया। तीस बिस्तर वाले इस सीएचसी में पुरुष, स्त्री व जनरल वार्ड की सुविधा हो गई है। वहीं पर सीएचसी में कृष्णा डायग्रोस्टिक लैब सोमवार से आधुनिक टेस्ट की सुविधा से लैस हो गई है। इसमें पेशाब विश्लेषण की सुविधा होगी जो नग्गर खंड के किसी भी अस्पताल में नहीं हैं। मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने अस्पताल में सर्वप्रथम आपातकालीन सेवाओं का विधिवत रूप से पूजा-अर्चना से इसका शुभारंभ किया। उसके पश्चात आधुनिक उपकरणों के लैस कृष्णा डायग्रोस्टिक लैब का भी रिबन काटकर इस कार्य के लिए एनजीओ को आभार जताया। अस्पताल के सभागार कक्ष में सभी गणमान्यों व्यक्तियों का स्वास्थ्य एवं कल्याण विभाग के कुल्लू में तैनात मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. नागराज पवार ने विधायक का पारंपारिक रूप से टोपी व मफलर पहनाकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यातिथि विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व चिकित्सकों व पूरे सीएचसी स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि दो महीनों के अंदर ही जिस तरह से इस सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं देने के साथ चौबीस घंटे आपातकालीन सेवाएं क्षेत्रों के लोगों को पिछले दो महीनों से अधिक समय से मिल रही है। उन्होंने कहा कि जिला कुल्लू के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. नागराज पवार ने जिस तरह से इस सीएचसी में स्वास्थ्य बेहतर सवाओं को मुहैया करवाने के लिए प्रयास किए हैं, आज वह लोगों के समक्ष हैं। उन्होंने कहा कि सीएचसी में एक्स-रे मशीन, सिटीस्कैन व रेडियोलोजिस्ट की कमी को भी शीघ्र पूरा करने के प्रयास किए जाएंगें ताकि यह सीएचसी कुल्लू व मनाली का केंद्र स्थल होने पर यहां पर सारी सुविधाएंं लोगों को मिलें। इस अवसर पर मैडिकल आफिसर डा. दोरजे, डा. धनंजय ठाकुर, आईपीएच अधिशाषी अभियंता अनूप शर्मा, ग्राम पंचायत हलाण-दो की प्रधान सीमा देवी, नग्गर पंचायत के प्रधान प्रदीप कुमार और समाजसेवी कृष्णलाल संकल्प, अमित शर्मा, मिथुन, डिंपल नेगी सहित क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने इस समारोह में शिरकत की।
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हम सभी चाहते हैं कि हमारे नाखून खूबसूरत नजर आए और इसके लिए हम आए दिन अपने नाखूनों पर तरह-तरह के नेल आर्ट भी करवाते हैं बात अगर ब्राइडल लुक की करें तो आजकल हर दूसरी आप और हम जैसी दुल्हन स्टाइलिश और अप-टू-डेट दिखना चाहती हैं वहीं आजकल नाखूनों को खूबसूरत बनाने के लिए ग्लिटर नेल आर्ट काफी चलन में नजर आ रहे हैं इसलिए आज हम आपको दिखाने वाले हैं ग्लिटर नेल आर्ट के कुछ लेटेस्ट डिजाइंस, जिन्हें आप अपने शादी के लिए चुन सकती हैं।
आजकल इस तरह के डबल शेड वाले नेल आर्ट को काफी पसंद किया जा रहा है। बता दें कि अगर आपकी ऑउटफिट पेस्टल कलर या ऐसे ही डबल कलर की है तो इस तरह का नेल आर्ट आपके लिए परफेक्ट रहेगा आप चाहे तो एक नेल की जगह 2 से 3 नेल पर अलग-अलग तरह से ग्लिटर लगवा सकती हैं।
देखने में ऐसा मैटेलिक कलर काफी यूनीक बोल्ड और यूनीक नजर आता है कि इस तरह का डिजाइन आप हर तरह के कलर के साथ कैरी कर सकती हैं। साथ ही इसमें आप अपने हिसाब से ग्लिटर एक से 3 उंगली में करवा सकती हैं। इसके अलावा आप चाहे तो ग्लॉसी की जगह मैट कलर भी चुन सकती हैं।
आजकल स्टोन वर्क को काफी पसंद किया जाता है। बता दें कि इस तरह का डिजाइन खासकर ब्राइड के लिए ही खास होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि देखने में ऐसा डिजाइन काफी भारी नजर आता है। आप चाहे तो स्टोन के साथ मोती भी लगवा सकती हैं।
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हम सभी चाहते हैं कि हमारे नाखून खूबसूरत नजर आए और इसके लिए हम आए दिन अपने नाखूनों पर तरह-तरह के नेल आर्ट भी करवाते हैं बात अगर ब्राइडल लुक की करें तो आजकल हर दूसरी आप और हम जैसी दुल्हन स्टाइलिश और अप-टू-डेट दिखना चाहती हैं वहीं आजकल नाखूनों को खूबसूरत बनाने के लिए ग्लिटर नेल आर्ट काफी चलन में नजर आ रहे हैं इसलिए आज हम आपको दिखाने वाले हैं ग्लिटर नेल आर्ट के कुछ लेटेस्ट डिजाइंस, जिन्हें आप अपने शादी के लिए चुन सकती हैं। आजकल इस तरह के डबल शेड वाले नेल आर्ट को काफी पसंद किया जा रहा है। बता दें कि अगर आपकी ऑउटफिट पेस्टल कलर या ऐसे ही डबल कलर की है तो इस तरह का नेल आर्ट आपके लिए परफेक्ट रहेगा आप चाहे तो एक नेल की जगह दो से तीन नेल पर अलग-अलग तरह से ग्लिटर लगवा सकती हैं। देखने में ऐसा मैटेलिक कलर काफी यूनीक बोल्ड और यूनीक नजर आता है कि इस तरह का डिजाइन आप हर तरह के कलर के साथ कैरी कर सकती हैं। साथ ही इसमें आप अपने हिसाब से ग्लिटर एक से तीन उंगली में करवा सकती हैं। इसके अलावा आप चाहे तो ग्लॉसी की जगह मैट कलर भी चुन सकती हैं। आजकल स्टोन वर्क को काफी पसंद किया जाता है। बता दें कि इस तरह का डिजाइन खासकर ब्राइड के लिए ही खास होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि देखने में ऐसा डिजाइन काफी भारी नजर आता है। आप चाहे तो स्टोन के साथ मोती भी लगवा सकती हैं।
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Dhartiputra: BJP प्रवक्ता ने की Sisodia की 'Acting', भड़के Congress नेता Prabhat Kumar !
Dhartiputra । रेलवे में जमीन के बदले नौकरी घोटाला (Land For Job Scam) मामले में ईडी (ED) ने अपनी जांच तेज कर दी है। इसी कड़ी में ईडी अधिकोरियों ने मुंबई से लेकर दिल्ली में कई जगहों पर छापेमारी की। बता दें छापेमारी लालू यादव के अलावा उनके रिश्तेदारों के आवास पर भी की गई। वहीं इस पूरे मामले को विपक्ष ने बदले का आरोप बताया है। इसी को लेकर जब डिबेट में BJP प्रवक्ता Anuja Kapur ने की Manish Sisodia की Acting की फिर भड़के Congress नेता Prabhat Kumar. .
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Dhartiputra: BJP प्रवक्ता ने की Sisodia की 'Acting', भड़के Congress नेता Prabhat Kumar ! Dhartiputra । रेलवे में जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में ईडी ने अपनी जांच तेज कर दी है। इसी कड़ी में ईडी अधिकोरियों ने मुंबई से लेकर दिल्ली में कई जगहों पर छापेमारी की। बता दें छापेमारी लालू यादव के अलावा उनके रिश्तेदारों के आवास पर भी की गई। वहीं इस पूरे मामले को विपक्ष ने बदले का आरोप बताया है। इसी को लेकर जब डिबेट में BJP प्रवक्ता Anuja Kapur ने की Manish Sisodia की Acting की फिर भड़के Congress नेता Prabhat Kumar. .
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मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखे जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र से बरेली, कानपुर और आगरा हवाई अड्डों का नाम भी बदलने का प्रस्ताव किया है।
इससे पहले नाथ संप्रदाय से ताल्लुक रखने वाले सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में भारतीय वायुसेना के हवाईअड्डे के सिविल टर्मिनल के नाम में बदलाव किया था। इसका नाम महायोगी गोरखनाथ के नाम पर रखा गया था जो नाथ पंथ के संस्थापक थे। मुख्यमंत्री नाथ संप्रदाय की आस्था के सबसे बड़े केंद्र गोरक्षनाथ पीठ के महंत भी हैं।
प्रदेश के नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कहा कि हमने इन हवाई अड्डों के नाम बदलने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया है।
वहीं, कानपुर के चकेरी हवाई अड्डे का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव है।
आगरा हवाई अड्डे का नाम दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखने का प्रस्ताव किया गया है। प्रस्ताव में बरेली के बारे में कहा गया है कि ये शहर चारों ओर से भगवान शिव के मंदिरों - अलखनाथ, त्रिवटीनाथ, मधिनाथ, धोपेश्वरनाथ , वनखंडीनाथ, तपेश्वरनाथ और पशुपतिनाथ से घिरा है।
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मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखे जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र से बरेली, कानपुर और आगरा हवाई अड्डों का नाम भी बदलने का प्रस्ताव किया है। इससे पहले नाथ संप्रदाय से ताल्लुक रखने वाले सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में भारतीय वायुसेना के हवाईअड्डे के सिविल टर्मिनल के नाम में बदलाव किया था। इसका नाम महायोगी गोरखनाथ के नाम पर रखा गया था जो नाथ पंथ के संस्थापक थे। मुख्यमंत्री नाथ संप्रदाय की आस्था के सबसे बड़े केंद्र गोरक्षनाथ पीठ के महंत भी हैं। प्रदेश के नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कहा कि हमने इन हवाई अड्डों के नाम बदलने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया है। वहीं, कानपुर के चकेरी हवाई अड्डे का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव है। आगरा हवाई अड्डे का नाम दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखने का प्रस्ताव किया गया है। प्रस्ताव में बरेली के बारे में कहा गया है कि ये शहर चारों ओर से भगवान शिव के मंदिरों - अलखनाथ, त्रिवटीनाथ, मधिनाथ, धोपेश्वरनाथ , वनखंडीनाथ, तपेश्वरनाथ और पशुपतिनाथ से घिरा है।
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वंदे भारत एक्स्प्रेस में सफर करने का इंतजार कर रहे करोड़ों देशवासियों के लिए ये एक खुशखबरी है. आज से महज 10 दिनों बाद पीएम मोदी 27 जून को एक साथ पांच वंदे भारत एक्स्प्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे. आईसीएफ द्वारा मेक इन इंडिया नीति के अनुसार निर्मित ये सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें देश भर के विभिन्न शहरों को जोड़ेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल 27 जून को एक साथ पांच नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का अनावरण करेंगे.
रेल मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ये ट्रेनें गोवा-मुंबई, पटना-रांची, भोपाल-इंदौर, भोपाल-जबलपुर और बेंगलुरु-हुबली-धारवाड़ रूट पर चलेंगी. इन नई ट्रेनों के शुरू होने से देश के रेल नेटवर्क पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेनों की कुल संख्या 23 हो जाएगी. इन ट्रेनों के जुड़ने से इन शहरों के निवासियों को अधिक सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें एक आरामदायक और आधुनिक मोड की सुविधा मिलेगी. रेल यात्रा.
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें आरामदायक बैठने, उन्नत सुरक्षा सुविधाओं और बेहतर यात्री सेवाओं सहित अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए जानी जाती हैं. इन ट्रेनों को सेमी-हाई स्पीड पर संचालित करने, तेज कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने और शहरों के बीच यात्रा के समय को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
इन पांच नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को शुरू करने की भारतीय रेलवे की पहल रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नागरिकों के लिए यात्रा विकल्पों को बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है.
अतिरिक्त मार्गों पर इन नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के शुरू होने से उन क्षेत्रों में पर्यटन, व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जहां ये सेवा प्रदान करते हैं. यह 'मेक इन इंडिया' पहल को भी एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान करेगा, क्योंकि इन ट्रेनों का निर्माण घरेलू स्तर पर किया जाता है, जो देश के विनिर्माण क्षेत्र के विकास में योगदान देता है.
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वंदे भारत एक्स्प्रेस में सफर करने का इंतजार कर रहे करोड़ों देशवासियों के लिए ये एक खुशखबरी है. आज से महज दस दिनों बाद पीएम मोदी सत्ताईस जून को एक साथ पांच वंदे भारत एक्स्प्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे. आईसीएफ द्वारा मेक इन इंडिया नीति के अनुसार निर्मित ये सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें देश भर के विभिन्न शहरों को जोड़ेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल सत्ताईस जून को एक साथ पांच नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का अनावरण करेंगे. रेल मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ये ट्रेनें गोवा-मुंबई, पटना-रांची, भोपाल-इंदौर, भोपाल-जबलपुर और बेंगलुरु-हुबली-धारवाड़ रूट पर चलेंगी. इन नई ट्रेनों के शुरू होने से देश के रेल नेटवर्क पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेनों की कुल संख्या तेईस हो जाएगी. इन ट्रेनों के जुड़ने से इन शहरों के निवासियों को अधिक सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें एक आरामदायक और आधुनिक मोड की सुविधा मिलेगी. रेल यात्रा. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें आरामदायक बैठने, उन्नत सुरक्षा सुविधाओं और बेहतर यात्री सेवाओं सहित अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए जानी जाती हैं. इन ट्रेनों को सेमी-हाई स्पीड पर संचालित करने, तेज कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने और शहरों के बीच यात्रा के समय को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इन पांच नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को शुरू करने की भारतीय रेलवे की पहल रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नागरिकों के लिए यात्रा विकल्पों को बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है. अतिरिक्त मार्गों पर इन नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के शुरू होने से उन क्षेत्रों में पर्यटन, व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जहां ये सेवा प्रदान करते हैं. यह 'मेक इन इंडिया' पहल को भी एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान करेगा, क्योंकि इन ट्रेनों का निर्माण घरेलू स्तर पर किया जाता है, जो देश के विनिर्माण क्षेत्र के विकास में योगदान देता है.
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आइए जानते हैं पंजाब में 9 से 15 जून के बीच कैसा रहेगा मौसम का हाल। और क्या है पंजाब के लिए फसलों से जुड़ी सलाह।
पंजाब में इस सप्ताह मौसम बहुत परेशान नहीं करेगा। अनुमान है कि 9 जून से 13 जून के बीच पंजाब के विभिन्न इलाकों में आंशिक बादल आते जाते रहेंगे। उत्तरी और पश्चिमी भागों में रुक-रुक कर आँधी और गर्जना के साथ बारिश भी हो सकती है। बारिश की तीव्रता बहुत अधिक नहीं होगी। मुख्यतः हल्की वर्षा के ही आसार हैं। हालांकि 11 जून को गुरदासपुर, होशियारपुर, कपूरथला, जालंधर, रूप नगर, लुधियाना, शहीद भगत सिंह नगर जैसे उत्तरी और पूर्वी जिलों में तेज़ बौछारें भी गिर सकती हैं।
पटियाला, बरनाला, मोगा, फाजिल्का, फतेहगढ़ साहिब, भटिंडा और श्रीमुक्तसर साहिब जैसे दक्षिणी जिलों में अधिकांश समय मौसम साफ और शुष्क रहने के आसार हैं। इन भागों में तापमान बढ़ेगा लेकिन लू का प्रकोप इस सप्ताह पंजाब के लोगों को परेशान नहीं करेगा।
रुक-रुक कर हल्की वर्षा की संभावना को देखते हुए किसानों को सलाह है कि धान की नर्सरी में आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें, लेकिन अधिक पानी लगाने से बचें। धान की नर्सरी मिट्टी में लौह की कमी के कारण पीली पड़ जाती है, अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो मौसम साफ होने पर 500 ग्राम से 1.0 कि.ग्रा. फेरस सल्फेट प्रति 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें।
मौसम में हो रहे बदलाव के कारण फसलों में कीटों और रोगों का प्रकोप हो सकता है, इसलिए फसलों की नियमित निगरानी करते रहें।
गन्ने की फसल में दीमक का प्रकोप इस समय पाया जा सकता है। इसकी रोकथाम के लिए (बुवाई के 45 दिन बाद) 400 मिली इमिडाक्लोप्रिड प्रति एकड़ की दर से पंक्तियों के आस पास छिड़कें। गन्ने की फसल में मिट्टी की नमी के अनुसार 7 से 12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। मौसम साफ हो जाने पर गन्ने की फसल में नाइट्रोजन की दूसरी खुराक 65 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से दें।
टिड्डी दल से फसलों को बचाने के लिए फसलों की नियमित निगरानी करते रहें और इन्हें रोकने के उचित उपाय करें। अनेक भागों में हो रही बरसात इनके प्रजनन के लिए अनुकूल सहायक है इसलिए इंका तत्काल नियंत्रण अतिआवश्यक है। अगर आपके खेत में टिड्डी दल दिखाई दे तो मेलाथियान 3 मि.ली. अथवा क्लोरपाइरीफॉस 4 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिडकाव करें।
कृपया ध्यान देंः स्काइमेट की वेबसाइट पर उपलब्ध किसी भी सूचना या लेख को प्रसारित या प्रकाशित करने पर साभारः skymetweather.com अवश्य लिखें।
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आइए जानते हैं पंजाब में नौ से पंद्रह जून के बीच कैसा रहेगा मौसम का हाल। और क्या है पंजाब के लिए फसलों से जुड़ी सलाह। पंजाब में इस सप्ताह मौसम बहुत परेशान नहीं करेगा। अनुमान है कि नौ जून से तेरह जून के बीच पंजाब के विभिन्न इलाकों में आंशिक बादल आते जाते रहेंगे। उत्तरी और पश्चिमी भागों में रुक-रुक कर आँधी और गर्जना के साथ बारिश भी हो सकती है। बारिश की तीव्रता बहुत अधिक नहीं होगी। मुख्यतः हल्की वर्षा के ही आसार हैं। हालांकि ग्यारह जून को गुरदासपुर, होशियारपुर, कपूरथला, जालंधर, रूप नगर, लुधियाना, शहीद भगत सिंह नगर जैसे उत्तरी और पूर्वी जिलों में तेज़ बौछारें भी गिर सकती हैं। पटियाला, बरनाला, मोगा, फाजिल्का, फतेहगढ़ साहिब, भटिंडा और श्रीमुक्तसर साहिब जैसे दक्षिणी जिलों में अधिकांश समय मौसम साफ और शुष्क रहने के आसार हैं। इन भागों में तापमान बढ़ेगा लेकिन लू का प्रकोप इस सप्ताह पंजाब के लोगों को परेशान नहीं करेगा। रुक-रुक कर हल्की वर्षा की संभावना को देखते हुए किसानों को सलाह है कि धान की नर्सरी में आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें, लेकिन अधिक पानी लगाने से बचें। धान की नर्सरी मिट्टी में लौह की कमी के कारण पीली पड़ जाती है, अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो मौसम साफ होने पर पाँच सौ ग्राम से एक.शून्य कि.ग्रा. फेरस सल्फेट प्रति एक सौ लीटरटर पानी में मिलाकर छिड़कें। मौसम में हो रहे बदलाव के कारण फसलों में कीटों और रोगों का प्रकोप हो सकता है, इसलिए फसलों की नियमित निगरानी करते रहें। गन्ने की फसल में दीमक का प्रकोप इस समय पाया जा सकता है। इसकी रोकथाम के लिए चार सौ मिली इमिडाक्लोप्रिड प्रति एकड़ की दर से पंक्तियों के आस पास छिड़कें। गन्ने की फसल में मिट्टी की नमी के अनुसार सात से बारह दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। मौसम साफ हो जाने पर गन्ने की फसल में नाइट्रोजन की दूसरी खुराक पैंसठ कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से दें। टिड्डी दल से फसलों को बचाने के लिए फसलों की नियमित निगरानी करते रहें और इन्हें रोकने के उचित उपाय करें। अनेक भागों में हो रही बरसात इनके प्रजनन के लिए अनुकूल सहायक है इसलिए इंका तत्काल नियंत्रण अतिआवश्यक है। अगर आपके खेत में टिड्डी दल दिखाई दे तो मेलाथियान तीन मि.ली. अथवा क्लोरपाइरीफॉस चार मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिडकाव करें। कृपया ध्यान देंः स्काइमेट की वेबसाइट पर उपलब्ध किसी भी सूचना या लेख को प्रसारित या प्रकाशित करने पर साभारः skymetweather.com अवश्य लिखें।
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कोरोना वायरस से दुनियाभर में 1,825,780 लोगों की मौत हो गई है और अभी तक इस वायरस की चपेट में 83,809,705 लोग आ गए हैं। हालांकि कुल संक्रमितों में 59,325,746 ठीक भी हुए हैं।
इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए फाइजर-बायोएनटेक के टीके के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है और अब गरीब देशों को भी ये टीके उपलब्ध हो सकेंगे। ये टीके अभी तक यूरोप और उत्तर अमेरिका में ही उपलब्ध थे।
- देशों की औषध नियामक एजेंसी किसी भी कोविड-19 टीके के लिए अपनी ओर से मंजूरी देती हैं, लेकिन कमजोर प्रणाली वाले देश आमतौर पर इसके लिए डब्ल्यूएचओ पर निर्भर करते हैं।
- कोविड-19 के टीके के आपात इस्तेमाल की मंजूरी देने के उसके फैसले से 'देशों को अवसर मिलेगा कि वे टीके आयात करने तथा इन्हें लगाने संबंधी अपने नियामकों की मंजूरी प्रक्रिया को गति प्रदान कर सकें।
- फाइजर-बायोएनटेक द्वारा निर्मित टीका 'संगठन द्वारा तय किए गए सुरक्षा मानकों एवं अन्य मापदंडों पर खरा उतरा है। '
- गौरतलब है कि इस टीके को अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ समेत अनेक देश मंजूरी दे चुके हैं।
- इस टीके को बहुत ही कम तापमान पर रखना होता है जो विकासशील देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
- फार्मास्युटिकल कंपनी फाइजर ने अपनी कोरोना टीके के आपातकालीन टीकाकरण के लिए भारत सरकार से अनुमति मांगी है।
- फाइजर इंडिया ने 4 दिसंबर को भारत में टीकाकरण के लिए आवेदन किया है। ब्रिटेन ने फाइजर के कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग के लिए अनुमति दे दी है. बहरीन इसे अनुमति देने वाला दूसरा देश है।
- कंपनी ने संयुक्त राज्य अमेरिका में आपातकालीन टीकाकरण के लिए मंजूरी दी है। संयुक्त राज्य अमेरिका के फाइजर ने कोरोना वायरस के खिलाफ 90 प्रतिशत प्रभावी टीका विकसित किया था।
- जिन स्वयंसेवकों का कोरोना टीका लगाया गया है, वे टीकाकरण होने के बाद कैसा महसूस करते हैं, इस बारे में चौंकाने वाले खुलासे करने लगे हैं। कुछ स्वयंसेवकों ने कहा कि टीका लगने के बाद यह हैंगओवर जैसा महसूस हुआ।
- सिरदर्द, बुखार और मांसपेशियों में दर्द शुरू हो गया था। जैसा कि फ्लू के टीके में महसूस होता है। वैक्सीन का दूसरा चरण और भी गंभीर था।
- कंपनी फाइजर ने कहा है कि दुनिया के विभिन्न देशों में उसके कोविड-19 टीके का दाम अलग-अलग होगा। कंपनी का इरादा इस टीके को दुनियाभर में उपलब्ध कराने का है।
- वैक्सीन की कीमत के पीछे कंपनी का आधार यह है कि इसे जल्द से जल्द सभी को उपलब्ध कराया जाए। इस टीके का भिन्न देशों में अलग-अलग दाम होगा।
- विकसित देशों में टीके की कीमत उनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आधार पर तय की जाएगी। वहीं मध्यम आय वर्ग के देशों के लिए इसकी कीमत और कम होगी।
- अमेरिका में टीके का दाम 19. 50 डॉलर है, जो वहां एक बार के भोजन का औसत दाम है। उन्होंने कहा कि कंपनी विभिन्न सरकारों से वैक्सीन के लिए बात कर रही है।
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कोरोना वायरस से दुनियाभर में एक,आठ सौ पच्चीस,सात सौ अस्सी लोगों की मौत हो गई है और अभी तक इस वायरस की चपेट में तिरासी,आठ सौ नौ,सात सौ पाँच लोग आ गए हैं। हालांकि कुल संक्रमितों में उनसठ,तीन सौ पच्चीस,सात सौ छियालीस ठीक भी हुए हैं। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए फाइजर-बायोएनटेक के टीके के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है और अब गरीब देशों को भी ये टीके उपलब्ध हो सकेंगे। ये टीके अभी तक यूरोप और उत्तर अमेरिका में ही उपलब्ध थे। - देशों की औषध नियामक एजेंसी किसी भी कोविड-उन्नीस टीके के लिए अपनी ओर से मंजूरी देती हैं, लेकिन कमजोर प्रणाली वाले देश आमतौर पर इसके लिए डब्ल्यूएचओ पर निर्भर करते हैं। - कोविड-उन्नीस के टीके के आपात इस्तेमाल की मंजूरी देने के उसके फैसले से 'देशों को अवसर मिलेगा कि वे टीके आयात करने तथा इन्हें लगाने संबंधी अपने नियामकों की मंजूरी प्रक्रिया को गति प्रदान कर सकें। - फाइजर-बायोएनटेक द्वारा निर्मित टीका 'संगठन द्वारा तय किए गए सुरक्षा मानकों एवं अन्य मापदंडों पर खरा उतरा है। ' - गौरतलब है कि इस टीके को अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ समेत अनेक देश मंजूरी दे चुके हैं। - इस टीके को बहुत ही कम तापमान पर रखना होता है जो विकासशील देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है। - फार्मास्युटिकल कंपनी फाइजर ने अपनी कोरोना टीके के आपातकालीन टीकाकरण के लिए भारत सरकार से अनुमति मांगी है। - फाइजर इंडिया ने चार दिसंबर को भारत में टीकाकरण के लिए आवेदन किया है। ब्रिटेन ने फाइजर के कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग के लिए अनुमति दे दी है. बहरीन इसे अनुमति देने वाला दूसरा देश है। - कंपनी ने संयुक्त राज्य अमेरिका में आपातकालीन टीकाकरण के लिए मंजूरी दी है। संयुक्त राज्य अमेरिका के फाइजर ने कोरोना वायरस के खिलाफ नब्बे प्रतिशत प्रभावी टीका विकसित किया था। - जिन स्वयंसेवकों का कोरोना टीका लगाया गया है, वे टीकाकरण होने के बाद कैसा महसूस करते हैं, इस बारे में चौंकाने वाले खुलासे करने लगे हैं। कुछ स्वयंसेवकों ने कहा कि टीका लगने के बाद यह हैंगओवर जैसा महसूस हुआ। - सिरदर्द, बुखार और मांसपेशियों में दर्द शुरू हो गया था। जैसा कि फ्लू के टीके में महसूस होता है। वैक्सीन का दूसरा चरण और भी गंभीर था। - कंपनी फाइजर ने कहा है कि दुनिया के विभिन्न देशों में उसके कोविड-उन्नीस टीके का दाम अलग-अलग होगा। कंपनी का इरादा इस टीके को दुनियाभर में उपलब्ध कराने का है। - वैक्सीन की कीमत के पीछे कंपनी का आधार यह है कि इसे जल्द से जल्द सभी को उपलब्ध कराया जाए। इस टीके का भिन्न देशों में अलग-अलग दाम होगा। - विकसित देशों में टीके की कीमत उनके सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर तय की जाएगी। वहीं मध्यम आय वर्ग के देशों के लिए इसकी कीमत और कम होगी। - अमेरिका में टीके का दाम उन्नीस. पचास डॉलर है, जो वहां एक बार के भोजन का औसत दाम है। उन्होंने कहा कि कंपनी विभिन्न सरकारों से वैक्सीन के लिए बात कर रही है।
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शराबबंदी कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। पटना उच्च न्यायालय के महानिबंधक की अनुशंसा के आलोक में राज्य सरकार ने 74 जजों को मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय के पीठासीन पदाधिकारी के पद पर नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय के पीठासीन पदाधिकारी बनाए गए जज विभिन्न जिला अदालतों में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर पदस्थापित हैं। इन्हें अब विशेष न्यायालय के पीठासीन पदाधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया है।
परसविगहा थाने की पुलिस ने तीन शराब कारोबारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार करोबारी पुनीतविगहा गांव निवासी अशोक यादव, पहाड़ीविगहा गांव निवासी मतलू मांझी व धर्मेंद्र मांझी बताया जाता है। थानाध्यक्ष धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पूर्व में अशोक यादव के खिलाफ शराब निर्माण मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वहीं मतलू मांझी व धर्मेंद्र मांझी के घर के समीप से दस- दस लीटर महुआ शराब बरामद हुई थी।
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शराबबंदी कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। पटना उच्च न्यायालय के महानिबंधक की अनुशंसा के आलोक में राज्य सरकार ने चौहत्तर जजों को मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय के पीठासीन पदाधिकारी के पद पर नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय के पीठासीन पदाधिकारी बनाए गए जज विभिन्न जिला अदालतों में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर पदस्थापित हैं। इन्हें अब विशेष न्यायालय के पीठासीन पदाधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया है। परसविगहा थाने की पुलिस ने तीन शराब कारोबारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार करोबारी पुनीतविगहा गांव निवासी अशोक यादव, पहाड़ीविगहा गांव निवासी मतलू मांझी व धर्मेंद्र मांझी बताया जाता है। थानाध्यक्ष धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पूर्व में अशोक यादव के खिलाफ शराब निर्माण मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वहीं मतलू मांझी व धर्मेंद्र मांझी के घर के समीप से दस- दस लीटर महुआ शराब बरामद हुई थी।
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बाराबंकी (उत्तर प्रदेश), 8 मई : बाराबंकी जिले के देवा थाना क्षेत्र स्थित चिनहट-देवा मार्ग पर ढाबे के पास एक निजी विश्वविद्यालय के छात्रों के दो गुटों के बीच हुए खूनी संघर्ष में एक युवक की मौत हो गई तथा एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया. पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. वहीं, वारदात के शिकार युवकों को अस्पताल में भर्ती करा कर लौट रहे सिपाहियों की मोटरसाइकिल की एक आवारा पशु से टक्कर हो जाने के कारण एक पुलिसकर्मी की भी मृत्यु हो गई.
उन्होंने बताया कि वारदात में गंभीर रूप से घायल सुयश (25) और आलोक (26) को पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान सुयश की मौत हो गई. आलोक का उपचार किया जा रहा है. सिंह ने बताया कि घायल छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद लौट रहे सिपाहियों की मोटरसाइकिल कोतवाली के निकट छुट्टा पशुओं से टकरा गई. इस हादसे में दोनों सिपाही घायल हो गए. लखनऊ ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान उनमें से राम कुमार पांडे की मौत हो गई. पुलिस ने मामले दर्ज कर लिया है.
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बाराबंकी , आठ मई : बाराबंकी जिले के देवा थाना क्षेत्र स्थित चिनहट-देवा मार्ग पर ढाबे के पास एक निजी विश्वविद्यालय के छात्रों के दो गुटों के बीच हुए खूनी संघर्ष में एक युवक की मौत हो गई तथा एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया. पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. वहीं, वारदात के शिकार युवकों को अस्पताल में भर्ती करा कर लौट रहे सिपाहियों की मोटरसाइकिल की एक आवारा पशु से टक्कर हो जाने के कारण एक पुलिसकर्मी की भी मृत्यु हो गई. उन्होंने बताया कि वारदात में गंभीर रूप से घायल सुयश और आलोक को पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान सुयश की मौत हो गई. आलोक का उपचार किया जा रहा है. सिंह ने बताया कि घायल छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद लौट रहे सिपाहियों की मोटरसाइकिल कोतवाली के निकट छुट्टा पशुओं से टकरा गई. इस हादसे में दोनों सिपाही घायल हो गए. लखनऊ ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान उनमें से राम कुमार पांडे की मौत हो गई. पुलिस ने मामले दर्ज कर लिया है.
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भोपाल, मध्यप्रदेश। देश-प्रदेश में जहां वैश्विक महामारी कोरोना का संकटकाल जारी है वहीं कोरोना संकट के माहौल में नियुक्तियों का दौर भी जारी है, इस बीच ही मंगूभाई छगनभाई पटेल (Mangubhai Chhaganbhai Patel) को मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगूभाई छगनभाई पटेल को मध्य प्रदेश का नया राज्यपाल बनाया है, इनके पहले आनंदीबेन पटेल उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद पर थीं। एमपी के 19वें राज्यपाल बने मंगू भाई पटेल गुजरात के नवसारी से पांच बार और एक बार दूसरे क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं।
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा- एमपी के नए राज्यपाल बनने पर मंगूभाई छगनभाई पटेल को बहुत-बहुत बधाई। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपका अपार राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन मध्यप्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा, मध्यप्रदेश की जनता की ओर से आपका स्वागत एवं अभिनंदन।
गुजरात भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री श्री मंगूभाई छगनभाई पटेल जी को एमपी का राज्यपाल बनाए जाने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं, मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके सानिध्य और कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश विकास और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी के साथ अग्रसर होगा।
दक्षिण गुजरात के प्रमुख आदिवासी नेता हैं मप्र के नवनियुक्त राजपाल श्री मंगुभाई छगन भाई पटेल जी। वे नवसारी से पांच बार और एक बार अन्य क्षेत्र से विधायक और आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी की गुजरात कैबिनेट में वन एवं पर्यावरण मंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं।
वही मोदी कैबिनेट के विस्तार की सुगबुगाहट के बीच केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत (Thawar Chand Gehlot) को कर्नाटक का राज्यपाल बना दिया गया है, थावरचंद गहलोत लंबे समय से राजनीति में सक्रिय है और केंद्रीय मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा भाजपा में कई संगठन कार्यों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
बताते चलें कि, केंद्र सरकार ने कई राज्यों के राज्यपाल बदल दिए हैं, जिन आठ राज्यों के राज्यपाल बदले गए हैं, उनमें त्रिपुरा, मिजोरम, मध्यप्रदेश और हरियाणा भी शामिल है। केंद्र सरकार की अनुशंसा पर राष्ट्रपति ने राज्यपालों की नियुक्ति की आदेश जारी कर दिए हैं।
मिजोरम के राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई को गोवा का राज्यपाल, हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को त्रिपुरा का राज्यपाल, त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस को झारखंड का राज्यपाल और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय को हरियाणा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति ने थावरचंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल, हरि बाबू कमभमपति को मिजोरम का राज्यपाल, मंगूभाई छगनभाई पटेल को मध्य प्रदेश का राज्यपाल और राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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भोपाल, मध्यप्रदेश। देश-प्रदेश में जहां वैश्विक महामारी कोरोना का संकटकाल जारी है वहीं कोरोना संकट के माहौल में नियुक्तियों का दौर भी जारी है, इस बीच ही मंगूभाई छगनभाई पटेल को मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगूभाई छगनभाई पटेल को मध्य प्रदेश का नया राज्यपाल बनाया है, इनके पहले आनंदीबेन पटेल उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद पर थीं। एमपी के उन्नीसवें राज्यपाल बने मंगू भाई पटेल गुजरात के नवसारी से पांच बार और एक बार दूसरे क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा- एमपी के नए राज्यपाल बनने पर मंगूभाई छगनभाई पटेल को बहुत-बहुत बधाई। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपका अपार राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन मध्यप्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा, मध्यप्रदेश की जनता की ओर से आपका स्वागत एवं अभिनंदन। गुजरात भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री श्री मंगूभाई छगनभाई पटेल जी को एमपी का राज्यपाल बनाए जाने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं, मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके सानिध्य और कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश विकास और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी के साथ अग्रसर होगा। दक्षिण गुजरात के प्रमुख आदिवासी नेता हैं मप्र के नवनियुक्त राजपाल श्री मंगुभाई छगन भाई पटेल जी। वे नवसारी से पांच बार और एक बार अन्य क्षेत्र से विधायक और आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी की गुजरात कैबिनेट में वन एवं पर्यावरण मंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं। वही मोदी कैबिनेट के विस्तार की सुगबुगाहट के बीच केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल बना दिया गया है, थावरचंद गहलोत लंबे समय से राजनीति में सक्रिय है और केंद्रीय मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा भाजपा में कई संगठन कार्यों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। बताते चलें कि, केंद्र सरकार ने कई राज्यों के राज्यपाल बदल दिए हैं, जिन आठ राज्यों के राज्यपाल बदले गए हैं, उनमें त्रिपुरा, मिजोरम, मध्यप्रदेश और हरियाणा भी शामिल है। केंद्र सरकार की अनुशंसा पर राष्ट्रपति ने राज्यपालों की नियुक्ति की आदेश जारी कर दिए हैं। मिजोरम के राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई को गोवा का राज्यपाल, हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को त्रिपुरा का राज्यपाल, त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस को झारखंड का राज्यपाल और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय को हरियाणा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति ने थावरचंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल, हरि बाबू कमभमपति को मिजोरम का राज्यपाल, मंगूभाई छगनभाई पटेल को मध्य प्रदेश का राज्यपाल और राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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Vishvas Kailash Sarang) ने दी। उनका कहना है कि सेवा के इन मेडिकल छात्रों के 2 लाख का मेडिक्लेम तथा दुर्घटना के समय 10 लाख का बीमा रहेगा।
उक्त बातें चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने पत्रकार वार्ता के दैारन देते हुए कहा कि कोविड जैसी महामारी के समय मेडिकल के छात्रों ने दिन रात एक कर रोगियो की सेवा की। उन्होने कहा कि प्रदेश के सरकारी, आटोनामस मेडिकल कालेज, दंत चिकित्सा, नर्सिग कालेज, पैरामेडिकल कालेजों में पढ रहे छात्रों का इस मेडिक्लेम का लाभ मिलेगा।
मेडिक्लेम के फायदे के सम्बंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि इसके लिए बीमा कम्पनी की ओर से एक कार्ड जारी किया जायेगा। जिसमें कैशलेस के जरिये देश के किसी भी शहर में इलाज करवाया जा सकता है। वही दुर्घटना होने पर 10 लाख तक बीमा क्लेम रहेगा। इसका लाभ प्रदेश के 15 हजार छात्रों को लाभ मिलेगा।
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Vishvas Kailash Sarang) ने दी। उनका कहना है कि सेवा के इन मेडिकल छात्रों के दो लाख का मेडिक्लेम तथा दुर्घटना के समय दस लाख का बीमा रहेगा। उक्त बातें चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने पत्रकार वार्ता के दैारन देते हुए कहा कि कोविड जैसी महामारी के समय मेडिकल के छात्रों ने दिन रात एक कर रोगियो की सेवा की। उन्होने कहा कि प्रदेश के सरकारी, आटोनामस मेडिकल कालेज, दंत चिकित्सा, नर्सिग कालेज, पैरामेडिकल कालेजों में पढ रहे छात्रों का इस मेडिक्लेम का लाभ मिलेगा। मेडिक्लेम के फायदे के सम्बंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि इसके लिए बीमा कम्पनी की ओर से एक कार्ड जारी किया जायेगा। जिसमें कैशलेस के जरिये देश के किसी भी शहर में इलाज करवाया जा सकता है। वही दुर्घटना होने पर दस लाख तक बीमा क्लेम रहेगा। इसका लाभ प्रदेश के पंद्रह हजार छात्रों को लाभ मिलेगा।
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Mungair : बिहार में बेखौफ अपराधी आये दिन घटनाओं को अंजाम देते हैं. ताजा मामला मुंगेर से सामने आया है. जहां अपराधियों ने दिनदहाड़े मुखिया संजय शर्मा और उसकी पत्नी की गोली मार की हत्या कर दी. घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गयी. पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है. घटना के संबंध में बताया जाता है कि मुखिया संजय शर्मा अपनी पत्नी को लेकर डॉक्टर के पास जा रहे थे. तभी रामनगर थाना क्षेत्र के जानकीनगर के पास अपराधियों ने दंपत्ति को गोली मार दी. जिससे दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी.
इसे भी पढ़ें : कर्नाटक चुनाव : मोदी जहरीले सांप, तो सोनिया गांधी विषकन्या, भाजपा-कांग्रेस के बीच ये चल क्या रहा है?
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Mungair : बिहार में बेखौफ अपराधी आये दिन घटनाओं को अंजाम देते हैं. ताजा मामला मुंगेर से सामने आया है. जहां अपराधियों ने दिनदहाड़े मुखिया संजय शर्मा और उसकी पत्नी की गोली मार की हत्या कर दी. घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गयी. पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है. घटना के संबंध में बताया जाता है कि मुखिया संजय शर्मा अपनी पत्नी को लेकर डॉक्टर के पास जा रहे थे. तभी रामनगर थाना क्षेत्र के जानकीनगर के पास अपराधियों ने दंपत्ति को गोली मार दी. जिससे दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी. इसे भी पढ़ें : कर्नाटक चुनाव : मोदी जहरीले सांप, तो सोनिया गांधी विषकन्या, भाजपा-कांग्रेस के बीच ये चल क्या रहा है?
