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ई-कॉमर्स कंपनी ईबे इंडिया के एक सर्वे के अनुसार इस त्योहारी सीजन में दिल्ली में लोग आभूषण, होम अप्लायंसेज और परिधानों की खरीदारी पर जोर देंगे. हालांकि मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट सबसे ज्यादा खरीदे जाने का अनुमान है.
कंपनी ने अपनी रिपोर्ट को 2014 के त्योहारी सीजन के रूझानों के अनुसंधान और विश्लेषण पर आधारित बताते हुए कहा कि इस बार त्यौहारों के दौरान खरीदारों के लिए क्रमशः आभूषण, घरेलू सामान, कपड़े, किचन-डाइनिंग और घड़ियां प्रमुख आकर्षण होंगे.
इसके अनुसार ईबे इंडिया का मानना है कि राष्ट्रीय राजधानी में त्योहारी सीजन के दौरान लोग आभूषण, होम अप्लायंसेज, परिधान आदि की खरीदारी करेंगे. इसके साथ ही वे घड़ियों और रसोई के सामान पर भी ध्यान देंगे.
अध्ययन का मानना है कि त्योहारी सीजन में मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट सबसे अधिक खरीदे जाने वाले उत्पाद बने रहेंगे. गौरलतब है कि ebay. in पर 45 लाख खरीदारों में से 12 फीसदी दिल्ली के हैं. ईबे सर्वे (2014) के अनुसार दिल्ली भारत का शीर्ष ई-कॉमर्स हब है.
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ई-कॉमर्स कंपनी ईबे इंडिया के एक सर्वे के अनुसार इस त्योहारी सीजन में दिल्ली में लोग आभूषण, होम अप्लायंसेज और परिधानों की खरीदारी पर जोर देंगे. हालांकि मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट सबसे ज्यादा खरीदे जाने का अनुमान है. कंपनी ने अपनी रिपोर्ट को दो हज़ार चौदह के त्योहारी सीजन के रूझानों के अनुसंधान और विश्लेषण पर आधारित बताते हुए कहा कि इस बार त्यौहारों के दौरान खरीदारों के लिए क्रमशः आभूषण, घरेलू सामान, कपड़े, किचन-डाइनिंग और घड़ियां प्रमुख आकर्षण होंगे. इसके अनुसार ईबे इंडिया का मानना है कि राष्ट्रीय राजधानी में त्योहारी सीजन के दौरान लोग आभूषण, होम अप्लायंसेज, परिधान आदि की खरीदारी करेंगे. इसके साथ ही वे घड़ियों और रसोई के सामान पर भी ध्यान देंगे. अध्ययन का मानना है कि त्योहारी सीजन में मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट सबसे अधिक खरीदे जाने वाले उत्पाद बने रहेंगे. गौरलतब है कि ebay. in पर पैंतालीस लाख खरीदारों में से बारह फीसदी दिल्ली के हैं. ईबे सर्वे के अनुसार दिल्ली भारत का शीर्ष ई-कॉमर्स हब है.
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मांस के साथ पाई, जिस नुस्खा पर हम विचार करेंगेआगे, यह किसी भी आधार से स्वादिष्ट और संतुष्ट हो जाता है। आज हमने आटा उत्पादों की तैयारी के दो अलग-अलग संस्करणों को ध्यान में रखने का फैसला किया, इस स्व-निर्मित खमीर आटा के लिए और खरीदा अर्द्ध तैयार उत्पाद खरीदा।
आटा और भरने के लिए आवश्यक सामग्रीः
- दूध वसा - 550 मिलीलीटर;
- मार्जरीन मलाईदार - 150 ग्राम;
- अंडा बड़ा चिकन - 1 टुकड़ा;
- चीनी - एक बड़ा चम्मच;
- नमक - आधा मिठाई का चम्मच;
- सफेद आटा - घनत्व में जोड़ें;
- गोमांस - 500 ग्राम लुगदी;
- बड़े बल्ब - 2 पीसी।
- भरने के लिए मसाले - स्वाद में जोड़ें;
- गोल अनाज चावल - 1/3 कप।
मांस के साथ एक पाई, जिसकी नुस्खा पर आधारित हैखमीर परीक्षण, पर्याप्त लंबा समय तैयार किया जा रहा है। लेकिन आपके सभी काम जरूरी रूप से उचित होंगे, नतीजतन आपको बहुत स्वादिष्ट और शानदार आटा उत्पाद मिलेंगे।
खमीर आटा गूंधने के लिए,दूध को गर्म करना, चीनी, खमीर, नमक डालना और उन्हें भंग करने की प्रतीक्षा करना आवश्यक है। इसके बाद, पिघला हुआ मार्जरीन, चिकन अंडा और सफेद आटा दूध द्रव्यमान में जोड़ा जाना चाहिए। मोटी आधार को मिलाकर, इसे 1.3 घंटे के लिए गर्म जगह में रखा जाना चाहिए।
मांस के साथ एक पाई, जिसकी नुस्खा पर आधारित हैगोमांस से भरना, सुगंधित फोर्समीट के बाद ही बनाया जाना चाहिए। ऐसा करने के लिए, प्याज के साथ मांस चक्की में गोमांस पीसना जरूरी है, और उसके बाद मसाले जोड़ें और हल्के ढंग से एक पैन में तलना। भरने के बगल में उबले हुए गोल चावल चावल डालना और सब कुछ अच्छी तरह मिलाएं।
भरने और आधार दोनों तैयार होने के बाद,आपको पाई बनाना शुरू करना चाहिए। ऐसा करने के लिए, आटे के खाली सर्कल (व्यास में 7 सेंटीमीटर तक) रोल करें, और उसके बाद अपने मध्यम सूखे मांस और चुटकी किनारों पर रखें। सभी तैयार अर्द्ध तैयार उत्पादों को एक ग्रीस शीट पर रखा जाना चाहिए और 40-50 मिनट के लिए ओवन में पकाया जाना चाहिए।
आवश्यक सामग्रीः
- सूखे मांस से भराई - 700 ग्राम (तैयारी का सिद्धांत पिछले नुस्खा में वर्णित है);
- खमीर के बिना flaky पेस्ट्री - 600 ग्राम।
मांस के साथ एक पाई, जो नुस्खा प्रदान करता हैएक स्तरित आधार का उपयोग पिछले संस्करण की तुलना में बहुत तेज किया जाता है। आखिरकार, इस तरह के उत्पाद की तैयारी के लिए आटे को लंबे समय तक गूंधने की कोई जरूरत नहीं है, और फिर जब तक यह उगता है तब तक प्रतीक्षा करें। इस प्रकार, प्रस्तुत डिश के लिए आपको तैयार पफ सेमी-फिनिश उत्पाद की एक परत लेनी चाहिए, इसे चौकोर में कटौती करें, और फिर मिस्ड मांस से मध्यम भरने में रखें और अच्छी तरह से किनारों को चुटकी लें। इस तरह के एक पफ पकवान बेकिंग पिछले नुस्खा के समान ही है। हालांकि, ओवन में खाना पकाने का समय 10-16 मिनट तक कम किया जाना चाहिए।
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मांस के साथ पाई, जिस नुस्खा पर हम विचार करेंगेआगे, यह किसी भी आधार से स्वादिष्ट और संतुष्ट हो जाता है। आज हमने आटा उत्पादों की तैयारी के दो अलग-अलग संस्करणों को ध्यान में रखने का फैसला किया, इस स्व-निर्मित खमीर आटा के लिए और खरीदा अर्द्ध तैयार उत्पाद खरीदा। आटा और भरने के लिए आवश्यक सामग्रीः - दूध वसा - पाँच सौ पचास मिलीलीटर; - मार्जरीन मलाईदार - एक सौ पचास ग्राम; - अंडा बड़ा चिकन - एक टुकड़ा; - चीनी - एक बड़ा चम्मच; - नमक - आधा मिठाई का चम्मच; - सफेद आटा - घनत्व में जोड़ें; - गोमांस - पाँच सौ ग्राम लुगदी; - बड़े बल्ब - दो पीसी। - भरने के लिए मसाले - स्वाद में जोड़ें; - गोल अनाज चावल - एक/तीन कप। मांस के साथ एक पाई, जिसकी नुस्खा पर आधारित हैखमीर परीक्षण, पर्याप्त लंबा समय तैयार किया जा रहा है। लेकिन आपके सभी काम जरूरी रूप से उचित होंगे, नतीजतन आपको बहुत स्वादिष्ट और शानदार आटा उत्पाद मिलेंगे। खमीर आटा गूंधने के लिए,दूध को गर्म करना, चीनी, खमीर, नमक डालना और उन्हें भंग करने की प्रतीक्षा करना आवश्यक है। इसके बाद, पिघला हुआ मार्जरीन, चिकन अंडा और सफेद आटा दूध द्रव्यमान में जोड़ा जाना चाहिए। मोटी आधार को मिलाकर, इसे एक दशमलव तीन घंटाटे के लिए गर्म जगह में रखा जाना चाहिए। मांस के साथ एक पाई, जिसकी नुस्खा पर आधारित हैगोमांस से भरना, सुगंधित फोर्समीट के बाद ही बनाया जाना चाहिए। ऐसा करने के लिए, प्याज के साथ मांस चक्की में गोमांस पीसना जरूरी है, और उसके बाद मसाले जोड़ें और हल्के ढंग से एक पैन में तलना। भरने के बगल में उबले हुए गोल चावल चावल डालना और सब कुछ अच्छी तरह मिलाएं। भरने और आधार दोनों तैयार होने के बाद,आपको पाई बनाना शुरू करना चाहिए। ऐसा करने के लिए, आटे के खाली सर्कल रोल करें, और उसके बाद अपने मध्यम सूखे मांस और चुटकी किनारों पर रखें। सभी तैयार अर्द्ध तैयार उत्पादों को एक ग्रीस शीट पर रखा जाना चाहिए और चालीस-पचास मिनट के लिए ओवन में पकाया जाना चाहिए। आवश्यक सामग्रीः - सूखे मांस से भराई - सात सौ ग्राम ; - खमीर के बिना flaky पेस्ट्री - छः सौ ग्राम। मांस के साथ एक पाई, जो नुस्खा प्रदान करता हैएक स्तरित आधार का उपयोग पिछले संस्करण की तुलना में बहुत तेज किया जाता है। आखिरकार, इस तरह के उत्पाद की तैयारी के लिए आटे को लंबे समय तक गूंधने की कोई जरूरत नहीं है, और फिर जब तक यह उगता है तब तक प्रतीक्षा करें। इस प्रकार, प्रस्तुत डिश के लिए आपको तैयार पफ सेमी-फिनिश उत्पाद की एक परत लेनी चाहिए, इसे चौकोर में कटौती करें, और फिर मिस्ड मांस से मध्यम भरने में रखें और अच्छी तरह से किनारों को चुटकी लें। इस तरह के एक पफ पकवान बेकिंग पिछले नुस्खा के समान ही है। हालांकि, ओवन में खाना पकाने का समय दस-सोलह मिनट तक कम किया जाना चाहिए।
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उत्तर प्रदेश के मथुरा में नंदबाब मंदिर में नमाज पढ़ने के आरोपी फैसल खान की सशर्त जमानत अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। रविवार को यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ ने दिया है। बरसाना थाने में 1 नवंबर को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जिसमे याची के अलावा सह अभियुक्त चांद मोहम्मद पर बिना पुजारी की सहमति के जबरन नमाज पढ़ने और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल करने का आरोप लगाया गया गया था। यह हिन्दुओं की आस्था को असम्मान करने तथा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की नीयत से किया गया था।
याची के अधिवक्ता का कहना था कि वह सामाजिक कार्यकर्ता है। खुदायी खिदमतगार के रूप में जाना जाता है। 25 सालों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाने में जुटा हुआ है। वह मंदिर के भीतर नहीं गया। पुजारी की सहमति से मंदिर के बाहर नमाज पढ़ी थी। याची के अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने अपील करते हुए कहा कि आरोपी साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, गवाहों पर प्रलोभन या अन्य तरीके से दबाव नहीं डालेगा तथा विचारण में सहयोग करेगा। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि याची अब कोई भी फोटोग्राफ सोशल मीडिया में वायरल नहीं करेगा।
बता दें कि नंद गांव में नंदबाबा मंदिर में फैसल खान और उसके साथ ही चांद मोहम्मद द्वारा नमाज अदा की थी। इसके बाद दोनों की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। फोटो वायरल होने के बाद मंदिर के सेवायत कान्हा गोस्वामी ने इन दोनों के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने के मामले में बरसाने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। साथ ही दो अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फैसल खान को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से लगातार फैसल खान मथुरा की जिला जेल में बंद है।
मंदिर में नमाज पढ़ने वाले फैसल खान ने कहा था कि वह कई दिनों की यात्रा पर था। इस यात्रा का मकसद हिन्दू-मुस्लिम एकता था। हम अपने साथियों के साथ मंदिर में जा रहे थे। लोगों से एकता की बात कर रहे थे। इसी तरह नंदबाबा के मंदिर में भी गए थे। जब नमाज़ का वक्त हो गया तो मंदिर के लोगों ने ही हमें नमाज़ पढ़ने के लिए जगह दी। उसके बाद खाना भी खिलाया। इसके बाद हम लोग वापस दिल्ली आ गए। इसके तीन दिन बाद विरोध शुरू हो गया। गौरतलब रहे कि इसके बाद ही फैसल खान को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
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उत्तर प्रदेश के मथुरा में नंदबाब मंदिर में नमाज पढ़ने के आरोपी फैसल खान की सशर्त जमानत अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। रविवार को यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ ने दिया है। बरसाना थाने में एक नवंबर को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जिसमे याची के अलावा सह अभियुक्त चांद मोहम्मद पर बिना पुजारी की सहमति के जबरन नमाज पढ़ने और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल करने का आरोप लगाया गया गया था। यह हिन्दुओं की आस्था को असम्मान करने तथा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की नीयत से किया गया था। याची के अधिवक्ता का कहना था कि वह सामाजिक कार्यकर्ता है। खुदायी खिदमतगार के रूप में जाना जाता है। पच्चीस सालों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाने में जुटा हुआ है। वह मंदिर के भीतर नहीं गया। पुजारी की सहमति से मंदिर के बाहर नमाज पढ़ी थी। याची के अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने अपील करते हुए कहा कि आरोपी साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, गवाहों पर प्रलोभन या अन्य तरीके से दबाव नहीं डालेगा तथा विचारण में सहयोग करेगा। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि याची अब कोई भी फोटोग्राफ सोशल मीडिया में वायरल नहीं करेगा। बता दें कि नंद गांव में नंदबाबा मंदिर में फैसल खान और उसके साथ ही चांद मोहम्मद द्वारा नमाज अदा की थी। इसके बाद दोनों की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। फोटो वायरल होने के बाद मंदिर के सेवायत कान्हा गोस्वामी ने इन दोनों के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने के मामले में बरसाने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। साथ ही दो अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फैसल खान को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से लगातार फैसल खान मथुरा की जिला जेल में बंद है। मंदिर में नमाज पढ़ने वाले फैसल खान ने कहा था कि वह कई दिनों की यात्रा पर था। इस यात्रा का मकसद हिन्दू-मुस्लिम एकता था। हम अपने साथियों के साथ मंदिर में जा रहे थे। लोगों से एकता की बात कर रहे थे। इसी तरह नंदबाबा के मंदिर में भी गए थे। जब नमाज़ का वक्त हो गया तो मंदिर के लोगों ने ही हमें नमाज़ पढ़ने के लिए जगह दी। उसके बाद खाना भी खिलाया। इसके बाद हम लोग वापस दिल्ली आ गए। इसके तीन दिन बाद विरोध शुरू हो गया। गौरतलब रहे कि इसके बाद ही फैसल खान को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
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नेशनल डेस्कः अमरनाथ यात्रा के शेषनाग आधार शिविर में हुई झड़प में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें कुछ तीर्थयात्रियों और टट्टूवालों को मामूली चोटें आई थीं। कश्मीर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) विजय कुमार ने कहा कि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर एक भ्रामक और निराधार वीडियो अपलोड किया है जिसमें दावा किया गया है कि तीर्थयात्रियों पर पत्थर फेंके गए। उन्होंने कहा, "मामले का संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. "
शेषनाग दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में अमरनाथ यात्रा के पहलगाम अक्ष पर स्थित है। एडीजीपी ने ट्विटर पर कहा, "शेषनाग में 15 जुलाई को टट्टूवालों के बीच झड़प हो गई, जिसके परिणामस्वरूप टट्टूवालों और कुछ तीर्थयात्रियों को मामूली चोटें आईं। स्थिति को तुरंत नियंत्रण में ले लिया गया। "
उन्होंने कहा कि पहलगाम पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. जनता को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। कुमार ने कहा, जम्मू-कश्मीर पुलिस तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण यात्रा सुनिश्चित करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है और रहेगी।
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नेशनल डेस्कः अमरनाथ यात्रा के शेषनाग आधार शिविर में हुई झड़प में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें कुछ तीर्थयात्रियों और टट्टूवालों को मामूली चोटें आई थीं। कश्मीर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विजय कुमार ने कहा कि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर एक भ्रामक और निराधार वीडियो अपलोड किया है जिसमें दावा किया गया है कि तीर्थयात्रियों पर पत्थर फेंके गए। उन्होंने कहा, "मामले का संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. " शेषनाग दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में अमरनाथ यात्रा के पहलगाम अक्ष पर स्थित है। एडीजीपी ने ट्विटर पर कहा, "शेषनाग में पंद्रह जुलाई को टट्टूवालों के बीच झड़प हो गई, जिसके परिणामस्वरूप टट्टूवालों और कुछ तीर्थयात्रियों को मामूली चोटें आईं। स्थिति को तुरंत नियंत्रण में ले लिया गया। " उन्होंने कहा कि पहलगाम पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. जनता को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। कुमार ने कहा, जम्मू-कश्मीर पुलिस तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण यात्रा सुनिश्चित करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है और रहेगी।
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अकसर बच्चे गलती करने के बाद सजा से बचने के लिए झूठ बोलते हैं। लेकिन धीरे-धीरे झूठ बोलना उनकी आदत में शामिल हो जाता है।
इस आदत (Habit) में समय रहते सुधार न किया जाए तो बड़े होने पर भी झूठ (Lie) बोलना उनके व्यक्तित्व (Personality) का हिस्सा बन जाता है।
बच्चे की झूठ बोलने की आदत को दूर करने के लिए पैरेंट्स (Parents) खुद भी झूठ न बोलें और उसे सच बोलने का महत्व समझाएं। अगर समस्या गंभीर हो तो काउंसलर (Counselor) की मदद लें।
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अकसर बच्चे गलती करने के बाद सजा से बचने के लिए झूठ बोलते हैं। लेकिन धीरे-धीरे झूठ बोलना उनकी आदत में शामिल हो जाता है। इस आदत में समय रहते सुधार न किया जाए तो बड़े होने पर भी झूठ बोलना उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है। बच्चे की झूठ बोलने की आदत को दूर करने के लिए पैरेंट्स खुद भी झूठ न बोलें और उसे सच बोलने का महत्व समझाएं। अगर समस्या गंभीर हो तो काउंसलर की मदद लें।
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लाइव हिंदी खबर :-आज हम आपको उन राशियों के बारे मे बताने जा रहे हैं। जिनको अचानक बहुत बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। इन दिनों आप बहुत गहरे विचार कर सकते हैं। जिससे आपको मानसिक तनाव भी हो सकता है। इन दिनों आप अपनी निजी समस्याओ से घिरे होंगे। और परिवार को लेकर असुरक्षा मे घिरे होंगे। यदि आप इन दिनों किसी के साथ खरीदारी करने जा रहे हैं। तो यह समय आपके लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। खरीदारी मे आपको बहुत ज्यादा अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती हैं।
आज आप अपने जीवनसाथी के साथ कही बाहर घूमने जा सकते है। जिससे आपको बहुत लाभ होगा। आपको अपने उत्साह को काबू रखने की जरूरत हैं। इन दिनों ज्यादा खुशी भी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। आपको अपने काम काज मे किसी की मदद मिल सकती हैं। नौकरी य बिजनेस को लेकर इन दिनों विवाद हो सकता है। इन दिनों आप कोशिश करे की किसी गरीब बच्चे को खट्टी या मीठी चीज खिलाए। आपका जिद्दी स्वभाव आपके माता-पिता का चैन छिन सकता हैं।
आपको अपने माता-पिता की सलाह पर ध्यान देने की जरूरत हैं। उनकी सेहत का खास खयाल रखे। सकारात्मक विचारों पर आपको ध्यान देने की जरूरत है। आपकी किसी को अपने करियर के बीच बाधा न बनने दे। इन दिनों आप अपनी चीजों को रोशनी मे देख सकते है। आज के दिन दान-पुण्य करने से आपको लाभ हो सकता हैं।
आपको इन दिनों मानसिक शांति और सुकून मिल सकता है। आपको इन दिनों अपने करियर मे आगे बढ़ने के कई मौके मिल सकते हैं। धन लाभ होने के योग बन रहे हैं। आपको इन दिनों अपनी योजनाओ मे सफलता मिल सकती हैं। जिससे आपको बहुत से लाभ हो सकते हैं। जल्द ही आपको आगे बढ़ने के कई मौके मिल सकते हैं। इन दिनों आप अपनी हैसियत बढ़ाने मे पूरी तरह से सक्रिय होंगे।
भाग्यशाली राशियाँ हैः- धनु राशि , मीन राशि और कर्क राशि।
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लाइव हिंदी खबर :-आज हम आपको उन राशियों के बारे मे बताने जा रहे हैं। जिनको अचानक बहुत बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। इन दिनों आप बहुत गहरे विचार कर सकते हैं। जिससे आपको मानसिक तनाव भी हो सकता है। इन दिनों आप अपनी निजी समस्याओ से घिरे होंगे। और परिवार को लेकर असुरक्षा मे घिरे होंगे। यदि आप इन दिनों किसी के साथ खरीदारी करने जा रहे हैं। तो यह समय आपके लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। खरीदारी मे आपको बहुत ज्यादा अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती हैं। आज आप अपने जीवनसाथी के साथ कही बाहर घूमने जा सकते है। जिससे आपको बहुत लाभ होगा। आपको अपने उत्साह को काबू रखने की जरूरत हैं। इन दिनों ज्यादा खुशी भी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। आपको अपने काम काज मे किसी की मदद मिल सकती हैं। नौकरी य बिजनेस को लेकर इन दिनों विवाद हो सकता है। इन दिनों आप कोशिश करे की किसी गरीब बच्चे को खट्टी या मीठी चीज खिलाए। आपका जिद्दी स्वभाव आपके माता-पिता का चैन छिन सकता हैं। आपको अपने माता-पिता की सलाह पर ध्यान देने की जरूरत हैं। उनकी सेहत का खास खयाल रखे। सकारात्मक विचारों पर आपको ध्यान देने की जरूरत है। आपकी किसी को अपने करियर के बीच बाधा न बनने दे। इन दिनों आप अपनी चीजों को रोशनी मे देख सकते है। आज के दिन दान-पुण्य करने से आपको लाभ हो सकता हैं। आपको इन दिनों मानसिक शांति और सुकून मिल सकता है। आपको इन दिनों अपने करियर मे आगे बढ़ने के कई मौके मिल सकते हैं। धन लाभ होने के योग बन रहे हैं। आपको इन दिनों अपनी योजनाओ मे सफलता मिल सकती हैं। जिससे आपको बहुत से लाभ हो सकते हैं। जल्द ही आपको आगे बढ़ने के कई मौके मिल सकते हैं। इन दिनों आप अपनी हैसियत बढ़ाने मे पूरी तरह से सक्रिय होंगे। भाग्यशाली राशियाँ हैः- धनु राशि , मीन राशि और कर्क राशि।
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ISIS: तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने घोषणा की है कि ISIS प्रमुख अबू हुसैन अल कुरैशी मारा गया है। कहा जाता है कि अबू हुसैन अल कुरैशी तुर्की की एमआईटी इंटेलिजेंस एजेंसी द्वारा चलाए गए एक ऑपरेशन में मारा गया था। ऑपरेशन शनिवार को होने की पुष्टि हुई थी।
मालूम हो कि आईएसआईएस प्रमुख अबू हसन अल हसमिनी अल कुरैशी को पिछले साल 30 नवंबर को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। हसमिनी अल कुरैशी की जगह अबुल हुसैन अल कुरैशी ने ली। हालाँकि, अल कुरैशी जिस ज़िंदिर ज़ोन में रह रहा है, उस पर तुर्की के खुफिया एजेंटों और स्थानीय सैन्य पुलिस ने छापा मारा था। उसके बाद कुरैशी का सफाया कर दिया गया और इलाके पर कब्जा कर लिया गया।
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ISIS: तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने घोषणा की है कि ISIS प्रमुख अबू हुसैन अल कुरैशी मारा गया है। कहा जाता है कि अबू हुसैन अल कुरैशी तुर्की की एमआईटी इंटेलिजेंस एजेंसी द्वारा चलाए गए एक ऑपरेशन में मारा गया था। ऑपरेशन शनिवार को होने की पुष्टि हुई थी। मालूम हो कि आईएसआईएस प्रमुख अबू हसन अल हसमिनी अल कुरैशी को पिछले साल तीस नवंबर को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। हसमिनी अल कुरैशी की जगह अबुल हुसैन अल कुरैशी ने ली। हालाँकि, अल कुरैशी जिस ज़िंदिर ज़ोन में रह रहा है, उस पर तुर्की के खुफिया एजेंटों और स्थानीय सैन्य पुलिस ने छापा मारा था। उसके बाद कुरैशी का सफाया कर दिया गया और इलाके पर कब्जा कर लिया गया।
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थोडा मनोविनोद करता था । शुक-सारिका ( तोता-मैना ) का पढाना, तित्तर और बटेरोकी लडाई, भेड़ोकी भिडन्त, उसके प्रिय विनोद थे ( का० सू० पृ० ४७ ) । उसके घरमे हस, कारण्डव, चकबाक, मोर, कोयल आदि पक्षी, बानर, हरिन, व्याघ्र, सिंह जन्तु भी पाले जाते थे । समय-समय पर वह उनसे भी अपना मनोरजन करता था ( का० सू० पृ० २८४) । इस समय उसके निकटवर्ती सहचर पीठमर्द, विट, विदूषक भी या जाया करते थे । वह उनसे आप भी करता था ! फिर सो जाता था । सोकर उठने के बाद वह गोष्ठी-बिहार के लिये प्रसाधन करता था, ग्रगराग, उपलेपन, माल्यगध और उत्तरीय सम्भालकर वह गोष्ठियोमे जाता था । हमने आगे इन गोष्ठियोका विस्तृत वर्णन किया है। यहाँ उनकी चर्चा सक्षेपमें ही करली है । गोष्ठियोसे लौटने के बाद वह साध्य कृत्योसे निवृत्त होता था और साथकाल संगीतानुष्ठानोका आयोजन करता था या अन्यत्र आयोजित संगीतका रस लेने जाता था । इन संगीतकोमे नाच, गान अभिनय हुआ करते थे यदि ( का० सू० पृ० ४७-४८) । साधारण नागरक भी इन उत्सवोमे सम्मिलित होते थे । मृच्छकटिकके रेभिल नामक सुकंठ नागरकने साय संध्या के बाद ही अपने घर परयोजित संगीतक नामक मजलिसमे गान किया था । इन सभा से लौटने के बाद भी नागरक कुछ विनोदोमे लगा रहता था । परन्तु वे उसके अत्यन्त निजी व्यापार होते थे । इस प्रकार प्राचीन भारतका रईस प्रातःकालसे सन्ध्यातक एक कलापूर्ण विलासिताके वातावरणमे वास करता था । उसके विलाससे किसी-न किसी कलाको उत्तेजना मिलती थी, उसके प्रत्येक उपभोग्य वस्तुके उत्पादन के लिये एक सुरुचिपूर्ण परिश्रमी परिचारक-मण्डली नियुक्त रहती थी । वह धनका सुरू जमकर भोगता था और अपनी प्रचुर धन-राशिके उपभोगमे अपने साथ एक बड़े भारी जनसमुदायकी जीविकाकी भी व्यवस्था करता था । वह काव्य, नाटक, श्राख्यान, रचनाको प्रत्यक्ष रूपसे उत्साहित करता था और नृत्य, गीत,
चित्र वाटिका तो वह शरण रूप ही था । वह रूप-रस-गंध-स्पर्श ि सभी इन्द्रियार्थीके भोगनेमे सुरुचिका परिचय देता था और विलामितामे कंठ मन रहकर भी धर्म और अध्यात्मसे एकदम उदासीन नही रहता था। उम युगके साहित्यमे भोगके साथ-ही-साथ त्यागका, विलासिता के साथ शौर्यका और सौदर्यप्रेमके साथ आत्मदानका आदर्श सर्वत्र सुप्रतिष्ठित था । सब समय आदर्श के अनुकूल नही हुआ करता था, परन्तु फिर भी आदर्शका महत्त्व भुलाया नहीं जा सकता।
२२ - [अन्तःपुर
परन्तु का सबसे वडा आश्रयदाता था राजा और रईसोका अन्तःपुर । पुरुषोकी दुनिया उतनी निर्विघ्न नही होती थी । प्रायः ही वास्तविकताके कठोर आघात रोमासके वातावरणको क्षुब्ध कर जाते थे । युद्ध-विग्रह, ढंगा-फसाद, व्यापारहानि, चोर डाकुओका उपद्रव, दूर-दूर देशोकी यात्रा, लौटनेमे अनिश्चित विश्वास; ये और ऐसे ही अन्य उत्पात पुरुषोकी बैठकको चंचल बनाते रहते थे। पर अन्तःपुरतक विक्षोभकी लहरियों बहुत कम पहुँच पाती थी । शत्रु और मित्र दोनो ही उन दिनो अन्तःपुरकी शान्तिका सम्मान करते थे । प्राचीन ग्रन्थोसे अनुमान होता है कि राजकीय अन्तःपुरोमे नाट्य-शालाएँ भी होती थी । रामायणके पुराने युगमे ही 'वधूजन-नाट्य-संघ' की चर्चा मिलती है । प्रियदर्शिकामे जो नाटक खेला गया था मालविकाग्निमित्रमे जिस अभिनय-प्रतिद्वंद्विता की चर्चा है वे अन्तःपुरके रंगमंचपर ही अभिनीत हुए थे । नाच, गान, वाद्य, चित्रकारी आदि मुकुमार कलाएँ अन्तःपुरमे जीती थी ।
कामसूत्रसे जान पडता है कि तत्कालीन नागरकन अपना घर पानीके आसपास बनाया करते थे ( पृ० ४१ ), पर परवर्ती ग्रन्थोसे जान पडता है कि इस बातो कोई बहुत आवश्यक नही समझा जाता था । घरके दो भाग तो होते ही थे । बाहरी प्रकोष्ठ पुरुषोके लिये और भीतरी प्रकोष्ठ अन्तःपुरकी स्त्रियो के लिये । वराहमिहिरने बृहत् संहितामे ऐसे मकान बनानेकी विस्तृत विधि बताई है`। साधारणतः ये मकान नगरीके प्रधान राजपथोकी दोनो ओर हुआ करते थे । अन्तःपुरको वधुएँ ऊपरी तल्लेमे रहा करती थी, क्योकि प्राचीन काव्यो और नाटकोमे किसी विशेष उत्सवादिके देखनेके सिलसिलेमे ऊपरी तल्लेके गवाक्षोसे अन्तरदेखनेका वर्णन प्रायः मिल जाया करता है । अन्तःपुरके ऊपरी तल्लेके घरोमे गवाक्ष निश्चितरूपसे रहते थे। राजपथकी ओर गवाक्षोका रखना आवश्यक समझा जाता था । ये अन्तःपुरके ऊपरी तल्लेके गवाक्ष कुछ ऊँचेपर बैठाए जाते थे । मालती-माधवकी मालती ऊपरके तल्लेपरते माधवको रथ्या (रथके चलने लायक चौड़ी सडक ) मार्ग से भ्रमण करते हुए देखा करती थी । देखनेवाला वातायन 'तुंग' था अर्थात् ऊँचाईपर था । ऊँचेपर बनानेका उद्देश्य संभवतः यह होता था, कि अतःपुरिकाएँ तो चाहरकी ओर देख सकें, पर बाहरके लोग उन्हें न
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थोडा मनोविनोद करता था । शुक-सारिका का पढाना, तित्तर और बटेरोकी लडाई, भेड़ोकी भिडन्त, उसके प्रिय विनोद थे । उसके घरमे हस, कारण्डव, चकबाक, मोर, कोयल आदि पक्षी, बानर, हरिन, व्याघ्र, सिंह जन्तु भी पाले जाते थे । समय-समय पर वह उनसे भी अपना मनोरजन करता था । इस समय उसके निकटवर्ती सहचर पीठमर्द, विट, विदूषक भी या जाया करते थे । वह उनसे आप भी करता था ! फिर सो जाता था । सोकर उठने के बाद वह गोष्ठी-बिहार के लिये प्रसाधन करता था, ग्रगराग, उपलेपन, माल्यगध और उत्तरीय सम्भालकर वह गोष्ठियोमे जाता था । हमने आगे इन गोष्ठियोका विस्तृत वर्णन किया है। यहाँ उनकी चर्चा सक्षेपमें ही करली है । गोष्ठियोसे लौटने के बाद वह साध्य कृत्योसे निवृत्त होता था और साथकाल संगीतानुष्ठानोका आयोजन करता था या अन्यत्र आयोजित संगीतका रस लेने जाता था । इन संगीतकोमे नाच, गान अभिनय हुआ करते थे यदि । साधारण नागरक भी इन उत्सवोमे सम्मिलित होते थे । मृच्छकटिकके रेभिल नामक सुकंठ नागरकने साय संध्या के बाद ही अपने घर परयोजित संगीतक नामक मजलिसमे गान किया था । इन सभा से लौटने के बाद भी नागरक कुछ विनोदोमे लगा रहता था । परन्तु वे उसके अत्यन्त निजी व्यापार होते थे । इस प्रकार प्राचीन भारतका रईस प्रातःकालसे सन्ध्यातक एक कलापूर्ण विलासिताके वातावरणमे वास करता था । उसके विलाससे किसी-न किसी कलाको उत्तेजना मिलती थी, उसके प्रत्येक उपभोग्य वस्तुके उत्पादन के लिये एक सुरुचिपूर्ण परिश्रमी परिचारक-मण्डली नियुक्त रहती थी । वह धनका सुरू जमकर भोगता था और अपनी प्रचुर धन-राशिके उपभोगमे अपने साथ एक बड़े भारी जनसमुदायकी जीविकाकी भी व्यवस्था करता था । वह काव्य, नाटक, श्राख्यान, रचनाको प्रत्यक्ष रूपसे उत्साहित करता था और नृत्य, गीत, चित्र वाटिका तो वह शरण रूप ही था । वह रूप-रस-गंध-स्पर्श ि सभी इन्द्रियार्थीके भोगनेमे सुरुचिका परिचय देता था और विलामितामे कंठ मन रहकर भी धर्म और अध्यात्मसे एकदम उदासीन नही रहता था। उम युगके साहित्यमे भोगके साथ-ही-साथ त्यागका, विलासिता के साथ शौर्यका और सौदर्यप्रेमके साथ आत्मदानका आदर्श सर्वत्र सुप्रतिष्ठित था । सब समय आदर्श के अनुकूल नही हुआ करता था, परन्तु फिर भी आदर्शका महत्त्व भुलाया नहीं जा सकता। बाईस - [अन्तःपुर परन्तु का सबसे वडा आश्रयदाता था राजा और रईसोका अन्तःपुर । पुरुषोकी दुनिया उतनी निर्विघ्न नही होती थी । प्रायः ही वास्तविकताके कठोर आघात रोमासके वातावरणको क्षुब्ध कर जाते थे । युद्ध-विग्रह, ढंगा-फसाद, व्यापारहानि, चोर डाकुओका उपद्रव, दूर-दूर देशोकी यात्रा, लौटनेमे अनिश्चित विश्वास; ये और ऐसे ही अन्य उत्पात पुरुषोकी बैठकको चंचल बनाते रहते थे। पर अन्तःपुरतक विक्षोभकी लहरियों बहुत कम पहुँच पाती थी । शत्रु और मित्र दोनो ही उन दिनो अन्तःपुरकी शान्तिका सम्मान करते थे । प्राचीन ग्रन्थोसे अनुमान होता है कि राजकीय अन्तःपुरोमे नाट्य-शालाएँ भी होती थी । रामायणके पुराने युगमे ही 'वधूजन-नाट्य-संघ' की चर्चा मिलती है । प्रियदर्शिकामे जो नाटक खेला गया था मालविकाग्निमित्रमे जिस अभिनय-प्रतिद्वंद्विता की चर्चा है वे अन्तःपुरके रंगमंचपर ही अभिनीत हुए थे । नाच, गान, वाद्य, चित्रकारी आदि मुकुमार कलाएँ अन्तःपुरमे जीती थी । कामसूत्रसे जान पडता है कि तत्कालीन नागरकन अपना घर पानीके आसपास बनाया करते थे , पर परवर्ती ग्रन्थोसे जान पडता है कि इस बातो कोई बहुत आवश्यक नही समझा जाता था । घरके दो भाग तो होते ही थे । बाहरी प्रकोष्ठ पुरुषोके लिये और भीतरी प्रकोष्ठ अन्तःपुरकी स्त्रियो के लिये । वराहमिहिरने बृहत् संहितामे ऐसे मकान बनानेकी विस्तृत विधि बताई है`। साधारणतः ये मकान नगरीके प्रधान राजपथोकी दोनो ओर हुआ करते थे । अन्तःपुरको वधुएँ ऊपरी तल्लेमे रहा करती थी, क्योकि प्राचीन काव्यो और नाटकोमे किसी विशेष उत्सवादिके देखनेके सिलसिलेमे ऊपरी तल्लेके गवाक्षोसे अन्तरदेखनेका वर्णन प्रायः मिल जाया करता है । अन्तःपुरके ऊपरी तल्लेके घरोमे गवाक्ष निश्चितरूपसे रहते थे। राजपथकी ओर गवाक्षोका रखना आवश्यक समझा जाता था । ये अन्तःपुरके ऊपरी तल्लेके गवाक्ष कुछ ऊँचेपर बैठाए जाते थे । मालती-माधवकी मालती ऊपरके तल्लेपरते माधवको रथ्या मार्ग से भ्रमण करते हुए देखा करती थी । देखनेवाला वातायन 'तुंग' था अर्थात् ऊँचाईपर था । ऊँचेपर बनानेका उद्देश्य संभवतः यह होता था, कि अतःपुरिकाएँ तो चाहरकी ओर देख सकें, पर बाहरके लोग उन्हें न
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वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी विवियन रिचर्ड्स की गिनती दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में की जाती है। वह उस दौर में गेंदबाजों पर कहर बरपाते थे जब अन्य बल्लेबाज तेज गेंदबाजों से डरा करते थे। उनके स्ट्राइकरेट और औसत की हर कोई बात करता था। विव रिटर्ड्स ने अपने करियर के दौरान खेले 121 टेस्ट में 8540 और 187 वनडे में 6721 रन बनाये थे। अगर यह महान खिलाड़ी आईपीएल जैसी टी20 टूर्नामेंट लीग खेलता तो उसकी नीलामी की बोली कितनी लगती?
न्यूजीलैंड के पूर्व विकेटकीपर का मानना है कि रिचडर्स अगर टी20 खेल रहे होते तो फ्रेंचाइजी में उन्हें लेने के लिये होड़ मची होती। कमिंस और स्टोक्स पर मिलाकर जितना खर्च हुआ है, टीमें उससे ज्यादा में उन्हें खरीदने को तत्पर होती। बता दें आईपीएल में बेन स्टोक्स का कॉन्ट्रैक्ट 12. 50 करोड़ रुपए का है जबकि कमिंस को हाल ही में कोलकाता नाइट राइडर्स ने 15. 50 करोड़ रुपए में खरीदा है।
उन्होंने कहा,"जब भी आप सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ विश्व एकादश चुनेंगे तो उनका नाम हमेशा जेहन में रहेगा। इतने साल में कई बल्लेबाजों ने कई रिकॉर्ड बनाये लेकिन गेंदबाजी की धज्जियां उधेड़ने का ऐसा हुनर बिरला ही देखने को मिलता है।
(With Bhasha Inputs)
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वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी विवियन रिचर्ड्स की गिनती दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में की जाती है। वह उस दौर में गेंदबाजों पर कहर बरपाते थे जब अन्य बल्लेबाज तेज गेंदबाजों से डरा करते थे। उनके स्ट्राइकरेट और औसत की हर कोई बात करता था। विव रिटर्ड्स ने अपने करियर के दौरान खेले एक सौ इक्कीस टेस्ट में आठ हज़ार पाँच सौ चालीस और एक सौ सत्तासी वनडे में छः हज़ार सात सौ इक्कीस रन बनाये थे। अगर यह महान खिलाड़ी आईपीएल जैसी टीबीस टूर्नामेंट लीग खेलता तो उसकी नीलामी की बोली कितनी लगती? न्यूजीलैंड के पूर्व विकेटकीपर का मानना है कि रिचडर्स अगर टीबीस खेल रहे होते तो फ्रेंचाइजी में उन्हें लेने के लिये होड़ मची होती। कमिंस और स्टोक्स पर मिलाकर जितना खर्च हुआ है, टीमें उससे ज्यादा में उन्हें खरीदने को तत्पर होती। बता दें आईपीएल में बेन स्टोक्स का कॉन्ट्रैक्ट बारह. पचास करोड़ रुपए का है जबकि कमिंस को हाल ही में कोलकाता नाइट राइडर्स ने पंद्रह. पचास करोड़ रुपए में खरीदा है। उन्होंने कहा,"जब भी आप सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ विश्व एकादश चुनेंगे तो उनका नाम हमेशा जेहन में रहेगा। इतने साल में कई बल्लेबाजों ने कई रिकॉर्ड बनाये लेकिन गेंदबाजी की धज्जियां उधेड़ने का ऐसा हुनर बिरला ही देखने को मिलता है।
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केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और बीजेपी नेता रावसाहेब दानवे( rao saheb danave) ने एक बेहद अहम बयान दिया है। जिसने राज्य में सियासत की गर्मी को और बढ़ा दिया है। रावसाहेब दानवे ने कहा है कि लोकसभा चुनाव के साथ-साथ महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Along with the Lok Sabha elections, there will also be Maharashtra assembly elections.) भी होंगे। इसको लेकर राज्य के राजनीतिक गलियारों में जोरदार चर्चा शुरू हो गई है। महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक संकट की पृष्ठभूमि में रावसाहेब दानवे का बयान काफी अहम माना जा रहा है।
औरंगाबाद के फूलंबरी तालुका में बीजेपी सरपंच व ग्राम पंचायत सदस्यों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। दानवे इस कार्यक्रम में बोल रहे थे। रावसाहेब दानवे अपने तरह-तरह के बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। अब भी वह चुनाव की पृष्ठभूमि में दिए गए बयान के कारण चर्चा में हैं। दानवे ने कहा कि राज्य के समग्र राजनीतिक घटनाक्रम और स्थिति को देखते हुए लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव भी कराये जायेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि औरंगाबाद से कई नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे।
सत्ता पक्ष से पहले भी विपक्ष ने मध्यावधि चुनाव कराने की बात कही थी। अजित पवार, संजय राउत, आदित्य ठाकरे समेत कई नेताओं ने मध्यावधि चुनाव की संभावना जताई थी। इसमें अब रावसाहेब दानवे का बयान आया है। इसलिए, कई लोगों ने अब यह मान लिया है कि मध्यावधि चुनाव होंगे।
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केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और बीजेपी नेता रावसाहेब दानवे ने एक बेहद अहम बयान दिया है। जिसने राज्य में सियासत की गर्मी को और बढ़ा दिया है। रावसाहेब दानवे ने कहा है कि लोकसभा चुनाव के साथ-साथ महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भी होंगे। इसको लेकर राज्य के राजनीतिक गलियारों में जोरदार चर्चा शुरू हो गई है। महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक संकट की पृष्ठभूमि में रावसाहेब दानवे का बयान काफी अहम माना जा रहा है। औरंगाबाद के फूलंबरी तालुका में बीजेपी सरपंच व ग्राम पंचायत सदस्यों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। दानवे इस कार्यक्रम में बोल रहे थे। रावसाहेब दानवे अपने तरह-तरह के बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। अब भी वह चुनाव की पृष्ठभूमि में दिए गए बयान के कारण चर्चा में हैं। दानवे ने कहा कि राज्य के समग्र राजनीतिक घटनाक्रम और स्थिति को देखते हुए लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव भी कराये जायेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि औरंगाबाद से कई नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे। सत्ता पक्ष से पहले भी विपक्ष ने मध्यावधि चुनाव कराने की बात कही थी। अजित पवार, संजय राउत, आदित्य ठाकरे समेत कई नेताओं ने मध्यावधि चुनाव की संभावना जताई थी। इसमें अब रावसाहेब दानवे का बयान आया है। इसलिए, कई लोगों ने अब यह मान लिया है कि मध्यावधि चुनाव होंगे।
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जो मिथिलावासी नहीं है, और जिन्होंने मिथिला की बेटी की विदाई का दृश्य नजदीक से नहीं देखा है, यह बात अटपटी जरूर लगेगी कि मिथिला की बेटी के रोने के दृश्य को ही सबसे अधिक दर्दनाक दृश्य क्यों कहा जा रहा है । किसी प्रिय की मृत्यु से उत्पन्न दर्द से भी अधिक मिथिला की बेटी की विदाई से उत्पन्न दर्द को अधिक क्यों बताया जा रहा है ?
यूं तो नेपाल की हर बेटी जब पहली बार अपने मायके को अलविदा करते हुए ससुराल में अपनी नयी दुनिया बसाने को मायके की देहरी लांघती है तो टूटते हृदय के भाव आंसू बनकर आंखों से टपकने ही लगते हैं और माहौल बहुत गमगीन हो जाता है, लेकिन मिथिला की बेटी की विदाई के वक्त यह गम अपनी चरमावस्था में होता है । यह बात अलग है कि शहरों की अधिकांश बेटियों ने विदाई के वक्त ब्यूटीशियन की मदद से तैयार किये गये मंहगे मेकअप के बिगड़ जाने के डर से आंसु बहाना बंद कर दिया है और खुशी-खुशी बोलेरो में बैठकर समझदारी और आधुनिकता का परिचय देना प्रारम्भ कर दिया है, किंतु मिथिला की बेटियां अभी भी इस प्रभाव से पूरी तरह अछूती हैं ।
यहाँ तक कि दहेज के नाम पर बेटी के बाप से खून तक चूस लेनेवाले निष्ठुर दुल्हे भी इस अवसर पर आंखें पोंछते नजर आते हैं और कभी-कभी तो दुल्हे के मन में यह भाव भी उत्पन्न हो जाता है कि वह अपनी दुल्हन को अपने साथ ले जाकर उसके मायके वालों को इस तरह का असहनीय कष्ट क्यों दे रहा है । ऐसे में दुल्हा कभी-कभी सबों की मार्मिक कथा का जिम्मेदार खुद को मानने लगता है । बेटी को विदा करने आम-पड़ोस के व टोल से सारे लोग पहुँच जाते हैं और आशिर्वाद के साथ-साथ आंसू की सौगात भी देते हैं । ऐसा लगता है मानो घरद्वार, पेड़-पौधे, जानवर आदि भी रो रहे हैं, बेटी को विदा करते वक्त ।
विदाई के क्षण के पास आते ही बेटी जब रोना शुरु कर देती है तो फिर उस करुन क्रंदन का कोई ओर-छोर नहीं होता है । माता-पिता, भाई-बहन, भाभी-चाची व अन्य सबों से गले मिलकर रोती है और सबों को जोर-जोर से पुकार-पुकार कर बिखलते हुए स्वर में पूछती है कि उसने कौन-सा अपरा- किया है कि उसे सबों से दूर भेजा जा रहा है, कैसे सब आत्मीय जनों के बिना जाएगी वह किसको मां-मां या बाबूजी कह पुकारेगी ।
भाव विह्वल होकर वह पूछती है कि उसे कहां भेजा जा रहा है, जिसका जवाब हर कोई सिर्फ रो कर आंसुओं से देता है । साथ रोती महिलाएं सामूहिक रुदन के साथ-साथ धीरे-धीरे बेटी को संभालते हुए उस सवारी (कार, जीप, ट्रैक्टर, बोलेरो, बस) के पास लाती है, जिस सवारी पर बैठकर उसे ससुराल जाना होता है, तो यह दृश्य अपने 'क्लाइमेक्स' पर जा पहुँचता है । बेटी गाड़ी पर चढ़ना नहीं चाहती है और रिश्तेदार महिलाएं उसे समझा-बुझाकर गाड़ी पर चढ़ाने का प्रयास करती रहती है । बेटी इस कदर कतराती है मानो वह गाड़ी नहीं फांसी का फंदा हो ।
न जाने कब से पारंपारिक गीत बना हुआ है । यह गीत मिथिला का चर्चित गीत है और इसमें कोई सन्देह नहीं कि इस गीत की धुन हिन्दी, नेपाली, बंगाली, अंग्रेजी के बेहतरीन मार्मिक धुनों में से एक है । बिछोड़ से उपजे इस तरह के गीतों की धुन को मिथिलावासियों ने एक अलग ही नाम दे डाला है- 'समदाउन' । समदाउन के तहत कई तरह के गीत इस बात को प्रतिबिंबित करते हैं कि मैथिली भाषा के गीतकारों-संगीतकारों ने भी बड़ी गहराई से बेटी की विदाई की मार्मिकता को महसूस किया है ।
वस्तुतः यह मिथिलावासियों की भावुकता व अत्यधिक संवेदनशीलता का बहुत बड़ा प्रमाण है । जिसकी चरम प्रस्तुति बेटी की विदाई के वक्त होती है । इससे यह कल्पना की जा सकती है कि विदाई के औपचारिक दृश्यों में भी जब स्थानीयवासी रोने लगते हैं तो दिल के टुकड़े से विदाई के वक्त वे कितना आंसू बहाते होंगे । कभी-कभी तो इस तरह के दृश्यों तस्वीरें उतारने वाला 'फोटोग्राफर' या सेल्फिस्तान' लेनेवाले भी तस्वीरें उतारते-उतारते खुद भी तस्वीर का एक हिस्सा बन जाता है और हिचकियां लेने लगता है । ऐसी ही स्थिति रोने की आवाज को रेकॉर्ड करनेवाले के साथ भी होती है । वस्तुतः ये आंसू दर्द के पिघलने से उत्पन्न होते हैं, इसलिए एक मुख्य सवाल यह भी उठता है कि मिथिला की बेटियों का ही दर्द इतना गहरा क्यों है ?
दरअसल मिथिला में प्रारम्भ से ही बच्चों के विवाह में दूरी को नजरअंदाज किया जाता रहा है । लोग अपनी बेटियों की शादी दूर-दूर के गांवों में करते रहे हैं, अच्छे घर एवं वर की तलाश में । और अब तो तेज सवारियां व सड़क उपलब्- हैं, पहले तो डोली व कहार ही थे । डोली व कहार के बाद बैलगाड़ी पर चढ़कर दुल्हन सुसुराल जाने लगी, फिर ट्रैक्टर का युग आया और अब कार, जीप, बस का युग आया है । वैसे अभी भी ट्रैक्टर का युग है ।
दिलचस्प तथ्य तो यह भी है कि मिथिला में विदाई के वक्त बेटी का रुदन एक कला भी है । बेटी के सुसराल चले जाने के बाद आस-पड़ोस के लोग खासकर महिलाएं उसके रुदन की समीक्षा करती हैं । जो नवविवाहिता बहुत ही मार्मिक ढंग से रोती है व अधिक से अधिक लोगों को रुलाकर चली जाती है, उसे लोग बरसों याद रखते हैं और बातचीत के दौरान उसके रुदन को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हैं । इसके विपरीत जो ढंग से रो भी नहीं पाती, उसका उपहास भी बाद में किया जाता है ।
इतना ही नहीं मार्मिक ढंग से न रो पाना मिथिला महिलाओं के व्यक्तित्व का एक 'निगेटिव प्वाइंट' भी माना जाता है क्योंकि बेटियों के रोने का काम विदाई में ही समाप्त नहीं हो जाता । विदाई के बाद पहली बार अपने गांव लौटती हुई महिला भी अपने गांव की सीमा रेखा के अंदर प्रवेश करते ही जोर-जोर से रोना आरंभ कर देती है । मिथिला के दूरदराज के गांवों में अभी भी ऐसा देखा जा सकता है ।
पुनः ससुराल जाते वक्त भी बेटी रोती है । फिर माता-पिता के मौत पर भी बेटियां रोती हैं । इसलिए विदाई से पहले बेटी रोने का पूर्वाभ्यास भी कर लेती है । पुराने समय में तो बेटियों को विदाई से एक महीना पूर्व से ही रुलाया जाता था, लेकिन अब यह प्रचलन नहीं है ।
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जो मिथिलावासी नहीं है, और जिन्होंने मिथिला की बेटी की विदाई का दृश्य नजदीक से नहीं देखा है, यह बात अटपटी जरूर लगेगी कि मिथिला की बेटी के रोने के दृश्य को ही सबसे अधिक दर्दनाक दृश्य क्यों कहा जा रहा है । किसी प्रिय की मृत्यु से उत्पन्न दर्द से भी अधिक मिथिला की बेटी की विदाई से उत्पन्न दर्द को अधिक क्यों बताया जा रहा है ? यूं तो नेपाल की हर बेटी जब पहली बार अपने मायके को अलविदा करते हुए ससुराल में अपनी नयी दुनिया बसाने को मायके की देहरी लांघती है तो टूटते हृदय के भाव आंसू बनकर आंखों से टपकने ही लगते हैं और माहौल बहुत गमगीन हो जाता है, लेकिन मिथिला की बेटी की विदाई के वक्त यह गम अपनी चरमावस्था में होता है । यह बात अलग है कि शहरों की अधिकांश बेटियों ने विदाई के वक्त ब्यूटीशियन की मदद से तैयार किये गये मंहगे मेकअप के बिगड़ जाने के डर से आंसु बहाना बंद कर दिया है और खुशी-खुशी बोलेरो में बैठकर समझदारी और आधुनिकता का परिचय देना प्रारम्भ कर दिया है, किंतु मिथिला की बेटियां अभी भी इस प्रभाव से पूरी तरह अछूती हैं । यहाँ तक कि दहेज के नाम पर बेटी के बाप से खून तक चूस लेनेवाले निष्ठुर दुल्हे भी इस अवसर पर आंखें पोंछते नजर आते हैं और कभी-कभी तो दुल्हे के मन में यह भाव भी उत्पन्न हो जाता है कि वह अपनी दुल्हन को अपने साथ ले जाकर उसके मायके वालों को इस तरह का असहनीय कष्ट क्यों दे रहा है । ऐसे में दुल्हा कभी-कभी सबों की मार्मिक कथा का जिम्मेदार खुद को मानने लगता है । बेटी को विदा करने आम-पड़ोस के व टोल से सारे लोग पहुँच जाते हैं और आशिर्वाद के साथ-साथ आंसू की सौगात भी देते हैं । ऐसा लगता है मानो घरद्वार, पेड़-पौधे, जानवर आदि भी रो रहे हैं, बेटी को विदा करते वक्त । विदाई के क्षण के पास आते ही बेटी जब रोना शुरु कर देती है तो फिर उस करुन क्रंदन का कोई ओर-छोर नहीं होता है । माता-पिता, भाई-बहन, भाभी-चाची व अन्य सबों से गले मिलकर रोती है और सबों को जोर-जोर से पुकार-पुकार कर बिखलते हुए स्वर में पूछती है कि उसने कौन-सा अपरा- किया है कि उसे सबों से दूर भेजा जा रहा है, कैसे सब आत्मीय जनों के बिना जाएगी वह किसको मां-मां या बाबूजी कह पुकारेगी । भाव विह्वल होकर वह पूछती है कि उसे कहां भेजा जा रहा है, जिसका जवाब हर कोई सिर्फ रो कर आंसुओं से देता है । साथ रोती महिलाएं सामूहिक रुदन के साथ-साथ धीरे-धीरे बेटी को संभालते हुए उस सवारी के पास लाती है, जिस सवारी पर बैठकर उसे ससुराल जाना होता है, तो यह दृश्य अपने 'क्लाइमेक्स' पर जा पहुँचता है । बेटी गाड़ी पर चढ़ना नहीं चाहती है और रिश्तेदार महिलाएं उसे समझा-बुझाकर गाड़ी पर चढ़ाने का प्रयास करती रहती है । बेटी इस कदर कतराती है मानो वह गाड़ी नहीं फांसी का फंदा हो । न जाने कब से पारंपारिक गीत बना हुआ है । यह गीत मिथिला का चर्चित गीत है और इसमें कोई सन्देह नहीं कि इस गीत की धुन हिन्दी, नेपाली, बंगाली, अंग्रेजी के बेहतरीन मार्मिक धुनों में से एक है । बिछोड़ से उपजे इस तरह के गीतों की धुन को मिथिलावासियों ने एक अलग ही नाम दे डाला है- 'समदाउन' । समदाउन के तहत कई तरह के गीत इस बात को प्रतिबिंबित करते हैं कि मैथिली भाषा के गीतकारों-संगीतकारों ने भी बड़ी गहराई से बेटी की विदाई की मार्मिकता को महसूस किया है । वस्तुतः यह मिथिलावासियों की भावुकता व अत्यधिक संवेदनशीलता का बहुत बड़ा प्रमाण है । जिसकी चरम प्रस्तुति बेटी की विदाई के वक्त होती है । इससे यह कल्पना की जा सकती है कि विदाई के औपचारिक दृश्यों में भी जब स्थानीयवासी रोने लगते हैं तो दिल के टुकड़े से विदाई के वक्त वे कितना आंसू बहाते होंगे । कभी-कभी तो इस तरह के दृश्यों तस्वीरें उतारने वाला 'फोटोग्राफर' या सेल्फिस्तान' लेनेवाले भी तस्वीरें उतारते-उतारते खुद भी तस्वीर का एक हिस्सा बन जाता है और हिचकियां लेने लगता है । ऐसी ही स्थिति रोने की आवाज को रेकॉर्ड करनेवाले के साथ भी होती है । वस्तुतः ये आंसू दर्द के पिघलने से उत्पन्न होते हैं, इसलिए एक मुख्य सवाल यह भी उठता है कि मिथिला की बेटियों का ही दर्द इतना गहरा क्यों है ? दरअसल मिथिला में प्रारम्भ से ही बच्चों के विवाह में दूरी को नजरअंदाज किया जाता रहा है । लोग अपनी बेटियों की शादी दूर-दूर के गांवों में करते रहे हैं, अच्छे घर एवं वर की तलाश में । और अब तो तेज सवारियां व सड़क उपलब्- हैं, पहले तो डोली व कहार ही थे । डोली व कहार के बाद बैलगाड़ी पर चढ़कर दुल्हन सुसुराल जाने लगी, फिर ट्रैक्टर का युग आया और अब कार, जीप, बस का युग आया है । वैसे अभी भी ट्रैक्टर का युग है । दिलचस्प तथ्य तो यह भी है कि मिथिला में विदाई के वक्त बेटी का रुदन एक कला भी है । बेटी के सुसराल चले जाने के बाद आस-पड़ोस के लोग खासकर महिलाएं उसके रुदन की समीक्षा करती हैं । जो नवविवाहिता बहुत ही मार्मिक ढंग से रोती है व अधिक से अधिक लोगों को रुलाकर चली जाती है, उसे लोग बरसों याद रखते हैं और बातचीत के दौरान उसके रुदन को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हैं । इसके विपरीत जो ढंग से रो भी नहीं पाती, उसका उपहास भी बाद में किया जाता है । इतना ही नहीं मार्मिक ढंग से न रो पाना मिथिला महिलाओं के व्यक्तित्व का एक 'निगेटिव प्वाइंट' भी माना जाता है क्योंकि बेटियों के रोने का काम विदाई में ही समाप्त नहीं हो जाता । विदाई के बाद पहली बार अपने गांव लौटती हुई महिला भी अपने गांव की सीमा रेखा के अंदर प्रवेश करते ही जोर-जोर से रोना आरंभ कर देती है । मिथिला के दूरदराज के गांवों में अभी भी ऐसा देखा जा सकता है । पुनः ससुराल जाते वक्त भी बेटी रोती है । फिर माता-पिता के मौत पर भी बेटियां रोती हैं । इसलिए विदाई से पहले बेटी रोने का पूर्वाभ्यास भी कर लेती है । पुराने समय में तो बेटियों को विदाई से एक महीना पूर्व से ही रुलाया जाता था, लेकिन अब यह प्रचलन नहीं है ।
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New Delhi 13 September 2016: डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों ने दिल्ली को चारों तरफ घेर रखा है, अस्पताल मरीजों से भरें हैं, स्वास्थ्य सेवाओं का एक तरह से कबाड़ा हो चुका है, लेकिन केजरीवाल सरकार राजधानी में ही नहीं है। मंगलवार को जब खबर आई कि चिकनगुनिया से दिल्ली में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इस पर जरूरी एक्शन लेने के लिए कोई मंत्री राजधानी में नहीं था।
मंगलवार को जल मंत्री कपिल मिश्रा को छोड़कर केजरीवाल कैबिनेट के सभी मंत्री किसी न किसी काम से बाहर हैं। मुख्यमंत्री खांसी से निजात पाने और गले का ऑपरेशन करवाने के लिए बेंगलुरू गए हैं। वहां से वे सीधा पंजाब का रुख करेंगे, जहां चुनाव होने हैं और आम आदमी पार्टी पूरे दमखम से मैदान में है।
शेखर गुप्ता की केवल इतनी बात से केजरीवाल बौखला गए और उन्होने शेखर गुप्ता को कहा कि आप पहले कांग्रेस की दलाली करते थे और अब मोदी की दलाली कर रहे हो, ऐसे लोगों ने पत्रकारिता को गंदा किया है।
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New Delhi तेरह सितंबरtember दो हज़ार सोलह: डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों ने दिल्ली को चारों तरफ घेर रखा है, अस्पताल मरीजों से भरें हैं, स्वास्थ्य सेवाओं का एक तरह से कबाड़ा हो चुका है, लेकिन केजरीवाल सरकार राजधानी में ही नहीं है। मंगलवार को जब खबर आई कि चिकनगुनिया से दिल्ली में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इस पर जरूरी एक्शन लेने के लिए कोई मंत्री राजधानी में नहीं था। मंगलवार को जल मंत्री कपिल मिश्रा को छोड़कर केजरीवाल कैबिनेट के सभी मंत्री किसी न किसी काम से बाहर हैं। मुख्यमंत्री खांसी से निजात पाने और गले का ऑपरेशन करवाने के लिए बेंगलुरू गए हैं। वहां से वे सीधा पंजाब का रुख करेंगे, जहां चुनाव होने हैं और आम आदमी पार्टी पूरे दमखम से मैदान में है। शेखर गुप्ता की केवल इतनी बात से केजरीवाल बौखला गए और उन्होने शेखर गुप्ता को कहा कि आप पहले कांग्रेस की दलाली करते थे और अब मोदी की दलाली कर रहे हो, ऐसे लोगों ने पत्रकारिता को गंदा किया है।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए साल से पहले बंगाल को पूर्वी भारत की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की सौगात देने वाले हैं। 30 दिसंबर को पीएम अपने कोलकाता दौरे में हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी मार्ग के बीच चलने वाली इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।
कोलकाता, राज्य ब्यूरोः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए साल से पहले बंगाल को पूर्वी भारत की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की सौगात देने वाले हैं। 30 दिसंबर को पीएम अपने कोलकाता दौरे में हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी मार्ग के बीच चलने वाली इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इससे पहले सोमवार को इस ट्रेन का यहां ट्रायल रन शुरू हुआ। पूर्व रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रविवार को ही वंदे भारत एक्सप्रेस हावड़ा पहुंच गई। ट्रेन सेवा शुरू होने से पहले इसकी पूरी तरह से जांच की जाएगी और अभी दो-तीन दिन इसका ट्रायल रन चलेगा।
पूर्व रेलवे के प्रवक्ता एकलव्य चक्रवर्ती ने बताया कि आधुनिक यात्री सुविधाओं वाली इस सुपरफास्ट ट्रेन को दोनों दिशाओं से गंतव्य की दूरी तय करने में लगभग 7. 5 घंटे ही लगेंगे। बाकी एक्सप्रेस ट्रेनों को हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी के बीच दूरी तय करने में 12 घंटे से अधिक का समय लगता है। वंदे भारत ट्रेन कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच यात्रा का समय काफी कम कर देगी और आठ घंटे से भी कम समय में उत्तर बंगाल से यहां आना-जाना संभव होगा।
एकलव्य चक्रवर्ती ने बताया कि बंगाल की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाई जाएगी। ट्रेन हावड़ा स्टेशन से सुबह छह बजे रवाना होगी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर दोपहर डेढ़ बजे पहुंचेगी। एक घंटे के ठहराव के बाद यह ट्रेन वापसी में दोपहर ढाई बजे ट्रेन जलपाईगुड़ी से रवाना होगी और रात 10 बजे हावड़ा पहुंचेगी। बता दें कि क्रिसमस के दिन रविवार को वंदे भारत ट्रेन हावड़ा स्टेशन पर पहुंची। हावड़ा के डीआरएम मनीष जैन के साथ पूर्व रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी रविवार दोपहर को ट्रेन का निरीक्षण करने के लिए लिलुआ शार्टिंग यार्ड का दौरा किया था। वंदे भारत को चलाने के लिए 10 मोटरमैन को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी ने 11 दिसंबर को नागपुर से छठी वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी। रेल मंत्रालय का अगले साल अगस्त तक 75 वंदे भारत ट्रेन्स को ट्रैक पर उतारने का लक्ष्य है। वहीं, वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 67 रैक्स को अनुमति मिली है। पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को 15 फरवरी 2019 को हरी झंडी दिखाई गई थी। यह ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चली थी। इसके बाद पांचवीं ट्रेन पिछले ही महीने 11 तारीख को मैसूर से चेन्नई के लिए रवाना की गई।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए साल से पहले बंगाल को पूर्वी भारत की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की सौगात देने वाले हैं। तीस दिसंबर को पीएम अपने कोलकाता दौरे में हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी मार्ग के बीच चलने वाली इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। कोलकाता, राज्य ब्यूरोः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए साल से पहले बंगाल को पूर्वी भारत की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की सौगात देने वाले हैं। तीस दिसंबर को पीएम अपने कोलकाता दौरे में हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी मार्ग के बीच चलने वाली इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इससे पहले सोमवार को इस ट्रेन का यहां ट्रायल रन शुरू हुआ। पूर्व रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रविवार को ही वंदे भारत एक्सप्रेस हावड़ा पहुंच गई। ट्रेन सेवा शुरू होने से पहले इसकी पूरी तरह से जांच की जाएगी और अभी दो-तीन दिन इसका ट्रायल रन चलेगा। पूर्व रेलवे के प्रवक्ता एकलव्य चक्रवर्ती ने बताया कि आधुनिक यात्री सुविधाओं वाली इस सुपरफास्ट ट्रेन को दोनों दिशाओं से गंतव्य की दूरी तय करने में लगभग सात. पाँच घंटाटे ही लगेंगे। बाकी एक्सप्रेस ट्रेनों को हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी के बीच दूरी तय करने में बारह घंटाटे से अधिक का समय लगता है। वंदे भारत ट्रेन कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच यात्रा का समय काफी कम कर देगी और आठ घंटे से भी कम समय में उत्तर बंगाल से यहां आना-जाना संभव होगा। एकलव्य चक्रवर्ती ने बताया कि बंगाल की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाई जाएगी। ट्रेन हावड़ा स्टेशन से सुबह छह बजे रवाना होगी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर दोपहर डेढ़ बजे पहुंचेगी। एक घंटे के ठहराव के बाद यह ट्रेन वापसी में दोपहर ढाई बजे ट्रेन जलपाईगुड़ी से रवाना होगी और रात दस बजे हावड़ा पहुंचेगी। बता दें कि क्रिसमस के दिन रविवार को वंदे भारत ट्रेन हावड़ा स्टेशन पर पहुंची। हावड़ा के डीआरएम मनीष जैन के साथ पूर्व रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी रविवार दोपहर को ट्रेन का निरीक्षण करने के लिए लिलुआ शार्टिंग यार्ड का दौरा किया था। वंदे भारत को चलाने के लिए दस मोटरमैन को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी ने ग्यारह दिसंबर को नागपुर से छठी वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी। रेल मंत्रालय का अगले साल अगस्त तक पचहत्तर वंदे भारत ट्रेन्स को ट्रैक पर उतारने का लक्ष्य है। वहीं, वित्त वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के लिए सरसठ रैक्स को अनुमति मिली है। पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को पंद्रह फरवरी दो हज़ार उन्नीस को हरी झंडी दिखाई गई थी। यह ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चली थी। इसके बाद पांचवीं ट्रेन पिछले ही महीने ग्यारह तारीख को मैसूर से चेन्नई के लिए रवाना की गई।
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साउथ सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री शालिनी अपना जन्मदिन 20 नवंबर को मनाती हैं। वह लंबे समय से फिल्मी पर्दे से दूर हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब शालिनी की गिनती साउथ सिनेमा की शानदार अभिनेत्रियों में होती थी। उन्होंने बाल कलाकार के तौर पर अभिनय की शुरुआत की थी। जन्मदिन के मौक पर हम आपको शालिनी से जुड़ी खास बातें बताते हैं।
शालिनी का जन्म 20 नंवबर 1980 को केरल के तिरुवल्ला शहर में हुआ था। वह एक फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। शालिनी ने फिल्मों में अभिनय की शुरुआत छोटी उम्र से ही कर दी थी। वह पहली बार तीन साल की उम्र में मलयालम फिल्म 'एंटी मामाटिक्कुट्टियाम्मक्कु' में नजर आई थीं। शालिनी की यह फिल्म साल 1983 में आई थी।
'एंटी मामाटिक्कुट्टियाम्मक्कु' के बाद शालिनी ने मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ सिनेमा की कई फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम किया। लंबे समय तक बाल कलाकार के तौर पर काम करने के बाद शालिनी ने साल 1997 में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर फिल्मों में काम करना शुरू किया। मुख्य अभिनेत्री के तौर पर वह पहली बार फिल्म 'अनियथीप्रवु' में नजर आई थीं।
इसके बाद शालिनी ने 'कलियुंजल', 'कईकूदूंना निलावु' और 'निरम' सहित साउथ की कई फिल्मों में काम किया था। मुख्य भूमिका के तौर पर शालिनी का फिल्मी सफर ज्यादा लंबा नहीं रहा था। वह आखिरी बार तमिल फिल्म 'पिरीयधा वरम वेंदम' में नजर आई थीं। शालिनी की यह आखिरी फिल्म थी। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने अपनी शादी के बाद फिल्मी दुनिया को छोड़ने का फैसला किया था।
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साउथ सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री शालिनी अपना जन्मदिन बीस नवंबर को मनाती हैं। वह लंबे समय से फिल्मी पर्दे से दूर हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब शालिनी की गिनती साउथ सिनेमा की शानदार अभिनेत्रियों में होती थी। उन्होंने बाल कलाकार के तौर पर अभिनय की शुरुआत की थी। जन्मदिन के मौक पर हम आपको शालिनी से जुड़ी खास बातें बताते हैं। शालिनी का जन्म बीस नंवबर एक हज़ार नौ सौ अस्सी को केरल के तिरुवल्ला शहर में हुआ था। वह एक फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। शालिनी ने फिल्मों में अभिनय की शुरुआत छोटी उम्र से ही कर दी थी। वह पहली बार तीन साल की उम्र में मलयालम फिल्म 'एंटी मामाटिक्कुट्टियाम्मक्कु' में नजर आई थीं। शालिनी की यह फिल्म साल एक हज़ार नौ सौ तिरासी में आई थी। 'एंटी मामाटिक्कुट्टियाम्मक्कु' के बाद शालिनी ने मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ सिनेमा की कई फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम किया। लंबे समय तक बाल कलाकार के तौर पर काम करने के बाद शालिनी ने साल एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर फिल्मों में काम करना शुरू किया। मुख्य अभिनेत्री के तौर पर वह पहली बार फिल्म 'अनियथीप्रवु' में नजर आई थीं। इसके बाद शालिनी ने 'कलियुंजल', 'कईकूदूंना निलावु' और 'निरम' सहित साउथ की कई फिल्मों में काम किया था। मुख्य भूमिका के तौर पर शालिनी का फिल्मी सफर ज्यादा लंबा नहीं रहा था। वह आखिरी बार तमिल फिल्म 'पिरीयधा वरम वेंदम' में नजर आई थीं। शालिनी की यह आखिरी फिल्म थी। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने अपनी शादी के बाद फिल्मी दुनिया को छोड़ने का फैसला किया था।
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Sonali Raut Bold Pic: कलेंडर गर्ल सोनाली राउत सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय और एक्टिव हैं. वे अपने सिजलिंग अवतार से फैंस का दिल धड़काती रहती हैं. हाल ही में एक्ट्रेस ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से सिजलिंग तस्वीर शेयर कर तहलका मचा दिया है. सोनाली राउत ने रेड कलर की डीप नेक हॉट बॉडीकॉन ड्रेस पहनी है. हेयर को खास अंदाज में बांधा हुआ है साथ ही गोल्डन ईयररिंग्स उनपर काफी जच रहे हैं. एक्ट्रेस की यह बोल्ड तस्वीर देख यूजर्स लट्टू हो रहे हैं. फैंस कमेंट बॉक्स पर फायर इमोजी की बौछार कर रहे हैं. देखें सोनाली राउत की हॉट तस्वीरः
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Sonali Raut Bold Pic: कलेंडर गर्ल सोनाली राउत सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय और एक्टिव हैं. वे अपने सिजलिंग अवतार से फैंस का दिल धड़काती रहती हैं. हाल ही में एक्ट्रेस ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से सिजलिंग तस्वीर शेयर कर तहलका मचा दिया है. सोनाली राउत ने रेड कलर की डीप नेक हॉट बॉडीकॉन ड्रेस पहनी है. हेयर को खास अंदाज में बांधा हुआ है साथ ही गोल्डन ईयररिंग्स उनपर काफी जच रहे हैं. एक्ट्रेस की यह बोल्ड तस्वीर देख यूजर्स लट्टू हो रहे हैं. फैंस कमेंट बॉक्स पर फायर इमोजी की बौछार कर रहे हैं. देखें सोनाली राउत की हॉट तस्वीरः
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विच गुजरी वाली पींग वे माइया ।"
"डिग पई नी गोरी शीशमहल तों,
और ऐसे ही हंसी-मजाक करतीं, ढेरों गीतों को गाती हुईं वे सब दूर से आती धूल के गुबार का इंतजार कर रही थीं। जो घोड़े गाड़ियों के आने से उठना था । असल में गुजरी का माइया (पति) रावलपिंडी से पुन्या (पूर्णमासी) की रात वापिस आता था। साथ में जो कामे (सहायक ) जाते थे, उनकी बीवियां ही गुजरी के साथ थीं । सभी हम उम्र थीं । आसमां पर से अभी सिंदूरी चादर का जादू उतरा नहीं था कि वहां के "गुसाईं जी" की कुटिया दिखी और ये सब वहां जा पहुंचीं ।
क्योंकि झोले में पाथियां वहीं के लिए थीं ।
गुसाईं जी के डेरे पर आग जलती नहीं दिखी तो गुजरी ने पूछा,
"गुसाईं जी, यह क्या आज धूनी नहीं रमाई ?"
लेकर आई।"
गुजरी ने अपना झोला आगे कर के कहा,
" ये लो गुसाईं जी ! लगाओ धूनी ।"
"जितनी पाथियां तूं लाई है शाहणी, उतनी बार रब्ब तेरी झोली भरे ।" गुसाईं जी ने खुश होकर कहा।
गुजरी इस आशीर्वाद से घबरा कर बोली,
"गुसाईं जी मैं तो अपने तीनों बच्चे ब्याह बैठी हूं । मुझे कैसा वरदान दे दिया है, आपने ! मेरी तो अब सूखने की उम्र आ रही थी। यह क्या कह दिया है आपने ?"
