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करने मे बडी कारगर सिद्ध हुई। यही नही, निमोनिया के वाइरस पर आक्रमण करने मे भी यह दवा सफल रही । वस्तुत टेरामाइसीन लगभग 100 रोगो के इलाज मे लाभदायक पायी गयी । किन्तु ऐसे अनेक वायरस येथे जिन पर इन चमत्कारी औषधियो का कोई प्रभाव नहीं पड़ता था । कई वैक्सीन विकसित किये गये जैसे पोलियोमारक वैक्सीन पोलियो सक्रामक रोग से बचने के लिए सन् 1955 मे पहली वार इसके टीके लगाये गये । किन्तु जुकाम के इलाज के लिए या इससे बचने के लिए आज तक कोई वैक्सीन तैयार नहीं की जा सकी ह ।
यद्यपि उपर्युक्त चमत्कारी औपधियो से लोगो को वडा लाभ पहुँचा है और अनेक प्रकार के वैक्ट्रियों को नष्ट करने मे सफलता प्राप्त हुई है तथापि यह देखा गया है कि इनमे से कई औषधियों का प्रभाव मानव शरीर के लिए हितकर नहीं होता। अतएव रसायनज्ञो ने ऐण्टीवायटिक को विटामिन के साथ देने की संस्तुति की । इसमे सन्देह नहीं कि इन ऐण्टीवायटिको के प्रयोग मृत्युदर मे काफी कमी हो गयी है ।
हमारे शरीर मे अनेक ग्रन्थिया है जो महत्त्वपूर्ण कार्य करती है। ये ग्रन्थियाँ है - एडरेनल, थायरायड,
98 दतिक जीवन मे रसायन विज्ञान
पैकियाज, पिट्यूटरी, ओवरी । इन सबका एक संयुक्त नाम है--- इण्डोकीन (अत स्त्रावी ) ग्रन्थियाँ । ये ग्रन्थियाँ ऐसे रसायन बनाती है जो रक्त के साथ प्रवाहित होते है । इन रासायनिक पदार्थों को हारमोन कहते हैं । ये हारमोन शरीर के अन्दर बहुत जटिल कार्य करते है । इनमे मूलरूप से स्टेरायड यौगिक होते ह । इन्ही के कारण हारमोन चमत्कारी कार्य करते ह । वैज्ञानिको ने स्टेरायड के अध्ययन के दौरान एक चमत्कारी हारमोन कारटीमोन की खोज की। सन् 1948 मे इसको इस्तेमाल किया गया और रोगी को बडा लाभ हुआ । मेटिक ज्वर और अर्थराइटिस मे इसका इस्तेमाल वडा लाभदायक सिद्ध हुआ ।
खून का थक्का जमने से रोकने के लिए रसायनज्ञो डाइक्यूमराल की खोज की । इससे हृदय के रोगियो को बडा लाभ पहुँचा है । मानसिक रोग के इलाज के लिए प्रयोगोपरान्त रसायनज्ञा ने क्लोरोप्रोमाजीन और रेमरपाइन जैसी चमत्कारी औषधियों निर्मित की जिनके प्रयोग से रोगियों को मानसिक शाति मिलती है और उनकी हिमात्मक प्रवृत्ति का दमन होता है । उच्च सतचाप मे रेसरपाइन बहुत उपयोगी पायी गयी है । रमायनज्ञो ने अथक परिश्रम और परीक्षण के बाद दो
रसायन विज्ञान - चिकित्सा में 99
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करने मे बडी कारगर सिद्ध हुई। यही नही, निमोनिया के वाइरस पर आक्रमण करने मे भी यह दवा सफल रही । वस्तुत टेरामाइसीन लगभग एक सौ रोगो के इलाज मे लाभदायक पायी गयी । किन्तु ऐसे अनेक वायरस येथे जिन पर इन चमत्कारी औषधियो का कोई प्रभाव नहीं पड़ता था । कई वैक्सीन विकसित किये गये जैसे पोलियोमारक वैक्सीन पोलियो सक्रामक रोग से बचने के लिए सन् एक हज़ार नौ सौ पचपन मे पहली वार इसके टीके लगाये गये । किन्तु जुकाम के इलाज के लिए या इससे बचने के लिए आज तक कोई वैक्सीन तैयार नहीं की जा सकी ह । यद्यपि उपर्युक्त चमत्कारी औपधियो से लोगो को वडा लाभ पहुँचा है और अनेक प्रकार के वैक्ट्रियों को नष्ट करने मे सफलता प्राप्त हुई है तथापि यह देखा गया है कि इनमे से कई औषधियों का प्रभाव मानव शरीर के लिए हितकर नहीं होता। अतएव रसायनज्ञो ने ऐण्टीवायटिक को विटामिन के साथ देने की संस्तुति की । इसमे सन्देह नहीं कि इन ऐण्टीवायटिको के प्रयोग मृत्युदर मे काफी कमी हो गयी है । हमारे शरीर मे अनेक ग्रन्थिया है जो महत्त्वपूर्ण कार्य करती है। ये ग्रन्थियाँ है - एडरेनल, थायरायड, अट्ठानवे दतिक जीवन मे रसायन विज्ञान पैकियाज, पिट्यूटरी, ओवरी । इन सबका एक संयुक्त नाम है--- इण्डोकीन ग्रन्थियाँ । ये ग्रन्थियाँ ऐसे रसायन बनाती है जो रक्त के साथ प्रवाहित होते है । इन रासायनिक पदार्थों को हारमोन कहते हैं । ये हारमोन शरीर के अन्दर बहुत जटिल कार्य करते है । इनमे मूलरूप से स्टेरायड यौगिक होते ह । इन्ही के कारण हारमोन चमत्कारी कार्य करते ह । वैज्ञानिको ने स्टेरायड के अध्ययन के दौरान एक चमत्कारी हारमोन कारटीमोन की खोज की। सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस मे इसको इस्तेमाल किया गया और रोगी को बडा लाभ हुआ । मेटिक ज्वर और अर्थराइटिस मे इसका इस्तेमाल वडा लाभदायक सिद्ध हुआ । खून का थक्का जमने से रोकने के लिए रसायनज्ञो डाइक्यूमराल की खोज की । इससे हृदय के रोगियो को बडा लाभ पहुँचा है । मानसिक रोग के इलाज के लिए प्रयोगोपरान्त रसायनज्ञा ने क्लोरोप्रोमाजीन और रेमरपाइन जैसी चमत्कारी औषधियों निर्मित की जिनके प्रयोग से रोगियों को मानसिक शाति मिलती है और उनकी हिमात्मक प्रवृत्ति का दमन होता है । उच्च सतचाप मे रेसरपाइन बहुत उपयोगी पायी गयी है । रमायनज्ञो ने अथक परिश्रम और परीक्षण के बाद दो रसायन विज्ञान - चिकित्सा में निन्यानवे
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इंटरनेट यूज करने या सर्फिंग के बाद हिस्ट्री डिलीट करना अच्छी आदत है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें आपके वेब सर्फिंग की पल-पल की जानकारी होती है. आपने कौन-सी पोर्न साइट कब और कितनी बार विजिट की है इसकी जानकारी इन लोगों के पास होती है.
अगर आप Gmail अकाउंट यूज करते हैं तो आपके पर्सनल इंफॉर्मेशन गूगल के पास होंगे. इसके अलावा आपकी वेब सर्फिंग आदतों के बारे में गूगल को पता चल जाता है. गूगल अपनी पॉलिसी के अनुसार आपका पर्सनल इंफॉर्मेशन तो यूज नहीं करती. लेकिन, आपकी सर्फिंग हैबिट के अनुसार आपको ऐड दिखाती है.
अगर आप किसी अडल्ट कंटेंट या पोर्न वेबसाइट पर विजिट करते हैं तो गूगल को सबसे पहले पता चलता है. गूगल आपकी सर्च हिस्ट्री के हिसाब से आपको प्रोडक्ट्स के ऐड दिखाता है.
रिसर्च के मुताबिक सबसे ज्यादा वायरस अडल्ट कंटेंट वाले वेबसाइट्स से आते हैं. इसके अलावा ये वेबसाइट्स आपकी सर्फिंग भी ट्रैक करती हैं. Daily Beats के मुताबिक पोर्न या अडल्ट वेबसाइट पर क्लिक करते ही आपकी पर्सनल इंफॉर्मेशन उनके सर्वर में सेव हो जाती है.
इन वेबसाइट्स से आपके स्मार्टफोन या सिस्टम में खतरनाक वायरस आ सकते हैं. ये वायरस आपकी बैंकिंग और पर्सनल जानकारियां चुरा सकते हैं.
ऐसी कंपनियां जो मल्टीपल वेबसाइट्स ऑपरेट करती हैं वो कुकीज के जरिए आपकी सर्फिंग हैबिट्स पर नजर रखती हैं. अगर आप फेसबुक अकाउंट से किसी अडल्ट कंटेंट वाली वेबसाइट पर लॉग इन करते हैं तो आपके साथ-साथ आपके फ्रेंड्स की जानकारी भी इन साइट्स के सर्वर में पहुंच जाती है.
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इंटरनेट यूज करने या सर्फिंग के बाद हिस्ट्री डिलीट करना अच्छी आदत है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें आपके वेब सर्फिंग की पल-पल की जानकारी होती है. आपने कौन-सी पोर्न साइट कब और कितनी बार विजिट की है इसकी जानकारी इन लोगों के पास होती है. अगर आप Gmail अकाउंट यूज करते हैं तो आपके पर्सनल इंफॉर्मेशन गूगल के पास होंगे. इसके अलावा आपकी वेब सर्फिंग आदतों के बारे में गूगल को पता चल जाता है. गूगल अपनी पॉलिसी के अनुसार आपका पर्सनल इंफॉर्मेशन तो यूज नहीं करती. लेकिन, आपकी सर्फिंग हैबिट के अनुसार आपको ऐड दिखाती है. अगर आप किसी अडल्ट कंटेंट या पोर्न वेबसाइट पर विजिट करते हैं तो गूगल को सबसे पहले पता चलता है. गूगल आपकी सर्च हिस्ट्री के हिसाब से आपको प्रोडक्ट्स के ऐड दिखाता है. रिसर्च के मुताबिक सबसे ज्यादा वायरस अडल्ट कंटेंट वाले वेबसाइट्स से आते हैं. इसके अलावा ये वेबसाइट्स आपकी सर्फिंग भी ट्रैक करती हैं. Daily Beats के मुताबिक पोर्न या अडल्ट वेबसाइट पर क्लिक करते ही आपकी पर्सनल इंफॉर्मेशन उनके सर्वर में सेव हो जाती है. इन वेबसाइट्स से आपके स्मार्टफोन या सिस्टम में खतरनाक वायरस आ सकते हैं. ये वायरस आपकी बैंकिंग और पर्सनल जानकारियां चुरा सकते हैं. ऐसी कंपनियां जो मल्टीपल वेबसाइट्स ऑपरेट करती हैं वो कुकीज के जरिए आपकी सर्फिंग हैबिट्स पर नजर रखती हैं. अगर आप फेसबुक अकाउंट से किसी अडल्ट कंटेंट वाली वेबसाइट पर लॉग इन करते हैं तो आपके साथ-साथ आपके फ्रेंड्स की जानकारी भी इन साइट्स के सर्वर में पहुंच जाती है.
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पंजाब के अबोहर बस स्टैंड के पास से एक युवक को किडनैप कर उससे मारपीट करने का मामला सामने आया है। पुरानी रंजिश के चलते युवकों द्वारा मारपीट की गई है। पीड़ित युवक को परिजनों ने इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया है। पुलिस को मामले की सूचना दी गई है।
उपचाराधीन संत नगर निवासी गौरव पुत्र राजिंदर कुमार ने बताया कि वह मंगलवार देर रात बठिंडा से बस से अबोहर आया था। जब वह जैन नगर रोड पर रात करीब 12 बजे एक होटल में पहुंचा तो वहां पर उनके मोहल्ले के कुछ युवकों ने किडनैप कर गाड़ी में डाल लिया। आरोपी बंधक बनाकर संत नगर मोहल्ले में ले गए। जहां उन्होंने उसके साथ बुरी तरह से मारपीट करते हुए घायल कर दिया।
बताया जा रहा है कि गौरव के परिवार की दूसरे गुट के साथ पुरानी रंजिश है। जिसके चलते उक्त लोगों द्वारा उससे मारपीट की गई है। इस संबंध में थाना सिटी वन के एसएचओ संजीव कुमार ने बताया कि रात को करीब 2 बजे उन्हें सूचना मिली थी, जिस पर वह मौके पर पहुंचे थे, लेकिन वहां कुछ नहीं मिला। वहां होटल संचालक ने बताया कि रात को उनके होटल में कमरा बुक करवाया गया था।
शराब पीते आपस में झगड़ा होने के बाद वह वहां से चले गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है। एसएचओ ने बताया कि अभी तक उनके पास कोई MLR नहीं मिली है। एक युवक अस्पताल में भर्ती है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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पंजाब के अबोहर बस स्टैंड के पास से एक युवक को किडनैप कर उससे मारपीट करने का मामला सामने आया है। पुरानी रंजिश के चलते युवकों द्वारा मारपीट की गई है। पीड़ित युवक को परिजनों ने इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया है। पुलिस को मामले की सूचना दी गई है। उपचाराधीन संत नगर निवासी गौरव पुत्र राजिंदर कुमार ने बताया कि वह मंगलवार देर रात बठिंडा से बस से अबोहर आया था। जब वह जैन नगर रोड पर रात करीब बारह बजे एक होटल में पहुंचा तो वहां पर उनके मोहल्ले के कुछ युवकों ने किडनैप कर गाड़ी में डाल लिया। आरोपी बंधक बनाकर संत नगर मोहल्ले में ले गए। जहां उन्होंने उसके साथ बुरी तरह से मारपीट करते हुए घायल कर दिया। बताया जा रहा है कि गौरव के परिवार की दूसरे गुट के साथ पुरानी रंजिश है। जिसके चलते उक्त लोगों द्वारा उससे मारपीट की गई है। इस संबंध में थाना सिटी वन के एसएचओ संजीव कुमार ने बताया कि रात को करीब दो बजे उन्हें सूचना मिली थी, जिस पर वह मौके पर पहुंचे थे, लेकिन वहां कुछ नहीं मिला। वहां होटल संचालक ने बताया कि रात को उनके होटल में कमरा बुक करवाया गया था। शराब पीते आपस में झगड़ा होने के बाद वह वहां से चले गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है। एसएचओ ने बताया कि अभी तक उनके पास कोई MLR नहीं मिली है। एक युवक अस्पताल में भर्ती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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इस वर्ष अक्टूबर में, सैन्य विभाग के प्रमुख ए। सेरड्यूकोव ने वीएनआईईईएफ (परमाणु संघीय केंद्र) का दौरा किया। रूसी संघ के रक्षा मंत्रालय के प्रमुख ने गणितीय और सैद्धांतिक भौतिकी के संस्थान VNIIEF के वैज्ञानिक और पद्धतिगत केंद्र का दौरा किया। नगरपालिका के प्रमुख को VNIIEF द्वारा की गई मुख्य गतिविधियों से परिचित कराया गया था।
अनातोली सेरड्यूकोव ने उल्लेख किया कि वह पूरी तरह से काम की दिशा से सहमत है, और सशस्त्र बलों में भविष्य के विकास के उपयोग की भविष्यवाणी करता है।
कार्य के VNIIEF क्षेत्रों में से एक रूसी सशस्त्र बलों में उपयोग के लिए उच्च समानांतर उच्च प्रदर्शन वाले सुपर कंप्यूटर का डिज़ाइन और निर्माण है। इन कंप्यूटरों में निरंतर राउंड-द-क्लॉक कार्य में ऑपरेशन की उच्च विश्वसनीयता होती है, इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटिंग उपकरणों के विकास के उन्नत स्तर पर सॉफ्टवेयर गुणवत्ता और सॉफ्टवेयर अपडेट को बनाए रखने के लिए वारंटी समर्थन और उन्नयन के साथ प्रदान किया जाता है।
इस दिशा में काम ने पहले से ही एक सकारात्मक परिणाम दिया है - रक्षा मंत्रालय के उद्यम में एक पूर्ण कंप्यूटिंग केंद्र बनाया गया है। केंद्र कंप्यूटर और मालिकाना सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में नवीनतम तकनीक का उपयोग करके बनाया गया था और उच्च गति वाले कंप्यूटरों के लिए अनुकूलित किया गया था।
केएस-कंप्यूटर APK-1।
राष्ट्रपति के कार्यक्रम "सुपर कंप्यूटर और ग्रिड टेक्नोलॉजीज का विकास" के अनुसार, VNIIEF ने एक उच्च श्रेणी का टेराफ्लॉप सॉफ्टवेयर हार्डवेयर कॉम्प्लेक्स विकसित किया है।
KS-1 कंप्यूटर को कॉम्पैक्ट यूनिवर्सल मल्टीप्रोसेसर KS-Computer के रूप में तैयार किया गया है। यह RFNC-VNIIEF द्वारा निर्मित सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर से लैस है।
"KS-COMPUTER 1" तीन आयामी मॉडलिंग और सिमुलेशन की समस्याओं को हल करने के लिए है। यह उच्च तकनीकी क्षेत्र में उद्यमों, कारखानों, डिजाइन ब्यूरो और अनुसंधान संस्थानों में नई तकनीकी परियोजनाओं के डिजाइन और निर्माण में इंजीनियरिंग और डिजाइन की गणना के समय को कम करेगा और इन गणनाओं की सटीकता को बढ़ाएगा।
घरेलू डेवलपर्स एक अद्वितीय कंप्यूटर बनाने में कामयाब रहे। व्यावहारिक रूप से, एपीके-एक्सएनयूएमएक्स आधुनिक परियोजनाओं की गणना करने के लिए एक डिजाइनर का सपना है।
1 KS-COMPUTER के छोटे आयाम, इसे किसी भी कार्यस्थल में स्थापित करना संभव बनाते हैं, बस समग्र आयामों में सामान्य सुपर कंप्यूटर एक छोटे से अलग कमरे की तरह दिखते हैं। 1 KS-COMPUTER को अतिरिक्त प्रणालियों की आवश्यकता नहीं है, जैसे कि शीतलन प्रणाली, और न ही विशेष तकनीकी कर्मचारी। हम कह सकते हैं कि यह व्यावहारिक रूप से थोड़ा बड़ा पर्सनल कंप्यूटर है। केएस-एक्सएनयूएमएक्स कंप्यूटरों के फायदों में कम शोर प्रदर्शन और कम बिजली की खपत शामिल है। तो एपीके-एक्सएनयूएमएक्स एक्सएनयूएमएक्स केडब्ल्यू के बारे में खपत करता है, जो विदेशी एनालॉग्स और पिछले सुपर कंप्यूटरों की खपत से काफी कम है।
प्रोग्राम कॉम्प्लेक्स ऐसी मशीन भाषाओं में "फोरट्रान-एक्सएनयूएमएक्स", "सी ++" और "सी" के रूप में निष्पादित अनुप्रयोगों को विकसित, कॉन्फ़िगर और निष्पादित करने का अवसर प्रदान करता है, जो ओएमपी और एमपीआई द्वारा उपयोग किए जाते हैं। समानांतर, अनुक्रमिक एक और बहुत सारे उपयोगकर्ता मोड में सॉफ्टवेयर समाधान का उपयोग करने की क्षमता को लागू किया।
1 KS-COMPUTER को सौंपी गई मेमोरी के साथ क्लस्टर MIMD- आर्किटेक्चर के साथ प्रदान किया जाता है, एक उच्च-प्रदर्शन इंटरप्रोसेस संचार प्रणाली, x86 आर्किटेक्चर का समर्थन करता है।
सुपर कंप्यूटर "KS-COMPUTER 1" कंपनी के मल्टी-कोर माइक्रोप्रोसेसरों का आधार एएमडी प्रौद्योगिकी InfiniBand QDR का उपयोग करके एक उच्च गति वाले नेटवर्क में एकजुट हुआ।
डायरेक्ट स्विचिंग के साथ प्रोसेसर डेटा एक्सचेंजों के बीच की प्रणाली RFNC-VNIIEF द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के मालिकाना संस्करण पर आधारित है।
सिस्टम आंतरिक और नेटवर्क उपयोग के लिए "गीगाबिट ईथरनेट" तकनीक का उपयोग करता है।
केएस-कंप्यूटर APK-1 की मुख्य विशेषताएंः
- लंबाई 650 मिमी;
- चौड़ाई 325 मिमी;
- ऊंचाई 752 मिमी;
- प्रदर्शन 1. 1 TFlops;
- लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम;
- 220 बी बिजली की आपूर्ति;
- आवृत्ति 50 हर्ट्ज;
- शीतलन प्रणाली - तरल;
- मॉनिटर 24-inch LCD;
- ब्लू-रे ड्राइव;
- कार्ड रीडर;
- कीबोर्ड और माउस।
- अनुमानित मूल्य 1. 45 मिलियन रूबल।
अतिरिक्त जानकारी।
एक समान विदेशी निर्मित कंप्यूटर समाधान में कम से कम दोगुना लागत होती है।
2010 में, 1. 1 को इस कार्यक्रम के लिए एक अरब रूबल आवंटित किया गया था। 2011 वर्ष में - 1. 5 अरब रूबल।
पिछले साल, इन सुपर कंप्यूटरों के 15 ने "सुपर कंप्यूटर और GRID टेक्नोलॉजीज के विकास" कार्यक्रम में भाग लेते हुए घरेलू डिज़ाइन ब्यूरो, उद्यमों और कारखानों को 11 स्थानांतरित किया। राज्य द्वारा भुगतान की गई कारों की लागत का 50 प्रतिशत।
RFNC-VNIIEF ने वाणिज्यिक आधार पर बिक्री के लिए 6 KS-Computer APK-1 को भी इकट्ठा किया।
कार्यक्रम 52 "केएस-कंप्यूटर" के उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया गया है। जिनमें से ज्यादातर को वाणिज्यिक आधार पर बेचा जाएगा।
100 Tflops के आसपास घरेलू उद्यमों की अनुमानित रुचि।
इस वर्ष "केएस-कंप्यूटर" के प्रदर्शन को जारी करने की योजना बनाई गई है 3 TFlops, एक प्रोटोटाइप बनाया।
1 Pflops में प्रदर्शन के साथ एक सुपर कंप्यूटर भी बनाया गया था, जिसे अगले साल मार्च में घोषित किया गया है। कई उद्यम पहले ही इस कंप्यूटर से दूर से जुड़े हुए हैं, दूरस्थ परीक्षण परीक्षण किए जा रहे हैं।
भविष्य की योजना 2015 द्वारा 15 Pflops तक के प्रदर्शन के साथ एक मेगा-कंप्यूटर का निर्माण है।
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इस वर्ष अक्टूबर में, सैन्य विभाग के प्रमुख ए। सेरड्यूकोव ने वीएनआईईईएफ का दौरा किया। रूसी संघ के रक्षा मंत्रालय के प्रमुख ने गणितीय और सैद्धांतिक भौतिकी के संस्थान VNIIEF के वैज्ञानिक और पद्धतिगत केंद्र का दौरा किया। नगरपालिका के प्रमुख को VNIIEF द्वारा की गई मुख्य गतिविधियों से परिचित कराया गया था। अनातोली सेरड्यूकोव ने उल्लेख किया कि वह पूरी तरह से काम की दिशा से सहमत है, और सशस्त्र बलों में भविष्य के विकास के उपयोग की भविष्यवाणी करता है। कार्य के VNIIEF क्षेत्रों में से एक रूसी सशस्त्र बलों में उपयोग के लिए उच्च समानांतर उच्च प्रदर्शन वाले सुपर कंप्यूटर का डिज़ाइन और निर्माण है। इन कंप्यूटरों में निरंतर राउंड-द-क्लॉक कार्य में ऑपरेशन की उच्च विश्वसनीयता होती है, इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटिंग उपकरणों के विकास के उन्नत स्तर पर सॉफ्टवेयर गुणवत्ता और सॉफ्टवेयर अपडेट को बनाए रखने के लिए वारंटी समर्थन और उन्नयन के साथ प्रदान किया जाता है। इस दिशा में काम ने पहले से ही एक सकारात्मक परिणाम दिया है - रक्षा मंत्रालय के उद्यम में एक पूर्ण कंप्यूटिंग केंद्र बनाया गया है। केंद्र कंप्यूटर और मालिकाना सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में नवीनतम तकनीक का उपयोग करके बनाया गया था और उच्च गति वाले कंप्यूटरों के लिए अनुकूलित किया गया था। केएस-कंप्यूटर APK-एक। राष्ट्रपति के कार्यक्रम "सुपर कंप्यूटर और ग्रिड टेक्नोलॉजीज का विकास" के अनुसार, VNIIEF ने एक उच्च श्रेणी का टेराफ्लॉप सॉफ्टवेयर हार्डवेयर कॉम्प्लेक्स विकसित किया है। KS-एक कंप्यूटर को कॉम्पैक्ट यूनिवर्सल मल्टीप्रोसेसर KS-Computer के रूप में तैयार किया गया है। यह RFNC-VNIIEF द्वारा निर्मित सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर से लैस है। "KS-COMPUTER एक" तीन आयामी मॉडलिंग और सिमुलेशन की समस्याओं को हल करने के लिए है। यह उच्च तकनीकी क्षेत्र में उद्यमों, कारखानों, डिजाइन ब्यूरो और अनुसंधान संस्थानों में नई तकनीकी परियोजनाओं के डिजाइन और निर्माण में इंजीनियरिंग और डिजाइन की गणना के समय को कम करेगा और इन गणनाओं की सटीकता को बढ़ाएगा। घरेलू डेवलपर्स एक अद्वितीय कंप्यूटर बनाने में कामयाब रहे। व्यावहारिक रूप से, एपीके-एक्सएनयूएमएक्स आधुनिक परियोजनाओं की गणना करने के लिए एक डिजाइनर का सपना है। एक KS-COMPUTER के छोटे आयाम, इसे किसी भी कार्यस्थल में स्थापित करना संभव बनाते हैं, बस समग्र आयामों में सामान्य सुपर कंप्यूटर एक छोटे से अलग कमरे की तरह दिखते हैं। एक KS-COMPUTER को अतिरिक्त प्रणालियों की आवश्यकता नहीं है, जैसे कि शीतलन प्रणाली, और न ही विशेष तकनीकी कर्मचारी। हम कह सकते हैं कि यह व्यावहारिक रूप से थोड़ा बड़ा पर्सनल कंप्यूटर है। केएस-एक्सएनयूएमएक्स कंप्यूटरों के फायदों में कम शोर प्रदर्शन और कम बिजली की खपत शामिल है। तो एपीके-एक्सएनयूएमएक्स एक्सएनयूएमएक्स केडब्ल्यू के बारे में खपत करता है, जो विदेशी एनालॉग्स और पिछले सुपर कंप्यूटरों की खपत से काफी कम है। प्रोग्राम कॉम्प्लेक्स ऐसी मशीन भाषाओं में "फोरट्रान-एक्सएनयूएमएक्स", "सी ++" और "सी" के रूप में निष्पादित अनुप्रयोगों को विकसित, कॉन्फ़िगर और निष्पादित करने का अवसर प्रदान करता है, जो ओएमपी और एमपीआई द्वारा उपयोग किए जाते हैं। समानांतर, अनुक्रमिक एक और बहुत सारे उपयोगकर्ता मोड में सॉफ्टवेयर समाधान का उपयोग करने की क्षमता को लागू किया। एक KS-COMPUTER को सौंपी गई मेमोरी के साथ क्लस्टर MIMD- आर्किटेक्चर के साथ प्रदान किया जाता है, एक उच्च-प्रदर्शन इंटरप्रोसेस संचार प्रणाली, xछियासी आर्किटेक्चर का समर्थन करता है। सुपर कंप्यूटर "KS-COMPUTER एक" कंपनी के मल्टी-कोर माइक्रोप्रोसेसरों का आधार एएमडी प्रौद्योगिकी InfiniBand QDR का उपयोग करके एक उच्च गति वाले नेटवर्क में एकजुट हुआ। डायरेक्ट स्विचिंग के साथ प्रोसेसर डेटा एक्सचेंजों के बीच की प्रणाली RFNC-VNIIEF द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के मालिकाना संस्करण पर आधारित है। सिस्टम आंतरिक और नेटवर्क उपयोग के लिए "गीगाबिट ईथरनेट" तकनीक का उपयोग करता है। केएस-कंप्यूटर APK-एक की मुख्य विशेषताएंः - लंबाई छः सौ पचास मिमी; - चौड़ाई तीन सौ पच्चीस मिमी; - ऊंचाई सात सौ बावन मिमी; - प्रदर्शन एक. एक TFlops; - लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम; - दो सौ बीस बी बिजली की आपूर्ति; - आवृत्ति पचास हर्ट्ज; - शीतलन प्रणाली - तरल; - मॉनिटर चौबीस-inch LCD; - ब्लू-रे ड्राइव; - कार्ड रीडर; - कीबोर्ड और माउस। - अनुमानित मूल्य एक. पैंतालीस मिलियन रूबल। अतिरिक्त जानकारी। एक समान विदेशी निर्मित कंप्यूटर समाधान में कम से कम दोगुना लागत होती है। दो हज़ार दस में, एक. एक को इस कार्यक्रम के लिए एक अरब रूबल आवंटित किया गया था। दो हज़ार ग्यारह वर्ष में - एक. पाँच अरब रूबल। पिछले साल, इन सुपर कंप्यूटरों के पंद्रह ने "सुपर कंप्यूटर और GRID टेक्नोलॉजीज के विकास" कार्यक्रम में भाग लेते हुए घरेलू डिज़ाइन ब्यूरो, उद्यमों और कारखानों को ग्यारह स्थानांतरित किया। राज्य द्वारा भुगतान की गई कारों की लागत का पचास प्रतिशत। RFNC-VNIIEF ने वाणिज्यिक आधार पर बिक्री के लिए छः KS-Computer APK-एक को भी इकट्ठा किया। कार्यक्रम बावन "केएस-कंप्यूटर" के उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया गया है। जिनमें से ज्यादातर को वाणिज्यिक आधार पर बेचा जाएगा। एक सौ Tflops के आसपास घरेलू उद्यमों की अनुमानित रुचि। इस वर्ष "केएस-कंप्यूटर" के प्रदर्शन को जारी करने की योजना बनाई गई है तीन TFlops, एक प्रोटोटाइप बनाया। एक Pflops में प्रदर्शन के साथ एक सुपर कंप्यूटर भी बनाया गया था, जिसे अगले साल मार्च में घोषित किया गया है। कई उद्यम पहले ही इस कंप्यूटर से दूर से जुड़े हुए हैं, दूरस्थ परीक्षण परीक्षण किए जा रहे हैं। भविष्य की योजना दो हज़ार पंद्रह द्वारा पंद्रह Pflops तक के प्रदर्शन के साथ एक मेगा-कंप्यूटर का निर्माण है।
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18वीं शताब्दी में इंग्लैंड के थर्स्क (Thirsk) में थॉमस बज्बी (Thomas Busby) नामक शख्स रहता था. उसका एक साथी था जिसका नाम डेनियल औटी (Daniel Auty) था. कहा जाता है कि ये दोनों नकली सिक्के बनाने का अवैध काम करते थे. डेनियल न सिर्फ थॉमस का अच्छा दोस्त था, बल्कि उसकी बेटी एलिजाबेथ से थॉमस ने शादी भी कर ली थी. जिसके बाद दोनों दामाद और ससुर बन गए थे.
बाद में यह दोस्ती और भी गहरी हो गई. काम के बाद दोनों रोज साथ में Thirsk में स्थित अपने फेवरट बार में बैठते और वहां जमकर शराब पीते. थॉमस उस बार में हमेशा एक ही कुर्सी में ही बैठता, जिससे उसे खास लगाव हो गया था. अगर कोई भी उस कुर्सी में बैठ जाता तो थॉमस उससे लड़ने झगड़ने लगता. फिर उसे जबरदस्ती वहां से हटाकर खुद उसमें बैठ जाता. लेकिन यह कुर्सी आगे जाकर कितने ही लोगों की जान लेने वाली थी. इस बात से हर कोई अंजान था.
कहानी की शुरुआत होती है साल 1702 से. एक दिन बार में किसी बात को लेकर थॉमस और डेनियल के बीच लड़ाई हो गई. लड़ाई मारपीट तक पहुंच गई. फिर थॉमस को चिढ़ाने के लिए डेनियल उसकी पसंदीदा कुर्सी पर जा बैठा. थॉमस को यह देखकर इतना गुस्सा आया कि उसने डेनियल की हत्या कर डाली.
पुलिस ने हत्या के आरोप में थॉमस को गिरफ्तार कर लिया. जिसके बाद ससुर की हत्या करने के जुर्म में थॉमस को मौत की सजा सुना दी गई. जिस दिन थॉमस को फांसी दी जानी थी. उस दिन उससे उसकी आखिरी इच्छा पूछी गई. फांसी से पहले अपनी आखिरी इच्छा जाहिर करते हुए थॉमस ने कहा कि वह Thirsk में स्थित बार में रखी अपनी फेवरेट कुर्सी में बैठकर आखिरी बार भोजन खाना चाहता है. थॉमस की इस इच्छा को मान लिया गया और उसे उसी बार में ले जाया गया. अपना खाना खत्म करने के बाद वह खड़ा हुआ और बोलने लगा 'उसकी मौत तय है जो मेरी कुर्सी पर बैठने की हिम्मत करेगा'. तब से ये कुर्सी सच में ही शापित हो गई.
Medium. com के मुताबिक, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान रॉयल एनफॉर्स के दो पायलट उस पब में आए और उस कुर्सी पर बैठ गए. फिर जैसे ही वे दोनों पब से बाहर निकले, उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया और दोनों पायलटों की मौत हो गई. इसके बाद जो भी शख्स इस कुर्सी पर बैठा उसकी रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई. लगातार होती इन मौतों के कारण पब के मालिक ने इस कुर्सी को पब के गोदाम में रखवा दिया. लेकिन यहां भी इस कुर्सी के शाप ने लोगों का पीछा नहीं छोड़ा.
एक बार गोदाम में कुछ सामान रखने आया वर्कर थककर उस कुर्सी पर बैठ गया. फिर एक घंटे बाद ही एक रोड एक्सीडेंट में उस वर्कर की मौत हो गई. इस घटना के बाद पब के मालिक ने इस मनहूस कुर्सी को थर्स्क के म्यूजियम को दान कर दिया. तब से उस म्यूजियम में 5 फुट की ऊंचाई पर इस कुर्सी को रख दिया गया. ताकि कोई भी व्यक्ति गलती से भी इस कुर्सी पर न बैठे.
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अट्ठारहवीं शताब्दी में इंग्लैंड के थर्स्क में थॉमस बज्बी नामक शख्स रहता था. उसका एक साथी था जिसका नाम डेनियल औटी था. कहा जाता है कि ये दोनों नकली सिक्के बनाने का अवैध काम करते थे. डेनियल न सिर्फ थॉमस का अच्छा दोस्त था, बल्कि उसकी बेटी एलिजाबेथ से थॉमस ने शादी भी कर ली थी. जिसके बाद दोनों दामाद और ससुर बन गए थे. बाद में यह दोस्ती और भी गहरी हो गई. काम के बाद दोनों रोज साथ में Thirsk में स्थित अपने फेवरट बार में बैठते और वहां जमकर शराब पीते. थॉमस उस बार में हमेशा एक ही कुर्सी में ही बैठता, जिससे उसे खास लगाव हो गया था. अगर कोई भी उस कुर्सी में बैठ जाता तो थॉमस उससे लड़ने झगड़ने लगता. फिर उसे जबरदस्ती वहां से हटाकर खुद उसमें बैठ जाता. लेकिन यह कुर्सी आगे जाकर कितने ही लोगों की जान लेने वाली थी. इस बात से हर कोई अंजान था. कहानी की शुरुआत होती है साल एक हज़ार सात सौ दो से. एक दिन बार में किसी बात को लेकर थॉमस और डेनियल के बीच लड़ाई हो गई. लड़ाई मारपीट तक पहुंच गई. फिर थॉमस को चिढ़ाने के लिए डेनियल उसकी पसंदीदा कुर्सी पर जा बैठा. थॉमस को यह देखकर इतना गुस्सा आया कि उसने डेनियल की हत्या कर डाली. पुलिस ने हत्या के आरोप में थॉमस को गिरफ्तार कर लिया. जिसके बाद ससुर की हत्या करने के जुर्म में थॉमस को मौत की सजा सुना दी गई. जिस दिन थॉमस को फांसी दी जानी थी. उस दिन उससे उसकी आखिरी इच्छा पूछी गई. फांसी से पहले अपनी आखिरी इच्छा जाहिर करते हुए थॉमस ने कहा कि वह Thirsk में स्थित बार में रखी अपनी फेवरेट कुर्सी में बैठकर आखिरी बार भोजन खाना चाहता है. थॉमस की इस इच्छा को मान लिया गया और उसे उसी बार में ले जाया गया. अपना खाना खत्म करने के बाद वह खड़ा हुआ और बोलने लगा 'उसकी मौत तय है जो मेरी कुर्सी पर बैठने की हिम्मत करेगा'. तब से ये कुर्सी सच में ही शापित हो गई. Medium. com के मुताबिक, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान रॉयल एनफॉर्स के दो पायलट उस पब में आए और उस कुर्सी पर बैठ गए. फिर जैसे ही वे दोनों पब से बाहर निकले, उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया और दोनों पायलटों की मौत हो गई. इसके बाद जो भी शख्स इस कुर्सी पर बैठा उसकी रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई. लगातार होती इन मौतों के कारण पब के मालिक ने इस कुर्सी को पब के गोदाम में रखवा दिया. लेकिन यहां भी इस कुर्सी के शाप ने लोगों का पीछा नहीं छोड़ा. एक बार गोदाम में कुछ सामान रखने आया वर्कर थककर उस कुर्सी पर बैठ गया. फिर एक घंटे बाद ही एक रोड एक्सीडेंट में उस वर्कर की मौत हो गई. इस घटना के बाद पब के मालिक ने इस मनहूस कुर्सी को थर्स्क के म्यूजियम को दान कर दिया. तब से उस म्यूजियम में पाँच फुट की ऊंचाई पर इस कुर्सी को रख दिया गया. ताकि कोई भी व्यक्ति गलती से भी इस कुर्सी पर न बैठे.
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- Kids Nutrition (2-15 Yrs)
एक्सेलटो 15mg टैबलेट एक दवा है जिसे एंटीकोगुलेंट या ब्लड थिनर (खून पतला करने की दवा) के नाम से जाना जाता है. It helps prevent and treat blood clots. इसका इस्तेमाल स्ट्रोक और हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है. यह आपकी टांगों, फेफड़ों, मस्तिष्क और हार्ट की नसों में क्लॉट बनने से रोकता है और उनका इलाज करता है.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट को सामान्य तौर पर अनियमित हार्ट रिदम (एट्रियल फाइब्रिलेशन) वाले मरीजों में क्लॉट बनने की रोकथाम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह उन लोगों में थक्के होने के जोखिम को भी कम करता है जो घुटने या कूल्हे के प्रतिस्थापन की सर्जरी करा चुके हैं. इसे खाने के साथ या बिना खाए लिया जा सकता है.. Take it at the same time each day for maximum benefits. आपको इस दवा को कई वर्षों तक,कुछ मामलों में तो जीवन के लिए भी लेना पड़ सकता है. अपने डॉक्टर के मार्गदर्शन के बिना इसे लेना बंद न करें और न ही खुराक बदलें.. यह आपको तेजी से हार्ट अटैक, स्ट्रोक या थ्रोम्बोसिस (रक्त वाहिका के भीतर खून के थक्के की एक संरचना) के जोखिम पर डाल सकता है. आप अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करके, जैसे कि धूम्रपान न करना, स्वस्थ डाइट खाना, नियमित रूप से व्यायाम करना और ज़रूरत पड़ने पर वजन घटाकर, अपने लिए खून का थक्का जमने के जोखिम को कम कर सकते हैं.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट का सबसे सामान्य साइड इफेक्ट सामान्य के मुकाबले आसानी से खून निकलना होना है, उदाहरण के लिए, नाक से ब्लीडिंग होना या नील पड़ना. अगर आपको किसी लक्षण का अनुभव होता है, तो अपने डॉक्टर को तुरंत बताएं. Do not take this medicine if you have severe kidney or liver problems, if you are currently bleeding or if you are taking other medicines to reduce blood clotting. इस दवा का इस्तेमाल करते समय आपको स्तनपान नहीं कराना चाहिए. अन्य एंटीकोऐग्युलेंट से विपरीत, इस दवा को लेते समय एक रेगुलर ब्लड टेस्ट (पीटी-आईएनआर) की आवश्यकता नहीं होती है.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट को सामान्य तौर पर अनियमित हार्ट रिदम (एट्रियल फाइब्रिलेशन) वाले मरीजों में क्लॉट बनने की रोकथाम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह उन लोगों में थक्के होने के जोखिम को भी कम करता है जो घुटने या कूल्हे के प्रतिस्थापन की सर्जरी करा चुके हैं. इसे खाने के साथ या बिना खाए लिया जा सकता है.. Take it at the same time each day for maximum benefits. आपको इस दवा को कई वर्षों तक,कुछ मामलों में तो जीवन के लिए भी लेना पड़ सकता है. अपने डॉक्टर के मार्गदर्शन के बिना इसे लेना बंद न करें और न ही खुराक बदलें.. यह आपको तेजी से हार्ट अटैक, स्ट्रोक या थ्रोम्बोसिस (रक्त वाहिका के भीतर खून के थक्के की एक संरचना) के जोखिम पर डाल सकता है. आप अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करके, जैसे कि धूम्रपान न करना, स्वस्थ डाइट खाना, नियमित रूप से व्यायाम करना और ज़रूरत पड़ने पर वजन घटाकर, अपने लिए खून का थक्का जमने के जोखिम को कम कर सकते हैं.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट का सबसे सामान्य साइड इफेक्ट सामान्य के मुकाबले आसानी से खून निकलना होना है, उदाहरण के लिए, नाक से ब्लीडिंग होना या नील पड़ना. अगर आपको किसी लक्षण का अनुभव होता है, तो अपने डॉक्टर को तुरंत बताएं. Do not take this medicine if you have severe kidney or liver problems, if you are currently bleeding or if you are taking other medicines to reduce blood clotting. इस दवा का इस्तेमाल करते समय आपको स्तनपान नहीं कराना चाहिए. अन्य एंटीकोऐग्युलेंट से विपरीत, इस दवा को लेते समय एक रेगुलर ब्लड टेस्ट (पीटी-आईएनआर) की आवश्यकता नहीं होती है.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट एक प्रकार की दवा है जिसे एंटीकोगुलेंट के रूप में जाना जाता है. Although it does not "dissolve" blood clots, it can prevent them from getting bigger so your body can dissolve them over time. यह दवा नए को बनने से रोकने का भी काम करती है. यह दवा शरीर में मौजूद ब्लड क्लॉटिंग का कारण बनने वाले पदार्थ को ब्लॉक करने का काम करती है. यह आपके शरीर में रक्त का मुक्त प्रवाह बनाए रखता है और रक्त वाहिका के भीतर क्लॉट बनने की संभावनाओं को कम कर देता है.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट स्ट्रोक, फेफड़ों (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) या अन्य रक्त वाहिकाओं (थ्रोम्बोसिस) में थक्के के कारण होने वाले नुकसान को रोकने या कम करने में मदद कर सकता है. यह इस बात की संभावना को भी कम कर सकता है कि थक्के का कोई हिस्सा टूट जाएगा तथा शरीर के किसी अन्य भाग में चला जाएगा. इस दवा को प्रभावी बनाने के लिए आपको इसे नियमित रूप से लेना चाहिए और जीवनशैली में उपयुक्त बदलाव करने चाहिए.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट स्ट्रोक, फेफड़ों (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) या अन्य रक्त वाहिकाओं (थ्रोम्बोसिस) में थक्के के कारण होने वाले नुकसान को रोकने या कम करने में मदद कर सकता है. यह इस बात की संभावना को भी कम कर सकता है कि थक्के का कोई हिस्सा टूट जाएगा तथा शरीर के किसी अन्य भाग में चला जाएगा. इस दवा को प्रभावी बनाने के लिए आपको इसे नियमित रूप से लेना चाहिए और जीवनशैली में उपयुक्त बदलाव करने चाहिए.
इस दवा की खुराक और अनुपान की अवधि के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें. इसे साबुत निगल लें. इसे चबाएं, कुचलें या तोड़ें नहीं. एक्सेलटो 15mg टैबलेट को खाने के साथ या भूखे पेट भी ले सकते हैं, लेकिन बेहतर यह होगा कि इसे एक तय समय पर लिया जाए.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट खून का थक्का रोकने (नोक) के लिए मुंह के ज़रिए ली जाने वाली एक नई तरह की दवा है. It works by stopping a clotting factor called factor Xa from working. This helps prevent the formation of blood clots in the body.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट के साथ शराब का सेवन करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें.
गर्भावस्था के दौरान एक्सेलटो 15mg टैबलेट का इस्तेमाल करना असुरक्षित हो सकता है.. हालांकि, इंसानों से जुड़े शोध सीमित हैं लेकिन जानवरों पर किए शोधों से पता चलता है कि ये विकसित हो रहे शिशु पर हानिकारक प्रभाव डालता है. आपके डॉक्टर पहले इससे होने वाले लाभ और संभावित जोखिमों की तुलना करेंगें और उसके बाद ही इसे लेने की सलाह देंगें. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट स्तनपान के दौरान इस्तेमाल के लिए संभवतः असुरक्षित है. मानवो पर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि यह दवा मां के दूध में मिश्रित हो सकती है और बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट के इस्तेमाल से ऐसे साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जिससे आपकी गाड़ी चलाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट के कारण चक्कर आने या बेहोशी की शिकायत हो सकती है. इससे आपका गाड़ी चलाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
एक्सेलटो 15mg टैबलेट के कारण चक्कर आने या बेहोशी की शिकायत हो सकती है. इससे आपका गाड़ी चलाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
किडनी की बीमारियों से पीड़ित मरीजों में एक्सेलटो 15mg टैबलेट का इस्तेमाल सावधानी के साथ किया जाना चाहिए. एक्सेलटो 15mg टैबलेट की खुराक में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें.
किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को एक्सेलटो 15mg टैबलेट का इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती है.
किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को एक्सेलटो 15mg टैबलेट का इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती है.
लिवर की बीमारी वाले मरीजों में एक्सेलटो 15mg टैबलेट का इस्तेमाल करना संभवतः असुरक्षित है और उन्हें इससे बचना चाहिए. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें.
अगर आप जेराल्टो टैबलेट लेना भूल जाएं तो?
अगर आप एक्सेलटो 15mg टैबलेट निर्धारित समय पर लेना भूल गए हैं तो जितनी जल्दी हो सके इसे ले लें. हालांकि, अगर अगली खुराक का समय हो गया है तो छूटी हुई खुराक को छोड़ दें और नियमित समय पर अगली खुराक लें. खुराक को डबल न करें.
यह जानकारी सिर्फ सूचना के उद्देश्य से है. कृपया कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें.
- बेहतरीन परिणाम के लिए रोजाना एक ही समय पर एक्सेलटो 15mg टैबलेट लें. इसे रात में खाने के साथ लेना बेहतर रहता है.
- यह खाने या अन्य दवाओं के साथ कम प्रभाव डालता है. इसलिए, बार-बार डोज़ बदलने की ज़रूरत नहीं होती है.
- यह आपमें रक्तस्राव के खतरे को बढ़ाता है. शेविंग करते समय, नाख़ून काटते समय या किसी तेज धार वाली चीज का उपयोग करते समय सावधानी बरतें।. फुटबॉल, कुश्ती).
- इसकी वजह से चक्कर आ सकता है. जब तक आप यह न जान लें कि यह आपके ऊपर कैसा प्रभाव डालता है तब तक गाड़ी चलाने या एकाग्रता वाली गतिविधि करने से बचें.
- अगर आप कोई सर्जरी या दांतों का इलाज करवाने जा रहे हैं तो आपको अस्थायी रूप से एक्सेलटो 15mg टैबलेट का सेवन बंद करने ले लिए कहा जा सकता है.
- अगर आपको किडनी में कोई समस्या है, तो अपने डॉक्टर को सूचित करें.
- अगर आप गर्भवती है, प्रेगनेंसी प्लान कर रही है या स्तनपान करा रही हैं, तो अपने डॉक्टर को बताएं.
- अपने डॉक्टर से बात किए बिना दवा लेना बंद न करें.
आप जेराल्टो टैबलेट का उपयोग किस लिए कर रहे हैं?
प्र. एक्सेलटो 15mg टैबलेट के दुष्प्रभाव क्या हैं?
एक्सेलटो 15mg टैबलेट के सबसे आम दुष्प्रभाव में लंबे या अत्यधिक खून निकलना , सांस रहित (जो खून निकलना का संकेत हो सकता है), असाधारण कमजोरी, थकान, रोग, चक्कर आना, सिरदर्द और अस्पष्ट सूजन शामिल हैं. अन्य दुष्प्रभाव त्वचा और एलर्जी से होने वाले प्रतिक्रियाएं, ब्रूजिंग, खून खराब करना, त्वचा से या त्वचा के तहत खून निकलना , और अंगों में सूजन और दर्द हो सकते हैं. एक्सेलटो 15mg टैबलेट का उपयोग करके बिलीरुबिन बढ़ सकता है और प्लेटलेट की संख्या घट सकती है. कुछ लोग फेइंटिंग एपिसोड, फास्टर हार्टबीट और ड्राय माउथ का अनुभव कर सकते हैं. अगर आपको कोई दुष्प्रभाव नहीं मिलता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
प्र. क्या एक्सेलटो 15mg टैबलेट ब्लड थिनर है?
हां, एक्सेलटो 15mg टैबलेट ब्लड थिनर है. यह एक दवा है जो रक्त वाहिकाओं के भीतर रक्त को बंद करने से बचाता है. यह रक्त वाहिकाओं में आवर्ती खून के थक्के बनना को भी रोकता है. पैरों के शिराओं और फेफड़ों के रक्त वाहिकाओं में खून के थक्के बनना के इलाज के लिए निर्धारित किया जा सकता है.
प्र. क्या एक्सेलटो 15mg टैबलेट खतरनाक है?
एक्सेलटो 15mg टैबलेट में कई लाभकारी प्रभाव होते हैं, लेकिन यह आपको सामान्य से अधिक रक्तस्राव करने की प्रवृत्ति है क्योंकि यह आपके रक्त के थक्के की क्षमता को कम करता है. कभी-कभी एक्सेलटो 15mg टैबलेट गंभीर खून निकलना का कारण बन सकता है जो खतरनाक हो सकता है और इसके लिए तुरंत चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता पड़ सकती है. यह जोखिम एक्सेलटो 15mg टैबलेट लेने वाले लोगों में अन्य रक्त पतली दवाओं के साथ अधिक हो सकता है. अगर आप नाबालिग खून निकलना को भी नोटिस करते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें.
प्र. अगर आप ब्लड थिनर पर हैं, तो आपको किन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए?
एक्सेलटो 15mg टैबलेट लेने के दौरान ग्रेपेफ्रूट और ग्रेपफ्रूट जूस लेने से परहेज करें. इसका कारण, ग्रेपफ्रूट में ऐसे कंपाउंड होते हैं जो एक्सेलटो 15mg टैबलेट के मेटाबोलिज्म को धीमा करते हैं और खून निकलना की गतिविधि को बढ़ाते हैं. दूसरी ओर, अगर आप वॉरफेरिन जैसे कुछ अन्य रक्त पतला ले रहे हैं, तो आपको विटामिन के गतिविधि को बढ़ाने या रक्त के थक्के बढ़ाने से बचना चाहिए. ऐसे खाद्य पदार्थों में पालक, ब्रसल्स, स्प्राउट्स, मस्टर्ड ग्रीन्स, ब्रोकोली, एस्पैरागस और ग्रीन टी शामिल हो सकते हैं. हालांकि, इन खाद्य पदार्थों का उपयोग एक्सेलटो 15mg टैबलेट के साथ प्रतिबंधित नहीं है.
Disclaimer:टाटा 1mg's का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके उपभोक्ताओं को एक्सपर्ट द्वारा जांच की गई, सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले. यहां उपलब्ध जानकारी को चिकित्सकीय परामर्श के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. यहां दिए गए विवरण सिर्फ़ आपकी जानकारी के लिए हैं. यह संभव है कि इसमें स्वास्थ्य संबधी किसी विशेष समस्या, लैब टेस्ट, दवाओं और उनके सभी संभावित दुष्प्रभावों, पारस्परिक प्रभाव और उनसे जुड़ी सावधानियां एवं चेतावनियों के बारे में सारी जानकारी सम्मिलित ना हो। किसी भी दवा या बीमारी से जुड़े अपने सभी सवालों के लिए डॉक्टर से संपर्क करें. हमारा उद्देश्य डॉक्टर और मरीज के बीच के संबंध को मजबूत बनाना है, उसका विकल्प बनना नहीं.
- Fox KA, White HD, Gersh BJ, et al. Antithrombotic Agents: Platelete Inhibitors, Acute Anticoagulants, Fibrinolytics, and Chronic Anticoagulants. In: Opie LH, Gersh BJ, editors. Drugs for the Heart. 8th ed. Philadelphia, Pennsylvania: Elsevier Saunders; 2013. pp. 365-66.
- Briggs GG, Freeman RK, editors. A Reference Guide to Fetal and Neonatal Risk: Drugs in Pregnancy and Lactation. 10th ed. Philadelphia, PA: Wolters Kluwer Health; 2015. p. 1228.
The list of available options shown with the same composition has been prepared upon the advice of registered medical practitioners, pharmacists affiliated with TATA 1MG. TATA 1MG does not promote any pharmaceutical product of any particular company, and all recommendations are based on the medical opinion, advisories from specialist medical and pharmaceutical professionals.
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वेरिएंट (3)
Same salt composition:रिवारोक्साबैन (15एमजी)
Why buy these from 1mg?
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- Kids Nutrition एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट एक दवा है जिसे एंटीकोगुलेंट या ब्लड थिनर के नाम से जाना जाता है. It helps prevent and treat blood clots. इसका इस्तेमाल स्ट्रोक और हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है. यह आपकी टांगों, फेफड़ों, मस्तिष्क और हार्ट की नसों में क्लॉट बनने से रोकता है और उनका इलाज करता है. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट को सामान्य तौर पर अनियमित हार्ट रिदम वाले मरीजों में क्लॉट बनने की रोकथाम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह उन लोगों में थक्के होने के जोखिम को भी कम करता है जो घुटने या कूल्हे के प्रतिस्थापन की सर्जरी करा चुके हैं. इसे खाने के साथ या बिना खाए लिया जा सकता है.. Take it at the same time each day for maximum benefits. आपको इस दवा को कई वर्षों तक,कुछ मामलों में तो जीवन के लिए भी लेना पड़ सकता है. अपने डॉक्टर के मार्गदर्शन के बिना इसे लेना बंद न करें और न ही खुराक बदलें.. यह आपको तेजी से हार्ट अटैक, स्ट्रोक या थ्रोम्बोसिस के जोखिम पर डाल सकता है. आप अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करके, जैसे कि धूम्रपान न करना, स्वस्थ डाइट खाना, नियमित रूप से व्यायाम करना और ज़रूरत पड़ने पर वजन घटाकर, अपने लिए खून का थक्का जमने के जोखिम को कम कर सकते हैं. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट का सबसे सामान्य साइड इफेक्ट सामान्य के मुकाबले आसानी से खून निकलना होना है, उदाहरण के लिए, नाक से ब्लीडिंग होना या नील पड़ना. अगर आपको किसी लक्षण का अनुभव होता है, तो अपने डॉक्टर को तुरंत बताएं. Do not take this medicine if you have severe kidney or liver problems, if you are currently bleeding or if you are taking other medicines to reduce blood clotting. इस दवा का इस्तेमाल करते समय आपको स्तनपान नहीं कराना चाहिए. अन्य एंटीकोऐग्युलेंट से विपरीत, इस दवा को लेते समय एक रेगुलर ब्लड टेस्ट की आवश्यकता नहीं होती है. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट को सामान्य तौर पर अनियमित हार्ट रिदम वाले मरीजों में क्लॉट बनने की रोकथाम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह उन लोगों में थक्के होने के जोखिम को भी कम करता है जो घुटने या कूल्हे के प्रतिस्थापन की सर्जरी करा चुके हैं. इसे खाने के साथ या बिना खाए लिया जा सकता है.. Take it at the same time each day for maximum benefits. आपको इस दवा को कई वर्षों तक,कुछ मामलों में तो जीवन के लिए भी लेना पड़ सकता है. अपने डॉक्टर के मार्गदर्शन के बिना इसे लेना बंद न करें और न ही खुराक बदलें.. यह आपको तेजी से हार्ट अटैक, स्ट्रोक या थ्रोम्बोसिस के जोखिम पर डाल सकता है. आप अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करके, जैसे कि धूम्रपान न करना, स्वस्थ डाइट खाना, नियमित रूप से व्यायाम करना और ज़रूरत पड़ने पर वजन घटाकर, अपने लिए खून का थक्का जमने के जोखिम को कम कर सकते हैं. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट का सबसे सामान्य साइड इफेक्ट सामान्य के मुकाबले आसानी से खून निकलना होना है, उदाहरण के लिए, नाक से ब्लीडिंग होना या नील पड़ना. अगर आपको किसी लक्षण का अनुभव होता है, तो अपने डॉक्टर को तुरंत बताएं. Do not take this medicine if you have severe kidney or liver problems, if you are currently bleeding or if you are taking other medicines to reduce blood clotting. इस दवा का इस्तेमाल करते समय आपको स्तनपान नहीं कराना चाहिए. अन्य एंटीकोऐग्युलेंट से विपरीत, इस दवा को लेते समय एक रेगुलर ब्लड टेस्ट की आवश्यकता नहीं होती है. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट एक प्रकार की दवा है जिसे एंटीकोगुलेंट के रूप में जाना जाता है. Although it does not "dissolve" blood clots, it can prevent them from getting bigger so your body can dissolve them over time. यह दवा नए को बनने से रोकने का भी काम करती है. यह दवा शरीर में मौजूद ब्लड क्लॉटिंग का कारण बनने वाले पदार्थ को ब्लॉक करने का काम करती है. यह आपके शरीर में रक्त का मुक्त प्रवाह बनाए रखता है और रक्त वाहिका के भीतर क्लॉट बनने की संभावनाओं को कम कर देता है. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट स्ट्रोक, फेफड़ों या अन्य रक्त वाहिकाओं में थक्के के कारण होने वाले नुकसान को रोकने या कम करने में मदद कर सकता है. यह इस बात की संभावना को भी कम कर सकता है कि थक्के का कोई हिस्सा टूट जाएगा तथा शरीर के किसी अन्य भाग में चला जाएगा. इस दवा को प्रभावी बनाने के लिए आपको इसे नियमित रूप से लेना चाहिए और जीवनशैली में उपयुक्त बदलाव करने चाहिए. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट स्ट्रोक, फेफड़ों या अन्य रक्त वाहिकाओं में थक्के के कारण होने वाले नुकसान को रोकने या कम करने में मदद कर सकता है. यह इस बात की संभावना को भी कम कर सकता है कि थक्के का कोई हिस्सा टूट जाएगा तथा शरीर के किसी अन्य भाग में चला जाएगा. इस दवा को प्रभावी बनाने के लिए आपको इसे नियमित रूप से लेना चाहिए और जीवनशैली में उपयुक्त बदलाव करने चाहिए. इस दवा की खुराक और अनुपान की अवधि के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें. इसे साबुत निगल लें. इसे चबाएं, कुचलें या तोड़ें नहीं. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट को खाने के साथ या भूखे पेट भी ले सकते हैं, लेकिन बेहतर यह होगा कि इसे एक तय समय पर लिया जाए. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट खून का थक्का रोकने के लिए मुंह के ज़रिए ली जाने वाली एक नई तरह की दवा है. It works by stopping a clotting factor called factor Xa from working. This helps prevent the formation of blood clots in the body. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट के साथ शराब का सेवन करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें. गर्भावस्था के दौरान एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट का इस्तेमाल करना असुरक्षित हो सकता है.. हालांकि, इंसानों से जुड़े शोध सीमित हैं लेकिन जानवरों पर किए शोधों से पता चलता है कि ये विकसित हो रहे शिशु पर हानिकारक प्रभाव डालता है. आपके डॉक्टर पहले इससे होने वाले लाभ और संभावित जोखिमों की तुलना करेंगें और उसके बाद ही इसे लेने की सलाह देंगें. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट स्तनपान के दौरान इस्तेमाल के लिए संभवतः असुरक्षित है. मानवो पर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि यह दवा मां के दूध में मिश्रित हो सकती है और बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट के इस्तेमाल से ऐसे साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जिससे आपकी गाड़ी चलाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट के कारण चक्कर आने या बेहोशी की शिकायत हो सकती है. इससे आपका गाड़ी चलाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट के कारण चक्कर आने या बेहोशी की शिकायत हो सकती है. इससे आपका गाड़ी चलाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. किडनी की बीमारियों से पीड़ित मरीजों में एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट का इस्तेमाल सावधानी के साथ किया जाना चाहिए. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट की खुराक में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें. किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट का इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती है. किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट का इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती है. लिवर की बीमारी वाले मरीजों में एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट का इस्तेमाल करना संभवतः असुरक्षित है और उन्हें इससे बचना चाहिए. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें. अगर आप जेराल्टो टैबलेट लेना भूल जाएं तो? अगर आप एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट निर्धारित समय पर लेना भूल गए हैं तो जितनी जल्दी हो सके इसे ले लें. हालांकि, अगर अगली खुराक का समय हो गया है तो छूटी हुई खुराक को छोड़ दें और नियमित समय पर अगली खुराक लें. खुराक को डबल न करें. यह जानकारी सिर्फ सूचना के उद्देश्य से है. कृपया कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें. - बेहतरीन परिणाम के लिए रोजाना एक ही समय पर एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट लें. इसे रात में खाने के साथ लेना बेहतर रहता है. - यह खाने या अन्य दवाओं के साथ कम प्रभाव डालता है. इसलिए, बार-बार डोज़ बदलने की ज़रूरत नहीं होती है. - यह आपमें रक्तस्राव के खतरे को बढ़ाता है. शेविंग करते समय, नाख़ून काटते समय या किसी तेज धार वाली चीज का उपयोग करते समय सावधानी बरतें।. फुटबॉल, कुश्ती). - इसकी वजह से चक्कर आ सकता है. जब तक आप यह न जान लें कि यह आपके ऊपर कैसा प्रभाव डालता है तब तक गाड़ी चलाने या एकाग्रता वाली गतिविधि करने से बचें. - अगर आप कोई सर्जरी या दांतों का इलाज करवाने जा रहे हैं तो आपको अस्थायी रूप से एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट का सेवन बंद करने ले लिए कहा जा सकता है. - अगर आपको किडनी में कोई समस्या है, तो अपने डॉक्टर को सूचित करें. - अगर आप गर्भवती है, प्रेगनेंसी प्लान कर रही है या स्तनपान करा रही हैं, तो अपने डॉक्टर को बताएं. - अपने डॉक्टर से बात किए बिना दवा लेना बंद न करें. आप जेराल्टो टैबलेट का उपयोग किस लिए कर रहे हैं? प्र. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट के दुष्प्रभाव क्या हैं? एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट के सबसे आम दुष्प्रभाव में लंबे या अत्यधिक खून निकलना , सांस रहित , असाधारण कमजोरी, थकान, रोग, चक्कर आना, सिरदर्द और अस्पष्ट सूजन शामिल हैं. अन्य दुष्प्रभाव त्वचा और एलर्जी से होने वाले प्रतिक्रियाएं, ब्रूजिंग, खून खराब करना, त्वचा से या त्वचा के तहत खून निकलना , और अंगों में सूजन और दर्द हो सकते हैं. एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट का उपयोग करके बिलीरुबिन बढ़ सकता है और प्लेटलेट की संख्या घट सकती है. कुछ लोग फेइंटिंग एपिसोड, फास्टर हार्टबीट और ड्राय माउथ का अनुभव कर सकते हैं. अगर आपको कोई दुष्प्रभाव नहीं मिलता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. प्र. क्या एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट ब्लड थिनर है? हां, एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट ब्लड थिनर है. यह एक दवा है जो रक्त वाहिकाओं के भीतर रक्त को बंद करने से बचाता है. यह रक्त वाहिकाओं में आवर्ती खून के थक्के बनना को भी रोकता है. पैरों के शिराओं और फेफड़ों के रक्त वाहिकाओं में खून के थक्के बनना के इलाज के लिए निर्धारित किया जा सकता है. प्र. क्या एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट खतरनाक है? एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट में कई लाभकारी प्रभाव होते हैं, लेकिन यह आपको सामान्य से अधिक रक्तस्राव करने की प्रवृत्ति है क्योंकि यह आपके रक्त के थक्के की क्षमता को कम करता है. कभी-कभी एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट गंभीर खून निकलना का कारण बन सकता है जो खतरनाक हो सकता है और इसके लिए तुरंत चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता पड़ सकती है. यह जोखिम एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट लेने वाले लोगों में अन्य रक्त पतली दवाओं के साथ अधिक हो सकता है. अगर आप नाबालिग खून निकलना को भी नोटिस करते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें. प्र. अगर आप ब्लड थिनर पर हैं, तो आपको किन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए? एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट लेने के दौरान ग्रेपेफ्रूट और ग्रेपफ्रूट जूस लेने से परहेज करें. इसका कारण, ग्रेपफ्रूट में ऐसे कंपाउंड होते हैं जो एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट के मेटाबोलिज्म को धीमा करते हैं और खून निकलना की गतिविधि को बढ़ाते हैं. दूसरी ओर, अगर आप वॉरफेरिन जैसे कुछ अन्य रक्त पतला ले रहे हैं, तो आपको विटामिन के गतिविधि को बढ़ाने या रक्त के थक्के बढ़ाने से बचना चाहिए. ऐसे खाद्य पदार्थों में पालक, ब्रसल्स, स्प्राउट्स, मस्टर्ड ग्रीन्स, ब्रोकोली, एस्पैरागस और ग्रीन टी शामिल हो सकते हैं. हालांकि, इन खाद्य पदार्थों का उपयोग एक्सेलटो पंद्रह मिलीग्राम टैबलेट के साथ प्रतिबंधित नहीं है. Disclaimer:टाटा एक मिलीग्राम's का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके उपभोक्ताओं को एक्सपर्ट द्वारा जांच की गई, सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले. यहां उपलब्ध जानकारी को चिकित्सकीय परामर्श के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. यहां दिए गए विवरण सिर्फ़ आपकी जानकारी के लिए हैं. यह संभव है कि इसमें स्वास्थ्य संबधी किसी विशेष समस्या, लैब टेस्ट, दवाओं और उनके सभी संभावित दुष्प्रभावों, पारस्परिक प्रभाव और उनसे जुड़ी सावधानियां एवं चेतावनियों के बारे में सारी जानकारी सम्मिलित ना हो। किसी भी दवा या बीमारी से जुड़े अपने सभी सवालों के लिए डॉक्टर से संपर्क करें. हमारा उद्देश्य डॉक्टर और मरीज के बीच के संबंध को मजबूत बनाना है, उसका विकल्प बनना नहीं. - Fox KA, White HD, Gersh BJ, et al. Antithrombotic Agents: Platelete Inhibitors, Acute Anticoagulants, Fibrinolytics, and Chronic Anticoagulants. In: Opie LH, Gersh BJ, editors. Drugs for the Heart. आठth ed. Philadelphia, Pennsylvania: Elsevier Saunders; दो हज़ार तेरह. pp. तीन सौ पैंसठ-छयासठ. - Briggs GG, Freeman RK, editors. A Reference Guide to Fetal and Neonatal Risk: Drugs in Pregnancy and Lactation. दसth ed. Philadelphia, PA: Wolters Kluwer Health; दो हज़ार पंद्रह. p. एक हज़ार दो सौ अट्ठाईस. The list of available options shown with the same composition has been prepared upon the advice of registered medical practitioners, pharmacists affiliated with TATA एकMG. TATA एकMG does not promote any pharmaceutical product of any particular company, and all recommendations are based on the medical opinion, advisories from specialist medical and pharmaceutical professionals. The list of available options shown with the same composition has been prepared upon the advice of registered medical practitioners, pharmacists affiliated with TATA एकMG. TATA एकMG does not promote any pharmaceutical product of any particular company, and all recommendations are based on the medical opinion, advisories from specialist medical and pharmaceutical professionals. वेरिएंट Same salt composition:रिवारोक्साबैन Why buy these from एक मिलीग्राम?
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जब नदीम अली और संजिदा की बेटी रिम्शा घर से तैयार होकर निकलीं, तो सभी की नजरें उनपर थीं। साड़ी और आलता से रंगे छोटे-छोटे हाथों और पैरों के साथ रिम्शा खुटी पूजा में शामिल होने के लिए जा रही थीं।
ईद उल अजहा के मौके पर हुई अहम पूजा और रिम्शा नाम की छोटी सी बच्ची दुर्गा मां के रूप में पूजी गई। आयोजन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुआ, जहां आयोजकों हर साल होने वाली अहम पूजा के लिए ईद का दिन चुना। आयोजकों का कहना है कि राम नवमी पर हुई राज्य में हिंसा के चलते हमें इस बार कुछ अलग सोचना पड़ा।
गुरुवार को जब नदीम अली और संजिदा की बेटी रिम्शा घर से तैयार होकर निकलीं, तो सभी की नजरें उनपर थीं। साड़ी और आलता से रंगे छोटे-छोटे हाथों और पैरों के साथ रिम्शा खुटी पूजा में शामिल होने के लिए जा रही थीं। दरअसल, खुटी पूजा को राज्य में दुर्गा पूजा की तैयारियों का शुरुआत माना जाता है, जिसका आगाज पंडाल के काम से होता है।
यहां पुजारी ने उनकी दुर्गा के अवतार के रूप में पूजा की। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी कोलकाता में इस पूजा के आयोजक बारनगर फ्रेंड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय घोष बताते हैं, 'राज्य में राम नवमी के दौरान हुई हिंसा ने हमें अलग तरह से सोचने पर मजबूर कर दिया। ' 75वें साल हो रही इस पूजा का आयोजन सिंथी में हुआ, जिसमें सभी समुदाय के लोग पहुंचे।
सिंथी में दर्जी का काम करने वाले अली कहते हैं कि कुछ दिनों पहले घोष इस प्रस्ताव के साथ मेरे पास आए थे, जिसे सुनकर वह काफी खुश हुए। उनकी पत्नी संजीदा भी इससे खुश थीं। गुरुवार सुबह मस्जिद में नमाज अदा करने के बाद अली पूजा में शामिल होने के लिए निकल गए। वहीं, संजीदा कहती हैं कि ईद की चलते व्यस्तता थी, लेकिन दोपहर तक वह भी मंदिर पहुंच गईं थीं। इधर, पुजारी भी पूजा का हिस्सा बनकर काफी खुश हैं।
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जब नदीम अली और संजिदा की बेटी रिम्शा घर से तैयार होकर निकलीं, तो सभी की नजरें उनपर थीं। साड़ी और आलता से रंगे छोटे-छोटे हाथों और पैरों के साथ रिम्शा खुटी पूजा में शामिल होने के लिए जा रही थीं। ईद उल अजहा के मौके पर हुई अहम पूजा और रिम्शा नाम की छोटी सी बच्ची दुर्गा मां के रूप में पूजी गई। आयोजन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुआ, जहां आयोजकों हर साल होने वाली अहम पूजा के लिए ईद का दिन चुना। आयोजकों का कहना है कि राम नवमी पर हुई राज्य में हिंसा के चलते हमें इस बार कुछ अलग सोचना पड़ा। गुरुवार को जब नदीम अली और संजिदा की बेटी रिम्शा घर से तैयार होकर निकलीं, तो सभी की नजरें उनपर थीं। साड़ी और आलता से रंगे छोटे-छोटे हाथों और पैरों के साथ रिम्शा खुटी पूजा में शामिल होने के लिए जा रही थीं। दरअसल, खुटी पूजा को राज्य में दुर्गा पूजा की तैयारियों का शुरुआत माना जाता है, जिसका आगाज पंडाल के काम से होता है। यहां पुजारी ने उनकी दुर्गा के अवतार के रूप में पूजा की। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी कोलकाता में इस पूजा के आयोजक बारनगर फ्रेंड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय घोष बताते हैं, 'राज्य में राम नवमी के दौरान हुई हिंसा ने हमें अलग तरह से सोचने पर मजबूर कर दिया। ' पचहत्तरवें साल हो रही इस पूजा का आयोजन सिंथी में हुआ, जिसमें सभी समुदाय के लोग पहुंचे। सिंथी में दर्जी का काम करने वाले अली कहते हैं कि कुछ दिनों पहले घोष इस प्रस्ताव के साथ मेरे पास आए थे, जिसे सुनकर वह काफी खुश हुए। उनकी पत्नी संजीदा भी इससे खुश थीं। गुरुवार सुबह मस्जिद में नमाज अदा करने के बाद अली पूजा में शामिल होने के लिए निकल गए। वहीं, संजीदा कहती हैं कि ईद की चलते व्यस्तता थी, लेकिन दोपहर तक वह भी मंदिर पहुंच गईं थीं। इधर, पुजारी भी पूजा का हिस्सा बनकर काफी खुश हैं।
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मैट्रिक परीक्षाओं के छठे दिन मंगलवार को मातृभाषा परीक्षा आयोजित हुई। जिसमें परीक्षार्थियों ने हिंदी, उर्दू, बांग्ला व मैथिली की परीक्षाएं दी। सभी केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। किसी भी परीक्षा केंद्र से कदाचार करते हुए नहीं देखा गया।
छात्रों ने प्रश्न पत्रों को बेहद आसान बताया। छात्रों ने बताया कि इस विषय की तैयारी में ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि दूसरे पेपर की परीक्षाएं से बेहतर मातृभाषा की परीक्षा होने की बात छात्रों ने बताई। उन्होंने यह भी कहा कि गणित विषय की परीक्षा के साथ ही परीक्षा का दबाव समाप्त हो गया। अब द्वितिय भाषा व ऐच्छिक पेपर की परीक्षा शेष है। इन परीक्षाओं से अब डरने की जरूरत नहीं है, इन पेपरों में तो हम बाकी पेपरों से ज्यादा अच्छा करेंगे। छठे दिन की मैट्रिक परीक्षा भी शांतिपूर्ण व कदाचार मुक्त रही। इस परीक्षा की पहली पाली में 22615 परीक्षार्थियों को शामिल होना था, जिसमें से 22244 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए व 371 अनुपस्थित रहे। वही दूसरी पाली में कुल 22096परीक्षार्थियों को शामिल होना था, जिसमें से 21733 परीक्षार्थी ही शामिल हुए व 363 परीक्षार्थी अनुपस्थित थे।
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मैट्रिक परीक्षाओं के छठे दिन मंगलवार को मातृभाषा परीक्षा आयोजित हुई। जिसमें परीक्षार्थियों ने हिंदी, उर्दू, बांग्ला व मैथिली की परीक्षाएं दी। सभी केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। किसी भी परीक्षा केंद्र से कदाचार करते हुए नहीं देखा गया। छात्रों ने प्रश्न पत्रों को बेहद आसान बताया। छात्रों ने बताया कि इस विषय की तैयारी में ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि दूसरे पेपर की परीक्षाएं से बेहतर मातृभाषा की परीक्षा होने की बात छात्रों ने बताई। उन्होंने यह भी कहा कि गणित विषय की परीक्षा के साथ ही परीक्षा का दबाव समाप्त हो गया। अब द्वितिय भाषा व ऐच्छिक पेपर की परीक्षा शेष है। इन परीक्षाओं से अब डरने की जरूरत नहीं है, इन पेपरों में तो हम बाकी पेपरों से ज्यादा अच्छा करेंगे। छठे दिन की मैट्रिक परीक्षा भी शांतिपूर्ण व कदाचार मुक्त रही। इस परीक्षा की पहली पाली में बाईस हज़ार छः सौ पंद्रह परीक्षार्थियों को शामिल होना था, जिसमें से बाईस हज़ार दो सौ चौंतालीस परीक्षार्थी सम्मिलित हुए व तीन सौ इकहत्तर अनुपस्थित रहे। वही दूसरी पाली में कुल बाईस हज़ार छियानवेपरीक्षार्थियों को शामिल होना था, जिसमें से इक्कीस हज़ार सात सौ तैंतीस परीक्षार्थी ही शामिल हुए व तीन सौ तिरेसठ परीक्षार्थी अनुपस्थित थे।
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एक्टर अक्षय कुमार को कौन नहीं जानता. सामाजिक मुद्दों पर फिल्मे बनाकर अक्षय अपने फैन्स के ओर भी करीब आ गए हैं और उनकी फैन्स के दिलों में उनके लिए इज़्ज़त और भी बढ़ गई है. लेकिन ये ख़बर उनके फैन्स को थोड़ा दुखी कर सकती है क्योकि अक्षय कुमार पर बलात्कार के केस में सजा काट रहें राम रहीम की मदद करने का आरोप लगा है. साथ ही कहा जा रहा है कि अक्षय कुमार का परिवार राम रहीम का फॉलोवर है. क्या सच में अक्षय कुमार ने करवाई थी राम रहीम की मीटिंग? पूरा मामला आज हम आपको बताएंगे.
दरसअल अक्षय कुमार पर आरोप है कि अक्षय ने डेरा सच्चा सौदा के चीफ गुरमीत राम रहीम की सुखबीर बादल से मीटिंग करवाई थी. और इसी मामले में आज SIT ने अक्षय कुमार से पूछताछ की. एसआईटी के सामने पेश होने के लिए आज सुबह अक्षय कुमार चंडीगढ़ पहुंचे. यहीं से वो एसआईटी के सामने अपने बयान दर्ज करवाने और इन्वेस्टिगेशन में सहयोग देने पहुंचे.
बता दें अक्षय पर डेरा सच्चा सौदा के चीफ गुरमीत राम रहीम सिंह पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा था. अक्षय कुमार पर आरोप है कि उन्होंने राम रहीम सिंह को माफी दिलवाने के लिए मीडिएटर का काम किया था. इस पर चर्चा करने के लिए अक्षय कुमार ने अपने घर पर सुखबीर बादल और कुछ लोगों के साथ बैठक की थी.
आपको बता दें कि पूछताछ में अक्षय कुमार से करीब 2 घंटों तक पूछताछ की गई. इस पूछताछ में SIT के सभी अहम सदस्य वहां मौजूद थे. पूछताछ के दौरान अक्षय से वही पांच सवाल पूछे गए जो जांच दल ने सुखबरी सिंह से बादल से पूछे थे. इनमें सबसे अहम सवाल यही था कि क्या अक्षय ने सुखबीर सिंह बादल और राम रहीम की कोई मीटिंग फिक्स करवाई थी. सूत्रों की मानें तो अक्षय ने ऐसी किसी मीटिंग से इंकार किया है. अक्षय ने खुद को बेकसूर बताते हुए ये भी बताया कि ये आरोप किसी फिल्मी कहानी की तरह ही मनगढ़ंत हैं.
