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द मदर टेरेसा ऑफ ओडिशा के नाम से जाने जानी वाली पार्वती गिरि भारत की महिला स्वतंत्रता सेनानीयों में से एक थी। उन्होंने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता और गांधी जी के वचनों से वह इस कदर प्रभावित थीं कि उन्होंने तीसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ कांग्रेस का प्रचार शुरू किया। उन्हें कई गांवों की यात्रा कि और कांग्रेस के बारे में लोगों को बताया। छोटी सी उम्र में देश प्रेम की भावना ने उन्होंने स्वतंत्रता में बढ़-चढ़ के हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया। वह 11 साल की थी जब उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देना शुरू किया था । 16 साल की उम्र में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और उस आंदोलन में वह सबसे आगे रहीं। उन्हें कई बार गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन नाबालिग होने की वजह से उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाता था। लेकिन फिर अंग्रेजों ने आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर 2 साल के कठोर कारवास पर भेज दिया। लेकिन पार्वती ने हार नहीं मानी और वह तब भी स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी रही। देश के स्वतंत्रता के साथ साथ उन्होंने देश वासियों और जरूरतमंदों के लिए कार्य करना शुरू किए। अनाथों, महिलाओं और उन लोगों के लिए आश्रम बनवाए जिनके पास रहने के लिए कोई स्थान नहीं था। स्वतंत्रता संग्राम और देश कल्याण के उनके कार्यों को भारत आज नमन करता है। आइए जाने पार्वती गिरि के जीवन के बारे में।
ओडिशा की मदर टेरेसा के नाम से जाने जाने वाली पार्वती गिरि का जन्म 19 जनवरी 1926 में बरगढ़ जिले और संबलपूर जिले के समवाईपदार गांव में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा केवल तीसरी कक्षा तक ली और उसके बाद से ही वह कांग्रेस के लिए प्रचार करने लगी। ऐसे वह गांव गांव में जाकर कांग्रेस पार्टी का प्रचार करने लगी। 1938 में कांग्रेस के नेता ने पार्वती गिरि के पिता को समलाईपदार की एक बैठक दौरान कांग्रेस में उनके काम करने के लिए काफी मनाने की कोशिश की। उस दौरान पार्वती केवल 12 वर्ष की थी।
पार्वती गिरि एक युवा लड़की के तौर पर बारी आश्रम की गई और वहां उन्होंने हस्तशिल्प, अहिंसा के दर्शन और आत्मनिर्भरता के साथ कई सारी चीजें सीखीं।
पार्वती गिरि अकेली नहीं थी उनके चाचा भी कांग्रेसी नेता थे। पार्वती गिरि स्वतंत्रता में अपना योगदान देना चाहती थी और एक स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर कार्य करना चाहती थी, इसलिए वह अपने चाचा के साथ बैठ के सुना करती थी। वह कांग्रेस और भारत की स्वतंत्रता के लिए बहुत समर्पित थी। उन्होंने कांग्रेस के लिए 1940 में बरगढ़, संबलपुर, पदमपुर, पनिमारा और घेंस के साथ कई अन्य स्थानों की यात्रा शुरू की। अपनी इस यात्रा के दौरान पार्वती गिरि ने ग्रामीण लोगों को खादी काटना और बुनना सिखाया।
1942 में उन्होंने 'भारत छोड़ो आंदोलन' के लिए कई अभियानों का नेतृत्व किया जिसके लिए उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। नाबालिग होने के नाते हर बार पुलिस को उन्हें छोड़ना पड़ा। लेकिन जब पार्वती गिरि ने एसडीओ के कार्यालय पर हमला किया तो उनकी गिरफ्तारी हुई और उन्हे दो साल के कारावास की सजा दी गई।
बारगढ़ कोर्ट में अंग्रजों के खिलाफ उन्होंने वकीलों को अदालत के बहिष्कार करने को कहा। वकीलों को इस बहिष्कार के लिए राजी करने के लिए उन्होंने एक आंदोलन भी चलाया।
पार्वती गिरी ने 16 साल की उम्र में गांधी जी के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में हिस्सा लिया और वह इस आंदोलन में सबसे आगे भी रही।
15 अगस्त 1947 में भारत को आजादी मिली। आजादी के बाद पार्वती ने 1950 में इलाहाबाद में प्रयाग विद्यापीठ से अपनी बची हुई स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने लोगों की सहायता कार्य किया और 1954 में वह रमा देवी के साथ राहत कार्यों में भाग लेने लगी।
1955 में संबलपुर जिले में रहने वाले लोगों के स्वास्थय और स्वच्छाता में सुधार करने के लिए वह अमेरिकी परियोजना का हिस्सा बनी।
इसके बाद पार्वती गिरि ने महिलाओं और अनाथ बच्चों के लिए कस्तूरबा गांधी मातृनिकेतन नामक आश्रम की शुरूआत की। इस आश्रम को उन्होंने नृसिंहनाथ में शुरू किया। इसके बाद उन्होंने संबलपुर जिले के बिरसिंह गर में एक एक और आश्रम खोला जिसका नाम डॉ. संतरा बाल निकेतन था। इस तरह स्वतंत्रता के बाद उन्होंने कल्याण कार्यों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। पहले उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए खुद को समर्पित किया उसके बाद उन्होंने देश वासियों के कल्याण में अपना बचा हुआ जीवन समर्पित किया।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए और लोगों के कल्याण कार्यें करने की उनकी इच्छा और दृढ़ निश्चय से लोगों ने उन्हें "ओडिशा की मदर टेरेसा" के नाम से सम्मानित किया गया ।
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द मदर टेरेसा ऑफ ओडिशा के नाम से जाने जानी वाली पार्वती गिरि भारत की महिला स्वतंत्रता सेनानीयों में से एक थी। उन्होंने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता और गांधी जी के वचनों से वह इस कदर प्रभावित थीं कि उन्होंने तीसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ कांग्रेस का प्रचार शुरू किया। उन्हें कई गांवों की यात्रा कि और कांग्रेस के बारे में लोगों को बताया। छोटी सी उम्र में देश प्रेम की भावना ने उन्होंने स्वतंत्रता में बढ़-चढ़ के हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया। वह ग्यारह साल की थी जब उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देना शुरू किया था । सोलह साल की उम्र में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और उस आंदोलन में वह सबसे आगे रहीं। उन्हें कई बार गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन नाबालिग होने की वजह से उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाता था। लेकिन फिर अंग्रेजों ने आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर दो साल के कठोर कारवास पर भेज दिया। लेकिन पार्वती ने हार नहीं मानी और वह तब भी स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी रही। देश के स्वतंत्रता के साथ साथ उन्होंने देश वासियों और जरूरतमंदों के लिए कार्य करना शुरू किए। अनाथों, महिलाओं और उन लोगों के लिए आश्रम बनवाए जिनके पास रहने के लिए कोई स्थान नहीं था। स्वतंत्रता संग्राम और देश कल्याण के उनके कार्यों को भारत आज नमन करता है। आइए जाने पार्वती गिरि के जीवन के बारे में। ओडिशा की मदर टेरेसा के नाम से जाने जाने वाली पार्वती गिरि का जन्म उन्नीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में बरगढ़ जिले और संबलपूर जिले के समवाईपदार गांव में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा केवल तीसरी कक्षा तक ली और उसके बाद से ही वह कांग्रेस के लिए प्रचार करने लगी। ऐसे वह गांव गांव में जाकर कांग्रेस पार्टी का प्रचार करने लगी। एक हज़ार नौ सौ अड़तीस में कांग्रेस के नेता ने पार्वती गिरि के पिता को समलाईपदार की एक बैठक दौरान कांग्रेस में उनके काम करने के लिए काफी मनाने की कोशिश की। उस दौरान पार्वती केवल बारह वर्ष की थी। पार्वती गिरि एक युवा लड़की के तौर पर बारी आश्रम की गई और वहां उन्होंने हस्तशिल्प, अहिंसा के दर्शन और आत्मनिर्भरता के साथ कई सारी चीजें सीखीं। पार्वती गिरि अकेली नहीं थी उनके चाचा भी कांग्रेसी नेता थे। पार्वती गिरि स्वतंत्रता में अपना योगदान देना चाहती थी और एक स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर कार्य करना चाहती थी, इसलिए वह अपने चाचा के साथ बैठ के सुना करती थी। वह कांग्रेस और भारत की स्वतंत्रता के लिए बहुत समर्पित थी। उन्होंने कांग्रेस के लिए एक हज़ार नौ सौ चालीस में बरगढ़, संबलपुर, पदमपुर, पनिमारा और घेंस के साथ कई अन्य स्थानों की यात्रा शुरू की। अपनी इस यात्रा के दौरान पार्वती गिरि ने ग्रामीण लोगों को खादी काटना और बुनना सिखाया। एक हज़ार नौ सौ बयालीस में उन्होंने 'भारत छोड़ो आंदोलन' के लिए कई अभियानों का नेतृत्व किया जिसके लिए उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। नाबालिग होने के नाते हर बार पुलिस को उन्हें छोड़ना पड़ा। लेकिन जब पार्वती गिरि ने एसडीओ के कार्यालय पर हमला किया तो उनकी गिरफ्तारी हुई और उन्हे दो साल के कारावास की सजा दी गई। बारगढ़ कोर्ट में अंग्रजों के खिलाफ उन्होंने वकीलों को अदालत के बहिष्कार करने को कहा। वकीलों को इस बहिष्कार के लिए राजी करने के लिए उन्होंने एक आंदोलन भी चलाया। पार्वती गिरी ने सोलह साल की उम्र में गांधी जी के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में हिस्सा लिया और वह इस आंदोलन में सबसे आगे भी रही। पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत को आजादी मिली। आजादी के बाद पार्वती ने एक हज़ार नौ सौ पचास में इलाहाबाद में प्रयाग विद्यापीठ से अपनी बची हुई स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने लोगों की सहायता कार्य किया और एक हज़ार नौ सौ चौवन में वह रमा देवी के साथ राहत कार्यों में भाग लेने लगी। एक हज़ार नौ सौ पचपन में संबलपुर जिले में रहने वाले लोगों के स्वास्थय और स्वच्छाता में सुधार करने के लिए वह अमेरिकी परियोजना का हिस्सा बनी। इसके बाद पार्वती गिरि ने महिलाओं और अनाथ बच्चों के लिए कस्तूरबा गांधी मातृनिकेतन नामक आश्रम की शुरूआत की। इस आश्रम को उन्होंने नृसिंहनाथ में शुरू किया। इसके बाद उन्होंने संबलपुर जिले के बिरसिंह गर में एक एक और आश्रम खोला जिसका नाम डॉ. संतरा बाल निकेतन था। इस तरह स्वतंत्रता के बाद उन्होंने कल्याण कार्यों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। पहले उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए खुद को समर्पित किया उसके बाद उन्होंने देश वासियों के कल्याण में अपना बचा हुआ जीवन समर्पित किया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए और लोगों के कल्याण कार्यें करने की उनकी इच्छा और दृढ़ निश्चय से लोगों ने उन्हें "ओडिशा की मदर टेरेसा" के नाम से सम्मानित किया गया ।
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Ghatshila : रूर्बन मिशन व पर्यटन का निरीक्षण करने के लिए भारत सरकार ग्रामीण विकास के सचिव एनएन सिन्हा सोमवार को घाटशिला पहुंचे. वे सुबह घाटशिला गोल्फ ग्राउंड में हेलीकॉप्टर से उतरे. इसके बाद एचसीएल के डायरेक्टर बंग्लो पहुंचे. मौके पर उनके साथ झारखंड के ग्रामीण विकास सचिव प्रशांत कुमार, आइएएस राजेश्वरी बी, डीसी सूरज कुमार के अन्य अधिकारी शामिल थे.
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Ghatshila : रूर्बन मिशन व पर्यटन का निरीक्षण करने के लिए भारत सरकार ग्रामीण विकास के सचिव एनएन सिन्हा सोमवार को घाटशिला पहुंचे. वे सुबह घाटशिला गोल्फ ग्राउंड में हेलीकॉप्टर से उतरे. इसके बाद एचसीएल के डायरेक्टर बंग्लो पहुंचे. मौके पर उनके साथ झारखंड के ग्रामीण विकास सचिव प्रशांत कुमार, आइएएस राजेश्वरी बी, डीसी सूरज कुमार के अन्य अधिकारी शामिल थे.
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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा है कि मनमोहन सिंह सरकार पर फिलहाल कोई ख़तरा नहीं है, बशर्ते सभी संदेहों को दूर करने के बाद ही परमाणु समझौते पर आगे बढ़ा जाए.
इस बीच विदेश दौरे से लौटी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ख़ुद अगले हफ़्ते वामपंथी दलों से इस मसले पर बात कर सकती हैं.
उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने कहा, 'हम अपनी पार्टी में बातचीत करने के बाद अगले हफ़्ते उनसे (वाम दलों) बात करेंगे'.
हालाँकि दक्षिण अफ़्रीका से लौटते ही सोनिया गांधी ने शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत की. इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे.
'सरकार पर ख़तरा नहीं'
परमाणु करार के मामले पर वामपंथी दलों के रवैये में और नरमी आने के संकेत शुक्रवार को मिले जब माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार पर कोई ख़तरा नहीं देख रही है.
उनका कहना था, मैं इसे संकट के तौर पर नहीं देख रहा हूँ. ये (संकट) कहाँ था और कहाँ चला गया. हम यही कह रहे हैं कि बिना समीक्षा किए आगे न बढ़ें. "
येचुरी ने कहा कि सरकार को सिर्फ़ 'पॉज़' का बटन दबाना चाहिए, 'स्टॉप' या 'इजेक्ट' बटन नहीं.
कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक से पहले विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सोनिया गांधी से बातचीत की. माना जा रहा है कि दोनों के बीच वामपंथी दलों के साथ उपजे मतभेद को दूर करने के संभावित उपायों पर चर्चा हुई.
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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि मनमोहन सिंह सरकार पर फिलहाल कोई ख़तरा नहीं है, बशर्ते सभी संदेहों को दूर करने के बाद ही परमाणु समझौते पर आगे बढ़ा जाए. इस बीच विदेश दौरे से लौटी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ख़ुद अगले हफ़्ते वामपंथी दलों से इस मसले पर बात कर सकती हैं. उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने कहा, 'हम अपनी पार्टी में बातचीत करने के बाद अगले हफ़्ते उनसे बात करेंगे'. हालाँकि दक्षिण अफ़्रीका से लौटते ही सोनिया गांधी ने शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत की. इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे. 'सरकार पर ख़तरा नहीं' परमाणु करार के मामले पर वामपंथी दलों के रवैये में और नरमी आने के संकेत शुक्रवार को मिले जब माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार पर कोई ख़तरा नहीं देख रही है. उनका कहना था, मैं इसे संकट के तौर पर नहीं देख रहा हूँ. ये कहाँ था और कहाँ चला गया. हम यही कह रहे हैं कि बिना समीक्षा किए आगे न बढ़ें. " येचुरी ने कहा कि सरकार को सिर्फ़ 'पॉज़' का बटन दबाना चाहिए, 'स्टॉप' या 'इजेक्ट' बटन नहीं. कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक से पहले विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सोनिया गांधी से बातचीत की. माना जा रहा है कि दोनों के बीच वामपंथी दलों के साथ उपजे मतभेद को दूर करने के संभावित उपायों पर चर्चा हुई.
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शिवपुरी। पोहरी थाना पुलिस ने कल एक बाइक चोर रामनिवास पुत्र बचनूराम परिहार निवासी नगरा को बाइक क्रमांक एमपी 33 एमए 5200 के साथ गिर तार किया है। उक्त चोर के साथ उसके अन्य साथी भी बाइक चोरी में संलिप्त हैं जिनकी पुलिस तलाश करने में जुटी हुई है।
सूत्रों की मानें तो पुलिस ने पकड़े गये चोर के एक साथी को भी गिर तार कर लिया है और उसके पास से कुछ चोरी की बाइकें भी बरामद की गई हैं। पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही में पोहरी थाना प्रभारी आनंद राय सहित उप निरीक्षक भगवान लाल एवं प्रधान आरक्षक चंदन धाकड़ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उक्त चोर को उसके घर नगरा से गिर तार किया है। पुलिस पकड़े गये चोर से पूछताछ में जुटी हुई है।
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शिवपुरी। पोहरी थाना पुलिस ने कल एक बाइक चोर रामनिवास पुत्र बचनूराम परिहार निवासी नगरा को बाइक क्रमांक एमपी तैंतीस एमए पाँच हज़ार दो सौ के साथ गिर तार किया है। उक्त चोर के साथ उसके अन्य साथी भी बाइक चोरी में संलिप्त हैं जिनकी पुलिस तलाश करने में जुटी हुई है। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने पकड़े गये चोर के एक साथी को भी गिर तार कर लिया है और उसके पास से कुछ चोरी की बाइकें भी बरामद की गई हैं। पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही में पोहरी थाना प्रभारी आनंद राय सहित उप निरीक्षक भगवान लाल एवं प्रधान आरक्षक चंदन धाकड़ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उक्त चोर को उसके घर नगरा से गिर तार किया है। पुलिस पकड़े गये चोर से पूछताछ में जुटी हुई है।
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फिल्म की कहानीः
फिल्म की कहानी वासुदेव शास्त्री (उत्कर्ष शर्मा) से शुरू होती है जो मथुरा का रहने वाला है, और किस तरह से पढ़ाई लिखाई के बाद वह भारतीय सुरक्षा के लिए रॉ में काम करने लगता है. इसी दौरान उसकी मुलाकात उसके कॉलेज के प्यार नंदिनी (इशिता चौहान) से दोबारा होती है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब MRS (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) की एंट्री होती है. एक तरफ प्यार है तो दूसरी तरफ भारतीय सुरक्षा में घात लगाए हुए लोगों से देश को बचाने का काम वासुदेव को मिलता है. कहानी में बहुत सारे ट्विस्ट और टर्न आते हैं और अंततः क्या होता है यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.
फिल्म क्या है फिल्म में खास, जो देखने पर करेगा मजबूरः
इस फिल्म को देखने की सिर्फ एक ही वजह हो सकती है और वो है उत्कर्ष का अभिनय. डायलॉग बोलने से लेकर एक्शन तक और डांस से लेकर रोमांस-कॉमेडी आजमाने तक, हर काम में वे बराबर अपरिपक्व दिखाई देते हैं. फिल्म जगत में अभी एक लम्बा सफर तय करना है लेकिन इस बात का परिचय उन्होंने दे दिया है. फिल्म में रोमांस की गुंजाइश भी रखी गई है और बेहद क्लीशे तरीके से ना-ना करते हो जाने वाले प्यार को परदे पर घटते हुए दिखाया गया है. फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी हैं.
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फिल्म की कहानीः फिल्म की कहानी वासुदेव शास्त्री से शुरू होती है जो मथुरा का रहने वाला है, और किस तरह से पढ़ाई लिखाई के बाद वह भारतीय सुरक्षा के लिए रॉ में काम करने लगता है. इसी दौरान उसकी मुलाकात उसके कॉलेज के प्यार नंदिनी से दोबारा होती है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब MRS की एंट्री होती है. एक तरफ प्यार है तो दूसरी तरफ भारतीय सुरक्षा में घात लगाए हुए लोगों से देश को बचाने का काम वासुदेव को मिलता है. कहानी में बहुत सारे ट्विस्ट और टर्न आते हैं और अंततः क्या होता है यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी. फिल्म क्या है फिल्म में खास, जो देखने पर करेगा मजबूरः इस फिल्म को देखने की सिर्फ एक ही वजह हो सकती है और वो है उत्कर्ष का अभिनय. डायलॉग बोलने से लेकर एक्शन तक और डांस से लेकर रोमांस-कॉमेडी आजमाने तक, हर काम में वे बराबर अपरिपक्व दिखाई देते हैं. फिल्म जगत में अभी एक लम्बा सफर तय करना है लेकिन इस बात का परिचय उन्होंने दे दिया है. फिल्म में रोमांस की गुंजाइश भी रखी गई है और बेहद क्लीशे तरीके से ना-ना करते हो जाने वाले प्यार को परदे पर घटते हुए दिखाया गया है. फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी हैं.
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वाराणसी. देव दीपावली के मौके पर शुक्रवार देर रात वाराणसी की घाटों पर सुंदर नजारा दिखा। गंगा किनारे घाटों पर एक साथ 21 लाख दीपक जलाए गए। घाटों पर देर रात तक लेजर एवं लाइट शो भी चला जिसका लोगों ने भरपूर आनंद लिया। राज्यपाल राम नाइक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी देर रात तक मौजूद रहे।
इसलिए मनाई जाती है देव दीपावलीः योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दीपावली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को सभी देवता गंगा के किनारे दीपावली मनाने आते है। त्रिपुर राक्षस का भगवान शंकर ने वध किया था और इसी की खुशी के बाद शिव की नगरी काशी में देवताओं ने दीपावली मनाई थी। बाद में इसे ही देव दीपावली का नाम दिया गया। विश्व के सबसे प्राचीनतम नगरी काशी में 6000 वर्षों से जीवन की अटूट धारा का एक नाता रहा है। यह नगर जितना धार्मिक है उतना ही अधिक अध्यात्मिक भी है।
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वाराणसी. देव दीपावली के मौके पर शुक्रवार देर रात वाराणसी की घाटों पर सुंदर नजारा दिखा। गंगा किनारे घाटों पर एक साथ इक्कीस लाख दीपक जलाए गए। घाटों पर देर रात तक लेजर एवं लाइट शो भी चला जिसका लोगों ने भरपूर आनंद लिया। राज्यपाल राम नाइक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी देर रात तक मौजूद रहे। इसलिए मनाई जाती है देव दीपावलीः योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दीपावली के पंद्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को सभी देवता गंगा के किनारे दीपावली मनाने आते है। त्रिपुर राक्षस का भगवान शंकर ने वध किया था और इसी की खुशी के बाद शिव की नगरी काशी में देवताओं ने दीपावली मनाई थी। बाद में इसे ही देव दीपावली का नाम दिया गया। विश्व के सबसे प्राचीनतम नगरी काशी में छः हज़ार वर्षों से जीवन की अटूट धारा का एक नाता रहा है। यह नगर जितना धार्मिक है उतना ही अधिक अध्यात्मिक भी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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सीरिया के एलेप्पो के बाहरी इलाके में किए गए हवाई हमलों में दक्षिण-पूर्वी उपनगर सफीरा में स्थित कई सैन्य डिपो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए है। रूसी मीडिया एजेंसी स्पुतनिक के अनुसार सीरियाई सेना कमान ने इस बात की जानकारी दी है।
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सीरिया के एलेप्पो के बाहरी इलाके में किए गए हवाई हमलों में दक्षिण-पूर्वी उपनगर सफीरा में स्थित कई सैन्य डिपो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए है। रूसी मीडिया एजेंसी स्पुतनिक के अनुसार सीरियाई सेना कमान ने इस बात की जानकारी दी है। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
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ग्रामीणक्षेत्रों में रहने वाले लोगों को एक बड़ी राहत देते हुए यूनिकआईडेंटीफिकेशन अथारिटी आफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने आईटी एवं इलेक्ट्रोनिक्समंत्रालय के तहत एक एसपीवी, कॉमन सर्विस सेंटर को अपने 20,000 सीएससी परआधार अद्यतन सुविधा आरंभ करने की अनुमति दे दी है जो बैंकिंगकॉरेस्पॉडेंट (बीसी) के रूप में प्रचालन करते हैं। केंद्रीय संचार, एमईआईटीवाई तथा न्याय एवं विधि मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद ने एक ट्वीटमें यह जानकारी दी।
केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट किया कि 20,000 सीएससी अबनागरिकों को इस सुविधा की पेशकश करने में सक्षम होंगे। उन्होंने सीएससीवीएलई से जिम्मेदारी पूर्वक एवं इस संबंध में यूआईडीएआई द्वारा निर्देशोंके अनुरुप आधार कार्य आरंभ करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि यहसुविधा बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को अपनेनिवास स्थान के निकट आधार सेवाएं प्राप्त करने में सहायता करेगी।
यूआईडीएआईने कार्य के आरंभ के लिए जून की समयसीमा निर्धारित की है जब बैंकिंगसुविधाओं के साथ सीएससी अपनी आवश्यक अवसंरचना को अपग्रेड कर लेगे और अन्यआवश्यक मंजूरियां प्राप्त कर लेंगे। तथापि, सीएससी सीईओ डॉ दिनेश त्यागीने कहा कि उन्होंने सभी बीसी को तत्काल तकनीकी एवं अन्य उन्नयन, जिसके लिएयूआईडीएआई ने कह रखा है, संपन्न कर लेने को कहा है जिससे कि आधार अद्यतनका कार्य शीघ्र आरंभ हो सके।
केंद्रीय मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद कोसीएससी के जरिये आधार अद्यतन कार्य फिर से आरंभ कराने के लिए धन्यवाद देतेहुए डाॅ त्यागी ने कहा कि यह 'डिजिटल इंडिया' के लक्ष्यों को अर्जित करनेके प्रयासों को और भी सुदृढ़ बनाएगा जैसी कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रमोदी द्वारा परिकल्पना की गई है।
सीएससी के जरिये आधार अद्यतन सेवाओंकी शुरुआत कोविड 19 के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन प्रतिबंधोंके दौरान एक बड़ी राहत के रूप में भी सामने आई है। आधार को अद्यतन करने केलिए उपलब्ध इन 20,000 अतिरिक्त केंद्रों के साथ, विशेष रूप से ग्रामीणक्षेत्रों में रहने वाले उपयोगकर्ताओं को इस कार्य के लिए बैंक शाखाओं याडाक घरों में आधार केंद्रों में जाने की आवश्यकता नहीं है।
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Posted On: ग्रामीणक्षेत्रों में रहने वाले लोगों को एक बड़ी राहत देते हुए यूनिकआईडेंटीफिकेशन अथारिटी आफ इंडिया ने आईटी एवं इलेक्ट्रोनिक्समंत्रालय के तहत एक एसपीवी, कॉमन सर्विस सेंटर को अपने बीस,शून्य सीएससी परआधार अद्यतन सुविधा आरंभ करने की अनुमति दे दी है जो बैंकिंगकॉरेस्पॉडेंट के रूप में प्रचालन करते हैं। केंद्रीय संचार, एमईआईटीवाई तथा न्याय एवं विधि मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद ने एक ट्वीटमें यह जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट किया कि बीस,शून्य सीएससी अबनागरिकों को इस सुविधा की पेशकश करने में सक्षम होंगे। उन्होंने सीएससीवीएलई से जिम्मेदारी पूर्वक एवं इस संबंध में यूआईडीएआई द्वारा निर्देशोंके अनुरुप आधार कार्य आरंभ करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि यहसुविधा बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को अपनेनिवास स्थान के निकट आधार सेवाएं प्राप्त करने में सहायता करेगी। यूआईडीएआईने कार्य के आरंभ के लिए जून की समयसीमा निर्धारित की है जब बैंकिंगसुविधाओं के साथ सीएससी अपनी आवश्यक अवसंरचना को अपग्रेड कर लेगे और अन्यआवश्यक मंजूरियां प्राप्त कर लेंगे। तथापि, सीएससी सीईओ डॉ दिनेश त्यागीने कहा कि उन्होंने सभी बीसी को तत्काल तकनीकी एवं अन्य उन्नयन, जिसके लिएयूआईडीएआई ने कह रखा है, संपन्न कर लेने को कहा है जिससे कि आधार अद्यतनका कार्य शीघ्र आरंभ हो सके। केंद्रीय मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद कोसीएससी के जरिये आधार अद्यतन कार्य फिर से आरंभ कराने के लिए धन्यवाद देतेहुए डाॅ त्यागी ने कहा कि यह 'डिजिटल इंडिया' के लक्ष्यों को अर्जित करनेके प्रयासों को और भी सुदृढ़ बनाएगा जैसी कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रमोदी द्वारा परिकल्पना की गई है। सीएससी के जरिये आधार अद्यतन सेवाओंकी शुरुआत कोविड उन्नीस के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन प्रतिबंधोंके दौरान एक बड़ी राहत के रूप में भी सामने आई है। आधार को अद्यतन करने केलिए उपलब्ध इन बीस,शून्य अतिरिक्त केंद्रों के साथ, विशेष रूप से ग्रामीणक्षेत्रों में रहने वाले उपयोगकर्ताओं को इस कार्य के लिए बैंक शाखाओं याडाक घरों में आधार केंद्रों में जाने की आवश्यकता नहीं है। Read this release in:
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नई दिल्ली, 15 दिसम्बरः सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को देशभर में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गो के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी. एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लाइसेंस धारक सभी शराब विक्रेता अपने लाइसेंस की समाप्ति तक या 31 मार्च, 2017 तक, जो भी पहले हो, ऐसा करेंगे। लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
शीर्ष अदालत का यह आदेश राज्यों और गैर सरकारी संगठनों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया है।
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नई दिल्ली, पंद्रह दिसम्बरः सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को देशभर में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गो के दोनों ओर पाँच सौ मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी. एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लाइसेंस धारक सभी शराब विक्रेता अपने लाइसेंस की समाप्ति तक या इकतीस मार्च, दो हज़ार सत्रह तक, जो भी पहले हो, ऐसा करेंगे। लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। शीर्ष अदालत का यह आदेश राज्यों और गैर सरकारी संगठनों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया है।
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हमारे एक जानकार हैं। नाम है रामेश्वर। नाम के अनुरूप ही दुनिया की हर समस्या उनकी है। किसी को उनकी चिंता हो न हो,पर उन्हें सब की चिंता रहती है। कड़वा जरूर बोलते हैं पर ताल ठोककर बोलते हैं। मजाल क्या, कोई उनकी बात को काट दे। तर्क ही ऐसे देते हैं कि सुनने वाले को उनकी बात पर सोचना ही पड़ता है। दिन में जब तक पांच-सात लोगों से मिल मन की भड़ास न निकाल लें तब तक उनके पेट का अफारा(गैस) ही नहीं मिटता। आज सुबह-सुबह हम उनके फंस गए। उम्र में बड़े है सो उनसे आंख भी नहीं फेर सकते थे। अब तो उनको सुनना और बाद में उसे मनन करना हमारी मजबूरी थी।
राम-राम के बाद वो अपने मूड में आ गए। बोले-आजकल तो कुछ भी हो सकता है। मैने कहा-क्या हो गया चाचा। आज सुबह-सुबह किस झंझावात ने तुम्हें झिंझोर दिया। दुनिया उलट-पुलट हो गई क्या। बोले-तुम्हें तो हर चीज में स्वाद लेने की आदत है। बातों की गम्भीरता को भी समझा करो। तुम्हें पता है आजकल क्या हो रहा है। मेरे जवाब का इंतजार किए बिना ही वो फिर शुरू हो गए। बोले-आजकल वो हो रहा है जो नहीं होना चाहिए। उत्सुकतावश मैंने भी पूछा-चचा, हो क्या रहा है? ये तो बताओ। बोले-जो काम दिन में होते थे अब वो रातों को होने लगे हैं। न्याय के दरवाजे तक रातों को खुल रहे हैं। बस आपकी बात और जेब दोनों में दम होना चाहिए। कोर्ट का काम खबरिया चैनल कर रहे हैं। किसी गवाह और साक्ष्य की उन्हें कोई जरूरत ही नहीं है। खुद ही जज बन फैसला सुना रहे हैं। हर एक रिपोर्टर और एंकर काला कोट पहन अपनी ही अदालत में वकील और जज का रोल निभाते दिख रहे हैं। जैसे सबकुछ बदलने का ठेका अब इनके पास ही है। मैंने कहा-तो इसमें दिक्कत क्या है। वो अपना काम कर रहे हैं। करने दीजिए। हमारे इतना कहते ही वो सीधा हम पर शब्दों के बाण लेकर बरस पड़े। बोले-तुम्हें कोई दिक्कत नहीं है। क्यों तुम विदेशी हो। बाहर मुल्क के हो। बड़े आए, हमें कोई दिक्कत नहीं कहने वाले। सोचो, जरा सोचो। आज देश मे कोरोना से मरने वालों की संख्या एक लाख पार कर गई है। वैक्सीन का अभी तक कोई अता-पता नहीं। डोनाल्ड ट्रम्प और उसकी घरबारन मेलिनिया को कोरोना हो गया,इसकी तो चिंता है तुम्हें। नहीं है तो देश के लोगों की। इस मुए कोरोना ने लाखों लोग बेरोजगार कर घर बैठा दिए और दावा हो रहा है कि बेरोजगारी की दर घट गई है। कह रहे हैं कि बेरोजगारी की यह दर पिछले 18 माह के निचले स्तर की है। तुम ही बताओ, बेरोजगारी की दर घट रही है तो लोग क्यों रो रहे हैं। देश भर के युवा राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस तक मना राजतंत्र को जगाने का प्रयास कर चुके हैं। .... आईपीएल में कोहली की खराब फार्म चिंता का विषय हो सकती है, पर देश के किसान की बदहाल फार्म के बारे में सोचने का वक्त तुम्हारे पास थोड़े ही है। बस तुमने तो विधेयक बना दिए हैं। इसका किसे फायदा होना है, सब जानते हैं। किसान तो सदा लुटेगा, मुनाफाखोर सदा मजे लेते आए हैं और आगे भी लेते रहेंगे। बस इनके चेहरे बदल जाएंगे। पर तुम्हे समझाने का क्या फायदा, तुम्हें तो 'बिहार में का बा' की फिक्र है। अरे 'देश में का बा' इस पर भी कभी विचार करो। वो आगे कुछ कहते इससे पहले बेटी ने पानी के गिलासों से भरी ट्रे उनके आगे कर दी। खुश रहो बेटा, कह गटागट चार गिलास पी गए। पानी पीकर एक लंबी सांस ली और अच्छा बेटा, राम राम कहकर चल दिए। उनके जाने के बाद ट्रे में बचे दो गिलास का पानी पीया तब जान में जान आई। आधे एक घण्टा यदि चाचा को और सुनना पड़ जाता तो देश की चिंता में बीपी लो होना पक्का था। आपको क्या लगा? चाचा कुछ गलत कह रहे थे। मेरे अनुसार चाचा जैसे यदि देश में सब हो जाएं तो हर सोया इंसान जाग जाएगा। अच्छा,राम राम।
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हमारे एक जानकार हैं। नाम है रामेश्वर। नाम के अनुरूप ही दुनिया की हर समस्या उनकी है। किसी को उनकी चिंता हो न हो,पर उन्हें सब की चिंता रहती है। कड़वा जरूर बोलते हैं पर ताल ठोककर बोलते हैं। मजाल क्या, कोई उनकी बात को काट दे। तर्क ही ऐसे देते हैं कि सुनने वाले को उनकी बात पर सोचना ही पड़ता है। दिन में जब तक पांच-सात लोगों से मिल मन की भड़ास न निकाल लें तब तक उनके पेट का अफारा ही नहीं मिटता। आज सुबह-सुबह हम उनके फंस गए। उम्र में बड़े है सो उनसे आंख भी नहीं फेर सकते थे। अब तो उनको सुनना और बाद में उसे मनन करना हमारी मजबूरी थी। राम-राम के बाद वो अपने मूड में आ गए। बोले-आजकल तो कुछ भी हो सकता है। मैने कहा-क्या हो गया चाचा। आज सुबह-सुबह किस झंझावात ने तुम्हें झिंझोर दिया। दुनिया उलट-पुलट हो गई क्या। बोले-तुम्हें तो हर चीज में स्वाद लेने की आदत है। बातों की गम्भीरता को भी समझा करो। तुम्हें पता है आजकल क्या हो रहा है। मेरे जवाब का इंतजार किए बिना ही वो फिर शुरू हो गए। बोले-आजकल वो हो रहा है जो नहीं होना चाहिए। उत्सुकतावश मैंने भी पूछा-चचा, हो क्या रहा है? ये तो बताओ। बोले-जो काम दिन में होते थे अब वो रातों को होने लगे हैं। न्याय के दरवाजे तक रातों को खुल रहे हैं। बस आपकी बात और जेब दोनों में दम होना चाहिए। कोर्ट का काम खबरिया चैनल कर रहे हैं। किसी गवाह और साक्ष्य की उन्हें कोई जरूरत ही नहीं है। खुद ही जज बन फैसला सुना रहे हैं। हर एक रिपोर्टर और एंकर काला कोट पहन अपनी ही अदालत में वकील और जज का रोल निभाते दिख रहे हैं। जैसे सबकुछ बदलने का ठेका अब इनके पास ही है। मैंने कहा-तो इसमें दिक्कत क्या है। वो अपना काम कर रहे हैं। करने दीजिए। हमारे इतना कहते ही वो सीधा हम पर शब्दों के बाण लेकर बरस पड़े। बोले-तुम्हें कोई दिक्कत नहीं है। क्यों तुम विदेशी हो। बाहर मुल्क के हो। बड़े आए, हमें कोई दिक्कत नहीं कहने वाले। सोचो, जरा सोचो। आज देश मे कोरोना से मरने वालों की संख्या एक लाख पार कर गई है। वैक्सीन का अभी तक कोई अता-पता नहीं। डोनाल्ड ट्रम्प और उसकी घरबारन मेलिनिया को कोरोना हो गया,इसकी तो चिंता है तुम्हें। नहीं है तो देश के लोगों की। इस मुए कोरोना ने लाखों लोग बेरोजगार कर घर बैठा दिए और दावा हो रहा है कि बेरोजगारी की दर घट गई है। कह रहे हैं कि बेरोजगारी की यह दर पिछले अट्ठारह माह के निचले स्तर की है। तुम ही बताओ, बेरोजगारी की दर घट रही है तो लोग क्यों रो रहे हैं। देश भर के युवा राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस तक मना राजतंत्र को जगाने का प्रयास कर चुके हैं। .... आईपीएल में कोहली की खराब फार्म चिंता का विषय हो सकती है, पर देश के किसान की बदहाल फार्म के बारे में सोचने का वक्त तुम्हारे पास थोड़े ही है। बस तुमने तो विधेयक बना दिए हैं। इसका किसे फायदा होना है, सब जानते हैं। किसान तो सदा लुटेगा, मुनाफाखोर सदा मजे लेते आए हैं और आगे भी लेते रहेंगे। बस इनके चेहरे बदल जाएंगे। पर तुम्हे समझाने का क्या फायदा, तुम्हें तो 'बिहार में का बा' की फिक्र है। अरे 'देश में का बा' इस पर भी कभी विचार करो। वो आगे कुछ कहते इससे पहले बेटी ने पानी के गिलासों से भरी ट्रे उनके आगे कर दी। खुश रहो बेटा, कह गटागट चार गिलास पी गए। पानी पीकर एक लंबी सांस ली और अच्छा बेटा, राम राम कहकर चल दिए। उनके जाने के बाद ट्रे में बचे दो गिलास का पानी पीया तब जान में जान आई। आधे एक घण्टा यदि चाचा को और सुनना पड़ जाता तो देश की चिंता में बीपी लो होना पक्का था। आपको क्या लगा? चाचा कुछ गलत कह रहे थे। मेरे अनुसार चाचा जैसे यदि देश में सब हो जाएं तो हर सोया इंसान जाग जाएगा। अच्छा,राम राम।
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अर्द्धकुंभ मेले के बावजूद हरकी पैड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण और अनाधिकृत पार्किंग की शिकायतों पर प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं देना इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। रविवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के हरिद्वार आने के दौरान लगे जाम व्यवस्थाओं की पोल खोल दी।
आडवाणी परिवार का काफिला रविवार को भीड़ का दबाव होने के बावजूद सीसीआर टावर की ओर से लाने के बजाय भीमगोड़ा बैरियर की ओर से सीधे हरकी पैड़ी लाया गया। यहां जितनी देर भी अस्थि विसर्जन चलता रहा उस दौरान बस और प्रशासनिक गाड़ियों समेत 20 से ज्यादा वाहन हरकी पैड़ी पर ही खड़े रहे।
जबकि हरकी पैड़ी चौकी से लेकर गंगा सभा के दफ्तर के ऊपर सड़क तक अनाधिकृत पार्किंग में सौ से भी ज्यादा बाइकें खड़ी थी। दुकानों के बाहर भी चार-चार फुट अतिक्रमण सड़क को संकरा किए हुए था। पुलिस ने इन्हें आज भी नहीं हटवाया।
इसका नतीजा यह हुआ कि एकतरफ ललतारौ पुल से भी आगे तक और दूसरी तरफ सूखी नदी तक जाम लगा रहा। पुलिस वीआईपी लोगों को तो कुछ कह नहीं पाई अलबत्ता उधर से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों पर ही सारी भड़ास निकाली।
किसी को धक्का देकर तो किसी को वापस मोड़कर व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाता रहा। करीब साढ़े ग्यारह बजे जब काफिला वहां से गुजरा तभी लोगों ने राहत की सांस ली।
बीच सडक़ में बस और कारों का काफिला खड़ा रहने के कारण जब जाम लग गया और उसमें फंसे लोग गर्मी के कारण हांफने लगे तो पुलिस कुछ हरकत में दिखी वह भी जब खुद एसएसपी सैंथिल अबुदई कृष्णराज एस स्थिति को भांपकर खुद ही हरकी पैड़ी के सामने की दुकानों के बाहर किया गया अतिक्रमण हटवाने लगे तो मेला एसपी मणिकांत मिश्रा, सीओ जेपी जुयाल, सीओ सिटी चंद्रमोहन, कोतवाली प्रभारी महेंद्र सिंह नेगी और मेले के थाना प्रभारी टीएस राणा भी जाम खुलवाने के लिए दौड़े।
इस दौरान अव्यवस्थाओं से ट्रैफिक रोककर भी बचा जा सकता था लेकिन पुलिस के बदइंतजामी का नतीजा यह रहा कि दोनों और जाम लग जाने के बाद भी हरकी पैड़ी क्षेत्र में ट्रैफिक का आवागमन नहीं रोका गया।
दोनों ओर से दोपहिया वाहनों के साथ ही हाथ रिक्शा और ई- रिक्शा जीरो जोन में दौड़ते रहे। अधिकारियों ने भी अपनी गाड़िया निकालने के लिए हिल बाईपास या पंतद्वीप पुल के बजाय बाजार का ही रास्ता चुना जिससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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अर्द्धकुंभ मेले के बावजूद हरकी पैड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण और अनाधिकृत पार्किंग की शिकायतों पर प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं देना इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। रविवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के हरिद्वार आने के दौरान लगे जाम व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। आडवाणी परिवार का काफिला रविवार को भीड़ का दबाव होने के बावजूद सीसीआर टावर की ओर से लाने के बजाय भीमगोड़ा बैरियर की ओर से सीधे हरकी पैड़ी लाया गया। यहां जितनी देर भी अस्थि विसर्जन चलता रहा उस दौरान बस और प्रशासनिक गाड़ियों समेत बीस से ज्यादा वाहन हरकी पैड़ी पर ही खड़े रहे। जबकि हरकी पैड़ी चौकी से लेकर गंगा सभा के दफ्तर के ऊपर सड़क तक अनाधिकृत पार्किंग में सौ से भी ज्यादा बाइकें खड़ी थी। दुकानों के बाहर भी चार-चार फुट अतिक्रमण सड़क को संकरा किए हुए था। पुलिस ने इन्हें आज भी नहीं हटवाया। इसका नतीजा यह हुआ कि एकतरफ ललतारौ पुल से भी आगे तक और दूसरी तरफ सूखी नदी तक जाम लगा रहा। पुलिस वीआईपी लोगों को तो कुछ कह नहीं पाई अलबत्ता उधर से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों पर ही सारी भड़ास निकाली। किसी को धक्का देकर तो किसी को वापस मोड़कर व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाता रहा। करीब साढ़े ग्यारह बजे जब काफिला वहां से गुजरा तभी लोगों ने राहत की सांस ली। बीच सडक़ में बस और कारों का काफिला खड़ा रहने के कारण जब जाम लग गया और उसमें फंसे लोग गर्मी के कारण हांफने लगे तो पुलिस कुछ हरकत में दिखी वह भी जब खुद एसएसपी सैंथिल अबुदई कृष्णराज एस स्थिति को भांपकर खुद ही हरकी पैड़ी के सामने की दुकानों के बाहर किया गया अतिक्रमण हटवाने लगे तो मेला एसपी मणिकांत मिश्रा, सीओ जेपी जुयाल, सीओ सिटी चंद्रमोहन, कोतवाली प्रभारी महेंद्र सिंह नेगी और मेले के थाना प्रभारी टीएस राणा भी जाम खुलवाने के लिए दौड़े। इस दौरान अव्यवस्थाओं से ट्रैफिक रोककर भी बचा जा सकता था लेकिन पुलिस के बदइंतजामी का नतीजा यह रहा कि दोनों और जाम लग जाने के बाद भी हरकी पैड़ी क्षेत्र में ट्रैफिक का आवागमन नहीं रोका गया। दोनों ओर से दोपहिया वाहनों के साथ ही हाथ रिक्शा और ई- रिक्शा जीरो जोन में दौड़ते रहे। अधिकारियों ने भी अपनी गाड़िया निकालने के लिए हिल बाईपास या पंतद्वीप पुल के बजाय बाजार का ही रास्ता चुना जिससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
इंग्लैंड के मानचित्र में "'उत्तर पश्चिमी इंग्लैंड"'। उत्तर पश्चिमी इंग्लैंड इंग्लैंड के ९ आधिकारिक क्षेत्रों में से एक है। इसकी कुल जनसंख्या है ६८,५३,२०० और इसके अंतर्गत इंग्लैंड की पाँच काउंटीयाँ आती हैः- कम्ब्रिया, लैंकाशायर, ग्रेटर मैनचेस्टर, मर्सीसाइड और चेशायर। इस क्षेत्र के दो प्रमुख नगर हैं - मैनचेस्टर और लिवरपूल। श्रेणीःइंग्लैंड. लिवरपूल का एक दृश्य। लिवरपूल मर्सीसाइड,इंग्लैंड में एक नगर का नाम है। यह जहाज़ कारखानों और विश्व प्रसिद्द पॉप ग्रुप द बिटल्स के लिये प्रसिद्द है। यह अपनी फुटबाल टीमों लिवरपूल एफ़.सी. और एवरटन एफ.सी. के लिये भी जाना जाता है। .
उत्तर पश्चिमी इंग्लैंड और लिवरपूल आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): मर्सीसाइड।
मर्सीसाइड (अंग्रेज़ीः Merseyside) एक इंग्लैंड का काउंटी है।.
उत्तर पश्चिमी इंग्लैंड 7 संबंध है और लिवरपूल 6 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 7.69% है = 1 / (7 + 6)।
यह लेख उत्तर पश्चिमी इंग्लैंड और लिवरपूल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। इंग्लैंड के मानचित्र में "'उत्तर पश्चिमी इंग्लैंड"'। उत्तर पश्चिमी इंग्लैंड इंग्लैंड के नौ आधिकारिक क्षेत्रों में से एक है। इसकी कुल जनसंख्या है अड़सठ,तिरेपन,दो सौ और इसके अंतर्गत इंग्लैंड की पाँच काउंटीयाँ आती हैः- कम्ब्रिया, लैंकाशायर, ग्रेटर मैनचेस्टर, मर्सीसाइड और चेशायर। इस क्षेत्र के दो प्रमुख नगर हैं - मैनचेस्टर और लिवरपूल। श्रेणीःइंग्लैंड. लिवरपूल का एक दृश्य। लिवरपूल मर्सीसाइड,इंग्लैंड में एक नगर का नाम है। यह जहाज़ कारखानों और विश्व प्रसिद्द पॉप ग्रुप द बिटल्स के लिये प्रसिद्द है। यह अपनी फुटबाल टीमों लिवरपूल एफ़.सी. और एवरटन एफ.सी. के लिये भी जाना जाता है। . उत्तर पश्चिमी इंग्लैंड और लिवरपूल आम में एक बात है : मर्सीसाइड। मर्सीसाइड एक इंग्लैंड का काउंटी है।. उत्तर पश्चिमी इंग्लैंड सात संबंध है और लिवरपूल छः है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक सात.उनहत्तर% है = एक / । यह लेख उत्तर पश्चिमी इंग्लैंड और लिवरपूल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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लखनऊः मदरसा शिक्षक भर्ती भी अब TET एग्जाम की तर्ज पर होगी. इसे MTET का नाम दिया गया है, यानी कि मदरसा TET. यूपी कि योगी आदित्यनाथ सरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा की तर्ज पर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू करने जा रही है. योगी सरकार सभी सरकारी अनुदानित मदरसों में शिक्षकों के पद भरने का जो अधिकार है, उसे प्रबंधक समितियों से वापस लेकर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा के माध्यम से मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति करेगी.
बता दें कि अभी तक प्रबंध समिति के पास मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति करने का अधिकार हुआ करता था. ऐसे में कई बार भर्ती में भाई-भतीजावाद के भी इल्जाम लगते थे. प्रबंधक जिसे चाहते थे, उसकी भर्ती कर लेते थे. खासकर कई बार प्रबंधक अपने संबंधियों को मदरसों में शिक्षक बना देते थे. इस समय मदरसों के कुल 482 शिक्षकों के पद रिक्त हैं. इसके साथ ही 49 प्रधानाचार्य के पद भी रिक्त हैं. जल्द ही सरकार MTET परीक्षा का प्रारूप जारी करेगी.
वहीं, हाल ही में यूपी में मदरसा शिक्षा परिषद् की मीटिंग में अहम फैसला लिया गया था. अब नए सत्र से प्रत्येक मदरसे में कक्षा शुरू होने से पहले राष्ट्रगान गाया जाएगा. उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद् के रजिस्ट्रार ने इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं. इसके अलावा अब प्रत्येक मदरसा में शिक्षक की उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लगाया जाएगा.
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लखनऊः मदरसा शिक्षक भर्ती भी अब TET एग्जाम की तर्ज पर होगी. इसे MTET का नाम दिया गया है, यानी कि मदरसा TET. यूपी कि योगी आदित्यनाथ सरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा की तर्ज पर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू करने जा रही है. योगी सरकार सभी सरकारी अनुदानित मदरसों में शिक्षकों के पद भरने का जो अधिकार है, उसे प्रबंधक समितियों से वापस लेकर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा के माध्यम से मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति करेगी. बता दें कि अभी तक प्रबंध समिति के पास मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति करने का अधिकार हुआ करता था. ऐसे में कई बार भर्ती में भाई-भतीजावाद के भी इल्जाम लगते थे. प्रबंधक जिसे चाहते थे, उसकी भर्ती कर लेते थे. खासकर कई बार प्रबंधक अपने संबंधियों को मदरसों में शिक्षक बना देते थे. इस समय मदरसों के कुल चार सौ बयासी शिक्षकों के पद रिक्त हैं. इसके साथ ही उनचास प्रधानाचार्य के पद भी रिक्त हैं. जल्द ही सरकार MTET परीक्षा का प्रारूप जारी करेगी. वहीं, हाल ही में यूपी में मदरसा शिक्षा परिषद् की मीटिंग में अहम फैसला लिया गया था. अब नए सत्र से प्रत्येक मदरसे में कक्षा शुरू होने से पहले राष्ट्रगान गाया जाएगा. उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद् के रजिस्ट्रार ने इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं. इसके अलावा अब प्रत्येक मदरसा में शिक्षक की उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लगाया जाएगा.
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नोएडा (उप्र),12 दिसंबर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शनिवार सुबह हुई बारिश के बावजूद भी वायु प्रदूषण के स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ। गाजियाबाद और नोएडा में वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में रही, जबकि नोएडा और फरीदाबाद में 'बहुत खराब' तथा गुड़गांव में 'खराब' श्रेणी में रही।
सीपीसीबी के समीर ऐप के अनुसार, शनिवार को शाम चार बजे 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) गाजियाबाद में 415, ग्रेटर नोएडा में 404, नोएडा में 393, फरीदाबाद में 348 और गुरुग्राम में 296 दर्ज किया गया।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हल्की बारिश हुई, जिससे प्रदूषण का स्तर घटने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नोएडा ,बारह दिसंबर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शनिवार सुबह हुई बारिश के बावजूद भी वायु प्रदूषण के स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ। गाजियाबाद और नोएडा में वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में रही, जबकि नोएडा और फरीदाबाद में 'बहुत खराब' तथा गुड़गांव में 'खराब' श्रेणी में रही। सीपीसीबी के समीर ऐप के अनुसार, शनिवार को शाम चार बजे चौबीस घंटाटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक गाजियाबाद में चार सौ पंद्रह, ग्रेटर नोएडा में चार सौ चार, नोएडा में तीन सौ तिरानवे, फरीदाबाद में तीन सौ अड़तालीस और गुरुग्राम में दो सौ छियानवे दर्ज किया गया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हल्की बारिश हुई, जिससे प्रदूषण का स्तर घटने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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एक्टर इमरान खान की पत्नी अवंतिका मलिक एक समय रणबीर कपूर की गर्लफ्रेंड थीं। कम ही लोगों को पता है कि अवंतिका और रणबीर एक साथ पढ़ते थे। अवंतिका भी एक एक्ट्रेस रह चुकी हैं। 'जस्ट मोहब्बत' नामक सीरियल में उन्होंने एक्टिंग किया था। रणबीर उनसे मिलने के लिए सीरियल के सेट पर पहुंचते थे। दोनों वहां पर काफी समय एक साथ गुजारते थे। अचानक ही दोनों का ब्रेकअप हो गया और अवंतिका ने इमरान से शादी कर ली।
संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सावंरिया' से रणबीर कपूर और सोनम कपूर ने बॉलीवुड में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। उस समय ये खबर जोरों पर थी कि दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे हैं, हालांकि जल्द ही दोनों का बेकअप हो गया। 'कॉफी विद करण' के सेट पर सोनम कपूर ने खुलकर इस बारे में बात भी की थी।
दीपिका पादुकोण और रणबीर कपूर 'बचना ऐ हसीनो' फिल्म के बाद से ही दोनों एक दूसरे को डेट करते थे। दोनों को कई बार कई मौकों पर एक साथ देखा जाता था। दोनों अपने रिलेशनशिप को लेकर खुले मिजाज के थे लेकिन अचानक ही दोनों अलग हो गए। बाद में एक इंटरव्यू के दौरान दीपिका ने साफ कहा था कि उनके ब्रेकअप का कारण रणबीर थे क्योंकि वो उनके साथ धोखा कर रहे थे। माना जा रहा था रणबीर एक ओर दीपिका को डेट कर रहे थे तो दूसरी ओर कटरीना कैफ से उनकी नजदीकियां बढ़ती जा रही थीं।
रणबीर कपूर की 'रॉकस्टार' फिल्म ब्लॉकबस्टर रही थी। इस फिल्म में उनके अपोजिट एक्ट्रेस नर्गिस फाखरी थीं। फिल्म के दौरान नर्गिस फाखरी के साथ भी उनके रिश्तों ने सुर्खियां बटोरी थीं। खबर थी कि दोनों फिल्म की शूटिंग के दौरान काफी नजदीक आ गए थे। लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद ही दोनों अलग हो गए।
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एक्टर इमरान खान की पत्नी अवंतिका मलिक एक समय रणबीर कपूर की गर्लफ्रेंड थीं। कम ही लोगों को पता है कि अवंतिका और रणबीर एक साथ पढ़ते थे। अवंतिका भी एक एक्ट्रेस रह चुकी हैं। 'जस्ट मोहब्बत' नामक सीरियल में उन्होंने एक्टिंग किया था। रणबीर उनसे मिलने के लिए सीरियल के सेट पर पहुंचते थे। दोनों वहां पर काफी समय एक साथ गुजारते थे। अचानक ही दोनों का ब्रेकअप हो गया और अवंतिका ने इमरान से शादी कर ली। संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सावंरिया' से रणबीर कपूर और सोनम कपूर ने बॉलीवुड में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। उस समय ये खबर जोरों पर थी कि दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे हैं, हालांकि जल्द ही दोनों का बेकअप हो गया। 'कॉफी विद करण' के सेट पर सोनम कपूर ने खुलकर इस बारे में बात भी की थी। दीपिका पादुकोण और रणबीर कपूर 'बचना ऐ हसीनो' फिल्म के बाद से ही दोनों एक दूसरे को डेट करते थे। दोनों को कई बार कई मौकों पर एक साथ देखा जाता था। दोनों अपने रिलेशनशिप को लेकर खुले मिजाज के थे लेकिन अचानक ही दोनों अलग हो गए। बाद में एक इंटरव्यू के दौरान दीपिका ने साफ कहा था कि उनके ब्रेकअप का कारण रणबीर थे क्योंकि वो उनके साथ धोखा कर रहे थे। माना जा रहा था रणबीर एक ओर दीपिका को डेट कर रहे थे तो दूसरी ओर कटरीना कैफ से उनकी नजदीकियां बढ़ती जा रही थीं। रणबीर कपूर की 'रॉकस्टार' फिल्म ब्लॉकबस्टर रही थी। इस फिल्म में उनके अपोजिट एक्ट्रेस नर्गिस फाखरी थीं। फिल्म के दौरान नर्गिस फाखरी के साथ भी उनके रिश्तों ने सुर्खियां बटोरी थीं। खबर थी कि दोनों फिल्म की शूटिंग के दौरान काफी नजदीक आ गए थे। लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद ही दोनों अलग हो गए।
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पीबीएल 3 के डिफेंडिंग चैंपियंस हैदराबाद हंटर्स ने सीजन-4 आगाज वही से किया जहा से पिछले सीजन उन्होने जीत के साथ खिताब अपने नाम किया था। पीबीएल सीजन-4 के पहले मुकाबले में हैदराबाद हंटर्स से पीवी सिंधु सामने थी तो वही नई टीम पुणे सेवन एसेस से कैरोलिना मारिन सामने थी। जिसमे सिंधु ने चौथे सीजन का पहला मुकाबला 11-15, 15-8 और 15-13 से अपने नाम किया। स्पेन की कैरोलिना मारिन और पीवी सिंधु के बीच अबतक अंतरराष्ट्रीय लेवल पर 13 मुकाबले हुए है जिसमें मारिन ने 7 जीते है तो वही पीवी सिंधु ने 6 मुकाबले जीते है।
दौरे पर, यह जोड़ी 15 बार मिल चुकी है - जिसमे रियो ओलंपिक का प्रसिद्ध फाइनल भी शामिल है । आखिरी बार जब वे मिले थे, तो इस साल की शुरुआत में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में, मारिन ने व्यापक जीत हासिल की।
सीजन के पहले मैच में सिंधु और कैरोलिना मारिन के बीच एक अच्छा मुकाबला देखने को मिला। जहा सिंधु पहला सेट 11-15 से हारी तो उसके बाद उन्होने 15-8, 15-13 से लगातार दो सेट अपने नाम किये।
कैरोलिना मारिन और सिंधु की भिढ़त से पहले सिंधु की हैदराबाद हंटर्स यह मैच अपने नाम कर चुकी थी, क्योकि इन दोनो से पहले भारत के युवा बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन और हैदराबाद के मार्क कालजाउ के बीच मुकाबला हुआ था, जहा कालजाउ ने इस युवा खिलाड़ी को 10-15, 12-15 और 14-15 से मात दी थी।
लक्ष्य ने पहले राउंड में मैच में अच्छा नियंत्रण बना रखा था और पहला राउंड 15-10 से अपने नाम किया था लेकिन दूसरे और तीसरे राउंड में वह नियंत्रण खो बैठे और लगातार आखिरी दो सेट हार गए। उसके बाद पुरुष डबल्स मुकाबले में सी शेट्टी एम बोई की जोड़ी को भी हैदराबाद की जोड़ी एस रंग और बी इसारा ने मात दी।
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पीबीएल तीन के डिफेंडिंग चैंपियंस हैदराबाद हंटर्स ने सीजन-चार आगाज वही से किया जहा से पिछले सीजन उन्होने जीत के साथ खिताब अपने नाम किया था। पीबीएल सीजन-चार के पहले मुकाबले में हैदराबाद हंटर्स से पीवी सिंधु सामने थी तो वही नई टीम पुणे सेवन एसेस से कैरोलिना मारिन सामने थी। जिसमे सिंधु ने चौथे सीजन का पहला मुकाबला ग्यारह-पंद्रह, पंद्रह-आठ और पंद्रह-तेरह से अपने नाम किया। स्पेन की कैरोलिना मारिन और पीवी सिंधु के बीच अबतक अंतरराष्ट्रीय लेवल पर तेरह मुकाबले हुए है जिसमें मारिन ने सात जीते है तो वही पीवी सिंधु ने छः मुकाबले जीते है। दौरे पर, यह जोड़ी पंद्रह बार मिल चुकी है - जिसमे रियो ओलंपिक का प्रसिद्ध फाइनल भी शामिल है । आखिरी बार जब वे मिले थे, तो इस साल की शुरुआत में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में, मारिन ने व्यापक जीत हासिल की। सीजन के पहले मैच में सिंधु और कैरोलिना मारिन के बीच एक अच्छा मुकाबला देखने को मिला। जहा सिंधु पहला सेट ग्यारह-पंद्रह से हारी तो उसके बाद उन्होने पंद्रह-आठ, पंद्रह-तेरह से लगातार दो सेट अपने नाम किये। कैरोलिना मारिन और सिंधु की भिढ़त से पहले सिंधु की हैदराबाद हंटर्स यह मैच अपने नाम कर चुकी थी, क्योकि इन दोनो से पहले भारत के युवा बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन और हैदराबाद के मार्क कालजाउ के बीच मुकाबला हुआ था, जहा कालजाउ ने इस युवा खिलाड़ी को दस-पंद्रह, बारह-पंद्रह और चौदह-पंद्रह से मात दी थी। लक्ष्य ने पहले राउंड में मैच में अच्छा नियंत्रण बना रखा था और पहला राउंड पंद्रह-दस से अपने नाम किया था लेकिन दूसरे और तीसरे राउंड में वह नियंत्रण खो बैठे और लगातार आखिरी दो सेट हार गए। उसके बाद पुरुष डबल्स मुकाबले में सी शेट्टी एम बोई की जोड़ी को भी हैदराबाद की जोड़ी एस रंग और बी इसारा ने मात दी।
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3.680 हे., निस्तार मद में 213.286 हे. की जानकारी दी गई थी। (ख) जिला-खरगोन की तहसील - बड़वाह अंतर्गत 09 वन ग्रामों के वर्ष 1948-49 के मिसल व मिसल का नक्शा हल्का पटवारी के पास उपलब्ध है एवं वर्ष 1948-49 एवं वर्ष 1980-81 की मिसल बंदोबस्त, खसरा पंजी, खातोनी पंजी, पटवारी मानचित्र वन मण्डल कार्यालय बड़वाह में उपलब्ध है। (ग) मध्य भारत वन विधान 1950 की धारा 20 के तहत् फॉरेस्ट एण्ड ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट ग्वालियर की अधिसूचना क्रमांक / 1623/X-F/114 (54) दिनांक 09/10/1954 राजपत्र दिनांक 21/10/1954 से आरक्षित वन अधिसूचित किया गया है। इन वन ग्रामों के अभिलेख पटवारी मानचित्र (नक्शा) राजस्व विभाग द्वारा गिरदावरी एवं आर.बी.सी. 6 (4) के लिए संधारण करता है। (घ) प्रश्नांश (ग) अनुसार अधिसूचना राजपत्र में दिनांक 21/10/1954 को आरक्षित वन अधिसूचित किया गया।
ग्रामीण संसाधनों पर अधिकार
11. ( क्र. 136 ) श्री ब्रह्मा भलावी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या बैतूल हरदा एवं होशंगाबाद जिले के कितने राजस्व ग्रामों के निस्तार पत्रक की प्रतिया प्रश्नांकित दिनांक तक ग्रामसभा / ग्राम पंचायत को प्रदान कर उनमें दर्ज कितनी-कितनी भूमियों के अधिकार नियंत्रण एवं प्रबंधन भी ग्रामसभा या ग्राम पंचायत को सौंप दिये गये हैं। (ख) ग्राम के पटवारी मानचित्र में दर्ज निस्तार पत्रक एवं अधिकार अभिलेख में किस-किस सार्वजनिक एवं निस्तारी प्रयोजनों के लिये किस-किस मद में दर्ज जमीनों के संबंध में ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत को संविधान की 11वीं अनुसूची, पैसा कानून 1996 एवं वन अधिकार कानून 2006 में क्या-क्या अधिकार दिए गये हैं ? (ग) सार्वजनिक एवं निस्तारी प्रयोजनों के लिये दर्ज जमीनों के संबंध में माननीय सर्वोच्च अदालत ने सिविल अपील प्रकरण क्रमांक 19869/2010 में दिनांक 28 जनवरी 2011 को दिये आदेश में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत बावत् क्या-क्या निर्देश दिये हैं?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) बैतूल जिले के 1303 राजस्व ग्रामों के निस्तार पत्र में दर्ज 209418 हे. भूमि के निस्तार पत्रक की प्रतियां तथा जिला नर्मदापुरम के 936 राजस्व ग्रामों के निस्तार पत्रक में दर्ज 140803 हे. के निस्तार पत्रक की प्रतियां ग्राम पंचायत को सौंपी गई है जबकि जिला हरदा में अभी कोई ऐसी प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गई है। (ख) संविधान की 11 वीं अनूसूची, पेसा कानून 1996 एवं वन अधिकार कानून 2006 में किये गये प्रावधानों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- "अ" अनुसार । (ग) माननीय सर्वोच्च अदालत की सिविल अपील प्रकरण क्रमांक 19869/2010 आदेश दिनांक 28 जनवरी 2011 में दिये गये प्रावधानों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- "ब" अनुसार ।
लघु वनोपज पर ग्रामसभा का अधिकार [वन]
12. ( क्र. 137 ) श्री ब्रह्मा भलावी : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायतों को किस-किस लघु वनोपज पर संविधान की 11वीं अनुसूची पेसा कानून 1996, वन अधिकार कानून 2006, भू-राजस्व संहिता 1959 एवं भारतीय वन अधिनियम 1927 की
किस-किस धारा में क्या-क्या अधिकार दिया है, किस-किस धारा में वन विभाग को क्या-क्या अधिकार दिया है ? पृथक-पृथक बतावें । (ख) ग्रामसभा एवं ग्रामपंचायतों को किस-किस लघु वनोपज
पर क्या-क्या अधिकार सौंपे जाने के संबंध में राज्य मंत्रालय भोपाल ने किस-किस दिनांक को आदेश जारी किया, किस-किस लघु वनोपज को वन विभाग के नियंत्रण से मुक्त किए जाने के संबंध में किस-किस दिनांक को राजपत्र में अधिसूचना का प्रकाशन किया, आदेश एवं अधिसूचना की प्रति सहित बतावें। (ग) ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत को लघु वनोपज पर प्राप्त अधिकारों में हस्तक्षेप कर लघु वनोपज पर प्रतिबंध लगाने, लघु वनोपज के वन अपराध पंजीबद्ध कर जप्ती एवं राजसात करने का अधिकार राज्य शासन ने किस आदेश दिनांक से वन विभाग के किस श्रेणी के अधिकारी को सौंपा हैं?
वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- एक अनुसार है। (ख) ग्राम सभाओं को प्रत्योजित अधिकार की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। (ग) ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत को लघु वनोपज पर प्राप्त अधिकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं है किन्तु संग्रहण सतत् पोषणीय पद्धति से न करने पर एवं संग्रहण प्रकिया में वनोपज को नुकसान पहुंचाने के कारण भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रावधानों के अंतर्गत वन अधिकारी कार्यवाही करने हेतु अधिकृत हैं।
विवाह सहायता राशि भुगतान के प्रकरण
13. ( क्र. 153 ) श्री रामपाल सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 25 जून 2022 की स्थिति में रायसेन जिले में मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मण्डल में पंजीकृत किन-किन के विवाह सहायता राशि भुगतान के प्रकरण किस स्तर पर कब से एवं क्यों लंबित हैं? (ख) संबंधितों के परिजनों को राशि का भुगतान कब तक कर दिया जायेगा? (ग) प्रश्नांश (क) के संबंध में माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को 1 जनवरी 2022 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में प्रश्नकर्ता विधायक के पत्र विवाह सहायता राशि भुगतान हेतु कब-कब प्राप्त हुए तथा उन पर क्या कार्यवाही की गई? (घ) प्रश्नकर्ता विधायक के पत्रों में उल्लेखित किन-किन को राशि का भुगतान कर दिया गया तथा किन-किन को राशि का भुगतान क्यों नहीं किया तथा कब तक राशि का भुगतान होगा?
खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) 25 जून 2022 की स्थिति में रायसेन जिले में मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मण्डल अंतर्गत पंजीकृत 80 हितग्राहियों के विवाह सहायता योजनांतर्गत राशि भुगतान के प्रकरण जनपद पंचायत / नगरीय निकाय स्तर पर लंबित हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र- अ अनुसार है। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन एवं नगरीय निर्वाचन में संलग्न होने के कारण प्रकरण में कार्यवाही प्रचलित है । (ख) म.प्र. राजपत्र दिनांक 15 अप्रैल 2022 में मंडल की 'विवाह सहायता योजना में आंशिक संशोधन संबंधी अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें योजनांतर्गत पंजीकृत पात्र महिला श्रमिक अथवा पंजीकृत श्रमिक की पुत्री (प्रति श्रमिक 02 पुत्रियों तक) द्वारा सामाजिक न्याय विभाग की "मुख्यमंत्री कन्यादान योजना" अंतर्गत आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर विवाह करने पर
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के प्रावधान अनुसार हितग्राही को सामाजिक न्याय विभाग के माध्यम से हितलाभ प्रदान किए जाने संबंधी प्रावधान किया गया है। विवाह सहायता योजना में उक्त संशोधन के परिणाम स्वरूप मंडल के पत्र क्रमांक 4135 दिनांक 20-05-2022 अनुसार दिनांक 22-04-2022 के पूर्व संपन्न हुए विवाहों में संबंधित जिला कलेक्टर से प्राप्त मांग पत्र अनुसार विवाह सहायता राशि का आवंटन प्रदाय किया जायेगा तथा दिनांक 22-04-2022 को अथवा इसके पश्चात संपन्न हुए विवाहों हेतु "मुख्यमंत्री कन्यादान योजना अंतर्गत आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर विवाह करने पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के प्रावधान अनुसार हितग्राही को सामाजिक न्याय विभाग के माध्यम से हितलाभ प्रदान किया जायेगा। (ग) प्रश्नांश (क) के संबंध में माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को 1 जनवरी 2022 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में प्रश्नकर्ता विधायक का 01 पत्र प्राप्त हुआ, जिस पर की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है।
अन्त्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता राशि का प्रदाय
14. ( क्र. 154 ) श्री रामपाल सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 25 जून 2022 की स्थिति में रायसेन जिले में मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना तथा मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मण्डल में पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु उपरांत अन्त्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता राशि भुगतान के किन-किन प्रकरण में किस स्तर पर कब से एवं क्यों लंबित हैं? (ख) उक्त लंबित प्रकरणों का कब तक निराकरण होगा तथा संबंधित के परिजनों को राशि का भुगतान कब तक कर दिया जायेगा ? (ग) प्रश्नांश (क) के संबंध में माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को 1 जनवरी 2022 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में प्रश्नकर्ता विधायक के पत्र कब-कब प्राप्त हुए तथा उन पर क्या-क्या कार्यवाही की गई ? (घ) प्रश्नकर्ता विधायक के पत्रों में उल्लेखित किन-किन समस्याओं का निराकरण हुआ तथा किन-किन समस्याओं का निराकरण क्यों नहीं हुआ तथा कब तक निराकरण होगा?
खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल ) योजना के अंतर्गत रायसेन जिले में 25 जून 2022 की स्थिति में पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु उपरांत अन्तेष्टि सहायता का कोई भी प्रकरण भुगतान हेतु लंबित नहीं है। अनुग्रह सहायता राशि भुगतान के 189 प्रकरण में ई.पी.ओ. जारी है। जिनमें पर्याप्त बजट उपलब्धता पर भुगतान किया जाता है। मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के अंतर्गत 25 जून 2022 की स्थिति में रायसेन जिले में मृत्यु की दशा में अंत्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता योजनांतर्गत कोई भी प्रकरण भुगतान हेतु लंबित नहीं है । (ख) म.प्र. असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत प्रकरणों में पात्रता अनुसार राशि भुगतान एक सतत् प्रक्रिया है। पदाभिहित अधिकारियों द्वारा पात्रता अनुसार प्रकरण स्वीकृति उपरान्त ई.पी.ओ. जारी कर डिजीटली हस्ताक्षरित किये जाने तथा मृत्यु सत्यापन की कार्यवाही पश्चात् राज्य स्तर पर प्रकरणों में बजट उपलब्धता अनुसार भुगतान किया जाता है। (ग) प्रश्नांश (क) के संबंध में माननीय विधायक महोदय द्वारा माननीय
मंत्री जी को संबोधित पत्र क्रमांक 1030 दिनांक 20-04-2022 मंत्री महोदय के माध्यम से दिनांक 27-04-2022 को सचिव, असंगठित मण्डल को प्राप्त हुआ। जिस संबंध में वस्तुस्थिति से माननीय विधायक महोदय को मण्डल के पत्र क्रमांक 1539 दिनांक 29-04-2022 द्वारा अवगत कराया गया, साथ ही उक्त पत्र श्रम पदाधिकारी, मण्डीदीप की ओर आवश्यक कार्यवाही हेतु अग्रेषित किया गया। 2. इसी प्रकार माननीय विधायक महोदय का समविषयक पत्र माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से दिनांक 06-06-2022 को प्राप्त हुआ। जिसे श्रम पदाधिकारी, मण्डीदीप को आवश्यक कार्यवाही बावत् पत्र क्र. 2538 दिनांक 13-06-2022 द्वारा प्रेषित किया गया। जिसकी प्रतिलिपि माननीय विधायक महोदय जी को भी प्रेषित की गई है। 3. माननीय विधायक महोदय का माननीय मंत्री जी श्रम विभाग को संबोधित पत्र क्रमांक 1058 दिनांक 28-04-2022 माननीय मंत्री जी
कार्यालय के माध्यम से दिनांक 13-06-2022 को प्राप्त हुआ। जो कि पत्र क्रमांक 8849 दिनांक 28-06-2022 के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही हेतु श्रम पदाधिकारी, रायसेन को भेजा गया। जिसकी प्रतिलिपि माननीय विधायक महोदय जी को भी प्रेषित की गई है। प्रश्नांश (क) के संबंध में भवन मंडल अंतर्गत माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को 1 जनवरी 2022 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में प्रश्नकर्ता विधायक का 01 पत्र प्राप्त हुआ, जिस पर की गई कार्यवाही की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) असंगठित मंडल अंतर्गत माननीय विधायक महोदय के पत्रों में उल्लेखित सभी समस्याओं के निराकरण हेतु तत्परता से कार्यवाही करते हुये श्रम पदाधिकारी, मण्डीदीप द्वारा मुख्य कार्यापालन अधिकारी जनपद पंचायत सिलवानी / बेगमगंज एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी सिलवानी / बेगमगंज को कार्यवाही हेतु पत्र प्रेषित किये गये, जिन पर त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन एवं नगरीय निर्वाचन में संलग्न होने के कारण कार्यवाही प्रचलन में है। माननीय विधायक महोदय द्वारा प्रकरणों में भुगतान लंबित होने की समस्या का उल्लेख किया गया था। प्रकरणों में भुगतान एक सतत् प्रक्रिया है। पदाभिहित अधिकारियों द्वारा पात्रता अनुसार प्रकरण स्वीकृति उपरान्त ई.पी.ओ. जारी कर डिजीटली हस्ताक्षरित किये जाने तथा मृत्यु सत्यापन की कार्यवाही पश्चात् राज्य स्तर पर प्रकरणों में बजट उपलब्धता अनुसार भुगतान किया जाता है। भवन मंडल अंतर्गत प्रश्नांश की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।
परिशिष्ट - "सैंतीस"
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना
15. ( क्र. 170 ) श्री बैजनाथ कुशवाह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत पात्रता हेतु क्या-क्या नियम एवं निर्देश हैं? (ख) प्रश्नांश (क) के प्रकाश में बी. पी. एल. कार्डधारियों को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिये जाने का प्रावधान हैं? (ग) यदि हाँ, तो सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत स्थिति इण्डेन गैस एजेंसी रामपुर कला द्वारा ऐसे पात्र हितग्राहियों से राशि वसूली गई है? यदि हाँ, तो क्या उक्त एजेंसी के विरूद्ध कोई शिकायती आवेदन विभाग को प्राप्त हुए है? यदि हाँ, तो प्राप्त आवेदनों का विवरण व आज दिनांक तक उक्त गैस एजेंसी के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई है?
खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत पात्रता हेतु भारत सरकार के पत्र दिनांक 04 अगस्त 2021 एवं म.प्र. शासन के पत्र क्रमांक 608/पी.एस.फूड/उज्जवला/ 2021 दिनांक 16.08.2021, पत्र क्र. 635 / पी. एस. खाद्य / उज्जवला/2021 दिनांक 25.08.2021, पत्र क्र.706 /उज्जवला/2021 दि.15.09.2021, पत्र क्र.756/पी.एस. खाद्य/उज्जवला/2021 दिनांक 28.09.2021, पत्र क्र. 9551/पी.एस.खाद्य/उज्जवला /2021 दिनांक 22.10.2021 के द्वारा विभागीय दिशा निर्देश जारी किये गये, जो पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" अनुसार है। (ख) जी हाँ । (ग) इण्डेन गैस एजेंसी रामपुरकलां के संचालक द्वारा अवैध राशि प्राप्त कर उज्जवला का गैस कनेक्शन देने के संबंध में प्राप्त शिकायत की जांच कराई गई एवं जांच प्रतिवेदन अनुसार पाई गई अनियमितताओं के संबंध में इण्डेन गैस एजेंसी रामपुरकलां के संचालक के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई। उक्त प्रकरण में मान. न्यायालय कलेक्टर जिला मुरैना के प्र.क्र. 83 / ब-121/2020-21 में पारित आदेश दिनांक 18.03.2021 द्वारा रूपये 10000/- अर्थदण्ड कर जमा करने हेतु आदेश पारित किया गया है। उपरोक्त आदेश के विरूद्ध गैस एजेंसी संचालक द्वारा मा. न्यायालय सत्र न्यायाधीश, सत्र खण्ड मुरैना के आपराधिक अपील क्र. 51/2021 में पारित आदेश दिनांक 10 जून 2022 द्वारा अपील स्वीकार करते हुए आलोच्य आदेश को अपास्त किया गया है। उक्त एजेंसी के विरूद्ध प्राप्त शिकायती आवेदन एवं उक्त गैस एजेंसी के विरूद्ध की गई कार्यवाही का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" अनुसार है।
वृक्षारोपण की जांच व स्थानांतरित रेन्जरों को कार्यमुक्त करना
16. ( क्र. 191 ) श्री पुरुषोत्तम लाल तंतुवाय : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला दमोह की हटा वीट अंतर्गत वर्ष 2019-20, 2020-21 व वर्ष 2021-22 में किस-किस प्रजाति के कितने वृक्ष एवं पौधे कहां-कहां रोपे गये एवं वृक्षारोपण में सरकार का कितना व्यय हुआ ? वृक्षारोपण में स्थलवार जीवित पौधों की संख्या बतायी जावे व प्राक्कलन सहित गड्ढों की खुदाई व रोपण पर व संरक्षण पर व्यय की जानकारी दी जावे । वृक्षारोपण की शिकायतें लगातार प्राप्त होती रहती है तो क्या एक प्रदेश स्तरीय जांच समिति बनाकर हटा बीट अंतर्गत हुये वृक्षारोपण की जांच कराकर कार्यवाही की जावेगी? (ख) साथ ही बताया जावे कि वन विभाग में शासन द्वारा कुछ रेंजरों की परिवीक्षा अवधि के पूर्ण हो जाने उपरांत नवीन पदस्थापना की गई थी लेकिन आज दिनांक तक नवीन पदस्थापना स्थल पर कितने रेंजरों ने कार्य भार लिया? हटा के रेंजर द्वारा नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार क्यों ग्रहण नहीं किया ?
वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जिला दमोह में आने वाले वन मण्डल दमोह एवं नौरादेही (वन्यप्राणी) वन मण्डल के अंतर्गत बीट हटा नहीं है, शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो जाने के उपरांत नवीन पदस्थापना पर 54 वन क्षेत्रपालों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। परिक्षेत्र हटा में किसी अन्य वनक्षेत्रपाल की पदस्थिति न होने से तथा तत्पश्चात कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी दमोह के आदेश क्रमांक - 185, दिनांक 31.05.2022 एवं आदेश क्रमांक-718, दिनांक 21.06.2022 द्वारा परिक्षेत्र अधिकारी हटा को त्रि-स्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2022 में
सेक्टर अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिस कारण नवीन पदस्थापना में कार्यभार ग्रहण करने हेतु भारमुक्त नहीं किया जा सका।
कोरोना मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि का प्रदाय [राजस्व]
17. (क्र. 204 ) श्री तरूण भनोत : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या कोरोना से होने वाली मृत्यु पर मृतक के परिजन को 50 लाख अथवा अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने का प्रावधान है अथवा नहीं? (ख) यदि वर्णित (क) हाँ तो जबलपुर जिले में कितने कोरोना से मृतकों के परिजनों को 50 लाख अथवा अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है, जानकारी उनके नामवार एवं पतावार दी जावे। (ग) क्या उक्त योजना एस. टी. / एस. सी. कर्मचारियों के लिये भी है? यदि हाँ, तो जबलपुर स्थित शासकीय सेठ गोविन्ददास चिकित्सालय अंतर्गत कार्यरत कोरोना से मृतक एस.डी. प्रधान के परिजनों को कब अनुकंपा नियुक्ति अथवा 50 हजार की राशि प्राप्त होगी?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ । (ख) जबलपुर जिले में डॉ. क्षीतिज भटनागर की पत्नी डॉ. शिखा भटनागर को 50 लाख की राशि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज योजना में प्रदान की गई। इसी प्रकार श्री अब्दुल मुबीन लैब टैक्नीशियन की पत्नी श्रीमति आरजू बानो को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज योजना के अंतर्गत 50 लाख की राशि एवं अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई। श्री एस. डी. प्रधान कंपाउंडर की पत्नी को 50 लाख की राशि एवं उनके पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति का प्रकरण संचालनालय, स्वास्थ्य सेवायें में प्रक्रियाधीन है। (ग) जी हाँ । शासकीय सेठ गोविन्ददास चिकित्सालय जबलपुर के श्री एस. डी. प्रधान कंपाउंडर की पत्नी को 50 लाख की राशि का भुगतान बीमा कंपनी में प्रक्रियाधीन है एवं उनके पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति का प्रकरण संचालनालय, स्वास्थ्य सेवायें में प्रक्रियाधीन है।
नर्मदा तट पर अवैध मुरूम उत्खन्न [खनिज साधन]
18. ( क्र. 210 ) श्री तरूण भनोत : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या भेड़ाघाट नर्मदा तट स्थित सरस्वती घाट और भीटा गांव में बेजा तरीके से अवैध मुरूम उत्खनन की घटनाओं की शिकायतें मिली हैं? (ख) यदि हाँ, तो इन शिकायतों पर शासन द्वारा क्या कार्यवाही की गई है? (ग) क्या अवैध मुरूम उत्खनन के कारण मिट्टी के ढेरों में टिटहरी पक्षी के अंडे नष्ट हो रहे है और अवैध उत्खनन से पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान के साथ ही पशुपक्षियों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिये क्या कदम उठाये जा रहे है ? (घ) क्या सरकार अवैध उत्खनन को रोकने और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिये किसी ठोस नीतिगत फैसले पर विचार करेगी ?
खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्नांश (क) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है । (ग) एवं (घ) प्रश्नांश (क) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है ।
निराकृत प्रकरणों की जानकारी [राजस्व]
19. ( क्र. 239 ) श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले की महाराजपुर तहसील में पदस्थ वर्तमान तहसीलदार द्वारा भूमि संबंधी वसीयत सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा आदि के प्रकरण निराकृत किये गये है ? (ख) प्रश्नांश (क) यदि हाँ, तो वर्तमान पदस्थ तहसीलदार के पदांकन दिनांक से प्रश्न दिनांक तक निराकृत प्रकरणों की प्रति उपलब्ध करायें। (ग) प्रश्नांश (क) के अनुसार वसीयत प्रकरणों में आपत्तियां लगी है? यदि हाँ, तो किन-किन प्रकरणों में ?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ । (ख) उपरोक्त वसीयत, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा आदि के प्रकरणों का निराकरण म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 109,110 के तहत नामांतरण/वसीयत नामांतरण धारा 129 के तहत सीमांकन, धारा 178, 178 (क) के तहत बंटवारा के प्रकरणों में विधि संगत न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत प्रकरणों का निराकरण किया गया। प्रकरणों में निराकृत आदेश की नियमानुसार प्रतियां आर. सी. एम. एस. पोर्टल पर डिजिटल साईन से अपलोड की गई है। (ग) जी हाँ। कुल 03 वसीयत नामांतरण पर आपत्तियाँ प्राप्त हुई है। आपत्तियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार ।
ग्रेनाइट पत्थर उत्खनन की स्वीकृति
20. ( क्र. 240 ) श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या डी.जी. मिनरल्स कम्पनी लवकुश नगर को ग्रेनाइट पत्थर उत्खनन की स्वीकृत शासन के नियम व निर्देशों के तहत की गयी थी? यदि हाँ, तो नियम व निर्देशों की प्रति तथा स्वीकृत दिनांक की जानकारी उपलब्ध करायें। (ख) क्या उक्त कम्पनी संचालक द्वारा नियम व निर्देशों का पालन किया जा रहा है? यदि हाँ, तो क्या कम्पनी नगर की बीच बस्ती में संचालित है तथा स्वीकृत क्षेत्र के बाहर पत्थर खोदा जा रहा है ? (ग) प्रश्नांश (ख) यदि हाँ, तो जिला खनिज अधिकारी द्वारा कार्यवाही की गयी है? यदि हाँ, तो कार्यवाही की प्रति उपलब्ध करायें। यदि नहीं, तो क्यों कारण बतायें। (घ) विगत दिनों कम्पनी की दीवाल गिरने से आर. के. महाविद्यालय के दो विद्यार्थियों की मृत्यु तथा कुछ विद्यार्थी घायल हुये थे तथा इसके पूर्व भी जन हानि की सूचनाएं प्राप्त हुई है? यदि हाँ, तो शासन कम्पनी संचालक व निरीक्षणकर्ता अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की गयी है? यदि हाँ, तो कार्यवाही की प्रति उपलब्ध करायें। यदि नहीं, तो कारण बतायें ।
खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जी हाँ । मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 अधिसूचित है। डी.जी. मिनरल्स कंपनी को शासन के आदेश दिनांक 21/04/2022 से स्वीकृत किया गया है। (ख) जी हाँ। जी नहीं। कंपनी द्वारा नगर के बीच बस्ती में खदान संचालित नहीं है, बल्कि नगर के बाहर एक छोर में बस्ती से निर्धारित दूरी छोड़कर खदान संचालित की जा रही है। खदान में पत्थर उत्खनन स्वीकृत क्षेत्र के अंदर किया जा रहा है। (ग) कंपनी संचालक द्वारा नियम व निर्देशों का पालन किये जाने एवं स्वीकृत क्षेत्रान्तर्गत खनन कार्य संपादित करने से कंपनी पर
कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी हाँ। दिनांक 28/03/2022 की घटना को संज्ञान में लेते हुए थाना लवकुश नगर में अपराध क्रमांक 123/2022 धारा 304 ए ता. हि. का प्रकरण दर्ज किया गया है। विवेचना में दीवार निर्माण करने वाले ठेकेदार इकबाल मोहम्मद निवासी लवकुश नगर, आर. के. कॉलेज प्रबंधन समिति के प्रमुख श्री योगेन्द्र खरे व श्री रजनीश सोनी एवं डी.जी. मिनरल्स प्रायवेट लिमिटेड के प्रमुख श्री मुकेश मीना को जिम्मेदार मानते हुए अपराध में नामजद किया गया है। मामले में विवेचना जारी है। चालानी कार्यवाही होना शेष है। इस घटना के अतिरिक्त ग्रेनाईट खदान में उत्खनन के दौरान पूर्व में अन्य कोई भी जन हानि या किसी के घायल होने की सूचना थाना ईकाई में पंजीकृत नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
कोरोना काल में अनियमितता
21. ( क्र. 246 ) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्जैन में वैश्विक महामारी कोरोना में कितने पीड़ितों ने इलाज या मृत्यु होने पर राहत राशि मुआवजे के लिए आवेदन प्रस्तुत किये, कितने पीड़ितों को इलाज के लिए किस-किस मद में राशि दी गयी ? (ख) प्रश्नांश (क) संदर्भित कितने पीडितों को किस कारण से मुवावजा राशि नहीं दी गयी ? (ग) कोरोना पीड़ित की मृत्यु होने पर राहत राशि मुआवजा राशि प्राप्त करने के क्या नियम प्रावधान थे, रतलाम मंदसौर जिले में ऐसे कितने आवेदन लंबित है जिनमें समस्त शासन द्वारा चाही गयी जानकारी होने के बावजूद भी पीड़ित परिवारों को मुवावजा नहीं दिया गया ? (घ) उज्जैन संभाग में कोरोना अवधि (1 जनवरी 2020 से प्रश्न दिनांक तक) में खरीदी आदि अनियमितता करने के मामले में जिला कलेक्टरों द्वारा क्या-क्या सम्बन्धित के खिलाफ कार्यवाही की गयी नाम सहित जांच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराये?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) उज्जैन जिले अन्तर्गत कुल 1599 मृतकों के वैध वारिसानों द्वारा अनुग्रह राशि हेतु आवेदन प्रस्तुत किये। कोविड- 19 संक्रमण से मृत्यु होने पर विभाग द्वारा अनुग्रह राशि प्रदाय किये जाने के निर्देश है, ईलाज के लिये राशि प्रदाय किये जाने का प्रावधान नहीं है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" अनुसार है। (ग) कोरोना पीड़ित की मृत्यु होने पर मुआवजा राशि प्राप्त करने के दिशा-निर्देशों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" अनुसार है। रतलाम एवं जिला मंदसौर में अनुग्रह राशि हेतु पात्र पीड़ित परिवारों के आवेदन लंबित नहीं है। (घ) उज्जैन संभाग में कोरोना अवधि (1 जनवरी 2020 से प्रश्न दिनांक तक) में खरीदी आदि अनियमितता के संबंध में कोई मामला नहीं है। अतः शेष प्रश्न उद्भूत नहीं होता है।
अवैध उत्खनन की जानकारी
22. ( क्र. 248 ) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्जैन संभाग में 1 जनवरी 2018 के पश्चात अवैध उत्खनन के कितने माम कहाँकहाँ, दर्ज किये गये ? इसमें कौन-कौन सा खनिज कितनी - कितनी मात्रा में जप्त किया गया तथा किस कारण से कितना वापस छोड़ा गया, कितना खनन माफिया जबरन छुड़ा ले गये ? समस्त जानकारी
देवें। (ख) वर्तमान में उक्त संभाग में किस-किस सामग्री के कितने-कितने ठेके किस-किस कम्पनी/व्यक्ति के नाम से हैं जिनकी कितनी - कितनी मात्रा में खनन की स्वीकृति है? विभाग इसकी निगरानी किस तरह करता है? समस्त जानकारी देवें । (ग) प्रश्नांश (क) एवं ( ख ) संदर्भित खदानों की निगरानी विभाग किस तरह करता है? ठेकेदारों द्वारा स्वीकृत खनन से अधिक खनन के कितने मामले उक्त संभागों में, उक्त अवधि में, कहाँ-कहाँ सामने आये? उनके विरुद्ध क्या-क्या कार्यवाही विभाग द्वारा की गयी? कितनी कार्यवाही अभी भी प्रचलन में है? समस्त जानकारी देवें । (घ) खनिज विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के विरुद्ध उक्त अवधि में, उक्त संभागों में, जांच एजेंसियों/विभाग द्वारा की गयी कार्यवाही का विवरण देवें तथा प्रतिवेदन की प्रतिलिपि देते हुए प्रकरण की वर्तमान स्थिति से अवगत करायें।
खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) प्रश्नांश में उल्लेखित संभाग के जिलों में प्रश्नाधीन अवधि में दर्ज अवैध उत्खनन के प्रकरणों तथा उनमें जप्त की गई खनिज की मात्रा का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - अ में दर्शित है। जप्तशुदा खनिज अर्थदण्ड राशि जमा होने पर छोड़ा गया परंतु खनिज माफिया द्वारा जबरन छुड़ा कर खनिज ले जाने संबंधी कोई स्थिति प्रकाश में नहीं आयी है । (ख) प्रश्नांश में उल्लेखित संभाग के जिलो उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, मंदसौर तथा नीमच में कोई भी खनिज ठेके पर स्वीकृत नहीं किया गया है। देवास जिले में रेत खनिज का ठेका मेसर्स परम एजेन्सीस भोपाल के पक्ष में स्वीकृत किया गया है, उक्त ठेके में खनन हेतु स्वीकृत खनिज मात्रा का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - ब अनुसार है। विभागीय अधिकारियों के साथ ही राजस्व एवं पुलिस विभाग द्वारा इसकी निगरानी नियमित निरीक्षण तथा औचक निरीक्षण कर की जा रही है । (ग) प्रश्नांश अनुसार विभाग द्वारा विभागीय अमले से खदानों का सामयिक निरीक्षण कराता है तथा औचक निरीक्षण हेतु दल गठित कर कार्यवाही कराया जाता है। संभाग के किसी भी जिले में ठेकेदारों द्वारा खनिज खनन हेतु स्वीकृत मात्रा से अधिक मात्रा में खनन किये जाने का कोई प्रकरण प्रश्नाधीन अवधि में नहीं पाया गया, अतः प्रश्नांश के शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) संभाग में प्रश्नाधीन अवधि में विभाग के किसी भी अधिकारी, कर्मचारी के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई। प्रश्नांश के शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
राजस्व अधिकारी/कर्मचारियों के विरुद्ध जांच
23. ( क्र. 249 ) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 1 जनवरी 2018 के पश्चात राजस्व विभाग में पदस्थ राजस्व अधिकारी, संयुक्त कलेक्टर, ADM, SDM / SDO, अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार, ट्रेप अपराधिक प्रकरणों के अपराध क्रमांक, दिनांक, धारा सहित अपराध का विवरण देते हुए समस्त जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांश "क" संदर्भित उक्त सभी अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध प्रचलित विभागीय कार्यवाही का विवरण प्राप्त प्रतिवेदन का विवरण देवें। (ग) प्रश्नांश "क", "ख" संदर्भित उक्त अवधि में किस-किस अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय जाँच नस्तीबद्ध / समाप्त की गयी है? आदेश की प्रतिलिपि देवें ।
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध आपराधिक प्रकरणों में संबंधित न्यायालयों में विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त / जांच एजेंसी द्वारा कार्यवाही की जाती है।
पृथक अनुविभागीय अधिकारी राजस्व न्यायालय की स्थापना
24. ( क्र. 256 ) श्री दिव्यराज सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विगत तीन माह पूर्व विकासखण्ड सिरमौर में आयोजित कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री महोदय के द्वारा तहसील जवा में पृथक अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय (एस. डी. एम. कोर्ट) को स्थापित कर डभौरा एवं अतरैला में उप तहसील कार्यालय संचालित कराने संबंधी घोषणा की गई थी? यदि हाँ, तो उक्त घोषणा के अनुक्रम में क्या कार्यवाही की गई है ? (ख) प्रश्नांश (क) के अनुक्रम में उक्त घोषित पृथक अनुविभागीय राजस्व न्यायालय ( एस. डी. एम. कोर्ट) के संचालन एवं डभौरा तथा अतरैला में नियमित रूप से उप तहसील कार्यालय संचालित करने के संबंध में क्या कार्यवाही प्रस्तावित की गई है? विभाग के द्वारा जवा में पृथक अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय ( एस. डी. एम. कोर्ट) कब से प्रारंभ किया जा सकेगा? क्या उप तहसील कार्यालय डभौरा एवं अतरैला में नियमित स्टाफ की पदस्थापना एवं नियमित कार्यालय संचालन की व्यवस्था की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा दिनांक 30 मई 2022 को प्रेषित नोटशीट के माध्यम से सिरमौर में आयोजित कार्यक्रम में तहसील जवा में अनुविभाग कार्यालय स्थापित किए जाने की घोषणा की जाने की आधिकारिक सूचना प्राप्त हुई। जिसके क्रम में जवा में पृथक अनुविभाग बनाए जाने के संबंध में कलेक्टर रीवा से प्रस्ताव प्राप्त करने की कार्रवाई प्रचलित है। (ख) जवा में अनुविभाग कार्यालय गठन संबंधी घोषणा के क्रम में कलेक्टर रीवा से विधिवत प्रस्ताव प्राप्त करने की कार्रवाई प्रचलित है। कलेक्टर रीवा से प्रस्ताव प्राप्त होने पर, घोषणा के अनुरूप नियमनुसार कार्रवाई की जाना प्रस्तावित हैं।
योजना का लाभ दिया जाना
25. ( क्र. 266 ) श्री अजय कुमार टंडन : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दमोह जिले की विधानसभा क्षेत्र दमोह अंतर्गत कितने बुजुर्ग राशनकार्ड धारक हैं जिनके अंगूठे के निशान के बॉयोमेट्रिक मशीन से मैच न होने के कारण राशन नहीं मिल रहा है ? (ख) क्या ऐसे मामलों में परिवार से बाहर के व्यक्ति को नामांकित करने का नियम है? (ग) यदि हाँ, तो क्या सरकार बुजुर्ग राशनकार्ड धारकों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए अंगूठे के निशान के बॉयोमेट्रिक मशीन से मैच न होने की स्थिति में ओ.टी.पी., आई स्केनर या आधार कार्ड की कापी से राशन देने का प्रावधान करेगी?
खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) दमोह जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र हितग्राहियों में से बुजुर्ग हितग्राहियों के अंगूठे की रेखाएं घिसने सिकुड़ने से पी.ओ.एस. मशीन पर बॉयोमेट्रिक सत्यापन विफल होने के कारण राशन प्राप्त करने से कोई हितग्राही वंचित नहीं है । (ख) जी हाँ। बॉयोमेट्रिक सत्यापन सफल न होने वाले हितग्राहियों को नॉमिनी के माध्यम से राशन वितरण का प्रावधान है। (ग) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों में से परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा पी. ओ. एस. मशीन पर बॉयोमेट्रिक सत्यापन के आधार पर राशन प्राप्त किया जा सकता है। हितग्राही की एक अंगुली/ अंगूठा की रेखाओं से बॉयोमेट्रिक सत्यापन सफल न होने पर एक से अधिक अंगुलियों (फ्यूजन फिंगर) के बॉयोमेट्रिक सत्यापन किया जाता है। साथ ही, बॉयोमेट्रिक सत्यापन न होने पर आधार नंबर से लिंक मोबाइल नंबर पर ओ.टी.पी. अथवा नॉमिनी के माध्यम से राशन सामग्री के वितरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। हितग्राही द्वारा आधार पंजीयन केन्द्र पर अपने आधार नंबर को अपडेट कराने तथा मोबाइल नंबर लिंक कराने की सुविधा उपलब्ध है। किसी भी पात्र हितग्राही को बॉयोमेट्रिक सत्यापन सफल न होने के आधार पर राशन से वंचित नहीं किया जा रहा है।
कोटवारों का नियमितीकरण
26. ( क्र. 268 ) श्री अजय कुमार टंडन : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के कोटवारों को प्रति माह कितना वेतन तथा कौन-कौन सी अन्य सुविधाएं दी जाती हैं? (ख) क्या वर्तमान में प्रदेश के कोटवारों को दिया जाने वाला वेतन उनके परिवार के भरण पोषण के लिए पर्याप्त है? (ग) क्या प्रदेश के कोटवारों को नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित करने और उन्हें कलेक्टर रेट पर वेतन दिए जाने के लिए कार्यवाही करेगी?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) ग्राम कोटवार को मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता1959 की धारा-231 अनुसार सेवा भूमि या पारिश्रमिक या दोनों का प्रावधान किया गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। इसके अतिरिक्त कोटवारों को प्रतिवर्ष वर्दी, जूते, टार्च, बेल्ट एवं गरम कोट प्रदाय किये जाते हैं। (ख) कोटवारों को उनकी सेवाओं के लिए सेवाभूमि या पारिश्रमिक या दोनों मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता- 1959 के प्रावधानों अनुसार प्रदाय किए जाते हैं। (ग) ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है ।
परिशिष्ट- "अडतीस "
गहरी खदानों के अपशिष्ट से फसलें एवं जमीनें खराब होना
27. ( क्र. 295 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खनिज संपदा निकालने हेतु कितने फिट गहराई तक खुदाई का प्रावधान है? ( ख ) जबलपुर
जिले के अंतर्गत गांधी ग्राम से लगे बडखेरा रोड पर आयरन ओर की खदान 300 फीट तक खोदी गई, क्या यह सही है या नहीं? (ग) क्या खदान से निकल रहा पानी एवं अपशिष्ट नाली, नहरों एवं
खेतों में बहाया जा रहा है? (घ) क्या व्यक्तिगत लाभ के लिए फसल, जमीन की उर्वरा शक्ति एवं पर्यावरण को क्षति नहीं हो रही है? यदि हाँ, तो क्या शासन कार्यवाही करेगा?
खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) रेत खनन को छोड़कर शेष खनिज के खनन कार्य हेतु गहराई की कोई सीमा नहीं है । (ख) से (घ) जी नहीं।
ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायतों को अधिकार
28. ( क्र. 470 ) डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्रामसभा और ग्राम पंचायत को पटवारी मानचित्र में दर्ज सामुदायिक भूमियों, किस-किस लघु वनोपज पर क्या-क्या अधिकार संविधान की 11वीं अनुसूची, पेसा कानून 1996, वन अधिकार कानून 2006, भू-राजस्व संहिता 1959 की किस-किस धारा में दिया गया है, इनमें से किस-किस धारा में वन विभाग को क्या-क्या अधिकार दिए गए है? पृथक-पृथक बतावें। (ख) राज्य शासन ने पटवारी मानिचत्र, निस्तार पत्रक, अधिकार अभिलेख में सार्वजनिक एवं निस्तारी प्रयोजनों के लिए दर्ज सामुदायिक भूमियों एवं किस-किस लघु वनोपज के अधिकार, नियंत्रण एवं प्रबंधन ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत को सौंपे जाने का किस-किस दिनांक को आदेश या अधिसूचना जारी की है? प्रति सहित बतावें। (ग) पटवारी मानिचत्र एवं निस्तार पत्रक में दर्ज सामुदायिक भूमियों को वन विभाग द्वारा वर्किंग प्लान में शामिल कर कब्जा किए जाने, लघु वनोपज पर प्रतिबंध लगाकर लघु वनोपज के वन अपराध पंजीबद्ध किए जाने पर संबंधित वन अधिकारियों के विरूद्ध किस-किस कानून की किस-किस धारा के अनुसार कौन-कौन सी कार्यवाही के क्या-क्या अधिकार वर्तमान में किसे दिए गए है?
वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। लघु वनोपजों में तेन्दूपत्ता विनिर्दिष्ट वनोपज घोषित होने से इसके विपणन की कार्यवाही म.प्र. राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा की जाती है । (ख) प्रश्नांश से संबंधित राज्य शासन द्वारा कोई विशिष्ट आदेश जारी नहीं किये गये है। (ग) वन विभाग द्वारा वर्किंग प्लान में अधिसूचित वन भूमियों को शामिल किया जाता है, जिसके प्रबंधन एवं नियंत्रण का अधिकार वन अधिकारियों को प्राप्त है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
परिशिष्ट - "उनतालीस"
गौण खनिज पर ग्राम पंचायतों को छूट
[ खनिज साधन]
29. (क्र. 471 ) डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्राम पंचायतों द्वारा किए जाने वाले निर्माण कार्यों और ग्रामीण विकास से संबंधित जिला पंचायत द्वारा नियंत्रित मदों से स्वीकृत किए गए कार्यों में लगने वाले गौण खनिज से संबंधित क्या-क्या छूट म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 एवं म.प्र. रेत नियम 2019 में दी गई है, इस छूट में ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों को क्या-क्या अधिकार दिए गए है? (ख) गत दो वर्षों में मण्डला, डिण्डोरी एवं बैतूल जिले में किस-किस ग्राम पंचायत एवं किस-किस एजेन्सी ने ग्रामीण
विकास के कितने कार्यों में कितना गौण खनिज किस दर पर क्रय किया? कितने गौण खनिज के परिवहन पर कितनी राशि खर्च की? कितने गौण खनिज की कितनी रॉयल्टी का सप्लायर को या खनिज विभाग को भुगतान किया गया ? (ग) राजपत्र में अधिसूचित छूट से संबंधित नियमों का पालन नहीं किए जाने का क्या-क्या कारण रहा है? राज्य शासन ने नियमों में दी गई छूट का लाभ सुनिश्चित किए जाने के संबंध में किस-किस दिनांक को पत्र परिपत्र, आदेश, निर्देश जारी किए? प्रति सहित बतावें।
खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 के नियम 3 में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों, जिला पंचायतों द्वारा किये जाने वाले निर्माण कार्यों के संबंध में छूट से संबंधित निम्नानुसार प्रावधान हैंः- "नियम - 3 ( छूट) ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों, जिला पंचायतों तथा उपभोक्ता संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक कार्यों के लिये संबंधित पंचायतों तथा जल उपभोक्ता संस्थाओं द्वारा हाथ में लिये गये कार्यों के लिए शासकीय भूमि से निकाले गये गौण खनिज के लिए लागू नहीं होगी। (तथापि शासकीय विभागों को नियम 10 के उप-नियम ( 3 ) में निहित राजस्व प्राप्ति शीर्ष के अधीन रॉयल्टी जमा करना होगी)"। मध्यप्रदेश रेत (खनन, परिवहन, भंडारण तथा व्यापार) नियम, 2019 के नियम 4 (1) में पंचायतों के संबंध में छूट से संबंधित निम्नानुसार प्रावधान हैंः- "नियम 4 (1) (छूट) - पंचायत / नगरीय निकाय द्वारा शुरू की गई शासकीय योजना या अन्य लाभप्रद कार्यों (स्वच्छ भारत अधियान, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि) के लिए निकटतम स्वीकृत रेत खदान से रॉयल्टी का भुगतान करने के उपरांत ही रेत प्राप्त की जा सकेगी। पंचायत/नगरीय निकाय द्वारा जमा की गई रॉयल्टी की संपूर्ण रकम, लदान (लोडिंग) एवं परिवहन छोड़कर, की वापसी आवश्यक जांच एवं प्रमाणीकरण के आधार पर की जाएगी परंतु पंचायत/नगरीय निकाय के लिए कार्य ठेकेदार द्वारा किए जाते हैं, तो उपरोक्त जमा रॉयल्टी वापस नहीं की जाएगी।" (ख) ग्राम पंचायत द्वारा खनिजों का क्रय तथा परिवहन व्यय की जानकारी का संधारण किया जाना मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 में प्रावधानित नहीं है। ग्राम पंचायतों द्वारा रॉयल्टी का भुगतान किये जाने का प्रावधान नहीं है। अतः प्रश्नांश की जानकारी का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 के नियम 3 में प्रावधानित छूट अधिसूचित है। अधिसूचित नियमों के संबंध में पृथक से निर्देश जारी किया जाना आवश्यक नहीं है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
वन ग्रामों की जानकारी [वन]
30. ( क्र. 472 ) डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राज्य के 925 वनग्रामों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रश्न क्रमांक 2175 दिनांक 7.3.2017 एवं प्रश्न क्रमांक 3248 दिनांक 8.3.2017 में पटल पर प्रस्तुत करने के बाद भी ग्रामों के पटवारी मानचित्र एवं खसरा पंजी आदि बनाने के लिए पटवारियों की पदस्थापना बाबत् वन विभाग ने राज्य शासन को पत्र लिखा है? (ख) 925 वनग्रामों में किस ग्राम का पटवारी मानचित्र खसरा पंजी राज्य शासन के आदेश दिनांक 28.02.1980 के तहत बनाए गए ? (ग) किस ग्राम को किस अधिसूचना क्रमांक दिनांक से किस कानून की किस धारा के तहत अधिसूचित आरक्षित वन / संरक्षित
वन कक्ष में कब बसाया गया, उसमें से किस-किस अधिसूचना की प्रति वन विभाग के पास उपलब्ध है? प्रति सहित बतावें ।
वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ । (ख) एवं (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।
राजस्व ग्राम को वन ग्राम घोषित करना
31. ( क्र. 473 ) डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खंडवा वनवृत्त के किस-किस राजस्व ग्राम को किस अधिसूचना क्रमांक या आदेश दिनांक से वनग्राम घोषित किया? किस वनग्राम को किस अधिसूचना क्रमांक या आदेश दिनांक से वीरान ग्राम घोषित किया? राजस्व ग्राम को वन ग्राम एवं वीरान ग्राम घोषित करने का क्याक्या अधिकार या छूट वन विभाग को किस कानून की किस धारा में दी है? (ख) खंडवा वनवृत्त में प्रतिवेदित किस-किस वनग्राम की भूमि से संबंधित कौन-कौन सी मिसल बंदोबस्त, खसरा पंजी, खतौनी पंजी, पटवारी मानचित्र वनमंडलों में उपलब्ध है? किस ग्राम की किस वर्ष की खसरा पंजी खतौनी पंजी भू-पोर्टल पर उपलब्ध है? इनमें किस ग्राम में कितनी निजी भूमि, कितनी आबादी मद की भूमि कितनी निस्तार मद और जंगल मद की भूमि दर्ज है? (ग) खंडवा वनवृत्त में प्रतिवेदित किस वनग्राम की कितनी निजी भूमि, कितनी आबाद मद की भूमि, कितनी निस्तार मद एवं जंगल मद की भूमि को मध्य भारत वन विधान 1950 की धारा 20 के अनुसार राजपत्र में किस दिनांक को आरक्षित वन अधिसूचित किया ? इन भूमियों से संबंधित धारा 4 की अधिसूचना किस दिनांक को प्रकाशित की गई धारा 5 से 19 तक की जांच किस प्रकरण में कर किस दिनांक को आदेश दिए गए ? धारा 4 की अधिसूचना एवं आदेश की प्रति सहित बतावें ।
वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) वनवृत्त खण्डवा अंतर्गत वनमंडल खण्डवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वाह, बडवानी एवं सेंधवा में किसी भी राजस्व ग्राम को वनग्राम अथवा वीरान घोषित नहीं किया गया है। राजस्व ग्रामों को वनग्राम एवं वीरान ग्राम घोषित करने का वन विभाग के पास कोई अधिकार / कानून नहीं है। (ख) वनवृत्त खण्डवा अंतर्गत वनमंडल खण्डवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वाह, बडवानी एवं सेंधवा के कुल 225 वनग्रामों के खसरा पंजी, मानचित्र, खसरा-खतौनी, अभिलेख, राजस्व अभिलेखागार एवं वनमंडल कार्यालय में उपलब्ध हैं। वनग्रामों में स्थित निजी भूमि, आबादी भूमि, निस्तार मद एवं जंगल मद की वनभूमियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) वन वृत्त खण्डवा के अंतर्गत मध्य भारत विधान 1950 की धारा-20 के अनुसार राजपत्र दिनांक 21.10.1954 में वनमण्डल खरगोन के 58 वनग्राम, बड़वाह के 09, बड़वानी के 45 वनग्राम तथा सेंधवा के 25 वनग्राम इस प्रकार कुल 137 वनग्रामों को पुनः आरक्षित वनभूमि के रूप में अधिसूचित की गई है। खण्डवा वनवृत्त के वनग्राम पूर्व से ही धारा-20 में आरक्षित वन के रूप में घोषित होने से धारा-5 से 19 तक की कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
जल संसाधन विभाग की स्वीकृत योजनाएं
[जल संसाधन]
32. ( क्र. 528 ) श्री उमंग सिंघारः क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या धार जिले की गंधवानी विधानसभा में जल संसाधन विभाग द्वारा निर्माण कार्य स्वीकृत किये गये हैं? यदि हाँ, तो गंधवानी, बाग एवं तिरला विकासखण्ड में कौन-कौन से कार्य कितनीकितनी लागत राशि के कब-कब स्वीकृत किये गये हैं? विकासखण्ड, कार्यवार एवं राशिवार सूची उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांकित (क) यदि हाँ, तो स्वीकृत कार्यों की प्रश्न दिनांक तक निविदा जारी कर टेण्डर प्रक्रिया क्यों नहीं की गई है? इसका जिम्मेदार कौन है तथा कब तक निविदा जारी कर टेण्डर प्रक्रिया कर दी जायेगी ? यदि नहीं, तो क्यों ?
जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। सूची संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। गंधवानी बाग एवं तिरला विकासखण्ड में स्वीकृत 05 परियोजनाओं में से 02 परियोजनाओं की निविदा स्वीकृत की जा चुकी है। 02 परियोजनाओं की निविदा की कार्यवाही प्रचलन में है। शेष 01 परियोजना से प्रभावित होने वाली वनभूमि व्यपवर्तन की अनुमति के अभाव में निविदा की कार्यवाही नहीं की जा सकी है। अतः किसी अधिकारी के जिम्मेदार होने की स्थिति नहीं है। निविदा जारी कर टेण्डर प्रक्रिया करने की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
परिशिष्ट- "चालीस"
प्राप्त राशि का उपयोग [वन]
33. ( क्र. 557 ) श्री देवेन्द्र सिंह पटेल : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वित्तीय वर्ष 2021-22 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में रायसेन जिले में विभाग को किसकिस योजना में कब-कब शासन से कितनी - कितनी राशि प्राप्त हुई ? (ख) उक्त प्राप्त राशि में से क्या-क्या, कितनी-कितनी राशि के किसकी अनुशंसा पर कहाँ-कहाँ कार्य स्वीकृत किये गये? (ग) वित्तीय वर्ष 2020-21 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को रायसेन जिले के किन-किन विधायकों के पत्र कब प्राप्त हुए तथा उन पर क्या-क्या कार्यवाही की गई ? (घ) प्रश्नांश (ग) में प्राप्त पत्रों में उल्लेखित किन-किन समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तथा क्यों? इसके लिए कौन-कौन दोषी है तथा उल्लेखित समस्याओं का निराकरण कब तक होगा?
वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट3 अनुसार है। (घ) वित्तीय वर्ष 2020-21 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में माननीय वन मंत्री जी एवं विधायकों के 44 पत्र प्राप्त हुये, जिसमें से 34 पत्रों का निराकरण किया गया है तथा उत्तरांश "ग" के परिशिष्ट में लिखे कारणों से 10 पत्रों के निराकरण की कार्यवाही जारी है, जिनका निराकरण शीघ्र किया जावेगा। इसके लिये कोई दोषी नहीं है।
किसान सम्मान निधि
34. ( क्र. 558 ) श्री देवेन्द्र सिंह पटेल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 25 जून, 2022 की स्थिति में रायसेन जिले में कितने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि मिल रही है? तहसीलवार संख्या बतायें । ( ख ) 25 जून, 2022 की स्थिति में रायसेन जिले में कितने किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की राशि मिल रही है? तहसीलवार संख्या बतायें। (ग) रायेसन जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्राप्त करने वाले कितने किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की राशि नहीं मिल रही है तथा इस हेतु विभाग के अधिकारियों ने क्या-क्या कार्यवाही की ? (घ) प्रश्नांश (क) एवं ( ख ) के संबंध में जिला कार्यालय रायसेन को 1 जनवरी, 2021 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में रायसेन जिले के किन-किन सांसद तथा विधायकों के पत्र प्राप्त हुए तथा उन पर क्या कार्यवाही की गई?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) 25 जून, 2022 की स्थिति में रायसेन जिले में 161065 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि मिल रही है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट - 1 अनुसार है । (ख) 25 जून 2022 की स्थिति में रायसेन जिले में 159225 किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की राशि मिल रही है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट-2 अनुसार है। (ग) प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि प्राप्त करने वाला प्रत्येक हितग्राही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की राशि प्राप्त करने हेतु पात्र होता है। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होते ही राशि हितग्राही के खाते में अंतरित कर दी जाती है। (घ) प्रश्नांश (क) एवं ( ख ) के संबंध में जिला कार्यालय रायसेन को 01 जनवरी, 2021 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में माननीय प्रभारी मंत्री जिला रायसेन, माननीय मंत्री लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मध्यप्रदेश शासन एवं माननीय विधायक विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 143 सिलवानी के पत्र प्राप्त हुए है। प्राप्त पत्रों पर नियमानुसार कार्यवाही हेतु संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं तहसीलदारों को निर्देशित किया गया है।
परिशिष्ट - "इकतालीस"
दोषियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही
35. ( क्र. 571 ) श्री योगेन्द्र सिंह (बाबा) : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासकीय कर्म. गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, तलैनी, सारंगपुर राजगढ़ के सम्बंध में प्रमुख सचिव राजस्व को प्रदान किये गये पत्र क्रमांक-561, दिनांक 30.05.2022 तथा समिति के सदस्यों के अभ्यावेदन के बिन्दु क्रमांक-1 से 5 तक बिन्दुवार जांच करवाते हुए स्वीकृत नक्शे के अनुसार सीमांकन नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी तथा तत्कालीन सरपंच द्वारा अपने नाबालिक पुत्रों को आवासीय पट्टे प्रदान करने तथा पट्टों पर क्षेत्रफल, चतुःसीमा, क्र., दिनांक का उल्लेख नहीं होने पर क्या पट्टे निरस्त किये गये हैं? (ख) प्रश्न क्रमांक - 470 दिनांक 10.03.2022 को एवं मुख्यमंत्री मेनिट के अभ्यावेदन के बिन्दुवार जांच कब करवाई गई तथा जांच प्रतिवेदन से अवगत कराया जाएगा ? स्वीकृत नक्शे के अनुसार जांच करने पर पाये गये आवास अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया तथा पुनः दूसरी बार जांच 29.03.2022 को मनमानी करते हुए टी. एण्ड सी. पी.
के स्वीकृत नक्शे के अनुसार नहीं करने पर दोषियों को निलंबित किया जायेगा ? (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार राजस्व निरीक्षक द्वारा दोनों बार जांच में बनाये गये पंचनामा तथा जांच रिपोर्ट प्रदान की जाएगी तथा स्वीकृत नक्शे के अनुसार गुमराहपूर्वक जांच रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों को निलम्बित करते हुए, अतिक्रमण हटाया जायेगा तथा निष्पक्ष जांच कराई जायेगी?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) शासकीय कर्म गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, तलेनी, सारंगपुर जिला राजगढ़ के संबंध में समिति के सदस्यों के अभ्यावेदन के बिंदु क्रमांक (1) से (5) की जांच प्रचलित है। जांच प्रतिवेदन अनुसार कार्यवाही प्रावधानित है। तत्कालीन सरपंच द्वारा अपने नाबालिग पुत्रों को आवासीय पट्टा प्रदान करने के संबंध में न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी सारंगपुर में प्रकरण क्रमांक 41 / बी-121/2022-23 (विविध) दर्ज कर कार्यवाही प्रचलित है। (ख) मुख्यमंत्री कार्यालय भोपाल का पत्र क्रमांक 6090/CMS/PUB/2022 भोपाल, दिनांक 08/04/2022 तहसीलदार सारंगपुर को जांच हेतु प्रेषित किया गया। प्रथम बार राजस्व निरीक्षक व दल द्वारा दिनांक 24/02/2022 को आवेदक की उपस्थिति में मौका जांच की गई जिसके प्रतिवेदन व पंचनामे में अतिक्रमण का उल्लेख नहीं है एवं दिनांक 29/03/2022 को राजस्व निरीक्षक व दल द्वारा आवेदक की उपस्थिति में सीमांकन किया गया जिसमें कोई अतिक्रमण नहीं पाया गया। शेष जानकारी उपरोक्त (क) अनुसार है। (ग) प्रश्नांश "ख" के अनुसार राजस्व निरीक्षक द्वारा दोनों बार जांच में बनाए गए पंचनामा तथा जांच रिपोर्ट की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। शेष जानकारी उपरोक्त (क) अनुसार है ।
किसान क्रेडिट कार्ड की जानकारी
36. ( क्र. 613 ) श्री कमलेश्वर पटेल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र में सिहावल सहित सीधी एवं सिंगरौली जिले में प्रश्न दिनांक तक कुल कितने कृषि भूमिधारक किसान हैं? (ख) उपरोक्त में से कितने किसानों के पास बैंकों द्वारा जारी किसान क्रेडिट कार्ड हैं तथा कितने किसान फसल बीमा से जुड़े हैं? (ग) क्या सरकार की जानकारी में है कि जिन किसानों के पास बैंकों द्वारा जारी किसान क्रेडिट कार्ड नहीं हैं उन्हें निजी साहूकारों से कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है ? (घ) यदि हाँ, तो क्या सरकार सभी किसानों को समय-सीमा में
किसान क्रेडिट कार्ड के दायरे में लाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करेगी?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) सिहावल विधानसभा क्षेत्र सहित सीधी जिले में कुल 166520 एवं सिंगरौली जिले में कुल 269794 कृषि भूमि धारक किसान है । (ख) सीधी जिले में बैंकों द्वारा जारी किये गये किसान क्रेडिट कार्ड की संख्या 29080 एवं सिंगरौली जिले में 59351 है तथा सीधी जिले में खरीफ 2021 में 2525 एवं रबी 2021-22 में 2945 किसान फसल बीमा से जुड़े है एवं सिंगरौली जिले में 4876 किसान बीमा से जुड़े हुये है। (ग) जी नहीं। सीधी एवं सिंगरौली जिले में ऐसा कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं है। (घ) उत्तरांश (ग) के प्रकाश में, प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
विभागीय भूमियों की जानकारी
37. ( क्र. 631 ) डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रतलाम जिला अंतर्गत किन-किन स्थानों पर कितनी-कितनी शासन / विभाग की वन भूमि स्थित है? क्षेत्रफल सहित बताएं । (ख) साथ ही विकासखंडवार किन-किन स्थानों पर कितनी-कितनी भूमियां हैं ? जानकारी देकर स्पष्ट करें कि उन भूमियों पर किस किस प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं? कितने भूमियों का उपयोग होकर कितनी भूमियां रिक्त पड़ी हैं अथवा स्थाई या अस्थाई प्रकार का अतिक्रमण, अवैध कब्जा है? स्पष्ट जानकारी दें? (ग) बताएं कि वर्ष 2018-19 से लेकर प्रश्न दिनांक तक विभाग की भूमियों पर किस-किस प्रकार के कार्य किए जाते रहे हैं? विकासखंडवार, ग्रामवार किए गए कार्यवार स्वीकृत बजट एवं व्यय राशि सहित कार्यों की पूर्णता, अपूर्णता की जानकारी दें। (घ) बताएं कि वर्ष 2018-19 से लेकर प्रश्न दिनांक तक उपरोक्तानुसार उपरोक्त उल्लेखित भूमियों पर किए गए कार्यों के उल्लेखनीय कार्य क्या होकर, उससे क्या लाभ हुआ तथा विगत समय में किसकिस स्थान पर नवीन योजनाएं बनाकर भूमियों का संरक्षण व उपयोग किया जाना सुनिश्चित हुआ? वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) भारतीय वन अधिनियम, 1927 में अधिसूचित वन भूमि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ग) वन विभाग द्वारा वन परिक्षेत्रों में वन कक्षों के अंतर्गत कार्य किया जाता है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है। (घ) रतलाम वनमंडल में विगत समय में कराये गये विभिन्न वानिकी कार्यों के फलस्वरूप इंडिया स्टेट ऑफ फारेस्ट रिपोर्ट 2019 एवं 2021 के तुलनात्मक विश्लेषण में रतलाम जिले के अंतर्गत 15.31 वर्ग कि.मी. वन आवरण की वृद्धि हुई। पर्यावरणीय लाभ के साथ स्थानीय समुदायों को रोजगार, चारा, जलाऊ एवं लघु वनोपज की प्राप्ति हुई। योजना बनाकर विगत समय में भूमि संरक्षण एवं वृक्षारोपण कार्य का स्थलवार विवरण उत्तरांश 'ग' के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है।
राजस्व भूमियों के संबंध में [राजस्व]
38. ( क्र. 632 ) डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जावरा नगर फोरलेन सड़क स्थित जावरा चौपाटी से लेकर अरनियापीथा मंडी, भेसाना फंटा से आगे ग्राम रूपनगर फंटे तक सड़क के दोनों और अनेक स्थानों पर शासन की राजस्व भूमिया हैं? (ख) यदि हाँ, तो फोरलेन सड़क निर्माण के पूर्व एवं फोरलेन सड़क निर्माण के पश्चात उपरोक्त दोनों स्थलों पर शासन की राजस्व भूमियों पर कब-कब सीमांकन किया गया और किसके द्वारा किया गया? सीमांकन में निर्माण के पूर्व व पश्चात भूमियों की स्थितियां किस प्रकार की रही ? (ग ) साथ ही बताएं कि विगत वर्षों में अरनिया पीथा मंडी परिसर की बाउंड्रीवाल की चारों दिशाओं से लगी भूमियों पर एवं अरनिया पीथा मंडी के सामने ग्राम अरनिया पीथा एवं ग्राम भैसाना की भूमियों पर तथा हिंगलाज माता मंदिर के पास एवं मंदिर के सामने व औद्योगिक क्षेत्र थाना जावरा के पास व सामने शासन की भूमियों की क्या स्थिति है? (घ) अवगत कराएं कि वर्ष 2021-22 एवं वर्ष 2022-23 में विभाग द्वारा उक्त समस्त शासकीय भूमियों की जांच हेतु जांच दल गठित किए गए तो जांच
दल द्वारा किस-किस दिनांक को किस-किस प्रकार की कार्यवाही करते हुए शासन की भूमि से अवैध कब्जे हटाकर अतिक्रमण मुक्त की गई?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ । (ख) शासकीय भूमियां होने से सीमांकन नहीं किया। फोरलेन निर्माण के पश्चात बन्नाखेडा भूमि सर्वे नम्बर 185/251 पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय बनाया है। निर्माण पूर्व / पश्चात भूमि सर्वे नं. 226/2 पर बस स्टेण्ड दुकान आदि, सर्वे नम्बर 226/3 व 226/4 पर श्रीराम कालोनी के मकान व दुकानें बनी है। सर्वे नम्बर 240/8 ग्राम रूपनगर, मंगलदास महाराज का आश्रम एवं बालाजी का मंदिर बना है। (ग) अरनियापीथा मण्डी के सामने भूमि सर्वे नम्बर 148/1/1/1 रकबा 5.036 हेक्टेयर भूमि में स्कूल भवन, खेल मैदान, पानी की टंकी (पेयजल), आबादी व खेतों के आने-जाने के रास्ते है। ग्राम भैसाना भूमि सर्वे नम्बर 161/1 रकबा 0.880 हेक्टेयर नोईयत चरागाह व सर्वे नम्बर 164 रकबा 0.430 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण है। हिंगलाज माता मंदिर कस्बा जावरा के सर्वे नम्बर 87 रकबा 3.743 हेक्टेयर नोईयत में रास्ता है एवं मंदिर के पास बगीचा भी है। इसी सर्वे नम्बर पर बागरी समाज के श्मशान की भूमि आवंटित है व कुछ भाग पर अतिक्रमण है। औद्योगिक क्षेत्र थाना जावरा के आस-पास व सामने की भूमि खाते की भूमि है। (घ) जी नहीं।
राजस्व प्रकरणों का निपटारा
39. ( क्र. 644 ) श्री दिनेश राय मुनमुन : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 01 अप्रैल 2019 से प्रश्न दिनांक तक कितने आवेदन सीमांकन, नामांतरण बंटवारे के प्राप्त हुये? कितने आवेदनों के संबंध में न्यायालय में प्रकरण दर्ज किए गए। उसमें कितने प्रकरण दर्ज करना शेष हैं? (ख) प्राप्त आवेदनों में से कितने सीमांकन, नामांतरण बंटवारा समय-सीमा में स्वीकृत किये गये? कितने आवेदन अस्वीकृत व विचाराधीन हैं? कारण सहित विवरण दें। (ग) कितने सीमांकन, त्रुटि सुधार, बंटवारा, नामांतरण के प्रकरण राजस्व अधिकारी द्वारा समय-सीमा में कार्यवाही नहीं करने के कारण निरस्त हुये हैं? आवेदनकर्ता के नाम कारण सहित विवरण दें। (घ) सिवनी जिले में 01 नवम्बर से 15 नवम्बर 2021 तक शासन द्वारा भू अभिलेख रिकार्ड शुद्धिकरण अभियान के अंतर्गत नक्शा संबंधित त्रुटियों में सुधार फोती नामांतरण, भूमि सुधार, खसरा रकबा में सुधार व्यपवर्तन डाटा एन्ट्री हेतु कितने आवेदन प्राप्त हुये ? राजस्व अधिकारी द्वारा उसमें कितने प्रकरण का निराकरण कर दिया गया तथा कितने शेष है? नाम सहित विवरण दें।
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जिला सिवनी अंतर्गत आने वाली सभी तहसीलों में नामांतरण, बंटवारा एवं सीमांकन के प्रकरणों की स्थिति निम्नानुसार हैःमद
न्यायालय में कुल प्राप्त आवेदन
न्यायालय में कुल दर्ज आवेदन
दर्ज होने से शेष आवेदन
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तीन.छः सौ अस्सी हे., निस्तार मद में दो सौ तेरह.दो सौ छियासी हे. की जानकारी दी गई थी। जिला-खरगोन की तहसील - बड़वाह अंतर्गत नौ वन ग्रामों के वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस-उनचास के मिसल व मिसल का नक्शा हल्का पटवारी के पास उपलब्ध है एवं वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस-उनचास एवं वर्ष एक हज़ार नौ सौ अस्सी-इक्यासी की मिसल बंदोबस्त, खसरा पंजी, खातोनी पंजी, पटवारी मानचित्र वन मण्डल कार्यालय बड़वाह में उपलब्ध है। मध्य भारत वन विधान एक हज़ार नौ सौ पचास की धारा बीस के तहत् फॉरेस्ट एण्ड ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट ग्वालियर की अधिसूचना क्रमांक / एक हज़ार छः सौ तेईस/X-F/एक सौ चौदह दिनांक नौ अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ चौवन राजपत्र दिनांक इक्कीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ चौवन से आरक्षित वन अधिसूचित किया गया है। इन वन ग्रामों के अभिलेख पटवारी मानचित्र राजस्व विभाग द्वारा गिरदावरी एवं आर.बी.सी. छः के लिए संधारण करता है। प्रश्नांश अनुसार अधिसूचना राजपत्र में दिनांक इक्कीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ चौवन को आरक्षित वन अधिसूचित किया गया। ग्रामीण संसाधनों पर अधिकार ग्यारह. श्री ब्रह्मा भलावी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या बैतूल हरदा एवं होशंगाबाद जिले के कितने राजस्व ग्रामों के निस्तार पत्रक की प्रतिया प्रश्नांकित दिनांक तक ग्रामसभा / ग्राम पंचायत को प्रदान कर उनमें दर्ज कितनी-कितनी भूमियों के अधिकार नियंत्रण एवं प्रबंधन भी ग्रामसभा या ग्राम पंचायत को सौंप दिये गये हैं। ग्राम के पटवारी मानचित्र में दर्ज निस्तार पत्रक एवं अधिकार अभिलेख में किस-किस सार्वजनिक एवं निस्तारी प्रयोजनों के लिये किस-किस मद में दर्ज जमीनों के संबंध में ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत को संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची, पैसा कानून एक हज़ार नौ सौ छियानवे एवं वन अधिकार कानून दो हज़ार छः में क्या-क्या अधिकार दिए गये हैं ? सार्वजनिक एवं निस्तारी प्रयोजनों के लिये दर्ज जमीनों के संबंध में माननीय सर्वोच्च अदालत ने सिविल अपील प्रकरण क्रमांक उन्नीस हज़ार आठ सौ उनहत्तर/दो हज़ार दस में दिनांक अट्ठाईस जनवरी दो हज़ार ग्यारह को दिये आदेश में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत बावत् क्या-क्या निर्देश दिये हैं? राजस्व मंत्री : बैतूल जिले के एक हज़ार तीन सौ तीन राजस्व ग्रामों के निस्तार पत्र में दर्ज दो लाख नौ हज़ार चार सौ अट्ठारह हे. भूमि के निस्तार पत्रक की प्रतियां तथा जिला नर्मदापुरम के नौ सौ छत्तीस राजस्व ग्रामों के निस्तार पत्रक में दर्ज एक लाख चालीस हज़ार आठ सौ तीन हे. के निस्तार पत्रक की प्रतियां ग्राम पंचायत को सौंपी गई है जबकि जिला हरदा में अभी कोई ऐसी प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गई है। संविधान की ग्यारह वीं अनूसूची, पेसा कानून एक हज़ार नौ सौ छियानवे एवं वन अधिकार कानून दो हज़ार छः में किये गये प्रावधानों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- "अ" अनुसार । माननीय सर्वोच्च अदालत की सिविल अपील प्रकरण क्रमांक उन्नीस हज़ार आठ सौ उनहत्तर/दो हज़ार दस आदेश दिनांक अट्ठाईस जनवरी दो हज़ार ग्यारह में दिये गये प्रावधानों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- "ब" अनुसार । लघु वनोपज पर ग्रामसभा का अधिकार [वन] बारह. श्री ब्रह्मा भलावी : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायतों को किस-किस लघु वनोपज पर संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची पेसा कानून एक हज़ार नौ सौ छियानवे, वन अधिकार कानून दो हज़ार छः, भू-राजस्व संहिता एक हज़ार नौ सौ उनसठ एवं भारतीय वन अधिनियम एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस की किस-किस धारा में क्या-क्या अधिकार दिया है, किस-किस धारा में वन विभाग को क्या-क्या अधिकार दिया है ? पृथक-पृथक बतावें । ग्रामसभा एवं ग्रामपंचायतों को किस-किस लघु वनोपज पर क्या-क्या अधिकार सौंपे जाने के संबंध में राज्य मंत्रालय भोपाल ने किस-किस दिनांक को आदेश जारी किया, किस-किस लघु वनोपज को वन विभाग के नियंत्रण से मुक्त किए जाने के संबंध में किस-किस दिनांक को राजपत्र में अधिसूचना का प्रकाशन किया, आदेश एवं अधिसूचना की प्रति सहित बतावें। ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत को लघु वनोपज पर प्राप्त अधिकारों में हस्तक्षेप कर लघु वनोपज पर प्रतिबंध लगाने, लघु वनोपज के वन अपराध पंजीबद्ध कर जप्ती एवं राजसात करने का अधिकार राज्य शासन ने किस आदेश दिनांक से वन विभाग के किस श्रेणी के अधिकारी को सौंपा हैं? वन मंत्री : जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- एक अनुसार है। ग्राम सभाओं को प्रत्योजित अधिकार की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत को लघु वनोपज पर प्राप्त अधिकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं है किन्तु संग्रहण सतत् पोषणीय पद्धति से न करने पर एवं संग्रहण प्रकिया में वनोपज को नुकसान पहुंचाने के कारण भारतीय वन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस के प्रावधानों के अंतर्गत वन अधिकारी कार्यवाही करने हेतु अधिकृत हैं। विवाह सहायता राशि भुगतान के प्रकरण तेरह. श्री रामपाल सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि पच्चीस जून दो हज़ार बाईस की स्थिति में रायसेन जिले में मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मण्डल में पंजीकृत किन-किन के विवाह सहायता राशि भुगतान के प्रकरण किस स्तर पर कब से एवं क्यों लंबित हैं? संबंधितों के परिजनों को राशि का भुगतान कब तक कर दिया जायेगा? प्रश्नांश के संबंध में माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को एक जनवरी दो हज़ार बाईस से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में प्रश्नकर्ता विधायक के पत्र विवाह सहायता राशि भुगतान हेतु कब-कब प्राप्त हुए तथा उन पर क्या कार्यवाही की गई? प्रश्नकर्ता विधायक के पत्रों में उल्लेखित किन-किन को राशि का भुगतान कर दिया गया तथा किन-किन को राशि का भुगतान क्यों नहीं किया तथा कब तक राशि का भुगतान होगा? खनिज साधन मंत्री : पच्चीस जून दो हज़ार बाईस की स्थिति में रायसेन जिले में मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मण्डल अंतर्गत पंजीकृत अस्सी हितग्राहियों के विवाह सहायता योजनांतर्गत राशि भुगतान के प्रकरण जनपद पंचायत / नगरीय निकाय स्तर पर लंबित हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र- अ अनुसार है। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन एवं नगरीय निर्वाचन में संलग्न होने के कारण प्रकरण में कार्यवाही प्रचलित है । म.प्र. राजपत्र दिनांक पंद्रह अप्रैल दो हज़ार बाईस में मंडल की 'विवाह सहायता योजना में आंशिक संशोधन संबंधी अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें योजनांतर्गत पंजीकृत पात्र महिला श्रमिक अथवा पंजीकृत श्रमिक की पुत्री द्वारा सामाजिक न्याय विभाग की "मुख्यमंत्री कन्यादान योजना" अंतर्गत आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर विवाह करने पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के प्रावधान अनुसार हितग्राही को सामाजिक न्याय विभाग के माध्यम से हितलाभ प्रदान किए जाने संबंधी प्रावधान किया गया है। विवाह सहायता योजना में उक्त संशोधन के परिणाम स्वरूप मंडल के पत्र क्रमांक चार हज़ार एक सौ पैंतीस दिनांक बीस मई दो हज़ार बाईस अनुसार दिनांक बाईस अप्रैल दो हज़ार बाईस के पूर्व संपन्न हुए विवाहों में संबंधित जिला कलेक्टर से प्राप्त मांग पत्र अनुसार विवाह सहायता राशि का आवंटन प्रदाय किया जायेगा तथा दिनांक बाईस अप्रैल दो हज़ार बाईस को अथवा इसके पश्चात संपन्न हुए विवाहों हेतु "मुख्यमंत्री कन्यादान योजना अंतर्गत आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर विवाह करने पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के प्रावधान अनुसार हितग्राही को सामाजिक न्याय विभाग के माध्यम से हितलाभ प्रदान किया जायेगा। प्रश्नांश के संबंध में माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को एक जनवरी दो हज़ार बाईस से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में प्रश्नकर्ता विधायक का एक पत्र प्राप्त हुआ, जिस पर की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। अन्त्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता राशि का प्रदाय चौदह. श्री रामपाल सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि पच्चीस जून दो हज़ार बाईस की स्थिति में रायसेन जिले में मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना तथा मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मण्डल में पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु उपरांत अन्त्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता राशि भुगतान के किन-किन प्रकरण में किस स्तर पर कब से एवं क्यों लंबित हैं? उक्त लंबित प्रकरणों का कब तक निराकरण होगा तथा संबंधित के परिजनों को राशि का भुगतान कब तक कर दिया जायेगा ? प्रश्नांश के संबंध में माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को एक जनवरी दो हज़ार बाईस से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में प्रश्नकर्ता विधायक के पत्र कब-कब प्राप्त हुए तथा उन पर क्या-क्या कार्यवाही की गई ? प्रश्नकर्ता विधायक के पत्रों में उल्लेखित किन-किन समस्याओं का निराकरण हुआ तथा किन-किन समस्याओं का निराकरण क्यों नहीं हुआ तथा कब तक निराकरण होगा? खनिज साधन मंत्री : मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना के अंतर्गत रायसेन जिले में पच्चीस जून दो हज़ार बाईस की स्थिति में पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु उपरांत अन्तेष्टि सहायता का कोई भी प्रकरण भुगतान हेतु लंबित नहीं है। अनुग्रह सहायता राशि भुगतान के एक सौ नवासी प्रकरण में ई.पी.ओ. जारी है। जिनमें पर्याप्त बजट उपलब्धता पर भुगतान किया जाता है। मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के अंतर्गत पच्चीस जून दो हज़ार बाईस की स्थिति में रायसेन जिले में मृत्यु की दशा में अंत्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता योजनांतर्गत कोई भी प्रकरण भुगतान हेतु लंबित नहीं है । म.प्र. असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत प्रकरणों में पात्रता अनुसार राशि भुगतान एक सतत् प्रक्रिया है। पदाभिहित अधिकारियों द्वारा पात्रता अनुसार प्रकरण स्वीकृति उपरान्त ई.पी.ओ. जारी कर डिजीटली हस्ताक्षरित किये जाने तथा मृत्यु सत्यापन की कार्यवाही पश्चात् राज्य स्तर पर प्रकरणों में बजट उपलब्धता अनुसार भुगतान किया जाता है। प्रश्नांश के संबंध में माननीय विधायक महोदय द्वारा माननीय मंत्री जी को संबोधित पत्र क्रमांक एक हज़ार तीस दिनांक बीस अप्रैल दो हज़ार बाईस मंत्री महोदय के माध्यम से दिनांक सत्ताईस अप्रैल दो हज़ार बाईस को सचिव, असंगठित मण्डल को प्राप्त हुआ। जिस संबंध में वस्तुस्थिति से माननीय विधायक महोदय को मण्डल के पत्र क्रमांक एक हज़ार पाँच सौ उनतालीस दिनांक उनतीस अप्रैल दो हज़ार बाईस द्वारा अवगत कराया गया, साथ ही उक्त पत्र श्रम पदाधिकारी, मण्डीदीप की ओर आवश्यक कार्यवाही हेतु अग्रेषित किया गया। दो. इसी प्रकार माननीय विधायक महोदय का समविषयक पत्र माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से दिनांक छः जून दो हज़ार बाईस को प्राप्त हुआ। जिसे श्रम पदाधिकारी, मण्डीदीप को आवश्यक कार्यवाही बावत् पत्र क्र. दो हज़ार पाँच सौ अड़तीस दिनांक तेरह जून दो हज़ार बाईस द्वारा प्रेषित किया गया। जिसकी प्रतिलिपि माननीय विधायक महोदय जी को भी प्रेषित की गई है। तीन. माननीय विधायक महोदय का माननीय मंत्री जी श्रम विभाग को संबोधित पत्र क्रमांक एक हज़ार अट्ठावन दिनांक अट्ठाईस अप्रैल दो हज़ार बाईस माननीय मंत्री जी कार्यालय के माध्यम से दिनांक तेरह जून दो हज़ार बाईस को प्राप्त हुआ। जो कि पत्र क्रमांक आठ हज़ार आठ सौ उनचास दिनांक अट्ठाईस जून दो हज़ार बाईस के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही हेतु श्रम पदाधिकारी, रायसेन को भेजा गया। जिसकी प्रतिलिपि माननीय विधायक महोदय जी को भी प्रेषित की गई है। प्रश्नांश के संबंध में भवन मंडल अंतर्गत माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को एक जनवरी दो हज़ार बाईस से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में प्रश्नकर्ता विधायक का एक पत्र प्राप्त हुआ, जिस पर की गई कार्यवाही की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। असंगठित मंडल अंतर्गत माननीय विधायक महोदय के पत्रों में उल्लेखित सभी समस्याओं के निराकरण हेतु तत्परता से कार्यवाही करते हुये श्रम पदाधिकारी, मण्डीदीप द्वारा मुख्य कार्यापालन अधिकारी जनपद पंचायत सिलवानी / बेगमगंज एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी सिलवानी / बेगमगंज को कार्यवाही हेतु पत्र प्रेषित किये गये, जिन पर त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन एवं नगरीय निर्वाचन में संलग्न होने के कारण कार्यवाही प्रचलन में है। माननीय विधायक महोदय द्वारा प्रकरणों में भुगतान लंबित होने की समस्या का उल्लेख किया गया था। प्रकरणों में भुगतान एक सतत् प्रक्रिया है। पदाभिहित अधिकारियों द्वारा पात्रता अनुसार प्रकरण स्वीकृति उपरान्त ई.पी.ओ. जारी कर डिजीटली हस्ताक्षरित किये जाने तथा मृत्यु सत्यापन की कार्यवाही पश्चात् राज्य स्तर पर प्रकरणों में बजट उपलब्धता अनुसार भुगतान किया जाता है। भवन मंडल अंतर्गत प्रश्नांश की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। परिशिष्ट - "सैंतीस" प्रधानमंत्री उज्जवला योजना पंद्रह. श्री बैजनाथ कुशवाह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत पात्रता हेतु क्या-क्या नियम एवं निर्देश हैं? प्रश्नांश के प्रकाश में बी. पी. एल. कार्डधारियों को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिये जाने का प्रावधान हैं? यदि हाँ, तो सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत स्थिति इण्डेन गैस एजेंसी रामपुर कला द्वारा ऐसे पात्र हितग्राहियों से राशि वसूली गई है? यदि हाँ, तो क्या उक्त एजेंसी के विरूद्ध कोई शिकायती आवेदन विभाग को प्राप्त हुए है? यदि हाँ, तो प्राप्त आवेदनों का विवरण व आज दिनांक तक उक्त गैस एजेंसी के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई है? खाद्य मंत्री : प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत पात्रता हेतु भारत सरकार के पत्र दिनांक चार अगस्त दो हज़ार इक्कीस एवं म.प्र. शासन के पत्र क्रमांक छः सौ आठ/पी.एस.फूड/उज्जवला/ दो हज़ार इक्कीस दिनांक सोलह.आठ.दो हज़ार इक्कीस, पत्र क्र. छः सौ पैंतीस / पी. एस. खाद्य / उज्जवला/दो हज़ार इक्कीस दिनांक पच्चीस.आठ.दो हज़ार इक्कीस, पत्र क्र.सात सौ छः /उज्जवला/दो हज़ार इक्कीस दि.पंद्रह.नौ.दो हज़ार इक्कीस, पत्र क्र.सात सौ छप्पन/पी.एस. खाद्य/उज्जवला/दो हज़ार इक्कीस दिनांक अट्ठाईस.नौ.दो हज़ार इक्कीस, पत्र क्र. नौ हज़ार पाँच सौ इक्यावन/पी.एस.खाद्य/उज्जवला /दो हज़ार इक्कीस दिनांक बाईस.दस.दो हज़ार इक्कीस के द्वारा विभागीय दिशा निर्देश जारी किये गये, जो पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" अनुसार है। जी हाँ । इण्डेन गैस एजेंसी रामपुरकलां के संचालक द्वारा अवैध राशि प्राप्त कर उज्जवला का गैस कनेक्शन देने के संबंध में प्राप्त शिकायत की जांच कराई गई एवं जांच प्रतिवेदन अनुसार पाई गई अनियमितताओं के संबंध में इण्डेन गैस एजेंसी रामपुरकलां के संचालक के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई। उक्त प्रकरण में मान. न्यायालय कलेक्टर जिला मुरैना के प्र.क्र. तिरासी / ब-एक सौ इक्कीस/दो हज़ार बीस-इक्कीस में पारित आदेश दिनांक अट्ठारह.तीन.दो हज़ार इक्कीस द्वारा रूपये दस हज़ार/- अर्थदण्ड कर जमा करने हेतु आदेश पारित किया गया है। उपरोक्त आदेश के विरूद्ध गैस एजेंसी संचालक द्वारा मा. न्यायालय सत्र न्यायाधीश, सत्र खण्ड मुरैना के आपराधिक अपील क्र. इक्यावन/दो हज़ार इक्कीस में पारित आदेश दिनांक दस जून दो हज़ार बाईस द्वारा अपील स्वीकार करते हुए आलोच्य आदेश को अपास्त किया गया है। उक्त एजेंसी के विरूद्ध प्राप्त शिकायती आवेदन एवं उक्त गैस एजेंसी के विरूद्ध की गई कार्यवाही का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" अनुसार है। वृक्षारोपण की जांच व स्थानांतरित रेन्जरों को कार्यमुक्त करना सोलह. श्री पुरुषोत्तम लाल तंतुवाय : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि जिला दमोह की हटा वीट अंतर्गत वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस, दो हज़ार बीस-इक्कीस व वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस में किस-किस प्रजाति के कितने वृक्ष एवं पौधे कहां-कहां रोपे गये एवं वृक्षारोपण में सरकार का कितना व्यय हुआ ? वृक्षारोपण में स्थलवार जीवित पौधों की संख्या बतायी जावे व प्राक्कलन सहित गड्ढों की खुदाई व रोपण पर व संरक्षण पर व्यय की जानकारी दी जावे । वृक्षारोपण की शिकायतें लगातार प्राप्त होती रहती है तो क्या एक प्रदेश स्तरीय जांच समिति बनाकर हटा बीट अंतर्गत हुये वृक्षारोपण की जांच कराकर कार्यवाही की जावेगी? साथ ही बताया जावे कि वन विभाग में शासन द्वारा कुछ रेंजरों की परिवीक्षा अवधि के पूर्ण हो जाने उपरांत नवीन पदस्थापना की गई थी लेकिन आज दिनांक तक नवीन पदस्थापना स्थल पर कितने रेंजरों ने कार्य भार लिया? हटा के रेंजर द्वारा नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार क्यों ग्रहण नहीं किया ? वन मंत्री : जिला दमोह में आने वाले वन मण्डल दमोह एवं नौरादेही वन मण्डल के अंतर्गत बीट हटा नहीं है, शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो जाने के उपरांत नवीन पदस्थापना पर चौवन वन क्षेत्रपालों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। परिक्षेत्र हटा में किसी अन्य वनक्षेत्रपाल की पदस्थिति न होने से तथा तत्पश्चात कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी दमोह के आदेश क्रमांक - एक सौ पचासी, दिनांक इकतीस.पाँच.दो हज़ार बाईस एवं आदेश क्रमांक-सात सौ अट्ठारह, दिनांक इक्कीस.छः.दो हज़ार बाईस द्वारा परिक्षेत्र अधिकारी हटा को त्रि-स्तरीय पंचायत आम निर्वाचन दो हज़ार बाईस में सेक्टर अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिस कारण नवीन पदस्थापना में कार्यभार ग्रहण करने हेतु भारमुक्त नहीं किया जा सका। कोरोना मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि का प्रदाय [राजस्व] सत्रह. श्री तरूण भनोत : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या कोरोना से होने वाली मृत्यु पर मृतक के परिजन को पचास लाख अथवा अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने का प्रावधान है अथवा नहीं? यदि वर्णित हाँ तो जबलपुर जिले में कितने कोरोना से मृतकों के परिजनों को पचास लाख अथवा अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है, जानकारी उनके नामवार एवं पतावार दी जावे। क्या उक्त योजना एस. टी. / एस. सी. कर्मचारियों के लिये भी है? यदि हाँ, तो जबलपुर स्थित शासकीय सेठ गोविन्ददास चिकित्सालय अंतर्गत कार्यरत कोरोना से मृतक एस.डी. प्रधान के परिजनों को कब अनुकंपा नियुक्ति अथवा पचास हजार की राशि प्राप्त होगी? राजस्व मंत्री : जी हाँ । जबलपुर जिले में डॉ. क्षीतिज भटनागर की पत्नी डॉ. शिखा भटनागर को पचास लाख की राशि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज योजना में प्रदान की गई। इसी प्रकार श्री अब्दुल मुबीन लैब टैक्नीशियन की पत्नी श्रीमति आरजू बानो को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज योजना के अंतर्गत पचास लाख की राशि एवं अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई। श्री एस. डी. प्रधान कंपाउंडर की पत्नी को पचास लाख की राशि एवं उनके पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति का प्रकरण संचालनालय, स्वास्थ्य सेवायें में प्रक्रियाधीन है। जी हाँ । शासकीय सेठ गोविन्ददास चिकित्सालय जबलपुर के श्री एस. डी. प्रधान कंपाउंडर की पत्नी को पचास लाख की राशि का भुगतान बीमा कंपनी में प्रक्रियाधीन है एवं उनके पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति का प्रकरण संचालनालय, स्वास्थ्य सेवायें में प्रक्रियाधीन है। नर्मदा तट पर अवैध मुरूम उत्खन्न [खनिज साधन] अट्ठारह. श्री तरूण भनोत : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या भेड़ाघाट नर्मदा तट स्थित सरस्वती घाट और भीटा गांव में बेजा तरीके से अवैध मुरूम उत्खनन की घटनाओं की शिकायतें मिली हैं? यदि हाँ, तो इन शिकायतों पर शासन द्वारा क्या कार्यवाही की गई है? क्या अवैध मुरूम उत्खनन के कारण मिट्टी के ढेरों में टिटहरी पक्षी के अंडे नष्ट हो रहे है और अवैध उत्खनन से पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान के साथ ही पशुपक्षियों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिये क्या कदम उठाये जा रहे है ? क्या सरकार अवैध उत्खनन को रोकने और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिये किसी ठोस नीतिगत फैसले पर विचार करेगी ? खनिज साधन मंत्री : जी नहीं। प्रश्नांश के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है । एवं प्रश्नांश के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है । निराकृत प्रकरणों की जानकारी [राजस्व] उन्नीस. श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि छतरपुर जिले की महाराजपुर तहसील में पदस्थ वर्तमान तहसीलदार द्वारा भूमि संबंधी वसीयत सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा आदि के प्रकरण निराकृत किये गये है ? प्रश्नांश यदि हाँ, तो वर्तमान पदस्थ तहसीलदार के पदांकन दिनांक से प्रश्न दिनांक तक निराकृत प्रकरणों की प्रति उपलब्ध करायें। प्रश्नांश के अनुसार वसीयत प्रकरणों में आपत्तियां लगी है? यदि हाँ, तो किन-किन प्रकरणों में ? राजस्व मंत्री : जी हाँ । उपरोक्त वसीयत, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा आदि के प्रकरणों का निराकरण म.प्र. भू-राजस्व संहिता एक हज़ार नौ सौ उनसठ की धारा एक सौ नौ,एक सौ दस के तहत नामांतरण/वसीयत नामांतरण धारा एक सौ उनतीस के तहत सीमांकन, धारा एक सौ अठहत्तर, एक सौ अठहत्तर के तहत बंटवारा के प्रकरणों में विधि संगत न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत प्रकरणों का निराकरण किया गया। प्रकरणों में निराकृत आदेश की नियमानुसार प्रतियां आर. सी. एम. एस. पोर्टल पर डिजिटल साईन से अपलोड की गई है। जी हाँ। कुल तीन वसीयत नामांतरण पर आपत्तियाँ प्राप्त हुई है। आपत्तियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार । ग्रेनाइट पत्थर उत्खनन की स्वीकृति बीस. श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या डी.जी. मिनरल्स कम्पनी लवकुश नगर को ग्रेनाइट पत्थर उत्खनन की स्वीकृत शासन के नियम व निर्देशों के तहत की गयी थी? यदि हाँ, तो नियम व निर्देशों की प्रति तथा स्वीकृत दिनांक की जानकारी उपलब्ध करायें। क्या उक्त कम्पनी संचालक द्वारा नियम व निर्देशों का पालन किया जा रहा है? यदि हाँ, तो क्या कम्पनी नगर की बीच बस्ती में संचालित है तथा स्वीकृत क्षेत्र के बाहर पत्थर खोदा जा रहा है ? प्रश्नांश यदि हाँ, तो जिला खनिज अधिकारी द्वारा कार्यवाही की गयी है? यदि हाँ, तो कार्यवाही की प्रति उपलब्ध करायें। यदि नहीं, तो क्यों कारण बतायें। विगत दिनों कम्पनी की दीवाल गिरने से आर. के. महाविद्यालय के दो विद्यार्थियों की मृत्यु तथा कुछ विद्यार्थी घायल हुये थे तथा इसके पूर्व भी जन हानि की सूचनाएं प्राप्त हुई है? यदि हाँ, तो शासन कम्पनी संचालक व निरीक्षणकर्ता अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की गयी है? यदि हाँ, तो कार्यवाही की प्रति उपलब्ध करायें। यदि नहीं, तो कारण बतायें । खनिज साधन मंत्री : जी हाँ । मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, एक हज़ार नौ सौ छियानवे अधिसूचित है। डी.जी. मिनरल्स कंपनी को शासन के आदेश दिनांक इक्कीस अप्रैल दो हज़ार बाईस से स्वीकृत किया गया है। जी हाँ। जी नहीं। कंपनी द्वारा नगर के बीच बस्ती में खदान संचालित नहीं है, बल्कि नगर के बाहर एक छोर में बस्ती से निर्धारित दूरी छोड़कर खदान संचालित की जा रही है। खदान में पत्थर उत्खनन स्वीकृत क्षेत्र के अंदर किया जा रहा है। कंपनी संचालक द्वारा नियम व निर्देशों का पालन किये जाने एवं स्वीकृत क्षेत्रान्तर्गत खनन कार्य संपादित करने से कंपनी पर कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। जी हाँ। दिनांक अट्ठाईस मार्च दो हज़ार बाईस की घटना को संज्ञान में लेते हुए थाना लवकुश नगर में अपराध क्रमांक एक सौ तेईस/दो हज़ार बाईस धारा तीन सौ चार ए ता. हि. का प्रकरण दर्ज किया गया है। विवेचना में दीवार निर्माण करने वाले ठेकेदार इकबाल मोहम्मद निवासी लवकुश नगर, आर. के. कॉलेज प्रबंधन समिति के प्रमुख श्री योगेन्द्र खरे व श्री रजनीश सोनी एवं डी.जी. मिनरल्स प्रायवेट लिमिटेड के प्रमुख श्री मुकेश मीना को जिम्मेदार मानते हुए अपराध में नामजद किया गया है। मामले में विवेचना जारी है। चालानी कार्यवाही होना शेष है। इस घटना के अतिरिक्त ग्रेनाईट खदान में उत्खनन के दौरान पूर्व में अन्य कोई भी जन हानि या किसी के घायल होने की सूचना थाना ईकाई में पंजीकृत नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। कोरोना काल में अनियमितता इक्कीस. श्री यशपाल सिंह सिसौदिया : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि उज्जैन में वैश्विक महामारी कोरोना में कितने पीड़ितों ने इलाज या मृत्यु होने पर राहत राशि मुआवजे के लिए आवेदन प्रस्तुत किये, कितने पीड़ितों को इलाज के लिए किस-किस मद में राशि दी गयी ? प्रश्नांश संदर्भित कितने पीडितों को किस कारण से मुवावजा राशि नहीं दी गयी ? कोरोना पीड़ित की मृत्यु होने पर राहत राशि मुआवजा राशि प्राप्त करने के क्या नियम प्रावधान थे, रतलाम मंदसौर जिले में ऐसे कितने आवेदन लंबित है जिनमें समस्त शासन द्वारा चाही गयी जानकारी होने के बावजूद भी पीड़ित परिवारों को मुवावजा नहीं दिया गया ? उज्जैन संभाग में कोरोना अवधि में खरीदी आदि अनियमितता करने के मामले में जिला कलेक्टरों द्वारा क्या-क्या सम्बन्धित के खिलाफ कार्यवाही की गयी नाम सहित जांच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराये? राजस्व मंत्री : उज्जैन जिले अन्तर्गत कुल एक हज़ार पाँच सौ निन्यानवे मृतकों के वैध वारिसानों द्वारा अनुग्रह राशि हेतु आवेदन प्रस्तुत किये। कोविड- उन्नीस संक्रमण से मृत्यु होने पर विभाग द्वारा अनुग्रह राशि प्रदाय किये जाने के निर्देश है, ईलाज के लिये राशि प्रदाय किये जाने का प्रावधान नहीं है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" अनुसार है। कोरोना पीड़ित की मृत्यु होने पर मुआवजा राशि प्राप्त करने के दिशा-निर्देशों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" अनुसार है। रतलाम एवं जिला मंदसौर में अनुग्रह राशि हेतु पात्र पीड़ित परिवारों के आवेदन लंबित नहीं है। उज्जैन संभाग में कोरोना अवधि में खरीदी आदि अनियमितता के संबंध में कोई मामला नहीं है। अतः शेष प्रश्न उद्भूत नहीं होता है। अवैध उत्खनन की जानकारी बाईस. श्री यशपाल सिंह सिसौदिया : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि उज्जैन संभाग में एक जनवरी दो हज़ार अट्ठारह के पश्चात अवैध उत्खनन के कितने माम कहाँकहाँ, दर्ज किये गये ? इसमें कौन-कौन सा खनिज कितनी - कितनी मात्रा में जप्त किया गया तथा किस कारण से कितना वापस छोड़ा गया, कितना खनन माफिया जबरन छुड़ा ले गये ? समस्त जानकारी देवें। वर्तमान में उक्त संभाग में किस-किस सामग्री के कितने-कितने ठेके किस-किस कम्पनी/व्यक्ति के नाम से हैं जिनकी कितनी - कितनी मात्रा में खनन की स्वीकृति है? विभाग इसकी निगरानी किस तरह करता है? समस्त जानकारी देवें । प्रश्नांश एवं संदर्भित खदानों की निगरानी विभाग किस तरह करता है? ठेकेदारों द्वारा स्वीकृत खनन से अधिक खनन के कितने मामले उक्त संभागों में, उक्त अवधि में, कहाँ-कहाँ सामने आये? उनके विरुद्ध क्या-क्या कार्यवाही विभाग द्वारा की गयी? कितनी कार्यवाही अभी भी प्रचलन में है? समस्त जानकारी देवें । खनिज विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के विरुद्ध उक्त अवधि में, उक्त संभागों में, जांच एजेंसियों/विभाग द्वारा की गयी कार्यवाही का विवरण देवें तथा प्रतिवेदन की प्रतिलिपि देते हुए प्रकरण की वर्तमान स्थिति से अवगत करायें। खनिज साधन मंत्री : प्रश्नांश में उल्लेखित संभाग के जिलों में प्रश्नाधीन अवधि में दर्ज अवैध उत्खनन के प्रकरणों तथा उनमें जप्त की गई खनिज की मात्रा का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - अ में दर्शित है। जप्तशुदा खनिज अर्थदण्ड राशि जमा होने पर छोड़ा गया परंतु खनिज माफिया द्वारा जबरन छुड़ा कर खनिज ले जाने संबंधी कोई स्थिति प्रकाश में नहीं आयी है । प्रश्नांश में उल्लेखित संभाग के जिलो उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, मंदसौर तथा नीमच में कोई भी खनिज ठेके पर स्वीकृत नहीं किया गया है। देवास जिले में रेत खनिज का ठेका मेसर्स परम एजेन्सीस भोपाल के पक्ष में स्वीकृत किया गया है, उक्त ठेके में खनन हेतु स्वीकृत खनिज मात्रा का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - ब अनुसार है। विभागीय अधिकारियों के साथ ही राजस्व एवं पुलिस विभाग द्वारा इसकी निगरानी नियमित निरीक्षण तथा औचक निरीक्षण कर की जा रही है । प्रश्नांश अनुसार विभाग द्वारा विभागीय अमले से खदानों का सामयिक निरीक्षण कराता है तथा औचक निरीक्षण हेतु दल गठित कर कार्यवाही कराया जाता है। संभाग के किसी भी जिले में ठेकेदारों द्वारा खनिज खनन हेतु स्वीकृत मात्रा से अधिक मात्रा में खनन किये जाने का कोई प्रकरण प्रश्नाधीन अवधि में नहीं पाया गया, अतः प्रश्नांश के शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। संभाग में प्रश्नाधीन अवधि में विभाग के किसी भी अधिकारी, कर्मचारी के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई। प्रश्नांश के शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। राजस्व अधिकारी/कर्मचारियों के विरुद्ध जांच तेईस. श्री यशपाल सिंह सिसौदिया : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि एक जनवरी दो हज़ार अट्ठारह के पश्चात राजस्व विभाग में पदस्थ राजस्व अधिकारी, संयुक्त कलेक्टर, ADM, SDM / SDO, अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार, ट्रेप अपराधिक प्रकरणों के अपराध क्रमांक, दिनांक, धारा सहित अपराध का विवरण देते हुए समस्त जानकारी देवें। प्रश्नांश "क" संदर्भित उक्त सभी अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध प्रचलित विभागीय कार्यवाही का विवरण प्राप्त प्रतिवेदन का विवरण देवें। प्रश्नांश "क", "ख" संदर्भित उक्त अवधि में किस-किस अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय जाँच नस्तीबद्ध / समाप्त की गयी है? आदेश की प्रतिलिपि देवें । राजस्व मंत्री : एवं जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध आपराधिक प्रकरणों में संबंधित न्यायालयों में विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त / जांच एजेंसी द्वारा कार्यवाही की जाती है। पृथक अनुविभागीय अधिकारी राजस्व न्यायालय की स्थापना चौबीस. श्री दिव्यराज सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या विगत तीन माह पूर्व विकासखण्ड सिरमौर में आयोजित कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री महोदय के द्वारा तहसील जवा में पृथक अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय को स्थापित कर डभौरा एवं अतरैला में उप तहसील कार्यालय संचालित कराने संबंधी घोषणा की गई थी? यदि हाँ, तो उक्त घोषणा के अनुक्रम में क्या कार्यवाही की गई है ? प्रश्नांश के अनुक्रम में उक्त घोषित पृथक अनुविभागीय राजस्व न्यायालय के संचालन एवं डभौरा तथा अतरैला में नियमित रूप से उप तहसील कार्यालय संचालित करने के संबंध में क्या कार्यवाही प्रस्तावित की गई है? विभाग के द्वारा जवा में पृथक अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय कब से प्रारंभ किया जा सकेगा? क्या उप तहसील कार्यालय डभौरा एवं अतरैला में नियमित स्टाफ की पदस्थापना एवं नियमित कार्यालय संचालन की व्यवस्था की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? राजस्व मंत्री : माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा दिनांक तीस मई दो हज़ार बाईस को प्रेषित नोटशीट के माध्यम से सिरमौर में आयोजित कार्यक्रम में तहसील जवा में अनुविभाग कार्यालय स्थापित किए जाने की घोषणा की जाने की आधिकारिक सूचना प्राप्त हुई। जिसके क्रम में जवा में पृथक अनुविभाग बनाए जाने के संबंध में कलेक्टर रीवा से प्रस्ताव प्राप्त करने की कार्रवाई प्रचलित है। जवा में अनुविभाग कार्यालय गठन संबंधी घोषणा के क्रम में कलेक्टर रीवा से विधिवत प्रस्ताव प्राप्त करने की कार्रवाई प्रचलित है। कलेक्टर रीवा से प्रस्ताव प्राप्त होने पर, घोषणा के अनुरूप नियमनुसार कार्रवाई की जाना प्रस्तावित हैं। योजना का लाभ दिया जाना पच्चीस. श्री अजय कुमार टंडन : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि दमोह जिले की विधानसभा क्षेत्र दमोह अंतर्गत कितने बुजुर्ग राशनकार्ड धारक हैं जिनके अंगूठे के निशान के बॉयोमेट्रिक मशीन से मैच न होने के कारण राशन नहीं मिल रहा है ? क्या ऐसे मामलों में परिवार से बाहर के व्यक्ति को नामांकित करने का नियम है? यदि हाँ, तो क्या सरकार बुजुर्ग राशनकार्ड धारकों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए अंगूठे के निशान के बॉयोमेट्रिक मशीन से मैच न होने की स्थिति में ओ.टी.पी., आई स्केनर या आधार कार्ड की कापी से राशन देने का प्रावधान करेगी? खाद्य मंत्री : दमोह जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, दो हज़ार तेरह के अंतर्गत सम्मिलित पात्र हितग्राहियों में से बुजुर्ग हितग्राहियों के अंगूठे की रेखाएं घिसने सिकुड़ने से पी.ओ.एस. मशीन पर बॉयोमेट्रिक सत्यापन विफल होने के कारण राशन प्राप्त करने से कोई हितग्राही वंचित नहीं है । जी हाँ। बॉयोमेट्रिक सत्यापन सफल न होने वाले हितग्राहियों को नॉमिनी के माध्यम से राशन वितरण का प्रावधान है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, दो हज़ार तेरह के अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों में से परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा पी. ओ. एस. मशीन पर बॉयोमेट्रिक सत्यापन के आधार पर राशन प्राप्त किया जा सकता है। हितग्राही की एक अंगुली/ अंगूठा की रेखाओं से बॉयोमेट्रिक सत्यापन सफल न होने पर एक से अधिक अंगुलियों के बॉयोमेट्रिक सत्यापन किया जाता है। साथ ही, बॉयोमेट्रिक सत्यापन न होने पर आधार नंबर से लिंक मोबाइल नंबर पर ओ.टी.पी. अथवा नॉमिनी के माध्यम से राशन सामग्री के वितरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। हितग्राही द्वारा आधार पंजीयन केन्द्र पर अपने आधार नंबर को अपडेट कराने तथा मोबाइल नंबर लिंक कराने की सुविधा उपलब्ध है। किसी भी पात्र हितग्राही को बॉयोमेट्रिक सत्यापन सफल न होने के आधार पर राशन से वंचित नहीं किया जा रहा है। कोटवारों का नियमितीकरण छब्बीस. श्री अजय कुमार टंडन : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि प्रदेश के कोटवारों को प्रति माह कितना वेतन तथा कौन-कौन सी अन्य सुविधाएं दी जाती हैं? क्या वर्तमान में प्रदेश के कोटवारों को दिया जाने वाला वेतन उनके परिवार के भरण पोषण के लिए पर्याप्त है? क्या प्रदेश के कोटवारों को नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित करने और उन्हें कलेक्टर रेट पर वेतन दिए जाने के लिए कार्यवाही करेगी? राजस्व मंत्री : ग्राम कोटवार को मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिताएक हज़ार नौ सौ उनसठ की धारा-दो सौ इकतीस अनुसार सेवा भूमि या पारिश्रमिक या दोनों का प्रावधान किया गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। इसके अतिरिक्त कोटवारों को प्रतिवर्ष वर्दी, जूते, टार्च, बेल्ट एवं गरम कोट प्रदाय किये जाते हैं। कोटवारों को उनकी सेवाओं के लिए सेवाभूमि या पारिश्रमिक या दोनों मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता- एक हज़ार नौ सौ उनसठ के प्रावधानों अनुसार प्रदाय किए जाते हैं। ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है । परिशिष्ट- "अडतीस " गहरी खदानों के अपशिष्ट से फसलें एवं जमीनें खराब होना सत्ताईस. श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि खनिज संपदा निकालने हेतु कितने फिट गहराई तक खुदाई का प्रावधान है? जबलपुर जिले के अंतर्गत गांधी ग्राम से लगे बडखेरा रोड पर आयरन ओर की खदान तीन सौ फीट तक खोदी गई, क्या यह सही है या नहीं? क्या खदान से निकल रहा पानी एवं अपशिष्ट नाली, नहरों एवं खेतों में बहाया जा रहा है? क्या व्यक्तिगत लाभ के लिए फसल, जमीन की उर्वरा शक्ति एवं पर्यावरण को क्षति नहीं हो रही है? यदि हाँ, तो क्या शासन कार्यवाही करेगा? खनिज साधन मंत्री : रेत खनन को छोड़कर शेष खनिज के खनन कार्य हेतु गहराई की कोई सीमा नहीं है । से जी नहीं। ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायतों को अधिकार अट्ठाईस. डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि ग्रामसभा और ग्राम पंचायत को पटवारी मानचित्र में दर्ज सामुदायिक भूमियों, किस-किस लघु वनोपज पर क्या-क्या अधिकार संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची, पेसा कानून एक हज़ार नौ सौ छियानवे, वन अधिकार कानून दो हज़ार छः, भू-राजस्व संहिता एक हज़ार नौ सौ उनसठ की किस-किस धारा में दिया गया है, इनमें से किस-किस धारा में वन विभाग को क्या-क्या अधिकार दिए गए है? पृथक-पृथक बतावें। राज्य शासन ने पटवारी मानिचत्र, निस्तार पत्रक, अधिकार अभिलेख में सार्वजनिक एवं निस्तारी प्रयोजनों के लिए दर्ज सामुदायिक भूमियों एवं किस-किस लघु वनोपज के अधिकार, नियंत्रण एवं प्रबंधन ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत को सौंपे जाने का किस-किस दिनांक को आदेश या अधिसूचना जारी की है? प्रति सहित बतावें। पटवारी मानिचत्र एवं निस्तार पत्रक में दर्ज सामुदायिक भूमियों को वन विभाग द्वारा वर्किंग प्लान में शामिल कर कब्जा किए जाने, लघु वनोपज पर प्रतिबंध लगाकर लघु वनोपज के वन अपराध पंजीबद्ध किए जाने पर संबंधित वन अधिकारियों के विरूद्ध किस-किस कानून की किस-किस धारा के अनुसार कौन-कौन सी कार्यवाही के क्या-क्या अधिकार वर्तमान में किसे दिए गए है? वन मंत्री : जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। लघु वनोपजों में तेन्दूपत्ता विनिर्दिष्ट वनोपज घोषित होने से इसके विपणन की कार्यवाही म.प्र. राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा की जाती है । प्रश्नांश से संबंधित राज्य शासन द्वारा कोई विशिष्ट आदेश जारी नहीं किये गये है। वन विभाग द्वारा वर्किंग प्लान में अधिसूचित वन भूमियों को शामिल किया जाता है, जिसके प्रबंधन एवं नियंत्रण का अधिकार वन अधिकारियों को प्राप्त है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। परिशिष्ट - "उनतालीस" गौण खनिज पर ग्राम पंचायतों को छूट [ खनिज साधन] उनतीस. डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि ग्राम पंचायतों द्वारा किए जाने वाले निर्माण कार्यों और ग्रामीण विकास से संबंधित जिला पंचायत द्वारा नियंत्रित मदों से स्वीकृत किए गए कार्यों में लगने वाले गौण खनिज से संबंधित क्या-क्या छूट म.प्र. गौण खनिज नियम एक हज़ार नौ सौ छियानवे एवं म.प्र. रेत नियम दो हज़ार उन्नीस में दी गई है, इस छूट में ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों को क्या-क्या अधिकार दिए गए है? गत दो वर्षों में मण्डला, डिण्डोरी एवं बैतूल जिले में किस-किस ग्राम पंचायत एवं किस-किस एजेन्सी ने ग्रामीण विकास के कितने कार्यों में कितना गौण खनिज किस दर पर क्रय किया? कितने गौण खनिज के परिवहन पर कितनी राशि खर्च की? कितने गौण खनिज की कितनी रॉयल्टी का सप्लायर को या खनिज विभाग को भुगतान किया गया ? राजपत्र में अधिसूचित छूट से संबंधित नियमों का पालन नहीं किए जाने का क्या-क्या कारण रहा है? राज्य शासन ने नियमों में दी गई छूट का लाभ सुनिश्चित किए जाने के संबंध में किस-किस दिनांक को पत्र परिपत्र, आदेश, निर्देश जारी किए? प्रति सहित बतावें। खनिज साधन मंत्री : मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, एक हज़ार नौ सौ छियानवे के नियम तीन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों, जिला पंचायतों द्वारा किये जाने वाले निर्माण कार्यों के संबंध में छूट से संबंधित निम्नानुसार प्रावधान हैंः- "नियम - तीन ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों, जिला पंचायतों तथा उपभोक्ता संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक कार्यों के लिये संबंधित पंचायतों तथा जल उपभोक्ता संस्थाओं द्वारा हाथ में लिये गये कार्यों के लिए शासकीय भूमि से निकाले गये गौण खनिज के लिए लागू नहीं होगी। में निहित राजस्व प्राप्ति शीर्ष के अधीन रॉयल्टी जमा करना होगी)"। मध्यप्रदेश रेत नियम, दो हज़ार उन्नीस के नियम चार में पंचायतों के संबंध में छूट से संबंधित निम्नानुसार प्रावधान हैंः- "नियम चार - पंचायत / नगरीय निकाय द्वारा शुरू की गई शासकीय योजना या अन्य लाभप्रद कार्यों के लिए निकटतम स्वीकृत रेत खदान से रॉयल्टी का भुगतान करने के उपरांत ही रेत प्राप्त की जा सकेगी। पंचायत/नगरीय निकाय द्वारा जमा की गई रॉयल्टी की संपूर्ण रकम, लदान एवं परिवहन छोड़कर, की वापसी आवश्यक जांच एवं प्रमाणीकरण के आधार पर की जाएगी परंतु पंचायत/नगरीय निकाय के लिए कार्य ठेकेदार द्वारा किए जाते हैं, तो उपरोक्त जमा रॉयल्टी वापस नहीं की जाएगी।" ग्राम पंचायत द्वारा खनिजों का क्रय तथा परिवहन व्यय की जानकारी का संधारण किया जाना मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, एक हज़ार नौ सौ छियानवे में प्रावधानित नहीं है। ग्राम पंचायतों द्वारा रॉयल्टी का भुगतान किये जाने का प्रावधान नहीं है। अतः प्रश्नांश की जानकारी का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, एक हज़ार नौ सौ छियानवे के नियम तीन में प्रावधानित छूट अधिसूचित है। अधिसूचित नियमों के संबंध में पृथक से निर्देश जारी किया जाना आवश्यक नहीं है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। वन ग्रामों की जानकारी [वन] तीस. डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या राज्य के नौ सौ पच्चीस वनग्रामों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रश्न क्रमांक दो हज़ार एक सौ पचहत्तर दिनांक सात.तीन.दो हज़ार सत्रह एवं प्रश्न क्रमांक तीन हज़ार दो सौ अड़तालीस दिनांक आठ.तीन.दो हज़ार सत्रह में पटल पर प्रस्तुत करने के बाद भी ग्रामों के पटवारी मानचित्र एवं खसरा पंजी आदि बनाने के लिए पटवारियों की पदस्थापना बाबत् वन विभाग ने राज्य शासन को पत्र लिखा है? नौ सौ पच्चीस वनग्रामों में किस ग्राम का पटवारी मानचित्र खसरा पंजी राज्य शासन के आदेश दिनांक अट्ठाईस.दो.एक हज़ार नौ सौ अस्सी के तहत बनाए गए ? किस ग्राम को किस अधिसूचना क्रमांक दिनांक से किस कानून की किस धारा के तहत अधिसूचित आरक्षित वन / संरक्षित वन कक्ष में कब बसाया गया, उसमें से किस-किस अधिसूचना की प्रति वन विभाग के पास उपलब्ध है? प्रति सहित बतावें । वन मंत्री : जी हाँ । एवं जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। राजस्व ग्राम को वन ग्राम घोषित करना इकतीस. डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि खंडवा वनवृत्त के किस-किस राजस्व ग्राम को किस अधिसूचना क्रमांक या आदेश दिनांक से वनग्राम घोषित किया? किस वनग्राम को किस अधिसूचना क्रमांक या आदेश दिनांक से वीरान ग्राम घोषित किया? राजस्व ग्राम को वन ग्राम एवं वीरान ग्राम घोषित करने का क्याक्या अधिकार या छूट वन विभाग को किस कानून की किस धारा में दी है? खंडवा वनवृत्त में प्रतिवेदित किस-किस वनग्राम की भूमि से संबंधित कौन-कौन सी मिसल बंदोबस्त, खसरा पंजी, खतौनी पंजी, पटवारी मानचित्र वनमंडलों में उपलब्ध है? किस ग्राम की किस वर्ष की खसरा पंजी खतौनी पंजी भू-पोर्टल पर उपलब्ध है? इनमें किस ग्राम में कितनी निजी भूमि, कितनी आबादी मद की भूमि कितनी निस्तार मद और जंगल मद की भूमि दर्ज है? खंडवा वनवृत्त में प्रतिवेदित किस वनग्राम की कितनी निजी भूमि, कितनी आबाद मद की भूमि, कितनी निस्तार मद एवं जंगल मद की भूमि को मध्य भारत वन विधान एक हज़ार नौ सौ पचास की धारा बीस के अनुसार राजपत्र में किस दिनांक को आरक्षित वन अधिसूचित किया ? इन भूमियों से संबंधित धारा चार की अधिसूचना किस दिनांक को प्रकाशित की गई धारा पाँच से उन्नीस तक की जांच किस प्रकरण में कर किस दिनांक को आदेश दिए गए ? धारा चार की अधिसूचना एवं आदेश की प्रति सहित बतावें । वन मंत्री : वनवृत्त खण्डवा अंतर्गत वनमंडल खण्डवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वाह, बडवानी एवं सेंधवा में किसी भी राजस्व ग्राम को वनग्राम अथवा वीरान घोषित नहीं किया गया है। राजस्व ग्रामों को वनग्राम एवं वीरान ग्राम घोषित करने का वन विभाग के पास कोई अधिकार / कानून नहीं है। वनवृत्त खण्डवा अंतर्गत वनमंडल खण्डवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वाह, बडवानी एवं सेंधवा के कुल दो सौ पच्चीस वनग्रामों के खसरा पंजी, मानचित्र, खसरा-खतौनी, अभिलेख, राजस्व अभिलेखागार एवं वनमंडल कार्यालय में उपलब्ध हैं। वनग्रामों में स्थित निजी भूमि, आबादी भूमि, निस्तार मद एवं जंगल मद की वनभूमियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। वन वृत्त खण्डवा के अंतर्गत मध्य भारत विधान एक हज़ार नौ सौ पचास की धारा-बीस के अनुसार राजपत्र दिनांक इक्कीस.दस.एक हज़ार नौ सौ चौवन में वनमण्डल खरगोन के अट्ठावन वनग्राम, बड़वाह के नौ, बड़वानी के पैंतालीस वनग्राम तथा सेंधवा के पच्चीस वनग्राम इस प्रकार कुल एक सौ सैंतीस वनग्रामों को पुनः आरक्षित वनभूमि के रूप में अधिसूचित की गई है। खण्डवा वनवृत्त के वनग्राम पूर्व से ही धारा-बीस में आरक्षित वन के रूप में घोषित होने से धारा-पाँच से उन्नीस तक की कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। जल संसाधन विभाग की स्वीकृत योजनाएं [जल संसाधन] बत्तीस. श्री उमंग सिंघारः क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या धार जिले की गंधवानी विधानसभा में जल संसाधन विभाग द्वारा निर्माण कार्य स्वीकृत किये गये हैं? यदि हाँ, तो गंधवानी, बाग एवं तिरला विकासखण्ड में कौन-कौन से कार्य कितनीकितनी लागत राशि के कब-कब स्वीकृत किये गये हैं? विकासखण्ड, कार्यवार एवं राशिवार सूची उपलब्ध करावें। प्रश्नांकित यदि हाँ, तो स्वीकृत कार्यों की प्रश्न दिनांक तक निविदा जारी कर टेण्डर प्रक्रिया क्यों नहीं की गई है? इसका जिम्मेदार कौन है तथा कब तक निविदा जारी कर टेण्डर प्रक्रिया कर दी जायेगी ? यदि नहीं, तो क्यों ? जल संसाधन मंत्री : एवं जी हाँ। सूची संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। गंधवानी बाग एवं तिरला विकासखण्ड में स्वीकृत पाँच परियोजनाओं में से दो परियोजनाओं की निविदा स्वीकृत की जा चुकी है। दो परियोजनाओं की निविदा की कार्यवाही प्रचलन में है। शेष एक परियोजना से प्रभावित होने वाली वनभूमि व्यपवर्तन की अनुमति के अभाव में निविदा की कार्यवाही नहीं की जा सकी है। अतः किसी अधिकारी के जिम्मेदार होने की स्थिति नहीं है। निविदा जारी कर टेण्डर प्रक्रिया करने की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। परिशिष्ट- "चालीस" प्राप्त राशि का उपयोग [वन] तैंतीस. श्री देवेन्द्र सिंह पटेल : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि वित्तीय वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में रायसेन जिले में विभाग को किसकिस योजना में कब-कब शासन से कितनी - कितनी राशि प्राप्त हुई ? उक्त प्राप्त राशि में से क्या-क्या, कितनी-कितनी राशि के किसकी अनुशंसा पर कहाँ-कहाँ कार्य स्वीकृत किये गये? वित्तीय वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को रायसेन जिले के किन-किन विधायकों के पत्र कब प्राप्त हुए तथा उन पर क्या-क्या कार्यवाही की गई ? प्रश्नांश में प्राप्त पत्रों में उल्लेखित किन-किन समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तथा क्यों? इसके लिए कौन-कौन दोषी है तथा उल्लेखित समस्याओं का निराकरण कब तक होगा? वन मंत्री : जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-एक अनुसार है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्टतीन अनुसार है। वित्तीय वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में माननीय वन मंत्री जी एवं विधायकों के चौंतालीस पत्र प्राप्त हुये, जिसमें से चौंतीस पत्रों का निराकरण किया गया है तथा उत्तरांश "ग" के परिशिष्ट में लिखे कारणों से दस पत्रों के निराकरण की कार्यवाही जारी है, जिनका निराकरण शीघ्र किया जावेगा। इसके लिये कोई दोषी नहीं है। किसान सम्मान निधि चौंतीस. श्री देवेन्द्र सिंह पटेल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि पच्चीस जून, दो हज़ार बाईस की स्थिति में रायसेन जिले में कितने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि मिल रही है? तहसीलवार संख्या बतायें । पच्चीस जून, दो हज़ार बाईस की स्थिति में रायसेन जिले में कितने किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की राशि मिल रही है? तहसीलवार संख्या बतायें। रायेसन जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्राप्त करने वाले कितने किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की राशि नहीं मिल रही है तथा इस हेतु विभाग के अधिकारियों ने क्या-क्या कार्यवाही की ? प्रश्नांश एवं के संबंध में जिला कार्यालय रायसेन को एक जनवरी, दो हज़ार इक्कीस से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में रायसेन जिले के किन-किन सांसद तथा विधायकों के पत्र प्राप्त हुए तथा उन पर क्या कार्यवाही की गई? राजस्व मंत्री : पच्चीस जून, दो हज़ार बाईस की स्थिति में रायसेन जिले में एक लाख इकसठ हज़ार पैंसठ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि मिल रही है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट - एक अनुसार है । पच्चीस जून दो हज़ार बाईस की स्थिति में रायसेन जिले में एक लाख उनसठ हज़ार दो सौ पच्चीस किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की राशि मिल रही है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट-दो अनुसार है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि प्राप्त करने वाला प्रत्येक हितग्राही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की राशि प्राप्त करने हेतु पात्र होता है। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होते ही राशि हितग्राही के खाते में अंतरित कर दी जाती है। प्रश्नांश एवं के संबंध में जिला कार्यालय रायसेन को एक जनवरी, दो हज़ार इक्कीस से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में माननीय प्रभारी मंत्री जिला रायसेन, माननीय मंत्री लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मध्यप्रदेश शासन एवं माननीय विधायक विधानसभा क्षेत्र क्रमांक एक सौ तैंतालीस सिलवानी के पत्र प्राप्त हुए है। प्राप्त पत्रों पर नियमानुसार कार्यवाही हेतु संबंधित अनुविभागीय अधिकारी एवं तहसीलदारों को निर्देशित किया गया है। परिशिष्ट - "इकतालीस" दोषियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही पैंतीस. श्री योगेन्द्र सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि शासकीय कर्म. गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, तलैनी, सारंगपुर राजगढ़ के सम्बंध में प्रमुख सचिव राजस्व को प्रदान किये गये पत्र क्रमांक-पाँच सौ इकसठ, दिनांक तीस.पाँच.दो हज़ार बाईस तथा समिति के सदस्यों के अभ्यावेदन के बिन्दु क्रमांक-एक से पाँच तक बिन्दुवार जांच करवाते हुए स्वीकृत नक्शे के अनुसार सीमांकन नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी तथा तत्कालीन सरपंच द्वारा अपने नाबालिक पुत्रों को आवासीय पट्टे प्रदान करने तथा पट्टों पर क्षेत्रफल, चतुःसीमा, क्र., दिनांक का उल्लेख नहीं होने पर क्या पट्टे निरस्त किये गये हैं? प्रश्न क्रमांक - चार सौ सत्तर दिनांक दस.तीन.दो हज़ार बाईस को एवं मुख्यमंत्री मेनिट के अभ्यावेदन के बिन्दुवार जांच कब करवाई गई तथा जांच प्रतिवेदन से अवगत कराया जाएगा ? स्वीकृत नक्शे के अनुसार जांच करने पर पाये गये आवास अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया तथा पुनः दूसरी बार जांच उनतीस.तीन.दो हज़ार बाईस को मनमानी करते हुए टी. एण्ड सी. पी. के स्वीकृत नक्शे के अनुसार नहीं करने पर दोषियों को निलंबित किया जायेगा ? प्रश्नांश अनुसार राजस्व निरीक्षक द्वारा दोनों बार जांच में बनाये गये पंचनामा तथा जांच रिपोर्ट प्रदान की जाएगी तथा स्वीकृत नक्शे के अनुसार गुमराहपूर्वक जांच रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों को निलम्बित करते हुए, अतिक्रमण हटाया जायेगा तथा निष्पक्ष जांच कराई जायेगी? राजस्व मंत्री : शासकीय कर्म गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, तलेनी, सारंगपुर जिला राजगढ़ के संबंध में समिति के सदस्यों के अभ्यावेदन के बिंदु क्रमांक से की जांच प्रचलित है। जांच प्रतिवेदन अनुसार कार्यवाही प्रावधानित है। तत्कालीन सरपंच द्वारा अपने नाबालिग पुत्रों को आवासीय पट्टा प्रदान करने के संबंध में न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी सारंगपुर में प्रकरण क्रमांक इकतालीस / बी-एक सौ इक्कीस/दो हज़ार बाईस-तेईस दर्ज कर कार्यवाही प्रचलित है। मुख्यमंत्री कार्यालय भोपाल का पत्र क्रमांक छः हज़ार नब्बे/CMS/PUB/दो हज़ार बाईस भोपाल, दिनांक आठ अप्रैल दो हज़ार बाईस तहसीलदार सारंगपुर को जांच हेतु प्रेषित किया गया। प्रथम बार राजस्व निरीक्षक व दल द्वारा दिनांक चौबीस फ़रवरी दो हज़ार बाईस को आवेदक की उपस्थिति में मौका जांच की गई जिसके प्रतिवेदन व पंचनामे में अतिक्रमण का उल्लेख नहीं है एवं दिनांक उनतीस मार्च दो हज़ार बाईस को राजस्व निरीक्षक व दल द्वारा आवेदक की उपस्थिति में सीमांकन किया गया जिसमें कोई अतिक्रमण नहीं पाया गया। शेष जानकारी उपरोक्त अनुसार है। प्रश्नांश "ख" के अनुसार राजस्व निरीक्षक द्वारा दोनों बार जांच में बनाए गए पंचनामा तथा जांच रिपोर्ट की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। शेष जानकारी उपरोक्त अनुसार है । किसान क्रेडिट कार्ड की जानकारी छत्तीस. श्री कमलेश्वर पटेल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि विधानसभा क्षेत्र में सिहावल सहित सीधी एवं सिंगरौली जिले में प्रश्न दिनांक तक कुल कितने कृषि भूमिधारक किसान हैं? उपरोक्त में से कितने किसानों के पास बैंकों द्वारा जारी किसान क्रेडिट कार्ड हैं तथा कितने किसान फसल बीमा से जुड़े हैं? क्या सरकार की जानकारी में है कि जिन किसानों के पास बैंकों द्वारा जारी किसान क्रेडिट कार्ड नहीं हैं उन्हें निजी साहूकारों से कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है ? यदि हाँ, तो क्या सरकार सभी किसानों को समय-सीमा में किसान क्रेडिट कार्ड के दायरे में लाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करेगी? राजस्व मंत्री : सिहावल विधानसभा क्षेत्र सहित सीधी जिले में कुल एक लाख छयासठ हज़ार पाँच सौ बीस एवं सिंगरौली जिले में कुल दो लाख उनहत्तर हज़ार सात सौ चौरानवे कृषि भूमि धारक किसान है । सीधी जिले में बैंकों द्वारा जारी किये गये किसान क्रेडिट कार्ड की संख्या उनतीस हज़ार अस्सी एवं सिंगरौली जिले में उनसठ हज़ार तीन सौ इक्यावन है तथा सीधी जिले में खरीफ दो हज़ार इक्कीस में दो हज़ार पाँच सौ पच्चीस एवं रबी दो हज़ार इक्कीस-बाईस में दो हज़ार नौ सौ पैंतालीस किसान फसल बीमा से जुड़े है एवं सिंगरौली जिले में चार हज़ार आठ सौ छिहत्तर किसान बीमा से जुड़े हुये है। जी नहीं। सीधी एवं सिंगरौली जिले में ऐसा कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं है। उत्तरांश के प्रकाश में, प्रश्न उपस्थित नहीं होता। विभागीय भूमियों की जानकारी सैंतीस. डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि रतलाम जिला अंतर्गत किन-किन स्थानों पर कितनी-कितनी शासन / विभाग की वन भूमि स्थित है? क्षेत्रफल सहित बताएं । साथ ही विकासखंडवार किन-किन स्थानों पर कितनी-कितनी भूमियां हैं ? जानकारी देकर स्पष्ट करें कि उन भूमियों पर किस किस प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं? कितने भूमियों का उपयोग होकर कितनी भूमियां रिक्त पड़ी हैं अथवा स्थाई या अस्थाई प्रकार का अतिक्रमण, अवैध कब्जा है? स्पष्ट जानकारी दें? बताएं कि वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस से लेकर प्रश्न दिनांक तक विभाग की भूमियों पर किस-किस प्रकार के कार्य किए जाते रहे हैं? विकासखंडवार, ग्रामवार किए गए कार्यवार स्वीकृत बजट एवं व्यय राशि सहित कार्यों की पूर्णता, अपूर्णता की जानकारी दें। बताएं कि वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस से लेकर प्रश्न दिनांक तक उपरोक्तानुसार उपरोक्त उल्लेखित भूमियों पर किए गए कार्यों के उल्लेखनीय कार्य क्या होकर, उससे क्या लाभ हुआ तथा विगत समय में किसकिस स्थान पर नवीन योजनाएं बनाकर भूमियों का संरक्षण व उपयोग किया जाना सुनिश्चित हुआ? वन मंत्री : भारतीय वन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में अधिसूचित वन भूमि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-एक अनुसार है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-एक अनुसार है। वन विभाग द्वारा वन परिक्षेत्रों में वन कक्षों के अंतर्गत कार्य किया जाता है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। रतलाम वनमंडल में विगत समय में कराये गये विभिन्न वानिकी कार्यों के फलस्वरूप इंडिया स्टेट ऑफ फारेस्ट रिपोर्ट दो हज़ार उन्नीस एवं दो हज़ार इक्कीस के तुलनात्मक विश्लेषण में रतलाम जिले के अंतर्गत पंद्रह.इकतीस वर्ग कि.मी. वन आवरण की वृद्धि हुई। पर्यावरणीय लाभ के साथ स्थानीय समुदायों को रोजगार, चारा, जलाऊ एवं लघु वनोपज की प्राप्ति हुई। योजना बनाकर विगत समय में भूमि संरक्षण एवं वृक्षारोपण कार्य का स्थलवार विवरण उत्तरांश 'ग' के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। राजस्व भूमियों के संबंध में [राजस्व] अड़तीस. डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या जावरा नगर फोरलेन सड़क स्थित जावरा चौपाटी से लेकर अरनियापीथा मंडी, भेसाना फंटा से आगे ग्राम रूपनगर फंटे तक सड़क के दोनों और अनेक स्थानों पर शासन की राजस्व भूमिया हैं? यदि हाँ, तो फोरलेन सड़क निर्माण के पूर्व एवं फोरलेन सड़क निर्माण के पश्चात उपरोक्त दोनों स्थलों पर शासन की राजस्व भूमियों पर कब-कब सीमांकन किया गया और किसके द्वारा किया गया? सीमांकन में निर्माण के पूर्व व पश्चात भूमियों की स्थितियां किस प्रकार की रही ? साथ ही बताएं कि विगत वर्षों में अरनिया पीथा मंडी परिसर की बाउंड्रीवाल की चारों दिशाओं से लगी भूमियों पर एवं अरनिया पीथा मंडी के सामने ग्राम अरनिया पीथा एवं ग्राम भैसाना की भूमियों पर तथा हिंगलाज माता मंदिर के पास एवं मंदिर के सामने व औद्योगिक क्षेत्र थाना जावरा के पास व सामने शासन की भूमियों की क्या स्थिति है? अवगत कराएं कि वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस एवं वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में विभाग द्वारा उक्त समस्त शासकीय भूमियों की जांच हेतु जांच दल गठित किए गए तो जांच दल द्वारा किस-किस दिनांक को किस-किस प्रकार की कार्यवाही करते हुए शासन की भूमि से अवैध कब्जे हटाकर अतिक्रमण मुक्त की गई? राजस्व मंत्री : जी हाँ । शासकीय भूमियां होने से सीमांकन नहीं किया। फोरलेन निर्माण के पश्चात बन्नाखेडा भूमि सर्वे नम्बर एक सौ पचासी/दो सौ इक्यावन पर अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय बनाया है। निर्माण पूर्व / पश्चात भूमि सर्वे नं. दो सौ छब्बीस/दो पर बस स्टेण्ड दुकान आदि, सर्वे नम्बर दो सौ छब्बीस/तीन व दो सौ छब्बीस/चार पर श्रीराम कालोनी के मकान व दुकानें बनी है। सर्वे नम्बर दो सौ चालीस/आठ ग्राम रूपनगर, मंगलदास महाराज का आश्रम एवं बालाजी का मंदिर बना है। अरनियापीथा मण्डी के सामने भूमि सर्वे नम्बर एक सौ अड़तालीस/एक/एक/एक रकबा पाँच.छत्तीस हेक्टेयर भूमि में स्कूल भवन, खेल मैदान, पानी की टंकी , आबादी व खेतों के आने-जाने के रास्ते है। ग्राम भैसाना भूमि सर्वे नम्बर एक सौ इकसठ/एक रकबा शून्य.आठ सौ अस्सी हेक्टेयर नोईयत चरागाह व सर्वे नम्बर एक सौ चौंसठ रकबा शून्य.चार सौ तीस हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण है। हिंगलाज माता मंदिर कस्बा जावरा के सर्वे नम्बर सत्तासी रकबा तीन.सात सौ तैंतालीस हेक्टेयर नोईयत में रास्ता है एवं मंदिर के पास बगीचा भी है। इसी सर्वे नम्बर पर बागरी समाज के श्मशान की भूमि आवंटित है व कुछ भाग पर अतिक्रमण है। औद्योगिक क्षेत्र थाना जावरा के आस-पास व सामने की भूमि खाते की भूमि है। जी नहीं। राजस्व प्रकरणों का निपटारा उनतालीस. श्री दिनेश राय मुनमुन : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि सिवनी जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में एक अप्रैल दो हज़ार उन्नीस से प्रश्न दिनांक तक कितने आवेदन सीमांकन, नामांतरण बंटवारे के प्राप्त हुये? कितने आवेदनों के संबंध में न्यायालय में प्रकरण दर्ज किए गए। उसमें कितने प्रकरण दर्ज करना शेष हैं? प्राप्त आवेदनों में से कितने सीमांकन, नामांतरण बंटवारा समय-सीमा में स्वीकृत किये गये? कितने आवेदन अस्वीकृत व विचाराधीन हैं? कारण सहित विवरण दें। कितने सीमांकन, त्रुटि सुधार, बंटवारा, नामांतरण के प्रकरण राजस्व अधिकारी द्वारा समय-सीमा में कार्यवाही नहीं करने के कारण निरस्त हुये हैं? आवेदनकर्ता के नाम कारण सहित विवरण दें। सिवनी जिले में एक नवम्बर से पंद्रह नवम्बर दो हज़ार इक्कीस तक शासन द्वारा भू अभिलेख रिकार्ड शुद्धिकरण अभियान के अंतर्गत नक्शा संबंधित त्रुटियों में सुधार फोती नामांतरण, भूमि सुधार, खसरा रकबा में सुधार व्यपवर्तन डाटा एन्ट्री हेतु कितने आवेदन प्राप्त हुये ? राजस्व अधिकारी द्वारा उसमें कितने प्रकरण का निराकरण कर दिया गया तथा कितने शेष है? नाम सहित विवरण दें। राजस्व मंत्री : जिला सिवनी अंतर्गत आने वाली सभी तहसीलों में नामांतरण, बंटवारा एवं सीमांकन के प्रकरणों की स्थिति निम्नानुसार हैःमद न्यायालय में कुल प्राप्त आवेदन न्यायालय में कुल दर्ज आवेदन दर्ज होने से शेष आवेदन
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परमजीत कुमार/देवघर. आषाढ़ महीने के चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है. इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा की जाती है. वहीं पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी पड़ती है. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है. बैद्यनाथधाम के ज्योतिष आचार्य के अनुसार इस साल संकष्टी चतुर्थी बुधवार 7 जून को मनाई जाएगी.
हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का अपना अलग ही महत्त्व है. इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. जिससे सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. विशेषकर जो कर्ज में डूबे हुए व्यक्ति हैं, उन्हें इस दिन व्रत रखकर गणेश जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए. सारे कर्जों से मुक्ति मिलेगी.