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19 वीं शताब्दी के अंत में रूसी नाविकों क्रोनस्टेड और हेलसिंगफोर्स के अनुरूप नहीं था, सिद्धांत रूप में, समझ में आता है और समझ में आता हैः बेड़ा छलांग और सीमा से बढ़ गया, जर्मनी रूस का मुख्य दुश्मन बन गया, जिसने सबसे शक्तिशाली निर्माण भी शुरू किया नौसेना बलों, और बेड़ा नए खतरों का मुकाबला करने के लिए, बाल्टिक में एक बर्फ मुक्त आधार और एक किले की आवश्यकता थी। यह सब स्पष्ट है, यह केवल स्पष्ट नहीं है कि सीमा से 80 किमी दूर स्थित लिबौ को इस भूमिका के लिए क्यों चुना गया - शांतिकाल में एक अच्छा वाणिज्यिक बंदरगाह और युद्ध के मामले में कोई आधार नहीं।
हालांकि हमारे में ऐसे रहस्य इतिहास पर्याप्त, और सुराग आमतौर पर सरल और स्पष्ट होते हैं - इस मामले में, अलेक्जेंडर III को यकीन था कि रूस जर्मन साम्राज्य की तुलना में बहुत मजबूत है, और युद्ध रक्षात्मक नहीं होगा, लेकिन आक्रामक होगा, क्रमशः, आधार और मरम्मत सुविधाओं को आगे लाया गया अग्रिम पंक्ति एक स्मार्ट निर्णय है। १८९० में, किसी तरह ऐसा था, लिबवा कील नहर के लिए हमारा जवाब है और एडमिरलों के मूड का एक दृश्य अवतार हैः
तथ्य की बात के रूप में, उन्होंने यह नहीं छिपाया कि जर्मन सीमा के पास एक आधार की आवश्यकता क्यों थीः
और 1890 में, ग्रैंड ड्यूक और एडमिरल जनरल एलेक्सी अलेक्जेंड्रोविच ने अभी भी अपनी राजनीतिक कल्पनाओं के भौतिक अवतार की शुरुआत हासिल कीः
योजनाओं को लगातार सुधारा गया, बदला गया, निकोलस II आमतौर पर ऐसा मानते थेः
"हम खुद को बंदरगाह के निर्माण पर पहले से ही पूरा किए गए कार्यों तक सीमित नहीं कर सकते हैं और जहां तक यह बाल्टिक बेड़े के भविष्य के लिए आवश्यक है, इसे विस्तारित करना जारी रखना चाहिए। "
रुसो-जापानी युद्ध के फैलने के बाद, जो 1917 तक, लिबवा को समायोजित करने में सक्षम बेड़े का मुख्य आधार बन जाना चाहिएः
"9 नए स्क्वाड्रन युद्धपोत, 7 पुराने युद्धपोत, 3 तटीय रक्षा युद्धपोत, 6 पुराने प्रथम श्रेणी के क्रूजर और 1 विध्वंसक। "
दूसरे और तीसरे प्रशांत स्क्वाड्रन ने लिबवा छोड़ दिया, और फिर, सौभाग्य से बजट और सामान्य ज्ञान के लिए, सब कुछ जम गया। यह जम गया, क्योंकि कोई नया युद्धपोत नहीं था, कोई पुराना नहीं था, कोई तटीय रक्षा नहीं थी, कोई पैसा नहीं था . . . अपर्याप्त रूप से गढ़वाले पोर्ट आर्थर और असुरक्षित सखालिन गिर गए, और जो बाल्टिक में रह गया वह केवल स्वेड्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता था। सब कुछ खरोंच से शुरू करना आवश्यक था, और खराब खिलौना, जिसमें दसियों लाख राज्य का पैसा लगाया गया था, फेंक दिया गया था। अधिक सटीक रूप से, उन्होंने इसे नहीं छोड़ा, बल्कि इसे वह बनाया जो इसके लिए उपयुक्त था - प्रकाश बलों का आधार। 1907 में लिबौ किले को ही समाप्त कर दिया गया था, और बिल्डरों को हटा दिया गया था। तब शांति और मौन के सात साल थे, जिसे लिबावा ने बाल्टिक, प्रांतीय और तृतीयक में एक आधार के रूप में बिताया। और फिर युद्ध हुआ।
प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत में, एक स्कूबा डाइविंग प्रशिक्षण टुकड़ी, एक जलविद्युत टुकड़ी, लिबौ में स्थित थी, और बाल्टिक बेड़े के दुर्लभ जहाजों ने प्रवेश किया। वास्तव में, दो ब्रिटिश पनडुब्बियां और हमारी पनडुब्बी "मगरमच्छ" लीबावा से सैन्य अभियानों पर चली गईं। 17 अप्रैल, 1915 को, जर्मन आक्रमण के दौरान, एक आदेश प्राप्त हुआ - लिबौ को छोड़ने के लिएः कुछ उड़ा दिया गया, कुछ बाढ़ आ गई, और 24 अप्रैल को जर्मन शहर में प्रवेश कर गए। होशसीफ्लोट को रूस का आभारी होना चाहिए था - युद्ध के दौरान डॉक, बैरकों, मरम्मत की दुकानों और रेलवे के एक विकसित नेटवर्क के साथ प्रथम श्रेणी का बंदरगाह प्राप्त करने के लिए - क्या यह उपहार नहीं है? जर्मन, वैसे, सक्रिय रूप से बंदरगाह का उपयोग करते थे, और संरचनाओं के विशाल परिसर को अक्षम करने के उन प्रयासों ने रूसी कमांड द्वारा इसमें हस्तक्षेप नहीं किया। और जर्मनों के आने के बाद अंग्रेज आए, जिनके बाल्टिक स्क्वाड्रन ने हस्तक्षेप के दौरान एक विश्वसनीय आधार हासिल कर लिया।
परिणामों का सारांश - रूसी साम्राज्य का लिबवा बिल्कुल भी उपयोगी नहीं था। कोई भी मछली पकड़ने वाला गांव पनडुब्बी के लिए अस्थायी आधार के रूप में उपयुक्त होगा। लेकिन जर्मनों और अंग्रेजों के लिए, जिनके खिलाफ अलेक्जेंडर III के बंदरगाह को इस तरह के उत्साह के साथ डिजाइन और बनाया गया था, आधार ने सही ढंग से सेवा की, एक बार फिर से एक सरल सत्य साबित हुआ - युद्ध में रसद के मुद्दे प्राथमिक हैं। और रूस-जापानी युद्ध ने हमें सबसे बुरे से बचाया, नीति को अलग तरह से बदल दिया, और हमने बाल्टिक में पोर्ट आर्थर, और स्कूलों में विद्यार्थियों को, बेड़े की मौत के साथ सेवस्तोपोल की वीर रक्षा के अलावा, अध्ययन करने का जोखिम उठाया। लिबावा की वीर रक्षा के साथ . . . चूहादानी ने काम नहीं किया, हमने दुश्मन के लिए एक अद्भुत आधार बनाया, जो युद्ध के परिणामस्वरूप लातवियाई लोगों के पास गया, मित्र देशों के एंटेंटे के साथ संबद्ध, जो शत्रुतापूर्ण था नवजात यूएसएसआर, और बाल्टिक में एक संभावित खतरा। हालांकि यह काम नहीं किया, और 25 साल बाद, असली मालिक लिबाऊ लौट आए।
अपने घरेलू बंदरगाह पर लौटकर, लिबौ ने बेड़े के एक गंभीर बुनियादी ढांचे को संरक्षित किया है, और सबसे महत्वपूर्ण बात - एक उत्कृष्ट कारखाना। बाल्टिक नौसैनिक अड्डे का गठन शुरू हुआ और इसकी संरचना में, लिबाऊ बेस, जिसकी कमान कैप्टन 1 रैंक क्लेवांस्की ने संभाली थी। लिबाऊ में स्वयं बल कम थेः पांच टारपीडो नौकाएं, चार शिकारी, नौ सीमा नौकाएं और तीन बैटरी - दो 130 मिमी और एक 180 मिमी। इस अर्थ में, tsarist समय के विपरीत, उन्होंने लिबवा को गंभीरता से देखा। लेकिन संयंत्र . . . बाल्टिक में मरम्मत क्षमता की बहुत कमी थी, और 22. 06. 1941 को लिबौ में विध्वंसक "लेनिन" और 15 पनडुब्बियों की मरम्मत चल रही थी। शहर पर हमला 23 जून को शुरू हुआ और शहर 29 जून को गिर गया। ज़ारवादी समय के विपरीत, उन्होंने उसे अंत तक रखा, लेकिन इससे स्थिति ठीक नहीं हुई, लिबौ में वे खो गएः
"24 जून की रात को, जिनके पास बेस छोड़ने का अवसर नहीं था, उन्हें पनडुब्बियों M-71 (कमांडर लेफ्टिनेंट कमांडर L. N. Kostylev), M-80 (कमांडर लेफ्टिनेंट कमांडर F. A. मोचलोव), S -1 (कमांडर लेफ्टिनेंट कमांडर आईटी मोर्स्कोय), रोनिस (कमांडर लेफ्टिनेंट कमांडर एआई मैडिसन), स्पिडोला (कमांडर सीनियर लेफ्टिनेंट VI बोयत्सोव)। एक विघटित वाहन और हटाए गए तोपखाने के साथ विध्वंसक "लेनिन" को भी अपने स्वयं के चालक दल द्वारा नष्ट कर दिया गया था। आइसब्रेकर "सिलाच" को उड़ा दिया गया था। "
इसके अलावा, सेवा योग्य जहाजों और जहाजों के आधार से एक सफलता के दौरान, पनडुब्बी "एस -3", "एम -78" और दो टीकेए मारे गए। आधार में ही खो गया थाः
"युद्ध की शुरुआत से पहले, लिबाऊ में गोदामों में 493 खदानें (अन्य स्रोतों के अनुसार, 3. 532 खदानें और रक्षक), 146 टॉरपीडो, 41 ट्रॉल्स, 3. 000 डेप्थ चार्ज, 9. 761 टन ईंधन तेल, 1. 911 टन डीजल ईंधन, 585 टन थे। गैसोलीन का, 10. 505 टन कोयला (अन्य आंकड़ों के अनुसार, केवल 15. 000 टन ईंधन)।
बहुत सारी संपत्ति। जाल एक क्लैंग के साथ बंद हो गया। शहर की रक्षा में 10 हजार लोगों की लाल सेना का खर्च आया। और फिर लिबावा ने फिर से युद्ध के अंत तक जर्मनों की सेवा की, शहर केवल 9 मई, 1945 को मुक्त हुआ।
यह एक बार फिर एक निर्दयी शब्द अलेक्सी अलेक्जेंड्रोविच, सम्राट अलेक्जेंडर III और उनके प्रशंसकों के साथ याद किया जाता है, जिन्होंने बाल्टिक में रूस के दुश्मनों के लिए इस तरह के एक शांत किले का निर्माण किया था। और यह सर्दियों में खत्म करने लायक है समाचारः
"फिलहाल, लातवियाई रक्षा मंत्रालय की नौ संरचनाएं लीपाजा में स्थित हैं, जिनमें युद्धपोत, नागरिक मिलिशिया की इकाइयां" होम गार्ड "आदि शामिल हैं। इस शहर में एक सैन्य अड्डे के विकास की योजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है। . पहले चरण के दौरान, एक बैरक, एक मुख्यालय भवन, एक कैंटीन, एक खाद्य गोदाम, एक चिकित्सा केंद्र, एक खेल परिसर, एक गैरीसन गोदाम, "होम गार्ड" के लिए गोदाम और नौसेना बलों, एक मरम्मत की दुकान बनाने की योजना है , परिवहन बक्से, आदि दूसरे चरण में, एक गोला बारूद गोदाम बनाया जाएगा, गैस स्टेशन, मरीना और अन्य सुविधाएं। यहां यह याद रखने योग्य है कि अभ्यास में भाग लेने के लिए लातविया पहुंचने वाले नाटो के भारी उपकरणों को उतारने के लिए लेपाजा के बंदरगाह का समय-समय पर उपयोग किया जाता है। "
बस यह पता लगाने के लिए कि एक गलती की कीमत कितनी हो सकती है।
- लेखकः
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उन्नीस वीं शताब्दी के अंत में रूसी नाविकों क्रोनस्टेड और हेलसिंगफोर्स के अनुरूप नहीं था, सिद्धांत रूप में, समझ में आता है और समझ में आता हैः बेड़ा छलांग और सीमा से बढ़ गया, जर्मनी रूस का मुख्य दुश्मन बन गया, जिसने सबसे शक्तिशाली निर्माण भी शुरू किया नौसेना बलों, और बेड़ा नए खतरों का मुकाबला करने के लिए, बाल्टिक में एक बर्फ मुक्त आधार और एक किले की आवश्यकता थी। यह सब स्पष्ट है, यह केवल स्पष्ट नहीं है कि सीमा से अस्सी किमी दूर स्थित लिबौ को इस भूमिका के लिए क्यों चुना गया - शांतिकाल में एक अच्छा वाणिज्यिक बंदरगाह और युद्ध के मामले में कोई आधार नहीं। हालांकि हमारे में ऐसे रहस्य इतिहास पर्याप्त, और सुराग आमतौर पर सरल और स्पष्ट होते हैं - इस मामले में, अलेक्जेंडर III को यकीन था कि रूस जर्मन साम्राज्य की तुलना में बहुत मजबूत है, और युद्ध रक्षात्मक नहीं होगा, लेकिन आक्रामक होगा, क्रमशः, आधार और मरम्मत सुविधाओं को आगे लाया गया अग्रिम पंक्ति एक स्मार्ट निर्णय है। एक हज़ार आठ सौ नब्बे में, किसी तरह ऐसा था, लिबवा कील नहर के लिए हमारा जवाब है और एडमिरलों के मूड का एक दृश्य अवतार हैः तथ्य की बात के रूप में, उन्होंने यह नहीं छिपाया कि जर्मन सीमा के पास एक आधार की आवश्यकता क्यों थीः और एक हज़ार आठ सौ नब्बे में, ग्रैंड ड्यूक और एडमिरल जनरल एलेक्सी अलेक्जेंड्रोविच ने अभी भी अपनी राजनीतिक कल्पनाओं के भौतिक अवतार की शुरुआत हासिल कीः योजनाओं को लगातार सुधारा गया, बदला गया, निकोलस II आमतौर पर ऐसा मानते थेः "हम खुद को बंदरगाह के निर्माण पर पहले से ही पूरा किए गए कार्यों तक सीमित नहीं कर सकते हैं और जहां तक यह बाल्टिक बेड़े के भविष्य के लिए आवश्यक है, इसे विस्तारित करना जारी रखना चाहिए। " रुसो-जापानी युद्ध के फैलने के बाद, जो एक हज़ार नौ सौ सत्रह तक, लिबवा को समायोजित करने में सक्षम बेड़े का मुख्य आधार बन जाना चाहिएः "नौ नए स्क्वाड्रन युद्धपोत, सात पुराने युद्धपोत, तीन तटीय रक्षा युद्धपोत, छः पुराने प्रथम श्रेणी के क्रूजर और एक विध्वंसक। " दूसरे और तीसरे प्रशांत स्क्वाड्रन ने लिबवा छोड़ दिया, और फिर, सौभाग्य से बजट और सामान्य ज्ञान के लिए, सब कुछ जम गया। यह जम गया, क्योंकि कोई नया युद्धपोत नहीं था, कोई पुराना नहीं था, कोई तटीय रक्षा नहीं थी, कोई पैसा नहीं था . . . अपर्याप्त रूप से गढ़वाले पोर्ट आर्थर और असुरक्षित सखालिन गिर गए, और जो बाल्टिक में रह गया वह केवल स्वेड्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता था। सब कुछ खरोंच से शुरू करना आवश्यक था, और खराब खिलौना, जिसमें दसियों लाख राज्य का पैसा लगाया गया था, फेंक दिया गया था। अधिक सटीक रूप से, उन्होंने इसे नहीं छोड़ा, बल्कि इसे वह बनाया जो इसके लिए उपयुक्त था - प्रकाश बलों का आधार। एक हज़ार नौ सौ सात में लिबौ किले को ही समाप्त कर दिया गया था, और बिल्डरों को हटा दिया गया था। तब शांति और मौन के सात साल थे, जिसे लिबावा ने बाल्टिक, प्रांतीय और तृतीयक में एक आधार के रूप में बिताया। और फिर युद्ध हुआ। प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत में, एक स्कूबा डाइविंग प्रशिक्षण टुकड़ी, एक जलविद्युत टुकड़ी, लिबौ में स्थित थी, और बाल्टिक बेड़े के दुर्लभ जहाजों ने प्रवेश किया। वास्तव में, दो ब्रिटिश पनडुब्बियां और हमारी पनडुब्बी "मगरमच्छ" लीबावा से सैन्य अभियानों पर चली गईं। सत्रह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह को, जर्मन आक्रमण के दौरान, एक आदेश प्राप्त हुआ - लिबौ को छोड़ने के लिएः कुछ उड़ा दिया गया, कुछ बाढ़ आ गई, और चौबीस अप्रैल को जर्मन शहर में प्रवेश कर गए। होशसीफ्लोट को रूस का आभारी होना चाहिए था - युद्ध के दौरान डॉक, बैरकों, मरम्मत की दुकानों और रेलवे के एक विकसित नेटवर्क के साथ प्रथम श्रेणी का बंदरगाह प्राप्त करने के लिए - क्या यह उपहार नहीं है? जर्मन, वैसे, सक्रिय रूप से बंदरगाह का उपयोग करते थे, और संरचनाओं के विशाल परिसर को अक्षम करने के उन प्रयासों ने रूसी कमांड द्वारा इसमें हस्तक्षेप नहीं किया। और जर्मनों के आने के बाद अंग्रेज आए, जिनके बाल्टिक स्क्वाड्रन ने हस्तक्षेप के दौरान एक विश्वसनीय आधार हासिल कर लिया। परिणामों का सारांश - रूसी साम्राज्य का लिबवा बिल्कुल भी उपयोगी नहीं था। कोई भी मछली पकड़ने वाला गांव पनडुब्बी के लिए अस्थायी आधार के रूप में उपयुक्त होगा। लेकिन जर्मनों और अंग्रेजों के लिए, जिनके खिलाफ अलेक्जेंडर III के बंदरगाह को इस तरह के उत्साह के साथ डिजाइन और बनाया गया था, आधार ने सही ढंग से सेवा की, एक बार फिर से एक सरल सत्य साबित हुआ - युद्ध में रसद के मुद्दे प्राथमिक हैं। और रूस-जापानी युद्ध ने हमें सबसे बुरे से बचाया, नीति को अलग तरह से बदल दिया, और हमने बाल्टिक में पोर्ट आर्थर, और स्कूलों में विद्यार्थियों को, बेड़े की मौत के साथ सेवस्तोपोल की वीर रक्षा के अलावा, अध्ययन करने का जोखिम उठाया। लिबावा की वीर रक्षा के साथ . . . चूहादानी ने काम नहीं किया, हमने दुश्मन के लिए एक अद्भुत आधार बनाया, जो युद्ध के परिणामस्वरूप लातवियाई लोगों के पास गया, मित्र देशों के एंटेंटे के साथ संबद्ध, जो शत्रुतापूर्ण था नवजात यूएसएसआर, और बाल्टिक में एक संभावित खतरा। हालांकि यह काम नहीं किया, और पच्चीस साल बाद, असली मालिक लिबाऊ लौट आए। अपने घरेलू बंदरगाह पर लौटकर, लिबौ ने बेड़े के एक गंभीर बुनियादी ढांचे को संरक्षित किया है, और सबसे महत्वपूर्ण बात - एक उत्कृष्ट कारखाना। बाल्टिक नौसैनिक अड्डे का गठन शुरू हुआ और इसकी संरचना में, लिबाऊ बेस, जिसकी कमान कैप्टन एक रैंक क्लेवांस्की ने संभाली थी। लिबाऊ में स्वयं बल कम थेः पांच टारपीडो नौकाएं, चार शिकारी, नौ सीमा नौकाएं और तीन बैटरी - दो एक सौ तीस मिमी और एक एक सौ अस्सी मिमी। इस अर्थ में, tsarist समय के विपरीत, उन्होंने लिबवा को गंभीरता से देखा। लेकिन संयंत्र . . . बाल्टिक में मरम्मत क्षमता की बहुत कमी थी, और बाईस. छः. एक हज़ार नौ सौ इकतालीस को लिबौ में विध्वंसक "लेनिन" और पंद्रह पनडुब्बियों की मरम्मत चल रही थी। शहर पर हमला तेईस जून को शुरू हुआ और शहर उनतीस जून को गिर गया। ज़ारवादी समय के विपरीत, उन्होंने उसे अंत तक रखा, लेकिन इससे स्थिति ठीक नहीं हुई, लिबौ में वे खो गएः "चौबीस जून की रात को, जिनके पास बेस छोड़ने का अवसर नहीं था, उन्हें पनडुब्बियों M-इकहत्तर , M-अस्सी , S -एक , रोनिस , स्पिडोला । एक विघटित वाहन और हटाए गए तोपखाने के साथ विध्वंसक "लेनिन" को भी अपने स्वयं के चालक दल द्वारा नष्ट कर दिया गया था। आइसब्रेकर "सिलाच" को उड़ा दिया गया था। " इसके अलावा, सेवा योग्य जहाजों और जहाजों के आधार से एक सफलता के दौरान, पनडुब्बी "एस -तीन", "एम -अठहत्तर" और दो टीकेए मारे गए। आधार में ही खो गया थाः "युद्ध की शुरुआत से पहले, लिबाऊ में गोदामों में चार सौ तिरानवे खदानें , एक सौ छियालीस टॉरपीडो, इकतालीस ट्रॉल्स, तीन. शून्य डेप्थ चार्ज, नौ. सात सौ इकसठ टन ईंधन तेल, एक. नौ सौ ग्यारह टन डीजल ईंधन, पाँच सौ पचासी टन थे। गैसोलीन का, दस. पाँच सौ पाँच टन कोयला । बहुत सारी संपत्ति। जाल एक क्लैंग के साथ बंद हो गया। शहर की रक्षा में दस हजार लोगों की लाल सेना का खर्च आया। और फिर लिबावा ने फिर से युद्ध के अंत तक जर्मनों की सेवा की, शहर केवल नौ मई, एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस को मुक्त हुआ। यह एक बार फिर एक निर्दयी शब्द अलेक्सी अलेक्जेंड्रोविच, सम्राट अलेक्जेंडर III और उनके प्रशंसकों के साथ याद किया जाता है, जिन्होंने बाल्टिक में रूस के दुश्मनों के लिए इस तरह के एक शांत किले का निर्माण किया था। और यह सर्दियों में खत्म करने लायक है समाचारः "फिलहाल, लातवियाई रक्षा मंत्रालय की नौ संरचनाएं लीपाजा में स्थित हैं, जिनमें युद्धपोत, नागरिक मिलिशिया की इकाइयां" होम गार्ड "आदि शामिल हैं। इस शहर में एक सैन्य अड्डे के विकास की योजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है। . पहले चरण के दौरान, एक बैरक, एक मुख्यालय भवन, एक कैंटीन, एक खाद्य गोदाम, एक चिकित्सा केंद्र, एक खेल परिसर, एक गैरीसन गोदाम, "होम गार्ड" के लिए गोदाम और नौसेना बलों, एक मरम्मत की दुकान बनाने की योजना है , परिवहन बक्से, आदि दूसरे चरण में, एक गोला बारूद गोदाम बनाया जाएगा, गैस स्टेशन, मरीना और अन्य सुविधाएं। यहां यह याद रखने योग्य है कि अभ्यास में भाग लेने के लिए लातविया पहुंचने वाले नाटो के भारी उपकरणों को उतारने के लिए लेपाजा के बंदरगाह का समय-समय पर उपयोग किया जाता है। " बस यह पता लगाने के लिए कि एक गलती की कीमत कितनी हो सकती है। - लेखकः
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भोपाल। गर्मी के मौसम की आहट होने और तापमान बढ़ने के बीच मध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में स्थिति काफी गंभीर हो गई है। मगर अभी तक सरकारी अमला इस मामले में गंभीर नहीं हुआ है। ऐसे में एक समाचार चैनल द्वारा राज्य के कुछ क्षेत्रों में आसन्न जल संकट को लेकर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।
इसके बाद जब उक्त चैनल ने कथित तौर पर मंत्री कुसुम मेहदेले से चर्चा की तो कथितरूप से उनका कहना था कि पानी प्रयोगशाला में नहीं बनता है अभी हालात इतने खराब नहीं है। हालांकि सरकार कार्य कर रही है। मंत्री के इस तरह के बयान पर जमकर हंगामा हो गया।
हालांकि जिम्मेदार मंत्री के अपने अलग तर्क थे लेकिन यह मामला गर्मा गया और राज्य में पर्याप्त जल आपूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे। गौरतलब है कि कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर जल स्त्रोत सूखने की कगार पर हैं तो भूजल का स्तर बहुत नीचे चला गया है। ऐसे में हालात काफी गंभीर हो गए हैं। प्रतिवर्ष गर्मी के मौसम की दस्तक के ही साथ इस तरह के हालात बन जाते हैं। मध्यप्रदेश के ही साथ अन्य राज्यों में भी लगभग इसी तरह की स्थिति बनी है।
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भोपाल। गर्मी के मौसम की आहट होने और तापमान बढ़ने के बीच मध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में स्थिति काफी गंभीर हो गई है। मगर अभी तक सरकारी अमला इस मामले में गंभीर नहीं हुआ है। ऐसे में एक समाचार चैनल द्वारा राज्य के कुछ क्षेत्रों में आसन्न जल संकट को लेकर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। इसके बाद जब उक्त चैनल ने कथित तौर पर मंत्री कुसुम मेहदेले से चर्चा की तो कथितरूप से उनका कहना था कि पानी प्रयोगशाला में नहीं बनता है अभी हालात इतने खराब नहीं है। हालांकि सरकार कार्य कर रही है। मंत्री के इस तरह के बयान पर जमकर हंगामा हो गया। हालांकि जिम्मेदार मंत्री के अपने अलग तर्क थे लेकिन यह मामला गर्मा गया और राज्य में पर्याप्त जल आपूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे। गौरतलब है कि कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर जल स्त्रोत सूखने की कगार पर हैं तो भूजल का स्तर बहुत नीचे चला गया है। ऐसे में हालात काफी गंभीर हो गए हैं। प्रतिवर्ष गर्मी के मौसम की दस्तक के ही साथ इस तरह के हालात बन जाते हैं। मध्यप्रदेश के ही साथ अन्य राज्यों में भी लगभग इसी तरह की स्थिति बनी है।
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उपमंडल बड़सर की ग्राम पंचायत करेर के अंतर्गत शुक्रवार रात वन बीट सालन में भीषण आग लग गई। इस कारण लगभग दो हेक्टेयर सरकारी व अढ़ाई हेक्टेयर निजी जंगल जलकर राख हो गया। शुक्रवार शाम सालन-बल्ह गांवों के जंगल में अचानक भयंकर आग लग गई। आग की लपटें आसमान को छू रही थीं। डमयाना, सालन, बल्ह, लाहड़ी, गलोह आदि गांवों के लोगों ने वन विभाग और फायर ब्रिगेड को सूचित किया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग व वन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और जनसहयोग से आग पर रात लगभग 10 बजे तक काबू पा लिया गया। रिहायशी क्षेत्रों में आग नहीं पहुंची, जिससे बड़ी अनहोनी होने से टल गयी। झिरालड़ी वन बीट अधिकारी रामपाल शर्मा ने बताया कि आग से लगभग दो हेक्टेयर सरकारी व अढ़ाई हेक्टेयर निजी जंगल जल गया है। जनसहयोग से समय पर आग पर काबू पा लिया गया, जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ है। बिझड़ी अग्निशमन केंद्र के प्रभारी रत्न चंद ने कहा कि आग पर नियंत्रण कर लिया था।
लदरौर। भोरंज उपमंडल के लदरौर कस्बे में शुक्रवार देरशाम रेडिमेड कपड़ों की दुकान में आग लगने से लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो गया है। दुकान मालिक ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब आठ बजे के लगभग दुकान में आग लगने की सूचना साथ लगते दुकानदारों ने दी, तो वे दौड़ा-दौड़ा दुकान पहुंचा, लेकिन तब तक आधी दुकान का सामान जलकर राख हो चुका था। साथ लगते दुकानदारों ने जब दुकान के अंदर से धुआं उठते देखा तो दुकान का ताला तोड़कर उन्होंने आग पर काबू पाने का प्रयास किया, नहीं तो आग साथ वाली दुकानों में भी लग सकती थी। बताया जा रहा है कि सामने वाले घर के लिए पानी का टैंकर पानी लेकर ही उसी समय पहुंचा था। उस पानी के टैंकर से समय पर आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक आगजनी से पीडि़त दुकानदार का आधे से ज्यादा सामान जलकर राख हो चुका था। दुकानदारों में बलवीर, तारा चंद, मान चंद, जोगिंद्र सिंह, सोनू, प्रवीण कुमार, अजय कुमार, शक्ति चंद, रिंकू, सुनील कुमार आदि ने शीघ्र ही पीड़त दुकानदार को मुआवजा दिलवाने की मांग की है, ताकि उन्हें नुकसान से थोड़ी राहत मिल सके।
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उपमंडल बड़सर की ग्राम पंचायत करेर के अंतर्गत शुक्रवार रात वन बीट सालन में भीषण आग लग गई। इस कारण लगभग दो हेक्टेयर सरकारी व अढ़ाई हेक्टेयर निजी जंगल जलकर राख हो गया। शुक्रवार शाम सालन-बल्ह गांवों के जंगल में अचानक भयंकर आग लग गई। आग की लपटें आसमान को छू रही थीं। डमयाना, सालन, बल्ह, लाहड़ी, गलोह आदि गांवों के लोगों ने वन विभाग और फायर ब्रिगेड को सूचित किया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग व वन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और जनसहयोग से आग पर रात लगभग दस बजे तक काबू पा लिया गया। रिहायशी क्षेत्रों में आग नहीं पहुंची, जिससे बड़ी अनहोनी होने से टल गयी। झिरालड़ी वन बीट अधिकारी रामपाल शर्मा ने बताया कि आग से लगभग दो हेक्टेयर सरकारी व अढ़ाई हेक्टेयर निजी जंगल जल गया है। जनसहयोग से समय पर आग पर काबू पा लिया गया, जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ है। बिझड़ी अग्निशमन केंद्र के प्रभारी रत्न चंद ने कहा कि आग पर नियंत्रण कर लिया था। लदरौर। भोरंज उपमंडल के लदरौर कस्बे में शुक्रवार देरशाम रेडिमेड कपड़ों की दुकान में आग लगने से लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो गया है। दुकान मालिक ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब आठ बजे के लगभग दुकान में आग लगने की सूचना साथ लगते दुकानदारों ने दी, तो वे दौड़ा-दौड़ा दुकान पहुंचा, लेकिन तब तक आधी दुकान का सामान जलकर राख हो चुका था। साथ लगते दुकानदारों ने जब दुकान के अंदर से धुआं उठते देखा तो दुकान का ताला तोड़कर उन्होंने आग पर काबू पाने का प्रयास किया, नहीं तो आग साथ वाली दुकानों में भी लग सकती थी। बताया जा रहा है कि सामने वाले घर के लिए पानी का टैंकर पानी लेकर ही उसी समय पहुंचा था। उस पानी के टैंकर से समय पर आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक आगजनी से पीडि़त दुकानदार का आधे से ज्यादा सामान जलकर राख हो चुका था। दुकानदारों में बलवीर, तारा चंद, मान चंद, जोगिंद्र सिंह, सोनू, प्रवीण कुमार, अजय कुमार, शक्ति चंद, रिंकू, सुनील कुमार आदि ने शीघ्र ही पीड़त दुकानदार को मुआवजा दिलवाने की मांग की है, ताकि उन्हें नुकसान से थोड़ी राहत मिल सके।
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सूरज पंचोली और अतिया शेट्टी की फिल्म हीरो का ट्रेलर बुधवार को मुंबई में लॉन्च हुआ. सूरज आदित्य पंचोली के बेटे हैं वही आथिया शेट्टी सुनील शेट्टी की बेटी हैं. फिल्म के निर्देशक है निखिल आडवाणी हैं, वही फिल्म के निर्माता सलमान खान हैं. लॉन्च का मौका कई मायनों में खास व अलग रहा. सलमान खान ने बड़े आराम से पत्रकार के सवालों का जवाब दिया. वो पूरी तरह सूरज व अतिया के मेंटॉर की भूमिका में दिखाई दिए, जबकि ट्रेलर जारी के होने के बाद मंच पर आए सूरज की आंखों में खुशी के आंसू दिखाई दिए.
दर्शको में सबसे आखिरी सीट पर बैठे उनके पिता आदित्य पंचोली पूरा नजारा देख रहे थे. खुद उनकी आंखों से भी आंसुओं की गंगा-जमुना बह रही थी. सलमान और मंच पर मौजूद अन्य लोगों ने मिलकर सूरज को सहज अनुभव कराया. बाद में सूरज ने सलमान व अपने पिता का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, 'मैं सबकी आंखों का तारा बनकर दिखाऊंगा. कड़ी मेहनत करूंगा और जिन लोगों ने मुझमें भरोसा जताया है, उनका सिर फक्र से ऊंचा कर दूंगा. यह मेरा ड्रीम डेब्यू है. इससे अच्छा करियर का आगाज और क्या हो सकता है? फिल्म में सूरज एक्शन-पैक्ड भूमिका में दिखाई देंगे.
उनका किरदार जिस लडकी को अगवा करता है, उसी से उसे प्यार हो जाता है. फिर समाज व सिस्टम की बंदिशों को तोड वह अपने प्यार को कैसे हासिल करता है, यह फिल्म उस बारे में है. फिल्म सुभाष घई की सुपरहिट रही फिल्म हीरो की रीमेक है. नई फिल्म में सूरज के काम से खुश सलमान खान ने उन्हें इंडस्ट्री का अगला सलमान खान तक कह दिया. बकौल सूरज, 'मेरा एक्टिंग करने का इरादा बचपन से नहीं था. सलमान सर के कहने पर मैंने इस ओर ध्यान भी दिया. मैं तो उनके कॉल तक का जवाब नहीं दे पाता था.
अर्पिता दी मुझे कॉल कर कहा करतीं कि भाई तुम्हें बुला रहे हैं. फिर मैंने इस ओर ध्यान दिया. डांसिंग स्किल डेवलप की. डोले-शोले बनाए, अदाकारी को गंभीरता से लेना शुरू किया. अब आप सभी के सामने हूं. गौरतलब है कि सलमान सूरज से पहले भी कई प्रतिभाओं की मेंटरिंग कर चुके हैं. इससे पहले हाल-फिलहाल उनके कहने पर अर्जुन कपूर ने एक्टिंग में कदम रखा है. अपना वजन 140 किलो से घटाकर उन्होंने 80 किलो किया है. आज वे प्रॉमिसिंग कलाकारों की लीग में सबसे आगे हैं.
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सूरज पंचोली और अतिया शेट्टी की फिल्म हीरो का ट्रेलर बुधवार को मुंबई में लॉन्च हुआ. सूरज आदित्य पंचोली के बेटे हैं वही आथिया शेट्टी सुनील शेट्टी की बेटी हैं. फिल्म के निर्देशक है निखिल आडवाणी हैं, वही फिल्म के निर्माता सलमान खान हैं. लॉन्च का मौका कई मायनों में खास व अलग रहा. सलमान खान ने बड़े आराम से पत्रकार के सवालों का जवाब दिया. वो पूरी तरह सूरज व अतिया के मेंटॉर की भूमिका में दिखाई दिए, जबकि ट्रेलर जारी के होने के बाद मंच पर आए सूरज की आंखों में खुशी के आंसू दिखाई दिए. दर्शको में सबसे आखिरी सीट पर बैठे उनके पिता आदित्य पंचोली पूरा नजारा देख रहे थे. खुद उनकी आंखों से भी आंसुओं की गंगा-जमुना बह रही थी. सलमान और मंच पर मौजूद अन्य लोगों ने मिलकर सूरज को सहज अनुभव कराया. बाद में सूरज ने सलमान व अपने पिता का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, 'मैं सबकी आंखों का तारा बनकर दिखाऊंगा. कड़ी मेहनत करूंगा और जिन लोगों ने मुझमें भरोसा जताया है, उनका सिर फक्र से ऊंचा कर दूंगा. यह मेरा ड्रीम डेब्यू है. इससे अच्छा करियर का आगाज और क्या हो सकता है? फिल्म में सूरज एक्शन-पैक्ड भूमिका में दिखाई देंगे. उनका किरदार जिस लडकी को अगवा करता है, उसी से उसे प्यार हो जाता है. फिर समाज व सिस्टम की बंदिशों को तोड वह अपने प्यार को कैसे हासिल करता है, यह फिल्म उस बारे में है. फिल्म सुभाष घई की सुपरहिट रही फिल्म हीरो की रीमेक है. नई फिल्म में सूरज के काम से खुश सलमान खान ने उन्हें इंडस्ट्री का अगला सलमान खान तक कह दिया. बकौल सूरज, 'मेरा एक्टिंग करने का इरादा बचपन से नहीं था. सलमान सर के कहने पर मैंने इस ओर ध्यान भी दिया. मैं तो उनके कॉल तक का जवाब नहीं दे पाता था. अर्पिता दी मुझे कॉल कर कहा करतीं कि भाई तुम्हें बुला रहे हैं. फिर मैंने इस ओर ध्यान दिया. डांसिंग स्किल डेवलप की. डोले-शोले बनाए, अदाकारी को गंभीरता से लेना शुरू किया. अब आप सभी के सामने हूं. गौरतलब है कि सलमान सूरज से पहले भी कई प्रतिभाओं की मेंटरिंग कर चुके हैं. इससे पहले हाल-फिलहाल उनके कहने पर अर्जुन कपूर ने एक्टिंग में कदम रखा है. अपना वजन एक सौ चालीस किलो से घटाकर उन्होंने अस्सी किलो किया है. आज वे प्रॉमिसिंग कलाकारों की लीग में सबसे आगे हैं.
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प्रदेशभर में शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ (निर्वाचन कार्य) कार्य में फिर से लगा दी गई है। ऐसे में राजधानी के ही स्कूलों की हालत यह है कि कई स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं। सीएम राइज स्कूल सरदार पटेल करोंद भोपाल के 15 शिक्षकों तक को ड्यूटी पर लगाया गया है। इसके अलावा भी कई स्कूल में से कई एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है। शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने आरोप लगाए कि इससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। जल्द ही तिमाही परीक्षा होने वाली है। पिछले 3 माह से शिक्षक पूर्णतः बीएलओ ( निर्वाचन कार्य) एवं गैर शैक्षणिक कार्यों कर रहे हैं। खासतौर से प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों के बच्चों की पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
कौशल का कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा अनेकों बार शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों एवं बीएलओ में नहीं लगाए जाने के आदेश जारी करने के उपरांत भी शिक्षकों की ड्यूटी एकमुश्त के गैर शैक्षणिक कार्यों एवं विभिन्न कार्यालयों में लगा दी जाती है, जिससे स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। राजधानी भोपाल के कई स्कूलों की स्थिति यह बन गई है कि सिर्फ संस्था प्रमुख ही साला के बच्चों को घेरकर शिक्षक कार्य करा रहे हैं। वहीं, शिक्षा विभाग ने सीएम राइज स्कूलों के शिक्षकों को निर्वाचन कार्य एवं गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने के निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के विपरीत भी सीएम राइज स्कूलों के शिक्षकों को बीएलओ और अन्य गैर शैक्षणिक कार्य में लगाया जा रहा है।
राजधानी के सीएम राइज स्कूल सरदार पटेल करोंद के 15 शिक्षक, निशातपुरा के 5 शिक्षक, गोविंदपुरा महात्मा गांधी के 4-4 शिक्षक, बीएलओ कार्य में संलग्न है। वहीं, माध्यमिक शाला द्वारका नगर के 9 शिक्षकों में से 8 शिक्षक, पलासी के 5, जीवन ज्योति के 2, काजी कैम्प के 5, भानपुर के 4 शिक्षक 3 महीनों से बीएलओ ड्यूटी कर रहे हैं। अन्य स्कूलों की स्थिति भी यही है। कौशल ने आरोप लगाया है कि शिक्षक महीनों गैर शैक्षणिक कार्य में संलग्न रहते हैं, जिसके कारण स्कूल की शिक्षण व्यवस्था एवं परीक्षा परिणाम प्रभावित होता है। ऐसे में शिक्षकों को दंडित करना न्याय संगत नहीं है। स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने के लिए पूर्ण रूप से उत्तरदायी शिक्षक ना होकर वह अधिकारी हैं, जो इन शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाते हैं। संगठन ने मांग की है शिक्षकों को तत्काल बीएलओ एवं अन्य गैर शैक्षणिक कार्य से मुक्त कर उनकी मूल पदस्थ स्कूलों में भेजा जाए। अन्य कार्यालयों में आसंजित शिक्षकों का भी तत्काल अटैचमेंट समाप्त किया जाए। शासन के आदेशों के विपरीत शिक्षकों को आसंजित करने वाले अधिकारी कर्मचारी पर कार्रवाई की जाए।
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प्रदेशभर में शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ कार्य में फिर से लगा दी गई है। ऐसे में राजधानी के ही स्कूलों की हालत यह है कि कई स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं। सीएम राइज स्कूल सरदार पटेल करोंद भोपाल के पंद्रह शिक्षकों तक को ड्यूटी पर लगाया गया है। इसके अलावा भी कई स्कूल में से कई एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है। शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने आरोप लगाए कि इससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। जल्द ही तिमाही परीक्षा होने वाली है। पिछले तीन माह से शिक्षक पूर्णतः बीएलओ एवं गैर शैक्षणिक कार्यों कर रहे हैं। खासतौर से प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों के बच्चों की पूरी तरह प्रभावित हो रही है। कौशल का कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा अनेकों बार शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों एवं बीएलओ में नहीं लगाए जाने के आदेश जारी करने के उपरांत भी शिक्षकों की ड्यूटी एकमुश्त के गैर शैक्षणिक कार्यों एवं विभिन्न कार्यालयों में लगा दी जाती है, जिससे स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। राजधानी भोपाल के कई स्कूलों की स्थिति यह बन गई है कि सिर्फ संस्था प्रमुख ही साला के बच्चों को घेरकर शिक्षक कार्य करा रहे हैं। वहीं, शिक्षा विभाग ने सीएम राइज स्कूलों के शिक्षकों को निर्वाचन कार्य एवं गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने के निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के विपरीत भी सीएम राइज स्कूलों के शिक्षकों को बीएलओ और अन्य गैर शैक्षणिक कार्य में लगाया जा रहा है। राजधानी के सीएम राइज स्कूल सरदार पटेल करोंद के पंद्रह शिक्षक, निशातपुरा के पाँच शिक्षक, गोविंदपुरा महात्मा गांधी के चार-चार शिक्षक, बीएलओ कार्य में संलग्न है। वहीं, माध्यमिक शाला द्वारका नगर के नौ शिक्षकों में से आठ शिक्षक, पलासी के पाँच, जीवन ज्योति के दो, काजी कैम्प के पाँच, भानपुर के चार शिक्षक तीन महीनों से बीएलओ ड्यूटी कर रहे हैं। अन्य स्कूलों की स्थिति भी यही है। कौशल ने आरोप लगाया है कि शिक्षक महीनों गैर शैक्षणिक कार्य में संलग्न रहते हैं, जिसके कारण स्कूल की शिक्षण व्यवस्था एवं परीक्षा परिणाम प्रभावित होता है। ऐसे में शिक्षकों को दंडित करना न्याय संगत नहीं है। स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने के लिए पूर्ण रूप से उत्तरदायी शिक्षक ना होकर वह अधिकारी हैं, जो इन शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाते हैं। संगठन ने मांग की है शिक्षकों को तत्काल बीएलओ एवं अन्य गैर शैक्षणिक कार्य से मुक्त कर उनकी मूल पदस्थ स्कूलों में भेजा जाए। अन्य कार्यालयों में आसंजित शिक्षकों का भी तत्काल अटैचमेंट समाप्त किया जाए। शासन के आदेशों के विपरीत शिक्षकों को आसंजित करने वाले अधिकारी कर्मचारी पर कार्रवाई की जाए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नसीरुद्दीन शाह के डर वाले बयान पर अनुपम खेर ने पूछा- सेना को गाली और पत्थर. . . और कितनी आजादी चाहिए?
कांति सिंह ने उपेन्द्र कुशवाहा पर उठाए सवाल, पूछा- कितने दिन रहेंगे महागठबंधन में ?
तेजस्वी का सीधा सवाल, नीतीश जी बताएं बिहार में कैसा सुशासन है?
खेमका हत्याकांड : शिवानंद ने नीतीश कुमार से पूछा, बिहार में कौन आएगा निवेश करने ?
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नसीरुद्दीन शाह के डर वाले बयान पर अनुपम खेर ने पूछा- सेना को गाली और पत्थर. . . और कितनी आजादी चाहिए? कांति सिंह ने उपेन्द्र कुशवाहा पर उठाए सवाल, पूछा- कितने दिन रहेंगे महागठबंधन में ? तेजस्वी का सीधा सवाल, नीतीश जी बताएं बिहार में कैसा सुशासन है? खेमका हत्याकांड : शिवानंद ने नीतीश कुमार से पूछा, बिहार में कौन आएगा निवेश करने ? Phone No.