"अब तो 'वाक्क ' निकल गया है शाहणी, फिक्र न कर ।उस रब्ब का हिसाब किसने जाना है ।" यह कह कर वो सच्चा साधु आग जलाने में व्यस्त हो गया ।
और उस खाली झोले में अब पांच बच्चे लिए गुजरी लौट रही थी । दूर से धुएं का गुबार भी दिखाई दे रहा था । ये सहेलियां वहीं ठहर गई और घोड़ागाड़ियां पास आते ही अपनें-अपने माही के पास पहुंच गईं थीं ।
उस जमाने में साधु-संतों मेंं बहुत तेज होता था। उनके न आश्रम होते थे और न ही चेले-चपाटे । केवल ईश्वर की आराधना में वे लीन रहते थे। उनका आशीर्वाद खाली नहीं जाता था। गुजरी की पैदाइश १८७० की थी। ३८ वर्ष की उम्र में उनके पांव फिर भारी हो गए। दो-दो वर्षो के अंतराल से पुनः दो बेटियां और तीन बेटे और आ गए थे परिवार में । हमारे पापा चौथे स्थान पर थे । वे ९९ वर्ष की आयु तक जीवित रहीं। और ढेरों किस्से सुनाती थीं । कभी गीत गाकर तो कभी अफसाने । लेकिन एक साधु के कहने से बीस साल बाद बच्चे होने लगे --- यह बात हमारे गले नहीं उतरती थी तब । अब समझ आती हैं, ऐसी बातें ।
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विच गुजरी वाली पींग वे माइया ।" "डिग पई नी गोरी शीशमहल तों, और ऐसे ही हंसी-मजाक करतीं, ढेरों गीतों को गाती हुईं वे सब दूर से आती धूल के गुबार का इंतजार कर रही थीं। जो घोड़े गाड़ियों के आने से उठना था । असल में गुजरी का माइया रावलपिंडी से पुन्या की रात वापिस आता था। साथ में जो कामे जाते थे, उनकी बीवियां ही गुजरी के साथ थीं । सभी हम उम्र थीं । आसमां पर से अभी सिंदूरी चादर का जादू उतरा नहीं था कि वहां के "गुसाईं जी" की कुटिया दिखी और ये सब वहां जा पहुंचीं । क्योंकि झोले में पाथियां वहीं के लिए थीं । गुसाईं जी के डेरे पर आग जलती नहीं दिखी तो गुजरी ने पूछा, "गुसाईं जी, यह क्या आज धूनी नहीं रमाई ?" लेकर आई।" गुजरी ने अपना झोला आगे कर के कहा, " ये लो गुसाईं जी ! लगाओ धूनी ।" "जितनी पाथियां तूं लाई है शाहणी, उतनी बार रब्ब तेरी झोली भरे ।" गुसाईं जी ने खुश होकर कहा। गुजरी इस आशीर्वाद से घबरा कर बोली, "गुसाईं जी मैं तो अपने तीनों बच्चे ब्याह बैठी हूं । मुझे कैसा वरदान दे दिया है, आपने ! मेरी तो अब सूखने की उम्र आ रही थी। यह क्या कह दिया है आपने ?" "अब तो 'वाक्क ' निकल गया है शाहणी, फिक्र न कर ।उस रब्ब का हिसाब किसने जाना है ।" यह कह कर वो सच्चा साधु आग जलाने में व्यस्त हो गया । और उस खाली झोले में अब पांच बच्चे लिए गुजरी लौट रही थी । दूर से धुएं का गुबार भी दिखाई दे रहा था । ये सहेलियां वहीं ठहर गई और घोड़ागाड़ियां पास आते ही अपनें-अपने माही के पास पहुंच गईं थीं । उस जमाने में साधु-संतों मेंं बहुत तेज होता था। उनके न आश्रम होते थे और न ही चेले-चपाटे । केवल ईश्वर की आराधना में वे लीन रहते थे। उनका आशीर्वाद खाली नहीं जाता था। गुजरी की पैदाइश एक हज़ार आठ सौ सत्तर की थी। अड़तीस वर्ष की उम्र में उनके पांव फिर भारी हो गए। दो-दो वर्षो के अंतराल से पुनः दो बेटियां और तीन बेटे और आ गए थे परिवार में । हमारे पापा चौथे स्थान पर थे । वे निन्यानवे वर्ष की आयु तक जीवित रहीं। और ढेरों किस्से सुनाती थीं । कभी गीत गाकर तो कभी अफसाने । लेकिन एक साधु के कहने से बीस साल बाद बच्चे होने लगे --- यह बात हमारे गले नहीं उतरती थी तब । अब समझ आती हैं, ऐसी बातें ।
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इंदौर. एक अर्द्धविक्षिप्त महिला से सामूहिक दुष्कर्म किए जाने की घटना सामने आई है। गौतमपुरा थाना क्षेत्र में रहने वाली 28 साल की महिला के साथ ट्रक ड्राइवर ने साथियों के साथ मिलकर दुष्कर्म किया। वारदात में शामिल एक अपराधी फिलहाल फरार है जिसकी तलाश की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, गौतमपुरा थाना क्षेत्र में रहने वाली 28 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। पीड़ित महिला अर्द्धविक्षिप्त है। पीड़िता की शादी लगभग 8 साल पहले हुई थी लेकिन उसके पति ने उसे छोड़ दिया था।
1 दिसंबर की रात वह सड़क पर घूम रही थी तभी ट्रक ड्राइवर जगदीश उसे डरा-धमकाकर अपने साथ नागदा ले गया। नागदा में जगदीश से अपने साथी राजेश के कमरे पर ले गया। जहां जगदीश, राजेश और ट्रक क्लीनर बहादुर ने महिला के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया।
महिला के शोर मचाने पर वहां भीड़ एकत्रित हो गई जिसे देखकर आराेपी मौके से फरार हो गए। मामले की सूचना नागदा पुलिस को लगी तो उसने जांच प्रांरभ की। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी महिला को लाते हुए नजर आए। मामले में नागदा पुलिस की मदद से आरोपी जगदीश और राजेश को गिरफ्तार कर लिया है। एक अन्य आरोपी बहादुर की तलाश की जा रही है।
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इंदौर. एक अर्द्धविक्षिप्त महिला से सामूहिक दुष्कर्म किए जाने की घटना सामने आई है। गौतमपुरा थाना क्षेत्र में रहने वाली अट्ठाईस साल की महिला के साथ ट्रक ड्राइवर ने साथियों के साथ मिलकर दुष्कर्म किया। वारदात में शामिल एक अपराधी फिलहाल फरार है जिसकी तलाश की जा रही है। पुलिस के अनुसार, गौतमपुरा थाना क्षेत्र में रहने वाली अट्ठाईस वर्षीय महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। पीड़ित महिला अर्द्धविक्षिप्त है। पीड़िता की शादी लगभग आठ साल पहले हुई थी लेकिन उसके पति ने उसे छोड़ दिया था। एक दिसंबर की रात वह सड़क पर घूम रही थी तभी ट्रक ड्राइवर जगदीश उसे डरा-धमकाकर अपने साथ नागदा ले गया। नागदा में जगदीश से अपने साथी राजेश के कमरे पर ले गया। जहां जगदीश, राजेश और ट्रक क्लीनर बहादुर ने महिला के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया। महिला के शोर मचाने पर वहां भीड़ एकत्रित हो गई जिसे देखकर आराेपी मौके से फरार हो गए। मामले की सूचना नागदा पुलिस को लगी तो उसने जांच प्रांरभ की। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी महिला को लाते हुए नजर आए। मामले में नागदा पुलिस की मदद से आरोपी जगदीश और राजेश को गिरफ्तार कर लिया है। एक अन्य आरोपी बहादुर की तलाश की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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PATNA: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के नामांकन की तारीख समाप्त हो गई है और तीसरे चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है। इसके बीच चुनाव प्रचार भी लगातार जारी है। विभिन्न दलों के नेताओं ने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चार विधानसभा क्षेत्रों जनसभा करेंगे। वहीं, तेजस्वी यादव सात चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे. वहीं बीजेपी के कई बड़े नेताओं का तुफानी दौरा है।
औरंगबाद के अनुग्रह नारायण स्टेडियम, नवीनगर में पहली सभा. दूसरी चुनावी सभा श्रीमती रामदुलारी सोन्डिक बालिका हाई स्कूल मैदान राजपुर में, वहीं तीसरी जनसभा रोहतास के करगहर में जगजीवन स्टेडियम में होगी. सीएम नीतीश की चौथी सभा रोहतास के ही दिनारा में बलदेव उच्च विद्यालय के मैदान में आयोजित होगी. वे पटना से सुबह 11 बजे निकलेंगे और शाम को वापस राजधानी लौट आएंगे.
तेजस्वी यादव शनिवार को सात चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे. तेजस्वी यादव पूर्वाह्न 10:35 बजे अमरपुर विधान सभा (जिला बांका) के हाईस्कूल मैदान भरको में, 11:20 बजे धोरैया विधान सभा (जिला बांका) के हाईस्कूल मैदान धवनी में, दोपहर 12:10 बजे बांका विधान सभा (जिला-बांका) के कोरोन्दा मैदान में, दोपहर 01 बजे कटोरिया विधान सभा (जिला बांका) के हाई स्कूल मैदान कटोरिया में, दोपहर 01:50 बजे बेलहर विधान सभा (जिला बांका) के झामा मैदान बेलहर में और इसके बाद दोपहर 02:40 बजे झाझा विधान सभा (जिला जमुई) के महात्मा गांधी हाई स्कूल मैदान झाझा में एवं दोपहर 03:35 बजे तारापुर विधान सभा (मुुंगेर) के गाजीपुर ईदगाह मैदान, तारापुर में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित करेंगे.
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PATNA: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के नामांकन की तारीख समाप्त हो गई है और तीसरे चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है। इसके बीच चुनाव प्रचार भी लगातार जारी है। विभिन्न दलों के नेताओं ने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चार विधानसभा क्षेत्रों जनसभा करेंगे। वहीं, तेजस्वी यादव सात चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे. वहीं बीजेपी के कई बड़े नेताओं का तुफानी दौरा है। औरंगबाद के अनुग्रह नारायण स्टेडियम, नवीनगर में पहली सभा. दूसरी चुनावी सभा श्रीमती रामदुलारी सोन्डिक बालिका हाई स्कूल मैदान राजपुर में, वहीं तीसरी जनसभा रोहतास के करगहर में जगजीवन स्टेडियम में होगी. सीएम नीतीश की चौथी सभा रोहतास के ही दिनारा में बलदेव उच्च विद्यालय के मैदान में आयोजित होगी. वे पटना से सुबह ग्यारह बजे निकलेंगे और शाम को वापस राजधानी लौट आएंगे. तेजस्वी यादव शनिवार को सात चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे. तेजस्वी यादव पूर्वाह्न दस:पैंतीस बजे अमरपुर विधान सभा के हाईस्कूल मैदान भरको में, ग्यारह:बीस बजे धोरैया विधान सभा के हाईस्कूल मैदान धवनी में, दोपहर बारह:दस बजे बांका विधान सभा के कोरोन्दा मैदान में, दोपहर एक बजे कटोरिया विधान सभा के हाई स्कूल मैदान कटोरिया में, दोपहर एक:पचास बजे बेलहर विधान सभा के झामा मैदान बेलहर में और इसके बाद दोपहर दो:चालीस बजे झाझा विधान सभा के महात्मा गांधी हाई स्कूल मैदान झाझा में एवं दोपहर तीन:पैंतीस बजे तारापुर विधान सभा के गाजीपुर ईदगाह मैदान, तारापुर में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित करेंगे.
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आखिरकार कांग्रेस अपना गेम चेंजर लेकर आ ही गई. राजीव गांधी के जन्मदिन के अवसर पर कांग्रेस ने चुनावी जाल फेंक ही दिया. यह जाल कुछ ऐसा है जिसमें भारत के निम्न आय वर्ग के फंसने की पूरी संभावना है. अब देखना यह है कि कितने प्रतिशत भारतीय इस जाल में फंसते हैं और कितने प्रतिशत इससे बचकर निकल जाते हैं.
कांग्रेस की गेम चेंजर खाद्य सुरक्षा स्कीम राजीव गांधी के जन्मदिन के अवसर पर दिल्ली समेत चार कांग्रेस शासित राज्यों में यूपीए सरकार ने लागू कर दी. इस योजना के विरोध में खड़ी मुख्य विपक्षी दल भाजपा को दरकिनार कर पूरे देश में इस योजना को लागू कर अपने लिए आगामी लोकसभा चुनावों में वोट बैंक जुटाने की कोशिश कर रही कांग्रेस के लिए यह थोड़ा सुकून भरा हो सकता है.
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गौरतलब है कि सदन में खाद्य सुरक्षा विधेयक अब तक पारित नहीं हो सका है. कांग्रेस जहां इसे आगामी लोकसभा चुनावों के लिए तुरुप का पत्ता मान रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस को इस पत्ते को खेलने से रोकने में कोई न कोई जुगत लगा ही लेती है. हर बार जब भी सदन में यह विधेयक बहस के लिए आता है, भाजपा इसके पारित होने में कोई न कोई अड़ंगा लगा ही देती है. मानसून सत्र से पहले ही यूपीए सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी यह विधेयक पारित नहीं सका. आखिरकार सरकार को अध्यादेश लाना पड़ा. इसी का परिणाम है कि आज दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में इसे लागू कर पाने में कांग्रेस सफल हो सकी है. पर तुरुप का यह पत्ता पूरी तरह फेंक पाने में कांग्रेस अभी भी नाकामयाब हो सकती है.
अध्यादेश लाकर यूपीए सरकार खाद्य सुरक्षा योजना को स्व-शासित चार राज्यों में लागू कर 67 प्रतिशत गरीब जनता को महंगाई के दौर में 3 और 2 रुपए प्रति किलो के नगण्यतम मूल्य पर चावल-गेहूं उपलब्ध कराने के गुणगान कर चुकी है. लेकिन क्योंकि सदन में खाद्य सुरक्षा विधेयक अब तक पारित हो पाने में सफल नहीं हो सका है इसलिए पूरे देश में यह योजना लागू कर पाने में सरकार के हाथ अब भी बंधे हैं. अभी लागू योजना अध्यादेश के प्रभाव से लागू तो कर दी गई है, लेकिन अध्यादेश का प्रभाव केवल 6 महीनों तक ही रहेगा. इस बीच अगर कांग्रेस इस विधेयक को सदन में पारित करवाने में सफल नहीं हो सकी तो यह तुरुप का पत्ता लंबित पड़ सकता है.
सरकार और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचारियों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी यूपीए सरकार और कांग्रेस हालांकि मानसून सत्र खत्म होने से पहले ही इस विधेयक को पारित करवाना चाहती थीं, लेकिन इसी भ्रष्टाचार ने उसे उस वक्त भी चारो खाने चित्त किए थे. कितने जोर चलाए, यहां तक कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सुषमा स्वराज और लालकृष्ण आडवाणी तक से मिल आईं, पर उनकी परेशानियां कम नहीं हुईं. कोल आवंटन घोटाला और रेलवे घोटाले का मुद्दा भाजपा फिर भी उठाती रही. इस तरह बहुप्रचारित, कांग्रेस की यह ड्रीम योजना मानसून सत्र के पहले पारित नहीं हो सकी. अंततः कांग्रेस को अध्यादेश ही लाना पड़ा. इसी अध्यादेश की बदौलत कांग्रेस शुरुआती तौर पर चार राज्यों में यह योजना लागू कर इसका प्रभाव भी देखना चाहती है. प्रभाव जो भी सामने आएं, कांग्रेस और यूपीए सरकार इस योजना के लिए हमेशा आशान्वित रही हैं. इसके नकारात्मक असर दिखने या प्रभावहीन होने की संभावना भी नगण्य है. बस कांग्रेस के लिए इसे सदन में पारित कराना एक चुनौती बन गई है.
मंगलवार को खाद्य सुरक्षा बिल पर बहस के दौरान कांग्रेस अपनी मंजिल के लगभग करीब ही थी लेकिन भाजपा ने कोल आवंटन घोटाले की फाइल गुम होने पर जवाब मांगकर मामला फिर अधर में लटका दिया. जवाब की शर्त पर विधेयक पारित करने की भाजपा की जिद के आगे कांग्रेस का यह तुरुप का पत्ता फिर सदन के अंदर ही रह गया. हालांकि सपा, जेडीयू और बसपा के समर्थन से यूपीए सरकार इसे पारित करा सकती है लेकिन इस तरह उसे अपने प्रमुख विपक्षी दल को नगण्य मानना पड़ेगा. किसी भी सत्तारूढ़ पार्टी के लिए यह अंतिम रास्ता होता है. कांग्रेस इसे अपनाना नहीं चाहती क्योंकि शायद इस तरह वह अपनी विवशता दिखाना नहीं चाहती. अब देखना यह है कि कोयला घोटाले की गुम हुई फाइलों पर बिफरी हुई भाजपा को मनाकर कांग्रेस अपना चुनावी कार्ड फेंकती है या पिछली बार की तरह कोई बगल का रास्ता देखती है.
Read: आखिर क्यों 15 अगस्त को ही मिली आजादी ?
2014 के लोकसभा चुनावों की बयार अभी से दिखने लगी है. हर पार्टी की रणनीतियां कहीं न कहीं चुनावी रणनीति ही है. हर पार्टी अगले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहती है और इसके लिए जो भी करना पड़े अभी से करने में जुटी है. जो भी हो, इसी बहाने जनता जनार्दन का थोड़ा भला हो जाता है. हास्यास्पद बस इतना है कि अगर यही काम सरकारें अपने कार्यकाल में करतीं तो विपक्षी पार्टी के लिए एक स्वस्थ चुनौती बन पाती और इस तरह आज कांग्रेस को भी तुरुप का पत्ता फेंकने की न जरूरत पड़ती, न एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता. जो भी हो इस चुनावी माहौल के केंद्र में जनता जनार्दन ही है. अंतिम फैसला उसी का होगा लेकिन फिलहाल उस फैसले को अपने पक्ष में करने के लिए इस गेम चेंजर योजना को पारित कराना कांग्रेस की चुनौती बन गई है.
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आखिरकार कांग्रेस अपना गेम चेंजर लेकर आ ही गई. राजीव गांधी के जन्मदिन के अवसर पर कांग्रेस ने चुनावी जाल फेंक ही दिया. यह जाल कुछ ऐसा है जिसमें भारत के निम्न आय वर्ग के फंसने की पूरी संभावना है. अब देखना यह है कि कितने प्रतिशत भारतीय इस जाल में फंसते हैं और कितने प्रतिशत इससे बचकर निकल जाते हैं. कांग्रेस की गेम चेंजर खाद्य सुरक्षा स्कीम राजीव गांधी के जन्मदिन के अवसर पर दिल्ली समेत चार कांग्रेस शासित राज्यों में यूपीए सरकार ने लागू कर दी. इस योजना के विरोध में खड़ी मुख्य विपक्षी दल भाजपा को दरकिनार कर पूरे देश में इस योजना को लागू कर अपने लिए आगामी लोकसभा चुनावों में वोट बैंक जुटाने की कोशिश कर रही कांग्रेस के लिए यह थोड़ा सुकून भरा हो सकता है. Read: गांधी ने नहीं हिटलर ने दिलवाई थी भारत को आजादी ! ! ! गौरतलब है कि सदन में खाद्य सुरक्षा विधेयक अब तक पारित नहीं हो सका है. कांग्रेस जहां इसे आगामी लोकसभा चुनावों के लिए तुरुप का पत्ता मान रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस को इस पत्ते को खेलने से रोकने में कोई न कोई जुगत लगा ही लेती है. हर बार जब भी सदन में यह विधेयक बहस के लिए आता है, भाजपा इसके पारित होने में कोई न कोई अड़ंगा लगा ही देती है. मानसून सत्र से पहले ही यूपीए सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी यह विधेयक पारित नहीं सका. आखिरकार सरकार को अध्यादेश लाना पड़ा. इसी का परिणाम है कि आज दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में इसे लागू कर पाने में कांग्रेस सफल हो सकी है. पर तुरुप का यह पत्ता पूरी तरह फेंक पाने में कांग्रेस अभी भी नाकामयाब हो सकती है. अध्यादेश लाकर यूपीए सरकार खाद्य सुरक्षा योजना को स्व-शासित चार राज्यों में लागू कर सरसठ प्रतिशत गरीब जनता को महंगाई के दौर में तीन और दो रुपयापए प्रति किलो के नगण्यतम मूल्य पर चावल-गेहूं उपलब्ध कराने के गुणगान कर चुकी है. लेकिन क्योंकि सदन में खाद्य सुरक्षा विधेयक अब तक पारित हो पाने में सफल नहीं हो सका है इसलिए पूरे देश में यह योजना लागू कर पाने में सरकार के हाथ अब भी बंधे हैं. अभी लागू योजना अध्यादेश के प्रभाव से लागू तो कर दी गई है, लेकिन अध्यादेश का प्रभाव केवल छः महीनों तक ही रहेगा. इस बीच अगर कांग्रेस इस विधेयक को सदन में पारित करवाने में सफल नहीं हो सकी तो यह तुरुप का पत्ता लंबित पड़ सकता है. सरकार और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचारियों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी यूपीए सरकार और कांग्रेस हालांकि मानसून सत्र खत्म होने से पहले ही इस विधेयक को पारित करवाना चाहती थीं, लेकिन इसी भ्रष्टाचार ने उसे उस वक्त भी चारो खाने चित्त किए थे. कितने जोर चलाए, यहां तक कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सुषमा स्वराज और लालकृष्ण आडवाणी तक से मिल आईं, पर उनकी परेशानियां कम नहीं हुईं. कोल आवंटन घोटाला और रेलवे घोटाले का मुद्दा भाजपा फिर भी उठाती रही. इस तरह बहुप्रचारित, कांग्रेस की यह ड्रीम योजना मानसून सत्र के पहले पारित नहीं हो सकी. अंततः कांग्रेस को अध्यादेश ही लाना पड़ा. इसी अध्यादेश की बदौलत कांग्रेस शुरुआती तौर पर चार राज्यों में यह योजना लागू कर इसका प्रभाव भी देखना चाहती है. प्रभाव जो भी सामने आएं, कांग्रेस और यूपीए सरकार इस योजना के लिए हमेशा आशान्वित रही हैं. इसके नकारात्मक असर दिखने या प्रभावहीन होने की संभावना भी नगण्य है. बस कांग्रेस के लिए इसे सदन में पारित कराना एक चुनौती बन गई है. मंगलवार को खाद्य सुरक्षा बिल पर बहस के दौरान कांग्रेस अपनी मंजिल के लगभग करीब ही थी लेकिन भाजपा ने कोल आवंटन घोटाले की फाइल गुम होने पर जवाब मांगकर मामला फिर अधर में लटका दिया. जवाब की शर्त पर विधेयक पारित करने की भाजपा की जिद के आगे कांग्रेस का यह तुरुप का पत्ता फिर सदन के अंदर ही रह गया. हालांकि सपा, जेडीयू और बसपा के समर्थन से यूपीए सरकार इसे पारित करा सकती है लेकिन इस तरह उसे अपने प्रमुख विपक्षी दल को नगण्य मानना पड़ेगा. किसी भी सत्तारूढ़ पार्टी के लिए यह अंतिम रास्ता होता है. कांग्रेस इसे अपनाना नहीं चाहती क्योंकि शायद इस तरह वह अपनी विवशता दिखाना नहीं चाहती. अब देखना यह है कि कोयला घोटाले की गुम हुई फाइलों पर बिफरी हुई भाजपा को मनाकर कांग्रेस अपना चुनावी कार्ड फेंकती है या पिछली बार की तरह कोई बगल का रास्ता देखती है. Read: आखिर क्यों पंद्रह अगस्त को ही मिली आजादी ? दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनावों की बयार अभी से दिखने लगी है. हर पार्टी की रणनीतियां कहीं न कहीं चुनावी रणनीति ही है. हर पार्टी अगले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहती है और इसके लिए जो भी करना पड़े अभी से करने में जुटी है. जो भी हो, इसी बहाने जनता जनार्दन का थोड़ा भला हो जाता है. हास्यास्पद बस इतना है कि अगर यही काम सरकारें अपने कार्यकाल में करतीं तो विपक्षी पार्टी के लिए एक स्वस्थ चुनौती बन पाती और इस तरह आज कांग्रेस को भी तुरुप का पत्ता फेंकने की न जरूरत पड़ती, न एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता. जो भी हो इस चुनावी माहौल के केंद्र में जनता जनार्दन ही है. अंतिम फैसला उसी का होगा लेकिन फिलहाल उस फैसले को अपने पक्ष में करने के लिए इस गेम चेंजर योजना को पारित कराना कांग्रेस की चुनौती बन गई है. Read:
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केंद्र सरकार के कोरोना को "आपदा" घोषित करने के बीच वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दिल्ली में संसद भवन में अब दर्शकों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राष्ट्रपति भवन में कुछ समय बाद होने वाला पद्म पुरुस्कार समारोह भी फिलहाल टाल दिया गया है। उधर कोरोना पर कल सार्क देशों के प्रमुखों की वीडियो कांफ्रेंसिंग होगी, जिसका प्रस्ताव पीएम मोदी ने दिया था।
इस बीच कोरोना को देखते हुए बीसीसीआई ने अपने सारे घरेलू टूर्नामेंट रद्द कर दिए हैं साथ ही आईपीएल को भी १५ अप्रैल से आगे खिसकाया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने फिर दोहराया है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन वे पूरी सावधानी बरतें। कोरोना को देखते हुए राष्ट्रपति भवन में होने वाला पद्म पुरुस्कार समारोह फिलहाल आगे खिसका दिया गया है। केंद्र ने कोरोना को "आपदा" घोषित कर दिया है और कोरोना से होने वाली मौत पर केंद्र सरकार पीड़ित परिवार को तीन लाख मुआवजा देगी।
संसद का सत्र चल रहा है और आज शाम एक फैसले के मुताबिक अब वहां सिर्फ मंत्री, सांसद, पत्रकार और संबंधित अधिकारी ही जा पाएंगे। दर्शकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है। कोरोना के फैलते खौफ के बीच यह फैसला किया गया है।
देश के कई राज्यों में कैसीनो, सिनेमा हाल, स्कूल और कालेज आदि बंद कर दिए गए हैं।
दुनिया की बात करें तो अब चीन और अमेरिका कोरोना को लेकर एक-दूसरे के सामने आ खड़े हुए हैं और इसे जैविक हथियार बताते हुए एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। चीन और अमेरिका के बीच कोरोना वायरस को लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए गए हैं और अमेरिका जहां कोरोना वायरस को "चीनी वायरस" कह रहा है वहीं, चीन का दावा है कि अमेरिकी सैनिक की वजह से चीन में ये वायरस आया।
दुनिया भर में अब तक कोरोना से ५,५३५ लोगों की जान अंतिम रिपोर्ट्स के मुताबिक जा चुकी है जबकि १,४७,२९८ लोग इसकी चपेट में हैं। अच्छी खबर यह है कि ६७,००३ लोग इस वायरस से रिकवर कर स्वस्थ हो चुके हैं। इनमें भारत में स्वस्थ हुए १० लोग भी शामिल हैं।
चीन से अब मौतों की खबर कम है लेकिन इटली में मौतों की आंकड़ा १,२६८ जा पहुंचा है जबकि ईरान में ६११ लोगों की जान गयी है। अमेरिका में भी कोरोना से ४७ लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अमेरिका और स्पेन में इमरजेंसी की घोषणा की गयी है।
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केंद्र सरकार के कोरोना को "आपदा" घोषित करने के बीच वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दिल्ली में संसद भवन में अब दर्शकों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राष्ट्रपति भवन में कुछ समय बाद होने वाला पद्म पुरुस्कार समारोह भी फिलहाल टाल दिया गया है। उधर कोरोना पर कल सार्क देशों के प्रमुखों की वीडियो कांफ्रेंसिंग होगी, जिसका प्रस्ताव पीएम मोदी ने दिया था। इस बीच कोरोना को देखते हुए बीसीसीआई ने अपने सारे घरेलू टूर्नामेंट रद्द कर दिए हैं साथ ही आईपीएल को भी पंद्रह अप्रैल से आगे खिसकाया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने फिर दोहराया है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन वे पूरी सावधानी बरतें। कोरोना को देखते हुए राष्ट्रपति भवन में होने वाला पद्म पुरुस्कार समारोह फिलहाल आगे खिसका दिया गया है। केंद्र ने कोरोना को "आपदा" घोषित कर दिया है और कोरोना से होने वाली मौत पर केंद्र सरकार पीड़ित परिवार को तीन लाख मुआवजा देगी। संसद का सत्र चल रहा है और आज शाम एक फैसले के मुताबिक अब वहां सिर्फ मंत्री, सांसद, पत्रकार और संबंधित अधिकारी ही जा पाएंगे। दर्शकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है। कोरोना के फैलते खौफ के बीच यह फैसला किया गया है। देश के कई राज्यों में कैसीनो, सिनेमा हाल, स्कूल और कालेज आदि बंद कर दिए गए हैं। दुनिया की बात करें तो अब चीन और अमेरिका कोरोना को लेकर एक-दूसरे के सामने आ खड़े हुए हैं और इसे जैविक हथियार बताते हुए एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। चीन और अमेरिका के बीच कोरोना वायरस को लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए गए हैं और अमेरिका जहां कोरोना वायरस को "चीनी वायरस" कह रहा है वहीं, चीन का दावा है कि अमेरिकी सैनिक की वजह से चीन में ये वायरस आया। दुनिया भर में अब तक कोरोना से पाँच,पाँच सौ पैंतीस लोगों की जान अंतिम रिपोर्ट्स के मुताबिक जा चुकी है जबकि एक,सैंतालीस,दो सौ अट्ठानवे लोग इसकी चपेट में हैं। अच्छी खबर यह है कि सरसठ,तीन लोग इस वायरस से रिकवर कर स्वस्थ हो चुके हैं। इनमें भारत में स्वस्थ हुए दस लोग भी शामिल हैं। चीन से अब मौतों की खबर कम है लेकिन इटली में मौतों की आंकड़ा एक,दो सौ अड़सठ जा पहुंचा है जबकि ईरान में छः सौ ग्यारह लोगों की जान गयी है। अमेरिका में भी कोरोना से सैंतालीस लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अमेरिका और स्पेन में इमरजेंसी की घोषणा की गयी है।
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मल्लिका शेरावत ने गुरुवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक तस्वीर शेयर की है। इसमें वह चीन के सुपरस्टार जैकी चैन के साथ नजर आ रही हैं। जैकी चैन मल्लिका शेरावत का हाथ चूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर आपका ध्यान जरुर खींचेगी। ऐक्ट्रेस ने इस तस्वीर के साथ लिखा, 'वन एंड ओनली जैकी चैन'। बता दें कि मल्लिका शेरावत और जैकी चैन ने साल 2005 में आई फिल्म 'द मिथ' में काम किया था।
वर्कफ्रंट की बात करें तो मल्लिका शेरावत ने हाल ही में अपनी नई फिल्म की घोषणा की है। ऐसा कहा जा रहा है कि उनकी यह फिल्म तमिल, तेलुगु, हिंदी, मलयालम और कन्नड़ में रिलीज होगी।
वहीं, हाल ही में जैकी चैन को लेकर ऐसी खबरें आईं कि वह कोरोना वायरस के चपेट में आ गए हैं लेकिन उन्होंने इन अफवाहों को सिरे से नकार दिया है। जैकी चैन ने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, 'इतनी फिक्र के लिए सभी का धन्यवाद। मैं सुरक्षित और स्वस्थ हूं। कृपया परेशान ना हो, मैं क्वॉरेंटाइन में नहीं हूं। उम्मीद करता हूं आप सभी भी सुरक्षित और स्वस्थ होंगे। '
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मल्लिका शेरावत ने गुरुवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक तस्वीर शेयर की है। इसमें वह चीन के सुपरस्टार जैकी चैन के साथ नजर आ रही हैं। जैकी चैन मल्लिका शेरावत का हाथ चूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर आपका ध्यान जरुर खींचेगी। ऐक्ट्रेस ने इस तस्वीर के साथ लिखा, 'वन एंड ओनली जैकी चैन'। बता दें कि मल्लिका शेरावत और जैकी चैन ने साल दो हज़ार पाँच में आई फिल्म 'द मिथ' में काम किया था। वर्कफ्रंट की बात करें तो मल्लिका शेरावत ने हाल ही में अपनी नई फिल्म की घोषणा की है। ऐसा कहा जा रहा है कि उनकी यह फिल्म तमिल, तेलुगु, हिंदी, मलयालम और कन्नड़ में रिलीज होगी। वहीं, हाल ही में जैकी चैन को लेकर ऐसी खबरें आईं कि वह कोरोना वायरस के चपेट में आ गए हैं लेकिन उन्होंने इन अफवाहों को सिरे से नकार दिया है। जैकी चैन ने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, 'इतनी फिक्र के लिए सभी का धन्यवाद। मैं सुरक्षित और स्वस्थ हूं। कृपया परेशान ना हो, मैं क्वॉरेंटाइन में नहीं हूं। उम्मीद करता हूं आप सभी भी सुरक्षित और स्वस्थ होंगे। '
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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प्रिलिम्स के लियेः
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) पुरस्कार, भारतीय पर्यटन विकास निगम, उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (AISHE)।
मेन्स के लियेः
भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के कार्य।
चर्चा में क्यों?
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (Indian Council for Cultural Relations- ICCR) भारत में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के अनुभवों का उपयोग करके वैश्विक स्तर पर भारत के सांस्कृतिक पदचिह्न का विस्तार करने की योजना बना रही है।
- इस "सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी" का उद्देश्य विदेशी छात्रों के अपने देश लौटने पर वहाँ भारत की संस्कृति के बारे में बताना है।
भारतीय सांस्कृतिक पदचिह्न के विस्तार हेतु ICCR की पहलः
- ICCR देश के विभिन्न केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, संस्थानों एवं कृषि महाविद्यालयों में अपना पाठ्यक्रम पूरा करने से 3 से 4 महीने पहले विदेशी छात्रों के साथ E-3 या एग्जिट एंगेजमेंट इवनिंग शुरू करेगा।
- एंगेजमेंट इवनिंग कार्यक्रम के पश्चात् छात्रों को निश्चित रूप से वापस जाना होगा और भारतीय विरासत तथा इसकी अनूठी संस्कृति के पहलुओं को बढ़ावा देना होगा।
- इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय महत्त्व के स्थलों का दौरा भी शामिल होगा। छात्रों के साथ इन कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिये ICCR ने खादी आयोग, भारतीय पर्यटन विकास निगम और आयुष विभाग को चुना है।
- ICCR ने भारत में अध्ययन करने वाले विश्व भर के विदेशी छात्रों से जुड़ने के लिये एक मंच के रूप में अप्रैल 2022 में इंडिया एलुमनी पोर्टल नामक एक वेबसाइट भी लॉन्च की है।
भारत में नामांकित विदेशी छात्रों की वर्तमान स्थितिः
- शिक्षा मंत्रालय द्वारा किये गए उच्च शिक्षा पर नवीनतम अखिल भारतीय सर्वेक्षण (All India Survey on Higher Education-AISHE) के अनुसार, वर्ष 2020-21 में भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकित विदेशी छात्रों की संख्या 48,035 थी, जो वर्ष 2019-20 के 49,348 से मामूली अंतराल के साथ कम थी।
- 160 से भी अधिक देशों के छात्र अध्ययन के लिये भारत आते हैं, नेपाल, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, भूटान, सूडान, नाइजीरिया, तंजानिया और यमन उनमें प्रमुख हैं।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के कार्यः
- परिचयः
- ICCR विदेश मंत्रालय के तहत भारत सरकार का एक स्वायत्त संगठन है।
- इसकी स्थापना वर्ष 1950 में विदेशों में भारतीय संस्कृति और इसके मूल्यों को बढ़ावा देने तथा भारत एवं अन्य देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
- कार्यः
- भारत और विदेशों में सांस्कृतिक उत्सवों, प्रदर्शनों, प्रदर्शनियों और व्याख्यानों का आयोजन करना।
- भारत में अध्ययन करने के लिये विदेशी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करना।
- भारतीय संगीत, नृत्य, योग और विभिन्न भाषाओं में पाठ्यक्रम की सुविधा प्रदान करना।
- ICCR को वर्ष 2015 से विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों/केंद्रों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उत्सव को सुविधाजनक बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
- भारतीय संगीत, नृत्य, योग और विभिन्न भाषाओं में पाठ्यक्रम की सुविधा प्रदान करना।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, सांस्कृतिक संस्थानों तथा विदेशी सरकारों के साथ सहयोग करना।
- पुरस्कारः
- प्रतिष्ठित भारतविद् पुरस्कार, विश्व संस्कृत पुरस्कार, विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार - प्रशस्ति पत्र और पट्टिका एवं गिसेला बॉन पुरस्कार।
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प्रिलिम्स के लियेः भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद पुरस्कार, भारतीय पर्यटन विकास निगम, उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण । मेन्स के लियेः भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के कार्य। चर्चा में क्यों? भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद भारत में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के अनुभवों का उपयोग करके वैश्विक स्तर पर भारत के सांस्कृतिक पदचिह्न का विस्तार करने की योजना बना रही है। - इस "सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी" का उद्देश्य विदेशी छात्रों के अपने देश लौटने पर वहाँ भारत की संस्कृति के बारे में बताना है। भारतीय सांस्कृतिक पदचिह्न के विस्तार हेतु ICCR की पहलः - ICCR देश के विभिन्न केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, संस्थानों एवं कृषि महाविद्यालयों में अपना पाठ्यक्रम पूरा करने से तीन से चार महीने पहले विदेशी छात्रों के साथ E-तीन या एग्जिट एंगेजमेंट इवनिंग शुरू करेगा। - एंगेजमेंट इवनिंग कार्यक्रम के पश्चात् छात्रों को निश्चित रूप से वापस जाना होगा और भारतीय विरासत तथा इसकी अनूठी संस्कृति के पहलुओं को बढ़ावा देना होगा। - इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय महत्त्व के स्थलों का दौरा भी शामिल होगा। छात्रों के साथ इन कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिये ICCR ने खादी आयोग, भारतीय पर्यटन विकास निगम और आयुष विभाग को चुना है। - ICCR ने भारत में अध्ययन करने वाले विश्व भर के विदेशी छात्रों से जुड़ने के लिये एक मंच के रूप में अप्रैल दो हज़ार बाईस में इंडिया एलुमनी पोर्टल नामक एक वेबसाइट भी लॉन्च की है। भारत में नामांकित विदेशी छात्रों की वर्तमान स्थितिः - शिक्षा मंत्रालय द्वारा किये गए उच्च शिक्षा पर नवीनतम अखिल भारतीय सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकित विदेशी छात्रों की संख्या अड़तालीस,पैंतीस थी, जो वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस के उनचास,तीन सौ अड़तालीस से मामूली अंतराल के साथ कम थी। - एक सौ साठ से भी अधिक देशों के छात्र अध्ययन के लिये भारत आते हैं, नेपाल, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, भूटान, सूडान, नाइजीरिया, तंजानिया और यमन उनमें प्रमुख हैं। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के कार्यः - परिचयः - ICCR विदेश मंत्रालय के तहत भारत सरकार का एक स्वायत्त संगठन है। - इसकी स्थापना वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचास में विदेशों में भारतीय संस्कृति और इसके मूल्यों को बढ़ावा देने तथा भारत एवं अन्य देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। - कार्यः - भारत और विदेशों में सांस्कृतिक उत्सवों, प्रदर्शनों, प्रदर्शनियों और व्याख्यानों का आयोजन करना। - भारत में अध्ययन करने के लिये विदेशी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करना। - भारतीय संगीत, नृत्य, योग और विभिन्न भाषाओं में पाठ्यक्रम की सुविधा प्रदान करना। - ICCR को वर्ष दो हज़ार पंद्रह से विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों/केंद्रों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उत्सव को सुविधाजनक बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। - भारतीय संगीत, नृत्य, योग और विभिन्न भाषाओं में पाठ्यक्रम की सुविधा प्रदान करना। - सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, सांस्कृतिक संस्थानों तथा विदेशी सरकारों के साथ सहयोग करना। - पुरस्कारः - प्रतिष्ठित भारतविद् पुरस्कार, विश्व संस्कृत पुरस्कार, विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार - प्रशस्ति पत्र और पट्टिका एवं गिसेला बॉन पुरस्कार।
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चीन में कोरोना संक्रमण की वजह से एक बार फिर से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। 'जीरो कोविड पॉलिसी' पर सख्ती से अमल के बाद भी कोरोना बेकाबू रफ्तार से बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे के भीतर चीन में आज तक के सबसे ज्यादा कोरोना केस दर्ज किए गए। इसके बाद सरकार ने 11 शहरों में लॉकडाउन लगाकर 3 करोड़ लोगों को घरों में कैद कर दिया। नीचे दिए पोल में हिस्सा लेकर आप इस मामले पर अपनी राय दे सकते हैं।
चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन के मुताबिक, बीते 24 घंटे में कोरोना के 5,280 नए केस रजिस्टर किए गए। यह पिछले दिन के मुकाबले दोगुने से ज्यादा हैं। इनमें 3,000 केस से ज्यादा मामले अकेले जिलिन प्रांत में सामने आए। चीन ने जिन शहरों में लॉकडाउन का ऐलान किया है कि उनमें 1. 70 करोड़ की आबादी वाला शेंजेन भी शामिल है।
कोरोना के बेकाबू रफ्तार के बीच इन्फेक्शियस डिसीज एक्सपर्ट और वायरोलॉजिस्ट झेंग वेनहोंग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन के लिए बहुत मुश्किल वक्त है। मुताबिक, वेनहोंग ने कहा यह चीन के लिए झूठ बोलने और जीरो-कोविड पॉलिसी पर बहस करने का वक्त नहीं है। इससे बेहतर होगा कि इस तरह की रणनीति बनाई जिससे कोरोना को काबू किया जा सके। चीन के लिए यह सबसे मुश्किल वक्त है, क्योंकि दो साल पहले COVID-19 महामारी फैल गई थी।
महामारी के बढ़ते प्रकोप के असर से हांगकांग के शेयर मार्केट में सुबह 3% से ज्यादा की गिरावट आई। दूसरी तरफ मंगलवार सुबह बीजिंग और शंघाई के हवाई अड्डों पर दर्जनों घरेलू उड़ानों को रद्द कर दिया गया। शंघाई समेत कई शहरों में इमारतों को पूरी तरह से सील कर दिया गया।
उत्तर कोरिया बॉर्डर पर स्थित जिलिन प्रांत के लोगों पर प्रांत से बाहर और आसपास के इलाकों पर ट्रैवल बैन लगा दिया गया। जिलिन के गवर्नर ने सोमवार रात इमरजेंसी मीटिंग में एक हफ्ते के भीतर जीरो कोविड का टारगेट तय किया।
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चीन में कोरोना संक्रमण की वजह से एक बार फिर से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। 'जीरो कोविड पॉलिसी' पर सख्ती से अमल के बाद भी कोरोना बेकाबू रफ्तार से बढ़ रहा है। पिछले चौबीस घंटाटे के भीतर चीन में आज तक के सबसे ज्यादा कोरोना केस दर्ज किए गए। इसके बाद सरकार ने ग्यारह शहरों में लॉकडाउन लगाकर तीन करोड़ लोगों को घरों में कैद कर दिया। नीचे दिए पोल में हिस्सा लेकर आप इस मामले पर अपनी राय दे सकते हैं। चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन के मुताबिक, बीते चौबीस घंटाटे में कोरोना के पाँच,दो सौ अस्सी नए केस रजिस्टर किए गए। यह पिछले दिन के मुकाबले दोगुने से ज्यादा हैं। इनमें तीन,शून्य केस से ज्यादा मामले अकेले जिलिन प्रांत में सामने आए। चीन ने जिन शहरों में लॉकडाउन का ऐलान किया है कि उनमें एक. सत्तर करोड़ की आबादी वाला शेंजेन भी शामिल है। कोरोना के बेकाबू रफ्तार के बीच इन्फेक्शियस डिसीज एक्सपर्ट और वायरोलॉजिस्ट झेंग वेनहोंग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन के लिए बहुत मुश्किल वक्त है। मुताबिक, वेनहोंग ने कहा यह चीन के लिए झूठ बोलने और जीरो-कोविड पॉलिसी पर बहस करने का वक्त नहीं है। इससे बेहतर होगा कि इस तरह की रणनीति बनाई जिससे कोरोना को काबू किया जा सके। चीन के लिए यह सबसे मुश्किल वक्त है, क्योंकि दो साल पहले COVID-उन्नीस महामारी फैल गई थी। महामारी के बढ़ते प्रकोप के असर से हांगकांग के शेयर मार्केट में सुबह तीन% से ज्यादा की गिरावट आई। दूसरी तरफ मंगलवार सुबह बीजिंग और शंघाई के हवाई अड्डों पर दर्जनों घरेलू उड़ानों को रद्द कर दिया गया। शंघाई समेत कई शहरों में इमारतों को पूरी तरह से सील कर दिया गया। उत्तर कोरिया बॉर्डर पर स्थित जिलिन प्रांत के लोगों पर प्रांत से बाहर और आसपास के इलाकों पर ट्रैवल बैन लगा दिया गया। जिलिन के गवर्नर ने सोमवार रात इमरजेंसी मीटिंग में एक हफ्ते के भीतर जीरो कोविड का टारगेट तय किया।
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Prize Competition 26 SEPTEMBER 1955 Prize Competition
[ श्री राधा रमण]
इस बिद्दत या इस प्रकार के कम्पिटीशन्स का मार्ग पिछले १५, २० वर्षों में बहुत ज्यादा खुला है, और जैसाकि अभी कुछ भाइयों ने सदन के सामने प्रांकड़े वगैरह दे कर और · पत्रों में से भी पढ़ कर बताया इन में बहुत बड़े बड़े फिगर रक्खे जाते हैं इनाम वगैरह के, क्योंकि जितनी बड़ी रकम एक अखबार घोषित करता है, उतने ही ज्यादा लोग उस के अन्दर फंसते हैं । आम तौर से साधारण प्रादमियों की प्रवृत्ति होती है कि किसी न किसी तरह वह धन प्राप्त करें और पैसे को अपनी तरफ खींचें । यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि इस प्रकार के कम्पिटीशन्स. गेम आफ स्किल होते ( game of skill )
उन में स्किल का अंश शायद ही ५ प्रतिशत होता हो, ६५ प्रतिशत तो केवल ऐसे कम्पिटीशन्स होते हैं जो अखबार की अधिक बिक्री के लिये होते हैं, या इस लिये कि एक व्यक्ति या एक संस्था बड़े बड़े इनाम मुकर कर के ग्राम लोगों की जेबों से हजारों रुपये निकाल ले और उसका कोई हिसाब भी न दे तथा उसकों अपने उपयोग में लाये । अगर आप इस प्रकार की संस्थाओं की शुरुप्रात को तथा उन की भ्राज की अवस्था को देखेंगे तो उस से प्राप को स्पष्ट मालूम हो जायेगा कि उन लोगों ने बहुत थोड़ी रकम लगा कर ऐसा कम्पिटीशन शुरू किया और आहिस्ता आहिस्ता लाखों और करोड़ों रुपये उन के पास आ गये । वह हिन्दुस्तान के पत्रों में भी समय समय पर घोषणायें करते हैं जिन में वह जनता से कहते हैं कि हम १० लाख रुपये, ५ लाख रुपये या १ या २ लाख रुपये प्राइज के तौर पर लोगों को इनाम में देंगे। पर आखीर में न तो यह पता चलता है कि वह इनाम किस को मिला न इस का ही पता चलता है कि किस को नहीं मिला । अगर किसी को मिलता भी है तो उस को १ लाख में से १० हजार दे दिया जाता है बाकी संस्था खुद ले लेती है । इस प्रकार की प्रणाली प्राज खूब चल रही है और
बहुत सारी संस्थायें इस प्रकार की बन गई हैं जो छोटे छोटे लोगों से जो कि बहुत धन अपने पास नहीं रखते, थोड़ा थोड़ा रुपया इकट्ठा करती हैं और अन्त में उस सारे रुपये को अपने ही उपयोग में ले लेती हैं । बहुत कम रकम इनामों में तकसीम की जाती है, यह बात मैं दावे के साथ कह सकता हूं ।
पहली बात तो यह है कि देश में ऐसी भावना पैदा हो गई है कि नौजवानों की प्रवृत्तियों को उभारें और इस प्रकार जो थोड़ा बहुत धन उन के पास है उस को ऐसे कामों में लगाने का प्रलोभन दें । अगर हमारी सरकार ऐसा करने देती है तो यह उस के लिये कहां तक उचित होगा, यह बात सदन के सामने है । . इसलिये इस प्रकार का विधेयक बहुत मुनासिब और सामयिक है और हम तो समझते थे कि यह बहुत पहले श्रायेगा. लेकिन खैर, अब भाया है और इस रूप में प्राया है, तब भी हम इस का स्वागत करते हैं । एक नये रास्ते पर चलने के लिये हमारे वास्ते यह एक नया अनुभव प्रदान करेगा । मैं यह मानता हूं कि बहुत मुमकिन है कि कुछ अखबार वाले या कुछ संस्थायें इस विधेयक की पकड़ में भा जायेंगी और उन का कुछ नुक्सान भी हो सकता है, लेकिन हमें इस बात का विश्वास है कि इस का बहुत अच्छा असर मुल्क पर और मुल्क के नौजवानों पर पड़ेगा और जो मेहनत से कमाया हुआा धन पाज ग्राहिस्ता प्राहिस्ता लोगों की जेबों से निकलता है और एक व्यक्ति या एक संस्था के पास चला जाता है, वह रुक जायेगा और जिस बात का भी अभी हमारे एक भाई ने इंशारा किया है कि उस से देश का बहुत नुक्सान होता है, और जो एक बहुत बुरी बात है, अर्थात् जब एक इनाम १०,१० और ५, ५ लाख रुपये का घोषित होता है तो एक एक प्रादमी एक एक हजार और पांच पांच सौ एन्ट्रीज भेजता है, वह समझता है कि अगर एक एन्ट्री सही नहीं होगी तो दूसरी होगी, दूसरी नहीं सही होगी तो तीसरी होगी,
15275 Prize Competition 26 SEPTEMBER 1955 Prize Competition Bill
इस तरह से उस की प्राकांक्षा खत्म नहीं होती और वह एन्ट्री पर एन्ट्री भेजता है, वह भी रुक जायेगी । एक एक आदमी जिस वक्त ५००, ५०० या १०००, १००० रु०
की एन्ट्री भेज कर उम्मीद पर बैठा रहता है कि जिस इनाम की घोषणा किसी व्यक्ति, अखबार या संस्था ने की है, वह उसे मिलेगा, उस समय वह धन का भी अपव्यय करता है और समय भी खराब करता है । मैंने कई ऐसे मित्रों को भी देखा है कि जब उन को इस प्रकार का रुपया मिला है तो जो उन का जीवन स्तर था वह बजाय ऊपर उठने के गलत रास्ते पर चला गया । जो रुपया उन्हें मिला था उस से उन्होंने अपने जीवन में ऐसी बुराइयां करनी शुरू कर दीं जिन से बहुत शीघ्र ही सारी रकम उन के हाथ से जाती रही और उन को बजाय फायदे के नुकसान हुआ ।
तो जहां हम इस बिल का स्वागत करते हैं और ख्वाहिश करते हैं कि इस को पास किया जाय वहां हम यह भी चाहते हैं कि इस के अन्दर वह संस्थायें भी भ्रा जायें जिन को कि हमने इस में छूट दी है कि वह १००० या ५०० रु० का कम्पिटीशन रख सकती हैं भौर उससे ऊपर हम उनको लाइसेन्स देंगे । अगर उन को भी रोका जाय तो ज्यादा अच्छा होगा और इस का बहुत अच्छा असर पड़ेगा । लेकिन अगर सरकार यह समझती है कि यह आवश्यक है कि किसी न किसी रूप में हमारे देश में इस प्रकार के कम्पिटीशन चलते रहने चाहियें, और इस विधेयक का अभिप्राय यह है कि सिर्फ तजुर्बा कर के देखा जाय कि इस से क्या हानि या लाभ होता है तो भले ही प्राप इस विधेयक को इस रूप में रक्खें, अन्यथा सारे भारत में इस का पूर्ण बहिष्कार होना चाहिये । इस विधेयक को हम ने सिर्फ चन्द सूबों में और पार्ट सी स्टेट्स में ही लागू करने का विचार किया है । मैं समझता हूं कि यह विधेयक ऐसा होना चाहिये कि जिसे सारे देश में लागू किया जा सके और इसे इतना पूर्ण बनाया जाय
कि सम्पूर्ण देश में इस प्रकार के कम्पिटीशन्स न किये जा सकें जिस के कारण आज हमारे यहां के बहुत से नर और नारी फंसते हैं और अपनी गाढ़ी कमाई का रुपया लगा कर इन में हिस्सा लेते हैं और जब अन्त में उन को कुछ प्राप्त नहीं होती तो वह कहने लगते हैं कि शायद हमारी किस्मत में ही नहीं था कि यह इनाम मिले। हालांकि कोई भी यह नहीं जानता कि वह किसी को मिला भी या नहीं ।
इस लिये विधेयक का स्वागत करते हुये मुझे इस बात की पूर्ण आशा है कि हमारे गृह मंत्री जी ने जिन भावनाओं से इस विधेयक को यहां रक्खा है उन को देखते हुये इस में जो अपूर्णतायें हैं वह भी दूर की जायेंगी और सारा भारतवर्ष इस बिद्दत से बच सकेगा जिस से कि हमारे बहुत सारे भाइयों और बहनों का इतना अहित होता है।
इन शब्दों के साथ मैं इस विधेयक का स्वागत करता हूं ।
Shri M. D. Joshi (Ratnagiri South): Crossword puzzles are a kind of organised swindling of the innocent public. Various daily newspapers which are very ably conducted are.. on the one hand, trying to educate the public mind and on the other, are carrying this poison-disseminating this poison-through their advertise ment columns, amassing fabulous sums. of money from poor pockets. I know from my own district, which happens. to be a very poor part of the country, lakhs and lakhs of rupees are every month going out of the pockets of poor people on account of this, and primarily for this reason, we have been feeling for years together that a measure of this kind was a sore necessity. So this Bill is most opportune; but, as my hon. friend, Shri Dabhi, said, it does not go far enough. It still allows competitions to the extent of Rs. 1000; that means the prize will be Rs. 1000. That means that it is like a.
temperance measure, not a prohibition measure. Temperance measure allows people to drink but not go tipsy..
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Prize Competition छब्बीस SEPTEMBER एक हज़ार नौ सौ पचपन Prize Competition [ श्री राधा रमण] इस बिद्दत या इस प्रकार के कम्पिटीशन्स का मार्ग पिछले पंद्रह, बीस वर्षों में बहुत ज्यादा खुला है, और जैसाकि अभी कुछ भाइयों ने सदन के सामने प्रांकड़े वगैरह दे कर और · पत्रों में से भी पढ़ कर बताया इन में बहुत बड़े बड़े फिगर रक्खे जाते हैं इनाम वगैरह के, क्योंकि जितनी बड़ी रकम एक अखबार घोषित करता है, उतने ही ज्यादा लोग उस के अन्दर फंसते हैं । आम तौर से साधारण प्रादमियों की प्रवृत्ति होती है कि किसी न किसी तरह वह धन प्राप्त करें और पैसे को अपनी तरफ खींचें । यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि इस प्रकार के कम्पिटीशन्स. गेम आफ स्किल होते उन में स्किल का अंश शायद ही पाँच प्रतिशत होता हो, पैंसठ प्रतिशत तो केवल ऐसे कम्पिटीशन्स होते हैं जो अखबार की अधिक बिक्री के लिये होते हैं, या इस लिये कि एक व्यक्ति या एक संस्था बड़े बड़े इनाम मुकर कर के ग्राम लोगों की जेबों से हजारों रुपये निकाल ले और उसका कोई हिसाब भी न दे तथा उसकों अपने उपयोग में लाये । अगर आप इस प्रकार की संस्थाओं की शुरुप्रात को तथा उन की भ्राज की अवस्था को देखेंगे तो उस से प्राप को स्पष्ट मालूम हो जायेगा कि उन लोगों ने बहुत थोड़ी रकम लगा कर ऐसा कम्पिटीशन शुरू किया और आहिस्ता आहिस्ता लाखों और करोड़ों रुपये उन के पास आ गये । वह हिन्दुस्तान के पत्रों में भी समय समय पर घोषणायें करते हैं जिन में वह जनता से कहते हैं कि हम दस लाख रुपये, पाँच लाख रुपये या एक या दो लाख रुपये प्राइज के तौर पर लोगों को इनाम में देंगे। पर आखीर में न तो यह पता चलता है कि वह इनाम किस को मिला न इस का ही पता चलता है कि किस को नहीं मिला । अगर किसी को मिलता भी है तो उस को एक लाख में से दस हजार दे दिया जाता है बाकी संस्था खुद ले लेती है । इस प्रकार की प्रणाली प्राज खूब चल रही है और बहुत सारी संस्थायें इस प्रकार की बन गई हैं जो छोटे छोटे लोगों से जो कि बहुत धन अपने पास नहीं रखते, थोड़ा थोड़ा रुपया इकट्ठा करती हैं और अन्त में उस सारे रुपये को अपने ही उपयोग में ले लेती हैं । बहुत कम रकम इनामों में तकसीम की जाती है, यह बात मैं दावे के साथ कह सकता हूं । पहली बात तो यह है कि देश में ऐसी भावना पैदा हो गई है कि नौजवानों की प्रवृत्तियों को उभारें और इस प्रकार जो थोड़ा बहुत धन उन के पास है उस को ऐसे कामों में लगाने का प्रलोभन दें । अगर हमारी सरकार ऐसा करने देती है तो यह उस के लिये कहां तक उचित होगा, यह बात सदन के सामने है । . इसलिये इस प्रकार का विधेयक बहुत मुनासिब और सामयिक है और हम तो समझते थे कि यह बहुत पहले श्रायेगा. लेकिन खैर, अब भाया है और इस रूप में प्राया है, तब भी हम इस का स्वागत करते हैं । एक नये रास्ते पर चलने के लिये हमारे वास्ते यह एक नया अनुभव प्रदान करेगा । मैं यह मानता हूं कि बहुत मुमकिन है कि कुछ अखबार वाले या कुछ संस्थायें इस विधेयक की पकड़ में भा जायेंगी और उन का कुछ नुक्सान भी हो सकता है, लेकिन हमें इस बात का विश्वास है कि इस का बहुत अच्छा असर मुल्क पर और मुल्क के नौजवानों पर पड़ेगा और जो मेहनत से कमाया हुआा धन पाज ग्राहिस्ता प्राहिस्ता लोगों की जेबों से निकलता है और एक व्यक्ति या एक संस्था के पास चला जाता है, वह रुक जायेगा और जिस बात का भी अभी हमारे एक भाई ने इंशारा किया है कि उस से देश का बहुत नुक्सान होता है, और जो एक बहुत बुरी बात है, अर्थात् जब एक इनाम दस,दस और पाँच, पाँच लाख रुपये का घोषित होता है तो एक एक प्रादमी एक एक हजार और पांच पांच सौ एन्ट्रीज भेजता है, वह समझता है कि अगर एक एन्ट्री सही नहीं होगी तो दूसरी होगी, दूसरी नहीं सही होगी तो तीसरी होगी, पंद्रह हज़ार दो सौ पचहत्तर Prize Competition छब्बीस SEPTEMBER एक हज़ार नौ सौ पचपन Prize Competition Bill इस तरह से उस की प्राकांक्षा खत्म नहीं होती और वह एन्ट्री पर एन्ट्री भेजता है, वह भी रुक जायेगी । एक एक आदमी जिस वक्त पाँच सौ, पाँच सौ या एक हज़ार, एक हज़ार रुपयाशून्य की एन्ट्री भेज कर उम्मीद पर बैठा रहता है कि जिस इनाम की घोषणा किसी व्यक्ति, अखबार या संस्था ने की है, वह उसे मिलेगा, उस समय वह धन का भी अपव्यय करता है और समय भी खराब करता है । मैंने कई ऐसे मित्रों को भी देखा है कि जब उन को इस प्रकार का रुपया मिला है तो जो उन का जीवन स्तर था वह बजाय ऊपर उठने के गलत रास्ते पर चला गया । जो रुपया उन्हें मिला था उस से उन्होंने अपने जीवन में ऐसी बुराइयां करनी शुरू कर दीं जिन से बहुत शीघ्र ही सारी रकम उन के हाथ से जाती रही और उन को बजाय फायदे के नुकसान हुआ । तो जहां हम इस बिल का स्वागत करते हैं और ख्वाहिश करते हैं कि इस को पास किया जाय वहां हम यह भी चाहते हैं कि इस के अन्दर वह संस्थायें भी भ्रा जायें जिन को कि हमने इस में छूट दी है कि वह एक हज़ार या पाँच सौ रुपयाशून्य का कम्पिटीशन रख सकती हैं भौर उससे ऊपर हम उनको लाइसेन्स देंगे । अगर उन को भी रोका जाय तो ज्यादा अच्छा होगा और इस का बहुत अच्छा असर पड़ेगा । लेकिन अगर सरकार यह समझती है कि यह आवश्यक है कि किसी न किसी रूप में हमारे देश में इस प्रकार के कम्पिटीशन चलते रहने चाहियें, और इस विधेयक का अभिप्राय यह है कि सिर्फ तजुर्बा कर के देखा जाय कि इस से क्या हानि या लाभ होता है तो भले ही प्राप इस विधेयक को इस रूप में रक्खें, अन्यथा सारे भारत में इस का पूर्ण बहिष्कार होना चाहिये । इस विधेयक को हम ने सिर्फ चन्द सूबों में और पार्ट सी स्टेट्स में ही लागू करने का विचार किया है । मैं समझता हूं कि यह विधेयक ऐसा होना चाहिये कि जिसे सारे देश में लागू किया जा सके और इसे इतना पूर्ण बनाया जाय कि सम्पूर्ण देश में इस प्रकार के कम्पिटीशन्स न किये जा सकें जिस के कारण आज हमारे यहां के बहुत से नर और नारी फंसते हैं और अपनी गाढ़ी कमाई का रुपया लगा कर इन में हिस्सा लेते हैं और जब अन्त में उन को कुछ प्राप्त नहीं होती तो वह कहने लगते हैं कि शायद हमारी किस्मत में ही नहीं था कि यह इनाम मिले। हालांकि कोई भी यह नहीं जानता कि वह किसी को मिला भी या नहीं । इस लिये विधेयक का स्वागत करते हुये मुझे इस बात की पूर्ण आशा है कि हमारे गृह मंत्री जी ने जिन भावनाओं से इस विधेयक को यहां रक्खा है उन को देखते हुये इस में जो अपूर्णतायें हैं वह भी दूर की जायेंगी और सारा भारतवर्ष इस बिद्दत से बच सकेगा जिस से कि हमारे बहुत सारे भाइयों और बहनों का इतना अहित होता है। इन शब्दों के साथ मैं इस विधेयक का स्वागत करता हूं । Shri M. D. Joshi : Crossword puzzles are a kind of organised swindling of the innocent public. Various daily newspapers which are very ably conducted are.. on the one hand, trying to educate the public mind and on the other, are carrying this poison-disseminating this poison-through their advertise ment columns, amassing fabulous sums. of money from poor pockets. I know from my own district, which happens. to be a very poor part of the country, lakhs and lakhs of rupees are every month going out of the pockets of poor people on account of this, and primarily for this reason, we have been feeling for years together that a measure of this kind was a sore necessity. So this Bill is most opportune; but, as my hon. friend, Shri Dabhi, said, it does not go far enough. It still allows competitions to the extent of Rs. एक हज़ार; that means the prize will be Rs. एक हज़ार. That means that it is like a. temperance measure, not a prohibition measure. Temperance measure allows people to drink but not go tipsy..
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चंडीगढ़ - हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेशवासियों को संविधान दिवस के अवसर पर बधाई दी और उनसे संविधान में निहित आदर्शों और मूल्यों का अनुसरण करने का आग्रह किया। 26 नवंबर, 1949 को संविधान अपनाने की स्मृति में वर्ष 2015 से प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। संविधान के निर्माता डा. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने अपना समस्त जीवन सामाजिक असमानता को समाप्त करने और वंचित समूह को एक समान अवसर प्रदान करके मुख्य धारा में लाने के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि इस दिन को संविधान की महत्ता और डा. अंबेडकर के विजन का प्रसार करने के लिए मनाया जाना चाहिए। श्री मनोहर लाल ने कहा कि संविधान दिवस पर हम उन महान महिलाओं और पुरुषों, जिन्होंने देश को अपनी संप्रभुता के लिए संविधान दिया, को भी नमन करते हैं।
जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
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चंडीगढ़ - हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेशवासियों को संविधान दिवस के अवसर पर बधाई दी और उनसे संविधान में निहित आदर्शों और मूल्यों का अनुसरण करने का आग्रह किया। छब्बीस नवंबर, एक हज़ार नौ सौ उनचास को संविधान अपनाने की स्मृति में वर्ष दो हज़ार पंद्रह से प्रत्येक वर्ष छब्बीस नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। संविधान के निर्माता डा. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने अपना समस्त जीवन सामाजिक असमानता को समाप्त करने और वंचित समूह को एक समान अवसर प्रदान करके मुख्य धारा में लाने के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि इस दिन को संविधान की महत्ता और डा. अंबेडकर के विजन का प्रसार करने के लिए मनाया जाना चाहिए। श्री मनोहर लाल ने कहा कि संविधान दिवस पर हम उन महान महिलाओं और पुरुषों, जिन्होंने देश को अपनी संप्रभुता के लिए संविधान दिया, को भी नमन करते हैं। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
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रोडरेज में विवाद होने पर स्कूटी सवार ने कुछ साथियों को मौके पर बुलाकर कार सवार को बेरहमी से पीटा। चौराहे के नजदीक पीड़ित पर लात-घूंसे बरसाकर कांच की बोतल से हमला कर दिया गया। विरोध करने पर गाली-गलौच कर जान से मारने की धमकी दी गई। यह देखकर वहां राहगीरों की भीड़ जुट गई। ऐसे में सभी हमलावर फरार हो गए।
दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि एम्स के बाहर एक कार से उन्हें 10-15 मीटर घसीटा गया। उनका कहना है कि गाड़ी की खिड़की में उनका हाथ फंस गया था और नशे में धुत वाहन चालक ने कार आगे बढ़ा दी।
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रोडरेज में विवाद होने पर स्कूटी सवार ने कुछ साथियों को मौके पर बुलाकर कार सवार को बेरहमी से पीटा। चौराहे के नजदीक पीड़ित पर लात-घूंसे बरसाकर कांच की बोतल से हमला कर दिया गया। विरोध करने पर गाली-गलौच कर जान से मारने की धमकी दी गई। यह देखकर वहां राहगीरों की भीड़ जुट गई। ऐसे में सभी हमलावर फरार हो गए। दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि एम्स के बाहर एक कार से उन्हें दस-पंद्रह मीटर घसीटा गया। उनका कहना है कि गाड़ी की खिड़की में उनका हाथ फंस गया था और नशे में धुत वाहन चालक ने कार आगे बढ़ा दी।
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१५ - ब्रह्मचर्य पर महात्मा गान्धी के अनुभव ब्रह्मचर्य क्या है, ब्रह्मचर्य के साधन, ब्रह्मचर्य की आवश्यकता, ब्रह्मचर्य और ग्रात्मसयम, ब्रह्मचर्य और स्वास्थ्य, ब्रह्मचर्य और सत्य, ब्रह्मचर्य र सन्तान - निग्रह, ब्रह्मचर्य और मनोवृत्तियाँ अप्राकृतिक व्यभिचार, ब्रह्मचर्य का रक्षक भगवान्, ब्रह्मचर्य के प्रयोग, ब्रह्मचर्य व्रत, भोजन और उपवास से ब्रह्मचर्य का सम्बन्ध, मन का सयम इत्यादि विषयों के साथ महात्मा जी के अन्य भी कई उपदेशों का संग्रह किया गया है । पुस्तक का मूल्य लागत मात्र सिर्फ ॥) प्रचारार्थ रखा है। १६ - दिल्ली - इन्द्रप्रस्थ ( सचित्र )
( लेखक, रायबहादुर दत्तात्रेय बलवन्त पारसनीस ) सम्राट युधिष्ठिर से लेकर राजपूत हिन्दू सम्राटो औौर मुगल बादशाहाँ तक इन्द्रप्रस्थ और दिल्ली का बहुत ही मनोरञ्जक इतिहास इस पुस्तक में दिया गया है । महाभारत से लेकर बहुत से इतिहासिक ग्रन्थों की पूरी पूरी खोज करके तथा स्वयं दिल्ली के पुराने और नये स्थानो की जॉच करके विद्वान् ग्रन्थकार ने यह ग्रन्थ लिखा है। हिन्दू और मुगल मम्राटी के प्राचीन स्मारक और उनकी मनोरञ्जक कहानियाँ पढ़ते हुए इन्द्रप्रस्थ और दिल्ली का प्राचीन वैभव मूर्तिमान आपके सामने आकर खड़ा हो जायगा । प्राचीन ऐतिहासिक स्थानों के १०-१२ हाफटोन चित्र मी पुस्तक में दिये गये हैं । मूल्य सिर्फ } आने ।
१७- अपना सुधार
( लेखक, साहित्य-विशारद पं० नर्मदाप्रसाद जी मिश्र वी० ए० ) इम पुस्तक में शारीरिक, मानसिक और अध्यात्मिक शक्तियो उन्नति करने के लिए ऐसे ऐसे उपयोगी उपाय बतलाये गये हूँ कि
जिनको पढकर मनुष्य के आचरण में निश्चित ही शुभ परिवर्तन होना है । जनता ने इसको बहुत पसन्द किया है । चौथा सत्करण है।
त्राने ।
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पंद्रह - ब्रह्मचर्य पर महात्मा गान्धी के अनुभव ब्रह्मचर्य क्या है, ब्रह्मचर्य के साधन, ब्रह्मचर्य की आवश्यकता, ब्रह्मचर्य और ग्रात्मसयम, ब्रह्मचर्य और स्वास्थ्य, ब्रह्मचर्य और सत्य, ब्रह्मचर्य र सन्तान - निग्रह, ब्रह्मचर्य और मनोवृत्तियाँ अप्राकृतिक व्यभिचार, ब्रह्मचर्य का रक्षक भगवान्, ब्रह्मचर्य के प्रयोग, ब्रह्मचर्य व्रत, भोजन और उपवास से ब्रह्मचर्य का सम्बन्ध, मन का सयम इत्यादि विषयों के साथ महात्मा जी के अन्य भी कई उपदेशों का संग्रह किया गया है । पुस्तक का मूल्य लागत मात्र सिर्फ ॥) प्रचारार्थ रखा है। सोलह - दिल्ली - इन्द्रप्रस्थ सम्राट युधिष्ठिर से लेकर राजपूत हिन्दू सम्राटो औौर मुगल बादशाहाँ तक इन्द्रप्रस्थ और दिल्ली का बहुत ही मनोरञ्जक इतिहास इस पुस्तक में दिया गया है । महाभारत से लेकर बहुत से इतिहासिक ग्रन्थों की पूरी पूरी खोज करके तथा स्वयं दिल्ली के पुराने और नये स्थानो की जॉच करके विद्वान् ग्रन्थकार ने यह ग्रन्थ लिखा है। हिन्दू और मुगल मम्राटी के प्राचीन स्मारक और उनकी मनोरञ्जक कहानियाँ पढ़ते हुए इन्द्रप्रस्थ और दिल्ली का प्राचीन वैभव मूर्तिमान आपके सामने आकर खड़ा हो जायगा । प्राचीन ऐतिहासिक स्थानों के दस-बारह हाफटोन चित्र मी पुस्तक में दिये गये हैं । मूल्य सिर्फ } आने । सत्रह- अपना सुधार इम पुस्तक में शारीरिक, मानसिक और अध्यात्मिक शक्तियो उन्नति करने के लिए ऐसे ऐसे उपयोगी उपाय बतलाये गये हूँ कि जिनको पढकर मनुष्य के आचरण में निश्चित ही शुभ परिवर्तन होना है । जनता ने इसको बहुत पसन्द किया है । चौथा सत्करण है। त्राने ।
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रानीखेत भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक प्रमुख पहाड़ी पर्यटन स्थल है। यह राज्य के अल्मोड़ा जनपद के अंतर्गत स्थित एक फौजी छावनी है। देवदार और बलूत के वृक्षों से घिरा रानीखेत बहुत ही रमणीक हिल स्टेशन है। इस स्थान से हिमाच्छादित मध्य हिमालयी श्रेणियाँ स्पष्ट देखी जा सकती हैं। रानीखेत से सुविधापूर्वक भ्रमण के लिए पिण्डारी ग्लेशियर, कौसानी, चौबटिया और कालिका पहुँचा जा सकता है। चौबटिया में प्रदेश सरकार के फलों के उद्यान हैं। इस पर्वतीय नगरी का मुख्य आकर्षण यहाँ विराजती नैसर्गिक शान्ति है। रानीखेत में फ़ौजी छावनी भी है और गोल्फ़ प्रेमियों के लिए एक सुन्दर पार्क भी है। १८६९ में ब्रिटिश सरकार ने कुमाऊं रेजिमेंट के मुख्यालय की स्थापना रानीखेत में की, और भारतीय गर्मियों से बचने के लिए हिल स्टेशन के रूप में इस नगर का प्रयोग किया जाने लगा। ब्रिटिश राज के दौरान एक समय में, यह शिमला के स्थान पर भारत सरकार के ग्रीष्मकालीन मुख्यालय के रूप में भी प्रस्तावित किया गया था। १९०० में इसकी गर्मियों की ७,७०५ जनसंख्या थी, और उसी साल की सर्दियों की जनसंख्या १९०१ में ३,१५३ मापी गई थी। स्वच्छ सर्वेक्षण २०१८ के अनुसार रानीखेत दिल्ली और अल्मोड़ा छावनियों के बाद भारत की तीसरी सबसे स्वच्छ छावनी है। .
37 संबंधोंः चौखुटिया, द्वाराहाट, दूनागिरी, नागा रेजिमेंट, बदरीनाथ, बिनसर, बैजनाथ, उत्तराखण्ड, भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची - प्रदेश अनुसार, भारत के शहरों की सूची, भारतीय थलसेना, भांग का पौधा, भवाली, मानिला देवी मन्दिर, उत्तराखण्ड, मॉंसी, रानीखेत तहसील, रानीखेत रोग, श्यामाचरण लाहिड़ी, सोमेश्वर, उत्तराखण्ड, हल्द्वानी में यातायात, जी डी बिरला मैमोरियल स्कूल, रानीखेत, खैरना, गोविन्द बल्लभ पन्त, गोविन्द बल्लभ पन्त (हिन्दी साहित्यकार), कटारमल सूर्य मन्दिर, काठगोदाम, काला चौना, कुमाऊँ मण्डल, कुमाऊँ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड, कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों की सूची, कुमाऊं रेजिमेंट, अल्मोड़ा, अल्मोड़ा का इतिहास, उत्तराखण्ड, उत्तराखण्ड में जिलावार विधानसभा सीटें, उत्तराखण्ड के नगरों की सूची, उत्तराखण्ड के राज्य राजमार्गों की सूची, उत्तराखण्ड की राजनीति।
चौखुटिया, अल्मोड़ा जिला, उत्तराखंड में स्थित एक क्षेत्र है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। .
द्वाराहाट उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले का एक कस्बा है जो रानीखेत से लगभग 21 किलोमीटर दूर स्थित है। द्वाराहाट में तीन वर्ग के मन्दिर हैं - कचहरी, मनिया तथा रत्नदेव। इसके अतिरिक्त बहुत से मन्दिर प्रतिमाविहीन हैं। द्वाराहाट में गूजरदेव का मन्दिर सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। .
दूनागिरी भूमंडल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के उत्तराखण्ड प्रदेश के अन्तर्गत कुमांऊँ क्षेत्र के अल्मोड़ा जिले में एक पौराणिक पर्वत शिखर का नाम है। द्रोण, द्रोणगिरी, द्रोण-पर्वत, द्रोणागिरी, द्रोणांचल, तथा द्रोणांचल-पर्वत इसी पर्वत के पर्यायवाची शब्द हैं। कालान्तर के उपरांत द्रोण का अपभ्रंश होते-होते वर्तमान में इस पर्वत को कुमांऊँनी बोली के समरूप अथवा अनुसार दूनागिरी नाम से पुकारा जाने लगा है। यथार्थतः यह पौराणिक उल्लिखित द्रोण है। .
"नागा रेजीमेंट" भारतीय सेना का एक सैन्य-दल है। नागा रेजिमेंट भारतीय सेना के एक पैदल सेना की रेजिमेंट है। यह भारतीय सेना की सबसे कम उम्र की रेजिमेंटों में से एक है - 1९७० में रानीखेत में पहली बटालियन (1 नागा) उठाया गया था। रेजिमेंट मुख्यतः नागालैंड से भर्ती होती है। .
बद्रीनाथ घाटी तथा अलकनन्दा नदी बदरीनाथ भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक स्थान है जो हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ है। यह उत्तराखण्ड के चमोली जिले में स्थित एक नगर पंचायत है। यहाँ बद्रीरीनाथ मन्दिर है जो हिन्दुओं के चार प्रसिद्ध धामों में से एक है। .
बिनसर उत्तरांचल में अल्मोड़ा से लगभग ३४ किलोमीटर दूर है। यह समुद्र तल से लगभग २४१२ मीटर की उंचाई पर बसा है। लगभग ११वीं से १८वीं शताब्दी तक ये चन्द राजाओं की राजधानी रहा था। अब इसे वन्य जीव अभयारण्य बना दिया गया है। बिनसर झांडी ढार नाम की पहाडी पर है। यहां की पहाड़ियां झांदी धार के रूप में जानी जाती हैं। बिनसर गढ़वाली बोली का एक शब्द है -जिसका अर्थ नव प्रभात है। यहां से अल्मोड़ा शहर का उत्कृष्ट दृश्य, कुमाऊं की पहाडियां और ग्रेटर हिमालय भी दिखाई देते हैं। घने देवदार के जंगलों से निकलते हुए शिखर की ओर रास्ता जाता है, जहां से हिमालय पर्वत श्रृंखला का अकाट्य दृश्य और चारों ओर की घाटी देखी जा सकती है। बिनसर से हिमालय की केदारनाथ, चौखंबा, त्रिशूल, नंदा देवी, नंदाकोट और पंचोली चोटियों की ३०० किलोमीटर लंबी शृंखला दिखाई देती है, जो अपने आप में अद्भुत है और ये बिनसर का सबसे बड़ा आकर्षण भी हैं। .
बैजनाथ उत्तराखण्ड राज्य के बागेश्वर जनपद में गोमती नदी के किनारे एक छोटा सा नगर है। यह अपने प्राचीन मंदिरों के लिए विख्यात है, जिन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के रूप में मान्यता प्राप्त है। बैजनाथ उन चार स्थानों में से एक है, जिन्हें भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत 'शिव हेरिटेज सर्किट' से जोड़ा जाना है। बैजनाथ को प्राचीनकाल में "कार्तिकेयपुर" के नाम से जाना जाता था, और तब यह कत्यूरी राजवंश के शासकों की राजधानी थी। कत्यूरी राजा तब गढ़वाल, कुमाऊँ तथा डोटी क्षेत्रों तक राज करते थे। .
भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों का संजाल भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची भारतीय राजमार्ग के क्षेत्र में एक व्यापक सूची देता है, द्वारा अनुरक्षित सड़कों के एक वर्ग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण। ये लंबे मुख्य में दूरी roadways हैं भारत और के अत्यधिक उपयोग का मतलब है एक परिवहन भारत में। वे में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा भारतीय अर्थव्यवस्था। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 laned (प्रत्येक दिशा में एक), के बारे में 65,000 किमी की एक कुल, जिनमें से 5,840 किमी बदल सकता है गठन में "स्वर्ण Chathuspatha" या स्वर्णिम चतुर्भुज, एक प्रतिष्ठित परियोजना राजग सरकार द्वारा शुरू की श्री अटल बिहारी वाजपेयी.
कोई विवरण नहीं।
भारतीय थलसेना, सेना की भूमि-आधारित दल की शाखा है और यह भारतीय सशस्त्र बल का सबसे बड़ा अंग है। भारत का राष्ट्रपति, थलसेना का प्रधान सेनापति होता है, और इसकी कमान भारतीय थलसेनाध्यक्ष के हाथों में होती है जो कि चार-सितारा जनरल स्तर के अधिकारी होते हैं। पांच-सितारा रैंक के साथ फील्ड मार्शल की रैंक भारतीय सेना में श्रेष्ठतम सम्मान की औपचारिक स्थिति है, आजतक मात्र दो अधिकारियों को इससे सम्मानित किया गया है। भारतीय सेना का उद्भव ईस्ट इण्डिया कम्पनी, जो कि ब्रिटिश भारतीय सेना के रूप में परिवर्तित हुई थी, और भारतीय राज्यों की सेना से हुआ, जो स्वतंत्रता के पश्चात राष्ट्रीय सेना के रूप में परिणत हुई। भारतीय सेना की टुकड़ी और रेजिमेंट का विविध इतिहास रहा हैं इसने दुनिया भर में कई लड़ाई और अभियानों में हिस्सा लिया है, तथा आजादी से पहले और बाद में बड़ी संख्या में युद्ध सम्मान अर्जित किये। भारतीय सेना का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद की एकता सुनिश्चित करना, राष्ट्र को बाहरी आक्रमण और आंतरिक खतरों से बचाव, और अपनी सीमाओं पर शांति और सुरक्षा को बनाए रखना हैं। यह प्राकृतिक आपदाओं और अन्य गड़बड़ी के दौरान मानवीय बचाव अभियान भी चलाते है, जैसे ऑपरेशन सूर्य आशा, और आंतरिक खतरों से निपटने के लिए सरकार द्वारा भी सहायता हेतु अनुरोध किया जा सकता है। यह भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के साथ राष्ट्रीय शक्ति का एक प्रमुख अंग है। सेना अब तक पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ चार युद्धों तथा चीन के साथ एक युद्ध लड़ चुकी है। सेना द्वारा किए गए अन्य प्रमुख अभियानों में ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत और ऑपरेशन कैक्टस शामिल हैं। संघर्षों के अलावा, सेना ने शांति के समय कई बड़े अभियानों, जैसे ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स और युद्ध-अभ्यास शूरवीर का संचालन किया है। सेना ने कई देशो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में एक सक्रिय प्रतिभागी भी रहा है जिनमे साइप्रस, लेबनान, कांगो, अंगोला, कंबोडिया, वियतनाम, नामीबिया, एल साल्वाडोर, लाइबेरिया, मोज़ाम्बिक और सोमालिया आदि सम्मलित हैं। भारतीय सेना में एक सैन्य-दल (रेजिमेंट) प्रणाली है, लेकिन यह बुनियादी क्षेत्र गठन विभाजन के साथ संचालन और भौगोलिक रूप से सात कमान में विभाजित है। यह एक सर्व-स्वयंसेवी बल है और इसमें देश के सक्रिय रक्षा कर्मियों का 80% से अधिक हिस्सा है। यह 1,200,255 सक्रिय सैनिकों और 909,60 आरक्षित सैनिकों के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्थायी सेना है। सेना ने सैनिको के आधुनिकीकरण कार्यक्रम की शुरुआत की है, जिसे "फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री सैनिक एक प्रणाली के रूप में" के नाम से जाना जाता है इसके साथ ही यह अपने बख़्तरबंद, तोपखाने और उड्डयन शाखाओं के लिए नए संसाधनों का संग्रह एवं सुधार भी कर रहा है।.
भांग का पौधा और उसके विभिन्न भाग भांग (वानस्पतिक नामः Cannabis indica) एक प्रकार का पौधा है जिसकी पत्तियों को पीस कर भांग तैयार की जाती है। उत्तर भारत में इसका प्रयोग बहुतायत से स्वास्थ्य, हल्के नशे तथा दवाओं के लिए किया जाता है। भारतवर्ष में भांग के अपने आप पैदा हुए पौधे सभी जगह पाये जाते हैं। भांग विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल में प्रचुरता से पाया जाता है। भांग के पौधे 3-8 फुट ऊंचे होते हैं। इसके पत्ते एकान्तर क्रम में व्यवस्थित होते हैं। भांग के ऊपर की पत्तियां 1-3 खंडों से युक्त तथा निचली पत्तियां 3-8 खंडों से युक्त होती हैं। निचली पत्तियों में इसके पत्रवृन्त लम्बे होते हैं। भांग के नर पौधे के पत्तों को सुखाकर भांग तैयार की जाती है। भांग के मादा पौधों की रालीय पुष्प मंजरियों को सुखाकर गांजा तैयार किया जाता है। भांग की शाखाओं और पत्तों पर जमे राल के समान पदार्थ को चरस कहते हैं। भांग की खेती प्राचीन समय में 'पणि' कहे जानेवाले लोगों द्वारा की जाती थी। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने कुमाऊँ में शासन स्थापित होने से पहले ही भांग के व्यवसाय को अपने हाथ में ले लिया था तथा काशीपुर के नजदीक डिपो की स्थापना कर ली थी। दानपुर, दसोली तथा गंगोली की कुछ जातियाँ भांग के रेशे से कुथले और कम्बल बनाती थीं। भांग के पौधे का घर गढ़वाल में चांदपुर कहा जा सकता है। इसके पौधे की छाल से रस्सियाँ बनती हैं। डंठल कहीं-कहीं मशाल का काम देता है। पर्वतीय क्षेत्र में भांग प्रचुरता से होती है, खाली पड़ी जमीन पर भांग के पौधे स्वभाविक रूप से पैदा हो जाते हैं। लेकिन उनके बीज खाने के उपयोग में नहीं आते हैं। टनकपुर, रामनगर, पिथौरागढ़, हल्द्वानी, नैनीताल, अल्मोडा़, रानीखेत,बागेश्वर, गंगोलीहाट में बरसात के बाद भांग के पौधे सर्वत्र देखे जा सकते हैं। नम जगह भांग के लिए बहुत अनुकूल रहती है। पहाड़ की लोक कला में भांग से बनाए गए कपड़ों की कला बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन मशीनों द्वारा बुने गये बोरे, चटाई इत्यादि की पहुँच घर-घर में हो जाने तथा भांग की खेती पर प्रतिबन्ध के कारण इस लोक कला के समाप्त हो जाने का भय है। होली के अवसर पर मिठाई और ठंडाई के साथ इसका प्रयोग करने की परंपरा है। भांग का इस्तेमाल लंबे समय से लोग दर्द निवारक के रूप में करते रहे हैं। कई देशों में इसे दवा के रूप में भी उपलब्ध कराया जाता है। .
भवाली या भुवाली उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जनपद में स्थित एक नगर है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। शान्त वातावरण और खुली जगह होने के कारण 'भवाली' कुमाऊँ की एक शानदार नगरी है। यहाँ पर फलों की एक मण्डी है। यह एक ऐसा केन्द्र - बिन्दु है जहाँ से काठगोदाम हल्द्वानी और नैनीताल, अल्मोड़ा - रानीखेत भीमताल - सातताल और रामगढ़ - मुक्तेश्वर आदि स्थानों को अलग - अलग मोटर मार्ग जाते हैं। भवाली नगर अपने प्राचीन टीबी सैनिटोरियम के लिए विख्यात है, जिसकी स्थापना १९१२ में हुई थी। चीड़ के पेड़ों की हवा टी.
मानिला देवी मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले के शल्ट क्षेत्र में स्थित है। यह स्थान रामनगर से लगभग ७० किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ तक बस या निजी वाहन द्वारा पहुँचा जा सकता है। यह इस क्षेत्र का एक प्रसिद्द मन्दिर है और हर वर्ष यहाँ दूर-दूर से लोग देवी के दर्शनों के लिए आते हैं। यह मन्दिर कत्यूरी लोगो की पारिवारिक देवी मानिला का मंदिर है। मन्दिर दो भागों में बँटा हुआ है जिसे स्थानीय भाषा में मल मानिला (ऊपरी मानिला) और तल मानिला (निचला मानिला) कहते है। प्राचीन मन्दिर तो तल मनीला में ही स्थित है लेकिन मल मानिला मन्दिर के पीछे की कहानी जो स्थानीय लोगो के बीच बहुत प्रचलित है वो ये हैं कि "एक बार कुछ चोर मानिला देवी की मूर्ति को चुराना चाहते थे। लेकिन जब वो मूर्ति उठा रहे थे तो उठा न सके और तब वे मूर्ति का एक हाथ ही उखाड़ कर ले गए, लेकिन उस हाथ को भी वे अधिक दूर ना लेजा सके।" और तबसे वही पर माता का एक और मन्दिर स्थापित कर दिया गया जिसे आज मल मानिला के नाम से लोग जानते है। .
मॉंसी एक गाँव है जो रामगंगा नदी के पूर्वी किनारे पर चौखुटिया (गनांई) तहसील के तल्ला गेवाड़ पट्टी में भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमांऊँ क्षेत्र के अल्मोड़ा जिले में स्थित है। यह मूलतः मासीवाल नामक उपनाम से विख्यात कुमांऊॅंनी हिन्दुओं का पुश्तैनी गाँव है। यह अपनी ऐतिहासिक व सॉस्कृतिक विरासत, ठेठ कुमांऊॅंनी सभ्यता व संस्कृति, पर्वतीय जीवन शैली तथा समतल उपजाऊ भूमि के लिए पहचाना जाता है। .
रानीखेत तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जनपद की एक तहसील है। अल्मोड़ा जनपद के मध्य भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय रानीखेत छावनी में स्थित हैं। इसके पूर्व में अल्मोड़ा तहसील, पश्चिम में भिक्यासैंण तहसील, उत्तर में द्वाराहाट तहसील, तथा दक्षिण में नैनीताल जनपद की कोश्याकुटौली तहसील है। .
यह मुर्गियों में फैलने वाला रोग है। यह रोग सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश के रानीखेत में देखा गया था। श्रेणीःपशु पक्षी रोग.
श्यामाचरण लाहिड़ी (30 सितम्बर 1828 - 26 सितम्बर 1895) 18वीं शताब्दी के उच्च कोटि के साधक थे जिन्होंने सद्गृहस्थ के रूप में यौगिक पूर्णता प्राप्त कर ली थी। आपका जन्म बंगाल के नदिया जिले की प्राचीन राजधानी कृष्णनगर के निकट धरणी नामक ग्राम के एक संभ्रांत ब्राह्मण कुल में अनुमानतः 1825-26 ई. में हुआ था। आपका पठनपाठन काशी में हुआ। बंगला, संस्कृत के अतिरिक्त अपने अंग्रेजी भी पड़ी यद्यपि कोई परीक्षा नहीं पास की। जीविकोपार्जन के लिए छोटी उम्र में सरकारी नौकरी में लग गए। आप दानापुर में मिलिटरी एकाउंट्स आफिस में थे। कुछ समय के लिए सरकारी काम से अल्मोड़ा जिले के रानीखेत नामक स्थान पर भेज दिए गए। हिमालय की इस उपत्यका में गुरुप्राप्ति और दीक्षा हुई। आपके तीन प्रमुख शिष्य युक्तेश्वर गिरि, केशवानंद और प्रणवानंद ने गुरु के संबंध में प्रकाश डाला है। योगानंद परमहंस ने 'योगी की आत्मकथा' नामक जीवनवृत्त में गुरु को बाबा जी कहा है। दीक्षा के बाद भी इन्होंने कई वर्षों तक नौकरी की और इसी समय से गुरु के आज्ञानुसार लोगों को दीक्षा देने लगे थे। सन् 1880 में पेंशन लेकर आप काशी आ गए। इनकी गीता की आध्यात्मिक व्याख्या आज भी शीर्ष स्थान पर है। इन्होंने वेदांत, सांख्य, वैशेषिक, योगदर्शन और अनेक संहिताओं की व्याख्या भी प्रकाशित की। इनकी प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि गृहस्थ मनुष्य भी योगाभ्यास द्वारा चिरशांति प्राप्त कर योग के उच्चतम शिखर पर आरूढ़ हो सकता है। आपने अपने सहज आडंबररहित गार्हस्थ्य जीवन से यह प्रमाणित कर दिया था। धर्म के संबंध में बहुत कट्टरता के पक्षपाती न होने पर भी आप प्राचीन रीतिनीति और मर्यादा का पूर्णतया पालन करते थे। शास्त्रों में आपका अटूट विश्वास था। जब आप रानीखेत में थे तो अवकाश के समय शून्य विजन में पर्यटन पर प्राकृतिक सौंदर्यनिरीक्षण करते। इसी भ्रमण में दूर से अपना नाम सुनकर द्रोणगिरि नामक पर्वत पर चढ़ते-चढ़ते एक ऐसे स्थान पर पहुँचे जहाँ थोड़ी सी खुली जगह में अनेक गुफाएँ थीं। इसी एक गुफा के करार पर एक तेजस्वी युवक खड़े दीख पड़े। उन्होंने हिंदी में गुफा में विश्राम करने का संकेत किया। उन्होंने कहा 'मैंने ही तुम्हें बुलाया था'। इसके बाद पूर्वजन्मों का वृत्तांत बताते हुए शक्तिपात किया। बाबा जी से दीक्षा का जो प्रकार प्राप्त हुआ उसे क्रियायोग कहा गया है। क्रियायोग की विधि केवल दीक्षित साधकों को ही बताई जाती है। यह विधि पूर्णतया शास्त्रोक्त है और गीता उसकी कुंजी है। गीता में कर्म, ज्ञान, सांख्य इत्यादि सभी योग है और वह भी इतने सहज रूप में जिसमें जाति और धर्म के बंधन बाधक नहीं होते। आप हिंदू, मुसलमान, ईसाई सभी को बिना भेदभाव के दीक्षा देते थे। इसीलिए आपके भक्त सभी धर्मानुयायी हैं। उन्होंने अपने समय में व्याप्त कट्टर जातिवाद को कभी महत्व नहीं दिया। वह अन्य धर्मावलंबियों से यही कहते थे कि आप अपनी धार्मिक मान्यताओं का आदर और अभ्यास करते हुए क्रियायोग द्वारा मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। पात्रानुसार भक्ति, ज्ञान, कर्म और राजयोग के आधार पर व्यक्तित्व और प्रवृत्तियों के अनुसार साधना करने की प्रेरणा देते। उनके मत से शास्त्रों पर शंका अथवा विवाद न कर उनका तथ्य आत्मसात् करना चाहिए। अपनी समस्याओं के हल करने का आत्मचिंतन से बढ़कर कोई मार्ग नहीं। लाहिड़ी महाशय के प्रवचनों का पूर्ण संग्रह प्राप्य नहीं है किंतु गीता, उपनिषद्, संहिता इत्यादि की अनेक व्याख्याएँ बँगला में उपलब्ध हैं। भगवद्गीताभाष्य का हिंदी अनुवाद लाहिड़ी महाशय के शिष्य श्री भूपेंद्रनाथ सान्याल ने प्रस्तुत किया है। श्री लाहिड़ी की अधिकांश रचनाएँ बँगला में हैं। .
सोमेश्वर उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा जनपद में स्थित एक कस्बा है। कोसी और साई नदियों के संगम पर स्थित सोमेश्वर अल्मोड़ा का एक प्रमुख कस्बा है, तथा इसी नाम की एक तहसील का मुख्यालय भी है। सोमेश्वर अल्मोड़ा के उत्तरी क्षेत्र के दर्जनों गांवों का प्रमुख बाजार है, और यहां करीब ३५० दुकानें हैं। यहां से होकर बागेश्वर, अल्मोड़ा, रानीखेत, द्वाराहाट तथा कौसानी आदि स्थानों को प्रतिदिन सैकड़ों वाहन आते जाते हैं। यहां एक ऐतिहासिक शिव मंदिर भी है। .
कुमाऊँ का प्रवेश द्वार, हल्द्वानी उत्तराखण्ड के नैनीताल ज़िले में स्थित हल्द्वानी राज्य के सर्वाधिक जनसँख्या वाले नगरों में से है। इसे "कुमाऊँ का प्रवेश द्वार" भी कहा जाता है। नगर के यातायात साधनों में २ रेलवे स्टेशन, २ बस स्टेशन तथा एक अधिकृत टैक्सी स्टैंड है। इनके अतिरिक्त नगर से २८ किमी की दूरी पर एक घरेलू हवाई अड्डा स्थित है, और नगर में एक अंतर्राज्यीय बस अड्डा निर्माणाधीन है। .
जी डी बिरला मैमोरियल स्कूल की स्थापना १९८७ में भारतीय उद्योगपति घंश्याम दास बिरला की स्मृति में श्री बी के बिरला और श्रीमती सरला बिरला द्वारा कि गई थी। यह एक विद्यालय है जो भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत नामक कस्बे में स्थित है। यहाँ गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान कि जाती है और इस विद्यालय में आवासीय सुविधा के साथ कक्षा ४ से १२ तक ७०० छात्र पढ़ते हैं। यह दिल्ली से ३६० किमी दूर है। यह विद्यालय, एक पहाड़ी के हलके ढलान पर रानीखेत से ५ किमी की दूरी पर है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जो ८५ किमी दूर है। .
खैरना उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में एक छोटा सा नगर है, जो इसी नाम के पुल के दोनों ओर बस गया। खैरना पुल कोसी नदी पर ब्रिटिश काल के समय से ही स्थित है। खैरना मछिलयों के शिकार के लिए विख्यात है। .
नैनीताल में गोविन्द वल्लभ पन्त की प्रतिमा पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त या जी॰बी॰ पन्त (जन्म १० सितम्बर १८८७ - ७ मार्च १९६१) प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी और वरिष्ठ भारतीय राजनेता थे। वे उत्तर प्रदेश राज्य के प्रथम मुख्य मन्त्री और भारत के चौथे गृहमंत्री थे। सन 1957 में उन्हें भारतरत्न से सम्मानित किया गया। गृहमंत्री के रूप में उनका मुख्य योगदान भारत को भाषा के अनुसार राज्यों में विभक्त करना तथा हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करना था। .
गोविन्द बल्लभ पन्त (हिन्दी साहित्यकार)
गोविन्द बल्लभ पन्त (१८९८ - १९९८) हिन्दी के नाटककार थे। .
कटारमल सूर्य मन्दिर भारतवर्ष का प्राचीनतम सूर्य मन्दिर है। यह पूर्वाभिमुखी है तथा उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जिले के अधेली सुनार नामक गॉंव में स्थित है। इसका निर्माण कत्यूरी राजवंश के तत्कालीन शासक कटारमल के द्वारा छठीं से नवीं शताब्दी में हुआ था। यह कुमांऊॅं के विशालतम ऊँचे मन्दिरों में से एक व उत्तर भारत में विलक्षण स्थापत्य एवम् शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण है तथा समुद्र सतह से लगभग 2116 मीटर की ऊँचाई पर पर्वत पर स्थित है। .
काठगोदाम भारत के उत्तराखण्ड राज्य में स्थित हल्द्वानी नगर के अंतर्गत स्थित एक क्षेत्र है। इसे ऐतिहासिक तौर पर कुमाऊँ का द्वार कहा जाता रहा है। यह छोटा सा नगर पहाड़ के पाद प्रदेश में बसा है। गौला नदी इसके दायें से होकर हल्द्वानी बाजार की ओर बढ़ती है। पूर्वोतर रेलवे का यह अन्तिम स्टेशन है। यहाँ से बरेली, लखनऊ तथा आगरा के लिए छोटी लाइन की रेल चलती है। काठगोदाम से नैनीताल, अल्मोड़ा, रानीखेत और पिथौरागढ़ के लिए केएमओयू की बसें जाती है। कुमाऊँ के सभी अंचलों के लिए यहाँ से बसें जाती हैं। १९०१ में काठगोदाम ३७५ की जनसंख्या वाला एक छोटा सा गाँव था। १९०९ तक इसे रानीबाग़ के साथ जोड़कर नोटिफ़िएड एरिया घोषित कर दिया गया। काठगोदाम-रानीबाग़ १९४२ तक स्वतंत्र नगर के रूप में उपस्थित रहा, जिसके बाद इसे हल्द्वानी नोटिफ़िएड एरिया के साथ जोड़कर नगर पालिका परिषद् हल्द्वानी-काठगोदाम का गठन किया गया। २१ मई २०११ को हल्द्वानी-काठगोदाम को नगर पालिका परिषद से नगर निगम घोषित किया गया, और फिर इसके विस्तार को देखते हुए इसका नाम बदलकर नगर निगम हल्द्वानी कर दिया गया। .
काला चौना एक गॉंव है। यह रामगंगा नदी के पूर्वी किनारे पर चौखुटिया तहसील के तल्ला गेवाड़ नामक पट्टी में, भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के अल्मोड़ा जिले में स्थित है। यह गॉंव मूलरूप से कनौंणियॉं नामक उपनाम से विख्यात कुमांऊॅंनी हिन्दू राजपूतों का प्राचीन और पुश्तैनी चार गाँवों में से एक है। दक्षिणी हिमालय की तलहटी में बसा यह काला चौना अपनी ऐतिहासिक व सॉंस्कृतिक विरासत, ठेठ कुमांऊॅंनी सभ्यता व संस्कृति, पर्वतीय जीवन शैली, प्रकृति संरक्षण, अलौकिक प्राकृतिक छटा तथा समतल-उपजाऊ भूमि के लिए पहचाना जाता है। .
यह लेख कुमाऊँ मण्डल पर है। अन्य कुमाऊँ लेखों के लिए देखें कुमांऊॅं उत्तराखण्ड के मण्डल कुमाऊँ मण्डल भारत के उत्तराखण्ड राज्य के दो प्रमुख मण्डलों में से एक हैं। अन्य मण्डल है गढ़वाल। कुमाऊँ मण्डल में निम्न जिले आते हैंः-.
हल्द्वानी के केमू स्टेशन में खड़ी बसें। कुमाऊँ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड (Kumaon Motor Owners Union Limited), जो अपने संक्षिप्त नाम के॰एम॰ओ॰यू॰ (K.M.O.U) या केमू से अधिक प्रसिद्ध है, उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में बस सेवा प्रदान करने वाली एक निजी कम्पनी है। १९३९ में १३ निजी कम्पनियों के विलय द्वारा अस्तित्व में आयी यह मोटर कम्पनी स्वतन्त्रता पूर्व कुमाऊँ क्षेत्र में बसें चलाने वाली एकमात्र बस कम्पनी थी। १९८७ तक यह इस क्षेत्र की सबसे बड़ी बस कम्पनी थी। .
कुमाऊं विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न निम्नलिखित सूची कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से सम्बद्ध राजकीय महाविद्यालयों की हैः .
कुमांऊँ रेजीमेंट भारतीय सशस्त्र सेना का एक सैन्य-दल है, जिसकी स्थापना सन् 1788 में हुई। यह कुमांऊँ नामक हिमालयी क्षेत्र के निवासियों से सम्बन्धित भारतीय सैन्य-दल है। जिसका मुख्यालय उत्तराखण्ड के कुमांऊँ क्षेत्र के रानीखेत नामक पर्वतीय स्थान में स्थित है तथा भारतीय सशस्त्र सेना के वीरता का प्रथम सर्वश्रेष्ठ सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित है। कुमांऊँ रेजिमेंट को 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान तथा 1962 के भारत और चीन युद्ध के लिये विशेष गौरवपूर्ण माना जाता है। .
अल्मोड़ा भारतीय राज्य उत्तराखण्ड का एक महत्वपूर्ण नगर है। यह अल्मोड़ा जिले का मुख्यालय भी है। अल्मोड़ा दिल्ली से ३६५ किलोमीटर और देहरादून से ४१५ किलोमीटर की दूरी पर, कुमाऊँ हिमालय श्रंखला की एक पहाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है। भारत की २०११ की जनगणना के अनुसार अल्मोड़ा की कुल जनसंख्या ३५,५१३ है। अल्मोड़ा की स्थापना राजा बालो कल्याण चंद ने १५६८ में की थी। महाभारत (८ वीं और ९वीं शताब्दी ईसा पूर्व) के समय से ही यहां की पहाड़ियों और आसपास के क्षेत्रों में मानव बस्तियों के विवरण मिलते हैं। अल्मोड़ा, कुमाऊं राज्य पर शासन करने वाले चंदवंशीय राजाओं की राजधानी थी। स्वतंत्रता की लड़ाई में तथा शिक्षा, कला एवं संस्कृति के उत्थान में अल्मोड़ा का विशेष हाथ रहा है। .
२०१३ में अल्मोड़ा अल्मोड़ा, भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक नगर है। यह अल्मोड़ा जिले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। इस नगर को राजा कल्याण चंद ने १५६८ में स्थापित किया था। महाभारत (८ वीं और ९वीं शताब्दी ईसा पूर्व) के समय से ही यहां की पहाड़ियों और आसपास के क्षेत्रों में मानव बस्तियों के विवरण मिलते हैं। अल्मोड़ा, कुमाऊँ राज्य पर शासन करने वाले चंदवंशीय राजाओं की राजधानी थी। .
उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तरांचल), उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण ९ नवम्बर २००० को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था। सन २००० से २००६ तक यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। जनवरी २००७ में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया। राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं। सन २००० में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था। पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं। देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है। गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं। साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं। राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी-भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना। इस परियोजना की कल्पना १९५३ मे की गई थी और यह अन्ततः २००७ में बनकर तैयार हुआ। उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है। .
उत्तराखण्ड में जिलावार विधानसभा सीटें उत्तराखण्ड के जिलों के अन्तर्गत आने वाली विधानसभा सीटें हैं। इस सूची में जिला और उस जिले में उत्तराखण्ड विधानसभा की कौन-कौन सी सीटें हैं दिया गया है। भारतीय चुनाव आयोग द्वारा विर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किए जाए से उत्तराखण्ड में भी सीटों में बदलाव आया है। इस सूची में भूतपूर्व सीटें किसी भी जिले में नहीं दी गई हैं। .
उत्तराखण्ड के नगर नामक इस सूची में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के सभी नगरों की ज़िलेवार सूची दी गई है, जो वर्णमालानुसार क्रमित है। .
निम्नलिखित सूची उत्तराखण्ड राज्य के राज्य राजमार्गों की हैः .
उत्तराखण्ड की राजनीति भारत के उत्तराखण्ड की राजनैतिक व्यवस्था को कहते हैं। इस राज्य राजनीति की विशेषता है राष्ट्रीय दलों और क्षेत्रिय दलों के बीच आपसी संयोजन जिससे राज्य में शासन व्यव्स्था चलाई जाती है। उत्तराखण्ड राज्य २००० में बनाया गया था। एक अलग राज्य की स्थापना लम्बे समय से ऊपरी हिमालय की पहाड़ियों पर रह रहे लोगों की हार्दिक इच्छा थी।भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी), उत्तराखण्ड की राजनीति में सबसे प्रमुख राष्ट्रीय दल हैं। इसके अतिरिक्त बहुजन समाज पार्टी(बसपा) का भी राज्य के मैदानी क्षेत्रों में जनाधार है। राष्ट्रीय स्तर के दलों को उत्तराखण्ड के राज्य स्तरीय दलों से मजबूत समर्थन प्राप्त है। विशेष रूप से, उत्तराखण्ड क्रान्ति दल (उक्राद), जिसकी स्थापना १९७० के दशक में पृथक राज्य के लिए लोगों को जागृत करने के लिए कि गई थी और जो पर्वतिय निवासियों के लिए अलग राज्य के गठन के पीछे मुख्य विचारक था, अभी भी उत्तराखण्ड की राजनीति के मैदान में एक विस्तृत प्रभाव वाला दल है। राज्य गठन के बाद सबसे पहले चुनाव २००२ में आयिजित किए गए थे। इन चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरा और राज्य में प्रथम सरकार बनाई। इन चुनावों में भाजपा, दूसरा सबसे बड़ा दल था। इसके बाद, फ़रवरी २००७ के दूसरे विधानसभा चुनावों में सरकार-विरोधी लहर के चलते, भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में सामने आया। भाजपा को इन चुनावों में ३४ सीटें प्राप्त हुईं, जो बहुत से एक कम थी जिसे उक्राद के तीन सदस्यों के समर्थ्न ने पूरा कर दिया। उत्तराखण्ड राज्य विधायिका, उत्तराखण्ड की राजनीति का केन्द्र बिन्दू है। वर्तमान (2017)चुनाव में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से 57 सीटों पर जीत का परचम लहराया है। यह राज्य में अब तक के इतिहास में न केवल भारतीय जनता पार्टी, बल्कि किसी भी दल के लिए सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, कांग्रेस के खाते में बस 11 सीटें ही आई.
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रानीखेत भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक प्रमुख पहाड़ी पर्यटन स्थल है। यह राज्य के अल्मोड़ा जनपद के अंतर्गत स्थित एक फौजी छावनी है। देवदार और बलूत के वृक्षों से घिरा रानीखेत बहुत ही रमणीक हिल स्टेशन है। इस स्थान से हिमाच्छादित मध्य हिमालयी श्रेणियाँ स्पष्ट देखी जा सकती हैं। रानीखेत से सुविधापूर्वक भ्रमण के लिए पिण्डारी ग्लेशियर, कौसानी, चौबटिया और कालिका पहुँचा जा सकता है। चौबटिया में प्रदेश सरकार के फलों के उद्यान हैं। इस पर्वतीय नगरी का मुख्य आकर्षण यहाँ विराजती नैसर्गिक शान्ति है। रानीखेत में फ़ौजी छावनी भी है और गोल्फ़ प्रेमियों के लिए एक सुन्दर पार्क भी है। एक हज़ार आठ सौ उनहत्तर में ब्रिटिश सरकार ने कुमाऊं रेजिमेंट के मुख्यालय की स्थापना रानीखेत में की, और भारतीय गर्मियों से बचने के लिए हिल स्टेशन के रूप में इस नगर का प्रयोग किया जाने लगा। ब्रिटिश राज के दौरान एक समय में, यह शिमला के स्थान पर भारत सरकार के ग्रीष्मकालीन मुख्यालय के रूप में भी प्रस्तावित किया गया था। एक हज़ार नौ सौ में इसकी गर्मियों की सात,सात सौ पाँच जनसंख्या थी, और उसी साल की सर्दियों की जनसंख्या एक हज़ार नौ सौ एक में तीन,एक सौ तिरेपन मापी गई थी। स्वच्छ सर्वेक्षण दो हज़ार अट्ठारह के अनुसार रानीखेत दिल्ली और अल्मोड़ा छावनियों के बाद भारत की तीसरी सबसे स्वच्छ छावनी है। . सैंतीस संबंधोंः चौखुटिया, द्वाराहाट, दूनागिरी, नागा रेजिमेंट, बदरीनाथ, बिनसर, बैजनाथ, उत्तराखण्ड, भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची - प्रदेश अनुसार, भारत के शहरों की सूची, भारतीय थलसेना, भांग का पौधा, भवाली, मानिला देवी मन्दिर, उत्तराखण्ड, मॉंसी, रानीखेत तहसील, रानीखेत रोग, श्यामाचरण लाहिड़ी, सोमेश्वर, उत्तराखण्ड, हल्द्वानी में यातायात, जी डी बिरला मैमोरियल स्कूल, रानीखेत, खैरना, गोविन्द बल्लभ पन्त, गोविन्द बल्लभ पन्त , कटारमल सूर्य मन्दिर, काठगोदाम, काला चौना, कुमाऊँ मण्डल, कुमाऊँ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड, कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों की सूची, कुमाऊं रेजिमेंट, अल्मोड़ा, अल्मोड़ा का इतिहास, उत्तराखण्ड, उत्तराखण्ड में जिलावार विधानसभा सीटें, उत्तराखण्ड के नगरों की सूची, उत्तराखण्ड के राज्य राजमार्गों की सूची, उत्तराखण्ड की राजनीति। चौखुटिया, अल्मोड़ा जिला, उत्तराखंड में स्थित एक क्षेत्र है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। . द्वाराहाट उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले का एक कस्बा है जो रानीखेत से लगभग इक्कीस किलोग्राममीटर दूर स्थित है। द्वाराहाट में तीन वर्ग के मन्दिर हैं - कचहरी, मनिया तथा रत्नदेव। इसके अतिरिक्त बहुत से मन्दिर प्रतिमाविहीन हैं। द्वाराहाट में गूजरदेव का मन्दिर सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। . दूनागिरी भूमंडल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के उत्तराखण्ड प्रदेश के अन्तर्गत कुमांऊँ क्षेत्र के अल्मोड़ा जिले में एक पौराणिक पर्वत शिखर का नाम है। द्रोण, द्रोणगिरी, द्रोण-पर्वत, द्रोणागिरी, द्रोणांचल, तथा द्रोणांचल-पर्वत इसी पर्वत के पर्यायवाची शब्द हैं। कालान्तर के उपरांत द्रोण का अपभ्रंश होते-होते वर्तमान में इस पर्वत को कुमांऊँनी बोली के समरूप अथवा अनुसार दूनागिरी नाम से पुकारा जाने लगा है। यथार्थतः यह पौराणिक उल्लिखित द्रोण है। . "नागा रेजीमेंट" भारतीय सेना का एक सैन्य-दल है। नागा रेजिमेंट भारतीय सेना के एक पैदल सेना की रेजिमेंट है। यह भारतीय सेना की सबसे कम उम्र की रेजिमेंटों में से एक है - एक हज़ार नौ सौ सत्तर में रानीखेत में पहली बटालियन उठाया गया था। रेजिमेंट मुख्यतः नागालैंड से भर्ती होती है। . बद्रीनाथ घाटी तथा अलकनन्दा नदी बदरीनाथ भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक स्थान है जो हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ है। यह उत्तराखण्ड के चमोली जिले में स्थित एक नगर पंचायत है। यहाँ बद्रीरीनाथ मन्दिर है जो हिन्दुओं के चार प्रसिद्ध धामों में से एक है। . बिनसर उत्तरांचल में अल्मोड़ा से लगभग चौंतीस किलोग्राममीटर दूर है। यह समुद्र तल से लगभग दो हज़ार चार सौ बारह मीटर की उंचाई पर बसा है। लगभग ग्यारहवीं से अट्ठारहवीं शताब्दी तक ये चन्द राजाओं की राजधानी रहा था। अब इसे वन्य जीव अभयारण्य बना दिया गया है। बिनसर झांडी ढार नाम की पहाडी पर है। यहां की पहाड़ियां झांदी धार के रूप में जानी जाती हैं। बिनसर गढ़वाली बोली का एक शब्द है -जिसका अर्थ नव प्रभात है। यहां से अल्मोड़ा शहर का उत्कृष्ट दृश्य, कुमाऊं की पहाडियां और ग्रेटर हिमालय भी दिखाई देते हैं। घने देवदार के जंगलों से निकलते हुए शिखर की ओर रास्ता जाता है, जहां से हिमालय पर्वत श्रृंखला का अकाट्य दृश्य और चारों ओर की घाटी देखी जा सकती है। बिनसर से हिमालय की केदारनाथ, चौखंबा, त्रिशूल, नंदा देवी, नंदाकोट और पंचोली चोटियों की तीन सौ किलोग्राममीटर लंबी शृंखला दिखाई देती है, जो अपने आप में अद्भुत है और ये बिनसर का सबसे बड़ा आकर्षण भी हैं। . बैजनाथ उत्तराखण्ड राज्य के बागेश्वर जनपद में गोमती नदी के किनारे एक छोटा सा नगर है। यह अपने प्राचीन मंदिरों के लिए विख्यात है, जिन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के रूप में मान्यता प्राप्त है। बैजनाथ उन चार स्थानों में से एक है, जिन्हें भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत 'शिव हेरिटेज सर्किट' से जोड़ा जाना है। बैजनाथ को प्राचीनकाल में "कार्तिकेयपुर" के नाम से जाना जाता था, और तब यह कत्यूरी राजवंश के शासकों की राजधानी थी। कत्यूरी राजा तब गढ़वाल, कुमाऊँ तथा डोटी क्षेत्रों तक राज करते थे। . भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों का संजाल भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची भारतीय राजमार्ग के क्षेत्र में एक व्यापक सूची देता है, द्वारा अनुरक्षित सड़कों के एक वर्ग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण। ये लंबे मुख्य में दूरी roadways हैं भारत और के अत्यधिक उपयोग का मतलब है एक परिवहन भारत में। वे में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा भारतीय अर्थव्यवस्था। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या दो laned , के बारे में पैंसठ,शून्य किमी की एक कुल, जिनमें से पाँच,आठ सौ चालीस किमी बदल सकता है गठन में "स्वर्ण Chathuspatha" या स्वर्णिम चतुर्भुज, एक प्रतिष्ठित परियोजना राजग सरकार द्वारा शुरू की श्री अटल बिहारी वाजपेयी. कोई विवरण नहीं। भारतीय थलसेना, सेना की भूमि-आधारित दल की शाखा है और यह भारतीय सशस्त्र बल का सबसे बड़ा अंग है। भारत का राष्ट्रपति, थलसेना का प्रधान सेनापति होता है, और इसकी कमान भारतीय थलसेनाध्यक्ष के हाथों में होती है जो कि चार-सितारा जनरल स्तर के अधिकारी होते हैं। पांच-सितारा रैंक के साथ फील्ड मार्शल की रैंक भारतीय सेना में श्रेष्ठतम सम्मान की औपचारिक स्थिति है, आजतक मात्र दो अधिकारियों को इससे सम्मानित किया गया है। भारतीय सेना का उद्भव ईस्ट इण्डिया कम्पनी, जो कि ब्रिटिश भारतीय सेना के रूप में परिवर्तित हुई थी, और भारतीय राज्यों की सेना से हुआ, जो स्वतंत्रता के पश्चात राष्ट्रीय सेना के रूप में परिणत हुई। भारतीय सेना की टुकड़ी और रेजिमेंट का विविध इतिहास रहा हैं इसने दुनिया भर में कई लड़ाई और अभियानों में हिस्सा लिया है, तथा आजादी से पहले और बाद में बड़ी संख्या में युद्ध सम्मान अर्जित किये। भारतीय सेना का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद की एकता सुनिश्चित करना, राष्ट्र को बाहरी आक्रमण और आंतरिक खतरों से बचाव, और अपनी सीमाओं पर शांति और सुरक्षा को बनाए रखना हैं। यह प्राकृतिक आपदाओं और अन्य गड़बड़ी के दौरान मानवीय बचाव अभियान भी चलाते है, जैसे ऑपरेशन सूर्य आशा, और आंतरिक खतरों से निपटने के लिए सरकार द्वारा भी सहायता हेतु अनुरोध किया जा सकता है। यह भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के साथ राष्ट्रीय शक्ति का एक प्रमुख अंग है। सेना अब तक पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ चार युद्धों तथा चीन के साथ एक युद्ध लड़ चुकी है। सेना द्वारा किए गए अन्य प्रमुख अभियानों में ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत और ऑपरेशन कैक्टस शामिल हैं। संघर्षों के अलावा, सेना ने शांति के समय कई बड़े अभियानों, जैसे ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स और युद्ध-अभ्यास शूरवीर का संचालन किया है। सेना ने कई देशो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में एक सक्रिय प्रतिभागी भी रहा है जिनमे साइप्रस, लेबनान, कांगो, अंगोला, कंबोडिया, वियतनाम, नामीबिया, एल साल्वाडोर, लाइबेरिया, मोज़ाम्बिक और सोमालिया आदि सम्मलित हैं। भारतीय सेना में एक सैन्य-दल प्रणाली है, लेकिन यह बुनियादी क्षेत्र गठन विभाजन के साथ संचालन और भौगोलिक रूप से सात कमान में विभाजित है। यह एक सर्व-स्वयंसेवी बल है और इसमें देश के सक्रिय रक्षा कर्मियों का अस्सी% से अधिक हिस्सा है। यह एक,दो सौ,दो सौ पचपन सक्रिय सैनिकों और नौ सौ नौ,साठ आरक्षित सैनिकों के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्थायी सेना है। सेना ने सैनिको के आधुनिकीकरण कार्यक्रम की शुरुआत की है, जिसे "फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री सैनिक एक प्रणाली के रूप में" के नाम से जाना जाता है इसके साथ ही यह अपने बख़्तरबंद, तोपखाने और उड्डयन शाखाओं के लिए नए संसाधनों का संग्रह एवं सुधार भी कर रहा है।. भांग का पौधा और उसके विभिन्न भाग भांग एक प्रकार का पौधा है जिसकी पत्तियों को पीस कर भांग तैयार की जाती है। उत्तर भारत में इसका प्रयोग बहुतायत से स्वास्थ्य, हल्के नशे तथा दवाओं के लिए किया जाता है। भारतवर्ष में भांग के अपने आप पैदा हुए पौधे सभी जगह पाये जाते हैं। भांग विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल में प्रचुरता से पाया जाता है। भांग के पौधे तीन-आठ फुट ऊंचे होते हैं। इसके पत्ते एकान्तर क्रम में व्यवस्थित होते हैं। भांग के ऊपर की पत्तियां एक-तीन खंडों से युक्त तथा निचली पत्तियां तीन-आठ खंडों से युक्त होती हैं। निचली पत्तियों में इसके पत्रवृन्त लम्बे होते हैं। भांग के नर पौधे के पत्तों को सुखाकर भांग तैयार की जाती है। भांग के मादा पौधों की रालीय पुष्प मंजरियों को सुखाकर गांजा तैयार किया जाता है। भांग की शाखाओं और पत्तों पर जमे राल के समान पदार्थ को चरस कहते हैं। भांग की खेती प्राचीन समय में 'पणि' कहे जानेवाले लोगों द्वारा की जाती थी। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने कुमाऊँ में शासन स्थापित होने से पहले ही भांग के व्यवसाय को अपने हाथ में ले लिया था तथा काशीपुर के नजदीक डिपो की स्थापना कर ली थी। दानपुर, दसोली तथा गंगोली की कुछ जातियाँ भांग के रेशे से कुथले और कम्बल बनाती थीं। भांग के पौधे का घर गढ़वाल में चांदपुर कहा जा सकता है। इसके पौधे की छाल से रस्सियाँ बनती हैं। डंठल कहीं-कहीं मशाल का काम देता है। पर्वतीय क्षेत्र में भांग प्रचुरता से होती है, खाली पड़ी जमीन पर भांग के पौधे स्वभाविक रूप से पैदा हो जाते हैं। लेकिन उनके बीज खाने के उपयोग में नहीं आते हैं। टनकपुर, रामनगर, पिथौरागढ़, हल्द्वानी, नैनीताल, अल्मोडा़, रानीखेत,बागेश्वर, गंगोलीहाट में बरसात के बाद भांग के पौधे सर्वत्र देखे जा सकते हैं। नम जगह भांग के लिए बहुत अनुकूल रहती है। पहाड़ की लोक कला में भांग से बनाए गए कपड़ों की कला बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन मशीनों द्वारा बुने गये बोरे, चटाई इत्यादि की पहुँच घर-घर में हो जाने तथा भांग की खेती पर प्रतिबन्ध के कारण इस लोक कला के समाप्त हो जाने का भय है। होली के अवसर पर मिठाई और ठंडाई के साथ इसका प्रयोग करने की परंपरा है। भांग का इस्तेमाल लंबे समय से लोग दर्द निवारक के रूप में करते रहे हैं। कई देशों में इसे दवा के रूप में भी उपलब्ध कराया जाता है। . भवाली या भुवाली उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जनपद में स्थित एक नगर है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। शान्त वातावरण और खुली जगह होने के कारण 'भवाली' कुमाऊँ की एक शानदार नगरी है। यहाँ पर फलों की एक मण्डी है। यह एक ऐसा केन्द्र - बिन्दु है जहाँ से काठगोदाम हल्द्वानी और नैनीताल, अल्मोड़ा - रानीखेत भीमताल - सातताल और रामगढ़ - मुक्तेश्वर आदि स्थानों को अलग - अलग मोटर मार्ग जाते हैं। भवाली नगर अपने प्राचीन टीबी सैनिटोरियम के लिए विख्यात है, जिसकी स्थापना एक हज़ार नौ सौ बारह में हुई थी। चीड़ के पेड़ों की हवा टी. मानिला देवी मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले के शल्ट क्षेत्र में स्थित है। यह स्थान रामनगर से लगभग सत्तर किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ तक बस या निजी वाहन द्वारा पहुँचा जा सकता है। यह इस क्षेत्र का एक प्रसिद्द मन्दिर है और हर वर्ष यहाँ दूर-दूर से लोग देवी के दर्शनों के लिए आते हैं। यह मन्दिर कत्यूरी लोगो की पारिवारिक देवी मानिला का मंदिर है। मन्दिर दो भागों में बँटा हुआ है जिसे स्थानीय भाषा में मल मानिला और तल मानिला कहते है। प्राचीन मन्दिर तो तल मनीला में ही स्थित है लेकिन मल मानिला मन्दिर के पीछे की कहानी जो स्थानीय लोगो के बीच बहुत प्रचलित है वो ये हैं कि "एक बार कुछ चोर मानिला देवी की मूर्ति को चुराना चाहते थे। लेकिन जब वो मूर्ति उठा रहे थे तो उठा न सके और तब वे मूर्ति का एक हाथ ही उखाड़ कर ले गए, लेकिन उस हाथ को भी वे अधिक दूर ना लेजा सके।" और तबसे वही पर माता का एक और मन्दिर स्थापित कर दिया गया जिसे आज मल मानिला के नाम से लोग जानते है। . मॉंसी एक गाँव है जो रामगंगा नदी के पूर्वी किनारे पर चौखुटिया तहसील के तल्ला गेवाड़ पट्टी में भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमांऊँ क्षेत्र के अल्मोड़ा जिले में स्थित है। यह मूलतः मासीवाल नामक उपनाम से विख्यात कुमांऊॅंनी हिन्दुओं का पुश्तैनी गाँव है। यह अपनी ऐतिहासिक व सॉस्कृतिक विरासत, ठेठ कुमांऊॅंनी सभ्यता व संस्कृति, पर्वतीय जीवन शैली तथा समतल उपजाऊ भूमि के लिए पहचाना जाता है। . रानीखेत तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जनपद की एक तहसील है। अल्मोड़ा जनपद के मध्य भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय रानीखेत छावनी में स्थित हैं। इसके पूर्व में अल्मोड़ा तहसील, पश्चिम में भिक्यासैंण तहसील, उत्तर में द्वाराहाट तहसील, तथा दक्षिण में नैनीताल जनपद की कोश्याकुटौली तहसील है। . यह मुर्गियों में फैलने वाला रोग है। यह रोग सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश के रानीखेत में देखा गया था। श्रेणीःपशु पक्षी रोग. श्यामाचरण लाहिड़ी अट्ठारहवीं शताब्दी के उच्च कोटि के साधक थे जिन्होंने सद्गृहस्थ के रूप में यौगिक पूर्णता प्राप्त कर ली थी। आपका जन्म बंगाल के नदिया जिले की प्राचीन राजधानी कृष्णनगर के निकट धरणी नामक ग्राम के एक संभ्रांत ब्राह्मण कुल में अनुमानतः एक हज़ार आठ सौ पच्चीस-छब्बीस ई. में हुआ था। आपका पठनपाठन काशी में हुआ। बंगला, संस्कृत के अतिरिक्त अपने अंग्रेजी भी पड़ी यद्यपि कोई परीक्षा नहीं पास की। जीविकोपार्जन के लिए छोटी उम्र में सरकारी नौकरी में लग गए। आप दानापुर में मिलिटरी एकाउंट्स आफिस में थे। कुछ समय के लिए सरकारी काम से अल्मोड़ा जिले के रानीखेत नामक स्थान पर भेज दिए गए। हिमालय की इस उपत्यका में गुरुप्राप्ति और दीक्षा हुई। आपके तीन प्रमुख शिष्य युक्तेश्वर गिरि, केशवानंद और प्रणवानंद ने गुरु के संबंध में प्रकाश डाला है। योगानंद परमहंस ने 'योगी की आत्मकथा' नामक जीवनवृत्त में गुरु को बाबा जी कहा है। दीक्षा के बाद भी इन्होंने कई वर्षों तक नौकरी की और इसी समय से गुरु के आज्ञानुसार लोगों को दीक्षा देने लगे थे। सन् एक हज़ार आठ सौ अस्सी में पेंशन लेकर आप काशी आ गए। इनकी गीता की आध्यात्मिक व्याख्या आज भी शीर्ष स्थान पर है। इन्होंने वेदांत, सांख्य, वैशेषिक, योगदर्शन और अनेक संहिताओं की व्याख्या भी प्रकाशित की। इनकी प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि गृहस्थ मनुष्य भी योगाभ्यास द्वारा चिरशांति प्राप्त कर योग के उच्चतम शिखर पर आरूढ़ हो सकता है। आपने अपने सहज आडंबररहित गार्हस्थ्य जीवन से यह प्रमाणित कर दिया था। धर्म के संबंध में बहुत कट्टरता के पक्षपाती न होने पर भी आप प्राचीन रीतिनीति और मर्यादा का पूर्णतया पालन करते थे। शास्त्रों में आपका अटूट विश्वास था। जब आप रानीखेत में थे तो अवकाश के समय शून्य विजन में पर्यटन पर प्राकृतिक सौंदर्यनिरीक्षण करते। इसी भ्रमण में दूर से अपना नाम सुनकर द्रोणगिरि नामक पर्वत पर चढ़ते-चढ़ते एक ऐसे स्थान पर पहुँचे जहाँ थोड़ी सी खुली जगह में अनेक गुफाएँ थीं। इसी एक गुफा के करार पर एक तेजस्वी युवक खड़े दीख पड़े। उन्होंने हिंदी में गुफा में विश्राम करने का संकेत किया। उन्होंने कहा 'मैंने ही तुम्हें बुलाया था'। इसके बाद पूर्वजन्मों का वृत्तांत बताते हुए शक्तिपात किया। बाबा जी से दीक्षा का जो प्रकार प्राप्त हुआ उसे क्रियायोग कहा गया है। क्रियायोग की विधि केवल दीक्षित साधकों को ही बताई जाती है। यह विधि पूर्णतया शास्त्रोक्त है और गीता उसकी कुंजी है। गीता में कर्म, ज्ञान, सांख्य इत्यादि सभी योग है और वह भी इतने सहज रूप में जिसमें जाति और धर्म के बंधन बाधक नहीं होते। आप हिंदू, मुसलमान, ईसाई सभी को बिना भेदभाव के दीक्षा देते थे। इसीलिए आपके भक्त सभी धर्मानुयायी हैं। उन्होंने अपने समय में व्याप्त कट्टर जातिवाद को कभी महत्व नहीं दिया। वह अन्य धर्मावलंबियों से यही कहते थे कि आप अपनी धार्मिक मान्यताओं का आदर और अभ्यास करते हुए क्रियायोग द्वारा मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। पात्रानुसार भक्ति, ज्ञान, कर्म और राजयोग के आधार पर व्यक्तित्व और प्रवृत्तियों के अनुसार साधना करने की प्रेरणा देते। उनके मत से शास्त्रों पर शंका अथवा विवाद न कर उनका तथ्य आत्मसात् करना चाहिए। अपनी समस्याओं के हल करने का आत्मचिंतन से बढ़कर कोई मार्ग नहीं। लाहिड़ी महाशय के प्रवचनों का पूर्ण संग्रह प्राप्य नहीं है किंतु गीता, उपनिषद्, संहिता इत्यादि की अनेक व्याख्याएँ बँगला में उपलब्ध हैं। भगवद्गीताभाष्य का हिंदी अनुवाद लाहिड़ी महाशय के शिष्य श्री भूपेंद्रनाथ सान्याल ने प्रस्तुत किया है। श्री लाहिड़ी की अधिकांश रचनाएँ बँगला में हैं। . सोमेश्वर उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा जनपद में स्थित एक कस्बा है। कोसी और साई नदियों के संगम पर स्थित सोमेश्वर अल्मोड़ा का एक प्रमुख कस्बा है, तथा इसी नाम की एक तहसील का मुख्यालय भी है। सोमेश्वर अल्मोड़ा के उत्तरी क्षेत्र के दर्जनों गांवों का प्रमुख बाजार है, और यहां करीब तीन सौ पचास दुकानें हैं। यहां से होकर बागेश्वर, अल्मोड़ा, रानीखेत, द्वाराहाट तथा कौसानी आदि स्थानों को प्रतिदिन सैकड़ों वाहन आते जाते हैं। यहां एक ऐतिहासिक शिव मंदिर भी है। . कुमाऊँ का प्रवेश द्वार, हल्द्वानी उत्तराखण्ड के नैनीताल ज़िले में स्थित हल्द्वानी राज्य के सर्वाधिक जनसँख्या वाले नगरों में से है। इसे "कुमाऊँ का प्रवेश द्वार" भी कहा जाता है। नगर के यातायात साधनों में दो रेलवे स्टेशन, दो बस स्टेशन तथा एक अधिकृत टैक्सी स्टैंड है। इनके अतिरिक्त नगर से अट्ठाईस किमी की दूरी पर एक घरेलू हवाई अड्डा स्थित है, और नगर में एक अंतर्राज्यीय बस अड्डा निर्माणाधीन है। . जी डी बिरला मैमोरियल स्कूल की स्थापना एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में भारतीय उद्योगपति घंश्याम दास बिरला की स्मृति में श्री बी के बिरला और श्रीमती सरला बिरला द्वारा कि गई थी। यह एक विद्यालय है जो भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत नामक कस्बे में स्थित है। यहाँ गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान कि जाती है और इस विद्यालय में आवासीय सुविधा के साथ कक्षा चार से बारह तक सात सौ छात्र पढ़ते हैं। यह दिल्ली से तीन सौ साठ किमी दूर है। यह विद्यालय, एक पहाड़ी के हलके ढलान पर रानीखेत से पाँच किमी की दूरी पर है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जो पचासी किमी दूर है। . खैरना उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में एक छोटा सा नगर है, जो इसी नाम के पुल के दोनों ओर बस गया। खैरना पुल कोसी नदी पर ब्रिटिश काल के समय से ही स्थित है। खैरना मछिलयों के शिकार के लिए विख्यात है। . नैनीताल में गोविन्द वल्लभ पन्त की प्रतिमा पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त या जी॰बी॰ पन्त प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी और वरिष्ठ भारतीय राजनेता थे। वे उत्तर प्रदेश राज्य के प्रथम मुख्य मन्त्री और भारत के चौथे गृहमंत्री थे। सन एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में उन्हें भारतरत्न से सम्मानित किया गया। गृहमंत्री के रूप में उनका मुख्य योगदान भारत को भाषा के अनुसार राज्यों में विभक्त करना तथा हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करना था। . गोविन्द बल्लभ पन्त गोविन्द बल्लभ पन्त हिन्दी के नाटककार थे। . कटारमल सूर्य मन्दिर भारतवर्ष का प्राचीनतम सूर्य मन्दिर है। यह पूर्वाभिमुखी है तथा उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जिले के अधेली सुनार नामक गॉंव में स्थित है। इसका निर्माण कत्यूरी राजवंश के तत्कालीन शासक कटारमल के द्वारा छठीं से नवीं शताब्दी में हुआ था। यह कुमांऊॅं के विशालतम ऊँचे मन्दिरों में से एक व उत्तर भारत में विलक्षण स्थापत्य एवम् शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण है तथा समुद्र सतह से लगभग दो हज़ार एक सौ सोलह मीटर की ऊँचाई पर पर्वत पर स्थित है। . काठगोदाम भारत के उत्तराखण्ड राज्य में स्थित हल्द्वानी नगर के अंतर्गत स्थित एक क्षेत्र है। इसे ऐतिहासिक तौर पर कुमाऊँ का द्वार कहा जाता रहा है। यह छोटा सा नगर पहाड़ के पाद प्रदेश में बसा है। गौला नदी इसके दायें से होकर हल्द्वानी बाजार की ओर बढ़ती है। पूर्वोतर रेलवे का यह अन्तिम स्टेशन है। यहाँ से बरेली, लखनऊ तथा आगरा के लिए छोटी लाइन की रेल चलती है। काठगोदाम से नैनीताल, अल्मोड़ा, रानीखेत और पिथौरागढ़ के लिए केएमओयू की बसें जाती है। कुमाऊँ के सभी अंचलों के लिए यहाँ से बसें जाती हैं। एक हज़ार नौ सौ एक में काठगोदाम तीन सौ पचहत्तर की जनसंख्या वाला एक छोटा सा गाँव था। एक हज़ार नौ सौ नौ तक इसे रानीबाग़ के साथ जोड़कर नोटिफ़िएड एरिया घोषित कर दिया गया। काठगोदाम-रानीबाग़ एक हज़ार नौ सौ बयालीस तक स्वतंत्र नगर के रूप में उपस्थित रहा, जिसके बाद इसे हल्द्वानी नोटिफ़िएड एरिया के साथ जोड़कर नगर पालिका परिषद् हल्द्वानी-काठगोदाम का गठन किया गया। इक्कीस मई दो हज़ार ग्यारह को हल्द्वानी-काठगोदाम को नगर पालिका परिषद से नगर निगम घोषित किया गया, और फिर इसके विस्तार को देखते हुए इसका नाम बदलकर नगर निगम हल्द्वानी कर दिया गया। . काला चौना एक गॉंव है। यह रामगंगा नदी के पूर्वी किनारे पर चौखुटिया तहसील के तल्ला गेवाड़ नामक पट्टी में, भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के अल्मोड़ा जिले में स्थित है। यह गॉंव मूलरूप से कनौंणियॉं नामक उपनाम से विख्यात कुमांऊॅंनी हिन्दू राजपूतों का प्राचीन और पुश्तैनी चार गाँवों में से एक है। दक्षिणी हिमालय की तलहटी में बसा यह काला चौना अपनी ऐतिहासिक व सॉंस्कृतिक विरासत, ठेठ कुमांऊॅंनी सभ्यता व संस्कृति, पर्वतीय जीवन शैली, प्रकृति संरक्षण, अलौकिक प्राकृतिक छटा तथा समतल-उपजाऊ भूमि के लिए पहचाना जाता है। . यह लेख कुमाऊँ मण्डल पर है। अन्य कुमाऊँ लेखों के लिए देखें कुमांऊॅं उत्तराखण्ड के मण्डल कुमाऊँ मण्डल भारत के उत्तराखण्ड राज्य के दो प्रमुख मण्डलों में से एक हैं। अन्य मण्डल है गढ़वाल। कुमाऊँ मण्डल में निम्न जिले आते हैंः-. हल्द्वानी के केमू स्टेशन में खड़ी बसें। कुमाऊँ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड , जो अपने संक्षिप्त नाम के॰एम॰ओ॰यू॰ या केमू से अधिक प्रसिद्ध है, उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में बस सेवा प्रदान करने वाली एक निजी कम्पनी है। एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में तेरह निजी कम्पनियों के विलय द्वारा अस्तित्व में आयी यह मोटर कम्पनी स्वतन्त्रता पूर्व कुमाऊँ क्षेत्र में बसें चलाने वाली एकमात्र बस कम्पनी थी। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी तक यह इस क्षेत्र की सबसे बड़ी बस कम्पनी थी। . कुमाऊं विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न निम्नलिखित सूची कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से सम्बद्ध राजकीय महाविद्यालयों की हैः . कुमांऊँ रेजीमेंट भारतीय सशस्त्र सेना का एक सैन्य-दल है, जिसकी स्थापना सन् एक हज़ार सात सौ अठासी में हुई। यह कुमांऊँ नामक हिमालयी क्षेत्र के निवासियों से सम्बन्धित भारतीय सैन्य-दल है। जिसका मुख्यालय उत्तराखण्ड के कुमांऊँ क्षेत्र के रानीखेत नामक पर्वतीय स्थान में स्थित है तथा भारतीय सशस्त्र सेना के वीरता का प्रथम सर्वश्रेष्ठ सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित है। कुमांऊँ रेजिमेंट को एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में हुए भारत-पाकिस्तान तथा एक हज़ार नौ सौ बासठ के भारत और चीन युद्ध के लिये विशेष गौरवपूर्ण माना जाता है। . अल्मोड़ा भारतीय राज्य उत्तराखण्ड का एक महत्वपूर्ण नगर है। यह अल्मोड़ा जिले का मुख्यालय भी है। अल्मोड़ा दिल्ली से तीन सौ पैंसठ किलोग्राममीटर और देहरादून से चार सौ पंद्रह किलोग्राममीटर की दूरी पर, कुमाऊँ हिमालय श्रंखला की एक पहाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है। भारत की दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार अल्मोड़ा की कुल जनसंख्या पैंतीस,पाँच सौ तेरह है। अल्मोड़ा की स्थापना राजा बालो कल्याण चंद ने एक हज़ार पाँच सौ अड़सठ में की थी। महाभारत के समय से ही यहां की पहाड़ियों और आसपास के क्षेत्रों में मानव बस्तियों के विवरण मिलते हैं। अल्मोड़ा, कुमाऊं राज्य पर शासन करने वाले चंदवंशीय राजाओं की राजधानी थी। स्वतंत्रता की लड़ाई में तथा शिक्षा, कला एवं संस्कृति के उत्थान में अल्मोड़ा का विशेष हाथ रहा है। . दो हज़ार तेरह में अल्मोड़ा अल्मोड़ा, भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक नगर है। यह अल्मोड़ा जिले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। इस नगर को राजा कल्याण चंद ने एक हज़ार पाँच सौ अड़सठ में स्थापित किया था। महाभारत के समय से ही यहां की पहाड़ियों और आसपास के क्षेत्रों में मानव बस्तियों के विवरण मिलते हैं। अल्मोड़ा, कुमाऊँ राज्य पर शासन करने वाले चंदवंशीय राजाओं की राजधानी थी। . उत्तराखण्ड , उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण नौ नवम्बर दो हज़ार को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था। सन दो हज़ार से दो हज़ार छः तक यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। जनवरी दो हज़ार सात में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया। राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं। सन दो हज़ार में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था। पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं। देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है। गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं। साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं। राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी-भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना। इस परियोजना की कल्पना एक हज़ार नौ सौ तिरेपन मे की गई थी और यह अन्ततः दो हज़ार सात में बनकर तैयार हुआ। उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है। . उत्तराखण्ड में जिलावार विधानसभा सीटें उत्तराखण्ड के जिलों के अन्तर्गत आने वाली विधानसभा सीटें हैं। इस सूची में जिला और उस जिले में उत्तराखण्ड विधानसभा की कौन-कौन सी सीटें हैं दिया गया है। भारतीय चुनाव आयोग द्वारा विर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किए जाए से उत्तराखण्ड में भी सीटों में बदलाव आया है। इस सूची में भूतपूर्व सीटें किसी भी जिले में नहीं दी गई हैं। . उत्तराखण्ड के नगर नामक इस सूची में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के सभी नगरों की ज़िलेवार सूची दी गई है, जो वर्णमालानुसार क्रमित है। . निम्नलिखित सूची उत्तराखण्ड राज्य के राज्य राजमार्गों की हैः . उत्तराखण्ड की राजनीति भारत के उत्तराखण्ड की राजनैतिक व्यवस्था को कहते हैं। इस राज्य राजनीति की विशेषता है राष्ट्रीय दलों और क्षेत्रिय दलों के बीच आपसी संयोजन जिससे राज्य में शासन व्यव्स्था चलाई जाती है। उत्तराखण्ड राज्य दो हज़ार में बनाया गया था। एक अलग राज्य की स्थापना लम्बे समय से ऊपरी हिमालय की पहाड़ियों पर रह रहे लोगों की हार्दिक इच्छा थी।भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस , उत्तराखण्ड की राजनीति में सबसे प्रमुख राष्ट्रीय दल हैं। इसके अतिरिक्त बहुजन समाज पार्टी का भी राज्य के मैदानी क्षेत्रों में जनाधार है। राष्ट्रीय स्तर के दलों को उत्तराखण्ड के राज्य स्तरीय दलों से मजबूत समर्थन प्राप्त है। विशेष रूप से, उत्तराखण्ड क्रान्ति दल , जिसकी स्थापना एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में पृथक राज्य के लिए लोगों को जागृत करने के लिए कि गई थी और जो पर्वतिय निवासियों के लिए अलग राज्य के गठन के पीछे मुख्य विचारक था, अभी भी उत्तराखण्ड की राजनीति के मैदान में एक विस्तृत प्रभाव वाला दल है। राज्य गठन के बाद सबसे पहले चुनाव दो हज़ार दो में आयिजित किए गए थे। इन चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरा और राज्य में प्रथम सरकार बनाई। इन चुनावों में भाजपा, दूसरा सबसे बड़ा दल था। इसके बाद, फ़रवरी दो हज़ार सात के दूसरे विधानसभा चुनावों में सरकार-विरोधी लहर के चलते, भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में सामने आया। भाजपा को इन चुनावों में चौंतीस सीटें प्राप्त हुईं, जो बहुत से एक कम थी जिसे उक्राद के तीन सदस्यों के समर्थ्न ने पूरा कर दिया। उत्तराखण्ड राज्य विधायिका, उत्तराखण्ड की राजनीति का केन्द्र बिन्दू है। वर्तमान चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की सत्तर विधानसभा सीटों में से सत्तावन सीटों पर जीत का परचम लहराया है। यह राज्य में अब तक के इतिहास में न केवल भारतीय जनता पार्टी, बल्कि किसी भी दल के लिए सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, कांग्रेस के खाते में बस ग्यारह सीटें ही आई.
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गुलाब - न केवल बगीचे की रानी, यह एक सदी के लिए एक प्रभावी आरोग्य और गंधी के रूप में नहीं है। गुलाब जल और मलहम प्राचीन फारस, मिस्र, भारत में प्रयोग किया जाता है, और इन देशों के लिए रास्ता के खुलने के साथ यूरोप पर विजय प्राप्त की। आधुनिक विज्ञान, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा पैकेजिंग, नई खोजों के एक बहुत कुछ किया है, लेकिन तेल गुलाब अपनी लोकप्रियता खो नहीं है। यह सक्रिय रूप से इत्र रचनाओं में इस्तेमाल किया जाता है, यह पोषण और पुनः क्रीम और मास्क का हिस्सा है।
कश्मीर, पी, बी, ई, पीपी, बी 1, जो कोशिकाओं को खिलाने के लिए और एक कायाकल्प प्रभाव उत्पन्नः गुलाब तेल कई विटामिन और खनिज शामिल हैं। तेल की खुशबूदार घटक तंत्रिका तंत्र पर एक शांत प्रभाव है, एक कामोद्दीपक है। उत्पाद की मांग और इसके उत्पादन के लिए कच्चे माल की एक बड़ी मात्रा की आवश्यकता पर तेल के अपेक्षाकृत उच्च कीमत निर्धारित करता है।
मैं घर पर खाना बनाना तेल गुलाब कर सकते हैं? एक मूल्यवान बाम की पंखुड़ियों से निकालने के लिए एक तरीका है। इसके अलावा, घर संस्करणों के लाभकारी गुण से हीन नहीं हैं औद्योगिक डिजाइन। यह अन्य तेलों में अत्यधिक घुलनशील है, इसलिए तैयार करने के लिए गुलाब तेल जैतून की आवश्यकता होगी। बेहतर गंध नहीं मिश्रण के लिए परिष्कृत लेने के लिए।
पाक कला गुलाब तेल गर्म और ठंडे तरीका हो सकता है। पहली विधि के लिए पंखुड़ियों तुरंत सुगंधित गुलाब की एक बड़ी संख्या की आवश्यकता होगी। पंखुड़ियों की तीन पर तेल की एक लो, एक गिलास कंटेनर में मिश्रण और एक अंधेरी जगह में डालने के लिए छोड़ देना चाहिए। 3 सप्ताह के बाद, एक कसकर मोहरबंद एक फ्रिज में रखा बोतल में पंखुड़ियों और मक्खन नाली।
गर्म विधि आप कई चरणों में की पंखुड़ियों को जोड़ने के लिए अनुमति देता है। ग्लास जैतून का तेल 50 डिग्री गरम किया जाता है। तो फिर तुम एक गर्म स्थान में पंखुड़ियों के रूप में कई जोड़ सकते हैं और 2-3 दिनों के लिए रवाना होने की जरूरत है। तनाव, पिच त्यागने और ताजा, पूर्व गरम तेल फिर से भरें। तो, 5-10 गुना दोहराने प्रत्येक प्रक्रिया स्वाद को तेज करेगा। फ्रिज में स्टोर।
कई घरेलू क्रीम और मास्क का हिस्सा की संरचना तेल गुलाब। इसका उपयोग व्यापक रूप से पर्याप्त। सबसे पहले, तेल त्वचा पर एक लाभदायक प्रभाव है, यह नरम और मख़मली बनाने, छोटे दरारें चंगा और जलन से छुटकारा दिलाता है। कुछ बूंदें चेहरे के लिए किसी भी अच्छे दही मुखौटा करने के लिए जोड़ा या मिश्रण शरीर लोशन गुलाब के तेल की एक ही राशि के साथ और स्नान के बाद गीला त्वचा के लिए मिश्रण लागू होते हैं।
एप्लाइड गुलाबी बालों के तेल, यह बाल कूप को पुनर्स्थापित करता है और जेट गर्म ड्रायर या सूर्य के प्रभाव से कर्ल सूखने से बचाता है। एक घर हाथ से पकाया जाता है या दुकान तेल पर खरीदा के बाद, आप हमेशा बाल लाभ एजेंट इलाज कर सकते हैं। आप किसी भी विशेष प्रक्रियाओं की जरूरत नहीं है। कुल्ला Balsam में - अपने बालों को शैम्पू के हिस्से में कुछ बूँदें जोड़ने के लिए, और के बाद धोने के दौरान पर्याप्त। बाम तेल की कार्रवाई के दौरान जल्दी से बाहर उबले हुए त्वचा और गीले बालों में लीन है।
शरारती बाल और केश चिकनाई की आवश्यकता है, तो आप एक छोटे से अपनी हथेली पर तेल गुलाब छोड़, अपनी हथेलियों रगड़ और बाल पकड़ कर सकते हैं। वे नरम और चमक प्राप्त करें। उपचार और ड्रॉप-डाउन के पुनर्वास के लिए बाल गुलाब तेल burdock या बराबर अनुपात में अरंडी को जोड़ा गया। इस मिश्रण खोपड़ी में मला जाना चाहिए और 30-40 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर नियमित रूप से शैम्पू के साथ बंद धोने।
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गुलाब - न केवल बगीचे की रानी, यह एक सदी के लिए एक प्रभावी आरोग्य और गंधी के रूप में नहीं है। गुलाब जल और मलहम प्राचीन फारस, मिस्र, भारत में प्रयोग किया जाता है, और इन देशों के लिए रास्ता के खुलने के साथ यूरोप पर विजय प्राप्त की। आधुनिक विज्ञान, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा पैकेजिंग, नई खोजों के एक बहुत कुछ किया है, लेकिन तेल गुलाब अपनी लोकप्रियता खो नहीं है। यह सक्रिय रूप से इत्र रचनाओं में इस्तेमाल किया जाता है, यह पोषण और पुनः क्रीम और मास्क का हिस्सा है। कश्मीर, पी, बी, ई, पीपी, बी एक, जो कोशिकाओं को खिलाने के लिए और एक कायाकल्प प्रभाव उत्पन्नः गुलाब तेल कई विटामिन और खनिज शामिल हैं। तेल की खुशबूदार घटक तंत्रिका तंत्र पर एक शांत प्रभाव है, एक कामोद्दीपक है। उत्पाद की मांग और इसके उत्पादन के लिए कच्चे माल की एक बड़ी मात्रा की आवश्यकता पर तेल के अपेक्षाकृत उच्च कीमत निर्धारित करता है। मैं घर पर खाना बनाना तेल गुलाब कर सकते हैं? एक मूल्यवान बाम की पंखुड़ियों से निकालने के लिए एक तरीका है। इसके अलावा, घर संस्करणों के लाभकारी गुण से हीन नहीं हैं औद्योगिक डिजाइन। यह अन्य तेलों में अत्यधिक घुलनशील है, इसलिए तैयार करने के लिए गुलाब तेल जैतून की आवश्यकता होगी। बेहतर गंध नहीं मिश्रण के लिए परिष्कृत लेने के लिए। पाक कला गुलाब तेल गर्म और ठंडे तरीका हो सकता है। पहली विधि के लिए पंखुड़ियों तुरंत सुगंधित गुलाब की एक बड़ी संख्या की आवश्यकता होगी। पंखुड़ियों की तीन पर तेल की एक लो, एक गिलास कंटेनर में मिश्रण और एक अंधेरी जगह में डालने के लिए छोड़ देना चाहिए। तीन सप्ताह के बाद, एक कसकर मोहरबंद एक फ्रिज में रखा बोतल में पंखुड़ियों और मक्खन नाली। गर्म विधि आप कई चरणों में की पंखुड़ियों को जोड़ने के लिए अनुमति देता है। ग्लास जैतून का तेल पचास डिग्री गरम किया जाता है। तो फिर तुम एक गर्म स्थान में पंखुड़ियों के रूप में कई जोड़ सकते हैं और दो-तीन दिनों के लिए रवाना होने की जरूरत है। तनाव, पिच त्यागने और ताजा, पूर्व गरम तेल फिर से भरें। तो, पाँच-दस गुना दोहराने प्रत्येक प्रक्रिया स्वाद को तेज करेगा। फ्रिज में स्टोर। कई घरेलू क्रीम और मास्क का हिस्सा की संरचना तेल गुलाब। इसका उपयोग व्यापक रूप से पर्याप्त। सबसे पहले, तेल त्वचा पर एक लाभदायक प्रभाव है, यह नरम और मख़मली बनाने, छोटे दरारें चंगा और जलन से छुटकारा दिलाता है। कुछ बूंदें चेहरे के लिए किसी भी अच्छे दही मुखौटा करने के लिए जोड़ा या मिश्रण शरीर लोशन गुलाब के तेल की एक ही राशि के साथ और स्नान के बाद गीला त्वचा के लिए मिश्रण लागू होते हैं। एप्लाइड गुलाबी बालों के तेल, यह बाल कूप को पुनर्स्थापित करता है और जेट गर्म ड्रायर या सूर्य के प्रभाव से कर्ल सूखने से बचाता है। एक घर हाथ से पकाया जाता है या दुकान तेल पर खरीदा के बाद, आप हमेशा बाल लाभ एजेंट इलाज कर सकते हैं। आप किसी भी विशेष प्रक्रियाओं की जरूरत नहीं है। कुल्ला Balsam में - अपने बालों को शैम्पू के हिस्से में कुछ बूँदें जोड़ने के लिए, और के बाद धोने के दौरान पर्याप्त। बाम तेल की कार्रवाई के दौरान जल्दी से बाहर उबले हुए त्वचा और गीले बालों में लीन है। शरारती बाल और केश चिकनाई की आवश्यकता है, तो आप एक छोटे से अपनी हथेली पर तेल गुलाब छोड़, अपनी हथेलियों रगड़ और बाल पकड़ कर सकते हैं। वे नरम और चमक प्राप्त करें। उपचार और ड्रॉप-डाउन के पुनर्वास के लिए बाल गुलाब तेल burdock या बराबर अनुपात में अरंडी को जोड़ा गया। इस मिश्रण खोपड़ी में मला जाना चाहिए और तीस-चालीस मिनट के लिए छोड़ दें। फिर नियमित रूप से शैम्पू के साथ बंद धोने।
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बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहिद कपूर आज यानी 25 फरवरी को अपना 42वां जन्मदिन मना रहे हैं। वह अपनी दमदार एक्टिंग से अपने किरदार में जान डाल देते हैं। शाहिद उन स्टार किड्स में से एक हैं, जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने अपने करियर में काफी उतार-चढ़ाव का सामना किया है उनके पिता पंकज कपूर और मां नीलिमा आजमी इंडस्ट्री के जाने-माने कलाकारों में से एक हैं। तो आज शाहिद कपूर के जन्मदिन पर हम आपके लिए लाये हैं शाहिद के वो किरदार जो लीक से हटकर थे और हमेशा याद किये जाते हैं.
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बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहिद कपूर आज यानी पच्चीस फरवरी को अपना बयालीसवां जन्मदिन मना रहे हैं। वह अपनी दमदार एक्टिंग से अपने किरदार में जान डाल देते हैं। शाहिद उन स्टार किड्स में से एक हैं, जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने अपने करियर में काफी उतार-चढ़ाव का सामना किया है उनके पिता पंकज कपूर और मां नीलिमा आजमी इंडस्ट्री के जाने-माने कलाकारों में से एक हैं। तो आज शाहिद कपूर के जन्मदिन पर हम आपके लिए लाये हैं शाहिद के वो किरदार जो लीक से हटकर थे और हमेशा याद किये जाते हैं.