बैद्यनाथ धाम के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल ने न्यूज़18 लोकल से कहा कि संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखकर गणेश भगवान की पूजा की जाती है और शाम में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. इसके साथ ही इस दिन गणेश यंत्र बनाकर उसमें ध्रुवा चढ़ाएं. ऐसा करने से सारे कष्ट मिट जाएंगे. संकष्टी चतुर्थी का नाम इसलिए संकष्टी चतुर्थी पड़ा, क्योंकि इस दिन व्रत रखकर गणेश भगवान की सच्चे मन से पूजा की जाए तो सारे संकटों को भगवान के द्वारा हर लिया जाता है.
हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ के लिए शुभ मुहूर्त देखा जाता है. संकष्टी चतुर्थी तिथि 6 जून को रात 10 बजे से शुरू हो रही है और इसका समापन 7 जून को रात 11 बजे होगा. इसलिए उदया तिथि के अनुसार 7 जून को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी. संध्या 7 बजे के बाद से पूजा का शुभ मुहूर्त है. रात्रि रात 10 बजकर 18 मिनट मे चंद्रमा को अर्घ्य दें.
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परमजीत कुमार/देवघर. आषाढ़ महीने के चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है. इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा की जाती है. वहीं पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी पड़ती है. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है. बैद्यनाथधाम के ज्योतिष आचार्य के अनुसार इस साल संकष्टी चतुर्थी बुधवार सात जून को मनाई जाएगी. हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का अपना अलग ही महत्त्व है. इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. जिससे सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. विशेषकर जो कर्ज में डूबे हुए व्यक्ति हैं, उन्हें इस दिन व्रत रखकर गणेश जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए. सारे कर्जों से मुक्ति मिलेगी. बैद्यनाथ धाम के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल ने न्यूज़अट्ठारह लोकल से कहा कि संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखकर गणेश भगवान की पूजा की जाती है और शाम में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. इसके साथ ही इस दिन गणेश यंत्र बनाकर उसमें ध्रुवा चढ़ाएं. ऐसा करने से सारे कष्ट मिट जाएंगे. संकष्टी चतुर्थी का नाम इसलिए संकष्टी चतुर्थी पड़ा, क्योंकि इस दिन व्रत रखकर गणेश भगवान की सच्चे मन से पूजा की जाए तो सारे संकटों को भगवान के द्वारा हर लिया जाता है. हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ के लिए शुभ मुहूर्त देखा जाता है. संकष्टी चतुर्थी तिथि छः जून को रात दस बजे से शुरू हो रही है और इसका समापन सात जून को रात ग्यारह बजे होगा. इसलिए उदया तिथि के अनुसार सात जून को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी. संध्या सात बजे के बाद से पूजा का शुभ मुहूर्त है. रात्रि रात दस बजकर अट्ठारह मिनट मे चंद्रमा को अर्घ्य दें. .
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उमर अब्दुल्ला ने अपने पिता फारूक अब्दुल्ला को क्लीन चिट दे दी, जो राज्यपाल शासन लागू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री थे।
उमर अब्दुल्ला ने अपने पिता फारूक अब्दुल्ला को क्लीन चिट दे दी, जो राज्यपाल शासन लागू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री थे।
जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का पुनर्गठन किया है और इसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के आठ लोगों को तीन वर्ष के लिए मनोनीत किया है।
उन्होंने कहा, "हमारे नेता, श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने यह सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया कि देश में केवल 'एक प्रधान, एक निशान, एक विधान' (एक प्रधान मंत्री, एक ध्वज और एक संविधान) है।
फारूक अब्दुल्ला 7 नवंबर 1986 से 18 जनवरी 1990 तक मुख्यमंत्री थे। यह वह समय था, जिसमें कश्मीर धीरे-धीरे नीचे गिर रहा था और खुफिया एजेंसियों द्वारा चेतावनी के बावजूद उदासीनता दुर्गम लग रही थी।
जावेद ने ट्वीट में लिखा है- 'मैं कश्मीरी मुस्लिम हूं। हमारी बहन गिरजा टिक्कू के जीते जी टुकड़े कर दिए गए। ये कश्मीरी मुस्लिम परिवारों ने किया जिनके हाथों में पाकिस्तान ने आजादी के नाम पर बंदूकें थाम दी थी। '
भारत और बांग्लादेश के इतिहास में 19 मार्च की तारीख का एक खास महत्व है। दरअसल वह 19 मार्च 1972 का दिन था जब इन दोनो देशों के बीच मैत्री एवं शांति संधि पर हस्ताक्षर हुये परस्पर सहयोग का एक नया युग प्रारंभ हुआ।
देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 27,802 रह गई है, जो कुल मामलों का 0. 06 प्रतिशत है।
यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने वॉट्सऐप हेल्पलाइन नंबर +380933559958, +919205290802, +917428022564 उपलब्ध कराया है।
चीन के साथ तनाव का एक मुख्य कारण भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में सुधार था।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि, मैं 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म में तरह-तरह के झूठ दिखाए गए हैं। जब कश्मीरी पंडित यहां से निकले तब उस दौरान फारूक अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री नहीं थे उस समय राज्यपाल का राज था और देश में वी. पी. सिंह की सरकार थी जिसे BJP का समर्थन था।
गिरफ्तार लोगों की पहचान लल्हार काकापोरा निवासी रऊफ अहमद लोन उर्फ अमजिद, आकिब मकबूल भट निवासी अलोचीबाग पंपोर, जावेद अहमद डार निवासी लार्वे काकापोरा, अर्शीद अहमद मीर निवासी परिगाम पुलवामा, रमीज राजा निवासी परिगाम पुलवामा और सज्जाद अहमद डार, निवासी लार्वा काकापोरा के रूप में हुई है।
अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित फिल्म, आतंकवाद के कारण कश्मीर से पलायन करने वाले कश्मीरी पंडितों पर आधारित है। फिल्म की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए फिल्मकार को देश में तीसरी उच्च स्तरीय श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।
चीन में जहां कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं, वहीं हमारे देश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार घट रही है। भारत में एक दिन में कोविड-19 के 2,528 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4,30,04,005 हो गई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मलयालम दैनिक 'मातृभूमि' के शताब्दी वर्ष समारोह का उद्घाटन किया।
18 मार्च से 4 अप्रैल तक राजधानी के प्रगति मैदान में लगाए गए इस मेले में 200 से अधिक प्रकाशकों ने भाग लिया और तत्कालीन राष्ट्रपति वी. वी. गिरी ने इसका उद्घाटन किया।
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उमर अब्दुल्ला ने अपने पिता फारूक अब्दुल्ला को क्लीन चिट दे दी, जो राज्यपाल शासन लागू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री थे। उमर अब्दुल्ला ने अपने पिता फारूक अब्दुल्ला को क्लीन चिट दे दी, जो राज्यपाल शासन लागू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री थे। जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का पुनर्गठन किया है और इसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के आठ लोगों को तीन वर्ष के लिए मनोनीत किया है। उन्होंने कहा, "हमारे नेता, श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने यह सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया कि देश में केवल 'एक प्रधान, एक निशान, एक विधान' है। फारूक अब्दुल्ला सात नवंबर एक हज़ार नौ सौ छियासी से अट्ठारह जनवरी एक हज़ार नौ सौ नब्बे तक मुख्यमंत्री थे। यह वह समय था, जिसमें कश्मीर धीरे-धीरे नीचे गिर रहा था और खुफिया एजेंसियों द्वारा चेतावनी के बावजूद उदासीनता दुर्गम लग रही थी। जावेद ने ट्वीट में लिखा है- 'मैं कश्मीरी मुस्लिम हूं। हमारी बहन गिरजा टिक्कू के जीते जी टुकड़े कर दिए गए। ये कश्मीरी मुस्लिम परिवारों ने किया जिनके हाथों में पाकिस्तान ने आजादी के नाम पर बंदूकें थाम दी थी। ' भारत और बांग्लादेश के इतिहास में उन्नीस मार्च की तारीख का एक खास महत्व है। दरअसल वह उन्नीस मार्च एक हज़ार नौ सौ बहत्तर का दिन था जब इन दोनो देशों के बीच मैत्री एवं शांति संधि पर हस्ताक्षर हुये परस्पर सहयोग का एक नया युग प्रारंभ हुआ। देश में कोविड-उन्नीस के उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर सत्ताईस,आठ सौ दो रह गई है, जो कुल मामलों का शून्य. छः प्रतिशत है। यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने वॉट्सऐप हेल्पलाइन नंबर + तीन आठ शून्य नौ तीन तीन पाँच पाँच नौ नौ पाँच आठ, + नौ एक नौ दो शून्य पाँच दो नौ शून्य आठ शून्य दो, + नौ एक सात चार दो आठ शून्य दो दो पाँच छः चार उपलब्ध कराया है। चीन के साथ तनाव का एक मुख्य कारण भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में सुधार था। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि, मैं 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म में तरह-तरह के झूठ दिखाए गए हैं। जब कश्मीरी पंडित यहां से निकले तब उस दौरान फारूक अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री नहीं थे उस समय राज्यपाल का राज था और देश में वी. पी. सिंह की सरकार थी जिसे BJP का समर्थन था। गिरफ्तार लोगों की पहचान लल्हार काकापोरा निवासी रऊफ अहमद लोन उर्फ अमजिद, आकिब मकबूल भट निवासी अलोचीबाग पंपोर, जावेद अहमद डार निवासी लार्वे काकापोरा, अर्शीद अहमद मीर निवासी परिगाम पुलवामा, रमीज राजा निवासी परिगाम पुलवामा और सज्जाद अहमद डार, निवासी लार्वा काकापोरा के रूप में हुई है। अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित फिल्म, आतंकवाद के कारण कश्मीर से पलायन करने वाले कश्मीरी पंडितों पर आधारित है। फिल्म की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए फिल्मकार को देश में तीसरी उच्च स्तरीय श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। चीन में जहां कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं, वहीं हमारे देश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार घट रही है। भारत में एक दिन में कोविड-उन्नीस के दो,पाँच सौ अट्ठाईस नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर चार,तीस,चार,पाँच हो गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मलयालम दैनिक 'मातृभूमि' के शताब्दी वर्ष समारोह का उद्घाटन किया। अट्ठारह मार्च से चार अप्रैल तक राजधानी के प्रगति मैदान में लगाए गए इस मेले में दो सौ से अधिक प्रकाशकों ने भाग लिया और तत्कालीन राष्ट्रपति वी. वी. गिरी ने इसका उद्घाटन किया।
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गुवाहाटीः प्री-मानसून बाढ़ की पहली लहर ने राज्य के डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली, गोलपारा आदि जिलों में लगभग 4,000 लोगों को प्रभावित किया है। तिनसुकिया और माजुली जिलों में तटबंध टूट गए। कटाव ने अन्य जिलों के लोगों के लिए खतरा पैदा कर दिया है।
ब्रह्मपुत्र के जलस्तर में अचानक आई तेजी से बाढ़ आ गई है। हालांकि बाढ़ ने खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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गुवाहाटीः प्री-मानसून बाढ़ की पहली लहर ने राज्य के डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली, गोलपारा आदि जिलों में लगभग चार,शून्य लोगों को प्रभावित किया है। तिनसुकिया और माजुली जिलों में तटबंध टूट गए। कटाव ने अन्य जिलों के लोगों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। ब्रह्मपुत्र के जलस्तर में अचानक आई तेजी से बाढ़ आ गई है। हालांकि बाढ़ ने खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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दुल्हन को घर में प्रवेश करते समय दहलीज क्यों लांघनी पड़ती है?
हिंदू धर्म में शादी को चार महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है। इसके चलते इससे जुड़ी कुछ रस्में निभाई जाती हैं। शादी से पहले, शादी के दौरान और शादी के बाद भी कुछ रस्में पूरी होने के बाद शादी संपन्न होती है। ऐसे में हम आपको शादी के बाद होने वाली एक महत्वपूर्ण परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं।
आप सभी ने दुल्हन को घर में एंट्री करते देखा होगा. फिर वह अपने दाहिने पैर से नाप को पार करती है और घर में प्रवेश करती है। लेकिन आइए जानते हैं इसके पीछे के सटीक महत्व के बारे में।
दरअसल नवंधु को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इस तरह यह परंपरा घर में प्रवेश के समय निभाई जाती है। चावल से भरी मटकियों को लांघकर घर में प्रवेश करने की बहुत पुरानी परंपरा है। हिंदू धर्म में चावल को बहुत शुभ माना जाता है और यह स्थिरता का प्रतीक है। इसलिए चावल से भरा नाप रखा जाता है। जब वह उस उपाय को पार कर घर में प्रवेश करती है तो ऐसा माना जाता है कि घर में जीवन भर के लिए सुख-समृद्धि आती है।
नवविवाहितों के घर में प्रवेश करने पर घर की कुंवारी कन्याओं को धन या उपहार दिया जाता है। माना जाता है कि यह प्रतीक इस बात का संकेत देता है कि देवी लक्ष्मी घर में प्रवेश कर चुकी हैं। साथ ही वह अपने साथ दौलत भी लाई है।
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दुल्हन को घर में प्रवेश करते समय दहलीज क्यों लांघनी पड़ती है? हिंदू धर्म में शादी को चार महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है। इसके चलते इससे जुड़ी कुछ रस्में निभाई जाती हैं। शादी से पहले, शादी के दौरान और शादी के बाद भी कुछ रस्में पूरी होने के बाद शादी संपन्न होती है। ऐसे में हम आपको शादी के बाद होने वाली एक महत्वपूर्ण परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं। आप सभी ने दुल्हन को घर में एंट्री करते देखा होगा. फिर वह अपने दाहिने पैर से नाप को पार करती है और घर में प्रवेश करती है। लेकिन आइए जानते हैं इसके पीछे के सटीक महत्व के बारे में। दरअसल नवंधु को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इस तरह यह परंपरा घर में प्रवेश के समय निभाई जाती है। चावल से भरी मटकियों को लांघकर घर में प्रवेश करने की बहुत पुरानी परंपरा है। हिंदू धर्म में चावल को बहुत शुभ माना जाता है और यह स्थिरता का प्रतीक है। इसलिए चावल से भरा नाप रखा जाता है। जब वह उस उपाय को पार कर घर में प्रवेश करती है तो ऐसा माना जाता है कि घर में जीवन भर के लिए सुख-समृद्धि आती है। नवविवाहितों के घर में प्रवेश करने पर घर की कुंवारी कन्याओं को धन या उपहार दिया जाता है। माना जाता है कि यह प्रतीक इस बात का संकेत देता है कि देवी लक्ष्मी घर में प्रवेश कर चुकी हैं। साथ ही वह अपने साथ दौलत भी लाई है।
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यह बहुत ही लाइटवेट लैपटॉप्स है जिन्हें कैरी करना आपके लिए आसान होगा, साथ ही इनका डिस्प्ले भी काफी बड़ा है। यहां आपको फुल एचडी आईपीएस एंटी ग्लेयर डिस्प्ले वाले लैपटॉप्स भी मिलेंगे। इनकी मेमोरी और स्टोरेज कैपेसिटी अच्छी है, साथ ही इन Best Online Laptops की बैटरी लाइफ भी काफी दमदार है।
HP Touchscreen Laptop :
Mi Notebook Horizon Edition 14 Intel Core i5 :
Acer Aspire 7 Core i5 9th Gen Gaming Laptop :
ASUS ROG Gaming Laptop :
HP Pavilion Gaming 15. 6-inch Laptop :
नोट : Electronics Store पर विजिट करने के लिए यहां क्लिक करें।
Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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यह बहुत ही लाइटवेट लैपटॉप्स है जिन्हें कैरी करना आपके लिए आसान होगा, साथ ही इनका डिस्प्ले भी काफी बड़ा है। यहां आपको फुल एचडी आईपीएस एंटी ग्लेयर डिस्प्ले वाले लैपटॉप्स भी मिलेंगे। इनकी मेमोरी और स्टोरेज कैपेसिटी अच्छी है, साथ ही इन Best Online Laptops की बैटरी लाइफ भी काफी दमदार है। HP Touchscreen Laptop : Mi Notebook Horizon Edition चौदह Intel Core iपाँच : Acer Aspire सात Core iपाँच नौth Gen Gaming Laptop : ASUS ROG Gaming Laptop : HP Pavilion Gaming पंद्रह. छः-inch Laptop : नोट : Electronics Store पर विजिट करने के लिए यहां क्लिक करें। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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ध्याय ।
शाखादिक भिन्न कोई पदार्थ नहीं है। इसी प्रकार देश, देशांश, गुण, गुणांशका समूह ही द्रव्य है । द्रव्यसे भिन्न न तो देशादिक ही हैं, और देशादिसे भिन्न न द्रव्य ही है । कारक और आधाराधेयकी अभिन्नता---
यद्यपि भिन्नोऽभिन्नो दृष्टान्तः कारकश्च भवतीह । ग्राह्यस्तथाप्यभिन्नो साध्ये चास्मिन् गुणात्मके द्रव्ये ॥ ७८ ॥ अर्थ - यद्यपि दृष्टान्त और कारक भिन्न भी होते हैं और अभिन्न भी होते हैं । यहां गुण समुदायरूप द्रव्यकी सिद्धिमे अभिन्न दृष्टान्त और अभिन्न ही कारक ग्रहण करना चाहिये । खुलासा आगे किया जाता है।
दोनोकी भिन्नतामें दृष्टान्त -
भिन्नोप्यथ दृष्टान्तो भित्तौ चित्रं यथा दधीह घटे ।
भिन्न कारक इति वा कश्चिनवान् धनस्य योगेन ॥ ७९ ॥ अर्थ - आधाराधेयकी भिन्नताका दृष्टान्त इस प्रकार है कि जैसे भित्तिम चित्र होता है अथवा बडेमें दही रक्खा है । भित्ति भिन्न पदार्थ है और उसपर खिचा हुआ चित्र दूसरा पदार्थ है। इसी प्रकार वट दूसरा पदार्थ है और उसमे रक्खा हुआ दही दूसरा पदार्थ है, इमलिये ये दोनों ही दृष्टान्त आधाराधेयकी भिन्ननामे है । भिन्न कारकका दृष्टान्त इस प्रकार है-जैसे कोई आदमी घनके निमित्तसे धनवाला कहलाना है। यहांपर धन दूसरा पदार्थ है और पुरुष दूसरा पदार्थ है। घन और पुरुषका स्व-स्वामि सम्बन्ध कहलाता है । यह स्व-स्वामि सम्बन्ध भिन्नताका है।
भावार्थ - जिस प्रकार धनवान् पुरुष, यह भिन्नतामें स्व स्वामि सम्बन्ध है उम प्रकारं गुण- पर्यायवान् द्रव्य, यह सम्बन्ध नहीं है अथवा जैसा आधारराधेय भाव मित्ति और चित्रमें है वैसा गुण द्रव्यमें नहीं है किन्तु कारक और आधाराधेय दोनों ही अभिन्न हैं। दोनोंकी अभिन्नता दृष्टान्तदृष्टान्तश्चाभिन्नो वृक्षे शाखा यथा गृहे स्तम्भः । अपि चाभिन्न कारक इति वृक्षोऽयं यथा हि शाखावान् ॥ ८० अर्थ - आधार आधेयकी अभिन्नता में दृष्टान्त इस प्रकार है, जैसे वृक्षमें शाखा अथवा घरमे खम्भा । कारककी अभिन्नता में दृष्टान्त इस प्रकार है जैसे - यह वृक्ष शाखावाला
भावार्थ - यहांपर वृक्ष और शाखा तथा घर और खंभा दोनों ही अभिनताके दृष्टान्त । वृक्षसे शाखा जुदा पदार्थ नहीं है । और घरसे खथा जुदा पदार्थ नहीं है। इसी प्रकार 'वृक्ष शाखावान् है" यह स्वस्वामि सम्बन्ध भी अभिन्नताका है। इन्ही अभिन्न आभार-आधेय और अभिन्नकारकके समान गुण, पर्याय, और द्रव्यको समझना चाहिये ।
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ध्याय । शाखादिक भिन्न कोई पदार्थ नहीं है। इसी प्रकार देश, देशांश, गुण, गुणांशका समूह ही द्रव्य है । द्रव्यसे भिन्न न तो देशादिक ही हैं, और देशादिसे भिन्न न द्रव्य ही है । कारक और आधाराधेयकी अभिन्नता--- यद्यपि भिन्नोऽभिन्नो दृष्टान्तः कारकश्च भवतीह । ग्राह्यस्तथाप्यभिन्नो साध्ये चास्मिन् गुणात्मके द्रव्ये ॥ अठहत्तर ॥ अर्थ - यद्यपि दृष्टान्त और कारक भिन्न भी होते हैं और अभिन्न भी होते हैं । यहां गुण समुदायरूप द्रव्यकी सिद्धिमे अभिन्न दृष्टान्त और अभिन्न ही कारक ग्रहण करना चाहिये । खुलासा आगे किया जाता है। दोनोकी भिन्नतामें दृष्टान्त - भिन्नोप्यथ दृष्टान्तो भित्तौ चित्रं यथा दधीह घटे । भिन्न कारक इति वा कश्चिनवान् धनस्य योगेन ॥ उन्यासी ॥ अर्थ - आधाराधेयकी भिन्नताका दृष्टान्त इस प्रकार है कि जैसे भित्तिम चित्र होता है अथवा बडेमें दही रक्खा है । भित्ति भिन्न पदार्थ है और उसपर खिचा हुआ चित्र दूसरा पदार्थ है। इसी प्रकार वट दूसरा पदार्थ है और उसमे रक्खा हुआ दही दूसरा पदार्थ है, इमलिये ये दोनों ही दृष्टान्त आधाराधेयकी भिन्ननामे है । भिन्न कारकका दृष्टान्त इस प्रकार है-जैसे कोई आदमी घनके निमित्तसे धनवाला कहलाना है। यहांपर धन दूसरा पदार्थ है और पुरुष दूसरा पदार्थ है। घन और पुरुषका स्व-स्वामि सम्बन्ध कहलाता है । यह स्व-स्वामि सम्बन्ध भिन्नताका है। भावार्थ - जिस प्रकार धनवान् पुरुष, यह भिन्नतामें स्व स्वामि सम्बन्ध है उम प्रकारं गुण- पर्यायवान् द्रव्य, यह सम्बन्ध नहीं है अथवा जैसा आधारराधेय भाव मित्ति और चित्रमें है वैसा गुण द्रव्यमें नहीं है किन्तु कारक और आधाराधेय दोनों ही अभिन्न हैं। दोनोंकी अभिन्नता दृष्टान्तदृष्टान्तश्चाभिन्नो वृक्षे शाखा यथा गृहे स्तम्भः । अपि चाभिन्न कारक इति वृक्षोऽयं यथा हि शाखावान् ॥ अस्सी अर्थ - आधार आधेयकी अभिन्नता में दृष्टान्त इस प्रकार है, जैसे वृक्षमें शाखा अथवा घरमे खम्भा । कारककी अभिन्नता में दृष्टान्त इस प्रकार है जैसे - यह वृक्ष शाखावाला भावार्थ - यहांपर वृक्ष और शाखा तथा घर और खंभा दोनों ही अभिनताके दृष्टान्त । वृक्षसे शाखा जुदा पदार्थ नहीं है । और घरसे खथा जुदा पदार्थ नहीं है। इसी प्रकार 'वृक्ष शाखावान् है" यह स्वस्वामि सम्बन्ध भी अभिन्नताका है। इन्ही अभिन्न आभार-आधेय और अभिन्नकारकके समान गुण, पर्याय, और द्रव्यको समझना चाहिये ।
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SENSASWITCH-OCA ओवरफ्लो कंट्रोल अलार्म टंकी के ओवरफ्लो की स्थिति काफी काम आ सकता है। इस SensaSwitch-OCA ओवरफ्लो कंट्रोल अलार्म में इन-बिल्ट सेफ्टी फीचर्स हैं, जो पानी की टंकी में पानी के स्तर को समझने के लिए सिग्नल का इस्तेमाल करती है। यह कुछ मिनट पहले ही पता लगा लेते हैं कि टंकी में पानी ओवरफ्लो होने वाला है। इस SensaSwitch-OCA ओवरफ्लो कंट्रोल अलार्म में साउंड लेवल 75 से 85 डेसिबल है, जो नाइज कंट्रोल नियमों की सीमा के भीतर है। इसमें वॉटर सेंसर में बेहतर सेंसिंग सर्किट होते हैं और इसे किसी सफाई या रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती है। इस SensaSwitch-OCA ओवरफ्लो कंट्रोल अलार्म की जंग मुक्त बॉडी रूफटॉप वॉटर टैंक की गर्मी, आर्द्रता और कठोरता का आसनी से सामना कर सकती है। अमेजन पर इसकी कीमत केवल 490 रुपये है।
यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक एक्वास्मार्ट वाटर ओवरफ्लो कंट्रोलर टंकी में पानी का स्तर कम होने पर पानी के पंप को ऑटोमैटिक रूप से स्विच ऑन कर देता है। साथ ही, जब टंकी में पानी का स्तर भर जाने पर उसे बंद भी कर देता है। यह टेक और ट्रेड एक्वास्मार्ट पूरी तरह से स्वचालित वाटर ओवरफ्लो कंट्रोलर भी एक स्वचालित मोड बाईपास स्विच के साथ आता है, जिसे मैनुअल तरीके से भी संचालित किया जा सकता है। पानी की टंकी भर जाने पर भी आपको ताजा पानी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। इस टेक और ट्रेड एक्वास्मार्ट को हैवी ड्यूटी के हिसाब से डिजाइन किया गया है। मेटल बॉडी होने की वजह से किसी भी मौसम में इस्तेमाल के लिहाज से सुरक्षित है। साथ ही, लंबे समय तक उपयोग सुनिश्चित करता है। यह एक्वास्मार्ट वाटर ओवरफ्लो कंट्रोलर एलईडी इंडिकटर (led indicators) के साथ आता है, जिससे आपको पता चलता है कि पानी पंप चल रहा है या नहीं। अमेजन पर इसकी कीमत 1950 रुपये है।
पैराकीट फ्लोट स्विस सेंसर भी आपको लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह वाटर लेवल कंट्रोलर है। इसकी खास बात यह है कि टंकी खाली होगा, तो यह ऑटोमैटिक रूप से स्विच ऑन हो जाता है, वहीं टंकी के भरने पर यह खुद ही बंद हो जाता है। यह न सिर्फ पानी की बर्बादी को रोकता है, बल्कि आपकी परेशान को भी कम करता है। इसे किसी भी टैंक में इंस्टॉल करना आसान है। बस इसे नीचे लटकाना होता है, फिर केबल पर ऑन/ऑफ स्विच से कनेक्ट करना पड़ता है। जब टैंक भर जाता है तो यह ऊपर जाता है (स्विच ऑफ) और जब टैंक खाली होता है तो यह नीचे होता है (स्विच ऑन)। लंबे जीवन और जंग प्रूफ (पॉलीप्रोपाइलीन में संपूर्ण सेंसर बॉडी) 2 मीटर केबल के साथ उच्च गुणवत्ता वाला फ्लोट स्विच है। इसकी कीमत अमेजन पर बस 365 रुपये है।
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SENSASWITCH-OCA ओवरफ्लो कंट्रोल अलार्म टंकी के ओवरफ्लो की स्थिति काफी काम आ सकता है। इस SensaSwitch-OCA ओवरफ्लो कंट्रोल अलार्म में इन-बिल्ट सेफ्टी फीचर्स हैं, जो पानी की टंकी में पानी के स्तर को समझने के लिए सिग्नल का इस्तेमाल करती है। यह कुछ मिनट पहले ही पता लगा लेते हैं कि टंकी में पानी ओवरफ्लो होने वाला है। इस SensaSwitch-OCA ओवरफ्लो कंट्रोल अलार्म में साउंड लेवल पचहत्तर से पचासी डेसिबल है, जो नाइज कंट्रोल नियमों की सीमा के भीतर है। इसमें वॉटर सेंसर में बेहतर सेंसिंग सर्किट होते हैं और इसे किसी सफाई या रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती है। इस SensaSwitch-OCA ओवरफ्लो कंट्रोल अलार्म की जंग मुक्त बॉडी रूफटॉप वॉटर टैंक की गर्मी, आर्द्रता और कठोरता का आसनी से सामना कर सकती है। अमेजन पर इसकी कीमत केवल चार सौ नब्बे रुपयापये है। यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक एक्वास्मार्ट वाटर ओवरफ्लो कंट्रोलर टंकी में पानी का स्तर कम होने पर पानी के पंप को ऑटोमैटिक रूप से स्विच ऑन कर देता है। साथ ही, जब टंकी में पानी का स्तर भर जाने पर उसे बंद भी कर देता है। यह टेक और ट्रेड एक्वास्मार्ट पूरी तरह से स्वचालित वाटर ओवरफ्लो कंट्रोलर भी एक स्वचालित मोड बाईपास स्विच के साथ आता है, जिसे मैनुअल तरीके से भी संचालित किया जा सकता है। पानी की टंकी भर जाने पर भी आपको ताजा पानी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। इस टेक और ट्रेड एक्वास्मार्ट को हैवी ड्यूटी के हिसाब से डिजाइन किया गया है। मेटल बॉडी होने की वजह से किसी भी मौसम में इस्तेमाल के लिहाज से सुरक्षित है। साथ ही, लंबे समय तक उपयोग सुनिश्चित करता है। यह एक्वास्मार्ट वाटर ओवरफ्लो कंट्रोलर एलईडी इंडिकटर के साथ आता है, जिससे आपको पता चलता है कि पानी पंप चल रहा है या नहीं। अमेजन पर इसकी कीमत एक हज़ार नौ सौ पचास रुपयापये है। पैराकीट फ्लोट स्विस सेंसर भी आपको लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह वाटर लेवल कंट्रोलर है। इसकी खास बात यह है कि टंकी खाली होगा, तो यह ऑटोमैटिक रूप से स्विच ऑन हो जाता है, वहीं टंकी के भरने पर यह खुद ही बंद हो जाता है। यह न सिर्फ पानी की बर्बादी को रोकता है, बल्कि आपकी परेशान को भी कम करता है। इसे किसी भी टैंक में इंस्टॉल करना आसान है। बस इसे नीचे लटकाना होता है, फिर केबल पर ऑन/ऑफ स्विच से कनेक्ट करना पड़ता है। जब टैंक भर जाता है तो यह ऊपर जाता है और जब टैंक खाली होता है तो यह नीचे होता है । लंबे जीवन और जंग प्रूफ दो मीटर केबल के साथ उच्च गुणवत्ता वाला फ्लोट स्विच है। इसकी कीमत अमेजन पर बस तीन सौ पैंसठ रुपयापये है।
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मेरठ में गंगनहर में डूबकर मां-बेटी की मौत मामले की पुलिस जांच हुई तो ये हादसा नहीं हत्या निकला। पति आशीष ने ही 12 साल छोटी लड़की से शादी करने के चक्कर में पत्नी, बेटी की हत्या कर दी। पुलिस ने बेटी, बीवी के हत्यारोपी आशीष को जेल भेज दिया है। आशीष के माता-पिता को भी पुलिस खोज रही है। परिवार उजड़ गया, लेकिन अब आशीष की उन दोनों बेटियों को कौन पालेगा जो पलभर में अनाथ हो गईं। इन बच्चियों को रखने के लिए अब कोई तैयार नहीं है।
आशीष की 10 साल पहले 2013 में बागपत की ज्योति से अरेंज मैरिज हुई थी। दोनों के 3 बेटियां हुईं। अविका, अवनी और भव्या। 2 साल की भव्या को आशीष ने पत्नी ज्योति के साथ ही मार डाला। लाश को गंगनहर में बहा दिया। आशीष की प्लानिंग अवनी और अविका को भी मारकर रास्ते से हटाने की थी। इसमें वो सफल नहीं हो सका। दोनों बेटियां सुरक्षित बच गईं।
अब अवनी, अविका के सामने जिंदगी का संकट खड़ा हो गया। महज 6 और 4 साल की उम्र की ये बच्चियां अब किसके सहारे जिएंगी। हत्यारोपी पिता ने इन बच्चियों की मां को मौत के घाट उतार दिया। खुद जेल चला गया। वहीं आशीष के बुजुर्ग माता-पिता के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज है। पुलिस उन्हें भी खोज रही है। जिस दिन दोनों बुजुर्ग पुलिस के हत्थे चढ़े, जेल जाएंगे। आशीष इकलौता बेटा था। घर में कोई भाई नहीं होने के कारण ये दोनों बच्चियां अब किसके सहारे जिएंगी।
दोनों बच्चियों को रखने के लिए परिवार का कोई भी शख्स तैयार नहीं हैं। ननिहाल पक्ष ने भी इन दोनों बेटियों को रखने से इनकार कर दिया। ननिहाल पक्ष ने पुलिस के सामने साफ तौर पर कहा कि वो इन बच्चियों को नहीं रखेंगे। अगर ये बच्चियां लड़का होती तो रिश्तेदार भी इन्हें रख लेते। पुलिस ने फिलहाल दोनों बच्चियों को रिश्तेदारों के यहां रखा है। जल्द ही तय होगा कि बच्चियों को किसके पास छोड़ा जाए, इनकी देखभाल कौन करेगा।
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मेरठ में गंगनहर में डूबकर मां-बेटी की मौत मामले की पुलिस जांच हुई तो ये हादसा नहीं हत्या निकला। पति आशीष ने ही बारह साल छोटी लड़की से शादी करने के चक्कर में पत्नी, बेटी की हत्या कर दी। पुलिस ने बेटी, बीवी के हत्यारोपी आशीष को जेल भेज दिया है। आशीष के माता-पिता को भी पुलिस खोज रही है। परिवार उजड़ गया, लेकिन अब आशीष की उन दोनों बेटियों को कौन पालेगा जो पलभर में अनाथ हो गईं। इन बच्चियों को रखने के लिए अब कोई तैयार नहीं है। आशीष की दस साल पहले दो हज़ार तेरह में बागपत की ज्योति से अरेंज मैरिज हुई थी। दोनों के तीन बेटियां हुईं। अविका, अवनी और भव्या। दो साल की भव्या को आशीष ने पत्नी ज्योति के साथ ही मार डाला। लाश को गंगनहर में बहा दिया। आशीष की प्लानिंग अवनी और अविका को भी मारकर रास्ते से हटाने की थी। इसमें वो सफल नहीं हो सका। दोनों बेटियां सुरक्षित बच गईं। अब अवनी, अविका के सामने जिंदगी का संकट खड़ा हो गया। महज छः और चार साल की उम्र की ये बच्चियां अब किसके सहारे जिएंगी। हत्यारोपी पिता ने इन बच्चियों की मां को मौत के घाट उतार दिया। खुद जेल चला गया। वहीं आशीष के बुजुर्ग माता-पिता के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज है। पुलिस उन्हें भी खोज रही है। जिस दिन दोनों बुजुर्ग पुलिस के हत्थे चढ़े, जेल जाएंगे। आशीष इकलौता बेटा था। घर में कोई भाई नहीं होने के कारण ये दोनों बच्चियां अब किसके सहारे जिएंगी। दोनों बच्चियों को रखने के लिए परिवार का कोई भी शख्स तैयार नहीं हैं। ननिहाल पक्ष ने भी इन दोनों बेटियों को रखने से इनकार कर दिया। ननिहाल पक्ष ने पुलिस के सामने साफ तौर पर कहा कि वो इन बच्चियों को नहीं रखेंगे। अगर ये बच्चियां लड़का होती तो रिश्तेदार भी इन्हें रख लेते। पुलिस ने फिलहाल दोनों बच्चियों को रिश्तेदारों के यहां रखा है। जल्द ही तय होगा कि बच्चियों को किसके पास छोड़ा जाए, इनकी देखभाल कौन करेगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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आजमगढ़ जिले के एनएच 233 पर आज शाम एक बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में आजमगढ़ की ओर से आकर वाराणसी की ओर जा रही कार देवगांव कोतवाली क्षेत्र के इस्माइलपुर बरहती गांव के निकट नेशनल हाईवे 233 के किनारे अनियंत्रित होकर खाई में पलट गई। कार के खाई में पलटते ही चीख-पुकार मच गई। आस-पास के लोगों ने कार में सवार घायलों को किसी तरह से बाहर निकालकर लालगंज के अस्पताल में भर्ती कराया। इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल तीनों लोगों को अस्पताल लाया गया जहां पर संतकबीरनगर के मेंहदावल निवासी विभा पाण्डेय 65 वर्ष को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जबकि गंभीर रूप से घायल शिव प्रसाद पाण्डेय 67 वर्ष व आशुतोष जायसवाल 25 वर्ष का इलाज चल रहा है।
देवगांव कोतवाली क्षेत्र में हुई दुर्घटना के सवाल पर जानकारी देते हुए देवगांव कोतवाली के इंस्पेक्टर ने बताया कि अचानक ब्रेक लगाने के कारण यह हादसा हुआ। इंस्पेक्टर ने बताया कि दुर्घटना में घायलों को पहले लालगंज के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पर हालात गंभीर होते देख घायलों को आजमगढ़ के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया है। जहां घायलों का इलाज चल रहा है। मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है।
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आजमगढ़ जिले के एनएच दो सौ तैंतीस पर आज शाम एक बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में आजमगढ़ की ओर से आकर वाराणसी की ओर जा रही कार देवगांव कोतवाली क्षेत्र के इस्माइलपुर बरहती गांव के निकट नेशनल हाईवे दो सौ तैंतीस के किनारे अनियंत्रित होकर खाई में पलट गई। कार के खाई में पलटते ही चीख-पुकार मच गई। आस-पास के लोगों ने कार में सवार घायलों को किसी तरह से बाहर निकालकर लालगंज के अस्पताल में भर्ती कराया। इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल तीनों लोगों को अस्पताल लाया गया जहां पर संतकबीरनगर के मेंहदावल निवासी विभा पाण्डेय पैंसठ वर्ष को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जबकि गंभीर रूप से घायल शिव प्रसाद पाण्डेय सरसठ वर्ष व आशुतोष जायसवाल पच्चीस वर्ष का इलाज चल रहा है। देवगांव कोतवाली क्षेत्र में हुई दुर्घटना के सवाल पर जानकारी देते हुए देवगांव कोतवाली के इंस्पेक्टर ने बताया कि अचानक ब्रेक लगाने के कारण यह हादसा हुआ। इंस्पेक्टर ने बताया कि दुर्घटना में घायलों को पहले लालगंज के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पर हालात गंभीर होते देख घायलों को आजमगढ़ के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया है। जहां घायलों का इलाज चल रहा है। मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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दिल्ली के छावला में साल 2012 में हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड में आज सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाली गई है, जिसके बाद चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ इस मामले की सुनवाई और इसमें तीन जजों की बेंच के गठन के लिए तैयार हो गए हैं।
Solicitor General Tushar Mehta mentions before Supreme Court about review petition challenging its order which acquitted three men who were awarded the death penalty by a Delhi Court in connection with allegedly raping and killing a woman in Delhi's Chhawala area in 2012.
छावला इलाके में साल 2012 में घटना को अंजाम दिया गया था जिसने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थी। तीन युवकों ने इलाके की रहने वाली 19 साल की युवती को कार से अगवा कर लिया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी आंखों में तेजाब डालकर मार डाला। घटना 14 फरवरी 2012 की है।
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दिल्ली के छावला में साल दो हज़ार बारह में हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड में आज सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाली गई है, जिसके बाद चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ इस मामले की सुनवाई और इसमें तीन जजों की बेंच के गठन के लिए तैयार हो गए हैं। Solicitor General Tushar Mehta mentions before Supreme Court about review petition challenging its order which acquitted three men who were awarded the death penalty by a Delhi Court in connection with allegedly raping and killing a woman in Delhi's Chhawala area in दो हज़ार बारह. छावला इलाके में साल दो हज़ार बारह में घटना को अंजाम दिया गया था जिसने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थी। तीन युवकों ने इलाके की रहने वाली उन्नीस साल की युवती को कार से अगवा कर लिया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी आंखों में तेजाब डालकर मार डाला। घटना चौदह फरवरी दो हज़ार बारह की है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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मेलबर्न, 9 दिसम्बर । आस्ट्रेलिया ने शुक्रवार को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) पर खेले गए तीसरे और अंतिम एकदिवसीय मैच में न्यूजीलैंड को 117 रनों से करारी मात दे दी। इस जीत के साथ ही मेजबानों ने तीन एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला 3-0 से अपने नाम कर ली।
265 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी किवी टीम को टॉम लाथम (28) और मार्टिन गुप्टिल (34) ने सधी हुई शुरुआत दी और पहले विकेट के लिए 44 रन जोड़े। कमिंस ने लाथम को पवेलियन भेज मेजबानों को पहली सफलता दिलाई। रोहित,हार्दिक के बाद टीम इंडिया का ये बड़ा बल्लेबाज इंग्लैंड वनडे,टी20 सीरीज से बाहर!
इसके बाद कप्तान केन विलियमसन (13) ने गुप्टिल के साथ टीम का स्कोर 74 तक पहुंचाया। फॉल्कनर ने इसी स्कोर पर विलियमसन की पारी का अंत किया। यहां से आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने 73 रनों के भीतर किवी टीम के आठ बल्लेबाजों को पवेलियन भेज उसे श्रृंखला की पहली जीत से महरूम रखा। EXCLUSIVE VIDEO: जब पार्थिव पटेल लाइव मैच के दौरान बने सुपरमैन धोनी..
न्यूजीलैंड के पांच बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके। इससे पहले, टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेजबान टीम के लिए वार्नर ने शुरू से अंत तक एक छोर संभाले रखा और किवी गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। 128 गेंदों में 13 चौके और चार छक्के लगाने वाले वार्नर पारी की आखिरी गेंद पर रन आउट हुए।
BREAKING: सोशल मीडिया पर धोनी ने अपने फैन्स से पुछा प्यारा सवाल, जबाव देने को कहा..
आस्ट्रेलिया ने 11 रनों पर ही एरॉन फिंच (3) और कप्तान स्टीवन स्मिथ (0) के विकेट गंवा दिए थे। लेकिन वार्नर ने जॉर्ज बेली (23) के साथ तीसरे विकेट के लिए 62 और फिर ट्रेविस हेड (37) के साथ पांचवें विकेट के लिए 105 रनों की साझेदारी कर टीम को मजबूती प्रदान की। निचले क्रम में मैथ्यू वेड (14) और फॉल्कनर (13) ने वार्नर का अच्छा साथ दिया। किवी टीम के लिए ट्रेंट बाउल्ट ने सर्वाधिक तीन विकेट लिए। वहीं मिशेल सैंटनर और कोलिन डे ग्रांडहोमे ने दो-दो विकेट लिए।
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मेलबर्न, नौ दिसम्बर । आस्ट्रेलिया ने शुक्रवार को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए तीसरे और अंतिम एकदिवसीय मैच में न्यूजीलैंड को एक सौ सत्रह रनों से करारी मात दे दी। इस जीत के साथ ही मेजबानों ने तीन एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला तीन-शून्य से अपने नाम कर ली। दो सौ पैंसठ रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी किवी टीम को टॉम लाथम और मार्टिन गुप्टिल ने सधी हुई शुरुआत दी और पहले विकेट के लिए चौंतालीस रन जोड़े। कमिंस ने लाथम को पवेलियन भेज मेजबानों को पहली सफलता दिलाई। रोहित,हार्दिक के बाद टीम इंडिया का ये बड़ा बल्लेबाज इंग्लैंड वनडे,टीबीस सीरीज से बाहर! इसके बाद कप्तान केन विलियमसन ने गुप्टिल के साथ टीम का स्कोर चौहत्तर तक पहुंचाया। फॉल्कनर ने इसी स्कोर पर विलियमसन की पारी का अंत किया। यहां से आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने तिहत्तर रनों के भीतर किवी टीम के आठ बल्लेबाजों को पवेलियन भेज उसे श्रृंखला की पहली जीत से महरूम रखा। EXCLUSIVE VIDEO: जब पार्थिव पटेल लाइव मैच के दौरान बने सुपरमैन धोनी.. न्यूजीलैंड के पांच बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके। इससे पहले, टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेजबान टीम के लिए वार्नर ने शुरू से अंत तक एक छोर संभाले रखा और किवी गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। एक सौ अट्ठाईस गेंदों में तेरह चौके और चार छक्के लगाने वाले वार्नर पारी की आखिरी गेंद पर रन आउट हुए। BREAKING: सोशल मीडिया पर धोनी ने अपने फैन्स से पुछा प्यारा सवाल, जबाव देने को कहा.. आस्ट्रेलिया ने ग्यारह रनों पर ही एरॉन फिंच और कप्तान स्टीवन स्मिथ के विकेट गंवा दिए थे। लेकिन वार्नर ने जॉर्ज बेली के साथ तीसरे विकेट के लिए बासठ और फिर ट्रेविस हेड के साथ पांचवें विकेट के लिए एक सौ पाँच रनों की साझेदारी कर टीम को मजबूती प्रदान की। निचले क्रम में मैथ्यू वेड और फॉल्कनर ने वार्नर का अच्छा साथ दिया। किवी टीम के लिए ट्रेंट बाउल्ट ने सर्वाधिक तीन विकेट लिए। वहीं मिशेल सैंटनर और कोलिन डे ग्रांडहोमे ने दो-दो विकेट लिए।
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भुवनेश्वर-कक्षा दसवीं में लगातार चार बार फेल होने वाले कुलदीप सिंह ने अपनी कामयाबी का राज वेस्टीज कंपनी की टीम के सदस्यों को बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए गोल निर्धारित करना जरूरी है। इसके बिना किसी भी मुकाम तक नहीं पहुंचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहले एक बार आप गोल तय करें फिर उसे हासिल करने के लिए निरंतर कार्य करते रहें। यह देखना जरूरी नहीं है कि कौन आपके बारे में क्या टिप्पणी कर रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार अपने गोल की तरफ बढ़ते रहने से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि वेस्टीज आफ लाइन की एक कंपनी है।
अधिकांशतः यह अपनी टीम को आगे बढ़ने के लिए सफल सदस्यों को लेकर एक सेमिनार का आयोजन करती रहती है। इस सेमिनार का आयोजन सोआ विश्वविद्यालय के आडिटोरियम में किया गया था। वेस्टीज टीम के सदस्यों से भरे सभागार में सिंह ने बताया कि वह एक किसान परिवार में पैदा होकर मुश्किलों के दौर से गुजरते हुए इस मुकाम को उन्होंने हासिल किया है। बतौर उनकी बैलेंस सीट वह साल में लगभग एक करोड़ से अधिक की कमाई कर रहे हैंं। अपनी जिंदगी की सफर को झेल कर यहां तक पहुंचे कुलदीप सिंह ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए बड़े-बड़े सपने देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जबतक आप बड़े सपने नहीं देखेंगे, तबतक आप कुछ भी हासिल नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आपके आत्म विश्वास पर ही कोई भी सफलता टिकी होती है। लगभग तीन घंटे से अधिक समय तक कुलदीप सिंह ने अपनी सफलता से राज को सामने रखते हुए वहां मौजूद सदस्यों से दृढ़ता के साथ अपने काम जुटे रहने की सलाह दी।
कुलदीप सिंह ने कहा कि आज आन लाइन के बढ़ते बाजार से कहीं अधिक संभावनाएं आफ लाइन में है। उन्होंने कहा कि यह भी बड़े क्षेत्र के रूप मे उभर रहा है।
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भुवनेश्वर-कक्षा दसवीं में लगातार चार बार फेल होने वाले कुलदीप सिंह ने अपनी कामयाबी का राज वेस्टीज कंपनी की टीम के सदस्यों को बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए गोल निर्धारित करना जरूरी है। इसके बिना किसी भी मुकाम तक नहीं पहुंचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहले एक बार आप गोल तय करें फिर उसे हासिल करने के लिए निरंतर कार्य करते रहें। यह देखना जरूरी नहीं है कि कौन आपके बारे में क्या टिप्पणी कर रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार अपने गोल की तरफ बढ़ते रहने से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि वेस्टीज आफ लाइन की एक कंपनी है। अधिकांशतः यह अपनी टीम को आगे बढ़ने के लिए सफल सदस्यों को लेकर एक सेमिनार का आयोजन करती रहती है। इस सेमिनार का आयोजन सोआ विश्वविद्यालय के आडिटोरियम में किया गया था। वेस्टीज टीम के सदस्यों से भरे सभागार में सिंह ने बताया कि वह एक किसान परिवार में पैदा होकर मुश्किलों के दौर से गुजरते हुए इस मुकाम को उन्होंने हासिल किया है। बतौर उनकी बैलेंस सीट वह साल में लगभग एक करोड़ से अधिक की कमाई कर रहे हैंं। अपनी जिंदगी की सफर को झेल कर यहां तक पहुंचे कुलदीप सिंह ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए बड़े-बड़े सपने देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जबतक आप बड़े सपने नहीं देखेंगे, तबतक आप कुछ भी हासिल नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आपके आत्म विश्वास पर ही कोई भी सफलता टिकी होती है। लगभग तीन घंटे से अधिक समय तक कुलदीप सिंह ने अपनी सफलता से राज को सामने रखते हुए वहां मौजूद सदस्यों से दृढ़ता के साथ अपने काम जुटे रहने की सलाह दी। कुलदीप सिंह ने कहा कि आज आन लाइन के बढ़ते बाजार से कहीं अधिक संभावनाएं आफ लाइन में है। उन्होंने कहा कि यह भी बड़े क्षेत्र के रूप मे उभर रहा है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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आज पूरे देश में दिवाली का त्यौहार धूम धाम से मनाया जा रहा है. ऐसे में सभी इस दौरान ट्रेडिशनल लुक्स में दिखाई दे रहे हैं. वहीं दिवाली के त्यौहार को बॉलीवुड में भी धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है और ऐसे में इस दौरान बॉलीवुड सितारे बहुत शानदार नजर आते हैं. वहीं इस बार देसी गर्ल यानि प्रियंका चोपड़ा की पहली दिवाली है जिसे वह विदेश में मना रही है.
आप देख सकते हैं प्रियंका ने साड़ी पहन रखी है और उनके कानों में बड़े बड़े झुमके नजर आ रहे हैं बिल्कुल देसी अंदाज में सज धज कर प्रियंका विदेश में दिवाली का त्यौहार मना रही है. वहीं प्रियंका ने एक और पिक्चर शेयर की है और इस पिक्चर में प्रियंका का वह घर नजर आ रहा है जहां वह इस बार दिवाली सेलिब्रेट कर रही हैं. बात करें काम की तो इन दिनों प्रियंका ने काम से फुर्सत होकर पति के साथ समय बिताना जरुरी समझा है.
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आज पूरे देश में दिवाली का त्यौहार धूम धाम से मनाया जा रहा है. ऐसे में सभी इस दौरान ट्रेडिशनल लुक्स में दिखाई दे रहे हैं. वहीं दिवाली के त्यौहार को बॉलीवुड में भी धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है और ऐसे में इस दौरान बॉलीवुड सितारे बहुत शानदार नजर आते हैं. वहीं इस बार देसी गर्ल यानि प्रियंका चोपड़ा की पहली दिवाली है जिसे वह विदेश में मना रही है. आप देख सकते हैं प्रियंका ने साड़ी पहन रखी है और उनके कानों में बड़े बड़े झुमके नजर आ रहे हैं बिल्कुल देसी अंदाज में सज धज कर प्रियंका विदेश में दिवाली का त्यौहार मना रही है. वहीं प्रियंका ने एक और पिक्चर शेयर की है और इस पिक्चर में प्रियंका का वह घर नजर आ रहा है जहां वह इस बार दिवाली सेलिब्रेट कर रही हैं. बात करें काम की तो इन दिनों प्रियंका ने काम से फुर्सत होकर पति के साथ समय बिताना जरुरी समझा है.
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चीन के विदेश मंत्रालय Sözcüएसयू झाओ लिजियन ने घोषणा की कि बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक खेलों के उद्घाटन में पुतिन की भागीदारी के संबंध में ठोस मुद्दों पर चर्चा करने के लिए चीन और रूस ने गहन बातचीत की। क्रेमलिन Sözcüएक बयान में, दिमित्री पेसकोव ने हाल ही में कहा कि पुतिन को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से 2022 बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन में भाग लेने का निमंत्रण मिला है, और यह कि दोनों पक्ष संयुक्त रूप से प्रासंगिक विवरणों पर चर्चा करने के बाद एक सार्वजनिक बयान देंगे।
दैनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विषय पर टिप्पणी करते हुए, झाओ लिजियन ने कहा, "चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पुतिन के निमंत्रण पर 2014 में सोची शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन में भाग लिया। अब, शी ने अपने मित्र पुतिन को बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया है। "पुतिन ने यह भी घोषणा की कि उन्होंने सहर्ष निमंत्रण स्वीकार कर लिया है," उन्होंने कहा।
यह बताते हुए कि दोनों पक्ष पुतिन की चीन यात्रा के संबंध में निकट संपर्क में हैं, झाओ ने कहा कि बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक में दोनों देशों के नेताओं की बैठक एक बार फिर चीन और रूस के बीच अच्छे पड़ोसी और साझेदारी संबंधों को दिखाएगी।
झाओ ने कहा कि उनका मानना है कि दोनों देशों के एथलीट प्रतियोगिताओं में बड़ी सफलता हासिल करेंगे और दुनिया को एक "सरल, सुरक्षित और शानदार" खेल उत्सव पेश करने के लिए आवश्यक योगदान देंगे।
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चीन के विदेश मंत्रालय Sözcüएसयू झाओ लिजियन ने घोषणा की कि बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक खेलों के उद्घाटन में पुतिन की भागीदारी के संबंध में ठोस मुद्दों पर चर्चा करने के लिए चीन और रूस ने गहन बातचीत की। क्रेमलिन Sözcüएक बयान में, दिमित्री पेसकोव ने हाल ही में कहा कि पुतिन को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दो हज़ार बाईस बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन में भाग लेने का निमंत्रण मिला है, और यह कि दोनों पक्ष संयुक्त रूप से प्रासंगिक विवरणों पर चर्चा करने के बाद एक सार्वजनिक बयान देंगे। दैनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विषय पर टिप्पणी करते हुए, झाओ लिजियन ने कहा, "चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पुतिन के निमंत्रण पर दो हज़ार चौदह में सोची शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन में भाग लिया। अब, शी ने अपने मित्र पुतिन को बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया है। "पुतिन ने यह भी घोषणा की कि उन्होंने सहर्ष निमंत्रण स्वीकार कर लिया है," उन्होंने कहा। यह बताते हुए कि दोनों पक्ष पुतिन की चीन यात्रा के संबंध में निकट संपर्क में हैं, झाओ ने कहा कि बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक में दोनों देशों के नेताओं की बैठक एक बार फिर चीन और रूस के बीच अच्छे पड़ोसी और साझेदारी संबंधों को दिखाएगी। झाओ ने कहा कि उनका मानना है कि दोनों देशों के एथलीट प्रतियोगिताओं में बड़ी सफलता हासिल करेंगे और दुनिया को एक "सरल, सुरक्षित और शानदार" खेल उत्सव पेश करने के लिए आवश्यक योगदान देंगे।
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Jio Fiber: Jio Fiber के प्लान्स में आपको अच्छी इंटरनेट स्पीड तो मिलती है लेकिन इसके साथ ही कई और खासियतें भी देखने को मिलती हैं जो आपके पूरे पैसे वसूल करवा देंगी.
Free Netflix: अगर आप Jio Fiber इस्तेमाल करते हैं और आप OTT प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन अलग से लेते हैं तो अब आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं है. दरअसल हम आपके लिए Jio फाइबर के कुछ ऐसे प्लान लेकर आए हैं जो ना सिर्फ आपको हाई स्पीड इंटरनेट ऑफर करते हैं बल्कि आपको OTT का भी मजा देते हैं. आज हम आपको Jio Fiber के कुछ ऐसे ही प्लान्स के बारे में बताने जा रहे हैं.
JioFiber के 1499 रुपये वाले प्लान में आपको 300mbps की स्पीड मिलती है. नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम वीडियो, डिज़नी + हॉटस्टार वीआईपी, सोनीलिव, ज़ी5, सन एनएक्सटी, वूट सेलेक्ट, वूट किड्स, एएलटीबालाजी, होइचोई, शेमारूमी, लायंसगेट प्ले जैसी सेवाओं सहित कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का मुफ्त एक्सेस मिलेगा. यह योजना 30 दिनों की वैधता के साथ आती है, जिसका अर्थ है कि योजना के माध्यम से प्राप्त ओटीटी प्लेटफार्मों तक पहुंच भी 30 दिनों तक सीमित है. अमेजन प्राइम का एक्सेस आपको पूरे साल के लिए मिलेगा. साथ ही फ्री/अनलिमिटिड वॉयज कॉलिंग भी है.
जियोफाइबर के 2499 रुपये वाले प्लान में आपको 500mbps की स्पीड मिलेगी. इस प्लान में आपको नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम वीडियो, डिज़नी + हॉटस्टार वीआईपी, सोनीलिव, ज़ी5, सन एनएक्सटी, वूट सेलेक्ट, वूट किड्स, एएलटीबालाजी, होइचोई, शेमारूमी, लायंसगेट प्ले जैसी सेवाओं सहित कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का मुफ्त एक्सेस मिलेगा. साथ ही फ्री अनलिमिटिड कॉलिंग भी मिलेगी.
जियोफाइबर के 3499 रुपये वाले प्लान में आपको 1gbps की स्पीड मिलेगी. इस प्लान में भी आपको नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम सहित कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का फ्री एक्सेस मिलेगा. यह प्लान भी 30 दिन के लिए होगा.
जियोफाइबर के 8499 रुपये वाले प्लान में आपको 1gbps की स्पीड मिलेगी. साथ ही 6600GB डाटा मिलेगा. फ्री अनलिमिटिड कॉलिंग के साथ-साथ नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम सहित कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का फ्री एक्सेस मिलेगा. इसकी वैलिडिटी भी 30 दिन की होगी.
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Jio Fiber: Jio Fiber के प्लान्स में आपको अच्छी इंटरनेट स्पीड तो मिलती है लेकिन इसके साथ ही कई और खासियतें भी देखने को मिलती हैं जो आपके पूरे पैसे वसूल करवा देंगी. Free Netflix: अगर आप Jio Fiber इस्तेमाल करते हैं और आप OTT प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन अलग से लेते हैं तो अब आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं है. दरअसल हम आपके लिए Jio फाइबर के कुछ ऐसे प्लान लेकर आए हैं जो ना सिर्फ आपको हाई स्पीड इंटरनेट ऑफर करते हैं बल्कि आपको OTT का भी मजा देते हैं. आज हम आपको Jio Fiber के कुछ ऐसे ही प्लान्स के बारे में बताने जा रहे हैं. JioFiber के एक हज़ार चार सौ निन्यानवे रुपयापये वाले प्लान में आपको तीन सौmbps की स्पीड मिलती है. नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम वीडियो, डिज़नी + हॉटस्टार वीआईपी, सोनीलिव, ज़ीपाँच, सन एनएक्सटी, वूट सेलेक्ट, वूट किड्स, एएलटीबालाजी, होइचोई, शेमारूमी, लायंसगेट प्ले जैसी सेवाओं सहित कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का मुफ्त एक्सेस मिलेगा. यह योजना तीस दिनों की वैधता के साथ आती है, जिसका अर्थ है कि योजना के माध्यम से प्राप्त ओटीटी प्लेटफार्मों तक पहुंच भी तीस दिनों तक सीमित है. अमेजन प्राइम का एक्सेस आपको पूरे साल के लिए मिलेगा. साथ ही फ्री/अनलिमिटिड वॉयज कॉलिंग भी है. जियोफाइबर के दो हज़ार चार सौ निन्यानवे रुपयापये वाले प्लान में आपको पाँच सौmbps की स्पीड मिलेगी. इस प्लान में आपको नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम वीडियो, डिज़नी + हॉटस्टार वीआईपी, सोनीलिव, ज़ीपाँच, सन एनएक्सटी, वूट सेलेक्ट, वूट किड्स, एएलटीबालाजी, होइचोई, शेमारूमी, लायंसगेट प्ले जैसी सेवाओं सहित कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का मुफ्त एक्सेस मिलेगा. साथ ही फ्री अनलिमिटिड कॉलिंग भी मिलेगी. जियोफाइबर के तीन हज़ार चार सौ निन्यानवे रुपयापये वाले प्लान में आपको एकgbps की स्पीड मिलेगी. इस प्लान में भी आपको नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम सहित कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का फ्री एक्सेस मिलेगा. यह प्लान भी तीस दिन के लिए होगा. जियोफाइबर के आठ हज़ार चार सौ निन्यानवे रुपयापये वाले प्लान में आपको एकgbps की स्पीड मिलेगी. साथ ही छः हज़ार छः सौGB डाटा मिलेगा. फ्री अनलिमिटिड कॉलिंग के साथ-साथ नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम सहित कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का फ्री एक्सेस मिलेगा. इसकी वैलिडिटी भी तीस दिन की होगी.
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UP Weather Update : यूपी की राजधानी लखनऊ में आज भी बारिश होने की संभावना है। IMD के मुताबिक अगले दो दिनों तक प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
Lucknow Weather Today 1 July 2022 : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में 3 दिन से हो रही बारिश के बाद लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिल गयी है। बता दें सोमवार सही उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में बारिश का सिलसिला जारी है जिसके कारण राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के सभी जिलों में तापमान 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे लुढ़क गया है।
बीते दिन लखनऊ तथा उसके आसपास के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई जिसके कारण कई जगहों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। चिनहट में तेज हवा के साथ बारिश होने के कारण एक विद्युत पोल टेढ़ा हो गया। जिसके कारण कुछ इलाकों में काफी देर तक विद्युत सेवा बाधित रही।
मौसम विभाग का अनुमान है कि राजधानी लखनऊ समेत उससे सटे आसपास के कई जनपदों में अगले 48 घंटे तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
लखनऊ का मौसम (Lucknow Weather Today)
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक लखनऊ का मौसम (Lucknow Ka Mausam) अगले कुछ दिनों तक सुहाना बना रहेगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि 3 जुलाई तक लखनऊ समेत प्रदेश के कई जनपदों में बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रहेगा, इस दौरान कई जगहों पर बिजली गिरने की भी संभावना है।
गौरतलब है कि बीते 1 हफ्ते से उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में आंशिक रूप से बादल छाए रहे। वहीं, इस हफ्ते सोमवार से प्रदेश के 25 से अधिक जनपदों में बारिश शुरू हो गया। मंगलवार और बुधवार को पूर्वांचल के कई हिस्सों में बारिश के साथ बिजली गिरने की घटना भी सामने आयी।
मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वांचल के गोरखपुर, प्रयागराज, इलाहाबाद, कुशीनगर, देवरिया समेत कई अन्य जनपदों में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा यूपी के पश्चिमांचल हिस्सों में भी अगले 48 घंटे के दौरान भारी बारिश की संभावना है। आज भी लखनऊ के गोमतीनगर, चिनहट, मोहनलालगंज, चारबाग तथा आलमबाग समेत कई अन्य हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
लखनऊ का तापमान (Lucknow Temperature)
लखनऊ का तापमान (Lucknow Ka Tapman) बीते कुछ दिनों से हुई बारिश के बाद काफी कम हो गया है। सोमवार से शुरू है बारिश के कारण लखनऊ समेत आसपास के कई जनपदों में पारा 4 से 5 डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया है। बीते दिन लखनऊ में अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा।
वहीं, उत्तर प्रदेश में सबसे कम तापमान बीते दिन गोरखपुर में दर्ज किया गया जहां गुरुवार को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में अगले 48 घंटे के दौरान बारिश होने की संभावना है जिसके कारण तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट आ सकती है। लखनऊ में आज अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
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UP Weather Update : यूपी की राजधानी लखनऊ में आज भी बारिश होने की संभावना है। IMD के मुताबिक अगले दो दिनों तक प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। Lucknow Weather Today एक जुलाईy दो हज़ार बाईस : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तीन दिन से हो रही बारिश के बाद लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिल गयी है। बता दें सोमवार सही उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में बारिश का सिलसिला जारी है जिसके कारण राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के सभी जिलों में तापमान चार से पाँच डिग्री सेल्सियस तक नीचे लुढ़क गया है। बीते दिन लखनऊ तथा उसके आसपास के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई जिसके कारण कई जगहों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। चिनहट में तेज हवा के साथ बारिश होने के कारण एक विद्युत पोल टेढ़ा हो गया। जिसके कारण कुछ इलाकों में काफी देर तक विद्युत सेवा बाधित रही। मौसम विभाग का अनुमान है कि राजधानी लखनऊ समेत उससे सटे आसपास के कई जनपदों में अगले अड़तालीस घंटाटे तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। लखनऊ का मौसम भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक लखनऊ का मौसम अगले कुछ दिनों तक सुहाना बना रहेगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि तीन जुलाई तक लखनऊ समेत प्रदेश के कई जनपदों में बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रहेगा, इस दौरान कई जगहों पर बिजली गिरने की भी संभावना है। गौरतलब है कि बीते एक हफ्ते से उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में आंशिक रूप से बादल छाए रहे। वहीं, इस हफ्ते सोमवार से प्रदेश के पच्चीस से अधिक जनपदों में बारिश शुरू हो गया। मंगलवार और बुधवार को पूर्वांचल के कई हिस्सों में बारिश के साथ बिजली गिरने की घटना भी सामने आयी। मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वांचल के गोरखपुर, प्रयागराज, इलाहाबाद, कुशीनगर, देवरिया समेत कई अन्य जनपदों में अगले चौबीस घंटाटे के दौरान भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा यूपी के पश्चिमांचल हिस्सों में भी अगले अड़तालीस घंटाटे के दौरान भारी बारिश की संभावना है। आज भी लखनऊ के गोमतीनगर, चिनहट, मोहनलालगंज, चारबाग तथा आलमबाग समेत कई अन्य हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। लखनऊ का तापमान लखनऊ का तापमान बीते कुछ दिनों से हुई बारिश के बाद काफी कम हो गया है। सोमवार से शुरू है बारिश के कारण लखनऊ समेत आसपास के कई जनपदों में पारा चार से पाँच डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया है। बीते दिन लखनऊ में अधिकतम तापमान अट्ठाईस डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। वहीं, उत्तर प्रदेश में सबसे कम तापमान बीते दिन गोरखपुर में दर्ज किया गया जहां गुरुवार को अधिकतम तापमान पच्चीस डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में अगले अड़तालीस घंटाटे के दौरान बारिश होने की संभावना है जिसके कारण तापमान में दो डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट आ सकती है। लखनऊ में आज अधिकतम तापमान सत्ताईस डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
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दोकामा दूध
दुद्दा ४४५ का पहशम्म मक्तः का और हूँ (गुजराठी) इन दो एकपर्यवाची शब्दों को मिलाकर बनाया गया है। बो-मोकामाशा का रूप । यो प्राकृत की धातु है। - यो (स्त्रीलिंग । बो बात बो पटना । बाइमा पूर्वकालिक किया है। इ पारपूर्य पेड़ा गया . दूदा ४४६ दुवी-रोती हुई होनेवाली मग । दूदा ४४ प पर भी हिलते रहते हैं।
साइर से सामू प्रा साई । वाहयौ = घोड़ों का निगरानीदार ।
सामना सम्हालना ।
एक चारय वीस् समगतमा व्यक्तिवाचक नाम न की किसी बावि विशेष का नाम है, वैसे-- ।
सुमराज महाराज का शुम हो । चारण, माट, सदी दोशी आदि बाचक जातियाँ अपने अजमान को सुमराज कर आशीष देती है 1
होकर चारों
दूदा ४४८ एकरएक का विकारी रूप । राजस्थानी में विकारी रूप समस्यय कर्ता के लिये प्रयुक्त होता है।
दूदा ४४६ सहिर्नोग- सज्ञान प्राँ समाय । इसी प्रकार महिनाद ( से मिलन ) । मिलाप्रोयह मुद्रिा माठ मैं मानी।
दीन्ह राम म कई सहिदामी ॥ ( मानस = सुंदरकांड ) बुद्दा ४५२ समयीमा + (- प्रत्पम )-समनेवाली । से धम् प्रा लम।
क-कब प्राक
गरबी --से गुर्थी दि गई ।
पूरा ४१३ कसं का अर्थ मी कटि ही होता है। दो शब्दों के प्रयोग का अभिप्राम सौंदर्य पर बोर देना है। अथवा का कार्यबी पाची लिया बाम ।
इराण से बचन के स्थान पर प्राइव आदि में कई शम्म मैं हो बाता है मेडम डोला इस्मादि । दूरा ४५४ पुसिंद-कपा । मगद ४ मृगेंद्र ।
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दोकामा दूध दुद्दा चार सौ पैंतालीस का पहशम्म मक्तः का और हूँ इन दो एकपर्यवाची शब्दों को मिलाकर बनाया गया है। बो-मोकामाशा का रूप । यो प्राकृत की धातु है। - यो । मिलाप्रोयह मुद्रिा माठ मैं मानी। दीन्ह राम म कई सहिदामी ॥ बुद्दा चार सौ बावन समयीमा + -समनेवाली । से धम् प्रा लम। क-कब प्राक गरबी --से गुर्थी दि गई । पूरा चार सौ तेरह कसं का अर्थ मी कटि ही होता है। दो शब्दों के प्रयोग का अभिप्राम सौंदर्य पर बोर देना है। अथवा का कार्यबी पाची लिया बाम । इराण से बचन के स्थान पर प्राइव आदि में कई शम्म मैं हो बाता है मेडम डोला इस्मादि । दूरा चार सौ चौवन पुसिंद-कपा । मगद चार मृगेंद्र ।
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थाना मुरादनगर पुलिस द्वारा कनौजा से सदरपुर रोड के पास वाले रास्ते पर बाइक सवार गौ तस्करों को रोकने का प्रयास किया गया। जब ये बदमाश नहीं रुके और पुलिस पर फायर करने लगे तो पुलिस की जवाबी करवाई में इरफान पुत्र असगर निबासी नाहल थाना मसूरी गाजियाबाद को पैर मे गोली लगने से घायल होने के बाद गिरफ्तार किया गया है। पकड़ा गया बदमाश थाना मुरादनगर से गोकशी के अभियोग में वांछित चल रहा था। इसके अन्य 2 साथी अंधेरे का लाभ उठाकर मौके से फरार हो गए हैं। गिरफ्तार अभियुक्त पर करीब 1 दर्जन से अधिक गोकशी/चोरी/ गैंगस्टर एक्ट/ शस्त्र अधिनियम आदि के अभियोग पंजीकृत हैं। (आईएएनएस)
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थाना मुरादनगर पुलिस द्वारा कनौजा से सदरपुर रोड के पास वाले रास्ते पर बाइक सवार गौ तस्करों को रोकने का प्रयास किया गया। जब ये बदमाश नहीं रुके और पुलिस पर फायर करने लगे तो पुलिस की जवाबी करवाई में इरफान पुत्र असगर निबासी नाहल थाना मसूरी गाजियाबाद को पैर मे गोली लगने से घायल होने के बाद गिरफ्तार किया गया है। पकड़ा गया बदमाश थाना मुरादनगर से गोकशी के अभियोग में वांछित चल रहा था। इसके अन्य दो साथी अंधेरे का लाभ उठाकर मौके से फरार हो गए हैं। गिरफ्तार अभियुक्त पर करीब एक दर्जन से अधिक गोकशी/चोरी/ गैंगस्टर एक्ट/ शस्त्र अधिनियम आदि के अभियोग पंजीकृत हैं।
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जम्मू-कश्मीर सांबा सेक्टर में शनिवार रात अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर एक पाकिस्तानी ड्रोन देखा गया है।
यह जानकारी जम्मू-कश्मीर पुलिस के तरफ से आज यानि रविवार को दी गई है। पुलिस ने बताया कि ड्रोन कुछ मिनट तक भारत में रहने के बाद पाकिस्तान की ओर चला गया। पुलिस के मुताबिक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अब देखना यह होगा की जांच में क्या कुछ सामने आता है ।
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जम्मू-कश्मीर सांबा सेक्टर में शनिवार रात अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर एक पाकिस्तानी ड्रोन देखा गया है। यह जानकारी जम्मू-कश्मीर पुलिस के तरफ से आज यानि रविवार को दी गई है। पुलिस ने बताया कि ड्रोन कुछ मिनट तक भारत में रहने के बाद पाकिस्तान की ओर चला गया। पुलिस के मुताबिक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अब देखना यह होगा की जांच में क्या कुछ सामने आता है ।
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भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री पिछले कुछ समय से भयानक स्थिति में है। संकट की शुरुआत 2019 में हुई जब एमिशन नॉर्म्स, लिक्वीडिटी चैलेंज आदि में बदलाव हुआ। विशेषज्ञों का मानना था कि 2020 में स्थिति में सुधार होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कोरोना वायरस महामारी के कारण इंडस्ट्री में ठहराव आया और इंडस्ट्री की परेशानी बढ़ गई। हालांकि, सरकार के पाबंदियों में ढिलाई करने के बाद सेल्स में एक बार फिर गति आई। हालांकि, कोविड-19 स्थिति के पहले की तुलना में यह बिलकुल करीब नहीं है। इन सभी के बावजूद हुंडई क्रेटा की बिक्री शानदार रही।
हम जानते हैं क्योंकि दक्षिण कोरियाई ऑटोमेकर ने हाल ही में लोकप्रिय एसयूवी के जून 2020 के सेल्स फिगर साझा किया, जिसमें खुलासा हुआ कि पिछले महीने देश में सबसे ज्यादा एसयूवी ब्रिकी के मामले में क्रेटा सर्वश्रेष्ठ रही। भारत में पिछले महीने हाल ही में लांच हुई हुंडई क्रेटा की कुल 7,207 यूनिट बिकी। इसलिए कोरोना वायरस महामारी के बीच देश में सबसे ज्यादा एसयूवी बिकने का खिताब हासिल किया। सिर्फ यही नहीं, इन आंकड़ों के साथ नई क्रेटा जून 2020 में भारत में सबसे ज्यादा यात्री वाहन बिक्री में दूसरे नंबर पर रही।
ऑटोमेकर ने खुलासा किया कि जून 2020 से 2020 हुंडई क्रेटा का बुकिंग आंकड़ाः पिछले महीने एसयूवी को 14,825 ऑर्डर मिले। भारत में मार्च 2020 में लांच हुई हुंडई क्रेटा को जून के बीच महीने तक 30,000 बुकिंग मिली। यह जानने योग्य है कि 55 प्रतिशत बुकिंग क्रेटा के डीजल मॉडल की है।
यह क्रेटा का नया मॉडल नहीं है। पुराने मॉडल में भी सबसे ज्यादा मांग डीजल मॉडल की ही थी। भारत में आमतौर पर डीजल वाहनों की मांग बढ़ रही है। हुंडई क्रेटा के दूसरे जनरेशन में दो पेट्रोल इंजन और एक डीजल इंजन का विकल्प है। 1. 4 लीटर टर्बोचार्ज्ड इंजन सात स्पीड डीसीटी के साथ जोड़ी बनाता है, जिसमें 138 बीएचपी और 242 एनएम है।
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भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री पिछले कुछ समय से भयानक स्थिति में है। संकट की शुरुआत दो हज़ार उन्नीस में हुई जब एमिशन नॉर्म्स, लिक्वीडिटी चैलेंज आदि में बदलाव हुआ। विशेषज्ञों का मानना था कि दो हज़ार बीस में स्थिति में सुधार होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कोरोना वायरस महामारी के कारण इंडस्ट्री में ठहराव आया और इंडस्ट्री की परेशानी बढ़ गई। हालांकि, सरकार के पाबंदियों में ढिलाई करने के बाद सेल्स में एक बार फिर गति आई। हालांकि, कोविड-उन्नीस स्थिति के पहले की तुलना में यह बिलकुल करीब नहीं है। इन सभी के बावजूद हुंडई क्रेटा की बिक्री शानदार रही। हम जानते हैं क्योंकि दक्षिण कोरियाई ऑटोमेकर ने हाल ही में लोकप्रिय एसयूवी के जून दो हज़ार बीस के सेल्स फिगर साझा किया, जिसमें खुलासा हुआ कि पिछले महीने देश में सबसे ज्यादा एसयूवी ब्रिकी के मामले में क्रेटा सर्वश्रेष्ठ रही। भारत में पिछले महीने हाल ही में लांच हुई हुंडई क्रेटा की कुल सात,दो सौ सात यूनिट बिकी। इसलिए कोरोना वायरस महामारी के बीच देश में सबसे ज्यादा एसयूवी बिकने का खिताब हासिल किया। सिर्फ यही नहीं, इन आंकड़ों के साथ नई क्रेटा जून दो हज़ार बीस में भारत में सबसे ज्यादा यात्री वाहन बिक्री में दूसरे नंबर पर रही। ऑटोमेकर ने खुलासा किया कि जून दो हज़ार बीस से दो हज़ार बीस हुंडई क्रेटा का बुकिंग आंकड़ाः पिछले महीने एसयूवी को चौदह,आठ सौ पच्चीस ऑर्डर मिले। भारत में मार्च दो हज़ार बीस में लांच हुई हुंडई क्रेटा को जून के बीच महीने तक तीस,शून्य बुकिंग मिली। यह जानने योग्य है कि पचपन प्रतिशत बुकिंग क्रेटा के डीजल मॉडल की है। यह क्रेटा का नया मॉडल नहीं है। पुराने मॉडल में भी सबसे ज्यादा मांग डीजल मॉडल की ही थी। भारत में आमतौर पर डीजल वाहनों की मांग बढ़ रही है। हुंडई क्रेटा के दूसरे जनरेशन में दो पेट्रोल इंजन और एक डीजल इंजन का विकल्प है। एक. चार लीटरटर टर्बोचार्ज्ड इंजन सात स्पीड डीसीटी के साथ जोड़ी बनाता है, जिसमें एक सौ अड़तीस बीएचपी और दो सौ बयालीस एनएम है।
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आज हम आपके लिए जो ऑप्टिकल इल्यूजन टेस्ट लेकर आए हैं, वो एक आदमी का स्केच है. इस स्केच में ही कहीं उसकी 3 बेटियों के चेहरे भी छिपे हुए हैं. आपको 20 सेकंड के भीतर बताना है कि वो कहां हैं?
सोशल मीडिया पर 'दिमाग का दही' कर देने वाली एक और तस्वीर सामने आई है, जो कि एक आदमी का स्केच है. लेकिन इस स्केच में ही कहीं उसकी बेटियों के चेहरे भी छिपे हुए हैं. आपको 20 सेकंड के अंदर बताना है कि आखिर वो चेहरेकहां है? वैसे, तस्वीर के साथ यह भी दावा किया जा रहा है कि जिनकी नजर बाज जैसी तेज होगी, वो ही इस ऑप्टिकल इल्यूजन को सुलझा पाएंगे. तो आइए देखते हैं कि आपकी ऑब्जर्वेशन स्किल कितनी अच्छी है और क्या आप तय समय के भीतर बेटियों को ढूंढ पाते हैं या नहीं.
आइए पहले जानते हैं कि ये ऑप्टिकल इल्यूजन आखिर होता क्या है. दरअसल, ये एक तरह की फोटो पहेली होती है, वो आपके दिमाग की अच्छी तरह से कसरत करवाती है. मसलन, दिखने में भले ही आपको ये आसान लगेंगे, लेकिन जब आप तस्वीर की गहराई में झांकने की कोशिश करेंगे, तब आपको पता चलेगा कि आपने क्या पंगा लिया है. यूं कहें कि जो तुर्रम खां तेज नजर होने का दावा करते हैं, वो भी इस पहेली के आगे पानी मांगने लगेंगे. तो चलिए शुरू करते हैं आज का ऑप्टिकल इल्यूजन टेस्ट. अब जरा नीचे वाली तस्वीर को गौर से देखिए. आपको एक शख्स का स्केच दिखेगा. इसी में कहीं उसकी तीन बेटियों के चेहरे भी हैं. तो आपका समय शुरू होता है अब.
क्या आपको दिखे बेटियों के चेहरे?
आपको बता दें कि आर्टिस्ट ने इस ऑप्टिकल इल्यूजन को ऐसे बनाया है कि शख्स की बेटियों के चेहरे ढूंढने में नेटिजन्स के पसीने छूट रहे हैं. अगर आप खुद को जीनियस समझते हैं, तो 20 सेकंड के भीतर चेहरे को खोजकर बताएं. वैसे, हमें यकीन है कि आप इस टेस्ट को आसानी से पार पा लेंगे. और अगर आप अभी तक बेटियों को ढूंढ ही रहे हैं, तो कोई बात नहीं. हम आपकी थोड़ी मदद कर देते हैं.
शख्स के चेहरे को निहारने के बाद उसकी दाढ़ी और गर्दन को गौर से देखिए. आपको उसके इर्द-गिर्द चेहरा जरूर नजर आएगा. अब शायद आपने चेहरों को सेकंडों में देख लिया होगा. फिर भी नहीं दिखे, तो नीचे लाल घेरे में हम बता रहे हैं कि आखिर बेटियों के चेहरे कहां हैं?
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आज हम आपके लिए जो ऑप्टिकल इल्यूजन टेस्ट लेकर आए हैं, वो एक आदमी का स्केच है. इस स्केच में ही कहीं उसकी तीन बेटियों के चेहरे भी छिपे हुए हैं. आपको बीस सेकंड के भीतर बताना है कि वो कहां हैं? सोशल मीडिया पर 'दिमाग का दही' कर देने वाली एक और तस्वीर सामने आई है, जो कि एक आदमी का स्केच है. लेकिन इस स्केच में ही कहीं उसकी बेटियों के चेहरे भी छिपे हुए हैं. आपको बीस सेकंड के अंदर बताना है कि आखिर वो चेहरेकहां है? वैसे, तस्वीर के साथ यह भी दावा किया जा रहा है कि जिनकी नजर बाज जैसी तेज होगी, वो ही इस ऑप्टिकल इल्यूजन को सुलझा पाएंगे. तो आइए देखते हैं कि आपकी ऑब्जर्वेशन स्किल कितनी अच्छी है और क्या आप तय समय के भीतर बेटियों को ढूंढ पाते हैं या नहीं. आइए पहले जानते हैं कि ये ऑप्टिकल इल्यूजन आखिर होता क्या है. दरअसल, ये एक तरह की फोटो पहेली होती है, वो आपके दिमाग की अच्छी तरह से कसरत करवाती है. मसलन, दिखने में भले ही आपको ये आसान लगेंगे, लेकिन जब आप तस्वीर की गहराई में झांकने की कोशिश करेंगे, तब आपको पता चलेगा कि आपने क्या पंगा लिया है. यूं कहें कि जो तुर्रम खां तेज नजर होने का दावा करते हैं, वो भी इस पहेली के आगे पानी मांगने लगेंगे. तो चलिए शुरू करते हैं आज का ऑप्टिकल इल्यूजन टेस्ट. अब जरा नीचे वाली तस्वीर को गौर से देखिए. आपको एक शख्स का स्केच दिखेगा. इसी में कहीं उसकी तीन बेटियों के चेहरे भी हैं. तो आपका समय शुरू होता है अब. क्या आपको दिखे बेटियों के चेहरे? आपको बता दें कि आर्टिस्ट ने इस ऑप्टिकल इल्यूजन को ऐसे बनाया है कि शख्स की बेटियों के चेहरे ढूंढने में नेटिजन्स के पसीने छूट रहे हैं. अगर आप खुद को जीनियस समझते हैं, तो बीस सेकंड के भीतर चेहरे को खोजकर बताएं. वैसे, हमें यकीन है कि आप इस टेस्ट को आसानी से पार पा लेंगे. और अगर आप अभी तक बेटियों को ढूंढ ही रहे हैं, तो कोई बात नहीं. हम आपकी थोड़ी मदद कर देते हैं. शख्स के चेहरे को निहारने के बाद उसकी दाढ़ी और गर्दन को गौर से देखिए. आपको उसके इर्द-गिर्द चेहरा जरूर नजर आएगा. अब शायद आपने चेहरों को सेकंडों में देख लिया होगा. फिर भी नहीं दिखे, तो नीचे लाल घेरे में हम बता रहे हैं कि आखिर बेटियों के चेहरे कहां हैं?
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ऊना - उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग ऊना द्वारा जिला में अनुबंध आधार पर बैचवाइज भूतपूर्व सैनिक आश्रित श्रेणी से भाषा अध्यापकों व शास्त्री के क्रमशः चार-चार पदों को भरा जाना है, जिनमें भाषा अध्यापक के चार पदों में से भूतपूर्व सैनिक आश्रित सामान्य वर्ग के दो पद बैच 2010 तथा भूतपूर्व सैनिक आश्रित दो पद अनुसूचित जाति के अप-टू-डेट बैच तक भरे जाएंगे, जबकि शास्त्री के चार पदों में से दो पद भूतपूर्व सैनिक आश्रित सामान्य श्रेणी, एक पद भूतपूर्व सैनिक आश्रित ओबीसी से बैच 2010 तथा एक पद भूतपूर्व सैनिक आश्रित अनुसूचित जनजाति के अप-टू-डेट बैच तक का भरा जाएगा। जिला रोजगार अधिकारी ऊना आरसी कटोच ने बताया कि भाषा अध्यापक के पदों के लिए उम्मीदवार बीए हिंदी वैकल्पिक विषय 50 प्रतिशत अंकों के साथ या एमए हिंदी 50 प्रतिशत अंकों के साथ या प्रभाकर के साथ बीए 50 प्रतिशत अंकों के साथ तथा सामान्य श्रेणी के लिए 31 दिसंबर, 2010 तक बीएड की परीक्षा, जबकि अनुसूचित जाति से संबंधित उम्मीदवार ने अप-टू-डेट तक बीएड परीक्षा पास की हो, जबकि शास्त्री के पदों के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ शास्त्री पास किया होना चाहिए। इसके अलावा शास्त्री और भाषा अध्यापक में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला या हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर से टेट की परीक्षा उत्तीर्ण की हो। उन्होंने बताया कि आरक्षित वर्ग से संबंधित उम्मीदवारों को नियमानुसार अंकों में पांच प्रतिशत की छूट मिलेगी। उन्होंने भाषा व शास्त्री अध्यापकों के पदों के लिए मांगे गए बैच तक के ऐसे सभी योग्य उम्मीदवारों से आह्वान किया है कि वे इस बारे 18 अगस्त, 2017 तक जिला रोजगार कार्यालय ऊना तथा रोजगार उपकार्यालय हरोली व अंब से संपर्क करना सुनिश्चित करें, ताकि उनके नाम प्रारंभिक शिक्षा विभाग को प्रायोजित किए जा सकें।
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ऊना - उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग ऊना द्वारा जिला में अनुबंध आधार पर बैचवाइज भूतपूर्व सैनिक आश्रित श्रेणी से भाषा अध्यापकों व शास्त्री के क्रमशः चार-चार पदों को भरा जाना है, जिनमें भाषा अध्यापक के चार पदों में से भूतपूर्व सैनिक आश्रित सामान्य वर्ग के दो पद बैच दो हज़ार दस तथा भूतपूर्व सैनिक आश्रित दो पद अनुसूचित जाति के अप-टू-डेट बैच तक भरे जाएंगे, जबकि शास्त्री के चार पदों में से दो पद भूतपूर्व सैनिक आश्रित सामान्य श्रेणी, एक पद भूतपूर्व सैनिक आश्रित ओबीसी से बैच दो हज़ार दस तथा एक पद भूतपूर्व सैनिक आश्रित अनुसूचित जनजाति के अप-टू-डेट बैच तक का भरा जाएगा। जिला रोजगार अधिकारी ऊना आरसी कटोच ने बताया कि भाषा अध्यापक के पदों के लिए उम्मीदवार बीए हिंदी वैकल्पिक विषय पचास प्रतिशत अंकों के साथ या एमए हिंदी पचास प्रतिशत अंकों के साथ या प्रभाकर के साथ बीए पचास प्रतिशत अंकों के साथ तथा सामान्य श्रेणी के लिए इकतीस दिसंबर, दो हज़ार दस तक बीएड की परीक्षा, जबकि अनुसूचित जाति से संबंधित उम्मीदवार ने अप-टू-डेट तक बीएड परीक्षा पास की हो, जबकि शास्त्री के पदों के लिए पचास प्रतिशत अंकों के साथ शास्त्री पास किया होना चाहिए। इसके अलावा शास्त्री और भाषा अध्यापक में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला या हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर से टेट की परीक्षा उत्तीर्ण की हो। उन्होंने बताया कि आरक्षित वर्ग से संबंधित उम्मीदवारों को नियमानुसार अंकों में पांच प्रतिशत की छूट मिलेगी। उन्होंने भाषा व शास्त्री अध्यापकों के पदों के लिए मांगे गए बैच तक के ऐसे सभी योग्य उम्मीदवारों से आह्वान किया है कि वे इस बारे अट्ठारह अगस्त, दो हज़ार सत्रह तक जिला रोजगार कार्यालय ऊना तथा रोजगार उपकार्यालय हरोली व अंब से संपर्क करना सुनिश्चित करें, ताकि उनके नाम प्रारंभिक शिक्षा विभाग को प्रायोजित किए जा सकें। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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दिल्ली में अब सस्ते में एसी में बैठकर शराब का मजा लिया जा सकता है. इसका खर्च भी ₹300 रुपये से कम आएगा.
दिल्ली सरकार ने शहर में कई जगहों पर प्रीमियम ठेके यानी लिकर शॉप खोली हैं. इनमें सरकारी रेट पर ही शराब मिलती है, साथ में वहीं बैठकर पीने की सुविधा भी मिलती है.
दिल्ली में रॉयल स्टैग जैसे ब्रांड के 180ML की कीमत 130 है. प्रीमियम शॉप पर बैठकर पीने के लिए इस पर नॉमिनल चार्ज देना होता है, जो शराब की कीमत में ही जुड़ जाता है. चखने के पैसे और मिला लें, तो खर्चा सिर्फ 300 तक आएगा.
दिल्ली सरकार की इन प्रीमियम लिकर शॉप्स में सिर्फ व्हिस्की ही नहीं, बल्कि वाइन और बीयर भी मिल रही है. इन शॉप्स में शराब को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है.
दिल्ली सरकार की प्रीमियम लिकर शॉप जहां खान मार्केट और साकेत जैसे इलाकों में खुली हैं. वहीं कनॉट प्लेस, अशोक रोड और वसंत कुंज को मिलाकर दिल्ली में कुल 5 ब्रुअरीज खुली हैं जहां लोकल लेवल पर बनी फ्रेश बीयर मिलती है.
दिल्ली में ब्रांडेड बीयर भी सस्ती है. बीयर की 650ML की कैन की कीमत तमिलनाडु में जहां 210 रुपये है तो दिल्ली में ये 110 रुपये में मिल जाती है.
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दिल्ली में अब सस्ते में एसी में बैठकर शराब का मजा लिया जा सकता है. इसका खर्च भी तीन सौ रुपया रुपये से कम आएगा. दिल्ली सरकार ने शहर में कई जगहों पर प्रीमियम ठेके यानी लिकर शॉप खोली हैं. इनमें सरकारी रेट पर ही शराब मिलती है, साथ में वहीं बैठकर पीने की सुविधा भी मिलती है. दिल्ली में रॉयल स्टैग जैसे ब्रांड के एक सौ अस्सीML की कीमत एक सौ तीस है. प्रीमियम शॉप पर बैठकर पीने के लिए इस पर नॉमिनल चार्ज देना होता है, जो शराब की कीमत में ही जुड़ जाता है. चखने के पैसे और मिला लें, तो खर्चा सिर्फ तीन सौ तक आएगा. दिल्ली सरकार की इन प्रीमियम लिकर शॉप्स में सिर्फ व्हिस्की ही नहीं, बल्कि वाइन और बीयर भी मिल रही है. इन शॉप्स में शराब को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है. दिल्ली सरकार की प्रीमियम लिकर शॉप जहां खान मार्केट और साकेत जैसे इलाकों में खुली हैं. वहीं कनॉट प्लेस, अशोक रोड और वसंत कुंज को मिलाकर दिल्ली में कुल पाँच ब्रुअरीज खुली हैं जहां लोकल लेवल पर बनी फ्रेश बीयर मिलती है. दिल्ली में ब्रांडेड बीयर भी सस्ती है. बीयर की छः सौ पचासML की कैन की कीमत तमिलनाडु में जहां दो सौ दस रुपयापये है तो दिल्ली में ये एक सौ दस रुपयापये में मिल जाती है.
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नेपाल विमान हादसा (Image Source:PTI)
Nepal Plane Crash: नेपाल में रविवार (15 जनवरी) को हुए विमान हादसे में कोई भी यात्री जीवित नहीं बचा है. भारत के पड़ोसी देश की राजधानी काठमांडू से पोखरा जा रहा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. पोखरा एयरपोर्ट पहाड़ी इलाके में हैं, तो विमान हादसे को लेकर संभावना जताई जा रही थी कि खराब मौसम की वजह से प्लेन क्रैश हुआ होगा. हालांकि, जांच में सामने आया था कि प्लेन के क्रैश होने में मौसम की स्थिति की कोई भूमिका नहीं थी. सवाल जस का तस बना हुआ है कि आखिर नेपाल विमान हादसा क्यों हुआ?
नेपाल विमान हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में लगी नेपाल सेना के प्रवक्ता कृष्ण प्रसाद भंडारी ने बताया कि प्लेन क्रैश में 68 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं. वहीं, 4 लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. इस हादसे में मारे गए लोगों में 5 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. संभावना जताई जा रही है कि विमान हादसे की जांच रिपोर्ट 45 दिनों में आ जाएगी. नेपाल सरकार ने प्लेन क्रैश की जांच के लिए पांच सदस्यीय आयोग बनाया है.
आखिर नेपाल प्लेन क्रैश की क्या थी वजह?
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक की जांच और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर रनवे यानी हवाई पट्टी बदलने का फैसला सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है. अधिकारियों के अनुसार, विमान को लैंडिंग की इजाजत दे दी गई थी. अचानक पायलट ने रनवे बदलने का फैसला किया. लैंडिंग की अनुमति मिलने के बाद विमान ने एक मोड़ पर अपनी ऊंचाई खो दी. प्रत्यक्षदर्शियों ने भी विमान के बहुत नीचे आ जाने की बात कही है. वहीं, नेपाल विमान हादसे के सामने आए वीडियो भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं.
क्या पोखरा एयरपोर्ट का तकनीकी पक्ष बना वजह?
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पोखरा में बना नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक जनवरी से ही चालू हुआ है. यहां पूरब और पश्चिम दो दिशाओं से विमान लैंडिंग करते हैं. आमतौर पर पूर्व की ओर से आने वाले विमानों की लैंडिंग के लिए रनवे-30 और पश्चिम से लैंडिंग के लिए रनवे-12 का इस्तेमाल होता है. अधिकारियों का कहना है कि पहले विमान को रनवे-30 पर उतरने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन एयरपोर्ट के करीब आने पर पायलट ने रनवे-12 पर उतरने की अनुमति मांगी. उन्होंने बताया कि हादसे की वजह क्या थी, इसकी जांच की जाएगी.
क्या विमान में आई थी तकनीकी खराबी?
आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेन क्रैश की जांच कर रही टीम के एक सदस्य ने बताया कि ऐसा लग रहा है, विमान का गलत संचालन, प्लेन में तकनीकी खराबी या पायलट की थकान हादसे की वजह हो सकती है. हालांकि, उन्होंने कहा कि विमान हादसे की वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आई आएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि पायलट की थकान समेत विमान हादसे की कई वजहें हो सकती हैं. तकनीकी खराबी, प्रक्रियाओं का पालन न करना जैसे कई कारण हो सकते हैं. हालांकि, जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.
