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Posted On: सभी बाधाओं से पार पाकर और नए-नए समाधान ढूंढ कर देश भर के विभिन्न राज्यों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की डिलीवरी करके मरीजों को भारी राहत पहुंचाने के लिए भारतीय रेलवे की यात्रा निरंतर जारी है। भारतीय रेलवे ने अब तक देश भर के विभिन्न राज्यों में 540 से भी अधिक टैंकरों में भरकर लगभग 8700 मीट्रिक टन (एमटी) एलएमओ की डिलीवरी की है। उल्लेखनीय है कि 139 ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनें अब तक अपनी यात्राएं बाकायदा पूरी कर चुकी हैं और विभिन्न राज्यों में बड़ी राहत पहुंचाई है। इस विज्ञप्ति के समय तक 35 टैंकरों में 475 मीट्रिक टन से भी अधिक एलएमओ को साथ लेकर 6 लोडेड ऑक्सीजन एक्सप्रेस अपनी-अपनी मंजिल की ओर जा रही थीं। ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनें पिछले कुछ दिनों से हर दिन लगभग 800 मीट्रिक टन एलएमओ पूरे देश में पहुंचा रही हैं। यह भारतीय रेलवे का ही अथक प्रयास है जिसके तहत अनुरोध करने वाले राज्यों को कम से कम समय में अधिक से अधिक एलएमओ पहुंचाई जा रही है। 40 मीट्रिक टन एलएमओ के साथ पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस आंध्र प्रदेश के नेल्लोर पहुंच गई है। एक ऑक्सीजन एक्सप्रेस 118 मीट्रिक टन एलएमओ को साथ लेकर केरल की ओर जा रही है, ताकि इस क्षेत्र में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाई जा सके। इस विज्ञप्ति के समय तक, अब तक महाराष्ट्र में 521 एमटी, उत्तर प्रदेश में लगभग 2350 एमटी, मध्य प्रदेश में 430 एमटी, हरियाणा में 1228 एमटी, तेलंगाना में 308 एमटी, राजस्थान में 40 एमटी, कर्नाटक में 361 एमटी, उत्तराखंड में 200 एमटी, तमिलनाडु में 111 एमटी, आंध्र प्रदेश में 40 एमटी और दिल्ली में 3084 एमटी से भी अधिक ऑक्सीजन विभिन्न टैंकरों से उतारी जा चुकी है। नई ऑक्सीजन को मंजिल तक पहुंचाने का काम एक बहुत ही गतिशील प्रक्रिया है और संबंधित आंकड़े हर समय अपडेट होते रहते हैं। कई और लोडेड ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों के अभी कुछ समय बाद रात में अपनी यात्रा शुरू करने की उम्मीद है। रेलवे ने ऑक्सीजन आपूर्ति वाले स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों का खाका तैयार किया है और इसके साथ ही रेलवे राज्यों की किसी भी उभरती जरूरत या मांग को पूरा करने के लिए खुद को तैयार रखती है। विभिन्न राज्य अपने यहां एलएमओ लाने के लिए भारतीय रेलवे को टैंकर प्रदान करते हैं।
Posted On: सभी बाधाओं से पार पाकर और नए-नए समाधान ढूंढ कर देश भर के विभिन्न राज्यों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी करके मरीजों को भारी राहत पहुंचाने के लिए भारतीय रेलवे की यात्रा निरंतर जारी है। भारतीय रेलवे ने अब तक देश भर के विभिन्न राज्यों में पाँच सौ चालीस से भी अधिक टैंकरों में भरकर लगभग आठ हज़ार सात सौ मीट्रिक टन एलएमओ की डिलीवरी की है। उल्लेखनीय है कि एक सौ उनतालीस ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनें अब तक अपनी यात्राएं बाकायदा पूरी कर चुकी हैं और विभिन्न राज्यों में बड़ी राहत पहुंचाई है। इस विज्ञप्ति के समय तक पैंतीस टैंकरों में चार सौ पचहत्तर मीट्रिक टन से भी अधिक एलएमओ को साथ लेकर छः लोडेड ऑक्सीजन एक्सप्रेस अपनी-अपनी मंजिल की ओर जा रही थीं। ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनें पिछले कुछ दिनों से हर दिन लगभग आठ सौ मीट्रिक टन एलएमओ पूरे देश में पहुंचा रही हैं। यह भारतीय रेलवे का ही अथक प्रयास है जिसके तहत अनुरोध करने वाले राज्यों को कम से कम समय में अधिक से अधिक एलएमओ पहुंचाई जा रही है। चालीस मीट्रिक टन एलएमओ के साथ पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस आंध्र प्रदेश के नेल्लोर पहुंच गई है। एक ऑक्सीजन एक्सप्रेस एक सौ अट्ठारह मीट्रिक टन एलएमओ को साथ लेकर केरल की ओर जा रही है, ताकि इस क्षेत्र में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाई जा सके। इस विज्ञप्ति के समय तक, अब तक महाराष्ट्र में पाँच सौ इक्कीस एमटी, उत्तर प्रदेश में लगभग दो हज़ार तीन सौ पचास एमटी, मध्य प्रदेश में चार सौ तीस एमटी, हरियाणा में एक हज़ार दो सौ अट्ठाईस एमटी, तेलंगाना में तीन सौ आठ एमटी, राजस्थान में चालीस एमटी, कर्नाटक में तीन सौ इकसठ एमटी, उत्तराखंड में दो सौ एमटी, तमिलनाडु में एक सौ ग्यारह एमटी, आंध्र प्रदेश में चालीस एमटी और दिल्ली में तीन हज़ार चौरासी एमटी से भी अधिक ऑक्सीजन विभिन्न टैंकरों से उतारी जा चुकी है। नई ऑक्सीजन को मंजिल तक पहुंचाने का काम एक बहुत ही गतिशील प्रक्रिया है और संबंधित आंकड़े हर समय अपडेट होते रहते हैं। कई और लोडेड ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों के अभी कुछ समय बाद रात में अपनी यात्रा शुरू करने की उम्मीद है। रेलवे ने ऑक्सीजन आपूर्ति वाले स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों का खाका तैयार किया है और इसके साथ ही रेलवे राज्यों की किसी भी उभरती जरूरत या मांग को पूरा करने के लिए खुद को तैयार रखती है। विभिन्न राज्य अपने यहां एलएमओ लाने के लिए भारतीय रेलवे को टैंकर प्रदान करते हैं।
(i). मास्टर एफजी क) नहीं द्वारा ! अनुभव सहित मास्टर ग्रेड-I सर्टीफकेट जिन्होंने उस पाइलट परीक्षा पास किया हो उन्हें भी कमांडर (प्रशिक्षण पर) के रुप में पदोन्नति किया जा सकता है । नोट उम्मीदवार जो मास्टर हो अथवा भारतीय नौसेना से मास्टर (एफजी) के रुप सेवा सर्टीफिकेट अथवा ड्रेज मास्टर ग्रेडसर्टीफिकेट से कोलकाता पत्तन न्यास के ड्रेजर व डिस्पैच सेवा में कमाडर (ऑन-- ट्रेनिंग ) के रुप में सीधे प्रवेश कर सकता है । आवश्यक प्रशिक्षण ग्रहण करने आवश्यक परीक्षा पास करने के पश्चात, कोलकाता पत्तन न्यास के ड्रेजर व डिस्पैच सेवा में अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु परियोजना में उनके लिए जैसा निर्धारित हो, स्वतंत् 'कमांड के लिए अहता प्राप्त होंगे हाइड्रोग्राफिक सेवा से सेवारत कमाण्डर डी एण्ड डी पद हेतु पात्र होंगे। कमोडोर / कमाण्डर अधीक्षक डी एंड डी अधीक्षक डी एंड डी सेवा सर्टीफिकेट अथवा ख) नहीं भारतीय नौसेना से ग) नहीं मास्टर एफजी के रूप में सेवा प्रमाण पत्र अथवा ड्रेज मास्टर ग्रेड-I सर्टीफिकेट कमांडर के रुप में 5 वर्षों का अनुभव (i). मास्टर एफजी । क) नहीं सर्टीफिकेट अथवा भारतीय नौसेना से मास्टर एफजी के रूप में सेवा प्रमाण पत्र अथवा ड्रेज मास्टर ग्रेड-I सर्टीफिकेट कमांडर के रुप में 10 वर्षों की अनुभव प्रतिनियुक्त द्वारा दोनों संगठन से प्रतिनियुक्ति द्वारा तथा दोनों के न होने पर ग्रेड से पदोन्नति द्वारा जो कमोडोर / कमाण्डर के रुप कम से कम कुल 5 वर्ष की नियमित सेवा में हो, जिसके व होने स्थांतरण/ प्रतिनियुक्ति / सीधी भर्ती द्वारा । सामासिक विधि से समावेशन के लिए पद धारित अधिकारी अथवा उप एसडीडीएस का पद और समतुल्य पद जो किसी महापत्तन न्यास के उक्त ग्रेड में 3 वर्ष के नियमित सेवा में हो। । प्रतिनियुक्ति के लिए, अधिकारी अथवा उप एसडीडीएस समतुल्य पद, वेतनमान 36,600-62,000 / - के ग्रेड में किसी महाप्तन न्यास सरकारी / लोक उपक्रम निकाय में 3 वर्षो की नियमित सेवा का अनुभव हो । चयन गुणागुण आधार पर होगा जिसके एपीएआर में ग्रेडिंग अच्छा से कम नहीं । भाग ।। खण्ड 3(i) ।
. मास्टर एफजी क) नहीं द्वारा ! अनुभव सहित मास्टर ग्रेड-I सर्टीफकेट जिन्होंने उस पाइलट परीक्षा पास किया हो उन्हें भी कमांडर के रुप में पदोन्नति किया जा सकता है । नोट उम्मीदवार जो मास्टर हो अथवा भारतीय नौसेना से मास्टर के रुप सेवा सर्टीफिकेट अथवा ड्रेज मास्टर ग्रेडसर्टीफिकेट से कोलकाता पत्तन न्यास के ड्रेजर व डिस्पैच सेवा में कमाडर के रुप में सीधे प्रवेश कर सकता है । आवश्यक प्रशिक्षण ग्रहण करने आवश्यक परीक्षा पास करने के पश्चात, कोलकाता पत्तन न्यास के ड्रेजर व डिस्पैच सेवा में अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु परियोजना में उनके लिए जैसा निर्धारित हो, स्वतंत् 'कमांड के लिए अहता प्राप्त होंगे हाइड्रोग्राफिक सेवा से सेवारत कमाण्डर डी एण्ड डी पद हेतु पात्र होंगे। कमोडोर / कमाण्डर अधीक्षक डी एंड डी अधीक्षक डी एंड डी सेवा सर्टीफिकेट अथवा ख) नहीं भारतीय नौसेना से ग) नहीं मास्टर एफजी के रूप में सेवा प्रमाण पत्र अथवा ड्रेज मास्टर ग्रेड-I सर्टीफिकेट कमांडर के रुप में पाँच वर्षों का अनुभव . मास्टर एफजी । क) नहीं सर्टीफिकेट अथवा भारतीय नौसेना से मास्टर एफजी के रूप में सेवा प्रमाण पत्र अथवा ड्रेज मास्टर ग्रेड-I सर्टीफिकेट कमांडर के रुप में दस वर्षों की अनुभव प्रतिनियुक्त द्वारा दोनों संगठन से प्रतिनियुक्ति द्वारा तथा दोनों के न होने पर ग्रेड से पदोन्नति द्वारा जो कमोडोर / कमाण्डर के रुप कम से कम कुल पाँच वर्ष की नियमित सेवा में हो, जिसके व होने स्थांतरण/ प्रतिनियुक्ति / सीधी भर्ती द्वारा । सामासिक विधि से समावेशन के लिए पद धारित अधिकारी अथवा उप एसडीडीएस का पद और समतुल्य पद जो किसी महापत्तन न्यास के उक्त ग्रेड में तीन वर्ष के नियमित सेवा में हो। । प्रतिनियुक्ति के लिए, अधिकारी अथवा उप एसडीडीएस समतुल्य पद, वेतनमान छत्तीस,छः सौ-बासठ,शून्य / - के ग्रेड में किसी महाप्तन न्यास सरकारी / लोक उपक्रम निकाय में तीन वर्षो की नियमित सेवा का अनुभव हो । चयन गुणागुण आधार पर होगा जिसके एपीएआर में ग्रेडिंग अच्छा से कम नहीं । भाग ।। खण्ड तीन ।
लेंगे। वनडे, लेकिन लगता है कि नियति को कुछ और ही मंजूर है तभी तो पांच एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला के तहत भारत और मेजबान इंग्लैंड के बीच काउंटी ग्राउंड ब्रिस्टल पर सोमवार को खेला जाने वाला पहला एकदिवसीय मैच बारिश के कारण रद्द कर दिया गया। मैच से एक दिन पहले पूरी रात बारिश होती रही और यह पूरे दिन भी जारी रही जिसकी वजह से एक भी बॉल खेला जाना संभव नहीं था इस कारण पहला वनडे बारिश की बलि चढ़ गया। अब दूसरा एकदिवसीय मैच बुधवार को कार्डिफ में खेला जाएगा। अंग्रेजों से मिली टेस्ट में शर्मनाक हार का बदला लेगी टीम इंडिया! आपको बता दें कि भारत के लिए यह दौरा अब तक बेहद खराब रहा है और टीम को पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 1-3 से हार का सामना करना पड़ा। वैसे, भारतीय टीम के लिए अच्छी बात यह है कि टेस्ट श्रृंखला में मिली हार के बाद टीम ने मिडिलसेक्स काउंटी टीम के खिलाफ एक मात्र अभ्यास मैच जरूर 95 रनों से जीता। बेहद खराब दौर से गुजर रहे विराट कोहली ने इस मैच में 71 रनों की पारी खेल कर फॉर्म में लौटने का संकेत भी दिया। टीम (संभावित) : भारत : महेंद्र सिंह धौनी (कप्तान), रोहित शर्मा, शिखर धवन, अंजिक्य रहाणे, विराट कोहली, सुरेश रैना, अंबाती रायडू, संजू सैमसन, रवींद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन, स्टुअर्ट बिन्नी, धवल कुलकर्णी, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद समी, कर्ण शर्मा, मोहित शर्मा, उमेश यादव। इंग्लैंड : एलिस्टर कुक (कप्तान), गैरी बैलेंस, इयान बेल, जोस बटलर (विकेटकीपर), स्टीवन फिन, हैरी गर्नी, इयान मॉर्गन, जोए रूट, मोइन अली, जेम्स एंडरसन, एलेक्स हेल्स, क्रिस जॉर्डन, क्रिस वोक्स, बेन स्टोक्स।
लेंगे। वनडे, लेकिन लगता है कि नियति को कुछ और ही मंजूर है तभी तो पांच एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला के तहत भारत और मेजबान इंग्लैंड के बीच काउंटी ग्राउंड ब्रिस्टल पर सोमवार को खेला जाने वाला पहला एकदिवसीय मैच बारिश के कारण रद्द कर दिया गया। मैच से एक दिन पहले पूरी रात बारिश होती रही और यह पूरे दिन भी जारी रही जिसकी वजह से एक भी बॉल खेला जाना संभव नहीं था इस कारण पहला वनडे बारिश की बलि चढ़ गया। अब दूसरा एकदिवसीय मैच बुधवार को कार्डिफ में खेला जाएगा। अंग्रेजों से मिली टेस्ट में शर्मनाक हार का बदला लेगी टीम इंडिया! आपको बता दें कि भारत के लिए यह दौरा अब तक बेहद खराब रहा है और टीम को पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला में एक-तीन से हार का सामना करना पड़ा। वैसे, भारतीय टीम के लिए अच्छी बात यह है कि टेस्ट श्रृंखला में मिली हार के बाद टीम ने मिडिलसेक्स काउंटी टीम के खिलाफ एक मात्र अभ्यास मैच जरूर पचानवे रनों से जीता। बेहद खराब दौर से गुजर रहे विराट कोहली ने इस मैच में इकहत्तर रनों की पारी खेल कर फॉर्म में लौटने का संकेत भी दिया। टीम : भारत : महेंद्र सिंह धौनी , रोहित शर्मा, शिखर धवन, अंजिक्य रहाणे, विराट कोहली, सुरेश रैना, अंबाती रायडू, संजू सैमसन, रवींद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन, स्टुअर्ट बिन्नी, धवल कुलकर्णी, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद समी, कर्ण शर्मा, मोहित शर्मा, उमेश यादव। इंग्लैंड : एलिस्टर कुक , गैरी बैलेंस, इयान बेल, जोस बटलर , स्टीवन फिन, हैरी गर्नी, इयान मॉर्गन, जोए रूट, मोइन अली, जेम्स एंडरसन, एलेक्स हेल्स, क्रिस जॉर्डन, क्रिस वोक्स, बेन स्टोक्स।
कश्मीर के इन सात लाख लोगों का भविष्य क्या है? कश्मीर के इन सात लाख लोगों का भविष्य क्या है? जम्मू-कश्मीर के लगभग 7 लाख खानाबदोश गुज्जर-बकरवालों के लिए ज़िंदगी सदियों से चलने का नाम रही है. गर्मियों में ये लोग अपने मवेशियों को चराने कश्मीर की ऊंची पहाड़ियों पर जाते हैं और सर्दियों में जम्मू वापस लौटते हैं. इन लोगों के मुताबिक़, अगर उनके लिए कोई चीज़ हमेशा थमी रही है वो है विकास. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
कश्मीर के इन सात लाख लोगों का भविष्य क्या है? कश्मीर के इन सात लाख लोगों का भविष्य क्या है? जम्मू-कश्मीर के लगभग सात लाख खानाबदोश गुज्जर-बकरवालों के लिए ज़िंदगी सदियों से चलने का नाम रही है. गर्मियों में ये लोग अपने मवेशियों को चराने कश्मीर की ऊंची पहाड़ियों पर जाते हैं और सर्दियों में जम्मू वापस लौटते हैं. इन लोगों के मुताबिक़, अगर उनके लिए कोई चीज़ हमेशा थमी रही है वो है विकास.
वाले व्यक्तिको भारी सम्पत्ति मिल गई हो, तो वह उसको सख्या नहीं जानता किन्तु यह जानता है कि अपार सम्पत्ति है, उसीप्रकार तिर्यंच जीवात्माका नाम, सख्या आदि न जाने, तथापि उसके अन्तर मे भावभासन हो तो वह सम्यक्त्वी है । तत्त्वार्थश्रद्धानको सम्यग्दर्शन कहा है । उसे नवतत्त्वोके नाम नही नाते किन्तु उनका स्वरूप समझता है । मैं जीव ज्ञायक तत्त्व हूँ, शरीरादिक पर- अजीव हैं, वे मुझमे नही हैं । पुण्य - पाप तथा प्राश्रव - बन्धके भाव बुरे हैं और सवर - निर्जरा -- मोक्षके भाव भले है । इसप्रकार चार बोलो मे सात तत्त्वोका भासन हुआ है, उसे पूर्वकाल में ज्ञानीका उपदेश मिला है । तिर्यंच आदि भाव भासनका वर्तमान पुरुषार्थ करते हैं, उसमे पूर्व सस्कारादि निमित्त हैं । सम्यग्दर्शन - ज्ञान - चारित्र भले भाव हैं श्रादि प्रकार से भाव भासन है, उसमे देव - गुरु - शास्त्रका स्वरूप और सवर निर्जराका स्वरूप प्रा जाता है । कोई जीव मात्र नवतत्त्वोके नाम रट ले किन्तु अन्तनिर्णय न करे तो वह मिथ्यादृष्टि है । यत्नपूर्वक चलने को निश्चय समिति मान लेता है । चलना तो जडकी क्रिया है औौर अन्तर मे शुभभाव होना वह व्यवहार समिति है, और अन्तरमे रागरहित शुद्ध परिशाति होना वह निश्चय समिति है, - ऐसा जिसे भावभासन नहीं है, वह कदाचित् मात्र शब्द रट ले तो भी मिथ्यादृष्टि है । श्रव, भावभासन में शिवभूति मुनि का दृष्टान्त देते हैं । वे प्रात्मज्ञानी धर्मात्मा मुनि थे, छट्टी- सातवी भूमिकामे भूलते थे, जीवादिके नाम नही जानते थे । "तुषमाषभिन्न" - ऐसी घोषणा करने लगे । गुरु ने "मारुष मा तुष" अर्थात् राग-द्वेष मत करना, - स्वसन्मुख की फिरों शाता रहना ऐसा कहा था लेकिन उसे वे भूस गये समापि उन्हें ऐसा भागभासन था। एकबार माहार मेने पा रहे थे । माग में एक स्त्री उदको दास के सिसक निकास रही थी। दूसरी स्त्री मे भम उससे पूछा कि क्या कर रही है ? तब उसने उत्तर दिया कि तुपमापभित करती हूँ। माप अर्थात् उड़द और सुप मर्याद चिलका । ठहदको दाम से छिसके अलग कर रही हूँ । मुमि को भान तो मा हो कि मैं शुद्ध विवानम्व हूँ किन्तु विशेष भोगता करके ये वीतराग वधाको प्राप्त हुए । मैं मन बाणी पेहसे सिम्म राग तूप श्चिमके हैं उनसे रहित हूँ माम स्वभाषी है उसी में विशेष सोमठा करके वे कामको प्राप्त हुए। यह सम्पग्दर्शन के पश्चात्क बात है। विमसूत मुमि जो सब्द बोमे थे वे सैज्ञान्तिक शब्द नहीं थे किन्तु स्व-परके मानसहित घ्यात किया इसलिये फेमसमान प्राप्त कर लिया। ग्यारह का पाठो हो अथवा उम्र तपश्चर्या करे तथापि जिसे पारमाका माम नहीं है वह मिष्पादृष्टि है। मोर म्यारह अङ्गका पाठी तो जीवादि के विशेष जानता है किन्तु उसे प्रस्ठरग भाग भासिव नहीं होते इसलिये यह मिय्याइटि रहता है। समस्यको माम निक्षपसे तस्यका खास है किन्तु भाषनिक्षेपसे भागभासम नहीं है। जो बीब सांसारिक बातो में चतुराई बताता है किन्तु धम में सूखता प्रगट करता है उसे धमकी प्रीति नहीं है तथा परि प्रीति हो नितु भावभासत न हो तो वह भी मिथ्यावृष्टि है। जीब-अजीवतत्र फ भद्धानकी अपथार्थता बोतराम शास्त्रों में सोजोबादित बात है मेसी त्यम कही नही है । भगवान की वाणी के अनुसार प्राचार्यों ने शास्त्रो की रचना की है। समयसार, नियमसार षट्खण्डागम श्रादि जैन शास्त्र हैं । उनमे कहे हुए स- स्थावरादिरूप जीवके भेद सीखता है, गुणस्थान, मार्गरणास्थान के भेदो को पहिचानता है, जीव- पुद्गलादि के भेदो को और उनके वरर्गादि भेदो को जानता है, व्यवहार - शास्त्रो की वातें समझता है, किन्तु श्रध्यात्म शास्त्रो मे भेदविज्ञान के कारण - भूत तथा वीतरागदशा होने के कारणभूत जैसा निरूपण किया है वैसा नही जानता । श्रात्मा जड कर्म से भिन्न है ~~ ऐसा चैतन्यस्वरूप अध्यात्म शास्त्र में कहा है, व्यवहारशास्त्र मे कर्म के साथ निमित्तनैमित्तिक सम्बन्ध कहा है । श्रध्यात्मशास्त्र मे ऐसा कहा है कि गुरगस्थान- मार्गणास्थान जीवका मूलस्वरूप नही है । वीतरागदशाका सच्चा कारण जीव- द्रव्य है । अध्यात्मशास्त्रमे किस अपेक्षा से कथन है उसे नही समझता । प्रागम शास्त्रमे जीवका स्वरूप मार्गरणास्थान, गुरणस्थान तथा वर्तमान पर्याय सहित कहा है, और अध्यात्म शास्त्र मे मुख्यत मात्र शुद्ध कहा है । वर्तमान पर्यायको गौरण करके त्रिकाली शुद्ध स्वभाव को जीव कहा है, उसके स्वरूपको प्रज्ञानी यथार्थ नही जानता, और किसी प्रसग पर वैसा भी जानना पडे तो शास्त्रानुसार जान लेता है । किन्तु अपने को अपने रूप जानकर उसमे परका ऋश भी न मिलाना, तथा अपना श्रश परमे न मिलाना - ऐसा सच्चा श्रद्धान नहीं करता । स्वयं अपने को नहीं जानता। मैं तो शायक चिदानन्द हूँ, कर्म - शरीर का अश अपने में नहीं मानना चाहिये, शरीरकी क्रिया मुझसे होती है - ऐसा नही मानना चाहिये । प्रात्माकी इच्छा
वाले व्यक्तिको भारी सम्पत्ति मिल गई हो, तो वह उसको सख्या नहीं जानता किन्तु यह जानता है कि अपार सम्पत्ति है, उसीप्रकार तिर्यंच जीवात्माका नाम, सख्या आदि न जाने, तथापि उसके अन्तर मे भावभासन हो तो वह सम्यक्त्वी है । तत्त्वार्थश्रद्धानको सम्यग्दर्शन कहा है । उसे नवतत्त्वोके नाम नही नाते किन्तु उनका स्वरूप समझता है । मैं जीव ज्ञायक तत्त्व हूँ, शरीरादिक पर- अजीव हैं, वे मुझमे नही हैं । पुण्य - पाप तथा प्राश्रव - बन्धके भाव बुरे हैं और सवर - निर्जरा -- मोक्षके भाव भले है । इसप्रकार चार बोलो मे सात तत्त्वोका भासन हुआ है, उसे पूर्वकाल में ज्ञानीका उपदेश मिला है । तिर्यंच आदि भाव भासनका वर्तमान पुरुषार्थ करते हैं, उसमे पूर्व सस्कारादि निमित्त हैं । सम्यग्दर्शन - ज्ञान - चारित्र भले भाव हैं श्रादि प्रकार से भाव भासन है, उसमे देव - गुरु - शास्त्रका स्वरूप और सवर निर्जराका स्वरूप प्रा जाता है । कोई जीव मात्र नवतत्त्वोके नाम रट ले किन्तु अन्तनिर्णय न करे तो वह मिथ्यादृष्टि है । यत्नपूर्वक चलने को निश्चय समिति मान लेता है । चलना तो जडकी क्रिया है औौर अन्तर मे शुभभाव होना वह व्यवहार समिति है, और अन्तरमे रागरहित शुद्ध परिशाति होना वह निश्चय समिति है, - ऐसा जिसे भावभासन नहीं है, वह कदाचित् मात्र शब्द रट ले तो भी मिथ्यादृष्टि है । श्रव, भावभासन में शिवभूति मुनि का दृष्टान्त देते हैं । वे प्रात्मज्ञानी धर्मात्मा मुनि थे, छट्टी- सातवी भूमिकामे भूलते थे, जीवादिके नाम नही जानते थे । "तुषमाषभिन्न" - ऐसी घोषणा करने लगे । गुरु ने "मारुष मा तुष" अर्थात् राग-द्वेष मत करना, - स्वसन्मुख की फिरों शाता रहना ऐसा कहा था लेकिन उसे वे भूस गये समापि उन्हें ऐसा भागभासन था। एकबार माहार मेने पा रहे थे । माग में एक स्त्री उदको दास के सिसक निकास रही थी। दूसरी स्त्री मे भम उससे पूछा कि क्या कर रही है ? तब उसने उत्तर दिया कि तुपमापभित करती हूँ। माप अर्थात् उड़द और सुप मर्याद चिलका । ठहदको दाम से छिसके अलग कर रही हूँ । मुमि को भान तो मा हो कि मैं शुद्ध विवानम्व हूँ किन्तु विशेष भोगता करके ये वीतराग वधाको प्राप्त हुए । मैं मन बाणी पेहसे सिम्म राग तूप श्चिमके हैं उनसे रहित हूँ माम स्वभाषी है उसी में विशेष सोमठा करके वे कामको प्राप्त हुए। यह सम्पग्दर्शन के पश्चात्क बात है। विमसूत मुमि जो सब्द बोमे थे वे सैज्ञान्तिक शब्द नहीं थे किन्तु स्व-परके मानसहित घ्यात किया इसलिये फेमसमान प्राप्त कर लिया। ग्यारह का पाठो हो अथवा उम्र तपश्चर्या करे तथापि जिसे पारमाका माम नहीं है वह मिष्पादृष्टि है। मोर म्यारह अङ्गका पाठी तो जीवादि के विशेष जानता है किन्तु उसे प्रस्ठरग भाग भासिव नहीं होते इसलिये यह मिय्याइटि रहता है। समस्यको माम निक्षपसे तस्यका खास है किन्तु भाषनिक्षेपसे भागभासम नहीं है। जो बीब सांसारिक बातो में चतुराई बताता है किन्तु धम में सूखता प्रगट करता है उसे धमकी प्रीति नहीं है तथा परि प्रीति हो नितु भावभासत न हो तो वह भी मिथ्यावृष्टि है। जीब-अजीवतत्र फ भद्धानकी अपथार्थता बोतराम शास्त्रों में सोजोबादित बात है मेसी त्यम कही नही है । भगवान की वाणी के अनुसार प्राचार्यों ने शास्त्रो की रचना की है। समयसार, नियमसार षट्खण्डागम श्रादि जैन शास्त्र हैं । उनमे कहे हुए स- स्थावरादिरूप जीवके भेद सीखता है, गुणस्थान, मार्गरणास्थान के भेदो को पहिचानता है, जीव- पुद्गलादि के भेदो को और उनके वरर्गादि भेदो को जानता है, व्यवहार - शास्त्रो की वातें समझता है, किन्तु श्रध्यात्म शास्त्रो मे भेदविज्ञान के कारण - भूत तथा वीतरागदशा होने के कारणभूत जैसा निरूपण किया है वैसा नही जानता । श्रात्मा जड कर्म से भिन्न है ~~ ऐसा चैतन्यस्वरूप अध्यात्म शास्त्र में कहा है, व्यवहारशास्त्र मे कर्म के साथ निमित्तनैमित्तिक सम्बन्ध कहा है । श्रध्यात्मशास्त्र मे ऐसा कहा है कि गुरगस्थान- मार्गणास्थान जीवका मूलस्वरूप नही है । वीतरागदशाका सच्चा कारण जीव- द्रव्य है । अध्यात्मशास्त्रमे किस अपेक्षा से कथन है उसे नही समझता । प्रागम शास्त्रमे जीवका स्वरूप मार्गरणास्थान, गुरणस्थान तथा वर्तमान पर्याय सहित कहा है, और अध्यात्म शास्त्र मे मुख्यत मात्र शुद्ध कहा है । वर्तमान पर्यायको गौरण करके त्रिकाली शुद्ध स्वभाव को जीव कहा है, उसके स्वरूपको प्रज्ञानी यथार्थ नही जानता, और किसी प्रसग पर वैसा भी जानना पडे तो शास्त्रानुसार जान लेता है । किन्तु अपने को अपने रूप जानकर उसमे परका ऋश भी न मिलाना, तथा अपना श्रश परमे न मिलाना - ऐसा सच्चा श्रद्धान नहीं करता । स्वयं अपने को नहीं जानता। मैं तो शायक चिदानन्द हूँ, कर्म - शरीर का अश अपने में नहीं मानना चाहिये, शरीरकी क्रिया मुझसे होती है - ऐसा नही मानना चाहिये । प्रात्माकी इच्छा
नई दिल्ली। 2021-22 आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद जेल में बंद ठग सुकेश चंद्रशेखर ने शुक्रवार को कहा कि अब गिरफ्तारी की बारी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की है। चंद्रशेखर की यह टिप्पणी शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किए जाने के बाद आई, जहां मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उनकी न्यायिक हिरासत 18 मार्च तक बढ़ा दी गई थी। अदालत से बाहर आते समय चंद्रशेखर ने संवाददाताओं से कहा कि सच्चाई की जीत हुई है और अब केजरीवाल की बारी है। दिल्ली के उपराज्यपाल को हाल ही में लिखे एक पत्र में वी. के. सक्सेना, चंद्रशेखर ने केजरीवाल, सिसोदिया और जेल में बंद आप नेता सत्येंद्र जैन पर गंभीर आरोप लगाए थे। मंडोली जेल में बंद चंद्रशेखर ने पांच पन्नों के पत्र में आरोप लगाया था कि सीबीआई द्वारा सिसोदिया की गिरफ्तारी सिर्फ शुरुआत है और उन्होंने हर उस विभाग में 'लूट कमीशन' लिया है, जहां वह डिप्टी सीएम के रूप में काम कर रहे थे। एक 'टैबलेट घोटाले' का जिक्र करते हुए चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि उन्होंने एक चीनी कंपनी से टैबलेट (बच्चों को बांटने के लिए) खरीदे थे, लेकिन केजरीवाल सरकार ने 20 फीसदी अतिरिक्त कमीशन के बदले टेंडर किसी और को सौंपने का फैसला किया।
नई दिल्ली। दो हज़ार इक्कीस-बाईस आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद जेल में बंद ठग सुकेश चंद्रशेखर ने शुक्रवार को कहा कि अब गिरफ्तारी की बारी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की है। चंद्रशेखर की यह टिप्पणी शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किए जाने के बाद आई, जहां मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उनकी न्यायिक हिरासत अट्ठारह मार्च तक बढ़ा दी गई थी। अदालत से बाहर आते समय चंद्रशेखर ने संवाददाताओं से कहा कि सच्चाई की जीत हुई है और अब केजरीवाल की बारी है। दिल्ली के उपराज्यपाल को हाल ही में लिखे एक पत्र में वी. के. सक्सेना, चंद्रशेखर ने केजरीवाल, सिसोदिया और जेल में बंद आप नेता सत्येंद्र जैन पर गंभीर आरोप लगाए थे। मंडोली जेल में बंद चंद्रशेखर ने पांच पन्नों के पत्र में आरोप लगाया था कि सीबीआई द्वारा सिसोदिया की गिरफ्तारी सिर्फ शुरुआत है और उन्होंने हर उस विभाग में 'लूट कमीशन' लिया है, जहां वह डिप्टी सीएम के रूप में काम कर रहे थे। एक 'टैबलेट घोटाले' का जिक्र करते हुए चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि उन्होंने एक चीनी कंपनी से टैबलेट खरीदे थे, लेकिन केजरीवाल सरकार ने बीस फीसदी अतिरिक्त कमीशन के बदले टेंडर किसी और को सौंपने का फैसला किया।
पश्चिम गुजरात विज कंपनी लिमिटेड ने विद्युत सहायक (जूनियर इंजीनियर) के पदों की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी की है। पात्र अभ्यर्थी 04 जुलाई 2016 से 25 जुलाई 2016 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार आयु सीमा, योग्यता, आवेदन शुल्क की जानकारी के लिए नीचे प्रारूप देख सकते हैं। पद - विद्युत सहायक (जूनियर इंजीनियर)। योग्यता - बीटेक की डिग्री। स्थान - गुजरात। आयु सीमा - अधिकतम 35 वर्ष। पद का नाम - विद्युत सहायक (जूनियर इंजीनियर) - इलेक्ट्रिकल। योग्यता - मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से उम्मीदवार इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 60% अंकों के साथ बीटेक डिग्री पास होना चाहिए। आयु सीमा - उम्मीदवारों की आयु 04 जुलाई 2016 के आधार पर अधिकतम 35 वर्ष होनी चाहिए। आयु छूट - ऊपरी आयु सीमा में सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए 05 साल और विकलांग श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए 10 साल तक छूट है। वेतनमान - Fixed remuneration for 1st and 2nd year would be Rs 19,750 and Rs 21,750 respectively per month. The selected Vidyut Sahayak (Junior Engineer) shall be appointed initially for the period of three years and may be considered for appointment to the post of Junior Engineer on regular establishment, in the pay scale of Rs 17300-38610 per month. पीजीवीसीएल भर्ती में आवेदन शुल्क - इस आवेदन पत्र के लिए उम्मीदवारों को जनित एसबीआई चालान या ऑनलाइन मोड, डेबिट कार्ड / क्रेडिट कार्ड / इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग कर भारतीय स्टेट बैंक की किसी भी शाखा में 500 रुपये का आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों को 250 रुपये का आवेदन शुल्क देय हैं। चयन प्रक्रिया - उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा (बहु विकल्प प्रश्न) और व्यक्तिगत साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। Section-I General Knowledge. Section-II English Language. Section-III Electrical Engineering. Section-IV Computer Knowledge. नोट - प्रश्न पत्र अंग्रेजी भाषा में ही होगा। पीजीवीसीएल भर्ती में आवेदन ऐसे करें - उम्मीदवार अपना आवेदन 04 जुलाई 2016 से 25 जुलाई 2016 तक वेबसाइट www. pgvcl. com के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन जमा करने के बाद, अताशे की स्वयं सत्यापित डिग्री की प्रतियां, मार्क-शीट के साथ ऑनलाइन आवेदन का प्रिंटआउट, डाक द्वारा इस पते पर भेज दें। पता - to I/c. General Manager (HR), Paschim Gujarat Vij Company Limited, Regd. & Corporate Office, 'Paschim Gujarat Vij Seva Sadan', Nana Mava Main Road, Laxminagar, Rajkot -360004 (Gujarat), till date 04 August 2016. भर्ती विज्ञापन के लिए यहां पर क्लिक करें। ऑनलाइन आवेदन के लिए यहां पर क्लिक करें।
पश्चिम गुजरात विज कंपनी लिमिटेड ने विद्युत सहायक के पदों की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी की है। पात्र अभ्यर्थी चार जुलाई दो हज़ार सोलह से पच्चीस जुलाई दो हज़ार सोलह तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार आयु सीमा, योग्यता, आवेदन शुल्क की जानकारी के लिए नीचे प्रारूप देख सकते हैं। पद - विद्युत सहायक । योग्यता - बीटेक की डिग्री। स्थान - गुजरात। आयु सीमा - अधिकतम पैंतीस वर्ष। पद का नाम - विद्युत सहायक - इलेक्ट्रिकल। योग्यता - मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से उम्मीदवार इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में साठ% अंकों के साथ बीटेक डिग्री पास होना चाहिए। आयु सीमा - उम्मीदवारों की आयु चार जुलाई दो हज़ार सोलह के आधार पर अधिकतम पैंतीस वर्ष होनी चाहिए। आयु छूट - ऊपरी आयु सीमा में सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए पाँच साल और विकलांग श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए दस साल तक छूट है। वेतनमान - Fixed remuneration for एकst and दोnd year would be उन्नीस रुपया,सात सौ पचास and इक्कीस रुपया,सात सौ पचास respectively per month. The selected Vidyut Sahayak shall be appointed initially for the period of three years and may be considered for appointment to the post of Junior Engineer on regular establishment, in the pay scale of सत्रह हज़ार तीन सौ रुपया-अड़तीस हज़ार छः सौ दस per month. पीजीवीसीएल भर्ती में आवेदन शुल्क - इस आवेदन पत्र के लिए उम्मीदवारों को जनित एसबीआई चालान या ऑनलाइन मोड, डेबिट कार्ड / क्रेडिट कार्ड / इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग कर भारतीय स्टेट बैंक की किसी भी शाखा में पाँच सौ रुपयापये का आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों को दो सौ पचास रुपयापये का आवेदन शुल्क देय हैं। चयन प्रक्रिया - उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और व्यक्तिगत साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। Section-I General Knowledge. Section-II English Language. Section-III Electrical Engineering. Section-IV Computer Knowledge. नोट - प्रश्न पत्र अंग्रेजी भाषा में ही होगा। पीजीवीसीएल भर्ती में आवेदन ऐसे करें - उम्मीदवार अपना आवेदन चार जुलाई दो हज़ार सोलह से पच्चीस जुलाई दो हज़ार सोलह तक वेबसाइट www. pgvcl. com के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन जमा करने के बाद, अताशे की स्वयं सत्यापित डिग्री की प्रतियां, मार्क-शीट के साथ ऑनलाइन आवेदन का प्रिंटआउट, डाक द्वारा इस पते पर भेज दें। पता - to I/c. General Manager , Paschim Gujarat Vij Company Limited, Regd. & Corporate Office, 'Paschim Gujarat Vij Seva Sadan', Nana Mava Main Road, Laxminagar, Rajkot -तीन लाख साठ हज़ार चार , till date चार अगस्तust दो हज़ार सोलह. भर्ती विज्ञापन के लिए यहां पर क्लिक करें। ऑनलाइन आवेदन के लिए यहां पर क्लिक करें।
नेशनल हेराल्ड केस में ED सोमवार को राहुल गांधी से पूछताछ करेगी। बता दें कि ईडी ने इस मामले में पूछताछ के लिए सोनिया गांधी को अब 23 जून को बुलाया है। इससे पहले ईडी ने उन्हें 8 जून को बुलाया था, लेकिन वो कोरोना पॉजिटिव हो गई थीं। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली के गंगाराम हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। क्या है नेशनल हेराल्ड केस? आइए जानते हैं।
नेशनल हेराल्ड केस में ED सोमवार को राहुल गांधी से पूछताछ करेगी। बता दें कि ईडी ने इस मामले में पूछताछ के लिए सोनिया गांधी को अब तेईस जून को बुलाया है। इससे पहले ईडी ने उन्हें आठ जून को बुलाया था, लेकिन वो कोरोना पॉजिटिव हो गई थीं। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली के गंगाराम हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। क्या है नेशनल हेराल्ड केस? आइए जानते हैं।
आरिफ कुर्रेशी, श्योपुर। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के श्योपुर (Sheopur) जिले में कोतवाली थाना पुलिस ने चोरी की 12 बाइकों के साथ तीन शातिर बाइक चोरों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान एक शातिर चोर मौके से फरार हो गया है। जिसकी तलाश में पुलिस कर रही है। एसपी आलोक कुमार सिंह ने शनिवार को प्रेस वार्ता के दौरान मामले का खुलासा किया है। मामले को लेकर एसपी आलोक कुमार सिंह ने बताया कि शहर सहित आसपास के इलाके से लगातार बाइक चोरी की शिकायत मिल रही थी। शिकायतों को गंभीरता से लेकर टीमें गठित की गई, साथ ही मुखबिर तंत्र को सक्रिय करके वाहन चोर गिरोह का पता लगाया गया। कोतवाली थाना पुलिस को सूचना मिली कि मंडी बाईपास रोड से आरोपी अंकुर (उम्र 28) पुत्र बाले स्टर जादौन निवासी कल्याण पुरम कॉलोनी श्योपुर, दीपक (उम्र 26) पुत्र विजय जोशी निवासी कच्ची बस्ती श्योपुर चोरी की बाइक के साथ जा रहे हैं। इस पर कोतवाली थाना टीआई ने दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और अलग-अलग जगहों से चोरी की आठ बाइक जब्त की गई है। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि उन्होंने अपने दोस्त अनिल जाटव गौरव शर्मा के साथ मिलकर शिवपुरवा राजस्थान से बाइक चोरी की थी, इस पर पुलिस ने आरोपी अनिल जाटव पुत्र कल्लू जाटव निवासी चैनपुरा को मोरडूंगरी नदी के पास से गिरफ्तार किया गया। आरोपी की घर से चोरी की चार बाइक भी जब्त की गई। इस बीच आरोपी गौरव शर्मा फरार हो गया है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। इस कार्रवाई पर एसपी आलोक कुमार सिंह ने कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम को 10 हजार रुपए का नगद इनाम दिया है।
आरिफ कुर्रेशी, श्योपुर। मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में कोतवाली थाना पुलिस ने चोरी की बारह बाइकों के साथ तीन शातिर बाइक चोरों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान एक शातिर चोर मौके से फरार हो गया है। जिसकी तलाश में पुलिस कर रही है। एसपी आलोक कुमार सिंह ने शनिवार को प्रेस वार्ता के दौरान मामले का खुलासा किया है। मामले को लेकर एसपी आलोक कुमार सिंह ने बताया कि शहर सहित आसपास के इलाके से लगातार बाइक चोरी की शिकायत मिल रही थी। शिकायतों को गंभीरता से लेकर टीमें गठित की गई, साथ ही मुखबिर तंत्र को सक्रिय करके वाहन चोर गिरोह का पता लगाया गया। कोतवाली थाना पुलिस को सूचना मिली कि मंडी बाईपास रोड से आरोपी अंकुर पुत्र बाले स्टर जादौन निवासी कल्याण पुरम कॉलोनी श्योपुर, दीपक पुत्र विजय जोशी निवासी कच्ची बस्ती श्योपुर चोरी की बाइक के साथ जा रहे हैं। इस पर कोतवाली थाना टीआई ने दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और अलग-अलग जगहों से चोरी की आठ बाइक जब्त की गई है। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि उन्होंने अपने दोस्त अनिल जाटव गौरव शर्मा के साथ मिलकर शिवपुरवा राजस्थान से बाइक चोरी की थी, इस पर पुलिस ने आरोपी अनिल जाटव पुत्र कल्लू जाटव निवासी चैनपुरा को मोरडूंगरी नदी के पास से गिरफ्तार किया गया। आरोपी की घर से चोरी की चार बाइक भी जब्त की गई। इस बीच आरोपी गौरव शर्मा फरार हो गया है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। इस कार्रवाई पर एसपी आलोक कुमार सिंह ने कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम को दस हजार रुपए का नगद इनाम दिया है।
भारत और लीबिया ने चुनावी प्रबंधन एवं प्रशासन के क्षेत्र में सहयोग के लिए आज नई दिल्ली में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये। लीबिया निर्वाचन आयोग ने भारतीय निर्वाचन आयोग से प्रशिक्षण और चुनावी सहयोग की मांग की है। सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भारत की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त श्री वी एस सम्पत और लीबिया की ओर से उच्च राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग के उपाध्यक्ष श्री नजीब अब्देसलाम ने किया। इस मौके पर चुनाव आयुक्त श्री एच एस ब्रह्मा और डॉ नसीम जैदी, लीबिया से चुनाव आयुक्त श्री अलताहिर अब्द अलाह ग्राफ, श्री मोह्हमद अल शादिक अबो हैदमा और श्री मसुद अम्र अल नामी के साथ भारतीय निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
भारत और लीबिया ने चुनावी प्रबंधन एवं प्रशासन के क्षेत्र में सहयोग के लिए आज नई दिल्ली में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये। लीबिया निर्वाचन आयोग ने भारतीय निर्वाचन आयोग से प्रशिक्षण और चुनावी सहयोग की मांग की है। सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भारत की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त श्री वी एस सम्पत और लीबिया की ओर से उच्च राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग के उपाध्यक्ष श्री नजीब अब्देसलाम ने किया। इस मौके पर चुनाव आयुक्त श्री एच एस ब्रह्मा और डॉ नसीम जैदी, लीबिया से चुनाव आयुक्त श्री अलताहिर अब्द अलाह ग्राफ, श्री मोह्हमद अल शादिक अबो हैदमा और श्री मसुद अम्र अल नामी के साथ भारतीय निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
कियारा आडवाणी की मौसी का नाम शाहीन जाफरी है. मुंबईः सलमान खान (Salman Khan) अपनी फिल्मों के लिए ही नहीं अपनी लव लाइफ को लेकर भी हमेशा सुर्खियों में रहे. सोमी अली, संगीता बिजलानी सहित एक्टर की लाइफ में कई लड़कियां आईं, लेकिन अभिनेता आज तक शादी के बंधन में नहीं बंध पाए हैं. सलमान खान की लव लाइफ की चर्चा हो रही है तो ये सवाल सभी के मन में आता है कि आखिर उनकी पहली गर्लफ्रेंड कौन थी? मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बॉलीवुड के सुपरस्टार की पहली गर्लफ्रेंड थीं लीजेंड्री एक्टर अशोक कुमार (Ashok Kumar) की नातिन और बॉलीवुड अभिनेत्री कियारा आडवाणी (Kiara Advani) की मौसी शाहीन जाफरी (Shaheen Jaffrey). बताया जाता है कि सलमान, शाहीन जाफरी पर कदर लट्टू थे कि उन्होंने अपने घरवालों तक को शाहीन से मिलवा दिया था. कहा जाता है कि सलमान शाहीन के इंतजार में घंटों उनके कॉलेज के बाहर खड़े होकर उनका इंतजार करते थे. बात तब की है, जब सलमान ने बॉलीवुड में एंट्री नहीं की थी और उन दिनों उनकी उम्र महज 19 साल थी. तब सलमान मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज में पढ़ाई करते थे और सेकंड ईयर के स्टूडेंट थे, तभी उन्हें शाहीन से प्यार हो गया था. रिपोर्ट्स में तो ये भी कहा जाता है कि सलमान के घरवाले भी शाहीन को खूब पसंद करने लगे थे, वह उन्हें अपने घर की बहू बनाना चाहते थे, लेकिन अचानक वो हो गया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, यही वो समय था जब सलमान खान और शाहीन की जिंदगी में संगीता बिजलानी (Sangeeta Bijlani) की एंट्री हुई. संगीता के आने से सलमान का शाहीन से लगाव खत्म होने लगा और आगे चलकर दोनों का ब्रेकअप हो गया. जब संगीता, सलमान से मिलीं वह ब्रेकअप के दर्द से गुजर रही थीं. 1980 में मिस इंडिया रह चुकीं संगीता बिजलानी का तब बॉयफ्रेंड बिंजू अली से ब्रेकअप हुआ था. कहा जाता है कि जब संगीता सलमान से मिलीं उनका ब्रेकअप हो चुका था. वह उसी हेल्थ क्लब में जाती थीं, जहां सलमान जाया करते थे. यहीं से दोनों की मुलाकात हुई. फिर दोनों में पहचान हुई, दोस्ती हुई और फिर ये दोस्ती प्यार तक जा पहुंची. दोनों ने एक-दूसरे को करीब 10 साल डेट किया. बात शादी तक पहुंच गई, लेकिन फिर सलमान की जिंदगी में सोमी अली की एंट्री हुई और संगीता से उनका ब्रेकअप हो गया. इसके बाद संगीता ने क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन से शादी कर ली. लेकिन, ये शादी ज्यादा समय तक नहीं चल पाई और फिर दोनों अलग हो गए. .
