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तो वई भी अंधकार में छिप गया है अर्थात् वह साधारण मनुष्यों की समझ में नहीं आ सकता । इसलिये महा-जन जिस मार्ग से गये हों वही ( धर्म का ) मार्ग है " ( मभा. वन. ३१२.११५ ) । ठीक है ! परन्तु सहा-जन किस को कहना चाहिये ? उसका अर्थ " बड़ा अथवा बहुतसा जनसमूह " नहीं हो सकता; क्योंकि जिन साधारण लोगों के मन में धर्म-अधर्म की शंका भी कभी उत्पन्न नहीं होती, उनके बतलाये मार्ग से जाना मानो कठोपनिपद में वर्णित "अन्धेनैव सुनीयमाना यथान्धाः" वाली नीति ही को चरितार्थ करना है ! अब यदि महाजन का अर्थ ' बड़े बड़े सदाचारी पुरुष लिया जाय- और यही अर्थ उक्त श्लोक में अभिप्रेत है - तो, उन महा-जनों के आचरण में भी एकता कहाँ है ? निष्पाप श्रीरामचन्द्र ने, अद्विारा शुद्ध हो जाने पर भी अपनी पत्नी का त्याग केवल लोकापवाद के ही लिये किया; और सुग्रीव को अपने पक्ष में मिलाने के लिये, उससे " तुल्यारिमित्र " - अर्थात् जो तेरा शत्रु वही मेरा शत्रु और जो तेरा मित्र वही मेरा मित्र, इस प्रकार संधि करके, बेचारे वालि का बध किया, यद्यपि उसने श्रीरामचन्द्र का कुछ अपराध नहीं किया था ! परशुराम ने तो पिता की आज्ञा से प्रत्यक्ष अपनी साता का शिरश्छेद कर डाला ! यदि पाण्डवों का आचरण देखा जाय तो पाँचों की एक ही स्त्री थी ! स्वर्ग के देवताओं को देखें, तो कोई अहल्या का सतीत्व भ्रष्ट करनेवाला है, और कोई (ब्रह्मा ) मृगरूप से अपनी ही कन्या की अभिलाष करने के कारण रुद्र के बाण से विद्ध हो कर आकाश में पड़ा हुआ है (ऐ. ब्रा. ३.३३ ) ! इन्हीं बातों को मन में ला कर उत्तररामचरित्र नाटक में भवभूति ने लव के मुख से कह लाया है कि " वृद्धास्ते न विचारणीयचरिताः " - इन वृद्धों के कृत्यों का बहुत विचार नहीं करना चाहिये । अंग्रेज़ी में शैतान का इतिहास लिखनेवाले एक ग्रंथकार ने लिखा है कि, शैतान के साथियों और देवदूतों के झगड़ों का हाल देखने से मालूम होता है कि कई बार देवताओं ने ही दैत्यों को कपटजाल में फाँस लिया है। इसी प्रकार कौपीतकी ब्राह्मणोपनिषद ( कौषी ३. १ और ऐ. ब्रा. ७. २८ देखो ) में इन्द्र प्रतर्दन से कहता है कि. " मैंने वृत्र को ( यद्यपि वह ब्राह्मण था ) मार ढाला । अरुन्मुख संन्यासियों के टुकड़े टुकड़े करके भेड़ियों को ( खाने के लिये ) दिये और अपनी कई प्रतिज्ञाओं का भंग करके प्रल्हाद के नातेदारों और गोनजों का तथा पौलोम और कालखंज नामक दैत्यों का बध किया, ( इससे ) मेरा एक वाल भी बाँका नहीं हुआ - " तस्य मे तत्र न लोम च मा मीयते ! " यदि कोई कहे कि " तुम्हें इन महात्माओं के बुरे कर्मों की ओर ध्यान देने का कुछ भी कारण नहीं है; जैसा कि तैत्तिरीयोपनिषद (१.११. २) में बतलाया है, उनके जो कर्म अच्छे हों उन्हों का अनुकरण करो, और सब छोड़ दो। उदाहरणार्थ, परशुराम के समान पिता की आज्ञा का पालन करो, परन्तु माता की हत्या मत करो " तो वही पहला प्रश्न फिर भी उठता है कि बुरा कर्म और भला कर्म समझने के लिये साधन है क्या ? इसलिये अपनी करनी का उक्त प्रकार से वर्णन कर
तो वई भी अंधकार में छिप गया है अर्थात् वह साधारण मनुष्यों की समझ में नहीं आ सकता । इसलिये महा-जन जिस मार्ग से गये हों वही मार्ग है " । ठीक है ! परन्तु सहा-जन किस को कहना चाहिये ? उसका अर्थ " बड़ा अथवा बहुतसा जनसमूह " नहीं हो सकता; क्योंकि जिन साधारण लोगों के मन में धर्म-अधर्म की शंका भी कभी उत्पन्न नहीं होती, उनके बतलाये मार्ग से जाना मानो कठोपनिपद में वर्णित "अन्धेनैव सुनीयमाना यथान्धाः" वाली नीति ही को चरितार्थ करना है ! अब यदि महाजन का अर्थ ' बड़े बड़े सदाचारी पुरुष लिया जाय- और यही अर्थ उक्त श्लोक में अभिप्रेत है - तो, उन महा-जनों के आचरण में भी एकता कहाँ है ? निष्पाप श्रीरामचन्द्र ने, अद्विारा शुद्ध हो जाने पर भी अपनी पत्नी का त्याग केवल लोकापवाद के ही लिये किया; और सुग्रीव को अपने पक्ष में मिलाने के लिये, उससे " तुल्यारिमित्र " - अर्थात् जो तेरा शत्रु वही मेरा शत्रु और जो तेरा मित्र वही मेरा मित्र, इस प्रकार संधि करके, बेचारे वालि का बध किया, यद्यपि उसने श्रीरामचन्द्र का कुछ अपराध नहीं किया था ! परशुराम ने तो पिता की आज्ञा से प्रत्यक्ष अपनी साता का शिरश्छेद कर डाला ! यदि पाण्डवों का आचरण देखा जाय तो पाँचों की एक ही स्त्री थी ! स्वर्ग के देवताओं को देखें, तो कोई अहल्या का सतीत्व भ्रष्ट करनेवाला है, और कोई मृगरूप से अपनी ही कन्या की अभिलाष करने के कारण रुद्र के बाण से विद्ध हो कर आकाश में पड़ा हुआ है ! इन्हीं बातों को मन में ला कर उत्तररामचरित्र नाटक में भवभूति ने लव के मुख से कह लाया है कि " वृद्धास्ते न विचारणीयचरिताः " - इन वृद्धों के कृत्यों का बहुत विचार नहीं करना चाहिये । अंग्रेज़ी में शैतान का इतिहास लिखनेवाले एक ग्रंथकार ने लिखा है कि, शैतान के साथियों और देवदूतों के झगड़ों का हाल देखने से मालूम होता है कि कई बार देवताओं ने ही दैत्यों को कपटजाल में फाँस लिया है। इसी प्रकार कौपीतकी ब्राह्मणोपनिषद में इन्द्र प्रतर्दन से कहता है कि. " मैंने वृत्र को मार ढाला । अरुन्मुख संन्यासियों के टुकड़े टुकड़े करके भेड़ियों को दिये और अपनी कई प्रतिज्ञाओं का भंग करके प्रल्हाद के नातेदारों और गोनजों का तथा पौलोम और कालखंज नामक दैत्यों का बध किया, मेरा एक वाल भी बाँका नहीं हुआ - " तस्य मे तत्र न लोम च मा मीयते ! " यदि कोई कहे कि " तुम्हें इन महात्माओं के बुरे कर्मों की ओर ध्यान देने का कुछ भी कारण नहीं है; जैसा कि तैत्तिरीयोपनिषद में बतलाया है, उनके जो कर्म अच्छे हों उन्हों का अनुकरण करो, और सब छोड़ दो। उदाहरणार्थ, परशुराम के समान पिता की आज्ञा का पालन करो, परन्तु माता की हत्या मत करो " तो वही पहला प्रश्न फिर भी उठता है कि बुरा कर्म और भला कर्म समझने के लिये साधन है क्या ? इसलिये अपनी करनी का उक्त प्रकार से वर्णन कर
DEHRADUN: कनाडा में नौकरी की चाहत लिए दो युवा कबूतरबाजों के फेर में फंस गए। दोनों ने अपनी गाढ़ी कमाई के आठ-आठ लाख तो गंवाए ही, उल्टा कनाडा की जगह कबूतरबाजों ने उन्हें चाइना पहुंचा दिया। बताया जा रहा है कि दोनों को वहां बंधुवा मजदूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन वक्त रहते दोनों ने कबूतरबाजों के इरादे भांप लिए और चाइना से वापस दून लौट आए। दून पहुंचकर दोनों ने पूरा वाकया पुलिस को बताया और कार्रवाई की मांग की। एसएसपी से शिकायत करते हुए ग्राम डांग पटिया, हिंसरियाखाल, टिहरी गढ़वाल निवासी अनूप सिंह ने बताया कि दो साल पहले दिसंबर में वह अपने दोस्त विकास सिंह निवासी कीर्तीनगर टिहरी गढ़वाल के साथ नौकरी की तलाश में देहरादून आया। यहां एक दिन वह डीएवी पीजी कॉलेज गए जहां उन्हें यशस्वी शर्मा उर्फ सन्नीनाम का युवक मिला। यशस्वी शर्मा ने उन्हें कहा कि उसकी व उसके पिता सुरेन्द्र दत्त शर्मा की दून कन्सलटेन्ट नाम से प्लेसमैंट एंजेसी है और वह उन्हें विदेश में अच्छी नौकरी दिलवा सकता है। सन्नी के कहने पर अनूप व विकास एंजेसी के ऑफिस में जाकर सुरेन्द्र शर्मा से मिले। इन्होंने अनूप को कनाडा में नौकरी दिलवाने के एवज में कुल दस लाख रुपये(प्रत्येक से पांच पांच लाख रपये) की मांग की। इससे पहले मेडिकल व अन्य खर्च के नाम पर उन दोनों से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये ले लिए। परन्तु रुपये लेने के बाद कहा कि कनाडा में वैकेन्सी खत्म हो गई है और अब उन्हें सिंगापुर में नौकरी दिलवाई जाएगी। वे दोनों सिंगापुर जाने को भी तैयार हो गए। इसके बाद सुरेन्द्र शर्मा ने उन्हें रजतदीप सिंह से मिलवाया। जिसने दोनों से दो-दो लाख की रुपए और लेकर उन्हें दिल्ली भिजवाया। दिल्ली से जब वे सिंगापुर की फ्लाइट में बैठे तो उनके साथ एक धीरज गुप्ता नाम का शख्श भी गया। जब दोनों फ्लाइट से उतरे तो उन्हें पता चला कि वे सिंगापुर नहीं बल्कि चाइना पहुंचा दिए गए हैं। इसके बाद उन्हें अपने साथ धोखे का एहसास हुआ। दरअसल उन्हें बंधुवा मजदूरी के लिए चीन लाया गया था। यहां से वे दोनों धीरज गुप्ता से बचकर वापस लौट आए। दून पहुंचकर दोनों ने एसएसपी से मामले की शिकायत की और मदद की गुहार लगाई। एसएसपी ने उन्हें मदद का भरोसा दिलाया।
DEHRADUN: कनाडा में नौकरी की चाहत लिए दो युवा कबूतरबाजों के फेर में फंस गए। दोनों ने अपनी गाढ़ी कमाई के आठ-आठ लाख तो गंवाए ही, उल्टा कनाडा की जगह कबूतरबाजों ने उन्हें चाइना पहुंचा दिया। बताया जा रहा है कि दोनों को वहां बंधुवा मजदूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन वक्त रहते दोनों ने कबूतरबाजों के इरादे भांप लिए और चाइना से वापस दून लौट आए। दून पहुंचकर दोनों ने पूरा वाकया पुलिस को बताया और कार्रवाई की मांग की। एसएसपी से शिकायत करते हुए ग्राम डांग पटिया, हिंसरियाखाल, टिहरी गढ़वाल निवासी अनूप सिंह ने बताया कि दो साल पहले दिसंबर में वह अपने दोस्त विकास सिंह निवासी कीर्तीनगर टिहरी गढ़वाल के साथ नौकरी की तलाश में देहरादून आया। यहां एक दिन वह डीएवी पीजी कॉलेज गए जहां उन्हें यशस्वी शर्मा उर्फ सन्नीनाम का युवक मिला। यशस्वी शर्मा ने उन्हें कहा कि उसकी व उसके पिता सुरेन्द्र दत्त शर्मा की दून कन्सलटेन्ट नाम से प्लेसमैंट एंजेसी है और वह उन्हें विदेश में अच्छी नौकरी दिलवा सकता है। सन्नी के कहने पर अनूप व विकास एंजेसी के ऑफिस में जाकर सुरेन्द्र शर्मा से मिले। इन्होंने अनूप को कनाडा में नौकरी दिलवाने के एवज में कुल दस लाख रुपये की मांग की। इससे पहले मेडिकल व अन्य खर्च के नाम पर उन दोनों से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये ले लिए। परन्तु रुपये लेने के बाद कहा कि कनाडा में वैकेन्सी खत्म हो गई है और अब उन्हें सिंगापुर में नौकरी दिलवाई जाएगी। वे दोनों सिंगापुर जाने को भी तैयार हो गए। इसके बाद सुरेन्द्र शर्मा ने उन्हें रजतदीप सिंह से मिलवाया। जिसने दोनों से दो-दो लाख की रुपए और लेकर उन्हें दिल्ली भिजवाया। दिल्ली से जब वे सिंगापुर की फ्लाइट में बैठे तो उनके साथ एक धीरज गुप्ता नाम का शख्श भी गया। जब दोनों फ्लाइट से उतरे तो उन्हें पता चला कि वे सिंगापुर नहीं बल्कि चाइना पहुंचा दिए गए हैं। इसके बाद उन्हें अपने साथ धोखे का एहसास हुआ। दरअसल उन्हें बंधुवा मजदूरी के लिए चीन लाया गया था। यहां से वे दोनों धीरज गुप्ता से बचकर वापस लौट आए। दून पहुंचकर दोनों ने एसएसपी से मामले की शिकायत की और मदद की गुहार लगाई। एसएसपी ने उन्हें मदद का भरोसा दिलाया।
छत्तीसगढ़ में नक्सली हमलों की वारदात बढ़ती जा रही है। अब पिछले 3 दिनों में यहां तीसरा नक्सली हमला सामने आया है। सुकमा जिले के भेज्जी थाने से सिर्फ आधा किलोमीटर दूर पुलिस के दो जवानों की हत्या कर दी गई। ये घटना ऐसे समय सामने आई है, जब बीजापुर में अर्धसैनिक बलों के 22 जवानों की नक्सलियों द्वारा हत्या का ग़म देश भूला नहीं है। ताज़ा मामले में दोनों मृतक भेज्जी पुलिस थाने में ही तैनात थे। थाने के पास ही एक पुलिस कैम्प भी है। गुरुवार (अप्रैल 15, 2021) को दोनों जवान बाइक से बाजार की तरफ जा रहे थे, तभी इनका रास्ता रोक कर किसी ने धारदार हथियार से गला रेत डाला और फ़रार हो गए। इस हमले को लेकर ग्रामीणों ने भी चुप्पी साधी हुई है। एसपी केएल ध्रुव ने बस इतना कहा है कि मामले की जाँच की जा रही है। मृतक जवानों की पहचान पुनेम हड़मा और धनीराम कश्यप के रूप में हुई है। मीडिया ने ग्रामीण सूत्रों के हवाले से अंदेशा जताया है कि इस हमले के पीछे नक्सलियों की 'स्मॉल एक्शन टीम' का हाथ हो सकता है। इस दस्ते में दो-चार नक्सली ही होते हैं लेकिन वो खतरनाक हथियारों से छोटे हमले करते हैं। ये टीमें कैम्प से बाहर निकलने वाले पुलिसकर्मियों पर नजर रखती है। ये नक्सली ग्रामीणों के बीच ही आम आदमी बन कर रहते हैं और इनके प्रभाव के कारण इन्हें चिह्नित कर पाना बड़ा मुश्किल होता है। जहां ये घटना हुई, वहां पुलिसकर्मी अक्सर बाजार के काम के लिए जाया करते हैं। पुलिस को सूचना मिली थी कि दोनों जवान सड़क पर पड़े हुए हैं, जिसके बाद वो मौके पर पहुँची। दोनों जवान पड़े हुए थे और उनके गले से खून लगातार निकल रहा था। पुलिस जब तक पहुंची, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। अब पुलिस गांव वालों की मदद से ही नक्सलियों को चिह्नित कर के दोषियों को पकड़ने में लगी हुई है। इससे पहले बीजापुर में पट्रोलिंग करते जवानों को यू-शेप व्यूह बना कर फंसाया गया था और उनके निकलने के रास्ते को जाम कर के ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। 23 जवान बलिदान हो गए थे। एक जवान राकेश्वर सिंह का अपहरण कर लिया गया था, लेकिन फिर सरकार के प्रयासों के बाद छोड़ दिया गया। इसी तरह 3 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के बीजापुर जिले में नक्सलियों के सथ मुठभेड़ में 5 जवान बलिदान हो गए थे। 9 नक्सली भी मार गिराए गए थे।
छत्तीसगढ़ में नक्सली हमलों की वारदात बढ़ती जा रही है। अब पिछले तीन दिनों में यहां तीसरा नक्सली हमला सामने आया है। सुकमा जिले के भेज्जी थाने से सिर्फ आधा किलोमीटर दूर पुलिस के दो जवानों की हत्या कर दी गई। ये घटना ऐसे समय सामने आई है, जब बीजापुर में अर्धसैनिक बलों के बाईस जवानों की नक्सलियों द्वारा हत्या का ग़म देश भूला नहीं है। ताज़ा मामले में दोनों मृतक भेज्जी पुलिस थाने में ही तैनात थे। थाने के पास ही एक पुलिस कैम्प भी है। गुरुवार को दोनों जवान बाइक से बाजार की तरफ जा रहे थे, तभी इनका रास्ता रोक कर किसी ने धारदार हथियार से गला रेत डाला और फ़रार हो गए। इस हमले को लेकर ग्रामीणों ने भी चुप्पी साधी हुई है। एसपी केएल ध्रुव ने बस इतना कहा है कि मामले की जाँच की जा रही है। मृतक जवानों की पहचान पुनेम हड़मा और धनीराम कश्यप के रूप में हुई है। मीडिया ने ग्रामीण सूत्रों के हवाले से अंदेशा जताया है कि इस हमले के पीछे नक्सलियों की 'स्मॉल एक्शन टीम' का हाथ हो सकता है। इस दस्ते में दो-चार नक्सली ही होते हैं लेकिन वो खतरनाक हथियारों से छोटे हमले करते हैं। ये टीमें कैम्प से बाहर निकलने वाले पुलिसकर्मियों पर नजर रखती है। ये नक्सली ग्रामीणों के बीच ही आम आदमी बन कर रहते हैं और इनके प्रभाव के कारण इन्हें चिह्नित कर पाना बड़ा मुश्किल होता है। जहां ये घटना हुई, वहां पुलिसकर्मी अक्सर बाजार के काम के लिए जाया करते हैं। पुलिस को सूचना मिली थी कि दोनों जवान सड़क पर पड़े हुए हैं, जिसके बाद वो मौके पर पहुँची। दोनों जवान पड़े हुए थे और उनके गले से खून लगातार निकल रहा था। पुलिस जब तक पहुंची, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। अब पुलिस गांव वालों की मदद से ही नक्सलियों को चिह्नित कर के दोषियों को पकड़ने में लगी हुई है। इससे पहले बीजापुर में पट्रोलिंग करते जवानों को यू-शेप व्यूह बना कर फंसाया गया था और उनके निकलने के रास्ते को जाम कर के ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। तेईस जवान बलिदान हो गए थे। एक जवान राकेश्वर सिंह का अपहरण कर लिया गया था, लेकिन फिर सरकार के प्रयासों के बाद छोड़ दिया गया। इसी तरह तीन अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के बीजापुर जिले में नक्सलियों के सथ मुठभेड़ में पाँच जवान बलिदान हो गए थे। नौ नक्सली भी मार गिराए गए थे।
कोलकाताः पश्चिम बंगाल में एक विधायक पर महिला से शादी का वादा कर 'यौन संबंध' बनाने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, सूबे में 8 जुलाई को होने वाले पंचायत चुनाव से पहले इंडियन सेक्युलर फ्रंट के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी के खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया है। वहीं विधायक नौशाद सिद्दीकी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और कहा कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें न तो शिकायत के बारे में पता है और न ही पुलिस की तरफ से कोई नोटिस मिला है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि महिला ने विधायक के खिलाफ दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उन्होंने 1. 5 साल पहले बीबी गांगुली स्ट्रीट स्थित अपने दफ्तर में उसे 'गलत तरीके से रोककर रखा' और शादी का वादा करके उसके साथ 'यौन संबंध' बनाए। अधिकारी ने बताया कि FIR बॉवबाजार थाने में दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि विधायक पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। अधिकारी ने बताया, 'हमने एक महिला से मिली शिकायत के आधार पर सिद्दीकी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। ' सिद्दीकी दक्षिण 24 परगना के भांगर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां राज्य में पंचायत चुनावों से पहले हिंसा हुई है।
कोलकाताः पश्चिम बंगाल में एक विधायक पर महिला से शादी का वादा कर 'यौन संबंध' बनाने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, सूबे में आठ जुलाई को होने वाले पंचायत चुनाव से पहले इंडियन सेक्युलर फ्रंट के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी के खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया है। वहीं विधायक नौशाद सिद्दीकी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और कहा कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें न तो शिकायत के बारे में पता है और न ही पुलिस की तरफ से कोई नोटिस मिला है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि महिला ने विधायक के खिलाफ दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उन्होंने एक. पाँच साल पहले बीबी गांगुली स्ट्रीट स्थित अपने दफ्तर में उसे 'गलत तरीके से रोककर रखा' और शादी का वादा करके उसके साथ 'यौन संबंध' बनाए। अधिकारी ने बताया कि FIR बॉवबाजार थाने में दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि विधायक पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। अधिकारी ने बताया, 'हमने एक महिला से मिली शिकायत के आधार पर सिद्दीकी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। ' सिद्दीकी दक्षिण चौबीस परगना के भांगर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां राज्य में पंचायत चुनावों से पहले हिंसा हुई है।
उज्जैन : अब राज्य में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले गरीब परिवारों को स्टाम्प ड्यूटी के 501 रूपये एक मुश्त में नहीं देना होंगे। ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले गरीब परिवारों को एक नई सुविधा उपलब्ध करवाई है, जिससे कि गरीब परिवार बिजली के घरेलू कनेक्शन में आवेदन के समय स्टाम्प ड्यूटी के रूप में एक भी पैसा जमा नहीं करेंगे। यह पैसा उन्हें कनेक्शन मिलने के बाद आने वाले बिलों में प्रतिमाह 20 रूपये 25 किश्त में देने की सुविधा मिलेगी। विद्युत प्रदाय संहिता के वर्तमान प्रावधान के अनुसार घरेलू बीपीएल सहित सभी आवेदक के लिए स्टाम्प पेपर पर अनुबंध किया जाना आवश्यक होता है। राज्य शासन ने 501 रुपये स्टाम्प शुल्क देने के लिए गरीब उपभोक्ताओं के हित में कुछ नये प्रावधान किए हैं। इसमें बीपीएल उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन देते समय सादे कागज पर अनुबंध हस्ताक्षरित कर घरेलू कनेक्शन दिए जाने के बाद स्टाम्प शुल्क की राशि 25 समान किश्त में मासिक बिल के साथ देना होगी। इसका आशय है कि राशि प्रतिमाह 20 रूपये बिजली बिल के साथ 25 माह तक देना होगी। शासन ने निर्देश दिए है कि कंपनी बीपीएल उपभोक्ताओं की एक सूची तैयार करेगी और राज्य की ट्रेजरी में स्टाम्प शुल्क की एक मुश्त राशि सूची अनुसार जमा कराते हुए हस्ताक्षरित अनुबंध पर ई-स्टाम्पिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। व्यवस्था से गरीब उपभोक्ताओं को कनेक्शन लेने में एक साथ 501 रूपये देने की अनिवार्यता समाप्त होगी और उन्हें आसानी से बिजली कनेक्शन मिल पाएंगे।
उज्जैन : अब राज्य में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले गरीब परिवारों को स्टाम्प ड्यूटी के पाँच सौ एक रूपये एक मुश्त में नहीं देना होंगे। ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले गरीब परिवारों को एक नई सुविधा उपलब्ध करवाई है, जिससे कि गरीब परिवार बिजली के घरेलू कनेक्शन में आवेदन के समय स्टाम्प ड्यूटी के रूप में एक भी पैसा जमा नहीं करेंगे। यह पैसा उन्हें कनेक्शन मिलने के बाद आने वाले बिलों में प्रतिमाह बीस रूपये पच्चीस किश्त में देने की सुविधा मिलेगी। विद्युत प्रदाय संहिता के वर्तमान प्रावधान के अनुसार घरेलू बीपीएल सहित सभी आवेदक के लिए स्टाम्प पेपर पर अनुबंध किया जाना आवश्यक होता है। राज्य शासन ने पाँच सौ एक रुपयापये स्टाम्प शुल्क देने के लिए गरीब उपभोक्ताओं के हित में कुछ नये प्रावधान किए हैं। इसमें बीपीएल उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन देते समय सादे कागज पर अनुबंध हस्ताक्षरित कर घरेलू कनेक्शन दिए जाने के बाद स्टाम्प शुल्क की राशि पच्चीस समान किश्त में मासिक बिल के साथ देना होगी। इसका आशय है कि राशि प्रतिमाह बीस रूपये बिजली बिल के साथ पच्चीस माह तक देना होगी। शासन ने निर्देश दिए है कि कंपनी बीपीएल उपभोक्ताओं की एक सूची तैयार करेगी और राज्य की ट्रेजरी में स्टाम्प शुल्क की एक मुश्त राशि सूची अनुसार जमा कराते हुए हस्ताक्षरित अनुबंध पर ई-स्टाम्पिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। व्यवस्था से गरीब उपभोक्ताओं को कनेक्शन लेने में एक साथ पाँच सौ एक रूपये देने की अनिवार्यता समाप्त होगी और उन्हें आसानी से बिजली कनेक्शन मिल पाएंगे।
मुंबईः दादर (Dadar) स्थित शिवाजी पार्क (Shivaji Park) में भारतरत्न लता मंगेशकर (Bharat Ratna Lata Mangeshkar) का स्मारक (Memorial) बनाए जाने को लेकर राजनीति (Politics) तेज हो गयी है। भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) ने जहां शिवाजी पार्क में स्मारक बनाने की मांग की है, वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने कहा है कि राजनीति के लिए शिवाजी पार्क मैदान की कुर्बानी नहीं दी जा सकती है। बहुजन वंचित महाविकास आघाड़ी के नेता प्रकाश आंबेडकर भी शिवाजी पार्क में लता के स्मारक का विरोध कर चुके हैं। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने ट्वीट कर कहा है कि कुछ लोगों ने मांग की है कि लता दीदी का स्मारक होना चाहिए। हमारा भी मानना है कि स्मारक बनना चाहिए, लेकिन इसे दूसरी जगह बनाया जाना चाहिए। शिवाजी पार्क एक खेल का मैदान है और इसके लिए दादर के लोगों ने कई बार संघर्ष किया है। अतिक्रमण से बचाया है। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि राजनीति के लिए शिवाजी पार्क की कुर्बानी देना ठीक नहीं है। छत्रपती शिवाजी महाराज पार्क हे मैदान दादर वासीयांनी खेळण्यासाठी अनेक वेळा संघर्ष करून अतिक्रमणा पासून वाचवलं आहे. तुमच्या राजकारणासाठी त्याचा बळी देऊ नका ही विनंती. रविवार को दादर के शिवाजी पार्क में भारतरत्न लता मंगेशकर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अनेक राजनीतिक एवं फिल्मी हस्तियां मौजूद थीं। भाजपा विधायक राम कदम ने पहले मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर शिवाजी पार्क में लता मंगेशकर का स्मारक बनाये जाने की मांग की थी। अब उन्होंने एनसीपी प्रमुख शरद पवार को चिट्ठी लिखी है। कदम ने पवार से गुजारिश की है कि वे इस संदर्भ में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार से बातचीत कर स्मारक निर्माण का मार्ग प्रस्स्थ करें। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने भाजपा की मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि शिवाजी पार्क में स्वर कोकिला का स्मारक बनना चाहिए। हालांकि शिवसेना ने भाजपा की मांग को एक सिरे से खारिज कर दिया था। शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि स्मारक के संदर्भ में केंद्र सरकार को विचार करना चाहिए।
मुंबईः दादर स्थित शिवाजी पार्क में भारतरत्न लता मंगेशकर का स्मारक बनाए जाने को लेकर राजनीति तेज हो गयी है। भाजपा और कांग्रेस ने जहां शिवाजी पार्क में स्मारक बनाने की मांग की है, वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने कहा है कि राजनीति के लिए शिवाजी पार्क मैदान की कुर्बानी नहीं दी जा सकती है। बहुजन वंचित महाविकास आघाड़ी के नेता प्रकाश आंबेडकर भी शिवाजी पार्क में लता के स्मारक का विरोध कर चुके हैं। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने ट्वीट कर कहा है कि कुछ लोगों ने मांग की है कि लता दीदी का स्मारक होना चाहिए। हमारा भी मानना है कि स्मारक बनना चाहिए, लेकिन इसे दूसरी जगह बनाया जाना चाहिए। शिवाजी पार्क एक खेल का मैदान है और इसके लिए दादर के लोगों ने कई बार संघर्ष किया है। अतिक्रमण से बचाया है। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि राजनीति के लिए शिवाजी पार्क की कुर्बानी देना ठीक नहीं है। छत्रपती शिवाजी महाराज पार्क हे मैदान दादर वासीयांनी खेळण्यासाठी अनेक वेळा संघर्ष करून अतिक्रमणा पासून वाचवलं आहे. तुमच्या राजकारणासाठी त्याचा बळी देऊ नका ही विनंती. रविवार को दादर के शिवाजी पार्क में भारतरत्न लता मंगेशकर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अनेक राजनीतिक एवं फिल्मी हस्तियां मौजूद थीं। भाजपा विधायक राम कदम ने पहले मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर शिवाजी पार्क में लता मंगेशकर का स्मारक बनाये जाने की मांग की थी। अब उन्होंने एनसीपी प्रमुख शरद पवार को चिट्ठी लिखी है। कदम ने पवार से गुजारिश की है कि वे इस संदर्भ में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार से बातचीत कर स्मारक निर्माण का मार्ग प्रस्स्थ करें। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने भाजपा की मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि शिवाजी पार्क में स्वर कोकिला का स्मारक बनना चाहिए। हालांकि शिवसेना ने भाजपा की मांग को एक सिरे से खारिज कर दिया था। शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि स्मारक के संदर्भ में केंद्र सरकार को विचार करना चाहिए।
अनलॉक-4 की गाइड लाइन में बाजार खोलने का समय चार घंटे बढ़ाने के साथ एक दिन अधिक खोलने की अनुमति े से व्यापारियों में खुशी नजर आई हैं। पांच माह बाद अब सप्ताह में छह दिनों तक लगातार बाजारों में स्थित दुकानों के खुलने से जहां व्यापारियों ने एक ओर राहत की सांस ली, वहीं दूसरी ओर उन्हें उम्मीद हैं कि जिले में हर दिन की तरह मौजूद समय में करीब 15 से 20 करोड़ रुपए के कारोबार में वृद्धि होगी। व्यापारियों का कहना है कि मार्च के बाद से दो माह तक लॉक डाउन की वजह से दुकानें बंद रही। अनलॉक 2 में छूट मिलने पर व्यापारियों ने दुकानें खोलनी शुरू की तो कोरोना संक्रमण के डर से ग्राहक नहीं आ रहे थे। मगर लगातार घर में रहने से भी परेशान हो गए थे। जिससे दुकान खोलकर बैठना बेहतर लग रहा था। सालों से प्रतिष्ठानों में काम कर रहे कर्मियों को घर से पगार के साथ ही दो तीन माह का बिजली बिल बेवजह अदा करना पड़ा। बाजार के खुलने से धीरे धीरे ग्राहक भी आने से कारोबार पटरी पर आना शुरू हो गया था। व्यापारियों के मुताबिक जिले में मार्च से पहले हर रोज का कारोबार करीब 40 से 50 करोड़ रुपए का था। मगर बंदी बाजारों के खुलने से 20 से 30 करोड़ कर प्रतिदिन रह गया है। अनलॉक-4 में समय बढ़ाए जाने से कारोबार के बढ़ाने की संभावना है।
अनलॉक-चार की गाइड लाइन में बाजार खोलने का समय चार घंटे बढ़ाने के साथ एक दिन अधिक खोलने की अनुमति े से व्यापारियों में खुशी नजर आई हैं। पांच माह बाद अब सप्ताह में छह दिनों तक लगातार बाजारों में स्थित दुकानों के खुलने से जहां व्यापारियों ने एक ओर राहत की सांस ली, वहीं दूसरी ओर उन्हें उम्मीद हैं कि जिले में हर दिन की तरह मौजूद समय में करीब पंद्रह से बीस करोड़ रुपए के कारोबार में वृद्धि होगी। व्यापारियों का कहना है कि मार्च के बाद से दो माह तक लॉक डाउन की वजह से दुकानें बंद रही। अनलॉक दो में छूट मिलने पर व्यापारियों ने दुकानें खोलनी शुरू की तो कोरोना संक्रमण के डर से ग्राहक नहीं आ रहे थे। मगर लगातार घर में रहने से भी परेशान हो गए थे। जिससे दुकान खोलकर बैठना बेहतर लग रहा था। सालों से प्रतिष्ठानों में काम कर रहे कर्मियों को घर से पगार के साथ ही दो तीन माह का बिजली बिल बेवजह अदा करना पड़ा। बाजार के खुलने से धीरे धीरे ग्राहक भी आने से कारोबार पटरी पर आना शुरू हो गया था। व्यापारियों के मुताबिक जिले में मार्च से पहले हर रोज का कारोबार करीब चालीस से पचास करोड़ रुपए का था। मगर बंदी बाजारों के खुलने से बीस से तीस करोड़ कर प्रतिदिन रह गया है। अनलॉक-चार में समय बढ़ाए जाने से कारोबार के बढ़ाने की संभावना है।
Chhapra : बिहार के छपरा जिले में अपराधियों ने गुरुवार सुबह एक टेंट व्यवसायी की गोली मारकर हत्या कर दी. घटना जिले के मांझी थाना क्षेत्र के मटियार उच्च विद्यालय के पास की है. जहां अपराधियों ने टेंट व्यवसायी शौकत अली उर्फ ढुल्लू साईं पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी जिससे की घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गयी. घटना के बारे में बताया जा रहा है कि शौकत अली अपने मुर्गा फार्म में मुर्गों को दाना-पानी देकर घर वापस लौट रहे थे. तभी अचानक कुछ अपराधी वहां पहुंचे और शौकत पर गोलियां चला दी. गोलियों की आवाज सुनकर लोग अपने घरों से बाहर निकले तो देखा की शौकत जमीन पर खून से लतपत पड़े थे. वहीं अपराधी तबतक फरार हो चुके थे. गौरतलब है कि घटनास्थल शौकत के घर से मात्र सौ मीटर की दूरी पर स्थित है. घटना की सूचना पुलिस को दी गयी लेकिन पुलिस घटना के ढाई घंटे के बाद वहां पहुंची. जिससे के उन्हें ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा. वहीं कुछ देर के बाद डीएसपी और एसपी भी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच की. पुलिस का कहना है कि फिलहाल घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है. इसकी जांच की जा रही है और जल्द ही अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. इधर घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने ताजपुर-सिसवन मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और मटियार में पुलिस चौकी बनाने की मांग की. न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.
Chhapra : बिहार के छपरा जिले में अपराधियों ने गुरुवार सुबह एक टेंट व्यवसायी की गोली मारकर हत्या कर दी. घटना जिले के मांझी थाना क्षेत्र के मटियार उच्च विद्यालय के पास की है. जहां अपराधियों ने टेंट व्यवसायी शौकत अली उर्फ ढुल्लू साईं पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी जिससे की घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गयी. घटना के बारे में बताया जा रहा है कि शौकत अली अपने मुर्गा फार्म में मुर्गों को दाना-पानी देकर घर वापस लौट रहे थे. तभी अचानक कुछ अपराधी वहां पहुंचे और शौकत पर गोलियां चला दी. गोलियों की आवाज सुनकर लोग अपने घरों से बाहर निकले तो देखा की शौकत जमीन पर खून से लतपत पड़े थे. वहीं अपराधी तबतक फरार हो चुके थे. गौरतलब है कि घटनास्थल शौकत के घर से मात्र सौ मीटर की दूरी पर स्थित है. घटना की सूचना पुलिस को दी गयी लेकिन पुलिस घटना के ढाई घंटे के बाद वहां पहुंची. जिससे के उन्हें ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा. वहीं कुछ देर के बाद डीएसपी और एसपी भी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच की. पुलिस का कहना है कि फिलहाल घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है. इसकी जांच की जा रही है और जल्द ही अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. इधर घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने ताजपुर-सिसवन मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और मटियार में पुलिस चौकी बनाने की मांग की. न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.
डॉन 3 डॉन सीरिज की तीसरा भाग है, फिल्म में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में नजर आयेंगे। डॉन 3 को एक्टर डायरेक्टर फरहान अख्तर निर्देशित कार्नर जा रहे हैं। फिल्म का ज्यादातर हिस्सा भारत में ही फिल्माया जाएगा। जबकि कुछ हिस्से की शूटिंग दुबई और अबु ढ़ाबी में होगी। डॉन 3 को पहली दो फिल्मों से भी ज्यादा बड़े स्तर पर बनाया जाएगा। डॉन 3 की तीसरी किश्त में किंग खान की जगह इस बार रणवीर सिंह दिखाई देने वाले हैं। बता दें फिल्म की आधिकारिक घोषणा 9 अगस्त 2023 को हुई है। बता दें यह फिल्म साल 2025 तक सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
डॉन तीन डॉन सीरिज की तीसरा भाग है, फिल्म में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में नजर आयेंगे। डॉन तीन को एक्टर डायरेक्टर फरहान अख्तर निर्देशित कार्नर जा रहे हैं। फिल्म का ज्यादातर हिस्सा भारत में ही फिल्माया जाएगा। जबकि कुछ हिस्से की शूटिंग दुबई और अबु ढ़ाबी में होगी। डॉन तीन को पहली दो फिल्मों से भी ज्यादा बड़े स्तर पर बनाया जाएगा। डॉन तीन की तीसरी किश्त में किंग खान की जगह इस बार रणवीर सिंह दिखाई देने वाले हैं। बता दें फिल्म की आधिकारिक घोषणा नौ अगस्त दो हज़ार तेईस को हुई है। बता दें यह फिल्म साल दो हज़ार पच्चीस तक सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
कोरोना वायरस का कहर देशभर में बढ़ता हुआ देखकर पूरा देश लॉकडाउन कर दिया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लॉकडाउन का दूसरा चरण यानी कि लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया। ऐसे में घर पर रहना लोगों के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। लोग इस समय घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ऐसे में बॉलीवुड के कुछ गाने ऐसे हैं जिन्हें सुनकर आपको लगेगा कि ये गाने वाकई लॉकडाउन के लिए ही बनाए गए थे। इस पैकेज में बॉलीवुड के ऐसे ही गाने आपको बताते हैं। ये क्या हुआ, कैसे हुआ, कब हुआ, क्यों हुआ (अमर प्रेम) फिल्म अमर प्रेम का ये गाना अभिनेता राजेश खन्ना पर फिल्माया गया है। इस गाने को सुनकर आपको इस समय बने हालात याद आ जाएंगे। आप खुद को लॉकडाउन से इस गाने को जोड़ने से रोक नहीं पाएंगे। क्या करें क्या ना करें ये कैसी मुश्किल हाय (रंगीला) फिल्म रंगीला का ये गाना 'क्या करें क्या ना करें' इस समय की स्थिति पर एकदम फिट बैठता है। इस समय हर कोई अपने घर पर बैठा यही सोच रहा है 'क्या करें और क्या ना करें'। ये गाना अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर और आमिर खान पर फिल्माया गया है। फिल्म 'कल हो ना हो' का ये टाइटल ट्रैक उन लोगों के लिए एकदम परफेक्ट है जिनकी लॉकडाउन की वजह से छुट्टियां लगी हुई हैं। ऐसे लोगों के लिए ये समय एकदम कीमती है। क्योंकि क्या पता इसके बाद इतनी सारी छु्ट्टियां कब मिलें। पल पल हर पल (लगे रहो मुन्नाभाई) लगे रहो मुन्नाभाई का ये गाना उन लोगों पर इतना फिट बैठता है जिनका घर पर समय ही नहीं कट रहा हो। ऐसे लोग जो घर पर ज्यादा समय नहीं बिताते हों उनके लिए ये समय एकदम भारी है। ऐसे लोग इस गाने को सुनकर इससे खुद से रिलेट कर सकते हैं।
कोरोना वायरस का कहर देशभर में बढ़ता हुआ देखकर पूरा देश लॉकडाउन कर दिया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लॉकडाउन का दूसरा चरण यानी कि लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया। ऐसे में घर पर रहना लोगों के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। लोग इस समय घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ऐसे में बॉलीवुड के कुछ गाने ऐसे हैं जिन्हें सुनकर आपको लगेगा कि ये गाने वाकई लॉकडाउन के लिए ही बनाए गए थे। इस पैकेज में बॉलीवुड के ऐसे ही गाने आपको बताते हैं। ये क्या हुआ, कैसे हुआ, कब हुआ, क्यों हुआ फिल्म अमर प्रेम का ये गाना अभिनेता राजेश खन्ना पर फिल्माया गया है। इस गाने को सुनकर आपको इस समय बने हालात याद आ जाएंगे। आप खुद को लॉकडाउन से इस गाने को जोड़ने से रोक नहीं पाएंगे। क्या करें क्या ना करें ये कैसी मुश्किल हाय फिल्म रंगीला का ये गाना 'क्या करें क्या ना करें' इस समय की स्थिति पर एकदम फिट बैठता है। इस समय हर कोई अपने घर पर बैठा यही सोच रहा है 'क्या करें और क्या ना करें'। ये गाना अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर और आमिर खान पर फिल्माया गया है। फिल्म 'कल हो ना हो' का ये टाइटल ट्रैक उन लोगों के लिए एकदम परफेक्ट है जिनकी लॉकडाउन की वजह से छुट्टियां लगी हुई हैं। ऐसे लोगों के लिए ये समय एकदम कीमती है। क्योंकि क्या पता इसके बाद इतनी सारी छु्ट्टियां कब मिलें। पल पल हर पल लगे रहो मुन्नाभाई का ये गाना उन लोगों पर इतना फिट बैठता है जिनका घर पर समय ही नहीं कट रहा हो। ऐसे लोग जो घर पर ज्यादा समय नहीं बिताते हों उनके लिए ये समय एकदम भारी है। ऐसे लोग इस गाने को सुनकर इससे खुद से रिलेट कर सकते हैं।
उत्तराखंड के एक शहर में दो नाबालिग सहेलियों ने अपनी ही दोस्त को एक होटल कर्मी को 5 हज़ार में बीच दिया। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उत्तराखंड के शहर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां नाबालिग लड़कियों ने अपनी ही एक नाबालिग सहेली के साथ ऐसा कुछ किया जिसे जानकर पुलिस भी सोच में पड़ गयी। दो नाबालिग लड़कियों ने अपनी एक नाबलिग सहेली को एक होटल कर्मी को बेच डाला। आरोप यह है की खरीदने वाले होटल कर्मी ने नाबालिगा के साथ रेप किया। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आपको बता दें, की 10 फरवरी को एक नाबालिग लड़की अचानक से कहीं लापता हो गयी थी। इस मामले में रूद्रपुर निवासी दो नाबालिग लड़कियों को अपनी ही सहेली को बेचने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले की जानकारी महिला उप निरीक्षक नेहा राणा ने दी है। मामले की जांच करने के बाद मालूम हुआ की नाबालिग लड़की बिंदुखेड़ा निवासी धर्मेंद्र के साथ थी। पुलिस के डर की वजह से आरोपी ने नाबालिग लड़की को रुद्रपुर छोड़ दिया और फरार हो गया। SSI ने घटना की जानकारी देते हुए बताया की पीड़िता रुद्रपुर निवासी सहेलियों के यहाँ पर गयी थी, जहां उन दोनों ने लालपुर स्थित एक होटल में उसे जाकर छोड़ दिया था। जब पुलिस को लड़की की लोकेशन मिली तो पूरी टीम लालपुर स्थित होटल पहुंची और लड़की को बरामद किया। पीड़िता ने बताया की उसकी दो सहेलियों ने होटल के ही एक दुबे कश्यप नामक कर्मी को 5 हज़ार में बेच दिया था। जिसके बाद दुबे ने नाबालिग लड़की के साथ रेप किया। पीड़िता ने यह भी बताया की इससे पहले उसके साथ धर्मेंद्र नामक शख्स ने भी रेप किया था। SSI ने बताया पीड़िता के बयान पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और जेल भेज दिया है। वहीं साथ ही रविवार की शाम को दोनों सहेलियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों सहेलियां नाबालिग हैं इसलिए दोनों को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है।
उत्तराखंड के एक शहर में दो नाबालिग सहेलियों ने अपनी ही दोस्त को एक होटल कर्मी को पाँच हज़ार में बीच दिया। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उत्तराखंड के शहर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां नाबालिग लड़कियों ने अपनी ही एक नाबालिग सहेली के साथ ऐसा कुछ किया जिसे जानकर पुलिस भी सोच में पड़ गयी। दो नाबालिग लड़कियों ने अपनी एक नाबलिग सहेली को एक होटल कर्मी को बेच डाला। आरोप यह है की खरीदने वाले होटल कर्मी ने नाबालिगा के साथ रेप किया। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आपको बता दें, की दस फरवरी को एक नाबालिग लड़की अचानक से कहीं लापता हो गयी थी। इस मामले में रूद्रपुर निवासी दो नाबालिग लड़कियों को अपनी ही सहेली को बेचने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले की जानकारी महिला उप निरीक्षक नेहा राणा ने दी है। मामले की जांच करने के बाद मालूम हुआ की नाबालिग लड़की बिंदुखेड़ा निवासी धर्मेंद्र के साथ थी। पुलिस के डर की वजह से आरोपी ने नाबालिग लड़की को रुद्रपुर छोड़ दिया और फरार हो गया। SSI ने घटना की जानकारी देते हुए बताया की पीड़िता रुद्रपुर निवासी सहेलियों के यहाँ पर गयी थी, जहां उन दोनों ने लालपुर स्थित एक होटल में उसे जाकर छोड़ दिया था। जब पुलिस को लड़की की लोकेशन मिली तो पूरी टीम लालपुर स्थित होटल पहुंची और लड़की को बरामद किया। पीड़िता ने बताया की उसकी दो सहेलियों ने होटल के ही एक दुबे कश्यप नामक कर्मी को पाँच हज़ार में बेच दिया था। जिसके बाद दुबे ने नाबालिग लड़की के साथ रेप किया। पीड़िता ने यह भी बताया की इससे पहले उसके साथ धर्मेंद्र नामक शख्स ने भी रेप किया था। SSI ने बताया पीड़िता के बयान पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और जेल भेज दिया है। वहीं साथ ही रविवार की शाम को दोनों सहेलियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों सहेलियां नाबालिग हैं इसलिए दोनों को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है।
14491 Written Answers MAY 3, 1968 Central Secretariat Stenographers Service 4805. Shri Hari Vishnu Kamath: Will the Minister of Transport, Aviation, Shipping and Tourism be pleas ed to refer to the reply given to Unstarred Question No. 3282 on the 5th April, 1966 regarding Central Secretariat Stenographers Service and state: (a) whether the Stenographers with the status of Grade II are discharging the higher duties of Grade I posts satisfactorily; (b) whether this was an interim arrangement pending selection of Grade I officers: (c) if so, whether any promotion has since been made to Grade I and if so, against which post, from which cadre and on what date; and (d) if not whether all the eligible stenographers in the Aviation Department were found unsuitable for promotion? The Minister of Transport, Aviation, Shipping and Tourism (Shri Sanjiva Roddy): (a) Yes. (b) Yes. (c ) By appointment against the post of First P.A. to Minister of State, from the Department of Transport. Shipping and Tourism, from 1st March. 1966. (d) Does not arise. श्री श्रो० एम० महेमू, ऐडवोकेट का ध्याय. सायिक कदाचार 4806. श्री बागड़ी : श्री किशन पटनायक : डा० राम मनोहर लोहिया : क्या विधि मन्त्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : (क) क्या यह सच है कि दिल्ली के एक एडवोकेट श्री प्रो० एन० महेन्द्र ने दिल्ली Written Answers के एक मात्र मध्यस्थ श्री वी० रामास्वामी अय्यर की प्रदालत में राज्य की ओर से उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय खाद्य निदेशक की पैरवी की थी; ( ख ) क्या यह भी सच है कि श्री महेन्द्र ने तीस हजारी प्रदालत, दिल्ली में एक सरकारी मिसल ( फाइल ) का मुभायना करते समय, उसमें से कुछ कागज निकाल लिये थे, जिसके दण्ड स्वरूप उसका लाइसेंस एक वर्ष के लिये दिल्ली वकील-सभा परिषद् ( बार कौंसिल) ने जब्त कर लिया था और उक्त प्रवेश के विरुद्ध श्री महेन्द्र की अपील पर भारतीय वकील-सभा परिषद् (इंडियन बार कौंसिल) ने भी उस एण्ड को कायम रखा था ; क्या यह भी सच है कि मंत्रालय में अभी तक कोई दूसरा वकील नियुक्त नहीं किया है, जिसके परिणामस्वरूप सुनवाई की तिथियों को बदलवाने में और बाहर से बुलाये अधिकारियों के आने और जाने पर, जब कि उनके आने का कोई भी लाभ नहीं होता, सरकार को व्यय करना पड़ता है ; प्रौर् (घ) यदि हां, तो इसके क्या कारण विधि मन्त्रालय में राज्य मन्त्री (श्री पं० रा० पट्टाभि रामन् ) : ( क ) जी हां । (ख) जी हां, बार कौंसिल ग्राफ इंडिया की अनुशासनिक समिति के विनिश्चय के अनुसार निष्कर्ष वही है जो इस प्रश्न में कथित है । (ग) बार कौंसिल प्राफ इंडिया ने रोकने के प्रदेश 29 दिसम्बर, 1965 को निकाले थे और इसलिए श्री महेन्द्र को उन मामलों का संचालन करने के लिए अनुशा दी गई थी जो उन्हें पहले ही साँगे जा चुके थे। 24 मार्च, 1966 को बार कौंसिस ग्राफ इंडिया द्वारा और 18 अप्रैल, 1966 को उच्चतम न्यायालय द्वारा अपील बारिज किए 14493 Written Answers VAISAKHA 13, 1888 ( SAKA) Written Answers 14494 जाने पर सभी मंत्रालयों को अनुदेश जारी किए गए थे कि वे श्री महेन्द्र का सौंप गए मामले वापिस ले न तथा श्री महेन्द्र द्वारा संचालित किये जाने वाले मामलों के लिए एक नया कौंसिल नियक्त करने के लिए इंतजाम किए जा रहे है। (घ) प्रश्न ही नहीं उठता । साथ, कृषि, सामुदायिक विकास तथा सहकार मंत्रालय में उपमंत्री ( श्री श्यामचर मिश्र) : ( क ) जी हां। 23 अप्रैल, 1962 को हस्ताक्षर हुए भारत-जापानी करार के अनुसार भाग (बिहार), रानाभाट (पश्चिम बंगाल), चाकली ( उड़ीसा ) तथा व्यारा (गुजरात) में चार जापानी कृषि प्रदर्शन फार्मों की स्थापना की गई थी। 17 दिसम्बर, 1964 को हस्ताक्षर हुए दूसरे करार के अनुसार खोपाली (महाराष्ट्र ) चेंगमनाड (केरल), वापथ (आन्ध्र प्रदेश ) तथा मांडया (मैसूर) में 4 और जापानी प्रदर्शन फार्मों की स्थापना की गई थी। इन फार्मों का उद्देश्य यह था कि प्रदर्शन तथा परीक्षण के माध्यम से कृषकों को जापानी ढंग से धान की खेती करना सिखाया जाए । भारत का लाथ निगम 4807. श्री प्रकार लाल बेरवा : क्या खाद्य, कृषि, सामुदायिक विकास तथा सहकार मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : ( क ) क्या यह सब है कि सरकार ने भारत के खाद्य निगम के एक अधिकारी को हाल में कोटा, राजस्थान में नियुक्त किया है : २) यदि हां, तो वह क्या काम करेगा ; (ग) क्या उसका खर्च केन्द्रीय सरकार अथवा राज्य सरकार वहन करेगी ? काय कृषि सामवाधिक विकास तथा सहकार मन्त्रालय में राज्य मन्त्री (श्री गोविन्द मेमन) : (क) सरकार ने कोटा में भारतीय खाद्य निगम का कोई अधिकारी नियुक्त नहीं किया है। (ब) और (ग) : प्रश्न ही नहीं उठते । संती करने का जापानी तरीका 4808. श्री प्रकार लाल बेरेवा : क्य, कृषि, मनुदायिक विकास तथा सहकार मंत्री यह बताने की कृपा करगे किः ( क ) क्या यह सच है कि सरकार ने प्रायोगिक आधार पर बहुत से स्थानों पर खेती करने का जापानी तरीका मिलाया है : और रहा है ? २) यदि हां तो उसका क्या परिणाम ( ख ) पहले करार के अन्तर्गत स्थापित हुए 4 पुराने फार्मों में बोई गई धाम की विभिन्न किस्मों से जो उत्पादन हुआ वह 896 किलो ग्राम से 2253 किलोग्राम के बीच था और यह उत्पादन इन राज्यों के स्थानीय कृषकों सरकारी फार्मों की तुलना में प्रच्छा था। इन फार्मों के कार्यों का स्थानीय कृषकों पर बढ़ा प्रभाव पड़ा है और कृषक लोग प्रत्येक मौसम में इन प्रदर्शन प्लाटों को देखने के लिए बढ़ी संख्या में प्राते हैं। 196465 की अवधि में विभिन्न फार्मों में लगभग 3000 कृषकों को जापानी पद्धति से बढ़ी करने का तरीका प्रदर्शित किया गया । भाग फार्म (बिहार) तथा बाबुली फार्म (उड़ीसा) में कृषकों तथा विस्तार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम शुरू हो चुका है। 1964-65 की प्रबंधि में भारा फार्म (बिहार) में 53 बिम्नार कार्यकर्ताओं व लगभग 90 कृषकों को तथा चाकुली फार्म (उड़ीसा) में लगभग 200 कृषकों को प्रशिक्षण दिया गया । बरीफ के भागामी मौसम में रानाबाट फार्म (पश्चिम बंगाल ) तथा ब्यारा फार्म (गुजरात) में भी कृषकों तथा विस्तार कार्यकर्ताओं को
चौदह हज़ार चार सौ इक्यानवे Written Answers MAY तीन, एक हज़ार नौ सौ अड़सठ Central Secretariat Stenographers Service चार हज़ार आठ सौ पाँच. Shri Hari Vishnu Kamath: Will the Minister of Transport, Aviation, Shipping and Tourism be pleas ed to refer to the reply given to Unstarred Question No. तीन हज़ार दो सौ बयासी on the पाँच अप्रैलil, एक हज़ार नौ सौ छयासठ regarding Central Secretariat Stenographers Service and state: whether the Stenographers with the status of Grade II are discharging the higher duties of Grade I posts satisfactorily; whether this was an interim arrangement pending selection of Grade I officers: if so, whether any promotion has since been made to Grade I and if so, against which post, from which cadre and on what date; and if not whether all the eligible stenographers in the Aviation Department were found unsuitable for promotion? The Minister of Transport, Aviation, Shipping and Tourism : Yes. Yes. By appointment against the post of First P.A. to Minister of State, from the Department of Transport. Shipping and Tourism, from एक मार्चch. एक हज़ार नौ सौ छयासठ. Does not arise. श्री श्रोशून्य एमशून्य महेमू, ऐडवोकेट का ध्याय. सायिक कदाचार चार हज़ार आठ सौ छः. श्री बागड़ी : श्री किशन पटनायक : डाशून्य राम मनोहर लोहिया : क्या विधि मन्त्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : क्या यह सच है कि दिल्ली के एक एडवोकेट श्री प्रोशून्य एनशून्य महेन्द्र ने दिल्ली Written Answers के एक मात्र मध्यस्थ श्री वीशून्य रामास्वामी अय्यर की प्रदालत में राज्य की ओर से उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय खाद्य निदेशक की पैरवी की थी; क्या यह भी सच है कि श्री महेन्द्र ने तीस हजारी प्रदालत, दिल्ली में एक सरकारी मिसल का मुभायना करते समय, उसमें से कुछ कागज निकाल लिये थे, जिसके दण्ड स्वरूप उसका लाइसेंस एक वर्ष के लिये दिल्ली वकील-सभा परिषद् ने जब्त कर लिया था और उक्त प्रवेश के विरुद्ध श्री महेन्द्र की अपील पर भारतीय वकील-सभा परिषद् ने भी उस एण्ड को कायम रखा था ; क्या यह भी सच है कि मंत्रालय में अभी तक कोई दूसरा वकील नियुक्त नहीं किया है, जिसके परिणामस्वरूप सुनवाई की तिथियों को बदलवाने में और बाहर से बुलाये अधिकारियों के आने और जाने पर, जब कि उनके आने का कोई भी लाभ नहीं होता, सरकार को व्यय करना पड़ता है ; प्रौर् यदि हां, तो इसके क्या कारण विधि मन्त्रालय में राज्य मन्त्री : जी हां । जी हां, बार कौंसिल ग्राफ इंडिया की अनुशासनिक समिति के विनिश्चय के अनुसार निष्कर्ष वही है जो इस प्रश्न में कथित है । बार कौंसिल प्राफ इंडिया ने रोकने के प्रदेश उनतीस दिसम्बर, एक हज़ार नौ सौ पैंसठ को निकाले थे और इसलिए श्री महेन्द्र को उन मामलों का संचालन करने के लिए अनुशा दी गई थी जो उन्हें पहले ही साँगे जा चुके थे। चौबीस मार्च, एक हज़ार नौ सौ छयासठ को बार कौंसिस ग्राफ इंडिया द्वारा और अट्ठारह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ छयासठ को उच्चतम न्यायालय द्वारा अपील बारिज किए चौदह हज़ार चार सौ तिरानवे Written Answers VAISAKHA तेरह, एक हज़ार आठ सौ अठासी Written Answers चौदह हज़ार चार सौ चौरानवे जाने पर सभी मंत्रालयों को अनुदेश जारी किए गए थे कि वे श्री महेन्द्र का सौंप गए मामले वापिस ले न तथा श्री महेन्द्र द्वारा संचालित किये जाने वाले मामलों के लिए एक नया कौंसिल नियक्त करने के लिए इंतजाम किए जा रहे है। प्रश्न ही नहीं उठता । साथ, कृषि, सामुदायिक विकास तथा सहकार मंत्रालय में उपमंत्री : जी हां। तेईस अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ बासठ को हस्ताक्षर हुए भारत-जापानी करार के अनुसार भाग , रानाभाट , चाकली तथा व्यारा में चार जापानी कृषि प्रदर्शन फार्मों की स्थापना की गई थी। सत्रह दिसम्बर, एक हज़ार नौ सौ चौंसठ को हस्ताक्षर हुए दूसरे करार के अनुसार खोपाली चेंगमनाड , वापथ तथा मांडया में चार और जापानी प्रदर्शन फार्मों की स्थापना की गई थी। इन फार्मों का उद्देश्य यह था कि प्रदर्शन तथा परीक्षण के माध्यम से कृषकों को जापानी ढंग से धान की खेती करना सिखाया जाए । भारत का लाथ निगम चार हज़ार आठ सौ सात. श्री प्रकार लाल बेरवा : क्या खाद्य, कृषि, सामुदायिक विकास तथा सहकार मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : क्या यह सब है कि सरकार ने भारत के खाद्य निगम के एक अधिकारी को हाल में कोटा, राजस्थान में नियुक्त किया है : दो) यदि हां, तो वह क्या काम करेगा ; क्या उसका खर्च केन्द्रीय सरकार अथवा राज्य सरकार वहन करेगी ? काय कृषि सामवाधिक विकास तथा सहकार मन्त्रालय में राज्य मन्त्री : सरकार ने कोटा में भारतीय खाद्य निगम का कोई अधिकारी नियुक्त नहीं किया है। और : प्रश्न ही नहीं उठते । संती करने का जापानी तरीका चार हज़ार आठ सौ आठ. श्री प्रकार लाल बेरेवा : क्य, कृषि, मनुदायिक विकास तथा सहकार मंत्री यह बताने की कृपा करगे किः क्या यह सच है कि सरकार ने प्रायोगिक आधार पर बहुत से स्थानों पर खेती करने का जापानी तरीका मिलाया है : और रहा है ? दो) यदि हां तो उसका क्या परिणाम पहले करार के अन्तर्गत स्थापित हुए चार पुराने फार्मों में बोई गई धाम की विभिन्न किस्मों से जो उत्पादन हुआ वह आठ सौ छियानवे किलो ग्राम से दो हज़ार दो सौ तिरेपन किलोग्रामग्राम के बीच था और यह उत्पादन इन राज्यों के स्थानीय कृषकों सरकारी फार्मों की तुलना में प्रच्छा था। इन फार्मों के कार्यों का स्थानीय कृषकों पर बढ़ा प्रभाव पड़ा है और कृषक लोग प्रत्येक मौसम में इन प्रदर्शन प्लाटों को देखने के लिए बढ़ी संख्या में प्राते हैं। एक लाख छियानवे हज़ार चार सौ पैंसठ की अवधि में विभिन्न फार्मों में लगभग तीन हज़ार कृषकों को जापानी पद्धति से बढ़ी करने का तरीका प्रदर्शित किया गया । भाग फार्म तथा बाबुली फार्म में कृषकों तथा विस्तार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम शुरू हो चुका है। एक हज़ार नौ सौ चौंसठ-पैंसठ की प्रबंधि में भारा फार्म में तिरेपन बिम्नार कार्यकर्ताओं व लगभग नब्बे कृषकों को तथा चाकुली फार्म में लगभग दो सौ कृषकों को प्रशिक्षण दिया गया । बरीफ के भागामी मौसम में रानाबाट फार्म तथा ब्यारा फार्म में भी कृषकों तथा विस्तार कार्यकर्ताओं को
देश की सभी टेलीकॉम कंपनियों की ये प्रयास रहता है कि वो अपने ग्राहकों को सस्ते रिचार्ज प्लान्स ऑफर कर सकें जिनमें उन्हें अधिक बेनिफिट्स दिए जाएं. आज हम आपको एक ऐसे रिचार्ज प्लान के बारे में जानकारी देने जा रहे है, जिसका मूल्य और बेनिफिट्स ने रिलायंस जियो (Reliance Jio), एयरटेल (Airtel) और वीआई (Vi), सभी प्रमुख प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों के छक्के छुड़ाने वाला है. ये है अब तक का सबसे सस्ता रिचार्ज प्लानः यहां एमटीएनएल (MTNL) के सालाना प्रीपेड प्लान के बारें में बात की जा रही है. MTNL एक ऐसा रिचार्ज प्लान ऑफर कर रहा है इसमें आपको 150 रुपये से कम में पूरे एक वर्ष तक की वैलिडिटी भी दी जा रही है. इसमें आपको हाई-स्पीड डेटा के साथ अनलिमिटेड कॉलिंग के भी लाभ दिए जा रहे हैं. एमटीएनएल (MTNL) के प्लान के बेनिफिट्सः एमटीएनएल (MTNL) के इस प्लान में आपको क्या लाभ मिलने वाले है. 141 रुपये की कीमत वाले इस प्लान में आपको 365 दिनों के लिए कई सारे लाभ भी दिए जाने वाले है. इस प्लान में शुरू के 90 दिनों के लिए हर दिन 1GB डेटा भी प्रदान किया जा रहा है, साथ ही, एमटीएनएल (MTNL) नेटवर्क पर कॉल करने के लिए अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा भी दी जाने वाली है. अगर आप किसी दूसरे नेटवर्क पर कॉल करना चाह रहे है तो आपको उसके लिए फ्री 200 मिनट्स दिए जा रहे है. इन मिनट के समाप्त होने के उपरांत आप 25 पैसे प्रति मिनट के हिसाब से फोन कर पाएंगे. यह चार्ज केवल 90 दिनों तक के लिए होने वाला है. वहीं, 90 दिनों के उपरांत आपको हर सेकेंड का 0. 02 पैसा चार्ज देना जरुरी है. खबरों की माने तो कि जियो (Jio), एयरटेल (Airtel) और वीआई (Vi) में से कोई भी कंपनी इतना सस्ता सालाना प्लान नहीं ऑफर भी प्रदान कर रही है.
देश की सभी टेलीकॉम कंपनियों की ये प्रयास रहता है कि वो अपने ग्राहकों को सस्ते रिचार्ज प्लान्स ऑफर कर सकें जिनमें उन्हें अधिक बेनिफिट्स दिए जाएं. आज हम आपको एक ऐसे रिचार्ज प्लान के बारे में जानकारी देने जा रहे है, जिसका मूल्य और बेनिफिट्स ने रिलायंस जियो , एयरटेल और वीआई , सभी प्रमुख प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों के छक्के छुड़ाने वाला है. ये है अब तक का सबसे सस्ता रिचार्ज प्लानः यहां एमटीएनएल के सालाना प्रीपेड प्लान के बारें में बात की जा रही है. MTNL एक ऐसा रिचार्ज प्लान ऑफर कर रहा है इसमें आपको एक सौ पचास रुपयापये से कम में पूरे एक वर्ष तक की वैलिडिटी भी दी जा रही है. इसमें आपको हाई-स्पीड डेटा के साथ अनलिमिटेड कॉलिंग के भी लाभ दिए जा रहे हैं. एमटीएनएल के प्लान के बेनिफिट्सः एमटीएनएल के इस प्लान में आपको क्या लाभ मिलने वाले है. एक सौ इकतालीस रुपयापये की कीमत वाले इस प्लान में आपको तीन सौ पैंसठ दिनों के लिए कई सारे लाभ भी दिए जाने वाले है. इस प्लान में शुरू के नब्बे दिनों के लिए हर दिन एकGB डेटा भी प्रदान किया जा रहा है, साथ ही, एमटीएनएल नेटवर्क पर कॉल करने के लिए अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा भी दी जाने वाली है. अगर आप किसी दूसरे नेटवर्क पर कॉल करना चाह रहे है तो आपको उसके लिए फ्री दो सौ मिनट्स दिए जा रहे है. इन मिनट के समाप्त होने के उपरांत आप पच्चीस पैसे प्रति मिनट के हिसाब से फोन कर पाएंगे. यह चार्ज केवल नब्बे दिनों तक के लिए होने वाला है. वहीं, नब्बे दिनों के उपरांत आपको हर सेकेंड का शून्य. दो पैसा चार्ज देना जरुरी है. खबरों की माने तो कि जियो , एयरटेल और वीआई में से कोई भी कंपनी इतना सस्ता सालाना प्लान नहीं ऑफर भी प्रदान कर रही है.
अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिला शहडोल के पकरिया गांव में प्रधानमंत्री का 27 जून को आगमन हो रहा है। पकरिया गांव खुद में खास है। खास इसलिए है क्योंकि यहां की महिलाएं महिला सशक्तिकरण की मिशाल पेश कर रही है। जिस गांव में PM मोदी आ रहे उस पंचायत की कमान महिलाओं के हाथ है। सरपंच, उपसरपंच समेत 20 में 13 महिला पंच और 200 से ज्यादा बहनें लखपति है। आजीविका मिशन से संचालित समूहों के जरिए महिलाएं लखपति बन गई हैं। सरपंच, उपसरपंच, 13 महिला पंच व संचालित समूहों की महिलाएं प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन के साथ तैयारियां कर रही हैं। पीएम मोदी समुदाय के प्रमुख लोगों से व आजीविका मिशन से संचालित समूहों की लखपति बहनों से चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 जून को शहडोल जिले के लालपुर में सभा के बाद बुढार जनपद पंचायत के पकरिया गांव पहुंचेंगे। पकरिया गांव की आबादी लगभग 5 हजार के आसपास है। इस ग्राम पंचायत में जल्दीटोला, समदाटोला, सरकारी टोला समेत अन्य मोहल्ले आते हैं। गांव में मतदाताओं की संख्या 2250 है। पकरिया ग्राम पंचायत में 20 वार्ड में से 13 पंच पदों पर महिलाएं काबिज हैं। सिर्फ 7 वार्ड पर ही पुरुष पंच हैं । पकरिया ग्राम पंचायत के समदा टोला और सरकारी टोला में रहने वाली 442 महिलाएं आजीविका मिशन के साथ जुड़कर चौका बर्तन के साथ साथ स्वरोजगार भी कर रही है। ग्राम पंचायत में 29 समूहों का गठन किया गया है। इन समूहों के साथ मिलकर काम करने वाली लगभग 200 महिलाएं लखपति बन गई है। पीएम जिले के लालपुर हवाई अड्डा ग्राउंड में एक सभा को संबोधित करेंगे, जिसके बाद ग्राम पकरिया के जल्दी टोला में आदिवासी परिवेश में जन जातीय समुदाय के साथ कोदो कुटकी सहित अन्य आदिवासी व्यंजन का लुत्फ उठाएंगे। पीएम के आने को लेकर प्रशासन युद्ध स्तर पर तैयारी में जुटा हुआ है। पीएम की सुनने के लिए 1 लाख से अधिक लोग पहुंचेंगे। पीएम की सुरक्षा के लिए 50 से अधिक आईपीएस अधिकारी तैनात किये जाएंगे। पीएम की सुरक्षा में राज्य के अलावा केंद्र के भी आईपीएस अधिकारी शहडोल पहुंचेंगे। पीएम की सुरक्षा के लिए एसपीजी (SPG) आईबी (IB) के अधिकारी कमान संभाले हुए हैं। इसके साथ एमपी पुलिस के 3 हजार से अधिक जवानों की ड्यूटी लगाई गई है। सुरक्षा की दृष्टि से शहडोल कलेक्टर वन्दना वैद्य ने ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबद्ध लगाया है इसके साथ ही लालपुर पकरिया क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दिया है।
अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिला शहडोल के पकरिया गांव में प्रधानमंत्री का सत्ताईस जून को आगमन हो रहा है। पकरिया गांव खुद में खास है। खास इसलिए है क्योंकि यहां की महिलाएं महिला सशक्तिकरण की मिशाल पेश कर रही है। जिस गांव में PM मोदी आ रहे उस पंचायत की कमान महिलाओं के हाथ है। सरपंच, उपसरपंच समेत बीस में तेरह महिला पंच और दो सौ से ज्यादा बहनें लखपति है। आजीविका मिशन से संचालित समूहों के जरिए महिलाएं लखपति बन गई हैं। सरपंच, उपसरपंच, तेरह महिला पंच व संचालित समूहों की महिलाएं प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन के साथ तैयारियां कर रही हैं। पीएम मोदी समुदाय के प्रमुख लोगों से व आजीविका मिशन से संचालित समूहों की लखपति बहनों से चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ताईस जून को शहडोल जिले के लालपुर में सभा के बाद बुढार जनपद पंचायत के पकरिया गांव पहुंचेंगे। पकरिया गांव की आबादी लगभग पाँच हजार के आसपास है। इस ग्राम पंचायत में जल्दीटोला, समदाटोला, सरकारी टोला समेत अन्य मोहल्ले आते हैं। गांव में मतदाताओं की संख्या दो हज़ार दो सौ पचास है। पकरिया ग्राम पंचायत में बीस वार्ड में से तेरह पंच पदों पर महिलाएं काबिज हैं। सिर्फ सात वार्ड पर ही पुरुष पंच हैं । पकरिया ग्राम पंचायत के समदा टोला और सरकारी टोला में रहने वाली चार सौ बयालीस महिलाएं आजीविका मिशन के साथ जुड़कर चौका बर्तन के साथ साथ स्वरोजगार भी कर रही है। ग्राम पंचायत में उनतीस समूहों का गठन किया गया है। इन समूहों के साथ मिलकर काम करने वाली लगभग दो सौ महिलाएं लखपति बन गई है। पीएम जिले के लालपुर हवाई अड्डा ग्राउंड में एक सभा को संबोधित करेंगे, जिसके बाद ग्राम पकरिया के जल्दी टोला में आदिवासी परिवेश में जन जातीय समुदाय के साथ कोदो कुटकी सहित अन्य आदिवासी व्यंजन का लुत्फ उठाएंगे। पीएम के आने को लेकर प्रशासन युद्ध स्तर पर तैयारी में जुटा हुआ है। पीएम की सुनने के लिए एक लाख से अधिक लोग पहुंचेंगे। पीएम की सुरक्षा के लिए पचास से अधिक आईपीएस अधिकारी तैनात किये जाएंगे। पीएम की सुरक्षा में राज्य के अलावा केंद्र के भी आईपीएस अधिकारी शहडोल पहुंचेंगे। पीएम की सुरक्षा के लिए एसपीजी आईबी के अधिकारी कमान संभाले हुए हैं। इसके साथ एमपी पुलिस के तीन हजार से अधिक जवानों की ड्यूटी लगाई गई है। सुरक्षा की दृष्टि से शहडोल कलेक्टर वन्दना वैद्य ने ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबद्ध लगाया है इसके साथ ही लालपुर पकरिया क्षेत्र में धारा एक सौ चौंतालीस लागू कर दिया है।
- 41 min ago सोनाक्षी सिन्हा के साथ रोमांस करने से रणबीर कपूर ने कर दिया था इंकार? वजह है चौकाने वाली! Don't Miss! - Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? वह लगातार सेट पर देर से आती हैं और जिससे यहां के लोगों को शूटिंग करने में परेशानी होती है। इतना ही नहीं वह नखरे दिखाने के साथ साथ अपने जूते चप्पल भी फेंकती चलती हैं। वह हमेशा कॉस्टयूम डिजाइनर व मेकअप मैन को परेशान करती रहती हैं कि उनका मेकअप फिर से किया जाये। इन सारी चीजों से वहां के लोग बेहद परेशान हो गये हैं। गौरतलब है कि इन दिनों उनके साथ सेट पर उनके पति नंदिश संधू भी साथ साथ नजर आते हैं। जिसकी वजह से कई बार वह शूटिंग के दौरान भी गप करती नजर आती हैं। जबकि प्रोडयूसर ने इस बारे में खासतौर से रश्मि को चेतावनी दी थी। लेकिन फिर भी रश्मि इन चीजों से बाज नहीं आ रही हैं। Rashmi desai is very naughty says Director. Ankita Lokhande की बला से खूबसूरत तस्वीरें वायरल, फैंस बोले- 'संजय लीला भंसाली के फिल्म की हीरोईन लग रही हैं'
- इकतालीस मिनट ago सोनाक्षी सिन्हा के साथ रोमांस करने से रणबीर कपूर ने कर दिया था इंकार? वजह है चौकाने वाली! Don't Miss! - Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? वह लगातार सेट पर देर से आती हैं और जिससे यहां के लोगों को शूटिंग करने में परेशानी होती है। इतना ही नहीं वह नखरे दिखाने के साथ साथ अपने जूते चप्पल भी फेंकती चलती हैं। वह हमेशा कॉस्टयूम डिजाइनर व मेकअप मैन को परेशान करती रहती हैं कि उनका मेकअप फिर से किया जाये। इन सारी चीजों से वहां के लोग बेहद परेशान हो गये हैं। गौरतलब है कि इन दिनों उनके साथ सेट पर उनके पति नंदिश संधू भी साथ साथ नजर आते हैं। जिसकी वजह से कई बार वह शूटिंग के दौरान भी गप करती नजर आती हैं। जबकि प्रोडयूसर ने इस बारे में खासतौर से रश्मि को चेतावनी दी थी। लेकिन फिर भी रश्मि इन चीजों से बाज नहीं आ रही हैं। Rashmi desai is very naughty says Director. Ankita Lokhande की बला से खूबसूरत तस्वीरें वायरल, फैंस बोले- 'संजय लीला भंसाली के फिल्म की हीरोईन लग रही हैं'
यह संभावना नहीं है कि आज के जीवन से कम से कम एक व्यक्ति जानता है,जो पहले लोग थे जिन्होंने पौधों के सभी प्रकार के मतभेदों को देखा और अपने अद्वितीय गुणों का उपयोग करने के लिए सीखा। निश्चित रूप से, कोई भी इन प्राचीन विद्वानों के नामों का नाम नहीं लेगा, जो पौधों के वर्गीकरण के रूप में मानव जाति के लिए इस तरह का एक महत्वपूर्ण कार्य करने लगे। पौधों को वर्गीकृत करने का पहला डरपोक प्रयासकेवल सामग्री की बाहरी समानता पर आधारित अध्ययन किया। यही कारण है कि बहुत बार उनके परिणाम गलत थे हालांकि, संयंत्र के नमूनों को और अधिक गहराई से अध्ययन करके, वैज्ञानिकों ने सभी नए तथ्यों को प्राप्त किया है, जिन्होंने पौधे की दुनिया की जांच में काफी प्रगति की है। पौधों का आधुनिक वर्गीकरण, साथ ही साथजीवित जीवों के अधिकांश वर्गीकरण, प्रसिद्ध डार्विन सिद्धांत पर आधारित है। यह कई तरह की शाखाओं के साथ परिवार के पेड़ का एक प्रकार है इस सिद्धांत की शुद्धता की एक प्राकृतिक पुष्टि विभिन्न पेलियोट्रियल निष्कर्ष हैं प्राचीन विलुप्त पौधों की संरचना और आधुनिक नमूनों के साथ अपनी तुलना के विश्लेषण से हमें प्रजातियों और आधुनिक संयंत्रों की प्राचीनता का निर्धारण करने के मूल से समझ सकेंगे। और इस तरह के अध्ययन का नतीजा एक सामान्य "पूर्वजों" वाले पौधों का समूह है। इस तरह के वनस्पति प्रयोगों के समय ध्यान से प्रत्येक नमूने की विकासवादी पथ का पता लगाने और इसे वर्गीकृत करते हैं। सशर्त रूप से यह पौधे की दुनिया को विभाजित करना संभव हैउच्च और निम्न पौधे निचले वाले शैवाल और लाइसेंस हैं, और उच्च वाले श्लेष्म, व्यायामशाला, फर्न और फूलों के पौधे हैं। तदनुसार, इन श्रेणियों को अलग-अलग विभागों में बांटा गया है। सबसे बड़ा एंजियोस्पर्म के विभाग को कहा जा सकता हैया फूल पौधों, जो पेड़, झाड़ियाँ, जंगली और खेती जीवों में शामिल हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि वे आकार और आकार, साथ ही जीवन प्रत्याशा और कई अन्य गुण में एक दूसरे से बहुत अलग हैं। यह आदेश सुरक्षित रूप से वन्य जीवन के इस दंगे में नेविगेट करने के लिए है, और फूल वाले पौधों के वर्गीकरण बनाया गया था। यह परिवारों की एक बड़ी संख्या के बीच एक साथ लाया, इस तरह के समूहों और उपसमूहों, एक प्रजाति, वंश, आदेश, वर्ग और विभाजन के रूप में बनाने। इन समूहों संरचना की विशेषताओं, सामुदायिक विकास और पौधों के प्रजनन के तरीकों के आधार पर बनाया गया था। प्रमुख परिवर्तन वर्गीकृत किए गए थे178 9 में पौधे पुस्तक, जिसे प्रसिद्ध वनस्पतिविद एंटोनी लॉरेंट जुसी द्वारा लिखा गया था, जिसका शीर्षक "प्राकृतिक आदेश में स्थित प्लांट जेनर" था, ने फूल विभाग को 15 वर्गों में विभाजित किया, जिसमें लगभग 100 "प्राकृतिक आदेश" थे। इस काम ने फ्रांसीसी वनस्पतिविदों को विश्वव्यापी प्रसिद्धि लाई है, और उनके द्वारा आविष्कार किए गए अधिकांश नाम आज भी उपयोग किए जाते हैं। वन्यजीवन के कुछ प्रशंसकों नहीं करते हैंगंभीरता से इस तरह के जटिल विज्ञान, जैसे वनस्पति विज्ञान, लेकिन घर के पौधे लगाने की तरह। इस तरह के घर "वैज्ञानिक" अच्छी तरह से इनडोर पौधों के वर्गीकरण में आ सकते हैं, जो इस खंड को तीन समूहों में विभाजित करता हैः मध्यम रोशनी, छाया-सहिष्णु और हल्के-प्रेमियों के पौधे। पहले समूह में लगभग सभी ज्ञात इनडोर पौधों शामिल हैं। साइट्रस, हाइड्रेंजस, प्राइमरोस और बेगोनिया मध्यम प्रकाश के तहत बहुत अच्छा महसूस करते हैं। दूसरे समूह में फर्न, आईवी, इनडोर अंगूर और बॉक्सवुड, पौधे शामिल हैं जो बगीचे और सब्जी उद्यान के छायादार कोनों में काफी शांति से जीवित रहते हैं। तीसरा समूह सूर्य, कैक्टि, नीलगिरी और बैल के बच्चे हैं, जो पौधे सूरज की कोमल किरणों के बिना अपने जीवन का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं और प्रकाश की कमी से जल्दी मर जाते हैं।
यह संभावना नहीं है कि आज के जीवन से कम से कम एक व्यक्ति जानता है,जो पहले लोग थे जिन्होंने पौधों के सभी प्रकार के मतभेदों को देखा और अपने अद्वितीय गुणों का उपयोग करने के लिए सीखा। निश्चित रूप से, कोई भी इन प्राचीन विद्वानों के नामों का नाम नहीं लेगा, जो पौधों के वर्गीकरण के रूप में मानव जाति के लिए इस तरह का एक महत्वपूर्ण कार्य करने लगे। पौधों को वर्गीकृत करने का पहला डरपोक प्रयासकेवल सामग्री की बाहरी समानता पर आधारित अध्ययन किया। यही कारण है कि बहुत बार उनके परिणाम गलत थे हालांकि, संयंत्र के नमूनों को और अधिक गहराई से अध्ययन करके, वैज्ञानिकों ने सभी नए तथ्यों को प्राप्त किया है, जिन्होंने पौधे की दुनिया की जांच में काफी प्रगति की है। पौधों का आधुनिक वर्गीकरण, साथ ही साथजीवित जीवों के अधिकांश वर्गीकरण, प्रसिद्ध डार्विन सिद्धांत पर आधारित है। यह कई तरह की शाखाओं के साथ परिवार के पेड़ का एक प्रकार है इस सिद्धांत की शुद्धता की एक प्राकृतिक पुष्टि विभिन्न पेलियोट्रियल निष्कर्ष हैं प्राचीन विलुप्त पौधों की संरचना और आधुनिक नमूनों के साथ अपनी तुलना के विश्लेषण से हमें प्रजातियों और आधुनिक संयंत्रों की प्राचीनता का निर्धारण करने के मूल से समझ सकेंगे। और इस तरह के अध्ययन का नतीजा एक सामान्य "पूर्वजों" वाले पौधों का समूह है। इस तरह के वनस्पति प्रयोगों के समय ध्यान से प्रत्येक नमूने की विकासवादी पथ का पता लगाने और इसे वर्गीकृत करते हैं। सशर्त रूप से यह पौधे की दुनिया को विभाजित करना संभव हैउच्च और निम्न पौधे निचले वाले शैवाल और लाइसेंस हैं, और उच्च वाले श्लेष्म, व्यायामशाला, फर्न और फूलों के पौधे हैं। तदनुसार, इन श्रेणियों को अलग-अलग विभागों में बांटा गया है। सबसे बड़ा एंजियोस्पर्म के विभाग को कहा जा सकता हैया फूल पौधों, जो पेड़, झाड़ियाँ, जंगली और खेती जीवों में शामिल हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि वे आकार और आकार, साथ ही जीवन प्रत्याशा और कई अन्य गुण में एक दूसरे से बहुत अलग हैं। यह आदेश सुरक्षित रूप से वन्य जीवन के इस दंगे में नेविगेट करने के लिए है, और फूल वाले पौधों के वर्गीकरण बनाया गया था। यह परिवारों की एक बड़ी संख्या के बीच एक साथ लाया, इस तरह के समूहों और उपसमूहों, एक प्रजाति, वंश, आदेश, वर्ग और विभाजन के रूप में बनाने। इन समूहों संरचना की विशेषताओं, सामुदायिक विकास और पौधों के प्रजनन के तरीकों के आधार पर बनाया गया था। प्रमुख परिवर्तन वर्गीकृत किए गए थेएक सौ अठहत्तर नौ में पौधे पुस्तक, जिसे प्रसिद्ध वनस्पतिविद एंटोनी लॉरेंट जुसी द्वारा लिखा गया था, जिसका शीर्षक "प्राकृतिक आदेश में स्थित प्लांट जेनर" था, ने फूल विभाग को पंद्रह वर्गों में विभाजित किया, जिसमें लगभग एक सौ "प्राकृतिक आदेश" थे। इस काम ने फ्रांसीसी वनस्पतिविदों को विश्वव्यापी प्रसिद्धि लाई है, और उनके द्वारा आविष्कार किए गए अधिकांश नाम आज भी उपयोग किए जाते हैं। वन्यजीवन के कुछ प्रशंसकों नहीं करते हैंगंभीरता से इस तरह के जटिल विज्ञान, जैसे वनस्पति विज्ञान, लेकिन घर के पौधे लगाने की तरह। इस तरह के घर "वैज्ञानिक" अच्छी तरह से इनडोर पौधों के वर्गीकरण में आ सकते हैं, जो इस खंड को तीन समूहों में विभाजित करता हैः मध्यम रोशनी, छाया-सहिष्णु और हल्के-प्रेमियों के पौधे। पहले समूह में लगभग सभी ज्ञात इनडोर पौधों शामिल हैं। साइट्रस, हाइड्रेंजस, प्राइमरोस और बेगोनिया मध्यम प्रकाश के तहत बहुत अच्छा महसूस करते हैं। दूसरे समूह में फर्न, आईवी, इनडोर अंगूर और बॉक्सवुड, पौधे शामिल हैं जो बगीचे और सब्जी उद्यान के छायादार कोनों में काफी शांति से जीवित रहते हैं। तीसरा समूह सूर्य, कैक्टि, नीलगिरी और बैल के बच्चे हैं, जो पौधे सूरज की कोमल किरणों के बिना अपने जीवन का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं और प्रकाश की कमी से जल्दी मर जाते हैं।
भारतीय जनता पार्टी युवाओं को जोड़ने के लिए अब एक नया प्रयास शुरु कर दिया है. इसकी जिम्मेदारी भाजपा युवा मोर्चा को दी गई है. इसी क्रम में बीजेपी युवाओं को जोड़ने के लिए Y-20 चौपाल का आयोजन करेगी. Y-20 चौपाल अभियान 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक संचालित हो रहा है. प्रत्येक जिले में 350-400 चौपाल व ई-चौपाल आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसको लेकर 98 संगठनात्मक जिलों में ये चौपाल लगाने की योजना है. इन कार्यक्रमों में समाज के विद्वान व प्रतिष्ठित लोग मुख्य वक्ता के रूप में ज़िलों में पहुँचेंगे. कार्यक्रम का आयोजन विधानसभा स्तर पर ग़ैर राजनीतिक तरीक़े से किया जाएगा. सभी क्षेत्र के युवा को जोड़कर एक चौपाल लगाई जाएगी. इन चौपालों में कोई भाषण नहीं होगा. कोई राजनीतिक बात नहीं होगी. बीजेपी युवाओं से संपर्क करने के बाद उनको पार्टी में जोड़ने का प्रयास करेगी. इसको लेकर अब पूरे प्रदेश में तैयारियों को अंजाम दिया जा रहा है. शीघ्र ही इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर उतारने की योजना है. बता दें कि बीजेपी पूरी तरह से लोकसभा चुनाव में उतर चुकी है वहीं विपक्ष अपने एक होने का रोना रोता नजर आ रहा है. बीजेपी चुनाव को युद्ध और रणभूमि की तरह लड़ती है. इसीलिए बीजेपी चुनाव में जीत का लक्ष्य प्राप्त करती है।
भारतीय जनता पार्टी युवाओं को जोड़ने के लिए अब एक नया प्रयास शुरु कर दिया है. इसकी जिम्मेदारी भाजपा युवा मोर्चा को दी गई है. इसी क्रम में बीजेपी युवाओं को जोड़ने के लिए Y-बीस चौपाल का आयोजन करेगी. Y-बीस चौपाल अभियान एक अप्रैल से पंद्रह अप्रैल तक संचालित हो रहा है. प्रत्येक जिले में तीन सौ पचास-चार सौ चौपाल व ई-चौपाल आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसको लेकर अट्ठानवे संगठनात्मक जिलों में ये चौपाल लगाने की योजना है. इन कार्यक्रमों में समाज के विद्वान व प्रतिष्ठित लोग मुख्य वक्ता के रूप में ज़िलों में पहुँचेंगे. कार्यक्रम का आयोजन विधानसभा स्तर पर ग़ैर राजनीतिक तरीक़े से किया जाएगा. सभी क्षेत्र के युवा को जोड़कर एक चौपाल लगाई जाएगी. इन चौपालों में कोई भाषण नहीं होगा. कोई राजनीतिक बात नहीं होगी. बीजेपी युवाओं से संपर्क करने के बाद उनको पार्टी में जोड़ने का प्रयास करेगी. इसको लेकर अब पूरे प्रदेश में तैयारियों को अंजाम दिया जा रहा है. शीघ्र ही इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर उतारने की योजना है. बता दें कि बीजेपी पूरी तरह से लोकसभा चुनाव में उतर चुकी है वहीं विपक्ष अपने एक होने का रोना रोता नजर आ रहा है. बीजेपी चुनाव को युद्ध और रणभूमि की तरह लड़ती है. इसीलिए बीजेपी चुनाव में जीत का लक्ष्य प्राप्त करती है।
नई दिल्ली, मार्च 7। पोस्ट ऑफिस में अगर आप भी निवेश करते है तो ये खबर आपके लिए है। 1 अप्रैल से पोस्ट ऑफिस ने अपने खास नियम में कुछ बदलाव करने जा रहा है। पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में इनवेस्ट करने वाले ग्राहकों के लिए भारतीय डाक से बड़ी अपडेट सामने आ रही है। एमआईएस, एससीएसएस टाइम डिपॉजिट खातों पर ब्याज केवल खाताधारक के पोस्ट ऑफिस बचत खाते या बैंक खाते में 1 अप्रैल 2022 से जमा किया जाएगा। अगर कोई खाताधारक 31 मार्च, 2022 तक बचत खाते को एमआईएस, एससीएसएस, टाइम डिपॉजिट खातों से लिंक नहीं कर पात हैं तो बकाया ब्याज का भुगतान केवल पीओ बचत खाते में क्रेडिट या चेक द्वारा किया जाएगा। मिली रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2022 से मंथली इनकम स्कीम, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना खाता या टाइम डिपॉजिट खाते से कैश में ब्याज भुगतान की अनुमति नहीं होगी। 5 वर्षीय मंथली इनकम स्कीम (एमआईएस) के तहत ब्याज भुगतान केवल मासिक आधार पर होता है जबकि 5 वर्षीय सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम अकाउंट (एससीएसएस) में ब्याज का भुगतान तिमाही आधार पर होता है। टाइम डिपॉजिट खाते में ब्याज का भुगतान केवल वार्षिक आधार पर होता है। पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट- पोस्ट ऑफिस बचत खाते के मामले में खाताधारक एमआईएस, एससीएसएस, टाइम डिपॉजिट खातों को जोड़ने के लिए ऑटोमेटिक ट्रांसफर की सुविधा का लाभ उठा सकता है। जहां तक बैंक खाते की बात है तो इस मामले में जमाकर्ता को ब्याज राशि जमा करने के लिए एक कैंसिल चेक या बैंक खाते की पासबुक के पहले पृष्ठ की प्रति के साथ ईसीएस मैंडेट फॉर्म जमा करना होगा। - एमआईएस, एससीएसएस, टाइम डिपॉडिट खातों से सीधे ब्याज की निकासी नहीं की जाती है तो बचत खातों में जमा ब्याज पर अतिरिक्त ब्याज मिलेगा। - जमाकर्ता पोस्ट ऑफिस में गए बिना ड्यू इंट्रेस्ट निकाल सकते हैं और अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से उसका उपयोग कर सकते हैं। - प्रत्येक एमआईएस, एससीएसएस, टाइम डिपॉजिट खातों के लिए कई निकासी फॉर्म भरने से बचा जा सकता है। - जमाकर्ता अपने एमआईएस, एससीएसएस, टाइम डिपॉजिट खातों से पोस्ट ऑफिस बचत खाते के माध्यम से रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) खाते में ब्याज राशि के ऑटोमेटिक क्रेडिट की सुविधा का फायदा उठा सकते हैं।
नई दिल्ली, मार्च सात। पोस्ट ऑफिस में अगर आप भी निवेश करते है तो ये खबर आपके लिए है। एक अप्रैल से पोस्ट ऑफिस ने अपने खास नियम में कुछ बदलाव करने जा रहा है। पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में इनवेस्ट करने वाले ग्राहकों के लिए भारतीय डाक से बड़ी अपडेट सामने आ रही है। एमआईएस, एससीएसएस टाइम डिपॉजिट खातों पर ब्याज केवल खाताधारक के पोस्ट ऑफिस बचत खाते या बैंक खाते में एक अप्रैल दो हज़ार बाईस से जमा किया जाएगा। अगर कोई खाताधारक इकतीस मार्च, दो हज़ार बाईस तक बचत खाते को एमआईएस, एससीएसएस, टाइम डिपॉजिट खातों से लिंक नहीं कर पात हैं तो बकाया ब्याज का भुगतान केवल पीओ बचत खाते में क्रेडिट या चेक द्वारा किया जाएगा। मिली रिपोर्ट के मुताबिक, एक अप्रैल दो हज़ार बाईस से मंथली इनकम स्कीम, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना खाता या टाइम डिपॉजिट खाते से कैश में ब्याज भुगतान की अनुमति नहीं होगी। पाँच वर्षीय मंथली इनकम स्कीम के तहत ब्याज भुगतान केवल मासिक आधार पर होता है जबकि पाँच वर्षीय सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम अकाउंट में ब्याज का भुगतान तिमाही आधार पर होता है। टाइम डिपॉजिट खाते में ब्याज का भुगतान केवल वार्षिक आधार पर होता है। पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट- पोस्ट ऑफिस बचत खाते के मामले में खाताधारक एमआईएस, एससीएसएस, टाइम डिपॉजिट खातों को जोड़ने के लिए ऑटोमेटिक ट्रांसफर की सुविधा का लाभ उठा सकता है। जहां तक बैंक खाते की बात है तो इस मामले में जमाकर्ता को ब्याज राशि जमा करने के लिए एक कैंसिल चेक या बैंक खाते की पासबुक के पहले पृष्ठ की प्रति के साथ ईसीएस मैंडेट फॉर्म जमा करना होगा। - एमआईएस, एससीएसएस, टाइम डिपॉडिट खातों से सीधे ब्याज की निकासी नहीं की जाती है तो बचत खातों में जमा ब्याज पर अतिरिक्त ब्याज मिलेगा। - जमाकर्ता पोस्ट ऑफिस में गए बिना ड्यू इंट्रेस्ट निकाल सकते हैं और अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से उसका उपयोग कर सकते हैं। - प्रत्येक एमआईएस, एससीएसएस, टाइम डिपॉजिट खातों के लिए कई निकासी फॉर्म भरने से बचा जा सकता है। - जमाकर्ता अपने एमआईएस, एससीएसएस, टाइम डिपॉजिट खातों से पोस्ट ऑफिस बचत खाते के माध्यम से रेकरिंग डिपॉजिट खाते में ब्याज राशि के ऑटोमेटिक क्रेडिट की सुविधा का फायदा उठा सकते हैं।
दन्तिदुर्ग ( पांचवें ) के निःसन्तान मरने पर उसका चाचा कृष्णराज उत्तराधिकारी हुआ। इसने सोलंकियों का रहा सहा राज्य भी विजय कर लिया। इसने राइप नामक राजा को भी पराजय किया था। सुप्रख्यात् इलोरा (दक्षिण) की गुफा में पर्वत को काटकर 'कैलाश' नामक, जो भव्य मन्दिर बना हुआ है, वह इन्हीं के कला--प्रेम का आदर्श नमूना है। कृष्णराज के बाद उनका पुत्र गोविन्दराज राज्याधिकारी हुआ। यह बड़ा विलास प्रिय था । इसलिये इसके छोटे भाई ध्रुवराज ने इसका राज्य छीन लिया। ध्रुवराज ने 'निरुपम' और 'धारावर्ष' की पदवियाँ धारण कीं। इसने गौड़ों पर विजय प्राप्त करनेवाले वत्सराज पड़िहार को परास्त कर मारवाड़ में भगा दिया था। इसने उत्तर में अयोध्या और दक्षिण में काँची तक विजय प्राप्त की थी । धुवराज के बाद गोविन्दराज ( तीसरा ) राज्य-सिंहासन पर बैठा । इसने 'जगतुंग' और 'प्रभूतवर्ष' का खिताब धारण किया । यह महा प्रतापी था । इसने युवराज पद पर रहते हुए ही बहुत सी लड़ाईयों में विजय प्राप्त में की थी। इसने दक्षिण के बारह राजाओं की संयुक्त सेना पर भी अपूर्व विजय प्राप्त की थी । दक्षिण के लाट-देश से लगाकर करीब २ रामेश्वर तक का सारा प्रदेश इसके अधिकार में था। ईस्वी सन् ८१५ तक इसने राज्य किया। गोविन्द राज ( तीसरे ) के बाद उसका पुत्र अमोघ वर्ष राज्य-सिंहा• बैठा । 'वीर नारायण' 'नृप तुंग' आदि इसकी उपाधियाँ थीं । इसने बाल्यावस्था ही में राज्य पाया था। इसकी सोलंकी राजा विजयादित्य से कई लड़ाईयाँ हुई थीं । इसने मान्यखेट ( मालखेड़, निजाम राज्य ) को अपनी राजधानी बनाया था। इसने लग भग ६३ वर्ष तक राज्य किया। यह स्वयं बड़ा विद्वान था और विद्वानों का बड़ा सम्मान करता था। इसकी बनाई हुई 'प्रश्नोत्तर रत्न मालिका, नामक एक छोटीसी पुस्तिका होने पर भी 'रत्नमाला' के समान कंठ में धारण करने योग्य है। प्राचीन समय में इस
दन्तिदुर्ग के निःसन्तान मरने पर उसका चाचा कृष्णराज उत्तराधिकारी हुआ। इसने सोलंकियों का रहा सहा राज्य भी विजय कर लिया। इसने राइप नामक राजा को भी पराजय किया था। सुप्रख्यात् इलोरा की गुफा में पर्वत को काटकर 'कैलाश' नामक, जो भव्य मन्दिर बना हुआ है, वह इन्हीं के कला--प्रेम का आदर्श नमूना है। कृष्णराज के बाद उनका पुत्र गोविन्दराज राज्याधिकारी हुआ। यह बड़ा विलास प्रिय था । इसलिये इसके छोटे भाई ध्रुवराज ने इसका राज्य छीन लिया। ध्रुवराज ने 'निरुपम' और 'धारावर्ष' की पदवियाँ धारण कीं। इसने गौड़ों पर विजय प्राप्त करनेवाले वत्सराज पड़िहार को परास्त कर मारवाड़ में भगा दिया था। इसने उत्तर में अयोध्या और दक्षिण में काँची तक विजय प्राप्त की थी । धुवराज के बाद गोविन्दराज राज्य-सिंहासन पर बैठा । इसने 'जगतुंग' और 'प्रभूतवर्ष' का खिताब धारण किया । यह महा प्रतापी था । इसने युवराज पद पर रहते हुए ही बहुत सी लड़ाईयों में विजय प्राप्त में की थी। इसने दक्षिण के बारह राजाओं की संयुक्त सेना पर भी अपूर्व विजय प्राप्त की थी । दक्षिण के लाट-देश से लगाकर करीब दो रामेश्वर तक का सारा प्रदेश इसके अधिकार में था। ईस्वी सन् आठ सौ पंद्रह तक इसने राज्य किया। गोविन्द राज के बाद उसका पुत्र अमोघ वर्ष राज्य-सिंहा• बैठा । 'वीर नारायण' 'नृप तुंग' आदि इसकी उपाधियाँ थीं । इसने बाल्यावस्था ही में राज्य पाया था। इसकी सोलंकी राजा विजयादित्य से कई लड़ाईयाँ हुई थीं । इसने मान्यखेट को अपनी राजधानी बनाया था। इसने लग भग तिरेसठ वर्ष तक राज्य किया। यह स्वयं बड़ा विद्वान था और विद्वानों का बड़ा सम्मान करता था। इसकी बनाई हुई 'प्रश्नोत्तर रत्न मालिका, नामक एक छोटीसी पुस्तिका होने पर भी 'रत्नमाला' के समान कंठ में धारण करने योग्य है। प्राचीन समय में इस
PATNA : सीएजी ने उठाया सवाल-80 हजार करोड़ रु. के खर्च का हिसाब नहीं दे रहे विभाग, सदन में सीएजी रिपोर्ट पेश : 9 साल का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित, सरकार को राजस्व की कमी और पीडी खाते में पड़े हैं 4377 करोड़ : राज्य का बजट आकार लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन उसकी तुलना में खर्च कम हो रही है। विभागों द्वारा जो खर्च किया भी जा रहा है उसका हिसाब देने में संबंधित विभाग आनाकानी कर रहा है। इससे गड़बड़ी की संभावना बढ़ती। नियंत्रक महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने वित्तीय वर्ष 2019-20 की अपनी रिपोर्ट में कहा कि लगभग 80 हजार करोड़ रुपए का खर्च का हिसाब सरकार नहीं दे रही है। यह राशि वित्तीय वर्ष 2011 से 2020 के बीच की है। यह राशि साल दर साल बढ़ती जा रही है। यानी सरकार इतनी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र अभी तक जमा नहीं की है। सीएजी ने लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र से राशि का दुरुपयोग और गबन की संभावना बढ़ने की तरफ इशारा किया है। 31 मार्च 2019 तक 58242 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र बकाया था, जो 31 मार्च 2020 तक बढ़कर 79691 करोड़ रुपया हो गया। वित्तीय वर्ष में 2019-20 में 21448 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है। विधानसभा में गुरुवार को उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने सीएजी की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखा। बिहार जैसे राज्यों में खुद के राजस्व की कमी रहती है। लेकिन राज्य के 175 पीडी खाते (पसर्नल डिपोजिट खाते) 4377 करोड़ हैं। चार साल से 9 पीडी खाते में करीब 66 करोड़ रुपए, पड़े हुए हंै। इस राशि को राज्य के समेकित निधि में जमा किया जाना चाहिए। पीएल खातों में भी 35 करोड से अधिक राशि पड़ी हुई है। लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र वाले टॉप पांच विभाग है। जिसमें मुख्य रूप से पंचायती राज विभाग, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग व नगर विकास एवं आवास विभाग प्रमुख है।
PATNA : सीएजी ने उठाया सवाल-अस्सी हजार करोड़ रु. के खर्च का हिसाब नहीं दे रहे विभाग, सदन में सीएजी रिपोर्ट पेश : नौ साल का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित, सरकार को राजस्व की कमी और पीडी खाते में पड़े हैं चार हज़ार तीन सौ सतहत्तर करोड़ : राज्य का बजट आकार लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन उसकी तुलना में खर्च कम हो रही है। विभागों द्वारा जो खर्च किया भी जा रहा है उसका हिसाब देने में संबंधित विभाग आनाकानी कर रहा है। इससे गड़बड़ी की संभावना बढ़ती। नियंत्रक महालेखापरीक्षक ने वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस की अपनी रिपोर्ट में कहा कि लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपए का खर्च का हिसाब सरकार नहीं दे रही है। यह राशि वित्तीय वर्ष दो हज़ार ग्यारह से दो हज़ार बीस के बीच की है। यह राशि साल दर साल बढ़ती जा रही है। यानी सरकार इतनी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र अभी तक जमा नहीं की है। सीएजी ने लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र से राशि का दुरुपयोग और गबन की संभावना बढ़ने की तरफ इशारा किया है। इकतीस मार्च दो हज़ार उन्नीस तक अट्ठावन हज़ार दो सौ बयालीस करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र बकाया था, जो इकतीस मार्च दो हज़ार बीस तक बढ़कर उन्यासी हज़ार छः सौ इक्यानवे करोड़ रुपया हो गया। वित्तीय वर्ष में दो हज़ार उन्नीस-बीस में इक्कीस हज़ार चार सौ अड़तालीस करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है। विधानसभा में गुरुवार को उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने सीएजी की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखा। बिहार जैसे राज्यों में खुद के राजस्व की कमी रहती है। लेकिन राज्य के एक सौ पचहत्तर पीडी खाते चार हज़ार तीन सौ सतहत्तर करोड़ हैं। चार साल से नौ पीडी खाते में करीब छयासठ करोड़ रुपए, पड़े हुए हंै। इस राशि को राज्य के समेकित निधि में जमा किया जाना चाहिए। पीएल खातों में भी पैंतीस करोड से अधिक राशि पड़ी हुई है। लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र वाले टॉप पांच विभाग है। जिसमें मुख्य रूप से पंचायती राज विभाग, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग व नगर विकास एवं आवास विभाग प्रमुख है।
स्टेट डेस्क/पटना। मंगलवार को चार महत्वपूर्ण दलों की बैठकें होंगी। कल राजद, जदयू, कांग्रेस और हम की बैठक होगी। वही राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह का सबसे बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हम हर युद्ध के लिए तैयार है। अभी उन्होंने किसी तरह के गठबंधन की बात से इनकार किया है। जगदानंद ने कहा कि नीतीश कुमार को हमने आमंत्रित नहीं किया है। गठबंधन की कोई बात नहीं हुई है जबकि जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का कहना है कि पार्टी के विधायकों से फीडबैक लेने के लिए जेडीयू विधायक दल की बैठक बुलाई गयी है। जगदानंद ने कहा कि राजद ने 2024-25 चुनाव की तैयारियों के लिए कल की बैठक बुलाई है। जगदानंद सिंह ने कह दिया कि हर युद्ध के लिए हम तैयार हैं। वही जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि आरसीपी प्रकरण को लेकर जेडीयू ने विधायक दल की बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधायक दल की बैठक बुलाई है जिसमें आरसीपी के जाने के बाद की परिस्थितियों पर चर्चा होगी। जबकि हम पार्टी के संरक्षण जीतन राम मांझी ने यह क्लीयर कर दिया कि वे नीतीश कुमार के साथ हैं। हालांकि कि एनडीए में टूट की संभावना से जीतन राम मांझी ने भी इनकार किया है। बता दें कि जेडीयू ने विधायक दल की बैठक को लेकर घोषणा कर दी है। फिलहाल बिहार में जो ताजा राजनीतिक हालात हैं ऐसे में यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है कि बैठक आरसीपी प्रकरण को लेकर बुलाई गई है।
स्टेट डेस्क/पटना। मंगलवार को चार महत्वपूर्ण दलों की बैठकें होंगी। कल राजद, जदयू, कांग्रेस और हम की बैठक होगी। वही राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह का सबसे बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हम हर युद्ध के लिए तैयार है। अभी उन्होंने किसी तरह के गठबंधन की बात से इनकार किया है। जगदानंद ने कहा कि नीतीश कुमार को हमने आमंत्रित नहीं किया है। गठबंधन की कोई बात नहीं हुई है जबकि जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का कहना है कि पार्टी के विधायकों से फीडबैक लेने के लिए जेडीयू विधायक दल की बैठक बुलाई गयी है। जगदानंद ने कहा कि राजद ने दो हज़ार चौबीस-पच्चीस चुनाव की तैयारियों के लिए कल की बैठक बुलाई है। जगदानंद सिंह ने कह दिया कि हर युद्ध के लिए हम तैयार हैं। वही जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि आरसीपी प्रकरण को लेकर जेडीयू ने विधायक दल की बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधायक दल की बैठक बुलाई है जिसमें आरसीपी के जाने के बाद की परिस्थितियों पर चर्चा होगी। जबकि हम पार्टी के संरक्षण जीतन राम मांझी ने यह क्लीयर कर दिया कि वे नीतीश कुमार के साथ हैं। हालांकि कि एनडीए में टूट की संभावना से जीतन राम मांझी ने भी इनकार किया है। बता दें कि जेडीयू ने विधायक दल की बैठक को लेकर घोषणा कर दी है। फिलहाल बिहार में जो ताजा राजनीतिक हालात हैं ऐसे में यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है कि बैठक आरसीपी प्रकरण को लेकर बुलाई गई है।
अमृतांशी जोशी, भोपाल। मध्यप्रदेश बोर्ड (Madhya Pradesh Board) में जल्द ही नई शिक्षा नीति (New Education Policy) लागू होगी। इसके तहत छात्रों को विषय (Subject) चुनने की आजादी मिलेगी। माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board of Secondary Education) जल्द ही बड़ा बदलाव करने जा रहा है। स्टूडेंट्स को इसका फायदा आगामी सत्र से मिलेगा। एमपी बोर्ड में नई शिक्षा नीति के तहत स्टूडेंट्स गणित और भौतिक विज्ञान के साथ संगीत भी पढ़ सकेंगे। छात्रों को दसवीं से ही विषय चुनने की आज़ादी मिलेगी। माध्यमिक शिक्षा मंडल अगले सत्र से क्षेत्रीय भाषाओं के साथ जर्मन फ्रेंच और स्पेनिश भाषा चुनने का विकल्प देगा। जिससे अन्य देशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले स्टूडेंट्स को फायदा होगा। MP में 10वीं बोर्ड परीक्षा का पेपर लीक! साइंस का प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल, अधिकारी मौन, जिम्मेदार कौन ? 10वीं कक्षा के ऐसे छात्र जो आगे गणित विषय नहीं पढ़ना चाहते हैं, उन छात्रों के लिए आगामी सत्र से बड़ी सौगात मिलेगी। ऐसे स्टूडेंट्स के पास बेसिक मैथ का ऑप्शन होगा, जो छात्र गणित विषय लेकर आगे अध्ययन करना चाहते हैं, उनके लिए स्टेण्डर्ड गणित का विकल्प पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। इसके अलावा कक्षा 12वीं के स्टूडेंट्स की वर्तमान समय की मांग के अनुसार कुछ अतिरिक्त विषय इंजीनियरिंग ग्राफिक्स, इंटरप्रेन्योरशिप, लीगल स्टडीस, एप्लाइड मैथमेटिक्स के रूप में ले सकेंगे। हाईस्कूल के छात्रों के लिए भी जल्द ही अतिरिक्त विषय के रूप में ऐसे विषय होंगे। जिससे उन्हें हायर सेकेण्डरी में अपनी पसंद की फैकल्टी चुनने में मदद मिलेगी। अगर हाईस्कूल का छात्र चाहे तो वह वाणिज्य संकाय के विषय जैसे बुक कीपिंग, पेंटिंग, होम साइंस, कम्प्यूटर एप्लीकेशन जैसे विषय में से किसी एक सब्जेक्ट को चुन सकेगा।
अमृतांशी जोशी, भोपाल। मध्यप्रदेश बोर्ड में जल्द ही नई शिक्षा नीति लागू होगी। इसके तहत छात्रों को विषय चुनने की आजादी मिलेगी। माध्यमिक शिक्षा मंडल जल्द ही बड़ा बदलाव करने जा रहा है। स्टूडेंट्स को इसका फायदा आगामी सत्र से मिलेगा। एमपी बोर्ड में नई शिक्षा नीति के तहत स्टूडेंट्स गणित और भौतिक विज्ञान के साथ संगीत भी पढ़ सकेंगे। छात्रों को दसवीं से ही विषय चुनने की आज़ादी मिलेगी। माध्यमिक शिक्षा मंडल अगले सत्र से क्षेत्रीय भाषाओं के साथ जर्मन फ्रेंच और स्पेनिश भाषा चुनने का विकल्प देगा। जिससे अन्य देशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले स्टूडेंट्स को फायदा होगा। MP में दसवीं बोर्ड परीक्षा का पेपर लीक! साइंस का प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल, अधिकारी मौन, जिम्मेदार कौन ? दसवीं कक्षा के ऐसे छात्र जो आगे गणित विषय नहीं पढ़ना चाहते हैं, उन छात्रों के लिए आगामी सत्र से बड़ी सौगात मिलेगी। ऐसे स्टूडेंट्स के पास बेसिक मैथ का ऑप्शन होगा, जो छात्र गणित विषय लेकर आगे अध्ययन करना चाहते हैं, उनके लिए स्टेण्डर्ड गणित का विकल्प पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। इसके अलावा कक्षा बारहवीं के स्टूडेंट्स की वर्तमान समय की मांग के अनुसार कुछ अतिरिक्त विषय इंजीनियरिंग ग्राफिक्स, इंटरप्रेन्योरशिप, लीगल स्टडीस, एप्लाइड मैथमेटिक्स के रूप में ले सकेंगे। हाईस्कूल के छात्रों के लिए भी जल्द ही अतिरिक्त विषय के रूप में ऐसे विषय होंगे। जिससे उन्हें हायर सेकेण्डरी में अपनी पसंद की फैकल्टी चुनने में मदद मिलेगी। अगर हाईस्कूल का छात्र चाहे तो वह वाणिज्य संकाय के विषय जैसे बुक कीपिंग, पेंटिंग, होम साइंस, कम्प्यूटर एप्लीकेशन जैसे विषय में से किसी एक सब्जेक्ट को चुन सकेगा।
रूस-यूक्रेन के बीच पिछले 7 महीने से चल रहा युद्ध अब खतरनाक होता जा रहा है। पहले की तुलना में रूस के ज्यादा उग्र होने की एक वजह पुतिन के सबसे भरोसेमंद कमांडर सर्गेई सुरोविकिन भी हैं। आखिर कौन हैं सुरोविकिन और क्यों उन्हें कहा जाता है सबसे निर्दयी कमांडर, आइए जानते हैं। Russian Commonder Sergey Surovikin: रूस-यूक्रेन के बीच पिछले 7 महीने से चल रहा युद्ध अब खतरनाक होता जा रहा है। क्रीमिया ब्रिज पर हमले के बाद से ही रूस बुरी तरह बौखलाया हुआ है और यही वजह है कि उसने एक ही दिन में यूक्रेन की राजधानी कीव पर 83 मिसाइलें दागीं। पहले की तुलना में रूस के ज्यादा उग्र होने की एक वजह पुतिन के सबसे भरोसेमंद कमांडर सर्गेई सुरोविकिन भी हैं। सर्गेई सुरोविकिन वही हैं, जिन्होंने सीरिया में लड़ाकू मिशन पर काम करते हुए लाशों की झड़ी लगा दी थी। उन्हें दुनिया का सबसे क्रूर कमांडर भी कहा जाता है। महीनेभर पहले ही बने ओवरऑल कमांडर : सर्गेई सुरोविकिन को रूसी रक्षा मंत्रालय ने 8 सितंबर को रूसी सेना के ओवरऑल कमांडर के रूप में नियुक्त किया है। 55 साल के जनरल सर्गेई सुरोविकिन ओवरऑल कमांडर बनने से पहले रूसी एयरफोर्स की कमान संभाल रहे थे। पुतिन ने नए जनरल को ऐसे समय में नियुक्त किया है, जब यूक्रेनी सेनाएं रूस पर भारी पड़ती नजर आ रही थीं। कौन हैं सर्गेई सुरोविकिन? सुरोविकिन का जन्म 11 अक्टूबर 1966 को साइबेरिया के नोवोसिबिर्स्क शहर में हुआ था। सुरोविकिन की पैदाइश उस वक्त हुई, जब रूस सोवियत संघ कहलाता था। 1987 में सुरोविकिन सोवियत सेना में शामिल हुए। सुरोविकिन 2004 में चेचेन्या में इस्लामिक अलगाववादियों के खिलाफ रूसी सैन्य कार्रवाई में भी शामिल थे। 2013 से 2017 के दौरान सुरोविकिन ईस्टर्न मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के कमांडर थे। क्यों निर्दयी कमांडर कहलाते हैं सुरोविकिन? - 2017 में सर्गेई सुरोविकिन सीरिया के तानाशाह बशर अल असद की मदद के लिए चलाए गए रूसी सैन्य अभियान का हिस्सा थे। इस दौरान उन्होंने सीरिया में असद के विद्रोहियों की लाशों के ढेर लगा दिए थे। - सीरियाई विद्रोहियों के खिलाफ चलाए गए रूसी सेना के ऑपरेशन में सुरोविकिन ने असद के दुश्मनों को नाको चने चबवा दिए थे। यही वजह थी कि उन्हें 2017 में हीरो ऑफ द रशियन फेडरेन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। - 2017 में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की मदद के लिए रूसी सेना की कमान संभालने वाले सुरोविकिन ने न सिर्फ विद्रोही गुटों को ठिकाने लगाया बल्कि आम जनता को भी नहीं बख्शा। - सुरोविकिन ने सीरिया के अलेप्पो में इतने बम गिराए कि पूरा शहर खंडहर में बदल गया। 2019 में भी सुरोविकिन ने सीरिया के इदलिब शहर पर जमकर बमबारी की, जिसमें बेगुनाह लोगों की लाशों के ढेर लग गए थे। इंसानी जानों की जरा भी परवाह नहीं : सर्गेई सुरोविकिन के साथ काम कर चुके रूसी रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व ऑफिसर के मुताबिक, 10 अक्टूबर को यूक्रेन की राजधानी कीव में हुए मिसाइल हमले से वो जरा भी हैरत में नहीं हैं, क्योंकि सुरोविकिन इंसानी जानों की जरा भी परवाह नहीं करते हैं। अब उन्हें इस बात का भी डर है कि सुरोविकिन के हाथ कहीं पूरी तरह यूक्रेन की बेगुनाह जनता के खून से न सन जाएं। ये भी देखें : क्या है क्रीमिया ब्रिज जिसकी वजह से बौखलाया रूस, क्यों समझा जा रहा पुतिन की शान पर हमला?
रूस-यूक्रेन के बीच पिछले सात महीने से चल रहा युद्ध अब खतरनाक होता जा रहा है। पहले की तुलना में रूस के ज्यादा उग्र होने की एक वजह पुतिन के सबसे भरोसेमंद कमांडर सर्गेई सुरोविकिन भी हैं। आखिर कौन हैं सुरोविकिन और क्यों उन्हें कहा जाता है सबसे निर्दयी कमांडर, आइए जानते हैं। Russian Commonder Sergey Surovikin: रूस-यूक्रेन के बीच पिछले सात महीने से चल रहा युद्ध अब खतरनाक होता जा रहा है। क्रीमिया ब्रिज पर हमले के बाद से ही रूस बुरी तरह बौखलाया हुआ है और यही वजह है कि उसने एक ही दिन में यूक्रेन की राजधानी कीव पर तिरासी मिसाइलें दागीं। पहले की तुलना में रूस के ज्यादा उग्र होने की एक वजह पुतिन के सबसे भरोसेमंद कमांडर सर्गेई सुरोविकिन भी हैं। सर्गेई सुरोविकिन वही हैं, जिन्होंने सीरिया में लड़ाकू मिशन पर काम करते हुए लाशों की झड़ी लगा दी थी। उन्हें दुनिया का सबसे क्रूर कमांडर भी कहा जाता है। महीनेभर पहले ही बने ओवरऑल कमांडर : सर्गेई सुरोविकिन को रूसी रक्षा मंत्रालय ने आठ सितंबर को रूसी सेना के ओवरऑल कमांडर के रूप में नियुक्त किया है। पचपन साल के जनरल सर्गेई सुरोविकिन ओवरऑल कमांडर बनने से पहले रूसी एयरफोर्स की कमान संभाल रहे थे। पुतिन ने नए जनरल को ऐसे समय में नियुक्त किया है, जब यूक्रेनी सेनाएं रूस पर भारी पड़ती नजर आ रही थीं। कौन हैं सर्गेई सुरोविकिन? सुरोविकिन का जन्म ग्यारह अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ छयासठ को साइबेरिया के नोवोसिबिर्स्क शहर में हुआ था। सुरोविकिन की पैदाइश उस वक्त हुई, जब रूस सोवियत संघ कहलाता था। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में सुरोविकिन सोवियत सेना में शामिल हुए। सुरोविकिन दो हज़ार चार में चेचेन्या में इस्लामिक अलगाववादियों के खिलाफ रूसी सैन्य कार्रवाई में भी शामिल थे। दो हज़ार तेरह से दो हज़ार सत्रह के दौरान सुरोविकिन ईस्टर्न मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के कमांडर थे। क्यों निर्दयी कमांडर कहलाते हैं सुरोविकिन? - दो हज़ार सत्रह में सर्गेई सुरोविकिन सीरिया के तानाशाह बशर अल असद की मदद के लिए चलाए गए रूसी सैन्य अभियान का हिस्सा थे। इस दौरान उन्होंने सीरिया में असद के विद्रोहियों की लाशों के ढेर लगा दिए थे। - सीरियाई विद्रोहियों के खिलाफ चलाए गए रूसी सेना के ऑपरेशन में सुरोविकिन ने असद के दुश्मनों को नाको चने चबवा दिए थे। यही वजह थी कि उन्हें दो हज़ार सत्रह में हीरो ऑफ द रशियन फेडरेन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। - दो हज़ार सत्रह में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की मदद के लिए रूसी सेना की कमान संभालने वाले सुरोविकिन ने न सिर्फ विद्रोही गुटों को ठिकाने लगाया बल्कि आम जनता को भी नहीं बख्शा। - सुरोविकिन ने सीरिया के अलेप्पो में इतने बम गिराए कि पूरा शहर खंडहर में बदल गया। दो हज़ार उन्नीस में भी सुरोविकिन ने सीरिया के इदलिब शहर पर जमकर बमबारी की, जिसमें बेगुनाह लोगों की लाशों के ढेर लग गए थे। इंसानी जानों की जरा भी परवाह नहीं : सर्गेई सुरोविकिन के साथ काम कर चुके रूसी रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व ऑफिसर के मुताबिक, दस अक्टूबर को यूक्रेन की राजधानी कीव में हुए मिसाइल हमले से वो जरा भी हैरत में नहीं हैं, क्योंकि सुरोविकिन इंसानी जानों की जरा भी परवाह नहीं करते हैं। अब उन्हें इस बात का भी डर है कि सुरोविकिन के हाथ कहीं पूरी तरह यूक्रेन की बेगुनाह जनता के खून से न सन जाएं। ये भी देखें : क्या है क्रीमिया ब्रिज जिसकी वजह से बौखलाया रूस, क्यों समझा जा रहा पुतिन की शान पर हमला?
Palamu : धरती पर हरियाली लाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए पर्यावरणविद् कौशल किशोर जायसवाल की ओर से शुरू की गयी मुहिम लगातार आगे बढ़ रही है. इस वर्ष नेपाल और भूटान के अलावा देश के 10 राज्यों में 2 लाख पौधों का वितरण और रोपण का संकल्प लेकर निकले श्री जायसवाल का कारवां अब बंगाल की ओर बढ़ चला है. इससे पहले पलामू जिले के हरिहरगंज कस्तूरबा विद्यालय में पर्यावरण जागरूकता को लेकर गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस दौरान जहां पौधा वितरण किया गया, वहीं पेड़ों पर राखी बांध कर उनकी रक्षा का संकल्प लिया गया. गोष्ठी का उद्घाटन विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पर्यावरण धर्म एवं वन राखी मूवमेंट के प्रणेता कौशल किशोर जायसवाल ने किया. इस दौरान उन्होंने अमरूद, अनार और महोगनी के पौधों का निःशुलक वितरण भी किया. मौके पर जायसवाल ने शिक्षकों और छात्राओं को पर्यावरण धर्म का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि अभी सावन के महीने में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा. छात्राएं-महिलाएं अपने भाइयों को रक्षा बंधन करने के साथ-साथ पेड़ों को भी राखी बांधे और उनकी सुरक्षा का संकल्प लें. उन्होंने कहा कि वृक्ष भाई की सुरक्षा से धरती पर 84 लाख योनियों की सुरक्षा होगी. पर्यावरणविद् कौशल ने कहा कि बढ़ते तापमान को रोकने का एक ही विकल्प है कि ज्यादा से ज्यादा पौधे लगायें. आने वाले समय में गर्मी के साथ-साथ बारिश के मौसम में भी पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो सकती है. इससे बचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण धर्म के 8 मूल मंत्रों को अपनाना होगा. अध्यक्षता कर रही विद्यालय की वार्डन रॉकी मुक्ता ने कहा कि पहले भी पर्यावरणविद् कौशल द्वारा उनके विद्यालय में पौधों का वितरण किया गया. आज उनके द्वारा दिए गए पौधे वृक्ष हो गए हैं. कार्यक्रम का संचालन सावित्री कुमारी ने किया. मौके पर बलराम सिंह, भावना कुमारी, सुनीता कुमारी, अनुसूर्या कुमारी गुप्ता, रिंकू कुमारी, सतीश कुमार ठाकुर, राजन कुमार, सोनी कुमारी सहित सभी छात्राओं ने पौधे लगाने और उसे बचाने की शपथ ली.
Palamu : धरती पर हरियाली लाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए पर्यावरणविद् कौशल किशोर जायसवाल की ओर से शुरू की गयी मुहिम लगातार आगे बढ़ रही है. इस वर्ष नेपाल और भूटान के अलावा देश के दस राज्यों में दो लाख पौधों का वितरण और रोपण का संकल्प लेकर निकले श्री जायसवाल का कारवां अब बंगाल की ओर बढ़ चला है. इससे पहले पलामू जिले के हरिहरगंज कस्तूरबा विद्यालय में पर्यावरण जागरूकता को लेकर गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस दौरान जहां पौधा वितरण किया गया, वहीं पेड़ों पर राखी बांध कर उनकी रक्षा का संकल्प लिया गया. गोष्ठी का उद्घाटन विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पर्यावरण धर्म एवं वन राखी मूवमेंट के प्रणेता कौशल किशोर जायसवाल ने किया. इस दौरान उन्होंने अमरूद, अनार और महोगनी के पौधों का निःशुलक वितरण भी किया. मौके पर जायसवाल ने शिक्षकों और छात्राओं को पर्यावरण धर्म का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि अभी सावन के महीने में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा. छात्राएं-महिलाएं अपने भाइयों को रक्षा बंधन करने के साथ-साथ पेड़ों को भी राखी बांधे और उनकी सुरक्षा का संकल्प लें. उन्होंने कहा कि वृक्ष भाई की सुरक्षा से धरती पर चौरासी लाख योनियों की सुरक्षा होगी. पर्यावरणविद् कौशल ने कहा कि बढ़ते तापमान को रोकने का एक ही विकल्प है कि ज्यादा से ज्यादा पौधे लगायें. आने वाले समय में गर्मी के साथ-साथ बारिश के मौसम में भी पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो सकती है. इससे बचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों को अपनाना होगा. अध्यक्षता कर रही विद्यालय की वार्डन रॉकी मुक्ता ने कहा कि पहले भी पर्यावरणविद् कौशल द्वारा उनके विद्यालय में पौधों का वितरण किया गया. आज उनके द्वारा दिए गए पौधे वृक्ष हो गए हैं. कार्यक्रम का संचालन सावित्री कुमारी ने किया. मौके पर बलराम सिंह, भावना कुमारी, सुनीता कुमारी, अनुसूर्या कुमारी गुप्ता, रिंकू कुमारी, सतीश कुमार ठाकुर, राजन कुमार, सोनी कुमारी सहित सभी छात्राओं ने पौधे लगाने और उसे बचाने की शपथ ली.
पटनाः बिहार कर्मचारी चयन आयोग ने पेपर लीक होने के पश्चात् पहली शिफ्ट की परीक्षा कैंसिल कर दी है। इस सिलसिले में आयोग ने आदेश जारी किया है। दरअसल, 23 दिसंबर 2022 को तीसरी स्नातक स्तरीय प्रारंभिक परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। तत्पश्चात, आयोग द्वारा पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया गया था। वही इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने इस बाबत खबर देते हुए बताया था कि पहली शिफ्ट के बीच शांतिनिकेतन जुबली स्कूल, शांतिपुरी, मोहितहारी से एक उम्मीदवार को प्रश्न पत्र दिया गया था। इसने उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस सिलसिले में उसके खिलाफ धारा 420/467/468/469/120बी/34 IPS एवं आईटी की धारा 66 व 10 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया था कि मुकदमा दर्ज होने के पश्चात् जब मामले की तहकीकात की, तो पता चला कि परीक्षा आरम्भ होने के बाद तकरीबन 10:53 से 11:09 के बीच परीक्षा केंद्र से एक परीक्षार्थी ने फोटों खींचकर पेपर वायरल किया था। फोटो खींचने वाले परीक्षार्थी (मुख्य अभियुक्त) को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके साथ ही जिसको ये फोटो भेजा गया था, उसे भी गिरफ्तार किया गया है तथा अन्य अभियुक्तों की भी पहचान कर ली गई। बता दें कि BSSC द्वारा लगभग 8 वर्ष पश्चात् भर्ती निकाली गई हैं। इसके जरिए कुल 2187 रिक्तियां भरी जाएंगी। बिहार के सभी 38 जिलों में 528 केंद्रों पर यह परीक्षा की गई। इसमें लगभग 9 लाख परीक्षार्थी सम्मिलित हुए।
पटनाः बिहार कर्मचारी चयन आयोग ने पेपर लीक होने के पश्चात् पहली शिफ्ट की परीक्षा कैंसिल कर दी है। इस सिलसिले में आयोग ने आदेश जारी किया है। दरअसल, तेईस दिसंबर दो हज़ार बाईस को तीसरी स्नातक स्तरीय प्रारंभिक परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। तत्पश्चात, आयोग द्वारा पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया गया था। वही इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चौबीस घंटाटे के भीतर मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने इस बाबत खबर देते हुए बताया था कि पहली शिफ्ट के बीच शांतिनिकेतन जुबली स्कूल, शांतिपुरी, मोहितहारी से एक उम्मीदवार को प्रश्न पत्र दिया गया था। इसने उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस सिलसिले में उसके खिलाफ धारा चार सौ बीस/चार सौ सरसठ/चार सौ अड़सठ/चार सौ उनहत्तर/एक सौ बीसबी/चौंतीस IPS एवं आईटी की धारा छयासठ व दस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया था कि मुकदमा दर्ज होने के पश्चात् जब मामले की तहकीकात की, तो पता चला कि परीक्षा आरम्भ होने के बाद तकरीबन दस:तिरेपन से ग्यारह:नौ के बीच परीक्षा केंद्र से एक परीक्षार्थी ने फोटों खींचकर पेपर वायरल किया था। फोटो खींचने वाले परीक्षार्थी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके साथ ही जिसको ये फोटो भेजा गया था, उसे भी गिरफ्तार किया गया है तथा अन्य अभियुक्तों की भी पहचान कर ली गई। बता दें कि BSSC द्वारा लगभग आठ वर्ष पश्चात् भर्ती निकाली गई हैं। इसके जरिए कुल दो हज़ार एक सौ सत्तासी रिक्तियां भरी जाएंगी। बिहार के सभी अड़तीस जिलों में पाँच सौ अट्ठाईस केंद्रों पर यह परीक्षा की गई। इसमें लगभग नौ लाख परीक्षार्थी सम्मिलित हुए।
चंबा - चंबा के साहो क्षेत्र में पड़ने वाले जडेरा एवं बरौर सहित करीब पांच दर्जन गावं दो दिनों से अंधेरे में है। परीक्षा के दौरान एन वक्त पर बत्ती गुल होने से छात्रों के साथ अविभावकों की भी टेंशन बढ़ गई है। वर्षभर की कमाई के लिए आखिरी समय पर रिवाइज करने के वक्त बिजली न होने से दिये एवं अन्य साधनों के सहारे पढ़ाई करने पर काफी दिक्कते झेलनी पड़ रही हैं। क्षेत्रवासी मनोज, राहुल, सुधीर, विनोद, अनित, अजीत एवं बॅवी सहित अन्य का कहना है कि दो दिनों से बिजली न होने से लोगों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में हर कार्य बिजली पर निर्भर होने से बिन बिजली के कई तरह के कार्य डिस्टर्व हो गए हैं। घरों में मनोरंज के साधन ठप पड़े हुए हैं। साथ ही लोगों को मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए भी कहीं ओर गांव में जाना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षेत्र में कई दिनों से बिजली की समस्या चल रही है। बार-बार कट के साथ कई दफा आधा-आधा दिन तक बिजली गुल रहती है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने बोर्ड से बिजली की सप्लाई सुचारू करने की मांग उठाई है, ताकि परीक्षा के दिनों में बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्व न हो।
चंबा - चंबा के साहो क्षेत्र में पड़ने वाले जडेरा एवं बरौर सहित करीब पांच दर्जन गावं दो दिनों से अंधेरे में है। परीक्षा के दौरान एन वक्त पर बत्ती गुल होने से छात्रों के साथ अविभावकों की भी टेंशन बढ़ गई है। वर्षभर की कमाई के लिए आखिरी समय पर रिवाइज करने के वक्त बिजली न होने से दिये एवं अन्य साधनों के सहारे पढ़ाई करने पर काफी दिक्कते झेलनी पड़ रही हैं। क्षेत्रवासी मनोज, राहुल, सुधीर, विनोद, अनित, अजीत एवं बॅवी सहित अन्य का कहना है कि दो दिनों से बिजली न होने से लोगों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में हर कार्य बिजली पर निर्भर होने से बिन बिजली के कई तरह के कार्य डिस्टर्व हो गए हैं। घरों में मनोरंज के साधन ठप पड़े हुए हैं। साथ ही लोगों को मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए भी कहीं ओर गांव में जाना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षेत्र में कई दिनों से बिजली की समस्या चल रही है। बार-बार कट के साथ कई दफा आधा-आधा दिन तक बिजली गुल रहती है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने बोर्ड से बिजली की सप्लाई सुचारू करने की मांग उठाई है, ताकि परीक्षा के दिनों में बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्व न हो।
सैदपुर थाना क्षेत्र के हीरानंदपुर गांव के पास मंगलवार की शाम बलिया से वाराणसी जा रही एक यात्री बस लगभग 25 फीट खाई में पलट गई। जिसमें एक दर्जन यात्री घायल हो गए। जिन्हें तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैदपुर पहुंचाया गया। जहां उनका उपचार किया जा रहा है। वही घटनास्थल पर बस के नीचे कुछ यात्रियों के दबे होने की आशंका के मद्देनजर, जेसीबी बुलाकर राहत और बचाव कार्य किया जा रहा है। यात्रियों को बचाने के लिए मौके पर मौजूद सैदपुर कोतवाल तेज बहादुर सिंह स्वयं कीचड़ में उतर कर, राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं। वहीं उप जिलाधिकारी ओम प्रकाश गुप्ता घटनास्थल का निरीक्षण कर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर घायल यात्रियों के प्राथमिक उपचार की व्यवस्था संभाले हुए हैं। 108 की चार एंबुलेंस बचाव कार्य में लगी हुई है। जो बिना किसी दूसरे घायल के इंतजार में, घटनास्थल से सैदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर लगा रहीं हैं। बस के कंडक्टर संतोष ने बताया कि सैदपुर सादात मार्ग पर हीरानंदपुर और ककरही गांव के बीच स्थित एक पुलिया से ठीक पहले, बस एक ट्रक से बचने के चक्कर में 30 फुट नीचे खाई में पलट गई। घटनास्थल पर बरसात का पानी भरे होने के कारण, बचाव कार्य में थोड़ी समस्या आ रही है। फिलहाल मौके पर जेसीबी के साथ ही उप जिला अधिकारी के निर्देश पर हाइड्रा लिफ्ट मशीन भी मंगाई जा रही है। घायलों में बस का कंडक्टर संतोष 50 पुत्र स्वर्गीय नरसिंह मिश्र निवासी नैढ़ी जनपद चंदौली, विक्की 27 पुत्र स्वर्गीय सीताराम गुप्ता तथा उसकी मां लालसा देवी 45 निवासी रसड़ा बलिया, ओमप्रकाश सिंह 57 पुत्र राम मूरत सिंह निवासी मनिहारी, सुमित्रा 35 पत्नी सुरेंद्र निवासी डहरा कला, चंदा 35 पत्नी त्रिलोकी निवासी डहरा कला व चंदा की 3 वर्षीय पुत्री अपर्णा, प्रतिमा सिंह 40 पत्नी नागेंद्र निवासी शादियाबाद और इसरार अहमद पुत्र इजहार निवासी शादियाबाद है। जबकि आधा दर्जन से ज्यादा बेहद मामूली घायल यात्री, मौके से दूसरे वाहन के सहारे अपने गंतव्य को रवाना हो गए। घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सैदपुर थाना क्षेत्र के हीरानंदपुर गांव के पास मंगलवार की शाम बलिया से वाराणसी जा रही एक यात्री बस लगभग पच्चीस फीट खाई में पलट गई। जिसमें एक दर्जन यात्री घायल हो गए। जिन्हें तत्काल एक सौ आठ एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैदपुर पहुंचाया गया। जहां उनका उपचार किया जा रहा है। वही घटनास्थल पर बस के नीचे कुछ यात्रियों के दबे होने की आशंका के मद्देनजर, जेसीबी बुलाकर राहत और बचाव कार्य किया जा रहा है। यात्रियों को बचाने के लिए मौके पर मौजूद सैदपुर कोतवाल तेज बहादुर सिंह स्वयं कीचड़ में उतर कर, राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं। वहीं उप जिलाधिकारी ओम प्रकाश गुप्ता घटनास्थल का निरीक्षण कर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर घायल यात्रियों के प्राथमिक उपचार की व्यवस्था संभाले हुए हैं। एक सौ आठ की चार एंबुलेंस बचाव कार्य में लगी हुई है। जो बिना किसी दूसरे घायल के इंतजार में, घटनास्थल से सैदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर लगा रहीं हैं। बस के कंडक्टर संतोष ने बताया कि सैदपुर सादात मार्ग पर हीरानंदपुर और ककरही गांव के बीच स्थित एक पुलिया से ठीक पहले, बस एक ट्रक से बचने के चक्कर में तीस फुट नीचे खाई में पलट गई। घटनास्थल पर बरसात का पानी भरे होने के कारण, बचाव कार्य में थोड़ी समस्या आ रही है। फिलहाल मौके पर जेसीबी के साथ ही उप जिला अधिकारी के निर्देश पर हाइड्रा लिफ्ट मशीन भी मंगाई जा रही है। घायलों में बस का कंडक्टर संतोष पचास पुत्र स्वर्गीय नरसिंह मिश्र निवासी नैढ़ी जनपद चंदौली, विक्की सत्ताईस पुत्र स्वर्गीय सीताराम गुप्ता तथा उसकी मां लालसा देवी पैंतालीस निवासी रसड़ा बलिया, ओमप्रकाश सिंह सत्तावन पुत्र राम मूरत सिंह निवासी मनिहारी, सुमित्रा पैंतीस पत्नी सुरेंद्र निवासी डहरा कला, चंदा पैंतीस पत्नी त्रिलोकी निवासी डहरा कला व चंदा की तीन वर्षीय पुत्री अपर्णा, प्रतिमा सिंह चालीस पत्नी नागेंद्र निवासी शादियाबाद और इसरार अहमद पुत्र इजहार निवासी शादियाबाद है। जबकि आधा दर्जन से ज्यादा बेहद मामूली घायल यात्री, मौके से दूसरे वाहन के सहारे अपने गंतव्य को रवाना हो गए। घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कमल जयंत (वरिष्ठ पत्रकार)। यूपी में हुए विधानसभा के आम चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को सबसे बड़ा नुक्सान हुआ है, इस चुनाव में बसपा के आधार वोट बैंक पर भी सेंध लगी है। इस चुनाव में दलितों ने बसपा से किनारा किया है, बसपा का मूल वोट बैंक समझे जाने वाले चमार-जाटव बिरादरी के लोगों ने भी बसपा से दूरी बनायीं है, इस बिरादरी का लगभग 50 फीसदी वोट बसपा से अलग होकर सपा और भाजपा में शिफ्ट हुआ है। इस चुनाव में बसपा का ना केवल वोट बैंक नौ फीसदी कम हुआ है बल्कि सीटें भी काफी कम हुई हैं, हालाँकि पिछले विधानसभा चुनाव में ही बसपा को 19 सीटें पाकर ही संतोष करना पड़ा था, लेकिन चुनाव आते-आते बसपा के पास महज तीन विधायक ही बचे, इस चुनाव में भी बसपा महज चार सीटें ही जीत सकी। इस चुनाव में जिस तरह से बसपा का आधार वोट बैंक उससे छिटका है यह जरूर चिंता का विषय है, बसपा प्रमुख मायावती को अपना आधार वोट पार्टी में दोबारा वापस लाने के लिए काफी मेहनत करनी होगी। अब बसपा नेतृत्व के लिए अपने आधार वोट बैंक के साथ अपनी साख बचाने की भी चुनौती होगी। वैसे राज्य में किसी भी चरण में बसपा कहीं भी मैदान में लड़ती नहीं दिखी, जिसकी वजह से दलितों में मायावती को लेकर काफी निराशा व्याप्त है। उत्तर प्रदेश में दलितों की आबादी लगभग 23 फीसदी है और इनमें भी सबसे अधिक संख्या चमार-जाटव बिरादरी की है। दलितों में इस वर्ग की आबादी लगभग 55 से 60 फीसदी है, इस समाज का वोट पहले की तरह इस बार परंपरागत तरीके से बसपा के साथ खड़ा नहीं दिखाई दिया। दलित समाज को इस बार चुनाव में बसपा से ज्यादा संविधान बचाने की चिंता दिखी। बसपा प्रमुख की इस चुनाव में निष्क्रियता का नतीजा रहा कि दलित वोट विभाजित हो गया और सपा गठबंधन के साथ ही ये वोट भाजपा के पक्ष में भी गया, इसी का नतीजा रहा कि भाजपा को देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में दोबारा प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने का मौका मिला। दलितों के वोट को विभाजित होने से रोकने और इसे बसपा के पक्ष में बनाये रखने के लिए पिछले तमाम चुनावों की अपेक्षा इस बार बसपा ने सुरक्षित और सामान्य सीटों पर ज्यादा चमार-जाटव प्रत्याशी मैदान में उतारे। ये समाज बहुजन नायक कांशीराम जी की नीतियों से प्रभावित होकर बसपा के गठन के समय से ही पार्टी के साथ मजबूती से जुड़ गया और 2019 में हुए लोकसभा के चुनाव तक बसपा के साथ काफी मजबूती से जुड़ा रहा। यहाँ तक कि तमाम दलित उत्पीड़न की घटनाओं और दलित एक्ट की बहाली की मांग को लेकर दलितों के आन्दोलन से भी बसपा के अलग रहने के बावजूद दलितों की अन्य जातियों के साथ ही चमार-जाटव बिरादरी के लोग बसपा के साथ जुड़े रहे। यहाँ तक कि मायावती के बहुजन से सर्वजन का सियासी सफ़र तय करने के दौरान भी ये वर्ग बसपा के साथ मजबूती से जुड़ा रहा, इसके पीछे इस वर्ग का ये मानना था कि बसपा प्रमुख सर्वसमाज की बात जरूर कर रहीं हैं, लेकिन सरकार बनने के बाद वह दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज को मिलाकर बनने वाले 85 फीसदी बहुजन समाज के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहतीं हैं, यही वजह रही कि बसपा का कट्टर समर्थक चमार-जाटव समाज 2017 में यूपी में हुए विधानसभा के आमचुनाव में बसपा के साथ खड़ा रहा, क्योंकि उसे राज्य में बसपा की सरकार बनने का भरोसा था और साथ ही उसके सामने बसपा का कोई विकल्प भी नहीं दिख रहा था, लेकिन वर्ष 2019 में जिस तरह से बसपा प्रमुख ने लोकसभा चुनाव के बाद सपा से गठबंधन तोडा, उसको लेकर इस वर्ग में भी निराशा व्याप्त हुई, क्योंकि इस गठबंधन ने दलितों और पिछड़ा वर्ग को एक साथ लाने में काफी मदद की, इन दोनों दलों के बीच गठबंधन तो टूट गया, लेकिन सामाजिक गठबंधन बरकरार रहा, जिसे ये वर्ग आगे भी बनाये रखने का भी प्रयास कर रहा है। हालाँकि इस चुनाव में बहुजन समाज को एकजुट रखने का प्रयास सफल होता नहीं दिखा, इसी का नतीजा रहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे सपा प्रमुख अखिलेश यादव पिछली बार के मुकाबले दो गुनी से अधिक सीटें पाने में सफल रहे, लेकिन वह दलितों, अति पिछड़ा वर्ग को समझाने में बहुत सफल नहीं हुए। वहीँ दूसरी तरफ बसपा प्रमुख मायावती ने जिस तरह से अपने को निष्क्रिय रखा, यहाँ तक कि उनकी चुनावी सभाएं भी काफी कम हुई, जिससे दलितों में बसपा को लेकर निराशा पैदा हुई और ये वोट सपा गठबंधन के साथ ही भाजपा के साथ भी चला गया, हालाँकि दलितों में गैर चमार-जाटव जिसमें धोबी, खटिक, बाल्मीकि, कोरी, धानुक, आदि जातियों का तो एकतरफा वोट भाजपा के पक्ष में गया, पासी समाज जरूर भाजपा के साथ ही सपा गठबंधन के पक्ष में खड़ा दिखाई दिया। दरअसल बसपा के वोट बैंक के खिसकने के कारणों पर नजर डालें तो वर्ष 2019 में हुए लोकसभा के चुनाव के बाद से मायावती दलितों पर हुए उत्पीड़न को लेकर आंदोलित नहीं रही, जिसके कारण बसपा का मूल वोट बैंक इस चुनाव में लगभग 50 फीसदी तक खिसक गया। विधानसभा चुनाव के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जिस तरह से बसपा को कमजोर ना आंकने की सलाह दी, उससे भी बसपा का मूल वोट बैंक को यह लगने लगा कि बसपा और भाजपा के बीच कोई गुप्त समझौता है और ये दोनों अंदर ही अंदर मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन शाह के बयान के बाद जिस तरह से बहन जी ने उनके प्रति अपना आभार व्यक्त किया, उसके बाद से दलित वर्ग के लोग बसपा के पक्ष में जाने के बजाय उससे और दूर हो गए। दलितों का नेतृत्व करने के लिए मायावती ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र को आगे किया और चुनावी घोषणा से ठीक पहले बहन जी ने 84 सुरक्षित सीटों पर दलितों और ब्राह्मणों में समन्वय स्थापित कराने के लिए सतीश मिश्रा को भेजा, इसको लेकर दलितों में सतीश मिश्रा के साथ ही बसपा नेतृत्व के खिलाफ भी आक्रोश व्याप्त हो गया, इस वर्ग का कहना है कि बहुजन नायक कांशीराम जी ने मनुवाद और ब्राह्मणवाद से निजात दिलाने के लिए इस व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करने के लिए बहुजन समाज पार्टी का गठन किया था, जिस तरह से मायावती जी दलितों की अगुवाई के लिए खुद आगे ना आकर सतीश मिश्रा को आगे किया। इसको लेकर दलित समाज को यह लगने लगा कि अब बसपा नेतृत्व ने संविधान बचाने की लड़ाई से अपने को दूर कर लिया। वैसे इस सम्बन्ध में सामाजिक संस्था बहुजन भारत के अध्यक्ष एवं यूपी के पूर्व प्रमुख सचिव गृह कुंवर फ़तेह बहादुर का कहना है कि बसपा नेतृत्व अपने मूल मकसद से भटक गया जिसकी वजह से पार्टी के आदर्शों से जुड़े इस समाज का भरोसा भी बसपा प्रमुख पर कम हुआ। जिसका परिणाम विधानसभा चुनाव के नतीजों में देखने को मिला। इस चुनाव में दलितों में चमार-जाटव बिरादरी का वोट बचाने की बसपा के सामने चुनौती थी, लेकिन बसपा अपने मूल वोट बैंक को बचाने में सफल नहीं हो सकी, और ये वोट सपा गठबंधन के पक्ष में ज्यादा जाता दिखाई दिया, हालाँकि वोटों के बंटवारे का सीधा फायदा भाजपा को मिला, जबकि सवर्णों के वोट में कोई बंटवारा नहीं हुआ और ये ये वोट एकतरफा भाजपा के पक्ष में गया। उनका कहना है कि ये बहुजन समाज के लोगों का दुर्भाग्य है कि वंचित-शोषित दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज को एकजुट करने के लिए बहुजन नायक कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी का गठन किया और पार्टी गठन के तुरंत बाद 1989 में यूपी में 13 विधानसभा और दो लोकसभा की सीटें जीती थी, लेकिन बसपा प्रमुख की बहुजन से छोड़कर सर्वसमाज की नीतियों को लागू करने का ही नतीजा रहा, 2022 में बसपा की सीटों में भारी कमी के साथ उसके वोट बैंक में भी भारी कमी आई। कुंवर फ़तेह बहादुर का कहना है कि मायावती जी ने दलितों के साथ हुए उत्पीड़न को लेकर हुए किसी भी आन्दोलन में कोई शिरकत नहीं की, और ना ही पिछड़ा वर्ग या अल्पसंख्यकों की परेशानी को लेकर कोई लड़ाई लड़ी, जिसकी वजह से बसपा के पक्ष में शुरुआती दौर में एकजुट हुआ ये वर्ग बसपा से लगभग पूरी तरह से दूर हो गया। उनका कहना है कि अब नए सिरे से बहुजन समाज को एकजुट करने के लिए एक बड़ा आन्दोलन चलाने की जरूरत है। बसपा के सामने अपने पुराने वोट बैंक को दोबारा पार्टी से जोड़ने की चुनौती है, लेकिन जो बसपा की नीतियाँ हैं, उसके हिसाब से तो ये वर्ग जिसमें दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज शामिल है, जुड़ता नहीं दिख रहा है। बसपा प्रमुख ने अपने को बहुजन से सर्वजन की ओर परिवर्तित करने के साथ ही बसपा को केवल एक जाति की पार्टी बना दिया, जिसकी वजह से दलितों में गैर जाटव बिरादरी के लोगों के साथ ही पिछड़ा वर्ग की लगभग सभी जातियों के आलावा अल्पसंख्यकों में खासतौर पर मुस्लिम बसपा से दूर हो गया, जिसका भारी नुकसान इस चुनाव में दिख रहा है। इसके आलावा मायावती ने बहुजन नायक कांशीराम जी के मूवमेंट से अपने को अलग करने के साथ ही इस वर्ग पर हुए अत्याचार के खिलाफ हुए आन्दोलन से भी अपने को दूर रखा, यही वजह रही कि इस बड़े वर्ग ने बसपा से किनारा कर लिया और संविधान और आरक्षण की रक्षा की बात करने वाली सपा की ओर रुख कर लिया, यह बात अलग है कि सपा गठबंधन को इस बार सरकार बनाने में सफलता नहीं मिली। भाजपा को शिकस्त देने के लिए संविधान और आरक्षण बचाने की लड़ाई लड़ रही सपा को बहुजन नायक कांशीराम जी के एजेंडे पर वापस आना होगा, तभी इन ताकतों से मुकाबला किया जा सकता है। कमल जयंत (वरिष्ठ पत्रकार)
कमल जयंत । यूपी में हुए विधानसभा के आम चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को सबसे बड़ा नुक्सान हुआ है, इस चुनाव में बसपा के आधार वोट बैंक पर भी सेंध लगी है। इस चुनाव में दलितों ने बसपा से किनारा किया है, बसपा का मूल वोट बैंक समझे जाने वाले चमार-जाटव बिरादरी के लोगों ने भी बसपा से दूरी बनायीं है, इस बिरादरी का लगभग पचास फीसदी वोट बसपा से अलग होकर सपा और भाजपा में शिफ्ट हुआ है। इस चुनाव में बसपा का ना केवल वोट बैंक नौ फीसदी कम हुआ है बल्कि सीटें भी काफी कम हुई हैं, हालाँकि पिछले विधानसभा चुनाव में ही बसपा को उन्नीस सीटें पाकर ही संतोष करना पड़ा था, लेकिन चुनाव आते-आते बसपा के पास महज तीन विधायक ही बचे, इस चुनाव में भी बसपा महज चार सीटें ही जीत सकी। इस चुनाव में जिस तरह से बसपा का आधार वोट बैंक उससे छिटका है यह जरूर चिंता का विषय है, बसपा प्रमुख मायावती को अपना आधार वोट पार्टी में दोबारा वापस लाने के लिए काफी मेहनत करनी होगी। अब बसपा नेतृत्व के लिए अपने आधार वोट बैंक के साथ अपनी साख बचाने की भी चुनौती होगी। वैसे राज्य में किसी भी चरण में बसपा कहीं भी मैदान में लड़ती नहीं दिखी, जिसकी वजह से दलितों में मायावती को लेकर काफी निराशा व्याप्त है। उत्तर प्रदेश में दलितों की आबादी लगभग तेईस फीसदी है और इनमें भी सबसे अधिक संख्या चमार-जाटव बिरादरी की है। दलितों में इस वर्ग की आबादी लगभग पचपन से साठ फीसदी है, इस समाज का वोट पहले की तरह इस बार परंपरागत तरीके से बसपा के साथ खड़ा नहीं दिखाई दिया। दलित समाज को इस बार चुनाव में बसपा से ज्यादा संविधान बचाने की चिंता दिखी। बसपा प्रमुख की इस चुनाव में निष्क्रियता का नतीजा रहा कि दलित वोट विभाजित हो गया और सपा गठबंधन के साथ ही ये वोट भाजपा के पक्ष में भी गया, इसी का नतीजा रहा कि भाजपा को देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में दोबारा प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने का मौका मिला। दलितों के वोट को विभाजित होने से रोकने और इसे बसपा के पक्ष में बनाये रखने के लिए पिछले तमाम चुनावों की अपेक्षा इस बार बसपा ने सुरक्षित और सामान्य सीटों पर ज्यादा चमार-जाटव प्रत्याशी मैदान में उतारे। ये समाज बहुजन नायक कांशीराम जी की नीतियों से प्रभावित होकर बसपा के गठन के समय से ही पार्टी के साथ मजबूती से जुड़ गया और दो हज़ार उन्नीस में हुए लोकसभा के चुनाव तक बसपा के साथ काफी मजबूती से जुड़ा रहा। यहाँ तक कि तमाम दलित उत्पीड़न की घटनाओं और दलित एक्ट की बहाली की मांग को लेकर दलितों के आन्दोलन से भी बसपा के अलग रहने के बावजूद दलितों की अन्य जातियों के साथ ही चमार-जाटव बिरादरी के लोग बसपा के साथ जुड़े रहे। यहाँ तक कि मायावती के बहुजन से सर्वजन का सियासी सफ़र तय करने के दौरान भी ये वर्ग बसपा के साथ मजबूती से जुड़ा रहा, इसके पीछे इस वर्ग का ये मानना था कि बसपा प्रमुख सर्वसमाज की बात जरूर कर रहीं हैं, लेकिन सरकार बनने के बाद वह दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज को मिलाकर बनने वाले पचासी फीसदी बहुजन समाज के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहतीं हैं, यही वजह रही कि बसपा का कट्टर समर्थक चमार-जाटव समाज दो हज़ार सत्रह में यूपी में हुए विधानसभा के आमचुनाव में बसपा के साथ खड़ा रहा, क्योंकि उसे राज्य में बसपा की सरकार बनने का भरोसा था और साथ ही उसके सामने बसपा का कोई विकल्प भी नहीं दिख रहा था, लेकिन वर्ष दो हज़ार उन्नीस में जिस तरह से बसपा प्रमुख ने लोकसभा चुनाव के बाद सपा से गठबंधन तोडा, उसको लेकर इस वर्ग में भी निराशा व्याप्त हुई, क्योंकि इस गठबंधन ने दलितों और पिछड़ा वर्ग को एक साथ लाने में काफी मदद की, इन दोनों दलों के बीच गठबंधन तो टूट गया, लेकिन सामाजिक गठबंधन बरकरार रहा, जिसे ये वर्ग आगे भी बनाये रखने का भी प्रयास कर रहा है। हालाँकि इस चुनाव में बहुजन समाज को एकजुट रखने का प्रयास सफल होता नहीं दिखा, इसी का नतीजा रहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे सपा प्रमुख अखिलेश यादव पिछली बार के मुकाबले दो गुनी से अधिक सीटें पाने में सफल रहे, लेकिन वह दलितों, अति पिछड़ा वर्ग को समझाने में बहुत सफल नहीं हुए। वहीँ दूसरी तरफ बसपा प्रमुख मायावती ने जिस तरह से अपने को निष्क्रिय रखा, यहाँ तक कि उनकी चुनावी सभाएं भी काफी कम हुई, जिससे दलितों में बसपा को लेकर निराशा पैदा हुई और ये वोट सपा गठबंधन के साथ ही भाजपा के साथ भी चला गया, हालाँकि दलितों में गैर चमार-जाटव जिसमें धोबी, खटिक, बाल्मीकि, कोरी, धानुक, आदि जातियों का तो एकतरफा वोट भाजपा के पक्ष में गया, पासी समाज जरूर भाजपा के साथ ही सपा गठबंधन के पक्ष में खड़ा दिखाई दिया। दरअसल बसपा के वोट बैंक के खिसकने के कारणों पर नजर डालें तो वर्ष दो हज़ार उन्नीस में हुए लोकसभा के चुनाव के बाद से मायावती दलितों पर हुए उत्पीड़न को लेकर आंदोलित नहीं रही, जिसके कारण बसपा का मूल वोट बैंक इस चुनाव में लगभग पचास फीसदी तक खिसक गया। विधानसभा चुनाव के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जिस तरह से बसपा को कमजोर ना आंकने की सलाह दी, उससे भी बसपा का मूल वोट बैंक को यह लगने लगा कि बसपा और भाजपा के बीच कोई गुप्त समझौता है और ये दोनों अंदर ही अंदर मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन शाह के बयान के बाद जिस तरह से बहन जी ने उनके प्रति अपना आभार व्यक्त किया, उसके बाद से दलित वर्ग के लोग बसपा के पक्ष में जाने के बजाय उससे और दूर हो गए। दलितों का नेतृत्व करने के लिए मायावती ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र को आगे किया और चुनावी घोषणा से ठीक पहले बहन जी ने चौरासी सुरक्षित सीटों पर दलितों और ब्राह्मणों में समन्वय स्थापित कराने के लिए सतीश मिश्रा को भेजा, इसको लेकर दलितों में सतीश मिश्रा के साथ ही बसपा नेतृत्व के खिलाफ भी आक्रोश व्याप्त हो गया, इस वर्ग का कहना है कि बहुजन नायक कांशीराम जी ने मनुवाद और ब्राह्मणवाद से निजात दिलाने के लिए इस व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करने के लिए बहुजन समाज पार्टी का गठन किया था, जिस तरह से मायावती जी दलितों की अगुवाई के लिए खुद आगे ना आकर सतीश मिश्रा को आगे किया। इसको लेकर दलित समाज को यह लगने लगा कि अब बसपा नेतृत्व ने संविधान बचाने की लड़ाई से अपने को दूर कर लिया। वैसे इस सम्बन्ध में सामाजिक संस्था बहुजन भारत के अध्यक्ष एवं यूपी के पूर्व प्रमुख सचिव गृह कुंवर फ़तेह बहादुर का कहना है कि बसपा नेतृत्व अपने मूल मकसद से भटक गया जिसकी वजह से पार्टी के आदर्शों से जुड़े इस समाज का भरोसा भी बसपा प्रमुख पर कम हुआ। जिसका परिणाम विधानसभा चुनाव के नतीजों में देखने को मिला। इस चुनाव में दलितों में चमार-जाटव बिरादरी का वोट बचाने की बसपा के सामने चुनौती थी, लेकिन बसपा अपने मूल वोट बैंक को बचाने में सफल नहीं हो सकी, और ये वोट सपा गठबंधन के पक्ष में ज्यादा जाता दिखाई दिया, हालाँकि वोटों के बंटवारे का सीधा फायदा भाजपा को मिला, जबकि सवर्णों के वोट में कोई बंटवारा नहीं हुआ और ये ये वोट एकतरफा भाजपा के पक्ष में गया। उनका कहना है कि ये बहुजन समाज के लोगों का दुर्भाग्य है कि वंचित-शोषित दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज को एकजुट करने के लिए बहुजन नायक कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी का गठन किया और पार्टी गठन के तुरंत बाद एक हज़ार नौ सौ नवासी में यूपी में तेरह विधानसभा और दो लोकसभा की सीटें जीती थी, लेकिन बसपा प्रमुख की बहुजन से छोड़कर सर्वसमाज की नीतियों को लागू करने का ही नतीजा रहा, दो हज़ार बाईस में बसपा की सीटों में भारी कमी के साथ उसके वोट बैंक में भी भारी कमी आई। कुंवर फ़तेह बहादुर का कहना है कि मायावती जी ने दलितों के साथ हुए उत्पीड़न को लेकर हुए किसी भी आन्दोलन में कोई शिरकत नहीं की, और ना ही पिछड़ा वर्ग या अल्पसंख्यकों की परेशानी को लेकर कोई लड़ाई लड़ी, जिसकी वजह से बसपा के पक्ष में शुरुआती दौर में एकजुट हुआ ये वर्ग बसपा से लगभग पूरी तरह से दूर हो गया। उनका कहना है कि अब नए सिरे से बहुजन समाज को एकजुट करने के लिए एक बड़ा आन्दोलन चलाने की जरूरत है। बसपा के सामने अपने पुराने वोट बैंक को दोबारा पार्टी से जोड़ने की चुनौती है, लेकिन जो बसपा की नीतियाँ हैं, उसके हिसाब से तो ये वर्ग जिसमें दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज शामिल है, जुड़ता नहीं दिख रहा है। बसपा प्रमुख ने अपने को बहुजन से सर्वजन की ओर परिवर्तित करने के साथ ही बसपा को केवल एक जाति की पार्टी बना दिया, जिसकी वजह से दलितों में गैर जाटव बिरादरी के लोगों के साथ ही पिछड़ा वर्ग की लगभग सभी जातियों के आलावा अल्पसंख्यकों में खासतौर पर मुस्लिम बसपा से दूर हो गया, जिसका भारी नुकसान इस चुनाव में दिख रहा है। इसके आलावा मायावती ने बहुजन नायक कांशीराम जी के मूवमेंट से अपने को अलग करने के साथ ही इस वर्ग पर हुए अत्याचार के खिलाफ हुए आन्दोलन से भी अपने को दूर रखा, यही वजह रही कि इस बड़े वर्ग ने बसपा से किनारा कर लिया और संविधान और आरक्षण की रक्षा की बात करने वाली सपा की ओर रुख कर लिया, यह बात अलग है कि सपा गठबंधन को इस बार सरकार बनाने में सफलता नहीं मिली। भाजपा को शिकस्त देने के लिए संविधान और आरक्षण बचाने की लड़ाई लड़ रही सपा को बहुजन नायक कांशीराम जी के एजेंडे पर वापस आना होगा, तभी इन ताकतों से मुकाबला किया जा सकता है। कमल जयंत
न्यूज डेस्कः बिहार में एक बार फिर कोरोना बम फूटा हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अपडेट के मुताबिक बिहार में 1667 नए कोरोना मरीज मिले हैं। जिससे राज्य में हड़कंप मच गया हैं। साथ ही साथ बिहार सरकार की चिंता भी बढ़ गई हैं। जारी अपडेट के मुताबिक राज्य में 16 जुलाई को 928 नए मामले सामने आये। जबकि 17 जुलाई को अब तक 739 मामले सामने आए हैं। जिससे राज्य में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 24967 पर पहुंच गई है। इसकी जानकारी खुद बिहार स्वास्थ्य विभाग ने जारी की हैं। आपको बता दें की बिहार में शुक्रवार को रिकॉर्ड 1742 नए मामले सामने आए थे। इसके साथ ही संक्रमितों की कुल संख्या 23 हजार को पार कर गया था। वहीं आज ये संख्या 25 हजार के करीब पहुंच गया हैं तथा यहां 200 के करीब लोग कोरोना वायरस से अपनी जान गवा चुके हैं।
न्यूज डेस्कः बिहार में एक बार फिर कोरोना बम फूटा हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अपडेट के मुताबिक बिहार में एक हज़ार छः सौ सरसठ नए कोरोना मरीज मिले हैं। जिससे राज्य में हड़कंप मच गया हैं। साथ ही साथ बिहार सरकार की चिंता भी बढ़ गई हैं। जारी अपडेट के मुताबिक राज्य में सोलह जुलाई को नौ सौ अट्ठाईस नए मामले सामने आये। जबकि सत्रह जुलाई को अब तक सात सौ उनतालीस मामले सामने आए हैं। जिससे राज्य में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर चौबीस हज़ार नौ सौ सरसठ पर पहुंच गई है। इसकी जानकारी खुद बिहार स्वास्थ्य विभाग ने जारी की हैं। आपको बता दें की बिहार में शुक्रवार को रिकॉर्ड एक हज़ार सात सौ बयालीस नए मामले सामने आए थे। इसके साथ ही संक्रमितों की कुल संख्या तेईस हजार को पार कर गया था। वहीं आज ये संख्या पच्चीस हजार के करीब पहुंच गया हैं तथा यहां दो सौ के करीब लोग कोरोना वायरस से अपनी जान गवा चुके हैं।
- 6 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 6 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? 'चार दोस्त क्या छुपा रही हैं? ' जैसा कि दर्शक इस सवाल पर विचार कर रहे हैं, प्राइम वीडियो ने आज अपने आगामी क्राइम ड्रामा अमेज़न ओरिजिनल हश हश से कृतिका कामरा की विशेषता वाले एक और करैक्टर प्रोमो को जारी कर दिया है। अभिनेत्री ने डॉली दलाल की भूमिका निभाई है, जो एक संपन्न परिवार की बहू है, जिसे आजादी की लालसा रहती है। प्रोमो में दिखाया गया है कि डॉली सामाजिक दबावों में फंसी हुई महसूस कर रही है, साथ ही एक ऐसे रहस्य से भी जूझ रही है जिसने उसके डर को बढ़ा दिया है। सीरीज के लिए उन्हें आकर्षित करने वाली बात को साझा करते हुए, कृतिका ने कहा है, "मेरे लिए असल में जो काम आया वह यह था कि जब आप इतनी सारी महिलाओं के एक साथ आने के बारे में सोचते हैं, तो आप उस तरह के शो की उम्मीद नहीं करते हैं। यह अब तक अन्य महिला प्रधान शो की तुलना में ज्यादा तीव्र है। " वह आगे कहती हैं, "भले ही मैं जिस किरदार को निभा रही हूं, मैं वैसी बिल्कुल भी नहीं हूं, लेकिन मुझे ऐसा लगा कि मैं डॉली जैसे लोगों को जानती हूं। तो यह कुछ ऐसा था जिसे मैं एक्सप्लोर करना चाहती थी। मैं एक ऐसा किरदार निभाना चाहती थिज़ जो लोगों से जुड़ा हो। " तनुजा चंद्रा द्वारा निर्देशित और सह-निर्मित, हश हश एक क्राइम ड्रामा है जिसमें सोहा अली खान, कृतिका कामरा, शाहना गोस्वामी, करिश्मा तन्ना और आयशा जुलखा भी हैं, और यह विशेष रूप से 22 सितंबर को भारत और दुनिया भर के 240 देशों में प्राइम वीडियो पर रिलीज़ होगी। . हश हश 23 सितंबर से शुरू होने वाले ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 2022 के लिए प्राइम वीडियो के फेस्टिव लाइन-अप का एक हिस्सा है। प्राइम वीडियो चैनलों के माध्यम से भागीदारों से आकर्षक "दिवाली विशेष छूट" के अलावा लाइन-अप में कई अन्य मूल श्रृंखला और कई भाषाओं में ब्लॉकबस्टर फिल्में भी शामिल हैं।
- छः hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - छः hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? 'चार दोस्त क्या छुपा रही हैं? ' जैसा कि दर्शक इस सवाल पर विचार कर रहे हैं, प्राइम वीडियो ने आज अपने आगामी क्राइम ड्रामा अमेज़न ओरिजिनल हश हश से कृतिका कामरा की विशेषता वाले एक और करैक्टर प्रोमो को जारी कर दिया है। अभिनेत्री ने डॉली दलाल की भूमिका निभाई है, जो एक संपन्न परिवार की बहू है, जिसे आजादी की लालसा रहती है। प्रोमो में दिखाया गया है कि डॉली सामाजिक दबावों में फंसी हुई महसूस कर रही है, साथ ही एक ऐसे रहस्य से भी जूझ रही है जिसने उसके डर को बढ़ा दिया है। सीरीज के लिए उन्हें आकर्षित करने वाली बात को साझा करते हुए, कृतिका ने कहा है, "मेरे लिए असल में जो काम आया वह यह था कि जब आप इतनी सारी महिलाओं के एक साथ आने के बारे में सोचते हैं, तो आप उस तरह के शो की उम्मीद नहीं करते हैं। यह अब तक अन्य महिला प्रधान शो की तुलना में ज्यादा तीव्र है। " वह आगे कहती हैं, "भले ही मैं जिस किरदार को निभा रही हूं, मैं वैसी बिल्कुल भी नहीं हूं, लेकिन मुझे ऐसा लगा कि मैं डॉली जैसे लोगों को जानती हूं। तो यह कुछ ऐसा था जिसे मैं एक्सप्लोर करना चाहती थी। मैं एक ऐसा किरदार निभाना चाहती थिज़ जो लोगों से जुड़ा हो। " तनुजा चंद्रा द्वारा निर्देशित और सह-निर्मित, हश हश एक क्राइम ड्रामा है जिसमें सोहा अली खान, कृतिका कामरा, शाहना गोस्वामी, करिश्मा तन्ना और आयशा जुलखा भी हैं, और यह विशेष रूप से बाईस सितंबर को भारत और दुनिया भर के दो सौ चालीस देशों में प्राइम वीडियो पर रिलीज़ होगी। . हश हश तेईस सितंबर से शुरू होने वाले ग्रेट इंडियन फेस्टिवल दो हज़ार बाईस के लिए प्राइम वीडियो के फेस्टिव लाइन-अप का एक हिस्सा है। प्राइम वीडियो चैनलों के माध्यम से भागीदारों से आकर्षक "दिवाली विशेष छूट" के अलावा लाइन-अप में कई अन्य मूल श्रृंखला और कई भाषाओं में ब्लॉकबस्टर फिल्में भी शामिल हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
जनतंत्र डेस्क BJP National Executive Meeting: दिल्ली स्थित NDMC कन्वेंशन सेंटर में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक में बीजेपी के तमाम बड़े नेता और मंत्री शामिल हुए। मीटिंग में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ज्ञान सिर्फ किताबों से नहीं मिलता, लोगों के बीच काम करने से तजुर्बा आता है। बैठक में पार्टी नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनावों समेत कई बड़े मुद्दों पर चर्चा की। वहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े। इस दौरान बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि, पीएम मोदी ने पार्टी के इतिहास को रेखांकित किया और कहा कि बीजेपी ने आज केंद्र में जो स्थान हासिल किया है। उसका बड़ा कारण ये है कि पार्टी सामान्य व्यक्ति से हमेशा जुड़ी रही। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत सभी बड़े नेता शामिल हुए। बैठक के दौरान पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि PM मोदी ने महामारी के बीच बोल्ड स्टेप लिए, जिससे अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचा।
जनतंत्र डेस्क BJP National Executive Meeting: दिल्ली स्थित NDMC कन्वेंशन सेंटर में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक में बीजेपी के तमाम बड़े नेता और मंत्री शामिल हुए। मीटिंग में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ज्ञान सिर्फ किताबों से नहीं मिलता, लोगों के बीच काम करने से तजुर्बा आता है। बैठक में पार्टी नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनावों समेत कई बड़े मुद्दों पर चर्चा की। वहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े। इस दौरान बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि, पीएम मोदी ने पार्टी के इतिहास को रेखांकित किया और कहा कि बीजेपी ने आज केंद्र में जो स्थान हासिल किया है। उसका बड़ा कारण ये है कि पार्टी सामान्य व्यक्ति से हमेशा जुड़ी रही। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत सभी बड़े नेता शामिल हुए। बैठक के दौरान पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि PM मोदी ने महामारी के बीच बोल्ड स्टेप लिए, जिससे अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचा।
१८२ : जैन धर्म का संक्षिप्त इतिहास' मुहुर्त था, चतुर्थः प्रहर था तथा उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र था। सिद्धों को नमस्कार करके भगवान् ने सामायिक चरित्र स्वीकार किया। जिस समय प्रभु ने सामायिक प्रतिज्ञा स्वीकार की उस समय देव और मानव सभी चित्रलिखित से रह गये । देवेन्द्र ने भगवान् को देवदूष्य (दिव्य वस्त्र) प्रदान किया । भगवान् ने अपना जीत आचार समझकर उसे वामस्कंध पर धारण किया। आचारांग, कल्पसूत्र, आवश्यक चूरिंग आदि में एक देवदूष्य वस्त्र लेकर दीक्षा लेने का उल्लेख है । भगवान महावीर ने एकाकी दीक्षा ग्रहण की थी । दिगम्बर परम्परा के ग्रंथों में देवदूष्य वस्त्र के साथ संयम ग्रहण का उल्लेख नहीं है । दीक्षा लेते ही महावीर को मनः पर्यवज्ञान हुआ । जिससे ढाई द्वीप और दो समुद्र तक के समनस्क प्राणियों के मनोगत भावों को जानने लगे थे । सबको विदा कर प्रभु ने निम्नांकित अभिग्रह धारण किया - "आज से साढ़े बारह वर्ष पर्यन्त, जब तक केवलज्ञान उत्पन्न न हो तबतक मैं देह की ममता छोड़कर रहूंगा अर्थात् इस बीच में देव, मनुष्य या तिर्यन्च जीवों की ओर से जो भी उपसर्ग कष्ट उत्पन्न होंगे, उनको समभावपूर्वक सम्यक् रूपेण सहन करूंगा 19 "इसके उपरान्त उन्होंने ज्ञातखण्ड उद्यान ।१ से विहार कर दिया। उस समय वहां उपस्थित जनसमूह जाते हुए प्रभु को तब तक देखता रहा जब तक कि वे आंखों से श्रोभल नहीं हो गये । भगवान् सन्ध्या के समय मुहूर्त भर दिन शेष रहते कूर्मारग्राम पहुंचे तथा वहां ध्यानावस्थित हो गये । 2 १. (१) ऐतिहासिक काल के तीन तीर्थंकर, पृ०२२६ (२) भगवान् महावीर : एक अनु०, पृ०२८६. २. ऐति० काल के तीन तीर्थंकर पृ०० २२६
एक सौ बयासी : जैन धर्म का संक्षिप्त इतिहास' मुहुर्त था, चतुर्थः प्रहर था तथा उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र था। सिद्धों को नमस्कार करके भगवान् ने सामायिक चरित्र स्वीकार किया। जिस समय प्रभु ने सामायिक प्रतिज्ञा स्वीकार की उस समय देव और मानव सभी चित्रलिखित से रह गये । देवेन्द्र ने भगवान् को देवदूष्य प्रदान किया । भगवान् ने अपना जीत आचार समझकर उसे वामस्कंध पर धारण किया। आचारांग, कल्पसूत्र, आवश्यक चूरिंग आदि में एक देवदूष्य वस्त्र लेकर दीक्षा लेने का उल्लेख है । भगवान महावीर ने एकाकी दीक्षा ग्रहण की थी । दिगम्बर परम्परा के ग्रंथों में देवदूष्य वस्त्र के साथ संयम ग्रहण का उल्लेख नहीं है । दीक्षा लेते ही महावीर को मनः पर्यवज्ञान हुआ । जिससे ढाई द्वीप और दो समुद्र तक के समनस्क प्राणियों के मनोगत भावों को जानने लगे थे । सबको विदा कर प्रभु ने निम्नांकित अभिग्रह धारण किया - "आज से साढ़े बारह वर्ष पर्यन्त, जब तक केवलज्ञान उत्पन्न न हो तबतक मैं देह की ममता छोड़कर रहूंगा अर्थात् इस बीच में देव, मनुष्य या तिर्यन्च जीवों की ओर से जो भी उपसर्ग कष्ट उत्पन्न होंगे, उनको समभावपूर्वक सम्यक् रूपेण सहन करूंगा उन्नीस "इसके उपरान्त उन्होंने ज्ञातखण्ड उद्यान ।एक से विहार कर दिया। उस समय वहां उपस्थित जनसमूह जाते हुए प्रभु को तब तक देखता रहा जब तक कि वे आंखों से श्रोभल नहीं हो गये । भगवान् सन्ध्या के समय मुहूर्त भर दिन शेष रहते कूर्मारग्राम पहुंचे तथा वहां ध्यानावस्थित हो गये । दो एक. ऐतिहासिक काल के तीन तीर्थंकर, पृदो सौ छब्बीस भगवान् महावीर : एक अनुशून्य, पृदो सौ छियासी. दो. ऐतिशून्य काल के तीन तीर्थंकर पृशून्य दो सौ छब्बीस
कॉमेडी किंग कपिल शर्मा (Kapil Sharma) अपनी गर्लफ्रेंड गिन्नी चतरथ (Ginni Chatrath) के साथ सात फेरे लेने जा रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर ऑफिशियल अनाउंसमेंट कर दी है. बता दें कि बॉलीवुड में इन दिनों एक के बाद एक शादियां हो रही हैं. रणवीर सिंह (Ranveer Singh) और दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने 14-15 नवंबर को सात फेरे लिए. वहीं, प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) जल्द ही ब्वॉयफ्रेंड निक जोनास (Nick Jonas) के साथ शादी के बंधन में बंधने वाली हैं. कपिल शर्मा ने इंस्टाग्राम पर शादी की जानकारी देते हुए एक फोटो शेयर की. इसमें लिखा है, 'माता-पिता के आशीर्वाद से आपको बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मैं और गिन्नी बहुत जल्दी एक नई शुरुआत करने वाले हैं. 12 दिसंबर 2018 को हम सात फेरे लेंगे. हमें बहुत खुशी होगी कि आप हमारी खुशी में शामिल हों और अपना प्यार दें.' ये भी पढ़ेंः दीपिका की तरह प्रियंका चोपड़ा भी करेंगी दो रीति-रिवाजों से शादी, क्रिश्चियन वेडिंग में पहनेंगी ऐसी ड्रेस? कपिल और गिन्नी की शादी जालंधर में होगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 10 दिसंबर को जागरण होगा और इसके बाद चूड़ा सेरेमनी, मेहंदी और कॉकटेल पार्टी भी होगी. 14 दिसंबर को अमृतसर में रिसेप्शन पार्टी भी होगी. खबरों की मानें तो यह शादी पंजाबी रीति-रिवाज से होगी. कपिल ने पिछले साल गिन्नी के साथ अपने रिलेशनशिप का खुलासा किया था. वहीं, दूसरी तरफ कपिल के लिए एक और खुशखबरी है कि वह एक बार फिर लोगों को हंसाने के लिए टीवी पर आने वाले हैं. 'द कपिल शर्मा शो' का दूसरा सीजन शुरू होने वाला है. इसका प्रोमो रिलीज हो चुका है.