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इन सभी छात्रों के खिलाफ थाना शहर फतेहाबाद में धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किए गए हैं।
हरियाणा ओपन विद्यालय की होम साइंस की परीक्षा के दौरान फतेहाबाद शहर में दो परीक्षा केन्द्रों पर 9 छात्रों को दूसरे छात्र की परीक्षा देते पकड़ा गया। इन सभी छात्रों के खिलाफ थाना शहर फतेहाबाद में धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किए गए हैं। पहले मामले में पुलिस को दी शिकायत में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय फतेहाबाद के सेंटर सुपरीडेंट दिनेश कुमार ने कहा है कि उनके परीक्षा केन्द्र पर गत दिवस हरियाणा ओपन स्कूल की होम साईंस विषय की परीक्षा चल रही थी। परीक्षा केन्द्र के कमरा नं. 43 में सुपरवाइजर ललित रानी की ड्यूटी थी। जब उन्होंने एक परीक्षार्थी को चैक किया तो वह अपना पेपर बोर्ड, प्रश्न पत्र व अन्य सामग्री छोड़कर वहां से भाग गया, क्योंकि वह दूसरे के स्थान पर पेपर देने आया था।
इसके अलावा उड़नदस्ते ने अनेक लोगों को दूसरे की जगह पेपर देते पकड़ा। इसमें अजय कुमार के स्थान पर सुमित पपर दे रहा था वहीं प्रवीन कुमार की जगह मोहित को पेपर देते पकड़ा। इसके अलावा सुमित कुमार, नरेन्द्र कुमार, अतुल कुमार, विक्रम कुमार, कुलदीप के स्थान पर भी अन्य युवकों को पेपर देते पकड़ा गया लेकिन जब वे कागजी कार्यवाही कर रहे थे तो इसी दौरान उक्त युवक मौके से फरार हो गए। इसके अलावा मोहित व सुमित भी इनके साथ भाग गए। इस पर केन्द्र अधीक्षक ने पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई। इस मामले में पुलिस ने अजय, सुमित, प्रवीन, मोहित, सुमित, नरेन्द्र, अतुल, विक्रम, कुलदीप व 5 अन्य युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इसके अलावा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में भी चेयरमैन फ्लाईंग टीम ने दो युवकों को दूसरे की जगह पेपर परीक्षा देते पकड़ा है। इस बारे पुलिस को दी शिकायत में केन्द्र अधीक्षक अमित पूनियां ने कहा है कि गत दिवस स्कूल में जब हरियाणा ओपन बोर्ड की होम साईंस की परीक्षा चल रही थी तो निरीक्षण के लिए चेयरमैन फ्लाईंग की टीम सैंटर पर पहुंची। इस दौरान उन्होंने पाया कि नरेश की जगह रमजान निवासी दुर्जनपुर जिला जींद पेपर दे रहा था। इसके अलावा प्रवीन कुमार की जगह परविन्द्र निवासी नहला पेपर देते पकड़ा गया। पुलिस ने इनके खिलाफ भी केस दर्ज कर लिया है।
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इन सभी छात्रों के खिलाफ थाना शहर फतेहाबाद में धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किए गए हैं। हरियाणा ओपन विद्यालय की होम साइंस की परीक्षा के दौरान फतेहाबाद शहर में दो परीक्षा केन्द्रों पर नौ छात्रों को दूसरे छात्र की परीक्षा देते पकड़ा गया। इन सभी छात्रों के खिलाफ थाना शहर फतेहाबाद में धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किए गए हैं। पहले मामले में पुलिस को दी शिकायत में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय फतेहाबाद के सेंटर सुपरीडेंट दिनेश कुमार ने कहा है कि उनके परीक्षा केन्द्र पर गत दिवस हरियाणा ओपन स्कूल की होम साईंस विषय की परीक्षा चल रही थी। परीक्षा केन्द्र के कमरा नं. तैंतालीस में सुपरवाइजर ललित रानी की ड्यूटी थी। जब उन्होंने एक परीक्षार्थी को चैक किया तो वह अपना पेपर बोर्ड, प्रश्न पत्र व अन्य सामग्री छोड़कर वहां से भाग गया, क्योंकि वह दूसरे के स्थान पर पेपर देने आया था। इसके अलावा उड़नदस्ते ने अनेक लोगों को दूसरे की जगह पेपर देते पकड़ा। इसमें अजय कुमार के स्थान पर सुमित पपर दे रहा था वहीं प्रवीन कुमार की जगह मोहित को पेपर देते पकड़ा। इसके अलावा सुमित कुमार, नरेन्द्र कुमार, अतुल कुमार, विक्रम कुमार, कुलदीप के स्थान पर भी अन्य युवकों को पेपर देते पकड़ा गया लेकिन जब वे कागजी कार्यवाही कर रहे थे तो इसी दौरान उक्त युवक मौके से फरार हो गए। इसके अलावा मोहित व सुमित भी इनके साथ भाग गए। इस पर केन्द्र अधीक्षक ने पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई। इस मामले में पुलिस ने अजय, सुमित, प्रवीन, मोहित, सुमित, नरेन्द्र, अतुल, विक्रम, कुलदीप व पाँच अन्य युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में भी चेयरमैन फ्लाईंग टीम ने दो युवकों को दूसरे की जगह पेपर परीक्षा देते पकड़ा है। इस बारे पुलिस को दी शिकायत में केन्द्र अधीक्षक अमित पूनियां ने कहा है कि गत दिवस स्कूल में जब हरियाणा ओपन बोर्ड की होम साईंस की परीक्षा चल रही थी तो निरीक्षण के लिए चेयरमैन फ्लाईंग की टीम सैंटर पर पहुंची। इस दौरान उन्होंने पाया कि नरेश की जगह रमजान निवासी दुर्जनपुर जिला जींद पेपर दे रहा था। इसके अलावा प्रवीन कुमार की जगह परविन्द्र निवासी नहला पेपर देते पकड़ा गया। पुलिस ने इनके खिलाफ भी केस दर्ज कर लिया है।
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जिले में कोरोना टीकाकरण के लिए दिन प्रतिदिन केंद्रों पर भीड़ बढ़ती जा रही है। मंगलवार को भी शहरी और ग्रामीण इलाकों में कई केंद्रों पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं दिखा। मंगलवार को महिला अस्पताल, काशी विद्यापीठ स्वास्थ्य केंद्र, एमएसएमई भवन चांदपुर सहित अन्य केंद्रों पर समय से पहले वैक्सीन खत्म होने पर लोगों ने हंगामा किया। इस दौरान उनकी कर्मचारियों से नोकझोंक भी हुई। सुरक्षा के लिहाज से लगी पुलिस को भी बीचबचाव के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। वैक्सीन की संकट की वजह से पिछले सप्ताह केंद्रों की संख्या भी कम थी। अब जब थोड़ी स्थिति सुधरी तो केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई। हालत यह है कि मंगलवार को महिला अस्पताल कबीरचौरा, चांदपुर एमएसएमई भवन सहित अन्य केंद्रों पर सुबह आठ बजे से ही लाइन लगनी शुरू हो गई। महिला अस्पताल में दोपहर में टीका लगवाने आई महिलाओं और पुलिस कर्मियों में नोकझोंक हुई। भीड़ अधिक होने पर पुलिसकर्मी लोगों से कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की अपील करते रहे। स्वामी विवेकानंद अस्पताल भेलूपुर, शहरी सीएचसी दुर्गाकुंड पर भी भीड़ लगी रही। एमएसएमई भवन सभागार में पहले दिन 320 लोगों का टीकाकरण हुआ। यहां भी सामाजिक दूरी नहीं दिखी। लोग एक दूसरे से सटकर खड़े रहे।
पहले की तरह अब टीकाकरण के लिए स्लॉट बुकिंग का झंझट खत्म हो गया है। केंद्रों पर ऑन द स्पॉट पंजीकरण की व्यवस्था शुरू हो गई है। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि अधिक से अधिक लोग टीका लगवा सके, इसलिए व्यवस्था शुरू की गई है। लोगों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर इसका लाभ उठाना चाहिए।
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जिले में कोरोना टीकाकरण के लिए दिन प्रतिदिन केंद्रों पर भीड़ बढ़ती जा रही है। मंगलवार को भी शहरी और ग्रामीण इलाकों में कई केंद्रों पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं दिखा। मंगलवार को महिला अस्पताल, काशी विद्यापीठ स्वास्थ्य केंद्र, एमएसएमई भवन चांदपुर सहित अन्य केंद्रों पर समय से पहले वैक्सीन खत्म होने पर लोगों ने हंगामा किया। इस दौरान उनकी कर्मचारियों से नोकझोंक भी हुई। सुरक्षा के लिहाज से लगी पुलिस को भी बीचबचाव के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। वैक्सीन की संकट की वजह से पिछले सप्ताह केंद्रों की संख्या भी कम थी। अब जब थोड़ी स्थिति सुधरी तो केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई। हालत यह है कि मंगलवार को महिला अस्पताल कबीरचौरा, चांदपुर एमएसएमई भवन सहित अन्य केंद्रों पर सुबह आठ बजे से ही लाइन लगनी शुरू हो गई। महिला अस्पताल में दोपहर में टीका लगवाने आई महिलाओं और पुलिस कर्मियों में नोकझोंक हुई। भीड़ अधिक होने पर पुलिसकर्मी लोगों से कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की अपील करते रहे। स्वामी विवेकानंद अस्पताल भेलूपुर, शहरी सीएचसी दुर्गाकुंड पर भी भीड़ लगी रही। एमएसएमई भवन सभागार में पहले दिन तीन सौ बीस लोगों का टीकाकरण हुआ। यहां भी सामाजिक दूरी नहीं दिखी। लोग एक दूसरे से सटकर खड़े रहे। पहले की तरह अब टीकाकरण के लिए स्लॉट बुकिंग का झंझट खत्म हो गया है। केंद्रों पर ऑन द स्पॉट पंजीकरण की व्यवस्था शुरू हो गई है। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि अधिक से अधिक लोग टीका लगवा सके, इसलिए व्यवस्था शुरू की गई है। लोगों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर इसका लाभ उठाना चाहिए।
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जैसी शोभा दक्ष प्रजापति के चयन कर्म की हुई थी। चार स्थण्डिलों से युक्त इस महायज्ञ की वेदी आठारह हाथ परिमित रुक्म पक्ष युक्त त्रिकोण तथा गरुढाकार से बनायी गयी थी ।
अनन्तर मनीषियों के द्वारा शास्त्र के अनुसार देवताओं के उद्देश्य से जो समस्त पशु, पक्षी, ऋषभ तथा जलचर नियुक्त हुए थे; ऋत्विजों ने अग्निचयन कर्म में उन पशुओं को भेंट किया। युधिष्ठिर के यज्ञ में अश्वादि तीन सौ पशु खंभों में बंधे हुए थे । युधिष्ठिर का यज्ञमण्डप, देवताओं और ऋषियों की उपस्थिति, गन्धर्वो के सङ्गीत और अप्सराओं के नृत्य से शोभायमान हो रहा था । किम्पुरुषों से युक्त, किन्नरों से शोभित, सिद्ध और ब्राह्मणों से परिवेटित उस यज्ञमण्डप की शोभा देखते ही बन आती थी ।
उस महामण्डप में सर्वशास्त्रप्रणेता, यज्ञसंस्कार में निपुण द्विजश्रेष्ट व्यासशिष्यों के बैठने पर, महातेजस्वी गीतकोविद नारद, तुम्बुरु, विश्वावसु, चित्रसेन तथा नृत्य गीत जानने वाले गन्धर्व गण उपस्थित ब्राह्मणमण्डली को हर्षित करने लगे।
नवासीवाँ अध्याय यज्ञ-समाप्ति
वैशम्पायन जी बोले - हे जनमेजय ! द्विजाति याजकों ने अन्यान्य सुन्दर पशुओं का विधि पूर्वक संस्कार कर के शास्त्रोक्त विधि से उस यज्ञीय अश्व का वध किया। तदनन्तर याजकों ने पवित्र मन बाली द्रौपदी को वहाँ बैठाया। फिर घोड़े की चर्बी निकाल ब्राह्मणों ने विधि के अनुसार उसे तपाया । तब युधिष्ठिर ने अपने समस्त भाइयों सहित तपायी हुई चर्बी से निकलते हुए धुए को विधिपूर्वक सूँधा । यह धुए की गन्ध सब पाप को दूर करने वाली थी। राजन् ! घोड़े के जो अङ्ग बच गये थे, उनको
नवासीव धभ्याय
ऋत्विजों ने शास्त्रोक्त विधि में अग्नि में हम दिया । इन्द्र तुल्य नेजस्वी राजा युधिष्ठिर के यज्ञ को इस प्रकार करवा शिष्यों सहित वेदव्यास जी ने युधिष्ठिर को ग्रागोवढ दिया। तदनन्तर युधिष्टिर ने विधि के अनुसार ब्राह्मणों को सात हजार कोटि निष्क दक्षिणा में दिये और व्याम जी को पृथिवी दी। हे राजन् ! सत्यवतीसुत व्याम ने पृथिवी का प्रतिग्रह ले. युधिष्टिर से कहा- हे राजमत्तम ! मैं इस पृथिवी को त्यागना है। यह तुम्हारी हो हो । मुझे इसका मूल्य है हो । क्योंकि मात्र तो धन पा पर ही सन्नुष्ट होते हैं।
महामना युधिष्ठिर भाइयों की उपस्थिति में इन मालवों मे चोलेअश्वमेध यज्ञ की दक्षिणा में पृथिवी ही दी जाती है। प्रतपुव अर्जुन द्वारा निर्जित यह वसुन्धरा मैंने ऋत्विजों को प्रदान की है। हे विभगय ! चिप्रगत ग्राप लोग इसको आपस में बाँट लें में अब वन को जाऊँगा तुम चातुर्होत्र के प्रमाण से पृथिवी के चार भाग कर के चाँट लो। यह धर ब्रह्मस्व है। अतः मैं ब्राह्मणों का धन लेना नहीं चाहता । ६ विनो! मैंने जो कहा है, उपमे मेरे भाई भी सहमत हैं।
जब युधिष्टिर ने यह कहा, तय द्रौपदी महिन उनके सब भारों ने एक स्वर से कहा-महाराज ने जो कहा है, उसमे हम पूरानया सहमत हैं। पाण्डवों के हुन वचनों को सुन, वहाँ उपस्थित समम्त लोगों के रोंगटे गढ़े हो गये ।
हे गजन् ! तदनन्तर धापाशस्य लोगों के साधुराद और माराद मे के वह म्यान व्याप्त हो गया। तय महर्षि वेदव्यास घोर घोर के मध्य बैठे हुए युधिष्टिर की प्रशंसा कर कहा तुमने मुझे यह में अब इसे आपको लौटाये देता है। इसके पहले तुम सुवर्णदान करो। यह बसुन्धरा तुम्हारी हो रहे ।
अनन्तर श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्टिर में पा- भगरानू राम के कथनानुसार ही आपको करना चाहिये ।
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जैसी शोभा दक्ष प्रजापति के चयन कर्म की हुई थी। चार स्थण्डिलों से युक्त इस महायज्ञ की वेदी आठारह हाथ परिमित रुक्म पक्ष युक्त त्रिकोण तथा गरुढाकार से बनायी गयी थी । अनन्तर मनीषियों के द्वारा शास्त्र के अनुसार देवताओं के उद्देश्य से जो समस्त पशु, पक्षी, ऋषभ तथा जलचर नियुक्त हुए थे; ऋत्विजों ने अग्निचयन कर्म में उन पशुओं को भेंट किया। युधिष्ठिर के यज्ञ में अश्वादि तीन सौ पशु खंभों में बंधे हुए थे । युधिष्ठिर का यज्ञमण्डप, देवताओं और ऋषियों की उपस्थिति, गन्धर्वो के सङ्गीत और अप्सराओं के नृत्य से शोभायमान हो रहा था । किम्पुरुषों से युक्त, किन्नरों से शोभित, सिद्ध और ब्राह्मणों से परिवेटित उस यज्ञमण्डप की शोभा देखते ही बन आती थी । उस महामण्डप में सर्वशास्त्रप्रणेता, यज्ञसंस्कार में निपुण द्विजश्रेष्ट व्यासशिष्यों के बैठने पर, महातेजस्वी गीतकोविद नारद, तुम्बुरु, विश्वावसु, चित्रसेन तथा नृत्य गीत जानने वाले गन्धर्व गण उपस्थित ब्राह्मणमण्डली को हर्षित करने लगे। नवासीवाँ अध्याय यज्ञ-समाप्ति वैशम्पायन जी बोले - हे जनमेजय ! द्विजाति याजकों ने अन्यान्य सुन्दर पशुओं का विधि पूर्वक संस्कार कर के शास्त्रोक्त विधि से उस यज्ञीय अश्व का वध किया। तदनन्तर याजकों ने पवित्र मन बाली द्रौपदी को वहाँ बैठाया। फिर घोड़े की चर्बी निकाल ब्राह्मणों ने विधि के अनुसार उसे तपाया । तब युधिष्ठिर ने अपने समस्त भाइयों सहित तपायी हुई चर्बी से निकलते हुए धुए को विधिपूर्वक सूँधा । यह धुए की गन्ध सब पाप को दूर करने वाली थी। राजन् ! घोड़े के जो अङ्ग बच गये थे, उनको नवासीव धभ्याय ऋत्विजों ने शास्त्रोक्त विधि में अग्नि में हम दिया । इन्द्र तुल्य नेजस्वी राजा युधिष्ठिर के यज्ञ को इस प्रकार करवा शिष्यों सहित वेदव्यास जी ने युधिष्ठिर को ग्रागोवढ दिया। तदनन्तर युधिष्टिर ने विधि के अनुसार ब्राह्मणों को सात हजार कोटि निष्क दक्षिणा में दिये और व्याम जी को पृथिवी दी। हे राजन् ! सत्यवतीसुत व्याम ने पृथिवी का प्रतिग्रह ले. युधिष्टिर से कहा- हे राजमत्तम ! मैं इस पृथिवी को त्यागना है। यह तुम्हारी हो हो । मुझे इसका मूल्य है हो । क्योंकि मात्र तो धन पा पर ही सन्नुष्ट होते हैं। महामना युधिष्ठिर भाइयों की उपस्थिति में इन मालवों मे चोलेअश्वमेध यज्ञ की दक्षिणा में पृथिवी ही दी जाती है। प्रतपुव अर्जुन द्वारा निर्जित यह वसुन्धरा मैंने ऋत्विजों को प्रदान की है। हे विभगय ! चिप्रगत ग्राप लोग इसको आपस में बाँट लें में अब वन को जाऊँगा तुम चातुर्होत्र के प्रमाण से पृथिवी के चार भाग कर के चाँट लो। यह धर ब्रह्मस्व है। अतः मैं ब्राह्मणों का धन लेना नहीं चाहता । छः विनो! मैंने जो कहा है, उपमे मेरे भाई भी सहमत हैं। जब युधिष्टिर ने यह कहा, तय द्रौपदी महिन उनके सब भारों ने एक स्वर से कहा-महाराज ने जो कहा है, उसमे हम पूरानया सहमत हैं। पाण्डवों के हुन वचनों को सुन, वहाँ उपस्थित समम्त लोगों के रोंगटे गढ़े हो गये । हे गजन् ! तदनन्तर धापाशस्य लोगों के साधुराद और माराद मे के वह म्यान व्याप्त हो गया। तय महर्षि वेदव्यास घोर घोर के मध्य बैठे हुए युधिष्टिर की प्रशंसा कर कहा तुमने मुझे यह में अब इसे आपको लौटाये देता है। इसके पहले तुम सुवर्णदान करो। यह बसुन्धरा तुम्हारी हो रहे । अनन्तर श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्टिर में पा- भगरानू राम के कथनानुसार ही आपको करना चाहिये ।
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फिर से फन फैला रहे कोरोना पर कंट्रोल करने के लिए राज्य सरकार ने सख्ती कर दी है। सरकार ने हरियाणा बार्डर से आने वाले दिल्ली और अन्य राज्यों के लोगों को RT-PCR की निगेटिव रिपोर्ट दिखानी जरूरी है। नीमकाथाना में हरियाणा बॉर्डर पर नाका लगाया गया है जो सीमा पार से आने वाले लोगों की कोविड रिपोर्ट जांचते है। जिनके पास निगेटिव रिपोर्ट नहीं थी और जांच भी नहीं करा रहे हैं, उन्हें लौटाया जा रहा है।
आयुष विभाग के डॉ. दामोदर शर्मा की अगुवाई में टीम बॉर्डर पर बैठी है, उसमें मेडिकल टीम का मेंबर, पुलिस और प्रशासन से भी एक-एक मेंबर बैठा हुआ है। ये बॉर्डर से प्रदेश में आ रहे लोगों की जांच रिपोर्ट देखते है। जिसके पास ऐसी रिपोर्ट नहीं है उनको लौटा दिया जाता है।
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फिर से फन फैला रहे कोरोना पर कंट्रोल करने के लिए राज्य सरकार ने सख्ती कर दी है। सरकार ने हरियाणा बार्डर से आने वाले दिल्ली और अन्य राज्यों के लोगों को RT-PCR की निगेटिव रिपोर्ट दिखानी जरूरी है। नीमकाथाना में हरियाणा बॉर्डर पर नाका लगाया गया है जो सीमा पार से आने वाले लोगों की कोविड रिपोर्ट जांचते है। जिनके पास निगेटिव रिपोर्ट नहीं थी और जांच भी नहीं करा रहे हैं, उन्हें लौटाया जा रहा है। आयुष विभाग के डॉ. दामोदर शर्मा की अगुवाई में टीम बॉर्डर पर बैठी है, उसमें मेडिकल टीम का मेंबर, पुलिस और प्रशासन से भी एक-एक मेंबर बैठा हुआ है। ये बॉर्डर से प्रदेश में आ रहे लोगों की जांच रिपोर्ट देखते है। जिसके पास ऐसी रिपोर्ट नहीं है उनको लौटा दिया जाता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन दिल्ली में संपन्न हुआ। इस सत्र में शरद पवार और वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के अगले कदमों के बारे में कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर जयंत पाटिल ने महाराष्ट्र राज्य के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में राज्य की भूमिका प्रस्तुत की। राष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रीय नेताओं और प्रांतीय अध्यक्षों के बोलने की उम्मीद है। अजित पवार ने कहा, 'इसलिए मैंने बोलने से परहेज किया, लेकिन मीडिया ने इसकी अलग तरह से व्याख्या की गयी है।
इस बीच यदि राज्य में कोई अधिवेशन या संगोष्ठी होती है तो मैं उसमें अवश्य भाग लेता हूँ। पवार ने यह भी कहा कि मैं अपनी स्थिति साफ तौर पर पेश कर रहा हूं। इस अवसर पर बोलते हुए पवार ने यह भी मांग की कि लम्पी रोग से प्रभावित पशुओं का टीकाकरण किया जाए।
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन दिल्ली में संपन्न हुआ। इस सत्र में शरद पवार और वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के अगले कदमों के बारे में कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर जयंत पाटिल ने महाराष्ट्र राज्य के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में राज्य की भूमिका प्रस्तुत की। राष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रीय नेताओं और प्रांतीय अध्यक्षों के बोलने की उम्मीद है। अजित पवार ने कहा, 'इसलिए मैंने बोलने से परहेज किया, लेकिन मीडिया ने इसकी अलग तरह से व्याख्या की गयी है। इस बीच यदि राज्य में कोई अधिवेशन या संगोष्ठी होती है तो मैं उसमें अवश्य भाग लेता हूँ। पवार ने यह भी कहा कि मैं अपनी स्थिति साफ तौर पर पेश कर रहा हूं। इस अवसर पर बोलते हुए पवार ने यह भी मांग की कि लम्पी रोग से प्रभावित पशुओं का टीकाकरण किया जाए।
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Anupama देगी OTT प्लेटफॉर्म पर दस्तक तो स्मार्ट जोड़ी से बाहर हुआ ये कपल, नागिन 6 मे होगी रश्मि देसाई की एंट्री?
स्टार प्लस के नए-नवेले शो स्मार्ट जोड़ी पर टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की जोड़ियां आए दिन धमाल मचाती हुई नजर आती हैं। अंकिता लोखंडे-विक्की जैन, मोनालिसा-विक्रांत सिंह राजपूत और भाग्यश्री-हिमालय दसानी समेत कई जोड़ियां इस शो पर एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देती हैं। शो को शुरू हुए अब एक महीने पूरे होने वाले हैं। इसी के साथ मेकर्स अब स्मार्ट जोड़ी से पहली जोड़ी को बाहर का रास्ता (Smart Jodi Elimination) दिखाने वाले हैं। इसी के साथ टीवी सीरियल अनुपमा के दर्शकों के लिए एक खुशखबरी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जल्द ही इस शो (Anupama Prequel) को नए फ्लेवर के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी रिलीज किया जाएगा। वहीं नागिन 6 (Naagin 6) में रश्मि देसाई की एंट्री की खबर भी सामने आ रही है। तो चलिए लाइव हिंदुस्तान की इस रिपोर्ट में टीवी इंडस्ट्री से सामने आई इन 3 बड़ी खबरों को थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
अनुपमा की सफलता को देखते हुए मेकर्स ने इसे नए सिरे से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने का फैसला लिया है। दरअसल अब मेकर्स अनुपमा प्रीक्वल के जरिए अनुपमा और वनराज की जिंदगी के अनसुने किस्सों को सामने लाने की कोशिश करेंगे। अनुपमा के प्रीक्वल के 10-11 एपिसोड्स ही होंगे और इसके जरिए दर्शकों को पता चल पाएगा कि शादी के बाद अनुपमा और वनराज के बीच की बॉन्डिंग सिर्फ दिखावे की थी या फिर शुरुआत में दोनों के बीच वाकई में प्यार था।
इंडिया फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक इस हफ्ते स्मार्ट जोड़ी से राहुल महाजन और उनकी पत्नी नतालिया का पत्ता साफ होने वाला है। वैसे देखा जाए तो राहुल महाजन ने अपनी ओर से लोगों को एंटरटेन करने की पूरी कोशिश की थी। फिलहाल तो देखना होगा कि अगले हफ्ते इस शो से किसका पत्ता कटेगा?
नागिन 6 में होगी रश्मि देसाई की एंट्री?
तेजस्वी प्रकाश (Tejasswi Prakash) और महक चहल स्टारर सीरियल नागिन 6 (Naagin 6) की कहानी में इन दिनों दिलचस्प मोड़ आया हुआ है। इस समय प्रथा और महक जानना चाहती हैं कि आखिर लाल नागिन के पीछे का रहस्य क्या है? हाल ही में खबर आई थी कि इस रोल में एक्ट्रेस रीम नजर आने वाली हैं। अब इस किरदार से रश्मि देसाई का नाम जुड़ने लगा है।
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Anupama देगी OTT प्लेटफॉर्म पर दस्तक तो स्मार्ट जोड़ी से बाहर हुआ ये कपल, नागिन छः मे होगी रश्मि देसाई की एंट्री? स्टार प्लस के नए-नवेले शो स्मार्ट जोड़ी पर टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की जोड़ियां आए दिन धमाल मचाती हुई नजर आती हैं। अंकिता लोखंडे-विक्की जैन, मोनालिसा-विक्रांत सिंह राजपूत और भाग्यश्री-हिमालय दसानी समेत कई जोड़ियां इस शो पर एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देती हैं। शो को शुरू हुए अब एक महीने पूरे होने वाले हैं। इसी के साथ मेकर्स अब स्मार्ट जोड़ी से पहली जोड़ी को बाहर का रास्ता दिखाने वाले हैं। इसी के साथ टीवी सीरियल अनुपमा के दर्शकों के लिए एक खुशखबरी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जल्द ही इस शो को नए फ्लेवर के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी रिलीज किया जाएगा। वहीं नागिन छः में रश्मि देसाई की एंट्री की खबर भी सामने आ रही है। तो चलिए लाइव हिंदुस्तान की इस रिपोर्ट में टीवी इंडस्ट्री से सामने आई इन तीन बड़ी खबरों को थोड़ा विस्तार से जानते हैं। अनुपमा की सफलता को देखते हुए मेकर्स ने इसे नए सिरे से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने का फैसला लिया है। दरअसल अब मेकर्स अनुपमा प्रीक्वल के जरिए अनुपमा और वनराज की जिंदगी के अनसुने किस्सों को सामने लाने की कोशिश करेंगे। अनुपमा के प्रीक्वल के दस-ग्यारह एपिसोड्स ही होंगे और इसके जरिए दर्शकों को पता चल पाएगा कि शादी के बाद अनुपमा और वनराज के बीच की बॉन्डिंग सिर्फ दिखावे की थी या फिर शुरुआत में दोनों के बीच वाकई में प्यार था। इंडिया फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक इस हफ्ते स्मार्ट जोड़ी से राहुल महाजन और उनकी पत्नी नतालिया का पत्ता साफ होने वाला है। वैसे देखा जाए तो राहुल महाजन ने अपनी ओर से लोगों को एंटरटेन करने की पूरी कोशिश की थी। फिलहाल तो देखना होगा कि अगले हफ्ते इस शो से किसका पत्ता कटेगा? नागिन छः में होगी रश्मि देसाई की एंट्री? तेजस्वी प्रकाश और महक चहल स्टारर सीरियल नागिन छः की कहानी में इन दिनों दिलचस्प मोड़ आया हुआ है। इस समय प्रथा और महक जानना चाहती हैं कि आखिर लाल नागिन के पीछे का रहस्य क्या है? हाल ही में खबर आई थी कि इस रोल में एक्ट्रेस रीम नजर आने वाली हैं। अब इस किरदार से रश्मि देसाई का नाम जुड़ने लगा है।
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हम नवचेतन युग के नवयुवक हैं मां, ये दहेज प्रथा कब तक चलेगी? इस पर अंकुश लगाने के लिए हमें ही कदम बढ़ाना होगा।
नाटक की भूमिका यूं है कि लड़के के माता-पिता गांव में पले-बड़े हैं तो शहर में आकर भी उनकी सोच ज्यों की त्यों है, और साथ में दादी भी, पर हां लड़का जो है, शहर में ही पला-बड़ा और एक कंपनी में मैनेजर है।
लड़की के माता-पिता नौकरी पेशा हैं और लड़की बैंक में नौकरी करती है और उसकी सहेली बचपन से ही उसके साथ है और प्राईवेट कॉलेज में प्रोफेसर है।
नाटक का मुख्य रूप यह है कि लड़के वाले लड़की वालों के यहां लड़की देखने जाते हैं, तब उनके बीच जो संवाद होता है, वो इस नाटक के जरिये प्रस्तुत है।
जानकी देवीः अरे सुशिला कहॉं चली गयी ? मेरे न, पांव बहुत दुख रहें हैं, जरा तेल तो लगा दे।
सुशिला देवीः आयी माँजी, गरम करके लाती हूं तेल, अच्छा रहेगा।
इतने में रामनारायण जी का प्रवेश होता है, जो नीलम के पिता से बात करके आते हैं और नीलम को देखने जाने की तिथि निश्चित करके आते हैं।
रामनारायणः अरी भाग्यवान कहां हो, एक अच्छी खबर देनी है, जल्दी आओ।
सुशिला देवीः हांजी आ गए आप? कौन सी अच्छी खबर है जी जल्दी बताइए न।
रामनारायणः मैं प्रभा देवी एवं परशुरामजी से उनकी बेटी नीलम से अपने नवकिशोर के विवाह की बात करके आया हूं, भाग्यवान। एक बार माताजी, तुम और नवकिशोर, नीलम को देखे लेते, अगर पसंद आ गई तो बात आगे बढ़ाएंगे। परिवार तो बहुत अच्छा है। नीलम बैंक में नौकरी करती है, सो, नवकिशोर का जीवन भी संवर जाएगा।
जानकी देवीः क्या हुआ बेटा? बात पक्की हुई या नहीं?
रामनारायणः अरे अम्मा, अभी कहां, अभी तो अपन सभी रविवार को नीलम को देखने जाएंगे। उस दिन उसे व नवकिशोर को छुट्टी जो रहती है।
जानकी देवीः अरे बेटा बात पक्की ही कर आता न। हमारे ज़माने में तो लड़का-लड़की का देखने-दिखाने का रिवाज ही नहीं था, बेटा। बस, बुजुर्गों की अनुमति से शादी कर ली जाती थी।
रामनारायणः अरे अम्मा अब न ज़माना बदल गया है, और सही भी है, अपना नवकिशोर नीलम को देख भी लेगा और इसी बहाने देने-लेने की बात भी हो जाएगी न अम्मा।
जानकी देवीः तो फिर ठीक है बेटा। सुशिला फलदान की सारी तैयारी कर लेना।
सुशिला देवीः हां बेटा। आ गया तू काम से? हाथ-मुँह धो ले बेटा। मैं खाना परोसती हूं। तेरी पसंद के भरवां बेंगन बनाएं हैं।
नवकिशोरः हाँ माँ, जल्दी परोसो। दादीजी, पिताजी को भी बुला लो न माँ, अपन सभी साथ में भोजन करते हैं।
इस अंतराल में सभी के साथ भोजन करते हुए नवकिशोर को पिताजी द्वारा नीलम को देखने के संबंध में सारी बातें बताई जाती हैं, पर लेन-देन का जिक्र नहीं किया जाता है। तो फिर रविवार को नीलम के घर जाना निश्चित हो जाता है।
परशुरामः बिटिया शिखा, तैयार हो गई क्या नीलम? नवकिशोर का परिवार आता ही होगा, हमारे यहां।
शिखाः जी अंकल, नीलम भी तैयार है और मैंने प्रभा चाची के साथ मिलकर नाश्ता भी बना लिया है।
परशुरामः अच्छा किया बेटा। अजी सुनती हो?
प्रभा देवीः जी कहिए, मैं तैयारी करके न अभी आयी। देखो जी हमारी बिटिया रानी साड़ी में कितनी सुंदर दिख रही है, है न शिखा बेटी?
शिखाः जी हां चाची जी। मेरी सखी है, मेरे साथ ही रहती है, तो लगेगी ही खूबसूरत।
नीलमः ये तुम सब मेरे बारे में क्या कह रहे हो? माताजी और पिताजी आपने उनको अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में सब बता दिया है, तो अच्छी बात होगी। बाद में किसी को धोखा ना हो।
परशुरामः अरे नहीं बेटी। ऐसा कुछ भी नहीं होगा। मैंने उनको सब बता दिया है। वे बहुत अच्छे घराने से हैं।
इतने में नवकिशोर के परिवार वाले आते हैं। परशुरामजी, शिखा और प्रभा देवी द्वारा उनका स्वागत किया जाता है।
जानकी देवीः घर तो बहुत अच्छा है, आपका।
परशुरामः जी हाँ माताजी। पसंद आया आपको, इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। बस, हमारी बिटिया को भी पसंद कर लीजिए, फिर चट मंगनी पट ब्याह रचाएंगे।
रामनारायणः शिखा बेटी तुम नीलम के साथ ही हो?
शिखाः जी हां चाचाजी, मैं बचपन की सहेली हूं नीलम की।
प्रभा देवीः चलो शिखा बेटी, नाश्ता लगाते हैं और नीलम बेटी को लेकर आते हैं।
नीलम अपनी सखी शिखा के साथ नाश्ता लेकर आती है और सभी को प्रणाम करती है।
जानकी देवी रामनारायण और सुशिला देवी को पास बुलाती हैं और तीनों की लेन-देन के संबंध में चर्चा होती है।
नवकिशोरः नीलम जी से मैं आपसे कुछ अकेले में बात करना चाहता हूँ।
नीलम अपने माता-पिता की आज्ञा से नवकिशोर से बात करने जाती है और अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत करा देती है। दोनों आपस में बोलते हैं कि हमारे बीच केवल प्यार ही रहेगा और सभी संवाद हम स्पष्ट रूप से करेंगे तो हम खुशहाल जीवन व्यतीत कर पाएंगे। दोनों की रज़ामंदी के बाद वे वापस आते हैं और शिखा को भी बताते हैं।
रामनारायण नवकिशोर को बुलाते हैं। नवकिशोर अपनी दादी और माता-पिता को बताता है कि नीलम उसे पसंद है और वह उससे शादी करना चाहता है।
नवकिशोरः अच्छा घर होने से ज़्यादा पिताजी नीलम पढ़ी-लिखी है, नौकरी भी करती है, और ये लोग भी हमारे जैसे मध्यम परिवार के हैं तो हमारी और इनकी खूब जमेगी भी और निभेगी भी।
जानकी देवीः अरे नवकिशोर, रामनारायण को लेने-देने की बाते कर लेने दे बेटा, तभी तो सुशिला फलदान करेगी।
नवकिशोरः आप सभी लोग सुन लें अच्छे से, मुझे और नीलम को अपना नया संसार बसाना है, हमारी रज़ामंदी भी हो चुकी है। मां शुभ-मुहुर्त निकला जा रहा है, फलदान कर बात पक्की कर दे माँ। तू भी आई थी गांव से, नानाजी ने भी दहेज दिया था। तू उस प्रथा से सहमत है माँ, पर हम नवचेतन युग के नवयुवक हैं मां, ये दहेज प्रथा कब तक चलेगी? इस पर अंकुश लगाने के लिए हमें ही कदम बढ़ाना होगा। आईए सभी, इस नवीन प्रकाश रूपी दीपक को प्रकाशित करते हुए हम फलदान करें।
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लंदन, (भाषा)। महान हाकी खिलाड़ी बलबीर सिंह लंदन ओलंपिक में भारतीय टीम के लचर प्रदर्शन से निराश है जहां आ" बार की स्वर्ण पदक विजेता टीम 12 टीमों की प्रतियोगिता में अंतिम स्थान पर रही थी। वर्ष 1948 में ओलंपिक स्वर्ण जीतने वाली टीम के सदस्य बलबीर लंदन में 64 बरस बाद ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम के मैच देखने गये थे लेकिन वह माइकल नोब्स की टीम के लचर प्रदर्शन से निराश हैं। बलबीर ने कहा, भारतीय हाकी टीम की दशा देखकर मैं निराश हूं। ओलंपिक में तीन बार स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य रहे बलबीर ने कहा, भारतीय टीम प्रतिस्पर्धा में नजर नहीं आ रही थी। देश को गौरवांवित करने वाले खेल की यह काफी दुखद स्थिति है। बीजिंग ओलंपिक 2008 के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रहने वाला भारत लंदन ओलंपिक में शुरूआती चरण के मुकाबलों में अपने पूल में सभी मैच हारकर छ"s और अंतिम स्थान पर रहा। इतना ही नहीं टीम को इसके बाद 11वें और 12वें स्थान के क्लासीफिकेशन मुकाबले में भी दक्षिण अफीका के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा जिससे टीम प्रतियोगिता में अंतिम स्थान पर रही। ाारतीय टीम इससे पहले 1996 में अटलांटा ओलंपिक में आ"वें स्थान पर रही थी जो उसका ओलंपिक में सबसे खराब प्रदर्शन था। यहां भारतीय टीम के मुकाबले के दौरान अंतरराष्ट्रीय हाकी महासंघ ःएफआईएचः द्वारा सम्मानित किए गए बलबीर ने कहा, भारतीय हाकी का विनाश देखना काफी पीड़ादायक था। उन्होंने कहा, भारतीय हाकी का गौरव चकनाचूर हो गया है। लड़के मुकाबले में नजर ही नहीं आ रहे थे। लग ही नहीं रहा था कि वे गेंद छीनने का प्रयास कर रहे हैं। बलबीर ने हालांकि इन सुझावों का मानने से इनकार कर दिया कि शीर्ष टीमों के खिलाफ प्रदर्शन करने में भारतीय टीम की नाकामी का कारण उसके खिलाड़ियों की कमजोर कद का"ाr है। उन्होंने कहा, हमारे दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों की कद का"ाr इसी तरह की थी। लेकिन देश का प्रतिनिधित्व करने के गौरव ने खिलाड़ियों को यूरोपीय प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धी हाकी खेलने के लिए प्रेरित किया।
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लंदन, । महान हाकी खिलाड़ी बलबीर सिंह लंदन ओलंपिक में भारतीय टीम के लचर प्रदर्शन से निराश है जहां आ" बार की स्वर्ण पदक विजेता टीम बारह टीमों की प्रतियोगिता में अंतिम स्थान पर रही थी। वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में ओलंपिक स्वर्ण जीतने वाली टीम के सदस्य बलबीर लंदन में चौंसठ बरस बाद ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम के मैच देखने गये थे लेकिन वह माइकल नोब्स की टीम के लचर प्रदर्शन से निराश हैं। बलबीर ने कहा, भारतीय हाकी टीम की दशा देखकर मैं निराश हूं। ओलंपिक में तीन बार स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य रहे बलबीर ने कहा, भारतीय टीम प्रतिस्पर्धा में नजर नहीं आ रही थी। देश को गौरवांवित करने वाले खेल की यह काफी दुखद स्थिति है। बीजिंग ओलंपिक दो हज़ार आठ के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रहने वाला भारत लंदन ओलंपिक में शुरूआती चरण के मुकाबलों में अपने पूल में सभी मैच हारकर छ"s और अंतिम स्थान पर रहा। इतना ही नहीं टीम को इसके बाद ग्यारहवें और बारहवें स्थान के क्लासीफिकेशन मुकाबले में भी दक्षिण अफीका के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा जिससे टीम प्रतियोगिता में अंतिम स्थान पर रही। ाारतीय टीम इससे पहले एक हज़ार नौ सौ छियानवे में अटलांटा ओलंपिक में आ"वें स्थान पर रही थी जो उसका ओलंपिक में सबसे खराब प्रदर्शन था। यहां भारतीय टीम के मुकाबले के दौरान अंतरराष्ट्रीय हाकी महासंघ ःएफआईएचः द्वारा सम्मानित किए गए बलबीर ने कहा, भारतीय हाकी का विनाश देखना काफी पीड़ादायक था। उन्होंने कहा, भारतीय हाकी का गौरव चकनाचूर हो गया है। लड़के मुकाबले में नजर ही नहीं आ रहे थे। लग ही नहीं रहा था कि वे गेंद छीनने का प्रयास कर रहे हैं। बलबीर ने हालांकि इन सुझावों का मानने से इनकार कर दिया कि शीर्ष टीमों के खिलाफ प्रदर्शन करने में भारतीय टीम की नाकामी का कारण उसके खिलाड़ियों की कमजोर कद का"ाr है। उन्होंने कहा, हमारे दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों की कद का"ाr इसी तरह की थी। लेकिन देश का प्रतिनिधित्व करने के गौरव ने खिलाड़ियों को यूरोपीय प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धी हाकी खेलने के लिए प्रेरित किया।
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नई दिल्लीः जिस फिल्म के ट्रेलर का इंतजार करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को बेसब्री से था आखिरकार वो लॉन्च हो ही गया। 'एम. एस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी' वो फिल्म जो टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के ऐसे राज खोलेगी जिससे दुनिया अबतक पूरी तरह अंजान है। धोनी ने मुंबई में अपनी बायोपिक फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया। मौके पर फिल्म के डायरेक्टर नीरज पांडे और धोनी का किरदार निभा रहे एक्टर सुशांत राजपूत भी मौजूद थे।
फिल्म में धोनी की भूमिका निभा रहे सुशांत राजपूत ने कहा कि, धोनी की भूमिका निभाना आसान नहीं था। क्रिकेट खेलने के तरीके को अपनाने में उतनी मुश्किल नहीं हुई जितनी उनके शांत स्वभाव और टेंपरामेंट को समझने में दिक्कत आयी।
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपने करियर में लगभग सारी उपलब्धी हासिल कर ली हैं। उन्होंने T-20 वर्ल्ड कप जीता, वनडे का वर्ल्ड कप भी जीता, चैंपियन्स ट्रॉफी जीती। धोनी की कप्तानी में टेस्ट में भी टीम इंडिया नंबर वन बनी। धोनी की इन ऐतिहासिक उपलब्धियों को तो दुनिया ने देखा लेकिन ऐसे बड़े मैच से पहले धोनी के दिमाग में क्या चल रहा होता था इसका राज अब सामने आएगा।
वैसे धोनी के अनजाने राज तो 30 सितम्बर को उस वक्त खुलेंगे जब ये फिल्म रिलीज होगी लेकिन ट्रेलर लॉन्चिंग के दौरान धोनी ने कई ऐसे खुलासे किए जिनसे हम और आप अबतक अंजान रहे।
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नई दिल्लीः जिस फिल्म के ट्रेलर का इंतजार करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को बेसब्री से था आखिरकार वो लॉन्च हो ही गया। 'एम. एस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी' वो फिल्म जो टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के ऐसे राज खोलेगी जिससे दुनिया अबतक पूरी तरह अंजान है। धोनी ने मुंबई में अपनी बायोपिक फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया। मौके पर फिल्म के डायरेक्टर नीरज पांडे और धोनी का किरदार निभा रहे एक्टर सुशांत राजपूत भी मौजूद थे। फिल्म में धोनी की भूमिका निभा रहे सुशांत राजपूत ने कहा कि, धोनी की भूमिका निभाना आसान नहीं था। क्रिकेट खेलने के तरीके को अपनाने में उतनी मुश्किल नहीं हुई जितनी उनके शांत स्वभाव और टेंपरामेंट को समझने में दिक्कत आयी। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपने करियर में लगभग सारी उपलब्धी हासिल कर ली हैं। उन्होंने T-बीस वर्ल्ड कप जीता, वनडे का वर्ल्ड कप भी जीता, चैंपियन्स ट्रॉफी जीती। धोनी की कप्तानी में टेस्ट में भी टीम इंडिया नंबर वन बनी। धोनी की इन ऐतिहासिक उपलब्धियों को तो दुनिया ने देखा लेकिन ऐसे बड़े मैच से पहले धोनी के दिमाग में क्या चल रहा होता था इसका राज अब सामने आएगा। वैसे धोनी के अनजाने राज तो तीस सितम्बर को उस वक्त खुलेंगे जब ये फिल्म रिलीज होगी लेकिन ट्रेलर लॉन्चिंग के दौरान धोनी ने कई ऐसे खुलासे किए जिनसे हम और आप अबतक अंजान रहे।
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- #T20 World CupICC की बेस्ट महिला टी-20 विश्व कप टीम में भारत से सिर्फ एक प्लेयर को मिली जगह, जानिए वो है कौन?