कियारा आडवाणी की मौसी का नाम शाहीन जाफरी है. मुंबईः सलमान खान अपनी फिल्मों के लिए ही नहीं अपनी लव लाइफ को लेकर भी हमेशा सुर्खियों में रहे. सोमी अली, संगीता बिजलानी सहित एक्टर की लाइफ में कई लड़कियां आईं, लेकिन अभिनेता आज तक शादी के बंधन में नहीं बंध पाए हैं. सलमान खान की लव लाइफ की चर्चा हो रही है तो ये सवाल सभी के मन में आता है कि आखिर उनकी पहली गर्लफ्रेंड कौन थी? मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बॉलीवुड के सुपरस्टार की पहली गर्लफ्रेंड थीं लीजेंड्री एक्टर अशोक कुमार की नातिन और बॉलीवुड अभिनेत्री कियारा आडवाणी की मौसी शाहीन जाफरी . बताया जाता है कि सलमान, शाहीन जाफरी पर कदर लट्टू थे कि उन्होंने अपने घरवालों तक को शाहीन से मिलवा दिया था. कहा जाता है कि सलमान शाहीन के इंतजार में घंटों उनके कॉलेज के बाहर खड़े होकर उनका इंतजार करते थे. बात तब की है, जब सलमान ने बॉलीवुड में एंट्री नहीं की थी और उन दिनों उनकी उम्र महज उन्नीस साल थी. तब सलमान मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज में पढ़ाई करते थे और सेकंड ईयर के स्टूडेंट थे, तभी उन्हें शाहीन से प्यार हो गया था. रिपोर्ट्स में तो ये भी कहा जाता है कि सलमान के घरवाले भी शाहीन को खूब पसंद करने लगे थे, वह उन्हें अपने घर की बहू बनाना चाहते थे, लेकिन अचानक वो हो गया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, यही वो समय था जब सलमान खान और शाहीन की जिंदगी में संगीता बिजलानी की एंट्री हुई. संगीता के आने से सलमान का शाहीन से लगाव खत्म होने लगा और आगे चलकर दोनों का ब्रेकअप हो गया. जब संगीता, सलमान से मिलीं वह ब्रेकअप के दर्द से गुजर रही थीं. एक हज़ार नौ सौ अस्सी में मिस इंडिया रह चुकीं संगीता बिजलानी का तब बॉयफ्रेंड बिंजू अली से ब्रेकअप हुआ था. कहा जाता है कि जब संगीता सलमान से मिलीं उनका ब्रेकअप हो चुका था. वह उसी हेल्थ क्लब में जाती थीं, जहां सलमान जाया करते थे. यहीं से दोनों की मुलाकात हुई. फिर दोनों में पहचान हुई, दोस्ती हुई और फिर ये दोस्ती प्यार तक जा पहुंची. दोनों ने एक-दूसरे को करीब दस साल डेट किया. बात शादी तक पहुंच गई, लेकिन फिर सलमान की जिंदगी में सोमी अली की एंट्री हुई और संगीता से उनका ब्रेकअप हो गया. इसके बाद संगीता ने क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन से शादी कर ली. लेकिन, ये शादी ज्यादा समय तक नहीं चल पाई और फिर दोनों अलग हो गए. .
संबंधो कायव्वो । किमविसेसेण ? नेत्याह- णवंसयवदेण उवट्टिदखवयस्स पुणो वि तिस्लेव विसेसणमावलियचरिमसमयअसंछोहयस्से त्ति । जो आवलियमेत्तकालेण चरिमसमयअसंछोहओ होहिदि तस्स आवलियमेत्तगुणसे ढिगोवुच्छाओ घेत्तूण सामित्तमेदं दहव्वमिदि वृत्तं होइ । * उक्कस्सयमुदयादो झीणहिदियं तस्सेव चरिमसमयणवु सयवेदक्खवयस्स । १५२६, तस्सेव चरिमसमयणबुंसयवेदक्खत्रयभावेणावद्वियस्स णयुंसयवेदसंबंधिपयदुकस्ससामित्तं होइ । सेसं सुगमं । * कृण्णोकसायाण मुक्कस्सियाणि तिरिण वि झीणहिदियाणि कस्स ? ६५२७. सुबोहमेदं पुच्छासुतं । * गुणिदकम्म॑सिएष खबएण जाधे अंतर कीरमाणं कदं तेसिं चेच कम्मंसाणमुदयावलियाओ उदयवज्जाबो पुराणायो ताधे उक्कस्सयाणि तिरिण विभीहिदियाणि । ऐसा सम्बन्ध कर लेना चाहिये । तो क्या यह स्वामित्व सामान्यसे सभी गुणितकमांशवाले जीवोंके होता है ? नहीं होता, बस यही बतलाने के लिये 'जा नपुंसकवेदके उदयसे पकांणि पर चढ़ा है' यह कहा है। और फिर इसका भी विशेषण 'आवलियचरिमसमयमा यस्स' दिया है । जो एक आवलिप्रमाण कालके द्वारा अन्तिमसमर्पणादि नहीं करेगा उसके एक आवलिप्रमाण गुण गिगांपुच्छाओकी अपेक्षा यह स्वामित्व जानना चाहिये यह उक्त कथनका तात्पर्य है । * तथा वही अन्तिम समयवती नपुंसकवेदी क्षपक जीव उदय में झीनस्थितिवाले उत्कृष्ट कर्मपरमाणुओंका स्वामी है । $५२६. जा अन्तिम समयमे नपुंसकवेदकी क्षपणा करता हुआ स्थित है उसीके नपुंसकवेदसम्बन्धी प्रकृत उत्कृष्ट स्वामित्व होता है। टोप कथन सुगम है। * छह नोकपायोंके अपकर्पण आदि तीनोंकी अपेक्षा झीनस्थितिवाले उत्कृष्ट कर्मपरमाणुओंका स्वामी कौन है ? १५२७. इस पृच्छास्त्रका अर्थ समझने के लिये सरल है । * जो गुणितकर्माशवाला क्षपक जीव अन्तरकरण करने के बाद जब उन्हीं कर्मपरमाणुओं की गुणश्रेणि द्वारा उदय समयके सिवा उदयावलिको भर देता है तब वह अपकर्षण आदि तीनोंकी अपेक्षा झीनस्थितिवाले उत्कृष्ट कर्मपरमाणुओंका स्वामी है ।
संबंधो कायव्वो । किमविसेसेण ? नेत्याह- णवंसयवदेण उवट्टिदखवयस्स पुणो वि तिस्लेव विसेसणमावलियचरिमसमयअसंछोहयस्से त्ति । जो आवलियमेत्तकालेण चरिमसमयअसंछोहओ होहिदि तस्स आवलियमेत्तगुणसे ढिगोवुच्छाओ घेत्तूण सामित्तमेदं दहव्वमिदि वृत्तं होइ । * उक्कस्सयमुदयादो झीणहिदियं तस्सेव चरिमसमयणवु सयवेदक्खवयस्स । एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस, तस्सेव चरिमसमयणबुंसयवेदक्खत्रयभावेणावद्वियस्स णयुंसयवेदसंबंधिपयदुकस्ससामित्तं होइ । सेसं सुगमं । * कृण्णोकसायाण मुक्कस्सियाणि तिरिण वि झीणहिदियाणि कस्स ? छः हज़ार पाँच सौ सत्ताईस. सुबोहमेदं पुच्छासुतं । * गुणिदकम्म॑सिएष खबएण जाधे अंतर कीरमाणं कदं तेसिं चेच कम्मंसाणमुदयावलियाओ उदयवज्जाबो पुराणायो ताधे उक्कस्सयाणि तिरिण विभीहिदियाणि । ऐसा सम्बन्ध कर लेना चाहिये । तो क्या यह स्वामित्व सामान्यसे सभी गुणितकमांशवाले जीवोंके होता है ? नहीं होता, बस यही बतलाने के लिये 'जा नपुंसकवेदके उदयसे पकांणि पर चढ़ा है' यह कहा है। और फिर इसका भी विशेषण 'आवलियचरिमसमयमा यस्स' दिया है । जो एक आवलिप्रमाण कालके द्वारा अन्तिमसमर्पणादि नहीं करेगा उसके एक आवलिप्रमाण गुण गिगांपुच्छाओकी अपेक्षा यह स्वामित्व जानना चाहिये यह उक्त कथनका तात्पर्य है । * तथा वही अन्तिम समयवती नपुंसकवेदी क्षपक जीव उदय में झीनस्थितिवाले उत्कृष्ट कर्मपरमाणुओंका स्वामी है । पाँच सौ छब्बीस डॉलर. जा अन्तिम समयमे नपुंसकवेदकी क्षपणा करता हुआ स्थित है उसीके नपुंसकवेदसम्बन्धी प्रकृत उत्कृष्ट स्वामित्व होता है। टोप कथन सुगम है। * छह नोकपायोंके अपकर्पण आदि तीनोंकी अपेक्षा झीनस्थितिवाले उत्कृष्ट कर्मपरमाणुओंका स्वामी कौन है ? एक हज़ार पाँच सौ सत्ताईस. इस पृच्छास्त्रका अर्थ समझने के लिये सरल है । * जो गुणितकर्माशवाला क्षपक जीव अन्तरकरण करने के बाद जब उन्हीं कर्मपरमाणुओं की गुणश्रेणि द्वारा उदय समयके सिवा उदयावलिको भर देता है तब वह अपकर्षण आदि तीनोंकी अपेक्षा झीनस्थितिवाले उत्कृष्ट कर्मपरमाणुओंका स्वामी है ।
(मध्यमपर्व - द्वितीय भाग) सूतजी बोले - ब्राह्मणों ! देव-कर्म या पैतृक-कर्म काल के आधार पर ही सम्पन्न होते हैं और कर्म भी नियत समय पर किये जाने पर पूर्णरूपेण फलप्रद होते हैं । समय के बिना की गयी क्रियाओं का फल तीनों कालों तथा लोकों में भी प्राप्त नहीं होता । अतः मैं काल के विभागों का वर्णन करता हूँ ।यद्यपि काल अमूर्तरूप में एक तथा भगवान् का ही अन्यतम स्वरुप है तथापि उपाधियों के भेद से वह दीर्घ, लघु आदि अनेक रूपों में विभक्त है । तिथि, नक्षत्र, वार तथा रात्रि का सम्बन्ध आदि जो कुछ है, वे सभी काल के ही अङ्ग हैं और पक्ष, मास आदि रुप से वर्षान्तरों में भी आते-जाते रहते हैं तथा वे ही सब कर्मों के साधन हैं । समय के बिना कोई भी स्वतन्त्र-रूप से कर्म करने में समर्थ नहीं । धर्म या अधर्म का मुख्य द्वार काल ही है । तिथि आदि काल विशेषों में निषिद्ध और विहित कर्म बताये गये हैं । विहित कर्मों का पालन करनेवाला स्वर्ग प्राप्त करता है और विहित का त्यागकर निषिद्ध कर्म करने से अधोगति प्राप्त करता है । पूर्वाह्णव्यापिनी तिथि में वैदिक क्रियाएँ करनी चाहिये । एकोद्दिष्ट श्राद्ध मध्याह्नव्यापिनी तिथि में और पार्वण-श्राद्ध अपराह्ण-व्यापिनी तिथि में करना चाहिये । वृद्धिश्राद्ध आदि प्रातःकाल में करने चाहिये । ब्रह्माजी ने देवताओं के लिये तिथियों के साथ पुर्वाह्णकाल दिया है और पितरों को अपराह्र । पुर्वाह्ण में देवताओं का अर्चन करना चाहिये ।तिथियाँ तीन प्रकार की होती हैं - खर्वा, दर्पा और हिंस्रा । लङ्घित होनेवाली खर्वा, तिथिवृद्धि दर्पा तथा तिथिहानी हिंस्रा कही जाती है । इनमें खर्वा और दर्पा आगे की लेनी चाहिये और हिंस्रा (क्षय तिथि) पूर्व में लेनी चाहिये । शुक्ल पक्ष में पक्ष में परा लेनी चाहिये और कृष्ण पक्ष में पूर्वा । भगवान् सूर्य जिस तिथि को प्राप्त कर उदित होते हैं, वह तिथि स्नान-दान आदि कृत्यों में उचित है । यदि अस्त समय में भगवान् सूर्य दस घटी पर्यन्त रहते हैं तो वह तिथि रात-दिन समझनी चाहिये । शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष में खर्वा या दर्पा तिथि के अस्तपर्यन्त सूर्य रहे तो पितृकार्य में वही तिथि ग्राह्य है । दो दिन में मध्याह्नकालव्यापिनी तिथि होने पर अस्तपर्यन्त रहनेवाली प्रथम तिथि श्राद्ध आदि में विहित है । द्वितीया तृतीया से तथा चतुर्थी पञ्चमी से युक्त हों तो ये तिथियाँ पुण्यप्रद मानी गयी है और उसके विपरीत होने पर पुण्य का ह्रास करती हैं । षष्ठी पञ्चमी से एवं अष्टमी सप्तमी से विद्ध हो तथा दशमी से एकादशी, त्रयोदशी से चतुर्दशी और चतुर्दशी से अमावास्या विद्ध हो तो उनमें उपवास नहीं करना चाहिये, अन्यथा पुत्र, कलत्र और धन का ह्रास होता है । पुत्र-भार्यादि से रहित व्यक्ति का यज्ञ में अधिकार नहीं है । जिस तिथि को लेकर सूर्य उदित होते है, वह तिथि स्नान, अध्ययन और दान के लिये श्रेष्ठ समझनी चाहिये । कृष्ण पक्ष में जिस तिथि में सूर्य अस्त होते हैं, वह स्नान, दान आदि कर्मों में पितरों के लिये उत्तम मानी जाती है ।सूतजी कहते है - ब्राह्मणों ! अब मैं ब्रह्माजी द्वारा बतलायी गयी श्रेष्ठ तिथियों का वर्णन करता हूँ । आश्विन, कार्तिक, माघ और चैत्र इन महीनों में स्नान, दान और भगवान् शिव तथा विष्णु का पूजन दस गुना फलप्रद होता है । प्रतिपदा तिथि मे अग्निदेव का यजन और हवन करने से सभी तरह के धान्य और ईप्सित धन प्राप्त होते हैं । यदि शुक्ल पक्ष में द्वितीया तिथि बृहस्पतिवार से युक्त हो तो उस तिथि में विधिपूर्वक भगवान् अग्निदेव का पूजन और नक्तव्रत करने से इच्छित ऐश्वर्य प्राप्त होता है । मिथुन (आषाढ़) और कर्क (श्रावण) राशि के सूर्य में जो द्वितीया आये, उसमें उपवास करके भगवान् विष्णु का पूजन करनेवाली स्त्री कभी विधवा नहीं होती । अशून्य-शयन द्वितीया (श्रावण मासके कृष्ण पक्षकी द्वितीया तिथि) - को गन्ध, पुष्प, वस्त्र तथा विविध नैवेद्यों से भगवान् लक्ष्मीनारायण की पूजा करनी चाहिये । (इस व्रतसे पति-पत्नी का परस्पर वियोग नहीं होता।) वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया में गङ्गाजी में स्नान करनेवाला सब पापों से मुक्त हो जाता है । वैशाख मास की तृतीया स्वाती नक्षत्र और माघ की तृतीया रोहिणी-युक्त हो तथा आश्विन-तृतीया वृषराशि से युक्त हो तो उसमें जो भी दान दिया जाता है, वह अक्षय होता है । विशेषरूप से इनमें हविष्यान्न एवं मोदक देने से अधिक लाभ होता है तथा गुड़ और कर्पुर से युक्त जलदान करनेवाले की विद्वान् पुरुष अधिक प्रंशसा करते हैं, वह मनुष्य ब्रह्मलोक में पूजित होता है । यदि बुधवार और श्रवण से युक्त तृतीया हो तो उसमें स्नान और उपवास करने से अनन्त फल प्राप्त होता है । भरणी नक्षत्रयुक्त चतुर्थी में यमदेवता की उपासना करने से सम्पूर्ण पापों से मुक्ति मिलती है । भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी शिवलोक में पूजित है । कार्तिक और माघ मास के ग्रहणों में स्नान, जप, तप, दान, उपवास और श्राद्ध करने से अनन्त फल मिलता है । चतुर्थी में सम्पूर्ण विघ्नों के नाश तथा इच्छापूर्ति के लिये भगवान् गणेश की पूजा मोदक आदि से भक्तिपूर्वक करनी चाहिये । श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पञ्चमी में द्वार-देश के दोनों ओर गोमय से नागों की रचनाकर दूध, दही, सिन्दूर, चन्दन, गङ्गाजल एवं सुगन्धित द्रव्यों से नागों का पूजन करना चाहिये । नागों का पूजन करनेवालों के कुल में निर्भयता रहती है एवं प्राणों की रक्षा भी होती है । श्रावण कृष्ण पञ्चमी को घर के आँगन में नीम के पत्तों से मनसा देवी की पूजा करने से कभी सर्पभय नहीं होता । भाद्रपद की षष्ठी में स्नान, दान आदि करने से अनन्त पुण्य होता है । विप्रगणों ! माघ और कार्तिक की षष्ठी में व्रत करने से इहलोक और परलोक में असीम कीर्ति प्राप्त होती है । शुक्ल पक्ष की सप्तमी में यदि संक्रान्ति पड़े तो उसका नाम महाजया या सुर्यप्रिया होती है । भाद्रपद की सप्तमी अपराजिता है । शुक्ल या कृष्ण पक्ष की षष्ठी या सप्तमी रविवार से युक्त हो तो वह ललिता नाम की तिथि पुत्र-पौत्रों की वृद्धि करनेवाली और महान् पुण्यदायिनी है । अश्विनी एवं कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में अष्टादशभुजा का पूजा करना चाहिये । आषाढ़ और श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में चण्डिकादेवी का प्रातःकाल स्नान करके अत्यन्त भक्तिपूर्वक पूजन कर रात्रि में अभिषेक करना चाहिये । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में अशोक पुष्प से मृण्मयी भगवती देवी का अर्चन करने से सम्पूर्ण शोक निवृत्त हो जाते हैं । श्रावण मास में अथवा सिंह संक्रान्ति में रोहिणीयुक्त अष्टमी हो तो उसकी अत्यन्त प्रशंसा की गयी है । प्रतिमास की नवमी में देवी की पूजा करनी चाहिये । कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को शुद्ध आहारपूर्वक रहनेवाले ब्रह्मलोक में जाते हैं । ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी गङ्गा-दशहरा कहलाती है । आश्विन की दशमी विजया और कार्तिक की दशमी महापुण्या कहलाती है । एकादशी व्रत करने से सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते है । इस व्रत में दशमी को जितेन्द्रिय होकर एक ही बार भोजन करना चाहिये । दूसरे दिन एकादशी में उपवास कर द्वादशी में पारणा करनी चाहिये । द्वादशी तिथि द्वादश पापों का हरण करती है । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी में अनेक पुष्पादि सामग्रियों से कामदेव की पूजा करे । इसे अनङ्ग त्रयोदशी कहा जाता है । चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी शनिवार या शतभिषा नक्षत्र से युक्त हो तो गङ्गा में स्नान करने से सैकड़ों सूर्यग्रहण का फल प्राप्त होता है । इसी मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यदि शनिवार या शतभिषा से युक्त हो तो वह महावारुणी पर्व कहलाता है । इसमें किया गया स्नान, दान एवं श्राद्ध अक्षय होता है । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी दम्भ-भंजिनी कही जाती है । इस दिन धतूरे की जड में कामदेव का अर्चन करना चाहिये, इससे उत्तम स्थान प्राप्त होता है । अनन्त चतुर्दशी का व्रत सम्पूर्ण पापों का नाश करनेवाला है । इसे भक्तिपूर्वक करने से मनुष्य अनन्त सुख प्राप्त करता है । प्रेत-चतुर्दशी (यम चतुर्दशी) - को तपस्वी ब्राह्मणों को भोजन और दान देने से मनुष्य यमलोक में नहीं जाता । फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है और वह सम्पूर्ण अभिलाषाओं की पूर्ति करनेवाली है । इस दिन चारों पहरों में स्नान करके भक्तिपूर्वक शिवजी की आराधना करनी चाहिये । चैत्र मास की पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र तथा गुरुवार से युक्त हो तो वह महाचैत्री कही जाती है । वह अनन्त पुण्य प्रदान करनेवाली है । इसी प्रकार विशाखादि नक्षत्र से युक्त वैशाखी, महाज्येष्ठी आदि बारह पूर्णिमाएँ होती है । इनमें किये गये स्नान, दान, तप, जप, नियम आदि सत्कर्म अक्षय होते हैं और व्रती के पितर संतृप्त होकर अक्षय विष्णुलोक को प्राप्त करते हैं । हरिद्वार में महावैशाखी का पर्व विशेष पुण्यप्र दान करता है । इसी प्रकार शालग्राम-क्षेत्र में महाचैत्री, पुरुषोत्तम-क्षेत्र में महाज्येष्ठी, शृंखल-क्षेत्र में महाषाढ़ी, केदार में महाश्रावणी, बदरिकाक्षेत्र में महाभाद्री , पुष्कर तथा कान्यकुब्ज में महाकार्तिकी, अयोध्या में महामार्गशीर्षी तथा महापौषी, प्रयाग में महामाघी तथा नैमिष्यारण्य में महाफल्गुनी पूर्णिमा विशेष फल देनेवाली है । इन पर्वों में जो भी शुभाशुभ कर्म किये जाते है, वे अक्षय हो जाते हैं । आश्विन की पूर्णिमा कौमुदी कही गयी है, इसमें चन्द्रोदय काल में विधिपूर्वक लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये । प्रत्येक अमावस्या को तर्पण और श्राद्धकर्म अवश्य करना चाहिये । कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावास्या में प्रदोष के समय लक्ष्मी का सविधि पूजन कर उनकी प्रीति के लिये दीपों को प्रज्वलित करना चाहिये एवं नदी तीर, पर्वत, गोष्ठ, श्मशान, वृक्षमूल, चौराहा, अपने घर में और चत्वर ( [सं-पु.] - 1. जहाँ चारों ओर से चार सड़कें आकर मिलती हों; चौमुहानी; चौराहा 2. चौकोर क्षेत्र या स्थान 3. हवन की वेदी या चबूतरा ) में दीपों को सजाना चाहिये ।
सूतजी बोले - ब्राह्मणों ! देव-कर्म या पैतृक-कर्म काल के आधार पर ही सम्पन्न होते हैं और कर्म भी नियत समय पर किये जाने पर पूर्णरूपेण फलप्रद होते हैं । समय के बिना की गयी क्रियाओं का फल तीनों कालों तथा लोकों में भी प्राप्त नहीं होता । अतः मैं काल के विभागों का वर्णन करता हूँ ।यद्यपि काल अमूर्तरूप में एक तथा भगवान् का ही अन्यतम स्वरुप है तथापि उपाधियों के भेद से वह दीर्घ, लघु आदि अनेक रूपों में विभक्त है । तिथि, नक्षत्र, वार तथा रात्रि का सम्बन्ध आदि जो कुछ है, वे सभी काल के ही अङ्ग हैं और पक्ष, मास आदि रुप से वर्षान्तरों में भी आते-जाते रहते हैं तथा वे ही सब कर्मों के साधन हैं । समय के बिना कोई भी स्वतन्त्र-रूप से कर्म करने में समर्थ नहीं । धर्म या अधर्म का मुख्य द्वार काल ही है । तिथि आदि काल विशेषों में निषिद्ध और विहित कर्म बताये गये हैं । विहित कर्मों का पालन करनेवाला स्वर्ग प्राप्त करता है और विहित का त्यागकर निषिद्ध कर्म करने से अधोगति प्राप्त करता है । पूर्वाह्णव्यापिनी तिथि में वैदिक क्रियाएँ करनी चाहिये । एकोद्दिष्ट श्राद्ध मध्याह्नव्यापिनी तिथि में और पार्वण-श्राद्ध अपराह्ण-व्यापिनी तिथि में करना चाहिये । वृद्धिश्राद्ध आदि प्रातःकाल में करने चाहिये । ब्रह्माजी ने देवताओं के लिये तिथियों के साथ पुर्वाह्णकाल दिया है और पितरों को अपराह्र । पुर्वाह्ण में देवताओं का अर्चन करना चाहिये ।तिथियाँ तीन प्रकार की होती हैं - खर्वा, दर्पा और हिंस्रा । लङ्घित होनेवाली खर्वा, तिथिवृद्धि दर्पा तथा तिथिहानी हिंस्रा कही जाती है । इनमें खर्वा और दर्पा आगे की लेनी चाहिये और हिंस्रा पूर्व में लेनी चाहिये । शुक्ल पक्ष में पक्ष में परा लेनी चाहिये और कृष्ण पक्ष में पूर्वा । भगवान् सूर्य जिस तिथि को प्राप्त कर उदित होते हैं, वह तिथि स्नान-दान आदि कृत्यों में उचित है । यदि अस्त समय में भगवान् सूर्य दस घटी पर्यन्त रहते हैं तो वह तिथि रात-दिन समझनी चाहिये । शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष में खर्वा या दर्पा तिथि के अस्तपर्यन्त सूर्य रहे तो पितृकार्य में वही तिथि ग्राह्य है । दो दिन में मध्याह्नकालव्यापिनी तिथि होने पर अस्तपर्यन्त रहनेवाली प्रथम तिथि श्राद्ध आदि में विहित है । द्वितीया तृतीया से तथा चतुर्थी पञ्चमी से युक्त हों तो ये तिथियाँ पुण्यप्रद मानी गयी है और उसके विपरीत होने पर पुण्य का ह्रास करती हैं । षष्ठी पञ्चमी से एवं अष्टमी सप्तमी से विद्ध हो तथा दशमी से एकादशी, त्रयोदशी से चतुर्दशी और चतुर्दशी से अमावास्या विद्ध हो तो उनमें उपवास नहीं करना चाहिये, अन्यथा पुत्र, कलत्र और धन का ह्रास होता है । पुत्र-भार्यादि से रहित व्यक्ति का यज्ञ में अधिकार नहीं है । जिस तिथि को लेकर सूर्य उदित होते है, वह तिथि स्नान, अध्ययन और दान के लिये श्रेष्ठ समझनी चाहिये । कृष्ण पक्ष में जिस तिथि में सूर्य अस्त होते हैं, वह स्नान, दान आदि कर्मों में पितरों के लिये उत्तम मानी जाती है ।सूतजी कहते है - ब्राह्मणों ! अब मैं ब्रह्माजी द्वारा बतलायी गयी श्रेष्ठ तिथियों का वर्णन करता हूँ । आश्विन, कार्तिक, माघ और चैत्र इन महीनों में स्नान, दान और भगवान् शिव तथा विष्णु का पूजन दस गुना फलप्रद होता है । प्रतिपदा तिथि मे अग्निदेव का यजन और हवन करने से सभी तरह के धान्य और ईप्सित धन प्राप्त होते हैं । यदि शुक्ल पक्ष में द्वितीया तिथि बृहस्पतिवार से युक्त हो तो उस तिथि में विधिपूर्वक भगवान् अग्निदेव का पूजन और नक्तव्रत करने से इच्छित ऐश्वर्य प्राप्त होता है । मिथुन और कर्क राशि के सूर्य में जो द्वितीया आये, उसमें उपवास करके भगवान् विष्णु का पूजन करनेवाली स्त्री कभी विधवा नहीं होती । अशून्य-शयन द्वितीया - को गन्ध, पुष्प, वस्त्र तथा विविध नैवेद्यों से भगवान् लक्ष्मीनारायण की पूजा करनी चाहिये । वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया में गङ्गाजी में स्नान करनेवाला सब पापों से मुक्त हो जाता है । वैशाख मास की तृतीया स्वाती नक्षत्र और माघ की तृतीया रोहिणी-युक्त हो तथा आश्विन-तृतीया वृषराशि से युक्त हो तो उसमें जो भी दान दिया जाता है, वह अक्षय होता है । विशेषरूप से इनमें हविष्यान्न एवं मोदक देने से अधिक लाभ होता है तथा गुड़ और कर्पुर से युक्त जलदान करनेवाले की विद्वान् पुरुष अधिक प्रंशसा करते हैं, वह मनुष्य ब्रह्मलोक में पूजित होता है । यदि बुधवार और श्रवण से युक्त तृतीया हो तो उसमें स्नान और उपवास करने से अनन्त फल प्राप्त होता है । भरणी नक्षत्रयुक्त चतुर्थी में यमदेवता की उपासना करने से सम्पूर्ण पापों से मुक्ति मिलती है । भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी शिवलोक में पूजित है । कार्तिक और माघ मास के ग्रहणों में स्नान, जप, तप, दान, उपवास और श्राद्ध करने से अनन्त फल मिलता है । चतुर्थी में सम्पूर्ण विघ्नों के नाश तथा इच्छापूर्ति के लिये भगवान् गणेश की पूजा मोदक आदि से भक्तिपूर्वक करनी चाहिये । श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पञ्चमी में द्वार-देश के दोनों ओर गोमय से नागों की रचनाकर दूध, दही, सिन्दूर, चन्दन, गङ्गाजल एवं सुगन्धित द्रव्यों से नागों का पूजन करना चाहिये । नागों का पूजन करनेवालों के कुल में निर्भयता रहती है एवं प्राणों की रक्षा भी होती है । श्रावण कृष्ण पञ्चमी को घर के आँगन में नीम के पत्तों से मनसा देवी की पूजा करने से कभी सर्पभय नहीं होता । भाद्रपद की षष्ठी में स्नान, दान आदि करने से अनन्त पुण्य होता है । विप्रगणों ! माघ और कार्तिक की षष्ठी में व्रत करने से इहलोक और परलोक में असीम कीर्ति प्राप्त होती है । शुक्ल पक्ष की सप्तमी में यदि संक्रान्ति पड़े तो उसका नाम महाजया या सुर्यप्रिया होती है । भाद्रपद की सप्तमी अपराजिता है । शुक्ल या कृष्ण पक्ष की षष्ठी या सप्तमी रविवार से युक्त हो तो वह ललिता नाम की तिथि पुत्र-पौत्रों की वृद्धि करनेवाली और महान् पुण्यदायिनी है । अश्विनी एवं कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में अष्टादशभुजा का पूजा करना चाहिये । आषाढ़ और श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में चण्डिकादेवी का प्रातःकाल स्नान करके अत्यन्त भक्तिपूर्वक पूजन कर रात्रि में अभिषेक करना चाहिये । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में अशोक पुष्प से मृण्मयी भगवती देवी का अर्चन करने से सम्पूर्ण शोक निवृत्त हो जाते हैं । श्रावण मास में अथवा सिंह संक्रान्ति में रोहिणीयुक्त अष्टमी हो तो उसकी अत्यन्त प्रशंसा की गयी है । प्रतिमास की नवमी में देवी की पूजा करनी चाहिये । कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को शुद्ध आहारपूर्वक रहनेवाले ब्रह्मलोक में जाते हैं । ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी गङ्गा-दशहरा कहलाती है । आश्विन की दशमी विजया और कार्तिक की दशमी महापुण्या कहलाती है । एकादशी व्रत करने से सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते है । इस व्रत में दशमी को जितेन्द्रिय होकर एक ही बार भोजन करना चाहिये । दूसरे दिन एकादशी में उपवास कर द्वादशी में पारणा करनी चाहिये । द्वादशी तिथि द्वादश पापों का हरण करती है । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी में अनेक पुष्पादि सामग्रियों से कामदेव की पूजा करे । इसे अनङ्ग त्रयोदशी कहा जाता है । चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी शनिवार या शतभिषा नक्षत्र से युक्त हो तो गङ्गा में स्नान करने से सैकड़ों सूर्यग्रहण का फल प्राप्त होता है । इसी मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यदि शनिवार या शतभिषा से युक्त हो तो वह महावारुणी पर्व कहलाता है । इसमें किया गया स्नान, दान एवं श्राद्ध अक्षय होता है । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी दम्भ-भंजिनी कही जाती है । इस दिन धतूरे की जड में कामदेव का अर्चन करना चाहिये, इससे उत्तम स्थान प्राप्त होता है । अनन्त चतुर्दशी का व्रत सम्पूर्ण पापों का नाश करनेवाला है । इसे भक्तिपूर्वक करने से मनुष्य अनन्त सुख प्राप्त करता है । प्रेत-चतुर्दशी - को तपस्वी ब्राह्मणों को भोजन और दान देने से मनुष्य यमलोक में नहीं जाता । फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है और वह सम्पूर्ण अभिलाषाओं की पूर्ति करनेवाली है । इस दिन चारों पहरों में स्नान करके भक्तिपूर्वक शिवजी की आराधना करनी चाहिये । चैत्र मास की पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र तथा गुरुवार से युक्त हो तो वह महाचैत्री कही जाती है । वह अनन्त पुण्य प्रदान करनेवाली है । इसी प्रकार विशाखादि नक्षत्र से युक्त वैशाखी, महाज्येष्ठी आदि बारह पूर्णिमाएँ होती है । इनमें किये गये स्नान, दान, तप, जप, नियम आदि सत्कर्म अक्षय होते हैं और व्रती के पितर संतृप्त होकर अक्षय विष्णुलोक को प्राप्त करते हैं । हरिद्वार में महावैशाखी का पर्व विशेष पुण्यप्र दान करता है । इसी प्रकार शालग्राम-क्षेत्र में महाचैत्री, पुरुषोत्तम-क्षेत्र में महाज्येष्ठी, शृंखल-क्षेत्र में महाषाढ़ी, केदार में महाश्रावणी, बदरिकाक्षेत्र में महाभाद्री , पुष्कर तथा कान्यकुब्ज में महाकार्तिकी, अयोध्या में महामार्गशीर्षी तथा महापौषी, प्रयाग में महामाघी तथा नैमिष्यारण्य में महाफल्गुनी पूर्णिमा विशेष फल देनेवाली है । इन पर्वों में जो भी शुभाशुभ कर्म किये जाते है, वे अक्षय हो जाते हैं । आश्विन की पूर्णिमा कौमुदी कही गयी है, इसमें चन्द्रोदय काल में विधिपूर्वक लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये । प्रत्येक अमावस्या को तर्पण और श्राद्धकर्म अवश्य करना चाहिये । कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावास्या में प्रदोष के समय लक्ष्मी का सविधि पूजन कर उनकी प्रीति के लिये दीपों को प्रज्वलित करना चाहिये एवं नदी तीर, पर्वत, गोष्ठ, श्मशान, वृक्षमूल, चौराहा, अपने घर में और चत्वर में दीपों को सजाना चाहिये ।
सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के भेज्जी थाने में पुलिस व सीआरपीएफ के समक्ष इलाके में सक्रिय 19 नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया। इसमें चार महिला नक्सली भी शामिल है और तीन ऐसे नक्सली भी है जिन पर शासन ने एक-एक लाख का इनाम घोषित कर रखा है। सभी सरेंडर नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि दी गई और शासन की पुनर्वास नीति का लाभ देने की बात अधिकारियों ने कही। इस इलाके में सुरक्षा बल के जवान लगातार आपरेशन कर रहे है। इसके साथ ही शासन की योजनाएं पहुंच रही है। जिसका असर है कि नक्सलवाद छोड़ कर लोग मुख्यधारा से जुड़ रहे है। नक्सलियों के खिलाफ लगातार सुरक्षा बलों के द्वारा आपरेशन चलाए जा रहे है, साथ ही कई इलाकों में नए कैंप भी खोले जा रहे है। जिला पुलिस द्वारा पूना नर्कोम अभियान चलाया जा रहा है, जिसके कारण नक्सली अब संगठन छोड़ मुख्यधारा से जुड़ने के लिए आत्मसमर्पण कर रहे है। भेज्जी थाने में सीआरपीएफ 219 व जिला पुलिस के समक्ष इलाके में सक्रिय 19 नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया जिसमें चार महिला नक्सली शामिल है। वहीं तीन नक्सलियों पर एक-एक लाख का इनाम घोषित है। सभी नक्सली पिछले कई सालों से संगठन में काम कर रहे है और इलाके में सक्रिय है। लेकिन लगातार बढ रहे सुरक्षा बल के दबाव व योजनाओं से प्रभावित होकर आत्म समर्पण किया है। सभी को प्रोत्साहन राशि दी गई साथ ही शासन की पुनर्वास नीति का लाभ देने की बात अधिकारियों ने कही। इस दौरान नितिन कुमार कमांडेंट , ब्रुनो ए कमांडैंट, एनपी सिंह कमांडेंट, नीरज कुमार, सुर्यकांत सिंह, पामुला किशोर, सचिन्द्र चैबे, गिरजाशंकर साव, देवेन्द्र कुमार मौजूद रहे। जाएगा।
सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के भेज्जी थाने में पुलिस व सीआरपीएफ के समक्ष इलाके में सक्रिय उन्नीस नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया। इसमें चार महिला नक्सली भी शामिल है और तीन ऐसे नक्सली भी है जिन पर शासन ने एक-एक लाख का इनाम घोषित कर रखा है। सभी सरेंडर नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि दी गई और शासन की पुनर्वास नीति का लाभ देने की बात अधिकारियों ने कही। इस इलाके में सुरक्षा बल के जवान लगातार आपरेशन कर रहे है। इसके साथ ही शासन की योजनाएं पहुंच रही है। जिसका असर है कि नक्सलवाद छोड़ कर लोग मुख्यधारा से जुड़ रहे है। नक्सलियों के खिलाफ लगातार सुरक्षा बलों के द्वारा आपरेशन चलाए जा रहे है, साथ ही कई इलाकों में नए कैंप भी खोले जा रहे है। जिला पुलिस द्वारा पूना नर्कोम अभियान चलाया जा रहा है, जिसके कारण नक्सली अब संगठन छोड़ मुख्यधारा से जुड़ने के लिए आत्मसमर्पण कर रहे है। भेज्जी थाने में सीआरपीएफ दो सौ उन्नीस व जिला पुलिस के समक्ष इलाके में सक्रिय उन्नीस नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया जिसमें चार महिला नक्सली शामिल है। वहीं तीन नक्सलियों पर एक-एक लाख का इनाम घोषित है। सभी नक्सली पिछले कई सालों से संगठन में काम कर रहे है और इलाके में सक्रिय है। लेकिन लगातार बढ रहे सुरक्षा बल के दबाव व योजनाओं से प्रभावित होकर आत्म समर्पण किया है। सभी को प्रोत्साहन राशि दी गई साथ ही शासन की पुनर्वास नीति का लाभ देने की बात अधिकारियों ने कही। इस दौरान नितिन कुमार कमांडेंट , ब्रुनो ए कमांडैंट, एनपी सिंह कमांडेंट, नीरज कुमार, सुर्यकांत सिंह, पामुला किशोर, सचिन्द्र चैबे, गिरजाशंकर साव, देवेन्द्र कुमार मौजूद रहे। जाएगा।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने दिल्ली (New Delhi) में महिलाओं के लिए फ्री मेट्रो (Free Metro Ride) योजना लागू किए जाने के संबंध में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी (Hardeep Puri) से मुलाकात की। इस दौरान AAP राज्यसभा सांसद एन डी गुप्ता (ND Gupta) भी मौजूद रहे। 'फ्री मेट्रो से सभी को लाभ' दिल्ली में महिलओं के लिए फ्री मेट्रो को लेकर संजय सिंह का कहना है कि इस योजना के लागू हो जाने से ट्रैफिक कम होगा, गाड़ियां कम चलेंगी तो प्रदूषण में भी कमी आएगी। इसके साथ ही महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही दिल्ली मेट्रो की आमदनी भी बढ़ेगी। 'इस योजना से मेट्रो को नुकसान नहीं' सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार अपने मुनाफे के पैसों से महिलाओं को मुफ्त सफर कराएगी इसमें दिल्ली मेट्रो क्या नुकसान है? इसमें तो मेट्रो का फायदा है कि उसके यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। इसके साथ ही संजय सिंह ने कहा कि ये कोई केंद्र सरकार का प्रस्ताव नहीं है ये दिल्ली की राज्य सरकार का प्रस्ताव है। अगर उनसे इस योजना के विषय में प्रश्न किया जाएगा तो वो यही कहेंगे कि हमने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया। ये दिल्ली सरकार की योजना है। 'दिल्ली सरकार मेट्रो में 50% की भागीदार' सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार मेट्रो में 50% की भागीदार है। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री चाहते हैं कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिले। अगर वाकई केंद्र पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना चाहती है तो ये केजरीवाल सरकार का बहुत ही सार्थक और क्रांतिकारी कदम है। केंद्र सरकार इसमें सीनियर सिटीजन को शामिल करने के लिए कहती है तो हम इसके लिए भी काम करेंगे और संभव हुआ तो उनको भी इसमें शामिल करेंगे। सिंह ने कहा कि ये एक बहुत ही अच्छी शुरुआत है और हम उम्मीद करते हैं कि इसमें हमें केंद्र सरकार का सहयोग मिलेगा।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दिल्ली में महिलाओं के लिए फ्री मेट्रो योजना लागू किए जाने के संबंध में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी से मुलाकात की। इस दौरान AAP राज्यसभा सांसद एन डी गुप्ता भी मौजूद रहे। 'फ्री मेट्रो से सभी को लाभ' दिल्ली में महिलओं के लिए फ्री मेट्रो को लेकर संजय सिंह का कहना है कि इस योजना के लागू हो जाने से ट्रैफिक कम होगा, गाड़ियां कम चलेंगी तो प्रदूषण में भी कमी आएगी। इसके साथ ही महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही दिल्ली मेट्रो की आमदनी भी बढ़ेगी। 'इस योजना से मेट्रो को नुकसान नहीं' सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार अपने मुनाफे के पैसों से महिलाओं को मुफ्त सफर कराएगी इसमें दिल्ली मेट्रो क्या नुकसान है? इसमें तो मेट्रो का फायदा है कि उसके यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। इसके साथ ही संजय सिंह ने कहा कि ये कोई केंद्र सरकार का प्रस्ताव नहीं है ये दिल्ली की राज्य सरकार का प्रस्ताव है। अगर उनसे इस योजना के विषय में प्रश्न किया जाएगा तो वो यही कहेंगे कि हमने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया। ये दिल्ली सरकार की योजना है। 'दिल्ली सरकार मेट्रो में पचास% की भागीदार' सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार मेट्रो में पचास% की भागीदार है। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री चाहते हैं कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिले। अगर वाकई केंद्र पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना चाहती है तो ये केजरीवाल सरकार का बहुत ही सार्थक और क्रांतिकारी कदम है। केंद्र सरकार इसमें सीनियर सिटीजन को शामिल करने के लिए कहती है तो हम इसके लिए भी काम करेंगे और संभव हुआ तो उनको भी इसमें शामिल करेंगे। सिंह ने कहा कि ये एक बहुत ही अच्छी शुरुआत है और हम उम्मीद करते हैं कि इसमें हमें केंद्र सरकार का सहयोग मिलेगा।
Introduction to Programming in C Department of Computer Science and Engineering सी में प्रोग्रामिंग का परिचय कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग एनपीटीईएल एमओओसी (MOOCs) पर परिचयात्मक प्रोग्रामिंग पाठ्यक्रम में आपका स्वागत है। इसका लक्ष्य C प्रोग्रामिंग भाषा में बुनियादी प्रोग्रॅम्स को कोड करना सीखना है। (स्लाइड समय देखेंः 00:18 ) > The course teaches you how to solve problems using the computer. > Every discipline uses computing: All branches of engineering, sciences, design and arts. > No prior exposure to programming is needed. मूल रूप से इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य आपको यह सिखाना है कि कंप्यूटर का उपयोग करके समस्याओं को कैसे हल किया जाए। और इस पाठ्यक्रम के अंत तक, हम आशा करेंगे कि आप मध्यम आकार के प्रोग्राम लिख सकते हैं - शायद C प्रोग्रामिंग भाषा में कोड की 100 पंक्तियों तक को भी आराम से चला रहे हों। आजकल प्रोग्रामिंग को गणित के समान एक बुनियादी कौशल माना जाता है जो इंजीनियरिंग, विज्ञान जैसे सभी विषयों में और यहां तक कि कला में भी आवश्यक है। तो, थोड़ा सा प्रोग्रामिंग कौशल किसी अन्य कौशल सेट, जो आपमें पहले से ही हो सकता है, के लिए एक वृद्धि है । यह पाठ्यक्रम हम आधार से शुरू करेंगे; हम प्रोग्रामिंग में किसी भी पूर्व अनुभव को नहीं मानते हैं, चाहे वह C में हो या किसी अन्य भाषा में। तो, केंद्र बिंदु मूल बातों से शुरू होगा; और C का उपयोग प्रोग्राम के माध्यम के रूप में करने के लिए होगा । (स्लाइड समय देखेंः 01:21 ) Process of Programming 1. Define and model the problem. In real-life this is important and complicated. For example, consider modeling the Indian Railways reservation system. 2. In this course, all problems will be defined precisely and will be simple. प्रोग्रामिंग की प्रक्रिया के बारे में कुछ शब्द; कि इसमें दो मूल चरण शामिल हैं। एक, समस्या को परिभाषित करना है; अक्सर आपको वास्तविक दुनिया की समस्याएं मिलती हैं, जिनके लिए एक प्रोग्राम लिखना बिल्कुल सटीक नहीं है। तो, पहला कदम समस्या को परिभाषित और मॉडल करना होगा। और यह बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर विकास में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है; हालाँकि हम इस पाठ्यक्रम के भाग के रूप में इस पर ध्यान केंद्रित नहीं करेंगे। इस पाठ्यक्रम के दौरान, आप भारतीय रेलवे आरक्षण प्रणाली जैसी बड़ी सॉफ्टवेयर प्रणाली नहीं लिखेंगे; वे कई प्रोग्रामर्स से जुड़ी बेहद जटिल समस्याएं हैं। इस पाठ्यक्रम में, हम मान लेंगे कि समस्या अच्छी तरह से परिभाषित है और पहले से ही आपको प्रदान की गई है। तो, वे सटीक होंगे और वे काफी छोटे और सरल होंगे। तो, यह प्रोग्रामिंग का पहला चरण है, जो समस्या की परिभाषा है, जिसे आप मान सकते हैं कि आपको दिया जाएगा। (स्लाइड समय देखेंः 02:22) Process of Programming: Step 2 → Obtain a logical solution to your problem. → A logical solution is a finite and clear step-by-step procedure to solve your problem. > Also called an Algorithm. We can visualize this using a flowchart. > Very important step in the programming process.
Introduction to Programming in C Department of Computer Science and Engineering सी में प्रोग्रामिंग का परिचय कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग एनपीटीईएल एमओओसी पर परिचयात्मक प्रोग्रामिंग पाठ्यक्रम में आपका स्वागत है। इसका लक्ष्य C प्रोग्रामिंग भाषा में बुनियादी प्रोग्रॅम्स को कोड करना सीखना है। > The course teaches you how to solve problems using the computer. > Every discipline uses computing: All branches of engineering, sciences, design and arts. > No prior exposure to programming is needed. मूल रूप से इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य आपको यह सिखाना है कि कंप्यूटर का उपयोग करके समस्याओं को कैसे हल किया जाए। और इस पाठ्यक्रम के अंत तक, हम आशा करेंगे कि आप मध्यम आकार के प्रोग्राम लिख सकते हैं - शायद C प्रोग्रामिंग भाषा में कोड की एक सौ पंक्तियों तक को भी आराम से चला रहे हों। आजकल प्रोग्रामिंग को गणित के समान एक बुनियादी कौशल माना जाता है जो इंजीनियरिंग, विज्ञान जैसे सभी विषयों में और यहां तक कि कला में भी आवश्यक है। तो, थोड़ा सा प्रोग्रामिंग कौशल किसी अन्य कौशल सेट, जो आपमें पहले से ही हो सकता है, के लिए एक वृद्धि है । यह पाठ्यक्रम हम आधार से शुरू करेंगे; हम प्रोग्रामिंग में किसी भी पूर्व अनुभव को नहीं मानते हैं, चाहे वह C में हो या किसी अन्य भाषा में। तो, केंद्र बिंदु मूल बातों से शुरू होगा; और C का उपयोग प्रोग्राम के माध्यम के रूप में करने के लिए होगा । Process of Programming एक. Define and model the problem. In real-life this is important and complicated. For example, consider modeling the Indian Railways reservation system. दो. In this course, all problems will be defined precisely and will be simple. प्रोग्रामिंग की प्रक्रिया के बारे में कुछ शब्द; कि इसमें दो मूल चरण शामिल हैं। एक, समस्या को परिभाषित करना है; अक्सर आपको वास्तविक दुनिया की समस्याएं मिलती हैं, जिनके लिए एक प्रोग्राम लिखना बिल्कुल सटीक नहीं है। तो, पहला कदम समस्या को परिभाषित और मॉडल करना होगा। और यह बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर विकास में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है; हालाँकि हम इस पाठ्यक्रम के भाग के रूप में इस पर ध्यान केंद्रित नहीं करेंगे। इस पाठ्यक्रम के दौरान, आप भारतीय रेलवे आरक्षण प्रणाली जैसी बड़ी सॉफ्टवेयर प्रणाली नहीं लिखेंगे; वे कई प्रोग्रामर्स से जुड़ी बेहद जटिल समस्याएं हैं। इस पाठ्यक्रम में, हम मान लेंगे कि समस्या अच्छी तरह से परिभाषित है और पहले से ही आपको प्रदान की गई है। तो, वे सटीक होंगे और वे काफी छोटे और सरल होंगे। तो, यह प्रोग्रामिंग का पहला चरण है, जो समस्या की परिभाषा है, जिसे आप मान सकते हैं कि आपको दिया जाएगा। Process of Programming: Step दो → Obtain a logical solution to your problem. → A logical solution is a finite and clear step-by-step procedure to solve your problem. > Also called an Algorithm. We can visualize this using a flowchart. > Very important step in the programming process.
हरियाणा सरकार किसानों को खेती की मशीनें खरीदने के लिए सब्सिडी दे रही है. इस योजना के लिए ड्रा रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने की आखिरी तारीख 20 जनवरी रखी गई थी. हालांकि, अब किसानों को एक और मौका देते हुए खट्टर सरकार ने तारीख 23 जनवरी तक बढ़ा दी है. ऐसे में किसान आज ही हरियाणा सरकार की कृषि विभाग की वेबसाइट saralharyana. gov. in पर जाकर ड्रा रजिस्ट्रेशन फीस जमा कर दें. हरियाणा सरकार अनुसूचित जाति के किसानों को ट्रैक्टरों पर 3 लाख रुपये (अधिकतम 50 %) तक अनुदान दे रही है. अनुदान पाने के लिए saralharyana. gov. in पर 10 जनवरी, 2023 तक आवेदन करना था. फिर ड्रा रजिस्ट्रेशन की तारीख 20 जनवरी रखी गई. अब इसे बढ़ाकर 23 जनवरी कर दी गई है. इसके अलावा हरियाणा सरकार 55 तरह के कृषि यंत्रों पर भी अनुदान दे रही है. बता दें कि खट्टर सरकार अनुसूचित जाति के किसानों एस. बी. 89 स्कीम के तहत 35hp का नए ट्रैक्टर की खरीद पर अनुदान पर दे रही है. इस ट्रैक्टर का उपयोग कर किसान अपने खेती के कामों को पूरा कर सकेगा. साथ ही आगे चलकर वह इन ट्रैक्टरों के माध्यम से दूसरे किसानों की मदद कर भारी मुनाफा भी कमा सकता है. केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं जिसका लाभ उठा कर किसान अपनी स्थिति बेहतर कर सकते हैं. ऐसी ही एक योजना फार्म मशीनरी बैंक (https://agrimachinery. nic. in/) केंद्र सरकार के द्वारा चलाई जा रही है. जिसके तहत किसानों को 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी पर कृषि यंत्र दिए जाते हैं. इसके अलावा अन्य राज्य सरकारें भी किसानों को अपने-अपने स्तर पर सब्सिडी पर कृषि यंत्र मुहैया कराती हैं.
हरियाणा सरकार किसानों को खेती की मशीनें खरीदने के लिए सब्सिडी दे रही है. इस योजना के लिए ड्रा रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने की आखिरी तारीख बीस जनवरी रखी गई थी. हालांकि, अब किसानों को एक और मौका देते हुए खट्टर सरकार ने तारीख तेईस जनवरी तक बढ़ा दी है. ऐसे में किसान आज ही हरियाणा सरकार की कृषि विभाग की वेबसाइट saralharyana. gov. in पर जाकर ड्रा रजिस्ट्रेशन फीस जमा कर दें. हरियाणा सरकार अनुसूचित जाति के किसानों को ट्रैक्टरों पर तीन लाख रुपये तक अनुदान दे रही है. अनुदान पाने के लिए saralharyana. gov. in पर दस जनवरी, दो हज़ार तेईस तक आवेदन करना था. फिर ड्रा रजिस्ट्रेशन की तारीख बीस जनवरी रखी गई. अब इसे बढ़ाकर तेईस जनवरी कर दी गई है. इसके अलावा हरियाणा सरकार पचपन तरह के कृषि यंत्रों पर भी अनुदान दे रही है. बता दें कि खट्टर सरकार अनुसूचित जाति के किसानों एस. बी. नवासी स्कीम के तहत पैंतीसhp का नए ट्रैक्टर की खरीद पर अनुदान पर दे रही है. इस ट्रैक्टर का उपयोग कर किसान अपने खेती के कामों को पूरा कर सकेगा. साथ ही आगे चलकर वह इन ट्रैक्टरों के माध्यम से दूसरे किसानों की मदद कर भारी मुनाफा भी कमा सकता है. केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं जिसका लाभ उठा कर किसान अपनी स्थिति बेहतर कर सकते हैं. ऐसी ही एक योजना फार्म मशीनरी बैंक केंद्र सरकार के द्वारा चलाई जा रही है. जिसके तहत किसानों को अस्सी प्रतिशत तक की सब्सिडी पर कृषि यंत्र दिए जाते हैं. इसके अलावा अन्य राज्य सरकारें भी किसानों को अपने-अपने स्तर पर सब्सिडी पर कृषि यंत्र मुहैया कराती हैं.
हरियाणा के कई जिलों में अग्निपथ भर्ती योजना का विरोध शुरू हो चुका है। गुरुवार को हिसार, भिवानी और चरखी दादरी जिलों में युवाओं ने इस योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। हिसार में सात बास के गांवों के युवाओं ने गांव कंवारी के बस स्टैंड पर अग्निपथ योजना के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया और रोड जाम किया। वहीं चरखी दादरी में भी युवा सड़कों पर उतरे और बस स्टैंड रोड जाम कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर समझाने का प्रयास किया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
हरियाणा के कई जिलों में अग्निपथ भर्ती योजना का विरोध शुरू हो चुका है। गुरुवार को हिसार, भिवानी और चरखी दादरी जिलों में युवाओं ने इस योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। हिसार में सात बास के गांवों के युवाओं ने गांव कंवारी के बस स्टैंड पर अग्निपथ योजना के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया और रोड जाम किया। वहीं चरखी दादरी में भी युवा सड़कों पर उतरे और बस स्टैंड रोड जाम कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर समझाने का प्रयास किया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे ने राष्ट्रीय कांग्रेस और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस का विलनिकरण होने के बारे में बड़ा बयान किया है। भविष्य में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस एकत्रित आएंगे। वे (राकांपा) भी अब थक चुके हैं और हम (inc) भी अब तक गए हैं, ऐसा शिंदे ने कहा। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी पिछले पांच साल से महाराष्ट्र में सरकार का हिस्सा है। उसके पास कोई खास शक्तियां नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद उसने कभी धोखा नहीं दिया और न ही सरकार गिराने के लिए कोई षडयंत्र रचा। पार्टी प्रमुख ने कहा कि किसी गठबंधन में दोनों पार्टियों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है अगर अकारण गति बढ़ाई जाती है तो इससे दुर्घटना हो सकती है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना मिलकर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं। दोनों पार्टियों में सीट बंटवारे पर सहमति हो गई थी। लेकिन नाम वापसी के बाद साफ दिख रहा है कि गठबंधन के बावजूद कई सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी-शिवसेना के उम्मीदवार बगावत पर उतर आए हैं। बागियों ने गठबंधन के फॉर्मूले को खारिज कर दिया है और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। एआईएमआईएम चीफ सांसद असदुद्दीन ओवैसी इस वक्त महाराष्ट्र में अपनी पार्टी कैंडिडेट का जमकर प्रचार कर रहे हैं। ओवैसी के भाषणों में निशाने पर कांग्रेस पार्टी है। एक रैली में सांसद ने कांग्रेस पर फिर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा, "दुनिया के किसी भी डॉक्टर को लाया जाए, वो अब कांग्रेस पार्टी का इलाज नहीं कर सकता। दवाई देने पर नामर्द भी मर्द बन सकता है, मगर कांग्रेस अब ठीक नहीं हो सकती। " महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का माहौल इन दिनों गर्म है। ऐसे में पार्टियां दूसरे राज्यों से अपने स्टार प्रचारकों को बुलाकर तूफानी कैम्पेन कर रही हैं। मुंबई में उत्तर भारतीय मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने जनता को संबोधित किया। डिप्टी सीएम इस कैंपेन में एक विवादित बयान भी दे डाला, मौर्या ने कहा, जनता को अगर पाकिस्तान पर परमाणु बम गिराना है तो आने वाले 21 तारीख को कमल का बटन दबाएं। 'जहां विश्वास है-वहां आस है! ' यह वीडियो यही दिखाता है। यह वीडियो मुंबई की लोकल ट्रेन का है। ये महिलाएं नौकरीपेशा हैं। लेकिन कामकाज के चलते इन्हें दफ्तर से छुट्टी नहीं मिली। लिहाजा उन्होंने ट्रेन में ही गरबा खेला। भागवत शहर के रेशीमबाग मैदान में स्वयंसेवकों को संबोधित कर सकते हैं, संगठन के स्वयंसेवकों तथा संघ से संबद्ध संस्थाओं के नाम भी एक संदेश जारी करेंगे। पुलिसकर्मी जब भिखारी की मौत के बाद उसकी झुग्गी पर पहंचे वहां इतनी दौलत मिली की पुलिसवाले भी हैरान हो गए। मृतक ने पैसे चार बैग में भर रखे थे। पुलिस को गिनने में करीब रातभर लग गई। महाराष्ट्र के नागपुर से एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 60 साल के बुजुर्ग को मजदूरी मांगने पर दलालों ने तालिबानी शैली में सजा दी। उसके हाथ और पैरों की उंगुलियां काट दी। फिर बेहोश मजदूर को रेलवे पटरी पर फेंक दिया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे ने राष्ट्रीय कांग्रेस और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस का विलनिकरण होने के बारे में बड़ा बयान किया है। भविष्य में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस एकत्रित आएंगे। वे भी अब थक चुके हैं और हम भी अब तक गए हैं, ऐसा शिंदे ने कहा। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी पिछले पांच साल से महाराष्ट्र में सरकार का हिस्सा है। उसके पास कोई खास शक्तियां नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद उसने कभी धोखा नहीं दिया और न ही सरकार गिराने के लिए कोई षडयंत्र रचा। पार्टी प्रमुख ने कहा कि किसी गठबंधन में दोनों पार्टियों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है अगर अकारण गति बढ़ाई जाती है तो इससे दुर्घटना हो सकती है। भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना मिलकर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं। दोनों पार्टियों में सीट बंटवारे पर सहमति हो गई थी। लेकिन नाम वापसी के बाद साफ दिख रहा है कि गठबंधन के बावजूद कई सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी-शिवसेना के उम्मीदवार बगावत पर उतर आए हैं। बागियों ने गठबंधन के फॉर्मूले को खारिज कर दिया है और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। एआईएमआईएम चीफ सांसद असदुद्दीन ओवैसी इस वक्त महाराष्ट्र में अपनी पार्टी कैंडिडेट का जमकर प्रचार कर रहे हैं। ओवैसी के भाषणों में निशाने पर कांग्रेस पार्टी है। एक रैली में सांसद ने कांग्रेस पर फिर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा, "दुनिया के किसी भी डॉक्टर को लाया जाए, वो अब कांग्रेस पार्टी का इलाज नहीं कर सकता। दवाई देने पर नामर्द भी मर्द बन सकता है, मगर कांग्रेस अब ठीक नहीं हो सकती। " महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का माहौल इन दिनों गर्म है। ऐसे में पार्टियां दूसरे राज्यों से अपने स्टार प्रचारकों को बुलाकर तूफानी कैम्पेन कर रही हैं। मुंबई में उत्तर भारतीय मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने जनता को संबोधित किया। डिप्टी सीएम इस कैंपेन में एक विवादित बयान भी दे डाला, मौर्या ने कहा, जनता को अगर पाकिस्तान पर परमाणु बम गिराना है तो आने वाले इक्कीस तारीख को कमल का बटन दबाएं। 'जहां विश्वास है-वहां आस है! ' यह वीडियो यही दिखाता है। यह वीडियो मुंबई की लोकल ट्रेन का है। ये महिलाएं नौकरीपेशा हैं। लेकिन कामकाज के चलते इन्हें दफ्तर से छुट्टी नहीं मिली। लिहाजा उन्होंने ट्रेन में ही गरबा खेला। भागवत शहर के रेशीमबाग मैदान में स्वयंसेवकों को संबोधित कर सकते हैं, संगठन के स्वयंसेवकों तथा संघ से संबद्ध संस्थाओं के नाम भी एक संदेश जारी करेंगे। पुलिसकर्मी जब भिखारी की मौत के बाद उसकी झुग्गी पर पहंचे वहां इतनी दौलत मिली की पुलिसवाले भी हैरान हो गए। मृतक ने पैसे चार बैग में भर रखे थे। पुलिस को गिनने में करीब रातभर लग गई। महाराष्ट्र के नागपुर से एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक साठ साल के बुजुर्ग को मजदूरी मांगने पर दलालों ने तालिबानी शैली में सजा दी। उसके हाथ और पैरों की उंगुलियां काट दी। फिर बेहोश मजदूर को रेलवे पटरी पर फेंक दिया।
कई दिनों की अटकलों और कथित बातचीतों के सिलसिलों के बाद तालिबान के प्रवक्ता ने आखिरकार मजहबी उन्मादी लड़ाकों की तथाकथित कार्यवाहक सरकार की घोषणा कर दी। उन्मादी लड़ाकों के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कल ये घोषणा की। उसकी घोषणा के अनुसार, मुल्ला मुहम्मद हसन अखुंद कार्यवाहक प्रधानमंत्री, मुल्ला अब्दुल गनी बरादर कार्यवाहक उपप्रधानमंत्री और हक्कानी नेटवर्क का असदुद्दीन हक्कानी कार्यवाहक आंतरिक मंत्री बनाया जाएगा। प्रवक्ता द्वारा बताया यह भी गया है कि मुल्ला याकूब रक्षा मंत्री बनेगा। जबकि सिराजुद्दीन हक्कानी गृह मंत्री तथा मुल्ला अमीर खान को विदेश मंत्री बनाया जाना तय है। तथाकथित सरकार की घोषणा के बाद इन अटकलों का बाजार गर्म हो गया कि यह तथाकथित सरकार बैठेगी कब? पहले बताया गया था कि तालिबान की 'सरकार' 9/11 हमले की बरसी मतलब 11 सितंबर को बैठेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह तिथि घोषित की जाती है तो उसके साफ मायने होंगे कि तालिबान अमेरिका को चिढ़ाना चाहते हैं। बताते हैं इन मजहबी उन्मादी लड़ाकों की सरकार में 33 लड़ाकों को 'मंत्री' बनाया गया है। बड़े - बड़े बयानों के बावजूद इन 33 कट्टर लड़ाकों में एक भी महिला को 'मंत्री' नहीं बनाया गया है। नई सरकार का प्रमुख मुल्ला हसन तालिबान के दमदार फैसले लेने वाले जमावड़े 'रहबरी शूरा' का प्रमुख बना है। ये 'शूरा' सरकार के मंत्रिमंडल जैसा है और लड़ाकों की 'सरकार' के सभी विषयों को देखेगा। बताते हैं, मुल्ला हसन को यह जिम्मेदारी मुल्ला हिबतुल्लाह के प्रस्ताव पर दी गई है। ये मुल्ला हसन उस कंधार से है जहां तालिबान पैदा हुआ था। नई सरकार का प्रमुख मुल्ला हसन तालिबान के दमदार फैसले लेने वाले जमावड़े 'रहबरी शूरा' का प्रमुख बना है। ये 'शूरा' सरकार के मंत्रिमंडल जैसा है और लड़ाकों की 'सरकार' के सभी विषयों को देखेगा। बताते हैं, मुल्ला हसन को यह जिम्मेदारी मुल्ला हिबतुल्लाह के प्रस्ताव पर दी गई है। ये मुल्ला हसन उस कंधार से है जहां तालिबान पैदा हुआ था। वह लड़ाकों के इस गुट की नींव डालने वालों में से एक रहा है। वह 'शूरा' के मुखिया के नाते 20 साल काम देख चुका है और मुल्ला हिबतुल्लाह का नजदीकी माना जाता है। यही मुल्ला हसन ने 1996 से 2001 के दौरान लड़ाकों की तत्कालीन सरकार में विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री रह चुका है।
कई दिनों की अटकलों और कथित बातचीतों के सिलसिलों के बाद तालिबान के प्रवक्ता ने आखिरकार मजहबी उन्मादी लड़ाकों की तथाकथित कार्यवाहक सरकार की घोषणा कर दी। उन्मादी लड़ाकों के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कल ये घोषणा की। उसकी घोषणा के अनुसार, मुल्ला मुहम्मद हसन अखुंद कार्यवाहक प्रधानमंत्री, मुल्ला अब्दुल गनी बरादर कार्यवाहक उपप्रधानमंत्री और हक्कानी नेटवर्क का असदुद्दीन हक्कानी कार्यवाहक आंतरिक मंत्री बनाया जाएगा। प्रवक्ता द्वारा बताया यह भी गया है कि मुल्ला याकूब रक्षा मंत्री बनेगा। जबकि सिराजुद्दीन हक्कानी गृह मंत्री तथा मुल्ला अमीर खान को विदेश मंत्री बनाया जाना तय है। तथाकथित सरकार की घोषणा के बाद इन अटकलों का बाजार गर्म हो गया कि यह तथाकथित सरकार बैठेगी कब? पहले बताया गया था कि तालिबान की 'सरकार' नौ/ग्यारह हमले की बरसी मतलब ग्यारह सितंबर को बैठेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह तिथि घोषित की जाती है तो उसके साफ मायने होंगे कि तालिबान अमेरिका को चिढ़ाना चाहते हैं। बताते हैं इन मजहबी उन्मादी लड़ाकों की सरकार में तैंतीस लड़ाकों को 'मंत्री' बनाया गया है। बड़े - बड़े बयानों के बावजूद इन तैंतीस कट्टर लड़ाकों में एक भी महिला को 'मंत्री' नहीं बनाया गया है। नई सरकार का प्रमुख मुल्ला हसन तालिबान के दमदार फैसले लेने वाले जमावड़े 'रहबरी शूरा' का प्रमुख बना है। ये 'शूरा' सरकार के मंत्रिमंडल जैसा है और लड़ाकों की 'सरकार' के सभी विषयों को देखेगा। बताते हैं, मुल्ला हसन को यह जिम्मेदारी मुल्ला हिबतुल्लाह के प्रस्ताव पर दी गई है। ये मुल्ला हसन उस कंधार से है जहां तालिबान पैदा हुआ था। नई सरकार का प्रमुख मुल्ला हसन तालिबान के दमदार फैसले लेने वाले जमावड़े 'रहबरी शूरा' का प्रमुख बना है। ये 'शूरा' सरकार के मंत्रिमंडल जैसा है और लड़ाकों की 'सरकार' के सभी विषयों को देखेगा। बताते हैं, मुल्ला हसन को यह जिम्मेदारी मुल्ला हिबतुल्लाह के प्रस्ताव पर दी गई है। ये मुल्ला हसन उस कंधार से है जहां तालिबान पैदा हुआ था। वह लड़ाकों के इस गुट की नींव डालने वालों में से एक रहा है। वह 'शूरा' के मुखिया के नाते बीस साल काम देख चुका है और मुल्ला हिबतुल्लाह का नजदीकी माना जाता है। यही मुल्ला हसन ने एक हज़ार नौ सौ छियानवे से दो हज़ार एक के दौरान लड़ाकों की तत्कालीन सरकार में विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री रह चुका है।
अमरावती/ दि. 11- महाराष्ट्र सरकार व्दारा विद्यापीठ कानून 2016 में बदल करने का निर्णय लिया गया था. निर्णय लेने के पूर्व किसी प्रकार की चर्चा न कर कानून में बदल कर विद्यापीठ कानून पारित भी किया गया जिसका अभाविप व्दारा निषेध व्यक्त किया गया. अभाविप महानगर व्दारा तहसीलदार के मार्फत राज्यपाल को निवेदन भिजवाया गया तथा महानगर में हस्ताक्षर अभियान चलाकर विद्यार्थी, प्राध्यापक, प्राचार्य, पालक व कर्मचारियों के हस्ताक्षर लिए गए. सरकार व्दारा विद्यापीठ कानून को वापस नहीं लिया गया तो अभाविप व्दारा राज्य सरकार के खिलाफ तीव्र आंदोलन किए जाने की भी चेतावनी दी गई ऐसी जानकारी अभाविप के कार्यालय मंत्री रोहण देवर्षी ने प्रेस विज्ञप्ती व्दारा दी.