साथ ही अक्षय कुमार ने कहा कि वो जब 2011 में वर्ल्ड कबड्डी कप में परफॉर्म करने के लिए पंजाब आया था और इस दौरान उनकी सुखबीर बादल से मुलाकात हुई थी. इसके अलावा उनसे दो-तीन बार और सार्वजनिक कार्यक्रमों में ही मुलाकात हुई साथ ही अक्षय ने पूछताछ में बताया कि जिस वक्त 2015 में उनके फ्लैट पर मीटिंग होने की बात की जा रही है उस वक्त वो अपनी फिल्मों 'गब्बर इज़ बैक' और 'बेबी' के काम में काफी उलझे हुए थे और गुरमीत राम रहीम और उसके परिवार से न तो वो कभी मिले हैं और न ही उन्हें जानते हैं.
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एक्टर अक्षय कुमार को कौन नहीं जानता. सामाजिक मुद्दों पर फिल्मे बनाकर अक्षय अपने फैन्स के ओर भी करीब आ गए हैं और उनकी फैन्स के दिलों में उनके लिए इज़्ज़त और भी बढ़ गई है. लेकिन ये ख़बर उनके फैन्स को थोड़ा दुखी कर सकती है क्योकि अक्षय कुमार पर बलात्कार के केस में सजा काट रहें राम रहीम की मदद करने का आरोप लगा है. साथ ही कहा जा रहा है कि अक्षय कुमार का परिवार राम रहीम का फॉलोवर है. क्या सच में अक्षय कुमार ने करवाई थी राम रहीम की मीटिंग? पूरा मामला आज हम आपको बताएंगे. दरसअल अक्षय कुमार पर आरोप है कि अक्षय ने डेरा सच्चा सौदा के चीफ गुरमीत राम रहीम की सुखबीर बादल से मीटिंग करवाई थी. और इसी मामले में आज SIT ने अक्षय कुमार से पूछताछ की. एसआईटी के सामने पेश होने के लिए आज सुबह अक्षय कुमार चंडीगढ़ पहुंचे. यहीं से वो एसआईटी के सामने अपने बयान दर्ज करवाने और इन्वेस्टिगेशन में सहयोग देने पहुंचे. बता दें अक्षय पर डेरा सच्चा सौदा के चीफ गुरमीत राम रहीम सिंह पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा था. अक्षय कुमार पर आरोप है कि उन्होंने राम रहीम सिंह को माफी दिलवाने के लिए मीडिएटर का काम किया था. इस पर चर्चा करने के लिए अक्षय कुमार ने अपने घर पर सुखबीर बादल और कुछ लोगों के साथ बैठक की थी. आपको बता दें कि पूछताछ में अक्षय कुमार से करीब दो घंटाटों तक पूछताछ की गई. इस पूछताछ में SIT के सभी अहम सदस्य वहां मौजूद थे. पूछताछ के दौरान अक्षय से वही पांच सवाल पूछे गए जो जांच दल ने सुखबरी सिंह से बादल से पूछे थे. इनमें सबसे अहम सवाल यही था कि क्या अक्षय ने सुखबीर सिंह बादल और राम रहीम की कोई मीटिंग फिक्स करवाई थी. सूत्रों की मानें तो अक्षय ने ऐसी किसी मीटिंग से इंकार किया है. अक्षय ने खुद को बेकसूर बताते हुए ये भी बताया कि ये आरोप किसी फिल्मी कहानी की तरह ही मनगढ़ंत हैं. साथ ही अक्षय कुमार ने कहा कि वो जब दो हज़ार ग्यारह में वर्ल्ड कबड्डी कप में परफॉर्म करने के लिए पंजाब आया था और इस दौरान उनकी सुखबीर बादल से मुलाकात हुई थी. इसके अलावा उनसे दो-तीन बार और सार्वजनिक कार्यक्रमों में ही मुलाकात हुई साथ ही अक्षय ने पूछताछ में बताया कि जिस वक्त दो हज़ार पंद्रह में उनके फ्लैट पर मीटिंग होने की बात की जा रही है उस वक्त वो अपनी फिल्मों 'गब्बर इज़ बैक' और 'बेबी' के काम में काफी उलझे हुए थे और गुरमीत राम रहीम और उसके परिवार से न तो वो कभी मिले हैं और न ही उन्हें जानते हैं.
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कार्यक्रम रोहिंग्या त्रास्दी-7ः म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के जातीय सफाए के पीछे के कुछ ऐसे कारण जिन्हें जानकर आप रह जाएंगे हैरान!
रोहिंग्या के मुसलमानों को कई बार विस्थापन और बौद्ध कट्टरपंथियों के हमलों की वजह से अपना घर बार छोड़ना पड़ा लेकिन सन 2011 और सन 2017 में यह त्रासदी इतनी भयानक थी कि उसकी कुछ जानकारियां जो मिल पायी हैं वही इन्सान का दिल दहला देने के लिए काफी हैं।
इस दौरान रोहिंग्या मुसलमानों के विस्थापन के परिणाम में तीन प्रकार के शरणार्थी नज़र आए। एक वह लोग जो राखीन में हंगामों और बौद्ध चरमपंथियों तथा सेना के हमलों के बाद अपना इलाका छोड़ कर सुरक्षित इलाक़ों में चले गये, दूसरे वह लोग जिन्होंने नदी के रास्ते बांग्लादेश और भारत में शरण लेने की कोशिश की और तीसरे और सब से अधि खतरनाक स्थिति में वह लोग फंसे जिन्होंने राखीन में मौत के तांडव से भागने के लिए बेहद असुरक्षित नौकाओं का सहारा लेकर समुद्र में विकल्प चुना। दर-दर की ठोकरें खा रहे एक रोहिंग्या युवक का कहना है कि म्यांमार की सेना और कट्टरपंथी बौद्ध किसी से कुछ नहीं कहते लेकिन जैसे ही किसी रोहिंग्या मुसलमान को देखते हैं वह उसकी बड़ी बेरहमी से हत्या कर देते हैं, वहीं एक अन्य रोहिंग्या व्यक्ति का कहना है कि, हम 12 दिनों तक पहाड़ों पर जा कर छिप गए थे, फिर हमने 75 डॉलर दिए एक नांव वाले को ताकि वह हमे बांग्लादेश तक पहुंचा दे। राखीन से भाग कर भारत की सीमा पर पहुंचने वालों को भारतीय सुरक्षा बलों ने रोक लिया। अस्ल में म्यांमार से भारत के अच्छे संबंध हैं इस लिए उसने म्यांमार की वजह से इस मामले में हस्तक्षेप न करने का फैसला किया। कुछ लोग भाग कर सुरक्षित इलाक़ों में पहुंच गये लेकिन भारत सरकार उनकी पहचान करके उन्हें बांग्लादेश भेजती है। इस तरह से राखीन से रोहिंग्या मुसलमानों क पास, म्यांमार के सैनिकों के हाथों मारे जाने या बाग्लादेश भाग जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। जिन लोगों ने समुद्र का रास्ता अपना कर दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों जैसे, मलेशिया, इंडोनेशिया या थाईलैंड में शरण लेने की कोशिश की उनका अजांम तो बहुत ही भयानक हुआ।
बांग्लादेश में शरण लेने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों में अधिकांश महिलाएं, बच्चे और वृद्ध हैं जो अपने गांवों में होने वाली तबाही के चश्मदीद गवाह वह बताते हैं कि किस तरह से उनका पूरा गांव जला दिया गया और किस तरह से महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। इन लोगों से वार्ता करने वाले पत्रकारों ने बेहद खौफनाक रिपोर्टें प्रकाशित की हैं। बांग्लादेश की सरकार और इसी तरह शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के आयोग ने जो आंकड़े प्रकाशित किये हैं उनके अनुसार सन 2017 से पहले तीन लाख और उसके बाद लगभग 7 लाख रोहिंग्या जान बचाकर किसी तरह से बांग्लादेश पहुंचे हैं। इस तरह से लगभग दस लाख रोहिंग्या, बांग्लादेश में काक्स बाज़ार के नाम से मशहूर इलाक़े में बेहद दयनीय दशा में शरणार्थी कैंपों में ज़िदगी गुज़ार रहे हैं। म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमान किस दयनीय स्थिति में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उनके दर्द का एहसास करते हुए भारत के प्रसिद्ध शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने अपनी एक नज़्म के ज़रिए पेश किया है। बांग्लादेश की सरकार, रोहिंग्या मुद्दे पर म्यांमार सरकार के साथ मतभेदों की वजह से इन लोगों को इस इलाक़े से बाहर निकलने नहीं देती। अस्ल में म्यांमार, रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश कहता है जो कि एक गलत दावा है लेकिन इस दावे की वजह से बांग्लादेश की सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों को अपने देश के समाज में घुलने मिलने की अनुमति नहीं देती क्योंकि इस तरह से म्यांमार का दावा सही साबित हो जाएगा। बांग्लादेश के काक्स बाज़ार में रोहिंग्या मुसलमानों की दशा बेहद दयनीय है। इस कैंप में अधिकांश बच्चे और महिलाएं हैं। यहां की महिलाओं के पति और बच्चों के पिता या माता या दोनों ही चरमपंथी बौद्धों और म्यांमार की सेना के हमलों में मारे गये हैं। इस कैंप में इतनी भीड़ है कि शरणार्थी बहुत अधिक कठिनाइ में जीवन व्यतीत करते हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बहुत सी कम और अर्याप्त सहायता मिलती है और यह लोग जनता की मदद पर ही जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
काक्स बाज़ार के रोहिंग्या शरणार्थियों की हालत चाहे जितनी बुरी हो लेकिन उन लोगों जैसी नहीं है जिन्होंने जान बचाने के लिए समुद्र का रास्ता अपना कर दक्षिणपूर्वी देशों में जाने का सपना देखा था। इन में से बहुत से बच्चे असुरक्षित नौकाओं में अपने मां बाप के सामने ही भूख प्यास से दम तोड़ देते हैं और उनके शव को समुद्र में फेंक दिया जाता है। म्यांमार के राख़ीन प्रांत से जान बचाकर समुद्न की शरण में जाने वाले रोहिंग्या अगर किसी तरह बच कर किसी देश के तट पर पहुंच भी गये तो फिर वहां उन्हें मलेशिया, इंडोनेशिया या थाईलैंड के सुरक्षा बलों का सामना करना पड़ता है जो उन्हें तट पर पैर ही नहीं रखने देते या बड़ी मुश्किल से उन्हें इसकी इजाज़त मिलती है। जिसके बाद वह मानव तस्करों के हत्थे चढ़ जाते हैं जो उन्हें काम और नौकरी का लालच देकर जंगलों में ले जाते हैं और वहां दासों की तरह उन्हें बेच देते हैं। एक पीड़ित रोहिंग्या मुस्लिम महिला का कहना है कि म्यांमार में हमारे घरों और मस्जिदों को जला दिया गया, हम जहां जाते हैं हमे मार दिया जाता है, हम कहां जाएं, जहां हमे सुरक्षा मिल सके, 10 दिनों की बेहद कठिनाईयों के बाद हम सुरक्षित स्थान पर पहुंचे हैं।
कुल मिलाकर बांग्लादेश में कैंपों में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों की दशा बेहद दयनीय है लेकिन समुद्र में भूख प्यास व दसियों जान लेवा समस्याएं सहन करके तट पर जीवित पहुंचने वाले रोहिंग्या की दशा उनसे अधिक दयनीय है कि फिर वह राखीन प्रान्त से भाग कर म्यांमार के ही सुरक्षित इलाकों में शरण लेने वालों से बहुत बेहतर है। यह लोग अपने ही देश में अपने हिसाब से सुरक्षित इलाक़ों में तलाश में जिस तरह से भटकते हैं वह बेहद डराने वाला और चिंताजनक है। इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने अपने एक बयान में कहा है कि, वह लोग जो कथित तौर पर दुनिया में मानवाधिकारों के नाम पर हंगामा करते रहते हैं और यहां तक कि एक जानवर की मौत पर आंसू बहाते हैं वही लोग म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों पर चुप्पी साधे रहते हैं. . . (इफेक्ट) यह लोग अगर किसी तरह से म्यांमार की सेना और बौद्ध चरमपंथियों के हाथों जीवित बच भी जाते हैं तो उन्हें पकड़ कर एसे कैंपों में बंद कर दिया जाता है जहां उनके बारे में किसी को कोई सूचना नहीं होती। किसी भी पत्रकार को इस बात की अनुमति नहीं होती कि वह वहां जाकर हालात देखे। बताया जाता है कि म्यांमार में सेना के कड़े पहरे में इस प्रकार के कैंपों में लगभग डेढ़ लाख रोहिंग्या मुसलमानों को बेहद बुरी दशा में रखा गया है। इस प्रकार के अधिकांश कैंप राखीन प्रांत में ही बनाए गये हैं।
म्यांमार में फंसने वाले अधिकांश रोहिंग्या वह हैं जो बीमारी या बुढ़ापे के कारण भागने की ताक़त नहीं रखते थे। अलबत्ता इनमें कुछ लोग एसे भी हैं जिन्होंने अपनी मातृभूमि को छोड़ कर भागने के बजाए अपनी मिट्टी में जान देने को तरजीह दी और इस तरह से वह अपना गांव छोड़ कर नहीं भागे जिसके बाद वह या तो सैनिकों और बौद्ध चरमपंथियों के हाथों मारे गये या फिर उन्हें कैंपों में भेज दिया गया। म्यांमार में इस प्रकार के भयानक कैंपों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए विश्व संगठनों के सभी प्रयास अब तक विफल रहे हैं।
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कार्यक्रम रोहिंग्या त्रास्दी-सातः म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के जातीय सफाए के पीछे के कुछ ऐसे कारण जिन्हें जानकर आप रह जाएंगे हैरान! रोहिंग्या के मुसलमानों को कई बार विस्थापन और बौद्ध कट्टरपंथियों के हमलों की वजह से अपना घर बार छोड़ना पड़ा लेकिन सन दो हज़ार ग्यारह और सन दो हज़ार सत्रह में यह त्रासदी इतनी भयानक थी कि उसकी कुछ जानकारियां जो मिल पायी हैं वही इन्सान का दिल दहला देने के लिए काफी हैं। इस दौरान रोहिंग्या मुसलमानों के विस्थापन के परिणाम में तीन प्रकार के शरणार्थी नज़र आए। एक वह लोग जो राखीन में हंगामों और बौद्ध चरमपंथियों तथा सेना के हमलों के बाद अपना इलाका छोड़ कर सुरक्षित इलाक़ों में चले गये, दूसरे वह लोग जिन्होंने नदी के रास्ते बांग्लादेश और भारत में शरण लेने की कोशिश की और तीसरे और सब से अधि खतरनाक स्थिति में वह लोग फंसे जिन्होंने राखीन में मौत के तांडव से भागने के लिए बेहद असुरक्षित नौकाओं का सहारा लेकर समुद्र में विकल्प चुना। दर-दर की ठोकरें खा रहे एक रोहिंग्या युवक का कहना है कि म्यांमार की सेना और कट्टरपंथी बौद्ध किसी से कुछ नहीं कहते लेकिन जैसे ही किसी रोहिंग्या मुसलमान को देखते हैं वह उसकी बड़ी बेरहमी से हत्या कर देते हैं, वहीं एक अन्य रोहिंग्या व्यक्ति का कहना है कि, हम बारह दिनों तक पहाड़ों पर जा कर छिप गए थे, फिर हमने पचहत्तर डॉलर दिए एक नांव वाले को ताकि वह हमे बांग्लादेश तक पहुंचा दे। राखीन से भाग कर भारत की सीमा पर पहुंचने वालों को भारतीय सुरक्षा बलों ने रोक लिया। अस्ल में म्यांमार से भारत के अच्छे संबंध हैं इस लिए उसने म्यांमार की वजह से इस मामले में हस्तक्षेप न करने का फैसला किया। कुछ लोग भाग कर सुरक्षित इलाक़ों में पहुंच गये लेकिन भारत सरकार उनकी पहचान करके उन्हें बांग्लादेश भेजती है। इस तरह से राखीन से रोहिंग्या मुसलमानों क पास, म्यांमार के सैनिकों के हाथों मारे जाने या बाग्लादेश भाग जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। जिन लोगों ने समुद्र का रास्ता अपना कर दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों जैसे, मलेशिया, इंडोनेशिया या थाईलैंड में शरण लेने की कोशिश की उनका अजांम तो बहुत ही भयानक हुआ। बांग्लादेश में शरण लेने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों में अधिकांश महिलाएं, बच्चे और वृद्ध हैं जो अपने गांवों में होने वाली तबाही के चश्मदीद गवाह वह बताते हैं कि किस तरह से उनका पूरा गांव जला दिया गया और किस तरह से महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। इन लोगों से वार्ता करने वाले पत्रकारों ने बेहद खौफनाक रिपोर्टें प्रकाशित की हैं। बांग्लादेश की सरकार और इसी तरह शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के आयोग ने जो आंकड़े प्रकाशित किये हैं उनके अनुसार सन दो हज़ार सत्रह से पहले तीन लाख और उसके बाद लगभग सात लाख रोहिंग्या जान बचाकर किसी तरह से बांग्लादेश पहुंचे हैं। इस तरह से लगभग दस लाख रोहिंग्या, बांग्लादेश में काक्स बाज़ार के नाम से मशहूर इलाक़े में बेहद दयनीय दशा में शरणार्थी कैंपों में ज़िदगी गुज़ार रहे हैं। म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमान किस दयनीय स्थिति में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उनके दर्द का एहसास करते हुए भारत के प्रसिद्ध शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने अपनी एक नज़्म के ज़रिए पेश किया है। बांग्लादेश की सरकार, रोहिंग्या मुद्दे पर म्यांमार सरकार के साथ मतभेदों की वजह से इन लोगों को इस इलाक़े से बाहर निकलने नहीं देती। अस्ल में म्यांमार, रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश कहता है जो कि एक गलत दावा है लेकिन इस दावे की वजह से बांग्लादेश की सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों को अपने देश के समाज में घुलने मिलने की अनुमति नहीं देती क्योंकि इस तरह से म्यांमार का दावा सही साबित हो जाएगा। बांग्लादेश के काक्स बाज़ार में रोहिंग्या मुसलमानों की दशा बेहद दयनीय है। इस कैंप में अधिकांश बच्चे और महिलाएं हैं। यहां की महिलाओं के पति और बच्चों के पिता या माता या दोनों ही चरमपंथी बौद्धों और म्यांमार की सेना के हमलों में मारे गये हैं। इस कैंप में इतनी भीड़ है कि शरणार्थी बहुत अधिक कठिनाइ में जीवन व्यतीत करते हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बहुत सी कम और अर्याप्त सहायता मिलती है और यह लोग जनता की मदद पर ही जीवन व्यतीत कर रहे हैं। काक्स बाज़ार के रोहिंग्या शरणार्थियों की हालत चाहे जितनी बुरी हो लेकिन उन लोगों जैसी नहीं है जिन्होंने जान बचाने के लिए समुद्र का रास्ता अपना कर दक्षिणपूर्वी देशों में जाने का सपना देखा था। इन में से बहुत से बच्चे असुरक्षित नौकाओं में अपने मां बाप के सामने ही भूख प्यास से दम तोड़ देते हैं और उनके शव को समुद्र में फेंक दिया जाता है। म्यांमार के राख़ीन प्रांत से जान बचाकर समुद्न की शरण में जाने वाले रोहिंग्या अगर किसी तरह बच कर किसी देश के तट पर पहुंच भी गये तो फिर वहां उन्हें मलेशिया, इंडोनेशिया या थाईलैंड के सुरक्षा बलों का सामना करना पड़ता है जो उन्हें तट पर पैर ही नहीं रखने देते या बड़ी मुश्किल से उन्हें इसकी इजाज़त मिलती है। जिसके बाद वह मानव तस्करों के हत्थे चढ़ जाते हैं जो उन्हें काम और नौकरी का लालच देकर जंगलों में ले जाते हैं और वहां दासों की तरह उन्हें बेच देते हैं। एक पीड़ित रोहिंग्या मुस्लिम महिला का कहना है कि म्यांमार में हमारे घरों और मस्जिदों को जला दिया गया, हम जहां जाते हैं हमे मार दिया जाता है, हम कहां जाएं, जहां हमे सुरक्षा मिल सके, दस दिनों की बेहद कठिनाईयों के बाद हम सुरक्षित स्थान पर पहुंचे हैं। कुल मिलाकर बांग्लादेश में कैंपों में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों की दशा बेहद दयनीय है लेकिन समुद्र में भूख प्यास व दसियों जान लेवा समस्याएं सहन करके तट पर जीवित पहुंचने वाले रोहिंग्या की दशा उनसे अधिक दयनीय है कि फिर वह राखीन प्रान्त से भाग कर म्यांमार के ही सुरक्षित इलाकों में शरण लेने वालों से बहुत बेहतर है। यह लोग अपने ही देश में अपने हिसाब से सुरक्षित इलाक़ों में तलाश में जिस तरह से भटकते हैं वह बेहद डराने वाला और चिंताजनक है। इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने अपने एक बयान में कहा है कि, वह लोग जो कथित तौर पर दुनिया में मानवाधिकारों के नाम पर हंगामा करते रहते हैं और यहां तक कि एक जानवर की मौत पर आंसू बहाते हैं वही लोग म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों पर चुप्पी साधे रहते हैं. . . यह लोग अगर किसी तरह से म्यांमार की सेना और बौद्ध चरमपंथियों के हाथों जीवित बच भी जाते हैं तो उन्हें पकड़ कर एसे कैंपों में बंद कर दिया जाता है जहां उनके बारे में किसी को कोई सूचना नहीं होती। किसी भी पत्रकार को इस बात की अनुमति नहीं होती कि वह वहां जाकर हालात देखे। बताया जाता है कि म्यांमार में सेना के कड़े पहरे में इस प्रकार के कैंपों में लगभग डेढ़ लाख रोहिंग्या मुसलमानों को बेहद बुरी दशा में रखा गया है। इस प्रकार के अधिकांश कैंप राखीन प्रांत में ही बनाए गये हैं। म्यांमार में फंसने वाले अधिकांश रोहिंग्या वह हैं जो बीमारी या बुढ़ापे के कारण भागने की ताक़त नहीं रखते थे। अलबत्ता इनमें कुछ लोग एसे भी हैं जिन्होंने अपनी मातृभूमि को छोड़ कर भागने के बजाए अपनी मिट्टी में जान देने को तरजीह दी और इस तरह से वह अपना गांव छोड़ कर नहीं भागे जिसके बाद वह या तो सैनिकों और बौद्ध चरमपंथियों के हाथों मारे गये या फिर उन्हें कैंपों में भेज दिया गया। म्यांमार में इस प्रकार के भयानक कैंपों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए विश्व संगठनों के सभी प्रयास अब तक विफल रहे हैं। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, सांसद और सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा के फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई होगी। अभिषेक बनर्जी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बसु और जस्टिस संजय करोल की बेंच में जल्द सुनवाई की अर्जी दाखिल करते हुए गिरफ्तारी की आशंका जताई। इसके साथ ही अभिषेक ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा मांगी है।
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, सांसद और सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा के फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई होगी। अभिषेक बनर्जी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बसु और जस्टिस संजय करोल की बेंच में जल्द सुनवाई की अर्जी दाखिल करते हुए गिरफ्तारी की आशंका जताई। इसके साथ ही अभिषेक ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा मांगी है।
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नई दिल्लीः केरल के दक्षिणी और मध्य (Southern and Central of Kerala) भागों में लगातार झमाझम बारिश (Heavy rain) जारी है। वहां भारी बारिश की वजह से जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है।
बता दें कि केरल के कोट्टयम में भी तेज बारिश हुई है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कोट्टयम में आज आसमान में बादल छाए रहने के साथ साथ बारिश होने की संभावना है।
इसके अलाव केरल के तिरुवनंतपुरम में भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव देखने को मिला है। जिसकी वजह से वहां के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मालूम हो कि केरल के कई भागों में मूसलाधार वर्षा जारी रहने से तिरुवनंतपुरम और कोल्लम जिलों में भारी नुकसान हुआ है। जिससे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा है कि भूस्खलन और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत शिविर खोले जाएंगे।
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नई दिल्लीः केरल के दक्षिणी और मध्य भागों में लगातार झमाझम बारिश जारी है। वहां भारी बारिश की वजह से जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है। बता दें कि केरल के कोट्टयम में भी तेज बारिश हुई है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कोट्टयम में आज आसमान में बादल छाए रहने के साथ साथ बारिश होने की संभावना है। इसके अलाव केरल के तिरुवनंतपुरम में भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव देखने को मिला है। जिसकी वजह से वहां के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मालूम हो कि केरल के कई भागों में मूसलाधार वर्षा जारी रहने से तिरुवनंतपुरम और कोल्लम जिलों में भारी नुकसान हुआ है। जिससे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा है कि भूस्खलन और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत शिविर खोले जाएंगे।
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काहिराः
युवा निशानेबाज रुद्राक्ष पाटिल ने शुक्रवार को यहां आईएसएसएफ (अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ) विश्व चैम्पियनशिप में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर पेरिस ओलंपिक का कोटा हासिल किया।
वह विश्व चैम्पियनशिप के 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में महान अभिनव बिंद्रा के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले केवल दूसरे भारतीय निशानेबाज बन गये है। वह 2024 ओलंपिक कोटा हासिल करने वाले दूसरे भारतीय निशानेबाज है।
अठारह साल के रुद्राक्ष ने स्वर्ण पदक मैच में पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए इटली के दानिलो डेनिस सोल्लाजो को 17-13 से हराया।
इस साल विश्व चैंपियनशिप में ओलंपिक के लिए चार कोटा स्थान उपलब्ध हैं।
भारत ने हाल ही में क्रोएशिया में शॉटगन विश्व चैम्पियनशिप में पुरुष ट्रैप स्पर्धा में भवनीश मेंदीरत्ता के जरिये अपना पहला कोटा अर्जित किया था।
पहली बार विश्व चैम्पियनशिप में भाग ले रहे रुद्राक्ष शीर्ष दो खिलाड़ियों के फैसले के लिए नये प्रारूप में खेले गये स्वर्ण पदक मैच में एक समय 4-10 से पीछे चल रहे थे। इटली के निशानेबाज ने मैच के ज्यादातर समय अपनी बढ़त बनाये रखी लेकिन भारतीय निशानेबाज ने शानदार वापसी की।
रुद्राक्ष ने क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल किया और रैंकिंग राउंड में दूसरे स्थान पर रहते हुए स्वर्ण पदक मैच में प्रवेश करने के साथ ही ओलंपिक कोटा पक्का कर लिया।
इससे पहले बीजिंग ओलंपिक (2008) के स्वर्ण पदक विजेता बिंद्रा ने 2006 में जगरेब में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्घा में स्वर्ण पदक जीता था। (भाषा)
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काहिराः युवा निशानेबाज रुद्राक्ष पाटिल ने शुक्रवार को यहां आईएसएसएफ विश्व चैम्पियनशिप में पुरुषों की दस मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर पेरिस ओलंपिक का कोटा हासिल किया। वह विश्व चैम्पियनशिप के दस मीटर एयर राइफल स्पर्धा में महान अभिनव बिंद्रा के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले केवल दूसरे भारतीय निशानेबाज बन गये है। वह दो हज़ार चौबीस ओलंपिक कोटा हासिल करने वाले दूसरे भारतीय निशानेबाज है। अठारह साल के रुद्राक्ष ने स्वर्ण पदक मैच में पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए इटली के दानिलो डेनिस सोल्लाजो को सत्रह-तेरह से हराया। इस साल विश्व चैंपियनशिप में ओलंपिक के लिए चार कोटा स्थान उपलब्ध हैं। भारत ने हाल ही में क्रोएशिया में शॉटगन विश्व चैम्पियनशिप में पुरुष ट्रैप स्पर्धा में भवनीश मेंदीरत्ता के जरिये अपना पहला कोटा अर्जित किया था। पहली बार विश्व चैम्पियनशिप में भाग ले रहे रुद्राक्ष शीर्ष दो खिलाड़ियों के फैसले के लिए नये प्रारूप में खेले गये स्वर्ण पदक मैच में एक समय चार-दस से पीछे चल रहे थे। इटली के निशानेबाज ने मैच के ज्यादातर समय अपनी बढ़त बनाये रखी लेकिन भारतीय निशानेबाज ने शानदार वापसी की। रुद्राक्ष ने क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल किया और रैंकिंग राउंड में दूसरे स्थान पर रहते हुए स्वर्ण पदक मैच में प्रवेश करने के साथ ही ओलंपिक कोटा पक्का कर लिया। इससे पहले बीजिंग ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता बिंद्रा ने दो हज़ार छः में जगरेब में दस मीटर एयर राइफल स्पर्घा में स्वर्ण पदक जीता था।
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Curator Daljit Singh ने दिन रात्रि टेस्ट मैच के दौरान विकेट पर अधिक घास रखने की सलाह दी जानिए क्यों?
नई दिल्ली। बीसीसीआई के पूर्व मुख्य क्यूरेटर दलजीत सिंह ने अगले महीने भारत में होने वाले पहले दिन रात्रि टेस्ट मैच के दौरान विकेट पर अधिक घास रखने और ओस से बचने के लिए आउटफील्ड पर कम घास रखने की सलाह दी है।
बीसीसीआई और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने ईडन गार्डन्स में 22 नवंबर से शुरू होने वाले टेस्ट मैच को गुलाबी गेंद से खेलने पर सहमति जताई है। इस दिन रात्रि टेस्ट मैच की तैयारियों में हालांकि बहुत कम समय बचा है। बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) को गुलाबी गेंद से मैचों के आयोजन का अनुभव है।
इस मैच के दोपहर बाद 01:30 मिनट से शुरू होने की संभावना है और खेल रात 08:30 मिनट तक चल सकता है। दलजीत का मानना है कि गुलाबी गेंद की चमक लंबे समय तक बनाए रखने के लिए पिच पर अधिक घास रखनी होगी। उन्होंने और उनकी टीम ने 2016 में दलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट के दौरान ऐसा किया था जब मैच ग्रेटर नोएडा में दूधिया रोशनी में खेले गए थे।
दलजीत ने कहा, '(दलीप ट्रॉफी मैचों के दौरान) ओस एक मसला था, गेंद वास्तव में गंदी हो जाती थी। पिच पर 7 मिमी घास थी जबकि अमूमन घास 2. 5 से 4 मिमी लंबी होती है। घास लंबी होने का मतलब है कि गेंद बहुत अधिक सीम करेगी। ' एक अन्य क्यूरेटर ने गोपनीयता की शर्त पर मैच से दो तीन दिन पहले से आउटफील्ड की घास पर पानी न डालने की सलाह दी।
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Curator Daljit Singh ने दिन रात्रि टेस्ट मैच के दौरान विकेट पर अधिक घास रखने की सलाह दी जानिए क्यों? नई दिल्ली। बीसीसीआई के पूर्व मुख्य क्यूरेटर दलजीत सिंह ने अगले महीने भारत में होने वाले पहले दिन रात्रि टेस्ट मैच के दौरान विकेट पर अधिक घास रखने और ओस से बचने के लिए आउटफील्ड पर कम घास रखने की सलाह दी है। बीसीसीआई और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने ईडन गार्डन्स में बाईस नवंबर से शुरू होने वाले टेस्ट मैच को गुलाबी गेंद से खेलने पर सहमति जताई है। इस दिन रात्रि टेस्ट मैच की तैयारियों में हालांकि बहुत कम समय बचा है। बंगाल क्रिकेट संघ को गुलाबी गेंद से मैचों के आयोजन का अनुभव है। इस मैच के दोपहर बाद एक:तीस मिनट से शुरू होने की संभावना है और खेल रात आठ:तीस मिनट तक चल सकता है। दलजीत का मानना है कि गुलाबी गेंद की चमक लंबे समय तक बनाए रखने के लिए पिच पर अधिक घास रखनी होगी। उन्होंने और उनकी टीम ने दो हज़ार सोलह में दलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट के दौरान ऐसा किया था जब मैच ग्रेटर नोएडा में दूधिया रोशनी में खेले गए थे। दलजीत ने कहा, ' ओस एक मसला था, गेंद वास्तव में गंदी हो जाती थी। पिच पर सात मिमी घास थी जबकि अमूमन घास दो. पाँच से चार मिमी लंबी होती है। घास लंबी होने का मतलब है कि गेंद बहुत अधिक सीम करेगी। ' एक अन्य क्यूरेटर ने गोपनीयता की शर्त पर मैच से दो तीन दिन पहले से आउटफील्ड की घास पर पानी न डालने की सलाह दी।
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मथुरा। पुलिस महानिदेशक Director General of Police ओपी सिंह ने मथुरा में भ्रमण के दौरान पुलिस लाइन मथुरा के सभागार में समीक्षा बैठक की गयी। इस अवसर पर अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, पुलिस महानिरीक्षक, आगरा परिक्षेत्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा, जनपद मथुरा के सभी राजपत्रित पुलिस अधिकारी एवं प्रभारी निरीक्षक/थाना प्रभारी उपस्थित रहे।
पुलिस महानिदेशक Director General of Police ने इस अवसर पर पुलिस लाइन मथुरा में स्थित पुलिस मार्डन स्कूल में अत्याधुनिक कम्प्यूटर लैब का उद्घाटन किया गया। पुलिस लाइन मथुरा में 200 जवाना के लिये नवनिर्मित बहुमजिला पुलिस बैरक का उद्घाटन किया गया। यातायात माह के दौरान जागरूकता कार्यक्रम के अन्तर्गत पुलिस लाइन्स में यातायात पुलिस की कार्यशाला का निरीक्षण किया गया। पुलिस कर्मियों के स्वास्थ एवं कल्याण हेतु आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित पुलिस लाइन्स में बनायी गयी जिम का निरीक्षण किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा बबलू कुमार को प्रशंसा चिन्ह गोल्ड व पुलिस अधीक्षक, नगर, श्रवण कुमार सिंह को प्रशंसा चिन्ह सिल्वर प्रदान किया गया। माह अक्टूबर में काप आफ द मन्थ चुने गये 22 पुलिस कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। पुलिस लाइन्स में नियुक्त चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को कम्बल वितरित किया गया।
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मथुरा। पुलिस महानिदेशक Director General of Police ओपी सिंह ने मथुरा में भ्रमण के दौरान पुलिस लाइन मथुरा के सभागार में समीक्षा बैठक की गयी। इस अवसर पर अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, पुलिस महानिरीक्षक, आगरा परिक्षेत्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा, जनपद मथुरा के सभी राजपत्रित पुलिस अधिकारी एवं प्रभारी निरीक्षक/थाना प्रभारी उपस्थित रहे। पुलिस महानिदेशक Director General of Police ने इस अवसर पर पुलिस लाइन मथुरा में स्थित पुलिस मार्डन स्कूल में अत्याधुनिक कम्प्यूटर लैब का उद्घाटन किया गया। पुलिस लाइन मथुरा में दो सौ जवाना के लिये नवनिर्मित बहुमजिला पुलिस बैरक का उद्घाटन किया गया। यातायात माह के दौरान जागरूकता कार्यक्रम के अन्तर्गत पुलिस लाइन्स में यातायात पुलिस की कार्यशाला का निरीक्षण किया गया। पुलिस कर्मियों के स्वास्थ एवं कल्याण हेतु आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित पुलिस लाइन्स में बनायी गयी जिम का निरीक्षण किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा बबलू कुमार को प्रशंसा चिन्ह गोल्ड व पुलिस अधीक्षक, नगर, श्रवण कुमार सिंह को प्रशंसा चिन्ह सिल्वर प्रदान किया गया। माह अक्टूबर में काप आफ द मन्थ चुने गये बाईस पुलिस कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। पुलिस लाइन्स में नियुक्त चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को कम्बल वितरित किया गया।
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राजस्थान (Rajasthan) के चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) में रविवार को दर्दनाक हादसा हुआ. मंगलवाड़ा थाना क्षेत्र में तालाब में नहाने के दौरान पांच बच्चे डूब गए. डूबने (Five Children Drown) से पांचों बच्चों की मौत हो गई है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है. सीएम अशोक गहलोत ने अपने ट्वीट में लिखा,'चित्तौड़गढ़ के मंगलवाड़ क्षेत्र में स्थित तालाब में डूबने से 5 बच्चों की मृत्यु बेहद हृदयविदारक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है. मेरी गहरी संवेदनाएं बच्चों के माता-पिता एवं परिजनों के साथ हैं, ईश्वर उन्हें इस अत्यंत कठिन समय में सम्बल प्रदान करें. '
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राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में रविवार को दर्दनाक हादसा हुआ. मंगलवाड़ा थाना क्षेत्र में तालाब में नहाने के दौरान पांच बच्चे डूब गए. डूबने से पांचों बच्चों की मौत हो गई है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है. सीएम अशोक गहलोत ने अपने ट्वीट में लिखा,'चित्तौड़गढ़ के मंगलवाड़ क्षेत्र में स्थित तालाब में डूबने से पाँच बच्चों की मृत्यु बेहद हृदयविदारक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है. मेरी गहरी संवेदनाएं बच्चों के माता-पिता एवं परिजनों के साथ हैं, ईश्वर उन्हें इस अत्यंत कठिन समय में सम्बल प्रदान करें. '
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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THE GAZETTE OF INDIA. EXTRAORDINARY
[PART I- SEC. 1]
जांच के समय याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों और मै. बी ए एस एफ द्वारा प्रस्तुत सूचना के आधार पर कंपनी से कुछ स्पष्टीकरण मांगे गए थे । कंपनी से अनुरोध किया गया था कि वे जांच के समय मौखिक स्पष्टीकरणों को लिखित में पुनः प्रस्तुत करें जिसे वे प्रस्तुत करने में विफल रहे थे ।
(iii) चूंकि कंपनी अपने मौरिवक स्पष्टीकरणों को पुनः प्रस्तुत करने में विफल रही है इसलिए कंपनी द्वारा जांच के समय प्रस्तुत मौखिक स्पष्टीकरणों की खासकर याचिकाकर्ता द्वारा दायर किए गए प्रतिदावों को ध्यान में रखते हुए रिकार्ड में नहीं रखा गया है । यह मै. बी ए एस एफ को दौरे के समय स्पष्ट कर दिया गया था और लिखित में भी सूचित कर दिया गया था । तथापि मै. बी ए एस एफ प्राधिकारी द्वारा अपेक्षित स्पष्टीकरण / सूचना लिखित में प्रस्तुत करने में विफल रहा है और इसलिए मै. बी ए एस एफ को यहां तक अप सहयोगी माना गया है । इसलिए प्राधिकारी ने नियम 6 (8) अर्थात सर्वोत्तम उपलब्ध सूचना के आधार पर कार्रवाई की है ।
निर्यात कीमत
मै. बी ए एस एफ ने भारत को अमरीकी डालर के कुल मूल्य के हाइड्रोक्सिल एमीन सल्फेट का निर्यात किया है । तदनुसार, जांच अवधि के दौरान हाइड्रोक्सिल एमीन सल्फेट की औसत निर्यात कीमत अमरीकी डालर प्रति किग्रा निकलती है । निर्यातक ने कमीशन *** स्वदेशी भाड़े , विदेशी भाडे और पैकिंग के लिए समायोजनों का दावा
किया है। भारत के लिए कारखाना द्वार पर निर्यात कीमत * / किग्रा का दावा किया गया है । निर्यात कीमत के लिए प्राधिकारी ने निर्यातक द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर भरोसा किया है ।
इस प्रकार प्राधिकारी ने मै. बी ए एस एफ, जर्मनी यूरोपीय संघ के मामले में पाटन मार्जिन अमरीकी डालर प्रति किग्रा या 98.74% निर्धारित किया गया है ।
यूरोपीय संघ के अन्य निर्यातक
(क) प्राधिकारी ने उपर उल्लिखित धारा के अनुसार यूरोपीय संघ के निर्यातकों को जांच से संबद्ध सूचना प्रस्तुत करने और टिप्पणयां, अगर कोई हों, प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया । प्राधिकारी ने भारत में युरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल को पत्र भी लिखा । तथापि, यूरोपीय संघ से किसी अन्य निर्यातकों ने प्राधिकारी के सूचना भेजने के अनुरोध का उत्तर नहीं दिया है । सामान्य मूल्य के निर्धारण के संबंध में याचिकाकर्ता द्वारा किए गए दावे का भी किसी अन्य हितबद्ध पार्टियों) ने विरोध नहीं किया है । इसलिए प्राधिकारी ने नियम 6 (8), अर्थात सर्वोत्तम उपलब्ध सूचना के आधार पर कार्रवाई की है ।
(ख) इस प्रकार प्राधिकारी द्वारा ई यू के हाइड्रोक्सिल एमीन सल्फेट के असहयोगी / अन्य निर्यातकों के मामले में निर्धारित किया गया पाटन मार्जिन मै. सी ए एस एफ के समान अर्थात अमरीकी डालर प्रति किग्रा या 98.74% है ।
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THE GAZETTE OF INDIA. EXTRAORDINARY [PART I- SEC. एक] जांच के समय याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों और मै. बी ए एस एफ द्वारा प्रस्तुत सूचना के आधार पर कंपनी से कुछ स्पष्टीकरण मांगे गए थे । कंपनी से अनुरोध किया गया था कि वे जांच के समय मौखिक स्पष्टीकरणों को लिखित में पुनः प्रस्तुत करें जिसे वे प्रस्तुत करने में विफल रहे थे । चूंकि कंपनी अपने मौरिवक स्पष्टीकरणों को पुनः प्रस्तुत करने में विफल रही है इसलिए कंपनी द्वारा जांच के समय प्रस्तुत मौखिक स्पष्टीकरणों की खासकर याचिकाकर्ता द्वारा दायर किए गए प्रतिदावों को ध्यान में रखते हुए रिकार्ड में नहीं रखा गया है । यह मै. बी ए एस एफ को दौरे के समय स्पष्ट कर दिया गया था और लिखित में भी सूचित कर दिया गया था । तथापि मै. बी ए एस एफ प्राधिकारी द्वारा अपेक्षित स्पष्टीकरण / सूचना लिखित में प्रस्तुत करने में विफल रहा है और इसलिए मै. बी ए एस एफ को यहां तक अप सहयोगी माना गया है । इसलिए प्राधिकारी ने नियम छः अर्थात सर्वोत्तम उपलब्ध सूचना के आधार पर कार्रवाई की है । निर्यात कीमत मै. बी ए एस एफ ने भारत को अमरीकी डालर के कुल मूल्य के हाइड्रोक्सिल एमीन सल्फेट का निर्यात किया है । तदनुसार, जांच अवधि के दौरान हाइड्रोक्सिल एमीन सल्फेट की औसत निर्यात कीमत अमरीकी डालर प्रति किग्रा निकलती है । निर्यातक ने कमीशन *** स्वदेशी भाड़े , विदेशी भाडे और पैकिंग के लिए समायोजनों का दावा किया है। भारत के लिए कारखाना द्वार पर निर्यात कीमत * / किग्रा का दावा किया गया है । निर्यात कीमत के लिए प्राधिकारी ने निर्यातक द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर भरोसा किया है । इस प्रकार प्राधिकारी ने मै. बी ए एस एफ, जर्मनी यूरोपीय संघ के मामले में पाटन मार्जिन अमरीकी डालर प्रति किग्रा या अट्ठानवे.चौहत्तर% निर्धारित किया गया है । यूरोपीय संघ के अन्य निर्यातक प्राधिकारी ने उपर उल्लिखित धारा के अनुसार यूरोपीय संघ के निर्यातकों को जांच से संबद्ध सूचना प्रस्तुत करने और टिप्पणयां, अगर कोई हों, प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया । प्राधिकारी ने भारत में युरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल को पत्र भी लिखा । तथापि, यूरोपीय संघ से किसी अन्य निर्यातकों ने प्राधिकारी के सूचना भेजने के अनुरोध का उत्तर नहीं दिया है । सामान्य मूल्य के निर्धारण के संबंध में याचिकाकर्ता द्वारा किए गए दावे का भी किसी अन्य हितबद्ध पार्टियों) ने विरोध नहीं किया है । इसलिए प्राधिकारी ने नियम छः , अर्थात सर्वोत्तम उपलब्ध सूचना के आधार पर कार्रवाई की है । इस प्रकार प्राधिकारी द्वारा ई यू के हाइड्रोक्सिल एमीन सल्फेट के असहयोगी / अन्य निर्यातकों के मामले में निर्धारित किया गया पाटन मार्जिन मै. सी ए एस एफ के समान अर्थात अमरीकी डालर प्रति किग्रा या अट्ठानवे.चौहत्तर% है ।
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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक ज़रूरी हस्तक्षेप किया है। सत्ता के इशारों पर नाचने वाले न्यूज़ चैनलों को आईना दिखाने का काम किया है।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने मीडिया की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। बिना सबूत किसानों को खालिस्तानी और एंटी नेशनल प्रचारित करने की आलोचना करते हुए इसे दिखाना तत्काल बन्द करने को कहा है।
एडिटर्स गिल्ड का कहना है कि किसान अपने संवैधानिक अधिकार के तहत कर प्रदर्शन कर रहे हैं। एडिटर्स गिल्ड ने चैनलों को निष्पक्ष पत्रकारिता करने की नसीहत दी है।
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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक ज़रूरी हस्तक्षेप किया है। सत्ता के इशारों पर नाचने वाले न्यूज़ चैनलों को आईना दिखाने का काम किया है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने मीडिया की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। बिना सबूत किसानों को खालिस्तानी और एंटी नेशनल प्रचारित करने की आलोचना करते हुए इसे दिखाना तत्काल बन्द करने को कहा है। एडिटर्स गिल्ड का कहना है कि किसान अपने संवैधानिक अधिकार के तहत कर प्रदर्शन कर रहे हैं। एडिटर्स गिल्ड ने चैनलों को निष्पक्ष पत्रकारिता करने की नसीहत दी है।
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शारीरिक श्रम की क्रिया करते समय जो लोकगीत गाये जाते हैं उन्हें श्रमगीत या क्रिया गीत कहते हैं । इन गीतों से श्रम परिहार होता रहता है। इनमें जँतसार, कोल्हौरा, निरवही आदि के गीत आते हैं ।
६६. जँतसार
जाँत या हाथ की चक्की चलाते समय महिलाएँ जो लोकगीत गाती हैं, उन्हें जँतसार, जँतसारी या जाँत के गीत कहते हैं । सन्दर्भ - पुत्रवधू का शिर दर्द और सास की करतूत । कँकरा औ पथरा दुनउ जोड़ी जँतवा हो ना । दिनवा भै पीसेउँ सासू रतिया हो ना ॥ सासू, तबहूँ न चुकै झीन गोहुँआ होना । बहू उठि कै करौ दतुइनिया हो ना ।। ॥ रोज तो मोरी सासू मुँहवा न बोलिउ हो ना । सासू, आजु काहे पूछिउ दतुइनिया होना ॥ रोज तौ मोरी सासू काठे कै कठोलिया हो ना । सासू, आज काहे फूल कै थरिया हो ना ॥ खात- पिअत सासू भल निक लागइ हो ना । सासू, अँचवत मुँड़वा धमाकै हो ना ॥ जउ मोरी बहुवरि मुँढ़वा धमाकै हो ना । बहू, साजी बाटी ससुरू सेजरिया हो ना ॥ - राहपुर लपटा ( सुल्तानपुर)
बहू कहती है कि कंकड़ और पत्थर के दो जोड़ी जाँत हैं । हे सासू ! मैंने दिन भर पीसा और रात भी व्यतीत होने वाली है। तब भी झीना गेहूँ नहीं चुकता !
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शारीरिक श्रम की क्रिया करते समय जो लोकगीत गाये जाते हैं उन्हें श्रमगीत या क्रिया गीत कहते हैं । इन गीतों से श्रम परिहार होता रहता है। इनमें जँतसार, कोल्हौरा, निरवही आदि के गीत आते हैं । छयासठ. जँतसार जाँत या हाथ की चक्की चलाते समय महिलाएँ जो लोकगीत गाती हैं, उन्हें जँतसार, जँतसारी या जाँत के गीत कहते हैं । सन्दर्भ - पुत्रवधू का शिर दर्द और सास की करतूत । कँकरा औ पथरा दुनउ जोड़ी जँतवा हो ना । दिनवा भै पीसेउँ सासू रतिया हो ना ॥ सासू, तबहूँ न चुकै झीन गोहुँआ होना । बहू उठि कै करौ दतुइनिया हो ना ।। ॥ रोज तो मोरी सासू मुँहवा न बोलिउ हो ना । सासू, आजु काहे पूछिउ दतुइनिया होना ॥ रोज तौ मोरी सासू काठे कै कठोलिया हो ना । सासू, आज काहे फूल कै थरिया हो ना ॥ खात- पिअत सासू भल निक लागइ हो ना । सासू, अँचवत मुँड़वा धमाकै हो ना ॥ जउ मोरी बहुवरि मुँढ़वा धमाकै हो ना । बहू, साजी बाटी ससुरू सेजरिया हो ना ॥ - राहपुर लपटा बहू कहती है कि कंकड़ और पत्थर के दो जोड़ी जाँत हैं । हे सासू ! मैंने दिन भर पीसा और रात भी व्यतीत होने वाली है। तब भी झीना गेहूँ नहीं चुकता !
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नैनाटिक्कर - पच्छाद क्षेत्र में यूं तो स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव तो है ही, परंतु क्षेत्र की अधिकांश छोटी-बड़ी सड़कों की हालत बद से बदत्तर हो चुकी है, परंतु किसी भी राजनेता ने अभी तक इसकी सुध नहीं ली है। गौर हो कि 17वें लोकसभा चुनावों के लिए विभिन्न राजनीतिक दल जोर-शोर से अपने अपने चुनाव प्रचार के दौरान आम जनमानस को लुभावने वादे कर अपनी उपलब्धियों के दावे ठोंक रहे हैं, परंतु धरातल पर सच्चाई कुछ ओर ही है, जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी बेरोजगारी, महंगाई आदि मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना बनाकर लोगों से वोट की अपील कर रही है। वहीं भाजपा प्रत्याशी सुरेश कश्यप पच्छाद क्षेत्र में एक प्रपत्र के जरिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं, जिसमें केंद्र तथा राज्य सरकारों की उपलब्धियों के साथ-साथ पच्छाद विधायक के किए गए कार्यों का लेखा-जोखा दिया गया है, जिसमें पच्छाद की सड़कों को बजट मुहैया करवाने के बड़े-बड़े दावे किए गए हैं, परंतु धरातल पर सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। जी, हां हम बात कर रहे हैं पच्छाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सड़कों की, जिनकी हालत बद से बदत्तर हो चुकी है तथा क्षेत्र के ग्रामीणों सहित स्कूल तथा कालेज के छात्र-छात्राओं को तो जान जोखिम में डालकर सफर करना ही पड़ता है, अपितु किसानों को भी अपनी नकदी फसलें इन्हीं टूटी-फूटी तथा खस्ताहाल सड़कों के ऊपर से ही मंडी तक पहुंचानी पड़ती है, जो कि किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं है। क्षेत्र के गिरिपार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सड़कें नैनाटिक्कर-दयोथल-औच्छघाट की बात करें तो सड़क की स्थिति इतनी दयनीय है कि समझ नहीं आता है कि सड़क में गड्ढे हैं अथवा गड्ढों में सड़क। इसी तरह नैनाटिक्कर-ढंग्यार रोड तथा नैनाटिक्कर से मेहंदोबाग-ढूंगाघाट सड़क जो कि अपनी हालत पर स्वयं आंसू बहा रही है। इसी तरह नारग क्षेत्र की सड़कों की बात करें तो दयोथल-नारग मार्ग से लेकर नारग से मरयोग सड़क तथा नारग से मढ़ीघाट-धरयार सड़क की खस्ताहालत किसी से छिपी नहीं है। इसी तरह अन्य छोटी-बड़ी सड़कें जैसे सादनाघाट-पटांजी-मशोबरा मार्ग, नैना देवी मंदिर मार्ग, पर्यटन तथा आस्था की दृष्टि से देखे जाने वाले भुरेश्वर महादेव मंदिर की सड़क, नैनाटिक्कर-ढगोथर मार्ग तथा डिलमन-शिनाघाट सड़क के खस्ताहाल तथा दयनीय स्थिति न तो राजनेताओं से छिपी है और न ही आम वोटरों से, जिनका असर आगामी लोकसभा चुनावों पर पड़ रहा है। हालांकि इन सड़कों की हालत लंबे अरसे से दयनीय है, परंतु न ही कांग्रेस कार्यकाल में इन सड़कों की ओर ध्यान दिया गया तथा न ही भाजपा के शासनकाल में इन सड़कों की सुध ली गई।
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नैनाटिक्कर - पच्छाद क्षेत्र में यूं तो स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव तो है ही, परंतु क्षेत्र की अधिकांश छोटी-बड़ी सड़कों की हालत बद से बदत्तर हो चुकी है, परंतु किसी भी राजनेता ने अभी तक इसकी सुध नहीं ली है। गौर हो कि सत्रहवें लोकसभा चुनावों के लिए विभिन्न राजनीतिक दल जोर-शोर से अपने अपने चुनाव प्रचार के दौरान आम जनमानस को लुभावने वादे कर अपनी उपलब्धियों के दावे ठोंक रहे हैं, परंतु धरातल पर सच्चाई कुछ ओर ही है, जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी बेरोजगारी, महंगाई आदि मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना बनाकर लोगों से वोट की अपील कर रही है। वहीं भाजपा प्रत्याशी सुरेश कश्यप पच्छाद क्षेत्र में एक प्रपत्र के जरिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं, जिसमें केंद्र तथा राज्य सरकारों की उपलब्धियों के साथ-साथ पच्छाद विधायक के किए गए कार्यों का लेखा-जोखा दिया गया है, जिसमें पच्छाद की सड़कों को बजट मुहैया करवाने के बड़े-बड़े दावे किए गए हैं, परंतु धरातल पर सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। जी, हां हम बात कर रहे हैं पच्छाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सड़कों की, जिनकी हालत बद से बदत्तर हो चुकी है तथा क्षेत्र के ग्रामीणों सहित स्कूल तथा कालेज के छात्र-छात्राओं को तो जान जोखिम में डालकर सफर करना ही पड़ता है, अपितु किसानों को भी अपनी नकदी फसलें इन्हीं टूटी-फूटी तथा खस्ताहाल सड़कों के ऊपर से ही मंडी तक पहुंचानी पड़ती है, जो कि किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं है। क्षेत्र के गिरिपार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सड़कें नैनाटिक्कर-दयोथल-औच्छघाट की बात करें तो सड़क की स्थिति इतनी दयनीय है कि समझ नहीं आता है कि सड़क में गड्ढे हैं अथवा गड्ढों में सड़क। इसी तरह नैनाटिक्कर-ढंग्यार रोड तथा नैनाटिक्कर से मेहंदोबाग-ढूंगाघाट सड़क जो कि अपनी हालत पर स्वयं आंसू बहा रही है। इसी तरह नारग क्षेत्र की सड़कों की बात करें तो दयोथल-नारग मार्ग से लेकर नारग से मरयोग सड़क तथा नारग से मढ़ीघाट-धरयार सड़क की खस्ताहालत किसी से छिपी नहीं है। इसी तरह अन्य छोटी-बड़ी सड़कें जैसे सादनाघाट-पटांजी-मशोबरा मार्ग, नैना देवी मंदिर मार्ग, पर्यटन तथा आस्था की दृष्टि से देखे जाने वाले भुरेश्वर महादेव मंदिर की सड़क, नैनाटिक्कर-ढगोथर मार्ग तथा डिलमन-शिनाघाट सड़क के खस्ताहाल तथा दयनीय स्थिति न तो राजनेताओं से छिपी है और न ही आम वोटरों से, जिनका असर आगामी लोकसभा चुनावों पर पड़ रहा है। हालांकि इन सड़कों की हालत लंबे अरसे से दयनीय है, परंतु न ही कांग्रेस कार्यकाल में इन सड़कों की ओर ध्यान दिया गया तथा न ही भाजपा के शासनकाल में इन सड़कों की सुध ली गई।
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अनिल कुंबले टीम इंडिया के अगले कोच बन गए हैं, लेकिन आप शायद नहीं जानते होंगे कि जंबो बोर्ड की पहली पसंद कभी नहीं थे। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर बीसीसीआई की पहली पसंद कौन था?
बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने नए कोच के नाम का ऐलान करते वक्त कहा कि उन्होंने पहले इस पद के लिए राहुल द्रविड़ से बात की थी। उन्होंने कहा, "मैंने राहुल द्रविड़ से टीम इंडिया का मुख्य कोच बनने के लिए अनुरोध किया था। उन्होंने इसके लिए ना नहीं कहा, लेकिन उनका कहना था कि वह जूनियर टीम के साथ काम करना चाहते हैं। "
बोर्ड अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने बताया कि राहुल द्रविड़ के पास कोच बनने का शानदार मौका था, लेकिन वह सीनियर टीम के कोच नहीं बने, और न ही वह ज्यादा पैसे के लिए गए। वह अभी जूनियर क्रिकेटरों के साथ काम करना चाहते थे न कि सीनियर टीम के साथ।
तीन महीने पहले भी जब राहुल द्रविड़ से टीम इंडिया की कोचिंग करने के संबंध में पूछा गया तो तब उन्होंने कहा था कि वह छोटी अवधि के लिए काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "मैं केवल छोटी अवधि के लिए काम कर सकता हूं, मैं लंबे समय के लिए अपने परिवार से दूर नहीं रह सकता। मेरे लिए शॉर्ट असाइनमेंट ही बेहतर हैं। "
इससे पहले राहुल द्रविड़ ने बीसीसीआई की क्रिकेट की एडवाइजरी कमिटी में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसी कमिटी में सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण और सचिन तेंदुलकर शामिल हैं।
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अनिल कुंबले टीम इंडिया के अगले कोच बन गए हैं, लेकिन आप शायद नहीं जानते होंगे कि जंबो बोर्ड की पहली पसंद कभी नहीं थे। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर बीसीसीआई की पहली पसंद कौन था? बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने नए कोच के नाम का ऐलान करते वक्त कहा कि उन्होंने पहले इस पद के लिए राहुल द्रविड़ से बात की थी। उन्होंने कहा, "मैंने राहुल द्रविड़ से टीम इंडिया का मुख्य कोच बनने के लिए अनुरोध किया था। उन्होंने इसके लिए ना नहीं कहा, लेकिन उनका कहना था कि वह जूनियर टीम के साथ काम करना चाहते हैं। " बोर्ड अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने बताया कि राहुल द्रविड़ के पास कोच बनने का शानदार मौका था, लेकिन वह सीनियर टीम के कोच नहीं बने, और न ही वह ज्यादा पैसे के लिए गए। वह अभी जूनियर क्रिकेटरों के साथ काम करना चाहते थे न कि सीनियर टीम के साथ। तीन महीने पहले भी जब राहुल द्रविड़ से टीम इंडिया की कोचिंग करने के संबंध में पूछा गया तो तब उन्होंने कहा था कि वह छोटी अवधि के लिए काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "मैं केवल छोटी अवधि के लिए काम कर सकता हूं, मैं लंबे समय के लिए अपने परिवार से दूर नहीं रह सकता। मेरे लिए शॉर्ट असाइनमेंट ही बेहतर हैं। " इससे पहले राहुल द्रविड़ ने बीसीसीआई की क्रिकेट की एडवाइजरी कमिटी में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसी कमिटी में सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण और सचिन तेंदुलकर शामिल हैं।
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर और भारत में उसके बुरे प्रभाव के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता कायम है। अमेरिकी डेटा इंटेलिजेंस फर्म मॉर्निंग कंसल्ट के सर्वे में ग्लोबल लीडर्स की रैंकिंग में मोदी टॉप पर हैं। उनकी लोकप्रियता को 100 में 66% नंबर मिले हैं।
इस सर्वे में अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, फ्रांस और जर्मनी सहित 13 देश के नेताओं को शामिल किया गया था। हालांकि, सर्वे में बताया गया है कि पिछले एक साल में मोदी की लोकप्रियता में 20% गिरावट आई है। फिर भी जून की शुरुआत तक 66% लोग मोदी को पसंद करते हैं।
सर्वे में भारत के 2,126 लोगों को शामिल किया गया। इसमें 28% लोगों ने मोदी की लोकप्रियता को अस्वीकार भी किया। सर्वे में सिर्फ 3 देश के नेताओं की रेटिंग 60 के ऊपर है। सर्वे में मोदी के बाद इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी का नंबर है। उनकी रेटिंग 65% है। इसके बाद तीसरे नंबर पर मेक्सिको के राष्ट्रपति लोपेज ओब्रेडोर हैं। इनकी रेटिंग 63% है।
मॉर्निंग कंसल्ट पॉलिटिकल इंटेलिजेंस अमेरिका, भारत, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, जर्मनी, इटली, जापान, मेक्सिको, दक्षिण कोरिया, स्पेन और ब्रिटेन के नेताओं की अप्रूवल रेटिंग ट्रैक करता है और हर सप्ताह नए डेटा के साथ अपना पेज अपडेट करता है।
किस नेता की कितनी रैंकिंग?
अमेरिकी एजेंसी ने 7 जून को मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को रैंकिंग सुधरने का एक जरिया माना है। इसमें उन्होंने कई घोषणाएं की थीं। राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने 18 साल से ज्यादा के सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन लगवाने की घोषणा की थी। उन्होंने राज्य सरकारों को 75 प्रतिशत वैक्सीन की आपूर्ति करने की भी बात कही थी। मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में 80 करोड़ गरीबों को नवंबर तक मुफ्त राशन देने का वादा किया था।
1. कंपनी का दावा है कि उनकी पहुंच 100 मिलियन (10 करोड़) लोगों के डेटा तक है। इससे उन्हें रिसर्च करने में आसानी मिलती है।
2. 100 से ज्यादा देश में अब तक कंपनी 15 मिलियन (1. 5 करोड़) लोगों का इंटरव्यू कर चुकी है।
3. रिसर्च के लिए कंपनी मशीन लर्निंग एल्गोरिदम (ML) और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) टूल का उपयोग भी करती है।
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर और भारत में उसके बुरे प्रभाव के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता कायम है। अमेरिकी डेटा इंटेलिजेंस फर्म मॉर्निंग कंसल्ट के सर्वे में ग्लोबल लीडर्स की रैंकिंग में मोदी टॉप पर हैं। उनकी लोकप्रियता को एक सौ में छयासठ% नंबर मिले हैं। इस सर्वे में अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, फ्रांस और जर्मनी सहित तेरह देश के नेताओं को शामिल किया गया था। हालांकि, सर्वे में बताया गया है कि पिछले एक साल में मोदी की लोकप्रियता में बीस% गिरावट आई है। फिर भी जून की शुरुआत तक छयासठ% लोग मोदी को पसंद करते हैं। सर्वे में भारत के दो,एक सौ छब्बीस लोगों को शामिल किया गया। इसमें अट्ठाईस% लोगों ने मोदी की लोकप्रियता को अस्वीकार भी किया। सर्वे में सिर्फ तीन देश के नेताओं की रेटिंग साठ के ऊपर है। सर्वे में मोदी के बाद इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी का नंबर है। उनकी रेटिंग पैंसठ% है। इसके बाद तीसरे नंबर पर मेक्सिको के राष्ट्रपति लोपेज ओब्रेडोर हैं। इनकी रेटिंग तिरेसठ% है। मॉर्निंग कंसल्ट पॉलिटिकल इंटेलिजेंस अमेरिका, भारत, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, जर्मनी, इटली, जापान, मेक्सिको, दक्षिण कोरिया, स्पेन और ब्रिटेन के नेताओं की अप्रूवल रेटिंग ट्रैक करता है और हर सप्ताह नए डेटा के साथ अपना पेज अपडेट करता है। किस नेता की कितनी रैंकिंग? अमेरिकी एजेंसी ने सात जून को मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को रैंकिंग सुधरने का एक जरिया माना है। इसमें उन्होंने कई घोषणाएं की थीं। राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने अट्ठारह साल से ज्यादा के सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन लगवाने की घोषणा की थी। उन्होंने राज्य सरकारों को पचहत्तर प्रतिशत वैक्सीन की आपूर्ति करने की भी बात कही थी। मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में अस्सी करोड़ गरीबों को नवंबर तक मुफ्त राशन देने का वादा किया था। एक. कंपनी का दावा है कि उनकी पहुंच एक सौ मिलियन लोगों के डेटा तक है। इससे उन्हें रिसर्च करने में आसानी मिलती है। दो. एक सौ से ज्यादा देश में अब तक कंपनी पंद्रह मिलियन लोगों का इंटरव्यू कर चुकी है। तीन. रिसर्च के लिए कंपनी मशीन लर्निंग एल्गोरिदम और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग टूल का उपयोग भी करती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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रेलवे स्टेशन पर गाना गाकर रातों-रात फेमस हुईं रानू मंडल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। जानिए वजह।
रानू मंडल रेलवे स्टेशन पर गाना गाती थीं। उनका एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसके बाद वो रातोरात मशहूर हो गई थीं।
सोशल मीडिया पर आए दिन कुछ ना कुछ वायरल होता रहता है। इस बार भीख मांगने वाले सनी बाबा की वीडियो वायरल हो रही है। वह इंग्लिश में गाना गाकर भीख मांगते हैं।
फेमस सिंगर और अभिनेता हिमेश रेशमिया की फिल्म 'हैप्पी हार्डी एंड हीर' का ट्रेलर रिलीज हो गया है।
2019 में रानू मंडल से लेकर के सीवान तक ऐसे कई लोग रहे जो फ्लैश लाइट की तरह सोशल मीडिया पर चमके और चमकते ही स्टार बन गए।
इंटरनेट सेंसेशन रानू मंडल 019 में सबसे ज्यादा सर्च किए गए सेलिब्रिटी की लिस्ट में शामिल हुई हैं। इस लिस्ट में लता मंगेशकर और सिद्धार्थ शुक्ला भी शामिल हैं।
जब हिमेश रेशमिया से एक इवेंट में रानू मंडल के बारे में पूछा गया तो वो टालमटोल करने लगे।
लता मंगेशकर का गाना 'एक प्यार का नगमा' गाकर रातोंरात मशहूर हूईं रानू मंडल अक्सर सुर्खियों में रहती हैं।
रानू मंडल हाल में ही अपना मेकओवर कराकर एक इवेंट पर पहुंची थी। लेकिन उनके मेकअप को लेकर सोशल मीडिया में काफी मीम्स और जोक्स बने। लेकिन रानू का मेकअप करने वाली आर्टिस्ट ने असली तस्वीर शेयर की है।
ट्विटर पर रानू मंडल की कुछ फोटोज सामने आई हैं। इसमें उन्होंने डिजाइनर कपड़े पहने हैं और हैवी मेकअप किया है।
रानू मंडल ने हिमेश रेशमिया की फिल्म में एक या दो नहीं, बल्कि तीन गाने गाए हैं। इनमें 'तेरी मेरी कहानी', 'आदत' और 'आशिकी में तेरी' गाना शामिल है।
इंटरनेट सेंसशन रानू मंडल का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह मीडिया को तेवर दिखाती नजर आ रही हैं। इससे पहले उन्होंने अपने फैन्स से बदतमीजी से बात की थी।
इंटरनेट सेंसेशन रानू मंडल का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वह फैन पर गुस्सा करती नजर आ रही हैं।
रानू मंडल अपनी सुरीली आवाज की वजह से रातोंरात मशहूर हो गई थीं। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो वायरल हुआ था।
इंटरनेट सेंसशन रानू मंडल पर बायोपिक बनने जा रही है। लता मंगेशकर का गाना एक प्यार का नगमा गाकर फेमस हुई थीं रानू मंडल।
इंटरनेट सेंसेशन रानू मंडल को फ्लैट देने की खबरों पर पहली बार सलमान खान ने बात की है।
रानू मंडल का वीडियो वायरल हुआ था। उनकी सुरीली आवाज के लोग कायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें हिमेश रेशमिया ने गाने का मौका दिया।
इंटरनेट सेंसशन रानू मंडल ने लता मंगेशकर के द्वारा की गई टिप्पणी पर रिएक्ट किया है।
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रेलवे स्टेशन पर गाना गाकर रातों-रात फेमस हुईं रानू मंडल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। जानिए वजह। रानू मंडल रेलवे स्टेशन पर गाना गाती थीं। उनका एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसके बाद वो रातोरात मशहूर हो गई थीं। सोशल मीडिया पर आए दिन कुछ ना कुछ वायरल होता रहता है। इस बार भीख मांगने वाले सनी बाबा की वीडियो वायरल हो रही है। वह इंग्लिश में गाना गाकर भीख मांगते हैं। फेमस सिंगर और अभिनेता हिमेश रेशमिया की फिल्म 'हैप्पी हार्डी एंड हीर' का ट्रेलर रिलीज हो गया है। दो हज़ार उन्नीस में रानू मंडल से लेकर के सीवान तक ऐसे कई लोग रहे जो फ्लैश लाइट की तरह सोशल मीडिया पर चमके और चमकते ही स्टार बन गए। इंटरनेट सेंसेशन रानू मंडल उन्नीस में सबसे ज्यादा सर्च किए गए सेलिब्रिटी की लिस्ट में शामिल हुई हैं। इस लिस्ट में लता मंगेशकर और सिद्धार्थ शुक्ला भी शामिल हैं। जब हिमेश रेशमिया से एक इवेंट में रानू मंडल के बारे में पूछा गया तो वो टालमटोल करने लगे। लता मंगेशकर का गाना 'एक प्यार का नगमा' गाकर रातोंरात मशहूर हूईं रानू मंडल अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। रानू मंडल हाल में ही अपना मेकओवर कराकर एक इवेंट पर पहुंची थी। लेकिन उनके मेकअप को लेकर सोशल मीडिया में काफी मीम्स और जोक्स बने। लेकिन रानू का मेकअप करने वाली आर्टिस्ट ने असली तस्वीर शेयर की है। ट्विटर पर रानू मंडल की कुछ फोटोज सामने आई हैं। इसमें उन्होंने डिजाइनर कपड़े पहने हैं और हैवी मेकअप किया है। रानू मंडल ने हिमेश रेशमिया की फिल्म में एक या दो नहीं, बल्कि तीन गाने गाए हैं। इनमें 'तेरी मेरी कहानी', 'आदत' और 'आशिकी में तेरी' गाना शामिल है। इंटरनेट सेंसशन रानू मंडल का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह मीडिया को तेवर दिखाती नजर आ रही हैं। इससे पहले उन्होंने अपने फैन्स से बदतमीजी से बात की थी। इंटरनेट सेंसेशन रानू मंडल का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वह फैन पर गुस्सा करती नजर आ रही हैं। रानू मंडल अपनी सुरीली आवाज की वजह से रातोंरात मशहूर हो गई थीं। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो वायरल हुआ था। इंटरनेट सेंसशन रानू मंडल पर बायोपिक बनने जा रही है। लता मंगेशकर का गाना एक प्यार का नगमा गाकर फेमस हुई थीं रानू मंडल। इंटरनेट सेंसेशन रानू मंडल को फ्लैट देने की खबरों पर पहली बार सलमान खान ने बात की है। रानू मंडल का वीडियो वायरल हुआ था। उनकी सुरीली आवाज के लोग कायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें हिमेश रेशमिया ने गाने का मौका दिया। इंटरनेट सेंसशन रानू मंडल ने लता मंगेशकर के द्वारा की गई टिप्पणी पर रिएक्ट किया है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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मूडीज एनालिटिक्स का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत एशिया प्रशांत क्षेत्र में कोविड-19 टीकों के लिए वितरण प्रयासों का संचालन करेगा।
मूडीज एनालिटिक्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि 60 फीसदी वैश्विक हिस्सेदारी के साथ दुनिया में टीकों के सबसे बड़े उत्पादक के रूप में भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के अलावा अन्य देशों के लिए बड़े स्तर पर टीका उत्पादन और वितरण में योगदान के लिहाज से अपनी मौजूदा विनिर्माण क्षमताओं का उपयोग करने में बेहतर स्थिति में है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जल्द ही कोविड-19 टीकों का निर्यात शुरू होने की उम्मीद से भारत (चीन के साथ) आने वाले महीनों में इस क्षेत्र के वितरण प्रयासों के संचालन की कमान संभालने को तैयार दिखता है। टीकाकरण की दिशा में भारत का विकास इस क्षेत्र के लिए महत्त्वपूर्ण प्रगति है। चूंकि अमेरिका के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित देश है, इसलिए महत्त्वपूर्ण सामाजिक आर्थिक लागतों को सीमित रखने के लिए स्थानीय टीकाकरण की आवश्यकता सर्वोपरि है और इस मोर्चे पर देश के आगे बढऩे की सफलता अंततः इस क्षेत्र के भीतर महामारी की कठोरता को कम कर देगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 के झटके की बढ़ती आर्थिक लागत से हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र के कुछ देशों ने टीका खरीद और उसकी शुरुआत की दिशा में अपने प्रयासों को आगे बढ़ाया है। इस क्षेत्र में सुधार की रफ्तार असमान बनी हुई है, लेकिन मूडीज एनालिटिक्स से पिछले अपडेट के बाद से जोखिमों में बदलाव आया है। स्थानीय कंटेनमेंट के संबंध में जापान और दक्षिण कोरिया में तीसरी लहरों की वजह से निकट भविष्य का परिदृश्य बदतर हो गया है जिससे जापान के प्रमुख प्रांतों में कामबंदी सहित नए प्रतिबंध लग गए हैं। दक्षिणपूर्व एशिया की अर्थव्यवस्थाएं - इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया कड़े नियंत्रण उपायों के साथ मामलों के बढ़ते बोझ से जूझ रही हैं। मूडीज एनालिटिक्स ने कहा कि दैनिक मामलों में अचानक हुए इजाफे के बाद चीन ने भी चार शहरों में लॉकडाउन किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देशों के मामले में हाल के बदलाव ने उन्हें अपनी टीका खरीद और कार्यान्वयन योजनाओं में तेजी लाने की तत्काल आवश्यकता के लिए प्रेरित किया है।
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मूडीज एनालिटिक्स का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत एशिया प्रशांत क्षेत्र में कोविड-उन्नीस टीकों के लिए वितरण प्रयासों का संचालन करेगा। मूडीज एनालिटिक्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि साठ फीसदी वैश्विक हिस्सेदारी के साथ दुनिया में टीकों के सबसे बड़े उत्पादक के रूप में भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के अलावा अन्य देशों के लिए बड़े स्तर पर टीका उत्पादन और वितरण में योगदान के लिहाज से अपनी मौजूदा विनिर्माण क्षमताओं का उपयोग करने में बेहतर स्थिति में है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जल्द ही कोविड-उन्नीस टीकों का निर्यात शुरू होने की उम्मीद से भारत आने वाले महीनों में इस क्षेत्र के वितरण प्रयासों के संचालन की कमान संभालने को तैयार दिखता है। टीकाकरण की दिशा में भारत का विकास इस क्षेत्र के लिए महत्त्वपूर्ण प्रगति है। चूंकि अमेरिका के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित देश है, इसलिए महत्त्वपूर्ण सामाजिक आर्थिक लागतों को सीमित रखने के लिए स्थानीय टीकाकरण की आवश्यकता सर्वोपरि है और इस मोर्चे पर देश के आगे बढऩे की सफलता अंततः इस क्षेत्र के भीतर महामारी की कठोरता को कम कर देगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-उन्नीस के झटके की बढ़ती आर्थिक लागत से हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र के कुछ देशों ने टीका खरीद और उसकी शुरुआत की दिशा में अपने प्रयासों को आगे बढ़ाया है। इस क्षेत्र में सुधार की रफ्तार असमान बनी हुई है, लेकिन मूडीज एनालिटिक्स से पिछले अपडेट के बाद से जोखिमों में बदलाव आया है। स्थानीय कंटेनमेंट के संबंध में जापान और दक्षिण कोरिया में तीसरी लहरों की वजह से निकट भविष्य का परिदृश्य बदतर हो गया है जिससे जापान के प्रमुख प्रांतों में कामबंदी सहित नए प्रतिबंध लग गए हैं। दक्षिणपूर्व एशिया की अर्थव्यवस्थाएं - इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया कड़े नियंत्रण उपायों के साथ मामलों के बढ़ते बोझ से जूझ रही हैं। मूडीज एनालिटिक्स ने कहा कि दैनिक मामलों में अचानक हुए इजाफे के बाद चीन ने भी चार शहरों में लॉकडाउन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देशों के मामले में हाल के बदलाव ने उन्हें अपनी टीका खरीद और कार्यान्वयन योजनाओं में तेजी लाने की तत्काल आवश्यकता के लिए प्रेरित किया है।
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भारतीय रेल का इतिहास 170 वर्ष पुराना है और पर्यटकों को आज भी एक अनोखी ट्रेन काफी आकर्षित करती है। जहां एक ओर भारतीय रेलवे कई शाही ट्रेनों और आज भी चलने वाले भाप के इंजनों के जरिए दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचता है। वहीं दूसरी कुछ परंपरागत ट्रेनों का संचालन भी भारतीय रेल को दुनियाभर के रेल नेटवर्क से अलग करता है। भारतीय रेल की कुछ ऐसी ही खास तस्वीर राजस्थान में नजर आती हैं। यहां एक ऐसी झील है जिसमें भारतीय रेलवे और राजस्थान सरकार के साझा उपक्रम के तहत एक ट्रेन चलती है।
जिस ट्रेन की हम बात कर रहे है वह जयपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर सांभर लेक में आज भी चलती है। सांभर लेक से भारत में उपयोग होने वाले नमक का करीब नौ फीसदी हिस्सा निकलता है। देश की कई नामी कपंनियों इस लेक से नमक निकालने की काम करती है। लेकिन सबसे खास बात यह है कि सांभर लेक में अब पानी ही नहीं है। लेकिन इस क्षेत्र से अब भी नमक निकाला जा रहा है।
भारत की यह अनूठी ट्रेन सुबह सांभर स्टेशन से रवाना होती है। लेकिन इस ट्रेन में सवार आम यात्री नहीं होते। इस ट्रेन में वे वर्कर होते हैं, जो लेक में नमक निकालने का कार्य करते हैं। नागौर, अजमेर और जयपुर में फैली इस झील से नमक ढोने वाली इस ट्रेन में सभी डिब्बे लकड़ी के बने हैं, जो यहां आने वाले पर्यटकों को खासा आकर्षित करते है।
जानकारी के अनुसार नमक ढोने वाली इस ट्रेन में पेट्रोल इंजन लगा हुआ। यह इंजन कई दशकों पुराना है। भारत की यह अनूठी सॉल्ट ट्रेन आम पर्यटकों के अतिरिक्त बॉलीवुड का ध्यान भी खींचती है। इसी का परिणाम है कि यह ट्रेन से जुड़ी कई बातें और सांभर लेक में बिछा मीटर गेज ट्रेक कई फिल्मों में नजर आता है। सांभर लेक में अब तक पीके, गुलाल, द्रोण, जोधा-अकबर सहित कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है।
वहीं सांभर लेक में 18 फरवरी से ऋतिक रोशन भी अगले वर्ष रिलीज होने वाली अपनी फिल्म सुपर 30 की शूटिंग करेंगे। गौरतलब है कि इससे पूर्व भी ऋतिक रोशन जोधा-अकबर के लिए यहां शूटिंग कर चुके है। सुपर 30 फिल्म में ऋतिक के अब तक दिखे लुक को खासा पसंद किया जा रहा है। माना जा रहा है कि सांभर लेक में ऋतिक शूटिंग के दौरान किसी नए लुक में नजर आ सकते हैं।
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भारतीय रेल का इतिहास एक सौ सत्तर वर्ष पुराना है और पर्यटकों को आज भी एक अनोखी ट्रेन काफी आकर्षित करती है। जहां एक ओर भारतीय रेलवे कई शाही ट्रेनों और आज भी चलने वाले भाप के इंजनों के जरिए दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचता है। वहीं दूसरी कुछ परंपरागत ट्रेनों का संचालन भी भारतीय रेल को दुनियाभर के रेल नेटवर्क से अलग करता है। भारतीय रेल की कुछ ऐसी ही खास तस्वीर राजस्थान में नजर आती हैं। यहां एक ऐसी झील है जिसमें भारतीय रेलवे और राजस्थान सरकार के साझा उपक्रम के तहत एक ट्रेन चलती है। जिस ट्रेन की हम बात कर रहे है वह जयपुर से करीब नब्बे किलोग्राममीटर दूर सांभर लेक में आज भी चलती है। सांभर लेक से भारत में उपयोग होने वाले नमक का करीब नौ फीसदी हिस्सा निकलता है। देश की कई नामी कपंनियों इस लेक से नमक निकालने की काम करती है। लेकिन सबसे खास बात यह है कि सांभर लेक में अब पानी ही नहीं है। लेकिन इस क्षेत्र से अब भी नमक निकाला जा रहा है। भारत की यह अनूठी ट्रेन सुबह सांभर स्टेशन से रवाना होती है। लेकिन इस ट्रेन में सवार आम यात्री नहीं होते। इस ट्रेन में वे वर्कर होते हैं, जो लेक में नमक निकालने का कार्य करते हैं। नागौर, अजमेर और जयपुर में फैली इस झील से नमक ढोने वाली इस ट्रेन में सभी डिब्बे लकड़ी के बने हैं, जो यहां आने वाले पर्यटकों को खासा आकर्षित करते है। जानकारी के अनुसार नमक ढोने वाली इस ट्रेन में पेट्रोल इंजन लगा हुआ। यह इंजन कई दशकों पुराना है। भारत की यह अनूठी सॉल्ट ट्रेन आम पर्यटकों के अतिरिक्त बॉलीवुड का ध्यान भी खींचती है। इसी का परिणाम है कि यह ट्रेन से जुड़ी कई बातें और सांभर लेक में बिछा मीटर गेज ट्रेक कई फिल्मों में नजर आता है। सांभर लेक में अब तक पीके, गुलाल, द्रोण, जोधा-अकबर सहित कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। वहीं सांभर लेक में अट्ठारह फरवरी से ऋतिक रोशन भी अगले वर्ष रिलीज होने वाली अपनी फिल्म सुपर तीस की शूटिंग करेंगे। गौरतलब है कि इससे पूर्व भी ऋतिक रोशन जोधा-अकबर के लिए यहां शूटिंग कर चुके है। सुपर तीस फिल्म में ऋतिक के अब तक दिखे लुक को खासा पसंद किया जा रहा है। माना जा रहा है कि सांभर लेक में ऋतिक शूटिंग के दौरान किसी नए लुक में नजर आ सकते हैं।
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लाइव हिंदी खबर :- समाज में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब होंगे, कई वर्षों से अटके हुए कार्य तेजी से बनेंगे। अपने जीवनसाथी के किसी काम कीआप तनाव के बारे में कुछ दे सकते हैं, अगर आप अपने जीवन में सभी नकारात्मकताओं से अभिभूत हैं।
जिस वजह से आप कुछ शर्मिन्दगी महसूस कर सकते हैं, कुछ बदलाव का मूड आज आप बना सकते हैं, पैसे कमाने के नए अवसर बाहर आ सकते हैं और रोजगार के क्षेत्र में नए रास्ते पर होंगे और आप एक नया काम प्राप्त कर सकते हैं, शारीरिक और मानसिक स्थिति में सुधार होने की संभावना है।
वह भाग्यशाली राशियां मीन, धनु, मकर, मिथुन, तुला और कुंभ है।
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लाइव हिंदी खबर :- समाज में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब होंगे, कई वर्षों से अटके हुए कार्य तेजी से बनेंगे। अपने जीवनसाथी के किसी काम कीआप तनाव के बारे में कुछ दे सकते हैं, अगर आप अपने जीवन में सभी नकारात्मकताओं से अभिभूत हैं। जिस वजह से आप कुछ शर्मिन्दगी महसूस कर सकते हैं, कुछ बदलाव का मूड आज आप बना सकते हैं, पैसे कमाने के नए अवसर बाहर आ सकते हैं और रोजगार के क्षेत्र में नए रास्ते पर होंगे और आप एक नया काम प्राप्त कर सकते हैं, शारीरिक और मानसिक स्थिति में सुधार होने की संभावना है। वह भाग्यशाली राशियां मीन, धनु, मकर, मिथुन, तुला और कुंभ है।
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भोपालः मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर पांच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को रवाना किया। इन पांच ट्रेनों में से दो मध्य प्रदेश के लिए हैं तो तीन अन्य स्थानों के लिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि वंदे भारत से सफर तेज, आधुनिक और सुविधायुक्त होगा। राजधानी में प्रधानमंत्री मोदी ने वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने के बाद 'मेरा बूथ, सबसे मजबूत' कार्यक्रम में रेल सुविधाएं दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा, देश के छह राज्यों को जोड़ने वाली पांच वंदे भारत ट्रेनों को एक साथ हरी झंडी दिखाने का अवसर मिला है। मैं मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र की जनता को इस आधुनिक वंदे भारत ट्रेन की कनेक्टिविटी के लिए बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि इसमें मैं एमपी को विशेष बधाई दूंगा क्योंकि एक साथ दो ट्रेन मेरे भाई-बहनों को मिली है। अब भोपाल से इंदौर और भोपाल से जबलपुर का सफर तेज, आधुनिक और सुविधायुक्त होगा।
वंदे भारत एक्सप्रेस से स्कूली बच्चों ने भी इटारसी तक की यात्रा की। इन बच्चों से भी प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद किया। बच्चों ने जहां प्रधानमंत्री को बनाए गए चित्र दिखाए तो प्रधानमंत्री ने बच्चों से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से जिन वंदे भारत ट्रेनों को झंडी दिखाई है, उनमें से दो ट्रेन भोपाल (रानी कमलापति)- इंदौर , भोपाल (रानी कमलापति)-जबलपुर के बीच चलेंगी। वहीं, तीन गाड़ियों के लिए वर्चुअली हरी झंडी दिखाई गई। ये गाड़ियां हैं- रांची-पटना, धारवाड़-बेंगलुरु और गोवा (मडगांव)-मुंबई। भोपाल (रानी कमलापति)- इंदौर, वंदे भारत एक्सप्रेस मध्य प्रदेश के दो महत्वपूर्ण शहरों के बीच सरल और त्वरित यात्रा की सुविधा प्रदान करेगी तथा क्षेत्र में सांस्कृतिक, पर्यटन एवं धार्मिक स्थानों की कनेक्टिविटी में सुधार लाएगी। भोपाल (रानी कमलापति)-जबलपुर वंदे भारत एक्सप्रेस महाकौशल क्षेत्र (जबलपुर) को मध्यप्रदेश के मध्य क्षेत्र (भोपाल) से जोड़ेगी। इसके अतिरिक्त, बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र के पर्यटन स्थलों को भी लाभ होगा।
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भोपालः मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर पांच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को रवाना किया। इन पांच ट्रेनों में से दो मध्य प्रदेश के लिए हैं तो तीन अन्य स्थानों के लिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि वंदे भारत से सफर तेज, आधुनिक और सुविधायुक्त होगा। राजधानी में प्रधानमंत्री मोदी ने वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने के बाद 'मेरा बूथ, सबसे मजबूत' कार्यक्रम में रेल सुविधाएं दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा, देश के छह राज्यों को जोड़ने वाली पांच वंदे भारत ट्रेनों को एक साथ हरी झंडी दिखाने का अवसर मिला है। मैं मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र की जनता को इस आधुनिक वंदे भारत ट्रेन की कनेक्टिविटी के लिए बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि इसमें मैं एमपी को विशेष बधाई दूंगा क्योंकि एक साथ दो ट्रेन मेरे भाई-बहनों को मिली है। अब भोपाल से इंदौर और भोपाल से जबलपुर का सफर तेज, आधुनिक और सुविधायुक्त होगा। वंदे भारत एक्सप्रेस से स्कूली बच्चों ने भी इटारसी तक की यात्रा की। इन बच्चों से भी प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद किया। बच्चों ने जहां प्रधानमंत्री को बनाए गए चित्र दिखाए तो प्रधानमंत्री ने बच्चों से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से जिन वंदे भारत ट्रेनों को झंडी दिखाई है, उनमें से दो ट्रेन भोपाल - इंदौर , भोपाल -जबलपुर के बीच चलेंगी। वहीं, तीन गाड़ियों के लिए वर्चुअली हरी झंडी दिखाई गई। ये गाड़ियां हैं- रांची-पटना, धारवाड़-बेंगलुरु और गोवा -मुंबई। भोपाल - इंदौर, वंदे भारत एक्सप्रेस मध्य प्रदेश के दो महत्वपूर्ण शहरों के बीच सरल और त्वरित यात्रा की सुविधा प्रदान करेगी तथा क्षेत्र में सांस्कृतिक, पर्यटन एवं धार्मिक स्थानों की कनेक्टिविटी में सुधार लाएगी। भोपाल -जबलपुर वंदे भारत एक्सप्रेस महाकौशल क्षेत्र को मध्यप्रदेश के मध्य क्षेत्र से जोड़ेगी। इसके अतिरिक्त, बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र के पर्यटन स्थलों को भी लाभ होगा।
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चर्चा में क्यों?