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5 Tips to Cut High Cholesterol Fast : कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या इन दिनों महामारी की तरह फैल रही है. हर उम्र के लोगों को अनहेल्दी लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की वजह की वजह से यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है. सबसे पहले तो यह समझने की जरूरत है कि कोलेस्ट्रॉल क्या होता है. कोलेस्ट्रॉल आपके खून में पाया जाने वाला मोम जैसा पदार्थ होता है. हमारी बॉडी को स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण के लिए कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है. जब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सामान्य से ज्यादा हो जाए, तो यह हार्ट डिजीज के जोखिम को बढ़ा सकता है. हमारे शरीर में टोटल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 200 mg/dL से कम होना चाहिए. इससे ज्यादा हो जाए, तो कंडीशन गंभीर हो सकती है.
मायोक्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक कोलेस्ट्रॉल की मात्रा जब बढ़ जाती है, जब यह खून की धमनियों में जम जाता है. जब जमाव ज्यादा बढ़ जाता है, तो इसके अचानक टूटने का खतरा होता है. ऐसा होने पर खून की धमनियों का ब्लड फ्लो रुक जाता है और दिल का दौरा या स्ट्रोक की नौबत आ जाती है. कई बार कोलेस्ट्रॉल की समस्या जेनेटिक हो सकती है, लेकिन अक्सर यह अनहेल्दी लाइफस्टाइल का परिणाम होता है. हेल्दी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज समेत कई बातों का ध्यान रख जाए, तो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है.
डायबिटीज से परेशान हैं तो इस मसाले की पत्तियों का करें सेवन, तनाव भी होगा दूर!
हाई कोलेस्ट्रॉल के कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं और ब्लड टेस्ट के जरिए ही इसका पता लगाया जा सकता है. सबसे बड़ी बात यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल के कोई लक्षण नहीं दिखते, इसी वजह से इसे साइलेंट किलर कहा जाता है. नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) की मानें तो कोलेस्ट्रॉल की जांच पहली बार 9 से 11 साल की उम्र में करानी चाहिए. इसके बाद हर 5 साल में जांच करवानी चाहिए. 45 से 65 साल के लोगों को हर साल या 2 साल में एक बार कोलेस्ट्रॉल की जांच करवानी चाहिए. 65 साल से ऊपर के लोगों को हर साल कोलेस्ट्रॉल की जांच करवानी चाहिए. अगर आप हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीज हैं, तो आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच करवाएं.
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पाँच Tips to Cut High Cholesterol Fast : कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या इन दिनों महामारी की तरह फैल रही है. हर उम्र के लोगों को अनहेल्दी लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की वजह की वजह से यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है. सबसे पहले तो यह समझने की जरूरत है कि कोलेस्ट्रॉल क्या होता है. कोलेस्ट्रॉल आपके खून में पाया जाने वाला मोम जैसा पदार्थ होता है. हमारी बॉडी को स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण के लिए कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है. जब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सामान्य से ज्यादा हो जाए, तो यह हार्ट डिजीज के जोखिम को बढ़ा सकता है. हमारे शरीर में टोटल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा दो सौ मिलीग्राम/dL से कम होना चाहिए. इससे ज्यादा हो जाए, तो कंडीशन गंभीर हो सकती है. मायोक्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक कोलेस्ट्रॉल की मात्रा जब बढ़ जाती है, जब यह खून की धमनियों में जम जाता है. जब जमाव ज्यादा बढ़ जाता है, तो इसके अचानक टूटने का खतरा होता है. ऐसा होने पर खून की धमनियों का ब्लड फ्लो रुक जाता है और दिल का दौरा या स्ट्रोक की नौबत आ जाती है. कई बार कोलेस्ट्रॉल की समस्या जेनेटिक हो सकती है, लेकिन अक्सर यह अनहेल्दी लाइफस्टाइल का परिणाम होता है. हेल्दी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज समेत कई बातों का ध्यान रख जाए, तो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है. डायबिटीज से परेशान हैं तो इस मसाले की पत्तियों का करें सेवन, तनाव भी होगा दूर! हाई कोलेस्ट्रॉल के कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं और ब्लड टेस्ट के जरिए ही इसका पता लगाया जा सकता है. सबसे बड़ी बात यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल के कोई लक्षण नहीं दिखते, इसी वजह से इसे साइलेंट किलर कहा जाता है. नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट की मानें तो कोलेस्ट्रॉल की जांच पहली बार नौ से ग्यारह साल की उम्र में करानी चाहिए. इसके बाद हर पाँच साल में जांच करवानी चाहिए. पैंतालीस से पैंसठ साल के लोगों को हर साल या दो साल में एक बार कोलेस्ट्रॉल की जांच करवानी चाहिए. पैंसठ साल से ऊपर के लोगों को हर साल कोलेस्ट्रॉल की जांच करवानी चाहिए. अगर आप हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीज हैं, तो आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच करवाएं. .
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यह पहला मौका था - जी हा पहला ही कहिए, जब मैं अपनी बीवी और दो बच्चो के साथ वही बाहर निकला था और कुछ दिनों के लिए किसी का मेहमान हुआ था ।
ऐसा करते समय मेरे दिमाग में दो बातें थी - पहली यह कि जिस जडता, एकरसता और ऊब को पिछले दस सालो से मैं झेल रहा था उससे नजात पाना बेहद जरूरी था। ज़रूरी इसलिए कि छोटी-से-छोटी बात पर भी मेरी झुंझलाहट बढती जा रही थी। बीवी से, बच्चो से, मेहमानो से - गरज कि हर मिलनेवाले से जब भी मैं बोलता, झुंझलाकर बोलता, उन पर नाराज़ हो उठता, उनसे झगडा कर बैठता - और यह सब विला वजह । दूसरी ओर महीने के महीने गुजर जाते, पत्नी के चेहरे पर हँसी क्या, मुस्कान तक न दिखायी पडती । इन सारी बातो के लिए उनके पास एक ही जवाब था - 'किस्मत' । "जब मेरी किस्मत में ही ऐसा लिखा है ।" "जब मेरी किस्मत ही ऐसी है । " मेरा उनसे कहना था कि जब उन्हे कारण का पता चल गया है तब तो मुस्कराने में कोई हज़ नही है और इस तरह रात-दिन रोआँ कविता को नयी तारीख / ६
गिराये रखना भी गलत है । एक छोटी-सी ज़िन्दगी दी है हमारे मा-बाप ने, इसलिए जब तक है ताव के साथ जिया जाये । लेकिन जब भी में ऐसा कहते-कहते उखड जाता, उहे विश्वास हो जाता कि डाक्टर सही था। मुझे अपना रक्तचाप चेक-अप करवा लेना चाहिए, और ऐमा खयाल आते ही वे और भी खिन्न हो उठती-"किस्मत मे यदि यही है तो जो होना है, हो ।"
दूसरी बात यह कि जिसके यहाँ हम गये थे, उसने काफी तग कर रखा था । वह साल मे, पता नहीं, क्या कर-कराके पद्रह बीस रोज़ की छुट्टी लेता, गैराज से अपनी कार निकालता, उस पर सारा परिवार लादता और दूसरे शहर के लिए चल देता । और दूसरा शहर भी कहा ? मेरे घर । यहा साला ग्वाने का ठिकाना नहीं और कर्जे ले-लेकर अण्डे और मछली और गोश्त और फ्रूट जूम और जैम और ड्रिंक और व्यवस्था उलट-पुलट हो जाती और आनेवाले छह महीने के लिए मेरा दिवाला निकल जाता । मैं तो थोडी देर के लिए खुदा भी हो लेता, क्योकि यही मौके होते जब कार पर बैठने का सुख मिलता और मेरी गदन खिडकी के बाहर ही निकली रहती कि जो भी मुझे थोडा बहुत जानता है, वह देख ले कि मै कोई फालतू आदमी नहीं हूँ । लेकिन पत्नी की हुलिया खराब हो जाती, क्योंकि उनका कहना था कि इनको तो कोई बात नही लेकिन ड्राइवर और नौकर दोनो मिलकर इतना खाते है जितना हमारा सारा परिवार ।
१० / नयी तारीख
वे तो चले जाते लेकिन बीवी को दवा करने मे मेरी हुलिया बैठ जाती ।
यही एक मज़ेदार - मजेदार क्या, ददनाक कहिए - वाकया का भी जिक्र कर दूं । यदि कोई मेहमान आये - रेलगाडी से, तो वापसी के लिए 'आरक्षण' करवायेगा ही, इसलिए हमे इतना पता चल जाता है कि उसे कब जाना है । भविष्य का यह निश्चय दिमाग को राहत और सकून देता है। लेकिन अपनी फिएट गाडी -- यह दिमाग को ही नहीं, भविष्य को भी, अधकारपूर्ण बनाये रखती है। जब भी हमे मौका मिलता, हम सोचते - अंधरे में आखें मिचमिचाते और नीद का सपना देखते और बिस्तर पर पडे पडे सोचा करते कि हे प्रभो, हमारे पिछले दिन कब लौटेगे ।
निहायत हो सगीन और गोपनीय एक और मामला है जिसे मैं अपने सीने मे छिपाये हूँ । वे आते है, रहते हैं और कहते जाते हैं, "कवीजी, जरा इधर भी ध्यान दीजिए। एक तो आपकी छत बेहद नीची है, दूसरे, इसकी दो घरनें भार से लपककर टढी हो गयी हैं । सावधानी न बरतिएगा तो मकान ही बैठ जायेगा । खर मनाइए कि हम पतले है वरना सीढियाँ ऐसी है कि मोटा आदमी बीच मे ही अँडस जाये । बाथरूम ऐसा है कि इसमे सिफ बैठ और खडे हो सकते है इसकी खिडकिया और दरवाजे मोहनजोदडो कालीन है ऐसे काम न चलेगा, घर मे चार-पाच मच्छरदानिया तो रखा कीजिए कवीजी " एक तरह से देखिए भविता की नयी तारीख / ११
तो यह हमारे फायदे के लिए दी जानेवाली हिदायते हैं लेकिन जरा दूसरी नरह से देखिए तो तो देखा आपने? यह है हमारी जेब से सारे पैसे निकलवा लेना, कपडे तक उतरवा लेना, फिर गले लगाना और अन्त मे चूतड पर चार लात लगाकर चल देना ।
ये सारी बातें थी । इसीलिए जब पत्नी ने कहा कि उनकी विस्मत मे बच्चे पैदा करना, चूल्हा-चक्की करना और घर मे पडे सडते रहना ही है तो सहसा में 'मुगले आजम' के पथ्वीराज कपूर की तरह चहलकदमी करने लगा । मैंने वह मुहल्ला याद करने की कोशिश की जिम पर हमे धावे मारता था । यहा फिर एक दूसरी मुसीबत आन पड़ी। जैसा मुझे बताया गया था, अव तक उस कालोनी का नाम भगडे मे चल रहा है। बदकिस्मती मे उस नयी वालोनी मे दो भूतपूर्व मन्निया के विशाल भवन है और विवाद इस पर है कि कालोनी किसके नाम पर हो ! नयो सरकार के जावासमन्त्री चूकि दोनो के मित्र हैं इसलिए उन्होने बातचीत के जरिये यह रास्ता निकाला कि जो पहले स्वर्गीय होगा, उसके नाम पर 'कालोनी' और दूसरे के नाम पर 'राजमाग' । मेरे भावी मेजवान ने बताया था कि दोनो मनी एकसाथ रक्तचाप और मधुमेह के शिकार हो अपने-अपने बिस्तर पर पड़े है और दोनो वो दो बार दिल का दौरा पड़ चुका है।
मो, मैंने उसके दफ्तर के पते पर तार दिया, बीवी और दो बच्चो को साथ लिया और चौथे गज उस शहर के लिए रवाना हो गया।
१२ / भयो तारीब
जिन्दगी में पहली बार मैंने गाना गाया । वल्कि कहिए - गाया नहीं, पता नही कैसे अपने आप मेरे गले से स्वर फूट पडा-कुछ-कुछ आदिकवि वाल्मीकि की तरह, कुछ ऐसा कि मुझे भी अचम्भा हुआ और पत्नी को भी । वच्चो की तो जैसे हालत खराब थी । शायद उन्होंने मन-ही-मन तय कर लिया कि अरे, इस आदमी से हम खामखा डरते थे, अब इससे डरने की क्या जरूरत । ऐसा सोचने का मेरे पास कारण है । गाते समय जैसे ही मैंने कहा कि तालियाँ बजाओ, वे हँस पडे । और सच मानिए, पत्नी भी हंस पड़ी - खिलखिलाकर ही पहले मुस्करायी देर तक मुस्कराती रही, फिर तो ऐसी हँसी कि बस । यही - इस वक्त मुझे एक नया अनुभव हुआ कि पत्नी भी हँस सकती हैं। जी हाँ, हँसना कतई नही भूली है । "क्यो बेटो, मुर्गा खाओगे ? " मै पूछने लगा । "बकरा खाओगे ?"
"अण्डे खाओगे ? आमलेट और फ्राई ?" "फल भी खाओगे ? केले और सन्तरे और सेब ?"
"चलो । जितना खाना हो, खूब खाओ ! जमकर । एकदम लाल होकर आओ। फिर लौटकर मेरा दिमाग मत चाटना "
"हा तो भई, हो जाय"राजा को आयेगो बारात रँगोली होगी रात
कविता की नयी तारीख / १३
मगन मै नाचूगी । होऽऽऽ नाचूगी हा बोलो, नाचूगी नाचूगी
गाडी मे ऐसी मस्ती छायी कि पूछिए मत ! अगल-बगल वैठे मुसाफिर हम लोगो को ही देखते रहे । कुछ तो देखते नही, घूरते रह - मुझे और बच्चा को नही पत्नी को । मुझे कतई अटपटा नही लगा- लगा कि मुमकिन है, अब भी उनमे कोई देखने लायक चीज बाकी रह गयी हो जिस पर मेरा ध्यान नही गया है।
गाने बजाने के साथ हो बच्चे सीट पर सडे होकर--- फर्श पर चलकर पहली बार गाडी मे बैठने का मज़ा लेते रहे । थोडा सा किरकिरापन वहाँ आया जब छोटे को टट्टी लगी । भीड इतनी कि यही पाँव रखने की जगह नहीं, लेकिन मैने तत्काल वीररस से काम लिया । ऐसा वरना उस समय बहुत ज़रूरी था, क्योकि घर पर परिवार के राजनीतिक मामलों मे मुझे बार-बार मिमियाते देखकर पत्नी की धारणा हो गयी थी कि मैं बहुत दव्यू और डरपोक हूँ । यही अवसर था जब में सिद्ध कर सकता था कि देखो, अगर कोई चोर-उचक्का तुम्हारे गले को ज़जोर लेकर भागने लगे तो मैं हिम्मत से काम ले सकता हूँऐसा नहीं हूँ कि मेरे गले से आवाज भी न निकले ।
जब में छोटे को लेकर अपनी सीट पर आया तो गाडी खडी हो गयी थी ।
हम बाहर निकले । मेजवान नहीं दिखायी पड़ा । मैंने धीरे२४ / नयो तारीख
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यह पहला मौका था - जी हा पहला ही कहिए, जब मैं अपनी बीवी और दो बच्चो के साथ वही बाहर निकला था और कुछ दिनों के लिए किसी का मेहमान हुआ था । ऐसा करते समय मेरे दिमाग में दो बातें थी - पहली यह कि जिस जडता, एकरसता और ऊब को पिछले दस सालो से मैं झेल रहा था उससे नजात पाना बेहद जरूरी था। ज़रूरी इसलिए कि छोटी-से-छोटी बात पर भी मेरी झुंझलाहट बढती जा रही थी। बीवी से, बच्चो से, मेहमानो से - गरज कि हर मिलनेवाले से जब भी मैं बोलता, झुंझलाकर बोलता, उन पर नाराज़ हो उठता, उनसे झगडा कर बैठता - और यह सब विला वजह । दूसरी ओर महीने के महीने गुजर जाते, पत्नी के चेहरे पर हँसी क्या, मुस्कान तक न दिखायी पडती । इन सारी बातो के लिए उनके पास एक ही जवाब था - 'किस्मत' । "जब मेरी किस्मत में ही ऐसा लिखा है ।" "जब मेरी किस्मत ही ऐसी है । " मेरा उनसे कहना था कि जब उन्हे कारण का पता चल गया है तब तो मुस्कराने में कोई हज़ नही है और इस तरह रात-दिन रोआँ कविता को नयी तारीख / छः गिराये रखना भी गलत है । एक छोटी-सी ज़िन्दगी दी है हमारे मा-बाप ने, इसलिए जब तक है ताव के साथ जिया जाये । लेकिन जब भी में ऐसा कहते-कहते उखड जाता, उहे विश्वास हो जाता कि डाक्टर सही था। मुझे अपना रक्तचाप चेक-अप करवा लेना चाहिए, और ऐमा खयाल आते ही वे और भी खिन्न हो उठती-"किस्मत मे यदि यही है तो जो होना है, हो ।" दूसरी बात यह कि जिसके यहाँ हम गये थे, उसने काफी तग कर रखा था । वह साल मे, पता नहीं, क्या कर-कराके पद्रह बीस रोज़ की छुट्टी लेता, गैराज से अपनी कार निकालता, उस पर सारा परिवार लादता और दूसरे शहर के लिए चल देता । और दूसरा शहर भी कहा ? मेरे घर । यहा साला ग्वाने का ठिकाना नहीं और कर्जे ले-लेकर अण्डे और मछली और गोश्त और फ्रूट जूम और जैम और ड्रिंक और व्यवस्था उलट-पुलट हो जाती और आनेवाले छह महीने के लिए मेरा दिवाला निकल जाता । मैं तो थोडी देर के लिए खुदा भी हो लेता, क्योकि यही मौके होते जब कार पर बैठने का सुख मिलता और मेरी गदन खिडकी के बाहर ही निकली रहती कि जो भी मुझे थोडा बहुत जानता है, वह देख ले कि मै कोई फालतू आदमी नहीं हूँ । लेकिन पत्नी की हुलिया खराब हो जाती, क्योंकि उनका कहना था कि इनको तो कोई बात नही लेकिन ड्राइवर और नौकर दोनो मिलकर इतना खाते है जितना हमारा सारा परिवार । दस / नयी तारीख वे तो चले जाते लेकिन बीवी को दवा करने मे मेरी हुलिया बैठ जाती । यही एक मज़ेदार - मजेदार क्या, ददनाक कहिए - वाकया का भी जिक्र कर दूं । यदि कोई मेहमान आये - रेलगाडी से, तो वापसी के लिए 'आरक्षण' करवायेगा ही, इसलिए हमे इतना पता चल जाता है कि उसे कब जाना है । भविष्य का यह निश्चय दिमाग को राहत और सकून देता है। लेकिन अपनी फिएट गाडी -- यह दिमाग को ही नहीं, भविष्य को भी, अधकारपूर्ण बनाये रखती है। जब भी हमे मौका मिलता, हम सोचते - अंधरे में आखें मिचमिचाते और नीद का सपना देखते और बिस्तर पर पडे पडे सोचा करते कि हे प्रभो, हमारे पिछले दिन कब लौटेगे । निहायत हो सगीन और गोपनीय एक और मामला है जिसे मैं अपने सीने मे छिपाये हूँ । वे आते है, रहते हैं और कहते जाते हैं, "कवीजी, जरा इधर भी ध्यान दीजिए। एक तो आपकी छत बेहद नीची है, दूसरे, इसकी दो घरनें भार से लपककर टढी हो गयी हैं । सावधानी न बरतिएगा तो मकान ही बैठ जायेगा । खर मनाइए कि हम पतले है वरना सीढियाँ ऐसी है कि मोटा आदमी बीच मे ही अँडस जाये । बाथरूम ऐसा है कि इसमे सिफ बैठ और खडे हो सकते है इसकी खिडकिया और दरवाजे मोहनजोदडो कालीन है ऐसे काम न चलेगा, घर मे चार-पाच मच्छरदानिया तो रखा कीजिए कवीजी " एक तरह से देखिए भविता की नयी तारीख / ग्यारह तो यह हमारे फायदे के लिए दी जानेवाली हिदायते हैं लेकिन जरा दूसरी नरह से देखिए तो तो देखा आपने? यह है हमारी जेब से सारे पैसे निकलवा लेना, कपडे तक उतरवा लेना, फिर गले लगाना और अन्त मे चूतड पर चार लात लगाकर चल देना । ये सारी बातें थी । इसीलिए जब पत्नी ने कहा कि उनकी विस्मत मे बच्चे पैदा करना, चूल्हा-चक्की करना और घर मे पडे सडते रहना ही है तो सहसा में 'मुगले आजम' के पथ्वीराज कपूर की तरह चहलकदमी करने लगा । मैंने वह मुहल्ला याद करने की कोशिश की जिम पर हमे धावे मारता था । यहा फिर एक दूसरी मुसीबत आन पड़ी। जैसा मुझे बताया गया था, अव तक उस कालोनी का नाम भगडे मे चल रहा है। बदकिस्मती मे उस नयी वालोनी मे दो भूतपूर्व मन्निया के विशाल भवन है और विवाद इस पर है कि कालोनी किसके नाम पर हो ! नयो सरकार के जावासमन्त्री चूकि दोनो के मित्र हैं इसलिए उन्होने बातचीत के जरिये यह रास्ता निकाला कि जो पहले स्वर्गीय होगा, उसके नाम पर 'कालोनी' और दूसरे के नाम पर 'राजमाग' । मेरे भावी मेजवान ने बताया था कि दोनो मनी एकसाथ रक्तचाप और मधुमेह के शिकार हो अपने-अपने बिस्तर पर पड़े है और दोनो वो दो बार दिल का दौरा पड़ चुका है। मो, मैंने उसके दफ्तर के पते पर तार दिया, बीवी और दो बच्चो को साथ लिया और चौथे गज उस शहर के लिए रवाना हो गया। बारह / भयो तारीब जिन्दगी में पहली बार मैंने गाना गाया । वल्कि कहिए - गाया नहीं, पता नही कैसे अपने आप मेरे गले से स्वर फूट पडा-कुछ-कुछ आदिकवि वाल्मीकि की तरह, कुछ ऐसा कि मुझे भी अचम्भा हुआ और पत्नी को भी । वच्चो की तो जैसे हालत खराब थी । शायद उन्होंने मन-ही-मन तय कर लिया कि अरे, इस आदमी से हम खामखा डरते थे, अब इससे डरने की क्या जरूरत । ऐसा सोचने का मेरे पास कारण है । गाते समय जैसे ही मैंने कहा कि तालियाँ बजाओ, वे हँस पडे । और सच मानिए, पत्नी भी हंस पड़ी - खिलखिलाकर ही पहले मुस्करायी देर तक मुस्कराती रही, फिर तो ऐसी हँसी कि बस । यही - इस वक्त मुझे एक नया अनुभव हुआ कि पत्नी भी हँस सकती हैं। जी हाँ, हँसना कतई नही भूली है । "क्यो बेटो, मुर्गा खाओगे ? " मै पूछने लगा । "बकरा खाओगे ?" "अण्डे खाओगे ? आमलेट और फ्राई ?" "फल भी खाओगे ? केले और सन्तरे और सेब ?" "चलो । जितना खाना हो, खूब खाओ ! जमकर । एकदम लाल होकर आओ। फिर लौटकर मेरा दिमाग मत चाटना " "हा तो भई, हो जाय"राजा को आयेगो बारात रँगोली होगी रात कविता की नयी तारीख / तेरह मगन मै नाचूगी । होऽऽऽ नाचूगी हा बोलो, नाचूगी नाचूगी गाडी मे ऐसी मस्ती छायी कि पूछिए मत ! अगल-बगल वैठे मुसाफिर हम लोगो को ही देखते रहे । कुछ तो देखते नही, घूरते रह - मुझे और बच्चा को नही पत्नी को । मुझे कतई अटपटा नही लगा- लगा कि मुमकिन है, अब भी उनमे कोई देखने लायक चीज बाकी रह गयी हो जिस पर मेरा ध्यान नही गया है। गाने बजाने के साथ हो बच्चे सीट पर सडे होकर--- फर्श पर चलकर पहली बार गाडी मे बैठने का मज़ा लेते रहे । थोडा सा किरकिरापन वहाँ आया जब छोटे को टट्टी लगी । भीड इतनी कि यही पाँव रखने की जगह नहीं, लेकिन मैने तत्काल वीररस से काम लिया । ऐसा वरना उस समय बहुत ज़रूरी था, क्योकि घर पर परिवार के राजनीतिक मामलों मे मुझे बार-बार मिमियाते देखकर पत्नी की धारणा हो गयी थी कि मैं बहुत दव्यू और डरपोक हूँ । यही अवसर था जब में सिद्ध कर सकता था कि देखो, अगर कोई चोर-उचक्का तुम्हारे गले को ज़जोर लेकर भागने लगे तो मैं हिम्मत से काम ले सकता हूँऐसा नहीं हूँ कि मेरे गले से आवाज भी न निकले । जब में छोटे को लेकर अपनी सीट पर आया तो गाडी खडी हो गयी थी । हम बाहर निकले । मेजवान नहीं दिखायी पड़ा । मैंने धीरेचौबीस / नयो तारीख
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गाजियाबाद,। गाजियाबाद के थाना नंदग्राम क्षेत्र के हिंडन रिवर मेट्रो स्टेशन के पास एक बड़े प्लॉट में महिला नग्न अवस्था में पड़ी मिली। प्लॉट के चौकीदार ने देखा तत्काल ही पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंचीं वही महिला पुलिस के द्वारा कपड़े पहनाए गए उसके बाद महिला को पुलिस की जीप में अस्पताल ले जाया गया है!
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक चौकीदार ने सूचना दी कि खाली प्लॉट में महिला नग्न अवस्था में पड़ी है। चेहरे पर चोट के निशान मौजूद थे। साथ ही पैर भी जला हुआ था। वो 2 से 3 दिन से यही घूम रही थी। सूचना के बाद मौके पहुंची पुलिस ने महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस मामले में एडीसीपी आलोक दुबे ने बताया हिंडन रिवर मेट्रो के पास एक खाली प्लॉट में महिला बेहोश अवस्था में मिली थी। बताया जा रहा है तीन-चार दिन पहले उसी जगह के आस पास यह महिला देखी गई थी। पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया हे जांच के लिए टीम गठित की गई है। साथ ही पुलिस द्वारा महिला का मेडिकल भी कराया जा रहा है।
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गाजियाबाद,। गाजियाबाद के थाना नंदग्राम क्षेत्र के हिंडन रिवर मेट्रो स्टेशन के पास एक बड़े प्लॉट में महिला नग्न अवस्था में पड़ी मिली। प्लॉट के चौकीदार ने देखा तत्काल ही पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंचीं वही महिला पुलिस के द्वारा कपड़े पहनाए गए उसके बाद महिला को पुलिस की जीप में अस्पताल ले जाया गया है! पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक चौकीदार ने सूचना दी कि खाली प्लॉट में महिला नग्न अवस्था में पड़ी है। चेहरे पर चोट के निशान मौजूद थे। साथ ही पैर भी जला हुआ था। वो दो से तीन दिन से यही घूम रही थी। सूचना के बाद मौके पहुंची पुलिस ने महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस मामले में एडीसीपी आलोक दुबे ने बताया हिंडन रिवर मेट्रो के पास एक खाली प्लॉट में महिला बेहोश अवस्था में मिली थी। बताया जा रहा है तीन-चार दिन पहले उसी जगह के आस पास यह महिला देखी गई थी। पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया हे जांच के लिए टीम गठित की गई है। साथ ही पुलिस द्वारा महिला का मेडिकल भी कराया जा रहा है।
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पीठ में न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी, न्यायमूर्ति विनीत सरन, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट भी हैं। शीर्ष अदालत पांच सदस्यीय पीठ से न्यायमूर्ति मिश्रा को अलग रखने की मांग करने वाली याचिका पर 23 अक्टूबर को आदेश सुनाएगी।
दीवान ने कहा कि किसी न्यायाधीश को पक्षपात की किसी भी आशंका को खत्म करना चाहिये, अन्यथा जनता का भरोसा खत्म होगा और सुनवाई से अलग होने का उनका अनुरोध और कुछ नहीं बल्कि संस्थान की ईमानदारी को कायम रखना है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि पीठ से उनके अलग होने की मांग करने वाली याचिका "प्रायोजित" है।
दीवान ने विभिन्न निर्णयों का उल्लेख किया और कहा कि जब किसी न्यायाधीश के सुनवाई से अलग होने की मांग की जाती है तो उसे अनावश्यक संवेदनशील नहीं होना चाहिए, इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहिए।
दीवान ने कहा कि मुद्दा यह है कि क्या यह सही है अगर किसी न्यायाधीश ने किसी मुद्दे पर निर्णय लिया है और फिर उस मुद्दे को एक बड़ी पीठ को सौंपा जाता है, तो क्या न्यायाधीश को उस बड़ी पीठ का हिस्सा होना चाहिए?
न्यायमूर्ति मिश्रा ने न्यायाधीश के सुनवाई से अलग हो जाने के लिए पांच घंटे से अधिक समय तक निडर होकर बहस करने के लिए दीवान की सराहना की, जिसमें मुश्किल से तीस मिनट लगते। उन्होंने कहा कि यह एक अच्छा गुण है और वकील में यह विशेषता होनी चाहिए।
इसी तरह वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी और गोपाल शंकरनारायणन ने भी न्यायमूर्ति मिश्रा के सुनवाई से अलग हो जाने पर दलील देते हुए कहा कि जरूरत संस्था की रक्षा की है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एक प्रवृत्ति उभर रही है जिसमें सुनवाई की पूर्व संध्या पर रिपोर्ट और लेख प्रकाशित किए जाते हैं।
न्यायमूर्ति मिश्रा पिछले साल फरवरी में वह फैसला सुनाने वाली पीठ के सदस्य थे जिसने कहा था कि सरकारी एजेन्सियों द्वारा किया गया भूमि अधिग्रहण का मामला अदालत में लंबित होने की वजह से भू स्वामी द्वारा मुआवजे की राशि स्वीकार करने में पांच साल तक का विलंब होने के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता।
इससे पहले, 2014 में एक अन्य पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि मुआवजा स्वीकार करने में विलंब के आधार पर भूमि अधिग्रहण रद्द किया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल छह मार्च को कहा था कि समान संख्या के सदस्यों वाली उसकी दो अलग-अलग पीठ के भूमि अधिग्रहण से संबंधित दो अलग-अलग फैसलों के सही होने के सवाल पर वृहद पीठ विचार करेगी।
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पीठ में न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी, न्यायमूर्ति विनीत सरन, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट भी हैं। शीर्ष अदालत पांच सदस्यीय पीठ से न्यायमूर्ति मिश्रा को अलग रखने की मांग करने वाली याचिका पर तेईस अक्टूबर को आदेश सुनाएगी। दीवान ने कहा कि किसी न्यायाधीश को पक्षपात की किसी भी आशंका को खत्म करना चाहिये, अन्यथा जनता का भरोसा खत्म होगा और सुनवाई से अलग होने का उनका अनुरोध और कुछ नहीं बल्कि संस्थान की ईमानदारी को कायम रखना है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि पीठ से उनके अलग होने की मांग करने वाली याचिका "प्रायोजित" है। दीवान ने विभिन्न निर्णयों का उल्लेख किया और कहा कि जब किसी न्यायाधीश के सुनवाई से अलग होने की मांग की जाती है तो उसे अनावश्यक संवेदनशील नहीं होना चाहिए, इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहिए। दीवान ने कहा कि मुद्दा यह है कि क्या यह सही है अगर किसी न्यायाधीश ने किसी मुद्दे पर निर्णय लिया है और फिर उस मुद्दे को एक बड़ी पीठ को सौंपा जाता है, तो क्या न्यायाधीश को उस बड़ी पीठ का हिस्सा होना चाहिए? न्यायमूर्ति मिश्रा ने न्यायाधीश के सुनवाई से अलग हो जाने के लिए पांच घंटे से अधिक समय तक निडर होकर बहस करने के लिए दीवान की सराहना की, जिसमें मुश्किल से तीस मिनट लगते। उन्होंने कहा कि यह एक अच्छा गुण है और वकील में यह विशेषता होनी चाहिए। इसी तरह वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी और गोपाल शंकरनारायणन ने भी न्यायमूर्ति मिश्रा के सुनवाई से अलग हो जाने पर दलील देते हुए कहा कि जरूरत संस्था की रक्षा की है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एक प्रवृत्ति उभर रही है जिसमें सुनवाई की पूर्व संध्या पर रिपोर्ट और लेख प्रकाशित किए जाते हैं। न्यायमूर्ति मिश्रा पिछले साल फरवरी में वह फैसला सुनाने वाली पीठ के सदस्य थे जिसने कहा था कि सरकारी एजेन्सियों द्वारा किया गया भूमि अधिग्रहण का मामला अदालत में लंबित होने की वजह से भू स्वामी द्वारा मुआवजे की राशि स्वीकार करने में पांच साल तक का विलंब होने के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता। इससे पहले, दो हज़ार चौदह में एक अन्य पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि मुआवजा स्वीकार करने में विलंब के आधार पर भूमि अधिग्रहण रद्द किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल छह मार्च को कहा था कि समान संख्या के सदस्यों वाली उसकी दो अलग-अलग पीठ के भूमि अधिग्रहण से संबंधित दो अलग-अलग फैसलों के सही होने के सवाल पर वृहद पीठ विचार करेगी।
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PKL 2022 के 129वें मुकाबले में यूपी योद्धाज ने पुनेरी पलटन को 45-41 से हराते हुए रोमांचक जीत दर्ज की। दोनों ही टीमों का यह आखिरी लीग मुकाबला था। पुनेरी पलटन ने लीग स्टेज का अंत दूसरे स्थान पर रहते हुए किया और यूपी योद्धाज इस समय चौथे स्थान पर हैं। परदीप नरवाल ने मैच की शुरुआत की, लेकिन सिर्फ एक रेड करने के बाद वो चले गए और युवा खिलाड़ियों को खेलने का मौका दिया। उनके बिना भी टीम ने जीत दर्ज की, जिसमें दिग्गज खिलाड़ी संदीप नरवाल का अहम योगदान था।
इस मैच में पुनेरी पलटन की तरफ से रेडिंग में आदित्य शिंदे ने 12 और सौरभ ने 11 रेड पॉइंट्स लिए। डिफेंस में हर्ष लाड और गोविंद गुर्जर ने 4-4 टैकल पॉइंट्स लिए। यूपी योद्धाज के लिए रेडिंग में दुर्गेश कुमार और रोहित तोमर ने 5-5 रेड पॉइंट्स लिए। डिफेंस में संदीप नरवाल ने 6 टैकल पॉइंंट्स लिए।
पहले हाफ के बाद पुनेरी पलटन ने यूपी योद्धाज के खिलाफ 22-19 से बढ़त बनाई। आदित्य शिंदे ने मैच की पहली ही रेड में सुपर रेड (बोनस + 2 टच) पॉइंट्स हासिल करते हुए शानदार शुरुआत की। पुणे के युवा रेडर्स और डिफेंडर्स ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए यूपी योद्धाज को 12वें मिनट में ऑल-आउट कर दिया। इस बीच यूपी योद्धाज ने पलटवार किया और इसमें अनिल का अहम योगदान रहा। उन्होंने सुपर रेड लगाते हुए पुणे को दबाव में डाला और पहले हाफ के अंत में वो पुनेरी पलटन को ऑल-आउट करने के काफी करीब आ गए थे।
दूसरे हाफ की पहली रेड में दुर्गेश कुमार सुपर टैकल हो गए, लेकिन यूपी योद्धाज ने बिना देर करते हुए जल्द ही पहली बार पुनेरी पलटन को ऑल-आउट कर दिया। संदीप नरवाल ने अपना अनुभव दिखाते हुए जबरदस्त प्रदर्शन किया और अपना हाई 5 भी पूरा किया। दूसरे हाफ में यूपी को रेडर्स और डिफेंडर्स से ज्यादा पॉइंट्स एक्स्ट्रा के मिले। पुनेरी पलटन के कई खिलाड़ी सेल्फ-आउट हुए और यूपी को इस प्रकार 9 पॉइंट्स मिले। इसी वजह से दूसरी बार यूपी की टीम पुनेरी पलटन को लोना देने में कामयाब हो पाई। अंत में यूपी योद्धाज ने 4 पॉइंट्स से इस मैच को जीत लिया और पुनेरी पलटन को सिर्फ एक अंक ही मिला।
आपको बता दें कि इस मैच में पुनेरी पलटन की तरफ से कप्तान फज़ल अत्राचली, मोहम्मद नबीबक्श, आकाश शिंदे, सोमबीर, पंकज मोहिते, अबिनेश नादराजन जैसे प्रमुख खिलाड़ियों को नहीं खिलाया। दूसरी तरफ यूपी योद्धाज ने सुमित सांगवान, नितेश कुमार, गुरदीप, परदीप नरवाल को आराम दिया।
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PKL दो हज़ार बाईस के एक सौ उनतीसवें मुकाबले में यूपी योद्धाज ने पुनेरी पलटन को पैंतालीस-इकतालीस से हराते हुए रोमांचक जीत दर्ज की। दोनों ही टीमों का यह आखिरी लीग मुकाबला था। पुनेरी पलटन ने लीग स्टेज का अंत दूसरे स्थान पर रहते हुए किया और यूपी योद्धाज इस समय चौथे स्थान पर हैं। परदीप नरवाल ने मैच की शुरुआत की, लेकिन सिर्फ एक रेड करने के बाद वो चले गए और युवा खिलाड़ियों को खेलने का मौका दिया। उनके बिना भी टीम ने जीत दर्ज की, जिसमें दिग्गज खिलाड़ी संदीप नरवाल का अहम योगदान था। इस मैच में पुनेरी पलटन की तरफ से रेडिंग में आदित्य शिंदे ने बारह और सौरभ ने ग्यारह रेड पॉइंट्स लिए। डिफेंस में हर्ष लाड और गोविंद गुर्जर ने चार-चार टैकल पॉइंट्स लिए। यूपी योद्धाज के लिए रेडिंग में दुर्गेश कुमार और रोहित तोमर ने पाँच-पाँच रेड पॉइंट्स लिए। डिफेंस में संदीप नरवाल ने छः टैकल पॉइंंट्स लिए। पहले हाफ के बाद पुनेरी पलटन ने यूपी योद्धाज के खिलाफ बाईस-उन्नीस से बढ़त बनाई। आदित्य शिंदे ने मैच की पहली ही रेड में सुपर रेड पॉइंट्स हासिल करते हुए शानदार शुरुआत की। पुणे के युवा रेडर्स और डिफेंडर्स ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए यूपी योद्धाज को बारहवें मिनट में ऑल-आउट कर दिया। इस बीच यूपी योद्धाज ने पलटवार किया और इसमें अनिल का अहम योगदान रहा। उन्होंने सुपर रेड लगाते हुए पुणे को दबाव में डाला और पहले हाफ के अंत में वो पुनेरी पलटन को ऑल-आउट करने के काफी करीब आ गए थे। दूसरे हाफ की पहली रेड में दुर्गेश कुमार सुपर टैकल हो गए, लेकिन यूपी योद्धाज ने बिना देर करते हुए जल्द ही पहली बार पुनेरी पलटन को ऑल-आउट कर दिया। संदीप नरवाल ने अपना अनुभव दिखाते हुए जबरदस्त प्रदर्शन किया और अपना हाई पाँच भी पूरा किया। दूसरे हाफ में यूपी को रेडर्स और डिफेंडर्स से ज्यादा पॉइंट्स एक्स्ट्रा के मिले। पुनेरी पलटन के कई खिलाड़ी सेल्फ-आउट हुए और यूपी को इस प्रकार नौ पॉइंट्स मिले। इसी वजह से दूसरी बार यूपी की टीम पुनेरी पलटन को लोना देने में कामयाब हो पाई। अंत में यूपी योद्धाज ने चार पॉइंट्स से इस मैच को जीत लिया और पुनेरी पलटन को सिर्फ एक अंक ही मिला। आपको बता दें कि इस मैच में पुनेरी पलटन की तरफ से कप्तान फज़ल अत्राचली, मोहम्मद नबीबक्श, आकाश शिंदे, सोमबीर, पंकज मोहिते, अबिनेश नादराजन जैसे प्रमुख खिलाड़ियों को नहीं खिलाया। दूसरी तरफ यूपी योद्धाज ने सुमित सांगवान, नितेश कुमार, गुरदीप, परदीप नरवाल को आराम दिया।
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हम सब इसके कायर गवाह हैं
मिस्र में 13 साल की एक बच्ची को सिर्फ इसलिए पीट-पीटकर मार डाला गया कि उसने गरमी से परेशान होकर सार्वजनिक स्थान पर चेहरे से बुर्का हटा लिया था। कट्टरपथी मौलवी के आदेश पर यह सब हुआ पिछले साल । बांग्लादेश में भी प्रेम करने के आरोप में इतनी ही उम्र की एक किशोरी को मौलवी के आदेश पर गले तक मैदान में गाड दिया गया और उसके गड़े सिर पर चारो तरफ से भीड ने पत्थरों की बौछार की सजा पूरी होने के बाद जब बच्ची के घरवालो ने उसे खोदकर निकाला तो घंटे भर के भीतर ही उसने दम तोड़ दिया।
इस्लामी देशों में हर साल छह महीने में कहीं न कहीं से ऐसी ही दिल दहला देने वाली वहशियाना हरकत की खवर आती है, जो बताती है कि इस्लामी देशो में महिलाओं की स्थिति क्या है? बल्कि इस्लामी देश ही क्यो, हम सिर्फ इस्लाम को ही ले सकते हैं। इससे करीब 4 महीने पहले बुलदशहर में एक मुसलमान मर्द ने अपनी बच्ची की बारात सिर्फ इसलिए वापस कर दी, क्योकि दूल्हा चाहता था कि वीडियो फोटोग्राफी में दुल्हन की भी एक झलक आ जाए। लड़की के घरवालों ने इसे इस्लाम के खिलाफ बताकर दुल्हन की फोटो खिचवाने से साफ इनकार कर दिया। जब दूल्हे ने दोबारा दबाव डाला तो उसकी पिटाई की गई, जिससे उसने शादी तोड़ दी ।
मिस्र और बांग्लादेश की इन दो दिल दहला देने वाली घटनाओं ने वहा के रहने वालों को नहीं झकझोरा, बल्कि थोड़े दिन पहले अखबारों में एक फोटो छपा था जिसमे महिलाओं को एक मैदान में कोडे मारे जा रहे थे और चारों तरफ खड़ी हजारों की भीड़ तालियां बजा रही थी । इस्लामी देश के अंगूठाछाप मौलवी कुरान और हदीस के अनुसार एकतरफा न्याय करते है। औरत अगर अपने हक में कोई बयान देना चाहे तो वह चादर की आड में या बुर्के के अंदर से ही एक बार में अपनी बात कह सकती है। बस, इसके बाद जंगली तर्ज पर फैसला सुना दिया जाता है। तमाम मानवाधिकार संगठनों द्वारा मिस्र और बाग्लादेश में महिलाओ के साथ हुई इस क्रूरता के मामले उठाए गए तब पुलिस ने उनके खिलाफ सिर्फ
हम सब इसके कायर गवाह है ● 11
रिपोर्ट दर्ज की है।
तस्लीमा ने 'औरत के हक में' हदीस के बारे मे लिखा है- मुझे विश्वास नहीं हुआ कि इस सभ्य युग में भी मुद्रित अक्षरों में नारी के प्रति इस तरह के कुविचार ऐसे मर्यादाहोन रूप में प्रचारित हो रहे हैं और इस तरह के अन्याय को समाज आदरपूर्वक ग्रहण करता है। समाज के सज्जन व्यक्ति चरम और परम् निष्ठा के साथ सारी धार्मिक बर्बरता का पालन भी करते हैं। हदीस में लिखा कि यदि स्त्री पति की बात तुरत नहीं मानती है तो ऐसी स्त्री की सामान्य तौर पर पिटाई करो।
अभी थोड़े दिनों पहले पाकिस्तान में 12 वर्ष के ईसाई वालक और उसके चाचा को दीवारों पर कुछ इस्लाम विरोधी लिखने पर फांसी की सजा सुनाई गई थी । इस मुकदमे मे बचाव पक्ष की वकील अस्मा जहांगीर, जिन्हें हाल ही मे मे मैग्सेसे अवार्ड मिला है, कहती है - स्त्रियों या अल्पसंख्यकों को पाकिस्तान मे जानवरों से बदतर जीवन जीना पड़ रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी तमाम उदाहरणो और तथ्यों के आधार पर अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस्लाम धर्म हिंसा को बढावा देता है और क्रूरता इसके मूल में है। बी बी सी ने थोड़े दिन पहले पाकिस्तान के मदरसो के बारे में एक डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई थी, जिसमें बच्चों के पैरों में बेड़ियां पड़ी थीं। पूछने पर बच्चों के अभिभावको ने बताया कि हमने बच्चों को मदरसे में इसलिए डाला है कि कुरान सीख जाएगा तो कहीं सौ-डेढ़ सौ रुपये का मौलवी हो जाएगा। सोचने की बात तो यह है कि जो बच्चा बचपन में बेडी डालकर पढ़ाया-लिखाया गया है, वह दया और करुणा की शिक्षा खाक देगा! किसी फैसले मे हम उस मौलवी से विवेकपूर्ण न्याय की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं?
महिलाओं के खिलाफ यह हिंसा भारत में भी लगातार बढ़ रही है। कई ग्राम पंचायतों में प्रेम विवाह के मामले में सार्वजनिक तौर पर प्रेमी जोड़े को फांसी पर लटका दिया। कोई ऐसा दिन नही बीतना जब देश में कही न कही किसी औरत को नंगा करके घुमाया जाता हो। बल्कि यहां तो हम अंगूठाछाप को भी दोष नही दे सकते। सांसद, मजिस्ट्रेट, प्रिंसिपल आदि इसमे शामिल है। यह एक सच है कि युद्ध या अराजकता का पहला शिकार महिला ही होती है। लेकिन आजाद लोकतात्रिक व्यवस्था में ऐसी स्थिति क्यो है ?
जाने-माने लेखक और आलोचक सुधीश पचौरी ने अपने एक लेख में लिखा है कि तंदूर कांड एक तरह का हत्या कर्म नही बल्कि कला कर्म बन गया
112 • हम सभ्य औरते
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हम सब इसके कायर गवाह हैं मिस्र में तेरह साल की एक बच्ची को सिर्फ इसलिए पीट-पीटकर मार डाला गया कि उसने गरमी से परेशान होकर सार्वजनिक स्थान पर चेहरे से बुर्का हटा लिया था। कट्टरपथी मौलवी के आदेश पर यह सब हुआ पिछले साल । बांग्लादेश में भी प्रेम करने के आरोप में इतनी ही उम्र की एक किशोरी को मौलवी के आदेश पर गले तक मैदान में गाड दिया गया और उसके गड़े सिर पर चारो तरफ से भीड ने पत्थरों की बौछार की सजा पूरी होने के बाद जब बच्ची के घरवालो ने उसे खोदकर निकाला तो घंटे भर के भीतर ही उसने दम तोड़ दिया। इस्लामी देशों में हर साल छह महीने में कहीं न कहीं से ऐसी ही दिल दहला देने वाली वहशियाना हरकत की खवर आती है, जो बताती है कि इस्लामी देशो में महिलाओं की स्थिति क्या है? बल्कि इस्लामी देश ही क्यो, हम सिर्फ इस्लाम को ही ले सकते हैं। इससे करीब चार महीने पहले बुलदशहर में एक मुसलमान मर्द ने अपनी बच्ची की बारात सिर्फ इसलिए वापस कर दी, क्योकि दूल्हा चाहता था कि वीडियो फोटोग्राफी में दुल्हन की भी एक झलक आ जाए। लड़की के घरवालों ने इसे इस्लाम के खिलाफ बताकर दुल्हन की फोटो खिचवाने से साफ इनकार कर दिया। जब दूल्हे ने दोबारा दबाव डाला तो उसकी पिटाई की गई, जिससे उसने शादी तोड़ दी । मिस्र और बांग्लादेश की इन दो दिल दहला देने वाली घटनाओं ने वहा के रहने वालों को नहीं झकझोरा, बल्कि थोड़े दिन पहले अखबारों में एक फोटो छपा था जिसमे महिलाओं को एक मैदान में कोडे मारे जा रहे थे और चारों तरफ खड़ी हजारों की भीड़ तालियां बजा रही थी । इस्लामी देश के अंगूठाछाप मौलवी कुरान और हदीस के अनुसार एकतरफा न्याय करते है। औरत अगर अपने हक में कोई बयान देना चाहे तो वह चादर की आड में या बुर्के के अंदर से ही एक बार में अपनी बात कह सकती है। बस, इसके बाद जंगली तर्ज पर फैसला सुना दिया जाता है। तमाम मानवाधिकार संगठनों द्वारा मिस्र और बाग्लादेश में महिलाओ के साथ हुई इस क्रूरता के मामले उठाए गए तब पुलिस ने उनके खिलाफ सिर्फ हम सब इसके कायर गवाह है ● ग्यारह रिपोर्ट दर्ज की है। तस्लीमा ने 'औरत के हक में' हदीस के बारे मे लिखा है- मुझे विश्वास नहीं हुआ कि इस सभ्य युग में भी मुद्रित अक्षरों में नारी के प्रति इस तरह के कुविचार ऐसे मर्यादाहोन रूप में प्रचारित हो रहे हैं और इस तरह के अन्याय को समाज आदरपूर्वक ग्रहण करता है। समाज के सज्जन व्यक्ति चरम और परम् निष्ठा के साथ सारी धार्मिक बर्बरता का पालन भी करते हैं। हदीस में लिखा कि यदि स्त्री पति की बात तुरत नहीं मानती है तो ऐसी स्त्री की सामान्य तौर पर पिटाई करो। अभी थोड़े दिनों पहले पाकिस्तान में बारह वर्ष के ईसाई वालक और उसके चाचा को दीवारों पर कुछ इस्लाम विरोधी लिखने पर फांसी की सजा सुनाई गई थी । इस मुकदमे मे बचाव पक्ष की वकील अस्मा जहांगीर, जिन्हें हाल ही मे मे मैग्सेसे अवार्ड मिला है, कहती है - स्त्रियों या अल्पसंख्यकों को पाकिस्तान मे जानवरों से बदतर जीवन जीना पड़ रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी तमाम उदाहरणो और तथ्यों के आधार पर अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस्लाम धर्म हिंसा को बढावा देता है और क्रूरता इसके मूल में है। बी बी सी ने थोड़े दिन पहले पाकिस्तान के मदरसो के बारे में एक डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई थी, जिसमें बच्चों के पैरों में बेड़ियां पड़ी थीं। पूछने पर बच्चों के अभिभावको ने बताया कि हमने बच्चों को मदरसे में इसलिए डाला है कि कुरान सीख जाएगा तो कहीं सौ-डेढ़ सौ रुपये का मौलवी हो जाएगा। सोचने की बात तो यह है कि जो बच्चा बचपन में बेडी डालकर पढ़ाया-लिखाया गया है, वह दया और करुणा की शिक्षा खाक देगा! किसी फैसले मे हम उस मौलवी से विवेकपूर्ण न्याय की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं? महिलाओं के खिलाफ यह हिंसा भारत में भी लगातार बढ़ रही है। कई ग्राम पंचायतों में प्रेम विवाह के मामले में सार्वजनिक तौर पर प्रेमी जोड़े को फांसी पर लटका दिया। कोई ऐसा दिन नही बीतना जब देश में कही न कही किसी औरत को नंगा करके घुमाया जाता हो। बल्कि यहां तो हम अंगूठाछाप को भी दोष नही दे सकते। सांसद, मजिस्ट्रेट, प्रिंसिपल आदि इसमे शामिल है। यह एक सच है कि युद्ध या अराजकता का पहला शिकार महिला ही होती है। लेकिन आजाद लोकतात्रिक व्यवस्था में ऐसी स्थिति क्यो है ? जाने-माने लेखक और आलोचक सुधीश पचौरी ने अपने एक लेख में लिखा है कि तंदूर कांड एक तरह का हत्या कर्म नही बल्कि कला कर्म बन गया एक सौ बारह • हम सभ्य औरते
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चढ़कर मालवराज श्रीहर्ष के शत्रु कर्णाट के राजा खोट्टिगदेव की सेना का संहार करता हुआ नर्मदा के किनारे मारा गया । मालवे के परमार राजा जयसिंह ( प्रथम ) और वागढ़ के सामन्त मन्डलीक के समय ( वि० सं० १९९६ ) के पाणाहेड़ा ( बांसवाड़ा राज्य ) वाले लेख के अनुसार यह लड़ाई खलिघट्ट नामक स्थान में हुई थी ।
( ५ ) चंडप ( सं० ४ का पुत्र ) ।
( ६ ) सत्यराज ( सं० ५ का पुत्र ) - उसका वैभव राजा भोज ने बढ़ाया और वह गुजरातवालों से लड़ा । उसकी स्त्री राजश्री चौहान वंश की थी ।
(७) लिंबराज ( सं० ६ का पुत्र ) ।
( ८ ) मंडलीक ( सं० ७ का छोटा भाई ) - उसको मंडनदेव भी कहते थे । वह मालवे के परमार राजा भोज और जयसिंह (प्रथम) का सामंत था । उसने बड़े वलवान सेनापति कन्छ को पकड़कर उसके घोड़ों और हाथियों सहित जयसिंह के सुपुर्द किया और अपने नाम से पाणाहेड़ा गांव में मंडलेश्वर का मंदिर वि० सं० १९९६ ( ई० स० १०५६ ) में बनवाया ।
( १ ) चामुंडराज ( सं० ८ का पुत्र ) - उसने वि० सं० १९३६ ( ई० स० १०७६ ) में अगा ( वांसवाड़ा राज्य ) गांव में मंडलेश्वर का शिवमंदिर बनवाया, जिसके शिलालेख के अनुसार उसने सिंधुराज को नष्ट किया था। सिंधुराज से अभिप्राय या तो सिंध के राजा या उक्त नाम के राजा से होगा, परंतु उसका ठीक पता नहीं लगा । उसने अपने पिता मंडस्लीक ( मंडनदेव ) के नाम से मंडनेश ( मंडलेश्वर ) नामक शिवालय और मठ वनवाया । उसके समय के चार शिलालेख अ से मिले हैं, जो
१ ) देखो ऊपर पृष्ठ २०७ थौर टिप्पण १ ।
( २ ) पायाहेड़ा का शिलालेख, लो० ३२ ।
( ३ ) राजपूताना म्यूज़ियम् (अजमेर ) की ई० स० १९१६ - १७ की रिपोर्ट,
४० २, लेससत्या २ ।
(१०) विजयराज ( ० ६ का पुत्र ) - उसका सांधिविग्रहिक चालभ जाति के कायस्थ राजपाल का पुत्र वामन था । उसके समय के दो शिलालेख वि० सं० १९६५५ र १९६६० ( ई० स० ११०८ और १९०६) के मिले हैं। विजयराज के वंशजों के नामों का पता नहीं लगा, क्योंकि विजयराज के पीछे का कोई शिलालेख अव तक नहीं मिला। वि० सं० १२३६ ( ई० स० १९७६ ) से कुछ पूर्व मेवाड़ के गुहिल राजा सामन्तसिंह मे, मेवाड़ का राज्य छूट जाने के पीछे वागड़ के बड़ौदे पर अपना अधिकार जमाया । तदनन्तर उसने तथा उसके वंशज ने क्रमशः सारा वागढ़ इन परमारों से छीन लिया । अव वागड़ के परमारों के वंश में सौंथ ( महीकांठा इलाक़ा, गुजरात ) के राजा हैं ।
वागढ़ के परमारों की राजधानी उत्थूणक नगर ( अगा ) थी । अव तो वह प्राचीन नगर नष्ट हो गया है और उसके पास श्रण गांव नया बसा है, परंतु परमारों के समय में वह वड़ा वैभवशाली नगर था। अभी वहा कई एक चड़े बड़े मंदिर खड़े हैं और कई एक को गिराकर उनके द्वार आदि को लोग उठा ले गये, जो दूर दूर के गांवों के नये मन्दिरों में लगे हुए देखने में आते हैं । अगा गांव का नया जैनमन्दिर भी बद्दी के पुराने मंदिरों से स्तंभ आदि लाकर खड़ा किया गया है ।
१) राजपूताना म्यूजियम् ( अजमेर ) की ई० स० १९१४-१५ की रिपोर्टर १० २, लेग्यरया १ ।
( ३ ) इस शिलालेख के ऊपर का थाधा धश राजपूताना म्यूजियम् (अजमेर) में सुरक्षित है ( इसका नीचे का श्राधा अश, जो पहले विद्यमान था, थम्र नहीं रहा ) ।
( ४ ) राजपूताना म्यूजियम् ( भजमेर ) फी ६० स० १६१४-१५ की रिपोर्ट, १० २, लेखसख्या ३ ।
( ५ ) वहीं, ई० स० १२१७-१८ की रिपोर्ट
( ६ ) यह शिलालेख राजपुताना म्यूजियम् ( धजमेर ) में सुरक्षित है ।
लेखसंग्या ग
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चढ़कर मालवराज श्रीहर्ष के शत्रु कर्णाट के राजा खोट्टिगदेव की सेना का संहार करता हुआ नर्मदा के किनारे मारा गया । मालवे के परमार राजा जयसिंह और वागढ़ के सामन्त मन्डलीक के समय के पाणाहेड़ा वाले लेख के अनुसार यह लड़ाई खलिघट्ट नामक स्थान में हुई थी । चंडप । सत्यराज - उसका वैभव राजा भोज ने बढ़ाया और वह गुजरातवालों से लड़ा । उसकी स्त्री राजश्री चौहान वंश की थी । लिंबराज । मंडलीक - उसको मंडनदेव भी कहते थे । वह मालवे के परमार राजा भोज और जयसिंह का सामंत था । उसने बड़े वलवान सेनापति कन्छ को पकड़कर उसके घोड़ों और हाथियों सहित जयसिंह के सुपुर्द किया और अपने नाम से पाणाहेड़ा गांव में मंडलेश्वर का मंदिर विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ छियानवे में बनवाया । चामुंडराज - उसने विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में अगा गांव में मंडलेश्वर का शिवमंदिर बनवाया, जिसके शिलालेख के अनुसार उसने सिंधुराज को नष्ट किया था। सिंधुराज से अभिप्राय या तो सिंध के राजा या उक्त नाम के राजा से होगा, परंतु उसका ठीक पता नहीं लगा । उसने अपने पिता मंडस्लीक के नाम से मंडनेश नामक शिवालय और मठ वनवाया । उसके समय के चार शिलालेख अ से मिले हैं, जो एक ) देखो ऊपर पृष्ठ दो सौ सात थौर टिप्पण एक । पायाहेड़ा का शिलालेख, लोशून्य बत्तीस । राजपूताना म्यूज़ियम् की ईशून्य सशून्य एक हज़ार नौ सौ सोलह - सत्रह की रिपोर्ट, चालीस दो, लेससत्या दो । विजयराज - उसका सांधिविग्रहिक चालभ जाति के कायस्थ राजपाल का पुत्र वामन था । उसके समय के दो शिलालेख विशून्य संशून्य उन्नीस हज़ार छः सौ पचपन र उन्नीस हज़ार छः सौ साठ के मिले हैं। विजयराज के वंशजों के नामों का पता नहीं लगा, क्योंकि विजयराज के पीछे का कोई शिलालेख अव तक नहीं मिला। विशून्य संशून्य एक हज़ार दो सौ छत्तीस से कुछ पूर्व मेवाड़ के गुहिल राजा सामन्तसिंह मे, मेवाड़ का राज्य छूट जाने के पीछे वागड़ के बड़ौदे पर अपना अधिकार जमाया । तदनन्तर उसने तथा उसके वंशज ने क्रमशः सारा वागढ़ इन परमारों से छीन लिया । अव वागड़ के परमारों के वंश में सौंथ के राजा हैं । वागढ़ के परमारों की राजधानी उत्थूणक नगर थी । अव तो वह प्राचीन नगर नष्ट हो गया है और उसके पास श्रण गांव नया बसा है, परंतु परमारों के समय में वह वड़ा वैभवशाली नगर था। अभी वहा कई एक चड़े बड़े मंदिर खड़े हैं और कई एक को गिराकर उनके द्वार आदि को लोग उठा ले गये, जो दूर दूर के गांवों के नये मन्दिरों में लगे हुए देखने में आते हैं । अगा गांव का नया जैनमन्दिर भी बद्दी के पुराने मंदिरों से स्तंभ आदि लाकर खड़ा किया गया है । एक) राजपूताना म्यूजियम् की ईशून्य सशून्य एक हज़ार नौ सौ चौदह-पंद्रह की रिपोर्टर दस दो, लेग्यरया एक । इस शिलालेख के ऊपर का थाधा धश राजपूताना म्यूजियम् में सुरक्षित है । राजपूताना म्यूजियम् फी साठ सशून्य एक हज़ार छः सौ चौदह-पंद्रह की रिपोर्ट, दस दो, लेखसख्या तीन । वहीं, ईशून्य सशून्य एक हज़ार दो सौ सत्रह-अट्ठारह की रिपोर्ट यह शिलालेख राजपुताना म्यूजियम् में सुरक्षित है । लेखसंग्या ग
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सीतामढ़ी में डबल मर्डर हुआ है। गुरुवार देर रात घर पर चढ़कर अपराधियों ने पिता और पुत्र को चाकू गोदकर हत्या कर दी।
Double Murder In Sitamarhi : सीतामढ़ी में डबल मर्डर हुआ है। गुरुवार देर रात घर पर चढ़कर अपराधियों ने पिता और पुत्र की चाकू गोदकर हत्या कर दी। इतना ही नही बीच बचाव करने गई बेटी को भी बदमाशों ने चाकू से घायल कर दिया। जिसे अन्य परिजन और स्थानीय लोगों के सहयोग से अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। उक्त वारदात रीगा थाना इलाके के पिपरा गांव की है।
मृतक की पहचान आसनारायण दास और शिवम कुमार के रूप में की गई है। परिजनों का आरोप है कि गांव उदय दास अपने अन्य मित्रों के साथ घटना को अंजाम दिया। अपराधियों ने घर घुसकर आसनारायण दास को सोए अवस्था में चाकू मारी, फिर बचाने गए बेटे को भी चाकू घोंप दिया। इससे दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं आवाज सुनकर निकली बेटी के पीठ पर चाकू घोंप दिया। जख्मी हालत में भर्ती बेटी ने बताया कि कोचिंग जाने वक्त आरोपी उदय के द्वारा रास्ते में छेड़खानी की जाती थी। जिसके बाद परिजनों के शिकायत से नाराज चल रहा था। इसी बीच महावीरी झंडा के दौरान उदय व मृतक शिवम के साथ बकरे को लेकर विवाद हुआ। उसी दिन से उदय खफा चल रहा था। मौके के तलाश में लगे उदय ने गुरुवार की रात दोनो की हत्या कर दी।
घटना की सूचना पर रीगा थाना पुलिस घटनास्थल पहुंचकर शव कि पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया है। डबल मर्डर से इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस का कहना है कि मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य दो की तलाश में छापेमारी चल रही है। कुछ लोगों से पूछताछ चल रही है।
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सीतामढ़ी में डबल मर्डर हुआ है। गुरुवार देर रात घर पर चढ़कर अपराधियों ने पिता और पुत्र को चाकू गोदकर हत्या कर दी। Double Murder In Sitamarhi : सीतामढ़ी में डबल मर्डर हुआ है। गुरुवार देर रात घर पर चढ़कर अपराधियों ने पिता और पुत्र की चाकू गोदकर हत्या कर दी। इतना ही नही बीच बचाव करने गई बेटी को भी बदमाशों ने चाकू से घायल कर दिया। जिसे अन्य परिजन और स्थानीय लोगों के सहयोग से अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। उक्त वारदात रीगा थाना इलाके के पिपरा गांव की है। मृतक की पहचान आसनारायण दास और शिवम कुमार के रूप में की गई है। परिजनों का आरोप है कि गांव उदय दास अपने अन्य मित्रों के साथ घटना को अंजाम दिया। अपराधियों ने घर घुसकर आसनारायण दास को सोए अवस्था में चाकू मारी, फिर बचाने गए बेटे को भी चाकू घोंप दिया। इससे दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं आवाज सुनकर निकली बेटी के पीठ पर चाकू घोंप दिया। जख्मी हालत में भर्ती बेटी ने बताया कि कोचिंग जाने वक्त आरोपी उदय के द्वारा रास्ते में छेड़खानी की जाती थी। जिसके बाद परिजनों के शिकायत से नाराज चल रहा था। इसी बीच महावीरी झंडा के दौरान उदय व मृतक शिवम के साथ बकरे को लेकर विवाद हुआ। उसी दिन से उदय खफा चल रहा था। मौके के तलाश में लगे उदय ने गुरुवार की रात दोनो की हत्या कर दी। घटना की सूचना पर रीगा थाना पुलिस घटनास्थल पहुंचकर शव कि पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया है। डबल मर्डर से इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस का कहना है कि मामले में पाँच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य दो की तलाश में छापेमारी चल रही है। कुछ लोगों से पूछताछ चल रही है।
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CM Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि लोगों को चिकित्सा के लिए अब मजबूरी में बिहार से बाहर जाने की जरूरत नहीं है. इसे ध्यान में रखते हुए पूरे प्रदेश में इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है.
मुजफ्फरपुरः CM Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि लोगों को चिकित्सा के लिए अब मजबूरी में बिहार से बाहर जाने की जरूरत नहीं है. इसे ध्यान में रखते हुए पूरे प्रदेश में इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है. ये बातें मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच परिसर स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में बुद्धा ऑपरेशन थियेटर कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन समारोह में कही. मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू आदि का निरीक्षण किया और मरीजों को दी जाने वाली स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की जानकारी ली.
निरीक्षण के क्रम में उन्होंने कहा कि यहां बहुत अच्छा काम हुआ है. मुख्यमंत्री ने अस्पताल में इलाजरत सुनीता देवी को बेहतर इलाज के लिए मुख्यमंत्री चिकित्सा राहत कोष से 5 लाख रुपये की सहायता राशि भी दी. मुख्यमंत्री ने अनुसंधान केंद्र में नर्सिंग छात्रावास का शिलान्यास किया एवं विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां पर भर्ती मरीजों को हर प्रकार की सुविधा मिले, चिकित्सकों एवं अस्पतालकर्मियों के आवासन की बेहतर सुविधा उपलब्ध हो, इसके लिए राज्य सरकार हर संभव मदद करने के लिए तैयार है.
मुख्यमंत्री ने होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर में निर्माणाधीन सेंटर फॉर कैंसर एपिडिमियोलॉजी यूनिट का निरीक्षण किया. निरीक्षण के क्रम में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य प्रत्यय अमृत ने निर्माणाधीन एपिडिमियोलॉजी यूनिट की उपयोगिता एवं मरीजों को दी जानेवाली स्वास्थ्य संबंधी सुविधा के संबंध में मुख्यमंत्री को विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस कैंसर एपिडिमियोलॉजी यूनिट को बंकरनुमा बनाया जा रहा है जिसकी दीवारें काफी मोटी है ताकि कैंसर पीड़ित मरीजों को दी जानेवाली थेरेपी का दुष्प्रभाव बाहर न पड़े.
इसके बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां जो भी निर्माण कार्य चल रहा है यह इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा. अब इलाज के लिए लोगों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पढ़ेगी. मेडिकल कॉलेज का भी विस्तार करेंगे, यहां बेडों की संख्या बढ़ाकर 2500 की जाएगी. मुजफ्फरपुर के गायघाट में नाव हादसे को लेकर पूछे गए पत्रकारों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना बहुत ही दुखद है राहत एवं बचाव कार्य को लेकर हमने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है. पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद दी जाएगी.
यह भी पढ़ें- 'नालंदा विश्वविद्यालय का पुनरुथान देख खिलजी को मानने वालों की फट रही है छाती'
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CM Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि लोगों को चिकित्सा के लिए अब मजबूरी में बिहार से बाहर जाने की जरूरत नहीं है. इसे ध्यान में रखते हुए पूरे प्रदेश में इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है. मुजफ्फरपुरः CM Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि लोगों को चिकित्सा के लिए अब मजबूरी में बिहार से बाहर जाने की जरूरत नहीं है. इसे ध्यान में रखते हुए पूरे प्रदेश में इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है. ये बातें मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच परिसर स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में बुद्धा ऑपरेशन थियेटर कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन समारोह में कही. मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू आदि का निरीक्षण किया और मरीजों को दी जाने वाली स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की जानकारी ली. निरीक्षण के क्रम में उन्होंने कहा कि यहां बहुत अच्छा काम हुआ है. मुख्यमंत्री ने अस्पताल में इलाजरत सुनीता देवी को बेहतर इलाज के लिए मुख्यमंत्री चिकित्सा राहत कोष से पाँच लाख रुपये की सहायता राशि भी दी. मुख्यमंत्री ने अनुसंधान केंद्र में नर्सिंग छात्रावास का शिलान्यास किया एवं विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां पर भर्ती मरीजों को हर प्रकार की सुविधा मिले, चिकित्सकों एवं अस्पतालकर्मियों के आवासन की बेहतर सुविधा उपलब्ध हो, इसके लिए राज्य सरकार हर संभव मदद करने के लिए तैयार है. मुख्यमंत्री ने होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर में निर्माणाधीन सेंटर फॉर कैंसर एपिडिमियोलॉजी यूनिट का निरीक्षण किया. निरीक्षण के क्रम में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य प्रत्यय अमृत ने निर्माणाधीन एपिडिमियोलॉजी यूनिट की उपयोगिता एवं मरीजों को दी जानेवाली स्वास्थ्य संबंधी सुविधा के संबंध में मुख्यमंत्री को विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस कैंसर एपिडिमियोलॉजी यूनिट को बंकरनुमा बनाया जा रहा है जिसकी दीवारें काफी मोटी है ताकि कैंसर पीड़ित मरीजों को दी जानेवाली थेरेपी का दुष्प्रभाव बाहर न पड़े. इसके बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां जो भी निर्माण कार्य चल रहा है यह इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा. अब इलाज के लिए लोगों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पढ़ेगी. मेडिकल कॉलेज का भी विस्तार करेंगे, यहां बेडों की संख्या बढ़ाकर दो हज़ार पाँच सौ की जाएगी. मुजफ्फरपुर के गायघाट में नाव हादसे को लेकर पूछे गए पत्रकारों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना बहुत ही दुखद है राहत एवं बचाव कार्य को लेकर हमने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है. पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद दी जाएगी. यह भी पढ़ें- 'नालंदा विश्वविद्यालय का पुनरुथान देख खिलजी को मानने वालों की फट रही है छाती'
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रामभवन निवासी महालक्ष्मी डेरा गुरुकुल के रूप में हुई है।
आरोपी पिछले करीब 10 साल से महिला के पडोस में रहता है। महिला छेडसाड़ की सूचना थाना में 24 जुलाई दी। सूचना पर तुरन्त कार्रवाई करते हुए थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरु कर दी।
मामले में कार्रवाई महिला मुख्य द्वारा की गई। पुलिस टीम ने आरोपी को अपने सूत्रों से प्राप्त सूचना से आरोपी के घर महालक्ष्मी डेरा से गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम के द्वारा मामले में पूछताछ के बाद आरोपी को अदालत में पेश कर उचित कानूनी कार्रवाई की गई।
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रामभवन निवासी महालक्ष्मी डेरा गुरुकुल के रूप में हुई है। आरोपी पिछले करीब दस साल से महिला के पडोस में रहता है। महिला छेडसाड़ की सूचना थाना में चौबीस जुलाई दी। सूचना पर तुरन्त कार्रवाई करते हुए थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरु कर दी। मामले में कार्रवाई महिला मुख्य द्वारा की गई। पुलिस टीम ने आरोपी को अपने सूत्रों से प्राप्त सूचना से आरोपी के घर महालक्ष्मी डेरा से गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम के द्वारा मामले में पूछताछ के बाद आरोपी को अदालत में पेश कर उचित कानूनी कार्रवाई की गई।
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आरके पुरम थाना पुलिस की ओर में चांदी जब्ती की यह अब तक सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
कोटा. पुलिस (Police) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 89 किलो चांदी बरामद (Silver recovered) की है. पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार (Arrested) किया है. बरामद की गई चांदी उदयपुर से उड़ीसा (Udaipur to Orissa) ले जाई जा रही थी. पुलिस आरोपियों से पूछताछ (Inquiry) में जुटी है. आरोपियों को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया.
जानकारी के अनुसार कार्रवाई आरके पुरम थाना पुलिस ने रविवार को देर रात की. पुलिस अधीक्षक के विशेष निर्देशों पर इलाके में नाकाबंदी की जा रही थी. इसी दौरान नयागांव पुलिया के नजदीक हैंगिंग ब्रिज की तरफ से कोटा की ओर से एक कार आई. कार को चेकिंग के लिए रोका गया. उसमें 5 लोग सवार थे. तलाशी के दौरान कार से 89 किलो चांदी बरामद हुई. पूछताछ में पांचों लोग इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. इस पर पुलिस ने चांदी को जब्त कर पांचों को गिरफ्तार कर लिया.
पूछताछ में सामने आया कि यह चांदी उदयपुर से लाई गई थी और उड़ीसा के भुवनेश्वर ले जाई जा रही थी. आरके पुरम थाना पुलिस की ओर में चांदी जब्ती की यह अब तक सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है. बरामद चांदी की कीमत करीब 40 लाख रुपए से अधिक है. पकड़े गए आरोपियों में नारायण सिंह, गोपाल और अंकित चित्तौड़गढ़ जिले के रहने वाले हैं. जबकि दो अन्य मुकेश और अशोक उदयपुर जिले के रहने वाले हैं. आरोपियों को सोमवार शाम को कोर्ट में पेश किया गया.
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पूर्व में भी कई बार अवैध रूप से ले जाई जा रहे सोने-चांदी को पकड़ा गया है. जयपुर एयरपोर्ट पर गत साल के दौरान सोने की तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं. गत एक वर्ष के दौरान इनमें काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
(रिपोर्ट- ओमप्रकाश मारू)
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आरके पुरम थाना पुलिस की ओर में चांदी जब्ती की यह अब तक सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है. फोटो : न्यूज अट्ठारह राजस्थान । कोटा. पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नवासी किलो चांदी बरामद की है. पुलिस ने इस मामले में पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. बरामद की गई चांदी उदयपुर से उड़ीसा ले जाई जा रही थी. पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है. आरोपियों को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया. जानकारी के अनुसार कार्रवाई आरके पुरम थाना पुलिस ने रविवार को देर रात की. पुलिस अधीक्षक के विशेष निर्देशों पर इलाके में नाकाबंदी की जा रही थी. इसी दौरान नयागांव पुलिया के नजदीक हैंगिंग ब्रिज की तरफ से कोटा की ओर से एक कार आई. कार को चेकिंग के लिए रोका गया. उसमें पाँच लोग सवार थे. तलाशी के दौरान कार से नवासी किलो चांदी बरामद हुई. पूछताछ में पांचों लोग इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. इस पर पुलिस ने चांदी को जब्त कर पांचों को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में सामने आया कि यह चांदी उदयपुर से लाई गई थी और उड़ीसा के भुवनेश्वर ले जाई जा रही थी. आरके पुरम थाना पुलिस की ओर में चांदी जब्ती की यह अब तक सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है. बरामद चांदी की कीमत करीब चालीस लाख रुपए से अधिक है. पकड़े गए आरोपियों में नारायण सिंह, गोपाल और अंकित चित्तौड़गढ़ जिले के रहने वाले हैं. जबकि दो अन्य मुकेश और अशोक उदयपुर जिले के रहने वाले हैं. आरोपियों को सोमवार शाम को कोर्ट में पेश किया गया. उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पूर्व में भी कई बार अवैध रूप से ले जाई जा रहे सोने-चांदी को पकड़ा गया है. जयपुर एयरपोर्ट पर गत साल के दौरान सोने की तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं. गत एक वर्ष के दौरान इनमें काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. .