कॉमेडी किंग कपिल शर्मा अपनी गर्लफ्रेंड गिन्नी चतरथ के साथ सात फेरे लेने जा रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर ऑफिशियल अनाउंसमेंट कर दी है. बता दें कि बॉलीवुड में इन दिनों एक के बाद एक शादियां हो रही हैं. रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण ने चौदह-पंद्रह नवंबर को सात फेरे लिए. वहीं, प्रियंका चोपड़ा जल्द ही ब्वॉयफ्रेंड निक जोनास के साथ शादी के बंधन में बंधने वाली हैं. कपिल शर्मा ने इंस्टाग्राम पर शादी की जानकारी देते हुए एक फोटो शेयर की. इसमें लिखा है, 'माता-पिता के आशीर्वाद से आपको बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मैं और गिन्नी बहुत जल्दी एक नई शुरुआत करने वाले हैं. बारह दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह को हम सात फेरे लेंगे. हमें बहुत खुशी होगी कि आप हमारी खुशी में शामिल हों और अपना प्यार दें.' ये भी पढ़ेंः दीपिका की तरह प्रियंका चोपड़ा भी करेंगी दो रीति-रिवाजों से शादी, क्रिश्चियन वेडिंग में पहनेंगी ऐसी ड्रेस? कपिल और गिन्नी की शादी जालंधर में होगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दस दिसंबर को जागरण होगा और इसके बाद चूड़ा सेरेमनी, मेहंदी और कॉकटेल पार्टी भी होगी. चौदह दिसंबर को अमृतसर में रिसेप्शन पार्टी भी होगी. खबरों की मानें तो यह शादी पंजाबी रीति-रिवाज से होगी. कपिल ने पिछले साल गिन्नी के साथ अपने रिलेशनशिप का खुलासा किया था. वहीं, दूसरी तरफ कपिल के लिए एक और खुशखबरी है कि वह एक बार फिर लोगों को हंसाने के लिए टीवी पर आने वाले हैं. 'द कपिल शर्मा शो' का दूसरा सीजन शुरू होने वाला है. इसका प्रोमो रिलीज हो चुका है.
मुंबई : भांग का नशा ऐसा है जो एक बार किसी पर चढ़ जाए तो वह सबकुछ भूल जाता है. ऐसा ही कुछ बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के साथ हुआ. पति राज ने शिल्पा का वीडियो शेयर किया है. यह वीडियो होली के दिन का है. लेकिन राज कुंद्रा ने इसे अब शेयर किया है. यह वीडियो कुछ घंटों से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में शिल्पा भांग के नशे में कुछ ऐसा कर रही हैं, जिसे देखकर कोई भी उनका जबरा फैन बन जाए. इस वीडियो में शिल्पा भंग पीने के नागिन डांस कर रही हैं. शिल्पा के साथ उनकी फ्रेंड भी नागिन डांस कर रही हैं. दरअसल इस विडियो को शिल्पा के पति राज कुंद्रा ने अपने इंस्ट्राग्राम पर शेयर किया है और कैप्शन में लिखा है 'दो घूंट भांग पीने का असर'. शिल्पा ने अपने पति राज कुंद्रा के साथ कुछ खास परिवारवालों और दोस्तों के साथ खूब होली खेली थी. होली को एन्जॉय करते-करते शिल्पा ने भंग पी ली. उसके बाद शिल्पा झुमने लगीं नागिन डांस के साथ. राज ने इस खुशनुमा मौके को हमेशा के लिए रिकॉर्ड कर लिया. भले ही शिल्पा अब फिल्मों में अपना जलवा नहीं दिखाती हैं. लेकिन वह रियलिटी शो और फंक्शन में अपने पति के साथ अक्सर नजर आती हैं.
मुंबई : भांग का नशा ऐसा है जो एक बार किसी पर चढ़ जाए तो वह सबकुछ भूल जाता है. ऐसा ही कुछ बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के साथ हुआ. पति राज ने शिल्पा का वीडियो शेयर किया है. यह वीडियो होली के दिन का है. लेकिन राज कुंद्रा ने इसे अब शेयर किया है. यह वीडियो कुछ घंटों से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में शिल्पा भांग के नशे में कुछ ऐसा कर रही हैं, जिसे देखकर कोई भी उनका जबरा फैन बन जाए. इस वीडियो में शिल्पा भंग पीने के नागिन डांस कर रही हैं. शिल्पा के साथ उनकी फ्रेंड भी नागिन डांस कर रही हैं. दरअसल इस विडियो को शिल्पा के पति राज कुंद्रा ने अपने इंस्ट्राग्राम पर शेयर किया है और कैप्शन में लिखा है 'दो घूंट भांग पीने का असर'. शिल्पा ने अपने पति राज कुंद्रा के साथ कुछ खास परिवारवालों और दोस्तों के साथ खूब होली खेली थी. होली को एन्जॉय करते-करते शिल्पा ने भंग पी ली. उसके बाद शिल्पा झुमने लगीं नागिन डांस के साथ. राज ने इस खुशनुमा मौके को हमेशा के लिए रिकॉर्ड कर लिया. भले ही शिल्पा अब फिल्मों में अपना जलवा नहीं दिखाती हैं. लेकिन वह रियलिटी शो और फंक्शन में अपने पति के साथ अक्सर नजर आती हैं.
Cargo Review: पृथ्वी पर वर्चस्व के लिए इंसानों और राक्षसों की लड़ाई पुरानी नहीं बल्कि पौराणिक है. लेखक-निर्देशक आरती कदव अपनी डेब्यू फिल्म कार्गो (Cargo) में इस पौराणिक मिथक को कई ट्विस्ट एंड टर्न के साथ पेश करती हुई नई-रोचक कहानी बुनकर लाई हैं. जिसमें विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान के साथ आत्मा-परमात्मा और जीवन-मृत्यु का दर्शन भी है लेकिन इसे फैंटेसी में सहजता से बुना गया है. ऐसे दौर में जबकि हिंदी सिनेमा में रियलिटी का जोर है, आरती काल्पनिक कहानी को जमीनी सच की तरह पेश करती हैं. हल्के-फुल्के कॉमिक अंदाज में. साल 2027 में शुरू होने वाली यह फिल्म अपनी कालगणना में हमारे कैलेंडरों से काफी दूर की है. 2027 में यहां ऐसा समय दिखाया गया है, जब इंसान चांद-मंगल से आगे बृहस्पति तक पहुंच गया है. लेकिन धरती पर हालात 2020 जैसे हैं. वही लोकल ट्रेनें, वही घरों की पलस्तर उखड़ती दीवारें और उनमें काले पड़ते इलेक्ट्रिक सॉकेट. वही प्यार के झूठे वादे और रिश्तों में धोखे. इंसान पैदा हो रहा और मर रहा है. लेकिन कार्गो (Cargo) में इस जीवन-मरण के बीच में बड़ा बदलाव दिखता है. मरे हुए इंसान को लेने के लिए भैंसे पर सवार यमराज या उनके नुमाइंदे नहीं आते. यह काम मनुष्यों जैसे दिखने वाले राक्षस करते हैं. साथ ही यहां न स्वर्ग है, न नर्क. पृथ्वी पर मनुष्यों और राक्षसों के समझौते के बाद आकाशगंगा में 'पोस्ट डैथ ट्रांसपोर्टेशन सर्विस' करने वाले अंतरिक्ष स्टेशन बने हैं, जहां आदमी मर कर पहुंचता है. यहां उसे कार्गो यानी डिब्बाबंद माल कहा जाता है. स्टेशन में उसकी 'मेमोरी इरेज' की जाती है और फिर धरती पर नए शरीर में उसका जन्म होता है. काल्पनिक काल और स्थान के बैकग्राउंड वाली यह कहानी एक अंतरिक्ष स्टेशन पुष्पक 634-ए पर 75 साल से रह रहे होमो-राक्षस प्रहस्थ (विक्रांत मैसी) की है. जिसकी उम्र कितने सौ बरस होगी, कह नहीं सकते. लेकिन चूंकि अब उसके स्टेशन में जन्म-मृत्यु के कई चक्रों से गुजर कर आते लोग कहने लगे हैं कि उसे कहीं देखा है, तो इसका मतलब है कि धरती पर कई युग बीत चुके हैं. रिटायरमेंट का समय आ गया. उसकी जगह लेने के लिए राक्षसों-मनुष्यों के इंटरप्लेनेटरी स्पेस ऑर्गनाइजेशन ने युविष्का शेखर (श्वेता त्रिपाठी) को भेजा है. पुष्पक 634-ए में किसी इंसानी रोबोट की तरह दोनों थोड़े समय तक साथ रहते हैं. प्रहस्थ को धरती पर लौटना मुश्किल लगता है क्योंकि उसकी भावनाएं अपने काम से जुड़ी हैं. मगर यहां उसकी एक छोटी-सी प्रेम कहानी भी आरती ने दिखाई है. ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आई कार्गो का ढांचा रोचक है. हॉलीवुड या पश्चिमी देशों में बनने वाली महंगी अंतरिक्ष फिल्मों की तुलना में सीमित संसाधनों में बनी कार्गो अंतरिक्ष फैंटेसी का सुंदर नमूना है. कहानी और स्क्रिप्ट में दम है. यह आपको बांधे रखती है. मृत्यु का सफर और वहां से पुनर्जन्म की राह पर लौटना क्या इतना ही सहज किंतु रोचक होता होगा. फिल्म में मर कर अंतरिक्ष स्टेशन में आने वाले किरदारों में एक बात लगभग समान दिखती है. वे अचानक मर गए हैं और एक बार अपने किसी प्रियजन या परिवारवाले से बात करना चाहते हैं. मृत्यु यहां मशीनी है. जिसमें कोई दर्द नहीं, तकलीफ और इमोशन भी नहीं. स्मृति को 'इरेज' कर देने वाली कुर्सी पर बैठने के बाद इंसान जैसे कोरी स्लेट हो जाता है और धरती पर ट्रांसपोर्ट होने के लिए रबर के गुड्डे जैसा तैयार रहता है. ऐसे तमाम दृश्य और प्रसंग यहां आकर्षक हैं. कार्गो जीवन से मोह और मृत्यु के भय को एक समान दूरी और एक नजर से देखने की कहानी मालूम पड़ती है. कई बार जैसे हमें यह पता नहीं होता कि हम जी रहे हैं, वैसे ही हमें यह भी पता नहीं चलता कि हम मर चुके है. कुछ ऐसी ही बात कहते हुए कार्गो कहीं-कहीं हल्की मुस्कान पैदा करती है. इसमें हल्का व्यंग्य भी है. लगभग एक घंटे 50 मिनट की यह फिल्म बांधे रहती है. अगर आप रूटीन फिल्मों से अलग कुछ देखना पसंद करते हैं और साइंस फिक्शन में रुचि है तो कार्गो आपके लिए है. हिंदी में ऐसी फिल्में दुर्लभ है. अतः एक अलग अनुभव के लिए इस फिल्म को देखा जा सकता है. विक्रांत मैसी और श्वेता त्रिपाठी ने अपनी भूमिकाएं सहजता से निभाई हैं. फिल्म के सैट अच्छे डिजाइन किए गए हैं. इसका आर्ट डायरेक्शन और वीएफएक्स कहानी के अनुकूल हैं.
Cargo Review: पृथ्वी पर वर्चस्व के लिए इंसानों और राक्षसों की लड़ाई पुरानी नहीं बल्कि पौराणिक है. लेखक-निर्देशक आरती कदव अपनी डेब्यू फिल्म कार्गो में इस पौराणिक मिथक को कई ट्विस्ट एंड टर्न के साथ पेश करती हुई नई-रोचक कहानी बुनकर लाई हैं. जिसमें विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान के साथ आत्मा-परमात्मा और जीवन-मृत्यु का दर्शन भी है लेकिन इसे फैंटेसी में सहजता से बुना गया है. ऐसे दौर में जबकि हिंदी सिनेमा में रियलिटी का जोर है, आरती काल्पनिक कहानी को जमीनी सच की तरह पेश करती हैं. हल्के-फुल्के कॉमिक अंदाज में. साल दो हज़ार सत्ताईस में शुरू होने वाली यह फिल्म अपनी कालगणना में हमारे कैलेंडरों से काफी दूर की है. दो हज़ार सत्ताईस में यहां ऐसा समय दिखाया गया है, जब इंसान चांद-मंगल से आगे बृहस्पति तक पहुंच गया है. लेकिन धरती पर हालात दो हज़ार बीस जैसे हैं. वही लोकल ट्रेनें, वही घरों की पलस्तर उखड़ती दीवारें और उनमें काले पड़ते इलेक्ट्रिक सॉकेट. वही प्यार के झूठे वादे और रिश्तों में धोखे. इंसान पैदा हो रहा और मर रहा है. लेकिन कार्गो में इस जीवन-मरण के बीच में बड़ा बदलाव दिखता है. मरे हुए इंसान को लेने के लिए भैंसे पर सवार यमराज या उनके नुमाइंदे नहीं आते. यह काम मनुष्यों जैसे दिखने वाले राक्षस करते हैं. साथ ही यहां न स्वर्ग है, न नर्क. पृथ्वी पर मनुष्यों और राक्षसों के समझौते के बाद आकाशगंगा में 'पोस्ट डैथ ट्रांसपोर्टेशन सर्विस' करने वाले अंतरिक्ष स्टेशन बने हैं, जहां आदमी मर कर पहुंचता है. यहां उसे कार्गो यानी डिब्बाबंद माल कहा जाता है. स्टेशन में उसकी 'मेमोरी इरेज' की जाती है और फिर धरती पर नए शरीर में उसका जन्म होता है. काल्पनिक काल और स्थान के बैकग्राउंड वाली यह कहानी एक अंतरिक्ष स्टेशन पुष्पक छः सौ चौंतीस-ए पर पचहत्तर साल से रह रहे होमो-राक्षस प्रहस्थ की है. जिसकी उम्र कितने सौ बरस होगी, कह नहीं सकते. लेकिन चूंकि अब उसके स्टेशन में जन्म-मृत्यु के कई चक्रों से गुजर कर आते लोग कहने लगे हैं कि उसे कहीं देखा है, तो इसका मतलब है कि धरती पर कई युग बीत चुके हैं. रिटायरमेंट का समय आ गया. उसकी जगह लेने के लिए राक्षसों-मनुष्यों के इंटरप्लेनेटरी स्पेस ऑर्गनाइजेशन ने युविष्का शेखर को भेजा है. पुष्पक छः सौ चौंतीस-ए में किसी इंसानी रोबोट की तरह दोनों थोड़े समय तक साथ रहते हैं. प्रहस्थ को धरती पर लौटना मुश्किल लगता है क्योंकि उसकी भावनाएं अपने काम से जुड़ी हैं. मगर यहां उसकी एक छोटी-सी प्रेम कहानी भी आरती ने दिखाई है. ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आई कार्गो का ढांचा रोचक है. हॉलीवुड या पश्चिमी देशों में बनने वाली महंगी अंतरिक्ष फिल्मों की तुलना में सीमित संसाधनों में बनी कार्गो अंतरिक्ष फैंटेसी का सुंदर नमूना है. कहानी और स्क्रिप्ट में दम है. यह आपको बांधे रखती है. मृत्यु का सफर और वहां से पुनर्जन्म की राह पर लौटना क्या इतना ही सहज किंतु रोचक होता होगा. फिल्म में मर कर अंतरिक्ष स्टेशन में आने वाले किरदारों में एक बात लगभग समान दिखती है. वे अचानक मर गए हैं और एक बार अपने किसी प्रियजन या परिवारवाले से बात करना चाहते हैं. मृत्यु यहां मशीनी है. जिसमें कोई दर्द नहीं, तकलीफ और इमोशन भी नहीं. स्मृति को 'इरेज' कर देने वाली कुर्सी पर बैठने के बाद इंसान जैसे कोरी स्लेट हो जाता है और धरती पर ट्रांसपोर्ट होने के लिए रबर के गुड्डे जैसा तैयार रहता है. ऐसे तमाम दृश्य और प्रसंग यहां आकर्षक हैं. कार्गो जीवन से मोह और मृत्यु के भय को एक समान दूरी और एक नजर से देखने की कहानी मालूम पड़ती है. कई बार जैसे हमें यह पता नहीं होता कि हम जी रहे हैं, वैसे ही हमें यह भी पता नहीं चलता कि हम मर चुके है. कुछ ऐसी ही बात कहते हुए कार्गो कहीं-कहीं हल्की मुस्कान पैदा करती है. इसमें हल्का व्यंग्य भी है. लगभग एक घंटे पचास मिनट की यह फिल्म बांधे रहती है. अगर आप रूटीन फिल्मों से अलग कुछ देखना पसंद करते हैं और साइंस फिक्शन में रुचि है तो कार्गो आपके लिए है. हिंदी में ऐसी फिल्में दुर्लभ है. अतः एक अलग अनुभव के लिए इस फिल्म को देखा जा सकता है. विक्रांत मैसी और श्वेता त्रिपाठी ने अपनी भूमिकाएं सहजता से निभाई हैं. फिल्म के सैट अच्छे डिजाइन किए गए हैं. इसका आर्ट डायरेक्शन और वीएफएक्स कहानी के अनुकूल हैं.
लखनऊः उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से बड़ी खबर आ रही है। निर्वाचन आयोग से अनुमति मिलने के बाद 65 लाख रुपये वसूली के मामले में बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक डॉ. सतीश कुमार को निलंबित कर दिया गया है। बाराबंकी साइबर क्राइम सेल प्रभारी अनूप कुमार यादव द्वारा की गई वसूली में एसपी ऑफिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जिस पर उनके खिलाफ एक्शन लिया गया। नए पुलिस अधीक्ष की तैनाती के लिए चुनाव आयोग को तीन नामों का पैनल भेजा गया है। बताया जा रहा है कि शाम तक नए एसपी की तैनाती हो जाएगी। विश्वास ट्रेडिंग कंपनी के शंकर गायन ने लखनऊ में हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर साइबर क्राइम सेल के प्रभारी अनूप कुमार यादव व उसके साथियों पर 65 लाख रुपये की वसूली का आरोप लगाया था। आरोप था कि अनूप ने कंपनी के प्रसनजीत सरदार, शंकर गायन और धीरज श्रीवास्तव को कंपनी के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले की जांच के बहाने दस्तावेज के साथ 10 जनवरी को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बुलाया। वहां से अपने आवास ले जाकर 65 लाख की मांग के साथ कंपनी बंद कराने की धमकी दी। उन्होंने डर के चलते 65 लाख दे दिए। अनूप ने 11 जनवरी को फिर बुलाया और जेल भेज दिया। आरोप है कि कंपनी के लोगों को एसपी के दफ्तर में बुलाकर धमकाया गया। डॉ। सतीश के इस मामले में लापरवाही करने की भी बात सामने आई। हालांकि पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने उनसे सवाल किए तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। डीजीपी ओपी सिंह ने प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार को एसपी के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव सौंपा था। गृह विभाग से यह प्रस्ताव मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय के पास भेजा गया। प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने सहमति जता दी है।
लखनऊः उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से बड़ी खबर आ रही है। निर्वाचन आयोग से अनुमति मिलने के बाद पैंसठ लाख रुपये वसूली के मामले में बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक डॉ. सतीश कुमार को निलंबित कर दिया गया है। बाराबंकी साइबर क्राइम सेल प्रभारी अनूप कुमार यादव द्वारा की गई वसूली में एसपी ऑफिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जिस पर उनके खिलाफ एक्शन लिया गया। नए पुलिस अधीक्ष की तैनाती के लिए चुनाव आयोग को तीन नामों का पैनल भेजा गया है। बताया जा रहा है कि शाम तक नए एसपी की तैनाती हो जाएगी। विश्वास ट्रेडिंग कंपनी के शंकर गायन ने लखनऊ में हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर साइबर क्राइम सेल के प्रभारी अनूप कुमार यादव व उसके साथियों पर पैंसठ लाख रुपये की वसूली का आरोप लगाया था। आरोप था कि अनूप ने कंपनी के प्रसनजीत सरदार, शंकर गायन और धीरज श्रीवास्तव को कंपनी के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले की जांच के बहाने दस्तावेज के साथ दस जनवरी को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बुलाया। वहां से अपने आवास ले जाकर पैंसठ लाख की मांग के साथ कंपनी बंद कराने की धमकी दी। उन्होंने डर के चलते पैंसठ लाख दे दिए। अनूप ने ग्यारह जनवरी को फिर बुलाया और जेल भेज दिया। आरोप है कि कंपनी के लोगों को एसपी के दफ्तर में बुलाकर धमकाया गया। डॉ। सतीश के इस मामले में लापरवाही करने की भी बात सामने आई। हालांकि पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने उनसे सवाल किए तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। डीजीपी ओपी सिंह ने प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार को एसपी के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव सौंपा था। गृह विभाग से यह प्रस्ताव मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय के पास भेजा गया। प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने सहमति जता दी है।
है - प्रतः इस प्रकार के ज्वरो की चिकित्सा ( लघन ) भेषज साध्य है। जैसा कि आचार्य निर्देश करता है। "ज्वरे लंधन मेवादौ ।" । यहां लंघन शब्द का उपवास रूप विशेष अर्थ में प्रयोग है। वैसे लंघन भेषज दस तरह का बतलाया गया है । चरक चतुष्प्रकारा संशुद्धिः पिपासा मारुना तपौ। पाचनान्युपवासश्च व्यायामश्चेति लंघनम् ॥ १॥ उपवास रूप लंघन का प्रयोग प्रारम्भ मे उन सब ज्वरों में कराना श्रावश्यक है जो दोष वृद्धि से श्राभाशय की विकृति के कारण रस सामता के साथ उत्पन्न होते हैं । यदि ऐसे ज्वरो मे खान-पान बन्द न किया जाय तो ज्वर वृद्धि के साथ-साथ अन्य व्याधियों की उत्पत्ति होती है जिनके प्रत्याख्यान मे पीछे पर्याप्त कठिनाई का सामना करना पड़ता है । इन ज्वरों की दोष-स्थिति के कारण चार अवस्थाएं मानी गई है। ग्राम, पच्यमान, पवव तथा जीर्णावस्था । उपवास रूप लघन का प्रयोग श्रमावस्था के लिए है । पच्यमान अवस्था में पाचन-भेषज का प्रयोग दोषों की पक्वावस्था में शोधन शमन का प्रयोग होना चाहिए । दोषों की जीर्णावस्था में वृहण रूप शमन भेषज का प्रयोग उपादेय है। अवस्था भेद से ग्राम तथा पच्यमान ज्वरों में वमन विरेचनादि की तरह लंघन का भी प्रयोग किया जाता है। मारुत, व्यायाम रूप लघन का तरुण ज्वर में निषेध है। शेष का अवस्थानुरूप प्रयोग किया जाना चाहिए । भारतीय पद्धति से दोष वृद्धिजन्य ज्वरों की ग्राम तथा पच्यमान अवस्था में ज्वर को रोकने की भेषज कभी नहीं दी जानी चाहिए । कारण इस अवस्था में एक प्रकार की शरीर मे विषाक्तता उत्पन्न होती है। उसका लंघन तथा पाचन से परिहार करना जरूरी है । यदि इस दशा में ज्वर को रोक देते हैं तो रस स्रोतों से संचालित सम्पूर्ण शरीरगत, दोष विकृतिजन्य विषाक्तता उसी दशा में शरीर में रुक जाती है। जिसका कि परिणाम पुनः पुनः ज्वरोत्पत्ति, रक्त-निर्माता अवयवों की विकृति, पाचन प्रणाली की गड़बड़ी तथा श्रोज क्षय रूप सामने प्राता है । रोगी महीनों तक सुलझने नहीं पाता -लंघन पाचन से विषाकता निर्मल हो जाने पर शमन भेषज का प्रयोग कराना चाहिए । क्षयजन्य ज्वरों में प्रारम्भ से ज्वर रोकने की भेषज का प्रयोग करना संगत है। कारण न तो वहां सामता है न रस - विकृति है । जिस तरह वृद्धिजन्य ज्वरों मे प्रारम्भ मे शमन भेषज का निषेध है उसी तरह क्षयजन्य में लंघन का निषेध है । यथा••ऋतं ज्वरात् । श्रमोद्भवात् ॥१॥ क्षयातिल भय कोघ काम शोक
है - प्रतः इस प्रकार के ज्वरो की चिकित्सा भेषज साध्य है। जैसा कि आचार्य निर्देश करता है। "ज्वरे लंधन मेवादौ ।" । यहां लंघन शब्द का उपवास रूप विशेष अर्थ में प्रयोग है। वैसे लंघन भेषज दस तरह का बतलाया गया है । चरक चतुष्प्रकारा संशुद्धिः पिपासा मारुना तपौ। पाचनान्युपवासश्च व्यायामश्चेति लंघनम् ॥ एक॥ उपवास रूप लंघन का प्रयोग प्रारम्भ मे उन सब ज्वरों में कराना श्रावश्यक है जो दोष वृद्धि से श्राभाशय की विकृति के कारण रस सामता के साथ उत्पन्न होते हैं । यदि ऐसे ज्वरो मे खान-पान बन्द न किया जाय तो ज्वर वृद्धि के साथ-साथ अन्य व्याधियों की उत्पत्ति होती है जिनके प्रत्याख्यान मे पीछे पर्याप्त कठिनाई का सामना करना पड़ता है । इन ज्वरों की दोष-स्थिति के कारण चार अवस्थाएं मानी गई है। ग्राम, पच्यमान, पवव तथा जीर्णावस्था । उपवास रूप लघन का प्रयोग श्रमावस्था के लिए है । पच्यमान अवस्था में पाचन-भेषज का प्रयोग दोषों की पक्वावस्था में शोधन शमन का प्रयोग होना चाहिए । दोषों की जीर्णावस्था में वृहण रूप शमन भेषज का प्रयोग उपादेय है। अवस्था भेद से ग्राम तथा पच्यमान ज्वरों में वमन विरेचनादि की तरह लंघन का भी प्रयोग किया जाता है। मारुत, व्यायाम रूप लघन का तरुण ज्वर में निषेध है। शेष का अवस्थानुरूप प्रयोग किया जाना चाहिए । भारतीय पद्धति से दोष वृद्धिजन्य ज्वरों की ग्राम तथा पच्यमान अवस्था में ज्वर को रोकने की भेषज कभी नहीं दी जानी चाहिए । कारण इस अवस्था में एक प्रकार की शरीर मे विषाक्तता उत्पन्न होती है। उसका लंघन तथा पाचन से परिहार करना जरूरी है । यदि इस दशा में ज्वर को रोक देते हैं तो रस स्रोतों से संचालित सम्पूर्ण शरीरगत, दोष विकृतिजन्य विषाक्तता उसी दशा में शरीर में रुक जाती है। जिसका कि परिणाम पुनः पुनः ज्वरोत्पत्ति, रक्त-निर्माता अवयवों की विकृति, पाचन प्रणाली की गड़बड़ी तथा श्रोज क्षय रूप सामने प्राता है । रोगी महीनों तक सुलझने नहीं पाता -लंघन पाचन से विषाकता निर्मल हो जाने पर शमन भेषज का प्रयोग कराना चाहिए । क्षयजन्य ज्वरों में प्रारम्भ से ज्वर रोकने की भेषज का प्रयोग करना संगत है। कारण न तो वहां सामता है न रस - विकृति है । जिस तरह वृद्धिजन्य ज्वरों मे प्रारम्भ मे शमन भेषज का निषेध है उसी तरह क्षयजन्य में लंघन का निषेध है । यथा••ऋतं ज्वरात् । श्रमोद्भवात् ॥एक॥ क्षयातिल भय कोघ काम शोक
मुंबईः बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी हाल ही में फिल्म भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की बायोपिक 'अजहर' में नजर आए हैं। फिल्म में उनके अभिनय की काफी तारीफे गई हैं। इमरान इस फिल्म को लेकर इतने खुश हैं कि अब वह युवराज सिंह की बायोपिक में भी काम करना चाहते हैं। इमरान हाशमी पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी मोहम्मद अजहरुद्दीन के जीवन पर आधारित फिल्म 'अजहर' में काम करने के बाद अब बैट्समैन युवराज सिंह के जीवन पर बनी फिल्म में काम करना चाहते हैं। दरअसल ट्विटर उपभोक्ताओं के साथ एक ऑनलाइन चैट के दौरान इमरान से यह पूछे जाने पर कि वह और किस क्रिकेटर की बायोपिक में काम करना चाहते हैं, उन्होंने कहा, "युवराज सिंह ऐसे क्रिकेटर हैं, जिनकी बायोपिक में मैं काम करना चाहता हूं। " इमरान कहीं से भी अजहरुद्दीन के जैसे नहीं दिखते लेकिन फिर भी उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय से उनके जीवन को बखूबी पर्दे पर उतारा है। फिल्म के लिए इमरान ने काफी कड़ी मेहनत भी की हैं। फिल्म में उनके साथ प्राची देसाई और नरगिस फाखरी भी अहम भूमिकाओं में नजर आई हैं। फिल्म में प्राची, अजहरूद्दीन की पहली पत्नी नौरीन के किरदार में दिखीं जबकि नरगिस ने उनकी दूसरी पत्नी और अभिनेत्री संगीता बिजलानी की भूमिका निभाई है। इमरान की आगामी फिल्में 'टाइगर' और 'राज रीबूट' हैं, जिनका निर्देशन क्रमशः डैनिस टैनोविक और विक्रम भट्ट करेंगे। 'राज रीबूट' के बारे में उन्होंने कहा, "फिल्म इसी सितंबर में रिलीज होगी। हम इसे 'राज 3' से ज्यादा डरावनी बनाने का प्रयास कर रहे हैं। "
मुंबईः बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी हाल ही में फिल्म भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की बायोपिक 'अजहर' में नजर आए हैं। फिल्म में उनके अभिनय की काफी तारीफे गई हैं। इमरान इस फिल्म को लेकर इतने खुश हैं कि अब वह युवराज सिंह की बायोपिक में भी काम करना चाहते हैं। इमरान हाशमी पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी मोहम्मद अजहरुद्दीन के जीवन पर आधारित फिल्म 'अजहर' में काम करने के बाद अब बैट्समैन युवराज सिंह के जीवन पर बनी फिल्म में काम करना चाहते हैं। दरअसल ट्विटर उपभोक्ताओं के साथ एक ऑनलाइन चैट के दौरान इमरान से यह पूछे जाने पर कि वह और किस क्रिकेटर की बायोपिक में काम करना चाहते हैं, उन्होंने कहा, "युवराज सिंह ऐसे क्रिकेटर हैं, जिनकी बायोपिक में मैं काम करना चाहता हूं। " इमरान कहीं से भी अजहरुद्दीन के जैसे नहीं दिखते लेकिन फिर भी उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय से उनके जीवन को बखूबी पर्दे पर उतारा है। फिल्म के लिए इमरान ने काफी कड़ी मेहनत भी की हैं। फिल्म में उनके साथ प्राची देसाई और नरगिस फाखरी भी अहम भूमिकाओं में नजर आई हैं। फिल्म में प्राची, अजहरूद्दीन की पहली पत्नी नौरीन के किरदार में दिखीं जबकि नरगिस ने उनकी दूसरी पत्नी और अभिनेत्री संगीता बिजलानी की भूमिका निभाई है। इमरान की आगामी फिल्में 'टाइगर' और 'राज रीबूट' हैं, जिनका निर्देशन क्रमशः डैनिस टैनोविक और विक्रम भट्ट करेंगे। 'राज रीबूट' के बारे में उन्होंने कहा, "फिल्म इसी सितंबर में रिलीज होगी। हम इसे 'राज तीन' से ज्यादा डरावनी बनाने का प्रयास कर रहे हैं। "
Manish Kashyap Arrested: बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप ने शनिवार को बेतिया जिले के जगदीशपुर थाने में जाकर सरेंडर कर दिया। इससे पहले बिहार पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने सच तक न्यूज के संचालक मनीष कश्यप उर्फ त्रिपुरारि कुमार तिवारी के घर कुर्की जब्त की थी। पुलिस की बढ़ती कार्रवाई के मद्देनजर मनीष ने आज सरेंडर कर दिया। बता दें कि मनीष कश्यप ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था। इसके बाद से पुलिस लगातार मनीष की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी। बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप पर आरोप है कि उन्होंने तमिलनाडु में काम कर रहे बिहार के निवासियों के भ्रामक और उन्मादपूर्ण वीडियो प्रसारित किया था। फर्जी वीडियो चलाने के मामले में उनके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था। बिहार पुलिस ने आज एक बयान जारी कर बताया कि बिहार पुलिस और ईओयू के छापे के कारण मनीष कश्यप ने बेतिया के जगदीशपुर पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस यूट्यूबर मनीष कश्यप के खिलाफ कुल 7 मामले दर्ज किए हैं। उनके खिलाफ धारा 153/153(ए)/153(बी)/505 (1) (बी)/505 (1) (सी) 468/471/120 (बी) भारतीय दंड संहिता एवं आईटी एक्ट 2000 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बता दें कि कुछ दिनों पहले मनीष कश्यप के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया था। उनके तीन बैंक अकाउंट्स में 42 लाख रुपये जमा थे। 'सन ऑफ बिहार' नाम से मशहूर मनीष कश्यप का जन्म 9 मार्च 1991 को पश्चिम चंपारण के डुमरी महनवा गांव में हुआ था। उसकी शुरुआती शिक्षा गांव से ही हुई। 2009 में 12वीं के बाद उसने महारानी जानकी कुंवर कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। 2016 में उसने पुणे की सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग में BE किया था। इसके बाद वह यूट्यूब चैनल बनाकर वीडियो अपलोड करने लगा।
Manish Kashyap Arrested: बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप ने शनिवार को बेतिया जिले के जगदीशपुर थाने में जाकर सरेंडर कर दिया। इससे पहले बिहार पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई ने सच तक न्यूज के संचालक मनीष कश्यप उर्फ त्रिपुरारि कुमार तिवारी के घर कुर्की जब्त की थी। पुलिस की बढ़ती कार्रवाई के मद्देनजर मनीष ने आज सरेंडर कर दिया। बता दें कि मनीष कश्यप ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था। इसके बाद से पुलिस लगातार मनीष की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी। बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप पर आरोप है कि उन्होंने तमिलनाडु में काम कर रहे बिहार के निवासियों के भ्रामक और उन्मादपूर्ण वीडियो प्रसारित किया था। फर्जी वीडियो चलाने के मामले में उनके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था। बिहार पुलिस ने आज एक बयान जारी कर बताया कि बिहार पुलिस और ईओयू के छापे के कारण मनीष कश्यप ने बेतिया के जगदीशपुर पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस यूट्यूबर मनीष कश्यप के खिलाफ कुल सात मामले दर्ज किए हैं। उनके खिलाफ धारा एक सौ तिरेपन/एक सौ तिरेपन/एक सौ तिरेपन/पाँच सौ पाँच /पाँच सौ पाँच चार सौ अड़सठ/चार सौ इकहत्तर/एक सौ बीस भारतीय दंड संहिता एवं आईटी एक्ट दो हज़ार के तहत मामला दर्ज किया गया है। बता दें कि कुछ दिनों पहले मनीष कश्यप के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया था। उनके तीन बैंक अकाउंट्स में बयालीस लाख रुपये जमा थे। 'सन ऑफ बिहार' नाम से मशहूर मनीष कश्यप का जन्म नौ मार्च एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे को पश्चिम चंपारण के डुमरी महनवा गांव में हुआ था। उसकी शुरुआती शिक्षा गांव से ही हुई। दो हज़ार नौ में बारहवीं के बाद उसने महारानी जानकी कुंवर कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। दो हज़ार सोलह में उसने पुणे की सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग में BE किया था। इसके बाद वह यूट्यूब चैनल बनाकर वीडियो अपलोड करने लगा।
इस रंग की ब्रा देखकर आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है हर लड़का ! सावधान! महिलाएं अपने गुप्तांग में न रखें ये 4 चीजें, वरना पूरी जिन्दगी हो जाएगी बर्बाद. . लड़का वर्जिन है या नहीं, लडकिया बस करे ये काम तुरंत सच होगा आपके सामने. .
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चर्चा में क्यों? 17 जुलाई, 2023 को केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी और देश के महत्त्वपूर्ण शहरों में से एक लखनऊ में 3,300 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश वाली दो राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शुभारंभ किया। - इन परियोजनाओं में मड़ियाँव-आई.आई.एम.राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर लखनऊ-सीतापुर खंड शामिल है। नवनिर्मित 4-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर समय से छह महीने पहले पूरा हो गया है। - इससे लखनऊ से सीतापुर तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, भिटौली तिराहा और जानकीपुरम एक्सटेंशन पर भारी ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और 30 मिनट से अधिक समय और ईंधन की बचत होगी। तीर्थयात्रियों को चंद्रिका देवी और नैमिषारण्य जाने में भी सुविधा होगी। - अलीगढ़-कानपुर खंड के नवीगंज से मित्रसेनपुर तक 4-लेन सड़क के निर्माण से नवीगंज, कन्नौज, मित्रसेनपुर और आगे दिल्ली तक यातायात की सुविधा होगी। उत्तर प्रदेश के इत्र हब कन्नौज और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। - छिबरामऊ, गुरसहायगंज, जलालाबाद, मानीमऊ जैसे इलाकों में छोटे और मझोले उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। कन्नौज के किसानों को छिबरामऊ, नवीगंज मंडी तक आवागमन में आसानी होगी और दिल्ली तक सीधी पहुँच आसान होगी। चर्चा में क्यों? 17 जुलाई, 2023 को राजस्थान विधानसभा में राजस्थान विश्वविद्यालयों के अध्यापक (अस्थायी अध्यापकों का आमेलन) (संशोधन) विधेयक-2023 को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक के माध्यम से स्क्रीनिंग कर पात्र अस्थायी अध्यापकों को नियमित किया जा सकेगा। - विदित है कि इससे पूर्व वर्ष 2008 में राजस्थान विश्वविद्यालयों के अध्यापक (अस्थायी अध्यापकों का आमेलन) अध्यादेश लाया गया था। बाद में इस अध्यादेश का प्रतिस्थापक विधेयक विधानसभा में पारित कराया गया। - इस अध्यादेश एवं अधिनियम के अंतर्गत विश्वविद्यालयों में अस्थायी रूप से कार्यरत 300 से अधिक शिक्षकों को स्क्रीनिंग कमेटी के माध्यम से पात्र पाए जाने पर संबंधित विश्वविद्यालयों की सेवा में स्थायी किया गया था। - ज्ञातव्य है कि वर्ष 2008 से पूर्व विश्वविद्यालय में कार्यरत कुछ अस्थायी शिक्षक/योग प्रशिक्षक 2008 के अध्यादेश में कवर होने से रह गए। अतः राज्य सरकार ने ऐसे शिक्षकों एवं योग प्रशिक्षकों को स्क्रीनिंग कमेटी के माध्यम से पात्र पाए जाने पर स्थायी किये जाने का निर्णय लिया है। - इसके लिये 2008 के आमेलन अधिनियम में अस्थायी शिक्षक की परिभाषा को संशोधित करने व मूल अधिनियम के द्वारा आमेलन हेतु निर्धारित 180 दिवस की अवधि में छूट देते हुए राजस्थान विश्वविद्यालयों के अध्यापक (अस्थायी अध्यापकों का आमेलन) (संशोधन) विधेयक-2023 लाया गया है। चर्चा में क्यों? 17 जुलाई, 2023 को राजस्थान विधानसभा में राजीव गांधी फिनटेक डिजिटल संस्थान विधेयक-2023 पर चर्चा के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। - राजस्थान के शिक्षा मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने विधानसभा में कहा कि जोधपुर में स्थापित किया जा रहा राजीव गांधी फिनटेक डिजिटल संस्थान वित्तीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्वस्तरीय मानक स्थापित करेगा। राज्य के युवाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करने के लिये इस संस्थान की स्थापना की जा रही है। - यह विश्वस्तरीय संस्थान डिजिटल वर्ल्ड में एक नई क्रांति साबित होगा। इससे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञ तैयार होंगे, जिन्हें दुनिया भर में रोज़गार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। - संस्थान आईटी क्रांति के सूत्रधार भारत रत्न स्व. राजीव गांधी के नाम से स्थापित किया जा रहा है। - वर्तमान दौर में जहाँ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और निवेश व बीमा जैसे कार्यों के लिये लोगों को विशेषज्ञ सलाह की आवश्यकता बढ़ रही है, इस संस्थान से डिजिटल ज्ञानयुक्त वित्तीय प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ तैयार होंगे। - राज्य सरकार ने अपने वित्तीय संसाधनों से संस्थान के लिये 672.45 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है, जिसमें से 130 करोड़ की राशि व्यय भी की जा चुकी है। इसके लिये 97 बीघा भूमि आवंटित की जा चुकी है, जिस पर निर्माण कार्य जारी है। - संस्थान में यूजीसी और एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा, डिग्री कोर्सेज उपलब्ध हो सकेंगे। यह संस्थान डिजिटल स्टेट यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित होगा, जहाँ सायबर एक्सपर्ट और डिजिटल एक्सपर्ट तैयार किये जाएंगे। - साथ ही, संस्थान आईआईटी, एम्स के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। यहाँ का प्रबंधन पूर्ण रूप से स्वायत्तशासी होगा। - विदित है कि इससे पूर्व सदन ने विधेयक पर जनमत जानने के लिये परिचालित करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया। चर्चा में क्यों? 17 जुलाई, 2023 को राजस्थान के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने विधानसभा में बताया कि प्रदेश में 11 मिलेट्स एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिये 3 करोड़ 37 लाख रुपयों की अनुदान सहायता दी गई है। - कृषि मंत्री ने बताया कि राजस्थान मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन के तहत मिलेट्स प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिये किसी भी ज़िले से किसानों द्वारा आवेदन नहीं किया गया है। मिलेट्स एवं अन्य खाद्य सामग्री की प्रसंस्करण इकाइयों के लिये निजी कंपनियों के 20 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 11 प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिये 3 करोड़ 37 लाख रुपयों की अनुदान सहायता दी गई है। - उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2022-23 के बजट में राजस्थान मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन की घोषणा की गई है। - मिशन के अंतर्गत लघु एवं सीमांत किसानों को उन्नत किस्मों के निःशुल्क बीज, सुक्ष्म पोषक तत्त्व एवं जैव कीटनाशी किट का अनुदानित दर पर वितरण, मिलेट्स की प्रथम 100 प्रसंस्करण ईकाइयों की स्थापना पर अनुदान, बाजरा व अन्य मिलेट्स के संवर्धन, प्रोत्साहन व नवीनतम तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की दृष्टि से जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत मिलेट्स उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना आदि प्रावधान किये गए हैं। - ज्ञातव्य है कि रागी, कंगनी, सावां, चीना, कोदो, कुटकी फसलें मिलेट्स के अंतर्गत शामिल हैं। इनकी पोषण गुणवत्ता के बारे में जन-जागरूकता कार्यक्रम प्रस्तावित किये गए हैं। - राज्य की बीज उत्पादक संस्थाओं, राजस्थान राज्य बीज निगम लिमिटेड एवं राजस्थान राज्य तिलहन उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के पास छोटे अनाजों जैसे रागी, कंगनी, सावां, चीना, कोदो, कुटकी के उन्नत बीज उपलब्ध नहीं है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में ही इन बीजों को विकसित करने के लिये इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च, हैदराबाद से बीज मंगाए गए हैं। चर्चा में क्यों? 16 जुलाई, 2023 को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने करीब 46 लाख रुपए की लागत से राज्य के सोनीपत ज़िले के मुरथल में स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) में स्थापित 135 फीट ऊँचे तिरंगे का आरोहण किया। - साथ ही, मुख्यमंत्री ने 35 करोड़ रुपए की लागत से नवनिर्मित अटल अकादमी एवं आईडिया लैब का भी लोकार्पण किया। - मुख्यमंत्री ने कहा कि डीसीआरयूएसटी में सबसे ऊँचा राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया गया है, जो एक गौरव एवं प्रेरणादायी परियोजना है। यहाँ से गुज़रते वक्त हाईवे से भी यह ध्वज राष्ट्रीयता के संदेश को प्रसारित करता हुआ दिखाई देगा। इस पर लाईट की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे यह दिन-रात 24 घंटे चमकता रहेगा। नये नियम के तहत इसे रात्रि के समय उतारने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। - इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अन्य परियोजनाओं की चर्चा करते हुए बताया कि विज्ञान एवं वास्तुकला को समर्पित अटल अकादमी एवं आईडिया लैब से शोध को बढ़ावा मिलेगा। डीसीआरयूएसटी के नाम में ही विज्ञान शामिल है, जो विशेष रूप से विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। - इस परियोजना में एआईसीटीई का विशेष रूप से सहयोग मिला है। आईडिया लैब की स्थापना से नए-नए विचारों को विकसित कर विज्ञान के माध्यम से जीवनशैली में उपयोगी बनाने में मदद मिलेगी। चर्चा में क्यों? 16 जुलाई, 2023 को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्य के सोनीपत ज़िले के खरखोदा उपमंडल में दादा कुशाल सिंह और ब्रिगेडियर होशियार सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया। - समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि ये दोनों इस इलाके की महान शख्सियत हैं और दोनों की विशेषता इनका देश के प्रति और धर्म के प्रति निष्ठावान रहना है। इनकी गुरु भक्ति और बलिदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। - विदित है कि वर्ष 1675 में जब श्री गुरु तेग बहादुर जी ने औरंगजेब के खिलाफ बिगुल फूँका तो दादा कुशाल सिंह ने धर्म निभाकर अपने शीश का बलिदान दिया था। - इसी तरह, ब्रिगेडियर होशियार सिंह, जिन्हें सेना के सर्वोच्च सम्मान 'परमवीर चक्र' से नवाज़ा गया है, उन्होंने वर्ष 1965 और 1971 की लड़ाइयों में भाग लिया और अपनी वीरता का परिचय दिया। - मुख्यमंत्री ने बताया कि ब्रिगेडियर होशियार सिंह ने युद्ध विराम होते हुए भी पीछे हटने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि आज देश की सेना में हर दसवाँ व्यक्ति हरियाणा से है जो कि प्रदेश के युवाओं की देशभक्ति के प्रति लगन का ही परिणाम है। प्रदेश में 17 लाख ऐसे परिवार हैं जो पूर्व सैनिकों से संबंध रखते हैं। - पूर्व सैनिकों के प्रति सच्ची निष्ठा रखते हुए प्रदेश सरकार ने 1971 की लड़ाई के बाद जितनी भी लड़ाइयाँ लड़ी गईं उन सभी में हुए शहीदों के परिवारों में से पिछले 8 सालों में 367 लोगों को नौकरियाँ प्रदान की गई है। - शहीदों के परिवार को अनुग्रह राशि के तौर पर 50 लाख, आईईडी ब्लास्ट में शहीद होने पर उनके परिवार को 50 लाख, किसी भी युद्ध में घायल, शहीद के दिव्यांग के अलग-अलग पैमाने पर 15 लाख, 25 लाख और 35 लाख रुपए की सहायता राशि मुहैया कराई जाती है। - इनके अलावा, द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए परिवारों को 10,000 रुपए मासिक पेंशन भी उपलब्ध कराई जा रही है। चर्चा में क्यों? 16 जुलाई, 2023 को भगवान बिरसा जैविक पार्क (बिरसा चिड़ियाघर) के निदेशक जब्बार सिंह ने बताया कि पूर्वी भारत का सबसे बड़ा ओपन-एयर बटरफ्लाई पार्क जल्द ही भगवान बिरसा जैविक पार्क (बीबीबीपी) में जनता के लिये खोल दिया जाएगा। - यह पार्क बीबीबीपी के परिसर में एक्वैरियम के ठीक सामने 19 एकड़ की विशाल भूमि पर बनाया गया है। भगवान बिरसा जैविक पार्क रांची शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर है, जिसे बिरसा चिड़ियाघर के नाम से जाना जाता है। - बटरफ्लाई प्रेमियों को मनोरंजन के साथ-साथ शैक्षिक मूल्य प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गए इस पार्क के पहले चरण का विकास कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इस पार्क की अनुमानित लागत दो करोड़ रुपए है। - पहले चरण में जो विकास कार्य किये गए हैं उनमें एक बटरफ्लाई कंजर्वेटरी, इसके अलावा आवास विकास जैसे पराग पौधों का रोपण, तितली पार्क के लिये पैदल मार्ग का निर्माण, एक तालाब और एक प्रवेश द्वार शामिल है। अभी पार्क में कुछ सुधारीकरण और अन्य कार्य चल रहे हैं। आने वाले चरणों में पार्क में और सुविधाएँ जोड़ी जाएंगी। इसे एक या दो महीने में जनता के देखने के लिये खोल दिया जाएगा। - जब्बार सिंह ने बताया कि पार्क को हरे-भरे क्षेत्र में विकसित किया गया है, जो आगंतुकों को पारिस्थितिकी (Ecology) में तितलियों के महत्त्व के बारे में जागरूक करने में मदद करेगा। स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में जैव विविधता की बढ़ती आवश्यकता के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने में तितलियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अच्छी संख्या में तितलियों की मौजूदगी एक उत्तम प्राकृतिक वातावरण का सूचक है। - वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार राँची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरी क्षेत्र वाहनों और उद्योगों की बढ़ती संख्या से प्रदूषित हैं। अशांति के प्रभाव को कम करने के लिये तितली या पारिस्थितिक पार्क जैसे विषयगत उद्यान समय की मांग है। पर्यावरण में तितलियों का अस्तित्व पौधों के परागणकर्त्ता, अन्य जानवरों के लिये भोजन स्रोत और वैज्ञानिक खोजों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। - निदेशक जब्बार सिंह ने बताया कि झारखंड में तितलियों की 75 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। पार्क में अनुकूल वातावरण तैयार किया जाएगा ताकि तितलियाँ प्राकृतिक रूप से विकसित हो सकें। 900 वर्ग मीटर के क्षेत्र में एक ढका हुआ कंजर्वेटरी बनाया गया है ताकि उन्हें पक्षियों और किसी अन्य शिकार से बचाया जा सके। - चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा झारखंड में पाई जाने वाली अधिकांश प्रजातियों जैसे ट्वनी कोस्टर, सार्जेंट, बुश ब्राउन, बैरोनेट, प्लेन टाइगर, लेमन पैंसी, कॉमन सेलर और अन्य को पार्क में रखने की कोशिश की जाएगी। - गौरतलब है कि पार्क के पहले चरण को पूरा होने में लगभग छह साल लगे। तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने 29 जून, 2017 को पार्क की नींव रखी थी। हालाँकि, परियोजना पर काम तीन साल बाद 2020 में शुरू हुआ। कोविड-19 महामारी के कारण परियोजना के क्रियान्वयन में ज्यादा देरी हुई। - राँची के ओरमांझी क्षेत्र में 104 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जैविक उद्यान में स्तनधारियों, सरीसृपों और पक्षियों की 83 प्रजातियों के लगभग 1,450 जानवर हैं। चर्चा में क्यों? 17 जुलाई, 2023 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर के ग्राम पंचायत नवागाँव में 'हरेली पर्व'के अवसर पर गेड़ी दौड़ को हरी झंडी दिखाकर छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का शुभारंभ किया। - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर में मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित 'हरेली' कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के शुभंकर 'बछरू'को लॉन्च किया। 36 नंबर की जर्सी और गले में सोहई की माला पहने बछरू छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की पहचान बनने के साथ-साथ छत्तीसगढ़िया संस्कृति को भी प्रदर्शित कर रहा है। - गौरतलब है कि छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के आयोजन का ये दूसरा वर्ष है और इसकी लोकप्रियता को देखते हुए इस वर्ष पहली बार रस्सी कूद और कुश्ती जैसे खेल भी इसमें शामिल किये गए हैं। इस बार छत्तीसगढ़िया ओलंपिक 16 पारंपरिक मुकाबलों के साथ 6 चरणों में संपन्न होगी। - छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में तीन अलग-अलग आयु वर्ग में 30 लाख से ज्यादा महिला एवं पुरूष प्रतिभागी हिस्सा लेंगे और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। - छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल प्रतियोगिताएँ दलीय व एकल दो श्रेणी में आयोजित होंगी। छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में दलीय श्रेणी में गिल्ली डंडा, पिटेूल, संखली, लंगड़ी दौड़, कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी और बांटी (कंचा) जैसी खेल विधाएँ शामिल की गई हैं। वहीं एकल श्रेणी की खेल विधा में बिल्लस, फुगड़ी, गेड़ी दौड़, भँवरा, 100 मीटर दौड़, लंबी कूद, रस्सी कूद एवं कुश्ती शामिल हैं। - वहीं दूसरा स्तर ज़ोन है, जिसमें 8 राजीव युवा मितान क्लब को मिलाकर एक क्लब बनाया जाएगा। इसका आयोजन 26 जुलाई से 31 जुलाई तक होगा। विकासखंड एवं नगरीय क्लस्टर स्तर का आयोजन 7 अगस्त से 21 अगस्त तक होगा। - ज़िला स्तर का आयोजन 25 अगस्त से 04 सितंबर तक होगा। संभाग स्तर का आयोजन 10 सितंबर से 20 सितंबर तक होगा और अंत में राज्य स्तर खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी, जिसका आयोजन 25 सितंबर से 27 सितंबर तक होगा। - छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में आयु वर्ग को तीन वर्गों में बाँटा गया है। इसमें प्रथम वर्ग 18 वर्ष की आयु तक, दूसरा वर्ग 18-40 वर्ष आयु सीमा तक और तीसरे वर्ग में 40 वर्ष से अधिक उम्र के प्रतिभागी शामिल होंगे। इस प्रतियोगिता में महिला एवं पुरुष दोनों वर्ग में प्रतिभागी भाग ले सकेंगे। - छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में विकासखंड व नगरीय क्लस्टर स्तर पर विजेता प्रतिभागियों से लेकर राज्य स्तर के विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। विकासखंड व नगरीय क्लस्टर स्तर पर प्रथम आने वाले विजेता खिलाड़ियों को 1000 रुपए, द्वितीय स्थान पर 750 रुपए एवं तीसरा स्थान के लिये 500 रुपए की पुरस्कार राशि एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाएंगे। - इसी तरह ज़िला स्तर पर प्रथम आने वाल विजेता प्रतिभागियों को 2000 रुपए की राशि, द्वितीय आने पर 1500 रुपए और तीसरे स्थान के लिये 1000 रुपए की राशि सहित प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाएंगे। - संभाग स्तर पर विजेता प्रतियोगियों को प्रथम आने पर 3000 रुपए, द्वितीय आने पर 2500 रुपए एवं तीसरे स्थान पाने वाले खिलाड़ियों को 2000 रुपए एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाएंगे। - राज्य स्तर पर ओलंपिक के अंतिम आयोजन में प्रथम आने वाले प्रतिभागियों को 5000 रुपए, द्वितीय आने पर 4500 रुपए एवं तीसरे स्थान पर आने वाले खिलाड़ियों को 4000 रुपए की राशि और प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाएंगे। - विदित है कि पिछले बार के ओलंपिक में पूरे प्रदेश में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों, महिलाओं एवं बच्चों ने इस प्रतियोगिता में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। गाँव-गाँव में पारंपरिक खेलों के प्रति एक अच्छा वातावरण निर्मित हुआ। - उल्लेखनीय है कि लोक संस्कृति से जुड़े छत्तीसगढ़ का पहला तिहार (त्यौहार) हरेली है, जिसे प्रदेश भर में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी के उपयोग में आने वाली कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं। हरेली में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक गेड़ी का आनंद लेते हैं। चर्चा में क्यों? 17 जुलाई, 2023 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन विभाग की ओर से देहरादून के रायपुर में स्थित अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में आयोजित हरेला पर्व का शुभारंभ किया। - इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास करने वाले स्कूलों और वनपंचायतों को सम्मानित भी किया। - वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हरेला पर्व के उपलक्ष्य में इस वर्ष प्रदेश में आठ लाख पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान 15 अगस्त तक चलेगा। - उन्होंने पौध रोपण के साथ ही उनके संरक्षण की दिशा में भी विशेष ध्यान दिये जाने की बात कही। जिस सेक्टर में वृक्षों का सक्सेस रेट सबसे अधिक होगा, उस सेक्टर के वन दरोगा को सम्मानित किया जाएगा। - प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक ने कहा कि 15 अगस्त को 1750 गाँवों में 75-75 पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से अपील की कि पर्यावरण के संरक्षण में सभी एकजुट होकर कार्य करें और पौधे लगाकर सेल्फी विद प्लांट पोस्ट करें, जिससे हम अपनी भावी पीढ़ी को बता सकें कि हमने पर्यावरण संरक्षण के लिये क्या योगदान दिया। - कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक रूप से समृद्ध राज्य है। यहाँ का हरेला पर्व सुख, समृद्धि, शांति, पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक है। यह पर्व सामाजिक सद्भाव का पर्व और ऋतु परिवर्तन का भी सूचक है। हरेला एक ऐसा ही पर्व है, जो हमारी प्रकृति से निकटता को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है। - मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सर्कुलर इकोनॉमी पर काफी जोर दिया है क्योंकि जल संरक्षण के क्षेत्र में भी सर्कुलर इकोनॉमी की बड़ी भूमिका है। जब ट्रीटेड जल को फिर से उपयोग किया जाता है, ताजा जल को संरक्षित किया जाता है तो उससे पूरे ईको सिस्टम को बहुत लाभ होता है। चर्चा में क्यों? 17 जुलाई, 2023 को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में हिमालय की गर्मी से जल्द ही बिजली उत्पादन होगा। इसके लिये पहली बार भू-तापीय ऊर्जा (जियोथर्मल एनर्जी) से बिजली उत्पादन पर काम शुरू किया जाएगा। - हिमालय की गर्मी से बिजली बनाने के लिये राज्य सरकार व ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) जल्द ही एमओयू साइन करेंगे। जल्द ही ओएनजीसी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और आइसलैंड जियो सर्वे के विशेषज्ञों की टीम प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर जियोथर्मल एनर्जी की संभावनाएँ तलाश करने आएगी। - ज्ञातव्य है कि उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भू-तापीय ऊर्जा होने की संभावना है। पूर्व के अध्ययनों में भी ये बात सामने आ चुकी है। - गौरतलब है कि पिछले महीने ओएनजीसी ने लद्दाख में भू-तापीय ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिये आइसलैंड जियो सर्वे नामक वैज्ञानिक व शोध संस्था के साथ एमओयू साइन किया है। - इस दौरान ओएनजीसी की निदेशक (विस्तार) सुषमा रावत ने इसे ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करने का एक अच्छा उपाय मानते हुए कहा कि हेतु देश के अन्य राज्यों में इसकी संभावनाएँ देखी जाएंगी। इसी क्रम में, उत्तराखंड सरकार अब ओएनजीसी के साथ मिलकर राज्य में जियो थर्मल एनर्जी पर काम शुरू करने जा रही है। - विदित है कि वर्ष 2008 में गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रो. कैलाश भारद्वाज और प्रो. एससी तिवारी का एक शोधपत्र प्रकाशित हुआ था। इसमें उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जियो थर्मल ऊर्जा की अपार संभावनाएँ जताई गईं थीं। - उन्होंने अपने शोध में बताया था कि हिमालय के गर्भ में 121 से 371 डिग्री सेल्सियस तक ऊर्जा छुपी हुई है, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन में किया जा सकता है। - उन्होंने शोध में तपोवन जियोथर्मल स्प्रिंग के निकट धौलीगंगा के तीन किलोमीटर अपस्ट्रीम एरिया तीन ड्रिल का जिक्र किया है, जहाँ से 65-90 डिग्री सेल्सियस तापमान के गर्म पानी के चश्मे निकल रहे थे। यमुनोत्री के निकट भी एक जियोथर्मल स्प्रिंग से 88-90 डिग्री सेल्सियस गर्म पानी निकलता पाया गया था। - वैज्ञानिकों का कहना था कि बदरीनाथ, गौरीकुंड और तपोवन के जियोथर्मल क्षेत्रों को विकसित किया जा सकता है। - वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने वर्ष 2020 में हिमाचल और उत्तराखंड में जियोथर्मल स्प्रिंग पर बड़ा अध्ययन किया था वाडिया के निदेशक कालाचंद साईं ने बताया था कि किस तरह से उत्तराखंड में 40 और हिमाचल प्रदेश में 35 गर्म पानी के चश्मे चिह्नित किये गए हैं, जो कि भविष्य में ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से काफी कारगर साबित हो सकते हैं। - उल्लेखनीय है कि प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाएँ लंबे समय से लटकी हैं। अब राज्य सरकार इसके विकल्पों पर काम कर रही है ताकि भविष्य में राज्य में बिजली ज़रूरतों के हिसाब से उत्पादन किया जा सके। - राज्य सरकार ओडिशा में कोयले से बिजली उत्पादन करेगी। इसके लिये यूजेवीएनएल-टीएचडीसी का संयुक्त उपक्रम बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, बारिश के पानी से बिजली के लिये राज्य में पंप स्टोरेज पॉलिसी बनाई जा रही है। जिंदल समूह ने प्रदेश में चार ज़िलों देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा और चंपावत में इसके लिये सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। - भू-तापीय ऊर्जा से देश में 10,600 मेगावाट बिजली उत्पादन की संभावनाएँ 15 साल पहले आँकी गई थीं। केन्या में 129 मेगावाट, इथोपिया में सात मेगावाट, पापुआ न्यू गिनी में 56 मेगावाट के प्रोजेक्ट को इसके उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है। अमेरिका (3676 मेगावाट) सहित दुनिया के 20 देश आज जियोथर्मल एनर्जी से बिजली उत्पादन कर रहे हैं। - ऐसे बनती है भू-तापीय ऊर्जा से बिजलीः जियोथर्मल एरिया में ड्रिल किया जाता है। यहाँ गर्म पानी के चश्मे की भाप से टरबाइन चलाकर बिजली उत्पादन होता है। इस भाप से बनने वाला पानी दोबारा ज़मीन के भीतर ही ड्रिल करके भेज दिया जाता है। - वर्तमान में उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएन) के तहत 1396.1 मेगावाट की जल विद्युत परियोजनाएँ चल रही हैं। 440.5 मेगावाट की जल विद्युत परियोजनाओं पर निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा, सौर ऊर्जा के करीब 60 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसके सापेक्ष बिजली की मांग कई गुना अधिक है।
चर्चा में क्यों? सत्रह जुलाई, दो हज़ार तेईस को केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी और देश के महत्त्वपूर्ण शहरों में से एक लखनऊ में तीन,तीन सौ करोड़ रुपए से अधिक के निवेश वाली दो राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शुभारंभ किया। - इन परियोजनाओं में मड़ियाँव-आई.आई.एम.राष्ट्रीय राजमार्ग चौबीस पर लखनऊ-सीतापुर खंड शामिल है। नवनिर्मित चार-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर समय से छह महीने पहले पूरा हो गया है। - इससे लखनऊ से सीतापुर तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, भिटौली तिराहा और जानकीपुरम एक्सटेंशन पर भारी ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और तीस मिनट से अधिक समय और ईंधन की बचत होगी। तीर्थयात्रियों को चंद्रिका देवी और नैमिषारण्य जाने में भी सुविधा होगी। - अलीगढ़-कानपुर खंड के नवीगंज से मित्रसेनपुर तक चार-लेन सड़क के निर्माण से नवीगंज, कन्नौज, मित्रसेनपुर और आगे दिल्ली तक यातायात की सुविधा होगी। उत्तर प्रदेश के इत्र हब कन्नौज और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। - छिबरामऊ, गुरसहायगंज, जलालाबाद, मानीमऊ जैसे इलाकों में छोटे और मझोले उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। कन्नौज के किसानों को छिबरामऊ, नवीगंज मंडी तक आवागमन में आसानी होगी और दिल्ली तक सीधी पहुँच आसान होगी। चर्चा में क्यों? सत्रह जुलाई, दो हज़ार तेईस को राजस्थान विधानसभा में राजस्थान विश्वविद्यालयों के अध्यापक विधेयक-दो हज़ार तेईस को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक के माध्यम से स्क्रीनिंग कर पात्र अस्थायी अध्यापकों को नियमित किया जा सकेगा। - विदित है कि इससे पूर्व वर्ष दो हज़ार आठ में राजस्थान विश्वविद्यालयों के अध्यापक अध्यादेश लाया गया था। बाद में इस अध्यादेश का प्रतिस्थापक विधेयक विधानसभा में पारित कराया गया। - इस अध्यादेश एवं अधिनियम के अंतर्गत विश्वविद्यालयों में अस्थायी रूप से कार्यरत तीन सौ से अधिक शिक्षकों को स्क्रीनिंग कमेटी के माध्यम से पात्र पाए जाने पर संबंधित विश्वविद्यालयों की सेवा में स्थायी किया गया था। - ज्ञातव्य है कि वर्ष दो हज़ार आठ से पूर्व विश्वविद्यालय में कार्यरत कुछ अस्थायी शिक्षक/योग प्रशिक्षक दो हज़ार आठ के अध्यादेश में कवर होने से रह गए। अतः राज्य सरकार ने ऐसे शिक्षकों एवं योग प्रशिक्षकों को स्क्रीनिंग कमेटी के माध्यम से पात्र पाए जाने पर स्थायी किये जाने का निर्णय लिया है। - इसके लिये दो हज़ार आठ के आमेलन अधिनियम में अस्थायी शिक्षक की परिभाषा को संशोधित करने व मूल अधिनियम के द्वारा आमेलन हेतु निर्धारित एक सौ अस्सी दिवस की अवधि में छूट देते हुए राजस्थान विश्वविद्यालयों के अध्यापक विधेयक-दो हज़ार तेईस लाया गया है। चर्चा में क्यों? सत्रह जुलाई, दो हज़ार तेईस को राजस्थान विधानसभा में राजीव गांधी फिनटेक डिजिटल संस्थान विधेयक-दो हज़ार तेईस पर चर्चा के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। - राजस्थान के शिक्षा मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने विधानसभा में कहा कि जोधपुर में स्थापित किया जा रहा राजीव गांधी फिनटेक डिजिटल संस्थान वित्तीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्वस्तरीय मानक स्थापित करेगा। राज्य के युवाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करने के लिये इस संस्थान की स्थापना की जा रही है। - यह विश्वस्तरीय संस्थान डिजिटल वर्ल्ड में एक नई क्रांति साबित होगा। इससे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञ तैयार होंगे, जिन्हें दुनिया भर में रोज़गार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। - संस्थान आईटी क्रांति के सूत्रधार भारत रत्न स्व. राजीव गांधी के नाम से स्थापित किया जा रहा है। - वर्तमान दौर में जहाँ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और निवेश व बीमा जैसे कार्यों के लिये लोगों को विशेषज्ञ सलाह की आवश्यकता बढ़ रही है, इस संस्थान से डिजिटल ज्ञानयुक्त वित्तीय प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ तैयार होंगे। - राज्य सरकार ने अपने वित्तीय संसाधनों से संस्थान के लिये छः सौ बहत्तर.पैंतालीस करोड़ की राशि का प्रावधान किया है, जिसमें से एक सौ तीस करोड़ की राशि व्यय भी की जा चुकी है। इसके लिये सत्तानवे बीघा भूमि आवंटित की जा चुकी है, जिस पर निर्माण कार्य जारी है। - संस्थान में यूजीसी और एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा, डिग्री कोर्सेज उपलब्ध हो सकेंगे। यह संस्थान डिजिटल स्टेट यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित होगा, जहाँ सायबर एक्सपर्ट और डिजिटल एक्सपर्ट तैयार किये जाएंगे। - साथ ही, संस्थान आईआईटी, एम्स के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। यहाँ का प्रबंधन पूर्ण रूप से स्वायत्तशासी होगा। - विदित है कि इससे पूर्व सदन ने विधेयक पर जनमत जानने के लिये परिचालित करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया। चर्चा में क्यों? सत्रह जुलाई, दो हज़ार तेईस को राजस्थान के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने विधानसभा में बताया कि प्रदेश में ग्यारह मिलेट्स एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिये तीन करोड़ सैंतीस लाख रुपयों की अनुदान सहायता दी गई है। - कृषि मंत्री ने बताया कि राजस्थान मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन के तहत मिलेट्स प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिये किसी भी ज़िले से किसानों द्वारा आवेदन नहीं किया गया है। मिलेट्स एवं अन्य खाद्य सामग्री की प्रसंस्करण इकाइयों के लिये निजी कंपनियों के बीस आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से ग्यारह प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिये तीन करोड़ सैंतीस लाख रुपयों की अनुदान सहायता दी गई है। - उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस के बजट में राजस्थान मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन की घोषणा की गई है। - मिशन के अंतर्गत लघु एवं सीमांत किसानों को उन्नत किस्मों के निःशुल्क बीज, सुक्ष्म पोषक तत्त्व एवं जैव कीटनाशी किट का अनुदानित दर पर वितरण, मिलेट्स की प्रथम एक सौ प्रसंस्करण ईकाइयों की स्थापना पर अनुदान, बाजरा व अन्य मिलेट्स के संवर्धन, प्रोत्साहन व नवीनतम तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की दृष्टि से जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत मिलेट्स उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना आदि प्रावधान किये गए हैं। - ज्ञातव्य है कि रागी, कंगनी, सावां, चीना, कोदो, कुटकी फसलें मिलेट्स के अंतर्गत शामिल हैं। इनकी पोषण गुणवत्ता के बारे में जन-जागरूकता कार्यक्रम प्रस्तावित किये गए हैं। - राज्य की बीज उत्पादक संस्थाओं, राजस्थान राज्य बीज निगम लिमिटेड एवं राजस्थान राज्य तिलहन उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के पास छोटे अनाजों जैसे रागी, कंगनी, सावां, चीना, कोदो, कुटकी के उन्नत बीज उपलब्ध नहीं है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में ही इन बीजों को विकसित करने के लिये इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च, हैदराबाद से बीज मंगाए गए हैं। चर्चा में क्यों? सोलह जुलाई, दो हज़ार तेईस को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने करीब छियालीस लाख रुपए की लागत से राज्य के सोनीपत ज़िले के मुरथल में स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में स्थापित एक सौ पैंतीस फीट ऊँचे तिरंगे का आरोहण किया। - साथ ही, मुख्यमंत्री ने पैंतीस करोड़ रुपए की लागत से नवनिर्मित अटल अकादमी एवं आईडिया लैब का भी लोकार्पण किया। - मुख्यमंत्री ने कहा कि डीसीआरयूएसटी में सबसे ऊँचा राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया गया है, जो एक गौरव एवं प्रेरणादायी परियोजना है। यहाँ से गुज़रते वक्त हाईवे से भी यह ध्वज राष्ट्रीयता के संदेश को प्रसारित करता हुआ दिखाई देगा। इस पर लाईट की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे यह दिन-रात चौबीस घंटाटे चमकता रहेगा। नये नियम के तहत इसे रात्रि के समय उतारने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। - इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अन्य परियोजनाओं की चर्चा करते हुए बताया कि विज्ञान एवं वास्तुकला को समर्पित अटल अकादमी एवं आईडिया लैब से शोध को बढ़ावा मिलेगा। डीसीआरयूएसटी के नाम में ही विज्ञान शामिल है, जो विशेष रूप से विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। - इस परियोजना में एआईसीटीई का विशेष रूप से सहयोग मिला है। आईडिया लैब की स्थापना से नए-नए विचारों को विकसित कर विज्ञान के माध्यम से जीवनशैली में उपयोगी बनाने में मदद मिलेगी। चर्चा में क्यों? सोलह जुलाई, दो हज़ार तेईस को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्य के सोनीपत ज़िले के खरखोदा उपमंडल में दादा कुशाल सिंह और ब्रिगेडियर होशियार सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया। - समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि ये दोनों इस इलाके की महान शख्सियत हैं और दोनों की विशेषता इनका देश के प्रति और धर्म के प्रति निष्ठावान रहना है। इनकी गुरु भक्ति और बलिदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। - विदित है कि वर्ष एक हज़ार छः सौ पचहत्तर में जब श्री गुरु तेग बहादुर जी ने औरंगजेब के खिलाफ बिगुल फूँका तो दादा कुशाल सिंह ने धर्म निभाकर अपने शीश का बलिदान दिया था। - इसी तरह, ब्रिगेडियर होशियार सिंह, जिन्हें सेना के सर्वोच्च सम्मान 'परमवीर चक्र' से नवाज़ा गया है, उन्होंने वर्ष एक हज़ार नौ सौ पैंसठ और एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर की लड़ाइयों में भाग लिया और अपनी वीरता का परिचय दिया। - मुख्यमंत्री ने बताया कि ब्रिगेडियर होशियार सिंह ने युद्ध विराम होते हुए भी पीछे हटने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि आज देश की सेना में हर दसवाँ व्यक्ति हरियाणा से है जो कि प्रदेश के युवाओं की देशभक्ति के प्रति लगन का ही परिणाम है। प्रदेश में सत्रह लाख ऐसे परिवार हैं जो पूर्व सैनिकों से संबंध रखते हैं। - पूर्व सैनिकों के प्रति सच्ची निष्ठा रखते हुए प्रदेश सरकार ने एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर की लड़ाई के बाद जितनी भी लड़ाइयाँ लड़ी गईं उन सभी में हुए शहीदों के परिवारों में से पिछले आठ सालों में तीन सौ सरसठ लोगों को नौकरियाँ प्रदान की गई है। - शहीदों के परिवार को अनुग्रह राशि के तौर पर पचास लाख, आईईडी ब्लास्ट में शहीद होने पर उनके परिवार को पचास लाख, किसी भी युद्ध में घायल, शहीद के दिव्यांग के अलग-अलग पैमाने पर पंद्रह लाख, पच्चीस लाख और पैंतीस लाख रुपए की सहायता राशि मुहैया कराई जाती है। - इनके अलावा, द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए परिवारों को दस,शून्य रुपयापए मासिक पेंशन भी उपलब्ध कराई जा रही है। चर्चा में क्यों? सोलह जुलाई, दो हज़ार तेईस को भगवान बिरसा जैविक पार्क के निदेशक जब्बार सिंह ने बताया कि पूर्वी भारत का सबसे बड़ा ओपन-एयर बटरफ्लाई पार्क जल्द ही भगवान बिरसा जैविक पार्क में जनता के लिये खोल दिया जाएगा। - यह पार्क बीबीबीपी के परिसर में एक्वैरियम के ठीक सामने उन्नीस एकड़ की विशाल भूमि पर बनाया गया है। भगवान बिरसा जैविक पार्क रांची शहर से लगभग पच्चीस किलोग्राममीटर दूर है, जिसे बिरसा चिड़ियाघर के नाम से जाना जाता है। - बटरफ्लाई प्रेमियों को मनोरंजन के साथ-साथ शैक्षिक मूल्य प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गए इस पार्क के पहले चरण का विकास कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इस पार्क की अनुमानित लागत दो करोड़ रुपए है। - पहले चरण में जो विकास कार्य किये गए हैं उनमें एक बटरफ्लाई कंजर्वेटरी, इसके अलावा आवास विकास जैसे पराग पौधों का रोपण, तितली पार्क के लिये पैदल मार्ग का निर्माण, एक तालाब और एक प्रवेश द्वार शामिल है। अभी पार्क में कुछ सुधारीकरण और अन्य कार्य चल रहे हैं। आने वाले चरणों में पार्क में और सुविधाएँ जोड़ी जाएंगी। इसे एक या दो महीने में जनता के देखने के लिये खोल दिया जाएगा। - जब्बार सिंह ने बताया कि पार्क को हरे-भरे क्षेत्र में विकसित किया गया है, जो आगंतुकों को पारिस्थितिकी में तितलियों के महत्त्व के बारे में जागरूक करने में मदद करेगा। स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में जैव विविधता की बढ़ती आवश्यकता के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने में तितलियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अच्छी संख्या में तितलियों की मौजूदगी एक उत्तम प्राकृतिक वातावरण का सूचक है। - वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार राँची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरी क्षेत्र वाहनों और उद्योगों की बढ़ती संख्या से प्रदूषित हैं। अशांति के प्रभाव को कम करने के लिये तितली या पारिस्थितिक पार्क जैसे विषयगत उद्यान समय की मांग है। पर्यावरण में तितलियों का अस्तित्व पौधों के परागणकर्त्ता, अन्य जानवरों के लिये भोजन स्रोत और वैज्ञानिक खोजों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। - निदेशक जब्बार सिंह ने बताया कि झारखंड में तितलियों की पचहत्तर से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। पार्क में अनुकूल वातावरण तैयार किया जाएगा ताकि तितलियाँ प्राकृतिक रूप से विकसित हो सकें। नौ सौ वर्ग मीटर के क्षेत्र में एक ढका हुआ कंजर्वेटरी बनाया गया है ताकि उन्हें पक्षियों और किसी अन्य शिकार से बचाया जा सके। - चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा झारखंड में पाई जाने वाली अधिकांश प्रजातियों जैसे ट्वनी कोस्टर, सार्जेंट, बुश ब्राउन, बैरोनेट, प्लेन टाइगर, लेमन पैंसी, कॉमन सेलर और अन्य को पार्क में रखने की कोशिश की जाएगी। - गौरतलब है कि पार्क के पहले चरण को पूरा होने में लगभग छह साल लगे। तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने उनतीस जून, दो हज़ार सत्रह को पार्क की नींव रखी थी। हालाँकि, परियोजना पर काम तीन साल बाद दो हज़ार बीस में शुरू हुआ। कोविड-उन्नीस महामारी के कारण परियोजना के क्रियान्वयन में ज्यादा देरी हुई। - राँची के ओरमांझी क्षेत्र में एक सौ चार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जैविक उद्यान में स्तनधारियों, सरीसृपों और पक्षियों की तिरासी प्रजातियों के लगभग एक,चार सौ पचास जानवर हैं। चर्चा में क्यों? सत्रह जुलाई, दो हज़ार तेईस को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर के ग्राम पंचायत नवागाँव में 'हरेली पर्व'के अवसर पर गेड़ी दौड़ को हरी झंडी दिखाकर छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का शुभारंभ किया। - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर में मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित 'हरेली' कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के शुभंकर 'बछरू'को लॉन्च किया। छत्तीस नंबर की जर्सी और गले में सोहई की माला पहने बछरू छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की पहचान बनने के साथ-साथ छत्तीसगढ़िया संस्कृति को भी प्रदर्शित कर रहा है। - गौरतलब है कि छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के आयोजन का ये दूसरा वर्ष है और इसकी लोकप्रियता को देखते हुए इस वर्ष पहली बार रस्सी कूद और कुश्ती जैसे खेल भी इसमें शामिल किये गए हैं। इस बार छत्तीसगढ़िया ओलंपिक सोलह पारंपरिक मुकाबलों के साथ छः चरणों में संपन्न होगी। - छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में तीन अलग-अलग आयु वर्ग में तीस लाख से ज्यादा महिला एवं पुरूष प्रतिभागी हिस्सा लेंगे और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। - छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल प्रतियोगिताएँ दलीय व एकल दो श्रेणी में आयोजित होंगी। छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में दलीय श्रेणी में गिल्ली डंडा, पिटेूल, संखली, लंगड़ी दौड़, कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी और बांटी जैसी खेल विधाएँ शामिल की गई हैं। वहीं एकल श्रेणी की खेल विधा में बिल्लस, फुगड़ी, गेड़ी दौड़, भँवरा, एक सौ मीटर दौड़, लंबी कूद, रस्सी कूद एवं कुश्ती शामिल हैं। - वहीं दूसरा स्तर ज़ोन है, जिसमें आठ राजीव युवा मितान क्लब को मिलाकर एक क्लब बनाया जाएगा। इसका आयोजन छब्बीस जुलाई से इकतीस जुलाई तक होगा। विकासखंड एवं नगरीय क्लस्टर स्तर का आयोजन सात अगस्त से इक्कीस अगस्त तक होगा। - ज़िला स्तर का आयोजन पच्चीस अगस्त से चार सितंबर तक होगा। संभाग स्तर का आयोजन दस सितंबर से बीस सितंबर तक होगा और अंत में राज्य स्तर खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी, जिसका आयोजन पच्चीस सितंबर से सत्ताईस सितंबर तक होगा। - छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में आयु वर्ग को तीन वर्गों में बाँटा गया है। इसमें प्रथम वर्ग अट्ठारह वर्ष की आयु तक, दूसरा वर्ग अट्ठारह-चालीस वर्ष आयु सीमा तक और तीसरे वर्ग में चालीस वर्ष से अधिक उम्र के प्रतिभागी शामिल होंगे। इस प्रतियोगिता में महिला एवं पुरुष दोनों वर्ग में प्रतिभागी भाग ले सकेंगे। - छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में विकासखंड व नगरीय क्लस्टर स्तर पर विजेता प्रतिभागियों से लेकर राज्य स्तर के विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। विकासखंड व नगरीय क्लस्टर स्तर पर प्रथम आने वाले विजेता खिलाड़ियों को एक हज़ार रुपयापए, द्वितीय स्थान पर सात सौ पचास रुपयापए एवं तीसरा स्थान के लिये पाँच सौ रुपयापए की पुरस्कार राशि एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाएंगे। - इसी तरह ज़िला स्तर पर प्रथम आने वाल विजेता प्रतिभागियों को दो हज़ार रुपयापए की राशि, द्वितीय आने पर एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए और तीसरे स्थान के लिये एक हज़ार रुपयापए की राशि सहित प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाएंगे। - संभाग स्तर पर विजेता प्रतियोगियों को प्रथम आने पर तीन हज़ार रुपयापए, द्वितीय आने पर दो हज़ार पाँच सौ रुपयापए एवं तीसरे स्थान पाने वाले खिलाड़ियों को दो हज़ार रुपयापए एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाएंगे। - राज्य स्तर पर ओलंपिक के अंतिम आयोजन में प्रथम आने वाले प्रतिभागियों को पाँच हज़ार रुपयापए, द्वितीय आने पर चार हज़ार पाँच सौ रुपयापए एवं तीसरे स्थान पर आने वाले खिलाड़ियों को चार हज़ार रुपयापए की राशि और प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाएंगे। - विदित है कि पिछले बार के ओलंपिक में पूरे प्रदेश में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों, महिलाओं एवं बच्चों ने इस प्रतियोगिता में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। गाँव-गाँव में पारंपरिक खेलों के प्रति एक अच्छा वातावरण निर्मित हुआ। - उल्लेखनीय है कि लोक संस्कृति से जुड़े छत्तीसगढ़ का पहला तिहार हरेली है, जिसे प्रदेश भर में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी के उपयोग में आने वाली कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं। हरेली में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक गेड़ी का आनंद लेते हैं। चर्चा में क्यों? सत्रह जुलाई, दो हज़ार तेईस को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन विभाग की ओर से देहरादून के रायपुर में स्थित अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में आयोजित हरेला पर्व का शुभारंभ किया। - इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास करने वाले स्कूलों और वनपंचायतों को सम्मानित भी किया। - वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हरेला पर्व के उपलक्ष्य में इस वर्ष प्रदेश में आठ लाख पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान पंद्रह अगस्त तक चलेगा। - उन्होंने पौध रोपण के साथ ही उनके संरक्षण की दिशा में भी विशेष ध्यान दिये जाने की बात कही। जिस सेक्टर में वृक्षों का सक्सेस रेट सबसे अधिक होगा, उस सेक्टर के वन दरोगा को सम्मानित किया जाएगा। - प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक ने कहा कि पंद्रह अगस्त को एक हज़ार सात सौ पचास गाँवों में पचहत्तर-पचहत्तर पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से अपील की कि पर्यावरण के संरक्षण में सभी एकजुट होकर कार्य करें और पौधे लगाकर सेल्फी विद प्लांट पोस्ट करें, जिससे हम अपनी भावी पीढ़ी को बता सकें कि हमने पर्यावरण संरक्षण के लिये क्या योगदान दिया। - कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक रूप से समृद्ध राज्य है। यहाँ का हरेला पर्व सुख, समृद्धि, शांति, पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक है। यह पर्व सामाजिक सद्भाव का पर्व और ऋतु परिवर्तन का भी सूचक है। हरेला एक ऐसा ही पर्व है, जो हमारी प्रकृति से निकटता को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है। - मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सर्कुलर इकोनॉमी पर काफी जोर दिया है क्योंकि जल संरक्षण के क्षेत्र में भी सर्कुलर इकोनॉमी की बड़ी भूमिका है। जब ट्रीटेड जल को फिर से उपयोग किया जाता है, ताजा जल को संरक्षित किया जाता है तो उससे पूरे ईको सिस्टम को बहुत लाभ होता है। चर्चा में क्यों? सत्रह जुलाई, दो हज़ार तेईस को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में हिमालय की गर्मी से जल्द ही बिजली उत्पादन होगा। इसके लिये पहली बार भू-तापीय ऊर्जा से बिजली उत्पादन पर काम शुरू किया जाएगा। - हिमालय की गर्मी से बिजली बनाने के लिये राज्य सरकार व ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड जल्द ही एमओयू साइन करेंगे। जल्द ही ओएनजीसी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और आइसलैंड जियो सर्वे के विशेषज्ञों की टीम प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर जियोथर्मल एनर्जी की संभावनाएँ तलाश करने आएगी। - ज्ञातव्य है कि उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भू-तापीय ऊर्जा होने की संभावना है। पूर्व के अध्ययनों में भी ये बात सामने आ चुकी है। - गौरतलब है कि पिछले महीने ओएनजीसी ने लद्दाख में भू-तापीय ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिये आइसलैंड जियो सर्वे नामक वैज्ञानिक व शोध संस्था के साथ एमओयू साइन किया है। - इस दौरान ओएनजीसी की निदेशक सुषमा रावत ने इसे ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करने का एक अच्छा उपाय मानते हुए कहा कि हेतु देश के अन्य राज्यों में इसकी संभावनाएँ देखी जाएंगी। इसी क्रम में, उत्तराखंड सरकार अब ओएनजीसी के साथ मिलकर राज्य में जियो थर्मल एनर्जी पर काम शुरू करने जा रही है। - विदित है कि वर्ष दो हज़ार आठ में गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रो. कैलाश भारद्वाज और प्रो. एससी तिवारी का एक शोधपत्र प्रकाशित हुआ था। इसमें उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जियो थर्मल ऊर्जा की अपार संभावनाएँ जताई गईं थीं। - उन्होंने अपने शोध में बताया था कि हिमालय के गर्भ में एक सौ इक्कीस से तीन सौ इकहत्तर डिग्री सेल्सियस तक ऊर्जा छुपी हुई है, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन में किया जा सकता है। - उन्होंने शोध में तपोवन जियोथर्मल स्प्रिंग के निकट धौलीगंगा के तीन किलोमीटर अपस्ट्रीम एरिया तीन ड्रिल का जिक्र किया है, जहाँ से पैंसठ-नब्बे डिग्री सेल्सियस तापमान के गर्म पानी के चश्मे निकल रहे थे। यमुनोत्री के निकट भी एक जियोथर्मल स्प्रिंग से अठासी-नब्बे डिग्री सेल्सियस गर्म पानी निकलता पाया गया था। - वैज्ञानिकों का कहना था कि बदरीनाथ, गौरीकुंड और तपोवन के जियोथर्मल क्षेत्रों को विकसित किया जा सकता है। - वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने वर्ष दो हज़ार बीस में हिमाचल और उत्तराखंड में जियोथर्मल स्प्रिंग पर बड़ा अध्ययन किया था वाडिया के निदेशक कालाचंद साईं ने बताया था कि किस तरह से उत्तराखंड में चालीस और हिमाचल प्रदेश में पैंतीस गर्म पानी के चश्मे चिह्नित किये गए हैं, जो कि भविष्य में ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से काफी कारगर साबित हो सकते हैं। - उल्लेखनीय है कि प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाएँ लंबे समय से लटकी हैं। अब राज्य सरकार इसके विकल्पों पर काम कर रही है ताकि भविष्य में राज्य में बिजली ज़रूरतों के हिसाब से उत्पादन किया जा सके। - राज्य सरकार ओडिशा में कोयले से बिजली उत्पादन करेगी। इसके लिये यूजेवीएनएल-टीएचडीसी का संयुक्त उपक्रम बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, बारिश के पानी से बिजली के लिये राज्य में पंप स्टोरेज पॉलिसी बनाई जा रही है। जिंदल समूह ने प्रदेश में चार ज़िलों देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा और चंपावत में इसके लिये सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। - भू-तापीय ऊर्जा से देश में दस,छः सौ मेगावाट बिजली उत्पादन की संभावनाएँ पंद्रह साल पहले आँकी गई थीं। केन्या में एक सौ उनतीस मेगावाट, इथोपिया में सात मेगावाट, पापुआ न्यू गिनी में छप्पन मेगावाट के प्रोजेक्ट को इसके उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है। अमेरिका सहित दुनिया के बीस देश आज जियोथर्मल एनर्जी से बिजली उत्पादन कर रहे हैं। - ऐसे बनती है भू-तापीय ऊर्जा से बिजलीः जियोथर्मल एरिया में ड्रिल किया जाता है। यहाँ गर्म पानी के चश्मे की भाप से टरबाइन चलाकर बिजली उत्पादन होता है। इस भाप से बनने वाला पानी दोबारा ज़मीन के भीतर ही ड्रिल करके भेज दिया जाता है। - वर्तमान में उत्तराखंड जल विद्युत निगम के तहत एक हज़ार तीन सौ छियानवे.एक मेगावाट की जल विद्युत परियोजनाएँ चल रही हैं। चार सौ चालीस.पाँच मेगावाट की जल विद्युत परियोजनाओं पर निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा, सौर ऊर्जा के करीब साठ प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसके सापेक्ष बिजली की मांग कई गुना अधिक है।
अ॒ग्नीषोम॑यो॒रुज्जति॒म॒ज्जैषं॒ वाज॑स्य मा प्रस॒वेन॒ प्रोहा॑मं । अ॒ग्नीषोमो तमप॑नु॒दतां योऽस्मान्द्वेट यं च॑ व॒यं द्वि॒ष्मो वाज॑स्यैनं॑ प्रस॒वेनापो॑हामि । इन्द्राग्न्योरुज्जितिमनूज्जैषं वाज॑स्य मा प्रस॒वेन॒ मोहहा॑मिं । इन्द्राग्नी तमप॑नुक्तां इन्द्राग्नी तमप॑नुवर्ता योऽस्मान्द्वेष्टि यं च॑ व॒यं द्वि॒ष्मो वाज॑स्यैनं च॑ प्रस॒वेनापहामि ॥ १५ ॥ (४६) (अग्निषोमयोः उज्जिर्ति) अग्नि और सोमने जैसी विजय प्राप्त की, (अनु उज्जेषं) वैसी विजय मैं प्राप्त भी प्राप्त करूं। (वाजस्य प्रसवेन) अन्नकी प्रेरणासे ( मा प्रोहामि) मैं स्वयंको प्रेरित करता हूं। (यः अस्मान् द्वेष्टि) जो हमसे द्वेष करता है, (यं च वयं द्विष्मः) और जिससे हम द्वेष करते हैं (तं अनीषोमौ अपनुदतां) उसे अग्नि और सोम दूर करें। (वाजस्य प्रसवेन) अन्नकी प्रेरणासे ( एनं अपोहामि) इस शत्रुको दूर करता हूं। (इद्राग्यो उज्जितं) इन्द्र और अग्निने जैसी विजय प्राप्त की, उसी तरह मैं भी (अनु उत् जेषं) विजय प्राप्त करूं। (वाजस्य प्रसवेन) अन्नकी प्रेरणासे ( मा प्रोहामि) मैं स्वयंको प्रेरित करता हूं। (यः अस्मान् दृष्टि) जो हमसे द्वेष करता है, (यं च वयं द्विषमः) और जिससे हम द्वेष करते हैं, (यः इन्द्राग्नी अपनुदत्तां) उसे इन्द्र और अग्नि दूर करें। (वाजस्य प्रसवेन एनं अपोहामि) मैं अन्नकी प्रेरणासे इस शत्रुको दूर करता हूं ।।१५।। यह मैं देखता हूं। विजय प्राप्तिके लिए जो साधन जिस प्रकार वर्तने चाहिए, इसका ज्ञान प्राप्त करता हूं और वैसा व्यवहार करके अपनी विजय सिद्ध करता हूं। देवताओंके अनुसार हम अपना आचरण करके अपनी विजय प्राप्त करे। 'यत् देवाः अकुर्वन् तत्करवाणि' जैसा कुछ देवोंने किया है, वैसाही मैं करूं, यही विजयका सूत्र है। यही बात 'देवानां उज्जितं अनु उज्ज्ञेषं इस मंत्रभागमें कही है। अन्नकी प्रेरणासे मैं अपने आपको प्रेरित करता हूं, उत्साहित करता हूं। मानव जो विविध कार्य करते हैं, वे अन्नके उत्पादनसे, अन्नकी प्रेरणासे प्रेरित होकरही करते हैं। मानवी व्यवहारमें सर्व साधारण प्रेरणा अन्नकीही है। अन्न मिलनेवाला न हो, तो अन्य भोग मिलनेवाले होंगे। अर्थात् भोगोंकी प्राप्ति की प्रेरणासेही मानव उत्साहित होकर कार्य करते रहते हैं। अपने सब व्यवहार भोग प्रेरणासेही सब मानव करते हैं। भोग या अन्न प्राप्त होना चाहिए। इस भोग प्राप्तिमें कई शत्रु होते हैं, इन शत्रुओंको दूर करना चाहिए, तभी अपनी विजय होगी और अन्नादि भोग प्राप्त होंगे। शत्रुका लक्षण हैं जो अकेला हम सबसे द्वेष करता है और जिस अकेले से हम सब द्वेष करते है, वह शत्रु है। शत्रुका यह लक्षण है। जो अकेला सब समाजसे द्वेष करता है और वहीं शत्रु है और वह उस समाजमें रहने योग्य नहीं है। ऐसे शत्रुको दूर करना चाहिए । जिस तरह अग्नि और सोम अथवा इन्द्र और अग्निने अपने शत्रुओंको परास्त करके भगा दिया, उसी तरह हम आपसका संगठन बढाकर शत्रुओंको दूर करें । शत्रुओंको क्यों दूर किया जाए ? इस प्रश्नके उत्तरमें कहा जा सकता है कि अन्नके प्रसवसे, अन्नकी प्रेरणासे में शत्रुको भगाता हूं। शत्रु समाजमें रहेगा तो अन्न प्राप्तिके कार्य में बाधा उत्पन्न होगी। इसलिए शत्रुको दूर करतना आवश्यक है। हमें अन्न भरपूर मिले, इसलिए शत्रुको दूर करनेका प्रयत्न करना चाहिए। इस मंत्र में कहा है कि 'अन्नकी प्रेरणासे अपनी उन्नतिके लिए विजय प्राप्त करना और उसी अन्नकी प्रेरणासे शत्रुको दूर करना चाहिए।' इस प्रकार इस मंत्रमें उन्नितके दो सूत्र बतायें हैं- (१) अपनी विजय प्राप्त करना और (२) शत्रुको दूर करना ।।१५।। वसु, रुद्र और आदित्योंके लिए तेरा अर्पण करते हैं। वसु पृथ्वी आदि आठ हैं, वे सबका निवास कराते हैं। रुद्र शत्रुका संहार करते हैं। शरीरमें स्थित ग्यारह प्राणही ग्यारह रुद्र हं। आदित्य देव बारह है और वे सबकी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। ये तीनों देव क्रमशः सबका निवास करानेवाले, सबका संहार करनेवाले और सबका आधार देनेवाले हैं। इनके लिए अर्पण करनेका तात्पर्य यह है कि इनके तीनों कार्योंके लिए अपना अर्पण करना अर्थात् इन तीनों कार्यों में अपना भाग स्वयं करना अर्थात् जगत्का निवास करानेके लिए, शत्रुओंका नाश करनेके लिए और सबको केन्द्रित करनेके लिए मनुष्योंको यत्न करना चाहिए । उक्त तीनों देवोंके उक्त तीनों कार्योंकि लिए यहां मानवोंका समर्पण होना है। मानवोंका संगठन उक्त तीनों कार्योंके लिए हुआ है, यह बात
अ॒ग्नीषोम॑यो॒रुज्जति॒म॒ज्जैषं॒ वाज॑स्य मा प्रस॒वेन॒ प्रोहा॑मं । अ॒ग्नीषोमो तमप॑नु॒दतां योऽस्मान्द्वेट यं च॑ व॒यं द्वि॒ष्मो वाज॑स्यैनं॑ प्रस॒वेनापो॑हामि । इन्द्राग्न्योरुज्जितिमनूज्जैषं वाज॑स्य मा प्रस॒वेन॒ मोहहा॑मिं । इन्द्राग्नी तमप॑नुक्तां इन्द्राग्नी तमप॑नुवर्ता योऽस्मान्द्वेष्टि यं च॑ व॒यं द्वि॒ष्मो वाज॑स्यैनं च॑ प्रस॒वेनापहामि ॥ पंद्रह ॥ अग्नि और सोमने जैसी विजय प्राप्त की, वैसी विजय मैं प्राप्त भी प्राप्त करूं। अन्नकी प्रेरणासे मैं स्वयंको प्रेरित करता हूं। जो हमसे द्वेष करता है, और जिससे हम द्वेष करते हैं उसे अग्नि और सोम दूर करें। अन्नकी प्रेरणासे इस शत्रुको दूर करता हूं। इन्द्र और अग्निने जैसी विजय प्राप्त की, उसी तरह मैं भी विजय प्राप्त करूं। अन्नकी प्रेरणासे मैं स्वयंको प्रेरित करता हूं। जो हमसे द्वेष करता है, और जिससे हम द्वेष करते हैं, उसे इन्द्र और अग्नि दूर करें। मैं अन्नकी प्रेरणासे इस शत्रुको दूर करता हूं ।।पंद्रह।। यह मैं देखता हूं। विजय प्राप्तिके लिए जो साधन जिस प्रकार वर्तने चाहिए, इसका ज्ञान प्राप्त करता हूं और वैसा व्यवहार करके अपनी विजय सिद्ध करता हूं। देवताओंके अनुसार हम अपना आचरण करके अपनी विजय प्राप्त करे। 'यत् देवाः अकुर्वन् तत्करवाणि' जैसा कुछ देवोंने किया है, वैसाही मैं करूं, यही विजयका सूत्र है। यही बात 'देवानां उज्जितं अनु उज्ज्ञेषं इस मंत्रभागमें कही है। अन्नकी प्रेरणासे मैं अपने आपको प्रेरित करता हूं, उत्साहित करता हूं। मानव जो विविध कार्य करते हैं, वे अन्नके उत्पादनसे, अन्नकी प्रेरणासे प्रेरित होकरही करते हैं। मानवी व्यवहारमें सर्व साधारण प्रेरणा अन्नकीही है। अन्न मिलनेवाला न हो, तो अन्य भोग मिलनेवाले होंगे। अर्थात् भोगोंकी प्राप्ति की प्रेरणासेही मानव उत्साहित होकर कार्य करते रहते हैं। अपने सब व्यवहार भोग प्रेरणासेही सब मानव करते हैं। भोग या अन्न प्राप्त होना चाहिए। इस भोग प्राप्तिमें कई शत्रु होते हैं, इन शत्रुओंको दूर करना चाहिए, तभी अपनी विजय होगी और अन्नादि भोग प्राप्त होंगे। शत्रुका लक्षण हैं जो अकेला हम सबसे द्वेष करता है और जिस अकेले से हम सब द्वेष करते है, वह शत्रु है। शत्रुका यह लक्षण है। जो अकेला सब समाजसे द्वेष करता है और वहीं शत्रु है और वह उस समाजमें रहने योग्य नहीं है। ऐसे शत्रुको दूर करना चाहिए । जिस तरह अग्नि और सोम अथवा इन्द्र और अग्निने अपने शत्रुओंको परास्त करके भगा दिया, उसी तरह हम आपसका संगठन बढाकर शत्रुओंको दूर करें । शत्रुओंको क्यों दूर किया जाए ? इस प्रश्नके उत्तरमें कहा जा सकता है कि अन्नके प्रसवसे, अन्नकी प्रेरणासे में शत्रुको भगाता हूं। शत्रु समाजमें रहेगा तो अन्न प्राप्तिके कार्य में बाधा उत्पन्न होगी। इसलिए शत्रुको दूर करतना आवश्यक है। हमें अन्न भरपूर मिले, इसलिए शत्रुको दूर करनेका प्रयत्न करना चाहिए। इस मंत्र में कहा है कि 'अन्नकी प्रेरणासे अपनी उन्नतिके लिए विजय प्राप्त करना और उसी अन्नकी प्रेरणासे शत्रुको दूर करना चाहिए।' इस प्रकार इस मंत्रमें उन्नितके दो सूत्र बतायें हैं- अपनी विजय प्राप्त करना और शत्रुको दूर करना ।।पंद्रह।। वसु, रुद्र और आदित्योंके लिए तेरा अर्पण करते हैं। वसु पृथ्वी आदि आठ हैं, वे सबका निवास कराते हैं। रुद्र शत्रुका संहार करते हैं। शरीरमें स्थित ग्यारह प्राणही ग्यारह रुद्र हं। आदित्य देव बारह है और वे सबकी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। ये तीनों देव क्रमशः सबका निवास करानेवाले, सबका संहार करनेवाले और सबका आधार देनेवाले हैं। इनके लिए अर्पण करनेका तात्पर्य यह है कि इनके तीनों कार्योंके लिए अपना अर्पण करना अर्थात् इन तीनों कार्यों में अपना भाग स्वयं करना अर्थात् जगत्का निवास करानेके लिए, शत्रुओंका नाश करनेके लिए और सबको केन्द्रित करनेके लिए मनुष्योंको यत्न करना चाहिए । उक्त तीनों देवोंके उक्त तीनों कार्योंकि लिए यहां मानवोंका समर्पण होना है। मानवोंका संगठन उक्त तीनों कार्योंके लिए हुआ है, यह बात
में होता है। ऐसी बात कहना वो बड़ा सरम है। यदि तर्क करने के लिए यह मान से कि धर्म-कर्म सब मिथ्या भूठ है तो क्या होगा इस पर विचार करो । बनि तो एक ही होती है, पर प्रकास विभिन्न होता है। उसी एक महादाक्ति का मामीसियों में राजनेतिक स्वाधीनता के रूप में अंग्रेजों में वापिस विस्तार के रूप में वीर हिन्दुओं के इषय में मुश्किाम की इच्छा के रूप में विकास हुआ है। किन्तु इसी महाशक्ति की प्रेरणा से कई मताध्वियों से माना प्रकार के मुपन्दुओं को से करो हुए फांसीसी और अंग्रेजी चरित्र पठित हुआ है और उसीकी प्रेरणा से फालों में भगन में हिन्दुओं के जातीय चरित्र का विकास हुआ है। अब मैं जानना चाहता हूँ कि कार्यों के हमारे मान को छोड़ना सरल है अपना सौ पचास वर्ष के तुम्हारे विदेधी स्वभाव को छोड़ना ? प्रेमार काट जाशि को भूककर सात घिष्ट बन धर्मप्राण वप नहीं हो जाते ? धर्म के अतिरिक्त और किसी दूसरी चीन से भारत के जातीय जीवन प्रतिष्ठा असम्भव है वास्तविक बात यह है कि जो भी पहाड़ से एक हजार कोस नीचे उतर बायी हो यह क्या फिर पहाड़ पर जायगी मा जा सकेगी ? यदि यह जाने की चेप्टा भी करे तो परिणाम यही होगा कि इधर-उबर जाकर वह सूद जायगी। वह नदी चाहे जैसे ही समुद्र में मीही चाहे दो दिन पहले मा दो दिन बाद, दो बच्छी जगहो में होकर अथवा दी मन्दी जयहाँ से गुजरकर यदि हमारे इस दस हजार वर्ष के बातमीन में मूस हुई, तो इस समय जब तो और कोई उपाय है ही नहीं इस समय यदि नये चरित्र का मठम किया जाय तो मृत्यु की है। सम्भावना है। मुझे क्षमा करो यदि हम यह कहे कि यह सोचता कि हमारे राष्ट्रीय भादर्श मे मूल रही है मिरी मूर्खता है। पहले अन्य देशों में जामा प रेल दूसरों की माँ के सहारे नहीं उनकी जबस्था और रहन-सहका सम्पमत करो। और यदि मस्तिष्क हो तो उन पर विचार करो फिर अपने सास्त्रों और पुराने साहित्य को पड़ी और समस्त भारत की मात्रा का विभिन्न प्ररेसों में रहनेवाडे अविवासियों के पास आचार-विचार का विस्ता गत दृष्टि मीर उमय मस्तिष्क सेबक की तरह नही विचार करो त समझ सकोगे कि जाति मी भी है, की रही है केवल बेहोपा हो गयी है और लोय कि इस देश का प्राण धर्म है भाषा धर्म है तथा मान धर्म है। तुम्हारी राजनीति समाजनीति यस्तै की सफाई, केगनिबार दुमिक्ष पीडितो को अन्नदान आदि आदि चिरकाल से इस देश मे जैसे हुआ है, वैसे ही होगा - अर्थात् धर्म के द्वारा यदि होगा तो होगा, अन्यथा नही । तुम्हारे रोतेचिल्लाने का कुछ भी असर न होगा । शक्तिमान पुरुष ही सब समाजो का परिचालक है इसके अतिरिक्त प्रत्येक देश में एक ही नियम है, वह यह कि थोडे से शक्तिमान मनुष्य जो करते है, वही होता है। बाकी लोग केवल भेडियाघसान का ही अनुकरण करते हैं। मेरे मित्रो। मैंने तुम्हारी पार्लियामेन्ट ( parliament), सेनेट (senate), वोट (vote), मेजारटी (majority), बैलट (ballot) आदि सव देखा है, शक्तिमान पुरुष जिस ओर चलने की इच्छा करते हैं, समाज को उसी ओर चलाते है, वाकी लोग भेडी की तरह उनका अनुकरण करते हैं। तो भारत मे कौन शक्तिमान पुरुष है? वे ही जो धर्मवीर है । वे ही हमारे समाज को चलाते हैं, वे ही समाज की रीति-नीति में परिवर्तन की आवश्यकता होने पर उसे बदल देते हैं। हम चुपचाप सुनते है और उसे मानते हैं। किन्तु, यह तो हमारा सौभाग्य है कि बहुमत, वोट आदि के झमेले में नहीं पड़ता पडता । पाश्चात्य देशो में राजनीति के नाम पर दिन में लूट यह ठीक है कि वोट, बैलट आदि द्वारा प्रजा को एक प्रकार की जो शिक्षा मिलती है, उसे हम नही दे पाते, किन्तु राजनीति के नाम पर चोरो का जो दल देशवासियो का रक्त चूसकर समस्त यूरोपीय देशो का नाश करता है और स्वय मोटा-ताजा बनता है, वह भी दल हमारे देश मे नही है। घूस की वह घूम, बहु दिन-दहाडे लूट, जो पाश्चात्य देशो में होती है, यदि भारत में दिखायी पड़े, तो हताश होना पड़ेगा । घर की जोरू वर्तन माँजे, गणिका लड्डू खाय। गली गली हे गोरस फिरता, मदिरा बेठि विकाय ।। जिनके हाथ में रुपया है, वे राज्यशासन को अपनी मुट्ठी में रखते है, प्रजा को लूटते है और उसको चूसते हैं, उसके बाद उन्हें सिपाही बनाकर देश-देशान्तरो मे मरने के लिए भेज देते हैं, जीत होने पर उन्होका घर धन-धान्य से भरा जायगा, किन्तु प्रजा तो उसी जगह मार डाली गयी। मेरे मित्रो। तुम घवडाओ नही, आश्चर्य भी मत प्रकट करो !