टी20 विश्व कप 2022 में रविवार को दक्षिण अफ्रीका ने भारतीय टीम का विजय रथ रोकने का काम किया। अफ्रीकी टीम ने भारत को 5 विकेट से मात दे दी। इस मैच में टीम इंडिया की लचर बल्लेबाजी देखने को मिली। टॉप ऑर्डर पूरी तरह से फेल रहा, लेकिन इन परिस्थितियों में भी सूर्यकुमार यादव ने धैर्यपूर्ण पारी खेलते हुए अर्द्धशतक लगाया। सूर्यकुमार यादव ने 40 गेंदों में 68 रन की पारी खेली। इस पारी में उन्होंने 170 के स्ट्राइट रेट से बल्लेबाजी करते हुए 6 चौके और 3 छक्के लगाए। सूर्यकुमार की पारी ने पाकिस्तान के कई पूर्व क्रिकेटरों को प्रभावित किया है। इसमें वसीम अकरम, कामरान अकमल और शोएब मलिक का नाम शामिल है।
आपको बता दें कि कल भारत की हार के साथ ही पाकिस्तान की सेमीफाइनल में जाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। भारत की इस हार के बाद पाकिस्तान का सेमीफाइनल में जाने बहुत ही मुश्किल नजर आ रहा है। अगर भारत कल जीत जाता तो पाकिस्तान के सेमीफाइनल में जाने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में कल पूरा पाकिस्तान भारत की जीत की दुआएं कर रहा था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। फिर भी पूर्व पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने सूर्यकुमार यादव की पारी की सराहना की है।
गेंदबाज के दिमाग से कैसे खेलते हैं सूर्या?
वसीम अकरम ने कहा है कि सूर्यकुमार यादव गेंदबाज के दिमाग से खिलवाड़ करते हैं, वो अक्सर गेंदबाज की गति और उछाल का सही इस्तेमाल कर शॉट्स लगाते हैं। वसीम अकरम ने आगे कहा है कि सूर्या से युवाओं को काफी कुछ सीखना चाहिए कि वो कैसे मिडिल ऑर्डर में गेंदबाज के दिमाग से खेलकर बल्लेबाजी करते हैं। अकरम के अलावा शोएब मलिक ने भी कहा है कि जब वो शॉट खेलते हैं, तो वो कमाल के होते हैं। शोएब ने कहा कि उनकी बल्लेबाजी करने की टेक्निक बहुत ही शानदार है।
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- #Tबीस World CupICC की बेस्ट महिला टी-बीस विश्व कप टीम में भारत से सिर्फ एक प्लेयर को मिली जगह, जानिए वो है कौन? टीबीस विश्व कप दो हज़ार बाईस में रविवार को दक्षिण अफ्रीका ने भारतीय टीम का विजय रथ रोकने का काम किया। अफ्रीकी टीम ने भारत को पाँच विकेट से मात दे दी। इस मैच में टीम इंडिया की लचर बल्लेबाजी देखने को मिली। टॉप ऑर्डर पूरी तरह से फेल रहा, लेकिन इन परिस्थितियों में भी सूर्यकुमार यादव ने धैर्यपूर्ण पारी खेलते हुए अर्द्धशतक लगाया। सूर्यकुमार यादव ने चालीस गेंदों में अड़सठ रन की पारी खेली। इस पारी में उन्होंने एक सौ सत्तर के स्ट्राइट रेट से बल्लेबाजी करते हुए छः चौके और तीन छक्के लगाए। सूर्यकुमार की पारी ने पाकिस्तान के कई पूर्व क्रिकेटरों को प्रभावित किया है। इसमें वसीम अकरम, कामरान अकमल और शोएब मलिक का नाम शामिल है। आपको बता दें कि कल भारत की हार के साथ ही पाकिस्तान की सेमीफाइनल में जाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। भारत की इस हार के बाद पाकिस्तान का सेमीफाइनल में जाने बहुत ही मुश्किल नजर आ रहा है। अगर भारत कल जीत जाता तो पाकिस्तान के सेमीफाइनल में जाने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में कल पूरा पाकिस्तान भारत की जीत की दुआएं कर रहा था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। फिर भी पूर्व पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने सूर्यकुमार यादव की पारी की सराहना की है। गेंदबाज के दिमाग से कैसे खेलते हैं सूर्या? वसीम अकरम ने कहा है कि सूर्यकुमार यादव गेंदबाज के दिमाग से खिलवाड़ करते हैं, वो अक्सर गेंदबाज की गति और उछाल का सही इस्तेमाल कर शॉट्स लगाते हैं। वसीम अकरम ने आगे कहा है कि सूर्या से युवाओं को काफी कुछ सीखना चाहिए कि वो कैसे मिडिल ऑर्डर में गेंदबाज के दिमाग से खेलकर बल्लेबाजी करते हैं। अकरम के अलावा शोएब मलिक ने भी कहा है कि जब वो शॉट खेलते हैं, तो वो कमाल के होते हैं। शोएब ने कहा कि उनकी बल्लेबाजी करने की टेक्निक बहुत ही शानदार है।
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1 जुलाई 1955 को इम्पीरियल बैंक का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रख दिया गया था.
नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ऑनलाइन सर्विसेज (SBI Online Services) ठीक से काम नहीं कर रही हैं. इसकी वजह कई SBI कस्टमर्स को परेशानी हो रही है. इस बाबत कस्टमर्स ने SBI के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर बैंक से शिकायत भी की है.
कस्टमर्स के शिकायत को लेकर SBI के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जवाब भी दिया जा रहा है. ऐसे कई ट्वीट्स की रिप्लाई में एसबीआई ने कहा कि जल्द ही उसकी सेवाएं शुरू हो जाएंगी.
SBI के एक कस्टमर कहा कहना कि 13 जून की सुबह से ही बैंक की सर्विसेज ठप पड़ी हैं, इस वजह से उन्हें अपने बैंक अकाउंट से ट्रांजैक्शन करने में परेशानी हो रही है. कई अन्य कस्टमर्स का कहना है कि वो पेटीएम, यूपीआई, योनो SBI ऐप, SBI इंटरनेट बैंकिंग आदि के जरिये ट्रांजैक्शन नहीं कर पा रहे हैं. वो अपने अकाउंट का बैलेंस भी नहीं चेक कर पा रहे हैं.
SBI ने कुछ ग्राहकों को बताया है कि उसकी इंटरनेट बैंकिंग (SBI Internet Banking) सर्विस एक बार फिर शुरू हो चुकी है, लेकिन एसबीआई योनो ऐप की सर्विस अभी भी डाउन है. बैंक ने कस्टमर्स से कहा है कि सेवा रखरखा के अधीन हैं और जल्द ही इसे फिर से शुरू कर दिया जाएगा.
एसबीआई ने ग्राहकों रिप्लाई में एक लिंक भी दिया है, जिसपर अपनी शिकायत दर्ज कराने को कहा है ताकि जल्द से जल्द उनकी समस्या का समाधान किया है. इसके अतिरिक्त एसबीआई ने हेल्पलाइन नंबर के बारे में भी जानकारी दी है. एसबीआई के ये टो-फ्री नंबर्स 1800 11 2211, 1800 425 3800 और 080. 26599990 हैं. ग्राहका सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक इन नंबर्स पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
Alternatively, you may also call on SBI's helpline number i. e. 1800 11 2211 (toll-free), 1800 425 3800 (toll-free) or 080-26599990 8am to 8pm to register your complaint. (2/2)
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एक जुलाई एक हज़ार नौ सौ पचपन को इम्पीरियल बैंक का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रख दिया गया था. नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक की ऑनलाइन सर्विसेज ठीक से काम नहीं कर रही हैं. इसकी वजह कई SBI कस्टमर्स को परेशानी हो रही है. इस बाबत कस्टमर्स ने SBI के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर बैंक से शिकायत भी की है. कस्टमर्स के शिकायत को लेकर SBI के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जवाब भी दिया जा रहा है. ऐसे कई ट्वीट्स की रिप्लाई में एसबीआई ने कहा कि जल्द ही उसकी सेवाएं शुरू हो जाएंगी. SBI के एक कस्टमर कहा कहना कि तेरह जून की सुबह से ही बैंक की सर्विसेज ठप पड़ी हैं, इस वजह से उन्हें अपने बैंक अकाउंट से ट्रांजैक्शन करने में परेशानी हो रही है. कई अन्य कस्टमर्स का कहना है कि वो पेटीएम, यूपीआई, योनो SBI ऐप, SBI इंटरनेट बैंकिंग आदि के जरिये ट्रांजैक्शन नहीं कर पा रहे हैं. वो अपने अकाउंट का बैलेंस भी नहीं चेक कर पा रहे हैं. SBI ने कुछ ग्राहकों को बताया है कि उसकी इंटरनेट बैंकिंग सर्विस एक बार फिर शुरू हो चुकी है, लेकिन एसबीआई योनो ऐप की सर्विस अभी भी डाउन है. बैंक ने कस्टमर्स से कहा है कि सेवा रखरखा के अधीन हैं और जल्द ही इसे फिर से शुरू कर दिया जाएगा. एसबीआई ने ग्राहकों रिप्लाई में एक लिंक भी दिया है, जिसपर अपनी शिकायत दर्ज कराने को कहा है ताकि जल्द से जल्द उनकी समस्या का समाधान किया है. इसके अतिरिक्त एसबीआई ने हेल्पलाइन नंबर के बारे में भी जानकारी दी है. एसबीआई के ये टो-फ्री नंबर्स एक हज़ार आठ सौ ग्यारह दो हज़ार दो सौ ग्यारह, एक हज़ार आठ सौ चार सौ पच्चीस तीन हज़ार आठ सौ और अस्सी. दो करोड़ पैंसठ लाख निन्यानवे हज़ार नौ सौ नब्बे हैं. ग्राहका सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक इन नंबर्स पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. Alternatively, you may also call on SBI's helpline number i. e. एक हज़ार आठ सौ ग्यारह दो हज़ार दो सौ ग्यारह , एक हज़ार आठ सौ चार सौ पच्चीस तीन हज़ार आठ सौ or अस्सी-दो करोड़ पैंसठ लाख निन्यानवे हज़ार नौ सौ नब्बे आठam to आठpm to register your complaint. .
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पटना. सम्मानजनक मासिक मानदेय,सामाजिक सुरक्षा और पेंशन की मांग पर ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन (ऐक्टू) सहित इसके संयुक्त प्लेटफॉर्म(मंच) के आह्वान पर आज 24 सितम्बर को मोदी राज के खिलाफ स्कीम वर्करों की देशव्यापी हड़ताल सफल रहा, इस राष्ट्रीय हड़ताल को स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की मुख्य राष्ट्रीय संयोजक व आशा कार्यकर्ता संघ अध्यक्ष सशि यादव ने ऐतिहासिक परिघटना बताया है.
उन्होंने कहा कि आज बिहार में बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ (गोप गुट-ऐक्टू) के बैनर तले आशाओं ने राष्ट्रीय मांगो के साथ - साथ नीतीश सरकार में लम्बित आशा की मांगों व सरकार की बेरुखी को मुद्दा बनाते हुए राज्य के अधिकांश पीएचसी को ठप कर गेट पर धरना - प्रदर्शन किया.
आज ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन (ऐक्टू) सहित इसके संयुक्त प्लेटफॉर्म(मंच) के आह्वान पर आशाओं की हुई देशव्यापी हड़ताल के तहत राज्य के पटना,रोहतास, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, मुंगेर,बेगूसराय,मुज़फ़्फ़रपुर, दरभंगा, सिवान, गोपालगंज, चंपारण,सीतामढ़ी, मधुबनी,समस्तीपुर,खगड़िया,भभुआ, कटिहार, शिवहर,भोजपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण ,नवादा आदि जिलों में बहुत ही प्रभावी हड़ताल हुई.
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पटना. सम्मानजनक मासिक मानदेय,सामाजिक सुरक्षा और पेंशन की मांग पर ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन सहित इसके संयुक्त प्लेटफॉर्म के आह्वान पर आज चौबीस सितम्बर को मोदी राज के खिलाफ स्कीम वर्करों की देशव्यापी हड़ताल सफल रहा, इस राष्ट्रीय हड़ताल को स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की मुख्य राष्ट्रीय संयोजक व आशा कार्यकर्ता संघ अध्यक्ष सशि यादव ने ऐतिहासिक परिघटना बताया है. उन्होंने कहा कि आज बिहार में बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ के बैनर तले आशाओं ने राष्ट्रीय मांगो के साथ - साथ नीतीश सरकार में लम्बित आशा की मांगों व सरकार की बेरुखी को मुद्दा बनाते हुए राज्य के अधिकांश पीएचसी को ठप कर गेट पर धरना - प्रदर्शन किया. आज ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन सहित इसके संयुक्त प्लेटफॉर्म के आह्वान पर आशाओं की हुई देशव्यापी हड़ताल के तहत राज्य के पटना,रोहतास, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, मुंगेर,बेगूसराय,मुज़फ़्फ़रपुर, दरभंगा, सिवान, गोपालगंज, चंपारण,सीतामढ़ी, मधुबनी,समस्तीपुर,खगड़िया,भभुआ, कटिहार, शिवहर,भोजपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण ,नवादा आदि जिलों में बहुत ही प्रभावी हड़ताल हुई. Copyright @ दो हज़ार उन्नीस All Right Reserved । Powred by eMag Technologies Pvt. Ltd.
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अनजाने में कीड़ों के काटने की वजह से व्यक्ति को परेशान होना पड़ता हैं. यानि छोटे छोटे कीड़े कुछ ऐसे होते हैं जिससे उन्हें बड़ी परेशानी भी हो सकती है. ऐसे ही मकड़ी के काटने पर भी समस्या होने लगती है. इसके काटने से शरीर पर छोटे-छोटे छाले और सूजन होने लगती हैं जो खुजली का कारण भी बनती हैं. मकड़ी के काटने की यह समस्या बड़ी परेशानी बनने लगती हैं.
मकड़ी के काटने से होने वाली सूजन और दर्द को दूर करने में लैवेंडर ऑयल का इस्तेमाल फायदेमंद होता है. इसका इस्तेमाल करने के लिए लैवेंडर ऑयल की कुछ बूंदों में नारियल का तेल मिलाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं.
एलोवेरा मकड़ी के काटने को ठीक करने में मदद करता है. एलोवेरा खुजली और सूजन को कम करने में मदद करता है. इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन दूर करने में फायदेमंद होते हैं. इसके लिए ताजा एलोवेरा को दिन में कई बार लगाएं.
मकड़ी के काटने को ठीक करने के लिए सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र को गर्म पानी और साबुन से साफ कर लें. उसके बाद इस पर बर्फ लगाएं. यह सूजन को कम करने में मदद करता है. इसे 10 मिनट तक करें. इस बर्फ को दिन में कई बार लगाएं.
बेकिंग सोडा से बना पेस्ट मकड़ी के काटने पर ठीक करने के लिए फायदेमंद होता है. सबसे पहले पानी और बेकिंग सोडा मिलाकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को दिन में कई बार प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं.
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अनजाने में कीड़ों के काटने की वजह से व्यक्ति को परेशान होना पड़ता हैं. यानि छोटे छोटे कीड़े कुछ ऐसे होते हैं जिससे उन्हें बड़ी परेशानी भी हो सकती है. ऐसे ही मकड़ी के काटने पर भी समस्या होने लगती है. इसके काटने से शरीर पर छोटे-छोटे छाले और सूजन होने लगती हैं जो खुजली का कारण भी बनती हैं. मकड़ी के काटने की यह समस्या बड़ी परेशानी बनने लगती हैं. मकड़ी के काटने से होने वाली सूजन और दर्द को दूर करने में लैवेंडर ऑयल का इस्तेमाल फायदेमंद होता है. इसका इस्तेमाल करने के लिए लैवेंडर ऑयल की कुछ बूंदों में नारियल का तेल मिलाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं. एलोवेरा मकड़ी के काटने को ठीक करने में मदद करता है. एलोवेरा खुजली और सूजन को कम करने में मदद करता है. इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन दूर करने में फायदेमंद होते हैं. इसके लिए ताजा एलोवेरा को दिन में कई बार लगाएं. मकड़ी के काटने को ठीक करने के लिए सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र को गर्म पानी और साबुन से साफ कर लें. उसके बाद इस पर बर्फ लगाएं. यह सूजन को कम करने में मदद करता है. इसे दस मिनट तक करें. इस बर्फ को दिन में कई बार लगाएं. बेकिंग सोडा से बना पेस्ट मकड़ी के काटने पर ठीक करने के लिए फायदेमंद होता है. सबसे पहले पानी और बेकिंग सोडा मिलाकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को दिन में कई बार प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं.
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ईरान सरकार के प्रवक्ता मुहम्मद बाक़िर नौबख़्त ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के बाद की स्थिति के लिए पूर्ण रूप से तैयार है।
स्वीडन से संबंध रखने वाली एक शोध संस्था ने बताया है कि शीत युद्ध के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रक्षा ख़र्चों में पिछले वर्ष सबसे अधिक वृद्धि हुई और अमरीका, चीन और सऊदी अरब इसमें सर्वोपरि रहे।
सीरियाई सेना और स्वयं सेवी बलों ने राजधान दमिश्क़ के दक्षिण में स्थित अलआलाफ़ इलाक़े को आतंकवादियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करा लिया है।
भाजपा नेताओं के दलितों के घर खाना खाने की उमा भारती ने परोक्ष रूप से आलोचना की है।
सीरिया में इस्राईल की गतिविधियों के सुबूत आए दिन सामने आते रहते हैं और हालिया दिनों में एक बार फिर सीरिया में इस्राईली हथियार बरामद हुए हैं।
मानवता के अंतिम मोक्षदाता हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के जन्म दिन पर भारत प्रशासित कश्मीर में भव्य सभाओं का आयोजन हुआ।
दलितों को रिझाने की कोशिश के तहत उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा अली गढ़ के एक गांव में एक दलित परिवार के घर ठहरने पहुंचे लेकिन इस बात का पूरा प्रबंध किया गया कि उनके एशो आराम में किसी तरह की रुकावट पैदा न होने पाए।
भाजपा की कर्नाटक विधान सभा चुनाव के मद्देनज़र जनता दल एस को अपने साथ मिलाने की कोशिश के तहत प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधान मंत्री व जनता दल एस के प्रमुख देवेगोड़ा की तारीफ़ की।
इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने आईआरआईबी के मीडिया कर्मियों के प्रति फ्रांस पुलिस के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि फ्रांस की पुलिस को इस देश में पत्रकारों और रिपोर्टरों को पेशेवराना गतिविधियों को सुनिश्चित बनाना चाहिए।
यमन की उच्च क्रांति परिषद के प्रमुख ने ईरान के बारे में सऊदी अधिकारियों की बयानबाज़ी का मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा है कि सऊदी जनरल, मीडिया गेम खत्म करें।
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ईरान सरकार के प्रवक्ता मुहम्मद बाक़िर नौबख़्त ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के बाद की स्थिति के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। स्वीडन से संबंध रखने वाली एक शोध संस्था ने बताया है कि शीत युद्ध के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रक्षा ख़र्चों में पिछले वर्ष सबसे अधिक वृद्धि हुई और अमरीका, चीन और सऊदी अरब इसमें सर्वोपरि रहे। सीरियाई सेना और स्वयं सेवी बलों ने राजधान दमिश्क़ के दक्षिण में स्थित अलआलाफ़ इलाक़े को आतंकवादियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करा लिया है। भाजपा नेताओं के दलितों के घर खाना खाने की उमा भारती ने परोक्ष रूप से आलोचना की है। सीरिया में इस्राईल की गतिविधियों के सुबूत आए दिन सामने आते रहते हैं और हालिया दिनों में एक बार फिर सीरिया में इस्राईली हथियार बरामद हुए हैं। मानवता के अंतिम मोक्षदाता हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के जन्म दिन पर भारत प्रशासित कश्मीर में भव्य सभाओं का आयोजन हुआ। दलितों को रिझाने की कोशिश के तहत उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा अली गढ़ के एक गांव में एक दलित परिवार के घर ठहरने पहुंचे लेकिन इस बात का पूरा प्रबंध किया गया कि उनके एशो आराम में किसी तरह की रुकावट पैदा न होने पाए। भाजपा की कर्नाटक विधान सभा चुनाव के मद्देनज़र जनता दल एस को अपने साथ मिलाने की कोशिश के तहत प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधान मंत्री व जनता दल एस के प्रमुख देवेगोड़ा की तारीफ़ की। इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने आईआरआईबी के मीडिया कर्मियों के प्रति फ्रांस पुलिस के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि फ्रांस की पुलिस को इस देश में पत्रकारों और रिपोर्टरों को पेशेवराना गतिविधियों को सुनिश्चित बनाना चाहिए। यमन की उच्च क्रांति परिषद के प्रमुख ने ईरान के बारे में सऊदी अधिकारियों की बयानबाज़ी का मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा है कि सऊदी जनरल, मीडिया गेम खत्म करें।
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Sivas के गवर्नर Salih Ayhan ने Yıldız शहर, Kuzören और Olukman गांव के मार्ग पर 13 किमी सड़क के काम की जांच करके दिन की शुरुआत की। गवर्नर अहान, जिन्होंने ओलुकमैन चौराहे पर चल रहे काम के बारे में विशेष प्रांतीय प्रशासन के उप महासचिव मेवलुत सोयसल से जानकारी प्राप्त की, sohbet और कर्मचारियों की सुविधा की कामना की।
येल्डिज़ माउंटेन स्की सेंटर, हॉट ऑर्मिक हॉट स्प्रिंग और नूरी डेमीरा हवाई अड्डे के बीच संपर्क सड़क का निर्माण पूरी गति से जारी है। Yıldız माउंटेन स्की सेंटर नवनिर्मित सड़कों के साथ अधिक सुलभ हो जाएगा।
येल्डिज़ माउंटेन स्की सेंटर और हॉट ऑर्मिक थर्मल क्षेत्र के बीच 54 किलोमीटर की सड़क का निर्माण शुरू किया गया था, और राज्यपाल सालीह अहान, जिन्होंने पहले चरण में साइट पर कामों की जांच की, और अंतिम स्थिति तक पहुँचने के बारे में सिवास राजमार्गों के 1 वें क्षेत्रीय निदेशक, मुस्तैब दूज से जानकारी प्राप्त की। ठेकेदार को सफलता की कामना की।
गवर्नर अहान और उनका प्रवेश, नवाचारों के साथ हर मौसम में इसकी संरचना में इजाफा होता है, हमारे देश के सबसे महत्वपूर्ण स्की रिसॉर्ट में से एक बनने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए, यंगाल्ड माउंटेन स्की स्की सेंटर में बनने वाले बंगले मकानों की जांच करना शुरू कर दिया गया है और येनिहान होटल में चल रहे काम, और बुरुसिएन ए के महाप्रबंधक मुस्तफा अल्तुन। से जानकारी प्राप्त की।
गवर्नर सलीह अहान ने कहा, "हमारे पास येल्डिज़ माउंटेन स्की सेंटर को गर्मियों और सर्दियों में अधिक कार्यात्मक रूप से उपयोग करने के लिए कुछ विशेष प्रयास हैं और इसका उपयोग न केवल सर्दियों में बल्कि गर्मियों में भी योग्य है। उनमें से एक बंगला घर है, जैसा कि आप पीछे देख सकते हैं। इसके अलावा, हम अपने होटल में विभिन्न मांगों और घनत्वों पर प्रतिक्रिया देने के लिए मानकों को बढ़ा रहे हैं। स्की सेंटर ने अपनी प्रारंभिक अवस्था और चलने की अवधि को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने मानकों को निर्धारित करके इस क्षेत्र में खुद को स्थापित किया। अब हमें अलग-अलग लोगों के साथ अपना अंतर बनाने की जरूरत है। इस उद्देश्य के लिए, हमने सर्दियों में इसे प्रभावी ढंग से उपयोग करने और गर्मियों में हमारे युवाओं के लिए इसे एक शिविर स्थल बनाने के लिए दोनों नए अध्ययन शुरू किए हैं। फिर, हम अपनी सुविधाओं के तल पर खेल क्षेत्र बनाते हैं। हमने अपने युवा और खेल मंत्रालय को जो परियोजनाएँ सौंपी थीं, उन्हें स्वीकार कर लिया गया था। हम जल्द ही निर्माण शुरू करेंगे और एक फुटबॉल मैदान का निर्माण करेंगे और इसे एक उच्च ऊंचाई वाला केंद्र बनाएंगे। " कहा हुआ।
राज्यपाल अहान ने कहा कि वे उच्च मानकों के साथ एक सुविधा तक पहुँचना चाहते हैं जो हमारे नागरिकों की इच्छा हो, राज्यपाल ने कहा, "वास्तव में, यह एक ऐसी सुविधा है जिसका मैं हर बार आनंद लेता हूं और हम अच्छी सेवाएं प्रदान करते हैं। मैं कह सकता हूं कि यह स्थान शिव के लिए मूल्य को बढ़ाता रहेगा। सिवास की सामाजिक गतिशीलता में वृद्धि होगी, विशेष रूप से हाई-स्पीड ट्रेन के साथ, और यह पर्यटन के मामले में एक अधिक लोकप्रिय शहर बन जाएगा। यह शीतकालीन पर्यटन में सिवाओं का दिल होगा। बेशक, हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। हम पड़ोसी प्रांतों के साथ अपने संबंध बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, हमारा टोकाट कनेक्शन। क्योंकि यह सिवास से 58 किमी और टोकत से 60 किमी दूर है, हम यहां टोकाट को एकीकृत करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले वर्षों में, उन्होंने हमारी सुविधाओं के लिए अपना पक्ष दिखाया। हमने अपने पथ की मुख्य पंक्तियों को समाप्त कर दिया। हमने लिंक बनाया। दोस्त अपने मानक को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा मानना है कि स्की प्रेमी और प्रकृति प्रेमी हर साल एक अच्छे विज्ञापन के साथ बढ़ेंगे। सारांश में, हम न केवल सिवास बल्कि आसपास के प्रांतों को न केवल सर्दियों में बल्कि गर्मियों में भी संबोधित करना चाहते हैं। हमारे सभी प्रयास इस दिशा में हैं। मैं उन सभी को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने कड़ी मेहनत की। " भावों का उपयोग किया।
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Sivas के गवर्नर Salih Ayhan ने Yıldız शहर, Kuzören और Olukman गांव के मार्ग पर तेरह किमी सड़क के काम की जांच करके दिन की शुरुआत की। गवर्नर अहान, जिन्होंने ओलुकमैन चौराहे पर चल रहे काम के बारे में विशेष प्रांतीय प्रशासन के उप महासचिव मेवलुत सोयसल से जानकारी प्राप्त की, sohbet और कर्मचारियों की सुविधा की कामना की। येल्डिज़ माउंटेन स्की सेंटर, हॉट ऑर्मिक हॉट स्प्रिंग और नूरी डेमीरा हवाई अड्डे के बीच संपर्क सड़क का निर्माण पूरी गति से जारी है। Yıldız माउंटेन स्की सेंटर नवनिर्मित सड़कों के साथ अधिक सुलभ हो जाएगा। येल्डिज़ माउंटेन स्की सेंटर और हॉट ऑर्मिक थर्मल क्षेत्र के बीच चौवन किलोग्राममीटर की सड़क का निर्माण शुरू किया गया था, और राज्यपाल सालीह अहान, जिन्होंने पहले चरण में साइट पर कामों की जांच की, और अंतिम स्थिति तक पहुँचने के बारे में सिवास राजमार्गों के एक वें क्षेत्रीय निदेशक, मुस्तैब दूज से जानकारी प्राप्त की। ठेकेदार को सफलता की कामना की। गवर्नर अहान और उनका प्रवेश, नवाचारों के साथ हर मौसम में इसकी संरचना में इजाफा होता है, हमारे देश के सबसे महत्वपूर्ण स्की रिसॉर्ट में से एक बनने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए, यंगाल्ड माउंटेन स्की स्की सेंटर में बनने वाले बंगले मकानों की जांच करना शुरू कर दिया गया है और येनिहान होटल में चल रहे काम, और बुरुसिएन ए के महाप्रबंधक मुस्तफा अल्तुन। से जानकारी प्राप्त की। गवर्नर सलीह अहान ने कहा, "हमारे पास येल्डिज़ माउंटेन स्की सेंटर को गर्मियों और सर्दियों में अधिक कार्यात्मक रूप से उपयोग करने के लिए कुछ विशेष प्रयास हैं और इसका उपयोग न केवल सर्दियों में बल्कि गर्मियों में भी योग्य है। उनमें से एक बंगला घर है, जैसा कि आप पीछे देख सकते हैं। इसके अलावा, हम अपने होटल में विभिन्न मांगों और घनत्वों पर प्रतिक्रिया देने के लिए मानकों को बढ़ा रहे हैं। स्की सेंटर ने अपनी प्रारंभिक अवस्था और चलने की अवधि को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने मानकों को निर्धारित करके इस क्षेत्र में खुद को स्थापित किया। अब हमें अलग-अलग लोगों के साथ अपना अंतर बनाने की जरूरत है। इस उद्देश्य के लिए, हमने सर्दियों में इसे प्रभावी ढंग से उपयोग करने और गर्मियों में हमारे युवाओं के लिए इसे एक शिविर स्थल बनाने के लिए दोनों नए अध्ययन शुरू किए हैं। फिर, हम अपनी सुविधाओं के तल पर खेल क्षेत्र बनाते हैं। हमने अपने युवा और खेल मंत्रालय को जो परियोजनाएँ सौंपी थीं, उन्हें स्वीकार कर लिया गया था। हम जल्द ही निर्माण शुरू करेंगे और एक फुटबॉल मैदान का निर्माण करेंगे और इसे एक उच्च ऊंचाई वाला केंद्र बनाएंगे। " कहा हुआ। राज्यपाल अहान ने कहा कि वे उच्च मानकों के साथ एक सुविधा तक पहुँचना चाहते हैं जो हमारे नागरिकों की इच्छा हो, राज्यपाल ने कहा, "वास्तव में, यह एक ऐसी सुविधा है जिसका मैं हर बार आनंद लेता हूं और हम अच्छी सेवाएं प्रदान करते हैं। मैं कह सकता हूं कि यह स्थान शिव के लिए मूल्य को बढ़ाता रहेगा। सिवास की सामाजिक गतिशीलता में वृद्धि होगी, विशेष रूप से हाई-स्पीड ट्रेन के साथ, और यह पर्यटन के मामले में एक अधिक लोकप्रिय शहर बन जाएगा। यह शीतकालीन पर्यटन में सिवाओं का दिल होगा। बेशक, हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। हम पड़ोसी प्रांतों के साथ अपने संबंध बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, हमारा टोकाट कनेक्शन। क्योंकि यह सिवास से अट्ठावन किमी और टोकत से साठ किमी दूर है, हम यहां टोकाट को एकीकृत करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले वर्षों में, उन्होंने हमारी सुविधाओं के लिए अपना पक्ष दिखाया। हमने अपने पथ की मुख्य पंक्तियों को समाप्त कर दिया। हमने लिंक बनाया। दोस्त अपने मानक को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा मानना है कि स्की प्रेमी और प्रकृति प्रेमी हर साल एक अच्छे विज्ञापन के साथ बढ़ेंगे। सारांश में, हम न केवल सिवास बल्कि आसपास के प्रांतों को न केवल सर्दियों में बल्कि गर्मियों में भी संबोधित करना चाहते हैं। हमारे सभी प्रयास इस दिशा में हैं। मैं उन सभी को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने कड़ी मेहनत की। " भावों का उपयोग किया।
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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता देवांगत इरफान खान का बीते दिन यानी 8 जनवरी को जन्मदिन था। उनकी याद में बड़े-बड़े दिग्गजों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर किया था। इसी बीच क्रिकेट गलियारों के स्टार विराट कोहली (Virat Kohli) ने भी उन्हें याद करते हुए अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इरफान का एक क्वोट शेयर किया। वृंदावन के दर्शन करके लौटे किंग कोहली की सोच में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका अंदाजा उनके द्वारा हाल ही में शेयर किए गए पोस्ट से लगा जा सकता है। जिसके जरिए वो काफी कुछ कहने की कोशिश कर रहे हैं।
विराट कोहली (Virat Kohli) की श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज के जरिए क्रिकेट मैदान पर वापसी करने जा रहे हैं. टी20 सीरीज में उन्हें आराम दिया गया था. वहीं इस सीरीज के शुरू होने से पहले स्टार बल्लेबाज ने सोशल मीडिया पर एक फिलॉसफिकल पोस्ट शेयर किया है. दरअसल, उन्होंने इरफान खान का एक क्वोट शेयर किया है. घातक बल्लेबाज ने इरफान के साथ फोटो शेयर कर लिखा,
इरफान पठान के क्वोट के अलावा विराट कोहली ने हॉलीवुड ऐक्टर टॉम हैंक्स का वीडियो भी शेयर किया है। इस वीडियो में टॉम को कहते हुए सुना जा रहा है कि,
गौरतलब है कि विराट कोहली के ऐसे पोस्ट शेयर करने के बाद फैंस उनका मिजाज समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसी के साथ बता दें कि बांग्लादेश सीरीज के बाद से ही ब्रेक पर हैं। वह हाल ही में अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा और बेटी वमीका के साथ वृंदावन बाबा नीम करोली आश्रम गए हुए थे।
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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता देवांगत इरफान खान का बीते दिन यानी आठ जनवरी को जन्मदिन था। उनकी याद में बड़े-बड़े दिग्गजों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर किया था। इसी बीच क्रिकेट गलियारों के स्टार विराट कोहली ने भी उन्हें याद करते हुए अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इरफान का एक क्वोट शेयर किया। वृंदावन के दर्शन करके लौटे किंग कोहली की सोच में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका अंदाजा उनके द्वारा हाल ही में शेयर किए गए पोस्ट से लगा जा सकता है। जिसके जरिए वो काफी कुछ कहने की कोशिश कर रहे हैं। विराट कोहली की श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज के जरिए क्रिकेट मैदान पर वापसी करने जा रहे हैं. टीबीस सीरीज में उन्हें आराम दिया गया था. वहीं इस सीरीज के शुरू होने से पहले स्टार बल्लेबाज ने सोशल मीडिया पर एक फिलॉसफिकल पोस्ट शेयर किया है. दरअसल, उन्होंने इरफान खान का एक क्वोट शेयर किया है. घातक बल्लेबाज ने इरफान के साथ फोटो शेयर कर लिखा, इरफान पठान के क्वोट के अलावा विराट कोहली ने हॉलीवुड ऐक्टर टॉम हैंक्स का वीडियो भी शेयर किया है। इस वीडियो में टॉम को कहते हुए सुना जा रहा है कि, गौरतलब है कि विराट कोहली के ऐसे पोस्ट शेयर करने के बाद फैंस उनका मिजाज समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसी के साथ बता दें कि बांग्लादेश सीरीज के बाद से ही ब्रेक पर हैं। वह हाल ही में अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा और बेटी वमीका के साथ वृंदावन बाबा नीम करोली आश्रम गए हुए थे।
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पाकिस्तान (Pakistan) की नेशनल असेंबली के सदस्य और देश के अल्पसंख्यक नेता लाल चंद मल्ही (Lal Chand Malhi) ने पीड़ितों की जानकारी को साझा किया है.
पाकिस्तान (Pakistan) में एक बार फिर धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का मामला सामने आया है. पड़ोसी मुल्क के सिंध प्रांत (Sindh) में एक नाबालिग सहित दो हिंदू लड़कियों (Hindu Girl Converted in Pakistan) का अपहरण कर लिया गया. इसके बाद दोनों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और जिन लोगों ने उन्हें अगवा किया था, उनसे ही दोनों की शादी करवा दी गई. एक पीड़िता की उम्र महज 13 साल है, जबकि दूसरे की 19 साल. इस तरह एक बार फिर इमरान खान (Imran Khan) के 'नए पाकिस्तान' में अल्पसंख्यकों के ऊपर ढाए जाने वाले जुल्मों की पोल खुल गई है.
सिंध प्रांत के मीरपुर खास जिले की नाबालिग लड़की रोशनी मेघवार (Roshni Meghwar) का अपहरण कर लिया गया. उसे इस्लाम धर्म में जबरन परिवर्तन कर दिया गया और फिर उसकी उम्र दोगुने से अधिक व्यक्ति से शादी कर दी गई. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य और देश के अल्पसंख्यक नेता लाल चंद मल्ही (Lal Chand Malhi) ने पीड़ित की जानकारी को साझा किया है. उन्होंने अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार और उनके जबरन धर्मांतरण को रोकने में विफल रहने के लिए सत्तारूढ़ इमरान खान के नेतृत्व वाली पीटीआई सरकार की आलोचना की.
लाल चंद मल्ही पाकिस्तान में मानवाधिकारों के लिए संसद सचिव भी हैं. उन्होंने 24 दिसंबर को अपने आधिकारिक हैंडल से पीड़ितों की जानकारी के साथ उनकी तस्वीरों को शेयर किया. रोशनी मेघवार की शादी थारपारकर के मूल निवासी और अगवा करने वाले व्यक्ति मोहम्मद मूसा से करवा दी गई है. वहीं, रोशनी का नाम बदलकर रजिया रख दिया गया है. लड़की का कथित तौर पर महीनों पहले अपहरण कर लिया गया था और उसे अवैध रूप से कैद में रखा गया था. वहीं, 19 वर्षीय हरियान मेघवार (Hariyan Meghwar) को अगवा करने के बाद उसकी शादी भाई खान से करवा दी गई है, जो 31 साल का है और पहले से ही शादीशुदा है.
इमरान खान के राज में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की पीड़ा जारी है. धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और धार्मिक संस्थानों की तोड़फोड़ की घटनाएं बार-बार हुई हैं. ये पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर रिपोर्ट किए गए कई जबरन धर्मांतरण वाले मामलों में से कुछ ही हैं. अपने अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा नहीं करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा बार-बार पाकिस्तान की आलोचना की गई है. हालांकि, इन सबके बाद भी पाकिस्तान में इस तरह के मामलों में कमी देखने को नहीं मिल रही है.
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पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य और देश के अल्पसंख्यक नेता लाल चंद मल्ही ने पीड़ितों की जानकारी को साझा किया है. पाकिस्तान में एक बार फिर धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का मामला सामने आया है. पड़ोसी मुल्क के सिंध प्रांत में एक नाबालिग सहित दो हिंदू लड़कियों का अपहरण कर लिया गया. इसके बाद दोनों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और जिन लोगों ने उन्हें अगवा किया था, उनसे ही दोनों की शादी करवा दी गई. एक पीड़िता की उम्र महज तेरह साल है, जबकि दूसरे की उन्नीस साल. इस तरह एक बार फिर इमरान खान के 'नए पाकिस्तान' में अल्पसंख्यकों के ऊपर ढाए जाने वाले जुल्मों की पोल खुल गई है. सिंध प्रांत के मीरपुर खास जिले की नाबालिग लड़की रोशनी मेघवार का अपहरण कर लिया गया. उसे इस्लाम धर्म में जबरन परिवर्तन कर दिया गया और फिर उसकी उम्र दोगुने से अधिक व्यक्ति से शादी कर दी गई. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य और देश के अल्पसंख्यक नेता लाल चंद मल्ही ने पीड़ित की जानकारी को साझा किया है. उन्होंने अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार और उनके जबरन धर्मांतरण को रोकने में विफल रहने के लिए सत्तारूढ़ इमरान खान के नेतृत्व वाली पीटीआई सरकार की आलोचना की. लाल चंद मल्ही पाकिस्तान में मानवाधिकारों के लिए संसद सचिव भी हैं. उन्होंने चौबीस दिसंबर को अपने आधिकारिक हैंडल से पीड़ितों की जानकारी के साथ उनकी तस्वीरों को शेयर किया. रोशनी मेघवार की शादी थारपारकर के मूल निवासी और अगवा करने वाले व्यक्ति मोहम्मद मूसा से करवा दी गई है. वहीं, रोशनी का नाम बदलकर रजिया रख दिया गया है. लड़की का कथित तौर पर महीनों पहले अपहरण कर लिया गया था और उसे अवैध रूप से कैद में रखा गया था. वहीं, उन्नीस वर्षीय हरियान मेघवार को अगवा करने के बाद उसकी शादी भाई खान से करवा दी गई है, जो इकतीस साल का है और पहले से ही शादीशुदा है. इमरान खान के राज में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की पीड़ा जारी है. धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और धार्मिक संस्थानों की तोड़फोड़ की घटनाएं बार-बार हुई हैं. ये पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर रिपोर्ट किए गए कई जबरन धर्मांतरण वाले मामलों में से कुछ ही हैं. अपने अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा नहीं करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा बार-बार पाकिस्तान की आलोचना की गई है. हालांकि, इन सबके बाद भी पाकिस्तान में इस तरह के मामलों में कमी देखने को नहीं मिल रही है.