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हाथरस की सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता की मौत को लेकर जारी सियासत और हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। राष्ट्रीय राजधानी के लोगों ने शुक्रवार को 2012 के दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म मामले की यादों को ताजा करते हुए हाथरस में हुई भयानक दुष्कर्म की वीभत्स घटना के विरोध में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया।
जंतर मंतर पर एकत्रित होने वाले समूहों में चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के सदस्य शामिल रहे, जो कि दुष्कर्म घटना के विरोध में हाथों में पोस्टर लेकर पहुंचे थे। उन्होंने हाथरस पीड़िता के लिए न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए।
भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने कहा, यह प्रशासन नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का काम है, जिन्होंने मीडिया और राष्ट्रीय व राजनीतिक नेताओं सहित सभी के लिए प्रवेश वर्जित कर दिया है। मैं सभी सफाई कर्मचारियों से काम बंद करने और इस सरकार को गंदगी में छोड़ने की अपील करता हूं।
उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर दलित लड़की के कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के बाद रात में हाथरस प्रशासन द्वारा हड़बड़ी में परिजनों की गैर-मौजूदगी में उसका दाह संस्कार करने के तरीके पर निशाना साधा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे की मांग करते हुए आजाद ने कहा कि यह घटना 2012 के दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म मामले की दर्दनाक यादें वापस ले आई है।
इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गुरुवार को हाथरस की घटना का संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। राज्य सरकार ने गुरुवार को कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली 19 वर्षीय लड़की का दुष्कर्म नहीं हुआ है। कानून एवं व्यवस्था एडीजी प्रशांत कुमार ने दावा किया कि फोरिंसिक रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की मौत का कारण गर्दन पर आई गहरी चोट है।
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हाथरस की सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता की मौत को लेकर जारी सियासत और हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। राष्ट्रीय राजधानी के लोगों ने शुक्रवार को दो हज़ार बारह के दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म मामले की यादों को ताजा करते हुए हाथरस में हुई भयानक दुष्कर्म की वीभत्स घटना के विरोध में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। जंतर मंतर पर एकत्रित होने वाले समूहों में चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के सदस्य शामिल रहे, जो कि दुष्कर्म घटना के विरोध में हाथों में पोस्टर लेकर पहुंचे थे। उन्होंने हाथरस पीड़िता के लिए न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए। भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने कहा, यह प्रशासन नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का काम है, जिन्होंने मीडिया और राष्ट्रीय व राजनीतिक नेताओं सहित सभी के लिए प्रवेश वर्जित कर दिया है। मैं सभी सफाई कर्मचारियों से काम बंद करने और इस सरकार को गंदगी में छोड़ने की अपील करता हूं। उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर दलित लड़की के कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के बाद रात में हाथरस प्रशासन द्वारा हड़बड़ी में परिजनों की गैर-मौजूदगी में उसका दाह संस्कार करने के तरीके पर निशाना साधा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे की मांग करते हुए आजाद ने कहा कि यह घटना दो हज़ार बारह के दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म मामले की दर्दनाक यादें वापस ले आई है। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गुरुवार को हाथरस की घटना का संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। राज्य सरकार ने गुरुवार को कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली उन्नीस वर्षीय लड़की का दुष्कर्म नहीं हुआ है। कानून एवं व्यवस्था एडीजी प्रशांत कुमार ने दावा किया कि फोरिंसिक रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की मौत का कारण गर्दन पर आई गहरी चोट है।
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जवाहर कला केन्द्र की आर्ट गैलेरीज में आयोजित नयापुन एग्जीबिशन में स्टूडेंट्स की क्रिएटिविटी ने सभी का ध्यान खींचा। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के डिजाइन स्टूडेंट की बनाई कलाकृतियों ने खूब सुर्खियां बटोरी। तीन दिवसीय इन प्रदर्शनियों में 60 छात्र-छात्राओं ने कुल 9 पोस्टर और 17 मॉडल्स से दर्शकों को आकर्षित किया। यहां प्रदर्शित पोस्टर में कुछ ऐसे वनलाइनर थे, जिन्होंने हंसाया भी और एक मैसेज भी दिया। यहां पोस्टर्स को ह्यूमर को क्रिएटिव डिजाइन के जरिए प्रदर्शित किया गया।
इस प्रदर्शनी में सुनने में एक जैसे पर अर्थ में भिन्न हिंदी और अंग्रेजी शब्दों के कुशल प्रयोग से दर्शकों को हंसाने का प्रयास किया गया। शब्दों को जोड़-घटाकर देखने पर उसमें छुपा हास्य और व्यंग उजागर हुआ, जिसने लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया। इस प्रदर्शनी के संरक्षक और पेंसिल बॉक्स डिजाइन के फाउंडर अनुराग. एस ने बताया कि यह प्रदर्शनी भारत की इस भाषा को जीवंत रखने मे मदद करेगी। इस एग्जीबिशन के लिए जेईसीआरसी स्कूल ऑफ डिजाइन ने 'द पैलेस स्कूल' और 'अन्नत्य स्कूल' को भी जोडा है।
जेईसीआरसी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने बताया क ऐसी प्रदर्शनियां जनता के लिए कला और विचारों को प्रस्तुत करने के लिए उचित माध्यम है। डीन शिवानी कौशिक ने इसे कला को प्रदर्शित करने और इसे प्रासंगिक बनाने का अहम मौका बताया है। इस तरह की प्रदर्शनियां छात्रों को थ्योरी से हटकर अपने प्रैक्टिकल नॉलेज का प्रयोग करने में एक अहम भूमिका निभाती हैं और उसके साथ ह्यूमर और संस्कृत का प्रसार करना वाकई एक सराहनीय प्रयास हैं।
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जवाहर कला केन्द्र की आर्ट गैलेरीज में आयोजित नयापुन एग्जीबिशन में स्टूडेंट्स की क्रिएटिविटी ने सभी का ध्यान खींचा। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के डिजाइन स्टूडेंट की बनाई कलाकृतियों ने खूब सुर्खियां बटोरी। तीन दिवसीय इन प्रदर्शनियों में साठ छात्र-छात्राओं ने कुल नौ पोस्टर और सत्रह मॉडल्स से दर्शकों को आकर्षित किया। यहां प्रदर्शित पोस्टर में कुछ ऐसे वनलाइनर थे, जिन्होंने हंसाया भी और एक मैसेज भी दिया। यहां पोस्टर्स को ह्यूमर को क्रिएटिव डिजाइन के जरिए प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी में सुनने में एक जैसे पर अर्थ में भिन्न हिंदी और अंग्रेजी शब्दों के कुशल प्रयोग से दर्शकों को हंसाने का प्रयास किया गया। शब्दों को जोड़-घटाकर देखने पर उसमें छुपा हास्य और व्यंग उजागर हुआ, जिसने लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया। इस प्रदर्शनी के संरक्षक और पेंसिल बॉक्स डिजाइन के फाउंडर अनुराग. एस ने बताया कि यह प्रदर्शनी भारत की इस भाषा को जीवंत रखने मे मदद करेगी। इस एग्जीबिशन के लिए जेईसीआरसी स्कूल ऑफ डिजाइन ने 'द पैलेस स्कूल' और 'अन्नत्य स्कूल' को भी जोडा है। जेईसीआरसी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने बताया क ऐसी प्रदर्शनियां जनता के लिए कला और विचारों को प्रस्तुत करने के लिए उचित माध्यम है। डीन शिवानी कौशिक ने इसे कला को प्रदर्शित करने और इसे प्रासंगिक बनाने का अहम मौका बताया है। इस तरह की प्रदर्शनियां छात्रों को थ्योरी से हटकर अपने प्रैक्टिकल नॉलेज का प्रयोग करने में एक अहम भूमिका निभाती हैं और उसके साथ ह्यूमर और संस्कृत का प्रसार करना वाकई एक सराहनीय प्रयास हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नई दिल्ली/दि. 13- गत वर्ष केंद्रीय निर्वाचन आयोग में शिवसेना पार्टी के नाम और पार्टी के चुनावी चिन्ह को लेकर कुछ ही मिनटों के भीतर सुनवाई खत्म करते हुए इसे आगामी जनवरी माह तक के लिए टाल दिया गया था. कुछ ऐसा ही आज इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भी दिखाई दिया. जब इस सुनवाई को कुछ ही मिनट के भीतर खत्म करते हुए सुनवाई को आगामी 10 जनवरी तक के लिए टाल दिया गया.
बता दें कि, महाराष्ट्र में चल रहे सत्ता संघर्ष को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई चल रही है. इस समय ठाकरे गुट की ओर से इस मामले को 7 न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सामने चलाए जाने की मांग की गई. परंतु न्यायालय ने इस मांग को फिलहाल खारिज कर दिया. ऐसे में अब शिवसेना में बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे सहित अन्य बागी विधायकों पर अपात्रता की कार्रवाई के साथ ही राज्यपाल एवं विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों के दायरे को लेकर चल रहे इस मुकदमे की अगली सुनवाई आगामी 10 दिसंबर को होगी.
ठाकरे गुट वाली शिवसेना की ओर से कपील सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से इस मुकदमे को बडी खंडपीठ में चलाने का निवेदन दिया. जिसे खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग विस्तृत स्वरुप में नियमानुसार करने का निर्देश दिया. ऐसा में अब कपील सिब्बल द्बारा यह मांग लिखित तौर पर अदालत के सामने रखी जाएगी. वहीं कपील सिब्बल द्बारा रखी गई मांग को खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई को अगली तारीख तक स्थगित कर दिया और अगली सुनवाई आगामी 10 जनवरी को करने की बात कही.
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नई दिल्ली/दि. तेरह- गत वर्ष केंद्रीय निर्वाचन आयोग में शिवसेना पार्टी के नाम और पार्टी के चुनावी चिन्ह को लेकर कुछ ही मिनटों के भीतर सुनवाई खत्म करते हुए इसे आगामी जनवरी माह तक के लिए टाल दिया गया था. कुछ ऐसा ही आज इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भी दिखाई दिया. जब इस सुनवाई को कुछ ही मिनट के भीतर खत्म करते हुए सुनवाई को आगामी दस जनवरी तक के लिए टाल दिया गया. बता दें कि, महाराष्ट्र में चल रहे सत्ता संघर्ष को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई चल रही है. इस समय ठाकरे गुट की ओर से इस मामले को सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सामने चलाए जाने की मांग की गई. परंतु न्यायालय ने इस मांग को फिलहाल खारिज कर दिया. ऐसे में अब शिवसेना में बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे सहित अन्य बागी विधायकों पर अपात्रता की कार्रवाई के साथ ही राज्यपाल एवं विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों के दायरे को लेकर चल रहे इस मुकदमे की अगली सुनवाई आगामी दस दिसंबर को होगी. ठाकरे गुट वाली शिवसेना की ओर से कपील सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से इस मुकदमे को बडी खंडपीठ में चलाने का निवेदन दिया. जिसे खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग विस्तृत स्वरुप में नियमानुसार करने का निर्देश दिया. ऐसा में अब कपील सिब्बल द्बारा यह मांग लिखित तौर पर अदालत के सामने रखी जाएगी. वहीं कपील सिब्बल द्बारा रखी गई मांग को खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई को अगली तारीख तक स्थगित कर दिया और अगली सुनवाई आगामी दस जनवरी को करने की बात कही.
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Hariyali teej 2021 : आज 11 अगस्त 2021, दिन बुधवार को हरियाली तीज (Hariyali teej) का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत (Nirjala Vrat) रखती हैं और अगले दिन पूजा के बाद इस व्रत का पारण करती हैं। वैसे तो सालभर में चार तीज होती हैं, लेकिन सभी में हरियाली तीज का महत्व सबसे अधिक है। इस व्रत को कुंवारी लड़कियों द्वारा भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए किया जाता है। तो आइए हरियाली तीज के दिन आज जानते हैं कि, इस व्रत में कौन सी पूजन सामग्री (Pujan Samagri) इस्तेमाल की जाती है और इस दिन मां पार्वती (Maa Parvati) और भगवान शिव (Lord Shiva) का पूजन कैसे किया जाता है।
Hariyali teej 2021 : आज 11 अगस्त 2021, दिन बुधवार को हरियाली तीज (Hariyali teej) का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत (Nirjala Vrat) रखती हैं और अगले दिन पूजा के बाद इस व्रत का पारण करती हैं। वैसे तो सालभर में चार तीज होती हैं, लेकिन सभी में हरियाली तीज का महत्व सबसे अधिक है। इस व्रत को कुंवारी लड़कियों द्वारा भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए किया जाता है। तो आइए हरियाली तीज के दिन आज जानते हैं कि, इस व्रत में कौन सी पूजन सामग्री (Pujan Samagri) इस्तेमाल की जाती है और इस दिन मां पार्वती (Maa Parvati) और भगवान शिव (Lord Shiva) का पूजन कैसे किया जाता है।
इस दिन व्रत करने वाली स्त्रियां सूर्योदय से पहले उठकर स्नान और श्रृंगार करती हैं। पूजा के लिए केले के पत्ते का मंडप बनाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनायी जाती है और पार्वती जी को श्रृंगार कराकर सुहाग का सारा सामान चढ़ाया जाता है। तथा इस दिन पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। उसके बाद रात्रि में भजन-कीर्तन किया जाता है और शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनी जाती है। इसके उपरांत प्रातःकाल स्नान के बाद पूजन कर श्रृंगार सामग्री को किसी सुहागन महिला को दान कर व्रत खोला जाता है।
हरियाली तीज की पूजन सामग्री इस प्रकार है। गीली मिट्टी, बेलपत्र, शमी का पत्र, इसके अलावा केले का पत्ता, धतूरे का फूल, आक का फूल, जनेऊ, वस्त्र, मौसमी फल-फूल, नारियल, कलश, नीम, चंदन, घी, कपूर, कुमकुम, दीपक, दही, चीनी, गुड़ और शहद। ये सभी पूजन सामग्री हरियाली तीज के दिन प्रयोग में लाई जाती हैं।
भारत में हरियाली तीज को लोग बहुत ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाते हैं।
मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, काजल, बिन्दी, कुमकुम, सिन्दूर, कंघी, माहुर, सुहाग पिटारी आदि चीजों का मां पार्वती के श्रृंगार में प्रयोग किया जाता है।
हरियाली तीज व्रत माता गौरी और भगवान शंकर को पूरी तरह समर्पित होता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह को स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें और सभी पूजन सामग्री को एक साथ एकत्रित करके पूजाघर में कलश की स्थापना करके उस पर मां पार्वती और शिव की प्रतिमा स्थापित करें। सुहाग की सामग्री माता पार्वती को अर्पित करें। तथा भगवान शिव को वस्त्र अर्पित करें और हरियाली तीज की व्रत कथा सुनें। तथा उसके बाद भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिवजी की आरती उतारें। तथा रात को जागरण करें। फिर अगले दिन सुबह स्नान कर माता पार्वती का पूजन करें और भोग लगाने के बाद ककड़ी खाकर व्रत का पारण करें। पार्वती जी को अर्पित की गई श्रृंगार सामग्री को सुहागिन महिला अथवा किसी पंडित को दान कर दें।
(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi. com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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Hariyali teej दो हज़ार इक्कीस : आज ग्यारह अगस्त दो हज़ार इक्कीस, दिन बुधवार को हरियाली तीज का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और अगले दिन पूजा के बाद इस व्रत का पारण करती हैं। वैसे तो सालभर में चार तीज होती हैं, लेकिन सभी में हरियाली तीज का महत्व सबसे अधिक है। इस व्रत को कुंवारी लड़कियों द्वारा भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए किया जाता है। तो आइए हरियाली तीज के दिन आज जानते हैं कि, इस व्रत में कौन सी पूजन सामग्री इस्तेमाल की जाती है और इस दिन मां पार्वती और भगवान शिव का पूजन कैसे किया जाता है। Hariyali teej दो हज़ार इक्कीस : आज ग्यारह अगस्त दो हज़ार इक्कीस, दिन बुधवार को हरियाली तीज का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और अगले दिन पूजा के बाद इस व्रत का पारण करती हैं। वैसे तो सालभर में चार तीज होती हैं, लेकिन सभी में हरियाली तीज का महत्व सबसे अधिक है। इस व्रत को कुंवारी लड़कियों द्वारा भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए किया जाता है। तो आइए हरियाली तीज के दिन आज जानते हैं कि, इस व्रत में कौन सी पूजन सामग्री इस्तेमाल की जाती है और इस दिन मां पार्वती और भगवान शिव का पूजन कैसे किया जाता है। इस दिन व्रत करने वाली स्त्रियां सूर्योदय से पहले उठकर स्नान और श्रृंगार करती हैं। पूजा के लिए केले के पत्ते का मंडप बनाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनायी जाती है और पार्वती जी को श्रृंगार कराकर सुहाग का सारा सामान चढ़ाया जाता है। तथा इस दिन पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। उसके बाद रात्रि में भजन-कीर्तन किया जाता है और शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनी जाती है। इसके उपरांत प्रातःकाल स्नान के बाद पूजन कर श्रृंगार सामग्री को किसी सुहागन महिला को दान कर व्रत खोला जाता है। हरियाली तीज की पूजन सामग्री इस प्रकार है। गीली मिट्टी, बेलपत्र, शमी का पत्र, इसके अलावा केले का पत्ता, धतूरे का फूल, आक का फूल, जनेऊ, वस्त्र, मौसमी फल-फूल, नारियल, कलश, नीम, चंदन, घी, कपूर, कुमकुम, दीपक, दही, चीनी, गुड़ और शहद। ये सभी पूजन सामग्री हरियाली तीज के दिन प्रयोग में लाई जाती हैं। भारत में हरियाली तीज को लोग बहुत ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाते हैं। मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, काजल, बिन्दी, कुमकुम, सिन्दूर, कंघी, माहुर, सुहाग पिटारी आदि चीजों का मां पार्वती के श्रृंगार में प्रयोग किया जाता है। हरियाली तीज व्रत माता गौरी और भगवान शंकर को पूरी तरह समर्पित होता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह को स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें और सभी पूजन सामग्री को एक साथ एकत्रित करके पूजाघर में कलश की स्थापना करके उस पर मां पार्वती और शिव की प्रतिमा स्थापित करें। सुहाग की सामग्री माता पार्वती को अर्पित करें। तथा भगवान शिव को वस्त्र अर्पित करें और हरियाली तीज की व्रत कथा सुनें। तथा उसके बाद भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिवजी की आरती उतारें। तथा रात को जागरण करें। फिर अगले दिन सुबह स्नान कर माता पार्वती का पूजन करें और भोग लगाने के बाद ककड़ी खाकर व्रत का पारण करें। पार्वती जी को अर्पित की गई श्रृंगार सामग्री को सुहागिन महिला अथवा किसी पंडित को दान कर दें।
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ललित ने कहा कि कल के समय में आप देखेंगे कि द्विपक्षीय क्रिकेट समाप्त हो जाएगा। ऐसे में बड़ी सीरीज तीन या चार साल में केवल एक बार होगी, जैसे विश्व कप टूर्नामेंट होता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) एक अप्रासंगिक संगठन बन जाएगा। इसमें केवल वही लोग रह जाएंगे, जिनके पास कोई ताकत नहीं होगी।
वे भविष्य में चिल्लाकर बीसीसीआई द्वारा आईपीएल के विस्तार किए जाने पर भारत को आईसीसी से बाहर करने की धमकी दे सकते हैं। हालांकि, भारत के पास अपने पैरों पर खड़े होने की क्षमता है। उसके पास एक ऐसी घरेलू लीग है, जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की तुलना में 20 गुना अधिक चलेगी।
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ललित ने कहा कि कल के समय में आप देखेंगे कि द्विपक्षीय क्रिकेट समाप्त हो जाएगा। ऐसे में बड़ी सीरीज तीन या चार साल में केवल एक बार होगी, जैसे विश्व कप टूर्नामेंट होता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद एक अप्रासंगिक संगठन बन जाएगा। इसमें केवल वही लोग रह जाएंगे, जिनके पास कोई ताकत नहीं होगी। वे भविष्य में चिल्लाकर बीसीसीआई द्वारा आईपीएल के विस्तार किए जाने पर भारत को आईसीसी से बाहर करने की धमकी दे सकते हैं। हालांकि, भारत के पास अपने पैरों पर खड़े होने की क्षमता है। उसके पास एक ऐसी घरेलू लीग है, जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की तुलना में बीस गुना अधिक चलेगी।
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किंग्स इलेवन पंजाब की टीम इस सीजन के प्लेऑफ में पहुंचने में नाकाम रही। पंजाब के मेंटोर वीरेंद्र सहवाग भले ही अपनी टीम को फाइनल में पहुंचाने में कामयाब नहीं हो पाए हों लेकिन बतौर बल्लेबाज वह यह कारनामा कर चुके हैं। 2014 में आज के दिन ही उन्होंने तूफानी शतक जड़ टीम को फाइनल का टिकट दिलाया था।
वीरेंद्र सहवाग को एक मैच विनर बल्लेबाज माना जाता था। अपनी विस्फोटक पारी के सहवाग ने इंटरनेशनल क्रिकेट में ना जानें कितनी टीम का काम बिगाड़ा है। सहवाग ने आज के दिन ही चार साल पहले एक ऐसी पारी खेली थी जो किंग्स इलेवन पंजाब के इतिहास में दर्ज हो गया।
साल 2014 के दूसरे क्वालीफायर मुकाबले में किंग्स इलेवन पंजाब का सामना चेन्नई सुपर किंग्स के साथ हुआ था। इस मैच में वीरेंद्र सहवाग ने महज 58 गेंद पर 12 चौके और 8 छक्के की मदद से शानदार 122 रन की पारी खेली थी। यह सहवाग का दूसरा आईपीएल शतक था।
आईपीएल के इस अहम मुकाबले में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला किया था। पंजाब ने सहवाग के शतक की बदौलत 226 रन का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया था। इस मैच में चेन्नई की टीम को 24 रन से हार का सामना करना पड़ा था। चेन्नई की तरफ से जोरदार पारी खेलने के बाद भी कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और सुरेश रैना टीम को जीत नहीं दिला पाए। रैना ने 87 जबकि धोनी ने नाबाद 42 रन बनाए थे।
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किंग्स इलेवन पंजाब की टीम इस सीजन के प्लेऑफ में पहुंचने में नाकाम रही। पंजाब के मेंटोर वीरेंद्र सहवाग भले ही अपनी टीम को फाइनल में पहुंचाने में कामयाब नहीं हो पाए हों लेकिन बतौर बल्लेबाज वह यह कारनामा कर चुके हैं। दो हज़ार चौदह में आज के दिन ही उन्होंने तूफानी शतक जड़ टीम को फाइनल का टिकट दिलाया था। वीरेंद्र सहवाग को एक मैच विनर बल्लेबाज माना जाता था। अपनी विस्फोटक पारी के सहवाग ने इंटरनेशनल क्रिकेट में ना जानें कितनी टीम का काम बिगाड़ा है। सहवाग ने आज के दिन ही चार साल पहले एक ऐसी पारी खेली थी जो किंग्स इलेवन पंजाब के इतिहास में दर्ज हो गया। साल दो हज़ार चौदह के दूसरे क्वालीफायर मुकाबले में किंग्स इलेवन पंजाब का सामना चेन्नई सुपर किंग्स के साथ हुआ था। इस मैच में वीरेंद्र सहवाग ने महज अट्ठावन गेंद पर बारह चौके और आठ छक्के की मदद से शानदार एक सौ बाईस रन की पारी खेली थी। यह सहवाग का दूसरा आईपीएल शतक था। आईपीएल के इस अहम मुकाबले में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला किया था। पंजाब ने सहवाग के शतक की बदौलत दो सौ छब्बीस रन का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया था। इस मैच में चेन्नई की टीम को चौबीस रन से हार का सामना करना पड़ा था। चेन्नई की तरफ से जोरदार पारी खेलने के बाद भी कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और सुरेश रैना टीम को जीत नहीं दिला पाए। रैना ने सत्तासी जबकि धोनी ने नाबाद बयालीस रन बनाए थे।
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दमयंती के पुनर्विवाह का अयोजन
दमयंती पर पहले ही लुब्ध था । उस समय वह उसे नहीं मिल सकी, तो अब वह उसे प्राप्त करने अवश्य ही आएगा । और यदि कूबड़ा स्वयं नल होगा, तो दमयंती का पुनविवाह सुन कर, विचलित हो कर साथ ही आएगा । फिर वह नहीं रुक सकेगा । दूसरी बात यह कि नल ही एक ऐसा व्यक्ति है जो अश्व की विशेषता तथा हृदय जानता है । थोड़े समय में लम्वा मार्ग पार करने का सामर्थ्य नल में ही है । इससे भी उसकी पहिचान हो सकेगी । राजा ने पुत्री को अपनी योजना बताई और एक विश्वस्त दूत के साथ राजा दधिपर्ण को, दमयंती के स्वयंवर में सम्मिलित होने का आमन्त्रण दिया । आमन्त्रण में स्वयंवर का समय इतना निकट बताया कि राजा, तत्काल चल दे और रथ-चालक अत्यंत निपुण हो तथा घोड़े शीघ्रगामी हो, तो भी पहुँचना कठिन था । आमन्त्रण पा कर पहले तो दधिपर्ण प्रसन्न हुआ । उसने सोचा - यह दैव की अनुकूलता है कि निष्फल हुआ मनोरथ, अकल्पित रूप से अनायास ही सफल एवं सिद्ध हो रहा है । उसके हृदय में हर्प का आवेग उत्पन्न हुआ । किंतु तत्काल ही वह निराशा के झूले में झूलने लगा । 'पंचमी तो कल है और स्थान सैकड़ों योजन दूर है । जिस मार्ग को सन्देशवाहक कई दिनों चल कर पहुँच सका, उसे मैं डेढ़ दिन में कैसे पूरा कर सकूंगा ।' राजा, चिन्ता-सागर में निमग्न हो गया और उच्चाटन के कारण करवट बदलने लगा ।
विदर्भ के दूत से दमयंती के पुनर्लग्न की बात सुन कर नल के हृदय पर वज्रपात के समान आघात लगा । उसका हृदय कुंठित हो गया । थोड़ी देर में हृदय को स्थिर कर के उसने विदर्भ जाने का निश्चय किया और नरेश के पास आया । नरेश चिन्ता-सागर में गोते लगा रहे थे । नल ने चिन्ता का कारण पूछा । दधिपर्ण ने बताया । नल ने कहा- आप निश्चित रहें और मुझे दो अच्छे घोड़े और रथ दीजिये । मैं आपको निर्धारित समय के पूर्व ही पहुॅचा दूंगा । दधिपूर्ण का साहस बढ़ा । नल को इच्छित अव और रथ मिल गया । दधिपर्ण तत्काल आवश्यक सामग्री और अपने छत्र-चामर धारक आदि चार सेवकों के साथ रथ में बैठा । नल ने देव-प्रदत्त श्रीफल और आभूषण को पेटिका को एक वस्त्र से कमर पर वाँधी और रथारूढ़ हो कर मन्त्राधिराज का स्मरण कर प्रस्थान किया । रथ, देव विमान के समान शीघ्रगति से चला । अति वेग से चलते हुए रथ से, वायुवेग से दधिपर्ण का उत्तरीय वस्त्र उड़ गया । राजा ने नल को रथ रोक कर वस्त्र लाने का कहा । नल ने कहा -"महाराज ! अब तक वस्त्र पच्चीस योजन दूर हो गया । अब लौटना अनुचित होगा ।" राजा ने दूर से एक अक्ष (बेड़ा) का वृक्ष देखा, जिस पर भरपूर फल लगे हुए थे । राजा ने नल से कहा
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दमयंती के पुनर्विवाह का अयोजन दमयंती पर पहले ही लुब्ध था । उस समय वह उसे नहीं मिल सकी, तो अब वह उसे प्राप्त करने अवश्य ही आएगा । और यदि कूबड़ा स्वयं नल होगा, तो दमयंती का पुनविवाह सुन कर, विचलित हो कर साथ ही आएगा । फिर वह नहीं रुक सकेगा । दूसरी बात यह कि नल ही एक ऐसा व्यक्ति है जो अश्व की विशेषता तथा हृदय जानता है । थोड़े समय में लम्वा मार्ग पार करने का सामर्थ्य नल में ही है । इससे भी उसकी पहिचान हो सकेगी । राजा ने पुत्री को अपनी योजना बताई और एक विश्वस्त दूत के साथ राजा दधिपर्ण को, दमयंती के स्वयंवर में सम्मिलित होने का आमन्त्रण दिया । आमन्त्रण में स्वयंवर का समय इतना निकट बताया कि राजा, तत्काल चल दे और रथ-चालक अत्यंत निपुण हो तथा घोड़े शीघ्रगामी हो, तो भी पहुँचना कठिन था । आमन्त्रण पा कर पहले तो दधिपर्ण प्रसन्न हुआ । उसने सोचा - यह दैव की अनुकूलता है कि निष्फल हुआ मनोरथ, अकल्पित रूप से अनायास ही सफल एवं सिद्ध हो रहा है । उसके हृदय में हर्प का आवेग उत्पन्न हुआ । किंतु तत्काल ही वह निराशा के झूले में झूलने लगा । 'पंचमी तो कल है और स्थान सैकड़ों योजन दूर है । जिस मार्ग को सन्देशवाहक कई दिनों चल कर पहुँच सका, उसे मैं डेढ़ दिन में कैसे पूरा कर सकूंगा ।' राजा, चिन्ता-सागर में निमग्न हो गया और उच्चाटन के कारण करवट बदलने लगा । विदर्भ के दूत से दमयंती के पुनर्लग्न की बात सुन कर नल के हृदय पर वज्रपात के समान आघात लगा । उसका हृदय कुंठित हो गया । थोड़ी देर में हृदय को स्थिर कर के उसने विदर्भ जाने का निश्चय किया और नरेश के पास आया । नरेश चिन्ता-सागर में गोते लगा रहे थे । नल ने चिन्ता का कारण पूछा । दधिपर्ण ने बताया । नल ने कहा- आप निश्चित रहें और मुझे दो अच्छे घोड़े और रथ दीजिये । मैं आपको निर्धारित समय के पूर्व ही पहुॅचा दूंगा । दधिपूर्ण का साहस बढ़ा । नल को इच्छित अव और रथ मिल गया । दधिपर्ण तत्काल आवश्यक सामग्री और अपने छत्र-चामर धारक आदि चार सेवकों के साथ रथ में बैठा । नल ने देव-प्रदत्त श्रीफल और आभूषण को पेटिका को एक वस्त्र से कमर पर वाँधी और रथारूढ़ हो कर मन्त्राधिराज का स्मरण कर प्रस्थान किया । रथ, देव विमान के समान शीघ्रगति से चला । अति वेग से चलते हुए रथ से, वायुवेग से दधिपर्ण का उत्तरीय वस्त्र उड़ गया । राजा ने नल को रथ रोक कर वस्त्र लाने का कहा । नल ने कहा -"महाराज ! अब तक वस्त्र पच्चीस योजन दूर हो गया । अब लौटना अनुचित होगा ।" राजा ने दूर से एक अक्ष का वृक्ष देखा, जिस पर भरपूर फल लगे हुए थे । राजा ने नल से कहा
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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लखनऊ। छात्र परीक्षा में अच्छे नंबर लाने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं। हालांकि कुछ ऐसे भी होते हैं जिनका उद्देश्य अच्छे नंबर लाना नहीं बस 33 नंबर लेकर पास होना होता है। कुछ ऐसे भी होते हैं जो साल भर कोई पढाई नहीं करते लेकिन जब रिजल्ट आने वाला होता है तो मंदिरों में भगवान के चक्कर लगाने लगते हैं कि कम से कम वो पास ही हो जाएं। हालांकि कुछ इससे भी एक कदम आगे होते हैं जो आंसर शीट में ही नोट और और अपने परिवार की दुख भरी कहानी लिखकर पास होने अपील करते हैं।
आज हम आपको दसवी के कुछ स्टूडेंट्स की आंसरशीट दिखाने वाले हैं जिसे देख आप भी हैरान रह जाएंगे। इन छात्रों ने पास होने के ऐसी ऐसी-ऐसी तरकीब लगाई है कि जिसे देखकर आपकी भी हंसी छूट जाएगी। सोशल मीडिया पर इन दिनों कुछ ऐसे ही छात्रो की कापियां काफी तेजी से वायरल हो रही है जिनपर छात्र एक्सामिनर्स से केवल 33 परसेंट मार्क्स देने के बाद उन्हें पार्टी देने की बात कह रहे हैं। हरियाणा बोर्ड की आंसर शीट में छात्रों ने ऐसी-ऐसी बातें लिखी हैं जिनको पढ़कर आप हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएंगे।
इन्ही कॉपी में से एक टीचर ने 10 वीं की एक छात्रा की कॉपी दिखाई जिसमे उसने लिखा था , 'सर प्लीज मुझे माफ कर दीजिए, क्योंकि पैरंट्स भी मुझे कहते हैं कि मैं फेल हो जाऊंगी। ऐसे में मुझ पर काफी बर्डन है। पास कर देंगे तो आपकी कृपा होगी। ' इसके अलावा एक टीचर ने एक और बच्चे की कॉपी दिखाई जिसमे लिखा था की सर अगर आप हमे पास कर देंगे, तो हम आपको पार्टी देंगे और साथ ही 600 रुपये भी देंगे।
इसके अलावा खांड़सा स्थित गवर्नमेंट स्कूल के साइंस टीचर योगेश ने बताया कि एक विद्यार्थी की कॉपी में गालिब की शायरी लिखी हुई थी और इसके साथ ही यह भी लिखा था 'प्लीज मुझे पास कर दें। इसके अलावा उसने कॉपी में कुछ भी नहीं लिखा था इसके साथ ही बसई स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल के केमिस्ट्री टीचर ने भी एक बच्चे की कॉपी के विषय में बताया की एक छात्र ने आपने आंसर शीट में केवल कविताएं और शायरी लिख डाली थी।
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लखनऊ। छात्र परीक्षा में अच्छे नंबर लाने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं। हालांकि कुछ ऐसे भी होते हैं जिनका उद्देश्य अच्छे नंबर लाना नहीं बस तैंतीस नंबर लेकर पास होना होता है। कुछ ऐसे भी होते हैं जो साल भर कोई पढाई नहीं करते लेकिन जब रिजल्ट आने वाला होता है तो मंदिरों में भगवान के चक्कर लगाने लगते हैं कि कम से कम वो पास ही हो जाएं। हालांकि कुछ इससे भी एक कदम आगे होते हैं जो आंसर शीट में ही नोट और और अपने परिवार की दुख भरी कहानी लिखकर पास होने अपील करते हैं। आज हम आपको दसवी के कुछ स्टूडेंट्स की आंसरशीट दिखाने वाले हैं जिसे देख आप भी हैरान रह जाएंगे। इन छात्रों ने पास होने के ऐसी ऐसी-ऐसी तरकीब लगाई है कि जिसे देखकर आपकी भी हंसी छूट जाएगी। सोशल मीडिया पर इन दिनों कुछ ऐसे ही छात्रो की कापियां काफी तेजी से वायरल हो रही है जिनपर छात्र एक्सामिनर्स से केवल तैंतीस परसेंट मार्क्स देने के बाद उन्हें पार्टी देने की बात कह रहे हैं। हरियाणा बोर्ड की आंसर शीट में छात्रों ने ऐसी-ऐसी बातें लिखी हैं जिनको पढ़कर आप हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएंगे। इन्ही कॉपी में से एक टीचर ने दस वीं की एक छात्रा की कॉपी दिखाई जिसमे उसने लिखा था , 'सर प्लीज मुझे माफ कर दीजिए, क्योंकि पैरंट्स भी मुझे कहते हैं कि मैं फेल हो जाऊंगी। ऐसे में मुझ पर काफी बर्डन है। पास कर देंगे तो आपकी कृपा होगी। ' इसके अलावा एक टीचर ने एक और बच्चे की कॉपी दिखाई जिसमे लिखा था की सर अगर आप हमे पास कर देंगे, तो हम आपको पार्टी देंगे और साथ ही छः सौ रुपयापये भी देंगे। इसके अलावा खांड़सा स्थित गवर्नमेंट स्कूल के साइंस टीचर योगेश ने बताया कि एक विद्यार्थी की कॉपी में गालिब की शायरी लिखी हुई थी और इसके साथ ही यह भी लिखा था 'प्लीज मुझे पास कर दें। इसके अलावा उसने कॉपी में कुछ भी नहीं लिखा था इसके साथ ही बसई स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल के केमिस्ट्री टीचर ने भी एक बच्चे की कॉपी के विषय में बताया की एक छात्र ने आपने आंसर शीट में केवल कविताएं और शायरी लिख डाली थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा)
यमुनानगर में अधिकारियों ने कांग्रेस विधायक की कुर्सी एक कोने में लगा दी थी। इसका विरोध जताकर विधायक ने बैठक छोड़ दी। बाद में मेयर ने मनाया।
जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक छोड़कर बाहर आए रादौर विधायक डॉ. बीएल सैनी।
हरियाणा के यमुनानगर में लघु सचिवालय में गुरुवार को हुई जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में मंच पर एक कोने में बैठाए जाने से रादौर से कांग्रेस विधायक डॉ. बीएल सैनी नाराज हो गए। उनकी नाराजगी इतनी बढ़ गई की वह कष्ट निवारण समिति की बैठक को छोड़ कर वहां से चले गए। इसके बाद नगर निगम के मेयर मदन चौहान उन्हें रोकने के लिए नीचे गए। मेयर विधायक का हाथ पकड़ कर सभागार में लाए। बीएल सैनी को यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा के साथ वाली कुर्सी पर बैठाया गया।
बैठक की अध्यक्षता जिला सचिवालय के सभाकक्ष में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता को करनी थी। मंच पर मंत्री समेत नौ कुर्सियां लगाई गई थी। मंत्री के साथ यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, डीसी पार्थ गुप्ता, निगम मेयर मदन लाल, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा, व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन रामनिवास गर्ग, समाज कल्याण बोर्ड की चेयरपर्सन रोजी मलिक आनंद, जजपा जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह बैठे थे।
सबसे कोने में विधायक बीएल सैनी व साढौरा से कांग्रेस विधायक रेनू बाला की कुर्सी लगी थी। रेनू बाला हर बार की तरह इस बार भी बैठक में नहीं पहुंची। बीएल सैनी ने जब अपनी नेम प्लेट को एक कोने में रखे देखा तो वह तैश में आ गए। सैनी ने कहा कि एक विधायक को कोने में बैठाना यह उनका अपमान है।
विधायक बीएल सैनी को बाद में यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा के साथ बैठाया गया।
ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि वह विपक्ष के विधायक हैं। प्रोटोकोल के अनुसार उनकी कुर्सी मंत्री या फिर सत्ता पक्ष के विधायक के साथ होनी चाहिए। जनता ने उन्हें भी विधानसभा में भेजा है। इतना कहने के बाद वह नीचे चले गए। इससे सभागार का माहौल गरमा गया।
मेयर मदन लाल उन्हें लेने के लिए नीचे चले गए। विधायक को लाया गया तो मंच पर बैठे व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन रामनिवास गर्ग मंच से चले गए। जिस कुर्सी पर पहले रामनिवास गर्ग बैठे थे अब उस पर मेयर बैठ गए।
बैठक खत्म होने के बाद डॉ. बीएल सैनी नीचे उतरे तो उन्होंने कहा कि मैं इस बैठक में हुई कार्यवाही से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं। इसमें लोगों को इंसाफ नहीं मिलता। जो लोग शिकायतें लेकर आए उनकी बात को ठीक से सुना नहीं जाता। सभी परिवादों को मंत्री निपटाने में लगे रहे।
विकास कार्यों के साथ-साथ बैठक में बैठाने तक में भी भेदभाव किया जाता है। मैं सीनियर विधायक हूं। तीसरी बार एमएलए बना हूं। बैठक में सत्ता पक्ष का विधायक मंत्री के साथ बैठता है और विपक्ष का एक कोने में। इसलिए वह विरोध स्वरूप बैठक को छोड़ कर आ गए थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर यमुनानगर में अधिकारियों ने कांग्रेस विधायक की कुर्सी एक कोने में लगा दी थी। इसका विरोध जताकर विधायक ने बैठक छोड़ दी। बाद में मेयर ने मनाया। जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक छोड़कर बाहर आए रादौर विधायक डॉ. बीएल सैनी। हरियाणा के यमुनानगर में लघु सचिवालय में गुरुवार को हुई जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में मंच पर एक कोने में बैठाए जाने से रादौर से कांग्रेस विधायक डॉ. बीएल सैनी नाराज हो गए। उनकी नाराजगी इतनी बढ़ गई की वह कष्ट निवारण समिति की बैठक को छोड़ कर वहां से चले गए। इसके बाद नगर निगम के मेयर मदन चौहान उन्हें रोकने के लिए नीचे गए। मेयर विधायक का हाथ पकड़ कर सभागार में लाए। बीएल सैनी को यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा के साथ वाली कुर्सी पर बैठाया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला सचिवालय के सभाकक्ष में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता को करनी थी। मंच पर मंत्री समेत नौ कुर्सियां लगाई गई थी। मंत्री के साथ यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, डीसी पार्थ गुप्ता, निगम मेयर मदन लाल, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा, व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन रामनिवास गर्ग, समाज कल्याण बोर्ड की चेयरपर्सन रोजी मलिक आनंद, जजपा जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह बैठे थे। सबसे कोने में विधायक बीएल सैनी व साढौरा से कांग्रेस विधायक रेनू बाला की कुर्सी लगी थी। रेनू बाला हर बार की तरह इस बार भी बैठक में नहीं पहुंची। बीएल सैनी ने जब अपनी नेम प्लेट को एक कोने में रखे देखा तो वह तैश में आ गए। सैनी ने कहा कि एक विधायक को कोने में बैठाना यह उनका अपमान है। विधायक बीएल सैनी को बाद में यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा के साथ बैठाया गया। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि वह विपक्ष के विधायक हैं। प्रोटोकोल के अनुसार उनकी कुर्सी मंत्री या फिर सत्ता पक्ष के विधायक के साथ होनी चाहिए। जनता ने उन्हें भी विधानसभा में भेजा है। इतना कहने के बाद वह नीचे चले गए। इससे सभागार का माहौल गरमा गया। मेयर मदन लाल उन्हें लेने के लिए नीचे चले गए। विधायक को लाया गया तो मंच पर बैठे व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन रामनिवास गर्ग मंच से चले गए। जिस कुर्सी पर पहले रामनिवास गर्ग बैठे थे अब उस पर मेयर बैठ गए। बैठक खत्म होने के बाद डॉ. बीएल सैनी नीचे उतरे तो उन्होंने कहा कि मैं इस बैठक में हुई कार्यवाही से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं। इसमें लोगों को इंसाफ नहीं मिलता। जो लोग शिकायतें लेकर आए उनकी बात को ठीक से सुना नहीं जाता। सभी परिवादों को मंत्री निपटाने में लगे रहे। विकास कार्यों के साथ-साथ बैठक में बैठाने तक में भी भेदभाव किया जाता है। मैं सीनियर विधायक हूं। तीसरी बार एमएलए बना हूं। बैठक में सत्ता पक्ष का विधायक मंत्री के साथ बैठता है और विपक्ष का एक कोने में। इसलिए वह विरोध स्वरूप बैठक को छोड़ कर आ गए थे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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भारी साहससे काम लेकर हनुमान समुद्र लांघकर लंका जा पहुंचा। रावणको राजधानीमें पहुंचकर उसने जगह-जगह मीताको खोज की। वह रावणके अन्तःपुरमें भी टोह लगा आया, किन्तु कहीं भो सोलाका पता न चला । आखिर वह अशोकचनमें जा पहुंचा। वहां भयंकर राक्षमियोंसे रक्षित एक घरमें उसने सोताको देखा । उनको स्थिति दयाजनक थो । उन्होंने एक पीला और मैला वस्त्र पहन रखा था । उपवासके कारण उनके अंग-प्रत्यंग दुर्बल हो गये थे। उनके हृदयसे बार-बार लम्बे निःश्वास निकलते थे। उनके शरीर पर सौभाग्य सूचक एक भी आभूषण नही था। उनके चाल मुले और अस्तव्यस्त रूपमें लटक रहे थे । वे इस तरह त्रस्त नजर आती थीं, मानो वाघिनोंके झुण्डमे बैठी हुई कोई हरिणी हो । वे नंगी जमीन पर मुंह लटकाये उदास भावसे बैठी हुई थी। साध्वीको ऐसी दशा देखकर वोर किन्तु दयालु हनुमानकी आंखोसे आंसू वह चले ।
२. किन्तु यह सोचकर कि तत्काल प्रकट होनेका अवसर नहीं है, हनुमान एक पेड़ पर छिपकर बैठ गया और देखने
हनुमानका मिलाप
लगा कि अब क्या होता है । इतनेमें रावण वहां आ पहुंचा। वह फिर सीताको ललचाने और धमकाने लगा । सीताने उसे धर्म-मार्गसे
चलनेके लिए अनेक प्रकारसे समझाया; पर इससे वह अधिक क्रोध में आ गया और राक्षसियोंको सीता पर भारी जुल्म करनेका आदेश देकर चला गया । राक्षसियां भी सीताको सतानेमें अपनी ओरसे कोई कसर नहीं रखती थीं; किन्तु उनमें त्रिजटा नामक एक ऐसी राक्षसी थी, जिसमें थोड़ी मनुष्यता शेष थी । वह न केवल सीताके दुःखमें सहानुभूति रखती थी, बल्कि दूसरी राक्षसियोंको भी अत्याचार करनेसे रोक्ती थी । कई महीनोंसे रामकी ओरसे कोई समाचार न मिलनेके कारण सीता अब निराश हो चुकी थीं और रावणके व्यवहार के कारण आज जो घटना घटी थी, उसके बाद तो वह आत्महत्या करनेका विचार करने लगी थीं । अतएव हनुमानने सोचा कि सीताके चरणोंमें उपस्थित होनेंका यही अनुकूल अवसर है। लेकिन यह सोचकर कि अचानक सामने जा पहुंचनेसे कहीं सीता घबरा न जायें, उसने शुरूमें पेड़ परसे हो रामका संक्षिप्त चरित्र गाना शुरू कर दिया । आवाज सुनकर सीता चकित आंत्रोंसे इधर-उधर देखने लगीं। जब कोई दिशाई न पड़ा, तो मारे डरके 'हे राम' कह कर जमीन पर गिर पड़ी बीन हनुमान पेड़ परसे नीचे उतरा और करुणा-पूरित भावसे विनयपूर्वक नमस्कार करके सीताके सामने गड़ा हो गया और राम तथा लक्ष्मणके अनुचरके रूपमें अपना परिचय देकर सारे गमावार सुनाये । जब कई विद्ध मिल गये और गोडाने रामकी मुद्रा भी देग ली, तो उन्हें विश्वास हो गया कि हनुमान कोई माया सक्षम नहीं, वनि मादा है। हमने सीके आवरदका पार न रहा।
samvida shi
सीताने हनुमानके साथ पेट भरकर बातें की। हनुमानने बताया कि उन्हें छुड़ानेके लिए राम किस प्रकारको कोशिश करेंगे । दूसरी तरफ सीताने अनुनय-विनयके साथ रामको यह संदेशा भेजा कि अब वे किसी भी हालत में अधिक विलम्ब न करें ।
३. इसके बादका वर्णन यह है कि सोताका पता तो चल गया, लेकिन हनुमानके मनमें एक अविचारपूर्ण कल्पना यह उठी कि वापस लौटनेसे पहले रावणको भी अपने पराक्रमका कुछ स्वाद चखा देना चाहिये । सीताकी अनुमति लेकर हनुमानने अशोक वाटिकाके पेड़ उखाड़ कर उसे उजाड़ना शुरू किया । यह देखकर राक्षसियां धवराई और दौड़ी- दौड़ी रावणके पास पहुंचीं। जब रावणको पता चला कि उसको आज्ञाके बिना सीतासे बात करनेवाला और उसके उपवनको उजाड़नेकी हिम्मत रखनेवाला कोई ढोठ वानर लंकामें आया है, तो उसे बहुत ही गुस्सा हो आया । उसने राक्षसोंको हुक्म दिया कि वे हनुमानको पकड़कर ले आयें । राक्षस हनुमान पर टूट पड़े; पर हनुमाननें अपनी पूंछके प्रहारसे हो कई राक्षसोको ढेर कर दिया और फिर एक राक्षससे उसका आयुध लेकर उसके द्वारा राक्षसोंका संहार शुरू कर दिया । देखते-देखते भयंकर युद्ध शुरू हो गया । रावणके अक्षय आदि राजकुमार और सेनापतिका पुत्र आदि कई राक्षस योद्धा मृत्युलोकको सिधार गये । अन्तमें युवराज इन्द्रजित भी हनुमानसे लड़ने आ पहुंचा। दोनोके बीच घनघोर युद्ध छिड़ गया । आखिर इन्द्रजितने हनुमानको बांध लिया ।
४. हनुमानको पकड़कर रावणके पास ले जाया गया। हनुमाननें रावणको समझाया कि वह सीताको छोड़ दे और
अपने अधर्म तथा अन्यायके लिए पश्चात्ताप करे । पर इससे तो रावण और भी ज्यादा आगबबूला हो गया और उसने हनुमानका वध करनेको आज्ञा दे दी । इस पर विभीषणने आपत्ति की और कहा कि दूतका वध करना निषिद्ध है । सच पूछा जाये, तो हनुमान दूतके रूपमें पहुंचा ही नहीं था । वह तो जासूसी करने गया था । फिर उसने अशोक वाटिकाको जिस तरह उजाड़ा था, उसका कोई वचाव हो नहीं सकता था। फिर भी कथा यह है कि रावणने विभीषणकी आपत्तिको मान लिया और वध करनेके बदले हनुमानकी पूंछ जला डालनेकी आज्ञा की । हनुमानकी पूंछ पर चिथड़े लपेटे गये । उन पर तेल उड़ेला गया और फिर उसमें आग लगा दी गई। जैसे ही पूंछ जलने लगी, हनुमानने एक छलांग भरी और आसपास गड़े हुए राक्षसोंके कपड़ोंमें आग लगा दी। वादमें उसने घरोंकी छतों पर छलांग मारी और घर जलाने शुरू किये । थोड़ी हो देर किलकारियां मारता हुआ हनुमान हजारों घरों पर घूम गया और उसने गमुची राजधानीमें आग लगा दी। अन्तमें बड़े बैगसे समुद्र किनारे पहुंचकर उसने अपनी पूंछ समदमे बुझा ली । फिर तो समुद्र लांच कर हनुमान उम पर बैठे हुए अंगद, जापान आदिगे जा मिला ।
५. थोड़ी ही देर गायियों को हनुमानकी गरवास 3 चट । गया । वासरोगे कोई सीमा नहीं हो।
राम और सुप्रीवको यह शुभ समाचार सुनानेके
रामका उपहार लिए सारा दल चल पड़ा । आनन्द हो आनन्दमें उन्होंने सुग्रीवके कई फलदार पेड़ोंको, जो उनके रास्ते में पड़े, नष्ट कर दिया। लेकिन यह कहकर कि हनुमानने जो भारो पराक्रम किया था, उसकी तुलनामें यह नुकसान किसी विसातमें नहीं है, सुग्रोवने उल्टे उन्हें प्रोत्साहित हो किया । रामने भी हनुमानको गले लगा लिया। उन्होंने वहा - " तुम्हारे इस काम के बदलेमें में तुम्हें क्या दूं? अपने हृदय में स्थान देनेके अतिरिक्त दूसरी ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो तुम्हारे इस पराक्रम के लिए पूर्ण उपहारका काम कर सके । इसलिए आजसे में तुम्हें अपना हृदय हो अर्पित करता हूं।"
अब राम युद्धके लिए वानर सेना तैयार करने लगे । रामेश्वर में वानरोंको छावनियां खड़ी हो गईं ।
२. इस तरफ रावण भी इस चिन्तामे पड़ा कि अगर रामने हमला किया, तो क्या करना चाहिये । उसने अपने भाइयों और मन्त्रियोकी सभा बुलाई । मन्त्री रावणका स्वभाव जानते थे । अभिमानी और समृद्धिशाली लोग सलाह तो भागते हैं, पर वे सच्ची सलाह सहन नहीं कर सकते। जिस सिखावन द्वारा उन्हें उनकी भूल दिखाई जाती है, वह उनको रुचती नहीं । उन्हें तो वे हो लोग सच्चे सलाहकार मालूम होते हैं, जो
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भारी साहससे काम लेकर हनुमान समुद्र लांघकर लंका जा पहुंचा। रावणको राजधानीमें पहुंचकर उसने जगह-जगह मीताको खोज की। वह रावणके अन्तःपुरमें भी टोह लगा आया, किन्तु कहीं भो सोलाका पता न चला । आखिर वह अशोकचनमें जा पहुंचा। वहां भयंकर राक्षमियोंसे रक्षित एक घरमें उसने सोताको देखा । उनको स्थिति दयाजनक थो । उन्होंने एक पीला और मैला वस्त्र पहन रखा था । उपवासके कारण उनके अंग-प्रत्यंग दुर्बल हो गये थे। उनके हृदयसे बार-बार लम्बे निःश्वास निकलते थे। उनके शरीर पर सौभाग्य सूचक एक भी आभूषण नही था। उनके चाल मुले और अस्तव्यस्त रूपमें लटक रहे थे । वे इस तरह त्रस्त नजर आती थीं, मानो वाघिनोंके झुण्डमे बैठी हुई कोई हरिणी हो । वे नंगी जमीन पर मुंह लटकाये उदास भावसे बैठी हुई थी। साध्वीको ऐसी दशा देखकर वोर किन्तु दयालु हनुमानकी आंखोसे आंसू वह चले । दो. किन्तु यह सोचकर कि तत्काल प्रकट होनेका अवसर नहीं है, हनुमान एक पेड़ पर छिपकर बैठ गया और देखने हनुमानका मिलाप लगा कि अब क्या होता है । इतनेमें रावण वहां आ पहुंचा। वह फिर सीताको ललचाने और धमकाने लगा । सीताने उसे धर्म-मार्गसे चलनेके लिए अनेक प्रकारसे समझाया; पर इससे वह अधिक क्रोध में आ गया और राक्षसियोंको सीता पर भारी जुल्म करनेका आदेश देकर चला गया । राक्षसियां भी सीताको सतानेमें अपनी ओरसे कोई कसर नहीं रखती थीं; किन्तु उनमें त्रिजटा नामक एक ऐसी राक्षसी थी, जिसमें थोड़ी मनुष्यता शेष थी । वह न केवल सीताके दुःखमें सहानुभूति रखती थी, बल्कि दूसरी राक्षसियोंको भी अत्याचार करनेसे रोक्ती थी । कई महीनोंसे रामकी ओरसे कोई समाचार न मिलनेके कारण सीता अब निराश हो चुकी थीं और रावणके व्यवहार के कारण आज जो घटना घटी थी, उसके बाद तो वह आत्महत्या करनेका विचार करने लगी थीं । अतएव हनुमानने सोचा कि सीताके चरणोंमें उपस्थित होनेंका यही अनुकूल अवसर है। लेकिन यह सोचकर कि अचानक सामने जा पहुंचनेसे कहीं सीता घबरा न जायें, उसने शुरूमें पेड़ परसे हो रामका संक्षिप्त चरित्र गाना शुरू कर दिया । आवाज सुनकर सीता चकित आंत्रोंसे इधर-उधर देखने लगीं। जब कोई दिशाई न पड़ा, तो मारे डरके 'हे राम' कह कर जमीन पर गिर पड़ी बीन हनुमान पेड़ परसे नीचे उतरा और करुणा-पूरित भावसे विनयपूर्वक नमस्कार करके सीताके सामने गड़ा हो गया और राम तथा लक्ष्मणके अनुचरके रूपमें अपना परिचय देकर सारे गमावार सुनाये । जब कई विद्ध मिल गये और गोडाने रामकी मुद्रा भी देग ली, तो उन्हें विश्वास हो गया कि हनुमान कोई माया सक्षम नहीं, वनि मादा है। हमने सीके आवरदका पार न रहा। samvida shi सीताने हनुमानके साथ पेट भरकर बातें की। हनुमानने बताया कि उन्हें छुड़ानेके लिए राम किस प्रकारको कोशिश करेंगे । दूसरी तरफ सीताने अनुनय-विनयके साथ रामको यह संदेशा भेजा कि अब वे किसी भी हालत में अधिक विलम्ब न करें । तीन. इसके बादका वर्णन यह है कि सोताका पता तो चल गया, लेकिन हनुमानके मनमें एक अविचारपूर्ण कल्पना यह उठी कि वापस लौटनेसे पहले रावणको भी अपने पराक्रमका कुछ स्वाद चखा देना चाहिये । सीताकी अनुमति लेकर हनुमानने अशोक वाटिकाके पेड़ उखाड़ कर उसे उजाड़ना शुरू किया । यह देखकर राक्षसियां धवराई और दौड़ी- दौड़ी रावणके पास पहुंचीं। जब रावणको पता चला कि उसको आज्ञाके बिना सीतासे बात करनेवाला और उसके उपवनको उजाड़नेकी हिम्मत रखनेवाला कोई ढोठ वानर लंकामें आया है, तो उसे बहुत ही गुस्सा हो आया । उसने राक्षसोंको हुक्म दिया कि वे हनुमानको पकड़कर ले आयें । राक्षस हनुमान पर टूट पड़े; पर हनुमाननें अपनी पूंछके प्रहारसे हो कई राक्षसोको ढेर कर दिया और फिर एक राक्षससे उसका आयुध लेकर उसके द्वारा राक्षसोंका संहार शुरू कर दिया । देखते-देखते भयंकर युद्ध शुरू हो गया । रावणके अक्षय आदि राजकुमार और सेनापतिका पुत्र आदि कई राक्षस योद्धा मृत्युलोकको सिधार गये । अन्तमें युवराज इन्द्रजित भी हनुमानसे लड़ने आ पहुंचा। दोनोके बीच घनघोर युद्ध छिड़ गया । आखिर इन्द्रजितने हनुमानको बांध लिया । चार. हनुमानको पकड़कर रावणके पास ले जाया गया। हनुमाननें रावणको समझाया कि वह सीताको छोड़ दे और अपने अधर्म तथा अन्यायके लिए पश्चात्ताप करे । पर इससे तो रावण और भी ज्यादा आगबबूला हो गया और उसने हनुमानका वध करनेको आज्ञा दे दी । इस पर विभीषणने आपत्ति की और कहा कि दूतका वध करना निषिद्ध है । सच पूछा जाये, तो हनुमान दूतके रूपमें पहुंचा ही नहीं था । वह तो जासूसी करने गया था । फिर उसने अशोक वाटिकाको जिस तरह उजाड़ा था, उसका कोई वचाव हो नहीं सकता था। फिर भी कथा यह है कि रावणने विभीषणकी आपत्तिको मान लिया और वध करनेके बदले हनुमानकी पूंछ जला डालनेकी आज्ञा की । हनुमानकी पूंछ पर चिथड़े लपेटे गये । उन पर तेल उड़ेला गया और फिर उसमें आग लगा दी गई। जैसे ही पूंछ जलने लगी, हनुमानने एक छलांग भरी और आसपास गड़े हुए राक्षसोंके कपड़ोंमें आग लगा दी। वादमें उसने घरोंकी छतों पर छलांग मारी और घर जलाने शुरू किये । थोड़ी हो देर किलकारियां मारता हुआ हनुमान हजारों घरों पर घूम गया और उसने गमुची राजधानीमें आग लगा दी। अन्तमें बड़े बैगसे समुद्र किनारे पहुंचकर उसने अपनी पूंछ समदमे बुझा ली । फिर तो समुद्र लांच कर हनुमान उम पर बैठे हुए अंगद, जापान आदिगे जा मिला । पाँच. थोड़ी ही देर गायियों को हनुमानकी गरवास तीन चट । गया । वासरोगे कोई सीमा नहीं हो। राम और सुप्रीवको यह शुभ समाचार सुनानेके रामका उपहार लिए सारा दल चल पड़ा । आनन्द हो आनन्दमें उन्होंने सुग्रीवके कई फलदार पेड़ोंको, जो उनके रास्ते में पड़े, नष्ट कर दिया। लेकिन यह कहकर कि हनुमानने जो भारो पराक्रम किया था, उसकी तुलनामें यह नुकसान किसी विसातमें नहीं है, सुग्रोवने उल्टे उन्हें प्रोत्साहित हो किया । रामने भी हनुमानको गले लगा लिया। उन्होंने वहा - " तुम्हारे इस काम के बदलेमें में तुम्हें क्या दूं? अपने हृदय में स्थान देनेके अतिरिक्त दूसरी ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो तुम्हारे इस पराक्रम के लिए पूर्ण उपहारका काम कर सके । इसलिए आजसे में तुम्हें अपना हृदय हो अर्पित करता हूं।" अब राम युद्धके लिए वानर सेना तैयार करने लगे । रामेश्वर में वानरोंको छावनियां खड़ी हो गईं । दो. इस तरफ रावण भी इस चिन्तामे पड़ा कि अगर रामने हमला किया, तो क्या करना चाहिये । उसने अपने भाइयों और मन्त्रियोकी सभा बुलाई । मन्त्री रावणका स्वभाव जानते थे । अभिमानी और समृद्धिशाली लोग सलाह तो भागते हैं, पर वे सच्ची सलाह सहन नहीं कर सकते। जिस सिखावन द्वारा उन्हें उनकी भूल दिखाई जाती है, वह उनको रुचती नहीं । उन्हें तो वे हो लोग सच्चे सलाहकार मालूम होते हैं, जो
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पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू सहित छः अल्पसंख्यक समूहों के लोगों को भारतीय नागरिकों की तरह जरूरी सुविधाएं व सरकारी रियायतें हर समय मिलेगी। भारत सरकार इन्हें सुविधा देने के लिए समय सीमा की बाध्यता समाप्त करेगी।
नई दिल्ली : पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू सहित छः अल्पसंख्यक समूहों के लोगों को भारतीय नागरिकों की तरह जरूरी सुविधाएं व सरकारी रियायतें हर समय मिलेगी। भारत सरकार इन्हें सुविधा देने के लिए समय सीमा की बाध्यता समाप्त करेगी।
सरकार ने सैद्धांतिक रूप से तय किया है पड़ोसी देशों से आए इन धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के लिए समय और दस्तावेज रोड़ा नहीं होंगे। पहले, ३१ दिसंबर २०१४ तक या उससे पहले आए लोगों को बिना वैध दस्तावेज के भारत में रहने संबंधी आदेश जारी किए गए थे।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया की, उच्च स्तर पर तय किया गया है कि पड़ोसी देशों से उत्पीड़न के कारण भारत आने को हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए समय सीमा का प्रतिबंध नहीं होगा।
राज्यों को इस संबंध में जल्द दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। संभव है कि नागरिकता संशोधन विधेयक में ही इस तरह के प्रावधान शामिल कर लिए जाएं।
दरम्यान, नागरिकता संशोधन विधेयक अभी आगे नहीं बढ़ पाया है। इस पर सहमति बनाने का प्रयास चल रहा है। इस संशोधन विधेयक, २०१९ का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के ६ अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है।
नया विधेयक नागरिकता कानून १९५५ में संशोधन के लिए तैयार किया गया है। यह विधेयक कानून बनने के बाद, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदाय को १२ वर्ष के बजाय छः वर्ष भारत में गुजारने पर और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारत नागरिकता प्रदान करेगा। जब तक उन्हें नागरिकता नहीं मिलेगी दीर्घावधि वीजा व कार्यकारी आदेशों के आधार पर सुविधाएं मिलती रहेंगी।
उल्लेखनीय है की भाजपा ने २०१४ के चुनावों में इस बाए में आश्वासन दिया था। २०१९ में प्रधानमंत्री मोदी ने इस विधेयक पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। माना जाता है कि संबंधित अल्पसंख्यक समूहों के करीब ३० हजार लोग, जो कई वर्षों से वीजा पर भारत में रहे हैं, उन्हें इसका लाभ मिलेगा।
नागरिकता संशोधन विधेयक, २०१६ के रूप में शुरुआत में लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद इसे तब संयुक्त संसदीय समिति को सौंपा गया था। समिति ने इस वर्ष ७ जनवरी को अपनी रिपोर्ट संसद को सौंप दी थी। नागरिकता संशोधन विधेयक, २०१९ पर विचार करने के बाद लोकसभा ने ८ जनवरी, २०१९ में इसे को पारित कर दिया गया था।
मोदी सरकार बनने के बाद से संबंधित शरणार्थियों के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें लंबी अवधि का वीजा शामिल है। इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी है। नागरिकता के आवेदनों को निपटाने की प्रक्रिया भी आसान हुई है। नागरिकता के आवेदन मैनुअल भी लिए जा रहे हैं। बिना पासपोर्ट वाले बच्चों को उनके माता-पिता के पासपोर्ट के आधार पर नागरिकता का आवेदन करने की अनुमति दी गई है। इससे उनको भी लाभ होगा जो पड़ोसी देशों से भारत में बसने के लिए आए हैं।
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पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू सहित छः अल्पसंख्यक समूहों के लोगों को भारतीय नागरिकों की तरह जरूरी सुविधाएं व सरकारी रियायतें हर समय मिलेगी। भारत सरकार इन्हें सुविधा देने के लिए समय सीमा की बाध्यता समाप्त करेगी। नई दिल्ली : पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू सहित छः अल्पसंख्यक समूहों के लोगों को भारतीय नागरिकों की तरह जरूरी सुविधाएं व सरकारी रियायतें हर समय मिलेगी। भारत सरकार इन्हें सुविधा देने के लिए समय सीमा की बाध्यता समाप्त करेगी। सरकार ने सैद्धांतिक रूप से तय किया है पड़ोसी देशों से आए इन धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के लिए समय और दस्तावेज रोड़ा नहीं होंगे। पहले, इकतीस दिसंबर दो हज़ार चौदह तक या उससे पहले आए लोगों को बिना वैध दस्तावेज के भारत में रहने संबंधी आदेश जारी किए गए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया की, उच्च स्तर पर तय किया गया है कि पड़ोसी देशों से उत्पीड़न के कारण भारत आने को हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए समय सीमा का प्रतिबंध नहीं होगा। राज्यों को इस संबंध में जल्द दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। संभव है कि नागरिकता संशोधन विधेयक में ही इस तरह के प्रावधान शामिल कर लिए जाएं। दरम्यान, नागरिकता संशोधन विधेयक अभी आगे नहीं बढ़ पाया है। इस पर सहमति बनाने का प्रयास चल रहा है। इस संशोधन विधेयक, दो हज़ार उन्नीस का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के छः अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है। नया विधेयक नागरिकता कानून एक हज़ार नौ सौ पचपन में संशोधन के लिए तैयार किया गया है। यह विधेयक कानून बनने के बाद, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदाय को बारह वर्ष के बजाय छः वर्ष भारत में गुजारने पर और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारत नागरिकता प्रदान करेगा। जब तक उन्हें नागरिकता नहीं मिलेगी दीर्घावधि वीजा व कार्यकारी आदेशों के आधार पर सुविधाएं मिलती रहेंगी। उल्लेखनीय है की भाजपा ने दो हज़ार चौदह के चुनावों में इस बाए में आश्वासन दिया था। दो हज़ार उन्नीस में प्रधानमंत्री मोदी ने इस विधेयक पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। माना जाता है कि संबंधित अल्पसंख्यक समूहों के करीब तीस हजार लोग, जो कई वर्षों से वीजा पर भारत में रहे हैं, उन्हें इसका लाभ मिलेगा। नागरिकता संशोधन विधेयक, दो हज़ार सोलह के रूप में शुरुआत में लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद इसे तब संयुक्त संसदीय समिति को सौंपा गया था। समिति ने इस वर्ष सात जनवरी को अपनी रिपोर्ट संसद को सौंप दी थी। नागरिकता संशोधन विधेयक, दो हज़ार उन्नीस पर विचार करने के बाद लोकसभा ने आठ जनवरी, दो हज़ार उन्नीस में इसे को पारित कर दिया गया था। मोदी सरकार बनने के बाद से संबंधित शरणार्थियों के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें लंबी अवधि का वीजा शामिल है। इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी है। नागरिकता के आवेदनों को निपटाने की प्रक्रिया भी आसान हुई है। नागरिकता के आवेदन मैनुअल भी लिए जा रहे हैं। बिना पासपोर्ट वाले बच्चों को उनके माता-पिता के पासपोर्ट के आधार पर नागरिकता का आवेदन करने की अनुमति दी गई है। इससे उनको भी लाभ होगा जो पड़ोसी देशों से भारत में बसने के लिए आए हैं।
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यह हमारे व्यर्थ सदी का दिमाग की उपज है,पारंपरिक चीनी व्यंजनों सूप के रूप में समय, परिश्रम और ध्यान देने की जरूरत। (चिकन विंग्स से कम से कम) साधारण यूरोपीय शोरबा, नमक यह वेल्डेड, एक तरफ रख दिया। पल्प सूअर का मांस (लगभग 250 ग्राम) सूक्ष्मता काट दिया गया। गोभी चीनी गोभी का आधा एक सिर Nashinkuem। मुट्ठी Funchoza उबलते नरम करने के लिए पानी डालना। एक विशेष पैन "वोक" वनस्पति तेल में बहुत जल्दी सूअर का मांस भून। एक तरफ केंद्र चीनी गोभी का प्रसार में, किनारे पर उसकी लेपनी ले जाएँ। जब वह रस, तनावपूर्ण नूडल्स डाल देंगे। फिर हम शोरबा में फ्राइंग पैन की सामग्री को शिफ्ट। हम इसके बारे में 5 मिनट तक उबालें, फिर अदरक का एक चुटकी, सोया सॉस के 2-3 बड़े चम्मच और कटा हुआ 8 हरी प्याज पंख जोड़ने दे। गर्मी बंद करें और एक छोटे से एक आड़ में जोर देते हैं।
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यह हमारे व्यर्थ सदी का दिमाग की उपज है,पारंपरिक चीनी व्यंजनों सूप के रूप में समय, परिश्रम और ध्यान देने की जरूरत। साधारण यूरोपीय शोरबा, नमक यह वेल्डेड, एक तरफ रख दिया। पल्प सूअर का मांस सूक्ष्मता काट दिया गया। गोभी चीनी गोभी का आधा एक सिर Nashinkuem। मुट्ठी Funchoza उबलते नरम करने के लिए पानी डालना। एक विशेष पैन "वोक" वनस्पति तेल में बहुत जल्दी सूअर का मांस भून। एक तरफ केंद्र चीनी गोभी का प्रसार में, किनारे पर उसकी लेपनी ले जाएँ। जब वह रस, तनावपूर्ण नूडल्स डाल देंगे। फिर हम शोरबा में फ्राइंग पैन की सामग्री को शिफ्ट। हम इसके बारे में पाँच मिनट तक उबालें, फिर अदरक का एक चुटकी, सोया सॉस के दो-तीन बड़े चम्मच और कटा हुआ आठ हरी प्याज पंख जोड़ने दे। गर्मी बंद करें और एक छोटे से एक आड़ में जोर देते हैं।
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मिशन सुधार यानी सेवा उन्नयन, भीड़-भाड़ कम करना और सुविधाओं की बहाली के लिए समग्र कार्रवाई के लिए मालदा डिवीजन के डीआरएम विकास चौबे के निर्देश पर 9 से 15 नवंबर तक चलाए गए विशेष अभियान चलाया गया।
इसके तहत स्वच्छता, कूड़ा करकट, बिना टिकट यात्रा पर अंकुश, यातायात प्रवाह और पार्किंग, स्टेशन रखरखाव और सेवा गुणवत्ता निगरानी आदि के क्षेत्र में समग्र सुधार पर विशेष ध्यान दिया गया। मालदा डिवीजन के पीआर रूपा मंडल ने बताया कि 9 से 15 नवंबर तक मालदा टाउन-न्यू फरक्का, भागलपुर-सबौर, भागलपुर-टिकानी, भागलपुर-बाराहाट इत्यादि खंडों के बीच विशेष अभियान चलाया गया।
अभियान के दौरान बिना टिकट यात्रा करते हुए, अनुचित टिकट ले जाते हुए, कूड़ा फेंकते हुए, बिना बुक किए सामान आदि के साथ सफर करने वाले 2219 यात्रियों से 16,69,950 रुपए जुर्माने के तौर पर वसूला गया। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी व्यक्ति रेलवे में उचित टिकट के बिना यात्रा न करे और इससे यात्रा के दौरान टिकट खरीदने की प्रवृत्ति बढ़े।
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मिशन सुधार यानी सेवा उन्नयन, भीड़-भाड़ कम करना और सुविधाओं की बहाली के लिए समग्र कार्रवाई के लिए मालदा डिवीजन के डीआरएम विकास चौबे के निर्देश पर नौ से पंद्रह नवंबर तक चलाए गए विशेष अभियान चलाया गया। इसके तहत स्वच्छता, कूड़ा करकट, बिना टिकट यात्रा पर अंकुश, यातायात प्रवाह और पार्किंग, स्टेशन रखरखाव और सेवा गुणवत्ता निगरानी आदि के क्षेत्र में समग्र सुधार पर विशेष ध्यान दिया गया। मालदा डिवीजन के पीआर रूपा मंडल ने बताया कि नौ से पंद्रह नवंबर तक मालदा टाउन-न्यू फरक्का, भागलपुर-सबौर, भागलपुर-टिकानी, भागलपुर-बाराहाट इत्यादि खंडों के बीच विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान बिना टिकट यात्रा करते हुए, अनुचित टिकट ले जाते हुए, कूड़ा फेंकते हुए, बिना बुक किए सामान आदि के साथ सफर करने वाले दो हज़ार दो सौ उन्नीस यात्रियों से सोलह,उनहत्तर,नौ सौ पचास रुपयापए जुर्माने के तौर पर वसूला गया। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी व्यक्ति रेलवे में उचित टिकट के बिना यात्रा न करे और इससे यात्रा के दौरान टिकट खरीदने की प्रवृत्ति बढ़े। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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एक किताब की 10 लाख कॉपी दो दिन में ही बिक गईं,
दरअसल ये गलती उस किताब के टाइटल में हो गई थी।
किताब का नाम था - 'एक आइडिया जो आपकी Life बदल दे'
और गलती से हो गया - 'एक आइडिया जो आपकी 'Wife बदल दे' ?
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? ? ? ? ? एक किताब की दस लाख कॉपी दो दिन में ही बिक गईं, दरअसल ये गलती उस किताब के टाइटल में हो गई थी। किताब का नाम था - 'एक आइडिया जो आपकी Life बदल दे' और गलती से हो गया - 'एक आइडिया जो आपकी 'Wife बदल दे' ?
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उत्तर प्रदेशः उत्तर प्रदेश का यश भारती सम्मान पर योगी सरकार की निगाहें टिक गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने ऐलान किया है कि वो पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा शुरू किये गए यश भारती सम्मान की जांच कराएंगे. बता दें कि यश भारती सम्मान की शुरुआत मुलायम सिंह यादव की सरकार ने लगभग दो दशक पहले की थी. इस पुरस्कार में 11 लाख की धनराशि और 50 हजार रुपए मासिक पेंशन दिए जाने का उल्लेख है.
उल्लेखनीय है कि यश भारती सम्मान की शुरुआत मुलायम सिंह यादव की सपा सरकार ने प्रदेश का नाम रोशन करने वाले कलाकारों को सम्मानित करने के लिए लगभग दो दशक पहले 1994 में की थी. ये सम्मान सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, नसीरुद्दीन शाह, नवाजुद्दीन सिद्दीकी समेत तमाम बड़ी हस्तियों को दिया जा चुका है. कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन पर आरोप लगते रहे थे कि इस कुछ लोगों को आर्थिक फायदा पहुंचाने के लिए सम्मान के तहत 11 लाख की धनराशि और 50 हजार रुपए मासिक पेंशन के तौर पर बांटे गए हैं.
बता दें कि योगी सरकार के सूत्रो ने बताया कि पुरस्कार बांटने में अगर किसी भी तरह की धांधली पाई गई ,तो 50 हजार रुपए की मासिक पेंशन को तत्काल बंद कर दिया जाएगा. यश भारती पुरस्कार से सम्मानित बहुत सी शख्सियतें ऐसी भी हैं जो पेंशन नहीं लेती हैं. इनमें से बच्चन परिवार का नाम सबसे ऊपर है. जब मायावती की बसपा सरकार सत्ता में आई तब उन्होंने इस सम्मान को बंद कर दिया था.
लेकिन बाद में फिर से सत्ता परिवर्तन हुआ और अखिलेश यादव के सीएम बनने के बाद एक बार फिर से इन पुरस्कारों को शुरू कर दिया गया. अखिलेश ने अपने पार्टी दफ्तर के दो पत्रकारों को भी इस सम्मान से नवाज दिया था. योगी आदित्यनाथ ने अयोग्य उम्मीदवारों को पुरस्कृत करने को पुरस्कारों का अपमान बताते हुए इसकी जांच के आदेश दिए हैं.
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उत्तर प्रदेशः उत्तर प्रदेश का यश भारती सम्मान पर योगी सरकार की निगाहें टिक गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने ऐलान किया है कि वो पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा शुरू किये गए यश भारती सम्मान की जांच कराएंगे. बता दें कि यश भारती सम्मान की शुरुआत मुलायम सिंह यादव की सरकार ने लगभग दो दशक पहले की थी. इस पुरस्कार में ग्यारह लाख की धनराशि और पचास हजार रुपए मासिक पेंशन दिए जाने का उल्लेख है. उल्लेखनीय है कि यश भारती सम्मान की शुरुआत मुलायम सिंह यादव की सपा सरकार ने प्रदेश का नाम रोशन करने वाले कलाकारों को सम्मानित करने के लिए लगभग दो दशक पहले एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में की थी. ये सम्मान सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, नसीरुद्दीन शाह, नवाजुद्दीन सिद्दीकी समेत तमाम बड़ी हस्तियों को दिया जा चुका है. कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन पर आरोप लगते रहे थे कि इस कुछ लोगों को आर्थिक फायदा पहुंचाने के लिए सम्मान के तहत ग्यारह लाख की धनराशि और पचास हजार रुपए मासिक पेंशन के तौर पर बांटे गए हैं. बता दें कि योगी सरकार के सूत्रो ने बताया कि पुरस्कार बांटने में अगर किसी भी तरह की धांधली पाई गई ,तो पचास हजार रुपए की मासिक पेंशन को तत्काल बंद कर दिया जाएगा. यश भारती पुरस्कार से सम्मानित बहुत सी शख्सियतें ऐसी भी हैं जो पेंशन नहीं लेती हैं. इनमें से बच्चन परिवार का नाम सबसे ऊपर है. जब मायावती की बसपा सरकार सत्ता में आई तब उन्होंने इस सम्मान को बंद कर दिया था. लेकिन बाद में फिर से सत्ता परिवर्तन हुआ और अखिलेश यादव के सीएम बनने के बाद एक बार फिर से इन पुरस्कारों को शुरू कर दिया गया. अखिलेश ने अपने पार्टी दफ्तर के दो पत्रकारों को भी इस सम्मान से नवाज दिया था. योगी आदित्यनाथ ने अयोग्य उम्मीदवारों को पुरस्कृत करने को पुरस्कारों का अपमान बताते हुए इसकी जांच के आदेश दिए हैं.