में होता है। ऐसी बात कहना वो बड़ा सरम है। यदि तर्क करने के लिए यह मान से कि धर्म-कर्म सब मिथ्या भूठ है तो क्या होगा इस पर विचार करो । बनि तो एक ही होती है, पर प्रकास विभिन्न होता है। उसी एक महादाक्ति का मामीसियों में राजनेतिक स्वाधीनता के रूप में अंग्रेजों में वापिस विस्तार के रूप में वीर हिन्दुओं के इषय में मुश्किाम की इच्छा के रूप में विकास हुआ है। किन्तु इसी महाशक्ति की प्रेरणा से कई मताध्वियों से माना प्रकार के मुपन्दुओं को से करो हुए फांसीसी और अंग्रेजी चरित्र पठित हुआ है और उसीकी प्रेरणा से फालों में भगन में हिन्दुओं के जातीय चरित्र का विकास हुआ है। अब मैं जानना चाहता हूँ कि कार्यों के हमारे मान को छोड़ना सरल है अपना सौ पचास वर्ष के तुम्हारे विदेधी स्वभाव को छोड़ना ? प्रेमार काट जाशि को भूककर सात घिष्ट बन धर्मप्राण वप नहीं हो जाते ? धर्म के अतिरिक्त और किसी दूसरी चीन से भारत के जातीय जीवन प्रतिष्ठा असम्भव है वास्तविक बात यह है कि जो भी पहाड़ से एक हजार कोस नीचे उतर बायी हो यह क्या फिर पहाड़ पर जायगी मा जा सकेगी ? यदि यह जाने की चेप्टा भी करे तो परिणाम यही होगा कि इधर-उबर जाकर वह सूद जायगी। वह नदी चाहे जैसे ही समुद्र में मीही चाहे दो दिन पहले मा दो दिन बाद, दो बच्छी जगहो में होकर अथवा दी मन्दी जयहाँ से गुजरकर यदि हमारे इस दस हजार वर्ष के बातमीन में मूस हुई, तो इस समय जब तो और कोई उपाय है ही नहीं इस समय यदि नये चरित्र का मठम किया जाय तो मृत्यु की है। सम्भावना है। मुझे क्षमा करो यदि हम यह कहे कि यह सोचता कि हमारे राष्ट्रीय भादर्श मे मूल रही है मिरी मूर्खता है। पहले अन्य देशों में जामा प रेल दूसरों की माँ के सहारे नहीं उनकी जबस्था और रहन-सहका सम्पमत करो। और यदि मस्तिष्क हो तो उन पर विचार करो फिर अपने सास्त्रों और पुराने साहित्य को पड़ी और समस्त भारत की मात्रा का विभिन्न प्ररेसों में रहनेवाडे अविवासियों के पास आचार-विचार का विस्ता गत दृष्टि मीर उमय मस्तिष्क सेबक की तरह नही विचार करो त समझ सकोगे कि जाति मी भी है, की रही है केवल बेहोपा हो गयी है और लोय कि इस देश का प्राण धर्म है भाषा धर्म है तथा मान धर्म है। तुम्हारी राजनीति समाजनीति यस्तै की सफाई, केगनिबार दुमिक्ष पीडितो को अन्नदान आदि आदि चिरकाल से इस देश मे जैसे हुआ है, वैसे ही होगा - अर्थात् धर्म के द्वारा यदि होगा तो होगा, अन्यथा नही । तुम्हारे रोतेचिल्लाने का कुछ भी असर न होगा । शक्तिमान पुरुष ही सब समाजो का परिचालक है इसके अतिरिक्त प्रत्येक देश में एक ही नियम है, वह यह कि थोडे से शक्तिमान मनुष्य जो करते है, वही होता है। बाकी लोग केवल भेडियाघसान का ही अनुकरण करते हैं। मेरे मित्रो। मैंने तुम्हारी पार्लियामेन्ट , सेनेट , वोट , मेजारटी , बैलट आदि सव देखा है, शक्तिमान पुरुष जिस ओर चलने की इच्छा करते हैं, समाज को उसी ओर चलाते है, वाकी लोग भेडी की तरह उनका अनुकरण करते हैं। तो भारत मे कौन शक्तिमान पुरुष है? वे ही जो धर्मवीर है । वे ही हमारे समाज को चलाते हैं, वे ही समाज की रीति-नीति में परिवर्तन की आवश्यकता होने पर उसे बदल देते हैं। हम चुपचाप सुनते है और उसे मानते हैं। किन्तु, यह तो हमारा सौभाग्य है कि बहुमत, वोट आदि के झमेले में नहीं पड़ता पडता । पाश्चात्य देशो में राजनीति के नाम पर दिन में लूट यह ठीक है कि वोट, बैलट आदि द्वारा प्रजा को एक प्रकार की जो शिक्षा मिलती है, उसे हम नही दे पाते, किन्तु राजनीति के नाम पर चोरो का जो दल देशवासियो का रक्त चूसकर समस्त यूरोपीय देशो का नाश करता है और स्वय मोटा-ताजा बनता है, वह भी दल हमारे देश मे नही है। घूस की वह घूम, बहु दिन-दहाडे लूट, जो पाश्चात्य देशो में होती है, यदि भारत में दिखायी पड़े, तो हताश होना पड़ेगा । घर की जोरू वर्तन माँजे, गणिका लड्डू खाय। गली गली हे गोरस फिरता, मदिरा बेठि विकाय ।। जिनके हाथ में रुपया है, वे राज्यशासन को अपनी मुट्ठी में रखते है, प्रजा को लूटते है और उसको चूसते हैं, उसके बाद उन्हें सिपाही बनाकर देश-देशान्तरो मे मरने के लिए भेज देते हैं, जीत होने पर उन्होका घर धन-धान्य से भरा जायगा, किन्तु प्रजा तो उसी जगह मार डाली गयी। मेरे मित्रो। तुम घवडाओ नही, आश्चर्य भी मत प्रकट करो !
Muzaffarnagar: जनपद में स्थित एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में कुछ असामाजिक तत्वों ने मंगलवार की देर रात विद्यालय परिसर की दीवारों पर आपत्तिजनक बातें लिख कर सनसनी फैला दी। Muzaffarnagar: जनपद में स्थित एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में कुछ असामाजिक तत्वों ने मंगलवार की देर रात विद्यालय परिसर की दीवारों पर आपत्तिजनक बातें लिख कर सनसनी फैला दी थी। घटना की जानकारी सुबह सवेरे उस समय हुई जब विद्यालय का स्टाफ विद्यालय में पहुंचा, जिसने देखा कि विद्यालय की दीवारों पर अशोभनीय बातें लिखी हुई थी और स्कूल प्रांगण में आपत्तिजनक सामग्री भी पड़ी हुई थी, जिसके चलते स्कूल प्रशासन ने जिसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दी। दरअसल, मामला नगर कोतवाली क्षेत्र (Nagar Kotwali area) के बाननगर गांव में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय का है, जहां देर रात कुछ असामाजिक तत्वों ने विद्यालय की दीवारों पर आपत्तिजनक बातें लिखकर सब को अचंभे में डाल दिया। सुबह सवेरे स्टॉप के विद्यालय पहुंचने पर इस घटना की जानकारी हुई जिसके चलते विद्यालय के अध्यापकों ने जिसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दीवारों पर लिखी हुई आपत्तिजनक बातों को मिटवाकर अपनी जांच शुरू कर दी है। विद्यालय स्टाफ की मानें तो विद्यालय में पहले भी शरारती तत्वों ने कई बार तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया है जिसके चलते विद्यालय में कहीं बाहर आपत्तिजनक सामग्रियां भी पड़ी मिली है जिसके चलते ये ज़ाहिर होता है की कुछ शरारती तत्व विद्यालय परिसर में आकर शराब का सेवन भी करते हैं। इस मामले पर विद्यालय के अध्यापक संदीप शर्मा (School teacher Sandeep Sharma) ने बताया कि आज जैसे ही स्टाफ स्कूल में आया तो देखा कि जो फुलवाड़ी विद्यालय में लगा रखी है, वह टूटी हुई थी। शौच भी शरारती तत्वों ने यहां पर किया हुआ था और विद्यालय की जो दीवारें हैं उस पर अश्लील बातें लिखी हुई थी जो कि बिल्कुल अशोभनीय थी। जिसके बाद ग्राम प्रधान को बुलाकर विद्यालय के स्टाफ द्वारा पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। इससे पहले भी स्कूल में चीजों को तोड़ना पेड़ों को तोड़ना जैसी हरकतें होती रही है। कुछ शरारती तत्व यहां पर शराब का सेवन भी करते हैं, जिनकी खाली बोतले विद्यालय परिसर में पड़ी हुई मिलती है। विद्यालय जब तक खुलता है तब तक तो कोई नहीं आता, लेकिन उसके बाद का पता नहीं यहां कौन आता है और इस तरह की हरकत करता है, यह जो हरकत है, बहुत है अशोभनीय है, जिसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। इस बारे में जानकारी लेते हुए एसपी सिटी अर्पित विजयवर्गीय (SP City Arpit Vijayvargiya) ने बताया कि आज कोतवाली क्षेत्र स्थित एक विद्यालय की सूचना आई थी कि कुछ असामाजिक तत्वों ने विद्यालय की दीवारों पर कुछ अपशब्द लिखे हैं। इसके चलते सूचना पर पुलिस ने विद्यालय में पहुंचकर सबसे पहले उन शब्दों को मिटाया गया। उसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी है, जो भी इस मामले में सम्मिलित पाया जाएगा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
Muzaffarnagar: जनपद में स्थित एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में कुछ असामाजिक तत्वों ने मंगलवार की देर रात विद्यालय परिसर की दीवारों पर आपत्तिजनक बातें लिख कर सनसनी फैला दी। Muzaffarnagar: जनपद में स्थित एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में कुछ असामाजिक तत्वों ने मंगलवार की देर रात विद्यालय परिसर की दीवारों पर आपत्तिजनक बातें लिख कर सनसनी फैला दी थी। घटना की जानकारी सुबह सवेरे उस समय हुई जब विद्यालय का स्टाफ विद्यालय में पहुंचा, जिसने देखा कि विद्यालय की दीवारों पर अशोभनीय बातें लिखी हुई थी और स्कूल प्रांगण में आपत्तिजनक सामग्री भी पड़ी हुई थी, जिसके चलते स्कूल प्रशासन ने जिसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दी। दरअसल, मामला नगर कोतवाली क्षेत्र के बाननगर गांव में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय का है, जहां देर रात कुछ असामाजिक तत्वों ने विद्यालय की दीवारों पर आपत्तिजनक बातें लिखकर सब को अचंभे में डाल दिया। सुबह सवेरे स्टॉप के विद्यालय पहुंचने पर इस घटना की जानकारी हुई जिसके चलते विद्यालय के अध्यापकों ने जिसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दीवारों पर लिखी हुई आपत्तिजनक बातों को मिटवाकर अपनी जांच शुरू कर दी है। विद्यालय स्टाफ की मानें तो विद्यालय में पहले भी शरारती तत्वों ने कई बार तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया है जिसके चलते विद्यालय में कहीं बाहर आपत्तिजनक सामग्रियां भी पड़ी मिली है जिसके चलते ये ज़ाहिर होता है की कुछ शरारती तत्व विद्यालय परिसर में आकर शराब का सेवन भी करते हैं। इस मामले पर विद्यालय के अध्यापक संदीप शर्मा ने बताया कि आज जैसे ही स्टाफ स्कूल में आया तो देखा कि जो फुलवाड़ी विद्यालय में लगा रखी है, वह टूटी हुई थी। शौच भी शरारती तत्वों ने यहां पर किया हुआ था और विद्यालय की जो दीवारें हैं उस पर अश्लील बातें लिखी हुई थी जो कि बिल्कुल अशोभनीय थी। जिसके बाद ग्राम प्रधान को बुलाकर विद्यालय के स्टाफ द्वारा पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। इससे पहले भी स्कूल में चीजों को तोड़ना पेड़ों को तोड़ना जैसी हरकतें होती रही है। कुछ शरारती तत्व यहां पर शराब का सेवन भी करते हैं, जिनकी खाली बोतले विद्यालय परिसर में पड़ी हुई मिलती है। विद्यालय जब तक खुलता है तब तक तो कोई नहीं आता, लेकिन उसके बाद का पता नहीं यहां कौन आता है और इस तरह की हरकत करता है, यह जो हरकत है, बहुत है अशोभनीय है, जिसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। इस बारे में जानकारी लेते हुए एसपी सिटी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि आज कोतवाली क्षेत्र स्थित एक विद्यालय की सूचना आई थी कि कुछ असामाजिक तत्वों ने विद्यालय की दीवारों पर कुछ अपशब्द लिखे हैं। इसके चलते सूचना पर पुलिस ने विद्यालय में पहुंचकर सबसे पहले उन शब्दों को मिटाया गया। उसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी है, जो भी इस मामले में सम्मिलित पाया जाएगा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इरशादे बारी तआला हैतो अल्लाह तआला की दी हुई हलाल पाकीज़ा रोज़ी खाओ और अल्लाह तआला की नेअमतों का शुक्र अदा करो। (सू० - नहल - 114) सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमायाखाना खाकर शुक्र अदा करने वाला सब्र करने वाले रोज़दार की तरह हैं। (मुस्नद अहमद - 4 / 343 ) अल्लाह तआला ने अपनी मखलूक में इख़्तिलाफ़ रखा है किसी को अमीर बनाया किसी को ग़रीब बनाया किसी को मेहनत व मशक़्क़तों में डाला किसी को ऐशो इशरत में रखा किसी को मुसीबतो परेशानी में मुब्तिला किया और किसी को अफियत व फ़राख़ी में रखा और ये तमाम इख़्तिलाफ़ हिकमते इलाही हैं और मखलूक के लिये आसानी व राहत व बेहतरी और अल्लाह तआला की रहमत हैं और अल्लाह तआला हमें जिस हाल में भी रखे हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिये ताकि आख़िरत में हम बेहतर जज़ा के पायें । क्योंकि दुनियाँ की ज़िन्दगी हमेशगी का घर नहीं है बल्कि थोड़े दिनों का बरतना है और हमेशगी का घर तो आख़िरत है जहाँ इन्सान को हमेशा रहना है दुनियाँ रास्ता है मंज़िल नहीं है और हर इन्सान की मंज़िल आख़िरत है और हम मुसाफिर हैं जो दुनियाँ के रास्तों पर सफर कर रहे हैं और हर मुसाफिर वापस अपने घर को आता है तो हमें चाहिये कि हम सिर्फ अपने हमेशगी वाले घर के लिये ग़ौरो फिक्र करें और दुनियाँ में हमें जो मिले उस पर रब तआला का शुक्र अदा करें और जो न मिले उस पर सब्र करें और उससे बेपरवाह रहें । क्योंकि हर चीज़ का बरतना थोड़े दिनों का है और हमेशा दुन्यावी तमाम मामलात में अपने से नीचे वाले लोगों को देखें कि उन पर कितनी मुसीबतो परेशानी है तो हम पर ये हक़ीक़त वाज़ेह हो जायेगी कि हमें अल्लाह तआला ने उन लोगों से ज़्यादा बेहतर नेअमतें अता की हैं तो इस तरह हम अपने रब के शुक्र गुज़ार बन्दे बन जायेंगे जो बड़ा करम करने वाला है इसलिये हमें चाहिये कि चाहे जैसे भी असबाब हों हम अल्लाह तआला का कसरत से शुक्र
इरशादे बारी तआला हैतो अल्लाह तआला की दी हुई हलाल पाकीज़ा रोज़ी खाओ और अल्लाह तआला की नेअमतों का शुक्र अदा करो। सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमायाखाना खाकर शुक्र अदा करने वाला सब्र करने वाले रोज़दार की तरह हैं। अल्लाह तआला ने अपनी मखलूक में इख़्तिलाफ़ रखा है किसी को अमीर बनाया किसी को ग़रीब बनाया किसी को मेहनत व मशक़्क़तों में डाला किसी को ऐशो इशरत में रखा किसी को मुसीबतो परेशानी में मुब्तिला किया और किसी को अफियत व फ़राख़ी में रखा और ये तमाम इख़्तिलाफ़ हिकमते इलाही हैं और मखलूक के लिये आसानी व राहत व बेहतरी और अल्लाह तआला की रहमत हैं और अल्लाह तआला हमें जिस हाल में भी रखे हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिये ताकि आख़िरत में हम बेहतर जज़ा के पायें । क्योंकि दुनियाँ की ज़िन्दगी हमेशगी का घर नहीं है बल्कि थोड़े दिनों का बरतना है और हमेशगी का घर तो आख़िरत है जहाँ इन्सान को हमेशा रहना है दुनियाँ रास्ता है मंज़िल नहीं है और हर इन्सान की मंज़िल आख़िरत है और हम मुसाफिर हैं जो दुनियाँ के रास्तों पर सफर कर रहे हैं और हर मुसाफिर वापस अपने घर को आता है तो हमें चाहिये कि हम सिर्फ अपने हमेशगी वाले घर के लिये ग़ौरो फिक्र करें और दुनियाँ में हमें जो मिले उस पर रब तआला का शुक्र अदा करें और जो न मिले उस पर सब्र करें और उससे बेपरवाह रहें । क्योंकि हर चीज़ का बरतना थोड़े दिनों का है और हमेशा दुन्यावी तमाम मामलात में अपने से नीचे वाले लोगों को देखें कि उन पर कितनी मुसीबतो परेशानी है तो हम पर ये हक़ीक़त वाज़ेह हो जायेगी कि हमें अल्लाह तआला ने उन लोगों से ज़्यादा बेहतर नेअमतें अता की हैं तो इस तरह हम अपने रब के शुक्र गुज़ार बन्दे बन जायेंगे जो बड़ा करम करने वाला है इसलिये हमें चाहिये कि चाहे जैसे भी असबाब हों हम अल्लाह तआला का कसरत से शुक्र
Don't Miss! पोल डांस हमेशा से ही कई बॅालीवुड एक्ट्रेसेस की पसंद रहा है। कई एक्ट्रेसेस ऐसी हैं जो कि पोल डांस के जरिए अपने वजन पर भी काम कर चुकी हैं तो किसी की इस तरह के डांस स्टाइल में दिलचस्पी अधिक है। एक्ट्रेस शमा सिकंदर का नाम भी इसमें शामिल है जो कि पोल डांस के जरिए एक बार फिर से अपने बोल्डनेस का जलवा दिखा रही हैं। क्रिसमस के मौके पर शमा सिकंदर ने अपने डांस स्टाइल से सभी को चौंका दिया। जहां पर वह गजब का पोल डांस करती हुई दिखाई दी। उन्होंने इसकी कुछ तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम पर भी शेयर की हैं। वह पोल डांस करते हुए काफी खूबसूरत भी दिखाई दे रही हैं।शमा सिकंदर ने पोल डांस का इस्तेमाल फिट रहने के लिए किया है। वह इन दिनों दुबई में रहकर वेकेशन पर पोल डांस कर भी रही हैं और सीख भी रही हैं। उन्होंने पोल डांस में पोज देते हुए इंस्टाग्राम पर अपनी कई सारी तस्वीरें शेयर की हैं। शमा ने इन तस्वीरों के साथ लिखा है कि अपनी सीमाओं को आजमाएं , आप चकित हो जायेंगे कि आप क्या कर सकते हैं। कभी नहीं पता था कि मैं ऐसा पहली बार कर सकती हूं- ओफ्फो सो थ्रिलिंग सो फन।
Don't Miss! पोल डांस हमेशा से ही कई बॅालीवुड एक्ट्रेसेस की पसंद रहा है। कई एक्ट्रेसेस ऐसी हैं जो कि पोल डांस के जरिए अपने वजन पर भी काम कर चुकी हैं तो किसी की इस तरह के डांस स्टाइल में दिलचस्पी अधिक है। एक्ट्रेस शमा सिकंदर का नाम भी इसमें शामिल है जो कि पोल डांस के जरिए एक बार फिर से अपने बोल्डनेस का जलवा दिखा रही हैं। क्रिसमस के मौके पर शमा सिकंदर ने अपने डांस स्टाइल से सभी को चौंका दिया। जहां पर वह गजब का पोल डांस करती हुई दिखाई दी। उन्होंने इसकी कुछ तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम पर भी शेयर की हैं। वह पोल डांस करते हुए काफी खूबसूरत भी दिखाई दे रही हैं।शमा सिकंदर ने पोल डांस का इस्तेमाल फिट रहने के लिए किया है। वह इन दिनों दुबई में रहकर वेकेशन पर पोल डांस कर भी रही हैं और सीख भी रही हैं। उन्होंने पोल डांस में पोज देते हुए इंस्टाग्राम पर अपनी कई सारी तस्वीरें शेयर की हैं। शमा ने इन तस्वीरों के साथ लिखा है कि अपनी सीमाओं को आजमाएं , आप चकित हो जायेंगे कि आप क्या कर सकते हैं। कभी नहीं पता था कि मैं ऐसा पहली बार कर सकती हूं- ओफ्फो सो थ्रिलिंग सो फन।
भले ही मोबाइल पर इंटरनेट इस्तेमाल करना आम बात हो चली हो, लेकिन लेपटॉप या कंप्यूटर पर इंटरनेट यूज करने वालों की तादाद भी कम नहीं है। ऐसे में लेपटॉप यूजर्स को यह जानना बेहद जरूरी है कि जब भी आप अपने वेबकैम का इस्तेमाल ना कर रहे हों तो उसे ढंक कर रखने में ही भलाई है। कभी अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एंजेसी (CIA) में काम कर चुके कंप्यूटर प्रोफेशनल एडवर्ड स्नोडेन ने बताया था कि अमेरिकी सरकार के लिए काम करने वाली नेशनल सिक्योरिटी एंजेसी लोगों के वेबकैम का इस्तेमाल करती है। एडवर्ड के मुताबिक एजेंसी ने याहू के करीब 18 लाख यूजर्स की तस्वीरें चोरी करके सरकारी सर्वर में डाल दी थी। इतना ही नहीं हमें लेपटॉप के माइक को भी कवर करके ही रखना चाहिए। इसका सबसे अच्छा उदाहरण फेसबुक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी मार्क जुकरबर्ग की एक तस्वीर है। इस तस्वीर में मार्क के लेपटॉप के वेबकैम और माइक पर लगा टेप साफ तौर पर देखा जा सकता है।
भले ही मोबाइल पर इंटरनेट इस्तेमाल करना आम बात हो चली हो, लेकिन लेपटॉप या कंप्यूटर पर इंटरनेट यूज करने वालों की तादाद भी कम नहीं है। ऐसे में लेपटॉप यूजर्स को यह जानना बेहद जरूरी है कि जब भी आप अपने वेबकैम का इस्तेमाल ना कर रहे हों तो उसे ढंक कर रखने में ही भलाई है। कभी अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एंजेसी में काम कर चुके कंप्यूटर प्रोफेशनल एडवर्ड स्नोडेन ने बताया था कि अमेरिकी सरकार के लिए काम करने वाली नेशनल सिक्योरिटी एंजेसी लोगों के वेबकैम का इस्तेमाल करती है। एडवर्ड के मुताबिक एजेंसी ने याहू के करीब अट्ठारह लाख यूजर्स की तस्वीरें चोरी करके सरकारी सर्वर में डाल दी थी। इतना ही नहीं हमें लेपटॉप के माइक को भी कवर करके ही रखना चाहिए। इसका सबसे अच्छा उदाहरण फेसबुक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी मार्क जुकरबर्ग की एक तस्वीर है। इस तस्वीर में मार्क के लेपटॉप के वेबकैम और माइक पर लगा टेप साफ तौर पर देखा जा सकता है।
भुंतर - रंगों के त्योहार होली पर 'वाटर गन' से इस बार रंगों की बौछारें होंगी। जिला में होली को लेकर तैयारियों ने तेजी पकडनी आरंभ कर दी है तो होली के रंग में रंगने के लिए जिला के नन्हे-मुन्नें नौनिहालों ने अपनी पसंदीदा पिचकारियों के लिए डिमांड भेजनी शुरू कर दी है। बाजार में होली पर बच्चों की पसंद की जाने वाली पिचकारियां दिखने लगी है। एक मार्च को होने वाले होली उत्सव के निकट आने के साथ ही नौनिहाल भी समय निकालकर दुकानों पर पहुंच रहे हैं। कारोबारियों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार जिला के बाजारों में मिकी माऊस, डोरेमन, छोटा भीम जैसी पिचकारियां उपलब्ध करवाई गई है तो किंग ऑफ वाटर गन बच्चों को रास आ रही है। 100 मिलीलीटर से लेकर दो लीटर क्षमता की वाटर गन विशेष तौर पर बच्चों की पसंद बनी हुई है। इसके अलावा अन्य डिजाइनों की पिचकारियां भी बाजार में दिख रही है। इसके अलावा संगीत के शौकीन बच्चों के अरमान पूरा करने की भी व्यवस्था की गई है। ऐसे बच्चे वायलन पिचकारी खरीद रहे हैं। इसके साथ में चाईनीज पिचकारियां, बौनी व ड्रम पिचकारियों को भी बड़ी मात्रा में खरीदा जा रहा है। कारोबारियों के अनुसार बाजार में इस बार पिचकारियां 100 रूपये से लेकर अधिकतम 500 रूपये तक उपलब्ध करवाई जा रही है। होली को लेकर इसके अतिरिक्त मुर्गा छाप रंग भी बाजार में देखने को मिल रहा है। हालांकि जानकारों की मानें तो यह खतरनाक रंग हो सकता है क्योंकि यह तरल में उपलब्ध है। जिला कुल्लू के प्रवेश द्वार भुंतर के कारोबारियों विजय सूद, रणबीर सिंह, बहादुर ङ्क्षसह आदि ने बताया होली के नजदीक आते ही खरीददारी तेज हो गई है। उन्होंने बताया कि रंगोत्सव के तहत इस बार बच्चे विभिन्न प्रकार की पिचकारियों को खरीद रहे हैं लेकिन छोटा भीम, डोरेमन और मिकी माऊस पिचकारियों की डिमांड सबसे ज्यादा चल रही है। उधर कुल्लू के उपायुक्त युनुस खान ने जिलावासियों से अपील की है कि वे होली पर हर्बल रंगों का इस्तेमाल करें और किसी भी प्रकार के खतरनाक रंगों का प्रयोग करने से बचें ताकि किसी को भी नुकसान न पहुंचे।
भुंतर - रंगों के त्योहार होली पर 'वाटर गन' से इस बार रंगों की बौछारें होंगी। जिला में होली को लेकर तैयारियों ने तेजी पकडनी आरंभ कर दी है तो होली के रंग में रंगने के लिए जिला के नन्हे-मुन्नें नौनिहालों ने अपनी पसंदीदा पिचकारियों के लिए डिमांड भेजनी शुरू कर दी है। बाजार में होली पर बच्चों की पसंद की जाने वाली पिचकारियां दिखने लगी है। एक मार्च को होने वाले होली उत्सव के निकट आने के साथ ही नौनिहाल भी समय निकालकर दुकानों पर पहुंच रहे हैं। कारोबारियों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार जिला के बाजारों में मिकी माऊस, डोरेमन, छोटा भीम जैसी पिचकारियां उपलब्ध करवाई गई है तो किंग ऑफ वाटर गन बच्चों को रास आ रही है। एक सौ मिलीलीटर से लेकर दो लीटर क्षमता की वाटर गन विशेष तौर पर बच्चों की पसंद बनी हुई है। इसके अलावा अन्य डिजाइनों की पिचकारियां भी बाजार में दिख रही है। इसके अलावा संगीत के शौकीन बच्चों के अरमान पूरा करने की भी व्यवस्था की गई है। ऐसे बच्चे वायलन पिचकारी खरीद रहे हैं। इसके साथ में चाईनीज पिचकारियां, बौनी व ड्रम पिचकारियों को भी बड़ी मात्रा में खरीदा जा रहा है। कारोबारियों के अनुसार बाजार में इस बार पिचकारियां एक सौ रूपये से लेकर अधिकतम पाँच सौ रूपये तक उपलब्ध करवाई जा रही है। होली को लेकर इसके अतिरिक्त मुर्गा छाप रंग भी बाजार में देखने को मिल रहा है। हालांकि जानकारों की मानें तो यह खतरनाक रंग हो सकता है क्योंकि यह तरल में उपलब्ध है। जिला कुल्लू के प्रवेश द्वार भुंतर के कारोबारियों विजय सूद, रणबीर सिंह, बहादुर ङ्क्षसह आदि ने बताया होली के नजदीक आते ही खरीददारी तेज हो गई है। उन्होंने बताया कि रंगोत्सव के तहत इस बार बच्चे विभिन्न प्रकार की पिचकारियों को खरीद रहे हैं लेकिन छोटा भीम, डोरेमन और मिकी माऊस पिचकारियों की डिमांड सबसे ज्यादा चल रही है। उधर कुल्लू के उपायुक्त युनुस खान ने जिलावासियों से अपील की है कि वे होली पर हर्बल रंगों का इस्तेमाल करें और किसी भी प्रकार के खतरनाक रंगों का प्रयोग करने से बचें ताकि किसी को भी नुकसान न पहुंचे।
नई दिल्ली : जेएनयू के प्रेसिडेंशियल डिबेट में एक भगवाधारी छात्र मंच पर चढ़ता है और एकदम ऊंचा चीख-चीख कर नारे लगाता है, 'इस मंच से मैं बोलता हूं...जय श्रीराम! जय-जय श्रीराम! भारत माता की जय! वंदे मातरम! जय भवानी-जय शिवाजी! मित्रों, मेरा नारा है...जय श्रीराम, जय भीम, जय कलाम! ' बहस शुरू होती उसके पहले ही इस वाकये ने सबको चौका दिया. दरअसल, सबको पता था कि अध्यक्ष पद पर कुल पांच उम्मीदवार पार्टी सिंबल पर अपना दावा पेश कर रहे हैं. लेकिन देशभर में मशहूर इस बहस को देखने पहुंचे लोगों को अचानक से एक छठा उम्मीदवार भी दिखा. ये उम्मीदवार कोई और नहीं बल्कि कैंपस के 'योगी आदित्यनाथ' के नाम से मशहूर छात्र राघवेंद्र मिश्रा थे. उन्होंने ही अपने भाषण की शुरुआत इन नारों के साथ की. राघवेंद्र ने दक्षिणपंथी पार्टियों और संगठनों से सवाल किया, 'मैं हेडगेवार जी से लेकर आरएसएस से लेकर बीजेपी से लेकर यहां मौजूद आरएसएस के सम्मानित पदाधिकारियों और जितने भी हमारे राइट विंग के शुभचिंतक हैं उनसे पूछना चाहता हूं राघवेंद्र मिश्रा में क्या कमी थी मित्रों? ' दरअसल, उन्होंने ये सवाल इस वजह से किया क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से टिकट नहीं मिला. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. जेएनयू में हिंदू लीडर की मांग कर रहे राघवेंद्र का सवाल था कि क्या जेएनयू वाले लाइब्रेरी में नमाज़ को बढ़ावा देकर इसे एक मजहबी कैंपस बनाना चाहते हैं. आरोप लगाते हुए उन्होंने ये भी कहा, 'कैंपस में अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल ज़िंदा हैं जैसे नारे लगते हैं. मित्रों आपको चयन करना होगा कि आपको कसाब चाहिए या कलाम चाहिए. ' सिलसिलेवार आरोपों में उन्होंने कैंपस में तिरंगे के अपमान से इसे जलाए जाने तक जैसी बातें कहीं. अन्य छात्रों के भाषण में 370 हटाए जाने जैसे राष्ट्रीय मुद्दे से लेकर कैंपस के मुद्दे शामिल थे. एबीवीपी के अलावा बाकी सबने 370 हटाए जाने की निंदा की. बापसा के जीतेंद्र सुना ने तो कश्मीर में आज़ादी की मांग कर रहे लोगों के लिए सम्मान भी प्रकट किया. थोड़ी उठा-पटक के बीच बहस बिना किसी विवाद के समाप्त हुई. अब देखने वाली बात होगी कि हाई कोर्ट से आदेश लेकर आने वाले और कैंपस में हिंदू लीडर की मांग करने वाले राघवेंद्र कितने वोट पाते हैं. छह तारीख को जेएनयू छात्रसंध की वोटिंग होगी और नतीजे रविवार तक आयेंगे.
नई दिल्ली : जेएनयू के प्रेसिडेंशियल डिबेट में एक भगवाधारी छात्र मंच पर चढ़ता है और एकदम ऊंचा चीख-चीख कर नारे लगाता है, 'इस मंच से मैं बोलता हूं...जय श्रीराम! जय-जय श्रीराम! भारत माता की जय! वंदे मातरम! जय भवानी-जय शिवाजी! मित्रों, मेरा नारा है...जय श्रीराम, जय भीम, जय कलाम! ' बहस शुरू होती उसके पहले ही इस वाकये ने सबको चौका दिया. दरअसल, सबको पता था कि अध्यक्ष पद पर कुल पांच उम्मीदवार पार्टी सिंबल पर अपना दावा पेश कर रहे हैं. लेकिन देशभर में मशहूर इस बहस को देखने पहुंचे लोगों को अचानक से एक छठा उम्मीदवार भी दिखा. ये उम्मीदवार कोई और नहीं बल्कि कैंपस के 'योगी आदित्यनाथ' के नाम से मशहूर छात्र राघवेंद्र मिश्रा थे. उन्होंने ही अपने भाषण की शुरुआत इन नारों के साथ की. राघवेंद्र ने दक्षिणपंथी पार्टियों और संगठनों से सवाल किया, 'मैं हेडगेवार जी से लेकर आरएसएस से लेकर बीजेपी से लेकर यहां मौजूद आरएसएस के सम्मानित पदाधिकारियों और जितने भी हमारे राइट विंग के शुभचिंतक हैं उनसे पूछना चाहता हूं राघवेंद्र मिश्रा में क्या कमी थी मित्रों? ' दरअसल, उन्होंने ये सवाल इस वजह से किया क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से टिकट नहीं मिला. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. जेएनयू में हिंदू लीडर की मांग कर रहे राघवेंद्र का सवाल था कि क्या जेएनयू वाले लाइब्रेरी में नमाज़ को बढ़ावा देकर इसे एक मजहबी कैंपस बनाना चाहते हैं. आरोप लगाते हुए उन्होंने ये भी कहा, 'कैंपस में अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल ज़िंदा हैं जैसे नारे लगते हैं. मित्रों आपको चयन करना होगा कि आपको कसाब चाहिए या कलाम चाहिए. ' सिलसिलेवार आरोपों में उन्होंने कैंपस में तिरंगे के अपमान से इसे जलाए जाने तक जैसी बातें कहीं. अन्य छात्रों के भाषण में तीन सौ सत्तर हटाए जाने जैसे राष्ट्रीय मुद्दे से लेकर कैंपस के मुद्दे शामिल थे. एबीवीपी के अलावा बाकी सबने तीन सौ सत्तर हटाए जाने की निंदा की. बापसा के जीतेंद्र सुना ने तो कश्मीर में आज़ादी की मांग कर रहे लोगों के लिए सम्मान भी प्रकट किया. थोड़ी उठा-पटक के बीच बहस बिना किसी विवाद के समाप्त हुई. अब देखने वाली बात होगी कि हाई कोर्ट से आदेश लेकर आने वाले और कैंपस में हिंदू लीडर की मांग करने वाले राघवेंद्र कितने वोट पाते हैं. छह तारीख को जेएनयू छात्रसंध की वोटिंग होगी और नतीजे रविवार तक आयेंगे.
घूमने के दुनिया में कई लोग शौकीन है, हालाँकि शादीशुदा लोगों को कई बार समझ नहीं आता कि घूमने कहाँ जाए? ऐसे में अगर आप भी शादीशुदा हैं और आपको समझ नहीं आ रहा है कहाँ जाना है, तो हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसी जगहों के बारे में जहाँ जाकर आप अपनी पत्नी के साथ रोमांस कर सकते हैं। दार्जिलिंग- दार्जिलिंग दुनिया के तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत कंचनजंगा के खूबसूरत नजारों के लिए जाना जाता है। जी हाँ और यह हिल स्टेशन बजट में शानदार अनुभव प्रदान करता है। यहाँ आप पहाड़ों के बीच में एक लकड़ी के कॉटेज में रह सकते हैं, और अपने बजट के अनुसार स्थानीय भोजन का आनंद ले सकते हैं। हम्पी- आप अपनी पत्नी के साथ हम्पी घूमने का भी प्लान बना सकते हैं। जी दरअसल हम्पी के खूबसूरत मंदिर पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं। यह शहर पार्टनर के साथ घूमने के लिए भी परफेक्ट है। आपको बता दें कि बैंगलोर से हम्पी के लिए बस का किराया 650 रुपये प्रति व्यक्ति से शुरू होता है। हम्पी में ठहरने के लिए बहुत सस्ते होटल हैं। आगरा- पत्नी के साथ यहाँ जाकर आपको आनंद आएगा। प्रमुख शहरों से आगरा के लिए ट्रेनों की लागत रु. 340 से रु। 2500 के बीच हो सकता है। जी हाँ और आगरा में होटल की कीमतें प्रति रात लगभग 300 रुपये से शुरू होती हैं। यहाँ शहर में घूमने की सभी जगहों की कीमत 700 से 4500 रुपये के बीच होगी। मनाली- मनाली दिल्ली से एक सुपर किफायती गंतव्य के रूप में जाना जाता है। जी हाँ और दिल्ली से मनाली के लिए आपको प्रति व्यक्ति 700 रुपये से 1000 रुपये की एसी बस मिल सकती है। वहीँ मनाली में बजट होटलों की कोई कमी नहीं है, यहाँ जाकर आपको आनंद ही आनंद आएगा। मनाली जाकर आपकी पत्नी को आनंद आगे। वर्कला- जो लोग समुद्र से यात्रा करना पसंद करते हैं, उनके लिए वर्कला एक आदर्श स्थान है। जी दरअसल अरब सागर के तट पर बसा केरल का वीरान शहर प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर है। यहाँ वर्कला की हवा में रोमांस है। वहीँ कोच्चि से वर्कला के लिए ट्रेनों का किराया 140 रुपये से 800 रुपये प्रति व्यक्ति होगा और वर्कला में होटलों की कीमत लगभग रु. 550 / व्यक्ति।
घूमने के दुनिया में कई लोग शौकीन है, हालाँकि शादीशुदा लोगों को कई बार समझ नहीं आता कि घूमने कहाँ जाए? ऐसे में अगर आप भी शादीशुदा हैं और आपको समझ नहीं आ रहा है कहाँ जाना है, तो हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसी जगहों के बारे में जहाँ जाकर आप अपनी पत्नी के साथ रोमांस कर सकते हैं। दार्जिलिंग- दार्जिलिंग दुनिया के तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत कंचनजंगा के खूबसूरत नजारों के लिए जाना जाता है। जी हाँ और यह हिल स्टेशन बजट में शानदार अनुभव प्रदान करता है। यहाँ आप पहाड़ों के बीच में एक लकड़ी के कॉटेज में रह सकते हैं, और अपने बजट के अनुसार स्थानीय भोजन का आनंद ले सकते हैं। हम्पी- आप अपनी पत्नी के साथ हम्पी घूमने का भी प्लान बना सकते हैं। जी दरअसल हम्पी के खूबसूरत मंदिर पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं। यह शहर पार्टनर के साथ घूमने के लिए भी परफेक्ट है। आपको बता दें कि बैंगलोर से हम्पी के लिए बस का किराया छः सौ पचास रुपयापये प्रति व्यक्ति से शुरू होता है। हम्पी में ठहरने के लिए बहुत सस्ते होटल हैं। आगरा- पत्नी के साथ यहाँ जाकर आपको आनंद आएगा। प्रमुख शहरों से आगरा के लिए ट्रेनों की लागत रु. तीन सौ चालीस से रु। दो हज़ार पाँच सौ के बीच हो सकता है। जी हाँ और आगरा में होटल की कीमतें प्रति रात लगभग तीन सौ रुपयापये से शुरू होती हैं। यहाँ शहर में घूमने की सभी जगहों की कीमत सात सौ से चार हज़ार पाँच सौ रुपयापये के बीच होगी। मनाली- मनाली दिल्ली से एक सुपर किफायती गंतव्य के रूप में जाना जाता है। जी हाँ और दिल्ली से मनाली के लिए आपको प्रति व्यक्ति सात सौ रुपयापये से एक हज़ार रुपयापये की एसी बस मिल सकती है। वहीँ मनाली में बजट होटलों की कोई कमी नहीं है, यहाँ जाकर आपको आनंद ही आनंद आएगा। मनाली जाकर आपकी पत्नी को आनंद आगे। वर्कला- जो लोग समुद्र से यात्रा करना पसंद करते हैं, उनके लिए वर्कला एक आदर्श स्थान है। जी दरअसल अरब सागर के तट पर बसा केरल का वीरान शहर प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर है। यहाँ वर्कला की हवा में रोमांस है। वहीँ कोच्चि से वर्कला के लिए ट्रेनों का किराया एक सौ चालीस रुपयापये से आठ सौ रुपयापये प्रति व्यक्ति होगा और वर्कला में होटलों की कीमत लगभग रु. पाँच सौ पचास / व्यक्ति।
खूंटीः 25 जनवरी को रनियां थाना पुलिस ने बालू में गड़ा एक अज्ञात शव बरामद किया था। शव की पहचान नहीं होने के कारण पुलिस के बयान के आधार पर रनियां थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अज्ञात शव रनियां थाना क्षेत्र के खरवागढ़ा तुम्बाटोली के समीप बालू से ढका हुआ था। संबंधित मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ रनियां थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद एसपी के निर्देश पर तोरपा एसडीपीओ के नेतृत्व में तोरपा अंचल और रनियां थाना पुलिस की टीम बनायी गयी और अनुसंधान जारी रहा। लगातार संदिग्ध इलाकों में। पुलिस टीम द्वारा छापामारी अभियान चलाया गया और हत्या में शामिल एक आरोपी हाबिल कंडुलना को पूर्व में गिरफ्तार किया गया। बाद में गहन अनुसंधान के बाद हत्या में शामिल मृतक की पत्नी नामलेन और उसके साथी असीम तोपनो को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त रक्तरंजित लकड़ी का डंडा और स्कूटी बरामद किया गया। खूंटी एसपी आशुतोष शेखर ने बताया कि पूछताछ के क्रम में गिरफ्तार आरोपियों ने हत्या की बात कबूली और बताया कि मृतक दिल्ली में लगातार शराब का सेवन कर अपनी पत्नी की प्रताड़ित करता था। प्रताड़ना से तंग आकर मृतक की पत्नी अपने पति को घूमने के बहाने खुंटी रनियां ले आयी और हाबिल कंडुलना तथा असीम तोपनो के साथ मिलकर उसकी हत्या कर शव बालू में गाड़ दिया था। शव की पहचान दिल्ली निवासी राकेश मल्लिक के रूप में हुई।
खूंटीः पच्चीस जनवरी को रनियां थाना पुलिस ने बालू में गड़ा एक अज्ञात शव बरामद किया था। शव की पहचान नहीं होने के कारण पुलिस के बयान के आधार पर रनियां थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अज्ञात शव रनियां थाना क्षेत्र के खरवागढ़ा तुम्बाटोली के समीप बालू से ढका हुआ था। संबंधित मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ रनियां थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद एसपी के निर्देश पर तोरपा एसडीपीओ के नेतृत्व में तोरपा अंचल और रनियां थाना पुलिस की टीम बनायी गयी और अनुसंधान जारी रहा। लगातार संदिग्ध इलाकों में। पुलिस टीम द्वारा छापामारी अभियान चलाया गया और हत्या में शामिल एक आरोपी हाबिल कंडुलना को पूर्व में गिरफ्तार किया गया। बाद में गहन अनुसंधान के बाद हत्या में शामिल मृतक की पत्नी नामलेन और उसके साथी असीम तोपनो को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त रक्तरंजित लकड़ी का डंडा और स्कूटी बरामद किया गया। खूंटी एसपी आशुतोष शेखर ने बताया कि पूछताछ के क्रम में गिरफ्तार आरोपियों ने हत्या की बात कबूली और बताया कि मृतक दिल्ली में लगातार शराब का सेवन कर अपनी पत्नी की प्रताड़ित करता था। प्रताड़ना से तंग आकर मृतक की पत्नी अपने पति को घूमने के बहाने खुंटी रनियां ले आयी और हाबिल कंडुलना तथा असीम तोपनो के साथ मिलकर उसकी हत्या कर शव बालू में गाड़ दिया था। शव की पहचान दिल्ली निवासी राकेश मल्लिक के रूप में हुई।
नई दिल्ली - ओपनर गौतम गंभीर (86) शतक से चूक गए, जबकि ध्रुव शौरी ने नाबाद 65 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेलकर दिल्ली की उत्तर प्रदेश के खिलाफ रणजी ट्रॉफी ग्रुप-ए मैच के दूसरे दिन गुरुवार को पहली पारी में बढ़त हासिल करने की उम्मीदें कायम रखीं। दिल्ली के पालम मैदान पर खेले जा रहे इस रणजी ट्रॉफी मुकाबले में यूपी की टीम आठ विकेट पर 270 रन से आगे खेलते हुए पहली पारी में 291 रन पर सिमट गई। दिल्ली ने दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक छह विकेट खोकर 228 रन बना लिए हैं और वह पहली पारी में 63 रन से पीछे है। पूर्व कप्तान एवं ओपनर गंभीर ने 122 गेंदों में 13 चौकों की मदद से 86 रन की बेहतरीन पारी खेली। दिल्ली एक समय एक विकेट पर 125 रन बनाकर सुखद स्थिति में थी, लेकिन फिर 217 रन तक जाते जाते उसके छह विकेट गिर गए। शौरी ने 163 गेंदों का सामना किया है और सात चौकों की मदद से नाबाद 65 रन बनाकर दिल्ली की बढ़त हासिल करने की उम्मीदों को कायम रखा। कोलकाता - अभिषेक रमन (176) की शतकीय पारी के बाद कप्तान मनोज तिवारी (123) के शतकों से बंगाल ने ग्रुप-डी में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ पहली पारी में 419 रन का मजबूत स्कोर बनाया। हिमाचल के लिए ऋषि धवन ने सर्वाधिक चार विकेट निकाले। इसके बाद दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक बंगाल ने हिमाचल के पांच विकेट 163 पर निकाल उसे दबाव में ला दिया। हिमाचल की ओर से प्रियांशु खंडूरी (52) और कप्तान सुमित वर्मा (64) ने स्थिति संभाली। राजकोट - कप्तान चेतेश्वर पुजारा (204) के दोहरे शतक और चिराग जानी (108) की जबरदस्त पारी से सौराष्ट्र ने रणजी ट्रॉफी ग्रुप बी मैच के दूसरे दिन गुरुवार को झारखंड के खिलाफ अपनी पहली पारी नौ विकेट पर 553 रन बनाकर घोषित कर दी। झारखंड की टीम इस विशाल स्कोर के सामने अपनी पहली पारी में दो विकेट गंवाकर 52 रन बना चुकी है और वह सौराष्ट्र के स्कोर से अभी 501 रन पीछे है। रायपुर - पंजाब ने अनमोलप्रीत सिंह(नाबाद 171) और गुरकीरत सिंह (111) के शानदार शतकों की बदौलत ग्रुप डी मैच में छत्तीसगढ़ के खिलाफ दूसरे दिन छह विकेट पर 481 रन का मजबूत स्कोर बनाकर चार विकेट शेष रहते 243 रन की विशाल बढ़त हासिल कर ली। फिलहाल अनमोलप्रीत के साथ विनय चौधरी(19) क्रीज पर हैं। वलसाड़ - गुजरात के लेग स्पिनर पीयूष चावला ( 48 रन पर चार विकेट) की फिरकी में हरियाणा की पहली पारी यहां ग्रुप बी मैच के दूसरे दिन 64 ओवर में 157 पर ही ढेर हो गई। हरियाणा के लिए हिमांशु राणा (50) और रोहित शर्मा (65) ने अर्द्धशतक लगाकर टीम को संभाला। चावला के अलावा सिद्धार्थ देसाई ने 68 रन पर तीन विकेट लिए। वडोदरा - इरफान पठान को कप्तानी और टीम से बाहर करने के बाद रणजी ट्रॉफी के तीसरे दौर के मुकाबले में बड़ौदा ने ग्रुप-सी मैच के दूसरे दिन त्रिपुरा के खिलाफ विष्णु सोलंकी (116), अतित सेठ (नाबाद 95), अभिजीत (86) और मितेश पटेल (76) के विस्फोटक पारियों की बदौलत 152. 2 ओवर में 521 रन का पहाड़ सा स्कोर बना लिया।
नई दिल्ली - ओपनर गौतम गंभीर शतक से चूक गए, जबकि ध्रुव शौरी ने नाबाद पैंसठ रन की संघर्षपूर्ण पारी खेलकर दिल्ली की उत्तर प्रदेश के खिलाफ रणजी ट्रॉफी ग्रुप-ए मैच के दूसरे दिन गुरुवार को पहली पारी में बढ़त हासिल करने की उम्मीदें कायम रखीं। दिल्ली के पालम मैदान पर खेले जा रहे इस रणजी ट्रॉफी मुकाबले में यूपी की टीम आठ विकेट पर दो सौ सत्तर रन से आगे खेलते हुए पहली पारी में दो सौ इक्यानवे रन पर सिमट गई। दिल्ली ने दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक छह विकेट खोकर दो सौ अट्ठाईस रन बना लिए हैं और वह पहली पारी में तिरेसठ रन से पीछे है। पूर्व कप्तान एवं ओपनर गंभीर ने एक सौ बाईस गेंदों में तेरह चौकों की मदद से छियासी रन की बेहतरीन पारी खेली। दिल्ली एक समय एक विकेट पर एक सौ पच्चीस रन बनाकर सुखद स्थिति में थी, लेकिन फिर दो सौ सत्रह रन तक जाते जाते उसके छह विकेट गिर गए। शौरी ने एक सौ तिरेसठ गेंदों का सामना किया है और सात चौकों की मदद से नाबाद पैंसठ रन बनाकर दिल्ली की बढ़त हासिल करने की उम्मीदों को कायम रखा। कोलकाता - अभिषेक रमन की शतकीय पारी के बाद कप्तान मनोज तिवारी के शतकों से बंगाल ने ग्रुप-डी में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ पहली पारी में चार सौ उन्नीस रन का मजबूत स्कोर बनाया। हिमाचल के लिए ऋषि धवन ने सर्वाधिक चार विकेट निकाले। इसके बाद दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक बंगाल ने हिमाचल के पांच विकेट एक सौ तिरेसठ पर निकाल उसे दबाव में ला दिया। हिमाचल की ओर से प्रियांशु खंडूरी और कप्तान सुमित वर्मा ने स्थिति संभाली। राजकोट - कप्तान चेतेश्वर पुजारा के दोहरे शतक और चिराग जानी की जबरदस्त पारी से सौराष्ट्र ने रणजी ट्रॉफी ग्रुप बी मैच के दूसरे दिन गुरुवार को झारखंड के खिलाफ अपनी पहली पारी नौ विकेट पर पाँच सौ तिरेपन रन बनाकर घोषित कर दी। झारखंड की टीम इस विशाल स्कोर के सामने अपनी पहली पारी में दो विकेट गंवाकर बावन रन बना चुकी है और वह सौराष्ट्र के स्कोर से अभी पाँच सौ एक रन पीछे है। रायपुर - पंजाब ने अनमोलप्रीत सिंह और गुरकीरत सिंह के शानदार शतकों की बदौलत ग्रुप डी मैच में छत्तीसगढ़ के खिलाफ दूसरे दिन छह विकेट पर चार सौ इक्यासी रन का मजबूत स्कोर बनाकर चार विकेट शेष रहते दो सौ तैंतालीस रन की विशाल बढ़त हासिल कर ली। फिलहाल अनमोलप्रीत के साथ विनय चौधरी क्रीज पर हैं। वलसाड़ - गुजरात के लेग स्पिनर पीयूष चावला की फिरकी में हरियाणा की पहली पारी यहां ग्रुप बी मैच के दूसरे दिन चौंसठ ओवर में एक सौ सत्तावन पर ही ढेर हो गई। हरियाणा के लिए हिमांशु राणा और रोहित शर्मा ने अर्द्धशतक लगाकर टीम को संभाला। चावला के अलावा सिद्धार्थ देसाई ने अड़सठ रन पर तीन विकेट लिए। वडोदरा - इरफान पठान को कप्तानी और टीम से बाहर करने के बाद रणजी ट्रॉफी के तीसरे दौर के मुकाबले में बड़ौदा ने ग्रुप-सी मैच के दूसरे दिन त्रिपुरा के खिलाफ विष्णु सोलंकी , अतित सेठ , अभिजीत और मितेश पटेल के विस्फोटक पारियों की बदौलत एक सौ बावन. दो ओवर में पाँच सौ इक्कीस रन का पहाड़ सा स्कोर बना लिया।
भारत में शिक्षा के साथ स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। देश के आर्थिक विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ये स्टार्टअप मददगार साबित हो रहे हैं। देश में कई ऐसे विश्वविद्यालय हैं जो युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने के लिए बढ़ावा देते हैं। आप इन विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेकर अपने स्टार्टअप शुरू करने के सपने को साकार कर सकते हैं। 1. स्वर्णिम स्टार्टअप एंड इनोवेशन यूनिवर्सिटी गुजरात (SSIU) भारत का स्टार्टअप केंद्रित विश्वविद्यालय है। इसमें उद्यमशीलता शिक्षा के साथ इंजीनियरिंग, वास्तुकला और चिकित्सा में कई कार्यक्रम उपलब्ध हैं। 2. बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS) पिलानी स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाले विश्वविद्यालयों में से एक है। इसके स्नातकों ने 900 से अधिक स्टार्टअप शुरू किए हैं और इनमें से 13 ने अपने स्टार्टअप को भारतीय यूनिकॉर्न सूची में शामिल किया है। 3. सन 1951 में स्थापित हुआ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर का टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन और आंत्रप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सोसायटी (TIEDS) अलग-अलग क्षेत्रों के स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेशन सुविधाएं, उपयोगी सलाह, वित्त सहायता, उद्योग विशेषज्ञों और निवेशकों तक पहुंच प्रदान करता है। 4. IIT हैदराबाद का टेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर सेंटर (ITIC) भारत का अग्रणी इनक्यूबेशन केंद्र है, जो विकास के विभिन्न चरणों में स्टार्टअप का समर्थन करने के लिए अलग-अलग कार्यक्रमों की पेशकश करता है। 5. गुजरात प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GTU) स्टार्टअप को बढ़ावा देता है। विश्वविद्यालय की स्टार्टअप नीति छात्रों को अपने स्टार्टअप पर काम करने की अनुमति देती है। GTU की नवाचार परिषद उद्यमियों और छात्रों के बीच संवाद को बढ़ाने पर काम करती है। 6. केरल प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (KTU) अपने स्टार्टअप मिशन के तहत छात्रों को उनके व्यवसाय और उद्यमिता कौशल को बढ़ावा देने के लिए उचित माहौल देता है। यहां भी छात्रों को स्टार्टअप के लिए छुट्टी लेने की अनुमति मिलती है।
भारत में शिक्षा के साथ स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। देश के आर्थिक विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ये स्टार्टअप मददगार साबित हो रहे हैं। देश में कई ऐसे विश्वविद्यालय हैं जो युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने के लिए बढ़ावा देते हैं। आप इन विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेकर अपने स्टार्टअप शुरू करने के सपने को साकार कर सकते हैं। एक. स्वर्णिम स्टार्टअप एंड इनोवेशन यूनिवर्सिटी गुजरात भारत का स्टार्टअप केंद्रित विश्वविद्यालय है। इसमें उद्यमशीलता शिक्षा के साथ इंजीनियरिंग, वास्तुकला और चिकित्सा में कई कार्यक्रम उपलब्ध हैं। दो. बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस पिलानी स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाले विश्वविद्यालयों में से एक है। इसके स्नातकों ने नौ सौ से अधिक स्टार्टअप शुरू किए हैं और इनमें से तेरह ने अपने स्टार्टअप को भारतीय यूनिकॉर्न सूची में शामिल किया है। तीन. सन एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में स्थापित हुआ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर का टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन और आंत्रप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सोसायटी अलग-अलग क्षेत्रों के स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेशन सुविधाएं, उपयोगी सलाह, वित्त सहायता, उद्योग विशेषज्ञों और निवेशकों तक पहुंच प्रदान करता है। चार. IIT हैदराबाद का टेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर सेंटर भारत का अग्रणी इनक्यूबेशन केंद्र है, जो विकास के विभिन्न चरणों में स्टार्टअप का समर्थन करने के लिए अलग-अलग कार्यक्रमों की पेशकश करता है। पाँच. गुजरात प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्टार्टअप को बढ़ावा देता है। विश्वविद्यालय की स्टार्टअप नीति छात्रों को अपने स्टार्टअप पर काम करने की अनुमति देती है। GTU की नवाचार परिषद उद्यमियों और छात्रों के बीच संवाद को बढ़ाने पर काम करती है। छः. केरल प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अपने स्टार्टअप मिशन के तहत छात्रों को उनके व्यवसाय और उद्यमिता कौशल को बढ़ावा देने के लिए उचित माहौल देता है। यहां भी छात्रों को स्टार्टअप के लिए छुट्टी लेने की अनुमति मिलती है।
क्या व्यवसायों "बॉब" पंप कर सकते हैं? Warcraft की दुनिया खेलने के लिए किसी भी शिल्प सीखने के बिना काफी मुश्किल है। इसलिए हम "महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध" में जो पेशे, आज देखते हैं, और क्या बेहतर वर्ग के आधार पर चयन करने के लिए पता लगाने के लिए प्रदान करते हैं। व्यवसायों का सारांश "बॉब" Warcraft की दुनिया खेलने के लिए शुरू, बिल्कुल नहीं सोच रहे हैं कि समय के साथ चरित्र आप किसी भी शिल्प में महारत हासिल करने की जरूरत है। पेशे "बॉब" मदद अपने कपड़े, elixirs, शौकीन मिलता है, और सोने कमाने के लिए। वहाँ ग्यारह प्रमुख शिल्प और चार और आज कर रहे हैं। पहले अक्षर के केवल दो अधिकारी कर सकते हैं। अतिरिक्त पेशे "बॉब" तुम सब कुछ सीख सकते हैं। मुख्य, बारी में, आगे डेरिवेटिव और सामूहिक में विभाजित हैं। प्रत्येक क्राफ्ट अपने संसाधनों की जरूरत है। वे उत्पादन किया जब, दुनिया भर में यात्रा, विनिमय समाज के सदस्यों के साथ नीलामी में खरीदने के लिए, या अन्य खिलाड़ियों के साथ कर रहे हैं। शिक्षकों जो प्रमुख शहरों स्थानों पर स्थित हैं पर एक व्यापार जानें। कुछ कलाकारों सड़क के साथ पाया जा सकता है। प्रत्येक नया खेल अद्यतन शिल्प अद्यतन के साथ। उदाहरण के लिए, व्यापार "महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध 3. 3. 5" में पुरातत्व जानने का अवसर उम्मीद नहीं की थी। इस शिल्प केवल अगले विस्तार में दिखाई दिया है। इसके अलावा, वहाँ नए संसाधनों और व्यंजनों हैं। उत्पन्न पेशे "बॉब" इस शिल्प, में महारत हासिल करने के बाद, आप कपड़े, हथियार, पोशन और विभिन्न मदों बना सकते हैं। इनमें शामिल हैंः - कीमियाः आप पोशन और elixirs की एक किस्म बनाने के लिए अनुमति देता है। मुख्य घटकः घास। बोनसः नशे में पोशन वृद्धि का प्रभाव। - इंजीनियरिंगः आविष्कार किया जा सकता है (उदाहरण के लिए, एक हेलिकॉप्टर और विभिन्न उपग्रहों), कपड़े और अन्य उपयोगी वस्तुओं। बोनस सुधार दस्ताने के लिए उपलब्ध। - Leatherworking: इस पेशे माहिर हैं, तो आप पहले से तैयार बातें करने श्रृंखला मेल और चमड़े के कपड़े और जूते, हैंडबैग, साथ ही सुधार कर सकते हैं। मुख्य घटकः चमड़े। बोनसः ब्रेसेर मंत्रमुग्ध। - Blacksmithing: यदि आप एक मेल बना सकते हैं और कपड़े, जूते, हथियार थाली सकते हैं, और चीजों को बेहतर बनाने के लिए तैयार है। बोनसः रत्नों के लिए दो अतिरिक्त स्लॉट के उपयोग की अनुमति देता। - करामातीः इस शिल्प माहिर, आप कपड़े और हथियारों पर अतिरिक्त प्रभाव लागू कर सकते हैं। मुख्य घटकः आइटम है कि छिड़काव किया जा सकता है। बोनसः दो के छल्ले को मोहित करते। - मार्कः आप अक्षर हैं जो खिलाड़ियों की मौजूदा क्षमता को बढ़ाने या नए देने बनाने के लिए अनुमति देता है। बोनसः कंधे मंत्रमुग्ध। - सिलाईः कपड़े कपड़े और जूते, बैग की सिलाई अनुमति देता है। बोनसः लबादा पर कढ़ाई सुधार। - आभूषणः आप कीमती पत्थरों और जवाहरात भविष्य में उपयोग के लिए, साथ ही साथ के छल्ले और अन्य सामान कर सकते हैं। बोनसः रत्न सुधार प्राप्त। ऊपर से यह स्पष्ट हो जाता है कि, क्रम में कुछ का निर्माण करने के लिए, हम संसाधनों की जरूरत है। वे नीलामी में खरीदा जा सकता है या अन्य खिलाड़ियों के लिए कहें। और तुम सामूहिक रूप से जानने के लिए, "महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध" पेशे और अपने दम पर आवश्यक संसाधन प्राप्त कर सकते हैंः - खननः अपने बैग गैंती प्रकट होता है, जिसके साथ आप अयस्क की एक किस्म को इकट्ठा कर सकते हैं। लोहार, जौहरी और इंजीनियरों के लिए आवश्यक संसाधन। बोनसः बढ़ जाती है सहनशक्ति। - Skinning: एक विशेष चाकू के साथ पहनते हैं आप मारे गए पशुओं से त्वचा और फर को निकालने के लिए। चर्मकार और दर्जी के लिए संसाधन। बोनसः महत्वपूर्ण हड़ताल रेटिंग को बढ़ाता है। - हर्बलिज्मः यदि आप फूल और घास को इकट्ठा करने की अनुमति देता है। संसाधन alchemists और भनक जरूरत है। ये शिल्प यह संभव आइटम, पूरक स्वास्थ्य और ऊर्जा (मन, क्रोध, और इसी तरह) प्राप्त करने के लिए, साथ ही दुर्लभ हथियारों और कवच मिल जाए, या सोने कमाते हैं। इनमें शामिल हैंः - पुरातत्वः दुनिया यात्रा, आप प्राचीन कलाकृतियों को इकट्ठा कर सकते हैं बिक्री या दुर्लभ हथियार या कवच के लिए आइटम प्राप्त करने के लिए अनुमति देता है। - मत्स्य पालन मत्स्य पालनः जलाशयों से दोनों मछली और दिलचस्प आइटम प्राप्त करने के लिए संभव है। - पाक कला आप भोजन और पेय बनाने के लिए अनुमति देता है, पुनः बनाता है। - प्राथमिक चिकित्साः सीखें कि कैसे अपने या किसी और के स्वास्थ्य की भरपाई करने के लिए, साथ ही विष और सीरम बनाने पट्टियाँ ऊतक के बाहर एक चरित्र बनाने के लिए। अक्सर, खिलाड़ियों पेशे, जहां आप और अधिक कमा सकते हैं चुनना चाहते हैं। वास्तव में, यदि आप एक चरित्र है, यह बेहतर शिल्प है, जो अपनी कक्षा या क्षमता से मेल खाती है पर चुनाव रोकने के लिए है। उदाहरण के लिए, warlocks और mages कपड़ा कवच पहनते हैं। इसलिए, उनके लिए वास्तविक पेशे है सिलाई। त्वचा में तैयार पुरोहित, इसलिए उनके लिए सबसे अच्छा Leatherworking किया जाना है। इसके अलावा, और प्रत्येक दौड़ एक विशेष मामले में 15 बोनस पर हैः - रसायन विद्या में दिए गए goblins; - gnome इसके - इंजीनियरिंग में; - रक्त कल्पित बौने - करामाती में; - Draenei - हर्बलिज्म में; - worgen - खाल को दूर करने में। पेशे के दूसरा व्युत्पन्न के बगल में एक सामूहिक उचित चयन करने की आवश्यकताः - रसायन विद्या में घास (Herbalism) की जरूरत है; - Blacksmithing खनन के साथ बगल में है; - इंजीनियरिंग में जानने के लिए, भी, खनन के साथ आसान हो जाता है; - Leatherworking खाल को हटाने के बिना असंभव है; - खनन भी आसान गहने अध्ययन करने के लिए बनाता है। इस प्रकार, आप अपने आप को एक विशेष पेशे संसाधनों के लिए प्रमुख की उपस्थिति के साथ प्रदान करते हैं।
क्या व्यवसायों "बॉब" पंप कर सकते हैं? Warcraft की दुनिया खेलने के लिए किसी भी शिल्प सीखने के बिना काफी मुश्किल है। इसलिए हम "महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध" में जो पेशे, आज देखते हैं, और क्या बेहतर वर्ग के आधार पर चयन करने के लिए पता लगाने के लिए प्रदान करते हैं। व्यवसायों का सारांश "बॉब" Warcraft की दुनिया खेलने के लिए शुरू, बिल्कुल नहीं सोच रहे हैं कि समय के साथ चरित्र आप किसी भी शिल्प में महारत हासिल करने की जरूरत है। पेशे "बॉब" मदद अपने कपड़े, elixirs, शौकीन मिलता है, और सोने कमाने के लिए। वहाँ ग्यारह प्रमुख शिल्प और चार और आज कर रहे हैं। पहले अक्षर के केवल दो अधिकारी कर सकते हैं। अतिरिक्त पेशे "बॉब" तुम सब कुछ सीख सकते हैं। मुख्य, बारी में, आगे डेरिवेटिव और सामूहिक में विभाजित हैं। प्रत्येक क्राफ्ट अपने संसाधनों की जरूरत है। वे उत्पादन किया जब, दुनिया भर में यात्रा, विनिमय समाज के सदस्यों के साथ नीलामी में खरीदने के लिए, या अन्य खिलाड़ियों के साथ कर रहे हैं। शिक्षकों जो प्रमुख शहरों स्थानों पर स्थित हैं पर एक व्यापार जानें। कुछ कलाकारों सड़क के साथ पाया जा सकता है। प्रत्येक नया खेल अद्यतन शिल्प अद्यतन के साथ। उदाहरण के लिए, व्यापार "महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध तीन. तीन. पाँच" में पुरातत्व जानने का अवसर उम्मीद नहीं की थी। इस शिल्प केवल अगले विस्तार में दिखाई दिया है। इसके अलावा, वहाँ नए संसाधनों और व्यंजनों हैं। उत्पन्न पेशे "बॉब" इस शिल्प, में महारत हासिल करने के बाद, आप कपड़े, हथियार, पोशन और विभिन्न मदों बना सकते हैं। इनमें शामिल हैंः - कीमियाः आप पोशन और elixirs की एक किस्म बनाने के लिए अनुमति देता है। मुख्य घटकः घास। बोनसः नशे में पोशन वृद्धि का प्रभाव। - इंजीनियरिंगः आविष्कार किया जा सकता है , कपड़े और अन्य उपयोगी वस्तुओं। बोनस सुधार दस्ताने के लिए उपलब्ध। - Leatherworking: इस पेशे माहिर हैं, तो आप पहले से तैयार बातें करने श्रृंखला मेल और चमड़े के कपड़े और जूते, हैंडबैग, साथ ही सुधार कर सकते हैं। मुख्य घटकः चमड़े। बोनसः ब्रेसेर मंत्रमुग्ध। - Blacksmithing: यदि आप एक मेल बना सकते हैं और कपड़े, जूते, हथियार थाली सकते हैं, और चीजों को बेहतर बनाने के लिए तैयार है। बोनसः रत्नों के लिए दो अतिरिक्त स्लॉट के उपयोग की अनुमति देता। - करामातीः इस शिल्प माहिर, आप कपड़े और हथियारों पर अतिरिक्त प्रभाव लागू कर सकते हैं। मुख्य घटकः आइटम है कि छिड़काव किया जा सकता है। बोनसः दो के छल्ले को मोहित करते। - मार्कः आप अक्षर हैं जो खिलाड़ियों की मौजूदा क्षमता को बढ़ाने या नए देने बनाने के लिए अनुमति देता है। बोनसः कंधे मंत्रमुग्ध। - सिलाईः कपड़े कपड़े और जूते, बैग की सिलाई अनुमति देता है। बोनसः लबादा पर कढ़ाई सुधार। - आभूषणः आप कीमती पत्थरों और जवाहरात भविष्य में उपयोग के लिए, साथ ही साथ के छल्ले और अन्य सामान कर सकते हैं। बोनसः रत्न सुधार प्राप्त। ऊपर से यह स्पष्ट हो जाता है कि, क्रम में कुछ का निर्माण करने के लिए, हम संसाधनों की जरूरत है। वे नीलामी में खरीदा जा सकता है या अन्य खिलाड़ियों के लिए कहें। और तुम सामूहिक रूप से जानने के लिए, "महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध" पेशे और अपने दम पर आवश्यक संसाधन प्राप्त कर सकते हैंः - खननः अपने बैग गैंती प्रकट होता है, जिसके साथ आप अयस्क की एक किस्म को इकट्ठा कर सकते हैं। लोहार, जौहरी और इंजीनियरों के लिए आवश्यक संसाधन। बोनसः बढ़ जाती है सहनशक्ति। - Skinning: एक विशेष चाकू के साथ पहनते हैं आप मारे गए पशुओं से त्वचा और फर को निकालने के लिए। चर्मकार और दर्जी के लिए संसाधन। बोनसः महत्वपूर्ण हड़ताल रेटिंग को बढ़ाता है। - हर्बलिज्मः यदि आप फूल और घास को इकट्ठा करने की अनुमति देता है। संसाधन alchemists और भनक जरूरत है। ये शिल्प यह संभव आइटम, पूरक स्वास्थ्य और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए, साथ ही दुर्लभ हथियारों और कवच मिल जाए, या सोने कमाते हैं। इनमें शामिल हैंः - पुरातत्वः दुनिया यात्रा, आप प्राचीन कलाकृतियों को इकट्ठा कर सकते हैं बिक्री या दुर्लभ हथियार या कवच के लिए आइटम प्राप्त करने के लिए अनुमति देता है। - मत्स्य पालन मत्स्य पालनः जलाशयों से दोनों मछली और दिलचस्प आइटम प्राप्त करने के लिए संभव है। - पाक कला आप भोजन और पेय बनाने के लिए अनुमति देता है, पुनः बनाता है। - प्राथमिक चिकित्साः सीखें कि कैसे अपने या किसी और के स्वास्थ्य की भरपाई करने के लिए, साथ ही विष और सीरम बनाने पट्टियाँ ऊतक के बाहर एक चरित्र बनाने के लिए। अक्सर, खिलाड़ियों पेशे, जहां आप और अधिक कमा सकते हैं चुनना चाहते हैं। वास्तव में, यदि आप एक चरित्र है, यह बेहतर शिल्प है, जो अपनी कक्षा या क्षमता से मेल खाती है पर चुनाव रोकने के लिए है। उदाहरण के लिए, warlocks और mages कपड़ा कवच पहनते हैं। इसलिए, उनके लिए वास्तविक पेशे है सिलाई। त्वचा में तैयार पुरोहित, इसलिए उनके लिए सबसे अच्छा Leatherworking किया जाना है। इसके अलावा, और प्रत्येक दौड़ एक विशेष मामले में पंद्रह बोनस पर हैः - रसायन विद्या में दिए गए goblins; - gnome इसके - इंजीनियरिंग में; - रक्त कल्पित बौने - करामाती में; - Draenei - हर्बलिज्म में; - worgen - खाल को दूर करने में। पेशे के दूसरा व्युत्पन्न के बगल में एक सामूहिक उचित चयन करने की आवश्यकताः - रसायन विद्या में घास की जरूरत है; - Blacksmithing खनन के साथ बगल में है; - इंजीनियरिंग में जानने के लिए, भी, खनन के साथ आसान हो जाता है; - Leatherworking खाल को हटाने के बिना असंभव है; - खनन भी आसान गहने अध्ययन करने के लिए बनाता है। इस प्रकार, आप अपने आप को एक विशेष पेशे संसाधनों के लिए प्रमुख की उपस्थिति के साथ प्रदान करते हैं।
इंदौर। एमटीएच अस्पताल में समय पर भोजन नहीं पहुंचने को लेकर वीडियो वायरल हुआ है। इसमें मरीज रात को साढ़े दस बजे के बाद बासी भोजन देने का आरोप लगा रहे हैं। अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर ये लोग रोज परेशान होने की बात भी बता रहे हैं। महिलाएं व बच्चे तक उस भोजन को करने से मना करते भी दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में इस अस्पताल में मरीज की जानकारी नहीं देने पर स्वजन ने हंगामा भी किया था।
इंदौर। एमटीएच अस्पताल में समय पर भोजन नहीं पहुंचने को लेकर वीडियो वायरल हुआ है। इसमें मरीज रात को साढ़े दस बजे के बाद बासी भोजन देने का आरोप लगा रहे हैं। अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर ये लोग रोज परेशान होने की बात भी बता रहे हैं। महिलाएं व बच्चे तक उस भोजन को करने से मना करते भी दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में इस अस्पताल में मरीज की जानकारी नहीं देने पर स्वजन ने हंगामा भी किया था।
PATNA : अपराधियों का दुस्साहस बढ़ता ही जा रहा है। जेल बंद होने के बाद भी अपराधी आम आदमी के साथ ही खास लोगों को डरा-धमका रहे हैं और उनसे रंगदारी मांग रहे हैं। इस बार जेल में बंद अपराधी ने शिवहर के विधायक मो। सरफुद्दीन से क्0 लाख रुपए की रंगदारी मांगी। रंगदारी की रकम के लिए अपराधी ने सीधे विधायक के मोबाइल पर कॉल किया था। रंगदारी के क्0 लाख रुपए नहीं दिए जाने पर अपराधी ने विधायक को देख लेने की भी धमकी दे डाली। जिसके बाद विधायक डरे और सहमे भी। इस मामले में उन्होंने पटना के गर्दनीबाग थाने में दो अप्रैल को एफआईआर दर्ज कराई। एसएसपी मनु महाराज ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया। सिटी एसपी पटना सेंट्रल चंदन कुशवाहा की अगुआई में टीम बनाई गई। जिसे तेजी से जांच कर अपराधी को पकड़ने का निर्देश दिया। जिस नंबर से विधायक को कॉल किया गया, पटना पुलिस ने उसका टावर लोकेशन निकाला। जांच के दौरान पुलिस को सीतामढ़ी जेल का टावर लोकेशन मिला। जिसके बाद पुलिस अधिकारी भी आश्चर्य में पड़ गए। पुलिस के पास अपराधी को पहचानने की एक बड़ी चु़नौती थी। जिसे टीम ने बखूबी पूरा भी किया। साइंटिफिक तरीके से किए गए जांच के दौरान पुलिस के सामने सीतामढ़ी जेल में बंद कुख्यात गोलू कुमार का नाम सामने आया। जो सीतामढ़ी के ही मनियारी का रहने वाला है। इस कुख्यात अपराधी को जेल में अधिक समय तक रखने की तैयारी सीतामढ़ी की पुलिस ने पहले से कर रखी है। जानकारी के अनुसार सीतामढ़ी की पुलिस को आशंका है कि पंचायत चुनाव के दौरान लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने में प्रॉब्लम क्रिएट कर सकता है। इस कारण पुलिस ने क्राइम कंट्रोल एक्ट लगाने का प्रस्ताव वहां के डीएम को भेज दिया है। शिवहर के विधायक से ही पहली बार गोलू ने रंगदारी मांगी है, ऐसा नहीं है। उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें सीतामढ़ी, मेजरगंज और रीगा थाना शामिल हैं। विधायक से जेल में बंद गोलू ने ही कॉल कर क्0 लाख रुपए की रंगदारी मांगी थी। पुलिस की जांच में ये साफ हो चुका है। पटना पुलिस जल्द ही उसे रिमांड पर लेगी।