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नेपाल विमान हादसा Nepal Plane Crash: नेपाल में रविवार को हुए विमान हादसे में कोई भी यात्री जीवित नहीं बचा है. भारत के पड़ोसी देश की राजधानी काठमांडू से पोखरा जा रहा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. पोखरा एयरपोर्ट पहाड़ी इलाके में हैं, तो विमान हादसे को लेकर संभावना जताई जा रही थी कि खराब मौसम की वजह से प्लेन क्रैश हुआ होगा. हालांकि, जांच में सामने आया था कि प्लेन के क्रैश होने में मौसम की स्थिति की कोई भूमिका नहीं थी. सवाल जस का तस बना हुआ है कि आखिर नेपाल विमान हादसा क्यों हुआ? नेपाल विमान हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में लगी नेपाल सेना के प्रवक्ता कृष्ण प्रसाद भंडारी ने बताया कि प्लेन क्रैश में अड़सठ लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं. वहीं, चार लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. इस हादसे में मारे गए लोगों में पाँच भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. संभावना जताई जा रही है कि विमान हादसे की जांच रिपोर्ट पैंतालीस दिनों में आ जाएगी. नेपाल सरकार ने प्लेन क्रैश की जांच के लिए पांच सदस्यीय आयोग बनाया है. आखिर नेपाल प्लेन क्रैश की क्या थी वजह? बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक की जांच और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर रनवे यानी हवाई पट्टी बदलने का फैसला सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है. अधिकारियों के अनुसार, विमान को लैंडिंग की इजाजत दे दी गई थी. अचानक पायलट ने रनवे बदलने का फैसला किया. लैंडिंग की अनुमति मिलने के बाद विमान ने एक मोड़ पर अपनी ऊंचाई खो दी. प्रत्यक्षदर्शियों ने भी विमान के बहुत नीचे आ जाने की बात कही है. वहीं, नेपाल विमान हादसे के सामने आए वीडियो भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं. क्या पोखरा एयरपोर्ट का तकनीकी पक्ष बना वजह? बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पोखरा में बना नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक जनवरी से ही चालू हुआ है. यहां पूरब और पश्चिम दो दिशाओं से विमान लैंडिंग करते हैं. आमतौर पर पूर्व की ओर से आने वाले विमानों की लैंडिंग के लिए रनवे-तीस और पश्चिम से लैंडिंग के लिए रनवे-बारह का इस्तेमाल होता है. अधिकारियों का कहना है कि पहले विमान को रनवे-तीस पर उतरने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन एयरपोर्ट के करीब आने पर पायलट ने रनवे-बारह पर उतरने की अनुमति मांगी. उन्होंने बताया कि हादसे की वजह क्या थी, इसकी जांच की जाएगी. क्या विमान में आई थी तकनीकी खराबी? आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेन क्रैश की जांच कर रही टीम के एक सदस्य ने बताया कि ऐसा लग रहा है, विमान का गलत संचालन, प्लेन में तकनीकी खराबी या पायलट की थकान हादसे की वजह हो सकती है. हालांकि, उन्होंने कहा कि विमान हादसे की वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आई आएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि पायलट की थकान समेत विमान हादसे की कई वजहें हो सकती हैं. तकनीकी खराबी, प्रक्रियाओं का पालन न करना जैसे कई कारण हो सकते हैं. हालांकि, जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी. ये भी पढ़ेंः
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मेष राशि - आज आपके व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होंगे. सत्ता के प्रति सुख की प्राप्ति होगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। पेशेवर या शैक्षणिक मोर्च पर यदि अब भी आप गंभीर नहीं हुए तो आने वाले समय में आपको और हानी उठानी पड़ सकती है।
वृषभ राशि - ध्यान और योग न केवल आध्यात्मिक तौर पर, बल्कि शारीरिक तौर पर भी आपके लिए फ़ायदेमन्द साबित होंगे। बोलते समय और वित्तीय लेन-देन करते समय सावधानी बरतने की ज़रूरत है। आपका ज़्यादातर समय दोस्तों और परिवार के साथ बीतेगा।
मिथुन राशि - आज आपका दिन अच्छा रहेगा। छोटे पैमाने पर अगर आप कोई काम शुरू कर रहे हैं, तो आगे चलकर आपको फायदा हो सकता है। महिला उद्यमियों को धनलाभ हो सकता है। आप बिजनेस के सिलसिले में किसी यात्रा पर जाने का प्लान बना सकते हैं।
कर्क राशि - आज आपके करीबी लोग आपके निजी जीवन में परेशानियाँ खड़ी कर सकते हैं। जिन लोगों से आपको पैसे लेने हैं, उनसे वसूली भी कर सकते हैं। निजी कामों की उलझनों में पड़ कर अपनी एकाग्रता न टूटने दें। आत्मविश्वास से लबरेज रहेगें, लेकिन किसी अज्ञात भय से परेशान भी रहेंगे।
सिंह राशि - अपने जीवन-साथी के साथ पारिवारिक समस्याओं को साझा करें। एक-दूसरे को फिर से भली-भांति जानने के लिए थोड़ा और वक़्त एक-दूसरे के साथ बिताएँ और ख़ुद की स्नेही जोड़े की छवि को मज़बूत करें। आपके बच्चे भी घर में ख़ुशी और सुकून के माहौल को महसूस कर सकेंगे।
कन्या राशि - आज आपका दिन बेहतर रहेगा. कुछ लोगों से आपको उम्मीद से अधिक फायदा होगा। लवमेट के लिए आज का दिन बढ़िया रहेगा। थोड़ी मेहनत से आपको किसी बड़े धन लाभ का अवसर प्राप्त होगा।
तुला राशि - तुला राशि के जातक आज भाग्य की अपेक्षा मेहनत पर जोर दें, विभिन्न स्त्रोतों से लाभ के संकेत हैं। जीवनसाथी आप लोगों को ख़ुशी देने की हर संभव कोशिश करेगा. बिगड़े हुए काम बनेंगे व आप दिन-दुगनी व रात-चौगुनी तरक्की करेंगे।
वृश्चिक राशि -कामकाज में आपकी तेज़ी लम्बे समय से चली आ रही समस्या का समाधान कर देगी। आपके ख़र्चों में बढ़ोतरी होगी, जो आपके लिए परेशानी का सबब साबित हो सकती है। पारिवारिक मोर्चे पर कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन अन्य पारिवारिक सदस्यों के सहयोग से आप समस्या का समाधान करने में सफल रहेंगे।
धनु राशि - आज आपका मन प्रसन्न रहेगा। आपको किसी तरह के कानूनी मामले में बड़ी मदद मिल सकती है। आप परिवार वालों के साथ शॉपिंग करने जा सकते हैं। परिवार में सबकी इच्छा पूरी करने में आप सफल होंगे। आपको दूसरों की मदद करने के मौके मिलेंगे।
मकर राशि - आज आप कार्य की अधिकता की वजह से अपने घर के सदस्यों को अधिक समय नहीं दे पाएगें। आपका प्रिय को आपसे भरोसे एवं वादे की ज़रूरत है। उन व्यक्तियों पर नज़र रखें जो आप लोगों को ग़लत राह पर ले जा सकते हैं। किसी की मदद भी करनी पड़ सकती है और आप उसकी मदद करने के लिए तत्पर रहेंगे।
कुंभ राशि - जीवन-साथी ख़ुशी की वजह साबित होगा। आर्थिक तौर पर सिर्फ़ और सिर्फ़ एक स्रोत से ही लाभ मिलेगा। घर में उल्लास का माहौल आपके तनावों को कम कर देगा। आप भी इसमें पूरी सहभागिता करें और महज़ मूक दर्शक न बने रहें।
मीन राशि - आज शाम तक कोई शुभ समाचार मिल सकता है। घर में खुशियों का माहौल बन सकता है। सोसाइटी के लोग आपसे घर पर मिलने आ सकते हैं। इस राशि के विवाहितों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। आपके काम से जीवनसाथी प्रसन्न रहेगा।
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मेष राशि - आज आपके व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होंगे. सत्ता के प्रति सुख की प्राप्ति होगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। पेशेवर या शैक्षणिक मोर्च पर यदि अब भी आप गंभीर नहीं हुए तो आने वाले समय में आपको और हानी उठानी पड़ सकती है। वृषभ राशि - ध्यान और योग न केवल आध्यात्मिक तौर पर, बल्कि शारीरिक तौर पर भी आपके लिए फ़ायदेमन्द साबित होंगे। बोलते समय और वित्तीय लेन-देन करते समय सावधानी बरतने की ज़रूरत है। आपका ज़्यादातर समय दोस्तों और परिवार के साथ बीतेगा। मिथुन राशि - आज आपका दिन अच्छा रहेगा। छोटे पैमाने पर अगर आप कोई काम शुरू कर रहे हैं, तो आगे चलकर आपको फायदा हो सकता है। महिला उद्यमियों को धनलाभ हो सकता है। आप बिजनेस के सिलसिले में किसी यात्रा पर जाने का प्लान बना सकते हैं। कर्क राशि - आज आपके करीबी लोग आपके निजी जीवन में परेशानियाँ खड़ी कर सकते हैं। जिन लोगों से आपको पैसे लेने हैं, उनसे वसूली भी कर सकते हैं। निजी कामों की उलझनों में पड़ कर अपनी एकाग्रता न टूटने दें। आत्मविश्वास से लबरेज रहेगें, लेकिन किसी अज्ञात भय से परेशान भी रहेंगे। सिंह राशि - अपने जीवन-साथी के साथ पारिवारिक समस्याओं को साझा करें। एक-दूसरे को फिर से भली-भांति जानने के लिए थोड़ा और वक़्त एक-दूसरे के साथ बिताएँ और ख़ुद की स्नेही जोड़े की छवि को मज़बूत करें। आपके बच्चे भी घर में ख़ुशी और सुकून के माहौल को महसूस कर सकेंगे। कन्या राशि - आज आपका दिन बेहतर रहेगा. कुछ लोगों से आपको उम्मीद से अधिक फायदा होगा। लवमेट के लिए आज का दिन बढ़िया रहेगा। थोड़ी मेहनत से आपको किसी बड़े धन लाभ का अवसर प्राप्त होगा। तुला राशि - तुला राशि के जातक आज भाग्य की अपेक्षा मेहनत पर जोर दें, विभिन्न स्त्रोतों से लाभ के संकेत हैं। जीवनसाथी आप लोगों को ख़ुशी देने की हर संभव कोशिश करेगा. बिगड़े हुए काम बनेंगे व आप दिन-दुगनी व रात-चौगुनी तरक्की करेंगे। वृश्चिक राशि -कामकाज में आपकी तेज़ी लम्बे समय से चली आ रही समस्या का समाधान कर देगी। आपके ख़र्चों में बढ़ोतरी होगी, जो आपके लिए परेशानी का सबब साबित हो सकती है। पारिवारिक मोर्चे पर कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन अन्य पारिवारिक सदस्यों के सहयोग से आप समस्या का समाधान करने में सफल रहेंगे। धनु राशि - आज आपका मन प्रसन्न रहेगा। आपको किसी तरह के कानूनी मामले में बड़ी मदद मिल सकती है। आप परिवार वालों के साथ शॉपिंग करने जा सकते हैं। परिवार में सबकी इच्छा पूरी करने में आप सफल होंगे। आपको दूसरों की मदद करने के मौके मिलेंगे। मकर राशि - आज आप कार्य की अधिकता की वजह से अपने घर के सदस्यों को अधिक समय नहीं दे पाएगें। आपका प्रिय को आपसे भरोसे एवं वादे की ज़रूरत है। उन व्यक्तियों पर नज़र रखें जो आप लोगों को ग़लत राह पर ले जा सकते हैं। किसी की मदद भी करनी पड़ सकती है और आप उसकी मदद करने के लिए तत्पर रहेंगे। कुंभ राशि - जीवन-साथी ख़ुशी की वजह साबित होगा। आर्थिक तौर पर सिर्फ़ और सिर्फ़ एक स्रोत से ही लाभ मिलेगा। घर में उल्लास का माहौल आपके तनावों को कम कर देगा। आप भी इसमें पूरी सहभागिता करें और महज़ मूक दर्शक न बने रहें। मीन राशि - आज शाम तक कोई शुभ समाचार मिल सकता है। घर में खुशियों का माहौल बन सकता है। सोसाइटी के लोग आपसे घर पर मिलने आ सकते हैं। इस राशि के विवाहितों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। आपके काम से जीवनसाथी प्रसन्न रहेगा।
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प्लान का मंथली खर्च केवल 150 रुपये आता है।
Airtel Rs 1,799 Plan:
एयरटेल का 1,799 रुपये वाला प्लान उपलब्ध है जिसके तहत 365 दिनों यानि पूरे एक साल की वैधता ऑफर की जा रही है। प्लान में आपको 2GB मंथली डेटा मिलेगा यानि पूरे साल के डेटा की बात करें तो कुल 24GB डेटा होता है। हाई स्पीड डेटा की FUP लिमिट खत्म होने के बाद इंटरनेट की स्पीड घटकर 64 Kbps हो जाती है। इस प्लान में यूजर्स को अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग के साथ 3600 SMS मिलते हैं। इसके अलावा, प्लान में एक्सट्रीम ऐप प्रीमियम, फ्री हेलोट्यून्स, विंक म्यूजिक का फ्री सब्स्क्रिप्शन और अनलिमिटेड डाउनलोड जैसे अतिरिक्त बेनेफिट्स भी दिए जाते हैं।
वैसे तो एयरटेल के 1,799 रुपये वाले सालाना प्लान को एक बार खरीदने पर आपको ज्यादा लग सकता है, लेकिन अगर इसका मंथली खर्च निकाला जाए तो यह मात्र 150 रुपये पड़ता है। यानि आप हर महीने सिर्फ 150 रुपये में अपने दोस्तों और परिवार से अनलिमिटेड बातें कर सकते हैं और 12 महीनों तक सिम को एक्टिव रख सकते हैं। हालांकि, आप 150 रुपये में हर महीने का रिचार्ज करवा सकते हैं लेकिन उन मंथली प्लांस के मुकाबले इस प्लान में आपको कहीं अधिक लाभ मिल रहे हैं इसलिए यह प्लान आपके लिए बेस्ट साबित हो सकता है।
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प्लान का मंथली खर्च केवल एक सौ पचास रुपयापये आता है। Airtel एक रुपया,सात सौ निन्यानवे Plan: एयरटेल का एक,सात सौ निन्यानवे रुपयापये वाला प्लान उपलब्ध है जिसके तहत तीन सौ पैंसठ दिनों यानि पूरे एक साल की वैधता ऑफर की जा रही है। प्लान में आपको दोGB मंथली डेटा मिलेगा यानि पूरे साल के डेटा की बात करें तो कुल चौबीसGB डेटा होता है। हाई स्पीड डेटा की FUP लिमिट खत्म होने के बाद इंटरनेट की स्पीड घटकर चौंसठ Kbps हो जाती है। इस प्लान में यूजर्स को अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग के साथ तीन हज़ार छः सौ SMS मिलते हैं। इसके अलावा, प्लान में एक्सट्रीम ऐप प्रीमियम, फ्री हेलोट्यून्स, विंक म्यूजिक का फ्री सब्स्क्रिप्शन और अनलिमिटेड डाउनलोड जैसे अतिरिक्त बेनेफिट्स भी दिए जाते हैं। वैसे तो एयरटेल के एक,सात सौ निन्यानवे रुपयापये वाले सालाना प्लान को एक बार खरीदने पर आपको ज्यादा लग सकता है, लेकिन अगर इसका मंथली खर्च निकाला जाए तो यह मात्र एक सौ पचास रुपयापये पड़ता है। यानि आप हर महीने सिर्फ एक सौ पचास रुपयापये में अपने दोस्तों और परिवार से अनलिमिटेड बातें कर सकते हैं और बारह महीनों तक सिम को एक्टिव रख सकते हैं। हालांकि, आप एक सौ पचास रुपयापये में हर महीने का रिचार्ज करवा सकते हैं लेकिन उन मंथली प्लांस के मुकाबले इस प्लान में आपको कहीं अधिक लाभ मिल रहे हैं इसलिए यह प्लान आपके लिए बेस्ट साबित हो सकता है।
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कोलकाता, मकर संक्रांति के मौके पर गंगासागर मेले की शुरुआत से पहले पश्चिम बंगाल में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। एक अधिकारी ने सोमवार को कहा कि इस पर्व पर करीब 16 लाख श्रद्धालु गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए आते हैं।
राज्य सरकार ने भारी संख्या में पुलिस को तैनात किया है। 20 ड्रोन और 800 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।
तटरेखा के समीप भारतीय तटरक्षकों ने होवरक्रॉफ्ट, उच्च गति वाले गश्ती जहाज और निगरानी वाली नावें तैनात की हैं।
इलाके में विभिन्न जगहों पर बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं, जिसके जरिए श्रद्धालु ट्रेनों, बसों और नावों के समय और शुल्क को लेकर अवगत रहेंगे और ज्वार के समय को भी जान सकेंगे।
तटरक्षक तटीय सुरक्षा नेटवर्क (सीएसएन) प्रणाली के माध्यम से भी इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस बनाए रखेंगे।
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कोलकाता, मकर संक्रांति के मौके पर गंगासागर मेले की शुरुआत से पहले पश्चिम बंगाल में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। एक अधिकारी ने सोमवार को कहा कि इस पर्व पर करीब सोलह लाख श्रद्धालु गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए आते हैं। राज्य सरकार ने भारी संख्या में पुलिस को तैनात किया है। बीस ड्रोन और आठ सौ सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। तटरेखा के समीप भारतीय तटरक्षकों ने होवरक्रॉफ्ट, उच्च गति वाले गश्ती जहाज और निगरानी वाली नावें तैनात की हैं। इलाके में विभिन्न जगहों पर बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं, जिसके जरिए श्रद्धालु ट्रेनों, बसों और नावों के समय और शुल्क को लेकर अवगत रहेंगे और ज्वार के समय को भी जान सकेंगे। तटरक्षक तटीय सुरक्षा नेटवर्क प्रणाली के माध्यम से भी इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस बनाए रखेंगे।
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यह बात किसी नहीं छिपी है कि आत्मनिर्भर लोग ज्यादा आत्मविश्वासी होते हैं। सिर्फ ऑफिस में नौकरी करके ही आत्मनिर्भर बना जा सकता है। करियर के क्षेत्र में खुलते नये-नये अवसरों ने इतने सारे विकल्प हमारे सामने रख दिये हैं कि अब आप नौकरी के बजाए अपना खुद का काम करके पैसा कमा सकती हैं। और सबसे अच्छी बात यह है कि बहुत से काम तो ऐसे हैं, जिनके लिए आपको घर से बाहर भी कहीं जाने की जरूरत नहीं है। तो इन कामों के जरिये अपना खुद का पैसा कमाइये, साथ ही इस ग्लानि से भी मुक्त हो जाइये कि आप घर-परिवार का ध्यान कैसे रख पाएंगी।
वैसे यह भी सच है कि अपना खुद का कोई भी काम शुरू करना इतना भी आसान नहीं होता और अपनी मेहनत को मुनाफे में बदलने के लिए एक चरणबद्ध रणनीति भी बनानी पड़ती है। लेकिन अगर शुरूआत सकारात्मक और दमदार हो तो सफलता मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए काम शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अपनी पसंद का काम शुरू करें और उसके बारे में पहले सारी जानकारी इकट्ठा कर लें। फिर देखिये कि कैसे आपके सपने धीरे-धीरे साकार होते चले जाते हैं। तो आइये बात करें कुछ ऐसे क्षेत्रों के बारे में, जिनमें आप अपने पैर जमा सकती हैं।
क्या अक्सर लोग आपकी हाजिरजवाबी की तारीफ करते हैं या आपकी बातों का चुटीला अंदाज लोगों को बेहद पसंद आता है? कहने का मतलब है कि अगर शब्दों को बुनना आपका शौक है, तो फ्रीलांस कंटेंट राइटर के क्षेत्र में आप बहुत कुछ कर सकती हैं। वैसे भी स्मार्टफोन और इंटरनेट के क्षेत्र में आये बूम की वजह से अच्छा लिखने वालों की बाजार में हमेशा ही मांग बनी रहती है और ऐसे अनेकों प्लेटफार्म हैं जो उभरते लेखकों को अपना हुनर दिखाने का मौका देते हैं। अच्छी बात यह है कि इस क्षेत्र में अपने पैर जमाने के लिए पैसे की जगह आपको अपना दिमाग इन्वेस्ट करना है। और एक बार पैर जम जाने पर आप अच्छा खासा पैसा भी कमा सकती हैं। वैसे, इस क्षेत्र में बने रहने के लिए दिमाग पर लगातार धार लगाते रहने की जरूरत होती है। इसलिए पढ़ने की आदत डालें और जिस भी भाषा में लिखना चाहती हों, उस पर अपनी पकड़ मजबूत करें।
क्या लोग आपके बनाए खाने की तारीफ करते नहीं थकते। और क्या घर में कोई पार्टी वगैराह होने पर आपसे ही कोई स्पेशल डिश बनाने के लिए कहा जाता है। अगर हां, तो क्यों ना अपनी इस कला को करियर में बदल दिया जाए। देखिए, स्वादिष्ट खाना हर किसी को पसंद आता है। इसीलिए फूड इंडस्ट्री हमेशा आगे बढ़ती रहती है। आप चाहें तो शुरूआती स्तर पर घर से ही टिफिन सर्विस शुरू कर सकती हैं, जिसमें हॉस्टल में रहने वाले छात्रों या कामकाजी लोगों को किफायती कीमत पर घर का खाना मुहैया कराया जाता है। और अब तो इंटरनेट पर भी अनेकों ऐसी साइट्स हैं, जो आपके हाथों से बने स्वादिष्ट खाने को ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करती हैं।
वैसे अपनी पाक कला को दिखाने का एक अन्य अच्छा माध्यम यह है कि अपनी स्पेशल रेसिपीज के छोटी-छोटी अवधि वाले वीडियोज बना लें और उन्हें सोशल साइट्स पर अपलोड कर दें। वैसे आजकल केक बेकिंग भी बहुत चलन में है, जिसमें आप घर बैठे ही ग्राहक की पसंद और इच्छा के हिसाब से उसके लिए केक तैयार करती हैं। ऐसी अनेकों सेलिब्रेटी शेफ हैं, जिन्होंने शौकिया तौर पर खाना बनाने से शुरूआत की और आज शोहरत और पैसा दोनों कमा रही हैं। इसके लिए आपको एक अच्छे मोबाइल कैमरा और खाना बनाने के लिए जरूरी अच्छी क्वालिटी के बर्तनों की जरूरत पड़ेगी।
यूं तो बच्चे सभी को अच्छे लगते हैं, लेकिन अगर आपको हमेशा ही बच्चों से घिरे रहना पसंद है तो उनके लिए आप डेकेयर सेंटर आसानी से शुरू कर सकती हैं। यदि माता-पिता दोनों की कामकाजी हों तो बच्चों की देखभाल एक बड़ी समस्या बन जाती है और इसी समस्या का समाधान डेकेयर के रूप में उन्हें मिलता है, जहां वे अपने बच्चों को सुरक्षित हाथों में छोड़कर रोजाना दफ्तर जा सकते हैं। अगर आपके घर में ग्राउंड फ्लोर पर थोड़ी जगह खाली है, तो डेकेयर आप आसानी से शुरू कर सकती हैं। बस आपको ध्यान यह रखना है कि जिस कमरे में आप बच्चों को रखें वह पूरी तरह सुरक्षित हो। इसके लिए शुरूआती स्तर पर 50-60 हजार रुपये निवेश करने से बात बन जाएगी, जिसमें बच्चों के आराम के लिए पलंग, गद्दे, खिलौने जैसी शामिल हैं। वैसे आप चाहें तो इस काम में अपनी मदद के लिए एक सहायक भी रख सकती हैं, जो बच्चों को दिन में दूध पिलाने, खाना खिलाने आदि में आपका हाथ बंटा सके।
वैसे यह बात को माननी पड़ेगी कि सोशल मीडिया बूम ने युवाओं के बीच जबरदस्त क्रांति ला दी है। पहले जहां किसी भी विषय से संबंधित ताजा-तरीन जानकारी सिर्फ किताबों और वेबसाइट्स पर उपलब्ध होती थी, वहीं अब हर विषय से जुड़े एक्सपर्ट आपको सोशल मीडिया पर मिल जाएंगे, जो आपको मेकअप, ट्रैवल, खान-पान और फैशन से जुड़ी अनेकों जानकारियां रोजाना उपलब्ध कराते हैं। और तो और बड़े ब्रांड्स और कंपनियां भी अपने उत्पादों के प्रमोशन के लिए भी इन पेशेवरों की खूब मदद लेती हैं।
बस, आपको जिस भी क्षेत्र में सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर बनना है, तो उससे जुड़ी तमाम जानकारियों और गतिविधियों पर अपनी नजर बनाए रखें, साथ ही अपना कंटेंट कुछ हटकर तैयार करें ताकि लोगों को उसमें कुछ नयापन लगे। इस क्षेत्र में अपना काम शुरू करने के लिए आपको बहुत ज्यादा पैसों की जरूरत नहीं है। आपको चाहिये एक बढ़िया सा स्मार्टफोन और वो भी शानदार कैमरा क्वालिटी के साथ। लोगों से बात करने का हुनर भी है, तो इस क्षेत्र में आप काफी पैसा और शोहरत कमा सकती हैं।
आपको याद होगा कि पहले शाम अक्सर सारी माएं अपने बच्चों को पढ़ाती थीं और पिता भी ऑफिस से आकर बच्चों को पढ़ाया करते थे। लेकिन अब व्यस्तताएं इतनी बढ़ गयी हैं कि माता-पिता अक्सर बच्चों की पढ़ाई का ध्यान नहीं रख पाते और उन्हें अक्सर अपने बच्चों की ट्यूशन लगवानी पड़ती है। वैसे तो मुख्य रूप से बच्चों को अंग्रेजी, गणित और साइंस जैसे विषयों में ट्यूशन की जरूरत होती है, लेकिन बड़ी कक्षाओं में अक्सर छात्र बाकी विषयों की कोचिंग लेना भी शुरू कर देते हैं। अगर आपको किसी भी विषय में महारत हासित है, तो क्यों ना बच्चों को पढ़ाया जाए।
आजकल तो ऑनलाइन कोचिंग का ट्रेंड भी बहुत जोरों पर है, जिसमें आपको घर बैठे ही ऑनलाइन बच्चों को पढ़ाना होता है। या फिर आप चाहें तो शाम के समय दो घंटे का समय निकालकर अपने घर पर ही बच्चों को ट्यूशन देने के लिए बुला सकती हैं। और इसके लिए अलग से कोई बहुत ज्यादा निवेश की जरूरत भी नहीं है। क्योंकि सिर्फ एक शांत कमरे में आपको अपने पूरे दिन से केवल दो घंटे निकालकर बच्चों को पढ़ाना है। और अगर आपका पढ़ाया हुआ बच्चों को समझ आने लगता है तो यकीन मानिये खुद ब खुद आपके और बच्चे भी पढ़ने आने लगेंगे और घर बैठे आपका काम बढ़ता चला जाएगा। इस काम में भी अच्छी बात यह है कि आप अपने काम करने के घंटे और फीस अपने मन मुताबिक तय कर सकती हैं।
फैशन हम सभी के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। खासतौर पर महिलाओं की तो इस पर बहुत गहरी पकड़ होती है। वैसे आप खुद भी जानती हैं कि फैशन का मतलब हमेशा रैम्प, कैटवॉक और ग्लैमरस मॉडल्स नहीं होता। तो अगर आपको भी फैशन की नब्ज पकड़नी आती है तो क्यों ना खुद का बुटीक ही शुरू किया जाए। इसके लिए ज्यादा तामझाम की भी जरूरत नहीं है। लगभग 50 हजार रुपये से यह काम आप आसानी से शुरू कर सकती हैं। बस एक कमरे में सिलाई मशीन के साथ एक हुनरमंद मास्टरजी की जरूरत है। अगर आपके द्वारा बनाई गयी ड्रेसेज के डिजाइन और फिटिंग एक बार किसी को पसंद आ गये तो यकीन मानिये कि आपके ग्राहकों की लिस्ट तेजी से बढ़ने लगेगी। लेकिन हां, बुटीक शुरू करने से पहले सिलाई और उससे जुड़ी अन्य बारीकियों पर अपनी पकड़ भी पुख्ता कर लें।
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यह बात किसी नहीं छिपी है कि आत्मनिर्भर लोग ज्यादा आत्मविश्वासी होते हैं। सिर्फ ऑफिस में नौकरी करके ही आत्मनिर्भर बना जा सकता है। करियर के क्षेत्र में खुलते नये-नये अवसरों ने इतने सारे विकल्प हमारे सामने रख दिये हैं कि अब आप नौकरी के बजाए अपना खुद का काम करके पैसा कमा सकती हैं। और सबसे अच्छी बात यह है कि बहुत से काम तो ऐसे हैं, जिनके लिए आपको घर से बाहर भी कहीं जाने की जरूरत नहीं है। तो इन कामों के जरिये अपना खुद का पैसा कमाइये, साथ ही इस ग्लानि से भी मुक्त हो जाइये कि आप घर-परिवार का ध्यान कैसे रख पाएंगी। वैसे यह भी सच है कि अपना खुद का कोई भी काम शुरू करना इतना भी आसान नहीं होता और अपनी मेहनत को मुनाफे में बदलने के लिए एक चरणबद्ध रणनीति भी बनानी पड़ती है। लेकिन अगर शुरूआत सकारात्मक और दमदार हो तो सफलता मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए काम शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अपनी पसंद का काम शुरू करें और उसके बारे में पहले सारी जानकारी इकट्ठा कर लें। फिर देखिये कि कैसे आपके सपने धीरे-धीरे साकार होते चले जाते हैं। तो आइये बात करें कुछ ऐसे क्षेत्रों के बारे में, जिनमें आप अपने पैर जमा सकती हैं। क्या अक्सर लोग आपकी हाजिरजवाबी की तारीफ करते हैं या आपकी बातों का चुटीला अंदाज लोगों को बेहद पसंद आता है? कहने का मतलब है कि अगर शब्दों को बुनना आपका शौक है, तो फ्रीलांस कंटेंट राइटर के क्षेत्र में आप बहुत कुछ कर सकती हैं। वैसे भी स्मार्टफोन और इंटरनेट के क्षेत्र में आये बूम की वजह से अच्छा लिखने वालों की बाजार में हमेशा ही मांग बनी रहती है और ऐसे अनेकों प्लेटफार्म हैं जो उभरते लेखकों को अपना हुनर दिखाने का मौका देते हैं। अच्छी बात यह है कि इस क्षेत्र में अपने पैर जमाने के लिए पैसे की जगह आपको अपना दिमाग इन्वेस्ट करना है। और एक बार पैर जम जाने पर आप अच्छा खासा पैसा भी कमा सकती हैं। वैसे, इस क्षेत्र में बने रहने के लिए दिमाग पर लगातार धार लगाते रहने की जरूरत होती है। इसलिए पढ़ने की आदत डालें और जिस भी भाषा में लिखना चाहती हों, उस पर अपनी पकड़ मजबूत करें। क्या लोग आपके बनाए खाने की तारीफ करते नहीं थकते। और क्या घर में कोई पार्टी वगैराह होने पर आपसे ही कोई स्पेशल डिश बनाने के लिए कहा जाता है। अगर हां, तो क्यों ना अपनी इस कला को करियर में बदल दिया जाए। देखिए, स्वादिष्ट खाना हर किसी को पसंद आता है। इसीलिए फूड इंडस्ट्री हमेशा आगे बढ़ती रहती है। आप चाहें तो शुरूआती स्तर पर घर से ही टिफिन सर्विस शुरू कर सकती हैं, जिसमें हॉस्टल में रहने वाले छात्रों या कामकाजी लोगों को किफायती कीमत पर घर का खाना मुहैया कराया जाता है। और अब तो इंटरनेट पर भी अनेकों ऐसी साइट्स हैं, जो आपके हाथों से बने स्वादिष्ट खाने को ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। वैसे अपनी पाक कला को दिखाने का एक अन्य अच्छा माध्यम यह है कि अपनी स्पेशल रेसिपीज के छोटी-छोटी अवधि वाले वीडियोज बना लें और उन्हें सोशल साइट्स पर अपलोड कर दें। वैसे आजकल केक बेकिंग भी बहुत चलन में है, जिसमें आप घर बैठे ही ग्राहक की पसंद और इच्छा के हिसाब से उसके लिए केक तैयार करती हैं। ऐसी अनेकों सेलिब्रेटी शेफ हैं, जिन्होंने शौकिया तौर पर खाना बनाने से शुरूआत की और आज शोहरत और पैसा दोनों कमा रही हैं। इसके लिए आपको एक अच्छे मोबाइल कैमरा और खाना बनाने के लिए जरूरी अच्छी क्वालिटी के बर्तनों की जरूरत पड़ेगी। यूं तो बच्चे सभी को अच्छे लगते हैं, लेकिन अगर आपको हमेशा ही बच्चों से घिरे रहना पसंद है तो उनके लिए आप डेकेयर सेंटर आसानी से शुरू कर सकती हैं। यदि माता-पिता दोनों की कामकाजी हों तो बच्चों की देखभाल एक बड़ी समस्या बन जाती है और इसी समस्या का समाधान डेकेयर के रूप में उन्हें मिलता है, जहां वे अपने बच्चों को सुरक्षित हाथों में छोड़कर रोजाना दफ्तर जा सकते हैं। अगर आपके घर में ग्राउंड फ्लोर पर थोड़ी जगह खाली है, तो डेकेयर आप आसानी से शुरू कर सकती हैं। बस आपको ध्यान यह रखना है कि जिस कमरे में आप बच्चों को रखें वह पूरी तरह सुरक्षित हो। इसके लिए शुरूआती स्तर पर पचास-साठ हजार रुपये निवेश करने से बात बन जाएगी, जिसमें बच्चों के आराम के लिए पलंग, गद्दे, खिलौने जैसी शामिल हैं। वैसे आप चाहें तो इस काम में अपनी मदद के लिए एक सहायक भी रख सकती हैं, जो बच्चों को दिन में दूध पिलाने, खाना खिलाने आदि में आपका हाथ बंटा सके। वैसे यह बात को माननी पड़ेगी कि सोशल मीडिया बूम ने युवाओं के बीच जबरदस्त क्रांति ला दी है। पहले जहां किसी भी विषय से संबंधित ताजा-तरीन जानकारी सिर्फ किताबों और वेबसाइट्स पर उपलब्ध होती थी, वहीं अब हर विषय से जुड़े एक्सपर्ट आपको सोशल मीडिया पर मिल जाएंगे, जो आपको मेकअप, ट्रैवल, खान-पान और फैशन से जुड़ी अनेकों जानकारियां रोजाना उपलब्ध कराते हैं। और तो और बड़े ब्रांड्स और कंपनियां भी अपने उत्पादों के प्रमोशन के लिए भी इन पेशेवरों की खूब मदद लेती हैं। बस, आपको जिस भी क्षेत्र में सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर बनना है, तो उससे जुड़ी तमाम जानकारियों और गतिविधियों पर अपनी नजर बनाए रखें, साथ ही अपना कंटेंट कुछ हटकर तैयार करें ताकि लोगों को उसमें कुछ नयापन लगे। इस क्षेत्र में अपना काम शुरू करने के लिए आपको बहुत ज्यादा पैसों की जरूरत नहीं है। आपको चाहिये एक बढ़िया सा स्मार्टफोन और वो भी शानदार कैमरा क्वालिटी के साथ। लोगों से बात करने का हुनर भी है, तो इस क्षेत्र में आप काफी पैसा और शोहरत कमा सकती हैं। आपको याद होगा कि पहले शाम अक्सर सारी माएं अपने बच्चों को पढ़ाती थीं और पिता भी ऑफिस से आकर बच्चों को पढ़ाया करते थे। लेकिन अब व्यस्तताएं इतनी बढ़ गयी हैं कि माता-पिता अक्सर बच्चों की पढ़ाई का ध्यान नहीं रख पाते और उन्हें अक्सर अपने बच्चों की ट्यूशन लगवानी पड़ती है। वैसे तो मुख्य रूप से बच्चों को अंग्रेजी, गणित और साइंस जैसे विषयों में ट्यूशन की जरूरत होती है, लेकिन बड़ी कक्षाओं में अक्सर छात्र बाकी विषयों की कोचिंग लेना भी शुरू कर देते हैं। अगर आपको किसी भी विषय में महारत हासित है, तो क्यों ना बच्चों को पढ़ाया जाए। आजकल तो ऑनलाइन कोचिंग का ट्रेंड भी बहुत जोरों पर है, जिसमें आपको घर बैठे ही ऑनलाइन बच्चों को पढ़ाना होता है। या फिर आप चाहें तो शाम के समय दो घंटे का समय निकालकर अपने घर पर ही बच्चों को ट्यूशन देने के लिए बुला सकती हैं। और इसके लिए अलग से कोई बहुत ज्यादा निवेश की जरूरत भी नहीं है। क्योंकि सिर्फ एक शांत कमरे में आपको अपने पूरे दिन से केवल दो घंटे निकालकर बच्चों को पढ़ाना है। और अगर आपका पढ़ाया हुआ बच्चों को समझ आने लगता है तो यकीन मानिये खुद ब खुद आपके और बच्चे भी पढ़ने आने लगेंगे और घर बैठे आपका काम बढ़ता चला जाएगा। इस काम में भी अच्छी बात यह है कि आप अपने काम करने के घंटे और फीस अपने मन मुताबिक तय कर सकती हैं। फैशन हम सभी के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। खासतौर पर महिलाओं की तो इस पर बहुत गहरी पकड़ होती है। वैसे आप खुद भी जानती हैं कि फैशन का मतलब हमेशा रैम्प, कैटवॉक और ग्लैमरस मॉडल्स नहीं होता। तो अगर आपको भी फैशन की नब्ज पकड़नी आती है तो क्यों ना खुद का बुटीक ही शुरू किया जाए। इसके लिए ज्यादा तामझाम की भी जरूरत नहीं है। लगभग पचास हजार रुपये से यह काम आप आसानी से शुरू कर सकती हैं। बस एक कमरे में सिलाई मशीन के साथ एक हुनरमंद मास्टरजी की जरूरत है। अगर आपके द्वारा बनाई गयी ड्रेसेज के डिजाइन और फिटिंग एक बार किसी को पसंद आ गये तो यकीन मानिये कि आपके ग्राहकों की लिस्ट तेजी से बढ़ने लगेगी। लेकिन हां, बुटीक शुरू करने से पहले सिलाई और उससे जुड़ी अन्य बारीकियों पर अपनी पकड़ भी पुख्ता कर लें।
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नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) पर आतंकियों के हमले (Terror Attack) के जोखिम को देखते हुए केद्र सरकार हर बार की तरह इस बार भी कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने यात्रा की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगी।
आपको बता दें कि अमरनाथ का पवित्र गुफा मंदिर दक्षिण कश्मीर (South Kashmir) हिमालय में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पिछले साल 3. 45 लाख लोगों ने दर्शन किया था। इस साल यह आंकड़ा 5 लाख तक जा सकता है। अमित शाह केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ अमरनाथ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। वे यात्रा के लिए पुख्ता तैयारी सुनिश्चित करने के लिए चल जा रही योजनाओं का भी जायजा लेंगे। बैठक में तीर्थयात्रा से जुड़े अन्य लोगों के भी शामिल होने की संभावना है।
खुफिया सूचनाएं मिली हैं कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन तीर्थयात्रा को बाधित करने की कोशिश कर सकते हैं। उनके नापाक मंसूबों को नाकाम करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। बीते साल मंदिर के पास भारी बारिश से अचानक आई बाढ़ में 16 लोगों की मौत हो गई थी। ऐसी किसी भी घटना से बचने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल भी अपनी तैयारी में जुट गई है। अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा (Natural Calamity) को ध्यान में रखते हुए तीर्थयात्री शिविर स्थापित करने के लिए आदर्श स्थानों की पहचान शुरू कर दी गई है।
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नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा पर आतंकियों के हमले के जोखिम को देखते हुए केद्र सरकार हर बार की तरह इस बार भी कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यात्रा की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। अमरनाथ यात्रा एक जुलाई से शुरू होकर इकतीस अगस्त तक चलेगी। आपको बता दें कि अमरनाथ का पवित्र गुफा मंदिर दक्षिण कश्मीर हिमालय में तीन,आठ सौ अस्सी मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पिछले साल तीन. पैंतालीस लाख लोगों ने दर्शन किया था। इस साल यह आंकड़ा पाँच लाख तक जा सकता है। अमित शाह केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ अमरनाथ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। वे यात्रा के लिए पुख्ता तैयारी सुनिश्चित करने के लिए चल जा रही योजनाओं का भी जायजा लेंगे। बैठक में तीर्थयात्रा से जुड़े अन्य लोगों के भी शामिल होने की संभावना है। खुफिया सूचनाएं मिली हैं कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन तीर्थयात्रा को बाधित करने की कोशिश कर सकते हैं। उनके नापाक मंसूबों को नाकाम करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। बीते साल मंदिर के पास भारी बारिश से अचानक आई बाढ़ में सोलह लोगों की मौत हो गई थी। ऐसी किसी भी घटना से बचने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल भी अपनी तैयारी में जुट गई है। अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रखते हुए तीर्थयात्री शिविर स्थापित करने के लिए आदर्श स्थानों की पहचान शुरू कर दी गई है।
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RJD कार्यकर्ताओं ने आरा-मोहनिया नेशनल हाईवे एनएच-30 को जाम कर दिया। खबर है कि सड़क पर विरोध कर रहे सैकड़ों की संख्या में राजद के कार्यकर्ता आगजनी भी कर रहे हैं।
अब सभी की निगाहें चुनाव नतीजों पर है। 10 नवंबर को मतगणना के बाद फाइनल नतीजे सामने आएँगे। लेकिन एग्जिट पोल्स के रुझान आने शुरू हो गए हैं। जिसके अनुसार एनडीए और यूपीए में कड़ी टक्कर दिखाई दे रही है।
बुजुर्ग का कहना है कि उन्होंने जेडीयू के चुनाव चिन्ह 'तीर' पर वोट डालने की बात कही तो लालटेन वाली राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) समर्थकों ने उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी।
"मोदी जी को यह अहसास नहीं हो रहा है कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं। उन्हें अब भी लग रहा है कि वह गुजरात के वही दंगेवाले सीएम हैं। "
बिहार के फतुहा में RJD के गुंडों ने कवींद्र महतो के परिवार पर हमला करके उनसे गाली-गलौज की क्योंकि उन्होंने भाजपा को वोट दिया था।
आखिर कैसे लिबरल्स के 'पोस्टर बॉय' बन गए तेजस्वी यादव? किस आधार पर माँग रहे हैं वोट?
भारतीय 'लिबरलिज़्म' का एक नया उभरता चेहरा हैं बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव। उनके वोट माँगने का आधार है क्या? क्या हैं तेजस्वी के कीर्तिमान?
राजद नेता ने कहा कि वो लालू यादव के परिवार के लिए जान लेने और देने, दोनों के लिए ही तैयार रहा करते थे, लेकिन अब उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार किया गया है।
CM योगी ने बिहार चुनावी रैलियों के मंच से कट्टरपंथियों और धर्म के नाम पर महिलाओं और बच्चों का शोषण करने वालों के विरोध में खुलकर कहा- "देश कठमुल्लों के फतवों से नहीं बल्कि संविधान से चलेगा। "
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RJD कार्यकर्ताओं ने आरा-मोहनिया नेशनल हाईवे एनएच-तीस को जाम कर दिया। खबर है कि सड़क पर विरोध कर रहे सैकड़ों की संख्या में राजद के कार्यकर्ता आगजनी भी कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें चुनाव नतीजों पर है। दस नवंबर को मतगणना के बाद फाइनल नतीजे सामने आएँगे। लेकिन एग्जिट पोल्स के रुझान आने शुरू हो गए हैं। जिसके अनुसार एनडीए और यूपीए में कड़ी टक्कर दिखाई दे रही है। बुजुर्ग का कहना है कि उन्होंने जेडीयू के चुनाव चिन्ह 'तीर' पर वोट डालने की बात कही तो लालटेन वाली राष्ट्रीय जनता दल समर्थकों ने उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी। "मोदी जी को यह अहसास नहीं हो रहा है कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं। उन्हें अब भी लग रहा है कि वह गुजरात के वही दंगेवाले सीएम हैं। " बिहार के फतुहा में RJD के गुंडों ने कवींद्र महतो के परिवार पर हमला करके उनसे गाली-गलौज की क्योंकि उन्होंने भाजपा को वोट दिया था। आखिर कैसे लिबरल्स के 'पोस्टर बॉय' बन गए तेजस्वी यादव? किस आधार पर माँग रहे हैं वोट? भारतीय 'लिबरलिज़्म' का एक नया उभरता चेहरा हैं बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव। उनके वोट माँगने का आधार है क्या? क्या हैं तेजस्वी के कीर्तिमान? राजद नेता ने कहा कि वो लालू यादव के परिवार के लिए जान लेने और देने, दोनों के लिए ही तैयार रहा करते थे, लेकिन अब उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार किया गया है। CM योगी ने बिहार चुनावी रैलियों के मंच से कट्टरपंथियों और धर्म के नाम पर महिलाओं और बच्चों का शोषण करने वालों के विरोध में खुलकर कहा- "देश कठमुल्लों के फतवों से नहीं बल्कि संविधान से चलेगा। "
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा दिसम्बर 2022 और जनवरी 2023 में केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) का आयोजन कराया जाएगा। सीटेट के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार इस समय अपने एडमिट कार्ड का बेशब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन अभ्यर्थियों को बता दें परीक्षा से एक हफ्ते -10 पहले ही सीबीएसई एडमिट कार्ड जारी करेगा। अगर परीक्षा 15-20 दिसम्बर के बीच शुरू होती है। तो एडमिट कार्ड इसी हफ्ते जारी कर दिए जाएंगे। अगर परीक्षा दिसम्बर के आखिरी हफ्ते से शुरू होती है तो एडमिट कार्ड तीसरे हफ्ते में जारी होंगे। इस वर्ष 31 अक्तूबर से लेकर 24 नवम्बर 2022 तक चली सीटेट आवेदन प्रक्रिया में 30 लाख से अधिक आवेदन आए हैं। इसलिए परीक्षा में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। अगर आप भी सीटेट परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आप सफलता डॉट कॉम के CTET Detailed Course : Join Now की मदद ले सकते हैं। इससे पूर्व सीटेट परीक्षा को लेकर सफलता द्वारा चलाए गए विभिन्न कोर्सों के जरिए हजारों अभ्यर्थियों ने सीटेट परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की है।
सीटेट परीक्षा के आयोजन शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। अगर उम्मीदवारों को इसी परीक्षा में सफलता हासिल करनी है तो कुछ टिप्स का पालन करना होगा। जैसे- सीटेट तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को परीक्षा पाठ्यक्रम का रिवीजन करना चाहिए। सभी खंडों के स्टडी मटीरियल के नोट्स इसमें मददगार साबित हो सकते हैं। आखिरी दिनों में तैयारी के लिए एक टाइम टेबल बनाएं और उसका कड़ाई से पालन करें। पिछले प्रश्न पत्रों को पढ़ें और ये समझें कि किन प्रश्नों को बार बार पूछा जा रहा है या किस तरह के प्रश्न हर वर्ष आ रहे हैं। उनकी पुख्ता तैयारी कर लें। परीक्षा में निगेटिव मार्किंग नहीं होती है इसलिए परीक्षा अटेम्प्ट करते समय सभी प्रश्नों को हल करें। आखिरी दिनों में उम्मीदवार को मॉक टेस्ट जरूर देने चाहिए। उम्मीदवार को अपने मॉक टेस्ट का विश्लेषण भी करना चाहिए।
CTET 2021 के प्राइमरी लेवल टीचर के लिए आयोजित होने वाले पेपर-1 में शामिल होने वाले अभ्यथियों के मुताबिक इस परीक्षा में अधिकतर दिन ईजी या मॉडरेट श्रेणी के प्रश्न पूछे गए थे। इस परीक्षा के लिए अलग-अलग शिफ्ट में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के मुताबिक औसतन इसमें 110 से 120 प्रश्न ईजी से मॉडरेट श्रेणी के पूछे गए थे। वहीं सेकेंडरी लेवल टीचर के लिए आयोजित होने वाले पेपर 2 में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के मुताबिक इस परीक्षा में अधिकतर दिन प्रश्नों का स्तर मॉडरेट श्रेणी का रहा था। इस परीक्षा के अलग-अलग शिफ्ट में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के मुताबिक पेपर 2 में कभी 105 से 110 प्रश्न ईजी और मॉडरेट श्रेणी के तो कभी 100 से 105 प्रश्न ईजी और मॉडरेट श्रेणी के प्रश्न पूछे गए थे।
सरकारी नौकरी का सपना देख रहे अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए सफलता डॉट कॉम की मदद ले सकते हैं। सफलता डॉट कॉम द्वारा इस वक्त SSC CGL, SSC GD, NDA/NA, CTET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए खास कोर्स चलाए जा रहे हैं जिनकी मदद से कई अभ्यर्थियों ने पहली बार में ही अपनी प्रतियोगी परीक्षा को शानदार अंकों से पास किया है। आप भी इन कोर्सेस की मदद से अपनी बाकी की तैयारी और कम्प्लीट रिवीजन कर सकते हैं। तो फिर देर किस बात की safalta app के जरिए तुरंत इन कोर्सेस में एडमिशन लें और सरकारी नौकरी के अपने सपने को साकार करें।
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा दिसम्बर दो हज़ार बाईस और जनवरी दो हज़ार तेईस में केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन कराया जाएगा। सीटेट के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार इस समय अपने एडमिट कार्ड का बेशब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन अभ्यर्थियों को बता दें परीक्षा से एक हफ्ते -दस पहले ही सीबीएसई एडमिट कार्ड जारी करेगा। अगर परीक्षा पंद्रह-बीस दिसम्बर के बीच शुरू होती है। तो एडमिट कार्ड इसी हफ्ते जारी कर दिए जाएंगे। अगर परीक्षा दिसम्बर के आखिरी हफ्ते से शुरू होती है तो एडमिट कार्ड तीसरे हफ्ते में जारी होंगे। इस वर्ष इकतीस अक्तूबर से लेकर चौबीस नवम्बर दो हज़ार बाईस तक चली सीटेट आवेदन प्रक्रिया में तीस लाख से अधिक आवेदन आए हैं। इसलिए परीक्षा में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। अगर आप भी सीटेट परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आप सफलता डॉट कॉम के CTET Detailed Course : Join Now की मदद ले सकते हैं। इससे पूर्व सीटेट परीक्षा को लेकर सफलता द्वारा चलाए गए विभिन्न कोर्सों के जरिए हजारों अभ्यर्थियों ने सीटेट परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की है। सीटेट परीक्षा के आयोजन शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। अगर उम्मीदवारों को इसी परीक्षा में सफलता हासिल करनी है तो कुछ टिप्स का पालन करना होगा। जैसे- सीटेट तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को परीक्षा पाठ्यक्रम का रिवीजन करना चाहिए। सभी खंडों के स्टडी मटीरियल के नोट्स इसमें मददगार साबित हो सकते हैं। आखिरी दिनों में तैयारी के लिए एक टाइम टेबल बनाएं और उसका कड़ाई से पालन करें। पिछले प्रश्न पत्रों को पढ़ें और ये समझें कि किन प्रश्नों को बार बार पूछा जा रहा है या किस तरह के प्रश्न हर वर्ष आ रहे हैं। उनकी पुख्ता तैयारी कर लें। परीक्षा में निगेटिव मार्किंग नहीं होती है इसलिए परीक्षा अटेम्प्ट करते समय सभी प्रश्नों को हल करें। आखिरी दिनों में उम्मीदवार को मॉक टेस्ट जरूर देने चाहिए। उम्मीदवार को अपने मॉक टेस्ट का विश्लेषण भी करना चाहिए। CTET दो हज़ार इक्कीस के प्राइमरी लेवल टीचर के लिए आयोजित होने वाले पेपर-एक में शामिल होने वाले अभ्यथियों के मुताबिक इस परीक्षा में अधिकतर दिन ईजी या मॉडरेट श्रेणी के प्रश्न पूछे गए थे। इस परीक्षा के लिए अलग-अलग शिफ्ट में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के मुताबिक औसतन इसमें एक सौ दस से एक सौ बीस प्रश्न ईजी से मॉडरेट श्रेणी के पूछे गए थे। वहीं सेकेंडरी लेवल टीचर के लिए आयोजित होने वाले पेपर दो में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के मुताबिक इस परीक्षा में अधिकतर दिन प्रश्नों का स्तर मॉडरेट श्रेणी का रहा था। इस परीक्षा के अलग-अलग शिफ्ट में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के मुताबिक पेपर दो में कभी एक सौ पाँच से एक सौ दस प्रश्न ईजी और मॉडरेट श्रेणी के तो कभी एक सौ से एक सौ पाँच प्रश्न ईजी और मॉडरेट श्रेणी के प्रश्न पूछे गए थे। सरकारी नौकरी का सपना देख रहे अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए सफलता डॉट कॉम की मदद ले सकते हैं। सफलता डॉट कॉम द्वारा इस वक्त SSC CGL, SSC GD, NDA/NA, CTET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए खास कोर्स चलाए जा रहे हैं जिनकी मदद से कई अभ्यर्थियों ने पहली बार में ही अपनी प्रतियोगी परीक्षा को शानदार अंकों से पास किया है। आप भी इन कोर्सेस की मदद से अपनी बाकी की तैयारी और कम्प्लीट रिवीजन कर सकते हैं। तो फिर देर किस बात की safalta app के जरिए तुरंत इन कोर्सेस में एडमिशन लें और सरकारी नौकरी के अपने सपने को साकार करें। सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।
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जम्मूः नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की घटनाओं में वृद्धि से केंद्र सरकार के उस दावे की पोल खुल गई है जिसमें कहा गया था कि अनुच्छेद 370 के प्रावधान निरस्त करने के बाद आतंकवाद समाप्त हो जाएगा।
अब्दुल्ला ने पुंछ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "आतंकवाद के खात्मे के बारे में ज्यादा कहने की जरूरत नहीं, यह तो बढ़ता ही जा रहा है और गृहमंत्री अमित शाह को इसका जवाब देना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में वृद्धि से केंद्र सरकार के उस दावे की पोल खुल गई है जिसमें कहा जा रहा था कि अनुच्छेद 370 निरस्त करने के बाद आतंकवाद खत्म हो जाएगा। " अब्दुल्ला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद नहीं रुक सकता। (एजेंसी )
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जम्मूः नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की घटनाओं में वृद्धि से केंद्र सरकार के उस दावे की पोल खुल गई है जिसमें कहा गया था कि अनुच्छेद तीन सौ सत्तर के प्रावधान निरस्त करने के बाद आतंकवाद समाप्त हो जाएगा। अब्दुल्ला ने पुंछ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "आतंकवाद के खात्मे के बारे में ज्यादा कहने की जरूरत नहीं, यह तो बढ़ता ही जा रहा है और गृहमंत्री अमित शाह को इसका जवाब देना चाहिए। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में वृद्धि से केंद्र सरकार के उस दावे की पोल खुल गई है जिसमें कहा जा रहा था कि अनुच्छेद तीन सौ सत्तर निरस्त करने के बाद आतंकवाद खत्म हो जाएगा। " अब्दुल्ला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद नहीं रुक सकता।
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१६ - पंजाब में मुस्लिम लीग का नेतृत्व अस्वीकारता का एक ऐतिहासिक तथ्य बन चुका है।
१७ - यह एक दयनीय राजनीतिक व्यंग्य है ।
१८ - एक मुसलमान अपने घर में मृत्यु का जाल बनाकर कफन कर कपड़ा लेने गया ।
१९ - श्री अलेकजेंडर का रुख भारत की अखंडता के पक्ष में निर्णायक
रहा ।
-कांग्रेस को अपनी घोषणाओं के विरुद्ध जाना पड़ेगा । २१ - इसके पीछे बहुत से इंजीनियरों का अनुभव है।
२२ - उन्होंने भारत सरकार को एक बार हिन्दू सरकार कहकर पुकारा
तात्पर्य यह कि इस प्रकार के बहुत से भद्दे प्रयोग हमारी भाषा पर नित्य बहुत अधिक संख्या में लड़ते जा रहे हैं। ऐसे प्रयोग हम हजम नहीं कर सकते; इसलिए हमारी भाषा का शरीर अजीर्ण से जर्जर हो रहा है ।
ऐसी वाक्य रचना भी अँगरेजी की छाया से कलुपित है- 'इसमें महायानीय लक्षण हैं, यद्यपि यह होन यानवालों के लिए लिखा गया था। और 'समीज्ञा कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है, अपेक्षाकृत संगति के ।' अँगरेजी का कुछ इसी प्रकार का प्रभाव इन वाक्यों पर भी देखाई देता है - 'इससे ज्यादा जानुकारी किलो के पास नहीं थी ।' 'विजय का भरोसा हमारे पास है ।' 'वह चाहता था कि कुछ समाधान उसके पास आये।' 'उसके पास नींद गई।' और 'उसने ललित कला में विशेष अभिरुचि पाई है ।'
आज-कल कुछ लोग ऐसे स्थलों पर भी अँगरेजी के 'बिकॉज' (because के कारण 'क्योंकि' का प्रयोग करते हैं, जहाँ केवल 'कि' होना चाहिए. जैसे१ - मैं इसी लिए बोला, क्योंकि मैं समझता था ।
२ - पाँच व्यक्तियों को इस कारण कारावास का दंड मिला, क्योंकि...
३ - में इसी लिए वहाँ नहीं गया था, क्योंकि...!
४ - पैसा इसीलिए नहीं है, क्योंकि लोग बेरोजगार हैं ।
इसी से मिलता जुलता 'जब कि' का भी प्रयोग है । जैसे - 'प्रतीत युगों के चित्र परिपूर्ण थे, जब कि वर्त्तमान युग के चित्र पूर्ण हैं । हिन्दी की प्रकृति के अनुसार इसमें 'जब कि' की जगह 'परन्तु' होना चाहिए ।
उपन्यासों आदि में पात्रों की बात-चीत पर भी, जिसे संलाप या कथोपकथन कहते हैं, अँगरेजी का प्रभाव बढ़ता हुआ दिखाई देता है । जैसे - 'तुम्हारी यही लियाकत है !" मालिक ने डाँटा । 'जाओ, दूर हो ।' 'छुट्टी पर जा रहा हूँ'- विनोद ने बिस्तर इक्के पर रखते हुए कहा । "अब मुझे फुरसत ही फुरसत है।'
'आप कौन हैं ?' पूछा नीहार ने ।
लोग कहते हैं कि इस प्रकार की वाक्य रचना से भाषा में कुछ जोर आ जाता है। हो सकता है कि कुछ विशिष्ट अवसरों पर इससे जोर आता हो; अथवा बातों का सिलसिला मिलाये रखने के लिए भी इसका कुछ उपयोग होता हो; पर कहानियों या उपन्यासों में आदि से अन्त तक सब जगह इसी प्रकार की रचना परम परकीय और फलतः त्याज्य है ।
प्रायः लोग वाक्य में कोई कठिन शब्द या पद रखने के बाद कोष्ठक में उसकी व्याख्या कर देते हैं अथवा उसके लिए कोई सरल शब्द या पद रख देते हैं। पहले तो ऐसा करना इसी लिए अनुचित है कि हम एक ही शब्द या बद दो बार लिखते हैं, एक बार कठिन रूप में और दूसरी बार सरल रूप में । क्यों न पहले ही सरल रूप में लिखा जाय १ पर हँसी तब आती है, जब हम पहले तो सरल शब्द देखते हैं और तब उसे स्पष्ट करने के लिए कोष्ठक में दिया हुआ कठिन शब्द । एक ससाचार पत्र में पढ़ा था - 'कम्पनी के सदर चुफ्तर ( हेड आफिस ) से यह श्राज्ञा श्राई है।" मानों जन साधारण के लिए 'सदर दफ्तर' समझना कठिन हो और 'हेड आफिस' समझना सहज । यदि कठिन हैं तो दोनों समान रूप से कठिन हैं। इससे भी आगे बढ़ जानेवाले वे लोग हैं, जो इस प्रकार के वाक्य लिखते हैं - वहाँ चमड़ा कमाने के बड़े-बड़े कारखाने ( Tanneries ) हैं ।
लोग अपने लेखों में अँगरेजी वाक्यों के ज्यों-के-त्यों रूप रख देते हैं । अनुवाद के समय ही नहीं, बल्कि स्वतन्त्रतापूर्वक लिखने के समय भी
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सोलह - पंजाब में मुस्लिम लीग का नेतृत्व अस्वीकारता का एक ऐतिहासिक तथ्य बन चुका है। सत्रह - यह एक दयनीय राजनीतिक व्यंग्य है । अट्ठारह - एक मुसलमान अपने घर में मृत्यु का जाल बनाकर कफन कर कपड़ा लेने गया । उन्नीस - श्री अलेकजेंडर का रुख भारत की अखंडता के पक्ष में निर्णायक रहा । -कांग्रेस को अपनी घोषणाओं के विरुद्ध जाना पड़ेगा । इक्कीस - इसके पीछे बहुत से इंजीनियरों का अनुभव है। बाईस - उन्होंने भारत सरकार को एक बार हिन्दू सरकार कहकर पुकारा तात्पर्य यह कि इस प्रकार के बहुत से भद्दे प्रयोग हमारी भाषा पर नित्य बहुत अधिक संख्या में लड़ते जा रहे हैं। ऐसे प्रयोग हम हजम नहीं कर सकते; इसलिए हमारी भाषा का शरीर अजीर्ण से जर्जर हो रहा है । ऐसी वाक्य रचना भी अँगरेजी की छाया से कलुपित है- 'इसमें महायानीय लक्षण हैं, यद्यपि यह होन यानवालों के लिए लिखा गया था। और 'समीज्ञा कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है, अपेक्षाकृत संगति के ।' अँगरेजी का कुछ इसी प्रकार का प्रभाव इन वाक्यों पर भी देखाई देता है - 'इससे ज्यादा जानुकारी किलो के पास नहीं थी ।' 'विजय का भरोसा हमारे पास है ।' 'वह चाहता था कि कुछ समाधान उसके पास आये।' 'उसके पास नींद गई।' और 'उसने ललित कला में विशेष अभिरुचि पाई है ।' आज-कल कुछ लोग ऐसे स्थलों पर भी अँगरेजी के 'बिकॉज' से यह श्राज्ञा श्राई है।" मानों जन साधारण के लिए 'सदर दफ्तर' समझना कठिन हो और 'हेड आफिस' समझना सहज । यदि कठिन हैं तो दोनों समान रूप से कठिन हैं। इससे भी आगे बढ़ जानेवाले वे लोग हैं, जो इस प्रकार के वाक्य लिखते हैं - वहाँ चमड़ा कमाने के बड़े-बड़े कारखाने हैं । लोग अपने लेखों में अँगरेजी वाक्यों के ज्यों-के-त्यों रूप रख देते हैं । अनुवाद के समय ही नहीं, बल्कि स्वतन्त्रतापूर्वक लिखने के समय भी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.
लोकसभा चुनाव से पहले आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने के बाद अब मोदी सरकार मध्य वर्गीय परिवारों को भी तोहफा देने की तैयारी कर रही है. मोदी सरकार मध्यम वर्ग को खुश करने के लिए इनकम टैक्स में बड़ी छूट का ऐलान कर सकती है. इसी के साथ घर का सपना देखने वाले लोगों को भी मोदी सरकार बड़ी सौगात दे सकती है.
तीन राज्यों में हार के बाद से मोदी सरकार ने अपनी कमर कस ली है. मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले हर वर्ग के लोगों के लिए योजना तैयार कर रही है. आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने के बाद अब मोदी सरकार मध्यम वर्ग को अपनी ओर लाना चाहती है. आगामी अंतरिम बजट में मोदी सरकार इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ा सकती है.
सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्री इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स स्लैब में बड़ा परिवर्तन करने का ऐलान कर सकते हैं. इसी के साथ पेंशन धारकों के लिए अतिरिक्त छूट का ऐलान किया जा सकता है. घर का सपना देख रहे लोगों के लिए भी मोदी सरकार बड़ा ऐलान कर सकती है. मोदी सरकार होम लोन में छूट का ऐलान कर सकती है, इससे होम लोन सस्ता होगा और ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास अपना घर होगा.
एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी WhatsApp अपडेट्स.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. लोकसभा चुनाव से पहले आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने के बाद अब मोदी सरकार मध्य वर्गीय परिवारों को भी तोहफा देने की तैयारी कर रही है. मोदी सरकार मध्यम वर्ग को खुश करने के लिए इनकम टैक्स में बड़ी छूट का ऐलान कर सकती है. इसी के साथ घर का सपना देखने वाले लोगों को भी मोदी सरकार बड़ी सौगात दे सकती है. तीन राज्यों में हार के बाद से मोदी सरकार ने अपनी कमर कस ली है. मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले हर वर्ग के लोगों के लिए योजना तैयार कर रही है. आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने के बाद अब मोदी सरकार मध्यम वर्ग को अपनी ओर लाना चाहती है. आगामी अंतरिम बजट में मोदी सरकार इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ा सकती है. सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्री इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन अस्सी सी के तहत टैक्स स्लैब में बड़ा परिवर्तन करने का ऐलान कर सकते हैं. इसी के साथ पेंशन धारकों के लिए अतिरिक्त छूट का ऐलान किया जा सकता है. घर का सपना देख रहे लोगों के लिए भी मोदी सरकार बड़ा ऐलान कर सकती है. मोदी सरकार होम लोन में छूट का ऐलान कर सकती है, इससे होम लोन सस्ता होगा और ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास अपना घर होगा. एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़अट्ठारह हिंदी WhatsApp अपडेट्स. .
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फिर भी दिल्ली हमारे सपनों का शहर है. .
पहले दिल्ली की छवि महिलाओं के लिए सबसे ख़तरनाक़ शहर की बनी और अब इसे दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर कहा जा रहा है.
दिल्ली से नफ़रत करने वालों के लिए यह कभी अच्छा शहर नहीं था. इस शहर की हिमायत कभी इतनी मुश्किल नहीं रही.
बहुत कम लोग जानते हैं कि मुंबई नहीं बल्कि दिल्ली देश का सबसे बड़ा शहर है. मगर जनगणना विभाग इससे सहमत नहीं. वह मुंबई के उपनगरीय इलाक़ों को मुंबई शहर का हिस्सा मानता है.
दिल्ली राज्य की सीमाएं नोएडा और ग़ाज़ियाबाद जैसे शहरों को दिल्ली का हिस्सा बनने से रोकती हैं.
अगर इन्हें और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा मिला लें, तो ढाई करोड़ की आबादी वाला शहर दिल्ली, टोक्यो और जकार्ता के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ी शहरी आबादी वाला शहर हो जाएगा.
1951 से 2001 के बीच दिल्ली की आबादी हर साल दोगुनी बढ़ी. 2001 से 2011 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर 20 फ़ीसद रही.
आबादी की दर इसलिए कम रही क्योंकि भारत ने सही कदम उठाए और कुछ उपनगर विकसित कर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) बना दिया गया.
यूं तो प्रशासन के मामले में भारत सबसे अच्छा देश नहीं है, फिर भी यह चमत्कार ही है कि एनसीआर रहने लायक है.
सिर्फ़ दिल्ली के 1. 7 करोड़ लोग अपनी गाड़ियों से नहीं बल्कि उपनगरों के लोग, उत्तर भारत का ट्रैफ़िक और पंजाब के खेतों में लगाई गई आग भी शहर को प्रदूषण के मुहाने पर पहुँचाते हैं.
एक गौरवान्वित दिल्लीवासी होने के नाते मैं कहूँगा कि यहां उतनी ही अव्यवस्था है जैसी भारत के दूसरे शहरों में.
पटना, ग्वालियर और रायपुर की हवा भी उतनी ही ख़राब है जितनी दिल्ली की, जबकि इन शहरों की आबादी दिल्ली से काफ़ी कम है.
मैं तो कहूँगा कि दूसरे शहरों के मुक़ाबले दिल्ली अपनी हवा साफ़ रखने में ज़्यादा कामयाब रहा है.
आप बीजिंग में हो या बैंकॉक, आपको सांस लेने के लिए अच्छी हवा नहीं मिलेगी. वायु प्रदूषण विकासशील देशों के बड़े शहरों की एक आम समस्या है.
प्रदूषण को लेकर दिल्ली में इतना ख़ौफ़ पहली बार नहीं. वायु प्रदूषण के ऐसे ही आर्मागेडॉन हालात 90 के दशक के अंत में भी पैदा हुए थे.
जब 2001 में सुप्रीम कोर्ट को दिल्ली में पेट्रोल-डीज़ल वाले सार्वजनिक परिवहन पर रोक लगानी पड़ी थी और उन्हें सीएनजी में बदलने को कहना पड़ा था.
इससे दिल्ली में प्रदूषण तो घटा, पर कई बसें सड़क से हटीं और अभी तक वापस नहीं लौटीं.
दिल्ली मेट्रो सड़कों से क़रीब 20 लाख यात्रियों को हटाती है. सोचिए, अगर 2003 में शुरू हुई और लगातार फैल रही दिल्ली मेट्रो न होती, तो कितनी अव्यवस्था होती?
दिल्ली का मौजूदा सार्वजनिक परिवहन संकट ज़्यादातर 1998 से 2001 के बीच सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को लेकर दिल्ली सरकार की अनदेखी का नतीजा है.
सुप्रीम कोर्ट और सरकार का रुख कमर्शियल वाहनों के लिए कड़े क़ानून बनाने पर था, जो उन लोगों को ढोते हैं, जिनके पास अपनी कार नहीं है.
दूसरी तरफ़ कार मालिकों के लिए सरकारें हज़ारों करोड़ रुपए ख़र्च करके फ़्लाईओवर बनाती रही.
इस बार चेतावनी की घंटी ज़ोर से बजी है. उम्मीद करनी चाहिए कि सही नतीजा निकलेंगे.
दो-तीन साल में हमें दिल्ली में प्रदूषण स्तर कम मिलेगा. दिल्ली मेट्रो की इनर और आउटर रिंग रोड से निकलने वाली दो लाइनों के बाद स्टेशन 4 से बढ़कर 27 हो जाएंगे, जहां से लोग ट्रेनें बदल सकते हैं.
इससे यात्रा का समय घटेगा और दिल्ली के तक़रीबन हर हिस्से में पहुँचा जा सकेगा. ज़्यादा लोग अपनी गाड़ियां पार्क करके मेट्रो पकड़ सकेंगे.
दिल्ली मेट्रो भारत ही नहीं बाहर के शहरों के लिए भी आदर्श है. मेट्रो का प्रस्ताव तो दशकों से था पर इसे अमलीजामा 2003 में ही पहनाया जा सका.
इसी तरह उत्तर भारत से दिल्ली में घुसने वाले ट्रकों की आवाजाही रोकने के लिए बाहरी इलाक़ों में सड़कें बनाने की योजना भी कई साल पुरानी है.
उम्मीद है कि मौजूदा संकट से यह भी शायद जल्द साकार हो पाए.
इसमें वक़्त लगेगा पर तब तक दिल्ली सरकार को नए बस स्टॉप के लिए ज़मीनें लेनी होंगी और सड़कों पर और बसें उतारनी होंगी.
इन्हें ठीक से चलाने के लिए कॉरिडोर बनाना होगा, जिससे कार मालिक नफ़रत करते हैं. मगर यह ज़रूरी होगा.
दिल्ली की हवा इस क़दर प्रदूषित है कि डॉक्टर अपने मरीजों को सांस की बीमारी की वजह से दिल्ली छोड़ने के लिए कहने लगे हैं.
फिर भी मुझे लगता है कि स्थिति बदलेगी, जैसा 2000 के शुरू में हुआ था.
हमें प्रदूषण को लेकर इतना नहीं डरना चाहिए कि हम दिल्ली से ही नफ़रत करने लगें. यह अभी भी रहने के लिए देश के अच्छे शहरों में एक है.
यहां खुली जगह हैं, किराए कम हैं और मुंबई के मुक़ाबले चौड़ी सड़कें हैं. ये कोलकाता या चेन्नई के मुक़ाबले कम दमघोंटू है.
जीवंत बौद्धिक और सांस्कृतिक जीवन है, जिसकी बराबरी बैंगलुरु नहीं कर सकता और स्वागत करने वाले लोग हैं, जिससे बंबईवाले ईर्ष्या कर सकते हैं.
यह देशभर के प्रवासियों की पसंदीदा जगह है. आज जो दिल्ली है, वो 90 के दशक में कभी मुंबई होता था- सपनों का शहर.
2012 में महिलाओं पर हिंसा के ख़िलाफ़ लगातार महीने चले प्रदर्शन ने साबित किया कि दिल्लीवासी शहर की बेहतरी के लिए आगे आने को तैयार हैं.
वो प्रदर्शन बाद में दुनियाभर में आंदोलनों के लिए प्रेरणा बने.
आइए, वायु प्रदूषण से हमारी जंग भी उसी तरह एक मिसाल बन जाए.
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फिर भी दिल्ली हमारे सपनों का शहर है. . पहले दिल्ली की छवि महिलाओं के लिए सबसे ख़तरनाक़ शहर की बनी और अब इसे दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर कहा जा रहा है. दिल्ली से नफ़रत करने वालों के लिए यह कभी अच्छा शहर नहीं था. इस शहर की हिमायत कभी इतनी मुश्किल नहीं रही. बहुत कम लोग जानते हैं कि मुंबई नहीं बल्कि दिल्ली देश का सबसे बड़ा शहर है. मगर जनगणना विभाग इससे सहमत नहीं. वह मुंबई के उपनगरीय इलाक़ों को मुंबई शहर का हिस्सा मानता है. दिल्ली राज्य की सीमाएं नोएडा और ग़ाज़ियाबाद जैसे शहरों को दिल्ली का हिस्सा बनने से रोकती हैं. अगर इन्हें और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा मिला लें, तो ढाई करोड़ की आबादी वाला शहर दिल्ली, टोक्यो और जकार्ता के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ी शहरी आबादी वाला शहर हो जाएगा. एक हज़ार नौ सौ इक्यावन से दो हज़ार एक के बीच दिल्ली की आबादी हर साल दोगुनी बढ़ी. दो हज़ार एक से दो हज़ार ग्यारह के बीच जनसंख्या वृद्धि दर बीस फ़ीसद रही. आबादी की दर इसलिए कम रही क्योंकि भारत ने सही कदम उठाए और कुछ उपनगर विकसित कर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बना दिया गया. यूं तो प्रशासन के मामले में भारत सबसे अच्छा देश नहीं है, फिर भी यह चमत्कार ही है कि एनसीआर रहने लायक है. सिर्फ़ दिल्ली के एक. सात करोड़ लोग अपनी गाड़ियों से नहीं बल्कि उपनगरों के लोग, उत्तर भारत का ट्रैफ़िक और पंजाब के खेतों में लगाई गई आग भी शहर को प्रदूषण के मुहाने पर पहुँचाते हैं. एक गौरवान्वित दिल्लीवासी होने के नाते मैं कहूँगा कि यहां उतनी ही अव्यवस्था है जैसी भारत के दूसरे शहरों में. पटना, ग्वालियर और रायपुर की हवा भी उतनी ही ख़राब है जितनी दिल्ली की, जबकि इन शहरों की आबादी दिल्ली से काफ़ी कम है. मैं तो कहूँगा कि दूसरे शहरों के मुक़ाबले दिल्ली अपनी हवा साफ़ रखने में ज़्यादा कामयाब रहा है. आप बीजिंग में हो या बैंकॉक, आपको सांस लेने के लिए अच्छी हवा नहीं मिलेगी. वायु प्रदूषण विकासशील देशों के बड़े शहरों की एक आम समस्या है. प्रदूषण को लेकर दिल्ली में इतना ख़ौफ़ पहली बार नहीं. वायु प्रदूषण के ऐसे ही आर्मागेडॉन हालात नब्बे के दशक के अंत में भी पैदा हुए थे. जब दो हज़ार एक में सुप्रीम कोर्ट को दिल्ली में पेट्रोल-डीज़ल वाले सार्वजनिक परिवहन पर रोक लगानी पड़ी थी और उन्हें सीएनजी में बदलने को कहना पड़ा था. इससे दिल्ली में प्रदूषण तो घटा, पर कई बसें सड़क से हटीं और अभी तक वापस नहीं लौटीं. दिल्ली मेट्रो सड़कों से क़रीब बीस लाख यात्रियों को हटाती है. सोचिए, अगर दो हज़ार तीन में शुरू हुई और लगातार फैल रही दिल्ली मेट्रो न होती, तो कितनी अव्यवस्था होती? दिल्ली का मौजूदा सार्वजनिक परिवहन संकट ज़्यादातर एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे से दो हज़ार एक के बीच सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को लेकर दिल्ली सरकार की अनदेखी का नतीजा है. सुप्रीम कोर्ट और सरकार का रुख कमर्शियल वाहनों के लिए कड़े क़ानून बनाने पर था, जो उन लोगों को ढोते हैं, जिनके पास अपनी कार नहीं है. दूसरी तरफ़ कार मालिकों के लिए सरकारें हज़ारों करोड़ रुपए ख़र्च करके फ़्लाईओवर बनाती रही. इस बार चेतावनी की घंटी ज़ोर से बजी है. उम्मीद करनी चाहिए कि सही नतीजा निकलेंगे. दो-तीन साल में हमें दिल्ली में प्रदूषण स्तर कम मिलेगा. दिल्ली मेट्रो की इनर और आउटर रिंग रोड से निकलने वाली दो लाइनों के बाद स्टेशन चार से बढ़कर सत्ताईस हो जाएंगे, जहां से लोग ट्रेनें बदल सकते हैं. इससे यात्रा का समय घटेगा और दिल्ली के तक़रीबन हर हिस्से में पहुँचा जा सकेगा. ज़्यादा लोग अपनी गाड़ियां पार्क करके मेट्रो पकड़ सकेंगे. दिल्ली मेट्रो भारत ही नहीं बाहर के शहरों के लिए भी आदर्श है. मेट्रो का प्रस्ताव तो दशकों से था पर इसे अमलीजामा दो हज़ार तीन में ही पहनाया जा सका. इसी तरह उत्तर भारत से दिल्ली में घुसने वाले ट्रकों की आवाजाही रोकने के लिए बाहरी इलाक़ों में सड़कें बनाने की योजना भी कई साल पुरानी है. उम्मीद है कि मौजूदा संकट से यह भी शायद जल्द साकार हो पाए. इसमें वक़्त लगेगा पर तब तक दिल्ली सरकार को नए बस स्टॉप के लिए ज़मीनें लेनी होंगी और सड़कों पर और बसें उतारनी होंगी. इन्हें ठीक से चलाने के लिए कॉरिडोर बनाना होगा, जिससे कार मालिक नफ़रत करते हैं. मगर यह ज़रूरी होगा. दिल्ली की हवा इस क़दर प्रदूषित है कि डॉक्टर अपने मरीजों को सांस की बीमारी की वजह से दिल्ली छोड़ने के लिए कहने लगे हैं. फिर भी मुझे लगता है कि स्थिति बदलेगी, जैसा दो हज़ार के शुरू में हुआ था. हमें प्रदूषण को लेकर इतना नहीं डरना चाहिए कि हम दिल्ली से ही नफ़रत करने लगें. यह अभी भी रहने के लिए देश के अच्छे शहरों में एक है. यहां खुली जगह हैं, किराए कम हैं और मुंबई के मुक़ाबले चौड़ी सड़कें हैं. ये कोलकाता या चेन्नई के मुक़ाबले कम दमघोंटू है. जीवंत बौद्धिक और सांस्कृतिक जीवन है, जिसकी बराबरी बैंगलुरु नहीं कर सकता और स्वागत करने वाले लोग हैं, जिससे बंबईवाले ईर्ष्या कर सकते हैं. यह देशभर के प्रवासियों की पसंदीदा जगह है. आज जो दिल्ली है, वो नब्बे के दशक में कभी मुंबई होता था- सपनों का शहर. दो हज़ार बारह में महिलाओं पर हिंसा के ख़िलाफ़ लगातार महीने चले प्रदर्शन ने साबित किया कि दिल्लीवासी शहर की बेहतरी के लिए आगे आने को तैयार हैं. वो प्रदर्शन बाद में दुनियाभर में आंदोलनों के लिए प्रेरणा बने. आइए, वायु प्रदूषण से हमारी जंग भी उसी तरह एक मिसाल बन जाए.
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मॉनसून के आते ही चंडीगढ़ में वन महोत्सव का भी आगाज हो गया है। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने इसका शुभारंभ सेक्टर-26 रिजर्व फॉरेस्ट में जामुन का पौधा लगाकर किया। वहीं मोबाइल वैन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जो लोगों को घर पर ही मुफ्त पौधे बांटेगी।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। लंबे इंतजार के बाद ही सही सोमवार से चंडीगढ़ में वन महोत्सव का शुभारंभ हो गया। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने सेक्टर-26 रिजर्व फॉरेस्ट में जामुन का पौधा लगाकर इसकी शुरुआत की। इससे पहले उन्होंने वन विभाग आपके द्वार मोबाइल वैन को भी हरी झंडी दिखा रवाना किया। यह मोबाइल वैन के जरिये 29 जुलाई तक शहर के अलग-अलग एरिया में घूमकर लोगों को मुफ्त पौधे बांटे जाएंगे।
इन वाहनों से कोई भी व्यक्ति बिना किसी औपचारिकता के पांच पौधे ले सकता है। इसके लिए तीन वाहन फॉरेस्ट डिपार्टमेंट रोजाना चलाएगा। इन वाहनों से लोगों को डोर स्टेप पर बिना किसी औपचारिकता के पौधे मिल जाएंगे। शहर को अलग-अलग जोन में बांटकर यह वाहन सभी सेक्टरों को कवर करेंगे। एक सेक्टर में कई-कई चक्कर लगाएंगे। सुबह नौ से शाम छह बजे तक घूमकर पौधे वितरित किए जाएंगे।
किस समय किस एरिया में यह वाहन मिलेंगे, इसकी सूचना लोगों को डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर मिल जाएगी। वाहनों के लिए जारी इन 97801-80238, 79862-64894, 93571-48202 पर कॉल कर भी आने की जानकारी ले सकते हैं। वाहनों पर विभिन्न तरह के पाैधे मिलेंगे। इसमें मेडिसन प्लांट अधिक होंगे। एलोवेरा, गिलोय, तुलसी, नीम, अजवायन आदि के पौधे भी शामिल होंगे। लोग गाड़ी से अपनी इच्छा अनुसार पसंद और जगह का ध्यान रखते हुए पौधा ले सकते हैं।
जन्मदिन, सालगिरह जैसे मौके पर पौधरोपण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के इस प्रयास को सराहा। लोगों से मॉनसून में कम से कम एक पौध लगाने का आह्वान किया। चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट देबेंद्र दलाई ने कहा कि ग्रीनिंग चंडीगढ़ एक्शन प्लान-2021-22 तैयार किया गया है। इसमें फेज वाइज 1. 75 लाख पौधे लगाए जाएंगे। जबकि 80 हजार पौधे बांटे जाएंगे। वन विभाग लोगों को डोर स्टेप पर पौधे उपलब्ध कराएगा। लोग अपनी जरूरत और पसंद अनुसार पौधे वाहन से ले सकते हैं।
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मॉनसून के आते ही चंडीगढ़ में वन महोत्सव का भी आगाज हो गया है। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने इसका शुभारंभ सेक्टर-छब्बीस रिजर्व फॉरेस्ट में जामुन का पौधा लगाकर किया। वहीं मोबाइल वैन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जो लोगों को घर पर ही मुफ्त पौधे बांटेगी। जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। लंबे इंतजार के बाद ही सही सोमवार से चंडीगढ़ में वन महोत्सव का शुभारंभ हो गया। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने सेक्टर-छब्बीस रिजर्व फॉरेस्ट में जामुन का पौधा लगाकर इसकी शुरुआत की। इससे पहले उन्होंने वन विभाग आपके द्वार मोबाइल वैन को भी हरी झंडी दिखा रवाना किया। यह मोबाइल वैन के जरिये उनतीस जुलाई तक शहर के अलग-अलग एरिया में घूमकर लोगों को मुफ्त पौधे बांटे जाएंगे। इन वाहनों से कोई भी व्यक्ति बिना किसी औपचारिकता के पांच पौधे ले सकता है। इसके लिए तीन वाहन फॉरेस्ट डिपार्टमेंट रोजाना चलाएगा। इन वाहनों से लोगों को डोर स्टेप पर बिना किसी औपचारिकता के पौधे मिल जाएंगे। शहर को अलग-अलग जोन में बांटकर यह वाहन सभी सेक्टरों को कवर करेंगे। एक सेक्टर में कई-कई चक्कर लगाएंगे। सुबह नौ से शाम छह बजे तक घूमकर पौधे वितरित किए जाएंगे। किस समय किस एरिया में यह वाहन मिलेंगे, इसकी सूचना लोगों को डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर मिल जाएगी। वाहनों के लिए जारी इन सत्तानवे हज़ार आठ सौ एक-अस्सी हज़ार दो सौ अड़तीस, उन्यासी हज़ार आठ सौ बासठ-चौंसठ हज़ार आठ सौ चौरानवे, तिरानवे हज़ार पाँच सौ इकहत्तर-अड़तालीस हज़ार दो सौ दो पर कॉल कर भी आने की जानकारी ले सकते हैं। वाहनों पर विभिन्न तरह के पाैधे मिलेंगे। इसमें मेडिसन प्लांट अधिक होंगे। एलोवेरा, गिलोय, तुलसी, नीम, अजवायन आदि के पौधे भी शामिल होंगे। लोग गाड़ी से अपनी इच्छा अनुसार पसंद और जगह का ध्यान रखते हुए पौधा ले सकते हैं। जन्मदिन, सालगिरह जैसे मौके पर पौधरोपण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के इस प्रयास को सराहा। लोगों से मॉनसून में कम से कम एक पौध लगाने का आह्वान किया। चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट देबेंद्र दलाई ने कहा कि ग्रीनिंग चंडीगढ़ एक्शन प्लान-दो हज़ार इक्कीस-बाईस तैयार किया गया है। इसमें फेज वाइज एक. पचहत्तर लाख पौधे लगाए जाएंगे। जबकि अस्सी हजार पौधे बांटे जाएंगे। वन विभाग लोगों को डोर स्टेप पर पौधे उपलब्ध कराएगा। लोग अपनी जरूरत और पसंद अनुसार पौधे वाहन से ले सकते हैं।
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नई दिल्ली : एक आत्मघाती हमले में तालिबान का टॉप कमांडर रहीमुल्ला हक्कानी मारा गया. ये हमला काबुल के मदरसे में हुआ है. बता दें, रहीमुल्ला तालिबान के आतंकी विचारधारा का कट्टर समर्थक था जिसे इस्लामी विद्वान भी माना जाता था. बहरहाल इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी भी संगठन ने नहीं ली है. तालिबान सूत्रों की मानें तो इस हमले के पीछे रेजिस्टेंस फोर्स या इस्लामिक स्टेट का हाथ हो सकता है.
तालिबान की स्पेशल पुलिस मामले की जांच में जुटी है. रहीमुल्ला हक्कानी अफगानिस्तान के गृहमंत्री और हक्कानी नेटवर्क के सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी का वैचारिक गुरु माना जाता था. इतना ही नहीं सोशल मीडिया के लिए भी एक चेहरा था. बता दें, सोशल मीडिया पर रहीमुल्ला के लाखों में फॉलोवर्स हैं.
पाकिस्तान की सीमा से सटे नंगरहार प्रांत के पचिर अव आगम जिले का अफगान नागरिक रहीमुल्ला हक्कानी अब मारा गया है. हदीस साहित्य के विद्वान कहलाने वाले हक्कानी ने स्वाबी और अकोरा खट्टक के देवबंदी मदरसों में अपनी शिक्षा प्राप्त की थी. ये पहली बार नहीं था जब हक्कानी पर कोई हमला किया गया हो. हक्कानी पर ये तीसरा आत्मघाती हमला था. बीते साल अक्टूबर 2020 में भी रहीमुल्ला को निशाना बनाया गया था, जिसमें वह बाल-बाल बच गया था. इसके अलावा भी साल 2013 में पेशावर के रिंग रोड पर हक्कानी के काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी. हालाँकि उस समय पाकिस्तान पुलिस और सेना की जवाबी कार्रवाई से डरकर हमलावर भाग गए और रहीमुल्ला की जान बच गई.
हक्कानी नंगरहार प्रांत में तालिबान सैन्य आयोग का सदस्य भी था. मुठभेड़ के दौरान शेख रहीमुल्ला हक्कानी को अमेरिकी सेना ने पकड़ा था, जिसके बाद इसे अफगानिस्तान की बगराम जेल में कई सालों की कैद हुई. अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से पहले वह नौ साल तक भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में रहा. इस दौरान हक्कानी ने पाकिस्तान के पेशावर में स्थित दीर कॉलोनी में मदरसा जुबैरी खोला. इस मदरसे में अफगान नागरिक और तालिबान लड़ाके धार्मिक शिक्षा लेता थे. यह मदरसा पेशावर में तालिबान के प्रमुख ठिकानों की तरह माना गया था. इस मदरसे के सहारे ही पूरे पाकिस्तान और विदेशों से तालिबान के लिए चंदा वसूला जाता था जिसमें पाकिस्तान की मदद ख़ुफ़िया एजेंसी ISIS भी करती थी.
हक्कानी नेटवर्क के लिए ये हत्या सबसे बड़ा झटका साबित होने वाली है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि रहीमुल्ला हक्कानी तालिबान नेटवर्क का वैचारिक चेहरा माना जाता था. वह अफगानिस्तान समेत पूरे अरब मुल्कों में हक्कानी नेटवर्क का प्रतिनिधित्व किया करता था. गृहमंत्री रहते हुए हक्कानी की हत्या ने तालिबान की इस्लामिक अमीरात सरकार को हिला दिया है. यह हमला काबुल में भी तालिबान की पकड़ ढीली होने के संकेत देता है. बता दें, इस समय तालिबान अपनी सरकार को मान्यता दिलवाने के प्रयास में है. जिसमें रहीमुल्ला की भूमिका काफी अहम थी. लेकिन दूसरी ओर तालिबान को विदेशों और पाकिस्तान से मिलने वाली फंडिंग पर भी असर पड़ने वाला है.
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नई दिल्ली : एक आत्मघाती हमले में तालिबान का टॉप कमांडर रहीमुल्ला हक्कानी मारा गया. ये हमला काबुल के मदरसे में हुआ है. बता दें, रहीमुल्ला तालिबान के आतंकी विचारधारा का कट्टर समर्थक था जिसे इस्लामी विद्वान भी माना जाता था. बहरहाल इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी भी संगठन ने नहीं ली है. तालिबान सूत्रों की मानें तो इस हमले के पीछे रेजिस्टेंस फोर्स या इस्लामिक स्टेट का हाथ हो सकता है. तालिबान की स्पेशल पुलिस मामले की जांच में जुटी है. रहीमुल्ला हक्कानी अफगानिस्तान के गृहमंत्री और हक्कानी नेटवर्क के सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी का वैचारिक गुरु माना जाता था. इतना ही नहीं सोशल मीडिया के लिए भी एक चेहरा था. बता दें, सोशल मीडिया पर रहीमुल्ला के लाखों में फॉलोवर्स हैं. पाकिस्तान की सीमा से सटे नंगरहार प्रांत के पचिर अव आगम जिले का अफगान नागरिक रहीमुल्ला हक्कानी अब मारा गया है. हदीस साहित्य के विद्वान कहलाने वाले हक्कानी ने स्वाबी और अकोरा खट्टक के देवबंदी मदरसों में अपनी शिक्षा प्राप्त की थी. ये पहली बार नहीं था जब हक्कानी पर कोई हमला किया गया हो. हक्कानी पर ये तीसरा आत्मघाती हमला था. बीते साल अक्टूबर दो हज़ार बीस में भी रहीमुल्ला को निशाना बनाया गया था, जिसमें वह बाल-बाल बच गया था. इसके अलावा भी साल दो हज़ार तेरह में पेशावर के रिंग रोड पर हक्कानी के काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी. हालाँकि उस समय पाकिस्तान पुलिस और सेना की जवाबी कार्रवाई से डरकर हमलावर भाग गए और रहीमुल्ला की जान बच गई. हक्कानी नंगरहार प्रांत में तालिबान सैन्य आयोग का सदस्य भी था. मुठभेड़ के दौरान शेख रहीमुल्ला हक्कानी को अमेरिकी सेना ने पकड़ा था, जिसके बाद इसे अफगानिस्तान की बगराम जेल में कई सालों की कैद हुई. अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से पहले वह नौ साल तक भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में रहा. इस दौरान हक्कानी ने पाकिस्तान के पेशावर में स्थित दीर कॉलोनी में मदरसा जुबैरी खोला. इस मदरसे में अफगान नागरिक और तालिबान लड़ाके धार्मिक शिक्षा लेता थे. यह मदरसा पेशावर में तालिबान के प्रमुख ठिकानों की तरह माना गया था. इस मदरसे के सहारे ही पूरे पाकिस्तान और विदेशों से तालिबान के लिए चंदा वसूला जाता था जिसमें पाकिस्तान की मदद ख़ुफ़िया एजेंसी ISIS भी करती थी. हक्कानी नेटवर्क के लिए ये हत्या सबसे बड़ा झटका साबित होने वाली है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि रहीमुल्ला हक्कानी तालिबान नेटवर्क का वैचारिक चेहरा माना जाता था. वह अफगानिस्तान समेत पूरे अरब मुल्कों में हक्कानी नेटवर्क का प्रतिनिधित्व किया करता था. गृहमंत्री रहते हुए हक्कानी की हत्या ने तालिबान की इस्लामिक अमीरात सरकार को हिला दिया है. यह हमला काबुल में भी तालिबान की पकड़ ढीली होने के संकेत देता है. बता दें, इस समय तालिबान अपनी सरकार को मान्यता दिलवाने के प्रयास में है. जिसमें रहीमुल्ला की भूमिका काफी अहम थी. लेकिन दूसरी ओर तालिबान को विदेशों और पाकिस्तान से मिलने वाली फंडिंग पर भी असर पड़ने वाला है.
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गिरफ्तारी के बाद से ही भगवान दास जेल में बंद है, जबकि उसकी पत्नी सरोज को जमानत मिल गई थी। ये मुकदमा पॉक्सो तृतीय संजय कुमार चतुर्थ की अदालत में विचाराधीन चल रहा था। शुक्रवार को न्यायालय में मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता चौधरी संजीव कुमार ने पैरवी की।
दुकान के विवाद में बड़े भाई की गंडासे से गर्दन काटकर हत्या करने के मामले में न्यायालय ने छोटे भाई को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोषी की पत्नी भी आरोपी थी, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने उसे दोषमुक्त कर दिया। गिरफ्तारी के बाद से ही दोषी जेल में बंद है, उसे जमानत नहीं मिल सकी थी।
ये घटना आदमपुर थानाक्षेत्र के गांव दौरारा की है। यहां पर किसान कनछिद का परिवार रहता है। उनके दो बेटे थे। बड़ा बेटा रामकेश और छोटा बेटा भगवान दास के बीच जमीन का बंटवारा हुआ था। इस दौरान घर में बनी दुकान रामकेश से हिस्से में आ गई थी। लेकिन भगवानदास इस दुकान पर कब्जा करना चाहता था। इसके चलते दोनों भाइयों में विवाद रहता था।
घटना 15 अगस्त 2020 की सुबह 11 बजे की है। इस दिन भगवान दास ने अपनी पत्नी सरोज के साथ मिलकर रामकेश पर गंडासे से हमला कर घायल कर दिया। आनन-फानन में परिजनों ने रामकेश को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में रामकेश की पत्नी मुन्नी देवी की तरफ से भगवानदास और उसकी पत्नी सरोज के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। लेकिन मौत के बाद पुलिस ने मुकदमे को हत्या में तरमीम कर लिया था। आरोपी दंपती को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
गिरफ्तारी के बाद से ही भगवान दास जेल में बंद है, जबकि उसकी पत्नी सरोज को जमानत मिल गई थी। ये मुकदमा पॉक्सो तृतीय संजय कुमार चतुर्थ की अदालत में विचाराधीन चल रहा था। शुक्रवार को न्यायालय में मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता चौधरी संजीव कुमार ने पैरवी की। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी भगवानदास को दोषी करार दिया। जबकि उसकी पत्नी सरोज को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। वहीं शनिवार को न्यायालय ने दोषी भगवानदास को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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गिरफ्तारी के बाद से ही भगवान दास जेल में बंद है, जबकि उसकी पत्नी सरोज को जमानत मिल गई थी। ये मुकदमा पॉक्सो तृतीय संजय कुमार चतुर्थ की अदालत में विचाराधीन चल रहा था। शुक्रवार को न्यायालय में मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता चौधरी संजीव कुमार ने पैरवी की। दुकान के विवाद में बड़े भाई की गंडासे से गर्दन काटकर हत्या करने के मामले में न्यायालय ने छोटे भाई को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही सत्तर हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोषी की पत्नी भी आरोपी थी, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने उसे दोषमुक्त कर दिया। गिरफ्तारी के बाद से ही दोषी जेल में बंद है, उसे जमानत नहीं मिल सकी थी। ये घटना आदमपुर थानाक्षेत्र के गांव दौरारा की है। यहां पर किसान कनछिद का परिवार रहता है। उनके दो बेटे थे। बड़ा बेटा रामकेश और छोटा बेटा भगवान दास के बीच जमीन का बंटवारा हुआ था। इस दौरान घर में बनी दुकान रामकेश से हिस्से में आ गई थी। लेकिन भगवानदास इस दुकान पर कब्जा करना चाहता था। इसके चलते दोनों भाइयों में विवाद रहता था। घटना पंद्रह अगस्त दो हज़ार बीस की सुबह ग्यारह बजे की है। इस दिन भगवान दास ने अपनी पत्नी सरोज के साथ मिलकर रामकेश पर गंडासे से हमला कर घायल कर दिया। आनन-फानन में परिजनों ने रामकेश को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में रामकेश की पत्नी मुन्नी देवी की तरफ से भगवानदास और उसकी पत्नी सरोज के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। लेकिन मौत के बाद पुलिस ने मुकदमे को हत्या में तरमीम कर लिया था। आरोपी दंपती को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। गिरफ्तारी के बाद से ही भगवान दास जेल में बंद है, जबकि उसकी पत्नी सरोज को जमानत मिल गई थी। ये मुकदमा पॉक्सो तृतीय संजय कुमार चतुर्थ की अदालत में विचाराधीन चल रहा था। शुक्रवार को न्यायालय में मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता चौधरी संजीव कुमार ने पैरवी की। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी भगवानदास को दोषी करार दिया। जबकि उसकी पत्नी सरोज को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। वहीं शनिवार को न्यायालय ने दोषी भगवानदास को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही सत्तर हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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रेल मंत्री सुरेश प्रभु की कृपा से मां-बाप की डांट से डर कर भागे सोनीपत के एक 12 वर्षीय बच्चे को छह घंटे के अंदर एक ट्रेन से रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने बरामद कर लिया। अपने तरह की इस अनोखी घटना में वाट्सअप और सीसीटीवी कैमरों के साथ आरपीएफ ने सघन तलाशी अभियान चला कर जम्मू से इंदौर जाने वाली 12920 अप मालवा एक्सप्रेस से शिकायत मिलने के करीब साढ़े पांच घंटे बाद खोज लिया।
अनुसार कल रात करीब 8 बजे सोनीपत हरियाणा के निवासी राजेश कुमार ने रेल मंत्री के आवास स्थित शिकायत सेल में तैनात रमेश कुमार को सूचित किया कि उनका 12 वर्षीय बेटा सत्यम दोपहर ट्यूशन से अब तक लौट कर घर नहीं लौटा है और उन्हें किसी ने बताया है कि वह शाम 6 बजे सोनीपत रेलवे स्टेशन पर देखा गया था। बच्चे के गलत हाथों में पड़ जाने की आशंका से ग्रस्त राजेश कुमार ने रेल मंत्री से मदद की प्रार्थना की।
रेल मंत्री शिकायत सेल ने यह सूचना तुरन्त ही रेल भवन स्थित सुरक्षा निदेशालय में महानिरीक्षक (प्रशासन) अनुप श्रीवास्तव को दी। उन्होंने लापता नाबालिग बच्चे के खोज अभियान की कमान उपमहानिरीक्षक (रेल सुरक्षा) अंबिका नाथ मिश्रा को सौपीं। मिश्रा ने तत्काल ही वाट्सअप पर नाबालिग बच्चे का फोटो एवं अन्य जानकारी प्राप्त की। प्राप्त जानकारी के अनुसार सांय 6 बजे जब सत्यम सोनीपत रेलवे स्टेशन पर देखा गया तो उस समय स्टेशन पर जम्मू से इन्दौर जाने वाली ट्रेन न0 12920 मालवा एक्सप्रेस खड़ी थी जो सूचना प्राप्त होने तक दिल्ली मे तमाम स्टेशनों पर ठहराव के बाद मथुरा रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली थी।
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रेल मंत्री सुरेश प्रभु की कृपा से मां-बाप की डांट से डर कर भागे सोनीपत के एक बारह वर्षीय बच्चे को छह घंटे के अंदर एक ट्रेन से रेल सुरक्षा बल ने बरामद कर लिया। अपने तरह की इस अनोखी घटना में वाट्सअप और सीसीटीवी कैमरों के साथ आरपीएफ ने सघन तलाशी अभियान चला कर जम्मू से इंदौर जाने वाली बारह हज़ार नौ सौ बीस अप मालवा एक्सप्रेस से शिकायत मिलने के करीब साढ़े पांच घंटे बाद खोज लिया। अनुसार कल रात करीब आठ बजे सोनीपत हरियाणा के निवासी राजेश कुमार ने रेल मंत्री के आवास स्थित शिकायत सेल में तैनात रमेश कुमार को सूचित किया कि उनका बारह वर्षीय बेटा सत्यम दोपहर ट्यूशन से अब तक लौट कर घर नहीं लौटा है और उन्हें किसी ने बताया है कि वह शाम छः बजे सोनीपत रेलवे स्टेशन पर देखा गया था। बच्चे के गलत हाथों में पड़ जाने की आशंका से ग्रस्त राजेश कुमार ने रेल मंत्री से मदद की प्रार्थना की। रेल मंत्री शिकायत सेल ने यह सूचना तुरन्त ही रेल भवन स्थित सुरक्षा निदेशालय में महानिरीक्षक अनुप श्रीवास्तव को दी। उन्होंने लापता नाबालिग बच्चे के खोज अभियान की कमान उपमहानिरीक्षक अंबिका नाथ मिश्रा को सौपीं। मिश्रा ने तत्काल ही वाट्सअप पर नाबालिग बच्चे का फोटो एवं अन्य जानकारी प्राप्त की। प्राप्त जानकारी के अनुसार सांय छः बजे जब सत्यम सोनीपत रेलवे स्टेशन पर देखा गया तो उस समय स्टेशन पर जम्मू से इन्दौर जाने वाली ट्रेन नशून्य बारह हज़ार नौ सौ बीस मालवा एक्सप्रेस खड़ी थी जो सूचना प्राप्त होने तक दिल्ली मे तमाम स्टेशनों पर ठहराव के बाद मथुरा रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली थी।
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वैद्यनाथ गाँव में समझदार थे, इसीलिए वे भविष्य की ओर दृष्टि रखकर वर्तमान के सम्पूर्ण कार्यों को करते थे । जब विवाह किया, तब उन्होंने वर्तमान नववधू की अपेक्षा भावी नवशिशु के मुख को स्पष्ट रूप से देख पाया था । शुभदृष्टि (विवाह) के समय ऐसी दूरदृष्टि प्रायः देखी नहीं जाती । वे पक्के आदमी थे, इसीलिए प्रेम की अपेक्षा पिण्ड को ही अधिक समझते एवं 'पुत्रार्थ क्रियते भार्या ( पुत्र के लिए पत्नी करनी चाहिए ) इसी मर्म को समझ कर उन्होंने विनोदिनी से विवाह किया था ।
परन्तु इस संसार में समझदार व्यक्ति भी ठगे जाते हैं । यौवन प्राप्त होने पर भी जब विनोदिनी ने अपने सर्वप्रधान कर्तव्य का पालन नहीं किया, उस समय 'पुन्नाम नरक' के द्वार खुले हुए देखकर वैद्यनाथ अत्यन्त चिन्तित हुए । मृत्यु के पश्चात् उनके विपुल ऐश्वर्य का भोग कौन करेगा, इस भावना के कारण मृत्यु से पूर्व ही वे उस ऐश्वर्य का भोग करने में एक प्रकार से विमुख होगये । पहले ही कहा जा चुका है कि वर्तमान की अपेक्षा भविष्य को ही वे सत्य कहकर जानते हैं ।
परन्तु युवती विनोदिनी से हठात् इस प्रकार की समझदारी की प्रत्याशा नहीं की जा सकती। उस बेचारी का बहुमूल्य वर्तमान उसका नवविकसित यौवन, बिना प्रेम के व्यर्थ ही बीता चला जा रहा है। यही उसके लिए सबसे शोचनीय बात थी । पारलौकिक पिण्ड की क्षुधा को यह इहलौकिक मन की भूख के दाह के समक्ष एक बार में ही भूल
बैठी, मनु के पवित्र विधान एवं वैद्यनाथ की आध्यात्मिक व्याख्या से उसके बुभुक्षित हृदय की रत्ती भर भी तृप्ति नहीं होती ।
कोई कुछ भी कहे, इस आयु में प्रेम देना और प्रेम पाना ही स्त्रियों को समस्त सुख एवं सम्पूर्ण कर्तव्यों की अपेक्षा स्वभावतः अधिक महत्वपूर्ण जान पड़ता है ।
परन्तु विनोदा के में नवीन प्रेम की वर्षावारी-सिंचन के बदले पति, फफुग्रा-सास तथा अन्यान्य उच्च एवं उच्चतर लोगों के सम्मिलित प्रकाश से तर्जन गर्जन की शिला वृष्टि की ही व्य वस्था हुई। सभी उसे 'वन्ध्या' कहकर अपराधी ठहराते । एक फूल के पौधे को प्रकाश एवं वायु से रहित मकान में रखने से उसकी जो अवस्था होती है, विनोदा के वंचित-यौवन की भी वही अवस्था हुई ।
सदा सर्वदा इसी कानाफूसी एवं बकाबकी के बीच न ठहर पाने के कारण जब वह कुसुम के मकान में ताश खेलने जाती, उस उसे बहुत अच्छा लगता । वहाँ पुन्नामनरक की भोषण छाया सदैव वर्तमान न रहने से, हँसी-ठट्ठा भौर व हानियों में किसी प्रकार की बाधा नहीं थी ।
कुसुम जिस दिन ताश खेलने को साथी नहीं पाती, उस दिन अपने तरुण देवर नगेन्द्र को पकड़कर ले प्राती । नगेन्द्र और विनोदा की आपत्ति को यह हंसी में उड़ा देती । इस संसार में एक से दूसरा होता है एवं खेलने का क्रम संकट में परिगित हो सकता है-- इन सब गंभीर बातों पर अल्पायु में यकायक ही विश्वास नहीं होता ।
इस सम्बन्ध में नगेन्द्र की भी आपत्ति की दृढ़ता कुछ नहीं देखी गई; अब वह ताश खेलने के लिए अधिक बुलाहट की प्रीक्षा भी नहीं कर पाता ।
इस प्रकार विनोदा के साथ जगेन्द्र का अक्सर साक्षात्कार होने
लगा 8
नगेन्द्र जब ताश खेलने के लिए बैठता, तब वाशों की अपेक्षा
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वैद्यनाथ गाँव में समझदार थे, इसीलिए वे भविष्य की ओर दृष्टि रखकर वर्तमान के सम्पूर्ण कार्यों को करते थे । जब विवाह किया, तब उन्होंने वर्तमान नववधू की अपेक्षा भावी नवशिशु के मुख को स्पष्ट रूप से देख पाया था । शुभदृष्टि के समय ऐसी दूरदृष्टि प्रायः देखी नहीं जाती । वे पक्के आदमी थे, इसीलिए प्रेम की अपेक्षा पिण्ड को ही अधिक समझते एवं 'पुत्रार्थ क्रियते भार्या इसी मर्म को समझ कर उन्होंने विनोदिनी से विवाह किया था । परन्तु इस संसार में समझदार व्यक्ति भी ठगे जाते हैं । यौवन प्राप्त होने पर भी जब विनोदिनी ने अपने सर्वप्रधान कर्तव्य का पालन नहीं किया, उस समय 'पुन्नाम नरक' के द्वार खुले हुए देखकर वैद्यनाथ अत्यन्त चिन्तित हुए । मृत्यु के पश्चात् उनके विपुल ऐश्वर्य का भोग कौन करेगा, इस भावना के कारण मृत्यु से पूर्व ही वे उस ऐश्वर्य का भोग करने में एक प्रकार से विमुख होगये । पहले ही कहा जा चुका है कि वर्तमान की अपेक्षा भविष्य को ही वे सत्य कहकर जानते हैं । परन्तु युवती विनोदिनी से हठात् इस प्रकार की समझदारी की प्रत्याशा नहीं की जा सकती। उस बेचारी का बहुमूल्य वर्तमान उसका नवविकसित यौवन, बिना प्रेम के व्यर्थ ही बीता चला जा रहा है। यही उसके लिए सबसे शोचनीय बात थी । पारलौकिक पिण्ड की क्षुधा को यह इहलौकिक मन की भूख के दाह के समक्ष एक बार में ही भूल बैठी, मनु के पवित्र विधान एवं वैद्यनाथ की आध्यात्मिक व्याख्या से उसके बुभुक्षित हृदय की रत्ती भर भी तृप्ति नहीं होती । कोई कुछ भी कहे, इस आयु में प्रेम देना और प्रेम पाना ही स्त्रियों को समस्त सुख एवं सम्पूर्ण कर्तव्यों की अपेक्षा स्वभावतः अधिक महत्वपूर्ण जान पड़ता है । परन्तु विनोदा के में नवीन प्रेम की वर्षावारी-सिंचन के बदले पति, फफुग्रा-सास तथा अन्यान्य उच्च एवं उच्चतर लोगों के सम्मिलित प्रकाश से तर्जन गर्जन की शिला वृष्टि की ही व्य वस्था हुई। सभी उसे 'वन्ध्या' कहकर अपराधी ठहराते । एक फूल के पौधे को प्रकाश एवं वायु से रहित मकान में रखने से उसकी जो अवस्था होती है, विनोदा के वंचित-यौवन की भी वही अवस्था हुई । सदा सर्वदा इसी कानाफूसी एवं बकाबकी के बीच न ठहर पाने के कारण जब वह कुसुम के मकान में ताश खेलने जाती, उस उसे बहुत अच्छा लगता । वहाँ पुन्नामनरक की भोषण छाया सदैव वर्तमान न रहने से, हँसी-ठट्ठा भौर व हानियों में किसी प्रकार की बाधा नहीं थी । कुसुम जिस दिन ताश खेलने को साथी नहीं पाती, उस दिन अपने तरुण देवर नगेन्द्र को पकड़कर ले प्राती । नगेन्द्र और विनोदा की आपत्ति को यह हंसी में उड़ा देती । इस संसार में एक से दूसरा होता है एवं खेलने का क्रम संकट में परिगित हो सकता है-- इन सब गंभीर बातों पर अल्पायु में यकायक ही विश्वास नहीं होता । इस सम्बन्ध में नगेन्द्र की भी आपत्ति की दृढ़ता कुछ नहीं देखी गई; अब वह ताश खेलने के लिए अधिक बुलाहट की प्रीक्षा भी नहीं कर पाता । इस प्रकार विनोदा के साथ जगेन्द्र का अक्सर साक्षात्कार होने लगा आठ नगेन्द्र जब ताश खेलने के लिए बैठता, तब वाशों की अपेक्षा
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नई दिल्लीः एशिया कप के लिए भारत की 17 सदस्यीय टीम से लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल का बाहर होना कई लोगों के लिए हैरान करने वाला था. चयनकर्ताओं के इस फैसले पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं. हालांकि, अगरकर ने खुलकर इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है. एशिया कप के लिए भारत की 17 सदस्यीय टीम का ऐलान सोमवार को किया गया. लेकिन इस टीम में युजवेंद्र चहल का नाम नहीं था. इसके बाद कई सावल उठने लगे, आखिर क्यों चहल को टीम में जगह नहीं मिली.