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रेल बजट में तीन बातों पर विशेष ध्यान दिया जाता हैö(1) सुरक्षा, (2) सुविधा और (3) विस्तार)। इन मानकों के मुताबिक रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने जो बजट पेश किया है वह कम से कम एक निश्चित नीति पर आधारित है। जहां तक बजट से नाराजगी और खुशी की बात है तो आज तक कोई भी ऐसा रेल बजट संसद में पेश नहीं हुआ जिसकी आलोचना न हुई हो। रेल मंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही दिनेश त्रिवेदी यात्रियों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील दिखे। उन्होंने सैम पित्रोदा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जिसे रेलवे को आधुनिक बनाने के लिए दिशा निर्देश देना था। पित्रोदा समिति ने रिपोर्ट दे भी दिया। दूसरी रिपोर्ट परमाणु विशेषज्ञ अनिल काकोदकर की अध्यक्षता में बनी जिसने रेलवे यात्रियों की सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए निर्देशों को प्रस्तावित किया। रेल मंत्री ने इन दोनों ही समितियों की रिपोर्टों को अपने बजट में शामिल किया और इन रिपोर्टों के मुताबिक रेलवे के आधुनिकीकरण एवं सुरक्षा के लिए अगले पांच वर्षों में पांच लाख करोड़ खर्च करने की बात कही गई है। साथ ही एक लाख बीस हजार करोड़ रुपये पर सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने पर खर्च किए जाने हैं। असल में यह राशि रेलवे की यात्रा सुरक्षित और रेलवे को संरक्षित बनाने के लिए पूंजी निवेश है और यह राशि भी रेलवे अपने पास से नहीं लगा पाएगी। यह राशि भी वित्त मंत्रालय को ही देना होगा। जहां विस्तार की बात है तो रेल मंत्री ने पिछले बजट में घोषित परियोजनाओं को पूरा न हो पाने के बावजूद भी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की घोषणा की है। इनमें रेल लाइनों का दोहरीकरण एवं विस्तार के साथ-साथ नई रेलगाड़ियों को शुरू करने की बात भी कही गई है। लेकिन सवाल उठता है कि जब पहले से घोषित रेल परियोजना पूरी होने की बात तो दूर उनका श्रीगणेश ही नहीं हुआ तो नई घोषित परियोजनाओं पर आम आदमी को भला भरोसा कैसे होगा? लगता है इसी सवाल के जवाब में अलग से इंडियन रेल अथारिटी के गठन की घोषणा की है। यह नई संस्था घोषित नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान देगी। बहरहाल इस बजट में रेल मंत्री ने रेलवे के भविष्य को सुधारने पर बल दिया है। आर्थिक मदद वित्त मंत्री से मांगी है। यह सारा कुछ तो ठीक है किन्तु रेलवे के आंतरिक राजस्व स्रोतों पर उन्होंने जो प्रयास सभी श्रेणियों में औसतन एक रुपये से लेकर 90 रुपये तक की न्यूनतम बढ़ोतरी की है, उससे आम जनता में भले ही कोई प्रतिक्रिया न हुई हो लेकिन रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी आग बबूला हो गई। उनका गुस्सा इतना बढ़ा कि उन्होंने बजट पेश होने के तुरन्त बाद ही फुफकारा कि या तो बढ़े हुए किराये रोल बैक होंगे या फिर खुद त्रिवेदी ही रोल बैक हो जाएंगे। सवाल यह है कि पिछले नौ वर्षों से लोकलुभावन बजट पेश करने वालों की समझ में यह बात क्यों नहीं आती कि रेलवे संचालन में आर्थिक पहलुओं की यदि अनदेखी होगी तो न तो सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी और न तो संरक्षा। तृणमूल का यह मानना सही है कि महंगाई की मार से त्रस्त आम जनता पर रेल किराये में वृद्धि से दोहरी मार पड़ेगी किन्तु जब मालभाड़े में 20 प्रतिशत की पहले ही वृद्धि हुई तो ममता बनर्जी कहां थीं। मालभाड़े में वृद्धि तो सीधे बाजार की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार है। सवाल है कि मान लीजिए रेलवे का किराया एक रुपये भी नहीं बढ़ना चाहिए तो क्या तृणमूल और ममता यह बताएंगी कि आखिर रेलवे को अपनी आय में वृद्धि के लिए क्या तरीका अपनाना चाहिए? क्षेत्रीय राजनीति का भूत रेल बजट को ऐसे जकड़ लिया है कि इस बजट के भविष्य पर कुछ भी टिप्पणी कर पाना मुश्किल है। किन्तु लगता है कि ममता और उनकी राजनीति से परिचित होने के बावजूद दिनेश त्रिवेदी ने भी दिल में शहीद होने की तमन्ना पाल रखी थी। रेल मंत्रालय के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक रेल बजट के पूर्व ही ममता ने दिनेश त्रिवेदी से कहा था कि रेलभाड़े में बढ़ोतरी करके आम आदमी को प्रभावित न करना। लेकिन त्रिवेदी ने उनके निर्देशों को अनसुना करते हुए साहसिक कदम उठाया। अब भारत सरकार के मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में तो उनका बजट अच्छा है। किन्तु तृणमूल कांग्रेस के नेता के तौर पर उन्होंने बजट को मोहरा बनाकर अपनी छवि चमकाने का प्रयास किया है। जानकार सूत्रों का मानना है कि इन दिनों दिनेश त्रिवेदी की ममता बनर्जी से दूरियां लगातार बढ़ रही थीं और बजट के बाद त्रिवेदी की रेल भवन से विदाई निश्चित थी। इसीलिए उन्होंने शहीद बनने का तरीका खोजा। तनाव की खबर में सच्चाई जो भी हो किन्तु एक बात तो तय है कि बजट पेश करने के बाद रेल मंत्री ने जैसा तेवर दिखाया और देश पहले, पार्टी बाद में जैसा बयान दिया, वह शायद ममता जैसी नेता बर्दाश्त कर पातीं। इसलिए तृणमूल की आंतरिक राजनीति पश्चिम बंगाल की विद्रोही मानसिकता और तृणमूल तथा यूपीए के संबंधों में खटास के कारण ही हालत बिगड़ी है। बहरहाल बजट पर राजनीति के प्रभावी होने से रेलवे की सेहत का प्रभावित होना स्वाभाविक है। इसलिए लगता है कि दिनेश त्रिवेदी के बजट प्रस्ताव से किराया वृद्धि वापस होना तय है और यदि किराया वृद्धि वापस हो गया तो फिर रेलवे ठन-ठन गोपाल बनकर रह जाएगी क्योंकि वित्त मंत्रालय रेलवे को बजटीय सहायता 10 लाख करोड़ से ज्यादा देने वाला नहीं है जबकि जितनी परियोजनाएं लम्बित हैं उन्हें पूरा करने के लिए कम से कम 50 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है। सवाल है कि क्या पश्चिम बंगाल की राजनीतिक छाया में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं उपक्रमों का संचालन होगा तो देश भी पश्चिम बंगाल ही नहीं बन जाएगा? इस बेढंगे सवाल का जवाब तो यूपीए सरकार को ही देना है किन्तु यदि यूपीए के विभिन्न घटकों का यही रवैया रहा तो केंद्र सरकार तो डूबेगी ही देश का भी भाग्यचक्र पीछे की तरफ चलना शुरू हो जाएगा।
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रेल बजट में तीन बातों पर विशेष ध्यान दिया जाता हैö सुरक्षा, सुविधा और विस्तार)। इन मानकों के मुताबिक रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने जो बजट पेश किया है वह कम से कम एक निश्चित नीति पर आधारित है। जहां तक बजट से नाराजगी और खुशी की बात है तो आज तक कोई भी ऐसा रेल बजट संसद में पेश नहीं हुआ जिसकी आलोचना न हुई हो। रेल मंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही दिनेश त्रिवेदी यात्रियों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील दिखे। उन्होंने सैम पित्रोदा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जिसे रेलवे को आधुनिक बनाने के लिए दिशा निर्देश देना था। पित्रोदा समिति ने रिपोर्ट दे भी दिया। दूसरी रिपोर्ट परमाणु विशेषज्ञ अनिल काकोदकर की अध्यक्षता में बनी जिसने रेलवे यात्रियों की सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए निर्देशों को प्रस्तावित किया। रेल मंत्री ने इन दोनों ही समितियों की रिपोर्टों को अपने बजट में शामिल किया और इन रिपोर्टों के मुताबिक रेलवे के आधुनिकीकरण एवं सुरक्षा के लिए अगले पांच वर्षों में पांच लाख करोड़ खर्च करने की बात कही गई है। साथ ही एक लाख बीस हजार करोड़ रुपये पर सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने पर खर्च किए जाने हैं। असल में यह राशि रेलवे की यात्रा सुरक्षित और रेलवे को संरक्षित बनाने के लिए पूंजी निवेश है और यह राशि भी रेलवे अपने पास से नहीं लगा पाएगी। यह राशि भी वित्त मंत्रालय को ही देना होगा। जहां विस्तार की बात है तो रेल मंत्री ने पिछले बजट में घोषित परियोजनाओं को पूरा न हो पाने के बावजूद भी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की घोषणा की है। इनमें रेल लाइनों का दोहरीकरण एवं विस्तार के साथ-साथ नई रेलगाड़ियों को शुरू करने की बात भी कही गई है। लेकिन सवाल उठता है कि जब पहले से घोषित रेल परियोजना पूरी होने की बात तो दूर उनका श्रीगणेश ही नहीं हुआ तो नई घोषित परियोजनाओं पर आम आदमी को भला भरोसा कैसे होगा? लगता है इसी सवाल के जवाब में अलग से इंडियन रेल अथारिटी के गठन की घोषणा की है। यह नई संस्था घोषित नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान देगी। बहरहाल इस बजट में रेल मंत्री ने रेलवे के भविष्य को सुधारने पर बल दिया है। आर्थिक मदद वित्त मंत्री से मांगी है। यह सारा कुछ तो ठीक है किन्तु रेलवे के आंतरिक राजस्व स्रोतों पर उन्होंने जो प्रयास सभी श्रेणियों में औसतन एक रुपये से लेकर नब्बे रुपयापये तक की न्यूनतम बढ़ोतरी की है, उससे आम जनता में भले ही कोई प्रतिक्रिया न हुई हो लेकिन रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी आग बबूला हो गई। उनका गुस्सा इतना बढ़ा कि उन्होंने बजट पेश होने के तुरन्त बाद ही फुफकारा कि या तो बढ़े हुए किराये रोल बैक होंगे या फिर खुद त्रिवेदी ही रोल बैक हो जाएंगे। सवाल यह है कि पिछले नौ वर्षों से लोकलुभावन बजट पेश करने वालों की समझ में यह बात क्यों नहीं आती कि रेलवे संचालन में आर्थिक पहलुओं की यदि अनदेखी होगी तो न तो सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी और न तो संरक्षा। तृणमूल का यह मानना सही है कि महंगाई की मार से त्रस्त आम जनता पर रेल किराये में वृद्धि से दोहरी मार पड़ेगी किन्तु जब मालभाड़े में बीस प्रतिशत की पहले ही वृद्धि हुई तो ममता बनर्जी कहां थीं। मालभाड़े में वृद्धि तो सीधे बाजार की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार है। सवाल है कि मान लीजिए रेलवे का किराया एक रुपये भी नहीं बढ़ना चाहिए तो क्या तृणमूल और ममता यह बताएंगी कि आखिर रेलवे को अपनी आय में वृद्धि के लिए क्या तरीका अपनाना चाहिए? क्षेत्रीय राजनीति का भूत रेल बजट को ऐसे जकड़ लिया है कि इस बजट के भविष्य पर कुछ भी टिप्पणी कर पाना मुश्किल है। किन्तु लगता है कि ममता और उनकी राजनीति से परिचित होने के बावजूद दिनेश त्रिवेदी ने भी दिल में शहीद होने की तमन्ना पाल रखी थी। रेल मंत्रालय के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक रेल बजट के पूर्व ही ममता ने दिनेश त्रिवेदी से कहा था कि रेलभाड़े में बढ़ोतरी करके आम आदमी को प्रभावित न करना। लेकिन त्रिवेदी ने उनके निर्देशों को अनसुना करते हुए साहसिक कदम उठाया। अब भारत सरकार के मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में तो उनका बजट अच्छा है। किन्तु तृणमूल कांग्रेस के नेता के तौर पर उन्होंने बजट को मोहरा बनाकर अपनी छवि चमकाने का प्रयास किया है। जानकार सूत्रों का मानना है कि इन दिनों दिनेश त्रिवेदी की ममता बनर्जी से दूरियां लगातार बढ़ रही थीं और बजट के बाद त्रिवेदी की रेल भवन से विदाई निश्चित थी। इसीलिए उन्होंने शहीद बनने का तरीका खोजा। तनाव की खबर में सच्चाई जो भी हो किन्तु एक बात तो तय है कि बजट पेश करने के बाद रेल मंत्री ने जैसा तेवर दिखाया और देश पहले, पार्टी बाद में जैसा बयान दिया, वह शायद ममता जैसी नेता बर्दाश्त कर पातीं। इसलिए तृणमूल की आंतरिक राजनीति पश्चिम बंगाल की विद्रोही मानसिकता और तृणमूल तथा यूपीए के संबंधों में खटास के कारण ही हालत बिगड़ी है। बहरहाल बजट पर राजनीति के प्रभावी होने से रेलवे की सेहत का प्रभावित होना स्वाभाविक है। इसलिए लगता है कि दिनेश त्रिवेदी के बजट प्रस्ताव से किराया वृद्धि वापस होना तय है और यदि किराया वृद्धि वापस हो गया तो फिर रेलवे ठन-ठन गोपाल बनकर रह जाएगी क्योंकि वित्त मंत्रालय रेलवे को बजटीय सहायता दस लाख करोड़ से ज्यादा देने वाला नहीं है जबकि जितनी परियोजनाएं लम्बित हैं उन्हें पूरा करने के लिए कम से कम पचास हजार करोड़ रुपये की जरूरत है। सवाल है कि क्या पश्चिम बंगाल की राजनीतिक छाया में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं उपक्रमों का संचालन होगा तो देश भी पश्चिम बंगाल ही नहीं बन जाएगा? इस बेढंगे सवाल का जवाब तो यूपीए सरकार को ही देना है किन्तु यदि यूपीए के विभिन्न घटकों का यही रवैया रहा तो केंद्र सरकार तो डूबेगी ही देश का भी भाग्यचक्र पीछे की तरफ चलना शुरू हो जाएगा।
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दिल्ली के खर्चे अन्य राज्यों की तुलना में 60 फीसदी भी नहीं है लेकिन बावजूद दिल्ली सरकार अपने 12 कॉलेजों के शिक्षकों का वेतन भी नहीं दे पाई है।
नई दिल्ली। दिल्ली के खर्चे अन्य राज्यों की तुलना में 60 फीसदी भी नहीं है लेकिन बावजूद दिल्ली सरकार अपने 12 कॉलेजों के शिक्षकों का वेतन भी नहीं दे पाई है। सेंटर फॉर सोशल डेवलपमेंट द्वारा प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित संवाद सभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बुधवार को ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में शिक्षक भाजपा का साथ दें, 'जहां शिक्षक जाएंगे वहां समाज जाएगा'। उन्होंने यहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के विभिन्न कॉलेज से आए शिक्षकों की समस्याओं को सुनते हुए आगामी नगर निगम चुनाव को लेकर विस्तृत चर्चा की।
इस मौके पर प्रधान ने शिक्षकों से संवाद के दौरान केजरीवाल सरकार पर दिल्ली की जनता के भरोसे का खून करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने शराब नीति से जिस तरह भ्रष्टाचार किया है, उसे दिल्ली वाले कभी नहीं भूलेंगे। इस सरकार ने शिक्षा के फंड से चेहरा चमकाने का काम किया है। संवाद सभा के विशेष अतिथि के तौर पर भाजपा की राष्ट्रीय मंत्री एवं प्रदेश सह-प्रभारी डॉ अलका गुर्जर भी उपस्थित थीं। इस दौरान एनडीटीएफ के अध्यक्ष प्रो ए के भागी ने संवाद सभा में शिक्षकों की समस्याओं को विस्तृत तरीके से सबके सामने रखा। संवाद सभा में संबंधित व्यक्तित्व शामिल रहे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने शिक्षकों से अपील की कि वह आगामी नगर निगम चुनाव में भाजपा को अपना समर्थन दें क्योंकि शिक्षक जिस दिशा में जाएंगे समाज भी उसी दिशा में जाएगा। उन्होंने कहा कि निगम चुनाव में केजरीवाल सरकार की ठगाई और पाखंड उजागर होगा। प्रधान ने कहा कि समाजिक समरसता में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने जो काम किया है, वह किसी भी सरकार में नहीं हो पाया। लेकिन आज दिल्ली में एक ऐसी सरकार बैठी है जिसे समाज से ना कोई मतलब है और शिक्षा का सिर्फ दिखावा है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति सहित आर्थिक आधार पर मोदी सरकार ने सभी को मुख्य विकासधारा में जोड़ने का काम किया है। आने वाले समय में 10 लाख रिक्त पदों को भरके या नया पद सृजन करके नई पीढ़ी को काम का अवसर दिया जाएगा।
धर्मेंन्द्र प्रधान ने कहा कि आज दिल्ली में एक ऐसी सरकार बैठी है जिसने शिक्षकों की एक भी समस्या का समाधान करना तो दूर उसने कभी शिक्षकों की बात तक नहीं सुनी। दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक कई बार अपनी समस्याओं को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास गए लेकिन उन्हें खाली हाथ वापस आना पड़ा, लेकिन हम आपके साथ मिलकर आपकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे और आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने की पूरी कोशिश भी करेंगे।
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दिल्ली के खर्चे अन्य राज्यों की तुलना में साठ फीसदी भी नहीं है लेकिन बावजूद दिल्ली सरकार अपने बारह कॉलेजों के शिक्षकों का वेतन भी नहीं दे पाई है। नई दिल्ली। दिल्ली के खर्चे अन्य राज्यों की तुलना में साठ फीसदी भी नहीं है लेकिन बावजूद दिल्ली सरकार अपने बारह कॉलेजों के शिक्षकों का वेतन भी नहीं दे पाई है। सेंटर फॉर सोशल डेवलपमेंट द्वारा प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित संवाद सभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बुधवार को ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में शिक्षक भाजपा का साथ दें, 'जहां शिक्षक जाएंगे वहां समाज जाएगा'। उन्होंने यहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के विभिन्न कॉलेज से आए शिक्षकों की समस्याओं को सुनते हुए आगामी नगर निगम चुनाव को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस मौके पर प्रधान ने शिक्षकों से संवाद के दौरान केजरीवाल सरकार पर दिल्ली की जनता के भरोसे का खून करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने शराब नीति से जिस तरह भ्रष्टाचार किया है, उसे दिल्ली वाले कभी नहीं भूलेंगे। इस सरकार ने शिक्षा के फंड से चेहरा चमकाने का काम किया है। संवाद सभा के विशेष अतिथि के तौर पर भाजपा की राष्ट्रीय मंत्री एवं प्रदेश सह-प्रभारी डॉ अलका गुर्जर भी उपस्थित थीं। इस दौरान एनडीटीएफ के अध्यक्ष प्रो ए के भागी ने संवाद सभा में शिक्षकों की समस्याओं को विस्तृत तरीके से सबके सामने रखा। संवाद सभा में संबंधित व्यक्तित्व शामिल रहे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने शिक्षकों से अपील की कि वह आगामी नगर निगम चुनाव में भाजपा को अपना समर्थन दें क्योंकि शिक्षक जिस दिशा में जाएंगे समाज भी उसी दिशा में जाएगा। उन्होंने कहा कि निगम चुनाव में केजरीवाल सरकार की ठगाई और पाखंड उजागर होगा। प्रधान ने कहा कि समाजिक समरसता में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने जो काम किया है, वह किसी भी सरकार में नहीं हो पाया। लेकिन आज दिल्ली में एक ऐसी सरकार बैठी है जिसे समाज से ना कोई मतलब है और शिक्षा का सिर्फ दिखावा है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति सहित आर्थिक आधार पर मोदी सरकार ने सभी को मुख्य विकासधारा में जोड़ने का काम किया है। आने वाले समय में दस लाख रिक्त पदों को भरके या नया पद सृजन करके नई पीढ़ी को काम का अवसर दिया जाएगा। धर्मेंन्द्र प्रधान ने कहा कि आज दिल्ली में एक ऐसी सरकार बैठी है जिसने शिक्षकों की एक भी समस्या का समाधान करना तो दूर उसने कभी शिक्षकों की बात तक नहीं सुनी। दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक कई बार अपनी समस्याओं को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास गए लेकिन उन्हें खाली हाथ वापस आना पड़ा, लेकिन हम आपके साथ मिलकर आपकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे और आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने की पूरी कोशिश भी करेंगे।
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5. ओरल सेक्स सुरक्षित है क्या?
HIV और एड्स कौन व्यक्ति पीड़ित है आप नहीं जानते हैं. आप किसी वैश्या के पास जाते हैं और सेक्स तो कंडोम से करते हैं किन्तु ओरल सेक्स का मजा ऐसे ही लेते होंगे, तो अब आप जान लीजिये कि ओरल सेक्स से भी एड्स हो सकता है. इसलिए आप वैश्या के पास ना जाये तो ही बेहतर है.
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पाँच. ओरल सेक्स सुरक्षित है क्या? HIV और एड्स कौन व्यक्ति पीड़ित है आप नहीं जानते हैं. आप किसी वैश्या के पास जाते हैं और सेक्स तो कंडोम से करते हैं किन्तु ओरल सेक्स का मजा ऐसे ही लेते होंगे, तो अब आप जान लीजिये कि ओरल सेक्स से भी एड्स हो सकता है. इसलिए आप वैश्या के पास ना जाये तो ही बेहतर है.
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सरायकेलाः अनुमंडल कार्यालय के निकट पब्लिक दुर्गा पूजा मैदान में शुक्रवार को भाजपा जिलाध्यक्ष विजय महतो के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया।
यह धरना प्रदर्शन जमशेदपुर के हिंदूवादी संगठन एवं भाजपा कार्यकर्ताओं की शीघ्र रिहाई की मांग को लेकर किया गया। धरना को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा हमारी मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, लेकिन प्रशासन और सरकार एकपक्षीय सोच रखती है।
अभय सिंह को सुबह 3 बजे आतंकवादियों की तरह से गिरफ्तार किया गया, ऐसा लगता है जैसे प्रशासन उनसे डरी हुई थी। उन्होंने कहा अभी बताया गया कि यहां सरायकेला के एक 300 साल पुराने मंदिर पर प्रशासन की कुदृष्टि पड़ गई है।
प्रशासन अब उस मंदिर का कागज दिखाने को कह रही है। उन्होंने कहा अगर हम चुप रहेंगे तो हेमंत सोरेन जिनका साथी कांग्रेस पार्टी है इनका हिंदू विरोध रुकने वाला नही।
रांची में दंगा हुआ पुलिस को गोली चलाना पड़ा,एक दंगाई घायल हुआ, सरकार उसके लिए एयर एंबुलेंस सुविधा मुहैया कराती है। सरकार ने आज तक उस दंगे पर कोई कार्रवाई नही किया, यह सरकार दंगाइयों को संरक्षण देती है।
सरकार को जांच से क्या डर है ? राज्य में लूट मचा हुआ है, अराजकता का माहौल है, सरकार दिल्ली,मुंबई के लोगो को राज्य के सभी संसाधन बेच रही है। विकास के काम ठप्प पड़े है, सरकार शराब का व्यवसाय भी छत्तीसगढ़ के लोगो को सौप कर घोटाला कर रही है। यह लोग आदिवासियों के नाम पर राज करते है और उन्ही को लुटते हैं।
प्रदेश के पूर्व भाजपा अध्यक्ष दिनेशानंद गोस्वामी ने अपने संबोधन में कहा चार पन्नो के एफआईआर में शरारती तत्वों के नाम है, जिन्होंने पत्थर फेंका, जिन्होंने बम फेंका, उनका नाम दर्ज है। लेकिन जेल में अभय सिंह और बाकी हिंदूवादी नेता हैं, इरफान अंसारी रोज राज्य का माहौल खराब करने वाला बयान देता है वह मुख्यमंत्री का चहेता बना हुआ है ।
ऐसा पहली बार हुआ होगा की ज्ञापन देने वाले को ही जेल भेज दिया गया है, इस हिंदू विरोधी, सरना विरोधी सरकार को उखाड़ फेंकना है।
जे. बी तुबित ने कहा अब सरना और सनातन को एक होना होगा, उन्होंने कहा देश में सबसे ज्यादा आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार होता है, आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ की लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध लगा हो।
पूर्व मंत्री बड़कुंवर गगराई ने अपने संबोधन कहा इस सरकार से भाजपा कार्यकर्ता डरने वाले नही है जेल जाने से हम नही डरते है।
धरना प्रदर्शन सभा को इनके अलावा भाजपा नेता शैलेंद्र सिंह, उदय सिंहदेव, गणेश माहली, रमेश हांसदा, सुनील श्रीवास्तव एवं लाल सिंह सोय ने भी संबोधन किया।
मंच संचालन राकेश सिंह ने किया,आज के कार्यक्रम में मीनाक्षी पटनायक, बास्को बेसरा,निर्भय सिंह,मनोज चौधरी, बॉबी सिंह, सतीश पूरी, सारथी महतो, हलधर नारायण, अमिताभ सेनापति भी मनचसीन रहे।
कार्यक्रम को संपन्न बनाने में जिला मीडिया प्रभारी राकेश मिश्रा, मनोज तिवारी, मुजाहिद खान, पंकज कुमार, सोहन सिंह, भोगेंद्र झा,अभिषेक आचार्या, राजू सिंह, ब्रह्मानंद झा,संजय सरदार, कृष्णा प्रधान,बिरेंद्र सिंह, बद्री दारोगा, होपना सोरेन, बीएन सिंह एवं सुशील सारंगी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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सरायकेलाः अनुमंडल कार्यालय के निकट पब्लिक दुर्गा पूजा मैदान में शुक्रवार को भाजपा जिलाध्यक्ष विजय महतो के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह धरना प्रदर्शन जमशेदपुर के हिंदूवादी संगठन एवं भाजपा कार्यकर्ताओं की शीघ्र रिहाई की मांग को लेकर किया गया। धरना को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा हमारी मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, लेकिन प्रशासन और सरकार एकपक्षीय सोच रखती है। अभय सिंह को सुबह तीन बजे आतंकवादियों की तरह से गिरफ्तार किया गया, ऐसा लगता है जैसे प्रशासन उनसे डरी हुई थी। उन्होंने कहा अभी बताया गया कि यहां सरायकेला के एक तीन सौ साल पुराने मंदिर पर प्रशासन की कुदृष्टि पड़ गई है। प्रशासन अब उस मंदिर का कागज दिखाने को कह रही है। उन्होंने कहा अगर हम चुप रहेंगे तो हेमंत सोरेन जिनका साथी कांग्रेस पार्टी है इनका हिंदू विरोध रुकने वाला नही। रांची में दंगा हुआ पुलिस को गोली चलाना पड़ा,एक दंगाई घायल हुआ, सरकार उसके लिए एयर एंबुलेंस सुविधा मुहैया कराती है। सरकार ने आज तक उस दंगे पर कोई कार्रवाई नही किया, यह सरकार दंगाइयों को संरक्षण देती है। सरकार को जांच से क्या डर है ? राज्य में लूट मचा हुआ है, अराजकता का माहौल है, सरकार दिल्ली,मुंबई के लोगो को राज्य के सभी संसाधन बेच रही है। विकास के काम ठप्प पड़े है, सरकार शराब का व्यवसाय भी छत्तीसगढ़ के लोगो को सौप कर घोटाला कर रही है। यह लोग आदिवासियों के नाम पर राज करते है और उन्ही को लुटते हैं। प्रदेश के पूर्व भाजपा अध्यक्ष दिनेशानंद गोस्वामी ने अपने संबोधन में कहा चार पन्नो के एफआईआर में शरारती तत्वों के नाम है, जिन्होंने पत्थर फेंका, जिन्होंने बम फेंका, उनका नाम दर्ज है। लेकिन जेल में अभय सिंह और बाकी हिंदूवादी नेता हैं, इरफान अंसारी रोज राज्य का माहौल खराब करने वाला बयान देता है वह मुख्यमंत्री का चहेता बना हुआ है । ऐसा पहली बार हुआ होगा की ज्ञापन देने वाले को ही जेल भेज दिया गया है, इस हिंदू विरोधी, सरना विरोधी सरकार को उखाड़ फेंकना है। जे. बी तुबित ने कहा अब सरना और सनातन को एक होना होगा, उन्होंने कहा देश में सबसे ज्यादा आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार होता है, आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ की लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध लगा हो। पूर्व मंत्री बड़कुंवर गगराई ने अपने संबोधन कहा इस सरकार से भाजपा कार्यकर्ता डरने वाले नही है जेल जाने से हम नही डरते है। धरना प्रदर्शन सभा को इनके अलावा भाजपा नेता शैलेंद्र सिंह, उदय सिंहदेव, गणेश माहली, रमेश हांसदा, सुनील श्रीवास्तव एवं लाल सिंह सोय ने भी संबोधन किया। मंच संचालन राकेश सिंह ने किया,आज के कार्यक्रम में मीनाक्षी पटनायक, बास्को बेसरा,निर्भय सिंह,मनोज चौधरी, बॉबी सिंह, सतीश पूरी, सारथी महतो, हलधर नारायण, अमिताभ सेनापति भी मनचसीन रहे। कार्यक्रम को संपन्न बनाने में जिला मीडिया प्रभारी राकेश मिश्रा, मनोज तिवारी, मुजाहिद खान, पंकज कुमार, सोहन सिंह, भोगेंद्र झा,अभिषेक आचार्या, राजू सिंह, ब्रह्मानंद झा,संजय सरदार, कृष्णा प्रधान,बिरेंद्र सिंह, बद्री दारोगा, होपना सोरेन, बीएन सिंह एवं सुशील सारंगी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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अम्बाला शहर, 2 मार्च (हप्र)
मानव चौक के पास सेक्टर-8 में हूडा की खाली पड़ी जमीन पर सब्जी विक्रेताओं द्वारा लगाई गई रेहड़ियाें, फड़ियाें को हटवाने के विभागीय प्रयास का जमकर विरोध हुआ। एक ओर जहां कब्जाधारी सब्जी विक्रेता धरने पर बैठ गए वहीं कांग्रेस और किसान नेता अवैध कब्जाधारियों के पक्ष में मौके पर पहुंच गए और कब्जे हटाने का विरोध करने लगे।
मंगलवार को हूडा विभाग पुलिस फोर्स के साथ कार्रवाई करने पहुंचा तो किसान यूनियन के नेता व कांग्रेस पार्टी के कुछ नेता इन रेहड़ी फड़ी वालों के समर्थन में आ गये। मामला तनावपूर्ण होने लगा तो उपायुक्त अम्बाला और कब्जाधारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के बीच तय हुआ कि हूडा संबंधित रेहड़ी और फड़ी वालों को बाकायदा नोटिस देगा ताकि वह निर्धारित समय में अपने कब्जे हटा दें।
रेहड़ी फड़ी यूनियन के प्रधान रामजी की अगुवाई में रेहड़ी फड़ी वाले धरने पर बैठ गये। उन्होंने कहा कि या तो प्रशासन किसी अन्य स्थान पर जगह दे, अन्याथा वे यहां से नहीं हटेंगे। अवैध कब्जे हटाने को लेकर भारी पुलिस बल व फोर्स बुलायी गयी थी। सिटी एसएचओ रामकुमार, सदर एसएचओ सुरेश कुमार, सेक्टर 9 थाना एसएचओ, पांच नंबर चौकी इंचार्ज सुल्तान सिंह सहित भारी संख्या में पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। देर शाम पुलिस फोर्स वापस लौट गई। अब हूडा विभाग कब्जाधारियों को नोटिस देगा तो आगे कार्रवाई होगी।
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अम्बाला शहर, दो मार्च मानव चौक के पास सेक्टर-आठ में हूडा की खाली पड़ी जमीन पर सब्जी विक्रेताओं द्वारा लगाई गई रेहड़ियाें, फड़ियाें को हटवाने के विभागीय प्रयास का जमकर विरोध हुआ। एक ओर जहां कब्जाधारी सब्जी विक्रेता धरने पर बैठ गए वहीं कांग्रेस और किसान नेता अवैध कब्जाधारियों के पक्ष में मौके पर पहुंच गए और कब्जे हटाने का विरोध करने लगे। मंगलवार को हूडा विभाग पुलिस फोर्स के साथ कार्रवाई करने पहुंचा तो किसान यूनियन के नेता व कांग्रेस पार्टी के कुछ नेता इन रेहड़ी फड़ी वालों के समर्थन में आ गये। मामला तनावपूर्ण होने लगा तो उपायुक्त अम्बाला और कब्जाधारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के बीच तय हुआ कि हूडा संबंधित रेहड़ी और फड़ी वालों को बाकायदा नोटिस देगा ताकि वह निर्धारित समय में अपने कब्जे हटा दें। रेहड़ी फड़ी यूनियन के प्रधान रामजी की अगुवाई में रेहड़ी फड़ी वाले धरने पर बैठ गये। उन्होंने कहा कि या तो प्रशासन किसी अन्य स्थान पर जगह दे, अन्याथा वे यहां से नहीं हटेंगे। अवैध कब्जे हटाने को लेकर भारी पुलिस बल व फोर्स बुलायी गयी थी। सिटी एसएचओ रामकुमार, सदर एसएचओ सुरेश कुमार, सेक्टर नौ थाना एसएचओ, पांच नंबर चौकी इंचार्ज सुल्तान सिंह सहित भारी संख्या में पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। देर शाम पुलिस फोर्स वापस लौट गई। अब हूडा विभाग कब्जाधारियों को नोटिस देगा तो आगे कार्रवाई होगी।
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إليـه فـقـال ما من عبد قال لا إله إلا الله ثم مات على ذلك إلا دخل الجنة قلت وإن زنى وإن سرق قال وإن زنى وإن سرق قلت وإن زنى وإن سرق قال وإن زنى وإن سرق ثلاثا ثم قال في الرابعة على رغم أنف أبي ذر قال فخرج أبوذر وهو يقول وإن رغم أنف أبي ذر. رواه مسلم (۲)
हज़रत अबूज़र रजि० कहते हैं मैं नबी अकरम सल्ल० की खिदमत में हाज़िर हुआ आप एक सफेद कपड़े में सो रहे थे। मैं दो बारा हाज़िर हुआ तब भी आप सो रहे थे, मैं तीसरी बार आया तो आप जाग रहे थे। मैं आप के पास बैठ गया, आपने फरमाया "जिस व्यक्ति ने ला इला- ह इल्लल्लाहु कहा और उसी पर मरा वह जन्नत में दाखिल होगा ।" मैंने अर्ज़ किया, "चाहे ज़िना किया हो, चारहे चोरी की हो ? आप सल्ल० ने इर्शाद फरमाया "चाहे ज़िना किया हो चाहे चोरी की हो ।" यह बात आपने तीन बार फरमाई फिर चौथी मर्तबा आपने फरमाया, "चाहे अबूज़र की नाक खाक आलूद हो ।" तो जब अबूज़र रज़ि० ( आपकी मजलिस से उठकर) बाहर आए तो कह रहे थे "चाहे अबूज़र की नाक खाक आलूद * " * Reis * Rala fal । fhalgr HI)
عـن عبـدالله بن عمرو بن العاص قال سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: إن الله سيخلص رجلا من أمتي على رءوس الخلائق يوم القيامة فينشر عليه تسعة وتسعين سجلا كل سجل مثل مد البصر ثم يقول : أتنكر من هذا شيئا؟ أظلمك كتبتي الحافظون فيقول لا يا رب فيقول أفلك عذر فيقول لا يا رب! فيقول بلى،إن لك عندنا حسنة، فإنه لا ظلم عليك اليوم فتخرج بطاقة فيها : أشهد أن لا إله إلا الله وأشهد أنّ محمداً عبده ورسوله فيقول: اخضر وزنك فيقول يا رب ما هذه البطاقة مع هذه السجلات ؟فـقـال: إنك لا تظلم قال: فتوضع السجلات في كفة،والبطاقة في كفة فطاشت السجلات،وثقلت البطاقة ولا يثقل مع اسم
الله شيء. رواه الترمذي (1)
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रजि० कहते हैं मैंने रसूले अकरम सल्ल० को फरमाते हुए सुना है कि कयामत के दिन अल्लाह तआला सारी मखलूक के सामने मेरी उम्मत के एक आदमी को लाएगा और उसके सामने ( गुनाहों) के निन्नान्वे दफतर रख दिये जाएंगे हर दफतर हदे निगाह तक फैला होगा, फिर अल्लाह तआला इस आदमी से पूछेगा, "तू अपने इन आमाल में से किसी का इंकार करता है ?" क्या ( नामाए आमाल तैयार करने वाले ) मेरे कातिबों ने तुझ पर जुल्म तो नहीं किया ? वह आदमी कहेगा "नहीं या अल्लाह ।" फिर अल्लाह तआला पूछगा ( उन गुनाहों के बारे में) "तेरे पास कोई उज़र है ?" वह आदमी कहेगा "नहीं या अल्लाह ।" अल्लाह तआला फिर इर्शाद फरमाएगा, "अच्छा ठहरो! हमारे पास तुम्हारी एक नेकी भी है और आज तुम पर कोई जुल्म नहीं होगा चुनांचे एक कागज़ का टुकड़ा लाया जाएगा जिसमें aw gargy one hars ol ng-शहदु अल्ला इला-ह इल्लल्लाहु व अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलहु तहरीर होगा । अल्लाह तआला इरशाद फरमाएगा, नामाए आमाल वज़न होने की जगह चले जाओ।" बन्दा अर्ज़ करेगा, "या अल्लाह इस छोटे से कागज़ के टुकड़े को मेरे गुनाहों के ढेर से क्या निसबत हो सकती है ?" अल्लाह तआल इरशाद फरमाएगा, "बन्दे ! आज तुम पर कोई ज़ुल्म नहीं होगा।" (यानी हर छोटे बड़े अमल का हिसाब ज़रूर होगा ) रसूलुल्लाह सल्ल० ने फरमाया, "गुनाहों के ढेर तराजू के एक पलड़े में और कागज़ का टुकड़ा दूसरे पलड़े में रख दिया जाएगा, गुनाहों के दफतर हलके साबित होंगे और कागज़ का टुकड़ा भारी हो जाएगा। (फिर आप सल्ल० ने इरशाद फरमाया), "अल्लाह तआला के नाम से ज़्यादा कोई चीज़ भारी नहीं हो सकती इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। (सही सुनन तिर्मिज़ी लिलबानी भाग दो हदीस २१२७ )
عـن أنـس بـن مـالك رضي الله عنه قال سمعت رسول الله صلى
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إليـه فـقـال ما من عبد قال لا إله إلا الله ثم مات على ذلك إلا دخل الجنة قلت وإن زنى وإن سرق قال وإن زنى وإن سرق قلت وإن زنى وإن سرق قال وإن زنى وإن سرق ثلاثا ثم قال في الرابعة على رغم أنف أبي ذر قال فخرج أبوذر وهو يقول وإن رغم أنف أبي ذر. رواه مسلم हज़रत अबूज़र रजिशून्य कहते हैं मैं नबी अकरम सल्लशून्य की खिदमत में हाज़िर हुआ आप एक सफेद कपड़े में सो रहे थे। मैं दो बारा हाज़िर हुआ तब भी आप सो रहे थे, मैं तीसरी बार आया तो आप जाग रहे थे। मैं आप के पास बैठ गया, आपने फरमाया "जिस व्यक्ति ने ला इला- ह इल्लल्लाहु कहा और उसी पर मरा वह जन्नत में दाखिल होगा ।" मैंने अर्ज़ किया, "चाहे ज़िना किया हो, चारहे चोरी की हो ? आप सल्लशून्य ने इर्शाद फरमाया "चाहे ज़िना किया हो चाहे चोरी की हो ।" यह बात आपने तीन बार फरमाई फिर चौथी मर्तबा आपने फरमाया, "चाहे अबूज़र की नाक खाक आलूद हो ।" तो जब अबूज़र रज़िशून्य बाहर आए तो कह रहे थे "चाहे अबूज़र की नाक खाक आलूद * " * Reis * Rala fal । fhalgr HI) عـن عبـدالله بن عمرو بن العاص قال سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: إن الله سيخلص رجلا من أمتي على رءوس الخلائق يوم القيامة فينشر عليه تسعة وتسعين سجلا كل سجل مثل مد البصر ثم يقول : أتنكر من هذا شيئا؟ أظلمك كتبتي الحافظون فيقول لا يا رب فيقول أفلك عذر فيقول لا يا رب! فيقول بلى،إن لك عندنا حسنة، فإنه لا ظلم عليك اليوم فتخرج بطاقة فيها : أشهد أن لا إله إلا الله وأشهد أنّ محمداً عبده ورسوله فيقول: اخضر وزنك فيقول يا رب ما هذه البطاقة مع هذه السجلات ؟فـقـال: إنك لا تظلم قال: فتوضع السجلات في كفة،والبطاقة في كفة فطاشت السجلات،وثقلت البطاقة ولا يثقل مع اسم الله شيء. رواه الترمذي हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रजिशून्य कहते हैं मैंने रसूले अकरम सल्लशून्य को फरमाते हुए सुना है कि कयामत के दिन अल्लाह तआला सारी मखलूक के सामने मेरी उम्मत के एक आदमी को लाएगा और उसके सामने के निन्नान्वे दफतर रख दिये जाएंगे हर दफतर हदे निगाह तक फैला होगा, फिर अल्लाह तआला इस आदमी से पूछेगा, "तू अपने इन आमाल में से किसी का इंकार करता है ?" क्या मेरे कातिबों ने तुझ पर जुल्म तो नहीं किया ? वह आदमी कहेगा "नहीं या अल्लाह ।" फिर अल्लाह तआला पूछगा "तेरे पास कोई उज़र है ?" वह आदमी कहेगा "नहीं या अल्लाह ।" अल्लाह तआला फिर इर्शाद फरमाएगा, "अच्छा ठहरो! हमारे पास तुम्हारी एक नेकी भी है और आज तुम पर कोई जुल्म नहीं होगा चुनांचे एक कागज़ का टुकड़ा लाया जाएगा जिसमें aw gargy one hars ol ng-शहदु अल्ला इला-ह इल्लल्लाहु व अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलहु तहरीर होगा । अल्लाह तआला इरशाद फरमाएगा, नामाए आमाल वज़न होने की जगह चले जाओ।" बन्दा अर्ज़ करेगा, "या अल्लाह इस छोटे से कागज़ के टुकड़े को मेरे गुनाहों के ढेर से क्या निसबत हो सकती है ?" अल्लाह तआल इरशाद फरमाएगा, "बन्दे ! आज तुम पर कोई ज़ुल्म नहीं होगा।" रसूलुल्लाह सल्लशून्य ने फरमाया, "गुनाहों के ढेर तराजू के एक पलड़े में और कागज़ का टुकड़ा दूसरे पलड़े में रख दिया जाएगा, गुनाहों के दफतर हलके साबित होंगे और कागज़ का टुकड़ा भारी हो जाएगा। , "अल्लाह तआला के नाम से ज़्यादा कोई चीज़ भारी नहीं हो सकती इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। عـن أنـس بـن مـالك رضي الله عنه قال سمعت رسول الله صلى
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हिमाचल प्रदेश पथ परिहवन निगम (HRTC) प्रबंधन ने आखिरकार हड़ताल कर रही ड्राइवर यूनियन को वार्ता के लिए बुला लिया। MD HRTC संदीप कुमार ने इन्हें मंगलवार सुबह 11. 30 बजे बैठक का न्योता भेजा है। उम्मीद की जा रही है बैठक में HRTC ड्राइवर की मांगें मान ली जाएं। ड्राइवर यूनियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से एक दिन पहले यानी 30 मई को 4000 सरकारी बसों को खड़ी करने का ऐलान कर रखा है।
HRTC ड्राइवर राज्य सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर छठे वेतनमान के लाभ की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार अपने लगभग सभी कर्मचारियों को छठे वेतनमान के लाभ दे चुकी है, लेकिन HRTC कर्मचारियों को अब तक इसका लाभ नहीं दिया गया है।
HRTC कर्मचारी 36 महीनों के लंबित पड़े ओवर टाइम के भुगतान, DA का 2006 से लंबित एरियर के भुगतान और वरिष्ठ चालकों के पद सृजित करने की मांग कर रहे हैं। वरिष्ठ चालकों के पद सृजन की मांग को HRTC की BOD पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसे लेकर यूनियन पहले भी कई बार HRTC प्रबंधन को नोटिस दे चुका है।
HRTC ड्राइवर यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रबंधन ने उन्हें वार्ता के लिए बुलाया है। इस दौरान लिखित में आश्वासन मिलने पर ही 12 मई से चली आ रही गेट मीटिंग को खत्म किया जाएगा और 30 मई की हड़ताल को स्थगित किया जाएगा। उन्होंने बताया उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 29 मई की रात 12 बजे से 30 मई की रात 12 बजे तक HRTC की कोई भी बस नहीं चलाई जाएगी। आज भी शिमला और सोलन में गेट मीटिंग कर विरोध जाहिर किया गया।
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हिमाचल प्रदेश पथ परिहवन निगम प्रबंधन ने आखिरकार हड़ताल कर रही ड्राइवर यूनियन को वार्ता के लिए बुला लिया। MD HRTC संदीप कुमार ने इन्हें मंगलवार सुबह ग्यारह. तीस बजे बैठक का न्योता भेजा है। उम्मीद की जा रही है बैठक में HRTC ड्राइवर की मांगें मान ली जाएं। ड्राइवर यूनियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से एक दिन पहले यानी तीस मई को चार हज़ार सरकारी बसों को खड़ी करने का ऐलान कर रखा है। HRTC ड्राइवर राज्य सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर छठे वेतनमान के लाभ की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार अपने लगभग सभी कर्मचारियों को छठे वेतनमान के लाभ दे चुकी है, लेकिन HRTC कर्मचारियों को अब तक इसका लाभ नहीं दिया गया है। HRTC कर्मचारी छत्तीस महीनों के लंबित पड़े ओवर टाइम के भुगतान, DA का दो हज़ार छः से लंबित एरियर के भुगतान और वरिष्ठ चालकों के पद सृजित करने की मांग कर रहे हैं। वरिष्ठ चालकों के पद सृजन की मांग को HRTC की BOD पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसे लेकर यूनियन पहले भी कई बार HRTC प्रबंधन को नोटिस दे चुका है। HRTC ड्राइवर यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रबंधन ने उन्हें वार्ता के लिए बुलाया है। इस दौरान लिखित में आश्वासन मिलने पर ही बारह मई से चली आ रही गेट मीटिंग को खत्म किया जाएगा और तीस मई की हड़ताल को स्थगित किया जाएगा। उन्होंने बताया उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उनतीस मई की रात बारह बजे से तीस मई की रात बारह बजे तक HRTC की कोई भी बस नहीं चलाई जाएगी। आज भी शिमला और सोलन में गेट मीटिंग कर विरोध जाहिर किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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अक्षय कुमार स्टारर फिल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' फ्लॉप हो गई थी।
फिल्म 'रक्षा बंधन' को भी ज्यादा अच्छा रिस्पांस नहीं मिला था।
165 करोड़ में बनी फिल्म 'बच्चन पांडे' वर्ल्डवाइड सिर्फ 73 करोड़ की कमाई कर पाई थी।
'राम सेतु' फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाई नहीं कर पाई।
अक्षय कुमार की फिल्म 'सेल्फी' फैंस को बिल्कुल पसंद नहीं आई।
जबरदस्त कास्ट के बावजूद फिल्म 'टशन' का जादू लोगों पर नहीं चल पाया।
अक्षय कुमार और सोनाक्षी सिन्हा स्टारर फिल्म 'राउडी राठौर' भी फ्लॉप हो गई।
'कमबख्त इश्क' भी अक्षय कुमार की फ्लॉप फिल्म की लिस्ट में शामिल है।
साउथ फिल्म की रीमेक 'लक्ष्मी' भी अपना कमाल नहीं दिखा पाई।
अगली वेब स्टोरी देखें.
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अक्षय कुमार स्टारर फिल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' फ्लॉप हो गई थी। फिल्म 'रक्षा बंधन' को भी ज्यादा अच्छा रिस्पांस नहीं मिला था। एक सौ पैंसठ करोड़ में बनी फिल्म 'बच्चन पांडे' वर्ल्डवाइड सिर्फ तिहत्तर करोड़ की कमाई कर पाई थी। 'राम सेतु' फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाई नहीं कर पाई। अक्षय कुमार की फिल्म 'सेल्फी' फैंस को बिल्कुल पसंद नहीं आई। जबरदस्त कास्ट के बावजूद फिल्म 'टशन' का जादू लोगों पर नहीं चल पाया। अक्षय कुमार और सोनाक्षी सिन्हा स्टारर फिल्म 'राउडी राठौर' भी फ्लॉप हो गई। 'कमबख्त इश्क' भी अक्षय कुमार की फ्लॉप फिल्म की लिस्ट में शामिल है। साउथ फिल्म की रीमेक 'लक्ष्मी' भी अपना कमाल नहीं दिखा पाई। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
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पटना। बिहार में जहरीली शराब से मौत पर सियासत तेज है। विपक्ष सरकार पर हमलावर हैं और बड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है तो सत्ता पक्ष इस पूरे मामले में सरकार की ओर से की जा रही कार्रवाई को गिनाने में जुटा है। जहरीली शराब मामले में मंत्री रामसूरत राय ने कहा कि अभी पंचायत चुनाव को लेकर ऐसी खबरें आ रही हैं कि लोग गांव में शराब बनाकर बेंच रहे हैं। जहरीली शराब से मौत की घटनाएं बहुत दुखद हैं। हमारी सरकार इसको लेकर बड़ा अभियान चलाएगी।
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पटना। बिहार में जहरीली शराब से मौत पर सियासत तेज है। विपक्ष सरकार पर हमलावर हैं और बड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है तो सत्ता पक्ष इस पूरे मामले में सरकार की ओर से की जा रही कार्रवाई को गिनाने में जुटा है। जहरीली शराब मामले में मंत्री रामसूरत राय ने कहा कि अभी पंचायत चुनाव को लेकर ऐसी खबरें आ रही हैं कि लोग गांव में शराब बनाकर बेंच रहे हैं। जहरीली शराब से मौत की घटनाएं बहुत दुखद हैं। हमारी सरकार इसको लेकर बड़ा अभियान चलाएगी।
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ढाका, नौ जुलाई (भाषा) ढाका के बाहरी क्षेत्र में एक बहुमंजिला खाद्य और पेय कारखाने में आग लगने से 52 लोगों की मौत हो गयी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अग्निशमन सेवा के अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम को नारायणगंज के रूपगंज इलाके में एक कारखाने में आग लग गई। आस-पड़ोस के लोगों ने बताया कि कारखाने में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर किशोर थे।
जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, "हादसे में अब तक 52 लोगों की मौत हुई है लेकिन हमें आशंका है कि और शव अंदर हैं और तलाशी अभियान जारी है। " दमकल अधिकारियों ने बताया कि इमारत से 49 शव बरामद किये गये हैं, जबकि अन्य की मौत अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हो गई। उन्होंने बताया कि कई अन्य का इलाज अस्पतालों में चल रहा है।
नारायणगंज और राजधानी ढाका में बड़ी संख्या में लोगों को स्वास्थ्य केन्द्रों तक पहुंचाया गया। अधिकारियों ने शुरू में केवल तीन लोगों की मौत होने की सूचना दी थी, लेकिन जब दमकलकर्मियों ने संयंत्र की ऊपरी मंजिलों में फंसे कई श्रमिकों के शवों को निकालना शुरू किया तो मृतकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई।
आग लगने के कारणों, कारखाने के अंदर कितने लोग थे और कितने लापता थे, इसका विवरण तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका है। जिला प्रशासन ने घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
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ढाका, नौ जुलाई ढाका के बाहरी क्षेत्र में एक बहुमंजिला खाद्य और पेय कारखाने में आग लगने से बावन लोगों की मौत हो गयी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अग्निशमन सेवा के अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम को नारायणगंज के रूपगंज इलाके में एक कारखाने में आग लग गई। आस-पड़ोस के लोगों ने बताया कि कारखाने में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर किशोर थे। जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, "हादसे में अब तक बावन लोगों की मौत हुई है लेकिन हमें आशंका है कि और शव अंदर हैं और तलाशी अभियान जारी है। " दमकल अधिकारियों ने बताया कि इमारत से उनचास शव बरामद किये गये हैं, जबकि अन्य की मौत अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हो गई। उन्होंने बताया कि कई अन्य का इलाज अस्पतालों में चल रहा है। नारायणगंज और राजधानी ढाका में बड़ी संख्या में लोगों को स्वास्थ्य केन्द्रों तक पहुंचाया गया। अधिकारियों ने शुरू में केवल तीन लोगों की मौत होने की सूचना दी थी, लेकिन जब दमकलकर्मियों ने संयंत्र की ऊपरी मंजिलों में फंसे कई श्रमिकों के शवों को निकालना शुरू किया तो मृतकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई। आग लगने के कारणों, कारखाने के अंदर कितने लोग थे और कितने लापता थे, इसका विवरण तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका है। जिला प्रशासन ने घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
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रोमनिवासियोंकी मण्डलीपर पत्र । ११ अध्याय । किसी भांतिसे अपने देश के लोगोंको ईर्खी उत्पन्न कराऊं, और उनमें से किसी किसीको बचवाऊं। जौ उनके टूर किये १५ जानेके द्वारासे संसारको ईश्वरके संग मिलाप हुच्चा है तो उनके ग्रहण किये जाने के द्वारासे क्या होगा? जैसाकि मृतकोंमेंसे जी उठने के द्वारासे होता है तैसाही होगा । जौ पहिले फल पबित्र थे तो सब फल भी पवित्र होंगे ; १६ बार 'जो जड़ पवित्र थी तो डालियां भी पवित्र होंगीं। जौं १७ कोई कोई डालियां काट डालों गईं हैं. और तू जो जंगली जैतूनकी डाली थी, उनके स्थानोंमें लगाया गया है और जैतून की जड़ औ रससे कुछ पाता है तो काट डाली हुई डालियोंपर अभिमान मत कर ; जो तू अभिमान करे तो चेत कर १८ कि तू जड़ का संभालनेहारा नहीं है परंतु जड़ तेरी संभालनेहारी है । क्या तू यह कहता है कि डालियां जो हैं सो काट १८ डाली गई है कि मैं उनके स्थानों में लगाया जाऊं? सच, वे २० अबिश्वासके द्वारासे काट डालों गईं हैं और तू बिश्वासके द्वारासे रहता है; व्यभिमान न कर, भयमान हो; जौ ईश्वरने २१ पहिली ढालियोंको न बचाया, तो, क्या जाने, तुझे भी न बचावेगा । देखो, ईश्वरकी दया और कठोरता कैसी हैं; उन्होंपर २२ जो गिरं हैं कठोरता, और तुझपर दया; जौ तू उसकी दयामें रहे तो भला होगा, नहीं तो, तू भी काट डाला जायगा ।
दूसरे देशोयोंका अहंकार कर्नाी उचित न होना को न्याय चौ दयाके लिये ईश्वरका धन्यबाद कली उचित होना ।
जौ वे भी अविश्वासी न रहें तो फिर लगाये जायेंगे ; २३ क्योंकि ईश्वर उन्हें फिर लगाने सकता है । जो तू जंगली २४ जैतूनसे काटा गया है और सच्चे जैतूनपर लगाया गया है तो कितने अधिक वे, जो तब्बे जैतूनके हैं, अपने जेतूनपर फिर लगाये जायेंगे। हे भाईयो, मैं नहीं चाहता हूं कि तुम इस ६५ भेदसे अनजान रहो, न हावे कि तुम अभिमान करो, अथीत कि जबतक बहुतेरे अन्यदेशी लोग (ईश्वर के राज में) न पैठें तबतक बहुतेरे इखायली लोग कठार रहेंगे; पीछे २६
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रोमनिवासियोंकी मण्डलीपर पत्र । ग्यारह अध्याय । किसी भांतिसे अपने देश के लोगोंको ईर्खी उत्पन्न कराऊं, और उनमें से किसी किसीको बचवाऊं। जौ उनके टूर किये पंद्रह जानेके द्वारासे संसारको ईश्वरके संग मिलाप हुच्चा है तो उनके ग्रहण किये जाने के द्वारासे क्या होगा? जैसाकि मृतकोंमेंसे जी उठने के द्वारासे होता है तैसाही होगा । जौ पहिले फल पबित्र थे तो सब फल भी पवित्र होंगे ; सोलह बार 'जो जड़ पवित्र थी तो डालियां भी पवित्र होंगीं। जौं सत्रह कोई कोई डालियां काट डालों गईं हैं. और तू जो जंगली जैतूनकी डाली थी, उनके स्थानोंमें लगाया गया है और जैतून की जड़ औ रससे कुछ पाता है तो काट डाली हुई डालियोंपर अभिमान मत कर ; जो तू अभिमान करे तो चेत कर अट्ठारह कि तू जड़ का संभालनेहारा नहीं है परंतु जड़ तेरी संभालनेहारी है । क्या तू यह कहता है कि डालियां जो हैं सो काट अट्ठारह डाली गई है कि मैं उनके स्थानों में लगाया जाऊं? सच, वे बीस अबिश्वासके द्वारासे काट डालों गईं हैं और तू बिश्वासके द्वारासे रहता है; व्यभिमान न कर, भयमान हो; जौ ईश्वरने इक्कीस पहिली ढालियोंको न बचाया, तो, क्या जाने, तुझे भी न बचावेगा । देखो, ईश्वरकी दया और कठोरता कैसी हैं; उन्होंपर बाईस जो गिरं हैं कठोरता, और तुझपर दया; जौ तू उसकी दयामें रहे तो भला होगा, नहीं तो, तू भी काट डाला जायगा । दूसरे देशोयोंका अहंकार कर्नाी उचित न होना को न्याय चौ दयाके लिये ईश्वरका धन्यबाद कली उचित होना । जौ वे भी अविश्वासी न रहें तो फिर लगाये जायेंगे ; तेईस क्योंकि ईश्वर उन्हें फिर लगाने सकता है । जो तू जंगली चौबीस जैतूनसे काटा गया है और सच्चे जैतूनपर लगाया गया है तो कितने अधिक वे, जो तब्बे जैतूनके हैं, अपने जेतूनपर फिर लगाये जायेंगे। हे भाईयो, मैं नहीं चाहता हूं कि तुम इस पैंसठ भेदसे अनजान रहो, न हावे कि तुम अभिमान करो, अथीत कि जबतक बहुतेरे अन्यदेशी लोग न पैठें तबतक बहुतेरे इखायली लोग कठार रहेंगे; पीछे छब्बीस
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नेक आदमी है !
आजकल उस गाँव के लड़के लड़कियों उस कब्र पर जाते हैं। बूढ़े दादू से पूछते हैं दादू दादा ! दादू दादा !! हमें अमीन शशि की कहानी सुनावो न !
दादू की आँखें रोती है। जबान कहानी सुनाती है ।
लड़के लड़कियाँ मन ही मन कहते हैं हिन्दुओं के पुराख में हजारों कहानियों है जिसे मुसलमान भाई नापाक समझते हैं गुसलमानों के कुरान में कितने ही किसी है उसे हिन्दू अपवित्र समाते हैं। हम उन दोनों को छोड़ कर अपने जीवन में ऐसी बातें करें कि जिसकी कहानियाँ हिन्दू मुसलमान ही नहीं मानवी समाज, संसार का बच्चा-नमा सुनें । प्रेम से आँसू बहायें । खुशी से हँसे । और शान से सर ऊँचा करें !
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नेक आदमी है ! आजकल उस गाँव के लड़के लड़कियों उस कब्र पर जाते हैं। बूढ़े दादू से पूछते हैं दादू दादा ! दादू दादा !! हमें अमीन शशि की कहानी सुनावो न ! दादू की आँखें रोती है। जबान कहानी सुनाती है । लड़के लड़कियाँ मन ही मन कहते हैं हिन्दुओं के पुराख में हजारों कहानियों है जिसे मुसलमान भाई नापाक समझते हैं गुसलमानों के कुरान में कितने ही किसी है उसे हिन्दू अपवित्र समाते हैं। हम उन दोनों को छोड़ कर अपने जीवन में ऐसी बातें करें कि जिसकी कहानियाँ हिन्दू मुसलमान ही नहीं मानवी समाज, संसार का बच्चा-नमा सुनें । प्रेम से आँसू बहायें । खुशी से हँसे । और शान से सर ऊँचा करें !
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सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के मोरबी पुल हादसे को बड़ी त्रासदी करार देते हुए सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट से इस मामले में जांच और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने समेत अन्य पहलुओं की समय-समय पर निगरानी करने को कहा है.
गुजरात के मोरबी में पुल के ढहने की जांच, जिसमें पिछले महीने 141 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, ने फिर से खोलने पर मरम्मत और प्रबंधन में भारी चूक का खुलासा किया है, ठेकेदार ओरेवा समूह और स्थानीय नगरपालिका पर सवाल उठा रहे हैं. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के मोरबी पुल हादसे को बड़ी त्रासदी करार देते हुए सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट से इस मामले में जांच और पुनर्वास तथा पीड़ितों को सम्मानजनक मुआवजा दिलाने समेत अन्य पहलुओं की समय-समय पर निगरानी करने को कहा है.
प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने इन दलीलों को भी खारिज कर दिया कि मोरबी जैसे हादसे फिर नहीं हों, इसके लिए एक जांच आयोग गठित किया जाना चाहिए. उसने कहा कि कई बार, आयोग मामले को केवल ठंडे बस्ते में डाल देता है. कई बार, न्यायाधीशों के लिए कार्यवाही को संभालना सही होता है. हमने इसे खुद किया होता, लेकिन अब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इसे देख रहे हैं. मोरबी में मच्छु नदी पर बना ब्रिटिश काल का पुल 30 अक्टूबर को ढह गया था, जिसमें 47 बच्चों सहित 141 लोगों की मौत हो गई थी.
- ओरेवा ग्रुप, जिसके पास निलंबन पुल के रखरखाव, संचालन और सुरक्षा का अनुबंध था, ने 30 अक्टूबर को हादसे के दिन 3,165 टिकट जारी किए थे, सरकारी वकील ने आज एक जिला अदालत में फोरेंसिक जांच रिपोर्ट जमा करते हुए कहा कि हालांकि सभी टिकटों को बेचा नहीं गया था, लेकिन कंपनी ने किसी भी मामले में पुल की भार वहन क्षमता का आकलन नहीं किया था.
- रिपोर्ट में कहा गया है कि पुल के केबल जंग खा गए थे, इसके एंकर टूट गए थे और केबल को एंकर से जोड़ने वाले बोल्ट भी ढीले थे. प्रारंभिक जांच ने सुझाव दिया गया था कि पुराने केबल ठेकेदार द्वारा बिछाई गई नई भारी फर्श का भार नहीं उठा सकते थे.
- वहीं ओरेवा द्वारा रखे गए गार्ड और टिकट कलेक्टर दिहाड़ी मजदूर थे, जिन्हें भीड़ प्रबंधन में कोई विशेषज्ञता नहीं थी. सरकारी वकील ने अब तक गिरफ्तार किए गए नौ कर्मचारियों की जमानत सुनवाई के दौरान कहा कि अभी तक शीर्ष प्रबंधन से किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है.
- रिपोर्ट में कहा गया है कि गार्डों को सुरक्षा प्रोटोकॉल या पुल पर कितने लोगों को अनुमति दी जानी चाहिए, के बारे में कभी नहीं बताया गया था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिला स्तर के सरकारी वकील विजय जानी ने कहा कि ओरेवा सुरक्षा के लिए जिम्मेदार था, लेकिन उन्होंने दुर्घटना की स्थिति में लोगों को बचाने के लिए कोई लाइफगार्ड या नाव तक नहीं रखी.
- मच्छू नदी पर बना पुल दोबारा खोले जाने के चार दिन बाद ही ढह गया. कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार इसे आठ से 12 महीनों के लिए बंद रखा जाना था, लेकिन सात महीने के बाद - 26 अक्टूबर, गुजराती नव वर्ष पर, स्थानीय नागरिक निकाय द्वारा किसी भी फिटनेस प्रमाण पत्र के बिना फिर से खोल दिया गया.
- पिछले हफ्ते हाईकोर्ट में नागरिक निकाय ने हादसे की जिम्मेदारी ली. इसने एक हलफनामे में कहा कि पुल को खोला नहीं जाना चाहिए था. इस मामले में एक अधिकारी को निलंबित किया गया है. बता दें कि हाईकोर्ट ने खुद इस त्रासदी को संज्ञान लेते हुए छह विभागों से जवाब मांगा था.
- मोरबी हादसे के विवरण के बारे में हलफनामा दायर करने में देरी से पहले दो सुनवाई में हाईकोर्ट ने नागरिक निकाय को फटकार लगाई गई थी. अदालत ने कहा था कि नगरपालिका, एक सरकारी निकाय, ने चूक की है, जिसने सैकड़ों लोगों को मार डाला.
- हाईकोर्ट ने पूछा है कि कानूनी मानदंडों का पालन क्यों नहीं किया गया. इसके आदेश में कहा गया है, "ऐसा लगता है कि इस संबंध में कोई टेंडर जारी ही नहीं किया गया. अदालत ने पूछा कि जून 2017 के बाद कंपनी किस आधार पर पुल का संचालन कर रही थी. जब अनुबंध (2008 में नौ साल के लिए हस्ताक्षरित) को नवीनीकृत नहीं किया गया था. मार्च 2022 में 15 साल के लिए एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.
- वहीं यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के मोरबी पुल हादसे को बड़ी त्रासदी करार देते हुए सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट से इस मामले में जांच और पुनर्वास तथा पीड़ितों को सम्मानजनक मुआवजा दिलाने समेत अन्य पहलुओं की समय-समय पर निगरानी करने को कहा है.
- जबकि राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, गुजरात राज्य मानवाधिकार आयोग ने उच्च न्यायालय को बताया है कि उसके अध्यक्ष और एक सदस्य हादसे के प्रभावों की जांच कर रहे हैं. आयोग यह भी सत्यापित कर रहा है कि परिवारों को मुआवजा ठीक से दिया जा रहा है या नहीं.
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सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के मोरबी पुल हादसे को बड़ी त्रासदी करार देते हुए सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट से इस मामले में जांच और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने समेत अन्य पहलुओं की समय-समय पर निगरानी करने को कहा है. गुजरात के मोरबी में पुल के ढहने की जांच, जिसमें पिछले महीने एक सौ इकतालीस से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, ने फिर से खोलने पर मरम्मत और प्रबंधन में भारी चूक का खुलासा किया है, ठेकेदार ओरेवा समूह और स्थानीय नगरपालिका पर सवाल उठा रहे हैं. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के मोरबी पुल हादसे को बड़ी त्रासदी करार देते हुए सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट से इस मामले में जांच और पुनर्वास तथा पीड़ितों को सम्मानजनक मुआवजा दिलाने समेत अन्य पहलुओं की समय-समय पर निगरानी करने को कहा है. प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने इन दलीलों को भी खारिज कर दिया कि मोरबी जैसे हादसे फिर नहीं हों, इसके लिए एक जांच आयोग गठित किया जाना चाहिए. उसने कहा कि कई बार, आयोग मामले को केवल ठंडे बस्ते में डाल देता है. कई बार, न्यायाधीशों के लिए कार्यवाही को संभालना सही होता है. हमने इसे खुद किया होता, लेकिन अब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इसे देख रहे हैं. मोरबी में मच्छु नदी पर बना ब्रिटिश काल का पुल तीस अक्टूबर को ढह गया था, जिसमें सैंतालीस बच्चों सहित एक सौ इकतालीस लोगों की मौत हो गई थी. - ओरेवा ग्रुप, जिसके पास निलंबन पुल के रखरखाव, संचालन और सुरक्षा का अनुबंध था, ने तीस अक्टूबर को हादसे के दिन तीन,एक सौ पैंसठ टिकट जारी किए थे, सरकारी वकील ने आज एक जिला अदालत में फोरेंसिक जांच रिपोर्ट जमा करते हुए कहा कि हालांकि सभी टिकटों को बेचा नहीं गया था, लेकिन कंपनी ने किसी भी मामले में पुल की भार वहन क्षमता का आकलन नहीं किया था. - रिपोर्ट में कहा गया है कि पुल के केबल जंग खा गए थे, इसके एंकर टूट गए थे और केबल को एंकर से जोड़ने वाले बोल्ट भी ढीले थे. प्रारंभिक जांच ने सुझाव दिया गया था कि पुराने केबल ठेकेदार द्वारा बिछाई गई नई भारी फर्श का भार नहीं उठा सकते थे. - वहीं ओरेवा द्वारा रखे गए गार्ड और टिकट कलेक्टर दिहाड़ी मजदूर थे, जिन्हें भीड़ प्रबंधन में कोई विशेषज्ञता नहीं थी. सरकारी वकील ने अब तक गिरफ्तार किए गए नौ कर्मचारियों की जमानत सुनवाई के दौरान कहा कि अभी तक शीर्ष प्रबंधन से किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है. - रिपोर्ट में कहा गया है कि गार्डों को सुरक्षा प्रोटोकॉल या पुल पर कितने लोगों को अनुमति दी जानी चाहिए, के बारे में कभी नहीं बताया गया था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिला स्तर के सरकारी वकील विजय जानी ने कहा कि ओरेवा सुरक्षा के लिए जिम्मेदार था, लेकिन उन्होंने दुर्घटना की स्थिति में लोगों को बचाने के लिए कोई लाइफगार्ड या नाव तक नहीं रखी. - मच्छू नदी पर बना पुल दोबारा खोले जाने के चार दिन बाद ही ढह गया. कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार इसे आठ से बारह महीनों के लिए बंद रखा जाना था, लेकिन सात महीने के बाद - छब्बीस अक्टूबर, गुजराती नव वर्ष पर, स्थानीय नागरिक निकाय द्वारा किसी भी फिटनेस प्रमाण पत्र के बिना फिर से खोल दिया गया. - पिछले हफ्ते हाईकोर्ट में नागरिक निकाय ने हादसे की जिम्मेदारी ली. इसने एक हलफनामे में कहा कि पुल को खोला नहीं जाना चाहिए था. इस मामले में एक अधिकारी को निलंबित किया गया है. बता दें कि हाईकोर्ट ने खुद इस त्रासदी को संज्ञान लेते हुए छह विभागों से जवाब मांगा था. - मोरबी हादसे के विवरण के बारे में हलफनामा दायर करने में देरी से पहले दो सुनवाई में हाईकोर्ट ने नागरिक निकाय को फटकार लगाई गई थी. अदालत ने कहा था कि नगरपालिका, एक सरकारी निकाय, ने चूक की है, जिसने सैकड़ों लोगों को मार डाला. - हाईकोर्ट ने पूछा है कि कानूनी मानदंडों का पालन क्यों नहीं किया गया. इसके आदेश में कहा गया है, "ऐसा लगता है कि इस संबंध में कोई टेंडर जारी ही नहीं किया गया. अदालत ने पूछा कि जून दो हज़ार सत्रह के बाद कंपनी किस आधार पर पुल का संचालन कर रही थी. जब अनुबंध को नवीनीकृत नहीं किया गया था. मार्च दो हज़ार बाईस में पंद्रह साल के लिए एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. - वहीं यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के मोरबी पुल हादसे को बड़ी त्रासदी करार देते हुए सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट से इस मामले में जांच और पुनर्वास तथा पीड़ितों को सम्मानजनक मुआवजा दिलाने समेत अन्य पहलुओं की समय-समय पर निगरानी करने को कहा है. - जबकि राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, गुजरात राज्य मानवाधिकार आयोग ने उच्च न्यायालय को बताया है कि उसके अध्यक्ष और एक सदस्य हादसे के प्रभावों की जांच कर रहे हैं. आयोग यह भी सत्यापित कर रहा है कि परिवारों को मुआवजा ठीक से दिया जा रहा है या नहीं.