वर्ष 2005 में लागू सूचना के अधिकार अधिनियम (Right to Information-RTI) ने अब 15 वर्ष पूरे कर लिये हैं, इस संबंध में जारी एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों में अभी तक लगभग 2.2 लाख मामले लंबित हैं।
- सूचना के अधिकार अधिनियम की 15वीं वर्षगांठ पर 'सतर्क नागरिक संगठन' और 'सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज़' (Centre for Equity Studies) द्वारा जारी रिपोर्ट में पाया गया है कि महाराष्ट्र में सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के कार्यान्वयन की स्थिति काफी चिंताजनक है, और वहाँ तकरीबन 59,000 मामले अभी लंबित हैं, जो कि अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक हैं।
- महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है, जहाँ अभी कुल 47,923 मामले लंबित हैं। इसके अलावा केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) में कुल 35,653 मामले लंबित हैं।
- रिपोर्ट बताती है कि यदि मामलों के निपटान की यही दर रहती है तो ओडिशा को सभी लंबित शिकायतों को निपटाने में 7 वर्ष से भी अधिक का समय लग सकता है।
- कारणः रिपोर्ट के अनुसार, इतनी अधिक मात्रा में लंबित मामलों का मुख्य कारण है कि देश में अधिकांश सूचना आयोग अपनी पूर्ण क्षमता के साथ कार्य नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उनमें सूचना आयुक्तों की नियुक्ति ही नहीं की जा रही है।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि ओडिशा केवल 4 सूचना आयुक्तों के साथ कार्य कर रहा है, जबकि राजस्थान में केवल 3 सूचना आयुक्त हैं। वहीं झारखंड और त्रिपुरा में कोई भी सूचना आयुक्त कार्य नहीं कर रहा है।
- वहीं केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) बीते कुछ वर्षों से बिना मुख्य सूचना आयुक्त के कार्य कर रहा है। वर्तमान में केंद्रीय सूचना आयुक्त (CIC) में केवल 5 सदस्य कार्य कर रहे हैं।
- जबकि नियम कहते हैं कि प्रत्येक आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 आयुक्त होने अनिवार्य हैं।
- विश्लेषण में पाया गया है कि सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत शायद ही कभी कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को सज़ा दी गई हो।
- रिपोर्ट में पाया गया है कि सभी सूचना आयोगों द्वारा निपटाए गए कुल मामलों में से केवल 2.2 प्रतिशत मामलो में ही सज़ा/दंड दिया गया है। इस प्रकार सज़ा संबंधी प्रावधानों का सही ढंग से पालन न करना यह नकारात्मक संदेश पहुँचता है कि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर किसी भी प्रकार की सज़ा नहीं मिलती है।
- सूचना के अधिकार का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना, सरकार के कामकाज में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार कम करना और सही अर्थों में जीवंत लोकतंत्र विकसित करना है, किंतु इस अधिनियम के सही ढंग से कार्यान्वित न होने के कारण इस उद्देश्य को प्राप्त करना काफी मुश्किल हो गया है।
- सूचना के अधिकार यानी RTI का अर्थ है कि कोई भी भारतीय नागरिक राज्य या केंद्र सरकार के कार्यालयों और विभागों से किसी भी जानकारी (जिसे सार्वजनिक सूचना माना जाता है) को प्राप्त करने का अनुरोध कर सकता है।
- इसी अवधारणा के मद्देनज़र भारतीय लोकतंत्र को मज़बूत करने और शासन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से भारतीय संसद ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 लागू किया था।
- विशेषज्ञ इस अधिनियम को भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में देखते हैं।
- इस अधिनियम में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कोई भी भारतीय नागरिक किसी भी सार्वजानिक अथवा सरकारी प्राधिकरण से किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिये स्वतंत्र है, साथ ही इस अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना को आवेदन की तारीख से 30 दिनों की अवधि के भीतर प्रदान करने की व्यवस्था की गई है।
- हालाँकि अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत सूचना से संबंधित नहीं होनी चाहिये।
- इस अधिनियम में यह भी कहा गया है कि सभी सार्वजनिक प्राधिकरण अपने दस्तावेज़ों का संरक्षण करते हुए उन्हें कंप्यूटर में सुरक्षित रखेंगे।
- इस अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद व राज्य विधानमंडल के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और निर्वाचन आयोग (Election Commission) जैसे संवैधानिक निकायों व उनसे संबंधित पदों को भी सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में लाया गया है।
- इस अधिनियम के अंतर्गत केंद्र स्तर पर एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 सूचना आयुक्तों की सदस्यता वाले एक केंद्रीय सूचना आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। इसी के आधार पर राज्य में भी एक राज्य सूचना आयोग का गठन किया जाएगा।
क्यों महत्त्वपूर्ण है सूचना का अधिकार?
- असल में सूचना उस मुद्रा की तरह होती है, जो कि प्रत्येक नागरिक के लिये समाज के शासन में हिस्सा लेने हेतु आवश्यक होती है।
- कार्यपालिका के प्रत्येक स्तर नियंत्रण, संरक्षण और शक्ति को बनाए रखने के उद्देश्य से सूचना को काफी सीमित कर दिया जाता है।
- इसलिये प्रायः यह माना जाता है कि कार्यपालिका में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिये नियमों और प्रक्रिया की स्पष्टता, पूर्ण पारदर्शिता और आम जनता के बीच प्रासंगिक जानकारी का प्रसार काफी महत्त्वपूर्ण हैं।
- इसलिये अंततः भ्रष्टाचार को समाप्त करने की सबसे प्रभावी प्रणाली वही होगी, जिसमें नागरिकों को राज्य से प्रासंगिक सूचना प्राप्त करने का अधिकार होगा।
- हम कह सकते हैं कि सरकार की प्रणाली और प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करना एक आवश्यक कदम है। जब सरकार की प्रणाली और प्रक्रिया पारदर्शी होती है तो वहाँ भ्रष्टाचार कीसंभावना काफी कम हो जाती है।
- सूचना के अधिकार से संबंधित पहला कानून वर्ष 1766 में स्वीडन द्वारा लागू किया गया था, इसके बाद वर्ष 1966 में अमेरिका ने भी इस संबंध में एक कानून अपना लिया, वर्ष 1990 आते-आते सूचना के अधिकार से संबंधी कानून लागू करने वाले देशों की संख्या बढ़कर 13 हो गई थी।
- भारत में इस संबंध में कानून बनाने के लिये आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1987 में तब हुई जब राजस्थान के कुछ मज़दूरों को उनके असंतोषजनक प्रदर्शन का हवाला देते हुए वेतन देने से इनकार कर दिया।
- भ्रष्टाचार की आशंका को देखते हुए मज़दूरों के हक में लड़ रहे मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) ने स्थानीय अधिकारियों से संबंधित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की मांग की।
- सार्वजानिक विरोध प्रदर्शन के बाद जब प्रासंगिक दस्तावेज़ उपलब्ध कराए गए तो सरकारी अधिकारियों द्वारा किया गया भ्रष्टाचार भी सामने आ गया।
- समय के साथ यह आंदोलन और ज़ोर पकड़ता गया और जल्द ही सूचना के अधिकार (RTI) की मांग करते हुए इस आंदोलन ने देशव्यापी रूप ले लिया।
- आंदोलन को बड़ा होते देख सरकार ने सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम, 2002 पारित कर दिया, जिसने आगे चलकर वर्ष 2005 में सूचना के अधिकार अधिनियम का रूप लिया।
- वर्ष 2005 में पुणे पुलिस स्टेशन को RTI के तहत पहली याचिका प्राप्त हुई थी।
- यह अधिनियम आम लोगों को प्रासंगिक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है, किंतु निरक्षरता और जागरूकता की कमी के कारण भारत में अधिकांश लोग इस अधिकार का प्रयोग नहीं कर पाते हैं।
- कई लोग मानते हैं कि इस अधिनियम में प्रावधानों का उल्लंघन करने की स्थिति में जो जुर्माना/दंड दिया गया है वह इतना कठोर नहीं है कि लोगों को इस कार्य से रोक सके।
- इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त जन जागरूकता का अभाव, सूचनाओं को संग्रहीत करने और प्रचार-प्रसार करने हेतु उचित प्रणाली का अभाव, सार्वजनिक सूचना अधिकारियों (PIOs) की अक्षमता और नौकरशाही मानसिकता आदि को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के कार्यान्वयन में बड़ी बाधा माना जाता है।
- सरकार के कार्यालयों और विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार से निपटने के लिये सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 एक मज़बूत उपाय साबित हुआ है।
- यह कानून स्वतंत्र भारत मे पारित सबसे सशक्त और प्रगतिशील कानूनों में से एक है।
- भ्रष्टाचार से मुकाबले के लिये एक कारगर उपाय होने के बावजूद यह कानून कई समस्याओं और चुनौतियों का सामना कर रहा है, और इस कानून की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिये इन समस्याओं और चुनौतियों को जल्द-से-जल्द संबोधित करना आवश्यक है।
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चर्चा में क्यों? वर्ष दो हज़ार पाँच में लागू सूचना के अधिकार अधिनियम ने अब पंद्रह वर्ष पूरे कर लिये हैं, इस संबंध में जारी एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों में अभी तक लगभग दो.दो लाख मामले लंबित हैं। - सूचना के अधिकार अधिनियम की पंद्रहवीं वर्षगांठ पर 'सतर्क नागरिक संगठन' और 'सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज़' द्वारा जारी रिपोर्ट में पाया गया है कि महाराष्ट्र में सूचना के अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की स्थिति काफी चिंताजनक है, और वहाँ तकरीबन उनसठ,शून्य मामले अभी लंबित हैं, जो कि अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक हैं। - महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है, जहाँ अभी कुल सैंतालीस,नौ सौ तेईस मामले लंबित हैं। इसके अलावा केंद्रीय सूचना आयोग में कुल पैंतीस,छः सौ तिरेपन मामले लंबित हैं। - रिपोर्ट बताती है कि यदि मामलों के निपटान की यही दर रहती है तो ओडिशा को सभी लंबित शिकायतों को निपटाने में सात वर्ष से भी अधिक का समय लग सकता है। - कारणः रिपोर्ट के अनुसार, इतनी अधिक मात्रा में लंबित मामलों का मुख्य कारण है कि देश में अधिकांश सूचना आयोग अपनी पूर्ण क्षमता के साथ कार्य नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उनमें सूचना आयुक्तों की नियुक्ति ही नहीं की जा रही है। - रिपोर्ट में कहा गया है कि ओडिशा केवल चार सूचना आयुक्तों के साथ कार्य कर रहा है, जबकि राजस्थान में केवल तीन सूचना आयुक्त हैं। वहीं झारखंड और त्रिपुरा में कोई भी सूचना आयुक्त कार्य नहीं कर रहा है। - वहीं केंद्रीय सूचना आयोग बीते कुछ वर्षों से बिना मुख्य सूचना आयुक्त के कार्य कर रहा है। वर्तमान में केंद्रीय सूचना आयुक्त में केवल पाँच सदस्य कार्य कर रहे हैं। - जबकि नियम कहते हैं कि प्रत्येक आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस आयुक्त होने अनिवार्य हैं। - विश्लेषण में पाया गया है कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत शायद ही कभी कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को सज़ा दी गई हो। - रिपोर्ट में पाया गया है कि सभी सूचना आयोगों द्वारा निपटाए गए कुल मामलों में से केवल दो.दो प्रतिशत मामलो में ही सज़ा/दंड दिया गया है। इस प्रकार सज़ा संबंधी प्रावधानों का सही ढंग से पालन न करना यह नकारात्मक संदेश पहुँचता है कि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर किसी भी प्रकार की सज़ा नहीं मिलती है। - सूचना के अधिकार का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना, सरकार के कामकाज में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार कम करना और सही अर्थों में जीवंत लोकतंत्र विकसित करना है, किंतु इस अधिनियम के सही ढंग से कार्यान्वित न होने के कारण इस उद्देश्य को प्राप्त करना काफी मुश्किल हो गया है। - सूचना के अधिकार यानी RTI का अर्थ है कि कोई भी भारतीय नागरिक राज्य या केंद्र सरकार के कार्यालयों और विभागों से किसी भी जानकारी को प्राप्त करने का अनुरोध कर सकता है। - इसी अवधारणा के मद्देनज़र भारतीय लोकतंत्र को मज़बूत करने और शासन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से भारतीय संसद ने सूचना का अधिकार अधिनियम, दो हज़ार पाँच लागू किया था। - विशेषज्ञ इस अधिनियम को भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में देखते हैं। - इस अधिनियम में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कोई भी भारतीय नागरिक किसी भी सार्वजानिक अथवा सरकारी प्राधिकरण से किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिये स्वतंत्र है, साथ ही इस अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना को आवेदन की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। - हालाँकि अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत सूचना से संबंधित नहीं होनी चाहिये। - इस अधिनियम में यह भी कहा गया है कि सभी सार्वजनिक प्राधिकरण अपने दस्तावेज़ों का संरक्षण करते हुए उन्हें कंप्यूटर में सुरक्षित रखेंगे। - इस अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद व राज्य विधानमंडल के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक निकायों व उनसे संबंधित पदों को भी सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में लाया गया है। - इस अधिनियम के अंतर्गत केंद्र स्तर पर एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस सूचना आयुक्तों की सदस्यता वाले एक केंद्रीय सूचना आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। इसी के आधार पर राज्य में भी एक राज्य सूचना आयोग का गठन किया जाएगा। क्यों महत्त्वपूर्ण है सूचना का अधिकार? - असल में सूचना उस मुद्रा की तरह होती है, जो कि प्रत्येक नागरिक के लिये समाज के शासन में हिस्सा लेने हेतु आवश्यक होती है। - कार्यपालिका के प्रत्येक स्तर नियंत्रण, संरक्षण और शक्ति को बनाए रखने के उद्देश्य से सूचना को काफी सीमित कर दिया जाता है। - इसलिये प्रायः यह माना जाता है कि कार्यपालिका में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिये नियमों और प्रक्रिया की स्पष्टता, पूर्ण पारदर्शिता और आम जनता के बीच प्रासंगिक जानकारी का प्रसार काफी महत्त्वपूर्ण हैं। - इसलिये अंततः भ्रष्टाचार को समाप्त करने की सबसे प्रभावी प्रणाली वही होगी, जिसमें नागरिकों को राज्य से प्रासंगिक सूचना प्राप्त करने का अधिकार होगा। - हम कह सकते हैं कि सरकार की प्रणाली और प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करना एक आवश्यक कदम है। जब सरकार की प्रणाली और प्रक्रिया पारदर्शी होती है तो वहाँ भ्रष्टाचार कीसंभावना काफी कम हो जाती है। - सूचना के अधिकार से संबंधित पहला कानून वर्ष एक हज़ार सात सौ छयासठ में स्वीडन द्वारा लागू किया गया था, इसके बाद वर्ष एक हज़ार नौ सौ छयासठ में अमेरिका ने भी इस संबंध में एक कानून अपना लिया, वर्ष एक हज़ार नौ सौ नब्बे आते-आते सूचना के अधिकार से संबंधी कानून लागू करने वाले देशों की संख्या बढ़कर तेरह हो गई थी। - भारत में इस संबंध में कानून बनाने के लिये आंदोलन की शुरुआत वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में तब हुई जब राजस्थान के कुछ मज़दूरों को उनके असंतोषजनक प्रदर्शन का हवाला देते हुए वेतन देने से इनकार कर दिया। - भ्रष्टाचार की आशंका को देखते हुए मज़दूरों के हक में लड़ रहे मजदूर किसान शक्ति संगठन ने स्थानीय अधिकारियों से संबंधित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की मांग की। - सार्वजानिक विरोध प्रदर्शन के बाद जब प्रासंगिक दस्तावेज़ उपलब्ध कराए गए तो सरकारी अधिकारियों द्वारा किया गया भ्रष्टाचार भी सामने आ गया। - समय के साथ यह आंदोलन और ज़ोर पकड़ता गया और जल्द ही सूचना के अधिकार की मांग करते हुए इस आंदोलन ने देशव्यापी रूप ले लिया। - आंदोलन को बड़ा होते देख सरकार ने सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम, दो हज़ार दो पारित कर दिया, जिसने आगे चलकर वर्ष दो हज़ार पाँच में सूचना के अधिकार अधिनियम का रूप लिया। - वर्ष दो हज़ार पाँच में पुणे पुलिस स्टेशन को RTI के तहत पहली याचिका प्राप्त हुई थी। - यह अधिनियम आम लोगों को प्रासंगिक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है, किंतु निरक्षरता और जागरूकता की कमी के कारण भारत में अधिकांश लोग इस अधिकार का प्रयोग नहीं कर पाते हैं। - कई लोग मानते हैं कि इस अधिनियम में प्रावधानों का उल्लंघन करने की स्थिति में जो जुर्माना/दंड दिया गया है वह इतना कठोर नहीं है कि लोगों को इस कार्य से रोक सके। - इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त जन जागरूकता का अभाव, सूचनाओं को संग्रहीत करने और प्रचार-प्रसार करने हेतु उचित प्रणाली का अभाव, सार्वजनिक सूचना अधिकारियों की अक्षमता और नौकरशाही मानसिकता आदि को सूचना का अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन में बड़ी बाधा माना जाता है। - सरकार के कार्यालयों और विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार से निपटने के लिये सूचना के अधिकार अधिनियम, दो हज़ार पाँच एक मज़बूत उपाय साबित हुआ है। - यह कानून स्वतंत्र भारत मे पारित सबसे सशक्त और प्रगतिशील कानूनों में से एक है। - भ्रष्टाचार से मुकाबले के लिये एक कारगर उपाय होने के बावजूद यह कानून कई समस्याओं और चुनौतियों का सामना कर रहा है, और इस कानून की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिये इन समस्याओं और चुनौतियों को जल्द-से-जल्द संबोधित करना आवश्यक है।
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और तेज को बढानेवाले अमृत को हम विष बना डालते हैं और उसी को पीकर शरीर और आत्मा दोनों का नाश कर डालते हैं ।
पेड़ों के मालिक समझते हैं पहले ही वैसे लेकर पेड़ों को ठेके पर दे देने से उन्हें बड़ा लाभ होता है। अगर यह सच है कि नीरोग रहना दौलत से भी बढ़ कर है तो कहना चाहिये कि इस से उन मालिकों की और देश की हानि ही होती है । अगर उन पेड़ों के नारियलों और उसके दूध का वे लोग, उनके बाल बच्चे और अन्य लोग उपयोग करें तो कई गुना ज्यादा लाभ हो सकता है।
देश से ताड़ी के प्रचार को बंद करने के लिये यही एक कारण काफ़ी है कि उससे एक बहुत ही उपयोगी भोजन का नाश होता है । जनता की भलाई का ख्याल रखनेवाली सरकार इस एक बात पर ही उसकी मनाई कर देगी। लेकिन हमारी सरकार को एक मात्र आमदनी का ही फ़िक्र है। लोगों की चाहे जो हालत हो उन्हें क्या
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और तेज को बढानेवाले अमृत को हम विष बना डालते हैं और उसी को पीकर शरीर और आत्मा दोनों का नाश कर डालते हैं । पेड़ों के मालिक समझते हैं पहले ही वैसे लेकर पेड़ों को ठेके पर दे देने से उन्हें बड़ा लाभ होता है। अगर यह सच है कि नीरोग रहना दौलत से भी बढ़ कर है तो कहना चाहिये कि इस से उन मालिकों की और देश की हानि ही होती है । अगर उन पेड़ों के नारियलों और उसके दूध का वे लोग, उनके बाल बच्चे और अन्य लोग उपयोग करें तो कई गुना ज्यादा लाभ हो सकता है। देश से ताड़ी के प्रचार को बंद करने के लिये यही एक कारण काफ़ी है कि उससे एक बहुत ही उपयोगी भोजन का नाश होता है । जनता की भलाई का ख्याल रखनेवाली सरकार इस एक बात पर ही उसकी मनाई कर देगी। लेकिन हमारी सरकार को एक मात्र आमदनी का ही फ़िक्र है। लोगों की चाहे जो हालत हो उन्हें क्या
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दिल्ली एनसीआर समेत उत्तर हिंदुस्तान में फरवरी के महीने में ही लोगों के पसीने छुड़ा रखे थे। यहां तक कि गर्मी ने अपने 146 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ा था। मार्च के महीने से भी मौसम विभाग का अनुमान था कि लोगों को हीट वेव का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन शनिवार को दिल्ली एनसीआर के लोगों को बारिश की वजह से बड़ी राहत मिली है।
राजधानी के भिन्न-भिन्न हिस्सों में शनिवार सुबह से ही मामूली से अधिक बारिश प्रारम्भ हो गई। जिसके बाद धीरे-धीरे लोगों ने भी मौसम का लुत्फ उठाने के लिए घर से बाहर निकलना प्रारम्भ कर दिया। बहुत से लोग ऐसे भी थे जिन्होंने ज़ी न्यूज़ की टीम से वार्ता की और बताया कि वे काफी समय से गर्मी की वजह से बाहर घूमने निकलने से बच रहे थे।
दिल्ली में मार्च का महीना प्रारम्भ होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब तापमान सामान्य दर्ज किया गया है। अन्यथा मार्च के प्रारम्भ होते ही जो तापमान था वह सामान्य से दो से तीन डिग्री अधिक बना रहता था। दिल्ली में शनिवार का अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तो वहीं न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की संभावना जताई गई है।
दिल्ली में शनिवार को बारिश को लेकर के ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है तो वहीं आने वाली 20 तारीख तक येलो अलर्ट जारी किया है। 20 तारीख को ठंडी हवाओं के चलने की वजह से तापमान गिर कर 28 डिग्री तक पहुंचने की आसार है।
मौसम विभाग ने 18 मार्च से लेकर 20 मार्च तक उत्तर हिंदुस्तान के कई राज्य जैसे जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब ,हरियाणा ,चंडीगढ़, यूपी और राजस्थान में आज मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अतिरिक्त आने वाले 20 तारीख तक मौसम विभाग ने येलो अलर्ट भी जारी किया है। कई राज्य जैसे मध्यप्रदेश में ओलावृष्टि जैसी स्थिति भी देखने को मिली है।
जहां एक तरफ लोग गर्मी से राहत मिलने की वजह से खुश हैं तो वहीं दूसरी तरफ किसानों के लिए यह एक बहुत चुनौतीपूर्ण स्थिति बन चुकी है क्योंकि अधिक तेज बारिश फसलों के लिएनुकसानदायक साबित हो सकता है।
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दिल्ली एनसीआर समेत उत्तर हिंदुस्तान में फरवरी के महीने में ही लोगों के पसीने छुड़ा रखे थे। यहां तक कि गर्मी ने अपने एक सौ छियालीस वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ा था। मार्च के महीने से भी मौसम विभाग का अनुमान था कि लोगों को हीट वेव का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन शनिवार को दिल्ली एनसीआर के लोगों को बारिश की वजह से बड़ी राहत मिली है। राजधानी के भिन्न-भिन्न हिस्सों में शनिवार सुबह से ही मामूली से अधिक बारिश प्रारम्भ हो गई। जिसके बाद धीरे-धीरे लोगों ने भी मौसम का लुत्फ उठाने के लिए घर से बाहर निकलना प्रारम्भ कर दिया। बहुत से लोग ऐसे भी थे जिन्होंने ज़ी न्यूज़ की टीम से वार्ता की और बताया कि वे काफी समय से गर्मी की वजह से बाहर घूमने निकलने से बच रहे थे। दिल्ली में मार्च का महीना प्रारम्भ होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब तापमान सामान्य दर्ज किया गया है। अन्यथा मार्च के प्रारम्भ होते ही जो तापमान था वह सामान्य से दो से तीन डिग्री अधिक बना रहता था। दिल्ली में शनिवार का अधिकतम तापमान उनतीस डिग्री सेल्सियस तो वहीं न्यूनतम तापमान सोलह डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की संभावना जताई गई है। दिल्ली में शनिवार को बारिश को लेकर के ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है तो वहीं आने वाली बीस तारीख तक येलो अलर्ट जारी किया है। बीस तारीख को ठंडी हवाओं के चलने की वजह से तापमान गिर कर अट्ठाईस डिग्री तक पहुंचने की आसार है। मौसम विभाग ने अट्ठारह मार्च से लेकर बीस मार्च तक उत्तर हिंदुस्तान के कई राज्य जैसे जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब ,हरियाणा ,चंडीगढ़, यूपी और राजस्थान में आज मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अतिरिक्त आने वाले बीस तारीख तक मौसम विभाग ने येलो अलर्ट भी जारी किया है। कई राज्य जैसे मध्यप्रदेश में ओलावृष्टि जैसी स्थिति भी देखने को मिली है। जहां एक तरफ लोग गर्मी से राहत मिलने की वजह से खुश हैं तो वहीं दूसरी तरफ किसानों के लिए यह एक बहुत चुनौतीपूर्ण स्थिति बन चुकी है क्योंकि अधिक तेज बारिश फसलों के लिएनुकसानदायक साबित हो सकता है।
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Bigg Boss 16: बिग बॉस के घर में शिव ठाकरे नए कैप्टन बन गए हैं। कैप्टेंसी डांस में शिव, अब्दु रोजिक और एमसी स्टेन के बीच टक्कर हुई। लेकिन इसी टास्क के दौरान शिव ने प्रियंका चाहर चौधरी के साथ डांस भी किया।
Bigg Boss 16: कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो 'बिग बॉस' (Bigg Boss) के हर सीजन में टीवी जगत के कुछ कलाकार नजर आते हैं, जो अपनी रियल पर्सनैलिटी से फैंस को हैरान कर देते हैं। इस शो में कब कौन किसका दुश्मन बन जाए और कब किसी में दोस्ती हो जाए। यह कोई नहीं जानता। इस शो का सीजन 16 चल रहा है, जिसमें प्रियंका चाहर चौधरी (Priyanka Chahar Choudhary) और शिव ठाकरे (Shiv Thakare) घर के मजबूत कंटेस्टेंट हैं। दोनों के बीच हमेशा 36 का आंकड़ा देखने को मिलता है। घर के हर मुद्दे पर दोनों के बीच झगड़ा हुआ है। लेकिन बीते एपिसोड में दोनों के बीच कुछ और ही देखने मिला। दोनों घर में रोमांटिक डांस करते नजर आए, जिसे देख बाकी कंटेस्टेंट्स हैरान रह गए।
दरअसल, बिग बॉस के बीते एपिसोड में कैप्टेंसी टास्क हुआ, जिसमें शिव ठाकरे विनर साबित हुए हैं और अब शिव बिग बॉस के नए कैप्टन बन गए हैं। कैप्टेंसी टास्क के दौरान घर में जनता की एंट्री ली और टास्क में पूरा सहयोग दिया। इसी दौरान कंटेस्टेंट्स जनता को एंटरटेन करते हुए नजर आए थे, जिसमें सुंबुल ने डांस किया। वहीं, शिव ठाकरे भी डांस करने के लिए आगे आए। लेकिन वह अपने साथ प्रियंका चाहर चौधरी को भी खींच लाए। शिव का यह कदम देखकर पहले तो प्रियंका भी हैरान रह गईं लेकिन फिर दोनों ने बाहों में बाहें डालकर डांस किया। इस दौरान घरवालें भी तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं पाए थे।
बिग बॉस के घर में शिव ठाकरे और प्रियंका चाहर चौधरी के डांस के बाद बाकी कंटेस्टेंट्स भी इस मोमेंट पर अपनी प्रतिक्रिया देने से खुद को रोक नहीं पाए। श्रीजिता डे ने शिव ठाकरे से कहा कि तुम्हें तो मैं बाद में बताती हूं। वहीं, साजिद खान इस पूरे सीन पर दोनों के डांस की असली वजह बताते हुए नजर आए। साजिद ने कहा कि प्रियंका ने जानबूझकर शिव के साथ डांस किया ताकि इस हफ्ते अगर उसकी मंडली से कोई बाहर होता है तो वह शिव को नया दोस्त बना सके।
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Bigg Boss सोलह: बिग बॉस के घर में शिव ठाकरे नए कैप्टन बन गए हैं। कैप्टेंसी डांस में शिव, अब्दु रोजिक और एमसी स्टेन के बीच टक्कर हुई। लेकिन इसी टास्क के दौरान शिव ने प्रियंका चाहर चौधरी के साथ डांस भी किया। Bigg Boss सोलह: कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो 'बिग बॉस' के हर सीजन में टीवी जगत के कुछ कलाकार नजर आते हैं, जो अपनी रियल पर्सनैलिटी से फैंस को हैरान कर देते हैं। इस शो में कब कौन किसका दुश्मन बन जाए और कब किसी में दोस्ती हो जाए। यह कोई नहीं जानता। इस शो का सीजन सोलह चल रहा है, जिसमें प्रियंका चाहर चौधरी और शिव ठाकरे घर के मजबूत कंटेस्टेंट हैं। दोनों के बीच हमेशा छत्तीस का आंकड़ा देखने को मिलता है। घर के हर मुद्दे पर दोनों के बीच झगड़ा हुआ है। लेकिन बीते एपिसोड में दोनों के बीच कुछ और ही देखने मिला। दोनों घर में रोमांटिक डांस करते नजर आए, जिसे देख बाकी कंटेस्टेंट्स हैरान रह गए। दरअसल, बिग बॉस के बीते एपिसोड में कैप्टेंसी टास्क हुआ, जिसमें शिव ठाकरे विनर साबित हुए हैं और अब शिव बिग बॉस के नए कैप्टन बन गए हैं। कैप्टेंसी टास्क के दौरान घर में जनता की एंट्री ली और टास्क में पूरा सहयोग दिया। इसी दौरान कंटेस्टेंट्स जनता को एंटरटेन करते हुए नजर आए थे, जिसमें सुंबुल ने डांस किया। वहीं, शिव ठाकरे भी डांस करने के लिए आगे आए। लेकिन वह अपने साथ प्रियंका चाहर चौधरी को भी खींच लाए। शिव का यह कदम देखकर पहले तो प्रियंका भी हैरान रह गईं लेकिन फिर दोनों ने बाहों में बाहें डालकर डांस किया। इस दौरान घरवालें भी तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं पाए थे। बिग बॉस के घर में शिव ठाकरे और प्रियंका चाहर चौधरी के डांस के बाद बाकी कंटेस्टेंट्स भी इस मोमेंट पर अपनी प्रतिक्रिया देने से खुद को रोक नहीं पाए। श्रीजिता डे ने शिव ठाकरे से कहा कि तुम्हें तो मैं बाद में बताती हूं। वहीं, साजिद खान इस पूरे सीन पर दोनों के डांस की असली वजह बताते हुए नजर आए। साजिद ने कहा कि प्रियंका ने जानबूझकर शिव के साथ डांस किया ताकि इस हफ्ते अगर उसकी मंडली से कोई बाहर होता है तो वह शिव को नया दोस्त बना सके। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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Maharashtra: स्कॉर्पियो कार के मालिक मनसुख हिरेन ने अपनी कार के चोरी होने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। इस कार के मालिक ने बताया था कि 17 फरवरी को उनकी कार का स्टीयरिंग जाम हो गया था जिसको उन्होंने आइरोली मुलंद पुल के पास खड़ा कर दिया था। वह तब एक पारिवारिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे थे।
नई दिल्ली। 25 फरवरी की शाम मुंबई स्थित मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास एक स्कॉर्पियो कार खड़ा पाया गया था। इस गाड़ी को संदिग्ठ परिस्थिति में पाकर जब पुलिस ने इसकी जांच की थी तो उसमें जिलेटिन की छड़ें रखी हुई थी। इसके बाद यहां हाहाकार मच गया था। पुलिस ने इस संदिग्ध गाड़ी के मालिक मनसुख हिरेन से पूछताछ की थी तो उनकी तरफ से गाड़ी चोरी होने की बात बताई गई थी। इस मामले पर पुलिस जांच जारी थी। इसी बीच खबर आ रही है कि उस गाड़ी के मालिक मनसुख हिरन का आज शव बरामद किया गया है।
इससे पहले स्कॉर्पियो कार के मालिक मनसुख हिरेन ने अपनी कार के चोरी होने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। इस कार के मालिक ने बताया था कि 17 फरवरी को उनकी कार का स्टीयरिंग जाम हो गया था जिसको उन्होंने आइरोली मुलंद पुल के पास खड़ा कर दिया था। वह तब एक पारिवारिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे थे। इसके बाद यह कार मुकेश अंबानी के घर के पास 25 फरवरी को मिली जिसमें जिलेटिन की छड़ें रखी हुई थीं। आज उसी मनसुख हिरेन का शव रहस्यमय परिस्थितियों में बरामद किया गया है।
मनसुख हिरेन के बारे में यह जानकारी थी कि वह गुरुवार को ऑटो से किसी से मिलने निकले हुए थे। ऐसे में अब मनसुख हिरेन का शव बरामद होने के बाद से ही पूरा मामला संदेहास्पद हो गया है। मनसुख हिरेन की संदिग्ध मौत के बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विधानसभा में वह यह बात उठा चुके थे और उन्होंने मांग की थी कि मुंबई पुलिस को मनसुख हिरेन को पूरी सुरक्षा मुहैया कराया जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने इस बात की भी मांग की कि इस मामले की जांच अब एनआईए को सौंपी जानी चाहिए।
Chronology को समझों !
मुम्बई में अँटेलिया के बाहर संदिग्ध गाड़ी के मामले की तारें काफ़ी पेचीदा और कई सारें गंभीर सवाल खड़े करनेवाली है !
वहीं इस मामले पर बोलते हुए महाराष्ट्र विधानसभा में गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि कार के मालिक सैम मटन थे जिन्होंने अपने इंटीरियर के रखरखाव के लिए इसे मनसुख हिरेन को दिया था। जब सैम ने इसके लिए भुगतान नहीं किया तो हिरेन ने कार को अपनी हिरासत में रखा था।
मुंबई के गामदेवी पुलिस स्टेशन की सीमा में गुरुवार शाम कार्मिकेल रोड पर एक संदिग्ध वाहन मिला। वाहन को संदिग्ध हालत में देखने के बाद आसपास के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। जिसके बाद बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड के साथ पुलिस मौके पर पहुंची और उसने एरिया की सघन जांच की। इस जांच में पुलिस को एक संदिग्ध वाहन के अंदर से जिलेटिन कीछड़े मिली हैं। बता दें कि जिलेटिन एक प्रकार का विस्फोटक होता है। हालांकि यह अभी असेंबल नहीं किया गया था। बता दें कि यह जिलेटिन जिस स्थान से मिला है, उसके करीब ही उद्योगपति मुकेश अंबानी का घर है। इस घटना के बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर मुकेश अंबानी के घर के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बताया जा रहा है कि, संदिग्ध कार से 20 जिलेटिन छड़ें मिली हैं।
पुलिस के मुताबिक प्राथमिक तौर पर इस मामले से पता चल रहा है कि इस तरह का कार्य धमकी देने के लिए किया गया है। जानकारी के मुताबिक मौके से एक पत्र भी मिला है। बम निरोधक दस्ता की टीम ने पहले कार के अंदर से विस्फोटक पदार्थ को सुरक्षित बाहर निकाला गया है और गाड़ी को पुलिस ने कब्जे में लिया है।
वहीं इस घटना को लेकर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि मुंबई में मुकेश अंबानी के आवास के पास जिलेटिन की एक कार मिली है। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच पूरे मामले की जांच कर रही है।
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Maharashtra: स्कॉर्पियो कार के मालिक मनसुख हिरेन ने अपनी कार के चोरी होने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। इस कार के मालिक ने बताया था कि सत्रह फरवरी को उनकी कार का स्टीयरिंग जाम हो गया था जिसको उन्होंने आइरोली मुलंद पुल के पास खड़ा कर दिया था। वह तब एक पारिवारिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे थे। नई दिल्ली। पच्चीस फरवरी की शाम मुंबई स्थित मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास एक स्कॉर्पियो कार खड़ा पाया गया था। इस गाड़ी को संदिग्ठ परिस्थिति में पाकर जब पुलिस ने इसकी जांच की थी तो उसमें जिलेटिन की छड़ें रखी हुई थी। इसके बाद यहां हाहाकार मच गया था। पुलिस ने इस संदिग्ध गाड़ी के मालिक मनसुख हिरेन से पूछताछ की थी तो उनकी तरफ से गाड़ी चोरी होने की बात बताई गई थी। इस मामले पर पुलिस जांच जारी थी। इसी बीच खबर आ रही है कि उस गाड़ी के मालिक मनसुख हिरन का आज शव बरामद किया गया है। इससे पहले स्कॉर्पियो कार के मालिक मनसुख हिरेन ने अपनी कार के चोरी होने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। इस कार के मालिक ने बताया था कि सत्रह फरवरी को उनकी कार का स्टीयरिंग जाम हो गया था जिसको उन्होंने आइरोली मुलंद पुल के पास खड़ा कर दिया था। वह तब एक पारिवारिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे थे। इसके बाद यह कार मुकेश अंबानी के घर के पास पच्चीस फरवरी को मिली जिसमें जिलेटिन की छड़ें रखी हुई थीं। आज उसी मनसुख हिरेन का शव रहस्यमय परिस्थितियों में बरामद किया गया है। मनसुख हिरेन के बारे में यह जानकारी थी कि वह गुरुवार को ऑटो से किसी से मिलने निकले हुए थे। ऐसे में अब मनसुख हिरेन का शव बरामद होने के बाद से ही पूरा मामला संदेहास्पद हो गया है। मनसुख हिरेन की संदिग्ध मौत के बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विधानसभा में वह यह बात उठा चुके थे और उन्होंने मांग की थी कि मुंबई पुलिस को मनसुख हिरेन को पूरी सुरक्षा मुहैया कराया जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने इस बात की भी मांग की कि इस मामले की जांच अब एनआईए को सौंपी जानी चाहिए। Chronology को समझों ! मुम्बई में अँटेलिया के बाहर संदिग्ध गाड़ी के मामले की तारें काफ़ी पेचीदा और कई सारें गंभीर सवाल खड़े करनेवाली है ! वहीं इस मामले पर बोलते हुए महाराष्ट्र विधानसभा में गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि कार के मालिक सैम मटन थे जिन्होंने अपने इंटीरियर के रखरखाव के लिए इसे मनसुख हिरेन को दिया था। जब सैम ने इसके लिए भुगतान नहीं किया तो हिरेन ने कार को अपनी हिरासत में रखा था। मुंबई के गामदेवी पुलिस स्टेशन की सीमा में गुरुवार शाम कार्मिकेल रोड पर एक संदिग्ध वाहन मिला। वाहन को संदिग्ध हालत में देखने के बाद आसपास के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। जिसके बाद बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड के साथ पुलिस मौके पर पहुंची और उसने एरिया की सघन जांच की। इस जांच में पुलिस को एक संदिग्ध वाहन के अंदर से जिलेटिन कीछड़े मिली हैं। बता दें कि जिलेटिन एक प्रकार का विस्फोटक होता है। हालांकि यह अभी असेंबल नहीं किया गया था। बता दें कि यह जिलेटिन जिस स्थान से मिला है, उसके करीब ही उद्योगपति मुकेश अंबानी का घर है। इस घटना के बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर मुकेश अंबानी के घर के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बताया जा रहा है कि, संदिग्ध कार से बीस जिलेटिन छड़ें मिली हैं। पुलिस के मुताबिक प्राथमिक तौर पर इस मामले से पता चल रहा है कि इस तरह का कार्य धमकी देने के लिए किया गया है। जानकारी के मुताबिक मौके से एक पत्र भी मिला है। बम निरोधक दस्ता की टीम ने पहले कार के अंदर से विस्फोटक पदार्थ को सुरक्षित बाहर निकाला गया है और गाड़ी को पुलिस ने कब्जे में लिया है। वहीं इस घटना को लेकर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि मुंबई में मुकेश अंबानी के आवास के पास जिलेटिन की एक कार मिली है। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच पूरे मामले की जांच कर रही है।
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जुलाई महीने के दौरान वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई क्योंकि यात्री वाहन उद्योग की मात्रात्मक बिक्री को ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों से दमदार ऑर्डर बुक और पूछताछ/बुकिंग में तेजी से बल मिला। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की घोषणा से भी मांग को रफ्तार मिल सकती है। महीने के दौरान वाहनों की बिक्री को वृहत अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख संकेतक माना जाता है।
यात्री वाहन बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजूकी ने इस साल जुलाई में कुल 202,462 वाहनों की बिक्री की जबकि एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने कुल 1,08,064 वाहनों की बिक्री की थी। इस प्रकार महीने के दौरान कंपनी की कुल बिक्री में 50 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
घरेलू बाजार में नेक्सन, हैरियर और सफारी समेत विभिन्न मॉडलों की बिक्री करने वाली टाटा मोटर्स ने 54,119 वाहनों की बिक्री की, जो पूर्ववर्ती वर्ष के मुकाबले 19 प्रतिशत की वृद्घि है।
इस सेक्टर पर नजर रख रहे विश्लेषकों का कहना है कि उन्हें दूसरी छमाही में वाहन बिक्री मजबूत रहने की संभावना है। मजबूत ऑर्डर बक और शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में पूछताछ/बुकिंग में तेजी आने से यात्री वाहन उद्योग की बिक्री में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। इसके अलावा, सरकारी कर्मियों के लिए पारिश्रमिक में सुधार से भी मांग को मजबूती मिल सकती है। एमके का कहना है कि दोपहिया वाहनों के लिए उद्योग की बिक्री तिमाही आधार पर बेहतर रहने की संभावना है, लेकिन 2019 के स्तरों के मुकाबले यह कमजोर रहेगी, क्योंकि कम आय वर्ग श्रेणियों के लिए मांग सुस्त है।
जुलाई महीने के दौरान वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई क्योंकि यात्री वाहन उद्योग की मात्रात्मक बिक्री को ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों से दमदार ऑर्डर बुक और पूछताछ/बुकिंग में तेजी से बल मिला। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की घोषणा से भी मांग को रफ्तार मिल सकती है। महीने के दौरान वाहनों की बिक्री को वृहत अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख संकेतक माना जाता है।
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जुलाई महीने के दौरान वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई क्योंकि यात्री वाहन उद्योग की मात्रात्मक बिक्री को ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों से दमदार ऑर्डर बुक और पूछताछ/बुकिंग में तेजी से बल मिला। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की घोषणा से भी मांग को रफ्तार मिल सकती है। महीने के दौरान वाहनों की बिक्री को वृहत अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख संकेतक माना जाता है। यात्री वाहन बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजूकी ने इस साल जुलाई में कुल दो सौ दो,चार सौ बासठ वाहनों की बिक्री की जबकि एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने कुल एक,आठ,चौंसठ वाहनों की बिक्री की थी। इस प्रकार महीने के दौरान कंपनी की कुल बिक्री में पचास फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। घरेलू बाजार में नेक्सन, हैरियर और सफारी समेत विभिन्न मॉडलों की बिक्री करने वाली टाटा मोटर्स ने चौवन,एक सौ उन्नीस वाहनों की बिक्री की, जो पूर्ववर्ती वर्ष के मुकाबले उन्नीस प्रतिशत की वृद्घि है। इस सेक्टर पर नजर रख रहे विश्लेषकों का कहना है कि उन्हें दूसरी छमाही में वाहन बिक्री मजबूत रहने की संभावना है। मजबूत ऑर्डर बक और शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में पूछताछ/बुकिंग में तेजी आने से यात्री वाहन उद्योग की बिक्री में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। इसके अलावा, सरकारी कर्मियों के लिए पारिश्रमिक में सुधार से भी मांग को मजबूती मिल सकती है। एमके का कहना है कि दोपहिया वाहनों के लिए उद्योग की बिक्री तिमाही आधार पर बेहतर रहने की संभावना है, लेकिन दो हज़ार उन्नीस के स्तरों के मुकाबले यह कमजोर रहेगी, क्योंकि कम आय वर्ग श्रेणियों के लिए मांग सुस्त है। जुलाई महीने के दौरान वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई क्योंकि यात्री वाहन उद्योग की मात्रात्मक बिक्री को ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों से दमदार ऑर्डर बुक और पूछताछ/बुकिंग में तेजी से बल मिला। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की घोषणा से भी मांग को रफ्तार मिल सकती है। महीने के दौरान वाहनों की बिक्री को वृहत अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख संकेतक माना जाता है।
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RRB NTPC Group D BPSC BSSC Inter bpssc daroga Recruitment Exams : बिहार के लाखों छात्रों को प्रतियोगिता परीक्षा के लिए इंतजार करना पड़ेगा। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को उम्मीद थी कि नए साल में नौकरी मिलेगी, पर कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन के बाद इनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अब कोई भी बड़ी प्रतियोगिता परीक्षा दो से तीन महीने के बाद ही संभव प्रतीत होता है। बिहार से लेकर केंद्र की सभी परीक्षाओं में विलंब होगा। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण रिजल्ट के परिणाम आने में देरी हो सकती है। रेलवे की लोको पायलट का रिजल्ट कई बोर्ड का आ चुका था। पर लॉकडाउन की वजह से किसी तरह की ज्वाइनिंग नहीं हो रही है।
बिहार लोक सेवा आयोग ने भी कई परीक्षाएं टाल दी गईं हैं। 3वीं बिहार न्याययिक सेवा के 221 पदों के लिए परीक्षा होनी थी। इसे टाल दिया गया है। वहीं 65वीं की प्रारंभिक परीक्षा हो गई है। इसका रिजल्ट भी आ गया है। आगे की परीक्षा टाल दी गई है। इसके माध्यम से 422 की नियुक्ति होनी है। दूसरी ओर 64वीं मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आना था। अब डेढ़ माह से अधिक बढ़ा दिया गया है। इस परीक्षा के बाद आयोग 256 इंजीनियर की परीक्षा होगी। सहायक अभियंता का रिजल्ट दिया गया है। अभी एक इंजीनियरिंग का रिजल्ट कोर्ट की वजह से फंसा है।
केंद्रीय नौकरी की बात करें तो रेलवे की दो बड़ी परीक्षाएं नए साल में होनी थी। इनमें एक बड़ी परीक्षा स्नातक स्तरीय एनटीपीसी थी। इनमें 34 हजार से ज्यादा पदों के लिए परीक्षा होनी थी। लॉक डाउन की वजह से परीक्षा कब होगी, कोई सूचना नहीं है। इस परीक्षा के लिए एक करोड़ से ज्यादा आवेदन आये हैं। इनमें बिहार के दस लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। वहीं दूसरी बड़ी परीक्षा रेलवे ग्रुप डी की है। इनमें एक लाख से ज्यादा सीटें है। इसके लिए एक करोड़ छात्रों ने आवेदन किया है। इसकी परीक्षा भी एनटीपीसी के बाद होनी थी। वहीं आरबीआई और कुछ अन्य बैंकों ने भी रिक्तियां निकाली थी। इनकी परीक्षा भी नहीं हो सकी। इसके अलावा केन्द्रीय कर्मचारी चयन आयोग की ओर से परीक्षा ली जा रही थी। इसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया। टीयर वन और टीयर टू की परीक्षा ऑनलाइन हो रही थी।
राज्य में दो बड़ी परीक्षाओं में एक बड़ी परीक्षा दारोगा की (प्रारम्भिक परीक्षा) हो गई है। इसका रिजल्ट आ गया है। इसके तहत 2446 पदों पर नियुक्ति होनी है। मुख्य परीक्षा और शारीरिक परीक्षा होगी। मुख्य परीक्षा जून में निर्धारित है। साल के अंत तक या उससे पहले ही इसकी नियुक्ति हो जाने की संभावना है।
कोविड 19 की वजह से बिहार कर्मचारी चयन आयोग की इंटर स्तरीय मुख्य परीक्षा भी विलंब से होगी। अभी इसमें पीटी में चयनित छात्रों ने आवेदन किया है। इनकी संख्या भी 50 हजार से ज्यादा है। राज्य के विश्वविद्यालयों में लगभग दस हजार व्याख्याताओं की नियुक्ति होने की उम्मीदें थी। यह भी लॉकडाउन की वजह से अटक गया है।
राज्य की बड़ी परीक्षाओं में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा हुई। इसके माध्यम से 35 हजार शिक्षकों का नियोजन विद्यालय में होना है। इसके लिए लगभग ढाई लाख ट्रेंड शिक्षकों ने आवेदन किया है। अभी रिजल्ट का इंतजार हो रहा है।
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RRB NTPC Group D BPSC BSSC Inter bpssc daroga Recruitment Exams : बिहार के लाखों छात्रों को प्रतियोगिता परीक्षा के लिए इंतजार करना पड़ेगा। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को उम्मीद थी कि नए साल में नौकरी मिलेगी, पर कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन के बाद इनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अब कोई भी बड़ी प्रतियोगिता परीक्षा दो से तीन महीने के बाद ही संभव प्रतीत होता है। बिहार से लेकर केंद्र की सभी परीक्षाओं में विलंब होगा। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण रिजल्ट के परिणाम आने में देरी हो सकती है। रेलवे की लोको पायलट का रिजल्ट कई बोर्ड का आ चुका था। पर लॉकडाउन की वजह से किसी तरह की ज्वाइनिंग नहीं हो रही है। बिहार लोक सेवा आयोग ने भी कई परीक्षाएं टाल दी गईं हैं। तीनवीं बिहार न्याययिक सेवा के दो सौ इक्कीस पदों के लिए परीक्षा होनी थी। इसे टाल दिया गया है। वहीं पैंसठवीं की प्रारंभिक परीक्षा हो गई है। इसका रिजल्ट भी आ गया है। आगे की परीक्षा टाल दी गई है। इसके माध्यम से चार सौ बाईस की नियुक्ति होनी है। दूसरी ओर चौंसठवीं मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आना था। अब डेढ़ माह से अधिक बढ़ा दिया गया है। इस परीक्षा के बाद आयोग दो सौ छप्पन इंजीनियर की परीक्षा होगी। सहायक अभियंता का रिजल्ट दिया गया है। अभी एक इंजीनियरिंग का रिजल्ट कोर्ट की वजह से फंसा है। केंद्रीय नौकरी की बात करें तो रेलवे की दो बड़ी परीक्षाएं नए साल में होनी थी। इनमें एक बड़ी परीक्षा स्नातक स्तरीय एनटीपीसी थी। इनमें चौंतीस हजार से ज्यादा पदों के लिए परीक्षा होनी थी। लॉक डाउन की वजह से परीक्षा कब होगी, कोई सूचना नहीं है। इस परीक्षा के लिए एक करोड़ से ज्यादा आवेदन आये हैं। इनमें बिहार के दस लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। वहीं दूसरी बड़ी परीक्षा रेलवे ग्रुप डी की है। इनमें एक लाख से ज्यादा सीटें है। इसके लिए एक करोड़ छात्रों ने आवेदन किया है। इसकी परीक्षा भी एनटीपीसी के बाद होनी थी। वहीं आरबीआई और कुछ अन्य बैंकों ने भी रिक्तियां निकाली थी। इनकी परीक्षा भी नहीं हो सकी। इसके अलावा केन्द्रीय कर्मचारी चयन आयोग की ओर से परीक्षा ली जा रही थी। इसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया। टीयर वन और टीयर टू की परीक्षा ऑनलाइन हो रही थी। राज्य में दो बड़ी परीक्षाओं में एक बड़ी परीक्षा दारोगा की हो गई है। इसका रिजल्ट आ गया है। इसके तहत दो हज़ार चार सौ छियालीस पदों पर नियुक्ति होनी है। मुख्य परीक्षा और शारीरिक परीक्षा होगी। मुख्य परीक्षा जून में निर्धारित है। साल के अंत तक या उससे पहले ही इसकी नियुक्ति हो जाने की संभावना है। कोविड उन्नीस की वजह से बिहार कर्मचारी चयन आयोग की इंटर स्तरीय मुख्य परीक्षा भी विलंब से होगी। अभी इसमें पीटी में चयनित छात्रों ने आवेदन किया है। इनकी संख्या भी पचास हजार से ज्यादा है। राज्य के विश्वविद्यालयों में लगभग दस हजार व्याख्याताओं की नियुक्ति होने की उम्मीदें थी। यह भी लॉकडाउन की वजह से अटक गया है। राज्य की बड़ी परीक्षाओं में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा हुई। इसके माध्यम से पैंतीस हजार शिक्षकों का नियोजन विद्यालय में होना है। इसके लिए लगभग ढाई लाख ट्रेंड शिक्षकों ने आवेदन किया है। अभी रिजल्ट का इंतजार हो रहा है।
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भिलाई। अवैध प्लाटिंग को लेकर एक बार फिर भिलाई निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल जाने वाले रास्ते पर लगभग 2 एकड़ भूखंड पर अवैध प्लाटिंग की नियत से पोल लगाए गए थे, मुरूम व गिट्टी से मार्ग संरचना तैयार किया जा रहा था। इसके अलावा प्राकृतिक नाला जो गुजरी हुई है उसमें पाइप डालकर डाइवर्ट करने का प्रयास भी अवैध प्लाटिंग करने वालों के द्वारा किया जा रहा था। जैसे ही इसकी सूचना निगम को मिली निगम के अधिकारियों ने अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई करते हुए चार डंपर मुरूम, एक डंपर गिट्टी को जप्त किया। इसके साथ ही प्राकृतिक रूप से गुजरे हुए नाला में डायवर्ट के लिए डाले गए पाइप को हटाया और मूल स्वरूप में तब्दील किया। अवैध प्लाटिंग के लिए लगाए गए पोल को भी हटाया गया।
गौरतलब है कि निगम आयुक्त रोहित व्यास ने अवैध प्लाटिंग, अवैध अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं इसी तारतम्य में अवैध प्लाटिंग को लेकर कार्रवाई की गई। वैशाली नगर की जोन आयुक्त येशा लहरें ने जानकारी देते हुए बताया कि अवैध प्लाटिंग पर कचांदूर जाने वाले मार्ग पर खसरा नंबर 174 की लगभग 2 एकड़ जमीन पर हो रहे अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई की गई है तथा बंटाकन की जानकारी तहसील कार्यालय से मिलने पर इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की भी कार्यवाही की जाएगी। कार्रवाई का सहायक कलेक्टर लक्ष्मण तिवारी ने भी निरीक्षण कर जायजा लिया और उपस्थित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त तहसीलदार क्षमा यदु, सहायक राजस्व अधिकारी जगदीश तिवारी तथा तोड़फोड़ दस्ता सहित निगम के अन्य अधिकारी/कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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भिलाई। अवैध प्लाटिंग को लेकर एक बार फिर भिलाई निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल जाने वाले रास्ते पर लगभग दो एकड़ भूखंड पर अवैध प्लाटिंग की नियत से पोल लगाए गए थे, मुरूम व गिट्टी से मार्ग संरचना तैयार किया जा रहा था। इसके अलावा प्राकृतिक नाला जो गुजरी हुई है उसमें पाइप डालकर डाइवर्ट करने का प्रयास भी अवैध प्लाटिंग करने वालों के द्वारा किया जा रहा था। जैसे ही इसकी सूचना निगम को मिली निगम के अधिकारियों ने अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई करते हुए चार डंपर मुरूम, एक डंपर गिट्टी को जप्त किया। इसके साथ ही प्राकृतिक रूप से गुजरे हुए नाला में डायवर्ट के लिए डाले गए पाइप को हटाया और मूल स्वरूप में तब्दील किया। अवैध प्लाटिंग के लिए लगाए गए पोल को भी हटाया गया। गौरतलब है कि निगम आयुक्त रोहित व्यास ने अवैध प्लाटिंग, अवैध अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं इसी तारतम्य में अवैध प्लाटिंग को लेकर कार्रवाई की गई। वैशाली नगर की जोन आयुक्त येशा लहरें ने जानकारी देते हुए बताया कि अवैध प्लाटिंग पर कचांदूर जाने वाले मार्ग पर खसरा नंबर एक सौ चौहत्तर की लगभग दो एकड़ जमीन पर हो रहे अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई की गई है तथा बंटाकन की जानकारी तहसील कार्यालय से मिलने पर इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की भी कार्यवाही की जाएगी। कार्रवाई का सहायक कलेक्टर लक्ष्मण तिवारी ने भी निरीक्षण कर जायजा लिया और उपस्थित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त तहसीलदार क्षमा यदु, सहायक राजस्व अधिकारी जगदीश तिवारी तथा तोड़फोड़ दस्ता सहित निगम के अन्य अधिकारी/कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस के कहर के चलते पूरी दुनिया थम सी गई है। सिनेमाहाल से लेकर क्रिकेट के मैदान रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसी जगहों पर भी कोई देखने को नहीं मिलता। क्रिकेट के मैच अनिश्चितकाल के लिए थम चुके हैं। इस बीच क्रिकेट जगत के कई दिग्गज खिलाड़ियों के करियर पर सवाल खड़ा हो गया है। ये सभी खिलाड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट में आखिरी झलक दिखाना चाहते थे, पर कोरोना के कारण इनकी उम्मीदों पर पानी फिर चुका है। इस लिस्ट में पहला नाम पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी का है। उनके अलावा साउथ अफ्रीका के एबी डिविलियर्स और वेस्टइंडीज के क्रिस गेल जैसे खिलाड़ियों का करियर भी अधर में लटक चुका है। इस महामारी के कारण इंडियन प्रीमियर लीग को 2 बार टाला जा चुका है। ऑस्ट्रेलिया में होने वाले वर्ल्डकप पर भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं। इस बीच धोनी, मलिंगा और गेल जैसे खिलाड़ियों का करियर अधर में लटक गया है।
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस के कहर के चलते पूरी दुनिया थम सी गई है। सिनेमाहाल से लेकर क्रिकेट के मैदान रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसी जगहों पर भी कोई देखने को नहीं मिलता। क्रिकेट के मैच अनिश्चितकाल के लिए थम चुके हैं। इस बीच क्रिकेट जगत के कई दिग्गज खिलाड़ियों के करियर पर सवाल खड़ा हो गया है। ये सभी खिलाड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट में आखिरी झलक दिखाना चाहते थे, पर कोरोना के कारण इनकी उम्मीदों पर पानी फिर चुका है। इस लिस्ट में पहला नाम पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी का है। उनके अलावा साउथ अफ्रीका के एबी डिविलियर्स और वेस्टइंडीज के क्रिस गेल जैसे खिलाड़ियों का करियर भी अधर में लटक चुका है। इस महामारी के कारण इंडियन प्रीमियर लीग को दो बार टाला जा चुका है। ऑस्ट्रेलिया में होने वाले वर्ल्डकप पर भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं। इस बीच धोनी, मलिंगा और गेल जैसे खिलाड़ियों का करियर अधर में लटक गया है।
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पुंछ। शिवखोड़ी मंदिर समिति की तरफ से दो बाद शनिवार रात्रि को नगर स्थित प्राचीन श्री दशनामी अखाड़ा मंदिर में आठवें मां चंडी जागरण का आयोजन किया गया। इसमें जिले भर से हजारों श्रद्धालुओं, महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने मां के चरणों में ध्यान लगाया।
इस दौरान जम्मू से आए कई भजन गायकों ने मां के नाम का गुणगान करते हुए श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। उधर मंदिर में रात भर लंगर लगाया गया। इसमें मंदिर समिति के सदस्यों लोकेश आनंद, सुरजीत सिंह, रोनिक शर्मा, दशनामी अखाड़ा मंदिर समिति प्रधान बसंतराम शर्मा, रोहित कुमार और बलराम शर्मा की अगुवाई में भगवान गणपति की आराधना करते हुए जागरण का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपायुक्त इंद्रजीत रहे। भजन गायकों में मास्टर आशीष, हैपि राही, कुमार विक्की, कुमार गोरव, विक्की मेहरा आदि ने मां चंडी की महिमा का ुगुणगान करते हुए मचैल यात्रा का इस प्रकार बखान किया कि श्रद्धालु झूमते रहे।
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पुंछ। शिवखोड़ी मंदिर समिति की तरफ से दो बाद शनिवार रात्रि को नगर स्थित प्राचीन श्री दशनामी अखाड़ा मंदिर में आठवें मां चंडी जागरण का आयोजन किया गया। इसमें जिले भर से हजारों श्रद्धालुओं, महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने मां के चरणों में ध्यान लगाया। इस दौरान जम्मू से आए कई भजन गायकों ने मां के नाम का गुणगान करते हुए श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। उधर मंदिर में रात भर लंगर लगाया गया। इसमें मंदिर समिति के सदस्यों लोकेश आनंद, सुरजीत सिंह, रोनिक शर्मा, दशनामी अखाड़ा मंदिर समिति प्रधान बसंतराम शर्मा, रोहित कुमार और बलराम शर्मा की अगुवाई में भगवान गणपति की आराधना करते हुए जागरण का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपायुक्त इंद्रजीत रहे। भजन गायकों में मास्टर आशीष, हैपि राही, कुमार विक्की, कुमार गोरव, विक्की मेहरा आदि ने मां चंडी की महिमा का ुगुणगान करते हुए मचैल यात्रा का इस प्रकार बखान किया कि श्रद्धालु झूमते रहे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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सनी देओल के बड़े बेटे करण देओल ने 18 जून को अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड द्रिशा आचार्या से शादी कर ली. द्रिशा के बारे में तो आपने अभी तक बहुत कुछ पढ़ा होगा, लेकिन आज हम बात करेंगे द्रिशा की मां चीमू आचार्या की.
चीमू आचार्या फिल्ममेकर बिमल रॉय की पोती रिंकू भट्टाचार्या की बेटी हैं. वह दुबई रहती हैं.
चीमू इवेंट मैनेजमेंट कंपनी 'L'Atitude'को बहुत समय से चला रही हैं. इसके साथ ही उनकी एक इंटीरियर डिजाइन कंपनी डिजाइन स्टूडियो भी है.
चीमू ने दुबई के बिजनेसमैन सुमित आचार्या से शादी की है. सुमित BCD ट्रेवल एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. सुमित और चीमू का एक बेटा रोहन भी है.
इंस्टाग्राम पर चीमू का पब्लिक अकाउंट है, जिसमें वह अपने डिजाइनंस की तस्वीरें शेयर करती हैं. उनके 1 लाख फॉलोअर्स भी हैं.
द्रिशा भी अपने पापा की कंपनी में ही बतौर प्रोग्राम मैनेजर काम करती हैं. वह बचपन से ही दुबई में ही रही हैं.
द्रिशा ने दुबई के जुमैराह कॉलेज से पढ़ाई की है. इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा चली गईं थीं.
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सनी देओल के बड़े बेटे करण देओल ने अट्ठारह जून को अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड द्रिशा आचार्या से शादी कर ली. द्रिशा के बारे में तो आपने अभी तक बहुत कुछ पढ़ा होगा, लेकिन आज हम बात करेंगे द्रिशा की मां चीमू आचार्या की. चीमू आचार्या फिल्ममेकर बिमल रॉय की पोती रिंकू भट्टाचार्या की बेटी हैं. वह दुबई रहती हैं. चीमू इवेंट मैनेजमेंट कंपनी 'L'Atitude'को बहुत समय से चला रही हैं. इसके साथ ही उनकी एक इंटीरियर डिजाइन कंपनी डिजाइन स्टूडियो भी है. चीमू ने दुबई के बिजनेसमैन सुमित आचार्या से शादी की है. सुमित BCD ट्रेवल एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. सुमित और चीमू का एक बेटा रोहन भी है. इंस्टाग्राम पर चीमू का पब्लिक अकाउंट है, जिसमें वह अपने डिजाइनंस की तस्वीरें शेयर करती हैं. उनके एक लाख फॉलोअर्स भी हैं. द्रिशा भी अपने पापा की कंपनी में ही बतौर प्रोग्राम मैनेजर काम करती हैं. वह बचपन से ही दुबई में ही रही हैं. द्रिशा ने दुबई के जुमैराह कॉलेज से पढ़ाई की है. इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा चली गईं थीं.