एशिया कप के लिए टीम में भारत की गेंदबाजी लाइनअप में छह तेज गेंदबाजों के अलावा, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल और रवींद्र जडेजा के रूप में तीन स्पिनर शामिल हैं. चहल को बाहर किए जाने के बारे में पूछे जाने पर मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने कहा कि टीम में दो कलाई के स्पिनरों का होना मुश्किल है और कुलदीप कई मायने में चहल से आगे हैं.
वह भारत के लिए शानदार खिलाड़ी हैं. लेकिन कभी-कभी हमें टीम कॉम्बिनेशन को ध्यान में रखकर फैसला लेना होता है. अक्षर पटेल ने अच्छा प्रदर्शन किया है और वह बल्लेबाजी भी कर सकता है. कुलदीप यादव लगातार गेंद और बल्ले से शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. इस समय, दो कलाई के स्पिनरों को फिट करना मुश्किल हो सकता है.
कुलदीप फॉर्म में हैं, उन्होंने 2022 की शुरुआत से 19 एकदिवसीय मैचों में 34 विकेट लिए हैं. दूसरी ओर, चहल ने इस साल केवल दो एकदिवसीय मैच खेले हैं और केवल तीन विकेट लिए हैं. एक समय था जब कुलदीप और चहल दोनों एकदिवसीय मैचों में एक साथ खेलते थे, लेकिन अब भारतीय टीम में हरफनमौला खिलाड़ियों की भरमार के कारण केवल एक के लिए ही जगह बची है.
30 अगस्त से 17 सितंबर तक होने वाले एशिया कप के लिए भारत की टीम में एक और उल्लेखनीय बात ऑफ-स्पिन विकल्प का अभाव है. लेकिन अधिक तेज गेंदबाजी विकल्प रखने और बल्लेबाजी में गहराई लाने के लिए भारतीय टीम को इस कॉम्बिनेशन के साथ मैदान में उतरना होगा.
Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, बॉलीवुड, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल और गैजेट्स की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप.
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नई दिल्लीः एशिया कप के लिए भारत की सत्रह सदस्यीय टीम से लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल का बाहर होना कई लोगों के लिए हैरान करने वाला था. चयनकर्ताओं के इस फैसले पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं. हालांकि, अगरकर ने खुलकर इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है. एशिया कप के लिए भारत की सत्रह सदस्यीय टीम का ऐलान सोमवार को किया गया. लेकिन इस टीम में युजवेंद्र चहल का नाम नहीं था. इसके बाद कई सावल उठने लगे, आखिर क्यों चहल को टीम में जगह नहीं मिली. एशिया कप के लिए टीम में भारत की गेंदबाजी लाइनअप में छह तेज गेंदबाजों के अलावा, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल और रवींद्र जडेजा के रूप में तीन स्पिनर शामिल हैं. चहल को बाहर किए जाने के बारे में पूछे जाने पर मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने कहा कि टीम में दो कलाई के स्पिनरों का होना मुश्किल है और कुलदीप कई मायने में चहल से आगे हैं. वह भारत के लिए शानदार खिलाड़ी हैं. लेकिन कभी-कभी हमें टीम कॉम्बिनेशन को ध्यान में रखकर फैसला लेना होता है. अक्षर पटेल ने अच्छा प्रदर्शन किया है और वह बल्लेबाजी भी कर सकता है. कुलदीप यादव लगातार गेंद और बल्ले से शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. इस समय, दो कलाई के स्पिनरों को फिट करना मुश्किल हो सकता है. कुलदीप फॉर्म में हैं, उन्होंने दो हज़ार बाईस की शुरुआत से उन्नीस एकदिवसीय मैचों में चौंतीस विकेट लिए हैं. दूसरी ओर, चहल ने इस साल केवल दो एकदिवसीय मैच खेले हैं और केवल तीन विकेट लिए हैं. एक समय था जब कुलदीप और चहल दोनों एकदिवसीय मैचों में एक साथ खेलते थे, लेकिन अब भारतीय टीम में हरफनमौला खिलाड़ियों की भरमार के कारण केवल एक के लिए ही जगह बची है. तीस अगस्त से सत्रह सितंबर तक होने वाले एशिया कप के लिए भारत की टीम में एक और उल्लेखनीय बात ऑफ-स्पिन विकल्प का अभाव है. लेकिन अधिक तेज गेंदबाजी विकल्प रखने और बल्लेबाजी में गहराई लाने के लिए भारतीय टीम को इस कॉम्बिनेशन के साथ मैदान में उतरना होगा. Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, बॉलीवुड, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल और गैजेट्स की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप.
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अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलेन भारतीय दौरे पर हैं। आज उनकी भारत के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक थी, जिसमें कई जरूरी मुद्दों पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध 50 प्लस द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हुआ है और उनका सहयोग व्यापक और बहु-क्षेत्रीय है।
हमारे गहन आर्थिक और व्यावसायिक संबंधों का एक प्रमाण यह है कि दोनों देशों के बीच माल का द्विपक्षीय व्यापार 2021 में 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गया, जिससे यह भारत-अमेरिका आर्थिक इतिहास में माल व्यापार की सबसे बड़ी मात्रा बन गया।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रक्षा व्यापार लगभग 12 साल पहले शून्य से अब 20 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंच गया है। जैसे-जैसे हमारी रक्षा साझेदारी विकसित होती है, हमारा रक्षा उद्योग बढ़ रहा है, विशेष रूप से भारत और दुनिया के लिए इनोवेशन, साथ में विकास कार्यों को करने और प्रोडक्शन में अग्रणी बनने में दोनों देश एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।
वित्त मंत्री जेनेट येलेन के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए सीतारमण ने इस अवसर पर इस बात को रेखांकित किया कि वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच भारत एक उज्जवल स्थान के रूप में उभरा है। आप सभी जानते हैं कि वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। आईएमएफ के हाल ही में आए विश्व आर्थिक आउटलुक (11 अक्टूबर, 2022) के अनुसार, वैश्विक आर्थिक गतिविधि कई दशकों की तुलना में अधिक महंगाई के साथ व्यापक-आधारित और तेज-से-अपेक्षित मंदी का अनुभव कर रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक आर्थिक विकास के प्रभाव से अछूता नहीं है। हालांकि, भारत ने सामान्य से ऊपर दक्षिण-पश्चिम मानसून, सार्वजनिक निवेश, मजबूत कॉर्पोरेट बैलेंस शीट, उत्साहित उपभोक्ता और व्यावसायिक विश्वास और महामारी के घटते खतरे के समर्थन में अपने विकास प्रक्षेपवक्र को उकेरा है।
सीतारमण ने भारत सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत को लेकर किए गए विभिन्न सुधार उपायों को इकट्ठा करने के लिए भी सूचीबद्ध किया। उन्होनें कहा कि हम विदेशी पूंजी प्रवाह को भारत की विकास गाथा के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में पहचानते हैं। प्रमुख सुधारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) नियमों का सरलीकरण और युक्तिकरण, कुल विदेशी निवेश सीमा में वृद्धि, एफपीआई के पंजीकरण के लिए सामान्य आवेदन पत्र (सीएएफ) की शुरूआत और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) और पूरी तरह से सुलभ मार्ग (एफएआर) जैसे ऋण निवेश के नए चैनल खोलना शामिल है। इन उपायों की सफलता एफपीआई मार्ग के माध्यम से भारत में प्रवेश करने वाले निरंतर निवेश प्रवाह में परिलक्षित होती है। गौरतलब है कि अमेरिका भारत में एफपीआई निवेश का शीर्ष स्रोत देश है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका से एफपीआई की संपत्ति (एयूसी) 30 सितंबर, 2022 तक 234 अरब डॉलर के करीब है।
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अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलेन भारतीय दौरे पर हैं। आज उनकी भारत के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक थी, जिसमें कई जरूरी मुद्दों पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध पचास प्लस द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हुआ है और उनका सहयोग व्यापक और बहु-क्षेत्रीय है। हमारे गहन आर्थिक और व्यावसायिक संबंधों का एक प्रमाण यह है कि दोनों देशों के बीच माल का द्विपक्षीय व्यापार दो हज़ार इक्कीस में एक सौ अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गया, जिससे यह भारत-अमेरिका आर्थिक इतिहास में माल व्यापार की सबसे बड़ी मात्रा बन गया। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रक्षा व्यापार लगभग बारह साल पहले शून्य से अब बीस अरब डॉलर से अधिक तक पहुंच गया है। जैसे-जैसे हमारी रक्षा साझेदारी विकसित होती है, हमारा रक्षा उद्योग बढ़ रहा है, विशेष रूप से भारत और दुनिया के लिए इनोवेशन, साथ में विकास कार्यों को करने और प्रोडक्शन में अग्रणी बनने में दोनों देश एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। वित्त मंत्री जेनेट येलेन के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए सीतारमण ने इस अवसर पर इस बात को रेखांकित किया कि वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच भारत एक उज्जवल स्थान के रूप में उभरा है। आप सभी जानते हैं कि वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। आईएमएफ के हाल ही में आए विश्व आर्थिक आउटलुक के अनुसार, वैश्विक आर्थिक गतिविधि कई दशकों की तुलना में अधिक महंगाई के साथ व्यापक-आधारित और तेज-से-अपेक्षित मंदी का अनुभव कर रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक आर्थिक विकास के प्रभाव से अछूता नहीं है। हालांकि, भारत ने सामान्य से ऊपर दक्षिण-पश्चिम मानसून, सार्वजनिक निवेश, मजबूत कॉर्पोरेट बैलेंस शीट, उत्साहित उपभोक्ता और व्यावसायिक विश्वास और महामारी के घटते खतरे के समर्थन में अपने विकास प्रक्षेपवक्र को उकेरा है। सीतारमण ने भारत सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत को लेकर किए गए विभिन्न सुधार उपायों को इकट्ठा करने के लिए भी सूचीबद्ध किया। उन्होनें कहा कि हम विदेशी पूंजी प्रवाह को भारत की विकास गाथा के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में पहचानते हैं। प्रमुख सुधारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक नियमों का सरलीकरण और युक्तिकरण, कुल विदेशी निवेश सीमा में वृद्धि, एफपीआई के पंजीकरण के लिए सामान्य आवेदन पत्र की शुरूआत और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग और पूरी तरह से सुलभ मार्ग जैसे ऋण निवेश के नए चैनल खोलना शामिल है। इन उपायों की सफलता एफपीआई मार्ग के माध्यम से भारत में प्रवेश करने वाले निरंतर निवेश प्रवाह में परिलक्षित होती है। गौरतलब है कि अमेरिका भारत में एफपीआई निवेश का शीर्ष स्रोत देश है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका से एफपीआई की संपत्ति तीस सितंबर, दो हज़ार बाईस तक दो सौ चौंतीस अरब डॉलर के करीब है।
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क्या आप जानते हैं कि ठंडे पानी में कुछ देर बैठने से भी शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचाए जा सकते हैं. यहां हम कोल्ड इम्मर्सन की बात कर रहे हैं जिसे कोल्ड थेरेपी या क्रायोथेरेपी के रूप में भी जाना जाता है.
क्या आप जानते हैं कि ठंडे पानी में कुछ देर बैठने से भी शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचाए जा सकते हैं. यहां हम कोल्ड इम्मर्सन की बात कर रहे हैं जिसे कोल्ड थेरेपी या क्रायोथेरेपी के रूप में भी जाना जाता है. बीते कुछ समय में ये हेल्थ बेनिफिट्स के चलते लोगों के बीच काफी पॉपुलर हुई है. इसमें कोल्ड शॉवर्स, आई बाथ और दूसरे तरीकों को शामिल किया जाता है. इस आर्टिकल में हम आपको कोल्ड थेरेपी क्या होती है, इसके फायदे क्या है और इसके कुछ रिस्क के बारे में बताने जा रहे हैं. जानिए.
कोल्ड थेरेपी में हमें ठंडे पानी के अंदर बैठना होता है जिसका तापमान करीब-करीब 60 डिग्री फारेनाइट होता है. इस तापमान को हम 50 डिग्री फारेनाइट तक भी रख सकते हैं. इस तरह की थेरेपी का ट्रेंड काफी बढ़ रहा है क्योंकि ये काफी अलग है और इसके फायदे भी हैं.
अंग्रेजी वेबसाइट हेल्थलाइन के मुताबिक इस तरह की थेरेपी से नसों में रक्त के प्रवाह को दुरुस्त बनाया जा सकता है. इसके अलावा शरीर में कहीं अगर सूजन है तो उसे कम किया जा सकता है और एनर्जी को बूस्ट तक किया जा सकता है. इससे लोगों को बेहतर फील होता है और उनकी हेल्थ तक इंप्रूव होती है.
अगर आप कोल्ड थेरेपी के दौरान ज्यादा देर शरीर को बर्फ के अंदर रखते हैं तो इसका बुरा प्रभाव स्किन पर नजर आ सकता है.
इससे स्किन पर रेडनेस हो सकती है और इस प्रॉब्लम को दूर होने में समय लग सकता है.
कई बार लोगों को इस थेरेपी की वजह से दर्द या सूजन हो सकती है और अगर ये समस्या 48 घंटे में कम न हो तो डॉक्टर से कांटेक्ट करना चाहिए.
जिन लोगों को दिल से जुड़ी बीमारियां हो उन्हें इस थेरेपी को अपनाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट से जरूर सलाह लेनी चाहिए.
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क्या आप जानते हैं कि ठंडे पानी में कुछ देर बैठने से भी शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचाए जा सकते हैं. यहां हम कोल्ड इम्मर्सन की बात कर रहे हैं जिसे कोल्ड थेरेपी या क्रायोथेरेपी के रूप में भी जाना जाता है. क्या आप जानते हैं कि ठंडे पानी में कुछ देर बैठने से भी शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचाए जा सकते हैं. यहां हम कोल्ड इम्मर्सन की बात कर रहे हैं जिसे कोल्ड थेरेपी या क्रायोथेरेपी के रूप में भी जाना जाता है. बीते कुछ समय में ये हेल्थ बेनिफिट्स के चलते लोगों के बीच काफी पॉपुलर हुई है. इसमें कोल्ड शॉवर्स, आई बाथ और दूसरे तरीकों को शामिल किया जाता है. इस आर्टिकल में हम आपको कोल्ड थेरेपी क्या होती है, इसके फायदे क्या है और इसके कुछ रिस्क के बारे में बताने जा रहे हैं. जानिए. कोल्ड थेरेपी में हमें ठंडे पानी के अंदर बैठना होता है जिसका तापमान करीब-करीब साठ डिग्री फारेनाइट होता है. इस तापमान को हम पचास डिग्री फारेनाइट तक भी रख सकते हैं. इस तरह की थेरेपी का ट्रेंड काफी बढ़ रहा है क्योंकि ये काफी अलग है और इसके फायदे भी हैं. अंग्रेजी वेबसाइट हेल्थलाइन के मुताबिक इस तरह की थेरेपी से नसों में रक्त के प्रवाह को दुरुस्त बनाया जा सकता है. इसके अलावा शरीर में कहीं अगर सूजन है तो उसे कम किया जा सकता है और एनर्जी को बूस्ट तक किया जा सकता है. इससे लोगों को बेहतर फील होता है और उनकी हेल्थ तक इंप्रूव होती है. अगर आप कोल्ड थेरेपी के दौरान ज्यादा देर शरीर को बर्फ के अंदर रखते हैं तो इसका बुरा प्रभाव स्किन पर नजर आ सकता है. इससे स्किन पर रेडनेस हो सकती है और इस प्रॉब्लम को दूर होने में समय लग सकता है. कई बार लोगों को इस थेरेपी की वजह से दर्द या सूजन हो सकती है और अगर ये समस्या अड़तालीस घंटाटे में कम न हो तो डॉक्टर से कांटेक्ट करना चाहिए. जिन लोगों को दिल से जुड़ी बीमारियां हो उन्हें इस थेरेपी को अपनाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट से जरूर सलाह लेनी चाहिए.
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(५) शीलः परस्परमें शोल और सदाचारका हो नाता था । शील और सदाचारमें कमी आने पर साधु-साध्वी गणसे अलग कर दिये जाते थे। शिष्योंको भी अधिकार दिया गया था कि असदाचारी, दुःशील माचार्यको परित्यक्त कर सकें। संघकी नींव सदाचार, उपासना और गुण-पूजा पर अवस्थित यो । "भिक्षुक हो या गृहस्थ, जो सुव्रती होता है, वही दिव्यगति प्राप्त करता है।" यह भगवान्को शाश्वत शिक्षा थी। " दुःशील साधु नरकसे नहीं बच सकता और गृहवासमें बसता हुआ भी सुव्रती शिक्षा सम्पन्न हो तो देवलोक प्राप्त करता है।" "गृहस्य संयममें श्रेष्ठ हो सकता है, पर सुशील साधु गृहस्थ संयमीसे हमेशा उत्तम होता है ।" उपर्युक्त शिक्षा में भगवान्ने शोलकी महिमा बतलाई है और गृहस्य - साधु सबको दुःशील छोड़ उत्तम से उत्तम संयमकी भोर आकृष्ट किया है। संयम और तपकी उपासना ही संघको उत्तम साधना रही ।
( ६ ) मैत्री : परस्पर व्यवहार में मृदुता और मंत्रीभावको बहुत ही उच्च स्थान दिया गया था। साधु, श्रावक, साध्वी, श्राविका - सबको मंत्री - भावनाका उपदेश रात-दिन मिलता था । "सबको आत्माके समान मानो ।" "सब भूतोंके प्रति मंत्रीभाव रखखां । " परस्पर मनोमालिन्यको इन्हीं भावोंकी उपासना द्वारा दूर रखा जाता है । आगममें ऐसे अनेक प्रसंग मिलते हैं, जबकि मंत्री भावना के प्रसार
१ - उत्तराध्ययन सूत्र : अ० २७ : १०, १६ २ - उत्तराध्ययन सूत्र : म० ५ : २२ ३- उत्तराध्ययन सूत्रः ०५ : २२, २४ ४- उत्तराध्ययन सूत्र : अ० ५ : २०
द्वारा उत्तमार्थसाधा गया। प्रतिमुक्तक नामक एक बालवयस्क कुमार साधु थे । । एक बार उन्होंने वर्षा के जलको पालसे बांध, उसमें अपने पात्रको तिरा दिया। स्थविर साधुओंने पूछा- "भदन्त ! आपका कुमार श्रमण अतिमुक्तक कितने भव करने के बाद सिद्ध होगा ?" भगवान् बोले- "वह इस भषको पूरा करके ही सिद्ध होगा। तुम लोग उसकी अवहेलना, निन्दा, तिरस्कार और अपमान मत करो, पर अम्लानभावसे उसकी सहायता करो, सम्भाल करो और सेवा करो।" इस तरह मृदुभाव - मंत्री भाबको जगा भगवान् संघमें बड़ा प्रेम और सौहार्द रखाते । ऐसी ही एक दूसरी घटना मिलती है। एक बार शंख नामक एक श्रमणोपासकने अपने मित्रों के साथ सहल करनेका तय किया। निश्चयानुसार मित्रोंने भोजन बना डाला । पर बादमें शंखने यह सोच कि इस तरह खान-पान, मौज-शौक करना श्रेयस्कर नहीं ब्रह्मचर्य रख, उपवास करते हुए पौषध ठाम दिया। दूसरे दिन सुबह श्रमणोपासकोंने उसे उलाहना दिया। भगवान् बोले"आर्यो ! तुमलोग शंखकी हीला, निन्दा, अपमान मत करो; कारण वह धर्म में प्रीतिषाला और दृढ़ है। उसने प्रमाद और निद्राको त्याग धर्म जागरिका की है।" इसके बाद भगवान्ने बतलाया कि क्रोध करनेवालेंकी कैसी दुर्गति होती है । श्रमणोपासकोंने शंखसे क्षमा मांगी। हृदय-शुद्धि करानेका एक तीसरा प्रसंग इस प्रकार हैश्रेणिक के पुत्र मेघकुमारने दीक्षा ली। रात में उसकी शय्या अन्त में होने से श्रमणोंके माने जाने और उनके पैरोंकी धूल उसके शरीर पर
१ - भगवती सूत्र : श० ५ उ० ४ : ११ २ - भगवती सूत्र : श० १२ उ० १
मिरनेके कारण उसे नींद न आई। वेद-खिन्न हो प्रातः होते ही उसने घर चले जाने की ठान ली। सुबह भगवान्ने मेषकुमारको प्रतिबोधित करते हुए कहा - "हे मेषं ! पिछले भबमें तू हाथी था। वनमें दावामल सुलग गया, जंगलके पशु एक जगह एकत्रित हो गये । तू भी उममें था। तेरे शरीर में खुजलाहट होने लगी। तूने शरीर खुजलाने के लिए एक पैर उंचा उठाया। भीड़ के दबाव से एक खरगोश उस पर के स्थान में प्रा घुसा। पैर रखनेका स्थान न रहा। कहीं खरगोश न मारा जाय इस भयसे तूने अपना पर अधर रखा। इस तरह २।। दिन तक तू तीन पैर पर ही खड़ा रहा। दावानल बुझा। खरगोश हटा । तूने पैर फैला जमीन पर रखने की चंष्टा की। तीन पैरके बल खड़ा रहने से तेरा शरीर अकड़ गया और वहीं जमीन पर तेरी मृत्यु हुई । हे मेघ ! तूने पशु योनियों में इतनी सहनशीलता - इतना समभाव दिखलाया; अब तो तुझमें अधिक बल, वीर्य, पुरुषार्थ, पराक्रम और विवेक हूँ। भोग-विलास छोड़ तूने मेरे पास दीक्षा ली है । श्रमणोंके आवागमनसे पड़ती धूलके कारण तू इतना व्याकुल हो गया ?" मेघ मारका मन शान्त हुआ। उसकी प्रांखों में हर्षाश्रु छा गये । वह बोला - " भवन्त ! प्राजसे मेरा यह शरीर श्रमणोंकी सेवामें समर्पित है।" भगवान्ने उसे फिरसे प्रव्रज्या दी और वह किस तरह संयममें सावधान रहे यह बतलाया' । भगवान् प्रेमभाव और परस्पर सद्भावना को किस तरह स्थापित करते, यह उसका ज्वलंत उदाहरण है। मनमें जहां थोड़ासा भी खटास देखते उसे दूर करते पोर मंत्रोभावकी ऊर्मियां भर देते। एक अन्य घटना तो धौर भी हृदयस्पर्शी है। एक बारका
१ -शाताषर्मकथा : अ० १
प्रसंग है कि महाशतक नामक एक प्रतिमाघारी उपासक संकेषण । व्रत धारण कर पौषधशाला में धर्मध्यान कर रहा था। उसकी पत्नी रेवती इतनी क्रूर थो कि उसने अपने बारह सौखोंको मौत के घाट उतार दिया था। वह गौ मांस और मदिरा तकका खान-पान करती। एक मदोन्मत्त हो, वह पौषधशाला में महाशतक के पास आई वस्त्र गिरा दिए मौर विषयांभ हो कहने लगी, "यदि तुमने मेरे साथ भोग नहीं भोगा हो स्वर्ग मोक्षके सुख लेकर क्या होगा ?" महाशतकको क्रोम चढ़ आया। वह बोला- "अप्रार्थकी प्रार्थना करनेवाली ! काली चतुर्दशी की जन्मी ! लज्जाहीन ! तू सात दिनके अन्दर रोगाकान्त हो मृत्यु प्राप्त कर नरक में उत्पन्न होगी।" रेवती भयभीत हो गई। "न माहूम मुझे कैसी मौत मरना होगा।" भगवान्ने गौतमसे कहा - "जाबो गौतम ! गायापतिसे कहो 'श्रमरणोपासकको ख़ास कर अपश्चिम मरणान्तिक संलेषणा करनेवालेको सत्य होने पर भी अनिष्टकारी, अप्रिय, प्रौर अमनोश वचन कहना नहीं कल्पता । उसने रेवतीको संतामकारी वचन कहे हैं उसकी वह मालोचना करें।" गो मांस खानेवाली, मदिरा पीनेवाली स्त्री के प्रति भी उदार भावनाका स्रोत बहा भगवान् ने आलोचना करवाई। परस्पर व्यवहार में जिसकी त्रुटि होती उसीको क्षमा याचनार्थ कहते । साधु और श्रावक इनमें कोई भेद नहीं रखते थे । अपराधी साधु भी गृहस्थ उपासकसे क्षमा मांगनेका पात्र होता । एक बार प्रधान शिष्य इन्द्रभूति गौतम तकको भगवान्ने मानन्द श्रावक से क्षमा याचना करने के लिए भेजा था ।
१ - उवासगदसाओ : ०८
२ - उपासकदसाओ : अ० १
(७) समभाव -प्राध्यात्मिक क्षेत्र में सबकी समानता के सिद्धान्तको संघ- सञ्चालनमें बड़ा उच्च स्थान दिया गया था। धनी निर्धनका अन्तर नहीं था। आर्य प्रनार्यका अन्तर नहीं माना जाता था । वर्णभेद, जाति भंद, गौत्र भेद, रूप भंद, शरीर भेदको स्थान नहीं था । सब प्रव्रजित हो सकते थं' । कुल मद, वर्ण मदको जघन्य और त्याज्य माना गया था। 'जातिकी कोई विशेषता नहीं होती, संयम और तपकी ही विशेषता होती है - इस सिद्धान्तका व्यापक प्रचार था । 'जाति प्रादिका मद करनेवाले पुरुषको जाति या कुल उसकी रक्षा नहीं कर सकते। अच्छी तरह सेवन किए हुए ज्ञान और चारित्रके सिवाय कोई भी पदार्थ जीवकी रक्षा करने में समर्थ नहीं ।' 'जो गौरवी बोर श्लोककामी होता है वह निष्किञ्चन और रूक्षभोजी होने पर भी अज्ञानी है। वह पुनः पुनः संसार भ्रमण करेगा।' 'धीर पुरुष मद स्थानोंको अलग करे। जो धर्मी इनका सेवन नहीं करते वे सब गौत्रोंसे छुटे हुए महर्षि उच्च अगोत्र गति मोक्षको पाते हैं।' 'मुनि गौत्र या दूसरी बातोंका मद न करें ।' 'परनिन्दा पापकारिणी होती है यह बाने। 'यदि एक अनायक - स्वयं प्रभु - चक्रवर्ती प्रादि हो और दूसरा दासका दास हो तो भी संयम मार्ग में आने के बाद परस्पर ब्यवहारमें लज्जा नहीं करनी चाहिए । सदा समभावसे व्यवहार करना चाहिए।
१ - सूत्रकृतांग सूत्र : श्रु० २ ० १ : ३५ उत्तराध्ययन सूत्र : अ० १२ : १ २ - सूत्रकृतांग श्रु० १ अ० १३ : १०, १५, उत्तराध्ययन सूत्र १२ : ३७
स्त्री पुरुष दोनोंको धर्म पालनका समान हक था। बुद्धके संघर्म भी श्रमणियां थीं पर बुद्धने अपने शिष्य आनन्दके बहुत हट करने के बाद ही स्त्रियोंके लिए प्रव्रज्याका मार्ग खोला था। वे बराबर कहते रहे - "मत रुवं कि स्त्रियां भी तथागतके दिखाए धर्म - विनयमें घर से बेघर हो प्रव्रज्या पावै ।" स्त्रियोंके लिए बाठ गुरु धर्म - संकीर्ण शर्तें थी। जो स्त्रियां इन्हें स्वीकार करती वे ही प्रव्रज्या पा सकती। अन्त तक उनकी यह धारणा बनी रही कि स्त्रियों को प्रव्रजित करनेसे संघकी आयुमें क्षीणता आ गई । "यदि तथागत प्रवेदित धर्म - विनयमें स्त्रियां प्रव्रज्या न पाती तो यह ब्रह्मचर्य चिरस्थायी होता, सद्धर्म सहस्र वर्ष तक ठहरता पर अब वह पांच सौ वर्ष ही ठहरेगा'।" भगवान् वर्द्धमानने अपने संघ में श्रमण श्रमणियोंका समान अधिकार रखा और स्त्रियोंकी पवित्र रहने की शक्तिमें कभी शंकाको स्थान नहीं दिया। साधु-साध्वियां दोनों के लिए सूक्ष्म ब्रह्मचर्य के नियम दिए । संघमें श्रमणियोंकी बहुत बड़ी संख्या होने पर भी भ्रष्टाचार जरा भी नहीं फल पाया । अत्यन्त कुशलता और दृढ़ अनुशासनशीलतासे ही यह
सम्भव था ।
(८) प्रमोदः - मंत्री भावनाके प्रचार द्वारा जिस तरह सहृदयता को कायम रखा जाता था उसी तरह प्रमोद भावनाके विकास द्वारा संघमें नवीन जीवन शक्तिको सदा संचारित रखा जाता था। जिस साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाम गुण देखते, भगवान् उसकी प्रशंसा सबके सामने कर गुणमें आनन्द भावना - प्रमोद भावनाको जागृत करते। ऐसे प्रसंग मिलते हैं जब कि गृहस्थ उपासकको प्रादर्श बतला
१ - विनय पिटक ( भिक्षुणी-स्कंधक ) १० ५१९-५२१,
र श्रमण श्रमणियोंको उसके जीवनसे शिक्षा ग्रहण करनेका उपदेश भगवान्ने दिया। एकबार कामदेव नामक श्रमणोपासककी प्रशंसा करते हुए श्रमण श्रमणियोंसे भगवान्ने कहाः- "घरमें बसते हुए इस श्रमणोपासकमे देव, मनुष्य और पशुकृत उपसर्गोंको बड़े समभावसे संहन करते हुए व्रत पालनमें इतनी दृढ़ता दिखलाई, फिर श्रमण-श्रमजियोंको तो अपना आचार - चरित्र सुरक्षित रखने के लिए हमेशा चौकस रहना चाहिए। जरा भी चलित नहीं होना चाहिये और जो उपसर्ग उपस्थित हों उन्हें सहन करना चाहिए।" इसी तरह एक बार अन्य तोर्थकोंको जंन रहस्य से भरपूर, युक्तिपुरस्सर सुन्दर उत्तर देने के लिए भगवान्ने मद्रुक और कुंडकौलिक श्रावक की मुक्त कंठसे प्रशंसा की थी। इस प्रमोद भावना - दूसरोंके गुणोंमें मुदिता भावना के प्रसारसे संघमें एक बड़ी दृढ़ शक्ति पैदा हो गई थी और सद्गुणोंकी निशदिन वृद्धि होती जाती थी।
पार्श्वनाथके श्रमण और एकीकरण
हम ऊपर एक जगह कह पाये हैं कि भगवान् के माता-पिता पश्र्विनाथके श्रमरणों के उपासक थं १ जब भगवान् एक तीर्थ करके रूपमें धर्म प्रचार करने लगे उस समय भी पार्श्वनाथ के अनुयायी साधु व उनके संघ विद्यमान थे। एक बार भगवान् के राजगृह पधारनेके अवसर पर पार्श्वनायके अनुयायी ५०० साघुंओंका एक संघ तुंगिका
१ - उपासगदसा सूत्रः ० २ : २९, ३०, ३१ २ - भगवती सूत्र श० १८ उ० ७ : १५,
उपासकदशा सूत्र प० ६ः१०, ११, १२
नगरी में आया था। तुंगिका नगरीमें जैन गृहस्य बहुत बड़ी संख्या में रहते थे और वे सब पार्श्वनाथके श्रमणोंके अनुयायी थे, ऐसा वर्णनसे प्रतीत होता है। पार्श्वनाथके वंशके कालास्यवेषिपुत्र नामक साधुका श्रमण महावीरके स्थविरोंके साथ सम्पर्क हुआ था, ऐसा भी उल्लेख मिलता है। पार्श्वनाथ के शिष्य के शीश्रमणके संघका उल्लेख उत्तराध्ययन सूत्रमें आया है। वाणिज्य ग्राममें जिन गांगेय श्रमणके साथ भगवान्का प्रश्नोत्तर हुमा था वे भी पार्श्वपात्य हो थे । निर्ग्रन्थ उदक पेढालपुत्रका उल्लेख सूत्रकृतांग में मिलता है। इन सबसे प्रकट होता है कि पार्श्वनाथकी परम्परा के अनेक श्रमण उस समय विद्यमान थे ।
पाश्र्वंपात्य निर्ग्रन्थ श्रमणोंके प्रति महावीर और उनके श्रमणोंका बहुमान ही देखा जाता है। तुंगिकानगरीमें जिन ५०० श्रमणोंके प्राने की बात है उनका वर्णन बड़े हो आदरपूर्ण और प्रशंसात्मक शब्दों में है भौर उन्हें विनय, ज्ञान, दर्शन और चारित्रयुक्त बताया गया है । उन्हें विशेष ज्ञानी भी कहा गया है । ऐसे श्रमय ब्राह्मणोंकीपर्यु - पासनाका फल भगवान्ने सिद्धि प्राप्ति तक बतलाया है। इससे प्रतीत होता है कि पार्श्वपात्य साधु और निजके साधुओं में भगवान् कोई मूल
१ - भगवती सूत्र : श० २ उ० ५ : १३ -
३ - भगवती सूत्र : श० १ उ० ९ः१५
४ - उत्तराध्ययन सूत्र : अ० २३ : १-३
५ - भगवती सूत्र : श० ९ उ० ३२ : १, ३४
६ - सूत्रकृतांग : श्रु० २ अ० ७ः४
भन्तर नहीं समझते थे । पूर्वोक्त श्रमणोंमें अनेक बहुश्रुत पौर श्रुतज्ञांनी थे। एकबार गणधर गौतम स्वयं पार्श्वपात्य केशीकुमारके पास गये थे और ज्येष्ठ तीर्थंकरके साधुओंके पास उनका जाना ही उन्हें ठीक प्रतीत हुआ था। यह भी बहुमानका ही परिचायक था। इससे मालूम होता है कि भगवान्, पार्श्वनाथको अपना ज्येष्ठ तीर्थङ्कर मानते थे ।
केशो और गौतमके परस्पर सम्मेलन के बाद तो दोनों संघोंके शामिल होनेका मार्ग ही खुल गया । इस सम्मेलनका विस्तृत वर्णन उतराध्ययन सूत्र म० २३ में मिलता है, जिसका सार इस प्रकार हैः
"लोकमें प्रदीप समान जिन तीर्थङ्कर पार्श्वनाथके विद्या और माचरण में पारङ्गत केश कुमार नामक एक महायशस्वी श्रमण थे । वे एक बार ग्रामानुग्राम विहार करते शिष्य संघके साथ श्रावस्ती नगरीमें मा पहुँचे और उस नगरके तिंदुक नामक उद्यान में प्रासुक शय्या-संस्तारक ग्रहण कर ठहरे। उसी अमें लोकविश्रुत धर्मतीयंकर वर्द्धमानके महायशस्वी और विद्या तथा प्राचारमें पारङ्गत शिष्य गौतम भी शिष्य समुदाय के साथ उसी नगरमें आ पहुंचे और कोष्ठक उद्यान में ठहरे (१-८) ।
" उस समय उन दोनों के शिष्य संघमें यह चिन्ता हुई : 'वर्द्धमान द्वारा उपदिष्ट पांच शिक्षावाला यह धर्म कैसा मौर महामुनि पार्श्व द्वारा उपदिष्ट यह चार यामवाला धर्म कैसा ? भोर अचेलक - वस्त्र
१ - भगवनी सू० : श० २ उ०५ : १३
उत्तराध्ययनः प्र० २३ : ३
२ - उत्तराध्ययन सू० : अ० १३ : १५
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शीलः परस्परमें शोल और सदाचारका हो नाता था । शील और सदाचारमें कमी आने पर साधु-साध्वी गणसे अलग कर दिये जाते थे। शिष्योंको भी अधिकार दिया गया था कि असदाचारी, दुःशील माचार्यको परित्यक्त कर सकें। संघकी नींव सदाचार, उपासना और गुण-पूजा पर अवस्थित यो । "भिक्षुक हो या गृहस्थ, जो सुव्रती होता है, वही दिव्यगति प्राप्त करता है।" यह भगवान्को शाश्वत शिक्षा थी। " दुःशील साधु नरकसे नहीं बच सकता और गृहवासमें बसता हुआ भी सुव्रती शिक्षा सम्पन्न हो तो देवलोक प्राप्त करता है।" "गृहस्य संयममें श्रेष्ठ हो सकता है, पर सुशील साधु गृहस्थ संयमीसे हमेशा उत्तम होता है ।" उपर्युक्त शिक्षा में भगवान्ने शोलकी महिमा बतलाई है और गृहस्य - साधु सबको दुःशील छोड़ उत्तम से उत्तम संयमकी भोर आकृष्ट किया है। संयम और तपकी उपासना ही संघको उत्तम साधना रही । मैत्री : परस्पर व्यवहार में मृदुता और मंत्रीभावको बहुत ही उच्च स्थान दिया गया था। साधु, श्रावक, साध्वी, श्राविका - सबको मंत्री - भावनाका उपदेश रात-दिन मिलता था । "सबको आत्माके समान मानो ।" "सब भूतोंके प्रति मंत्रीभाव रखखां । " परस्पर मनोमालिन्यको इन्हीं भावोंकी उपासना द्वारा दूर रखा जाता है । आगममें ऐसे अनेक प्रसंग मिलते हैं, जबकि मंत्री भावना के प्रसार एक - उत्तराध्ययन सूत्र : अशून्य सत्ताईस : दस, सोलह दो - उत्तराध्ययन सूत्र : मशून्य पाँच : बाईस तीन- उत्तराध्ययन सूत्रः पाँच : बाईस, चौबीस चार- उत्तराध्ययन सूत्र : अशून्य पाँच : बीस द्वारा उत्तमार्थसाधा गया। प्रतिमुक्तक नामक एक बालवयस्क कुमार साधु थे । । एक बार उन्होंने वर्षा के जलको पालसे बांध, उसमें अपने पात्रको तिरा दिया। स्थविर साधुओंने पूछा- "भदन्त ! आपका कुमार श्रमण अतिमुक्तक कितने भव करने के बाद सिद्ध होगा ?" भगवान् बोले- "वह इस भषको पूरा करके ही सिद्ध होगा। तुम लोग उसकी अवहेलना, निन्दा, तिरस्कार और अपमान मत करो, पर अम्लानभावसे उसकी सहायता करो, सम्भाल करो और सेवा करो।" इस तरह मृदुभाव - मंत्री भाबको जगा भगवान् संघमें बड़ा प्रेम और सौहार्द रखाते । ऐसी ही एक दूसरी घटना मिलती है। एक बार शंख नामक एक श्रमणोपासकने अपने मित्रों के साथ सहल करनेका तय किया। निश्चयानुसार मित्रोंने भोजन बना डाला । पर बादमें शंखने यह सोच कि इस तरह खान-पान, मौज-शौक करना श्रेयस्कर नहीं ब्रह्मचर्य रख, उपवास करते हुए पौषध ठाम दिया। दूसरे दिन सुबह श्रमणोपासकोंने उसे उलाहना दिया। भगवान् बोले"आर्यो ! तुमलोग शंखकी हीला, निन्दा, अपमान मत करो; कारण वह धर्म में प्रीतिषाला और दृढ़ है। उसने प्रमाद और निद्राको त्याग धर्म जागरिका की है।" इसके बाद भगवान्ने बतलाया कि क्रोध करनेवालेंकी कैसी दुर्गति होती है । श्रमणोपासकोंने शंखसे क्षमा मांगी। हृदय-शुद्धि करानेका एक तीसरा प्रसंग इस प्रकार हैश्रेणिक के पुत्र मेघकुमारने दीक्षा ली। रात में उसकी शय्या अन्त में होने से श्रमणोंके माने जाने और उनके पैरोंकी धूल उसके शरीर पर एक - भगवती सूत्र : शशून्य पाँच उशून्य चार : ग्यारह दो - भगवती सूत्र : शशून्य बारह उशून्य एक मिरनेके कारण उसे नींद न आई। वेद-खिन्न हो प्रातः होते ही उसने घर चले जाने की ठान ली। सुबह भगवान्ने मेषकुमारको प्रतिबोधित करते हुए कहा - "हे मेषं ! पिछले भबमें तू हाथी था। वनमें दावामल सुलग गया, जंगलके पशु एक जगह एकत्रित हो गये । तू भी उममें था। तेरे शरीर में खुजलाहट होने लगी। तूने शरीर खुजलाने के लिए एक पैर उंचा उठाया। भीड़ के दबाव से एक खरगोश उस पर के स्थान में प्रा घुसा। पैर रखनेका स्थान न रहा। कहीं खरगोश न मारा जाय इस भयसे तूने अपना पर अधर रखा। इस तरह दो।। दिन तक तू तीन पैर पर ही खड़ा रहा। दावानल बुझा। खरगोश हटा । तूने पैर फैला जमीन पर रखने की चंष्टा की। तीन पैरके बल खड़ा रहने से तेरा शरीर अकड़ गया और वहीं जमीन पर तेरी मृत्यु हुई । हे मेघ ! तूने पशु योनियों में इतनी सहनशीलता - इतना समभाव दिखलाया; अब तो तुझमें अधिक बल, वीर्य, पुरुषार्थ, पराक्रम और विवेक हूँ। भोग-विलास छोड़ तूने मेरे पास दीक्षा ली है । श्रमणोंके आवागमनसे पड़ती धूलके कारण तू इतना व्याकुल हो गया ?" मेघ मारका मन शान्त हुआ। उसकी प्रांखों में हर्षाश्रु छा गये । वह बोला - " भवन्त ! प्राजसे मेरा यह शरीर श्रमणोंकी सेवामें समर्पित है।" भगवान्ने उसे फिरसे प्रव्रज्या दी और वह किस तरह संयममें सावधान रहे यह बतलाया' । भगवान् प्रेमभाव और परस्पर सद्भावना को किस तरह स्थापित करते, यह उसका ज्वलंत उदाहरण है। मनमें जहां थोड़ासा भी खटास देखते उसे दूर करते पोर मंत्रोभावकी ऊर्मियां भर देते। एक अन्य घटना तो धौर भी हृदयस्पर्शी है। एक बारका एक -शाताषर्मकथा : अशून्य एक प्रसंग है कि महाशतक नामक एक प्रतिमाघारी उपासक संकेषण । व्रत धारण कर पौषधशाला में धर्मध्यान कर रहा था। उसकी पत्नी रेवती इतनी क्रूर थो कि उसने अपने बारह सौखोंको मौत के घाट उतार दिया था। वह गौ मांस और मदिरा तकका खान-पान करती। एक मदोन्मत्त हो, वह पौषधशाला में महाशतक के पास आई वस्त्र गिरा दिए मौर विषयांभ हो कहने लगी, "यदि तुमने मेरे साथ भोग नहीं भोगा हो स्वर्ग मोक्षके सुख लेकर क्या होगा ?" महाशतकको क्रोम चढ़ आया। वह बोला- "अप्रार्थकी प्रार्थना करनेवाली ! काली चतुर्दशी की जन्मी ! लज्जाहीन ! तू सात दिनके अन्दर रोगाकान्त हो मृत्यु प्राप्त कर नरक में उत्पन्न होगी।" रेवती भयभीत हो गई। "न माहूम मुझे कैसी मौत मरना होगा।" भगवान्ने गौतमसे कहा - "जाबो गौतम ! गायापतिसे कहो 'श्रमरणोपासकको ख़ास कर अपश्चिम मरणान्तिक संलेषणा करनेवालेको सत्य होने पर भी अनिष्टकारी, अप्रिय, प्रौर अमनोश वचन कहना नहीं कल्पता । उसने रेवतीको संतामकारी वचन कहे हैं उसकी वह मालोचना करें।" गो मांस खानेवाली, मदिरा पीनेवाली स्त्री के प्रति भी उदार भावनाका स्रोत बहा भगवान् ने आलोचना करवाई। परस्पर व्यवहार में जिसकी त्रुटि होती उसीको क्षमा याचनार्थ कहते । साधु और श्रावक इनमें कोई भेद नहीं रखते थे । अपराधी साधु भी गृहस्थ उपासकसे क्षमा मांगनेका पात्र होता । एक बार प्रधान शिष्य इन्द्रभूति गौतम तकको भगवान्ने मानन्द श्रावक से क्षमा याचना करने के लिए भेजा था । एक - उवासगदसाओ : आठ दो - उपासकदसाओ : अशून्य एक समभाव -प्राध्यात्मिक क्षेत्र में सबकी समानता के सिद्धान्तको संघ- सञ्चालनमें बड़ा उच्च स्थान दिया गया था। धनी निर्धनका अन्तर नहीं था। आर्य प्रनार्यका अन्तर नहीं माना जाता था । वर्णभेद, जाति भंद, गौत्र भेद, रूप भंद, शरीर भेदको स्थान नहीं था । सब प्रव्रजित हो सकते थं' । कुल मद, वर्ण मदको जघन्य और त्याज्य माना गया था। 'जातिकी कोई विशेषता नहीं होती, संयम और तपकी ही विशेषता होती है - इस सिद्धान्तका व्यापक प्रचार था । 'जाति प्रादिका मद करनेवाले पुरुषको जाति या कुल उसकी रक्षा नहीं कर सकते। अच्छी तरह सेवन किए हुए ज्ञान और चारित्रके सिवाय कोई भी पदार्थ जीवकी रक्षा करने में समर्थ नहीं ।' 'जो गौरवी बोर श्लोककामी होता है वह निष्किञ्चन और रूक्षभोजी होने पर भी अज्ञानी है। वह पुनः पुनः संसार भ्रमण करेगा।' 'धीर पुरुष मद स्थानोंको अलग करे। जो धर्मी इनका सेवन नहीं करते वे सब गौत्रोंसे छुटे हुए महर्षि उच्च अगोत्र गति मोक्षको पाते हैं।' 'मुनि गौत्र या दूसरी बातोंका मद न करें ।' 'परनिन्दा पापकारिणी होती है यह बाने। 'यदि एक अनायक - स्वयं प्रभु - चक्रवर्ती प्रादि हो और दूसरा दासका दास हो तो भी संयम मार्ग में आने के बाद परस्पर ब्यवहारमें लज्जा नहीं करनी चाहिए । सदा समभावसे व्यवहार करना चाहिए। एक - सूत्रकृतांग सूत्र : श्शून्य रुपया दो शून्य एक : पैंतीस उत्तराध्ययन सूत्र : अशून्य बारह : एक दो - सूत्रकृतांग श्शून्य रुपया एक अशून्य तेरह : दस, पंद्रह, उत्तराध्ययन सूत्र बारह : सैंतीस स्त्री पुरुष दोनोंको धर्म पालनका समान हक था। बुद्धके संघर्म भी श्रमणियां थीं पर बुद्धने अपने शिष्य आनन्दके बहुत हट करने के बाद ही स्त्रियोंके लिए प्रव्रज्याका मार्ग खोला था। वे बराबर कहते रहे - "मत रुवं कि स्त्रियां भी तथागतके दिखाए धर्म - विनयमें घर से बेघर हो प्रव्रज्या पावै ।" स्त्रियोंके लिए बाठ गुरु धर्म - संकीर्ण शर्तें थी। जो स्त्रियां इन्हें स्वीकार करती वे ही प्रव्रज्या पा सकती। अन्त तक उनकी यह धारणा बनी रही कि स्त्रियों को प्रव्रजित करनेसे संघकी आयुमें क्षीणता आ गई । "यदि तथागत प्रवेदित धर्म - विनयमें स्त्रियां प्रव्रज्या न पाती तो यह ब्रह्मचर्य चिरस्थायी होता, सद्धर्म सहस्र वर्ष तक ठहरता पर अब वह पांच सौ वर्ष ही ठहरेगा'।" भगवान् वर्द्धमानने अपने संघ में श्रमण श्रमणियोंका समान अधिकार रखा और स्त्रियोंकी पवित्र रहने की शक्तिमें कभी शंकाको स्थान नहीं दिया। साधु-साध्वियां दोनों के लिए सूक्ष्म ब्रह्मचर्य के नियम दिए । संघमें श्रमणियोंकी बहुत बड़ी संख्या होने पर भी भ्रष्टाचार जरा भी नहीं फल पाया । अत्यन्त कुशलता और दृढ़ अनुशासनशीलतासे ही यह सम्भव था । प्रमोदः - मंत्री भावनाके प्रचार द्वारा जिस तरह सहृदयता को कायम रखा जाता था उसी तरह प्रमोद भावनाके विकास द्वारा संघमें नवीन जीवन शक्तिको सदा संचारित रखा जाता था। जिस साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाम गुण देखते, भगवान् उसकी प्रशंसा सबके सामने कर गुणमें आनन्द भावना - प्रमोद भावनाको जागृत करते। ऐसे प्रसंग मिलते हैं जब कि गृहस्थ उपासकको प्रादर्श बतला एक - विनय पिटक दस पाँच सौ उन्नीस-पाँच सौ इक्कीस, र श्रमण श्रमणियोंको उसके जीवनसे शिक्षा ग्रहण करनेका उपदेश भगवान्ने दिया। एकबार कामदेव नामक श्रमणोपासककी प्रशंसा करते हुए श्रमण श्रमणियोंसे भगवान्ने कहाः- "घरमें बसते हुए इस श्रमणोपासकमे देव, मनुष्य और पशुकृत उपसर्गोंको बड़े समभावसे संहन करते हुए व्रत पालनमें इतनी दृढ़ता दिखलाई, फिर श्रमण-श्रमजियोंको तो अपना आचार - चरित्र सुरक्षित रखने के लिए हमेशा चौकस रहना चाहिए। जरा भी चलित नहीं होना चाहिये और जो उपसर्ग उपस्थित हों उन्हें सहन करना चाहिए।" इसी तरह एक बार अन्य तोर्थकोंको जंन रहस्य से भरपूर, युक्तिपुरस्सर सुन्दर उत्तर देने के लिए भगवान्ने मद्रुक और कुंडकौलिक श्रावक की मुक्त कंठसे प्रशंसा की थी। इस प्रमोद भावना - दूसरोंके गुणोंमें मुदिता भावना के प्रसारसे संघमें एक बड़ी दृढ़ शक्ति पैदा हो गई थी और सद्गुणोंकी निशदिन वृद्धि होती जाती थी। पार्श्वनाथके श्रमण और एकीकरण हम ऊपर एक जगह कह पाये हैं कि भगवान् के माता-पिता पश्र्विनाथके श्रमरणों के उपासक थं एक जब भगवान् एक तीर्थ करके रूपमें धर्म प्रचार करने लगे उस समय भी पार्श्वनाथ के अनुयायी साधु व उनके संघ विद्यमान थे। एक बार भगवान् के राजगृह पधारनेके अवसर पर पार्श्वनायके अनुयायी पाँच सौ साघुंओंका एक संघ तुंगिका एक - उपासगदसा सूत्रः शून्य दो : उनतीस, तीस, इकतीस दो - भगवती सूत्र शशून्य अट्ठारह उशून्य सात : पंद्रह, उपासकदशा सूत्र पशून्य छःःदस, ग्यारह, बारह नगरी में आया था। तुंगिका नगरीमें जैन गृहस्य बहुत बड़ी संख्या में रहते थे और वे सब पार्श्वनाथके श्रमणोंके अनुयायी थे, ऐसा वर्णनसे प्रतीत होता है। पार्श्वनाथके वंशके कालास्यवेषिपुत्र नामक साधुका श्रमण महावीरके स्थविरोंके साथ सम्पर्क हुआ था, ऐसा भी उल्लेख मिलता है। पार्श्वनाथ के शिष्य के शीश्रमणके संघका उल्लेख उत्तराध्ययन सूत्रमें आया है। वाणिज्य ग्राममें जिन गांगेय श्रमणके साथ भगवान्का प्रश्नोत्तर हुमा था वे भी पार्श्वपात्य हो थे । निर्ग्रन्थ उदक पेढालपुत्रका उल्लेख सूत्रकृतांग में मिलता है। इन सबसे प्रकट होता है कि पार्श्वनाथकी परम्परा के अनेक श्रमण उस समय विद्यमान थे । पाश्र्वंपात्य निर्ग्रन्थ श्रमणोंके प्रति महावीर और उनके श्रमणोंका बहुमान ही देखा जाता है। तुंगिकानगरीमें जिन पाँच सौ श्रमणोंके प्राने की बात है उनका वर्णन बड़े हो आदरपूर्ण और प्रशंसात्मक शब्दों में है भौर उन्हें विनय, ज्ञान, दर्शन और चारित्रयुक्त बताया गया है । उन्हें विशेष ज्ञानी भी कहा गया है । ऐसे श्रमय ब्राह्मणोंकीपर्यु - पासनाका फल भगवान्ने सिद्धि प्राप्ति तक बतलाया है। इससे प्रतीत होता है कि पार्श्वपात्य साधु और निजके साधुओं में भगवान् कोई मूल एक - भगवती सूत्र : शशून्य दो उशून्य पाँच : तेरह - तीन - भगवती सूत्र : शशून्य एक उशून्य नौःपंद्रह चार - उत्तराध्ययन सूत्र : अशून्य तेईस : एक-तीन पाँच - भगवती सूत्र : शशून्य नौ उशून्य बत्तीस : एक, चौंतीस छः - सूत्रकृतांग : श्शून्य रुपया दो अशून्य सातःचार भन्तर नहीं समझते थे । पूर्वोक्त श्रमणोंमें अनेक बहुश्रुत पौर श्रुतज्ञांनी थे। एकबार गणधर गौतम स्वयं पार्श्वपात्य केशीकुमारके पास गये थे और ज्येष्ठ तीर्थंकरके साधुओंके पास उनका जाना ही उन्हें ठीक प्रतीत हुआ था। यह भी बहुमानका ही परिचायक था। इससे मालूम होता है कि भगवान्, पार्श्वनाथको अपना ज्येष्ठ तीर्थङ्कर मानते थे । केशो और गौतमके परस्पर सम्मेलन के बाद तो दोनों संघोंके शामिल होनेका मार्ग ही खुल गया । इस सम्मेलनका विस्तृत वर्णन उतराध्ययन सूत्र मशून्य तेईस में मिलता है, जिसका सार इस प्रकार हैः "लोकमें प्रदीप समान जिन तीर्थङ्कर पार्श्वनाथके विद्या और माचरण में पारङ्गत केश कुमार नामक एक महायशस्वी श्रमण थे । वे एक बार ग्रामानुग्राम विहार करते शिष्य संघके साथ श्रावस्ती नगरीमें मा पहुँचे और उस नगरके तिंदुक नामक उद्यान में प्रासुक शय्या-संस्तारक ग्रहण कर ठहरे। उसी अमें लोकविश्रुत धर्मतीयंकर वर्द्धमानके महायशस्वी और विद्या तथा प्राचारमें पारङ्गत शिष्य गौतम भी शिष्य समुदाय के साथ उसी नगरमें आ पहुंचे और कोष्ठक उद्यान में ठहरे । " उस समय उन दोनों के शिष्य संघमें यह चिन्ता हुई : 'वर्द्धमान द्वारा उपदिष्ट पांच शिक्षावाला यह धर्म कैसा मौर महामुनि पार्श्व द्वारा उपदिष्ट यह चार यामवाला धर्म कैसा ? भोर अचेलक - वस्त्र एक - भगवनी सूशून्य : शशून्य दो उपाँच : तेरह उत्तराध्ययनः प्रशून्य तेईस : तीन दो - उत्तराध्ययन सूशून्य : अशून्य तेरह : पंद्रह
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- ओये बड़ी आयी खरचे की चाची, अच्छा एक बात बता - तू रोज़ ही इस तरह भाग कर कॉलेज से आती है?
- अगर रोज रोज मेरे वीरजी आयें तो मैं रोज़ ही कॉलेज से भाग कर आऊं।
वह गर्व से बताती है - अभी मैं सड़क पर ही थी कि किसी ने बताया - ओये घर जा कुड़िये, घर से भागा हुआ तेरा भाई वापिस आ गया है। बहुत बड़ा अफसर बन के। एकदम गबरू जवान दिखता है। जा वो तेरी राह देख रहा होगा। पहले तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि हमारा वीर भी कभी इस तरह से वापिस आ सकता है। मैंने सोचा कि हम भी तो देखें कि कौन गबरू जवान हमारे वीरजी बन कर आये हैं जिनकी तारीफ पूरा मौहल्ला कर रहा है। ज़रा हम भी देखें वे कैसे दिखते हैं। फिर हमने सोचा, आखिर भाई किसके हैं। स्मार्ट तो होंगे ही। मैंने ठीक ही सोचा है ना वीर जी....!
- बातें तो तू खूब बना लेती है। कुछ पढ़ाई भी करती है या नहीं?
जवाब बेबे देती है - सारा दिन कताबां विच सिर खपांदी रैंदी ए। किन्नी वारी केया ए इन्नू - इन्ना ना पढ़ेया कर। तूं केड़ी कलकटरी करणी ए, पर ऐ साडी गल सुण लवे तां गुड्डी नां किसदा?
अभी बेबे उसके बारे में यह बात बता ही रही है कि वह मुझे एक डायरी लाकर दिखाती है। अपनी कविताओं की डायरी।
मैं हैरान होता हूं - हमारी गुड्डी कविताएं भी लिखती है और वो भी इस तरह के माहौल में।
पूछता हूं मैं - कब से लिख रही है?
- तीन चार साल से। फिर उसने एक और फाइल दिखायी है। उसमें स्थानीय अखबारों और कॉलेज मैगजीनों की कतरनें हैं। उसकी छपी कविताओं की। गुड्डी की तरक्की देख कर सुकून हुआ है। बेबे ने बिल्लू और गोलू की जो तस्वीर खींची है उससे उन दोनों की तो कोई खास इमेज नहीं बनती।
गुड्डी मेरे बारे में ढेर सारे सवाल पूछ रही है, अपनी छोटी छोटी बातें बता रही है। बहुत खुश है वह मेरे आने से। मैं बैग से अपनी डायरी निकाल कर देखता हूं। उसमें दो एक एंट्रीज ही हैं।
डायरी गुड्डी को देता हूं - ले गुड्डी, अब तू अपनी कविताएं इसी डायरी में लिखा कर।
इतनी खूबसूरत डायरी पा कर वह बहुत खुश हो गयी है। तभी वह डायरी पर मेरे नाम के नीचे लिखी डिग्रियां देख कर चौंक जाती है,
- वीरजी, आपने पीएच डी की है?
- हां गुड्डी, खाली बैठा था, सोचा, कुछ पढ़ लिख ही लें।
- हमें बनाइये मत, कोई खाली बैठे रहने से पीएच डी थोड़े ही कर लेता है। आपके पास तो कभी फ़ुर्सत रही भी होगी या नहीं, हमें शक है। सच बताइये ना, कहां से की थी?
- अब तू ज़िद कर रही है तो बता देता हूं। एमटैक में युनिवर्सिटी में टॉप करने के बाद मेरे सामने दो ऑफर थे - एक बहुत बड़ी विदेशी कम्पनी में बढ़िया जॉब या अमेरिका में एक युनिवर्सिटी में पीएच डी के लिए स्कॉलरशिप। मैंने सोचा, नौकरी तो ज़िंदगी भर करनी ही है। लगे हाथों पीएच डी कर लें तो वापिस हिन्दुस्तान आने का भी बहाना बना रहेगा। नौकरी करने गये तो पता नहीं कब लौटें। आखिर तुझे ये डायरी, ये वॉक मैन और ये सारा सामान देने तो आना ही था ना...। मैंने उसे संक्षेप में बताया है।
- जब अमेरिका गये होंगे तो खूब घूमे भी होंगे? पूछती है गुड्डी। अमेरिका का नाम सुन कर बेबे भी पास सरक आयी है।
- कहां घूमना हुआ। बस, हॉस्टल का कमरा, गाइड का कमरा, क्लास रूम, लाइब्रेरी और कैंटीन। आखिर में जब सब लोग घूमने निकले थे तभी दो चार जगहें देखी थीं।
हँसते हुए कहती है वह - वहां कोई गोरी पसंद नहीं आयी थी?
मैं हँसता हूं - ओये पगलिये। ये बाहर की लड़कियां तो बस एÿवेई होती हैं। हम लोगों के लायक थोड़े ही होती हैं। तू खुद बता अगर मैं वहा से कोई मेम शेम ले आता तो ये बेब मुझे घर में घुसने देती?
यह सुन कर बेबे ने तसल्ली भरी ठंडी सांस ली है। कम से कम उसे एक बात का तो विश्वास हो गया है कि मैं अभी कुंवारा हूं।
गुड्डी आग्रह करती है - वीरजी कुछ लिखो भी तो सही इस पर.. मैं अपनी सारी सहेलियों को दिखाऊंगी।
- ठीक है, गुड्डी, तेरे लिए मैं लिख भी देता हूं।
जो एक मेले के चक्कर में मुझसे बिछ़ुड़ गयी थी।
डायरी ले कर वह तुरंत ही उसमें पता नहीं क्या लिखने लग गयी है। मैं पूछता हूं तो दिखाने से भी मना कर देती है।
आंगन में चारपाई पर लेटे लेटे गुड्डी से बातें करते-करते पता नहीं कब आंख लग गयी होगी। अचानक शोर-शराबे से आंख खुली तो देखा, दारजी मेरे सिरहाने बैठे हैं। पहले की तुलना में बेहद कमज़ोर और टूटे हुए आदमी लगे वे मुझे। मैं तुरंत उठ कर उनके पैरों पर गिर गया हूं। मैं एक बार फिर रो रहा हूं। मैं देख रहा हूं, दारजी मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए अपनी आंखें पोंछ रहे हैं। उन्हें शायद बेबे ने मेरी राम कहानी सुना दी होगी इसलिए उन्होंने कुछ भी नहीं पूछा। सिर्फ एक ही वाक्य कहा है - तेरे हिस्से विच घरों बार जा के ई आदमी बनण लिखेया सी। शायद रब्ब नूं ऐही मंज़ूर सी।
मैंने सिर झुका लिया है। क्या कहूं। बेबे मुझे अभी बता ही चुकी है घर से मेरे जाने के बाद का दारजी का व्यवहार। मुझे बेबे की बात पर विश्वास करना ही पड़ेगा। दारजी मेरे लिए कुछ भी कर सकते हैं। ये बूढ़ा जिद्दी आदमी, जिसने अपने गुस्से के आगे किसी को भी कुछ नहीं समझा। बेबे बता रही थी - जद तैनूं अद्धे अधूरे कपडेयां विच घरों कडेया सी तां दारजी कई दिनां तक इस गल्ल नूं मनण लई त्यार ई नईं सन कि इस विच उन्नादी कोई गलती सी। ओ ते सारेयां नूं सुणा-सुणा के ए ही कैंदे रये - मेरी तरफों दीपू कल मरदा ए, तां अज मर जावे। सारेयां ने एन्ना नूं समझाया सी - छोटा बच्चा ए। विचारा कित्थे मारेया मारेया फिरदा होवेगा। लेकन तेरे दारजी नईं मन्ने सी। ओ तां पुलस विच रपोट कराण वी नईं गए सन। मैं ई हत्थ जोड़ जोड़ के तेरे मामे नूं अगे भेजया सी लेकन ओ वी उत्थों खाली हत्थ वापस आ गया सी। पुलस ने जदों तेरी फोटो मंग्गी तां तेरा मामा उत्थे ई रो पेया सी - थानेदारजी, उसदी इक अध फोटो तां है, लम्मे केशां वाली जूड़े दे नाल, लेकन उस नाल किदां पता चलेगा दीपू दा ..। ओ ते केस कटवा के आया सी इसे लई तां गरमागरमी विच घर छड्ड के नठ गया ए..।
मुझे जब बेबे ये बात बता रही थी तो जैसे मेरी पीठ पर बचपन में दारजी की मार के सारे के सारे जख्म टीस मारने लगे थे। अब भी दारजी के सामने बैठे हुए मैं सोच रहा हूं - अगर मैं तब भी घर से न भागा होता तो मेरी ज़िंदगी ने क्या रुख लिया होता। ये तो तय है, न मेरे हिस्से में इतनी पढ़ाई लिखी होती और न इतना सुकून। तब मैं भी गोलू बिल्लू की तरह किसी दुकान पर सेल्समैनी कर रहा होता।
मैं दारजी के साथ ही खाना खाता हूं।
खाना जिद करके गुड्डी ने ही बनाया है।
बेबे ने उसे छेड़ा है - मैं लख कवां, कदी ते दो फुलके सेक दित्ता कर। पराये घर जावेंगी तां की करेंगी लेकन कदी रसोई दे नेड़े नईं आवेगी। अज वीर दे भाग जग गये हन कि साडी गुड्डी रोटी पका रई ए।
बेबे भी अजीब है। जब तक गुड्डी नहीं आयी थी उसकी खूब तारीफें कर रही थी कि पूरा घर अकेले संभाल लेती है और अब ...।
खाना खा कर दारजी गोलू और बिल्लू को खबर करने चले गये हैं।
मैं घर के भीतर आता हूं। सारा घर देखता हूं।
घर का सामान देखते हुए धीरे-धीरे भूली बिसरी बातें याद आने लगी हैं। याद करता हूं कि तब घर में क्या क्या हुआ करता था। कुल मिला कर घर में पुरानापन है। जैसे अरसे से किसी ने उसे जस का तस छोड़ रखा हो। बेशक इस बीच रंग रोगन भी हुआ ही होगा लेकिन फिर भी एक स्थायी किस्म का पुरानापन होता है चीजों में, माहौल में और कपड़ों तक में, जिसे झाड़ पोंछ कर दूर नहीं किया जा सकता।
हां, एक बात जरूर लग रही है कि पूरे घर में गुड्डी का स्पर्श है। हलका-सा युवा स्त्राú स्पर्श। उसने जिस चीज को भी झाड़ा पोंछा होगा, अपनी पसंद और चयन की नैसर्गिक महक उसमें छोड़ती चली गयी होगी। यह मेरे लिए नया ही अनुभव है। बड़े कमरे में एक पैनासोनिक के पुराने से स्टीरियो ने भी इस बीच अपनी जगह बना ली है। एक पुराना ब्लैक एंड व्हाइट टीवी भी एक कोने में विराजमान है। जब गया था तो टीवी तब शहर में पूरी तरह आये ही नहीं थे। टीवी चला कर देखता हूं। खराब है।
बंद कर देता हूं। सोचता हूं, जाते समय एक कलर टीवी यहां के लिए खरीद दूंगा। अब तो घर-घर में कलर टीवी हैं।
छोटे कमरे में जाता हूं। हम लोगों के पढ़ने लिखने के फालतू सामान रखने का कमरा यही होता था। हम भाइयों और दोस्तों के सारे सीक्रेट अभियान यहीं पूरे किये जाते थे क्योंकि दारजी इस कमरे में बहुत कम आते थे। इसी कमरे में हम कंचे छुपाते थे, लूटी हुई पतंगों को दारजी के डर से अलमारी के पीछे छुपा कर रखते थे। गुल्ली डंडा तो खैर दारजी ने हमें कभी बना कर दिये हों, याद नहीं आता। मुझे पता है, अल्मारी के पीछे वहां अब कुछ नहीं होगा फिर भी अल्मारी के पीछे झांक कर देखता हूं। नहीं, वहां कोई पतंग नहीं है। जब गया था तब वहां मेरी तीन चार पतंगें रखी थीं। एक आध चरखी मांझे की भी थी।
रात को हम सब इकट्ठे बैठे हैं। जैसे बचपन में बैठा करते थे। बड़े वाले कमरे में। सब के सब अपनी अपनी चारपाई पर जमे हुए। तब इस तरह बैठना सिर्फ सर्दियों में ही होता था। बेबे खाना बनाने के बाद कोयले वाली अंगीठी भी भीतर ले आती थी और हम चारों भाई बहन दारजी और बेबे उसके चारों तरफ बैठ कर हाथ भी सेंकते रहते और मूंगफली या रेवड़ी वगैरह खाते रहते। रात का यही वक्त होता था जब हम भाई बहनों में कोई झगड़ा नहीं होता था।
अब घर में गैस आ जाने के कारण कोयले वाली अंगीठी नहीं रही है। वैसे सर्दी अभी दूर है लेकिन सब के सब अपनी अपनी चारपाई पर खेस ओढ़े आराम से बैठे हैं। मुझे बेबे ने अपने खेस में जगह दे दी है। पता नहीं मेरी अनुपस्थिति में भी ये जमावड़े चलते रहते थे या नहीं।सबकी उत्सुकता मेरी चौदह बरस की यात्रा के बारे में विस्तार से सुनने की है जबकि मैं यहां के हाल चाल जानना चाहता हूं।
फैसला यही हुआ है कि आज मैं यहां के हाल चाल सुनूंगा और कल अपने हाल बताऊंगा। वैसे भी दिन भर किस्तों में मैं सबको अपनी कहानी सुना ही चुका हूं। ये बात अलग है कि ये बात सिर्फ़ मैं ही जानता हूं कि इस कहानी में कितना सच है और कितना झूठ।
शुरूआत बेबे ने की है। बिरादरी से..। इस बीच कौन-कौन पूरा हो गया, किस-किस के कितने-कितने बच्चे हुए, शादियां, दो-चार तलाक, दहेज की वजह से एकाध बहू को जलाने की खबर, किसने नया घर बनाया और कौन-कौन मोहल्ला छोड़ कर चले गये और गली में कौन-कौन नये बसने आये। किस के घर में बहू की शक्ल में डायन आ गयी है जिसने आते ही अपने मरद को अपने बस में कर लिया है और मां-बाप से अलग कर दिया है, ये और ऐसी ढेरों खबरें बेबे की पिटारी में से निकल रही हैं और हम सब मज़े ले रहे हैं।
अभी बेबे ने कोई बात पूरी नहीं की होती कि किसी और को उसी से जुड़ी और कोई बात याद आ जाती है तो बातों का सिलसिला उसी तरफ मुड़ जाता है।
मैं गोलू से कहता हूं - तू बारी बारी से बचपन के सब साथियों के बारे में बताता चल।
वह बता रहा है - प्रवेश ने बीए करने के बाद एक होटल में नौकरी कर ली है। अंग्रेजी तो वह तभी से बोलने लगा था। आजकल राजपुर रोड पर होटल मीडो में बड़ी पोस्ट पर है। शादी करके अब अलग रहने लगा है। ऊपर जाखन की तरफ घर बनाया है उसने।
- बंसी इसी घर में है। हाल ही में शादी हुई है उसकी। मां-बाप दोनों मर गये हैं उनके।
- और गामा?
मुझे गामे की अगुवाई में की गयी कई शरारतें याद आ रही हैं। दूसरों के बगीचों में अमरूद, लीची और आम तोड़ने के लिए हमारे ग्रुप के सारे लड़के उसी के साथ जाते थे।
बिल्लू बता रहा है - गामा बेचारा ग्यारहवीं तक पढ़ने के बाद आजकल सब्जी मंडी के पास गरम मसाले बेचता है। वहीं पर पक्की दुकान बना ली है और खूब कमा रहा है।
- दारजी, ये नंदू वाले घर के आगे मैंने किसी मेहरचंद की नेम प्लेट देखी थी। वे लोग भी घर छोड़ गये हैं क्या? मैं पूछता हूं।
- मंगाराम बिचारा मर गया है। बहुत बुरी हालत में मरा था। इलाज के लिए पैसे ही नहीं थे। मजबूरन घर बेचना पड़ा। उसके मरने के बाद नंदू की पढ़ाई भी छूट गयी। लेकिन मानना पड़ेगा नंदू को भी। उसने पढ़ाई छोड़ कर बाप की जगह कई साल तक ठेला लगाया, बाप का काम आगे बढ़ाया और अब उसी ठेले की बदौलत नहरवाली गली के सिरे पर ही उसका शानदार होटल है। विजय नगर की तरफ अपना घर-बार है और चार आदमियों में इज्जत है।
- मैं आपको एक मजेदार बात बताती हूं वीर जी।
ये गुड्डी है। हमेशा समझदारी भरी बातें करती है।
- चल तू ही बोल दे पहले। जब तक मन की बात न कह दे, तेरे ही डकार ज्यादा अटके रहते हैं। बिल्लू ने उसे छेड़ा है।
- रहने दे बड़ा आया मेरे डकारों की चिंता करने वाला। और तू जो मेरी सहेलियों के बारे में खोद खोद के पूछता रहता है वो...। गुड्डी ने बदला ले लिया है।
बिल्लू ने लपक कर गुड्डी की चुटिया पकड़ ली है - मेरी झूठी चुगली खाती है। अब आना मेरे पास पंज रपइये मांगने।
गुड्डी चिल्लायी है - देखो ना वीरजी, एक तो पंज रपइये का लालच दे के ना मेरी सहेलियों ....। बिल्लू शरमा गया है और उसने गुड्डी के मुंह पर हाथ रख दिया है - देख गुड्डी, खबरदार जो एक भी शब्द आगे बोला तो।
सब मजे ले रहे हैं। शायद ये उन दोनों के बीच का रोज का किस्सा है।
- तूं वी इन्नां पागलां दे चक्कर विच पै गेया एं। ऐ ते इन्ना दोवां दा रोज दा रोणा ऐ। बेबे इतनी देर बाद बोली है।
- असी ते सोइये हुण। गोलू ने अपने सिर के ऊपर चादर खींच ली है। गप्पबाजी का सिलसिला यहीं टूट गया है।
बाकी सब भी उबासियां लेने लगे हैं। तभी बिल्लू ने टोका है - लेकिन वीरा, आपके किस्से तो रह ही गये ।
- अब कल सुनना किस्से। अब मुझे भी नींद आ रही है। कहते हुए मैं भी बेबे की चारपाई पर ही मुड़ी-त़ुड़ी हो कर पसर गया हूं। बेबे मेरे बालों में उंगलियां फिरा रही है। चौदह बरस बाद बेबे के ममताभरे आंचल में आंखें बंद करते ही मुझे तुरंत नींद आ गयी है। कितने बरस बाद सुकून की नींद सो रहा हूं।
देख रहा हूं इस बीच बहुत कुछ बदल गया है। बहुत कुछ ऐसा भी लग रहा है जिस पर समय के क्रूर पंजों की खरोंच तक नहीं लगी है। सब कुछ जस का तस रह गया है। घर में भी और बाहर भी.. । दारजी बहुत दुबले हो गये हैं। अब उतना काम भी नहीं कर पाते, लेकिन उनके गुस्से में कोई कमी नहीं आयी है। कल बेबे बता रही थी - बच्चे जवान हो गये हैं, शादी के लायक होने को आये लेकिन अभी भी उन्हें जलील करने से बाज नहीं आते। उनके इसी गुस्से की वजह से अब तो कोई मोया ग्राहक ही नहीं आता।
गोलू और बिल्लू अपने अपने धंधे में बिजी है। बेबे ने बताया तो नहीं लेकिन बातों ही बातों में कल ही मुझे अंदाजा लग गया था कि गोलू के लिए कहीं बात चल रही है। अब मेरे आने से बात आगे बढ़ेगी या ठहर जायेगी, कहा नहीं जा सकता। अब बेबे और दारजी उसके बजाये कहीं मेरे लिए .. .. नहीं यह तो गलत होगा। बेबे को समझाना पड़ेगा।
ये गोलू और बिल्लू भी अजीब हैं। कल पहले तो तपाक से मिले, थोड़ी देर रोये-धोये। जब मैंने उन्हें उनके उपहार दे दिये तो बहुत खुश भी हुए लेकिन जब बाद में बातचीत चली तो मेरे हालचाल जानने के बजाये अपने दुखड़े सुनाने लगे। दारजी और बेबे की चुगलियां खाने लगे। मैं थोड़ी देर तक तो सुनता रहा लेकिन जब ये किस्से बढ़ने लगे तो मैंने बरज दिया - मैं ये सब सुनने के लिए यहां नहीं आया हूं। तुम्हारी जिससे भी जो भी शिकायतें हैं, सीधे ही निपटा लो तो बेहतर। इतना सुनने के बाद दोनों ही उठ कर चल दिये थे। रात को बेशक थोड़ा-बहुत हंसी मज़ाक कर रहे थे, लेकिन सवेरे-सवेरे ही तैयार हो कर - अच्छा वीरजी, निकलते हैं, कहते हुए दोनों एक साथ ही दरवाजे से बाहर हो गये हैं। गुड्डी के भी कॉलेज का टाइम हो रहा है, और फिर उसने सब सहेलियों को भी तो बताना है कि उसका सबसे प्यारा वीर वापिस आ गया है।
हँसती है वह - वीरजी, शाम को मेरी सारी सहेलियां आपसे मिलने आयेंगी। उनसे अच्छी तरह से बात करना।
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- ओये बड़ी आयी खरचे की चाची, अच्छा एक बात बता - तू रोज़ ही इस तरह भाग कर कॉलेज से आती है? - अगर रोज रोज मेरे वीरजी आयें तो मैं रोज़ ही कॉलेज से भाग कर आऊं। वह गर्व से बताती है - अभी मैं सड़क पर ही थी कि किसी ने बताया - ओये घर जा कुड़िये, घर से भागा हुआ तेरा भाई वापिस आ गया है। बहुत बड़ा अफसर बन के। एकदम गबरू जवान दिखता है। जा वो तेरी राह देख रहा होगा। पहले तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि हमारा वीर भी कभी इस तरह से वापिस आ सकता है। मैंने सोचा कि हम भी तो देखें कि कौन गबरू जवान हमारे वीरजी बन कर आये हैं जिनकी तारीफ पूरा मौहल्ला कर रहा है। ज़रा हम भी देखें वे कैसे दिखते हैं। फिर हमने सोचा, आखिर भाई किसके हैं। स्मार्ट तो होंगे ही। मैंने ठीक ही सोचा है ना वीर जी....! - बातें तो तू खूब बना लेती है। कुछ पढ़ाई भी करती है या नहीं? जवाब बेबे देती है - सारा दिन कताबां विच सिर खपांदी रैंदी ए। किन्नी वारी केया ए इन्नू - इन्ना ना पढ़ेया कर। तूं केड़ी कलकटरी करणी ए, पर ऐ साडी गल सुण लवे तां गुड्डी नां किसदा? अभी बेबे उसके बारे में यह बात बता ही रही है कि वह मुझे एक डायरी लाकर दिखाती है। अपनी कविताओं की डायरी। मैं हैरान होता हूं - हमारी गुड्डी कविताएं भी लिखती है और वो भी इस तरह के माहौल में। पूछता हूं मैं - कब से लिख रही है? - तीन चार साल से। फिर उसने एक और फाइल दिखायी है। उसमें स्थानीय अखबारों और कॉलेज मैगजीनों की कतरनें हैं। उसकी छपी कविताओं की। गुड्डी की तरक्की देख कर सुकून हुआ है। बेबे ने बिल्लू और गोलू की जो तस्वीर खींची है उससे उन दोनों की तो कोई खास इमेज नहीं बनती। गुड्डी मेरे बारे में ढेर सारे सवाल पूछ रही है, अपनी छोटी छोटी बातें बता रही है। बहुत खुश है वह मेरे आने से। मैं बैग से अपनी डायरी निकाल कर देखता हूं। उसमें दो एक एंट्रीज ही हैं। डायरी गुड्डी को देता हूं - ले गुड्डी, अब तू अपनी कविताएं इसी डायरी में लिखा कर। इतनी खूबसूरत डायरी पा कर वह बहुत खुश हो गयी है। तभी वह डायरी पर मेरे नाम के नीचे लिखी डिग्रियां देख कर चौंक जाती है, - वीरजी, आपने पीएच डी की है? - हां गुड्डी, खाली बैठा था, सोचा, कुछ पढ़ लिख ही लें। - हमें बनाइये मत, कोई खाली बैठे रहने से पीएच डी थोड़े ही कर लेता है। आपके पास तो कभी फ़ुर्सत रही भी होगी या नहीं, हमें शक है। सच बताइये ना, कहां से की थी? - अब तू ज़िद कर रही है तो बता देता हूं। एमटैक में युनिवर्सिटी में टॉप करने के बाद मेरे सामने दो ऑफर थे - एक बहुत बड़ी विदेशी कम्पनी में बढ़िया जॉब या अमेरिका में एक युनिवर्सिटी में पीएच डी के लिए स्कॉलरशिप। मैंने सोचा, नौकरी तो ज़िंदगी भर करनी ही है। लगे हाथों पीएच डी कर लें तो वापिस हिन्दुस्तान आने का भी बहाना बना रहेगा। नौकरी करने गये तो पता नहीं कब लौटें। आखिर तुझे ये डायरी, ये वॉक मैन और ये सारा सामान देने तो आना ही था ना...। मैंने उसे संक्षेप में बताया है। - जब अमेरिका गये होंगे तो खूब घूमे भी होंगे? पूछती है गुड्डी। अमेरिका का नाम सुन कर बेबे भी पास सरक आयी है। - कहां घूमना हुआ। बस, हॉस्टल का कमरा, गाइड का कमरा, क्लास रूम, लाइब्रेरी और कैंटीन। आखिर में जब सब लोग घूमने निकले थे तभी दो चार जगहें देखी थीं। हँसते हुए कहती है वह - वहां कोई गोरी पसंद नहीं आयी थी? मैं हँसता हूं - ओये पगलिये। ये बाहर की लड़कियां तो बस एÿवेई होती हैं। हम लोगों के लायक थोड़े ही होती हैं। तू खुद बता अगर मैं वहा से कोई मेम शेम ले आता तो ये बेब मुझे घर में घुसने देती? यह सुन कर बेबे ने तसल्ली भरी ठंडी सांस ली है। कम से कम उसे एक बात का तो विश्वास हो गया है कि मैं अभी कुंवारा हूं। गुड्डी आग्रह करती है - वीरजी कुछ लिखो भी तो सही इस पर.. मैं अपनी सारी सहेलियों को दिखाऊंगी। - ठीक है, गुड्डी, तेरे लिए मैं लिख भी देता हूं। जो एक मेले के चक्कर में मुझसे बिछ़ुड़ गयी थी। डायरी ले कर वह तुरंत ही उसमें पता नहीं क्या लिखने लग गयी है। मैं पूछता हूं तो दिखाने से भी मना कर देती है। आंगन में चारपाई पर लेटे लेटे गुड्डी से बातें करते-करते पता नहीं कब आंख लग गयी होगी। अचानक शोर-शराबे से आंख खुली तो देखा, दारजी मेरे सिरहाने बैठे हैं। पहले की तुलना में बेहद कमज़ोर और टूटे हुए आदमी लगे वे मुझे। मैं तुरंत उठ कर उनके पैरों पर गिर गया हूं। मैं एक बार फिर रो रहा हूं। मैं देख रहा हूं, दारजी मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए अपनी आंखें पोंछ रहे हैं। उन्हें शायद बेबे ने मेरी राम कहानी सुना दी होगी इसलिए उन्होंने कुछ भी नहीं पूछा। सिर्फ एक ही वाक्य कहा है - तेरे हिस्से विच घरों बार जा के ई आदमी बनण लिखेया सी। शायद रब्ब नूं ऐही मंज़ूर सी। मैंने सिर झुका लिया है। क्या कहूं। बेबे मुझे अभी बता ही चुकी है घर से मेरे जाने के बाद का दारजी का व्यवहार। मुझे बेबे की बात पर विश्वास करना ही पड़ेगा। दारजी मेरे लिए कुछ भी कर सकते हैं। ये बूढ़ा जिद्दी आदमी, जिसने अपने गुस्से के आगे किसी को भी कुछ नहीं समझा। बेबे बता रही थी - जद तैनूं अद्धे अधूरे कपडेयां विच घरों कडेया सी तां दारजी कई दिनां तक इस गल्ल नूं मनण लई त्यार ई नईं सन कि इस विच उन्नादी कोई गलती सी। ओ ते सारेयां नूं सुणा-सुणा के ए ही कैंदे रये - मेरी तरफों दीपू कल मरदा ए, तां अज मर जावे। सारेयां ने एन्ना नूं समझाया सी - छोटा बच्चा ए। विचारा कित्थे मारेया मारेया फिरदा होवेगा। लेकन तेरे दारजी नईं मन्ने सी। ओ तां पुलस विच रपोट कराण वी नईं गए सन। मैं ई हत्थ जोड़ जोड़ के तेरे मामे नूं अगे भेजया सी लेकन ओ वी उत्थों खाली हत्थ वापस आ गया सी। पुलस ने जदों तेरी फोटो मंग्गी तां तेरा मामा उत्थे ई रो पेया सी - थानेदारजी, उसदी इक अध फोटो तां है, लम्मे केशां वाली जूड़े दे नाल, लेकन उस नाल किदां पता चलेगा दीपू दा ..। ओ ते केस कटवा के आया सी इसे लई तां गरमागरमी विच घर छड्ड के नठ गया ए..। मुझे जब बेबे ये बात बता रही थी तो जैसे मेरी पीठ पर बचपन में दारजी की मार के सारे के सारे जख्म टीस मारने लगे थे। अब भी दारजी के सामने बैठे हुए मैं सोच रहा हूं - अगर मैं तब भी घर से न भागा होता तो मेरी ज़िंदगी ने क्या रुख लिया होता। ये तो तय है, न मेरे हिस्से में इतनी पढ़ाई लिखी होती और न इतना सुकून। तब मैं भी गोलू बिल्लू की तरह किसी दुकान पर सेल्समैनी कर रहा होता। मैं दारजी के साथ ही खाना खाता हूं। खाना जिद करके गुड्डी ने ही बनाया है। बेबे ने उसे छेड़ा है - मैं लख कवां, कदी ते दो फुलके सेक दित्ता कर। पराये घर जावेंगी तां की करेंगी लेकन कदी रसोई दे नेड़े नईं आवेगी। अज वीर दे भाग जग गये हन कि साडी गुड्डी रोटी पका रई ए। बेबे भी अजीब है। जब तक गुड्डी नहीं आयी थी उसकी खूब तारीफें कर रही थी कि पूरा घर अकेले संभाल लेती है और अब ...। खाना खा कर दारजी गोलू और बिल्लू को खबर करने चले गये हैं। मैं घर के भीतर आता हूं। सारा घर देखता हूं। घर का सामान देखते हुए धीरे-धीरे भूली बिसरी बातें याद आने लगी हैं। याद करता हूं कि तब घर में क्या क्या हुआ करता था। कुल मिला कर घर में पुरानापन है। जैसे अरसे से किसी ने उसे जस का तस छोड़ रखा हो। बेशक इस बीच रंग रोगन भी हुआ ही होगा लेकिन फिर भी एक स्थायी किस्म का पुरानापन होता है चीजों में, माहौल में और कपड़ों तक में, जिसे झाड़ पोंछ कर दूर नहीं किया जा सकता। हां, एक बात जरूर लग रही है कि पूरे घर में गुड्डी का स्पर्श है। हलका-सा युवा स्त्राú स्पर्श। उसने जिस चीज को भी झाड़ा पोंछा होगा, अपनी पसंद और चयन की नैसर्गिक महक उसमें छोड़ती चली गयी होगी। यह मेरे लिए नया ही अनुभव है। बड़े कमरे में एक पैनासोनिक के पुराने से स्टीरियो ने भी इस बीच अपनी जगह बना ली है। एक पुराना ब्लैक एंड व्हाइट टीवी भी एक कोने में विराजमान है। जब गया था तो टीवी तब शहर में पूरी तरह आये ही नहीं थे। टीवी चला कर देखता हूं। खराब है। बंद कर देता हूं। सोचता हूं, जाते समय एक कलर टीवी यहां के लिए खरीद दूंगा। अब तो घर-घर में कलर टीवी हैं। छोटे कमरे में जाता हूं। हम लोगों के पढ़ने लिखने के फालतू सामान रखने का कमरा यही होता था। हम भाइयों और दोस्तों के सारे सीक्रेट अभियान यहीं पूरे किये जाते थे क्योंकि दारजी इस कमरे में बहुत कम आते थे। इसी कमरे में हम कंचे छुपाते थे, लूटी हुई पतंगों को दारजी के डर से अलमारी के पीछे छुपा कर रखते थे। गुल्ली डंडा तो खैर दारजी ने हमें कभी बना कर दिये हों, याद नहीं आता। मुझे पता है, अल्मारी के पीछे वहां अब कुछ नहीं होगा फिर भी अल्मारी के पीछे झांक कर देखता हूं। नहीं, वहां कोई पतंग नहीं है। जब गया था तब वहां मेरी तीन चार पतंगें रखी थीं। एक आध चरखी मांझे की भी थी। रात को हम सब इकट्ठे बैठे हैं। जैसे बचपन में बैठा करते थे। बड़े वाले कमरे में। सब के सब अपनी अपनी चारपाई पर जमे हुए। तब इस तरह बैठना सिर्फ सर्दियों में ही होता था। बेबे खाना बनाने के बाद कोयले वाली अंगीठी भी भीतर ले आती थी और हम चारों भाई बहन दारजी और बेबे उसके चारों तरफ बैठ कर हाथ भी सेंकते रहते और मूंगफली या रेवड़ी वगैरह खाते रहते। रात का यही वक्त होता था जब हम भाई बहनों में कोई झगड़ा नहीं होता था। अब घर में गैस आ जाने के कारण कोयले वाली अंगीठी नहीं रही है। वैसे सर्दी अभी दूर है लेकिन सब के सब अपनी अपनी चारपाई पर खेस ओढ़े आराम से बैठे हैं। मुझे बेबे ने अपने खेस में जगह दे दी है। पता नहीं मेरी अनुपस्थिति में भी ये जमावड़े चलते रहते थे या नहीं।सबकी उत्सुकता मेरी चौदह बरस की यात्रा के बारे में विस्तार से सुनने की है जबकि मैं यहां के हाल चाल जानना चाहता हूं। फैसला यही हुआ है कि आज मैं यहां के हाल चाल सुनूंगा और कल अपने हाल बताऊंगा। वैसे भी दिन भर किस्तों में मैं सबको अपनी कहानी सुना ही चुका हूं। ये बात अलग है कि ये बात सिर्फ़ मैं ही जानता हूं कि इस कहानी में कितना सच है और कितना झूठ। शुरूआत बेबे ने की है। बिरादरी से..। इस बीच कौन-कौन पूरा हो गया, किस-किस के कितने-कितने बच्चे हुए, शादियां, दो-चार तलाक, दहेज की वजह से एकाध बहू को जलाने की खबर, किसने नया घर बनाया और कौन-कौन मोहल्ला छोड़ कर चले गये और गली में कौन-कौन नये बसने आये। किस के घर में बहू की शक्ल में डायन आ गयी है जिसने आते ही अपने मरद को अपने बस में कर लिया है और मां-बाप से अलग कर दिया है, ये और ऐसी ढेरों खबरें बेबे की पिटारी में से निकल रही हैं और हम सब मज़े ले रहे हैं। अभी बेबे ने कोई बात पूरी नहीं की होती कि किसी और को उसी से जुड़ी और कोई बात याद आ जाती है तो बातों का सिलसिला उसी तरफ मुड़ जाता है। मैं गोलू से कहता हूं - तू बारी बारी से बचपन के सब साथियों के बारे में बताता चल। वह बता रहा है - प्रवेश ने बीए करने के बाद एक होटल में नौकरी कर ली है। अंग्रेजी तो वह तभी से बोलने लगा था। आजकल राजपुर रोड पर होटल मीडो में बड़ी पोस्ट पर है। शादी करके अब अलग रहने लगा है। ऊपर जाखन की तरफ घर बनाया है उसने। - बंसी इसी घर में है। हाल ही में शादी हुई है उसकी। मां-बाप दोनों मर गये हैं उनके। - और गामा? मुझे गामे की अगुवाई में की गयी कई शरारतें याद आ रही हैं। दूसरों के बगीचों में अमरूद, लीची और आम तोड़ने के लिए हमारे ग्रुप के सारे लड़के उसी के साथ जाते थे। बिल्लू बता रहा है - गामा बेचारा ग्यारहवीं तक पढ़ने के बाद आजकल सब्जी मंडी के पास गरम मसाले बेचता है। वहीं पर पक्की दुकान बना ली है और खूब कमा रहा है। - दारजी, ये नंदू वाले घर के आगे मैंने किसी मेहरचंद की नेम प्लेट देखी थी। वे लोग भी घर छोड़ गये हैं क्या? मैं पूछता हूं। - मंगाराम बिचारा मर गया है। बहुत बुरी हालत में मरा था। इलाज के लिए पैसे ही नहीं थे। मजबूरन घर बेचना पड़ा। उसके मरने के बाद नंदू की पढ़ाई भी छूट गयी। लेकिन मानना पड़ेगा नंदू को भी। उसने पढ़ाई छोड़ कर बाप की जगह कई साल तक ठेला लगाया, बाप का काम आगे बढ़ाया और अब उसी ठेले की बदौलत नहरवाली गली के सिरे पर ही उसका शानदार होटल है। विजय नगर की तरफ अपना घर-बार है और चार आदमियों में इज्जत है। - मैं आपको एक मजेदार बात बताती हूं वीर जी। ये गुड्डी है। हमेशा समझदारी भरी बातें करती है। - चल तू ही बोल दे पहले। जब तक मन की बात न कह दे, तेरे ही डकार ज्यादा अटके रहते हैं। बिल्लू ने उसे छेड़ा है। - रहने दे बड़ा आया मेरे डकारों की चिंता करने वाला। और तू जो मेरी सहेलियों के बारे में खोद खोद के पूछता रहता है वो...। गुड्डी ने बदला ले लिया है। बिल्लू ने लपक कर गुड्डी की चुटिया पकड़ ली है - मेरी झूठी चुगली खाती है। अब आना मेरे पास पंज रपइये मांगने। गुड्डी चिल्लायी है - देखो ना वीरजी, एक तो पंज रपइये का लालच दे के ना मेरी सहेलियों ....। बिल्लू शरमा गया है और उसने गुड्डी के मुंह पर हाथ रख दिया है - देख गुड्डी, खबरदार जो एक भी शब्द आगे बोला तो। सब मजे ले रहे हैं। शायद ये उन दोनों के बीच का रोज का किस्सा है। - तूं वी इन्नां पागलां दे चक्कर विच पै गेया एं। ऐ ते इन्ना दोवां दा रोज दा रोणा ऐ। बेबे इतनी देर बाद बोली है। - असी ते सोइये हुण। गोलू ने अपने सिर के ऊपर चादर खींच ली है। गप्पबाजी का सिलसिला यहीं टूट गया है। बाकी सब भी उबासियां लेने लगे हैं। तभी बिल्लू ने टोका है - लेकिन वीरा, आपके किस्से तो रह ही गये । - अब कल सुनना किस्से। अब मुझे भी नींद आ रही है। कहते हुए मैं भी बेबे की चारपाई पर ही मुड़ी-त़ुड़ी हो कर पसर गया हूं। बेबे मेरे बालों में उंगलियां फिरा रही है। चौदह बरस बाद बेबे के ममताभरे आंचल में आंखें बंद करते ही मुझे तुरंत नींद आ गयी है। कितने बरस बाद सुकून की नींद सो रहा हूं। देख रहा हूं इस बीच बहुत कुछ बदल गया है। बहुत कुछ ऐसा भी लग रहा है जिस पर समय के क्रूर पंजों की खरोंच तक नहीं लगी है। सब कुछ जस का तस रह गया है। घर में भी और बाहर भी.. । दारजी बहुत दुबले हो गये हैं। अब उतना काम भी नहीं कर पाते, लेकिन उनके गुस्से में कोई कमी नहीं आयी है। कल बेबे बता रही थी - बच्चे जवान हो गये हैं, शादी के लायक होने को आये लेकिन अभी भी उन्हें जलील करने से बाज नहीं आते। उनके इसी गुस्से की वजह से अब तो कोई मोया ग्राहक ही नहीं आता। गोलू और बिल्लू अपने अपने धंधे में बिजी है। बेबे ने बताया तो नहीं लेकिन बातों ही बातों में कल ही मुझे अंदाजा लग गया था कि गोलू के लिए कहीं बात चल रही है। अब मेरे आने से बात आगे बढ़ेगी या ठहर जायेगी, कहा नहीं जा सकता। अब बेबे और दारजी उसके बजाये कहीं मेरे लिए .. .. नहीं यह तो गलत होगा। बेबे को समझाना पड़ेगा। ये गोलू और बिल्लू भी अजीब हैं। कल पहले तो तपाक से मिले, थोड़ी देर रोये-धोये। जब मैंने उन्हें उनके उपहार दे दिये तो बहुत खुश भी हुए लेकिन जब बाद में बातचीत चली तो मेरे हालचाल जानने के बजाये अपने दुखड़े सुनाने लगे। दारजी और बेबे की चुगलियां खाने लगे। मैं थोड़ी देर तक तो सुनता रहा लेकिन जब ये किस्से बढ़ने लगे तो मैंने बरज दिया - मैं ये सब सुनने के लिए यहां नहीं आया हूं। तुम्हारी जिससे भी जो भी शिकायतें हैं, सीधे ही निपटा लो तो बेहतर। इतना सुनने के बाद दोनों ही उठ कर चल दिये थे। रात को बेशक थोड़ा-बहुत हंसी मज़ाक कर रहे थे, लेकिन सवेरे-सवेरे ही तैयार हो कर - अच्छा वीरजी, निकलते हैं, कहते हुए दोनों एक साथ ही दरवाजे से बाहर हो गये हैं। गुड्डी के भी कॉलेज का टाइम हो रहा है, और फिर उसने सब सहेलियों को भी तो बताना है कि उसका सबसे प्यारा वीर वापिस आ गया है। हँसती है वह - वीरजी, शाम को मेरी सारी सहेलियां आपसे मिलने आयेंगी। उनसे अच्छी तरह से बात करना।
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मध्य प्रदेश के खरगोन से तीन तलाक का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि दहेज का लोभी पति 10 महीने से अपनी पत्नी को परेशान कर रहा था. आए दिन पत्नी के रंग रूप को लेकर भद्दे कमेंट करता था. पीड़िता का आरोप है कि उसे सबके सामने काली, सांवली होने और खूबसूरत ना होने के चलते सबके सामने बेइज्जत किया जाता था. महिला ने पति समेत ससुराल वालों के खिलाफ थाने में केस दर्ज कराया है.