अमरावती/ दि. ग्यारह- महाराष्ट्र सरकार व्दारा विद्यापीठ कानून दो हज़ार सोलह में बदल करने का निर्णय लिया गया था. निर्णय लेने के पूर्व किसी प्रकार की चर्चा न कर कानून में बदल कर विद्यापीठ कानून पारित भी किया गया जिसका अभाविप व्दारा निषेध व्यक्त किया गया. अभाविप महानगर व्दारा तहसीलदार के मार्फत राज्यपाल को निवेदन भिजवाया गया तथा महानगर में हस्ताक्षर अभियान चलाकर विद्यार्थी, प्राध्यापक, प्राचार्य, पालक व कर्मचारियों के हस्ताक्षर लिए गए. सरकार व्दारा विद्यापीठ कानून को वापस नहीं लिया गया तो अभाविप व्दारा राज्य सरकार के खिलाफ तीव्र आंदोलन किए जाने की भी चेतावनी दी गई ऐसी जानकारी अभाविप के कार्यालय मंत्री रोहण देवर्षी ने प्रेस विज्ञप्ती व्दारा दी.
UP News: 16 अगस्त से खुलने वाले माध्यमिक स्कूलों के बारे में जानकारी देते हुए सरकार ने कहा है कि माध्यमिक स्कूल केवल 5 दिनों के लिए खोले जाएंगे। UP News: उत्तर प्रदेश सरकार 16 अगस्त दिन सोमवार से माध्यमिक स्कूलों को खोलने का फैसला किया है, लेकिन इस दौरान कुछ खास सावधानियों को भी बरतने की बात कही है। 16 अगस्त से खुलने वाले माध्यमिक स्कूलों के बारे में जानकारी देते हुए सरकार ने कहा है कि माध्यमिक स्कूल केवल 5 दिनों के लिए खोले जाएंगे। शनिवार को स्कूल नहीं खोले जाएंगे। मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि स्कूल जिस दिन भी खोले जाएंगे उस दिन प्रदेश भर के स्कूलों के निरीक्षण के लिए अधिकारियों की खास तौर पर ड्यूटी लगाई गई है। इस दौरान 60 अधिकारी एक्टिव रहकर स्कूलों की जांच पड़ताल करेंगे और वहां पर सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों के पालन की वास्तविकता को जांचने और परखने का काम करेंगे। आपको बता दें कि इस संदर्भ में माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि 16 अगस्त से कक्षा 9 से 12 तक के विद्यालय खोले जा रहे हैं। और इस दौरान स्कूलों को कुछ खास दिशा निर्देश भी दिए गए हैं, जिनका पालन करते हुए ही स्कूल कालेज खोले जाने हैं। इस संदर्भ में विशेष सचिव शम्भु कुमार, नेहा प्रकाश, उदय भानु त्रिपाठी को बाराबंकी, फतेहपुर, मिर्जापुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह शिक्षा निदेशक विनय पाण्डेय को लखनऊ, अपर निदेशक मंजू शर्मा को सीतापुर, महेन्द्र देव को मेरठ, अंजना गोयल को प्रतापगढ़, यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ला को प्रयागराज, जेडी बरेली अजय कुमार को बदायूं व शाजहांपुर, जेडी वाराणसी प्रदी कुमार को चंदौली व जौनपुर, डीडी विकास श्रीवास्तव को वाराणसी को इस बात की खास जिम्मेदारी दी गई है। ताकि प्रदेश भर में जांच पड़ताल करके वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जा सके। इसके साथ ही साथ डायट प्राचार्य व उप प्राचार्य, सहायक निदेशक, वरिष्ठ विशेषज्ञ समेत कई अधिकारियों को निरीक्षण करने का जिम्मा सौंपा गया है। इस तरह से कुल 60 अफसरों को खास तौर पर जांच पड़ताल करने की जिम्मेदारी सूची बनाकर सौंपी गयी है। आदेश में कहा गया है कि सभी अफसरों को अलग-अलग ब्लॉक, नगर या ग्रामीण क्षेत्र के कम से कम एक और न्यूनतम 10 स्कूलों की व्यवस्था का निरीक्षण करना है। इसके साथ ही साथ निरीक्षण की रिपोर्ट शाम तक निदेशालय को भेजनी होगी। जिन स्कूलों में कमियां पाई जाएंगी उनका निराकरण शिक्षा निदेशक व सचिव यूपी बोर्ड के द्वारा किया जाना है। ताकि कोरोना के खतरे को देखते हुए स्कूल कोई ढिलायी न कर सकें।
UP News: सोलह अगस्त से खुलने वाले माध्यमिक स्कूलों के बारे में जानकारी देते हुए सरकार ने कहा है कि माध्यमिक स्कूल केवल पाँच दिनों के लिए खोले जाएंगे। UP News: उत्तर प्रदेश सरकार सोलह अगस्त दिन सोमवार से माध्यमिक स्कूलों को खोलने का फैसला किया है, लेकिन इस दौरान कुछ खास सावधानियों को भी बरतने की बात कही है। सोलह अगस्त से खुलने वाले माध्यमिक स्कूलों के बारे में जानकारी देते हुए सरकार ने कहा है कि माध्यमिक स्कूल केवल पाँच दिनों के लिए खोले जाएंगे। शनिवार को स्कूल नहीं खोले जाएंगे। मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि स्कूल जिस दिन भी खोले जाएंगे उस दिन प्रदेश भर के स्कूलों के निरीक्षण के लिए अधिकारियों की खास तौर पर ड्यूटी लगाई गई है। इस दौरान साठ अधिकारी एक्टिव रहकर स्कूलों की जांच पड़ताल करेंगे और वहां पर सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों के पालन की वास्तविकता को जांचने और परखने का काम करेंगे। आपको बता दें कि इस संदर्भ में माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि सोलह अगस्त से कक्षा नौ से बारह तक के विद्यालय खोले जा रहे हैं। और इस दौरान स्कूलों को कुछ खास दिशा निर्देश भी दिए गए हैं, जिनका पालन करते हुए ही स्कूल कालेज खोले जाने हैं। इस संदर्भ में विशेष सचिव शम्भु कुमार, नेहा प्रकाश, उदय भानु त्रिपाठी को बाराबंकी, फतेहपुर, मिर्जापुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह शिक्षा निदेशक विनय पाण्डेय को लखनऊ, अपर निदेशक मंजू शर्मा को सीतापुर, महेन्द्र देव को मेरठ, अंजना गोयल को प्रतापगढ़, यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ला को प्रयागराज, जेडी बरेली अजय कुमार को बदायूं व शाजहांपुर, जेडी वाराणसी प्रदी कुमार को चंदौली व जौनपुर, डीडी विकास श्रीवास्तव को वाराणसी को इस बात की खास जिम्मेदारी दी गई है। ताकि प्रदेश भर में जांच पड़ताल करके वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जा सके। इसके साथ ही साथ डायट प्राचार्य व उप प्राचार्य, सहायक निदेशक, वरिष्ठ विशेषज्ञ समेत कई अधिकारियों को निरीक्षण करने का जिम्मा सौंपा गया है। इस तरह से कुल साठ अफसरों को खास तौर पर जांच पड़ताल करने की जिम्मेदारी सूची बनाकर सौंपी गयी है। आदेश में कहा गया है कि सभी अफसरों को अलग-अलग ब्लॉक, नगर या ग्रामीण क्षेत्र के कम से कम एक और न्यूनतम दस स्कूलों की व्यवस्था का निरीक्षण करना है। इसके साथ ही साथ निरीक्षण की रिपोर्ट शाम तक निदेशालय को भेजनी होगी। जिन स्कूलों में कमियां पाई जाएंगी उनका निराकरण शिक्षा निदेशक व सचिव यूपी बोर्ड के द्वारा किया जाना है। ताकि कोरोना के खतरे को देखते हुए स्कूल कोई ढिलायी न कर सकें।
शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने आज IGMC शिमला में कोरोना योद्धाओं को सम्मानित किया। यह कार्यक्रम पुलिस क्लब ढली द्वारा आयोजित किया गया था। पुलिस क्लब दिल्ली ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में सेवा कार्य कर रही लोक कल्याण समिति को 5 व्हीलचेयर और दो स्ट्रेचर भी दिए। इस मौके पर डॉक्टर जनक राज, कaरोना वार्ड में ड्यूटी देने वाली नर्सों और लोक कल्याण समिति के सभी स्वयं सेवकों को मंत्री ने सम्मानित किया। भारद्वाज ने इस मौके पर कोरोना के विकेट काल में काम कर रहे डॉक्टरों नर्सों और स्टाफ के अलावा उन स्वयंसेवकों का भी आभार जताया जो निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा में दिन रात लगे हैं। मंत्री ने कहा के ऐसे समय में जब एक दूसरे के संपर्क में आना कोरोना को न्योता देने के समान है डॉक्टर नर्सें मरीजों के बीच काम कर रहे हैं। पूरा-पूरा दिन पीपीटी किट में रहना ऐसी कल्पना करना भी मुश्किल है लेकिन यह लोग इन विषमताओं में काम कर रहे हैं। इसके लिए सारा समाज इनका आभारी है। मंत्री ने सफाई कर्मचारियों का दी आभार व्यक्त किया। प्रदेश सरकार ने सफाई कर्मचारियों की सेवाओं को देखते हुए 3 महीनों के लिए 2000 प्रतिमाह प्रोत्साहन देने का निर्णय भी लिया है, इसके लिए सरकार ने 2. 50 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए हैं।
शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने आज IGMC शिमला में कोरोना योद्धाओं को सम्मानित किया। यह कार्यक्रम पुलिस क्लब ढली द्वारा आयोजित किया गया था। पुलिस क्लब दिल्ली ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में सेवा कार्य कर रही लोक कल्याण समिति को पाँच व्हीलचेयर और दो स्ट्रेचर भी दिए। इस मौके पर डॉक्टर जनक राज, कaरोना वार्ड में ड्यूटी देने वाली नर्सों और लोक कल्याण समिति के सभी स्वयं सेवकों को मंत्री ने सम्मानित किया। भारद्वाज ने इस मौके पर कोरोना के विकेट काल में काम कर रहे डॉक्टरों नर्सों और स्टाफ के अलावा उन स्वयंसेवकों का भी आभार जताया जो निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा में दिन रात लगे हैं। मंत्री ने कहा के ऐसे समय में जब एक दूसरे के संपर्क में आना कोरोना को न्योता देने के समान है डॉक्टर नर्सें मरीजों के बीच काम कर रहे हैं। पूरा-पूरा दिन पीपीटी किट में रहना ऐसी कल्पना करना भी मुश्किल है लेकिन यह लोग इन विषमताओं में काम कर रहे हैं। इसके लिए सारा समाज इनका आभारी है। मंत्री ने सफाई कर्मचारियों का दी आभार व्यक्त किया। प्रदेश सरकार ने सफाई कर्मचारियों की सेवाओं को देखते हुए तीन महीनों के लिए दो हज़ार प्रतिमाह प्रोत्साहन देने का निर्णय भी लिया है, इसके लिए सरकार ने दो. पचास करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए हैं।
भोपाल। सूखीसेवनिया में स्थित गांव पोरन भावनपुरा में बने पॉल्ट्री फार्म की आड़ में चल रही जुए की फड़ पर बीती रात 11:30 बजे क्राइम ब्रांच की टीम ने घेराबंदी कर रेड की। जहां फार्म के बाहर बने एक शेड में जुआ खेलते 17 जुआरियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से फड़ में दाव पर लगे दो लाख रुपए सहित दो दर्जन से अधिक मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। फड़ का संचालन गांधी नगर का एक बदमाश कर रहा था। एसआई सुनील भदौरिया के अनुसार बीती रात मुखबिर से सूचना मिली की ग्राम पोरन भावनपुरा में बने एक पाल्ट्री फार्म में जुए की फड़ जमी है। सूचना के बाद में टीम ने स्पॉट पर पहुंचकर योजना के तहत घेराबंदी की। जिसके बाद में जुआ खेल रहे युवकों को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान कुछ लोग भागने में कामयाब रहे। हालांकि 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। फड़ में दाव पर लगे दो लाख से अधिक की नकदी को जब्त किया गया। सभी को क्राइम ब्रांच थाने में लाकर कार्रवाई की गई। आरोपियों की पहचान हरीश उवेस अहमद,मनोज,सुनील प्रीतम, फजल, उमर ,रघुवीर,प्रकाश,राजेंद्र,दीपक,बजीर,सिराज मुन्न और सलमान के रूप में की गई है। सभी शहर के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं। जुआ का संचालन सिराज कर रहा था। जिसके खिलाफ गांधी नगर में पूर्व में भी कई अपराध दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के पुराने रिकार्ड की जानकारी जुटाई जा रही है। पूछताछ में साफ हुआ कि आरोपी शहर के विभिन्न इलाकों में जगाह बदल-बदलकर जुआ का संचालन कराते हैं। हालांकि पुलिस अधिकारी क्राइम ब्रांच की इस बड़ी कार्रवाई के बाद में सूखीसेवनिया पुलिस की मिली भगत की जानकारी भी जुटा रही है। Share:
भोपाल। सूखीसेवनिया में स्थित गांव पोरन भावनपुरा में बने पॉल्ट्री फार्म की आड़ में चल रही जुए की फड़ पर बीती रात ग्यारह:तीस बजे क्राइम ब्रांच की टीम ने घेराबंदी कर रेड की। जहां फार्म के बाहर बने एक शेड में जुआ खेलते सत्रह जुआरियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से फड़ में दाव पर लगे दो लाख रुपए सहित दो दर्जन से अधिक मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। फड़ का संचालन गांधी नगर का एक बदमाश कर रहा था। एसआई सुनील भदौरिया के अनुसार बीती रात मुखबिर से सूचना मिली की ग्राम पोरन भावनपुरा में बने एक पाल्ट्री फार्म में जुए की फड़ जमी है। सूचना के बाद में टीम ने स्पॉट पर पहुंचकर योजना के तहत घेराबंदी की। जिसके बाद में जुआ खेल रहे युवकों को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान कुछ लोग भागने में कामयाब रहे। हालांकि सत्रह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। फड़ में दाव पर लगे दो लाख से अधिक की नकदी को जब्त किया गया। सभी को क्राइम ब्रांच थाने में लाकर कार्रवाई की गई। आरोपियों की पहचान हरीश उवेस अहमद,मनोज,सुनील प्रीतम, फजल, उमर ,रघुवीर,प्रकाश,राजेंद्र,दीपक,बजीर,सिराज मुन्न और सलमान के रूप में की गई है। सभी शहर के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं। जुआ का संचालन सिराज कर रहा था। जिसके खिलाफ गांधी नगर में पूर्व में भी कई अपराध दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के पुराने रिकार्ड की जानकारी जुटाई जा रही है। पूछताछ में साफ हुआ कि आरोपी शहर के विभिन्न इलाकों में जगाह बदल-बदलकर जुआ का संचालन कराते हैं। हालांकि पुलिस अधिकारी क्राइम ब्रांच की इस बड़ी कार्रवाई के बाद में सूखीसेवनिया पुलिस की मिली भगत की जानकारी भी जुटा रही है। Share:
कोडरमाः कोडरमा गया रेलखंड के बंधुआ स्टेशन (Bandhuwa Station) के पास एक मालगाड़ी की तीन बोगियां बेपटरी (Train Accident) हो गयी। मिली जानकारी के अनुसार मालगाड़ी बंधुआ रेलवे स्टेशन (Bandhuwa Railway station) को पार कर रही थी, तभी मालगाड़ी के पीछे के तीन डिब्बे का हिस्सा कटकर अलग हो गया। इस दुर्घटना के बाद ट्रेनों का परिचालन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। जिसके बाद रेलवे विभाग के अधिकारियों के द्वारा दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन (Crashed Train) को मुख्य लाइन के बगल से हटाया गया। तब जाकर मुख्य लाइन पर ट्रेनों का परिचालन सामान्य हुआ। वहीं घटना की सूचना मिलने के बाद रेलवे (Railway) के वरीय अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। जानकारी के अनुसार सोमवार की दोपहर करीब 2:45 बजे धनबाद मुख्यालय (Dhanbad Headquarters) से सूचना मिली कि बंधुआ रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी का एक वैगन डिरेल (Wagon Derailleur) हो गया है। इस सूचना पर रेल अधिकारी, RPF इंस्पेक्टर सहित अन्य मौके पर पहुंचे। यहां देखा कि घटना फाटक संख्या 40 AT Pole No. 456/28 A Point No. P 55 B पर ब्रेक से 11वां नंबर का एक वैगन (SWR-22151177844) पटरी से उतर कर पलट गया है और टेढ़ा होकर उत्तर दिशा में लटक गया है। राहत बचाव टीम (Relief Rescue Team) ने लाइन को क्लियर कर डाउन में ट्रेनों का परिचालन दोपहर 3:15 बजे शुरू कराया। जिस मालगाड़ी की बोगी डिरेल हुई है, उसमें गॉर्ड (Gord) के रूप में अरविंद कुमार सागर, लोको पायलट विकास कुमार, सह लोको पायलट मिथुन कुमार (Loco Pilot Mithun Kumar) मौजूद थे।
कोडरमाः कोडरमा गया रेलखंड के बंधुआ स्टेशन के पास एक मालगाड़ी की तीन बोगियां बेपटरी हो गयी। मिली जानकारी के अनुसार मालगाड़ी बंधुआ रेलवे स्टेशन को पार कर रही थी, तभी मालगाड़ी के पीछे के तीन डिब्बे का हिस्सा कटकर अलग हो गया। इस दुर्घटना के बाद ट्रेनों का परिचालन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। जिसके बाद रेलवे विभाग के अधिकारियों के द्वारा दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन को मुख्य लाइन के बगल से हटाया गया। तब जाकर मुख्य लाइन पर ट्रेनों का परिचालन सामान्य हुआ। वहीं घटना की सूचना मिलने के बाद रेलवे के वरीय अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। जानकारी के अनुसार सोमवार की दोपहर करीब दो:पैंतालीस बजे धनबाद मुख्यालय से सूचना मिली कि बंधुआ रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी का एक वैगन डिरेल हो गया है। इस सूचना पर रेल अधिकारी, RPF इंस्पेक्टर सहित अन्य मौके पर पहुंचे। यहां देखा कि घटना फाटक संख्या चालीस AT Pole No. चार सौ छप्पन/अट्ठाईस एम्पीयर Point No. P पचपन B पर ब्रेक से ग्यारहवां नंबर का एक वैगन पटरी से उतर कर पलट गया है और टेढ़ा होकर उत्तर दिशा में लटक गया है। राहत बचाव टीम ने लाइन को क्लियर कर डाउन में ट्रेनों का परिचालन दोपहर तीन:पंद्रह बजे शुरू कराया। जिस मालगाड़ी की बोगी डिरेल हुई है, उसमें गॉर्ड के रूप में अरविंद कुमार सागर, लोको पायलट विकास कुमार, सह लोको पायलट मिथुन कुमार मौजूद थे।
'1 TL'S ALANYASPOR'A, 1 TL'S ALTAV'A' तुर्कडोगन ने कहा कि एजेंसियों को थोक बिक्री में 17 टीएल का शुल्क भी लागू किया जाता है, "इसमें, 1 टीएल हमारे शहर के सुपर लीग के प्रतिनिधि अलान्यास्पोर को दिया जाता है, और 1 टीएल एएलटीएवी को दिया जाता है, जो हमारे अलान्या को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कार्य करता है। यह एक महत्वपूर्ण लाभ है जो हमारे शहर के लिए योगदान देता है। मुझे उम्मीद है कि यह अलान्या में पर्यटन पेशेवरों, होटल व्यवसायियों, पर्यटन श्रमिकों और व्यापारियों के लिए एक उपयोगी और लाभदायक मौसम होगा। यह एक ऐसा सीज़न था जिसकी शुरुआत उम्मीदों से थोड़ी कम हुई। हमारे व्यापारी बहुत संतुष्ट नहीं थे, लेकिन मुझे उम्मीद है कि अगली अवधि में यह एक फलदायी और शुभ मौसम होगा। मुझे अब एक हलचल दिख रही है. होटल व्यस्त हो गए, बाज़ार खचाखच भर गया और धीरे-धीरे हमारे व्यापारी भी व्यापार करने लगे। मुझे उम्मीद है कि यह सभी के लिए लाभदायक अवधि और सीज़न होगा," उन्होंने कहा। (करने के लिए haberalany - मेर्ट कैंटर्र)
'एक TL'S ALANYASPOR'A, एक TL'S ALTAV'A' तुर्कडोगन ने कहा कि एजेंसियों को थोक बिक्री में सत्रह टीएल का शुल्क भी लागू किया जाता है, "इसमें, एक टीएल हमारे शहर के सुपर लीग के प्रतिनिधि अलान्यास्पोर को दिया जाता है, और एक टीएल एएलटीएवी को दिया जाता है, जो हमारे अलान्या को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कार्य करता है। यह एक महत्वपूर्ण लाभ है जो हमारे शहर के लिए योगदान देता है। मुझे उम्मीद है कि यह अलान्या में पर्यटन पेशेवरों, होटल व्यवसायियों, पर्यटन श्रमिकों और व्यापारियों के लिए एक उपयोगी और लाभदायक मौसम होगा। यह एक ऐसा सीज़न था जिसकी शुरुआत उम्मीदों से थोड़ी कम हुई। हमारे व्यापारी बहुत संतुष्ट नहीं थे, लेकिन मुझे उम्मीद है कि अगली अवधि में यह एक फलदायी और शुभ मौसम होगा। मुझे अब एक हलचल दिख रही है. होटल व्यस्त हो गए, बाज़ार खचाखच भर गया और धीरे-धीरे हमारे व्यापारी भी व्यापार करने लगे। मुझे उम्मीद है कि यह सभी के लिए लाभदायक अवधि और सीज़न होगा," उन्होंने कहा।
वेस्टइंडीज टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल (Chris Gayle) अक्सर भारतीय खिलाड़ी और टीम को लेकर बयानबाजी करते नजर आते हैं। उन्हें कई मौकों पर टीम इंडिया की वाहवाही करते हुए देखा गया है। इस बीच उन्होंने एक और हैरान कर देने वाला बयान दिया है। हाल ही में हुए एक इंटरव्यू के दौरान क्रिस गेल (Chris Gayle) ने कहा कि भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबला द एशेज़ से भी ज्यादा रोमांचक होता है। दरअसल, हाल ही में यूनिवर्स बॉस के नाम से मशहूर वेस्टइंडीज टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल (Chris Gayle) ने टाइम्स ऑफ इंडिया को एक इंटरव्यू दिया था। जिसमें उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान की राइवलरी एशेज से भी बड़ी है। क्रिस गेल (Chris Gayle) ने कहा, बता दें कि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जाने वाली एशेज़ हमेशा से ही रोमांचक रही है। इस श्रृंखला के दौरान कई दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले हैं। लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि भारत बनाम पाकिस्तान (IND vs PAK) भिड़ंत क्रिकेट की दूसरी सबसे बड़ी राइवलरी होती है। फैंस हर साल इस मैच का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस साल 15 अक्टूबर को दोनों टीमें आमने-सामने होगी। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में यह मुकाबला खेला जाएगा। ऋषभ पंत, केएल राहुल, श्रेयस अय्यर और जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ियों के चोटिल होने की वजह से भारतीय टीम की मुश्किलें चरम पर हैं। जसप्रीत बुमराह के एशिया कप 2022 के दौरान लग गई थी। तब से ही वह क्रिकेट से दूर हैं। वहीं, केएल राहुल और श्रेयस अय्यर को इस साल चोट से जूझना पड़ा। ऋषभ पंत साल 2022 के आखिरी में भीषण एक्सीडेंट का शिकार हो गए थे। लिहाजा, फैंस वनडे वर्ल्ड कप 2023 से पहले इन खिलाड़ियों के सही होने की दुआ कर रहे हैं।
वेस्टइंडीज टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल अक्सर भारतीय खिलाड़ी और टीम को लेकर बयानबाजी करते नजर आते हैं। उन्हें कई मौकों पर टीम इंडिया की वाहवाही करते हुए देखा गया है। इस बीच उन्होंने एक और हैरान कर देने वाला बयान दिया है। हाल ही में हुए एक इंटरव्यू के दौरान क्रिस गेल ने कहा कि भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबला द एशेज़ से भी ज्यादा रोमांचक होता है। दरअसल, हाल ही में यूनिवर्स बॉस के नाम से मशहूर वेस्टइंडीज टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल ने टाइम्स ऑफ इंडिया को एक इंटरव्यू दिया था। जिसमें उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान की राइवलरी एशेज से भी बड़ी है। क्रिस गेल ने कहा, बता दें कि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जाने वाली एशेज़ हमेशा से ही रोमांचक रही है। इस श्रृंखला के दौरान कई दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले हैं। लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि भारत बनाम पाकिस्तान भिड़ंत क्रिकेट की दूसरी सबसे बड़ी राइवलरी होती है। फैंस हर साल इस मैच का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस साल पंद्रह अक्टूबर को दोनों टीमें आमने-सामने होगी। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में यह मुकाबला खेला जाएगा। ऋषभ पंत, केएल राहुल, श्रेयस अय्यर और जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ियों के चोटिल होने की वजह से भारतीय टीम की मुश्किलें चरम पर हैं। जसप्रीत बुमराह के एशिया कप दो हज़ार बाईस के दौरान लग गई थी। तब से ही वह क्रिकेट से दूर हैं। वहीं, केएल राहुल और श्रेयस अय्यर को इस साल चोट से जूझना पड़ा। ऋषभ पंत साल दो हज़ार बाईस के आखिरी में भीषण एक्सीडेंट का शिकार हो गए थे। लिहाजा, फैंस वनडे वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस से पहले इन खिलाड़ियों के सही होने की दुआ कर रहे हैं।
थानेदार ने लिया छात्रों का पक्ष, वीडियो देखते ही कप्तान ने छीनी कुर्सी. . गंगा में डूबा युवक, खेल-खेल में चुन्नी से दम घुटने पर बच्ची की मौत. . "अधिवक्ता पर तहसील कर्मी की पिटाई का आरोप, हंगामा. .
थानेदार ने लिया छात्रों का पक्ष, वीडियो देखते ही कप्तान ने छीनी कुर्सी. . गंगा में डूबा युवक, खेल-खेल में चुन्नी से दम घुटने पर बच्ची की मौत. . "अधिवक्ता पर तहसील कर्मी की पिटाई का आरोप, हंगामा. .
साउथ के सुपरस्टार सूर्या के फैंस के लिए खुशखबरी है. सूर्या की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है जो फैंस के लिए अब राहत की खबर है. उसके बाद उनके भाई कार्ती ने बताया कि सूर्या की हालत में सुधार है और वह घर पर क्वारंटीन में हैं. अब सूर्या प्रोडक्शन हाउस 2D एंटरटेनमेंट राजशेखर ने ट्विटर पर अनाउंस किया है कि सूर्या की रिपोर्ट नेगेटिव आई है. इसके साथ ही उन्होंने फैंस को सूर्या के लिए प्रेयर करने के लिए सभी को थैंक्यू. राजशेखर ने लिखा, अन्ना की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई है. थैंक्यू आपकी दुआओं और प्यार के लिए. रिपोर्ट्स के मुताबिक सूर्या अब फिल्म पंडितराज की शूटिंग शुरू करेंगे. ये सूर्या की 40वीं फिल्म है. कुछ दिनों पहले ही पूजा के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी. बता दें कि हाल ही में सूर्या की फिल्म 'सोरारई पोटरु' ऑस्कर में शामिल हुई है. यह फिल्म हिंदुस्तान में काफी नाम कमा चुकी है और अब यह दुनिया में अपना परचम लहराने की ओर कदम रख रही है. इस फिल्म को कई कैटेगरी के लिए चुना गया है. यह फिल्म एमेजॉन प्राइम पर 12 नवंबर, 2020 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म में सूर्या शिवकुमार के साथ बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल भी अहम किरदार में नजर आए. जबकि लीड रोल में सूर्या के अपोजिट एक्ट्रेस अपर्णा नजर आईं. इस फिल्म को सुधा कोन्गारा ने निर्देशित की है. इस फिल्म को तीन भाषाओं में रिलीज किया गया था.