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भारत ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के टूर्नामेंटों में दक्षिण अफ्रीका पर लगातार छठी जीत दर्ज की है। विश्व की दूसरे नंबर की टीम भारत ने इंग्लैंड में चल रहे आईसीसी विश्वकप (ICC World Cup 2019) में बुधवार को दक्षिण अफ्रीका को एकतरफा अंदाज़ में छह विकेट से पराजित किया। दक्षिण अफ्रीका को नौ विकेट पर 227 रन पर रोकने के बाद भारत ने 47. 3 ओवर में चार विकेट पर 230 रन बनाकर मैच जीत लिया।
भारत ने इस तरह 2012 से अब तक आईसीसी टूर्नामेंटों में दक्षिण अफ्रीका को लगातार छह बार हरा दिया है। भारत ने 2012 के टी-20 विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका पर एक रन से, 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी में 26 रन से, 2014 के टी-20 विश्वकप में छह विकेट से, 2015 के वनडे विश्वकप में 130 रन से, 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी में 8 विकेट से और 2019 के विश्वकप में छह विकेट से जीत दर्ज की।
दक्षिण अफ्रीका को इस टूर्नामेंट में लगातार तीसरी हार का सामना करना पड़ा। इसी के साथ वनडे विश्वकप में यह पहला मौका है जब दक्षिण अफ्रीका ने लगातार तीन मैच गंवाए। दक्षिण अफ्रीका को पहले मुकाबले में इंग्लैंड ने, दूसरे मुकाबले में बंगलादेश ने और तीसरे मुकाबले में भारत ने पराजित किया। लगातार तीन पराजय से दक्षिण अफ्रीका का सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना टूटता दिखाई दे रहा है और वापसी करने के लिए उसे अगले छह मैचों में चमत्कारिक प्रदर्शन करना होगा।
भारतीय कप्तान विराट कोहली ने विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका को बुधवार को छह विकेट से हराने के साथ ही कप्तान के रूप में अपनी 50वीं जीत हासिल कर ली।
विराट की कप्तान के रूप में 69 मैचों में यह 50वीं जीत है। वह सबसे कम वनडे मैचों में 50 जीत हासिल करने के मामले में वेस्टइंडीज के विवियन रिचर्ड्स को पीछे छोड़कर तीसरे नंबर पर आ गए हैं। रिचर्ड्स ने 70 मैचों में 50वीं जीत हासिल की थी।
दक्षिण अफ्रीका के हैंसी क्रोनिए ने 68 मैचों में और वेस्ट इंडीज के क्लाइव लॉयड तथा ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग ने 63 मैचों में 50वीं जीत हासिल की थी।
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भारत ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के टूर्नामेंटों में दक्षिण अफ्रीका पर लगातार छठी जीत दर्ज की है। विश्व की दूसरे नंबर की टीम भारत ने इंग्लैंड में चल रहे आईसीसी विश्वकप में बुधवार को दक्षिण अफ्रीका को एकतरफा अंदाज़ में छह विकेट से पराजित किया। दक्षिण अफ्रीका को नौ विकेट पर दो सौ सत्ताईस रन पर रोकने के बाद भारत ने सैंतालीस. तीन ओवर में चार विकेट पर दो सौ तीस रन बनाकर मैच जीत लिया। भारत ने इस तरह दो हज़ार बारह से अब तक आईसीसी टूर्नामेंटों में दक्षिण अफ्रीका को लगातार छह बार हरा दिया है। भारत ने दो हज़ार बारह के टी-बीस विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका पर एक रन से, दो हज़ार तेरह की चैंपियंस ट्रॉफी में छब्बीस रन से, दो हज़ार चौदह के टी-बीस विश्वकप में छह विकेट से, दो हज़ार पंद्रह के वनडे विश्वकप में एक सौ तीस रन से, दो हज़ार सत्रह की चैंपियंस ट्रॉफी में आठ विकेट से और दो हज़ार उन्नीस के विश्वकप में छह विकेट से जीत दर्ज की। दक्षिण अफ्रीका को इस टूर्नामेंट में लगातार तीसरी हार का सामना करना पड़ा। इसी के साथ वनडे विश्वकप में यह पहला मौका है जब दक्षिण अफ्रीका ने लगातार तीन मैच गंवाए। दक्षिण अफ्रीका को पहले मुकाबले में इंग्लैंड ने, दूसरे मुकाबले में बंगलादेश ने और तीसरे मुकाबले में भारत ने पराजित किया। लगातार तीन पराजय से दक्षिण अफ्रीका का सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना टूटता दिखाई दे रहा है और वापसी करने के लिए उसे अगले छह मैचों में चमत्कारिक प्रदर्शन करना होगा। भारतीय कप्तान विराट कोहली ने विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका को बुधवार को छह विकेट से हराने के साथ ही कप्तान के रूप में अपनी पचासवीं जीत हासिल कर ली। विराट की कप्तान के रूप में उनहत्तर मैचों में यह पचासवीं जीत है। वह सबसे कम वनडे मैचों में पचास जीत हासिल करने के मामले में वेस्टइंडीज के विवियन रिचर्ड्स को पीछे छोड़कर तीसरे नंबर पर आ गए हैं। रिचर्ड्स ने सत्तर मैचों में पचासवीं जीत हासिल की थी। दक्षिण अफ्रीका के हैंसी क्रोनिए ने अड़सठ मैचों में और वेस्ट इंडीज के क्लाइव लॉयड तथा ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग ने तिरेसठ मैचों में पचासवीं जीत हासिल की थी।
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असली डर किसे कहते है और डर का माहौल क्या होता है ? इसे जानने के लिए वर्तमान समय में श्रीलंका सबसे बेहतर उदाहरण है। श्रीलंका की सत्ता में आते ही राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे साम, दाम, दंड, भेद की नीति का पालन करते हुए खुलेआम अपने विरोधियों का सफाया कर रहे है।
हाल ही में श्रीलंका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में टर्मिनेटर कहे जाने वाले गोटबाया राजपक्षे बहुमतों से जीत हासिल कर राष्ट्रपति बने हैं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी सत्तारूढ़ पार्टी के सजीत प्रेमदास को 13 लाख से अधिक मतों से पराजित किया। चुनाव में उन्हें 52.25 फीसदी वोट मिले तथा उनके प्रतिद्वंदी प्रेमदास को केवल 42 फीसदी वोट मिले। राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक और श्रीलंका के नायक माने जाने वाले गोटबाया राजपक्षे की विराट विजय अपने आप में बहुत कुछ कहती है। उनके विजय में ही अनकही सच्चाई छुपी हुई है। भारत की दृष्टी से भी इसे समझना बेहद जरुरी है और लाभप्रद भी है।
एक दशक पूर्व जब श्रीलंका में लिट्टे का आंतक अपने चरम पर था और उसकी आतंकी गतिविधियां जगजाहिर थी। आतंकी हथियारों के बल पर श्रीलंका के एक बड़े भूभाग पर कब्ज़ा कर अलग देश की मांग कर रहे थे। तब महिंद्रा राजपक्षे ने लिट्टे के खिलाफ आर - पार की जंग का ऐलान कर सैन्य ऑपरेशन शुरू किया। लिट्टे और श्रीलंका के बिच बहुत लम्बे समय तक युद्ध चला। उस समय रक्षा मंत्री थे गोटबाया राजपक्षे। उन्होंने लिट्टे नामक आतंकवाद के समूल नाश का संकल्प लिया और देश के सबसे घातक सैन्य दस्ते का इस्तेमाल कर निर्ममता से आतंकियों का सफाया शुरू किया। बताया जाता है कि इस ऑपरेशन के अंतिम निर्णायक समय पर लगभग 40 हजार आतंकियों का नरसंहार किया गया था। इसके बाद लिट्टे का श्रीलंका की धरती से सम्पूर्ण सफाया हो गया और श्रीलंका आतंकवाद से मुक्त हुआ। आतंकवाद के समूल नाश करने के कारण श्रीलंका में गोटबाया राजपक्षे एक सशक्त लीडर के रूप में उभरे और उन्हें लौहपुरुष माना जाने लगा। तब से ही उन्हें श्रीलंका में टर्मिनेटर कहा जाने लगा। उनका परिवार भी उन्हें टर्मिनेटर ही कहता है। उनकी इस उपलब्धि और सशक्त छवि के चलते श्रीलंकाई राष्ट्रवादी समाज उन्हें उम्मीद भरी नजरों से देखता है और वहीँ दूसरी ओर राष्ट्रविरोधी तत्व उनसे डरे सहमे से रहते है।
भारत में जिस तरह खुलेआम टुकड़े - टुकड़े गैंग, असहिष्णुता गैंग, अवार्ड वापसी गैंग, जिहादी आतंकवादी, अलगाववादी, स्लीपर सेल, अर्बन नक्सली, माओवादी आदि राष्ट्रविरोधी गतिविधियां चलाते है और इसाई मिशनरी धर्मांतरण जैसा देशविरोधी कृत्य करती है। उस तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियां अब श्रीलंका में नहीं चल सकती। राष्ट्रपति बने गोटबाया राजपक्षे की कठोर छवि और रणनीति इतनी प्रभावशाली है कि उनसे कोई बच नहीं सकता। वह किसी के दबाव में आकर काम नहीं करते। प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे और गोटबाया राजपक्षे दोनों ही सगे भाई है। दोनों ही राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक और आक्रामक नेता माने जाते है।
आये दिन भारत में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर हो - हल्ला मचाया जाता है। यहां तक की देश के प्रधानमंत्री तक को गलियां दी जाती है। अभिव्यक्ति की आड़ में जेएनयू जैसे यूनिवर्सिटी में भारत तेरे टुकड़े होंगे, कश्मीर मांगे आजादी, हम ले कर रहेंगे आजादी, कितने अफजल मारोगे हर घर से अफजल निकलेगा, आदि अनेक राष्ट्रविरोधी नारे लगाये जाते है। उन लोगों का मीडिया में महिमा मंडन किया जाता है। मानवाधिकार, एनजीओ एवं अन्य संगठनों का नेक्सस मिलकर देश की चुनी हुई सरकार को टारगेट करता है। और सरकार के साथ ही देश को बदनाम करने के लिए एजेंडे के तहत षड्यंत्रपूर्वक काम करता है। लेकिन याद रखे इस तरह की राष्ट्र विरोधी अभिव्यक्ति की आजादी दुनिया के किसी भी देश में नहीं है और श्रीलंका में तो बिलकुल ही नहीं है। भारत में कुछ ज्यादा ही छुट मिली हुई है इसलिए अराजक तत्व अभिव्यक्ति की आजादी का दुरूपयोग कर रहे है। ऐसे ही हरकते यदि हमारे पड़ोशी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, म्यांमार, और श्रीलंका में की गई होती तो विरोधियों का नामोनिशान मिट जाता। अब समय आ गया है कि भारत सरकार भी इन मामलों को गंभीरता से ले व सख्त कदम उठाये और राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें ताकि भारत की धरती पर सदियों - सदियों तक जिन्ना - जयचंद जैसा कोई गद्दार पैदा न हो।
अभी हाल ही में उद्योगपति राहुल बजाज ने एक कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री अमित शाह से सवाल पुछा कि देश में डर का माहौल है। ये जो डर है उसके बारे में कोई बोलेगा नहीं, माहौल बदलना पड़ेगा। यूपीए शाशन काल में हम किसी को भी गालियां दे सकते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि आपके पूछने के बाद अब कोई नहीं मानेगा की कोई डरता है। कुछ लोगों ने ये हव्वा बनाया है। किसी को भी डरने की जरुरत नहीं है। नरेन्द्र मोदी और हमारी सरकार पर अखबारों व मीडिया ने बहुत कुछ लिखा और बोला है। आज भी धड़ल्ले से लिख रहे है। सबसे ज्यादा यदि किसी के खिलाफ लिखा और बोला गया है तो वह हमारे खिलाफ ही है। जैसा कि आप बोल रहे है तो सरकार माहौल बदलने का प्रयास करेगी। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि किसी को भी डरने की जरुरत नहीं है। सब लोग संसद में भी बोलते है। सभी प्लेटफार्म पर बोलते है और सोशल मीडिया पर भी खुल कर बोलते है।
असली डर किसे कहते है और डर का माहौल क्या होता है ? इसे जानने के लिए वर्तमान समय में श्रीलंका सबसे बेहतर उदाहरण है। श्रीलंका की सत्ता में आते ही राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे साम, दाम, दंड, भेद की नीति का पालन करते हुए खुलेआम अपने विरोधियों का सफाया कर रहे है। उनका या उनकी सरकार का विरोध करने वालों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। विरोधी राजनीतिक पार्टियों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। बताया जाता है कि जो लोग उनके खिलाफ खबरे छापते है, जो उनकी विचारधारा को स्वीकार नहीं करते, वह सभी लोग खतरे में है। जिन्होंने मानवधिकार की आड़ में विदेशी शक्तियों के इशारे पर गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ मुहीम चलाई थी। उन सभी पत्रकारों, मानवधिकार कार्यकर्ताओं, जाँच अधिकारीयों और सेक्युलर का चोला पहने हुए अराजक तत्त्वों की जान खतरे में है। ऐसे डर के माहौल में यह सभी देश छोड़ कर भागना चाहते है लेकिन वहां के एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी किया जा चूका है। ताकि इनमें से कोई भी देश छोड़ कर भाग न सके। वर्तमान समय में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ बोलने का साहस किसी में नहीं है। इसे ही असली डर कहते है और यहीं वास्तविकता में डर का माहौल होता है।
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असली डर किसे कहते है और डर का माहौल क्या होता है ? इसे जानने के लिए वर्तमान समय में श्रीलंका सबसे बेहतर उदाहरण है। श्रीलंका की सत्ता में आते ही राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे साम, दाम, दंड, भेद की नीति का पालन करते हुए खुलेआम अपने विरोधियों का सफाया कर रहे है। हाल ही में श्रीलंका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में टर्मिनेटर कहे जाने वाले गोटबाया राजपक्षे बहुमतों से जीत हासिल कर राष्ट्रपति बने हैं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी सत्तारूढ़ पार्टी के सजीत प्रेमदास को तेरह लाख से अधिक मतों से पराजित किया। चुनाव में उन्हें बावन.पच्चीस फीसदी वोट मिले तथा उनके प्रतिद्वंदी प्रेमदास को केवल बयालीस फीसदी वोट मिले। राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक और श्रीलंका के नायक माने जाने वाले गोटबाया राजपक्षे की विराट विजय अपने आप में बहुत कुछ कहती है। उनके विजय में ही अनकही सच्चाई छुपी हुई है। भारत की दृष्टी से भी इसे समझना बेहद जरुरी है और लाभप्रद भी है। एक दशक पूर्व जब श्रीलंका में लिट्टे का आंतक अपने चरम पर था और उसकी आतंकी गतिविधियां जगजाहिर थी। आतंकी हथियारों के बल पर श्रीलंका के एक बड़े भूभाग पर कब्ज़ा कर अलग देश की मांग कर रहे थे। तब महिंद्रा राजपक्षे ने लिट्टे के खिलाफ आर - पार की जंग का ऐलान कर सैन्य ऑपरेशन शुरू किया। लिट्टे और श्रीलंका के बिच बहुत लम्बे समय तक युद्ध चला। उस समय रक्षा मंत्री थे गोटबाया राजपक्षे। उन्होंने लिट्टे नामक आतंकवाद के समूल नाश का संकल्प लिया और देश के सबसे घातक सैन्य दस्ते का इस्तेमाल कर निर्ममता से आतंकियों का सफाया शुरू किया। बताया जाता है कि इस ऑपरेशन के अंतिम निर्णायक समय पर लगभग चालीस हजार आतंकियों का नरसंहार किया गया था। इसके बाद लिट्टे का श्रीलंका की धरती से सम्पूर्ण सफाया हो गया और श्रीलंका आतंकवाद से मुक्त हुआ। आतंकवाद के समूल नाश करने के कारण श्रीलंका में गोटबाया राजपक्षे एक सशक्त लीडर के रूप में उभरे और उन्हें लौहपुरुष माना जाने लगा। तब से ही उन्हें श्रीलंका में टर्मिनेटर कहा जाने लगा। उनका परिवार भी उन्हें टर्मिनेटर ही कहता है। उनकी इस उपलब्धि और सशक्त छवि के चलते श्रीलंकाई राष्ट्रवादी समाज उन्हें उम्मीद भरी नजरों से देखता है और वहीँ दूसरी ओर राष्ट्रविरोधी तत्व उनसे डरे सहमे से रहते है। भारत में जिस तरह खुलेआम टुकड़े - टुकड़े गैंग, असहिष्णुता गैंग, अवार्ड वापसी गैंग, जिहादी आतंकवादी, अलगाववादी, स्लीपर सेल, अर्बन नक्सली, माओवादी आदि राष्ट्रविरोधी गतिविधियां चलाते है और इसाई मिशनरी धर्मांतरण जैसा देशविरोधी कृत्य करती है। उस तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियां अब श्रीलंका में नहीं चल सकती। राष्ट्रपति बने गोटबाया राजपक्षे की कठोर छवि और रणनीति इतनी प्रभावशाली है कि उनसे कोई बच नहीं सकता। वह किसी के दबाव में आकर काम नहीं करते। प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे और गोटबाया राजपक्षे दोनों ही सगे भाई है। दोनों ही राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक और आक्रामक नेता माने जाते है। आये दिन भारत में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर हो - हल्ला मचाया जाता है। यहां तक की देश के प्रधानमंत्री तक को गलियां दी जाती है। अभिव्यक्ति की आड़ में जेएनयू जैसे यूनिवर्सिटी में भारत तेरे टुकड़े होंगे, कश्मीर मांगे आजादी, हम ले कर रहेंगे आजादी, कितने अफजल मारोगे हर घर से अफजल निकलेगा, आदि अनेक राष्ट्रविरोधी नारे लगाये जाते है। उन लोगों का मीडिया में महिमा मंडन किया जाता है। मानवाधिकार, एनजीओ एवं अन्य संगठनों का नेक्सस मिलकर देश की चुनी हुई सरकार को टारगेट करता है। और सरकार के साथ ही देश को बदनाम करने के लिए एजेंडे के तहत षड्यंत्रपूर्वक काम करता है। लेकिन याद रखे इस तरह की राष्ट्र विरोधी अभिव्यक्ति की आजादी दुनिया के किसी भी देश में नहीं है और श्रीलंका में तो बिलकुल ही नहीं है। भारत में कुछ ज्यादा ही छुट मिली हुई है इसलिए अराजक तत्व अभिव्यक्ति की आजादी का दुरूपयोग कर रहे है। ऐसे ही हरकते यदि हमारे पड़ोशी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, म्यांमार, और श्रीलंका में की गई होती तो विरोधियों का नामोनिशान मिट जाता। अब समय आ गया है कि भारत सरकार भी इन मामलों को गंभीरता से ले व सख्त कदम उठाये और राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें ताकि भारत की धरती पर सदियों - सदियों तक जिन्ना - जयचंद जैसा कोई गद्दार पैदा न हो। अभी हाल ही में उद्योगपति राहुल बजाज ने एक कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री अमित शाह से सवाल पुछा कि देश में डर का माहौल है। ये जो डर है उसके बारे में कोई बोलेगा नहीं, माहौल बदलना पड़ेगा। यूपीए शाशन काल में हम किसी को भी गालियां दे सकते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि आपके पूछने के बाद अब कोई नहीं मानेगा की कोई डरता है। कुछ लोगों ने ये हव्वा बनाया है। किसी को भी डरने की जरुरत नहीं है। नरेन्द्र मोदी और हमारी सरकार पर अखबारों व मीडिया ने बहुत कुछ लिखा और बोला है। आज भी धड़ल्ले से लिख रहे है। सबसे ज्यादा यदि किसी के खिलाफ लिखा और बोला गया है तो वह हमारे खिलाफ ही है। जैसा कि आप बोल रहे है तो सरकार माहौल बदलने का प्रयास करेगी। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि किसी को भी डरने की जरुरत नहीं है। सब लोग संसद में भी बोलते है। सभी प्लेटफार्म पर बोलते है और सोशल मीडिया पर भी खुल कर बोलते है। असली डर किसे कहते है और डर का माहौल क्या होता है ? इसे जानने के लिए वर्तमान समय में श्रीलंका सबसे बेहतर उदाहरण है। श्रीलंका की सत्ता में आते ही राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे साम, दाम, दंड, भेद की नीति का पालन करते हुए खुलेआम अपने विरोधियों का सफाया कर रहे है। उनका या उनकी सरकार का विरोध करने वालों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। विरोधी राजनीतिक पार्टियों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। बताया जाता है कि जो लोग उनके खिलाफ खबरे छापते है, जो उनकी विचारधारा को स्वीकार नहीं करते, वह सभी लोग खतरे में है। जिन्होंने मानवधिकार की आड़ में विदेशी शक्तियों के इशारे पर गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ मुहीम चलाई थी। उन सभी पत्रकारों, मानवधिकार कार्यकर्ताओं, जाँच अधिकारीयों और सेक्युलर का चोला पहने हुए अराजक तत्त्वों की जान खतरे में है। ऐसे डर के माहौल में यह सभी देश छोड़ कर भागना चाहते है लेकिन वहां के एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी किया जा चूका है। ताकि इनमें से कोई भी देश छोड़ कर भाग न सके। वर्तमान समय में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ बोलने का साहस किसी में नहीं है। इसे ही असली डर कहते है और यहीं वास्तविकता में डर का माहौल होता है।
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भाई दूज के दिन मथुरा के विश्राम घाट पर यम फांस से मुक्ति के लिए होने वाले यम द्वितीया स्नान के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं को लेकर डीएम ने एसएसपी के अधिकारियों के साथ मथुरा के घाटों का दौरा किया। डीएम ने निरीक्षण के दौरान अधीनस्थ अधिकारियों को 3 दिन में सभी व्यवस्था पूरी करने के निर्देश दिए।
यम द्वितीया स्नान पर्व की व्यवस्थाओं को लेकर जिलाधिकारी पुलकित खरे, एसएसपी अभिषेक यादव और नगर आयुक्त अनुनय झा ने विश्राम घाट, श्याम घाट, राम घाट और बंगाली घाट आदि घाटों का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिए गए निर्देशों के अनुपालन के लिए तीन दिन का समय दिया। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने यमुना घाटों का निरीक्षण कर जायजा लिया। उन्होंने आगामी यम द्वितीया पर्व को लेकर व्यवस्थाओं के संबंध में सुझाव मांगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जो कुछ कमियां है, उन्हें तीन दिन में सही करा लें। जितने भी श्रद्धालु यहां आए, उनको किसी प्रकार की असुविधा न हो।
निरीक्षण के दौरान डीएम ने घाटों के दोनों ओर बैरिकेडिंग करने के निर्देश दिए। इसके अलावा स्नान के दौरान पर्याप्त संख्या में गोताखोर रहें, नगर निगम के कर्मचारी भी तैनात रहने के लिए भी कहा। नगर आयुक्त ने बताया कि भाई दौज पर्व पर कंट्रोल रूम बनेंगे, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी तैनात रहेंगे। पुलिस व्यवस्था भी चाक चौबंद रहेगी। पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी रहेंगे। कंट्रोल रूम में भी पुलिस के अधिकारी रहेंगे। सीसीटीवी कैमरे जो खराब है, उनको सही कराने के लिए भी दिशा निर्देश दिए गए हैं।
भारी बारिश के दौरान असकुंडा घाट पर जिस जगह पर जन्मदिन के दिन 3 वर्ष की मासूम यमुना में बही थी उस स्थान का भी अधिकारियों ने निरीक्षण किया था। डीएम ने उस स्थान पर बैरिकेडिंग कराने के लिए नगर निगम को कहा । जिलाधिकारी ने बताया कि यमुना स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को तीन दिन की समय सीमा दी गई है। निरीक्षण के दौरान बिजली, स्वास्थ्य आदि विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे।
निरीक्षण के दौरान माथुर चतुर्वेद परिषद के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। माथुर चतुर्वेद परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि इस बार यम द्वितीया का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा और इसमें यात्रियों की संख्या अधिक होने की संभावना है। इसे दृष्टिगत रखते हुए अधिकारियों ने घाटों का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान परिषद के द्वारा लाइट को सही कराने, गलियों को गड्ढा मुक्त करने के लिए भी कहा है।
अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान माथुर चतुर्वेद परिषद के संरक्षक नवीन नागर ,कोषाध्यक्ष कमल चतुर्वेदी, आशीष चतुर्वेदी डांडी वाले,आशीष युवा आदि मौजूद रहे।
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भाई दूज के दिन मथुरा के विश्राम घाट पर यम फांस से मुक्ति के लिए होने वाले यम द्वितीया स्नान के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं को लेकर डीएम ने एसएसपी के अधिकारियों के साथ मथुरा के घाटों का दौरा किया। डीएम ने निरीक्षण के दौरान अधीनस्थ अधिकारियों को तीन दिन में सभी व्यवस्था पूरी करने के निर्देश दिए। यम द्वितीया स्नान पर्व की व्यवस्थाओं को लेकर जिलाधिकारी पुलकित खरे, एसएसपी अभिषेक यादव और नगर आयुक्त अनुनय झा ने विश्राम घाट, श्याम घाट, राम घाट और बंगाली घाट आदि घाटों का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिए गए निर्देशों के अनुपालन के लिए तीन दिन का समय दिया। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने यमुना घाटों का निरीक्षण कर जायजा लिया। उन्होंने आगामी यम द्वितीया पर्व को लेकर व्यवस्थाओं के संबंध में सुझाव मांगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जो कुछ कमियां है, उन्हें तीन दिन में सही करा लें। जितने भी श्रद्धालु यहां आए, उनको किसी प्रकार की असुविधा न हो। निरीक्षण के दौरान डीएम ने घाटों के दोनों ओर बैरिकेडिंग करने के निर्देश दिए। इसके अलावा स्नान के दौरान पर्याप्त संख्या में गोताखोर रहें, नगर निगम के कर्मचारी भी तैनात रहने के लिए भी कहा। नगर आयुक्त ने बताया कि भाई दौज पर्व पर कंट्रोल रूम बनेंगे, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी तैनात रहेंगे। पुलिस व्यवस्था भी चाक चौबंद रहेगी। पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी रहेंगे। कंट्रोल रूम में भी पुलिस के अधिकारी रहेंगे। सीसीटीवी कैमरे जो खराब है, उनको सही कराने के लिए भी दिशा निर्देश दिए गए हैं। भारी बारिश के दौरान असकुंडा घाट पर जिस जगह पर जन्मदिन के दिन तीन वर्ष की मासूम यमुना में बही थी उस स्थान का भी अधिकारियों ने निरीक्षण किया था। डीएम ने उस स्थान पर बैरिकेडिंग कराने के लिए नगर निगम को कहा । जिलाधिकारी ने बताया कि यमुना स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को तीन दिन की समय सीमा दी गई है। निरीक्षण के दौरान बिजली, स्वास्थ्य आदि विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान माथुर चतुर्वेद परिषद के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। माथुर चतुर्वेद परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि इस बार यम द्वितीया का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा और इसमें यात्रियों की संख्या अधिक होने की संभावना है। इसे दृष्टिगत रखते हुए अधिकारियों ने घाटों का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान परिषद के द्वारा लाइट को सही कराने, गलियों को गड्ढा मुक्त करने के लिए भी कहा है। अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान माथुर चतुर्वेद परिषद के संरक्षक नवीन नागर ,कोषाध्यक्ष कमल चतुर्वेदी, आशीष चतुर्वेदी डांडी वाले,आशीष युवा आदि मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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वीरविनोद. [ शाहपुरा वकीलकी अर्जी - १२२३
'हिन्दुस्तानपर चढ़ाई की, जिसका मुफुस्सल हाल ऊपर लिखागया. उस लड़ाई में शरीक होनेके लिये महाराजा जयसिंह व अभयसिंहको मुहम्मदशाहने फर्मान भेजा, लेकिन् दोनोंने टाल दिया. इस बारे में एक कागज़की नछ, जो शाहपुरासे आई, हम नीचे दर्ज करते हैंःशाहपुराके राजा उम्मेदसिंहके नाम, मेड़तासे उनके
वकील गुलाबका कागज़.
अपरंच. अठे इसी बात हुई है. बादशाह बुलाया, महाराजा अभयसिंहजीने तथा जयपुर जयसिंहजीने. जब या दोनों राजावां सलाहकर वादशाहजीके नाम अरजी लिखी, अभयसिंहजी तो नहाराज जयसिंहजीका माणसांने गढ़ रणथम्भोर बखशे, और पचास लाख रुपया खरचीका बखशे. जीसूं जयसिंहजीने लेर हजूर आऊं; और महाराज जयसिंहजी अरज लिखी. सो महाराज अभयसिंहजीको गुजरातका तो सूवा बखशे, और पचास लाख रुपया खरचीका वखराजे, जो महाराजा अभयसिंहजीने लेरे हुजूर आऊं. ईतरां दोनो राजावां ऊपर लिखी हुई बातां लिखी छै; और महाराज अभयसिंहजीके और महाराज जयसिंहजीके मुलाकात होदाकी बहुत ताकीद होरही छै; मगर श्री दिवाणजीको लिख्यो आयो है, सो बस्तपंचमीने आय मिलस्यां सो जाणवासे तो बस्तपंचमीने तीनो राजावांकी मुलाकात होसी.
सेखावत सार्दूलसिंहजी ऊपर महाराज जयसिंहजीकी फ़ौज गई छी, अर अठी सूं वस्तसिंहजीकी फ़ौज सार्दूलसिंहजीकी मदद गई छी; सो महाराज जयसिंहजीको लिख्यो अठे महाराजके नाम आयो छो, जीमें लिखी छी, के या फौज महाराजका हुक्म सूं गई छै, या बखतसिंहजी मोखली छै; और फ़ौज बखतसिंहजी ही मोखली होय, तो म्हाने लिख्यो आजावेः सो बखतसिंहजी सूं नागोरका परगणां सूं समझल्वां; और श्री हजूर या भी मालूम होय, सो पहली भगायका मुकाता ताबे अरज लिखी छी. जींको जवाब अब तक इनायत हुवो नहीं, सो जाणवा आवे छै, सो श्री हुजूर की सलाहमें आई नहीं होसी. अठे भी ईं बातकी ताकीद छै, जीसूं श्री हुजूरने अरज लिखी छै; श्री हुजूरको हुक्म आ जावे, तो भणायका सुकाताकी रद बदल कर कमी वेशी कराय लेवां; और श्री हजूरको हुक्म न आवे, जद ई बातकी चरचा करां नहीं; और कंबरजी जालमसिंहजी पर श्रीमहाराज विशेष महरबान है. संबत १७९५ पौष
वीरविनोद. [ राजपूतानाकी ना इत्तिफाकी - १२२४
दिल्ली के वादशाहोंकी दिन वदिन बर्बादी देखकर राजपूतानहके राजा और ही घड़ंत घड़ रहे थे, लेकिन् कभी खयाली पुलावसे भूक नहीं जाती; आपसकी फूटने उस इच्छाको पूर्ण नहीं होने दिया. महाराजा अभयसिंहने कुछ अर्से बाढ़ विक्रमी १७९७ वैशाख [ हि० ११५३ सफर = ई० १७४० एप्रिल ] में बीकानेरपर चढ़ाई करदी, और महाराणा जगतसिंहके बड़े कुंवर प्रतापसिंह जोधपुर शादी करनेको गये, जो महाराजा अजीतसिंहकी बेटी सौभाग्य कुंवरके साथ शादी करके पीछे चले आये. महाराजा सवाई जयसिंहने सव राजाओंकी मददसे जोधपुरको जा घेरा; महाराणाने भी उनकी मदद के लिये अपने मातहत सरि सलूंबरके रावत् केसरीसिंह को जमूइयतके साथ भेज दिया; महाराजा जयसिंहने सव राजाओंको, जो दम दिया था, उस वातको छोड़कर फ़ौज खर्च लेनेपर घेरा उठा लिया; और महाराणा जगत्सिंह भी, जो पुष्कर यात्रा के बहानेसे रवानह हो चुके थे, इन सव राजाओंसे शौकिया मुलाकात करके पीछे अपनी राजधानीको आये. महाराज वख्तसिंह, महाराजा सवाई जयसिंहकी फ़िरेबी कार्रवाई से ना खुश होकर अपने भाई अभयसिंहसे मिलगये, और दोनों बड़ी फ़ौजके साथ जयपुरकी तरफ चले; जिले अजमेर गगवाणा गांव में सवाई जयसिंहसे मुकाबलह हुआ, जिसमें वस्तसिंहको भागना पड़ा, राजा उम्मेदसिंहने उनका अमर सेवाकी हथनीके छीन लिया. इससे लड़ाईका नतीजह यह हुआ कि अभयसिंह और बख्तसिंहमें ज़ियादह रंज बढ़ गया. इन आपसकी ना इत्तिफ़ाकियोंसे हर एक आदमी मरहटोंकी सदद ढूंढने लगा, जिससे दक्षिणी गालिब होकर इनपर हुकूमतका डंका बजाते थे. अँगर हुरड़ा मकामके अदनामहकी तासील होती, तो राजपूतानहको जुरूर फायदह पहुंचता, लेकिन् वीकानेर व नागौरसे जोधपुरकी ना इत्तिफाकी और जयपुरके महाराजाकी दगावाजीसे बूंदी व कोटाकी तवाही और माधवसिंह गैर हक़दारको हकदार बनाकर अपना वड़प्पन दिखलानेमें महाराणाकी कोशिशने राजपूतानहको ऐसा धक्का दिया, कि गवर्नमेन्ट अंग्रेज़ीके अहद तक सर्व दुःख सागर में गोता खाते रहे.
ईश्वर एक ढंगपर किसीको नहीं रखता, इन्हीं क्षत्रियोंके पूर्वजोंने इस भारतवर्षका वड़प्पन चारों तरफ जाहिर किया; फिर मुसल्मानोंने इनकी आजादी छीनकर अपनी हुकूमतका डंका बजाया; और थोड़े दिनों तक पहाड़ी वर्साती नालेकी तरह मरहटोंने भी अपना जोर शोर बतलाया; अव गवर्नमेन्ट अंग्रेजीकी आईनी राज्यनीति प्रकाशित होरही है. इन बातोंके देखनेसे मनुष्यको ईश्वरकी कार्रवाइयोंपर धन्यवाद करना चाहिये. इन्हीं दिनोंमें फिर महाराणाके मातह्त उमराव सलूंबरके रावत्
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वीरविनोद. [ शाहपुरा वकीलकी अर्जी - एक हज़ार दो सौ तेईस 'हिन्दुस्तानपर चढ़ाई की, जिसका मुफुस्सल हाल ऊपर लिखागया. उस लड़ाई में शरीक होनेके लिये महाराजा जयसिंह व अभयसिंहको मुहम्मदशाहने फर्मान भेजा, लेकिन् दोनोंने टाल दिया. इस बारे में एक कागज़की नछ, जो शाहपुरासे आई, हम नीचे दर्ज करते हैंःशाहपुराके राजा उम्मेदसिंहके नाम, मेड़तासे उनके वकील गुलाबका कागज़. अपरंच. अठे इसी बात हुई है. बादशाह बुलाया, महाराजा अभयसिंहजीने तथा जयपुर जयसिंहजीने. जब या दोनों राजावां सलाहकर वादशाहजीके नाम अरजी लिखी, अभयसिंहजी तो नहाराज जयसिंहजीका माणसांने गढ़ रणथम्भोर बखशे, और पचास लाख रुपया खरचीका बखशे. जीसूं जयसिंहजीने लेर हजूर आऊं; और महाराज जयसिंहजी अरज लिखी. सो महाराज अभयसिंहजीको गुजरातका तो सूवा बखशे, और पचास लाख रुपया खरचीका वखराजे, जो महाराजा अभयसिंहजीने लेरे हुजूर आऊं. ईतरां दोनो राजावां ऊपर लिखी हुई बातां लिखी छै; और महाराज अभयसिंहजीके और महाराज जयसिंहजीके मुलाकात होदाकी बहुत ताकीद होरही छै; मगर श्री दिवाणजीको लिख्यो आयो है, सो बस्तपंचमीने आय मिलस्यां सो जाणवासे तो बस्तपंचमीने तीनो राजावांकी मुलाकात होसी. सेखावत सार्दूलसिंहजी ऊपर महाराज जयसिंहजीकी फ़ौज गई छी, अर अठी सूं वस्तसिंहजीकी फ़ौज सार्दूलसिंहजीकी मदद गई छी; सो महाराज जयसिंहजीको लिख्यो अठे महाराजके नाम आयो छो, जीमें लिखी छी, के या फौज महाराजका हुक्म सूं गई छै, या बखतसिंहजी मोखली छै; और फ़ौज बखतसिंहजी ही मोखली होय, तो म्हाने लिख्यो आजावेः सो बखतसिंहजी सूं नागोरका परगणां सूं समझल्वां; और श्री हजूर या भी मालूम होय, सो पहली भगायका मुकाता ताबे अरज लिखी छी. जींको जवाब अब तक इनायत हुवो नहीं, सो जाणवा आवे छै, सो श्री हुजूर की सलाहमें आई नहीं होसी. अठे भी ईं बातकी ताकीद छै, जीसूं श्री हुजूरने अरज लिखी छै; श्री हुजूरको हुक्म आ जावे, तो भणायका सुकाताकी रद बदल कर कमी वेशी कराय लेवां; और श्री हजूरको हुक्म न आवे, जद ई बातकी चरचा करां नहीं; और कंबरजी जालमसिंहजी पर श्रीमहाराज विशेष महरबान है. संबत एक हज़ार सात सौ पचानवे पौष वीरविनोद. [ राजपूतानाकी ना इत्तिफाकी - एक हज़ार दो सौ चौबीस दिल्ली के वादशाहोंकी दिन वदिन बर्बादी देखकर राजपूतानहके राजा और ही घड़ंत घड़ रहे थे, लेकिन् कभी खयाली पुलावसे भूक नहीं जाती; आपसकी फूटने उस इच्छाको पूर्ण नहीं होने दिया. महाराजा अभयसिंहने कुछ अर्से बाढ़ विक्रमी एक हज़ार सात सौ सत्तानवे वैशाख [ हिशून्य एक हज़ार एक सौ तिरेपन सफर = ईशून्य एक हज़ार सात सौ चालीस एप्रिल ] में बीकानेरपर चढ़ाई करदी, और महाराणा जगतसिंहके बड़े कुंवर प्रतापसिंह जोधपुर शादी करनेको गये, जो महाराजा अजीतसिंहकी बेटी सौभाग्य कुंवरके साथ शादी करके पीछे चले आये. महाराजा सवाई जयसिंहने सव राजाओंकी मददसे जोधपुरको जा घेरा; महाराणाने भी उनकी मदद के लिये अपने मातहत सरि सलूंबरके रावत् केसरीसिंह को जमूइयतके साथ भेज दिया; महाराजा जयसिंहने सव राजाओंको, जो दम दिया था, उस वातको छोड़कर फ़ौज खर्च लेनेपर घेरा उठा लिया; और महाराणा जगत्सिंह भी, जो पुष्कर यात्रा के बहानेसे रवानह हो चुके थे, इन सव राजाओंसे शौकिया मुलाकात करके पीछे अपनी राजधानीको आये. महाराज वख्तसिंह, महाराजा सवाई जयसिंहकी फ़िरेबी कार्रवाई से ना खुश होकर अपने भाई अभयसिंहसे मिलगये, और दोनों बड़ी फ़ौजके साथ जयपुरकी तरफ चले; जिले अजमेर गगवाणा गांव में सवाई जयसिंहसे मुकाबलह हुआ, जिसमें वस्तसिंहको भागना पड़ा, राजा उम्मेदसिंहने उनका अमर सेवाकी हथनीके छीन लिया. इससे लड़ाईका नतीजह यह हुआ कि अभयसिंह और बख्तसिंहमें ज़ियादह रंज बढ़ गया. इन आपसकी ना इत्तिफ़ाकियोंसे हर एक आदमी मरहटोंकी सदद ढूंढने लगा, जिससे दक्षिणी गालिब होकर इनपर हुकूमतका डंका बजाते थे. अँगर हुरड़ा मकामके अदनामहकी तासील होती, तो राजपूतानहको जुरूर फायदह पहुंचता, लेकिन् वीकानेर व नागौरसे जोधपुरकी ना इत्तिफाकी और जयपुरके महाराजाकी दगावाजीसे बूंदी व कोटाकी तवाही और माधवसिंह गैर हक़दारको हकदार बनाकर अपना वड़प्पन दिखलानेमें महाराणाकी कोशिशने राजपूतानहको ऐसा धक्का दिया, कि गवर्नमेन्ट अंग्रेज़ीके अहद तक सर्व दुःख सागर में गोता खाते रहे. ईश्वर एक ढंगपर किसीको नहीं रखता, इन्हीं क्षत्रियोंके पूर्वजोंने इस भारतवर्षका वड़प्पन चारों तरफ जाहिर किया; फिर मुसल्मानोंने इनकी आजादी छीनकर अपनी हुकूमतका डंका बजाया; और थोड़े दिनों तक पहाड़ी वर्साती नालेकी तरह मरहटोंने भी अपना जोर शोर बतलाया; अव गवर्नमेन्ट अंग्रेजीकी आईनी राज्यनीति प्रकाशित होरही है. इन बातोंके देखनेसे मनुष्यको ईश्वरकी कार्रवाइयोंपर धन्यवाद करना चाहिये. इन्हीं दिनोंमें फिर महाराणाके मातह्त उमराव सलूंबरके रावत्
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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जयपुर, 19 जून (वार्ता) राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर जनसुनवाई कर आमजन की परिवेदनाओं को सुना तथा अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने जनसुनवाई में आमजन से उनकी समस्याओं के बारे में पूछा और अधिकारियों से भी जानकारी ली। श्री गहलोत ने सभी प्रकार के लम्बित प्रकरणों को त्वरित निस्तारित करने के लिए निर्देश दिए।
इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लोगों ने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और महंगाई राहत कैंपों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया और कहा कि महंगाई राहत कैंपों और प्रशासन शहरों/गांवों के संग अभियानों से काफी राहत मिल रही है। महंगाई राहत कैंपों में गारंटी कार्ड मिलने से आर्थिक स्थिति में सुधार होगा तथा परिवार की बचत भी बढ़ेगी। ऐसी योजनाएं पूरे देश में लागू होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र से आए लोगों ने कहा कि कृषि उपभोक्ताओं को 2000 यूनिट तक निःशुल्क बिजली, 500 रुपए में गैस सिलेंडर, 25 लाख रुपए तक का निःशुल्क उपचार मिलने से आर्थिक संबल मिलेगा।
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जयपुर, उन्नीस जून राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर जनसुनवाई कर आमजन की परिवेदनाओं को सुना तथा अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने जनसुनवाई में आमजन से उनकी समस्याओं के बारे में पूछा और अधिकारियों से भी जानकारी ली। श्री गहलोत ने सभी प्रकार के लम्बित प्रकरणों को त्वरित निस्तारित करने के लिए निर्देश दिए। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लोगों ने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और महंगाई राहत कैंपों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया और कहा कि महंगाई राहत कैंपों और प्रशासन शहरों/गांवों के संग अभियानों से काफी राहत मिल रही है। महंगाई राहत कैंपों में गारंटी कार्ड मिलने से आर्थिक स्थिति में सुधार होगा तथा परिवार की बचत भी बढ़ेगी। ऐसी योजनाएं पूरे देश में लागू होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र से आए लोगों ने कहा कि कृषि उपभोक्ताओं को दो हज़ार यूनिट तक निःशुल्क बिजली, पाँच सौ रुपयापए में गैस सिलेंडर, पच्चीस लाख रुपए तक का निःशुल्क उपचार मिलने से आर्थिक संबल मिलेगा।
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IPL 2022 के 55वें मुकाबले में Chennai Super Kings ने Delhi Capitals को 91 रनों से हराकर प्लेऑफ की मंसूबों पर पानी फेर दिया। चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट के नुकसान पर 208 रन बनाए। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली कैपिटल्स की पूरी टीम 117 रनों पर सिमट गई। इस जीत के साथ दिल्ली की टीम अंक तालिका में 8वें पायदान पर पहुंच गई।
IPL 2022 का 55वां मुकाबला Chennai Super Kings और Delhi Capitals के बीच खेला जा रहा है। यह मुकाबला शाम 7. 30 बजे से नवी मुंबई के डी वाई पाटिल स्टेडियम में शुरू होगा। दिल्ली कैपिटल्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया।
IPL 2022 में दिल्ली कैपिटल्स के लिए बुरी खबर सामने आ रही है। चेन्नई और दिल्ली के मुकाबले से पहले दिल्ली के स्टार सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ तेज बुखार के कारण अस्पताल में भर्ती है। पृथ्वी शॉ ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए अपने बीमार होने की पुष्टि की है। पृथ्वी शॉ ने हॉस्पिटल के अंदर बेड पर लेटे हुए तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है। शॉ ने फोटो शेयर करते हुए लिखा कि अस्पताल में एडमिट हूं और रिकवर कर रहा हूं। शुभकामनाओं के लिए आपका धन्यवाद। जल्द ही एक्शन में नजर आऊंगा।
IPL 2022 का 55वां मुकाबला Chennai Super Kings और Delhi Capitals के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला शाम 7. 30 बजे से नवी मुंबई के डी वाई पाटिल स्टेडियम में खेला जाएगा। दिल्ली को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए यह मैच काफी अहम होने वाला है। दिल्ली इस मैच को जीतकर प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखने की कोशिश करेगी। वहीं चेन्नई जो लगभग प्लेऑफ की रेस के बाहर हो गई है, वो इस मैच को जीतकर दिल्ली की पार्टी को खराब करने की कोशिश करेगी।
IPL 2022 में Delhi Capitals और कोरोना का नाता गहरा ही होते जा रहा है। आज आईपीएल का 55वां मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मुकाबले से पहले ही दिल्ली के खेमे से एक बुरी खबर आई है। दिल्ली कैपिटल्स का नेट्स बॉलर कोरोना पॉजिटिव पाया गया। बीसीसीआई ने आईपीएल 2022 के लिए जो प्रोटोकॉल बनाया है उसके अनुसार, दिल्ली कैपिटल्स को कोराना टेस्ट के एक और दौर से गुजरना होगा और तब तक सभी खिलाड़ी कमरों में ही आइसोलेट रहेंगे।
IPL 2022 का 50वां मुकाबला Delhi Capitals और Sunrisers Hyderabad के बीच खेला जा रहा है। यह मुकाबला शाम 7. 30 बजे से मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में शुरू होगा। सनराइजर्स हैदराबाद ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। आज के मुकाबले में कुल 7 बदलाव हुए। दिल्ली ने चार और सनराइजर्स ने तीन बदलाव किए।
IPL 2022 का 50वां मुकाबला Delhi Capitals और Sunrisers Hyderabad के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला शाम 7. 30 बजे से मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों टीमें अपना पिछला मुकाबला हार कर आई है। ऐसे में दोनों टीमें इस मुकाबले में वापसी करना चाहेगी। सनराइजर्स हैदराबाद ने शुरुआत में हारने के बाद जीत की लय पकड़ ली थी, लेकिन टीम एक बार फिर से जीत की पटरी पर उतर चुकी है। वहीं दिल्ली की टीम का प्रदर्शन इस बार औसतन रही है।
IPL 2022 का 45वां मुकाबला Delhi Capitals और Lucknow Super Giants के बीच खेला जा रहा है। यह मुकाबला दोपहर को 3. 30 बजे से मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में शुरू होगा। लखनऊ सुपर जायंट्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। लखनऊ ने आवेश खान के जगह के गौतम को टीम में शामिल किया। वहीं दिल्ली की टीम में कोई बदलाव नहीं किया।
IPL 2022 का 45वां मुकाबला Delhi Capitals और Lucknow Super Giants के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला दोपहर को 3. 30 बजे से मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। लखनऊ सुपर जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स ने अपने पिछले मुकाबले जीतकर पहुंची है। दोनों टीमों को प्लेऑफ में जगह बनाने के आज का मुकाबला अहम होगा। अगर दिल्ली जीत जाती है तो वो प्लेऑफ की रेस में बनी रहेगी। वहीं लखनऊ जीत जाती है तो उसके प्लेऑफ में क्वालीफाई करने की संभावना बढ़ जाएगी।
IPL 2022 के 41वें मुकाबले में Delhi Capitals ने Kolkata Knight Riders को 4 विकेट से हराकर इस सीजन में चौथी जीत हासिल की। इस जीत के बाद भी दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत विवादों में घिर गए। मैन ऑफ द मैच रहे कुलदीप यादव ने इस मैच में तीन ही ओवर फेंके। इस दौरान उन्होंने 14 रन देकर 4 विकेट चटकाए। कुलदीप को चौथा ओवर करने का मौका नहीं दिया गया, जिसको लेकर ऋषभ पंत सवालों के घेरे में घिर गए। पंत ने मैच के बाद इसको लेकर सफाई भी दी।
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IPL दो हज़ार बाईस के पचपनवें मुकाबले में Chennai Super Kings ने Delhi Capitals को इक्यानवे रनों से हराकर प्लेऑफ की मंसूबों पर पानी फेर दिया। चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए छः विकेट के नुकसान पर दो सौ आठ रन बनाए। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली कैपिटल्स की पूरी टीम एक सौ सत्रह रनों पर सिमट गई। इस जीत के साथ दिल्ली की टीम अंक तालिका में आठवें पायदान पर पहुंच गई। IPL दो हज़ार बाईस का पचपनवां मुकाबला Chennai Super Kings और Delhi Capitals के बीच खेला जा रहा है। यह मुकाबला शाम सात. तीस बजे से नवी मुंबई के डी वाई पाटिल स्टेडियम में शुरू होगा। दिल्ली कैपिटल्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। IPL दो हज़ार बाईस में दिल्ली कैपिटल्स के लिए बुरी खबर सामने आ रही है। चेन्नई और दिल्ली के मुकाबले से पहले दिल्ली के स्टार सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ तेज बुखार के कारण अस्पताल में भर्ती है। पृथ्वी शॉ ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए अपने बीमार होने की पुष्टि की है। पृथ्वी शॉ ने हॉस्पिटल के अंदर बेड पर लेटे हुए तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है। शॉ ने फोटो शेयर करते हुए लिखा कि अस्पताल में एडमिट हूं और रिकवर कर रहा हूं। शुभकामनाओं के लिए आपका धन्यवाद। जल्द ही एक्शन में नजर आऊंगा। IPL दो हज़ार बाईस का पचपनवां मुकाबला Chennai Super Kings और Delhi Capitals के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला शाम सात. तीस बजे से नवी मुंबई के डी वाई पाटिल स्टेडियम में खेला जाएगा। दिल्ली को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए यह मैच काफी अहम होने वाला है। दिल्ली इस मैच को जीतकर प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखने की कोशिश करेगी। वहीं चेन्नई जो लगभग प्लेऑफ की रेस के बाहर हो गई है, वो इस मैच को जीतकर दिल्ली की पार्टी को खराब करने की कोशिश करेगी। IPL दो हज़ार बाईस में Delhi Capitals और कोरोना का नाता गहरा ही होते जा रहा है। आज आईपीएल का पचपनवां मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मुकाबले से पहले ही दिल्ली के खेमे से एक बुरी खबर आई है। दिल्ली कैपिटल्स का नेट्स बॉलर कोरोना पॉजिटिव पाया गया। बीसीसीआई ने आईपीएल दो हज़ार बाईस के लिए जो प्रोटोकॉल बनाया है उसके अनुसार, दिल्ली कैपिटल्स को कोराना टेस्ट के एक और दौर से गुजरना होगा और तब तक सभी खिलाड़ी कमरों में ही आइसोलेट रहेंगे। IPL दो हज़ार बाईस का पचासवां मुकाबला Delhi Capitals और Sunrisers Hyderabad के बीच खेला जा रहा है। यह मुकाबला शाम सात. तीस बजे से मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में शुरू होगा। सनराइजर्स हैदराबाद ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। आज के मुकाबले में कुल सात बदलाव हुए। दिल्ली ने चार और सनराइजर्स ने तीन बदलाव किए। IPL दो हज़ार बाईस का पचासवां मुकाबला Delhi Capitals और Sunrisers Hyderabad के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला शाम सात. तीस बजे से मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों टीमें अपना पिछला मुकाबला हार कर आई है। ऐसे में दोनों टीमें इस मुकाबले में वापसी करना चाहेगी। सनराइजर्स हैदराबाद ने शुरुआत में हारने के बाद जीत की लय पकड़ ली थी, लेकिन टीम एक बार फिर से जीत की पटरी पर उतर चुकी है। वहीं दिल्ली की टीम का प्रदर्शन इस बार औसतन रही है। IPL दो हज़ार बाईस का पैंतालीसवां मुकाबला Delhi Capitals और Lucknow Super Giants के बीच खेला जा रहा है। यह मुकाबला दोपहर को तीन. तीस बजे से मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में शुरू होगा। लखनऊ सुपर जायंट्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। लखनऊ ने आवेश खान के जगह के गौतम को टीम में शामिल किया। वहीं दिल्ली की टीम में कोई बदलाव नहीं किया। IPL दो हज़ार बाईस का पैंतालीसवां मुकाबला Delhi Capitals और Lucknow Super Giants के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला दोपहर को तीन. तीस बजे से मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। लखनऊ सुपर जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स ने अपने पिछले मुकाबले जीतकर पहुंची है। दोनों टीमों को प्लेऑफ में जगह बनाने के आज का मुकाबला अहम होगा। अगर दिल्ली जीत जाती है तो वो प्लेऑफ की रेस में बनी रहेगी। वहीं लखनऊ जीत जाती है तो उसके प्लेऑफ में क्वालीफाई करने की संभावना बढ़ जाएगी। IPL दो हज़ार बाईस के इकतालीसवें मुकाबले में Delhi Capitals ने Kolkata Knight Riders को चार विकेट से हराकर इस सीजन में चौथी जीत हासिल की। इस जीत के बाद भी दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत विवादों में घिर गए। मैन ऑफ द मैच रहे कुलदीप यादव ने इस मैच में तीन ही ओवर फेंके। इस दौरान उन्होंने चौदह रन देकर चार विकेट चटकाए। कुलदीप को चौथा ओवर करने का मौका नहीं दिया गया, जिसको लेकर ऋषभ पंत सवालों के घेरे में घिर गए। पंत ने मैच के बाद इसको लेकर सफाई भी दी।
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(११) आकर -जान पड़ता है खानों पर कोई खास कर था।
उपर्युक्त करों को देखते हुए यह कहना पड़ेगा कि मध्ययुग में बनारस की प्रजा पर कर का काफी भार था । एक किसान को ही अपने खेत और चौपायों पर इतना कर देना पड़ता था कि शायद ही उसके पास खाने पीने के बाद कुछ बचता हो । इस भयंकर कर भार का कारण शायद मध्यकालीन राजाओं की बिलास-प्रियता और व्यर्थ की लड़ाइयाँ हो सकती हैं ।
दसवीं से बारहवीं शताब्दी तक के बनारस के व्यापार के बारे में हमें बहुत कम विवरण मिलता है। फिर भी यह विश्वास करने का कारण है कि उस युग में भी बनारस एक बड़ा व्यापारी शहर था। हमें तारीखुस्सुबुकतिगिन' से पता चलता है कि १०३३ ईस्वी में बनारस का बजाजा, जौहरी बाजार और गंधी बाजार बहुत ही समृद्ध थे और इन सबको लूट कर अहमद नियाल तिगिन को बहुत धन मिला। नौका इत्यादि पर कर लगने से भी हम अंदाज कर सकते हैं कि उस समय व्यापार की काफी उन्नति थी । नदी के वास्ते व्यापार होने के सिवाय सड़क भी खूब चलती थी । अलबेरुनी के अनुसार बारी से गंगा के पूर्वी किनारे पर होती हुई एक सड़क अयोध्या ( २५ फरसंग ), बनारस ( २० फरसंग ), गोरखपुर, पटना और मुंगेर होती हुई गंगासागर चली जाती थी। रशीदुद्दीन के जाभिउत्तवारीख में इस सड़क का कुछ और वर्णन आया है । 3 उसके अनुसार गंगा पर स्थित बारी से चल कर सड़क पूर्व होते हुए अयोध्या पहुँचती थी और फिर वहाँ से बनारस जाती थी । वहाँ से दक्षिण पूर्व ३० फरसंग पर सरजू पार ( गोरखपुर ) पड़ता था। वहाँ से पाटलिपुत्र १० फरसंग था और वहाँ से मुंगेर १५ फरसंग और चंपा (भागलपुर) ३० फरसंग । चंपा से दमकपुर ५० फरसंग और गंगासागर वहाँ से ३० फरसंग । यह रास्ता बराबर तुर्क सुल्तानों के समय में भी चलता था और इस पर होकर अक्सर दिल्ली के सुल्तान बंगाल या बिहार जाया करते थे । यही वही प्राचीन जनपथ है जिसका उपयोग ताम्रलिप्ति तक जाने में होता था ।
३. बनारस की स्थिति
गाहडवाल लेखों के आधार पर हम बनारस जिले का ग्यारहवीं-बारहवीं सदी का एक नक्शा खींच सकते हैं । इन लेखों में बनारस जिले के बहुत से परगनों और गाँवों के नाम आये हैं । इनम से कुछ गाँवों और परगनों की तो अब भी पहचान हो सकती है, बाकी के शायद नाम बदल गये हैं। जो भी हो ऐसा लगता है कि बनारस जिले का आधुनिक नक्शा बारहवीं सदी में प्रायः वैसा ही था जैसा अब है ।
१ इलियट ऐंड डाउसन, भा० २, पृ० १२३-१२४
सचाउ, वही, भा० १, ५० २२
3 ईलियट, भा० १, पृ० ५६
बनारस शहर के बारे में अभाग्यवश हमें संस्कृत साहित्य और लेखों में कुछ घाटों और मंदिरों के नामों को छोड़कर बहुत कम विवरण मिलता है। पर जो कुछ भी अलबेरुनी इत्यादि से हमें बनारस का विवरण मिलता है उससे पता चलता है कि बनारस उस समय सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भारत का सबसे बड़ा नगर था। महमूद गजनवी के आक्रमणों के बाद तो बनारस की महत्ता इसलिए और बढ़ गयी कि सारे उत्तर भारत से प्राचीन भारतीय संस्कृति के रक्षक और परिवर्धक पंडित भाग भाग कर बनारस में बस गये । अलबेरुनी ने इस ओर इशारा भी किया है । बनारस के बारे में अलबेरुनी का कहना है कि स्मार्त धर्म के लिये नगर प्रसिद्ध था । सारे भारत से साधु-सन्यासी घूमते हुए इस शहर में पहुँचकर मोक्ष के लिए उसी तरह सदा के लिए बस जाते थे जैसे काबा के रहने वाले मक्का में । उस समय यह कहावत थी कि हत्यारे को भी बनारस पहुँचने पर मृत्युदंड नहीं लगता था । २ जान पड़ता है, इसी धर्माधंता से बारहवीं सदी में बनारस ठगों का घर बन गया था। हेमचन्द्र ने अपने कुमारपाल चरित ( ३१५९ ) में ठग पर टीका करते हुए उस युग की कहावत यथा, "वाराणसी ठकानां स्थानं," अर्थात् बनारस ठगों का घर है उल्लेख किया है । बनारस का इस कहावत से अब भी पिंड नहीं छूटा है । वास्तव में मध्यकालीन हिंदूधर्म और ठगी का चोलीदामन का सा साथ हो गया था । बनारस में यात्रियों का काम था पूजना और ब्राह्मणों का पुजाना । बस ठगों को तो ऐसे ही अन्धविश्वासी श्रद्धालु चाहिएँ । फिर भी अन्धविश्वास और ठगहारी के रहते हुए भी बनारस सुखी था ऐसा पता चलता है । आनन्दधर ने अपने माघवानलाख्यान में 3 गोविन्द - चन्द्र की पुष्पवती नगरी अर्थात् काशी के रहने वालों के बारे में कहा है - "निरामयानिशतंकः संतुष्टाः परमायुषाः, वसंति यत्र पुरुषाः कालाऽजाता इव प्रजाः" इस नगरी में काल जिनको भूल गया हो जैसे निरामय, निरातंक, संतुष्ट, परमायुष, पुरुष रहते थे । अब भी बनारस का काफी अधःपतन होते हुए भी बनारसियों के चरित्र की ये प्राचीन बच गयी है ।
गणपति ने १५२८ ईस्वी में माधवानल कामकंदला नामक ग्रंथ लिखा । इस ग्रंथ में भी राजा गोविन्दचन्द्र के समय की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं का सुन्दर खाका है । पुस्तक गोविन्दचन्द्र से चार सौ बरस बाद लिखी गयी, पर इसका मसाला काफी प्राचीन ग्रंथो से लिया गया है और इस दृष्टि से हम इसका उपयोग गोविन्दचन्द्र के राज्यकाल के लिये कर सकते हैं। इसमें राजा की न्याय निष्ठा का जो अपने अपने पुत्रों और दूसरों को, बूढ़ों और बालकों को एक दृष्टि से देखती थी वर्णन किया गया है। उसके अनुसार काशी में चारों वर्ण अहर्निश अपना धर्म पालते थे । कोई झूठ नहीं बोलता था । लोग खेलकूद में मग्न रहते थे। मित्र अपनी मित्रता भरपूर निबाहते थे । कोई कभी कान
अलबेरुनीज इंडिया भा० १, पृ० २२
मजूमदार, माधवानल कामकंदला, पू० ३४१ वही, ३१२
से भी कलह की बात नहीं सुनता था, और लोग बड़ों को आदर की दृष्टि से देखते थे । स्त्रियाँ पतिव्रता होती थीं और कुटुंबियों में स्नेह भाव होता था । यहाँ व्यवसायी दगाबाज नहीं होते थे और कठोर वचनों के बिना व्यापार करते थे । 3 नगर में नित्य विवाह बघावे और अनेक तरह के उत्सव होते थे। राजा प्रजा का पालन करते थे । प्रदेश में खूब अन्न होता था कि एक बार बोने से ग्यारह बार काटा जा सकता था। ५ अवश्य ही बनारस की ऐसी स्थिति अतिरंजित है, पर उससे पता चलता है कि देश के सर्व साधारण लोगों में बनारस के प्रति अनुराग था।
४. लेखों में बनारस जिले के
कुछ भौगोलिक आधार
गाहडवाल लेखों से पता चलता है कि बनारस जिला आज की तरह परगनों में जिनको पत्तला कहते थे बसा था और हर परगने में बहुत से गाँव होते थे । लेखों में बनारस के निम्नलिखित परगनों के नाम आते हैं ।
१ -कटेहली - इसकी पहचान आधुनिक कटेहर परगने से की जाती है। लेख में इसकी प्राचीन सीमाएँ कोल्लक, नंदिवार, गोमती और भागीरथी बतलाया गया है । कटेहर पगरना बनारस तहसील के उत्तर-पूर्व में है। इसके पश्चिम में कोल असला ( लेख का कोलक), पूर्व में बरह जिसका प्राचीन नाम शायद गोमती की एक सहायक नदी नंद के नाम पर नंदिवार था, और गंगा हैं । उत्तर में परगना सुल्तानीपुर और गोमती नदी जो बनारस जिले को गाजीपुर और जौनपुर से अलग करती है और दक्खिन में इसकी प्राचीन सीमा पर बरना थी ।
२ - कोल्कक ७ -- यहाँ बनारस के उत्तर पश्चिम में बनारस के परगना कोल असला का आशय है। इसकी प्राचीन सीमाओं का उल्लेख नहीं मिलता। इस परगने की आधुनिक सीमाएँ निम्नलिखित हैंः - इसके पूर्व में कटेहर, दक्षिण में अठगाँवाँ, पश्चिम - में पनरह और उत्तर में जौनपुर की केराकत तहसील हैं ।
३ - नंविवार ' - शायद इसका तात्पर्य परगना बरह से है। इसकी प्राचीन सीमाएँ नहीं मिलतीं। चंदौली तहसील का यह ठेठ उत्तरी परगना है। इसके पश्चिम और उत्तर में गंगा है। पश्चिम में गंगा इसे कटेहर से अलग करती है, और दक्षिण में सैदपुर भितरी से । पूर्व में चंदौली का महाइच परगना है और दक्षिण में महुआरी और बढ़वल ।
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आकर -जान पड़ता है खानों पर कोई खास कर था। उपर्युक्त करों को देखते हुए यह कहना पड़ेगा कि मध्ययुग में बनारस की प्रजा पर कर का काफी भार था । एक किसान को ही अपने खेत और चौपायों पर इतना कर देना पड़ता था कि शायद ही उसके पास खाने पीने के बाद कुछ बचता हो । इस भयंकर कर भार का कारण शायद मध्यकालीन राजाओं की बिलास-प्रियता और व्यर्थ की लड़ाइयाँ हो सकती हैं । दसवीं से बारहवीं शताब्दी तक के बनारस के व्यापार के बारे में हमें बहुत कम विवरण मिलता है। फिर भी यह विश्वास करने का कारण है कि उस युग में भी बनारस एक बड़ा व्यापारी शहर था। हमें तारीखुस्सुबुकतिगिन' से पता चलता है कि एक हज़ार तैंतीस ईस्वी में बनारस का बजाजा, जौहरी बाजार और गंधी बाजार बहुत ही समृद्ध थे और इन सबको लूट कर अहमद नियाल तिगिन को बहुत धन मिला। नौका इत्यादि पर कर लगने से भी हम अंदाज कर सकते हैं कि उस समय व्यापार की काफी उन्नति थी । नदी के वास्ते व्यापार होने के सिवाय सड़क भी खूब चलती थी । अलबेरुनी के अनुसार बारी से गंगा के पूर्वी किनारे पर होती हुई एक सड़क अयोध्या , बनारस , गोरखपुर, पटना और मुंगेर होती हुई गंगासागर चली जाती थी। रशीदुद्दीन के जाभिउत्तवारीख में इस सड़क का कुछ और वर्णन आया है । तीन उसके अनुसार गंगा पर स्थित बारी से चल कर सड़क पूर्व होते हुए अयोध्या पहुँचती थी और फिर वहाँ से बनारस जाती थी । वहाँ से दक्षिण पूर्व तीस फरसंग पर सरजू पार पड़ता था। वहाँ से पाटलिपुत्र दस फरसंग था और वहाँ से मुंगेर पंद्रह फरसंग और चंपा तीस फरसंग । चंपा से दमकपुर पचास फरसंग और गंगासागर वहाँ से तीस फरसंग । यह रास्ता बराबर तुर्क सुल्तानों के समय में भी चलता था और इस पर होकर अक्सर दिल्ली के सुल्तान बंगाल या बिहार जाया करते थे । यही वही प्राचीन जनपथ है जिसका उपयोग ताम्रलिप्ति तक जाने में होता था । तीन. बनारस की स्थिति गाहडवाल लेखों के आधार पर हम बनारस जिले का ग्यारहवीं-बारहवीं सदी का एक नक्शा खींच सकते हैं । इन लेखों में बनारस जिले के बहुत से परगनों और गाँवों के नाम आये हैं । इनम से कुछ गाँवों और परगनों की तो अब भी पहचान हो सकती है, बाकी के शायद नाम बदल गये हैं। जो भी हो ऐसा लगता है कि बनारस जिले का आधुनिक नक्शा बारहवीं सदी में प्रायः वैसा ही था जैसा अब है । एक इलियट ऐंड डाउसन, भाशून्य दो, पृशून्य एक सौ तेईस-एक सौ चौबीस सचाउ, वही, भाशून्य एक, पचास बाईस तीन ईलियट, भाशून्य एक, पृशून्य छप्पन बनारस शहर के बारे में अभाग्यवश हमें संस्कृत साहित्य और लेखों में कुछ घाटों और मंदिरों के नामों को छोड़कर बहुत कम विवरण मिलता है। पर जो कुछ भी अलबेरुनी इत्यादि से हमें बनारस का विवरण मिलता है उससे पता चलता है कि बनारस उस समय सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भारत का सबसे बड़ा नगर था। महमूद गजनवी के आक्रमणों के बाद तो बनारस की महत्ता इसलिए और बढ़ गयी कि सारे उत्तर भारत से प्राचीन भारतीय संस्कृति के रक्षक और परिवर्धक पंडित भाग भाग कर बनारस में बस गये । अलबेरुनी ने इस ओर इशारा भी किया है । बनारस के बारे में अलबेरुनी का कहना है कि स्मार्त धर्म के लिये नगर प्रसिद्ध था । सारे भारत से साधु-सन्यासी घूमते हुए इस शहर में पहुँचकर मोक्ष के लिए उसी तरह सदा के लिए बस जाते थे जैसे काबा के रहने वाले मक्का में । उस समय यह कहावत थी कि हत्यारे को भी बनारस पहुँचने पर मृत्युदंड नहीं लगता था । दो जान पड़ता है, इसी धर्माधंता से बारहवीं सदी में बनारस ठगों का घर बन गया था। हेमचन्द्र ने अपने कुमारपाल चरित में ठग पर टीका करते हुए उस युग की कहावत यथा, "वाराणसी ठकानां स्थानं," अर्थात् बनारस ठगों का घर है उल्लेख किया है । बनारस का इस कहावत से अब भी पिंड नहीं छूटा है । वास्तव में मध्यकालीन हिंदूधर्म और ठगी का चोलीदामन का सा साथ हो गया था । बनारस में यात्रियों का काम था पूजना और ब्राह्मणों का पुजाना । बस ठगों को तो ऐसे ही अन्धविश्वासी श्रद्धालु चाहिएँ । फिर भी अन्धविश्वास और ठगहारी के रहते हुए भी बनारस सुखी था ऐसा पता चलता है । आनन्दधर ने अपने माघवानलाख्यान में तीन गोविन्द - चन्द्र की पुष्पवती नगरी अर्थात् काशी के रहने वालों के बारे में कहा है - "निरामयानिशतंकः संतुष्टाः परमायुषाः, वसंति यत्र पुरुषाः कालाऽजाता इव प्रजाः" इस नगरी में काल जिनको भूल गया हो जैसे निरामय, निरातंक, संतुष्ट, परमायुष, पुरुष रहते थे । अब भी बनारस का काफी अधःपतन होते हुए भी बनारसियों के चरित्र की ये प्राचीन बच गयी है । गणपति ने एक हज़ार पाँच सौ अट्ठाईस ईस्वी में माधवानल कामकंदला नामक ग्रंथ लिखा । इस ग्रंथ में भी राजा गोविन्दचन्द्र के समय की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं का सुन्दर खाका है । पुस्तक गोविन्दचन्द्र से चार सौ बरस बाद लिखी गयी, पर इसका मसाला काफी प्राचीन ग्रंथो से लिया गया है और इस दृष्टि से हम इसका उपयोग गोविन्दचन्द्र के राज्यकाल के लिये कर सकते हैं। इसमें राजा की न्याय निष्ठा का जो अपने अपने पुत्रों और दूसरों को, बूढ़ों और बालकों को एक दृष्टि से देखती थी वर्णन किया गया है। उसके अनुसार काशी में चारों वर्ण अहर्निश अपना धर्म पालते थे । कोई झूठ नहीं बोलता था । लोग खेलकूद में मग्न रहते थे। मित्र अपनी मित्रता भरपूर निबाहते थे । कोई कभी कान अलबेरुनीज इंडिया भाशून्य एक, पृशून्य बाईस मजूमदार, माधवानल कामकंदला, पूशून्य तीन सौ इकतालीस वही, तीन सौ बारह से भी कलह की बात नहीं सुनता था, और लोग बड़ों को आदर की दृष्टि से देखते थे । स्त्रियाँ पतिव्रता होती थीं और कुटुंबियों में स्नेह भाव होता था । यहाँ व्यवसायी दगाबाज नहीं होते थे और कठोर वचनों के बिना व्यापार करते थे । तीन नगर में नित्य विवाह बघावे और अनेक तरह के उत्सव होते थे। राजा प्रजा का पालन करते थे । प्रदेश में खूब अन्न होता था कि एक बार बोने से ग्यारह बार काटा जा सकता था। पाँच अवश्य ही बनारस की ऐसी स्थिति अतिरंजित है, पर उससे पता चलता है कि देश के सर्व साधारण लोगों में बनारस के प्रति अनुराग था। चार. लेखों में बनारस जिले के कुछ भौगोलिक आधार गाहडवाल लेखों से पता चलता है कि बनारस जिला आज की तरह परगनों में जिनको पत्तला कहते थे बसा था और हर परगने में बहुत से गाँव होते थे । लेखों में बनारस के निम्नलिखित परगनों के नाम आते हैं । एक -कटेहली - इसकी पहचान आधुनिक कटेहर परगने से की जाती है। लेख में इसकी प्राचीन सीमाएँ कोल्लक, नंदिवार, गोमती और भागीरथी बतलाया गया है । कटेहर पगरना बनारस तहसील के उत्तर-पूर्व में है। इसके पश्चिम में कोल असला , पूर्व में बरह जिसका प्राचीन नाम शायद गोमती की एक सहायक नदी नंद के नाम पर नंदिवार था, और गंगा हैं । उत्तर में परगना सुल्तानीपुर और गोमती नदी जो बनारस जिले को गाजीपुर और जौनपुर से अलग करती है और दक्खिन में इसकी प्राचीन सीमा पर बरना थी । दो - कोल्कक सात -- यहाँ बनारस के उत्तर पश्चिम में बनारस के परगना कोल असला का आशय है। इसकी प्राचीन सीमाओं का उल्लेख नहीं मिलता। इस परगने की आधुनिक सीमाएँ निम्नलिखित हैंः - इसके पूर्व में कटेहर, दक्षिण में अठगाँवाँ, पश्चिम - में पनरह और उत्तर में जौनपुर की केराकत तहसील हैं । तीन - नंविवार ' - शायद इसका तात्पर्य परगना बरह से है। इसकी प्राचीन सीमाएँ नहीं मिलतीं। चंदौली तहसील का यह ठेठ उत्तरी परगना है। इसके पश्चिम और उत्तर में गंगा है। पश्चिम में गंगा इसे कटेहर से अलग करती है, और दक्षिण में सैदपुर भितरी से । पूर्व में चंदौली का महाइच परगना है और दक्षिण में महुआरी और बढ़वल ।
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निवेश में शिक्षा के छात्रों के कौशल है कि संबंधित करियर की एक संख्या में सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक हो सकता है सिखाने के लिए करना है। इन व्यवसायों से कुछ धन प्रबंधन सलाहकार, वित्तीय योजनाकार और निवेश के प्रदर्शन विश्लेषक शामिल हैं।
ओशिनिया, काम के अवसरों और वर्क परमिट के कानूनों के भीतर कई देशों के कारण ही सीमित किया जा रहा है कुछ देशों में अवसरों के बारे में डेटा के साथ काफी भिन्न होते हैं. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड क्षेत्र में सबसे उन्नत देश हैं.
छात्रों के एक स्नातक की डिग्री कार्यक्रम पूरा करने के बाद स्नातकोत्तर किया है। एक परास्नातक प्राप्त करने के लिए, आप आमतौर पर अक्सर व्यापक परीक्षण और / या एक शोध पूरा शामिल है कि 12 से 18 कॉलेज के पाठ्यक्रम को पूरा करने की जरूरत है।
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निवेश में शिक्षा के छात्रों के कौशल है कि संबंधित करियर की एक संख्या में सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक हो सकता है सिखाने के लिए करना है। इन व्यवसायों से कुछ धन प्रबंधन सलाहकार, वित्तीय योजनाकार और निवेश के प्रदर्शन विश्लेषक शामिल हैं। ओशिनिया, काम के अवसरों और वर्क परमिट के कानूनों के भीतर कई देशों के कारण ही सीमित किया जा रहा है कुछ देशों में अवसरों के बारे में डेटा के साथ काफी भिन्न होते हैं. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड क्षेत्र में सबसे उन्नत देश हैं. छात्रों के एक स्नातक की डिग्री कार्यक्रम पूरा करने के बाद स्नातकोत्तर किया है। एक परास्नातक प्राप्त करने के लिए, आप आमतौर पर अक्सर व्यापक परीक्षण और / या एक शोध पूरा शामिल है कि बारह से अट्ठारह कॉलेज के पाठ्यक्रम को पूरा करने की जरूरत है।
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अश्विनीकुमार और उनके गुरु दथ्यङ्
वस्त्रों और अलंकारों को उतार कर रख दे और रथ समेत सारथी दिनुचरों को लौटा कर छात्रों की भाँति कौपीन और मेखला धारण करें। हाथ में समिधा लेकर पवित्र तन मन और वचन से हमारे पास दीक्षा लेने के लिए आएँ ।'
कोई दूसरा चारा न देख, दूसरे दिन प्रातःकाल इन्द्र बहुत विवश होकर अपने परम प्रिय वस्त्रों और अलंकारों को दूर रख कर बटु वेश में जब दथ्यङ के पास ब्रह्मविद्या की दीक्षा लेने के लिए पहुँचे तो आश्रमवासियों को इस पर बड़ा कुतूहल हुआ। पर स्वयं दध्यङ के मन में इन्द्र की इस विनीतता से कोई हर्ष नहीं हुआ और न इन्द्र ही को उनकी इस महान् कृपा पर कोई प्रसन्नता हुई क्योंकि एक जबदस्ती निश्चित किए गए पथ पर दोनों ही अनमने-से चल रहे थे । एक को अपना वचन पूरा करना था और दूसरे को अपना घोर स्वार्थ साधना था ।
यो वचन पूरा करना पड़ा । इन्द्र ने कपटी मन से ब्रह्मविद्या की दीक्षा तो ग्रहण की पर उसे कोई मानसिक सन्तोष या शान्ति अन्त तक नहीं मिली। एक दिन उपदेश करते समय दथ्यङ् ने भोग विलास की निन्दा करते हुए इन्द्र की बराबरी एक कामी कुत्ते से की और बताया कि जो मनुष्य इस संसार में जन्म लेकर
स्वार्थ साधने में लगे रहते हैं और भोग विलास को छोड़कर जिनके जीवन का कोई दूसरा उद्देश ही नहीं होता उनका जीवन सिवा दुःख, अशान्ति और सन्तोष के और कुछ नहीं है।
इन्द्र ऐसी ब्रह्मविद्या को जान कर क्या करते जिसमें उनके ऐश्वर्य एवं भोग विलास को कुत्ते का जीवन बताया जाय । जिस ऐश्वर्य, सुख और भोग-विलास आदि की प्राप्ति के लिए बड़े-बड़े ऋषि तपस्या करते-करते जिन्दगी बिता देते हैं और तिस पर भी उसे नहीं पाते वह कुत्ते का जीवन किस प्रकार हो सकता है । उन्होने मन में सन्देह किया कि ब्रह्मर्षि अपने प्रिय शिष्य अश्विनीकुमारों की प्रेरणा से मैस
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अश्विनीकुमार और उनके गुरु दथ्यङ् वस्त्रों और अलंकारों को उतार कर रख दे और रथ समेत सारथी दिनुचरों को लौटा कर छात्रों की भाँति कौपीन और मेखला धारण करें। हाथ में समिधा लेकर पवित्र तन मन और वचन से हमारे पास दीक्षा लेने के लिए आएँ ।' कोई दूसरा चारा न देख, दूसरे दिन प्रातःकाल इन्द्र बहुत विवश होकर अपने परम प्रिय वस्त्रों और अलंकारों को दूर रख कर बटु वेश में जब दथ्यङ के पास ब्रह्मविद्या की दीक्षा लेने के लिए पहुँचे तो आश्रमवासियों को इस पर बड़ा कुतूहल हुआ। पर स्वयं दध्यङ के मन में इन्द्र की इस विनीतता से कोई हर्ष नहीं हुआ और न इन्द्र ही को उनकी इस महान् कृपा पर कोई प्रसन्नता हुई क्योंकि एक जबदस्ती निश्चित किए गए पथ पर दोनों ही अनमने-से चल रहे थे । एक को अपना वचन पूरा करना था और दूसरे को अपना घोर स्वार्थ साधना था । यो वचन पूरा करना पड़ा । इन्द्र ने कपटी मन से ब्रह्मविद्या की दीक्षा तो ग्रहण की पर उसे कोई मानसिक सन्तोष या शान्ति अन्त तक नहीं मिली। एक दिन उपदेश करते समय दथ्यङ् ने भोग विलास की निन्दा करते हुए इन्द्र की बराबरी एक कामी कुत्ते से की और बताया कि जो मनुष्य इस संसार में जन्म लेकर स्वार्थ साधने में लगे रहते हैं और भोग विलास को छोड़कर जिनके जीवन का कोई दूसरा उद्देश ही नहीं होता उनका जीवन सिवा दुःख, अशान्ति और सन्तोष के और कुछ नहीं है। इन्द्र ऐसी ब्रह्मविद्या को जान कर क्या करते जिसमें उनके ऐश्वर्य एवं भोग विलास को कुत्ते का जीवन बताया जाय । जिस ऐश्वर्य, सुख और भोग-विलास आदि की प्राप्ति के लिए बड़े-बड़े ऋषि तपस्या करते-करते जिन्दगी बिता देते हैं और तिस पर भी उसे नहीं पाते वह कुत्ते का जीवन किस प्रकार हो सकता है । उन्होने मन में सन्देह किया कि ब्रह्मर्षि अपने प्रिय शिष्य अश्विनीकुमारों की प्रेरणा से मैस
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भारत में मीटू मूवमेंट का आगाज हो चुका है और यौन उत्पीड़न को झेल चुकीं कई महिलाओं ने इस बारे में खुलकर बोला है।
भारत में मीटू मूवमेंट का आगाज हो चुका है और यौन उत्पीड़न को झेल चुकीं कई महिलाओं ने इस बारे में खुलकर बोला है। इस अभियान ने सभी के लिए कार्यस्थल पर एक सुरक्षित माहौल प्रदान करने जैसे मुद्दे पर बहस को शुरू कर दिया है, लेकिन अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा का मानना है कि फिलहाल इस बारे में वास्तव में बदलाव आने के बजाय इसे लेकर शोरशराबा ज्यादा है। मलाइका ने भारत में मीटू मूवमेंट पर हो रही चर्चा व इससे आए बदलाव के बारे में पूछे जाने पर मुंबई से फोन पर आईएएनएस को बताया, "मुझे ज्यादा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। मैं लोगों की बातों को सुन रही हूं। मुझे लगता है कि बदलाव की अपेक्षा इसे लेकर शोरशराबा कहीं ज्यादा है।" हॉलीवुड में मीटू मूवमेंट का जबरदस्त असर दिखने के बाद तनुश्री दत्ता द्वारा अभिनेता नाना पाटेकर पर फिल्म 'हॉर्न ओके' की शूटिंग के दौरान छेड़खानी करने का आरोप लगाने के बाद बॉलीवुड में भी इस मूवमेंट ने जोर पकड़ा और कई महिलओं ने अपनी दास्तां बयां की।
कई बड़े नामों जैसे विकास बहल, चेतन भगत, गुरसिमरन खंबा, कैलाश खेर, रजत कपूर, आलोक नाथ, अनु मलिक और साजिद खान पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे। हालांकि, मलाइका का कहना है कि इस अभियान को फिलहाल अभी बहुत दूर जाना है।
एक बेटे की मां मलाइका ने कहा, "अगर हम मनोरंजन उद्योग की बात कर रहे हैं तो बहुत कुछ होता दिखाई दे रहा है। लोग इस बारे में बात कर रहे हैं। लेकिन, वास्तविक बदलाव के लिए या लोगों द्वारा आगे आकर इस बारे में कुछ करने और अभियान को सफल करने के लिए मानसिकता में बदलाव की जरूरत है और यह बदलाव रातोरात नहीं आ सकता।" मालइका इन दिनों टीवी शो 'इंडियाज नेक्स्ट टॉप मॉडल-4' करती नजर आ रही हैं। इसका प्रसारण एमटीवी पर होता है।
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भारत में मीटू मूवमेंट का आगाज हो चुका है और यौन उत्पीड़न को झेल चुकीं कई महिलाओं ने इस बारे में खुलकर बोला है। भारत में मीटू मूवमेंट का आगाज हो चुका है और यौन उत्पीड़न को झेल चुकीं कई महिलाओं ने इस बारे में खुलकर बोला है। इस अभियान ने सभी के लिए कार्यस्थल पर एक सुरक्षित माहौल प्रदान करने जैसे मुद्दे पर बहस को शुरू कर दिया है, लेकिन अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा का मानना है कि फिलहाल इस बारे में वास्तव में बदलाव आने के बजाय इसे लेकर शोरशराबा ज्यादा है। मलाइका ने भारत में मीटू मूवमेंट पर हो रही चर्चा व इससे आए बदलाव के बारे में पूछे जाने पर मुंबई से फोन पर आईएएनएस को बताया, "मुझे ज्यादा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। मैं लोगों की बातों को सुन रही हूं। मुझे लगता है कि बदलाव की अपेक्षा इसे लेकर शोरशराबा कहीं ज्यादा है।" हॉलीवुड में मीटू मूवमेंट का जबरदस्त असर दिखने के बाद तनुश्री दत्ता द्वारा अभिनेता नाना पाटेकर पर फिल्म 'हॉर्न ओके' की शूटिंग के दौरान छेड़खानी करने का आरोप लगाने के बाद बॉलीवुड में भी इस मूवमेंट ने जोर पकड़ा और कई महिलओं ने अपनी दास्तां बयां की। कई बड़े नामों जैसे विकास बहल, चेतन भगत, गुरसिमरन खंबा, कैलाश खेर, रजत कपूर, आलोक नाथ, अनु मलिक और साजिद खान पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे। हालांकि, मलाइका का कहना है कि इस अभियान को फिलहाल अभी बहुत दूर जाना है। एक बेटे की मां मलाइका ने कहा, "अगर हम मनोरंजन उद्योग की बात कर रहे हैं तो बहुत कुछ होता दिखाई दे रहा है। लोग इस बारे में बात कर रहे हैं। लेकिन, वास्तविक बदलाव के लिए या लोगों द्वारा आगे आकर इस बारे में कुछ करने और अभियान को सफल करने के लिए मानसिकता में बदलाव की जरूरत है और यह बदलाव रातोरात नहीं आ सकता।" मालइका इन दिनों टीवी शो 'इंडियाज नेक्स्ट टॉप मॉडल-चार' करती नजर आ रही हैं। इसका प्रसारण एमटीवी पर होता है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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चीनी स्टेट मीडिया में मौजूद चेंग लेई (Cheng Lei) के सहकर्मी उस समय काफी चिंतित हो गए थे, जब वो उनके मैसेज का जवाब नहीं दे रही थीं. ऐसे में उनके दोस्तों के बीच चेंग को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे.