PATNA : अपराधियों का दुस्साहस बढ़ता ही जा रहा है। जेल बंद होने के बाद भी अपराधी आम आदमी के साथ ही खास लोगों को डरा-धमका रहे हैं और उनसे रंगदारी मांग रहे हैं। इस बार जेल में बंद अपराधी ने शिवहर के विधायक मो। सरफुद्दीन से क्शून्य लाख रुपए की रंगदारी मांगी। रंगदारी की रकम के लिए अपराधी ने सीधे विधायक के मोबाइल पर कॉल किया था। रंगदारी के क्शून्य लाख रुपए नहीं दिए जाने पर अपराधी ने विधायक को देख लेने की भी धमकी दे डाली। जिसके बाद विधायक डरे और सहमे भी। इस मामले में उन्होंने पटना के गर्दनीबाग थाने में दो अप्रैल को एफआईआर दर्ज कराई। एसएसपी मनु महाराज ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया। सिटी एसपी पटना सेंट्रल चंदन कुशवाहा की अगुआई में टीम बनाई गई। जिसे तेजी से जांच कर अपराधी को पकड़ने का निर्देश दिया। जिस नंबर से विधायक को कॉल किया गया, पटना पुलिस ने उसका टावर लोकेशन निकाला। जांच के दौरान पुलिस को सीतामढ़ी जेल का टावर लोकेशन मिला। जिसके बाद पुलिस अधिकारी भी आश्चर्य में पड़ गए। पुलिस के पास अपराधी को पहचानने की एक बड़ी चु़नौती थी। जिसे टीम ने बखूबी पूरा भी किया। साइंटिफिक तरीके से किए गए जांच के दौरान पुलिस के सामने सीतामढ़ी जेल में बंद कुख्यात गोलू कुमार का नाम सामने आया। जो सीतामढ़ी के ही मनियारी का रहने वाला है। इस कुख्यात अपराधी को जेल में अधिक समय तक रखने की तैयारी सीतामढ़ी की पुलिस ने पहले से कर रखी है। जानकारी के अनुसार सीतामढ़ी की पुलिस को आशंका है कि पंचायत चुनाव के दौरान लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने में प्रॉब्लम क्रिएट कर सकता है। इस कारण पुलिस ने क्राइम कंट्रोल एक्ट लगाने का प्रस्ताव वहां के डीएम को भेज दिया है। शिवहर के विधायक से ही पहली बार गोलू ने रंगदारी मांगी है, ऐसा नहीं है। उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें सीतामढ़ी, मेजरगंज और रीगा थाना शामिल हैं। विधायक से जेल में बंद गोलू ने ही कॉल कर क्शून्य लाख रुपए की रंगदारी मांगी थी। पुलिस की जांच में ये साफ हो चुका है। पटना पुलिस जल्द ही उसे रिमांड पर लेगी।
मुंबई (Mumbai) और महाराष्ट्र (Maharashtra) में कोरोना की दूसरी लहर (second wave of covid19) भले ही कम हो रही हो, बावजूद इसके जिस धीमी गति से यह लहर कम हो रही है उसे लेकर डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। हाालांकि कोरोना (coronavirus) के केस मुंबई ही नहीं बल्कि देश भर में कम हो रहे हैं। इस बारे में संबंधित वरिष्ठ अधिकारी ने टीओआई को बताया कि ज्यादातर राज्य, जिन्होंने दूसरी लहर की गंभीरता देखी, जैसे दिल्ली और कर्नाटक, अब कम covid -19 के केस दर्ज हो रहे हैं। केवल महाराष्ट्र में हर दिन 8,000 से 10,000 मामलों के बीच घट बढ़ जारी है। वरिष्ठ डॉक्टरों का मानना है कि मुंबई में भी, एक दिन में कम से कम अभी भी 600 केस से कम नहीं हो रहे हैं। बीएमसी (BMC) के एक डॉक्टर ने कहा कि अगर कम होते भी हैं, तो बीच में कुछ दिनों के लिए ही। दिसंबर 2020-जनवरी में पहली लहर के अंत के दौरान, फरवरी के अंत में दूसरी लहर के दस्तक देने से कुछ दिनों पहले केस 300 से अधिक हो गए। विशेषज्ञों के अनुसार, केस में इस स्थिर गिरावट के पीछे का कारण जनसंख्या के घनत्व के लिए राज्य के आकार के लिए COVID-19 डेटा की सटीक रिपोर्टिंग है। जबकि कुछ जानकारों का मानना है कि यह महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के लिए अलग-अलग "पीक टाइम" के कारण हुआ है। हालांकि, मुंबई में, यह अधिक टेस्टिंग, बेहतर रिपोर्टिंग और जनसंख्या घनत्व के अनुसार उपाय योजना सहित अन्य कारण हो सकते है। बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त सुरेश काकानी ने कहा, यह विशाल जनसंख्या घनत्व या अस्थायी आबादी के कारण हो सकता है। विदर्भ के कुछ जिलों में फरवरी महीने में सबसे पहले कोरोना की दूसरी लहर का असर दिखा उसके बाद अन्य जिलों में इसका प्रसार हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, कोल्हापुर, सांगली, सिंधुदुर्ग और उस्मानाबाद में अब महाराष्ट्र में दर्ज होने वाले दैनिक मामलों का 60 प्रतिशत हिस्सा है। इस बीच, सरकारी आंकड़ों का कहना है कि वर्तमान में प्रतिदिन 2. 5 लाख परीक्षण किए जा रहे हैं। जनसंख्या के आकार और लोगों द्वारा कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने में विफलता को देखते हुए, इस बात को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं कि राज्य में प्रतिदिन कम से कम 2 फीसदी सकारात्मकता दर का दावा किया जा रहा है।
मुंबई और महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर भले ही कम हो रही हो, बावजूद इसके जिस धीमी गति से यह लहर कम हो रही है उसे लेकर डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। हाालांकि कोरोना के केस मुंबई ही नहीं बल्कि देश भर में कम हो रहे हैं। इस बारे में संबंधित वरिष्ठ अधिकारी ने टीओआई को बताया कि ज्यादातर राज्य, जिन्होंने दूसरी लहर की गंभीरता देखी, जैसे दिल्ली और कर्नाटक, अब कम covid -उन्नीस के केस दर्ज हो रहे हैं। केवल महाराष्ट्र में हर दिन आठ,शून्य से दस,शून्य मामलों के बीच घट बढ़ जारी है। वरिष्ठ डॉक्टरों का मानना है कि मुंबई में भी, एक दिन में कम से कम अभी भी छः सौ केस से कम नहीं हो रहे हैं। बीएमसी के एक डॉक्टर ने कहा कि अगर कम होते भी हैं, तो बीच में कुछ दिनों के लिए ही। दिसंबर दो हज़ार बीस-जनवरी में पहली लहर के अंत के दौरान, फरवरी के अंत में दूसरी लहर के दस्तक देने से कुछ दिनों पहले केस तीन सौ से अधिक हो गए। विशेषज्ञों के अनुसार, केस में इस स्थिर गिरावट के पीछे का कारण जनसंख्या के घनत्व के लिए राज्य के आकार के लिए COVID-उन्नीस डेटा की सटीक रिपोर्टिंग है। जबकि कुछ जानकारों का मानना है कि यह महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के लिए अलग-अलग "पीक टाइम" के कारण हुआ है। हालांकि, मुंबई में, यह अधिक टेस्टिंग, बेहतर रिपोर्टिंग और जनसंख्या घनत्व के अनुसार उपाय योजना सहित अन्य कारण हो सकते है। बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त सुरेश काकानी ने कहा, यह विशाल जनसंख्या घनत्व या अस्थायी आबादी के कारण हो सकता है। विदर्भ के कुछ जिलों में फरवरी महीने में सबसे पहले कोरोना की दूसरी लहर का असर दिखा उसके बाद अन्य जिलों में इसका प्रसार हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, कोल्हापुर, सांगली, सिंधुदुर्ग और उस्मानाबाद में अब महाराष्ट्र में दर्ज होने वाले दैनिक मामलों का साठ प्रतिशत हिस्सा है। इस बीच, सरकारी आंकड़ों का कहना है कि वर्तमान में प्रतिदिन दो. पाँच लाख परीक्षण किए जा रहे हैं। जनसंख्या के आकार और लोगों द्वारा कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने में विफलता को देखते हुए, इस बात को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं कि राज्य में प्रतिदिन कम से कम दो फीसदी सकारात्मकता दर का दावा किया जा रहा है।
. . . . . यूनान के तटीय इलाक़े शरणार्थियों की क़त्लगाह बन गए हैं। रात के समय ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से चलने वाली नौकाओं पर सफ़र करने वाले वाले यात्री कभी समुद्र में डूब कर मर जाते हैं और कभी तट तक पहुंच जाने के बाद सर्दी की शिद्दत उनकी जान ले लेती है. . . . महिलाएं और बच्चे भी उनमें शामिल हैं।
. . . . . यूनान के तटीय इलाक़े शरणार्थियों की क़त्लगाह बन गए हैं। रात के समय ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से चलने वाली नौकाओं पर सफ़र करने वाले वाले यात्री कभी समुद्र में डूब कर मर जाते हैं और कभी तट तक पहुंच जाने के बाद सर्दी की शिद्दत उनकी जान ले लेती है. . . . महिलाएं और बच्चे भी उनमें शामिल हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा में आज BBC डॉक्यूमेंट्री विवाद पर निंदा प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया। विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा किया। BJP विधायक ने कहा कि देश को तोड़ने की साजिश रची जा रही है। मध्यप्रदेश विधानसभा में आज भारतीय जनता पार्टी विधायक की ओर से बीबीसी के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव को अध्यक्ष गिरीश गौतम ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। शून्यकाल के दौरान भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन की ओर से ये प्रस्ताव लाया गया। बता दें, BBC की डॉक्यूमेंट्री के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन किया गया था। वहीं, भाजपा शासित राज्यों में इसे दिखाने पर रोक लगा दी है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय इसे पहले ही प्रतिबंधित कर चुका है। विधायक ने ये प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि बीबीसी ने 17 फरवरी 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश पर हमला करने के लिए एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज की थी। उन्होंने कहा, इसमें 2002 में गुजरात में हुई घटनाओं को गलत तरीके से पेश किया गया है। संस्था ने देश की न्यायिक संस्थाओं को समझौते करने वाली संस्थाओं के रूप मे पेश किया है। बीबीसी ने इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को अनदेखा कर झूठ प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि ये डॉक्यूमेंट्री अदालत की अवमानना है और सदन इसकी निंदा करता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बीबीसी संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री सह संसदीय कार्य मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। प्रस्ताव पर अध्यक्ष श्री गौतम ने सदन का मत मांगा, जिसके बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। BBC डॉक्यूमेंट्री को लेकर देश भर में विवाद ने तूल पकड़ी थी। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने भाजपा और केंद्र सरकार पर प्रेस पर कब्जा करने और पाबंदी लगाने का आरोप लगाया था। देश के कई विश्वविद्यालयों में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद भी हो चुका है। मध्य प्रदेश के भाजपा विधायक इस मामले पर पहले भी निंदा प्रस्ताव लाने के बारे में कह चुके थे। सदन में प्रस्ताव पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।
मध्य प्रदेश विधानसभा में आज BBC डॉक्यूमेंट्री विवाद पर निंदा प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया। विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा किया। BJP विधायक ने कहा कि देश को तोड़ने की साजिश रची जा रही है। मध्यप्रदेश विधानसभा में आज भारतीय जनता पार्टी विधायक की ओर से बीबीसी के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव को अध्यक्ष गिरीश गौतम ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। शून्यकाल के दौरान भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन की ओर से ये प्रस्ताव लाया गया। बता दें, BBC की डॉक्यूमेंट्री के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन किया गया था। वहीं, भाजपा शासित राज्यों में इसे दिखाने पर रोक लगा दी है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय इसे पहले ही प्रतिबंधित कर चुका है। विधायक ने ये प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि बीबीसी ने सत्रह फरवरी दो हज़ार तेईस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश पर हमला करने के लिए एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज की थी। उन्होंने कहा, इसमें दो हज़ार दो में गुजरात में हुई घटनाओं को गलत तरीके से पेश किया गया है। संस्था ने देश की न्यायिक संस्थाओं को समझौते करने वाली संस्थाओं के रूप मे पेश किया है। बीबीसी ने इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को अनदेखा कर झूठ प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि ये डॉक्यूमेंट्री अदालत की अवमानना है और सदन इसकी निंदा करता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बीबीसी संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री सह संसदीय कार्य मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। प्रस्ताव पर अध्यक्ष श्री गौतम ने सदन का मत मांगा, जिसके बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। BBC डॉक्यूमेंट्री को लेकर देश भर में विवाद ने तूल पकड़ी थी। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने भाजपा और केंद्र सरकार पर प्रेस पर कब्जा करने और पाबंदी लगाने का आरोप लगाया था। देश के कई विश्वविद्यालयों में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद भी हो चुका है। मध्य प्रदेश के भाजपा विधायक इस मामले पर पहले भी निंदा प्रस्ताव लाने के बारे में कह चुके थे। सदन में प्रस्ताव पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।
MP Rewa News: जिले में ऑनलाइन ठगी (Online Fraud) के मामलों ने पुलिस को उलझा कर रख दिया है। विडंबना तो यह है कि आरोपी ऑनलाइन ठगी के नित नए तरीके इजाद कर लेते हैं। इसी कड़ी में चोरहटा थाना अंतर्गत नौबस्ता निवासी शैलेन्द्र सिंह के साथ ऑनलाइन 4 लाख रूपए ठगी किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। हालांकि इस मामले में सायबर सेल की मदद से फरियादी को उसके पैसे वापस भी मिल गए। बताया गया है कि नौबस्ता निवासी शैलेन्द्र सिंह के मोबाइल में गत दिवस अज्ञात व्यक्ति का कॉल आया था। संबंधित व्यक्ति ने शैलेन्द्र को बिल जमा न करने की स्थिति में कनेक्शन काटने की बात कही। साथ ही मोबाइल में लिंक भेज कर पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर करने की बात भी कही। बताया गया है कि मोबाइल बंद होने के बाद जैसे ही युवक ने लिंक खोला उसके खाते से चार लाख रूपए पार हो गए। फरियादी द्वारा तुरंत ही घटना के संबंध में सायबर सेल में शिकायत की गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए फरियादी का पार हुआ पैसा वापस दिलाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। सायबर सेल की मेहनत रंग भी लाई और फरियादी के खाते में दूसरे दिन पैसे भी आ गए। बताया गया है कि ऑनलाइन ठगी के आए दिन मामले सामने आते रहते हैं। अधिकतर मामलों में ठगी करने वाले लोग लॉटरी, बाइक और इनाम जीतने का लालच देकर आम जन को ठगते हैं। इसके अलावा एटीएम बंद होने का डर दिखा कर भी ऑनलाइन ठगी किए जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं। कई बार ठगी का शिकार हुए लोगों के पैसे वापस भी आ जाते हैं। लेकिन पुलिस आरोपियों को नहीं पकड़ पाती। इसका कारण यह भी है कि आरोपी अपना मोबाइल नंबर सहित जगह भी बदलते रहते हैं।
MP Rewa News: जिले में ऑनलाइन ठगी के मामलों ने पुलिस को उलझा कर रख दिया है। विडंबना तो यह है कि आरोपी ऑनलाइन ठगी के नित नए तरीके इजाद कर लेते हैं। इसी कड़ी में चोरहटा थाना अंतर्गत नौबस्ता निवासी शैलेन्द्र सिंह के साथ ऑनलाइन चार लाख रूपए ठगी किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। हालांकि इस मामले में सायबर सेल की मदद से फरियादी को उसके पैसे वापस भी मिल गए। बताया गया है कि नौबस्ता निवासी शैलेन्द्र सिंह के मोबाइल में गत दिवस अज्ञात व्यक्ति का कॉल आया था। संबंधित व्यक्ति ने शैलेन्द्र को बिल जमा न करने की स्थिति में कनेक्शन काटने की बात कही। साथ ही मोबाइल में लिंक भेज कर पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर करने की बात भी कही। बताया गया है कि मोबाइल बंद होने के बाद जैसे ही युवक ने लिंक खोला उसके खाते से चार लाख रूपए पार हो गए। फरियादी द्वारा तुरंत ही घटना के संबंध में सायबर सेल में शिकायत की गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए फरियादी का पार हुआ पैसा वापस दिलाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। सायबर सेल की मेहनत रंग भी लाई और फरियादी के खाते में दूसरे दिन पैसे भी आ गए। बताया गया है कि ऑनलाइन ठगी के आए दिन मामले सामने आते रहते हैं। अधिकतर मामलों में ठगी करने वाले लोग लॉटरी, बाइक और इनाम जीतने का लालच देकर आम जन को ठगते हैं। इसके अलावा एटीएम बंद होने का डर दिखा कर भी ऑनलाइन ठगी किए जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं। कई बार ठगी का शिकार हुए लोगों के पैसे वापस भी आ जाते हैं। लेकिन पुलिस आरोपियों को नहीं पकड़ पाती। इसका कारण यह भी है कि आरोपी अपना मोबाइल नंबर सहित जगह भी बदलते रहते हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
राजनीतिक उत्कर्ष इसी प्रकार भारत के मुक्ति दिवस १५ अगस्त का स्तवन करता हुआ कवि मुख्यत उसके भौतिक उत्कर्ष की नही, वरन् उसके आत्मिक ऐश्वर्य की मगल कामना करता है : नव जीवन का वैभव जागृत हो जन गण मे आत्मा का ऐश्वर्य अवतरित मानव मन मे । रक्त-सिक्त धरणी का हो दुस्वप्न समापन शाति प्रीति सुख का भू-स्वर्ग उठे सुर-मोहन ।। उसकी राष्ट्रीयता अथवा देशभक्ति संकुचित नही है। भारत मात्र का कल्याण उसका प्रेय नही है - वह भारत के हित को विश्व हित के साथ एक करके देखता है। भारत की दासता उसकी अपनी दासता नही थी, वह सारी पृथ्वी की नैतिक दासता थी । इसी तरह उसकी मुक्ति एक देश मात्र की मुक्ति नहीं है, वह विश्व-जीवन की मुक्ति है, क्योकि उसे विश्वास है कि अपनी महान् सास्कृतिक परंपराओं से समृद्ध भारत एक नवीन सास्कृतिक आलोक का वितरण करेगा। इस प्रसंग से मुझे अचानक ही प्रधानमंत्री के अनेक वक्तव्यो का स्मरण हो आता है। उनमे प्रायः सभी में इस बात पर बल दिया जाता है कि भारत का कल्याण विश्व-कल्याण के साथ ग्रथित है । वह सकुचित राष्ट्रीयता के मोह मे न पडकर विश्वादर्शों के लिए ही सतत प्रयत्नवान् रहेगा : "मैंने भारत के हितो का ध्यान रखा है, क्योकि स्वभावतः हो यह मेरा प्रथम कर्तव्य था। मैंने सदैव भारत के हित को विश्व के हित का ही एक अंग माना है। हमारे गुरु महात्मा गांधी ने यही शिक्षा दी है। उन्होंने हमे भारत के स्वातंत्र्य और गौरव की रक्षा करते हुए दूसरो के साथ शांति और मित्रभाव से रहने का उपदेश दिया है। आज संसार में स्थान-स्थान पर संघर्ष और द्वेष फैला हुआ है और सामने विनाश दिखाई दे रहा है। इसलिए हमे प्रत्येक ऐसे कार्य का, जिससे यह हृद्ध कम हो, स्वागत करना चाहिए ।" [जवाहरलाल नेहरू] दोनो के आदर्शों मे कितना निकट साम्य है, और वह केवल संयोग नहीं है । सदा से ही, साहित्य, इस प्रकार, अपने एकात कक्ष से राजनीति को स्वप्न और आदर्श देता रहता है । इसीलिए तो कवियो को विश्व का नियामक कहा गया है। इस युग की काव्य चेतना की एक प्रमुख प्रवृत्ति है अतीत के प्रति आकर्षण । हमारे प्रमुख कवियों में यह प्रवृत्ति सबसे अधिक प्रखर थी प्रसाद मे। पत को आरंभ से ही अतीत की अपेक्षा भविष्य के प्रति अधिक आकर्षण रहा है। वे सदा से भविष्य के स्वप्न द्रष्टा कवि रहे हैं। इन नवीन कविताओं में पहली बार सास्कृतिक पुनरुत्थान की भावना मिलती है। कवि पहली बार अपनी प्राचीन अध्यात्म-पूत सस्कृति - वेद, उपनिषद्, सीता, लक्ष्मण आदि की ओर श्रद्धा और संभ्रम से आकृष्ट हुआ है। 'युगवाणी' पंत का नवीन जीवन-दर्शन : ४५३ और 'ग्राम्या' आदि में प्राचीन के प्रति एक वैज्ञानिक, ऐतिहासिक अध्ययन का भाव था परतु इन कविताओं मे आस्तिक भाव भी मिलता है । 'स्वर्णधूलि' के आपवाणी कवितासंग्रह मे वैदिक ऋचाओ का भव्य अनुवाद है। इन कविताओ द्वारा कवि आज के भूतत्रस्त जीवन मे शाति का सचार करने के लिए मानो भारत की भूत-पावनी सस्कृति की आत्मा का आवाहन करता है. शाति शाति दे हमे शाति हो व्यापक उज्ज्वल, शाति धाम यह धरा बने, हो फिर जन-मगल । बहुत-सी कविताओ मे उपनिषद् मंत्री के प्रेरणा ततु विद्यमान हैं। कही उपनिषद् के 'द्वासुपर्णा' आदि रूपको को ग्रहण किया गया है और कही उनके आर्यवचनो को उद्धृत किया गया है । 'स्वर्णकिरण' मे अशोक वन नाम का एक स्वगत-काव्य वैदेही की मनोगाथा का अध्यात्मपरक विश्लेषण-चित्रण करता है. नित सत् राम, शक्ति चित् सीता अखिल सृष्टि आनंद प्रणीता प्रकृति णिखा-सी उठे, शक्ति चित् उतरे, निखिल जगत् मे शिक्षा । इसी प्रकार भारत के समृद्ध साहित्य 'मेघदूत', 'कुमारसभव' आदि के शतरग कल्पना चित्र भी इन कविताओ मे स्थान-स्थान पर मणियो की भाति टके हुए हैं : सम्भव, पूरा तुम्हारी द्रोणी किन्नर मिथुनो से हो कूजित, छाया निभृत गुहाएँ उन्मद रति की सौरभ से समुच्छ्व सित अब भी ऊपा वहाँ दीखती वधू उमा के मुख-सी लज्जित बढती चंद्र-कला भी गिरिजा-सी हो गिरि के क्रोड मे उदित । जैसा कि मैंने ऊपर कहा है, प्राधुनिक युग के विधायक कवियो मे पत को पुरातन के प्रति सबसे कम मोह रहा है। इसका कारण यह है कि उन पर पाश्चात्य शिक्षा-सभ्यता का प्रभाव अपने अन्य सहयोगियों की अपेक्षा अधिक है। उसका रहनसहन अब तक बहुत कुछ पश्चिमी ढग का रहा है। कालिदास और भवभूति की अपेक्षा उन्होने शेली, कीट्स और टेनिसन से अधिक काव्य-प्रेरणा प्राप्त की है और उपनिषद् और पड्दर्शन की अपेक्षा हीगेल और मार्क्स का उनकी विचारधारा पर अधिक प्रभाव पडा है। प्रसाद, निराला और महादेवी जब भारतीय दर्शन और साहित्य के द्वारा अपने व्यक्तित्व का सवर्द्धन-सस्कार करते थे, उस समय पत को होगेल और मार्क्स का अध्ययन अधिक अनुकूल पडता था । 'स्वर्णधूलि' की एक कविता 'ग्रामीण' मे पत ने अपने प्रति अभारतीयता के प्राक्षेप का उत्तर देने का प्रयत्न किया है :
राजनीतिक उत्कर्ष इसी प्रकार भारत के मुक्ति दिवस पंद्रह अगस्त का स्तवन करता हुआ कवि मुख्यत उसके भौतिक उत्कर्ष की नही, वरन् उसके आत्मिक ऐश्वर्य की मगल कामना करता है : नव जीवन का वैभव जागृत हो जन गण मे आत्मा का ऐश्वर्य अवतरित मानव मन मे । रक्त-सिक्त धरणी का हो दुस्वप्न समापन शाति प्रीति सुख का भू-स्वर्ग उठे सुर-मोहन ।। उसकी राष्ट्रीयता अथवा देशभक्ति संकुचित नही है। भारत मात्र का कल्याण उसका प्रेय नही है - वह भारत के हित को विश्व हित के साथ एक करके देखता है। भारत की दासता उसकी अपनी दासता नही थी, वह सारी पृथ्वी की नैतिक दासता थी । इसी तरह उसकी मुक्ति एक देश मात्र की मुक्ति नहीं है, वह विश्व-जीवन की मुक्ति है, क्योकि उसे विश्वास है कि अपनी महान् सास्कृतिक परंपराओं से समृद्ध भारत एक नवीन सास्कृतिक आलोक का वितरण करेगा। इस प्रसंग से मुझे अचानक ही प्रधानमंत्री के अनेक वक्तव्यो का स्मरण हो आता है। उनमे प्रायः सभी में इस बात पर बल दिया जाता है कि भारत का कल्याण विश्व-कल्याण के साथ ग्रथित है । वह सकुचित राष्ट्रीयता के मोह मे न पडकर विश्वादर्शों के लिए ही सतत प्रयत्नवान् रहेगा : "मैंने भारत के हितो का ध्यान रखा है, क्योकि स्वभावतः हो यह मेरा प्रथम कर्तव्य था। मैंने सदैव भारत के हित को विश्व के हित का ही एक अंग माना है। हमारे गुरु महात्मा गांधी ने यही शिक्षा दी है। उन्होंने हमे भारत के स्वातंत्र्य और गौरव की रक्षा करते हुए दूसरो के साथ शांति और मित्रभाव से रहने का उपदेश दिया है। आज संसार में स्थान-स्थान पर संघर्ष और द्वेष फैला हुआ है और सामने विनाश दिखाई दे रहा है। इसलिए हमे प्रत्येक ऐसे कार्य का, जिससे यह हृद्ध कम हो, स्वागत करना चाहिए ।" [जवाहरलाल नेहरू] दोनो के आदर्शों मे कितना निकट साम्य है, और वह केवल संयोग नहीं है । सदा से ही, साहित्य, इस प्रकार, अपने एकात कक्ष से राजनीति को स्वप्न और आदर्श देता रहता है । इसीलिए तो कवियो को विश्व का नियामक कहा गया है। इस युग की काव्य चेतना की एक प्रमुख प्रवृत्ति है अतीत के प्रति आकर्षण । हमारे प्रमुख कवियों में यह प्रवृत्ति सबसे अधिक प्रखर थी प्रसाद मे। पत को आरंभ से ही अतीत की अपेक्षा भविष्य के प्रति अधिक आकर्षण रहा है। वे सदा से भविष्य के स्वप्न द्रष्टा कवि रहे हैं। इन नवीन कविताओं में पहली बार सास्कृतिक पुनरुत्थान की भावना मिलती है। कवि पहली बार अपनी प्राचीन अध्यात्म-पूत सस्कृति - वेद, उपनिषद्, सीता, लक्ष्मण आदि की ओर श्रद्धा और संभ्रम से आकृष्ट हुआ है। 'युगवाणी' पंत का नवीन जीवन-दर्शन : चार सौ तिरेपन और 'ग्राम्या' आदि में प्राचीन के प्रति एक वैज्ञानिक, ऐतिहासिक अध्ययन का भाव था परतु इन कविताओं मे आस्तिक भाव भी मिलता है । 'स्वर्णधूलि' के आपवाणी कवितासंग्रह मे वैदिक ऋचाओ का भव्य अनुवाद है। इन कविताओ द्वारा कवि आज के भूतत्रस्त जीवन मे शाति का सचार करने के लिए मानो भारत की भूत-पावनी सस्कृति की आत्मा का आवाहन करता है. शाति शाति दे हमे शाति हो व्यापक उज्ज्वल, शाति धाम यह धरा बने, हो फिर जन-मगल । बहुत-सी कविताओ मे उपनिषद् मंत्री के प्रेरणा ततु विद्यमान हैं। कही उपनिषद् के 'द्वासुपर्णा' आदि रूपको को ग्रहण किया गया है और कही उनके आर्यवचनो को उद्धृत किया गया है । 'स्वर्णकिरण' मे अशोक वन नाम का एक स्वगत-काव्य वैदेही की मनोगाथा का अध्यात्मपरक विश्लेषण-चित्रण करता है. नित सत् राम, शक्ति चित् सीता अखिल सृष्टि आनंद प्रणीता प्रकृति णिखा-सी उठे, शक्ति चित् उतरे, निखिल जगत् मे शिक्षा । इसी प्रकार भारत के समृद्ध साहित्य 'मेघदूत', 'कुमारसभव' आदि के शतरग कल्पना चित्र भी इन कविताओ मे स्थान-स्थान पर मणियो की भाति टके हुए हैं : सम्भव, पूरा तुम्हारी द्रोणी किन्नर मिथुनो से हो कूजित, छाया निभृत गुहाएँ उन्मद रति की सौरभ से समुच्छ्व सित अब भी ऊपा वहाँ दीखती वधू उमा के मुख-सी लज्जित बढती चंद्र-कला भी गिरिजा-सी हो गिरि के क्रोड मे उदित । जैसा कि मैंने ऊपर कहा है, प्राधुनिक युग के विधायक कवियो मे पत को पुरातन के प्रति सबसे कम मोह रहा है। इसका कारण यह है कि उन पर पाश्चात्य शिक्षा-सभ्यता का प्रभाव अपने अन्य सहयोगियों की अपेक्षा अधिक है। उसका रहनसहन अब तक बहुत कुछ पश्चिमी ढग का रहा है। कालिदास और भवभूति की अपेक्षा उन्होने शेली, कीट्स और टेनिसन से अधिक काव्य-प्रेरणा प्राप्त की है और उपनिषद् और पड्दर्शन की अपेक्षा हीगेल और मार्क्स का उनकी विचारधारा पर अधिक प्रभाव पडा है। प्रसाद, निराला और महादेवी जब भारतीय दर्शन और साहित्य के द्वारा अपने व्यक्तित्व का सवर्द्धन-सस्कार करते थे, उस समय पत को होगेल और मार्क्स का अध्ययन अधिक अनुकूल पडता था । 'स्वर्णधूलि' की एक कविता 'ग्रामीण' मे पत ने अपने प्रति अभारतीयता के प्राक्षेप का उत्तर देने का प्रयत्न किया है :
मुंबई। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा आज हुई सुनवाई में बनठिया आयोग की सिफारिशों को मंजूरी मिलने के बाद राज्य में ओबीसी (OBC) के लिए राजनीतिक आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही अगले दो सप्ताह में बनठिया की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने राज्य (State) में चुनाव घोषित करने का आदेश दिया है, वहीं कोर्ट के इस फैसले का हम तहे दिल से स्वागत करते हैं, इस पर राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने प्रतिक्रिया दी है। ओबीसी समुदाय के राजनीतिक आरक्षण की लड़ाई जीतने के बाद, शरद पवार ने ट्वीट किया, "सुप्रीम कोर्ट ने बनठिया आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और आज ओबीसी आरक्षण के साथ स्थानीय निकायों के चुनाव कराने को मंजूरी दे दी है। हम अदालत के इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। कोर्ट के फैसले ने आगामी चुनावों में ओबीसी उम्मीदवारों के लिए मार्ग प्रशस्त किया, ओबीसी आरक्षण के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और माविया सरकार के प्रयासों को याद करते हुए पवार ने ट्वीट किया कि "महाराष्ट्र संतुष्ट है कि ओबीसी समुदाय के अधिकारों के लिए चल रही अदालती लड़ाई और उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व आज जीत लिया गया है। यह आरक्षण कायम रहना चाहिए। " उन्होंने यह भी कहा कि छगन भुजबल (Chhagan Bhujbal) के साथ राकांपा और तत्कालीन महा विकास अघाड़ी सरकार (Maha Vikas Aghadi Govt. ) के नेतृत्व ने ईमानदारी से प्रयास किया और आज उसका परिणाम इस निर्णय में देखा गया। शरद पवार ने मंडल आयोग की रिपोर्ट को याद करते हुए कहा कि हम हमेशा ओबीसी समुदाय के उत्थान के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा िक मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू कर हमने राज्य में ओबीसी समुदाय को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने की कोशिश की और उन्हें मुख्य धारा में लाएं। ओबीसी समुदाय के साथ हम यह दोहराते हैं कि हम हमेशा उनके उत्थान के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं और रहेंगे।
मुंबई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आज हुई सुनवाई में बनठिया आयोग की सिफारिशों को मंजूरी मिलने के बाद राज्य में ओबीसी के लिए राजनीतिक आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही अगले दो सप्ताह में बनठिया की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने राज्य में चुनाव घोषित करने का आदेश दिया है, वहीं कोर्ट के इस फैसले का हम तहे दिल से स्वागत करते हैं, इस पर राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने प्रतिक्रिया दी है। ओबीसी समुदाय के राजनीतिक आरक्षण की लड़ाई जीतने के बाद, शरद पवार ने ट्वीट किया, "सुप्रीम कोर्ट ने बनठिया आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और आज ओबीसी आरक्षण के साथ स्थानीय निकायों के चुनाव कराने को मंजूरी दे दी है। हम अदालत के इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। कोर्ट के फैसले ने आगामी चुनावों में ओबीसी उम्मीदवारों के लिए मार्ग प्रशस्त किया, ओबीसी आरक्षण के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और माविया सरकार के प्रयासों को याद करते हुए पवार ने ट्वीट किया कि "महाराष्ट्र संतुष्ट है कि ओबीसी समुदाय के अधिकारों के लिए चल रही अदालती लड़ाई और उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व आज जीत लिया गया है। यह आरक्षण कायम रहना चाहिए। " उन्होंने यह भी कहा कि छगन भुजबल के साथ राकांपा और तत्कालीन महा विकास अघाड़ी सरकार के नेतृत्व ने ईमानदारी से प्रयास किया और आज उसका परिणाम इस निर्णय में देखा गया। शरद पवार ने मंडल आयोग की रिपोर्ट को याद करते हुए कहा कि हम हमेशा ओबीसी समुदाय के उत्थान के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा िक मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू कर हमने राज्य में ओबीसी समुदाय को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने की कोशिश की और उन्हें मुख्य धारा में लाएं। ओबीसी समुदाय के साथ हम यह दोहराते हैं कि हम हमेशा उनके उत्थान के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं और रहेंगे।
नई दिल्ली. केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार को सोशल मीडिया के लगभग सभी प्लेटफॉर्म्स के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी गई है. नई गाइडलाइंस के दायरे में फेसबुक, ट्विटर, वाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और नेटफ्लिकस, ऐमजॉन प्राइम, हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स आएंगे. सरकार की ओर से इस संबंध में दिशानिर्देश तैयार किए जा चुके है और जल्द ही उन्हें लागू किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इनके बारे में जानकारी दी. नई गाइडलाइंस के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत होने पर उसे 36 घंटे के भीतर हटाना होगा. साथ ही डिजिटल मीडिया को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह ही सेल्फ रेगुलेशन करना होगा. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भारत में व्यापार करने का स्वागत है, सरकार आलोचना के लिए तैयार है. सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या 140 करोड़ है. ये नए नियम यूजर की संख्या के आधार पर और सख्त होंगे. सोशल मीडिया के लिए जो गाइडलाइन्स जारी की गई हैं, वो 3 महीने में लागू कर दी जाएंगी. रविशंकर प्रसाद ने कहा आपके पास शिकायत आएगी तो उसको रजिस्टर करना और उसका निष्पादन करना आपकी जिम्मेदारी है. अगर आप इसका पालन नहीं करते हैं आईटीएक्ट में जो व्यवस्था है उसके तहत कार्रवाई होगी. प्रसाद के मुताबिक, सोशल मीडिया बिचौलियों के लिए शिकायत अधिकारी नियुक्त करना होगा. उन्हें 24 घंटे के भीतर शिकायतें दर्ज कर 15 दिनों के भीतर समस्या का समाधान करना होगा. प्लेटफॉर्म्स को भारत में अपने नोडल ऑफिसर, रेसिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर की तैनाती करनी होगी. इसके अलावा हर महीने कितनी शिकायतों पर एक्शन हुआ, इसकी जानकारी देनी होगी. प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डाले जाने वाले कंटेंट को लेकर गाइडलाइन्स बनाने के लिए कहा था. निर्देश के आधार पर भारत सरकार ने इसको लेकर गाइडलाइन्स तैयार की हैं. रविशंकर प्रसाद बोले कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स का वेरिफेकशन करना चाहिए, अभी सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी बल्कि प्लेटफॉर्म्स को ये खुद करना चाहिए.
नई दिल्ली. केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार को सोशल मीडिया के लगभग सभी प्लेटफॉर्म्स के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी गई है. नई गाइडलाइंस के दायरे में फेसबुक, ट्विटर, वाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और नेटफ्लिकस, ऐमजॉन प्राइम, हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स आएंगे. सरकार की ओर से इस संबंध में दिशानिर्देश तैयार किए जा चुके है और जल्द ही उन्हें लागू किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इनके बारे में जानकारी दी. नई गाइडलाइंस के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत होने पर उसे छत्तीस घंटाटे के भीतर हटाना होगा. साथ ही डिजिटल मीडिया को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह ही सेल्फ रेगुलेशन करना होगा. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भारत में व्यापार करने का स्वागत है, सरकार आलोचना के लिए तैयार है. सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या एक सौ चालीस करोड़ है. ये नए नियम यूजर की संख्या के आधार पर और सख्त होंगे. सोशल मीडिया के लिए जो गाइडलाइन्स जारी की गई हैं, वो तीन महीने में लागू कर दी जाएंगी. रविशंकर प्रसाद ने कहा आपके पास शिकायत आएगी तो उसको रजिस्टर करना और उसका निष्पादन करना आपकी जिम्मेदारी है. अगर आप इसका पालन नहीं करते हैं आईटीएक्ट में जो व्यवस्था है उसके तहत कार्रवाई होगी. प्रसाद के मुताबिक, सोशल मीडिया बिचौलियों के लिए शिकायत अधिकारी नियुक्त करना होगा. उन्हें चौबीस घंटाटे के भीतर शिकायतें दर्ज कर पंद्रह दिनों के भीतर समस्या का समाधान करना होगा. प्लेटफॉर्म्स को भारत में अपने नोडल ऑफिसर, रेसिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर की तैनाती करनी होगी. इसके अलावा हर महीने कितनी शिकायतों पर एक्शन हुआ, इसकी जानकारी देनी होगी. प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डाले जाने वाले कंटेंट को लेकर गाइडलाइन्स बनाने के लिए कहा था. निर्देश के आधार पर भारत सरकार ने इसको लेकर गाइडलाइन्स तैयार की हैं. रविशंकर प्रसाद बोले कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स का वेरिफेकशन करना चाहिए, अभी सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी बल्कि प्लेटफॉर्म्स को ये खुद करना चाहिए.
रुद्रपुर 22 जुलाई 2022- मण्डलायुक्त दीपक रावत ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार शुक्रवार को डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम सभागार पहुॅचकर आकांक्षी जनपद के अन्तर्गत चल रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने समीक्षा के दौरान निर्देशित करते हुए कहा कि जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुॅचे तथा जनपद का चहुमुॅखी विकास हो। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं का लाभ लेने से वंचित न रहे। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अपने-अपने विभाग से सम्बन्धित सूचकों का गहराई से अध्ययन करें ताकि कार्यों में अपेक्षित गति प्राप्त हो सके। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देशित करते हुए कहा कि शतप्रतिशत संस्थागत प्रसव हों, इसके लिए विशेष अभियान चलाकर सभी को जागरूक किया जाये। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि संस्थागत प्रसव न कराने वाले व्यक्तियों, परिवार, क्षेत्र एवं समुदाय को चिन्हित करते हुए जन-जागरूकता अभियान चलाया जाये ताकि शतप्रतिशत संस्थागत प्रसव हो सके। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि जनपद में कुपोषित बच्चे पैदा न हों, इसके लिए गर्भवती महिलाओं को खान-पान के प्रति जागरूक किया जाये तथा एएनसी आदि चेकअप काय्र नियमित किये जाये। उन्होंने आशाओं के कार्यों की गहनता से समीक्षा करने के निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी को दिये। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में टीबी के मरीज अधिक मिलें, उन क्षेत्रों को चिहिन्त करते हुए टीबी के कारणों का पता लगाया जाये और रोकथाम हेतु विशेष प्रयास किये जाये। उन्होंने शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देशित करते हुए कहा कि एक भी बच्चा स्कूल से ड्रॉप आउट न हो, आवश्यकता से अधिक टीसर्च वाले विद्यालयों से शिक्षकों का आवश्यकता वाले विद्यालयों में स्थानान्तरण किया जाये। उन्होंने सिंचाई विभाग की समीक्षा के दौरान ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देने के निर्देश दिये। उन्होंने ई-मार्केटिंग को बढ़ावा देने के लिए मण्डी के अधिकारियों के साथ बैठक करने के निर्देश मुख्य विकास अधिकारी को दिये। मण्डलायुक्त ने उद्यान, कृषि, बैंकिंग, कौशल विकास आदि कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा करते हुए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिये।
रुद्रपुर बाईस जुलाई दो हज़ार बाईस- मण्डलायुक्त दीपक रावत ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार शुक्रवार को डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम सभागार पहुॅचकर आकांक्षी जनपद के अन्तर्गत चल रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने समीक्षा के दौरान निर्देशित करते हुए कहा कि जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुॅचे तथा जनपद का चहुमुॅखी विकास हो। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं का लाभ लेने से वंचित न रहे। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अपने-अपने विभाग से सम्बन्धित सूचकों का गहराई से अध्ययन करें ताकि कार्यों में अपेक्षित गति प्राप्त हो सके। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देशित करते हुए कहा कि शतप्रतिशत संस्थागत प्रसव हों, इसके लिए विशेष अभियान चलाकर सभी को जागरूक किया जाये। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि संस्थागत प्रसव न कराने वाले व्यक्तियों, परिवार, क्षेत्र एवं समुदाय को चिन्हित करते हुए जन-जागरूकता अभियान चलाया जाये ताकि शतप्रतिशत संस्थागत प्रसव हो सके। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि जनपद में कुपोषित बच्चे पैदा न हों, इसके लिए गर्भवती महिलाओं को खान-पान के प्रति जागरूक किया जाये तथा एएनसी आदि चेकअप काय्र नियमित किये जाये। उन्होंने आशाओं के कार्यों की गहनता से समीक्षा करने के निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी को दिये। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में टीबी के मरीज अधिक मिलें, उन क्षेत्रों को चिहिन्त करते हुए टीबी के कारणों का पता लगाया जाये और रोकथाम हेतु विशेष प्रयास किये जाये। उन्होंने शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देशित करते हुए कहा कि एक भी बच्चा स्कूल से ड्रॉप आउट न हो, आवश्यकता से अधिक टीसर्च वाले विद्यालयों से शिक्षकों का आवश्यकता वाले विद्यालयों में स्थानान्तरण किया जाये। उन्होंने सिंचाई विभाग की समीक्षा के दौरान ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देने के निर्देश दिये। उन्होंने ई-मार्केटिंग को बढ़ावा देने के लिए मण्डी के अधिकारियों के साथ बैठक करने के निर्देश मुख्य विकास अधिकारी को दिये। मण्डलायुक्त ने उद्यान, कृषि, बैंकिंग, कौशल विकास आदि कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा करते हुए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिये।
पायेंगे। 2. यदि आप फ्रिज के ऊपर घड़ी टांगते है तो आपकी आर्थिक स्थिति बहुत धीरे धीरे होगी और लोग अक्सर आपको धोखा देंगे। 3. यदि आप दरवाजे के ऊपर या सामने घडी टांगते है तो घर में एकता की कमी रहती है। बढ़ जाएगी। यदि आपको काम में तरक्की और घर में बरकत देखना है तो घर में उत्तर की तरफ चकोर घडी लगाए। यदि हर काम में विजय प्राप्त करनी हो तो उत्तर की तरफ षठ कोणीय घडी लगाये।
पायेंगे। दो. यदि आप फ्रिज के ऊपर घड़ी टांगते है तो आपकी आर्थिक स्थिति बहुत धीरे धीरे होगी और लोग अक्सर आपको धोखा देंगे। तीन. यदि आप दरवाजे के ऊपर या सामने घडी टांगते है तो घर में एकता की कमी रहती है। बढ़ जाएगी। यदि आपको काम में तरक्की और घर में बरकत देखना है तो घर में उत्तर की तरफ चकोर घडी लगाए। यदि हर काम में विजय प्राप्त करनी हो तो उत्तर की तरफ षठ कोणीय घडी लगाये।
उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने गठबंधन पर कटाक्ष करते हुये कहा कि पहले मुलायम सिंह चरखा दांव चलते थे जिसमें विरोधी परस्त हो जाते थे इस बार मायावती के चरखा दांव में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश फंस गये और वह परास्त हो गये। श्री मौर्य रविवार को औरैया के बिधूना कस्बा में विधायक विनय शाक्य के स्वास्थ्य का हालचाल लेने आये थे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यदि सपाऔर बहुजन समाज पार्टी (बसपा)का गठबंधन नहीं होता तो दोनों दलों का सूफड़ साफ हो जाता। उन्होंने कहा कि गठबंधन का लाभ बसपा ने उठा लिया वह शून्य से 10 पर पहुंच गयी और सपा 5 की 5 पर ही रही। उन्होंने कहा कि सपा जिन्हें अपना गढ़ कहती थी वह कन्नौज हो या बदायूं या फिरोजबाद सभी जगह अखिलेश के परिवारीजन तक हार गये। अखिलेश को गठबंधन मंहगा पड़। खुद उनकी किसी तरह आजमगढ़ में इज्जत बची, मुलायम सिंह भी आखिरी चुनाव की बात कहकर किसी तरह चुनाव जीते। अखिलेश यादव मायावती के दांव का शिकार हुये। श्री मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द, मोदी के काम एवं विकास में विश्वास जताकर मतदान किया, जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तीन सौ के पार पहुंची है। लोगों भाजपा के पक्ष में मतदान किया जिससे उनकी और राजग को इतनी प्रचंड जीत मिली। उन्होंने कहा कि आतंकियों को उनके घर में घुसकर मारने से श्री मोदी जन जन के प्रिय नेता बन गये है और जनता को विश्वास है कि उनके नेतृत्व में न केवल देश से आतंकवाद का खात्मा होगा बल्कि अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर भारत एक महाशक्ति बनके उभरेगा। इस मौके पर विधायक विनय शाक्य, देवेश शाक्य, अमित मिश्रा, बन्टूराव दिवाकर आदि मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने गठबंधन पर कटाक्ष करते हुये कहा कि पहले मुलायम सिंह चरखा दांव चलते थे जिसमें विरोधी परस्त हो जाते थे इस बार मायावती के चरखा दांव में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश फंस गये और वह परास्त हो गये। श्री मौर्य रविवार को औरैया के बिधूना कस्बा में विधायक विनय शाक्य के स्वास्थ्य का हालचाल लेने आये थे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यदि सपाऔर बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन नहीं होता तो दोनों दलों का सूफड़ साफ हो जाता। उन्होंने कहा कि गठबंधन का लाभ बसपा ने उठा लिया वह शून्य से दस पर पहुंच गयी और सपा पाँच की पाँच पर ही रही। उन्होंने कहा कि सपा जिन्हें अपना गढ़ कहती थी वह कन्नौज हो या बदायूं या फिरोजबाद सभी जगह अखिलेश के परिवारीजन तक हार गये। अखिलेश को गठबंधन मंहगा पड़। खुद उनकी किसी तरह आजमगढ़ में इज्जत बची, मुलायम सिंह भी आखिरी चुनाव की बात कहकर किसी तरह चुनाव जीते। अखिलेश यादव मायावती के दांव का शिकार हुये। श्री मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द, मोदी के काम एवं विकास में विश्वास जताकर मतदान किया, जिससे भारतीय जनता पार्टी तीन सौ के पार पहुंची है। लोगों भाजपा के पक्ष में मतदान किया जिससे उनकी और राजग को इतनी प्रचंड जीत मिली। उन्होंने कहा कि आतंकियों को उनके घर में घुसकर मारने से श्री मोदी जन जन के प्रिय नेता बन गये है और जनता को विश्वास है कि उनके नेतृत्व में न केवल देश से आतंकवाद का खात्मा होगा बल्कि अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर भारत एक महाशक्ति बनके उभरेगा। इस मौके पर विधायक विनय शाक्य, देवेश शाक्य, अमित मिश्रा, बन्टूराव दिवाकर आदि मौजूद रहे।
३८ । संत-साहित्य कहीं लक्षणा और व्यंजना का भी प्रयोग हुआ है। उनकी वाणी ध्वनि के प्रभाव को व्यक्त करती हुई काव्य की आत्मा के स्वरूप का उद्घाटन करने में सक्षम है। पर यह सब है अपने सहज रूप में ही इस ओर उनका ध्यान भी नहीं है। इसका एक कारण भी है और वह यह कि ये संत शास्त्रीय परम्परा के संत न थे। किसी पाठशाला में बैठ कर न तो उन्होंने व्याकरण के सूत्रों को ही रटा था, और न साहित्य की विभिन्न विधाओं से परिचय ही प्राप्त किया था। इतस्ततः भ्रमण करते हुए साधुओं की संगति में बैठ-बैठक के रूप में इन्हें जो मिल गया उसे तो ले लिया और अधिकांशतः अपनी चिन्तना पर ही अवलम्वित रहे । अस्तु जैसे-तैसे अपने विचारों को सामान्य जन-जीवन तक पहुँचा देना इनका उद्देश्य रहा । इसीलिए इनकी दृष्टि भाषा-सौष्ठव की अपेक्षा भाव-सौष्ठव की ओर अधिक रही। इन्हें सभी सम्प्रदायों एवं प्रायः सभी प्रान्तों के लोगों के बीच में बैठने का अवसर मिलता था । अस्तु सभी स्थानों की प्रचलित भाषाओं का उन पर प्रभाव पड़ना भी स्वाभाविक था । यही कारण है कि इनकी रचनाओं में राजस्थानी, पंजाबी, अवधी, ब्रज, भोजपुरी, खड़ी बोली, गुजराती, मराठी, अरबी, फारसी आदि भाषाओं के रूप पाए जाते हैं। कहीं-कहीं संस्कृत के शुद्ध तत्सम शब्दों का प्रयोग भी मिलता है। इसीलिए विद्वानों ने संतों की भाषा को खिचड़ी भाषा कहा है। इनकी भाषा को सधुक्कड़ी भाषा भी कहा जाता है । इसमें सन्देह नहीं कि संतों की भाषा में अपने भाव को व्यंजित करने की पूर्ण क्षमता है। विभिन्न प्रान्तीय शब्दों एवं अपभ्रंश रूपों के व्यवहार के कारण संत-साहित्य की भाषा में यत्र-तत्र दुरूहता भी प्राप्त होती है । पर सामान्यतः संतसाहित्य की भाषा में एक विचित्र आर्जव, एक अद्भुत प्रभावात्मकता एवं स्पृहणीय आकर्षण प्रतीत होता है। उसकी अपनी निराली धज है। आगे के अध्यायों में हम संत-साहित्य की भाषा का ही अध्ययन करने का प्रयास करेंगे । ३. भाषा तथा हिन्दी भाषा का विकास प्रकृति का गुण है, स्फुरण । इस स्फुरण या अंकुरण में प्रकृति के कई अंग सहायक बनते हैं। मानव हृदय में भी स्फुरण की यह शक्ति एवं क्रिया विद्यमान है। उसकी सहज चेतना अपने दृश्यमान जगन से एकाकार हो कर जिस रूप एवं भाव का संस्पर्श प्राप्त करती है, वही उसके हृदय में बीज रूप बन कर विभिन्न कलाओं अथवा भाषागत रूपों में अंकुरित होती है । स्पष्ट है कि मानव अपनी भाव-निधि दूसरों के समक्ष रखना चाहता है तथा दूसरों की भाव-निधि को स्वयं देखना भी चाहता है । आदान प्रदान अथवा विनिमय की यह वृत्ति मानव की सहज वृत्ति है । भावों और विचारों के विनिमय का सहज सुलभ साधन है भाषा । जागतिक क्रिया-कलापों में भी हम विनिमय के व्यापार को देखते हैं। विनिमय ही सामाजिक श्रृंखला को सुस्थिर एवं सुदृढ़ करना है । यह दृढ़ता और स्थिरता कदापि संभव न हो सकती यदि भाषा न होती । सामाजिकता की संस्थापना के लिये भाषा अत्यन्त आवश्यक । लोक-जीवन की कामनाओं, आशाओं, इच्छाओं और स्वप्नों को संव हन करने वाली भाषा ही तो है । भाषा न केवल धात्री के रूप में किसी भाव विशेष का पालन करती है, अपितु वह नये-नये भावों एवं विचारों की जन्मदात्री भी बनती है। हम परस्पर भावों के आदान-प्रदान द्वारा न केवल एक-दूसरे की आवश्यकताओं को समझते हैं, अपितु उनके संघर्ष से उत्पन्न एक तीसरी वस्तु को प्राप्त भी करते हैं । इस प्रकार भाषागत विचार-विनिमय नूतनातिनूतन विचारों की सृष्टि करता रहता है । जिस समय हम वार्तालाप रत होते हैं अथवा किसी विचार पर मनन करते हैं उस समय हमारे मानसिक जगत में भी भाषण की क्रिया कार्य करती रहती है । भाषा वैज्ञानिकों ने इसे भाषा का मनोवैज्ञानिक अथवा मनःक्षेत्रीय रूप कहा है । उच्चरित वाणी का रूप भौतिक है। मन में निहित वाणी दिखाई नहीं देती, परन्तु वह अनुभव में अवश्य आती है। वहाँ भी शब्द और उनके अर्थ दोनों विद्यमान रहते हैं । एक रूप के लिए जो शब्द मन में संचरित होता है वह दूसरे रूप वाले शब्द से पृथक् रहता है। पार्थक्य के साथ वहाँ तारतम्य भी बना रहता है । भाषा वहाँ स्वरित नहीं, परन्तु स्पंदित और क्रियाशील अवश्य रहती है। ब्राह्म भाषा उसी मानसिक क्षेत्र की स्पंदित वाणी का मुखरित रूप है। ४० । संत साहित्य मानव अपनी चेतना के रथ पर अनादिकाल से गतिमान है। उसकी यात्रा की परिसमाप्ति कहाँ और कैसे होगी, यह कोई नहीं कह सकता । चेतन मानव की सहजात भाषा भी उसी के समान निरन्तर गतिशीला है। जिस प्रकार जलवायु तथा अन्य भौगोलिक प्रभाव एवं सभ्यता के नाना रूप मानव की निर्माण क्रिया में अपना महत्वपूर्ण योग देते रहते हैं, उसी प्रकार भाषा की निर्मिति पर भी इन सबका प्रभाव कभी प्रत्यक्ष और कभी अप्रत्यक्ष रूप में पड़ता रहता है । भाषा का एक विशेष धर्म है उसका व्यक्ति- सापेक्ष होना। यह व्यक्ति सापेक्षता कभी भौगोलिक और कभी सांस्कृतिक कारणों से समाज सापेक्ष भी बन जाती है। अंग्रेज भौगोलिक कारणों से 'त' नहीं कह पाते । इसलिए उनके शब्दों में 'ट' का प्रयोग होता है । जिस देश का सांस्कृतिक विकास जितना समुन्नत होगा उस देश की भाषा और साहित्य भी उतने ही समुन्नत होंगे। व्यक्ति सापेक्षता में शरीरावयवों का संगठन शब्दों के उच्चारण में अन्तर उत्पन्न करता रहता है । 'सिन्ध' को 'हिन्द' और 'पैसा' को 'पैफा' 'सत्यनारायण' को 'फत्यनारायण' कहने वाले प्राणी प्रायः देखे जाते हैं । भाषा के व्यावहारिक रूप पर शिक्षा का भी प्रभाव पड़ता है। जिस शब्द का उच्चारण एक विद्वान करता है, उसी शब्द का उच्चारण उसी रूप में एक ग्रामीण नहीं कर पाता। केवल शब्दों के उच्चारण की ही बात नहीं है, उनके नामकरण की भी बात है । एक ही वस्तु, एक ही रीति-रिवाज के भिन्न-भिन्न स्थानों में भिन्न-भिन्न नाम पाये जाते हैं । उत्तर प्रदेश का निवासी चारपाई या खटिया शब्द का प्रयोग करता है, लेकिन पंजाब का रहने वाला मंझा शब्द का प्रयोग करता है, जब कि पतंग उड़ाने वाले पतंग की एक डोर विशेष को भी मंझा कहते हैं । यज्ञोपवीत एवं विवाह के समय कहीं-कहीं यह प्रथा है कि भाई अपनी विवाहिता बहिन को वस्त्र आदि प्रदान करता है । इस पद्धति को कहीं पर 'भात' भेजना और कहीं पर वीकट' या 'पहिरावन' पहिनाना कहा जाता है । साधारणतः भाषा के दो रूप होते हैं, एक उच्चरित रूप और दूसरा लिखित रूप । भाषा का उच्चरित रूप हमारे दैनिक जीवन से विशेषतः सम्बन्धित है। निरंतर बोलचाल में, बाजारों में, घर के काम-काज में लेन-देन में जिन शब्दों एवं वाक्यों का हम प्रयोग करते हैं वह सब भाषा का उच्चारित रूप है, पर दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति ही हमारे जीवन का आदि और अन्त नहीं है। हम वर्तमान में रह कर अपने अतीत को देखना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि हमारी यात्रा कहाँ से प्रारम्भ हुई थी, हमने अतल - तल की कितनी गहराइयों को नापा, कितनी उत्तुंग शैलमालाओं का अतिक्रमण किया, किन बीहड़ बनों को पार किया, किन उपत्यकाओं में विश्राम किया; ये विस्तृत राजमार्ग और ये सुरम्य प्रदेश कब और कैसे बने, किसने हमारी निधि को छीना और किसने अपनी निधि का दान देकर हमें निहाल कर भाषा तथा हिन्दी भाषा का विकास । ४१ दिया। हम अपने जीवन के अश्रु-रूणों की कहानी और हास की परम स्निग्ध-ज्योत्स्ना को अपने तक ही सीमित नहीं रखना चाहते। हमारी इच्छा होती है कि कोई हमारे आँसुओं को पोछे, हमारी आहों को दुलराये और हमारी हँसी में अपने हृदय के उल्लास को घोल दे । यही नहीं, हम अपने समस्त अनुभवों का दान, अपने समस्त ज्ञान की मंजूषा एवं अपनी समस्त कामनाओं की कलना अपनी सम्पति को दे जाना चाहते हैं। हमारी साथ होती है कि हमारी सांसें भविष्य का अभिनव शृंगार करें। इस सब की पूर्ति भाषा के माध्यम से ही सम्भव है । निश्चय ही यह माध्यम भाषा का लिखित रूप होगा । हमारी समस्त सांस्कृतिक चेतना, हमारी सभ्यता का समस्त रूप दूसरे शब्दों में हमारी यात्रा की जय-विजय की कहानी भाषा के लिखित रूप में ही सुरक्षित रह सकती है। इस प्रकार विभिन्न जागतिक रूपों का बोध भाषा के व्यापार से ही सम्भव है। भाषा की उत्पत्ति भाषा एक अर्थ पूर्ण नाद है, समाज में समझी जाने वाली सार्थक ध्वनियों का समूह है। हम आँख, हाय आदि के संकेतों द्वारा भी भावों को ग्रहण कर सकते पर सार्थक नाद के द्वारा जो भाव-संकेत ग्रहण किये जाते हैं वे विशेष स्पष्ट और पुष्ट होते हैं, धार्मिक प्रवृत्ति के प्राणी नाद के रूप में किसी विशिष्ट ईश्वरीय प्रेरणा को अनुभव करते हैं, किन्तु बुद्धिवादी इस क्रिया में प्राणी की उस सहज शक्ति को ध्वनित होता हुआ देखते हैं जिसका कुछ भाग मनुष्येतर प्राणियों को भी उपलब्ध हुआ है। मनोविज्ञान विशारद भाषा की उत्पत्ति में प्राणी की उस मानसिक चेष्टा को देखते हैं जो अपनी अनुभूतियों एवं आवश्यकताओं के प्रकटीकरण के लिए उन्हें विकल कर देती है । भाषा वैज्ञानिक इसमें शारीरिक चेष्टाओं का सहारा भी समझते हैं । नाद के स्वरूप का मूल्यांकन करते समय मत-मतान्तरों की विभिन्नता अत्यन्त प्रबल और बहुमुखी हो उठती है। प्रस्तुत प्रसंग में हमें उन मत-मतान्तरों के संबंध में विशेष ऊहापोह नहीं करनी है। यहाँ पर तो उनका केवल परिचयात्मक विवरण ही पर्याप्त होगा । मनुष्य सृष्टि की एक अनुपम कृति है । विश्व के सभी आकार-प्रकारों में मनुष्य आकृति की दृष्टि से भी एक विशिष्टता रखता है। परन्तु उसकी वास्तविक विशिष्टता उसके ज्ञान में उसकी रागमयी प्रवृत्तियों में एवं उसके विवेक में है । साधारणतया राग और ज्ञान सभी प्राणियों में होता है। छोटे से छोटा जीव भी अपने बुद्धि-बल से विभिन्न कार्यों में संलग्न रहता है । शक्कर के कणों की ओर दौड़ती हुई चीटियाँ क्या ज्ञान-शून्य कही जा सकती हैं ? वे अपने बिलों में अन्न-कणों का संग्रह करती हैं जो उनकी सज्ञानता का परिचायक है। इसी प्रकार बया पक्षी के घोंसले में उसकी बुद्धि और उसके ज्ञान का समावेश है। घर के आँगन में फुदकती हुई चिड़ियों
अड़तीस । संत-साहित्य कहीं लक्षणा और व्यंजना का भी प्रयोग हुआ है। उनकी वाणी ध्वनि के प्रभाव को व्यक्त करती हुई काव्य की आत्मा के स्वरूप का उद्घाटन करने में सक्षम है। पर यह सब है अपने सहज रूप में ही इस ओर उनका ध्यान भी नहीं है। इसका एक कारण भी है और वह यह कि ये संत शास्त्रीय परम्परा के संत न थे। किसी पाठशाला में बैठ कर न तो उन्होंने व्याकरण के सूत्रों को ही रटा था, और न साहित्य की विभिन्न विधाओं से परिचय ही प्राप्त किया था। इतस्ततः भ्रमण करते हुए साधुओं की संगति में बैठ-बैठक के रूप में इन्हें जो मिल गया उसे तो ले लिया और अधिकांशतः अपनी चिन्तना पर ही अवलम्वित रहे । अस्तु जैसे-तैसे अपने विचारों को सामान्य जन-जीवन तक पहुँचा देना इनका उद्देश्य रहा । इसीलिए इनकी दृष्टि भाषा-सौष्ठव की अपेक्षा भाव-सौष्ठव की ओर अधिक रही। इन्हें सभी सम्प्रदायों एवं प्रायः सभी प्रान्तों के लोगों के बीच में बैठने का अवसर मिलता था । अस्तु सभी स्थानों की प्रचलित भाषाओं का उन पर प्रभाव पड़ना भी स्वाभाविक था । यही कारण है कि इनकी रचनाओं में राजस्थानी, पंजाबी, अवधी, ब्रज, भोजपुरी, खड़ी बोली, गुजराती, मराठी, अरबी, फारसी आदि भाषाओं के रूप पाए जाते हैं। कहीं-कहीं संस्कृत के शुद्ध तत्सम शब्दों का प्रयोग भी मिलता है। इसीलिए विद्वानों ने संतों की भाषा को खिचड़ी भाषा कहा है। इनकी भाषा को सधुक्कड़ी भाषा भी कहा जाता है । इसमें सन्देह नहीं कि संतों की भाषा में अपने भाव को व्यंजित करने की पूर्ण क्षमता है। विभिन्न प्रान्तीय शब्दों एवं अपभ्रंश रूपों के व्यवहार के कारण संत-साहित्य की भाषा में यत्र-तत्र दुरूहता भी प्राप्त होती है । पर सामान्यतः संतसाहित्य की भाषा में एक विचित्र आर्जव, एक अद्भुत प्रभावात्मकता एवं स्पृहणीय आकर्षण प्रतीत होता है। उसकी अपनी निराली धज है। आगे के अध्यायों में हम संत-साहित्य की भाषा का ही अध्ययन करने का प्रयास करेंगे । तीन. भाषा तथा हिन्दी भाषा का विकास प्रकृति का गुण है, स्फुरण । इस स्फुरण या अंकुरण में प्रकृति के कई अंग सहायक बनते हैं। मानव हृदय में भी स्फुरण की यह शक्ति एवं क्रिया विद्यमान है। उसकी सहज चेतना अपने दृश्यमान जगन से एकाकार हो कर जिस रूप एवं भाव का संस्पर्श प्राप्त करती है, वही उसके हृदय में बीज रूप बन कर विभिन्न कलाओं अथवा भाषागत रूपों में अंकुरित होती है । स्पष्ट है कि मानव अपनी भाव-निधि दूसरों के समक्ष रखना चाहता है तथा दूसरों की भाव-निधि को स्वयं देखना भी चाहता है । आदान प्रदान अथवा विनिमय की यह वृत्ति मानव की सहज वृत्ति है । भावों और विचारों के विनिमय का सहज सुलभ साधन है भाषा । जागतिक क्रिया-कलापों में भी हम विनिमय के व्यापार को देखते हैं। विनिमय ही सामाजिक श्रृंखला को सुस्थिर एवं सुदृढ़ करना है । यह दृढ़ता और स्थिरता कदापि संभव न हो सकती यदि भाषा न होती । सामाजिकता की संस्थापना के लिये भाषा अत्यन्त आवश्यक । लोक-जीवन की कामनाओं, आशाओं, इच्छाओं और स्वप्नों को संव हन करने वाली भाषा ही तो है । भाषा न केवल धात्री के रूप में किसी भाव विशेष का पालन करती है, अपितु वह नये-नये भावों एवं विचारों की जन्मदात्री भी बनती है। हम परस्पर भावों के आदान-प्रदान द्वारा न केवल एक-दूसरे की आवश्यकताओं को समझते हैं, अपितु उनके संघर्ष से उत्पन्न एक तीसरी वस्तु को प्राप्त भी करते हैं । इस प्रकार भाषागत विचार-विनिमय नूतनातिनूतन विचारों की सृष्टि करता रहता है । जिस समय हम वार्तालाप रत होते हैं अथवा किसी विचार पर मनन करते हैं उस समय हमारे मानसिक जगत में भी भाषण की क्रिया कार्य करती रहती है । भाषा वैज्ञानिकों ने इसे भाषा का मनोवैज्ञानिक अथवा मनःक्षेत्रीय रूप कहा है । उच्चरित वाणी का रूप भौतिक है। मन में निहित वाणी दिखाई नहीं देती, परन्तु वह अनुभव में अवश्य आती है। वहाँ भी शब्द और उनके अर्थ दोनों विद्यमान रहते हैं । एक रूप के लिए जो शब्द मन में संचरित होता है वह दूसरे रूप वाले शब्द से पृथक् रहता है। पार्थक्य के साथ वहाँ तारतम्य भी बना रहता है । भाषा वहाँ स्वरित नहीं, परन्तु स्पंदित और क्रियाशील अवश्य रहती है। ब्राह्म भाषा उसी मानसिक क्षेत्र की स्पंदित वाणी का मुखरित रूप है। चालीस । संत साहित्य मानव अपनी चेतना के रथ पर अनादिकाल से गतिमान है। उसकी यात्रा की परिसमाप्ति कहाँ और कैसे होगी, यह कोई नहीं कह सकता । चेतन मानव की सहजात भाषा भी उसी के समान निरन्तर गतिशीला है। जिस प्रकार जलवायु तथा अन्य भौगोलिक प्रभाव एवं सभ्यता के नाना रूप मानव की निर्माण क्रिया में अपना महत्वपूर्ण योग देते रहते हैं, उसी प्रकार भाषा की निर्मिति पर भी इन सबका प्रभाव कभी प्रत्यक्ष और कभी अप्रत्यक्ष रूप में पड़ता रहता है । भाषा का एक विशेष धर्म है उसका व्यक्ति- सापेक्ष होना। यह व्यक्ति सापेक्षता कभी भौगोलिक और कभी सांस्कृतिक कारणों से समाज सापेक्ष भी बन जाती है। अंग्रेज भौगोलिक कारणों से 'त' नहीं कह पाते । इसलिए उनके शब्दों में 'ट' का प्रयोग होता है । जिस देश का सांस्कृतिक विकास जितना समुन्नत होगा उस देश की भाषा और साहित्य भी उतने ही समुन्नत होंगे। व्यक्ति सापेक्षता में शरीरावयवों का संगठन शब्दों के उच्चारण में अन्तर उत्पन्न करता रहता है । 'सिन्ध' को 'हिन्द' और 'पैसा' को 'पैफा' 'सत्यनारायण' को 'फत्यनारायण' कहने वाले प्राणी प्रायः देखे जाते हैं । भाषा के व्यावहारिक रूप पर शिक्षा का भी प्रभाव पड़ता है। जिस शब्द का उच्चारण एक विद्वान करता है, उसी शब्द का उच्चारण उसी रूप में एक ग्रामीण नहीं कर पाता। केवल शब्दों के उच्चारण की ही बात नहीं है, उनके नामकरण की भी बात है । एक ही वस्तु, एक ही रीति-रिवाज के भिन्न-भिन्न स्थानों में भिन्न-भिन्न नाम पाये जाते हैं । उत्तर प्रदेश का निवासी चारपाई या खटिया शब्द का प्रयोग करता है, लेकिन पंजाब का रहने वाला मंझा शब्द का प्रयोग करता है, जब कि पतंग उड़ाने वाले पतंग की एक डोर विशेष को भी मंझा कहते हैं । यज्ञोपवीत एवं विवाह के समय कहीं-कहीं यह प्रथा है कि भाई अपनी विवाहिता बहिन को वस्त्र आदि प्रदान करता है । इस पद्धति को कहीं पर 'भात' भेजना और कहीं पर वीकट' या 'पहिरावन' पहिनाना कहा जाता है । साधारणतः भाषा के दो रूप होते हैं, एक उच्चरित रूप और दूसरा लिखित रूप । भाषा का उच्चरित रूप हमारे दैनिक जीवन से विशेषतः सम्बन्धित है। निरंतर बोलचाल में, बाजारों में, घर के काम-काज में लेन-देन में जिन शब्दों एवं वाक्यों का हम प्रयोग करते हैं वह सब भाषा का उच्चारित रूप है, पर दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति ही हमारे जीवन का आदि और अन्त नहीं है। हम वर्तमान में रह कर अपने अतीत को देखना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि हमारी यात्रा कहाँ से प्रारम्भ हुई थी, हमने अतल - तल की कितनी गहराइयों को नापा, कितनी उत्तुंग शैलमालाओं का अतिक्रमण किया, किन बीहड़ बनों को पार किया, किन उपत्यकाओं में विश्राम किया; ये विस्तृत राजमार्ग और ये सुरम्य प्रदेश कब और कैसे बने, किसने हमारी निधि को छीना और किसने अपनी निधि का दान देकर हमें निहाल कर भाषा तथा हिन्दी भाषा का विकास । इकतालीस दिया। हम अपने जीवन के अश्रु-रूणों की कहानी और हास की परम स्निग्ध-ज्योत्स्ना को अपने तक ही सीमित नहीं रखना चाहते। हमारी इच्छा होती है कि कोई हमारे आँसुओं को पोछे, हमारी आहों को दुलराये और हमारी हँसी में अपने हृदय के उल्लास को घोल दे । यही नहीं, हम अपने समस्त अनुभवों का दान, अपने समस्त ज्ञान की मंजूषा एवं अपनी समस्त कामनाओं की कलना अपनी सम्पति को दे जाना चाहते हैं। हमारी साथ होती है कि हमारी सांसें भविष्य का अभिनव शृंगार करें। इस सब की पूर्ति भाषा के माध्यम से ही सम्भव है । निश्चय ही यह माध्यम भाषा का लिखित रूप होगा । हमारी समस्त सांस्कृतिक चेतना, हमारी सभ्यता का समस्त रूप दूसरे शब्दों में हमारी यात्रा की जय-विजय की कहानी भाषा के लिखित रूप में ही सुरक्षित रह सकती है। इस प्रकार विभिन्न जागतिक रूपों का बोध भाषा के व्यापार से ही सम्भव है। भाषा की उत्पत्ति भाषा एक अर्थ पूर्ण नाद है, समाज में समझी जाने वाली सार्थक ध्वनियों का समूह है। हम आँख, हाय आदि के संकेतों द्वारा भी भावों को ग्रहण कर सकते पर सार्थक नाद के द्वारा जो भाव-संकेत ग्रहण किये जाते हैं वे विशेष स्पष्ट और पुष्ट होते हैं, धार्मिक प्रवृत्ति के प्राणी नाद के रूप में किसी विशिष्ट ईश्वरीय प्रेरणा को अनुभव करते हैं, किन्तु बुद्धिवादी इस क्रिया में प्राणी की उस सहज शक्ति को ध्वनित होता हुआ देखते हैं जिसका कुछ भाग मनुष्येतर प्राणियों को भी उपलब्ध हुआ है। मनोविज्ञान विशारद भाषा की उत्पत्ति में प्राणी की उस मानसिक चेष्टा को देखते हैं जो अपनी अनुभूतियों एवं आवश्यकताओं के प्रकटीकरण के लिए उन्हें विकल कर देती है । भाषा वैज्ञानिक इसमें शारीरिक चेष्टाओं का सहारा भी समझते हैं । नाद के स्वरूप का मूल्यांकन करते समय मत-मतान्तरों की विभिन्नता अत्यन्त प्रबल और बहुमुखी हो उठती है। प्रस्तुत प्रसंग में हमें उन मत-मतान्तरों के संबंध में विशेष ऊहापोह नहीं करनी है। यहाँ पर तो उनका केवल परिचयात्मक विवरण ही पर्याप्त होगा । मनुष्य सृष्टि की एक अनुपम कृति है । विश्व के सभी आकार-प्रकारों में मनुष्य आकृति की दृष्टि से भी एक विशिष्टता रखता है। परन्तु उसकी वास्तविक विशिष्टता उसके ज्ञान में उसकी रागमयी प्रवृत्तियों में एवं उसके विवेक में है । साधारणतया राग और ज्ञान सभी प्राणियों में होता है। छोटे से छोटा जीव भी अपने बुद्धि-बल से विभिन्न कार्यों में संलग्न रहता है । शक्कर के कणों की ओर दौड़ती हुई चीटियाँ क्या ज्ञान-शून्य कही जा सकती हैं ? वे अपने बिलों में अन्न-कणों का संग्रह करती हैं जो उनकी सज्ञानता का परिचायक है। इसी प्रकार बया पक्षी के घोंसले में उसकी बुद्धि और उसके ज्ञान का समावेश है। घर के आँगन में फुदकती हुई चिड़ियों