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दून के शुक्लापुर प्रेमनगर निवासी उत्कर्ष शर्मा एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर बने हैं। उनके इस कामयाबी पर उनके माता-पिता सहित क्षेत्रवासियों ने खुशी जाहिर की है। उत्कर्ष के पिता बीपी शर्मा एनआइसी (नेशनल इन्फॉर्मेशन सेंटर) में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि माता अनीता शर्मा उत्तराखंड सचिवालय में सहायक समीक्षा अधिकारी हैं।
वह मूल रूप से ग्राम घल्ला पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले हैं और वर्तमान में शुक्लापुर प्रेमनगर में रह रहे हैं। उत्कर्ष की प्रारंभिक शिक्षा ब्राइटलैंड स्कूल देहरादून में हुई थी। बारहवीं के बाद उनका चयन एनडीए खड़गवासला के लिए हुआ। यहां तीन साल कोर्स करने के बाद एयरफोर्स अकादमी डुंडीगल हैदराबाद में एक वर्ष के कठिन परिश्रम के बाद वह फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर कमीशन हुए हैं।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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दून के शुक्लापुर प्रेमनगर निवासी उत्कर्ष शर्मा एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर बने हैं। उनके इस कामयाबी पर उनके माता-पिता सहित क्षेत्रवासियों ने खुशी जाहिर की है। उत्कर्ष के पिता बीपी शर्मा एनआइसी में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि माता अनीता शर्मा उत्तराखंड सचिवालय में सहायक समीक्षा अधिकारी हैं। वह मूल रूप से ग्राम घल्ला पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले हैं और वर्तमान में शुक्लापुर प्रेमनगर में रह रहे हैं। उत्कर्ष की प्रारंभिक शिक्षा ब्राइटलैंड स्कूल देहरादून में हुई थी। बारहवीं के बाद उनका चयन एनडीए खड़गवासला के लिए हुआ। यहां तीन साल कोर्स करने के बाद एयरफोर्स अकादमी डुंडीगल हैदराबाद में एक वर्ष के कठिन परिश्रम के बाद वह फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर कमीशन हुए हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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तंजोर पड़ता था जिसे शिवाजी के सौतेले भाई व्यंकोजी उर्फ एकोजीने सन् १६७५ ई० में अपने अधिकार में कर लिया था। इससे और भी दक्षिण में मदुराका स्वाधीन राज्य पड़ता था । इसके सिवा बेलूर, अरणि आदि प्रसिद्ध किले अलग अलग अफसरोंके हाथमें थे ।
इन सब बीजापुरी उमरावों में अपने अपने स्वार्थ के लिए हमेशा लड़ाईझगड़ा, मार-काट और छीना-झपटी चलती रहती थी। कोई भी अपने ऊपर सुलतान के अधिकारको नहीं मानता था, क्योंकि सुलतान उस समय नाबालिग और वज़ीरके हाथका कठपुतला मात्र था । शेरखाँने एक युक्ति सोची कि वह फरासीसी कम्पनीकी, जिससे कि उसकी मित्रता थो, पाण्डीचेरीकी कोठीसे गोरे और साहबोंके सिखाये हुए देशी सिपाहियोंको लेकर जिंजीपर अधिकार कर ले; उसके बाद धीरे धीरे राज्य और बल बढ़ाकर मदुरा और तंजोरके अगाध धन-दौलतको लूटे, और अन्त में उसी धनके ज़ोरसे फौज बढ़ाकर गोलकुण्डाका राज्य जोत ले ।
कर्णाटकपर धावा करने के पूर्व अन्यान्य राज्योंसे सन्धि करना
शेरखाने १६७६ ई० सालमें जिंजी प्रदेशपर अक्रमण कर उसके बहुतसे हिस्से छीन लिए । जिंजीके मालिक नासिर महम्मदने निरुपाय हो गोलकुण्डासे सहायता माँगी । इस समय गोलकुण्डामें कुतुबशाहका मादन्ना नामक एक ब्राह्मण मन्त्री ही सर्वेसर्वा था। वह एक वैष्णव और धार्मिक हिन्दू था । मादन्नाकी आन्तरिक इच्छा थी कि कर्णाटकको मुसलमानोंके ( अर्थात् बीजापुरके ) हाथसे छुड़ाया जाय और सन् १६४८ से पहलेकी भाँति वहाँ फिर हिन्दू-शासन हो जाय । शिवाजीके समान भुवन-विजयी भक्त हिन्दूको छोड़ और किसी के द्वारा यह महान् कार्य सम्पन्न होनेकी सम्भावना न थी । सुलतानने अपने प्यारे मन्त्रीकी सलाह स्वीकार की। शिवाजीसे इस शर्तपर सन्धि हुई कि शिवाजी मराठा फौजके बलसे बीजापुरी कर्णाटक जीतकर कुतुबशाहको देंगे और वहाँके राज- कोष में जो धन-सम्पत्ति मौजूद है वह, तथा लूटका माल और मैसूरकी कुछ ज़मीन स्वयं लेंगे। इस आक्रमणका सब खर्च कुतुबशाहके जिम्मे रहेगा। इसके सिवा तोप और गोले तथा पाँच हजार फौज देकर वे शिवाजकी सहायता भी
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तंजोर पड़ता था जिसे शिवाजी के सौतेले भाई व्यंकोजी उर्फ एकोजीने सन् एक हज़ार छः सौ पचहत्तर ईशून्य में अपने अधिकार में कर लिया था। इससे और भी दक्षिण में मदुराका स्वाधीन राज्य पड़ता था । इसके सिवा बेलूर, अरणि आदि प्रसिद्ध किले अलग अलग अफसरोंके हाथमें थे । इन सब बीजापुरी उमरावों में अपने अपने स्वार्थ के लिए हमेशा लड़ाईझगड़ा, मार-काट और छीना-झपटी चलती रहती थी। कोई भी अपने ऊपर सुलतान के अधिकारको नहीं मानता था, क्योंकि सुलतान उस समय नाबालिग और वज़ीरके हाथका कठपुतला मात्र था । शेरखाँने एक युक्ति सोची कि वह फरासीसी कम्पनीकी, जिससे कि उसकी मित्रता थो, पाण्डीचेरीकी कोठीसे गोरे और साहबोंके सिखाये हुए देशी सिपाहियोंको लेकर जिंजीपर अधिकार कर ले; उसके बाद धीरे धीरे राज्य और बल बढ़ाकर मदुरा और तंजोरके अगाध धन-दौलतको लूटे, और अन्त में उसी धनके ज़ोरसे फौज बढ़ाकर गोलकुण्डाका राज्य जोत ले । कर्णाटकपर धावा करने के पूर्व अन्यान्य राज्योंसे सन्धि करना शेरखाने एक हज़ार छः सौ छिहत्तर ईशून्य सालमें जिंजी प्रदेशपर अक्रमण कर उसके बहुतसे हिस्से छीन लिए । जिंजीके मालिक नासिर महम्मदने निरुपाय हो गोलकुण्डासे सहायता माँगी । इस समय गोलकुण्डामें कुतुबशाहका मादन्ना नामक एक ब्राह्मण मन्त्री ही सर्वेसर्वा था। वह एक वैष्णव और धार्मिक हिन्दू था । मादन्नाकी आन्तरिक इच्छा थी कि कर्णाटकको मुसलमानोंके हाथसे छुड़ाया जाय और सन् एक हज़ार छः सौ अड़तालीस से पहलेकी भाँति वहाँ फिर हिन्दू-शासन हो जाय । शिवाजीके समान भुवन-विजयी भक्त हिन्दूको छोड़ और किसी के द्वारा यह महान् कार्य सम्पन्न होनेकी सम्भावना न थी । सुलतानने अपने प्यारे मन्त्रीकी सलाह स्वीकार की। शिवाजीसे इस शर्तपर सन्धि हुई कि शिवाजी मराठा फौजके बलसे बीजापुरी कर्णाटक जीतकर कुतुबशाहको देंगे और वहाँके राज- कोष में जो धन-सम्पत्ति मौजूद है वह, तथा लूटका माल और मैसूरकी कुछ ज़मीन स्वयं लेंगे। इस आक्रमणका सब खर्च कुतुबशाहके जिम्मे रहेगा। इसके सिवा तोप और गोले तथा पाँच हजार फौज देकर वे शिवाजकी सहायता भी
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AB6°e ke+ct_ ** चौथा प्रस्ताव । Rec + ত ধঠ
कुमार गजसिंहके पूर्व भवकी कथा । स जम्बूद्दीपके भरतक्षेत्रमें मगध देश है। उसके राजगृह नामक नगर में सुमित नामक एक क्षत्रिय पुन था, जो भद्रिक होते हुए भी मिथ्यादृष्टि, कौलधर्म आादि पाखण्डोंमें फँसा था । एक दिन वह शिकार खेलने के लिये जङ्गलमें गया। उसी समय यौवन मदसे मस्त हो मृग-मृगियों को परस्पर क्रीड़ा करते देख, उसने उन्हें बापसे मार गिराया। वे दोनोंने मरकर भकाम- निर्जराके कारण मनुष्यको देह पायो । मनको गति ओर शुभ कर्मक योगसे तुममें तो उस मृगका जीव आाया और वह मृगो प्रेतनी हो गयो । सुमिनी क्षत्री वनमें मृगोंको खोजमें घुमतेफिरते एक जगह मुनिको देखकर बड़ा लज्जित हुआ । साथ ही वह अच्छे परिणामके कारण मुनिको प्रणाम कर वहीं बैठ गया। मुनिने धर्मदेशना देते हुए कहा, "हे महानुभाव ! सदा जीवदया करते रहो, इन्द्रियोंको वशमें रखो, सत्यवचन बोलो । यही धर्मका रहस्य है । जो प्राणि वध करने में सखी होते हैं, लोगोंके दिल पर चोट पहुॅ चाने वाली बात बोलते।
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ABछः°e ke+ct_ ** चौथा प्रस्ताव । Rec + ত ধঠ कुमार गजसिंहके पूर्व भवकी कथा । स जम्बूद्दीपके भरतक्षेत्रमें मगध देश है। उसके राजगृह नामक नगर में सुमित नामक एक क्षत्रिय पुन था, जो भद्रिक होते हुए भी मिथ्यादृष्टि, कौलधर्म आादि पाखण्डोंमें फँसा था । एक दिन वह शिकार खेलने के लिये जङ्गलमें गया। उसी समय यौवन मदसे मस्त हो मृग-मृगियों को परस्पर क्रीड़ा करते देख, उसने उन्हें बापसे मार गिराया। वे दोनोंने मरकर भकाम- निर्जराके कारण मनुष्यको देह पायो । मनको गति ओर शुभ कर्मक योगसे तुममें तो उस मृगका जीव आाया और वह मृगो प्रेतनी हो गयो । सुमिनी क्षत्री वनमें मृगोंको खोजमें घुमतेफिरते एक जगह मुनिको देखकर बड़ा लज्जित हुआ । साथ ही वह अच्छे परिणामके कारण मुनिको प्रणाम कर वहीं बैठ गया। मुनिने धर्मदेशना देते हुए कहा, "हे महानुभाव ! सदा जीवदया करते रहो, इन्द्रियोंको वशमें रखो, सत्यवचन बोलो । यही धर्मका रहस्य है । जो प्राणि वध करने में सखी होते हैं, लोगोंके दिल पर चोट पहुॅ चाने वाली बात बोलते।
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पाकिस्तानी व्यापारी का दावाः 'भारत के साथ पिछले दरवाजे से बातचीत जारी, मोदी अगले महीने ही कर सकते हैं दौरा'
चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के मशहूर निशात ग्रुप के चेयरमैन मियां मोहम्मद मंशा ने यह बातें लाहौर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में जुटे व्यापारियों के सामने कहीं।
पाकिस्तान के जाने-माने बिजनेसमैन मियां मंशा ने कहा कि पीएम मोदी एक महीने में ही भारत का दौरा कर सकते हैं।
पाकिस्तान के एक जाने-माने व्यापारी मियां मोहम्मद मंशा ने दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच परदे के पीछे बातचीत जारी है और जल्द ही इससे कुछ बेहतर नतीजे मिलने की संभावना है। मंशा ने उम्मीद जताई है कि अगर दोनों पड़ोसी देशों के बीच स्थितियां सुधरीं, तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने ही पाकिस्तान जा सकते हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के मशहूर निशात ग्रुप के चेयरमैन मियां मोहम्मद मंशा ने यह बातें लाहौर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में जुटे व्यापारियों के सामने कहीं। उन्होंने सलाह दी कि दोनों ही देशों को अपने विवाद सुलझाकर व्यापार शुरू करना चाहिए, ताकि क्षेत्र में फैली गरीबी से निपटा जा सके।
उन्होंने पाकिस्तान के लिए आगे कठिन समय का जिक्र करते हुए कहा कि अगर हमारी अर्थव्यवस्था नहीं सुधरी तो देश को खतरनाक नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। पाकिस्तान को भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने चाहिए और आर्थिक विकास के लिए क्षेत्रीय नजरिया अपनाना चाहिए। यूरोप ने दो युद्ध लड़े हैं, लेकिन अंततः उसने क्षेत्रीय विकास के मुद्दे पर शांति स्थापित कर ली। कहीं भी स्थायी दुश्मनी नहीं हो सकती।
गौरतलब है कि भारत ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 रद्द कर दिया था। इसके बाद से ही पाकिस्तानी सरकार ने दुश्मन जैसा रवैया अपनाते हुए भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते खत्म करने शुरू कर दिए। पिछली गर्मियों में दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू होने की बात सामने आई थी, लेकिन ये बातचीत बाद में बंद हो गई।
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पाकिस्तानी व्यापारी का दावाः 'भारत के साथ पिछले दरवाजे से बातचीत जारी, मोदी अगले महीने ही कर सकते हैं दौरा' चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के मशहूर निशात ग्रुप के चेयरमैन मियां मोहम्मद मंशा ने यह बातें लाहौर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में जुटे व्यापारियों के सामने कहीं। पाकिस्तान के जाने-माने बिजनेसमैन मियां मंशा ने कहा कि पीएम मोदी एक महीने में ही भारत का दौरा कर सकते हैं। पाकिस्तान के एक जाने-माने व्यापारी मियां मोहम्मद मंशा ने दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच परदे के पीछे बातचीत जारी है और जल्द ही इससे कुछ बेहतर नतीजे मिलने की संभावना है। मंशा ने उम्मीद जताई है कि अगर दोनों पड़ोसी देशों के बीच स्थितियां सुधरीं, तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने ही पाकिस्तान जा सकते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के मशहूर निशात ग्रुप के चेयरमैन मियां मोहम्मद मंशा ने यह बातें लाहौर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में जुटे व्यापारियों के सामने कहीं। उन्होंने सलाह दी कि दोनों ही देशों को अपने विवाद सुलझाकर व्यापार शुरू करना चाहिए, ताकि क्षेत्र में फैली गरीबी से निपटा जा सके। उन्होंने पाकिस्तान के लिए आगे कठिन समय का जिक्र करते हुए कहा कि अगर हमारी अर्थव्यवस्था नहीं सुधरी तो देश को खतरनाक नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। पाकिस्तान को भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने चाहिए और आर्थिक विकास के लिए क्षेत्रीय नजरिया अपनाना चाहिए। यूरोप ने दो युद्ध लड़े हैं, लेकिन अंततः उसने क्षेत्रीय विकास के मुद्दे पर शांति स्थापित कर ली। कहीं भी स्थायी दुश्मनी नहीं हो सकती। गौरतलब है कि भारत ने पाँच अगस्त दो हज़ार उन्नीस को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर रद्द कर दिया था। इसके बाद से ही पाकिस्तानी सरकार ने दुश्मन जैसा रवैया अपनाते हुए भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते खत्म करने शुरू कर दिए। पिछली गर्मियों में दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू होने की बात सामने आई थी, लेकिन ये बातचीत बाद में बंद हो गई। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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RANCHI:झारखंड के लीडिंग बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के किओस्क सेंटर में पैसे जमा नहीं होने से कस्टमर्स परेशान हैं। डिजिटल के इस दौर में जब लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है एक जगह बहुत अधिक भीड़ नहीं लगानी है, ऐसे में एटीएम किओस्क खराब रहना व्यवस्था पर सवाल उठाता है।
सरकुलर रोड स्थित एसबीआई के किओस्क में लोगों की भीड़ लगी रहती है। गार्ड ने बताया कि पिछले 2 दिन से मशीन खराब है। इस वजह से पैसे जमा नहीं हो रहे हैं। इससे कस्टमर्स की परेशानी बढ़ गई है।
कचहरी चौक स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मेन ब्रांच के नीचे एसबीआई के कियोसक में पैसा जमा करने के लिए पहुंचे, तो वहां मौजूद गार्ड ने लोगों को बताया गया कि यहां कल रात से लाइट नहीं है। इस वजह से पैसा जमा नहीं हो रहा है।
रेडियम रोड स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के किओस्क पर भी सिर्फ एक सिक्योरिटी गार्ड खड़ा था। उसने बताया कि पिछले दो दिनों से यह मशीन खराब है। इसको लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सीनियर अधिकारियों को बताया गया है।
लोगों को बैंकों में पैसा जमा करने के लिए लंबी कतारों से छुटकारा मिले इसके लिए यह व्यवस्था शुरू की गई थी। लोगों को बैंकिंग से जुड़ी खास सुविधा मिले, इसके तहत किसी एक बैंक के ग्राहक दूसरे बैंक की शाखा या फिर एटीएम में कैश जमा कर सकेंगे। एटीएम में कैश डिपॉजिट होने से बैंक के साथ ही ग्राहकों को फायदा होगा। क्योंकि जो पैसा ग्राहक एटीएम मशीन में जमा करेंगे, उसका इस्तेमाल निकासी के लिए भी किया जा सकेगा।
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RANCHI:झारखंड के लीडिंग बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के किओस्क सेंटर में पैसे जमा नहीं होने से कस्टमर्स परेशान हैं। डिजिटल के इस दौर में जब लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है एक जगह बहुत अधिक भीड़ नहीं लगानी है, ऐसे में एटीएम किओस्क खराब रहना व्यवस्था पर सवाल उठाता है। सरकुलर रोड स्थित एसबीआई के किओस्क में लोगों की भीड़ लगी रहती है। गार्ड ने बताया कि पिछले दो दिन से मशीन खराब है। इस वजह से पैसे जमा नहीं हो रहे हैं। इससे कस्टमर्स की परेशानी बढ़ गई है। कचहरी चौक स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मेन ब्रांच के नीचे एसबीआई के कियोसक में पैसा जमा करने के लिए पहुंचे, तो वहां मौजूद गार्ड ने लोगों को बताया गया कि यहां कल रात से लाइट नहीं है। इस वजह से पैसा जमा नहीं हो रहा है। रेडियम रोड स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के किओस्क पर भी सिर्फ एक सिक्योरिटी गार्ड खड़ा था। उसने बताया कि पिछले दो दिनों से यह मशीन खराब है। इसको लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सीनियर अधिकारियों को बताया गया है। लोगों को बैंकों में पैसा जमा करने के लिए लंबी कतारों से छुटकारा मिले इसके लिए यह व्यवस्था शुरू की गई थी। लोगों को बैंकिंग से जुड़ी खास सुविधा मिले, इसके तहत किसी एक बैंक के ग्राहक दूसरे बैंक की शाखा या फिर एटीएम में कैश जमा कर सकेंगे। एटीएम में कैश डिपॉजिट होने से बैंक के साथ ही ग्राहकों को फायदा होगा। क्योंकि जो पैसा ग्राहक एटीएम मशीन में जमा करेंगे, उसका इस्तेमाल निकासी के लिए भी किया जा सकेगा।
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देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार मारुति सुजुकी eVX लॉन्च करने की योजना बना रही है। वर्तमान में कंपनी इस गाड़ी की टेस्टिंग कर रही है और इसे अगले साल पेश किया जा सकता है।
भारत की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने जून महीने में की गई बिक्री में आंकड़े पेश कर दिए हैं। सालाना आधार पर कंपनी को बिक्री में 2 प्रतिशत का फायदा हुआ है। हालांकि, मासिक आधार पर कंपनी की बिक्री में गिरावट दर्ज हुई है।
देश में पैसेंजर कारों की बिक्री का आंकड़ा 2023 की पहली छमाही में 20 लाख यूनिट के पार पहुंच सकती है।
मारुति सुजुकी की ऑफ-रोडर जिम्नी SUV को जल्द ही ऑस्ट्रेलिया में लॉन्च किया जा सकता है।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में हर सेगमेंट में नई गाड़ियां लॉन्च हो रही है और लोग इन्हें हाथों-हाथ खरीद रहे हैं।
टाटा मोटर्स वित्त वर्ष 2024 में अपनी कुल बिक्री में CNG कारों की हिस्सेदारी दोगुनी करने की योजना बना रही है।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में मारुति सुजुकी, हुंडई और किआ मोटर्स समेत कई कार निर्माता कंपनियां अगले महीने अपनी नई गाड़ियां लॉन्च करने वाली हैं।
मारुति सुजुकी अपनी सेलेरियो कार पर इस महीने में 54,000 रुपये तक की जबरदस्त छूट दे रही है।
मारुति सुजुकी की सबसे महंगी इनविक्टो MPV 5 जुलाई को लॉन्च होगी। कार निर्माता ने इसकी 25,000 रुपये की टोकन राशि पर बुकिंग की शुरू कर दी है।
मारुति सुजुकी नई इलेक्ट्रिक SUV EVX लाने की तैयारी कर रही है। कार निर्माता की पहली इलेक्ट्रिक कार को टेस्टिंग के दौरान पोलैंड में देखा गया है।
मारुति सुजुकी की सबसे महंगी इनविक्टो प्रीमियम MPV 5 जुलाई को लाॅन्च होगी।
भारतीय बाजार में मारुति सुजुकी समेत कई कार निर्माता कंपनियां अगले कुछ महीनों में कई गाड़ियां लॉन्च करने वाली हैं। देश में इन दिनों कारों की बिक्री तेज हो गई है।
मारुति सुजुकी अपनी नई फ्लैगशिप MPV इनविक्टो को 5 जुलाई को लॉन्च करेगी। कार निर्माता ने इस गाड़ी के लिए 25,000 रुपये की टोकन राशि पर बुकिंग भी शुरू कर दी है।
मारुति सुजुकी की आगामी फ्लैगशिप MPV इनविक्टो होगी, इसका खुलासा हो चुका है। इससे पहले रिपोर्ट्स में बताया जा रहा था कि इसे एंगेज नाम से उतारा जा सकता है।
मारुति सुजुकी ने इसी महीने अपनी ऑफ-रोडिंग जिम्नी SUV को भारतीय बाजार में लॉन्च किया है। गाड़ी में मस्कुलर बोनट और गोल हेडलाइट्स के साथ-साथ फॉगलैंप दिए गए हैं।
मारुति सुजुकी ने अपनी लाइनअप की सबसे महंगी कार इनविक्टो MPV के लिए सोमवार से बुकिंग शुरू कर दी है।
दक्षिण कोरियाई कंपनी देवू मोटर्स ने भारतीय बाजार में अपनी आइकॉनिक कार सिएलो के साथ दस्तक दी थी।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी 5 जुलाई नई MPV इनविक्टो को लॉन्च करने जा रही है।
मारुति सुजुकी की अर्टिगा की MPV सेगमेंट किफायती और आरामदायक कार है। यह गाड़ी लगभग 11 सालों से भारतीय ग्राहकों की पसंद बनी हुई है और MPV सेगमेंट में इसकी सबसे अधिक बिक्री होती है।
मारुति सुजुकी की फ्राेंक्स SUV के अन्य वेरिएंट की तुलना में बूस्टरजेट वेरिएंट को ज्यादा ग्राहक नहीं मिल रहे हैं।
मारुति सुजुकी की हाल ही में लॉन्च हुई 5-डोर SUV जिम्नी को भारतीय बाजार में अच्छी सफलता मिल रही है। यही कारण है कि इसे 31,000 से ज्यादा बुकिंग हासिल हो चुकी है और अधिक मांग के चलते इसका वेटिंग पीरियड 8 महीने तक पहुंच गया है।
मारुति सुजुकी की प्रीमियम MPV इनविक्टो 5 जुलाई को लॉन्च होगी। इसके लिए कार निर्माता 19 जून से बुकिंग लेना शुरू करेगी।
मारुति सुजुकी 5 जुलाई को अपनी फ्लैगशिप MPV लॉन्च करने वाली है।
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री तेज हो रही है। ऐसे में लगभग सभी कंपनियां अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियां लॉन्च कर रही है।
देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी एक नई कार उतारने की तैयारी कर रही हैं। कंपनी मारुति सुजुकी एंगेज नाम से एक नई MPV लॉन्च करेगी। यह टोयोटा हाईक्रॉस का रिबैज मॉडल होगा।
देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपनी ऑफ-रोडिंग जिम्नी SUV को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। इस गाड़ी को बॉक्सी लुक मिला है।
मारुति सुजुकी की ऑल्टो हैचबैक सेगमेंट में देश की सबसे अधिक बिकने वाली गाड़ियों में से एक है। यह गाड़ी लगभग 23 सालों से भारतीय सड़कों पर राज कर रही है। देश में मारुति की सफलता में इस गाड़ी का अहम योगदान रहा है।
कार सेगमेंट में भारतीय ग्राहकों द्वारा SUVs को सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है। बीते कुछ सालों से कॉम्पैक्ट, सब-कॉम्पैक्ट और मिड साइज SUV भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में धमाल मचा रही हैं।
मारुति सुजुकी ने नई ऑल्टो K10 CNG को टूर H1 के रूप में लॉन्च किया है।
मारुति सुजुकी की ऑफ-रोडिंग जिम्नी SUV के लिए ग्राहकों का इंतजार खत्म हो गया है।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी अब तक की अपनी सबसे महंगी कार एंगेज MPV ला रही है।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी 7-सीटर MPV एंगेज को 5 जुलाई को लॉन्च करेगी।
मारुति सुजुकी देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है। मारुति की वैगनआर हैचबैक सेगमेंट में कंपनी की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार है।
दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपनी ऑफ-रोडिंग जिम्नी SUV को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। इसमें मस्कुलर बोनट और गोल हेडलाइट्स के साथ-साथ फॉगलैंप दिए गए हैं।
मारुति सुजुकी की पहली पहली लाइफस्टाइल SUV जिम्नी भारत में बुधवार (7 जून) को लॉन्च होगी। इसी दौरान पता चलेगा कि इसकी कीमत महिंद्रा थार से कम या ज्यादा रहती है।
दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी एक नई कार उतारने की तैयारी कर रही हैं। कंपनी भारत में 'मारुति सुजुकी एंगेज' नाम से एक नई MPV लॉन्च करेगी।
मारुति सुजुकी देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है। वर्तमान में मारुति सुजुकी स्विफ्ट हैचबैक सेगमेंट में कंपनी की बेस्ट सेलिंग कार में से एक है।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी अपनी लोकप्रिय हैचबैक वैगनआर के फ्लेक्स-फ्यूल वेरिएंट का उत्पादन नवंबर, 2025 में शुरू करेगी।
मारुति सुजुकी जून में अपने एरिना मॉडल्स पर शानदार छूट दे रही है।
इस महीने मारुति सुजुकी अपनी नेक्सा गाड़ियों पर शानदार छूट लेकर आई है। इसमें इग्निस, सियाज, बलेनो और S-क्रॉस जैसी गाड़ियों पर 59,000 रुपये तक की छूट मिल रही है।
गाड़ियों की जबरदस्त मांग और सेमीकंडक्टर की कमी के कारण देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी की करीब 4 लाख गाड़ियों की डिलीवरी रुकी हुई है और इस वजह से कंपनी के मॉडलों का वेटिंग पीरियड भी बढ़ रहा है।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी का मई बिक्री में भी शीर्ष स्थान पर कब्जा बरकरार है।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी की कारों की घरेलू बाजार में जबरदस्त डिमांड है।
दक्षिण कोरियाई कंपनी देवू मोटर्स की आइकॉनिक कार सिएलो 90 के दशक में काफी लोकप्रिय हुई थी।
मारुति सुजुकी ने गुरुवार को मई महीने के अपनी कारों की बिक्री के आंकड़े जारी कर दिए हैं।
देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी अपनी ऑफ-रोडिंग जिम्नी SUV को भारत में लॉन्च करने की तैयारी कर ली है। कंपनी इस गाड़ी को 7 जून को देश में उतारने वाली है।
दिग्गज कार निर्माता मारुति सुजुकी की फ्रोंक्स SUV की देश में जबरदस्त डिमांड है। यही कारण है कि लॉन्च के 4 महीने में ही इस गाड़ी की 26,500 से ज्यादा की बुकिंग मिल चुकी है।
देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी की इग्निस हैचबैक कार को काफी पसंद किया जा रहा है। देश में इसकी 2 लाख यूनिट्स की बिक्री हो चुकी है। यह नेक्सा डीलरशिप पर उपलब्ध कंपनी की सबसे सस्ती है। इसे 2017 में लॉन्च किया गया था।
भारतीय बाजार में वाहनों की बिक्री तेज हो रही है। यही वजह है कि इस साल देश में कई नई और फेसलिफ्टेड गाड़ियां लॉन्च हुई हैं।
दिग्गज कार निर्माता मारुति सुजुकी एक नई हैचबैक कार पर काम कर रही है, जो अगली पीढ़ी की सुजुकी स्विफ्ट का 'स्पोर्ट' मॉडल होगा।
दिग्गज कार निर्माता मारुति सुजुकी अपने ग्रीन पोर्टफोलियो के विस्तार की योजना बना रही है। इसी के तहत कंपनी eVX इलेक्ट्रिक SUV पेश करने की तैयारी में है।
कार निर्माता मारुति सुजुकी की कॉम्पैक्ट SUV फ्रोंक्स को भारतीय बाजार में शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है।
टाटा मोटर्स ने भारत में अल्ट्रोज का CNG से चलने वाला वेरिएंट उतार दिया है। यह फैक्ट्री फिटेड CNG किट पाने वाला ब्रांड का तीसरा मॉडल है।
देश में डीजल कारों की मांग में गिरावट आ रही है।
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देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार मारुति सुजुकी eVX लॉन्च करने की योजना बना रही है। वर्तमान में कंपनी इस गाड़ी की टेस्टिंग कर रही है और इसे अगले साल पेश किया जा सकता है। भारत की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने जून महीने में की गई बिक्री में आंकड़े पेश कर दिए हैं। सालाना आधार पर कंपनी को बिक्री में दो प्रतिशत का फायदा हुआ है। हालांकि, मासिक आधार पर कंपनी की बिक्री में गिरावट दर्ज हुई है। देश में पैसेंजर कारों की बिक्री का आंकड़ा दो हज़ार तेईस की पहली छमाही में बीस लाख यूनिट के पार पहुंच सकती है। मारुति सुजुकी की ऑफ-रोडर जिम्नी SUV को जल्द ही ऑस्ट्रेलिया में लॉन्च किया जा सकता है। भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में हर सेगमेंट में नई गाड़ियां लॉन्च हो रही है और लोग इन्हें हाथों-हाथ खरीद रहे हैं। टाटा मोटर्स वित्त वर्ष दो हज़ार चौबीस में अपनी कुल बिक्री में CNG कारों की हिस्सेदारी दोगुनी करने की योजना बना रही है। भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में मारुति सुजुकी, हुंडई और किआ मोटर्स समेत कई कार निर्माता कंपनियां अगले महीने अपनी नई गाड़ियां लॉन्च करने वाली हैं। मारुति सुजुकी अपनी सेलेरियो कार पर इस महीने में चौवन,शून्य रुपयापये तक की जबरदस्त छूट दे रही है। मारुति सुजुकी की सबसे महंगी इनविक्टो MPV पाँच जुलाई को लॉन्च होगी। कार निर्माता ने इसकी पच्चीस,शून्य रुपयापये की टोकन राशि पर बुकिंग की शुरू कर दी है। मारुति सुजुकी नई इलेक्ट्रिक SUV EVX लाने की तैयारी कर रही है। कार निर्माता की पहली इलेक्ट्रिक कार को टेस्टिंग के दौरान पोलैंड में देखा गया है। मारुति सुजुकी की सबसे महंगी इनविक्टो प्रीमियम MPV पाँच जुलाई को लाॅन्च होगी। भारतीय बाजार में मारुति सुजुकी समेत कई कार निर्माता कंपनियां अगले कुछ महीनों में कई गाड़ियां लॉन्च करने वाली हैं। देश में इन दिनों कारों की बिक्री तेज हो गई है। मारुति सुजुकी अपनी नई फ्लैगशिप MPV इनविक्टो को पाँच जुलाई को लॉन्च करेगी। कार निर्माता ने इस गाड़ी के लिए पच्चीस,शून्य रुपयापये की टोकन राशि पर बुकिंग भी शुरू कर दी है। मारुति सुजुकी की आगामी फ्लैगशिप MPV इनविक्टो होगी, इसका खुलासा हो चुका है। इससे पहले रिपोर्ट्स में बताया जा रहा था कि इसे एंगेज नाम से उतारा जा सकता है। मारुति सुजुकी ने इसी महीने अपनी ऑफ-रोडिंग जिम्नी SUV को भारतीय बाजार में लॉन्च किया है। गाड़ी में मस्कुलर बोनट और गोल हेडलाइट्स के साथ-साथ फॉगलैंप दिए गए हैं। मारुति सुजुकी ने अपनी लाइनअप की सबसे महंगी कार इनविक्टो MPV के लिए सोमवार से बुकिंग शुरू कर दी है। दक्षिण कोरियाई कंपनी देवू मोटर्स ने भारतीय बाजार में अपनी आइकॉनिक कार सिएलो के साथ दस्तक दी थी। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी पाँच जुलाई नई MPV इनविक्टो को लॉन्च करने जा रही है। मारुति सुजुकी की अर्टिगा की MPV सेगमेंट किफायती और आरामदायक कार है। यह गाड़ी लगभग ग्यारह सालों से भारतीय ग्राहकों की पसंद बनी हुई है और MPV सेगमेंट में इसकी सबसे अधिक बिक्री होती है। मारुति सुजुकी की फ्राेंक्स SUV के अन्य वेरिएंट की तुलना में बूस्टरजेट वेरिएंट को ज्यादा ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। मारुति सुजुकी की हाल ही में लॉन्च हुई पाँच-डोर SUV जिम्नी को भारतीय बाजार में अच्छी सफलता मिल रही है। यही कारण है कि इसे इकतीस,शून्य से ज्यादा बुकिंग हासिल हो चुकी है और अधिक मांग के चलते इसका वेटिंग पीरियड आठ महीने तक पहुंच गया है। मारुति सुजुकी की प्रीमियम MPV इनविक्टो पाँच जुलाई को लॉन्च होगी। इसके लिए कार निर्माता उन्नीस जून से बुकिंग लेना शुरू करेगी। मारुति सुजुकी पाँच जुलाई को अपनी फ्लैगशिप MPV लॉन्च करने वाली है। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री तेज हो रही है। ऐसे में लगभग सभी कंपनियां अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियां लॉन्च कर रही है। देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी एक नई कार उतारने की तैयारी कर रही हैं। कंपनी मारुति सुजुकी एंगेज नाम से एक नई MPV लॉन्च करेगी। यह टोयोटा हाईक्रॉस का रिबैज मॉडल होगा। देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपनी ऑफ-रोडिंग जिम्नी SUV को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। इस गाड़ी को बॉक्सी लुक मिला है। मारुति सुजुकी की ऑल्टो हैचबैक सेगमेंट में देश की सबसे अधिक बिकने वाली गाड़ियों में से एक है। यह गाड़ी लगभग तेईस सालों से भारतीय सड़कों पर राज कर रही है। देश में मारुति की सफलता में इस गाड़ी का अहम योगदान रहा है। कार सेगमेंट में भारतीय ग्राहकों द्वारा SUVs को सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है। बीते कुछ सालों से कॉम्पैक्ट, सब-कॉम्पैक्ट और मिड साइज SUV भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में धमाल मचा रही हैं। मारुति सुजुकी ने नई ऑल्टो Kदस CNG को टूर Hएक के रूप में लॉन्च किया है। मारुति सुजुकी की ऑफ-रोडिंग जिम्नी SUV के लिए ग्राहकों का इंतजार खत्म हो गया है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी अब तक की अपनी सबसे महंगी कार एंगेज MPV ला रही है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी सात-सीटर MPV एंगेज को पाँच जुलाई को लॉन्च करेगी। मारुति सुजुकी देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है। मारुति की वैगनआर हैचबैक सेगमेंट में कंपनी की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार है। दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपनी ऑफ-रोडिंग जिम्नी SUV को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। इसमें मस्कुलर बोनट और गोल हेडलाइट्स के साथ-साथ फॉगलैंप दिए गए हैं। मारुति सुजुकी की पहली पहली लाइफस्टाइल SUV जिम्नी भारत में बुधवार को लॉन्च होगी। इसी दौरान पता चलेगा कि इसकी कीमत महिंद्रा थार से कम या ज्यादा रहती है। दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी एक नई कार उतारने की तैयारी कर रही हैं। कंपनी भारत में 'मारुति सुजुकी एंगेज' नाम से एक नई MPV लॉन्च करेगी। मारुति सुजुकी देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है। वर्तमान में मारुति सुजुकी स्विफ्ट हैचबैक सेगमेंट में कंपनी की बेस्ट सेलिंग कार में से एक है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी अपनी लोकप्रिय हैचबैक वैगनआर के फ्लेक्स-फ्यूल वेरिएंट का उत्पादन नवंबर, दो हज़ार पच्चीस में शुरू करेगी। मारुति सुजुकी जून में अपने एरिना मॉडल्स पर शानदार छूट दे रही है। इस महीने मारुति सुजुकी अपनी नेक्सा गाड़ियों पर शानदार छूट लेकर आई है। इसमें इग्निस, सियाज, बलेनो और S-क्रॉस जैसी गाड़ियों पर उनसठ,शून्य रुपयापये तक की छूट मिल रही है। गाड़ियों की जबरदस्त मांग और सेमीकंडक्टर की कमी के कारण देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी की करीब चार लाख गाड़ियों की डिलीवरी रुकी हुई है और इस वजह से कंपनी के मॉडलों का वेटिंग पीरियड भी बढ़ रहा है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी का मई बिक्री में भी शीर्ष स्थान पर कब्जा बरकरार है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी की कारों की घरेलू बाजार में जबरदस्त डिमांड है। दक्षिण कोरियाई कंपनी देवू मोटर्स की आइकॉनिक कार सिएलो नब्बे के दशक में काफी लोकप्रिय हुई थी। मारुति सुजुकी ने गुरुवार को मई महीने के अपनी कारों की बिक्री के आंकड़े जारी कर दिए हैं। देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी अपनी ऑफ-रोडिंग जिम्नी SUV को भारत में लॉन्च करने की तैयारी कर ली है। कंपनी इस गाड़ी को सात जून को देश में उतारने वाली है। दिग्गज कार निर्माता मारुति सुजुकी की फ्रोंक्स SUV की देश में जबरदस्त डिमांड है। यही कारण है कि लॉन्च के चार महीने में ही इस गाड़ी की छब्बीस,पाँच सौ से ज्यादा की बुकिंग मिल चुकी है। देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी की इग्निस हैचबैक कार को काफी पसंद किया जा रहा है। देश में इसकी दो लाख यूनिट्स की बिक्री हो चुकी है। यह नेक्सा डीलरशिप पर उपलब्ध कंपनी की सबसे सस्ती है। इसे दो हज़ार सत्रह में लॉन्च किया गया था। भारतीय बाजार में वाहनों की बिक्री तेज हो रही है। यही वजह है कि इस साल देश में कई नई और फेसलिफ्टेड गाड़ियां लॉन्च हुई हैं। दिग्गज कार निर्माता मारुति सुजुकी एक नई हैचबैक कार पर काम कर रही है, जो अगली पीढ़ी की सुजुकी स्विफ्ट का 'स्पोर्ट' मॉडल होगा। दिग्गज कार निर्माता मारुति सुजुकी अपने ग्रीन पोर्टफोलियो के विस्तार की योजना बना रही है। इसी के तहत कंपनी eVX इलेक्ट्रिक SUV पेश करने की तैयारी में है। कार निर्माता मारुति सुजुकी की कॉम्पैक्ट SUV फ्रोंक्स को भारतीय बाजार में शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। टाटा मोटर्स ने भारत में अल्ट्रोज का CNG से चलने वाला वेरिएंट उतार दिया है। यह फैक्ट्री फिटेड CNG किट पाने वाला ब्रांड का तीसरा मॉडल है। देश में डीजल कारों की मांग में गिरावट आ रही है।
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काबुल, 9 मई (एजेंसी)
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में स्कूल में किए गये भीषण बम धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है। गृह मंत्रालय ने बताया कि मरने वालों में अधिकतर 11 से 15 साल की लड़कियां हैं। घायलों की संख्या भी 100 के पार हो गई है।
शनिवार काे स्कूल की छुट्टी होने पर विद्यार्थी जब बाहर निकल रहे थे, तब 3 धमाके हुए थे। पहला धमाका विस्फोटकों से लदे एक वाहन से किया गया, जिसके बाद 2 और धमाके हुए। ये धमाके राजधानी के पश्चिम में स्थित शिया बहुल इलाके में हुए हैं। यह इलाका अल्पसंख्यक शिया मुसलमानों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमलों के लिये कुख्यात है और इन हमलों की जिम्मेदारी अक्सर इस्लामिक स्टेट से संबद्ध संगठन लेते हैं। शनिवार को हुए धमाकों की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है।
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काबुल, नौ मई अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में स्कूल में किए गये भीषण बम धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर पचास हो गई है। गृह मंत्रालय ने बताया कि मरने वालों में अधिकतर ग्यारह से पंद्रह साल की लड़कियां हैं। घायलों की संख्या भी एक सौ के पार हो गई है। शनिवार काे स्कूल की छुट्टी होने पर विद्यार्थी जब बाहर निकल रहे थे, तब तीन धमाके हुए थे। पहला धमाका विस्फोटकों से लदे एक वाहन से किया गया, जिसके बाद दो और धमाके हुए। ये धमाके राजधानी के पश्चिम में स्थित शिया बहुल इलाके में हुए हैं। यह इलाका अल्पसंख्यक शिया मुसलमानों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमलों के लिये कुख्यात है और इन हमलों की जिम्मेदारी अक्सर इस्लामिक स्टेट से संबद्ध संगठन लेते हैं। शनिवार को हुए धमाकों की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है।
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एकता कपूर के मशहूर कॉमेडी शो हम पांच की ज़ी टीवी पर वापसी होने जा रही है। जहां दूरदर्शन, 90 के दशक के शो वापस प्रसारित कर टीआरपी बटोर रहा है वहीं बाकी चैनल ने भी अब ये रास्ता अपना लिया है। स्टार प्लस साराभाई और खिचड़ी दिखाना शुरू कर चुका है।
अब एकता कपूर की शानदार कॉमेडी सीरीज़ हम पांच सोमवार से ज़ीटीवी पर अपनी वापसी कर रही है। और फैन्स इस सीरीज़ के लिए बेहद उत्साहित दिख रहे हैं।
सीरीज़ में आनंद माथुर का किरदार निभाने वाले एक्टर अशोक सर्राफ ने मुंबई मिरर से बातचीत में बताया कि उन्हें तो पता ही नहीं था कि शो वापस आ रहा है। लेकिन ये खबर सुनकर उन्हें काफी खुशी हुई।
अशोक सर्राफ का कहना था कि लोगों को ये शो बहुत ज़्यादा पसंद आया था और उम्मीद है फिर से पसंद आएगा। वैसे इस सीरियल के बारे में बहुत सी बातें काफी दिलचस्प थीं।
गया।
था।
बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन!
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Don't Miss! - News Petrol-Diesel Price ग्यारह जुलाईy: नोएडा में फिर बदले तेल के दाम, जानिए क्या हो गई है कीमत? एकता कपूर के मशहूर कॉमेडी शो हम पांच की ज़ी टीवी पर वापसी होने जा रही है। जहां दूरदर्शन, नब्बे के दशक के शो वापस प्रसारित कर टीआरपी बटोर रहा है वहीं बाकी चैनल ने भी अब ये रास्ता अपना लिया है। स्टार प्लस साराभाई और खिचड़ी दिखाना शुरू कर चुका है। अब एकता कपूर की शानदार कॉमेडी सीरीज़ हम पांच सोमवार से ज़ीटीवी पर अपनी वापसी कर रही है। और फैन्स इस सीरीज़ के लिए बेहद उत्साहित दिख रहे हैं। सीरीज़ में आनंद माथुर का किरदार निभाने वाले एक्टर अशोक सर्राफ ने मुंबई मिरर से बातचीत में बताया कि उन्हें तो पता ही नहीं था कि शो वापस आ रहा है। लेकिन ये खबर सुनकर उन्हें काफी खुशी हुई। अशोक सर्राफ का कहना था कि लोगों को ये शो बहुत ज़्यादा पसंद आया था और उम्मीद है फिर से पसंद आएगा। वैसे इस सीरियल के बारे में बहुत सी बातें काफी दिलचस्प थीं। गया। था। बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन!
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परम आत्मीय स्वजन,
" ये सहर भी रफ्ता रफ्ता कहीं शाम तक न पहुंचे "
मुशायरे की अवधि केवल दो दिन है । मुशायरे की शुरुआत दिनाकं 26 अगस्त दिन शुक्रवार को हो जाएगी और दिनांक 27 अगस्त दिन शनिवार समाप्त होते ही मुशायरे का समापन कर दिया जायेगा.
(सदस्य प्रबंधन समूह)
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आदरणीय आशुतोष भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने , वाह ! क्या बात है । गिरह भी अच्छी लगी है , बधाइयाँ आपको ।
वही प्याज आज कौड़ी के भी दाम तक न पहुंचे -- ये दोनो शेर बहुत अच्छे लगे , बधाई आपको ।
वही प्याज आज कौड़ी के भी दाम तक न पहुंचे.............वाह ! ये भी खूब है.
आदरणीय डॉ.आशुतोष मिश्र साहब सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है. बहुत उम्दा अशआर. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर.
वो न आया लेने बढ़कर कभी हाल मेरे मन का,
" ये सहर भी रफ्ता रफ्ता कहीं शाम तक न पहुंचे "
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सादर, बिलकुल सही सुझाया है आपने. सादर आभार.
जी ! जरूर. सादर आभार भाई शिज्जू जी.सादर.
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परम आत्मीय स्वजन, " ये सहर भी रफ्ता रफ्ता कहीं शाम तक न पहुंचे " मुशायरे की अवधि केवल दो दिन है । मुशायरे की शुरुआत दिनाकं छब्बीस अगस्त दिन शुक्रवार को हो जाएगी और दिनांक सत्ताईस अगस्त दिन शनिवार समाप्त होते ही मुशायरे का समापन कर दिया जायेगा. Replies are closed for this discussion. आदरणीय आशुतोष भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने , वाह ! क्या बात है । गिरह भी अच्छी लगी है , बधाइयाँ आपको । वही प्याज आज कौड़ी के भी दाम तक न पहुंचे -- ये दोनो शेर बहुत अच्छे लगे , बधाई आपको । वही प्याज आज कौड़ी के भी दाम तक न पहुंचे.............वाह ! ये भी खूब है. आदरणीय डॉ.आशुतोष मिश्र साहब सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है. बहुत उम्दा अशआर. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर. वो न आया लेने बढ़कर कभी हाल मेरे मन का, " ये सहर भी रफ्ता रफ्ता कहीं शाम तक न पहुंचे " आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सादर, बिलकुल सही सुझाया है आपने. सादर आभार. जी ! जरूर. सादर आभार भाई शिज्जू जी.सादर.
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हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के परवाणू में आयकर विभाग में टैक्स असिस्टेंट को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया है। CBI शिमला की टीम ने छापा मार कर अधिकारी को 15 हजार रुपए के साथ दबोचा।
रिश्वत लेने का आरोपी परवाणू स्थित आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन यूनिट मे कार्यरत है। एक पार्टी की शिकायत पर CBI शिमला की टीम ने यह कार्रवाई की। अभी मामले में विभाग का आधिकारिक बयान नहीं आया है।
मिली जानकारी के अनुसार, CBI शिमला की टीम ने परवाणू स्थित आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन यूनिट मे कार्यरत टैक्स असिस्टेंट मनीष बेदी को 15 हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़ा। आरोपी किसी फर्म से काम के बदले उपरोक्त राशि की मांग कर रहा था।
संबंधित फर्म की शिकायत पर ही छापामारी की यह कार्रवाई की गई और रिश्वतखोर अफसर को पकड़ा गया। हालांकि फर्म का नाम जगजाहिर नहीं किया जा रहा है। आरोपी को शिमला कोर्ट मे पेश किया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के परवाणू में आयकर विभाग में टैक्स असिस्टेंट को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया है। CBI शिमला की टीम ने छापा मार कर अधिकारी को पंद्रह हजार रुपए के साथ दबोचा। रिश्वत लेने का आरोपी परवाणू स्थित आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन यूनिट मे कार्यरत है। एक पार्टी की शिकायत पर CBI शिमला की टीम ने यह कार्रवाई की। अभी मामले में विभाग का आधिकारिक बयान नहीं आया है। मिली जानकारी के अनुसार, CBI शिमला की टीम ने परवाणू स्थित आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन यूनिट मे कार्यरत टैक्स असिस्टेंट मनीष बेदी को पंद्रह हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़ा। आरोपी किसी फर्म से काम के बदले उपरोक्त राशि की मांग कर रहा था। संबंधित फर्म की शिकायत पर ही छापामारी की यह कार्रवाई की गई और रिश्वतखोर अफसर को पकड़ा गया। हालांकि फर्म का नाम जगजाहिर नहीं किया जा रहा है। आरोपी को शिमला कोर्ट मे पेश किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बिजनेसमैन Anand Mahindra वीडियो को देखकर सन्न रह गए हैं, उन्होंने कहा कि ये जेंटलमैन शारीरिक चुनौतियों का सामना तो कर रहे हैं, लेकिन कुदरत ने उन्हें जो दिया है वो उससे ही खुश है और इसके लिए आभारी हैं। आनंद महिंद्रा ने इस शख्स के लिए अपनी कंपनी में नौकरी का ऑफर दिया है।
बीते कुछ दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ा इजाफा देखने को मिला है। आज सुबह 8 बजकर 15 मिनट की स्थिति के मुताबिक WTI Crude Oil (Nymex) का रेट 75. 72 डॉलर प्रति बैरल है, वहीं Brent Crude Oil का रेट 78. 65 डॉलर प्रति बैरल है। बता दें कि 24 घंटे में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है।
Bank Holidays in January 2022: एकमात्र राष्ट्रीय अवकाश जिस पर बैंक बंद रहेंगे गणतंत्र दिवस (Republic Day of India) है, जो 26 जनवरी को पड़ता है। कई राज्य-विशिष्ट छुट्टियां (State-Specific Holidays) भी हैं। इसके अलावा, पूरे जनवरी में, देश भर के बैंक दूसरे और चौथे शनिवार के साथ-साथ रविवार को भी बंद रहेंगे।
सीएससी (CSC) को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए देश भर में इसके 75,000 से अधिक केंद्रों के माध्यम से 25 लाख लोग आयकर रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल करेंगे।
टाटा टेलीसर्विसेज का शेयर (Tata Teleservices Share) उन मल्टीबैगर पेनी शेयरों में से एक है, जिसने 2021 में अपने शेयरधारकों को 2000 फीसदी से अधिक रिटर्न दिया है।
Mutual Fund SIP: आमतौर पर म्यूचुअल फंड एसआईपी (Mutual Fund SIP) में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की सलाह दी जाती है, लेकिन 55 साल की उम्र में रिटायर होने के लिए टैक्स और निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि इसे लगभग 15 फीसदी रखना होगा।
26 दिसंबर तक 2. 44 करोड़ से ज्यादा आईटीआर-1 (ITR 1) और 1. 12 करोड़ आईटीआर-4 (ITR 4) शामिल हैं। वहीं आईटीआर 2 (ITR 2) दाखिल करने वालों की संख्या 39. 94 लाख से ज्यादा हो गई है। आईटीआर 3 (ITR 3) दाखिल करने वालों की संख्या 47. 87 लाख से ज्यादा हो चुकी है।
एक जनवरी से सभी फुटवियर (Footwear) पर 12 फीसदी जीएसटी (GST) लगेगा, जबकि रेडीमेड कपड़ों (Readymade Cloths) सहित कपास को छोड़कर सभी कपड़ा उत्पादों पर 12 फीसदी जीएसटी लगेगा।
आरबीएल बैंक (RBL Bank) पर आरबीआई (RBI) की कार्रवाई के बाद से शेयरों (RBL Share Price) में 23 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है। वहीं राधाकृष्ण दमानी (Radhakrishna Damani) और राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala) ने आरबीआई से बैंक के शेयरों में निवेश करने की गुहार लगाई है।
Gold And Silver Price Today: सोमवार को सोने की कीमत (Gold Price Today) में तेजी का माहौल बना हुआ है। जबकि चांदी की कीमत (Silver Price Today) में गिरावट देखने को मिल रही है। विदेशी बाजारों की बात करें तो सोना और चांदी का बाजार क्रिस्मस की छुट्टियों के बाद खुला है तो स्पॉट गोल्ड और वायदा बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है।
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बिजनेसमैन Anand Mahindra वीडियो को देखकर सन्न रह गए हैं, उन्होंने कहा कि ये जेंटलमैन शारीरिक चुनौतियों का सामना तो कर रहे हैं, लेकिन कुदरत ने उन्हें जो दिया है वो उससे ही खुश है और इसके लिए आभारी हैं। आनंद महिंद्रा ने इस शख्स के लिए अपनी कंपनी में नौकरी का ऑफर दिया है। बीते कुछ दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ा इजाफा देखने को मिला है। आज सुबह आठ बजकर पंद्रह मिनट की स्थिति के मुताबिक WTI Crude Oil का रेट पचहत्तर. बहत्तर डॉलर प्रति बैरल है, वहीं Brent Crude Oil का रेट अठहत्तर. पैंसठ डॉलर प्रति बैरल है। बता दें कि चौबीस घंटाटे में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है। Bank Holidays in January दो हज़ार बाईस: एकमात्र राष्ट्रीय अवकाश जिस पर बैंक बंद रहेंगे गणतंत्र दिवस है, जो छब्बीस जनवरी को पड़ता है। कई राज्य-विशिष्ट छुट्टियां भी हैं। इसके अलावा, पूरे जनवरी में, देश भर के बैंक दूसरे और चौथे शनिवार के साथ-साथ रविवार को भी बंद रहेंगे। सीएससी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए देश भर में इसके पचहत्तर,शून्य से अधिक केंद्रों के माध्यम से पच्चीस लाख लोग आयकर रिटर्न दाखिल करेंगे। टाटा टेलीसर्विसेज का शेयर उन मल्टीबैगर पेनी शेयरों में से एक है, जिसने दो हज़ार इक्कीस में अपने शेयरधारकों को दो हज़ार फीसदी से अधिक रिटर्न दिया है। Mutual Fund SIP: आमतौर पर म्यूचुअल फंड एसआईपी में दस फीसदी की बढ़ोतरी की सलाह दी जाती है, लेकिन पचपन साल की उम्र में रिटायर होने के लिए टैक्स और निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि इसे लगभग पंद्रह फीसदी रखना होगा। छब्बीस दिसंबर तक दो. चौंतालीस करोड़ से ज्यादा आईटीआर-एक और एक. बारह करोड़ आईटीआर-चार शामिल हैं। वहीं आईटीआर दो दाखिल करने वालों की संख्या उनतालीस. चौरानवे लाख से ज्यादा हो गई है। आईटीआर तीन दाखिल करने वालों की संख्या सैंतालीस. सत्तासी लाख से ज्यादा हो चुकी है। एक जनवरी से सभी फुटवियर पर बारह फीसदी जीएसटी लगेगा, जबकि रेडीमेड कपड़ों सहित कपास को छोड़कर सभी कपड़ा उत्पादों पर बारह फीसदी जीएसटी लगेगा। आरबीएल बैंक पर आरबीआई की कार्रवाई के बाद से शेयरों में तेईस फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है। वहीं राधाकृष्ण दमानी और राकेश झुनझुनवाला ने आरबीआई से बैंक के शेयरों में निवेश करने की गुहार लगाई है। Gold And Silver Price Today: सोमवार को सोने की कीमत में तेजी का माहौल बना हुआ है। जबकि चांदी की कीमत में गिरावट देखने को मिल रही है। विदेशी बाजारों की बात करें तो सोना और चांदी का बाजार क्रिस्मस की छुट्टियों के बाद खुला है तो स्पॉट गोल्ड और वायदा बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है।
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" में जेंटलमेन हाने का दावा भी नहीं करता है, " माकावेये को ने सूचना दी। "मेरी प्यारी में व्यापार के क्षेत्र में काम करता हू और वहा जगल के कानून का वालवाला है ।
उसने वेबा के उघाडे कधे को हल्के-से काटा । हुम-हुम । डर गयी न
दादिक ने ग्रामाफोन पर रेकाड चढाया और वेवा की जवान बहन कूका का नाचन के लिये ग्रामन्त्रित किया। माकावेयत्का ने बेवा का नाच की सगिनी बनाया। बेहद रस भोगी, यहा तक कि चिकनी-चुपडी वाता मे गीत गूज रहा था -
वडे स्नहे से थके सूय ने
जब सागर को विदा कहा
उसी घडी, यह माना तुमने प्रेम हमारा नही रहा ।
वालाद्या दौदिक के कमरे में बैठा था और खीझता हुआ उसकी पिताबें उलट-पलट रहा था। बगलवाले कमरे म वालेन्तीना आयता अपने पलंग पर फैली हुई थी और वार्या का हाथ थामे हुए अपना दुखडा रा रही थी"वेटी, तुम तो कल्पना भी नही कर सकती कि उसके साथ निवाह करना कितना मुश्किल है । वह यह माग करता है कि मेरी अपनी दिलचस्पया होनी चाहिये और उसने मुझ पर उह माना लाद ही दिया । वह तो बडा हठी है - तुमने देखा न कि उसकी नीचेवाला जवडा कितना लम्बा है। उसने मुझे कढाई और सिलाई के कास म दाखिल हाने को मजबूर कर दिया । सवाल मेरी दिलचस्पया का ही नही, पसे का है । वह तो धुन का पक्का है - वह चाहता है कि मैं हमेशा सभी तरह की सुख-सुविधामा से घिरी रहू, वह मेरी जिंदगी का बेहद रगोन बनाना चाहता है। वह मुझसे कहता है, 'मेरी नन्ही', उसे मुझे 'मेरी नन्ही', 'मरी रोशनी' या 'वेबी' वहना पसंद है। वह कहता है- 'तुम्हारी पसद बहुत बढ़िया है, तुम शहर की सबसे बढिया दजिन बन सकती हो । इस अथ म नही कि में खुद सिलाई करूंगी, नहीं, बल्कि यह कि में हिदायत दिया करूंगी मिसाल के
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" में जेंटलमेन हाने का दावा भी नहीं करता है, " माकावेये को ने सूचना दी। "मेरी प्यारी में व्यापार के क्षेत्र में काम करता हू और वहा जगल के कानून का वालवाला है । उसने वेबा के उघाडे कधे को हल्के-से काटा । हुम-हुम । डर गयी न दादिक ने ग्रामाफोन पर रेकाड चढाया और वेवा की जवान बहन कूका का नाचन के लिये ग्रामन्त्रित किया। माकावेयत्का ने बेवा का नाच की सगिनी बनाया। बेहद रस भोगी, यहा तक कि चिकनी-चुपडी वाता मे गीत गूज रहा था - वडे स्नहे से थके सूय ने जब सागर को विदा कहा उसी घडी, यह माना तुमने प्रेम हमारा नही रहा । वालाद्या दौदिक के कमरे में बैठा था और खीझता हुआ उसकी पिताबें उलट-पलट रहा था। बगलवाले कमरे म वालेन्तीना आयता अपने पलंग पर फैली हुई थी और वार्या का हाथ थामे हुए अपना दुखडा रा रही थी"वेटी, तुम तो कल्पना भी नही कर सकती कि उसके साथ निवाह करना कितना मुश्किल है । वह यह माग करता है कि मेरी अपनी दिलचस्पया होनी चाहिये और उसने मुझ पर उह माना लाद ही दिया । वह तो बडा हठी है - तुमने देखा न कि उसकी नीचेवाला जवडा कितना लम्बा है। उसने मुझे कढाई और सिलाई के कास म दाखिल हाने को मजबूर कर दिया । सवाल मेरी दिलचस्पया का ही नही, पसे का है । वह तो धुन का पक्का है - वह चाहता है कि मैं हमेशा सभी तरह की सुख-सुविधामा से घिरी रहू, वह मेरी जिंदगी का बेहद रगोन बनाना चाहता है। वह मुझसे कहता है, 'मेरी नन्ही', उसे मुझे 'मेरी नन्ही', 'मरी रोशनी' या 'वेबी' वहना पसंद है। वह कहता है- 'तुम्हारी पसद बहुत बढ़िया है, तुम शहर की सबसे बढिया दजिन बन सकती हो । इस अथ म नही कि में खुद सिलाई करूंगी, नहीं, बल्कि यह कि में हिदायत दिया करूंगी मिसाल के
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अगर आपको लगता है कि केवल इंसान ही जुगाड़ कर सकते हैं तो आपकी सोच एकदम गलत है. यहां कई दफा पशु-पक्षी भी अपनी मस्ती के लिए 'जुगाड़ टेक्नोलॉजी' का सहारा लेते हैं. अब सामने आई इस क्लिप को ही देख लीजिए जहां एक कौआ अपने लिए स्नोबोर्डिंग का जुगाड़ लगाकर मस्ती करता दिखाई दे रहा है.
अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं तो यहां आए दिन एक से बढ़कर एक मजेदार वीडियो वायरल होते रहते हैं. जिनमें से कुछ बेहद ही मजेदार होते हैं, जिन्हें देख कर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते हैं तो कुछ हैरान करने वाले वीडियोज भी होते हैं. खासकर अगर वीडियो पशु-पक्षियों (Crow Viral Video) से जुड़ा हो तो बात ही कुछ अलग है. जिसे देखने के बाद हमारा मूड एकदम से फ्रेश हो जाता है. इन दिनों भी एक कौए का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें परिंदा मस्त बर्फबारी के बाद स्नोबोर्डिंग का लुत्फ उठाता नजर आ रहा है.
अगर आपको लगता है कि केवल इंसान ही जुगाड़ कर सकते हैं तो आपकी सोच एकदम गलत है. यहां कई दफा पशु-पक्षी भी अपनी मस्ती के लिए 'जुगाड़ टेक्नोलॉजी' का सहारा लेते हैं. अब सामने आई इस क्लिप को ही देख लीजिए जहां एक कौआ अपने लिए स्नोबोर्डिंग का जुगाड़ लगाकर मस्ती करता दिखाई दे रहा है.
वायरल हो रहे वीडियो में आप देख सकते हैं कि बर्फबारी और बारिश के बाद एक अच्छी धूप खिली नजर आ रही है और एक कौआ मस्त होकर किसी के घर की छत पर बैठा है, जिस पर र्फ की परत जमी है, बर्फ को देखकर उसके मन में स्नोबोर्डिंग का ख्याल आता है, जिसके बाद एक डब्बे का ढक्कन ले आता है और फिर मजे से स्लाइड करता है. कौए को जब यह गेम पसंद आ जाती है तो वो बार-बार इसे अलग-अलग डायरेक्शन में ले जाकर स्लाइड कर रहा है.
इस मजेदार वीडियो को @gunsnrosesgirl3 नाम के अकाउंट द्वारा शेयर किया गया है. जिसे खबर लिखे जाने 93 लाख से भी ज्यादा लोग देख चुके हैं और कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दिए जा रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, ' जुगाड़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना आखिर इन्हें भी आ ही गया.' वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, ' इस परिंदे की तरह मुझे भी स्नोबोर्डिंग करनी है.' इसके अलावा कुछ यूज़र्स ने लिखा कि ये वीडियो काफी क्यूट है तो वहीं कुछ अन्य लोगों ने कौए की स्मार्टनेस की जमकर तारीफ की है.
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अगर आपको लगता है कि केवल इंसान ही जुगाड़ कर सकते हैं तो आपकी सोच एकदम गलत है. यहां कई दफा पशु-पक्षी भी अपनी मस्ती के लिए 'जुगाड़ टेक्नोलॉजी' का सहारा लेते हैं. अब सामने आई इस क्लिप को ही देख लीजिए जहां एक कौआ अपने लिए स्नोबोर्डिंग का जुगाड़ लगाकर मस्ती करता दिखाई दे रहा है. अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं तो यहां आए दिन एक से बढ़कर एक मजेदार वीडियो वायरल होते रहते हैं. जिनमें से कुछ बेहद ही मजेदार होते हैं, जिन्हें देख कर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते हैं तो कुछ हैरान करने वाले वीडियोज भी होते हैं. खासकर अगर वीडियो पशु-पक्षियों से जुड़ा हो तो बात ही कुछ अलग है. जिसे देखने के बाद हमारा मूड एकदम से फ्रेश हो जाता है. इन दिनों भी एक कौए का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें परिंदा मस्त बर्फबारी के बाद स्नोबोर्डिंग का लुत्फ उठाता नजर आ रहा है. अगर आपको लगता है कि केवल इंसान ही जुगाड़ कर सकते हैं तो आपकी सोच एकदम गलत है. यहां कई दफा पशु-पक्षी भी अपनी मस्ती के लिए 'जुगाड़ टेक्नोलॉजी' का सहारा लेते हैं. अब सामने आई इस क्लिप को ही देख लीजिए जहां एक कौआ अपने लिए स्नोबोर्डिंग का जुगाड़ लगाकर मस्ती करता दिखाई दे रहा है. वायरल हो रहे वीडियो में आप देख सकते हैं कि बर्फबारी और बारिश के बाद एक अच्छी धूप खिली नजर आ रही है और एक कौआ मस्त होकर किसी के घर की छत पर बैठा है, जिस पर र्फ की परत जमी है, बर्फ को देखकर उसके मन में स्नोबोर्डिंग का ख्याल आता है, जिसके बाद एक डब्बे का ढक्कन ले आता है और फिर मजे से स्लाइड करता है. कौए को जब यह गेम पसंद आ जाती है तो वो बार-बार इसे अलग-अलग डायरेक्शन में ले जाकर स्लाइड कर रहा है. इस मजेदार वीडियो को @gunsnrosesgirlतीन नाम के अकाउंट द्वारा शेयर किया गया है. जिसे खबर लिखे जाने तिरानवे लाख से भी ज्यादा लोग देख चुके हैं और कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दिए जा रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, ' जुगाड़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना आखिर इन्हें भी आ ही गया.' वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, ' इस परिंदे की तरह मुझे भी स्नोबोर्डिंग करनी है.' इसके अलावा कुछ यूज़र्स ने लिखा कि ये वीडियो काफी क्यूट है तो वहीं कुछ अन्य लोगों ने कौए की स्मार्टनेस की जमकर तारीफ की है. और ट्रेंडिंग खबरों के लिए क्लिक करें.
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न्यूज़ अरोमा रांचीः भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री सह झारखंड के प्रभारी दिलीप सैकिया के रांची आगमन पर बिरसा चौक पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की ओर से शुक्रवार को ढोल नगाड़े के साथ भव्य स्वागत किया गया।
बिरसा चौक के आगमन पर सर्व प्रथम भगवान बिरसा की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया।
इसके बाद युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष किसलय तिवारी द्वारा पगड़ी पहनाकर एवं तलवार भेंट कर सम्मानित किया गया।
मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा, आदित्य साहू, प्रदेश मंत्री सुबोध सिंह गुड्डू, नवीन जयसवाल, सांसद संजय सेठ विशेष रुप से उपस्थित थे।
इन अतिथियों का भी पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया।
मौके पर दिलीप सैकिया ने कहा कि झारखंड के इस वीर भूमि भगवान बिरसा मुंडा की धरती को नमन करता हूं।
झारखंड के प्रभारी के तौर पर यहां आकर अभिभूत हूं।
युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने जो प्यार और सम्मान दिया उसे कभी नहीं भुलाया जा सकता है।
प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के नेतृत्व में झारखंड के सभी भाजपा कार्यकर्ता एवं युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर भाजपा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। झारखंड में फिर से भाजपा की सरकार बनायेंगे।
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न्यूज़ अरोमा रांचीः भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री सह झारखंड के प्रभारी दिलीप सैकिया के रांची आगमन पर बिरसा चौक पर भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से शुक्रवार को ढोल नगाड़े के साथ भव्य स्वागत किया गया। बिरसा चौक के आगमन पर सर्व प्रथम भगवान बिरसा की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष किसलय तिवारी द्वारा पगड़ी पहनाकर एवं तलवार भेंट कर सम्मानित किया गया। मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा, आदित्य साहू, प्रदेश मंत्री सुबोध सिंह गुड्डू, नवीन जयसवाल, सांसद संजय सेठ विशेष रुप से उपस्थित थे। इन अतिथियों का भी पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। मौके पर दिलीप सैकिया ने कहा कि झारखंड के इस वीर भूमि भगवान बिरसा मुंडा की धरती को नमन करता हूं। झारखंड के प्रभारी के तौर पर यहां आकर अभिभूत हूं। युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने जो प्यार और सम्मान दिया उसे कभी नहीं भुलाया जा सकता है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के नेतृत्व में झारखंड के सभी भाजपा कार्यकर्ता एवं युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर भाजपा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। झारखंड में फिर से भाजपा की सरकार बनायेंगे।
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अमेरिका और कनाडा के 200 से अधिक सिनेमाघरों में विवादित फिल्म 'द केरल स्टोरी' रिलीज हो गई है। निर्देशक सुदीप्तो सेन ने कहा है कि यह फिल्म एक मिशन है, जो सिनेमा की रचनात्मक सीमाओं से परे है। सेन ने डिजिटल संवाददाता सम्मेलन में भारतीय व अमेरिकी पत्रकारों से कहा, देश केरल राज्य में लंबे समय से जारी समस्या को अनदेखा कर रहा था।
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अमेरिका और कनाडा के दो सौ से अधिक सिनेमाघरों में विवादित फिल्म 'द केरल स्टोरी' रिलीज हो गई है। निर्देशक सुदीप्तो सेन ने कहा है कि यह फिल्म एक मिशन है, जो सिनेमा की रचनात्मक सीमाओं से परे है। सेन ने डिजिटल संवाददाता सम्मेलन में भारतीय व अमेरिकी पत्रकारों से कहा, देश केरल राज्य में लंबे समय से जारी समस्या को अनदेखा कर रहा था। Get all Entertainment news in Hindi related to bollywood, television, hollywood, movie reviews, etc. Stay updated with us for all breaking news from Entertainment and more news in Hindi.
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भारतीय रेलवे की ओर से रेलवे ट्रैक पर TWS (थिक वेब स्विच) लगाए जा रहे हैं। इसके लगने पर ट्रेनों की गति के साथ सुरक्षा बढ़ेगी। पटरियों में ट्रेनों की दिशा बदलने के लिए टर्न आउट लगे होते हैं। अभी तक उसमें परंपरागत स्विच का प्रयोग होता रहा है। लेकिन अब थिक वेब स्विच लगाने का काम तेजी से चल रहा है। थिक वेब स्विच (TWS) लगाने का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों को 130 किमी प्रति घंटे की स्पीड तक ले जाना है, जिसे भविष्य में 160 किमी प्रति घंटे तक बढ़ाया जा सकेगा। इसके अलावा इससे लूप लाइन में भी ट्रेनों की गति 30 किमी प्रति घंटे से बढ़कर 50 किमी प्रति घंटे हो सकेगी।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण के अनुसार भारतीय रेलवे द्वारा सभी रूट और व्यस्त मार्गों पर थिक वेब स्विच (TWS) का इस्तेमाल करने का निर्णय किया गया है। थिक वेब स्विच (TWS) को इस प्रकार डिजायन किया गया है कि यह कंक्रीट स्लीपरों पर आसानी से स्थापित किया जा सकेगा। थिक वेब स्विच (TWS) ट्रैक की सुरक्षा को मजबूत बनाने के साथ-साथ उसकी लाइफ को भी बढ़ाता है और तेज स्पीड में कंपन की भी कम करता है।
जहां पर पटरियों की दिशा बदली जाती है उसे फेसिंग पॉइंट कहा जाता है। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए इसका मजबूत और टिकाऊ होना जरूरी है। थिक वेब स्विच परंपरागत स्विच की तुलना में मोटा, डबल लॉकिंग और स्प्रिंग सेटिंग का होता है। जो हाई स्पीड के लिए आदर्श माना जाता है। थिक वेब स्विच के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के यात्रियों को पता तक नहीं चलता कि उनकी ट्रेन फेसिंग पॉइंट से गुजरी है और उन्हें कोई झटका भी महसूस नहीं होता है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण का कहना है कि ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ-साथ रेलवे ने थिक वेब स्विच की मदद से तकनीक के माध्यम से ट्रेन के सफर को आरामदायक बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस वित्तीय वर्ष में उत्तर पश्चिम रेलवे पर 219 थिक वेब स्विच (TWS) लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा अब तक चिन्हित मार्गों पर 88 थिक वेब स्विच (TWS) स्थापित किए जा चुके हैं।
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भारतीय रेलवे की ओर से रेलवे ट्रैक पर TWS लगाए जा रहे हैं। इसके लगने पर ट्रेनों की गति के साथ सुरक्षा बढ़ेगी। पटरियों में ट्रेनों की दिशा बदलने के लिए टर्न आउट लगे होते हैं। अभी तक उसमें परंपरागत स्विच का प्रयोग होता रहा है। लेकिन अब थिक वेब स्विच लगाने का काम तेजी से चल रहा है। थिक वेब स्विच लगाने का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों को एक सौ तीस किमी प्रति घंटे की स्पीड तक ले जाना है, जिसे भविष्य में एक सौ साठ किमी प्रति घंटे तक बढ़ाया जा सकेगा। इसके अलावा इससे लूप लाइन में भी ट्रेनों की गति तीस किमी प्रति घंटे से बढ़कर पचास किमी प्रति घंटे हो सकेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण के अनुसार भारतीय रेलवे द्वारा सभी रूट और व्यस्त मार्गों पर थिक वेब स्विच का इस्तेमाल करने का निर्णय किया गया है। थिक वेब स्विच को इस प्रकार डिजायन किया गया है कि यह कंक्रीट स्लीपरों पर आसानी से स्थापित किया जा सकेगा। थिक वेब स्विच ट्रैक की सुरक्षा को मजबूत बनाने के साथ-साथ उसकी लाइफ को भी बढ़ाता है और तेज स्पीड में कंपन की भी कम करता है। जहां पर पटरियों की दिशा बदली जाती है उसे फेसिंग पॉइंट कहा जाता है। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए इसका मजबूत और टिकाऊ होना जरूरी है। थिक वेब स्विच परंपरागत स्विच की तुलना में मोटा, डबल लॉकिंग और स्प्रिंग सेटिंग का होता है। जो हाई स्पीड के लिए आदर्श माना जाता है। थिक वेब स्विच के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के यात्रियों को पता तक नहीं चलता कि उनकी ट्रेन फेसिंग पॉइंट से गुजरी है और उन्हें कोई झटका भी महसूस नहीं होता है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण का कहना है कि ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ-साथ रेलवे ने थिक वेब स्विच की मदद से तकनीक के माध्यम से ट्रेन के सफर को आरामदायक बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस वित्तीय वर्ष में उत्तर पश्चिम रेलवे पर दो सौ उन्नीस थिक वेब स्विच लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा अब तक चिन्हित मार्गों पर अठासी थिक वेब स्विच स्थापित किए जा चुके हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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उत्तरकाशी, 3 अगस्त (एजेंसी)
उत्तरकाशी जिले में मंगलवार को गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़ेथी के पास सड़क का एक हिस्सा टूटकर भागीरथी नदी में समा गया। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पहाड़ी दरकने से सड़क का करीब 30 मीटर हिस्सा टूटकर भागीरथी नदी में गिर गया। इस घटना के बाद नेशनल हाइवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की 28.3 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन 310 मीटर लंबी सुरंग भी खतरे की जद में आ गई है।
जिले में गत 15 दिनों से निरंतर हो रही बारिश के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर नगुण से लेकर हर्षिल तक जगह-जगह भूस्खलन क्षेत्र सक्रिय हो गए हैं। सड़क टूटने तथा यातायात बाधित होने की जानकारी मिलने के बाद वाहनों को मनेरा बाईपास के जरिए दूसरे मार्ग पर भेजा गया।
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उत्तरकाशी, तीन अगस्त उत्तरकाशी जिले में मंगलवार को गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़ेथी के पास सड़क का एक हिस्सा टूटकर भागीरथी नदी में समा गया। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पहाड़ी दरकने से सड़क का करीब तीस मीटर हिस्सा टूटकर भागीरथी नदी में गिर गया। इस घटना के बाद नेशनल हाइवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की अट्ठाईस.तीन करोड़ की लागत से निर्माणाधीन तीन सौ दस मीटर लंबी सुरंग भी खतरे की जद में आ गई है। जिले में गत पंद्रह दिनों से निरंतर हो रही बारिश के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर नगुण से लेकर हर्षिल तक जगह-जगह भूस्खलन क्षेत्र सक्रिय हो गए हैं। सड़क टूटने तथा यातायात बाधित होने की जानकारी मिलने के बाद वाहनों को मनेरा बाईपास के जरिए दूसरे मार्ग पर भेजा गया।
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जैसा की विदित है कि अभी 26 जुलाई को शुक्र गृह ने राशि परिवर्तन कर लिया है, और वो अब मिथुन राशि में प्रवेश कर गया है। शुक्र गृह सुख शांति, वैभव, ऐश्वर्य और प्यार का कारक है तथा बुध गृह बुद्धि और वाणी का कारक होता है। आने वाले समय में शुक्र गृह का ये राशि परिवर्तन 7 राशि वाले लोगों के लिए ये काफी अच्छा होने वाला है तथा बहुत ही शुभ फलदायक होगा। जानिए किन राशि वाले लोगों की किस्मत चमकने वाली है और किन पर प्यार और पैसो की बारिश होगी।
मेष राशि वाले जातकों के लिए शुक्र गृह का ये राशि परिवर्तन बहुत ही शुभ फलदायक तथा जबरदस्त योग बना रहा है, जिसकी वजह से आपको अपने सभी कामो में सफलता मिलेगी। आपको अपने रिश्तेदारों और दोस्तों का भी भरपूर सहयोग मिलेगा। आपके नए कारोबार, जमीन या नई गाड़ी भी खरीदने के योग बन रहे हैं। इस समय पर आपका स्वस्थ्य तो अच्छा रहेगा, साथ ही आपको धन लाभ भी होगा।
वृषभ राशि वाले जातकों के लिए भी ये राशि परिवर्तन बहुत ही खास और शुभ है। आपके पास चारों दिशाओं से धन प्राप्ति होगी। आप जिस किसी भी काम को प्रारम्भ करेंगे उसमे आपको भरपूर सफलता मिलेगी तथा साथ ही साथ आपको मान सम्मान की भी प्राप्ति होगी। आपके अपने साथी के साथ भी सम्बन्ध बहुत ही मधुर बने रहेंगे।
मिथुन राशि वाले व्यक्तियों के लिए भी ये समय बहुत ही शुभ है, आपको खूब मान सम्मान, ख्याति तथा धन प्राप्ति होगी। आपके सारे रुके हुए काम पूरे होंगे जिसके कारण आपका मन काफी प्रसन्न रहेगा। नए नए लोगों से आपके संपर्क बनेगे जो की आपके लिए काफी फायदेमंद भी साबित होंगे। आपको अपना प्यार भी मिलने की प्रबल सम्भावना है।
अगली राशि है सिंह राशि, इस समय आपको अपने भाग्य तथा किस्मत का खूब साथ मिलेगा। आपके लिए धन प्राप्ति का सयोंग है, आप किसी नए काम की भी शुरुआत कर शुरुआत कर सकते है, जिससे भी आपको काफी लाभ होगा। जीवन साथी से भी आपको खूब प्यार और सहयोग मिलगा पर इस समय पर आप अपने स्वास्थय का खास ध्यान रखे क्यूंकि इसमें गड़बड़ी की सम्भावना है।
इस क्रम में अगली राशि है तुला राशि, तुला राशि वाले जातक इस समय अपने अंदर एक नए जोश और स्फूर्ति को महसूस करेंगे। आपका भाग्य काफी मजबूत है, जिसके कारण आपके शत्रु चाह कर भी आपका कुछ भी नहीं बिगड़ सकते है। आप अपने शत्रुओं पर हावी रहेंगे।
कुम्भ राशि वाले जातकों के लिए भी ये समय काफी लाभदायक सिद्ध होने वाला है। आपके धन प्राप्ति के प्रबल योग हैं तथा आपका काफी समय से रुका हुआ धन भी वापस मिल जायेगा। इस समय आपके धन अर्जन तथा धन संचय के भी अच्छे अवसर है। आपको अपने साथी से भी बहुत सुख तथा सहयोग मिलेगा। इस दौरान आप कहीं बाहर भी घूमने फिरने जा सकते है।
मीन राशि वाले जातकों के लिए भी ये समय बहुत ही अनुकूल होने वाला है। इस समय आपको कहीं से बहुत बड़ा धन लाभ मिलेगा। आपके कोई जमीन जायदाद भी खरीदने के योग बन रहे है। आपको इस समय अपनी किस्मत और भाग्य का भरपूर साथ भी मिलेगा। आपको सभी कामों में सफलता मिलेगी जिसके कारण आप काफी प्रफुल्लित रहेंगे।
आज की टिपः घर में कांच की प्याली में समुद्री नमक में सफ़ेद सिरका मिला कर एक कोने में रख दें, अगर उसका रंग बदले तो इस को पुनः करे जब तक पूरा पारदर्शी न हो जाये। आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाएगी।
यदि आपको ये लेख अच्छा लगा हो तो कृपया मुझे फॉलो करें ताकि आपको इसी प्रकार के लेख और खबरें तथा जानकारी मिलती रहे।
नोटः उपरोक्त सिफारिशों और सुझाव प्रकृति में सामान्य हैं, अपने आप पर प्रयोग करने से पहले एकपंजीकृत प्रमाणित ट्रेनर या अन्य पेशेवर से परामर्श करने की सलाह लीजिये।
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जैसा की विदित है कि अभी छब्बीस जुलाई को शुक्र गृह ने राशि परिवर्तन कर लिया है, और वो अब मिथुन राशि में प्रवेश कर गया है। शुक्र गृह सुख शांति, वैभव, ऐश्वर्य और प्यार का कारक है तथा बुध गृह बुद्धि और वाणी का कारक होता है। आने वाले समय में शुक्र गृह का ये राशि परिवर्तन सात राशि वाले लोगों के लिए ये काफी अच्छा होने वाला है तथा बहुत ही शुभ फलदायक होगा। जानिए किन राशि वाले लोगों की किस्मत चमकने वाली है और किन पर प्यार और पैसो की बारिश होगी। मेष राशि वाले जातकों के लिए शुक्र गृह का ये राशि परिवर्तन बहुत ही शुभ फलदायक तथा जबरदस्त योग बना रहा है, जिसकी वजह से आपको अपने सभी कामो में सफलता मिलेगी। आपको अपने रिश्तेदारों और दोस्तों का भी भरपूर सहयोग मिलेगा। आपके नए कारोबार, जमीन या नई गाड़ी भी खरीदने के योग बन रहे हैं। इस समय पर आपका स्वस्थ्य तो अच्छा रहेगा, साथ ही आपको धन लाभ भी होगा। वृषभ राशि वाले जातकों के लिए भी ये राशि परिवर्तन बहुत ही खास और शुभ है। आपके पास चारों दिशाओं से धन प्राप्ति होगी। आप जिस किसी भी काम को प्रारम्भ करेंगे उसमे आपको भरपूर सफलता मिलेगी तथा साथ ही साथ आपको मान सम्मान की भी प्राप्ति होगी। आपके अपने साथी के साथ भी सम्बन्ध बहुत ही मधुर बने रहेंगे। मिथुन राशि वाले व्यक्तियों के लिए भी ये समय बहुत ही शुभ है, आपको खूब मान सम्मान, ख्याति तथा धन प्राप्ति होगी। आपके सारे रुके हुए काम पूरे होंगे जिसके कारण आपका मन काफी प्रसन्न रहेगा। नए नए लोगों से आपके संपर्क बनेगे जो की आपके लिए काफी फायदेमंद भी साबित होंगे। आपको अपना प्यार भी मिलने की प्रबल सम्भावना है। अगली राशि है सिंह राशि, इस समय आपको अपने भाग्य तथा किस्मत का खूब साथ मिलेगा। आपके लिए धन प्राप्ति का सयोंग है, आप किसी नए काम की भी शुरुआत कर शुरुआत कर सकते है, जिससे भी आपको काफी लाभ होगा। जीवन साथी से भी आपको खूब प्यार और सहयोग मिलगा पर इस समय पर आप अपने स्वास्थय का खास ध्यान रखे क्यूंकि इसमें गड़बड़ी की सम्भावना है। इस क्रम में अगली राशि है तुला राशि, तुला राशि वाले जातक इस समय अपने अंदर एक नए जोश और स्फूर्ति को महसूस करेंगे। आपका भाग्य काफी मजबूत है, जिसके कारण आपके शत्रु चाह कर भी आपका कुछ भी नहीं बिगड़ सकते है। आप अपने शत्रुओं पर हावी रहेंगे। कुम्भ राशि वाले जातकों के लिए भी ये समय काफी लाभदायक सिद्ध होने वाला है। आपके धन प्राप्ति के प्रबल योग हैं तथा आपका काफी समय से रुका हुआ धन भी वापस मिल जायेगा। इस समय आपके धन अर्जन तथा धन संचय के भी अच्छे अवसर है। आपको अपने साथी से भी बहुत सुख तथा सहयोग मिलेगा। इस दौरान आप कहीं बाहर भी घूमने फिरने जा सकते है। मीन राशि वाले जातकों के लिए भी ये समय बहुत ही अनुकूल होने वाला है। इस समय आपको कहीं से बहुत बड़ा धन लाभ मिलेगा। आपके कोई जमीन जायदाद भी खरीदने के योग बन रहे है। आपको इस समय अपनी किस्मत और भाग्य का भरपूर साथ भी मिलेगा। आपको सभी कामों में सफलता मिलेगी जिसके कारण आप काफी प्रफुल्लित रहेंगे। आज की टिपः घर में कांच की प्याली में समुद्री नमक में सफ़ेद सिरका मिला कर एक कोने में रख दें, अगर उसका रंग बदले तो इस को पुनः करे जब तक पूरा पारदर्शी न हो जाये। आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाएगी। यदि आपको ये लेख अच्छा लगा हो तो कृपया मुझे फॉलो करें ताकि आपको इसी प्रकार के लेख और खबरें तथा जानकारी मिलती रहे। नोटः उपरोक्त सिफारिशों और सुझाव प्रकृति में सामान्य हैं, अपने आप पर प्रयोग करने से पहले एकपंजीकृत प्रमाणित ट्रेनर या अन्य पेशेवर से परामर्श करने की सलाह लीजिये।
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दुबई, 29 मई (एजेंसी)
भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल से पहले ' व्यवस्थित क्वारंटाइन' में रहेगी। आईसीसी ने शनिवार को इसकी जानकरी दी, लेकिन यह नहीं बताया कि टीम को इंगलैंड पहुंचने के बाद कितने दिनों तक कड़े पृथकवास (होटल कमरे तक सीमित) में रहना होगा। डब्ल्यूटीसी तालिका में शीर्ष पर रही इन दोनों टीमों के बीच 18 से 22 जून तक साउथमप्टन के हैम्पशर बाउल में यह मुकाबला खेला जाएगा। न्यूजीलैंड की टीम इंगलैंड के खिलाफ द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज के लिए पहले ही वहां पहुंच चुकी है, जबकि भारतीय टीम मुंबई में 14 दिनों का क्वारंटाइन पूरा करने के बाद 3 जून को इंगलैंड पहुंचेगी।
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दुबई, उनतीस मई भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल से पहले ' व्यवस्थित क्वारंटाइन' में रहेगी। आईसीसी ने शनिवार को इसकी जानकरी दी, लेकिन यह नहीं बताया कि टीम को इंगलैंड पहुंचने के बाद कितने दिनों तक कड़े पृथकवास में रहना होगा। डब्ल्यूटीसी तालिका में शीर्ष पर रही इन दोनों टीमों के बीच अट्ठारह से बाईस जून तक साउथमप्टन के हैम्पशर बाउल में यह मुकाबला खेला जाएगा। न्यूजीलैंड की टीम इंगलैंड के खिलाफ द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज के लिए पहले ही वहां पहुंच चुकी है, जबकि भारतीय टीम मुंबई में चौदह दिनों का क्वारंटाइन पूरा करने के बाद तीन जून को इंगलैंड पहुंचेगी।
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जम्मू (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने नौ साल के अन्तराल के बाद बुधवार को त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल सूत्रों के मुताबिक इस साल मार्च में पंचायत चुनाव होने की संभावना हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रिमंडलीय बैठक में यह फैसला लिया गया। कुछ देर बाद उमर ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट 'ट्विटर' के जरिए बताया, मंत्रिमंडल ने राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि राज्य में अंतिम पंचायत चुनाव 20 वर्षों के अन्तराल के बाद वर्ष 2002 में हुए थे। मंत्रिमंडल के सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण, सरपंच और जिला स्तर के त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव मार्च में होने की संभावना है।
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जम्मू । जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने नौ साल के अन्तराल के बाद बुधवार को त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल सूत्रों के मुताबिक इस साल मार्च में पंचायत चुनाव होने की संभावना हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रिमंडलीय बैठक में यह फैसला लिया गया। कुछ देर बाद उमर ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट 'ट्विटर' के जरिए बताया, मंत्रिमंडल ने राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि राज्य में अंतिम पंचायत चुनाव बीस वर्षों के अन्तराल के बाद वर्ष दो हज़ार दो में हुए थे। मंत्रिमंडल के सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण, सरपंच और जिला स्तर के त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव मार्च में होने की संभावना है।
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सीधी रेखा में विकीरित होती है जो लगभग ३ सेकण्डतक बनी रहती है। परमाणुबमका दाहक प्रभाव इसी ज्वालाके कारण उत्पन्न होता है ।
विस्फोटके क्षण परमाणुबनके केस और उसमें रखे पदार्थका तापक्रम १० लाख डिग्री से० ० तक पहुँच जाता है । इस ऊँच तापक्रमपर बमका समस्त पदार्थ वापरूप धारण कर लेता है । और एक सेकण्डके हजारवें भागका समय व्यतीत होते-होते लगभग ३० गज व्यासका बाप्पगोला-सा बन जाता है जिसका तापक्रम ३ लाख डिग्री होता है - यह सूर्यके धरातलकं तापक्रमका १० गुना है !