चीन (China) ने ऑस्ट्रेलियाई टेलीविजन एंकर चेंग लेई (Cheng Lei) को हिरासत में ले लिया है. चेंग लेई चीनी सरकार के अंग्रेजी न्यूज चैनल सीजीटीएन (CGTN) में पिछले कई सालों से काम कर रही थीं. राजधानी बीजिंग में हिरासत में रखी गईं चेंग लेई की अंतरराष्ट्रीय मीडिया में काफी चर्चा हो रही है. साथ ही इस केस ने ऑस्ट्रेलिया और चीन के रिश्ते में एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. विदेश मंत्री मैरिस पायने (Marise Payne) ने बयान जारी करके चेंग लेई को हिरासत में लिए जाने के खबर की पुष्टि की है. बयान में कहा गया है कि पिछले हफ्ते ऑस्ट्रेलियाई राजनयिकों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए लेई से बातचीत करने की इजाजत दी गई थी.
बयान के मुताबिक, 14 अगस्त को चीनी अथॉरिटीज की ओर से चेंग लेई को हिरासत में लिए जाने की सूचना दी गई. 27 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेस के जरिए ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने संपर्क साधा था. साथ ही कहा गया है कि चेंग लेई और उनके परिवार को ऑस्ट्रेलिया की ओर से पूरी मदद मुहैया कराई जाएगी.
चीनी स्टेट मीडिया में मौजूद चेंग लेई के सहकर्मी उस समय काफी चिंतित हो गए थे, जब वो उनके मैसेज का जवाब नहीं दे रही थीं. ऐसे में उनके दोस्तों के बीच चेंग को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे.
चेंग लेई पिछले आठ सालों से सीजीटीएन में काम कर रही थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार पर अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है. हालांकि उन्हें 'एक निर्दिष्ट स्थान पर आवासीय निगरानी' में रखा गया है.
चीनी मूल की पत्रकार, जिन्होंने क्वींसलैंड विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने मेलबर्न में कैडबरी श्वेप्स और एक्सॉनमोबिल के साथ पांच साल तक काम किया. साल 2003 में बीजिंग लौटने से पहले उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता ले ली.
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चीनी स्टेट मीडिया में मौजूद चेंग लेई के सहकर्मी उस समय काफी चिंतित हो गए थे, जब वो उनके मैसेज का जवाब नहीं दे रही थीं. ऐसे में उनके दोस्तों के बीच चेंग को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे. चीन ने ऑस्ट्रेलियाई टेलीविजन एंकर चेंग लेई को हिरासत में ले लिया है. चेंग लेई चीनी सरकार के अंग्रेजी न्यूज चैनल सीजीटीएन में पिछले कई सालों से काम कर रही थीं. राजधानी बीजिंग में हिरासत में रखी गईं चेंग लेई की अंतरराष्ट्रीय मीडिया में काफी चर्चा हो रही है. साथ ही इस केस ने ऑस्ट्रेलिया और चीन के रिश्ते में एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. विदेश मंत्री मैरिस पायने ने बयान जारी करके चेंग लेई को हिरासत में लिए जाने के खबर की पुष्टि की है. बयान में कहा गया है कि पिछले हफ्ते ऑस्ट्रेलियाई राजनयिकों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए लेई से बातचीत करने की इजाजत दी गई थी. बयान के मुताबिक, चौदह अगस्त को चीनी अथॉरिटीज की ओर से चेंग लेई को हिरासत में लिए जाने की सूचना दी गई. सत्ताईस अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेस के जरिए ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने संपर्क साधा था. साथ ही कहा गया है कि चेंग लेई और उनके परिवार को ऑस्ट्रेलिया की ओर से पूरी मदद मुहैया कराई जाएगी. चीनी स्टेट मीडिया में मौजूद चेंग लेई के सहकर्मी उस समय काफी चिंतित हो गए थे, जब वो उनके मैसेज का जवाब नहीं दे रही थीं. ऐसे में उनके दोस्तों के बीच चेंग को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे. चेंग लेई पिछले आठ सालों से सीजीटीएन में काम कर रही थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार पर अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है. हालांकि उन्हें 'एक निर्दिष्ट स्थान पर आवासीय निगरानी' में रखा गया है. चीनी मूल की पत्रकार, जिन्होंने क्वींसलैंड विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने मेलबर्न में कैडबरी श्वेप्स और एक्सॉनमोबिल के साथ पांच साल तक काम किया. साल दो हज़ार तीन में बीजिंग लौटने से पहले उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता ले ली.
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Amethi News : स्मृति इरानी के दीपावली होर्डिंग पर पोस्टर लगाकर जनता ने पूछा सवाल, चीनी 13 रूपये किलो कब मिलेगी?
(स्मृति इरानी के होर्डिंग पर जनता ने चिपकाए महंगाई वाले पोस्टर)
Amethi News : केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी (Smriti Irani) के संसदीय क्षेत्र अमेठी (Amethi) में जनता ने उनकी दीपावली शुभकामनाओं वाली होर्डिंग पर पोस्टर चिपका दिए हैं। यह पोस्टर महंगाई से जुड़े हुए हैं। अमेठी की जनता ने इन पोस्टरों के माध्यम से इरानी से पूछा है कि चीनी 13 रूपये किलो कब मिलेगी।
दरअसल स्मृति ईरानी ने 2019 लोकसभा चुनाव में कहा था कि, 'मोदी का संदेश है कि कमल का बटन दबाओ और 13 रुपए किलो में शक्कर पाओ। स्मृति ने आगे कहा था, 'मोदी ने जो कहा, वो किया है।' लोग इस जुमले में आ गए और स्मृति ईरानी अमेठी से जीत गईं। इसके बाद अब लोग 13 रुपए किलो की चीनी खोज रहे हैं।
गौरतलब है कि आसमान छूती कीमतों से जनता त्रस्त है। हाल ही में सरकार ने डीजल व पेट्रोल के दाम कम किए हैं, लेकिन लोग उसे महज चुनावी नफा-नुकसान के तौर पर आंक रहे हैं। पेट्रोल-डीजल का रेड 5-10 रूपये घटाने के बाद केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना के तहत दिया जाने वाला राशन भी बंद करने का फैसला किया है।
बात अगर स्मृति इरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी की करें तो वहां समाजवादी पार्टी के एक विधायक धरने पर इसलिए बैठे हैं क्योंकि अमेठी की सड़कें टूटी हुई हैं। आम जनता अलग परेशान है। लोग अब भाजपाइयों से सवाल कर रहे हैं। कि आखिर कब वो दिन आएगा जब भाजपा के तमाम नेता अपने चुनावी वादे पूरे करेंगे।
इसी वादे में एक जो इरानी ने अमेठी की जनता से किया था। जिसके लिए जनता अब उनकी होर्डिंग पर पोस्टर लगाकर सवाल कर रही है। इरानी ने कमल का बटन दबाने पर चीनी का दाम 13 रूपये किलो मिलने की बात कही थी। बावजूद इसके चीनी 35-38 रूपये किलो मिल रही है। अब जनता उनके किए वादे को इस तरह याद दिला रही है।
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Amethi News : स्मृति इरानी के दीपावली होर्डिंग पर पोस्टर लगाकर जनता ने पूछा सवाल, चीनी तेरह रूपये किलो कब मिलेगी? Amethi News : केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में जनता ने उनकी दीपावली शुभकामनाओं वाली होर्डिंग पर पोस्टर चिपका दिए हैं। यह पोस्टर महंगाई से जुड़े हुए हैं। अमेठी की जनता ने इन पोस्टरों के माध्यम से इरानी से पूछा है कि चीनी तेरह रूपये किलो कब मिलेगी। दरअसल स्मृति ईरानी ने दो हज़ार उन्नीस लोकसभा चुनाव में कहा था कि, 'मोदी का संदेश है कि कमल का बटन दबाओ और तेरह रुपयापए किलो में शक्कर पाओ। स्मृति ने आगे कहा था, 'मोदी ने जो कहा, वो किया है।' लोग इस जुमले में आ गए और स्मृति ईरानी अमेठी से जीत गईं। इसके बाद अब लोग तेरह रुपयापए किलो की चीनी खोज रहे हैं। गौरतलब है कि आसमान छूती कीमतों से जनता त्रस्त है। हाल ही में सरकार ने डीजल व पेट्रोल के दाम कम किए हैं, लेकिन लोग उसे महज चुनावी नफा-नुकसान के तौर पर आंक रहे हैं। पेट्रोल-डीजल का रेड पाँच-दस रूपये घटाने के बाद केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना के तहत दिया जाने वाला राशन भी बंद करने का फैसला किया है। बात अगर स्मृति इरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी की करें तो वहां समाजवादी पार्टी के एक विधायक धरने पर इसलिए बैठे हैं क्योंकि अमेठी की सड़कें टूटी हुई हैं। आम जनता अलग परेशान है। लोग अब भाजपाइयों से सवाल कर रहे हैं। कि आखिर कब वो दिन आएगा जब भाजपा के तमाम नेता अपने चुनावी वादे पूरे करेंगे। इसी वादे में एक जो इरानी ने अमेठी की जनता से किया था। जिसके लिए जनता अब उनकी होर्डिंग पर पोस्टर लगाकर सवाल कर रही है। इरानी ने कमल का बटन दबाने पर चीनी का दाम तेरह रूपये किलो मिलने की बात कही थी। बावजूद इसके चीनी पैंतीस-अड़तीस रूपये किलो मिल रही है। अब जनता उनके किए वादे को इस तरह याद दिला रही है।
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विधान सभा कार्यवाही / 21 December 2021
अशोधित / प्रकाशन के लिए नहीं
यह कहना सही है कि म०प्र० पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 74 के अनुसार ग्राम पंचायत क्षेत्र की भूमियों के लिए भू-राजस्व पर पंचायत उपकर का आरोपण केवल ग्राम पंचायत क्षेत्र की भूमियों के लिए किया जाता है।
यह कहना भी सही है कि, नगरीय क्षेत्रं की भूमियों के भू-राजस्व पर पंचायत उपकर का आरोपण नहीं किया जा सकता है।
यह कहना सही नहीं है कि भोपाल जिले के वर्ष 2014 में ग्राम पंचायत से नगर निगम क्षेत्र में सम्मिलित हुए ग्रामों सहित नगरीय क्षेत्र के ग्रामों में अभी भी मनमाने ढंग से राजस्व अधिकारियों द्वारा भू-राजस्व पर पंचायत उपकर का आरोपण किया जा रहा है।
भोपाल जिले में केवल ग्राम पंचायतों के अंतर्गत भूमियों के लिए निर्धारित भूराजस्व पर भू-राजस्व के 50 प्रतिशत पंचायत उपकर का आरोपण किया जा रहा है, नगरीय क्षेत्र की भूमियों पर पंचायत कर, आरोपित नहीं किया जाता है।
वस्तुतः भूमि उपयोग परिवर्तन के उपरांत पुनः निर्धारण या लगान सहित समस्त प्रकार के भू-राजस्व की गणना ऑनलाईन पोर्टल से राजस्व एकाउण्टिंग सिस्टम के द्वारा की जाती है, इस गणना में राजस्व अधिकारियों के द्वारा कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। पूर्व प्रक्रिया अनुसार निर्धारित व्यपवर्तन भूराजस्व को भी वर्तमान व्यवस्था अनुसार डायवर्सन डाटा एण्ट्री कर राजस्व रिकार्ड शुद्धिकरण अभियान के तहत अद्यतन किया जा रहा है। भोपाल जिले में किसी भी प्रकार के कर आरोपण विधि विपरीत नहीं किया जा रहा है।
और इसके बाद भी यदि आपके पास है तो आप मुझे बता दें.
श्रीमती कृष्णा गौर माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2014 में बहुत सारी ग्राम पंचायतें नगर निगम की सीमा में शामिल हुईं बावजूद इसके तहसील हुजूर से बहुत सारे नोटिस उन भूमि मालिकों को भेजे गए जिनकी जमीनें नगर निगम की सीमा में आ गईं थीं. मेरे पास प्रमाण हैं हो सकता है त्रुटिवश यह काम हो रहा हो लेकिन वर्ष 2014 से वर्ष 2021 तक लगातार उपकर के पैसों की वसूली हुई है. मैं चाहूंगी कि या तो उनका पैसा वापस किया जाए या उन अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए जिन्होंने यह त्रुटि की है.
श्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं विश्वस्त करना चाहूंगा कि निश्चित रूप से इसका पूरा संज्ञान लेते हुए हम इस पूरे प्रकरण की जांच करांएगे और यदि इसमें कोई शामिल होगा तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.
अध्यक्ष महोदय-- ठीक है.
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विधान सभा कार्यवाही / इक्कीस दिसंबरember दो हज़ार इक्कीस अशोधित / प्रकाशन के लिए नहीं यह कहना सही है कि मशून्यप्रशून्य पंचायत राज अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ तिरानवे की धारा चौहत्तर के अनुसार ग्राम पंचायत क्षेत्र की भूमियों के लिए भू-राजस्व पर पंचायत उपकर का आरोपण केवल ग्राम पंचायत क्षेत्र की भूमियों के लिए किया जाता है। यह कहना भी सही है कि, नगरीय क्षेत्रं की भूमियों के भू-राजस्व पर पंचायत उपकर का आरोपण नहीं किया जा सकता है। यह कहना सही नहीं है कि भोपाल जिले के वर्ष दो हज़ार चौदह में ग्राम पंचायत से नगर निगम क्षेत्र में सम्मिलित हुए ग्रामों सहित नगरीय क्षेत्र के ग्रामों में अभी भी मनमाने ढंग से राजस्व अधिकारियों द्वारा भू-राजस्व पर पंचायत उपकर का आरोपण किया जा रहा है। भोपाल जिले में केवल ग्राम पंचायतों के अंतर्गत भूमियों के लिए निर्धारित भूराजस्व पर भू-राजस्व के पचास प्रतिशत पंचायत उपकर का आरोपण किया जा रहा है, नगरीय क्षेत्र की भूमियों पर पंचायत कर, आरोपित नहीं किया जाता है। वस्तुतः भूमि उपयोग परिवर्तन के उपरांत पुनः निर्धारण या लगान सहित समस्त प्रकार के भू-राजस्व की गणना ऑनलाईन पोर्टल से राजस्व एकाउण्टिंग सिस्टम के द्वारा की जाती है, इस गणना में राजस्व अधिकारियों के द्वारा कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। पूर्व प्रक्रिया अनुसार निर्धारित व्यपवर्तन भूराजस्व को भी वर्तमान व्यवस्था अनुसार डायवर्सन डाटा एण्ट्री कर राजस्व रिकार्ड शुद्धिकरण अभियान के तहत अद्यतन किया जा रहा है। भोपाल जिले में किसी भी प्रकार के कर आरोपण विधि विपरीत नहीं किया जा रहा है। और इसके बाद भी यदि आपके पास है तो आप मुझे बता दें. श्रीमती कृष्णा गौर माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्ष दो हज़ार चौदह में बहुत सारी ग्राम पंचायतें नगर निगम की सीमा में शामिल हुईं बावजूद इसके तहसील हुजूर से बहुत सारे नोटिस उन भूमि मालिकों को भेजे गए जिनकी जमीनें नगर निगम की सीमा में आ गईं थीं. मेरे पास प्रमाण हैं हो सकता है त्रुटिवश यह काम हो रहा हो लेकिन वर्ष दो हज़ार चौदह से वर्ष दो हज़ार इक्कीस तक लगातार उपकर के पैसों की वसूली हुई है. मैं चाहूंगी कि या तो उनका पैसा वापस किया जाए या उन अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए जिन्होंने यह त्रुटि की है. श्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं विश्वस्त करना चाहूंगा कि निश्चित रूप से इसका पूरा संज्ञान लेते हुए हम इस पूरे प्रकरण की जांच करांएगे और यदि इसमें कोई शामिल होगा तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी. अध्यक्ष महोदय-- ठीक है.
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हेल्थ कार्नर :- वैसे तो जीरे को मसले के तौर पर सब्जियों में उपयोग किया जाता हैं लेकिन जीरा और जीरे का पानी कई बीमारियों से बचने में मदद भी करते हैं। तो आइए जानते हैं जीरे का पानी पीने के सेहतमंद फायदे।
1. जीरे का पानी पीने से बॉडी में जमा हुआ फैट यानी कि चर्बी गल कर निकल जाती हैं इससे मोटापा घटाने में मदद मिलती हैं।
2. रोजाना जीरे का पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता हैं और यह हार्ट् प्रॉब्लम से बचाता हैं।
3. जीरे के पानी मे थाइमोल होता हैं इससे पेट दिनभर हल्का रहता हैं और कब्ज की शिकायत नहीं रहती।
4. जीरे में पोटैशियम होता हैं अतः जीरे की चाय या जीरे का पानी पीने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता हैं।
5. जीरे के पानी मे आयरन होता हैं जो एनीमिया (खून की कमी) से बचाता हैं।
6. जीरे में विटामिन बी6 होता हैं अतः जीरे का पानी पीने से दिमाग मजबूत होता हैं।
7. जीरे का पानी बॉडी को डीटॉक्स करता हैं यह स्किन का ग्लो बढ़ता है।
8. रेगुलर जीरे का पानी पीने से बॉडी में ग्लूकोज लेवल मेंटेन रहता हैं यह डायबिटीज से बचाता हैं।
9. जीरे के पानी से मसल्स रिलैक्स होती हैं और बॉडी पेन से राहत मिलती हैं।
10. जीरे के पानी से एसिडिटी की समस्या नहीं होती हैं।
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हेल्थ कार्नर :- वैसे तो जीरे को मसले के तौर पर सब्जियों में उपयोग किया जाता हैं लेकिन जीरा और जीरे का पानी कई बीमारियों से बचने में मदद भी करते हैं। तो आइए जानते हैं जीरे का पानी पीने के सेहतमंद फायदे। एक. जीरे का पानी पीने से बॉडी में जमा हुआ फैट यानी कि चर्बी गल कर निकल जाती हैं इससे मोटापा घटाने में मदद मिलती हैं। दो. रोजाना जीरे का पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता हैं और यह हार्ट् प्रॉब्लम से बचाता हैं। तीन. जीरे के पानी मे थाइमोल होता हैं इससे पेट दिनभर हल्का रहता हैं और कब्ज की शिकायत नहीं रहती। चार. जीरे में पोटैशियम होता हैं अतः जीरे की चाय या जीरे का पानी पीने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता हैं। पाँच. जीरे के पानी मे आयरन होता हैं जो एनीमिया से बचाता हैं। छः. जीरे में विटामिन बीछः होता हैं अतः जीरे का पानी पीने से दिमाग मजबूत होता हैं। सात. जीरे का पानी बॉडी को डीटॉक्स करता हैं यह स्किन का ग्लो बढ़ता है। आठ. रेगुलर जीरे का पानी पीने से बॉडी में ग्लूकोज लेवल मेंटेन रहता हैं यह डायबिटीज से बचाता हैं। नौ. जीरे के पानी से मसल्स रिलैक्स होती हैं और बॉडी पेन से राहत मिलती हैं। दस. जीरे के पानी से एसिडिटी की समस्या नहीं होती हैं।
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रायपुर। मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए दो मौजूदा विधायकों समेत नौ उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में 2018 से कांग्रेस का शासन है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत पोयाम ने बताया कि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नौ उम्मीदवारों की सूची मंगलवार देर रात जारी की गई, जिसमें एक महिला विधायक समेत दो मौजूदा विधायक शामिल हैं।
पोयाम ने बताया कि वर्तमान विधायक केशव प्रसाद चंद्रा जो जैजैपुर (सक्ती जिला) और इंदु बंजारे जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पामगढ़ (जांजगीर-चांपा जिला) विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें उनके संबंधित क्षेत्रों से चुनाव मैदान में उतारा गया है। सूची के अनुसार वरिष्ठ नेता दाऊराम रत्नाकर (मस्तूरी सीट-अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), ओमप्रकाश बाचपेयी (नवागढ़- अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), राधेश्याम सूर्यवंशी (जांजगीर-चांपा), डॉक्टर विनोद शर्मा (अकलतरा), श्याम टंडन (बिलाईगढ़- अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), रामकुमार सूर्यवंशी (बेलतरा) और आनंद तिग्गा (सामरी-अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित) को पार्टी ने चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है।
2018 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। पिछले चुनाव में बसपा ने 4.27 प्रतिशत वोट प्राप्त किया था तथा दो सीटें- जैजैपुर और पामगढ़ में जीत हासिल की थी, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी जेसीसी (जे) को 7.6 प्रतिशत वोट मिले थे। पार्टी ने पांच सीटें हासिल की थीं। इस बार के चुनाव में इनमें से किसी भी दल ने अब तक गठबंधन की घोषणा नहीं की है।
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रायपुर। मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी ने आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए दो मौजूदा विधायकों समेत नौ उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में दो हज़ार अट्ठारह से कांग्रेस का शासन है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत पोयाम ने बताया कि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नौ उम्मीदवारों की सूची मंगलवार देर रात जारी की गई, जिसमें एक महिला विधायक समेत दो मौजूदा विधायक शामिल हैं। पोयाम ने बताया कि वर्तमान विधायक केशव प्रसाद चंद्रा जो जैजैपुर और इंदु बंजारे जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पामगढ़ विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें उनके संबंधित क्षेत्रों से चुनाव मैदान में उतारा गया है। सूची के अनुसार वरिष्ठ नेता दाऊराम रत्नाकर , ओमप्रकाश बाचपेयी , राधेश्याम सूर्यवंशी , डॉक्टर विनोद शर्मा , श्याम टंडन , रामकुमार सूर्यवंशी और आनंद तिग्गा को पार्टी ने चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है। दो हज़ार अट्ठारह के विधानसभा चुनाव में बसपा ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। पिछले चुनाव में बसपा ने चार.सत्ताईस प्रतिशत वोट प्राप्त किया था तथा दो सीटें- जैजैपुर और पामगढ़ में जीत हासिल की थी, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी जेसीसी को सात.छः प्रतिशत वोट मिले थे। पार्टी ने पांच सीटें हासिल की थीं। इस बार के चुनाव में इनमें से किसी भी दल ने अब तक गठबंधन की घोषणा नहीं की है।
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अमृतांशी जोशी,भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) से एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है. राजधानी में गायों की लाशों का पहाड़ देखने को मिला है. यह तस्वीर भोपाल नगर निगम (Bhopal City Corporation) की शर्मनाक करतूतों को उजागर कर रहा है. आदमपुर कचरा खंती में सैकड़ों गायों की लाश फेंकी गई है. गायों की लाश दूर दूर तक फैली दिख रही है, जिसे देखकर किसी का भी दिल सहम जाएगा.
भोपाल नगर निगम की लापरवाही के चलते आदमपुर कचरा खंती (Adampur garbage collection) में सैकड़ों गायों की लाश फेंकी जा रही है. हजारों गाय और जानवरों के अवशेष से कचरा खंती लाशों का पहाड़ बन गया है. सड़ी गली लाशों से आसपास भयंकर प्रदूषण फैल रहा है. गर्मी में बदबू और प्रदूषण से आसपास के 7 गांव का जीना दुश्वार हो गया है. मृत गायों को गड्ढा खोदकर दफनाने का नियम है, लेकिन निगम इस पर ध्यान नहीं दे रहा है. गोवंश को दफनाने के बजाय खुले में फेंका जा रहा है. इससे इलाकों में बदूब फैल रही है. इंसानों के लिए नई बीमारी का खतरा पैदा हो रहा है.
बता दें कि 3 अप्रैल को भोपाल के आदमपुर कचरा खंती में भीषण आग लग गई थी. कचरे में आग लगने से सैकड़ों टन पॉलिथिन जल गया था. नगर निगम का 50 लाख का प्लांट भी जलकर खाक हो गया. आसपास के कई गांव में खचरे का जहरीला धुआं भर गया था. नाराज ग्रामीणों ने निगम कैंप ऑफिस का घेराव कर ठेका कंपनी और निगम पर जानबूझकर कचरा जलाने का आरोप लगाया था.
वहीं, रहवासियों का दावा है कि बीते 15 दिनों से आग लगी थी. तब आग छोटी हिस्से में जल रही थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया. बाद में कचरे के पहाड़नुमा ढेरों में आग ने विशाल रूप ले लिया. जिसके बाद अमला सक्रिय हुआ. आगजनी से 6 गांव में धुएं की वजह से जमकर वायु प्रदूषण हो रहा है. लोगों ने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से सो नहीं पा रहे है. आग की धुएं के कारण उनके बच्चे बीमार भी हो रहे हैं.
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अमृतांशी जोशी,भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है. राजधानी में गायों की लाशों का पहाड़ देखने को मिला है. यह तस्वीर भोपाल नगर निगम की शर्मनाक करतूतों को उजागर कर रहा है. आदमपुर कचरा खंती में सैकड़ों गायों की लाश फेंकी गई है. गायों की लाश दूर दूर तक फैली दिख रही है, जिसे देखकर किसी का भी दिल सहम जाएगा. भोपाल नगर निगम की लापरवाही के चलते आदमपुर कचरा खंती में सैकड़ों गायों की लाश फेंकी जा रही है. हजारों गाय और जानवरों के अवशेष से कचरा खंती लाशों का पहाड़ बन गया है. सड़ी गली लाशों से आसपास भयंकर प्रदूषण फैल रहा है. गर्मी में बदबू और प्रदूषण से आसपास के सात गांव का जीना दुश्वार हो गया है. मृत गायों को गड्ढा खोदकर दफनाने का नियम है, लेकिन निगम इस पर ध्यान नहीं दे रहा है. गोवंश को दफनाने के बजाय खुले में फेंका जा रहा है. इससे इलाकों में बदूब फैल रही है. इंसानों के लिए नई बीमारी का खतरा पैदा हो रहा है. बता दें कि तीन अप्रैल को भोपाल के आदमपुर कचरा खंती में भीषण आग लग गई थी. कचरे में आग लगने से सैकड़ों टन पॉलिथिन जल गया था. नगर निगम का पचास लाख का प्लांट भी जलकर खाक हो गया. आसपास के कई गांव में खचरे का जहरीला धुआं भर गया था. नाराज ग्रामीणों ने निगम कैंप ऑफिस का घेराव कर ठेका कंपनी और निगम पर जानबूझकर कचरा जलाने का आरोप लगाया था. वहीं, रहवासियों का दावा है कि बीते पंद्रह दिनों से आग लगी थी. तब आग छोटी हिस्से में जल रही थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया. बाद में कचरे के पहाड़नुमा ढेरों में आग ने विशाल रूप ले लिया. जिसके बाद अमला सक्रिय हुआ. आगजनी से छः गांव में धुएं की वजह से जमकर वायु प्रदूषण हो रहा है. लोगों ने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से सो नहीं पा रहे है. आग की धुएं के कारण उनके बच्चे बीमार भी हो रहे हैं.
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मैंने ऐसी घटनायें देखी हैं जिनमें किसी मनुष्य के विषय में किये गये एक ही बुरे विचार ने उसे ऐसे कुमार्ग पर ढकेल दिया जिसका कुफल उसे अनेक जन्मों तक भोगना होगा । वह विचार उसके मनस्तल पर विद्यमान तो था, किन्तु उसने अभी तक निर्णयात्मक रूप धारण नहीं किया था, इतने में ही किसी व्यक्ति का भेजा हुआ बुरा विचार आया और उसने प्रवर्तन देके उसके विचार को कार्यरूप में परिणित कर दिया और उससे वह पाप करवा लिया । इस बात को जब तक आप दृष्टिद्वारा न देख सकें तब तक इसे कदाचित् ही समझ सकेंगे, किंतु एक बार देख लेने पर तो इतना भय होगा कि आप सदा के लिये सावधान हो जायेंगे । दिव्यदृष्टि आप में एक नवीन उत्तरदायित्व का भाव उत्पन्न करती है अथवा कभी-कभी आपको स्तब्ध कर देती है । याद कीजिये कि कवि सचिलर ( Schiller ) ने दिव्यदृष्टि के विषय में क्या लिखा था और कैसे उसने फिर से अपनी इस दिव्यदृष्टि की अन्धता को इच्छा की थी, उसने कहा था, "अपना यह निर्दय उपहार लौटा लो, यह भयंकर उपहार लौटा लो ! "
तुम अपने मन को भी उत्तम विचारों के स्थान पर बुरे विचारों से भरते हो और इस प्रकार स्वयं अपनी उन्नति में भी विघ्न डालते हो, तथा अपने आपको उन लोगों की दृष्टि में जिनको देख सकने की शक्ति है, एक सुन्दर और प्रिय दृश्य वनाने के स्थान पर एक भद्दा और अप्रिय दृश्य बना लेते हो ।"
लेडबीटर - बहुत लोग अपने शारीरिक वेश-विन्यास और अपने शिष्टाचार की शोभा व भद्रता के लिये बहुत
परिश्रम करते हैं, केवल इसलिये ही नहीं कि वे अपने के सर्वसुन्दर और सजन प्रकट करने को आतुर होते हैं, वरन् "सामान्यतः इसे समाज के प्रति एक कर्त्तव्य भी माना गया है। प्राचीन समय में अपने को प्रत्येक प्रकार से यथाशक्ति पूर्ण और सुन्दर बनाता प्रत्येक मनुष्य का कर्त्तव्य समझा जाता था; वेषभूषा, रूपरंग, बोल-चाल और कार्यक्रम सभी वातों में उसे यथार्थ, शोभायुक्त एवं उत्तम प्रणाली सीखनी होती थी । मनुष्य को केवल आकृति ही नहीं, वरन् उसके चारों ओर का वातावरण भी न केवल उपयोगी वरन् सुन्दर भी हुआ करता था । यदि कोई मनुष्य एक घर बनवाता था तो अपने पड़ोसियों के प्रति उसका यह कर्त्तव्य था कि वह उसे शोभामय और सुन्दर बनाये, यद्यपि उसे मूल्यवान् बनाना अनिवार्य न था; उनके वर्तन, उनकी प्रतिमायें और मूर्तियाँ भी सुन्दर हुआ करती थीं। आजकल तो लोग जहाँ तक संभव हो सस्ते से सस्ता काम ही करना चाहते हैं और उसके द्वारा उत्पन्न Heळे प्रभाव के विषय में तनिक भी ध्यान नहीं देते। एक. मनुष्य एक बहुत ही भद्दा घर या कारखाना बनवाता है और इसे देखने वाला प्रत्येक भावप्रधान मनुष्य ठिठुक कर. मुँह फिरा लेता है; जो लोग इसे देखते हैं वे इसे देखकर क्षुब्ध ही होते हैं । जो मनुष्य ऐसे मकानों को बनवाने का उत्तरदायी है वह अपने लिये सचमुच ही एक बुरे कर्म का निर्माण कर लेता है । लोग सोचते हैं कि ऐसी बातों का कोई महत्व नहीं, किन्तु इनका महत्व अवश्य है। हमारे आस-पास का वातावरण बहुत ही अधिक महत्व रखता. है । यह सत्य है कि एक चलवान् आत्मा मनुष्य इन सब पर विजय पा सकता है, किन्तु हम अपने पास विघ्नकारक
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मैंने ऐसी घटनायें देखी हैं जिनमें किसी मनुष्य के विषय में किये गये एक ही बुरे विचार ने उसे ऐसे कुमार्ग पर ढकेल दिया जिसका कुफल उसे अनेक जन्मों तक भोगना होगा । वह विचार उसके मनस्तल पर विद्यमान तो था, किन्तु उसने अभी तक निर्णयात्मक रूप धारण नहीं किया था, इतने में ही किसी व्यक्ति का भेजा हुआ बुरा विचार आया और उसने प्रवर्तन देके उसके विचार को कार्यरूप में परिणित कर दिया और उससे वह पाप करवा लिया । इस बात को जब तक आप दृष्टिद्वारा न देख सकें तब तक इसे कदाचित् ही समझ सकेंगे, किंतु एक बार देख लेने पर तो इतना भय होगा कि आप सदा के लिये सावधान हो जायेंगे । दिव्यदृष्टि आप में एक नवीन उत्तरदायित्व का भाव उत्पन्न करती है अथवा कभी-कभी आपको स्तब्ध कर देती है । याद कीजिये कि कवि सचिलर ने दिव्यदृष्टि के विषय में क्या लिखा था और कैसे उसने फिर से अपनी इस दिव्यदृष्टि की अन्धता को इच्छा की थी, उसने कहा था, "अपना यह निर्दय उपहार लौटा लो, यह भयंकर उपहार लौटा लो ! " तुम अपने मन को भी उत्तम विचारों के स्थान पर बुरे विचारों से भरते हो और इस प्रकार स्वयं अपनी उन्नति में भी विघ्न डालते हो, तथा अपने आपको उन लोगों की दृष्टि में जिनको देख सकने की शक्ति है, एक सुन्दर और प्रिय दृश्य वनाने के स्थान पर एक भद्दा और अप्रिय दृश्य बना लेते हो ।" लेडबीटर - बहुत लोग अपने शारीरिक वेश-विन्यास और अपने शिष्टाचार की शोभा व भद्रता के लिये बहुत परिश्रम करते हैं, केवल इसलिये ही नहीं कि वे अपने के सर्वसुन्दर और सजन प्रकट करने को आतुर होते हैं, वरन् "सामान्यतः इसे समाज के प्रति एक कर्त्तव्य भी माना गया है। प्राचीन समय में अपने को प्रत्येक प्रकार से यथाशक्ति पूर्ण और सुन्दर बनाता प्रत्येक मनुष्य का कर्त्तव्य समझा जाता था; वेषभूषा, रूपरंग, बोल-चाल और कार्यक्रम सभी वातों में उसे यथार्थ, शोभायुक्त एवं उत्तम प्रणाली सीखनी होती थी । मनुष्य को केवल आकृति ही नहीं, वरन् उसके चारों ओर का वातावरण भी न केवल उपयोगी वरन् सुन्दर भी हुआ करता था । यदि कोई मनुष्य एक घर बनवाता था तो अपने पड़ोसियों के प्रति उसका यह कर्त्तव्य था कि वह उसे शोभामय और सुन्दर बनाये, यद्यपि उसे मूल्यवान् बनाना अनिवार्य न था; उनके वर्तन, उनकी प्रतिमायें और मूर्तियाँ भी सुन्दर हुआ करती थीं। आजकल तो लोग जहाँ तक संभव हो सस्ते से सस्ता काम ही करना चाहते हैं और उसके द्वारा उत्पन्न Heळे प्रभाव के विषय में तनिक भी ध्यान नहीं देते। एक. मनुष्य एक बहुत ही भद्दा घर या कारखाना बनवाता है और इसे देखने वाला प्रत्येक भावप्रधान मनुष्य ठिठुक कर. मुँह फिरा लेता है; जो लोग इसे देखते हैं वे इसे देखकर क्षुब्ध ही होते हैं । जो मनुष्य ऐसे मकानों को बनवाने का उत्तरदायी है वह अपने लिये सचमुच ही एक बुरे कर्म का निर्माण कर लेता है । लोग सोचते हैं कि ऐसी बातों का कोई महत्व नहीं, किन्तु इनका महत्व अवश्य है। हमारे आस-पास का वातावरण बहुत ही अधिक महत्व रखता. है । यह सत्य है कि एक चलवान् आत्मा मनुष्य इन सब पर विजय पा सकता है, किन्तु हम अपने पास विघ्नकारक
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25 दिसंबर। गौतम गंभीर ने साल 2019 के समाप्ती पर अपने पसंद की वर्ल्ड XI टीम की घोषणा की है। अपनी पंसद की टीम में गंभीर ने कप्तानी की जिम्मेदारी न्यूजीलैंड दिग्गज केन विलियमसन को दी है।
गौतम गंभीर की टीम में रोहित शर्मा और विराट कोहली तो हैं लेकिन धोनी को जगह नहीं दी है। वहीं जसप्रीत बमराह भी इस टीम में हैं। इसके साथ - साथ गंभीर की टीम में 2 ऐसे नाम भी हैं जो हैरान करने वाले हैं।
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पच्चीस दिसंबर। गौतम गंभीर ने साल दो हज़ार उन्नीस के समाप्ती पर अपने पसंद की वर्ल्ड XI टीम की घोषणा की है। अपनी पंसद की टीम में गंभीर ने कप्तानी की जिम्मेदारी न्यूजीलैंड दिग्गज केन विलियमसन को दी है। गौतम गंभीर की टीम में रोहित शर्मा और विराट कोहली तो हैं लेकिन धोनी को जगह नहीं दी है। वहीं जसप्रीत बमराह भी इस टीम में हैं। इसके साथ - साथ गंभीर की टीम में दो ऐसे नाम भी हैं जो हैरान करने वाले हैं।
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चित्रकूट। कोतवाली थाना क्षेत्र के कछार पुरवा मजरा कोलगदहिया निवासी विमला देवी पत्नी अवधेश कुमार एसडीएम कार्यालय के बाहर पेट्रोल लेकर धरने पर बैठ गई। यह देख प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और न्याय का भरोसा दिया।
महिला ने बताया कि उसे 25 साल पहले पट्टे में जमीन मिली थी। दाखिल खारिज भी उसके पास है। गांव का दबंग उस पर कब्जा करना चाहता है वह उनकी जमीन पर निर्माण करा रहा है। आरोप लगाया कि संबंधित लेखपाल, नायब तहसीलदार आरोपी से रिश्वत की मांग कर रहे हैं। धरने पर बैठी महिला ने कहा कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो एसडीएम कार्यालय के बाहर सपरिवार पेट्रोल छिड़क कर आग लगा लेगी।
तहसीलदार संजय अग्रहरि ने बताया कि महिला को समझाकर धरना खत्म करा दिया है। उसके गांव जाकर समस्या का समाधान भी करा दिया गया है। लेखपाल व नायब तहसीलदार पर रिश्वत मांगने के आरोप गलत हैं।
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चित्रकूट। कोतवाली थाना क्षेत्र के कछार पुरवा मजरा कोलगदहिया निवासी विमला देवी पत्नी अवधेश कुमार एसडीएम कार्यालय के बाहर पेट्रोल लेकर धरने पर बैठ गई। यह देख प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और न्याय का भरोसा दिया। महिला ने बताया कि उसे पच्चीस साल पहले पट्टे में जमीन मिली थी। दाखिल खारिज भी उसके पास है। गांव का दबंग उस पर कब्जा करना चाहता है वह उनकी जमीन पर निर्माण करा रहा है। आरोप लगाया कि संबंधित लेखपाल, नायब तहसीलदार आरोपी से रिश्वत की मांग कर रहे हैं। धरने पर बैठी महिला ने कहा कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो एसडीएम कार्यालय के बाहर सपरिवार पेट्रोल छिड़क कर आग लगा लेगी। तहसीलदार संजय अग्रहरि ने बताया कि महिला को समझाकर धरना खत्म करा दिया है। उसके गांव जाकर समस्या का समाधान भी करा दिया गया है। लेखपाल व नायब तहसीलदार पर रिश्वत मांगने के आरोप गलत हैं।
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दरअसल हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका देते हुए बीजेपी के कृष्ण लाल पंवार और पार्टी के समर्थन वाले निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा ने राज्यसभा की दो सीटों पर जीत दर्ज की। चुनाव आयोग ने शुक्रवार देर रात दोनों की जीत की घोषणा की। चुनाव नियमों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर मतगणना सात घंटे से अधिक देरी से शुरू हुई और देर रात दो बजे नतीजों की घोषणा की गई। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय माकन को पर्याप्त वोट नहीं मिले। वहीं, कांग्रेस ने कहा कि उसके एक विधायक ने 'क्रॉस-वोटिंग' की, जबकि एक अन्य विधायक के वोट को अमान्य घोषित कर दिया गया।
निर्वाचन अधिकारी आरके नंदल ने बताया कि पंवार को 36 वोट मिले, जबकि शर्मा के खाते में प्रथम वरीयता के 23 मत गए और 6. 6 वोट बीजेपी से ट्रांसफर होकर आए, जिससे उनके वोटों की कुल संख्या 29. 6 हो गई। कांटे की टक्कर वाले इस मुकाबले में माकन को 29 वोट हासिल हुए, लेकिन दूसरी वरीयता का कोई वोट न होने के कारण वह हार गए। बीजेपी सदस्यों की ओर से दिए गए वोटों का मूल्य 3,600 था, जिससे पहली सीट पंवार के लिए सुरक्षित हो गई। वहीं, शर्मा ने 2,960 वोट मूल्य के साथ दूसरी सीट जीत ली, जिसमें दूसरी वरीयता के मतों के तौर पर बीजेपी उम्मीदवार से ट्रांसफर 660 वोट मूल्य शामिल है। कांग्रेस सदस्यों के वोटों का मूल्य 2,900 था।
कांग्रेस विधायक और पार्टी के अधिकृत मतदान एजेंट बीबी बत्रा ने बताया कि पार्टी के कुलदीप बिश्नोई ने मीडिया कारोबारी शर्मा के लिए 'क्रॉस वोटिंग' की, जबकि एक अन्य विधायक के वोट को अमान्य घोषित कर दिया गया। निर्दलीय उम्मीदवार शर्मा को बीजेपी और उसके सहयोगी दल जजपा का समर्थन हासिल था।
दरअसल अजय माकन की जीत के लिए कांग्रेस ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। कार्तिकेय की एंट्री के बाद से ही माना जा रहा था कि विधायक कुलदीप बिश्नोई खेल कर सकते हैं। कांग्रेस कुलदीप बिश्नोई पर नजर रखे थी कि वह छिटकर कहीं कार्तिकेय शर्मा के पाले में न चले जाएं। कुलदीप बिश्नोई की क्रॉस वोटिंग से अजय माकन हार गए। अब कांग्रेस ने उन्हें निशाने पर लिया है। वहीं कुलदीप ने ट्वीट करके इशारों में कांग्रेस नेताओं पर हमला बोला है जो उन्हें निशाने पर ले रहे हैं।
कुलदीप बिश्नोई ने ट्वीट किया, 'फन कुचलने का हुनर आता है मुझे, सांप के खौफ से जंगल नही छोड़ा करते। ' इसी के साथ उन्होंने एक रीट्वीट किया, जिसमें लिखा था, 'सही वक्त पर लिया गया फैसला ही इंसान को औरों से अलग करता है। ' कुलदीप बिश्नोई यहीं नहीं रुके। सुबह से उन्होंने एक के बाद एक रीट्वीट किए और इशारों में कांग्रेस को निशाने पर लिया।
कुलदीप बिश्नोई ने रीट्वीट किया, 'कितने नादान है शहर के जुगनू, मिलकर कहते है सूरज को उगने नही देगे। ' 'इतिहास लिखने के लिए कलम नही, हौसलों की जरूरत होती है। ' 'सही वक्त पर करवा देंगे हदों का अहसास, कुछ तालाब खुद को समंदर समझ बैठे हैं. . . . ' 'हम समंदर हैं हमें खामोश रहने दो, जरा मचल गए तो शहर ले डूबेंगे। '
दरअसल हरियाणा में कुल 90 विधायकों में से 89 ने वोट दिए, जबकि निर्दलीय विधायक बलराज कुंडु मतदान से दूर रहे। 40 विधायकों के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास जीत के लिए आवश्यक 31 प्रथम वरीयता मतों से नौ अधिक मत थे। कांग्रेस ने चुनाव से पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त के डर से उन्हें एक सप्ताह रायपुर के एक रिजॉर्ट में ठहराया था।
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दरअसल हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका देते हुए बीजेपी के कृष्ण लाल पंवार और पार्टी के समर्थन वाले निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा ने राज्यसभा की दो सीटों पर जीत दर्ज की। चुनाव आयोग ने शुक्रवार देर रात दोनों की जीत की घोषणा की। चुनाव नियमों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर मतगणना सात घंटे से अधिक देरी से शुरू हुई और देर रात दो बजे नतीजों की घोषणा की गई। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय माकन को पर्याप्त वोट नहीं मिले। वहीं, कांग्रेस ने कहा कि उसके एक विधायक ने 'क्रॉस-वोटिंग' की, जबकि एक अन्य विधायक के वोट को अमान्य घोषित कर दिया गया। निर्वाचन अधिकारी आरके नंदल ने बताया कि पंवार को छत्तीस वोट मिले, जबकि शर्मा के खाते में प्रथम वरीयता के तेईस मत गए और छः. छः वोट बीजेपी से ट्रांसफर होकर आए, जिससे उनके वोटों की कुल संख्या उनतीस. छः हो गई। कांटे की टक्कर वाले इस मुकाबले में माकन को उनतीस वोट हासिल हुए, लेकिन दूसरी वरीयता का कोई वोट न होने के कारण वह हार गए। बीजेपी सदस्यों की ओर से दिए गए वोटों का मूल्य तीन,छः सौ था, जिससे पहली सीट पंवार के लिए सुरक्षित हो गई। वहीं, शर्मा ने दो,नौ सौ साठ वोट मूल्य के साथ दूसरी सीट जीत ली, जिसमें दूसरी वरीयता के मतों के तौर पर बीजेपी उम्मीदवार से ट्रांसफर छः सौ साठ वोट मूल्य शामिल है। कांग्रेस सदस्यों के वोटों का मूल्य दो,नौ सौ था। कांग्रेस विधायक और पार्टी के अधिकृत मतदान एजेंट बीबी बत्रा ने बताया कि पार्टी के कुलदीप बिश्नोई ने मीडिया कारोबारी शर्मा के लिए 'क्रॉस वोटिंग' की, जबकि एक अन्य विधायक के वोट को अमान्य घोषित कर दिया गया। निर्दलीय उम्मीदवार शर्मा को बीजेपी और उसके सहयोगी दल जजपा का समर्थन हासिल था। दरअसल अजय माकन की जीत के लिए कांग्रेस ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। कार्तिकेय की एंट्री के बाद से ही माना जा रहा था कि विधायक कुलदीप बिश्नोई खेल कर सकते हैं। कांग्रेस कुलदीप बिश्नोई पर नजर रखे थी कि वह छिटकर कहीं कार्तिकेय शर्मा के पाले में न चले जाएं। कुलदीप बिश्नोई की क्रॉस वोटिंग से अजय माकन हार गए। अब कांग्रेस ने उन्हें निशाने पर लिया है। वहीं कुलदीप ने ट्वीट करके इशारों में कांग्रेस नेताओं पर हमला बोला है जो उन्हें निशाने पर ले रहे हैं। कुलदीप बिश्नोई ने ट्वीट किया, 'फन कुचलने का हुनर आता है मुझे, सांप के खौफ से जंगल नही छोड़ा करते। ' इसी के साथ उन्होंने एक रीट्वीट किया, जिसमें लिखा था, 'सही वक्त पर लिया गया फैसला ही इंसान को औरों से अलग करता है। ' कुलदीप बिश्नोई यहीं नहीं रुके। सुबह से उन्होंने एक के बाद एक रीट्वीट किए और इशारों में कांग्रेस को निशाने पर लिया। कुलदीप बिश्नोई ने रीट्वीट किया, 'कितने नादान है शहर के जुगनू, मिलकर कहते है सूरज को उगने नही देगे। ' 'इतिहास लिखने के लिए कलम नही, हौसलों की जरूरत होती है। ' 'सही वक्त पर करवा देंगे हदों का अहसास, कुछ तालाब खुद को समंदर समझ बैठे हैं. . . . ' 'हम समंदर हैं हमें खामोश रहने दो, जरा मचल गए तो शहर ले डूबेंगे। ' दरअसल हरियाणा में कुल नब्बे विधायकों में से नवासी ने वोट दिए, जबकि निर्दलीय विधायक बलराज कुंडु मतदान से दूर रहे। चालीस विधायकों के साथ भारतीय जनता पार्टी के पास जीत के लिए आवश्यक इकतीस प्रथम वरीयता मतों से नौ अधिक मत थे। कांग्रेस ने चुनाव से पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त के डर से उन्हें एक सप्ताह रायपुर के एक रिजॉर्ट में ठहराया था।
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- #Mumbaiजमीन खा गई या आसमान निगल गया, मुंबई में 6000 किलो वजनी और 90 फीट लंबा लोहे का पुल हुआ गायब!
मुंबई, 8 सितंबरः इटली की मॉडल डांसर और अब बॉलीवुड में काम कर रहीं जॉर्जिया एंड्रियानी सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय है। उनकी तस्वीरें अक्सर ही सुर्खियां बटोरती हैं तो वहीं वह उनके डांस वीडियो भी वायरल होते रहते हैं। जॉर्जिया फिल्म निर्माता और एक्टर अरबाज खान से रिश्ते को लेकर भी वो चर्चा में रहती हैं। जॉर्जिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिसमें वो समंदर किनारे इंज्वाय करती दिख रही हैं।
जॉर्जिया एंड्रियानी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें वो 'गोवा वाले बीच' गाने पर डांस और मस्ती करती नजर आ रही हैं। वीडियो में जॉर्जिया समंदर की लहरों के साथ मजे ले रही हैं। प्रिंटेड मोनोकनी में जॉर्जिया का ये अंदाज फैंस को खूहब पसंद आ रहा है। इस वीडियो को 1 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है और हजारों लोग इस पर कमेंट भी कर चुके हैं।
अभी तक जॉर्जिया एक मॉडल के तौर पर ही ज्यादा पहचान रखती हैं। हालांकि वो एक्टिंग भी कर रही हैं। उन्होंने साउथ की सीरीज 'कैरोलिन और कामाक्षी' से डेब्यू किया था। इसके बाद मीका सिंह के साथ 'रूप तेरा मस्ताना सॉन्ग' में वह नजर आईं। अब जॉर्जिया एंड्रियानी 'वेलकम टू बजरंजपुर' में दिखेंगी। इसके अलावा जॉर्जिया एंड्रियानी जल्दी ही फिल्म 'श्रीदेवी बंगलो' में भी नजर आने वाली हैं। फिल्म में जॉर्जिया एंड्रियानी के साथ अरबाज खान और प्रिया प्रकाश वॉरियर काम कर रहे हैं।
ब्रा को लेकर ट्रोल हो रहीं उर्फी ने अब ट्यूब टॉप में शेयर की तस्वीरें, बोलीं- लड़कियों को इसे पहनकर बार-बार. .
अरबाज खान और जॉर्जिया बीते काफी समय से रिश्ते में हैं। हालांकि अरबाज मानते हैं कि जॉर्जिया को उनके नाम के साथ ना पहचाना जाए। अरबाज ने हाल ही में कहा था कि उनको ये पसंद नहीं कि जॉर्जिया को उनकी वजह से जाना जाए। अरबाज का कहना है कि एंड्रियानी की खुद की शख्सियत है लेकिन लोग हमेशा लिखते हैं अरबाज खान की गर्लफ्रेंड। उसकी खुद की पहचान है। आप उन्हें हर वक्त अरबाज खान की गर्लफ्रेंड नहीं बुला सकते। आपको ये नहीं करना चाहिए। वो अभी मेरी जिंदगी में हैं लेकिन ये उनकी पहचान नहीं हो सकती है।
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- #Mumbaiजमीन खा गई या आसमान निगल गया, मुंबई में छः हज़ार किलो वजनी और नब्बे फीट लंबा लोहे का पुल हुआ गायब! मुंबई, आठ सितंबरः इटली की मॉडल डांसर और अब बॉलीवुड में काम कर रहीं जॉर्जिया एंड्रियानी सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय है। उनकी तस्वीरें अक्सर ही सुर्खियां बटोरती हैं तो वहीं वह उनके डांस वीडियो भी वायरल होते रहते हैं। जॉर्जिया फिल्म निर्माता और एक्टर अरबाज खान से रिश्ते को लेकर भी वो चर्चा में रहती हैं। जॉर्जिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिसमें वो समंदर किनारे इंज्वाय करती दिख रही हैं। जॉर्जिया एंड्रियानी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें वो 'गोवा वाले बीच' गाने पर डांस और मस्ती करती नजर आ रही हैं। वीडियो में जॉर्जिया समंदर की लहरों के साथ मजे ले रही हैं। प्रिंटेड मोनोकनी में जॉर्जिया का ये अंदाज फैंस को खूहब पसंद आ रहा है। इस वीडियो को एक लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है और हजारों लोग इस पर कमेंट भी कर चुके हैं। अभी तक जॉर्जिया एक मॉडल के तौर पर ही ज्यादा पहचान रखती हैं। हालांकि वो एक्टिंग भी कर रही हैं। उन्होंने साउथ की सीरीज 'कैरोलिन और कामाक्षी' से डेब्यू किया था। इसके बाद मीका सिंह के साथ 'रूप तेरा मस्ताना सॉन्ग' में वह नजर आईं। अब जॉर्जिया एंड्रियानी 'वेलकम टू बजरंजपुर' में दिखेंगी। इसके अलावा जॉर्जिया एंड्रियानी जल्दी ही फिल्म 'श्रीदेवी बंगलो' में भी नजर आने वाली हैं। फिल्म में जॉर्जिया एंड्रियानी के साथ अरबाज खान और प्रिया प्रकाश वॉरियर काम कर रहे हैं। ब्रा को लेकर ट्रोल हो रहीं उर्फी ने अब ट्यूब टॉप में शेयर की तस्वीरें, बोलीं- लड़कियों को इसे पहनकर बार-बार. . अरबाज खान और जॉर्जिया बीते काफी समय से रिश्ते में हैं। हालांकि अरबाज मानते हैं कि जॉर्जिया को उनके नाम के साथ ना पहचाना जाए। अरबाज ने हाल ही में कहा था कि उनको ये पसंद नहीं कि जॉर्जिया को उनकी वजह से जाना जाए। अरबाज का कहना है कि एंड्रियानी की खुद की शख्सियत है लेकिन लोग हमेशा लिखते हैं अरबाज खान की गर्लफ्रेंड। उसकी खुद की पहचान है। आप उन्हें हर वक्त अरबाज खान की गर्लफ्रेंड नहीं बुला सकते। आपको ये नहीं करना चाहिए। वो अभी मेरी जिंदगी में हैं लेकिन ये उनकी पहचान नहीं हो सकती है।
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Faridabad/Alive News : शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार देश भर में धूमधाम से मनाया गया। इस धार्मिक आयोजन को लेकर शहर के तमाम मंदिरों की रौनक देखने लायक थी। इस अवसर पर महारानी वैष्णोदेवी मंदिर भव्य रूप से सजाया गया। इस खास अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद कृष्णपाल गुर्जर ने मंदिर में पहुंंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दरबार में अपनी अर्जी लगाई तथा पूजा अर्चना में शामिल होकर आर्शीवाद ग्रहण किया। मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने संस्था के सभी पदाधिकारियों के साथ गुर्जर का स्वागत किया।
इस अवसर पर भाटिया ने केंद्रीय मंत्री को मंदिर परिसर में लगाई गई भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर झांकी एवं अन्य लीलाओं के दर्शन करवाए। मंदिर में विशाल केक भी काटा गया तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया। इस धार्मिक आयोजन को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की जन्माष्टमी पर वैष्णोदवी मंदिर में पहुंचकर आरती में शामिल होने का उन्हें सौभागय मिला है।
इस अवसर पर मंदिर संस्थान के चेयरमैन प्रताप भाटिया, फकीरचंद कथूरिया, गुलशन भाटिया, पार्षद मनोज नासवा, राज मदान, प्रीतम धमीजा, नीरज भाटिया, प्रदीप झांब, दर्शन कुकरेजा, संजीव, राहुल , धीरज, रोहित भाटिया, रमेश सहगल, योगेश, उद्योगपति आनंद मल्होत्रा, उद्योगपति आरके भाटिया, विनोद पांडे, अनिल ग्रोवर एवं बलबीर और शिवम ने भी केंद्रीय राज्यमंत्री का स्वागत किया।
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Faridabad/Alive News : शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार देश भर में धूमधाम से मनाया गया। इस धार्मिक आयोजन को लेकर शहर के तमाम मंदिरों की रौनक देखने लायक थी। इस अवसर पर महारानी वैष्णोदेवी मंदिर भव्य रूप से सजाया गया। इस खास अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद कृष्णपाल गुर्जर ने मंदिर में पहुंंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दरबार में अपनी अर्जी लगाई तथा पूजा अर्चना में शामिल होकर आर्शीवाद ग्रहण किया। मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने संस्था के सभी पदाधिकारियों के साथ गुर्जर का स्वागत किया। इस अवसर पर भाटिया ने केंद्रीय मंत्री को मंदिर परिसर में लगाई गई भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर झांकी एवं अन्य लीलाओं के दर्शन करवाए। मंदिर में विशाल केक भी काटा गया तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया। इस धार्मिक आयोजन को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की जन्माष्टमी पर वैष्णोदवी मंदिर में पहुंचकर आरती में शामिल होने का उन्हें सौभागय मिला है। इस अवसर पर मंदिर संस्थान के चेयरमैन प्रताप भाटिया, फकीरचंद कथूरिया, गुलशन भाटिया, पार्षद मनोज नासवा, राज मदान, प्रीतम धमीजा, नीरज भाटिया, प्रदीप झांब, दर्शन कुकरेजा, संजीव, राहुल , धीरज, रोहित भाटिया, रमेश सहगल, योगेश, उद्योगपति आनंद मल्होत्रा, उद्योगपति आरके भाटिया, विनोद पांडे, अनिल ग्रोवर एवं बलबीर और शिवम ने भी केंद्रीय राज्यमंत्री का स्वागत किया।
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महिला जैविक किसानों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भारतीय महिला जैविक उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में 26 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चलने वाले इस उत्सव का उद्घाटन महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने किया।
इस मेले में 26 राज्यों के जैविक उत्पादों के निर्माता हिस्सा लेंगे और लेह से कन्याकुमारी और कोहिमा से कच्छ तक की 500 से अधिक महिला उद्यमी एक साथ अपने जैविक उत्पादों को पेश करेंगी। इनमें चावल की 1200 किस्में, बाजरा, अनाज, दाल, मसाले, चिल्ली चॉकलेट, कद्दू के बीज, कुकीज, अचार, जाम, चटनी, जूस, सूखे फल, जैविक आईसक्रीम, तैयार भोजन, तेल, शहद, चाय, कॉफी, खुम्बी, जड़ी-बूटी, प्रसाधन, खुशबूदार उत्पाद, सौर उत्पाद, रसोई के कचरे से बनी खाद, जैविक बीज, जैविक सूती कपड़े, सूती कपड़े, बीजों से बने आभूषण, आसव, गाय के गोबर से बना एयर-प्यूरीफायर एवं अन्य उत्पाद शामिल हैं।
जैविक उत्पादों के अलावा दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा, जिनमें लोक संगीत और लोक नृत्य प्रमुख हैं। दर्शकों को बाउल संगीत का आनंद भी मिलेगा और पूर्वोत्तर, पंजाब और राजस्थान के भी कार्यक्रम भी होंगे।
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महिला जैविक किसानों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भारतीय महिला जैविक उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में छब्बीस अक्टूबर से चार नवंबर तक चलने वाले इस उत्सव का उद्घाटन महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने किया। इस मेले में छब्बीस राज्यों के जैविक उत्पादों के निर्माता हिस्सा लेंगे और लेह से कन्याकुमारी और कोहिमा से कच्छ तक की पाँच सौ से अधिक महिला उद्यमी एक साथ अपने जैविक उत्पादों को पेश करेंगी। इनमें चावल की एक हज़ार दो सौ किस्में, बाजरा, अनाज, दाल, मसाले, चिल्ली चॉकलेट, कद्दू के बीज, कुकीज, अचार, जाम, चटनी, जूस, सूखे फल, जैविक आईसक्रीम, तैयार भोजन, तेल, शहद, चाय, कॉफी, खुम्बी, जड़ी-बूटी, प्रसाधन, खुशबूदार उत्पाद, सौर उत्पाद, रसोई के कचरे से बनी खाद, जैविक बीज, जैविक सूती कपड़े, सूती कपड़े, बीजों से बने आभूषण, आसव, गाय के गोबर से बना एयर-प्यूरीफायर एवं अन्य उत्पाद शामिल हैं। जैविक उत्पादों के अलावा दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा, जिनमें लोक संगीत और लोक नृत्य प्रमुख हैं। दर्शकों को बाउल संगीत का आनंद भी मिलेगा और पूर्वोत्तर, पंजाब और राजस्थान के भी कार्यक्रम भी होंगे।
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छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक युवक को 77000 रुपए लेकर शराब दुकान जाना महंगा पड़ गया। उसने नोटों के बंडल से 500 रुपए का नोट निकाला और शराब खरीदा। उसके बाद जब लौटा तो देखा बाकी रुपए स्कूटर की डिग्गी से किसी ने पर कर दिए थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
छावनी सीएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि गुरुवार को छावनी थाना अंतर्गत नंदिनी रोड चौरसिया होटल के पास एक युवक के स्कूटर से 76,500 रुपए की उठाईगिरी हुई है। जेपी चौक के पास कैंप 2 भिलाई निवासी श्याम कुमार यादव (25 साल) ने मामले की शिकायत दर्ज कराई है। उसने बताया कि उसके पिता पिता राममिलन यादव ने 55000 रुपए उसे सीडीएम मशीन से खाता में डालने के लिए दिए थे। वह अपने दोस्त दोस्त ईश्वर के साथ रुपए डालने निकला था। ईश्वर भी अपने पास 9000 रुपए और वह खुद पहले 13 हजार रुपए रखा हुआ था। इस तरह उसके पास कुल 77 हजार रुपए नगद था। उन्होंने सारे रुपए एक ऑरेंज कलर के झोले में डाला और उसे अपने स्कूटर में रखकर हाउसिंग बोर्ड जामुल स्थित सीडीएम मशीन की तरफ जा रहा था।
श्याम ने बताया कि जब वह सीडीएम मशीन में रुपए डालने अपने दोस्त ईश्वर के साथ जा रहा था तो उसके दूसरे दोस्त विशु ने उन्हें रास्ते में रुकवा लिया। उसने कहा कि पार्टी देने बोला चल पार्टी दे। इसके बाद वो लोग शराब लेने नंदनी रोड स्थित अंग्रेजी शराब दुकान चले गए। उन्होंने स्कूटर की डिग्गी में रखे 77 हजार रुपए की गड्डी में से 500 रुपए निकाला और उससे शराब खरीदने लगे। शराब लेकर वह लोग चौरसिया होटल से चाय पार्सल कराने के लिए चले गए। उन्होंने एक्टिवा को खड़ा किया और चाय पैक कराने के लिए चले गए।
चाय पार्सल करवाने के बाद उन्होंने अपने दोस्त को रास्ते में छोड़ा और वहां से हाउसिंग बोर्ड जामुल सीडीएम मशीन जाने के लिए निकला। वह जैसे ही सीडीएम मशीन में रुपए डालने के लिए स्कूटर की डिग्गी खोला तो देखा उसमें रुपए नहीं हैं। इसके बाद उसने अपने दोस्तों से भी पूछताछ की। जब कहीं पता नहीं चला तो मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक युवक को सतहत्तर हज़ार रुपयापए लेकर शराब दुकान जाना महंगा पड़ गया। उसने नोटों के बंडल से पाँच सौ रुपयापए का नोट निकाला और शराब खरीदा। उसके बाद जब लौटा तो देखा बाकी रुपए स्कूटर की डिग्गी से किसी ने पर कर दिए थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है। छावनी सीएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि गुरुवार को छावनी थाना अंतर्गत नंदिनी रोड चौरसिया होटल के पास एक युवक के स्कूटर से छिहत्तर,पाँच सौ रुपयापए की उठाईगिरी हुई है। जेपी चौक के पास कैंप दो भिलाई निवासी श्याम कुमार यादव ने मामले की शिकायत दर्ज कराई है। उसने बताया कि उसके पिता पिता राममिलन यादव ने पचपन हज़ार रुपयापए उसे सीडीएम मशीन से खाता में डालने के लिए दिए थे। वह अपने दोस्त दोस्त ईश्वर के साथ रुपए डालने निकला था। ईश्वर भी अपने पास नौ हज़ार रुपयापए और वह खुद पहले तेरह हजार रुपए रखा हुआ था। इस तरह उसके पास कुल सतहत्तर हजार रुपए नगद था। उन्होंने सारे रुपए एक ऑरेंज कलर के झोले में डाला और उसे अपने स्कूटर में रखकर हाउसिंग बोर्ड जामुल स्थित सीडीएम मशीन की तरफ जा रहा था। श्याम ने बताया कि जब वह सीडीएम मशीन में रुपए डालने अपने दोस्त ईश्वर के साथ जा रहा था तो उसके दूसरे दोस्त विशु ने उन्हें रास्ते में रुकवा लिया। उसने कहा कि पार्टी देने बोला चल पार्टी दे। इसके बाद वो लोग शराब लेने नंदनी रोड स्थित अंग्रेजी शराब दुकान चले गए। उन्होंने स्कूटर की डिग्गी में रखे सतहत्तर हजार रुपए की गड्डी में से पाँच सौ रुपयापए निकाला और उससे शराब खरीदने लगे। शराब लेकर वह लोग चौरसिया होटल से चाय पार्सल कराने के लिए चले गए। उन्होंने एक्टिवा को खड़ा किया और चाय पैक कराने के लिए चले गए। चाय पार्सल करवाने के बाद उन्होंने अपने दोस्त को रास्ते में छोड़ा और वहां से हाउसिंग बोर्ड जामुल सीडीएम मशीन जाने के लिए निकला। वह जैसे ही सीडीएम मशीन में रुपए डालने के लिए स्कूटर की डिग्गी खोला तो देखा उसमें रुपए नहीं हैं। इसके बाद उसने अपने दोस्तों से भी पूछताछ की। जब कहीं पता नहीं चला तो मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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उकलाना मंडी (निस) :
हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा ने कहा है कि पुस्तकें ज्ञान का ऐसा भंडार जो किसी के भी जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। वे उकलाना मंडी की गुरु दक्ष कुम्हार धर्मशाला में शनिवार को गुरु दक्ष पुस्तकालय का उद्घाटन करते हुए उपस्थितजन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने ई-लाइब्रेरी की स्थापना के लिए अपने कोष से 11 लाख रुपये की राशि देने की भी घोषणा की। उद्घाटन अवसर पर पूर्व चेयरमैन एवं वरिष्ठ भाजपा नेता निवास गोयल, पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व चेयरमैन सतबीर वर्मा तथा धर्मशाला के प्रधान सूरजभान घोड़ेला विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर भाजपा के प्रांतीय नेता व अनुशासन समिति के सदस्य श्रीनिवास गोयल, निगरानी समिति के चेयरमैन रामफल नैन, नपा के चेयरमैन सुशील सिंगला, पार्षद महेंद्र सोनी, नंबरदार राजकुमार, दरबार सिंह तथा चमनलाल सहित समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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उकलाना मंडी : हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा ने कहा है कि पुस्तकें ज्ञान का ऐसा भंडार जो किसी के भी जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। वे उकलाना मंडी की गुरु दक्ष कुम्हार धर्मशाला में शनिवार को गुरु दक्ष पुस्तकालय का उद्घाटन करते हुए उपस्थितजन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने ई-लाइब्रेरी की स्थापना के लिए अपने कोष से ग्यारह लाख रुपये की राशि देने की भी घोषणा की। उद्घाटन अवसर पर पूर्व चेयरमैन एवं वरिष्ठ भाजपा नेता निवास गोयल, पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व चेयरमैन सतबीर वर्मा तथा धर्मशाला के प्रधान सूरजभान घोड़ेला विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर भाजपा के प्रांतीय नेता व अनुशासन समिति के सदस्य श्रीनिवास गोयल, निगरानी समिति के चेयरमैन रामफल नैन, नपा के चेयरमैन सुशील सिंगला, पार्षद महेंद्र सोनी, नंबरदार राजकुमार, दरबार सिंह तथा चमनलाल सहित समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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केरल सरकार के द्वारा राज्य में साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत होने वाली परीक्षा में 108 साल की बूढ़ी महिला ने टॉप कर दिखाया है।
पढ़ने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती। यह बात कहीं न कहीं सच साबित होती नजर आ रही है। तमिलनाडु की रहने वाली एक बूढ़ी महिला ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। दरअसल, केरल सरकार के द्वारा राज्य में साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत होने वाली परीक्षा में 108 साल की बूढ़ी महिला ने टॉप कर दिखाया है।
बता दें कि इस टॉप करने वाली बुजुर्ग महिला का नाम कमलाकन्नी है। उनका जन्म 1915 में तमिलनाडु के थेनी जिले के कुंबुम में हुआ था। वह बहुत कम उम्र में ही केरल चली आई और यहां के इलाइची बगानों में काम करने लगी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक, केरल देश का सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा यानी साक्षरता दर वाला राज्य है। वहीं, केरल की साक्षरता दर 96. 2 फीसदी है, जो यह बताती है कि यहां के लोग कितने पढ़े-लिखे होंगे। यहां पढ़ाई के लिए कई सारे संस्थान हैं।
दरअसल, केरल में बुजुर्गों को पढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। यही कारण है कि कि राज्य में साक्षरता प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इस प्रोग्राम का मकसद वरिष्ठ नागरिकों को पढ़ने का एक मौका देना है। साथ ही राज्य में संपूर्णम शास्त्र साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से बुजुर्ग लोगों को पढ़ाया जाता है। बुजुर्गों को इतना तक भी पढ़ाया जाता है कि वह खुद अपना हस्ताक्षर करना तो सीख ही जाएं।
बुजुर्ग महिला कमलाकन्नी ने संपूर्णम शास्त्र साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से ही शिक्षा हासिल की है। इसी कड़ी में उनकी सुनने और देखने की क्षमता में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है। कमलाकन्नी ने तमिल और मलयालम दोनों में ही भाषा लिखने की प्रैक्टिस की है। यही कारण है कि लिटरेसी प्रोजेक्ट टेस्ट में उन्हें 100 में से 97 नंबर दिए गए हैं। केरल के कई सारे ऐसे संगठन है जो पढ़ाई को लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं।
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केरल सरकार के द्वारा राज्य में साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत होने वाली परीक्षा में एक सौ आठ साल की बूढ़ी महिला ने टॉप कर दिखाया है। पढ़ने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती। यह बात कहीं न कहीं सच साबित होती नजर आ रही है। तमिलनाडु की रहने वाली एक बूढ़ी महिला ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। दरअसल, केरल सरकार के द्वारा राज्य में साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत होने वाली परीक्षा में एक सौ आठ साल की बूढ़ी महिला ने टॉप कर दिखाया है। बता दें कि इस टॉप करने वाली बुजुर्ग महिला का नाम कमलाकन्नी है। उनका जन्म एक हज़ार नौ सौ पंद्रह में तमिलनाडु के थेनी जिले के कुंबुम में हुआ था। वह बहुत कम उम्र में ही केरल चली आई और यहां के इलाइची बगानों में काम करने लगी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक, केरल देश का सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा यानी साक्षरता दर वाला राज्य है। वहीं, केरल की साक्षरता दर छियानवे. दो फीसदी है, जो यह बताती है कि यहां के लोग कितने पढ़े-लिखे होंगे। यहां पढ़ाई के लिए कई सारे संस्थान हैं। दरअसल, केरल में बुजुर्गों को पढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। यही कारण है कि कि राज्य में साक्षरता प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इस प्रोग्राम का मकसद वरिष्ठ नागरिकों को पढ़ने का एक मौका देना है। साथ ही राज्य में संपूर्णम शास्त्र साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से बुजुर्ग लोगों को पढ़ाया जाता है। बुजुर्गों को इतना तक भी पढ़ाया जाता है कि वह खुद अपना हस्ताक्षर करना तो सीख ही जाएं। बुजुर्ग महिला कमलाकन्नी ने संपूर्णम शास्त्र साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से ही शिक्षा हासिल की है। इसी कड़ी में उनकी सुनने और देखने की क्षमता में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है। कमलाकन्नी ने तमिल और मलयालम दोनों में ही भाषा लिखने की प्रैक्टिस की है। यही कारण है कि लिटरेसी प्रोजेक्ट टेस्ट में उन्हें एक सौ में से सत्तानवे नंबर दिए गए हैं। केरल के कई सारे ऐसे संगठन है जो पढ़ाई को लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं।
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दो गज ज़मीन भी न मिला कू-ए-यार में'
Bahadur Shah Zafar Royal Family:
भारत पर तकरीबन 300 साल तक राज करने वाले मुग़ल वंश के अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर ने रंगून में निर्वासित जीवन व्यतीत करते हुए जब यह लिखा होगा तो उनके ज़हन में 'कू-ए-यार' (प्रियतमा की गली) यानी दिल्ली थी। दिल्ली के साथ-साथ उनके ख्याल में मुग़लिया सल्तनत में चलने वाले राजनीतिक षड्यंत्रों, प्रेम के किस्सों और शहंशाहों के अंत का गवाह रहा लाल क़िला भी होगा।
दरभंगा शहर के रेलवे स्टेशन के पास मशहूर चंद्रधारी म्यूजियम के ठीक पीछे है दिग्घी तालाब। इस तालाब के दक्षिण पश्चिमी हिस्से पर तीन क़ब्र है। स्थानीय लोगों में इस जगह की पहचान है 'लाल क़ब्र' के तौर पर। टूटी फूटी लाल नक्काशीदार दीवार से घिरी हुई इन क़ब्रों पर स्थानीय लोग रस्सी बांधकर अपने कपड़े सुखाते हैं। क़ब्र तक जाने वाली सीढ़ियां भी टूटी हैं और कभीकभार कुत्तों-बकरियों की आरामगाह बन जाती हैं।
इन तीनों में से एक क़ब्र है मिर्जा मो. रईस बख्त जुबैरूद्दीन 'गोरगान' की। बहादुर शाह जफर के सबसे बड़े बेटे मिर्जा मोहम्मद दारा बख्त के बेटे थे जुबैरूद्दीन। दारा बख्त की मौत 1849 में मामूली से बुखार के चलते हो गई थी।
गोरगान के जीवन पर एमएलएमएस कॉलेज के प्राचार्य और इतिहासकार मुश्ताक अहमद ने 'आतिश-ए-पिन्हां' लिखी है। वह बताते हैं कि अगर 1857 के विद्रोह में मुग़लिया सल्तनत का तख्ता नहीं पलटता, तो गोरगान दिल्ली की गद्दी पर गद्दीनशीं होते।
दरअसल 1857 की क्रांति में मुग़लिया राज का सूरज अस्त होने के बाद मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफर, उनकी बेगम जीनत महल और बेटे मिर्जा जवान बख्त को अंग्रेज़ों ने रंगून (म्यांमार) निर्वासित कर दिया था। विजयी अंग्रेज़ कमांडरों ने मुग़ल साम्राज्य के उत्तराधिकारियों की बेरहमी से हत्या करना और उनके शवों का सार्वजनिक अपमान करना शुरू कर दिया।
ऐसे में शाही परिवार के बचे हुए लोग अपनी जान बचाने के लिए अलग-अलग जगहों पर चले गए। शाही परिवार के ये लोग सामान्य लोगों की तरह जीवनयापन को मजबूर थे। ख़ुद बहादुर शाह जफर रंगून जाने से पहले बेगम समरू की हवेली में थे, जहां उनकी निगरानी चार्ल्स ग्रिफीन नाम का अंग्रेज़ अफ़सर कर रहा था। बाद में चार्ल्स ने अपनी क़िताब 'नैरेटिव ऑफ द सीज ऑफ डेल्ही' में बहादुर शाह जफर का ब्यौरा देते हुए लिखा कि मुग़ल राजवंश का आखिरी प्रतिनिधि एक बरामदे में एक साधारण चारपाई पर बिछाए गए गद्दे पर पालथी मारकर बैठा हुआ था। उनके रूप से कुछ भी भव्य नहीं था, सिवाए उनकी सफे़द दाढ़ी के जो उनके कमरबंद तक पहुंच रही थी।
साफ़ है कि आलीशान मुग़लिया साम्राज्य से ताल्लुक रखने वाला हर आदमी इसी तरह की या इससे भी बदतर ज़िंदगी बसर करने को मजबूर था। जुबैरूद्दीन गोरगान भी दरभंगा पहुंचने से पहले भारत के अलग-अलग हिस्सों में भटकते रहे। सबसे पहले रतलाम पहुंचे, उसके बाद राजस्थान के कई इलाक़ों में रहे और वहां से फिर इलाहाबाद यानी आज के प्रयागराज। लेकिन, इलाहाबाद में उनका मन नहीं लगा तो वह अजीमाबाद (पटना) आ गए।
गोरगान ने अपने संस्मरणों पर क़िताब लिखी 'मौज-ए-सुल्तानी'। इसका प्रकाशन लखनऊ के मुंशी नवल किशोर प्रेस से सितंबर 1884 में हुआ था। इसको साल 2003 में दरभंगा राजपरिवार द्वारा संचालित कल्याणी फाउंडेशन ने फिर से प्रकाशित कराया है। मौज-ए-सुल्तानी में गोरगान लिखते हैं कि पटना शहर के लोग सभ्य और शिष्टाचार वाले हैं। यहां इस्लामपुर के जागीरदार चौधरी मोहम्मद जहरूलहक से उन्हें विशेष प्रेम मिला।
पटना के बाद गोरगान मुजफ्फरपुर गए, जहां से उनका अगला पड़ाव था बेतिया। इसके बाद वह कुछ दिन बेतिया राज के मेहमान रहे। अपनी क़िताब में गोरगान लिखते हैं कि बेतिया महाराज राजेंद्र किशोर सिंह ने उनके लिए पालकी भेजकर अपने महल में आने का न्योता दिया। गोरगान के महल पहुंचने पर राजेंद्र किशोर उनका स्वागत करने ख़ुद बरामदे तक आए। अपने शीशमहल में ले जाकर गोरगान को बैठने की जगह देकर राजा ख़ुद हाथ बांधे खड़े रहे।
असल में 17वीं शताब्दी में मुग़ल बादशाह शाहजहां के आदेश पर बेतिया राज अस्तित्व में आया था। इसी तरह दरभंगा राज का श्रेय भी मुग़लिया सल्तनत को जाता है। बेतिया में रहने के बाद जुबैरूद्दीन गोरगान दरभंगा पहुंचे। जुबैरूद्दीन कुछ वक़्त के लिए भागलपुर भी रहे थे, जहां उनकी मुलाकात दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह के भाई कुंवर रामेश्वर सिंह से हुई। वहीं पर उन्होंने रामेश्वर सिंह को अपनी हालत के बारे में बताया, जिसके बाद 17 मार्च 1881 को जुबैरूद्दीन दरभंगा आए। यहां कुछ दिनों तक उनके रहने का इंतजाम दरभंगा के एक नामी रईस मुहम्मद सादिक अली के यहां किया गया। महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह की विनम्रता और आतिथ्य से प्रभावित होकर जुबैरूद्दीन ने दरभंगा को ख़ुद के लिए सुरक्षित महसूस किया। इसके बाद जुबैरूद्दीन अपने परिवार को लेकर दरभंगा आ गए। दरभंगा राज ने अपने महल के पास ही कटहलबाड़ी मोहल्ले में जुबैरूद्दीन और उनके परिवार के लिए एक घर बनवाया और मस्जिद बनवाई।