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बॉलीवुड के दंबग हीरो सलमान खान अपने फैंस के बीच अक्सर चर्चा का विषय बनें रहते हैं। हाल ही में उनके बारें में एक दिलचस्प बात सामने आई है। दरअसल एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रही है। जिसमें सलमान खान अपने भतीजे आहिल के साथ नजर आ रहे हैं। तस्वीर में नजर आ रहा है कि आहिल सलमान खान के पास लेटे हुए है और उनकी टी-शर्ट खींच रहें हैं। इस तस्वीर के चर्चा के दौरान सलमान के बारें में एक और बात जानने को मिली। जो कि मीडिया से खुद उनके जीजा आयुष शर्मा ने शेयर की, जिसमें उन्होंने बताया कि घर में सिर्फ आहिल ही ऐसे है जो सलमान खान को नींद से उठा सकते है। बाकी तो घर में किसी की भी हिम्मत नहीं होती है कि सलमान खान को सोते हुए जगा दें। इसके साथ ही आयुष शर्मा ने कहा,'सलमान भाई अर्पिता को बहन से ज्यादा बेटी की तरह प्यार करते हैं। सलमान भाई के ही नहीं बल्कि आहिल पूरे घर के लाडले हैं। बताते चलें कि आयुष शर्मा ने फिल्म 'लवयात्री' से बॉलीवुड में डेब्यू किया है। उनके साथ एक्ट्रेस वरीना हुसैन ने भी इस फिल्म से बॉलीवुड में एन्ट्री ली है। फिल्म में नवरात्री के त्योहार के दौरान हुए प्यार की कहानी को दर्शाया गया है। जो फिल्म के हिरो हिरोईन की जिंदगी को पूरी तरह बदल देती है। फिल्म 'लवयात्री' गुजरात की पृष्ठभूमि पर निर्मित है। इस फिल्म में नवरात्री के मौके पर एक्टर और एक्ट्रेस के उभरते प्यार के बारें में दिखाया गया है। गरबा इस प्रेम की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वहीं फिल्म के प्रमोशन के दौरान सलमान खान से जब उनके पहली बार प्यार के अपने अनुभव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जो जवाब दिया वह काफी मजेदार था। उन्होंने कहा, 'मेरे मामले में प्यार बार-बार होता है। ' सलमान से जब भी उनकी शादी या किसी के साथ रिलेशन में होने के बारे में पूछे जाता हैं, तो वह हमेशा यहीं जवाब देते है कि वह अभी शादी करने के लिए तैयार नहीं है। With Ahil in London over breakfast . हर साल, सलमान की शादी की अफवाहें इंटरनेट पर जबरदस्त तरीके से फैलती है और फिर शांत हो जाती हैं। सलमान का नाम इन दिनों यूलिया वंतूरसे जुड़ा हुआ हैं। लंबे समय यह बात चल रही थी कि दोनों के बीच में कुछ चल रहा हैं। लेकिन दोनों ने अपने रिश्ते से जुड़ी अफवाहों पर पूरी तरह से इंकार कर दिया हैं। हालांकि, दोनों को एक साथ कई बार देखा गया है। साथ ही यूलिया भी सलमान खान के कई पारिवारिक कार्यों में शामिल होती हुई दिखी गई हैं।
बॉलीवुड के दंबग हीरो सलमान खान अपने फैंस के बीच अक्सर चर्चा का विषय बनें रहते हैं। हाल ही में उनके बारें में एक दिलचस्प बात सामने आई है। दरअसल एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रही है। जिसमें सलमान खान अपने भतीजे आहिल के साथ नजर आ रहे हैं। तस्वीर में नजर आ रहा है कि आहिल सलमान खान के पास लेटे हुए है और उनकी टी-शर्ट खींच रहें हैं। इस तस्वीर के चर्चा के दौरान सलमान के बारें में एक और बात जानने को मिली। जो कि मीडिया से खुद उनके जीजा आयुष शर्मा ने शेयर की, जिसमें उन्होंने बताया कि घर में सिर्फ आहिल ही ऐसे है जो सलमान खान को नींद से उठा सकते है। बाकी तो घर में किसी की भी हिम्मत नहीं होती है कि सलमान खान को सोते हुए जगा दें। इसके साथ ही आयुष शर्मा ने कहा,'सलमान भाई अर्पिता को बहन से ज्यादा बेटी की तरह प्यार करते हैं। सलमान भाई के ही नहीं बल्कि आहिल पूरे घर के लाडले हैं। बताते चलें कि आयुष शर्मा ने फिल्म 'लवयात्री' से बॉलीवुड में डेब्यू किया है। उनके साथ एक्ट्रेस वरीना हुसैन ने भी इस फिल्म से बॉलीवुड में एन्ट्री ली है। फिल्म में नवरात्री के त्योहार के दौरान हुए प्यार की कहानी को दर्शाया गया है। जो फिल्म के हिरो हिरोईन की जिंदगी को पूरी तरह बदल देती है। फिल्म 'लवयात्री' गुजरात की पृष्ठभूमि पर निर्मित है। इस फिल्म में नवरात्री के मौके पर एक्टर और एक्ट्रेस के उभरते प्यार के बारें में दिखाया गया है। गरबा इस प्रेम की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वहीं फिल्म के प्रमोशन के दौरान सलमान खान से जब उनके पहली बार प्यार के अपने अनुभव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जो जवाब दिया वह काफी मजेदार था। उन्होंने कहा, 'मेरे मामले में प्यार बार-बार होता है। ' सलमान से जब भी उनकी शादी या किसी के साथ रिलेशन में होने के बारे में पूछे जाता हैं, तो वह हमेशा यहीं जवाब देते है कि वह अभी शादी करने के लिए तैयार नहीं है। With Ahil in London over breakfast . हर साल, सलमान की शादी की अफवाहें इंटरनेट पर जबरदस्त तरीके से फैलती है और फिर शांत हो जाती हैं। सलमान का नाम इन दिनों यूलिया वंतूरसे जुड़ा हुआ हैं। लंबे समय यह बात चल रही थी कि दोनों के बीच में कुछ चल रहा हैं। लेकिन दोनों ने अपने रिश्ते से जुड़ी अफवाहों पर पूरी तरह से इंकार कर दिया हैं। हालांकि, दोनों को एक साथ कई बार देखा गया है। साथ ही यूलिया भी सलमान खान के कई पारिवारिक कार्यों में शामिल होती हुई दिखी गई हैं।
देश में भोजपुरी इंडस्ट्री के कई सितारे बेहद लोकप्रिय हैं। ऐसे ही भोजपुरी स्टार हैं रवि किशन (Ravi Kishan) और अंजना सिंह (Anjana Singh)। इन दोनों नाम को भोजपुरी इंडस्ट्री में किसी पहचान की जरुरत नहीं है। मशहूर और बोल्ड एक्ट्रेस अंजना लोगों के बीच काफी पॉपुलर हैं और अपने हॉट अंदाज से वह फैंस को हरबार दीवाना बना देती है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक पुराना गाना काफी वायरल हो रहा है। देश में भोजपुरी इंडस्ट्री के कई सितारे बेहद लोकप्रिय हैं। ऐसे ही भोजपुरी स्टार हैं रवि किशन (Ravi Kishan) और अंजना सिंह (Anjana Singh)। इन दोनों नाम को भोजपुरी इंडस्ट्री में किसी पहचान की जरुरत नहीं है। मशहूर और बोल्ड एक्ट्रेस अंजना लोगों के बीच काफी पॉपुलर हैं और अपने हॉट अंदाज से वह फैंस को हरबार दीवाना बना देती है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक पुराना गाना काफी वायरल हो रहा है। इस गाने के वीडियो में रवि किशन और अंजना सिंह जमकर रोमांस करते नजर आ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं 'लगाले तू अंग सजना' (Lagale Tu Ang Sajna) गाने की जिसमें कई बोल्ड सीन्स फिल्माए गए हैं। वीडियो में दोनों की केमेस्ट्री देखने लायक है और उन्होंने प्यार में बहकर रोमांस की सारी हदें पार कर दी है। गाने का वीडियो काफी बोल्ड है जिसे हम निश्चित तौर पर हम अपने फैमिली के साथ नहीं देख सकते हैं। हालांकि भोजपुरी लवर्स इस वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं और जमकर शेयर कर रहे हैं। वीडियो में रवि और अंजना बाथरूम में जमकर रोमांस कर रहे हैं। इस दौरान अंजना रिवीलिंग ड्रेस में बोल्ड फिगर फ्लॉन्ट करती नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस की हॉट और किलर एक्सप्रेशन देख रवि किशन खुद को रोक नहीं पाए और दोनों ने खुलेआम बोल्डनेस की हदें पार कर दी। यही वजह है की रिलीज के 7 साल के बाद यह गाना एक बार फिर लोगों के सर्चिंग लिस्ट में है। गौरतलब है कि भोजपुरी फिल्मों में जबरदस्त नाम कमा चुके रवि किशन छोटे पर्दे पर भी नजर आ चुके हैं। वहीं रवि पिछले कुछ समय से राजनीति में भी काफी एक्टिव और फिलहाल भाजपा के सांसद हैं।
देश में भोजपुरी इंडस्ट्री के कई सितारे बेहद लोकप्रिय हैं। ऐसे ही भोजपुरी स्टार हैं रवि किशन और अंजना सिंह । इन दोनों नाम को भोजपुरी इंडस्ट्री में किसी पहचान की जरुरत नहीं है। मशहूर और बोल्ड एक्ट्रेस अंजना लोगों के बीच काफी पॉपुलर हैं और अपने हॉट अंदाज से वह फैंस को हरबार दीवाना बना देती है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक पुराना गाना काफी वायरल हो रहा है। देश में भोजपुरी इंडस्ट्री के कई सितारे बेहद लोकप्रिय हैं। ऐसे ही भोजपुरी स्टार हैं रवि किशन और अंजना सिंह । इन दोनों नाम को भोजपुरी इंडस्ट्री में किसी पहचान की जरुरत नहीं है। मशहूर और बोल्ड एक्ट्रेस अंजना लोगों के बीच काफी पॉपुलर हैं और अपने हॉट अंदाज से वह फैंस को हरबार दीवाना बना देती है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक पुराना गाना काफी वायरल हो रहा है। इस गाने के वीडियो में रवि किशन और अंजना सिंह जमकर रोमांस करते नजर आ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं 'लगाले तू अंग सजना' गाने की जिसमें कई बोल्ड सीन्स फिल्माए गए हैं। वीडियो में दोनों की केमेस्ट्री देखने लायक है और उन्होंने प्यार में बहकर रोमांस की सारी हदें पार कर दी है। गाने का वीडियो काफी बोल्ड है जिसे हम निश्चित तौर पर हम अपने फैमिली के साथ नहीं देख सकते हैं। हालांकि भोजपुरी लवर्स इस वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं और जमकर शेयर कर रहे हैं। वीडियो में रवि और अंजना बाथरूम में जमकर रोमांस कर रहे हैं। इस दौरान अंजना रिवीलिंग ड्रेस में बोल्ड फिगर फ्लॉन्ट करती नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस की हॉट और किलर एक्सप्रेशन देख रवि किशन खुद को रोक नहीं पाए और दोनों ने खुलेआम बोल्डनेस की हदें पार कर दी। यही वजह है की रिलीज के सात साल के बाद यह गाना एक बार फिर लोगों के सर्चिंग लिस्ट में है। गौरतलब है कि भोजपुरी फिल्मों में जबरदस्त नाम कमा चुके रवि किशन छोटे पर्दे पर भी नजर आ चुके हैं। वहीं रवि पिछले कुछ समय से राजनीति में भी काफी एक्टिव और फिलहाल भाजपा के सांसद हैं।
गोली की आवाज सुनकर व्यक्ति को बचाने जब उसकी पत्नी आई तो बदमाशों ने महिला को भी पीटा और उसका सिर फोड़ दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद परिजनों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। विशेष संवाददाता, डाबड़ी डाबड़ी थाना क्षेत्र में दो हथियारबंद बदमाशों ने एक व्यक्ति को उसके घर में घुसकर गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर व्यक्ति को बचाने जब उसकी पत्नी आई तो बदमाशों ने महिला को भी पीटा और उसका सिर फोड़ दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद परिजनों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। दोनों घायलों को पास के अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने डाबड़ी थाने में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री की पत्नी की हत्या में तीसरा आरोपी भी अरेस्ट पुलिस अधिकारी के अनुसार घायल नरेश के बयान पर मामला दर्ज किया गया है। अभी तक की जांच में पता चला है कि घायल पर भी विभिन्न धाराओं के तहत आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस आशंका जता रही है कि आपसी रंजिश के चलते वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस के अनुसार सोमवार देर रात डाबड़ी थाने को यह जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस को पता चला कि घायलों को अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस टीम अस्पताल पहुंची तो पता चला कि नरेश को पैर में गोली लगी है। नरेश ने पुलिस को बताया कि देर रात दो लोगों ने उसका दरवाजा खटखटाया। जब उसने गेट खोला तो वह दोनों जबरन अंदर आ गए। उनमें से एक के हाथ में पिस्टल थी। उसी ने नरेश पर गोली चला दी। गोली लगने के बाद नरेश गिर गए। Delhi News: लॉकडाउन खुलते ही लूट और झपटमारी की वारदात में इजाफा इसी दौरान गोली की आवाज पर नरेश की पत्नी बाहर आई। आरोपियों और नरेश की पत्नी के बीच झड़प हो गई। इस दौरान आरोपियों ने उसे जमकर पीटा और उसका सिर फोड़ कर फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद पुलिस को मामले की सूचना दी गई। फिलहाल पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर लिया है और आरोपियों की पहचान का प्रयास कर रही है।
गोली की आवाज सुनकर व्यक्ति को बचाने जब उसकी पत्नी आई तो बदमाशों ने महिला को भी पीटा और उसका सिर फोड़ दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद परिजनों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। विशेष संवाददाता, डाबड़ी डाबड़ी थाना क्षेत्र में दो हथियारबंद बदमाशों ने एक व्यक्ति को उसके घर में घुसकर गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर व्यक्ति को बचाने जब उसकी पत्नी आई तो बदमाशों ने महिला को भी पीटा और उसका सिर फोड़ दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद परिजनों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। दोनों घायलों को पास के अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने डाबड़ी थाने में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री की पत्नी की हत्या में तीसरा आरोपी भी अरेस्ट पुलिस अधिकारी के अनुसार घायल नरेश के बयान पर मामला दर्ज किया गया है। अभी तक की जांच में पता चला है कि घायल पर भी विभिन्न धाराओं के तहत आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस आशंका जता रही है कि आपसी रंजिश के चलते वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस के अनुसार सोमवार देर रात डाबड़ी थाने को यह जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस को पता चला कि घायलों को अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस टीम अस्पताल पहुंची तो पता चला कि नरेश को पैर में गोली लगी है। नरेश ने पुलिस को बताया कि देर रात दो लोगों ने उसका दरवाजा खटखटाया। जब उसने गेट खोला तो वह दोनों जबरन अंदर आ गए। उनमें से एक के हाथ में पिस्टल थी। उसी ने नरेश पर गोली चला दी। गोली लगने के बाद नरेश गिर गए। Delhi News: लॉकडाउन खुलते ही लूट और झपटमारी की वारदात में इजाफा इसी दौरान गोली की आवाज पर नरेश की पत्नी बाहर आई। आरोपियों और नरेश की पत्नी के बीच झड़प हो गई। इस दौरान आरोपियों ने उसे जमकर पीटा और उसका सिर फोड़ कर फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद पुलिस को मामले की सूचना दी गई। फिलहाल पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर लिया है और आरोपियों की पहचान का प्रयास कर रही है।
मुकुल गोयल को DGP से DG नागरिक सुरक्षा बनाने के बाद आईपीएस देवेंद्र सिंह चौहान को DGP का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। डीएस चौहान चौहान 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीएस चौहान को लंबे अरसे तक कार्यवाहक के तौर पर ही DGP बना कर रखा जा सकता है। कुछ जानकार यह भी दावा कर रहे हैं कि चौहान जल्दी ही पूर्णकालिक डीजीपी, DGP बना दिए जाएंगे। ACS अवनीश कुमार अवस्थी ने गुरूवार को एक आदेश जारी करते हुए बताया कि वर्ष 1988 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान को अतिरिक्त प्रभार के रूप में प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है। चौहान मुकुल गोयल का स्थान लेंगे जिन्हें बुधवार को कर्तव्य के प्रति लापरवाही के आरोप में हटाकर महानिदेशक नागरिक सुरक्षा के पद पर भेजा गया था।
मुकुल गोयल को DGP से DG नागरिक सुरक्षा बनाने के बाद आईपीएस देवेंद्र सिंह चौहान को DGP का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। डीएस चौहान चौहान एक हज़ार नौ सौ अठासी बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीएस चौहान को लंबे अरसे तक कार्यवाहक के तौर पर ही DGP बना कर रखा जा सकता है। कुछ जानकार यह भी दावा कर रहे हैं कि चौहान जल्दी ही पूर्णकालिक डीजीपी, DGP बना दिए जाएंगे। ACS अवनीश कुमार अवस्थी ने गुरूवार को एक आदेश जारी करते हुए बताया कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ अठासी बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान को अतिरिक्त प्रभार के रूप में प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है। चौहान मुकुल गोयल का स्थान लेंगे जिन्हें बुधवार को कर्तव्य के प्रति लापरवाही के आरोप में हटाकर महानिदेशक नागरिक सुरक्षा के पद पर भेजा गया था।
लेखक : पुस्तक का साइज़ : कुल पृष्ठ : श्रेणी : लेखक के बारे में अधिक जानकारी : पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश(Click to expand) दूसरा अध्याय । जमनी के तीन विभाग़ । छुपी अथवा जर्मनी के छोग, इस विषय में सर्वे साधारण सिद्धातों का निश्चित करना, वड़ा कठिन काम है। "जर्मनी" इस एक शब्द में भिन्न भिन्न छब्बीस प्रार्तो का वोघ द्वोता है और इन प्रातों में भिन्न भिन्न प्रकार के छोग निवास फरते हैं। उन प्रा्तों में भौगोलिक दृष्टि से भी , बढ़ा अतर है । उनके राजकीय इतिद्दास फा स्वरूप भी बिल- कुल भिन्न भिन्न है। दर एक जाति की उपजातियों के भी बहुत से भेद हैं"और घरों की रहन सहन तथा ज्ञान-प्राप्ति के मांगे भी भिन्न भिन्न हैं । इस भिन्नता के कारण, सर्वस्ताधारण सिद्धारतों का स्थिर करना बड़ा कठिन काम है । परतु यदि सावधानी के साथ विचार किया जाय तो इस बात फा निम्धित कर छेना बिछकुछ असभव भी नहीं है। जमेन राष्ट्र के यदि कई विभाग कर दिए जॉय तो इस बात का बताना बहुत आसान दो जायगा । परतु ये विभाग निर्दोष अथवा / प्रमाणबद्ध होंगे, यह हमारा सिद्धात नहीं है। परतु यदि जमनी और जमन छोंगों का ठीक पत्ता छगा कर, उनका हाल जानना है, तो ऐसी योजना किए बिना, यद्द काम होना ! अस्नभव है और यदि ऐसा किया जायगा तो भिन्न प्रकार से (कुछ न कुछ स्थानिक मर्यादा त्याग करनी पड़ेगी ।
लेखक : पुस्तक का साइज़ : कुल पृष्ठ : श्रेणी : लेखक के बारे में अधिक जानकारी : पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश दूसरा अध्याय । जमनी के तीन विभाग़ । छुपी अथवा जर्मनी के छोग, इस विषय में सर्वे साधारण सिद्धातों का निश्चित करना, वड़ा कठिन काम है। "जर्मनी" इस एक शब्द में भिन्न भिन्न छब्बीस प्रार्तो का वोघ द्वोता है और इन प्रातों में भिन्न भिन्न प्रकार के छोग निवास फरते हैं। उन प्रा्तों में भौगोलिक दृष्टि से भी , बढ़ा अतर है । उनके राजकीय इतिद्दास फा स्वरूप भी बिल- कुल भिन्न भिन्न है। दर एक जाति की उपजातियों के भी बहुत से भेद हैं"और घरों की रहन सहन तथा ज्ञान-प्राप्ति के मांगे भी भिन्न भिन्न हैं । इस भिन्नता के कारण, सर्वस्ताधारण सिद्धारतों का स्थिर करना बड़ा कठिन काम है । परतु यदि सावधानी के साथ विचार किया जाय तो इस बात फा निम्धित कर छेना बिछकुछ असभव भी नहीं है। जमेन राष्ट्र के यदि कई विभाग कर दिए जॉय तो इस बात का बताना बहुत आसान दो जायगा । परतु ये विभाग निर्दोष अथवा / प्रमाणबद्ध होंगे, यह हमारा सिद्धात नहीं है। परतु यदि जमनी और जमन छोंगों का ठीक पत्ता छगा कर, उनका हाल जानना है, तो ऐसी योजना किए बिना, यद्द काम होना ! अस्नभव है और यदि ऐसा किया जायगा तो भिन्न प्रकार से (कुछ न कुछ स्थानिक मर्यादा त्याग करनी पड़ेगी ।
केरल का एक किसान बिजू कुरियन शिष्टमंडल के साथ आधुनिक तकनीक सीखने के लिए इजरायल गया था. हालांकि वहां वो लापता हो गया, लेकिन अब जानकारी है कि उसका पता लग गया है और वो भारत आ रहा है. इजरायल में लापता हुए केरल के एक किसान के बारे में पता चल गया है. केरल के कृषि मंत्री पी प्रसाद ने कहा कि किसान बिजू कुरियन का पता लगा लिया गया है और वो सोमवार को वापस देश लौट रहे हैं. आधुनिक कृषि तकनीक सीखने के लिए सरकार द्वारा प्रायोजित यात्रा पर इजरायल गए शिष्टमंडल से बिजू कुरियन लापता हो गए थे. मंत्री ने कहा कि कुरियन के भाई ने उन्हें बताया कि वह सोमवार को गल्फ एयर के विमान से कोझिकोड हवाईअड्डे पहुंचेंगे. उन्होंने बताया कि उसने अपने भाई से कहा कि इजरायल के कुछ पवित्र स्थानों की यात्रा करने के लिए उसने अपने दौरे को आगे बढ़ाया. कोई भी कार्रवाई करने से पहले हम उसे विस्तार से सुनेंगे. हाल ही में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में 27 सदस्यीय एक टीम आधुनिक तकनीक को समझने/सीखने के लिए 5 दिन की इजरायल यात्रा पर गई थी. लेकिन, शिष्टमंडल में शामिल 48 साल के बिजू कुरियन 17 फरवरी को टीम से अलग होकर लापता हो गए. टीम ने इस संबंध में इजरायली अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई. तब मंत्री ने कहा था कि कुरियन ने जो किया वह उचित नहीं है. प्रसाद ने कहा कि ऐसा लगता है कि वह जानबूझकर समूह से अलग हुआ. कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा यात्रा के लिए तय मानदंडों की जांच करने और बिजू के उस पर खरा उतरने के बाद वह शिष्टमंडल में शामिल किया गया था. इस योजना में यह सुविधा भी थी कि जो लोग विमान का टिकट खरीदने योग्य थे, वह अपना टिकट बुक कर सकते थे. बिजू ने अपने टिकट का पैसा दिया था. लेकिन वह इसमें प्रक्रियागत खामी पर जांच करेंगे. इजरायली कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से उसका पता लगाने के प्रयास के बावजूद कुरियन के ठिकाने का पता नहीं चला था. एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि हमने उसके (बिजू कुरियन) खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया है. पकड़े जाने पर हम उसे प्रत्यर्पित कर देंगे. बाद में शिष्टमंडल बिजू के बगैर ही लौट आया. वापस आए शिष्टमंडल के अन्य सदस्यों ने मीडिया को बताया कि बिजू ने यात्रा के दौरान सब कुछ गंभीरता से सीखा था. (भाषा इनपुट के साथ)
केरल का एक किसान बिजू कुरियन शिष्टमंडल के साथ आधुनिक तकनीक सीखने के लिए इजरायल गया था. हालांकि वहां वो लापता हो गया, लेकिन अब जानकारी है कि उसका पता लग गया है और वो भारत आ रहा है. इजरायल में लापता हुए केरल के एक किसान के बारे में पता चल गया है. केरल के कृषि मंत्री पी प्रसाद ने कहा कि किसान बिजू कुरियन का पता लगा लिया गया है और वो सोमवार को वापस देश लौट रहे हैं. आधुनिक कृषि तकनीक सीखने के लिए सरकार द्वारा प्रायोजित यात्रा पर इजरायल गए शिष्टमंडल से बिजू कुरियन लापता हो गए थे. मंत्री ने कहा कि कुरियन के भाई ने उन्हें बताया कि वह सोमवार को गल्फ एयर के विमान से कोझिकोड हवाईअड्डे पहुंचेंगे. उन्होंने बताया कि उसने अपने भाई से कहा कि इजरायल के कुछ पवित्र स्थानों की यात्रा करने के लिए उसने अपने दौरे को आगे बढ़ाया. कोई भी कार्रवाई करने से पहले हम उसे विस्तार से सुनेंगे. हाल ही में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में सत्ताईस सदस्यीय एक टीम आधुनिक तकनीक को समझने/सीखने के लिए पाँच दिन की इजरायल यात्रा पर गई थी. लेकिन, शिष्टमंडल में शामिल अड़तालीस साल के बिजू कुरियन सत्रह फरवरी को टीम से अलग होकर लापता हो गए. टीम ने इस संबंध में इजरायली अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई. तब मंत्री ने कहा था कि कुरियन ने जो किया वह उचित नहीं है. प्रसाद ने कहा कि ऐसा लगता है कि वह जानबूझकर समूह से अलग हुआ. कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा यात्रा के लिए तय मानदंडों की जांच करने और बिजू के उस पर खरा उतरने के बाद वह शिष्टमंडल में शामिल किया गया था. इस योजना में यह सुविधा भी थी कि जो लोग विमान का टिकट खरीदने योग्य थे, वह अपना टिकट बुक कर सकते थे. बिजू ने अपने टिकट का पैसा दिया था. लेकिन वह इसमें प्रक्रियागत खामी पर जांच करेंगे. इजरायली कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से उसका पता लगाने के प्रयास के बावजूद कुरियन के ठिकाने का पता नहीं चला था. एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि हमने उसके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया है. पकड़े जाने पर हम उसे प्रत्यर्पित कर देंगे. बाद में शिष्टमंडल बिजू के बगैर ही लौट आया. वापस आए शिष्टमंडल के अन्य सदस्यों ने मीडिया को बताया कि बिजू ने यात्रा के दौरान सब कुछ गंभीरता से सीखा था.
IND vs SA 3rd ODI भारत और साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीसरा और आखिरी मुकाबला दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला गया। पहले बल्लेबाजी करते हुए साउथ अफ्रीका की टीम केवल 99 रन बनाकर आउट हो गई। भारत ने 20वें ओवर में मैच जीत लिया। नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। Ind vs SA 3rd ODI: भारत और साउथ अफ्रीका के बीच 3 मैचों की सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला गया। भारत के कप्तान शिखर धवन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। साउथ अफ्रीका की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए केवल 99 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। टीम इंडिया ने साउथ अफ्रीका को 2-1 से वनडे सीरीज में मात दी और ट्राफी पर कब्जा किया। बता दे कि इंडिया टीम 'बी' कहलाने वाली टीम ने साउथ अफ्रीका को हरा दिया। सात विकेट से भारत ने तीसरा मैच जीत लिया। इस मैच में स्पिनर कुलदीप यादव ने शानदार गेंदबाजी की। कुलदीप ने 4. 1 ओवर में 18 रन देकर 4 विकेट झटके। वहीं, मोहम्मद सिराज को प्लेयर ऑफ दी सीरीज की ट्रॅाफी दी गई। उन्होंने इस सीरीज में 5 विकेट झटके। 100 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की तरफ से शिखर धवन और शुभमन गिल ने पारी की शुरुआत की लेकिन एकबार फिर धवन अनलकी साबित हुए और 8 रन बनाकर रन आउट हो गए। भारत को दूसरा झटका इशान किशन के रूप में लगा। इशान 10 रन बनाकर आउट हुए। भारत को तीसरा झटका शुभमन गिल के रूप में लगा। लुंगी एन्गिडी ने शुभमन को 49 रन के स्कोर पर आउट किया। शुभमन गिल के आउट होने के बाद बैटिंग के लिए संजू सैमसन आए। इस मैच में श्रेयस अय्यर 28 और संजू सैमसन 2 रन बनाकर नाबाद रहे। साउथ अफ्रीका की बात करें तो यह भारत के खिलाफ यह उनका वनडे में सबसे कम टोटल है। इससे पहले उनका वनडे में भारत के खिलाफ सबसे कम स्कोर 117 रन था। भारत की तरफ से कुलदीप यादव ने 4 जबकि शहबाज अहमद और वाशिंगटन सुंदर ने 2-2 खिलाड़ियों को आउट किया। इस मैच में साउथ अफ्रीका की तरफ से डेविड मिलर टीम ने टीम की कप्तानी की। तेंबा बावुमा अस्वस्थ हैं जिस कारण वो तीसरे मैच में नहीं खेले। इस मैच में साउथ अफ्रीका ने तीन बदलाव किए जबकि भारतीय टीम बिना किसी बदलाव के साथ उतरी थी। मार्को यान्सेन और एंजिले फेहलुकवायो को पहली बार इस सीरीज में मौका मिला। साउथ अफ्रीका की तरफ से जानेमन मलान और क्विंटन डीकॉक ने पारी की शुरुआत की। लेकिन जल्द ही डीकॉक के रूप में टीम को पहला झटका लगा। उन्हें 6 रन के निजी स्कोर पर वाशिंगटन सुंदर ने आवेश खान के हाथों कैच करवाया। दूसरे विकेट के रूप में जानेमन मलान आउट हुए। उन्हें 15 रन के निजी स्कोर पर सिराज ने आवेश खान के हाथों कैच कराया। साउथ अफ्रीका को तीसरा झटका रीजा हैंड्रिक्स के रूप में लगा। उन्हें सिराज ने बिश्नोई के हाथों कैच कराया। इन फॉर्म बल्लेबाज मार्करम भी ज्यादा कुछ नहीं कर पाए और 9 रन बनाकर शहबाज अहमद की गेंद पर आउट हुए। उनका कैच संजू सैमसन ने पकड़ा। टीम को इनफॉर्म बल्लेबाज डेविड मिलर से काफी उम्मीदें थी लेकिन वह भी 7 रन बनाकर वाशिंगटन सुंदर का शिकार बने। उन्हें सुंदर ने क्लीन बोल्ड किया। छठे विकेट के तौर पर एंडिले फेहलुकवायो 5 रन के निजी स्कोर पर कुलदीप के हाथों बोल्ड हो गए। 7वें विकेट के रूप में क्लासेन को शहबाज अहमद ने 34 रन के स्कोर पर बोल्ड किया। 94 के स्कोर पर साउथ अफ्रीका दो झटके और लगे जब फोर्टुइन और नॉर्खिया आउट हुए। दोनों को एक ही ओवर में कुलदीप ने आउट किया। आखिरी विकेट के रूप में मार्को यान्सेन आउट हुए जिन्हें कुलदीप ने अपना चौथा शिकार बनाया। यान्सेन ने 14 रन बनाए। शिखर धवन (कप्तान), शुभमन गिल, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन (विकेटकीपर), वाशिंगटन सुंदर, शहबाज अहमद, शार्दुल ठाकुर, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, अवेश खान। क्विंटन डीकॉक (विकेटकीपर), जानेमन मलान, रीजा हैंड्रिक्स, एडेन मार्करम, हेनरिक क्लासेन, डेविड मिलर (कप्तान), मार्को यान्सेन, एंडिले फेहलुकवायो, ब्योर्न फोर्टुइन, लुंगी एन्गिडी, ऑनरिक नॉर्खिया।
IND vs SA तीनrd ODI भारत और साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीसरा और आखिरी मुकाबला दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला गया। पहले बल्लेबाजी करते हुए साउथ अफ्रीका की टीम केवल निन्यानवे रन बनाकर आउट हो गई। भारत ने बीसवें ओवर में मैच जीत लिया। नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। Ind vs SA तीनrd ODI: भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला गया। भारत के कप्तान शिखर धवन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। साउथ अफ्रीका की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए केवल निन्यानवे रन बनाकर ऑल आउट हो गई। टीम इंडिया ने साउथ अफ्रीका को दो-एक से वनडे सीरीज में मात दी और ट्राफी पर कब्जा किया। बता दे कि इंडिया टीम 'बी' कहलाने वाली टीम ने साउथ अफ्रीका को हरा दिया। सात विकेट से भारत ने तीसरा मैच जीत लिया। इस मैच में स्पिनर कुलदीप यादव ने शानदार गेंदबाजी की। कुलदीप ने चार. एक ओवर में अट्ठारह रन देकर चार विकेट झटके। वहीं, मोहम्मद सिराज को प्लेयर ऑफ दी सीरीज की ट्रॅाफी दी गई। उन्होंने इस सीरीज में पाँच विकेट झटके। एक सौ रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की तरफ से शिखर धवन और शुभमन गिल ने पारी की शुरुआत की लेकिन एकबार फिर धवन अनलकी साबित हुए और आठ रन बनाकर रन आउट हो गए। भारत को दूसरा झटका इशान किशन के रूप में लगा। इशान दस रन बनाकर आउट हुए। भारत को तीसरा झटका शुभमन गिल के रूप में लगा। लुंगी एन्गिडी ने शुभमन को उनचास रन के स्कोर पर आउट किया। शुभमन गिल के आउट होने के बाद बैटिंग के लिए संजू सैमसन आए। इस मैच में श्रेयस अय्यर अट्ठाईस और संजू सैमसन दो रन बनाकर नाबाद रहे। साउथ अफ्रीका की बात करें तो यह भारत के खिलाफ यह उनका वनडे में सबसे कम टोटल है। इससे पहले उनका वनडे में भारत के खिलाफ सबसे कम स्कोर एक सौ सत्रह रन था। भारत की तरफ से कुलदीप यादव ने चार जबकि शहबाज अहमद और वाशिंगटन सुंदर ने दो-दो खिलाड़ियों को आउट किया। इस मैच में साउथ अफ्रीका की तरफ से डेविड मिलर टीम ने टीम की कप्तानी की। तेंबा बावुमा अस्वस्थ हैं जिस कारण वो तीसरे मैच में नहीं खेले। इस मैच में साउथ अफ्रीका ने तीन बदलाव किए जबकि भारतीय टीम बिना किसी बदलाव के साथ उतरी थी। मार्को यान्सेन और एंजिले फेहलुकवायो को पहली बार इस सीरीज में मौका मिला। साउथ अफ्रीका की तरफ से जानेमन मलान और क्विंटन डीकॉक ने पारी की शुरुआत की। लेकिन जल्द ही डीकॉक के रूप में टीम को पहला झटका लगा। उन्हें छः रन के निजी स्कोर पर वाशिंगटन सुंदर ने आवेश खान के हाथों कैच करवाया। दूसरे विकेट के रूप में जानेमन मलान आउट हुए। उन्हें पंद्रह रन के निजी स्कोर पर सिराज ने आवेश खान के हाथों कैच कराया। साउथ अफ्रीका को तीसरा झटका रीजा हैंड्रिक्स के रूप में लगा। उन्हें सिराज ने बिश्नोई के हाथों कैच कराया। इन फॉर्म बल्लेबाज मार्करम भी ज्यादा कुछ नहीं कर पाए और नौ रन बनाकर शहबाज अहमद की गेंद पर आउट हुए। उनका कैच संजू सैमसन ने पकड़ा। टीम को इनफॉर्म बल्लेबाज डेविड मिलर से काफी उम्मीदें थी लेकिन वह भी सात रन बनाकर वाशिंगटन सुंदर का शिकार बने। उन्हें सुंदर ने क्लीन बोल्ड किया। छठे विकेट के तौर पर एंडिले फेहलुकवायो पाँच रन के निजी स्कोर पर कुलदीप के हाथों बोल्ड हो गए। सातवें विकेट के रूप में क्लासेन को शहबाज अहमद ने चौंतीस रन के स्कोर पर बोल्ड किया। चौरानवे के स्कोर पर साउथ अफ्रीका दो झटके और लगे जब फोर्टुइन और नॉर्खिया आउट हुए। दोनों को एक ही ओवर में कुलदीप ने आउट किया। आखिरी विकेट के रूप में मार्को यान्सेन आउट हुए जिन्हें कुलदीप ने अपना चौथा शिकार बनाया। यान्सेन ने चौदह रन बनाए। शिखर धवन , शुभमन गिल, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन , वाशिंगटन सुंदर, शहबाज अहमद, शार्दुल ठाकुर, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, अवेश खान। क्विंटन डीकॉक , जानेमन मलान, रीजा हैंड्रिक्स, एडेन मार्करम, हेनरिक क्लासेन, डेविड मिलर , मार्को यान्सेन, एंडिले फेहलुकवायो, ब्योर्न फोर्टुइन, लुंगी एन्गिडी, ऑनरिक नॉर्खिया।
तक की खुराक में दी गई तो भी इसने चर्बी पर कोई बुरा असर नहीं बतलाया, बल्कि बहुत से मामलों में इसने चर्बी को घटाने का काम किया । "अफीम का रासायनिक विश्लेषण करने पर उसके अन्दर प्रधान रूप से "मारफाइन" नामक उपचार और "नॉरकोटाइन " नामक एक प्रकार का सत्व, ये दो तत्व पाये गये । पटने की अफीम में "मॉरफाइन" ३६८ परसेंट और "नॉरकोटाइन" ६ ६६ परसेंट पाया गया । मालवे की अफीम में "मॉरफाइन" ४६१ परसेंट व "नॉरकोटाइन" ५१४ परसेंट पाया गया । स्मरना की अफीम में "मॉरफाइन" ८२७ व "नॉरकोटाइन,, १२४ परसेंट पाया गया । "नॉरकोटाइन अफीम में से प्राप्त होने वाला एक प्रकार का सत्व है। जिसमें कि निद्रा लाने का खास गुण होता है । यह अफीम में काफी मात्रा में रहता है। अगर जानवरों की शिराओं में इसका इजेक्शन दिया जाय, तो उनका ब्लडप्रेशर गिर जाता है। रक्तवाहिनी नलियाँ ढोली हो जाती है। ब्लडप्रेशर गिरने से हृदय की गति पर भी प्रभाव पड़ता है । मस्तिष्क की गति पर भी असर दिखाकर यह उसे ढीला करता है। "दूसरा तत्व "मॉरफाइन" नॉरकोटाइन से अधिक जोरदार व अधिक महत्वपूर्ण है । यह भी अफीम का एक उपक्षार है। प्रारंभ में लोगों का ध्यान इसकी श्रोर कम गया, लेकिन बाद में है इसके ऊपर कई प्रकार के अनुसधान हुए, और कई बीमारियों ने उपचार में इसकी उपयोगिता पाई गई। "ओपियम कमिशन ने भी वैज्ञानिक ढंग से इसका मनन किया। वे भी इसी नतीजे पर श्राये कि इसमें मॉरफाइन व नॉरकोटाइन ये दो मुख्य पदार्थ रहते हैं । मॉरफाइन में उपशामक और निद्रा लाने वाला गुग्ण विशेष है । और नॉरकोटाइन एक प्रकार का पुष्टिकारक और सामयिक ज्वरों को नष्ट करने वाला पदार्थ है। यही गुण किनाइन में भी पाये जाते हैं। किनाइन और अफीम में इन गुणों की समानता होने से ही यह (अफीम ) भी मलेरिया में उपयोगी मानी जाती है । लेकिन प्रयोगों से मालूम हुआ कि, उपशामक पदार्थ होने की वजह से अफीम मलेरिया के बाह्यचिन्हों को दबा देती है पर इस बीमारी के मूल-भूत कारण पर कोई असर नहीं पहुँचाती । डाक्टर रॉबर्टस ने नॉरकोटाइन को मलेरिया में मुफीद बतलाया है । किन्तु इस विषय में में मतभेद है और इसके पश्चात् के अनुसंधानों से भी यह मालूम हुआ है कि, नॉरकोटाइन में रक्तोपजीवी मलेरिया के कीटाणुओं को मारने की शक्ति नहीं है।" " कर्नल चोपरा ने मलेरिया, मधुमेह, और निमोनिया में ५ मेन से लगाकर २० मेन तक की मात्रा में रोगियों को दिया, किन्तु कोई उल्लेखनीय सर नहीं दिखाई दिया। हृदय पर और श्वास क्रिया पर इसका किसी भी प्रकार का उत्तेजक प्रभाव दिसलाई नहीं दिया। इतना ही मालूम हुआ कि बीमार के ऊपरी कष्ट, नष्ट होगये, उसकी थकान मिट गई और उसे शीघ्र ही नीद श्री गई । " उपरोक्त विवेचन से मालूम होता है कि अफीम का असर सीधा स्नायु-मडल के ऊपर होता है। यह स्नायु जाल को एक दम स्तब्ध या मदहोश कर देती है, जिससे सारे शरीर में एक प्रकार की निस्तब्धता हो जाती है और रोगी की चाहे वह किसी भी रोग से ग्रसित हो, यत्रणा दब जाती है, जिससे उसे श्रागम मालूम होता है । इसका दूसरा विशेष गुण स्तभन का है। इसलिये श्रुतिसार इत्यादि रोगों में भी यह फायदा पहुॅचाती है तथा वीर्य स्तम्भन के लिये तो यह एक मशहूर श्रीमानी गई है। वीर्यस्तम्भन संधी शायद ही कोई नुस्खा होगा, जिसमें ग्रफीम का उपयोग न हो । प्रयोग - अतिसार अतिसार के अन्दर अफीम और केशर को समान भाग लेकर पीसकर एक रची प्रमाण की गोली बनाकर शहद के साथ देने से लाभ होता है। अजीर्ण-भयकर जीर्ण में नारियल में छेद कर २ रत्ती अफीम उसमें रखकर ग्राम पर पकाकर खिलाने से लाभ होता है । आमातिसार और विशूचिका - श्रामातिसार श्रौर विशुचिका में अफीम, जायफल, केशर और कपूर समान भाग खरल करके २ रत्ती की गोलियाँ बनाकर जल के साथ देने से लाभ होता है । संग्रहणी- अफीम और बच्छनाग तीन २ माशे, लोहे की भस्म १० रत्ती और कम १२ रत्ती इन चारों वस्तुओं को दूध में घोटकर एक २ रवी की गोलियाँ बनाकर दूध के साथ सेवन करना चाहिये, किंतु इसको सेवन करने तक जल का त्याग करके खाने-पीने में दूध ही का व्यहार करना चाहिये । नारू-फीम और साँप की केंचुली की टिचिया बनाकर नारू पर लगाने से फायदा होता है । नासूर - मनुष्य के नाखून की राख में दो या ढाई रत्ती अफीम मिलाकर गोलियाँ बनाकर सेवन करने से लाभ होता है। गठिया और आक्षेप वायु - गठिया, श्राक्षेपक वायु, हनुम्तम्भ, प्रलाप श्रादि रोगों में उचित मात्रा में श्रफीम देने से बहुत लाभ होता है। स्नायु पीड़ा-स्नायु सम्बन्धी वात पोड़ा पर ग्रफीम का लेप करने से बहुत लाभ होता है । दंत पीड़ा श्रफीम और नौसादार को पीस कर दाँत के छिद्र में रखने से दत पीड़ा मिटती है। मस्तक रोग-चार रत्ती अफीम औौर दो लौंग पीसकर गरम करके लेप करने से सर्दी और बादी का सिर दर्द मिटता है। नासूर - अफीम और हुक्के के कीट की बत्ती बनाकर भरने से नासूर में लाभ होता है। पक्वातिसार - अफीम को सेंक कर उचित मात्रा में खिलाने से पक्वातिसार मिटता है। कर्ण पीडा - अफीम की श्राधी रत्ती भस्म गुलाब के तेल में मिलाकर कान में टपकाने से कान का दर्द मिटता है । कठ रोग- अफीम के डोडे और श्रजवायन को पानी में श्रौटा कर उस पानी से कुल्ले करने से हुआ गला दुरुस्त हो जाता है। गर्भाशय की पीडा ~ अफीम के डोड़ों का क्वाथ पिलाने से बच्चा होने के बाद की गर्भाशय की पीड़ा मिटती है। खाँसी और जुकाम- अफीम के बीज सहित ६ तोले डोडों का काढा बनाकर उस काढे में ढाई छटाँक मिश्री डालकर शर्बत बना लेना चाहिये । इसमें से तीन तोला शर्वत दिन में दो बार देने से खाँसी और जुकाम मिटते हैं। कमर की पीडा - एक तोले पोस्ते दाने में एक तोला मिश्री मिलाकर फकी देने से कमर की पीडा मिटती है। केश रोग - इसके बीजों को दूध के साथ पीसकर लेप करने से केशों का दारुण रोग मिटता है । आमाशय की सूजन - श्रामाशय की मिल्ली की सूजन में इसका लेप करने से बड़ा लाभ अफीम पाक - अकरकरा, केशर, लवग, जायफन, भग, सिंगरफ, सब चार ४ तोला, दूध में डोला * यत्र द्वारा शुद्ध की हुई अफीम २ तोला लेकर पीसकर छ गुनी मिश्री की चासनी में अच्छी तरह से मिलाकर चार २ माशे की गोलियाँ बनावें । स्त्री प्रसग में दो घंटे पूर्व इस गोली को खाकर ऊपर से दूध पी लेना चाहिये, इससे बहुत स्तम्भन होता है । अफीम का प्लास्टर - अफीम का बारीक चूर्या २।। तोला, रेजिन प्लास्टर २२॥ तोला । रेजिन प्लास्टर को गरम पानी के अन्दर पिघला कर उसमें धीरे २ अफीम को मिलाना चाहिये, किसी भी स्थान की वेदना को मिटाने के लिये इस प्लास्टर का उपयोग किया जाता है । * डोलायत्र - एक कढाई में दूध भरके उसके ऊपर दोनों कड़ों में एक लकडी फँसाकर उस लकड़ी में कपड़े में बधी हुई अफीम की पोटली को बाधकर नीचे आँच लगाना चाहिये । प्रत्येक वस्तु डोलायत्र से इसप्रकार श्राँच लगाई जाती है।
तक की खुराक में दी गई तो भी इसने चर्बी पर कोई बुरा असर नहीं बतलाया, बल्कि बहुत से मामलों में इसने चर्बी को घटाने का काम किया । "अफीम का रासायनिक विश्लेषण करने पर उसके अन्दर प्रधान रूप से "मारफाइन" नामक उपचार और "नॉरकोटाइन " नामक एक प्रकार का सत्व, ये दो तत्व पाये गये । पटने की अफीम में "मॉरफाइन" तीन सौ अड़सठ परसेंट और "नॉरकोटाइन" छः छयासठ परसेंट पाया गया । मालवे की अफीम में "मॉरफाइन" चार सौ इकसठ परसेंट व "नॉरकोटाइन" पाँच सौ चौदह परसेंट पाया गया । स्मरना की अफीम में "मॉरफाइन" आठ सौ सत्ताईस व "नॉरकोटाइन,, एक सौ चौबीस परसेंट पाया गया । "नॉरकोटाइन अफीम में से प्राप्त होने वाला एक प्रकार का सत्व है। जिसमें कि निद्रा लाने का खास गुण होता है । यह अफीम में काफी मात्रा में रहता है। अगर जानवरों की शिराओं में इसका इजेक्शन दिया जाय, तो उनका ब्लडप्रेशर गिर जाता है। रक्तवाहिनी नलियाँ ढोली हो जाती है। ब्लडप्रेशर गिरने से हृदय की गति पर भी प्रभाव पड़ता है । मस्तिष्क की गति पर भी असर दिखाकर यह उसे ढीला करता है। "दूसरा तत्व "मॉरफाइन" नॉरकोटाइन से अधिक जोरदार व अधिक महत्वपूर्ण है । यह भी अफीम का एक उपक्षार है। प्रारंभ में लोगों का ध्यान इसकी श्रोर कम गया, लेकिन बाद में है इसके ऊपर कई प्रकार के अनुसधान हुए, और कई बीमारियों ने उपचार में इसकी उपयोगिता पाई गई। "ओपियम कमिशन ने भी वैज्ञानिक ढंग से इसका मनन किया। वे भी इसी नतीजे पर श्राये कि इसमें मॉरफाइन व नॉरकोटाइन ये दो मुख्य पदार्थ रहते हैं । मॉरफाइन में उपशामक और निद्रा लाने वाला गुग्ण विशेष है । और नॉरकोटाइन एक प्रकार का पुष्टिकारक और सामयिक ज्वरों को नष्ट करने वाला पदार्थ है। यही गुण किनाइन में भी पाये जाते हैं। किनाइन और अफीम में इन गुणों की समानता होने से ही यह भी मलेरिया में उपयोगी मानी जाती है । लेकिन प्रयोगों से मालूम हुआ कि, उपशामक पदार्थ होने की वजह से अफीम मलेरिया के बाह्यचिन्हों को दबा देती है पर इस बीमारी के मूल-भूत कारण पर कोई असर नहीं पहुँचाती । डाक्टर रॉबर्टस ने नॉरकोटाइन को मलेरिया में मुफीद बतलाया है । किन्तु इस विषय में में मतभेद है और इसके पश्चात् के अनुसंधानों से भी यह मालूम हुआ है कि, नॉरकोटाइन में रक्तोपजीवी मलेरिया के कीटाणुओं को मारने की शक्ति नहीं है।" " कर्नल चोपरा ने मलेरिया, मधुमेह, और निमोनिया में पाँच मेन से लगाकर बीस मेन तक की मात्रा में रोगियों को दिया, किन्तु कोई उल्लेखनीय सर नहीं दिखाई दिया। हृदय पर और श्वास क्रिया पर इसका किसी भी प्रकार का उत्तेजक प्रभाव दिसलाई नहीं दिया। इतना ही मालूम हुआ कि बीमार के ऊपरी कष्ट, नष्ट होगये, उसकी थकान मिट गई और उसे शीघ्र ही नीद श्री गई । " उपरोक्त विवेचन से मालूम होता है कि अफीम का असर सीधा स्नायु-मडल के ऊपर होता है। यह स्नायु जाल को एक दम स्तब्ध या मदहोश कर देती है, जिससे सारे शरीर में एक प्रकार की निस्तब्धता हो जाती है और रोगी की चाहे वह किसी भी रोग से ग्रसित हो, यत्रणा दब जाती है, जिससे उसे श्रागम मालूम होता है । इसका दूसरा विशेष गुण स्तभन का है। इसलिये श्रुतिसार इत्यादि रोगों में भी यह फायदा पहुॅचाती है तथा वीर्य स्तम्भन के लिये तो यह एक मशहूर श्रीमानी गई है। वीर्यस्तम्भन संधी शायद ही कोई नुस्खा होगा, जिसमें ग्रफीम का उपयोग न हो । प्रयोग - अतिसार अतिसार के अन्दर अफीम और केशर को समान भाग लेकर पीसकर एक रची प्रमाण की गोली बनाकर शहद के साथ देने से लाभ होता है। अजीर्ण-भयकर जीर्ण में नारियल में छेद कर दो रत्ती अफीम उसमें रखकर ग्राम पर पकाकर खिलाने से लाभ होता है । आमातिसार और विशूचिका - श्रामातिसार श्रौर विशुचिका में अफीम, जायफल, केशर और कपूर समान भाग खरल करके दो रत्ती की गोलियाँ बनाकर जल के साथ देने से लाभ होता है । संग्रहणी- अफीम और बच्छनाग तीन दो माशे, लोहे की भस्म दस रत्ती और कम बारह रत्ती इन चारों वस्तुओं को दूध में घोटकर एक दो रवी की गोलियाँ बनाकर दूध के साथ सेवन करना चाहिये, किंतु इसको सेवन करने तक जल का त्याग करके खाने-पीने में दूध ही का व्यहार करना चाहिये । नारू-फीम और साँप की केंचुली की टिचिया बनाकर नारू पर लगाने से फायदा होता है । नासूर - मनुष्य के नाखून की राख में दो या ढाई रत्ती अफीम मिलाकर गोलियाँ बनाकर सेवन करने से लाभ होता है। गठिया और आक्षेप वायु - गठिया, श्राक्षेपक वायु, हनुम्तम्भ, प्रलाप श्रादि रोगों में उचित मात्रा में श्रफीम देने से बहुत लाभ होता है। स्नायु पीड़ा-स्नायु सम्बन्धी वात पोड़ा पर ग्रफीम का लेप करने से बहुत लाभ होता है । दंत पीड़ा श्रफीम और नौसादार को पीस कर दाँत के छिद्र में रखने से दत पीड़ा मिटती है। मस्तक रोग-चार रत्ती अफीम औौर दो लौंग पीसकर गरम करके लेप करने से सर्दी और बादी का सिर दर्द मिटता है। नासूर - अफीम और हुक्के के कीट की बत्ती बनाकर भरने से नासूर में लाभ होता है। पक्वातिसार - अफीम को सेंक कर उचित मात्रा में खिलाने से पक्वातिसार मिटता है। कर्ण पीडा - अफीम की श्राधी रत्ती भस्म गुलाब के तेल में मिलाकर कान में टपकाने से कान का दर्द मिटता है । कठ रोग- अफीम के डोडे और श्रजवायन को पानी में श्रौटा कर उस पानी से कुल्ले करने से हुआ गला दुरुस्त हो जाता है। गर्भाशय की पीडा ~ अफीम के डोड़ों का क्वाथ पिलाने से बच्चा होने के बाद की गर्भाशय की पीड़ा मिटती है। खाँसी और जुकाम- अफीम के बीज सहित छः तोले डोडों का काढा बनाकर उस काढे में ढाई छटाँक मिश्री डालकर शर्बत बना लेना चाहिये । इसमें से तीन तोला शर्वत दिन में दो बार देने से खाँसी और जुकाम मिटते हैं। कमर की पीडा - एक तोले पोस्ते दाने में एक तोला मिश्री मिलाकर फकी देने से कमर की पीडा मिटती है। केश रोग - इसके बीजों को दूध के साथ पीसकर लेप करने से केशों का दारुण रोग मिटता है । आमाशय की सूजन - श्रामाशय की मिल्ली की सूजन में इसका लेप करने से बड़ा लाभ अफीम पाक - अकरकरा, केशर, लवग, जायफन, भग, सिंगरफ, सब चार चार तोला, दूध में डोला * यत्र द्वारा शुद्ध की हुई अफीम दो तोला लेकर पीसकर छ गुनी मिश्री की चासनी में अच्छी तरह से मिलाकर चार दो माशे की गोलियाँ बनावें । स्त्री प्रसग में दो घंटे पूर्व इस गोली को खाकर ऊपर से दूध पी लेना चाहिये, इससे बहुत स्तम्भन होता है । अफीम का प्लास्टर - अफीम का बारीक चूर्या दो।। तोला, रेजिन प्लास्टर बाईस॥ तोला । रेजिन प्लास्टर को गरम पानी के अन्दर पिघला कर उसमें धीरे दो अफीम को मिलाना चाहिये, किसी भी स्थान की वेदना को मिटाने के लिये इस प्लास्टर का उपयोग किया जाता है । * डोलायत्र - एक कढाई में दूध भरके उसके ऊपर दोनों कड़ों में एक लकडी फँसाकर उस लकड़ी में कपड़े में बधी हुई अफीम की पोटली को बाधकर नीचे आँच लगाना चाहिये । प्रत्येक वस्तु डोलायत्र से इसप्रकार श्राँच लगाई जाती है।
बेगूसराय में आयोजित हो रहे पीजी सत्र 2021-23 के सेकंड सेमेस्टर के परीक्षार्थियों का परीक्षा केंद्र LNMU के परीक्षा विभाग द्वारा बदल दिया गया है। विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने पत्र जारी किया है। जीडी कॉलेज बेगूसराय और एपीएसएम कॉलेज बरौनी के पीजी सेमेस्टर 2 के छात्रों का परीक्षा केंद्र आरसीएस कॉलेज मंझौल में बनाया गया था। अब विश्वविद्यालय द्वारा आरसीएस कॉलेज मंझौल से परीक्षा केंद्र को बदलकर एस के महिला कॉलेज बेगूसराय बनाया गया है। इससे पहले भी पीजी की परीक्षा में आरसीएस कॉलेज दिए गए परीक्षा केंद्र को बदलकर विश्वविद्यालय ने एसबीएसएस कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया था। एग्जाम कंट्रोलर ने इसकी सूचना केंद्राधीक्षक और सभी कॉलेज के प्राचार्य को भी दी है। बता दें कि विश्वविद्यालय द्वारा एस के महिला कॉलेज में B. Ed की परीक्षा का भी केंद्र केंद्र बनाया गया है। अब मंझौल कालेज का भी परीक्षा केंद्र बदलकर यही कर दिया दिया गया है। स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर ( सत्र 2021-23 ) परीक्षा 2022 की परीक्षा प्रपत्र और शुल्क ऑनलाइन के माध्यम से जमा नहीं हो पा रहा है। वैसे परीक्षार्थी के लिए अंतिम रूप से परीक्षा प्रपत्र जमा शुल्क ऑफलाइन माध्यम से दिनांक 4 मई को अंतिम अवसर के साथ विश्वविद्यालय मुख्यालय में स्वीकार किया जायेगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बेगूसराय में आयोजित हो रहे पीजी सत्र दो हज़ार इक्कीस-तेईस के सेकंड सेमेस्टर के परीक्षार्थियों का परीक्षा केंद्र LNMU के परीक्षा विभाग द्वारा बदल दिया गया है। विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने पत्र जारी किया है। जीडी कॉलेज बेगूसराय और एपीएसएम कॉलेज बरौनी के पीजी सेमेस्टर दो के छात्रों का परीक्षा केंद्र आरसीएस कॉलेज मंझौल में बनाया गया था। अब विश्वविद्यालय द्वारा आरसीएस कॉलेज मंझौल से परीक्षा केंद्र को बदलकर एस के महिला कॉलेज बेगूसराय बनाया गया है। इससे पहले भी पीजी की परीक्षा में आरसीएस कॉलेज दिए गए परीक्षा केंद्र को बदलकर विश्वविद्यालय ने एसबीएसएस कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया था। एग्जाम कंट्रोलर ने इसकी सूचना केंद्राधीक्षक और सभी कॉलेज के प्राचार्य को भी दी है। बता दें कि विश्वविद्यालय द्वारा एस के महिला कॉलेज में B. Ed की परीक्षा का भी केंद्र केंद्र बनाया गया है। अब मंझौल कालेज का भी परीक्षा केंद्र बदलकर यही कर दिया दिया गया है। स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर परीक्षा दो हज़ार बाईस की परीक्षा प्रपत्र और शुल्क ऑनलाइन के माध्यम से जमा नहीं हो पा रहा है। वैसे परीक्षार्थी के लिए अंतिम रूप से परीक्षा प्रपत्र जमा शुल्क ऑफलाइन माध्यम से दिनांक चार मई को अंतिम अवसर के साथ विश्वविद्यालय मुख्यालय में स्वीकार किया जायेगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
खबरें बहुत सी है है पर आपकी खोज खबर लेने वाला शख्स ही जब मुश्किल में हो तब वो खबर सबसे एहम बन जाती है, ऐसा ही एक मामला डॉ सुनीलम का है. तिजारती समाजवादी बड़े देखे सुने होंगे पर ज़मीनी मिलना एक दुस्वपन है. कल मुलताई न्यायालय के न्यायाधीश एससी उपाध्याय ने मुलताई गोलीकांड में हत्या के दोषी पाए जाने पर पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम सहित तीन लोगों को आजीवन कारावास एवं हत्या के प्रयास में सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. मुलताई हत्याकांड पर अपने इस निर्णय पर पहुंची अदालत ने महज तीन मामलो में ही फैसला सुनाया है जबकि सरकारी तंत्र ने पूरे 66 मामले ठोंके थे. इत्तेफाक है या दुर्भाग्य की बाबरी आन्दोलन में हज़ारो लोगो को इकठ्ठा कर जमकर बलवा करने वाले बच निकलते है कुछ तो इसी राज्य के मुख्यमंत्री भी बन जाते है, पर एक साधारण किसान आन्दोलन पर करीब 70 किसान कानूनी शिकंजे में फंस जाते है . . अब मुआवाजे की कौन कहे घर का सामान-जमीन बेचकर ये लोग सरकारी केस लड़ेंगे. आप अब भी सोचते है की सब ठीक ठाक है .... . इससे पहले वे पत्र लिखकर शिवराज चौहान से भी ऐसे केसों में किसानो पर हो रहे जुल्म पर अपनी बात रख चुके है इसी कड़ी में उनका ये पत्र को देखा जा सकता है. प्रिय भाई शिवराज सिंह चौहान जी, आपको यह पत्र मुलताई किसान आंदोलन के संबंध में लिख रहा हूं। आप जानते ही है कि 12 जनवरी 1998 को पडय़ंत्रकपूर्वक दिग्विजयसिंह की कांग्रेस सरकारी द्वारा मेरी हत्या तथा मुलताई किसान आंदोलन को कुचलने के उद्ेश्य से पुलिस गोलीचालन कराया गया था । सरकार द्वारा 250 किसानों के खिलाफ 66 मुकदमें दर्ज किये गये थे जिसमें से 17 मुकदमें मुलताई न्यायालय में लंबित है। जिनमें 3 अतिरिक्त सत्र न्यायालय में अंतिम चरण में है। कृपया स्मरण करें कि मुलताई गोली चालन की तुलना भारतीय जनता पार्टी द्वारा जलियावालाबाग हत्याकांड से की गई थी तथा भा. जा. पासरकार का मुख्यमंत्री बनने के बाद सुश्री उभा भारती जी ने सभी प्रकरण वापस लेने की घोषणा सदन में की थी। सरकार की घोषणा के बाद अब तक 1 लाख से अधिक प्रकरण वापस लिये जा चुके है, तथा लोक अदालतो के माध्यम से लाखो प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है, लेकिन मुलताई किसान आंदोलन से जुडे 17 में से एक भी प्रकरण वापस नही लिया गया है। गत 14 वर्षो में अनेक बार पेशी चूक जाने के चलते सैकडों किसान कई बार गिरपतार किये जा चुके है तथा 20 किसानो की अब तक मौत भी हो चुकी है। आपसे अनुरोध है कि किसानो पर लादे गये फर्जी मुकदमों को वापस लेने हेतु निर्देश जारी करे ताकि न्यायालय के समक्ष सी. आर. पी. सी. की धारा 21 के तहत् प्रकरण वापसी का आवेदन लगाया जा सके। आप यह भी जानते हैं कि किसान संघर्ष समिति द्वारा शहीद किसानों की स्मृति में मुलताई में शहीद किसान स्तंभ के निर्माण की मांग की जा रही है, मैंने विधायक निधि से 20 लाख रुपए की राशि भी आवंटित की थी, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग से नुमति नही मलने के कारण शहीद किसान स्तंभ का निर्माण नही किया जा सका। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी को नागपुर नाके पर कार्यालय नर्माण के लिये उर्दू स्कुल (आर. टीओ. बेरियर) की करोड़ों रुपए की भूमि आवंटित कर दी गई लेकिन 24 शहीद किसानों के लिये आपकी सरकार ने एक इंच भूमि भी आवंटित करना उचित नही समझा यही नही मुलताई बस स्टैण्ड पर जो स्तंभ कांग्रेस शासन काल में रातो रात बनाया गया था। उस भूमि को भी आज तक शहीद स्तंभ के नाम पर आवंटित नही किया गया है। किसान सघर्ष समिति की मांग थी की मुलताई तहसील को शहीद किसान स्मारक के तौर पर विकसित किया जाये, लेकिन आपकी सरकार ने शहीद किसानो की स्मृति में भी कोई कदम नही उठाया है। किसान सघर्ष समिति 12 जनवरी को शहीद किसान दिवस पर पूरे प्रदेश में मनाने की मांग करती रही है लेकिन इस मांग पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया है। मुलताई पुलिस गोली चालन के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तथा बाद में आपकी सरकार ने शहीद किसानों के परिवार के एक सदस्य को स्थाई शासकीय नौकरी देने की घोषणा की थी लेकिन इस घोषणा पर भी अमल नहीं किया गया, आपसे अनुरोध है कि सभी शहीद किसानो के परिवार के एक-एक सदस्य को स्थाई नौकरी उपलब्ध कराने का निर्देश जारी करें। भारतीय जनता पार्टी ने मुलताई में पुलिस गोली चालन के बाद एसपी-कलेक्टर पर हत्या के मुकदमें दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन भा. जा. पा. की सरकार बनने के बाद एसपी कलेक्टर पर मुकदमा दर्ज करने की बजाय उन्हें पदोन्नति दी गई है। जबकि आप भलि भॉंति जानते है कि देश में अनेक गोली चालनो के बाद संबंधित अधिकारियो पर हत्या के मामले दर्ज किये गये है। आपसे अनुरोध है कि गोली चालन करने एवं करवाने वाले अधिकारियो पर मुकदमा दर्ज करवाने का निर्देश जारी करें । मुलताई किसान आंदोलन मुआवजे के सवाल को लेकर हुआ था। जिसमें फसल बीमा भी अहम मुद्दा था, भा. जा. पा. अपने घोषणा पत्रो में तथा भा. जा. पा. नेता अपने भाषणों में बराबर किसानों को दोनो मुद्दो को लेकर आश्वासन देते रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही सरकार द्वारा नही की गई है। मुलताई के किसानो द्वारा फसल बीमा की प्रिमियम राशि लगातार जमा कराई जाती रही है लेकिन फसल नष्ट होने के बावजूद उन्हे कम से कम दुगना मुआवजा तथा नियमानुसार फसल बीमा की मुआवजा राशि नही दी गई है। आपसे अनुरोध है कि इस संबंध में भी आप संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का कष्ट करे ं उक्त मुद्दो को लेकर किसान सघर्ष समिति का प्रतिनिधि मंडल आपसे अविलंब मुलाकात करना चाहता है आपसे अनुरोध है कि 12 जनवरी 2012 के पहले प्रतिनिधि मंडल को मुलाकात का समय दें । डॉ सुनीलम ने इन सब बातो के मद्देनज़र ही कल कहा "सरकार बदलने से किसानों के प्रति सरकार का दृष्टिकोण नहीं बदलता".
खबरें बहुत सी है है पर आपकी खोज खबर लेने वाला शख्स ही जब मुश्किल में हो तब वो खबर सबसे एहम बन जाती है, ऐसा ही एक मामला डॉ सुनीलम का है. तिजारती समाजवादी बड़े देखे सुने होंगे पर ज़मीनी मिलना एक दुस्वपन है. कल मुलताई न्यायालय के न्यायाधीश एससी उपाध्याय ने मुलताई गोलीकांड में हत्या के दोषी पाए जाने पर पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम सहित तीन लोगों को आजीवन कारावास एवं हत्या के प्रयास में सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. मुलताई हत्याकांड पर अपने इस निर्णय पर पहुंची अदालत ने महज तीन मामलो में ही फैसला सुनाया है जबकि सरकारी तंत्र ने पूरे छयासठ मामले ठोंके थे. इत्तेफाक है या दुर्भाग्य की बाबरी आन्दोलन में हज़ारो लोगो को इकठ्ठा कर जमकर बलवा करने वाले बच निकलते है कुछ तो इसी राज्य के मुख्यमंत्री भी बन जाते है, पर एक साधारण किसान आन्दोलन पर करीब सत्तर किसान कानूनी शिकंजे में फंस जाते है . . अब मुआवाजे की कौन कहे घर का सामान-जमीन बेचकर ये लोग सरकारी केस लड़ेंगे. आप अब भी सोचते है की सब ठीक ठाक है .... . इससे पहले वे पत्र लिखकर शिवराज चौहान से भी ऐसे केसों में किसानो पर हो रहे जुल्म पर अपनी बात रख चुके है इसी कड़ी में उनका ये पत्र को देखा जा सकता है. प्रिय भाई शिवराज सिंह चौहान जी, आपको यह पत्र मुलताई किसान आंदोलन के संबंध में लिख रहा हूं। आप जानते ही है कि बारह जनवरी एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे को पडय़ंत्रकपूर्वक दिग्विजयसिंह की कांग्रेस सरकारी द्वारा मेरी हत्या तथा मुलताई किसान आंदोलन को कुचलने के उद्ेश्य से पुलिस गोलीचालन कराया गया था । सरकार द्वारा दो सौ पचास किसानों के खिलाफ छयासठ मुकदमें दर्ज किये गये थे जिसमें से सत्रह मुकदमें मुलताई न्यायालय में लंबित है। जिनमें तीन अतिरिक्त सत्र न्यायालय में अंतिम चरण में है। कृपया स्मरण करें कि मुलताई गोली चालन की तुलना भारतीय जनता पार्टी द्वारा जलियावालाबाग हत्याकांड से की गई थी तथा भा. जा. पासरकार का मुख्यमंत्री बनने के बाद सुश्री उभा भारती जी ने सभी प्रकरण वापस लेने की घोषणा सदन में की थी। सरकार की घोषणा के बाद अब तक एक लाख से अधिक प्रकरण वापस लिये जा चुके है, तथा लोक अदालतो के माध्यम से लाखो प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है, लेकिन मुलताई किसान आंदोलन से जुडे सत्रह में से एक भी प्रकरण वापस नही लिया गया है। गत चौदह वर्षो में अनेक बार पेशी चूक जाने के चलते सैकडों किसान कई बार गिरपतार किये जा चुके है तथा बीस किसानो की अब तक मौत भी हो चुकी है। आपसे अनुरोध है कि किसानो पर लादे गये फर्जी मुकदमों को वापस लेने हेतु निर्देश जारी करे ताकि न्यायालय के समक्ष सी. आर. पी. सी. की धारा इक्कीस के तहत् प्रकरण वापसी का आवेदन लगाया जा सके। आप यह भी जानते हैं कि किसान संघर्ष समिति द्वारा शहीद किसानों की स्मृति में मुलताई में शहीद किसान स्तंभ के निर्माण की मांग की जा रही है, मैंने विधायक निधि से बीस लाख रुपए की राशि भी आवंटित की थी, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग से नुमति नही मलने के कारण शहीद किसान स्तंभ का निर्माण नही किया जा सका। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी को नागपुर नाके पर कार्यालय नर्माण के लिये उर्दू स्कुल की करोड़ों रुपए की भूमि आवंटित कर दी गई लेकिन चौबीस शहीद किसानों के लिये आपकी सरकार ने एक इंच भूमि भी आवंटित करना उचित नही समझा यही नही मुलताई बस स्टैण्ड पर जो स्तंभ कांग्रेस शासन काल में रातो रात बनाया गया था। उस भूमि को भी आज तक शहीद स्तंभ के नाम पर आवंटित नही किया गया है। किसान सघर्ष समिति की मांग थी की मुलताई तहसील को शहीद किसान स्मारक के तौर पर विकसित किया जाये, लेकिन आपकी सरकार ने शहीद किसानो की स्मृति में भी कोई कदम नही उठाया है। किसान सघर्ष समिति बारह जनवरी को शहीद किसान दिवस पर पूरे प्रदेश में मनाने की मांग करती रही है लेकिन इस मांग पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया है। मुलताई पुलिस गोली चालन के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तथा बाद में आपकी सरकार ने शहीद किसानों के परिवार के एक सदस्य को स्थाई शासकीय नौकरी देने की घोषणा की थी लेकिन इस घोषणा पर भी अमल नहीं किया गया, आपसे अनुरोध है कि सभी शहीद किसानो के परिवार के एक-एक सदस्य को स्थाई नौकरी उपलब्ध कराने का निर्देश जारी करें। भारतीय जनता पार्टी ने मुलताई में पुलिस गोली चालन के बाद एसपी-कलेक्टर पर हत्या के मुकदमें दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन भा. जा. पा. की सरकार बनने के बाद एसपी कलेक्टर पर मुकदमा दर्ज करने की बजाय उन्हें पदोन्नति दी गई है। जबकि आप भलि भॉंति जानते है कि देश में अनेक गोली चालनो के बाद संबंधित अधिकारियो पर हत्या के मामले दर्ज किये गये है। आपसे अनुरोध है कि गोली चालन करने एवं करवाने वाले अधिकारियो पर मुकदमा दर्ज करवाने का निर्देश जारी करें । मुलताई किसान आंदोलन मुआवजे के सवाल को लेकर हुआ था। जिसमें फसल बीमा भी अहम मुद्दा था, भा. जा. पा. अपने घोषणा पत्रो में तथा भा. जा. पा. नेता अपने भाषणों में बराबर किसानों को दोनो मुद्दो को लेकर आश्वासन देते रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही सरकार द्वारा नही की गई है। मुलताई के किसानो द्वारा फसल बीमा की प्रिमियम राशि लगातार जमा कराई जाती रही है लेकिन फसल नष्ट होने के बावजूद उन्हे कम से कम दुगना मुआवजा तथा नियमानुसार फसल बीमा की मुआवजा राशि नही दी गई है। आपसे अनुरोध है कि इस संबंध में भी आप संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का कष्ट करे ं उक्त मुद्दो को लेकर किसान सघर्ष समिति का प्रतिनिधि मंडल आपसे अविलंब मुलाकात करना चाहता है आपसे अनुरोध है कि बारह जनवरी दो हज़ार बारह के पहले प्रतिनिधि मंडल को मुलाकात का समय दें । डॉ सुनीलम ने इन सब बातो के मद्देनज़र ही कल कहा "सरकार बदलने से किसानों के प्रति सरकार का दृष्टिकोण नहीं बदलता".