यह दहकता हुआ गैसका विशालकाय गोला प्रति सेकण्ड ३०० फुटके हिसाबसे ऊपर आकाश में चढ़ता है - इसका आकार भी बढ़ता जाता है। एक सेकण्ड उपरान्त इसका व्यास ३०० गज हो जाता है । इस गोलेके अन्दर मौजूद पदार्थके नन्हें परमाणु रेडियोधर्मी होते हैं ।
हिरोशिमाके परमाणुबम विस्फोटनके फलस्वरूप ठीक नीचेकी भूमिका तापक्रम ३००० डिग्री से० ग्रेड पहुँच गया था जो पत्थरको भी पिघलाने के लिए पर्याप्त था । अतः निकटके लोग जो खुले मैदान में थे, इस ज्वालाकी चपेट में आकर बुरी तरह जल गये और कुछ ही मिनटोंमें वे मृत्युकी गोद में सो गये । उस स्थानसे २ मीलकी दूरीपर जो लोग खुले मैदान में थे, उनकी त्वचापर भी इस ज्वालाके कारण फफोले पड़ गये । अवश्य मकानकी दीवारें या मोटे कपड़े शरीगंगोंको परमाणुबमके दाहक प्रभाव से बचाने में विशेष रूप से समर्थ होते हैं ।
३. रेडियोधर्मी किरणोंका प्रभाव - विस्फोट होने की क्रिया में ही तुरन्त गामा रश्मियाँ तथा न्यूट्रानकणोंकी बौछार बसे चारों ओर विकीरित होती हैं । इनके अतिरिक्त बीटाकणों (एलेपरमाणु अस्त्रों के विनाशकारी प्रभाव
क्ट्रान) तथा अल्फा कणोंकी बौछार भी विस्फोट से उत्पन्न होती हैं । किन्तु हवा अथवा अन्य पदार्थों में सहज ही ये शोषित हो जाती हैं, अतः ये जीवधारियोंतक विशेष मात्रा में नहीं पहुँच पाती हैं। इसी कारण इस प्रसंगमें इनपर विचार नहीं किया
जायगा ।
(क) गामा रश्मियाँ एक्स-रश्मियोंकी जातिकी किरणें होती हैं, कबल इनका तीव्रता अपक्षाकृत प्रबल होता है । जीवधारियापर इन गामा रश्मियोंका सदैव ही हानिकारक प्रभाव पड़ता है । एक्स-किरणोंकी भाँति ये भी लकड़ी तथा वस्त्रपरिधान आदिमेंसे होकर आसानी से गुजर सकती हैं। ईंटकी दीवारें भी इन्हें पूर्णतया रोक नहीं सकती हैं ।
शरीर के अन्दर गामा किरणें प्रवेश करनेपर ऐसे हानिकारक प्रभाव उत्पन्न करती हैं जो कुछ अरसे बाद अपना घातक रूप प्रकट करते हैं। सबसे भयानक बात तो यह है कि इन किरणोंके हानिकारक प्रभाव कुछ अंशों में अगली दो तीन पीढ़ियोंकी सन्तानमें भी प्रकट होते हैं । जीव वैज्ञानिक इस सम्बन्धमें अभी अनुसन्धान कर रहे हैं और निश्चित रूप से यह बतलाया भी नहीं जा सकता कि अगली पीढ़ीको इन रश्मियोंके कारण क्या क्लेश भोगने पड़ेंगे ।
अधिक मात्रा में यदि गामाकिरणें शरीर में प्रवेश कर जायँ तो ये हड्डीके अन्दर समा जाती हैं और मज्जातन्तुओंपर अपना हानिकारक प्रभाव डालती हैं । फलस्वरूप नये रुधिरके निर्माणकी सामर्थ्य मारी जाती हैं। अब ज्यों-ज्यों समय बीतता हूँ त्यों-त्यों शरीर में तरह-तरह की व्याधियाँ प्रकट होने लगती हैं । २४ घण्टे उपरान्त ज्वर ओर जी मचलाना आरम्भ हो जाता है । एक सप्ताह में शरीरके बाल झड़ने लगते हैं और दो सप्ताह उपरान्त पेचिशके चिह्न प्रकट होने लगते हैं और इस प्रकार गामाकिरणों१००
से आहत व्यक्ति धीरे-धीरे मृत्युपथपर अग्रसर होता है । विशेषज्ञोंकी खोजके अनुसार विस्फोट केन्द्रसे डेढ़ मीलकी दूरीतक भी गामारश्मियोंकी तीव्रता इतनी बनी रहती है कि वे हानिकारक प्रभाव उत्पन्न कर सकें। इस क्षेत्र में भी विस्फोट केन्द्र - से आप मीलकी दूरीतकके व्यक्तियोंके लिए ये किरणें घातक प्रभाव उत्पन्न करती हैं । आव मील और डेढ़ मीलके बीच स्थित व्यक्तियोंपर ये किरणें हानिकारक प्रभाव अवश्य डालती हैं, किन्तु घातक नहीं होतीं।
(ख) रेडियोधर्मी वादल - विस्फोटके लगभग १ मिनट पश्चात् परमाणुवमके अन्दरके पदार्थ असह्य ताप और दवावके कारण वापरूप में परिवर्तित हो जाते हैं । तप्त वाष्पका यह गोला एक प्रदीप्त बादलके रूप में ऊपर आकाश में उठता है । इस गोलेके अन्दरके वाटपकण प्रायः सबके सब रेडियोधर्मी होते हैं । यदि बमका विस्फोट आकाश में कराया गया हो (जैसे हिरोशिमा और नागासाकी में) तो इस बादलमें नीचे धरतीकी गई- गुबार आदि नहीं पहुँचने पाती है । अतः इस रेडियोधर्मी बादलके अन्दरके वाष्पकण अत्यन्त नन्हें आकारके रहते हैं और इसीलिए ये द्रवीभूत होकर जल्दी नीचे धरतीपर नहीं आ पाते हैं। ज्यों-ज्यों समय बीतता जाता है इनकी रेडियोधर्मिता भी त्यों-त्यों क्षीण होती जाती है । ऊर्ध्वाकाशंकी हवाओं द्वारा ये दूर-दूरतक फैल जाते हैं और अन्त वर्मा आदिके साथ जब ये धरतीपर पहुँचते है तो उस समयतक इनकी रेडियोधर्मिता इतनी क्षीण हो चुकी होती है कि ये विशेष हानिकारक नहीं साबित होते ।
यदि परमाणुबमको भूमिके निकट लगभग ३०० फुटकी ऊँचाईपर विस्फोट कराया जाय तो विस्फोटकी शक्तिका अधिकांश भूमि में लगभग ४०० गज व्यासका क्रेटरनुमा गड्डा फोड़ने में खर्च हो जाता है और धरतीके ससर्ग में आने के कारण भूकम्प
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सीधी रेखा में विकीरित होती है जो लगभग तीन सेकण्डतक बनी रहती है। परमाणुबमका दाहक प्रभाव इसी ज्वालाके कारण उत्पन्न होता है । विस्फोटके क्षण परमाणुबनके केस और उसमें रखे पदार्थका तापक्रम दस लाख डिग्री सेशून्य शून्य तक पहुँच जाता है । इस ऊँच तापक्रमपर बमका समस्त पदार्थ वापरूप धारण कर लेता है । और एक सेकण्डके हजारवें भागका समय व्यतीत होते-होते लगभग तीस गज व्यासका बाप्पगोला-सा बन जाता है जिसका तापक्रम तीन लाख डिग्री होता है - यह सूर्यके धरातलकं तापक्रमका दस गुना है ! यह दहकता हुआ गैसका विशालकाय गोला प्रति सेकण्ड तीन सौ फुटके हिसाबसे ऊपर आकाश में चढ़ता है - इसका आकार भी बढ़ता जाता है। एक सेकण्ड उपरान्त इसका व्यास तीन सौ गज हो जाता है । इस गोलेके अन्दर मौजूद पदार्थके नन्हें परमाणु रेडियोधर्मी होते हैं । हिरोशिमाके परमाणुबम विस्फोटनके फलस्वरूप ठीक नीचेकी भूमिका तापक्रम तीन हज़ार डिग्री सेशून्य ग्रेड पहुँच गया था जो पत्थरको भी पिघलाने के लिए पर्याप्त था । अतः निकटके लोग जो खुले मैदान में थे, इस ज्वालाकी चपेट में आकर बुरी तरह जल गये और कुछ ही मिनटोंमें वे मृत्युकी गोद में सो गये । उस स्थानसे दो मीलकी दूरीपर जो लोग खुले मैदान में थे, उनकी त्वचापर भी इस ज्वालाके कारण फफोले पड़ गये । अवश्य मकानकी दीवारें या मोटे कपड़े शरीगंगोंको परमाणुबमके दाहक प्रभाव से बचाने में विशेष रूप से समर्थ होते हैं । तीन. रेडियोधर्मी किरणोंका प्रभाव - विस्फोट होने की क्रिया में ही तुरन्त गामा रश्मियाँ तथा न्यूट्रानकणोंकी बौछार बसे चारों ओर विकीरित होती हैं । इनके अतिरिक्त बीटाकणों तथा अल्फा कणोंकी बौछार भी विस्फोट से उत्पन्न होती हैं । किन्तु हवा अथवा अन्य पदार्थों में सहज ही ये शोषित हो जाती हैं, अतः ये जीवधारियोंतक विशेष मात्रा में नहीं पहुँच पाती हैं। इसी कारण इस प्रसंगमें इनपर विचार नहीं किया जायगा । गामा रश्मियाँ एक्स-रश्मियोंकी जातिकी किरणें होती हैं, कबल इनका तीव्रता अपक्षाकृत प्रबल होता है । जीवधारियापर इन गामा रश्मियोंका सदैव ही हानिकारक प्रभाव पड़ता है । एक्स-किरणोंकी भाँति ये भी लकड़ी तथा वस्त्रपरिधान आदिमेंसे होकर आसानी से गुजर सकती हैं। ईंटकी दीवारें भी इन्हें पूर्णतया रोक नहीं सकती हैं । शरीर के अन्दर गामा किरणें प्रवेश करनेपर ऐसे हानिकारक प्रभाव उत्पन्न करती हैं जो कुछ अरसे बाद अपना घातक रूप प्रकट करते हैं। सबसे भयानक बात तो यह है कि इन किरणोंके हानिकारक प्रभाव कुछ अंशों में अगली दो तीन पीढ़ियोंकी सन्तानमें भी प्रकट होते हैं । जीव वैज्ञानिक इस सम्बन्धमें अभी अनुसन्धान कर रहे हैं और निश्चित रूप से यह बतलाया भी नहीं जा सकता कि अगली पीढ़ीको इन रश्मियोंके कारण क्या क्लेश भोगने पड़ेंगे । अधिक मात्रा में यदि गामाकिरणें शरीर में प्रवेश कर जायँ तो ये हड्डीके अन्दर समा जाती हैं और मज्जातन्तुओंपर अपना हानिकारक प्रभाव डालती हैं । फलस्वरूप नये रुधिरके निर्माणकी सामर्थ्य मारी जाती हैं। अब ज्यों-ज्यों समय बीतता हूँ त्यों-त्यों शरीर में तरह-तरह की व्याधियाँ प्रकट होने लगती हैं । चौबीस घण्टे उपरान्त ज्वर ओर जी मचलाना आरम्भ हो जाता है । एक सप्ताह में शरीरके बाल झड़ने लगते हैं और दो सप्ताह उपरान्त पेचिशके चिह्न प्रकट होने लगते हैं और इस प्रकार गामाकिरणोंएक सौ से आहत व्यक्ति धीरे-धीरे मृत्युपथपर अग्रसर होता है । विशेषज्ञोंकी खोजके अनुसार विस्फोट केन्द्रसे डेढ़ मीलकी दूरीतक भी गामारश्मियोंकी तीव्रता इतनी बनी रहती है कि वे हानिकारक प्रभाव उत्पन्न कर सकें। इस क्षेत्र में भी विस्फोट केन्द्र - से आप मीलकी दूरीतकके व्यक्तियोंके लिए ये किरणें घातक प्रभाव उत्पन्न करती हैं । आव मील और डेढ़ मीलके बीच स्थित व्यक्तियोंपर ये किरणें हानिकारक प्रभाव अवश्य डालती हैं, किन्तु घातक नहीं होतीं। रेडियोधर्मी वादल - विस्फोटके लगभग एक मिनट पश्चात् परमाणुवमके अन्दरके पदार्थ असह्य ताप और दवावके कारण वापरूप में परिवर्तित हो जाते हैं । तप्त वाष्पका यह गोला एक प्रदीप्त बादलके रूप में ऊपर आकाश में उठता है । इस गोलेके अन्दरके वाटपकण प्रायः सबके सब रेडियोधर्मी होते हैं । यदि बमका विस्फोट आकाश में कराया गया हो तो इस बादलमें नीचे धरतीकी गई- गुबार आदि नहीं पहुँचने पाती है । अतः इस रेडियोधर्मी बादलके अन्दरके वाष्पकण अत्यन्त नन्हें आकारके रहते हैं और इसीलिए ये द्रवीभूत होकर जल्दी नीचे धरतीपर नहीं आ पाते हैं। ज्यों-ज्यों समय बीतता जाता है इनकी रेडियोधर्मिता भी त्यों-त्यों क्षीण होती जाती है । ऊर्ध्वाकाशंकी हवाओं द्वारा ये दूर-दूरतक फैल जाते हैं और अन्त वर्मा आदिके साथ जब ये धरतीपर पहुँचते है तो उस समयतक इनकी रेडियोधर्मिता इतनी क्षीण हो चुकी होती है कि ये विशेष हानिकारक नहीं साबित होते । यदि परमाणुबमको भूमिके निकट लगभग तीन सौ फुटकी ऊँचाईपर विस्फोट कराया जाय तो विस्फोटकी शक्तिका अधिकांश भूमि में लगभग चार सौ गज व्यासका क्रेटरनुमा गड्डा फोड़ने में खर्च हो जाता है और धरतीके ससर्ग में आने के कारण भूकम्प
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छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CGBSE) ने कक्षा 10 और कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा 2022 डेटशीट (Chhattisgarh Board Exam) जारी कर दिया है.
CGBSE Board Exam Time Table 2022: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CGBSE) ने कक्षा 10 और कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा 2022 डेटशीट (Chhattisgarh Board Exam) जारी कर दिया है. CGBSE कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा 3 से 23 मार्च तक और कक्षा 12 की परीक्षा 2 से 30 मार्च तक होगी. परीक्षा के सभी दिन में एक पाली होगी. समय सुबह 9 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक रहेगा. छात्रों को सुबह नौ बजे तक परीक्षा स्थल पर पहुंचना होगा. प्रश्न पत्र सुबह 9:05 बजे क्वेशन पेपर दिए जाएंगे और छात्रों को प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए 10 मिनट का समय दिया जाएगा. वे सुबह 9:15 बजे से सवालों के जवाब देना शुरू कर सकते हैं.
राज्य सरकार द्वारा छुट्टी की घोषणा किए जाने पर भी परीक्षाएं जारी रहेंगी. हालांकि, बोर्ड ने कहा कि COVID-19 के कारण परीक्षा तिथियों (10th 12th Time Table) में बदलाव किया जा सकता है. बोर्ड ने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर प्रैक्टिकल परीक्षा भी आयोजित की जाएगी और छात्रों को परीक्षा के समय के बारे में केंद्र प्रमुखों से पता चलेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल बोर्ड परीक्षा में 6 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल होंगे.
दसवीं बोर्ड की परीक्षा में 03 लाख 90 हजार छात्र शामिल होंगे. वहीं 12वीं बोर्ड की परीक्षा के लिए 2 लाख 93 हजार छात्रों ने आवेदन किया है. कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच बोर्ड परीक्षा की डेटशीट जारी की गई है. एक तरफ स्कूलों को बंद करने पर विचार किया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ कई स्कूलों की परीक्षाएं शुरू हो रही है. छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं-12वीं की परीक्षा (Chhattisgarh Board Exam) ऑफलाइन मोड पर आयोजित की जाएगी.
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छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा दस और कक्षा बारह की बोर्ड परीक्षा दो हज़ार बाईस डेटशीट जारी कर दिया है. CGBSE Board Exam Time Table दो हज़ार बाईस: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा दस और कक्षा बारह की बोर्ड परीक्षा दो हज़ार बाईस डेटशीट जारी कर दिया है. CGBSE कक्षा दस की बोर्ड परीक्षा तीन से तेईस मार्च तक और कक्षा बारह की परीक्षा दो से तीस मार्च तक होगी. परीक्षा के सभी दिन में एक पाली होगी. समय सुबह नौ बजे से दोपहर बारह:पंद्रह बजे तक रहेगा. छात्रों को सुबह नौ बजे तक परीक्षा स्थल पर पहुंचना होगा. प्रश्न पत्र सुबह नौ:पाँच बजे क्वेशन पेपर दिए जाएंगे और छात्रों को प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए दस मिनट का समय दिया जाएगा. वे सुबह नौ:पंद्रह बजे से सवालों के जवाब देना शुरू कर सकते हैं. राज्य सरकार द्वारा छुट्टी की घोषणा किए जाने पर भी परीक्षाएं जारी रहेंगी. हालांकि, बोर्ड ने कहा कि COVID-उन्नीस के कारण परीक्षा तिथियों में बदलाव किया जा सकता है. बोर्ड ने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर प्रैक्टिकल परीक्षा भी आयोजित की जाएगी और छात्रों को परीक्षा के समय के बारे में केंद्र प्रमुखों से पता चलेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल बोर्ड परीक्षा में छः लाख से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल होंगे. दसवीं बोर्ड की परीक्षा में तीन लाख नब्बे हजार छात्र शामिल होंगे. वहीं बारहवीं बोर्ड की परीक्षा के लिए दो लाख तिरानवे हजार छात्रों ने आवेदन किया है. कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच बोर्ड परीक्षा की डेटशीट जारी की गई है. एक तरफ स्कूलों को बंद करने पर विचार किया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ कई स्कूलों की परीक्षाएं शुरू हो रही है. छत्तीसगढ़ बोर्ड दसवीं-बारहवीं की परीक्षा ऑफलाइन मोड पर आयोजित की जाएगी.
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प्रभु पार्श्व के सम्बन्ध में किसी भी समय कुछ भी संकीर्तन, श्रवण या कथन करने को मिले, यह परम सौमाग्य का संकेत है। फिर श्रमण कुमार देवेंद्र मुनिजी के संकीर्तन का प्राक्कथनप्रसंग प्राप्त हो इससे अधिक हर्ष का विषय और क्या हो सकता है ? सिद्धों के सैन्य में दिवाकर के समान आचार्य कुमुदचन्द्र स्वामी फरमाते हैं किनामाऽपि पाति भवतो भवतो जगन्ति ।
पाश्र्वं प्रभु का नाम भी हमें पवित्र करने में समर्थ है, उनके स्तवन का तो क्या कथन करूं ? मैं तो संसार के ताप से जला हुआ हूँ। इस सरोबर में स्नान करना तो किसी भाग्यवान का ही काम है। मुझे तो ठंडी ठंडी हवा ने परम आनंद प्रदान कर दिया ।
परम योगीश्वर आनंद घन जी महाराज के शब्दों में
राम कहो, रहमान कहो कोउ, कान कहो महादेव री ।
पारसनाथ' कहो कोउ ब्रह्मा, सकल ब्रह्म स्वयमेव ही ।।
२४ तीर्थंकर देवों में योगिराज को प्रभु पार्श्व का ही नाम-स्मरण प्यारा लगा । अर्थ भी उन्होंने बता दिया । मोक्ष मार्ग के वे ब्रह्मा है-विधाता ।
निज पद रमे राम सो कहिये, रहम करे रहमान जी ।
परसे रूप पाइव सो कहिये, महादेव निर्वाण री ।।
दयालु सम्यग्दृष्टि होने के बाद जो आत्मरूप यानी अमूर्त सौन्दर्य का संस्पर्श करता है, वही 'पार्श्व' नाम से विख्यात है। श्रद्धा प्ररूपण और स्पर्शना हो सिद्धि ( अन्तिम लक्ष्य ) स्थान के पाबं ले जाने में समर्थ हैं।
भगवान पार्श्व के चिह्नरूप में सर्प का संकेत है। पार्श्व प्रभु विषय वासना का हरण करने में सर्वाधिक समर्थ हैं। जब सांप काटता है, तो नीम कडबा नहीं लगता । उसी तरह जब जब संसार का मोह चढता है, तब विषय कडवे नहीं लगते । ज्यों ज्यों पाश्र्व प्रभु के नाम की भागदमनी विष का हरण करती है, त्यों त्यों विषयों का रस कडवा लगने लगता है। नीम कडवा लगने लगा कि समझो, विष उतरा । आचार्य प्रवर भद्रबाहु स्वामी फमति हैंविषहर-विष-निन्नासं मंगल-कल्याण-आवासं ।
विषय के सर्प का विष दूर कर के मंगल और कल्याण के धाम में पहुँचा देने वाले पार्श्व प्रभु का यह विवेचन हमारे लिये सर्वतो भद्र सिद्ध होगा, इसमें कोई सन्देह नहीं ।
सभी पुष्प उद्यान को सुरभित करते हैं, पर सभी सुमनों की सुरभि मिञ मिञ है। इसी प्रकार चौबीसों तीर्थंकर हमारे जीवनाराम को सुगन्धित करते हैं, पर पार्श्व प्रभु के सुमन का परिमल कुछ खास विशेषता रखता है ।
उनका तीर्थ शासनकाल सब से कम परन्तु उनकी प्रतिष्ठा सब से ज्यादा। उनकी प्रतिष्ठा की क्या कहें। जिस प्रकार भगवान महावीर के जीव को आदिनाथ ऋषभदेव के समय ही पता लग गया था कि वे तीर्थंकर होने वाले हैं, यह पता उनके एक गणघर को पूर्व चौवीसी में ही खबर हो गई थी, तभी से उनकी प्रतिष्ठा प्रारम्भ है। इतना ही नहीं भारत की सब से बडी नगरी के सब से बड़े उत्सव में शोभायात्रा धर्मनाथ की होती है, पर कहा जाता है, पार्श्वनाथ की पालकी । इससे भी बडी प्रतिष्ठा यह है कि सम्मेद शिखर में बीस तीर्थंकरों का निर्वाण कल्याण हुआ, पर प्रतिष्ठा है 'पारसनाथ हिल' की । इतना ही नहीं, स्टेशन का नाम भी 'पारसनाथ' है । है।
इसका कारण यही है कि पार्श्वनाथ प्रभु हमें संसार के विषयों का विव उतारने में सर्वथा समर्थ है। उन्होंने सर्प का चौदह पूर्व का सार सुना कर उद्धार कर दिया तो हम मनुष्यों को नमस्कार प्रदान कर के कल्याण कर दें, उसमें क्या आश्चर्य है ? इंजिन से अलग नहीं हो तो डिब्बा पहुँच जाता है, उसी प्रकार हम पाएवं प्रभु के परिचय से विभक्त न रहेंगे, तो भी कल्पतरु हो जायगा, इसम कोई सन्देह नहीं ।
नमस्कार अरिहन्त प्रभु, नमस्कार जिन सिद्ध । नमस्कार आचार्य गुरु, उपाध्याय समृद्ध ॥
उपाध्याय शुद्ध समृद्ध वाचक रहे । सर्व साधु को नमन सिद्धि साधन गहे ।। नमो सकल श्रीसंघ सदा संकट हरण । ● सूर्यचन्द्र' सर्वत्र मधुर मंगल करण ।। '
सुन्दर मृदु मंगल करण, वीतराग दृढ भक्ति । दृष्टिवाद का पूर्वगत, निर्विवाद निज शक्ति ।।
निविवाद निजशक्ति चतुर्दश युक्तियाँ । नन्दि घोषण चूल मूल अभिव्यक्तियाँ ।। ॥ ब्रह्मरन्ध्र उठित प्रवाद सुनाद है । 'सूर्यचन्द्र' चैतम्य प्रथम उत्पाद है ।
अवश्यात अब है कहाँ ? चित्त हुआ निर्भर । शत्रुभाव निर्मूल है- नमस्कार में खैर ।।
नमस्कार में खैर विश्वमंत्री वरी । प्रथम पूर्व की सम्पक वृत्ति यही सरी ॥ सूर्यचन्द्र अग्रायन सिद्धि-स्थान है। द्वितीय पद में पूर्व द्वितीय प्रदान है ।।
प्रगति कार्य में अस्ति या नास्ति शुद्ध आचार । आचार्यों से बार ले निर्मल व्रत व्यवहार ।
निर्मल व्रत व्यवहार पूर्व दोनों कहे । ज्ञान प्रवाद उपाध्यायों के गुण गहे. ।। 'सूर्यचन्द्र साधन विनु सत्य कहीं मिले I यो पाँचों पद में षट् पूर्व सुरभि खिले ॥
आत्मकर्म दर्शन हुआ, 'एस पंच नवकार' । विद्या प्रत्याख्यान से सर्व पाप संहार ।। सर्व पाप संहार 'ज्ञान' सच्चा यही । 'सब मंगल ' चारित्र्य कृति निर्मल रही ॥
ज्ञानपंचमी २४९६
'सूर्यचन्द्र कल्याण प्राण आधार है।
' मंगल प्रथम' विशाल क्रिया 'तप' 'सार' है ।
यह पंच नमस्कार ही आत्मप्रवाद और कर्मप्रवाद का सम्यक दर्शन है। विद्याप्रवाद प्रत्याख्यान सहित हो तो सर्वपाप प्रणाशन रूप सम्यम्ज्ञान है । चारित्र्य वृत्ति सर्व मंगलमयी है, यही कल्याण और प्राण प्रवाह है । तप सर्व श्रेष्ठ मंगल होने से यहीं क्रिया विशाल और लोक बिंदुसार है। इस प्रकार चौदह पूर्वी का रहस्य नमस्कार मंत्र में समाविष्ट है। यह नमस्कार मंत्र सुना कर जिस पाश्र्वं प्रभु ने विषधर सर्व को निविष बना दिया, उनका चरित्र पठन. हमारे विषयों का विष उतारने में अवश्य समर्थ होगा। पुष्कर राज के इस उत्तम तीर्थ देवेन्द्र घाट पर स्नान कर के अपने भव्य हृदय को दिव्य बनाते हुए सब को आहवान करता हूँ कि प्रभु के मंगल चरित्र को अवगाहन कर अपने आपको पवित्र बनावें ।
सूरज चन्द डाँगी का सप्रेम बडे मंदिर के पास बडा घर बडी सादडी ( राजस्थान)
लेखक की कलम से
भगवान पार्श्वः एक समीक्षात्मक अध्ययन प्रबुद्ध पाठकों के कर कमलों में अर्पित करते हुए अतीव प्रसन्नता है। भगवान पाश्र्वं को पाश्चात्य और पौर्वात्य सभी इतिहास विज्ञों ने एक ऐतिहासिक पुरुष माना है, जिसके सम्बन्ध में सप्रमाण वर्णन मूल ग्रन्थ में किया गया है ।
मेरी दृष्टि से भगवान पार्श्व की हजारों हजार विशेषताएँ हैं, उसमें एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि उनका शासन काल अन्य तेईस तीर्थंकरों की अपेक्षा बहुत ही कम रहा है, केवल २५० वर्ष किन्तु उनकी कीर्ति कौमुदी का प्रकाश सबसे अधिक रहा है। वे सब से अधिक जन-प्रिय रहे हैं। वर्तमान युग में श्रमण भगवान महावीर का शासन चल रहा है। किन्तु भगवान महावीर से भी अधिक लोकप्रिय भगवान पार्श्व रहे हैं। यही कारण है कि श्रुतकेवली भद्रबाहु, प्रतिभामूर्ति सिद्धसेन दिवाकर, कलिकाल सर्वज्ञ आचार्य हेमचंद्र, देवभद्र सुरि, आचार्य शीलांक, आचार्य गुणभद्र प्रभृति अनेक मूर्धन्य मनीषियों ने संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, गुजराती, राजस्थानी भाषाओं में श्रद्धा पूरित संस्तवन हो नहीं किया है, अपितु उनके जीवन दर्शन पर विस्तार से विवेचन भी किया है। आधुनिक युग में पाश्चात्य विचारक डॉ. हर्मन जंकोबी, बौद्ध साहित्य के प्रसिद्ध विद्वान धर्मानंद कोसाम्बी, पण्डित सुखलालजी, प्रा. दलसुखभाई मालवणिया, डॉ. कामताप्रसाद जैन, पण्डित कैलाशचंद्र जी आदि अनेक विद्वानों ने भगवान पाश्र्व के सम्बन्ध में प्रकाश डाला है। अनेक ऐतिहासिक तथ्यों का समुद्घाटन किया है, जो भगवान पार्श्व की लोकप्रियता का ही ज्वलंत प्रमाण है।
भगवान पाश्र्वं भारतीय संकृति के एक जाज्वल्यमान नक्षत्र रहे हैं । वे श्रमण संकृति के उन्नायक तो थे ही । उनके दिव्य प्रभाव से श्रमण संस्कृति की जैन और बौद्ध धाराएँ प्रभावित रही हैं, पर वैदिक परम्परा भी कम प्रभावित नहीं हुई । वैदिक परम्परा जो प्रारम्भ में यज्ञ-याग प्रधान थी, जिस में भौतिकता का स्वर ही मुखरित हो रहा था, उसमें आध्यात्मिक चिन्तन का सूर पुरने का श्रेय भगवान पार्श्व को ही है। भगवान पाश्र्वं ने ही वैदिक पर म्परा को भौतिकता से आध्यत्मिका की ओर मोडा है। विद्वानों का मन्तव्य है
कि उपनिषद साहित्य भगवान पाश्र्वं के परचात् निर्मित हुआ है. उसमे बाध्या स्मिक चर्चा विशद रूप से आयी है। वह आध्यात्मिक चर्चा वेदों में कहीं भी नहीं मिलती। इसलिए स्पष्ट हैं कि वह भगवान पार्श्व की ही वैदिक परम्परा को देन है। आधुनिक विद्वानों को साम्प्रदायिक और पूर्वाग्रह के रंगीन चश्मे उतार कर तटस्य दृष्टि से इस सत्य तथ्य की अन्वेषणा करनी चाहिए। उन्होंने यदि इस प्रकार किया तो प्रस्तुत तथ्य स्वीकार करने में किसी भी प्रकार का ऐतराज नहीं होगा ।
प्रसंगवश एक बात में इतिहासकारों से नम्र निवेदन करना चाहूंगा कि आज जो इतिहास के नाम पर कल्पना के भोडे दौडाये जा रहे हैं, मनचडन्त ऊटपटांग लिखा जा रहा है, वह उचित नहीं है। इस प्रकार का लेखन इतिहास को और भी अधिक धूमिल बनाता है। मावश्यकता है साम्प्रदायिक विष को न उगल कर जो सत्य-तथ्य है, उसे प्रकट किया जाय ।
प्रस्तुत ग्रन्थ में भगवान पार्श्व के सम्बन्ध में कुछ लिखा गया है। यह इस महापुरुष का सम्पूर्ण जीवन चरित्र नहीं है। क्या उस महापुरुष का जीवन एक लघुकाय पुस्तक में समा सकता है ? क्या बिराट् महासागर में से एक दो जल कणों को निकाल कर दिखाना उस महासागर का परिचय हो सकता है ? क्या सहस्ररश्मि सूर्य के विश्व व्यापी आलोक को एक पक्षी अपने लघुकाय घोंसले में बन्द कर सकता है ? क्या गंगा और जमुना के अनन्त जलकणों को एक घट में भरा जा सकता है ? नहीं, फिर महापुरुष के असीम जीवन को ससीम शब्दों में कैसे अभिव्यक्त किया जा सकता है ? तथापि श्रद्धा और भक्तिभावना से विभोर हो कर प्रस्तुत प्रयास किया गया है। प्रसंगवश मिथ्या धारणाओं का निरसन करने के लिए कहीं-कहीं पर मुझे आलोचना भी करनी पडी है। किन्तु किसी का खण्डन-मण्डन करना मेरा लक्ष्य नहीं रहा है। अपितु सत्य-स्थिति को प्रकाश में लाया जाय यह एक मात्र उद्देश्य रहा है।
शोध साहित्य में आजकल दो प्रकार की शैली मुख्य रूप से चल रही है। कितने ही विचारक अत्यन्त संक्षिप्त शैली को पसन्द करते हैं तो कितने ही विचारक व्यास शैली को । मैंने मध्यम मार्ग अपनाया है। क्यों कि अत्यन्त संक्षिप्त शैली उस विषय के ज्ञाता, विशिष्ट विद्वानों के लिए ही उपयुक्त होती है और व्यास शैली सर्व साधारण के लिए। पर मध्यम शैली सभी के लिए उपयोगी हो सकती है यह मेरी धारणा है।
ग्रन्थ की भाषा को मैंने साहित्यिक व दार्शनिक 'लहजे' से उन्मुक्त रखी है। इतिहास एवं शोध का सम्बन्ध भाषा से नहीं अपितु तथ्यों से है। उसकी अपनी एक स्वतंत्र शैली है, जिसमें अलंकारिता एवं गूढता का प्रायः अभाव होता
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प्रभु पार्श्व के सम्बन्ध में किसी भी समय कुछ भी संकीर्तन, श्रवण या कथन करने को मिले, यह परम सौमाग्य का संकेत है। फिर श्रमण कुमार देवेंद्र मुनिजी के संकीर्तन का प्राक्कथनप्रसंग प्राप्त हो इससे अधिक हर्ष का विषय और क्या हो सकता है ? सिद्धों के सैन्य में दिवाकर के समान आचार्य कुमुदचन्द्र स्वामी फरमाते हैं किनामाऽपि पाति भवतो भवतो जगन्ति । पाश्र्वं प्रभु का नाम भी हमें पवित्र करने में समर्थ है, उनके स्तवन का तो क्या कथन करूं ? मैं तो संसार के ताप से जला हुआ हूँ। इस सरोबर में स्नान करना तो किसी भाग्यवान का ही काम है। मुझे तो ठंडी ठंडी हवा ने परम आनंद प्रदान कर दिया । परम योगीश्वर आनंद घन जी महाराज के शब्दों में राम कहो, रहमान कहो कोउ, कान कहो महादेव री । पारसनाथ' कहो कोउ ब्रह्मा, सकल ब्रह्म स्वयमेव ही ।। चौबीस तीर्थंकर देवों में योगिराज को प्रभु पार्श्व का ही नाम-स्मरण प्यारा लगा । अर्थ भी उन्होंने बता दिया । मोक्ष मार्ग के वे ब्रह्मा है-विधाता । निज पद रमे राम सो कहिये, रहम करे रहमान जी । परसे रूप पाइव सो कहिये, महादेव निर्वाण री ।। दयालु सम्यग्दृष्टि होने के बाद जो आत्मरूप यानी अमूर्त सौन्दर्य का संस्पर्श करता है, वही 'पार्श्व' नाम से विख्यात है। श्रद्धा प्ररूपण और स्पर्शना हो सिद्धि स्थान के पाबं ले जाने में समर्थ हैं। भगवान पार्श्व के चिह्नरूप में सर्प का संकेत है। पार्श्व प्रभु विषय वासना का हरण करने में सर्वाधिक समर्थ हैं। जब सांप काटता है, तो नीम कडबा नहीं लगता । उसी तरह जब जब संसार का मोह चढता है, तब विषय कडवे नहीं लगते । ज्यों ज्यों पाश्र्व प्रभु के नाम की भागदमनी विष का हरण करती है, त्यों त्यों विषयों का रस कडवा लगने लगता है। नीम कडवा लगने लगा कि समझो, विष उतरा । आचार्य प्रवर भद्रबाहु स्वामी फमति हैंविषहर-विष-निन्नासं मंगल-कल्याण-आवासं । विषय के सर्प का विष दूर कर के मंगल और कल्याण के धाम में पहुँचा देने वाले पार्श्व प्रभु का यह विवेचन हमारे लिये सर्वतो भद्र सिद्ध होगा, इसमें कोई सन्देह नहीं । सभी पुष्प उद्यान को सुरभित करते हैं, पर सभी सुमनों की सुरभि मिञ मिञ है। इसी प्रकार चौबीसों तीर्थंकर हमारे जीवनाराम को सुगन्धित करते हैं, पर पार्श्व प्रभु के सुमन का परिमल कुछ खास विशेषता रखता है । उनका तीर्थ शासनकाल सब से कम परन्तु उनकी प्रतिष्ठा सब से ज्यादा। उनकी प्रतिष्ठा की क्या कहें। जिस प्रकार भगवान महावीर के जीव को आदिनाथ ऋषभदेव के समय ही पता लग गया था कि वे तीर्थंकर होने वाले हैं, यह पता उनके एक गणघर को पूर्व चौवीसी में ही खबर हो गई थी, तभी से उनकी प्रतिष्ठा प्रारम्भ है। इतना ही नहीं भारत की सब से बडी नगरी के सब से बड़े उत्सव में शोभायात्रा धर्मनाथ की होती है, पर कहा जाता है, पार्श्वनाथ की पालकी । इससे भी बडी प्रतिष्ठा यह है कि सम्मेद शिखर में बीस तीर्थंकरों का निर्वाण कल्याण हुआ, पर प्रतिष्ठा है 'पारसनाथ हिल' की । इतना ही नहीं, स्टेशन का नाम भी 'पारसनाथ' है । है। इसका कारण यही है कि पार्श्वनाथ प्रभु हमें संसार के विषयों का विव उतारने में सर्वथा समर्थ है। उन्होंने सर्प का चौदह पूर्व का सार सुना कर उद्धार कर दिया तो हम मनुष्यों को नमस्कार प्रदान कर के कल्याण कर दें, उसमें क्या आश्चर्य है ? इंजिन से अलग नहीं हो तो डिब्बा पहुँच जाता है, उसी प्रकार हम पाएवं प्रभु के परिचय से विभक्त न रहेंगे, तो भी कल्पतरु हो जायगा, इसम कोई सन्देह नहीं । नमस्कार अरिहन्त प्रभु, नमस्कार जिन सिद्ध । नमस्कार आचार्य गुरु, उपाध्याय समृद्ध ॥ उपाध्याय शुद्ध समृद्ध वाचक रहे । सर्व साधु को नमन सिद्धि साधन गहे ।। नमो सकल श्रीसंघ सदा संकट हरण । ● सूर्यचन्द्र' सर्वत्र मधुर मंगल करण ।। ' सुन्दर मृदु मंगल करण, वीतराग दृढ भक्ति । दृष्टिवाद का पूर्वगत, निर्विवाद निज शक्ति ।। निविवाद निजशक्ति चतुर्दश युक्तियाँ । नन्दि घोषण चूल मूल अभिव्यक्तियाँ ।। ॥ ब्रह्मरन्ध्र उठित प्रवाद सुनाद है । 'सूर्यचन्द्र' चैतम्य प्रथम उत्पाद है । अवश्यात अब है कहाँ ? चित्त हुआ निर्भर । शत्रुभाव निर्मूल है- नमस्कार में खैर ।। नमस्कार में खैर विश्वमंत्री वरी । प्रथम पूर्व की सम्पक वृत्ति यही सरी ॥ सूर्यचन्द्र अग्रायन सिद्धि-स्थान है। द्वितीय पद में पूर्व द्वितीय प्रदान है ।। प्रगति कार्य में अस्ति या नास्ति शुद्ध आचार । आचार्यों से बार ले निर्मल व्रत व्यवहार । निर्मल व्रत व्यवहार पूर्व दोनों कहे । ज्ञान प्रवाद उपाध्यायों के गुण गहे. ।। 'सूर्यचन्द्र साधन विनु सत्य कहीं मिले I यो पाँचों पद में षट् पूर्व सुरभि खिले ॥ आत्मकर्म दर्शन हुआ, 'एस पंच नवकार' । विद्या प्रत्याख्यान से सर्व पाप संहार ।। सर्व पाप संहार 'ज्ञान' सच्चा यही । 'सब मंगल ' चारित्र्य कृति निर्मल रही ॥ ज्ञानपंचमी दो हज़ार चार सौ छियानवे 'सूर्यचन्द्र कल्याण प्राण आधार है। ' मंगल प्रथम' विशाल क्रिया 'तप' 'सार' है । यह पंच नमस्कार ही आत्मप्रवाद और कर्मप्रवाद का सम्यक दर्शन है। विद्याप्रवाद प्रत्याख्यान सहित हो तो सर्वपाप प्रणाशन रूप सम्यम्ज्ञान है । चारित्र्य वृत्ति सर्व मंगलमयी है, यही कल्याण और प्राण प्रवाह है । तप सर्व श्रेष्ठ मंगल होने से यहीं क्रिया विशाल और लोक बिंदुसार है। इस प्रकार चौदह पूर्वी का रहस्य नमस्कार मंत्र में समाविष्ट है। यह नमस्कार मंत्र सुना कर जिस पाश्र्वं प्रभु ने विषधर सर्व को निविष बना दिया, उनका चरित्र पठन. हमारे विषयों का विष उतारने में अवश्य समर्थ होगा। पुष्कर राज के इस उत्तम तीर्थ देवेन्द्र घाट पर स्नान कर के अपने भव्य हृदय को दिव्य बनाते हुए सब को आहवान करता हूँ कि प्रभु के मंगल चरित्र को अवगाहन कर अपने आपको पवित्र बनावें । सूरज चन्द डाँगी का सप्रेम बडे मंदिर के पास बडा घर बडी सादडी लेखक की कलम से भगवान पार्श्वः एक समीक्षात्मक अध्ययन प्रबुद्ध पाठकों के कर कमलों में अर्पित करते हुए अतीव प्रसन्नता है। भगवान पाश्र्वं को पाश्चात्य और पौर्वात्य सभी इतिहास विज्ञों ने एक ऐतिहासिक पुरुष माना है, जिसके सम्बन्ध में सप्रमाण वर्णन मूल ग्रन्थ में किया गया है । मेरी दृष्टि से भगवान पार्श्व की हजारों हजार विशेषताएँ हैं, उसमें एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि उनका शासन काल अन्य तेईस तीर्थंकरों की अपेक्षा बहुत ही कम रहा है, केवल दो सौ पचास वर्ष किन्तु उनकी कीर्ति कौमुदी का प्रकाश सबसे अधिक रहा है। वे सब से अधिक जन-प्रिय रहे हैं। वर्तमान युग में श्रमण भगवान महावीर का शासन चल रहा है। किन्तु भगवान महावीर से भी अधिक लोकप्रिय भगवान पार्श्व रहे हैं। यही कारण है कि श्रुतकेवली भद्रबाहु, प्रतिभामूर्ति सिद्धसेन दिवाकर, कलिकाल सर्वज्ञ आचार्य हेमचंद्र, देवभद्र सुरि, आचार्य शीलांक, आचार्य गुणभद्र प्रभृति अनेक मूर्धन्य मनीषियों ने संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, गुजराती, राजस्थानी भाषाओं में श्रद्धा पूरित संस्तवन हो नहीं किया है, अपितु उनके जीवन दर्शन पर विस्तार से विवेचन भी किया है। आधुनिक युग में पाश्चात्य विचारक डॉ. हर्मन जंकोबी, बौद्ध साहित्य के प्रसिद्ध विद्वान धर्मानंद कोसाम्बी, पण्डित सुखलालजी, प्रा. दलसुखभाई मालवणिया, डॉ. कामताप्रसाद जैन, पण्डित कैलाशचंद्र जी आदि अनेक विद्वानों ने भगवान पाश्र्व के सम्बन्ध में प्रकाश डाला है। अनेक ऐतिहासिक तथ्यों का समुद्घाटन किया है, जो भगवान पार्श्व की लोकप्रियता का ही ज्वलंत प्रमाण है। भगवान पाश्र्वं भारतीय संकृति के एक जाज्वल्यमान नक्षत्र रहे हैं । वे श्रमण संकृति के उन्नायक तो थे ही । उनके दिव्य प्रभाव से श्रमण संस्कृति की जैन और बौद्ध धाराएँ प्रभावित रही हैं, पर वैदिक परम्परा भी कम प्रभावित नहीं हुई । वैदिक परम्परा जो प्रारम्भ में यज्ञ-याग प्रधान थी, जिस में भौतिकता का स्वर ही मुखरित हो रहा था, उसमें आध्यात्मिक चिन्तन का सूर पुरने का श्रेय भगवान पार्श्व को ही है। भगवान पाश्र्वं ने ही वैदिक पर म्परा को भौतिकता से आध्यत्मिका की ओर मोडा है। विद्वानों का मन्तव्य है कि उपनिषद साहित्य भगवान पाश्र्वं के परचात् निर्मित हुआ है. उसमे बाध्या स्मिक चर्चा विशद रूप से आयी है। वह आध्यात्मिक चर्चा वेदों में कहीं भी नहीं मिलती। इसलिए स्पष्ट हैं कि वह भगवान पार्श्व की ही वैदिक परम्परा को देन है। आधुनिक विद्वानों को साम्प्रदायिक और पूर्वाग्रह के रंगीन चश्मे उतार कर तटस्य दृष्टि से इस सत्य तथ्य की अन्वेषणा करनी चाहिए। उन्होंने यदि इस प्रकार किया तो प्रस्तुत तथ्य स्वीकार करने में किसी भी प्रकार का ऐतराज नहीं होगा । प्रसंगवश एक बात में इतिहासकारों से नम्र निवेदन करना चाहूंगा कि आज जो इतिहास के नाम पर कल्पना के भोडे दौडाये जा रहे हैं, मनचडन्त ऊटपटांग लिखा जा रहा है, वह उचित नहीं है। इस प्रकार का लेखन इतिहास को और भी अधिक धूमिल बनाता है। मावश्यकता है साम्प्रदायिक विष को न उगल कर जो सत्य-तथ्य है, उसे प्रकट किया जाय । प्रस्तुत ग्रन्थ में भगवान पार्श्व के सम्बन्ध में कुछ लिखा गया है। यह इस महापुरुष का सम्पूर्ण जीवन चरित्र नहीं है। क्या उस महापुरुष का जीवन एक लघुकाय पुस्तक में समा सकता है ? क्या बिराट् महासागर में से एक दो जल कणों को निकाल कर दिखाना उस महासागर का परिचय हो सकता है ? क्या सहस्ररश्मि सूर्य के विश्व व्यापी आलोक को एक पक्षी अपने लघुकाय घोंसले में बन्द कर सकता है ? क्या गंगा और जमुना के अनन्त जलकणों को एक घट में भरा जा सकता है ? नहीं, फिर महापुरुष के असीम जीवन को ससीम शब्दों में कैसे अभिव्यक्त किया जा सकता है ? तथापि श्रद्धा और भक्तिभावना से विभोर हो कर प्रस्तुत प्रयास किया गया है। प्रसंगवश मिथ्या धारणाओं का निरसन करने के लिए कहीं-कहीं पर मुझे आलोचना भी करनी पडी है। किन्तु किसी का खण्डन-मण्डन करना मेरा लक्ष्य नहीं रहा है। अपितु सत्य-स्थिति को प्रकाश में लाया जाय यह एक मात्र उद्देश्य रहा है। शोध साहित्य में आजकल दो प्रकार की शैली मुख्य रूप से चल रही है। कितने ही विचारक अत्यन्त संक्षिप्त शैली को पसन्द करते हैं तो कितने ही विचारक व्यास शैली को । मैंने मध्यम मार्ग अपनाया है। क्यों कि अत्यन्त संक्षिप्त शैली उस विषय के ज्ञाता, विशिष्ट विद्वानों के लिए ही उपयुक्त होती है और व्यास शैली सर्व साधारण के लिए। पर मध्यम शैली सभी के लिए उपयोगी हो सकती है यह मेरी धारणा है। ग्रन्थ की भाषा को मैंने साहित्यिक व दार्शनिक 'लहजे' से उन्मुक्त रखी है। इतिहास एवं शोध का सम्बन्ध भाषा से नहीं अपितु तथ्यों से है। उसकी अपनी एक स्वतंत्र शैली है, जिसमें अलंकारिता एवं गूढता का प्रायः अभाव होता
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नई दिल्ली, मार्च 13। इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में हीरो इलेक्ट्रिक कंपनी ने अपनी पकड़ी काफी मजबूत कर ली है। इसके ई-स्कूटर की बिक्री काफी अधिक होती है। इलेक्ट्रिक स्कूटर को लोग इसलिए भी पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इनसे पेट्रोल पर खर्च से मुक्ति मिल जाती है। यदि आप कोई इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं हीरो इलेक्ट्रिक के कई स्कूटर हैं, जो आपके लिए बेस्ट हो सकते हैं। इनमें एनवाईएक्स एचक्स और ऑप्टिमा एचएक्स स्कूटर शामिल हैं। अगर आपका बजट कम है तो भी टेंशन नहीं। आगे जानिए कम कि कम बजट वाले लोग कैसे हीरो के ई-स्कूटर आराम से खरीद सकते हैं।
यदि आपका बजट कम है और आप फिर भी हीरो का ई-स्कूटर लाना चाहते हैं तो महज 10,000 रुपये की डाउन पेमेंट देकर स्कूटर घर ले आएं। बाकी पैसा आप हर महीने की ईएमआई के रूप में चुका सकते हैं। दरअसल हीरो के ई-स्कूटरों पर ईएमआई ऑप्शन मिल रहा है। ये स्कूटर आराम से फाइनेंस कराए जा सकते हैं।
हीरो इलेक्ट्रिक एनवाईएक्स एचएक्स की कीमत 67,540 रुपये (एक्स शोरूम, दिल्ली) है। ये इलेक्ट्रिक स्कूटर 165 किमी तक की बैटरी रेंज के साथ आता है। वहीं इसकी टॉप स्पीड 42 किमी प्रति घंटे तक की है। बात करें हीरो इलेक्ट्रिक ऑप्टिमा एचएक्स की तो उसकी कीमत 55,580 रुपये है। उसकी बैटरी रेंज 82 किमी तक की है। वहीं इसकी टॉप स्पीड भी 42 किमी प्रति घंटे की ही है।
आप कोई हीरो इलेक्ट्रिक के एनवाईएक्स एचएक्स मॉडल को फाइनेंस कराए तो महज 10,000 रु की डाउन पेमेंट कर इसे घर ला सकता है। इसकी कीमत है 67,540 रुपये है, जिसमें से आपने पेमेंट कर दी 10 हजार रुपये की। बचे 57540 रु। इसकी 3 साल की एमआई बनेगी। इस पर ब्याज दर होगी 8 फीसदी। यानी आपकी आराम से 36 महीनों की मासिक ईएमआई होगी 1,803 रुपये।
अब बात करते हैं हीरो इलेक्ट्रिक कंपनी के ऑप्टिमा एचक्स मॉडल की। इसकी कीमत है 55,580 रुपये। 10,000 रुपये की डाउन पेमेंट आप दे देंगे। बचेंगे 45,580 रुपये। 3 साल की ईएमआई बनेगी। ब्याज दर 8 फीसदी ही होगी। 36 महीनों तक के लिए हर महीने आपकी मासिक ईएमआई होगी 1,428 रुपये।
हीरो इलेक्ट्रिक भारत की पहली और सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर निर्माता है, जिसके ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है। हीरो इलेक्ट्रिक भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी है। इसके प्रोडक्ट लाइन-अप में इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटी की विस्तृत रेंज शामिल है। आगे हीरो इलेक्ट्रिक भारत में सालाना 50 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बनाना चाहती है। इसके लिए कंपनी ने रोडमैप तैयार किया है। इस योजना को लागू करने के लिए कंपनी को 1500 करोड़ रुपये से 2000 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। इस विजन में देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में दो ग्रीनफील्ड प्लांट स्थापित करना शामिल है। हीरो इलेक्ट्रिक के प्रबंध निदेशक (एमडी) नवीन मुंजाल के अनुसार भारत में ईवी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि इस समय मांग आपूर्ति से अधिक है। भारतीय दोपहिया बाजार का लगभग 30 प्रतिशत 2025 तक ईवी में जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि दक्षिणी और पश्चिमी भारत में ग्रीनफील्ड सुविधाएं बिजनेस से जुड़े भौगोलिक जोखिमों को कम करने में सहायता करेंगी।
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नई दिल्ली, मार्च तेरह। इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में हीरो इलेक्ट्रिक कंपनी ने अपनी पकड़ी काफी मजबूत कर ली है। इसके ई-स्कूटर की बिक्री काफी अधिक होती है। इलेक्ट्रिक स्कूटर को लोग इसलिए भी पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इनसे पेट्रोल पर खर्च से मुक्ति मिल जाती है। यदि आप कोई इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं हीरो इलेक्ट्रिक के कई स्कूटर हैं, जो आपके लिए बेस्ट हो सकते हैं। इनमें एनवाईएक्स एचक्स और ऑप्टिमा एचएक्स स्कूटर शामिल हैं। अगर आपका बजट कम है तो भी टेंशन नहीं। आगे जानिए कम कि कम बजट वाले लोग कैसे हीरो के ई-स्कूटर आराम से खरीद सकते हैं। यदि आपका बजट कम है और आप फिर भी हीरो का ई-स्कूटर लाना चाहते हैं तो महज दस,शून्य रुपयापये की डाउन पेमेंट देकर स्कूटर घर ले आएं। बाकी पैसा आप हर महीने की ईएमआई के रूप में चुका सकते हैं। दरअसल हीरो के ई-स्कूटरों पर ईएमआई ऑप्शन मिल रहा है। ये स्कूटर आराम से फाइनेंस कराए जा सकते हैं। हीरो इलेक्ट्रिक एनवाईएक्स एचएक्स की कीमत सरसठ,पाँच सौ चालीस रुपयापये है। ये इलेक्ट्रिक स्कूटर एक सौ पैंसठ किमी तक की बैटरी रेंज के साथ आता है। वहीं इसकी टॉप स्पीड बयालीस किमी प्रति घंटे तक की है। बात करें हीरो इलेक्ट्रिक ऑप्टिमा एचएक्स की तो उसकी कीमत पचपन,पाँच सौ अस्सी रुपयापये है। उसकी बैटरी रेंज बयासी किमी तक की है। वहीं इसकी टॉप स्पीड भी बयालीस किमी प्रति घंटे की ही है। आप कोई हीरो इलेक्ट्रिक के एनवाईएक्स एचएक्स मॉडल को फाइनेंस कराए तो महज दस,शून्य रुपया की डाउन पेमेंट कर इसे घर ला सकता है। इसकी कीमत है सरसठ,पाँच सौ चालीस रुपयापये है, जिसमें से आपने पेमेंट कर दी दस हजार रुपये की। बचे सत्तावन हज़ार पाँच सौ चालीस रुपया। इसकी तीन साल की एमआई बनेगी। इस पर ब्याज दर होगी आठ फीसदी। यानी आपकी आराम से छत्तीस महीनों की मासिक ईएमआई होगी एक,आठ सौ तीन रुपयापये। अब बात करते हैं हीरो इलेक्ट्रिक कंपनी के ऑप्टिमा एचक्स मॉडल की। इसकी कीमत है पचपन,पाँच सौ अस्सी रुपयापये। दस,शून्य रुपयापये की डाउन पेमेंट आप दे देंगे। बचेंगे पैंतालीस,पाँच सौ अस्सी रुपयापये। तीन साल की ईएमआई बनेगी। ब्याज दर आठ फीसदी ही होगी। छत्तीस महीनों तक के लिए हर महीने आपकी मासिक ईएमआई होगी एक,चार सौ अट्ठाईस रुपयापये। हीरो इलेक्ट्रिक भारत की पहली और सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक दो-व्हीलर निर्माता है, जिसके ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है। हीरो इलेक्ट्रिक भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी है। इसके प्रोडक्ट लाइन-अप में इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटी की विस्तृत रेंज शामिल है। आगे हीरो इलेक्ट्रिक भारत में सालाना पचास लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बनाना चाहती है। इसके लिए कंपनी ने रोडमैप तैयार किया है। इस योजना को लागू करने के लिए कंपनी को एक हज़ार पाँच सौ करोड़ रुपये से दो हज़ार करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। इस विजन में देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में दो ग्रीनफील्ड प्लांट स्थापित करना शामिल है। हीरो इलेक्ट्रिक के प्रबंध निदेशक नवीन मुंजाल के अनुसार भारत में ईवी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि इस समय मांग आपूर्ति से अधिक है। भारतीय दोपहिया बाजार का लगभग तीस प्रतिशत दो हज़ार पच्चीस तक ईवी में जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि दक्षिणी और पश्चिमी भारत में ग्रीनफील्ड सुविधाएं बिजनेस से जुड़े भौगोलिक जोखिमों को कम करने में सहायता करेंगी।
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लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) के लिए जारी अपने घोषणा पत्र में जहां सपा-कांग्रेस (Congress) के तमाम वादों का जवाब बड़े एलानों (Announcements) से करने की कोशिश की है वहीं जातीय समीकरणों के लिहाज से योजनाओं (Schemes) और लव जिहाद (Love Jihad) का भी जिक्र है।
तमाम चुनावी वादों के साथ ही अपने एजेंडा पर भी आगे बढ़ते हुए भाजपा ने प्रदेश में लव जिहाद के मामलों में दस साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना करने की भी बात कही है। अयोध्या में रामायण विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया गया है।
जातीय समीकरणों को साधने की दिशा में आगे बढ़ते हुए बहराइच में महराज सुहेलदेव राजभर का स्मारक बनाने और निषाद समुदाय को एक लाख रुपये की नाव पर 40 फीसदी सब्सिडी देने का वादा किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में सोमवार को राजधानी लखनऊ में जारी लोक संकल्प पत्र में किसानों को मुफ्त सिंचाई, साल में दो मुफ्त सिलेंडर, मेधावी कालेज छात्राओं को स्कूटी, दो करोड़ टैबलेट व स्मार्ट फोन, गन्ना किसानों को 14 दिन में भुगतान, निराश्रित महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को 1500 रुपये पेंशन सहित कई बड़े वादे किए गए हैं।
संकल्प पत्र में विपक्षी दलों खास कर कांग्रेस की महिलाओं के लिए किए गए कई एलानों और समाजवादी पार्टी के साथ आम आदमी पार्टी के मुफ्त बिजली के वादों का असर भी साफ नजर आया है। सपा के समाजवादी कैंटीन चलाने के वादे के जवाब में भाजपा ने भी अन्नपूर्णा रसोई चला सभी को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने का एलान किया है। रोजगार को लेकर विपक्ष के हमलों से घिरी भाजपा ने फिर सरकार बनने पर हर परिवार में एक रोजगार देने का वादा किया है।
उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपने घोषणा पत्र में प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाओं, छह मेगा फूड पार्क, छह मेगा हेल्थ पार्क, पांच बड़े एक्सप्रेस वे, एमएसएमई पार्क, कानपुर में मेगा लेदर पार्क और स्टार्ट मिशन के जरिए 10 लाख लोगों को स्वरोजगार का वादा किया है। भाजपा के संकल्प पत्र में अगले पांच सालों में पांच एक्सप्रेस वे के निर्माण का वादा किया गया है। इनके बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले पांच सालों में प्रदेश की जनता को गंगा एक्सप्रेस वे, कानपुर लखनऊ एक्सप्रेस वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे, बलिया लिंक एक्सप्रेस वे और बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे की सौगात मिलेगी। दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए संकल्प पत्र में 1000 करोड़ की लागत से नंद बाबा दुग्ध मिशन योजना की घोषणा की गई है। प्रदेश में छह-छह मेगा फूड एवं हेल्थ पार्क बनाने के साथ तीन अत्याधुनिक डाटा सेंटर खोलने का वादा किया गया है। संकल्प पत्र में एमएसएमई क्षेत्र के लिए छह पार्क और कानपुर में मेगा लेदर पार्क बनाने का वादा किया गया है।
भाजपा ने उत्तर प्रदेश में फिर से सरकार बनने पर 60 साल के उपर की महिलाओं को मुफ्त परिवहन की सुविधा देने, लोक सेवा आयोग सहित सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं की संख्या दोगुना करने का वादा भी किया है। संकल्प पत्र मे वादा किया गया है कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को होली व दीवाली के मौके पर दो गैस सिलेंडर मुफ्त में दिए जाएंगे। कालेज जाने वाली सभी मेधावी छात्राओं को मुफ्त में स्कूटी दी जाएगी। प्रदेश में दो करोड़ छात्रों को मुफ्त में स्मार्ट फोन और टैबलेट दिया जाएगा।
किसानों के लिए तमाम वादों की झड़ी लगाते हुए भाजपा के लोक संकल्प पत्र में अगले पांच सालों में मुफ्त सिंचाई के साथ ही 5000 करोड़ रुपये की लागत मुख्यमंत्री कृषि सिंचाई योजना शुरु करने और आलू, प्याज और टमाटर जैसी फसलों के लिए को न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिए 1000 करोड़ रुपये का भामाशाह भाव स्थिरता कोष बनाने का वादा किया है। पहले चरण में हो रहे पश्चिम उत्तर प्रदेश के चुनावों और गन्ना किसानों की दिक्कतों पर संकल्प पत्र में वादा किया गया कि फिर से सरकार बनने पर 14 दिनों में भुगतान और देर होने पर ब्याज का प्रावधान करे का वादा किया गया है।
शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़े एलान करते हुए भाजपा ने संकल्प पत्र में हर मंडल में कम से कम एक विश्वविद्यालय बनाने, एमबीबीएस की सीटों को दोगुना करने और सभी प्राथमिक स्कूलों में मेज व कुर्सी की व्यवस्था करने का वादा किया है।
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लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के लिए जारी अपने घोषणा पत्र में जहां सपा-कांग्रेस के तमाम वादों का जवाब बड़े एलानों से करने की कोशिश की है वहीं जातीय समीकरणों के लिहाज से योजनाओं और लव जिहाद का भी जिक्र है। तमाम चुनावी वादों के साथ ही अपने एजेंडा पर भी आगे बढ़ते हुए भाजपा ने प्रदेश में लव जिहाद के मामलों में दस साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना करने की भी बात कही है। अयोध्या में रामायण विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया गया है। जातीय समीकरणों को साधने की दिशा में आगे बढ़ते हुए बहराइच में महराज सुहेलदेव राजभर का स्मारक बनाने और निषाद समुदाय को एक लाख रुपये की नाव पर चालीस फीसदी सब्सिडी देने का वादा किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में सोमवार को राजधानी लखनऊ में जारी लोक संकल्प पत्र में किसानों को मुफ्त सिंचाई, साल में दो मुफ्त सिलेंडर, मेधावी कालेज छात्राओं को स्कूटी, दो करोड़ टैबलेट व स्मार्ट फोन, गन्ना किसानों को चौदह दिन में भुगतान, निराश्रित महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये पेंशन सहित कई बड़े वादे किए गए हैं। संकल्प पत्र में विपक्षी दलों खास कर कांग्रेस की महिलाओं के लिए किए गए कई एलानों और समाजवादी पार्टी के साथ आम आदमी पार्टी के मुफ्त बिजली के वादों का असर भी साफ नजर आया है। सपा के समाजवादी कैंटीन चलाने के वादे के जवाब में भाजपा ने भी अन्नपूर्णा रसोई चला सभी को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने का एलान किया है। रोजगार को लेकर विपक्ष के हमलों से घिरी भाजपा ने फिर सरकार बनने पर हर परिवार में एक रोजगार देने का वादा किया है। उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपने घोषणा पत्र में प्रदेश में दस लाख करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाओं, छह मेगा फूड पार्क, छह मेगा हेल्थ पार्क, पांच बड़े एक्सप्रेस वे, एमएसएमई पार्क, कानपुर में मेगा लेदर पार्क और स्टार्ट मिशन के जरिए दस लाख लोगों को स्वरोजगार का वादा किया है। भाजपा के संकल्प पत्र में अगले पांच सालों में पांच एक्सप्रेस वे के निर्माण का वादा किया गया है। इनके बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले पांच सालों में प्रदेश की जनता को गंगा एक्सप्रेस वे, कानपुर लखनऊ एक्सप्रेस वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे, बलिया लिंक एक्सप्रेस वे और बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे की सौगात मिलेगी। दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए संकल्प पत्र में एक हज़ार करोड़ की लागत से नंद बाबा दुग्ध मिशन योजना की घोषणा की गई है। प्रदेश में छह-छह मेगा फूड एवं हेल्थ पार्क बनाने के साथ तीन अत्याधुनिक डाटा सेंटर खोलने का वादा किया गया है। संकल्प पत्र में एमएसएमई क्षेत्र के लिए छह पार्क और कानपुर में मेगा लेदर पार्क बनाने का वादा किया गया है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में फिर से सरकार बनने पर साठ साल के उपर की महिलाओं को मुफ्त परिवहन की सुविधा देने, लोक सेवा आयोग सहित सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं की संख्या दोगुना करने का वादा भी किया है। संकल्प पत्र मे वादा किया गया है कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को होली व दीवाली के मौके पर दो गैस सिलेंडर मुफ्त में दिए जाएंगे। कालेज जाने वाली सभी मेधावी छात्राओं को मुफ्त में स्कूटी दी जाएगी। प्रदेश में दो करोड़ छात्रों को मुफ्त में स्मार्ट फोन और टैबलेट दिया जाएगा। किसानों के लिए तमाम वादों की झड़ी लगाते हुए भाजपा के लोक संकल्प पत्र में अगले पांच सालों में मुफ्त सिंचाई के साथ ही पाँच हज़ार करोड़ रुपये की लागत मुख्यमंत्री कृषि सिंचाई योजना शुरु करने और आलू, प्याज और टमाटर जैसी फसलों के लिए को न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिए एक हज़ार करोड़ रुपये का भामाशाह भाव स्थिरता कोष बनाने का वादा किया है। पहले चरण में हो रहे पश्चिम उत्तर प्रदेश के चुनावों और गन्ना किसानों की दिक्कतों पर संकल्प पत्र में वादा किया गया कि फिर से सरकार बनने पर चौदह दिनों में भुगतान और देर होने पर ब्याज का प्रावधान करे का वादा किया गया है। शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़े एलान करते हुए भाजपा ने संकल्प पत्र में हर मंडल में कम से कम एक विश्वविद्यालय बनाने, एमबीबीएस की सीटों को दोगुना करने और सभी प्राथमिक स्कूलों में मेज व कुर्सी की व्यवस्था करने का वादा किया है।
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सबगुरु न्यूज़ः रणवीर और कैटरीना कैफ की फिल्म 'जग्गा जासूस' रिलीज होने के बाद पहले वीकेंड मेें ही धूम मचा चुकी है। 'जग्गा जासूस' ने फिलहाल तीन दिनों में ही तीस करोड़ रुपय की कमाई कर डाली है। (VIDEO: कुत्ते ने पानी के बिना तड़पती मछली की जान बचाने की कोशिश) पहले दिन इस फिल्म ने 8. 57 करोड़ रुपए कमाए थे। दूसरे दिन 11. 53 करोड़ रुपए इसे हासिल हुए। संडे को इसे लगभग 13. 07 करोड़ रुपए मिले हैं। तीन दिन की कुल 33. 17 करोड़ रुपए से ऊपर है।
इस फिल्म को केवल 1800 स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया है। (VIDEO: चलती रेलगाड़ी पर चढ़ कर किया डांस इलेक्ट्रिक लाइन से बचा) लेकिन उसके बाद भी फिल्म का प्रर्दशन काफी शानदार रहा है। अनुराग बसु की कड़ी मेहनत आखिर रंग लेकर आर्ई गयी। यह फिल्म अनुराग ने दिल से बनाई है यह बच्चों के लिए ही है कहना चाहिए इतने बड़े स्तर पर भारत में कभी बच्चों की फिल्म बनी ही नहीं है।
अब मुद्दा यह है कि इस साप्तह में कोई भी छुट्टी नहीं है तो देखना यह होगा कि रणवीर और कटरीना की यह फिल्म कितनी कमाई कर पाएगी। (VIDEO: कंपा देने वाला प्रेग्नेंट महिला ट्रैन से कटी बच्ची निकल कर गिरी पटरी पर) युवाओं को यह फिल्म अच्छी भी लग सकती है और नहीं भी इस का अंदाजा अभी नहीं लगया जा सकता। यदि फिल्म के अंत को छोड़ दिया जाए तो सब यकीन के लायक है।
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सबगुरु न्यूज़ः रणवीर और कैटरीना कैफ की फिल्म 'जग्गा जासूस' रिलीज होने के बाद पहले वीकेंड मेें ही धूम मचा चुकी है। 'जग्गा जासूस' ने फिलहाल तीन दिनों में ही तीस करोड़ रुपय की कमाई कर डाली है। पहले दिन इस फिल्म ने आठ. सत्तावन करोड़ रुपए कमाए थे। दूसरे दिन ग्यारह. तिरेपन करोड़ रुपए इसे हासिल हुए। संडे को इसे लगभग तेरह. सात करोड़ रुपए मिले हैं। तीन दिन की कुल तैंतीस. सत्रह करोड़ रुपए से ऊपर है। इस फिल्म को केवल एक हज़ार आठ सौ स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया है। लेकिन उसके बाद भी फिल्म का प्रर्दशन काफी शानदार रहा है। अनुराग बसु की कड़ी मेहनत आखिर रंग लेकर आर्ई गयी। यह फिल्म अनुराग ने दिल से बनाई है यह बच्चों के लिए ही है कहना चाहिए इतने बड़े स्तर पर भारत में कभी बच्चों की फिल्म बनी ही नहीं है। अब मुद्दा यह है कि इस साप्तह में कोई भी छुट्टी नहीं है तो देखना यह होगा कि रणवीर और कटरीना की यह फिल्म कितनी कमाई कर पाएगी। युवाओं को यह फिल्म अच्छी भी लग सकती है और नहीं भी इस का अंदाजा अभी नहीं लगया जा सकता। यदि फिल्म के अंत को छोड़ दिया जाए तो सब यकीन के लायक है।
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