मौज-ए-सुल्तानी में इस बात का ज़िक्र बार-बार मिलता है कि जुबैरूद्दीन देश के जिस भी हिस्से में जाते, वहां के स्थानीय अंग्रेज़ अधिकारियों से व्यक्तिगत तौर पर ज़रूर मिलते थे। इस मुलाकात का मकसद था ब्रिटिश अधिकारियों को इस बात के प्रति आश्वस्त करना कि वह अंग्रेज़ों की मुखालफत की कोई योजना नहीं बना रहे। इसी तरह देसी रजवाड़ों और जमींदार वाले इलाके़ में जुबैरूद्दीन अपने मुलाजिम से यह ख़बर भिजवाते थे।
अपने दादा बहादुर शाह जफर की तरह ही जुबैरूद्दीन शायर तबियत के आदमी थी। अपनी क़िताब में उन्होंने बिहार, कलकत्ता, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मुंबई की यात्राओं का तफसील से वर्णन किया है। साथ ही, मुग़ल शासकों की वंशावली और उनके द्वारा बनवाई गई इमारतों के बारे में भी बहुत विस्तार से लिखा है।
घूमने और समाज को समझने की जिज्ञासा रखने वाले जुबैरूद्दीन गोरगान ने दो क़िताबें और लिखीं। 'चमनिस्तान-ए-सुखन' काव्य संग्रह है। दूसरी क़िताब का नाम है 'मशनाबी दुर्रे शहसवार', जो महाकाव्य है।
1883 में गोरगान के इकलौते बेटे की हैजा से मौत हो गई। एक साल बाद उनकी बेगम का भी देहांत हो गया। इन दोनों की मौत से जुबैरूद्दीन तन्हा हो गए। इस तन्हाई में उन्होंने दरभंगा से बाहर जाने का फैसला लिया। लेकिन, दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह ने उन्हें रुके रहने के लिए मना लिया। वह जीवनभर दरभंगा में रहे और तकरीबन 85 साल की उम्र में दरभंगा में ही अंतिम सांस ली। जुबैरूद्दीन गोरगान की मौत के बाद महाराजा रामेश्वर सिंह ने उनके लिए मक़बरा बनवाया। यह बात दीगर है कि दरभंगा राज ने ताज़िंदगी जिस जुबैरूद्दीन को अपना आतिथ्य और भरपूर प्रेम दिया, उनकी दो गज की क़ब्र की कदर भी दरभंगा के शहरी और बिहार सरकार नहीं कर सकी।
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दो गज ज़मीन भी न मिला कू-ए-यार में' Bahadur Shah Zafar Royal Family: भारत पर तकरीबन तीन सौ साल तक राज करने वाले मुग़ल वंश के अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर ने रंगून में निर्वासित जीवन व्यतीत करते हुए जब यह लिखा होगा तो उनके ज़हन में 'कू-ए-यार' यानी दिल्ली थी। दिल्ली के साथ-साथ उनके ख्याल में मुग़लिया सल्तनत में चलने वाले राजनीतिक षड्यंत्रों, प्रेम के किस्सों और शहंशाहों के अंत का गवाह रहा लाल क़िला भी होगा। दरभंगा शहर के रेलवे स्टेशन के पास मशहूर चंद्रधारी म्यूजियम के ठीक पीछे है दिग्घी तालाब। इस तालाब के दक्षिण पश्चिमी हिस्से पर तीन क़ब्र है। स्थानीय लोगों में इस जगह की पहचान है 'लाल क़ब्र' के तौर पर। टूटी फूटी लाल नक्काशीदार दीवार से घिरी हुई इन क़ब्रों पर स्थानीय लोग रस्सी बांधकर अपने कपड़े सुखाते हैं। क़ब्र तक जाने वाली सीढ़ियां भी टूटी हैं और कभीकभार कुत्तों-बकरियों की आरामगाह बन जाती हैं। इन तीनों में से एक क़ब्र है मिर्जा मो. रईस बख्त जुबैरूद्दीन 'गोरगान' की। बहादुर शाह जफर के सबसे बड़े बेटे मिर्जा मोहम्मद दारा बख्त के बेटे थे जुबैरूद्दीन। दारा बख्त की मौत एक हज़ार आठ सौ उनचास में मामूली से बुखार के चलते हो गई थी। गोरगान के जीवन पर एमएलएमएस कॉलेज के प्राचार्य और इतिहासकार मुश्ताक अहमद ने 'आतिश-ए-पिन्हां' लिखी है। वह बताते हैं कि अगर एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विद्रोह में मुग़लिया सल्तनत का तख्ता नहीं पलटता, तो गोरगान दिल्ली की गद्दी पर गद्दीनशीं होते। दरअसल एक हज़ार आठ सौ सत्तावन की क्रांति में मुग़लिया राज का सूरज अस्त होने के बाद मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफर, उनकी बेगम जीनत महल और बेटे मिर्जा जवान बख्त को अंग्रेज़ों ने रंगून निर्वासित कर दिया था। विजयी अंग्रेज़ कमांडरों ने मुग़ल साम्राज्य के उत्तराधिकारियों की बेरहमी से हत्या करना और उनके शवों का सार्वजनिक अपमान करना शुरू कर दिया। ऐसे में शाही परिवार के बचे हुए लोग अपनी जान बचाने के लिए अलग-अलग जगहों पर चले गए। शाही परिवार के ये लोग सामान्य लोगों की तरह जीवनयापन को मजबूर थे। ख़ुद बहादुर शाह जफर रंगून जाने से पहले बेगम समरू की हवेली में थे, जहां उनकी निगरानी चार्ल्स ग्रिफीन नाम का अंग्रेज़ अफ़सर कर रहा था। बाद में चार्ल्स ने अपनी क़िताब 'नैरेटिव ऑफ द सीज ऑफ डेल्ही' में बहादुर शाह जफर का ब्यौरा देते हुए लिखा कि मुग़ल राजवंश का आखिरी प्रतिनिधि एक बरामदे में एक साधारण चारपाई पर बिछाए गए गद्दे पर पालथी मारकर बैठा हुआ था। उनके रूप से कुछ भी भव्य नहीं था, सिवाए उनकी सफे़द दाढ़ी के जो उनके कमरबंद तक पहुंच रही थी। साफ़ है कि आलीशान मुग़लिया साम्राज्य से ताल्लुक रखने वाला हर आदमी इसी तरह की या इससे भी बदतर ज़िंदगी बसर करने को मजबूर था। जुबैरूद्दीन गोरगान भी दरभंगा पहुंचने से पहले भारत के अलग-अलग हिस्सों में भटकते रहे। सबसे पहले रतलाम पहुंचे, उसके बाद राजस्थान के कई इलाक़ों में रहे और वहां से फिर इलाहाबाद यानी आज के प्रयागराज। लेकिन, इलाहाबाद में उनका मन नहीं लगा तो वह अजीमाबाद आ गए। गोरगान ने अपने संस्मरणों पर क़िताब लिखी 'मौज-ए-सुल्तानी'। इसका प्रकाशन लखनऊ के मुंशी नवल किशोर प्रेस से सितंबर एक हज़ार आठ सौ चौरासी में हुआ था। इसको साल दो हज़ार तीन में दरभंगा राजपरिवार द्वारा संचालित कल्याणी फाउंडेशन ने फिर से प्रकाशित कराया है। मौज-ए-सुल्तानी में गोरगान लिखते हैं कि पटना शहर के लोग सभ्य और शिष्टाचार वाले हैं। यहां इस्लामपुर के जागीरदार चौधरी मोहम्मद जहरूलहक से उन्हें विशेष प्रेम मिला। पटना के बाद गोरगान मुजफ्फरपुर गए, जहां से उनका अगला पड़ाव था बेतिया। इसके बाद वह कुछ दिन बेतिया राज के मेहमान रहे। अपनी क़िताब में गोरगान लिखते हैं कि बेतिया महाराज राजेंद्र किशोर सिंह ने उनके लिए पालकी भेजकर अपने महल में आने का न्योता दिया। गोरगान के महल पहुंचने पर राजेंद्र किशोर उनका स्वागत करने ख़ुद बरामदे तक आए। अपने शीशमहल में ले जाकर गोरगान को बैठने की जगह देकर राजा ख़ुद हाथ बांधे खड़े रहे। असल में सत्रहवीं शताब्दी में मुग़ल बादशाह शाहजहां के आदेश पर बेतिया राज अस्तित्व में आया था। इसी तरह दरभंगा राज का श्रेय भी मुग़लिया सल्तनत को जाता है। बेतिया में रहने के बाद जुबैरूद्दीन गोरगान दरभंगा पहुंचे। जुबैरूद्दीन कुछ वक़्त के लिए भागलपुर भी रहे थे, जहां उनकी मुलाकात दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह के भाई कुंवर रामेश्वर सिंह से हुई। वहीं पर उन्होंने रामेश्वर सिंह को अपनी हालत के बारे में बताया, जिसके बाद सत्रह मार्च एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को जुबैरूद्दीन दरभंगा आए। यहां कुछ दिनों तक उनके रहने का इंतजाम दरभंगा के एक नामी रईस मुहम्मद सादिक अली के यहां किया गया। महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह की विनम्रता और आतिथ्य से प्रभावित होकर जुबैरूद्दीन ने दरभंगा को ख़ुद के लिए सुरक्षित महसूस किया। इसके बाद जुबैरूद्दीन अपने परिवार को लेकर दरभंगा आ गए। दरभंगा राज ने अपने महल के पास ही कटहलबाड़ी मोहल्ले में जुबैरूद्दीन और उनके परिवार के लिए एक घर बनवाया और मस्जिद बनवाई। मौज-ए-सुल्तानी में इस बात का ज़िक्र बार-बार मिलता है कि जुबैरूद्दीन देश के जिस भी हिस्से में जाते, वहां के स्थानीय अंग्रेज़ अधिकारियों से व्यक्तिगत तौर पर ज़रूर मिलते थे। इस मुलाकात का मकसद था ब्रिटिश अधिकारियों को इस बात के प्रति आश्वस्त करना कि वह अंग्रेज़ों की मुखालफत की कोई योजना नहीं बना रहे। इसी तरह देसी रजवाड़ों और जमींदार वाले इलाके़ में जुबैरूद्दीन अपने मुलाजिम से यह ख़बर भिजवाते थे। अपने दादा बहादुर शाह जफर की तरह ही जुबैरूद्दीन शायर तबियत के आदमी थी। अपनी क़िताब में उन्होंने बिहार, कलकत्ता, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मुंबई की यात्राओं का तफसील से वर्णन किया है। साथ ही, मुग़ल शासकों की वंशावली और उनके द्वारा बनवाई गई इमारतों के बारे में भी बहुत विस्तार से लिखा है। घूमने और समाज को समझने की जिज्ञासा रखने वाले जुबैरूद्दीन गोरगान ने दो क़िताबें और लिखीं। 'चमनिस्तान-ए-सुखन' काव्य संग्रह है। दूसरी क़िताब का नाम है 'मशनाबी दुर्रे शहसवार', जो महाकाव्य है। एक हज़ार आठ सौ तिरासी में गोरगान के इकलौते बेटे की हैजा से मौत हो गई। एक साल बाद उनकी बेगम का भी देहांत हो गया। इन दोनों की मौत से जुबैरूद्दीन तन्हा हो गए। इस तन्हाई में उन्होंने दरभंगा से बाहर जाने का फैसला लिया। लेकिन, दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह ने उन्हें रुके रहने के लिए मना लिया। वह जीवनभर दरभंगा में रहे और तकरीबन पचासी साल की उम्र में दरभंगा में ही अंतिम सांस ली। जुबैरूद्दीन गोरगान की मौत के बाद महाराजा रामेश्वर सिंह ने उनके लिए मक़बरा बनवाया। यह बात दीगर है कि दरभंगा राज ने ताज़िंदगी जिस जुबैरूद्दीन को अपना आतिथ्य और भरपूर प्रेम दिया, उनकी दो गज की क़ब्र की कदर भी दरभंगा के शहरी और बिहार सरकार नहीं कर सकी।
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Esray, जो निवेश को गति देता है, निर्यात में वृद्धि पर केंद्रित हैः Esray Board of Directors के चेयरमैन, Ramazan Yanar ने कहा, "जर्मनी को निर्यात करना, जो कि एक कठिन बाजार है, हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है। एक कंपनी के रूप में, हम निर्यात कनेक्शन बढ़ाएंगे। हम निर्यात में वृद्धि करना चाहते हैं "।
एगर, जो वैगन-वाहन उपकरण, लाइन कंटेनर और उनके स्पेयर पार्ट्स का उत्पादन करता है, विदेशी बिक्री पर ध्यान केंद्रित करेगा। 2015 के आखिरी महीनों में रेलवे वाहनों में अपने अनुभव के साथ निर्यात कनेक्शन में प्रवेश करते हुए, एस्से के बोर्ड के अध्यक्ष रमज़ान यनार ने कहा, "जर्मनी को निर्यात करना, जो एक कठिन बाजार है, हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है। एक कंपनी के रूप में, हम निर्यात कनेक्शन बढ़ाएंगे। हम निर्यात में वृद्धि करना चाहते हैं "।
यह बताते हुए कि उन्हें रेलवे और परिवहन क्षेत्रों के लिए विशेष उत्पादन करने के लिए 2007 में स्थापित किया गया था, रमज़ान यनार ने कहा कि इस्कीयर ओएसबी में मौजूदा 6 हजार 500 वर्ग मीटर के बंद क्षेत्र के अलावा, एक और 7 हजार 500 वर्ग मीटर के बंद क्षेत्र का निर्माण पूरा हो चुका है। रमज़ान यानर ने कहा कि वे 22 हजार वर्ग मीटर के कुल क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को जारी रखते हैं; "रेलवे सेक्टर के लिए हमारे द्वारा बनाई गई प्रस्तुतियों के अलावा, हम टाइरसन ब्रांड के साथ ऑन-व्हीकल उपकरण के उत्पादन में अपने अनुभव और कौशल को मिलाकर भी टाइरासन चेसिस पर मामलों का उत्पादन करते हैं। 2012 में शुरू होने वाले वैगनों की खरीद के साथ, हमारे नए कारखाने का निर्माण और मशीनरी और उपकरणों की खरीद, 3 में लगभग 2016 मिलियन यूरो का हमारा निवेश पूरा हो जाएगा, "उन्होंने कहा।
यह बताते हुए कि वे विकास के रास्ते पर आवश्यक निवेश करना जारी रखते हैं, यनार ने कहा कि ट्यूबस्मैस के नेतृत्व में, उन्होंने 10 में TCDD उपयोग के लिए 40 बार दबाव के साथ काम करने वाली 2015 नई पीढ़ी "बैलास्ट वैगन" का उत्पादन पूरा किया और उन्हें वितरित किया। यनार ने गिट्टी वैगन उत्पादन के साथ-साथ अन्य उत्पादन गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा, "हमने डीई 24000 प्रकार के इंजनों के चालक केबिनों के आधुनिकीकरण का एहसास किया है, जीई पावर हॉल लोकोमोटिव के उच्च जोखिम वाले भागों का उत्पादन, और हुंडई रोटम लोकोमोटिव के विद्युत मंत्रिमंडलों का उत्पादन"।
यह कहते हुए कि वे लोहे और स्टील के मुख्य उद्योग के लिए जो वेगन बनाते हैं, वे उच्च तापमान से प्रभावित नहीं होते हैं और 600 से 800 डिग्री पर काम कर सकते हैं, रमजान यानर ने कहा, "हमने एक संदर्भ के रूप में KARDEM asR के लिए उत्पादित वैगन को लेते हुए, ISDEMİR ने हमें एक आदेश दिया। KARDEM TheR के लिए हम जिस वैगन का उत्पादन करते हैं वह बिल्ट आयरन का होता है, जबकि हम जिस वैगन का उत्पादन करते हैं, वह İSDEM threeR के लिए तीन उत्पादों का उत्पादन करता हैः रोल्ड शीट, स्लैप और बिलेट। विभिन्न उत्पादों को ले जाते समय वैगन पर कोई परिवर्तन नहीं किया जाता है। हमारे डिजाइन के लिए धन्यवाद, वैगन सभी तीन उत्पादों को ले जा सकता है। यह अभिनव विशेषता विभिन्न उत्पाद परिवहन के दौरान समय की हानि को समाप्त करती है "। यह बताते हुए कि वे अपने गुणवत्ता के उत्पादन को उनके पास मौजूद दस्तावेजों के साथ प्रदर्शित करते हैं, रमाज़ान यनर ने जोर देकर कहा कि यूरोप में रेलवे पर वेल्डेड बनाने वाली कंपनियां एन 15085 (ईएन 3834 के साथ) प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाली पहली कंपनियों में से एक हैं, जो उनके उत्पादन की गुणवत्ता का उच्चतम मानक दस्तावेज है। यनर ने यह भी रेखांकित किया कि वे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य का सम्मान करते हुए EN 9001, EN 14001 और OHSAS 18001 मानकों के अनुसार सभी उत्पादन प्रक्रियाओं को पूरा करते हैं।
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Esray, जो निवेश को गति देता है, निर्यात में वृद्धि पर केंद्रित हैः Esray Board of Directors के चेयरमैन, Ramazan Yanar ने कहा, "जर्मनी को निर्यात करना, जो कि एक कठिन बाजार है, हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है। एक कंपनी के रूप में, हम निर्यात कनेक्शन बढ़ाएंगे। हम निर्यात में वृद्धि करना चाहते हैं "। एगर, जो वैगन-वाहन उपकरण, लाइन कंटेनर और उनके स्पेयर पार्ट्स का उत्पादन करता है, विदेशी बिक्री पर ध्यान केंद्रित करेगा। दो हज़ार पंद्रह के आखिरी महीनों में रेलवे वाहनों में अपने अनुभव के साथ निर्यात कनेक्शन में प्रवेश करते हुए, एस्से के बोर्ड के अध्यक्ष रमज़ान यनार ने कहा, "जर्मनी को निर्यात करना, जो एक कठिन बाजार है, हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है। एक कंपनी के रूप में, हम निर्यात कनेक्शन बढ़ाएंगे। हम निर्यात में वृद्धि करना चाहते हैं "। यह बताते हुए कि उन्हें रेलवे और परिवहन क्षेत्रों के लिए विशेष उत्पादन करने के लिए दो हज़ार सात में स्थापित किया गया था, रमज़ान यनार ने कहा कि इस्कीयर ओएसबी में मौजूदा छः हजार पाँच सौ वर्ग मीटर के बंद क्षेत्र के अलावा, एक और सात हजार पाँच सौ वर्ग मीटर के बंद क्षेत्र का निर्माण पूरा हो चुका है। रमज़ान यानर ने कहा कि वे बाईस हजार वर्ग मीटर के कुल क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को जारी रखते हैं; "रेलवे सेक्टर के लिए हमारे द्वारा बनाई गई प्रस्तुतियों के अलावा, हम टाइरसन ब्रांड के साथ ऑन-व्हीकल उपकरण के उत्पादन में अपने अनुभव और कौशल को मिलाकर भी टाइरासन चेसिस पर मामलों का उत्पादन करते हैं। दो हज़ार बारह में शुरू होने वाले वैगनों की खरीद के साथ, हमारे नए कारखाने का निर्माण और मशीनरी और उपकरणों की खरीद, तीन में लगभग दो हज़ार सोलह मिलियन यूरो का हमारा निवेश पूरा हो जाएगा, "उन्होंने कहा। यह बताते हुए कि वे विकास के रास्ते पर आवश्यक निवेश करना जारी रखते हैं, यनार ने कहा कि ट्यूबस्मैस के नेतृत्व में, उन्होंने दस में TCDD उपयोग के लिए चालीस बार दबाव के साथ काम करने वाली दो हज़ार पंद्रह नई पीढ़ी "बैलास्ट वैगन" का उत्पादन पूरा किया और उन्हें वितरित किया। यनार ने गिट्टी वैगन उत्पादन के साथ-साथ अन्य उत्पादन गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा, "हमने डीई चौबीस हज़ार प्रकार के इंजनों के चालक केबिनों के आधुनिकीकरण का एहसास किया है, जीई पावर हॉल लोकोमोटिव के उच्च जोखिम वाले भागों का उत्पादन, और हुंडई रोटम लोकोमोटिव के विद्युत मंत्रिमंडलों का उत्पादन"। यह कहते हुए कि वे लोहे और स्टील के मुख्य उद्योग के लिए जो वेगन बनाते हैं, वे उच्च तापमान से प्रभावित नहीं होते हैं और छः सौ से आठ सौ डिग्री पर काम कर सकते हैं, रमजान यानर ने कहा, "हमने एक संदर्भ के रूप में KARDEM asR के लिए उत्पादित वैगन को लेते हुए, ISDEMİR ने हमें एक आदेश दिया। KARDEM TheR के लिए हम जिस वैगन का उत्पादन करते हैं वह बिल्ट आयरन का होता है, जबकि हम जिस वैगन का उत्पादन करते हैं, वह İSDEM threeR के लिए तीन उत्पादों का उत्पादन करता हैः रोल्ड शीट, स्लैप और बिलेट। विभिन्न उत्पादों को ले जाते समय वैगन पर कोई परिवर्तन नहीं किया जाता है। हमारे डिजाइन के लिए धन्यवाद, वैगन सभी तीन उत्पादों को ले जा सकता है। यह अभिनव विशेषता विभिन्न उत्पाद परिवहन के दौरान समय की हानि को समाप्त करती है "। यह बताते हुए कि वे अपने गुणवत्ता के उत्पादन को उनके पास मौजूद दस्तावेजों के साथ प्रदर्शित करते हैं, रमाज़ान यनर ने जोर देकर कहा कि यूरोप में रेलवे पर वेल्डेड बनाने वाली कंपनियां एन पंद्रह हज़ार पचासी प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाली पहली कंपनियों में से एक हैं, जो उनके उत्पादन की गुणवत्ता का उच्चतम मानक दस्तावेज है। यनर ने यह भी रेखांकित किया कि वे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य का सम्मान करते हुए EN नौ हज़ार एक, EN चौदह हज़ार एक और OHSAS अट्ठारह हज़ार एक मानकों के अनुसार सभी उत्पादन प्रक्रियाओं को पूरा करते हैं।
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की नाराज उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल से बातचीत के बाद ऐसा लगता है कि गुजरात सरकार में चल रहा संकट समाप्त हो गया है। देर शाम नितिन पटेल को वित्त मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया। पूर्ववर्ती सरकार में भी उनके पास ये मंत्रालय था। बता दें कि कैबिनेट में अपनी पसंद का मंत्रालय नहीं मिलने के कारण नितिन पटेल कार्यभार संभालने में देरी कर रहे थे।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की नाराज उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल से बातचीत के बाद ऐसा लगता है कि गुजरात सरकार में चल रहा संकट समाप्त हो गया है। देर शाम नितिन पटेल को वित्त मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया। पूर्ववर्ती सरकार में भी उनके पास ये मंत्रालय था। बता दें कि कैबिनेट में अपनी पसंद का मंत्रालय नहीं मिलने के कारण नितिन पटेल कार्यभार संभालने में देरी कर रहे थे। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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- Zara Hatke । Written by: बिक्रम कुमार सिंह ।शुक्रवार मई 26, 2023 10:16 PM ISTइस मैच में शुभमन गिल ने कमाल की पारी खेली. 129 रनों की पारी खेलकर शुभमन ने क्रिकेट की दुनिया में शुभ संकेत दे दिया है. इस मैच में गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में 3 विकेट के नुकसान पर 233 रनों का स्कोर बनाया है.
- Cricket । Written by: अभिषेक भारद्वाज ।शुक्रवार मई 26, 2023 09:32 AM ISTIPL Historical Record: अगर मुंबई, गुजरात को हराकर फाइनल में पहुंचती है तो उसके पास आईपीएल का छठा खिताब अपने नाम करने का मौका होगा.
- Cricket । Written by: अभिषेक भारद्वाज ।सोमवार मई 22, 2023 12:50 PM ISTAB de Villiers on Virat Kohli and Rcb Lose: आरसीबी ने पावर प्ले में बिना किसी नुकसान के 62 रन बनाए. कोहली ने अपनी शतकीय पारी से क्रिस गेल (Kohli Break Gayle Record) को पीछे छोड़कर आईपीएल में सर्वाधिक शतक जड़ने का रिकॉर्ड भी बनाया.
- Cricket । Written by: विशाल कुमार ।रविवार मई 21, 2023 10:56 AM ISTDavid Warner IPL Record: डेविड वॉर्नर ने आईपीएल में इतिहास रच दिया है. वॉर्नर आईपीएल के इतिहास में इकलौते ऐसे बल्लेबाज बन गए हैं, जिनके नाम 7 आईपीएल सीजन में 500 या उससे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है.
- शतक जड़ते ही सबसे पहले विराट कोहली को याद आईं अनुष्का शर्मा, वायरल फोटो को देख फैंस बोले- दुनिया का सबसे खूबसूरत पलZara Hatke । Written by: शालिनी सेंगर ।रविवार मई 21, 2023 06:47 AM ISTसोशल मीडिया पर अनुष्का शर्मा और विराट कोहली की एक फोटो और वीडियो तेजी से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है, जिसमें क्रिकेटर स्टेडियम से अनुष्का से वीडियो कॉल पर बात करते दिख रहे हैं.
- बीवी के साथ क्रिकेट खेलने उतरे हार्दिक पंड्या, टीम मेट्स के सामने ही बना डाला नताशा का मजाक, हरकत देख रह जाएंगे हैरानBollywood । Edited by: आनंद कश्यप ।गुरुवार मई 18, 2023 06:34 PM ISTइस वीडियो को नताशा स्तान्कोविक और हार्दिक पंड्या दोनों ने एक साथ शेयर किया है. जिसमें दोनों का आमने सामने मुकाबला है. खेल के मैदान में टीम नताशा और टीम हार्दिक टॉस के लिए पहुंचती है.
- Cricket । Reported by: भाषा, Edited by: अभिषेक भारद्वाज ।गुरुवार मई 11, 2023 02:54 PM ISTJio Cinema IPL 2023 Viewership record: दर्शकों ने टाटा आईपीएल 2023 को देखने के लिए डिजिटल मंच को अपनी पहली पसंद बना लिया है.
- VIDEO: आईपीएल छोड़ चोरी-छुपे 'जुआ' खेलते नजर आए शिखर धवन, पहुंच गई पुलिस तो क्रिकेटर देने लगे ऐसा रिएक्शनBollywood । Written by: आनंद कश्यप ।सोमवार अप्रैल 17, 2023 01:55 PM ISTइस बीस शिखर धवन का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वह अपने दोस्तों के साथ जुआ खेलते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं जब पुलिस ऑफिस आता है तो शिखर धवन के दोस्त उन्हें अकेला छोड़कर भाग जाते हैं.
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- Zara Hatke । Written by: बिक्रम कुमार सिंह ।शुक्रवार मई छब्बीस, दो हज़ार तेईस दस:सोलह PM ISTइस मैच में शुभमन गिल ने कमाल की पारी खेली. एक सौ उनतीस रनों की पारी खेलकर शुभमन ने क्रिकेट की दुनिया में शुभ संकेत दे दिया है. इस मैच में गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बीस ओवरों में तीन विकेट के नुकसान पर दो सौ तैंतीस रनों का स्कोर बनाया है. - Cricket । Written by: अभिषेक भारद्वाज ।शुक्रवार मई छब्बीस, दो हज़ार तेईस नौ:बत्तीस AM ISTIPL Historical Record: अगर मुंबई, गुजरात को हराकर फाइनल में पहुंचती है तो उसके पास आईपीएल का छठा खिताब अपने नाम करने का मौका होगा. - Cricket । Written by: अभिषेक भारद्वाज ।सोमवार मई बाईस, दो हज़ार तेईस बारह:पचास PM ISTAB de Villiers on Virat Kohli and Rcb Lose: आरसीबी ने पावर प्ले में बिना किसी नुकसान के बासठ रन बनाए. कोहली ने अपनी शतकीय पारी से क्रिस गेल को पीछे छोड़कर आईपीएल में सर्वाधिक शतक जड़ने का रिकॉर्ड भी बनाया. - Cricket । Written by: विशाल कुमार ।रविवार मई इक्कीस, दो हज़ार तेईस दस:छप्पन AM ISTDavid Warner IPL Record: डेविड वॉर्नर ने आईपीएल में इतिहास रच दिया है. वॉर्नर आईपीएल के इतिहास में इकलौते ऐसे बल्लेबाज बन गए हैं, जिनके नाम सात आईपीएल सीजन में पाँच सौ या उससे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है. - शतक जड़ते ही सबसे पहले विराट कोहली को याद आईं अनुष्का शर्मा, वायरल फोटो को देख फैंस बोले- दुनिया का सबसे खूबसूरत पलZara Hatke । Written by: शालिनी सेंगर ।रविवार मई इक्कीस, दो हज़ार तेईस छः:सैंतालीस AM ISTसोशल मीडिया पर अनुष्का शर्मा और विराट कोहली की एक फोटो और वीडियो तेजी से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है, जिसमें क्रिकेटर स्टेडियम से अनुष्का से वीडियो कॉल पर बात करते दिख रहे हैं. - बीवी के साथ क्रिकेट खेलने उतरे हार्दिक पंड्या, टीम मेट्स के सामने ही बना डाला नताशा का मजाक, हरकत देख रह जाएंगे हैरानBollywood । Edited by: आनंद कश्यप ।गुरुवार मई अट्ठारह, दो हज़ार तेईस छः:चौंतीस PM ISTइस वीडियो को नताशा स्तान्कोविक और हार्दिक पंड्या दोनों ने एक साथ शेयर किया है. जिसमें दोनों का आमने सामने मुकाबला है. खेल के मैदान में टीम नताशा और टीम हार्दिक टॉस के लिए पहुंचती है. - Cricket । Reported by: भाषा, Edited by: अभिषेक भारद्वाज ।गुरुवार मई ग्यारह, दो हज़ार तेईस दो:चौवन PM ISTJio Cinema IPL दो हज़ार तेईस Viewership record: दर्शकों ने टाटा आईपीएल दो हज़ार तेईस को देखने के लिए डिजिटल मंच को अपनी पहली पसंद बना लिया है. - VIDEO: आईपीएल छोड़ चोरी-छुपे 'जुआ' खेलते नजर आए शिखर धवन, पहुंच गई पुलिस तो क्रिकेटर देने लगे ऐसा रिएक्शनBollywood । Written by: आनंद कश्यप ।सोमवार अप्रैल सत्रह, दो हज़ार तेईस एक:पचपन PM ISTइस बीस शिखर धवन का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वह अपने दोस्तों के साथ जुआ खेलते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं जब पुलिस ऑफिस आता है तो शिखर धवन के दोस्त उन्हें अकेला छोड़कर भाग जाते हैं.
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चंबा-क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण ने इस माह का ड्राइविंग टेस्ट और वाहन पासिंग का शेड्यूल किन्हीं अपरिहार्य कारणों के चलते रद्द हो गया है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी चंबा ओंकार सिंह ने बताया कि अब केवल 19 दिसंबर को ही ड्राइविंग टेस्ट आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद का सारा शेड्यूल रद्द कर दिया गया है। लिहाजा अब पहले से निर्धारित शेड्यूल के तहत 31 दिसंबर को चंबा में 23 दिसंबर को बनीखेत, 28 दिसंबर को चुवाड़ी, 24 दिसंबर को सलूणी, 27 दिसंबर को तीसा और 20 दिसंबर को भरमौर में ड्राइविंग टेस्ट नहीं लिए जाएंगे। वहीं 30 दिसंबर को चंबा में 23 दिसंबर को बनीखेत और 28 दिसंबर को चुवाड़ी में वाहनों की पासिंग भी की नहीं की जाएगी। आरटीओ ने कहा कि पहली जनवरी 2020 से प्रथम सप्ताह से ही ड्राइविंग टेस्ट व वाहनों की पासिंग शुरु कर दी जाएगी। जल्द ही जनवरी माह का शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। इसके लेकर अधिक जानकारी के लिए आरटीओ कार्यालय भी संपर्क किया जा सकता है।
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चंबा-क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण ने इस माह का ड्राइविंग टेस्ट और वाहन पासिंग का शेड्यूल किन्हीं अपरिहार्य कारणों के चलते रद्द हो गया है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी चंबा ओंकार सिंह ने बताया कि अब केवल उन्नीस दिसंबर को ही ड्राइविंग टेस्ट आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद का सारा शेड्यूल रद्द कर दिया गया है। लिहाजा अब पहले से निर्धारित शेड्यूल के तहत इकतीस दिसंबर को चंबा में तेईस दिसंबर को बनीखेत, अट्ठाईस दिसंबर को चुवाड़ी, चौबीस दिसंबर को सलूणी, सत्ताईस दिसंबर को तीसा और बीस दिसंबर को भरमौर में ड्राइविंग टेस्ट नहीं लिए जाएंगे। वहीं तीस दिसंबर को चंबा में तेईस दिसंबर को बनीखेत और अट्ठाईस दिसंबर को चुवाड़ी में वाहनों की पासिंग भी की नहीं की जाएगी। आरटीओ ने कहा कि पहली जनवरी दो हज़ार बीस से प्रथम सप्ताह से ही ड्राइविंग टेस्ट व वाहनों की पासिंग शुरु कर दी जाएगी। जल्द ही जनवरी माह का शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। इसके लेकर अधिक जानकारी के लिए आरटीओ कार्यालय भी संपर्क किया जा सकता है।
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इकोनॉमिस्ट पत्रिका के सितंबर अंक (9 के लिए सं। 2013) ने वर्तमान आर्थिक स्थिति (गुबनोव एस। स्वायत्त मंदी, रूस में प्रणालीगत संकट के अंतिम चरण के रूप में एक दिलचस्प विश्लेषण दिया। // अर्थशास्त्री। 2013 सं। 9)।
हमने लेखक, प्रोफेसर सर्गेई सेमेनोविच गुबनोव से घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में बताने के लिए कहा।
- सर्गेई सेमेनोविच, रूसी अर्थव्यवस्था के साथ अब क्या हो रहा है?
- कई नवाचार हैं, लेकिन वे सभी एक चीज में अभिव्यक्ति पाते हैं - आर्थिक मंदी। मंदी के दौर में रूस यह सच है कि सरकार यह विश्वास दिलाती है कि जीडीपी बढ़ रही है, और केवल इस वृद्धि की दर घटकर असीम रूप से छोटी हो जाती है। ऐसा लगता है कि यह खुद को आराम देने के लिए प्रतिकूल नहीं है, भले ही यह नैनोस्टैंड हो, क्योंकि मधुमक्खी और कैंसर के लिए मछली है। हालांकि, वस्तुतः कोई वृद्धि नहीं है।
वृद्धि के बजाय, गिरावट है - जीडीपी, बजट, सकल मांग, जनसंख्या, उद्यमों और राज्य की क्रय शक्ति में गिरावट। जबकि मुख्य जिंस निर्यात की कीमतें - तेल और गैस - पिछले साल से कम नहीं हैं। वे बहुत लंबे हैं। इसलिए, नवाचारों में से एक यह है कि विकास की उपस्थिति का समर्थन करने के लिए कमोडिटी निर्यात के लिए उच्च कीमतें बंद हो गई हैं, जो अभी भी विकास के बिना विकास का सार है।
इस प्रकार, डॉलर के संदर्भ में, 2002 समय में 5,5 के बाद जीडीपी में वृद्धि हुई। लेकिन क्या एक्सएनयूएमएक्स द्वारा श्रम की उत्पादकता और रूसियों के जीवन स्तर में वृद्धि हुई थी? ऐसा कुछ नहीं है। अंतिम उपयोग वस्तु संसाधन केवल 5,5% की वृद्धि हुई, और बाकी सभी पेट्रोडॉलर की मुद्रास्फीति से फुलाया गया बुलबुला है। जीडीपी के कमोडिटी वाले हिस्से का वॉल्यूम अभी भी आरएसएफएसआर की राष्ट्रीय आय के एक्सएनयूएमएक्स के स्तर के मुकाबले एक्सएनयूएमएक्स% से कम है, जब तक, गोर्बाचेव की अव्यवस्था पहले ही यूएसएसआर के विनाश के यॉट्सिन ऑर्गी में डाली जा चुकी है।
2013 से पहले, नाममात्र वृद्धि हुई थी, लेकिन कोई विकास नहीं हुआ था। अब कोई विकास नहीं है। 2012 की दूसरी छमाही के बाद से, अर्थव्यवस्था क्षीणन बैंड में फिसल गई है, और फिर गिरावट - अभी भी मामूली है। राज्य के बजट में उद्योग, पूंजी निवेश, रोजगार, निर्यात, लाभ, प्राप्तियां लुढ़क जाती हैं। आबादी की क्रय शक्ति अक्षम्य रूप से सूख जाती है। मंदी ने पहले से ही समग्र मांग को प्रभावित किया है, और बहुत संवेदनशील है। बजट अनुक्रम, सभी के लिए दर्दनाकः लोगों, उद्योगों, क्षेत्रों। यह नहीं देखा कि राजस्व कैसे बढ़ाया जाए, क्रेमलिन निर्दयतापूर्वक खर्चों में कटौती करता है।
ऊपर की ओर प्रवृत्ति नीचे की ओर हो गई। मुख्य कारण निर्यात-कच्चे माल मॉडल के संरक्षण की नीति है - खाद और इसलिए रूसी विरोधी। इस नीति के कारण, रूस एक प्रणालीगत संकट में डूबा हुआ है, विदेशी पूंजी पर काम करना जारी रखने के बजाय, नए औद्योगीकरण पर, श्रम उत्पादकता में वृद्धि, जीवन स्तर और जनसंख्या के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ा रहा है।
- क्या यह मंदी है, जिसकी संभावना आपने डेढ़ साल पहले, जनवरी 2012 में वापस घोषित की थी?
- सच है, इस तरह की मंदी की संभावना पर चर्चा की गई थी। 2011 के अंत में, यह याद रखने योग्य है कि दुनिया बार-बार मंदी की प्रत्याशा में भटकती है। G7 देशों के लिए, IMF, वर्ल्ड बैंक और अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने 2012 की पहली छमाही की तुलना में बाद में निराशा की भविष्यवाणी की। एन रुबीनी भयानक भविष्यवाणी के साथ गाना बजानेवालों में शामिल थे। दिसंबर 2011 के मध्य में, मेरे सहयोगियों और मैंने यह जांचने का निर्णय लिया कि क्या 2012 वास्तव में एक और पतन का वर्ष होगा। और चक्रीय संकटों के हमारे मॉडल की भविष्यवाणी की ओर मुड़ गए। गणना से पता चला है कि "मंदी की दूसरी लहर" के ट्रबड्रोज़ ने जल्दबाज़ी मेंः 2012 पर, इसकी संभावना शून्य थी। एक साल बीत चुका है, और हमारा निष्कर्ष सटीक निकलाः मॉडल ने हमें निराश नहीं किया।
उसी समय, एक नहीं बल्कि अप्रत्याशित परिणाम सामने आया। उसने सीधे रूस को छुआ। जैसा कि यह निकला, जबकि औद्योगिक देशों में मंदी अब तक अविश्वसनीय है, फिर हमारे देश के लिए, इसके विपरीत, ऐसी संभावना मौजूद है - और गंभीरता से लिया जाना पर्याप्त है। इसलिए, मुझे यह जोड़ना था कि रूस में मंदी के बिना "सात बड़े" देशों में संभव है - विषम रूप से और उनके साथ अलग-अलग समय पर। यह शायद उद्धृत करना उचित हैः "2012 में विकसित देशों के लिए मंदी के खतरे नहीं हैं। रूस के लिए, यह खतरा मौजूद है, इसके अलावा, यह 2008 की तुलना में बहुत अधिक गंभीर है। "(एस। गुबनोव। क्या दुनिया में मंदी-2012 की संभावना है? // अर्थशास्त्री। 2012। 1)।
- 2013 में घरेलू अर्थव्यवस्था का पतन कितना गहरा है?
- मंदी अभी भी मध्यम है, वास्तविक गिरावट सकल घरेलू उत्पाद के 1,7% से अधिक नहीं है।
- आपका अनुमान रोसस्टेट गणना से भिन्न होता है, जो माइनस 1,7% के बजाय, पहली तिमाही के लिए GDP का 1,6%, दूसरी तिमाही के लिए 1,2% और समग्र रूप से वर्ष की पहली छमाही के लिए 1,4% देता है। यह न बताएँ कि यह विसंगति कहाँ से आती है और आप कैसे सोचते हैं?
- गणना आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर, दो तरीकों से की गई थी। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के संतुलन की विधि और जीडीपी के उपयोग के घटकों के संरचनात्मक-गतिशील विश्लेषण की विधि का उपयोग किया गया था। ऐसा लगता है कि कार्यप्रणाली, एल्गोरिथ्म और गणना उपकरण के विवरण और सूक्ष्मताओं में जाना अनावश्यक है। मुख्य परिणाम खुद के लिए बोलते हैं।
औपचारिक रूप से, रोजस्टैट का अनुमान सही हैः नाममात्र के संदर्भ में, पहली तिमाही में जीडीपी बढ़ी। 2013% पर 1,6। लेकिन क्या वास्तविक जीडीपी उपयोग में वृद्धि हुई है? वास्तव में, कोई वृद्धि नहीं है; इसके विपरीत - एक कमी है। कुल में, 1,7% से। दुर्भाग्य से, दूसरी तिमाही की गणना के लिए आवश्यक डेटा अभी भी गायब है। हम केवल यह जानते हैं कि दूसरी तिमाही पहले की तुलना में बेहतर नहीं थी। दो लगातार तिमाहियों में "लाल" एक मंदी है। मुख्य रूप से जीडीपी वृद्धि है, लेकिन वास्तव में इसका उपयोग करने के लिए कुछ भी नहीं है। और क्रेमलिन को सांख्यिकीय रूप से आर्थिक विकास दिखाने के लिए भंडार खर्च करना पड़ता है।
- क्या तत्व मंदी के लिए एक बड़ा योगदान देता है?
- सबसे बड़े माइनस सकल संचय में। शुद्ध निर्यात में कमी के कारण मुआवजा अंतिम खपत की रेखा पर था। राज्य ने व्यक्तिगत निवेश कार्यक्रमों का समर्थन करने के लिए और न्यूनतम, अनिवार्य सामाजिक खर्च के लिए विदेशी मुद्रा भंडार खर्च किया। यह स्पष्ट है कि विदेशी मुद्रा भंडार दुर्लभ हैं। इसलिए, बजट की गणना सभी मामलों में बढ़ती है, सरकार की नजर में अनिवार्य नहीं है। इनमें - विज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, आदि।
साथियों को तकलीफ नहीं होती। निजी बैंकों की मदद से, वे गहन रूप से विदेश में अपना किराया वापस लेते हैं। सामाजिक बहुमत पीड़ित है, क्योंकि मंदी का सारा बोझ उसके कंधों पर पड़ता है। राज्य कर्मचारियों के लिए सूचकांक स्थगित कर दिया जाता है, घरेलू टैरिफ में वृद्धि होती है, बिजली की खपत के आरोएसिक विनियमन को लागू किया जाता है, मजदूरी में कटौती की जाती है, बेरोजगारी बढ़ती है, यहां तक कि आरएएस की संपत्ति, जो निजीकरण से प्रभावित नहीं हुई है, बिक्री के लिए तैयार हो रही है - सरकार एक तिनका पकड़ रही है।
संक्षेप में, केवल राज्य भंडार से समर्थन हमें जीडीपी में सांख्यिकीय विकास दिखाने की अनुमति देता है। लेकिन वास्तविक संसाधनों की जरूरत है। पेपर त्सफिर उनकी कमी की भरपाई नहीं करता है, यह न तो निवेश की भूख को संतुष्ट करता है, न ही बजट को, न ही कमोडिटी को, न ही ऊर्जा को। इसलिए रूस वास्तव में मंदी में है, और बजट कम आपूर्ति में है।
- उच्च तेल और गैस की कीमतों के साथ, 2013 से अर्थव्यवस्था क्यों नीचे खिसकने लगी?
- कारणों को आंतरिक और बाह्य में विभाजित किया गया है। सरकार का मानना है कि बाहरी कारण हैंः वे कहते हैं कि दुनिया में हर जगह कम विकास दर हैं। यह तर्क गलत है। 2013 से पहले, जी -7 देशों की अर्थव्यवस्थाओं ने गुणात्मक परिवर्तनों के लिए अधिक संघर्ष किया, और फिर सरकार ने इस तथ्य का श्रेय लिया कि जीडीपी विकास के मामले में, रूस कई धीमी गति से आगे था। अब औद्योगिक देश धीमे से फुर्तीले हो गए हैं, एक औद्योगिक उछाल हासिल किया है, और वह - वे अचानक रूसी अर्थव्यवस्था को धीमा करना शुरू कर दिया है? बकवास। उन्हें कुछ भी करने के लिए नोड। यह सत्य से ध्यान हटाने के लिए तर्क को अनफिट करने के लिए कोई अर्थ नहीं रखता है।
बाहरी कारण उतने महत्वपूर्ण नहीं हैं जितने कि आंतरिक। आंतरिक लोगों की ओर मुड़ते हुए, अपने मौलिक और तात्कालिक लोगों में अपने विभाजन को ध्यान में रखना चाहिए।
शुरू में, मौलिक कारण। वे एक प्रणालीगत संकट से जुड़े हुए हैं, जो कि कंप्रैडर संपत्ति के प्रभुत्व के कारण होता है और निर्माण से निकालने वाले उद्योग के अलगाव का कारण बनता है। मूल्य श्रृंखलाएं स्वायत्त टुकड़ों में विभाजित होती हैं और अक्षम होती हैं। इंटरमीडिएट उत्पादन फाइनल से कटा हुआ है। यहां से डिंडोट्रोपोराइजेशन, विज्ञान और शिक्षा का क्षरण। परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय आर्थिक मूल्य वर्धित गुणक औद्योगिक देशों की तुलना में 7-10 गुना कम है।
अंतिम उत्पाद का आकार भयावह रूप से छोटा है, और हां यहां तक कि compradors के पक्ष में विभाजित है। यह रूस के लिए एक ऐतिहासिक रूप से अप्रमाणित आर्थिक प्रणाली शत्रुतापूर्ण है। मैं ध्यान देना चाहूंगाः रूस में, अब सभी समान कारणों में कार्रवाई के कारण यूएसएसआर का पतन हुआ। ये सभी राष्ट्रीय संपत्ति, डॉलर के भ्रष्टाचार, देशहित पर निजी स्वार्थ की सर्वोच्चता और सरकार और लोगों की नैतिक और राजनीतिक एकता की हानि को नकारते हैं। विनाशकारी कारणों को समाप्त नहीं किया गया है, और प्रणालीगत प्रतिबंधों को हटाया नहीं गया है। ऑलिगार्सिक-कंप्रैडर संपत्ति के आधार पर, एक महत्वपूर्ण द्रव्यमान का संचय होता रहता है, और जब पहुंचता है, तो हमारे देश के पतन की श्रृंखला प्रतिक्रिया के लिए एक हल्का झटका पर्याप्त होगा।
आंतरिक प्रणाली का संकट रूस को तब तक अपने घुटनों पर रखेगा जब तक कि कच्चे माल का निष्कर्षण उसके अधिकतम और उच्च-तकनीकी औद्योगिक प्रसंस्करण से उच्च उत्पादों के साथ समाप्त उत्पादों में काट दिया जाता है। लेकिन घरेलू उद्योग के दोनों क्षेत्रों को एकजुट करने के लिए, उन्हें एक ही दोहन में शामिल करने के लिए, और केवल उनके लिए आम है, एकीकृत संपत्ति पूरी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के उदय के लिए ड्राइविंग बल बना सकती है। बदले में, राज्य में अंतिम परिणाम पर उनके समन्वित और समन्वित काम को सुनिश्चित करने के लिए केवल एक योजना और आर्थिक प्रणाली, ऊर्ध्वाधर एकीकरण के कानून और आम सहमति योजना के सिद्धांत के अनुरूप लाया गया।
कोई भी प्रणालीगत संकट केवल पुरानी आर्थिक प्रणाली, प्रतिक्रियावादी और नए, ऐतिहासिक रूप से प्रगतिशील एक की स्थापना को समाप्त करके हल किया जाता है। इसका कोई और रास्ता नहीं है।
Россия так или иначе обречена на новое решение вопроса о собственности и своей политико-экономической системе. Все дело лишь в том, каким образом страна добьется исторически верного решения - преимущественно эволюционным или революционным, «сверху» или «снизу», либо при синхронном политическом обновлении «низов» и «верхов». Исход зависит, как учит история, от степени соответствия между объективными и субъективными факторами.
ऐसा लगता है कि मूलभूत कारणों को पर्याप्त रूप से रेखांकित किया गया है। तत्काल लोगों के बीच, यह आवश्यक हैः निर्यात की मात्रा में गिरावट, मूल्य के लिए निर्यात की मांग की नकारात्मक लोच के प्रभाव की उपस्थिति, विदेशों में पूंजी निर्यात की तीव्रता, निवेश पर बदले में गिरावट, लाभप्रदता का दोहरा पूर्वाग्रह जो निवेश के सामान के उत्पादन को पंगु बना देता है और संचय निधि को कम कर देता है।
2012 की दूसरी छमाही के बाद से रूसी निर्यात की मासिक गतिशीलता ज्यादातर नकारात्मक रही है। क्यों? यह मूल्य निर्धारण के बारे में नहीं है। तेल और गैस के लिए, वे पिछले वर्ष की तुलना में हैं, उदाहरण के लिए, तेल के लिए - 106 और 108 डॉलर प्रति बैरल। धातु की कीमतें गिर गई हैं, लेकिन धातुओं का हिस्सा इतना बड़ा नहीं है कि पूरे निर्यात की गतिशीलता को नीचे लाया जा सके। जाहिर है, एक नया कारक सामने आया है, क्योंकि तेल और गैस की ऊंची कीमतें जीडीपी को नहीं खींचती हैं।
और वास्तव में, ऐसा कारक मौजूद है। यह यूरोपीय संघ के देशों से एक कीमत पर निर्यात मांग की नकारात्मक लोच है। उच्च कीमत, हमारे हाइड्रोकार्बन कच्चे माल के लिए यूरोपीय संघ की मांग कम है। एकमात्र अपवाद वर्ष की चौथी तिमाही है जब ईंधन की आपूर्ति की आवश्यकता होती है। वर्ष के शेष तीन चौथाई एक नकारात्मक लोच देते हैं। नीचे की रेखाः अभी विदेशी देशों में गैस के निर्यात के भौतिक वॉल्यूम, मुख्य रूप से यूरोपीय संघ के लिए, 1,5 की तुलना में लगभग 2007 गुना कम हैं। तेल निर्यात के वॉल्यूम भी कम हैं। धातुकर्म निर्यात की मात्रा में गिरावट को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि कच्चे माल का निर्यात जीडीपी वृद्धि का स्रोत क्यों नहीं रह गया है।
- क्या यह अस्थायी या दीर्घकालिक है?
- लंबे समय तक, गंभीरता से और लंबे समय तक। मुझे याद है कि रेडियो पर हम, मारत मजीतोविच, यहां तक कि एक्सएनयूएमएक्स की शुरुआत में यूरोपीय संघ के ऊर्जा संतुलन, धातु तेल, प्लास्टिक आदि सहित तेल-तेल ऊर्जा और अपशिष्ट रीसाइक्लिंग तकनीकों की संभावनाओं पर चर्चा की। तब ऐसा लग रहा था कि यूरोपीय संघ को सालों तक 2009-5 की आवश्यकता होगी, ताकि इन परिवर्तनों से रूस से तेल और गैस की खरीद के लिए मांग की जा सके। हालांकि, वर्ष के 7 में, यूरोपीय तेजी से कामयाब रहे। अब उनके पास 4-15% की मात्रा में - तेल और गैस कच्चे माल के आयात प्रतिस्थापन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। धन्यवाद, वैसे, नव-औद्योगिक विकास के लिए, जो तेल और पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों के विकास को गति देता है, जिससे आप श्रम, ऊर्जा और संसाधनों में बचत बढ़ा सकते हैं।
निस्संदेह, बाद के वर्षों में कीमत पर नकारात्मक लोच का प्रभाव केवल बढ़ेगा। यह जर्मन ऊर्जा क्षेत्र पर हाल के विश्लेषणात्मक आंकड़ों द्वारा स्पष्ट रूप से दिखाया गया है।
तथ्य एक तथ्य हैः वस्तु निर्यात और रूसी जीडीपी की कीमतों के बीच एक सीधा आनुपातिक संबंध टूट गया है। इसे अब जोड़ा नहीं जा सकता है, और यह रूस की दया पर नहीं है। तेल और गैस के उच्च मूल्य अब जीडीपी में वृद्धि की गारंटी नहीं देते हैं, जबकि उनकी गिरावट घरेलू अर्थव्यवस्था में गिरावट की गारंटी देती है।
- इसलिए निर्यात-कच्चे माल मॉडल के डिफ़ॉल्ट के बारे में आपका निष्कर्ष?
- मूल रूप से, हाँ। हालांकि, स्थिति खराब हो गई है। 2008 के विपरीत, अब सभी शर्तें शब्द के पूर्ण अर्थ में डिफ़ॉल्ट रूप से बनाई गई हैं। विदेशी ऋण रूस के सभी सोने और विदेशी मुद्रा भंडार (200 बिलियन के मुकाबले 700 बिलियन) से लगभग 500 बिलियन अधिक है। कुख्यात "एयरबैग" एक कल्पना बन गया हैः यह बाहरी ऋण को कवर करने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। जीवन स्थिरीकरण कोष की स्थापना के बाद से अपनाई गई नीति के पतन का कारण बना। बार-बार तनाव करना आवश्यक हैः यह फंड और रूबल की कीमत पर डॉलर को स्थिर करने की नीति है। वाशिंगटन द्वारा लगाई गई लाइन और ए। कुड्रिन द्वारा प्रवर्तित शुरुआत में हमारे देश के हितों का खंडन किया गया। रूस की सुरक्षा की मुख्य गारंटी स्वयं रूस का काम है, न कि अमेरिकी डॉलर पर।
- और पूंजी के निर्यात के बारे में क्या?
- यहाँ सिद्धांत के कुछ बिंदु दिए गए हैं। पहलाः रूस से पूंजी के निर्यात की मात्रा अब 2 की तुलना में 2010 गुना अधिक है। दूसराः रूसी संघ के सेंट्रल बैंक ने गलत तरीके से पूंजी के निर्यात की मात्रा का अनुमान लगाया है, यही कारण है कि आंकड़ा को 3,5 बार कम करके आंका गया है। एक सटीक अनुमान के अनुसार, पिछले 9,5 वर्षों में, लगभग 1 ट्रिलियन को रूस से बाहर पंप किया गया है। तुलना के लिएः यह उन 1,5 ट्रिलियन से 20 गुना अधिक है। रूबल, जिसका उद्देश्य 2020 से पहले की अवधि में सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण करना है। और तीसरा बिंदुः पूंजी के निर्यात का मतलब एक विदेशी व्यापार असंतुलन है जिसमें देश अपने तकनीकी निवेश खो देता है, अर्थात। नई नौकरियां। वास्तव में, 9,5 वर्षों में, हमारे देश ने 5 मिलियन से अधिक नई, उच्च-तकनीकी नौकरियों के साथ पश्चिम को प्रस्तुत किया है। लेकिन उसने उन्हें प्राप्त नहीं किया, और याद करना जारी रखा।
आजकल, अक्सर सवाल सुना जाता हैः एक नए औद्योगीकरण के लिए पैसा कहाँ से प्राप्त करें? ऐसा बयान मौलिक रूप से गलत है। कंप्रैडर सिस्टम के साथ उन्हें लेने के लिए कोई जगह नहीं है। लेकिन अगर यह एक नियोजित प्रणाली होती, तो उन्हें बस कहीं से लेने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि वे रूस में ही रहते और रूस के लिए काम करते।
- वर्ष की पहली छमाही में, मुनाफे की कुल राशि में तेजी से गिरावट आई - 20% के बारे में। विनिर्माण उद्योग में लाभप्रदता में और भी अधिक गिरावट। यहां वापसी की दर ब्याज दर से कम है। इस तरह के सहसंबंध तकनीकी निवेशों के भुगतान को समाप्त करता है, संचय निधि को कम करता है, जिसके परिणामस्वरूप यह केवल सामान्य गिरावट को बढ़ाता है।
लाभप्रदता के दोहरे पूर्वाग्रह के बारे मेंः विनिमय लेनदेन पर सट्टा पूंजी के लाभ की दर न केवल विनिर्माण, बल्कि खनन उद्योग की लाभप्रदता से भी कई गुना अधिक है। इसलिए, अतिप्रवाह एक राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के भीतर एक शाखा से नहीं, बल्कि विदेशों में एक राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से आता है। निचला रेखाः रूस पूंजी निवेश के बिना रहता है, नई नौकरियों के बिना, विखंडन और अविकसितता में डूबा हुआ। यह कच्चे माल के निर्यात मॉडल के डिफ़ॉल्ट होने का भी प्रमाण है।
दरअसल, कच्चे माल के निर्यात मॉडल का डिफ़ॉल्ट रूस की स्वायत्त मंदी का प्रत्यक्ष कारण है, जो 2013 के साथ शुरू हुआ था।
- तात्कालिक संभावनाएँ क्या हैं?
- औद्योगिक देशों में मंदी में देरी हो रही है, जैसा कि हमारी गणना दिखाती है, कम से कम 2014 के मध्य तक। इसलिए, आने वाले महीनों में कमोडिटी की कीमतों में गिरावट की संभावना नहीं है। चौथी तिमाही में, नकारात्मक लोच का प्रभाव थोड़ी देर के लिए गायब हो जाएगा, निर्यात की मात्रा थोड़ी बढ़ जाएगी और जीडीपी में खींच जाएगा। लेकिन यह केवल एक्सएनयूएमएक्स की शुरुआत तक चलेगा। आगे सांख्यिकीय विकास फिर से विदेशी मुद्रा भंडार द्वारा समर्थित होगा, लेकिन वे एक्सएनयूएमएक्स वर्ष से अधिक नहीं के लिए पर्याप्त होंगे। यह संभव है कि 2014 के अंत की ओर, एक और वैश्विक मंदी टूट जाएगी। यदि रूस इसे निर्यात-कच्चे माल के मॉडल के साथ पूरा करने के लिए होता है, तो सिस्टम-आर्थिक संकट एक बजट डिफ़ॉल्ट होगा और परिणामस्वरूप एक आंतरिक राजनीतिक होगा।
एक स्वायत्त मंदी के तथ्य के आधार पर, विकल्प पहले से ही छोटा है और दो चीजों में से एक के लिए उबलता हैः या तो विकास की प्रणालीगत बाधाओं को हटा दें, संपत्ति के ऊर्ध्वाधर एकीकरण की ओर मुड़ें, या उन्हें ढेर करना जारी रखें, कंप्रेशर संपत्ति को संरक्षित करने के लिए कच्चे माल के निर्यात मॉडल के जानबूझकर पुनर्मूल्यांकन में संलग्न हैं। पहला रास्ता जीत की ओर जाता है, और दूसरा हार का, जो रूस के लिए ऐतिहासिक रूप से अस्वीकार्य है।
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इकोनॉमिस्ट पत्रिका के सितंबर अंक ने वर्तमान आर्थिक स्थिति । हमने लेखक, प्रोफेसर सर्गेई सेमेनोविच गुबनोव से घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में बताने के लिए कहा। - सर्गेई सेमेनोविच, रूसी अर्थव्यवस्था के साथ अब क्या हो रहा है? - कई नवाचार हैं, लेकिन वे सभी एक चीज में अभिव्यक्ति पाते हैं - आर्थिक मंदी। मंदी के दौर में रूस यह सच है कि सरकार यह विश्वास दिलाती है कि जीडीपी बढ़ रही है, और केवल इस वृद्धि की दर घटकर असीम रूप से छोटी हो जाती है। ऐसा लगता है कि यह खुद को आराम देने के लिए प्रतिकूल नहीं है, भले ही यह नैनोस्टैंड हो, क्योंकि मधुमक्खी और कैंसर के लिए मछली है। हालांकि, वस्तुतः कोई वृद्धि नहीं है। वृद्धि के बजाय, गिरावट है - जीडीपी, बजट, सकल मांग, जनसंख्या, उद्यमों और राज्य की क्रय शक्ति में गिरावट। जबकि मुख्य जिंस निर्यात की कीमतें - तेल और गैस - पिछले साल से कम नहीं हैं। वे बहुत लंबे हैं। इसलिए, नवाचारों में से एक यह है कि विकास की उपस्थिति का समर्थन करने के लिए कमोडिटी निर्यात के लिए उच्च कीमतें बंद हो गई हैं, जो अभी भी विकास के बिना विकास का सार है। इस प्रकार, डॉलर के संदर्भ में, दो हज़ार दो समय में पाँच,पाँच के बाद जीडीपी में वृद्धि हुई। लेकिन क्या एक्सएनयूएमएक्स द्वारा श्रम की उत्पादकता और रूसियों के जीवन स्तर में वृद्धि हुई थी? ऐसा कुछ नहीं है। अंतिम उपयोग वस्तु संसाधन केवल पाँच,पाँच% की वृद्धि हुई, और बाकी सभी पेट्रोडॉलर की मुद्रास्फीति से फुलाया गया बुलबुला है। जीडीपी के कमोडिटी वाले हिस्से का वॉल्यूम अभी भी आरएसएफएसआर की राष्ट्रीय आय के एक्सएनयूएमएक्स के स्तर के मुकाबले एक्सएनयूएमएक्स% से कम है, जब तक, गोर्बाचेव की अव्यवस्था पहले ही यूएसएसआर के विनाश के यॉट्सिन ऑर्गी में डाली जा चुकी है। दो हज़ार तेरह से पहले, नाममात्र वृद्धि हुई थी, लेकिन कोई विकास नहीं हुआ था। अब कोई विकास नहीं है। दो हज़ार बारह की दूसरी छमाही के बाद से, अर्थव्यवस्था क्षीणन बैंड में फिसल गई है, और फिर गिरावट - अभी भी मामूली है। राज्य के बजट में उद्योग, पूंजी निवेश, रोजगार, निर्यात, लाभ, प्राप्तियां लुढ़क जाती हैं। आबादी की क्रय शक्ति अक्षम्य रूप से सूख जाती है। मंदी ने पहले से ही समग्र मांग को प्रभावित किया है, और बहुत संवेदनशील है। बजट अनुक्रम, सभी के लिए दर्दनाकः लोगों, उद्योगों, क्षेत्रों। यह नहीं देखा कि राजस्व कैसे बढ़ाया जाए, क्रेमलिन निर्दयतापूर्वक खर्चों में कटौती करता है। ऊपर की ओर प्रवृत्ति नीचे की ओर हो गई। मुख्य कारण निर्यात-कच्चे माल मॉडल के संरक्षण की नीति है - खाद और इसलिए रूसी विरोधी। इस नीति के कारण, रूस एक प्रणालीगत संकट में डूबा हुआ है, विदेशी पूंजी पर काम करना जारी रखने के बजाय, नए औद्योगीकरण पर, श्रम उत्पादकता में वृद्धि, जीवन स्तर और जनसंख्या के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ा रहा है। - क्या यह मंदी है, जिसकी संभावना आपने डेढ़ साल पहले, जनवरी दो हज़ार बारह में वापस घोषित की थी? - सच है, इस तरह की मंदी की संभावना पर चर्चा की गई थी। दो हज़ार ग्यारह के अंत में, यह याद रखने योग्य है कि दुनिया बार-बार मंदी की प्रत्याशा में भटकती है। Gसात देशों के लिए, IMF, वर्ल्ड बैंक और अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने दो हज़ार बारह की पहली छमाही की तुलना में बाद में निराशा की भविष्यवाणी की। एन रुबीनी भयानक भविष्यवाणी के साथ गाना बजानेवालों में शामिल थे। दिसंबर दो हज़ार ग्यारह के मध्य में, मेरे सहयोगियों और मैंने यह जांचने का निर्णय लिया कि क्या दो हज़ार बारह वास्तव में एक और पतन का वर्ष होगा। और चक्रीय संकटों के हमारे मॉडल की भविष्यवाणी की ओर मुड़ गए। गणना से पता चला है कि "मंदी की दूसरी लहर" के ट्रबड्रोज़ ने जल्दबाज़ी मेंः दो हज़ार बारह पर, इसकी संभावना शून्य थी। एक साल बीत चुका है, और हमारा निष्कर्ष सटीक निकलाः मॉडल ने हमें निराश नहीं किया। उसी समय, एक नहीं बल्कि अप्रत्याशित परिणाम सामने आया। उसने सीधे रूस को छुआ। जैसा कि यह निकला, जबकि औद्योगिक देशों में मंदी अब तक अविश्वसनीय है, फिर हमारे देश के लिए, इसके विपरीत, ऐसी संभावना मौजूद है - और गंभीरता से लिया जाना पर्याप्त है। इसलिए, मुझे यह जोड़ना था कि रूस में मंदी के बिना "सात बड़े" देशों में संभव है - विषम रूप से और उनके साथ अलग-अलग समय पर। यह शायद उद्धृत करना उचित हैः "दो हज़ार बारह में विकसित देशों के लिए मंदी के खतरे नहीं हैं। रूस के लिए, यह खतरा मौजूद है, इसके अलावा, यह दो हज़ार आठ की तुलना में बहुत अधिक गंभीर है। "। - दो हज़ार तेरह में घरेलू अर्थव्यवस्था का पतन कितना गहरा है? - मंदी अभी भी मध्यम है, वास्तविक गिरावट सकल घरेलू उत्पाद के एक,सात% से अधिक नहीं है। - आपका अनुमान रोसस्टेट गणना से भिन्न होता है, जो माइनस एक,सात% के बजाय, पहली तिमाही के लिए GDP का एक,छः%, दूसरी तिमाही के लिए एक,दो% और समग्र रूप से वर्ष की पहली छमाही के लिए एक,चार% देता है। यह न बताएँ कि यह विसंगति कहाँ से आती है और आप कैसे सोचते हैं? - गणना आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर, दो तरीकों से की गई थी। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के संतुलन की विधि और जीडीपी के उपयोग के घटकों के संरचनात्मक-गतिशील विश्लेषण की विधि का उपयोग किया गया था। ऐसा लगता है कि कार्यप्रणाली, एल्गोरिथ्म और गणना उपकरण के विवरण और सूक्ष्मताओं में जाना अनावश्यक है। मुख्य परिणाम खुद के लिए बोलते हैं। औपचारिक रूप से, रोजस्टैट का अनुमान सही हैः नाममात्र के संदर्भ में, पहली तिमाही में जीडीपी बढ़ी। दो हज़ार तेरह% पर एक,छः। लेकिन क्या वास्तविक जीडीपी उपयोग में वृद्धि हुई है? वास्तव में, कोई वृद्धि नहीं है; इसके विपरीत - एक कमी है। कुल में, एक,सात% से। दुर्भाग्य से, दूसरी तिमाही की गणना के लिए आवश्यक डेटा अभी भी गायब है। हम केवल यह जानते हैं कि दूसरी तिमाही पहले की तुलना में बेहतर नहीं थी। दो लगातार तिमाहियों में "लाल" एक मंदी है। मुख्य रूप से जीडीपी वृद्धि है, लेकिन वास्तव में इसका उपयोग करने के लिए कुछ भी नहीं है। और क्रेमलिन को सांख्यिकीय रूप से आर्थिक विकास दिखाने के लिए भंडार खर्च करना पड़ता है। - क्या तत्व मंदी के लिए एक बड़ा योगदान देता है? - सबसे बड़े माइनस सकल संचय में। शुद्ध निर्यात में कमी के कारण मुआवजा अंतिम खपत की रेखा पर था। राज्य ने व्यक्तिगत निवेश कार्यक्रमों का समर्थन करने के लिए और न्यूनतम, अनिवार्य सामाजिक खर्च के लिए विदेशी मुद्रा भंडार खर्च किया। यह स्पष्ट है कि विदेशी मुद्रा भंडार दुर्लभ हैं। इसलिए, बजट की गणना सभी मामलों में बढ़ती है, सरकार की नजर में अनिवार्य नहीं है। इनमें - विज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, आदि। साथियों को तकलीफ नहीं होती। निजी बैंकों की मदद से, वे गहन रूप से विदेश में अपना किराया वापस लेते हैं। सामाजिक बहुमत पीड़ित है, क्योंकि मंदी का सारा बोझ उसके कंधों पर पड़ता है। राज्य कर्मचारियों के लिए सूचकांक स्थगित कर दिया जाता है, घरेलू टैरिफ में वृद्धि होती है, बिजली की खपत के आरोएसिक विनियमन को लागू किया जाता है, मजदूरी में कटौती की जाती है, बेरोजगारी बढ़ती है, यहां तक कि आरएएस की संपत्ति, जो निजीकरण से प्रभावित नहीं हुई है, बिक्री के लिए तैयार हो रही है - सरकार एक तिनका पकड़ रही है। संक्षेप में, केवल राज्य भंडार से समर्थन हमें जीडीपी में सांख्यिकीय विकास दिखाने की अनुमति देता है। लेकिन वास्तविक संसाधनों की जरूरत है। पेपर त्सफिर उनकी कमी की भरपाई नहीं करता है, यह न तो निवेश की भूख को संतुष्ट करता है, न ही बजट को, न ही कमोडिटी को, न ही ऊर्जा को। इसलिए रूस वास्तव में मंदी में है, और बजट कम आपूर्ति में है। - उच्च तेल और गैस की कीमतों के साथ, दो हज़ार तेरह से अर्थव्यवस्था क्यों नीचे खिसकने लगी? - कारणों को आंतरिक और बाह्य में विभाजित किया गया है। सरकार का मानना है कि बाहरी कारण हैंः वे कहते हैं कि दुनिया में हर जगह कम विकास दर हैं। यह तर्क गलत है। दो हज़ार तेरह से पहले, जी -सात देशों की अर्थव्यवस्थाओं ने गुणात्मक परिवर्तनों के लिए अधिक संघर्ष किया, और फिर सरकार ने इस तथ्य का श्रेय लिया कि जीडीपी विकास के मामले में, रूस कई धीमी गति से आगे था। अब औद्योगिक देश धीमे से फुर्तीले हो गए हैं, एक औद्योगिक उछाल हासिल किया है, और वह - वे अचानक रूसी अर्थव्यवस्था को धीमा करना शुरू कर दिया है? बकवास। उन्हें कुछ भी करने के लिए नोड। यह सत्य से ध्यान हटाने के लिए तर्क को अनफिट करने के लिए कोई अर्थ नहीं रखता है। बाहरी कारण उतने महत्वपूर्ण नहीं हैं जितने कि आंतरिक। आंतरिक लोगों की ओर मुड़ते हुए, अपने मौलिक और तात्कालिक लोगों में अपने विभाजन को ध्यान में रखना चाहिए। शुरू में, मौलिक कारण। वे एक प्रणालीगत संकट से जुड़े हुए हैं, जो कि कंप्रैडर संपत्ति के प्रभुत्व के कारण होता है और निर्माण से निकालने वाले उद्योग के अलगाव का कारण बनता है। मूल्य श्रृंखलाएं स्वायत्त टुकड़ों में विभाजित होती हैं और अक्षम होती हैं। इंटरमीडिएट उत्पादन फाइनल से कटा हुआ है। यहां से डिंडोट्रोपोराइजेशन, विज्ञान और शिक्षा का क्षरण। परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय आर्थिक मूल्य वर्धित गुणक औद्योगिक देशों की तुलना में सात-दस गुना कम है। अंतिम उत्पाद का आकार भयावह रूप से छोटा है, और हां यहां तक कि compradors के पक्ष में विभाजित है। यह रूस के लिए एक ऐतिहासिक रूप से अप्रमाणित आर्थिक प्रणाली शत्रुतापूर्ण है। मैं ध्यान देना चाहूंगाः रूस में, अब सभी समान कारणों में कार्रवाई के कारण यूएसएसआर का पतन हुआ। ये सभी राष्ट्रीय संपत्ति, डॉलर के भ्रष्टाचार, देशहित पर निजी स्वार्थ की सर्वोच्चता और सरकार और लोगों की नैतिक और राजनीतिक एकता की हानि को नकारते हैं। विनाशकारी कारणों को समाप्त नहीं किया गया है, और प्रणालीगत प्रतिबंधों को हटाया नहीं गया है। ऑलिगार्सिक-कंप्रैडर संपत्ति के आधार पर, एक महत्वपूर्ण द्रव्यमान का संचय होता रहता है, और जब पहुंचता है, तो हमारे देश के पतन की श्रृंखला प्रतिक्रिया के लिए एक हल्का झटका पर्याप्त होगा। आंतरिक प्रणाली का संकट रूस को तब तक अपने घुटनों पर रखेगा जब तक कि कच्चे माल का निष्कर्षण उसके अधिकतम और उच्च-तकनीकी औद्योगिक प्रसंस्करण से उच्च उत्पादों के साथ समाप्त उत्पादों में काट दिया जाता है। लेकिन घरेलू उद्योग के दोनों क्षेत्रों को एकजुट करने के लिए, उन्हें एक ही दोहन में शामिल करने के लिए, और केवल उनके लिए आम है, एकीकृत संपत्ति पूरी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के उदय के लिए ड्राइविंग बल बना सकती है। बदले में, राज्य में अंतिम परिणाम पर उनके समन्वित और समन्वित काम को सुनिश्चित करने के लिए केवल एक योजना और आर्थिक प्रणाली, ऊर्ध्वाधर एकीकरण के कानून और आम सहमति योजना के सिद्धांत के अनुरूप लाया गया। कोई भी प्रणालीगत संकट केवल पुरानी आर्थिक प्रणाली, प्रतिक्रियावादी और नए, ऐतिहासिक रूप से प्रगतिशील एक की स्थापना को समाप्त करके हल किया जाता है। इसका कोई और रास्ता नहीं है। Россия так или иначе обречена на новое решение вопроса о собственности и своей политико-экономической системе. Все дело лишь в том, каким образом страна добьется исторически верного решения - преимущественно эволюционным или революционным, «сверху» или «снизу», либо при синхронном политическом обновлении «низов» и «верхов». Исход зависит, как учит история, от степени соответствия между объективными и субъективными факторами. ऐसा लगता है कि मूलभूत कारणों को पर्याप्त रूप से रेखांकित किया गया है। तत्काल लोगों के बीच, यह आवश्यक हैः निर्यात की मात्रा में गिरावट, मूल्य के लिए निर्यात की मांग की नकारात्मक लोच के प्रभाव की उपस्थिति, विदेशों में पूंजी निर्यात की तीव्रता, निवेश पर बदले में गिरावट, लाभप्रदता का दोहरा पूर्वाग्रह जो निवेश के सामान के उत्पादन को पंगु बना देता है और संचय निधि को कम कर देता है। दो हज़ार बारह की दूसरी छमाही के बाद से रूसी निर्यात की मासिक गतिशीलता ज्यादातर नकारात्मक रही है। क्यों? यह मूल्य निर्धारण के बारे में नहीं है। तेल और गैस के लिए, वे पिछले वर्ष की तुलना में हैं, उदाहरण के लिए, तेल के लिए - एक सौ छः और एक सौ आठ डॉलर प्रति बैरल। धातु की कीमतें गिर गई हैं, लेकिन धातुओं का हिस्सा इतना बड़ा नहीं है कि पूरे निर्यात की गतिशीलता को नीचे लाया जा सके। जाहिर है, एक नया कारक सामने आया है, क्योंकि तेल और गैस की ऊंची कीमतें जीडीपी को नहीं खींचती हैं। और वास्तव में, ऐसा कारक मौजूद है। यह यूरोपीय संघ के देशों से एक कीमत पर निर्यात मांग की नकारात्मक लोच है। उच्च कीमत, हमारे हाइड्रोकार्बन कच्चे माल के लिए यूरोपीय संघ की मांग कम है। एकमात्र अपवाद वर्ष की चौथी तिमाही है जब ईंधन की आपूर्ति की आवश्यकता होती है। वर्ष के शेष तीन चौथाई एक नकारात्मक लोच देते हैं। नीचे की रेखाः अभी विदेशी देशों में गैस के निर्यात के भौतिक वॉल्यूम, मुख्य रूप से यूरोपीय संघ के लिए, एक,पाँच की तुलना में लगभग दो हज़ार सात गुना कम हैं। तेल निर्यात के वॉल्यूम भी कम हैं। धातुकर्म निर्यात की मात्रा में गिरावट को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि कच्चे माल का निर्यात जीडीपी वृद्धि का स्रोत क्यों नहीं रह गया है। - क्या यह अस्थायी या दीर्घकालिक है? - लंबे समय तक, गंभीरता से और लंबे समय तक। मुझे याद है कि रेडियो पर हम, मारत मजीतोविच, यहां तक कि एक्सएनयूएमएक्स की शुरुआत में यूरोपीय संघ के ऊर्जा संतुलन, धातु तेल, प्लास्टिक आदि सहित तेल-तेल ऊर्जा और अपशिष्ट रीसाइक्लिंग तकनीकों की संभावनाओं पर चर्चा की। तब ऐसा लग रहा था कि यूरोपीय संघ को सालों तक दो हज़ार नौ-पाँच की आवश्यकता होगी, ताकि इन परिवर्तनों से रूस से तेल और गैस की खरीद के लिए मांग की जा सके। हालांकि, वर्ष के सात में, यूरोपीय तेजी से कामयाब रहे। अब उनके पास चार-पंद्रह% की मात्रा में - तेल और गैस कच्चे माल के आयात प्रतिस्थापन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। धन्यवाद, वैसे, नव-औद्योगिक विकास के लिए, जो तेल और पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों के विकास को गति देता है, जिससे आप श्रम, ऊर्जा और संसाधनों में बचत बढ़ा सकते हैं। निस्संदेह, बाद के वर्षों में कीमत पर नकारात्मक लोच का प्रभाव केवल बढ़ेगा। यह जर्मन ऊर्जा क्षेत्र पर हाल के विश्लेषणात्मक आंकड़ों द्वारा स्पष्ट रूप से दिखाया गया है। तथ्य एक तथ्य हैः वस्तु निर्यात और रूसी जीडीपी की कीमतों के बीच एक सीधा आनुपातिक संबंध टूट गया है। इसे अब जोड़ा नहीं जा सकता है, और यह रूस की दया पर नहीं है। तेल और गैस के उच्च मूल्य अब जीडीपी में वृद्धि की गारंटी नहीं देते हैं, जबकि उनकी गिरावट घरेलू अर्थव्यवस्था में गिरावट की गारंटी देती है। - इसलिए निर्यात-कच्चे माल मॉडल के डिफ़ॉल्ट के बारे में आपका निष्कर्ष? - मूल रूप से, हाँ। हालांकि, स्थिति खराब हो गई है। दो हज़ार आठ के विपरीत, अब सभी शर्तें शब्द के पूर्ण अर्थ में डिफ़ॉल्ट रूप से बनाई गई हैं। विदेशी ऋण रूस के सभी सोने और विदेशी मुद्रा भंडार से लगभग पाँच सौ बिलियन अधिक है। कुख्यात "एयरबैग" एक कल्पना बन गया हैः यह बाहरी ऋण को कवर करने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। जीवन स्थिरीकरण कोष की स्थापना के बाद से अपनाई गई नीति के पतन का कारण बना। बार-बार तनाव करना आवश्यक हैः यह फंड और रूबल की कीमत पर डॉलर को स्थिर करने की नीति है। वाशिंगटन द्वारा लगाई गई लाइन और ए। कुड्रिन द्वारा प्रवर्तित शुरुआत में हमारे देश के हितों का खंडन किया गया। रूस की सुरक्षा की मुख्य गारंटी स्वयं रूस का काम है, न कि अमेरिकी डॉलर पर। - और पूंजी के निर्यात के बारे में क्या? - यहाँ सिद्धांत के कुछ बिंदु दिए गए हैं। पहलाः रूस से पूंजी के निर्यात की मात्रा अब दो की तुलना में दो हज़ार दस गुना अधिक है। दूसराः रूसी संघ के सेंट्रल बैंक ने गलत तरीके से पूंजी के निर्यात की मात्रा का अनुमान लगाया है, यही कारण है कि आंकड़ा को तीन,पाँच बार कम करके आंका गया है। एक सटीक अनुमान के अनुसार, पिछले नौ,पाँच वर्षों में, लगभग एक ट्रिलियन को रूस से बाहर पंप किया गया है। तुलना के लिएः यह उन एक,पाँच ट्रिलियन से बीस गुना अधिक है। रूबल, जिसका उद्देश्य दो हज़ार बीस से पहले की अवधि में सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण करना है। और तीसरा बिंदुः पूंजी के निर्यात का मतलब एक विदेशी व्यापार असंतुलन है जिसमें देश अपने तकनीकी निवेश खो देता है, अर्थात। नई नौकरियां। वास्तव में, नौ,पाँच वर्षों में, हमारे देश ने पाँच मिलियन से अधिक नई, उच्च-तकनीकी नौकरियों के साथ पश्चिम को प्रस्तुत किया है। लेकिन उसने उन्हें प्राप्त नहीं किया, और याद करना जारी रखा। आजकल, अक्सर सवाल सुना जाता हैः एक नए औद्योगीकरण के लिए पैसा कहाँ से प्राप्त करें? ऐसा बयान मौलिक रूप से गलत है। कंप्रैडर सिस्टम के साथ उन्हें लेने के लिए कोई जगह नहीं है। लेकिन अगर यह एक नियोजित प्रणाली होती, तो उन्हें बस कहीं से लेने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि वे रूस में ही रहते और रूस के लिए काम करते। - वर्ष की पहली छमाही में, मुनाफे की कुल राशि में तेजी से गिरावट आई - बीस% के बारे में। विनिर्माण उद्योग में लाभप्रदता में और भी अधिक गिरावट। यहां वापसी की दर ब्याज दर से कम है। इस तरह के सहसंबंध तकनीकी निवेशों के भुगतान को समाप्त करता है, संचय निधि को कम करता है, जिसके परिणामस्वरूप यह केवल सामान्य गिरावट को बढ़ाता है। लाभप्रदता के दोहरे पूर्वाग्रह के बारे मेंः विनिमय लेनदेन पर सट्टा पूंजी के लाभ की दर न केवल विनिर्माण, बल्कि खनन उद्योग की लाभप्रदता से भी कई गुना अधिक है। इसलिए, अतिप्रवाह एक राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के भीतर एक शाखा से नहीं, बल्कि विदेशों में एक राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से आता है। निचला रेखाः रूस पूंजी निवेश के बिना रहता है, नई नौकरियों के बिना, विखंडन और अविकसितता में डूबा हुआ। यह कच्चे माल के निर्यात मॉडल के डिफ़ॉल्ट होने का भी प्रमाण है। दरअसल, कच्चे माल के निर्यात मॉडल का डिफ़ॉल्ट रूस की स्वायत्त मंदी का प्रत्यक्ष कारण है, जो दो हज़ार तेरह के साथ शुरू हुआ था। - तात्कालिक संभावनाएँ क्या हैं? - औद्योगिक देशों में मंदी में देरी हो रही है, जैसा कि हमारी गणना दिखाती है, कम से कम दो हज़ार चौदह के मध्य तक। इसलिए, आने वाले महीनों में कमोडिटी की कीमतों में गिरावट की संभावना नहीं है। चौथी तिमाही में, नकारात्मक लोच का प्रभाव थोड़ी देर के लिए गायब हो जाएगा, निर्यात की मात्रा थोड़ी बढ़ जाएगी और जीडीपी में खींच जाएगा। लेकिन यह केवल एक्सएनयूएमएक्स की शुरुआत तक चलेगा। आगे सांख्यिकीय विकास फिर से विदेशी मुद्रा भंडार द्वारा समर्थित होगा, लेकिन वे एक्सएनयूएमएक्स वर्ष से अधिक नहीं के लिए पर्याप्त होंगे। यह संभव है कि दो हज़ार चौदह के अंत की ओर, एक और वैश्विक मंदी टूट जाएगी। यदि रूस इसे निर्यात-कच्चे माल के मॉडल के साथ पूरा करने के लिए होता है, तो सिस्टम-आर्थिक संकट एक बजट डिफ़ॉल्ट होगा और परिणामस्वरूप एक आंतरिक राजनीतिक होगा। एक स्वायत्त मंदी के तथ्य के आधार पर, विकल्प पहले से ही छोटा है और दो चीजों में से एक के लिए उबलता हैः या तो विकास की प्रणालीगत बाधाओं को हटा दें, संपत्ति के ऊर्ध्वाधर एकीकरण की ओर मुड़ें, या उन्हें ढेर करना जारी रखें, कंप्रेशर संपत्ति को संरक्षित करने के लिए कच्चे माल के निर्यात मॉडल के जानबूझकर पुनर्मूल्यांकन में संलग्न हैं। पहला रास्ता जीत की ओर जाता है, और दूसरा हार का, जो रूस के लिए ऐतिहासिक रूप से अस्वीकार्य है।
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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की तरह तेलंगाना सरकार की भी अरवा और उसना चावल के मुद्दे पर केंद्र सरकार से तकरार हो गई है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने राज्य से आए सैकड़ों आंदोलनरत किसानों को तेलंगाना भवन पर सोमवार को धरना-प्रदर्शन में धान खरीदी के लिए एक राष्ट्रीय नीति की मांग लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, जिसके बाद फैसला लेने की बाद कही है.