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वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें आर्सेनल कंसल्टिंग नामक एक डिजिटल फ़ोरेंसिक्स फ़र्म के हवाले से खुलासा किया गया है कि भीमा कोरेगाँव की घटना में एक्टिविस्ट रोना विल्सन को फँसाने के लिए सबूतों को उनके लैपटॉप में प्लांट करने के लिए "बहुत संगठित" और "बेहद गुप्त" तरीक़े से लैपटॉप हैक किया गया था।
यह खुलासा इस बात पर सोचने को मजबूर करता है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स के साक्ष्य कितने सार्थक हैं। इसी संबंध में दुष्यंत लिख रहे हैं।
1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगांव की घटना और इसके बाद की घटनाएं किसी भी समझदार व्यक्ति को केवल एक ही निष्कर्ष पर पहुंचा सकती हैंः कि लोगों पर हिंसा और साजिश के आरोप लगाकर उन्हे मुकदमें में दुर्भावना तरीके से फंसाया गया है।
प्रेस के कुछ हल्कों द्वारा अहस्ताक्षरित "पत्र" लीक करना, वकीलों और पेशेवरों की आधी रात को नाटकीय और गैर-जरूरी गिरफ्तारी करना- और सभी का अपने घरों में पाया जाना- गिरफ्तारियाँ वैधानिक क़ानूनों का उल्लंघन है, मामले को हैंडल करने वाले पुलिस अधिकारियों द्वारा समय से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करना, उपरोक्त हरकतें इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि अभियुक्तों के साथ पक्षपात कर उन्हे सताया जा रहा है।
पुलिस की जांच और उसके परिणामस्वरूप हुई गिरफ्तारी के ये वे पहलू हैं, जिनके आधार पर न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने तीखी निंदा की थी। उन्होंने अपने असहमतिपूर्ण फैसले में कहा था कि प्राथमिकी में जांच और गिरफ्तारी की वजह पूर्वाग्रह है और प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाना चाहिए।
अमेरिका स्थित वाशिंगटन पोस्ट अखबार में 10 फरवरी को प्रकाशित रपट से पता चलता है कि भीमा कोरेगांव मामले में लगभग सभी आरोपी लोगों के खिलाफ मामले की नींव को मज़बूत बनाने वाले दस्तावेजों को रॉन विल्सन के कंप्यूटर में एक अनाम हमलावर द्वारा मैलवेयर के जरिए रोपित किया गया थाः
यह नई फोरेंसिक रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकला कि "पुलिस द्वारा जब्त किए गए लैपटॉप पर सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रचने के आरोपी सभी भारतीय कार्यकर्ताओं के एक समूह के खिलाफ प्रमुख सबूत डाले गए थे, पोस्ट में प्रकाशित कहानी आगे कहती है कि इस मामले के बारे में गहराते संदेह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कानून के शासन की जांच भी होती है।"
मैसाचुसेट्स की डिजिटल फोरेंसिक फर्म आर्सेलर कंसल्टिंग ने वकीलों के अनुरोध पर जांच की और उनकी रिपोर्ट के अनुसार एक साइबर हमलावर ने गिरफ्तारी से पहले रोना विल्सन के लैपटॉप को हैक किया और मालवेयर का इस्तेमाल कर विल्सन के लैपटॉप में कम से कम 10 पत्रों की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी डाल दी थी॰...",।
वाशिंगटन पोस्ट की स्टोरी के अनुसार, वकीलों के अनुरोध पर कई विशेषज्ञों ने फोरेंसिक रिपोर्ट की समीक्षा की और इन विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि रिपोर्ट एक मज़बूत निष्कर्ष पर पहुंच गई है। आर्सेनल कंसल्टिंग के संस्थापक को स्टोरी में यह कहते हुए उद्धृत किया गया है कि उनकी फर्म ने जो खोज की वह "अद्वितीय, "बेहद गुप्त" और "बहुत संगठित" है जो गहन रूप से परेशान करने वाली खोज है"।
यदि कोई भारत के संविधान और भारत में लागू आपराधिक प्रक्रिया कानूनों को सख्ती से लागू करे तो उपरोक्त रिपोर्ट के आधार पर अभियुक्त के खिलाफ मामले को खारिज किया जा सकता है।
इतना ही नहीं, बल्कि न्याय को सुनिश्चित करने के लिए वाशिंगटन पोस्ट में किए गए खुलासे के आधार उन अपराधियों की जांच कर उन्हें दंडित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को अब एक एसआईटी का गठन करना चाहिए।
इस सुविख्यात समाचार पत्र में जिस तरह का खुलासा किया है, उसका प्रभाव इस विशेष मामले से भी बहुत परे हैं। वे केंद्र सरकार के खिलाफ लगे उन वाजिब और लगाए आरोपों से भी परे हैं कि वह स्वतंत्र प्रेस और नागरिक समाज के व्यक्तियों को प्रताड़ित करने के खतरनाक अभियान में लगी है।
सबसे पहली बात, ये खुलासे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की स्वीकार्यता की जड़ पर हमला करते हैं। अब हमारे पास नकली साक्ष्य के ठोस सबूत हैं जो इलेक्ट्रॉनिक रूप से बनाए गए हैं और यहाँ तक कि वे डिवाइस के मालिक से भी छिपे हुए हैं, इसलिए वे सबूत सवाल के घेरे में आ जाते हैं। इसलिए, यहां तक कि निष्पक्ष जांच के न्यूनतम तानेबाने को बनाए रखने और नियम कानून के सिद्धांतों का पालन करने के लक्ष्य के लिए या तो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के उपयोग पर पूर्ण स्थगन की जरूरत होगी या इससे जुड़े मूल्य को काफी कम करना होगा।
दूसरा, हमें यह भी पूछने की जरूरत है कि अगर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, अन्य संस्थानों के प्रमुखों, विपक्ष के नेताओं, सैन्य प्रमुखों के कम्प्यूटर्स में नकली सबूतों का रोपण किया जाता है तो क्या होगा? और यदि यह पहले ही किया जा चुका है तो क्या होगा?
न्यायाधीशों, राजनेताओं और संस्थानों के प्रमुखों के मामले में हमलावर पीड़ितों को ब्लैकमेल करने और भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने में कामयाब हो जाएंगे। ऐसा अगर सैन्य प्रमुखों के साथ होता है तो राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड सकती है।
इसमें एक अन्य संवेदनशील श्रेणी आ जाती है वह वकीलों और पत्रकारों की है, जो आज़ादी की सुरक्षा की लड़ाई में सबसे आगे हैं। ऐसे समय में जब अभियोजन एजेंसियां या जांच एजेंसियां वकीलों के कंप्यूटर को शारीरिक रूप से आसानी से जब्त कर सकती हैं- जैसा कि हाल ही में वकील महमूद प्राचा के साथ हुआ था- और जब पत्रकारों को अभूतपूर्व उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, तो हमें एक राष्ट्र के रूप में उन वकीलों और पत्रकारों के मामले मीन प्रक्रिया को थोड़ा और सख्त बनाने की जरूरत है जिन्हे मामलों में फंसाया जाता है।
इसलिए, कम से कम, हमें सुरक्षा की उस प्रकृति के बारे में बातचीत शुरू करने की जरूरत है जिसे कुछ दफ्तरों को दी जानी चाहिए जहां तक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का संबंध है।
केंद्रीय और राज्य विधायिका, बार एसोसिएशन, उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट, और प्रेस काउंसिल को इन घटनाओं के बारे में गंभीर विचार करने की जरूरत है-यदि कुछ और नहीं तो कम से कम आत्म-चिंतन या अपनी समझ के लिए ऐसा करना चाहिए।
यह कहना कि यह स्थिति अद्वितीय है, मामलों को बहुत हल्के में लेना होगा। इससे जो कुछ दांव पर लगा है वह एक अरब से अधिक नागरिकों की आजादी और भारत के लोकतंत्र की छाप है। अब हमारे पास खोने के लिए एक पल भी नहीं है।
(दुष्यंत एक वकील हैं। व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।)
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वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें आर्सेनल कंसल्टिंग नामक एक डिजिटल फ़ोरेंसिक्स फ़र्म के हवाले से खुलासा किया गया है कि भीमा कोरेगाँव की घटना में एक्टिविस्ट रोना विल्सन को फँसाने के लिए सबूतों को उनके लैपटॉप में प्लांट करने के लिए "बहुत संगठित" और "बेहद गुप्त" तरीक़े से लैपटॉप हैक किया गया था। यह खुलासा इस बात पर सोचने को मजबूर करता है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स के साक्ष्य कितने सार्थक हैं। इसी संबंध में दुष्यंत लिख रहे हैं। एक जनवरी, दो हज़ार अट्ठारह को भीमा कोरेगांव की घटना और इसके बाद की घटनाएं किसी भी समझदार व्यक्ति को केवल एक ही निष्कर्ष पर पहुंचा सकती हैंः कि लोगों पर हिंसा और साजिश के आरोप लगाकर उन्हे मुकदमें में दुर्भावना तरीके से फंसाया गया है। प्रेस के कुछ हल्कों द्वारा अहस्ताक्षरित "पत्र" लीक करना, वकीलों और पेशेवरों की आधी रात को नाटकीय और गैर-जरूरी गिरफ्तारी करना- और सभी का अपने घरों में पाया जाना- गिरफ्तारियाँ वैधानिक क़ानूनों का उल्लंघन है, मामले को हैंडल करने वाले पुलिस अधिकारियों द्वारा समय से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करना, उपरोक्त हरकतें इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि अभियुक्तों के साथ पक्षपात कर उन्हे सताया जा रहा है। पुलिस की जांच और उसके परिणामस्वरूप हुई गिरफ्तारी के ये वे पहलू हैं, जिनके आधार पर न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने तीखी निंदा की थी। उन्होंने अपने असहमतिपूर्ण फैसले में कहा था कि प्राथमिकी में जांच और गिरफ्तारी की वजह पूर्वाग्रह है और प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया जाना चाहिए। अमेरिका स्थित वाशिंगटन पोस्ट अखबार में दस फरवरी को प्रकाशित रपट से पता चलता है कि भीमा कोरेगांव मामले में लगभग सभी आरोपी लोगों के खिलाफ मामले की नींव को मज़बूत बनाने वाले दस्तावेजों को रॉन विल्सन के कंप्यूटर में एक अनाम हमलावर द्वारा मैलवेयर के जरिए रोपित किया गया थाः यह नई फोरेंसिक रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकला कि "पुलिस द्वारा जब्त किए गए लैपटॉप पर सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रचने के आरोपी सभी भारतीय कार्यकर्ताओं के एक समूह के खिलाफ प्रमुख सबूत डाले गए थे, पोस्ट में प्रकाशित कहानी आगे कहती है कि इस मामले के बारे में गहराते संदेह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कानून के शासन की जांच भी होती है।" मैसाचुसेट्स की डिजिटल फोरेंसिक फर्म आर्सेलर कंसल्टिंग ने वकीलों के अनुरोध पर जांच की और उनकी रिपोर्ट के अनुसार एक साइबर हमलावर ने गिरफ्तारी से पहले रोना विल्सन के लैपटॉप को हैक किया और मालवेयर का इस्तेमाल कर विल्सन के लैपटॉप में कम से कम दस पत्रों की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी डाल दी थी॰...",। वाशिंगटन पोस्ट की स्टोरी के अनुसार, वकीलों के अनुरोध पर कई विशेषज्ञों ने फोरेंसिक रिपोर्ट की समीक्षा की और इन विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि रिपोर्ट एक मज़बूत निष्कर्ष पर पहुंच गई है। आर्सेनल कंसल्टिंग के संस्थापक को स्टोरी में यह कहते हुए उद्धृत किया गया है कि उनकी फर्म ने जो खोज की वह "अद्वितीय, "बेहद गुप्त" और "बहुत संगठित" है जो गहन रूप से परेशान करने वाली खोज है"। यदि कोई भारत के संविधान और भारत में लागू आपराधिक प्रक्रिया कानूनों को सख्ती से लागू करे तो उपरोक्त रिपोर्ट के आधार पर अभियुक्त के खिलाफ मामले को खारिज किया जा सकता है। इतना ही नहीं, बल्कि न्याय को सुनिश्चित करने के लिए वाशिंगटन पोस्ट में किए गए खुलासे के आधार उन अपराधियों की जांच कर उन्हें दंडित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को अब एक एसआईटी का गठन करना चाहिए। इस सुविख्यात समाचार पत्र में जिस तरह का खुलासा किया है, उसका प्रभाव इस विशेष मामले से भी बहुत परे हैं। वे केंद्र सरकार के खिलाफ लगे उन वाजिब और लगाए आरोपों से भी परे हैं कि वह स्वतंत्र प्रेस और नागरिक समाज के व्यक्तियों को प्रताड़ित करने के खतरनाक अभियान में लगी है। सबसे पहली बात, ये खुलासे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की स्वीकार्यता की जड़ पर हमला करते हैं। अब हमारे पास नकली साक्ष्य के ठोस सबूत हैं जो इलेक्ट्रॉनिक रूप से बनाए गए हैं और यहाँ तक कि वे डिवाइस के मालिक से भी छिपे हुए हैं, इसलिए वे सबूत सवाल के घेरे में आ जाते हैं। इसलिए, यहां तक कि निष्पक्ष जांच के न्यूनतम तानेबाने को बनाए रखने और नियम कानून के सिद्धांतों का पालन करने के लक्ष्य के लिए या तो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के उपयोग पर पूर्ण स्थगन की जरूरत होगी या इससे जुड़े मूल्य को काफी कम करना होगा। दूसरा, हमें यह भी पूछने की जरूरत है कि अगर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, अन्य संस्थानों के प्रमुखों, विपक्ष के नेताओं, सैन्य प्रमुखों के कम्प्यूटर्स में नकली सबूतों का रोपण किया जाता है तो क्या होगा? और यदि यह पहले ही किया जा चुका है तो क्या होगा? न्यायाधीशों, राजनेताओं और संस्थानों के प्रमुखों के मामले में हमलावर पीड़ितों को ब्लैकमेल करने और भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने में कामयाब हो जाएंगे। ऐसा अगर सैन्य प्रमुखों के साथ होता है तो राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड सकती है। इसमें एक अन्य संवेदनशील श्रेणी आ जाती है वह वकीलों और पत्रकारों की है, जो आज़ादी की सुरक्षा की लड़ाई में सबसे आगे हैं। ऐसे समय में जब अभियोजन एजेंसियां या जांच एजेंसियां वकीलों के कंप्यूटर को शारीरिक रूप से आसानी से जब्त कर सकती हैं- जैसा कि हाल ही में वकील महमूद प्राचा के साथ हुआ था- और जब पत्रकारों को अभूतपूर्व उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, तो हमें एक राष्ट्र के रूप में उन वकीलों और पत्रकारों के मामले मीन प्रक्रिया को थोड़ा और सख्त बनाने की जरूरत है जिन्हे मामलों में फंसाया जाता है। इसलिए, कम से कम, हमें सुरक्षा की उस प्रकृति के बारे में बातचीत शुरू करने की जरूरत है जिसे कुछ दफ्तरों को दी जानी चाहिए जहां तक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का संबंध है। केंद्रीय और राज्य विधायिका, बार एसोसिएशन, उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट, और प्रेस काउंसिल को इन घटनाओं के बारे में गंभीर विचार करने की जरूरत है-यदि कुछ और नहीं तो कम से कम आत्म-चिंतन या अपनी समझ के लिए ऐसा करना चाहिए। यह कहना कि यह स्थिति अद्वितीय है, मामलों को बहुत हल्के में लेना होगा। इससे जो कुछ दांव पर लगा है वह एक अरब से अधिक नागरिकों की आजादी और भारत के लोकतंत्र की छाप है। अब हमारे पास खोने के लिए एक पल भी नहीं है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
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श्री शंकरदेव नेत्रालय असम ने ग्राफिक डिजाइनर सह वीडियो संपादक के पद के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं।
योग्यता : ग्राफिक डिजाइनिंग/वीडियो एडिटिंग में मास्टर्स/ग्रेजुएट/डिप्लोमा या समकक्ष। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए अंतर्दृष्टिपूर्ण वीडियो और ग्राफिक्स बनाने में सक्षम होना चाहिए, लघु प्रचार क्लिप, निर्देशात्मक वीडियो, प्रस्तुतियां, प्रचार पत्रक, बैनर आदि। रचनात्मक अनुभवी उम्मीदवारों को वरीयता दी जाएगी।
आवेदन कैसे करेंः उम्मीदवार अपने आवेदन मैनेजर (एचआर), श्री शंकरदेव नेत्रालय, 96, बशिष्ठ रोड, बेलटोला, गुवाहाटी -781028 को 13 फरवरी 2023 तक भेज सकते हैं।
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किदवई नगर में एक महिला ने डॉक्टर पर नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप....
किदवई नगर में एक महिला ने डॉक्टर पर नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। उसने कार्यवाहक एसएसपी से शिकायत की है, पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है।
महिला के मुताबिक पति से रिश्ते अच्छे न होने के चलते वह दो बच्चों को लेकर दो साल से अलग रह रही है। बेरोजगारी के कारण उसकी आर्थिक स्थिति भी खराब है। इस बीच उसकी मुलाकात इलाके में रहने वाले एक सरकारी अस्पताल के डॉक्टर से हुई। डॉक्टर ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया। आरोप है कि बीते चार जून को डॉक्टर ने बातचीत के बहाने से उसे घर बुलाया तो वह पांच साल के बेटे के साथ वहां पहुंची। डॉक्टर ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
विरोध करने पर उसे और बेटे को पीटा। पीडि़ता ने थाने पहुंचकर शिकायत की तो चौकी प्रभारी ने उस पर समझौते का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जिसके बाद पीडि़ता ने सोमवार को कार्यवाहक एसएसपी संजीव सुमन से गुहार लगाई। थाना प्रभारी किदवई नगर कुंज बिहारी मिश्र ने बताया कि तहरीर मिलने पर जांच कर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
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किदवई नगर में एक महिला ने डॉक्टर पर नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप.... किदवई नगर में एक महिला ने डॉक्टर पर नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। उसने कार्यवाहक एसएसपी से शिकायत की है, पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है। महिला के मुताबिक पति से रिश्ते अच्छे न होने के चलते वह दो बच्चों को लेकर दो साल से अलग रह रही है। बेरोजगारी के कारण उसकी आर्थिक स्थिति भी खराब है। इस बीच उसकी मुलाकात इलाके में रहने वाले एक सरकारी अस्पताल के डॉक्टर से हुई। डॉक्टर ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया। आरोप है कि बीते चार जून को डॉक्टर ने बातचीत के बहाने से उसे घर बुलाया तो वह पांच साल के बेटे के साथ वहां पहुंची। डॉक्टर ने उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसे और बेटे को पीटा। पीडि़ता ने थाने पहुंचकर शिकायत की तो चौकी प्रभारी ने उस पर समझौते का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जिसके बाद पीडि़ता ने सोमवार को कार्यवाहक एसएसपी संजीव सुमन से गुहार लगाई। थाना प्रभारी किदवई नगर कुंज बिहारी मिश्र ने बताया कि तहरीर मिलने पर जांच कर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की 2015 की ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में खाली रह गए पदों को भरने के करुणेश कुमार केस में दिए गए फैसले के तहत कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। जस्टिस एमसी त्रिपाठी ने जौनपुर के संतोष कुमार त्रिपाठी व अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची अधिवक्ता मुजीब अहमद सिद्दीकी का कहना था कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ ने 2015 में 3587 ग्राम पंचायत अधिकारियों की भर्ती निकाली थी। लिखित परीक्षा एवं पुनरीक्षित परिणाम के बाद साक्षात्कार लिए गए।
इंटरव्यू के बाद परिणाम घोषित किया गया। लेकिन, तमाम चयनितों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया, जिससे काफी पद खाली रह गए। उन पदों को भरने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इसमें एकल पीठ से राहत नहीं मिली, जिसके आदेश के खिलाफ विशेष अपील को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार एवं आयोग को अपीलार्थियों की नियुक्ति पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया 21 दिसंबर 2018 तक पूरी कर ली जाए। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने पुनर्विचार अर्जी डाली थी। उसे कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2019 को खारिज कर दिया। इसके बावजूद याची अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं जा रही है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की दो हज़ार पंद्रह की ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में खाली रह गए पदों को भरने के करुणेश कुमार केस में दिए गए फैसले के तहत कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। जस्टिस एमसी त्रिपाठी ने जौनपुर के संतोष कुमार त्रिपाठी व अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची अधिवक्ता मुजीब अहमद सिद्दीकी का कहना था कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ ने दो हज़ार पंद्रह में तीन हज़ार पाँच सौ सत्तासी ग्राम पंचायत अधिकारियों की भर्ती निकाली थी। लिखित परीक्षा एवं पुनरीक्षित परिणाम के बाद साक्षात्कार लिए गए। इंटरव्यू के बाद परिणाम घोषित किया गया। लेकिन, तमाम चयनितों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया, जिससे काफी पद खाली रह गए। उन पदों को भरने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इसमें एकल पीठ से राहत नहीं मिली, जिसके आदेश के खिलाफ विशेष अपील को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार एवं आयोग को अपीलार्थियों की नियुक्ति पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया इक्कीस दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह तक पूरी कर ली जाए। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने पुनर्विचार अर्जी डाली थी। उसे कोर्ट ने तीस अक्टूबर दो हज़ार उन्नीस को खारिज कर दिया। इसके बावजूद याची अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं जा रही है।
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- नये चकमक उद्योग की उपस्थिति ( appearance of new flint industries)
- आधुनिक मानव प्ररूप का उदय ( appearance of men of the modern type i. e. Homo sapiens sapiens )।
भारतीय संदर्भ में फलकों ( blades ) और तक्षणियों ( burins ) का प्रयोग विशेषरूप से दिखा जाता है। फिरभी इसका प्रधान पाषाण उपकरण फलक ( Blade ) है। फलक ( blade ) पतले तथा संकरे आकार वाला वह पाषाण फलक है जिसके दोनों किनारे समानान्तर होते है तथा जो लम्बाई में अपनी चौड़ाई से दूना होता है। इसका समय लगभग ३५,००० ई०पू० से १०,००० ई०पू० निर्धारित की गयी है।
प्रारम्भ में पुराविद् भारतीय प्रागैतिहास में ब्लेड प्रधान काल मानने को तैयार नहीं थे किन्तु बाद में विभिन्न स्थानों से ब्लेड उपकरणों के प्रकाश में आने के परिणामस्वरूप यह स्वीकार किया गया कि युरोप तथा पश्चिमी एशिया की भाँति भारत में भी ब्लेड प्रधान उच्च पूर्व पाषाणकाल का अस्तित्व था।
- बेलन नदी घाटी तथा सोन नदी घाटी ( उ०प्र० ),
- सिंहभूमि ( बिहार ),
- जोगदहा, भीमबेटका, बबुरी, रामपुर, बाघोर ( म०प्र० ),
- पटणे, भदणे तथा इनामगाँव ( महाराष्ट्र ),
- रेणिगुन्ता, वेमुला, कर्नूल गुफायें ( आन्ध्र प्रदेश ),
- शोरापुर दोआब ( कर्नाटक ),
- विसदी ( गुजरात ),
- बूढ़ा पुष्कर ( राजस्थान ),
- रिवात में ५५वाँ पुरास्थल ( रावलपिण्डी, पाकिस्तान ),
- संघाव की गुफाएँ ( मरदान जिला, पाकिस्तान ),
- सिंध में रोहड़ी की पहाड़ियों में माइलस्टोन १०१ आदि।
उत्तर प्रदेश के बेलन नदी घाटी में स्थित लोंहदा नाला से मिली हुई अस्थि-निर्मित मातृदेवी की मूर्ति इसी काल की है। बेलन नदी घाटी इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि यहाँ पर पुरापाषाणकाल से सम्बन्धित तीनों ( पूर्व, मध्य व उत्तर - पुरापाषाणकाल ) काल के पुरावशेष प्राप्त होते हैं। यहीं के चौपानी माण्डो से उत्तर पुरापाषाणकाल से लेकर नवपाषाणकाल की ओर संक्रमण का साक्ष्य भी मिलता है।
इन स्थानों से प्राप्त इस काल के उपकरण मुख्य रूप से फलक ( Blade ) पर बने हैं। इसके साथ-साथ कुछ स्क्रेपर, वेधक, छिद्रक भी मिले है। ब्लेड उपकरण एक विशेष प्रकार के बेलनाकार कोरों से निकाले जाते थे। इनके निर्माण मे चर्ट, जेस्पर, पिलन्ट आदि बहुमूल्य पत्थरों का उपयोग किया गया है। पाषाण के अतिरिक्त इस काल में अस्थियों के बने हुए कुछ उपकरण भी मिलते है। इनमें स्क्रेपर, छिद्रक, बेधक तथा धारदार उपकरण है।
भीमबेटका से नीले रंग के कुछ पाषाण खण्ड मिलते हैं। वाकणकर महोदय के अनुसार इनके द्वारा चित्रकारी के लिये रंग तैयार किया जाता होगा। संभव है विन्ध्य क्षेत्र की शिलाश्रयों में बने हुए कुछ गुहाचित्र उच्च पूर्वपाषाणकाल के ही हों। इनसे तत्कालीन मनुष्यों की कलात्मक अभिरुचि भी सूचित होती है। इस प्रकार के गुफाचित्र पश्चिमी युरोप से भी प्राप्त हुए हैं।
- इसमें उपकरण बनाने की मुख्य सामग्री लंबे, स्थूल प्रस्तर फलक ( blade ) होते हैं।
- जो उपकरण तैयार किये जाते थे उनमें तक्षणी ( burin ) और खुरचनी ( scraper ) की प्रतिशत मात्रा बहुत रहती है। सरल फलकों के किनारों को तेज या खुंडा बनाने के लिये उनकी घिसाई की जा सकती है।
- ऐसा प्रतीत होता है कि इस संस्कृति में अस्थि-उपकरणों की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण थी। जो प्रारूप पहचान किये गये हैं उनमें कुछ अलंकृत छड़ें, मत्स्य भाले, नोकदार सुइयाँ और भालों की नोकें सम्मिलित हैं।
- नक्काशी और चित्रकारी दोनों रूपों में कला, व्यापक रूप से देखने को मिलती है।
यदि ये विशेषताएँ किसी ऐसे निक्षेप में मिलती हों जिसे अत्यंतनूतन युग या हिमयुग ( Pleistocene age or Ice Age ) का निक्षेप सिद्ध किया जा सके तो उस संस्कृति को उत्तर-पुरापाषाणकालीन संस्कृति के रूप में पहचान सकते हैं।
कुछ ही समय पहले तक इस देश में ऐसी कोई संस्कृति नहीं पहचानी गयी थी, अतः हम लंबे समय तक पुरापाषाण काल के त्रिवर्गीय विभाजन का प्रयोग नहीं करते थे अर्थात् पूर्व, मध्य और उत्तर-पुरापाषाण काल के स्थान पर हम अत्यंतनूतन युग में केवल दो संस्कृतियाँ गिनते रहे हैं जिन्हें हम आद्य प्रस्तर युग ( Early Stone Age ) और मध्य प्रस्तर युग ( Middle Stone Age ) कहते थे।
यह कहना एकदम सही नहीं होगा कि फलक या फलकों से बने उपकरण इससे पहले भारत में अज्ञात थे। दुर्भाग्य से, ये हमेशा अपने से पहली या बाद की संस्कृति के साथ मिले-जुले पाये गये हैं, और हमेशा धरातल से ही मिले हैं। अतः इस सामग्री की कालानुक्रमिक स्थिति को भी प्रदर्शित नहीं किया जा सका है।
परन्तु हाल ही में अनेक ऐसे स्थल प्रकाश में आये हैं जहाँ शुद्ध फलक उद्योग नदी निक्षेपों में दबे हुए पाये गये हैं। इनका एक सर्वोत्तम उदाहरण उत्तर प्रदेश की बेलन नदी घाटी से मिला है। यहाँ बहुसंख्यक नदियों के विपरीत सामान्य दो बजरियों के ऊपर एक तीसरी बजरी की परत मिली है। इस तीसरी बजरी से न केवल उत्तरपुरापाषाण युग का पूरा उद्योग प्राप्त हुआ है, बल्कि रेडियो कार्बन पद्धति से इसका तिथि-निर्धारण भी किया जा सकता था। इसे १९,७१५ + ३४० वर्ष आद्यपूर्व का पाया गया है। साथ ही इस स्थल से उत्तरपुरापाषाणकाल से मध्यपाषाण काल की ओर संक्रमण का प्रमाण भी मिलता है।
आंध्र प्रदेश के रेनीगुंटा में फलकों और तक्षणियों का एक और विशाल संग्रह प्राप्त हुआ है । उसी राज्य के बेटमचेर्ला में अनेक अस्थि-उपकरण भी मिले हैं। लगता है, इनमें से अधिकांश अस्थि-उपकरण चूलदार वेधनी के रूप में प्रयुक्त होते थे।
कर्नाटक में, विशेषतः शोरापुर और बीजापुर जिलों में, उत्तरपुरापाषाणकाल के कुछ अन्य दबे हुए स्थल मिले हैं।
अभी तक कोई कलाकृति अंतिम रूप से इस संस्कृति के साथ नहीं जोड़ी जा सकी है, परंतु फलक उपकरणों, तक्षणियों और अस्थि-उपकरणों को भारतीय उत्तरपुरापाषाण काल के प्रमाण अवश्य माना जा सकता है। युरोप और अफ्रीका के अनेक उत्तरकालीन स्थलों से जो दोनों ओर महीन की गयी वेधनियाँ मिलती है, भारत में उनका कोई भी चिह्न नहीं मिलता है।
अभी तक यह सिद्ध करने की कोई संभावना है कि भारतीय उत्तरपुरापाषाण काल अपने मध्य-पुरापाषाणकालीन आधार पर विकसित हुआ है या बाहर के संपर्क का प्रतिनिधित्व करता है। यदि पुराने सिंधु, गुजरात और राजस्थान की पट्टी को संपर्क का मार्ग मान लिया जाए तो इस सम्पूर्ण मार्ग से बेलन जैसे, या यो समझिए कि शोरापुर जैसे पर्याप्त उत्तरपुरापाषाण नहीं मिलते। साथ ही यह पता चला है कि हमारे मध्य-पुरापाषाणकाल तक इस क्षेत्र में फलक-विनिर्माण की जड़ें गहरी जमी थीं। परिणामतः जब तक कोई और प्रमाण नहीं मिलता, भारत के उत्तरपुरापाषाण काल की स्थानीय उत्पत्ति की पचास प्रतिशत संभावना स्वीकार करना उपयुक्त होगा।
मानव उद्विकास ( Human Evolution )
आरम्भिक मानव ( The Earliest People )
पूर्व पुरापाषाणकाल ( Lower Palaeolithic Age )
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- नये चकमक उद्योग की उपस्थिति - आधुनिक मानव प्ररूप का उदय । भारतीय संदर्भ में फलकों और तक्षणियों का प्रयोग विशेषरूप से दिखा जाता है। फिरभी इसका प्रधान पाषाण उपकरण फलक है। फलक पतले तथा संकरे आकार वाला वह पाषाण फलक है जिसके दोनों किनारे समानान्तर होते है तथा जो लम्बाई में अपनी चौड़ाई से दूना होता है। इसका समय लगभग पैंतीस,शून्य ईशून्यपूशून्य से दस,शून्य ईशून्यपूशून्य निर्धारित की गयी है। प्रारम्भ में पुराविद् भारतीय प्रागैतिहास में ब्लेड प्रधान काल मानने को तैयार नहीं थे किन्तु बाद में विभिन्न स्थानों से ब्लेड उपकरणों के प्रकाश में आने के परिणामस्वरूप यह स्वीकार किया गया कि युरोप तथा पश्चिमी एशिया की भाँति भारत में भी ब्लेड प्रधान उच्च पूर्व पाषाणकाल का अस्तित्व था। - बेलन नदी घाटी तथा सोन नदी घाटी , - सिंहभूमि , - जोगदहा, भीमबेटका, बबुरी, रामपुर, बाघोर , - पटणे, भदणे तथा इनामगाँव , - रेणिगुन्ता, वेमुला, कर्नूल गुफायें , - शोरापुर दोआब , - विसदी , - बूढ़ा पुष्कर , - रिवात में पचपनवाँ पुरास्थल , - संघाव की गुफाएँ , - सिंध में रोहड़ी की पहाड़ियों में माइलस्टोन एक सौ एक आदि। उत्तर प्रदेश के बेलन नदी घाटी में स्थित लोंहदा नाला से मिली हुई अस्थि-निर्मित मातृदेवी की मूर्ति इसी काल की है। बेलन नदी घाटी इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि यहाँ पर पुरापाषाणकाल से सम्बन्धित तीनों काल के पुरावशेष प्राप्त होते हैं। यहीं के चौपानी माण्डो से उत्तर पुरापाषाणकाल से लेकर नवपाषाणकाल की ओर संक्रमण का साक्ष्य भी मिलता है। इन स्थानों से प्राप्त इस काल के उपकरण मुख्य रूप से फलक पर बने हैं। इसके साथ-साथ कुछ स्क्रेपर, वेधक, छिद्रक भी मिले है। ब्लेड उपकरण एक विशेष प्रकार के बेलनाकार कोरों से निकाले जाते थे। इनके निर्माण मे चर्ट, जेस्पर, पिलन्ट आदि बहुमूल्य पत्थरों का उपयोग किया गया है। पाषाण के अतिरिक्त इस काल में अस्थियों के बने हुए कुछ उपकरण भी मिलते है। इनमें स्क्रेपर, छिद्रक, बेधक तथा धारदार उपकरण है। भीमबेटका से नीले रंग के कुछ पाषाण खण्ड मिलते हैं। वाकणकर महोदय के अनुसार इनके द्वारा चित्रकारी के लिये रंग तैयार किया जाता होगा। संभव है विन्ध्य क्षेत्र की शिलाश्रयों में बने हुए कुछ गुहाचित्र उच्च पूर्वपाषाणकाल के ही हों। इनसे तत्कालीन मनुष्यों की कलात्मक अभिरुचि भी सूचित होती है। इस प्रकार के गुफाचित्र पश्चिमी युरोप से भी प्राप्त हुए हैं। - इसमें उपकरण बनाने की मुख्य सामग्री लंबे, स्थूल प्रस्तर फलक होते हैं। - जो उपकरण तैयार किये जाते थे उनमें तक्षणी और खुरचनी की प्रतिशत मात्रा बहुत रहती है। सरल फलकों के किनारों को तेज या खुंडा बनाने के लिये उनकी घिसाई की जा सकती है। - ऐसा प्रतीत होता है कि इस संस्कृति में अस्थि-उपकरणों की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण थी। जो प्रारूप पहचान किये गये हैं उनमें कुछ अलंकृत छड़ें, मत्स्य भाले, नोकदार सुइयाँ और भालों की नोकें सम्मिलित हैं। - नक्काशी और चित्रकारी दोनों रूपों में कला, व्यापक रूप से देखने को मिलती है। यदि ये विशेषताएँ किसी ऐसे निक्षेप में मिलती हों जिसे अत्यंतनूतन युग या हिमयुग का निक्षेप सिद्ध किया जा सके तो उस संस्कृति को उत्तर-पुरापाषाणकालीन संस्कृति के रूप में पहचान सकते हैं। कुछ ही समय पहले तक इस देश में ऐसी कोई संस्कृति नहीं पहचानी गयी थी, अतः हम लंबे समय तक पुरापाषाण काल के त्रिवर्गीय विभाजन का प्रयोग नहीं करते थे अर्थात् पूर्व, मध्य और उत्तर-पुरापाषाण काल के स्थान पर हम अत्यंतनूतन युग में केवल दो संस्कृतियाँ गिनते रहे हैं जिन्हें हम आद्य प्रस्तर युग और मध्य प्रस्तर युग कहते थे। यह कहना एकदम सही नहीं होगा कि फलक या फलकों से बने उपकरण इससे पहले भारत में अज्ञात थे। दुर्भाग्य से, ये हमेशा अपने से पहली या बाद की संस्कृति के साथ मिले-जुले पाये गये हैं, और हमेशा धरातल से ही मिले हैं। अतः इस सामग्री की कालानुक्रमिक स्थिति को भी प्रदर्शित नहीं किया जा सका है। परन्तु हाल ही में अनेक ऐसे स्थल प्रकाश में आये हैं जहाँ शुद्ध फलक उद्योग नदी निक्षेपों में दबे हुए पाये गये हैं। इनका एक सर्वोत्तम उदाहरण उत्तर प्रदेश की बेलन नदी घाटी से मिला है। यहाँ बहुसंख्यक नदियों के विपरीत सामान्य दो बजरियों के ऊपर एक तीसरी बजरी की परत मिली है। इस तीसरी बजरी से न केवल उत्तरपुरापाषाण युग का पूरा उद्योग प्राप्त हुआ है, बल्कि रेडियो कार्बन पद्धति से इसका तिथि-निर्धारण भी किया जा सकता था। इसे उन्नीस,सात सौ पंद्रह + तीन सौ चालीस वर्ष आद्यपूर्व का पाया गया है। साथ ही इस स्थल से उत्तरपुरापाषाणकाल से मध्यपाषाण काल की ओर संक्रमण का प्रमाण भी मिलता है। आंध्र प्रदेश के रेनीगुंटा में फलकों और तक्षणियों का एक और विशाल संग्रह प्राप्त हुआ है । उसी राज्य के बेटमचेर्ला में अनेक अस्थि-उपकरण भी मिले हैं। लगता है, इनमें से अधिकांश अस्थि-उपकरण चूलदार वेधनी के रूप में प्रयुक्त होते थे। कर्नाटक में, विशेषतः शोरापुर और बीजापुर जिलों में, उत्तरपुरापाषाणकाल के कुछ अन्य दबे हुए स्थल मिले हैं। अभी तक कोई कलाकृति अंतिम रूप से इस संस्कृति के साथ नहीं जोड़ी जा सकी है, परंतु फलक उपकरणों, तक्षणियों और अस्थि-उपकरणों को भारतीय उत्तरपुरापाषाण काल के प्रमाण अवश्य माना जा सकता है। युरोप और अफ्रीका के अनेक उत्तरकालीन स्थलों से जो दोनों ओर महीन की गयी वेधनियाँ मिलती है, भारत में उनका कोई भी चिह्न नहीं मिलता है। अभी तक यह सिद्ध करने की कोई संभावना है कि भारतीय उत्तरपुरापाषाण काल अपने मध्य-पुरापाषाणकालीन आधार पर विकसित हुआ है या बाहर के संपर्क का प्रतिनिधित्व करता है। यदि पुराने सिंधु, गुजरात और राजस्थान की पट्टी को संपर्क का मार्ग मान लिया जाए तो इस सम्पूर्ण मार्ग से बेलन जैसे, या यो समझिए कि शोरापुर जैसे पर्याप्त उत्तरपुरापाषाण नहीं मिलते। साथ ही यह पता चला है कि हमारे मध्य-पुरापाषाणकाल तक इस क्षेत्र में फलक-विनिर्माण की जड़ें गहरी जमी थीं। परिणामतः जब तक कोई और प्रमाण नहीं मिलता, भारत के उत्तरपुरापाषाण काल की स्थानीय उत्पत्ति की पचास प्रतिशत संभावना स्वीकार करना उपयुक्त होगा। मानव उद्विकास आरम्भिक मानव पूर्व पुरापाषाणकाल
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नयी दिल्ली, (एजेंसी/वार्ता): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को कर्नाटक का दौरा करेंगे और इस दौरे में वह शिवमोग्गा और बेलगावी में कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास अथवा उद्घाटन करेंगे तथा पीएम-किसान योजना की 13वीं किस्त के तहत किसानों के खातें में सीधे धन जारी करेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक श्री मोदी 27 फरवरी को सुबह लगभग 11:45 बजे शिवमोग्गा में नए विकसित किए गए हवाई अड्डे का निरीक्षण करेंगे और उसके बाद शिवमोग्गा में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे। वहां से वह लगभग 3:15 बजे बेलगावी में कई विकास पहलों की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और पीएम-किसान की 13वीं किस्त भी जारी करेंगे।
शिवमोग्गा में नया हवाई अड्डा लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इस हवाई अड्डे का यात्री टर्मिनल भवन प्रति घंटे 300 यात्रियों को संभाल सकने में सक्षम है। यह हवाई अड्डा मलनाड क्षेत्र के शिवमोग्गा एवं अन्य पड़ोसी इलाकों की कनेक्टिविटी और पहुंच को बेहतर करेगा।
प्रधानमंत्री शिवमोग्गा में दो रेल परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इसमें 990 करोड़ रुपये की लागत की शिवमोग्गा-शिकारीपुरा-रानेबेन्नूर नई रेलवे लाइन और 100 करोड़ रुपये से अधिक की कोटेगंगुरु रेलवे कोचिंग डिपो परियोजना शामिल हैं। इस कोचिंग सुविधा से बेंगलुरुऔर मैसुरु की कोचिंग सुविधाओं पर दबाव कम होगा तथा नयी गाड़ियां शुरू करने में सुविधा होगी।
श्री मोदी वहां सड़कों के विकास की कई परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। कुल 215 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित की जाने वाली इन परियोजनाओं में ब्यंदूर-रानेबेन्नूर को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग -766सी पर शिकारीपुरा शहर के लिए नई बाईपास सड़क का निर्माण; मेगारावल्ली से अगुम्बे तक राष्ट्रीय राजमार्ग -169ए का चौड़ीकरण; और राष्ट्रीय राजमार्ग 169 पर तीर्थाहल्ली तालुक के भारतीपुरा में नए पुल का निर्माण शामिल है।
इस कार्यक्रम में श्री मोदी जल जीवन मिशन के तहत 950 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बहु-ग्राम योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इसमें गौतमपुरा और 127 अन्य गांवों के लिए एक बहु-ग्राम योजना का उद्घाटन और कुल 860 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित की जाने वाली तीन अन्य बहु-ग्राम योजनाओं की आधारशिला रखना शामिल है। इन चार योजनाओं से कुल 4. 4 लाख से अधिक लोगों को पाइप लाइन से पेयजुल सुविधा का लाभ होगा।
प्रधानमंत्री शिवमोग्गा शहर में 895 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 44 स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी बेलगावी में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत 13वीं किस्त की लगभग 16,000 करोड़ रुपये की राशि आठ करोड़ से अधिक लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से जारी की जाएगी।
इस कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री पुनर्विकसित बेलगावी रेलवे स्टेशन भवन को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। लगभग 190 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास किया गया है।
श्री मोदी इस अवसर परदलोंडा-बेलगावी-घाटप्रभा खंड के बीच रेलवे लाइन दोहरीकरण परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। लगभग 930 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई यह परियोजना व्यस्तम मुंबई-पुणे-हुबली-बेंगलुरु रेलमार्ग पर लाइन क्षमता को बढ़ाएगी, जिससे इस क्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री बेलगावी में जल जीवन मिशन के तहत बहु-ग्राम योजना की छह परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे, जिन्हें लगभग 1585 करोड़ रुपये की कुल लागत से विकसित किया जाएगा और इससे 315 से अधिक गांवों की लगभग 8. 8 लाख आबादी लाभान्वित होगी।
-(एजेंसी/वार्ता)
यह भी पढ़ें : -जीरे के ये 2 उपाय अपनाकर आप भी कर सकते हैं वजन कम, जानिए कैसे?