किसान आंदोलन की दहशत, मध्यप्रदेश में सब्जी खरीदने उमड़ी भीड़, चार गुना बढ़े दाम (वीडियो) इंदौर। मध्यप्रदेश में एक जून से शुरू हो रहे 10 दिवसीय किसान आंदोलन के पहले सब्जी मंडियों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पिछले वर्ष हुए किसान आंदोलन के दौरान आम आदमी को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। उससे सबक लेते हुए इस बार हर व्यक्ति थोक में सब्जी खरीदने निकल पड़ा है। बाजार में उमड़ी भीड़ ने देखते ही देखते सब्जियों के दाम चार गुना तक महंगे कर दिए। हर कोई यह मानकर चल रहा है कि इस बार भी दूध और सब्जियों की किल्लत होने वाली है। इंदौर की चोइथराम मंडी, राजकुमार मंडी, नंदलालपुरा मंडी में आज सुबह पैर रखने की भी जगह नहीं थी। इंदौर ही नहीं रतलाम, मंदसौर, नीमच समेत उन सभी जिलों में भी किसान आंदोलन को लेकर तनाव दिखाई दे रहा है, जहां पिछले वर्ष उपद्रव हुआ था। इंदौर ही नहीं रतलाम, मंदसौर, नीमच समेत उन सभी जिलों में भी किसान आंदोलन को लेकर तनाव दिखाई दे रहा है, जहां पिछले वर्ष उपद्रव हुआ था। हालांकि आंदोलन को लेकर पुलिस और प्रशासन पुरी तरह मुस्तैद है और उसने सब्जी मंडी में सब्जी बेचने के लिए आने वाले किसानों को सुरक्षा का आश्वासन दिया।
किसान आंदोलन की दहशत, मध्यप्रदेश में सब्जी खरीदने उमड़ी भीड़, चार गुना बढ़े दाम इंदौर। मध्यप्रदेश में एक जून से शुरू हो रहे दस दिवसीय किसान आंदोलन के पहले सब्जी मंडियों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पिछले वर्ष हुए किसान आंदोलन के दौरान आम आदमी को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। उससे सबक लेते हुए इस बार हर व्यक्ति थोक में सब्जी खरीदने निकल पड़ा है। बाजार में उमड़ी भीड़ ने देखते ही देखते सब्जियों के दाम चार गुना तक महंगे कर दिए। हर कोई यह मानकर चल रहा है कि इस बार भी दूध और सब्जियों की किल्लत होने वाली है। इंदौर की चोइथराम मंडी, राजकुमार मंडी, नंदलालपुरा मंडी में आज सुबह पैर रखने की भी जगह नहीं थी। इंदौर ही नहीं रतलाम, मंदसौर, नीमच समेत उन सभी जिलों में भी किसान आंदोलन को लेकर तनाव दिखाई दे रहा है, जहां पिछले वर्ष उपद्रव हुआ था। इंदौर ही नहीं रतलाम, मंदसौर, नीमच समेत उन सभी जिलों में भी किसान आंदोलन को लेकर तनाव दिखाई दे रहा है, जहां पिछले वर्ष उपद्रव हुआ था। हालांकि आंदोलन को लेकर पुलिस और प्रशासन पुरी तरह मुस्तैद है और उसने सब्जी मंडी में सब्जी बेचने के लिए आने वाले किसानों को सुरक्षा का आश्वासन दिया।
[ प्रतिस्पर्द्धा प्राकृतिक नियम नहीं करते हैं । शक्ति खर्च करके अधिक से अधिक विकसित और क्रियाशील जीवन का निर्माण हो, इस बात के लिए जो महान संग्राम होता है, उसमें यथासम्भव प्रतिस्पर्द्धा को स्थान न मिलने देने के लिए प्रकृति बराबर उद्योग करती रहती है । चीटियाँ अपने रहने के बिल और अपनी एक अलग जाति बनाने के लिए एकता के सूत्र में बँधती हैं, ढेरों खाद्य सामग्री इकट्ठी करती हैं, अपनी नस्ल का पालन-पोषण करती है और इस प्रकार प्रतिस्पर्द्धा से अपने आपको बचाती हैं । चीटियों की जो क़िस्म प्रतिस्पर्द्धा से, दूर रहने में सब से अधिक कौशल का परिचय देती है उसको प्रकृति रक्षा के लिए चुन लेती है । इस चुनाव के साथ अन्य चीटियों का संहार करने का काम तो होता ही है । जब सर्दी पड़ने लगती है तो हमारे अधिकांश पक्षी धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ते हैं या अनेक गिरोह बनाकर एक दम लम्बी यात्रा कर डालते हैं; जीवन के अस्तित्व के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्द्धा नहीं करते । बहुत से कुतरने वाले जानवर प्रतिस्पर्द्धा का समय आने लगता है तो निद्रा देवी की गोद में जा शरण लेते हैं। उनमें से कुछ ऐसे भी होते हैं जो सर्दियों के लिए खाद्य-सामग्री इकट्ठी कर रखते है और काम करते समय आत्मरक्षा की दृष्टि से बड़ी-बड़ी बस्तियों में एक साथ रहते हैं । एशिया महाद्वीप के भीतरी भाग में बारहसिघा के खाने की वनस्पति सूख जाती है तो वह समुद्र की ओर प्रवास कर जाता है। बहुतायत से खाद्य सामग्री मिल सके, इसके लिए भैंसें एक महाद्वीप के इस सिरे से उस सिरे को चली जाती हैं। जब किसी नदी के किनारे [ १०९ ] ऊदबिलावों की संख्या बहुत बढ़ जाती है तो आपस में प्रतिस्पर्द्धा न होने देने के लिए वे दो भागों में बँट कर बुड्ढे बिलाव नदी के बहाव के नीचे की ओर तथा छोटे भिलाव ऊपर की ओर चले जाते हैं। यदि ऐसी स्थिति हो कि प्राणी न तो सो सफे, न प्रवास कर सकें, न खाद्य सामग्री इकट्ठी कर सकें और न चीटियों की भांति स्वयं अपनी खुराक पैदा कर सके, तो वे बया पक्षी की भांति नई क़िस्म की खुराक खाना शुरू कर देते हैं और इस तरह पुनः प्रतिस्पर्द्धा का आश्रय नहीं लेते । " प्रतिस्पर्द्धा मत करो, प्रतिस्पर्धा सदा प्राणियों के लिए हानिकर होती हैं, उसमे बचने के लिए तुम्हारे पास साधनों की कमी भी नहीं है, प्रकृति का यही कथन है । प्रकृति के इस तत्त्व को हम सदा ही पूरी तौर पर अनुभव नहीं करते, किन्तु वह उसमें हमेशा मौजूद रहता है। हर झाड़ी, जंगल, नदी और समुद्र - सब स्थानों से यही ध्वनि उठती है । " इसलिए संगठित होकर पारस्परिक सहयोग से काम लो, यह अचूक उपाय है जिसके द्वारा हरेक प्राणी खूब निश्चिन्त रह सकता है, यह उसके अस्तित्व की तथा शारीरिक, बौद्धिक और नैतिक प्रगति की सबसे बढ़िया गारण्टी है ।" प्रकृति का हमारे लिए यही उपदेश है। जिन प्राणियों ने अपनी-अपनी जाति में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है, उन सब ने ठीक इसी प्रकार व्यवहार किया है। प्राकृत से प्राकृत मनुष्य भी ऐसा ही आचरण करता रहा है। मनुष्य को आज जो स्थान मिला हुआ है, उसका कारण भी यही पारस्परिक सहयोग है. इस सम्बन्ध में हम अगले छाध्यायों में विचार करेंगे ।
[ प्रतिस्पर्द्धा प्राकृतिक नियम नहीं करते हैं । शक्ति खर्च करके अधिक से अधिक विकसित और क्रियाशील जीवन का निर्माण हो, इस बात के लिए जो महान संग्राम होता है, उसमें यथासम्भव प्रतिस्पर्द्धा को स्थान न मिलने देने के लिए प्रकृति बराबर उद्योग करती रहती है । चीटियाँ अपने रहने के बिल और अपनी एक अलग जाति बनाने के लिए एकता के सूत्र में बँधती हैं, ढेरों खाद्य सामग्री इकट्ठी करती हैं, अपनी नस्ल का पालन-पोषण करती है और इस प्रकार प्रतिस्पर्द्धा से अपने आपको बचाती हैं । चीटियों की जो क़िस्म प्रतिस्पर्द्धा से, दूर रहने में सब से अधिक कौशल का परिचय देती है उसको प्रकृति रक्षा के लिए चुन लेती है । इस चुनाव के साथ अन्य चीटियों का संहार करने का काम तो होता ही है । जब सर्दी पड़ने लगती है तो हमारे अधिकांश पक्षी धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ते हैं या अनेक गिरोह बनाकर एक दम लम्बी यात्रा कर डालते हैं; जीवन के अस्तित्व के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्द्धा नहीं करते । बहुत से कुतरने वाले जानवर प्रतिस्पर्द्धा का समय आने लगता है तो निद्रा देवी की गोद में जा शरण लेते हैं। उनमें से कुछ ऐसे भी होते हैं जो सर्दियों के लिए खाद्य-सामग्री इकट्ठी कर रखते है और काम करते समय आत्मरक्षा की दृष्टि से बड़ी-बड़ी बस्तियों में एक साथ रहते हैं । एशिया महाद्वीप के भीतरी भाग में बारहसिघा के खाने की वनस्पति सूख जाती है तो वह समुद्र की ओर प्रवास कर जाता है। बहुतायत से खाद्य सामग्री मिल सके, इसके लिए भैंसें एक महाद्वीप के इस सिरे से उस सिरे को चली जाती हैं। जब किसी नदी के किनारे [ एक सौ नौ ] ऊदबिलावों की संख्या बहुत बढ़ जाती है तो आपस में प्रतिस्पर्द्धा न होने देने के लिए वे दो भागों में बँट कर बुड्ढे बिलाव नदी के बहाव के नीचे की ओर तथा छोटे भिलाव ऊपर की ओर चले जाते हैं। यदि ऐसी स्थिति हो कि प्राणी न तो सो सफे, न प्रवास कर सकें, न खाद्य सामग्री इकट्ठी कर सकें और न चीटियों की भांति स्वयं अपनी खुराक पैदा कर सके, तो वे बया पक्षी की भांति नई क़िस्म की खुराक खाना शुरू कर देते हैं और इस तरह पुनः प्रतिस्पर्द्धा का आश्रय नहीं लेते । " प्रतिस्पर्द्धा मत करो, प्रतिस्पर्धा सदा प्राणियों के लिए हानिकर होती हैं, उसमे बचने के लिए तुम्हारे पास साधनों की कमी भी नहीं है, प्रकृति का यही कथन है । प्रकृति के इस तत्त्व को हम सदा ही पूरी तौर पर अनुभव नहीं करते, किन्तु वह उसमें हमेशा मौजूद रहता है। हर झाड़ी, जंगल, नदी और समुद्र - सब स्थानों से यही ध्वनि उठती है । " इसलिए संगठित होकर पारस्परिक सहयोग से काम लो, यह अचूक उपाय है जिसके द्वारा हरेक प्राणी खूब निश्चिन्त रह सकता है, यह उसके अस्तित्व की तथा शारीरिक, बौद्धिक और नैतिक प्रगति की सबसे बढ़िया गारण्टी है ।" प्रकृति का हमारे लिए यही उपदेश है। जिन प्राणियों ने अपनी-अपनी जाति में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है, उन सब ने ठीक इसी प्रकार व्यवहार किया है। प्राकृत से प्राकृत मनुष्य भी ऐसा ही आचरण करता रहा है। मनुष्य को आज जो स्थान मिला हुआ है, उसका कारण भी यही पारस्परिक सहयोग है. इस सम्बन्ध में हम अगले छाध्यायों में विचार करेंगे ।
जुलाई या अगस्त में काला सागर तट पर आराम - क्या बेहतर हो सकता है? और यह विदेश जाने के लिए आवश्यक नहीं है। उज्ज्वल छापों और अविस्मरणीय भावनाओं की एक बड़ी संख्या एडलर दे। अस्पताल "ज्ञान" हर किसी के लिए पर्यटन प्रदान करता है। लेकिन एक स्वास्थ्य रिसॉर्ट जाने से पहले, यह के विवरण का अध्ययन करने के लिए आवश्यक है। अनोखा उपाय "ज्ञान" (सोची), ग्राहक समीक्षाओं जो ज्यादातर सकारात्मक, शहर के केंद्र से सैर से सिर्फ 100 मीटर और 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अस्पताल "तीन सितारों" की श्रेणी है, और साल के किसी भी समय आगंतुकों स्वीकार करता है। लेकिन, कर्मचारियों के अनुसार, वास्तविक उत्तेजना यहां गर्मियों के महीनों में शुरू होता है। यह आसानी से समझाया गया हैः प्रत्येक न केवल उनके स्वास्थ्य में सुधार, लेकिन यह भी समुद्र तटीय पर धूप सेंकने के लिए करना चाहता है। सहारा तीन शयनगृह, जो जुड़ा गर्म संक्रमण होते हैं। मेहमान, आरामदायक कमरे में रहने के लिए एक या दो कमरों से मिलकर कर सकते हैं। एकल और सभी सुविधाओं के साथ अपार्टमेंट के रूप में उपलब्ध है। यह मानक कमरे, मानक और बढ़ाया आराम दूसरों प्रदान करता है। उन में जीवन यापन की लागत नीचे वर्णित किया जाएगा। अपार्टमेंट में एक रेफ्रिजरेटर, सेवा कर्मियों, टेलीविजन, एयर कंडीशनिंग के साथ संचार के लिए एक टेलीफोन है। इसके अलावा, हाल के वर्षों में कुछ इंटरनेट कनेक्शन का एक अवसर है। अस्पताल "ज्ञान" (एडलर) - एक स्वास्थ्य रिसॉर्ट, जिसका काम हृदय प्रणाली की समस्याओं और musculoskeletal प्रणाली को संबोधित कर के उद्देश्य से है। हालांकि, लोगों को यहाँ आए हैं, जो स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याओं की है। सुविधा उच्च शिक्षित विशेषज्ञों ने जो आचरण करेंगे रोजगार शरीर की एक पूरी परीक्षा और व्यापक उपचार की व्यवस्था। इस प्रकार, सीसीएम "ज्ञान" न केवल प्रतिदिन के काम से एक ब्रेक लेने के लिए, लेकिन यह भी, अपने स्वास्थ्य में सुधार, क्योंकि यह सभी आवश्यक निदान और उपचार उपकरण है की अनुमति देता है। वहाँ भौतिक चिकित्सा प्रक्रियाओं, चिकित्सकीय स्नान, मालिश, भौतिक चिकित्सा और अधिक करने के लिए सौंपा जा सकता है। "Matsesta" सब जो स्पा रिसॉर्ट के लिए आवागमन सेवा चाहते हैं। उपयोगी और विविध आहार मेहमानों के लिए एक उपाय "ज्ञान" (सोची) की पेशकश करने की कृपा है। संतुष्ट आगंतुकों की समीक्षा का कहना है कि मेनू मौसमी फलों और सब्जियों, मांस, मछली, स्वादिष्ट पेस्ट्री भी शामिल है। पावर दिन में तीन बार "बुफे" आपूर्ति की है। आहार भोजन के रूप में प्रस्तुत किया, स्वादिष्ट लोग हैं, जो जठरांत्र संबंधी मार्ग में समस्याएं आ रही खाने के लिए अनुमति देता है। हॉलिडे सब कुछ आप अस्पताल के क्षेत्र में की जरूरत है पा सकते हैं। यह अगर दौरे का कार्यक्रम है केवल छोड़ने के लिए आवश्यक है। गोले हरित क्षेत्र समुद्र से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर हैं। एक अच्छी तरह से सुसज्जित समुद्र तट खुद एक आरामदायक सहारा "ज्ञान" (सोची) है। समीक्षा कि मेहमानों को छोड़ने का कहना है कि यहां अतिरिक्त सेवाओं की पेशकश कर रहे हैं। तुम एक समुद्र तट कुर्सी या हवा गद्दा किराये पर ले सकते। समुद्र तट की बारिश, पीने के पानी के साथ फव्वारे के साथ सुसज्जित है। वहाँ एक शौचालय और स्वच्छता इकाई है। सक्रिय मेहमानों जेट स्की और नाव किराये पर ले सकते। उपकरण केवल वयस्क यात्रियों जारी किए हैं। जो समुद्र तट पर स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठाएं चाहते लोगों के लिए, यह कई बार और रेस्तरां चल रही है। सीधे एक कैफे के तट पर। यहाँ आप आइसक्रीम के कई प्रकार की कोशिश कर सकते एक ठंडा बीयर या एक पूर्ण रात के खाने के पीते हैं। केवल दोष यह समीक्षा के अनुसार उच्च कीमत है। हालांकि, यह ध्यान रखें कि छुट्टी भोजन की लागत हमेशा कुछ अधिक होती हैं में वहन किया जाना चाहिए। जेसीसी "ज्ञान" के राज्य क्षेत्र पर एक मजेदार हॉलिडे विभिन्न आयु वर्ग मिल जाएगा। वहाँ सक्रिय युवा लोगों के लिए एक डांस फ्लोर, साथ ही उत्साही पढ़ने के लिए एक पुस्तकालय है। सुरक्षा दस्तावेज़ पर एक किताब ले लो बिल्कुल मुफ्त हो सकता है। मैं आराम मिल जाता है करने के लिए क्या चाहते हैं, लेकिन मैं एक छोटे बच्चे के साथ छुट्टी पर आना पड़ा तो क्या होगा? लगभग समुद्र पर सभी रिसॉर्ट्स सेवाओं एक बच्चे के कमरे प्रदान करते हैं। कोई अपवाद नहीं और जटिल "ज्ञान" है। यहाँ सच पेशेवरों जो युवा मेहमानों के लिए दृष्टिकोण पता की एक टीम। ट्यूटर्स एक बच्चे के कमरे में सिर्फ माता-पिता के अभाव में बच्चों को देख नहीं है। वे लोगों के साथ लगे हुए हैं - पेंट, मिट्टी से ढाला, रिसॉर्ट क्षेत्र के माध्यम से टहल। वहाँ कई अद्भुत बच्चों के खेल के मैदानों, जो उच्च सुरक्षा की विशेषता है कर रहे हैं। स्वास्थ्य रिसॉर्ट उत्कृष्ट बुनियादी सुविधाओं के प्रदान करता है। वहाँ एक फार्मेसी, भोजन विक्रय बिंदु, टेलीफोन बिंदु, कई एटीएम है। स्वास्थ्य रिसॉर्ट "ज्ञान" - इस तरह की आवश्यक सेवाएं एक मिनी शहर प्रदान करता है। क्षेत्र में कीमतें - एक महत्वपूर्ण नुकसान। छुट्टियां मनाने ध्यान दें कि सभी वस्तुओं 10-15% पारंपरिक की तुलना में अधिक हैं। कौन सा कमरे उपलब्ध कराता है? अपार्टमेंट में एक मानक डबल बेड, टीवी, शॉवर और एक रेफ्रिजरेटर के साथ बाथरूम के लिए प्रदान करते हैं। दो सिंगल बेड स्थापित करने के लिए संभव। कमरे में वातानुकूलन है। उपचार के बिना एक कमरे में आवास के लिए 1,600 रूबल एक दिन का भुगतान करना होगा। चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से गुजरना करने की योजना बना उन, कमरे में रहने 2000 रूबल खर्च होंगे। कमरे में "परिवार" बैठक का कमरा, दालान, डबल बेडरूम की उपस्थिति भी शामिल है। पिछले अवतार में, वहाँ एक फ्रिज, टीवी, स्नान के साथ बाथरूम है। यह वैकल्पिक रूप से आगे बेबी बिस्तर पाया जा सकता है। 50% की छूट के साथ 6 साल से कम आयु के बच्चों निवास। 2200 रूबल - प्रति कमरा "परिवार" इलाज के बिना उपचार के साथ 1,800 रूबल एक दिन का भुगतान करने, होगा। कमरे के लिए "मानक उच्च आराम" हल्के रंग की विशेषता। यह आधुनिक फर्नीचर और घरेलू उपकरणों की सुविधा है। अपार्टमेंट में एक प्लाज्मा टीवी के लायक है। इसके अलावा, यात्रियों हेयर ड्रायर, लोहा, टेलीफोन आमंत्रित कर रहे हैं। बालकनी समुद्र सैर के सुंदर दृश्य प्रदान करता है। यह इंटरनेट से कनेक्ट करने के लिए संभव है। जो लोग अस्पताल "ज्ञान" (एडलर) के लिए आते हैं और उपचार के बिना इस तरह के एक कमरे में जीना चाहते हैं, यह खाता है कि दैनिक दर 1900 रूबल खर्च होंगे में रखना आवश्यक है। लेकिन उपचार के साथ, प्रति दिन 2300 का भुगतान करना होगा। सबसे महंगी परिवार कक्ष वृद्धि हुई आराम माना जाता है। एक बड़ा फ़ेरबदल के साथ यह दो बेडरूम का अपार्टमेंट। यहाँ हर किसी को घर पर महसूस कर सकते हैं। छज्जे पर दोनों बेडरूम और लिविंग रूम से पहुँचा जा सकता। बाथरूम एक आरामदायक शॉवर है। कमरे में एक हेयर ड्रायर, लोहा, रेफ्रिजरेटर, प्लाज्मा टीवी, प्रतिस्थापन तौलिए और चप्पलें हैं। उपचार के बिना कमरे में दैनिक ठहरने के लिए 2200 रूबल का भुगतान करना होगा। 2500 रूबल - उपचार के साथ। ये मूल्य हैं यह उपाय "ज्ञान" (सोची) प्रदान करता है। समीक्षा पता चलता है कि यह रिसॉर्ट्स और कम टैरिफ की तुलना में कम लगता है संभव है। हालांकि, सेवा की गुणवत्ता में यहां वास्तव में अधिक है। कैसे एक कमरा बुक करने के? बस आते हैं और अस्पताल की इमारतों सफल नहीं होगा में से एक में बसने। तथ्य यह है कई हर साल यहां आने की कोशिश है कि। यह इतना है कि खुश नहीं कर सकते हैं खाली सीटों अस्पताल "ज्ञान" (सोची)। एडलर - सिर्फ रूस और विदेशियों के लिए लोकप्रिय उपाय के रूप में। आदेश छुट्टी खराब करने के लिए नहीं है, आरक्षण अग्रिम चाहिए। इस आवेदन को भर कर स्वास्थ्य केंद्र की आधिकारिक साइट के माध्यम से किया जा सकता है। यहाँ पासपोर्ट डेटा, अनुमानित आगमन और प्रस्थान की तारीख, वांछित प्रकार के कमरे का संकेत मिला। साथ ही, आप ईमेल पते और मोबाइल फोन नंबर छोड़ने के लिए की जरूरत है। आरक्षण बल में प्रवेश के लिए, यह एक 50% भुगतान करने के लिए आवश्यक है। इस अस्पताल में सीधे नकद में किया जा सकता है। अस्पताल का पता "ज्ञान" - सोची, प्रबुद्धता स्ट्रीट 139. के शहर तुम भी एक टिकट के लिए भुगतान कर सकते हैं, रिसॉर्ट पर पैसा लगाने के किसी भी बैंक के माध्यम से खाते। खाता संख्या सहारा "ज्ञान" (फोन + 78,622 37-68-91) को फोन करके पाया जा सकता है। स्वास्थ्य रिसॉर्ट विशेष घटनाओं आयोजित कर रहे हैं, सीमित वित्तीय संसाधनों के साथ लोगों के लिए सस्ता छुट्टी की इजाजत दी। यही कारण है कि सहारा "ज्ञान" प्रदान करता है? कार्रवाई "रजत युग" पेंशनरों के लिए प्रदान की जाती है। यह रियायती दरों पर कमरे बुक करने के लिए मानक या मानक अर्थव्यवस्था संभव है। निवास 1600 से प्रतिदिन 1900 रूबल के लिए खर्च होंगे। अंतिम कीमत मौसम और कमरे श्रेणी पर निर्भर करेगा। "रजत युग" आरामदायक कमरे, उपचार, गुणवत्ता वाले भोजन में आवास उपलब्ध कराता है। अपार्टमेंट एक बच्चे 12 या उससे कम आयु के लिए एक अतिरिक्त बिस्तर के साथ सुसज्जित किया जा सकता है। छोटे कैम्पर 50% छूट के साथ रहते हैं। आप एक डॉक्टर की नियुक्ति है, तो यह संभव है भी अस्पताल "ज्ञान" को पाने के लिए। "ओपन दक्षिण" एक गुणवत्ता छुट्टी है, जो बीमारी प्रोफ़ाइल के लिए चिकित्सा के साथ जोड़ा जा सकता है प्रदान करता है। दैनिक कमरे की दर 1450 से 1950 रूबल के लिए किया जाएगा। मूल्य के मौसम पर निर्भर करता है। आप कम से कम 7 दिन बुक कर सकते हैं। musculoskeletal प्रणाली और हृदय प्रणाली के रोगों के उपचार - स्वास्थ्य रिसॉर्ट दो मुख्य प्रोफ़ाइल है। इसके अलावा, संचार प्रणाली और परिधीय तंत्रिका तंत्र की चिकित्सा। जो लोग किसी भी स्वास्थ्य समस्या है, तो आप निश्चित रूप से अस्पताल "ज्ञान" यात्रा करनी चाहिए। उपचार अत्यधिक कुशल विशेषज्ञों जो एक संपूर्ण जांच, एक निदान आचरण और उचित उपचार की व्यवस्था द्वारा किया जाता है। हॉलिडे की राय में, अस्पताल में प्रक्रियाओं के कई एक कम कीमत पर आयोजित की जाती हैं। आपको बस इतना करना है - एक टिकट चिह्नित "उपचार" और एक आराम भौतिक चिकित्सा, चिकित्सकीय मालिश और जड़ी बूटियों के साथ स्नान का आनंद लें पूर्व खरीद करने के लिए है। स्नान की संचार प्रणाली में इस तरह के प्रकार के रोगों के साथ लोगों को हाइड्रोजन सल्फाइड, हर्बल नमक, bischofite, हर्बल, खनिज, आयोडीन ब्रोमीन, मोती के रूप में नियुक्त कर रहे हैं। इन प्रक्रियाओं रक्त प्रवाह और रक्तचाप को सामान्य बनाने की अनुमति है। इसके अलावा, स्नान पूरी तरह से आराम करो। यह उन्हें शाम को लेने के लिए सिफारिश की है। ऐसा नहीं है कि प्रक्रिया चिकित्सक केवल सैरगाह कर सकते हैं की नियुक्ति के लिए ध्यान में रखा जाना चाहिए। स्वतंत्र रूप से स्वागत करने के लिए आते संभव नहीं होगा। ऐसी प्रक्रियाओं उनके मतभेद है। अस्पताल के रोगियों में सभी प्रक्रियाओं संकेत के अनुसार चुने गए हैं। पर्याप्त कुशल हार्डवेयर अल्ट्रासाउंड का उपयोग कर चिकित्सा है। इसके अलावा आयोडीन ब्रोमीन और हाइड्रोजन सल्फाइड पानी और गंदगी का उपयोग कर लोकप्रिय वैद्युतकणसंचलन। लेजर चुंबकीय चिकित्सा रोगियों सिर दर्द को हटा दें और रक्तचाप को सामान्य बनाने की अनुमति देता है। हृदय प्रणाली के रोगों के साथ लोगों को भी electrosleep दिखाया गया है। अल्ट्रासाउंड का उपयोग कर साँस लेना द्वारा सिफारिश की श्वसन प्रणाली है, साथ ही औषधीय जड़ी-बूटियों के अर्क के रोगों के साथ मरीजों। यह एक भाप और तेल उपकरण के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस तरह की साँस लेना ही मदद नहीं क्रोनिक ब्रोंकाइटिस के लक्षण निकालने के लिए, लेकिन यह भी पूरी तरह से आराम करने के लिए। आप रात में प्रक्रिया करते हैं, नींद की गुणवत्ता की गारंटी है। दिखा रहा है साँस लेना भी अक्सर बीमार बच्चों है। प्रक्रियाओं अस्पताल चिकित्सक की संख्या अलग-अलग स्थापित करता है, प्रत्येक रोगी की विशेषताओं के अनुसार। अस्पताल विशेषज्ञों के महान ध्यान अच्छा शारीरिक व्यायाम दे। सुबह जिमनास्टिक के साथ समुद्र तट पर हर सुबह। पर जाएं यह किसी को भी हो सकता है। आउटडोर अभ्यास पूरे दिन के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं। श्वास पुरानी फेफड़ों के रोग के साथ लोगों को दिखाया अभ्यास। विशेषज्ञ भी भौतिक चिकित्सा प्रदर्शन किया। सबक दोनों व्यक्तिगत और समूह हो सकता है। अपने जीवन के दौरान ज्यादातर लोगों को कम से कम एक बार उसकी पीठ में दर्द का अनुभव करने के लिए। इस लक्षण सर्दी या तनाव का संकेत हो सकता है, और एक अधिक जटिल बीमारी का विकास कर सकते हैं। जैसा कि ऊपर उल्लेख, अस्पताल "ज्ञान" musculoskeletal प्रणाली के बीमारियों पर केंद्रित है। पहली जगह में खाते में रीढ़ की हड्डी में स्वास्थ्य लिया जाता है। अद्वितीय तकनीकों का प्रयोग सफलतापूर्वक एक स्वास्थ्य रिसॉर्ट के इलाज के लिए और हर्नियेटेड intervertebral फलाव लागू किया दवा "Karipazim"। औषधि वैद्युतकणसंचलन द्वारा इंजेक्ट किया जाता है। उसकी पीठ में दर्द सता दूर करने के लिए बस कुछ ही संभव उपचार में। कोई समस्या नहीं सामान्य जीवन की ओर लौटने के साथ एक अस्पताल "ज्ञान" में उपचार के बाद रोगियों के अधिकांश। रीढ़ की बीमारियों के इलाज में काफी महत्व की मालिश की है। किसी भी हेरफेर केवल पर्चे पर योग्य कर्मियों द्वारा किए गए। हस्त शास्त्रीय जोनल मालिश उत्कृष्ट relieves दर्द है, रीढ़ की वक्रता समाप्त, सही मुद्रा में मदद करता है। एक विद्युत मालिश - यह एक नई तकनीक के रूप में अस्पताल में प्रयोग किया जाता है। विशेषज्ञ हाथ, पैर, पैर, कमर के साथ हेरफेर आयोजित करता है। प्रक्रिया 30-40 मिनट के लिए किया जाता है। रोगी पूरी तरह से आराम करने में असमर्थ है। सत्र के दौरान कुछ भी सो जाते हैं। स्वास्थ्य हमेशा पहले आता है, लेकिन यह भी बाहरी पर भूल नहीं की जानी चाहिए। रिसोर्ट में न्यायपूर्ण सेक्स के लिए एक ब्यूटी पार्लर चलाता है। विशेषज्ञ आपको त्वचा की व्यक्तिगत विशेषताओं के अनुसार देखभाल के लिए एक व्यापक कार्यक्रम का चयन करने में मदद करेगा। धारण पर रखा गया कायाकल्प उपचार, व्यापक सफ़ाई की मालिश चेहरे और गर्दन। खेतों में प्रयुक्त अल्ट्रासोनिक और यांत्रिक तकनीक है कि एक व्यक्ति बेदाग हालत में लाने के लिए अनुमति देते हैं। ब्यूटी पार्लर के रासायनिक छीलने, मौसा और papillomas को हटाने, रंजकता को हटाने का आयोजन किया। 30 साल, एक विशाल लोकप्रिय mesotherapy की आयु से अधिक महिलाओं में। सहारा केवल त्वचा हालत में सुधार नहीं कर सकते हैं, लेकिन यह भी स्वरूप बदलने के। इन पेशेवरों आप सौंदर्य प्रसाधन कि उपस्थिति की एक विशेष प्रकार फिट होगा चुनें में मदद मिलेगी। एक संभावना पलकें, स्थायी मेकअप होंठ और भौंह, छेदे हुए कान बनाते हैं। सेल्युलाईट उपचार "नारंगी के छिलके" से छुट्टी पर छुटकारा मिल जाएगा। wraps के विभिन्न प्रकार (चॉकलेट, समुद्री शैवाल, अंगूर)। आवश्यक तेलों का उपयोग कर समस्या क्षेत्रों की एक मालिश के रूप में लोकप्रिय। आप अस्पताल "ज्ञान" के बारे में सकारात्मक बयान की एक बड़ी संख्या पा सकते हैं। समीक्षा के अनुसार, यह साल के किसी भी समय एक गुणवत्ता छुट्टी के लिए सब कुछ है। कई लोग अभी भी गर्मी के दौरान यहां आने के लिए पसंद करते हैं। गर्म दिन पर, आप केवल अपने स्वास्थ्य में सुधार नहीं कर सकते हैं, लेकिन यह भी कोमल समुद्री सोख। अपने आप में नमकीन हवा उपयोगी है। सहारा के अतिथि केवल दोष यह एक इनडोर स्विमिंग पूल के अभाव पर विचार करें। तैरना सही मुद्रा, रीढ़ की हड्डी के साथ कई समस्याओं के समाधान के बढ़ावा देता है। और यह खुशी जब समुद्र पर्याप्त गर्म है, गर्मियों में ही उपलब्ध है। कई खुश उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे और सुविधाजनक स्थान है, जो अस्पताल "ज्ञान" है। नक्शे पर बिना किसी समस्या के वस्तु का पता लगाया जा सकता है। अवकाश के दौरान स्वास्थ्य रिसॉर्ट वहाँ छोड़ने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि वहाँ आराम से रहने के लिए सब कुछ है। यह कोई संयोग नहीं कई 3-4 सप्ताह के लिए एक टिकट मिलता है।
जुलाई या अगस्त में काला सागर तट पर आराम - क्या बेहतर हो सकता है? और यह विदेश जाने के लिए आवश्यक नहीं है। उज्ज्वल छापों और अविस्मरणीय भावनाओं की एक बड़ी संख्या एडलर दे। अस्पताल "ज्ञान" हर किसी के लिए पर्यटन प्रदान करता है। लेकिन एक स्वास्थ्य रिसॉर्ट जाने से पहले, यह के विवरण का अध्ययन करने के लिए आवश्यक है। अनोखा उपाय "ज्ञान" , ग्राहक समीक्षाओं जो ज्यादातर सकारात्मक, शहर के केंद्र से सैर से सिर्फ एक सौ मीटर और चौबीस किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित है। अस्पताल "तीन सितारों" की श्रेणी है, और साल के किसी भी समय आगंतुकों स्वीकार करता है। लेकिन, कर्मचारियों के अनुसार, वास्तविक उत्तेजना यहां गर्मियों के महीनों में शुरू होता है। यह आसानी से समझाया गया हैः प्रत्येक न केवल उनके स्वास्थ्य में सुधार, लेकिन यह भी समुद्र तटीय पर धूप सेंकने के लिए करना चाहता है। सहारा तीन शयनगृह, जो जुड़ा गर्म संक्रमण होते हैं। मेहमान, आरामदायक कमरे में रहने के लिए एक या दो कमरों से मिलकर कर सकते हैं। एकल और सभी सुविधाओं के साथ अपार्टमेंट के रूप में उपलब्ध है। यह मानक कमरे, मानक और बढ़ाया आराम दूसरों प्रदान करता है। उन में जीवन यापन की लागत नीचे वर्णित किया जाएगा। अपार्टमेंट में एक रेफ्रिजरेटर, सेवा कर्मियों, टेलीविजन, एयर कंडीशनिंग के साथ संचार के लिए एक टेलीफोन है। इसके अलावा, हाल के वर्षों में कुछ इंटरनेट कनेक्शन का एक अवसर है। अस्पताल "ज्ञान" - एक स्वास्थ्य रिसॉर्ट, जिसका काम हृदय प्रणाली की समस्याओं और musculoskeletal प्रणाली को संबोधित कर के उद्देश्य से है। हालांकि, लोगों को यहाँ आए हैं, जो स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याओं की है। सुविधा उच्च शिक्षित विशेषज्ञों ने जो आचरण करेंगे रोजगार शरीर की एक पूरी परीक्षा और व्यापक उपचार की व्यवस्था। इस प्रकार, सीसीएम "ज्ञान" न केवल प्रतिदिन के काम से एक ब्रेक लेने के लिए, लेकिन यह भी, अपने स्वास्थ्य में सुधार, क्योंकि यह सभी आवश्यक निदान और उपचार उपकरण है की अनुमति देता है। वहाँ भौतिक चिकित्सा प्रक्रियाओं, चिकित्सकीय स्नान, मालिश, भौतिक चिकित्सा और अधिक करने के लिए सौंपा जा सकता है। "Matsesta" सब जो स्पा रिसॉर्ट के लिए आवागमन सेवा चाहते हैं। उपयोगी और विविध आहार मेहमानों के लिए एक उपाय "ज्ञान" की पेशकश करने की कृपा है। संतुष्ट आगंतुकों की समीक्षा का कहना है कि मेनू मौसमी फलों और सब्जियों, मांस, मछली, स्वादिष्ट पेस्ट्री भी शामिल है। पावर दिन में तीन बार "बुफे" आपूर्ति की है। आहार भोजन के रूप में प्रस्तुत किया, स्वादिष्ट लोग हैं, जो जठरांत्र संबंधी मार्ग में समस्याएं आ रही खाने के लिए अनुमति देता है। हॉलिडे सब कुछ आप अस्पताल के क्षेत्र में की जरूरत है पा सकते हैं। यह अगर दौरे का कार्यक्रम है केवल छोड़ने के लिए आवश्यक है। गोले हरित क्षेत्र समुद्र से सिर्फ एक सौ मीटर की दूरी पर हैं। एक अच्छी तरह से सुसज्जित समुद्र तट खुद एक आरामदायक सहारा "ज्ञान" है। समीक्षा कि मेहमानों को छोड़ने का कहना है कि यहां अतिरिक्त सेवाओं की पेशकश कर रहे हैं। तुम एक समुद्र तट कुर्सी या हवा गद्दा किराये पर ले सकते। समुद्र तट की बारिश, पीने के पानी के साथ फव्वारे के साथ सुसज्जित है। वहाँ एक शौचालय और स्वच्छता इकाई है। सक्रिय मेहमानों जेट स्की और नाव किराये पर ले सकते। उपकरण केवल वयस्क यात्रियों जारी किए हैं। जो समुद्र तट पर स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठाएं चाहते लोगों के लिए, यह कई बार और रेस्तरां चल रही है। सीधे एक कैफे के तट पर। यहाँ आप आइसक्रीम के कई प्रकार की कोशिश कर सकते एक ठंडा बीयर या एक पूर्ण रात के खाने के पीते हैं। केवल दोष यह समीक्षा के अनुसार उच्च कीमत है। हालांकि, यह ध्यान रखें कि छुट्टी भोजन की लागत हमेशा कुछ अधिक होती हैं में वहन किया जाना चाहिए। जेसीसी "ज्ञान" के राज्य क्षेत्र पर एक मजेदार हॉलिडे विभिन्न आयु वर्ग मिल जाएगा। वहाँ सक्रिय युवा लोगों के लिए एक डांस फ्लोर, साथ ही उत्साही पढ़ने के लिए एक पुस्तकालय है। सुरक्षा दस्तावेज़ पर एक किताब ले लो बिल्कुल मुफ्त हो सकता है। मैं आराम मिल जाता है करने के लिए क्या चाहते हैं, लेकिन मैं एक छोटे बच्चे के साथ छुट्टी पर आना पड़ा तो क्या होगा? लगभग समुद्र पर सभी रिसॉर्ट्स सेवाओं एक बच्चे के कमरे प्रदान करते हैं। कोई अपवाद नहीं और जटिल "ज्ञान" है। यहाँ सच पेशेवरों जो युवा मेहमानों के लिए दृष्टिकोण पता की एक टीम। ट्यूटर्स एक बच्चे के कमरे में सिर्फ माता-पिता के अभाव में बच्चों को देख नहीं है। वे लोगों के साथ लगे हुए हैं - पेंट, मिट्टी से ढाला, रिसॉर्ट क्षेत्र के माध्यम से टहल। वहाँ कई अद्भुत बच्चों के खेल के मैदानों, जो उच्च सुरक्षा की विशेषता है कर रहे हैं। स्वास्थ्य रिसॉर्ट उत्कृष्ट बुनियादी सुविधाओं के प्रदान करता है। वहाँ एक फार्मेसी, भोजन विक्रय बिंदु, टेलीफोन बिंदु, कई एटीएम है। स्वास्थ्य रिसॉर्ट "ज्ञान" - इस तरह की आवश्यक सेवाएं एक मिनी शहर प्रदान करता है। क्षेत्र में कीमतें - एक महत्वपूर्ण नुकसान। छुट्टियां मनाने ध्यान दें कि सभी वस्तुओं दस-पंद्रह% पारंपरिक की तुलना में अधिक हैं। कौन सा कमरे उपलब्ध कराता है? अपार्टमेंट में एक मानक डबल बेड, टीवी, शॉवर और एक रेफ्रिजरेटर के साथ बाथरूम के लिए प्रदान करते हैं। दो सिंगल बेड स्थापित करने के लिए संभव। कमरे में वातानुकूलन है। उपचार के बिना एक कमरे में आवास के लिए एक,छः सौ रूबल एक दिन का भुगतान करना होगा। चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से गुजरना करने की योजना बना उन, कमरे में रहने दो हज़ार रूबल खर्च होंगे। कमरे में "परिवार" बैठक का कमरा, दालान, डबल बेडरूम की उपस्थिति भी शामिल है। पिछले अवतार में, वहाँ एक फ्रिज, टीवी, स्नान के साथ बाथरूम है। यह वैकल्पिक रूप से आगे बेबी बिस्तर पाया जा सकता है। पचास% की छूट के साथ छः साल से कम आयु के बच्चों निवास। दो हज़ार दो सौ रूबल - प्रति कमरा "परिवार" इलाज के बिना उपचार के साथ एक,आठ सौ रूबल एक दिन का भुगतान करने, होगा। कमरे के लिए "मानक उच्च आराम" हल्के रंग की विशेषता। यह आधुनिक फर्नीचर और घरेलू उपकरणों की सुविधा है। अपार्टमेंट में एक प्लाज्मा टीवी के लायक है। इसके अलावा, यात्रियों हेयर ड्रायर, लोहा, टेलीफोन आमंत्रित कर रहे हैं। बालकनी समुद्र सैर के सुंदर दृश्य प्रदान करता है। यह इंटरनेट से कनेक्ट करने के लिए संभव है। जो लोग अस्पताल "ज्ञान" के लिए आते हैं और उपचार के बिना इस तरह के एक कमरे में जीना चाहते हैं, यह खाता है कि दैनिक दर एक हज़ार नौ सौ रूबल खर्च होंगे में रखना आवश्यक है। लेकिन उपचार के साथ, प्रति दिन दो हज़ार तीन सौ का भुगतान करना होगा। सबसे महंगी परिवार कक्ष वृद्धि हुई आराम माना जाता है। एक बड़ा फ़ेरबदल के साथ यह दो बेडरूम का अपार्टमेंट। यहाँ हर किसी को घर पर महसूस कर सकते हैं। छज्जे पर दोनों बेडरूम और लिविंग रूम से पहुँचा जा सकता। बाथरूम एक आरामदायक शॉवर है। कमरे में एक हेयर ड्रायर, लोहा, रेफ्रिजरेटर, प्लाज्मा टीवी, प्रतिस्थापन तौलिए और चप्पलें हैं। उपचार के बिना कमरे में दैनिक ठहरने के लिए दो हज़ार दो सौ रूबल का भुगतान करना होगा। दो हज़ार पाँच सौ रूबल - उपचार के साथ। ये मूल्य हैं यह उपाय "ज्ञान" प्रदान करता है। समीक्षा पता चलता है कि यह रिसॉर्ट्स और कम टैरिफ की तुलना में कम लगता है संभव है। हालांकि, सेवा की गुणवत्ता में यहां वास्तव में अधिक है। कैसे एक कमरा बुक करने के? बस आते हैं और अस्पताल की इमारतों सफल नहीं होगा में से एक में बसने। तथ्य यह है कई हर साल यहां आने की कोशिश है कि। यह इतना है कि खुश नहीं कर सकते हैं खाली सीटों अस्पताल "ज्ञान" । एडलर - सिर्फ रूस और विदेशियों के लिए लोकप्रिय उपाय के रूप में। आदेश छुट्टी खराब करने के लिए नहीं है, आरक्षण अग्रिम चाहिए। इस आवेदन को भर कर स्वास्थ्य केंद्र की आधिकारिक साइट के माध्यम से किया जा सकता है। यहाँ पासपोर्ट डेटा, अनुमानित आगमन और प्रस्थान की तारीख, वांछित प्रकार के कमरे का संकेत मिला। साथ ही, आप ईमेल पते और मोबाइल फोन नंबर छोड़ने के लिए की जरूरत है। आरक्षण बल में प्रवेश के लिए, यह एक पचास% भुगतान करने के लिए आवश्यक है। इस अस्पताल में सीधे नकद में किया जा सकता है। अस्पताल का पता "ज्ञान" - सोची, प्रबुद्धता स्ट्रीट एक सौ उनतालीस. के शहर तुम भी एक टिकट के लिए भुगतान कर सकते हैं, रिसॉर्ट पर पैसा लगाने के किसी भी बैंक के माध्यम से खाते। खाता संख्या सहारा "ज्ञान" को फोन करके पाया जा सकता है। स्वास्थ्य रिसॉर्ट विशेष घटनाओं आयोजित कर रहे हैं, सीमित वित्तीय संसाधनों के साथ लोगों के लिए सस्ता छुट्टी की इजाजत दी। यही कारण है कि सहारा "ज्ञान" प्रदान करता है? कार्रवाई "रजत युग" पेंशनरों के लिए प्रदान की जाती है। यह रियायती दरों पर कमरे बुक करने के लिए मानक या मानक अर्थव्यवस्था संभव है। निवास एक हज़ार छः सौ से प्रतिदिन एक हज़ार नौ सौ रूबल के लिए खर्च होंगे। अंतिम कीमत मौसम और कमरे श्रेणी पर निर्भर करेगा। "रजत युग" आरामदायक कमरे, उपचार, गुणवत्ता वाले भोजन में आवास उपलब्ध कराता है। अपार्टमेंट एक बच्चे बारह या उससे कम आयु के लिए एक अतिरिक्त बिस्तर के साथ सुसज्जित किया जा सकता है। छोटे कैम्पर पचास% छूट के साथ रहते हैं। आप एक डॉक्टर की नियुक्ति है, तो यह संभव है भी अस्पताल "ज्ञान" को पाने के लिए। "ओपन दक्षिण" एक गुणवत्ता छुट्टी है, जो बीमारी प्रोफ़ाइल के लिए चिकित्सा के साथ जोड़ा जा सकता है प्रदान करता है। दैनिक कमरे की दर एक हज़ार चार सौ पचास से एक हज़ार नौ सौ पचास रूबल के लिए किया जाएगा। मूल्य के मौसम पर निर्भर करता है। आप कम से कम सात दिन बुक कर सकते हैं। musculoskeletal प्रणाली और हृदय प्रणाली के रोगों के उपचार - स्वास्थ्य रिसॉर्ट दो मुख्य प्रोफ़ाइल है। इसके अलावा, संचार प्रणाली और परिधीय तंत्रिका तंत्र की चिकित्सा। जो लोग किसी भी स्वास्थ्य समस्या है, तो आप निश्चित रूप से अस्पताल "ज्ञान" यात्रा करनी चाहिए। उपचार अत्यधिक कुशल विशेषज्ञों जो एक संपूर्ण जांच, एक निदान आचरण और उचित उपचार की व्यवस्था द्वारा किया जाता है। हॉलिडे की राय में, अस्पताल में प्रक्रियाओं के कई एक कम कीमत पर आयोजित की जाती हैं। आपको बस इतना करना है - एक टिकट चिह्नित "उपचार" और एक आराम भौतिक चिकित्सा, चिकित्सकीय मालिश और जड़ी बूटियों के साथ स्नान का आनंद लें पूर्व खरीद करने के लिए है। स्नान की संचार प्रणाली में इस तरह के प्रकार के रोगों के साथ लोगों को हाइड्रोजन सल्फाइड, हर्बल नमक, bischofite, हर्बल, खनिज, आयोडीन ब्रोमीन, मोती के रूप में नियुक्त कर रहे हैं। इन प्रक्रियाओं रक्त प्रवाह और रक्तचाप को सामान्य बनाने की अनुमति है। इसके अलावा, स्नान पूरी तरह से आराम करो। यह उन्हें शाम को लेने के लिए सिफारिश की है। ऐसा नहीं है कि प्रक्रिया चिकित्सक केवल सैरगाह कर सकते हैं की नियुक्ति के लिए ध्यान में रखा जाना चाहिए। स्वतंत्र रूप से स्वागत करने के लिए आते संभव नहीं होगा। ऐसी प्रक्रियाओं उनके मतभेद है। अस्पताल के रोगियों में सभी प्रक्रियाओं संकेत के अनुसार चुने गए हैं। पर्याप्त कुशल हार्डवेयर अल्ट्रासाउंड का उपयोग कर चिकित्सा है। इसके अलावा आयोडीन ब्रोमीन और हाइड्रोजन सल्फाइड पानी और गंदगी का उपयोग कर लोकप्रिय वैद्युतकणसंचलन। लेजर चुंबकीय चिकित्सा रोगियों सिर दर्द को हटा दें और रक्तचाप को सामान्य बनाने की अनुमति देता है। हृदय प्रणाली के रोगों के साथ लोगों को भी electrosleep दिखाया गया है। अल्ट्रासाउंड का उपयोग कर साँस लेना द्वारा सिफारिश की श्वसन प्रणाली है, साथ ही औषधीय जड़ी-बूटियों के अर्क के रोगों के साथ मरीजों। यह एक भाप और तेल उपकरण के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस तरह की साँस लेना ही मदद नहीं क्रोनिक ब्रोंकाइटिस के लक्षण निकालने के लिए, लेकिन यह भी पूरी तरह से आराम करने के लिए। आप रात में प्रक्रिया करते हैं, नींद की गुणवत्ता की गारंटी है। दिखा रहा है साँस लेना भी अक्सर बीमार बच्चों है। प्रक्रियाओं अस्पताल चिकित्सक की संख्या अलग-अलग स्थापित करता है, प्रत्येक रोगी की विशेषताओं के अनुसार। अस्पताल विशेषज्ञों के महान ध्यान अच्छा शारीरिक व्यायाम दे। सुबह जिमनास्टिक के साथ समुद्र तट पर हर सुबह। पर जाएं यह किसी को भी हो सकता है। आउटडोर अभ्यास पूरे दिन के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं। श्वास पुरानी फेफड़ों के रोग के साथ लोगों को दिखाया अभ्यास। विशेषज्ञ भी भौतिक चिकित्सा प्रदर्शन किया। सबक दोनों व्यक्तिगत और समूह हो सकता है। अपने जीवन के दौरान ज्यादातर लोगों को कम से कम एक बार उसकी पीठ में दर्द का अनुभव करने के लिए। इस लक्षण सर्दी या तनाव का संकेत हो सकता है, और एक अधिक जटिल बीमारी का विकास कर सकते हैं। जैसा कि ऊपर उल्लेख, अस्पताल "ज्ञान" musculoskeletal प्रणाली के बीमारियों पर केंद्रित है। पहली जगह में खाते में रीढ़ की हड्डी में स्वास्थ्य लिया जाता है। अद्वितीय तकनीकों का प्रयोग सफलतापूर्वक एक स्वास्थ्य रिसॉर्ट के इलाज के लिए और हर्नियेटेड intervertebral फलाव लागू किया दवा "Karipazim"। औषधि वैद्युतकणसंचलन द्वारा इंजेक्ट किया जाता है। उसकी पीठ में दर्द सता दूर करने के लिए बस कुछ ही संभव उपचार में। कोई समस्या नहीं सामान्य जीवन की ओर लौटने के साथ एक अस्पताल "ज्ञान" में उपचार के बाद रोगियों के अधिकांश। रीढ़ की बीमारियों के इलाज में काफी महत्व की मालिश की है। किसी भी हेरफेर केवल पर्चे पर योग्य कर्मियों द्वारा किए गए। हस्त शास्त्रीय जोनल मालिश उत्कृष्ट relieves दर्द है, रीढ़ की वक्रता समाप्त, सही मुद्रा में मदद करता है। एक विद्युत मालिश - यह एक नई तकनीक के रूप में अस्पताल में प्रयोग किया जाता है। विशेषज्ञ हाथ, पैर, पैर, कमर के साथ हेरफेर आयोजित करता है। प्रक्रिया तीस-चालीस मिनट के लिए किया जाता है। रोगी पूरी तरह से आराम करने में असमर्थ है। सत्र के दौरान कुछ भी सो जाते हैं। स्वास्थ्य हमेशा पहले आता है, लेकिन यह भी बाहरी पर भूल नहीं की जानी चाहिए। रिसोर्ट में न्यायपूर्ण सेक्स के लिए एक ब्यूटी पार्लर चलाता है। विशेषज्ञ आपको त्वचा की व्यक्तिगत विशेषताओं के अनुसार देखभाल के लिए एक व्यापक कार्यक्रम का चयन करने में मदद करेगा। धारण पर रखा गया कायाकल्प उपचार, व्यापक सफ़ाई की मालिश चेहरे और गर्दन। खेतों में प्रयुक्त अल्ट्रासोनिक और यांत्रिक तकनीक है कि एक व्यक्ति बेदाग हालत में लाने के लिए अनुमति देते हैं। ब्यूटी पार्लर के रासायनिक छीलने, मौसा और papillomas को हटाने, रंजकता को हटाने का आयोजन किया। तीस साल, एक विशाल लोकप्रिय mesotherapy की आयु से अधिक महिलाओं में। सहारा केवल त्वचा हालत में सुधार नहीं कर सकते हैं, लेकिन यह भी स्वरूप बदलने के। इन पेशेवरों आप सौंदर्य प्रसाधन कि उपस्थिति की एक विशेष प्रकार फिट होगा चुनें में मदद मिलेगी। एक संभावना पलकें, स्थायी मेकअप होंठ और भौंह, छेदे हुए कान बनाते हैं। सेल्युलाईट उपचार "नारंगी के छिलके" से छुट्टी पर छुटकारा मिल जाएगा। wraps के विभिन्न प्रकार । आवश्यक तेलों का उपयोग कर समस्या क्षेत्रों की एक मालिश के रूप में लोकप्रिय। आप अस्पताल "ज्ञान" के बारे में सकारात्मक बयान की एक बड़ी संख्या पा सकते हैं। समीक्षा के अनुसार, यह साल के किसी भी समय एक गुणवत्ता छुट्टी के लिए सब कुछ है। कई लोग अभी भी गर्मी के दौरान यहां आने के लिए पसंद करते हैं। गर्म दिन पर, आप केवल अपने स्वास्थ्य में सुधार नहीं कर सकते हैं, लेकिन यह भी कोमल समुद्री सोख। अपने आप में नमकीन हवा उपयोगी है। सहारा के अतिथि केवल दोष यह एक इनडोर स्विमिंग पूल के अभाव पर विचार करें। तैरना सही मुद्रा, रीढ़ की हड्डी के साथ कई समस्याओं के समाधान के बढ़ावा देता है। और यह खुशी जब समुद्र पर्याप्त गर्म है, गर्मियों में ही उपलब्ध है। कई खुश उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे और सुविधाजनक स्थान है, जो अस्पताल "ज्ञान" है। नक्शे पर बिना किसी समस्या के वस्तु का पता लगाया जा सकता है। अवकाश के दौरान स्वास्थ्य रिसॉर्ट वहाँ छोड़ने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि वहाँ आराम से रहने के लिए सब कुछ है। यह कोई संयोग नहीं कई तीन-चार सप्ताह के लिए एक टिकट मिलता है।
हथियार XNUMX वीं सदी। बहुत सारे हथियार कभी नहीं होते हैं। अधिशेष, अगर कोई निर्णय लेता है कि यह अधिशेष है, तो उसे हमेशा बेचा जा सकता है, दान किया जा सकता है, और यहां तक कि लाभ पर आसानी से निपटाया जा सकता है। ठीक है, एक युद्ध में गोला-बारूद को बचाना पाप है - जितना अधिक हम दुश्मन पर विस्फोटक फेंकेंगे, उतनी ही तेजी से हम सैन्य अभियानों के लक्ष्यों को महसूस करेंगे। लेकिन यहाँ समस्या है. . . परंपरा के अनुसार, हथियार और गोला-बारूद सबसे अच्छी सामग्री, स्टील और अन्य धातुओं से बनाए जाते हैं, और यह महंगा है और पर्यावरण के अनुकूल नहीं है। एक टन धातु को गलाने में चार टन ताजा पानी लगता है। जो उसके बाद पीने योग्य नहीं रहेगा। और अगर हमारे पास पर्याप्त साधारण पीने का पानी नहीं है तो हमें हजारों स्टील के गोले की आवश्यकता क्यों होगी? इसके अलावा, एक ही खोल निकायों को भी lathes पर संसाधित किया जाता है। और यह एक शेविंग है जिसे इकट्ठा करने और फिर से पिघलाने की जरूरत है। अर्थात्, अतीत का उत्पादन तकनीकी दृष्टिकोण से बहुत तर्कहीन हैः बहुत सारा पानी, बहुत सारा कचरा, बहुत सारे मानव-घंटे जिनका भुगतान करने की आवश्यकता है। XNUMXवीं सदी में हथियारों और गोला-बारूद को अलग तरह से बनाने की जरूरत है। "मुद्रित हथियार" खासतौर पर आज इसके लिए 3डी प्रिंटिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक उदाहरण जो एक पाठ्यपुस्तक बन गया है, वह 10 साल पहले की एक घटना का संदर्भ देता है। फिर 2013 में, अमेरिकी छात्र कोडी विल्सन 3डी ने पहली प्लास्टिक पिस्तौल छापी जो गोला बारूद दाग सकती थी। और भी - 2017 में, यूएस आर्मी वेपन्स रिसर्च सेंटर में एक हैंड-हेल्ड ग्रेनेड लॉन्चर और इसके लिए अधिक गोला-बारूद 3डी प्रिंटर पर प्रिंट किया गया था। इसके अलावा, इस बात पर जोर दिया गया कि सभी विवरण 3डी तकनीक में बनाए गए हैं। प्रसिद्ध 40-mm M203 A1 हैंड ग्रेनेड लॉन्चर और M781 ट्रेनिंग ग्रेनेड को डिजाइन के आधार के रूप में लिया गया था, क्योंकि इसके लिए मुकाबला करने की मनाही थी। एक ग्रेनेड लॉन्चर और इसके लिए ग्रेनेड को "प्रिंट" करने के लिए, एक साथ कई प्रकार के त्रि-आयामी मुद्रण का उपयोग किया गया था। पहला प्रत्यक्ष धातु लेजर सिंटरिंग है, जब लेजर मूल धातु पाउडर को परतों में एक हिस्से में, प्लास्टिक से 3 डी प्रिंटिंग और सांचों में प्लास्टिक के पुर्जों को ढालता है। सबसे बड़ी कठिनाई ग्रेनेड लॉन्चर बैरल की छपाई के साथ-साथ राइफलिंग थी, जो एल्यूमीनियम से बनी थी। रिसीवर भी एल्यूमीनियम से बना था। ग्रेनेड लॉन्चर का ट्रिगर, ड्रमर और ट्रिगर भी "मुद्रित" था, लेकिन केवल 4340 ब्रांड के स्टील मिश्र धातु से। पिस्टल ग्रिप बट, निश्चित रूप से प्लास्टिक से बना था - इस मामले में इस तकनीक के लिए सबसे सरल भाग . नतीजतन, यह पता चला कि ग्रेनेड लॉन्चर में पारंपरिक तरीके से केवल स्प्रिंग्स, माउंटिंग पिन और स्क्रू बनाए गए थे, और बाकी सब कुछ XNUMX वीं सदी की तकनीक में बनाया गया था। सच है, बैरल और रिसीवर दोनों को और अधिक संसाधित किया जाना था और खुरदरापन की सतह से हटा दिया गया था, और इससे भी अधिक कठोरता के लिए एनोडाइज़ किया गया था। सामान्य तौर पर, ग्रेनेड लॉन्चर के निर्माण में वास्तविक छपाई के लिए 70 घंटे और एनोडाइजिंग और फाइन मशीनिंग के लिए पांच घंटे की आवश्यकता होती है। सामान्य तौर पर, इसका कोई मतलब नहीं है - यह बहुत या थोड़ा है। लेकिन वे कहते हैं कि कीमतों की तुलना की जा सकती है। तो, एक मुद्रित ग्रेनेड लांचर की लागत सौ डॉलर से थोड़ी अधिक निकली, और लागत का शेर परत-दर-परत सिंटरिंग के लिए धातु पाउडर पर गिर गया। लेकिन मानक तकनीक का उपयोग करके बनाए गए M203 A1 ग्रेनेड लांचर की कीमत 1,1 हजार डॉलर है। अर्थात्, 3डी प्रिंटिंग ने अपनी लागत प्रभावशीलता के मामले में पारंपरिक उत्पादन को भी पीछे छोड़ दिया है। "अच्छे का सबसे अच्छा दुश्मन" सच है, सूरज पर धब्बे होते हैं। मानक ग्रेनेड के मामले जस्ता से डाले जाते हैं। लेकिन जिंक के विशिष्ट गुणों के कारण इन्हें प्रिंट करना संभव नहीं था। स्टील से प्रिंटेड. लेकिन स्टील ग्रेनेड ने एल्यूमीनियम बैरल को चीर डाला। उन्होंने इसे प्लास्टिक से ढक दिया। प्लास्टिक छिलने लगा! तब ग्रेनेड एल्यूमीनियम से बना था, और यह जस्ता की तुलना में हल्का निकला, और इसकी फायरिंग रेंज बढ़ गई, जिससे पुरानी दृष्टि का उपयोग करना तुरंत असंभव हो गया। समस्या, ज़ाहिर है, "सिर्फ भव्य" है। खैर, त्रि-आयामी मुद्रण की तकनीक के अनुसार, आस्तीन, प्राइमर और . . . प्रोपेलिंग पाउडर चार्ज जैसे विवरण नहीं बनाए गए थे। यह सिर्फ इतना है कि अमेरिका में 3डी तकनीक का उपयोग कर बनाए गए उत्पादों में विस्फोटकों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। लेकिन कुछ समय पहले तक, 3D प्रिंटर केवल कुछ शोध संस्थानों में ही मिल सकते थे। उन्होंने उत्पाद प्रोटोटाइप बनाने में मदद की, लेकिन इससे ज्यादा कुछ नहीं। हालाँकि, कुछ 10-15 साल बीत चुके हैं और मोटर वाहन उद्योग और दोनों में योगात्मक निर्माण विधियों का सक्रिय रूप से उपयोग किया गया है विमानन, और एयरोस्पेस उद्योग में, साथ ही चिकित्सा और उपकरण में। और इसके लाभ स्पष्ट हैंः यह कच्चे माल की अधिक किफायती खपत है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ज्यामितीय रूप से बहुत जटिल उत्पादों के उत्पादन की संभावना है। इसके अलावा, जिन सामग्रियों से मुद्रित भाग बनाए जाते हैं, वे भी फायदेमंद होते हैं। उदाहरण के लिए, एबीएस प्लास्टिक एक आधुनिक सिंथेटिक थर्माप्लास्टिक है जो आज अन्य संरचनात्मक सामग्रियों के बीच व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इसमें उच्च शक्ति और पहनने के प्रतिरोध, संचालन में स्थायित्व है, हालांकि यह पराबैंगनी विकिरण को "पसंद नहीं करता" है। इसके सभी तकनीकी गुणों को बनाए रखते हुए इसका उपयोग +80 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर किया जा सकता है। यह महत्वपूर्ण है कि यह गैर-विषाक्त है और थोड़े समय के लिए 100 डिग्री सेल्सियस तक तापमान का सामना कर सकता है। और ABS प्लास्टिक मशीनिंग के लिए उत्कृष्ट है। एबीसीः पीएलए, पीईटीजी, फ्लेक्स के अलावा अन्य प्रिंटिंग प्लास्टिक या फिलामेंट्स भी जाने जाते हैं। प्रत्येक की अपनी विशिष्ट विशेषताएं होती हैं, इसलिए आप हमेशा सही का चयन कर सकते हैं। यही है, 3 डी प्रिंटिंग सैन्य क्षेत्र सहित कार्यात्मक और अत्यधिक कुशल संरचनाओं को बनाने के लिए वास्तव में असीम संभावनाएं खोलती है। और कीमत के बारे में क्या? उदाहरण के लिए, PETG प्लास्टिक की कीमत 10 रूबल प्रति ग्राम है, जो सिद्धांत रूप में अपेक्षाकृत सस्ती है। "सिंगल-शॉट पिस्टल के बाद, आठ-शॉट रिवाल्वर! " वैसे, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, "मुद्रित हथियारों" में प्रगति अभी भी स्थिर नहीं है, और . 22LR कारतूस के लिए विनिमेय ड्रम के साथ मूल छह- या आठ-शॉट रिवॉल्वर पहले से ही यूएसए में मुद्रित किया जा चुका है। इसका नाम अजीब हैः वॉशबियर, क्योंकि यह ऐसा नहीं दिखता है, लेकिन यह काम करता है! आठ-शॉट रिवाल्वर की छपाई ABS प्लास्टिक से बनी थी, जिसे धातु के आवेषण के साथ ड्रम के अंदर प्रबलित किया गया था। लेकिन एक विशेष नायलॉन ब्रिज नायलॉन से छह-शॉट को बिल्कुल भी प्रिंट किया जा सकता है। और हमें क्या? और हमारे पास F2 इनोवेशन कंपनी है, जिसकी स्थापना Perm National Research Polytechnic University (PNRPU) के स्नातकों द्वारा की गई है, जो F3 Gigantry granule 2D प्रिंटर प्रदान करती है, जो सबसे बड़े उत्पादों को प्रिंट करने में सक्षम है। F2 गिगैन्ट्री एक पारंपरिक 3डी मशीन है जिसमें पॉलिमर ग्रैन्यूल्स को पिघलाया जाता है और एक प्रिंटर को खिलाया जाता है जो ट्रैजेक्टरी मोशन और लेयर-बाय-लेयर प्रिंटिंग करता है। लेकिन वह केवल 4 मीटर लंबे, 2 मीटर चौड़े और 1 मीटर ऊंचे हिस्से तक ही बनाने में सक्षम है। साथ ही, यह 10 किग्रा / घंटा तक की उत्पादकता के साथ प्रिंट करता है, और यह पुनर्नवीनीकरण सामग्री पर भी काम कर सकता है, अर्थात पुनर्नवीनीकरण दाने पर। सामान्य तौर पर, इस तरह की छपाई की तकनीक बिल्कुल भी नई नहीं है, केवल F2 Gigantry जैसे बड़े रूसी प्रतिष्ठान अभी तक हमारे बाजार में नहीं आए हैं। F2 Gigantry के लाभ कारखानों और विशेष रूप से एयरोस्पेस उद्योग को बड़े आकार के बहुलक भागों को बहुत जल्दी और सस्ते में बनाने की अनुमति देते हैं। इस प्रकार पारंपरिक तकनीकों की तुलना में कुल लागत लगभग 40 गुना कम हो जाती है। दिलचस्प बात यह है कि पहला उत्पादन प्रिंटर, F2 गिगैन्ट्री मॉडल, विकसित किया गया था . . . विमान के लिए समग्र पंखों के निर्माण के लिए प्रिंटिंग टूलिंग के लिए एक व्यक्तिगत आदेश के लिए। लेकिन सैन्य उत्पादन के क्षेत्र सहित किसी भी क्षेत्र में F2 Gigantry का उपयोग किया जा सकता है। "रॉकेट ऑन द लाइन" अब आइए देखते हैं तस्वीरें। उन पर, V-2 रॉकेट का एक मॉडल, एक 3D प्रिंटर पर मुद्रित भागों से इकट्ठा किया गया। कुल 5 भाग हैं। इसका मतलब है कि आपको 5 प्रिंटर और पांच श्रमिकों की आवश्यकता है जो तैयार भागों को उस समय संसाधित करेंगे जब मशीन अगले भाग को प्रिंट करेगी। साथ ही वह उनकी सभा में भी लगे हुए हैं। जो "नाक" के लिए जिम्मेदार है, वह इसमें फ्यूज डालता है। जिनके पास भाग संसाधित होने पर "कुछ करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है", विस्फोटकों के साथ तैयार रॉकेट को भरने में भाग लेते हैं। टेल सेक्शन का प्रभारी व्यक्ति इसमें एस्बेस्टस में लिपटे पाउडर इंजन को सम्मिलित करता है। फिर, फिर से, इन 5 श्रमिकों में से एक तैयार रॉकेट को कैसेट में सम्मिलित करता है, जिसे 3 डी प्रिंटर पर भी मुद्रित किया जाता है, केवल बड़े आकार में, या धातु की प्रोफाइल शीट से बनाया और इकट्ठा किया जाता है। बिजली के फ़्यूज़ की विद्युत वायरिंग जुड़ी हुई है, और "उत्पाद एक्स" को सामने भेजा जाता है। इसे आसानी से ले जाया जाता है, आसानी से छलावरण किया जाता है, और इसकी सीमा इसे आग से बड़े क्षेत्र को कवर करने की अनुमति देती है। ऐसा प्रोडक्शन लगातार दिन रात काम करता है, सिर्फ शिफ्ट बदलती है। इसके अलावा, यह सामने की रेखा से बहुत दूर नहीं एक ठोस बंकर में स्थित हो सकता है। यहां मुख्य बात पहुंच सड़कों का अच्छा छलावरण है। और उपयोग के बाद, कैसेट को अलग कर दिया जाता है और वापस भेज दिया जाता है या खाइयों को लैस करने के लिए उपयोग किया जाता है! इसी तरह, आप प्रिंट कर सकते हैं और ड्रोन. केवल बड़ा प्रिंटर। हम "नीचे" प्रिंट करते हैं, हम "शीर्ष" प्रिंट करते हैं, और सबसे सस्ते प्लास्टिक की न्यूनतम खपत के साथ - आखिरकार, उड़ान एक ही रास्ता है। नियंत्रण इकाई मॉड्यूलर है, पावर बैटरी भी त्वरित डिस्कनेक्ट टर्मिनलों के साथ एक मॉड्यूल है, ईंधन टैंक तैयार है, चार्ज "तरबूज" के रूप में तैयार टुकड़ों के साथ तैयार है, संचयी-विखंडन कार्रवाई, कैमरा है एक अलग इकाई भी है, जो चार शिकंजा के साथ खराब हो गई है। शरीर के दोनों हिस्सों को सुपरग्लू से एक साथ चिपकाया जाता है। यही है, विधानसभा मेकानो बच्चों के डिजाइनर के समान है। गलत न होने के लिए, कोडांतरक सभी विवरणों को स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली संख्याओं के साथ-साथ उनकी सीटों को संख्याओं के साथ चिह्नित कर सकता हैः 1 + 1, 7 + 7, हाँ, वैसे, सीटें स्वयं इन भागों के लिए उपयुक्त हैं, इसलिए स्लॉट 8 में आइटम 9 डालें नहीं। इंजन हमारा मॉडल MK-12V या सुपर टाइगर और बैंगी 600 इंजन का एनालॉग है, जिसके साथ ऐसा "विमान" 225 किमी / घंटा तक की गति तक पहुँच सकता है। यह यूएवी लॉन्च एक्सेलरेटर की मदद से शुरू होता है, जो टेकऑफ़ के बाद रीसेट हो जाता है। यह दिलचस्प है कि ऐसे "कारखाने" जहाजों पर बड़े लाभ के साथ स्थापित किए जा सकते हैं। आखिरकार, तैयार यूएवी भंडारण के दौरान बहुत अधिक जगह लेते हैं, लेकिन यहां उन्हें उत्पादन और लॉन्च के रूप में संग्रहीत किया जा सकता है, जो उनकी मदद से हमला करने के लिए स्थान और समय दोनों को बचाएगा। XNUMXवीं सदी का युद्ध ऐसा होना चाहिए (और रहेगा! )। और जितनी जल्दी "निर्णय लेने वालों" को यह एहसास हो जाए, उतना ही अच्छा है। - लेखकः
हथियार XNUMX वीं सदी। बहुत सारे हथियार कभी नहीं होते हैं। अधिशेष, अगर कोई निर्णय लेता है कि यह अधिशेष है, तो उसे हमेशा बेचा जा सकता है, दान किया जा सकता है, और यहां तक कि लाभ पर आसानी से निपटाया जा सकता है। ठीक है, एक युद्ध में गोला-बारूद को बचाना पाप है - जितना अधिक हम दुश्मन पर विस्फोटक फेंकेंगे, उतनी ही तेजी से हम सैन्य अभियानों के लक्ष्यों को महसूस करेंगे। लेकिन यहाँ समस्या है. . . परंपरा के अनुसार, हथियार और गोला-बारूद सबसे अच्छी सामग्री, स्टील और अन्य धातुओं से बनाए जाते हैं, और यह महंगा है और पर्यावरण के अनुकूल नहीं है। एक टन धातु को गलाने में चार टन ताजा पानी लगता है। जो उसके बाद पीने योग्य नहीं रहेगा। और अगर हमारे पास पर्याप्त साधारण पीने का पानी नहीं है तो हमें हजारों स्टील के गोले की आवश्यकता क्यों होगी? इसके अलावा, एक ही खोल निकायों को भी lathes पर संसाधित किया जाता है। और यह एक शेविंग है जिसे इकट्ठा करने और फिर से पिघलाने की जरूरत है। अर्थात्, अतीत का उत्पादन तकनीकी दृष्टिकोण से बहुत तर्कहीन हैः बहुत सारा पानी, बहुत सारा कचरा, बहुत सारे मानव-घंटे जिनका भुगतान करने की आवश्यकता है। XNUMXवीं सदी में हथियारों और गोला-बारूद को अलग तरह से बनाने की जरूरत है। "मुद्रित हथियार" खासतौर पर आज इसके लिए तीनडी प्रिंटिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक उदाहरण जो एक पाठ्यपुस्तक बन गया है, वह दस साल पहले की एक घटना का संदर्भ देता है। फिर दो हज़ार तेरह में, अमेरिकी छात्र कोडी विल्सन तीनडी ने पहली प्लास्टिक पिस्तौल छापी जो गोला बारूद दाग सकती थी। और भी - दो हज़ार सत्रह में, यूएस आर्मी वेपन्स रिसर्च सेंटर में एक हैंड-हेल्ड ग्रेनेड लॉन्चर और इसके लिए अधिक गोला-बारूद तीनडी प्रिंटर पर प्रिंट किया गया था। इसके अलावा, इस बात पर जोर दिया गया कि सभी विवरण तीनडी तकनीक में बनाए गए हैं। प्रसिद्ध चालीस-mm Mदो सौ तीन Aएक हैंड ग्रेनेड लॉन्चर और Mसात सौ इक्यासी ट्रेनिंग ग्रेनेड को डिजाइन के आधार के रूप में लिया गया था, क्योंकि इसके लिए मुकाबला करने की मनाही थी। एक ग्रेनेड लॉन्चर और इसके लिए ग्रेनेड को "प्रिंट" करने के लिए, एक साथ कई प्रकार के त्रि-आयामी मुद्रण का उपयोग किया गया था। पहला प्रत्यक्ष धातु लेजर सिंटरिंग है, जब लेजर मूल धातु पाउडर को परतों में एक हिस्से में, प्लास्टिक से तीन डी प्रिंटिंग और सांचों में प्लास्टिक के पुर्जों को ढालता है। सबसे बड़ी कठिनाई ग्रेनेड लॉन्चर बैरल की छपाई के साथ-साथ राइफलिंग थी, जो एल्यूमीनियम से बनी थी। रिसीवर भी एल्यूमीनियम से बना था। ग्रेनेड लॉन्चर का ट्रिगर, ड्रमर और ट्रिगर भी "मुद्रित" था, लेकिन केवल चार हज़ार तीन सौ चालीस ब्रांड के स्टील मिश्र धातु से। पिस्टल ग्रिप बट, निश्चित रूप से प्लास्टिक से बना था - इस मामले में इस तकनीक के लिए सबसे सरल भाग . नतीजतन, यह पता चला कि ग्रेनेड लॉन्चर में पारंपरिक तरीके से केवल स्प्रिंग्स, माउंटिंग पिन और स्क्रू बनाए गए थे, और बाकी सब कुछ XNUMX वीं सदी की तकनीक में बनाया गया था। सच है, बैरल और रिसीवर दोनों को और अधिक संसाधित किया जाना था और खुरदरापन की सतह से हटा दिया गया था, और इससे भी अधिक कठोरता के लिए एनोडाइज़ किया गया था। सामान्य तौर पर, ग्रेनेड लॉन्चर के निर्माण में वास्तविक छपाई के लिए सत्तर घंटाटे और एनोडाइजिंग और फाइन मशीनिंग के लिए पांच घंटे की आवश्यकता होती है। सामान्य तौर पर, इसका कोई मतलब नहीं है - यह बहुत या थोड़ा है। लेकिन वे कहते हैं कि कीमतों की तुलना की जा सकती है। तो, एक मुद्रित ग्रेनेड लांचर की लागत सौ डॉलर से थोड़ी अधिक निकली, और लागत का शेर परत-दर-परत सिंटरिंग के लिए धातु पाउडर पर गिर गया। लेकिन मानक तकनीक का उपयोग करके बनाए गए Mदो सौ तीन Aएक ग्रेनेड लांचर की कीमत एक,एक हजार डॉलर है। अर्थात्, तीनडी प्रिंटिंग ने अपनी लागत प्रभावशीलता के मामले में पारंपरिक उत्पादन को भी पीछे छोड़ दिया है। "अच्छे का सबसे अच्छा दुश्मन" सच है, सूरज पर धब्बे होते हैं। मानक ग्रेनेड के मामले जस्ता से डाले जाते हैं। लेकिन जिंक के विशिष्ट गुणों के कारण इन्हें प्रिंट करना संभव नहीं था। स्टील से प्रिंटेड. लेकिन स्टील ग्रेनेड ने एल्यूमीनियम बैरल को चीर डाला। उन्होंने इसे प्लास्टिक से ढक दिया। प्लास्टिक छिलने लगा! तब ग्रेनेड एल्यूमीनियम से बना था, और यह जस्ता की तुलना में हल्का निकला, और इसकी फायरिंग रेंज बढ़ गई, जिससे पुरानी दृष्टि का उपयोग करना तुरंत असंभव हो गया। समस्या, ज़ाहिर है, "सिर्फ भव्य" है। खैर, त्रि-आयामी मुद्रण की तकनीक के अनुसार, आस्तीन, प्राइमर और . . . प्रोपेलिंग पाउडर चार्ज जैसे विवरण नहीं बनाए गए थे। यह सिर्फ इतना है कि अमेरिका में तीनडी तकनीक का उपयोग कर बनाए गए उत्पादों में विस्फोटकों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। लेकिन कुछ समय पहले तक, तीनD प्रिंटर केवल कुछ शोध संस्थानों में ही मिल सकते थे। उन्होंने उत्पाद प्रोटोटाइप बनाने में मदद की, लेकिन इससे ज्यादा कुछ नहीं। हालाँकि, कुछ दस-पंद्रह साल बीत चुके हैं और मोटर वाहन उद्योग और दोनों में योगात्मक निर्माण विधियों का सक्रिय रूप से उपयोग किया गया है विमानन, और एयरोस्पेस उद्योग में, साथ ही चिकित्सा और उपकरण में। और इसके लाभ स्पष्ट हैंः यह कच्चे माल की अधिक किफायती खपत है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ज्यामितीय रूप से बहुत जटिल उत्पादों के उत्पादन की संभावना है। इसके अलावा, जिन सामग्रियों से मुद्रित भाग बनाए जाते हैं, वे भी फायदेमंद होते हैं। उदाहरण के लिए, एबीएस प्लास्टिक एक आधुनिक सिंथेटिक थर्माप्लास्टिक है जो आज अन्य संरचनात्मक सामग्रियों के बीच व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इसमें उच्च शक्ति और पहनने के प्रतिरोध, संचालन में स्थायित्व है, हालांकि यह पराबैंगनी विकिरण को "पसंद नहीं करता" है। इसके सभी तकनीकी गुणों को बनाए रखते हुए इसका उपयोग +अस्सी डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर किया जा सकता है। यह महत्वपूर्ण है कि यह गैर-विषाक्त है और थोड़े समय के लिए एक सौ डिग्री सेल्सियस तक तापमान का सामना कर सकता है। और ABS प्लास्टिक मशीनिंग के लिए उत्कृष्ट है। एबीसीः पीएलए, पीईटीजी, फ्लेक्स के अलावा अन्य प्रिंटिंग प्लास्टिक या फिलामेंट्स भी जाने जाते हैं। प्रत्येक की अपनी विशिष्ट विशेषताएं होती हैं, इसलिए आप हमेशा सही का चयन कर सकते हैं। यही है, तीन डी प्रिंटिंग सैन्य क्षेत्र सहित कार्यात्मक और अत्यधिक कुशल संरचनाओं को बनाने के लिए वास्तव में असीम संभावनाएं खोलती है। और कीमत के बारे में क्या? उदाहरण के लिए, PETG प्लास्टिक की कीमत दस रूबल प्रति ग्राम है, जो सिद्धांत रूप में अपेक्षाकृत सस्ती है। "सिंगल-शॉट पिस्टल के बाद, आठ-शॉट रिवाल्वर! " वैसे, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, "मुद्रित हथियारों" में प्रगति अभी भी स्थिर नहीं है, और . बाईसLR कारतूस के लिए विनिमेय ड्रम के साथ मूल छह- या आठ-शॉट रिवॉल्वर पहले से ही यूएसए में मुद्रित किया जा चुका है। इसका नाम अजीब हैः वॉशबियर, क्योंकि यह ऐसा नहीं दिखता है, लेकिन यह काम करता है! आठ-शॉट रिवाल्वर की छपाई ABS प्लास्टिक से बनी थी, जिसे धातु के आवेषण के साथ ड्रम के अंदर प्रबलित किया गया था। लेकिन एक विशेष नायलॉन ब्रिज नायलॉन से छह-शॉट को बिल्कुल भी प्रिंट किया जा सकता है। और हमें क्या? और हमारे पास Fदो इनोवेशन कंपनी है, जिसकी स्थापना Perm National Research Polytechnic University के स्नातकों द्वारा की गई है, जो Fतीन Gigantry granule दोD प्रिंटर प्रदान करती है, जो सबसे बड़े उत्पादों को प्रिंट करने में सक्षम है। Fदो गिगैन्ट्री एक पारंपरिक तीनडी मशीन है जिसमें पॉलिमर ग्रैन्यूल्स को पिघलाया जाता है और एक प्रिंटर को खिलाया जाता है जो ट्रैजेक्टरी मोशन और लेयर-बाय-लेयर प्रिंटिंग करता है। लेकिन वह केवल चार मीटर लंबे, दो मीटर चौड़े और एक मीटर ऊंचे हिस्से तक ही बनाने में सक्षम है। साथ ही, यह दस किग्रा / घंटा तक की उत्पादकता के साथ प्रिंट करता है, और यह पुनर्नवीनीकरण सामग्री पर भी काम कर सकता है, अर्थात पुनर्नवीनीकरण दाने पर। सामान्य तौर पर, इस तरह की छपाई की तकनीक बिल्कुल भी नई नहीं है, केवल Fदो Gigantry जैसे बड़े रूसी प्रतिष्ठान अभी तक हमारे बाजार में नहीं आए हैं। Fदो Gigantry के लाभ कारखानों और विशेष रूप से एयरोस्पेस उद्योग को बड़े आकार के बहुलक भागों को बहुत जल्दी और सस्ते में बनाने की अनुमति देते हैं। इस प्रकार पारंपरिक तकनीकों की तुलना में कुल लागत लगभग चालीस गुना कम हो जाती है। दिलचस्प बात यह है कि पहला उत्पादन प्रिंटर, Fदो गिगैन्ट्री मॉडल, विकसित किया गया था . . . विमान के लिए समग्र पंखों के निर्माण के लिए प्रिंटिंग टूलिंग के लिए एक व्यक्तिगत आदेश के लिए। लेकिन सैन्य उत्पादन के क्षेत्र सहित किसी भी क्षेत्र में Fदो Gigantry का उपयोग किया जा सकता है। "रॉकेट ऑन द लाइन" अब आइए देखते हैं तस्वीरें। उन पर, V-दो रॉकेट का एक मॉडल, एक तीनD प्रिंटर पर मुद्रित भागों से इकट्ठा किया गया। कुल पाँच भाग हैं। इसका मतलब है कि आपको पाँच प्रिंटर और पांच श्रमिकों की आवश्यकता है जो तैयार भागों को उस समय संसाधित करेंगे जब मशीन अगले भाग को प्रिंट करेगी। साथ ही वह उनकी सभा में भी लगे हुए हैं। जो "नाक" के लिए जिम्मेदार है, वह इसमें फ्यूज डालता है। जिनके पास भाग संसाधित होने पर "कुछ करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है", विस्फोटकों के साथ तैयार रॉकेट को भरने में भाग लेते हैं। टेल सेक्शन का प्रभारी व्यक्ति इसमें एस्बेस्टस में लिपटे पाउडर इंजन को सम्मिलित करता है। फिर, फिर से, इन पाँच श्रमिकों में से एक तैयार रॉकेट को कैसेट में सम्मिलित करता है, जिसे तीन डी प्रिंटर पर भी मुद्रित किया जाता है, केवल बड़े आकार में, या धातु की प्रोफाइल शीट से बनाया और इकट्ठा किया जाता है। बिजली के फ़्यूज़ की विद्युत वायरिंग जुड़ी हुई है, और "उत्पाद एक्स" को सामने भेजा जाता है। इसे आसानी से ले जाया जाता है, आसानी से छलावरण किया जाता है, और इसकी सीमा इसे आग से बड़े क्षेत्र को कवर करने की अनुमति देती है। ऐसा प्रोडक्शन लगातार दिन रात काम करता है, सिर्फ शिफ्ट बदलती है। इसके अलावा, यह सामने की रेखा से बहुत दूर नहीं एक ठोस बंकर में स्थित हो सकता है। यहां मुख्य बात पहुंच सड़कों का अच्छा छलावरण है। और उपयोग के बाद, कैसेट को अलग कर दिया जाता है और वापस भेज दिया जाता है या खाइयों को लैस करने के लिए उपयोग किया जाता है! इसी तरह, आप प्रिंट कर सकते हैं और ड्रोन. केवल बड़ा प्रिंटर। हम "नीचे" प्रिंट करते हैं, हम "शीर्ष" प्रिंट करते हैं, और सबसे सस्ते प्लास्टिक की न्यूनतम खपत के साथ - आखिरकार, उड़ान एक ही रास्ता है। नियंत्रण इकाई मॉड्यूलर है, पावर बैटरी भी त्वरित डिस्कनेक्ट टर्मिनलों के साथ एक मॉड्यूल है, ईंधन टैंक तैयार है, चार्ज "तरबूज" के रूप में तैयार टुकड़ों के साथ तैयार है, संचयी-विखंडन कार्रवाई, कैमरा है एक अलग इकाई भी है, जो चार शिकंजा के साथ खराब हो गई है। शरीर के दोनों हिस्सों को सुपरग्लू से एक साथ चिपकाया जाता है। यही है, विधानसभा मेकानो बच्चों के डिजाइनर के समान है। गलत न होने के लिए, कोडांतरक सभी विवरणों को स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली संख्याओं के साथ-साथ उनकी सीटों को संख्याओं के साथ चिह्नित कर सकता हैः एक + एक, सात + सात, हाँ, वैसे, सीटें स्वयं इन भागों के लिए उपयुक्त हैं, इसलिए स्लॉट आठ में आइटम नौ डालें नहीं। इंजन हमारा मॉडल MK-बारह वोल्ट या सुपर टाइगर और बैंगी छः सौ इंजन का एनालॉग है, जिसके साथ ऐसा "विमान" दो सौ पच्चीस किमी / घंटा तक की गति तक पहुँच सकता है। यह यूएवी लॉन्च एक्सेलरेटर की मदद से शुरू होता है, जो टेकऑफ़ के बाद रीसेट हो जाता है। यह दिलचस्प है कि ऐसे "कारखाने" जहाजों पर बड़े लाभ के साथ स्थापित किए जा सकते हैं। आखिरकार, तैयार यूएवी भंडारण के दौरान बहुत अधिक जगह लेते हैं, लेकिन यहां उन्हें उत्पादन और लॉन्च के रूप में संग्रहीत किया जा सकता है, जो उनकी मदद से हमला करने के लिए स्थान और समय दोनों को बचाएगा। XNUMXवीं सदी का युद्ध ऐसा होना चाहिए । और जितनी जल्दी "निर्णय लेने वालों" को यह एहसास हो जाए, उतना ही अच्छा है। - लेखकः
नई दिल्ली : रियो ओलंपिक में अपने मुकाबले से कुछ ही घंटो पहले डोपिंग के दोषी पाए जाने पर चार साल के लिए प्रतिबंधित कर दिए जाने वाले भारतीय पहलवान नरसिंह यादव के इस मामले में सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया है. इस बात की खुद सीबीआई ने पुष्टि करते हुए कहा कि नरसिंह यादव के डोपिंग मामले कि जांच की जिम्मेदारी अब सीबीआई के हाथो में है और इस मामले में हरियाणा पुलिस ने प्राथमिकी दायर कर रखी है. आपको बता दे कि रियो ओलंपिक से कुछ दिन पहले भारतीय पहलवान नरसिंह यादव का डोप सैम्पल पॉजिटिव पाया गया था जिसके बाद नरसिंह ने दलील दी थी कि उन्हें किसी ने साजिश के तहत फंसाया है. उनके खाने में किसी ने कुछ आपत्तिजनक पदार्थ मिलाया है. इसके बाद नरसिंह को भारतीय कुश्ती संघ से तो रियो के लिए अनुमति मिल गई थी और वह रियो भी पहुच गए थे लेकिन उनके मुकाबले से कुछ ही घंटो पहले नरसिंह पर खेल पंचाट ने चार साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया. इसके बाद नरसिंह ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा था कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है. वे निर्दोष है. अगर वह दोषी पाए जाए तो उन्हें फांसी दे दी जाए. सीबीआई ने यह मामला धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 328 (जहर) और आईपीसी की धारा 506 के तहत मुकदमा दायर कर लिया है. सीबीआई प्रवक्ता देवप्रीत सिंह के मुताबिक नरसिंह का आरोप है कि- उनके खाने या पानी में प्रतिबंधित पदार्थ मिलाया गया था ताकि वह रियो ओलंपिक में भाग नहीं ले सके जिसके लिये उसने क्वालीफाई किया था.
नई दिल्ली : रियो ओलंपिक में अपने मुकाबले से कुछ ही घंटो पहले डोपिंग के दोषी पाए जाने पर चार साल के लिए प्रतिबंधित कर दिए जाने वाले भारतीय पहलवान नरसिंह यादव के इस मामले में सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया है. इस बात की खुद सीबीआई ने पुष्टि करते हुए कहा कि नरसिंह यादव के डोपिंग मामले कि जांच की जिम्मेदारी अब सीबीआई के हाथो में है और इस मामले में हरियाणा पुलिस ने प्राथमिकी दायर कर रखी है. आपको बता दे कि रियो ओलंपिक से कुछ दिन पहले भारतीय पहलवान नरसिंह यादव का डोप सैम्पल पॉजिटिव पाया गया था जिसके बाद नरसिंह ने दलील दी थी कि उन्हें किसी ने साजिश के तहत फंसाया है. उनके खाने में किसी ने कुछ आपत्तिजनक पदार्थ मिलाया है. इसके बाद नरसिंह को भारतीय कुश्ती संघ से तो रियो के लिए अनुमति मिल गई थी और वह रियो भी पहुच गए थे लेकिन उनके मुकाबले से कुछ ही घंटो पहले नरसिंह पर खेल पंचाट ने चार साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया. इसके बाद नरसिंह ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा था कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है. वे निर्दोष है. अगर वह दोषी पाए जाए तो उन्हें फांसी दे दी जाए. सीबीआई ने यह मामला धारा एक सौ बीस-बी , तीन सौ अट्ठाईस और आईपीसी की धारा पाँच सौ छः के तहत मुकदमा दायर कर लिया है. सीबीआई प्रवक्ता देवप्रीत सिंह के मुताबिक नरसिंह का आरोप है कि- उनके खाने या पानी में प्रतिबंधित पदार्थ मिलाया गया था ताकि वह रियो ओलंपिक में भाग नहीं ले सके जिसके लिये उसने क्वालीफाई किया था.
करवे इस वाली औरत से व्याह का ? समाज में मुह क्स दिखाऊँगा ?" मेरिसन गुस्से में बाहर चला गया। सन् १७६५ वा निममस आ गया । क्लवता शहर वे साहवा व समाज म महोत्सव है। गिरजाघर में प्राथना के लिए आम तौर पर आधा दजन पालकिया भी नहीं हाजिर होती, किन्तु विसमस का उत्सव धूमधाम से होता है । यहाँ पर देशी प्रभाव पड़ा है। साहनों के घरो व फाटक पर दोनो तरफ केले वे पोधे गाडे जाते हैं, फूलो और पत्तो से फाटक को अच्छी तरह मजाया जाता है। बडे लाट जाने माने लोगो को प्रातकालीन नाश्ते पर आमंत्रित करते है। लाल दोघी से दनादन ताप दार्गे जाते है । दापहर म शानदार भाज। लम्बे पात्रा में लाल मंदिरा ढाल ढालकर सभी लोग पूरे वप भर का दुख शोष धो डालते है । सध्या से लेकर सारी रात चलता है नाच गान । लालदीघी के कमान ने सुबह से ही अनेक तोप दाग । उसके धमाके की आवाज ने कलकत्ता शहर वो एक छोर से दूसरे छोर तक कँपा दिया। सुबह से ही लेवेदेव न भेंट की अनद डालिया दो और ली। उपहारा वा पारस्परिव तेन देन उत्सव का अग है। प्रभावशाली अग्रेजो के यहा लेवेदेव न डालिया भेजी। फल फूल, भाति भाति की मदिराएँ । मिस्टर और मिसेज ह की डाली विशेष रूप मे दशनीय थी। मिस्टर हे जग्रेजी सरकार के एक प्रमुख सविध है । निसेज एतिजाबथ हे संगीतरसिक है ।यहा स एवं गुप्त लिखित संदेश आया - मित्र, हताश नही हाना, आवेदनपत्र अभी तक अस्वीकृत नही हुआ है।" बड लाट सर जात शोर के पास अग्रेजी थियेटर की मजूरी व लिए लवदेव ने जो आवेदन किया था, वह अभी तक मजूर या नामजूर नहीं हुआ है। लेवदेव के दिन म आशा बंधी । नववय का नूतन उपहार आया--गवनर जनरल की अनुमति । महामहिम सर जान शोर ने प्रसन्न मन से अनुमति दी है कि गरासिम लेवेदव क्लकता शहर में अंग्रेजी नाटक का अभिनय करा सकते हैं । क्लकत्ता शहर में गेरासिम लेवदेव अग्रेजी थियटर खोलेगा । सुनो स्विज, १०६ / लेबेदेव को नायिका
करवे इस वाली औरत से व्याह का ? समाज में मुह क्स दिखाऊँगा ?" मेरिसन गुस्से में बाहर चला गया। सन् एक हज़ार सात सौ पैंसठ वा निममस आ गया । क्लवता शहर वे साहवा व समाज म महोत्सव है। गिरजाघर में प्राथना के लिए आम तौर पर आधा दजन पालकिया भी नहीं हाजिर होती, किन्तु विसमस का उत्सव धूमधाम से होता है । यहाँ पर देशी प्रभाव पड़ा है। साहनों के घरो व फाटक पर दोनो तरफ केले वे पोधे गाडे जाते हैं, फूलो और पत्तो से फाटक को अच्छी तरह मजाया जाता है। बडे लाट जाने माने लोगो को प्रातकालीन नाश्ते पर आमंत्रित करते है। लाल दोघी से दनादन ताप दार्गे जाते है । दापहर म शानदार भाज। लम्बे पात्रा में लाल मंदिरा ढाल ढालकर सभी लोग पूरे वप भर का दुख शोष धो डालते है । सध्या से लेकर सारी रात चलता है नाच गान । लालदीघी के कमान ने सुबह से ही अनेक तोप दाग । उसके धमाके की आवाज ने कलकत्ता शहर वो एक छोर से दूसरे छोर तक कँपा दिया। सुबह से ही लेवेदेव न भेंट की अनद डालिया दो और ली। उपहारा वा पारस्परिव तेन देन उत्सव का अग है। प्रभावशाली अग्रेजो के यहा लेवेदेव न डालिया भेजी। फल फूल, भाति भाति की मदिराएँ । मिस्टर और मिसेज ह की डाली विशेष रूप मे दशनीय थी। मिस्टर हे जग्रेजी सरकार के एक प्रमुख सविध है । निसेज एतिजाबथ हे संगीतरसिक है ।यहा स एवं गुप्त लिखित संदेश आया - मित्र, हताश नही हाना, आवेदनपत्र अभी तक अस्वीकृत नही हुआ है।" बड लाट सर जात शोर के पास अग्रेजी थियेटर की मजूरी व लिए लवदेव ने जो आवेदन किया था, वह अभी तक मजूर या नामजूर नहीं हुआ है। लेवदेव के दिन म आशा बंधी । नववय का नूतन उपहार आया--गवनर जनरल की अनुमति । महामहिम सर जान शोर ने प्रसन्न मन से अनुमति दी है कि गरासिम लेवेदव क्लकता शहर में अंग्रेजी नाटक का अभिनय करा सकते हैं । क्लकत्ता शहर में गेरासिम लेवदेव अग्रेजी थियटर खोलेगा । सुनो स्विज, एक सौ छः / लेबेदेव को नायिका
नई दिल्ली। भारतीय फुटबॉल टीम के दिग्गज स्ट्राइकर सुनील छेत्री टखने की चोट के कारण जॉर्डन के खिलाफ होने वाले दोस्ताना मुकाबले में नहीं खेलेंगे। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के अनुसार, इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में बेंगलुरू से खेलने वाले छेत्री को पांच नवंबर को केरला ब्लास्टर्स के खिलाफ हुए मैच में टखने में चोट लगी। भारतीय टीम के फिजियोथेरेपिस्ट गिगी जॉर्ज ने कहा कि बेंगलुरू की मेडिकल टीम ने हमारे साथ छेत्री की एमआरआई एवं स्वास्थ्य की जांच रिपोर्ट साझा की है और हमने उसकी ध्यानपूर्वक जांच की। सुनील को करीब दो सप्ताह तक आराम की जरूरत है जिसके बाद वे ट्रेनिंग पर लौट सकते हैं। टीम के चिकित्सक शेरविन शेरिफ ने कहा कि सुनील चोटिल होने के कारण टीम के साथ यात्रा नहीं कर सकते। उन्हें जल्दी ठीक होने के लिए आराम और इलाज की जरूरत है। भारतीय टीम 17 नवंबर को जॉर्डन का सामना करेगी। रोमांचक मैच में सिटी ने चिर प्रतिद्वंद्वी युनाइटेड को 2-1 से मात दी। बदलेगी, जिसमें वे युनाइटेड को उसके खेल में सुधार करते हुए देख रहे हैं। उनकी टीम बेहतर होती जा रही है। हमारी टीम सुधार कर रही है और हम अंत तक साथ रहेंगे। मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में मोरिन्हो ने कहा कि हम इस हार से प्रभावित नहीं होने वाले हैं। मैं इस बात के लिए निराश हूं कि हमारे अगले मैच में अभी काफी समय है। अगले मैच के लिए हमें 13 दिनों का इंतजार करना है।
नई दिल्ली। भारतीय फुटबॉल टीम के दिग्गज स्ट्राइकर सुनील छेत्री टखने की चोट के कारण जॉर्डन के खिलाफ होने वाले दोस्ताना मुकाबले में नहीं खेलेंगे। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के अनुसार, इंडियन सुपर लीग में बेंगलुरू से खेलने वाले छेत्री को पांच नवंबर को केरला ब्लास्टर्स के खिलाफ हुए मैच में टखने में चोट लगी। भारतीय टीम के फिजियोथेरेपिस्ट गिगी जॉर्ज ने कहा कि बेंगलुरू की मेडिकल टीम ने हमारे साथ छेत्री की एमआरआई एवं स्वास्थ्य की जांच रिपोर्ट साझा की है और हमने उसकी ध्यानपूर्वक जांच की। सुनील को करीब दो सप्ताह तक आराम की जरूरत है जिसके बाद वे ट्रेनिंग पर लौट सकते हैं। टीम के चिकित्सक शेरविन शेरिफ ने कहा कि सुनील चोटिल होने के कारण टीम के साथ यात्रा नहीं कर सकते। उन्हें जल्दी ठीक होने के लिए आराम और इलाज की जरूरत है। भारतीय टीम सत्रह नवंबर को जॉर्डन का सामना करेगी। रोमांचक मैच में सिटी ने चिर प्रतिद्वंद्वी युनाइटेड को दो-एक से मात दी। बदलेगी, जिसमें वे युनाइटेड को उसके खेल में सुधार करते हुए देख रहे हैं। उनकी टीम बेहतर होती जा रही है। हमारी टीम सुधार कर रही है और हम अंत तक साथ रहेंगे। मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में मोरिन्हो ने कहा कि हम इस हार से प्रभावित नहीं होने वाले हैं। मैं इस बात के लिए निराश हूं कि हमारे अगले मैच में अभी काफी समय है। अगले मैच के लिए हमें तेरह दिनों का इंतजार करना है।
नई दिल्ली टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने राजनीतिक दलों को चंदा देने के मकसद से शुरू की गई चुनावी बांड योजना पर रोक लगाने के लिए दायर अर्जी पर सोमवार को केन्द्र और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा, लेकिन उसने इस योजना पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने गैर सरकारी संगठन 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफाम्र्स' के आवेदन पर केन्द्र और निर्वाचन आयोग से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। इस संगठन की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि इस योजना का मतलब बगैर हिसाब-किताब वाले काले धन को सत्तारूढ़ दल के पक्ष में देना है। उन्होंने इस योजना पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के एक दस्तावेज का भी जिक्र कया। पीठ ने कहा, 'हम इसे देखेंगे। हम इस मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध कर रहे हैं। ' निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि ये सभी दलीलें पहले दी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के खिलाफ गैर सरकारी संगठन के आवेदन पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया जाए।
नई दिल्ली टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक दलों को चंदा देने के मकसद से शुरू की गई चुनावी बांड योजना पर रोक लगाने के लिए दायर अर्जी पर सोमवार को केन्द्र और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा, लेकिन उसने इस योजना पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने गैर सरकारी संगठन 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफाम्र्स' के आवेदन पर केन्द्र और निर्वाचन आयोग से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। इस संगठन की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि इस योजना का मतलब बगैर हिसाब-किताब वाले काले धन को सत्तारूढ़ दल के पक्ष में देना है। उन्होंने इस योजना पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के एक दस्तावेज का भी जिक्र कया। पीठ ने कहा, 'हम इसे देखेंगे। हम इस मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध कर रहे हैं। ' निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि ये सभी दलीलें पहले दी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के खिलाफ गैर सरकारी संगठन के आवेदन पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया जाए।
मुंबईः महाराष्ट्र के मुंबई में मंत्रालय में पदस्थ एक उच्चस्तरीय अधिकारी की बेटी को एक कार ड्राइवर ने एड्रेस पूछने के बहाने पास बुलाया। तत्पश्चात, ड्राइवर उसके सामने अश्लील हरकत करने लगा। जब यह घटना हुई, उस वक़्त पीड़ित लड़की के मोबाइल की वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन थी, इससे पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई। पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने के पश्चात् अपराधी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है। वही अपराधी की पहचान 23 वर्षीय अब्दुल अहमद गौस मोहम्मद रहीनी के तौर पर की गई है। कहा जा रहा है कि 6 जनवरी की रात 9 बजे पीड़ित लड़की हाजी अली से गुजर रही थी। उसी के चलते एक कार कंपनी में पिकअप और ड्रॉप का काम करने वाले ड्राइवर ने लड़की को पता पूछने के बहाने पास बुलाया। इसके चलते लड़की को शक हुआ तो वह अपने मोबाइल में वीडियो रिकॉर्डिंग आरम्भ करके ड्राइवर के पास पहुंची। लड़की जब पास आई तो ड्राइवर ने उसके सामने अश्लील हरकत करना आरम्भ कर दिया। यह घटना लड़की के मोबाइल में कैद हो गई। पीड़िता ने शोर मचाना आरम्भ किया तो अपराधी ड्राइवर वहां से फरार हो गया। वही पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज कर तहकीकात आरम्भ कर दी। इलाके के तमाम CCTV खंगालने के पश्चात् पुलिस को पता चला कि ड्राइवर गाड़ी लेकर अंधेरी के एक ऑफिस में पहुंचा है। रात का समय होने की वजह से ऑफिस बंद हो चुका था। इसके कारण पुलिस को जानकारी नहीं मिल पाई। अपराधी अब्दुल का मोबाइल भी बंद था। रातभर पुलिस ने ऑफिस के बाहर और अन्य 2 स्थानों पर पहरा दिया। सुबह अपराधी ड्राइवर जैसे ही ऑफिस पहुंचा तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस दिलीप सावंत, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस अकबर पठान के आदेश पर पुलिस ने इस कार्यवाही को अंजाम दिया। वित्त मंत्री सीतारमण का बड़ा बयान, कहा- "निवेश के लिए लीक से हटकर सोचें उद्योग. . . " 'अडानी, अडानी, अडानी. . . ' संसद में बार-बार आखिर क्यों राहुल गांधी ने बोला एक ही नाम?