आयशा की शादी जनवरी 2022 में कासिब बेग मिर्जा नाम के शख्स से हुई थी. जो टेकड़ी मोहल्ला का रहने वाला है. शादी के बाद से ही पति, पत्नी के बीच लड़ाई झगड़ा शुरू हो गया था. पति अकसर अपनी पत्नी के रंग रूप को लेकर ताने मारने लगा. साथ ही ससुराल वालों ने एक लाख रुपये की डिमांड की. जिसे आयशा के परिजन देने में असमर्थ थे. बार बार उसे तीन तलाक की धमकी दी जाने लगी. इससे परेशान होकर कुछ दिनों के लिए वो अपने मायके चली गई.
मायके में कुछ समय गुजारने के बाद आयशा ने उसे लेने आने के लिए कहा. लेकिन कासिब ने लाने से इनकार कर दिया. लेकिन आयशा जबरन अपने ससुराल आ गई. इस पर जमकर विवाद हुआ और कासिम ने अपनी पत्नी की तीन बार तलाक. . . तलाक. . . . तलाक. . . कहकर घर से भगा दिया. इस दौरान आयशा ने काफी मिन्नतें की लेकिन उसकी एक ना सुनी गई. फिर उसने पति समेत ससुराल वालों के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया.
इस मामले पर खरगोन थाना इंचार्ज बीएन मंडलोई ने बताया कि पीड़िता संजय नगर की रहने वाली है. उसकी शादी टेकड़ी मोहल्ला के रहने वाले कासिम से हुई थी. दोनों की शादी 10 माह पर हुई थी. पीड़िता आरोप है कि उसके पति ने जेठ, जेठानी के करने पर उसे तीन तलाक दिया. पति समेत ससुराल वाले उस पर 1 लाख रुपये की मांग कर रहे थे. महिला के करने पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया. विधि अनुसार आरोप में गिरफ्तार किया जाएगा और माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा.
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मध्य प्रदेश के खरगोन से तीन तलाक का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि दहेज का लोभी पति दस महीने से अपनी पत्नी को परेशान कर रहा था. आए दिन पत्नी के रंग रूप को लेकर भद्दे कमेंट करता था. पीड़िता का आरोप है कि उसे सबके सामने काली, सांवली होने और खूबसूरत ना होने के चलते सबके सामने बेइज्जत किया जाता था. महिला ने पति समेत ससुराल वालों के खिलाफ थाने में केस दर्ज कराया है. आयशा की शादी जनवरी दो हज़ार बाईस में कासिब बेग मिर्जा नाम के शख्स से हुई थी. जो टेकड़ी मोहल्ला का रहने वाला है. शादी के बाद से ही पति, पत्नी के बीच लड़ाई झगड़ा शुरू हो गया था. पति अकसर अपनी पत्नी के रंग रूप को लेकर ताने मारने लगा. साथ ही ससुराल वालों ने एक लाख रुपये की डिमांड की. जिसे आयशा के परिजन देने में असमर्थ थे. बार बार उसे तीन तलाक की धमकी दी जाने लगी. इससे परेशान होकर कुछ दिनों के लिए वो अपने मायके चली गई. मायके में कुछ समय गुजारने के बाद आयशा ने उसे लेने आने के लिए कहा. लेकिन कासिब ने लाने से इनकार कर दिया. लेकिन आयशा जबरन अपने ससुराल आ गई. इस पर जमकर विवाद हुआ और कासिम ने अपनी पत्नी की तीन बार तलाक. . . तलाक. . . . तलाक. . . कहकर घर से भगा दिया. इस दौरान आयशा ने काफी मिन्नतें की लेकिन उसकी एक ना सुनी गई. फिर उसने पति समेत ससुराल वालों के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया. इस मामले पर खरगोन थाना इंचार्ज बीएन मंडलोई ने बताया कि पीड़िता संजय नगर की रहने वाली है. उसकी शादी टेकड़ी मोहल्ला के रहने वाले कासिम से हुई थी. दोनों की शादी दस माह पर हुई थी. पीड़िता आरोप है कि उसके पति ने जेठ, जेठानी के करने पर उसे तीन तलाक दिया. पति समेत ससुराल वाले उस पर एक लाख रुपये की मांग कर रहे थे. महिला के करने पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया. विधि अनुसार आरोप में गिरफ्तार किया जाएगा और माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा.
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच तकरार खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. पहले ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में आने से इनकार कर दिया था और अब उन्होंने नीति आयोग की बैठक में आने से मना कर दिया है. ममता ने पीएम मोदी को पत्र लिख कहा है कि जब नीति आयोग के पास कोई अधिकार ही नहीं हैं, तो बिना मतलब की इस बैठक में आने का क्या फायदा.
ममता बनर्जी ने तीन पेज की चिट्ठी लिख नीति आयोग को लेकर कई सवाल दागे हैं. 15 जून को नई दिल्ली में नीति आयोग की बैठक होनी है, जिसमें केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, नीति आयोग के सदस्य और केंद्रीय मंत्रियों को बुलाया है. नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की ये पहली बैठक है.
ममता बनर्जी ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि मुझे इस बैठक के बारे में बताया गया है, लेकिन इसको लेकर मैं कुछ सवाल करना चाहूंगी. ममता ने कहा है कि जब योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग बनाया था, तब किसी भी मुख्यमंत्री से नहीं पूछा था.
बंगाल की मुख्यमंत्री ने सवाल किया है कि जब नीति आयोग किसी भी राज्य की वित्तीय मदद नहीं कर सकता है, ना ही राज्यों द्वारा चलाई जा रही योजना में किसी तरह की सहायता नहीं करता है. तो फिर इस बेमतलब की बैठक में आने का क्या फायदा है.
बता दें कि इससे पहले ममता बनर्जी ने नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आने से इनकार कर दिया था. पहले तो उन्होंने निमंत्रण को स्वीकार किया था, लेकिन जब सरकार की ओर से भारतीय जनता पार्टी के उन कार्यकर्ताओं के परिवारजनों को न्योता दिया गया जिनकी मौत चुनाव के दौरान हुई थी तो ममता ने आने से इनकार कर दिया.
इससे पहले भी ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी के बीच जुबानी जंग चुनाव के दौरान जारी रही थी, जो अब केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई बनती जा रही है.
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच तकरार खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. पहले ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में आने से इनकार कर दिया था और अब उन्होंने नीति आयोग की बैठक में आने से मना कर दिया है. ममता ने पीएम मोदी को पत्र लिख कहा है कि जब नीति आयोग के पास कोई अधिकार ही नहीं हैं, तो बिना मतलब की इस बैठक में आने का क्या फायदा. ममता बनर्जी ने तीन पेज की चिट्ठी लिख नीति आयोग को लेकर कई सवाल दागे हैं. पंद्रह जून को नई दिल्ली में नीति आयोग की बैठक होनी है, जिसमें केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, नीति आयोग के सदस्य और केंद्रीय मंत्रियों को बुलाया है. नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की ये पहली बैठक है. ममता बनर्जी ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि मुझे इस बैठक के बारे में बताया गया है, लेकिन इसको लेकर मैं कुछ सवाल करना चाहूंगी. ममता ने कहा है कि जब योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग बनाया था, तब किसी भी मुख्यमंत्री से नहीं पूछा था. बंगाल की मुख्यमंत्री ने सवाल किया है कि जब नीति आयोग किसी भी राज्य की वित्तीय मदद नहीं कर सकता है, ना ही राज्यों द्वारा चलाई जा रही योजना में किसी तरह की सहायता नहीं करता है. तो फिर इस बेमतलब की बैठक में आने का क्या फायदा है. बता दें कि इससे पहले ममता बनर्जी ने नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आने से इनकार कर दिया था. पहले तो उन्होंने निमंत्रण को स्वीकार किया था, लेकिन जब सरकार की ओर से भारतीय जनता पार्टी के उन कार्यकर्ताओं के परिवारजनों को न्योता दिया गया जिनकी मौत चुनाव के दौरान हुई थी तो ममता ने आने से इनकार कर दिया. इससे पहले भी ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी के बीच जुबानी जंग चुनाव के दौरान जारी रही थी, जो अब केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई बनती जा रही है.
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डैनियल एल्सबर्ग अमेरिकी सेना और वियतनाम युद्ध विरोधी के लिए एक पूर्व विश्लेषक हैं। अमेरिकी संविधान में पहले संशोधन द्वारा दी गई प्रेस स्वतंत्रता के महत्व के साथ उनका नाम समानार्थी बन गया, जब उन्होंने वियतनाम युद्ध पर एक गुप्त रिपोर्ट लीक की जो पत्रकारों को " पेंटागन पेपर " के नाम से जाना जाता है । एल्सबर्ग के काम के रूप में एक व्हिस्टलब्लॉवर के रूप में काम ने न्यूयॉर्क टाइम्स, द वाशिंगटन पोस्ट और एक दर्जन से अधिक अन्य समाचार पत्रों में सरकार की युद्ध रणनीतियों की विफलता का खुलासा किया, और हॉलीवुड ने "द पोस्ट", "पेंटागन पेपर" जैसी फिल्मों में नाटक किया। "और" अमेरिका में सबसे खतरनाक आदमी "।
पेंटागन पेपर के एल्सबर्ग की रिसाव ने वियतनाम युद्ध के जनता के विरोध को मजबूत करने और संघर्ष के खिलाफ कांग्रेस के सदस्यों को बदलने में मदद की। न्यूयॉर्क टाइम्स, द वाशिंगटन पोस्ट और अन्य समाचार पत्रों के दस्तावेजों के प्रकाशन ने अमेरिकी इतिहास में प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय लेने में मदद की।
जब राष्ट्रपति रिचर्ड एम। निक्सन के प्रशासन ने द टाइम्स को पेंटागन पेपर पर रिपोर्ट करने से रोकने की मांग की, तो समाचार पत्र वापस लड़ा। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया कि समाचार पत्र जनता के हित में काम कर रहे थे और प्रकाशन से पहले कहानियों को सेंसर करने के लिए सरकार के " पूर्व संयम " के उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय के बहुमत को लिखाः "केवल एक स्वतंत्र और अनियंत्रित प्रेस प्रभावी ढंग से सरकार में धोखाधड़ी का पर्दाफाश कर सकती है। . . . वियतनाम युद्ध की ओर अग्रसर सरकार के कार्यकलापों को प्रकट करने में, समाचार पत्रों ने महान रूप से ऐसा किया जो संस्थापक उम्मीद करते थे और भरोसा करते थे। "राज्यपाल के दावे पर शासन करते हुए कि प्रकाशन राष्ट्रीय सुरक्षा को धमकाएगा, अदालत ने कहाः" शब्द 'सुरक्षा' एक व्यापक, अस्पष्ट सामान्यता है जिसका पहला आचरण में शामिल मौलिक कानून को रद्द करने के लिए आविष्कार नहीं किया जाना चाहिए। "
एल्सबर्ग तीन किताबों के लेखक हैं, जिनमें 2002 के पेंटागन पेपरों का खुलासा करने के लिए उनके काम के 2002 के ज्ञापन शामिल हैं, जिन्हें "रहस्यः वियतनाम का एक ज्ञापन और पेंटागन पेपर" कहा जाता है। उन्होंने 2017 की किताब "द डूम्सडे मशीनः कन्फेशंस ऑफ ए न्यूक्लियर वॉर प्लानर " में अमेरिका के परमाणु कार्यक्रम के बारे में भी लिखा है , और 1 9 71 की किताब "पेपर ऑन द वॉर" में वियतनाम युद्ध के बारे में निबंध प्रकाशित किए हैं।
पेंटागन पेपर को प्रेस में ले जाने और उनके प्रकाशन पर कानूनी लड़ाई में एल्सबर्ग की भूमिका के बारे में कई किताबें और फिल्में लिखी और बनाई गई हैं।
एल्सबर्ग को 2017 की फिल्म "द पोस्ट" में मैथ्यू Rhys द्वारा खेला गया था। इस फिल्म में मेरिल स्ट्रीप को द वाशिंगटन पोस्ट के प्रकाशक कैथरीन ग्राहम और अखबार के संपादक बेन ब्रैडली के रूप में टॉम हैंक्स के रूप में भी शामिल किया गया था। 2003 की फिल्म "द पेंटागन पेपर" में जेम्स स्पैडर द्वारा एल्सबर्ग खेला गया था। वह 200 9 की एक वृत्तचित्र में भी दिखाई दिए, "अमेरिका में सबसे खतरनाक आदमीः डैनियल एल्सबर्ग और पेंटागन पेपर। "
पेंटागन पेपर भी न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर नील शीहान के "पेंटागन पेपरः वियतनाम युद्ध का गुप्त इतिहास" सहित कई पुस्तकों का विषय रहा है; और ग्राहम के "द पेंटागन पेपरः वाशिंगटन पोस्ट में इतिहास बनाना। "
एल्सबर्ग ने 1 9 52 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और पीएच. डी. 1 9 62 में हार्वर्ड से अर्थशास्त्र में। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में किंग्स कॉलेज में भी अध्ययन किया।
एल्सबर्ग ने रैंड कॉर्प के लिए काम करने से पहले समुद्री कोर में काम किया, एक शोध और विश्लेषण गैर-लाभकारी अरलिंगटन, वर्जीनिया और अमेरिकी रक्षा विभाग में स्थित है, जहां उन्होंने एक रिपोर्ट के उत्पादन में मदद की कि कैसे शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने निर्णय लिया 1 9 45 और 1 9 68 के बीच वियतनाम मार्ग में देश की भागीदारी।
पेंटागन पेपर के रूप में जाना जाने वाला 7,000 पेज रिपोर्ट, अन्य चीजों के साथ, राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन के प्रशासन ने "न केवल जनता के लिए बल्कि कांग्रेस के लिए भी, राष्ट्रीय राष्ट्रीय हित और महत्व के विषय के बारे में, व्यवस्थित रूप से झूठ बोला था, । "
यहां एल्बर्ग के सैन्य और पेशेवर करियर की एक समयरेखा है।
- 1 9 54 से 1 9 57: एल्सबर्ग यूएस मरीन कोर में राइफल प्लैटून नेता, ऑपरेशंस ऑफिसर और राइफल कंपनी कमांडर के रूप में कार्य करता है।
- 1 9 57 से 1 9 5 9: एल्सबर्ग हार्वर्ड यूनिवर्सिटी सोसाइटी ऑफ फेलोस में जूनियर साथी के रूप में अपनी पढ़ाई जारी रखता है, जो एक विशिष्ट कार्यक्रम है जो युवा छात्रों को उनके छात्रवृत्ति को आगे बढ़ाने का मौका देता है।
- 1 9 5 9 : एल्सबर्ग रैंड कॉर्प में एक रणनीतिक विश्लेषक के रूप में एक पद लेता है। वह बाद में लिखेंगे कि उन्होंने "भ्रम के तहत" स्थिति स्वीकार कर ली है . . . सोवियत संघ के पक्ष में एक 'मिसाइल अंतर' ने सोवियत आश्चर्य पर हमला करने की समस्या को ओवरराइड किया अमेरिका और विश्व सुरक्षा के लिए चुनौती। " उन्होंने कमांडर-इन-चीफ पैसिफ़िक, या सीआईएनसीपीएसी के सलाहकार के रूप में काम किया।
- 1 9 61 से 1 9 64 : रैंड कार्पोरेशन कर्मचारी के रूप में, एल्सबर्ग ने रक्षा और राज्य और व्हाइट हाउस के विभागों के सलाहकार के रूप में काम किया। वह परमाणु हथियारों, परमाणु युद्ध योजनाओं, और संकट निर्णय लेने में विशिष्ट है।
- 1 9 64 : एल्सबर्ग रक्षा विभाग में शामिल हो गया और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के लिए रक्षा सचिव के सहायक सचिव जॉन टी। मैकनॉटन के लिए काम करता है। इस भूमिका में एल्सबर्ग को वियतनाम युद्ध पर निर्णय लेने का अध्ययन करने के लिए कहा जाता है।
- 1 9 64 और 1 9 65 : रक्षा सचिव रॉबर्ट मैकनामारा ने मैकनॉफ्टन और एल्सबर्ग को वियतनाम युद्ध को बढ़ाने के लिए गुप्त योजनाओं पर काम करने का आदेश दिया। योजना 1 9 65 के वसंत में की गई थी।
- 1 9 65 से 1 9 67: एल्सबर्ग राज्य विभाग में स्थानांतरित हो गया और वियतनाम में कार्य करता है। वह साइगॉन में दूतावास में स्थित है। उन्होंने हेपेटाइटिस से अनुबंध किया और जून 1 9 67 में वियतनाम छोड़ दिया।
- 1 9 67 : एल्सबर्ग रैंड कॉर्प के लिए काम करने के लिए लौट आया और "अमेरिका में निर्णय लेने, वियतनाम में निर्णय लेने, 1 945-68" पर काम शुरू करता है, जो दस्तावेज़ बाद में पेंटागन पेपर के रूप में जाना जाता था।
- 1 9 68 और 1 9 6 9 : एल्सबर्ग राष्ट्रपति चुने गए रिचर्ड निक्सन के राष्ट्रीय सुरक्षा सहायक हेनरी किसिंजर के सलाहकार के रूप में कार्य करता है। वह वियतनाम युद्ध पर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में निक्सन की प्रस्तुति के मसौदे में मदद करता है।
- 1 9 6 9 : एल्सबर्ग ने कहा कि "चार राष्ट्रपति के तहत, गुप्तता से घिरे हुए, सरकारी धोखाधड़ी और मोटे तौर पर मूर्खतापूर्ण निर्णय लेने के निरंतर रिकॉर्ड" के रूप में वर्णित एल्सबर्ग ने कहा कि निक्सन वियतनाम युद्ध में शामिल देश को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। बाद में एल्सबर्ग ने लिखाः "पेंटागन पत्रों में इतिहास ने नौकरशाही के भीतर से इस पैटर्न को बदलने का कोई वादा नहीं किया। केवल एक बेहतर सूचित कांग्रेस और जनता अनिश्चितकालीन लम्बाई और युद्ध की आगे बढ़ने के लिए कार्य कर सकती है । " वह गुप्त 7,000 पृष्ठ अध्ययन की फोटोकॉपी बनाना शुरू कर देता है।
- 1 9 71 : एलसबर्ग ने अधिकांश रिपोर्ट न्यूयॉर्क टाइम्स को लीक की क्योंकि कांग्रेस ने अध्ययन पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। जब अटॉर्नी जनरल और राष्ट्रपति पेंटागन पेपर पर समाचार पत्र के आगे की रिपोर्टों के प्रकाशन को अवरुद्ध करने के लिए चले गए, तो एल्सबर्ग ने वाशिंगटन पोस्ट और 1 9 अन्य समाचार पत्रों की प्रतियां लीक की। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया। लेकिन बाद में उस वर्ष, एल्सबर्ग को शीर्ष गुप्त दस्तावेज के रिसाव से संबंधित 12 आपराधिक आरोपों पर आरोप लगाया गया था। आरोपों में षड्यंत्र, सरकारी संपत्ति की चोरी, और जासूसी विधियों का उल्लंघन शामिल था।
- 1 9 73 : एल्सबर्ग के मुकदमे में न्यायाधीश ने एलसबर्ग के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर दिया, जिसमें "सार्वजनिक दृष्टिकोण से लंबे समय तक अनुचित सरकारी आचरण" का हवाला दिया गया। न्यायाधीश ने एक गलती की घोषणा की, जिसमें कहा गया था कि इस मामले में सरकार की कार्रवाई ने "न्याय की भावना को नाराज कर दिया। "
- 1 9 75 : वियतनाम युद्ध समाप्त होता है। एल्सबर्ग एक व्याख्याता, लेखक और कार्यकर्ता के रूप में एक कैरियर शुरू करता है जिसे उन्होंने "परमाणु युग के खतरों, गलत अमेरिकी हस्तक्षेपों और देशभक्ति के लिए तत्काल आवश्यकता के रूप में वर्णित किया है। "
एल्सबर्ग का जन्म 1 9 31 में शिकागो, इलिनोइस में हुआ था और डेट्रोइट, मिशिगन में उठाया गया था। वह विवाहित है और केन्सिंगटन, कैलिफ़ोर्निया में रहता है। वह और उसकी पत्नी के तीन बड़े बच्चे हैं।
- "तब ऐसा था जैसे एक कुल्हाड़ी ने मेरे सिर को विभाजित कर दिया था, और मेरा दिल खुला तोड़ दिया। लेकिन वास्तव में क्या हुआ था कि मेरा जीवन दो में विभाजित हो गया था। "- एल्सबर्ग ने एक वियतनाम युद्ध के विरोधक द्वारा भाषण सुनने पर जोर दिया, जो जेल होने के बारे में था और शीर्ष गुप्त पेंटागन पत्रों को रिसाव करने का उनका निर्णय था।
- "यह सहन करने का एक भारी बोझ है। मैं इसे हजारों अन्य लोगों के साथ साझा करता हूं जिनके पास इस तरह की पहुंच थी। " - एल्सबर्ग ने अपनी धारणा पर कि उन्होंने जल्द ही जानकारी लीक की थी, कांग्रेस ने वियतनाम युद्ध में अमेरिकी भागीदारी के विस्तार का समर्थन नहीं किया होगा।
- "क्या मैं या उन अन्य अधिकारियों में से एक था जिनके पास उच्च स्तर की जानकारी थी, फिर हमारे कार्यालय की शपथ पर - जो राष्ट्रपति की आज्ञा मानने की शपथ नहीं थी, न ही रहस्य रखने के लिए कि वह अपने स्वयं के शपथ ग्रहण का उल्लंघन कर रहा था , लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान का समर्थन और बचाव करने के लिए पूरी तरह से एक शपथ '- वह भयानक युद्ध पूरी तरह से उलट दिया जा सकता है। लेकिन इस प्रभाव को पाने के लिए, हमें दस्तावेजों का खुलासा करने की आवश्यकता होगी जब वे वर्तमान थे वृद्धि - भाग्यपूर्ण प्रतिबद्धताओं के बाद पांच या सात, या यहां तक कि दो साल नहीं। " - एल्सबर्ग ने अपनी धारणा पर कि उन्होंने जल्द ही जानकारी लीक की थी, कांग्रेस ने वियतनाम युद्ध में अमेरिकी भागीदारी के विस्तार का समर्थन नहीं किया होगा।
- "युवा पुरुषों के मसौदे के खिलाफ अहिंसक विरोधों के लिए जेल जाने के बिना, जिन लोगों को मैं जेल जाने के लिए मिला, कोई पेंटागन पेपर नहीं था। यह मेरे लिए कुछ ऐसा नहीं होता जो खुद को जेल में डाल देगा मेरा जीवन, जैसा कि मैंने माना कि ऐसा करेगा। " - पेंटागन पत्रों को लीक करने के लिए जेल जाने का जोखिम उठाने के अपने निर्णय पर एल्सबर्ग।
- "पेंटागन पेपर पढ़ने से एक सबक तैयार किया जाना चाहिए, जो बाद में आने वाले सभी लोगों को जान रहा है या ये वर्षों से बाहर आ गया है, यह है। पेंटागन, राज्य विभाग, व्हाइट हाउस, सीआईए (और ब्रिटेन में उनके समकक्षों और अन्य समकक्षों के लिए) नाटो देशों) जिनके पास मध्य पूर्व में हमारे युद्धों में विनाशकारी वृद्धि के बारे में और तब तक समान पहुंच है, मैं कहूंगाः मेरी गलती मत करो। मैंने जो किया वह मत करो। एक नया युद्ध तक इंतजार न करें ईरान में शुरू हुआ है, जब तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान, लीबिया, इराक या यमन में अफगानिस्तान में अधिक बम गिर गए हैं। तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक कि आप प्रेस पर जाएं और कांग्रेस से सच में बताने वाले दस्तावेज़ों के साथ सत्य न कहें झूठ या अपराध या लागत और खतरों के आंतरिक अनुमान। इसे घोषित करने के लिए 40 साल का इंतजार न करें, या सात साल तक मैंने आपके लिए या किसी और को रिसाव करने के लिए नहीं किया। " - लोकतंत्र के लिए whistleblowers के महत्व पर एल्सबर्ग।
- "व्यक्तिगत जोखिम बहुत अच्छे हैं। लेकिन युद्ध के लायक जीवन को बचाया जा सकता है। " - सरकार में पारदर्शिता के महत्वपूर्ण पर एल्सबर्ग।
- "मैं देशभक्त हूं, और यह कभी नहीं बदला है। " - एल्सबर्ग ने संयुक्त राष्ट्र की ताकत में देशभक्ति और विश्वास के बारे में राष्ट्रीय सार्वजनिक रेडियो से एक प्रश्न का जवाब दिया।
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डैनियल एल्सबर्ग अमेरिकी सेना और वियतनाम युद्ध विरोधी के लिए एक पूर्व विश्लेषक हैं। अमेरिकी संविधान में पहले संशोधन द्वारा दी गई प्रेस स्वतंत्रता के महत्व के साथ उनका नाम समानार्थी बन गया, जब उन्होंने वियतनाम युद्ध पर एक गुप्त रिपोर्ट लीक की जो पत्रकारों को " पेंटागन पेपर " के नाम से जाना जाता है । एल्सबर्ग के काम के रूप में एक व्हिस्टलब्लॉवर के रूप में काम ने न्यूयॉर्क टाइम्स, द वाशिंगटन पोस्ट और एक दर्जन से अधिक अन्य समाचार पत्रों में सरकार की युद्ध रणनीतियों की विफलता का खुलासा किया, और हॉलीवुड ने "द पोस्ट", "पेंटागन पेपर" जैसी फिल्मों में नाटक किया। "और" अमेरिका में सबसे खतरनाक आदमी "। पेंटागन पेपर के एल्सबर्ग की रिसाव ने वियतनाम युद्ध के जनता के विरोध को मजबूत करने और संघर्ष के खिलाफ कांग्रेस के सदस्यों को बदलने में मदद की। न्यूयॉर्क टाइम्स, द वाशिंगटन पोस्ट और अन्य समाचार पत्रों के दस्तावेजों के प्रकाशन ने अमेरिकी इतिहास में प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय लेने में मदद की। जब राष्ट्रपति रिचर्ड एम। निक्सन के प्रशासन ने द टाइम्स को पेंटागन पेपर पर रिपोर्ट करने से रोकने की मांग की, तो समाचार पत्र वापस लड़ा। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया कि समाचार पत्र जनता के हित में काम कर रहे थे और प्रकाशन से पहले कहानियों को सेंसर करने के लिए सरकार के " पूर्व संयम " के उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय के बहुमत को लिखाः "केवल एक स्वतंत्र और अनियंत्रित प्रेस प्रभावी ढंग से सरकार में धोखाधड़ी का पर्दाफाश कर सकती है। . . . वियतनाम युद्ध की ओर अग्रसर सरकार के कार्यकलापों को प्रकट करने में, समाचार पत्रों ने महान रूप से ऐसा किया जो संस्थापक उम्मीद करते थे और भरोसा करते थे। "राज्यपाल के दावे पर शासन करते हुए कि प्रकाशन राष्ट्रीय सुरक्षा को धमकाएगा, अदालत ने कहाः" शब्द 'सुरक्षा' एक व्यापक, अस्पष्ट सामान्यता है जिसका पहला आचरण में शामिल मौलिक कानून को रद्द करने के लिए आविष्कार नहीं किया जाना चाहिए। " एल्सबर्ग तीन किताबों के लेखक हैं, जिनमें दो हज़ार दो के पेंटागन पेपरों का खुलासा करने के लिए उनके काम के दो हज़ार दो के ज्ञापन शामिल हैं, जिन्हें "रहस्यः वियतनाम का एक ज्ञापन और पेंटागन पेपर" कहा जाता है। उन्होंने दो हज़ार सत्रह की किताब "द डूम्सडे मशीनः कन्फेशंस ऑफ ए न्यूक्लियर वॉर प्लानर " में अमेरिका के परमाणु कार्यक्रम के बारे में भी लिखा है , और एक नौ इकहत्तर की किताब "पेपर ऑन द वॉर" में वियतनाम युद्ध के बारे में निबंध प्रकाशित किए हैं। पेंटागन पेपर को प्रेस में ले जाने और उनके प्रकाशन पर कानूनी लड़ाई में एल्सबर्ग की भूमिका के बारे में कई किताबें और फिल्में लिखी और बनाई गई हैं। एल्सबर्ग को दो हज़ार सत्रह की फिल्म "द पोस्ट" में मैथ्यू Rhys द्वारा खेला गया था। इस फिल्म में मेरिल स्ट्रीप को द वाशिंगटन पोस्ट के प्रकाशक कैथरीन ग्राहम और अखबार के संपादक बेन ब्रैडली के रूप में टॉम हैंक्स के रूप में भी शामिल किया गया था। दो हज़ार तीन की फिल्म "द पेंटागन पेपर" में जेम्स स्पैडर द्वारा एल्सबर्ग खेला गया था। वह दो सौ नौ की एक वृत्तचित्र में भी दिखाई दिए, "अमेरिका में सबसे खतरनाक आदमीः डैनियल एल्सबर्ग और पेंटागन पेपर। " पेंटागन पेपर भी न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर नील शीहान के "पेंटागन पेपरः वियतनाम युद्ध का गुप्त इतिहास" सहित कई पुस्तकों का विषय रहा है; और ग्राहम के "द पेंटागन पेपरः वाशिंगटन पोस्ट में इतिहास बनाना। " एल्सबर्ग ने एक नौ बावन में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और पीएच. डी. एक नौ बासठ में हार्वर्ड से अर्थशास्त्र में। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में किंग्स कॉलेज में भी अध्ययन किया। एल्सबर्ग ने रैंड कॉर्प के लिए काम करने से पहले समुद्री कोर में काम किया, एक शोध और विश्लेषण गैर-लाभकारी अरलिंगटन, वर्जीनिया और अमेरिकी रक्षा विभाग में स्थित है, जहां उन्होंने एक रिपोर्ट के उत्पादन में मदद की कि कैसे शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने निर्णय लिया एक नौ पैंतालीस और एक नौ अड़सठ के बीच वियतनाम मार्ग में देश की भागीदारी। पेंटागन पेपर के रूप में जाना जाने वाला सात,शून्य पेज रिपोर्ट, अन्य चीजों के साथ, राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन के प्रशासन ने "न केवल जनता के लिए बल्कि कांग्रेस के लिए भी, राष्ट्रीय राष्ट्रीय हित और महत्व के विषय के बारे में, व्यवस्थित रूप से झूठ बोला था, । " यहां एल्बर्ग के सैन्य और पेशेवर करियर की एक समयरेखा है। - एक नौ चौवन से एक नौ सत्तावन: एल्सबर्ग यूएस मरीन कोर में राइफल प्लैटून नेता, ऑपरेशंस ऑफिसर और राइफल कंपनी कमांडर के रूप में कार्य करता है। - एक नौ सत्तावन से एक नौ पाँच नौ: एल्सबर्ग हार्वर्ड यूनिवर्सिटी सोसाइटी ऑफ फेलोस में जूनियर साथी के रूप में अपनी पढ़ाई जारी रखता है, जो एक विशिष्ट कार्यक्रम है जो युवा छात्रों को उनके छात्रवृत्ति को आगे बढ़ाने का मौका देता है। - एक नौ पाँच नौ : एल्सबर्ग रैंड कॉर्प में एक रणनीतिक विश्लेषक के रूप में एक पद लेता है। वह बाद में लिखेंगे कि उन्होंने "भ्रम के तहत" स्थिति स्वीकार कर ली है . . . सोवियत संघ के पक्ष में एक 'मिसाइल अंतर' ने सोवियत आश्चर्य पर हमला करने की समस्या को ओवरराइड किया अमेरिका और विश्व सुरक्षा के लिए चुनौती। " उन्होंने कमांडर-इन-चीफ पैसिफ़िक, या सीआईएनसीपीएसी के सलाहकार के रूप में काम किया। - एक नौ इकसठ से एक नौ चौंसठ : रैंड कार्पोरेशन कर्मचारी के रूप में, एल्सबर्ग ने रक्षा और राज्य और व्हाइट हाउस के विभागों के सलाहकार के रूप में काम किया। वह परमाणु हथियारों, परमाणु युद्ध योजनाओं, और संकट निर्णय लेने में विशिष्ट है। - एक नौ चौंसठ : एल्सबर्ग रक्षा विभाग में शामिल हो गया और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के लिए रक्षा सचिव के सहायक सचिव जॉन टी। मैकनॉटन के लिए काम करता है। इस भूमिका में एल्सबर्ग को वियतनाम युद्ध पर निर्णय लेने का अध्ययन करने के लिए कहा जाता है। - एक नौ चौंसठ और एक नौ पैंसठ : रक्षा सचिव रॉबर्ट मैकनामारा ने मैकनॉफ्टन और एल्सबर्ग को वियतनाम युद्ध को बढ़ाने के लिए गुप्त योजनाओं पर काम करने का आदेश दिया। योजना एक नौ पैंसठ के वसंत में की गई थी। - एक नौ पैंसठ से एक नौ सरसठ: एल्सबर्ग राज्य विभाग में स्थानांतरित हो गया और वियतनाम में कार्य करता है। वह साइगॉन में दूतावास में स्थित है। उन्होंने हेपेटाइटिस से अनुबंध किया और जून एक नौ सरसठ में वियतनाम छोड़ दिया। - एक नौ सरसठ : एल्सबर्ग रैंड कॉर्प के लिए काम करने के लिए लौट आया और "अमेरिका में निर्णय लेने, वियतनाम में निर्णय लेने, एक नौ सौ पैंतालीस-अड़सठ" पर काम शुरू करता है, जो दस्तावेज़ बाद में पेंटागन पेपर के रूप में जाना जाता था। - एक नौ अड़सठ और एक नौ छः नौ : एल्सबर्ग राष्ट्रपति चुने गए रिचर्ड निक्सन के राष्ट्रीय सुरक्षा सहायक हेनरी किसिंजर के सलाहकार के रूप में कार्य करता है। वह वियतनाम युद्ध पर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में निक्सन की प्रस्तुति के मसौदे में मदद करता है। - एक नौ छः नौ : एल्सबर्ग ने कहा कि "चार राष्ट्रपति के तहत, गुप्तता से घिरे हुए, सरकारी धोखाधड़ी और मोटे तौर पर मूर्खतापूर्ण निर्णय लेने के निरंतर रिकॉर्ड" के रूप में वर्णित एल्सबर्ग ने कहा कि निक्सन वियतनाम युद्ध में शामिल देश को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। बाद में एल्सबर्ग ने लिखाः "पेंटागन पत्रों में इतिहास ने नौकरशाही के भीतर से इस पैटर्न को बदलने का कोई वादा नहीं किया। केवल एक बेहतर सूचित कांग्रेस और जनता अनिश्चितकालीन लम्बाई और युद्ध की आगे बढ़ने के लिए कार्य कर सकती है । " वह गुप्त सात,शून्य पृष्ठ अध्ययन की फोटोकॉपी बनाना शुरू कर देता है। - एक नौ इकहत्तर : एलसबर्ग ने अधिकांश रिपोर्ट न्यूयॉर्क टाइम्स को लीक की क्योंकि कांग्रेस ने अध्ययन पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। जब अटॉर्नी जनरल और राष्ट्रपति पेंटागन पेपर पर समाचार पत्र के आगे की रिपोर्टों के प्रकाशन को अवरुद्ध करने के लिए चले गए, तो एल्सबर्ग ने वाशिंगटन पोस्ट और एक नौ अन्य समाचार पत्रों की प्रतियां लीक की। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया। लेकिन बाद में उस वर्ष, एल्सबर्ग को शीर्ष गुप्त दस्तावेज के रिसाव से संबंधित बारह आपराधिक आरोपों पर आरोप लगाया गया था। आरोपों में षड्यंत्र, सरकारी संपत्ति की चोरी, और जासूसी विधियों का उल्लंघन शामिल था। - एक नौ तिहत्तर : एल्सबर्ग के मुकदमे में न्यायाधीश ने एलसबर्ग के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर दिया, जिसमें "सार्वजनिक दृष्टिकोण से लंबे समय तक अनुचित सरकारी आचरण" का हवाला दिया गया। न्यायाधीश ने एक गलती की घोषणा की, जिसमें कहा गया था कि इस मामले में सरकार की कार्रवाई ने "न्याय की भावना को नाराज कर दिया। " - एक नौ पचहत्तर : वियतनाम युद्ध समाप्त होता है। एल्सबर्ग एक व्याख्याता, लेखक और कार्यकर्ता के रूप में एक कैरियर शुरू करता है जिसे उन्होंने "परमाणु युग के खतरों, गलत अमेरिकी हस्तक्षेपों और देशभक्ति के लिए तत्काल आवश्यकता के रूप में वर्णित किया है। " एल्सबर्ग का जन्म एक नौ इकतीस में शिकागो, इलिनोइस में हुआ था और डेट्रोइट, मिशिगन में उठाया गया था। वह विवाहित है और केन्सिंगटन, कैलिफ़ोर्निया में रहता है। वह और उसकी पत्नी के तीन बड़े बच्चे हैं। - "तब ऐसा था जैसे एक कुल्हाड़ी ने मेरे सिर को विभाजित कर दिया था, और मेरा दिल खुला तोड़ दिया। लेकिन वास्तव में क्या हुआ था कि मेरा जीवन दो में विभाजित हो गया था। "- एल्सबर्ग ने एक वियतनाम युद्ध के विरोधक द्वारा भाषण सुनने पर जोर दिया, जो जेल होने के बारे में था और शीर्ष गुप्त पेंटागन पत्रों को रिसाव करने का उनका निर्णय था। - "यह सहन करने का एक भारी बोझ है। मैं इसे हजारों अन्य लोगों के साथ साझा करता हूं जिनके पास इस तरह की पहुंच थी। " - एल्सबर्ग ने अपनी धारणा पर कि उन्होंने जल्द ही जानकारी लीक की थी, कांग्रेस ने वियतनाम युद्ध में अमेरिकी भागीदारी के विस्तार का समर्थन नहीं किया होगा। - "क्या मैं या उन अन्य अधिकारियों में से एक था जिनके पास उच्च स्तर की जानकारी थी, फिर हमारे कार्यालय की शपथ पर - जो राष्ट्रपति की आज्ञा मानने की शपथ नहीं थी, न ही रहस्य रखने के लिए कि वह अपने स्वयं के शपथ ग्रहण का उल्लंघन कर रहा था , लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान का समर्थन और बचाव करने के लिए पूरी तरह से एक शपथ '- वह भयानक युद्ध पूरी तरह से उलट दिया जा सकता है। लेकिन इस प्रभाव को पाने के लिए, हमें दस्तावेजों का खुलासा करने की आवश्यकता होगी जब वे वर्तमान थे वृद्धि - भाग्यपूर्ण प्रतिबद्धताओं के बाद पांच या सात, या यहां तक कि दो साल नहीं। " - एल्सबर्ग ने अपनी धारणा पर कि उन्होंने जल्द ही जानकारी लीक की थी, कांग्रेस ने वियतनाम युद्ध में अमेरिकी भागीदारी के विस्तार का समर्थन नहीं किया होगा। - "युवा पुरुषों के मसौदे के खिलाफ अहिंसक विरोधों के लिए जेल जाने के बिना, जिन लोगों को मैं जेल जाने के लिए मिला, कोई पेंटागन पेपर नहीं था। यह मेरे लिए कुछ ऐसा नहीं होता जो खुद को जेल में डाल देगा मेरा जीवन, जैसा कि मैंने माना कि ऐसा करेगा। " - पेंटागन पत्रों को लीक करने के लिए जेल जाने का जोखिम उठाने के अपने निर्णय पर एल्सबर्ग। - "पेंटागन पेपर पढ़ने से एक सबक तैयार किया जाना चाहिए, जो बाद में आने वाले सभी लोगों को जान रहा है या ये वर्षों से बाहर आ गया है, यह है। पेंटागन, राज्य विभाग, व्हाइट हाउस, सीआईए नाटो देशों) जिनके पास मध्य पूर्व में हमारे युद्धों में विनाशकारी वृद्धि के बारे में और तब तक समान पहुंच है, मैं कहूंगाः मेरी गलती मत करो। मैंने जो किया वह मत करो। एक नया युद्ध तक इंतजार न करें ईरान में शुरू हुआ है, जब तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान, लीबिया, इराक या यमन में अफगानिस्तान में अधिक बम गिर गए हैं। तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक कि आप प्रेस पर जाएं और कांग्रेस से सच में बताने वाले दस्तावेज़ों के साथ सत्य न कहें झूठ या अपराध या लागत और खतरों के आंतरिक अनुमान। इसे घोषित करने के लिए चालीस साल का इंतजार न करें, या सात साल तक मैंने आपके लिए या किसी और को रिसाव करने के लिए नहीं किया। " - लोकतंत्र के लिए whistleblowers के महत्व पर एल्सबर्ग। - "व्यक्तिगत जोखिम बहुत अच्छे हैं। लेकिन युद्ध के लायक जीवन को बचाया जा सकता है। " - सरकार में पारदर्शिता के महत्वपूर्ण पर एल्सबर्ग। - "मैं देशभक्त हूं, और यह कभी नहीं बदला है। " - एल्सबर्ग ने संयुक्त राष्ट्र की ताकत में देशभक्ति और विश्वास के बारे में राष्ट्रीय सार्वजनिक रेडियो से एक प्रश्न का जवाब दिया।
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वाराणसी (ब्यूरो)। बनारस में भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन के कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। अपने घर से दूर शहरों या बॉर्डर पर तैनात भाइयों के लिए बहनों ने अभी से राखी खरीदना और भेजना शुरू कर दिया है। इससे लंका, गोदौलिया, रथयात्रा, कमच्छा, सारनाथ, पहडिय़ा, नई बस्ती, नई सड़क, तेलियाबाग, दालमंडी, मैदागिन, सिगरा, विद्यापीठ रोड, लहरतारा, रामनगर समेत कई बाजारों में राखी की शॉप सज गई हैैं। यहां बहनें अलग-अलग डिजाइन की रंग-बिरंगी राखियां खरीद रही हैं। इसी तरह भाइयों द्वारा बहनों के लिए उपहार की खरीदारी का भी क्रेज दिख रहा है.
शहर में 11 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी। ऐसे में इस पर्व को लेकर अभी से बाजारों में रौनक बढ़ गई है। कोई सादे धागे वाली राखी पसंद कर रहा है तो कोई कुंदन, नग, फूल-पत्ती व नाम लिखी लिखी और रेशमी से धागे से तैयार राखी पसंद कर रहा है, तो इस बार ट्रेंड में बनी स्पेशल जरी की राखी का भी बहनों में जबरदस्त क्रेज दिख रहा है.
लंका में राखी विक्रेता मोनू ने बताया कि बाजार में रेशम, कच्चे धागे, सूती, तुलसी, रूद्राक्ष, कटिंग, जड़ाऊं के साथ लाइट और खासकर छोटे बच्चों के लिए फोम वाली राखियों की खूब मांग है। अभी तीन चार दिन ही दुकान लगाते हुआ है। बहनें जरी और रेशमी धागे की राखी पसंद कर रही है। इनकी कीमत 15 से 50 रुपए तक है। तेलियाबाग के राखी विक्रेता ने बताया कि राखियों की कई वैरायटी अवेलेबल है। राखियों की कीमत 10 रुपये लेकर 500 रुपये तक है। इनमें नग वाली, अलग-अलग रंगों वाली, जर्कन वाली, रेशमी धागों की राखियों की बिक्री ज्यादा हो रही है.
बहनें अपने छोटे भाइयों (बच्चों) के लिए में छोटा भीम, मोटू-पतलू और म्यूजिकल राखी खरीद रही हैैं। साथ ही बच्चों के लिए भी बाजार में विभिन्न तरह की राखियां आई हैं, जिन पर मिक्की माउस और छोटा भीम खरगोश, हाथी, तितली, तोते फोटो वाली राखी और म्यूजिकल राखी से दुकानें सजी हुई हैैं.
बहनें राखी बांधे और भाई भी कहां पीछे रहने वाले हैैं. लिहाजा, बहनों के लिए उपहार खरीदे जा रहे हैं। कोई ऑनलाइन सर्फिंग कर रहा है तो अधिकतर लोग बाजार से ही चॉकलेट का सेट, मिठाई, कपड़ों में सूट और साड़ी की खरीदारी कर रहा है। इसके अलावा गोल्ड। सिल्वर के इयर रिंग,नोज रिंग और ब्रॉसलेट भी खरीदे जा रहे हैैं।
रक्षा बंधन पर्व में मुंह मीठी कराने के लिए फ्लेवर्ड स्वीट का खासा महत्व है। लिहाजा, बाजारों में हलवाई तरह-तरह की मिठाइयों को तैयार करने में जुट गए हैैं। मिठाई कारोबारियों ने काजू और बादाम वाली बर्फी, चॉकलेट वाली बर्फी, रसगुल्ले, गुलाब जामुन, मोती चूर के लड्डू तैयार कराएं जा रहे हैैं.
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वाराणसी । बनारस में भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन के कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। अपने घर से दूर शहरों या बॉर्डर पर तैनात भाइयों के लिए बहनों ने अभी से राखी खरीदना और भेजना शुरू कर दिया है। इससे लंका, गोदौलिया, रथयात्रा, कमच्छा, सारनाथ, पहडिय़ा, नई बस्ती, नई सड़क, तेलियाबाग, दालमंडी, मैदागिन, सिगरा, विद्यापीठ रोड, लहरतारा, रामनगर समेत कई बाजारों में राखी की शॉप सज गई हैैं। यहां बहनें अलग-अलग डिजाइन की रंग-बिरंगी राखियां खरीद रही हैं। इसी तरह भाइयों द्वारा बहनों के लिए उपहार की खरीदारी का भी क्रेज दिख रहा है. शहर में ग्यारह अगस्त को रक्षाबंधन पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी। ऐसे में इस पर्व को लेकर अभी से बाजारों में रौनक बढ़ गई है। कोई सादे धागे वाली राखी पसंद कर रहा है तो कोई कुंदन, नग, फूल-पत्ती व नाम लिखी लिखी और रेशमी से धागे से तैयार राखी पसंद कर रहा है, तो इस बार ट्रेंड में बनी स्पेशल जरी की राखी का भी बहनों में जबरदस्त क्रेज दिख रहा है. लंका में राखी विक्रेता मोनू ने बताया कि बाजार में रेशम, कच्चे धागे, सूती, तुलसी, रूद्राक्ष, कटिंग, जड़ाऊं के साथ लाइट और खासकर छोटे बच्चों के लिए फोम वाली राखियों की खूब मांग है। अभी तीन चार दिन ही दुकान लगाते हुआ है। बहनें जरी और रेशमी धागे की राखी पसंद कर रही है। इनकी कीमत पंद्रह से पचास रुपयापए तक है। तेलियाबाग के राखी विक्रेता ने बताया कि राखियों की कई वैरायटी अवेलेबल है। राखियों की कीमत दस रुपयापये लेकर पाँच सौ रुपयापये तक है। इनमें नग वाली, अलग-अलग रंगों वाली, जर्कन वाली, रेशमी धागों की राखियों की बिक्री ज्यादा हो रही है. बहनें अपने छोटे भाइयों के लिए में छोटा भीम, मोटू-पतलू और म्यूजिकल राखी खरीद रही हैैं। साथ ही बच्चों के लिए भी बाजार में विभिन्न तरह की राखियां आई हैं, जिन पर मिक्की माउस और छोटा भीम खरगोश, हाथी, तितली, तोते फोटो वाली राखी और म्यूजिकल राखी से दुकानें सजी हुई हैैं. बहनें राखी बांधे और भाई भी कहां पीछे रहने वाले हैैं. लिहाजा, बहनों के लिए उपहार खरीदे जा रहे हैं। कोई ऑनलाइन सर्फिंग कर रहा है तो अधिकतर लोग बाजार से ही चॉकलेट का सेट, मिठाई, कपड़ों में सूट और साड़ी की खरीदारी कर रहा है। इसके अलावा गोल्ड। सिल्वर के इयर रिंग,नोज रिंग और ब्रॉसलेट भी खरीदे जा रहे हैैं। रक्षा बंधन पर्व में मुंह मीठी कराने के लिए फ्लेवर्ड स्वीट का खासा महत्व है। लिहाजा, बाजारों में हलवाई तरह-तरह की मिठाइयों को तैयार करने में जुट गए हैैं। मिठाई कारोबारियों ने काजू और बादाम वाली बर्फी, चॉकलेट वाली बर्फी, रसगुल्ले, गुलाब जामुन, मोती चूर के लड्डू तैयार कराएं जा रहे हैैं.
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महाराष्ट्र में हुए उप-चुनावों के बाद से सियासी सिलसिला काफी गर्म है। यहां जारी सियासी संकट पर आज सुप्रीम कोर्ट की ओर सबकी निगाहें हैं। महाराष्ट्र संकट पर सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही है। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में मौजूद हैं और इस मामले पर बहस फिलहाल कोर्टरूम में चल रही है। सुप्रीम कोर्ट में बहस और दलीलों का सिलसिला चला हुआ है।
शिवसेना की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने SC में कथित जल्दबाजी का जिक्र किया जिसके द्वारा राष्ट्रपति शासन को रद कर दिया गया था और महाराष्ट्र में नई सरकार का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि यह इतिहास में कभी नहीं किया गया है। कपिल सिब्बल ने पूछा कि राष्ट्रीय आपातकाल क्या था? जिसे राष्ट्रपति शासन में 5:17 मिनट पर हटाया गया था और सुबह 8 बजे शपथ दिलाई गई थी। राष्ट्रपति शासन को सुबह 5. 17 बजे हचाया गया गया जिसका मतलब है कि सुबह बजे से पहले सब कुछ हुआ।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कहा है कि मैं इस याचिका के खिलाफ हलफनामा दायर करूंगी। इस मामले में अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं है। फ्लोर टेस्ट की मांग पर बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फ्लोर टेस्ट अंतिम टेस्ट नहीं है। कोई भी पार्टी यह नहीं कह सकती है कि इसे 24 घंटे में आयोजित किया जाए। एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना की सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका पर न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का कहना है कि इस तरह के मामलों में अदालत के पिछले फैसले का हवाला देते हुए अधिकांश मामलों में 24 घंटे में फ्लोर टेस्ट किया गया, कुछ में 48 घंटे में किया गया है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि हमें 2-3 दिनों का समय दें और हमें जवाब दाखिल करने दें। राज्यपाल ने पूर्ण विवेक से 23 नवंबर को सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित किया। भाजपा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और कुछ निर्दलीय विधायकों ने देवेंद्र फडणवीस के समर्थन वाले महामंत्री सीएम अजीत पवार के पत्र का उल्लेख किया है।
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महाराष्ट्र में हुए उप-चुनावों के बाद से सियासी सिलसिला काफी गर्म है। यहां जारी सियासी संकट पर आज सुप्रीम कोर्ट की ओर सबकी निगाहें हैं। महाराष्ट्र संकट पर सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही है। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में मौजूद हैं और इस मामले पर बहस फिलहाल कोर्टरूम में चल रही है। सुप्रीम कोर्ट में बहस और दलीलों का सिलसिला चला हुआ है। शिवसेना की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने SC में कथित जल्दबाजी का जिक्र किया जिसके द्वारा राष्ट्रपति शासन को रद कर दिया गया था और महाराष्ट्र में नई सरकार का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि यह इतिहास में कभी नहीं किया गया है। कपिल सिब्बल ने पूछा कि राष्ट्रीय आपातकाल क्या था? जिसे राष्ट्रपति शासन में पाँच:सत्रह मिनट पर हटाया गया था और सुबह आठ बजे शपथ दिलाई गई थी। राष्ट्रपति शासन को सुबह पाँच. सत्रह बजे हचाया गया गया जिसका मतलब है कि सुबह बजे से पहले सब कुछ हुआ। महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कहा है कि मैं इस याचिका के खिलाफ हलफनामा दायर करूंगी। इस मामले में अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं है। फ्लोर टेस्ट की मांग पर बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फ्लोर टेस्ट अंतिम टेस्ट नहीं है। कोई भी पार्टी यह नहीं कह सकती है कि इसे चौबीस घंटाटे में आयोजित किया जाए। एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना की सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका पर न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का कहना है कि इस तरह के मामलों में अदालत के पिछले फैसले का हवाला देते हुए अधिकांश मामलों में चौबीस घंटाटे में फ्लोर टेस्ट किया गया, कुछ में अड़तालीस घंटाटे में किया गया है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि हमें दो-तीन दिनों का समय दें और हमें जवाब दाखिल करने दें। राज्यपाल ने पूर्ण विवेक से तेईस नवंबर को सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित किया। भाजपा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और कुछ निर्दलीय विधायकों ने देवेंद्र फडणवीस के समर्थन वाले महामंत्री सीएम अजीत पवार के पत्र का उल्लेख किया है।
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घायल शिवा गणेश और कॉलेज प्रिंसिपल के बयान पर पुलिस ने तीन छात्रों पर रैगिंग का केस दर्ज किया है.
खम्ममः सोशल मीडिया पर विवादित टिप्पणी करने पर एक इंजीनियरिंग छात्र के सीनियरों द्वार पिटाई किए जाने का मामला सामने आया है. यह घटना तेलंगाना में खम्मम जिले के सत्तुपल्ली इलाके की है.
मदर टेरेसा साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग कॉलेज में सेकेंड ईयर के छात्र शिवागणेश को एक मामूली सी बात को लेकर EEE के थर्ड ईयर के तीन छात्रों ने मिलकर जमकर पिटाई की.
सत्तुपल्ली पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर सुरेश ने कहा कि शिवागणेश ने करीब एक महीना पहले अपने एक दोस्त के फेसबुक मैसेंजर में मैसेज भेजा था जो उसी कॉलेज के थर्ड ईयर के अफरीदी तक पहुंच गया. जिससे गलतफहमी का शिकार होकर अफरीदी ने शिवा गणेश पर नाराज हो गया.
छानबीन करने के बाद जब उसे पता चला कि शिवा भी इसी कॉलेज में पड़ता है, तब अपने दोस्तों मनिकिरण और साईतेजा के साथ मिलकर कॉलेज से शिवा गणेश को बाहर एक पुराने घर में ले जाकर जमकर पिटाई की. जबकि ये एक महीना पुराना मामला था, जिसपर शिवा ने माफी भी मांग चुका था.
घायल शिवा गणेश और कॉलेज प्रिंसिपल के बयान पर पुलिस ने उन तीनों छात्रों पर रैगिंग का केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है. ये सारी घटना किसी दूसरे छात्र ने अपने फोन से वीडियो बनाया, जिससे पुलिस को आरोपी पर मामला दर्ज करने में आसानी हुई.
पुलिस ने कहा, शिकायत के आधार पर, आईपीसीऔर रैगिंग अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. बाद में पुलिस ने कहा कि छात्र इस तरह छोटी छोटी बातों पर रैगिंग जैसा अपराध करके अपना भविष्य बर्बाद न करें.
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घायल शिवा गणेश और कॉलेज प्रिंसिपल के बयान पर पुलिस ने तीन छात्रों पर रैगिंग का केस दर्ज किया है. खम्ममः सोशल मीडिया पर विवादित टिप्पणी करने पर एक इंजीनियरिंग छात्र के सीनियरों द्वार पिटाई किए जाने का मामला सामने आया है. यह घटना तेलंगाना में खम्मम जिले के सत्तुपल्ली इलाके की है. मदर टेरेसा साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग कॉलेज में सेकेंड ईयर के छात्र शिवागणेश को एक मामूली सी बात को लेकर EEE के थर्ड ईयर के तीन छात्रों ने मिलकर जमकर पिटाई की. सत्तुपल्ली पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर सुरेश ने कहा कि शिवागणेश ने करीब एक महीना पहले अपने एक दोस्त के फेसबुक मैसेंजर में मैसेज भेजा था जो उसी कॉलेज के थर्ड ईयर के अफरीदी तक पहुंच गया. जिससे गलतफहमी का शिकार होकर अफरीदी ने शिवा गणेश पर नाराज हो गया. छानबीन करने के बाद जब उसे पता चला कि शिवा भी इसी कॉलेज में पड़ता है, तब अपने दोस्तों मनिकिरण और साईतेजा के साथ मिलकर कॉलेज से शिवा गणेश को बाहर एक पुराने घर में ले जाकर जमकर पिटाई की. जबकि ये एक महीना पुराना मामला था, जिसपर शिवा ने माफी भी मांग चुका था. घायल शिवा गणेश और कॉलेज प्रिंसिपल के बयान पर पुलिस ने उन तीनों छात्रों पर रैगिंग का केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है. ये सारी घटना किसी दूसरे छात्र ने अपने फोन से वीडियो बनाया, जिससे पुलिस को आरोपी पर मामला दर्ज करने में आसानी हुई. पुलिस ने कहा, शिकायत के आधार पर, आईपीसीऔर रैगिंग अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. बाद में पुलिस ने कहा कि छात्र इस तरह छोटी छोटी बातों पर रैगिंग जैसा अपराध करके अपना भविष्य बर्बाद न करें.
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आईपीएल-13 में मंगलवार को अपनी पहली हार झेलने के बाद दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा है कि उनकी विपक्षी टीम सनराइजर्स हैदराबाद ने शेख जायेद स्टेडियम की पिच को उनसे बेहतर तरीके से पढ़ा था। हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी करते हुए दिल्ली के सामने 163 रनों का लक्ष्य रखा। दिल्ली 147 रन ही बना सकी और 15 रनों से मैच हार गई।
मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में अय्यर ने कहा, "हम 160 के स्कोर से खुश थे। यह पार स्कोर था। वह (हैदराबाद) पिच को हमसे बेहतर तरीके से पढ़ा । उन्होंने हमें पूरी तरह से मैच से बाहर कर दिया। इसका श्रेय उनको जाता है।"
उन्होंने कहा, "पिच दूसरी पारी में दोहरा व्यवहार कर रही थी यह देख आश्चर्य हुआ। हमने सोचा था कि ओस बड़ा रोल अदा करेगी और गेंद अच्छे से बल्ले पर आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हम हालांकि बहाने नहीं बना सकते। हमने ग्राउंड का उपयोग सही तरह से नहीं किया और दो रन अच्छे से नहीं लिए। कोशिश करेंगे कि जब अगला मैच यहां खेलें तो ऐसा न हो।"
बता दें कि दिल्ली ने पहले दो मैचों में जीत हासिल की थी, इस हार के साथ वह हैट्रिक पूरी करने से चूक गई।
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आईपीएल-तेरह में मंगलवार को अपनी पहली हार झेलने के बाद दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा है कि उनकी विपक्षी टीम सनराइजर्स हैदराबाद ने शेख जायेद स्टेडियम की पिच को उनसे बेहतर तरीके से पढ़ा था। हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी करते हुए दिल्ली के सामने एक सौ तिरेसठ रनों का लक्ष्य रखा। दिल्ली एक सौ सैंतालीस रन ही बना सकी और पंद्रह रनों से मैच हार गई। मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में अय्यर ने कहा, "हम एक सौ साठ के स्कोर से खुश थे। यह पार स्कोर था। वह पिच को हमसे बेहतर तरीके से पढ़ा । उन्होंने हमें पूरी तरह से मैच से बाहर कर दिया। इसका श्रेय उनको जाता है।" उन्होंने कहा, "पिच दूसरी पारी में दोहरा व्यवहार कर रही थी यह देख आश्चर्य हुआ। हमने सोचा था कि ओस बड़ा रोल अदा करेगी और गेंद अच्छे से बल्ले पर आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हम हालांकि बहाने नहीं बना सकते। हमने ग्राउंड का उपयोग सही तरह से नहीं किया और दो रन अच्छे से नहीं लिए। कोशिश करेंगे कि जब अगला मैच यहां खेलें तो ऐसा न हो।" बता दें कि दिल्ली ने पहले दो मैचों में जीत हासिल की थी, इस हार के साथ वह हैट्रिक पूरी करने से चूक गई।
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5 लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़े गए राजस्थान के ये दो अफसर, जानिए एसीबी के जाल कैसे फंसे ?
जिसे खरीदने को बेकरार अडानी और अंबानी, आखिर इस दिवालिया कोयला प्लांट में ऐसा क्या है?
अनुभवहीन पेसर्स, कमजोर बैटिंग. . . वो तीन कमजोरी जो भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ पड़ेंगी भारी!
Kuno National Park: प्रोजेक्ट चीता को बड़ा झटका, कूनो नेशनल पार्क में 7वें चीते की मौत, जानें कहा से आया था 'तेजस'
लगता है आप ऑफलाइन हो चुके हैं।
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पाँच लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़े गए राजस्थान के ये दो अफसर, जानिए एसीबी के जाल कैसे फंसे ? जिसे खरीदने को बेकरार अडानी और अंबानी, आखिर इस दिवालिया कोयला प्लांट में ऐसा क्या है? अनुभवहीन पेसर्स, कमजोर बैटिंग. . . वो तीन कमजोरी जो भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ पड़ेंगी भारी! Kuno National Park: प्रोजेक्ट चीता को बड़ा झटका, कूनो नेशनल पार्क में सातवें चीते की मौत, जानें कहा से आया था 'तेजस' लगता है आप ऑफलाइन हो चुके हैं।
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MP Rewa News : रीवा जिले की लौर पुलिस ने मारपीट कर लूट की घटना को अंजाम देने में शामिल तीन आरोपियों को पकड़ लिया है। पकड़े गए आरोपियों को पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। आरोपियों के खिलाफ थाने में आईपीसी की धारा 392 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।
पुलिस ने बताया कि लौर थाना अंतर्गत पिपरा निवासी अमित सोनी अपने मित्र दीपक मिश्रा निवासी पिपरा के साथ बाइक में सवार होकर मऊगंज से घर जा रहे थे। लौर थाना क्षेत्र के ओड्डा नाला के समीप पहुंचते ही तीन की संख्या में खडे़ आरोपियों ने बाइक के पीछे बैठे दीपक को नीचे गिरा दिया। इसके बाद आरोपी, अमित और दीपक के साथ मारपीट करने लगे। शोर मचाए जानें पर आरोपी, दीपक का मोबाइल छीनकर भाग गए। मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। इसी कड़ी में बीते दिवस पुलिस ने मुखबिर से सूचना मिलने पर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।
पकड़े गए आरोपियों में अमन सिंह पुत्र बृहस्पति सिंह 24 वर्ष निवासी जमुहरा, विनीत मिश्रा पुत्र लखननारायण मिश्रा 29 वर्ष और निखिल मिश्रा पुत्र मनोज कुमार मिश्रा 19 वर्ष निवासी पन्नी मऊगंज शामिल है।
लूट के एक और मामले में कार्रवाई करते हुए रायपुर कर्चुलियान पुलिस ने भी दो आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों के पास से पुलिस ने लूटा गया मोबाइल जब्त कर लिया है। आरोपियों में अनुज सिंह उर्फ दिप्पू सिंह पुत्र विश्वनाथ प्रताप सिंह 19 वर्ष और अनिल प्रताप सिंह पुत्र शिव प्रताप सिंह 35 वर्ष दोनों निवासी बेलवा पैकान थाना रायपुर कर्चुलियान शामिल है। आरोपियों ने गत दिवस रायपुर कर्चुलियान निवासी संजय तिवारी के साथ मारपीट कर लूट की घटना को अंजाम दिया था। पुलिस की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया।
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MP Rewa News : रीवा जिले की लौर पुलिस ने मारपीट कर लूट की घटना को अंजाम देने में शामिल तीन आरोपियों को पकड़ लिया है। पकड़े गए आरोपियों को पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। आरोपियों के खिलाफ थाने में आईपीसी की धारा तीन सौ बानवे के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। पुलिस ने बताया कि लौर थाना अंतर्गत पिपरा निवासी अमित सोनी अपने मित्र दीपक मिश्रा निवासी पिपरा के साथ बाइक में सवार होकर मऊगंज से घर जा रहे थे। लौर थाना क्षेत्र के ओड्डा नाला के समीप पहुंचते ही तीन की संख्या में खडे़ आरोपियों ने बाइक के पीछे बैठे दीपक को नीचे गिरा दिया। इसके बाद आरोपी, अमित और दीपक के साथ मारपीट करने लगे। शोर मचाए जानें पर आरोपी, दीपक का मोबाइल छीनकर भाग गए। मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। इसी कड़ी में बीते दिवस पुलिस ने मुखबिर से सूचना मिलने पर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपियों में अमन सिंह पुत्र बृहस्पति सिंह चौबीस वर्ष निवासी जमुहरा, विनीत मिश्रा पुत्र लखननारायण मिश्रा उनतीस वर्ष और निखिल मिश्रा पुत्र मनोज कुमार मिश्रा उन्नीस वर्ष निवासी पन्नी मऊगंज शामिल है। लूट के एक और मामले में कार्रवाई करते हुए रायपुर कर्चुलियान पुलिस ने भी दो आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों के पास से पुलिस ने लूटा गया मोबाइल जब्त कर लिया है। आरोपियों में अनुज सिंह उर्फ दिप्पू सिंह पुत्र विश्वनाथ प्रताप सिंह उन्नीस वर्ष और अनिल प्रताप सिंह पुत्र शिव प्रताप सिंह पैंतीस वर्ष दोनों निवासी बेलवा पैकान थाना रायपुर कर्चुलियान शामिल है। आरोपियों ने गत दिवस रायपुर कर्चुलियान निवासी संजय तिवारी के साथ मारपीट कर लूट की घटना को अंजाम दिया था। पुलिस की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया।
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मंगलवार सुबह शहीद योगेश कुमार का पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों और आसपास के गांव के लोगों ने हिस्सा लिया। जिस समय शहीद को मुखाग्नि दी गई, सारा वातावरण सहित योगेश कुमार अमर रहे और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।
रेवाड़ी। भारतीय सेना की 25 राज राइफल्स रेजीमेंट में सिक्किम में तैनात राइफलमैन योगेश कुमार गत 5 नवंबर को शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक गांव रामपुरी पहुंचा, जहां सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। योगेश के 14 माह के बच्चे अनित ने अपने पिता को श्रद्धांजलि दी, तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। राइफलमैन योगेश हाल ही में छुट्टी काटकर ड्यूटी पर गए थे। सिक्किम में जिस जगह पर उनकी ड्यूटी थी, उस जगह पर ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण हृदय गति रुकने से वह वीरगति को प्राप्त हो गए। वहां से उनकी बटालियन के जवान पार्थिव शरीर लेकर सोमवार रात जाटूसाना पुलिस स्टेशन पहुंच गए थे। सुबह शहीद योगेश कुमार का पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों और आसपास के गांव के लोगों ने हिस्सा लिया। जिस समय शहीद को मुखाग्नि दी गई, सारा वातावरण सहित योगेश कुमार अमर रहे और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।
शहीद योगेश कुमार को अंतिम विदाई देने के लिए एसडीएम होशियार सिंह व कोसली के डीएसपी मुकेश कुमार पहुंचे। हरियाणा पुलिस की एक टुकड़ी ने हवा में 1-1 राउंड फायर करते हुए शहीद को अंतिम विदाई दी। इस मौके पर जेजेपी नेता विजय भूरथला, निवर्तमान पार्षद अमित यादव, अनिल यादव व क्षेत्र के कई प्रबुद्ध लोग मौजूद रहे।
गांव में खेतीबाड़ी का काम करने वाले सुरेंद्र के 23 वर्षीय बेटे योगेश की लगभग 3 साल पहले चरखी दादरी के अचीना निवासी शारदा के साथ शादी हुई थी। उन्हें 114 मां का बेटा 14 माह का बेटा मनित है।
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मंगलवार सुबह शहीद योगेश कुमार का पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों और आसपास के गांव के लोगों ने हिस्सा लिया। जिस समय शहीद को मुखाग्नि दी गई, सारा वातावरण सहित योगेश कुमार अमर रहे और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। रेवाड़ी। भारतीय सेना की पच्चीस राज राइफल्स रेजीमेंट में सिक्किम में तैनात राइफलमैन योगेश कुमार गत पाँच नवंबर को शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक गांव रामपुरी पहुंचा, जहां सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। योगेश के चौदह माह के बच्चे अनित ने अपने पिता को श्रद्धांजलि दी, तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। राइफलमैन योगेश हाल ही में छुट्टी काटकर ड्यूटी पर गए थे। सिक्किम में जिस जगह पर उनकी ड्यूटी थी, उस जगह पर ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण हृदय गति रुकने से वह वीरगति को प्राप्त हो गए। वहां से उनकी बटालियन के जवान पार्थिव शरीर लेकर सोमवार रात जाटूसाना पुलिस स्टेशन पहुंच गए थे। सुबह शहीद योगेश कुमार का पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों और आसपास के गांव के लोगों ने हिस्सा लिया। जिस समय शहीद को मुखाग्नि दी गई, सारा वातावरण सहित योगेश कुमार अमर रहे और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। शहीद योगेश कुमार को अंतिम विदाई देने के लिए एसडीएम होशियार सिंह व कोसली के डीएसपी मुकेश कुमार पहुंचे। हरियाणा पुलिस की एक टुकड़ी ने हवा में एक-एक राउंड फायर करते हुए शहीद को अंतिम विदाई दी। इस मौके पर जेजेपी नेता विजय भूरथला, निवर्तमान पार्षद अमित यादव, अनिल यादव व क्षेत्र के कई प्रबुद्ध लोग मौजूद रहे। गांव में खेतीबाड़ी का काम करने वाले सुरेंद्र के तेईस वर्षीय बेटे योगेश की लगभग तीन साल पहले चरखी दादरी के अचीना निवासी शारदा के साथ शादी हुई थी। उन्हें एक सौ चौदह मां का बेटा चौदह माह का बेटा मनित है।
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1. प्रश्न -गोकुललाल असावा किस राज्य के रहने वाले थे?
उतर- शाहपुरा के।
2. प्रश्न -गोकुललाल असावा को प्रथम संयुक्त राजस्थान में क्या भूमिका दी गई?
उतर- उन्हें दक्षिण-पूर्वी रियासतों को मिलाकर बनाये गये संघ में मुख्यमंत्री बनाया गया। इस संघ में मेवाड़ शामिल नहीं था। इस संघ का उद्घाटन 25 मार्च 1948 को किया गया था।
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क्या जाट भारत में बाहर से आए थे!
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WISH LIST CART एक. प्रश्न -गोकुललाल असावा किस राज्य के रहने वाले थे? उतर- शाहपुरा के। दो. प्रश्न -गोकुललाल असावा को प्रथम संयुक्त राजस्थान में क्या भूमिका दी गई? उतर- उन्हें दक्षिण-पूर्वी रियासतों को मिलाकर बनाये गये संघ में मुख्यमंत्री बनाया गया। इस संघ में मेवाड़ शामिल नहीं था। इस संघ का उद्घाटन पच्चीस मार्च एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस को किया गया था। Share On Social Media: क्या जाट भारत में बाहर से आए थे! Rajasthanhistory, Jodhpur, forgot password? Already a user ?
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स्वामी अग्निवेश पर हुए हमले के बाद कल से मैं सोशल मीडिया पर हिन्दू धर्म के तथाकथित ठेकेदारों व राष्ट्रभक्तों को विजय उल्लास के साथ हमलावरों का महिमामंडन देख रहा हूँ। स्वामी अग्निवेश को हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा दुश्मन मुसलमानों, आंतकवादियों नक्सलियों का एजेंट कहने के साथ साथ संस्कृति रक्षकों ने माँ बहन की गन्दी गालियों के साथ सोशल मीडिया में चेतावनी जारी कर दी है, वामियों - कांग्रेसियों का यही हश्र होगा।
अभी आप स्वामी अग्निवेश को भूल जाइए, मैं आपको एक साधु की कहानी सुनाता हूँ।
ये कहानी है दक्षिण के ब्राह्मण परिवार में जन्मे श्याम वेपा राव की, जो बचपन से ही पढ़ने - लिखने और वाद विवाद में बहुत तेज थे। बाप की मृत्यु बचपन में ही हो गई। मां और बड़ी बहन ने अभावों में बड़े लाड़ - प्यार से पाला। उनका एक सपना था उसको एक बड़ा आदमी बनाने का।
साठ के दशक में जब BA को भी एक बड़ी डिग्री माना जाता था, तब उसने M.Com, LLB की शिक्षा पूरी की और और कोलकाता के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में उसकी अच्छी - खासी नौकरी लग गई और वो बिज़नेस मैनेजमेंट पढ़ाने लग गया। उसके बारे कहा जाने लगा कि वो जज बन बनने वाला है।
एक लड़की उसे पसंद करने लगी। घर में ब्याह - शादी के लिए एक से बढ़कर एक रिश्ते आने लगे, पर श्याम वेपा राव के मन में कुछ और ही चल रहा था उसने पूरी दुनिया के साहित्य, दर्शन, राजनीतिक और धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने के बाद एकाएक संन्यास की घोषणा कर दी।
उसने कहा अन्याय, गरीबी, असमानता, छुआछूत, धर्म में पाखंड और महिला विरोधी दकियानूसी सोच के खिलाफ सोच लड़ना ही मेरा धर्म है। संन्यास के दौरान वो जात - पात, छुआछूत मिटाने, गरीब मजदूर के अधिकार, महिला और पुरुष अधिकारों की बात करता और घर घर भिक्षा मांग कर अपना अपना गुजारा करता।
उसने धर्म के नाम पर चले आ रहे पाखंड, कठमुल्लावाद, महिला विरोधी ,अवैज्ञानिकता को बढ़ावा देने वाली पौराणिक मूर्खताओं को जनता के सामने नंगा कर दिया। उसने कुम्भ के मेले में हरिद्वार में जाकर पाखंड खंडिनी पताका गाड़ दी और कहा गंगा या किसी नदी में डुबकी लगा लेने से कोई पापी पवित्र नहीं हो सकता। जिस धर्म में मात्र नदी में डुबकी लगा लेने से सारे पाप माफ़ हो जायें वो धर्म गलत है। जो समाज ऐसी मान्यताओं को मानेगा उस समाज में पाप घटने की बजाए बढ़ेगा। उसने सभी पोंगा पंडितों को कहा कि वो अपनी दुकानदारी के लिए कुम्भ के दौरान करोड़ों लोगों का मल मूत्र और दूसरी गंदगी गंगा में प्रवाहित कर गंगा को मैला न करें।
हिन्दू व अन्य धर्मों में चली आ रही कुरीतियों का जमकर विरोध किया। 1987 में हिन्दू धर्म में सती प्रथा को जीवित करने की पुरजोर कोशिश हुई। 1987 में राजस्थान के देवराला में 18 साल की रूपकंवर जिसके पति की शादी के एक साल बाद मृत्यु हो गई थी और कोई संतान नहीं थी, उसके ससुराल वालों ने सम्पति का बंटवारा न हो इसलिए उसे सती के नाम पर जलती चिता में डालकर ऊपर से लाठियों से दबा दिया। जलते हुए वो पूरी जोर से चीखी बचाओ, बचाओ।
उसकी चीख सुनकर चिता के चारों ओर खड़ी भीड़ एक पल को चौंकी, फिर सती मैया की जय के नारों के बीच उसने तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया। पूरे देश के मंदिरों में सती मैया की जय जयकार होने लगी, उसके नाम पर मंदिर बनाने के लिए पंडो ने चंदा माँगना शुरू कर दिया। पूरे हिन्दू समाज में सिर्फ एक साधु इसके खिलाफ खड़ा हुआ और वो था श्याम वेपा राव। उसने इसे हत्या और अपराध कहा और इसका भंडाफोड़ करने वह पैदल सती विरोधी यात्रा लेकर देवराला की तरफ चल पड़ा।
उसे सभी पंडों, पुजारियों, हिन्दू धर्म के ठेकेदारों द्वारा हिन्दू धर्म का दुश्मन कहा। उसे धमकी दी गई, पीटने और जान से मारने की बात कही गई। तरह तरह की अफवाहें फैलाई गई। यही श्याम वेपा राव थे अग्निवेश।
सती प्रथा के खिलाफ हिंदुवादी ठेकेदारों से अग्निवेश ने अकेले टक्कर ली। कोई भी उनकी इस मुहिम में उनके साथ नहीं आया। मगर अग्निवेश का संघर्ष और मेहनत रंग लाई, भारत सरकार ने पहली बार सती प्रथा के महिमामंडण को भी अपराध की श्रेणी में डाला। सती मैया के नाम पर दुकान बढ़ाने की तैयारी में हिन्दू धर्म के ठेकेदार और पोंगे पंडित हाथ मलते रह गए।
इसी श्याम वेपा राव को आज आप अग्निवेश के नाम से जानते हैं। अग्निवेश ने जीवनभर हिन्दुओं में मूर्ति पूजा, अंधविश्वास, छुआछूत, इस्लाम में बुर्का और अन्य पिछड़ी मान्यताओं और चर्च के पाखंडों की जमकर बखिया उधेड़ी हैं।
हिन्दू धर्म को कबीर की परम्परा जैसा एक आधुनिक सुधारक मिला, जिसने अपनी वैज्ञानिक सोच और धर्म में अंधविश्वास और दकियानूसी कटटरवाद की पुरजोर खिलाफत की, जिसके कारण वे हमेशा से हिन्दू धर्म के खलनायक के रूप मे मशहूर हो गए। यही नहीं जब उन्होंने आर्य समाज में धर्मगुरुओं से रोज के धार्मिक कर्म यज्ञ, उपदेश के अलावा दलितों, आदिवासियों, गरीब मजदूरों के बीच जाकर उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने की बात कही, तो आर्य समाज में उनके खिलाफ बगावत हो गई, उनके खिलाफ कई गुट बन गए।
अग्निवेश ने आर्य सभा नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई और चुनाव लड़ा। विधायक चुने गए और बाद में हरियाणा के शिक्षा मंत्री बने। उनके मंत्री रहने के दौरान उन्हें किसी ने फरीदाबाद की पत्थर खदानों में बंधुआ मजदूरी होने की जानकारी दी। उन्होंने जब यह जानकारी मुख्यमंत्री से साझा की तो तो मुख्यमंत्री ने चुप रहने को कहा। साथ में यह भी कहा कि चुप नहीं रहने की स्थिति में अंजाम भुगतने को तैयार रहना होगा।
अग्निवेश ने खदान मालिकों के पक्ष में सत्ता के इस रवैए के खिलाफ मंत्री पद और विधायकी से इस्तीफ़ा दिया और फरीदाबाद की पत्थर खदानों में बंधुआ मुक्ति मोर्चा की स्थापना की। फरीदाबाद की पत्थर खदानों से उन्होंने बंधुआ मजदूरों को छुड़ाना शुरू किया और अब तक वे भारत के अलग अलग राज्यों से फैक्ट्रियों, ईंट - भट्टों, खेतों से 176000 बंधुआ मजदूरों को छुड़ा चुके हैं।
ऐसे समाज सुधारक स्वामी अग्निवेश के साथ भाजपा के संगठनों विद्यार्थी परिषद व भारतीय जनता युवा मोर्चा के लोगों ने जो व्यवहार किया, वह वाकई निंदनीय है।
(तैश पोठवारी स्वामी अग्निवेश के साथ काम कर चुके हैं।)
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स्वामी अग्निवेश पर हुए हमले के बाद कल से मैं सोशल मीडिया पर हिन्दू धर्म के तथाकथित ठेकेदारों व राष्ट्रभक्तों को विजय उल्लास के साथ हमलावरों का महिमामंडन देख रहा हूँ। स्वामी अग्निवेश को हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा दुश्मन मुसलमानों, आंतकवादियों नक्सलियों का एजेंट कहने के साथ साथ संस्कृति रक्षकों ने माँ बहन की गन्दी गालियों के साथ सोशल मीडिया में चेतावनी जारी कर दी है, वामियों - कांग्रेसियों का यही हश्र होगा। अभी आप स्वामी अग्निवेश को भूल जाइए, मैं आपको एक साधु की कहानी सुनाता हूँ। ये कहानी है दक्षिण के ब्राह्मण परिवार में जन्मे श्याम वेपा राव की, जो बचपन से ही पढ़ने - लिखने और वाद विवाद में बहुत तेज थे। बाप की मृत्यु बचपन में ही हो गई। मां और बड़ी बहन ने अभावों में बड़े लाड़ - प्यार से पाला। उनका एक सपना था उसको एक बड़ा आदमी बनाने का। साठ के दशक में जब BA को भी एक बड़ी डिग्री माना जाता था, तब उसने M.Com, LLB की शिक्षा पूरी की और और कोलकाता के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में उसकी अच्छी - खासी नौकरी लग गई और वो बिज़नेस मैनेजमेंट पढ़ाने लग गया। उसके बारे कहा जाने लगा कि वो जज बन बनने वाला है। एक लड़की उसे पसंद करने लगी। घर में ब्याह - शादी के लिए एक से बढ़कर एक रिश्ते आने लगे, पर श्याम वेपा राव के मन में कुछ और ही चल रहा था उसने पूरी दुनिया के साहित्य, दर्शन, राजनीतिक और धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने के बाद एकाएक संन्यास की घोषणा कर दी। उसने कहा अन्याय, गरीबी, असमानता, छुआछूत, धर्म में पाखंड और महिला विरोधी दकियानूसी सोच के खिलाफ सोच लड़ना ही मेरा धर्म है। संन्यास के दौरान वो जात - पात, छुआछूत मिटाने, गरीब मजदूर के अधिकार, महिला और पुरुष अधिकारों की बात करता और घर घर भिक्षा मांग कर अपना अपना गुजारा करता। उसने धर्म के नाम पर चले आ रहे पाखंड, कठमुल्लावाद, महिला विरोधी ,अवैज्ञानिकता को बढ़ावा देने वाली पौराणिक मूर्खताओं को जनता के सामने नंगा कर दिया। उसने कुम्भ के मेले में हरिद्वार में जाकर पाखंड खंडिनी पताका गाड़ दी और कहा गंगा या किसी नदी में डुबकी लगा लेने से कोई पापी पवित्र नहीं हो सकता। जिस धर्म में मात्र नदी में डुबकी लगा लेने से सारे पाप माफ़ हो जायें वो धर्म गलत है। जो समाज ऐसी मान्यताओं को मानेगा उस समाज में पाप घटने की बजाए बढ़ेगा। उसने सभी पोंगा पंडितों को कहा कि वो अपनी दुकानदारी के लिए कुम्भ के दौरान करोड़ों लोगों का मल मूत्र और दूसरी गंदगी गंगा में प्रवाहित कर गंगा को मैला न करें। हिन्दू व अन्य धर्मों में चली आ रही कुरीतियों का जमकर विरोध किया। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में हिन्दू धर्म में सती प्रथा को जीवित करने की पुरजोर कोशिश हुई। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में राजस्थान के देवराला में अट्ठारह साल की रूपकंवर जिसके पति की शादी के एक साल बाद मृत्यु हो गई थी और कोई संतान नहीं थी, उसके ससुराल वालों ने सम्पति का बंटवारा न हो इसलिए उसे सती के नाम पर जलती चिता में डालकर ऊपर से लाठियों से दबा दिया। जलते हुए वो पूरी जोर से चीखी बचाओ, बचाओ। उसकी चीख सुनकर चिता के चारों ओर खड़ी भीड़ एक पल को चौंकी, फिर सती मैया की जय के नारों के बीच उसने तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया। पूरे देश के मंदिरों में सती मैया की जय जयकार होने लगी, उसके नाम पर मंदिर बनाने के लिए पंडो ने चंदा माँगना शुरू कर दिया। पूरे हिन्दू समाज में सिर्फ एक साधु इसके खिलाफ खड़ा हुआ और वो था श्याम वेपा राव। उसने इसे हत्या और अपराध कहा और इसका भंडाफोड़ करने वह पैदल सती विरोधी यात्रा लेकर देवराला की तरफ चल पड़ा। उसे सभी पंडों, पुजारियों, हिन्दू धर्म के ठेकेदारों द्वारा हिन्दू धर्म का दुश्मन कहा। उसे धमकी दी गई, पीटने और जान से मारने की बात कही गई। तरह तरह की अफवाहें फैलाई गई। यही श्याम वेपा राव थे अग्निवेश। सती प्रथा के खिलाफ हिंदुवादी ठेकेदारों से अग्निवेश ने अकेले टक्कर ली। कोई भी उनकी इस मुहिम में उनके साथ नहीं आया। मगर अग्निवेश का संघर्ष और मेहनत रंग लाई, भारत सरकार ने पहली बार सती प्रथा के महिमामंडण को भी अपराध की श्रेणी में डाला। सती मैया के नाम पर दुकान बढ़ाने की तैयारी में हिन्दू धर्म के ठेकेदार और पोंगे पंडित हाथ मलते रह गए। इसी श्याम वेपा राव को आज आप अग्निवेश के नाम से जानते हैं। अग्निवेश ने जीवनभर हिन्दुओं में मूर्ति पूजा, अंधविश्वास, छुआछूत, इस्लाम में बुर्का और अन्य पिछड़ी मान्यताओं और चर्च के पाखंडों की जमकर बखिया उधेड़ी हैं। हिन्दू धर्म को कबीर की परम्परा जैसा एक आधुनिक सुधारक मिला, जिसने अपनी वैज्ञानिक सोच और धर्म में अंधविश्वास और दकियानूसी कटटरवाद की पुरजोर खिलाफत की, जिसके कारण वे हमेशा से हिन्दू धर्म के खलनायक के रूप मे मशहूर हो गए। यही नहीं जब उन्होंने आर्य समाज में धर्मगुरुओं से रोज के धार्मिक कर्म यज्ञ, उपदेश के अलावा दलितों, आदिवासियों, गरीब मजदूरों के बीच जाकर उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने की बात कही, तो आर्य समाज में उनके खिलाफ बगावत हो गई, उनके खिलाफ कई गुट बन गए। अग्निवेश ने आर्य सभा नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई और चुनाव लड़ा। विधायक चुने गए और बाद में हरियाणा के शिक्षा मंत्री बने। उनके मंत्री रहने के दौरान उन्हें किसी ने फरीदाबाद की पत्थर खदानों में बंधुआ मजदूरी होने की जानकारी दी। उन्होंने जब यह जानकारी मुख्यमंत्री से साझा की तो तो मुख्यमंत्री ने चुप रहने को कहा। साथ में यह भी कहा कि चुप नहीं रहने की स्थिति में अंजाम भुगतने को तैयार रहना होगा। अग्निवेश ने खदान मालिकों के पक्ष में सत्ता के इस रवैए के खिलाफ मंत्री पद और विधायकी से इस्तीफ़ा दिया और फरीदाबाद की पत्थर खदानों में बंधुआ मुक्ति मोर्चा की स्थापना की। फरीदाबाद की पत्थर खदानों से उन्होंने बंधुआ मजदूरों को छुड़ाना शुरू किया और अब तक वे भारत के अलग अलग राज्यों से फैक्ट्रियों, ईंट - भट्टों, खेतों से एक लाख छिहत्तर हज़ार बंधुआ मजदूरों को छुड़ा चुके हैं। ऐसे समाज सुधारक स्वामी अग्निवेश के साथ भाजपा के संगठनों विद्यार्थी परिषद व भारतीय जनता युवा मोर्चा के लोगों ने जो व्यवहार किया, वह वाकई निंदनीय है।
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भारत के 'इलीट वर्ग के' पत्रकार अब देश की आम जनता को ही बेवकूफ समझने लगे हैं। अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने को लेकर भारत की आम जनता क्या सोचे और क्या नहीं, अब अजीत अंजुम सरीखे पत्रकार चाहते हैं कि ये भी मीडिया का गिरोह ही तय करे। कौन से मुद्दे से जनता को तकलीफ हो रही है और कौन से मुद्दे से वो खुश हैं वो खुश हैं, ये भी जनता की जगह अब पत्रकार ही तय करने में लगे हुए हैं।
एक ताज़ा वीडियो को देखिए। इसमें अजीत अंजुम एक बुजुर्ग ग्रामीण से सवाल पूछते हैं। उक्त ग्रामीण ने कहा कि कश्मीर को पहले पाकिस्तान अपना हिस्सा मानता था, लेकिन अनुच्छेद-370 के हटने के बाद वो वो पूरी तरह भारत का हिस्सा हो गया है। इस पर अजीत अंजुम ने आरोप लगा डाला कि उन्होंने व्हाट्सएप्प पर ये सब पढ़ा है। यानी, एक बुजुर्ग अपनी मन की बात नहीं कह सकता उनकी नजर में, ज़रूर उसे किसी ने 'सिखाया' है।
इसके बाद अजीत अंजुम बेरोजगारी के मुद्दे पर आ गए। रोजगार के सवाल पर बुजुर्ग ग्रामीण ने स्पष्ट कहा कि लोगों को रोजगार मिल रहा है और खेती में भी रोजगार बढ़ा है। इस पर अजीत अंजुम कहने लगे कि क्या पहले खेती नहीं होती थी? उलटा सवाल दागने लगे कि क्या पहले ईंट की ढुलाई और मिल का काम नहीं होता था? फिर बुजुर्ग का मजाक बनाने लगे कि वो क्या बोल रहे हैं। जब व्हाट्सएप्प का नाम लेकर बात नहीं बना तो उन्होंने पूछा डाला कि कौन सा चैनल देखते हो?