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नयी दिल्ली, : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को कर्नाटक का दौरा करेंगे और इस दौरे में वह शिवमोग्गा और बेलगावी में कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास अथवा उद्घाटन करेंगे तथा पीएम-किसान योजना की तेरहवीं किस्त के तहत किसानों के खातें में सीधे धन जारी करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक श्री मोदी सत्ताईस फरवरी को सुबह लगभग ग्यारह:पैंतालीस बजे शिवमोग्गा में नए विकसित किए गए हवाई अड्डे का निरीक्षण करेंगे और उसके बाद शिवमोग्गा में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे। वहां से वह लगभग तीन:पंद्रह बजे बेलगावी में कई विकास पहलों की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और पीएम-किसान की तेरहवीं किस्त भी जारी करेंगे। शिवमोग्गा में नया हवाई अड्डा लगभग चार सौ पचास करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इस हवाई अड्डे का यात्री टर्मिनल भवन प्रति घंटे तीन सौ यात्रियों को संभाल सकने में सक्षम है। यह हवाई अड्डा मलनाड क्षेत्र के शिवमोग्गा एवं अन्य पड़ोसी इलाकों की कनेक्टिविटी और पहुंच को बेहतर करेगा। प्रधानमंत्री शिवमोग्गा में दो रेल परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इसमें नौ सौ नब्बे करोड़ रुपये की लागत की शिवमोग्गा-शिकारीपुरा-रानेबेन्नूर नई रेलवे लाइन और एक सौ करोड़ रुपये से अधिक की कोटेगंगुरु रेलवे कोचिंग डिपो परियोजना शामिल हैं। इस कोचिंग सुविधा से बेंगलुरुऔर मैसुरु की कोचिंग सुविधाओं पर दबाव कम होगा तथा नयी गाड़ियां शुरू करने में सुविधा होगी। श्री मोदी वहां सड़कों के विकास की कई परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। कुल दो सौ पंद्रह करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित की जाने वाली इन परियोजनाओं में ब्यंदूर-रानेबेन्नूर को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग -सात सौ छयासठसी पर शिकारीपुरा शहर के लिए नई बाईपास सड़क का निर्माण; मेगारावल्ली से अगुम्बे तक राष्ट्रीय राजमार्ग -एक सौ उनहत्तरए का चौड़ीकरण; और राष्ट्रीय राजमार्ग एक सौ उनहत्तर पर तीर्थाहल्ली तालुक के भारतीपुरा में नए पुल का निर्माण शामिल है। इस कार्यक्रम में श्री मोदी जल जीवन मिशन के तहत नौ सौ पचास करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बहु-ग्राम योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इसमें गौतमपुरा और एक सौ सत्ताईस अन्य गांवों के लिए एक बहु-ग्राम योजना का उद्घाटन और कुल आठ सौ साठ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित की जाने वाली तीन अन्य बहु-ग्राम योजनाओं की आधारशिला रखना शामिल है। इन चार योजनाओं से कुल चार. चार लाख से अधिक लोगों को पाइप लाइन से पेयजुल सुविधा का लाभ होगा। प्रधानमंत्री शिवमोग्गा शहर में आठ सौ पचानवे करोड़ रुपये से अधिक की लागत से चौंतालीस स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी बेलगावी में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत तेरहवीं किस्त की लगभग सोलह,शून्य करोड़ रुपये की राशि आठ करोड़ से अधिक लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से जारी की जाएगी। इस कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री पुनर्विकसित बेलगावी रेलवे स्टेशन भवन को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। लगभग एक सौ नब्बे करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास किया गया है। श्री मोदी इस अवसर परदलोंडा-बेलगावी-घाटप्रभा खंड के बीच रेलवे लाइन दोहरीकरण परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। लगभग नौ सौ तीस करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई यह परियोजना व्यस्तम मुंबई-पुणे-हुबली-बेंगलुरु रेलमार्ग पर लाइन क्षमता को बढ़ाएगी, जिससे इस क्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री बेलगावी में जल जीवन मिशन के तहत बहु-ग्राम योजना की छह परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे, जिन्हें लगभग एक हज़ार पाँच सौ पचासी करोड़ रुपये की कुल लागत से विकसित किया जाएगा और इससे तीन सौ पंद्रह से अधिक गांवों की लगभग आठ. आठ लाख आबादी लाभान्वित होगी। - यह भी पढ़ें : -जीरे के ये दो उपाय अपनाकर आप भी कर सकते हैं वजन कम, जानिए कैसे?
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Benefits of Babool : बबूल की जड़ें काफी मजबूत होती हैं। यह पेड़ सालों साल जिंदा रह सकती हैं। इसकी पत्तियों से लेकर फूल कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है और यह कई आयुर्वेदिक उपचार में काम (Benefits of Babool) आता है। इसकी हरी और पतली टहनियां दातून करने के काम आती हैं। इसके छाल से उत्तम कोटि का गोंद निकलता है, जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है तथा इससे कई रोगों का उपचार किया जाता है। बबूल के दातुन (Benefits of Babool) से आप अपने दांतों को स्वच्छ और स्वस्थ रख सकते हैं। इसकी लकड़ी का कोयला भी बहुत ही अच्छा होता है। चलिए जानते हैं कि बबूल के पेड़ से और क्या-क्या (Benefits of Babool) फायदे होते हैं।
बबूल (Gum arabic tree Benefits) फाइबर का काफी अच्छा स्त्रोत होता है। इसके इस्तेमाल से वजन कम होता है, साथ ही इससे पेट भरा-भरा महसूस होता है। इससे हम ओवरइटिंग की समस्या से बचे रहते हैं। वजन कम करने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल लेवक को नियंत्रित रखने में बबूल हमारी मदद करता है।
गर्मियों में अगर आपको अधिक पसीना आता है, तो बबूल आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए बबूल के पत्तों और इसके बाल को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इस पेस्ट को पूरे शरीर पर लगाकर मालिश करें। कुछ समय बाद ठंडे पानी से नहा लें। नियमित रूप से ऐसा करने पर पसीने की समस्या खत्म हो सकती है। इसके साथ ही आप बबूल के पत्तों का उबटन बनाकर भी लगा सकते हैं।
अगर आपको शरीर के किसी अंग में काफी जलन हो रही है, तो बबूल के छाल का काढ़ा बनाकर पिएं। इस काढ़े में थोड़ी सी मिश्री मिलाएं। इस काढ़े का सेवन करने से कुछ ही दिनों में शरीर में होने वाली जलन कम हो जाएगी।
बैठे-बैठे काम करने से अगर आपको कमर दर्द की समस्या हो गई है, तो बबूल आपको इस समस्या से राहत दिला सकता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए बबूल की फली, छाल और गोंद को बराबर मात्रा में लें। इसे अच्छी तरह से पीसें। इसका सेवन करने से कमर दर्द में राहत मिलेगी।
गर्मियों में पसीने के कारण दाद की समस्या काफी ज्यादा हो जाती है। ऐसे में इसे ठीक करने के लिए बबूल के कुछ फूल लें। इस फूलों को सिरके के साथ पीस लें। इसे खुजली वाले हिस्सों पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से दाद और खुजली की समस्या ठीक हो जाएगी।
बहुत से ऐसे लोग हैं, जो बबूल की टहनियों से दातुन करते हैं। रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि अगर आप 6 सप्ताह तक बबूल और इसके अन्य अवयवों से युक्त जेल अपने दांतों पर लगाते हैं, तो इससे मसूड़ों में सूजन की समस्या ठीक होती है।
वजन को कम करने के लिए भी बबूल काफी उपयोगी है। प्रारंभिक रिसर्च से पता चला है कि रोजाना 30 ग्राम बबूल का पाउडर का इस्तेमाल करने से मोटापा तेजी से कम होता है।
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Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! Benefits of Babool : बबूल की जड़ें काफी मजबूत होती हैं। यह पेड़ सालों साल जिंदा रह सकती हैं। इसकी पत्तियों से लेकर फूल कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है और यह कई आयुर्वेदिक उपचार में काम आता है। इसकी हरी और पतली टहनियां दातून करने के काम आती हैं। इसके छाल से उत्तम कोटि का गोंद निकलता है, जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है तथा इससे कई रोगों का उपचार किया जाता है। बबूल के दातुन से आप अपने दांतों को स्वच्छ और स्वस्थ रख सकते हैं। इसकी लकड़ी का कोयला भी बहुत ही अच्छा होता है। चलिए जानते हैं कि बबूल के पेड़ से और क्या-क्या फायदे होते हैं। बबूल फाइबर का काफी अच्छा स्त्रोत होता है। इसके इस्तेमाल से वजन कम होता है, साथ ही इससे पेट भरा-भरा महसूस होता है। इससे हम ओवरइटिंग की समस्या से बचे रहते हैं। वजन कम करने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल लेवक को नियंत्रित रखने में बबूल हमारी मदद करता है। गर्मियों में अगर आपको अधिक पसीना आता है, तो बबूल आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए बबूल के पत्तों और इसके बाल को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इस पेस्ट को पूरे शरीर पर लगाकर मालिश करें। कुछ समय बाद ठंडे पानी से नहा लें। नियमित रूप से ऐसा करने पर पसीने की समस्या खत्म हो सकती है। इसके साथ ही आप बबूल के पत्तों का उबटन बनाकर भी लगा सकते हैं। अगर आपको शरीर के किसी अंग में काफी जलन हो रही है, तो बबूल के छाल का काढ़ा बनाकर पिएं। इस काढ़े में थोड़ी सी मिश्री मिलाएं। इस काढ़े का सेवन करने से कुछ ही दिनों में शरीर में होने वाली जलन कम हो जाएगी। बैठे-बैठे काम करने से अगर आपको कमर दर्द की समस्या हो गई है, तो बबूल आपको इस समस्या से राहत दिला सकता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए बबूल की फली, छाल और गोंद को बराबर मात्रा में लें। इसे अच्छी तरह से पीसें। इसका सेवन करने से कमर दर्द में राहत मिलेगी। गर्मियों में पसीने के कारण दाद की समस्या काफी ज्यादा हो जाती है। ऐसे में इसे ठीक करने के लिए बबूल के कुछ फूल लें। इस फूलों को सिरके के साथ पीस लें। इसे खुजली वाले हिस्सों पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से दाद और खुजली की समस्या ठीक हो जाएगी। बहुत से ऐसे लोग हैं, जो बबूल की टहनियों से दातुन करते हैं। रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि अगर आप छः सप्ताह तक बबूल और इसके अन्य अवयवों से युक्त जेल अपने दांतों पर लगाते हैं, तो इससे मसूड़ों में सूजन की समस्या ठीक होती है। वजन को कम करने के लिए भी बबूल काफी उपयोगी है। प्रारंभिक रिसर्च से पता चला है कि रोजाना तीस ग्राम बबूल का पाउडर का इस्तेमाल करने से मोटापा तेजी से कम होता है।
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जबलपुर,यशभारत। फूटाताल चौक के पास करीब 4 दिन पहले घर के सामने बाइक खड़ी करने की बात पर शुरू हुए विवाद ने एक बड़ा रूप दोबारा धारण किया। इस दौरान सैंकड़ों की संख्या में युवकों ने भाजपा नेता अनंत कुमार जैन और उनके बेटे पूर्व प्रदेश कार्य समिति सदस्य भाजपा युवा मोर्चा के आशीष जैन के घर में तोड़फोड़ करते हुए जानलेवा हमला कर दिया जिससे दोनों को चोटें आईं हैं।
पीड़ित अनंत जैन ने कोतवाली पुलिस से हमलावरों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है। अनंत जैन के अनुसार उनके घर में हुई तोड़फोड़ की घटना फूटाताल चौक स्थित सीसी कैमरे में कैद हो चुकी है। पीड़ित के अनुसार असलम खान,टोलू खान, रवि उल्ला खान, अरबाज खान सहित बड़ी संख्या में आए युवकों ने उसके घर और उस पर हमला किया है। जानकारी के अनुसार कोतवाली पुलिस ने अरबाज की शिकायत पर पहले ही आशीष जैन के खिलाफ कोतवाली पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज कर ली थी और अब इस हमले के बाद अरबाज सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
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जबलपुर,यशभारत। फूटाताल चौक के पास करीब चार दिन पहले घर के सामने बाइक खड़ी करने की बात पर शुरू हुए विवाद ने एक बड़ा रूप दोबारा धारण किया। इस दौरान सैंकड़ों की संख्या में युवकों ने भाजपा नेता अनंत कुमार जैन और उनके बेटे पूर्व प्रदेश कार्य समिति सदस्य भाजपा युवा मोर्चा के आशीष जैन के घर में तोड़फोड़ करते हुए जानलेवा हमला कर दिया जिससे दोनों को चोटें आईं हैं। पीड़ित अनंत जैन ने कोतवाली पुलिस से हमलावरों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है। अनंत जैन के अनुसार उनके घर में हुई तोड़फोड़ की घटना फूटाताल चौक स्थित सीसी कैमरे में कैद हो चुकी है। पीड़ित के अनुसार असलम खान,टोलू खान, रवि उल्ला खान, अरबाज खान सहित बड़ी संख्या में आए युवकों ने उसके घर और उस पर हमला किया है। जानकारी के अनुसार कोतवाली पुलिस ने अरबाज की शिकायत पर पहले ही आशीष जैन के खिलाफ कोतवाली पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज कर ली थी और अब इस हमले के बाद अरबाज सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
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बच्चे ने कहा कि जब गोंग मारा और दिन का पहला भाग घोषित करने के लिए आवाज लगाई, तो उस समय 10 बजे थे। उन्होंने कहा कि उनके स्कूल जाने का समय भी यही था। स्कूल जाते समय वह एक सेल्समैन को देखता था जो अपनी चूड़ियाँ बेचने के लिए "चूड़ियाँ, क्रिस्टल की चूड़ियाँ" चिल्लाता था।
उसे देखते समय, बच्चे को लगा कि विक्रेता मुक्त है। वह उस बच्चे के विपरीत कहीं भी पहुंचने की जल्दी में नहीं था, जिसे समय पर अपने स्कूल पहुंचना था और घर वापस आना था। उसने सोचा कि चूड़ी विक्रेता किसी भी समय की कमी से मुक्त था, जगह की सीमा का मतलब है कि वह उसके विपरीत किसी भी स्थान पर जाने के लिए स्वतंत्र था। उसे लगा जैसे वह सख्त टिप्पणियों के अधीन था और विक्रेता पूर्ण स्वतंत्रता का आनंद ले रहा था।
इस प्रकार, वह अपनी स्वतंत्रता से इतना प्रभावित हुआ कि उसने एक शिकारी बनने की कामना की। वह स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ना चाहता था और सड़कों पर उसकी तरह चिल्लाता था।
दोपहर चार बजे स्कूल से वापस आने के बाद बच्चे ने घर के गेट के माध्यम से माली को देखा। वह बाहर झांकता था और उसे मिट्टी खोदते हुए देखता था।
यहां बच्चे को धूल में रहने और अपनी पसंद की चीजों को अपने औजारों से करने की स्वतंत्रता ने आकर्षित किया। उसने सोचा कि माली को अपने कपड़े मिट्टी से गंदे करने, अपने औजारों से खेलने, ज्यादा देर तक धूप में रहने, पसीने से भीगने या कुछ भी करने की आजादी थी और उसे इस सब के लिए कोई सजा नहीं मिल रही थी। जबकि अगर उसे यह सब करने की सजा मिलती। तो, उस कार्यकर्ता की कठिनाइयों से पूरी तरह से अनजान, वह अपनी पसंद की चीजें करने के लिए माली के रूप में आकर्षित हुआ और उसे रोकने के लिए आसपास कोई नहीं था।
रात में उसकी माँ उसे अपने कमरे में सोने के लिए भेजती थी जहाँ एक खुली खिड़की हुआ करती थी। वहाँ से वह एक पहरेदार को इधर-उधर टहलता हुआ दिखाई देगा, एक तरफ से दूसरी ओर अंधेरे में, अकेली गली में। उसके हाथ में एक दीपक भी था जो उसके सिर में लाल आँख के साथ एक अलौकिक की तरह लग रहा था।
बच्चा अपनी चाल से इतना आकर्षित था कि वह एक चौकीदार बनना चाहता था, जो पूरी रात सड़कों पर चल सकता था, हाथ में लालटेन लेकर उसकी परछाई के बाद।
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बच्चे ने कहा कि जब गोंग मारा और दिन का पहला भाग घोषित करने के लिए आवाज लगाई, तो उस समय दस बजे थे। उन्होंने कहा कि उनके स्कूल जाने का समय भी यही था। स्कूल जाते समय वह एक सेल्समैन को देखता था जो अपनी चूड़ियाँ बेचने के लिए "चूड़ियाँ, क्रिस्टल की चूड़ियाँ" चिल्लाता था। उसे देखते समय, बच्चे को लगा कि विक्रेता मुक्त है। वह उस बच्चे के विपरीत कहीं भी पहुंचने की जल्दी में नहीं था, जिसे समय पर अपने स्कूल पहुंचना था और घर वापस आना था। उसने सोचा कि चूड़ी विक्रेता किसी भी समय की कमी से मुक्त था, जगह की सीमा का मतलब है कि वह उसके विपरीत किसी भी स्थान पर जाने के लिए स्वतंत्र था। उसे लगा जैसे वह सख्त टिप्पणियों के अधीन था और विक्रेता पूर्ण स्वतंत्रता का आनंद ले रहा था। इस प्रकार, वह अपनी स्वतंत्रता से इतना प्रभावित हुआ कि उसने एक शिकारी बनने की कामना की। वह स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ना चाहता था और सड़कों पर उसकी तरह चिल्लाता था। दोपहर चार बजे स्कूल से वापस आने के बाद बच्चे ने घर के गेट के माध्यम से माली को देखा। वह बाहर झांकता था और उसे मिट्टी खोदते हुए देखता था। यहां बच्चे को धूल में रहने और अपनी पसंद की चीजों को अपने औजारों से करने की स्वतंत्रता ने आकर्षित किया। उसने सोचा कि माली को अपने कपड़े मिट्टी से गंदे करने, अपने औजारों से खेलने, ज्यादा देर तक धूप में रहने, पसीने से भीगने या कुछ भी करने की आजादी थी और उसे इस सब के लिए कोई सजा नहीं मिल रही थी। जबकि अगर उसे यह सब करने की सजा मिलती। तो, उस कार्यकर्ता की कठिनाइयों से पूरी तरह से अनजान, वह अपनी पसंद की चीजें करने के लिए माली के रूप में आकर्षित हुआ और उसे रोकने के लिए आसपास कोई नहीं था। रात में उसकी माँ उसे अपने कमरे में सोने के लिए भेजती थी जहाँ एक खुली खिड़की हुआ करती थी। वहाँ से वह एक पहरेदार को इधर-उधर टहलता हुआ दिखाई देगा, एक तरफ से दूसरी ओर अंधेरे में, अकेली गली में। उसके हाथ में एक दीपक भी था जो उसके सिर में लाल आँख के साथ एक अलौकिक की तरह लग रहा था। बच्चा अपनी चाल से इतना आकर्षित था कि वह एक चौकीदार बनना चाहता था, जो पूरी रात सड़कों पर चल सकता था, हाथ में लालटेन लेकर उसकी परछाई के बाद। यह भी पढ़ेंः
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मुख्यमंत्री एवं जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राजनीति के मूल उद्देश्यों से भटकने को लेकर प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव की ओर इशारा करते हुये आज कहा कि मौजूदा राजनीति में केवल जुबानी जंग का माहौल है और कोई भी युवा अपने बलबूते नहीं बल्कि परिवार के बल पर सियासत में आगे बढ़ रहा है।
श्री कुमार ने पटना बापू सभागार में विश्व पर्यावरण दिवस एवं सम्पूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर युवा जदयू की ओर से आयोजित युवा संकल्प सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि आजकल राजनीति में कुछ भी नहीं हो रहा है। राजनीति करने वाले लोग वास्तविक कार्य न कर दिनभर केवल ट्वीट करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि बयान देने के सिवा राजनीति में कुछ और नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीति में जुबानी जंग का माहौल बन गया है। यह सोचने वाली बात है कि इससे देश या राज्य का क्या भला होगा।
श्री कुमार ने छात्रों और युवाओं में उत्साह लाने की जरूरत पर बल देते हुये कहा कि युवाओं को राजनीति में एक संकल्प के साथ आने की आवश्यकता है। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के पुत्र एवं विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव का नाम लिये बगैर कहा कि आज परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं कि बहुत कम युवा ही अपने बलबूते सियासत में आगे बढ़ रहे हैं और जो युवा राजनीति की सीढ़ियां तेजी से चढ़ते दिख रहे हैं, वह अपने परिवार की बदौलत ही ऐसा कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि आज का युवा संकल्पित होकर आगे नहीं आएगा तो राजनीति की धार कुंद पड़ जाएगी।
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मुख्यमंत्री एवं जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राजनीति के मूल उद्देश्यों से भटकने को लेकर प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव की ओर इशारा करते हुये आज कहा कि मौजूदा राजनीति में केवल जुबानी जंग का माहौल है और कोई भी युवा अपने बलबूते नहीं बल्कि परिवार के बल पर सियासत में आगे बढ़ रहा है। श्री कुमार ने पटना बापू सभागार में विश्व पर्यावरण दिवस एवं सम्पूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर युवा जदयू की ओर से आयोजित युवा संकल्प सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि आजकल राजनीति में कुछ भी नहीं हो रहा है। राजनीति करने वाले लोग वास्तविक कार्य न कर दिनभर केवल ट्वीट करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि बयान देने के सिवा राजनीति में कुछ और नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीति में जुबानी जंग का माहौल बन गया है। यह सोचने वाली बात है कि इससे देश या राज्य का क्या भला होगा। श्री कुमार ने छात्रों और युवाओं में उत्साह लाने की जरूरत पर बल देते हुये कहा कि युवाओं को राजनीति में एक संकल्प के साथ आने की आवश्यकता है। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के पुत्र एवं विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव का नाम लिये बगैर कहा कि आज परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं कि बहुत कम युवा ही अपने बलबूते सियासत में आगे बढ़ रहे हैं और जो युवा राजनीति की सीढ़ियां तेजी से चढ़ते दिख रहे हैं, वह अपने परिवार की बदौलत ही ऐसा कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि आज का युवा संकल्पित होकर आगे नहीं आएगा तो राजनीति की धार कुंद पड़ जाएगी।
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निर्गुण तथा सगुण भावधारा को दार्शनिक पृष्ठभूमि
जहां पर इस प्रकार की व्याख्या है वहीं पर दूसरे ढंग से सकर्मक व्याख्या भी की गई है। यह दूसरे प्रकार की व्याख्या प्रस्तुत उद्धरण में देखी जा सकती है - 'गार्गी इस अक्षर के ही प्रशासन में सूर्य और चन्द्रमा विशेष रूप से धारण किए हुए स्थित रहते हैं। हे गार्गि इस अक्षर के ही प्रशासन में द्युलोक और पृथिवी विशेष रूप से धारण किए हुए स्थित रहते हैं । हे गार्गि ! इस अक्षर के ही प्रशासन में निमेष, मुहूर्त्त, दिन-रात, अर्धमास (पक्ष ), मास, ऋतु और संवत्सर विशेष रूप से धारण किए हुए स्थित रहते हैं । हे गागि ! इस अक्षर के ही प्रशासन में पूर्ववाहिनी नदियां जिस जिस दिशा को बहने लगती हैं, उसी का अनुसरण करती रहती हैं। हे गार्गि ! इस अक्षर के ही प्रशासन में मनुष्य दाता की प्रशंसा करते हैं तथा देवगण यजमान का और पितृगण दर्वीहोम का अनुवर्तन करते हैं । "
विशेषता अन्त में है जब याज्ञवल्क्य इसी प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं -- 'हे गार्गि ! यह अक्षर स्वयं दृष्टि का विषय नहीं, किन्तु द्रष्टा है, श्रवण का विषय नहीं किन्तु श्रोता है, मनन का विषय नहीं किन्तु मन्ता है, स्वयं अविज्ञात रह कर दूसरों का विज्ञाता है । इससे भिन्न कोई द्रष्टा नहीं है, इससे भिन्न कोई श्रोता नहीं है, इससे भिन्न कोई मन्ता नहीं है और इससे भिन्न कोई विज्ञाता नहीं है। हे गार्गि ! निश्चय इस अक्षर में ही आकाश ओत प्रोत है।
उपर्युक्त उद्धरणों का इस स्थल पर देने का आशय स्पष्ट रूप से यह है कि ब्रह्म के निर्गुण और सगुण रूप इन दोनों के तत्वों को शब्दों में प्रकट करने के लिये इससे अधिक कुछ नहीं कहा जा सकता। निर्गुण और सगुण के तत्वों को अलग अलग समझाते हुए दोनों के तात्विक विभेद को, याज्ञवल्क्य ने गार्गि को समझाते हुए बड़े सुन्दर ढंग से स्पष्ट कर दिया है। ब्रह्म के गुणों की सीमाएँ, उनकी परिव्याप्ति इतनी रहस्यात्मक है कि उसमें किसी भौतिक गुण का समावेश नहीं किया जा सकता है और यही कारण है कि ब्रह्म को निर्गुण कह दिया जाता है । जहाँ पर 'गुणेश' कहा गया वहां यही तात्पर्य है कि ब्रह्म अपने निर्गुण और सगुण दोनों रूपों का स्वयं ही नियन्ता है। समस्त प्राकृत, अप्राकृत गुणों का समावेश उस ब्रह्म में है। यही कारण है कि अभिव्यक्ति की प्रत्येक प्रणाली को अपनाने पर भी जब कवि दार्शनिक अपने अनुभवगम्य सत्य की यथातथ्य अभिव्यक्ति में अपने को असफल, असमर्थ पाता है तभी वह उसे द्वैताद्वैत-विलक्षण कहकर मौन हो जाता है ।
( ग ) सगुण और निर्गुण विचारधाराओं का वाह्य और आन्तरिक स्वरूप
वाह्य स्वरूप :
वाह्य रूप को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि निर्गुण विचारधारा में मूर्ति पूजा का विरोध, लीला गायन पर अविश्वास, कर्मकाण्ड की निरर्थकता आदि पर बल दिया जाता है, दूसरी ओर सगुण विचारधारा में मूर्तिपूजा पर, लीला गायन पर, कर्मकाण्ड पर बल दिया जाता है ।
२. वृहदारण्यकोपनिषद्, तृतीय अध्याय, अष्टम ब्राह्मण ॥ ११ ॥
o be पता न
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निर्गुण तथा सगुण भावधारा को दार्शनिक पृष्ठभूमि जहां पर इस प्रकार की व्याख्या है वहीं पर दूसरे ढंग से सकर्मक व्याख्या भी की गई है। यह दूसरे प्रकार की व्याख्या प्रस्तुत उद्धरण में देखी जा सकती है - 'गार्गी इस अक्षर के ही प्रशासन में सूर्य और चन्द्रमा विशेष रूप से धारण किए हुए स्थित रहते हैं। हे गार्गि इस अक्षर के ही प्रशासन में द्युलोक और पृथिवी विशेष रूप से धारण किए हुए स्थित रहते हैं । हे गार्गि ! इस अक्षर के ही प्रशासन में निमेष, मुहूर्त्त, दिन-रात, अर्धमास , मास, ऋतु और संवत्सर विशेष रूप से धारण किए हुए स्थित रहते हैं । हे गागि ! इस अक्षर के ही प्रशासन में पूर्ववाहिनी नदियां जिस जिस दिशा को बहने लगती हैं, उसी का अनुसरण करती रहती हैं। हे गार्गि ! इस अक्षर के ही प्रशासन में मनुष्य दाता की प्रशंसा करते हैं तथा देवगण यजमान का और पितृगण दर्वीहोम का अनुवर्तन करते हैं । " विशेषता अन्त में है जब याज्ञवल्क्य इसी प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं -- 'हे गार्गि ! यह अक्षर स्वयं दृष्टि का विषय नहीं, किन्तु द्रष्टा है, श्रवण का विषय नहीं किन्तु श्रोता है, मनन का विषय नहीं किन्तु मन्ता है, स्वयं अविज्ञात रह कर दूसरों का विज्ञाता है । इससे भिन्न कोई द्रष्टा नहीं है, इससे भिन्न कोई श्रोता नहीं है, इससे भिन्न कोई मन्ता नहीं है और इससे भिन्न कोई विज्ञाता नहीं है। हे गार्गि ! निश्चय इस अक्षर में ही आकाश ओत प्रोत है। उपर्युक्त उद्धरणों का इस स्थल पर देने का आशय स्पष्ट रूप से यह है कि ब्रह्म के निर्गुण और सगुण रूप इन दोनों के तत्वों को शब्दों में प्रकट करने के लिये इससे अधिक कुछ नहीं कहा जा सकता। निर्गुण और सगुण के तत्वों को अलग अलग समझाते हुए दोनों के तात्विक विभेद को, याज्ञवल्क्य ने गार्गि को समझाते हुए बड़े सुन्दर ढंग से स्पष्ट कर दिया है। ब्रह्म के गुणों की सीमाएँ, उनकी परिव्याप्ति इतनी रहस्यात्मक है कि उसमें किसी भौतिक गुण का समावेश नहीं किया जा सकता है और यही कारण है कि ब्रह्म को निर्गुण कह दिया जाता है । जहाँ पर 'गुणेश' कहा गया वहां यही तात्पर्य है कि ब्रह्म अपने निर्गुण और सगुण दोनों रूपों का स्वयं ही नियन्ता है। समस्त प्राकृत, अप्राकृत गुणों का समावेश उस ब्रह्म में है। यही कारण है कि अभिव्यक्ति की प्रत्येक प्रणाली को अपनाने पर भी जब कवि दार्शनिक अपने अनुभवगम्य सत्य की यथातथ्य अभिव्यक्ति में अपने को असफल, असमर्थ पाता है तभी वह उसे द्वैताद्वैत-विलक्षण कहकर मौन हो जाता है । सगुण और निर्गुण विचारधाराओं का वाह्य और आन्तरिक स्वरूप वाह्य स्वरूप : वाह्य रूप को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि निर्गुण विचारधारा में मूर्ति पूजा का विरोध, लीला गायन पर अविश्वास, कर्मकाण्ड की निरर्थकता आदि पर बल दिया जाता है, दूसरी ओर सगुण विचारधारा में मूर्तिपूजा पर, लीला गायन पर, कर्मकाण्ड पर बल दिया जाता है । दो. वृहदारण्यकोपनिषद्, तृतीय अध्याय, अष्टम ब्राह्मण ॥ ग्यारह ॥ o be पता न
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1.वो आँख हीं क्या कि जिसमे ना हो कोई ख्वाब ,
वो लेखन हीं क्या कि जिसमे ना हो कोई आग।
2.मेहनत के सारे फुल ऐसे हीं नही फल गए,
गिरे तो हम भी थे मगर गिरकर संभल गए।
3.जिस प्यार और जंग में सब जायज है,
वो ना मोहब्बत जायज है, न जंग जायज है।
4.तरक्की के पैमाने पे देश यूँ चढ़ता रहा.
इंसानियत गिरती रही इन्सान बढ़ता रहा।
5.अखबार में आए ये तय नहीं है,
हादसा तो है मगर समय नहीं है।
6.जा तुझे माफ किया,क्या हुआ जो सितम ढाती है,
एक तू हीं तो है,जो अंत तक निभाती है।
7.कल्प नद पर मेरे पद चाप,
ए कविता तुझसे ये प्राप्त।
आदमी के प्यास की भी,
कभी आंसू भारी पड़ जाते हैं।
9.अहम का था बना वो, वहम में हिल गया,
मिट्टी से न जुड़ा था , मिट्टी में मिल गया।
10.खुदा जाने कैसी अजब तेरी प्यास थी,
तुझसे तो बेहतर , तेरी तलाश थी।
11.मेरी चाल पे किंचित ना हो, तुम भी यूँ हैरान,
हार की गलियों से ही चलकर बनते लोग महान।
12.सोते तो हो ठीक , पर इतना रहे याद,
रात की नींद चुरा न ले कहीं दिन के ख्वाब।
13.तुममें बस इतना क़सूर छोड़ दो,
खुबसूरत तो हो बस गुरुर छोड़ दो।
14.हम नहीं कहते हमसे ना गिला करो,
पर खतम हो रंजिशें, खुल के मिला करो।
15.अलार्म के बदले जिम्मेवारियों से जगने लगा ,
कल तक जो बच्चा था, बुढा दिखने लगा।
16.चवन्नी में खुद को क्यूँ करते खराब?
कुछ तो तेरी जात का रखते हिसाब।
17.आजादी के बाद देश की बदल गयी तस्वीर,
बोरी थी चावल जितने की , नहीं मिले अब खीर।
18.चख के भी भला स्वाद , बताऊँ क्या ज़माने को,
जहर नहीं होता , पिलाने के लिए।
19.ये क्या अदा की तूने, दर्द की सौगात,
मैंने तो बस यूँ ही, तेरा राजे दिल चाहा था।
20.इस तरह सौदा हुआ गरीब का अमीर से,
खरीदी इसने अमीरी खुद के जमीर से।
21.उल्फत उसी से नफरत उसी से,
शिकायत है जिससे मोहब्बत उसी से।
22.जो होना अन्जाम वो हो ना सका,
तू ज़ी ना सका मैं मर ना सका।
23.अलमारी से झाँक के रोते गीता और कुरान,
मंदिर मस्जिद राम पे आखिर मरते क्यों इंसान?
24.ना इंतेेेजार ना कोई मुहूरत है,
मौत भी क्या इतनी बदसूरत है?
25.वाद, विवाद व प्रतिवाद से नहीं किसी के उलझन हल ,
अर्थपूर्ण संवाद न हो तो क्या कोई वार्ता देती फल?
खींच तान, रस्सा , कस्सी से देव ना दानव हुए लभित ,
याद करो सब सागर मंथन , कैसे अमृत हुआ फलित।
26.जो मेरे लिए अमृत शायद तेरे लिए जहर हो,
मेरी काली सी रात क्या पता तेरी दोपहर हो।
नकल करते हो ठीक है पर रहे हमेशा याद ,
मेरे लिए जो विस्मय क्या पता तेरे लिए कहर हो।
27.आफिस में रहता वो ऐसे,
जीभ बीच दाँतों के जैसे।
28.ज्यों पंछी का खुले गगन में नही कोई पग छाप,
ठीक वैसे हीं बुद्ध पुरुषों के कहाँ होते पद चाप।
29.ऐ लेखनी मेरी ये तेरा मुझको कैसा वरदान,
ज्ञान बाँटती जग में सारा और मुझे देती अभिमान।
30.तेरे इश्क़ में है तुझसे नाराज भी,
वो कैद में पड़ा हुआ आजाद भी।
31.ना तेरा हुआ अभी कहीं ना तेरा कभी रहा होगा,
तारों से भी कहीं कोई क्या तूने राज कहा होगा?
32.कहाँ उसे ढूंढे रे बंदे ,
शहर शहर और गाँव,
वो ईश्वर तो यही बसा,
भूखे नंगों के पाँव।
33.महीने की रोटी और चुटकी कमाई से,
उठाओगे कैसे तुम नखरे भौजाई के?
34.तेरे झूठ पे भी हमको न हो सके एतबार,
तुम्ही कहो कौन सी मिट्टी के बने हो यार।
35.काश कोई इतना सीखा दे मुझे,
झूठा हो कोई तो झूठा हीं दिखे।
36.तेरा मैं था कभी सहारा,
बेकदरी से पर मैं हारा।
38.इन हाथों का भगवन नही कोई जवाब,
बंध जाए तो तर्पण खुले तो नमाज।
39.सुखी अँतड़ी सूखे पेट क्षुधा व्यथित कंगाल,
तुम्हीं कहो सजाये कैसे वो पूजा की थाल?
40.मेरा मन हीं रहा न मेरा,
जब तेरी यादों ने घेरा।
41.तेरे दर पे इंसाँ मिटते क्यों कौम की लड़ाई में,
खुदा कुछ तो बचा रखो तुम अपनी खुदाई में।
42.याद करने की हद से गुजर जाता है जैसे कोई याद ,
ईश्क ठीक वैसे ही आज मेरे जेहन में शामिल है ।
अपने दो दो दांतों के वास्ते,
पेट में भी दांत होते है।
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एक.वो आँख हीं क्या कि जिसमे ना हो कोई ख्वाब , वो लेखन हीं क्या कि जिसमे ना हो कोई आग। दो.मेहनत के सारे फुल ऐसे हीं नही फल गए, गिरे तो हम भी थे मगर गिरकर संभल गए। तीन.जिस प्यार और जंग में सब जायज है, वो ना मोहब्बत जायज है, न जंग जायज है। चार.तरक्की के पैमाने पे देश यूँ चढ़ता रहा. इंसानियत गिरती रही इन्सान बढ़ता रहा। पाँच.अखबार में आए ये तय नहीं है, हादसा तो है मगर समय नहीं है। छः.जा तुझे माफ किया,क्या हुआ जो सितम ढाती है, एक तू हीं तो है,जो अंत तक निभाती है। सात.कल्प नद पर मेरे पद चाप, ए कविता तुझसे ये प्राप्त। आदमी के प्यास की भी, कभी आंसू भारी पड़ जाते हैं। नौ.अहम का था बना वो, वहम में हिल गया, मिट्टी से न जुड़ा था , मिट्टी में मिल गया। दस.खुदा जाने कैसी अजब तेरी प्यास थी, तुझसे तो बेहतर , तेरी तलाश थी। ग्यारह.मेरी चाल पे किंचित ना हो, तुम भी यूँ हैरान, हार की गलियों से ही चलकर बनते लोग महान। बारह.सोते तो हो ठीक , पर इतना रहे याद, रात की नींद चुरा न ले कहीं दिन के ख्वाब। तेरह.तुममें बस इतना क़सूर छोड़ दो, खुबसूरत तो हो बस गुरुर छोड़ दो। चौदह.हम नहीं कहते हमसे ना गिला करो, पर खतम हो रंजिशें, खुल के मिला करो। पंद्रह.अलार्म के बदले जिम्मेवारियों से जगने लगा , कल तक जो बच्चा था, बुढा दिखने लगा। सोलह.चवन्नी में खुद को क्यूँ करते खराब? कुछ तो तेरी जात का रखते हिसाब। सत्रह.आजादी के बाद देश की बदल गयी तस्वीर, बोरी थी चावल जितने की , नहीं मिले अब खीर। अट्ठारह.चख के भी भला स्वाद , बताऊँ क्या ज़माने को, जहर नहीं होता , पिलाने के लिए। उन्नीस.ये क्या अदा की तूने, दर्द की सौगात, मैंने तो बस यूँ ही, तेरा राजे दिल चाहा था। बीस.इस तरह सौदा हुआ गरीब का अमीर से, खरीदी इसने अमीरी खुद के जमीर से। इक्कीस.उल्फत उसी से नफरत उसी से, शिकायत है जिससे मोहब्बत उसी से। बाईस.जो होना अन्जाम वो हो ना सका, तू ज़ी ना सका मैं मर ना सका। तेईस.अलमारी से झाँक के रोते गीता और कुरान, मंदिर मस्जिद राम पे आखिर मरते क्यों इंसान? चौबीस.ना इंतेेेजार ना कोई मुहूरत है, मौत भी क्या इतनी बदसूरत है? पच्चीस.वाद, विवाद व प्रतिवाद से नहीं किसी के उलझन हल , अर्थपूर्ण संवाद न हो तो क्या कोई वार्ता देती फल? खींच तान, रस्सा , कस्सी से देव ना दानव हुए लभित , याद करो सब सागर मंथन , कैसे अमृत हुआ फलित। छब्बीस.जो मेरे लिए अमृत शायद तेरे लिए जहर हो, मेरी काली सी रात क्या पता तेरी दोपहर हो। नकल करते हो ठीक है पर रहे हमेशा याद , मेरे लिए जो विस्मय क्या पता तेरे लिए कहर हो। सत्ताईस.आफिस में रहता वो ऐसे, जीभ बीच दाँतों के जैसे। अट्ठाईस.ज्यों पंछी का खुले गगन में नही कोई पग छाप, ठीक वैसे हीं बुद्ध पुरुषों के कहाँ होते पद चाप। उनतीस.ऐ लेखनी मेरी ये तेरा मुझको कैसा वरदान, ज्ञान बाँटती जग में सारा और मुझे देती अभिमान। तीस.तेरे इश्क़ में है तुझसे नाराज भी, वो कैद में पड़ा हुआ आजाद भी। इकतीस.ना तेरा हुआ अभी कहीं ना तेरा कभी रहा होगा, तारों से भी कहीं कोई क्या तूने राज कहा होगा? बत्तीस.कहाँ उसे ढूंढे रे बंदे , शहर शहर और गाँव, वो ईश्वर तो यही बसा, भूखे नंगों के पाँव। तैंतीस.महीने की रोटी और चुटकी कमाई से, उठाओगे कैसे तुम नखरे भौजाई के? चौंतीस.तेरे झूठ पे भी हमको न हो सके एतबार, तुम्ही कहो कौन सी मिट्टी के बने हो यार। पैंतीस.काश कोई इतना सीखा दे मुझे, झूठा हो कोई तो झूठा हीं दिखे। छत्तीस.तेरा मैं था कभी सहारा, बेकदरी से पर मैं हारा। अड़तीस.इन हाथों का भगवन नही कोई जवाब, बंध जाए तो तर्पण खुले तो नमाज। उनतालीस.सुखी अँतड़ी सूखे पेट क्षुधा व्यथित कंगाल, तुम्हीं कहो सजाये कैसे वो पूजा की थाल? चालीस.मेरा मन हीं रहा न मेरा, जब तेरी यादों ने घेरा। इकतालीस.तेरे दर पे इंसाँ मिटते क्यों कौम की लड़ाई में, खुदा कुछ तो बचा रखो तुम अपनी खुदाई में। बयालीस.याद करने की हद से गुजर जाता है जैसे कोई याद , ईश्क ठीक वैसे ही आज मेरे जेहन में शामिल है । अपने दो दो दांतों के वास्ते, पेट में भी दांत होते है।
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क्रिकेट विश्व कप का 12वां संस्करण 30 मई से इंग्लैंड-वेल्स में शुरू हो जाएगा। लेकिन गेंद-बल्ले की इस जंग से पहले खिलाड़ियों के बीच जुबानी जंग भी शुरू हो गई है।
क्रिकेट के खेल में शरीर के साथ-साथ दिमाग का इस्तेमाल करना भी जरुरी होता है। क्योंकि कई बार खिलाड़ी विपक्षी टीम पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर उसपर हावी होना चाहता है।
10 टीमों के बीच होने वाले महामुकाबले से पहले ऐसा ही कुछ काम दक्षिण अफ्रीका का यह तेज गेंदबाज भी करना चाहता है।
भारत के खिलाफ 5 जून को होने वाले मुकाबले से पहले दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज लुंगी एनगिडी ने टीम इंडिया को चेतावनी दी है।
एनगिडी ने कहा है कि वो टीम इंडिया से हार का बदला लेने को बेताब हैं। लुंगी अभी तक इंडिया से मिली हार का गम नहीं भूल पाए हैं।
दरअसल टीम इंडिया ने पिछले साल दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर मेजबान टीम को उन्हीं के घर में 5-1 से हराया था।
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क्रिकेट विश्व कप का बारहवां संस्करण तीस मई से इंग्लैंड-वेल्स में शुरू हो जाएगा। लेकिन गेंद-बल्ले की इस जंग से पहले खिलाड़ियों के बीच जुबानी जंग भी शुरू हो गई है। क्रिकेट के खेल में शरीर के साथ-साथ दिमाग का इस्तेमाल करना भी जरुरी होता है। क्योंकि कई बार खिलाड़ी विपक्षी टीम पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर उसपर हावी होना चाहता है। दस टीमों के बीच होने वाले महामुकाबले से पहले ऐसा ही कुछ काम दक्षिण अफ्रीका का यह तेज गेंदबाज भी करना चाहता है। भारत के खिलाफ पाँच जून को होने वाले मुकाबले से पहले दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज लुंगी एनगिडी ने टीम इंडिया को चेतावनी दी है। एनगिडी ने कहा है कि वो टीम इंडिया से हार का बदला लेने को बेताब हैं। लुंगी अभी तक इंडिया से मिली हार का गम नहीं भूल पाए हैं। दरअसल टीम इंडिया ने पिछले साल दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर मेजबान टीम को उन्हीं के घर में पाँच-एक से हराया था।
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नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को सजा सुनाने वाले जज केटी थॉमस ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने सोनिया गांधी से अपने पति के हत्यारों की सजा को लेकर उदारता बरतने की अपील की है। बता दें कि राजीव गांधी के हत्यारों को सजा सुनाने वाली तीन सदस्यीय बेंच में केटी थॉमस भी थे जो की अब रिटायर हो चुके हैं।
न्यायाधीश केटी थॉमस ने ख़त में लिखा है कि "अगर आप, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा राष्ट्रपति को इस बारे में लिखे, तो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्यारों की सजा में रियायत बरतने को लेकर केंद्र सरकार मंजूरी दे सकती है। आपसे गुजारिश है कि आप अपने पति के हत्यारों की सजा को लेकर उदारता की भावना दिखाएं, क्योंकि ये लोग पहले ही अपनी जिंदगी के कई साल जेल में गुजार चुके हैं"।
अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक ये ख़त 18 अक्टूबर को लिखा है। सोनिया गांधी के नाम लिखी इस चिट्ठी में 1991 में हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों का जिक्र किया गया है।
रिटायर्ड जज ने अपनी चिट्ठी में महात्मा गांधी की हत्या के जुर्म में सजा से मुक्त हुए नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे का भी जिक्र किया है। रिटायर्ड जज ने इस केस में 2014 में तमिलनाडु सरकार के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसपर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई थी।
उन्होंने लिखा- "एक जज के तौर पर मेरा ऐसा मानना है कि मुझे इस बारे में आपको कुछ कहना चाहिए, ताकि आप ऐसे केस में उदारता की भावना दिखा सके। " रिटायर्ड जज ने राजीव गांधी की हत्या की जांच में सीबीआई से कई बिंदुओ पर गलती होने की बात भी कही है।
बता दें कि 21 मई 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेंरबदूर में एक धमाके में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत हो गई थी। इस केस में मुरुगन, संथान, पेरारीवालन, नलिनी, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रविचंद्रन को दोषी ठहराया गया था।
रॉबर्ट पायस और जयकुमार को मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की सजा उम्रकैद में बदल दी। मुरुगन, संथान और पेरारीवालन ने अपनी सजा-ए-मौत को लेकर राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी थी। इसपर फैसला लेने में देरी होने पर सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में इन तीनों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
राजीव गांधी हत्याकांड में नलिनी को भी मौत की सजा मिली थी। लेकिन, 24 अप्रैल 2000 में संविधान के आर्टिकल 161 के जरिए नलिनी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया। 25 साल से भी ज्यादा समय में जेल में बंद नलिनी, दुनिया में सबसे लंबे वक्त तक सजा काटने वाली महिला कैदी है।
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नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को सजा सुनाने वाले जज केटी थॉमस ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने सोनिया गांधी से अपने पति के हत्यारों की सजा को लेकर उदारता बरतने की अपील की है। बता दें कि राजीव गांधी के हत्यारों को सजा सुनाने वाली तीन सदस्यीय बेंच में केटी थॉमस भी थे जो की अब रिटायर हो चुके हैं। न्यायाधीश केटी थॉमस ने ख़त में लिखा है कि "अगर आप, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा राष्ट्रपति को इस बारे में लिखे, तो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्यारों की सजा में रियायत बरतने को लेकर केंद्र सरकार मंजूरी दे सकती है। आपसे गुजारिश है कि आप अपने पति के हत्यारों की सजा को लेकर उदारता की भावना दिखाएं, क्योंकि ये लोग पहले ही अपनी जिंदगी के कई साल जेल में गुजार चुके हैं"। अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक ये ख़त अट्ठारह अक्टूबर को लिखा है। सोनिया गांधी के नाम लिखी इस चिट्ठी में एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों का जिक्र किया गया है। रिटायर्ड जज ने अपनी चिट्ठी में महात्मा गांधी की हत्या के जुर्म में सजा से मुक्त हुए नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे का भी जिक्र किया है। रिटायर्ड जज ने इस केस में दो हज़ार चौदह में तमिलनाडु सरकार के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसपर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने लिखा- "एक जज के तौर पर मेरा ऐसा मानना है कि मुझे इस बारे में आपको कुछ कहना चाहिए, ताकि आप ऐसे केस में उदारता की भावना दिखा सके। " रिटायर्ड जज ने राजीव गांधी की हत्या की जांच में सीबीआई से कई बिंदुओ पर गलती होने की बात भी कही है। बता दें कि इक्कीस मई एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में तमिलनाडु के श्रीपेंरबदूर में एक धमाके में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत हो गई थी। इस केस में मुरुगन, संथान, पेरारीवालन, नलिनी, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रविचंद्रन को दोषी ठहराया गया था। रॉबर्ट पायस और जयकुमार को मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की सजा उम्रकैद में बदल दी। मुरुगन, संथान और पेरारीवालन ने अपनी सजा-ए-मौत को लेकर राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी थी। इसपर फैसला लेने में देरी होने पर सुप्रीम कोर्ट ने दो हज़ार चौदह में इन तीनों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। राजीव गांधी हत्याकांड में नलिनी को भी मौत की सजा मिली थी। लेकिन, चौबीस अप्रैल दो हज़ार में संविधान के आर्टिकल एक सौ इकसठ के जरिए नलिनी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया। पच्चीस साल से भी ज्यादा समय में जेल में बंद नलिनी, दुनिया में सबसे लंबे वक्त तक सजा काटने वाली महिला कैदी है।
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Agneepath Scheme: केंद्र सरकार के अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से सेना में नौकरी चाहने वालों ने बवाल काटना शुरू कर दिया है। योजना में किए गए प्रावधान से नाराज छात्र शुक्रवार को तीसरे दिन भी देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी उन उम्मीदवारों में शामिल हैं जो पिछले दो वर्षों से रक्षा क्षेत्र में नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल, सरकार ने कहा है कि सैनिकों की भर्ती 17. 5 से पहले 21 और अब 23 वर्ष की आयु सीमा के भीतर लगभग 30,000-40,000 रुपये के वेतन पर की जाएगी।
इस योजना के तहत महिलाएं भी भर्ती के पात्र हैं। सरकार की ओर से बताया गया है कि अग्निपथ के तहत भर्ती किए गए सैनिकों को चार साल बाद सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा। ये तो आपने जाना की सरकार की इस योजना में क्या-क्या प्रावधान है। अब विस्तार से बताते हैं कि सेना में नौकरी चाहने वाले छात्र क्यों विरोध प्रदर्शन कर रहे हैंः
Agneepath Scheme का विरोध क्यों कर रहे हैं रक्षा क्षेत्र में नौकरी चाहने वाले छात्र?