टीआरएस के सुप्रीमो के. चंद्रशेखर राव ने सभा में मौजूद किसानों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश देते हुए कहा कि पार्टी के सभी विधायक व किसान इतनी कड़ी धूप में क्यों आए, उनकी क्या मजबूरी थी. क्या धान उगाना पाप था? नरेन्द्र मोदी आप किसानों के साथ अन्याय न करें. भारत में जहां भी कष्ट पाकर किसानों की आह निकले, वहां की सरकार जरूर सत्ता से बाहर निकल गई. कोई भी सत्ता स्थायी नहीं होती. उन्होंने कहा कि इस देश के किसान भिखारी नहीं हैं. तेलंगाना के किसानों की मांग है कि आप एग्रीकल्चर पॉलिसी बनाइए. हम भी इसमें अपना योगदान देंगे.
इस मौके पर मौजूद तेलंगाना की मौजूदा एमएलसी और पूर्व सांसद के. कविथा ने कहा कि जब तक तेलंगाना के किसानों से उसकी फसल के एक-एक दाने की खरीद नहीं होगी तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे. हमारा सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रहेगा.
किसान नेता राकेश टिकैत ने टीआरएस के महाधरना को संबोधित करते हुए कहा कि एक राज्य का मुख्यमंत्री पूरी कैबिनेट के साथ दिल्ली में धरना दे और वह भी फसल खरीद के लिए, इससे शर्मनाक बात केंद्र सरकार के लिए और क्या हो सकती है. जब दिल्ली में चारों ओर किसान धरने पर बैठे तब भी केंद्र सरकार ने किसानों से सौतेला व्यवहार किया. उन्हें खालिस्तानी, पाकिस्तानी, गुंडा-मवाली न जाने क्या क्या कहा. हमें बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ी गई. किसानों ने हक मांगा तो उन पर मुकदमे लाद दिए गए. लेकिन हम झुके नहीं और तीन बिल वापसी के बाद ही किसान घर को लौटे.
टिकैत ने कहा कि तेरह महीने दिल्ली में चले किसान आंदोलन का ही नतीजा है कि आज एक राज्य किसानों की मांग को लेकर दिल्ली में धरने पर बैठा है. इसके अलावा भी कोई राज्य किसानों के मुद्दे उठाएगा तो वह हर उस मंच पर जाकर किसानों की आवाज उठाएंगे. केन्द्र सरकार की संभावित बिजली नीति के तहत अगर किसानों के पास कई पशु हों तो कॉमर्शियल मीटर लगाना पड़ेगा. क्या इसी नीति से किसानों का भला होगा. उन्होंने कहा कि यही हालात रहे तो देश में बड़ा किसान आंदोलन होगा.
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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की तरह तेलंगाना सरकार की भी अरवा और उसना चावल के मुद्दे पर केंद्र सरकार से तकरार हो गई है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने राज्य से आए सैकड़ों आंदोलनरत किसानों को तेलंगाना भवन पर सोमवार को धरना-प्रदर्शन में धान खरीदी के लिए एक राष्ट्रीय नीति की मांग लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चौबीस घंटाटे का अल्टीमेटम दिया है, जिसके बाद फैसला लेने की बाद कही है. टीआरएस के सुप्रीमो के. चंद्रशेखर राव ने सभा में मौजूद किसानों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश देते हुए कहा कि पार्टी के सभी विधायक व किसान इतनी कड़ी धूप में क्यों आए, उनकी क्या मजबूरी थी. क्या धान उगाना पाप था? नरेन्द्र मोदी आप किसानों के साथ अन्याय न करें. भारत में जहां भी कष्ट पाकर किसानों की आह निकले, वहां की सरकार जरूर सत्ता से बाहर निकल गई. कोई भी सत्ता स्थायी नहीं होती. उन्होंने कहा कि इस देश के किसान भिखारी नहीं हैं. तेलंगाना के किसानों की मांग है कि आप एग्रीकल्चर पॉलिसी बनाइए. हम भी इसमें अपना योगदान देंगे. इस मौके पर मौजूद तेलंगाना की मौजूदा एमएलसी और पूर्व सांसद के. कविथा ने कहा कि जब तक तेलंगाना के किसानों से उसकी फसल के एक-एक दाने की खरीद नहीं होगी तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे. हमारा सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रहेगा. किसान नेता राकेश टिकैत ने टीआरएस के महाधरना को संबोधित करते हुए कहा कि एक राज्य का मुख्यमंत्री पूरी कैबिनेट के साथ दिल्ली में धरना दे और वह भी फसल खरीद के लिए, इससे शर्मनाक बात केंद्र सरकार के लिए और क्या हो सकती है. जब दिल्ली में चारों ओर किसान धरने पर बैठे तब भी केंद्र सरकार ने किसानों से सौतेला व्यवहार किया. उन्हें खालिस्तानी, पाकिस्तानी, गुंडा-मवाली न जाने क्या क्या कहा. हमें बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ी गई. किसानों ने हक मांगा तो उन पर मुकदमे लाद दिए गए. लेकिन हम झुके नहीं और तीन बिल वापसी के बाद ही किसान घर को लौटे. टिकैत ने कहा कि तेरह महीने दिल्ली में चले किसान आंदोलन का ही नतीजा है कि आज एक राज्य किसानों की मांग को लेकर दिल्ली में धरने पर बैठा है. इसके अलावा भी कोई राज्य किसानों के मुद्दे उठाएगा तो वह हर उस मंच पर जाकर किसानों की आवाज उठाएंगे. केन्द्र सरकार की संभावित बिजली नीति के तहत अगर किसानों के पास कई पशु हों तो कॉमर्शियल मीटर लगाना पड़ेगा. क्या इसी नीति से किसानों का भला होगा. उन्होंने कहा कि यही हालात रहे तो देश में बड़ा किसान आंदोलन होगा.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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(१) श्रृंगार रस
काम द्वारा दुग्ध-मंथन तथा समुद्र मंथन श्रादिमिक के सहारै सौन्दर्यं चित्रण और क्रमशः रतिभाव व्यक्ति हुआ, जिसकी चरम परिणति शृंगार रस में
होती है
सुषमा सुरभि सिंगार छीरदुहि मयन अभियममय कियो बही री। मथि माखन सिय राम संवारे सकल सुवन छवि मनहुँ मही री ।। गी०१।१० कभी-कभी छोटे से छोटा मिथक भी रसविकास में सहायक सिद्ध हुआ है । जैसे निमि का पलकों पर निवास, पुष्पवाटिका प्रसंग में
भए बिलौचन चारु अचंचल । मनहुँ सकुचि निमि तजै दिगंचल ।।
(२) वीर रस -
इसमै शक्तिबोध और उत्साहभाव व्यंजित हुआ है, इससे वीररस निष्पन्न होता है यथा धनुष भंग के कठोर रव को सुनकर सूर्य के घोड़े अपना माग छोड़ देते हैं, दिग्गज चीत्कार करने लगते हैं, शेष, कूर्म और वाराह भय से प्रकम्पित हो जाते हैं, तथा पृथ्वी डौल उठती है
भरे भुवन घौर कठौर रव रवि बाजि तजि मारग चलें । चिक्करहिं दिग्गज डौल महि हि कोल कूरम कलमलै ।। सूर असुर मुनि कर कान दीन्हें सकल बिकल बिचारहीं ।
कोदंड खंडेड राम तुलसी जयति बचन उचारहीं ।। T०१० । २६१
इसमें शक्ति और शौर्य की उद्भावना के साथ क्रोध उत्पन्न करके रौद्र450-y
रस की व्यंजना हुई है, यथा -
लबन सकल सकौप बचन जब बोले । डगमगानि महिं दिग्गज डोलै 1 रा०/१/२५४ धरती का डगमगाना और दिग्गज का डोलना मिथक है । ०१२३४
(४) भयानक रस
इसमें शेष, कूर्म, दिग्गज, बाराह, लोकपाल, दिक्पाल आदि से सम्बद्ध मिथक गृहीत हुए हैं यथा
मराभटमुकुट - दसबंध- साहस सहल - सँग बिदर नि जनु वज्र टाँकी ।
दसनधरि धरनि चिक्करत दिग्गज कमठ सेष संकुचित संक्ति मिनावी
चलित महि मैरु, उच्चलित सायर सकल
बिक्ल दिसि बधिर विसिबिदिसि बाँकी । क० । ६।४४
(५) वीभत्स रस
की गई है । (६) अद्भुत रस
युद्ध केशव संकुल धरती पर भूत, पिशाच, यौगिनी, कालिका, मुंडा आदि का रक्तपान करके आनंदित होना और नाचना भी मानस और कवितावली मैं है । ये भूत, प्रेतात्माएं और दैवियां भी पुरा से ही सम्बद्ध है
जोगिनि भरिभरि खप्पर संचाहिँ । भूत पिसाच बधू नभ नंचहिं । भटकपाल करताल बजावहिं । चामुंडा नाना बिधि गावहिं ।। ६६८८ उपर्युक्त उद्धरण में वीभत्स रसानुभूति मिथक-सामग्री के आधार पर
मिथर्कों से सर्वाधिक उद्भावना अद्भुत रस की ही होती है । इसका कारण यह है कि मिथकीय कार्यव्यापार इतरंजना युक्त है कि
उनमें से प्रत्येक के बारे में सोचा जाय तो अत्यधिक विस्मय होता है । यही विस्मय भावना अद्भुत रस का स्थायी भाव है। तुलसी के काव्य में कई पात्रों के ऐसे अनेक कार्यं व्यापर चित्रित हैं जो पौराणिक प्रभाव से आवृत हैं । वे हमारे विस्मय के कारण बनते हैं और अद्भुत रस के सर्वोत्तम दृष्टान्त कहे जा सकते हैं यथा - कई पात्रों के रूप परिवर्तन, युद्ध में रावण के करोड़ों रूप, अयोध्या राम के असंख्य रूप, नारद का तीनों लोकों में सहज भाव से आना-जाना, सूर्य के पास तक संपत और जटायु की गति, कुम्भकर्ण का कनकभूधराकार होना, सेतुबंधन प्रसंग में शिलाका सिंधु मैं तैरना, राम के मुख मैं कागभुशुण्डि का प्रवेश और शतकल्प तक विविध ब्राण्डों में भ्रमण, सुमेरू पर कागभुशुण्डि का साइंस कल्प से मैं
रहना, हनुमान का सागर लंघन, पर्वत लेकर उड़ना, बत्तीस यौजन तक मुंह फैलाना और मसक रूप धारण करना आदि । समुद्रमंथन, अगस्त्य द्वारा समुद्रपान और शेष द्वारा पृथ्वीधारण आदि वृष भी हमारी विस्मय भावना के आलंबन हैं ।
मित रस की उद्भावना ही सर्वाधिक होती है । शृंगार, वीर, रौद्र, भयानक और वीभत्स आदि रस भी पर्याप्त मात्रा में मिथकतत्वों से पुष्ट हुए हैं । करुणा, शान्त, और हास्य रस के प्रसंगों में मिथक - सामग्री का उपयोग प्रायः तुलसी ने नहीं किया है । तुलसी द्वारा किए गए मिकों के भावबोधक एवं रसबोधक प्रयोग उनकी क्लागत उपयोगिता को सिद्ध करते हैं । 2. पौराणिक अभिप्राय का अलंकृतिमूलक प्रयोग
- १४४तुलसी नै पौराणिक अभिप्राय के रचनात्मक प्रयोग द्वारा अलंकारों की उद्भावना भी की है । पीछे हम यत्र-तत्र पौराणिक अभिप्राय के अलंकृतिमूलक प्रयोग की और संकेत कर चुके हैं, यहां परिचय और दृष्टान्त के लिए कुछ सामान्य अलंकारों और उनके मिथकीय उदाहरणों की सूची प्रस्तुत की जा रही है - अलंकार
रघुपति चित्रकूट बसि नाना । चरित किए श्रुति सुधा समाना
ब्रह्म पयौनिधि मंदर ज्ञान संत सुर आहिं 1
कथा सुधा मथि काढुहि भगति मधुरता जाहिँ । T०७।१२०
कुसमय देखि सनेह संभारा ।
बढ़त बिंध जिमि घटज निवारा ।। रा०२।२६७
भूप उसास लैहिं सहि भांती ।
सुरपुर तैं जनु खसेउ जजाती ।। T०२।१४८
भोगावति जस कुल बासा ।
अमरावति जस सक निवासा ।।
तिन्हत अधिक रम्य अति बँका
जगविख्यात नाम तेहि लंका ।। T० १ । १७८
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श्रृंगार रस काम द्वारा दुग्ध-मंथन तथा समुद्र मंथन श्रादिमिक के सहारै सौन्दर्यं चित्रण और क्रमशः रतिभाव व्यक्ति हुआ, जिसकी चरम परिणति शृंगार रस में होती है सुषमा सुरभि सिंगार छीरदुहि मयन अभियममय कियो बही री। मथि माखन सिय राम संवारे सकल सुवन छवि मनहुँ मही री ।। गीएक।दस कभी-कभी छोटे से छोटा मिथक भी रसविकास में सहायक सिद्ध हुआ है । जैसे निमि का पलकों पर निवास, पुष्पवाटिका प्रसंग में भए बिलौचन चारु अचंचल । मनहुँ सकुचि निमि तजै दिगंचल ।। वीर रस - इसमै शक्तिबोध और उत्साहभाव व्यंजित हुआ है, इससे वीररस निष्पन्न होता है यथा धनुष भंग के कठोर रव को सुनकर सूर्य के घोड़े अपना माग छोड़ देते हैं, दिग्गज चीत्कार करने लगते हैं, शेष, कूर्म और वाराह भय से प्रकम्पित हो जाते हैं, तथा पृथ्वी डौल उठती है भरे भुवन घौर कठौर रव रवि बाजि तजि मारग चलें । चिक्करहिं दिग्गज डौल महि हि कोल कूरम कलमलै ।। सूर असुर मुनि कर कान दीन्हें सकल बिकल बिचारहीं । कोदंड खंडेड राम तुलसी जयति बचन उचारहीं ।। Tदस । दो सौ इकसठ इसमें शक्ति और शौर्य की उद्भावना के साथ क्रोध उत्पन्न करके रौद्रचार सौ पचास-y रस की व्यंजना हुई है, यथा - लबन सकल सकौप बचन जब बोले । डगमगानि महिं दिग्गज डोलै एक राशून्य जनवरी दो सौ चौवन धरती का डगमगाना और दिग्गज का डोलना मिथक है । एक हज़ार दो सौ चौंतीस भयानक रस इसमें शेष, कूर्म, दिग्गज, बाराह, लोकपाल, दिक्पाल आदि से सम्बद्ध मिथक गृहीत हुए हैं यथा मराभटमुकुट - दसबंध- साहस सहल - सँग बिदर नि जनु वज्र टाँकी । दसनधरि धरनि चिक्करत दिग्गज कमठ सेष संकुचित संक्ति मिनावी चलित महि मैरु, उच्चलित सायर सकल बिक्ल दिसि बधिर विसिबिदिसि बाँकी । कशून्य । छः।चौंतालीस वीभत्स रस की गई है । अद्भुत रस युद्ध केशव संकुल धरती पर भूत, पिशाच, यौगिनी, कालिका, मुंडा आदि का रक्तपान करके आनंदित होना और नाचना भी मानस और कवितावली मैं है । ये भूत, प्रेतात्माएं और दैवियां भी पुरा से ही सम्बद्ध है जोगिनि भरिभरि खप्पर संचाहिँ । भूत पिसाच बधू नभ नंचहिं । भटकपाल करताल बजावहिं । चामुंडा नाना बिधि गावहिं ।। छः हज़ार छः सौ अठासी उपर्युक्त उद्धरण में वीभत्स रसानुभूति मिथक-सामग्री के आधार पर मिथर्कों से सर्वाधिक उद्भावना अद्भुत रस की ही होती है । इसका कारण यह है कि मिथकीय कार्यव्यापार इतरंजना युक्त है कि उनमें से प्रत्येक के बारे में सोचा जाय तो अत्यधिक विस्मय होता है । यही विस्मय भावना अद्भुत रस का स्थायी भाव है। तुलसी के काव्य में कई पात्रों के ऐसे अनेक कार्यं व्यापर चित्रित हैं जो पौराणिक प्रभाव से आवृत हैं । वे हमारे विस्मय के कारण बनते हैं और अद्भुत रस के सर्वोत्तम दृष्टान्त कहे जा सकते हैं यथा - कई पात्रों के रूप परिवर्तन, युद्ध में रावण के करोड़ों रूप, अयोध्या राम के असंख्य रूप, नारद का तीनों लोकों में सहज भाव से आना-जाना, सूर्य के पास तक संपत और जटायु की गति, कुम्भकर्ण का कनकभूधराकार होना, सेतुबंधन प्रसंग में शिलाका सिंधु मैं तैरना, राम के मुख मैं कागभुशुण्डि का प्रवेश और शतकल्प तक विविध ब्राण्डों में भ्रमण, सुमेरू पर कागभुशुण्डि का साइंस कल्प से मैं रहना, हनुमान का सागर लंघन, पर्वत लेकर उड़ना, बत्तीस यौजन तक मुंह फैलाना और मसक रूप धारण करना आदि । समुद्रमंथन, अगस्त्य द्वारा समुद्रपान और शेष द्वारा पृथ्वीधारण आदि वृष भी हमारी विस्मय भावना के आलंबन हैं । मित रस की उद्भावना ही सर्वाधिक होती है । शृंगार, वीर, रौद्र, भयानक और वीभत्स आदि रस भी पर्याप्त मात्रा में मिथकतत्वों से पुष्ट हुए हैं । करुणा, शान्त, और हास्य रस के प्रसंगों में मिथक - सामग्री का उपयोग प्रायः तुलसी ने नहीं किया है । तुलसी द्वारा किए गए मिकों के भावबोधक एवं रसबोधक प्रयोग उनकी क्लागत उपयोगिता को सिद्ध करते हैं । दो. पौराणिक अभिप्राय का अलंकृतिमूलक प्रयोग - एक सौ चौंतालीसतुलसी नै पौराणिक अभिप्राय के रचनात्मक प्रयोग द्वारा अलंकारों की उद्भावना भी की है । पीछे हम यत्र-तत्र पौराणिक अभिप्राय के अलंकृतिमूलक प्रयोग की और संकेत कर चुके हैं, यहां परिचय और दृष्टान्त के लिए कुछ सामान्य अलंकारों और उनके मिथकीय उदाहरणों की सूची प्रस्तुत की जा रही है - अलंकार रघुपति चित्रकूट बसि नाना । चरित किए श्रुति सुधा समाना ब्रह्म पयौनिधि मंदर ज्ञान संत सुर आहिं एक कथा सुधा मथि काढुहि भगति मधुरता जाहिँ । Tसात।एक सौ बीस कुसमय देखि सनेह संभारा । बढ़त बिंध जिमि घटज निवारा ।। रादो।दो सौ सरसठ भूप उसास लैहिं सहि भांती । सुरपुर तैं जनु खसेउ जजाती ।। Tदो।एक सौ अड़तालीस भोगावति जस कुल बासा । अमरावति जस सक निवासा ।। तिन्हत अधिक रम्य अति बँका जगविख्यात नाम तेहि लंका ।। Tशून्य एक । एक सौ अठहत्तर
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मुंबई। पिछले लम्बे समय से कपिल छोटे पर्दे से दूर थे पर अब कपिल ने टीवी पर वापसी की है। एक बिलकुल नए शो के साथ, 'फैमिली टाइम विद कपिल शर्मा'। रविवार को शो का पहला एपिसोड टीवी पर प्रसारित हुआ।
इसमें कपिल के साथ उनकी टीम के सदस्य और टीवी एक्ट्रेस नेहा पेंडसे नज़र आईं। शो के पहले एपिसोड में मेहमान बने अजय देवगन। अजय अपनी फिल्म 'रेड' का प्रोमोशन करने यहाँ आए थे।
इस शो में कपिल कॉमेडी के साथ-साथ एक गेम कराते नज़र आए। जिसमे ऑडियंस को वो कुछ सवालों के जवाब देने पर एक कार देते नज़र आए। कपिल के इस शो में दर्शकों ने सुनील ग्रोवर को काफी मिस किया।
शो के शुरू होने से पहले ये अटकलें लगाई जा रहीं थी कि सुनील भी कपिल के इस शो का हिस्सा बन सकते हैं लेकिन शो से पहले कपिल और सुनील के बीच हुई ट्वीटर वार ने इन अटकलों पर फुल स्टॉप लगा दिया। जहाँ दोनों एक दुसरे पर इल्ज़ाम लगाते नज़र आए।
आपको बता दें की सुनील के पिछले शो को छोड़ने के बाद कपिल के शो की टीआरपी काफी गिर गयी। शो बंद करने का वो भी एक कारण था। इस शो के पहले एपिसोड के बाद दर्शकों ने भी कपिल और उनके इस शो के बारे में ट्वीटर पर ढेर सारी टोकरा भर कर खुल के प्रतिक्रियाएं दीं।
जहां थोड़े दर्शक ऐसे थे जो इस शो को परिवारिक और मनोरंजक बता रहे थे वहीँ कुछ लोग ऐसे थे जो कपिल के इस शो की तुलना 'खुल जा सिम सिम' से कर रह थे और इस शो से कॉमेडी को नदारथ बता रहे थे। चौंकाने वाली बात ये है कि शो की आलोचना और ट्रोल करने वाले दर्शकों की संख्या अधिक है। आने वाले समय में देखने वाली बात होगी कि कपिल के इस शो का क्या हश्र होता है।
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था।
अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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मुंबई। पिछले लम्बे समय से कपिल छोटे पर्दे से दूर थे पर अब कपिल ने टीवी पर वापसी की है। एक बिलकुल नए शो के साथ, 'फैमिली टाइम विद कपिल शर्मा'। रविवार को शो का पहला एपिसोड टीवी पर प्रसारित हुआ। इसमें कपिल के साथ उनकी टीम के सदस्य और टीवी एक्ट्रेस नेहा पेंडसे नज़र आईं। शो के पहले एपिसोड में मेहमान बने अजय देवगन। अजय अपनी फिल्म 'रेड' का प्रोमोशन करने यहाँ आए थे। इस शो में कपिल कॉमेडी के साथ-साथ एक गेम कराते नज़र आए। जिसमे ऑडियंस को वो कुछ सवालों के जवाब देने पर एक कार देते नज़र आए। कपिल के इस शो में दर्शकों ने सुनील ग्रोवर को काफी मिस किया। शो के शुरू होने से पहले ये अटकलें लगाई जा रहीं थी कि सुनील भी कपिल के इस शो का हिस्सा बन सकते हैं लेकिन शो से पहले कपिल और सुनील के बीच हुई ट्वीटर वार ने इन अटकलों पर फुल स्टॉप लगा दिया। जहाँ दोनों एक दुसरे पर इल्ज़ाम लगाते नज़र आए। आपको बता दें की सुनील के पिछले शो को छोड़ने के बाद कपिल के शो की टीआरपी काफी गिर गयी। शो बंद करने का वो भी एक कारण था। इस शो के पहले एपिसोड के बाद दर्शकों ने भी कपिल और उनके इस शो के बारे में ट्वीटर पर ढेर सारी टोकरा भर कर खुल के प्रतिक्रियाएं दीं। जहां थोड़े दर्शक ऐसे थे जो इस शो को परिवारिक और मनोरंजक बता रहे थे वहीँ कुछ लोग ऐसे थे जो कपिल के इस शो की तुलना 'खुल जा सिम सिम' से कर रह थे और इस शो से कॉमेडी को नदारथ बता रहे थे। चौंकाने वाली बात ये है कि शो की आलोचना और ट्रोल करने वाले दर्शकों की संख्या अधिक है। आने वाले समय में देखने वाली बात होगी कि कपिल के इस शो का क्या हश्र होता है। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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मुंबई। बॉलीवुड के किंग शाहरुख खान ने 2018 के पहले दिन अपने प्रशंसकों के लिए फिल्म 'जीरो' का शीर्षक और टीजर जारी किया। फिल्म में शाहरुख एक बौने का किरदार निभाते दिखाई देंगे। शाहरुख का निर्देशक आनंद एल. राय के साथ यह पहली रचनात्मक साझेदारी है। राय के मुताबिक, यह एक ऐसी कहानी है जो किसी की जिंदगी की खामियों का जश्न मनाती है।
उन्होंने कहा, "यद्यपि फिल्म का नायक एक बौना है, लेकिन किसी व्यक्ति की शारीरिक विकलांगता से ज्यादा, कहानी हमारे जीवन की भावनात्मक अपूर्णता के बारे में बताती है। " फिल्म इस साल 21 दिसंबर को रिलीज होगी। फिल्म में अनुष्का शर्मा और कटरीना कैफ भी भूमिका में होंगी लेकिन टीजर में उनके किरदार के बारे में कुछ भी जाहिर नहीं किया गया है। इन तीनों कलाकार को 'जब तक है जान' में एक साथ देखा गया था।
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मुंबई। बॉलीवुड के किंग शाहरुख खान ने दो हज़ार अट्ठारह के पहले दिन अपने प्रशंसकों के लिए फिल्म 'जीरो' का शीर्षक और टीजर जारी किया। फिल्म में शाहरुख एक बौने का किरदार निभाते दिखाई देंगे। शाहरुख का निर्देशक आनंद एल. राय के साथ यह पहली रचनात्मक साझेदारी है। राय के मुताबिक, यह एक ऐसी कहानी है जो किसी की जिंदगी की खामियों का जश्न मनाती है। उन्होंने कहा, "यद्यपि फिल्म का नायक एक बौना है, लेकिन किसी व्यक्ति की शारीरिक विकलांगता से ज्यादा, कहानी हमारे जीवन की भावनात्मक अपूर्णता के बारे में बताती है। " फिल्म इस साल इक्कीस दिसंबर को रिलीज होगी। फिल्म में अनुष्का शर्मा और कटरीना कैफ भी भूमिका में होंगी लेकिन टीजर में उनके किरदार के बारे में कुछ भी जाहिर नहीं किया गया है। इन तीनों कलाकार को 'जब तक है जान' में एक साथ देखा गया था।
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फेंका । सोटे के सामान प्रबल सूँड़ के टुक टुकडे हो गये और उसके पीलवान को भी मार गिरायां, तथा गोध, सिद्ध, बेताल आदि ने आखों का मांस खींच लिया। इस प्रकार श्रेष्ठ नीर ने युद्ध भूमि में महाभारत मचा दिया और तलवारों की चमच माइट ने तरङ्गमाला सी उठाकर चकाचौंध पैदा कर दी। इस प्रकार तातार खाँ के सामने ही उस वीर सिंह ने हुकार से आकाश कपा दिया ।
सोलिखग्ग... वनां लहर-तब नृसिंह राय ने तलवार खींच कर शत्रुओं के सीस पर चलाई जिससे उनके सिर व धड़ टूट टूट कर धरती पर पड़ते हैं। पड़ते ही कटाके की आवाज होती है। उस वीर की मार से शत्रुओं के पैर भागते हुये उलझ जाते हैं ! अर्थात् घबड़ाहट पैल जाती है, क्योंकि कूर्म वशी नृसिंह राय बड़ा ही प्रबल वीर था। उसकी तलवार का दाव कभी चूकता ही न था। जिसकी झड़भड़ाहट की ध्वनि सर्वन सुनाई देती थी । इस प्रकार मार काट करता हुआ वीर आगे बढ़ता चला गया, किंञ्चत्मान भी न घबडाया और अन्त में शरीर घायल होकर हाथी पर गिर गया। उसके गिरते ही दाइर के पुत्र चामुंड राय ने तलवारों से उसकी रक्षा को
छुटी छदनी•••सालोप थान - शनि हो गई और सच अपने इच्छित स्थानों पर पहुच गये और यात्री के घन के समान अपनी रक्षा का प्रवन्ध किया। रात्रि जानकर प्रबलता से बाजे बजने लगे। और सारी पृथ्वीको अत्यन्त गहरे धुआँधार से पूरित कर दिया । मुल्तान की सेना भी पीछे लौट गई । फिर मातः पृथ्वीरान ने सामना करके ईरानियों की सेना को घेर लिया औरसाइयों में युद्ध का मोर्चा लगा दिया तथा चारों ओर दीवार सी खटी करदी ।
जैत बंध सुकी वधु - लासा, लक्ष्मण जो कि शत्रुओं को गति को रोकने वाला और जैत पवार का भाई था मारा गया। इसे जिसने पैदा किया था, यह बड़ी भाग्यवाली थी। उस समय देवी महामाया उसने लेने के लिये झगडने लगी और हुकार करने लगी। इसी समय गिद्धों के झुड ने उसे उड़ा लिया। उनसे अप्सराये लेना चाहती थीं परन्तु नहीं पायीं। वह स्वामी अब उद्धार के लिये दूसरी ओर ही चला गया, जिससे स्वर्ग में अभा पैदा हो गया । वह वीर न यमलोक मे गया, न शिवलोक में गया और न ब्रह्मलाक मे ही पहुॅचा वरन् यह सूर्य-मडल को वैध
कर पार चला गया ।
उस पॅवार का शरीर जर्जर होकर पृथ्वी पर पड़ा रह गया और ब्रह्मा ने उसे मोक्ष दी। और भाग्य के श्रेष्ठ अक्षरों को भी मिटा दिया और नाना प्रकार के माया जालों को छुटाकर हृदय में ईश्वर को अनुरक्त कर लिया। उसकी भलाई के लिये तुरत सरस्वती सलप के भाई लाखा के पास आई और उसके अग में ब्रह्मा के विचारों को लिख दिया तथा वहीं बाच कर दिखा दिया। पैदा होना और मरना, दुख सहना और स्वर्ग पाना ये सब बातें अमिट है परन्तु तुमको ये बाते नहीं भोगनी पड़ेगी। इस बार सुन्दर वरदान को नाश मत करो । कीर्तिरूपो वधू से गठ बधन कर लो ।
राम बंध.. ललचाई -- लक्ष्मण का उत्तम सिर महादेव ने इतनी उत्सुकता से ग्रहण किया जैसे धन का दरिद्री विपुल धन नाशि देस देखकर ललचाता है ।
जाम एक... मीर-एक पहर दिन चढते ही जधारों
जोगी वीर युद्ध
भूमि मे झुक पडा । वह तीर के समान तेज हो कर टूट पड़ा
और मीर को मैदान में पकड़ लिया ।
योगियों का राजा जघारा जागी जो कि अत्यन्त प्रल था युद्ध के लिए ऊचा निशूल हाथ में लेकर निकला । वह शत्रुश्री को वश में करने वाला था। वह जटाधारी वेत्र धारण किए और नरसिद्दा लिए था, भस्म लगाये श्रेष्ठ शिन की सार नाशक वृत्ति लिए हुए था। सावर-मन का जाप करता था, उसके शरीर से अन्यन्त गहरी शरान की गध का लपटें निकल रही थीं। नी मेना में सनने ऊँचे आसन पर था जिससे उसे सब देख सकते थे । सिर पर चन्द्रमा का चिन्ह लगाये देवताओं की भाति श्रमर पद युक्त था। उसने ऐसा भारी युद्ध किया मानों राम और रावण लड रहे हों, इतना युद्ध पहले नहीं हुआ था । सिलह सजि तेग उभारयौ - जन गोरी ने मुना किलगरीराय लगातार युद्ध में सलग्न है तो वह शस्त्रास्त्रों से सुसजित होकर रण-भूमि मे जाकर जोर से युद्ध करने लगा और सौ सामर्तो के बीच में हुकार करता हुआ दौड़ पड़ा त उसने देखा कि इन सामतों के बीच में दान ( इसलामी धर्म ) नष्ट होने का भय है तो युद्ध क्षेत्र में हार लगाता और आतक फैलाता हुआ वह तलवार खोल कर वडता जाता था । वह हिंदुओं के भस्म, तिलक, चदन से द्वेप के कारण दीन ( धार्मिक भाव ) को उत्तेजित कर रहा था। फिर लगरी राय घुमद्द कर और शस्त्र लेकर सेना के बीच में आक्रमण करने लगा। तलवार से तलवार भिड रही थी। कुछ बादल की घोर सो दिसलाई देती थी ( विजय को आशा प्रतीत होती थी ) इस प्रकार गारी की प्रचल सेना पर आग बरसा रहा था। जैसे हनुमान ने प्राचीन काल मेला में आग लगाई थी ।
किसी को मारा, किसी का साडे की मल्लविया में बरबाद किया, किसी को काट गिराया । यदि एक हाथ में किसी प्रकार
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फेंका । सोटे के सामान प्रबल सूँड़ के टुक टुकडे हो गये और उसके पीलवान को भी मार गिरायां, तथा गोध, सिद्ध, बेताल आदि ने आखों का मांस खींच लिया। इस प्रकार श्रेष्ठ नीर ने युद्ध भूमि में महाभारत मचा दिया और तलवारों की चमच माइट ने तरङ्गमाला सी उठाकर चकाचौंध पैदा कर दी। इस प्रकार तातार खाँ के सामने ही उस वीर सिंह ने हुकार से आकाश कपा दिया । सोलिखग्ग... वनां लहर-तब नृसिंह राय ने तलवार खींच कर शत्रुओं के सीस पर चलाई जिससे उनके सिर व धड़ टूट टूट कर धरती पर पड़ते हैं। पड़ते ही कटाके की आवाज होती है। उस वीर की मार से शत्रुओं के पैर भागते हुये उलझ जाते हैं ! अर्थात् घबड़ाहट पैल जाती है, क्योंकि कूर्म वशी नृसिंह राय बड़ा ही प्रबल वीर था। उसकी तलवार का दाव कभी चूकता ही न था। जिसकी झड़भड़ाहट की ध्वनि सर्वन सुनाई देती थी । इस प्रकार मार काट करता हुआ वीर आगे बढ़ता चला गया, किंञ्चत्मान भी न घबडाया और अन्त में शरीर घायल होकर हाथी पर गिर गया। उसके गिरते ही दाइर के पुत्र चामुंड राय ने तलवारों से उसकी रक्षा को छुटी छदनी•••सालोप थान - शनि हो गई और सच अपने इच्छित स्थानों पर पहुच गये और यात्री के घन के समान अपनी रक्षा का प्रवन्ध किया। रात्रि जानकर प्रबलता से बाजे बजने लगे। और सारी पृथ्वीको अत्यन्त गहरे धुआँधार से पूरित कर दिया । मुल्तान की सेना भी पीछे लौट गई । फिर मातः पृथ्वीरान ने सामना करके ईरानियों की सेना को घेर लिया औरसाइयों में युद्ध का मोर्चा लगा दिया तथा चारों ओर दीवार सी खटी करदी । जैत बंध सुकी वधु - लासा, लक्ष्मण जो कि शत्रुओं को गति को रोकने वाला और जैत पवार का भाई था मारा गया। इसे जिसने पैदा किया था, यह बड़ी भाग्यवाली थी। उस समय देवी महामाया उसने लेने के लिये झगडने लगी और हुकार करने लगी। इसी समय गिद्धों के झुड ने उसे उड़ा लिया। उनसे अप्सराये लेना चाहती थीं परन्तु नहीं पायीं। वह स्वामी अब उद्धार के लिये दूसरी ओर ही चला गया, जिससे स्वर्ग में अभा पैदा हो गया । वह वीर न यमलोक मे गया, न शिवलोक में गया और न ब्रह्मलाक मे ही पहुॅचा वरन् यह सूर्य-मडल को वैध कर पार चला गया । उस पॅवार का शरीर जर्जर होकर पृथ्वी पर पड़ा रह गया और ब्रह्मा ने उसे मोक्ष दी। और भाग्य के श्रेष्ठ अक्षरों को भी मिटा दिया और नाना प्रकार के माया जालों को छुटाकर हृदय में ईश्वर को अनुरक्त कर लिया। उसकी भलाई के लिये तुरत सरस्वती सलप के भाई लाखा के पास आई और उसके अग में ब्रह्मा के विचारों को लिख दिया तथा वहीं बाच कर दिखा दिया। पैदा होना और मरना, दुख सहना और स्वर्ग पाना ये सब बातें अमिट है परन्तु तुमको ये बाते नहीं भोगनी पड़ेगी। इस बार सुन्दर वरदान को नाश मत करो । कीर्तिरूपो वधू से गठ बधन कर लो । राम बंध.. ललचाई -- लक्ष्मण का उत्तम सिर महादेव ने इतनी उत्सुकता से ग्रहण किया जैसे धन का दरिद्री विपुल धन नाशि देस देखकर ललचाता है । जाम एक... मीर-एक पहर दिन चढते ही जधारों जोगी वीर युद्ध भूमि मे झुक पडा । वह तीर के समान तेज हो कर टूट पड़ा और मीर को मैदान में पकड़ लिया । योगियों का राजा जघारा जागी जो कि अत्यन्त प्रल था युद्ध के लिए ऊचा निशूल हाथ में लेकर निकला । वह शत्रुश्री को वश में करने वाला था। वह जटाधारी वेत्र धारण किए और नरसिद्दा लिए था, भस्म लगाये श्रेष्ठ शिन की सार नाशक वृत्ति लिए हुए था। सावर-मन का जाप करता था, उसके शरीर से अन्यन्त गहरी शरान की गध का लपटें निकल रही थीं। नी मेना में सनने ऊँचे आसन पर था जिससे उसे सब देख सकते थे । सिर पर चन्द्रमा का चिन्ह लगाये देवताओं की भाति श्रमर पद युक्त था। उसने ऐसा भारी युद्ध किया मानों राम और रावण लड रहे हों, इतना युद्ध पहले नहीं हुआ था । सिलह सजि तेग उभारयौ - जन गोरी ने मुना किलगरीराय लगातार युद्ध में सलग्न है तो वह शस्त्रास्त्रों से सुसजित होकर रण-भूमि मे जाकर जोर से युद्ध करने लगा और सौ सामर्तो के बीच में हुकार करता हुआ दौड़ पड़ा त उसने देखा कि इन सामतों के बीच में दान नष्ट होने का भय है तो युद्ध क्षेत्र में हार लगाता और आतक फैलाता हुआ वह तलवार खोल कर वडता जाता था । वह हिंदुओं के भस्म, तिलक, चदन से द्वेप के कारण दीन को उत्तेजित कर रहा था। फिर लगरी राय घुमद्द कर और शस्त्र लेकर सेना के बीच में आक्रमण करने लगा। तलवार से तलवार भिड रही थी। कुछ बादल की घोर सो दिसलाई देती थी इस प्रकार गारी की प्रचल सेना पर आग बरसा रहा था। जैसे हनुमान ने प्राचीन काल मेला में आग लगाई थी । किसी को मारा, किसी का साडे की मल्लविया में बरबाद किया, किसी को काट गिराया । यदि एक हाथ में किसी प्रकार
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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में स्वच्छ भारत दिवस मनाने के लिए जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने विभिन्न श्रेणियों में स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण पुरस्कार प्रदान किए।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार शाश्वत हैं। उन्होंने सत्य और अहिंसा की तरह स्वच्छता पर भी जोर दिया। स्वच्छता पर उनके संकल्प का उद्देश्य सामाजिक विकृतियों को दूर करना और एक नए भारत का निर्माण करना था। इसलिए उनके जन्मदिन को 'स्वच्छ भारत दिवस' के रूप में मनाना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
राष्ट्रपति ने कहा कि 2014 में 'स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण' के शुभारंभ के बाद से 11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है और लगभग 60 करोड़ लोगों ने खुले में शौच करने की अपनी आदत को बदला है। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि इस मिशन के माध्यम से भारत ने 2030 की समय सीमा से ग्यारह साल पहले संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य संख्या6 को हासिल कर लिया है।
केंद्रीय पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री श्री गिरिराज सिंह भी इस समारोह में शामिल हुए। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में 11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है और ग्रामीण घरों में 10 करोड़ से अधिक नल के पानी के कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि भारत जन भागीदारी आंदोलन के साथ स्वच्छ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए यह जन आंदोलन देश के कोने-कोने तक पहुंचना चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि सरकार हर घर में नल का पानी, शौचालय और बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में ईमानदारी से काम कर रही है।
पंचायती राज मंत्रालय में सचिव श्री सुनील कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन और ओडीएफ प्लस का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष जन भागीदारी है। उन्होंने कहा कि इन दोनों योजनाओं को बनाए रखने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। उन्होंने कहा कि लोग सेवा शुल्क का भुगतान करने के लिए तैयार हैं यदि उन्हें सेवा प्रदाता द्वारा अच्छी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतें आगे आ रही हैं और राज्य के अधिकारियों को शामिल कर रही हैं तथा निवासियों को यह सेवा सर्वोत्तम संभव तरीके से प्रदान करने के लिए कमर कस रही हैं।
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Posted On: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में स्वच्छ भारत दिवस मनाने के लिए जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने विभिन्न श्रेणियों में स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार शाश्वत हैं। उन्होंने सत्य और अहिंसा की तरह स्वच्छता पर भी जोर दिया। स्वच्छता पर उनके संकल्प का उद्देश्य सामाजिक विकृतियों को दूर करना और एक नए भारत का निर्माण करना था। इसलिए उनके जन्मदिन को 'स्वच्छ भारत दिवस' के रूप में मनाना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। राष्ट्रपति ने कहा कि दो हज़ार चौदह में 'स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण' के शुभारंभ के बाद से ग्यारह करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है और लगभग साठ करोड़ लोगों ने खुले में शौच करने की अपनी आदत को बदला है। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि इस मिशन के माध्यम से भारत ने दो हज़ार तीस की समय सीमा से ग्यारह साल पहले संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य संख्याछः को हासिल कर लिया है। केंद्रीय पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री श्री गिरिराज सिंह भी इस समारोह में शामिल हुए। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ग्यारह करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है और ग्रामीण घरों में दस करोड़ से अधिक नल के पानी के कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि भारत जन भागीदारी आंदोलन के साथ स्वच्छ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए यह जन आंदोलन देश के कोने-कोने तक पहुंचना चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि सरकार हर घर में नल का पानी, शौचालय और बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में ईमानदारी से काम कर रही है। पंचायती राज मंत्रालय में सचिव श्री सुनील कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन और ओडीएफ प्लस का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष जन भागीदारी है। उन्होंने कहा कि इन दोनों योजनाओं को बनाए रखने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। उन्होंने कहा कि लोग सेवा शुल्क का भुगतान करने के लिए तैयार हैं यदि उन्हें सेवा प्रदाता द्वारा अच्छी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतें आगे आ रही हैं और राज्य के अधिकारियों को शामिल कर रही हैं तथा निवासियों को यह सेवा सर्वोत्तम संभव तरीके से प्रदान करने के लिए कमर कस रही हैं।
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दिन गरी बगत ई अंक पुडिया खुलगी ही। ठानी क्यू सेवनजी आपरी बाध्योडी पुडिया रे खुलण सू इत्ता अधीरा हुयग्या ।
इण सू पला वदेई अडी बात नी हुयो । सेवजी रो ओ दावो रयो है के वे उमरभर म अब ई तो काम सीख्या है - पुडिया बाधणी घणी बार ई व आपरी बाध्योडी पुडिया जोर सू पटकन केवता - "कोई हमी थोडी है जो म्हारी बाध्योडी पुडिया खुल जाव, अवस्था गाळ' र अक इ तो कारज करयो है ।
पछ व भापर इण धघ में लागण से पूरी कहाणी अवस बतावता । सेवगजी रा बापू पुराणा वदजी से इलाज करवायो हो । ठीक हुयग्या जन घणी चावणा सू क वंदजी हेठ रयर मिनख बण जासी, व सेवगजो न छोरपण री ओस्था मे ई अठ छोडग्या । सवगजी घणी बार अफसोस भी कर के ज थोडा घणा ई पढयाडा हुक्ता तो आज न वेद बण जावता, पण वा तो रुक्कै मे मरीज रो नाव माडणो ई नी सीरया । सेवगजी समयणा हुया जित गाव से घर उजडग्यो । मा पला इ को ही नी बापू भी पूरा हुयग्या । गाव सू तो सोर ई चूकग्यो ।
सेवग जी काम में मन लगायो । पुड या बाधण सारू कागद रा आटा घण कोड सू सीरया । छोटी-मोटी दुआया बणावणी ई सीखी । आज लग अंक आई काम है जक न करता सवगजी दर ई नी थक्या है । किरची मुहड मे रगतोळता व दनातन पुड घा बणायन ढिगली वरता जाव तद साच ई बारी तल्लीनता देखण -- सरावण जोग हुव ।
दवाखानो बद वर′र सेवगजी आज घणा ऊतावळा घर काती दुरघा । रास्त म बीडी काढण सारू गूज म हाथ घाल्यो जद निग पड़ा क बडल पेटी तो हू दवाखान मे ई छोड आयो । गूजा सावळ सभाळघा तो खुण ग्वोचर म लुक्थोडी चारानी लाघगी । व मतो करयो कनूवा बडल लेयलू । फर सवगण री बात याद आयगी। वी खातर आज पत्रायत ई अग्रेजी दुआई से टिक्डी लेवणी हुयसी ।
ठर ठरन वार मुहड आग सेवगण से मुहडी फिरण लागग्यो ।
व भात भात रा जजाळा मे उळमयोडा घर पूग्या आवता अक प पइसाळी टिक्डी साग लाया । मतो रथोडो हो क टिक्डी चाय साग सेवगण नै दय देसू ।
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दिन गरी बगत ई अंक पुडिया खुलगी ही। ठानी क्यू सेवनजी आपरी बाध्योडी पुडिया रे खुलण सू इत्ता अधीरा हुयग्या । इण सू पला वदेई अडी बात नी हुयो । सेवजी रो ओ दावो रयो है के वे उमरभर म अब ई तो काम सीख्या है - पुडिया बाधणी घणी बार ई व आपरी बाध्योडी पुडिया जोर सू पटकन केवता - "कोई हमी थोडी है जो म्हारी बाध्योडी पुडिया खुल जाव, अवस्था गाळ' र अक इ तो कारज करयो है । पछ व भापर इण धघ में लागण से पूरी कहाणी अवस बतावता । सेवगजी रा बापू पुराणा वदजी से इलाज करवायो हो । ठीक हुयग्या जन घणी चावणा सू क वंदजी हेठ रयर मिनख बण जासी, व सेवगजो न छोरपण री ओस्था मे ई अठ छोडग्या । सवगजी घणी बार अफसोस भी कर के ज थोडा घणा ई पढयाडा हुक्ता तो आज न वेद बण जावता, पण वा तो रुक्कै मे मरीज रो नाव माडणो ई नी सीरया । सेवगजी समयणा हुया जित गाव से घर उजडग्यो । मा पला इ को ही नी बापू भी पूरा हुयग्या । गाव सू तो सोर ई चूकग्यो । सेवग जी काम में मन लगायो । पुड या बाधण सारू कागद रा आटा घण कोड सू सीरया । छोटी-मोटी दुआया बणावणी ई सीखी । आज लग अंक आई काम है जक न करता सवगजी दर ई नी थक्या है । किरची मुहड मे रगतोळता व दनातन पुड घा बणायन ढिगली वरता जाव तद साच ई बारी तल्लीनता देखण -- सरावण जोग हुव । दवाखानो बद वर′र सेवगजी आज घणा ऊतावळा घर काती दुरघा । रास्त म बीडी काढण सारू गूज म हाथ घाल्यो जद निग पड़ा क बडल पेटी तो हू दवाखान मे ई छोड आयो । गूजा सावळ सभाळघा तो खुण ग्वोचर म लुक्थोडी चारानी लाघगी । व मतो करयो कनूवा बडल लेयलू । फर सवगण री बात याद आयगी। वी खातर आज पत्रायत ई अग्रेजी दुआई से टिक्डी लेवणी हुयसी । ठर ठरन वार मुहड आग सेवगण से मुहडी फिरण लागग्यो । व भात भात रा जजाळा मे उळमयोडा घर पूग्या आवता अक प पइसाळी टिक्डी साग लाया । मतो रथोडो हो क टिक्डी चाय साग सेवगण नै दय देसू ।
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पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच चल रही टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच आज से शुरू हो गया। यह मैच भी कराची के नेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पहले दिन 6 विकेट खोकर 309 रन बनाए। न्यूजीलैंड की तरफ से सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉन्वे ने शानदार शतक लगाया और यह उनका साल 2023 का पहला शतक है।
PAK vs NZ 2nd Test: पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच चल रही टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच आज से शुरू हो गया। यह मैच भी कराची के नेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पहले दिन 6 विकेट खोकर 309 रन बनाए। न्यूजीलैंड की तरफ से सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे ने शानदार शतक लगाया और यह उनका साल 2023 का पहला शतक है।
कॉनवे ने पहली पारी में 122 रनों की पारी खेली। इस पारी में कॉन्वे ने 16 चौके और एक शानदार छक्का जड़ा। बता दे, यह पहली बार नहीं है कि नए साल के मौके पर कॉनवे ने शतक लगाया है इससे पहले भी उन्होंने साल 2022 में 1 जनवरी को बांग्लादेश के खिलाफ शतक लगाया था। उस दौरान भी कॉन्वे ने 122 रनों की ही पारी खेली थी।
कॉनवे के अलावा टॉम लाथम ने 71 रनों की पारी खेली। वहीं पाकिस्तान की तरफ से गेंदबाजी करते हुए पहले दिन आगाह सलमान ने 3 विकेट हासिल किए। इसके अलावा नशीम शाह ने 2 और अबरार अहमद ने एक विकेट हासिल किया है। फिलहाल न्यूजीलैंड की तरफ से क्रीज पर टॉम ब्लनडेल और ईश सोढ़ी मौजूद है। बता दे, इस मैच में न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया।
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पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच चल रही टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच आज से शुरू हो गया। यह मैच भी कराची के नेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पहले दिन छः विकेट खोकर तीन सौ नौ रन बनाए। न्यूजीलैंड की तरफ से सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉन्वे ने शानदार शतक लगाया और यह उनका साल दो हज़ार तेईस का पहला शतक है। PAK vs NZ दोnd Test: पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच चल रही टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच आज से शुरू हो गया। यह मैच भी कराची के नेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पहले दिन छः विकेट खोकर तीन सौ नौ रन बनाए। न्यूजीलैंड की तरफ से सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे ने शानदार शतक लगाया और यह उनका साल दो हज़ार तेईस का पहला शतक है। कॉनवे ने पहली पारी में एक सौ बाईस रनों की पारी खेली। इस पारी में कॉन्वे ने सोलह चौके और एक शानदार छक्का जड़ा। बता दे, यह पहली बार नहीं है कि नए साल के मौके पर कॉनवे ने शतक लगाया है इससे पहले भी उन्होंने साल दो हज़ार बाईस में एक जनवरी को बांग्लादेश के खिलाफ शतक लगाया था। उस दौरान भी कॉन्वे ने एक सौ बाईस रनों की ही पारी खेली थी। कॉनवे के अलावा टॉम लाथम ने इकहत्तर रनों की पारी खेली। वहीं पाकिस्तान की तरफ से गेंदबाजी करते हुए पहले दिन आगाह सलमान ने तीन विकेट हासिल किए। इसके अलावा नशीम शाह ने दो और अबरार अहमद ने एक विकेट हासिल किया है। फिलहाल न्यूजीलैंड की तरफ से क्रीज पर टॉम ब्लनडेल और ईश सोढ़ी मौजूद है। बता दे, इस मैच में न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया।
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण पांच सौ करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
वहीं अब तक 28 लोगों के मारे जाने की सूचना है।
बारिश के चलते यातायात व्यवस्था पर भी काफी प्रभाव पड़ा है, जिससे सड़क और कई पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बुधवार को नुकसान का आकलन करने के लिए एक समीक्षा बैठक की।
इस बैठक में जिन्हें नुकसान हुआ है, उन्हें तत्काल पर्याप्त धन उपलब्ध कराने, साथ ही गांव के संपर्क मार्गो और पुलों की मरम्मत करने पर करने का आदेश दिया गया है।
आकड़ों के मुताबिक अब तक बारिश के कारण 567. 32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
इसमें सड़कों और पुलों को ज्यादा नुकसान हुअा है, और यह करीब 396 करोड़ रुपये का नुकसान बताया जा रहा है।
अब तक बारिश से 28 लोगों के मारने की पुष्टि हुई है।
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को चंडीगढ़-मनालीराष्ट्रीय राजमार्ग-21 पर मंडी जिले के हंगोली मंदिर के पास लगातार भूस्खलन का हल ढूंढ़ने के निर्देश दिए हैं।
इस स्थान पर बार-बार होने वाले भूस्खलन के कारण यातायात बाधित हो रहा है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव नरिंदर चौहान ने कहा कि 166 क्षतिग्रस्त सड़कें बहाल कर दी गई हैं।
वहीं उन्होंने बताया कि तीन पुल पानी में बह गए हैं।
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण पांच सौ करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। वहीं अब तक अट्ठाईस लोगों के मारे जाने की सूचना है। बारिश के चलते यातायात व्यवस्था पर भी काफी प्रभाव पड़ा है, जिससे सड़क और कई पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बुधवार को नुकसान का आकलन करने के लिए एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में जिन्हें नुकसान हुआ है, उन्हें तत्काल पर्याप्त धन उपलब्ध कराने, साथ ही गांव के संपर्क मार्गो और पुलों की मरम्मत करने पर करने का आदेश दिया गया है। आकड़ों के मुताबिक अब तक बारिश के कारण पाँच सौ सरसठ. बत्तीस करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें सड़कों और पुलों को ज्यादा नुकसान हुअा है, और यह करीब तीन सौ छियानवे करोड़ रुपये का नुकसान बताया जा रहा है। अब तक बारिश से अट्ठाईस लोगों के मारने की पुष्टि हुई है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को चंडीगढ़-मनालीराष्ट्रीय राजमार्ग-इक्कीस पर मंडी जिले के हंगोली मंदिर के पास लगातार भूस्खलन का हल ढूंढ़ने के निर्देश दिए हैं। इस स्थान पर बार-बार होने वाले भूस्खलन के कारण यातायात बाधित हो रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव नरिंदर चौहान ने कहा कि एक सौ छयासठ क्षतिग्रस्त सड़कें बहाल कर दी गई हैं। वहीं उन्होंने बताया कि तीन पुल पानी में बह गए हैं।
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Putin Iran Visit: यूरोपीय देश यूक्रेन में बीते करीब पांच महीने से भीषण जंग चल रही है, जिसके लिए पश्चिमी देश रूस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई का कहना है कि ये जंग तो अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) ने शुरू की है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ तेहरान में बैठक करने के बाद नाटो को एक 'खतरनाक क्रिएचर' करार दिया है। खामनेई ने कहा कि पश्चिमी देश एक मजबूत और स्वतंत्र रूस के खिलाफ हैं। इन देशों यानी ईरान और रूस के बीच एक 40 बिलियन डॉलर की महाडील भी हुई है।
पुतिन के साथ बैठक के बाद खामनेई ने कहा, 'युद्ध एक हिंसक और मुश्किल मुद्दा है और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान भी इससे खुश नहीं है कि आम लोग इसकी चपेट में आएं। ' लेकिन जहां यूक्रेन की बात है, तो आपको पहल करनी होगी, वहीं वो दूसरा पक्ष है, जिसने लड़ाई शुरू की है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश एक मजबूत और स्वतंत्र रूस के खिलाफ हैं। ऐसे में अगर नाटो यूक्रेन में नहीं रुका, तो फिर वो भी वैसी ही जंग शुरू कर देगा और क्रीमिया को बहाना बनाएगा। क्रीमिया यूक्रेन का वही इलाका है, जिसपर रूस ने 2014 में कब्जा कर लिया था।
ईरान के स्थानीय मीडिया के अनुसार, पुतिन ने कहा है कि यूक्रेन के युद्ध में आम नागरिकों की मौत एक बड़ी त्रासदी है। इसके साथ ही उन्होंने रूस की प्रतिक्रिया (यूक्रेन पर हमलों के लिए) के लिए पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराया है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा है, 'कुछ पश्चिमी देशों का कहना है कि हम यूक्रेन की नाटो में सदस्यता के खिलाफ हैं। लेकिन हम अमेरिका के दबाव के कारण ऐसा कर रहे हैं। ' ठीक इसी दौरान ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि रूस और ईरान ने इस क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा बढ़ाई है। पश्चिम के विपरीत वो ईरान और रूस ही हैं, जो श्रेत्र में आतंकवाद को खत्म करने के लिए ईमानदारी और गंभीरता से सहयोग कर रहे हैं।
ये पुतिन का ईरान का पांचवां दौरा है और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पूर्व सोवियत देश का पहला दौरा है। रूसी राष्ट्रपति ऐसे वक्त पर ईरान आए हैं, जब अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हाल में ही इजरायल और सऊदी अरब का दौरा किया है। ये दोनों ही देश ईरान के दुश्मन माने जाते हैं। पुतिन के ईरान दौरे के समय दोनों देशों के बीच 40 बिलियन डॉलर की एक डील हुई है। इस डील के तहत तेल और गैस सेक्टर को विकसित किया जाएगा। ये समझौता ईरान की नेशनल ईरानियन तेल कंपनी और रूसी कंपनी गाजप्रोम के बीच हुआ है।
ईरान के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस का भंडार है। इस डील के तहत किश और नॉर्थ पारस गैस फील्ड के साथ ही 6 ऑयल फील्ड विकसित किए जाएंगे। ईरान के पास दुनिया में प्राकृतिक गैस का दूसरा सबसे बड़ा भंडार है, लेकिन पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण वह इसे विकसित नहीं कर पा रहा है। इतना ही नहीं पश्चिमी कंपनियां भी यहां निवेश नहीं कर पा रहीं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान ने कहा था कि तेहरान मॉस्को को "सैकड़ों" लड़ाकू ड्रोन उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है, और ईरानी सैनिक अपने रूसी समकक्षों को ड्रोन का उपयोग करने के तरीके के बारे में प्रशिक्षित करेंगे।
वहीं खामनेई का यह बयान पुतिन के अपने बयान से काफी मेल खाता है और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहे दोनों देशों के बीच नजदीकी का संकेत देता है। नाटो सहयोगियों ने पूर्वी यूरोप में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है और रूस के हमले का सामना करने के लिए यूक्रेन को हथियार मुहैया कराए हैं। रूस के आक्रमण के बाद से पुतिन की विदेश की यह दूसरी यात्रा है अैर इस दौरान उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन से भी मुलाकात की। इस दौरान नेताओं के बीच सीरिया में जारी संकट और वैश्विक खाद्य संकट को दूर करने के लिए यूक्रेन से अनाज के निर्यात को दोबारा शुरू करने के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।
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Putin Iran Visit: यूरोपीय देश यूक्रेन में बीते करीब पांच महीने से भीषण जंग चल रही है, जिसके लिए पश्चिमी देश रूस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई का कहना है कि ये जंग तो अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन नाटो ने शुरू की है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ तेहरान में बैठक करने के बाद नाटो को एक 'खतरनाक क्रिएचर' करार दिया है। खामनेई ने कहा कि पश्चिमी देश एक मजबूत और स्वतंत्र रूस के खिलाफ हैं। इन देशों यानी ईरान और रूस के बीच एक चालीस बिलियन डॉलर की महाडील भी हुई है। पुतिन के साथ बैठक के बाद खामनेई ने कहा, 'युद्ध एक हिंसक और मुश्किल मुद्दा है और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान भी इससे खुश नहीं है कि आम लोग इसकी चपेट में आएं। ' लेकिन जहां यूक्रेन की बात है, तो आपको पहल करनी होगी, वहीं वो दूसरा पक्ष है, जिसने लड़ाई शुरू की है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश एक मजबूत और स्वतंत्र रूस के खिलाफ हैं। ऐसे में अगर नाटो यूक्रेन में नहीं रुका, तो फिर वो भी वैसी ही जंग शुरू कर देगा और क्रीमिया को बहाना बनाएगा। क्रीमिया यूक्रेन का वही इलाका है, जिसपर रूस ने दो हज़ार चौदह में कब्जा कर लिया था। ईरान के स्थानीय मीडिया के अनुसार, पुतिन ने कहा है कि यूक्रेन के युद्ध में आम नागरिकों की मौत एक बड़ी त्रासदी है। इसके साथ ही उन्होंने रूस की प्रतिक्रिया के लिए पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराया है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा है, 'कुछ पश्चिमी देशों का कहना है कि हम यूक्रेन की नाटो में सदस्यता के खिलाफ हैं। लेकिन हम अमेरिका के दबाव के कारण ऐसा कर रहे हैं। ' ठीक इसी दौरान ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि रूस और ईरान ने इस क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा बढ़ाई है। पश्चिम के विपरीत वो ईरान और रूस ही हैं, जो श्रेत्र में आतंकवाद को खत्म करने के लिए ईमानदारी और गंभीरता से सहयोग कर रहे हैं। ये पुतिन का ईरान का पांचवां दौरा है और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पूर्व सोवियत देश का पहला दौरा है। रूसी राष्ट्रपति ऐसे वक्त पर ईरान आए हैं, जब अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हाल में ही इजरायल और सऊदी अरब का दौरा किया है। ये दोनों ही देश ईरान के दुश्मन माने जाते हैं। पुतिन के ईरान दौरे के समय दोनों देशों के बीच चालीस बिलियन डॉलर की एक डील हुई है। इस डील के तहत तेल और गैस सेक्टर को विकसित किया जाएगा। ये समझौता ईरान की नेशनल ईरानियन तेल कंपनी और रूसी कंपनी गाजप्रोम के बीच हुआ है। ईरान के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस का भंडार है। इस डील के तहत किश और नॉर्थ पारस गैस फील्ड के साथ ही छः ऑयल फील्ड विकसित किए जाएंगे। ईरान के पास दुनिया में प्राकृतिक गैस का दूसरा सबसे बड़ा भंडार है, लेकिन पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण वह इसे विकसित नहीं कर पा रहा है। इतना ही नहीं पश्चिमी कंपनियां भी यहां निवेश नहीं कर पा रहीं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान ने कहा था कि तेहरान मॉस्को को "सैकड़ों" लड़ाकू ड्रोन उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है, और ईरानी सैनिक अपने रूसी समकक्षों को ड्रोन का उपयोग करने के तरीके के बारे में प्रशिक्षित करेंगे। वहीं खामनेई का यह बयान पुतिन के अपने बयान से काफी मेल खाता है और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहे दोनों देशों के बीच नजदीकी का संकेत देता है। नाटो सहयोगियों ने पूर्वी यूरोप में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है और रूस के हमले का सामना करने के लिए यूक्रेन को हथियार मुहैया कराए हैं। रूस के आक्रमण के बाद से पुतिन की विदेश की यह दूसरी यात्रा है अैर इस दौरान उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन से भी मुलाकात की। इस दौरान नेताओं के बीच सीरिया में जारी संकट और वैश्विक खाद्य संकट को दूर करने के लिए यूक्रेन से अनाज के निर्यात को दोबारा शुरू करने के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।
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कोर्ट ने सचिन वाझे की NIA कस्टडी बढ़ाई (Photo Credit: फाइल फोटो)
नई दिल्लीः
Mansukh Hiren Murder Case : मनसुख हिरेन केस में एनआईए ने बुधवार को मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाझे ( Sachin Waze) को कोर्ट में पेश किया. इस दौरान स्पेशल एनआईए कोर्ट (Special NIA court ) ने सचिन वाझे की कस्टडी बढ़ा दी है. अब सचिन वाझे 9 अप्रैल तक एनआईए की कस्टडी में रहेगा. इस दौरान अदालत ने सीबीआई को एनआईए की हिरासत में सचिन वाझे से पूछताछ करने की अनुमति दे दी है. साथ ही सीबीआई को पूछताछ के समय का समन्वय करने का निर्देश दिया है.
परमबीर सिंह के लेटर मामले में सीबीआई (CBI) को सचिन वाझे से पूछताछ करने की इजाजत मिली गई है. CBI ने NIA की विशेष अदालत से वाज़े से पूछताछ के लिए इजाजत मांगी थी. 100 करोड़ रुपए वसूली मामले में अब CBI वाज़े से पूछताछ करेगी.
आपको बता दें कि इससे पहले एनआईए (NIA) सचिन वाझे ( Sachin Waze) को लेकर मीठी नंदी गई थी. सचिन वाझे पर सबूत नष्ट करने के आरोप हैं. एनआईए को मीठी नदी से अहम सबूत मिले थे. मीठी नदी से डीवीआर और नंबर प्लेट बरामद हुए हैं. मीठी नदी से एक DVR, एक CPU और गाड़ी के नंबर प्लेट्स मिले हैं. सचिन वाजे ने अपने बिल्डिंग के सीसीटीवी का DVR अपने कब्जे में लेकर सबूत मिटाने की कोशिश की थी.
इसके अलावा जिस दुकान पर गाड़ी का नंबर प्लेट बदला गया था वहां का DVR भी वाजे ने अपने कब्जे में ले लिया था. मीठी नदी में गोताखोरों की मदद से NIA ने DVR एक CPU और नंबर प्लेट्स बरामद किए. बीकेसी के पास मीठी नदी में सचिन वाजे ने सबूतों को फेंका था. उन्हीं सबूतों को ढूंढने के लिए NIA की टीम वाजे को लेकर गई थी. मीठी नदी से एक मोबाइल का कवर, दो डीवीआर भी मिले हैं. साथ ही एक लैपटॉप भी निकाला गया. मीठी नदी से एक वाईफाई का मॉडम भी मिला है.
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कोर्ट ने सचिन वाझे की NIA कस्टडी बढ़ाई नई दिल्लीः Mansukh Hiren Murder Case : मनसुख हिरेन केस में एनआईए ने बुधवार को मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाझे को कोर्ट में पेश किया. इस दौरान स्पेशल एनआईए कोर्ट ने सचिन वाझे की कस्टडी बढ़ा दी है. अब सचिन वाझे नौ अप्रैल तक एनआईए की कस्टडी में रहेगा. इस दौरान अदालत ने सीबीआई को एनआईए की हिरासत में सचिन वाझे से पूछताछ करने की अनुमति दे दी है. साथ ही सीबीआई को पूछताछ के समय का समन्वय करने का निर्देश दिया है. परमबीर सिंह के लेटर मामले में सीबीआई को सचिन वाझे से पूछताछ करने की इजाजत मिली गई है. CBI ने NIA की विशेष अदालत से वाज़े से पूछताछ के लिए इजाजत मांगी थी. एक सौ करोड़ रुपए वसूली मामले में अब CBI वाज़े से पूछताछ करेगी. आपको बता दें कि इससे पहले एनआईए सचिन वाझे को लेकर मीठी नंदी गई थी. सचिन वाझे पर सबूत नष्ट करने के आरोप हैं. एनआईए को मीठी नदी से अहम सबूत मिले थे. मीठी नदी से डीवीआर और नंबर प्लेट बरामद हुए हैं. मीठी नदी से एक DVR, एक CPU और गाड़ी के नंबर प्लेट्स मिले हैं. सचिन वाजे ने अपने बिल्डिंग के सीसीटीवी का DVR अपने कब्जे में लेकर सबूत मिटाने की कोशिश की थी. इसके अलावा जिस दुकान पर गाड़ी का नंबर प्लेट बदला गया था वहां का DVR भी वाजे ने अपने कब्जे में ले लिया था. मीठी नदी में गोताखोरों की मदद से NIA ने DVR एक CPU और नंबर प्लेट्स बरामद किए. बीकेसी के पास मीठी नदी में सचिन वाजे ने सबूतों को फेंका था. उन्हीं सबूतों को ढूंढने के लिए NIA की टीम वाजे को लेकर गई थी. मीठी नदी से एक मोबाइल का कवर, दो डीवीआर भी मिले हैं. साथ ही एक लैपटॉप भी निकाला गया. मीठी नदी से एक वाईफाई का मॉडम भी मिला है.
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चारित्र के भेद
आत्मिक शुद्धदशा में स्थिर रहने का प्रयत्न करना ही चारित्र है। परिणाम शुद्धि के तरतम भाव की अपेक्षा से चारित्र के सामायिक, आदि उपर्युक्त पाँच विभाग किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं
समभाव में स्थित रहने के लिए संपूर्ण अशुद्ध प्रवृत्तियों का त्याग करना सामायिकचारित्र है छेदोपस्थान आदि बाकी के चार चारित्र सामायिक रूप तो हैं ही इतने पर भी कितनी ही आचार और गुण की विशेषताओं के कारण इन रूप में वर्णन किया गया है । इत्वरिक
कुछ समय के लिए अथवा यावत्काधिक संपूर्ण जीवन के लिए जो पहले पहल मुनि दीक्षा ल्ये जाती है वह सामायिक है ।
प्रथम दीक्षा लेने के बाद विशिष्ट श्रुत का अभ्यास कर चुकने पर विशेष शुद्धि के निमित्त जो जीवनपर्यंत पुनः दीक्षा ली जाती है, एवं, प्रथम ली हुई दीक्षा में दोषापति आने से उसका छेद करके फिर नये सिरे से जो दीक्षा का आरोपण किया जाता है वह छेदोपस्थोपन चारित्र है । जिसमें ने पहला निरतिचार और दूसरा सातिचार छेदोपस्थापन कहलाता है ।
३. परिहारविद्धि चारित्र
४. सूक्ष्मपराय चॉरित्र
जिसमें स्रास विशिष्ट प्रकार के तपःप्रधान आचार का पालन किया जाना वह परिहारविशुद्धि चारित्र है ।
जिसमे क्रोध आदि कपायों का तो उदय नहीं होता, सिर्फ लोभ का अंश अतिसूक्ष्म रूप में रहता है, वह मदमसंपराय चारित्र है।
१. ठेखो हिदी चोथा कर्मग्रन्थ ०५९ - २१ ।
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चारित्र के भेद आत्मिक शुद्धदशा में स्थिर रहने का प्रयत्न करना ही चारित्र है। परिणाम शुद्धि के तरतम भाव की अपेक्षा से चारित्र के सामायिक, आदि उपर्युक्त पाँच विभाग किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं समभाव में स्थित रहने के लिए संपूर्ण अशुद्ध प्रवृत्तियों का त्याग करना सामायिकचारित्र है छेदोपस्थान आदि बाकी के चार चारित्र सामायिक रूप तो हैं ही इतने पर भी कितनी ही आचार और गुण की विशेषताओं के कारण इन रूप में वर्णन किया गया है । इत्वरिक कुछ समय के लिए अथवा यावत्काधिक संपूर्ण जीवन के लिए जो पहले पहल मुनि दीक्षा ल्ये जाती है वह सामायिक है । प्रथम दीक्षा लेने के बाद विशिष्ट श्रुत का अभ्यास कर चुकने पर विशेष शुद्धि के निमित्त जो जीवनपर्यंत पुनः दीक्षा ली जाती है, एवं, प्रथम ली हुई दीक्षा में दोषापति आने से उसका छेद करके फिर नये सिरे से जो दीक्षा का आरोपण किया जाता है वह छेदोपस्थोपन चारित्र है । जिसमें ने पहला निरतिचार और दूसरा सातिचार छेदोपस्थापन कहलाता है । तीन. परिहारविद्धि चारित्र चार. सूक्ष्मपराय चॉरित्र जिसमें स्रास विशिष्ट प्रकार के तपःप्रधान आचार का पालन किया जाना वह परिहारविशुद्धि चारित्र है । जिसमे क्रोध आदि कपायों का तो उदय नहीं होता, सिर्फ लोभ का अंश अतिसूक्ष्म रूप में रहता है, वह मदमसंपराय चारित्र है। एक. ठेखो हिदी चोथा कर्मग्रन्थ उनसठ - इक्कीस ।
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IND vs WI: भारतीय टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ 29 जुलाई से पांच मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी। इस सीरीज के लिए पहले ही टीम का ऐलान कर दिया गया था और कुलदीप यादव व केएल राहुल की जगह को फिटनेस पर निर्भर रखा गया था। राहुल एनसीए में रिकवरी कर रहे थे और हाल ही में जर्मनी से भी अपनी ग्रोइन इंजरी का इलाज करवाकर आए थे। उम्मीद सभी को थी कि वह टी20 सीरीज में वापसी करेंगे लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि वह पूरी टी20 सीरीज यानी सभी पांच मैचों से बाहर हो सकते हैं।
केएल राहुल आईपीएल के बाद से क्रिकेट फील्ड पर नजर नहीं आए हैं। उन्होंने इंटरनेशनल मुकाबला भारत के लिए आखिरी बार 9 फरवरी 2022 को वेस्टइंडीज के ही खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में खेला था। वहीं नवंबर 2021 में न्यूजीलैंड के खिलाफ वह आखिरी टी20 मैच खेले थे। टेस्ट मैच में भी वह इस साल की शुरुआत में साउथ अफ्रीका के खिलाफ ही आखिरी बार खेले थे। लंबे समय से उनके लिए इंटरनेशनल सर्किट से दूर रहना उनकी टी20 वर्ल्ड कप की जगह पर भी खतरा पैदा कर सकता है।
केएल राहुल पर क्या है ताजा अपडेट?