मुंबईः महाराष्ट्र के मुंबई में मंत्रालय में पदस्थ एक उच्चस्तरीय अधिकारी की बेटी को एक कार ड्राइवर ने एड्रेस पूछने के बहाने पास बुलाया। तत्पश्चात, ड्राइवर उसके सामने अश्लील हरकत करने लगा। जब यह घटना हुई, उस वक़्त पीड़ित लड़की के मोबाइल की वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन थी, इससे पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई। पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने के पश्चात् अपराधी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है। वही अपराधी की पहचान तेईस वर्षीय अब्दुल अहमद गौस मोहम्मद रहीनी के तौर पर की गई है। कहा जा रहा है कि छः जनवरी की रात नौ बजे पीड़ित लड़की हाजी अली से गुजर रही थी। उसी के चलते एक कार कंपनी में पिकअप और ड्रॉप का काम करने वाले ड्राइवर ने लड़की को पता पूछने के बहाने पास बुलाया। इसके चलते लड़की को शक हुआ तो वह अपने मोबाइल में वीडियो रिकॉर्डिंग आरम्भ करके ड्राइवर के पास पहुंची। लड़की जब पास आई तो ड्राइवर ने उसके सामने अश्लील हरकत करना आरम्भ कर दिया। यह घटना लड़की के मोबाइल में कैद हो गई। पीड़िता ने शोर मचाना आरम्भ किया तो अपराधी ड्राइवर वहां से फरार हो गया। वही पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज कर तहकीकात आरम्भ कर दी। इलाके के तमाम CCTV खंगालने के पश्चात् पुलिस को पता चला कि ड्राइवर गाड़ी लेकर अंधेरी के एक ऑफिस में पहुंचा है। रात का समय होने की वजह से ऑफिस बंद हो चुका था। इसके कारण पुलिस को जानकारी नहीं मिल पाई। अपराधी अब्दुल का मोबाइल भी बंद था। रातभर पुलिस ने ऑफिस के बाहर और अन्य दो स्थानों पर पहरा दिया। सुबह अपराधी ड्राइवर जैसे ही ऑफिस पहुंचा तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस दिलीप सावंत, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस अकबर पठान के आदेश पर पुलिस ने इस कार्यवाही को अंजाम दिया। वित्त मंत्री सीतारमण का बड़ा बयान, कहा- "निवेश के लिए लीक से हटकर सोचें उद्योग. . . " 'अडानी, अडानी, अडानी. . . ' संसद में बार-बार आखिर क्यों राहुल गांधी ने बोला एक ही नाम?
पड्यन्त्री का बोलबाला था। उस प्रथा को छोड़कर सम्मेलन प्रणाली को अपनाया गया । पार्टी के प्रतिनिधियों ( delegates ) की बैठक को सम्मेलन या कन्वेशन ( Convention ) कहते हैं। पार्टी के सदस्य सम्मेलन द्वारा चुने गए व्यक्तियों को मान्य ठहराने के लिए बाध्य है। इस सम्बन्ध मे बड़ी-बड़ी श्राधाएँ की गयी थी लेकिन बुराइयों का परित्याग न किया जा सका क्योंकि गुट नेता ( Bosses ) सम्मेलनो पर भी छाए रहते थे। यह अनुभव किया गया कि निष्कपट नागरिकों के लिए निर्वाचन में मनोनीत होने का कोई अवसर नही । परिणाम यह हुआ कि सम्मेलन-व्यवस्था समाप्त कर दी गई और अधिकाश राज्यों में उसका स्थान प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान ( Direct Primaries ) की व्यवस्था ने ले लिया। प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान की व्यवस्था के अन्तर्गत विभिन्न निर्वाचित पदो के लिए प्रत्याशियों का मनोनयन प्रत्यक्ष मतदाताओं के द्वारा होता है। प्राथमिक - मतदान तीन प्रकार का है -- सार्वजनिक (Open), गुप्त (Closed) और निष्पक्ष (Nonpartisan) । सार्वजनिक प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान ( Open Direct Primaries ) के अन्तर्गत प्रत्येक मताधिकारी को सब दलों के मत पत्र (Ballots) दिये जाते हैं और यह अपनी इच्छानुसार मत दे सकता है। गुप्त प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान (Closed Direct Primary) केवल पार्टी के सदस्यों के लिए खुला रहता है । गुप्त प्रत्यक्ष प्राथमिक प्रणाली के अन्तर्गत मताधिकारी को दिए गए मत-पत्र में विभिन्न प्रत्याशियो की पार्टियों का उल्लेख नहीं होता । प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान प्रणाली के प्रयोग से पता चलता है कि इस प्रणाली ने भी सन्तोषजनक समाधान प्रस्तुत नही किया है। प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान भो नेताम्रो के नियन्त्रण में रहता है, जो कि अपने प्रापको और अपने मित्रो को मनोनीत करा लेते हैं। अपनी इच्छा के अनुसार कराने के लिए नेता और उनके सेवक अपनी इच्छानुसार कार्य करने के लिए जालसाजी और शक्ति का प्रयोग करते हैं। कोई भारचर्ये नही कि अच्छे नागरिक प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान से दूर रहते हैं। राजनीतिज्ञ साधारणतया प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान (Primary) नहीं चाहते। यह विवाद का विषय है कि प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान ने दल को निष्ठा को बहुत अधिक हानि पहुँचाई है और दल की एकता तथा संगठन को नष्ट किया है। पार्टी के किसी अन्य सदस्य के अनुरूप हुए बगैर भी; कोई मनुष्य अपनी याचिका (petition) घुमा सकता है, मत-पत्र (Ballot) पर अपना नाम रखवा सकता है और यह नामजद भी हो सकता है । सम्भवतः यह कॉकस ग्रथवा सम्मेलन प्रणाली के अन्तर्गत घटित नहीं हो सकेगा। प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान व्ययसाध्य है और यह व्यय सम्बन्धित दलो के द्वारा बहन न किया जाकर जन-कोप (public treasury ) के द्वारा बहन किया जाता है। मतदाता स्वतः ही निर्वाचनो से जवे होते है और प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान की स्वतन्त्रता सदस्यों के लिए नियमित चुनाव आन्दोलन के साथ दूसरा एक मोर चुनाव ग्रान्दोलन चालू करने को प्रावश्यक बना देती है। यह प्रणाली नागरिक क्षेत्रों को सुविधाजनक है, जहाँ कि निर्वाचन स्थलों ( polls) की दूरी कम होती है मतदान अपेक्षाकृत आसान है । ग्रामीण क्षेत्रों के विषयों में अधिक दूरी के कारण
पड्यन्त्री का बोलबाला था। उस प्रथा को छोड़कर सम्मेलन प्रणाली को अपनाया गया । पार्टी के प्रतिनिधियों की बैठक को सम्मेलन या कन्वेशन कहते हैं। पार्टी के सदस्य सम्मेलन द्वारा चुने गए व्यक्तियों को मान्य ठहराने के लिए बाध्य है। इस सम्बन्ध मे बड़ी-बड़ी श्राधाएँ की गयी थी लेकिन बुराइयों का परित्याग न किया जा सका क्योंकि गुट नेता सम्मेलनो पर भी छाए रहते थे। यह अनुभव किया गया कि निष्कपट नागरिकों के लिए निर्वाचन में मनोनीत होने का कोई अवसर नही । परिणाम यह हुआ कि सम्मेलन-व्यवस्था समाप्त कर दी गई और अधिकाश राज्यों में उसका स्थान प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान की व्यवस्था ने ले लिया। प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान की व्यवस्था के अन्तर्गत विभिन्न निर्वाचित पदो के लिए प्रत्याशियों का मनोनयन प्रत्यक्ष मतदाताओं के द्वारा होता है। प्राथमिक - मतदान तीन प्रकार का है -- सार्वजनिक , गुप्त और निष्पक्ष । सार्वजनिक प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान के अन्तर्गत प्रत्येक मताधिकारी को सब दलों के मत पत्र दिये जाते हैं और यह अपनी इच्छानुसार मत दे सकता है। गुप्त प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान केवल पार्टी के सदस्यों के लिए खुला रहता है । गुप्त प्रत्यक्ष प्राथमिक प्रणाली के अन्तर्गत मताधिकारी को दिए गए मत-पत्र में विभिन्न प्रत्याशियो की पार्टियों का उल्लेख नहीं होता । प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान प्रणाली के प्रयोग से पता चलता है कि इस प्रणाली ने भी सन्तोषजनक समाधान प्रस्तुत नही किया है। प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान भो नेताम्रो के नियन्त्रण में रहता है, जो कि अपने प्रापको और अपने मित्रो को मनोनीत करा लेते हैं। अपनी इच्छा के अनुसार कराने के लिए नेता और उनके सेवक अपनी इच्छानुसार कार्य करने के लिए जालसाजी और शक्ति का प्रयोग करते हैं। कोई भारचर्ये नही कि अच्छे नागरिक प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान से दूर रहते हैं। राजनीतिज्ञ साधारणतया प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान नहीं चाहते। यह विवाद का विषय है कि प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान ने दल को निष्ठा को बहुत अधिक हानि पहुँचाई है और दल की एकता तथा संगठन को नष्ट किया है। पार्टी के किसी अन्य सदस्य के अनुरूप हुए बगैर भी; कोई मनुष्य अपनी याचिका घुमा सकता है, मत-पत्र पर अपना नाम रखवा सकता है और यह नामजद भी हो सकता है । सम्भवतः यह कॉकस ग्रथवा सम्मेलन प्रणाली के अन्तर्गत घटित नहीं हो सकेगा। प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान व्ययसाध्य है और यह व्यय सम्बन्धित दलो के द्वारा बहन न किया जाकर जन-कोप के द्वारा बहन किया जाता है। मतदाता स्वतः ही निर्वाचनो से जवे होते है और प्रत्यक्ष प्राथमिक मतदान की स्वतन्त्रता सदस्यों के लिए नियमित चुनाव आन्दोलन के साथ दूसरा एक मोर चुनाव ग्रान्दोलन चालू करने को प्रावश्यक बना देती है। यह प्रणाली नागरिक क्षेत्रों को सुविधाजनक है, जहाँ कि निर्वाचन स्थलों की दूरी कम होती है मतदान अपेक्षाकृत आसान है । ग्रामीण क्षेत्रों के विषयों में अधिक दूरी के कारण
धरमजयगढ़ (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिये राज्य एवं केन्द शासन द्वारा अनेकों योजनायें चलाई जाती हैं, जिसमें अल्पसंख्यकों के शिक्षा स्तर एवं बेरोजगारी को दूर करने के लिये राज्य में छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड का गठन किया गया है, मदरसा बोर्ड द्वारा पंजीकृत मदरसों में अल्पसंख्यक वर्ग सहित सभी वगै के बच्चे विद्यार्जन करते हैं , जिसमें मदरसों में आधुनिक शिक्षा लागू किया गया है जहॉ उन्हें उर्दु अरबी के साथ साथ आधुनिक विषय जैसे पर्यावरण , गणित , अंग्रेजी , एवं हिन्दी सहित खेलकुद एवं अन्य तात्कालिक विषय शामिल होते हैं । इन आधुनिक मदरसों में इन विषयों को पढ़ाने के लिये शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिन्हें केन्द शासन द्वारा मदरसा बोर्ड के माध्यम से सालाना अनुदान के रूप में राशि दी जाती है, यह राशि समय समय पर घटती बढ़ती रहती है, इसी अनुदान राशि से इन मदरसों को संचालित किया जाता है लेकिन बच्चों की अधिक संख्या होने तथा साधन एवं अनुदान राशि सीमित होने के कारण अब इन शिक्षकों एवं मदरसों को मदरसा संचालित करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी कड़ी में विगत दो शिक्षा सत्र 2008-09 एवं 2009-10 का अनुदान राशि आज तक जिले में संचालित मदरसों को पाप्त नहीं हो पाया है, जिससे मदरसों कुशल संचालन एवं इन मदरसों में नियुक्त शिक्षकों का भरण पोषण भी हो पाना दुभर हो रहा है, जहां आज तक कई मदरसे भवन विहीन हैं, वहीं कई मदरसे अन्य कई पकार के अभावों से जूझ रहे हैं, उस पर तुर्रा यह कि राज्य शासन द्वारा मिलने वाली स्टेशनरी भी इन मदरसों को समय पर पाप्त नहीं हो पाती है, मदरसा शिक्षकों को किताबों के लिये संकुल के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब कही जाकर लेट लतीफी से इन मदरसों को पुस्तवें उपलब्ध हो पाती हैं।
धरमजयगढ़ । अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिये राज्य एवं केन्द शासन द्वारा अनेकों योजनायें चलाई जाती हैं, जिसमें अल्पसंख्यकों के शिक्षा स्तर एवं बेरोजगारी को दूर करने के लिये राज्य में छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड का गठन किया गया है, मदरसा बोर्ड द्वारा पंजीकृत मदरसों में अल्पसंख्यक वर्ग सहित सभी वगै के बच्चे विद्यार्जन करते हैं , जिसमें मदरसों में आधुनिक शिक्षा लागू किया गया है जहॉ उन्हें उर्दु अरबी के साथ साथ आधुनिक विषय जैसे पर्यावरण , गणित , अंग्रेजी , एवं हिन्दी सहित खेलकुद एवं अन्य तात्कालिक विषय शामिल होते हैं । इन आधुनिक मदरसों में इन विषयों को पढ़ाने के लिये शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिन्हें केन्द शासन द्वारा मदरसा बोर्ड के माध्यम से सालाना अनुदान के रूप में राशि दी जाती है, यह राशि समय समय पर घटती बढ़ती रहती है, इसी अनुदान राशि से इन मदरसों को संचालित किया जाता है लेकिन बच्चों की अधिक संख्या होने तथा साधन एवं अनुदान राशि सीमित होने के कारण अब इन शिक्षकों एवं मदरसों को मदरसा संचालित करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी कड़ी में विगत दो शिक्षा सत्र दो हज़ार आठ-नौ एवं दो हज़ार नौ-दस का अनुदान राशि आज तक जिले में संचालित मदरसों को पाप्त नहीं हो पाया है, जिससे मदरसों कुशल संचालन एवं इन मदरसों में नियुक्त शिक्षकों का भरण पोषण भी हो पाना दुभर हो रहा है, जहां आज तक कई मदरसे भवन विहीन हैं, वहीं कई मदरसे अन्य कई पकार के अभावों से जूझ रहे हैं, उस पर तुर्रा यह कि राज्य शासन द्वारा मिलने वाली स्टेशनरी भी इन मदरसों को समय पर पाप्त नहीं हो पाती है, मदरसा शिक्षकों को किताबों के लिये संकुल के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब कही जाकर लेट लतीफी से इन मदरसों को पुस्तवें उपलब्ध हो पाती हैं।
जीरादेईः ऋषि सुनक के ब्रिटेन में पीएम बनने के साथ ही भारत में भी हर्ष की लहर है. जिस ब्रिटेन ने भारत पर राज किया था, आज उसी ब्रिटेन पर एक भारतवंशी राज करेगा. इसी के साथ चर्चा एक और नाम की है. ये नाम है प्रज्वल पांडेय का, जो कि ऋषि सुनक की कोर टीम में शामिल हुए हैं. प्रज्वल ने एक साथ ही बिहार और झारखंड दो प्रदेशों का नाम रौशन किया है. जहां एक तरफ बिहार के जीरादेई, सीवान में खुशी की लहर है तो वहीं झारखंड के सिंदरी के लोग भी खुश है. असल में, सीवान के जीरादेई की चर्चा डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम के साथ होती है. यहां जन्में डॉ राजेंद्र बाबू देश के पहले राष्ट्रपति बने. ब्रिटेन में हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद जीरादेई एक बार फिर चर्चा है. भारतीय मूल के पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की कोर टीम में सीवान जिले के जीरादेई प्रखंड के जामापुर के रहने वाले प्रज्वल पांडेय भी शामिल हैं. वे बागीश दत्त पांडेय के पोता व राजेश पांडेय व मनीषा पांडेय के पुत्र हैं. प्रज्वल अपने माता- पिता के साथ करीब एक दशक से ब्रिटेन में रहते हैं. प्रज्वल पांडेय के दादा नौकरी की वजह से झारखंड के सिंदरी में रहते हैं. इनके परिवार के लोगों का अक्सर गांव जामापुर आना - जाना रहता है. प्रज्वल को ब्रिटेन के पीएम की टीम में शामिल किए होने से सीवान जिले के लोगों में खुशी है. अगस्त 2022 में ऋषि सुनक प्रधानमंत्री पद के लिए जब चुनाव में उतरे तो प्रज्वल को उनकी पार्टी की ओर से मुख्य अभियान टीम में शामिल किया गया था. प्रज्वल 2019 में मात्र 16 साल की उम्र में ब्रिटेन के कंजरवेटिव पार्टी के सदस्य के रूप में शामिल हुए थे. इससे पहले प्रज्वल 2019 में ही यूके यूथ पार्लियामेंट के निर्वाचित सदस्य चुने गए. वे युवा संसद सदस्य के रूप में ब्रिटिश संसद में पहली बार भाषण भी दिए. प्रज्वल के चाचा अमित पांडेय ने बताया कि वह बचपन से ही मेधावी रहे हैं. वह 2021 में हार्वर्ड इंटरनेशनल इकोनॉमिक कांटेस्ट के विजेता भी रहे हैं. प्रज्वल 2019 में यूके यूथ पार्लियामेंट के लिए भी रिकॉर्ड वोट से जीत हासिल किए थे. प्रज्वल सुनक की टीम के कम्युनिकेशन एंड आउट रीच डिवीजन में कार्यरत रहे हैं.
जीरादेईः ऋषि सुनक के ब्रिटेन में पीएम बनने के साथ ही भारत में भी हर्ष की लहर है. जिस ब्रिटेन ने भारत पर राज किया था, आज उसी ब्रिटेन पर एक भारतवंशी राज करेगा. इसी के साथ चर्चा एक और नाम की है. ये नाम है प्रज्वल पांडेय का, जो कि ऋषि सुनक की कोर टीम में शामिल हुए हैं. प्रज्वल ने एक साथ ही बिहार और झारखंड दो प्रदेशों का नाम रौशन किया है. जहां एक तरफ बिहार के जीरादेई, सीवान में खुशी की लहर है तो वहीं झारखंड के सिंदरी के लोग भी खुश है. असल में, सीवान के जीरादेई की चर्चा डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम के साथ होती है. यहां जन्में डॉ राजेंद्र बाबू देश के पहले राष्ट्रपति बने. ब्रिटेन में हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद जीरादेई एक बार फिर चर्चा है. भारतीय मूल के पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की कोर टीम में सीवान जिले के जीरादेई प्रखंड के जामापुर के रहने वाले प्रज्वल पांडेय भी शामिल हैं. वे बागीश दत्त पांडेय के पोता व राजेश पांडेय व मनीषा पांडेय के पुत्र हैं. प्रज्वल अपने माता- पिता के साथ करीब एक दशक से ब्रिटेन में रहते हैं. प्रज्वल पांडेय के दादा नौकरी की वजह से झारखंड के सिंदरी में रहते हैं. इनके परिवार के लोगों का अक्सर गांव जामापुर आना - जाना रहता है. प्रज्वल को ब्रिटेन के पीएम की टीम में शामिल किए होने से सीवान जिले के लोगों में खुशी है. अगस्त दो हज़ार बाईस में ऋषि सुनक प्रधानमंत्री पद के लिए जब चुनाव में उतरे तो प्रज्वल को उनकी पार्टी की ओर से मुख्य अभियान टीम में शामिल किया गया था. प्रज्वल दो हज़ार उन्नीस में मात्र सोलह साल की उम्र में ब्रिटेन के कंजरवेटिव पार्टी के सदस्य के रूप में शामिल हुए थे. इससे पहले प्रज्वल दो हज़ार उन्नीस में ही यूके यूथ पार्लियामेंट के निर्वाचित सदस्य चुने गए. वे युवा संसद सदस्य के रूप में ब्रिटिश संसद में पहली बार भाषण भी दिए. प्रज्वल के चाचा अमित पांडेय ने बताया कि वह बचपन से ही मेधावी रहे हैं. वह दो हज़ार इक्कीस में हार्वर्ड इंटरनेशनल इकोनॉमिक कांटेस्ट के विजेता भी रहे हैं. प्रज्वल दो हज़ार उन्नीस में यूके यूथ पार्लियामेंट के लिए भी रिकॉर्ड वोट से जीत हासिल किए थे. प्रज्वल सुनक की टीम के कम्युनिकेशन एंड आउट रीच डिवीजन में कार्यरत रहे हैं.
सहाय (सं० १९२२-८६), माधवराव सप्रे ( सं० १९२६-८८), कामता प्रसाद गुरु ( सं० १६३२-२००५), जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी (सं० १९३२६६), रामदास गौड़ (सं० १९३८६४), ज्वालादत्त शर्मा (ज० सं० १९४५) रामचन्द्र वर्मा (जं० स० १९४६) आदि भी अच्छे साहित्यकार थे । द्विवेदी-युग के साहित्यकारो और उनकी रचनाओं के उपर्युक्त विवरण से यह स्पष्ट है कि उस युग में मोलिक नाटक बहुत कम लिखे गये । भारतेन्दु युग के ग्रन्त में किशोरीलाल गोस्वामी (सं० १९२२-८६) ने जो नाटक लिखे थे उनमें नाम मात्र के लिए नाटकत्व था । द्विवेदी-युग में अयोध्यासिह उपाध्याय 'हरिऔध' ने 'रुक्मिणी परिणाय' (सं० १९५१) और 'प्रद्युम्न विजय' (सं० १९५०) नामक जो दो नाटक लिखे उनमें भी नाटक-कला का सर्वथा अभाव था । ज्वालाप्रसाद मिश्र, कृत 'सीता बनवास' (संः १६५२) और 'रामलीला रामायण' (सं० १६६१); वनदेव प्रसाद मिश्र - कृत 'नन्दविदा' (सं० १६५७), 'लल्लाबाबू' (सं० १९५७), 'विचित्र विनोद ' ( स० १९५६), 'नवीन तपस्विनी' ( सं० १९५६), 'असत्य संकल्प' (सं० १९५६ ). 'राजा ययाति' (सं० १६५६ ), और 'मीराबाई ( सं० १९५६); बन्दी दीन दीक्षित- कृत 'सीता हरण' ( स० १९५२) और 'सीता स्वयंवर' (सं० १९५२); शिवनन्दन सहाय (सं० १९२२-८६) कृत 'सुदामा नाटक ' (सं० १९६४); राय देवीप्रसाद 'पूर्ण' (सं० १९२५-७२) कृत 'चन्द्रकला भानुकमार' (सं० १६६१ ) ; देवदत्त शर्मा - कृत 'बाल-विवाह नाटक (सं० १९५४); जीवानन्द शर्मा काव्यतीर्थ-कृत 'भारत - विजय' (सं० १९६४), भीष्म प्रतिज्ञा' (सं० १९६५), 'बाबा का व्याह' (सं० १९७०), 'छूत का भूत (सं० १९७०), और 'दर्श विवाह' (सं० १९७०); बद्रीनाथ भट्ट- कृत 'कुरु-वन-दहन' (सं० १६६६), 'चुंगी की उम्मेदवारी' (सं० १९७१) 'मेम्बरी की धूम' (सं० १६७१) और 'चन्द्रगुप्त' ( सं० १९७२) आदि भी साधारण रचनाएँ सिद्ध हुईं । माधव शुक्ल - कृत 'महाभारत' (सं० १९७२); आनन्द प्रसाद खत्री- कृत 'संसार - स्वप्न' (सं० १९७०) और लोचन प्रसाद पाण्डेय - कृत 'प्रेम प्रशंसा (सं० १६७९) आदि कुछ अच्छे बन पड़े। द्विवेदी - युग में चारों ओर इतनी अधिक संख्या में नाटककम्पनियाँ उत्पन्न हो गयी थीं और उनकी इतनी धूम थी कि उनके लिए खेलने योग्य नाटकों का सदैव टोटा बना रहता था । ऐसी दशा में साहित्यिक नाटक रचना की ओर किसी साहित्यकार का ध्यान आकृष्ट नहीं हुआ। उस युग में अधिकांश मौलिक रंगमंचीय नाटक ही लिखे गये । द्विवेदी-युग में अंगरेजी, बंगला और संस्कृत के नाटकों के खूब अनुवाद हुए। लाला सीताराम (सं० १९९५-९६३) ने शेक्सपियर के तीन नाटकों का अनुवाद 'मनमोहन का जाल ' ( सं० १९५०), 'सिम्बोलीन' ( सं० १९५२) और 'भूलभुलैयाँ' (सं० १९७२) के नाम से प्रकाशित किया । जयपुर-निवासी गोपीनाथ पुरोहित ने 'एज़ यू लाइक इट' का अनुवाद 'मन-भावन' (सं० १६५३), 'रोमियो जूलियट' का अनुवाद 'प्रेम लीला' ( सं० १९५४), 'मर्चेंट वेनिस का अनुवाद 'वेनिस का व्यापारी ( सं० १६५४) और 'किंग लियर ' (सं० १९५४ ) प्रकाशित किया । मथुरा प्रसाद चौधरी ने भी 'मैकबेथ' का अत्यन्त सुन्दर अनुवाद 'साहसेंद्र साहस' (सं० १९६५०) और 'हैट' का अनुवाद 'जयत' (सं० १९६७ ) के नाम से किया । बंगला के भी कई नाटकों के अनुवाद हुए । गोपालराम गहमीरी ने 'बभ्रुवाहन' (सं० १९४६), 'विद्या विनोद (सं० १९४६), 'देशदशा' (सं० १९४६), 'यौवन वियोगिनी' (सं० १९५०) और 'वनवीर' (सं० १६७०);रूपनारायण पाण्डेय (ज० सं० १९४१) ने गिरीश बाबू के 'पतिव्रता', क्षीरोदप्रसाद विद्याविनोद के 'खाँ जहाँ' (सं० १६७५), द्विजेन्द्रलाल राय के 'उस पार' (सं० १६७४), 'शाहजहाँ', 'दुर्गादास', 'ताराबाई' और रवीन्द्र बाबू के 'अचलायतन आदि कई नाटको के अनुवाद किये । संस्कृत नाटकों के अनुवाद भी हुए । लाला सीताराम ने 'मेघदूत', (सं० १९४०), 'नागानन्द' (सं० १९४४), 'महावीर-चरित' (सं० १९५४), 'उत्तर राम-चरित' (सं० १९५४), ' मालविकाग्निमित्र' ( स० १६५५), 'मालती-माधव', (सं० १९५६), और 'मृच्छकटिक' (सं० १९५६), के अत्यन्त सुन्दर अनुवाद प्रस्तुत किये । ज्वाला प्रसाद मिश्र ने 'वेणी संहार' (सं० १९५२ ) और 'अभिज्ञान शाकुन्तल' (सं० १९५६); बालमुकुन्द गुप्त (मं० १६२२.६४) ने 'रत्नावली नाटिका' (सं० १६५५) और सत्यनारायस 'कविरत्न' ने 'उत्तर राम-चरित' (स० १६७०) तथा 'मालती माधव' (सं० १६७५) का सरस अनुवाद किया । द्विवेटी-युग में नाटकों की अपेक्षा मौलिक उपन्यास अधिक लिसे गये और अनुवाद भी खूब हुए । देवकी नन्दन खत्री (सं० १६१८-७०) ने 'चन्द्रकान्ता संतति' (सं० १६५३) 'कुनुम कुमारी (सं० १९५६), 'नौलखा हार' (नं० १९५६), 'गुप्त गोदना' (गं० १९५६), 'काजल की फोटरी (म० १९५६), 'अनूठी वेगम' (सं० १९६२) और 'भूतनाथ' (सं० १९६६) नामक करें (तिलस्म' और 'ऐयारी' के उपन्यासों की रचना की। उनके इन उपन्यासों में भी पहले की भांति घटना-वैचित्र्य की प्रधानता रही, चरित्र चित्रण का प्रवेश नहीं हुआ। किशोरीलाल गोरवामी (सं० १६२२८१) ने सं० १९५५ में 'उपन्यास' नामक समाचार पत्र निकाला और कई सामाजिक, ऐतिहासिक और जासूसी उपन्यासों की रचना की । 'कुसुम कुमारी (सं० १९५५), 'तारा' (सं० १९५६), 'राजकुमारी ( स० १९५६), 'चपला' (सं० १९६०), 'लखनऊ की कब्र' (सं० १९६३), 'पन्नाबाई' (सं० १६६७), 'लाल कुँवर ' (सं० १९६६), 'रजिया बेगम' (सं० १९७२) यदि उनके प्रमुख ऐतिहासिक; 'त्रिवेणी' (सं० १९५१), 'लीलावती' (सं० १९५८), 'सौतिया डाह' (सं० १९६४) आादि उनके प्रमुख सामाजिक और 'याक्ती तख्ती' (सं० १९६३), 'कटे मूद्र की दो-दो बातें' (सं० १९६२), 'जिन्दे की लाश' (सं० १६६२ ) यदि उनके प्रमुख जासूसी उपन्यास थे। उन्होंने अपनी रचनाओं द्वारा हिन्दी-उपन्यास-साहित्य को बहुत आगे बढ़ाया औौर उपन्यास कला की रक्षा भी की। यह सच्च है कि उन्होने उच्चकोटि र परिष्कृत मतोवृत्ति के उपन्यास नही लिखे, पर उन्होंने जो कुछ लिखा उससे उपन्यास के लिए एक क्षेत्र अवश्य तैयार हो गया। उनकी परंपरा में गोपाल राम गहमरी (सं० १९२३-२००५) ने भी कई उपन्यासों की रचना की जिनमें से कुछ ' जासूसी' कुछ सामाजिक और कुछ ऐतिहासिक हैं। 'अजीबलाश' (सं० १९५३), 'गुप्तचर' (सं० १९५६), 'डबल जासूस' ( सं० १६५७ ), 'खूनी कौन है ?' (सं० १९५७), 'जासूस पर जासूस' (सं० १९६१), 'किले में खून ' ( सं० १९६३), 'गुप्तभेद (सं० १६७०) आदि उनके बंगला के प्रसिद्ध के रूपांतरित उपन्यास हैं । स० १९५१ मे उन्होंने अँगरेजी के 'मिस्ट्री टेल्स' के ढंग पर एक 'गुप्त-कथा' नामक मासिक पत्र और सं० १९५७ में 'जासूस' मासिक पत्र जासूसी उपन्यासों के लिए निकाला था । यह पत्र सं० १९६६ तक बराबर चलता रहा। उनके लिखने का ढंग अत्यंत मनोरजक था । अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (सं० १९२२-२००४) ने भी उसी समय 'प्रेमकान्ता' (सं० १६५१), 'ठेठ हिन्दी का ठाठ) (सं० १६५६ ) 'खिलाफूल' (सं० १९६४) नामक उपन्यास लिखे । इन उपन्यासों में भाषा का कौशल विशेष था, औपन्यासिक कौशल नहीं था । उनके साथ ही लज्जाराम मेहता ( स० १९२०-८८) ने 'धूर्त रसिक लाल' (सं० १९५६), 'दर्शदंपति' (सं० १९६१), 'बिगड़े का सुधार' (सं० १६६४) 'हिन्दू' (सं० १६७२) नामक उपन्यासों की रचना की । इन उपन्यासो में भी शब्द-कौशल ही था । मन्नन द्विवेदी (सं० १९४२-७८) ने 'रामलाल' ( स० १६७९) और 'कल्याणी' ( सं १६७५) की रचना की । ब्रजनन्दन सहाय बी० ए० (ज० सं०१६३१) के 'अद्भुत प्रायश्चित (सं० १६६३), 'राजेन्द्र मालती' (सं० १९६३), 'सत्यभामा मंगल' (सं० १६६६), 'राधाकान्त' ( स० १६३६ ) , 'अरण्यवाला' (सं० १६७२), 'लालचीन' (सं० १९७३), 'सौदयोंपासक' (सं० १६७३) आदि उपन्यासों में सबसे पहले औपन्यासिक कला देखने को मिली। मौलिक उपन्यासों की भाँति ही अनूदित उपन्यासो का तांता लगा । रामकृष्ण वर्मा (सं० १९९६-६३) ने 'चित्तौर चातकी' (सं० १६५२) का और कार्तिकप्रसाद खन्नी ( स० १६०८ ६१ ) ने 'इला' ( सं० १९५२), 'प्रमीली' (सं० १९५३), ' जया ' ( सं० १९५३), 'मधुमालती' (सं० १६५५ ), 'दीनानाथ' ( सं० १९५६) आदि का बंगला से अनुवाद किया । गोपालराम गहमरी ने भी 'चतुरचंचला' (सं० १९५०), 'भानमती' (सं० १६५१ ), 'नयेवाचू' (सं० १९५१), सास-पतोह ( स० १९५६), 'बडा भाई' (सं० १६५७) 'देवरानी-जेठानी' (सं० १६५८), 'दो वहिन' (सं० १९५६), 'तीन पतोहू' (सं० १९६१) आदि के बंगला से हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किये । ईश्वरीप्रसाद शर्मा ने भी इस दिशा में यांग दिया यार 'कोकिला' (सं० १९६५), 'हिरण्यमयी' (सं० १९६५), 'स्वर्णमयी' (सं० १९६७), 'नलिनो बाबू' (सं० १९६८) औौर 'चन्द्रधर' (सं० १९७५) आदि की रचना की । रूपनारायण पाण्डेय ( जं० सं० १९४१) र गंगाप्रसाद गुप्त भी इस युग के सफल अनुवादक थे । गंगाप्रसाद गुप्त ने 'दुल्ला का खून' (सं० १६५०), 'नूरजहाँ ' ( सं० १९५६), 'पूना में हल चल' (सं० १९६०), 'हवाईनाव' (सं० १६६०) रूपनारायण पाण्डेय ने 'रमा' (सं० १९६२), 'भयानक भूल' ( सं० १९६३) आदि अनूदित उपन्यास लिखे । अँगरेजी मे रेनल्डस-कृत 'लैला', 'लन्दन - रहस्य' र 'टामकाका की कुटिया का भी अनुवाद हुआ। इस प्रकार, क्या मौलिक और क्या नूदित, दोनों दृष्टियों से भावी युग में उपन्यास - साहित्य के लिए पर्याप्त क्षेत्र तैयार होगया । कथा-साहित्य के अन्तर्गत द्विवेदी-युग में कहानी-साहित्य का जन्म हुआ । द्विवेदी-युग के पूर्व कहानी के नाम से 'वृहत्कथा', 'बैताल पचीसी', 'सिंहासन बत्तीसी', 'हितोपदेश', 'रानी केतकी की कहानी, ' कहानी-साहित्य आदि मिलती थी। उनमें इति-वृत्ति का ही प्रवाह था । का श्रारंभ स्थितियो और पात्रों के चित्रण का नहीं था । ऐसी कहानियॉ सर्व प्रथम बंगला-साहित्य में 'गल्न' के नाम से देखने को मिली। उनमे जीवन के मार्मिक और भाव व्यंजक चित्र मिलते । संभवतः उन्हीं कहानियों के प्रभाव से सर्वप्रथम किशोरीलाल गोस्वामी (सं० १६२२-८६) ने 'सरस्वती' मे 'इन्दुमती' (सं० १६५७ ) शीर्षक कहानी लिखी। इसके पश्चात् बंगला से अनूदित अथवा रूपान्तरित कई कहानियाँ उसमे प्रकाशित हुई । मोलिक कहानियो में क्रमशः किशोरीलाल गोस्वामी कृत 'गुलबहार' (सं० १९५६), भगवानदास कृत 'प्लेग की चुड़ैल' (सं० १९५६), वृन्दावन लाल वर्मा - कृत 'राखीबन्द भाई' (सं० १९६६), गिरिजादत्त वाजपेयी कृत 'पंडित और पंडितानी' (सं० १९६०), रामचन्द्र शुक्ल- कृत 'ग्यारह वर्ष का समय (सं० १९६०), और बंग महिला - कृत ' दुलाईबाली ( स० १६६४) लोकप्रिय हुईं । इनके पश्चात् जयशंकर प्रसाद ( सं० १९४६ - ६४ ) - कृत 'ग्राम' (सं० १६६८ ) नामक कहानी 'इंदु' में प्रकाशित हुई । उसी पत्र में गंगाप्रसाद श्रीवास्तव की भी कहानियाँ प्रकाशित हुई । प्रेमचन्द ( सं ० १९३७-९३) ने भी उसमें 'ग्राम' (सं० १९६३) शीर्षक कहानी लिखी । विशम्भरनाथ शर्मा कौशिक ( स० १९४८-२००३) की पहली कहानी 'रक्षा बन्धन' (सं० १६७०) 'सरस्वती' में प्रकाशित हुई । राधिकारमण प्रसाद सिंह ने भी उसी समय 'कानों में कंगना' ( स० १६७०) नामक एक कहानी लिखी और वह 'इन्दु' में छपी । ज्वालादत्त शर्मा और चतुरसेन शास्त्री ने भी इसी के आस-पास कहानी लिखना आरम्भ किया । सं० १६७२ में चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ( सं ० १६४०-७६) ने 'उसने कहा था' शीर्षक कहानी लिखी और 'सरस्वती' में प्रकाशित हुई । इस कहानी ने हिन्दी साहित्य में कहानी - कला का वास्तविक रूप प्रस्तुत किया । इसके पूर्व की कहानियाँ प्रायः घटना-प्रधान थीं, परन्तु सर्वप्रथम चरित्र - प्रधान कहानी सामने आइसने लेखक को कर दिया । स ० १६६३ से प्रेमचन्द को भी कहानियाँ सामने आने लगी। जयशंकर प्रसाद का प्रथम कहानी संग्रह 'छाया' (सं० १९६६), और प्रेमचन्द के 'सप्त- सरोज' ( स १६७३) और 'नवनिधि ( स० १६७५) भी इसी समय निकले । नाटक, उपन्यास और कहानी की भांति गद्य-शैली के प्रधान अग, निबंध, का भी विकास द्विवेदी-युग में अधिक हुआ । भारतेन्दु युग में विषयों का क्षेत्र सीमित था। उस समय के निबंधकारो के विषय प्रधानतयः उत्सव, त्योहार, ऋतु, जीवन-चर्या आदि ही थे। द्विवेदी-युग में राजनीतिक और सामाजिक जीवन के क्षेत्र विकसित होने और पत्र-पत्रिकाओो की संख्या बढ़ने से निबंध की प्रगति को विशेष सहायता मिली और प्रायः गंभीर एवं साधारण विषयों पर सभी शैलियो में निबन्ध लिखे गये । निबन्धों का आदर्श प्रस्तुत करने के लिए महावीर प्रसाद द्विवेदी ने 'वेकन-विचार रत्नावली और गंगाप्रसाद अग्निहोत्री (सं० १९२७-८८) ने 'निबन्धमाला' नामक अनूदित ग्रंथों की रचना की। महावीरप्रसाद द्विवेदी (सं० १९२७-६५) अपने युग के सर्व प्रथम निबन्धकार थे । उन्होंने 'सरस्वती' में अनेक निबन्ध लिखे । उनके अधिकांश निबध पत्रकार - शैली में होते थे और उनमें विचारों की प्रधानता रहती थी। ऐसे निबंधों को वह प्रायः साधारण पाठको अथवा लेखकों को सचेत करने के लिए ही लिखा करते थे । 'कवि र कविता' आदि उनके ऐसे ही निबंध हैं । इनके अतिरिक्त उन्होने कई आलोचनात्मक निबंध भी लिखे । 'कवि-कर्तव्य' उनका सर्वोत्तम निबंध है। उनके निबंधो के पाँच संग्रह मिलते हैं : 'रसज्ञ-रज्ञ्चन', 'रसज्ञ - रज्जन', 'अद्भुत लाप', 'अद्भुत लाप', 'साहित्य - सदर्भ, सीकर' और 'विचार-विमर्श' । इन संग्रहों में उनके जो निबन्ध संग्रहीत हैं उन्हें देखने से वह किसी विशिष्ट शैली के जन्मदाता के रूप में हमारे सामने नहीं आते। भाषा उनकी शुद्ध और प्रौढ़ है । उनके समकालीन निबन्धकार बालमुकुंद गुप्त ( सं० १९२२-६४ ) के निबन्ध व्यक्तित्व- प्रधान होते थे । वह उर्दू से हिन्दी में आए थे । इसलिए उन्होंने अपने निबन्धों-द्वारा हिन्दी - निबन्ध- साहित्य में एक विशिष्ट शैली को जन्म दिया था। मीठी चुटकी लेने में वही थे। उनकी शैली विनोद - पूर्ण, भावात्मक और व्यंगात्मक होती थी। उनके निबन्धों का संग्रह 'गुप्तनिबन्धावली' के नाम से मिलता है। गोपालराम गहमरी ( सं० १६२३२००५ ) भी कभी-कभी निबन्ध लिखा करते थे। उनके निबन्ध अत्यन्त भाव-व्यंजक और मनोरंजक होते थे । गोविन्दनारायण मिश्र ( सं० १६१६-८३) की निबन्ध-शैली संस्कृत-गर्भित होती थी । ब्रजभाषा का पुट भी उसमें रहता था । अनुप्रास के वह बहुत प्रेमी थे । माधवप्रसाद मिश्र ( सं० १९२८-६४ ) भावात्मक निबन्ध लिखने में वेजोड थे । धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक आदि सभी विषयों पर वह बहुत सुन्दर निबन्ध लिखते थे । उनकी द्वितीय उत्थान काल : द्विवेदी-युग भाषा में पर्याप्त बल रहता था । श्यामसुन्दर दास ( स ० १६३२-२००२ ) के निबन्ध प्रायः आलोचनात्मक, गवेषणात्मक अथवा विचारात्मक होते थे । वह शैलीकार नहीं थे, पर भाषा शुद्ध, सरल और गठी हुई लिखते थे । जगन्नाथप्रसाद चतुर्वेदी ( सं० १९३२-६३) हास्य और विनोदपूर्ण निबन्ध लिखने में कुशल थे। चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ( सं ० १६४०-७७ ) के निबन्धो में प्रसंग - गर्भत्व अधिक रहता था । इसलिए सब उसको समझ नहीं सकते थे । पांडित्यपूर्ण हास्य की सृष्टि उनके निबन्धों की विशेषता थी । वह अपने युग के शैलीकार थे । उनकी शैली में विशिष्टता और अर्थगर्भित वक्रता होती थी । अध्यापक पूर्णसिह (सं० १९३८-८८) के निबन्ध यद्यपि संख्या में कम थे तथापि वे उन्हें निबन्धकार और शैलीकार के रूप में प्रतिष्टित करने के लिए प्रर्याप्त थे । उनकी लाक्षणिकता हिन्दी साहित्य में एक अजीब चीज थी । भावात्मक शैली में उनके निबन्ध वेजोड होते थे । 'आचरण की सभ्यता', 'मज़दूरी और प्रेम', 'सच्ची वीरता' आदि उनके निबन्ध हिन्दी में अमर हैं । द्विवेदी-युग में समालोचना - साहित्य का सृजन भी पर्याप्त मात्रा में हुआ । समालोचना के मुख्यतः दो मार्ग होते है : (१) निर्णयात्मक और (२) व्याख्यात्मक । निर्णयात्मक आलोचना के अनुसार किसी रचना के गुण-दोष का विवेचन करके उसका मूल्यांकन किया जाता है । इसके विरुद्ध व्याख्यात्मक आलोचना किसी रचना का मूल्यांकन नहीं करती। वह उस ग्रंथ में आई हुई अनेक बातों को सामने रखकर उनका स्पष्टीकरण करती है । उसके अन्तर्गत बहुत-सी बाहरी बातों का भी विचार होता है जिसका सम्बन्ध दूसरी रचनाओं से रहता है । इस प्रकार के सम्बन्ध पर सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक परिस्थितियों का प्रभाव रहता है । इसलिए इस प्रकार के पारस्परिक संबंध को जब आलोचनात्मक ढंग से व्यक्त किया जाता है तब उसे ऐतिहासिक समालोचना कहते हैं। समालोचक जब अपनी आलोचना रचनाकार के जीवन-क्रम और उसकी अन्तवृत्तियों पर आधारित
सहाय , माधवराव सप्रे , कामता प्रसाद गुरु , जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी , रामदास गौड़ , ज्वालादत्त शर्मा रामचन्द्र वर्मा आदि भी अच्छे साहित्यकार थे । द्विवेदी-युग के साहित्यकारो और उनकी रचनाओं के उपर्युक्त विवरण से यह स्पष्ट है कि उस युग में मोलिक नाटक बहुत कम लिखे गये । भारतेन्दु युग के ग्रन्त में किशोरीलाल गोस्वामी ने जो नाटक लिखे थे उनमें नाम मात्र के लिए नाटकत्व था । द्विवेदी-युग में अयोध्यासिह उपाध्याय 'हरिऔध' ने 'रुक्मिणी परिणाय' और 'प्रद्युम्न विजय' नामक जो दो नाटक लिखे उनमें भी नाटक-कला का सर्वथा अभाव था । ज्वालाप्रसाद मिश्र, कृत 'सीता बनवास' और 'रामलीला रामायण' ; वनदेव प्रसाद मिश्र - कृत 'नन्दविदा' , 'लल्लाबाबू' , 'विचित्र विनोद ' , 'नवीन तपस्विनी' , 'असत्य संकल्प' . 'राजा ययाति' , और 'मीराबाई ; बन्दी दीन दीक्षित- कृत 'सीता हरण' और 'सीता स्वयंवर' ; शिवनन्दन सहाय कृत 'सुदामा नाटक ' ; राय देवीप्रसाद 'पूर्ण' कृत 'चन्द्रकला भानुकमार' ; देवदत्त शर्मा - कृत 'बाल-विवाह नाटक ; जीवानन्द शर्मा काव्यतीर्थ-कृत 'भारत - विजय' , भीष्म प्रतिज्ञा' , 'बाबा का व्याह' , 'छूत का भूत , और 'दर्श विवाह' ; बद्रीनाथ भट्ट- कृत 'कुरु-वन-दहन' , 'चुंगी की उम्मेदवारी' 'मेम्बरी की धूम' और 'चन्द्रगुप्त' आदि भी साधारण रचनाएँ सिद्ध हुईं । माधव शुक्ल - कृत 'महाभारत' ; आनन्द प्रसाद खत्री- कृत 'संसार - स्वप्न' और लोचन प्रसाद पाण्डेय - कृत 'प्रेम प्रशंसा आदि कुछ अच्छे बन पड़े। द्विवेदी - युग में चारों ओर इतनी अधिक संख्या में नाटककम्पनियाँ उत्पन्न हो गयी थीं और उनकी इतनी धूम थी कि उनके लिए खेलने योग्य नाटकों का सदैव टोटा बना रहता था । ऐसी दशा में साहित्यिक नाटक रचना की ओर किसी साहित्यकार का ध्यान आकृष्ट नहीं हुआ। उस युग में अधिकांश मौलिक रंगमंचीय नाटक ही लिखे गये । द्विवेदी-युग में अंगरेजी, बंगला और संस्कृत के नाटकों के खूब अनुवाद हुए। लाला सीताराम ने शेक्सपियर के तीन नाटकों का अनुवाद 'मनमोहन का जाल ' , 'सिम्बोलीन' और 'भूलभुलैयाँ' के नाम से प्रकाशित किया । जयपुर-निवासी गोपीनाथ पुरोहित ने 'एज़ यू लाइक इट' का अनुवाद 'मन-भावन' , 'रोमियो जूलियट' का अनुवाद 'प्रेम लीला' , 'मर्चेंट वेनिस का अनुवाद 'वेनिस का व्यापारी और 'किंग लियर ' प्रकाशित किया । मथुरा प्रसाद चौधरी ने भी 'मैकबेथ' का अत्यन्त सुन्दर अनुवाद 'साहसेंद्र साहस' और 'हैट' का अनुवाद 'जयत' के नाम से किया । बंगला के भी कई नाटकों के अनुवाद हुए । गोपालराम गहमीरी ने 'बभ्रुवाहन' , 'विद्या विनोद , 'देशदशा' , 'यौवन वियोगिनी' और 'वनवीर' ;रूपनारायण पाण्डेय ने गिरीश बाबू के 'पतिव्रता', क्षीरोदप्रसाद विद्याविनोद के 'खाँ जहाँ' , द्विजेन्द्रलाल राय के 'उस पार' , 'शाहजहाँ', 'दुर्गादास', 'ताराबाई' और रवीन्द्र बाबू के 'अचलायतन आदि कई नाटको के अनुवाद किये । संस्कृत नाटकों के अनुवाद भी हुए । लाला सीताराम ने 'मेघदूत', , 'नागानन्द' , 'महावीर-चरित' , 'उत्तर राम-चरित' , ' मालविकाग्निमित्र' , 'मालती-माधव', , और 'मृच्छकटिक' , के अत्यन्त सुन्दर अनुवाद प्रस्तुत किये । ज्वाला प्रसाद मिश्र ने 'वेणी संहार' और 'अभिज्ञान शाकुन्तल' ; बालमुकुन्द गुप्त ने 'रत्नावली नाटिका' और सत्यनारायस 'कविरत्न' ने 'उत्तर राम-चरित' तथा 'मालती माधव' का सरस अनुवाद किया । द्विवेटी-युग में नाटकों की अपेक्षा मौलिक उपन्यास अधिक लिसे गये और अनुवाद भी खूब हुए । देवकी नन्दन खत्री ने 'चन्द्रकान्ता संतति' 'कुनुम कुमारी , 'नौलखा हार' , 'गुप्त गोदना' , 'काजल की फोटरी , 'अनूठी वेगम' और 'भूतनाथ' नामक करें ने संशून्य एक हज़ार नौ सौ पचपन में 'उपन्यास' नामक समाचार पत्र निकाला और कई सामाजिक, ऐतिहासिक और जासूसी उपन्यासों की रचना की । 'कुसुम कुमारी , 'तारा' , 'राजकुमारी , 'चपला' , 'लखनऊ की कब्र' , 'पन्नाबाई' , 'लाल कुँवर ' , 'रजिया बेगम' यदि उनके प्रमुख ऐतिहासिक; 'त्रिवेणी' , 'लीलावती' , 'सौतिया डाह' आादि उनके प्रमुख सामाजिक और 'याक्ती तख्ती' , 'कटे मूद्र की दो-दो बातें' , 'जिन्दे की लाश' यदि उनके प्रमुख जासूसी उपन्यास थे। उन्होंने अपनी रचनाओं द्वारा हिन्दी-उपन्यास-साहित्य को बहुत आगे बढ़ाया औौर उपन्यास कला की रक्षा भी की। यह सच्च है कि उन्होने उच्चकोटि र परिष्कृत मतोवृत्ति के उपन्यास नही लिखे, पर उन्होंने जो कुछ लिखा उससे उपन्यास के लिए एक क्षेत्र अवश्य तैयार हो गया। उनकी परंपरा में गोपाल राम गहमरी ने भी कई उपन्यासों की रचना की जिनमें से कुछ ' जासूसी' कुछ सामाजिक और कुछ ऐतिहासिक हैं। 'अजीबलाश' , 'गुप्तचर' , 'डबल जासूस' , 'खूनी कौन है ?' , 'जासूस पर जासूस' , 'किले में खून ' , 'गुप्तभेद आदि उनके बंगला के प्रसिद्ध के रूपांतरित उपन्यास हैं । सशून्य एक हज़ार नौ सौ इक्यावन मे उन्होंने अँगरेजी के 'मिस्ट्री टेल्स' के ढंग पर एक 'गुप्त-कथा' नामक मासिक पत्र और संशून्य एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में 'जासूस' मासिक पत्र जासूसी उपन्यासों के लिए निकाला था । यह पत्र संशून्य एक हज़ार नौ सौ छयासठ तक बराबर चलता रहा। उनके लिखने का ढंग अत्यंत मनोरजक था । अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' ने भी उसी समय 'प्रेमकान्ता' , 'ठेठ हिन्दी का ठाठ) 'खिलाफूल' नामक उपन्यास लिखे । इन उपन्यासों में भाषा का कौशल विशेष था, औपन्यासिक कौशल नहीं था । उनके साथ ही लज्जाराम मेहता ने 'धूर्त रसिक लाल' , 'दर्शदंपति' , 'बिगड़े का सुधार' 'हिन्दू' नामक उपन्यासों की रचना की । इन उपन्यासो में भी शब्द-कौशल ही था । मन्नन द्विवेदी ने 'रामलाल' और 'कल्याणी' की रचना की । ब्रजनन्दन सहाय बीशून्य एशून्य के 'अद्भुत प्रायश्चित , 'राजेन्द्र मालती' , 'सत्यभामा मंगल' , 'राधाकान्त' , 'अरण्यवाला' , 'लालचीन' , 'सौदयोंपासक' आदि उपन्यासों में सबसे पहले औपन्यासिक कला देखने को मिली। मौलिक उपन्यासों की भाँति ही अनूदित उपन्यासो का तांता लगा । रामकृष्ण वर्मा ने 'चित्तौर चातकी' का और कार्तिकप्रसाद खन्नी ने 'इला' , 'प्रमीली' , ' जया ' , 'मधुमालती' , 'दीनानाथ' आदि का बंगला से अनुवाद किया । गोपालराम गहमरी ने भी 'चतुरचंचला' , 'भानमती' , 'नयेवाचू' , सास-पतोह , 'बडा भाई' 'देवरानी-जेठानी' , 'दो वहिन' , 'तीन पतोहू' आदि के बंगला से हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किये । ईश्वरीप्रसाद शर्मा ने भी इस दिशा में यांग दिया यार 'कोकिला' , 'हिरण्यमयी' , 'स्वर्णमयी' , 'नलिनो बाबू' औौर 'चन्द्रधर' आदि की रचना की । रूपनारायण पाण्डेय र गंगाप्रसाद गुप्त भी इस युग के सफल अनुवादक थे । गंगाप्रसाद गुप्त ने 'दुल्ला का खून' , 'नूरजहाँ ' , 'पूना में हल चल' , 'हवाईनाव' रूपनारायण पाण्डेय ने 'रमा' , 'भयानक भूल' आदि अनूदित उपन्यास लिखे । अँगरेजी मे रेनल्डस-कृत 'लैला', 'लन्दन - रहस्य' र 'टामकाका की कुटिया का भी अनुवाद हुआ। इस प्रकार, क्या मौलिक और क्या नूदित, दोनों दृष्टियों से भावी युग में उपन्यास - साहित्य के लिए पर्याप्त क्षेत्र तैयार होगया । कथा-साहित्य के अन्तर्गत द्विवेदी-युग में कहानी-साहित्य का जन्म हुआ । द्विवेदी-युग के पूर्व कहानी के नाम से 'वृहत्कथा', 'बैताल पचीसी', 'सिंहासन बत्तीसी', 'हितोपदेश', 'रानी केतकी की कहानी, ' कहानी-साहित्य आदि मिलती थी। उनमें इति-वृत्ति का ही प्रवाह था । का श्रारंभ स्थितियो और पात्रों के चित्रण का नहीं था । ऐसी कहानियॉ सर्व प्रथम बंगला-साहित्य में 'गल्न' के नाम से देखने को मिली। उनमे जीवन के मार्मिक और भाव व्यंजक चित्र मिलते । संभवतः उन्हीं कहानियों के प्रभाव से सर्वप्रथम किशोरीलाल गोस्वामी ने 'सरस्वती' मे 'इन्दुमती' शीर्षक कहानी लिखी। इसके पश्चात् बंगला से अनूदित अथवा रूपान्तरित कई कहानियाँ उसमे प्रकाशित हुई । मोलिक कहानियो में क्रमशः किशोरीलाल गोस्वामी कृत 'गुलबहार' , भगवानदास कृत 'प्लेग की चुड़ैल' , वृन्दावन लाल वर्मा - कृत 'राखीबन्द भाई' , गिरिजादत्त वाजपेयी कृत 'पंडित और पंडितानी' , रामचन्द्र शुक्ल- कृत 'ग्यारह वर्ष का समय , और बंग महिला - कृत ' दुलाईबाली लोकप्रिय हुईं । इनके पश्चात् जयशंकर प्रसाद - कृत 'ग्राम' नामक कहानी 'इंदु' में प्रकाशित हुई । उसी पत्र में गंगाप्रसाद श्रीवास्तव की भी कहानियाँ प्रकाशित हुई । प्रेमचन्द ने भी उसमें 'ग्राम' शीर्षक कहानी लिखी । विशम्भरनाथ शर्मा कौशिक की पहली कहानी 'रक्षा बन्धन' 'सरस्वती' में प्रकाशित हुई । राधिकारमण प्रसाद सिंह ने भी उसी समय 'कानों में कंगना' नामक एक कहानी लिखी और वह 'इन्दु' में छपी । ज्वालादत्त शर्मा और चतुरसेन शास्त्री ने भी इसी के आस-पास कहानी लिखना आरम्भ किया । संशून्य एक हज़ार छः सौ बहत्तर में चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने 'उसने कहा था' शीर्षक कहानी लिखी और 'सरस्वती' में प्रकाशित हुई । इस कहानी ने हिन्दी साहित्य में कहानी - कला का वास्तविक रूप प्रस्तुत किया । इसके पूर्व की कहानियाँ प्रायः घटना-प्रधान थीं, परन्तु सर्वप्रथम चरित्र - प्रधान कहानी सामने आइसने लेखक को कर दिया । स शून्य एक हज़ार छः सौ तिरेसठ से प्रेमचन्द को भी कहानियाँ सामने आने लगी। जयशंकर प्रसाद का प्रथम कहानी संग्रह 'छाया' , और प्रेमचन्द के 'सप्त- सरोज' और 'नवनिधि भी इसी समय निकले । नाटक, उपन्यास और कहानी की भांति गद्य-शैली के प्रधान अग, निबंध, का भी विकास द्विवेदी-युग में अधिक हुआ । भारतेन्दु युग में विषयों का क्षेत्र सीमित था। उस समय के निबंधकारो के विषय प्रधानतयः उत्सव, त्योहार, ऋतु, जीवन-चर्या आदि ही थे। द्विवेदी-युग में राजनीतिक और सामाजिक जीवन के क्षेत्र विकसित होने और पत्र-पत्रिकाओो की संख्या बढ़ने से निबंध की प्रगति को विशेष सहायता मिली और प्रायः गंभीर एवं साधारण विषयों पर सभी शैलियो में निबन्ध लिखे गये । निबन्धों का आदर्श प्रस्तुत करने के लिए महावीर प्रसाद द्विवेदी ने 'वेकन-विचार रत्नावली और गंगाप्रसाद अग्निहोत्री ने 'निबन्धमाला' नामक अनूदित ग्रंथों की रचना की। महावीरप्रसाद द्विवेदी अपने युग के सर्व प्रथम निबन्धकार थे । उन्होंने 'सरस्वती' में अनेक निबन्ध लिखे । उनके अधिकांश निबध पत्रकार - शैली में होते थे और उनमें विचारों की प्रधानता रहती थी। ऐसे निबंधों को वह प्रायः साधारण पाठको अथवा लेखकों को सचेत करने के लिए ही लिखा करते थे । 'कवि र कविता' आदि उनके ऐसे ही निबंध हैं । इनके अतिरिक्त उन्होने कई आलोचनात्मक निबंध भी लिखे । 'कवि-कर्तव्य' उनका सर्वोत्तम निबंध है। उनके निबंधो के पाँच संग्रह मिलते हैं : 'रसज्ञ-रज्ञ्चन', 'रसज्ञ - रज्जन', 'अद्भुत लाप', 'अद्भुत लाप', 'साहित्य - सदर्भ, सीकर' और 'विचार-विमर्श' । इन संग्रहों में उनके जो निबन्ध संग्रहीत हैं उन्हें देखने से वह किसी विशिष्ट शैली के जन्मदाता के रूप में हमारे सामने नहीं आते। भाषा उनकी शुद्ध और प्रौढ़ है । उनके समकालीन निबन्धकार बालमुकुंद गुप्त के निबन्ध व्यक्तित्व- प्रधान होते थे । वह उर्दू से हिन्दी में आए थे । इसलिए उन्होंने अपने निबन्धों-द्वारा हिन्दी - निबन्ध- साहित्य में एक विशिष्ट शैली को जन्म दिया था। मीठी चुटकी लेने में वही थे। उनकी शैली विनोद - पूर्ण, भावात्मक और व्यंगात्मक होती थी। उनके निबन्धों का संग्रह 'गुप्तनिबन्धावली' के नाम से मिलता है। गोपालराम गहमरी भी कभी-कभी निबन्ध लिखा करते थे। उनके निबन्ध अत्यन्त भाव-व्यंजक और मनोरंजक होते थे । गोविन्दनारायण मिश्र की निबन्ध-शैली संस्कृत-गर्भित होती थी । ब्रजभाषा का पुट भी उसमें रहता था । अनुप्रास के वह बहुत प्रेमी थे । माधवप्रसाद मिश्र भावात्मक निबन्ध लिखने में वेजोड थे । धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक आदि सभी विषयों पर वह बहुत सुन्दर निबन्ध लिखते थे । उनकी द्वितीय उत्थान काल : द्विवेदी-युग भाषा में पर्याप्त बल रहता था । श्यामसुन्दर दास के निबन्ध प्रायः आलोचनात्मक, गवेषणात्मक अथवा विचारात्मक होते थे । वह शैलीकार नहीं थे, पर भाषा शुद्ध, सरल और गठी हुई लिखते थे । जगन्नाथप्रसाद चतुर्वेदी हास्य और विनोदपूर्ण निबन्ध लिखने में कुशल थे। चन्द्रधर शर्मा गुलेरी के निबन्धो में प्रसंग - गर्भत्व अधिक रहता था । इसलिए सब उसको समझ नहीं सकते थे । पांडित्यपूर्ण हास्य की सृष्टि उनके निबन्धों की विशेषता थी । वह अपने युग के शैलीकार थे । उनकी शैली में विशिष्टता और अर्थगर्भित वक्रता होती थी । अध्यापक पूर्णसिह के निबन्ध यद्यपि संख्या में कम थे तथापि वे उन्हें निबन्धकार और शैलीकार के रूप में प्रतिष्टित करने के लिए प्रर्याप्त थे । उनकी लाक्षणिकता हिन्दी साहित्य में एक अजीब चीज थी । भावात्मक शैली में उनके निबन्ध वेजोड होते थे । 'आचरण की सभ्यता', 'मज़दूरी और प्रेम', 'सच्ची वीरता' आदि उनके निबन्ध हिन्दी में अमर हैं । द्विवेदी-युग में समालोचना - साहित्य का सृजन भी पर्याप्त मात्रा में हुआ । समालोचना के मुख्यतः दो मार्ग होते है : निर्णयात्मक और व्याख्यात्मक । निर्णयात्मक आलोचना के अनुसार किसी रचना के गुण-दोष का विवेचन करके उसका मूल्यांकन किया जाता है । इसके विरुद्ध व्याख्यात्मक आलोचना किसी रचना का मूल्यांकन नहीं करती। वह उस ग्रंथ में आई हुई अनेक बातों को सामने रखकर उनका स्पष्टीकरण करती है । उसके अन्तर्गत बहुत-सी बाहरी बातों का भी विचार होता है जिसका सम्बन्ध दूसरी रचनाओं से रहता है । इस प्रकार के सम्बन्ध पर सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक परिस्थितियों का प्रभाव रहता है । इसलिए इस प्रकार के पारस्परिक संबंध को जब आलोचनात्मक ढंग से व्यक्त किया जाता है तब उसे ऐतिहासिक समालोचना कहते हैं। समालोचक जब अपनी आलोचना रचनाकार के जीवन-क्रम और उसकी अन्तवृत्तियों पर आधारित
Dehradun News: एक के बाद एक परीक्षा भर्ती घोटालों को लेकर राजधानी देहरादून में बेरोजगार युवाओं का गुस्सा सड़कों पर उतर आए है। गांधी पार्क के बाहर युवाओं की भारी भीड़ जुटी हुई है। धरना प्रदर्शन कर युवाओं ने प्रदेश में लगातार सामने आ रहे भर्ती घोटालों को लेकर आक्रोश जताया। बता दें, यूकेएसएसएससी (UKSSC) की परीक्षाओं में धांंधली के बाद यूकेपीएसी (UKPSC) के भी पेपर लीक होने के बाद युवाओं का भरोसा डगमगा गया है। गांधी पार्क में धरना प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सरकार से भर्ती घोटालों की जांच सीबीआई (CBI) से करवाने, परीक्षाओं को घोटालों से बचाने के लिए मजबूत और निष्पक्ष निगरानी तंत्र बनाने, यूकेएसएसएससी (UKSSC) परीक्षा में ईमानदारी से चयनित युवाओं को तत्काल प्रभाव से नियुक्ति देने और भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं से पूर्व घोटालों में लिप्त युवाओं का नाम सार्वजनिक करने और उन्हें सरकारी नौकरी की आगामी सभी परीक्षाओं से प्रतिबंधित करने की मांग की है। साथ ही कल रात जिस तरीके पुलिस नें युवाओं को जबरन उठाया उस पर भी युवाओं नें सवाल खड़े किये हैं। दून पुलिस (Doon Police) पर आरोप लगाया है कि अहिंसात्मक सत्यग्रह पर बैठे युवाओं पर लाठीचार्ज कि है इसको लेकर भी हजारों युवाओं नें अपना विरोध जताया है। This website uses cookies.
Dehradun News: एक के बाद एक परीक्षा भर्ती घोटालों को लेकर राजधानी देहरादून में बेरोजगार युवाओं का गुस्सा सड़कों पर उतर आए है। गांधी पार्क के बाहर युवाओं की भारी भीड़ जुटी हुई है। धरना प्रदर्शन कर युवाओं ने प्रदेश में लगातार सामने आ रहे भर्ती घोटालों को लेकर आक्रोश जताया। बता दें, यूकेएसएसएससी की परीक्षाओं में धांंधली के बाद यूकेपीएसी के भी पेपर लीक होने के बाद युवाओं का भरोसा डगमगा गया है। गांधी पार्क में धरना प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सरकार से भर्ती घोटालों की जांच सीबीआई से करवाने, परीक्षाओं को घोटालों से बचाने के लिए मजबूत और निष्पक्ष निगरानी तंत्र बनाने, यूकेएसएसएससी परीक्षा में ईमानदारी से चयनित युवाओं को तत्काल प्रभाव से नियुक्ति देने और भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं से पूर्व घोटालों में लिप्त युवाओं का नाम सार्वजनिक करने और उन्हें सरकारी नौकरी की आगामी सभी परीक्षाओं से प्रतिबंधित करने की मांग की है। साथ ही कल रात जिस तरीके पुलिस नें युवाओं को जबरन उठाया उस पर भी युवाओं नें सवाल खड़े किये हैं। दून पुलिस पर आरोप लगाया है कि अहिंसात्मक सत्यग्रह पर बैठे युवाओं पर लाठीचार्ज कि है इसको लेकर भी हजारों युवाओं नें अपना विरोध जताया है। This website uses cookies.
हरियाणा के अंबाला में आधा फाल्गुन माह बीतने के बाद शनिवार को अचानक धुंध छा गई। आसमान में धुंध देखकर लोग चौंक गए। धुंध छाने से विजिबिलिटी 10 से 15 मीटर तक सिमट गई। सड़कों पर वाहन धीमी गति से चलते हुए नजर आए। वाहन चालकों को लाइट जलाकर गाड़ी चलानी पड़ी। सुबह 9 बजे धूप खिलने के बाद कोहरा साफ हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक, अंबाला का अधिकतम तापमान 27. 4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12. 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अगले 5 दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस वृद्धि होने की संभावना जताई है। अंबाला में सुबह-सुबह धुंध के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। धुंध की वजह से सड़कों पर वाहनों की गति सामान्य दिनों की अपेक्षा कम रही। धुंध के कारण दिल्ली-चंडीगढ़, अंबाला कैंट-जगाधरी और चंडीगढ़-हिसार हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा के अंबाला में आधा फाल्गुन माह बीतने के बाद शनिवार को अचानक धुंध छा गई। आसमान में धुंध देखकर लोग चौंक गए। धुंध छाने से विजिबिलिटी दस से पंद्रह मीटर तक सिमट गई। सड़कों पर वाहन धीमी गति से चलते हुए नजर आए। वाहन चालकों को लाइट जलाकर गाड़ी चलानी पड़ी। सुबह नौ बजे धूप खिलने के बाद कोहरा साफ हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक, अंबाला का अधिकतम तापमान सत्ताईस. चार डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान बारह. आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अगले पाँच दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में दो-तीन डिग्री सेल्सियस वृद्धि होने की संभावना जताई है। अंबाला में सुबह-सुबह धुंध के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। धुंध की वजह से सड़कों पर वाहनों की गति सामान्य दिनों की अपेक्षा कम रही। धुंध के कारण दिल्ली-चंडीगढ़, अंबाला कैंट-जगाधरी और चंडीगढ़-हिसार हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सभी वर्गों के लोगों को एक साथ आने को कहा। कई जल संरक्षण विशेषज्ञों और आध्यात्मिक गुरुओं ने रविवार को जल संकट के कारण दुनिया भर में अशांति की चेतावनी दी और इसे रोकने के लिए सभी वर्गों के लोगों को एक साथ आने को कहा। अगले साल होने वाले संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन से पहले यहां आयोजित एक बैठक में सूखे और बाढ़ पर पीपुल्स वर्ल्ड कमीशन के अध्यक्ष और भारत के 'वाटरमैन' राजेंद्र सिंह ने कहा कि जल संकट के कारण दुनिया भर में अशांति फैल जाएगी और इसे रोकने के लिए सभी वर्गों के लोगों को साथ आना होगा, तभी शांति कायम होगी। आध्यात्मिक गुरुओं ने सर्वसम्मति से जल संरक्षण और प्रबंधन पर अपने प्रवचनों के माध्यम से समाज को जगाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि विश्व के सभी धर्म ग्रंथों में प्रकृति के संरक्षण को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है। आयोजकों के एक बयान के अनुसार, धर्मगुरुओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत सहित पूरी दुनिया में जल संरक्षण के माध्यम से शांति के लिए सभी को एक साथ आना चाहिए. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जल और प्रकृति में भारतीय आस्था की रक्षा के लिए धार्मिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मिलकर काम करेंगे। बयान में कहा गया है, "विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जल सुरक्षा के लिए अभियान चलाया जाएगा, भूजल पुनर्भरण के लिए चेतना यात्रा आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी धर्मों के धर्मगुरु नेतृत्व करेंगे। " हिमालयन रिवर बेसिन काउंसिल की अध्यक्ष इंदिरा खुराना ने कहा कि किसी ने नहीं सोचा था कि जलवायु परिवर्तन इतनी जल्दी हम सभी को प्रभावित करेगा, लेकिन जिस तरह से इसका प्रभाव बढ़ रहा है, यह भविष्य के लिए चिंता का विषय है और यह जरूरी भी है. समाज के लिए इसे दूर करने के लिए।
सभी वर्गों के लोगों को एक साथ आने को कहा। कई जल संरक्षण विशेषज्ञों और आध्यात्मिक गुरुओं ने रविवार को जल संकट के कारण दुनिया भर में अशांति की चेतावनी दी और इसे रोकने के लिए सभी वर्गों के लोगों को एक साथ आने को कहा। अगले साल होने वाले संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन से पहले यहां आयोजित एक बैठक में सूखे और बाढ़ पर पीपुल्स वर्ल्ड कमीशन के अध्यक्ष और भारत के 'वाटरमैन' राजेंद्र सिंह ने कहा कि जल संकट के कारण दुनिया भर में अशांति फैल जाएगी और इसे रोकने के लिए सभी वर्गों के लोगों को साथ आना होगा, तभी शांति कायम होगी। आध्यात्मिक गुरुओं ने सर्वसम्मति से जल संरक्षण और प्रबंधन पर अपने प्रवचनों के माध्यम से समाज को जगाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि विश्व के सभी धर्म ग्रंथों में प्रकृति के संरक्षण को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है। आयोजकों के एक बयान के अनुसार, धर्मगुरुओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत सहित पूरी दुनिया में जल संरक्षण के माध्यम से शांति के लिए सभी को एक साथ आना चाहिए. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जल और प्रकृति में भारतीय आस्था की रक्षा के लिए धार्मिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मिलकर काम करेंगे। बयान में कहा गया है, "विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जल सुरक्षा के लिए अभियान चलाया जाएगा, भूजल पुनर्भरण के लिए चेतना यात्रा आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी धर्मों के धर्मगुरु नेतृत्व करेंगे। " हिमालयन रिवर बेसिन काउंसिल की अध्यक्ष इंदिरा खुराना ने कहा कि किसी ने नहीं सोचा था कि जलवायु परिवर्तन इतनी जल्दी हम सभी को प्रभावित करेगा, लेकिन जिस तरह से इसका प्रभाव बढ़ रहा है, यह भविष्य के लिए चिंता का विषय है और यह जरूरी भी है. समाज के लिए इसे दूर करने के लिए।
ईएमआरएस में 4 हजार से ज्यादा पद पर निकली भर्ती ( Image Source : Freepik ) EMRS Recruitment 2023 For Teaching & Non-Teaching Posts: एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में नौकरी की तलाश है तो इन भर्तियों के लिए अप्लाई कर सकते हैं. यहां टीचिंग और नॉन-टीचिंग पद पर बंपर भर्ती निकली है. इन पद पर सेलेक्शन ईएमआरएस स्टाफ सेलेक्शन एग्जाम 2023 के माध्यम से होगा. ये भी जान लें कि इन वैकेंसी के लिए आवेदन आज यानी 30 जून से शुरू हो गए हैं और अप्लाई करने की लास्ट डेट 31 जुलाई 2023 है. अंतिम तारीख के पहले बताए गए प्रारूप में फॉर्म भर दें. इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के माध्यम से टीचिंग और नॉन-टीचिंग के कुल 4062 पद भरे जाएंगे. इनका डिटेल इस प्रकार है. एकल्व्य मॉडल स्कूल के इन पद पर केवल ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है. इसके लिए आपको ईएमआरएस की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा, जिसका पता ये है - emrs. tribal. gov. in. इसके अलावा किसी और माध्यम से किए गए आवेदन स्वीकार नहीं होंगे. इन पद पर आवेदन करने के लिए कैंडिडेट्स को लिखित परीक्षा जोकि ओएमआर बेस्ड होगी, वो देनी होगी और उसके बाद केवल प्रिंसिपल पद के लिए इंटरव्यू भी होगा. नॉन टीचिंग पद जैसे एकाउंटेंट जेएसए, लैब असिस्टेंट के लिए फाइनल सेलेक्शन लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट में आए अंकों के आधार पर होगा. जहां तक योग्यता की बात है तो इन पद के लिए योग्यता और आयु सीमा पद के मुताबिक अलग-अलग है. बेहतर होगा हर पद के बारे में डिटेल में और अलग-अलग जानकारी पाने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर दिया नोटिस चेक कर सकते हैं. नोटिस देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें. आवेदन करने के लिए शुल्क पद के मुताबिक है. प्रिंसिपल पद का शुल्क 2000 रुपये है. पीजीटी पद के लिए शुल्क 1500 रुपये है. नॉन-टीचिंग पद के लिए शुल्कक 1000 रुपये है. आरक्षित श्रेणी के कैंडिडेट्स को कोई शुल्क नहीं देना है. अन्य जानकारियां पाने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर दिया नोटिस चेक करें. Education Loan Information:
ईएमआरएस में चार हजार से ज्यादा पद पर निकली भर्ती EMRS Recruitment दो हज़ार तेईस For Teaching & Non-Teaching Posts: एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में नौकरी की तलाश है तो इन भर्तियों के लिए अप्लाई कर सकते हैं. यहां टीचिंग और नॉन-टीचिंग पद पर बंपर भर्ती निकली है. इन पद पर सेलेक्शन ईएमआरएस स्टाफ सेलेक्शन एग्जाम दो हज़ार तेईस के माध्यम से होगा. ये भी जान लें कि इन वैकेंसी के लिए आवेदन आज यानी तीस जून से शुरू हो गए हैं और अप्लाई करने की लास्ट डेट इकतीस जुलाई दो हज़ार तेईस है. अंतिम तारीख के पहले बताए गए प्रारूप में फॉर्म भर दें. इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के माध्यम से टीचिंग और नॉन-टीचिंग के कुल चार हज़ार बासठ पद भरे जाएंगे. इनका डिटेल इस प्रकार है. एकल्व्य मॉडल स्कूल के इन पद पर केवल ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है. इसके लिए आपको ईएमआरएस की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा, जिसका पता ये है - emrs. tribal. gov. in. इसके अलावा किसी और माध्यम से किए गए आवेदन स्वीकार नहीं होंगे. इन पद पर आवेदन करने के लिए कैंडिडेट्स को लिखित परीक्षा जोकि ओएमआर बेस्ड होगी, वो देनी होगी और उसके बाद केवल प्रिंसिपल पद के लिए इंटरव्यू भी होगा. नॉन टीचिंग पद जैसे एकाउंटेंट जेएसए, लैब असिस्टेंट के लिए फाइनल सेलेक्शन लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट में आए अंकों के आधार पर होगा. जहां तक योग्यता की बात है तो इन पद के लिए योग्यता और आयु सीमा पद के मुताबिक अलग-अलग है. बेहतर होगा हर पद के बारे में डिटेल में और अलग-अलग जानकारी पाने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर दिया नोटिस चेक कर सकते हैं. नोटिस देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें. आवेदन करने के लिए शुल्क पद के मुताबिक है. प्रिंसिपल पद का शुल्क दो हज़ार रुपयापये है. पीजीटी पद के लिए शुल्क एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये है. नॉन-टीचिंग पद के लिए शुल्कक एक हज़ार रुपयापये है. आरक्षित श्रेणी के कैंडिडेट्स को कोई शुल्क नहीं देना है. अन्य जानकारियां पाने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर दिया नोटिस चेक करें. Education Loan Information:
बालूमाथ । गुरुवार देर शाम करीब 7:00 बजे बालूमाथ प्रखंड मुख्यालय स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की दो बच्चियां अचानक बेहोश हो गई । आनन-फानन में दोनों को बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया जहां चिकित्सक अमरनाथ प्रसाद के देखरेख में दोनों का इलाज किया जा रहा है । घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सुमन कुमारी 17 वर्ष पिता भोला भुइयां गनेशपुर बालूमाथ निवासी और पूर्णिमा कुमारी 16 वर्ष पिता कोलेश्वर उरांव पालही बालूमाथ निवासी दोनों कक्षा नौवीं की छात्रा फुटबॉल खेल कर जब वापस कमरे में लौटी तो अचानक बेहोश हो गई । जिसके बाद दोनों को बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाया गया । जहां फिलहाल दोनों खतरे से बाहर बताई जाती है । इस सबंध वार्डन शिखा कुमारी ने बताया कि दोनों बच्चियां दोनों सुबह में ठीक थी । लेकिन अचानक ऐसा हो गया । फिलहाल हमलोग इलाज करवा रहे है । पूर्णिमा कुमारी का पहले से बुखार था जिसके बाद हमलोगों ने दवा दिया था । जिसके बाद वह ठीक हो गयी थी ।
बालूमाथ । गुरुवार देर शाम करीब सात:शून्य बजे बालूमाथ प्रखंड मुख्यालय स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की दो बच्चियां अचानक बेहोश हो गई । आनन-फानन में दोनों को बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया जहां चिकित्सक अमरनाथ प्रसाद के देखरेख में दोनों का इलाज किया जा रहा है । घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सुमन कुमारी सत्रह वर्ष पिता भोला भुइयां गनेशपुर बालूमाथ निवासी और पूर्णिमा कुमारी सोलह वर्ष पिता कोलेश्वर उरांव पालही बालूमाथ निवासी दोनों कक्षा नौवीं की छात्रा फुटबॉल खेल कर जब वापस कमरे में लौटी तो अचानक बेहोश हो गई । जिसके बाद दोनों को बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाया गया । जहां फिलहाल दोनों खतरे से बाहर बताई जाती है । इस सबंध वार्डन शिखा कुमारी ने बताया कि दोनों बच्चियां दोनों सुबह में ठीक थी । लेकिन अचानक ऐसा हो गया । फिलहाल हमलोग इलाज करवा रहे है । पूर्णिमा कुमारी का पहले से बुखार था जिसके बाद हमलोगों ने दवा दिया था । जिसके बाद वह ठीक हो गयी थी ।
Yati Narsinghanand: अटर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कुछ टिप्पणियों के लिए स्वामी यति नरसिंहानंद (Yati Narsinghanand) के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने की सहमति दे दी। स्वामी यति नरसिंहानंद (Yati Narsinghanand) ने कहा था जो लोग राजनेताओं, सेना और सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था में विश्वास करेंगे। वो कुत्ते की मौत मरेंगे। Yati Narsinghanand धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने का अंजाम भुगतना ही पड़ा और इसके लिए को हरिद्वार पुलिस ने उन्हें अंततः गिरफ्तार ही कर लिया। Haridwar Dharma Sansad: Wasim Rizvi (जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी) को Uttarakhand Police ने भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
Yati Narsinghanand: अटर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कुछ टिप्पणियों के लिए स्वामी यति नरसिंहानंद के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने की सहमति दे दी। स्वामी यति नरसिंहानंद ने कहा था जो लोग राजनेताओं, सेना और सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था में विश्वास करेंगे। वो कुत्ते की मौत मरेंगे। Yati Narsinghanand धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने का अंजाम भुगतना ही पड़ा और इसके लिए को हरिद्वार पुलिस ने उन्हें अंततः गिरफ्तार ही कर लिया। Haridwar Dharma Sansad: Wasim Rizvi को Uttarakhand Police ने भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
चंडीगढ़ - चंडीगढ़ नगर निगम सदन में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेसी पार्षद देविंदर सिंह बबला ने वीडियो कांन्फ्रेसिंग के जरिए तत्काल विशेष बैठक बुलाने की मांग की है। इससे पहले 10 अप्रैल को बबला ने बकाया मेयर को पत्र लिखकर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक बुलाए जाने की मांग को लेकर पत्र भी लिखा था। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं आ सका। जिसके बाद पार्षद ने बात याद दिलाए जाने के मकसद से ट्वीटर का इस्तेमाल किया। निगम सदन की बैठक में अक्सर नेता प्रतिपक्ष और मेयर के बीच कई मौकों पर तीखी-नौक झोक होती रही है, इसका असर अब पत्र व्यवहार से लेकर सोशल साइट््स के प्लेटफॉर्म में भीड़ देखने को मिल रहा है। मेयर की तरफ से कोई जवाब ही नहीं मिल रहे हैं।
चंडीगढ़ - चंडीगढ़ नगर निगम सदन में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेसी पार्षद देविंदर सिंह बबला ने वीडियो कांन्फ्रेसिंग के जरिए तत्काल विशेष बैठक बुलाने की मांग की है। इससे पहले दस अप्रैल को बबला ने बकाया मेयर को पत्र लिखकर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक बुलाए जाने की मांग को लेकर पत्र भी लिखा था। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं आ सका। जिसके बाद पार्षद ने बात याद दिलाए जाने के मकसद से ट्वीटर का इस्तेमाल किया। निगम सदन की बैठक में अक्सर नेता प्रतिपक्ष और मेयर के बीच कई मौकों पर तीखी-नौक झोक होती रही है, इसका असर अब पत्र व्यवहार से लेकर सोशल साइट््स के प्लेटफॉर्म में भीड़ देखने को मिल रहा है। मेयर की तरफ से कोई जवाब ही नहीं मिल रहे हैं।