जब बुजुर्ग ने 'जी न्यूज़' बताया तो फिर अजीत अंजुम कहने लगे कि इस तरह के चैनल देखने पर यही सब होता है। इसके बाद फिर से वो बुजुर्ग ग्रामीण 'त्यागी जी' का मजाक बनाने लगे। ऑक्सीजन छिपाने को लेकर भी बुजुर्ग ने अपनी बात रखी। फिर जबरन अजीत अंजुम तेल के मुद्दे पर आ गए। बुजुर्ग ने कहा कि इससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं। अंत में अजीत अंजुम उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'कट्टर समर्थक' बता कर निकल लिए।
इतना ही नहीं, उन्होंने सोशल मीडिया में भी बुजुर्ग ग्रामीण का मजाक बनाया। उन्हें 'मोदी समर्थक' और 'जी न्यूज का दर्शक' जैसे विशेषणों से सम्बोधित करते हुए लिखा कि इन्हें महँगाई भी कबूल है। भाजपा नेता मनीष पांडेय ने अजीत अंजुम पर निशाना हुए लिखा कि अनुच्छेद-370 हटने से पहले कश्मीर नाममात्र का भारत का हिस्सा था - ये बात एक बुजुर्ग ग्रामीण त्यागी जी समझते हैं, लेकिन अजीत अंजुम जैसे पत्रकार नहीं।
उन्होंने बुजुर्ग से पूछा कि तेल के दाम बढ़ गए, खेती पहले भी होती थी। जब सब पहले होता था तो क्या महँगाई पहले नहीं थी? महँगाई दर 2009 में 12. 31% थी और आज 2021 में 5% से भी कम है। क्या अजीत अंजुम आँकड़ों में विश्वास नहीं रखते? वीडियो तो पहले भी बनते थे। आज फिर क्यों बना रहे अजीत अंजुम? 2014 से पहले घर-घर में रोजगार था क्या? मोदी सरकार में तो तमाम योजनाओं के जरिए लोगों को रोजगार ही नहीं मिला है, बल्कि कइयों ने अपना कारोबार भी शुरू किया।
जबकि सच्चाई ये है कि सुदूर गाँव का एक निरक्षर व्यक्ति भी इन इलीट पत्रकारों से ज्यादा जानता है और देशहित के बारे में सोचता है। कभी शहर का मुँह भी नहीं देखने वाले व्यक्ति के घर भी आज बिजली है, इसीलिए वो कश्मीर व लद्दाख के बारे में इन पत्रकारों से ज्यादा जानता है, जो दिन-रात एसी गाड़ियों में घूमते रहते हैं। अजीत अंजुम जी, बुजुर्ग ग्रामीण 'त्यागी जी' का विवेक आपसे ज्यादा व्यापक है, उनकी समझ आपसे कई गुना ऊपर हैं।
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भारत के 'इलीट वर्ग के' पत्रकार अब देश की आम जनता को ही बेवकूफ समझने लगे हैं। अनुच्छेद-तीन सौ सत्तर के प्रावधानों को निरस्त किए जाने को लेकर भारत की आम जनता क्या सोचे और क्या नहीं, अब अजीत अंजुम सरीखे पत्रकार चाहते हैं कि ये भी मीडिया का गिरोह ही तय करे। कौन से मुद्दे से जनता को तकलीफ हो रही है और कौन से मुद्दे से वो खुश हैं वो खुश हैं, ये भी जनता की जगह अब पत्रकार ही तय करने में लगे हुए हैं। एक ताज़ा वीडियो को देखिए। इसमें अजीत अंजुम एक बुजुर्ग ग्रामीण से सवाल पूछते हैं। उक्त ग्रामीण ने कहा कि कश्मीर को पहले पाकिस्तान अपना हिस्सा मानता था, लेकिन अनुच्छेद-तीन सौ सत्तर के हटने के बाद वो वो पूरी तरह भारत का हिस्सा हो गया है। इस पर अजीत अंजुम ने आरोप लगा डाला कि उन्होंने व्हाट्सएप्प पर ये सब पढ़ा है। यानी, एक बुजुर्ग अपनी मन की बात नहीं कह सकता उनकी नजर में, ज़रूर उसे किसी ने 'सिखाया' है। इसके बाद अजीत अंजुम बेरोजगारी के मुद्दे पर आ गए। रोजगार के सवाल पर बुजुर्ग ग्रामीण ने स्पष्ट कहा कि लोगों को रोजगार मिल रहा है और खेती में भी रोजगार बढ़ा है। इस पर अजीत अंजुम कहने लगे कि क्या पहले खेती नहीं होती थी? उलटा सवाल दागने लगे कि क्या पहले ईंट की ढुलाई और मिल का काम नहीं होता था? फिर बुजुर्ग का मजाक बनाने लगे कि वो क्या बोल रहे हैं। जब व्हाट्सएप्प का नाम लेकर बात नहीं बना तो उन्होंने पूछा डाला कि कौन सा चैनल देखते हो? जब बुजुर्ग ने 'जी न्यूज़' बताया तो फिर अजीत अंजुम कहने लगे कि इस तरह के चैनल देखने पर यही सब होता है। इसके बाद फिर से वो बुजुर्ग ग्रामीण 'त्यागी जी' का मजाक बनाने लगे। ऑक्सीजन छिपाने को लेकर भी बुजुर्ग ने अपनी बात रखी। फिर जबरन अजीत अंजुम तेल के मुद्दे पर आ गए। बुजुर्ग ने कहा कि इससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं। अंत में अजीत अंजुम उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'कट्टर समर्थक' बता कर निकल लिए। इतना ही नहीं, उन्होंने सोशल मीडिया में भी बुजुर्ग ग्रामीण का मजाक बनाया। उन्हें 'मोदी समर्थक' और 'जी न्यूज का दर्शक' जैसे विशेषणों से सम्बोधित करते हुए लिखा कि इन्हें महँगाई भी कबूल है। भाजपा नेता मनीष पांडेय ने अजीत अंजुम पर निशाना हुए लिखा कि अनुच्छेद-तीन सौ सत्तर हटने से पहले कश्मीर नाममात्र का भारत का हिस्सा था - ये बात एक बुजुर्ग ग्रामीण त्यागी जी समझते हैं, लेकिन अजीत अंजुम जैसे पत्रकार नहीं। उन्होंने बुजुर्ग से पूछा कि तेल के दाम बढ़ गए, खेती पहले भी होती थी। जब सब पहले होता था तो क्या महँगाई पहले नहीं थी? महँगाई दर दो हज़ार नौ में बारह. इकतीस% थी और आज दो हज़ार इक्कीस में पाँच% से भी कम है। क्या अजीत अंजुम आँकड़ों में विश्वास नहीं रखते? वीडियो तो पहले भी बनते थे। आज फिर क्यों बना रहे अजीत अंजुम? दो हज़ार चौदह से पहले घर-घर में रोजगार था क्या? मोदी सरकार में तो तमाम योजनाओं के जरिए लोगों को रोजगार ही नहीं मिला है, बल्कि कइयों ने अपना कारोबार भी शुरू किया। जबकि सच्चाई ये है कि सुदूर गाँव का एक निरक्षर व्यक्ति भी इन इलीट पत्रकारों से ज्यादा जानता है और देशहित के बारे में सोचता है। कभी शहर का मुँह भी नहीं देखने वाले व्यक्ति के घर भी आज बिजली है, इसीलिए वो कश्मीर व लद्दाख के बारे में इन पत्रकारों से ज्यादा जानता है, जो दिन-रात एसी गाड़ियों में घूमते रहते हैं। अजीत अंजुम जी, बुजुर्ग ग्रामीण 'त्यागी जी' का विवेक आपसे ज्यादा व्यापक है, उनकी समझ आपसे कई गुना ऊपर हैं।
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अपूपैः पायसैर्दुग्धैः सुश्रीतैः सितसंयुतैः । कदलीपनसाद्यैश्च फलैर्मधुभिरेव च नैवेद्यैः प्रीणयेद् देवीं नृत्यगीतादिभिस्तथा । एकरात्रं त्रिरात्रं च पञ्चरात्रं तु सप्त वा ॥३॥ नवरात्रं तथा पक्षं मासं पूर्णादिकं तु वा । वर्ष वा फाल्गुनान्तं वा स्यात् समस्तार्तिनाशनम् ॥४॥ ग्रहाणां प्रातिकूल्येषु दीर्घरोगेषु वैकृते । देवतानामथोत्पाते त्रिविधे त्वभिचारके ॥५॥ दारिद्र्ये विजयप्राप्त्यां दुर्भिक्षे शत्रुपीडने । कृच्छ्रेष्वन्येषु घोरेषु पूजैषा सर्वकामदा ॥६॥ पीठे वा सुसमे कृत्वा वेदिकामण्डपे तु वा । कृत्वैतत् प्रोक्तरूपं च प्रोक्तद्रव्यैस्तथार्चयेत् ॥७॥ नमेरुचम्पक अशोकपुंनागबकुलाम्बुजैः । मल्लिकामालती जातीशतपत्रोत्पलादिभिः ॥८॥ सुगन्धिभिस्तथान्यैश्च पूजयेत् पूर्णमानसः । एतद्विद्या भक्त्युपास्तियुतानन्यांश्च पूजयेत् ॥९॥ अथान्यदपि देवेशि चक्रमद्भुतदर्शनम् । योन्यर्णवाख्यं वनितागर्वपर्वतवज्रकम् ॥१०॥ षड्विंशांगुलमानेन कृत्वा योनिं समे तले । तत्र द्वौंगुलमानेषु सूत्राण्येकादशार्पयेत् ॥११॥ तेनात्र योन्यो जायन्ते त्रिकोणानि शतात्परम् । चत्वारिंशच्च चत्वारि तेषु मन्त्राक्षराणि तु ॥ १२ ॥ प्रादक्षिण्यप्रवेशेन विलिखेत्तु निरन्तरम् । मध्येऽवशिष्टनवके नववर्गसमन्विते ॥१३॥ नाथान् नव लिखेत् पश्चात् साध्याख्यां कर्मसंयुतात् । सर्वत्र विलिखेद्भूमौ भूय आवर्तनेन तु ॥१४॥ अर्धरात्रै तु तां साध्यां स्मरन्मदनवह्निना । दह्यमानां हृतस्वान्तां मस्तकस्थापिताञ्जलिम् ॥१५॥ विकीर्णकेशीमालोललोचन अरुणारुणाम् । वायुप्रेङ्खत्पता कास्थपटोपमकलेवराम् ॥१६॥ विवेकविधुरां मत्तां मानलज्जाभयातिगाम् । चिन्तयन्नचयेच्चक्रं मध्ये देवीं दिगम्बराम् ॥१७॥ जपादाडिमबन्धूककिंशुकाद्यैः समर्चयेत् । अन्यैः सुगन्धिशेफालिकुसुमाद्यैः सुगन्धिभिः ॥१८॥ त्रिसप्तरात्रादायाति प्रोक्तरूपा मदाकुला । यावच्छरीरपातं सा छायेवानपगामिनी ॥ १९ ॥
॥ भगमालिनी प्रयोगः ॥
सारांश - प्रारंभ में श्लोक १ से ८ तक कामना फल दिया गया है।
भगमालिनी का मूल मन्त्र - ऐं भगभुगे भागिनि...... मे वशमानय स्त्रीं ह्र ब्लें ह्रीं ।
यह मन्त्र एक सौ पैंतीस अक्षर का है।
यन्त्र रचना के लिये प्रथम त्रिकोण बनाये फिर षट्कोण बनाकर चार वृत्त बनाये । वृतों के मध्य में ३ वीथिकाऐं (गलीयाँ) बनेगी।
त्रिकोण मध्य में ह्रीं मन्त्र के साथ साध्य (अथवा देवता) का नाम लिखें । त्रिकोण के तीनों कोणों में ऐं, भ, ग, ये तीन अक्षर लिखे। षट्कोणों में भु, गे, भ, गि, नी, भ ये छः अक्षर लिखें । पश्चात् वृत्तों की प्रथम वीथिका में दशम अक्षर गो लिखे, फिर दरि भगमाले.......ब्लें ह्रीं ये शेष १२५ वर्ण लिखकर यन्त्र पूरा करें ।
॥ भगमालिनी नित्या प्रयोगः ॥
दूसरी विथिका में अं आं.....कं खं.......लं क्षं मातृका वर्ण लिखें। तीसरी वीथिका में अः आः.....कः खः.....लः क्षः इस तरह विसर्ग युत पूरी मातृका लिखें।
यदि वीथिका में पूरा मंत्र नही लिखें तथा प्रथम वीथिका मे केवल १० अक्षर लिखें तो १३ यन्त्र बनेंगे । तथा मन्त्र के ५ वर्ण शेष रहेंगे। इन ५ वर्णों के साथ ज झ ठवस (अमृत पंचक) और लिखें तो १४ वे यन्त्र के लिये १० अक्षर प्राप्त हो जायेंगे।
पहले की तरह यन्त्र बनायें, वृत्त बनायें। अमृत पंचक ( ज झ ठ व स ) के प्रत्येक वर्ण के साथ १२ स्वर (ॠ, ॠ, लूं, लूंं से हीन) मातृका संयोग करें तो १२×५ = ६० अक्षर प्राप्त होते हैं । यदि विसर्ग युत स्वर ( अ : आ..... ) लिखते हैं तो भी ६० अक्षर होते है। बिन्दु, विसर्ग युत पूरा मंत्र ( ज झ ठव स ) प्रत्येक वर्ण के साथ करने से ६०+६० = १२० अक्षर होते हैं । १६ स्वरो से मन्त्र के प्रत्येक अक्षर के साथ विसर्ग युत होने से १६x५ = ८० तथा बिन्दु युक्त स्वरों से के संयोग से १६x५ = ८० अक्षर का मन्त्र बनता है। स्वरों के बिन्दु युक्त एवं विसर्ग युत पंचाक्षर वर्णों के संयोग से ८०+८० = १६० वर्णाक्षर हुये ।
१४ वें यन्त्र में वृत्तों की प्रथम विथिका में शेष ५ वर्ण (य, स्त्रीं, ह्र, ब्लूं ह्रीं ) एवं ज, झ, ठ, व, स ये १० अक्षर लिखें । दूसरी विथिका में १२० वर्णाक्षर लिखें तथा तीसरी वीथिका में १६० वर्णाक्षर लिखें ।
इस तरह यह प्रथम प्रकार के यंत्रो की रचना हुई ।
अन्य रचना के अनुसार त्रिकोण, वृत्त, अष्टदल के बाद दो वृत्त बनायें। त्रिकोण मध्य मे ह्रीं मन्त्र के साथ साध्य ( देव या व्यक्ति, अथवा भगमालिनी) लिखें। त्रिकोण के अन्दर ३ व बाहर ३ अक्षर मन्त्र के प्रारम्भ के लिखें। पश्चात् अष्टदल में ८ वर्ण (सातवें से १४ वे अक्षर तक) लिखें। पश्चात् वीथिका में मातृका वर्ण लिखें। वृत्त के बाहर मन्त्र के १५ वें अक्षर से शेष अक्षर लिखकर ज, झ, ठ, व, स ये ५ वर्ण लिखकर वेटन करे ।
भगमालिनी के मन्त्र के वर्गों की संख्या १३५ एवं भगमालिनी के अलावा शेष १४ नित्याओं के वर्णों की संख्या १६१ है। कुल २९६ वर्ण होते हैं । १६० पूर्व वर्णाक्षर मिलाने से ४५६ वर्ण होते हैं।
पूर्व-पश्चिम तथा उत्तर-दक्षिण में २० - २० रेखायें खींचने से ३६१ कोष्ठक बनेंगे। बाहरी कोष्ठक से अन्दर की ओर ईशान दिशा से प्रारंभ कर सभी नित्याओं के २९६ मन्त्र वर्ण लिखें। शेष ६५ कोष्ठक बचते है। शेष में पूर्वादि दिशाओं के ४-४ कोष्ठक छोड़ने पर शेष ४९ कोष्ठक बचते हैं।
उनके मध्य में बाहर से अन्दर की ओर १४ दल कमल बनायें उसके नीचे दो वृत्त बनायें। उसके मध्य में त्रिकोण बनायें। त्रिकोण में ह्रीं के साथ साध्य का नाम लिखें।
यन्त्र मध्य में भगमालिनी का पूजन, १४ कमल दल में शेष १४ नित्याओं की पूजा करें (नित्यक्लिन्ना से विचित्रा, कामेश्वरी तक ) । यन्त्र के बाहर चार द्वार युक्त भूपुर बनायें। उसमें ब्राह्मी, माहेश्वरी, पश्चिम द्वार के दोनों ओर, कौमारी एवं वैष्णवी उत्तर द्वार के दोनों ओर, वाराही, ऐन्द्री पूर्वद्वार के दोनों ओर, चामुण्डा, महाकाली दक्षिण द्वार के दोनों ओर पूजा करे । भूपुर के वायुकोण में वायव्यै नमः, ईशान में ईशान्यै नमः अग्निकोण में अग्नये नमः, नैऋत्य में नैऋत्यै नमः, से पूजन करें। फलश्रुति शेष लोक १ से १९ तक है ।
॥ इति भगमालिनी प्रयोगः ॥
॥ ३. अथ नित्यक्लिन्ना नित्या प्रयोगः ॥
मंत्र- ह्रीं नित्यक्लिन्ने मदद्रवे स्वाहा ।
ऋषिन्यास से विनियोग मंत्र बना लेवे ।
ऋषिन्यास - शिरसि ब्रह्मणे ऋषये नमः । मुखे विराज छंदसे नमः । हृदये श्री नित्याक्लिन्नानित्यायै देवतायै नमः । गुह्ये ह्रीं बीजाय नमः । पादयोः स्वाहा शक्तयै नमः । नाभौ न्ने कीलकाय नमः । सर्वाभीष्टसिद्धये विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।
षडङ्गन्यास - ह्रीं हृदयाय नमः । नित्य शिरसे स्वाहा । क्लिन्ने शिखायै वषट् । मद कवचाय हुं । द्रवे नेत्रत्रयाय वौषट् । स्वाहा अस्त्राय फट् ।
वर्णन्यास - हृदये ह्रीं नमः । दक्षनेत्रे निं नमः । वामनेत्रे त्यं नमः । दक्षश्रोत्रे क्लिं नमः । वामे वामश्रोत्रे न्नें नमः । दक्षिणनासायां मं नमः । वामनासे दं नमः । त्वचि द्रं नमः । लिङ्गे वें नमः । गुदे स्वां नमः । पादयो हां नमः ।
। अरुणस्त्रग्विलेपां तां चारु स्मेरमुखाम्बुजान् ॥ धर्माम्बुमौक्तिकैः । विराजमानां मुकुटलसदर्धेन्दु शेखराम् ॥ चतुर्भिर्बाहुभिः पाशमंकुशं पान पात्रकम् । अभयं बिभ्रतीं पद्ममध्यासीनां मदालसाम् ॥
॥ यंत्रपूजनम् ।।
स्वर्णादिपट्ट पर कुंकुमादि से दो शिवा वाला एक चतुरस्त्र बनाये उसके पूर्व पश्चिम में दो द्वार बनाये। मध्य में त्रिकोण बनाकर ऊपर अष्टदल बनाये । त्रिकोण का मुंह नीचे होवे।
१. मध्य में देवी के षडङ्गो की हृदयादि न्यास मंत्रों से पूजा करे। देवी के पृष्ठभाग में प्रकाशनंदादि गुरुपंक्ति त्रय का पूजन करे।
२. त्रिकोण में ह्रीं श्रीं क्षोभिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः । ह्रीं श्रीं मोहिनी पा. । ह्रीं श्रीं लोला पा. ।
३. चतुरस्त्र में देवी अग्रभाग के द्वार के दक्षिण में - ॐ ह्रीं श्रीं मदाबिलापा पादुकां पूजयामि नमः । उत्तरे- ॐ ह्रीं श्रीं मङ्गला पा ।
४. अष्टदले- ॐ ह्रीं श्रीं मन्मथार्ता पादुका पू. तर्पयामि नमः । मनस्विनी पा। मोहा पा.। आमोदा पा । मानमयी पा. । माया पा. । मन्दा पा । मनोवती पा.। पश्चात् सर्वविधपूजन प्रयोग करे।
गायत्री मन्त्र - नित्यक्लिन्नायै विद्महे नित्यमदद्रवायै धीमहि तन्नो नित्या प्रचोदयात् ॥
॥ अथ कादीक्रमानुसार नित्यक्लिन्ना प्रयोगविधिः ॥ (श्रीतन्त्रराजे)
विद्यायाः साधनं सम्यक्समीहितफलप्रदम् । शृणु देवी प्रवक्ष्यामि प्रयोगार्हो यतो भवेत् ॥१॥ जितेन्द्रियो हविष्याशी त्रिसन्ध्यार्वारतो भवेत् । प्राग्वल्लक्षं तद्दशांशं कुर्याद्धोमं च तर्पणम् ॥ २ ॥ ॥ ३ ॥ मधूकपुष्पैर्मध्वक्तै र्बकुलोत्थैरथापि । चन्द्रचन्दनकस्तूरी तो विद्याप्रयोगार्हो नित्यार्चानिरतस्तथा । सहस्त्रजापी तद्भक्तः कुर्यादुक्तं नचान्यथा पद्मं रक्तैस्त्रिमध्वक्तैर्हो माल्लक्ष्मीमवाप्नुयात् । तथैव कैरवै रक्तैरङ्गनास्तु वशं नयेत् ॥५॥ समानरूपवत्सायाः शुक्लायाः गोः पयःप्लुतैः । मल्लिकामालतीजाती- शतपर्त्रर्हुतैर्भवेत् ॥६॥ कीर्तिविद्याधनारोग्य - सौभाग्य विजयादिकम् । आरग्वधप्रसूनैस्तु क्षौद्राक्तैर्हवनाद्भवेत् ॥७॥ स्वर्णाप्तिः तम्भनं शत्रोः नृपादीनां क्रुधोऽपि च । आज्याक्तैः करवीरोत्थैः प्रसूनैररुणर्हुतैः ॥८॥ रक्ताम्बराणि जनिताभूपामात्यवशं तथा । भूषावाहनवाणिज्य सिद्धयश्चास्य वाञ्छिताः ॥९॥ लवणैः सर्षपैगौरैरितरैर्वाथ होमतः । तत्तैलाक्तैर्निशामध्ये त्वानयेद्वाञ्छितां वधूम् ॥१०॥ तैलाक्तैर्जुहुयात् कृष्णादरपुष्पैर्निशान्तरा । मासादरातिस्तीव्रार्तिर्ज्वरेण भवति ध्रुवम् ॥११॥ आरुष्करघृताभ्यक्तैस्तद्वीजैर्निशि होमतः । शत्रोर्दहे व्रणानि स्युर्दुःसाध्यानि चिकित्सकैः ॥१२॥ भल्लातकतैलम् तद्वीजैर्भल्लातकबीजैः ॥
तैरेव दलिताङ्गस्तु रिपुर्याति यमालयम् । तथा तत्तैलसंसिक्तै र्बीजैरङ्कोलकैरपि ॥१३॥ मरिचैः सर्षपाज्याक्तैर्निशि हौमात्तुः मासतः । वाञ्छितां वनितां कामज्वरार्तामानयेद् ध्रुवम् ॥१४॥ सप्तरात्रं हुतेर्निशि । धैर्यमानकुलैर्नित्यं दुष्प्रापामानयेद्वधूम् ॥ १५ ॥ मरिचैः सर्षपोपेतैः अन्नज्यैर्जुहुयान्नित्यं शतमष्टोत्तरं तु वा शतमष्टोत्तरं तु वा । तेनान्नपूर्णो भवने भोक्ता च भवति प्रिये ॥ १६ ॥ शालीभिराज्ययुक्ताभि र्होमाच्छालीमवाप्नुयात् । मुद्गैर्मुद्गं घृतेराज्यमिष्टैरिष्टं हुतर्भवेत् सार्ध्यक्षवृक्षसम्भूत पिष्टपादरजः कृताम् । राजीमरिचलोणोत्थां पुत्तलीं जुहुयान्निशि ॥ १८ ॥ प्रपदाभ्यां च जङ्घाभ्यां जानुभ्यामूरुयुग्मतः । नाभेरधस्ताद्धृदयाद्भिन्नेना शिरसा च सुतीक्ष्णेन छित्त्वा शस्त्रैण वै क्रमात् । एवं द्वादशधा होमान्नरनारीनराधिपाः ॥ २० ॥ वश्या भवन्ति सप्ताहाज्वरार्ताश्चास्य वाञ्छया । प्रयान्ति निधनं चास्य वाञ्छयानन्ययोगतः ॥ २१ ॥ अत्र साध्यनक्षत्रसम्भूतपिष्ट साध्यपादरजो धूली राजीमरिचलवणैरेभिः पञ्चद्रव्यैरेकैकपुत्तलिका प्राक्प्रयोगोक्तप्रकारेण कृतप्राणप्रतिष्ठा। प्रपदाध्यां १ जङ्घाभ्यां २ जानुभ्यां ३ ऊरुयुग्मतः ४ नाभेरधस्तात् ५ हृदयान्नाभिपर्यन्तं ६ कण्ठतो हृत्पर्यन्त ७ शिरः ८, एवमाहुत्यष्टकम् ॥ तथापिष्टेन गुडयुक्तेन मरिचैर्जीरकैर्युतम् । कृत्वा पुत्तलिकां साध्यनामयुक्तामथो हृदि ॥२२॥
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अपूपैः पायसैर्दुग्धैः सुश्रीतैः सितसंयुतैः । कदलीपनसाद्यैश्च फलैर्मधुभिरेव च नैवेद्यैः प्रीणयेद् देवीं नृत्यगीतादिभिस्तथा । एकरात्रं त्रिरात्रं च पञ्चरात्रं तु सप्त वा ॥तीन॥ नवरात्रं तथा पक्षं मासं पूर्णादिकं तु वा । वर्ष वा फाल्गुनान्तं वा स्यात् समस्तार्तिनाशनम् ॥चार॥ ग्रहाणां प्रातिकूल्येषु दीर्घरोगेषु वैकृते । देवतानामथोत्पाते त्रिविधे त्वभिचारके ॥पाँच॥ दारिद्र्ये विजयप्राप्त्यां दुर्भिक्षे शत्रुपीडने । कृच्छ्रेष्वन्येषु घोरेषु पूजैषा सर्वकामदा ॥छः॥ पीठे वा सुसमे कृत्वा वेदिकामण्डपे तु वा । कृत्वैतत् प्रोक्तरूपं च प्रोक्तद्रव्यैस्तथार्चयेत् ॥सात॥ नमेरुचम्पक अशोकपुंनागबकुलाम्बुजैः । मल्लिकामालती जातीशतपत्रोत्पलादिभिः ॥आठ॥ सुगन्धिभिस्तथान्यैश्च पूजयेत् पूर्णमानसः । एतद्विद्या भक्त्युपास्तियुतानन्यांश्च पूजयेत् ॥नौ॥ अथान्यदपि देवेशि चक्रमद्भुतदर्शनम् । योन्यर्णवाख्यं वनितागर्वपर्वतवज्रकम् ॥दस॥ षड्विंशांगुलमानेन कृत्वा योनिं समे तले । तत्र द्वौंगुलमानेषु सूत्राण्येकादशार्पयेत् ॥ग्यारह॥ तेनात्र योन्यो जायन्ते त्रिकोणानि शतात्परम् । चत्वारिंशच्च चत्वारि तेषु मन्त्राक्षराणि तु ॥ बारह ॥ प्रादक्षिण्यप्रवेशेन विलिखेत्तु निरन्तरम् । मध्येऽवशिष्टनवके नववर्गसमन्विते ॥तेरह॥ नाथान् नव लिखेत् पश्चात् साध्याख्यां कर्मसंयुतात् । सर्वत्र विलिखेद्भूमौ भूय आवर्तनेन तु ॥चौदह॥ अर्धरात्रै तु तां साध्यां स्मरन्मदनवह्निना । दह्यमानां हृतस्वान्तां मस्तकस्थापिताञ्जलिम् ॥पंद्रह॥ विकीर्णकेशीमालोललोचन अरुणारुणाम् । वायुप्रेङ्खत्पता कास्थपटोपमकलेवराम् ॥सोलह॥ विवेकविधुरां मत्तां मानलज्जाभयातिगाम् । चिन्तयन्नचयेच्चक्रं मध्ये देवीं दिगम्बराम् ॥सत्रह॥ जपादाडिमबन्धूककिंशुकाद्यैः समर्चयेत् । अन्यैः सुगन्धिशेफालिकुसुमाद्यैः सुगन्धिभिः ॥अट्ठारह॥ त्रिसप्तरात्रादायाति प्रोक्तरूपा मदाकुला । यावच्छरीरपातं सा छायेवानपगामिनी ॥ उन्नीस ॥ ॥ भगमालिनी प्रयोगः ॥ सारांश - प्रारंभ में श्लोक एक से आठ तक कामना फल दिया गया है। भगमालिनी का मूल मन्त्र - ऐं भगभुगे भागिनि...... मे वशमानय स्त्रीं ह्र ब्लें ह्रीं । यह मन्त्र एक सौ पैंतीस अक्षर का है। यन्त्र रचना के लिये प्रथम त्रिकोण बनाये फिर षट्कोण बनाकर चार वृत्त बनाये । वृतों के मध्य में तीन वीथिकाऐं बनेगी। त्रिकोण मध्य में ह्रीं मन्त्र के साथ साध्य का नाम लिखें । त्रिकोण के तीनों कोणों में ऐं, भ, ग, ये तीन अक्षर लिखे। षट्कोणों में भु, गे, भ, गि, नी, भ ये छः अक्षर लिखें । पश्चात् वृत्तों की प्रथम वीथिका में दशम अक्षर गो लिखे, फिर दरि भगमाले.......ब्लें ह्रीं ये शेष एक सौ पच्चीस वर्ण लिखकर यन्त्र पूरा करें । ॥ भगमालिनी नित्या प्रयोगः ॥ दूसरी विथिका में अं आं.....कं खं.......लं क्षं मातृका वर्ण लिखें। तीसरी वीथिका में अः आः.....कः खः.....लः क्षः इस तरह विसर्ग युत पूरी मातृका लिखें। यदि वीथिका में पूरा मंत्र नही लिखें तथा प्रथम वीथिका मे केवल दस अक्षर लिखें तो तेरह यन्त्र बनेंगे । तथा मन्त्र के पाँच वर्ण शेष रहेंगे। इन पाँच वर्णों के साथ ज झ ठवस और लिखें तो चौदह वे यन्त्र के लिये दस अक्षर प्राप्त हो जायेंगे। पहले की तरह यन्त्र बनायें, वृत्त बनायें। अमृत पंचक के प्रत्येक वर्ण के साथ बारह स्वर मातृका संयोग करें तो बारह×पाँच = साठ अक्षर प्राप्त होते हैं । यदि विसर्ग युत स्वर लिखते हैं तो भी साठ अक्षर होते है। बिन्दु, विसर्ग युत पूरा मंत्र प्रत्येक वर्ण के साथ करने से साठ+साठ = एक सौ बीस अक्षर होते हैं । सोलह स्वरो से मन्त्र के प्रत्येक अक्षर के साथ विसर्ग युत होने से सोलहxपाँच = अस्सी तथा बिन्दु युक्त स्वरों से के संयोग से सोलहxपाँच = अस्सी अक्षर का मन्त्र बनता है। स्वरों के बिन्दु युक्त एवं विसर्ग युत पंचाक्षर वर्णों के संयोग से अस्सी+अस्सी = एक सौ साठ वर्णाक्षर हुये । चौदह वें यन्त्र में वृत्तों की प्रथम विथिका में शेष पाँच वर्ण एवं ज, झ, ठ, व, स ये दस अक्षर लिखें । दूसरी विथिका में एक सौ बीस वर्णाक्षर लिखें तथा तीसरी वीथिका में एक सौ साठ वर्णाक्षर लिखें । इस तरह यह प्रथम प्रकार के यंत्रो की रचना हुई । अन्य रचना के अनुसार त्रिकोण, वृत्त, अष्टदल के बाद दो वृत्त बनायें। त्रिकोण मध्य मे ह्रीं मन्त्र के साथ साध्य लिखें। त्रिकोण के अन्दर तीन व बाहर तीन अक्षर मन्त्र के प्रारम्भ के लिखें। पश्चात् अष्टदल में आठ वर्ण लिखें। पश्चात् वीथिका में मातृका वर्ण लिखें। वृत्त के बाहर मन्त्र के पंद्रह वें अक्षर से शेष अक्षर लिखकर ज, झ, ठ, व, स ये पाँच वर्ण लिखकर वेटन करे । भगमालिनी के मन्त्र के वर्गों की संख्या एक सौ पैंतीस एवं भगमालिनी के अलावा शेष चौदह नित्याओं के वर्णों की संख्या एक सौ इकसठ है। कुल दो सौ छियानवे वर्ण होते हैं । एक सौ साठ पूर्व वर्णाक्षर मिलाने से चार सौ छप्पन वर्ण होते हैं। पूर्व-पश्चिम तथा उत्तर-दक्षिण में बीस - बीस रेखायें खींचने से तीन सौ इकसठ कोष्ठक बनेंगे। बाहरी कोष्ठक से अन्दर की ओर ईशान दिशा से प्रारंभ कर सभी नित्याओं के दो सौ छियानवे मन्त्र वर्ण लिखें। शेष पैंसठ कोष्ठक बचते है। शेष में पूर्वादि दिशाओं के चार-चार कोष्ठक छोड़ने पर शेष उनचास कोष्ठक बचते हैं। उनके मध्य में बाहर से अन्दर की ओर चौदह दल कमल बनायें उसके नीचे दो वृत्त बनायें। उसके मध्य में त्रिकोण बनायें। त्रिकोण में ह्रीं के साथ साध्य का नाम लिखें। यन्त्र मध्य में भगमालिनी का पूजन, चौदह कमल दल में शेष चौदह नित्याओं की पूजा करें । यन्त्र के बाहर चार द्वार युक्त भूपुर बनायें। उसमें ब्राह्मी, माहेश्वरी, पश्चिम द्वार के दोनों ओर, कौमारी एवं वैष्णवी उत्तर द्वार के दोनों ओर, वाराही, ऐन्द्री पूर्वद्वार के दोनों ओर, चामुण्डा, महाकाली दक्षिण द्वार के दोनों ओर पूजा करे । भूपुर के वायुकोण में वायव्यै नमः, ईशान में ईशान्यै नमः अग्निकोण में अग्नये नमः, नैऋत्य में नैऋत्यै नमः, से पूजन करें। फलश्रुति शेष लोक एक से उन्नीस तक है । ॥ इति भगमालिनी प्रयोगः ॥ ॥ तीन. अथ नित्यक्लिन्ना नित्या प्रयोगः ॥ मंत्र- ह्रीं नित्यक्लिन्ने मदद्रवे स्वाहा । ऋषिन्यास से विनियोग मंत्र बना लेवे । ऋषिन्यास - शिरसि ब्रह्मणे ऋषये नमः । मुखे विराज छंदसे नमः । हृदये श्री नित्याक्लिन्नानित्यायै देवतायै नमः । गुह्ये ह्रीं बीजाय नमः । पादयोः स्वाहा शक्तयै नमः । नाभौ न्ने कीलकाय नमः । सर्वाभीष्टसिद्धये विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे । षडङ्गन्यास - ह्रीं हृदयाय नमः । नित्य शिरसे स्वाहा । क्लिन्ने शिखायै वषट् । मद कवचाय हुं । द्रवे नेत्रत्रयाय वौषट् । स्वाहा अस्त्राय फट् । वर्णन्यास - हृदये ह्रीं नमः । दक्षनेत्रे निं नमः । वामनेत्रे त्यं नमः । दक्षश्रोत्रे क्लिं नमः । वामे वामश्रोत्रे न्नें नमः । दक्षिणनासायां मं नमः । वामनासे दं नमः । त्वचि द्रं नमः । लिङ्गे वें नमः । गुदे स्वां नमः । पादयो हां नमः । । अरुणस्त्रग्विलेपां तां चारु स्मेरमुखाम्बुजान् ॥ धर्माम्बुमौक्तिकैः । विराजमानां मुकुटलसदर्धेन्दु शेखराम् ॥ चतुर्भिर्बाहुभिः पाशमंकुशं पान पात्रकम् । अभयं बिभ्रतीं पद्ममध्यासीनां मदालसाम् ॥ ॥ यंत्रपूजनम् ।। स्वर्णादिपट्ट पर कुंकुमादि से दो शिवा वाला एक चतुरस्त्र बनाये उसके पूर्व पश्चिम में दो द्वार बनाये। मध्य में त्रिकोण बनाकर ऊपर अष्टदल बनाये । त्रिकोण का मुंह नीचे होवे। एक. मध्य में देवी के षडङ्गो की हृदयादि न्यास मंत्रों से पूजा करे। देवी के पृष्ठभाग में प्रकाशनंदादि गुरुपंक्ति त्रय का पूजन करे। दो. त्रिकोण में ह्रीं श्रीं क्षोभिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः । ह्रीं श्रीं मोहिनी पा. । ह्रीं श्रीं लोला पा. । तीन. चतुरस्त्र में देवी अग्रभाग के द्वार के दक्षिण में - ॐ ह्रीं श्रीं मदाबिलापा पादुकां पूजयामि नमः । उत्तरे- ॐ ह्रीं श्रीं मङ्गला पा । चार. अष्टदले- ॐ ह्रीं श्रीं मन्मथार्ता पादुका पू. तर्पयामि नमः । मनस्विनी पा। मोहा पा.। आमोदा पा । मानमयी पा. । माया पा. । मन्दा पा । मनोवती पा.। पश्चात् सर्वविधपूजन प्रयोग करे। गायत्री मन्त्र - नित्यक्लिन्नायै विद्महे नित्यमदद्रवायै धीमहि तन्नो नित्या प्रचोदयात् ॥ ॥ अथ कादीक्रमानुसार नित्यक्लिन्ना प्रयोगविधिः ॥ विद्यायाः साधनं सम्यक्समीहितफलप्रदम् । शृणु देवी प्रवक्ष्यामि प्रयोगार्हो यतो भवेत् ॥एक॥ जितेन्द्रियो हविष्याशी त्रिसन्ध्यार्वारतो भवेत् । प्राग्वल्लक्षं तद्दशांशं कुर्याद्धोमं च तर्पणम् ॥ दो ॥ ॥ तीन ॥ मधूकपुष्पैर्मध्वक्तै र्बकुलोत्थैरथापि । चन्द्रचन्दनकस्तूरी तो विद्याप्रयोगार्हो नित्यार्चानिरतस्तथा । सहस्त्रजापी तद्भक्तः कुर्यादुक्तं नचान्यथा पद्मं रक्तैस्त्रिमध्वक्तैर्हो माल्लक्ष्मीमवाप्नुयात् । तथैव कैरवै रक्तैरङ्गनास्तु वशं नयेत् ॥पाँच॥ समानरूपवत्सायाः शुक्लायाः गोः पयःप्लुतैः । मल्लिकामालतीजाती- शतपर्त्रर्हुतैर्भवेत् ॥छः॥ कीर्तिविद्याधनारोग्य - सौभाग्य विजयादिकम् । आरग्वधप्रसूनैस्तु क्षौद्राक्तैर्हवनाद्भवेत् ॥सात॥ स्वर्णाप्तिः तम्भनं शत्रोः नृपादीनां क्रुधोऽपि च । आज्याक्तैः करवीरोत्थैः प्रसूनैररुणर्हुतैः ॥आठ॥ रक्ताम्बराणि जनिताभूपामात्यवशं तथा । भूषावाहनवाणिज्य सिद्धयश्चास्य वाञ्छिताः ॥नौ॥ लवणैः सर्षपैगौरैरितरैर्वाथ होमतः । तत्तैलाक्तैर्निशामध्ये त्वानयेद्वाञ्छितां वधूम् ॥दस॥ तैलाक्तैर्जुहुयात् कृष्णादरपुष्पैर्निशान्तरा । मासादरातिस्तीव्रार्तिर्ज्वरेण भवति ध्रुवम् ॥ग्यारह॥ आरुष्करघृताभ्यक्तैस्तद्वीजैर्निशि होमतः । शत्रोर्दहे व्रणानि स्युर्दुःसाध्यानि चिकित्सकैः ॥बारह॥ भल्लातकतैलम् तद्वीजैर्भल्लातकबीजैः ॥ तैरेव दलिताङ्गस्तु रिपुर्याति यमालयम् । तथा तत्तैलसंसिक्तै र्बीजैरङ्कोलकैरपि ॥तेरह॥ मरिचैः सर्षपाज्याक्तैर्निशि हौमात्तुः मासतः । वाञ्छितां वनितां कामज्वरार्तामानयेद् ध्रुवम् ॥चौदह॥ सप्तरात्रं हुतेर्निशि । धैर्यमानकुलैर्नित्यं दुष्प्रापामानयेद्वधूम् ॥ पंद्रह ॥ मरिचैः सर्षपोपेतैः अन्नज्यैर्जुहुयान्नित्यं शतमष्टोत्तरं तु वा शतमष्टोत्तरं तु वा । तेनान्नपूर्णो भवने भोक्ता च भवति प्रिये ॥ सोलह ॥ शालीभिराज्ययुक्ताभि र्होमाच्छालीमवाप्नुयात् । मुद्गैर्मुद्गं घृतेराज्यमिष्टैरिष्टं हुतर्भवेत् सार्ध्यक्षवृक्षसम्भूत पिष्टपादरजः कृताम् । राजीमरिचलोणोत्थां पुत्तलीं जुहुयान्निशि ॥ अट्ठारह ॥ प्रपदाभ्यां च जङ्घाभ्यां जानुभ्यामूरुयुग्मतः । नाभेरधस्ताद्धृदयाद्भिन्नेना शिरसा च सुतीक्ष्णेन छित्त्वा शस्त्रैण वै क्रमात् । एवं द्वादशधा होमान्नरनारीनराधिपाः ॥ बीस ॥ वश्या भवन्ति सप्ताहाज्वरार्ताश्चास्य वाञ्छया । प्रयान्ति निधनं चास्य वाञ्छयानन्ययोगतः ॥ इक्कीस ॥ अत्र साध्यनक्षत्रसम्भूतपिष्ट साध्यपादरजो धूली राजीमरिचलवणैरेभिः पञ्चद्रव्यैरेकैकपुत्तलिका प्राक्प्रयोगोक्तप्रकारेण कृतप्राणप्रतिष्ठा। प्रपदाध्यां एक जङ्घाभ्यां दो जानुभ्यां तीन ऊरुयुग्मतः चार नाभेरधस्तात् पाँच हृदयान्नाभिपर्यन्तं छः कण्ठतो हृत्पर्यन्त सात शिरः आठ, एवमाहुत्यष्टकम् ॥ तथापिष्टेन गुडयुक्तेन मरिचैर्जीरकैर्युतम् । कृत्वा पुत्तलिकां साध्यनामयुक्तामथो हृदि ॥बाईस॥
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को शिक्षा देने और उनका ज्ञान बढ़ाने के लिए विद्यासागर ने कैसे निःस्वार्थ भाव से परिश्रम किया था। उन्होने मैट्रोपॉलिटन से तो एक पैसा लिया ही नहीं, बल्कि टेक्स-बुक कमेटी में शरीक होने के लिए डाइरेंकुर साहब के कहने पर भी उसे इस ख़याल से नामञ्जर कर दिया कि कहीं कोई यह कह कर स्वार्थी न बनावे कि विद्यासागर अपनी पुस्तक मञ्जर कराने के लिए ही टेक्स-बुक कमेटी के मेम्बर हुए हैं। हमारी समझ में वह वर्त्तमान पूर्वी और पश्चिमी नीति को नीचा दिसा कर न्याय और निष्ठा की विजय वैजयन्ती फहरा गये हैं। क्या वर्त्तमान पौध के बङ्गाली युवक विद्यासागर के आदर्श पर स्वार्थ-शून्य होकर देश सेवा और समाज सेवा के काम करना न सीखेंगे ? अगर वे विद्यासागर के चरित्र में ये बातें न सीस सकें तो फिर और कहीं सीखेंगे ? सचमुच यह हमारे भाग्य ही को बात है कि ऐसा उच्च आदर्श सामने रहने पर भी स्वदेश हित की अनेक चेष्टाय आरम्भ में ही समाप्त हो जाती हैं। सबसे बढ़ कर दुःख तो इस बात का है कि वँगला-साहित्य इस समय स्वार्थपरता से कलुपित हो रहा है। सहृदय साहित्य सेवक लोग यदि दया करके विद्यासागर के दिसलाये रास्ते पर धीरे धीरे होने की चेष्टा करें तो वर्त्तमान साहित्य का कूड़ा न देख पड़े और विद्यासागर की इच्छा के अनुसार लोगों को शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करने में सत्साहित्य से सहायता मिले ।
विद्यासागर के उद्योग से स्थापित मॅट्रॉपोलीटन इन्स्टीट्यूशन की देखा-देखी उस तरह के अनेक विद्यालय स्थापित हुए थे। विद्यासागर के अनुकरण पर सबसे पहले साधारण ब्राह्म समाज के मुखियों
* श्रीयुत ग्रानन्दमोहन वसु. श्रीयुत दुर्गामोहन दाम, श्रीयुत शिवनाय शाम्री श्रीयुत उमेशचन्द्र दत्त, श्रीयुत द्वारकानाथ, गंगोपाध्याय श्रादि महाशयों के उद्योग श्रोर परिश्रम से मिट्टी कालेज की स्थापना और उन्नति हुई है।
ने सिटी-कालेज की नींव डाली। उनके असीम आग्रह और उत्साह से सिटी-कालेज बहुत शीघ्र अपना काम चला लेने लायकको पहुँच गया । क्रमशः रिपन-कालेज और अन्यान्य प्रथम श्रेणी तथा द्वितीय श्रेणी के कालेजों का अभ्युदय और उन्नति सहज साध्य होती गई ।
कलकत्ते के बाहर भी अनेक स्थानों में यूनिवर्सिटी से शामिल बहुत से कालेज स्थापित हो गये हैं। उन्होने बहुत से गरीब बङ्गाली विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा प्राप्त करने और ज्ञानोपार्जन से अपना जन्म सफल बनाने का मार्ग साफ़ और सहज बना दिया है। इन सब कामों का श्रेय विद्यासागर को दिया जा सकता है, क्योंकि इस मार्ग में सबसे पहले अनेक सुविधाओं का सुयाल न करके विद्यासागर ही असर हुए थे । बङ्गाल के अनेक स्थानों में स्थापित और देशी आदमियों के द्वारा सञ्चालित कालेजों के संचालक लोग इस बात के लिए विद्यासागर के निकट रखी हैं। इन विद्यालयों के सञ्चालकों से विद्यासागर के लिए कुछ करने की आशा करना
* रिपन कालेज अकेले सुरेन्द्रनाथ बनर्जी की चेष्टा और अध्यवसाय का फल है। स्वर्गीय केशवचन्द्र के वर्ट कालेज विलायत से लौटे हुए गिरीशचन्द्र वसु के द्वारा संचालित बङ्गवासी कालेज, मेट्रोपोनीटन के भूत पूर्व अध्यापक दाबू खुदीराम वसु के स्थापित सेन्ट्रल इन्स्टीट्यूशन यादि का नाम विशेष रूप से उल्लेख के योग्य है ।
↑ महारानी स्वर्णमयी सी० आई० द्वारा सञ्चालित बहरामपुर कालेज, महा राजा कूब बिहार का विक्टोरिया कालेश, वईवान के महाराज का राज-कालेज, ढाके का जगन्नाथ कालेज, उत्तर पाडा-कालेज, बरीमाल का जमोहन कालेज, भागलपुर का तेजनारायण कालेज, बिहार नेशनल कलेज, नाडाइल का विक्टोरिया-कालेज, सिलहट का एम० सी० कालेज, कुमिल्ले का विक्टोरिया कालेज और पचनाकालेज इत्यादि ।
क्या अनुचित होगा ? विद्यासागर का स्मारक स्थापित करन के लिए सर रमेशचन्द्र मिन खुद धन-समह की चेष्टा कर रहे है। इससे बढ कर सुख की बात और क्या हो सकती है ? आधुनिक बङ्गला के सर्वश्रेष्ठ हितैषी ईश्वरचन्द्र विद्यासागर का स्मारक बनाने के लिए जो सज्जन चेष्टा कर रहे हैं वे इस कार्य से इस लोक में सन्तोष और अमरपद पा कर कृतार्थ होगे । विद्यासागर के कृतज्ञ औरणी लोग कम नहीं हैं। वे चाहे तो स्वदेश-प्रेमी धर्मवीर विद्यासागर का स्मारक स्थापित होना बहुत ही महज है।
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को शिक्षा देने और उनका ज्ञान बढ़ाने के लिए विद्यासागर ने कैसे निःस्वार्थ भाव से परिश्रम किया था। उन्होने मैट्रोपॉलिटन से तो एक पैसा लिया ही नहीं, बल्कि टेक्स-बुक कमेटी में शरीक होने के लिए डाइरेंकुर साहब के कहने पर भी उसे इस ख़याल से नामञ्जर कर दिया कि कहीं कोई यह कह कर स्वार्थी न बनावे कि विद्यासागर अपनी पुस्तक मञ्जर कराने के लिए ही टेक्स-बुक कमेटी के मेम्बर हुए हैं। हमारी समझ में वह वर्त्तमान पूर्वी और पश्चिमी नीति को नीचा दिसा कर न्याय और निष्ठा की विजय वैजयन्ती फहरा गये हैं। क्या वर्त्तमान पौध के बङ्गाली युवक विद्यासागर के आदर्श पर स्वार्थ-शून्य होकर देश सेवा और समाज सेवा के काम करना न सीखेंगे ? अगर वे विद्यासागर के चरित्र में ये बातें न सीस सकें तो फिर और कहीं सीखेंगे ? सचमुच यह हमारे भाग्य ही को बात है कि ऐसा उच्च आदर्श सामने रहने पर भी स्वदेश हित की अनेक चेष्टाय आरम्भ में ही समाप्त हो जाती हैं। सबसे बढ़ कर दुःख तो इस बात का है कि वँगला-साहित्य इस समय स्वार्थपरता से कलुपित हो रहा है। सहृदय साहित्य सेवक लोग यदि दया करके विद्यासागर के दिसलाये रास्ते पर धीरे धीरे होने की चेष्टा करें तो वर्त्तमान साहित्य का कूड़ा न देख पड़े और विद्यासागर की इच्छा के अनुसार लोगों को शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करने में सत्साहित्य से सहायता मिले । विद्यासागर के उद्योग से स्थापित मॅट्रॉपोलीटन इन्स्टीट्यूशन की देखा-देखी उस तरह के अनेक विद्यालय स्थापित हुए थे। विद्यासागर के अनुकरण पर सबसे पहले साधारण ब्राह्म समाज के मुखियों * श्रीयुत ग्रानन्दमोहन वसु. श्रीयुत दुर्गामोहन दाम, श्रीयुत शिवनाय शाम्री श्रीयुत उमेशचन्द्र दत्त, श्रीयुत द्वारकानाथ, गंगोपाध्याय श्रादि महाशयों के उद्योग श्रोर परिश्रम से मिट्टी कालेज की स्थापना और उन्नति हुई है। ने सिटी-कालेज की नींव डाली। उनके असीम आग्रह और उत्साह से सिटी-कालेज बहुत शीघ्र अपना काम चला लेने लायकको पहुँच गया । क्रमशः रिपन-कालेज और अन्यान्य प्रथम श्रेणी तथा द्वितीय श्रेणी के कालेजों का अभ्युदय और उन्नति सहज साध्य होती गई । कलकत्ते के बाहर भी अनेक स्थानों में यूनिवर्सिटी से शामिल बहुत से कालेज स्थापित हो गये हैं। उन्होने बहुत से गरीब बङ्गाली विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा प्राप्त करने और ज्ञानोपार्जन से अपना जन्म सफल बनाने का मार्ग साफ़ और सहज बना दिया है। इन सब कामों का श्रेय विद्यासागर को दिया जा सकता है, क्योंकि इस मार्ग में सबसे पहले अनेक सुविधाओं का सुयाल न करके विद्यासागर ही असर हुए थे । बङ्गाल के अनेक स्थानों में स्थापित और देशी आदमियों के द्वारा सञ्चालित कालेजों के संचालक लोग इस बात के लिए विद्यासागर के निकट रखी हैं। इन विद्यालयों के सञ्चालकों से विद्यासागर के लिए कुछ करने की आशा करना * रिपन कालेज अकेले सुरेन्द्रनाथ बनर्जी की चेष्टा और अध्यवसाय का फल है। स्वर्गीय केशवचन्द्र के वर्ट कालेज विलायत से लौटे हुए गिरीशचन्द्र वसु के द्वारा संचालित बङ्गवासी कालेज, मेट्रोपोनीटन के भूत पूर्व अध्यापक दाबू खुदीराम वसु के स्थापित सेन्ट्रल इन्स्टीट्यूशन यादि का नाम विशेष रूप से उल्लेख के योग्य है । ↑ महारानी स्वर्णमयी सीशून्य आईशून्य द्वारा सञ्चालित बहरामपुर कालेज, महा राजा कूब बिहार का विक्टोरिया कालेश, वईवान के महाराज का राज-कालेज, ढाके का जगन्नाथ कालेज, उत्तर पाडा-कालेज, बरीमाल का जमोहन कालेज, भागलपुर का तेजनारायण कालेज, बिहार नेशनल कलेज, नाडाइल का विक्टोरिया-कालेज, सिलहट का एमशून्य सीशून्य कालेज, कुमिल्ले का विक्टोरिया कालेज और पचनाकालेज इत्यादि । क्या अनुचित होगा ? विद्यासागर का स्मारक स्थापित करन के लिए सर रमेशचन्द्र मिन खुद धन-समह की चेष्टा कर रहे है। इससे बढ कर सुख की बात और क्या हो सकती है ? आधुनिक बङ्गला के सर्वश्रेष्ठ हितैषी ईश्वरचन्द्र विद्यासागर का स्मारक बनाने के लिए जो सज्जन चेष्टा कर रहे हैं वे इस कार्य से इस लोक में सन्तोष और अमरपद पा कर कृतार्थ होगे । विद्यासागर के कृतज्ञ औरणी लोग कम नहीं हैं। वे चाहे तो स्वदेश-प्रेमी धर्मवीर विद्यासागर का स्मारक स्थापित होना बहुत ही महज है।
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Don't Miss!
हाल ही में रणबीर सिंह की आने वाली फिल्म सिंबा सुर्खियों में है। फिल्म में रणवीर का जबरदस्त लुक सामने आने के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। बताया जा रहा है कि इस फिल्म के लिए एक्ट्रेस की तलाश की जा रही है। वहीं एक्ट्रेसेस के लिए इंटरनेट संसेशन प्रिया प्रकाश वरियर का नाम भी सामने आया है। इस फिल्म में रणवीर सिंह पहली बार किसी पुलिस वाले के किरदार में नजर आएंगे।
इस फिल्म का पोस्टर जारी किया जा चुका है। जिसे देखकर साफ पता चलता है कि इस बार रणवीर कुछ तूफानी करने वाले हैं। रोहित शेट्टी और करण जौहर की इस फिल्म के बारे में कुछ ज्यादा तो सामने नहीं आया है फिलहाल स्टार कास्ट को लेकर भी खास जानकारी नहीं मिली है। इस फिल्म के लिए कोई नई एक्ट्रेस को लेने पर विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ये फिल्म इसी साल दिसंबर में रिलीज की जाएगी।
बता दें कि रणवीर सिंह की ये फिल्म एक सुपरहिट साउथ इंडियन फिल्म 'टेंपर' का रीमेक है जिसमें जूनियर एनटीआर नजर आए थे। सिर्फ रणवीर सिंह ही नहीं उनसे पहले कई बड़े एक्टर्स साउथ इंडियन फिल्म की धमाकेदार रीमेक बना चुके हैं। आगे जानें बॉलीवुड की 10 जबरदस्त फिल्मों के बारे में जो साउथ इंडियन फिल्मों की रीमेक हैं।
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Don't Miss! हाल ही में रणबीर सिंह की आने वाली फिल्म सिंबा सुर्खियों में है। फिल्म में रणवीर का जबरदस्त लुक सामने आने के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। बताया जा रहा है कि इस फिल्म के लिए एक्ट्रेस की तलाश की जा रही है। वहीं एक्ट्रेसेस के लिए इंटरनेट संसेशन प्रिया प्रकाश वरियर का नाम भी सामने आया है। इस फिल्म में रणवीर सिंह पहली बार किसी पुलिस वाले के किरदार में नजर आएंगे। इस फिल्म का पोस्टर जारी किया जा चुका है। जिसे देखकर साफ पता चलता है कि इस बार रणवीर कुछ तूफानी करने वाले हैं। रोहित शेट्टी और करण जौहर की इस फिल्म के बारे में कुछ ज्यादा तो सामने नहीं आया है फिलहाल स्टार कास्ट को लेकर भी खास जानकारी नहीं मिली है। इस फिल्म के लिए कोई नई एक्ट्रेस को लेने पर विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ये फिल्म इसी साल दिसंबर में रिलीज की जाएगी। बता दें कि रणवीर सिंह की ये फिल्म एक सुपरहिट साउथ इंडियन फिल्म 'टेंपर' का रीमेक है जिसमें जूनियर एनटीआर नजर आए थे। सिर्फ रणवीर सिंह ही नहीं उनसे पहले कई बड़े एक्टर्स साउथ इंडियन फिल्म की धमाकेदार रीमेक बना चुके हैं। आगे जानें बॉलीवुड की दस जबरदस्त फिल्मों के बारे में जो साउथ इंडियन फिल्मों की रीमेक हैं।
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बॉलीवुड और टीवी एक्ट्रेस मौनी रॉय (Mouni Roy) इन दिनों अपनी शादी की वजह से सुर्खियों में हैं। कभी अपनी पति सूरज नांबियार के साथ आउटिंग को लेकर तो कभी नए घर में स्वागत को लेकर। अब एक बार फिर मौनी ने अपनी अदाओं से सभी का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। मौनी को हाल ही मुंबई में स्पॉट किया गया। मांग में सिंदूर लगाए मौनी रॉय गुलाबी दुपट्टा और शरारा पहनकर बाहर निकली थीं।
शाखा और पोला पहने हुए मौनी बेहद खूबसूरत लग रही थीं। जब मौनी रॉय ने पपाराजी को देखा तो उन्होंने उन्हें हाय किया और मास्क उतारकर पोज दिए। मौनी ने काले रंग का चश्मा भी लगा रखा था। इनकी ये तस्वीरें देखने के बाद साफ जाहिर है कि उनका लुक निखर गया है।
मौनी ने पिछले दिनों दुबई बेस्ड बिजनेसमैन सूरज नांबियार से शादी की थी। शादी के बाद मौनी कुछ समय पहले ही मुंबई लौटी हैं जहां उनके ससुराल वालों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
मौनी ने अपने ससुराल में हुए गृह प्रवेश की वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा की थी। इसमें वह चावल भरे कलश को गिराकर घर में प्रवेश करती दिख रही हैं। मौनी ने पैरों में आलता लगा रखा है और इसमें वह बहुत इमोशनल भी हो गई थीं।
मौनी के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह जल्द ही अयान मुखर्जी की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और अमिताभ बच्चन जैसे बॉलीवुड के बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर करती नजर आएंगी।
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बॉलीवुड और टीवी एक्ट्रेस मौनी रॉय इन दिनों अपनी शादी की वजह से सुर्खियों में हैं। कभी अपनी पति सूरज नांबियार के साथ आउटिंग को लेकर तो कभी नए घर में स्वागत को लेकर। अब एक बार फिर मौनी ने अपनी अदाओं से सभी का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। मौनी को हाल ही मुंबई में स्पॉट किया गया। मांग में सिंदूर लगाए मौनी रॉय गुलाबी दुपट्टा और शरारा पहनकर बाहर निकली थीं। शाखा और पोला पहने हुए मौनी बेहद खूबसूरत लग रही थीं। जब मौनी रॉय ने पपाराजी को देखा तो उन्होंने उन्हें हाय किया और मास्क उतारकर पोज दिए। मौनी ने काले रंग का चश्मा भी लगा रखा था। इनकी ये तस्वीरें देखने के बाद साफ जाहिर है कि उनका लुक निखर गया है। मौनी ने पिछले दिनों दुबई बेस्ड बिजनेसमैन सूरज नांबियार से शादी की थी। शादी के बाद मौनी कुछ समय पहले ही मुंबई लौटी हैं जहां उनके ससुराल वालों ने उनका जोरदार स्वागत किया। मौनी ने अपने ससुराल में हुए गृह प्रवेश की वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा की थी। इसमें वह चावल भरे कलश को गिराकर घर में प्रवेश करती दिख रही हैं। मौनी ने पैरों में आलता लगा रखा है और इसमें वह बहुत इमोशनल भी हो गई थीं। मौनी के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह जल्द ही अयान मुखर्जी की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और अमिताभ बच्चन जैसे बॉलीवुड के बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर करती नजर आएंगी।
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हम जब किसी देवी-देवता की पूजा करते है तो पूर्ण विधि के साथ पूजा कर रहे तो इस बात का ध्यान रखें कि कोई गलती न हो। अगर आपकी पूजा कोई पंडित या फिर ब्राह्मण करा रहा है तो उसके कहने के अनुसार हर काम करें, क्योंकि उनसे ज्यादा कोई भी विधि-विधान से पूजा कराना नहीं जानता है। उनके अनुसार पूजा करने से आपको पूरा फल प्राप्त होगा। इसलिए इनकी बात मानना बहुत ही जरुरी है।
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हम जब किसी देवी-देवता की पूजा करते है तो पूर्ण विधि के साथ पूजा कर रहे तो इस बात का ध्यान रखें कि कोई गलती न हो। अगर आपकी पूजा कोई पंडित या फिर ब्राह्मण करा रहा है तो उसके कहने के अनुसार हर काम करें, क्योंकि उनसे ज्यादा कोई भी विधि-विधान से पूजा कराना नहीं जानता है। उनके अनुसार पूजा करने से आपको पूरा फल प्राप्त होगा। इसलिए इनकी बात मानना बहुत ही जरुरी है।
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झारखंड के देवघर में त्रिकुट रोपवे की 18 ट्रालियों में फंसे 30 लोगों का रेस्क्यू अभियान अभी भी चल रहा है. यह सभी लोग रविवार शाम 5 बजे से 1000 हजार फीट की ऊंचाई पर झूलते हुई ट्रालियों में फंसे हैं. सभी जिंदगियों को बचाने के लिए सेना की मदद ली जा रही है. मौके पर सेना का दो MI-17 हेलिकॉप्टर पहुंचा है, लेकिन रेस्क्यू में मुश्किलें आ रही हैं. 21 घंटे से फंसी एक छोटी सी बच्ची को केबल के सहारे से रेस्क्यू किया गया और सही सलामत उसे नीचे लाया गया. लेकिन अभी कई लोग अब भी फंसे हुए हैं जिनको रेस्क्यू किया जा रहा है. देखें ये वीडियो.
Among 48 stranded tourists in the cable car on a ropeway that collided with another cable car at Trikut Pahar close to Baba Baidyanath Temple in Deoghar, Jharkhand, 8 have been rescued. During this, a little girl was also rescued through a cable wire. Army successfully conducted this rescue operation. According to reports, about 48 people were trapped in 19 trolleys in the ropeway. The National Disaster Response Force (NDRF) team has been deployed for the rescue. Rescue operation is also being carried out by Helicopter MI-17. Watch this video.
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झारखंड के देवघर में त्रिकुट रोपवे की अट्ठारह ट्रालियों में फंसे तीस लोगों का रेस्क्यू अभियान अभी भी चल रहा है. यह सभी लोग रविवार शाम पाँच बजे से एक हज़ार हजार फीट की ऊंचाई पर झूलते हुई ट्रालियों में फंसे हैं. सभी जिंदगियों को बचाने के लिए सेना की मदद ली जा रही है. मौके पर सेना का दो MI-सत्रह हेलिकॉप्टर पहुंचा है, लेकिन रेस्क्यू में मुश्किलें आ रही हैं. इक्कीस घंटाटे से फंसी एक छोटी सी बच्ची को केबल के सहारे से रेस्क्यू किया गया और सही सलामत उसे नीचे लाया गया. लेकिन अभी कई लोग अब भी फंसे हुए हैं जिनको रेस्क्यू किया जा रहा है. देखें ये वीडियो. Among अड़तालीस stranded tourists in the cable car on a ropeway that collided with another cable car at Trikut Pahar close to Baba Baidyanath Temple in Deoghar, Jharkhand, आठ have been rescued. During this, a little girl was also rescued through a cable wire. Army successfully conducted this rescue operation. According to reports, about अड़तालीस people were trapped in उन्नीस trolleys in the ropeway. The National Disaster Response Force team has been deployed for the rescue. Rescue operation is also being carried out by Helicopter MI-सत्रह. Watch this video.
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208 II आधुनिक भारत का दलित आंदोलन
में लिखी गई थी। उस पुस्तक में व्यक्त किए गए विचारों पर मैं पहले से भी अधिक दृढ़ हूं। मैं महसूस करता हूं कि यदि भारत आधुनिक सभ्यता का परित्याग कर दे तो उसे अधिक लाभ मिलेगा ।"
देखें गांधी जी के विचारों में ( 'धर्म मंथन' पृष्ठ 65 ) :
"पाश्चात्य सभ्यता पिशाच की उत्पत्ति है।"
गांधी" का दूसरा आदर्श था मालिकों और नौकरों तथा भूस्वामी तथा आसामी के संबंध में वर्ग संघर्ष को समाप्त करना । मालिकों और नौकरों के संबंध में गांधी के जो विचार थे 8 जून, 1921 के 'नवजीवन' में इस प्रकार प्रकाशित हुए थेः
"भारत के सामने दो रास्ते खुले हैं । एक रास्ता पाश्चात्य सभ्यता का 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' का और दूसरा रास्ता पूर्वी सभ्यता का 'सत्यमेव जयते' का है जिसमें शक्तिशाली और कमजोर दोनों को समान रूप से न्याय पाने का अधिकार है- जिस मार्ग को चाहे उसे पसंद करें। इस न्याय की प्रतिष्ठा हम श्रमिक वर्ग की समस्या से आरंभ करके कर सकते हैं। प्रश्न यह है कि क्या हिंसात्मक तरीकों से उनकी मजदूरी बढ़वाई जानी चाहिए ? यदि वह संभव भी हो तब भी श्रमिक हिंसा जैसे मार्ग का सहारा नहीं ले सकते - उनके अधिकार चाहे जितना न्यायोचित हों। अधिकारों को प्राप्त करने के लिए उनकी सुरक्षा के लिए हिंसा का मार्ग भले ही सरल लगता हो परंतु अंततः वह कंटकाकीर्ण मार्ग है। जो तलवार के बल पर जीवित रहते हैं उनका अंत भी तलवार से होता है । तैराक प्रायः डूबकर मरता है । यूरोप को ही देखिए वहां कोई प्रसन्न नहीं दिखाई पड़ता क्योंकि वह संतुष्ट नहीं है । श्रमिक पूंजीपति पर विश्वास नहीं करता और पूंजीपति श्रमिकों पर भरोसा नहीं करता । दोनों शक्तिमान हैं परंतु तब भी दोनों सुखी व संतुष्ट नहीं हैं । उनमें जबरदस्त संघर्ष होता है। हर प्रकार की गति को उन्नति नहीं कहा जा सकता । हमारे पास यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि यूरोप के लोग उन्नति कर रहे हैं। उनके पास अधिक संपत्ति का होने का यह तर्क नहीं कि उनमें नैतिक अथवा अध्यात्मिक गुण भी हों 12
"तब हम क्या करेंगे? बंबई में श्रमिकों ने स्थिति मजबूत कर ली है। मैं उनके विषय में सभी तथ्यों को जानने की स्थिति में नहीं था। परंतु मैं इतना देख सका कि वे अच्छे ढंग से लड़ सकते हैं। करोड़पति पूर्णतया गलती पर हो सकता है। पूंजीपति और श्रमिकों के संघर्ष में यह प्रायः कहा जाता है कि पूंजीपतियों का पक्ष गलत होता है। परंतु जब श्रमिक को अपनी शक्ति का पूरा आभास हो जाता है तो मैं समझता हूं कि पूंजीपति की अपेक्षा श्रमिक अधिक निर्दयी हो जाता है। यदि मजदूरों में बुद्धि का विकास होता है तो करोड़पतियों को मजदूरों द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार काम करना पड़ता है। यद्यपि स्पष्ट है कि मजदूर वर्ग पूंजीपतियों की उस बुद्धि को कभी नहीं प्राप्त कर पाता । यदि पूंजीपतियों की बुद्धि उसे प्राप्त हो जाए तो वह श्रम करना बंद कर स्वयं मालिक
गांधी और अम्बेडकर 209
बन जाए । पूंजीपति केवल धन शक्ति के बल पर नहीं लड़ते। उनके पास बुद्धि और तिकड़म भी होते हैं।"
"हमारे सामने प्रश्न यह है कि मजदूर जब मजदूर ही रह जाते हैं, जब भी उनमें चेतना का विकास होता है तब उनकी क्या क्रिया विधि होनी चाहिए? यदि मजदूर शक्ति प्रदर्शन और हिंसा का सहारा लेते हैं तो यह उनके लिए आत्मघाती सिद्ध होगा । ऐसा करके वे देश के उद्योगों को हानि पहुंचाएंगे। इसके विपरीत यदि वे न्याय पथ पर दृढ़ता से रहकर और कठिनाइयों को सहन कर अधिकारों को प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें सदैव केवल सफलता ही नहीं मिलेगी वरन् वे अपने मालिकों को भी सुधार लेंगे, अपने उद्योगों में प्रगति लाएंगे और तब मजदूर और मालिक दोनों एक ही परिवार के सदस्य के रूप में काम करेंगे।"
इसी प्रकार के विषय पर गांधी ने किसी दूसरे अवसर पर कहा (देखें 'यंग इंडिया' 23 फरवरी 1922 ) :
"भारत में पहले कभी भी पूंजी और श्रम के संबंधों में तनाव नहीं रहा।" अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए मजदूरों के हाथ में हड़ताल का जो हथियार है इस पर गांधी के विचार ध्यान देने योग्य हैं। गांधी का कहना है ( देखें 'यंग इंडिया' 11 फरवरी 1921 ) :
( 1 ) जब तक कोई वास्तविक क्लेश न हो हड़तालें नहीं की जानी चाहिए ।
( 2 ) यदि हड़तालियों में स्वयं अपने आप में अपनी बचत के बल पर अथवा अन्य अस्थाई साधनों पर जैसे कि दफ्ती बनाने का काम, सूत कातना, कपड़ा बुनना आदि साधनों पर निर्भर रहने की क्षमता न हो तो उन्हें हड़ताल नहीं करनी चाहिए । हड़तालियों को जनता के चन्दे और दान पर कभी नहीं निर्भर रहना चाहिए ।
( 3 ) हड़तालियों को अपनी न्यूनतम निश्चित मांगें निर्धारित करके उनकी घोषणा हड़ताल करने से पहले कर देनी चाहिए ।
हड़तालों की सफलता के संबंध में आगे अपने विचार व्यक्त करते हुए गांधी कहते
हैं :
"मजदूरों की मांगें वाजिब होते हुए तथा हड़तालियों की क्षमता के बावजूद हड़ताल इस कारण से भी असफल हो सकती है कि यदि पुराने कर्मचारियों के स्थान पर नए कर्मचारी भरती कर लिए जाते हैं । अतः बुद्धिमान लोगों को अपना वेतन अथवा सुविधाएं बढ़ाने के लिए उस समय हड़ताल नहीं करनी चाहिए जब उसे इस बात का आभास मिल जाए कि उसके स्थान पर दूसरे को भरती पर काम चलाया जा सकेगा परंतु लोक कल्याण अथवा स्वदेश प्रेम की भावना वाला व्यक्ति मांग से अधिक उत्पादन होते हुए भी अपने पड़ोस में मुसीबतों से परेशान लोगों की सहानुभूति में वह हड़ताल कर सकेगा। मैंने जिस प्रकार की नागरिक हड़ताल का उल्लेख किया है उसमें डराने-धमकाने और आग लगाने जैसी हिंसा की कोई गुंजायश नहीं है। मेरे सुझाव की परीक्षा करने पर स्पष्ट हो जाता है कि हड़तालियों के सच्चे मित्रों ने उन्हें कभी कांग्रेस फंड से सहायता अथवा उनके समर्थन
210 आधुनिक भारत का दलित आंदोलन
प्राप्त की राय नहीं दी । आर्थिक सहायता प्राप्त करने पर हड़तालियों की सहानुभूति स्थिति धूमिल हो जाती है। हड़ताल के सहानुभूति गुण इससे नष्ट हो जाते हैं "
उत्तर प्रदेश के आसामी किसानों को जिन्होंने अपने जमींदारों के विरोध में आंदोलन किया उससे संबंधित प्रकरण पर 18 मई, 1921 के 'यंग इंडिया' के अंक में आसामी किसानों तथा जमींदारों के संबंधों का प्रतिपादन करते हुए गांधी ने कहा :
"जब उत्तर प्रदेश सरकार औचित्य और सद्व्यवहार की सीमा का उल्लंघन कर रही है और लोगों को धमकियां दे रही हैं यह कहने में कोई संदेह नहीं कि किसान भी अपनी नवीन प्राप्त शक्ति का बुद्धिमानी से प्रयोग नहीं कर रहे हैं। कई जमींदारियों में वे ज्यादती करने में हद से आगे बढ़ गए बताए जाते हैं, उन्होंने कानून अपने हाथों में ले लिया है और इतना अधीर हो उठे हैं कि जैसा चाहते हैं, वही करते हैं । वे सामाजिक बहिष्कार का दुरुपयोग कर रहे हैं और हिंसा का रास्ता अपना रहे हैं। ऐसी सूचना मिली है कि उन किसानों का पानी भरना बंद कर दिया, बाल बनाना बंद कर दिया और सभी भुगतान वाले पेशे बंद कर दिए । यहां तक कि उन पर जमींदारों का जो लगान बाकी था उसका भी भुगतान करना बंद कर दिया। किसान आंदोलन ने 'असहयोग आंदोलन' से प्रेरणा ली है परंतु उनका उससे भिन्न है । जब किसान आंदोलन चल पड़ा है तो हमें उन्हें यह सलाह देने में कोई हिचक नहीं कि वे सरकार को लगान देना बंद कर दें । परंतु यह बात विचारणीय नहीं है कि असहयोग को आधार बनाकर वे जमींदारों को लगान देना बंद कर दें । किसान आंदोलन किसानों का स्तर ऊंचा उठाने तथा उनके और जमींदारों के बीच मधुर संबंध बनाए रखने तक सीमित रखना चाहिए। किसानों को नैतिकतया सावधानीपूर्वक जमींदारों से प्राचीन लिखित परंपरागत समझौतों के अनुसार चलना चाहिए । जहां पर लिखित अथवा परंपरागत समझौते गलत तथा बुरे हों उन्हें बिना जमींदारों की
सहमति के हिंसात्मक ढंग से नहीं उखाड़ फेंकना चाहिए । प्रत्येक परिवर्तन के लिए उन्हें जमींदारों के सौहार्दपूर्ण बातचीत कर मामले सुलझाने का प्रयत्न करने चाहिए।" आर्थिक प्रश्नों के संबंध में गांधी के उपरोक्त विचारों से स्पष्ट है कि वह संपत्ति वालों को हानि नहीं पहुंचाना चाहते। यहां तक कि वह उनके विरुद्ध आंदोलन भी नहीं होने देना चाहते । आर्थिक समानता के लिए उनकी कोई उत्कट भावना नहीं है । धनी वर्ग का उल्लेख करते हुए गांधी ने एक बार कहा था कि वह सोने का अंडा देने वाली मुर्गी का हनन नहीं करना चाहते ! मालिकों, मजदूरों, धनी और गरीब, जमींदारों और किसानों, आसामियों तथा मालिकों और नौकरों के मध्य उठते आर्थिक झगड़ों को सुलझाने के लिए गांधी जी का सरल नुस्खा है कि सम्पत्तिवान अपने को सम्पत्ति का ट्रस्टी घोषित कर दें । मालिकों को उनकी संपत्ति के अधिकार से उन्हें वंचित न किया जाए। संपत्ति वान जो कुछ करते हैं गरीबों के ट्रस्टी के रूप में करते हैं। निस्संदेह ट्रस्ट स्वेच्छा से काम करने का आध्यात्मिक नैतिक बंधन है 15
क्या आर्थिक रोग के गांधीवादी विश्लेषण से कोई नई बात सामने आती है ? क्या गांधीवादी अर्थशास्त्र स्वस्थ और ठोस है? गांधीवाद साधारण मनुष्यों तथा निचले स्तर
गांधी और अम्बेडकर 211
के लोगों को क्या आशा दिलाता है? क्या गांधीवाद साधारण मनुष्य को बेहतर जिंदगी, सुखी जीवन, अच्छी संस्कृति, स्वतंत्र जीवन, केवल मांग की स्वतंत्रता नहीं वरन् उत्थान करने की स्वतंत्रता, उसकी पूरी क्षमता तक पहुंचने में उसे सहायक है ?
आर्थिक रोगों के गांधीवादी विश्लेषण में बहुत सी समस्याओं की जड़ मशीनों तथा मशीनी सभ्यता को माना जाने के अतिरिक्त कोई नई बात नहीं है । ये जो तर्क दिए जाते हैं कि मशीनरी और आधुनिक सभ्यता संपत्ति को व्यवस्था और नियंत्रण थोड़े से व्यक्तियों तक केंद्रित करने में सहायक हैं और बैंक व महाजनी की सुविधाएं संपत्ति को और भी कुछ ही लोगों के हाथों में सीमित रखने में सहायक है, और बड़े-बड़े कारखाने तथा मिले जिनमें लाखों-करोड़ों आदमी अपनी झोपड़ियों से हजारों मील दूर उन बड़े कारखानों में अपना खून पसीना बहाते हैं अथवा उन मशीनों और आधुनिक सभ्यता को इतने अधिक कारण काल के गाल में चले जाते हैं। अंग भंग हो जाते हैं और शरीर से अयोग्य हो जाते हैं, जितने शायद युद्धों में घायल होने के कारण नहीं होते होंगे। बड़े-बड़े शहरों के विकास से और वहां बड़े कारखानों की चिमनियों से निकले धुएं, गंदगी, मशीनों की आवाजें, गंदी हवा, सूरज की धूप की कमी, बाह्य जीवन, मैली कुचैली गलियां, अवैध दुराचार एवं अस्वाभाविक कारणों से परोक्ष अथवा अपरोक्ष रूप में उत्पन्न रोगों और शारीरिक अक्षमता के गांधीवाद के सभी तर्क घिसे पिटे पुराने तर्क हैं, उनमें कोई नई बात नहीं है। मशीनों के विरुद्ध गांधीवाद के इन तर्कों में पाश्चात्य विद्वानों - रूसो, रस्किन, टॉलस्टाय आदि के ही विचारों को केवल अपने शब्दों में दुहराया गया है।
'गांधीवाद' 16 में जिन विचारों को समाहित किया गया है वे विचार हमें आदिम युग की ओर ले जाते हैं। उनसे प्रकृति की ओर तथा वन्य जीवन की ओर वापस होने की प्रेरणा मिलती है। यदि उन विचारों में कोई अच्छी बात है तो वह है सादगी । जैसा कि सदैव ऐसे सीधी-सादे साधारण लोगों की बड़ी संख्या में पलटन रही है जो उनकी ओर आकर्षित होती रही है। ऐसे सीधे-सादे साधारण विचार कभी समाप्त नहीं होते और मंद बुद्धि के लोग वैसे विचारों को उपदेशों के रूप में प्रचार करते रहे हैं इसीलिए गांधीवादी जैसे विचारों को पैर जमाने का अवसर मिलता रहा । इसमें कोई संदेह नहीं कि मनुष्यों के नित प्रति का सहज ज्ञान जो उन्हें पुरुषार्थ तथा प्रकृति के विरुद्ध खड़े होने की ओर ले जाता है और ऐसा समाज जो प्रकृति की ओर ही बढ़ रहा है ऐसे विचारों को अस्वीकार करना ही ठीक समझता है ।
'गांधीवाद' का अर्थशास्त्र निराशाजनक और भ्रामक है । यह सही है कि मशीनरी और आधुनिक सभ्यता से बहुत-सी बुराइयां उत्पन्न हुई हैं। परंतु उन बुराइयों के विरुद्ध ऐसे तर्क निरर्थक हैं। क्योंकि बुराइयां उन मशीनों और आधुनिक सभ्यता के कारण नहीं हैं वरन् ऐसे गलत सामाजिक संगठन के कारण हैं जिससे मशीनों से होने वाला अद्भुत लाभ सार्वजनिक न होकर निजी लाभ हो जाता है और उस व्यक्तिगत लाभ पर पवित्रता की मुहर लग जाती है। यदि मशीनरी और आधुनिक सभ्यता से सभी लोगों को लाभ नहीं पहुंचा है तो मशीनों तथा आधुनिक सभ्यता को दोषी ठहराना कोई सही उपाय नहीं
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दो सौ आठ II आधुनिक भारत का दलित आंदोलन में लिखी गई थी। उस पुस्तक में व्यक्त किए गए विचारों पर मैं पहले से भी अधिक दृढ़ हूं। मैं महसूस करता हूं कि यदि भारत आधुनिक सभ्यता का परित्याग कर दे तो उसे अधिक लाभ मिलेगा ।" देखें गांधी जी के विचारों में : "पाश्चात्य सभ्यता पिशाच की उत्पत्ति है।" गांधी" का दूसरा आदर्श था मालिकों और नौकरों तथा भूस्वामी तथा आसामी के संबंध में वर्ग संघर्ष को समाप्त करना । मालिकों और नौकरों के संबंध में गांधी के जो विचार थे आठ जून, एक हज़ार नौ सौ इक्कीस के 'नवजीवन' में इस प्रकार प्रकाशित हुए थेः "भारत के सामने दो रास्ते खुले हैं । एक रास्ता पाश्चात्य सभ्यता का 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' का और दूसरा रास्ता पूर्वी सभ्यता का 'सत्यमेव जयते' का है जिसमें शक्तिशाली और कमजोर दोनों को समान रूप से न्याय पाने का अधिकार है- जिस मार्ग को चाहे उसे पसंद करें। इस न्याय की प्रतिष्ठा हम श्रमिक वर्ग की समस्या से आरंभ करके कर सकते हैं। प्रश्न यह है कि क्या हिंसात्मक तरीकों से उनकी मजदूरी बढ़वाई जानी चाहिए ? यदि वह संभव भी हो तब भी श्रमिक हिंसा जैसे मार्ग का सहारा नहीं ले सकते - उनके अधिकार चाहे जितना न्यायोचित हों। अधिकारों को प्राप्त करने के लिए उनकी सुरक्षा के लिए हिंसा का मार्ग भले ही सरल लगता हो परंतु अंततः वह कंटकाकीर्ण मार्ग है। जो तलवार के बल पर जीवित रहते हैं उनका अंत भी तलवार से होता है । तैराक प्रायः डूबकर मरता है । यूरोप को ही देखिए वहां कोई प्रसन्न नहीं दिखाई पड़ता क्योंकि वह संतुष्ट नहीं है । श्रमिक पूंजीपति पर विश्वास नहीं करता और पूंजीपति श्रमिकों पर भरोसा नहीं करता । दोनों शक्तिमान हैं परंतु तब भी दोनों सुखी व संतुष्ट नहीं हैं । उनमें जबरदस्त संघर्ष होता है। हर प्रकार की गति को उन्नति नहीं कहा जा सकता । हमारे पास यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि यूरोप के लोग उन्नति कर रहे हैं। उनके पास अधिक संपत्ति का होने का यह तर्क नहीं कि उनमें नैतिक अथवा अध्यात्मिक गुण भी हों बारह "तब हम क्या करेंगे? बंबई में श्रमिकों ने स्थिति मजबूत कर ली है। मैं उनके विषय में सभी तथ्यों को जानने की स्थिति में नहीं था। परंतु मैं इतना देख सका कि वे अच्छे ढंग से लड़ सकते हैं। करोड़पति पूर्णतया गलती पर हो सकता है। पूंजीपति और श्रमिकों के संघर्ष में यह प्रायः कहा जाता है कि पूंजीपतियों का पक्ष गलत होता है। परंतु जब श्रमिक को अपनी शक्ति का पूरा आभास हो जाता है तो मैं समझता हूं कि पूंजीपति की अपेक्षा श्रमिक अधिक निर्दयी हो जाता है। यदि मजदूरों में बुद्धि का विकास होता है तो करोड़पतियों को मजदूरों द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार काम करना पड़ता है। यद्यपि स्पष्ट है कि मजदूर वर्ग पूंजीपतियों की उस बुद्धि को कभी नहीं प्राप्त कर पाता । यदि पूंजीपतियों की बुद्धि उसे प्राप्त हो जाए तो वह श्रम करना बंद कर स्वयं मालिक गांधी और अम्बेडकर दो सौ नौ बन जाए । पूंजीपति केवल धन शक्ति के बल पर नहीं लड़ते। उनके पास बुद्धि और तिकड़म भी होते हैं।" "हमारे सामने प्रश्न यह है कि मजदूर जब मजदूर ही रह जाते हैं, जब भी उनमें चेतना का विकास होता है तब उनकी क्या क्रिया विधि होनी चाहिए? यदि मजदूर शक्ति प्रदर्शन और हिंसा का सहारा लेते हैं तो यह उनके लिए आत्मघाती सिद्ध होगा । ऐसा करके वे देश के उद्योगों को हानि पहुंचाएंगे। इसके विपरीत यदि वे न्याय पथ पर दृढ़ता से रहकर और कठिनाइयों को सहन कर अधिकारों को प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें सदैव केवल सफलता ही नहीं मिलेगी वरन् वे अपने मालिकों को भी सुधार लेंगे, अपने उद्योगों में प्रगति लाएंगे और तब मजदूर और मालिक दोनों एक ही परिवार के सदस्य के रूप में काम करेंगे।" इसी प्रकार के विषय पर गांधी ने किसी दूसरे अवसर पर कहा : "भारत में पहले कभी भी पूंजी और श्रम के संबंधों में तनाव नहीं रहा।" अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए मजदूरों के हाथ में हड़ताल का जो हथियार है इस पर गांधी के विचार ध्यान देने योग्य हैं। गांधी का कहना है : जब तक कोई वास्तविक क्लेश न हो हड़तालें नहीं की जानी चाहिए । यदि हड़तालियों में स्वयं अपने आप में अपनी बचत के बल पर अथवा अन्य अस्थाई साधनों पर जैसे कि दफ्ती बनाने का काम, सूत कातना, कपड़ा बुनना आदि साधनों पर निर्भर रहने की क्षमता न हो तो उन्हें हड़ताल नहीं करनी चाहिए । हड़तालियों को जनता के चन्दे और दान पर कभी नहीं निर्भर रहना चाहिए । हड़तालियों को अपनी न्यूनतम निश्चित मांगें निर्धारित करके उनकी घोषणा हड़ताल करने से पहले कर देनी चाहिए । हड़तालों की सफलता के संबंध में आगे अपने विचार व्यक्त करते हुए गांधी कहते हैं : "मजदूरों की मांगें वाजिब होते हुए तथा हड़तालियों की क्षमता के बावजूद हड़ताल इस कारण से भी असफल हो सकती है कि यदि पुराने कर्मचारियों के स्थान पर नए कर्मचारी भरती कर लिए जाते हैं । अतः बुद्धिमान लोगों को अपना वेतन अथवा सुविधाएं बढ़ाने के लिए उस समय हड़ताल नहीं करनी चाहिए जब उसे इस बात का आभास मिल जाए कि उसके स्थान पर दूसरे को भरती पर काम चलाया जा सकेगा परंतु लोक कल्याण अथवा स्वदेश प्रेम की भावना वाला व्यक्ति मांग से अधिक उत्पादन होते हुए भी अपने पड़ोस में मुसीबतों से परेशान लोगों की सहानुभूति में वह हड़ताल कर सकेगा। मैंने जिस प्रकार की नागरिक हड़ताल का उल्लेख किया है उसमें डराने-धमकाने और आग लगाने जैसी हिंसा की कोई गुंजायश नहीं है। मेरे सुझाव की परीक्षा करने पर स्पष्ट हो जाता है कि हड़तालियों के सच्चे मित्रों ने उन्हें कभी कांग्रेस फंड से सहायता अथवा उनके समर्थन दो सौ दस आधुनिक भारत का दलित आंदोलन प्राप्त की राय नहीं दी । आर्थिक सहायता प्राप्त करने पर हड़तालियों की सहानुभूति स्थिति धूमिल हो जाती है। हड़ताल के सहानुभूति गुण इससे नष्ट हो जाते हैं " उत्तर प्रदेश के आसामी किसानों को जिन्होंने अपने जमींदारों के विरोध में आंदोलन किया उससे संबंधित प्रकरण पर अट्ठारह मई, एक हज़ार नौ सौ इक्कीस के 'यंग इंडिया' के अंक में आसामी किसानों तथा जमींदारों के संबंधों का प्रतिपादन करते हुए गांधी ने कहा : "जब उत्तर प्रदेश सरकार औचित्य और सद्व्यवहार की सीमा का उल्लंघन कर रही है और लोगों को धमकियां दे रही हैं यह कहने में कोई संदेह नहीं कि किसान भी अपनी नवीन प्राप्त शक्ति का बुद्धिमानी से प्रयोग नहीं कर रहे हैं। कई जमींदारियों में वे ज्यादती करने में हद से आगे बढ़ गए बताए जाते हैं, उन्होंने कानून अपने हाथों में ले लिया है और इतना अधीर हो उठे हैं कि जैसा चाहते हैं, वही करते हैं । वे सामाजिक बहिष्कार का दुरुपयोग कर रहे हैं और हिंसा का रास्ता अपना रहे हैं। ऐसी सूचना मिली है कि उन किसानों का पानी भरना बंद कर दिया, बाल बनाना बंद कर दिया और सभी भुगतान वाले पेशे बंद कर दिए । यहां तक कि उन पर जमींदारों का जो लगान बाकी था उसका भी भुगतान करना बंद कर दिया। किसान आंदोलन ने 'असहयोग आंदोलन' से प्रेरणा ली है परंतु उनका उससे भिन्न है । जब किसान आंदोलन चल पड़ा है तो हमें उन्हें यह सलाह देने में कोई हिचक नहीं कि वे सरकार को लगान देना बंद कर दें । परंतु यह बात विचारणीय नहीं है कि असहयोग को आधार बनाकर वे जमींदारों को लगान देना बंद कर दें । किसान आंदोलन किसानों का स्तर ऊंचा उठाने तथा उनके और जमींदारों के बीच मधुर संबंध बनाए रखने तक सीमित रखना चाहिए। किसानों को नैतिकतया सावधानीपूर्वक जमींदारों से प्राचीन लिखित परंपरागत समझौतों के अनुसार चलना चाहिए । जहां पर लिखित अथवा परंपरागत समझौते गलत तथा बुरे हों उन्हें बिना जमींदारों की सहमति के हिंसात्मक ढंग से नहीं उखाड़ फेंकना चाहिए । प्रत्येक परिवर्तन के लिए उन्हें जमींदारों के सौहार्दपूर्ण बातचीत कर मामले सुलझाने का प्रयत्न करने चाहिए।" आर्थिक प्रश्नों के संबंध में गांधी के उपरोक्त विचारों से स्पष्ट है कि वह संपत्ति वालों को हानि नहीं पहुंचाना चाहते। यहां तक कि वह उनके विरुद्ध आंदोलन भी नहीं होने देना चाहते । आर्थिक समानता के लिए उनकी कोई उत्कट भावना नहीं है । धनी वर्ग का उल्लेख करते हुए गांधी ने एक बार कहा था कि वह सोने का अंडा देने वाली मुर्गी का हनन नहीं करना चाहते ! मालिकों, मजदूरों, धनी और गरीब, जमींदारों और किसानों, आसामियों तथा मालिकों और नौकरों के मध्य उठते आर्थिक झगड़ों को सुलझाने के लिए गांधी जी का सरल नुस्खा है कि सम्पत्तिवान अपने को सम्पत्ति का ट्रस्टी घोषित कर दें । मालिकों को उनकी संपत्ति के अधिकार से उन्हें वंचित न किया जाए। संपत्ति वान जो कुछ करते हैं गरीबों के ट्रस्टी के रूप में करते हैं। निस्संदेह ट्रस्ट स्वेच्छा से काम करने का आध्यात्मिक नैतिक बंधन है पंद्रह क्या आर्थिक रोग के गांधीवादी विश्लेषण से कोई नई बात सामने आती है ? क्या गांधीवादी अर्थशास्त्र स्वस्थ और ठोस है? गांधीवाद साधारण मनुष्यों तथा निचले स्तर गांधी और अम्बेडकर दो सौ ग्यारह के लोगों को क्या आशा दिलाता है? क्या गांधीवाद साधारण मनुष्य को बेहतर जिंदगी, सुखी जीवन, अच्छी संस्कृति, स्वतंत्र जीवन, केवल मांग की स्वतंत्रता नहीं वरन् उत्थान करने की स्वतंत्रता, उसकी पूरी क्षमता तक पहुंचने में उसे सहायक है ? आर्थिक रोगों के गांधीवादी विश्लेषण में बहुत सी समस्याओं की जड़ मशीनों तथा मशीनी सभ्यता को माना जाने के अतिरिक्त कोई नई बात नहीं है । ये जो तर्क दिए जाते हैं कि मशीनरी और आधुनिक सभ्यता संपत्ति को व्यवस्था और नियंत्रण थोड़े से व्यक्तियों तक केंद्रित करने में सहायक हैं और बैंक व महाजनी की सुविधाएं संपत्ति को और भी कुछ ही लोगों के हाथों में सीमित रखने में सहायक है, और बड़े-बड़े कारखाने तथा मिले जिनमें लाखों-करोड़ों आदमी अपनी झोपड़ियों से हजारों मील दूर उन बड़े कारखानों में अपना खून पसीना बहाते हैं अथवा उन मशीनों और आधुनिक सभ्यता को इतने अधिक कारण काल के गाल में चले जाते हैं। अंग भंग हो जाते हैं और शरीर से अयोग्य हो जाते हैं, जितने शायद युद्धों में घायल होने के कारण नहीं होते होंगे। बड़े-बड़े शहरों के विकास से और वहां बड़े कारखानों की चिमनियों से निकले धुएं, गंदगी, मशीनों की आवाजें, गंदी हवा, सूरज की धूप की कमी, बाह्य जीवन, मैली कुचैली गलियां, अवैध दुराचार एवं अस्वाभाविक कारणों से परोक्ष अथवा अपरोक्ष रूप में उत्पन्न रोगों और शारीरिक अक्षमता के गांधीवाद के सभी तर्क घिसे पिटे पुराने तर्क हैं, उनमें कोई नई बात नहीं है। मशीनों के विरुद्ध गांधीवाद के इन तर्कों में पाश्चात्य विद्वानों - रूसो, रस्किन, टॉलस्टाय आदि के ही विचारों को केवल अपने शब्दों में दुहराया गया है। 'गांधीवाद' सोलह में जिन विचारों को समाहित किया गया है वे विचार हमें आदिम युग की ओर ले जाते हैं। उनसे प्रकृति की ओर तथा वन्य जीवन की ओर वापस होने की प्रेरणा मिलती है। यदि उन विचारों में कोई अच्छी बात है तो वह है सादगी । जैसा कि सदैव ऐसे सीधी-सादे साधारण लोगों की बड़ी संख्या में पलटन रही है जो उनकी ओर आकर्षित होती रही है। ऐसे सीधे-सादे साधारण विचार कभी समाप्त नहीं होते और मंद बुद्धि के लोग वैसे विचारों को उपदेशों के रूप में प्रचार करते रहे हैं इसीलिए गांधीवादी जैसे विचारों को पैर जमाने का अवसर मिलता रहा । इसमें कोई संदेह नहीं कि मनुष्यों के नित प्रति का सहज ज्ञान जो उन्हें पुरुषार्थ तथा प्रकृति के विरुद्ध खड़े होने की ओर ले जाता है और ऐसा समाज जो प्रकृति की ओर ही बढ़ रहा है ऐसे विचारों को अस्वीकार करना ही ठीक समझता है । 'गांधीवाद' का अर्थशास्त्र निराशाजनक और भ्रामक है । यह सही है कि मशीनरी और आधुनिक सभ्यता से बहुत-सी बुराइयां उत्पन्न हुई हैं। परंतु उन बुराइयों के विरुद्ध ऐसे तर्क निरर्थक हैं। क्योंकि बुराइयां उन मशीनों और आधुनिक सभ्यता के कारण नहीं हैं वरन् ऐसे गलत सामाजिक संगठन के कारण हैं जिससे मशीनों से होने वाला अद्भुत लाभ सार्वजनिक न होकर निजी लाभ हो जाता है और उस व्यक्तिगत लाभ पर पवित्रता की मुहर लग जाती है। यदि मशीनरी और आधुनिक सभ्यता से सभी लोगों को लाभ नहीं पहुंचा है तो मशीनों तथा आधुनिक सभ्यता को दोषी ठहराना कोई सही उपाय नहीं
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हिमाचल में शुक्रवार को दूसरे दिन भी बर्फबारी का दौर जारी रहने से दुश्वारियां बढ़ गई हैं। प्रदेश में छह नेशनल हाईवे समेत 298 छोटी-बड़ी सड़कों पर यातायात ठप रहा। रोहतांग में 30 घंटों में पांच फीट से ज्यादा बर्फबारी हो चुकी है। वीरवार रात को प्रदेश के पांच क्षेत्रों में न्यूनतम पारा माइनस में दर्ज हुआ। अधिकतम तापमान में भी आठ से 10 डिग्री की कमी हुई। कुफरी में अधिकतम पारा -0. 5 और केलांग में शून्य रहा। पूरा प्रदेश शीतलहर की चपेट में है। चंबा के स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी करनी पड़ी। हालांकि, बर्फबारी के बीच बच्चे परीक्षा देने भी पहुंचे।
सुंगरी में भारी बर्फबारी के चलते रोहडू के लिए चलने वाली बस सेवा ठप रही। कुल्लू के आनी में जलोड़ी जोत के पास एनएच 305 समेत दो दर्जन से अधिक सड़कें अवरुद्ध हैं। रामपुर-रिकांगपिओ एनएच के अलावा चंबा जिले में भरमौर-पठानकोट एनएच बंद है। मनाली-रोहतांग-लेह एनएच बंद होने से रोहतांग टनल से भी आवाजाही बंद होने से लाहौल-स्पीति जिले के लोग देश-दुनिया से कट गए हैं।
ऊझी घाटी समेत जिले के कई इलाकों में बिजली गुल है। कुल्लू जिला की सौ से ज्यादा पंचायतों का संपर्क कट गया है। लाहौल में यातायात ठप है। चंबा जिला मुख्यालय में शुक्रवार को दोपहर बाद बर्फबारी का दौर शुरू हुआ। जिला कांगड़ा की ऊंची पहाड़ियों पर भी बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश जारी रही।
किन्नौर जिले में दूसरे दिन में सुबह से बर्फबारी का दौर जारी रहा। इससे किन्नौर जिले की कई ग्रामीण सड़कें बंद होने से बसों की आवाजाही ठप हो गई है। जिले के रिकांगपिओ सहित अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई है। रोहडू उपमंडल के 50 प्रतिशत रूट बसों के लिए बंद हैं।
चंबा जिला मुख्यालय में शुक्रवार को दोपहर बाद बर्फबारी का दौर शुरू हुअा। करीब आधे घंटे तक बर्फ के फाहे गिरे। वहीं, जनजातीय क्षेत्र भरमौर में डेढ़ फुट, खज्जियार में एक फुट, जोत में दो फुट, भंजराड़ू में दो फुट तक बर्फबारी हुई। इसके अलावा जुम्हार में एक फुट, किहार में छह इंच, सलूणी में आधा फुट, संघणी में डेढ़ फुट तक बर्फबारी हुई।
जनजातीय क्षेत्र पांगी के लिए बर्फ आफत बनकर गिरी है। 24 घंटे से पांगी की 16 पंचायतों में बिजली व पेयजल की आपूर्ति ठप पड़ी है। लोग घरों में बर्फ को पिघलाकर पीने के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रशासन के अनुसार मौसम साफ होने के बाद ही बिजली व पानी की सप्लाई बहाल हो पाएगी।
राजधानी शिमला और कुफरी में सीजन की पहली बर्फबारी से यातायात व्यवस्था ठप हो गई है। राजधानी का अपर शिमला से संपर्क कट गया है। शुक्रवार को अपर शिमला के 80 से ज्यादा रूट ठप रहे। एचआरटीसी और कई निजी बसें रास्ते में फंसी हैं। बर्फबारी को देखते हुए शिमला से इन इलाकों के लिए शुक्रवार को बसें नहीं चलाई गईं। शुक्रवार सुबह दस बजे मौसम खुलने के बाद कुफरी में यातायात बहाल कर दिया गया लेकिन शाम करीब चार बजे फिर से बर्फबारी का दौर शुरू हो गया।
कांगड़ा जिले में बारिश शुक्रवार को भी जारी रही। वहीं जिले की ऊंची पहाड़ियों पर ताजा हिमपात भी दर्ज किया गया। इसके अलावा छोटा भंगाल, मुल्थान, चोहार घाटी व बरोट के गांवों में भी शुक्रवार को भी ताजा हिमपात दर्ज किया गया। इन गांवों में अब तक आठ से नौ इंच तक बर्फबारी हो चुकी है। बर्फबारी के कारण गुरुवार से बंद पड़ा मुल्थान-बरोट और कोठी कोढ़ व बड़ा गांव की ओर जाने वाले सड़क मार्ग अभी भी बाधित हैं। इसके अलावा जिला कांगड़ा के बैजनाथ, इंदौरा, कंडवाल, कांगड़ा, पालमपुर, ज्वालामुखी, कोटला, रैत व देहरा सहित अन्य क्षेत्रों में भी हल्की बारिश हुई।
सिरमौर में दो दिन से जारी बारिश व बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भारी बर्फबारी के चलते ऊपरी क्षेत्रों का संपर्क शेष सिरमौर व हिमाचल के कई हिस्सों से टूट गया है। बर्फबारी के चलते आधा दर्जन के करीब मार्ग बंद हो गए हैं। उधर, जिला की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। इस समय चोटी चोटी पर चार से छह फीट बर्फ जम चुकी है। चूड़धार में इस वर्ष की चौथी बर्फबारी हो चुकी है।
मंडी जिले में दो दिन से लगातार हो रही भारी बारिश व बर्फबारी से जनजीवन थम सा गया है। ऊपरी क्षेत्रों में दर्जनों सड़कें बंद पड़ी हैं। सैकड़ों घरों की बिजली और पानी की आपूर्ति ठप है। देव पराशर और कमरूनाग झीलें बर्फ से लद चुकी हैं। उधर डीसी ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है। शिकारी देवी में तीन फीट, भुलाह10 इंच, जंजैहली दो इंच, गाड़ागेशैणी एक फीट और शैटाधार में15 इंच बर्फ गिरी है।
हिमाचल में भारी बर्फबारी, 298 सड़कें ठप, आधा दर्जन गांवों का कटा संपर्क Reviewed by news himachali on December 14, 2019 Rating:
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हिमाचल में शुक्रवार को दूसरे दिन भी बर्फबारी का दौर जारी रहने से दुश्वारियां बढ़ गई हैं। प्रदेश में छह नेशनल हाईवे समेत दो सौ अट्ठानवे छोटी-बड़ी सड़कों पर यातायात ठप रहा। रोहतांग में तीस घंटाटों में पांच फीट से ज्यादा बर्फबारी हो चुकी है। वीरवार रात को प्रदेश के पांच क्षेत्रों में न्यूनतम पारा माइनस में दर्ज हुआ। अधिकतम तापमान में भी आठ से दस डिग्री की कमी हुई। कुफरी में अधिकतम पारा -शून्य. पाँच और केलांग में शून्य रहा। पूरा प्रदेश शीतलहर की चपेट में है। चंबा के स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी करनी पड़ी। हालांकि, बर्फबारी के बीच बच्चे परीक्षा देने भी पहुंचे। सुंगरी में भारी बर्फबारी के चलते रोहडू के लिए चलने वाली बस सेवा ठप रही। कुल्लू के आनी में जलोड़ी जोत के पास एनएच तीन सौ पाँच समेत दो दर्जन से अधिक सड़कें अवरुद्ध हैं। रामपुर-रिकांगपिओ एनएच के अलावा चंबा जिले में भरमौर-पठानकोट एनएच बंद है। मनाली-रोहतांग-लेह एनएच बंद होने से रोहतांग टनल से भी आवाजाही बंद होने से लाहौल-स्पीति जिले के लोग देश-दुनिया से कट गए हैं। ऊझी घाटी समेत जिले के कई इलाकों में बिजली गुल है। कुल्लू जिला की सौ से ज्यादा पंचायतों का संपर्क कट गया है। लाहौल में यातायात ठप है। चंबा जिला मुख्यालय में शुक्रवार को दोपहर बाद बर्फबारी का दौर शुरू हुआ। जिला कांगड़ा की ऊंची पहाड़ियों पर भी बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश जारी रही। किन्नौर जिले में दूसरे दिन में सुबह से बर्फबारी का दौर जारी रहा। इससे किन्नौर जिले की कई ग्रामीण सड़कें बंद होने से बसों की आवाजाही ठप हो गई है। जिले के रिकांगपिओ सहित अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई है। रोहडू उपमंडल के पचास प्रतिशत रूट बसों के लिए बंद हैं। चंबा जिला मुख्यालय में शुक्रवार को दोपहर बाद बर्फबारी का दौर शुरू हुअा। करीब आधे घंटे तक बर्फ के फाहे गिरे। वहीं, जनजातीय क्षेत्र भरमौर में डेढ़ फुट, खज्जियार में एक फुट, जोत में दो फुट, भंजराड़ू में दो फुट तक बर्फबारी हुई। इसके अलावा जुम्हार में एक फुट, किहार में छह इंच, सलूणी में आधा फुट, संघणी में डेढ़ फुट तक बर्फबारी हुई। जनजातीय क्षेत्र पांगी के लिए बर्फ आफत बनकर गिरी है। चौबीस घंटाटे से पांगी की सोलह पंचायतों में बिजली व पेयजल की आपूर्ति ठप पड़ी है। लोग घरों में बर्फ को पिघलाकर पीने के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रशासन के अनुसार मौसम साफ होने के बाद ही बिजली व पानी की सप्लाई बहाल हो पाएगी। राजधानी शिमला और कुफरी में सीजन की पहली बर्फबारी से यातायात व्यवस्था ठप हो गई है। राजधानी का अपर शिमला से संपर्क कट गया है। शुक्रवार को अपर शिमला के अस्सी से ज्यादा रूट ठप रहे। एचआरटीसी और कई निजी बसें रास्ते में फंसी हैं। बर्फबारी को देखते हुए शिमला से इन इलाकों के लिए शुक्रवार को बसें नहीं चलाई गईं। शुक्रवार सुबह दस बजे मौसम खुलने के बाद कुफरी में यातायात बहाल कर दिया गया लेकिन शाम करीब चार बजे फिर से बर्फबारी का दौर शुरू हो गया। कांगड़ा जिले में बारिश शुक्रवार को भी जारी रही। वहीं जिले की ऊंची पहाड़ियों पर ताजा हिमपात भी दर्ज किया गया। इसके अलावा छोटा भंगाल, मुल्थान, चोहार घाटी व बरोट के गांवों में भी शुक्रवार को भी ताजा हिमपात दर्ज किया गया। इन गांवों में अब तक आठ से नौ इंच तक बर्फबारी हो चुकी है। बर्फबारी के कारण गुरुवार से बंद पड़ा मुल्थान-बरोट और कोठी कोढ़ व बड़ा गांव की ओर जाने वाले सड़क मार्ग अभी भी बाधित हैं। इसके अलावा जिला कांगड़ा के बैजनाथ, इंदौरा, कंडवाल, कांगड़ा, पालमपुर, ज्वालामुखी, कोटला, रैत व देहरा सहित अन्य क्षेत्रों में भी हल्की बारिश हुई। सिरमौर में दो दिन से जारी बारिश व बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भारी बर्फबारी के चलते ऊपरी क्षेत्रों का संपर्क शेष सिरमौर व हिमाचल के कई हिस्सों से टूट गया है। बर्फबारी के चलते आधा दर्जन के करीब मार्ग बंद हो गए हैं। उधर, जिला की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। इस समय चोटी चोटी पर चार से छह फीट बर्फ जम चुकी है। चूड़धार में इस वर्ष की चौथी बर्फबारी हो चुकी है। मंडी जिले में दो दिन से लगातार हो रही भारी बारिश व बर्फबारी से जनजीवन थम सा गया है। ऊपरी क्षेत्रों में दर्जनों सड़कें बंद पड़ी हैं। सैकड़ों घरों की बिजली और पानी की आपूर्ति ठप है। देव पराशर और कमरूनाग झीलें बर्फ से लद चुकी हैं। उधर डीसी ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है। शिकारी देवी में तीन फीट, भुलाहदस इंच, जंजैहली दो इंच, गाड़ागेशैणी एक फीट और शैटाधार मेंपंद्रह इंच बर्फ गिरी है। हिमाचल में भारी बर्फबारी, दो सौ अट्ठानवे सड़कें ठप, आधा दर्जन गांवों का कटा संपर्क Reviewed by news himachali on December चौदह, दो हज़ार उन्नीस Rating:
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यह विचारकर एक दिन कृष्ण द्रौपदी तथा पांचों पांडवों को लेकर एक उपवन की ओर पहुँचे । उसमें प्रवेश करने से पूर्व कृष्ण ने सबसे यह कह दिया कि कोई भी इसमें से एक भी फल अथवा फूल तोड़े नहीं । सबने इस आज्ञा को स्वीकार कर लिया और उपवन में प्रवेश किया ।
उपवन के सौन्दर्य का अवलोकन करते हुए सब उसमें विचरण कर रहे थे । भीम सबसे पीछे थे । उनकी दृष्टि एक आम्र वृक्ष की ओर गई । अतिसुन्दर सरस आमों को देखकर उनसे रहा नहीं गया और एक आम तोड़ ही लिया । उसे खाने के लिये तैयार हो रहे थे कि सामने कृष्ण खड़े हुए दिखाई दिये ।
कृष्ण ने कहा - मैंने कहा था आप सबसे कि कोई भी फल-फूल नहीं तोड़ सकता । इस आदेश को भूल गए क्या ?