साउथ के सुपरस्टार सूर्या के फैंस के लिए खुशखबरी है. सूर्या की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है जो फैंस के लिए अब राहत की खबर है. उसके बाद उनके भाई कार्ती ने बताया कि सूर्या की हालत में सुधार है और वह घर पर क्वारंटीन में हैं. अब सूर्या प्रोडक्शन हाउस दोD एंटरटेनमेंट राजशेखर ने ट्विटर पर अनाउंस किया है कि सूर्या की रिपोर्ट नेगेटिव आई है. इसके साथ ही उन्होंने फैंस को सूर्या के लिए प्रेयर करने के लिए सभी को थैंक्यू. राजशेखर ने लिखा, अन्ना की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई है. थैंक्यू आपकी दुआओं और प्यार के लिए. रिपोर्ट्स के मुताबिक सूर्या अब फिल्म पंडितराज की शूटिंग शुरू करेंगे. ये सूर्या की चालीसवीं फिल्म है. कुछ दिनों पहले ही पूजा के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी. बता दें कि हाल ही में सूर्या की फिल्म 'सोरारई पोटरु' ऑस्कर में शामिल हुई है. यह फिल्म हिंदुस्तान में काफी नाम कमा चुकी है और अब यह दुनिया में अपना परचम लहराने की ओर कदम रख रही है. इस फिल्म को कई कैटेगरी के लिए चुना गया है. यह फिल्म एमेजॉन प्राइम पर बारह नवंबर, दो हज़ार बीस को रिलीज हुई थी. इस फिल्म में सूर्या शिवकुमार के साथ बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल भी अहम किरदार में नजर आए. जबकि लीड रोल में सूर्या के अपोजिट एक्ट्रेस अपर्णा नजर आईं. इस फिल्म को सुधा कोन्गारा ने निर्देशित की है. इस फिल्म को तीन भाषाओं में रिलीज किया गया था.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कल मुंबई में मेक इन इंडिया सम्मेलन और प्रदर्शनी से अलग ओडिशा के मुख्य सचिव के साथ बैठक की। मंत्री महोदय के साथ पेट्रोलियम सचिव, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, एचपीसीएल और बीपीसीएल के मुख्य प्रबंध निदेशक तथा इंडियन ऑयल कारपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जबकि मुख्य सचिव के साथ विकास आयुक्त और वित्त सचिव, उद्योग सचिव, आईडीसीओ के प्रबंध निदेशक और व्यावसायिक कर आयुक्त थे। दोनों पक्षों ने पारादीप में और उसके आसपास 15 एमएमटीपीए पारादीप रिफायनरी द्वारा समर्थित पेट्रो रसायन उद्योग विकसित करने के खांके पर चर्चा की। इस पर सहमति बनी कि इंडियन ऑयल कारपोरेशन पोलीप्रोपीलिन संयंत्र विकसित करने और अन्य परियोजनाओं के लिए समय-सीमा का पालन करेगा, जो वर्तमान में कार्यान्वयन के विभिन्न स्तर पर हैं। मुख्य सचिव ने परियोजनाओं के लिए ओडिशा सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। बीपीसीएल और एचपीसीएल ने राज्य सरकार से सामान्य उपयोग सुविधा (सीयूएफ) के आधार पर एलपीजी संयंत्र के लिए कोरापुट में भूमि देने का अनुरोध किया। ओडिशा सरकार के प्रतिनिधि इस पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने के लिए राजी हुए। बैठक में मानेस्वर में सिंचित भूमि होने के कारण संबलपुर के आसपास गैर सिंचित भूमि पर बीपीसीएल और एचपीसीएल द्वारा नए स्थान को विकसित करने पर आम सहमति बनी। पेट्रोलियम मंत्री ने राज्य सरकार से भुवनेश्वर, ओडिशा में हाईड्रोकार्बन कौशल विकास संस्थान की जल्द स्थापना के लिए भूमि आवंटन का अनुरोध किया। राज्य सरकार के प्रतिनिधि इस पर त्वरित कार्रवाई के लिए राजी हुए। ओडिशा सरकार ने बीएसएफ और राज्य सरकार के हेलिकॉप्टरों के लिए कोरापुट जिले में विमान ईंधन भरने की सुविधा के लिए भी अनुरोध किया। मंत्री महोदय ने इसे प्राथमिकता पर करने का आश्वासन दिया क्योंकि कोरापुट माओवाद प्रभावित जिला है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कल मुंबई में मेक इन इंडिया सम्मेलन और प्रदर्शनी से अलग ओडिशा के मुख्य सचिव के साथ बैठक की। मंत्री महोदय के साथ पेट्रोलियम सचिव, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, एचपीसीएल और बीपीसीएल के मुख्य प्रबंध निदेशक तथा इंडियन ऑयल कारपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जबकि मुख्य सचिव के साथ विकास आयुक्त और वित्त सचिव, उद्योग सचिव, आईडीसीओ के प्रबंध निदेशक और व्यावसायिक कर आयुक्त थे। दोनों पक्षों ने पारादीप में और उसके आसपास पंद्रह एमएमटीपीए पारादीप रिफायनरी द्वारा समर्थित पेट्रो रसायन उद्योग विकसित करने के खांके पर चर्चा की। इस पर सहमति बनी कि इंडियन ऑयल कारपोरेशन पोलीप्रोपीलिन संयंत्र विकसित करने और अन्य परियोजनाओं के लिए समय-सीमा का पालन करेगा, जो वर्तमान में कार्यान्वयन के विभिन्न स्तर पर हैं। मुख्य सचिव ने परियोजनाओं के लिए ओडिशा सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। बीपीसीएल और एचपीसीएल ने राज्य सरकार से सामान्य उपयोग सुविधा के आधार पर एलपीजी संयंत्र के लिए कोरापुट में भूमि देने का अनुरोध किया। ओडिशा सरकार के प्रतिनिधि इस पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने के लिए राजी हुए। बैठक में मानेस्वर में सिंचित भूमि होने के कारण संबलपुर के आसपास गैर सिंचित भूमि पर बीपीसीएल और एचपीसीएल द्वारा नए स्थान को विकसित करने पर आम सहमति बनी। पेट्रोलियम मंत्री ने राज्य सरकार से भुवनेश्वर, ओडिशा में हाईड्रोकार्बन कौशल विकास संस्थान की जल्द स्थापना के लिए भूमि आवंटन का अनुरोध किया। राज्य सरकार के प्रतिनिधि इस पर त्वरित कार्रवाई के लिए राजी हुए। ओडिशा सरकार ने बीएसएफ और राज्य सरकार के हेलिकॉप्टरों के लिए कोरापुट जिले में विमान ईंधन भरने की सुविधा के लिए भी अनुरोध किया। मंत्री महोदय ने इसे प्राथमिकता पर करने का आश्वासन दिया क्योंकि कोरापुट माओवाद प्रभावित जिला है।
खगोलीय वस्तु और माइमस (उपग्रह) शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। खगोलीय वस्तु vs. माइमस (उपग्रह) आकाशगंगा सब से बड़ी खगोलीय वस्तुएँ होती हैं - एन॰जी॰सी॰ ४४१४ हमारे सौर मण्डल से ६ करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर एक ५५,००० प्रकाश-वर्ष के व्यास की आकाशगंगा है खगोलीय वस्तु ऐसी वस्तु को कहा जाता है जो ब्रह्माण्ड में प्राकृतिक रूप से पायी जाती है, यानि जिसकी रचना मनुष्यों ने नहीं की होती है। इसमें तारे, ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, गैलेक्सी आदि शामिल हैं। . कैसिनी द्वारा फरवरी २०१० में ली गयी माइमस की तस्वीर जिसमें हरशॅल क्रेटर नज़र आ रहा है माइमस का नक़्शा छल्लों के ऍफ़ छल्ले के पीछे माइमस माइमस हमारे सौर मण्डल के छठे ग्रह शनि का सातवा सब से बड़ा उपग्रह है। पूरे सौर मण्डल में यह बीसवा सब से बड़ा उपग्रह है। माइमस सब से छोटी ज्ञात खगोलीय वस्तु है जो अपने गुरुत्वाकर्षण के खींचाव से स्वयं को गोल कर चुकी है। माइमस का व्यास (डायामीटर) ३९६ किमी है। . खगोलीय वस्तु और माइमस (उपग्रह) आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): सौर मण्डल। सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है। इन पिंडों में आठ ग्रह, उनके 166 ज्ञात उपग्रह, पाँच बौने ग्रह और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। इन छोटे पिंडों में क्षुद्रग्रह, बर्फ़ीला काइपर घेरा के पिंड, धूमकेतु, उल्कायें और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं। सौर मंडल के चार छोटे आंतरिक ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह जिन्हें स्थलीय ग्रह कहा जाता है, मुख्यतया पत्थर और धातु से बने हैं। और इसमें क्षुद्रग्रह घेरा, चार विशाल गैस से बने बाहरी गैस दानव ग्रह, काइपर घेरा और बिखरा चक्र शामिल हैं। काल्पनिक और्ट बादल भी सनदी क्षेत्रों से लगभग एक हजार गुना दूरी से परे मौजूद हो सकता है। सूर्य से होने वाला प्लाज़्मा का प्रवाह (सौर हवा) सौर मंडल को भेदता है। यह तारे के बीच के माध्यम में एक बुलबुला बनाता है जिसे हेलिओमंडल कहते हैं, जो इससे बाहर फैल कर बिखरी हुई तश्तरी के बीच तक जाता है। . खगोलीय वस्तु 7 संबंध है और माइमस (उपग्रह) 10 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 5.88% है = 1 / (7 + 10)। यह लेख खगोलीय वस्तु और माइमस (उपग्रह) के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
खगोलीय वस्तु और माइमस शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। खगोलीय वस्तु vs. माइमस आकाशगंगा सब से बड़ी खगोलीय वस्तुएँ होती हैं - एन॰जी॰सी॰ चार हज़ार चार सौ चौदह हमारे सौर मण्डल से छः करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर एक पचपन,शून्य प्रकाश-वर्ष के व्यास की आकाशगंगा है खगोलीय वस्तु ऐसी वस्तु को कहा जाता है जो ब्रह्माण्ड में प्राकृतिक रूप से पायी जाती है, यानि जिसकी रचना मनुष्यों ने नहीं की होती है। इसमें तारे, ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, गैलेक्सी आदि शामिल हैं। . कैसिनी द्वारा फरवरी दो हज़ार दस में ली गयी माइमस की तस्वीर जिसमें हरशॅल क्रेटर नज़र आ रहा है माइमस का नक़्शा छल्लों के ऍफ़ छल्ले के पीछे माइमस माइमस हमारे सौर मण्डल के छठे ग्रह शनि का सातवा सब से बड़ा उपग्रह है। पूरे सौर मण्डल में यह बीसवा सब से बड़ा उपग्रह है। माइमस सब से छोटी ज्ञात खगोलीय वस्तु है जो अपने गुरुत्वाकर्षण के खींचाव से स्वयं को गोल कर चुकी है। माइमस का व्यास तीन सौ छियानवे किमी है। . खगोलीय वस्तु और माइमस आम में एक बात है : सौर मण्डल। सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है। इन पिंडों में आठ ग्रह, उनके एक सौ छयासठ ज्ञात उपग्रह, पाँच बौने ग्रह और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। इन छोटे पिंडों में क्षुद्रग्रह, बर्फ़ीला काइपर घेरा के पिंड, धूमकेतु, उल्कायें और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं। सौर मंडल के चार छोटे आंतरिक ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह जिन्हें स्थलीय ग्रह कहा जाता है, मुख्यतया पत्थर और धातु से बने हैं। और इसमें क्षुद्रग्रह घेरा, चार विशाल गैस से बने बाहरी गैस दानव ग्रह, काइपर घेरा और बिखरा चक्र शामिल हैं। काल्पनिक और्ट बादल भी सनदी क्षेत्रों से लगभग एक हजार गुना दूरी से परे मौजूद हो सकता है। सूर्य से होने वाला प्लाज़्मा का प्रवाह सौर मंडल को भेदता है। यह तारे के बीच के माध्यम में एक बुलबुला बनाता है जिसे हेलिओमंडल कहते हैं, जो इससे बाहर फैल कर बिखरी हुई तश्तरी के बीच तक जाता है। . खगोलीय वस्तु सात संबंध है और माइमस दस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक पाँच.अठासी% है = एक / । यह लेख खगोलीय वस्तु और माइमस के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने तेलंगाना और आन्ध्रप्रदेश के लिए 573.13 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है. केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. उन्होने कहा कि तेलंगाना के मुलुगु जिले में NH-163 के हैदराबाद-भूपालपट्टनम सेक्शन में 136.22 करोड़ रुपए की लागत से मौजूदा दो-लेन की सड़क को दो-लेन के पेव्ड शोल्डर तक चौड़ा करने की मंजूरी दे दी गई है. गडकरी ने कहा कि एनएच-167के पर पेव्ड शोल्डर के साथ दो को चार लेन किए जाने को ईपीसी मोड पर 436.91 करोड़ रुपये की कुल लागत से मंजूरी दी गई है. इसमें तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में नागरकुर्नूल जिले में कृष्णा नदी पर प्रतिष्ठित पुल भी शामिल हैं. उम्मीद है कि तेलंगाना के मुलुगु जिले में NH-163 के हैदराबाद-भूपालपट्टनम सेक्शन में दो-लेन की सड़क चौड़ी होने पर वामपंथी उग्रवाद गतिविधियों में कमी आएगी. केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि मुलुगु जिला एक वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिला है और इस खंड के विकास से सरकार को वामपंथी उग्रवाद गतिविधियों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी. साथ ही मंत्री ने बताया है कि इस खंड का विकास होने से तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के बीच अंतरराज्यीय संपर्क में भी सुधार होगा. यह परियोजनाएं तेलंगाना और आन्ध्रप्रदेश में प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे लकनावरम झील और बोगोथा झरने को जोड़ती है, इसलिए इसके विकास होने से यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कोल्लापुर में स्वीकृत प्रतिष्ठित पुल दोनों राज्यों के लिए प्रवेश द्वार होगा और इससे पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद होगी. उन्होंने कहा कि एनएच-167k हैदराबाद/कलवाकुर्थी और तिरुपति, नंद्याला/चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण स्थलों के बीच की दूरी को लगभग 80 किलोमीटर कम कर देगा. साथ ही वर्तमान में एनएच-44 का अनुसरण करने वाला यातायात पूरा होने के बाद एनएच-167k पर चला जाएगा. मंत्री ने कहा कि नंद्याला कृषि उत्पादों और वन उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है क्योंकि यह नल्लामाला वन के निकट है. इससे इन स्थानों पर व्यापार की गतिविधियों में सुविधा होगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने तेलंगाना और आन्ध्रप्रदेश के लिए पाँच सौ तिहत्तर.तेरह करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है. केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. उन्होने कहा कि तेलंगाना के मुलुगु जिले में NH-एक सौ तिरेसठ के हैदराबाद-भूपालपट्टनम सेक्शन में एक सौ छत्तीस.बाईस करोड़ रुपए की लागत से मौजूदा दो-लेन की सड़क को दो-लेन के पेव्ड शोल्डर तक चौड़ा करने की मंजूरी दे दी गई है. गडकरी ने कहा कि एनएच-एक सौ सरसठके पर पेव्ड शोल्डर के साथ दो को चार लेन किए जाने को ईपीसी मोड पर चार सौ छत्तीस.इक्यानवे करोड़ रुपये की कुल लागत से मंजूरी दी गई है. इसमें तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में नागरकुर्नूल जिले में कृष्णा नदी पर प्रतिष्ठित पुल भी शामिल हैं. उम्मीद है कि तेलंगाना के मुलुगु जिले में NH-एक सौ तिरेसठ के हैदराबाद-भूपालपट्टनम सेक्शन में दो-लेन की सड़क चौड़ी होने पर वामपंथी उग्रवाद गतिविधियों में कमी आएगी. केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि मुलुगु जिला एक वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिला है और इस खंड के विकास से सरकार को वामपंथी उग्रवाद गतिविधियों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी. साथ ही मंत्री ने बताया है कि इस खंड का विकास होने से तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के बीच अंतरराज्यीय संपर्क में भी सुधार होगा. यह परियोजनाएं तेलंगाना और आन्ध्रप्रदेश में प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे लकनावरम झील और बोगोथा झरने को जोड़ती है, इसलिए इसके विकास होने से यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कोल्लापुर में स्वीकृत प्रतिष्ठित पुल दोनों राज्यों के लिए प्रवेश द्वार होगा और इससे पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद होगी. उन्होंने कहा कि एनएच-एक सौ सरसठk हैदराबाद/कलवाकुर्थी और तिरुपति, नंद्याला/चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण स्थलों के बीच की दूरी को लगभग अस्सी किलोग्राममीटर कम कर देगा. साथ ही वर्तमान में एनएच-चौंतालीस का अनुसरण करने वाला यातायात पूरा होने के बाद एनएच-एक सौ सरसठk पर चला जाएगा. मंत्री ने कहा कि नंद्याला कृषि उत्पादों और वन उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है क्योंकि यह नल्लामाला वन के निकट है. इससे इन स्थानों पर व्यापार की गतिविधियों में सुविधा होगी।
शिमला। राज्य सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य में तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा है, जो कि चिंता का विषय है । यही नहीं, राज्य के जनजातीय इलाके जहां न के बराबर मामले सामने आते थे, आज वहां भी तेजी से केस बढ़ रहे हैं । लिहाजा परिस्थितियों पर सरकार की नजर है, जिसके बाद अब कोरोना बंदिशों को कड़ाई से लागू करने का वक्त आ गया है।
शिमला। राज्य सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य में तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा है, जो कि चिंता का विषय है । यही नहीं, राज्य के जनजातीय इलाके जहां न के बराबर मामले सामने आते थे, आज वहां भी तेजी से केस बढ़ रहे हैं । लिहाजा परिस्थितियों पर सरकार की नजर है, जिसके बाद अब कोरोना बंदिशों को कड़ाई से लागू करने का वक्त आ गया है।
हालात को देखते हुए सोमवार को प्रभावित इलाके में जाने की कोशिश कर रहे पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष और पार्टी सांसद सुकांत मजूमदार को पुलिस दल ने रोक दिया। इस दौरान मजूमदार समेत उनके चार साथियों को हिरासत में ले लिया गया। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मोमिनपुर में रविवार रात दो समुदायों के बीच हुई छिटपुट हिंसा सांप्रदायिक झड़प में बदल गई। रविवार की देर रात शुरू हुई और सोमवार सुबह तक जारी रही झड़पों को रोकने के लिए भारी पुलिस दल तैनात किया गया है। झड़प के सिलसिले में 30 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। स्थानीय निवासियों ने पुलिस को सूचित किया है कि दो समूहों के बीच पहले बहस हुई और फिर झड़प शुरू हो गई। मोमिनपुर और उससे सटे मयूरभंज रोड के कुछ घरों में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और उस प्रक्रिया में एक पुलिस उपायुक्त सहित कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। इसके बाद लोगों के एक समूह ने स्थानीय एकबलपुर थाने के सामने धरना भी दिया। हालात को देखते हुए सोमवार को प्रभावित इलाके में जाने की कोशिश कर रहे पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष और पार्टी सांसद सुकांत मजूमदार को पुलिस दल ने रोक दिया। इस दौरान मजूमदार समेत उनके चार साथियों को हिरासत में ले लिया गया। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर केंद्रीय बलों के जवानों की तैनाती की मांग की है। उन्होंने सुकांता मजूमदार को हिरासत में लेने और अशांत क्षेत्र में पहुंचने के उनके लोकतांत्रिक अधिकार से इनकार करने वाली शहर की पुलिस की भी आलोचना की। अधिकारी ने कहा कि जितना हो सके कोशिश करें। लेकिन आप बीजेपी को नहीं रोक पाएंगे।
हालात को देखते हुए सोमवार को प्रभावित इलाके में जाने की कोशिश कर रहे पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष और पार्टी सांसद सुकांत मजूमदार को पुलिस दल ने रोक दिया। इस दौरान मजूमदार समेत उनके चार साथियों को हिरासत में ले लिया गया। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मोमिनपुर में रविवार रात दो समुदायों के बीच हुई छिटपुट हिंसा सांप्रदायिक झड़प में बदल गई। रविवार की देर रात शुरू हुई और सोमवार सुबह तक जारी रही झड़पों को रोकने के लिए भारी पुलिस दल तैनात किया गया है। झड़प के सिलसिले में तीस से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। स्थानीय निवासियों ने पुलिस को सूचित किया है कि दो समूहों के बीच पहले बहस हुई और फिर झड़प शुरू हो गई। मोमिनपुर और उससे सटे मयूरभंज रोड के कुछ घरों में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और उस प्रक्रिया में एक पुलिस उपायुक्त सहित कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। इसके बाद लोगों के एक समूह ने स्थानीय एकबलपुर थाने के सामने धरना भी दिया। हालात को देखते हुए सोमवार को प्रभावित इलाके में जाने की कोशिश कर रहे पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष और पार्टी सांसद सुकांत मजूमदार को पुलिस दल ने रोक दिया। इस दौरान मजूमदार समेत उनके चार साथियों को हिरासत में ले लिया गया। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर केंद्रीय बलों के जवानों की तैनाती की मांग की है। उन्होंने सुकांता मजूमदार को हिरासत में लेने और अशांत क्षेत्र में पहुंचने के उनके लोकतांत्रिक अधिकार से इनकार करने वाली शहर की पुलिस की भी आलोचना की। अधिकारी ने कहा कि जितना हो सके कोशिश करें। लेकिन आप बीजेपी को नहीं रोक पाएंगे।
MEA ने एक बयान में कहा कनाडा में घृणा अपराधों, सांप्रदायिक हिंसा और भारत विरोधी गतिविधियों की घटनाओं में तेज वृद्धि हुई है। MEA और कनाडा में हमारे उच्चायोग / वाणिज्य दूतावास ने इन घटनाओं को कनाडा के अधिकारियों के साथ उठाया है और जांच और उचित कार्रवाई का अनुरोध किया है। गुरुवार को भारत ने कनाडा में 'तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह' पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यह 'गहरा आपत्तिजनक' था कि चरमपंथी तत्वों द्वारा इस तरह की 'राजनीति से प्रेरित' गतिविधि को एक मित्र देश में होने दिया गय। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से कनाडा के अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाया था और इस संबंध में कनाडा पर दबाव बनाना जारी रखा जायेगा। कनाडा में घृणा अपराधों, सांप्रदायिक हिंसा और भारत विरोधी गतिविधियों की घटनाओं में तेज वृद्धि के बीच सरकार ने शुक्रवार को भारतीयों को उचित सावधानी बरतने और सतर्क रहने के लिए एक सलाह जारी की। शुक्रवार को MEA ने यह भी कहा कि कनाडा में भारत के भारतीय नागरिक और छात्र भी ओटावा में भारतीय उच्चायोग या टोरंटो और वैंकूवर में भारत के महावाणिज्य दूतावास, या MADAD पोर्टल madad. gov. in के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण किसी भी आवश्यकता या आपात स्थिति में कनाडा में भारतीय नागरिकों के साथ बेहतर ढंग से जुड़ने के लिए उच्चायोग और महावाणिज्य दूतावास को सक्षम करेगा। विभिन्न देशों में रह रहे भारतीयों की सहायता के लिए विदेश मंत्रालय द्वारा स्थापित 'मदद पोर्टल' पर पिछले साढ़े सात साल में 79,403 शिकायतें आईं और अब तक 75,114 मामलों का निपटारा किया गया है। हालांकि, पोर्टल पर पिछले साढ़े तीन वर्षों में शिकायतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। विदेश मंत्रालय के 'मदद पोर्टल' पर वर्ष 2015 से जुलाई 2022 तक संकलित आंकड़ों के अनुसार अभी 4,289 शिकायतें निपटारे की प्रक्रिया में हैं।
MEA ने एक बयान में कहा कनाडा में घृणा अपराधों, सांप्रदायिक हिंसा और भारत विरोधी गतिविधियों की घटनाओं में तेज वृद्धि हुई है। MEA और कनाडा में हमारे उच्चायोग / वाणिज्य दूतावास ने इन घटनाओं को कनाडा के अधिकारियों के साथ उठाया है और जांच और उचित कार्रवाई का अनुरोध किया है। गुरुवार को भारत ने कनाडा में 'तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह' पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यह 'गहरा आपत्तिजनक' था कि चरमपंथी तत्वों द्वारा इस तरह की 'राजनीति से प्रेरित' गतिविधि को एक मित्र देश में होने दिया गय। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से कनाडा के अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाया था और इस संबंध में कनाडा पर दबाव बनाना जारी रखा जायेगा। कनाडा में घृणा अपराधों, सांप्रदायिक हिंसा और भारत विरोधी गतिविधियों की घटनाओं में तेज वृद्धि के बीच सरकार ने शुक्रवार को भारतीयों को उचित सावधानी बरतने और सतर्क रहने के लिए एक सलाह जारी की। शुक्रवार को MEA ने यह भी कहा कि कनाडा में भारत के भारतीय नागरिक और छात्र भी ओटावा में भारतीय उच्चायोग या टोरंटो और वैंकूवर में भारत के महावाणिज्य दूतावास, या MADAD पोर्टल madad. gov. in के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण किसी भी आवश्यकता या आपात स्थिति में कनाडा में भारतीय नागरिकों के साथ बेहतर ढंग से जुड़ने के लिए उच्चायोग और महावाणिज्य दूतावास को सक्षम करेगा। विभिन्न देशों में रह रहे भारतीयों की सहायता के लिए विदेश मंत्रालय द्वारा स्थापित 'मदद पोर्टल' पर पिछले साढ़े सात साल में उन्यासी,चार सौ तीन शिकायतें आईं और अब तक पचहत्तर,एक सौ चौदह मामलों का निपटारा किया गया है। हालांकि, पोर्टल पर पिछले साढ़े तीन वर्षों में शिकायतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। विदेश मंत्रालय के 'मदद पोर्टल' पर वर्ष दो हज़ार पंद्रह से जुलाई दो हज़ार बाईस तक संकलित आंकड़ों के अनुसार अभी चार,दो सौ नवासी शिकायतें निपटारे की प्रक्रिया में हैं।
और मृत्यु की आशंका से ग्रस्त रहेगा और आज से २० वर्ष बाद अपने समस्त अधिकारों से हाथ धोकर वह ऐसी रोमाचकारी मृत्यु का शिकार होगा जैसी इतिहास में यदा कदा ही होती है।" कहना न होगा कि ठीक बीस वर्ष बाद सन् १६१७ में जार-वश के निर्ममता पूर्ण वश-नाश के द्वारा यह भविष्यवाणी सही हुई । इसी प्रकार सम्राट् सप्तम एडवर्ड, महारानी विक्टोरिया, अष्टमएडवर्ड, एनी बीसेण्ट, स्वामी विवेकानन्द, मोती लाल नेहरू, कर्नल ऑर्थरलाई किचनर इत्यादि अनेक लोगों के सम्बन्ध में उसकी भविष्यवाणियों से सत्य सिद्ध हुई। सन् १६२७ में उसने 'विश्व का भविष्य' नामक एक पुस्तक लिखी थी, जिसमें भारतीय गृह युद्ध, देश का विभाजन, शरणार्थी समस्या और सम्प्रदायिक दंगों का स्पष्ट उल्लेख किया था । करो प्रतापसिंह सजा से छूटने पर उसने फिर सामुद्रिक ज्ञान का काम प्रारम्भ किया । अन्त में सन् १६३६ में होलीउड में उसकी मृत्यु हो गई । अनेक गुणावगुणों के होने पर भी इस बारे में कोई सन्देह नहीं कि कैरो की टक्कर का सामुद्रिक इन कई शतादियों में ससार में नहीं हुआ। उसके निकाले हुये सिद्धान्त सामुद्रिक - विद्या के इतिहास में आज भी प्रमाणभूत माने जाते हैं। सामुद्रिक विद्या के अन्दर उसने एक युगान्तर कर दिया। इसकी रचनाओं में 'लैंग्वेज ऑफ दी हेराड' 'बुक ऑफ नम्बर्स' 'डेन वेयर यू बॉर्न' 'गाइड क दी हैण्ड ' 'यू एण्ड युवर हैराड' इत्यादि रचनाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं । इतना प्रकाण्ड सामुद्रिक होते हुए भी 'कैरो' का व्यक्ति गत जीवन लोगों के लिए बड़ा रहस्यमय बना रहा। समाज के एक वर्ग में वह सदिग्ध और षड्यत्री समझा जाता था। ऐमे लोगों ने उस को धूर्त और पाखण्डी सिद्ध करने के लिये अनेक प्रयत्न किये, मगर उसके सामुद्रिक ज्ञान पर इन प्रयत्नों से कोई आँच नहीं आई। कई सम्भ्रान्त लोगों की हस्त रेखाएँ देख कर उसने उनके जीवन के कई गुप्त रहस्यों को प्रकट कर दिया। इससे बड़ी इलचल मची और लन्दन की पुलिस ने उसकी भविष्यवाणियों पर प्रतिबन्ध लगा दिया। इन्हीं आरोपों में वह कई देशों से निर्वासित मी किया गया । इन सब घटनाओं से परेशान होकर उसने सामुद्रिक विद्या का व्यवसाय छोड कर, शेम्पैन शराब बनाने का एक कारखाना पेरिस में खोल दिया। इसके बाद उसने 'अमेरिकन रजिस्टर' नामक एक पत्र निकाल कर पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया। उसके बाद उसने एक निजी बैंक की स्थापना की । इस व्यवसाय में किसी व्यापारी का रुपया हडप जाने के आरोप में उसे एक वर्ष की सजा भी हुईं । कैरो प्रतापसिंह पूर्वी पन्जाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री । जिनका व्यक्तित्व १० वर्ष से अधिक समय तक पञ्जाब के राजनैतिक क्षितिज पर निर्विवाद रूप से छाया रहा। श्री प्रतापसिंह कैरो का जन्म अमृतसर जिले के 'कैरो' नामक गाँव में सन् १६०१ में हुआ था । खालसा - कालेज से बी० ए० करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिये अमेरिका चले गये। वहाँ पर 'मिशीगन युनिवर्सिटी' से उन्होंने एम० ए० को डिग्री ली। उनके राजनैतिक जीवन का आरंभ अमेरिका से हुआ, जब उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिये अमेरिका में स्थापित गदर पार्टी में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू किया । सन् १९.२६ में कैरो प्रतापसिंह कांग्रेस में शामिल हो गये। उन्होंने 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन तथा 'भारत छोडो आन्दोलन में भी भाग लिया और ५ वर्ष जेल में गुजारे । भारत की स्वाधीनता के पश्चात् श्री प्रतापसिंह कैरो, डा० गोपीचन्द भार्गव और भीमसेन सच्चर की मिनिस्ट्री के बाद पज्जाब के मुख्य मंत्री बनाए गये । जिस समय प्रताप सिंह कैरो की मिनिस्ट्री का निर्माण हुआ, उस समय पज्जाब की स्थिति बड़ी विस्फोटक हो रही थी। मास्टर तारा सिंह का स्वतंत्र पञ्जाव-सूचा आन्दो
और मृत्यु की आशंका से ग्रस्त रहेगा और आज से बीस वर्ष बाद अपने समस्त अधिकारों से हाथ धोकर वह ऐसी रोमाचकारी मृत्यु का शिकार होगा जैसी इतिहास में यदा कदा ही होती है।" कहना न होगा कि ठीक बीस वर्ष बाद सन् एक हज़ार छः सौ सत्रह में जार-वश के निर्ममता पूर्ण वश-नाश के द्वारा यह भविष्यवाणी सही हुई । इसी प्रकार सम्राट् सप्तम एडवर्ड, महारानी विक्टोरिया, अष्टमएडवर्ड, एनी बीसेण्ट, स्वामी विवेकानन्द, मोती लाल नेहरू, कर्नल ऑर्थरलाई किचनर इत्यादि अनेक लोगों के सम्बन्ध में उसकी भविष्यवाणियों से सत्य सिद्ध हुई। सन् एक हज़ार छः सौ सत्ताईस में उसने 'विश्व का भविष्य' नामक एक पुस्तक लिखी थी, जिसमें भारतीय गृह युद्ध, देश का विभाजन, शरणार्थी समस्या और सम्प्रदायिक दंगों का स्पष्ट उल्लेख किया था । करो प्रतापसिंह सजा से छूटने पर उसने फिर सामुद्रिक ज्ञान का काम प्रारम्भ किया । अन्त में सन् एक हज़ार छः सौ छत्तीस में होलीउड में उसकी मृत्यु हो गई । अनेक गुणावगुणों के होने पर भी इस बारे में कोई सन्देह नहीं कि कैरो की टक्कर का सामुद्रिक इन कई शतादियों में ससार में नहीं हुआ। उसके निकाले हुये सिद्धान्त सामुद्रिक - विद्या के इतिहास में आज भी प्रमाणभूत माने जाते हैं। सामुद्रिक विद्या के अन्दर उसने एक युगान्तर कर दिया। इसकी रचनाओं में 'लैंग्वेज ऑफ दी हेराड' 'बुक ऑफ नम्बर्स' 'डेन वेयर यू बॉर्न' 'गाइड क दी हैण्ड ' 'यू एण्ड युवर हैराड' इत्यादि रचनाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं । इतना प्रकाण्ड सामुद्रिक होते हुए भी 'कैरो' का व्यक्ति गत जीवन लोगों के लिए बड़ा रहस्यमय बना रहा। समाज के एक वर्ग में वह सदिग्ध और षड्यत्री समझा जाता था। ऐमे लोगों ने उस को धूर्त और पाखण्डी सिद्ध करने के लिये अनेक प्रयत्न किये, मगर उसके सामुद्रिक ज्ञान पर इन प्रयत्नों से कोई आँच नहीं आई। कई सम्भ्रान्त लोगों की हस्त रेखाएँ देख कर उसने उनके जीवन के कई गुप्त रहस्यों को प्रकट कर दिया। इससे बड़ी इलचल मची और लन्दन की पुलिस ने उसकी भविष्यवाणियों पर प्रतिबन्ध लगा दिया। इन्हीं आरोपों में वह कई देशों से निर्वासित मी किया गया । इन सब घटनाओं से परेशान होकर उसने सामुद्रिक विद्या का व्यवसाय छोड कर, शेम्पैन शराब बनाने का एक कारखाना पेरिस में खोल दिया। इसके बाद उसने 'अमेरिकन रजिस्टर' नामक एक पत्र निकाल कर पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया। उसके बाद उसने एक निजी बैंक की स्थापना की । इस व्यवसाय में किसी व्यापारी का रुपया हडप जाने के आरोप में उसे एक वर्ष की सजा भी हुईं । कैरो प्रतापसिंह पूर्वी पन्जाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री । जिनका व्यक्तित्व दस वर्ष से अधिक समय तक पञ्जाब के राजनैतिक क्षितिज पर निर्विवाद रूप से छाया रहा। श्री प्रतापसिंह कैरो का जन्म अमृतसर जिले के 'कैरो' नामक गाँव में सन् एक हज़ार छः सौ एक में हुआ था । खालसा - कालेज से बीशून्य एशून्य करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिये अमेरिका चले गये। वहाँ पर 'मिशीगन युनिवर्सिटी' से उन्होंने एमशून्य एशून्य को डिग्री ली। उनके राजनैतिक जीवन का आरंभ अमेरिका से हुआ, जब उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिये अमेरिका में स्थापित गदर पार्टी में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू किया । सन् उन्नीस.छब्बीस में कैरो प्रतापसिंह कांग्रेस में शामिल हो गये। उन्होंने 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन तथा 'भारत छोडो आन्दोलन में भी भाग लिया और पाँच वर्ष जेल में गुजारे । भारत की स्वाधीनता के पश्चात् श्री प्रतापसिंह कैरो, डाशून्य गोपीचन्द भार्गव और भीमसेन सच्चर की मिनिस्ट्री के बाद पज्जाब के मुख्य मंत्री बनाए गये । जिस समय प्रताप सिंह कैरो की मिनिस्ट्री का निर्माण हुआ, उस समय पज्जाब की स्थिति बड़ी विस्फोटक हो रही थी। मास्टर तारा सिंह का स्वतंत्र पञ्जाव-सूचा आन्दो
उसकी उम्र साफ-साफ कोई न बताता। सगे-संबंधी कहते, बारह-तेरह होगी। यानी चौदह-पन्द्रह होने की संभावना ही ज्यादा थी। लेकिन चूँकि दया पर चल रही थी इसलिए सहमे-से भाव ने उसके नव-यौवन के आरंभ को जब्त कर रखा था। महेंद्र ने पूछा - तुम्हारा नाम? अनुकूल बाबू ने उत्साह दिया - बता बेटी, अपना नाम बता! अपने अभ्यस्त आदेश-पालन के ढंग से झुक कर उसने कहा - जी, मेरा नाम आशालता है। आशा! महेंद्र को लगा, नाम बड़ा ही करुण और स्वर बड़ा कोमल है। दोनों मित्रों ने बाहर सड़क पर आ कर गाड़ी छोड़ दी। महेंद्र बोला - बिहारी, इस लड़की को तुम हर्गिज मत छोड़ो। बिहारी ने इसका कुछ साफ जवाब न दिया। बोला - इसे देख कर इसकी मौसी याद आ जाती है। ऐसी ही भली होगी शायद! महेंद्र ने कहा - जो बोझा तुम्हारे कंधे पर लाद दिया, अब वह शायद वैसा भारी नहीं लग रहा है। बिहारी ने कहा - नहीं, लगता है तो ढो लूँगा। महेंद्र बोला - इतनी तकलीफ उठाने की क्या जरूरत है? तुम्हें बोझा लग रहा हो तो मैं उठा लूँ। बिहारी ने गंभीर हो कर महेंद्र की तरफ ताका। बोला - सच? अब भी ठीक-ठीक बता दो! यदि तुम शादी कर लो तो चाची कहीं ज्यादा खुश होंगी- उन्हें हमेशा पास रखने का मौका मिलेगा। महेंद्र बोला - पागल हो तुम! यह होना होता तो कब का हो जाता। बिहारी ने कोई एतराज न किया। चला गया और महेंद्र भी यहाँ-वहाँ भटक कर घर पहुँच गया। माँ पूरियाँ निकाल रही थीं। चाची तब तक अपनी भानजी के पास से लौट कर नहीं आई थीं। महेंद्र अकेला सूनी छत पर गया और चटाई बिछा कर लेट गया। कलकत्ता की ऊँची अट्टालिकाओं के शिखरों पर शुक्ल सप्तमी का आधा चाँद टहल रहा था। माँ ने खाने के लिए बुलाया, तो महेंद्र ने अलसाई आवाज में कहा - छोड़ो, अब उठने को जी नहीं चाहता। माँ ने कहा - तो यहीं ले आऊँ? महेंद्र बोला - आज नहीं खाऊँगा। मैं खा कर आया हूँ। माँ ने पूछा - कहाँ खाने गया था? महेंद्र बोला - बाद में बताऊँगा। वे लौटने लगीं तो थोड़ा सोचते हुए महेंद्र ने कहा - माँ! खाना यहीं ले आओ। रात में महेंद्र ठीक से सो नहीं पाया। तड़के ही वह बिहारी के घर पहुँच गया। बोला - यार, मैंने बड़ी ध्यान से सोचा और देखा कि चाची यही चाहती है कि शादी मैं ही करूँ। बिहारी बोला - इसके लिए सोचने की जरूरत नहीं थी। यह बात तो वे खुद कई बार कह चुकी हैं। महेंद्र बोला - तभी तो कहता हूँ, मैंने आशा से विवाह न किया तो उन्हें दुःख होगा। बिहारी बोला - हो सकता है! महेंद्र ने कहा, मेरा खयाल है, यह तो ज्यादती होगी। हाँ! बात तो ठीक है। बिहारी ने कहा - यह बात थोड़ी देर से आपकी समझ में आई। कल आ जातr तो अच्छा होता। महेंद्र - एक दिन बाद ही आया, तो क्या बुरा हो गया। विवाह की बात पर मन की लगाम को छोड़ना था कि महेंद्र के लिए धीरज रखना कठिन हो गया। उसके मन में आया- इस बारे में बात करने का तो कोई अर्थ नहीं है। शादी हो ही जानी चाहिए। उसने माँ से कहा - अच्छा माँ, मैं विवाह करने के लिए राजी हूँ। माँ मन-ही-मन बोलीं- समझ गई, उस दिन अचानक क्यों मँझली बहू अपनी भानजी को देखने चली गई। और क्यों महेंद्र बन-ठन कर घर से निकला। उनके अनुरोध की बार-बार उपेक्षा होती रही और अन्नपूर्णा की साजिश कारगर हो गई, इस बात से वह नाराज हो उठीं। कहा - अच्छा, मैं अच्छी-सी लड़की को देखती हूँ। आशा का जिक्र करते हुए महेंद्र ने कहा - लड़की तो मिल गई। राजलक्ष्मी बोली - उस लड़की से विवाह नहीं हो सकता, यह मैं कहे देती हूँ। महेंद्र ने बड़े संयत शब्दों में कहा - क्यों माँ, लड़की बुरी तो नहीं है। राजलक्ष्मी- उसके तीनों कुल में कोई नहीं। ऐसी लड़की से विवाह रच कर कुटुंब को सुख भी न मिल सकेगा। महेंद्र - कुटुंब को सुख मिले न मिले, लड़की मुझे खूब पसंद है। उससे शादी न हुई तो मैं दुखी हो जाऊँगा। लड़के की जिद से राजलक्ष्मी और सख्त हो गईं। वह अन्नपूर्णा से भिड़ गईं- एक अनाथ से विवाह करा कर तुम मेरे लड़के को फँसा रही हो। यह हरकत है। अन्नपूर्णा रो पड़ीं - उससे तो शादी की कोई बात ही नहीं हुई, उसने तुम्हें क्या कहा, इसकी मुझे जरा भी खबर नहीं। राजलक्ष्मी इसका रत्ती- भर यकीन न कर सकीं। अन्नपूर्णा ने बिहारी को बुलवाया और आँसू भर कर कहा - तय तो सब तुमसे हुआ था, फिर तुमने पासा क्यों पलट दिया? मैं कहे देती हूँ शादी तो तुम्हें ही करनी पड़ेगी। यह बेड़ा तुम न पार करोगे तो मुझे बड़ी शर्मिंदगी उठानी होगी। वैसे लड़की अच्छी है। अन्नपूर्णा बोलीं- नहीं-नहीं बेटे, महेंद्र से उसका विवाह किसी भी हालत में न होगा। यकीन मानो, तुमसे विवाह हो, तभी मैं ज्यादा निश्चिंत हो सकूँगी। महेंद्र से रिश्ता हो यह मैं चाहती भी नहीं। बिहारी बोला - तुम्हीं नहीं चाहतीं तो कोई बात नहीं। और वह राजलक्ष्मी के पास जा कर बोला - माँ, चाची की भानजी से मेरी शादी पक्की हो गई। सगे-संबंधियों में तो कोई महिला है नहीं, इसलिए मैं ही खबर देने आया हूँ। राजलक्ष्मी- अच्छा! बड़ी खुशी हुई बिहारी, सुन कर। लड़की बड़ी भली है। तेरे लायक। इसे हाथ से जाने मत देना! बिहारी - हाथ से बाहर होने का सवाल ही क्या! खुद महेंद्र भैया ने लड़की पसंद करके रिश्ता पक्का किया है। इन झंझट से महेंद्र और भी उत्तेजित हो गया। माँ और चाची से नाराज हो कर वह मामूली-से हॉस्टल में जा कर रहने लगा। राजलक्ष्मी रोती हुई अन्नपूर्णा के कमरे में पहुँचीं कहा - मँझली बहू, लगता है, उदास हो कर महेंद्र ने घर छोड़ दिया, उसे बचाओ! अन्नपूर्णा बोलीं- दीदी, धीरज रखो, दो दिन के बाद गुस्सा उतर जाएगा। अन्नपूर्णा- भला यह कैसे होगा दीदी, बिहारी से बात लगभग पक्की हो चुकी। राजलक्ष्मी बोली - हो चुकी, तो टूटने में देर कितनी लगती है? और उन्होंने बिहारी को बुलवाया। कहा - तुम्हारे लिए मैं दूसरी लड़की ढूँढ़ देती हूँ- मगर इससे तुम्हें बाज आना पड़ेगा। बिहारी बोला - नहीं माँ, यह नहीं होगा। सब तय हो चुका है। राजलक्ष्मी फिर अन्नपूर्णा के पास गईं। बोलीं- मेरे सिर की कसम मँझली, मैं तुम्हारे पैरों पड़ती हूँ... तुम्हीं बिहारी से कहो! तुम कहोगी