बता दें कि देश भर में छात्र योजना के चार साल के सेवा प्रावधान के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। विरोध कर रहे सेना के उम्मीदवारों ने कहा कि न तो नौकरी चाहने वालों और न ही देश को इस योजना से लाभ होगा। 'अग्निपथ योजना' में युवाओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि चार साल बाद 75 फीसदी युवाओं को बाहर होना पड़ेगा।
एक उम्मीदवार ने कहा कि एक युवा जो 17. 5 साल की उम्र में अग्निशामक बन जाता है, उसके पास न तो कोई पेशेवर डिग्री होगी और न ही कोई विशेष योग्यता। ऐसे में उसे द्वितीय श्रेणी की नौकरी करने के लिए बाध्य होना होगा। दरअसल, छात्रों के बीच इस बात की चिंता है कि वे चार साल की सीमित अवधि में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे और इस अवधि के बाद, वे एक बार फिर बिना पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के बेरोजगार हो जाएंगे।
सेना के उम्मीदवारों ने कहा कि यह योजना एक दिखावा है। सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे युवा कह रहे हैं कि वे कड़ी मेहनत करते हैं और सेना में भर्ती होने के लिए कई साल तैयारी करते हैं। ऐसे में वे चार साल की नौकरी स्वीकार नहीं करते। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सरकार से इस योजना को तुरंत वापस लेने की अपील की है।
नौकरी चाहने वाले उम्मीदवार हथियार क्यों उठा रहे हैं?
प्रदर्शनकारियों द्वारा नौकरी की सुरक्षा और पेंशन दो प्रमुख मुद्दों का हवाला दिया जा रहा है। हालांकि, नई योजना में अधिकांश के लिए सिर्फ चार साल के कार्यकाल की बात कही गई है, और अग्निवीर पेंशन लाभ के लिए पात्र नहीं होंगे। बिहार के छपरा के एक विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्र ने कहा कि यह अग्निपथ योजना बेरोजगार युवाओं को दी जा रही महज एक जगह है। यहां तक कि माता-पिता भी अब अपने बेटों को सिर्फ चार साल के लिए सेना में भेजने से पहले कई बार सोचेंगे।
बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक कोचिंग सेंटर चलाने वाले एसके झा ने कहा कि बस चार साल बाद सेवानिवृत्त होने की कल्पना करो। रिटायर होने से पहले उन्हें कुछ कौशल देने के नाम पर यह उनकी भावनाओं के साथ खेलने के अलावा और कुछ नहीं है। छात्र पुरानी व्यवस्था को वापस चाहते हैं। बता दें कि महामारी के कारण सेना भर्ती पर दो साल की रोक से भी गुस्सा फूट रहा है। जबकि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अगले हफ्ते से शुरू होगी, पिछले दो वर्षों के दौरान अधिक आयु वाले कई उम्मीदवार अब आयु मानदंड में छूट की मांग कर रहे हैं।
सेना में बहाली की लगभग 2 साल की देरी और सरकार की ये नई योजना के तहत 4 साल की नौकरी की बात अब छात्रों को रास नहीं आ रही है। प्रदर्शन के दौरान छात्र जगह-जगह तोड़-फोड़ मचा रहे हैं। देश के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें फूंक दी है। लेकिन यहां सवाल ये उठता है कि क्या प्रदर्शन का ये तरीका सही है? क्या देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना सही है? क्या सरकार के किसी योजना का विरोध इस तरह से किया जाए?
कहां से शुरू हुआ Agneepath Scheme के खिलाफ उग्र प्रदर्शन?
गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर और बक्सर में बुधवार को विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। वहीं शुक्रवार यानी आज भी देश के कई राज्यों में 'अग्निपथ' के विरोध में प्रदर्शन के दौरान ट्रेनों में आग लगा दी गई। सार्वजनिक और पुलिस वाहनों पर हमला किया गया और कर्मियों को घायल कर दिया गया। बिहार के आरा से लेकर हरियाणा के पलवल तक, उत्तर प्रदेश के आगरा से लेकर बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में ग्वालियर और इंदौर तक, सेना में नौकरी के लिए सैकड़ों युवा उम्मीदवार सार्वजनिक और निजी संपत्ति पर अपना गुस्सा निकालते हुए सड़कों पर उतर आए हैं।
पुलिस ने नई भर्ती नीति के खिलाफ रेलवे ट्रैक को अवरुद्ध करने, सड़कों पर जलते टायर फेंकने और सड़कों पर पुश-अप और अन्य अभ्यास करने वाले नाराज युवाओं के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज भी किया।
अग्निपथ योजना के विरोध में सड़कों पर उतरे उग्र प्रदर्शनों के बीच एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भाजपा नेताओं के लिए सहारा बने हुए हैं। पार्टी नेता सरकार की इस योजना के फायदे सोशल मीडिया पर गिना रहे हैं। गौरतलब है कि किसान आंदोलन के दौरान भी भाजपा नेताओं को जगह-जगह किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ा था। 'अग्निपथ' योजना को लेकर ज़बरदस्त विरोध-प्रदर्शनों के बीच भाजपा नेता इस योजना के फायदे गिनाने में लगे हैं।
राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉक्टर सतीश पूनिया ने इस अग्निपथ योजना को केंद्र की मोदी सरकार का ऐतिहासिक निर्णय बताया है। प्रदेशाध्यक्ष डॉक्टर पूनिया ने कहा कि अग्निपथ योजना की सबसे बड़ी खासियत है कि नौजवानों को कम उम्र में सेना में सेवा करने का अवसर मिलेगा। राजस्थान से लेकर पूरे देश के नौजवानों ने अग्निपथ योजना का समर्थन किया है।
बता दें कि देश में छात्रों के बवाल के बीच केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब दिए हैं। सरकार ने कहा कि अग्निपथ स्कीम से सेना की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ने का संदेह निराधार है। उसने कहा कि दो साल के संपर्क अभियान के बाद अग्निपथ स्कीम का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जहां तक बात अग्निवीरों के भविष्य की है तो केंद्र एवं राज्य सरकारें उन्हें रिटायरमेंट के बाद अपने विभिन्न विभागों की भर्तियों में प्राथमिकता देंगी। साथ ही, उन्हें बिजनस करने, रोजगार पाने, पढ़ाई करने में भी मदद करेगी।
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Agneepath Scheme: केंद्र सरकार के अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से सेना में नौकरी चाहने वालों ने बवाल काटना शुरू कर दिया है। योजना में किए गए प्रावधान से नाराज छात्र शुक्रवार को तीसरे दिन भी देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी उन उम्मीदवारों में शामिल हैं जो पिछले दो वर्षों से रक्षा क्षेत्र में नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल, सरकार ने कहा है कि सैनिकों की भर्ती सत्रह. पाँच से पहले इक्कीस और अब तेईस वर्ष की आयु सीमा के भीतर लगभग तीस,शून्य-चालीस,शून्य रुपयापये के वेतन पर की जाएगी। इस योजना के तहत महिलाएं भी भर्ती के पात्र हैं। सरकार की ओर से बताया गया है कि अग्निपथ के तहत भर्ती किए गए सैनिकों को चार साल बाद सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा। ये तो आपने जाना की सरकार की इस योजना में क्या-क्या प्रावधान है। अब विस्तार से बताते हैं कि सेना में नौकरी चाहने वाले छात्र क्यों विरोध प्रदर्शन कर रहे हैंः Agneepath Scheme का विरोध क्यों कर रहे हैं रक्षा क्षेत्र में नौकरी चाहने वाले छात्र? बता दें कि देश भर में छात्र योजना के चार साल के सेवा प्रावधान के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। विरोध कर रहे सेना के उम्मीदवारों ने कहा कि न तो नौकरी चाहने वालों और न ही देश को इस योजना से लाभ होगा। 'अग्निपथ योजना' में युवाओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि चार साल बाद पचहत्तर फीसदी युवाओं को बाहर होना पड़ेगा। एक उम्मीदवार ने कहा कि एक युवा जो सत्रह. पाँच साल की उम्र में अग्निशामक बन जाता है, उसके पास न तो कोई पेशेवर डिग्री होगी और न ही कोई विशेष योग्यता। ऐसे में उसे द्वितीय श्रेणी की नौकरी करने के लिए बाध्य होना होगा। दरअसल, छात्रों के बीच इस बात की चिंता है कि वे चार साल की सीमित अवधि में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे और इस अवधि के बाद, वे एक बार फिर बिना पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के बेरोजगार हो जाएंगे। सेना के उम्मीदवारों ने कहा कि यह योजना एक दिखावा है। सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे युवा कह रहे हैं कि वे कड़ी मेहनत करते हैं और सेना में भर्ती होने के लिए कई साल तैयारी करते हैं। ऐसे में वे चार साल की नौकरी स्वीकार नहीं करते। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सरकार से इस योजना को तुरंत वापस लेने की अपील की है। नौकरी चाहने वाले उम्मीदवार हथियार क्यों उठा रहे हैं? प्रदर्शनकारियों द्वारा नौकरी की सुरक्षा और पेंशन दो प्रमुख मुद्दों का हवाला दिया जा रहा है। हालांकि, नई योजना में अधिकांश के लिए सिर्फ चार साल के कार्यकाल की बात कही गई है, और अग्निवीर पेंशन लाभ के लिए पात्र नहीं होंगे। बिहार के छपरा के एक विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्र ने कहा कि यह अग्निपथ योजना बेरोजगार युवाओं को दी जा रही महज एक जगह है। यहां तक कि माता-पिता भी अब अपने बेटों को सिर्फ चार साल के लिए सेना में भेजने से पहले कई बार सोचेंगे। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक कोचिंग सेंटर चलाने वाले एसके झा ने कहा कि बस चार साल बाद सेवानिवृत्त होने की कल्पना करो। रिटायर होने से पहले उन्हें कुछ कौशल देने के नाम पर यह उनकी भावनाओं के साथ खेलने के अलावा और कुछ नहीं है। छात्र पुरानी व्यवस्था को वापस चाहते हैं। बता दें कि महामारी के कारण सेना भर्ती पर दो साल की रोक से भी गुस्सा फूट रहा है। जबकि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अगले हफ्ते से शुरू होगी, पिछले दो वर्षों के दौरान अधिक आयु वाले कई उम्मीदवार अब आयु मानदंड में छूट की मांग कर रहे हैं। सेना में बहाली की लगभग दो साल की देरी और सरकार की ये नई योजना के तहत चार साल की नौकरी की बात अब छात्रों को रास नहीं आ रही है। प्रदर्शन के दौरान छात्र जगह-जगह तोड़-फोड़ मचा रहे हैं। देश के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें फूंक दी है। लेकिन यहां सवाल ये उठता है कि क्या प्रदर्शन का ये तरीका सही है? क्या देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना सही है? क्या सरकार के किसी योजना का विरोध इस तरह से किया जाए? कहां से शुरू हुआ Agneepath Scheme के खिलाफ उग्र प्रदर्शन? गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर और बक्सर में बुधवार को विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। वहीं शुक्रवार यानी आज भी देश के कई राज्यों में 'अग्निपथ' के विरोध में प्रदर्शन के दौरान ट्रेनों में आग लगा दी गई। सार्वजनिक और पुलिस वाहनों पर हमला किया गया और कर्मियों को घायल कर दिया गया। बिहार के आरा से लेकर हरियाणा के पलवल तक, उत्तर प्रदेश के आगरा से लेकर बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में ग्वालियर और इंदौर तक, सेना में नौकरी के लिए सैकड़ों युवा उम्मीदवार सार्वजनिक और निजी संपत्ति पर अपना गुस्सा निकालते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। पुलिस ने नई भर्ती नीति के खिलाफ रेलवे ट्रैक को अवरुद्ध करने, सड़कों पर जलते टायर फेंकने और सड़कों पर पुश-अप और अन्य अभ्यास करने वाले नाराज युवाओं के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज भी किया। अग्निपथ योजना के विरोध में सड़कों पर उतरे उग्र प्रदर्शनों के बीच एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भाजपा नेताओं के लिए सहारा बने हुए हैं। पार्टी नेता सरकार की इस योजना के फायदे सोशल मीडिया पर गिना रहे हैं। गौरतलब है कि किसान आंदोलन के दौरान भी भाजपा नेताओं को जगह-जगह किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ा था। 'अग्निपथ' योजना को लेकर ज़बरदस्त विरोध-प्रदर्शनों के बीच भाजपा नेता इस योजना के फायदे गिनाने में लगे हैं। राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉक्टर सतीश पूनिया ने इस अग्निपथ योजना को केंद्र की मोदी सरकार का ऐतिहासिक निर्णय बताया है। प्रदेशाध्यक्ष डॉक्टर पूनिया ने कहा कि अग्निपथ योजना की सबसे बड़ी खासियत है कि नौजवानों को कम उम्र में सेना में सेवा करने का अवसर मिलेगा। राजस्थान से लेकर पूरे देश के नौजवानों ने अग्निपथ योजना का समर्थन किया है। बता दें कि देश में छात्रों के बवाल के बीच केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब दिए हैं। सरकार ने कहा कि अग्निपथ स्कीम से सेना की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ने का संदेह निराधार है। उसने कहा कि दो साल के संपर्क अभियान के बाद अग्निपथ स्कीम का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जहां तक बात अग्निवीरों के भविष्य की है तो केंद्र एवं राज्य सरकारें उन्हें रिटायरमेंट के बाद अपने विभिन्न विभागों की भर्तियों में प्राथमिकता देंगी। साथ ही, उन्हें बिजनस करने, रोजगार पाने, पढ़ाई करने में भी मदद करेगी। यह भी पढ़ेंः
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चौथ के चांद के दीदार के लिए धरती के चांद खूब सजे और करवा चौथ की पूर्व संध्या पर बाजार पूरी तरह से गुलजार रहे और बाजारों में तिल धरने को जगह नहीं रही। महिलाओं ने न केवल सुहाग के सामान के साथ सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुएं खरीदी, वहीं खाने पीने की वस्तुएं जिनमें फैनी और मिठाईयां, फल आदि की खूब खरीददारी की। पिछले कई दिनों से शहर के बाजार लोगों की भ्रीउ़ से रोशन हो उठे और लोगों ने इस बार महंगाई के बावजूद खरीददारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। बीते वर्ष की कसर भी इस साल लोगों ने पूरी की, वहीं दुकानदारों व व्यापारियों ने भी इसी आस से अपनी दुकानों में उत्पाद सजाए थे कि इस वर्ष उनके पिछले वर्ष के व्यवसाय की भरपाई हो सके। (एचडीएम)
साज सज्जा के साथ सबसे महत्वपूर्ण हाथों में मेहंदी रचाने के लिए महिलाओं का तांता लगा रहा। मेहंदी रचाने वाले लोगों ने भी जगह-जगह पर स्टॉल लगाए हुए थे। इनमें हाथों में रचाने के लिए राजस्थानी मेहंदी के स्टॉल भी शामिल रहे, लेकिन अधिकांश महिलाओं ने अपने हाथों में लगाकर मेहंदी रचाई है। वहीं, ब्यूटी पॉर्लरों में भी खूब भीड़ रही और महिलाएं अपनी बारी का इंतजार करती रही। साज सजावट को लेकर महिलाएं पिछले कई दिनों से तैयारियों में जुटनी शुरू हो गई थी और कई महिलाओं ने अपने घरों पर ही ब्यूटीशियनों को बुलाया।
हालांकि इस बार सब्जियों से लेकर सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुओं में बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन बावजूद इसके लोगों ने इनकी खरीद की, वहीं ड्राई फ्रूट्स के दामों में आए उछाल के बावजूद लोगों ने इनकी खरीद करने में भी गुरेज नहीं किया। करवा चौथ को लेकर फैनी, मट्ठियों के अलावा मिठाईयों की महिलाओं सहित लोगों ने खरीद की। इससे हलवाईयों के मंद पड़े धंधे को भी पंख लगे है।
इस बार के करवा चौथ को लेकर नवविवाहित जोड़ों में खासा क्रेज है। बीते वर्ष कोरोना के चलते नवविवाहित जोड़े खरीददारी नहीं कर सके थे और धूमधाम से मनाए जा रहे इस बार के करवा चौथ को लेकर नए जोड़ों ने जमकर खरीददारी की है। व्रत के सामान से लेकर रूप सज्जा के सामान खरीदने में खूब रूचि दिखाई है।
पर्यटन विकास निगम ने भी इस बार पर्वों को लेकर विशेष छूट दी है। निगम के होटलों में ठहरने वाले पर्यटकों को 10 फीसदी अतिरिक्त छूट दी है। 15 नवंबर तक के लिए निगम ने अपने होटलों में 20 प्रतिशत दूट की घोषणा की हुई है, जबकि करवा चौथ पर सैलानियों के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त छूट प्रदान की है।
करवाचौथ व्रत को लेकर जहां महिलाओं में खासा उत्साह है, वहीं चौथ के चांद के दीदार के लिए सुहागिने रविवार को शिमला के रिज पर उमड़ेगी और व्रत की प्रक्रिया को पूर्ण करेगी। प्रतिवर्ष भारी संख्या में महिलाएं अपने पतियों के साथ रिज मैदान में पहुंचती है। रविवार को न केवल महिलाएं सज संवरेगी, वहीं रिज मैदान का रुख करके व्रत की विधि को पूरा करने के साथ चौथ के चांद का भी दीदार करेगी।
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चौथ के चांद के दीदार के लिए धरती के चांद खूब सजे और करवा चौथ की पूर्व संध्या पर बाजार पूरी तरह से गुलजार रहे और बाजारों में तिल धरने को जगह नहीं रही। महिलाओं ने न केवल सुहाग के सामान के साथ सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुएं खरीदी, वहीं खाने पीने की वस्तुएं जिनमें फैनी और मिठाईयां, फल आदि की खूब खरीददारी की। पिछले कई दिनों से शहर के बाजार लोगों की भ्रीउ़ से रोशन हो उठे और लोगों ने इस बार महंगाई के बावजूद खरीददारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। बीते वर्ष की कसर भी इस साल लोगों ने पूरी की, वहीं दुकानदारों व व्यापारियों ने भी इसी आस से अपनी दुकानों में उत्पाद सजाए थे कि इस वर्ष उनके पिछले वर्ष के व्यवसाय की भरपाई हो सके। साज सज्जा के साथ सबसे महत्वपूर्ण हाथों में मेहंदी रचाने के लिए महिलाओं का तांता लगा रहा। मेहंदी रचाने वाले लोगों ने भी जगह-जगह पर स्टॉल लगाए हुए थे। इनमें हाथों में रचाने के लिए राजस्थानी मेहंदी के स्टॉल भी शामिल रहे, लेकिन अधिकांश महिलाओं ने अपने हाथों में लगाकर मेहंदी रचाई है। वहीं, ब्यूटी पॉर्लरों में भी खूब भीड़ रही और महिलाएं अपनी बारी का इंतजार करती रही। साज सजावट को लेकर महिलाएं पिछले कई दिनों से तैयारियों में जुटनी शुरू हो गई थी और कई महिलाओं ने अपने घरों पर ही ब्यूटीशियनों को बुलाया। हालांकि इस बार सब्जियों से लेकर सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुओं में बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन बावजूद इसके लोगों ने इनकी खरीद की, वहीं ड्राई फ्रूट्स के दामों में आए उछाल के बावजूद लोगों ने इनकी खरीद करने में भी गुरेज नहीं किया। करवा चौथ को लेकर फैनी, मट्ठियों के अलावा मिठाईयों की महिलाओं सहित लोगों ने खरीद की। इससे हलवाईयों के मंद पड़े धंधे को भी पंख लगे है। इस बार के करवा चौथ को लेकर नवविवाहित जोड़ों में खासा क्रेज है। बीते वर्ष कोरोना के चलते नवविवाहित जोड़े खरीददारी नहीं कर सके थे और धूमधाम से मनाए जा रहे इस बार के करवा चौथ को लेकर नए जोड़ों ने जमकर खरीददारी की है। व्रत के सामान से लेकर रूप सज्जा के सामान खरीदने में खूब रूचि दिखाई है। पर्यटन विकास निगम ने भी इस बार पर्वों को लेकर विशेष छूट दी है। निगम के होटलों में ठहरने वाले पर्यटकों को दस फीसदी अतिरिक्त छूट दी है। पंद्रह नवंबर तक के लिए निगम ने अपने होटलों में बीस प्रतिशत दूट की घोषणा की हुई है, जबकि करवा चौथ पर सैलानियों के लिए दस प्रतिशत अतिरिक्त छूट प्रदान की है। करवाचौथ व्रत को लेकर जहां महिलाओं में खासा उत्साह है, वहीं चौथ के चांद के दीदार के लिए सुहागिने रविवार को शिमला के रिज पर उमड़ेगी और व्रत की प्रक्रिया को पूर्ण करेगी। प्रतिवर्ष भारी संख्या में महिलाएं अपने पतियों के साथ रिज मैदान में पहुंचती है। रविवार को न केवल महिलाएं सज संवरेगी, वहीं रिज मैदान का रुख करके व्रत की विधि को पूरा करने के साथ चौथ के चांद का भी दीदार करेगी।
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दिलेर समाचार, राजस्थान में कोर्ट ने 10 साल की बच्ची की शादी को निरस्त कर दिया है. जोधपुर की एक अदालत ने अलवर के थानागाजी की रहनेवाली पिंकी कंवर के बाल विवाह को निरस्त कर दिया है. पिंकी की शादी 10 साल की उम्र में हो गई थी. शादी के बाद उसके ससुराल वालों ने उस पर गौना करवाने का दबाव बनाया था. पिंकी अभी 19 साल की है और वह जोधपुर में अपनी पढ़ाई कर रही है.
पिंकी कंवर ने अपने बाल विवाह को निरस्त करने के लिए कोर्ट में मुकदमा दायर किया था. पिंकी ने जोधपुर के सारथी ट्रस्ट की प्रबंधक ट्रस्टी और पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती के माध्यम से कोर्ट में यह मुकदमा दायर किया था. डॉ. भारती के अनुसार, पिंकी कंवर को शादी के बाद ससुराल वालों ने गौना का दबाव बनाया था.
इस मामले में कोर्ट में सुनवाई हुई और उसके बाल विवाह को निरस्त कर दिया गया. न्यायाधीश रेखा भार्गव की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए बीते 31 जनवरी को पिंकी के बाल विवाह को निरस्त कर दिया. डॉ. भारती ने कहा कि बाल विवाह निरस्त होने के बाद पिंकी के बेहतर पुनर्वास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.
दायर मुकदमे के अनुसार, राजस्थान के अलवर की मूल निवासी और जोधपुर में पढ़ाई कर रही 19 साल की पिंकी कंवर का करीब 10 साल की उम्र में बाल विवाह हुआ था. 24 मार्च 2009 को दौसा निवासी हिम्मत सिंह राजपूत के साथ पिंकी कंवर का बाल विवाह करवा दिया गया था.
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दिलेर समाचार, राजस्थान में कोर्ट ने दस साल की बच्ची की शादी को निरस्त कर दिया है. जोधपुर की एक अदालत ने अलवर के थानागाजी की रहनेवाली पिंकी कंवर के बाल विवाह को निरस्त कर दिया है. पिंकी की शादी दस साल की उम्र में हो गई थी. शादी के बाद उसके ससुराल वालों ने उस पर गौना करवाने का दबाव बनाया था. पिंकी अभी उन्नीस साल की है और वह जोधपुर में अपनी पढ़ाई कर रही है. पिंकी कंवर ने अपने बाल विवाह को निरस्त करने के लिए कोर्ट में मुकदमा दायर किया था. पिंकी ने जोधपुर के सारथी ट्रस्ट की प्रबंधक ट्रस्टी और पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती के माध्यम से कोर्ट में यह मुकदमा दायर किया था. डॉ. भारती के अनुसार, पिंकी कंवर को शादी के बाद ससुराल वालों ने गौना का दबाव बनाया था. इस मामले में कोर्ट में सुनवाई हुई और उसके बाल विवाह को निरस्त कर दिया गया. न्यायाधीश रेखा भार्गव की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए बीते इकतीस जनवरी को पिंकी के बाल विवाह को निरस्त कर दिया. डॉ. भारती ने कहा कि बाल विवाह निरस्त होने के बाद पिंकी के बेहतर पुनर्वास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. दायर मुकदमे के अनुसार, राजस्थान के अलवर की मूल निवासी और जोधपुर में पढ़ाई कर रही उन्नीस साल की पिंकी कंवर का करीब दस साल की उम्र में बाल विवाह हुआ था. चौबीस मार्च दो हज़ार नौ को दौसा निवासी हिम्मत सिंह राजपूत के साथ पिंकी कंवर का बाल विवाह करवा दिया गया था.
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भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय का प्रकाशन विभाग दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पुस्तक मेलों में से एक, 41वें शारजाह अंतराष्ट्रीय पुस्तक मेले में भाग ले रहा है। शारजाह बुक अथॉरिटी (एसबीए) द्वारा आयोजित इस 12-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन 2 नवंबर से 13 नवंबर, 2022 के दौरान संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह स्थित एक्सपो सेंटर में किया जाएगा। यह पुस्तक मेला दुनिया भर के कई पुरस्कार विजेता लेखकों, बुद्धिजीवियों एवं अन्य साहित्यिक हस्तियों की मेजबानी करेगा। मेले की इस वर्ष की थीम 'स्प्रेड द वर्ड' है।
आजादी का अमृत महोत्सव के उत्सव को जारी रखते हुए, प्रकाशन विभाग पाठकों और पुस्तकप्रेमियों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास एवं स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी विभिन्न प्रकार की पुस्तकों की पेशकश करेगा। पाठकों को प्रकाशन विभाग द्वारा विशेष रूप से प्रकाशित राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री के भाषणों से संबंधित प्रमुख पुस्तकों के साथ - साथ विभिन्न भारतीय भाषाओं में कला एवं संस्कृति, भारत का इतिहास, प्रतिष्ठित हस्तियां, भाषा एवं साहित्य, गांधीवादी साहित्य, धर्म एवं दर्शन और बाल साहित्य जैसे विषयों पर 100 से अधिक पुस्तकों एवं पत्रिकाओं को भी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
प्रकाशन विभाग अपने प्रकाशनों को संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह स्थित एक्सपो सेंटर के हॉल 7 में स्टाल संख्या जेडए-3 पर प्रदर्शित करेगा।
प्रकाशन विभाग के बारे मेंः
प्रकाशन विभाग निदेशालय विभिन्न प्रकार की पुस्तकों और पत्रिकाओं का एक भंडार है, जो राष्ट्रीय महत्व के विषयों और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करते हैं। वर्ष 1941 में स्थापित, प्रकाशन विभाग भारत सरकार का एक प्रमुख प्रकाशन गृह है जो विभिन्न भाषाओं में और विकास, भारतीय इतिहास, संस्कृति, साहित्य, जीवनी, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और रोजगार जैसे विविध विषयों से संबंधित पुस्तकों एवं पत्रिकाओं की पेशकश करता है। इस विभाग की पाठकों एवं प्रकाशकों के बीच अच्छी साख है और यह सामग्री की प्रामाणिकता के साथ-साथ अपने प्रकाशनों के उचित मूल्य के लिए भी बेहद प्रसिद्ध है।
डिवीजन के प्रमुख प्रकाशनों में योजना, कुरुक्षेत्र, बाल भारती और आजकल जैसी लोकप्रिय मासिक पत्रिकाओं के साथ-साथ साप्ताहिक रोजगार समाचार पत्र 'एम्प्लॉयमेंट न्यूज' और 'रोजगार समाचार' शामिल हैं। इसके अलावा, प्रकाशन विभाग सरकार की प्रतिष्ठित संदर्भ वार्षिकी 'इंडिया ईयर बुक' भी प्रकाशित करता है।
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Posted On: भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय का प्रकाशन विभाग दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पुस्तक मेलों में से एक, इकतालीसवें शारजाह अंतराष्ट्रीय पुस्तक मेले में भाग ले रहा है। शारजाह बुक अथॉरिटी द्वारा आयोजित इस बारह-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन दो नवंबर से तेरह नवंबर, दो हज़ार बाईस के दौरान संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह स्थित एक्सपो सेंटर में किया जाएगा। यह पुस्तक मेला दुनिया भर के कई पुरस्कार विजेता लेखकों, बुद्धिजीवियों एवं अन्य साहित्यिक हस्तियों की मेजबानी करेगा। मेले की इस वर्ष की थीम 'स्प्रेड द वर्ड' है। आजादी का अमृत महोत्सव के उत्सव को जारी रखते हुए, प्रकाशन विभाग पाठकों और पुस्तकप्रेमियों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास एवं स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी विभिन्न प्रकार की पुस्तकों की पेशकश करेगा। पाठकों को प्रकाशन विभाग द्वारा विशेष रूप से प्रकाशित राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री के भाषणों से संबंधित प्रमुख पुस्तकों के साथ - साथ विभिन्न भारतीय भाषाओं में कला एवं संस्कृति, भारत का इतिहास, प्रतिष्ठित हस्तियां, भाषा एवं साहित्य, गांधीवादी साहित्य, धर्म एवं दर्शन और बाल साहित्य जैसे विषयों पर एक सौ से अधिक पुस्तकों एवं पत्रिकाओं को भी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। प्रकाशन विभाग अपने प्रकाशनों को संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह स्थित एक्सपो सेंटर के हॉल सात में स्टाल संख्या जेडए-तीन पर प्रदर्शित करेगा। प्रकाशन विभाग के बारे मेंः प्रकाशन विभाग निदेशालय विभिन्न प्रकार की पुस्तकों और पत्रिकाओं का एक भंडार है, जो राष्ट्रीय महत्व के विषयों और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करते हैं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकतालीस में स्थापित, प्रकाशन विभाग भारत सरकार का एक प्रमुख प्रकाशन गृह है जो विभिन्न भाषाओं में और विकास, भारतीय इतिहास, संस्कृति, साहित्य, जीवनी, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और रोजगार जैसे विविध विषयों से संबंधित पुस्तकों एवं पत्रिकाओं की पेशकश करता है। इस विभाग की पाठकों एवं प्रकाशकों के बीच अच्छी साख है और यह सामग्री की प्रामाणिकता के साथ-साथ अपने प्रकाशनों के उचित मूल्य के लिए भी बेहद प्रसिद्ध है। डिवीजन के प्रमुख प्रकाशनों में योजना, कुरुक्षेत्र, बाल भारती और आजकल जैसी लोकप्रिय मासिक पत्रिकाओं के साथ-साथ साप्ताहिक रोजगार समाचार पत्र 'एम्प्लॉयमेंट न्यूज' और 'रोजगार समाचार' शामिल हैं। इसके अलावा, प्रकाशन विभाग सरकार की प्रतिष्ठित संदर्भ वार्षिकी 'इंडिया ईयर बुक' भी प्रकाशित करता है।
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• एक एकीकृत अन्तर्राष्ट्रीयघरेलू सेवा प्रदान करने के लिए जो ग्राहकों के संतोष को विशिष्ट रूप से बढायेगा और इसे तीन वैश्विक एयरलाइन के संघों में से किसी एक में आसान से प्रविष्टि की अनुमति होगी।
• वैकल्पिक मार्गों पर मुक्त विमानों की तैनाती के साथ-साथ सामान्य सेवा मार्गों पर लाभ कमाने और अधिक उपयोग के जरिए वर्तमान संसाधनों को अधिकाधिक इस्तेमाल के योग्य बनाना।
• मजबूत परिसम्पत्ति, क्षमताओं और अवसंरचना के पूर्ण उपयोग का अवसर उपलब्ध कराना।
• रख-रखाव, मरम्मत और मरम्मत के लिए जांच (एमआरओ) आदि।
• बेहतर मूल्यांकन की संभावना को साकार बनाना।
• एक संयुक्त उड़ान शक्ति का संचालन जो भारत में सबसे बड़ी होगी और एशियाक्षेत्र में अन्य एयरलाइनों से बेहतर होगी।
• वित्तीय और पूंजीगत पुनर्निर्माण करने का अधिकतम लचीलापन अवसर उपलब्ध कराना। कम्पनी की संभावनाओं में सुधार के साथ उपर्युक्त लाभों का सभी कर्मचारियों के लिए बेहतर संभावनओं में बदलने की अपेक्षा है।
नागरिक विमानन मंत्रालय का एयर इंडिया-इंडियन एयरलाइन्स के विलयन को निरस्त करने का कोई इरादा नहीं है। विलयन सावधानीपूर्वक सोची समझी प्रक्रिया थी और यह भारत सरकार के सभी अभिकरणों का सामूहिक निर्णय था।
(Release ID :2608)
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• एक एकीकृत अन्तर्राष्ट्रीयघरेलू सेवा प्रदान करने के लिए जो ग्राहकों के संतोष को विशिष्ट रूप से बढायेगा और इसे तीन वैश्विक एयरलाइन के संघों में से किसी एक में आसान से प्रविष्टि की अनुमति होगी। • वैकल्पिक मार्गों पर मुक्त विमानों की तैनाती के साथ-साथ सामान्य सेवा मार्गों पर लाभ कमाने और अधिक उपयोग के जरिए वर्तमान संसाधनों को अधिकाधिक इस्तेमाल के योग्य बनाना। • मजबूत परिसम्पत्ति, क्षमताओं और अवसंरचना के पूर्ण उपयोग का अवसर उपलब्ध कराना। • रख-रखाव, मरम्मत और मरम्मत के लिए जांच आदि। • बेहतर मूल्यांकन की संभावना को साकार बनाना। • एक संयुक्त उड़ान शक्ति का संचालन जो भारत में सबसे बड़ी होगी और एशियाक्षेत्र में अन्य एयरलाइनों से बेहतर होगी। • वित्तीय और पूंजीगत पुनर्निर्माण करने का अधिकतम लचीलापन अवसर उपलब्ध कराना। कम्पनी की संभावनाओं में सुधार के साथ उपर्युक्त लाभों का सभी कर्मचारियों के लिए बेहतर संभावनओं में बदलने की अपेक्षा है। नागरिक विमानन मंत्रालय का एयर इंडिया-इंडियन एयरलाइन्स के विलयन को निरस्त करने का कोई इरादा नहीं है। विलयन सावधानीपूर्वक सोची समझी प्रक्रिया थी और यह भारत सरकार के सभी अभिकरणों का सामूहिक निर्णय था।
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VARANASI : लगातार जारी ठंड जानलेवा बनती जा रही है। रविवार को भी ठंड ने छह लोगों की जान ले ली। जानकारी मुताबिक सदर बाजार निवासी विक्रम कुमार (ख्भ् वर्ष) की ठंड लगने से मौत हो गई। बताया जाता है कि वह बनारस क्लब से शनिवार रात की ड्यूटी पूरी कर घर जा रहा था ठंड की चपेट में आ गया। चोलापुर क्षेत्र के सरैया (कचार) गांव निवासी पार्वती पटेल (भ्0 वर्ष) गेहूं की सिंचाई कर घर लौटीं। इसी बीच उन्हें ठंड लग गई और उनकी मौत हो गई। लोहता क्षेत्र के कोरौता गांव में बाढ़ू (ख्8 वर्ष) ने ठंड से दम तोड़ दिया। चौबेपुर के गरथौली में भोगन (80 वर्ष) की मौत हो गई। अहिरौली (आयर) के केदार यादव भी दुकान बंदकर घर जा रहे थे। घर से कुछ पहले ही साइकिल से गिरे। जब तक लोग इलाज का प्रबंध करते उनकी मौत हो गई थी। गरहा (सेवापुरी) की मूरता देवी (9भ् वर्ष) ने भी दम तोड़ दिया। कछवा रोड में बाइक सवार ठंड के चलते लबे सड़क भहरा गया। आसपास के लोगों ने अलाव जलाकर उसकी जान बचाई। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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VARANASI : लगातार जारी ठंड जानलेवा बनती जा रही है। रविवार को भी ठंड ने छह लोगों की जान ले ली। जानकारी मुताबिक सदर बाजार निवासी विक्रम कुमार की ठंड लगने से मौत हो गई। बताया जाता है कि वह बनारस क्लब से शनिवार रात की ड्यूटी पूरी कर घर जा रहा था ठंड की चपेट में आ गया। चोलापुर क्षेत्र के सरैया गांव निवासी पार्वती पटेल गेहूं की सिंचाई कर घर लौटीं। इसी बीच उन्हें ठंड लग गई और उनकी मौत हो गई। लोहता क्षेत्र के कोरौता गांव में बाढ़ू ने ठंड से दम तोड़ दिया। चौबेपुर के गरथौली में भोगन की मौत हो गई। अहिरौली के केदार यादव भी दुकान बंदकर घर जा रहे थे। घर से कुछ पहले ही साइकिल से गिरे। जब तक लोग इलाज का प्रबंध करते उनकी मौत हो गई थी। गरहा की मूरता देवी ने भी दम तोड़ दिया। कछवा रोड में बाइक सवार ठंड के चलते लबे सड़क भहरा गया। आसपास के लोगों ने अलाव जलाकर उसकी जान बचाई। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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ALLAHABAD: बिजली विभाग में दलालों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित रहेगा। कोई दलाल किसी कर्मचारी या अधिकारी पर काम का दबाव डालता है तो उसके खिलाफ तत्काल टोल फ्री नंबर पर शिकायत की जाए। पब्लिक भी ऐसा कर सकती है। विभागीय टोल फ्री नंबर 1912 जारी किया गया है। यह बात डीएम सुहास एलवाई ने गुरुवार को बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान कही।
डीएम ने चंदा लेकर खराब ट्रांसफारमर बदले जाने की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की मैं स्वयं जांच कराकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करुंगा। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है और तय समय के भीतर खराब ट्रांसफारमर को बदल दिया जाना चाहिए। डीएम अपने कैंप कार्यालय में बिजली विभाग के अधीक्षण अभियन्ता, अधिशाषी अभियन्ता तथा सहायक अभियन्ता आदि के साथ बैठक कर रहे थे। कहाकि, शिकायतों को पेंडिंग नही रखा जाए। किसी मामले में बिजली विभाग के लापरवाही सामने आती है तो सम्बन्धित लोगों पर सख्त कार्रवाही की जाएगी।
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ALLAHABAD: बिजली विभाग में दलालों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित रहेगा। कोई दलाल किसी कर्मचारी या अधिकारी पर काम का दबाव डालता है तो उसके खिलाफ तत्काल टोल फ्री नंबर पर शिकायत की जाए। पब्लिक भी ऐसा कर सकती है। विभागीय टोल फ्री नंबर एक हज़ार नौ सौ बारह जारी किया गया है। यह बात डीएम सुहास एलवाई ने गुरुवार को बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान कही। डीएम ने चंदा लेकर खराब ट्रांसफारमर बदले जाने की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की मैं स्वयं जांच कराकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करुंगा। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है और तय समय के भीतर खराब ट्रांसफारमर को बदल दिया जाना चाहिए। डीएम अपने कैंप कार्यालय में बिजली विभाग के अधीक्षण अभियन्ता, अधिशाषी अभियन्ता तथा सहायक अभियन्ता आदि के साथ बैठक कर रहे थे। कहाकि, शिकायतों को पेंडिंग नही रखा जाए। किसी मामले में बिजली विभाग के लापरवाही सामने आती है तो सम्बन्धित लोगों पर सख्त कार्रवाही की जाएगी।
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अगर सरकारी आंकड़ों की मानें तो 563. 35 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में अब तक खरीफ की फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस अवधि में ये आंकड़ा केवल 346. 46 लाख हेक्टेअर ही था। चालू मानसून में खरीफ फसलों की अब तक लगभग 34 फीसदी बुवाई हो गई है। उसमें सबसे अच्छा काम दलहन और तिलहन की फसलों की बुवाई में हुआ है।
अब उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक पखवाड़े में बुवाई कार्य पूरा हो जाएगा। इसबार लक्ष्य से अधिक बुवाई होने की संभावना है। इस समय मौसम मेहरबान है। लगातार हो रही वर्षा से किसानों के चेहरे खिल गए हैं और उन्होंने जोर-शोर से बुवाई शुरू कर दी हैं। यदि मानसून और बुवाई इसी गति से चलते रहे, तो करीब एक पखवाड़े से भी कम समय में बुवाई कार्य पूरा होने की उम्मीद है।
खरीफ फसलों की बुआई के लिए जुलाई का महीना अव्वल होता है। जिसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता रहती है। जुलाई की शुरूआत में हुई बरसात ने खेती के लिए सुधार कर दिया है। जबकि पिछले पांच सालों में 2012 को छोड़ इस वक्त बारिश के लिए आकाश की टकटकी लगानी पड़ती थी। परंतु भगवान इंद्र की समय से हुई मेहरबानी ने अच्छी खेती की संभावना जगा दी है। जुलाई के दूसरे सप्ताह के शुरू होते ही करीब 5 हजार हेक्टेयर रकबा में धान का आच्छादन कर लिया है। जबकि गत वर्ष अभी तक रोपनी का कार्य प्रारंभ भी नहीं हो पाया था। हालांकि बारिश की यह स्थिति जुलाई के सामान्य वर्षापात से काफी कम है, लेकिन अभी इस महीना पूरा होने में काफी दिन शेष है। लिहाजा मानसून के प्रति भरोसा बढ़ा है।
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अगर सरकारी आंकड़ों की मानें तो पाँच सौ तिरेसठ. पैंतीस लाख हेक्टेअर क्षेत्र में अब तक खरीफ की फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस अवधि में ये आंकड़ा केवल तीन सौ छियालीस. छियालीस लाख हेक्टेअर ही था। चालू मानसून में खरीफ फसलों की अब तक लगभग चौंतीस फीसदी बुवाई हो गई है। उसमें सबसे अच्छा काम दलहन और तिलहन की फसलों की बुवाई में हुआ है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक पखवाड़े में बुवाई कार्य पूरा हो जाएगा। इसबार लक्ष्य से अधिक बुवाई होने की संभावना है। इस समय मौसम मेहरबान है। लगातार हो रही वर्षा से किसानों के चेहरे खिल गए हैं और उन्होंने जोर-शोर से बुवाई शुरू कर दी हैं। यदि मानसून और बुवाई इसी गति से चलते रहे, तो करीब एक पखवाड़े से भी कम समय में बुवाई कार्य पूरा होने की उम्मीद है। खरीफ फसलों की बुआई के लिए जुलाई का महीना अव्वल होता है। जिसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता रहती है। जुलाई की शुरूआत में हुई बरसात ने खेती के लिए सुधार कर दिया है। जबकि पिछले पांच सालों में दो हज़ार बारह को छोड़ इस वक्त बारिश के लिए आकाश की टकटकी लगानी पड़ती थी। परंतु भगवान इंद्र की समय से हुई मेहरबानी ने अच्छी खेती की संभावना जगा दी है। जुलाई के दूसरे सप्ताह के शुरू होते ही करीब पाँच हजार हेक्टेयर रकबा में धान का आच्छादन कर लिया है। जबकि गत वर्ष अभी तक रोपनी का कार्य प्रारंभ भी नहीं हो पाया था। हालांकि बारिश की यह स्थिति जुलाई के सामान्य वर्षापात से काफी कम है, लेकिन अभी इस महीना पूरा होने में काफी दिन शेष है। लिहाजा मानसून के प्रति भरोसा बढ़ा है।
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आज हम आपके लिए काले चने और आलू की सब्जी बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। जिसकी मदद से आप इसे घर पर आसानी से तैयार कर सकती हैं। तो आइए जानते हैं इसे बनाने की रेसिपी।
आज हम आपके लिए काले चने और आलू की सब्जी बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। जिसकी मदद से आप इसे घर पर आसानी से तैयार कर सकती हैं। तो आइए जानते हैं इसे बनाने की रेसिपी।
- इसे बनाने के लिए आप सबसे पहले काले चने अच्छे से धोकर एक कटोरी में पानी के साथ रातभर भिगोकर रखें।
- फिर अगले दिन मीडियम आंच में एक प्रेशर कूकर में चना और पानी डालकर इसे 7-8 सीटियों में उबालें।
- फिर जब भाप निकल जाए तो मीडियम आंच में एक कड़ाही में तेल गरम करके इसमें आलू फ्राई करके अलग निकाल लें।
- इसके बाद अब जीरा डालकर चटकाएं.