भीम वोले - नटवर ! मुझसे भूल हो गई ।
कृष्ण ने कहा - अच्छा इसे वापिस पेड़ की डाल में लगाओ ! भीम चकरा गए और बोले -- ऐसा भी हो सकता है क्या ? टूटा हुआ फल वापिस पेड़ में कैसे लग सकता है ?
कृष्ण को तो द्रौपदी को प्रायश्चित्त व शिक्षा देनी थी अतः बोलेहाँ, अगर तुमने कोई पाप न किया होगा तो टूटा हुआ यह फल अवश्य डाल पर लगेगा ।
भीम ने कहा - कृष्ण ! मैंने तो अभी पाप किया ही है अतः आप धर्मराज से अपनी परीक्षा की शुरुआत कीजिये ।
कृष्ण ने बाकी चारों पांडवों को तथा द्रौपदी को बुलाया और धर्मराज युधिष्ठिर से फल को वापिस पेड़ में लगाने को कहा ।
युधिष्ठिर ने इष्टदेव का स्मरण किया और वोले - जहाँ तक मेरी स्मृति है, मैंने किसी दोप का सेवन नहीं किया है । अगर यह सत्य है तो फल पुनः वृक्ष की ओर उठ जाए ।
उनके यह कहते ही आम का फल पृथ्वी से कुछ उपर उठ गया । उसके पश्चात् अर्जुन, नकुल तथा सहदेव सभी ने इन शब्दों का उच्चारण किया । देखते-देखते आम क्रमशः थोड़ा-थोड़ा ऊपर उठता गया और वृक्ष की
शाखा के निकट जाकर रुक गया ।
द्रौपदी की बारी आई । उसने हाथ जोड़करको नमस्कार करते हुए कहा - अपने पाँचों पतियों के अतिरिक्त अगर स्वप्न में भो मुझे किसी अन्य की वांछा न हुई हो तो आम्रफल ! तुम वापिस वृक्ष की डाल से लग जाओ ।
किन्तु महान् आश्चर्य ! आम वृक्ष में लगने के बजाय वापस पृथ्वी पर गिर पड़ा । सब अभिभूत की तरह खड़े रह गए ।
कृष्ण ने तव सहज सान्त्वना के स्वर में कहा - द्रौपदी ! घबराओ नहीं, स्मरण करो, अपने जीवन को टटोलो, कभी तुम्हारी विचारधारा में कोई मलीनता तो नहीं आई ?
द्रौपदी कुछ क्षण निरुत्तर रहकर बोली- भगवन् ! मुझे तो स्मरण हो नहीं आता । कृपया ही मुझे मेरे दोष से अवगत कराइये ।
कृष्ण ने तब मुस्कराते हुए उसे नदी किनारे की घटना का स्मरण कराया । द्रौपदी ने अपने उस क्षणिक विकार के लिये घोर पश्चात्ताप किया और सोचा --- ग्रोह ! इतनी-सी बात का कटु परिणाम ? मुझे धिक्कार है ! मैंने अपने सतीत्व में कलंक लगाया ।
मन में इस प्रकार विचार आते ही द्रौपदी का हृदय निष्कलंक और पवित्र हो गया तथा सबकी आश्चर्य भरी निगाहों के सामने ही आम का वह फल पृथ्वी से उठकर पलभर में ही वृक्ष की डाल में जाकर लग गया ।
सज्जनो ! मन की तनिक-सी विकृति का और मन की निर्मलता का परिणाम आपने देखा ? इस प्रकार मन के क्षणिक विकार से आत्मा कलुपित हो जाती है किन्तु सच्चे हृदय से पश्चात्ताप करने पर तथा कृष्ण सदृश गुरु के समक्ष निवेदन करने पर वह कलुषता कान्ति में बदल जाती है । आत्मा अपनी तेजस्विता को पुनः प्राप्त कर लेती है ।
अपने प्रमाद या विगत भूलों के लिए पश्चात्ताप करना आवश्यक है । साथ ही यह ध्यान रखना भी अनिवार्य है कि पश्चात्ताप दिखावटी पश्चाताप न रह जाए । पश्चात्ताप होने के साथ भूलों को सुधारने का तथा नवीन भूलों को न होने देने का दृढ़ संकल्प भी होना चाहिये । यही सच्चे प्रायश्चित्त की कसोटी है ।
भविष्य में भूलें न हों, उसका उत्तम उपाय है आलोचना करना । सरल तथा शुद्ध भाव से प्रातःकाल तथा सायंकाल अपने दोपों पर विचार करनेवाला साधक भविष्य में अनेक दोषों से बच सकता है। जैसा कि मैंने अभी बताया था अपने पापों की गर्दा भी भगवान् महावीर के निर्देश किये हुए विधान के अनुसार करना चाहिये । कहा गया है :
जं पुच्वं तं पुच्वं जहाणुपुच्विं जहक्कमं सव्वं । आलोइज्ज सुविहिओ, कमकाल विधि अभिन्दंतो ।।
समाधिभरण, प्र. १०५
अर्थात् श्रेष्ठ आचार वाले साधक को क्रम और काल का उल्लंघन न करते हुए दोनों की क्रमशः आलोचना करनी चाहिये । जो दोष पहले लगा हो उसकी आलोचना पहले और बाद में लगे दोप को आलोचना बाद में करनी चाहिये ।
पैनी एवं अन्तर्मुख दृष्टि वाला साधक अपने जीवन की घटनाओं से बहुत लाभ उठा सकता है यद्यपि निरर्थक दुःख अथवा पश्चात्ताप करके अमूल्य समय गँवाना ठीक नहीं है, किन्तु जो अनुभव प्राप्त हुए हैं उनसे लाभ उठाते हुए शेप जीवन को उपयोगी और दोषरहित बनाना चाहिये ।
भूतकाल मनुष्य के हाथ में नहीं है किन्तु भविष्य को बनाना मनुष्य के हाथ में है । इसलिये प्रत्येक आनेवाले क्षण का सदुपयोग करते हुए साधक को साधना - पथ पर बढ़ना चाहिये । समय संसार की सर्वोत्तम विभूति से भी महान् है । क्योंकि अनुकूल प्रयत्न द्वारा सर्वश्रेष्ठ वैभव प्राप्त किया जा सकता है परन्तु करोड़ों प्रयत्न करके भी बीते हुए समय को वापिस नहीं लाया जा सकता । यही कारण है कि भगवान् ने 'समयं गोयम मा पमायए' कहकर समय का मूल्य प्रदर्शित किया है । ।
साधक को अपने जीवन की महत्ता समझते हुए आत्मा के असली स्वरूप को पहचानने का प्रयत्न करना चाहिये । मनुष्य में ही विशिष्ट विवेक की प्राप्ति होती है। और इसी मानव शरीर का निमित्त पाकर मुनिजन उच्च गुणस्थानों की प्राप्ति करके मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं । यह मानवशरीर तो इस भवसागर से पार उतरने के लिये नौका के समान है। नदी पार करके जिस प्रकार नाव किनारे पर छोड़ दी जाती है उसी प्रकार इस संसार को पार
मुक्ति का मूल-गर्हा
करके इस नश्वर शरीर का त्याग हो जाता है । कवि के कितने सुन्दर भाव हैं.
भव सागर से पार उतरने को शरीर नौका है ।
मानव भव शाश्वत सुख पाने का अनुपम मौका है ॥
साधक को शास्त्रों के विधानों की ओर दृष्टिपात करते हुए विगत पापों का पश्चात्ताप तथा भविष्य के लिये पवित्र भावनाओं से अपने हृदय को विभूपित करना चाहिए तभी आत्मा शाश्वत सुख की प्राप्ति कर सकेगी । और अजर अमर पद को पा सकेगी ।
इस सृष्टि में अपने जीवनकाल में जीते तो सभी मनुष्य हैं किन्तु उनमें से कितने जीवन को उन्नत बनाकर उसे सफल बना पाते हैं ? कितने व्यक्ति सदा जीवन को उन्नति की ओर अग्रसर करने का प्रयत्न करते हैं ? उत्तर होगा - बहुत ही कम, इने-गिने पुरुप हो ।
यद्यपि प्रत्येक मनुष्य अपने जेब से पाँच पैसे की वस्तु खरीदने पर उसका सही उपयोग करने का विचार करते हैं किन्तु अमूल्य जीवन को सही उपयोगिता पर विचार करने का कष्ट नहीं उठाते । जीवन किस लिये प्राप्त हुआ है ? इसकी सफलता किसमें है ? हमें कौन से कर्तव्य करने चाहिये जिससे जीवन निष्फल न बनकर सफल बने ? इन वातों पर गंभीरता से चिंतन विरले मनुष्य ही करते हैं ।
कुछ लोगों की, जो इस विषय में विचार करते भी हैं, दृष्टि अत्यंत सीमित होती है । अतएव वे इहलौकिक उन्नति में ही जीवन को सफलता मान लेते हैं । वे आत्मा के शाश्वत कल्याण के दृष्टिकोण से विचार नहीं करते । कोई करोड़पति बनने में जीवन का साफल्य मानते हैं, कोई मानप्रतिष्ठा को प्राप्ति में कोई परिवार की वृद्धि में और कोई भोगोपभोग भोगने में । उनकी दृष्टि में शरीर का सुख मुख्य होता है और शरीर में स्थित आत्मा का सुख नगण्य । वास्तव में वे शरीर और आत्मा को भिन्न तत्त्व ही नहीं मानते या इनकी भिन्नता को समझ नहीं पाते ।
किन्तु जिस शारीरिक सुख और भोग-विलास को मनुष्य जीवन का चरम सुख मानता है और जिनकी प्राप्ति के लिये वह अहर्निश दौड़-धूप किया करता है क्या उनसे आत्मा की समस्या सुलझती है ? उनसे आत्मा बन्धनमुक्त और शुद्ध बन सकता है ? भगवान् महावीर ने कहा है -
खणमित्त सुक्खा बहु काल दुक्खा,
पगाम दुक्खा अणिगाम सुक्खा ।
संसार मुक्खस्स विपक्खभूया,
खाणी अणत्थाण उ कामभोगा ।।
- उत्तराध्ययन १४-१३
अर्थात् यह काम-भोग क्षरण भर सुख देने वाले हैं और चिरकाल तक दुःख देने वाले हैं । यह काम-भोग जन्म-मरण से छुटकारा पाने के विरोधी हैं, मोक्ष सुख सुख के शत्रु और अनर्थों की खान हैं ।
जिसे आत्मतत्त्व की स्वतन्त्र सत्ता की प्रतीति हो चुकी है ऐसा विवेकवान् व्यक्ति मानव शरीर का निमित्त पाकर आत्मा को उन्नति की ओर ले जाने में प्रयत्नशील रहता है । आत्मा की उन्नति अथवा उसके कल्याण का अभिप्राय है आत्मा के विशुद्ध स्वरूप की प्राप्ति होना । विषय-विकारों को जीतते हुए आत्मा को निर्विकार बनाने का प्रयत्न ही उन्नति है और वही आत्मकल्याण है। आत्मा ज्यों-ज्यों उन्नत होती जाती है, मुक्तिपथ की मंजिल उतनी ही तय होती जाती है ।
इसलिये प्रत्येक बुद्धिमान् को प्रतिक्षण आत्मीति करते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिये । श्रात्मा को उन्नत बनाने के लिये सर्वप्रथम आत्मविश्वास होना आवश्यक है। आत्मविश्वास का अर्थ है अपनी असीम और अनन्त क्षमता को समझना । परमात्मा में जिन शक्तियों का अस्तित्व माना जाता है उन सबका अपने में अनुभव करना । समग्र पारमात्मिक शक्तियाँ मेरी श्रात्मा में निहित हैं, इस प्रकार की प्रबल अनुभूति से तत्काल आत्मा में में अनिवर्चनीय बल का प्रादुर्भाव होता है । इसके विपरीत, आत्महीनता का अनुभव होना मृत्यु के समान है । मृत्यु दुखदायी मानी जाती है और वह जीवन के अन्त में एक बार ही दुःख देती है, लेकिन आत्महीनता ऐसी मृत्यु है जो कि पल-पल पर आती है और तिल-तिल करके आन्तरिक शान्ति को नष्ट करती रहती है । अतः आत्मवल की अनुभूति के द्वारा ही बुद्धिमान् पुरुष को आत्मविश्वास पैदा करना चाहिये ।
आत्मबल के विना मानव उन्नति के मार्ग पर एक कदम भी नहीं बढ़ सकता । आत्मवल ही मनुष्य को निर्भय होकर उन्नति पथ पर चलने की प्रेरणा देता है । आत्मवल बढ़ने से इन्द्रियों की प्रबलता घटती है और विषयासक्ति हटने लग जाती है । विषयासक्ति ज्यों-ज्यों कम होती जाती है आत्मा में अपूर्व शान्ति, समता, सन्तुष्टि एवं निराकुलता उत्पन्न होती है और आत्मा का
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यह विचारकर एक दिन कृष्ण द्रौपदी तथा पांचों पांडवों को लेकर एक उपवन की ओर पहुँचे । उसमें प्रवेश करने से पूर्व कृष्ण ने सबसे यह कह दिया कि कोई भी इसमें से एक भी फल अथवा फूल तोड़े नहीं । सबने इस आज्ञा को स्वीकार कर लिया और उपवन में प्रवेश किया । उपवन के सौन्दर्य का अवलोकन करते हुए सब उसमें विचरण कर रहे थे । भीम सबसे पीछे थे । उनकी दृष्टि एक आम्र वृक्ष की ओर गई । अतिसुन्दर सरस आमों को देखकर उनसे रहा नहीं गया और एक आम तोड़ ही लिया । उसे खाने के लिये तैयार हो रहे थे कि सामने कृष्ण खड़े हुए दिखाई दिये । कृष्ण ने कहा - मैंने कहा था आप सबसे कि कोई भी फल-फूल नहीं तोड़ सकता । इस आदेश को भूल गए क्या ? भीम वोले - नटवर ! मुझसे भूल हो गई । कृष्ण ने कहा - अच्छा इसे वापिस पेड़ की डाल में लगाओ ! भीम चकरा गए और बोले -- ऐसा भी हो सकता है क्या ? टूटा हुआ फल वापिस पेड़ में कैसे लग सकता है ? कृष्ण को तो द्रौपदी को प्रायश्चित्त व शिक्षा देनी थी अतः बोलेहाँ, अगर तुमने कोई पाप न किया होगा तो टूटा हुआ यह फल अवश्य डाल पर लगेगा । भीम ने कहा - कृष्ण ! मैंने तो अभी पाप किया ही है अतः आप धर्मराज से अपनी परीक्षा की शुरुआत कीजिये । कृष्ण ने बाकी चारों पांडवों को तथा द्रौपदी को बुलाया और धर्मराज युधिष्ठिर से फल को वापिस पेड़ में लगाने को कहा । युधिष्ठिर ने इष्टदेव का स्मरण किया और वोले - जहाँ तक मेरी स्मृति है, मैंने किसी दोप का सेवन नहीं किया है । अगर यह सत्य है तो फल पुनः वृक्ष की ओर उठ जाए । उनके यह कहते ही आम का फल पृथ्वी से कुछ उपर उठ गया । उसके पश्चात् अर्जुन, नकुल तथा सहदेव सभी ने इन शब्दों का उच्चारण किया । देखते-देखते आम क्रमशः थोड़ा-थोड़ा ऊपर उठता गया और वृक्ष की शाखा के निकट जाकर रुक गया । द्रौपदी की बारी आई । उसने हाथ जोड़करको नमस्कार करते हुए कहा - अपने पाँचों पतियों के अतिरिक्त अगर स्वप्न में भो मुझे किसी अन्य की वांछा न हुई हो तो आम्रफल ! तुम वापिस वृक्ष की डाल से लग जाओ । किन्तु महान् आश्चर्य ! आम वृक्ष में लगने के बजाय वापस पृथ्वी पर गिर पड़ा । सब अभिभूत की तरह खड़े रह गए । कृष्ण ने तव सहज सान्त्वना के स्वर में कहा - द्रौपदी ! घबराओ नहीं, स्मरण करो, अपने जीवन को टटोलो, कभी तुम्हारी विचारधारा में कोई मलीनता तो नहीं आई ? द्रौपदी कुछ क्षण निरुत्तर रहकर बोली- भगवन् ! मुझे तो स्मरण हो नहीं आता । कृपया ही मुझे मेरे दोष से अवगत कराइये । कृष्ण ने तब मुस्कराते हुए उसे नदी किनारे की घटना का स्मरण कराया । द्रौपदी ने अपने उस क्षणिक विकार के लिये घोर पश्चात्ताप किया और सोचा --- ग्रोह ! इतनी-सी बात का कटु परिणाम ? मुझे धिक्कार है ! मैंने अपने सतीत्व में कलंक लगाया । मन में इस प्रकार विचार आते ही द्रौपदी का हृदय निष्कलंक और पवित्र हो गया तथा सबकी आश्चर्य भरी निगाहों के सामने ही आम का वह फल पृथ्वी से उठकर पलभर में ही वृक्ष की डाल में जाकर लग गया । सज्जनो ! मन की तनिक-सी विकृति का और मन की निर्मलता का परिणाम आपने देखा ? इस प्रकार मन के क्षणिक विकार से आत्मा कलुपित हो जाती है किन्तु सच्चे हृदय से पश्चात्ताप करने पर तथा कृष्ण सदृश गुरु के समक्ष निवेदन करने पर वह कलुषता कान्ति में बदल जाती है । आत्मा अपनी तेजस्विता को पुनः प्राप्त कर लेती है । अपने प्रमाद या विगत भूलों के लिए पश्चात्ताप करना आवश्यक है । साथ ही यह ध्यान रखना भी अनिवार्य है कि पश्चात्ताप दिखावटी पश्चाताप न रह जाए । पश्चात्ताप होने के साथ भूलों को सुधारने का तथा नवीन भूलों को न होने देने का दृढ़ संकल्प भी होना चाहिये । यही सच्चे प्रायश्चित्त की कसोटी है । भविष्य में भूलें न हों, उसका उत्तम उपाय है आलोचना करना । सरल तथा शुद्ध भाव से प्रातःकाल तथा सायंकाल अपने दोपों पर विचार करनेवाला साधक भविष्य में अनेक दोषों से बच सकता है। जैसा कि मैंने अभी बताया था अपने पापों की गर्दा भी भगवान् महावीर के निर्देश किये हुए विधान के अनुसार करना चाहिये । कहा गया है : जं पुच्वं तं पुच्वं जहाणुपुच्विं जहक्कमं सव्वं । आलोइज्ज सुविहिओ, कमकाल विधि अभिन्दंतो ।। समाधिभरण, प्र. एक सौ पाँच अर्थात् श्रेष्ठ आचार वाले साधक को क्रम और काल का उल्लंघन न करते हुए दोनों की क्रमशः आलोचना करनी चाहिये । जो दोष पहले लगा हो उसकी आलोचना पहले और बाद में लगे दोप को आलोचना बाद में करनी चाहिये । पैनी एवं अन्तर्मुख दृष्टि वाला साधक अपने जीवन की घटनाओं से बहुत लाभ उठा सकता है यद्यपि निरर्थक दुःख अथवा पश्चात्ताप करके अमूल्य समय गँवाना ठीक नहीं है, किन्तु जो अनुभव प्राप्त हुए हैं उनसे लाभ उठाते हुए शेप जीवन को उपयोगी और दोषरहित बनाना चाहिये । भूतकाल मनुष्य के हाथ में नहीं है किन्तु भविष्य को बनाना मनुष्य के हाथ में है । इसलिये प्रत्येक आनेवाले क्षण का सदुपयोग करते हुए साधक को साधना - पथ पर बढ़ना चाहिये । समय संसार की सर्वोत्तम विभूति से भी महान् है । क्योंकि अनुकूल प्रयत्न द्वारा सर्वश्रेष्ठ वैभव प्राप्त किया जा सकता है परन्तु करोड़ों प्रयत्न करके भी बीते हुए समय को वापिस नहीं लाया जा सकता । यही कारण है कि भगवान् ने 'समयं गोयम मा पमायए' कहकर समय का मूल्य प्रदर्शित किया है । । साधक को अपने जीवन की महत्ता समझते हुए आत्मा के असली स्वरूप को पहचानने का प्रयत्न करना चाहिये । मनुष्य में ही विशिष्ट विवेक की प्राप्ति होती है। और इसी मानव शरीर का निमित्त पाकर मुनिजन उच्च गुणस्थानों की प्राप्ति करके मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं । यह मानवशरीर तो इस भवसागर से पार उतरने के लिये नौका के समान है। नदी पार करके जिस प्रकार नाव किनारे पर छोड़ दी जाती है उसी प्रकार इस संसार को पार मुक्ति का मूल-गर्हा करके इस नश्वर शरीर का त्याग हो जाता है । कवि के कितने सुन्दर भाव हैं. भव सागर से पार उतरने को शरीर नौका है । मानव भव शाश्वत सुख पाने का अनुपम मौका है ॥ साधक को शास्त्रों के विधानों की ओर दृष्टिपात करते हुए विगत पापों का पश्चात्ताप तथा भविष्य के लिये पवित्र भावनाओं से अपने हृदय को विभूपित करना चाहिए तभी आत्मा शाश्वत सुख की प्राप्ति कर सकेगी । और अजर अमर पद को पा सकेगी । इस सृष्टि में अपने जीवनकाल में जीते तो सभी मनुष्य हैं किन्तु उनमें से कितने जीवन को उन्नत बनाकर उसे सफल बना पाते हैं ? कितने व्यक्ति सदा जीवन को उन्नति की ओर अग्रसर करने का प्रयत्न करते हैं ? उत्तर होगा - बहुत ही कम, इने-गिने पुरुप हो । यद्यपि प्रत्येक मनुष्य अपने जेब से पाँच पैसे की वस्तु खरीदने पर उसका सही उपयोग करने का विचार करते हैं किन्तु अमूल्य जीवन को सही उपयोगिता पर विचार करने का कष्ट नहीं उठाते । जीवन किस लिये प्राप्त हुआ है ? इसकी सफलता किसमें है ? हमें कौन से कर्तव्य करने चाहिये जिससे जीवन निष्फल न बनकर सफल बने ? इन वातों पर गंभीरता से चिंतन विरले मनुष्य ही करते हैं । कुछ लोगों की, जो इस विषय में विचार करते भी हैं, दृष्टि अत्यंत सीमित होती है । अतएव वे इहलौकिक उन्नति में ही जीवन को सफलता मान लेते हैं । वे आत्मा के शाश्वत कल्याण के दृष्टिकोण से विचार नहीं करते । कोई करोड़पति बनने में जीवन का साफल्य मानते हैं, कोई मानप्रतिष्ठा को प्राप्ति में कोई परिवार की वृद्धि में और कोई भोगोपभोग भोगने में । उनकी दृष्टि में शरीर का सुख मुख्य होता है और शरीर में स्थित आत्मा का सुख नगण्य । वास्तव में वे शरीर और आत्मा को भिन्न तत्त्व ही नहीं मानते या इनकी भिन्नता को समझ नहीं पाते । किन्तु जिस शारीरिक सुख और भोग-विलास को मनुष्य जीवन का चरम सुख मानता है और जिनकी प्राप्ति के लिये वह अहर्निश दौड़-धूप किया करता है क्या उनसे आत्मा की समस्या सुलझती है ? उनसे आत्मा बन्धनमुक्त और शुद्ध बन सकता है ? भगवान् महावीर ने कहा है - खणमित्त सुक्खा बहु काल दुक्खा, पगाम दुक्खा अणिगाम सुक्खा । संसार मुक्खस्स विपक्खभूया, खाणी अणत्थाण उ कामभोगा ।। - उत्तराध्ययन चौदह-तेरह अर्थात् यह काम-भोग क्षरण भर सुख देने वाले हैं और चिरकाल तक दुःख देने वाले हैं । यह काम-भोग जन्म-मरण से छुटकारा पाने के विरोधी हैं, मोक्ष सुख सुख के शत्रु और अनर्थों की खान हैं । जिसे आत्मतत्त्व की स्वतन्त्र सत्ता की प्रतीति हो चुकी है ऐसा विवेकवान् व्यक्ति मानव शरीर का निमित्त पाकर आत्मा को उन्नति की ओर ले जाने में प्रयत्नशील रहता है । आत्मा की उन्नति अथवा उसके कल्याण का अभिप्राय है आत्मा के विशुद्ध स्वरूप की प्राप्ति होना । विषय-विकारों को जीतते हुए आत्मा को निर्विकार बनाने का प्रयत्न ही उन्नति है और वही आत्मकल्याण है। आत्मा ज्यों-ज्यों उन्नत होती जाती है, मुक्तिपथ की मंजिल उतनी ही तय होती जाती है । इसलिये प्रत्येक बुद्धिमान् को प्रतिक्षण आत्मीति करते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिये । श्रात्मा को उन्नत बनाने के लिये सर्वप्रथम आत्मविश्वास होना आवश्यक है। आत्मविश्वास का अर्थ है अपनी असीम और अनन्त क्षमता को समझना । परमात्मा में जिन शक्तियों का अस्तित्व माना जाता है उन सबका अपने में अनुभव करना । समग्र पारमात्मिक शक्तियाँ मेरी श्रात्मा में निहित हैं, इस प्रकार की प्रबल अनुभूति से तत्काल आत्मा में में अनिवर्चनीय बल का प्रादुर्भाव होता है । इसके विपरीत, आत्महीनता का अनुभव होना मृत्यु के समान है । मृत्यु दुखदायी मानी जाती है और वह जीवन के अन्त में एक बार ही दुःख देती है, लेकिन आत्महीनता ऐसी मृत्यु है जो कि पल-पल पर आती है और तिल-तिल करके आन्तरिक शान्ति को नष्ट करती रहती है । अतः आत्मवल की अनुभूति के द्वारा ही बुद्धिमान् पुरुष को आत्मविश्वास पैदा करना चाहिये । आत्मबल के विना मानव उन्नति के मार्ग पर एक कदम भी नहीं बढ़ सकता । आत्मवल ही मनुष्य को निर्भय होकर उन्नति पथ पर चलने की प्रेरणा देता है । आत्मवल बढ़ने से इन्द्रियों की प्रबलता घटती है और विषयासक्ति हटने लग जाती है । विषयासक्ति ज्यों-ज्यों कम होती जाती है आत्मा में अपूर्व शान्ति, समता, सन्तुष्टि एवं निराकुलता उत्पन्न होती है और आत्मा का
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क्या आपको पता है कि सोने में निेवेश क्यों किया जाता है। सोने में निवेश करने को अन्य शेयरों में निवेश करने से ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। दरअसल, सोने में निवेश की दो अहम वजहें होती हैं।
जानकारी के मुताबिक सोने में निवेश महंगाई पर असर नहीं डालता। अगर सोने में लम्बे समय तक निवेश किया जाए तो महंगाई का असर इसको छूता भी नहीं है।
सोने की चाल विपरीत होती है। अगर शेयर बाजार में गिरावट होती है तो सोने की कीमतों में तेजी का संकेत हो सकता है। इसलिए अधिकतर निवेश अपने कुल निवेश का कम से कम पांच फीसदी हिस्सा सोने को देते हैं।
इसके अलावा आर्थिक संकट में भी सोना काम आता है। कठिन समय में आप सोने को नकदी में बदलकर अपनी जरूरत को पूरा कर सकते हैं। यह एक बेहतरीन विकल्प के तौर पर भी उभर रहा है।
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क्या आपको पता है कि सोने में निेवेश क्यों किया जाता है। सोने में निवेश करने को अन्य शेयरों में निवेश करने से ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। दरअसल, सोने में निवेश की दो अहम वजहें होती हैं। जानकारी के मुताबिक सोने में निवेश महंगाई पर असर नहीं डालता। अगर सोने में लम्बे समय तक निवेश किया जाए तो महंगाई का असर इसको छूता भी नहीं है। सोने की चाल विपरीत होती है। अगर शेयर बाजार में गिरावट होती है तो सोने की कीमतों में तेजी का संकेत हो सकता है। इसलिए अधिकतर निवेश अपने कुल निवेश का कम से कम पांच फीसदी हिस्सा सोने को देते हैं। इसके अलावा आर्थिक संकट में भी सोना काम आता है। कठिन समय में आप सोने को नकदी में बदलकर अपनी जरूरत को पूरा कर सकते हैं। यह एक बेहतरीन विकल्प के तौर पर भी उभर रहा है। Get Latest News alerts.
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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सोमवार को बड़ा हादसा हो गया। प्रभु घाट (Prabhu Ghat) पर नाव (Boat) पलट गई। बताया जा रहा है कि नाव (Boat) में सवार 6 लोग डूब गए हैं। नाविकों द्वारा 2 की जान बचा ली गई है।
बताया जा रहा है कि सभी लोग प्रभु-जैन घाट के स्थानीय हैं। नाव (Boat) पलटने के बाद नाविकों ने नदी में छलांग लगाकर दो लोगों की जान बचा ली। जबकि चार लोगों की तलाश अभी की जा रही है।
स्थानीय पुलिस और गोताखोर लोगों की तलाश में जुटे हैं।
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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सोमवार को बड़ा हादसा हो गया। प्रभु घाट पर नाव पलट गई। बताया जा रहा है कि नाव में सवार छः लोग डूब गए हैं। नाविकों द्वारा दो की जान बचा ली गई है। बताया जा रहा है कि सभी लोग प्रभु-जैन घाट के स्थानीय हैं। नाव पलटने के बाद नाविकों ने नदी में छलांग लगाकर दो लोगों की जान बचा ली। जबकि चार लोगों की तलाश अभी की जा रही है। स्थानीय पुलिस और गोताखोर लोगों की तलाश में जुटे हैं।
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बनीखेत - हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ की राज्य कार्यकारिणी की बैठक शुक्रवार को बट्ट आईटीआई बौंखरी मोड़ बनीखेत में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने की। इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा भी की गई। संघ ने सरकार द्वारा हाल में शुरू की गई प्री. नर्सरी कक्षाओं के निर्णय का स्वागत किया और इसे शिक्षा की गुणवत्ता की ओर उठाया गया सही कदम करार दिया। वीरेंद्र ने कहा कि प्री नर्सरी शुरू करने का सुझाव संघ ने अपनी 48 सूत्रीय मांग पत्र में दिया था। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि यदि इन प्री नर्सरी कक्षाओं में शीघ्र प्रशिक्षित अध्यापक तैनात न किए गए तो सरकार का यही कदम शिक्षा व्यवस्था को पंगु बना देगा। इसके अतिरिक्त संघ के सदस्यों ने अध्यापक संगठनों को लेकर सरकार द्वारा अपनाई जा रही संरक्षणवाद की नीति की कड़ी आलोचना भी की। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष के अलावा महासचिव नरेश महाजन, वित्त सचिव मुकेश शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता एवं मुख्य प्रेस सचिव कैलाश ठाकुर, सरंक्षक अरुण गुलेरिया के अतिरिक्त कांगड़ा जिला अध्यक्ष नरेश धीमान, शिमला के महावीर कैंथला, हमीरपुर के संजीव ठाकुर, मंडी के अश्विनी गुलेरिया, चंबा के हरिप्रसाद शर्मा, महिला विंग की अध्यक्ष कविता बिजलवान के अलावा कुल्लू के महासचिव यशपाल व बिलासपुर के महासचिव यशवीर रनौत आदि मौजूद रहे।
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बनीखेत - हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ की राज्य कार्यकारिणी की बैठक शुक्रवार को बट्ट आईटीआई बौंखरी मोड़ बनीखेत में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने की। इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा भी की गई। संघ ने सरकार द्वारा हाल में शुरू की गई प्री. नर्सरी कक्षाओं के निर्णय का स्वागत किया और इसे शिक्षा की गुणवत्ता की ओर उठाया गया सही कदम करार दिया। वीरेंद्र ने कहा कि प्री नर्सरी शुरू करने का सुझाव संघ ने अपनी अड़तालीस सूत्रीय मांग पत्र में दिया था। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि यदि इन प्री नर्सरी कक्षाओं में शीघ्र प्रशिक्षित अध्यापक तैनात न किए गए तो सरकार का यही कदम शिक्षा व्यवस्था को पंगु बना देगा। इसके अतिरिक्त संघ के सदस्यों ने अध्यापक संगठनों को लेकर सरकार द्वारा अपनाई जा रही संरक्षणवाद की नीति की कड़ी आलोचना भी की। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष के अलावा महासचिव नरेश महाजन, वित्त सचिव मुकेश शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता एवं मुख्य प्रेस सचिव कैलाश ठाकुर, सरंक्षक अरुण गुलेरिया के अतिरिक्त कांगड़ा जिला अध्यक्ष नरेश धीमान, शिमला के महावीर कैंथला, हमीरपुर के संजीव ठाकुर, मंडी के अश्विनी गुलेरिया, चंबा के हरिप्रसाद शर्मा, महिला विंग की अध्यक्ष कविता बिजलवान के अलावा कुल्लू के महासचिव यशपाल व बिलासपुर के महासचिव यशवीर रनौत आदि मौजूद रहे।
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कॉमेडी जगत के जाने माने मशहूर कॉमेडियन कीकू शारदा आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने कॉमेडी नाइट्स विद कपिल शो से देश-दुनिया में बहुत प्रशंसा एकत्रित की थी। अपनी कॉमेडी के दम पर लोगों को बहुत हंसाने वाले कीकू एक बार जेल भी जा चुके हैं। उन्हें डेरा सच्चा सौदा चीफ गुरमीत राम रहीम सिंह का मजाक उड़ाने के चलते यह दंड दिया गया था।
दरअसल, कीकू पर राम रहीम के फॉलोवर्स की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा था, जिसके पश्चात् उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। उन्हें अदालत ने 14 दिनों की ज्यूडिशियल रिमांड में भेजा गया, किन्तु बाद में उन्हें रिहाई भी मिल गई थी। कीकू को उस वक़्त मुंबई में हरियाणा पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 295-ए के तहत कार्रवाई की गई थी।
पुलिस ने कहा था कि कीकू के विरुद्ध उदय सिंह नामक डेरा सच्चा सौदा के फॉलोवर ने कम्प्लेन दर्ज करवाई थी। तत्पश्चात, पुलिस ने कार्रवाई की थी। कीकू पर आरोप था कि उन्होंने कॉमेडी शो के चलते एमएसजी-2 मूवी को लेकर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख का मजाक उड़ाया है। गिरफ्तारी के बारे में मीडिया संग चर्चा में कीकू ने क्षमा मांगते हुए कहा था कि उन्होंने यह एक्ट चैनल के निर्देशन तथा प्रोग्राम के प्रोड्यूसर के बोलने पर किया था। मुझे एक ड्रेस दी गई थी, स्क्रिप्ट पढ़ने के लिए दी तथा एक्ट निर्देशित करके बताया। मुझे इसके लिए अपराधी बताया तथा मामला दर्ज किया, किन्तु बाकियों को कुछ नहीं हुआ, विशेषकर टीवी चैनल को।
हिना खान के पीछे पड़ी पैपराजी को देख भड़कीं हिमांशी, कहा- 'शेमलेस एक्ट'
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कॉमेडी जगत के जाने माने मशहूर कॉमेडियन कीकू शारदा आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने कॉमेडी नाइट्स विद कपिल शो से देश-दुनिया में बहुत प्रशंसा एकत्रित की थी। अपनी कॉमेडी के दम पर लोगों को बहुत हंसाने वाले कीकू एक बार जेल भी जा चुके हैं। उन्हें डेरा सच्चा सौदा चीफ गुरमीत राम रहीम सिंह का मजाक उड़ाने के चलते यह दंड दिया गया था। दरअसल, कीकू पर राम रहीम के फॉलोवर्स की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा था, जिसके पश्चात् उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। उन्हें अदालत ने चौदह दिनों की ज्यूडिशियल रिमांड में भेजा गया, किन्तु बाद में उन्हें रिहाई भी मिल गई थी। कीकू को उस वक़्त मुंबई में हरियाणा पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा दो सौ पचानवे-ए के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने कहा था कि कीकू के विरुद्ध उदय सिंह नामक डेरा सच्चा सौदा के फॉलोवर ने कम्प्लेन दर्ज करवाई थी। तत्पश्चात, पुलिस ने कार्रवाई की थी। कीकू पर आरोप था कि उन्होंने कॉमेडी शो के चलते एमएसजी-दो मूवी को लेकर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख का मजाक उड़ाया है। गिरफ्तारी के बारे में मीडिया संग चर्चा में कीकू ने क्षमा मांगते हुए कहा था कि उन्होंने यह एक्ट चैनल के निर्देशन तथा प्रोग्राम के प्रोड्यूसर के बोलने पर किया था। मुझे एक ड्रेस दी गई थी, स्क्रिप्ट पढ़ने के लिए दी तथा एक्ट निर्देशित करके बताया। मुझे इसके लिए अपराधी बताया तथा मामला दर्ज किया, किन्तु बाकियों को कुछ नहीं हुआ, विशेषकर टीवी चैनल को। हिना खान के पीछे पड़ी पैपराजी को देख भड़कीं हिमांशी, कहा- 'शेमलेस एक्ट'
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आगरा। रेलवे ने त्योहार स्पेशल 196 ट्रेनों को शुरू करने के लिए हरी झंडी दे दी है। 20 अक्टूबर से इन ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा। इसमें से आगरा को अप-डाउन में 12 और ट्रेन मिली हैं। छह ट्रेन आगरा कैंट तो छह ट्रेन आगरा फोर्ट स्टेशन पर रुकेंगी। त्योहार में नई ट्रेन मिलने से यात्रियों को लाभ होगा।
ये ट्रेनें 30 नवंबर तक चलाई जाएंगी।
रेलवे ने त्योहार पर यात्रियों की सुविधा के लिए नई ट्रेनों को मंजूरी दे दी है। ट्रेन संख्या 2803/04 विशाखापट्टनम से हजरत निजामुद्दीन सप्ताह में दो दिन चलेगी। वहीं ट्रेन संख्या 2807/08 विशाखापट्टनम से हजरत निजामुद्दीन सप्ताह में पांच दिन चलेगी। ट्रेन संख्या 8237/38 कोरबा से अमृतसर सप्ताह में तीन दिन चलेगी। सभी ट्रेनें कैंट रेलवे स्टेशन पर रुकेंगी। इसके अलावा ट्रेन संख्या 02495/96 बीकानेर से कोलकाता सप्ताह में एक दिन चलेगी। ट्रेन संख्या 02988/87 अजमेर-सियालदाह एक्सप्रेस व ट्रेन संख्या 04853/54 वाराणसी-जोधपुर एक्सप्रेस प्रतिदिन चलेगी। सभी ट्रेनें आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर रुकेंगी। इन ट्रेनों के चलने से विशाखापट्टनम, अमृतसर, कोलकाता, बीकानेर, जोधपुर, अजमेर व वाराणसी जाने वाले यात्रियों को सुविधा होगी। आगरा रेल मंडल के पीआरओ एसके श्रीवास्तव ने बताया कि नई ट्रेन चलने से त्योहार पर यात्रियों को सुविधा होगी।
नई दिल्ली- भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस का परिचालन 17 अक्टूबर से होगा। यह ट्रेन आगरा कैंट स्टेशन पर रुकेगी। ट्रेन प्रतिदिन चलेगी। इससे भोपाल और नई दिल्ली जाने वाले यात्रियों को सुविधा होगी।
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आगरा। रेलवे ने त्योहार स्पेशल एक सौ छियानवे ट्रेनों को शुरू करने के लिए हरी झंडी दे दी है। बीस अक्टूबर से इन ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा। इसमें से आगरा को अप-डाउन में बारह और ट्रेन मिली हैं। छह ट्रेन आगरा कैंट तो छह ट्रेन आगरा फोर्ट स्टेशन पर रुकेंगी। त्योहार में नई ट्रेन मिलने से यात्रियों को लाभ होगा। ये ट्रेनें तीस नवंबर तक चलाई जाएंगी। रेलवे ने त्योहार पर यात्रियों की सुविधा के लिए नई ट्रेनों को मंजूरी दे दी है। ट्रेन संख्या दो हज़ार आठ सौ तीन/चार विशाखापट्टनम से हजरत निजामुद्दीन सप्ताह में दो दिन चलेगी। वहीं ट्रेन संख्या दो हज़ार आठ सौ सात/आठ विशाखापट्टनम से हजरत निजामुद्दीन सप्ताह में पांच दिन चलेगी। ट्रेन संख्या आठ हज़ार दो सौ सैंतीस/अड़तीस कोरबा से अमृतसर सप्ताह में तीन दिन चलेगी। सभी ट्रेनें कैंट रेलवे स्टेशन पर रुकेंगी। इसके अलावा ट्रेन संख्या दो हज़ार चार सौ पचानवे/छियानवे बीकानेर से कोलकाता सप्ताह में एक दिन चलेगी। ट्रेन संख्या दो हज़ार नौ सौ अठासी/सत्तासी अजमेर-सियालदाह एक्सप्रेस व ट्रेन संख्या चार हज़ार आठ सौ तिरेपन/चौवन वाराणसी-जोधपुर एक्सप्रेस प्रतिदिन चलेगी। सभी ट्रेनें आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर रुकेंगी। इन ट्रेनों के चलने से विशाखापट्टनम, अमृतसर, कोलकाता, बीकानेर, जोधपुर, अजमेर व वाराणसी जाने वाले यात्रियों को सुविधा होगी। आगरा रेल मंडल के पीआरओ एसके श्रीवास्तव ने बताया कि नई ट्रेन चलने से त्योहार पर यात्रियों को सुविधा होगी। नई दिल्ली- भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस का परिचालन सत्रह अक्टूबर से होगा। यह ट्रेन आगरा कैंट स्टेशन पर रुकेगी। ट्रेन प्रतिदिन चलेगी। इससे भोपाल और नई दिल्ली जाने वाले यात्रियों को सुविधा होगी।
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कुछ लोगों के लिए यह साल काफी शुभ फलदायी साबित हुआ है। साल खत्म होने के पहले, नए साल के आने की खुशी लोगों में अभी से देखने को मिल रही है।
इस साल कुछ राशियों को शनि की साढ़े साती और ढैय्या का प्रकोप भी झेलना पड़ा। इस साल कई राशियों को बड़ी - बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ा है।
नए साल की शुरूआत होने में कुछ ही दिन बचे हैं। हर कोई नए साल में अच्छे भविष्य के लिए उत्साहित है, लेकिन कुछ राशियों के लिए साल 2022 कुछ खास नहीं रहा। राहु-केतु की वजह ये साल इन राशियों के लिए बड़ा मुश्किल भरा रहा है।
2022 में बॉलीवुड में कई स्टार किड्स ने डेब्यू किया, तो कई एक्टर और एक्ट्रेस ने इंडस्ट्री के सुपर हिट फिल्में दी। बॉलीवुड इंडस्ट्री इस साल काफी चर्चा में रही है।
Year Ender 2022: साल 2022 में भारत के टॉप 10 सॉन्ग्स। इस बार बॉलीवुड के साथ- साथ साउथ फिल्मों के गाने और भोजपुरी गाने भी शामिल हैं।
बॉलीवुड हो या टॉलीवुड इंडस्ट्री इस साल इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। वहीं दूसरी ओर साउथ मूवी के तो क्या कहने, इन टॉप 10 फिल्मों को लोगों ने बहुत पसंद किया है। हिंदी थिएट्रिकल फिल्मों की लिस्ट में शामिल है साउथ की 6 मूवी।
भोजपुरी इंडस्ट्री के गाने और फिल्में लोगों के दिलों पर राज कर रही है। भोजपुरी फिल्मों के स्टार और सेलिब्रिटी बॉलीवुड और टॉलीवुड में भी डेब्यू कर चुके हैं। भोजपुरी इंडस्ट्री इस साल काफी चर्चा में रहा है।
बीते सप्ताह BSE के सेंसेक्स की शीर्ष दस कंपनियों में से नौ का मार्केट कैप 72,648. 98 करोड़ रुपए बढ़ा। सबसे अधिक लाभ में रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) रही।
सेंसेक्स की शीर्ष 10 में से आठ कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में बीते सप्ताह 93,225. 53 करोड़ रुपए की जोरदार बढ़ोतरी हुई।
सेंसेक्स की शीर्ष दस कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) बीते सप्ताह कुल मिलाकर 35,984 करोड़ रुपए बढ़ा।
सेंसेक्स की शीर्ष 10 में से पांच कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) बीते सप्ताह 32,959. 50 करोड़ रुपए घट गया। सबसे अधिक नुकसान में RIL रही।
अपने शेयर मूल्य में जोरदार तेजी से मुकेश अंबानी की RIL मार्केट कैप के लिहाज से TCS के करीब पहुंच रही है। RIL के मार्केट कैप में 28,000 करोड़ का इजाफा हुआ।
सेंसेक्स की शीर्ष दस में से चार कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) बीते सप्ताह 35,876. 31 करोड़ रुपए बढ़ गया। सबसे अधिक लाभ में रिलायंस इंडस्ट्रीज रही।
देश की दस शीर्ष कंपनियों में से आठ के बाजार पूंजीकरण में पिछले सप्ताह 66,707. 68 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। इनमें RIL सबसे अधिक फायदे में रही।
देश की सर्वाधिक 10 मूल्यवान कंपनियों में से 7 के मार्केट कैप में संयुक्त रूप से 48,518. 62 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ। इसमें सर्वाधिक लाभ में एचडीएफसी बैंक रहा।
देश की 10 सर्वाधिक मूल्यवान कंपनियों में से 5 के मार्केट कैप में पिछले सप्ताह 39,593. 68 करोड़ रुपए की कमी आई। इससे सबसे अधिक RIL प्रभावित हुई।
फोर्ब्स इंडिया ने सेलिब्रिटी-100 की लिस्ट जारी कर दी है। सलमान खान को साल 2016 के लिए नंबर वन सेलिब्रिटी चुना गया है। लिस्ट में दूसरे पायदान पर शाहरुख है।
इंडिया टीवी पैसा की टीम आज अपने रीडर्स के लिए ऐसी ही 5 महंगी कारें लेकर आई है, जो कीमत के मामले में भारतीय सड़कों की सरताज हैं।
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कुछ लोगों के लिए यह साल काफी शुभ फलदायी साबित हुआ है। साल खत्म होने के पहले, नए साल के आने की खुशी लोगों में अभी से देखने को मिल रही है। इस साल कुछ राशियों को शनि की साढ़े साती और ढैय्या का प्रकोप भी झेलना पड़ा। इस साल कई राशियों को बड़ी - बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ा है। नए साल की शुरूआत होने में कुछ ही दिन बचे हैं। हर कोई नए साल में अच्छे भविष्य के लिए उत्साहित है, लेकिन कुछ राशियों के लिए साल दो हज़ार बाईस कुछ खास नहीं रहा। राहु-केतु की वजह ये साल इन राशियों के लिए बड़ा मुश्किल भरा रहा है। दो हज़ार बाईस में बॉलीवुड में कई स्टार किड्स ने डेब्यू किया, तो कई एक्टर और एक्ट्रेस ने इंडस्ट्री के सुपर हिट फिल्में दी। बॉलीवुड इंडस्ट्री इस साल काफी चर्चा में रही है। Year Ender दो हज़ार बाईस: साल दो हज़ार बाईस में भारत के टॉप दस सॉन्ग्स। इस बार बॉलीवुड के साथ- साथ साउथ फिल्मों के गाने और भोजपुरी गाने भी शामिल हैं। बॉलीवुड हो या टॉलीवुड इंडस्ट्री इस साल इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। वहीं दूसरी ओर साउथ मूवी के तो क्या कहने, इन टॉप दस फिल्मों को लोगों ने बहुत पसंद किया है। हिंदी थिएट्रिकल फिल्मों की लिस्ट में शामिल है साउथ की छः मूवी। भोजपुरी इंडस्ट्री के गाने और फिल्में लोगों के दिलों पर राज कर रही है। भोजपुरी फिल्मों के स्टार और सेलिब्रिटी बॉलीवुड और टॉलीवुड में भी डेब्यू कर चुके हैं। भोजपुरी इंडस्ट्री इस साल काफी चर्चा में रहा है। बीते सप्ताह BSE के सेंसेक्स की शीर्ष दस कंपनियों में से नौ का मार्केट कैप बहत्तर,छः सौ अड़तालीस. अट्ठानवे करोड़ रुपए बढ़ा। सबसे अधिक लाभ में रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। सेंसेक्स की शीर्ष दस में से आठ कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में बीते सप्ताह तिरानवे,दो सौ पच्चीस. तिरेपन करोड़ रुपए की जोरदार बढ़ोतरी हुई। सेंसेक्स की शीर्ष दस कंपनियों का बाजार पूंजीकरण बीते सप्ताह कुल मिलाकर पैंतीस,नौ सौ चौरासी करोड़ रुपए बढ़ा। सेंसेक्स की शीर्ष दस में से पांच कंपनियों का बाजार पूंजीकरण बीते सप्ताह बत्तीस,नौ सौ उनसठ. पचास करोड़ रुपए घट गया। सबसे अधिक नुकसान में RIL रही। अपने शेयर मूल्य में जोरदार तेजी से मुकेश अंबानी की RIL मार्केट कैप के लिहाज से TCS के करीब पहुंच रही है। RIL के मार्केट कैप में अट्ठाईस,शून्य करोड़ का इजाफा हुआ। सेंसेक्स की शीर्ष दस में से चार कंपनियों का बाजार पूंजीकरण बीते सप्ताह पैंतीस,आठ सौ छिहत्तर. इकतीस करोड़ रुपए बढ़ गया। सबसे अधिक लाभ में रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। देश की दस शीर्ष कंपनियों में से आठ के बाजार पूंजीकरण में पिछले सप्ताह छयासठ,सात सौ सात. अड़सठ करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। इनमें RIL सबसे अधिक फायदे में रही। देश की सर्वाधिक दस मूल्यवान कंपनियों में से सात के मार्केट कैप में संयुक्त रूप से अड़तालीस,पाँच सौ अट्ठारह. बासठ करोड़ रुपए का इजाफा हुआ। इसमें सर्वाधिक लाभ में एचडीएफसी बैंक रहा। देश की दस सर्वाधिक मूल्यवान कंपनियों में से पाँच के मार्केट कैप में पिछले सप्ताह उनतालीस,पाँच सौ तिरानवे. अड़सठ करोड़ रुपए की कमी आई। इससे सबसे अधिक RIL प्रभावित हुई। फोर्ब्स इंडिया ने सेलिब्रिटी-एक सौ की लिस्ट जारी कर दी है। सलमान खान को साल दो हज़ार सोलह के लिए नंबर वन सेलिब्रिटी चुना गया है। लिस्ट में दूसरे पायदान पर शाहरुख है। इंडिया टीवी पैसा की टीम आज अपने रीडर्स के लिए ऐसी ही पाँच महंगी कारें लेकर आई है, जो कीमत के मामले में भारतीय सड़कों की सरताज हैं।
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पूर्ण शराबबंदी वाले बिहार में शराब पहुंचाने के लिए तस्कर नए-नए तरीके अपना रहे हैं. ताजा मामला सारण का है, जहां विदेशी शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई है. सारण जिले की मद्य निषेध और उत्पाद विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए छोटी ट्रक से विदेशी शराब को बरामद किया है. पकड़ी गई शराब की कीमत करीब साढ़े छह लाख रुपए है.
दरअसल, बुधवार को सारण जिले की मद्य निषेध और उत्पाद विभाग की टीम को शराब तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी. इसके आधार पर यूपी-बिहार की सीमा से लगने वाली नदी के किनारे टीम लगाई गई. इस दौरान तस्कर यूपी से नाव पर लादकर शराब की खेप नदी के रास्ते लाया गया. फिर बिहार में पहुंचकर मिनी पिकअप पर लादने लगे.
घात लगाए मद्य निषेध और उत्पाद विभाग की टीम ने पिकअप से भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की. साथ ही एक तस्कर को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ में उसने बताया कि विदेशी शराब की खेप को सारण जिले में अलग-अलग जगहों पर सप्लाई करना था.
मामले में सारण के उत्पाद अधीक्षक रजनीश ने बताया, "बुधवार को गुप्त सूचना मिली थी कि यूपी से नाव में बिहार शराब लाया जा रहा है. इसके बाद हमारी टीम ने छापेमारी करके मिनी पिकअप से 62 कार्टून विदेशी शराब बरामद की. साथ ही एक शराब तस्कर को गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल, गिरफ्तार तस्कर से पूछताछ की जा रही है. "
उत्पाद अधीक्षक रजनीश ने आगे बताया, "बिहार-यूपी की सीमा पर स्थित मद्य निषेध चेकपोस्ट पर हैंड हेल्ड स्कैनर से सघन जांच की जाती है. मकसद है यूपी की तरफ से आने वाले वाहनों में लाई जाने वाली शराब के बारे में पता करना. इस वजह से शराब तस्करों ने शराब की तस्करी के लिए वैकल्पिक मार्ग चुना है. अब वे नदी के रास्ते शराब ला रहे हैं. "
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पूर्ण शराबबंदी वाले बिहार में शराब पहुंचाने के लिए तस्कर नए-नए तरीके अपना रहे हैं. ताजा मामला सारण का है, जहां विदेशी शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई है. सारण जिले की मद्य निषेध और उत्पाद विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए छोटी ट्रक से विदेशी शराब को बरामद किया है. पकड़ी गई शराब की कीमत करीब साढ़े छह लाख रुपए है. दरअसल, बुधवार को सारण जिले की मद्य निषेध और उत्पाद विभाग की टीम को शराब तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी. इसके आधार पर यूपी-बिहार की सीमा से लगने वाली नदी के किनारे टीम लगाई गई. इस दौरान तस्कर यूपी से नाव पर लादकर शराब की खेप नदी के रास्ते लाया गया. फिर बिहार में पहुंचकर मिनी पिकअप पर लादने लगे. घात लगाए मद्य निषेध और उत्पाद विभाग की टीम ने पिकअप से भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की. साथ ही एक तस्कर को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ में उसने बताया कि विदेशी शराब की खेप को सारण जिले में अलग-अलग जगहों पर सप्लाई करना था. मामले में सारण के उत्पाद अधीक्षक रजनीश ने बताया, "बुधवार को गुप्त सूचना मिली थी कि यूपी से नाव में बिहार शराब लाया जा रहा है. इसके बाद हमारी टीम ने छापेमारी करके मिनी पिकअप से बासठ कार्टून विदेशी शराब बरामद की. साथ ही एक शराब तस्कर को गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल, गिरफ्तार तस्कर से पूछताछ की जा रही है. " उत्पाद अधीक्षक रजनीश ने आगे बताया, "बिहार-यूपी की सीमा पर स्थित मद्य निषेध चेकपोस्ट पर हैंड हेल्ड स्कैनर से सघन जांच की जाती है. मकसद है यूपी की तरफ से आने वाले वाहनों में लाई जाने वाली शराब के बारे में पता करना. इस वजह से शराब तस्करों ने शराब की तस्करी के लिए वैकल्पिक मार्ग चुना है. अब वे नदी के रास्ते शराब ला रहे हैं. "
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Who is Mohammed Shareeq: एएनआई उपरोक्त मामले को संज्ञान में लेने के बाद जांच का सिलसिला शुरू कर चुकी है और अब तक की जांच में यह प्रकाश में आया है कि मोहम्मद शारिक आईएसएसआई के संपर्क में आया था। उसने बाकायदा अपने नापाक इरादों को अंजाम देने के लिए विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
Rajiv Gandhi Assassination: गत दिनों सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी के हत्यारों को उनके अच्छे रवैयों को आधार मानकर रिहा करने का फैसला सुनाया था। हालांकि, इससे पूर्व मई माह में पेरारिवलन को भी रिहा किया गया था। उसकी रिहाई पर कांग्रेस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
Uttar Pradesh: बता दें कि साढ़े चार दशक में पहली मर्तबा ऐसा हो रहा है कि जब रामपुर सीट से आजम खान या फिर उनके परिवार का कोई सदस्य इस सीट से चुनाव नहीं लड़ने जा रहा है। इस बार रामपुर सीट से आजम खान के करीबी माने जाने वाले आसिम रजा को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया है।
दक्षिण जकार्ता में एक कर्मचारी विडी प्रिमाधनिया ने कहा, 'भूकंप के झटके इतने भयावह थे कि मैंने अपने साथियों से नौवीं मंजिल पर रहने के बावजूद भी आपातकालीन दफ्तर में जाने का फैसला किया, ताकि विषम परिस्थिति से निपटा जा सकें।
Ashok Gehlot Satement on Shardha Murder Case: गहलोत के बयान के बाद लोगों ने कांग्रेस को आगामी चुनाव में वोट नहीं देने की मन बना लिया है। बहरहाल, आगे हम आपको लोगों के आक्रोश की झलक भी दिखाएंगे, लेकिन उससे पहले आइए जरा आपको सुनाते हैं कि आखिर श्रद्धा मर्डर केस पर सीएम गहलोत ने क्या कुछ कहा है?
Gujarat Election 2022: पीएम मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि, कांग्रेस वाले कहते है कि मोदी को उसकी औकात दिखा देंगे। ये अंहकार है कि मोदी को उसी औकात दिखा देंगे। अरे माई-बाप, तुम तो राज-परिवार से हो। मैं तो एक सामान्य परिवार की संतान हूं। मेरी कोई औकत नहीं है। तुम्हें मेरी औकात दिखाने की कोई जरूरत नहीं है। अरे मैं तो सेवक हूं. . मैं तो सेवादार हूं। सेवक और सेवादार की कोई औकात थोड़ी होती है।
पता ये चला है कि नेपाल की सीमा से लगे सिद्धार्थनगर में 500, बलरामपुर में 400, लखीमपुर खीरी में 200, महराजगंज में 60 के अलावा बहराइच और श्रावस्ती में 400 से ज्यादा मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं। बिना मान्यता वाले मदरसों की बात करें, तो यूपी के 75 जिलों में 8496 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं।
Corruption In Ticket Distribution: बिंदु से एमसीडी चुनाव के टिकट के लिए 80 लाख रुपए मांगे जाने का आरोप बीजेपी ने लगाया है। इसमें आप के बड़े नेता आरआर पठानिया की आवाज बताई जा रही है। न्यूजरूम पोस्ट इस वीडियो के ऑरिजिनल होने की पुष्टि नहीं करता। बिंदु के बारे में बीजेपी का कहना है कि पुनीत गोयल ने उनसे एमसीडी चुनाव का टिकट देने के लिए 80 लाख रुपए तीन किस्तों में मांगे।
दिल्ली में तो आफताब अंसारी ने अपनी लिव इन पार्टनर श्रद्धा वालकर की हत्या कर लाश को 35 टुकड़ों में काटा था। वहीं, इस साल फरवरी में रीवा पुलिस को दुधमुनिया जंगल में एक लाश के 80 टुकड़े मिले थे। साफ तौर पर मामला हत्या का था। पुलिस ने लाश की पहचान विकास गिरि के तौर पर की थी।
मेंगलुरु ब्लास्ट मामले में अब तक की जांच से पता चला है कि ऑटो रिक्शा में कुकर बम रखा गया। बैटरी, तार और सर्किट बरामद हुए हैं। चटाई का भी इस्तेमाल किया गया। बता दें कि पहले ही पता चल चुका है कि धमाके का आरोपी शारिक किसी हिंदू के नाम से फर्जी आधार कार्ड के जरिए किराए के मकान में रह रहा था।
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Who is Mohammed Shareeq: एएनआई उपरोक्त मामले को संज्ञान में लेने के बाद जांच का सिलसिला शुरू कर चुकी है और अब तक की जांच में यह प्रकाश में आया है कि मोहम्मद शारिक आईएसएसआई के संपर्क में आया था। उसने बाकायदा अपने नापाक इरादों को अंजाम देने के लिए विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया था। Rajiv Gandhi Assassination: गत दिनों सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी के हत्यारों को उनके अच्छे रवैयों को आधार मानकर रिहा करने का फैसला सुनाया था। हालांकि, इससे पूर्व मई माह में पेरारिवलन को भी रिहा किया गया था। उसकी रिहाई पर कांग्रेस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। Uttar Pradesh: बता दें कि साढ़े चार दशक में पहली मर्तबा ऐसा हो रहा है कि जब रामपुर सीट से आजम खान या फिर उनके परिवार का कोई सदस्य इस सीट से चुनाव नहीं लड़ने जा रहा है। इस बार रामपुर सीट से आजम खान के करीबी माने जाने वाले आसिम रजा को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया है। दक्षिण जकार्ता में एक कर्मचारी विडी प्रिमाधनिया ने कहा, 'भूकंप के झटके इतने भयावह थे कि मैंने अपने साथियों से नौवीं मंजिल पर रहने के बावजूद भी आपातकालीन दफ्तर में जाने का फैसला किया, ताकि विषम परिस्थिति से निपटा जा सकें। Ashok Gehlot Satement on Shardha Murder Case: गहलोत के बयान के बाद लोगों ने कांग्रेस को आगामी चुनाव में वोट नहीं देने की मन बना लिया है। बहरहाल, आगे हम आपको लोगों के आक्रोश की झलक भी दिखाएंगे, लेकिन उससे पहले आइए जरा आपको सुनाते हैं कि आखिर श्रद्धा मर्डर केस पर सीएम गहलोत ने क्या कुछ कहा है? Gujarat Election दो हज़ार बाईस: पीएम मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि, कांग्रेस वाले कहते है कि मोदी को उसकी औकात दिखा देंगे। ये अंहकार है कि मोदी को उसी औकात दिखा देंगे। अरे माई-बाप, तुम तो राज-परिवार से हो। मैं तो एक सामान्य परिवार की संतान हूं। मेरी कोई औकत नहीं है। तुम्हें मेरी औकात दिखाने की कोई जरूरत नहीं है। अरे मैं तो सेवक हूं. . मैं तो सेवादार हूं। सेवक और सेवादार की कोई औकात थोड़ी होती है। पता ये चला है कि नेपाल की सीमा से लगे सिद्धार्थनगर में पाँच सौ, बलरामपुर में चार सौ, लखीमपुर खीरी में दो सौ, महराजगंज में साठ के अलावा बहराइच और श्रावस्ती में चार सौ से ज्यादा मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं। बिना मान्यता वाले मदरसों की बात करें, तो यूपी के पचहत्तर जिलों में आठ हज़ार चार सौ छियानवे मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं। Corruption In Ticket Distribution: बिंदु से एमसीडी चुनाव के टिकट के लिए अस्सी लाख रुपए मांगे जाने का आरोप बीजेपी ने लगाया है। इसमें आप के बड़े नेता आरआर पठानिया की आवाज बताई जा रही है। न्यूजरूम पोस्ट इस वीडियो के ऑरिजिनल होने की पुष्टि नहीं करता। बिंदु के बारे में बीजेपी का कहना है कि पुनीत गोयल ने उनसे एमसीडी चुनाव का टिकट देने के लिए अस्सी लाख रुपए तीन किस्तों में मांगे। दिल्ली में तो आफताब अंसारी ने अपनी लिव इन पार्टनर श्रद्धा वालकर की हत्या कर लाश को पैंतीस टुकड़ों में काटा था। वहीं, इस साल फरवरी में रीवा पुलिस को दुधमुनिया जंगल में एक लाश के अस्सी टुकड़े मिले थे। साफ तौर पर मामला हत्या का था। पुलिस ने लाश की पहचान विकास गिरि के तौर पर की थी। मेंगलुरु ब्लास्ट मामले में अब तक की जांच से पता चला है कि ऑटो रिक्शा में कुकर बम रखा गया। बैटरी, तार और सर्किट बरामद हुए हैं। चटाई का भी इस्तेमाल किया गया। बता दें कि पहले ही पता चल चुका है कि धमाके का आरोपी शारिक किसी हिंदू के नाम से फर्जी आधार कार्ड के जरिए किराए के मकान में रह रहा था।
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अभिलाष मिश्रा/इंदौर : इंदौर में एक ऐसा भी मंदिर है जो बेहद प्राचीन है और जिसको लेकर लोगों की तमाम प्रकार की मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. हम बात कर रहे हैं इंदौर शहर से 15 किलोमीटर की दूरी में स्थित गुटकेश्वर महादेव मंदिर की जो कि लोगों की आस्था का केंद्र है. मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पर भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ ने भगवान शिव की तपस्या की थी.
गरुड़ की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां पर शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे. तब से ही यह मंदिर यहां पर मौजूद है. इसीलिए इस मंदिर को गरुण तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है. बता दे कि इस मंदिर में एक बेहद बड़ा कुंड है जो हमेशा जल से भरा रहता है और कुंड के ऊपर ही मंदिर में शिवलिंग विराजमान है. मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग बताते हैं कि मंदिर के द्वार पर जो कुंड है जो कि जल से भरा रहता है. वहीं पर एक द्वार है जिसके नीचे अति प्राचीन स्वयं प्रकट शिवलिंग विराजमान हैं.
पुराने समय में यहां पर दर्शन के लिए केवल देवी अहिल्याबाई जाती थीं. अब तो काफी ऊपर तक कुंड में पानी भरा रहता है. इसलिए उस रास्ते उस दरवाजे तक कोई जाता नहीं है. मंदिर के गर्भ गृह में विराजित शिवलिंग के ठीक ऊपर गोमुख बना हुआ है. जब कुंड में जल का स्तर बढ़ जाता है तो जल गोमुख से अपने आप भगवान शिव का जलाभिषेक होने लगता है. बता दें कि मंदिर काफी पुराना है जो कि पत्थरों से बना हुआ है. मंदिर के चारों तरफ मौजूद कुंड में कछुए ,बिच्छ, सर्प और भी तमाम प्रकार के जीव रहते हैं.
मंदिर के जीर्णोद्धार के निर्माण का कार्य देवी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था. जो कि मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचती ही रहती थीं. बचपन से मंदिर में सेवा अर्चना करने वाले दीपक जाट ने बताया कि मंदिर अति प्राचीन है जहां गरुड़ जी ने तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था. तभी से यहां पर यह मंदिर मौजूद है. मंदिर में कुंड है जहां हमेशा जल भरा रहता है और कुंड के रास्ते में ही अति प्राचीन शिवलिंग भी विराजमान हैं.
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अभिलाष मिश्रा/इंदौर : इंदौर में एक ऐसा भी मंदिर है जो बेहद प्राचीन है और जिसको लेकर लोगों की तमाम प्रकार की मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. हम बात कर रहे हैं इंदौर शहर से पंद्रह किलोग्राममीटर की दूरी में स्थित गुटकेश्वर महादेव मंदिर की जो कि लोगों की आस्था का केंद्र है. मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पर भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ ने भगवान शिव की तपस्या की थी. गरुड़ की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां पर शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे. तब से ही यह मंदिर यहां पर मौजूद है. इसीलिए इस मंदिर को गरुण तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है. बता दे कि इस मंदिर में एक बेहद बड़ा कुंड है जो हमेशा जल से भरा रहता है और कुंड के ऊपर ही मंदिर में शिवलिंग विराजमान है. मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग बताते हैं कि मंदिर के द्वार पर जो कुंड है जो कि जल से भरा रहता है. वहीं पर एक द्वार है जिसके नीचे अति प्राचीन स्वयं प्रकट शिवलिंग विराजमान हैं. पुराने समय में यहां पर दर्शन के लिए केवल देवी अहिल्याबाई जाती थीं. अब तो काफी ऊपर तक कुंड में पानी भरा रहता है. इसलिए उस रास्ते उस दरवाजे तक कोई जाता नहीं है. मंदिर के गर्भ गृह में विराजित शिवलिंग के ठीक ऊपर गोमुख बना हुआ है. जब कुंड में जल का स्तर बढ़ जाता है तो जल गोमुख से अपने आप भगवान शिव का जलाभिषेक होने लगता है. बता दें कि मंदिर काफी पुराना है जो कि पत्थरों से बना हुआ है. मंदिर के चारों तरफ मौजूद कुंड में कछुए ,बिच्छ, सर्प और भी तमाम प्रकार के जीव रहते हैं. मंदिर के जीर्णोद्धार के निर्माण का कार्य देवी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था. जो कि मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचती ही रहती थीं. बचपन से मंदिर में सेवा अर्चना करने वाले दीपक जाट ने बताया कि मंदिर अति प्राचीन है जहां गरुड़ जी ने तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था. तभी से यहां पर यह मंदिर मौजूद है. मंदिर में कुंड है जहां हमेशा जल भरा रहता है और कुंड के रास्ते में ही अति प्राचीन शिवलिंग भी विराजमान हैं. .
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Weekly Rashifal, (Weekly Horoscope in Hindi), साप्ताहिक राशिफल 22-28 May 2023: आने वाला सप्ताह कुछ राशियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। इस हफ्ते वृष, मकर, सिंह व मिथुन राशि के जातक खूब तरक्की करेंगे। जानिए वृष, कर्क, तुला, मीन, धनु, सिंह और वृश्चिक समेत सभी राशियों की स्थिति।
Weekly Horoscope: 22 से 28 मई का साप्ताहिक राशिफल।
साप्ताहिक राशिफल (Weekly Horoscope )
1. मेष- 21 से 23 मई के मध्य व्यवसाय में प्रगति के साथ आय प्राप्ति के नए स्रोत भी बनेंगे। कन्या व मकर राशि का सहयोग ले सकते हैं। 22 मई के बाद स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। छात्र सफल रहेंगे। लाल व पीला रंग शुभ है। हनुमान जी की पूजा करते रहें।
2. वृष- व्यवसाय में 22 के बाद लाभ होगा। इस सप्ताह सूर्य बुध व शुक्र का गोचर नौकरी चेंज की पूरी योजना बना देगा। नीला रंग शुभ है। प्रतिदिन श्री सूक्त पढ़ते रहें। शुक्रवार को चावल का दान करें।
3. मिथुन-आपके मन में कई दिनों से चली आ रही योजनाएं इस सप्ताह में दूसरे दिन से ही अपना पूर्ण रूप लेंगी। मित्रों संग व्यवसाय की नई योजना बनेगी। हरा रंग शुभ है। श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। अन्न दान करते रहें।
4. कर्क- द्वादश चन्द्रमा सोमवार को धार्मिक क्रिया कलापों में व्यस्त करेगा। बुधवार के बाद कर्क का चन्द्रमा शिक्षा तथा प्रतियोगिता में सफलता की प्राप्ति कराएगा। व्यवसाय में सफल रहेंगे। लाल रंग शुभ है। आय प्राप्ति के स्रोत बढ़ेंगे। शिव उपासना करें।
5. सिंह- सप्ताह के आरंभिक दो दिन स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा। वृश्चिक राशि के लोग लाभान्वित कर सकते हैं। पीला व सफेद रंग शुभ है। इस सप्ताह किसी विशेष सरकारी कार्य को पूर्ण करने में सफल रहेंगे। मंगलवार को गेहूं का दान करें।
6. कन्या- सोमवार को दशम चन्द्रमा स्वास्थ्य बेहतर करेगा। तुला व मकर राशि की सहायता लें। बुधवार के बाद नवम चन्द्रमा व मंगल के गोचर अनुरूप धन का आगमन होगा। हरा रंग शुभ है। दुर्गासप्तशती का पाठ करें। गुरुवार के बाद चन्द्रमा व बुध गोचर व्यवसाय में आपको लाभ देगा।
7. तुला-इस सप्ताह के प्रथम दो दिन नौकरी को लेकर थोड़ा तनाव में रहेंगे। वृष व तुला राशि के जातक लाभ प्रदान करेंगे। श्री विष्णु जी की पूजा करते रहें। बुधवार के बाद धन का आगमन होगा। नीला रंग शुभ है। योग व ध्यान का सहारा लें। शुक्र ससुराल से लाभ दिलाएगा।
8. वृश्चिक- इस सप्ताह कई रुके कार्य पूर्ण होंगे। व्यवसाय में सफलता की प्राप्ति होगी। मिथुन का चन्द्रमा सोमवार के बाद धन का आगमन कराएगा। लाल रंग शुभ है। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें। मंगलवार को मसूर की दाल व गुरुवार को चने की दाल का दान करें।
9. धनु- गुरु मेष में है। मंगलवार के बाद कर्क का चन्द्रमा व अष्टम शनि प्रभाव के कारण स्वास्थ्य कुछ बेहतर होना प्रारम्भ हो जाएगा। धन आगमन से खुश रहेंगे। कर्क व सिंह राशि से लाभ है। नारंगी रंग शुभ है। पिता का आशीर्वाद लेते रहें।
10. मकर-शनि इस राशि के स्वामी होकर द्वितीय गोचर रत हैं। गुरु चतुर्थ में है। ये ग्रह सप्ताह के अंतिम तीन दिनों में कोई नया व्यवसाय प्रारम्भ करवा सकते हैं। वहीं नौकरी करने वाले भी उन्नति करेंगे। नीला रंग शुभ है। हनुमान जी की पूजा करते रहें। तिल का दान करें।
11. कुंभ- कुंभ का शनि व मिथुन का चन्द्रमा सफलता दिलवाएगा। मंगलवार के बाद कोई नया कार्य प्रारंभ होगा। हनुमान जी की पूजा करें। नीला रंग शुभ है। मकर व कन्या राशि से लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य सुख बेहतर रहेगा।
12. मीन- सप्ताह के आरंभ में चन्द्रमा इसी राशि से चतुर्थ में है जो कि एक सफल सप्ताह के प्रारंभ का प्रतीक है। बुधवार के बाद धन आगमन होगा। छात्र लाभान्वित होंगे। सप्ताह के अंतिम दो दिनों में सिंह का चन्द्रमा स्वास्थ्य के प्रति सचेत करता है। लाल रंग शुभ है। प्रतिदिन श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।
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Weekly Rashifal, , साप्ताहिक राशिफल बाईस-अट्ठाईस मई दो हज़ार तेईस: आने वाला सप्ताह कुछ राशियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। इस हफ्ते वृष, मकर, सिंह व मिथुन राशि के जातक खूब तरक्की करेंगे। जानिए वृष, कर्क, तुला, मीन, धनु, सिंह और वृश्चिक समेत सभी राशियों की स्थिति। Weekly Horoscope: बाईस से अट्ठाईस मई का साप्ताहिक राशिफल। साप्ताहिक राशिफल एक. मेष- इक्कीस से तेईस मई के मध्य व्यवसाय में प्रगति के साथ आय प्राप्ति के नए स्रोत भी बनेंगे। कन्या व मकर राशि का सहयोग ले सकते हैं। बाईस मई के बाद स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। छात्र सफल रहेंगे। लाल व पीला रंग शुभ है। हनुमान जी की पूजा करते रहें। दो. वृष- व्यवसाय में बाईस के बाद लाभ होगा। इस सप्ताह सूर्य बुध व शुक्र का गोचर नौकरी चेंज की पूरी योजना बना देगा। नीला रंग शुभ है। प्रतिदिन श्री सूक्त पढ़ते रहें। शुक्रवार को चावल का दान करें। तीन. मिथुन-आपके मन में कई दिनों से चली आ रही योजनाएं इस सप्ताह में दूसरे दिन से ही अपना पूर्ण रूप लेंगी। मित्रों संग व्यवसाय की नई योजना बनेगी। हरा रंग शुभ है। श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। अन्न दान करते रहें। चार. कर्क- द्वादश चन्द्रमा सोमवार को धार्मिक क्रिया कलापों में व्यस्त करेगा। बुधवार के बाद कर्क का चन्द्रमा शिक्षा तथा प्रतियोगिता में सफलता की प्राप्ति कराएगा। व्यवसाय में सफल रहेंगे। लाल रंग शुभ है। आय प्राप्ति के स्रोत बढ़ेंगे। शिव उपासना करें। पाँच. सिंह- सप्ताह के आरंभिक दो दिन स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा। वृश्चिक राशि के लोग लाभान्वित कर सकते हैं। पीला व सफेद रंग शुभ है। इस सप्ताह किसी विशेष सरकारी कार्य को पूर्ण करने में सफल रहेंगे। मंगलवार को गेहूं का दान करें। छः. कन्या- सोमवार को दशम चन्द्रमा स्वास्थ्य बेहतर करेगा। तुला व मकर राशि की सहायता लें। बुधवार के बाद नवम चन्द्रमा व मंगल के गोचर अनुरूप धन का आगमन होगा। हरा रंग शुभ है। दुर्गासप्तशती का पाठ करें। गुरुवार के बाद चन्द्रमा व बुध गोचर व्यवसाय में आपको लाभ देगा। सात. तुला-इस सप्ताह के प्रथम दो दिन नौकरी को लेकर थोड़ा तनाव में रहेंगे। वृष व तुला राशि के जातक लाभ प्रदान करेंगे। श्री विष्णु जी की पूजा करते रहें। बुधवार के बाद धन का आगमन होगा। नीला रंग शुभ है। योग व ध्यान का सहारा लें। शुक्र ससुराल से लाभ दिलाएगा। आठ. वृश्चिक- इस सप्ताह कई रुके कार्य पूर्ण होंगे। व्यवसाय में सफलता की प्राप्ति होगी। मिथुन का चन्द्रमा सोमवार के बाद धन का आगमन कराएगा। लाल रंग शुभ है। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें। मंगलवार को मसूर की दाल व गुरुवार को चने की दाल का दान करें। नौ. धनु- गुरु मेष में है। मंगलवार के बाद कर्क का चन्द्रमा व अष्टम शनि प्रभाव के कारण स्वास्थ्य कुछ बेहतर होना प्रारम्भ हो जाएगा। धन आगमन से खुश रहेंगे। कर्क व सिंह राशि से लाभ है। नारंगी रंग शुभ है। पिता का आशीर्वाद लेते रहें। दस. मकर-शनि इस राशि के स्वामी होकर द्वितीय गोचर रत हैं। गुरु चतुर्थ में है। ये ग्रह सप्ताह के अंतिम तीन दिनों में कोई नया व्यवसाय प्रारम्भ करवा सकते हैं। वहीं नौकरी करने वाले भी उन्नति करेंगे। नीला रंग शुभ है। हनुमान जी की पूजा करते रहें। तिल का दान करें। ग्यारह. कुंभ- कुंभ का शनि व मिथुन का चन्द्रमा सफलता दिलवाएगा। मंगलवार के बाद कोई नया कार्य प्रारंभ होगा। हनुमान जी की पूजा करें। नीला रंग शुभ है। मकर व कन्या राशि से लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य सुख बेहतर रहेगा। बारह. मीन- सप्ताह के आरंभ में चन्द्रमा इसी राशि से चतुर्थ में है जो कि एक सफल सप्ताह के प्रारंभ का प्रतीक है। बुधवार के बाद धन आगमन होगा। छात्र लाभान्वित होंगे। सप्ताह के अंतिम दो दिनों में सिंह का चन्द्रमा स्वास्थ्य के प्रति सचेत करता है। लाल रंग शुभ है। प्रतिदिन श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। ट्रेंडिंगः
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कुछ समय पूर्व ही बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने पंचायत और नगर निकाय से शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया को समाप्त करते हुए बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षकों की बहाली का निर्णय लिया था। आयोग के जरिये बहाल शिक्षकों को राज्य कर्मियों को दर्जा भी देगी। नई नियमावली के तहत 1. 70 लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति होनी है।
बिहार सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। इसके तहत अब दूसरे राज्यों के शिक्षक उम्मीदवारों के लिए बिहार में शिक्षक बनने का रास्ता खोल दिया गया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक (नियुक्ति, स्थानांतरण, अनुशासनिक कार्रवाई एवं सेवा शर्ता) (संशोधन) नियमावली 2023 को स्वीकृति दी गई। इसके माध्यम से पूर्व की स्वीकृत नियमावली में एक बदलाव किया गया है।
विद्यालय शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए बिहार के स्थायी निवासी होने की अर्हता जो पूर्व में अनिवार्य थी उसे समाप्त कर दिया गया है।
संशोधन के बाद किसी भी प्रदेश के शिक्षक अभ्यर्थी बिहार की इस परीक्षा में भाग ले सकेंगे। मंगलवार को हुई बैठक में कुल 25 प्रस्ताव स्वीकृत किए गए।
कुछ समय पूर्व ही सरकार ने पंचायत और नगर निकाय से शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया को समाप्त करते हुए बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षकों की बहाली का निर्णय लिया था।
आयोग के जरिये बहाल शिक्षकों को राज्य कर्मियों को दर्जा भी देगी। नई नियमावली के तहत 1. 70 लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति होनी है। लेकिन, इसके लिए बिहार के स्थायी निवासी की अर्हता तय की गई थी।
कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव डा. एस सिद्धार्थ ने बताया कि संशोधन के बाद अब इस परीक्षा में किसी भी प्रदेश के शिक्षक उम्मीदवार भाग ले सकेंगे और बिहार में शिक्षक बन सकेंगे।
- तकनीकी शिक्षा की डिग्री तथा प्राच्यभाषा विशेष से संबंधित डिग्री सामान्य विषय विद्यालय अध्यापक (कक्षा एक से पांच) पद पर नियुक्ति के लिए मान्य नहीं को विलोपित किया गया।
- कक्षा नौ से 10 तक की नियुक्ति हेतु गणित के लिए शैक्षणिक योग्यता स्नातक स्तर पर कंप्यूटर साइंस में बीसीए को सम्मिलित किया गया।
- कक्षा 11 व 12 के बायोलाजी विषय में नियुक्ति के लिए स्नातक के विषयों में किया गया संशोधन।
- सीटीईटी अभ्यर्थियों के लिए बीईटीईटी, 2017 के न्यूनतम अर्हतांक को कोटिवार किया गया प्रभावी।
- उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए भाग-1 विषय पत्र में वाणिज्य के स्थान पर बिजनेस स्टडीज दर्ज।
- 31 अगस्त तक सीटीईटी पेपर वन में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए योग्य माना।
- प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति के लिए बीएएड व बीएससीएड की चार वर्षीय उपाधि वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति की तिथि से दो साल के अंदर एनसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थान से छह माह का ब्रिज कोर्स करना होगा।
- कक्षा नौ व 10 के लिए विषय समूह विज्ञान के अंतर्गत जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान एवं रसायनशास्त्र के अलावा बायोटेक्नोलाजी व माइक्रोबायोलाजी को भी किया गया शामिल।
- कक्षा नौ व 10 के लिए विषय समूह सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत इतिहास विषय के समकक्ष प्राचीन इतिहास को माना गया।
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कुछ समय पूर्व ही बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने पंचायत और नगर निकाय से शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया को समाप्त करते हुए बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षकों की बहाली का निर्णय लिया था। आयोग के जरिये बहाल शिक्षकों को राज्य कर्मियों को दर्जा भी देगी। नई नियमावली के तहत एक. सत्तर लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति होनी है। बिहार सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। इसके तहत अब दूसरे राज्यों के शिक्षक उम्मीदवारों के लिए बिहार में शिक्षक बनने का रास्ता खोल दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक नियमावली दो हज़ार तेईस को स्वीकृति दी गई। इसके माध्यम से पूर्व की स्वीकृत नियमावली में एक बदलाव किया गया है। विद्यालय शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए बिहार के स्थायी निवासी होने की अर्हता जो पूर्व में अनिवार्य थी उसे समाप्त कर दिया गया है। संशोधन के बाद किसी भी प्रदेश के शिक्षक अभ्यर्थी बिहार की इस परीक्षा में भाग ले सकेंगे। मंगलवार को हुई बैठक में कुल पच्चीस प्रस्ताव स्वीकृत किए गए। कुछ समय पूर्व ही सरकार ने पंचायत और नगर निकाय से शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया को समाप्त करते हुए बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षकों की बहाली का निर्णय लिया था। आयोग के जरिये बहाल शिक्षकों को राज्य कर्मियों को दर्जा भी देगी। नई नियमावली के तहत एक. सत्तर लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति होनी है। लेकिन, इसके लिए बिहार के स्थायी निवासी की अर्हता तय की गई थी। कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव डा. एस सिद्धार्थ ने बताया कि संशोधन के बाद अब इस परीक्षा में किसी भी प्रदेश के शिक्षक उम्मीदवार भाग ले सकेंगे और बिहार में शिक्षक बन सकेंगे। - तकनीकी शिक्षा की डिग्री तथा प्राच्यभाषा विशेष से संबंधित डिग्री सामान्य विषय विद्यालय अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए मान्य नहीं को विलोपित किया गया। - कक्षा नौ से दस तक की नियुक्ति हेतु गणित के लिए शैक्षणिक योग्यता स्नातक स्तर पर कंप्यूटर साइंस में बीसीए को सम्मिलित किया गया। - कक्षा ग्यारह व बारह के बायोलाजी विषय में नियुक्ति के लिए स्नातक के विषयों में किया गया संशोधन। - सीटीईटी अभ्यर्थियों के लिए बीईटीईटी, दो हज़ार सत्रह के न्यूनतम अर्हतांक को कोटिवार किया गया प्रभावी। - उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए भाग-एक विषय पत्र में वाणिज्य के स्थान पर बिजनेस स्टडीज दर्ज। - इकतीस अगस्त तक सीटीईटी पेपर वन में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए योग्य माना। - प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति के लिए बीएएड व बीएससीएड की चार वर्षीय उपाधि वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति की तिथि से दो साल के अंदर एनसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थान से छह माह का ब्रिज कोर्स करना होगा। - कक्षा नौ व दस के लिए विषय समूह विज्ञान के अंतर्गत जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान एवं रसायनशास्त्र के अलावा बायोटेक्नोलाजी व माइक्रोबायोलाजी को भी किया गया शामिल। - कक्षा नौ व दस के लिए विषय समूह सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत इतिहास विषय के समकक्ष प्राचीन इतिहास को माना गया।
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महाराष्ट्र में लॉकडाउन 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है. पिछले तीन दिनों से प्रदेश में रोजाना 5 हजार से ज्यादा कोरोना मरीज सामने आने के बाद हालात गंभीर लगने लगे थे, जिसके चलते उद्धव सरकार ने पाबंदियां बढ़ाने का फैसला किया है. अलग गतिविधियों के लिए नई गाइडलाइन भी जारी हो गई है. देशतक में देखें क्या हैं वो गाइडलाइन.
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महाराष्ट्र में लॉकडाउन इकतीस जुलाई तक बढ़ा दिया गया है. पिछले तीन दिनों से प्रदेश में रोजाना पाँच हजार से ज्यादा कोरोना मरीज सामने आने के बाद हालात गंभीर लगने लगे थे, जिसके चलते उद्धव सरकार ने पाबंदियां बढ़ाने का फैसला किया है. अलग गतिविधियों के लिए नई गाइडलाइन भी जारी हो गई है. देशतक में देखें क्या हैं वो गाइडलाइन.
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मलाकी 1:1 किताब के मुसन्निफ़ को मलाकी नबी बतौर पहचानती है। इब्रानी में यह नाम एक लफ़्ज़ी मा'नी पैग़ाम्बर से आता है जो मलाकी की अदाकारी को ख़ुदावन्द का एक नबी होने बतौर इशारा करता है जो ख़ुदा के लोगों को ख़ुदा का पैग़म्बर सुनाता है। दुगनी समझ के मुताबिक़ मलाकी एक पैगम्बर है जो हमारे लिए इस किताब को ले आया, और उसका पैग़ाम यह है कि मुस्तक़बिल में ख़ुदा बड़े नबी एलियाह की तरह एक दूसरे पैग़म्बर को भेजेगा, ख़ुदावन्द का दिन लौटने से पहले।
इस किताब की तस्नीफ की तारीख तक़रीबन 430 - 400 क़ब्लमसीह के बीच है।
यह जिलावत्नी से पहले की किताब है मतलब यह कि इस को बाबुल की गिरफ़्तारी से लौटने के बाद लिखा गया।
यरूशलेम में रहने वाले यहूदियों के लिए एक ख़त है और एक आम ख़त बतौर ख़ुदा के लोगों के लिए जो हर जगह पाए जाते हैं।
लोगों को याद दिलाने के लिए कि ख़ुदा वह सब कुछ करेगा। जो वह अपने लोगों की मदद बतौर कर सकता है। और उन्हें याद दिलाने के लिए कि ख़ुदा उनको उनकी बुराइयों की बाबत ज़ामिन ठहराने के लिए पकड़े रहेगा जब वह मुन्सिफ़ की तरह आता है। लोगों को इस बात की तरफ़ तवज्जोह दिलाने के लिए कि वह अपने गुनाहों से तौबा करें ताकि मुआहिदे की बर्कतें पूरी की जाएं। यह मलाकी के ज़रिए ख़ुदा की तंबीह थी ताकि लोगों से कहा गया कि ख़ुदा की तरफ़ फिरो। मलाकी की किताब पुराने अहदनामे की आखरी किताब है उसी बतौर ख़ुदा के इंसाफ़ का एलान और उसकी बहाली का वायदा मसीहा के आने के ज़रिए से किया गया है जो बनी इस्राईल के कानों में बूंज रहा है।
रिवाज व दस्तूर की पाबन्दी की तंबीह की गई है।
1 ख़ुदावन्द की तरफ़ से मलाकी के ज़रिए' इस्राईल के लिए बार - ए - नबुव्वतः
6 रब्बुल - उल - अफ़वाज तुम को फ़रमाता हैः "ऐ मेरे नाम की तहक़ीर करने वाले काहिनों, बेटा अपने बाप की, और नौकर अपने आक़ा की ता'ज़ीम करता है। इसलिए अगर मैं बाप हूँ, तो मेरी 'इज़्ज़त कहाँ है? और अगर आक़ा हूँ, तो मेरा ख़ौफ़ कहाँ है? लेकिन तुम कहते हो, 'हमने किस बात में तेरे नाम की तहक़ीर की?' 7 तुम मेरे मज़बह पर नापाक रोटी पेश करते हो और कहते हो कि 'हमने किस बात में तेरी तौहीन की?' इसी में जो कहते हो, ख़ुदावन्द की मेज़ हक़ीर है। 8 जब तुम अंधे की क़ुर्बानी करते हो, तो कुछ बुराई नहीं? और जब लंगड़े और बीमार को पेश करते हो, तो कुछ नुक़सान नहीं? अब यही अपने हाकिम की नज़्र कर, क्या वह तुझ से ख़ुश होगा और तू उसका मंज़ूर - ए - नज़र होगा? रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है। 9 अब ज़रा ख़ुदा को मनाओ, ताकि वह हम पर रहम फ़रमाए। तुम्हारे ही हाथों ने ये पेश किया है; क्या तुम उसके मंज़ूर - ए - नज़र होगे? रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है। 10 काश कि तुम में कोई ऐसा होता जो दरवाज़े बंद करता, और तुम मेरे मज़बह पर 'अबस आग न जलाते, रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है, मैं तुम से ख़ुश नहीं हूँ और तुम्हारे हाथ का हदिया हरगिज़ क़ुबूल न करूँगा। 11 क्यूँकि आफ़ताब के तुलू' से ग़ुरुब तक क़ौमों में मेरे नाम की तम्जीद होगी, और हर जगह मेरे नाम पर ख़ुशबू जलाएँगे और पाक हदिये पेश करेंगे; क्यूँकि क़ौमों में मेरे नाम की तम्जीद होगी, रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है। 12 लेकिन तुम इस बात में उसकी तौहीन करते हो, कि तुम कहते हो, 'ख़ुदावन्द की मेज़ पर क्या है, उस पर के हदिये बेहक़ीक़त हैं। 13 और तुम ने कहा, 'ये कैसी ज़हमत है,' और उस पर नाक चढ़ाई रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है। फिर तुम लूट का माल और लंगड़े और बीमार ज़बीहे लाए, और इसी तरह के हदिये पेश करे! क्या मैं इनको तुम्हारे हाथ से क़ुबूल करूँ? ख़ुदावन्द फ़रमाता है। 14 ला'नत उस दग़ाबाज़ पर जिसके गल्ले में नर है, लेकिन ख़ुदावन्द के लिए 'ऐबदार जानवर की नज़्र मानकर पेश करता है; क्यूँकि मैं शाह - ए - 'अज़ीम हूँ और क़ौमों में मेरा नाम मुहीब है, रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है।
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मलाकी एक:एक किताब के मुसन्निफ़ को मलाकी नबी बतौर पहचानती है। इब्रानी में यह नाम एक लफ़्ज़ी मा'नी पैग़ाम्बर से आता है जो मलाकी की अदाकारी को ख़ुदावन्द का एक नबी होने बतौर इशारा करता है जो ख़ुदा के लोगों को ख़ुदा का पैग़म्बर सुनाता है। दुगनी समझ के मुताबिक़ मलाकी एक पैगम्बर है जो हमारे लिए इस किताब को ले आया, और उसका पैग़ाम यह है कि मुस्तक़बिल में ख़ुदा बड़े नबी एलियाह की तरह एक दूसरे पैग़म्बर को भेजेगा, ख़ुदावन्द का दिन लौटने से पहले। इस किताब की तस्नीफ की तारीख तक़रीबन चार सौ तीस - चार सौ क़ब्लमसीह के बीच है। यह जिलावत्नी से पहले की किताब है मतलब यह कि इस को बाबुल की गिरफ़्तारी से लौटने के बाद लिखा गया। यरूशलेम में रहने वाले यहूदियों के लिए एक ख़त है और एक आम ख़त बतौर ख़ुदा के लोगों के लिए जो हर जगह पाए जाते हैं। लोगों को याद दिलाने के लिए कि ख़ुदा वह सब कुछ करेगा। जो वह अपने लोगों की मदद बतौर कर सकता है। और उन्हें याद दिलाने के लिए कि ख़ुदा उनको उनकी बुराइयों की बाबत ज़ामिन ठहराने के लिए पकड़े रहेगा जब वह मुन्सिफ़ की तरह आता है। लोगों को इस बात की तरफ़ तवज्जोह दिलाने के लिए कि वह अपने गुनाहों से तौबा करें ताकि मुआहिदे की बर्कतें पूरी की जाएं। यह मलाकी के ज़रिए ख़ुदा की तंबीह थी ताकि लोगों से कहा गया कि ख़ुदा की तरफ़ फिरो। मलाकी की किताब पुराने अहदनामे की आखरी किताब है उसी बतौर ख़ुदा के इंसाफ़ का एलान और उसकी बहाली का वायदा मसीहा के आने के ज़रिए से किया गया है जो बनी इस्राईल के कानों में बूंज रहा है। रिवाज व दस्तूर की पाबन्दी की तंबीह की गई है। एक ख़ुदावन्द की तरफ़ से मलाकी के ज़रिए' इस्राईल के लिए बार - ए - नबुव्वतः छः रब्बुल - उल - अफ़वाज तुम को फ़रमाता हैः "ऐ मेरे नाम की तहक़ीर करने वाले काहिनों, बेटा अपने बाप की, और नौकर अपने आक़ा की ता'ज़ीम करता है। इसलिए अगर मैं बाप हूँ, तो मेरी 'इज़्ज़त कहाँ है? और अगर आक़ा हूँ, तो मेरा ख़ौफ़ कहाँ है? लेकिन तुम कहते हो, 'हमने किस बात में तेरे नाम की तहक़ीर की?' सात तुम मेरे मज़बह पर नापाक रोटी पेश करते हो और कहते हो कि 'हमने किस बात में तेरी तौहीन की?' इसी में जो कहते हो, ख़ुदावन्द की मेज़ हक़ीर है। आठ जब तुम अंधे की क़ुर्बानी करते हो, तो कुछ बुराई नहीं? और जब लंगड़े और बीमार को पेश करते हो, तो कुछ नुक़सान नहीं? अब यही अपने हाकिम की नज़्र कर, क्या वह तुझ से ख़ुश होगा और तू उसका मंज़ूर - ए - नज़र होगा? रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है। नौ अब ज़रा ख़ुदा को मनाओ, ताकि वह हम पर रहम फ़रमाए। तुम्हारे ही हाथों ने ये पेश किया है; क्या तुम उसके मंज़ूर - ए - नज़र होगे? रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है। दस काश कि तुम में कोई ऐसा होता जो दरवाज़े बंद करता, और तुम मेरे मज़बह पर 'अबस आग न जलाते, रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है, मैं तुम से ख़ुश नहीं हूँ और तुम्हारे हाथ का हदिया हरगिज़ क़ुबूल न करूँगा। ग्यारह क्यूँकि आफ़ताब के तुलू' से ग़ुरुब तक क़ौमों में मेरे नाम की तम्जीद होगी, और हर जगह मेरे नाम पर ख़ुशबू जलाएँगे और पाक हदिये पेश करेंगे; क्यूँकि क़ौमों में मेरे नाम की तम्जीद होगी, रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है। बारह लेकिन तुम इस बात में उसकी तौहीन करते हो, कि तुम कहते हो, 'ख़ुदावन्द की मेज़ पर क्या है, उस पर के हदिये बेहक़ीक़त हैं। तेरह और तुम ने कहा, 'ये कैसी ज़हमत है,' और उस पर नाक चढ़ाई रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है। फिर तुम लूट का माल और लंगड़े और बीमार ज़बीहे लाए, और इसी तरह के हदिये पेश करे! क्या मैं इनको तुम्हारे हाथ से क़ुबूल करूँ? ख़ुदावन्द फ़रमाता है। चौदह ला'नत उस दग़ाबाज़ पर जिसके गल्ले में नर है, लेकिन ख़ुदावन्द के लिए 'ऐबदार जानवर की नज़्र मानकर पेश करता है; क्यूँकि मैं शाह - ए - 'अज़ीम हूँ और क़ौमों में मेरा नाम मुहीब है, रब्ब - उल - अफ़वाज फ़रमाता है।
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