तो बिगड़ी बन जाएगी। आखिर अन्नपूर्णा ने बिहारी से कहा - बेटा, तुमसे कुछ कहने का मुँह नहीं है, मगर लाचारी है क्या करूँ। आशा को तुम्हें सौंप कर ही मैं निश्चिंत होती, मगर क्या बताऊँ, सब तो तुम्हें पता है ही। बिहारी - समझ गया। तुम जो हुक्म करोगी, वही होगा। लेकिन फिर कभी किसी से विवाह करने का मुझसे आग्रह मत करना! बिहारी चला गया। अन्नपूर्णा की आँखें छलछला गईं। महेंद्र का अमंगल न हो, इस आशंका से उन्होंने आँखें पोंछ लीं। बार-बार दिल को दिलासा दिया- जो हुआ, अच्छा ही हुआ। और इस तरह राजलक्ष्मी-अन्नपूर्णा-महेंद्र में किल-किल चलते-चलते आखिर विवाह का दिन आया। रोशनी हँसती हुई जली, शहनाई उतनी ही मधुर बजी जितनी वह बजा करती है। यानी उसके दिल के साथ कोई न था। सज-सँवर कर लज्जित और मुग्ध-मन आशा अपनी नई दुनिया में पहली बार आई। उसके कंपित कोमल हृदय को पता ही न चला कि उसके इस बसेरे में कहीं काँटा है। बल्कि यह सोच कर भरोसे और आनंद से उसके सारे ही संदेह जाते रहे कि इस दुनिया में एकमात्र माँ-जैसी अपनी मौसी के पास जा रही है। विवाह के बाद राजलक्ष्मी ने कहा - मैं कहती हूँ, अभी कुछ दिन बहू अपने बड़े चाचा के घर ही रहे। महेंद्र ने पूछा - ऐसा क्यों, माँ? माँ ने कहा - तुम्हारा इम्तहान है। पढ़ाई-लिखाई में रुकावट पड़ सकती है। महेंद्र बोला - आखिर मैं कोई नन्हा-नादान हूँ! अपने भले-बुरे की समझ नहीं मुझे? राजलक्ष्मी- जो हो, साल-भर की ही तो बात है। महेंद्र ने कहा - इसके माँ-बाप रहे होते, तो मुझे कोई एतराज न होता लेकिन चाचा के यहाँ इसे मैं नहीं छोड़ सकता। राजलक्ष्मी (अपने आप)- बाप रे आप ही मालिक, सास कोई नहीं! कल शादी और आज ही इतनी हमदर्दी! आखिर हमारी भी तो शादी हुई थी। मगर तब ऐसी बेहयाई न थी। महेंद्र ने दृढ़ता से कहा - तुम बिलकुल मत सोचो, माँ! इम्तहान में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। आखिर राजलक्ष्मी असीम उत्साह से बहू को गृहस्थी के काम-काज सिखाने में जुट गई। भंडार, रसोई और पूजा-घर में आशा के दिन कटने लगे, रात को अपने साथ सुला कर वह उसके आत्मीय बिछोह की कमी को पूरा करने लगीं। काफी सोच-समझ कर अन्नपूर्णा आशा से दूर ही रहा करती। कोई अभिभावक जब खुद सारी ईख का रस चूसने लगता है, तब निराश बच्चे की रंजिश कम नहीं होती। महेंद्र की हालत भी वैसी ही हो गई। उसकी आँखों के सामने ही नव-युवती वधू का सारा मीठा रस गिरस्ती के कामों में निचुड़ता रहे, यह भला कैसे सहा जा सकता है। अन्नपूर्णा जानती थी कि राजलक्ष्मी ज्यादती कर रही हैx। फिर भी उन्होंने कहा - क्यों बेटे, बहू को गृहस्थी के धंधे सिखाए जा रहे हैं अच्छा ही तो है। आजकल की लड़कियों की तरह उपन्यास पढ़ना, कार्पेट बुनना और सिर्फ बाबू बने रहना क्या अच्छा है? महेंद्र उत्तेजित हो कर बोला - आजकल की लड़कियाँ आजकल की लड़कियों की तरह ही रहेंगी। वह चाहे भली हों, चाहे बुरी। मेरी स्त्री अगर मेरी ही तरह उपन्यास पढ़ कर रस ले सके तो इसमें क्या बुरी बात है। यह न तो परिहास की बात है न पछतावे की। अन्नपूर्णा के कमरे में बेटे की आवाज सुन कर राजलक्ष्मी सब छोड़ कर आ गईं। रूखे स्वर में बोलीं- क्या मनसूबे बनाए जा रहे हैं? महेंद्र ने वैसे ही उत्तेजित भाव से कहा, मनसूबे क्या होंगे, बहू को घर में नौकरानी की तरह काम मैं न करने दूँगा। माँ ने अपनी तीखी जलन को दबा कर बड़े ही तीखे धीर भाव से कहा - आखिर उससे क्या कराना होगा? महेंद्र बोला - मैं उसे लिखना-पढ़ना सिखाऊँगा। राजलक्ष्मी कुछ न बोली। तेजी से कदम बढ़ाती हुई चली गईं और बहू का हाथ पकड़ कर खींचती हुई महेंद्र के पास ला कर बोली - यह रही तुम्हारी बहू, सिखाओ लिखना-पढ़ना! और अन्नपूर्णा की तरफ पलट कर गले में अँचल डाल कर कहा - माफ करो मँझली बहू, माफ करो! तुम्हारी भानजी की मर्यादा मेरी समझ में न आई। मैंने इसके कोमल हाथों में हल्दी लगाई है। अब तुम इसे धो-पोंछ कर परी बना कर रखो- महेंद्र को सौंपो- ये आराम से लिखना-पढ़ना सीखे, नौकरानी का काम मैं करूँगी। राजलक्ष्मी अपने कमरे में चली गईं और दरवाजा जोर से बंद कर लिया। क्षोभ से अन्नपूर्णा जमीन पर बैठ गईं। अचानक यह क्या हो गया, आशा के पल्ले नहीं पड़ा कि माजरा क्या है? महेंद्र नाराज हो गया। मन-ही-मन बोला - जो हुआ सो हुआ, अब से अपनी स्त्री का भार अपने हाथों में लेना पड़ेगा, नहीं तो जुल्म होगा। मन और कर्तव्य बोध दोनों मिल जाएँ तो अच्छा लगता है। पत्नी की उन्नति के चक्कर में महेंद्र रम गया। न तो उसे काम का ध्यान रहा न लोगों की परवाह। घमंडी राजलक्ष्मी ने अपने आप कहा - अब अगर महेंद्र बीवी को ले कर मेरे दरवाजे पर सिर पीट कर जान दे दे तो भी मैं मुड़ कर नहीं देखूँगी। देखती हूँ, माँ को छोड़ कर बीवी के साथ कैसे रहेगा? दिन बीतने लगे। राजलक्ष्मी के दरवाजे पर किसी अनुतप्त के पाँवों की आहट न सुनाई पड़ी। राजलक्ष्मी ने अपने मन में तय किया- अच्छा, माफी माँगने आएगा तो माफ कर दूँगी, नहीं तो कहाँ जाएगा। बहुत दुखी हो जाएगा बेचारा। लेकिन माफी कोई माँगे तभी तो आप माफ कर सकते हैं। कोई माफी के लिए दहलीज पर आया ही नहीं। राजलक्ष्मी ने सोचा कि मैं ही जा कर उसे क्षमा कर आऊँगी। लड़का रूठ गया है तो क्या माँ भी रूठी रहे! तिमंजिले पर एक कोने के छोटे-से कमरे में महेंद्र सोया करता था, वही उसकी पढ़ने की जगह भी थी। इधर कई दिनों से माँ ने उसके कपड़े सहेजने, बिस्तर बिछाने, झाड़ने-बुहारने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। मातृ-स्नेह के जिन कर्तव्यों की वह आदी थीं, बहुत दिनों तक उन कामों को न करने से वही दुखी हो गईं। उस दिन दोपहर को एकाएक मन में आया, अभी महेंद्र कॉलेज गया होगा, इसी बीच उसका कमरा ठीक कर आऊँ, लौट कर वह समझ जाएगा कि कमरे से माँ का हाथ फिरा है।
उसकी उम्र साफ-साफ कोई न बताता। सगे-संबंधी कहते, बारह-तेरह होगी। यानी चौदह-पन्द्रह होने की संभावना ही ज्यादा थी। लेकिन चूँकि दया पर चल रही थी इसलिए सहमे-से भाव ने उसके नव-यौवन के आरंभ को जब्त कर रखा था। महेंद्र ने पूछा - तुम्हारा नाम? अनुकूल बाबू ने उत्साह दिया - बता बेटी, अपना नाम बता! अपने अभ्यस्त आदेश-पालन के ढंग से झुक कर उसने कहा - जी, मेरा नाम आशालता है। आशा! महेंद्र को लगा, नाम बड़ा ही करुण और स्वर बड़ा कोमल है। दोनों मित्रों ने बाहर सड़क पर आ कर गाड़ी छोड़ दी। महेंद्र बोला - बिहारी, इस लड़की को तुम हर्गिज मत छोड़ो। बिहारी ने इसका कुछ साफ जवाब न दिया। बोला - इसे देख कर इसकी मौसी याद आ जाती है। ऐसी ही भली होगी शायद! महेंद्र ने कहा - जो बोझा तुम्हारे कंधे पर लाद दिया, अब वह शायद वैसा भारी नहीं लग रहा है। बिहारी ने कहा - नहीं, लगता है तो ढो लूँगा। महेंद्र बोला - इतनी तकलीफ उठाने की क्या जरूरत है? तुम्हें बोझा लग रहा हो तो मैं उठा लूँ। बिहारी ने गंभीर हो कर महेंद्र की तरफ ताका। बोला - सच? अब भी ठीक-ठीक बता दो! यदि तुम शादी कर लो तो चाची कहीं ज्यादा खुश होंगी- उन्हें हमेशा पास रखने का मौका मिलेगा। महेंद्र बोला - पागल हो तुम! यह होना होता तो कब का हो जाता। बिहारी ने कोई एतराज न किया। चला गया और महेंद्र भी यहाँ-वहाँ भटक कर घर पहुँच गया। माँ पूरियाँ निकाल रही थीं। चाची तब तक अपनी भानजी के पास से लौट कर नहीं आई थीं। महेंद्र अकेला सूनी छत पर गया और चटाई बिछा कर लेट गया। कलकत्ता की ऊँची अट्टालिकाओं के शिखरों पर शुक्ल सप्तमी का आधा चाँद टहल रहा था। माँ ने खाने के लिए बुलाया, तो महेंद्र ने अलसाई आवाज में कहा - छोड़ो, अब उठने को जी नहीं चाहता। माँ ने कहा - तो यहीं ले आऊँ? महेंद्र बोला - आज नहीं खाऊँगा। मैं खा कर आया हूँ। माँ ने पूछा - कहाँ खाने गया था? महेंद्र बोला - बाद में बताऊँगा। वे लौटने लगीं तो थोड़ा सोचते हुए महेंद्र ने कहा - माँ! खाना यहीं ले आओ। रात में महेंद्र ठीक से सो नहीं पाया। तड़के ही वह बिहारी के घर पहुँच गया। बोला - यार, मैंने बड़ी ध्यान से सोचा और देखा कि चाची यही चाहती है कि शादी मैं ही करूँ। बिहारी बोला - इसके लिए सोचने की जरूरत नहीं थी। यह बात तो वे खुद कई बार कह चुकी हैं। महेंद्र बोला - तभी तो कहता हूँ, मैंने आशा से विवाह न किया तो उन्हें दुःख होगा। बिहारी बोला - हो सकता है! महेंद्र ने कहा, मेरा खयाल है, यह तो ज्यादती होगी। हाँ! बात तो ठीक है। बिहारी ने कहा - यह बात थोड़ी देर से आपकी समझ में आई। कल आ जातr तो अच्छा होता। महेंद्र - एक दिन बाद ही आया, तो क्या बुरा हो गया। विवाह की बात पर मन की लगाम को छोड़ना था कि महेंद्र के लिए धीरज रखना कठिन हो गया। उसके मन में आया- इस बारे में बात करने का तो कोई अर्थ नहीं है। शादी हो ही जानी चाहिए। उसने माँ से कहा - अच्छा माँ, मैं विवाह करने के लिए राजी हूँ। माँ मन-ही-मन बोलीं- समझ गई, उस दिन अचानक क्यों मँझली बहू अपनी भानजी को देखने चली गई। और क्यों महेंद्र बन-ठन कर घर से निकला। उनके अनुरोध की बार-बार उपेक्षा होती रही और अन्नपूर्णा की साजिश कारगर हो गई, इस बात से वह नाराज हो उठीं। कहा - अच्छा, मैं अच्छी-सी लड़की को देखती हूँ। आशा का जिक्र करते हुए महेंद्र ने कहा - लड़की तो मिल गई। राजलक्ष्मी बोली - उस लड़की से विवाह नहीं हो सकता, यह मैं कहे देती हूँ। महेंद्र ने बड़े संयत शब्दों में कहा - क्यों माँ, लड़की बुरी तो नहीं है। राजलक्ष्मी- उसके तीनों कुल में कोई नहीं। ऐसी लड़की से विवाह रच कर कुटुंब को सुख भी न मिल सकेगा। महेंद्र - कुटुंब को सुख मिले न मिले, लड़की मुझे खूब पसंद है। उससे शादी न हुई तो मैं दुखी हो जाऊँगा। लड़के की जिद से राजलक्ष्मी और सख्त हो गईं। वह अन्नपूर्णा से भिड़ गईं- एक अनाथ से विवाह करा कर तुम मेरे लड़के को फँसा रही हो। यह हरकत है। अन्नपूर्णा रो पड़ीं - उससे तो शादी की कोई बात ही नहीं हुई, उसने तुम्हें क्या कहा, इसकी मुझे जरा भी खबर नहीं। राजलक्ष्मी इसका रत्ती- भर यकीन न कर सकीं। अन्नपूर्णा ने बिहारी को बुलवाया और आँसू भर कर कहा - तय तो सब तुमसे हुआ था, फिर तुमने पासा क्यों पलट दिया? मैं कहे देती हूँ शादी तो तुम्हें ही करनी पड़ेगी। यह बेड़ा तुम न पार करोगे तो मुझे बड़ी शर्मिंदगी उठानी होगी। वैसे लड़की अच्छी है। अन्नपूर्णा बोलीं- नहीं-नहीं बेटे, महेंद्र से उसका विवाह किसी भी हालत में न होगा। यकीन मानो, तुमसे विवाह हो, तभी मैं ज्यादा निश्चिंत हो सकूँगी। महेंद्र से रिश्ता हो यह मैं चाहती भी नहीं। बिहारी बोला - तुम्हीं नहीं चाहतीं तो कोई बात नहीं। और वह राजलक्ष्मी के पास जा कर बोला - माँ, चाची की भानजी से मेरी शादी पक्की हो गई। सगे-संबंधियों में तो कोई महिला है नहीं, इसलिए मैं ही खबर देने आया हूँ। राजलक्ष्मी- अच्छा! बड़ी खुशी हुई बिहारी, सुन कर। लड़की बड़ी भली है। तेरे लायक। इसे हाथ से जाने मत देना! बिहारी - हाथ से बाहर होने का सवाल ही क्या! खुद महेंद्र भैया ने लड़की पसंद करके रिश्ता पक्का किया है। इन झंझट से महेंद्र और भी उत्तेजित हो गया। माँ और चाची से नाराज हो कर वह मामूली-से हॉस्टल में जा कर रहने लगा। राजलक्ष्मी रोती हुई अन्नपूर्णा के कमरे में पहुँचीं कहा - मँझली बहू, लगता है, उदास हो कर महेंद्र ने घर छोड़ दिया, उसे बचाओ! अन्नपूर्णा बोलीं- दीदी, धीरज रखो, दो दिन के बाद गुस्सा उतर जाएगा। अन्नपूर्णा- भला यह कैसे होगा दीदी, बिहारी से बात लगभग पक्की हो चुकी। राजलक्ष्मी बोली - हो चुकी, तो टूटने में देर कितनी लगती है? और उन्होंने बिहारी को बुलवाया। कहा - तुम्हारे लिए मैं दूसरी लड़की ढूँढ़ देती हूँ- मगर इससे तुम्हें बाज आना पड़ेगा। बिहारी बोला - नहीं माँ, यह नहीं होगा। सब तय हो चुका है। राजलक्ष्मी फिर अन्नपूर्णा के पास गईं। बोलीं- मेरे सिर की कसम मँझली, मैं तुम्हारे पैरों पड़ती हूँ... तुम्हीं बिहारी से कहो! तुम कहोगी तो बिगड़ी बन जाएगी। आखिर अन्नपूर्णा ने बिहारी से कहा - बेटा, तुमसे कुछ कहने का मुँह नहीं है, मगर लाचारी है क्या करूँ। आशा को तुम्हें सौंप कर ही मैं निश्चिंत होती, मगर क्या बताऊँ, सब तो तुम्हें पता है ही। बिहारी - समझ गया। तुम जो हुक्म करोगी, वही होगा। लेकिन फिर कभी किसी से विवाह करने का मुझसे आग्रह मत करना! बिहारी चला गया। अन्नपूर्णा की आँखें छलछला गईं। महेंद्र का अमंगल न हो, इस आशंका से उन्होंने आँखें पोंछ लीं। बार-बार दिल को दिलासा दिया- जो हुआ, अच्छा ही हुआ। और इस तरह राजलक्ष्मी-अन्नपूर्णा-महेंद्र में किल-किल चलते-चलते आखिर विवाह का दिन आया। रोशनी हँसती हुई जली, शहनाई उतनी ही मधुर बजी जितनी वह बजा करती है। यानी उसके दिल के साथ कोई न था। सज-सँवर कर लज्जित और मुग्ध-मन आशा अपनी नई दुनिया में पहली बार आई। उसके कंपित कोमल हृदय को पता ही न चला कि उसके इस बसेरे में कहीं काँटा है। बल्कि यह सोच कर भरोसे और आनंद से उसके सारे ही संदेह जाते रहे कि इस दुनिया में एकमात्र माँ-जैसी अपनी मौसी के पास जा रही है। विवाह के बाद राजलक्ष्मी ने कहा - मैं कहती हूँ, अभी कुछ दिन बहू अपने बड़े चाचा के घर ही रहे। महेंद्र ने पूछा - ऐसा क्यों, माँ? माँ ने कहा - तुम्हारा इम्तहान है। पढ़ाई-लिखाई में रुकावट पड़ सकती है। महेंद्र बोला - आखिर मैं कोई नन्हा-नादान हूँ! अपने भले-बुरे की समझ नहीं मुझे? राजलक्ष्मी- जो हो, साल-भर की ही तो बात है। महेंद्र ने कहा - इसके माँ-बाप रहे होते, तो मुझे कोई एतराज न होता लेकिन चाचा के यहाँ इसे मैं नहीं छोड़ सकता। राजलक्ष्मी - बाप रे आप ही मालिक, सास कोई नहीं! कल शादी और आज ही इतनी हमदर्दी! आखिर हमारी भी तो शादी हुई थी। मगर तब ऐसी बेहयाई न थी। महेंद्र ने दृढ़ता से कहा - तुम बिलकुल मत सोचो, माँ! इम्तहान में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। आखिर राजलक्ष्मी असीम उत्साह से बहू को गृहस्थी के काम-काज सिखाने में जुट गई। भंडार, रसोई और पूजा-घर में आशा के दिन कटने लगे, रात को अपने साथ सुला कर वह उसके आत्मीय बिछोह की कमी को पूरा करने लगीं। काफी सोच-समझ कर अन्नपूर्णा आशा से दूर ही रहा करती। कोई अभिभावक जब खुद सारी ईख का रस चूसने लगता है, तब निराश बच्चे की रंजिश कम नहीं होती। महेंद्र की हालत भी वैसी ही हो गई। उसकी आँखों के सामने ही नव-युवती वधू का सारा मीठा रस गिरस्ती के कामों में निचुड़ता रहे, यह भला कैसे सहा जा सकता है। अन्नपूर्णा जानती थी कि राजलक्ष्मी ज्यादती कर रही हैx। फिर भी उन्होंने कहा - क्यों बेटे, बहू को गृहस्थी के धंधे सिखाए जा रहे हैं अच्छा ही तो है। आजकल की लड़कियों की तरह उपन्यास पढ़ना, कार्पेट बुनना और सिर्फ बाबू बने रहना क्या अच्छा है? महेंद्र उत्तेजित हो कर बोला - आजकल की लड़कियाँ आजकल की लड़कियों की तरह ही रहेंगी। वह चाहे भली हों, चाहे बुरी। मेरी स्त्री अगर मेरी ही तरह उपन्यास पढ़ कर रस ले सके तो इसमें क्या बुरी बात है। यह न तो परिहास की बात है न पछतावे की। अन्नपूर्णा के कमरे में बेटे की आवाज सुन कर राजलक्ष्मी सब छोड़ कर आ गईं। रूखे स्वर में बोलीं- क्या मनसूबे बनाए जा रहे हैं? महेंद्र ने वैसे ही उत्तेजित भाव से कहा, मनसूबे क्या होंगे, बहू को घर में नौकरानी की तरह काम मैं न करने दूँगा। माँ ने अपनी तीखी जलन को दबा कर बड़े ही तीखे धीर भाव से कहा - आखिर उससे क्या कराना होगा? महेंद्र बोला - मैं उसे लिखना-पढ़ना सिखाऊँगा। राजलक्ष्मी कुछ न बोली। तेजी से कदम बढ़ाती हुई चली गईं और बहू का हाथ पकड़ कर खींचती हुई महेंद्र के पास ला कर बोली - यह रही तुम्हारी बहू, सिखाओ लिखना-पढ़ना! और अन्नपूर्णा की तरफ पलट कर गले में अँचल डाल कर कहा - माफ करो मँझली बहू, माफ करो! तुम्हारी भानजी की मर्यादा मेरी समझ में न आई। मैंने इसके कोमल हाथों में हल्दी लगाई है। अब तुम इसे धो-पोंछ कर परी बना कर रखो- महेंद्र को सौंपो- ये आराम से लिखना-पढ़ना सीखे, नौकरानी का काम मैं करूँगी। राजलक्ष्मी अपने कमरे में चली गईं और दरवाजा जोर से बंद कर लिया। क्षोभ से अन्नपूर्णा जमीन पर बैठ गईं। अचानक यह क्या हो गया, आशा के पल्ले नहीं पड़ा कि माजरा क्या है? महेंद्र नाराज हो गया। मन-ही-मन बोला - जो हुआ सो हुआ, अब से अपनी स्त्री का भार अपने हाथों में लेना पड़ेगा, नहीं तो जुल्म होगा। मन और कर्तव्य बोध दोनों मिल जाएँ तो अच्छा लगता है। पत्नी की उन्नति के चक्कर में महेंद्र रम गया। न तो उसे काम का ध्यान रहा न लोगों की परवाह। घमंडी राजलक्ष्मी ने अपने आप कहा - अब अगर महेंद्र बीवी को ले कर मेरे दरवाजे पर सिर पीट कर जान दे दे तो भी मैं मुड़ कर नहीं देखूँगी। देखती हूँ, माँ को छोड़ कर बीवी के साथ कैसे रहेगा? दिन बीतने लगे। राजलक्ष्मी के दरवाजे पर किसी अनुतप्त के पाँवों की आहट न सुनाई पड़ी। राजलक्ष्मी ने अपने मन में तय किया- अच्छा, माफी माँगने आएगा तो माफ कर दूँगी, नहीं तो कहाँ जाएगा। बहुत दुखी हो जाएगा बेचारा। लेकिन माफी कोई माँगे तभी तो आप माफ कर सकते हैं। कोई माफी के लिए दहलीज पर आया ही नहीं। राजलक्ष्मी ने सोचा कि मैं ही जा कर उसे क्षमा कर आऊँगी। लड़का रूठ गया है तो क्या माँ भी रूठी रहे! तिमंजिले पर एक कोने के छोटे-से कमरे में महेंद्र सोया करता था, वही उसकी पढ़ने की जगह भी थी। इधर कई दिनों से माँ ने उसके कपड़े सहेजने, बिस्तर बिछाने, झाड़ने-बुहारने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। मातृ-स्नेह के जिन कर्तव्यों की वह आदी थीं, बहुत दिनों तक उन कामों को न करने से वही दुखी हो गईं। उस दिन दोपहर को एकाएक मन में आया, अभी महेंद्र कॉलेज गया होगा, इसी बीच उसका कमरा ठीक कर आऊँ, लौट कर वह समझ जाएगा कि कमरे से माँ का हाथ फिरा है।
राजकुमार राव व पत्रलेखा ने अपनी शादी के बाद अपना आशियाना सजाना शुरू कर दिया है। इस नए जोड़े ने अपने सपने का नया आशियाना जुहू में बनाया है जिसकी कीमत सुनकर किसी की भी आँखें फै रह जाएंगी। राजकुमार राव ने मुंबई के जुहू में अपनी रूही की सह-कलाकार जान्हवी से 44 करोड़ रुपये में एक लक्ज़री ट्रिपल अपार्टमेंट खरीदा है। राजकुमार और जाह्नवी फिल्म 'रूही' में साथ काम कर चुके हैं। और जल्द ही Mr एंड Mrs माही में साह दिखाई देंगे। राजकुमार इस घर को खरीद कर काफी खुश हैं। वहीं, जाह्नवी को इसे बेचने पर करोड़ों का फायदा भी हुआ है। दिसंबर 2020 में 39 करोड़ रुपये में खरीदने के बाद जान्हवी ने राजकुमार और उनकी पत्नी पत्रलेखा को फ्लैट बेच दिया है। 3,456 वर्ग फुट में लगभग 1. 27 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट में फैला यह अपार्टमेंट इसे देश के अब तक के सबसे महंगे आवासीय सौदों में से एक बनाता है। जाह्नवी कपूर ने खुद इस प्रॉपर्टी को आज से 2 साल पहले खरीदा था। जाह्नवी ने इसे दिसंबर 2020 में कथित तौर पर 39 करोड़ रुपये में खरीदा था। इस डील से जाह्नवी को 5 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। यह अपार्टमेंट 3456 स्क्वेयर फीट में फैला हुआ है। इसकी पर स्क्वेयर फुट कीमत 1। 27 लाख रुपए है। यह देश की सबसे महंगी डील्स में से एक है। इस अपार्टमेंट की बिल्डिंग को बॉलीवुड के जाने-माने प्रोड्यूसर और बिल्डर आनंद पंडित ने बनाया है। इस बिल्डिंग को लोटस आर्या कहते है। रिपोर्ट के मुताबिक, राजकुमार राव ने इस अपार्टमेंट को अपनी पत्नी पत्रलेखा के साथ खरीदा है। यह अपार्टमेंट 14वें, 15वें और 16वें फ्लोर तक है। इस बिल्डिंद में कई बॉलीवुड सेलेब्स रहते हैं। राजकुमार और पत्रलेखा ने इससे पहले इसी बिल्डिंग के 11वें और 12 वें प्लोर पर बने अपार्टमेंट को खरीदा था। राजकुमार और जाह्नवी की बात करें तो, दोनों ने हॉरर-कॉमेडी रूही में एक साथ काम किया है, जो पिछले साल लॉकडाउन के बाद सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों से एक थी।
राजकुमार राव व पत्रलेखा ने अपनी शादी के बाद अपना आशियाना सजाना शुरू कर दिया है। इस नए जोड़े ने अपने सपने का नया आशियाना जुहू में बनाया है जिसकी कीमत सुनकर किसी की भी आँखें फै रह जाएंगी। राजकुमार राव ने मुंबई के जुहू में अपनी रूही की सह-कलाकार जान्हवी से चौंतालीस करोड़ रुपये में एक लक्ज़री ट्रिपल अपार्टमेंट खरीदा है। राजकुमार और जाह्नवी फिल्म 'रूही' में साथ काम कर चुके हैं। और जल्द ही Mr एंड Mrs माही में साह दिखाई देंगे। राजकुमार इस घर को खरीद कर काफी खुश हैं। वहीं, जाह्नवी को इसे बेचने पर करोड़ों का फायदा भी हुआ है। दिसंबर दो हज़ार बीस में उनतालीस करोड़ रुपये में खरीदने के बाद जान्हवी ने राजकुमार और उनकी पत्नी पत्रलेखा को फ्लैट बेच दिया है। तीन,चार सौ छप्पन वर्ग फुट में लगभग एक. सत्ताईस लाख रुपये प्रति वर्ग फुट में फैला यह अपार्टमेंट इसे देश के अब तक के सबसे महंगे आवासीय सौदों में से एक बनाता है। जाह्नवी कपूर ने खुद इस प्रॉपर्टी को आज से दो साल पहले खरीदा था। जाह्नवी ने इसे दिसंबर दो हज़ार बीस में कथित तौर पर उनतालीस करोड़ रुपये में खरीदा था। इस डील से जाह्नवी को पाँच करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। यह अपार्टमेंट तीन हज़ार चार सौ छप्पन स्क्वेयर फीट में फैला हुआ है। इसकी पर स्क्वेयर फुट कीमत एक। सत्ताईस लाख रुपए है। यह देश की सबसे महंगी डील्स में से एक है। इस अपार्टमेंट की बिल्डिंग को बॉलीवुड के जाने-माने प्रोड्यूसर और बिल्डर आनंद पंडित ने बनाया है। इस बिल्डिंग को लोटस आर्या कहते है। रिपोर्ट के मुताबिक, राजकुमार राव ने इस अपार्टमेंट को अपनी पत्नी पत्रलेखा के साथ खरीदा है। यह अपार्टमेंट चौदहवें, पंद्रहवें और सोलहवें फ्लोर तक है। इस बिल्डिंद में कई बॉलीवुड सेलेब्स रहते हैं। राजकुमार और पत्रलेखा ने इससे पहले इसी बिल्डिंग के ग्यारहवें और बारह वें प्लोर पर बने अपार्टमेंट को खरीदा था। राजकुमार और जाह्नवी की बात करें तो, दोनों ने हॉरर-कॉमेडी रूही में एक साथ काम किया है, जो पिछले साल लॉकडाउन के बाद सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों से एक थी।
Posted On: केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री, श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत में स्टार्टअप बूम ने देश में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के लिए भी आंदोलन का रास्ता बनाना शुरू कर दिया है। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 'सरस आजीविका मेला, 2022' का उद्घाटन करने के बाद, श्री सिंह ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय को तीन राज्यों से उत्पादों और शिल्प क्षेत्रों में स्टार्टअप के लिए 60,000 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं। श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में लाल किले की प्राचीर से स्टार्टअप इंडिया की शुरूआत की थी और 2014 में देश में 400 स्टार्टअप थे जो आज बढ़कर 80,000 से ज्यादा हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इकोसिस्टम के क्षेत्र में भारत का स्थान विश्व में तीसरा है और देश में 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न सक्रिय हैं। मंत्री ने कहा कि जल्द ही दीदियों (महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य) के पास अपने स्टार्टअप होंगे क्योंकि उनका मंत्रालय इन प्रस्तावों पर सक्रियता से विचार कर रहा है। श्री सिंह ने दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि 2014 में एसएचजी के 2.35 करोड़ सदस्य थे, लेकिन पिछले आठ वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के सक्रिय समर्थन से एसएचजी के सदस्यों की संख्या बढ़कर लगभग 9 करोड़ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 2024 तक इसे 10 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने स्मरण किया कि जब वह एमएसएमई मंत्री थे, तब खादी की बिक्री लगभग 8,000 करोड़ रुपये थी जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये को पार कर चुकी है, सिर्फ इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोगों से खादी का कम से कम एक उत्पाद खरीदने की अपील की गई। मंत्री ने यह भी कहा कि 2014 से पहले एसएचजी का संचयी ऋण लगभग 80.000 करोड़ रुपये था और पिछले आठ वर्षों में बैंक लिंकेज 5.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है, जिसमें नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) मात्र 2.1 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि एनपीए को एक प्रतिशत से नीचे लाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि एनआरएलएम ग्रामीण एसएचजी महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे व्यवसायों का समर्थन देने की कोशिस कर रहा है जो खाद्य उत्पादों, हस्तशिल्पों और हैंडलूम आदि का उत्पादन करने में लगे हुए हैं। उत्पादकों और बाजारों को आपस में लिंक करने के प्रयासों के भाग के रूप में, एनआरएलएम और एसआरएलएम ने कई चैनलों जैसे सरस गैलरी, राज्य के विशिष्ट खुदरा आउटलेट, जीईएम और फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के माध्यम से एसएचजी और उसके सदस्य उद्यमियों के सहायक उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भी स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों जैसे फ्लिपकार्ट, अमेजन और मीशो आदि पर पंजीकृत करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक महिला लाभार्थी को स्थानीय उत्पादों की बिक्री से प्रत्येक वर्ष कम से कम एक लाख रूपये की बचत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं है जब कुछ लखपति दीदियां करोड़पति दीदियां बन जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की सोच का उल्लेख करते हुए, श्री सिंह ने कहा कि आज स्वयं सहायता समूहों के सर्वश्रेष्ठ उत्पादों का निर्यात विभिन्न देशों में हो रहा है और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों और अन्य उपायों के माध्यम से उनके बेहतरीन उत्पादों के बारे में स्थानीय और वैश्विक स्तर पर ज्यादा से ज्यादा जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। श्री नागेंद्र नाथ सिन्हा, सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि लगभग 8 करोड़ 62 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों की सदस्य हैं और 97 प्रतिशत ब्लॉकों में उनकी उपस्थिति है, जबकि उनमें से 85 प्रतिशत मंत्रालय के नेटवर्क से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। श्री सिन्हा ने स्वयं सहायता समूहों और शिल्पकारों को सलाह दिया कि वे उपभोक्ताओं की मांग को समझें और उस आधार पर अपने उत्पादों में सुधार करें। उन्होंने कहा कि मंत्रालय विज्ञापन और एसएमएस के माध्यम से सरस मेले का प्रचार करेगा जिससे सभी प्रतिभागियों को बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के सामने अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने का अवसर प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष सरस मेले में 4.32 करोड़ रुपये की बिक्री हुई थी, जिसका इस वर्ष 6 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। श्री शैलेश कुमार सिंह, ओएसडी, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि मंत्रालय पूरे देश में एसएचजी नेटवर्क को मजबूत करने और एसएचजी सदस्यों को लखपति दीदियां बनाने वाले श्री गिरिराज सिंह जी के सपने को साकार करने के लिए राज्य सरकारों के साथ समन्वय में काम कर रहा है। श्री चरणजीत सिंह, अपर सचिव ने कहा कि इस वर्ष 26 राज्यों के 300 शिल्पकार 150 स्टालों के माध्यम से जनजातीय और अद्वितीय उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री कर रहे हैं। उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली में 28 अक्टूबर से 10 नवंबर, 2022 तक हस्तशिल्प भवन, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में आयोजित किए गए सरस फूड फेस्टिवल-2022 का भी उल्लेख किया। प्रगति मैदान में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में सुश्री लीना जौहरी, अपर सचिव, आर.पी. सिंह, निदेशक और ग्रामीण विकास मंत्रालय के कई अन्य अधिकारी भी शामिल हुए।
Posted On: केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री, श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत में स्टार्टअप बूम ने देश में स्वयं सहायता समूह के लिए भी आंदोलन का रास्ता बनाना शुरू कर दिया है। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 'सरस आजीविका मेला, दो हज़ार बाईस' का उद्घाटन करने के बाद, श्री सिंह ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय को तीन राज्यों से उत्पादों और शिल्प क्षेत्रों में स्टार्टअप के लिए साठ,शून्य से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं। श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दो हज़ार पंद्रह में लाल किले की प्राचीर से स्टार्टअप इंडिया की शुरूआत की थी और दो हज़ार चौदह में देश में चार सौ स्टार्टअप थे जो आज बढ़कर अस्सी,शून्य से ज्यादा हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इकोसिस्टम के क्षेत्र में भारत का स्थान विश्व में तीसरा है और देश में एक सौ से ज्यादा यूनिकॉर्न सक्रिय हैं। मंत्री ने कहा कि जल्द ही दीदियों के पास अपने स्टार्टअप होंगे क्योंकि उनका मंत्रालय इन प्रस्तावों पर सक्रियता से विचार कर रहा है। श्री सिंह ने दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि दो हज़ार चौदह में एसएचजी के दो.पैंतीस करोड़ सदस्य थे, लेकिन पिछले आठ वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के सक्रिय समर्थन से एसएचजी के सदस्यों की संख्या बढ़कर लगभग नौ करोड़ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि दो हज़ार चौबीस तक इसे दस करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने स्मरण किया कि जब वह एमएसएमई मंत्री थे, तब खादी की बिक्री लगभग आठ,शून्य करोड़ रुपये थी जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये को पार कर चुकी है, सिर्फ इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोगों से खादी का कम से कम एक उत्पाद खरीदने की अपील की गई। मंत्री ने यह भी कहा कि दो हज़ार चौदह से पहले एसएचजी का संचयी ऋण लगभग अस्सी.शून्य करोड़ रुपये था और पिछले आठ वर्षों में बैंक लिंकेज पाँच.सात लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है, जिसमें नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स मात्र दो.एक प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि एनपीए को एक प्रतिशत से नीचे लाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि एनआरएलएम ग्रामीण एसएचजी महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे व्यवसायों का समर्थन देने की कोशिस कर रहा है जो खाद्य उत्पादों, हस्तशिल्पों और हैंडलूम आदि का उत्पादन करने में लगे हुए हैं। उत्पादकों और बाजारों को आपस में लिंक करने के प्रयासों के भाग के रूप में, एनआरएलएम और एसआरएलएम ने कई चैनलों जैसे सरस गैलरी, राज्य के विशिष्ट खुदरा आउटलेट, जीईएम और फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के माध्यम से एसएचजी और उसके सदस्य उद्यमियों के सहायक उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भी स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों जैसे फ्लिपकार्ट, अमेजन और मीशो आदि पर पंजीकृत करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक महिला लाभार्थी को स्थानीय उत्पादों की बिक्री से प्रत्येक वर्ष कम से कम एक लाख रूपये की बचत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं है जब कुछ लखपति दीदियां करोड़पति दीदियां बन जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की सोच का उल्लेख करते हुए, श्री सिंह ने कहा कि आज स्वयं सहायता समूहों के सर्वश्रेष्ठ उत्पादों का निर्यात विभिन्न देशों में हो रहा है और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों और अन्य उपायों के माध्यम से उनके बेहतरीन उत्पादों के बारे में स्थानीय और वैश्विक स्तर पर ज्यादा से ज्यादा जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। श्री नागेंद्र नाथ सिन्हा, सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि लगभग आठ करोड़ बासठ लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों की सदस्य हैं और सत्तानवे प्रतिशत ब्लॉकों में उनकी उपस्थिति है, जबकि उनमें से पचासी प्रतिशत मंत्रालय के नेटवर्क से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। श्री सिन्हा ने स्वयं सहायता समूहों और शिल्पकारों को सलाह दिया कि वे उपभोक्ताओं की मांग को समझें और उस आधार पर अपने उत्पादों में सुधार करें। उन्होंने कहा कि मंत्रालय विज्ञापन और एसएमएस के माध्यम से सरस मेले का प्रचार करेगा जिससे सभी प्रतिभागियों को बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के सामने अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने का अवसर प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष सरस मेले में चार.बत्तीस करोड़ रुपये की बिक्री हुई थी, जिसका इस वर्ष छः करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। श्री शैलेश कुमार सिंह, ओएसडी, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि मंत्रालय पूरे देश में एसएचजी नेटवर्क को मजबूत करने और एसएचजी सदस्यों को लखपति दीदियां बनाने वाले श्री गिरिराज सिंह जी के सपने को साकार करने के लिए राज्य सरकारों के साथ समन्वय में काम कर रहा है। श्री चरणजीत सिंह, अपर सचिव ने कहा कि इस वर्ष छब्बीस राज्यों के तीन सौ शिल्पकार एक सौ पचास स्टालों के माध्यम से जनजातीय और अद्वितीय उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री कर रहे हैं। उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली में अट्ठाईस अक्टूबर से दस नवंबर, दो हज़ार बाईस तक हस्तशिल्प भवन, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में आयोजित किए गए सरस फूड फेस्टिवल-दो हज़ार बाईस का भी उल्लेख किया। प्रगति मैदान में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में सुश्री लीना जौहरी, अपर सचिव, आर.पी. सिंह, निदेशक और ग्रामीण विकास मंत्रालय के कई अन्य अधिकारी भी शामिल हुए।
करवा चौथ के दिन महिलाएं सोलह श्रंगार कर हाथों में मेहंदी लगवाती हैं। बाजारों की रौनक देखते ही बनती हैं। मेहंदी में भी अलग-अलग डिजाइन उपलब्ध हैं, इस करवा चौथ पर बाजारों में अरेबिक, थीम मेहंदी और राजस्थानी मेहंदी की धूम है। बाजार में महिलाएं अपनी पसंद के हिसाब से मेहंदी लगवा रही है। आप भी मेहंदी लगवाने का प्लान बना रही हैं तो अपने लिए इन ऑप्शन में से डिजाइन चुन लें। किसी कारणवश मेहंदी नहीं लगवा पा रही हैं तो टैटू वाली मेहंदी का भी आपके पास विकल्प है। यहां हम आपके लिए लेकर आए हैं मेहंदी के एक से बढ़कर एक मेहंदी के डिजाइनः
करवा चौथ के दिन महिलाएं सोलह श्रंगार कर हाथों में मेहंदी लगवाती हैं। बाजारों की रौनक देखते ही बनती हैं। मेहंदी में भी अलग-अलग डिजाइन उपलब्ध हैं, इस करवा चौथ पर बाजारों में अरेबिक, थीम मेहंदी और राजस्थानी मेहंदी की धूम है। बाजार में महिलाएं अपनी पसंद के हिसाब से मेहंदी लगवा रही है। आप भी मेहंदी लगवाने का प्लान बना रही हैं तो अपने लिए इन ऑप्शन में से डिजाइन चुन लें। किसी कारणवश मेहंदी नहीं लगवा पा रही हैं तो टैटू वाली मेहंदी का भी आपके पास विकल्प है। यहां हम आपके लिए लेकर आए हैं मेहंदी के एक से बढ़कर एक मेहंदी के डिजाइनः
फीफा विश्व कप 2022 टूर्नामेंट अब अपने अंजाम की ओर पहुंचने लगा है. क्वार्टर फाइनल मुकाबलों के लिए टीमें तय हो चुकी है. सेमीफाइनल की जंग अब नौ दिसंबर से प्रारम्भ होगी. सेमीफाइनल में स्थान बनाने के लिए आठ टीमों के बीच यु्द्ध होगा. कतर में खेले जा रहे फीफा विश्व कप 2022 के क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में भिड़ने के लिए टीमें तय हो गई है. अब तक का फीफा विश्व कप का यात्रा रोमांच से भरपूर रहा है. अब तक के मुकाबलों में काफी उलटफेर देखने को मिले है. इस दौरान खिताब के दावेदार टीमों को मुंह की भी खानी पड़ी है जबकि कई कमजोर टीमें इस टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन कर चर्चा में बनी रही है. कई टीमों को क्वार्टर फाइनल का टिकट मिला है. क्वार्टर फाइनल मुकाबले नौ दिसंबर से खेले जाएंगे. जानते हैं उन टीमों के बारे में जो क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में भिड़ने वाली है. जानकारी के अनुसार फीफा विश्व कप 2022 में राउंड ऑफ 16 का आखिरी मुकाबला छह दिसंबर को खेला गया था. ये मुकाबला पुर्तगाल और स्विटजरलैंड के बीच हुआ था. इस मैच में पुर्तगाल ने जीत दर्ज की थी. इस बार क्वार्टर फाइनल मुकाबले खेलने के लिए कुल आठ टीमों ने कामयाबी हासिल की है. इसमें ब्राजील, क्रोएशिया, नीदरलैंड्स, अर्जेंटीना, मोरक्को, पुर्तगाल, इंग्लैंड और फ्रांस शामिल हैं. क्वार्टर फाइनल मुकाबले में कुल आठ टीमें स्थान बना चुकी है. अब सेमीफाइनल की रेस की आरंभ नौ दिसंबर से होने वाली है. सेमिफाइनल मुकाबलों में हिस्सा लेने के लिए हर टीम को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा ताकि वो मैच जीतकर सेमीफाइनल के रास्ते अपने लिए खोल सके. सेमीफाइनल मुकाबलों की जंग देखने के लिए फुटबॉल फैंस काफी उत्साहित हैं और बेसब्री से इसके प्रारम्भ होने का इन्तजार कर रहे है. जानकारी के अनुसार क्वार्टर फाइनल स्तर का पहला मुकाबला नौ दिसंबर को खेला जाएगा. पहला मुकाबला क्रोएशिया और ब्राजील के बीच में खेला जाएगा. इस मैच को एजूकेशन स्टेडियम में खेला जाएगा. नौ दिसंबर को ही दूसरा मुकाबला नीदरलैंड्स और अर्जेंटीना के बीच होना है. ये मुकाबला कतर के लुसैल स्टेडियम में खेला जाएगा. इसके बाद तीसरा मुकाबला 10 दिसंबर को तीसरा क्वार्टर फाइनल मुकाबला मोरक्को और पुर्तगाल के बीच खेला जाएगा. फ्रांस और इंग्लैड सेमीफाइनल की रेस के लिए 11 दिसंबर को एक दूसरे के सामने होंगे. इन दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला क्वार्टर फाइनल का आखिरी मुकाबला होगा. ये मुकाबला अल बैत स्टेडियम में खेला जाएगा. इन मुकाबलों में जो भी टीम विजय हासिल करेंगी वो सीधा सेमीफाइनल खेल सकेंगी.