- फिर अब जीरा डालकर चटक जाए तो तेल में धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डाल दें।
- मसाले के भुन जाने के बाद ही काला चना, आलू और नमक डालकर अच्छे से मिला लें।
- फिर 5-10 मिनट तक अच्छे से भूनकर गरम मसाला मिक्स कर दें।
- 2 मिनट तक भूनने के बाद गैस बंद कर दें।
आपके काले चने और आलू की सूखी सब्जी तैयार है।
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आज हम आपके लिए काले चने और आलू की सब्जी बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। जिसकी मदद से आप इसे घर पर आसानी से तैयार कर सकती हैं। तो आइए जानते हैं इसे बनाने की रेसिपी। आज हम आपके लिए काले चने और आलू की सब्जी बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। जिसकी मदद से आप इसे घर पर आसानी से तैयार कर सकती हैं। तो आइए जानते हैं इसे बनाने की रेसिपी। - इसे बनाने के लिए आप सबसे पहले काले चने अच्छे से धोकर एक कटोरी में पानी के साथ रातभर भिगोकर रखें। - फिर अगले दिन मीडियम आंच में एक प्रेशर कूकर में चना और पानी डालकर इसे सात-आठ सीटियों में उबालें। - फिर जब भाप निकल जाए तो मीडियम आंच में एक कड़ाही में तेल गरम करके इसमें आलू फ्राई करके अलग निकाल लें। - इसके बाद अब जीरा डालकर चटकाएं. - फिर अब जीरा डालकर चटक जाए तो तेल में धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डाल दें। - मसाले के भुन जाने के बाद ही काला चना, आलू और नमक डालकर अच्छे से मिला लें। - फिर पाँच-दस मिनट तक अच्छे से भूनकर गरम मसाला मिक्स कर दें। - दो मिनट तक भूनने के बाद गैस बंद कर दें। आपके काले चने और आलू की सूखी सब्जी तैयार है।
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पास का मारोप न गाया जा सके। पापा से फिसका सारा संगठन बिगड गाठा छ । यही मारण है कि प्रतिवेदनों की एक सागोपान व्यवस्था की महतारमा हुई है । इससे पदापान में बहुत कम अवसर रह जाता है। इस सबका मामन पर भी मैं वपना कबल हवास कर सकता है कि इस विद्या में सक्सि में उचित परोसन नहीं दिए है। चमाव के ऐसे मई त जिनसे वह काम उठा सकती थी। सिविल सर्विस के कई अधिकारी अपने अपमान का समय अध्ययन में लगाकर विश्वविद्यालय की उपाभियाँ प्राप्त करते है। यह मन्विप्न की ऐमी सति का प्रमाण है जिसके साथ प्रयोग करना समित होगा । अन्य गई व्यक्तियों में अपने से अने अधिकारियों के साथ बातचीत करने में यथेष्ट प्रशासनिक योग्यता का परिचय दिया है। इसमें से कुछ को मैं जानता हूँ और उन्हाने सिविल सर्विस टिब्यूनल के लिए जो अभियोग तम्मार किए थे ये उनकी प्रतिमा के सामी । पुनश्च मैत्यिक कार्य में जो योग्यता है उसमा पूरा उपयोग करने का प्रयास नहीं किया गया है। निम्न श्रेणिमो के अधिकारियों ने सामजनिक प्रशासन के साहित्य को अपनी विशिष्ट देनो से समुद्र किया है लेकिन सा उनके अफमरा पर कोई असर नहीं पड़ा है।
में इस बात पर इमलिए बरहा है कि यह निश्चित है कि यदि निम्न पेनी की माता का चची की योग्यता के साथ समस्यय हो जाये तो इसमे काम होगा। इससे यह परम्परागत मागरम टूट जायेगा जा बिमामीयानों के ऊपर अब भी इतनी बुरी तरह छाया हुआ है। इससे नूतन विचार मामन माप और मालोचना की नूवन बाटो की जोर ध्यान जायेगा । असे वर्ग के किसी जज के लिए यह जानना बड़ा कठिन है कि उससे नीचे के बर्य क्या मोच रहे है और यदि वह बसाधारण व्यक्ति नहीं है वाम पाने की भी चे माही करना । चूकि प्रशासनिक वर्म अपने से नीचे के बमों में भय रहता है इसलिए हम बर्मों की मापश्यनताओं के बारे में उसकी जामवारी होती है। इससे सिविल समिस के अधिकारी के इस विचार पर प्रभाव पड़ता है कि समग्रमा की गया सीमाएँ छानी चाहिएँ। उनके मुख विचारी पर जा आक्रमण होते हे मे मै अस्वीकार्य मालूम पड है क्योंकि स्वयं उस प्रकार के अनुभव से सौमा सम्पर्क नहीं होता जो इस प्रकार के बाहर्गों को बम्म बेता स्वर्म भिषिक सर्विस के बम्बर ही एसा अनुभव पर्याप्त मात्रा में है-निर्माण के समय उपयोग कर किया जाये तो उसे विभाग की परम्पराकों में मूलाबारी के सम्बन्ध में कुछ ऐसा समेह अस्प के पैदा हो जाये बाम सब के बधिकारी के लिए अत्यंत आवश्यक है। मेरा विचार है कि वर्तमान पाक में बह इससे बचित है और नमाज की सं पेनी से प्रयासम्बत्म होता है वह इस प्रकार के संदेह की उपलम्पिको मोसाइ नहीं देनी ।
यह स्पष्ट है कि इन मामलों में भी इन्तरिक परिवर्तन नहीं हो क्षमता नदि कोई परिवर्तन हुआ तो वह तमो हो समेगा बब कि सिधा-मवस्था में भी छान परिवर्तन हो इस समय विधिक समिस की एक प्रमुख
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पास का मारोप न गाया जा सके। पापा से फिसका सारा संगठन बिगड गाठा छ । यही मारण है कि प्रतिवेदनों की एक सागोपान व्यवस्था की महतारमा हुई है । इससे पदापान में बहुत कम अवसर रह जाता है। इस सबका मामन पर भी मैं वपना कबल हवास कर सकता है कि इस विद्या में सक्सि में उचित परोसन नहीं दिए है। चमाव के ऐसे मई त जिनसे वह काम उठा सकती थी। सिविल सर्विस के कई अधिकारी अपने अपमान का समय अध्ययन में लगाकर विश्वविद्यालय की उपाभियाँ प्राप्त करते है। यह मन्विप्न की ऐमी सति का प्रमाण है जिसके साथ प्रयोग करना समित होगा । अन्य गई व्यक्तियों में अपने से अने अधिकारियों के साथ बातचीत करने में यथेष्ट प्रशासनिक योग्यता का परिचय दिया है। इसमें से कुछ को मैं जानता हूँ और उन्हाने सिविल सर्विस टिब्यूनल के लिए जो अभियोग तम्मार किए थे ये उनकी प्रतिमा के सामी । पुनश्च मैत्यिक कार्य में जो योग्यता है उसमा पूरा उपयोग करने का प्रयास नहीं किया गया है। निम्न श्रेणिमो के अधिकारियों ने सामजनिक प्रशासन के साहित्य को अपनी विशिष्ट देनो से समुद्र किया है लेकिन सा उनके अफमरा पर कोई असर नहीं पड़ा है। में इस बात पर इमलिए बरहा है कि यह निश्चित है कि यदि निम्न पेनी की माता का चची की योग्यता के साथ समस्यय हो जाये तो इसमे काम होगा। इससे यह परम्परागत मागरम टूट जायेगा जा बिमामीयानों के ऊपर अब भी इतनी बुरी तरह छाया हुआ है। इससे नूतन विचार मामन माप और मालोचना की नूवन बाटो की जोर ध्यान जायेगा । असे वर्ग के किसी जज के लिए यह जानना बड़ा कठिन है कि उससे नीचे के बर्य क्या मोच रहे है और यदि वह बसाधारण व्यक्ति नहीं है वाम पाने की भी चे माही करना । चूकि प्रशासनिक वर्म अपने से नीचे के बमों में भय रहता है इसलिए हम बर्मों की मापश्यनताओं के बारे में उसकी जामवारी होती है। इससे सिविल समिस के अधिकारी के इस विचार पर प्रभाव पड़ता है कि समग्रमा की गया सीमाएँ छानी चाहिएँ। उनके मुख विचारी पर जा आक्रमण होते हे मे मै अस्वीकार्य मालूम पड है क्योंकि स्वयं उस प्रकार के अनुभव से सौमा सम्पर्क नहीं होता जो इस प्रकार के बाहर्गों को बम्म बेता स्वर्म भिषिक सर्विस के बम्बर ही एसा अनुभव पर्याप्त मात्रा में है-निर्माण के समय उपयोग कर किया जाये तो उसे विभाग की परम्पराकों में मूलाबारी के सम्बन्ध में कुछ ऐसा समेह अस्प के पैदा हो जाये बाम सब के बधिकारी के लिए अत्यंत आवश्यक है। मेरा विचार है कि वर्तमान पाक में बह इससे बचित है और नमाज की सं पेनी से प्रयासम्बत्म होता है वह इस प्रकार के संदेह की उपलम्पिको मोसाइ नहीं देनी । यह स्पष्ट है कि इन मामलों में भी इन्तरिक परिवर्तन नहीं हो क्षमता नदि कोई परिवर्तन हुआ तो वह तमो हो समेगा बब कि सिधा-मवस्था में भी छान परिवर्तन हो इस समय विधिक समिस की एक प्रमुख
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CBSE Board 10th, 12th Result 2023 : CBSE Board 10वीं, 12वीं के रिजल्ट डेट और टाइम का इंतजार सभी छात्र बड़ी बेसब्री के साथ कर रहे हैं। वहीं आज हम स्टूडेंट्स के लिए एक बड़ी ही महत्वपूर्ण जानकारी लेकर यहां आए हैं। CBSE 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 14 फरवरी 2023 से प्रारम्भ हुई थी, 10वीं कक्षा की एग्जाम 21 मार्च को समाप्त हुईं जबकि 12वीं कक्षा की एग्जाम 05 अप्रैल तक जारी रही थी। इस वर्ष लगभग 38 लाख स्टूडेंट्स ने CBSE 10वीं (मैट्रिक) और 12वीं (इंटरमीडिएट) बोर्ड एग्जाम के लिए पंजीयन किया था। छात्रों की सुविधा के लिए बोर्ड CBSE की ऑफिसियल वेबसाइट के अतिरिक्त डिजिलॉकर पर भी परीक्षा परिणाम जारी करेगा। डिजिलॉकर पर परिणाम चेक करने का स्टेप बाय स्टेप विधि आप यहां नीचे जरूर देख सकते हैं।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education, CBSE) शीघ्र ही CBSE बोर्ड परीक्षा परिणाम 2023 जारी करेगा। आशा है कि बोर्ड मई के फर्स्ट वीक में रिजल्ट डिक्लेयर कर देगी। ऐसे में पूरी प्रबल आशंका बनी हुई है कि परिणाम मई में डिक्लेयर हो जाएंगे। ऐसे में जून महीने में रिजल्ट होना बेहद कठिन है। हालांकि, इस विषय में बोर्ड ने फिलहाल कोई ऑफिसियल जानकारी तो नहीं दी है लेकिन ऐसे अंदेशे लगाए जा रहे है कि रिजल्ट का ऐलान जल्द कर दिया जाए।
- स्टेप 1: CBSE रिजल्ट जारी होने के बाद सर्व प्रथम अपने स्मार्ट फोन में सर्च इंजन गूगल ओपन करें।
- स्टेप 2: यहां डिजिलॉकर वेबसाइट digilocker. gov. in पर जाएं या प्ले स्टोर में डिजिलॉकर ऐप डाउनलोड करके खोलें।
- स्टेप 3: अब होम पेज पर साइन अप लिंक पर प्रेस करें।
- नंबर और 6 अंकों का सिक्योरिटी पिन दाखिल करें।
- स्टेप 5: अब इसके बाद पूछी गई सभी महत्वपूर्ण जानकारी भरने के बाद उपभोक्ता का नाम यहां पर सेट करें।
- स्टेप 6: वहीं अब अकाउंट बनने के बाद 'CBSE' लिंक पर क्लिक करें।
- स्टेप 7: यहां, 'CBSE X Result 2023', 'CBSE XII Result 2023' लिंक पर क्लिक करें।
- स्टेप 8: अब यहां पर अपना रोल नंबर और पंजीकृत मोबाइल नंबर दाखिल करें।
- अब आपका रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा।
- स्टेप 9: इसे चेक और डाउनलोड करके आप इसकी कॉपी भी अपने पास रख सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक, CBSE कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम मई के सेकेंड वीक में घोषित किए जाने की आशा जताई जा रही है। हालांकि, बोर्ड के ऑफिसर्स ने हाल फिलहाल परीक्षा परिणाम जारी करने के विषय में कोई ऑफिसियल डेट और टाइम की जानकारी नहीं दी है। बोर्ड जल्द ही अपनी ऑफिसियल वेबसाइट और ट्विटर अकाउंट के जरिए रिलीड डेट जारी कर सकता है। स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे ताजा जानकारी के लिए वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।
आपको बता दें कि इस वर्ष कुल 38,83,710 स्टूडेंट्स ने CBSE Board Exam 2023 के लिए पंजीकरण किया था। इनमें 10वीं क्लास के 21,86,940 छात्र और 12वीं क्लास के 16,96,770 छात्र सम्मिलित हुए। इन सभी स्टूडेंट्स का इंतजार अब बीएस कुछ ही दिनों में समाप्त होने वाला है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) शीघ्र अतिशीघ्र ही दोनों क्लास के बोर्ड रिजल्ट जारी करने वाला है।
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CBSE Board दसth, बारहth Result दो हज़ार तेईस : CBSE Board दसवीं, बारहवीं के रिजल्ट डेट और टाइम का इंतजार सभी छात्र बड़ी बेसब्री के साथ कर रहे हैं। वहीं आज हम स्टूडेंट्स के लिए एक बड़ी ही महत्वपूर्ण जानकारी लेकर यहां आए हैं। CBSE दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा चौदह फरवरी दो हज़ार तेईस से प्रारम्भ हुई थी, दसवीं कक्षा की एग्जाम इक्कीस मार्च को समाप्त हुईं जबकि बारहवीं कक्षा की एग्जाम पाँच अप्रैल तक जारी रही थी। इस वर्ष लगभग अड़तीस लाख स्टूडेंट्स ने CBSE दसवीं और बारहवीं बोर्ड एग्जाम के लिए पंजीयन किया था। छात्रों की सुविधा के लिए बोर्ड CBSE की ऑफिसियल वेबसाइट के अतिरिक्त डिजिलॉकर पर भी परीक्षा परिणाम जारी करेगा। डिजिलॉकर पर परिणाम चेक करने का स्टेप बाय स्टेप विधि आप यहां नीचे जरूर देख सकते हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड शीघ्र ही CBSE बोर्ड परीक्षा परिणाम दो हज़ार तेईस जारी करेगा। आशा है कि बोर्ड मई के फर्स्ट वीक में रिजल्ट डिक्लेयर कर देगी। ऐसे में पूरी प्रबल आशंका बनी हुई है कि परिणाम मई में डिक्लेयर हो जाएंगे। ऐसे में जून महीने में रिजल्ट होना बेहद कठिन है। हालांकि, इस विषय में बोर्ड ने फिलहाल कोई ऑफिसियल जानकारी तो नहीं दी है लेकिन ऐसे अंदेशे लगाए जा रहे है कि रिजल्ट का ऐलान जल्द कर दिया जाए। - स्टेप एक: CBSE रिजल्ट जारी होने के बाद सर्व प्रथम अपने स्मार्ट फोन में सर्च इंजन गूगल ओपन करें। - स्टेप दो: यहां डिजिलॉकर वेबसाइट digilocker. gov. in पर जाएं या प्ले स्टोर में डिजिलॉकर ऐप डाउनलोड करके खोलें। - स्टेप तीन: अब होम पेज पर साइन अप लिंक पर प्रेस करें। - नंबर और छः अंकों का सिक्योरिटी पिन दाखिल करें। - स्टेप पाँच: अब इसके बाद पूछी गई सभी महत्वपूर्ण जानकारी भरने के बाद उपभोक्ता का नाम यहां पर सेट करें। - स्टेप छः: वहीं अब अकाउंट बनने के बाद 'CBSE' लिंक पर क्लिक करें। - स्टेप सात: यहां, 'CBSE X Result दो हज़ार तेईस', 'CBSE XII Result दो हज़ार तेईस' लिंक पर क्लिक करें। - स्टेप आठ: अब यहां पर अपना रोल नंबर और पंजीकृत मोबाइल नंबर दाखिल करें। - अब आपका रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा। - स्टेप नौ: इसे चेक और डाउनलोड करके आप इसकी कॉपी भी अपने पास रख सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक, CBSE कक्षा दसवीं और बारहवीं के परीक्षा परिणाम मई के सेकेंड वीक में घोषित किए जाने की आशा जताई जा रही है। हालांकि, बोर्ड के ऑफिसर्स ने हाल फिलहाल परीक्षा परिणाम जारी करने के विषय में कोई ऑफिसियल डेट और टाइम की जानकारी नहीं दी है। बोर्ड जल्द ही अपनी ऑफिसियल वेबसाइट और ट्विटर अकाउंट के जरिए रिलीड डेट जारी कर सकता है। स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे ताजा जानकारी के लिए वेबसाइट पर नजर बनाए रखें। आपको बता दें कि इस वर्ष कुल अड़तीस,तिरासी,सात सौ दस स्टूडेंट्स ने CBSE Board Exam दो हज़ार तेईस के लिए पंजीकरण किया था। इनमें दसवीं क्लास के इक्कीस,छियासी,नौ सौ चालीस छात्र और बारहवीं क्लास के सोलह,छियानवे,सात सौ सत्तर छात्र सम्मिलित हुए। इन सभी स्टूडेंट्स का इंतजार अब बीएस कुछ ही दिनों में समाप्त होने वाला है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड शीघ्र अतिशीघ्र ही दोनों क्लास के बोर्ड रिजल्ट जारी करने वाला है।
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खबर है कि आतंकियों के स्वर्ग कहे जाने वाले पाक में, आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ व हिंदुस्तान के मोस्ट वांटेड आतंकवादी, सैयद सलाहुद्दीन पर हमला हुआ है, इसमें उसके घायल होने की समाचार है, लेकिन सलाहुद्दीन पर हुए इस हमले का संदेह ISI पर जताया जा रहा है।
अब सवाल ये उठता है कि ISI ने आखिर अपने प्रिय आतंकी सैयद सलाहुद्दीन पर हमला क्यों करवाया। इसकी वजह के बारे में हम आगे विस्तार से आपको बताएंगे। पहले आतंकी सलाहुद्दीन पर हमले की डिटेल्स आपको बता देते हैं।
सलाहुद्दीन पर ये हमला, 25 मई की रात में पाक की राजधानी इस्लामाबाद में हुआ। जिसमें सलाहुद्दीन बुरी तरह घायल हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने सलाहुद्दीन की कार को बम से उड़ा दिया। बम धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज करीब पांच किलोमीटर दूर तक सुनी गई। बताया जा रहा है कि हमले के वक्त सलाहुद्दीन, ISI अधिकारियों के साथ बैठक के लिए जा रहा था।
पाक में इंडियन आर्मी की सर्जिकल हड़ताल व एयर हड़ताल के बाद, आपके मन में ये सवाल भी जरूर आया होगा कि क्या भारतीय सेना, हाफिज सईद व मसूद अजहर जैसे मोस्ट वांटेड आतंकियों को पाक में घुसकर नहीं मार सकती।
आपको जानकर खुशी होगी कि इंडियन आर्मी का ये कार्य अब पाक की खुफिया एजेंसी ISI ने अपने हाथों में ले लिया है।
हमले के बाद पाक के Geo News पर इसकी ब्रेकिंग न्यूज भी चली। लेकिन थोड़ी ही देर बाद, Geo News ने समाचार हटा दी। ऐसा क्यों हुआ, इसे समझना कठिन नहीं है, क्योंकि सब जानते हैं कि पाक का मीडिया भी पाकिस्तानी सेना व आईएसआई के इशारों पर ही चलता है।
सलाहुद्दीन पर हमले की ये समाचार न तो पाक के किसी न्यूज चैनल पर चली व ना ही किसी बड़े अखबार में प्रकाशित हुई। हालांकि, हमले के बाद से, न तो सलाहुद्दीन की लोकेशन के बारे में कोई जानकारी है व न ही ये पता है कि वो जिंदा है या मारा गया। लेकिन बोला जा रहा है कि ISI ने ही घायल सलाहुद्दीन को किसी गुप्त स्थान पर रखा हुआ है व ISI के कहने पर ही पाक की मीडिया ने इस समाचार को दबा दिया है।
लेकिन सवाल ये नहीं है कि सलाहुद्दीन मारा गया या नहीं। सवाल तो ये है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि हिजबुल मुजाहिदीन के जिस चीफ को ISI ने पाला-पोसा, वही उसकी जान की शत्रु क्यों बन गई। आखिर ISI की आंखों का तारा, उसकी ही आंखों में इतना क्यों चुभने लगा।
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खबर है कि आतंकियों के स्वर्ग कहे जाने वाले पाक में, आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ व हिंदुस्तान के मोस्ट वांटेड आतंकवादी, सैयद सलाहुद्दीन पर हमला हुआ है, इसमें उसके घायल होने की समाचार है, लेकिन सलाहुद्दीन पर हुए इस हमले का संदेह ISI पर जताया जा रहा है। अब सवाल ये उठता है कि ISI ने आखिर अपने प्रिय आतंकी सैयद सलाहुद्दीन पर हमला क्यों करवाया। इसकी वजह के बारे में हम आगे विस्तार से आपको बताएंगे। पहले आतंकी सलाहुद्दीन पर हमले की डिटेल्स आपको बता देते हैं। सलाहुद्दीन पर ये हमला, पच्चीस मई की रात में पाक की राजधानी इस्लामाबाद में हुआ। जिसमें सलाहुद्दीन बुरी तरह घायल हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने सलाहुद्दीन की कार को बम से उड़ा दिया। बम धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज करीब पांच किलोमीटर दूर तक सुनी गई। बताया जा रहा है कि हमले के वक्त सलाहुद्दीन, ISI अधिकारियों के साथ बैठक के लिए जा रहा था। पाक में इंडियन आर्मी की सर्जिकल हड़ताल व एयर हड़ताल के बाद, आपके मन में ये सवाल भी जरूर आया होगा कि क्या भारतीय सेना, हाफिज सईद व मसूद अजहर जैसे मोस्ट वांटेड आतंकियों को पाक में घुसकर नहीं मार सकती। आपको जानकर खुशी होगी कि इंडियन आर्मी का ये कार्य अब पाक की खुफिया एजेंसी ISI ने अपने हाथों में ले लिया है। हमले के बाद पाक के Geo News पर इसकी ब्रेकिंग न्यूज भी चली। लेकिन थोड़ी ही देर बाद, Geo News ने समाचार हटा दी। ऐसा क्यों हुआ, इसे समझना कठिन नहीं है, क्योंकि सब जानते हैं कि पाक का मीडिया भी पाकिस्तानी सेना व आईएसआई के इशारों पर ही चलता है। सलाहुद्दीन पर हमले की ये समाचार न तो पाक के किसी न्यूज चैनल पर चली व ना ही किसी बड़े अखबार में प्रकाशित हुई। हालांकि, हमले के बाद से, न तो सलाहुद्दीन की लोकेशन के बारे में कोई जानकारी है व न ही ये पता है कि वो जिंदा है या मारा गया। लेकिन बोला जा रहा है कि ISI ने ही घायल सलाहुद्दीन को किसी गुप्त स्थान पर रखा हुआ है व ISI के कहने पर ही पाक की मीडिया ने इस समाचार को दबा दिया है। लेकिन सवाल ये नहीं है कि सलाहुद्दीन मारा गया या नहीं। सवाल तो ये है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि हिजबुल मुजाहिदीन के जिस चीफ को ISI ने पाला-पोसा, वही उसकी जान की शत्रु क्यों बन गई। आखिर ISI की आंखों का तारा, उसकी ही आंखों में इतना क्यों चुभने लगा।
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महाभारत सभापर्व ।
मनुष्य नियत हैं या नहीं जो तुम से प्रीति रखने हो, तुम्हारा चाय चाहते हों ? और तुम अपनी रक्षा महल के भोवर र बाहर रहने वाले मनुष्यों से और उन मनुष्यों की रक्षा पुत्र और मंत्रियों से और पुत्र की रक्षा मंत्री से, और
से करते हो या नहीं ? और पान, घृव, कोड़ा लियों के लिए जो तुम्हारा सूर्य होता है, वह तुम्हारे कर लोग वो नहीं करते है ? और तुम्हारा सर्च लाभ से भाघा, याई वा वीसरे दिल्ले में अच्छे प्रकार से हो जाता है या हो ? और तुम दरिडो, जातीय, गुरु, वृद्ध, व्यापारी और शिल्प
जानने वालों पर धन-धान्य देकर कृरा रस हो या नहीं ? र भावव्यय अर्थान जमा-खर्च के रखने वाले गए और कि त हिसाब करने वाले मुत्सद्दो लोग तुमको समय समय रे हिसाब समझाते रहते हैं या नहीं ? चतुर और हितकारी नुष्यों को निरपराध अपने अधिकार से अलग तो नहीं कर देते T१ और उत्तम, मध्यम नीच पुरुषों के साथ यथायोग्य वर्त्ताव
हो या नहीं? और तुम्हारे काम करने को ऐसे मनुष्य तो युक्त नहीं हैं जो लोभी, चोर और तुन से वैरभाव मानवे हों ? र तुम्हारा देश लोभी, चोर, कुमारों प्रघा तुम से पोड़ा तो नहीं पाता है ? और तुम्हारे किमान दुष्ट तो नहीं है ? तुम्हारे देश वडाग जन-पूरी बड़े बड़े और क्या थानों पर हैं या नहीं ? तुम्हारे किसानों को आजीविका और चीन की कोई मनुष्य नष्ट दी नहीं करता है और तुम किसी का अनुप्रह-धन, भर्यान ठकावी चौथाई बात पर है या नहीं और तुम्हारीबानां
संमद्दशिरोमणि ।
भर्घात् खेती, वाणिज्य, पशुपालन, व लेन देन के व्याज का व्य अच्छे मनुष्यों के द्वारा रहता है या नहीं ? क्योंकि "वार्ता" प्रचार से पड़ी वृद्धि होती है और तुम्हारं सम्पूर्ण राज्य में एक स्थान पर पाँच पाँच मनुष्य जो शूरवीर और बुद्धिमान शान्ति रखने के लिए नियत है या नहीं ? तुमने नगर को रक्षा लिए मामों को नगर के समान, व पत्तियों को ग्रामों के समान दिया है या नहीं ? और वहाँ के रहने वाले तुमको कर देते हैं नहीं ? और तुम्हारे राज्य में शूरवीर लोग सेना को लेकर देश और नगरों में भ्रमय अर्थात् दौरा करते हैं या नहीं ? ं चौरादिकों को मारते हैं या नहीं ? और तुम स्त्रियों से मोठी पो पोल कर उनकी रक्षा करते हो या नहीं ? स्त्रियों की बाव विश्वास तो नहीं करते और कहीं उनसे गुम बात तो नहीं करते और ऐसा तो नहीं करते कि अपने देश में किसी विघ्न को सुन उसका विना उपाय किये हुये मद्दल में सो रहते हो ? रात्रि दोपहर सोकर पिछले पहर में उठ कर अपने हिव की वार्ता । विचार करते है। या नहीं ? और समय पर मन्त्रियों सहित या आकर सब मनुष्यों को पर्याद सुनते हो या नहीं ? और चलते है बैठते समय तुम्हारे चारों और रक्त वस्त्र पहिरे हुए और हाथ नङ्गी तलवारें लिये हुए मनुष्य तुम्हारी रक्षा के लिए रहते हैं नहीं ? और दण्डनीय मनुष्या को तुम यमराज के समान दण्ड दे हा या नहीं ? और अपन प्रिय अप्रिय और पूज्या के साथ यथ याय बर्ताव रखते हो या नहीं ? और शरीर क ख का आषधिये स और मन की बाधा का वृद्धा का सवा मदर करते दो
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महाभारत सभापर्व । मनुष्य नियत हैं या नहीं जो तुम से प्रीति रखने हो, तुम्हारा चाय चाहते हों ? और तुम अपनी रक्षा महल के भोवर र बाहर रहने वाले मनुष्यों से और उन मनुष्यों की रक्षा पुत्र और मंत्रियों से और पुत्र की रक्षा मंत्री से, और से करते हो या नहीं ? और पान, घृव, कोड़ा लियों के लिए जो तुम्हारा सूर्य होता है, वह तुम्हारे कर लोग वो नहीं करते है ? और तुम्हारा सर्च लाभ से भाघा, याई वा वीसरे दिल्ले में अच्छे प्रकार से हो जाता है या हो ? और तुम दरिडो, जातीय, गुरु, वृद्ध, व्यापारी और शिल्प जानने वालों पर धन-धान्य देकर कृरा रस हो या नहीं ? र भावव्यय अर्थान जमा-खर्च के रखने वाले गए और कि त हिसाब करने वाले मुत्सद्दो लोग तुमको समय समय रे हिसाब समझाते रहते हैं या नहीं ? चतुर और हितकारी नुष्यों को निरपराध अपने अधिकार से अलग तो नहीं कर देते Tएक और उत्तम, मध्यम नीच पुरुषों के साथ यथायोग्य वर्त्ताव हो या नहीं? और तुम्हारे काम करने को ऐसे मनुष्य तो युक्त नहीं हैं जो लोभी, चोर और तुन से वैरभाव मानवे हों ? र तुम्हारा देश लोभी, चोर, कुमारों प्रघा तुम से पोड़ा तो नहीं पाता है ? और तुम्हारे किमान दुष्ट तो नहीं है ? तुम्हारे देश वडाग जन-पूरी बड़े बड़े और क्या थानों पर हैं या नहीं ? तुम्हारे किसानों को आजीविका और चीन की कोई मनुष्य नष्ट दी नहीं करता है और तुम किसी का अनुप्रह-धन, भर्यान ठकावी चौथाई बात पर है या नहीं और तुम्हारीबानां संमद्दशिरोमणि । भर्घात् खेती, वाणिज्य, पशुपालन, व लेन देन के व्याज का व्य अच्छे मनुष्यों के द्वारा रहता है या नहीं ? क्योंकि "वार्ता" प्रचार से पड़ी वृद्धि होती है और तुम्हारं सम्पूर्ण राज्य में एक स्थान पर पाँच पाँच मनुष्य जो शूरवीर और बुद्धिमान शान्ति रखने के लिए नियत है या नहीं ? तुमने नगर को रक्षा लिए मामों को नगर के समान, व पत्तियों को ग्रामों के समान दिया है या नहीं ? और वहाँ के रहने वाले तुमको कर देते हैं नहीं ? और तुम्हारे राज्य में शूरवीर लोग सेना को लेकर देश और नगरों में भ्रमय अर्थात् दौरा करते हैं या नहीं ? ं चौरादिकों को मारते हैं या नहीं ? और तुम स्त्रियों से मोठी पो पोल कर उनकी रक्षा करते हो या नहीं ? स्त्रियों की बाव विश्वास तो नहीं करते और कहीं उनसे गुम बात तो नहीं करते और ऐसा तो नहीं करते कि अपने देश में किसी विघ्न को सुन उसका विना उपाय किये हुये मद्दल में सो रहते हो ? रात्रि दोपहर सोकर पिछले पहर में उठ कर अपने हिव की वार्ता । विचार करते है। या नहीं ? और समय पर मन्त्रियों सहित या आकर सब मनुष्यों को पर्याद सुनते हो या नहीं ? और चलते है बैठते समय तुम्हारे चारों और रक्त वस्त्र पहिरे हुए और हाथ नङ्गी तलवारें लिये हुए मनुष्य तुम्हारी रक्षा के लिए रहते हैं नहीं ? और दण्डनीय मनुष्या को तुम यमराज के समान दण्ड दे हा या नहीं ? और अपन प्रिय अप्रिय और पूज्या के साथ यथ याय बर्ताव रखते हो या नहीं ? और शरीर क ख का आषधिये स और मन की बाधा का वृद्धा का सवा मदर करते दो
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है। घञ्चलवासे इष्ट सिद्धि नहीं, एकता नहीं अतएव ध्यान सिद्धि भी नहीं ।
(९1१०1११ ) १५० विपेर पूर्वक की गई भक्ति ही कन्यागशरिणी है। भक्ति उसकी उपयोगिनी है जिनके रागात दोष व आर रणादि कर्म दूर हुए हों। उसे आप्त बहते हैं।
( १०113 । ४४ ) १५३ समारमें सभी मनुष्य उर्प चाहते हैं, नि नहीं परन्तु उसके अभ्यती प्रभुताका अभाव है, यदी आमो है। यदि यह न हो तब कोई हानि नहीं। जगतका मूल कारण यही ईपी है।
( १४ ११४ ) १५४ किसी मनुष्यसे दैन्य व्यवहार न करना। मनुष्यकी तो यात छोड़ो परमात्मासे भी दैन्य शब्दा द्वारा प्रार्थना न करना । होगा वही जैसी परिणामांकी निर्मलता रहेगी। कोई बुद्ध नहीं कर सरना, केवल हमारे विकल्प ही हमें दुग्यदायी है।
( १५/21 ) १५५ यह पापी पेट है जिसके लिये मनुष्य समारके अनर्थ करना पड़ते हैं। इसका कार्य उदरपूर्ति-भोपन है। भोजन की इच्छाका नाम ही आहार है। इस आहार मझाके कारण ससारमे महान् अनर्थ होते हैं। अनर्थनीजह माननी गृघ्नता है। अच्छे अच्छे महान् पुरुप इसके वशीभूत होकर जो जो क्रियाएँ करते हैं वह किसीसे गुप्त नहा। भोजनकी लालसा भन्छे अच्छे पुरुषा तिरस्कार कराने में कारण होती है। (२१ । ५३४९ ) ९५६ पदार्थ से भिन्न आमनियर जो पर पहायमें
राग-द्वेषका त्याग कर देता है वही पूर्ण ब्रह्मचर्यका पालन करने वाला होता है। लौकिक मनुष्य केवल जननेन्द्रिय द्वारा विषय सेवनको ही ब्रह्मचर्यका घात मानते हैं परन्तु परमार्थसे सभी इन्द्रियों द्वारा जो विषय की इच्छा है यह सम्पूर्ण ब्रह्मचर्यकी घातक है।
( २९ १५ । ४६ ) अदत्त वस्तु ग्रहण करनेका भावमात्र चोरी है। चाहे वस्तुका ग्रहण हो चाहे न हो। आत्मातिरिक्त जो भी वस्तु है पर है । आत्माना वास्तव रूपज्ञान-दर्शन है। रागादिक श्रदायिन भाव है, अपने औपाधि हैं । उनको निन मानना चोरी है। पर वस्तु न ग्रहण हुई और न होती है उसे निज माननेका भाव ही चोरी है ।
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है। घञ्चलवासे इष्ट सिद्धि नहीं, एकता नहीं अतएव ध्यान सिद्धि भी नहीं । एक सौ पचास विपेर पूर्वक की गई भक्ति ही कन्यागशरिणी है। भक्ति उसकी उपयोगिनी है जिनके रागात दोष व आर रणादि कर्म दूर हुए हों। उसे आप्त बहते हैं। एक सौ तिरेपन समारमें सभी मनुष्य उर्प चाहते हैं, नि नहीं परन्तु उसके अभ्यती प्रभुताका अभाव है, यदी आमो है। यदि यह न हो तब कोई हानि नहीं। जगतका मूल कारण यही ईपी है। एक सौ चौवन किसी मनुष्यसे दैन्य व्यवहार न करना। मनुष्यकी तो यात छोड़ो परमात्मासे भी दैन्य शब्दा द्वारा प्रार्थना न करना । होगा वही जैसी परिणामांकी निर्मलता रहेगी। कोई बुद्ध नहीं कर सरना, केवल हमारे विकल्प ही हमें दुग्यदायी है। एक सौ पचपन यह पापी पेट है जिसके लिये मनुष्य समारके अनर्थ करना पड़ते हैं। इसका कार्य उदरपूर्ति-भोपन है। भोजन की इच्छाका नाम ही आहार है। इस आहार मझाके कारण ससारमे महान् अनर्थ होते हैं। अनर्थनीजह माननी गृघ्नता है। अच्छे अच्छे महान् पुरुप इसके वशीभूत होकर जो जो क्रियाएँ करते हैं वह किसीसे गुप्त नहा। भोजनकी लालसा भन्छे अच्छे पुरुषा तिरस्कार कराने में कारण होती है। नौ सौ छप्पन पदार्थ से भिन्न आमनियर जो पर पहायमें राग-द्वेषका त्याग कर देता है वही पूर्ण ब्रह्मचर्यका पालन करने वाला होता है। लौकिक मनुष्य केवल जननेन्द्रिय द्वारा विषय सेवनको ही ब्रह्मचर्यका घात मानते हैं परन्तु परमार्थसे सभी इन्द्रियों द्वारा जो विषय की इच्छा है यह सम्पूर्ण ब्रह्मचर्यकी घातक है। अदत्त वस्तु ग्रहण करनेका भावमात्र चोरी है। चाहे वस्तुका ग्रहण हो चाहे न हो। आत्मातिरिक्त जो भी वस्तु है पर है । आत्माना वास्तव रूपज्ञान-दर्शन है। रागादिक श्रदायिन भाव है, अपने औपाधि हैं । उनको निन मानना चोरी है। पर वस्तु न ग्रहण हुई और न होती है उसे निज माननेका भाव ही चोरी है ।
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