आपको बता दें कि पिछले हफ्ते केएल राहुल को कोरोना संक्रमित भी पाया गया था। जिसके बाद 27 जुलाई को उनका आइसोलेशन पीरियड खत्म होना था लेकिन जानकारी के मुताबिक बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने उनको एक और हफ्ते आराम करने के लिए कहा है। इसी कारण केएल राहुल वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी पांच मैचों की टी20 सीरीज के सभी मुकाबलों से बाहर हो सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि उनकी वापसी अब संभवतः 18, 20 और 22 अगस्त को जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले तीन वनडे मैचों की सीरीज में ही होगी।
केएल राहुल को आईपीएल के बाद साउथ अफ्रीका के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए टीम का कप्तान और इंग्लैंड के दौरे पर उपकप्तान नियुक्त किया गया था। वह लगातार इन सभी मौकों पर टीम का हिस्सा नहीं थे। वेस्टइंडीज के आगामी दौरे पर उनके टीम के साथ जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन कोरोना ने इन उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। इस स्टार खिलाड़ी की गैरमौजूदगी में टी20 सीरीज में ऋषभ पंत ही रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग करते हुए नजर आ सकते हैं। ईशान किशन भी एक ओपनिंग विकल्प के तौर पर टीम के साथ मौजूद हैं।
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IND vs WI: भारतीय टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ उनतीस जुलाई से पांच मैचों की टीबीस सीरीज खेलेगी। इस सीरीज के लिए पहले ही टीम का ऐलान कर दिया गया था और कुलदीप यादव व केएल राहुल की जगह को फिटनेस पर निर्भर रखा गया था। राहुल एनसीए में रिकवरी कर रहे थे और हाल ही में जर्मनी से भी अपनी ग्रोइन इंजरी का इलाज करवाकर आए थे। उम्मीद सभी को थी कि वह टीबीस सीरीज में वापसी करेंगे लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि वह पूरी टीबीस सीरीज यानी सभी पांच मैचों से बाहर हो सकते हैं। केएल राहुल आईपीएल के बाद से क्रिकेट फील्ड पर नजर नहीं आए हैं। उन्होंने इंटरनेशनल मुकाबला भारत के लिए आखिरी बार नौ फरवरी दो हज़ार बाईस को वेस्टइंडीज के ही खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में खेला था। वहीं नवंबर दो हज़ार इक्कीस में न्यूजीलैंड के खिलाफ वह आखिरी टीबीस मैच खेले थे। टेस्ट मैच में भी वह इस साल की शुरुआत में साउथ अफ्रीका के खिलाफ ही आखिरी बार खेले थे। लंबे समय से उनके लिए इंटरनेशनल सर्किट से दूर रहना उनकी टीबीस वर्ल्ड कप की जगह पर भी खतरा पैदा कर सकता है। केएल राहुल पर क्या है ताजा अपडेट? आपको बता दें कि पिछले हफ्ते केएल राहुल को कोरोना संक्रमित भी पाया गया था। जिसके बाद सत्ताईस जुलाई को उनका आइसोलेशन पीरियड खत्म होना था लेकिन जानकारी के मुताबिक बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने उनको एक और हफ्ते आराम करने के लिए कहा है। इसी कारण केएल राहुल वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी पांच मैचों की टीबीस सीरीज के सभी मुकाबलों से बाहर हो सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि उनकी वापसी अब संभवतः अट्ठारह, बीस और बाईस अगस्त को जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले तीन वनडे मैचों की सीरीज में ही होगी। केएल राहुल को आईपीएल के बाद साउथ अफ्रीका के खिलाफ पांच मैचों की टीबीस सीरीज के लिए टीम का कप्तान और इंग्लैंड के दौरे पर उपकप्तान नियुक्त किया गया था। वह लगातार इन सभी मौकों पर टीम का हिस्सा नहीं थे। वेस्टइंडीज के आगामी दौरे पर उनके टीम के साथ जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन कोरोना ने इन उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। इस स्टार खिलाड़ी की गैरमौजूदगी में टीबीस सीरीज में ऋषभ पंत ही रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग करते हुए नजर आ सकते हैं। ईशान किशन भी एक ओपनिंग विकल्प के तौर पर टीम के साथ मौजूद हैं।
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किसी भी क्रिकेटर के लिए एक साल तक इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर रहना और फिर धमाकेदार वापसी करना आसान नहीं होता है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पूर्व उप कप्तान डेविड वार्नर ने इसे झूठा साबित कर दिया है।
पढ़ेंः सानिया मिर्जा पर निशाना साधने वालों को अख्तर का जवाब, कहा..
बॉल टैंपरिंग मामले में एक साल का बैन झेलने के बाद वार्नर की इंग्लैंड में जारी 12वें क्रिकेट वर्ल्ड कप के तहत इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी हुई है। वार्नर का बल्ला इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में जमकर बोल रहा है।
32 वर्षीय इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने मौजूदा वर्ल्ड कप में अब तक 2 शतक और 2 अर्धशतक लगाए हैं। वार्नर ने वर्ल्ड कप के 26वें मैच में बांग्लादेश के खिलाफ 147 गेंदों पर 166 रन धमाकेदार पारी खेली। उन्होंने इस दौरान 14 चौके और 5 छक्के लगाए। वार्नर के वनडे करियर का ये 16वां शतक है।
वार्नर ने इस वर्ल्ड कप में अब तक दो सेंचुरी लगाई है। उन्होंने पहली सेंचुरी पाकिस्तान के खिलाफ 12 जून को टांटन में खेले गए मुकाबले में 111 गेंदों पर 107 रन की पारी खेली थी। उनकी शतकीय पारी में 11 चौके और 1 छक्का शामिल था। इस मुकाबले को ऑस्ट्रेलिया ने 41 रन से जीता था।
डेविड वार्नर ऑस्ट्रेलिया की ओर से सर्वाधिक वनडे शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में एडम गिलक्रिस्ट के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। इस लिस्ट में दिग्गज रिकी पोटिंग 29 शतकों के साथ पहले जबकि पूर्व बल्लेबाज मार्क वॉ 18 शतकों के साथ दूसरे नंबर पर हैं।
वार्नर ने बांग्लादेश के खिलाफ मैच में बतौर ओपनर कप्तान एरोन फिंच के साथ पहले विकेट के लिए 121 रन जोड़कर ऑस्ट्रेलिया को शानदार शुरुआत दिलाई। इसमें फिंच के 53 और वार्नर के 62 रन शामिल थे। इसके बाद वार्नर ने उस्मान ख्वाजा के साथ मिलकर दूसरे विकेट पर 192 रन जोड़े जिसमें वार्नर के 100 रन और ख्वाजा के 83 रन शामिल थे।
डेविड वार्नर वर्ल्ड कप के इतिहास में दो बार 150 से अधिक का स्कोर करने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने इससे पहले 2015 के वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान के खिलाफ 178 रन की पारी खेली थी।
वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे अधिक बार 150 से अधिक का स्कोर बनाने का रिकॉर्ड भारतीय टीम के उप कप्तान रोहित शर्मा के नाम है। रोहित ने 7 जबकि वार्नर ने 6 बार इस उपलब्धि को हासिल की है। इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर संयुक्त रूप से विंडीज के विस्फोटक ओपनर क्रिस गेल और दिग्गज सचिन तेंदुलकर हैं जिन्होंने 5 बार एक समान 150 से अधिक का स्कोर किया है।
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किसी भी क्रिकेटर के लिए एक साल तक इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर रहना और फिर धमाकेदार वापसी करना आसान नहीं होता है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पूर्व उप कप्तान डेविड वार्नर ने इसे झूठा साबित कर दिया है। पढ़ेंः सानिया मिर्जा पर निशाना साधने वालों को अख्तर का जवाब, कहा.. बॉल टैंपरिंग मामले में एक साल का बैन झेलने के बाद वार्नर की इंग्लैंड में जारी बारहवें क्रिकेट वर्ल्ड कप के तहत इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी हुई है। वार्नर का बल्ला इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में जमकर बोल रहा है। बत्तीस वर्षीय इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने मौजूदा वर्ल्ड कप में अब तक दो शतक और दो अर्धशतक लगाए हैं। वार्नर ने वर्ल्ड कप के छब्बीसवें मैच में बांग्लादेश के खिलाफ एक सौ सैंतालीस गेंदों पर एक सौ छयासठ रन धमाकेदार पारी खेली। उन्होंने इस दौरान चौदह चौके और पाँच छक्के लगाए। वार्नर के वनडे करियर का ये सोलहवां शतक है। वार्नर ने इस वर्ल्ड कप में अब तक दो सेंचुरी लगाई है। उन्होंने पहली सेंचुरी पाकिस्तान के खिलाफ बारह जून को टांटन में खेले गए मुकाबले में एक सौ ग्यारह गेंदों पर एक सौ सात रन की पारी खेली थी। उनकी शतकीय पारी में ग्यारह चौके और एक छक्का शामिल था। इस मुकाबले को ऑस्ट्रेलिया ने इकतालीस रन से जीता था। डेविड वार्नर ऑस्ट्रेलिया की ओर से सर्वाधिक वनडे शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में एडम गिलक्रिस्ट के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। इस लिस्ट में दिग्गज रिकी पोटिंग उनतीस शतकों के साथ पहले जबकि पूर्व बल्लेबाज मार्क वॉ अट्ठारह शतकों के साथ दूसरे नंबर पर हैं। वार्नर ने बांग्लादेश के खिलाफ मैच में बतौर ओपनर कप्तान एरोन फिंच के साथ पहले विकेट के लिए एक सौ इक्कीस रन जोड़कर ऑस्ट्रेलिया को शानदार शुरुआत दिलाई। इसमें फिंच के तिरेपन और वार्नर के बासठ रन शामिल थे। इसके बाद वार्नर ने उस्मान ख्वाजा के साथ मिलकर दूसरे विकेट पर एक सौ बानवे रन जोड़े जिसमें वार्नर के एक सौ रन और ख्वाजा के तिरासी रन शामिल थे। डेविड वार्नर वर्ल्ड कप के इतिहास में दो बार एक सौ पचास से अधिक का स्कोर करने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने इससे पहले दो हज़ार पंद्रह के वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान के खिलाफ एक सौ अठहत्तर रन की पारी खेली थी। वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे अधिक बार एक सौ पचास से अधिक का स्कोर बनाने का रिकॉर्ड भारतीय टीम के उप कप्तान रोहित शर्मा के नाम है। रोहित ने सात जबकि वार्नर ने छः बार इस उपलब्धि को हासिल की है। इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर संयुक्त रूप से विंडीज के विस्फोटक ओपनर क्रिस गेल और दिग्गज सचिन तेंदुलकर हैं जिन्होंने पाँच बार एक समान एक सौ पचास से अधिक का स्कोर किया है।
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नई दिल्ली। आज की जिंदगी में World Kidney Day लोगों को कब कौन सी Symptoms Of Kidney Disease बीमारी घेर ले कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे में सबसे अधिक खतरनाक बीमारी के रूप में आजकल जो सुनाई दे रही है वो है किडनी प्रॉब्लम। चलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे कुछ खास लक्षण। जिनसे आपको किडनी की समस्या को लेकर सतर्क हो सकते है। आज वर्ल्ड किडनी डे है। तो आप भी जान लें क्या हो सकते हैं वे लक्षण। ताकि सेहत का ध्यान रखा जा सके।
हमारे शरीर में खून से अपशिष्ट पदार्थ, अतिरिक्त पानी और अशुद्धियों को फिल्टर करके बाहर निकालने का काम किडनी ही करती है। आपको बता दें ये सारे अपशिष्ट उत्पाद फिल्टर करने के बाद ब्लैडर में जमा हो जाते हैं। इसके बाद में यूरिन से बाहर निकल जाते हैं।
किडनी संबंधी रोगों में अक्सर ऐसा होता है कि जब समस्या बढ़ जाती है तब इसके बारे में पता चलता है। पर तब तक उनकी किडनी डैमेज हो चुकी होती है। लेकिन कुछ ऐसे संकेत भी हैं, जो इस बात का संकेत देखे हैं कि किडनी सही तरह से काम नहीं कर रही है। आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है।
किडनी डिजीज के लक्षण (Symptoms of kidney disease)
आपको बता दें शुरुआती लक्षणों में आपको समस्या सामान्य लगती है लेकिन जैसे - जैसे किडनी बिगड़ती है उसके लक्षण भी सामने आते जाते हैं।
किडनी की बीमारी होने का कारण (Cause of kidney disease)
किडनी की समस्या अन्य बीमारियों के कारण भी बढ़ती हैं। ऐसे में आपको ये भी ध्यान रखना होगा कि आपको और भी बीमारियां घेरे हुए हैं। अतः किसी भी तरह के इलाज के पहले अपने चिकित्सक की सलाह जरूर ले लें।
कब दिखाएं डॉक्टर को (When to see a doctor)
जानकारों की मानें तो अगर आपको भी किडनी के लक्षण दिख रहे हैं तो बिना देर किए तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
ताकि किडनी को फेल होने से रोका जा सके। हालांकि कुछ दिए गए लक्षणों के अलावा यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट आदि के माध्यम से किडनी के काम करने के तरीकों और स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
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नई दिल्ली। आज की जिंदगी में World Kidney Day लोगों को कब कौन सी Symptoms Of Kidney Disease बीमारी घेर ले कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे में सबसे अधिक खतरनाक बीमारी के रूप में आजकल जो सुनाई दे रही है वो है किडनी प्रॉब्लम। चलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे कुछ खास लक्षण। जिनसे आपको किडनी की समस्या को लेकर सतर्क हो सकते है। आज वर्ल्ड किडनी डे है। तो आप भी जान लें क्या हो सकते हैं वे लक्षण। ताकि सेहत का ध्यान रखा जा सके। हमारे शरीर में खून से अपशिष्ट पदार्थ, अतिरिक्त पानी और अशुद्धियों को फिल्टर करके बाहर निकालने का काम किडनी ही करती है। आपको बता दें ये सारे अपशिष्ट उत्पाद फिल्टर करने के बाद ब्लैडर में जमा हो जाते हैं। इसके बाद में यूरिन से बाहर निकल जाते हैं। किडनी संबंधी रोगों में अक्सर ऐसा होता है कि जब समस्या बढ़ जाती है तब इसके बारे में पता चलता है। पर तब तक उनकी किडनी डैमेज हो चुकी होती है। लेकिन कुछ ऐसे संकेत भी हैं, जो इस बात का संकेत देखे हैं कि किडनी सही तरह से काम नहीं कर रही है। आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है। किडनी डिजीज के लक्षण आपको बता दें शुरुआती लक्षणों में आपको समस्या सामान्य लगती है लेकिन जैसे - जैसे किडनी बिगड़ती है उसके लक्षण भी सामने आते जाते हैं। किडनी की बीमारी होने का कारण किडनी की समस्या अन्य बीमारियों के कारण भी बढ़ती हैं। ऐसे में आपको ये भी ध्यान रखना होगा कि आपको और भी बीमारियां घेरे हुए हैं। अतः किसी भी तरह के इलाज के पहले अपने चिकित्सक की सलाह जरूर ले लें। कब दिखाएं डॉक्टर को जानकारों की मानें तो अगर आपको भी किडनी के लक्षण दिख रहे हैं तो बिना देर किए तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। ताकि किडनी को फेल होने से रोका जा सके। हालांकि कुछ दिए गए लक्षणों के अलावा यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट आदि के माध्यम से किडनी के काम करने के तरीकों और स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
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Hi,
"कांग्रेस"
भाजपा के साथ सरकार बनाने की कोशिश समेत अजित ने शरद पवार पर क्या-क्या आरोप लगाए?
अजित पवार की 2019 की बगावत को विफल करने वालीं NCP नेता सोनिया दुहन कौन हैं?
#NewsBytesExplainer: NCP में बगावत के जरिए भाजपा की लोकसभा चुनाव के लिए क्या रणनीति है?
#NewsBytesExplainer: NCP की जंग में शरद पवार और अजित पवार में से किसके पास ज्यादा विधायक?
#NewsBytesExplainer: बगावत करने वाले NCP के किन-किन नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच चल रही है?
अजित की बगावत से शरद पवार के एक्शन तक, NCP में 2 दिन में क्या-क्या हुआ?
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Hi, "कांग्रेस" भाजपा के साथ सरकार बनाने की कोशिश समेत अजित ने शरद पवार पर क्या-क्या आरोप लगाए? अजित पवार की दो हज़ार उन्नीस की बगावत को विफल करने वालीं NCP नेता सोनिया दुहन कौन हैं? #NewsBytesExplainer: NCP में बगावत के जरिए भाजपा की लोकसभा चुनाव के लिए क्या रणनीति है? #NewsBytesExplainer: NCP की जंग में शरद पवार और अजित पवार में से किसके पास ज्यादा विधायक? #NewsBytesExplainer: बगावत करने वाले NCP के किन-किन नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच चल रही है? अजित की बगावत से शरद पवार के एक्शन तक, NCP में दो दिन में क्या-क्या हुआ? Oops some error happened! Please try after some time.
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डेस्कः शास्त्रों की बात करें तो राशिफल में शामिल कुछ राशियां ऐसी हैं। जिन राशियों की कुंडली में शिवयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिसके कारण उन राशियों के लोगों को बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं तथा उनके दैनिक जीवन में अच्छे दिन आ सकते हैं। इसी विषय में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जानने की कोशिश करेंगे उन राशियों के बारे में जिन राशियों के लोगों की कुंडली में शिवयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिससे उन्हें बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। तो आइये जानते हैं विस्तार से।
कन्या और वृष राशि, शास्त्रों के अनुसार कन्या और वृष राशि की कुंडली में शिवयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिससे इनकी जिंदगी संवर सकती हैं। इन्हे जीवन में बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। इस राशि के जातक आर्थिक रूप से तरक्की हासिल कर सकते हैं। इनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। इनके धन दौलत में वृद्धि हो सकती हैं। लव पार्टनर का साथ इन्हे भाग्यशाली बना सकता हैं। इनके लिए भगवान शिव का दर्शन करना शुभ रहेगा।
मकर और मेष राशि, बहुत दिनों के बाद मकर और मेष राशि की कुंडली में शिवयोग का निर्माण हो रहा हैं। जो इनके दैनिक जीवन के लिए बेहद खास हैं। इससे इनके जीवन की सभी समस्या दूर हो सकती हैं। इन्हे जीवन में बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। इनके धन दौलत में वृद्धि हो सकती हैं। ये लोग एक सफल जीवन जी सकते हैं। जीवनसाथी का साथ मिल सकता हैं। शादीशुदा लोगों को संतान का सुख मिल सकता हैं। भगवान शिव की कृपा इनपर बनी रहेगी।
सिंह और धनु राशि, शास्त्रों के अनुसार सिंह और धनु राशि की कुंडली के दूसरे भाव में शिवयोग का निर्माण हो रहा हैं। जो इनके लिए बेहद खास हैं। इससे इन्हे जीवन में बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। कैरियर के छेत्र में इन्हे मनचाहा सफलता मिल सकती हैं। इनके जीवन की सभी परेशानी दूर हो सकती हैं। ये लोग बिजनेस व्यापार में भी तरक्की हासिल कर सकते हैं। इनके घरों में सुख, शांति और समृद्धि आ सकती हैं। भगवान शिव की कृपा इनपर बनी रहेगी।
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डेस्कः शास्त्रों की बात करें तो राशिफल में शामिल कुछ राशियां ऐसी हैं। जिन राशियों की कुंडली में शिवयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिसके कारण उन राशियों के लोगों को बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं तथा उनके दैनिक जीवन में अच्छे दिन आ सकते हैं। इसी विषय में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जानने की कोशिश करेंगे उन राशियों के बारे में जिन राशियों के लोगों की कुंडली में शिवयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिससे उन्हें बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। तो आइये जानते हैं विस्तार से। कन्या और वृष राशि, शास्त्रों के अनुसार कन्या और वृष राशि की कुंडली में शिवयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिससे इनकी जिंदगी संवर सकती हैं। इन्हे जीवन में बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। इस राशि के जातक आर्थिक रूप से तरक्की हासिल कर सकते हैं। इनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। इनके धन दौलत में वृद्धि हो सकती हैं। लव पार्टनर का साथ इन्हे भाग्यशाली बना सकता हैं। इनके लिए भगवान शिव का दर्शन करना शुभ रहेगा। मकर और मेष राशि, बहुत दिनों के बाद मकर और मेष राशि की कुंडली में शिवयोग का निर्माण हो रहा हैं। जो इनके दैनिक जीवन के लिए बेहद खास हैं। इससे इनके जीवन की सभी समस्या दूर हो सकती हैं। इन्हे जीवन में बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। इनके धन दौलत में वृद्धि हो सकती हैं। ये लोग एक सफल जीवन जी सकते हैं। जीवनसाथी का साथ मिल सकता हैं। शादीशुदा लोगों को संतान का सुख मिल सकता हैं। भगवान शिव की कृपा इनपर बनी रहेगी। सिंह और धनु राशि, शास्त्रों के अनुसार सिंह और धनु राशि की कुंडली के दूसरे भाव में शिवयोग का निर्माण हो रहा हैं। जो इनके लिए बेहद खास हैं। इससे इन्हे जीवन में बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। कैरियर के छेत्र में इन्हे मनचाहा सफलता मिल सकती हैं। इनके जीवन की सभी परेशानी दूर हो सकती हैं। ये लोग बिजनेस व्यापार में भी तरक्की हासिल कर सकते हैं। इनके घरों में सुख, शांति और समृद्धि आ सकती हैं। भगवान शिव की कृपा इनपर बनी रहेगी।
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खेल, डेस्क रिपोर्ट। टी-20 वर्ल्ड कप शुरू होने में बस 1 महिना बाकी है। मैच की तैयारियां भी टीम ने शुरू कर दी है। 15 सदस्यों के इंडियन टीम की घोषणा भी हो चुकी है। रोहित शर्मा को कप्तान बनाया गया है। बता दें की T-20 वर्ल्ड कप (T-20 World Cup) की शुरुआत 16 अक्टूबर 2022 से ऑस्ट्रेलिया में शुरू हो रही है। 23 अक्टूबर को इंडियन टीम और पाकिस्तान की टीम का घमासान टक्कर होगा। टीम में हर्षल पटेल और जसप्रीत बुमराह की वापसी हो चुकी है। उप-कप्तान केएल राहुल बने हैं।
टीम में विराट कोहली, दीपक हुड्डा, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), हार्दिक पंड्या, आर अश्विनी, दिनेश कार्तिक (विकेटकीपर), अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह, यूजेन्द्र चहल, भुवनेश्वर कुमार, अर्शदीप सिंह और हर्ष पटेल शामिल हैं। स्टैन्ड बाय में श्रेयस अय्यर, दीपक चाहर, रवि बिश्नोई और मोहम्मद शमी है।
आखिरी बार 2007 में भारत ने टी-20 जीता था। करीब 15 सालों से इंडियन क्रिकेट टीम टूर्नामेंट को जीतने में असफल रही है। वहीं दूसरी तरफ रवींद्र जडेजा भी टी-20 वर्ल्ड कप से आउट हो चुके हैं। उनके घुटने का ऑपरेशन हुआ, जिसके कारण वो टी-20 वर्ल्ड कप में शामिल नहीं हो पाएंगे। एशिया कप में बेहतरीन प्रदर्शन करने के बाद युवा खिलाड़ी अर्शदीप सिंह और रवि बिश्नोई को भी इस साल टीम में जगह मिली है। हालांकि भारतीय टीम एशिया कप जीतने में असफल रही।
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खेल, डेस्क रिपोर्ट। टी-बीस वर्ल्ड कप शुरू होने में बस एक महिना बाकी है। मैच की तैयारियां भी टीम ने शुरू कर दी है। पंद्रह सदस्यों के इंडियन टीम की घोषणा भी हो चुकी है। रोहित शर्मा को कप्तान बनाया गया है। बता दें की T-बीस वर्ल्ड कप की शुरुआत सोलह अक्टूबर दो हज़ार बाईस से ऑस्ट्रेलिया में शुरू हो रही है। तेईस अक्टूबर को इंडियन टीम और पाकिस्तान की टीम का घमासान टक्कर होगा। टीम में हर्षल पटेल और जसप्रीत बुमराह की वापसी हो चुकी है। उप-कप्तान केएल राहुल बने हैं। टीम में विराट कोहली, दीपक हुड्डा, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत , हार्दिक पंड्या, आर अश्विनी, दिनेश कार्तिक , अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह, यूजेन्द्र चहल, भुवनेश्वर कुमार, अर्शदीप सिंह और हर्ष पटेल शामिल हैं। स्टैन्ड बाय में श्रेयस अय्यर, दीपक चाहर, रवि बिश्नोई और मोहम्मद शमी है। आखिरी बार दो हज़ार सात में भारत ने टी-बीस जीता था। करीब पंद्रह सालों से इंडियन क्रिकेट टीम टूर्नामेंट को जीतने में असफल रही है। वहीं दूसरी तरफ रवींद्र जडेजा भी टी-बीस वर्ल्ड कप से आउट हो चुके हैं। उनके घुटने का ऑपरेशन हुआ, जिसके कारण वो टी-बीस वर्ल्ड कप में शामिल नहीं हो पाएंगे। एशिया कप में बेहतरीन प्रदर्शन करने के बाद युवा खिलाड़ी अर्शदीप सिंह और रवि बिश्नोई को भी इस साल टीम में जगह मिली है। हालांकि भारतीय टीम एशिया कप जीतने में असफल रही।
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Ranchi: झारखंड में पुलिस ने सोमवार को पांच नक्सलियों को मार गिराया. माओवादी एक गुफा में छिपे हुए थे और पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में उन सभी को मार गिराया. इन पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था. माओवादियों में से दो बिहार के थे और दो झारखंड के थे.
एसएसी कमांडर (गौतम पासवान), अजीत उरांव (उर्फ चार्ली), सब जोनल कमांडर अमर गंझू, नंदू और संजीत भुइयां चतरा पुलिस मुठभेड़ में शामिल हैं. एसएसी कमांडरों के लिए 25 लाख रुपये और सब-जोनल कमांडरों के लिए पांच-पांच लाख रुपये का इनाम है. दो एके 47, एक इंसास राइफल और दो नियमित राइफलें मिली हैं. चतरा में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है.
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Ranchi: झारखंड में पुलिस ने सोमवार को पांच नक्सलियों को मार गिराया. माओवादी एक गुफा में छिपे हुए थे और पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में उन सभी को मार गिराया. इन पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था. माओवादियों में से दो बिहार के थे और दो झारखंड के थे. एसएसी कमांडर , अजीत उरांव , सब जोनल कमांडर अमर गंझू, नंदू और संजीत भुइयां चतरा पुलिस मुठभेड़ में शामिल हैं. एसएसी कमांडरों के लिए पच्चीस लाख रुपये और सब-जोनल कमांडरों के लिए पांच-पांच लाख रुपये का इनाम है. दो एके सैंतालीस, एक इंसास राइफल और दो नियमित राइफलें मिली हैं. चतरा में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है.
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नई दिल्लीः जार एक काम को दोनों मिलकर करें तो वो काम और भी जल्दी और भी अच्छा होता है, हमेशा से कहा जाता है एक से भले दो ऐसा ही कुछ करेल में भी हुआ है जो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। कहते है न पति-पत्नी गृहस्थी के दो पहिये होते है दोनों का सही तालमेल बैठना बहुत जरुरी होता है, ऐसा ही एक शानदार जोड़ा है जो केरल की सबसे सुंदर बस चलाते है। जी हां केरल के रहने वाले गिरी और तारा (Giri and Tara Bus Service) एक ऐसे ही कपल हैं, जिन्हें लोगों को बस का खूबसूरत सफर कराना पसंद है और आज वो अपनी इसी हॉबी की वजह सोशल मीडिया (Viral Video On Social Media) पर सुर्खियां बटोर रहे हैं, यह जोड़ा सोशल मीडिया पर चाय हुआ है।
आपको बता दें कि केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (Kerala State Road Transport Corporation) की एक बस को चलाने की पूरी ज़िम्मेदारी इसी जोड़े ने उठा रखी है। जी हां मजे की बात ये है कि बस में पति गिरी ड्राइवर का काम करते हैं और पत्नी तारा कंडक्टर का काम करती हैं। वे दोनों बस को इतने प्यार और खूबसूरती से चला रहे हैं कि लोगों को इसका सफर बहुत पसंद आ रहा है। अब वो अलापुझा जिले (Alappuzha) में खासे मशहूर हो चुके हैं। लोग उनकी बस में सफर करना बहुत पसंद कर रहे है।
आपको बता दें कि फेसबुक पर Iype Vallikadan नाम के शख्स ने इस बस और कपल से जुड़ा एक वीडियो डाला, जिसे 10 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा। जानकारी के लिए आपको बता दें कि ये बस केरल की बाकी बसों से बिल्कुल अलग है क्योंकि इसमें यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम से लेकर उनके मनोरंजन तक का ख्याल रखा जाता है। बस के अंदर 6 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और इमरजेंसी स्विच मौजूद हैं। लोगों के मनोरंजन के लिए म्यूज़िक सिस्टम और ऑटोमेटिक एयर फ्रेशनर लगाया गया है। बस को डॉल्स और ऐसे ही तमाम सजावटी चीज़ों से सजाया गया है। लोगों को स्टेशन बताने के लिए एलईडी डेस्टिनेशन बोर्ड भी लगाया गया है, इस तरह इस बस को आम लोगों के लिए एकदम बढ़िया तरीके से सजाया गया है।
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नई दिल्लीः जार एक काम को दोनों मिलकर करें तो वो काम और भी जल्दी और भी अच्छा होता है, हमेशा से कहा जाता है एक से भले दो ऐसा ही कुछ करेल में भी हुआ है जो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। कहते है न पति-पत्नी गृहस्थी के दो पहिये होते है दोनों का सही तालमेल बैठना बहुत जरुरी होता है, ऐसा ही एक शानदार जोड़ा है जो केरल की सबसे सुंदर बस चलाते है। जी हां केरल के रहने वाले गिरी और तारा एक ऐसे ही कपल हैं, जिन्हें लोगों को बस का खूबसूरत सफर कराना पसंद है और आज वो अपनी इसी हॉबी की वजह सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहे हैं, यह जोड़ा सोशल मीडिया पर चाय हुआ है। आपको बता दें कि केरल राज्य सड़क परिवहन निगम की एक बस को चलाने की पूरी ज़िम्मेदारी इसी जोड़े ने उठा रखी है। जी हां मजे की बात ये है कि बस में पति गिरी ड्राइवर का काम करते हैं और पत्नी तारा कंडक्टर का काम करती हैं। वे दोनों बस को इतने प्यार और खूबसूरती से चला रहे हैं कि लोगों को इसका सफर बहुत पसंद आ रहा है। अब वो अलापुझा जिले में खासे मशहूर हो चुके हैं। लोग उनकी बस में सफर करना बहुत पसंद कर रहे है। आपको बता दें कि फेसबुक पर Iype Vallikadan नाम के शख्स ने इस बस और कपल से जुड़ा एक वीडियो डाला, जिसे दस लाख से ज्यादा लोगों ने देखा। जानकारी के लिए आपको बता दें कि ये बस केरल की बाकी बसों से बिल्कुल अलग है क्योंकि इसमें यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम से लेकर उनके मनोरंजन तक का ख्याल रखा जाता है। बस के अंदर छः सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और इमरजेंसी स्विच मौजूद हैं। लोगों के मनोरंजन के लिए म्यूज़िक सिस्टम और ऑटोमेटिक एयर फ्रेशनर लगाया गया है। बस को डॉल्स और ऐसे ही तमाम सजावटी चीज़ों से सजाया गया है। लोगों को स्टेशन बताने के लिए एलईडी डेस्टिनेशन बोर्ड भी लगाया गया है, इस तरह इस बस को आम लोगों के लिए एकदम बढ़िया तरीके से सजाया गया है।
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इंग्लैंड ने 50 ओवर में सात विकेट पर 227 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम ने 44. 2 ओवर में तीन विकेट पर 232 रन बनाकर मैच को अपने नाम कर लिया। अनुभवी तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने अपनी अंतिम अंतरराष्ट्रीय सीरीज के पहले मैच में प्रभावित किया।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम इंग्लैंड दौरे पर तीन वनडे मैचों की सीरीज की शुरुआत जीत के साथ ही है। उसने होव में खेले गए पहले मुकाबले मेजबान इंग्लैंड को सात विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। इससे पहले टी20 सीरीज में उसे 1-2 से हार मिली थी। भारत की जीत में बाएं हाथ की ओपनर स्मृति मंधाना, कप्तान हरमनप्रीत कौर, यास्तिका भाटिया और अनुभवी तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने अहम योगदान दिया।
इंग्लैंड ने 50 ओवर में सात विकेट पर 227 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम ने 44. 2 ओवर में तीन विकेट पर 232 रन बनाकर मैच को अपने नाम कर लिया। अनुभवी तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने अपनी अंतिम अंतरराष्ट्रीय सीरीज के पहले मैच में प्रभावित किया। उन्होंने 10 ओवर सिर्फ 20 रन दिए और एक विकेट भी हासिल किया। झूलन के 10 ओवर में इंग्लैंड की टीम एक भी बाउंड्री नहीं लगा पाई।
स्मृति मंधाना शतक से चूक गईं। उन्होंने 99 गेंद पर 91 रन बनाए। इस दौरान मंधाना के बल्ले से 10 चौके निकले। उन्होंने एक छक्का भी लगाया। कप्तान हरमनप्रीत 94 गेंद पर 74 रन बनाकर नाबाद रहीं। उन्होंने सात चौका और एक छक्का लगाया। यास्तिका भाटिया ने 47 गेंद पर 50 रन की पारी खेली। शेफाली वर्मा एक रन बनाकर आउट हुईं। हरलीन देओल छह रन बनाकर नाबाद रहीं।
भारत की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया। 39 वर्षीय दिग्गज झूलन ने 10 ओवर में सिर्फ 20 रन देकर एक विकेट हासिल किया और इस दौरान 42 डॉट गेंद (जिन गेंदों पर रन नहीं बने) फेंकी। दीप्ति शर्मा ने उनका अच्छा साथ निभाते हुए 33 रन देकर दो विकेट चटकाए। झूलन की गेंद पर एक भी चौका या छक्का नहीं लगा और उन्होंने अनुभवी सलामी बल्लेबाज टैमी ब्यूमोंट (07) को एलबीडब्ल्यू किया।
तेज गेंदबाज मेघना सिंह (1/42) ने दूसरी सलामी बल्लेबाज ऐमा लैंब (12) को शॉर्ट गेंद पर विकेटकीपर यस्तिका भाटिया के हाथों कैच कराया। इसके बाद झूलन ने दो स्पिनरों दीप्ति और राजेश्वरी गायकवाड़ (1/40) के साथ मिलकर रन गति पर अंकुश लगाया। हालांकि, मेघना के अलावा स्नेह राणा (1/45) और पूजा वस्त्रकार (दो ओवर में 20 रन) महंगी साबित हुई जिससे मेजबान टीम ने अंत में 220 से अधिक का स्कोर बनाया।
इंग्लैंड के लिए डैनी वाट (43 रन), एलिस डेविडसन-रिचर्ड्स (नाबाद 50) और सोफी एक्लेस्टोन (31) ने प्रमुख योगदान दिया। चार्ली डीन ने अंत में 21 गेंद में नाबाद 24 रन बनाए। इंग्लैंड का स्कोर 34वें ओवर में छह विकेट पर 128 रन था लेकिन सातवें, आठवें और नौवें नंबर की बल्लेबाजों ने 100 से अधिक रन जोड़कर टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया। डेविडसन-रिचर्ड्स ने एक्लेस्टोन के सातवें विकेट के लिए 50 और आठवें विकेट के लिए डीन के साथ नाबाद 49 रन की साझेदारी की।
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इंग्लैंड ने पचास ओवर में सात विकेट पर दो सौ सत्ताईस रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम ने चौंतालीस. दो ओवर में तीन विकेट पर दो सौ बत्तीस रन बनाकर मैच को अपने नाम कर लिया। अनुभवी तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने अपनी अंतिम अंतरराष्ट्रीय सीरीज के पहले मैच में प्रभावित किया। भारतीय महिला क्रिकेट टीम इंग्लैंड दौरे पर तीन वनडे मैचों की सीरीज की शुरुआत जीत के साथ ही है। उसने होव में खेले गए पहले मुकाबले मेजबान इंग्लैंड को सात विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया सीरीज में एक-शून्य की बढ़त हासिल कर ली है। इससे पहले टीबीस सीरीज में उसे एक-दो से हार मिली थी। भारत की जीत में बाएं हाथ की ओपनर स्मृति मंधाना, कप्तान हरमनप्रीत कौर, यास्तिका भाटिया और अनुभवी तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने अहम योगदान दिया। इंग्लैंड ने पचास ओवर में सात विकेट पर दो सौ सत्ताईस रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम ने चौंतालीस. दो ओवर में तीन विकेट पर दो सौ बत्तीस रन बनाकर मैच को अपने नाम कर लिया। अनुभवी तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने अपनी अंतिम अंतरराष्ट्रीय सीरीज के पहले मैच में प्रभावित किया। उन्होंने दस ओवर सिर्फ बीस रन दिए और एक विकेट भी हासिल किया। झूलन के दस ओवर में इंग्लैंड की टीम एक भी बाउंड्री नहीं लगा पाई। स्मृति मंधाना शतक से चूक गईं। उन्होंने निन्यानवे गेंद पर इक्यानवे रन बनाए। इस दौरान मंधाना के बल्ले से दस चौके निकले। उन्होंने एक छक्का भी लगाया। कप्तान हरमनप्रीत चौरानवे गेंद पर चौहत्तर रन बनाकर नाबाद रहीं। उन्होंने सात चौका और एक छक्का लगाया। यास्तिका भाटिया ने सैंतालीस गेंद पर पचास रन की पारी खेली। शेफाली वर्मा एक रन बनाकर आउट हुईं। हरलीन देओल छह रन बनाकर नाबाद रहीं। भारत की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया। उनतालीस वर्षीय दिग्गज झूलन ने दस ओवर में सिर्फ बीस रन देकर एक विकेट हासिल किया और इस दौरान बयालीस डॉट गेंद फेंकी। दीप्ति शर्मा ने उनका अच्छा साथ निभाते हुए तैंतीस रन देकर दो विकेट चटकाए। झूलन की गेंद पर एक भी चौका या छक्का नहीं लगा और उन्होंने अनुभवी सलामी बल्लेबाज टैमी ब्यूमोंट को एलबीडब्ल्यू किया। तेज गेंदबाज मेघना सिंह ने दूसरी सलामी बल्लेबाज ऐमा लैंब को शॉर्ट गेंद पर विकेटकीपर यस्तिका भाटिया के हाथों कैच कराया। इसके बाद झूलन ने दो स्पिनरों दीप्ति और राजेश्वरी गायकवाड़ के साथ मिलकर रन गति पर अंकुश लगाया। हालांकि, मेघना के अलावा स्नेह राणा और पूजा वस्त्रकार महंगी साबित हुई जिससे मेजबान टीम ने अंत में दो सौ बीस से अधिक का स्कोर बनाया। इंग्लैंड के लिए डैनी वाट , एलिस डेविडसन-रिचर्ड्स और सोफी एक्लेस्टोन ने प्रमुख योगदान दिया। चार्ली डीन ने अंत में इक्कीस गेंद में नाबाद चौबीस रन बनाए। इंग्लैंड का स्कोर चौंतीसवें ओवर में छह विकेट पर एक सौ अट्ठाईस रन था लेकिन सातवें, आठवें और नौवें नंबर की बल्लेबाजों ने एक सौ से अधिक रन जोड़कर टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया। डेविडसन-रिचर्ड्स ने एक्लेस्टोन के सातवें विकेट के लिए पचास और आठवें विकेट के लिए डीन के साथ नाबाद उनचास रन की साझेदारी की। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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बेटी की शादी के बाद कुलदेवी की पूजा करवाने संजना भारत आई थी । अपने लोगों से चारों ओर खुद को घिरा पाकर उसका मन लाल ऊँन के गोले-सा लुढ़का जा रहा था । चाबियों का गुच्छा निकाल उसने जल्दी से दरवाज़ा खोला तो देखा चारों ओर मकड़ियों के जाले लटक रहे थे । सबसे पहले संजना ने खिड़कियों के पर्दे खोले और ड्राइंगरूम में लगी फैमिली-फ़ोटोग्राफ़ साफ़ करने के लिए बेटी से कहा। सुहानी ने इधर-उधर डस्टर ढूंढा जब नहीं मिला तो वह रूमाल से ही उसे पोंछने लगी ।
"माँ, यहाँ आकर देखो न! जैसे ये तस्वीर चमक उठी है वैसे ही पापा का घर भी उनका गुणगान करता हुआ-सा लग रहा है ।" बेटी ने चारों ओर अपने घर को निहारते हुए कहा ।
"सुहानी, ये घर नहीं, तेरे पापा के मन का मोती है । नजर मत लगाना...।"गलबहियाँ डालते हुए संजना ने अपनी बेटी को दुलराया ।
"क्या मतलब माँ !" बेटी ने उत्सुकता से पूछा ।
"तेरे पापा का कहना है कि घर छोटा हो या बड़ा, गरीब का हो या अमीर का घरवाले को अपना घर वैसे ही लगता है जैसे सच्ची सीपी को अपना मोती ।"
"माय ग्रेट डैडी ।" बोलते हुए उसका मन अपने पिता के लिए गर्व से भर गया।
माँ-बेटी अभी बातें कर ही रही थीं कि मन्दिर जाने के लिए साहिल का कुनबा जुट आया । चाची-ताई सगुन गाने लगीं और भाभियाँ हँसी-मज़ाक में ऐसी जुटीं कि मंदिर का लंबा रास्ता पता न चला । जब विधि-विधान से पूजा संपन्न हुई तो चाची-ताई ने सुहानी को मुँह भर-भरकर "दूधो नहाओ, पूतो फलो" का आशीर्वाद देने लगीं । संजना ने अपना आँचल फैलाकर उसे समेटा और सुहानी के सिर पर छोड़ दिया । ये देख हँसते-हँसाते सभी गाड़ी की ओर लौट पड़े ।
लेकिन संजना ने सुहानी को फिर आवाज़ देते हुए कहा, "सुहानी, ज़रा यहाँ भी मत्था टेक ले बेटी, उसके बाद घर चलते हैं ।"
"ये तो नीले फूल वाली घास ...."आई मीन टु से" बेल है और मैं इसके आगे मत्था टेक लूँ ?" माँ, कभी-कभी आपकी आस्था मुझे स्ट्रेंज लगती है ।"
"देट इज टू गुड माँ ! फिर इतनी महत्वपूर्ण चीज को आप ने यूँ ही लावारिश छोड़ दिया । क्यों माँ ?"बेटी ने ध्यान से माँ को देखते हुए कहा ।
"क्या-क्या ले जाती दूसरे देश कहते-कहते संजना अपने ख्यालों में खोती चली गयी । उसे वे दिन याद आने लगे जब सुखार्थ हमेशा के लिए उसे लेने घर आया था । संजना ने बेटे को देखा तो भाव विभोर हो उससे लिपट गई । कुशल पूछ जल पान करते हुए अपने जीवन के वे संघर्ष याद आने लगे जिनको स्वयं झेला था लेकिन उनकी छाया कभी अपने बच्चों पर नहीं पड़ने दी थी ।
बेटा-बेटी ने भी अपने माँ -पापा की मेहनत का खूब ख्याल किया था तभी तो इतने कम समय में पराये देश में अपना परचम लहरा सके थे । जिसका संतोष सिरोही दम्पत्ति के चेहरे पर साफ़-साफ़ देखा जा सकता था । ऱोज दोनों देशों के समय का मिलान कर भाई माँ-पापा के साथ सुहानी से बातें करता । कुल मिलाकर सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था लेकिन एक दिन सुखार्थ ने वापस जाने की तारीख़ निश्चित की तो संजना का मन कसैला हो गया।
"साहिल आप इतने शांत कैसे रह सकते हो ? कुछ तो समझाओ उसे ।वो तो अभी बच्चा है लेकिन आप तो सब जानते हो न!" संजना ने पति से शिकायत करते हुए कहा ।
कहते हुए साहिल ने बताया कि आज के युवा जो अकेले रहने में ही सुख मनाने वाले समय में भी यदि उसके बच्चे उसे लेने आये हैं तो जरूर ख़ुदा का रहम है ।
"साहिल आप इतने आराम से इस घर को छोड़ने की बात कर भी कैसे सकते हो ?आपको पता है, इसे बनवाने में हमारे जीवन के कितने दिन-रात बिना सोये लगे हैं ।" बिना कारण या सकारण....संजना के गालों पर कुछ आँसू लुढक आये थे।
"कोई बात नहीं संजू! बहुत छोटी-सी उम्र से मैंने अपने निर्णय स्वयं लिए हैं, शायद ही उनमें कोई दगाबाज निकला हो, ये भी नहीं निकलेगा ।" साहिल ने गर्दन सीधी करते हुए कॉलर ठीक किया ।
"वो सब तो ठीक है साहिल लेकिन घर के सामान का क्या करेंगे ?"संजना ने भी मन मसोसकर अपनी सहमति जताई थी ।
"हूँ, ये बात तो उचित है । उन चीजों को हटाना ही पड़ेगा जो हमारे बिना ख़राब हो सकती हैं ।"
"हाँ भई, इसे पानी देने, कौन आयेगा ऱोज लंदन से !"कहते हुए साहिल खिलखिलाकर हँस पड़ा।
"साहिल, विष्णुकांता को मैं किसी के साथ साझा नहीं करना चाहती।"
थोड़ी देर के लिए दोनों मौन में चले गये । खिड़कियों के पर्दों से उलझती हवा मौसम की चुगली कर रही थी लेकिन संजना के दुख का ठिकाना न था इसलिए वह उसी में डूबी हुई बोली।
संजना के चेहरे पर पड़ी लट को साहिल ने शरारत से फूँक कर उड़ा दिया ।
"आप भी ... ।" संजना अपने ख़्यालों में बड़बड़ा उठी तो पास बैठी जेठानी ने उसका कंधा हिलाया। हम.....क्या कह रहे थे जीजी ?" संजना डर गई थी।
"माँ आप कहीं खो गयी थीं और बड़बड़ा भी रही थीं ।" सुहानी ने पानी की बोतल उसकी ओर बढ़ते हुए कहा।
संजना ने अपने काले-सफ़ेद बालों का जूड़ा लपेटते हुए हाँ में सिर हिलाया।
बूढ़ी संजना रसोई में खाना पकाते हुए अपने जीवन के अनेक किस्सों में झूलती जा रही थी। साहिल से जुड़ा एक किस्सा तो इतना वर्बोस निकला कि उसको कढ़ी में पड़ी कड़छी बेटी को पकड़ानी ही पड़ी और ख़ुद को बेडरूम की ओर ले जाना पड़ा।
"माँ, दीवारों से कान लगाकर आप क्या सुन रही हो?" बेडरूम में झाँकते हुए सुहानी हैरानी भरे स्वर में कहा।
"साहिल की बातों में कितनी सच्चाई है, समझने की कोशिश कर रही हूँ ।"
" तू तब आई ही कहाँ थी दुनिया में । ये बात सुखार्थ के बचपन की है जब मैं उसकी छोटी-छोटी शैतानियाँ को सेव करना चाहती थी और मेरे पास कैमरा नहीं था। मन इतना दुखी हुआ कि मेरे दुःख का कारण न जाने कैसे तेरे पापा को भी पता चल गया था।"
"फिर माँ !" सुहानी सुनने के लिए उतावली हो गई ।
"तेरे पापा ने मुझसे कहा था ।"
संजना ने बेटी के आगे अपनी यादों की पोटली ऐसे खोल कर बिखेर दी कि फिर उसे समेटने में उन्हें घंटों लग गए।
डायनिंग टेवल पर माँ को आचनक याद आया ।
"आप चिंता मत कीजिये माँ ! सब सेट है ।"
सुहानी की बातें सुनकर उदास घर भी ठहाके लगाकर हँस पड़ा ।
नई बहू ने अपनी नटखट मुस्कान के साथ कहा तो संजना ने उसके सिर पर हाथ रख आशीष दिया ।
"हां जी, भाई साहब बस हम निकल रहे हैं ।" कहते-सुनते हल्दी के थापों से चौखट को संतुष्ट कर माँ-बेटी अपने गंतव्य की ओर निकल पड़ी थीं । सुहानी यात्रा के काजग-पत्तर सम्हाल रही थी और संजना नई-पुरानी यादों की पोटली सम्हाले, मौन भाव से जहाज की खिड़की से ओझल होते अपने शहर को देखे जा रही थी ।
"माँ, आप यूँ ही उदास बैठी रहोगी या मेरी मदद भी करोगी ?"आधे मन से उसने बेटी की ओर देखा ।
बेटी ने झट से एक सुंदर -सी काँच की एक बोतल माँ को पकड़ा दी । बोतल में विष्णुकांता को लगा देख वह उछल पड़ी ।
"ये कैसे संभव...?" उसकी बात सुने बिना ही बेटी ने मुँह पर हाथ रख दिया ।
अब से विष्णुकांता हमारे साथ ही रहेगी।
बेटी की आव़ाज में साहिल के जीवन की गूँज सुनकर संजना का दिल ख़ुशी से धड़क उठा । कुछ कहना चाहा तो पास में बैठी एक विदेशी महिला बोल पड़ी ।
"सदा सुहागिन रहो ! भारत... बेटी!"
"आप हिंदी बोल और समझ लेती हैं ?" संजना ने आश्चर्य में भरकर पूछा था ।
सुनकर संजना ने अपनी पीठ सीट से टिकाते हुए आँखें मूँद लीं । उसके मन का चैन अब उसके झुर्रीदार चेहरे पर दीपदीपा उठा था। ये देखकर बेटी ने भी अपना सिर माँ के कंधे पर टिका दिया था।
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बेटी की शादी के बाद कुलदेवी की पूजा करवाने संजना भारत आई थी । अपने लोगों से चारों ओर खुद को घिरा पाकर उसका मन लाल ऊँन के गोले-सा लुढ़का जा रहा था । चाबियों का गुच्छा निकाल उसने जल्दी से दरवाज़ा खोला तो देखा चारों ओर मकड़ियों के जाले लटक रहे थे । सबसे पहले संजना ने खिड़कियों के पर्दे खोले और ड्राइंगरूम में लगी फैमिली-फ़ोटोग्राफ़ साफ़ करने के लिए बेटी से कहा। सुहानी ने इधर-उधर डस्टर ढूंढा जब नहीं मिला तो वह रूमाल से ही उसे पोंछने लगी । "माँ, यहाँ आकर देखो न! जैसे ये तस्वीर चमक उठी है वैसे ही पापा का घर भी उनका गुणगान करता हुआ-सा लग रहा है ।" बेटी ने चारों ओर अपने घर को निहारते हुए कहा । "सुहानी, ये घर नहीं, तेरे पापा के मन का मोती है । नजर मत लगाना...।"गलबहियाँ डालते हुए संजना ने अपनी बेटी को दुलराया । "क्या मतलब माँ !" बेटी ने उत्सुकता से पूछा । "तेरे पापा का कहना है कि घर छोटा हो या बड़ा, गरीब का हो या अमीर का घरवाले को अपना घर वैसे ही लगता है जैसे सच्ची सीपी को अपना मोती ।" "माय ग्रेट डैडी ।" बोलते हुए उसका मन अपने पिता के लिए गर्व से भर गया। माँ-बेटी अभी बातें कर ही रही थीं कि मन्दिर जाने के लिए साहिल का कुनबा जुट आया । चाची-ताई सगुन गाने लगीं और भाभियाँ हँसी-मज़ाक में ऐसी जुटीं कि मंदिर का लंबा रास्ता पता न चला । जब विधि-विधान से पूजा संपन्न हुई तो चाची-ताई ने सुहानी को मुँह भर-भरकर "दूधो नहाओ, पूतो फलो" का आशीर्वाद देने लगीं । संजना ने अपना आँचल फैलाकर उसे समेटा और सुहानी के सिर पर छोड़ दिया । ये देख हँसते-हँसाते सभी गाड़ी की ओर लौट पड़े । लेकिन संजना ने सुहानी को फिर आवाज़ देते हुए कहा, "सुहानी, ज़रा यहाँ भी मत्था टेक ले बेटी, उसके बाद घर चलते हैं ।" "ये तो नीले फूल वाली घास ...."आई मीन टु से" बेल है और मैं इसके आगे मत्था टेक लूँ ?" माँ, कभी-कभी आपकी आस्था मुझे स्ट्रेंज लगती है ।" "देट इज टू गुड माँ ! फिर इतनी महत्वपूर्ण चीज को आप ने यूँ ही लावारिश छोड़ दिया । क्यों माँ ?"बेटी ने ध्यान से माँ को देखते हुए कहा । "क्या-क्या ले जाती दूसरे देश कहते-कहते संजना अपने ख्यालों में खोती चली गयी । उसे वे दिन याद आने लगे जब सुखार्थ हमेशा के लिए उसे लेने घर आया था । संजना ने बेटे को देखा तो भाव विभोर हो उससे लिपट गई । कुशल पूछ जल पान करते हुए अपने जीवन के वे संघर्ष याद आने लगे जिनको स्वयं झेला था लेकिन उनकी छाया कभी अपने बच्चों पर नहीं पड़ने दी थी । बेटा-बेटी ने भी अपने माँ -पापा की मेहनत का खूब ख्याल किया था तभी तो इतने कम समय में पराये देश में अपना परचम लहरा सके थे । जिसका संतोष सिरोही दम्पत्ति के चेहरे पर साफ़-साफ़ देखा जा सकता था । ऱोज दोनों देशों के समय का मिलान कर भाई माँ-पापा के साथ सुहानी से बातें करता । कुल मिलाकर सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था लेकिन एक दिन सुखार्थ ने वापस जाने की तारीख़ निश्चित की तो संजना का मन कसैला हो गया। "साहिल आप इतने शांत कैसे रह सकते हो ? कुछ तो समझाओ उसे ।वो तो अभी बच्चा है लेकिन आप तो सब जानते हो न!" संजना ने पति से शिकायत करते हुए कहा । कहते हुए साहिल ने बताया कि आज के युवा जो अकेले रहने में ही सुख मनाने वाले समय में भी यदि उसके बच्चे उसे लेने आये हैं तो जरूर ख़ुदा का रहम है । "साहिल आप इतने आराम से इस घर को छोड़ने की बात कर भी कैसे सकते हो ?आपको पता है, इसे बनवाने में हमारे जीवन के कितने दिन-रात बिना सोये लगे हैं ।" बिना कारण या सकारण....संजना के गालों पर कुछ आँसू लुढक आये थे। "कोई बात नहीं संजू! बहुत छोटी-सी उम्र से मैंने अपने निर्णय स्वयं लिए हैं, शायद ही उनमें कोई दगाबाज निकला हो, ये भी नहीं निकलेगा ।" साहिल ने गर्दन सीधी करते हुए कॉलर ठीक किया । "वो सब तो ठीक है साहिल लेकिन घर के सामान का क्या करेंगे ?"संजना ने भी मन मसोसकर अपनी सहमति जताई थी । "हूँ, ये बात तो उचित है । उन चीजों को हटाना ही पड़ेगा जो हमारे बिना ख़राब हो सकती हैं ।" "हाँ भई, इसे पानी देने, कौन आयेगा ऱोज लंदन से !"कहते हुए साहिल खिलखिलाकर हँस पड़ा। "साहिल, विष्णुकांता को मैं किसी के साथ साझा नहीं करना चाहती।" थोड़ी देर के लिए दोनों मौन में चले गये । खिड़कियों के पर्दों से उलझती हवा मौसम की चुगली कर रही थी लेकिन संजना के दुख का ठिकाना न था इसलिए वह उसी में डूबी हुई बोली। संजना के चेहरे पर पड़ी लट को साहिल ने शरारत से फूँक कर उड़ा दिया । "आप भी ... ।" संजना अपने ख़्यालों में बड़बड़ा उठी तो पास बैठी जेठानी ने उसका कंधा हिलाया। हम.....क्या कह रहे थे जीजी ?" संजना डर गई थी। "माँ आप कहीं खो गयी थीं और बड़बड़ा भी रही थीं ।" सुहानी ने पानी की बोतल उसकी ओर बढ़ते हुए कहा। संजना ने अपने काले-सफ़ेद बालों का जूड़ा लपेटते हुए हाँ में सिर हिलाया। बूढ़ी संजना रसोई में खाना पकाते हुए अपने जीवन के अनेक किस्सों में झूलती जा रही थी। साहिल से जुड़ा एक किस्सा तो इतना वर्बोस निकला कि उसको कढ़ी में पड़ी कड़छी बेटी को पकड़ानी ही पड़ी और ख़ुद को बेडरूम की ओर ले जाना पड़ा। "माँ, दीवारों से कान लगाकर आप क्या सुन रही हो?" बेडरूम में झाँकते हुए सुहानी हैरानी भरे स्वर में कहा। "साहिल की बातों में कितनी सच्चाई है, समझने की कोशिश कर रही हूँ ।" " तू तब आई ही कहाँ थी दुनिया में । ये बात सुखार्थ के बचपन की है जब मैं उसकी छोटी-छोटी शैतानियाँ को सेव करना चाहती थी और मेरे पास कैमरा नहीं था। मन इतना दुखी हुआ कि मेरे दुःख का कारण न जाने कैसे तेरे पापा को भी पता चल गया था।" "फिर माँ !" सुहानी सुनने के लिए उतावली हो गई । "तेरे पापा ने मुझसे कहा था ।" संजना ने बेटी के आगे अपनी यादों की पोटली ऐसे खोल कर बिखेर दी कि फिर उसे समेटने में उन्हें घंटों लग गए। डायनिंग टेवल पर माँ को आचनक याद आया । "आप चिंता मत कीजिये माँ ! सब सेट है ।" सुहानी की बातें सुनकर उदास घर भी ठहाके लगाकर हँस पड़ा । नई बहू ने अपनी नटखट मुस्कान के साथ कहा तो संजना ने उसके सिर पर हाथ रख आशीष दिया । "हां जी, भाई साहब बस हम निकल रहे हैं ।" कहते-सुनते हल्दी के थापों से चौखट को संतुष्ट कर माँ-बेटी अपने गंतव्य की ओर निकल पड़ी थीं । सुहानी यात्रा के काजग-पत्तर सम्हाल रही थी और संजना नई-पुरानी यादों की पोटली सम्हाले, मौन भाव से जहाज की खिड़की से ओझल होते अपने शहर को देखे जा रही थी । "माँ, आप यूँ ही उदास बैठी रहोगी या मेरी मदद भी करोगी ?"आधे मन से उसने बेटी की ओर देखा । बेटी ने झट से एक सुंदर -सी काँच की एक बोतल माँ को पकड़ा दी । बोतल में विष्णुकांता को लगा देख वह उछल पड़ी । "ये कैसे संभव...?" उसकी बात सुने बिना ही बेटी ने मुँह पर हाथ रख दिया । अब से विष्णुकांता हमारे साथ ही रहेगी। बेटी की आव़ाज में साहिल के जीवन की गूँज सुनकर संजना का दिल ख़ुशी से धड़क उठा । कुछ कहना चाहा तो पास में बैठी एक विदेशी महिला बोल पड़ी । "सदा सुहागिन रहो ! भारत... बेटी!" "आप हिंदी बोल और समझ लेती हैं ?" संजना ने आश्चर्य में भरकर पूछा था । सुनकर संजना ने अपनी पीठ सीट से टिकाते हुए आँखें मूँद लीं । उसके मन का चैन अब उसके झुर्रीदार चेहरे पर दीपदीपा उठा था। ये देखकर बेटी ने भी अपना सिर माँ के कंधे पर टिका दिया था।
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डा. नंद किशोर त्रिखा वर्तमान परिस्थितियों में जिस पकार के हालात बने हैं उसके मद्देनजर जगदम्बा सिंह ने यूपीए सरकार की मजबूती, विश्वसनीयता एवं कुछ अन्य पहलुओं पर वरिष्ठ पत्रकार डा. नंद किशोर त्रिखा से बातचीत की पेश है वार्ता के खास अंश ö इस संदर्भ में डा. त्रिखा का कहना है कि जबसे यूपीए सरकार बनी है तबसे कांग्रेस यह मानकर चल रही है कि यह उसी की सरकार है। पहले भी कांग्रेस का यही रुख रहा। नीतियां बनाने एवं उसके संचालन में ही सिर्प यह देखने को नही मिलता बल्कि यह सभी स्तर पर देखने को मिलता है। नीतियों से ज्यादा कठिनाई रोजमर्रा के निर्णयों से पैदा हो रही है। एक भी सहयोगी दल का न कोई राज्यपाल बनाया गया, न ही राजदूत और न ही कोई महत्वपूर्ण पद दिया गया, जबकि गठबंधन सरकार में यह सब होना चाहिए। अटल सरकार थी तो जेएनयू के पोफेसर परिमल कुमार दास को वेस्टइंडीज में उच्चायुक्त बनाया गया, जबकि श्री दास खांटी समाजवादी थे। सिर्प इतना ही नहीं पो. दास भारतीय जनता पार्टी के कटु आलोचक थे। हालांकि उनकी मृत्यु भी वहीं हो गई थी। इसी तरह सहयोगी दलों के कई लोगों को विभिन्न पदों पर वाजपेयी की सरकार में आरूढ़ किया गया था। हालांकि इन बातों के लिए भाजपा एवं आरएसएस में अटल की काफी आलोचना हुई, मगर उन्होंने ऐसा किया क्योंकि गठबंधन धर्म ऐसा जरूरी था। गठबंधन सरकार में सहयोगी दलों की भावनाओं एवं नापसंद-पसंद का भी ध्यान रखना पड़ता है। अटल बिहारी ने सहयोगी दलों की भावनाओं का ध्यान रखा, जो लोग पुराने भाजपाई नहीं थे उनको भी महत्वपूर्ण स्थान दिए गए। जसवंत सिह व यशवंत सिन्हा के बारे में भी संघ में कहा गया कि इन लोगों को इतना महत्वपूर्ण दायित्व क्यों दे दिया गया। चूंकि यशवंत सिन्हा पहले जनता दल में थे। गठबंधन सरकार में सबको साथ लेकर चलना होता है। इसकी जिम्मेदारी गठबंधन के सबसे बड़े दल की होती है। अटल जी ने गठबंधन धर्म बखूबी निभाया मगर इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ा। उनकी सरकार दुबारा लौट नहीं पाई। कहा गया कि दत्तो पंत ठेगड़ी को सम्मान नहीं दिया गया। जबकि उन्होंने भारतीय मजदूर संघ जैसे संगठन की स्थापना की और उसका विस्तार किया इसके लिए उन्होंने आम जनता में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की नीतियों एवं कार्यकमों को पहुंचाने के लिए बहुत कुछ किया। काफी हद तक इस तरह का माहौल बनाया गया कि भाजपा को यहां तक पहुंचाने में जिन लोगों ने पयास किया उनको सम्मान नहीं दिया गया। सरकार के कियाकलापों से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं भाजपा के लोग भले ही नाराज हुए मगर अटल जी ने राजधर्म का पालन किया। इस वजह से 2004 के लोकसभा चुनाव में बहुत से लोगों ने मन लगाकर काम नहीं किया जिसका परिणाम सामने आ गया वही काम कांग्रेस पार्टी नहीं कर पा रही है। यूपीए सरकार के पथम कार्यकाल में भारी असंतोष के बावजूद यूपीए सरकार सत्ता में वापस आने में कामयाब रही, मगर इस बार लग रहा है कि समस्या कुछ ज्यादा ही बढ़ चुकी है। यूपीए 2 सरकार में एक से बढ़कर एक घोटाले सामने आते गए। महाराष्ट्र में आदर्श सोसायटी घोटाला हुआ, मुख्यमंत्री को हटाना पड़ा। ऐसे कई और घोटालों के कारण यूपीए सरकार कमजोर होती गई। कभी डीएमके का मामला तो कभी किसी और का सामने आता गया। सहयोगी दलों ने हमेशा अपने पदेशों के हितों को ध्यान में रखकर काम किया। अभी हाल ही में ताजा विवाद जो उत्पन्न हुआ है वह रेल बजट को लेकर हुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममजा बनर्जी के लिए अपने पदेश की राजनीति सर्वोपरि है। बाकी बातें उसके बाद हैं। स्वभव से वे दृढ़ निश्चयी है एंव हठी भी हैं। जो कुछ करने के लिए वे ठान लेती हैं उसको करती भी हैं। रेल बजट से यह स्पष्ट हो गया है कि उसे पणब मुखर्जी ने बनवाया है। यह बात सही है कि रेल बजट का काम वित्त मंत्री करते हैं। चूंकि रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी पुराने कांग्रेसी रह चुके हैं। पणब मुखर्जी एवं कांग्रेस के अन्य नेताओं से उनके पुराने संबंध हैं। ममता बनर्जी को यह स्पष्ट हो गया है कि रेलमत्री ने यह बजट पणब मुखर्जी के इशारे पर बनाया है। पधानमंत्री भले ही यह कहें कि मुझे इस पकरण की कोई जानकारी नहीं है। मगर ऐसा तो हो नहीं सकता कि वित्त मंत्री ने खपधानमंत्री से कोई सलाह नहीं ली होगी। पधानमंत्री और अन्य मंत्रियों से नीतिगत बात तो होती ही होगी। दिनेश त्रिवेदी का बजट कितना अच्छा है यह तो पधानमंत्री को भी पता है ममता बनर्जी से दिनेश त्रिवेदी ने बजट के सभी पहलुओं पर भले ही चर्चा न की होगी मगर मोटी-मोटी बातों पर औपचारिक चर्चा तो हो ही सकती है। ममता बनर्जी ने पहले ही कह दिया था कि किराया न बढ़ाया जाए। यदि बढ़े तो सिर्प एसी का ही किराया बढ़े मगर पणब मुखर्जी ने किराया बढ़वा लिया। रेल बजट के पहले मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी कह रहे ािs कि यदि किराया नहीं बढ़ेगा तो रेलवे की बेहतरी के लिए पैसा कहां से आएगा। जहां तक दिनेश त्रिवेदी की बात है तो पश्चिम बंगाल में उनका कोई जनाधार तो है नहीं। विधानसभा चुनाव जीतने की क्षमता उनकी नहीं हैं।
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डा. नंद किशोर त्रिखा वर्तमान परिस्थितियों में जिस पकार के हालात बने हैं उसके मद्देनजर जगदम्बा सिंह ने यूपीए सरकार की मजबूती, विश्वसनीयता एवं कुछ अन्य पहलुओं पर वरिष्ठ पत्रकार डा. नंद किशोर त्रिखा से बातचीत की पेश है वार्ता के खास अंश ö इस संदर्भ में डा. त्रिखा का कहना है कि जबसे यूपीए सरकार बनी है तबसे कांग्रेस यह मानकर चल रही है कि यह उसी की सरकार है। पहले भी कांग्रेस का यही रुख रहा। नीतियां बनाने एवं उसके संचालन में ही सिर्प यह देखने को नही मिलता बल्कि यह सभी स्तर पर देखने को मिलता है। नीतियों से ज्यादा कठिनाई रोजमर्रा के निर्णयों से पैदा हो रही है। एक भी सहयोगी दल का न कोई राज्यपाल बनाया गया, न ही राजदूत और न ही कोई महत्वपूर्ण पद दिया गया, जबकि गठबंधन सरकार में यह सब होना चाहिए। अटल सरकार थी तो जेएनयू के पोफेसर परिमल कुमार दास को वेस्टइंडीज में उच्चायुक्त बनाया गया, जबकि श्री दास खांटी समाजवादी थे। सिर्प इतना ही नहीं पो. दास भारतीय जनता पार्टी के कटु आलोचक थे। हालांकि उनकी मृत्यु भी वहीं हो गई थी। इसी तरह सहयोगी दलों के कई लोगों को विभिन्न पदों पर वाजपेयी की सरकार में आरूढ़ किया गया था। हालांकि इन बातों के लिए भाजपा एवं आरएसएस में अटल की काफी आलोचना हुई, मगर उन्होंने ऐसा किया क्योंकि गठबंधन धर्म ऐसा जरूरी था। गठबंधन सरकार में सहयोगी दलों की भावनाओं एवं नापसंद-पसंद का भी ध्यान रखना पड़ता है। अटल बिहारी ने सहयोगी दलों की भावनाओं का ध्यान रखा, जो लोग पुराने भाजपाई नहीं थे उनको भी महत्वपूर्ण स्थान दिए गए। जसवंत सिह व यशवंत सिन्हा के बारे में भी संघ में कहा गया कि इन लोगों को इतना महत्वपूर्ण दायित्व क्यों दे दिया गया। चूंकि यशवंत सिन्हा पहले जनता दल में थे। गठबंधन सरकार में सबको साथ लेकर चलना होता है। इसकी जिम्मेदारी गठबंधन के सबसे बड़े दल की होती है। अटल जी ने गठबंधन धर्म बखूबी निभाया मगर इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ा। उनकी सरकार दुबारा लौट नहीं पाई। कहा गया कि दत्तो पंत ठेगड़ी को सम्मान नहीं दिया गया। जबकि उन्होंने भारतीय मजदूर संघ जैसे संगठन की स्थापना की और उसका विस्तार किया इसके लिए उन्होंने आम जनता में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की नीतियों एवं कार्यकमों को पहुंचाने के लिए बहुत कुछ किया। काफी हद तक इस तरह का माहौल बनाया गया कि भाजपा को यहां तक पहुंचाने में जिन लोगों ने पयास किया उनको सम्मान नहीं दिया गया। सरकार के कियाकलापों से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं भाजपा के लोग भले ही नाराज हुए मगर अटल जी ने राजधर्म का पालन किया। इस वजह से दो हज़ार चार के लोकसभा चुनाव में बहुत से लोगों ने मन लगाकर काम नहीं किया जिसका परिणाम सामने आ गया वही काम कांग्रेस पार्टी नहीं कर पा रही है। यूपीए सरकार के पथम कार्यकाल में भारी असंतोष के बावजूद यूपीए सरकार सत्ता में वापस आने में कामयाब रही, मगर इस बार लग रहा है कि समस्या कुछ ज्यादा ही बढ़ चुकी है। यूपीए दो सरकार में एक से बढ़कर एक घोटाले सामने आते गए। महाराष्ट्र में आदर्श सोसायटी घोटाला हुआ, मुख्यमंत्री को हटाना पड़ा। ऐसे कई और घोटालों के कारण यूपीए सरकार कमजोर होती गई। कभी डीएमके का मामला तो कभी किसी और का सामने आता गया। सहयोगी दलों ने हमेशा अपने पदेशों के हितों को ध्यान में रखकर काम किया। अभी हाल ही में ताजा विवाद जो उत्पन्न हुआ है वह रेल बजट को लेकर हुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममजा बनर्जी के लिए अपने पदेश की राजनीति सर्वोपरि है। बाकी बातें उसके बाद हैं। स्वभव से वे दृढ़ निश्चयी है एंव हठी भी हैं। जो कुछ करने के लिए वे ठान लेती हैं उसको करती भी हैं। रेल बजट से यह स्पष्ट हो गया है कि उसे पणब मुखर्जी ने बनवाया है। यह बात सही है कि रेल बजट का काम वित्त मंत्री करते हैं। चूंकि रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी पुराने कांग्रेसी रह चुके हैं। पणब मुखर्जी एवं कांग्रेस के अन्य नेताओं से उनके पुराने संबंध हैं। ममता बनर्जी को यह स्पष्ट हो गया है कि रेलमत्री ने यह बजट पणब मुखर्जी के इशारे पर बनाया है। पधानमंत्री भले ही यह कहें कि मुझे इस पकरण की कोई जानकारी नहीं है। मगर ऐसा तो हो नहीं सकता कि वित्त मंत्री ने खपधानमंत्री से कोई सलाह नहीं ली होगी। पधानमंत्री और अन्य मंत्रियों से नीतिगत बात तो होती ही होगी। दिनेश त्रिवेदी का बजट कितना अच्छा है यह तो पधानमंत्री को भी पता है ममता बनर्जी से दिनेश त्रिवेदी ने बजट के सभी पहलुओं पर भले ही चर्चा न की होगी मगर मोटी-मोटी बातों पर औपचारिक चर्चा तो हो ही सकती है। ममता बनर्जी ने पहले ही कह दिया था कि किराया न बढ़ाया जाए। यदि बढ़े तो सिर्प एसी का ही किराया बढ़े मगर पणब मुखर्जी ने किराया बढ़वा लिया। रेल बजट के पहले मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी कह रहे ािs कि यदि किराया नहीं बढ़ेगा तो रेलवे की बेहतरी के लिए पैसा कहां से आएगा। जहां तक दिनेश त्रिवेदी की बात है तो पश्चिम बंगाल में उनका कोई जनाधार तो है नहीं। विधानसभा चुनाव जीतने की क्षमता उनकी नहीं हैं।
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Department of Consumer Affairs पात्र उम्मीदवारों को Young Professional के पद के लिए 3 रिक्तियों को भरने के लिए New Delhi पर आमंत्रित कर रहा है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज, अंतिम तिथि और चयन प्रक्रिया के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं। Department of Consumer Affairs Young Professional भर्ती 2023 से संबंधित आवेदन लिंक नीचे दिया गया है।
आवेदक जो Department of Consumer Affairs Young Professional भर्ती 2023 के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें अधिकारियों द्वारा पोस्ट की गई योग्यता विवरण की जांच करनी होगी, आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवारों को योग्यता को पूरा करना होगा जो कि N/A है। योग्यता का विस्तृत विवरण प्राप्त करने के लिए, कृपया नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना देखें।
Department of Consumer Affairs उम्मीदवारों को New Delhi में 3 रिक्तियों को भरने के लिए आमंत्रित करता है। योग्य उम्मीदवार अकेले आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से जा सकते हैं और नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं।
उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें Department of Consumer Affairs में Young Professional के रूप में रखा जाएगा।
Department of Consumer Affairs Young Professional भर्ती के लिए वेतन 2023 Rs. 40,000 - Rs. 40,000 Per Month है। चयनित उम्मीदवार अपनी कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से Young Professional के रूप में अपना कार्य ग्रहण कर सकते हैं।
नौकरी के लिए आवेदन करते समय नौकरी का स्थान सबसे आवश्यक मानदंडों में से एक है। Department of Consumer Affairs Young Professional रिक्ति के लिए New Delhi पर उम्मीदवारों की भर्ती कर रहा है। इच्छुक लोग 04/02/2023 से पहले आवेदन कर सकते हैं और आधिकारिक अधिसूचना में विवरण देख सकते हैं।
How to apply for Department of Consumer Affairs Recruitment 2023?
उम्मीदवारों को Department of Consumer Affairs भर्ती 2023 के लिए 04/02/2023 से पहले आवेदन करना होगा। Var__company_name Young Professional भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया नीचे दी गई है। आवेदन लिंक नीचे दिया गया है,
चरण 4: आवेदन के तरीके की जांच करें और Department of Consumer Affairs भर्ती 2023 के लिए आवेदन करें।
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Department of Consumer Affairs पात्र उम्मीदवारों को Young Professional के पद के लिए तीन रिक्तियों को भरने के लिए New Delhi पर आमंत्रित कर रहा है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज, अंतिम तिथि और चयन प्रक्रिया के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं। Department of Consumer Affairs Young Professional भर्ती दो हज़ार तेईस से संबंधित आवेदन लिंक नीचे दिया गया है। आवेदक जो Department of Consumer Affairs Young Professional भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें अधिकारियों द्वारा पोस्ट की गई योग्यता विवरण की जांच करनी होगी, आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवारों को योग्यता को पूरा करना होगा जो कि N/A है। योग्यता का विस्तृत विवरण प्राप्त करने के लिए, कृपया नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना देखें। Department of Consumer Affairs उम्मीदवारों को New Delhi में तीन रिक्तियों को भरने के लिए आमंत्रित करता है। योग्य उम्मीदवार अकेले आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से जा सकते हैं और नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें Department of Consumer Affairs में Young Professional के रूप में रखा जाएगा। Department of Consumer Affairs Young Professional भर्ती के लिए वेतन दो हज़ार तेईस रुपया. चालीस,शून्य - Rs. चालीस,शून्य Per Month है। चयनित उम्मीदवार अपनी कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से Young Professional के रूप में अपना कार्य ग्रहण कर सकते हैं। नौकरी के लिए आवेदन करते समय नौकरी का स्थान सबसे आवश्यक मानदंडों में से एक है। Department of Consumer Affairs Young Professional रिक्ति के लिए New Delhi पर उम्मीदवारों की भर्ती कर रहा है। इच्छुक लोग चार फ़रवरी दो हज़ार तेईस से पहले आवेदन कर सकते हैं और आधिकारिक अधिसूचना में विवरण देख सकते हैं। How to apply for Department of Consumer Affairs Recruitment दो हज़ार तेईस? उम्मीदवारों को Department of Consumer Affairs भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए चार फ़रवरी दो हज़ार तेईस से पहले आवेदन करना होगा। Var__company_name Young Professional भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया नीचे दी गई है। आवेदन लिंक नीचे दिया गया है, चरण चार: आवेदन के तरीके की जांच करें और Department of Consumer Affairs भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करें।
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कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को कहा कि दिल्ली में पूरे दिन हिंसा हुई और उन्होंने दिल्ली वालों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि हिंसा से सिर्फ आम आदमी और देश का नुकसान होगा। उत्तरपूर्वी दिल्ली के जाफराबाद और मौजपुर इलाके में सोमवार को सीएए के समर्थक और विरोधी गुटों में झड़प हो गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने घरों, दुकानों और वाहनों में आगजनी की व पथराव भी किया।
प्रियंका गांधी ने एक ट्वीट में कहा, "देश की राजधानी दिल्ली में आज पूरा दिन हिंसा से भरा रहा। हिंसा से सिर्फ और सिर्फ आम जनता और देश का नुकसान होता है। इसे रोकने की ज़िम्मेदारी हम सबकी है। " कांग्रेस महासचिव ने कहा, "महात्मा गांधी का देश शांति का देश है। सभी दिल्लीवासियों से मैं शांति की अपील करती हूं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अनुरोध करती हूं कि वे शान्ति और अमन बनाए रखने के लिए प्रयास करें। " शहर के चांदबाग और भजनपुरा इलाकों से भी झड़पों की खबर है। दिल्ली में हिंसक झड़पों का आज दूसरा दिन है।
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कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को कहा कि दिल्ली में पूरे दिन हिंसा हुई और उन्होंने दिल्ली वालों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि हिंसा से सिर्फ आम आदमी और देश का नुकसान होगा। उत्तरपूर्वी दिल्ली के जाफराबाद और मौजपुर इलाके में सोमवार को सीएए के समर्थक और विरोधी गुटों में झड़प हो गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने घरों, दुकानों और वाहनों में आगजनी की व पथराव भी किया। प्रियंका गांधी ने एक ट्वीट में कहा, "देश की राजधानी दिल्ली में आज पूरा दिन हिंसा से भरा रहा। हिंसा से सिर्फ और सिर्फ आम जनता और देश का नुकसान होता है। इसे रोकने की ज़िम्मेदारी हम सबकी है। " कांग्रेस महासचिव ने कहा, "महात्मा गांधी का देश शांति का देश है। सभी दिल्लीवासियों से मैं शांति की अपील करती हूं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अनुरोध करती हूं कि वे शान्ति और अमन बनाए रखने के लिए प्रयास करें। " शहर के चांदबाग और भजनपुरा इलाकों से भी झड़पों की खबर है। दिल्ली में हिंसक झड़पों का आज दूसरा दिन है।
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