फीफा विश्व कप दो हज़ार बाईस टूर्नामेंट अब अपने अंजाम की ओर पहुंचने लगा है. क्वार्टर फाइनल मुकाबलों के लिए टीमें तय हो चुकी है. सेमीफाइनल की जंग अब नौ दिसंबर से प्रारम्भ होगी. सेमीफाइनल में स्थान बनाने के लिए आठ टीमों के बीच यु्द्ध होगा. कतर में खेले जा रहे फीफा विश्व कप दो हज़ार बाईस के क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में भिड़ने के लिए टीमें तय हो गई है. अब तक का फीफा विश्व कप का यात्रा रोमांच से भरपूर रहा है. अब तक के मुकाबलों में काफी उलटफेर देखने को मिले है. इस दौरान खिताब के दावेदार टीमों को मुंह की भी खानी पड़ी है जबकि कई कमजोर टीमें इस टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन कर चर्चा में बनी रही है. कई टीमों को क्वार्टर फाइनल का टिकट मिला है. क्वार्टर फाइनल मुकाबले नौ दिसंबर से खेले जाएंगे. जानते हैं उन टीमों के बारे में जो क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में भिड़ने वाली है. जानकारी के अनुसार फीफा विश्व कप दो हज़ार बाईस में राउंड ऑफ सोलह का आखिरी मुकाबला छह दिसंबर को खेला गया था. ये मुकाबला पुर्तगाल और स्विटजरलैंड के बीच हुआ था. इस मैच में पुर्तगाल ने जीत दर्ज की थी. इस बार क्वार्टर फाइनल मुकाबले खेलने के लिए कुल आठ टीमों ने कामयाबी हासिल की है. इसमें ब्राजील, क्रोएशिया, नीदरलैंड्स, अर्जेंटीना, मोरक्को, पुर्तगाल, इंग्लैंड और फ्रांस शामिल हैं. क्वार्टर फाइनल मुकाबले में कुल आठ टीमें स्थान बना चुकी है. अब सेमीफाइनल की रेस की आरंभ नौ दिसंबर से होने वाली है. सेमिफाइनल मुकाबलों में हिस्सा लेने के लिए हर टीम को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा ताकि वो मैच जीतकर सेमीफाइनल के रास्ते अपने लिए खोल सके. सेमीफाइनल मुकाबलों की जंग देखने के लिए फुटबॉल फैंस काफी उत्साहित हैं और बेसब्री से इसके प्रारम्भ होने का इन्तजार कर रहे है. जानकारी के अनुसार क्वार्टर फाइनल स्तर का पहला मुकाबला नौ दिसंबर को खेला जाएगा. पहला मुकाबला क्रोएशिया और ब्राजील के बीच में खेला जाएगा. इस मैच को एजूकेशन स्टेडियम में खेला जाएगा. नौ दिसंबर को ही दूसरा मुकाबला नीदरलैंड्स और अर्जेंटीना के बीच होना है. ये मुकाबला कतर के लुसैल स्टेडियम में खेला जाएगा. इसके बाद तीसरा मुकाबला दस दिसंबर को तीसरा क्वार्टर फाइनल मुकाबला मोरक्को और पुर्तगाल के बीच खेला जाएगा. फ्रांस और इंग्लैड सेमीफाइनल की रेस के लिए ग्यारह दिसंबर को एक दूसरे के सामने होंगे. इन दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला क्वार्टर फाइनल का आखिरी मुकाबला होगा. ये मुकाबला अल बैत स्टेडियम में खेला जाएगा. इन मुकाबलों में जो भी टीम विजय हासिल करेंगी वो सीधा सेमीफाइनल खेल सकेंगी.
नई दिल्ली। राष्ट्रीय दिल्ली के रोहिणी इलाके में बागेश्वर धाम बाबा के समर्थन में प्रदर्शन हो रहा है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। बागेश्वर धाम को एक ओर जहां विरोध का सामना करना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर कई बड़े नेता इनके समर्थन में भी उतर आए हैं। अब इनके पक्ष में भारतीय जनता पार्टी के एक बड़े नेता कपिल मिश्रा भी उतर आए हैं। दिल्ली के रोहिणी इलाके में बागेश्वर धाम बाबा धीरेंद्र शास्त्री के सपोर्ट में जोर-शोर से नारे लगाए जा रहे हैं। अब उनके समर्थन में बीजेपी के बड़े नेता कपिल मिश्रा भी शामिल हो गए हैं। रिपोर्ट्स की माने तो, धर्मगुरु या मठाधीश अगर कथावाचक धर्म परिवर्तन के खिलाफ बात करेंगे, लव-जिहाद के खिलाफ खुलकर चर्चा करेंगे, हमारा कर्तव्य है कि हम उनके साथ खड़े हों। इसलिए मै इस प्रदर्शन में शामिल हो रहा हूं।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय दिल्ली के रोहिणी इलाके में बागेश्वर धाम बाबा के समर्थन में प्रदर्शन हो रहा है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। बागेश्वर धाम को एक ओर जहां विरोध का सामना करना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर कई बड़े नेता इनके समर्थन में भी उतर आए हैं। अब इनके पक्ष में भारतीय जनता पार्टी के एक बड़े नेता कपिल मिश्रा भी उतर आए हैं। दिल्ली के रोहिणी इलाके में बागेश्वर धाम बाबा धीरेंद्र शास्त्री के सपोर्ट में जोर-शोर से नारे लगाए जा रहे हैं। अब उनके समर्थन में बीजेपी के बड़े नेता कपिल मिश्रा भी शामिल हो गए हैं। रिपोर्ट्स की माने तो, धर्मगुरु या मठाधीश अगर कथावाचक धर्म परिवर्तन के खिलाफ बात करेंगे, लव-जिहाद के खिलाफ खुलकर चर्चा करेंगे, हमारा कर्तव्य है कि हम उनके साथ खड़े हों। इसलिए मै इस प्रदर्शन में शामिल हो रहा हूं।
यूरोपीय नियामक यूरोपीय संघ की भूमिगत भंडारण सुविधाओं में गैस भंडार की उपलब्धता के मुद्दे पर नेटवर्क पर दिखाई देने वाली जानकारी की पुष्टि करते हैं। यह पता चला कि, औसतन, यूरोपीय गैस भंडार वर्तमान में तथाकथित सक्रिय गैस से 28-30% भरे हुए हैं। ये संपूर्ण के लिए न्यूनतम वॉल्यूम हैं इतिहास. नियामक GIE (गैस इंफ्रास्ट्रक्चर यूरोप) थोड़ा आशावादी (यूरोप के लिए) आंकड़े प्रकाशित करता है, यह दर्शाता है कि फिलहाल यूरोपीय यूजीएसएफ के गैस भरने का स्तर पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में एक चौथाई कम है। सटीक होने के लिए, यह 26% कम है। इसके अतिरिक्त, यह ध्यान दिया जाता है कि यूरोपीय लोगों ने अपनी भूमिगत भंडारण सुविधाओं से 71 प्रतिशत से अधिक गैस बाहर निकाल दी। शरद ऋतु की शुरुआत के बाद से लगभग 35 बिलियन क्यूबिक मीटर "ब्लू फ्यूल" को यूजीएस सुविधाओं से बाहर निकाल दिया गया है, जिससे भंडार इतिहास में एक रिकॉर्ड-विरोधी हो गया है। फिलहाल, यूरोपीय संघ के यूजीएस सुविधाओं में गैस का भंडार निशान से लगभग 2 बिलियन क्यूबिक मीटर नीचे है, जो वास्तव में महत्वपूर्ण है। आमतौर पर गैस निकासी उस तक नहीं पहुंच पाती थी। यूरोपीय लोगों ने फिर से इंजेक्शन लगाने पर गैस के भंडार का 33% हमेशा भंडारण में रखने की कोशिश की है। इस तथ्य का क्या कारण है कि कई वर्षों में पहली बार भूमिगत भंडारण सुविधाओं में गैस की मात्रा 71% से अधिक कम हो गई है? विशेषज्ञों का मानना है कि केले के लालच ने इसकी मुख्य भूमिका निभाई। यूरोपीय कंपनियों को विश्व बाजार में विनिमय कीमतों पर गैस खरीदने की कोई जल्दी नहीं थी, जो अपने चरम पर 1800 डॉलर प्रति 1000 क्यूबिक मीटर तक पहुंच गई। इसके बजाय, उन्होंने काफी कम दरों पर खरीदी गई इन्वेंट्री का इस्तेमाल किया। उन्होंने पैसे कमाने की उम्मीद में एक-दूसरे को फिर से बेचने की भी कोशिश की। लेकिन आज यूरोपीय उपभोक्ताओं के लिए स्थिति अत्यंत कठिन है। गैस की कीमतें फिर से बढ़ रही हैं। यूरोप में कम स्टॉक के कारण भी शामिल है। इस प्रकार, डच टीटीएफ हब में, वायदा की कीमत 1,1 हजार डॉलर प्रति हजार क्यूबिक मीटर से ऊपर उछल गई। यह इस तथ्य के बावजूद है कि पिछले सप्ताह समान मात्रा के लिए कीमत केवल $920 से अधिक थी। वृद्धि लगभग 20 प्रतिशत थी। यह पता चला है कि यूरोपीय लोगों को निकट भविष्य में या तो उच्च कीमतों पर अरबों क्यूबिक मीटर गैस खरीदनी होगी, या ऊर्जा वाहक के रूप में गैस को पूरी तरह से छोड़ देना होगा, जो सर्दियों के बीच में पूरी तरह से बेतुका लगता है। भंडारण को 100% तक खाली करना तकनीकी रूप से असंभव है। यदि ऐसा होता है, तो यह यूजीएस सुविधाओं के संचालन को सुनिश्चित करने की प्रणाली को ही बाधित कर देगा। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
यूरोपीय नियामक यूरोपीय संघ की भूमिगत भंडारण सुविधाओं में गैस भंडार की उपलब्धता के मुद्दे पर नेटवर्क पर दिखाई देने वाली जानकारी की पुष्टि करते हैं। यह पता चला कि, औसतन, यूरोपीय गैस भंडार वर्तमान में तथाकथित सक्रिय गैस से अट्ठाईस-तीस% भरे हुए हैं। ये संपूर्ण के लिए न्यूनतम वॉल्यूम हैं इतिहास. नियामक GIE थोड़ा आशावादी आंकड़े प्रकाशित करता है, यह दर्शाता है कि फिलहाल यूरोपीय यूजीएसएफ के गैस भरने का स्तर पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में एक चौथाई कम है। सटीक होने के लिए, यह छब्बीस% कम है। इसके अतिरिक्त, यह ध्यान दिया जाता है कि यूरोपीय लोगों ने अपनी भूमिगत भंडारण सुविधाओं से इकहत्तर प्रतिशत से अधिक गैस बाहर निकाल दी। शरद ऋतु की शुरुआत के बाद से लगभग पैंतीस बिलियन क्यूबिक मीटर "ब्लू फ्यूल" को यूजीएस सुविधाओं से बाहर निकाल दिया गया है, जिससे भंडार इतिहास में एक रिकॉर्ड-विरोधी हो गया है। फिलहाल, यूरोपीय संघ के यूजीएस सुविधाओं में गैस का भंडार निशान से लगभग दो बिलियन क्यूबिक मीटर नीचे है, जो वास्तव में महत्वपूर्ण है। आमतौर पर गैस निकासी उस तक नहीं पहुंच पाती थी। यूरोपीय लोगों ने फिर से इंजेक्शन लगाने पर गैस के भंडार का तैंतीस% हमेशा भंडारण में रखने की कोशिश की है। इस तथ्य का क्या कारण है कि कई वर्षों में पहली बार भूमिगत भंडारण सुविधाओं में गैस की मात्रा इकहत्तर% से अधिक कम हो गई है? विशेषज्ञों का मानना है कि केले के लालच ने इसकी मुख्य भूमिका निभाई। यूरोपीय कंपनियों को विश्व बाजार में विनिमय कीमतों पर गैस खरीदने की कोई जल्दी नहीं थी, जो अपने चरम पर एक हज़ार आठ सौ डॉलर प्रति एक हज़ार क्यूबिक मीटर तक पहुंच गई। इसके बजाय, उन्होंने काफी कम दरों पर खरीदी गई इन्वेंट्री का इस्तेमाल किया। उन्होंने पैसे कमाने की उम्मीद में एक-दूसरे को फिर से बेचने की भी कोशिश की। लेकिन आज यूरोपीय उपभोक्ताओं के लिए स्थिति अत्यंत कठिन है। गैस की कीमतें फिर से बढ़ रही हैं। यूरोप में कम स्टॉक के कारण भी शामिल है। इस प्रकार, डच टीटीएफ हब में, वायदा की कीमत एक,एक हजार डॉलर प्रति हजार क्यूबिक मीटर से ऊपर उछल गई। यह इस तथ्य के बावजूद है कि पिछले सप्ताह समान मात्रा के लिए कीमत केवल नौ सौ बीस डॉलर से अधिक थी। वृद्धि लगभग बीस प्रतिशत थी। यह पता चला है कि यूरोपीय लोगों को निकट भविष्य में या तो उच्च कीमतों पर अरबों क्यूबिक मीटर गैस खरीदनी होगी, या ऊर्जा वाहक के रूप में गैस को पूरी तरह से छोड़ देना होगा, जो सर्दियों के बीच में पूरी तरह से बेतुका लगता है। भंडारण को एक सौ% तक खाली करना तकनीकी रूप से असंभव है। यदि ऐसा होता है, तो यह यूजीएस सुविधाओं के संचालन को सुनिश्चित करने की प्रणाली को ही बाधित कर देगा। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
IND vs AUS Test Series: भारतीय टीम और ऑस्ट्रेलिया (IND vs AUS Test Series) के बीच चार मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जानी हैं। इस सीरीज का पहला मैच (IND vs AUS 1st Test) 9 फरवरी को नागपुर में खेला जाना हैं। वहीं इस सीरीज से पहले पूर्व बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने टीम इंडिया के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) की तारीफ में कसीदे पढ़ें हैं। दरअसल, राहुल को टी20 वर्ल्डकप (T20 World Cup) के सेमी फाइनल में बुरी तरह हार के बाद आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था जिसके बाद सौरव ने इस पर जवाब दिया हैं। क्रिकेट की सभी खबरों के लिए Hindi. InsideSport. In के साथ जुड़े रहें। आपको बता दें कि स्पोर्टस्टार ने इंटरव्यू में पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली से पूछा था कि "क्या आपको लगता है कि यह भारत के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ के लिए ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज बेहद जरूरी है, जबकि पिछले साल टी20 विश्व कप में भारत की निराशाजनक हार के बाद आलोचना का शिकार हुए थे"? वहीं इस सवाल के बाद सौरव ने राहुल की तरीफ करते हुए इसका जवाब भी दिया हैं। स्पोर्टस्टार के पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सौरव ने कहा कि "टी20 वर्ल्ड कप को छोड़कर रोहुल ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। टीम इंडिया टी20 वर्ल्डकप के सेमीफाइनल में गई थी और फाइनल से सिर्फ एक मैच ही दूर थी। राहुल आगे और अच्छा करेगा। आपको उन्हें समय देना होगा और उन्हें कोचिंग करते हुए केवल एक साल हुआ और ये कोच के लिए यह बहुत कम समय है। वह इस टीम का कायापलट करेंगे"। उन्होंने आगे जवाब देते हुए आगे कहा कि "आप शुभमन गिल को एक बहुत अच्छे बल्लेबाज के रूप में उभरते हुए देख सकते हैं और आप कुछ कई लोगों को भी विकसित होते देखेंगे। और आप सूर्यकुमार यादव जैसे शानदार बल्लेबाज को देख सकते हैं। जिन्होंने टी20 में अच्छा शानदार प्रदर्शन किया है। इसलिए आपको राहुल को कुछ समय देना होगा और वो आपको और अच्छा कर के देंगे"। क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों (Latest Cricket News, Sports News, Breaking SportsNews, Viral Video) को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज (Google News) पर फॉलो करें।
IND vs AUS Test Series: भारतीय टीम और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जानी हैं। इस सीरीज का पहला मैच नौ फरवरी को नागपुर में खेला जाना हैं। वहीं इस सीरीज से पहले पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने टीम इंडिया के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ की तारीफ में कसीदे पढ़ें हैं। दरअसल, राहुल को टीबीस वर्ल्डकप के सेमी फाइनल में बुरी तरह हार के बाद आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था जिसके बाद सौरव ने इस पर जवाब दिया हैं। क्रिकेट की सभी खबरों के लिए Hindi. InsideSport. In के साथ जुड़े रहें। आपको बता दें कि स्पोर्टस्टार ने इंटरव्यू में पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली से पूछा था कि "क्या आपको लगता है कि यह भारत के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ के लिए ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज बेहद जरूरी है, जबकि पिछले साल टीबीस विश्व कप में भारत की निराशाजनक हार के बाद आलोचना का शिकार हुए थे"? वहीं इस सवाल के बाद सौरव ने राहुल की तरीफ करते हुए इसका जवाब भी दिया हैं। स्पोर्टस्टार के पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सौरव ने कहा कि "टीबीस वर्ल्ड कप को छोड़कर रोहुल ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। टीम इंडिया टीबीस वर्ल्डकप के सेमीफाइनल में गई थी और फाइनल से सिर्फ एक मैच ही दूर थी। राहुल आगे और अच्छा करेगा। आपको उन्हें समय देना होगा और उन्हें कोचिंग करते हुए केवल एक साल हुआ और ये कोच के लिए यह बहुत कम समय है। वह इस टीम का कायापलट करेंगे"। उन्होंने आगे जवाब देते हुए आगे कहा कि "आप शुभमन गिल को एक बहुत अच्छे बल्लेबाज के रूप में उभरते हुए देख सकते हैं और आप कुछ कई लोगों को भी विकसित होते देखेंगे। और आप सूर्यकुमार यादव जैसे शानदार बल्लेबाज को देख सकते हैं। जिन्होंने टीबीस में अच्छा शानदार प्रदर्शन किया है। इसलिए आपको राहुल को कुछ समय देना होगा और वो आपको और अच्छा कर के देंगे"। क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें।
इससे पहले ऐसे ही केस में 1. 4 किलो का ट्यूमर अलग किया गया था। मुंबई में 31 वर्षीय कपड़ा विक्रेता के सिर से 1. 873 किलो का ट्यूमर निकाला गया। शनिवार को नायर अस्पताल में इलाज किया गया। डॉक्टर्स का दावा है कि ये दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी ब्रेन ट्यूमर सर्जरी है। इससे पहले ऐसे ही केस में 1. 4 किलो का ट्यूमर अलग किया गया था। उसका सिर इतना बड़ा हो गया था मानों व्यक्ति के शरीर में सिर हों। उत्तर प्रदेश के संतलाल पाल को ट्रीटमेंट के लिए मुंबई रेफर किया गया। शुरुआती दिनों में ट्रीटमेंट करने में काफी दिक्कतें आई। 6 महीने में उनका ट्यूमर बढ़ता चला गया और 1 किलो के करीब हो गया। ऑपरेशन कराने के लिए उनको मुंबई रेफर कर दिया गया। डॉक्टर त्रिमूत्री नंदकरणी ने बताया कि ये ऑपरेशन काफी जोखिम भरा था। लगातार उनका ट्यूमर बढ़ता जा रहा था। सबसे पहले उनके ब्रेन का सीटी स्कैन और एमआर स्कैन्स हुए। जिसके बाद हमने 14 फरवरी को ऑपरेशन करने का जोखिम उठाया। डॉक्टर त्रिमूत्री नंदकरणी और उनकी टीम ने मरीज का ऑपरेशन किया। इस ऑपरेशन में करीब 7 घंटे लगे। इस दौरान उनको 11 यूनिट खून की जरूरत पड़ी। आखिर कार नंदकरणी और उनकी टीम सफल रही और मरीज के सिर से 1. 8 किलो का ट्यूमर निकालने में कामयाब रही। इससे पहले केईएम हॉस्पिटल में एक मरीज के सिर से 1. 4 किलो का ट्यूमर सिर से निकाला था। (फोटो- Mid-Day)
इससे पहले ऐसे ही केस में एक. चार किलो का ट्यूमर अलग किया गया था। मुंबई में इकतीस वर्षीय कपड़ा विक्रेता के सिर से एक. आठ सौ तिहत्तर किलो का ट्यूमर निकाला गया। शनिवार को नायर अस्पताल में इलाज किया गया। डॉक्टर्स का दावा है कि ये दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी ब्रेन ट्यूमर सर्जरी है। इससे पहले ऐसे ही केस में एक. चार किलो का ट्यूमर अलग किया गया था। उसका सिर इतना बड़ा हो गया था मानों व्यक्ति के शरीर में सिर हों। उत्तर प्रदेश के संतलाल पाल को ट्रीटमेंट के लिए मुंबई रेफर किया गया। शुरुआती दिनों में ट्रीटमेंट करने में काफी दिक्कतें आई। छः महीने में उनका ट्यूमर बढ़ता चला गया और एक किलो के करीब हो गया। ऑपरेशन कराने के लिए उनको मुंबई रेफर कर दिया गया। डॉक्टर त्रिमूत्री नंदकरणी ने बताया कि ये ऑपरेशन काफी जोखिम भरा था। लगातार उनका ट्यूमर बढ़ता जा रहा था। सबसे पहले उनके ब्रेन का सीटी स्कैन और एमआर स्कैन्स हुए। जिसके बाद हमने चौदह फरवरी को ऑपरेशन करने का जोखिम उठाया। डॉक्टर त्रिमूत्री नंदकरणी और उनकी टीम ने मरीज का ऑपरेशन किया। इस ऑपरेशन में करीब सात घंटाटे लगे। इस दौरान उनको ग्यारह यूनिट खून की जरूरत पड़ी। आखिर कार नंदकरणी और उनकी टीम सफल रही और मरीज के सिर से एक. आठ किलो का ट्यूमर निकालने में कामयाब रही। इससे पहले केईएम हॉस्पिटल में एक मरीज के सिर से एक. चार किलो का ट्यूमर सिर से निकाला था।
पिरामिड विशेषज्ञों ने पाया कि बच्चों को पिरामिड के नीचे रखने से उनकी सृजनात्मकता, सक्रियता, कार्य कुशलता और मानसिक विकास में लाभ होता है। पिरामिड के नीचे पढ़ने से किसी भी विषय को वह कम समय में अच्छे से याद कर सकते हैं और उनकी स्मृति में वह विषय लम्बे समय तक बना रहता है। विद्यार्थियों को हमेशा यह समस्या रहती है कि याद करने पर भी वे सब भूल जाते हैं। विद्यार्थियों को हमेशा यह समस्या रहती है कि याद करने पर भी वे सब भूल जाते हैं। पिरामिड के उपयोग से विद्यार्थी की स्मरण शक्ति, एकाग्रता, आत्मविश्वास, ग्रहण शक्ति, इच्छा शक्ति आदि में वृद्घि होती है। परीक्षा का समय बच्चों के लिए तनाव पूर्ण होता है। ऐसे समय में बच्चे यदि पिरामिड कैप लगाकर या पिरामिड के नीचे बैठ कर पढ़ें तो उनका मन जल्दी एकाग्र होता है। वे परीक्षा के तनाव और भय से मुक्त हो जाते हैं। पिरामिड के नीचे 8 घंटे तक पानी रख कर इसका सेवन करने से पाचन और त्वचा सम्बंधित बिमारियां ठीक होती हैं। पिरामिड ऊर्जित पानी टॉनिक के समान है। पिरामिड ऊर्जित पानी एंटीसेप्टिक का काम करता है। फल-सब्जी काटते समय ऊंगली कटने पर पिरामिड जल लगाने से रक्त का बहाव रूक जाता है। दर्द और संक्रमण वाले स्थान पर इस जल से मालिश करने से राहत मिलती है। पिरामिड जल से स्नान करने पर त्वचा की कांति बनी रहती है। पिरामिड के अंदर एक सप्ताह तक बीजों को रखने से उनकी गुणवत्ता और विकास में वृद्धि होती है। पौधे अधिक तीव्र गति से बढ़ते हैं। उनमें कीटक्षति कम होती है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। पिरामिड ऊर्जित पानी पौधों में डालने से पौधे बहुत अच्छे हो जाते हैं। फल, फूल, सब्जियां पिरामिड के अंदर रखने से लम्बे समय तक ताजी रहती हैं और उनका स्वाद बढ़ जाता है। पिरामिड के अंदर मोबाइल, लैपटॉप और अन्य विद्युत उपकरण रखने से उनकी कार्य क्षमता बढ़ जाती है और बैटरी लम्बे समय तक चलती है। पिरामिड के अंदर दवाइयां रखने से वह अत्यंत प्रभावी हो जाती हैं और उनके दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं। औषधि और जड़ी-बूटी आदि पिरामिड के नीचे रखने से वह ऊर्जित हो जाते हैं। पिरामिड ऊर्जित टूथपेस्ट इस्तेमाल करने से दांत स्वस्थ रहते हैं। गहनों को पिरामिड बॉक्स के अंदर रखने से उनकी चमक बनी रहती है। पिरामिड ऊर्जित पानी में मेंहदी घोलने से उसका रंग ज्यादा समय तक रहता है। परफ्यूम और लिपस्टिक को पिरामिड के अंदर रखने से लम्बे समय तक उसकी खुशबू बनी रहती है। गोशाला में पिरामिड लगाने से गाय में रोग निरोधक शक्ति बढ़ जाती है। अगर गाय को घाव या चोट लगे तो वह जल्दी ठीक हो जाती है। चारे का स्वाद बढ़ जाता है और उसके पौष्टिïक तत्त्व बने रहते हैं। अच्छी आरामदायक नींद सबसे लिए आवश्यक है। यदि शयन कक्ष में पिरामिड लगाया जाए तो कम समय में नींद पूरी हो जाती है। शरीर ऊर्जावान रहता है। बच्चों को पिरामिड के नीचे सुलाने से उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है और उनका समुचित विकास होता है। मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाली विभिन्न तरंगों में आश्चर्यजनक परिवर्तन होता है। बगीचे में पिरामिड लगाने से पौधे स्वस्थ और सुन्दर रहते हैं। पौधे में रोग प्रतिरोधक ऊर्जा अनंत होती है। वहां बैठ कर ध्यान करने से पिरामिड ऊर्जा के साथ-साथ हमें पौधों से भी ऊर्जा मिलती है जिससे मन जल्दी शांत और विचार शून्य हो जाता है। यह पिरामिड इस तरह से बनाया जाता है कि खोल कर कहीं भी लगाया जा सकता है। इस पिरामिड को बनाने में ज्यादा खर्च नहीं होता। यह पिरामिड छोटे-बड़े किसी भी आकार का बनाया जा सकता है। नमक, मसाले और अन्य सामग्री पिरामिड के अंदर रखने से वह लम्बे समय तक खराब नहीं होते। भोजन अधिक स्वादिष्ट और ऊर्जादायक बनता है। पिरामिड के नीचे पशु-पक्षी अधिक शांत और स्वस्थ रहते हैं। पिरामिड शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर सड़क के किनारे पिरामिड लगाया जाए तो दुर्घटनाएं कम हो जाती हैं। कार और स्कूटर में पिरामिड लगाने से उनकी कार्य क्षमता बढ़ जाती है। पिरामिड के नीचे वाद्य रखने से उसकी ध्वनि उत्तम हो जाती है। पिरामिड के अंदर संगीत की तरंगों से उपस्थित लोगों का मन जल्दी शांत होता है। पिरामिड आकार के संरक्षण गोदामों में अनाज, बीज आदि रखने से वह क्षतिग्रस्त नहीं होते और उनकी उत्पादकता में 100% तक वृद्धि होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिस स्थान पर बड़ा पिरामिड होता है उसके आसपास पर्यावरण की ओजोन परत अपने आप ठीक हो जाती है और प्रदूषण कम हो जाता है। पिरामिड आकृति से बने घर में रहने वालों का शारीरिक , मानसिक, बौद्धिक , आध्यात्मिक विकास और सृजन शक्ति में वृद्घि होती है। घर और आस-पास का वातावरण सकारात्मक बना रहता है। पिरामिड किसी भी स्थान के वास्तु दोष और जिओपेथिक स्ट्रेस को सामान्य करता है। वहां की विद्युत चुम्बकीय तरंगों (Elecromagnetic waves) में परिवर्तन हो जाता है।
पिरामिड विशेषज्ञों ने पाया कि बच्चों को पिरामिड के नीचे रखने से उनकी सृजनात्मकता, सक्रियता, कार्य कुशलता और मानसिक विकास में लाभ होता है। पिरामिड के नीचे पढ़ने से किसी भी विषय को वह कम समय में अच्छे से याद कर सकते हैं और उनकी स्मृति में वह विषय लम्बे समय तक बना रहता है। विद्यार्थियों को हमेशा यह समस्या रहती है कि याद करने पर भी वे सब भूल जाते हैं। विद्यार्थियों को हमेशा यह समस्या रहती है कि याद करने पर भी वे सब भूल जाते हैं। पिरामिड के उपयोग से विद्यार्थी की स्मरण शक्ति, एकाग्रता, आत्मविश्वास, ग्रहण शक्ति, इच्छा शक्ति आदि में वृद्घि होती है। परीक्षा का समय बच्चों के लिए तनाव पूर्ण होता है। ऐसे समय में बच्चे यदि पिरामिड कैप लगाकर या पिरामिड के नीचे बैठ कर पढ़ें तो उनका मन जल्दी एकाग्र होता है। वे परीक्षा के तनाव और भय से मुक्त हो जाते हैं। पिरामिड के नीचे आठ घंटाटे तक पानी रख कर इसका सेवन करने से पाचन और त्वचा सम्बंधित बिमारियां ठीक होती हैं। पिरामिड ऊर्जित पानी टॉनिक के समान है। पिरामिड ऊर्जित पानी एंटीसेप्टिक का काम करता है। फल-सब्जी काटते समय ऊंगली कटने पर पिरामिड जल लगाने से रक्त का बहाव रूक जाता है। दर्द और संक्रमण वाले स्थान पर इस जल से मालिश करने से राहत मिलती है। पिरामिड जल से स्नान करने पर त्वचा की कांति बनी रहती है। पिरामिड के अंदर एक सप्ताह तक बीजों को रखने से उनकी गुणवत्ता और विकास में वृद्धि होती है। पौधे अधिक तीव्र गति से बढ़ते हैं। उनमें कीटक्षति कम होती है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। पिरामिड ऊर्जित पानी पौधों में डालने से पौधे बहुत अच्छे हो जाते हैं। फल, फूल, सब्जियां पिरामिड के अंदर रखने से लम्बे समय तक ताजी रहती हैं और उनका स्वाद बढ़ जाता है। पिरामिड के अंदर मोबाइल, लैपटॉप और अन्य विद्युत उपकरण रखने से उनकी कार्य क्षमता बढ़ जाती है और बैटरी लम्बे समय तक चलती है। पिरामिड के अंदर दवाइयां रखने से वह अत्यंत प्रभावी हो जाती हैं और उनके दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं। औषधि और जड़ी-बूटी आदि पिरामिड के नीचे रखने से वह ऊर्जित हो जाते हैं। पिरामिड ऊर्जित टूथपेस्ट इस्तेमाल करने से दांत स्वस्थ रहते हैं। गहनों को पिरामिड बॉक्स के अंदर रखने से उनकी चमक बनी रहती है। पिरामिड ऊर्जित पानी में मेंहदी घोलने से उसका रंग ज्यादा समय तक रहता है। परफ्यूम और लिपस्टिक को पिरामिड के अंदर रखने से लम्बे समय तक उसकी खुशबू बनी रहती है। गोशाला में पिरामिड लगाने से गाय में रोग निरोधक शक्ति बढ़ जाती है। अगर गाय को घाव या चोट लगे तो वह जल्दी ठीक हो जाती है। चारे का स्वाद बढ़ जाता है और उसके पौष्टिïक तत्त्व बने रहते हैं। अच्छी आरामदायक नींद सबसे लिए आवश्यक है। यदि शयन कक्ष में पिरामिड लगाया जाए तो कम समय में नींद पूरी हो जाती है। शरीर ऊर्जावान रहता है। बच्चों को पिरामिड के नीचे सुलाने से उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है और उनका समुचित विकास होता है। मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाली विभिन्न तरंगों में आश्चर्यजनक परिवर्तन होता है। बगीचे में पिरामिड लगाने से पौधे स्वस्थ और सुन्दर रहते हैं। पौधे में रोग प्रतिरोधक ऊर्जा अनंत होती है। वहां बैठ कर ध्यान करने से पिरामिड ऊर्जा के साथ-साथ हमें पौधों से भी ऊर्जा मिलती है जिससे मन जल्दी शांत और विचार शून्य हो जाता है। यह पिरामिड इस तरह से बनाया जाता है कि खोल कर कहीं भी लगाया जा सकता है। इस पिरामिड को बनाने में ज्यादा खर्च नहीं होता। यह पिरामिड छोटे-बड़े किसी भी आकार का बनाया जा सकता है। नमक, मसाले और अन्य सामग्री पिरामिड के अंदर रखने से वह लम्बे समय तक खराब नहीं होते। भोजन अधिक स्वादिष्ट और ऊर्जादायक बनता है। पिरामिड के नीचे पशु-पक्षी अधिक शांत और स्वस्थ रहते हैं। पिरामिड शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर सड़क के किनारे पिरामिड लगाया जाए तो दुर्घटनाएं कम हो जाती हैं। कार और स्कूटर में पिरामिड लगाने से उनकी कार्य क्षमता बढ़ जाती है। पिरामिड के नीचे वाद्य रखने से उसकी ध्वनि उत्तम हो जाती है। पिरामिड के अंदर संगीत की तरंगों से उपस्थित लोगों का मन जल्दी शांत होता है। पिरामिड आकार के संरक्षण गोदामों में अनाज, बीज आदि रखने से वह क्षतिग्रस्त नहीं होते और उनकी उत्पादकता में एक सौ% तक वृद्धि होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिस स्थान पर बड़ा पिरामिड होता है उसके आसपास पर्यावरण की ओजोन परत अपने आप ठीक हो जाती है और प्रदूषण कम हो जाता है। पिरामिड आकृति से बने घर में रहने वालों का शारीरिक , मानसिक, बौद्धिक , आध्यात्मिक विकास और सृजन शक्ति में वृद्घि होती है। घर और आस-पास का वातावरण सकारात्मक बना रहता है। पिरामिड किसी भी स्थान के वास्तु दोष और जिओपेथिक स्ट्रेस को सामान्य करता है। वहां की विद्युत चुम्बकीय तरंगों में परिवर्तन हो जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनकी 57 सदस्यीय मंत्रिपरिषद ने गुरुवार शाम राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित एक भव्य समारोह में शपथ ग्रहण ली। आज मंत्रियों के विभागों का ऐलान किया जा रहा है। राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, के विभागों में बड़ा बदलाव किया गया है। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली पहली सरकार में राजनाथ सिंह गृह मंत्री थे जबकि निर्मला सीतारमण रक्षा मंत्री थीं। वहीं पूर्व विदेश सचिव रहे एस जयशंकर भारत के नए विदेश मंत्री बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास डीओपीटी ,एटॉमिक एनर्जी मंत्रालय रहेंगे। इसके साथ ही सभी अहम नीतिगत मुद्दों से जुड़े मंत्रालय तथा अनावंटित मंत्रालय भी उन्ही के पास ही रहेंगे। - श्रीपद नाईक : आयुष मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), रक्षा मंत्रालय (राज्य मंत्री) - जितेंद्र सिंह : पूर्वोत्तर विकास (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, जनशिकायत और पेंशन, परमाणु उर्जा, अंतरिक्ष मंत्रालय (राज्य मंत्री) - किरण रिजिजू : युवा मामले एवं खेल (स्वतंत्र प्रभार), अल्पसंख्यक मामले (राज्य मंत्री) - प्रह्लाद सिंह पटेल : संस्कृति और पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार) - आरके सिंह : बिजली, नवीन एवं नवीकरणीय उर्जा (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता (राज्य मंत्री) - हरदीप सिंह पुरी : शहरी विकास और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (राज्य मंत्री) - मनसुख मंडाविया : जहाजरानी (स्वतंत्र प्रभार), रसायन एवं उर्वरक (राज्य मंत्री)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनकी सत्तावन सदस्यीय मंत्रिपरिषद ने गुरुवार शाम राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित एक भव्य समारोह में शपथ ग्रहण ली। आज मंत्रियों के विभागों का ऐलान किया जा रहा है। राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, के विभागों में बड़ा बदलाव किया गया है। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली पहली सरकार में राजनाथ सिंह गृह मंत्री थे जबकि निर्मला सीतारमण रक्षा मंत्री थीं। वहीं पूर्व विदेश सचिव रहे एस जयशंकर भारत के नए विदेश मंत्री बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास डीओपीटी ,एटॉमिक एनर्जी मंत्रालय रहेंगे। इसके साथ ही सभी अहम नीतिगत मुद्दों से जुड़े मंत्रालय तथा अनावंटित मंत्रालय भी उन्ही के पास ही रहेंगे। - श्रीपद नाईक : आयुष मंत्रालय , रक्षा मंत्रालय - जितेंद्र सिंह : पूर्वोत्तर विकास , पीएमओ, कार्मिक, जनशिकायत और पेंशन, परमाणु उर्जा, अंतरिक्ष मंत्रालय - किरण रिजिजू : युवा मामले एवं खेल , अल्पसंख्यक मामले - प्रह्लाद सिंह पटेल : संस्कृति और पर्यटन - आरके सिंह : बिजली, नवीन एवं नवीकरणीय उर्जा , कौशल विकास एवं उद्यमिता - हरदीप सिंह पुरी : शहरी विकास और नागरिक उड्डयन मंत्रालय , वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय - मनसुख मंडाविया : जहाजरानी , रसायन एवं उर्वरक
कैलिफोर्निया,एजेंसी। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना का मानना है कि भारतीय लोग पाकिस्तान को नहीं, बल्कि चीन को सबसे बड़ी सैन्य चुनौती मानते हैं। कैलिफोर्निया के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के हूवर इंस्टीट्यूट में विदेश नीति पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अमेरिका को चीन के साथ अपने रिश्तों को फिर से संतुलित करने की जरूरत है। रो खन्ना ने कहा कि चीन से अमेरिका के संतुलित रिश्तों से अमेरिका और और एशिया में अमेरिकी सहयोगियों को मिल रही चुनौती को लेकर स्पष्टता आएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिकी कूटनीति और नेतृत्व की बदौलत 21वीं सदी, 20वीं सदी की तुलना में कम हिंसाग्रस्त होगी। उन्होंने कहा कि चीन एशिया में आधिपत्य जमा रहा है और सीमा विवाद को लेकर भारत को धमका रहा है तो अन्य देशों के साथ भी जूनियर सहयोगियों जैसा व्यवहार कर रहा है। अमेरिका को भारत और अन्य एशियाई सहयोगी देशों के साथ संबंध मजबूत करने की जरूरत है।
कैलिफोर्निया,एजेंसी। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना का मानना है कि भारतीय लोग पाकिस्तान को नहीं, बल्कि चीन को सबसे बड़ी सैन्य चुनौती मानते हैं। कैलिफोर्निया के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के हूवर इंस्टीट्यूट में विदेश नीति पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अमेरिका को चीन के साथ अपने रिश्तों को फिर से संतुलित करने की जरूरत है। रो खन्ना ने कहा कि चीन से अमेरिका के संतुलित रिश्तों से अमेरिका और और एशिया में अमेरिकी सहयोगियों को मिल रही चुनौती को लेकर स्पष्टता आएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिकी कूटनीति और नेतृत्व की बदौलत इक्कीसवीं सदी, बीसवीं सदी की तुलना में कम हिंसाग्रस्त होगी। उन्होंने कहा कि चीन एशिया में आधिपत्य जमा रहा है और सीमा विवाद को लेकर भारत को धमका रहा है तो अन्य देशों के साथ भी जूनियर सहयोगियों जैसा व्यवहार कर रहा है। अमेरिका को भारत और अन्य एशियाई सहयोगी देशों के साथ संबंध मजबूत करने की जरूरत है।
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस और देश के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुके राणा भगवान दास पाकिस्तान के उन जजों में से हैं जिन्होंने इमरजेंसी को ग़ैर-क़ानूनी क़रार दिया है. इससे पहले पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने जब परवेज़ मुशर्रफ़ को राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी तब भी राणा भगवान दास उन तीन जजों में से थे जो इस फ़ैसले से सहमत नहीं थे. वे उन जजों में से हैं जिन्होंने नई व्यवस्था के तहत शपथ नहीं ली है जिसका सीधा मतलब है कि इमरजेंसी के दौरान वे जज नहीं माने जाएँगे. पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के एकमात्र हिंदू जज राणा भगवान दास से शाहज़ेब जिलानी ने इमरजेंसी लगाए जाने के बाद बातचीत की. पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाने के फ़ैसले पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? हमने तो पहले ही इसे सरासर ग़लत और ग़ैर क़ानूनी करार दिया था. हमारे सात जजों के बेंच ने शनिवार को ही ये कह दिया था कि अगर प्रोविज़नल कॉन्स्टीट्यूशनल ऑर्डर (पीसीओ) के तहत इमरजेंसी लगाई जाती है तो ग़लत होगा. हमने अपने फ़ैसले की कॉपी भी मीडिया को दे दी थी, उसके बाद हम घर आ गए. फिर जो हुआ वह हमने टीवी पर देखा. क्या सरकार ने आपको बताया है कि आपकी छुट्टी हो गई है? जी नहीं, सरकार से कोई संपर्क नहीं हुआ है. आपके घर पर सरकारी सुरक्षा मौजूद है या हटा ली गई है? वे अब भी मौजूद हैं. जहाँ तक आपको मालूम है, आप अभी तक सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हैं? क़ानूनी और संवैधानिक तौर पर तो मेरा यही मानना है. आपको तो पता है कि देश में संविधान मुअत्तल है, पीसीओ के तहत देश चल रहा है. ऐसे में आप क्या कर सकते हैं? ये तो आने वाला वक़्त बताएगा. आपकी इस मामले पर चीफ़ जस्टिस चौधरी से कोई मुलाक़ात या बात हुई है? हाँ, बस ख़ैर-ख़बर तक बात हुई है, फिलहाल सारे जज अपने-अपने घर पर हैं. क्या आपको अंदाज़ा था कि ऐसा कोई क़दम उठाया जा सकता है, इस तरह अचानक? नहीं, मुझे इसका अंदाज़ा नहीं था, हमें नहीं लग रहा था कि इतनी जल्दी और इस तरह से यह ऑर्डर होगा. मुशर्रफ़ ने इमरजेंसी लगाने के जो कारण बताए हैं उनमें से एक यह भी था कि न्यायपालिका अपनी हद से बाहर जाकर काम कर रही थी. नहीं, यह बिल्कुल ग़लत है, अदालतें अपने संवैधानिक दायरे के भीतर ही काम कर रही थीं. वो ये भी कह रहे हैं कि अदालत ने अपनी तरफ़ से 100 से ज्यादा मामलों में कार्रवाई की, इस तरह सरकार कैसे चल सकती थी? ये तो जनता बता सकती है कि फ़ैसले सही थे या ग़लत. जज के तो निर्णय ही बताते हैं कि वह सही था या ग़लत. जज ख़ुद नहीं बोलता, उसके ऑर्डर और जजमेंट बोलते हैं. लेकिन आपके ही कई साथी जजों ने सरकार का साथ दिया और नए पीसीओ के तहत शपथ भी ले ली है, उनके बारे में क्या कहेंगे? सबका अपना-अपना ख़याल है, अपने अपने विचार हैं और अपना अपना ज़मीर है, इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है. कल आप क्या करेंगे? कल हम चाहेंगे कि अदालत जाएँ. अगर आपको अदालत जाने से रोका गया तो? हम वापस आ जाएँगे, जज सड़क पर प्रदर्शन तो नहीं कर सकते. तो क्या आप ख़ामोश होकर बैठ जाएँगे. ये तो आने वाला वक़्त बताएगा. आपके इतने लंबे करियर का इस तरह अंत, आपका निजी अनुभव कैसा रहा है? मैंने अपनी क़ानूनी और संवैधानिक भूमिका बखूबी निभाई है, मुझे कोई अफ़सोस नहीं है, कोई शर्मिंदगी नहीं है, जो लोग क़ानून और संविधान का सम्मान नहीं करते वे मौजूदा सूरतेहाल के लिए ज़िम्मेदार हैं. 'ये सब पाकिस्तान की ख़ातिर है' 'इमरजेंसी लागू करना असंवैधानिक' 'इमरजेंसी लगाना बेहद अफ़सोस की बात'
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस और देश के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुके राणा भगवान दास पाकिस्तान के उन जजों में से हैं जिन्होंने इमरजेंसी को ग़ैर-क़ानूनी क़रार दिया है. इससे पहले पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने जब परवेज़ मुशर्रफ़ को राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी तब भी राणा भगवान दास उन तीन जजों में से थे जो इस फ़ैसले से सहमत नहीं थे. वे उन जजों में से हैं जिन्होंने नई व्यवस्था के तहत शपथ नहीं ली है जिसका सीधा मतलब है कि इमरजेंसी के दौरान वे जज नहीं माने जाएँगे. पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के एकमात्र हिंदू जज राणा भगवान दास से शाहज़ेब जिलानी ने इमरजेंसी लगाए जाने के बाद बातचीत की. पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाने के फ़ैसले पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? हमने तो पहले ही इसे सरासर ग़लत और ग़ैर क़ानूनी करार दिया था. हमारे सात जजों के बेंच ने शनिवार को ही ये कह दिया था कि अगर प्रोविज़नल कॉन्स्टीट्यूशनल ऑर्डर के तहत इमरजेंसी लगाई जाती है तो ग़लत होगा. हमने अपने फ़ैसले की कॉपी भी मीडिया को दे दी थी, उसके बाद हम घर आ गए. फिर जो हुआ वह हमने टीवी पर देखा. क्या सरकार ने आपको बताया है कि आपकी छुट्टी हो गई है? जी नहीं, सरकार से कोई संपर्क नहीं हुआ है. आपके घर पर सरकारी सुरक्षा मौजूद है या हटा ली गई है? वे अब भी मौजूद हैं. जहाँ तक आपको मालूम है, आप अभी तक सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हैं? क़ानूनी और संवैधानिक तौर पर तो मेरा यही मानना है. आपको तो पता है कि देश में संविधान मुअत्तल है, पीसीओ के तहत देश चल रहा है. ऐसे में आप क्या कर सकते हैं? ये तो आने वाला वक़्त बताएगा. आपकी इस मामले पर चीफ़ जस्टिस चौधरी से कोई मुलाक़ात या बात हुई है? हाँ, बस ख़ैर-ख़बर तक बात हुई है, फिलहाल सारे जज अपने-अपने घर पर हैं. क्या आपको अंदाज़ा था कि ऐसा कोई क़दम उठाया जा सकता है, इस तरह अचानक? नहीं, मुझे इसका अंदाज़ा नहीं था, हमें नहीं लग रहा था कि इतनी जल्दी और इस तरह से यह ऑर्डर होगा. मुशर्रफ़ ने इमरजेंसी लगाने के जो कारण बताए हैं उनमें से एक यह भी था कि न्यायपालिका अपनी हद से बाहर जाकर काम कर रही थी. नहीं, यह बिल्कुल ग़लत है, अदालतें अपने संवैधानिक दायरे के भीतर ही काम कर रही थीं. वो ये भी कह रहे हैं कि अदालत ने अपनी तरफ़ से एक सौ से ज्यादा मामलों में कार्रवाई की, इस तरह सरकार कैसे चल सकती थी? ये तो जनता बता सकती है कि फ़ैसले सही थे या ग़लत. जज के तो निर्णय ही बताते हैं कि वह सही था या ग़लत. जज ख़ुद नहीं बोलता, उसके ऑर्डर और जजमेंट बोलते हैं. लेकिन आपके ही कई साथी जजों ने सरकार का साथ दिया और नए पीसीओ के तहत शपथ भी ले ली है, उनके बारे में क्या कहेंगे? सबका अपना-अपना ख़याल है, अपने अपने विचार हैं और अपना अपना ज़मीर है, इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है. कल आप क्या करेंगे? कल हम चाहेंगे कि अदालत जाएँ. अगर आपको अदालत जाने से रोका गया तो? हम वापस आ जाएँगे, जज सड़क पर प्रदर्शन तो नहीं कर सकते. तो क्या आप ख़ामोश होकर बैठ जाएँगे. ये तो आने वाला वक़्त बताएगा. आपके इतने लंबे करियर का इस तरह अंत, आपका निजी अनुभव कैसा रहा है? मैंने अपनी क़ानूनी और संवैधानिक भूमिका बखूबी निभाई है, मुझे कोई अफ़सोस नहीं है, कोई शर्मिंदगी नहीं है, जो लोग क़ानून और संविधान का सम्मान नहीं करते वे मौजूदा सूरतेहाल के लिए ज़िम्मेदार हैं. 'ये सब पाकिस्तान की ख़ातिर है' 'इमरजेंसी लागू करना असंवैधानिक' 'इमरजेंसी लगाना बेहद अफ़सोस की बात'
बाया और तुरन्त ही उन्होंने फतवा जारी किया, 'इस्लाम धर्म को इस प्रकार उपेक्षा करने वाले व्यक्ति को श्रद्धालु मुसलमानों द्वारा पत्थर मारकर मार डालना चाहिए । पीर की आज्ञा पाकर मुसलमानों की भीड़ गुरुजी के समीप पहुँच गई, तो गुरुजी ने परमात्मा के एश्वर्य, महिमा एवं शक्ति सम्बन्धी पदों को गाना शुरू कर दिया। जो लोग क्रोध में अन्धे और पागल होकर गुरु महाराज की हत्या करने आये थे, वे गुरुजी का दिव्य संगीत सुनने में एकदम तन्मय हो गए। सबके सब परमात्मा के उस अद्भुत गायक के प्रति श्रद्धानत हो गए । पीर साहब मन ही मन उनसे मिलना चाहते थे किन्तु धर्म-अनुयाइयों के डर से वे मिलना पसंद नहीं करते थे। परन्तु जैसे पत्थर मारने वालों की घटना की सूचना पीर साहब को मिली तो पीर साहब अपने छोटे पुत्र को साथ लेकर गुरु जी से मिलने चल दिये। जिस समय बह कब्रगाह के समीप पहुंचे तो उन्हें गुरु नानक देव की आकर्षक और मीठी संगीत ध्वनि सुनाई पड़ी। पीर साहब अपने पुत्र सहित शीघ्र ही उस स्थान पर पहुंच गए जहां गुरु जी रेतीली ज़मीन पर मरदाना के साथ बैठे हुए स्वर्गीय संगीत गा रहे थे । गुरु जी की आंखें पीर साहब की ओर मुड़ीं। उनकी भुवन-मोहनी प्रेमपूर्ण चितवन ने पीर साहब का हृदय बन्दी बना लिया। पीर साहब को साक्षात अनुभव हुआ कि इस अजनबी व्यक्ति का यही आकर्षण मुझसे इस्लाम धर्म की मर्यादा एवं पीर के गौरव को विस्मृत करके जबरदस्ती अपनी ओर खींच रहा था । उन्होंने गुरु महाराज को झुककर प्रणाम किया और उनके समीप चुपचाप बैठ गये। पत्थर फेंकने वाले लोग भी गुरु जी के समीप चुपचाप बैठ गये । पोर साहब का सबसे पहला प्रश्न था "संगीत मनुष्य के चित्त में आवेगों को उत्तेजित करता है, फिर भी आप संगीत से इतना प्रेम क्यों करते है ? यह तो इन्द्रिय-मुख-वादियों का सस्ता मनोरंजन है। ईश्वर परायण व्यक्तियों को मस्तिष्क और हृदय की उत्तेजना की कोई भी आवश्यकता नहीं है । उनकी वृति अन्तर्मुखी और शान्त होनी चाहिए उनके लिए तो संगीत का त्याग अपेक्षित है । इसी कारण, हमारे धर्म इस्लाम में संगीत का निषेध है ।" गुरु महाराज ने मुस्कराकर उत्तर दिया, "आपने संगीत के प्रयोग का गलत अर्थ लगाया है। सगीत अच्छी और बुरी दोनो ही प्रकार की भावनाओ को जागृत करने के लिए अत्यन्त शक्तिशाली माध्यम है। मनुष्य के मस्तिष्क पर इसका अत्यन्त प्रभावशाली प्रभाव पड़ता है। संगीत पाषाण हृदय को भी द्रविभूत कर देता है और उसे लचीला बना देता है । यह आत्मा को अन्तर्मुखी करके उसे सत्वगुण से परिपूर्ण कर देता है इन्हीं कारणों से संगीत हमारा धर्म हैं । इसके अतिरिक्त आपके पैगम्बर भी संगीत के प्रतिकूल नहीं थे। इस बात का उल्लेख मिलता है वे अपनी स्त्री को लेकर संगीत कक्ष में गए थे। मुझे आश्चर्य कि आपने कैसे विश्वास कर लिया कि संगीत धर्म का विरोधी हैं ।" गुरु जी की सारी बातें सुनकर पीर साहब अत्यन्त संतुष्ट और प्रभावित हुए। उसके बाद उन्होंने गुरु महाराज से दूसरे अपराध का जवाब चाहा, "मैं इस बात की कल्पना नहीं कर सकता कि आप जैसे धार्मिक व्यक्ति ' बुफ" करने पर आमादा हों। आपने "अजान" में मुहम्मद पैगम्बर का नाम क्यों नहीं लिया ?" गुरु महाराज ने उत्तर दिया, "इसका केवल यही कारण है कि मैं उस एक परमात्मा का उपासक हूं जिसकी जोड़ का और कोई दूसरा है ही नहीं । परमात्मा के साथ पैगम्बर मुहम्मद का नाम न जोड़कर मैं आपके एकेश्तरवाद के के और निकट ही हुआ हूं। मुझे स्वयं बड़ा आश्चर्य है कि ख़ुदा के साथ पैगम्बर को जोड़कर ऐकेश्वरवाद किस प्रकार सिद्ध कर सकते है ? ख़ुदा अकेला है, उसके लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नही । एक ओर तो आप लोग हिन्दुओं को इस बात के लिए धिक्कारते हैं कि वे बहुदेव वाद के उपासक हैं और दूसरी ओर खुद पैगबम्र वाद चलाकर उसी बात की पुष्टि करते हैं। इसके अलावा यदि आप एक खुदा में विश्वास करते हैं; और सृष्टि का निर्माण कर्ता और पालक उसी को मानते हैं, उसी को सर्वव्यापी मानते हैं तो आप उस खुदा के बनाए हुए अन्य लोगों को घृणा और हेय दृष्टि से क्यों देखते हैं ? उन्हें क्यों मौत के घाट उतारते हैं? यदि आप उन्हें ख़ुदा की सच्ची सन्तान मानते होते तो भी उन्हें सगा भाई समझने और उनके साथ प्रेम, दया और करुणा का भाव बरतते और उनकी सेवा के लिए सदैव तैयार रहते । आपको याद रखना चाहिए कि परमात्मा का साक्षात्कार एक आदमी, एक राष्ट्र और एक युग की बपौती नहीं है । आप लोगों का केवल यही विश्वास है कि सत्य का कथन केवल मुहम्मद पैगम्बर ने किया है, इसलिए आप उन लोगों से झगड़ते हैं, जिनका इस संबंध में आपसे मतभेद है । फिर भी आप लोग खुदा से प्रेम और उनकी सेवा करने का दम्भ भरते हैं। वास्तविकता तो यह है कि आप लोग अपने ही लोगों से घृणा करते हैं और उन पर भीषण अत्याचार करते हैं । पीर साहब ने शर्म से अपना सिर नींद कर लिया और कहा, 'हिन्दुस्तान के महान पीर । अपने ठीक ही कहा है। हमारे विश्वास और क्रिया तथा आच रण में बहुत बड़ा पतन हो गया है। यह बडे दुःख की बात है । इस्लाम के नाम पर मानवता के प्रति क्रूरताए बरती गई हैं और अगचार ढाए गए हैं। इस बात पर मैं पूर्णतः सहमत हु । इसके बाद गर महाराज ने पोर साहब के तीसरे ने प्रश्न का समाधान किया। गुरु जी ने पीर साहब को इस प्रकार आश्वासन दिया, "यह आध्यात्मिक अनुभूति आप स्वयं अनुभव कर सकते हैं। आपको अपने विश्वास की वृद्धि करनी चाहिए। यदि आप अपना हृदय और मन पवित्र कर लेते हैं और अपनी आत्मा अल्लाह के चरणों में समर्पित कर दें, तो आपको मेरी
बाया और तुरन्त ही उन्होंने फतवा जारी किया, 'इस्लाम धर्म को इस प्रकार उपेक्षा करने वाले व्यक्ति को श्रद्धालु मुसलमानों द्वारा पत्थर मारकर मार डालना चाहिए । पीर की आज्ञा पाकर मुसलमानों की भीड़ गुरुजी के समीप पहुँच गई, तो गुरुजी ने परमात्मा के एश्वर्य, महिमा एवं शक्ति सम्बन्धी पदों को गाना शुरू कर दिया। जो लोग क्रोध में अन्धे और पागल होकर गुरु महाराज की हत्या करने आये थे, वे गुरुजी का दिव्य संगीत सुनने में एकदम तन्मय हो गए। सबके सब परमात्मा के उस अद्भुत गायक के प्रति श्रद्धानत हो गए । पीर साहब मन ही मन उनसे मिलना चाहते थे किन्तु धर्म-अनुयाइयों के डर से वे मिलना पसंद नहीं करते थे। परन्तु जैसे पत्थर मारने वालों की घटना की सूचना पीर साहब को मिली तो पीर साहब अपने छोटे पुत्र को साथ लेकर गुरु जी से मिलने चल दिये। जिस समय बह कब्रगाह के समीप पहुंचे तो उन्हें गुरु नानक देव की आकर्षक और मीठी संगीत ध्वनि सुनाई पड़ी। पीर साहब अपने पुत्र सहित शीघ्र ही उस स्थान पर पहुंच गए जहां गुरु जी रेतीली ज़मीन पर मरदाना के साथ बैठे हुए स्वर्गीय संगीत गा रहे थे । गुरु जी की आंखें पीर साहब की ओर मुड़ीं। उनकी भुवन-मोहनी प्रेमपूर्ण चितवन ने पीर साहब का हृदय बन्दी बना लिया। पीर साहब को साक्षात अनुभव हुआ कि इस अजनबी व्यक्ति का यही आकर्षण मुझसे इस्लाम धर्म की मर्यादा एवं पीर के गौरव को विस्मृत करके जबरदस्ती अपनी ओर खींच रहा था । उन्होंने गुरु महाराज को झुककर प्रणाम किया और उनके समीप चुपचाप बैठ गये। पत्थर फेंकने वाले लोग भी गुरु जी के समीप चुपचाप बैठ गये । पोर साहब का सबसे पहला प्रश्न था "संगीत मनुष्य के चित्त में आवेगों को उत्तेजित करता है, फिर भी आप संगीत से इतना प्रेम क्यों करते है ? यह तो इन्द्रिय-मुख-वादियों का सस्ता मनोरंजन है। ईश्वर परायण व्यक्तियों को मस्तिष्क और हृदय की उत्तेजना की कोई भी आवश्यकता नहीं है । उनकी वृति अन्तर्मुखी और शान्त होनी चाहिए उनके लिए तो संगीत का त्याग अपेक्षित है । इसी कारण, हमारे धर्म इस्लाम में संगीत का निषेध है ।" गुरु महाराज ने मुस्कराकर उत्तर दिया, "आपने संगीत के प्रयोग का गलत अर्थ लगाया है। सगीत अच्छी और बुरी दोनो ही प्रकार की भावनाओ को जागृत करने के लिए अत्यन्त शक्तिशाली माध्यम है। मनुष्य के मस्तिष्क पर इसका अत्यन्त प्रभावशाली प्रभाव पड़ता है। संगीत पाषाण हृदय को भी द्रविभूत कर देता है और उसे लचीला बना देता है । यह आत्मा को अन्तर्मुखी करके उसे सत्वगुण से परिपूर्ण कर देता है इन्हीं कारणों से संगीत हमारा धर्म हैं । इसके अतिरिक्त आपके पैगम्बर भी संगीत के प्रतिकूल नहीं थे। इस बात का उल्लेख मिलता है वे अपनी स्त्री को लेकर संगीत कक्ष में गए थे। मुझे आश्चर्य कि आपने कैसे विश्वास कर लिया कि संगीत धर्म का विरोधी हैं ।" गुरु जी की सारी बातें सुनकर पीर साहब अत्यन्त संतुष्ट और प्रभावित हुए। उसके बाद उन्होंने गुरु महाराज से दूसरे अपराध का जवाब चाहा, "मैं इस बात की कल्पना नहीं कर सकता कि आप जैसे धार्मिक व्यक्ति ' बुफ" करने पर आमादा हों। आपने "अजान" में मुहम्मद पैगम्बर का नाम क्यों नहीं लिया ?" गुरु महाराज ने उत्तर दिया, "इसका केवल यही कारण है कि मैं उस एक परमात्मा का उपासक हूं जिसकी जोड़ का और कोई दूसरा है ही नहीं । परमात्मा के साथ पैगम्बर मुहम्मद का नाम न जोड़कर मैं आपके एकेश्तरवाद के के और निकट ही हुआ हूं। मुझे स्वयं बड़ा आश्चर्य है कि ख़ुदा के साथ पैगम्बर को जोड़कर ऐकेश्वरवाद किस प्रकार सिद्ध कर सकते है ? ख़ुदा अकेला है, उसके लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नही । एक ओर तो आप लोग हिन्दुओं को इस बात के लिए धिक्कारते हैं कि वे बहुदेव वाद के उपासक हैं और दूसरी ओर खुद पैगबम्र वाद चलाकर उसी बात की पुष्टि करते हैं। इसके अलावा यदि आप एक खुदा में विश्वास करते हैं; और सृष्टि का निर्माण कर्ता और पालक उसी को मानते हैं, उसी को सर्वव्यापी मानते हैं तो आप उस खुदा के बनाए हुए अन्य लोगों को घृणा और हेय दृष्टि से क्यों देखते हैं ? उन्हें क्यों मौत के घाट उतारते हैं? यदि आप उन्हें ख़ुदा की सच्ची सन्तान मानते होते तो भी उन्हें सगा भाई समझने और उनके साथ प्रेम, दया और करुणा का भाव बरतते और उनकी सेवा के लिए सदैव तैयार रहते । आपको याद रखना चाहिए कि परमात्मा का साक्षात्कार एक आदमी, एक राष्ट्र और एक युग की बपौती नहीं है । आप लोगों का केवल यही विश्वास है कि सत्य का कथन केवल मुहम्मद पैगम्बर ने किया है, इसलिए आप उन लोगों से झगड़ते हैं, जिनका इस संबंध में आपसे मतभेद है । फिर भी आप लोग खुदा से प्रेम और उनकी सेवा करने का दम्भ भरते हैं। वास्तविकता तो यह है कि आप लोग अपने ही लोगों से घृणा करते हैं और उन पर भीषण अत्याचार करते हैं । पीर साहब ने शर्म से अपना सिर नींद कर लिया और कहा, 'हिन्दुस्तान के महान पीर । अपने ठीक ही कहा है। हमारे विश्वास और क्रिया तथा आच रण में बहुत बड़ा पतन हो गया है। यह बडे दुःख की बात है । इस्लाम के नाम पर मानवता के प्रति क्रूरताए बरती गई हैं और अगचार ढाए गए हैं। इस बात पर मैं पूर्णतः सहमत हु । इसके बाद गर महाराज ने पोर साहब के तीसरे ने प्रश्न का समाधान किया। गुरु जी ने पीर साहब को इस प्रकार आश्वासन दिया, "यह आध्यात्मिक अनुभूति आप स्वयं अनुभव कर सकते हैं। आपको अपने विश्वास की वृद्धि करनी चाहिए। यदि आप अपना हृदय और मन पवित्र कर लेते हैं और अपनी आत्मा अल्लाह के चरणों में समर्पित कर दें, तो आपको मेरी
विकास की बाधाओ का वर्णन करना है।) सार्वजनिक उपक्रम क्या है। भारतीय अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक उपक्रमा का महत्त्व बताइए । सार्वजनिक उपक्रमो मे विनिवेश का लक्ष्य कहा तक प्राप्त हुआ है। (सकेत प्रश्न के प्रथम भाग में सार्वजनिक उपक्रमो का अर्थ और महत्त्व लिखना है तथा प्रश्न के दूसरे भाग में अध्याय में दिए गए सार्वजनिक उपक्रमो मे विनिवेश का वर्णन लिखिए ।)
विकास की बाधाओ का वर्णन करना है।) सार्वजनिक उपक्रम क्या है। भारतीय अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक उपक्रमा का महत्त्व बताइए । सार्वजनिक उपक्रमो मे विनिवेश का लक्ष्य कहा तक प्राप्त हुआ है।
LagatarDesk : एक्ट्रेस सनी लियोनी अपने नये गाने मधुबन को लेकर सुर्खियों में है. सनी के नया गाना विवादों में फंस गया है. इस बीच सनी का एक और गाना रिलीज हो गया है. 'मछली' गाने पर सनी की अदाएं कहर ढाह रही है. इस गाने को Glam Angel Media Entertainment ने प्रोड्यूस किया है. फैंस को भले ही सनी का मधुबन गाना पसंद नहीं आया, लेकिन उनका नया गाना दर्शकों को काफी भा रहा है. सनी लियोनी के नये गाने मछली में वह किसी राजा को लुभाती नजर आ रही हैं. इसके लिरिक्स काफी अटपटे हैं. लेकिन सनी का अंदाज काफी अलग है. 'मछली' सॉन्ग को सिंगर पावनी पांडे और शाहिद माल्या ने गाया है. इसको राही ने लिखा है. वहीं लाखन और ओये कुणाल करण ने इस म्यूजिक को डायरेक्टर किया है. फिलहाल सनी लियोनी अपने गाने और म्यूजिक वीडियो को लेकर विवादों से घिरी हैं. उनका लेटेस्ट गाना 'मधुबन' बड़े विवाद में पड़ गया है. गाना राधा पर आधारित है. इसके लिरिक्स पर कई लोगों ने आपत्ति जताई है. मथुरा पुजारियों ने गाने को बैन करने की मांग कर रहे हैं. वहीं मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सनी लियोनी को मांफी मांगने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर सनी ऐसा नहीं करेंगी तो वो उन पर एफआईआर करेंगे. मधुबन गाने को सारेगामा म्यूजिक ने प्रोड्यूस किया है. ऐसे में उन्होंने लोगों की भावनाओं को आहत करने के लिए माफी मांगी है. साथ ही कहा कि तीन दिनों के अंदर वह गाने के लिरिक्स को बदलकर उसका नया वर्जन यूट्यूब और अलग प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज करेंगे.
LagatarDesk : एक्ट्रेस सनी लियोनी अपने नये गाने मधुबन को लेकर सुर्खियों में है. सनी के नया गाना विवादों में फंस गया है. इस बीच सनी का एक और गाना रिलीज हो गया है. 'मछली' गाने पर सनी की अदाएं कहर ढाह रही है. इस गाने को Glam Angel Media Entertainment ने प्रोड्यूस किया है. फैंस को भले ही सनी का मधुबन गाना पसंद नहीं आया, लेकिन उनका नया गाना दर्शकों को काफी भा रहा है. सनी लियोनी के नये गाने मछली में वह किसी राजा को लुभाती नजर आ रही हैं. इसके लिरिक्स काफी अटपटे हैं. लेकिन सनी का अंदाज काफी अलग है. 'मछली' सॉन्ग को सिंगर पावनी पांडे और शाहिद माल्या ने गाया है. इसको राही ने लिखा है. वहीं लाखन और ओये कुणाल करण ने इस म्यूजिक को डायरेक्टर किया है. फिलहाल सनी लियोनी अपने गाने और म्यूजिक वीडियो को लेकर विवादों से घिरी हैं. उनका लेटेस्ट गाना 'मधुबन' बड़े विवाद में पड़ गया है. गाना राधा पर आधारित है. इसके लिरिक्स पर कई लोगों ने आपत्ति जताई है. मथुरा पुजारियों ने गाने को बैन करने की मांग कर रहे हैं. वहीं मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सनी लियोनी को मांफी मांगने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर सनी ऐसा नहीं करेंगी तो वो उन पर एफआईआर करेंगे. मधुबन गाने को सारेगामा म्यूजिक ने प्रोड्यूस किया है. ऐसे में उन्होंने लोगों की भावनाओं को आहत करने के लिए माफी मांगी है. साथ ही कहा कि तीन दिनों के अंदर वह गाने के लिरिक्स को बदलकर उसका नया वर्जन यूट्यूब और अलग प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज करेंगे.
सु० - ज्ञानत्वं' कहा गया है अर्थात् जिसका पहले से ज्ञान न हो और जिसका बाघ भी न होता हो, तो ऐसी वस्तु के ज्ञान को प्रमा कहते हैं। उसके जनक प्रमाण दो प्रकार के हैं । १ व्यावहारिक रूप तत्व का बतलाने वाला । २ पारमार्थिक अबाधितत्व बाधितत्व रूप तत्व को बतलाने वाला । उक्त दोनों को यथार्थता का बोध प्रमाण होता है । भेद इतना ही है कि एक का विषय व्यवहार काल में बाधित न होने पर भी ब्रह्म ज्ञान से बाधित हो जाता है। दूसरे पारमार्थिक तत्व को बतलाने वाले उपनिषद् वाक्यों के विषय जीव ब्रह्म की एकता का भूत भविष्यत् वर्तमान किसी भी काल में बाध ( मिथ्यात्व निश्चय ) नहीं होता । प्रपञ्च के अधिष्ठान ब्रह्म का साक्षात्कार होने के बाद प्रपञ्च में मिथ्यात्व का निश्चय हो जाता है, किन्तु ब्रह्म में कभी भी मिथ्यात्व का निश्चय नहीं होता । अतः ब्रह्म पारमार्थिक सत्य है । ब्रह्म स्वरूप श्रात्मा के बतलाने वाले उपनिषद् वाक्य से भिन्न शब्द हो अथवा प्रत्यक्षादि प्रमाण हो, सभी में व्यावहारिक तत्त्वावेदकत्व रूप प्रामाण्य है। क्योंकि उनके विषय भूत भौतिक सभी वस्तुओं का व्यवहार काल में बाध नहीं होता । केवल जीव ब्रह्म की एकता बतलाने वाले 'सदेव सोम्येदमग्र आसीत्' 'एकमेवाद्वितीयम्' यहाँ से लेकर तत्त्वमसि इस वाक्य तक के सभी उपनिषद्वाक्यों में पारमार्थिक तत्वावेदकत्व रूप प्रामाण्य है । क्योंकि उपनिषदों का प्रतिपाद्य विषय जीव ब्रह्म की एकता किसी भी काल में किसी भी प्रमाण से बाधित नहीं हो सकती । 'वाक्यार्थ ज्ञाने पदार्थ ज्ञानं कारणम् ( वाक्य के अर्थ जानने के लिए उसमें पड़े हुए पदों का ज्ञान पहले होना चाहिये ) इस नियम के अनुसार 'तत्त्वमसि' महावाक्य में स्थित तत् त्वम् आदि पदों के श्रथों का ज्ञान करना पहले आवश्यक हो जाता है । जिसे परिभाषाकार स्वयं ही विस्तार से बतलाएँगे । शंका - पृथक् पृथक् सभी पदों के अर्थ ज्ञान काल में पदार्थ का बोध होने पर भी उनके संसर्ग का भान न हो रहा था, उन पदार्थों के संसर्ग का बोध कराना वाक्य का काम है । अतः पदार्थों की अपेक्षा उनका संसर्ग हो वाक्यार्थ में वैशिष्टय है, किन्तु इस प्रकार का संसर्ग भान होना महावाक्यार्थं बोधकाल में वेदान्त को इष्ट नहीं है। फिर महावाक्यार्थ बोध में क्या विशेषता है १ इसका विचार आवश्यक हो जाता है । एवं इसमें महाविशेषण क्यों दिया गया । क्योंकि इन महावाक्यों का शरीर तो कादम्बरी के वाक्य के समान विशाल है नहीं । श्रतः शरीर कृत वैशिष्ट्य इसमें नहीं है । अर्थ की विशेषता सु० - भी इसकी नहीं है क्योंकि इसका कोई लम्बा चौड़ा अर्थ नहीं । सम्बन्धकृत विशेषता तो वेदान्ती को इष्ट हो नहीं है, फिर इस दो अथवा तीन पद वाले वाक्य को महाविशेषण लगाकर महावाक्य क्यों कहा गया । समा० - ठीक है, 'घटवद् भूतलम्' इस वाक्य 'घटवद् भूतलम्' इस वाक्य में घटवद् का अर्थ घड़ा वाला और भूतल पद का अर्थ पृथ्वी है । इन दोनों पदार्थों का पृथक् पृथक् बोध हो जाने पर इनका संयोग सम्बन्ध पदार्थज्ञान काल में नहीं दीखता किन्तु वाक्यार्थ बोध में दीखता है । अतः पदार्थ ज्ञान की अपेक्षा वाक्यार्थ बोध में उनका संसर्ग हो विशेष विषय पड़ता है । उस प्रकार के तत् और त्वं पदार्थों का संसर्ग भान होना वेदान्त को इष्ट नहीं है । यदि कदाचित् तत् पदार्थ ईश्वर और त्वं पदार्थ जीव के सम्बन्ध का बोधक इस महाबाक्य को मानें अर्थात् 'तस्य त्वं' 'तस्मिन् त्वं' 'तस्मात् त्वं' इत्यादि विग्रह करके स्वस्वामीभाव राधेयभाव एवं जन्यजनक भाव रूप सम्बन्ध का बोधक तत्त्वमसि महावाक्य को मानें, तो अन्य लौकिक वाक्य के समान होने से इसमें महाविशेषण देना व्यर्थ हो जायगा । अतः तत्त्वमसि श्रुतिवाक्य में समास की कल्पना कर उक्त सम्बन्ध बोधकता मान लेने से महाविशेषण कभी भी सार्थक नहीं हो सकता । साथ ही इस वाक्य में प्रमाण्य भी नहीं रहेगा, क्योंकि अन्य प्रमाण से जीवब्रह्म का भेद एवं सम्बन्ध सिद्ध है । उसी को यदि तत्त्वमसि महावाक्य भी बतलावे, तो इसमें अनुवादकत्व या जायगा, अलौकिकता न होने के कारण प्रामाण्य तो नष्ट ही हो जायगा । अतः उक्त महावाक्य में संसर्ग बोधकत्व की कल्पना विचारित रमणीय है । महावाक्य की विशेषता तो इसमें है कि लोक से एवं अन्य अवान्तर श्रुति वाक्य से सिद्ध जीव, ब्रह्म के भेद को दूर कर अखण्ड (द) अर्थका बोधन कराता है जो किसी भी प्रमाण से हो नहीं सकता । भेद कराने वाले को संसार में बड़ा नहीं कहते, किन्तु भेद मिटाकर एकता एवं प्रभेद की स्थापना कराने वाले को बड़ा कहते हैं । तदनुसार तत्त्वमसि महावाक्य में भी विशेषता का एकमात्र कारण यही है कि यह अनादि काल से सिद्ध ज्ञान कृत जीव ब्रह्म के भेद को हटाकर अभेद प्रतिपादन करता है । अतः इसमें महाविशेषण देना सार्थक है । ऐसे ही महावाक्यों की विशेषता प्रसङ्गतः श्रागे भी बतलाई नायगी । तत्प्रदार्थ ब्रह्म के स्वरूप तथा तटस्थ लक्षण याक्यार्थ का प्रतिपादन है । श्रतः पहले तत्त्वमसि महावाक्य के तत् और त्वं पदों का अर्थ बतलाया जाता है । तच्चेक्यं तत्त्वंपदार्थज्ञानाधीनज्ञानमिति प्रथमं तत्पपदार्थो लक्षणप्रमाणाभ्यां निरूप्यते । तत्र लक्षणं द्विविधम् - स्वरूपलक्षणं तटस्थलक्षणं चेति । तत्र स्वरूपमेव लक्षणं स्वरूपलक्षणम्, यथा सत्यादिकं ब्रह्मस्वरूपलक्षणम् । 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म' ( तै०२-१ - १ ) 'आनन्दो ब्रह्मेति व्यजानात्' ( तै० ३-६ ) इति श्रुतेः । तत्प्रतिपादने पदार्थ प्रतिपादनाधीनमतः पदार्थो निरूप्यत इत्याह -- तच्चैक्यमिति । इति इतिहेतोः । प्रथमोपात्तत्वात्प्रत्यक्षद्यगोचरत्वादभ्यर्हितत्वाच्चादौ तत्पदार्थो निरूप्यते इत्यर्थः । तत्र - लक्षण प्रमाणयोः । असाधारणधर्मो लक्षणम् । स्वरूपं सद्व्यावर्तकमिति मुख्यत्वात्स्वरूपलक्षणं लक्षयति तत्रेति । तत्पदार्थलक्षणस्य प्रकृतत्वाल्लौकिकं प्रकृष्टप्रकाशश्चन्द्र इत्यनुदाहृत्य वैदिकमेतदुदाहरति - यथेत । आदिपदेन ज्ञानानन्तसङ्ग्रहः । सच्चिदनन्तात्मकमेकमेव लक्षणमिति केचित् । सत्यादिकं प्रत्येकलक्षणमित्यन्ये । अ० - जीव ब्रह्म की एकता तत् त्वम् पदों के अर्थ ज्ञान के आधीन है अतः पहले लक्षण एवं प्रमाण से पदार्थ का निरूपण किया जाता है। उनमें स्वरूप एवं तटस्थ भेद से लक्षण दो प्रकार के होते हैं । उन दोनों में से स्वरूप भूत लक्षण को स्वरूप लक्षण कहते हैं यथा सत् चित् श्रानन्दादि ब्रह्मका स्वरूप लक्षण है । अतएव 'ब्रह्म सत्य ज्ञान एवं अनन्त है 'ब्रह्मानन्द रूप है ऐसा उसे जाना' ऐसी श्रुतियां भी हैं । सु०-किसी भी पदार्थ का निरूपण लक्षण और प्रमाण से होता है । अतः तत् त्वं पदार्थ निरूपण में भी प्रत्येक का लक्षण एवं प्रमाण बतलाना होगा । असाधारण धर्म का नाम लक्षण है । वह लक्षण कभी कभी स्वरूप भूत हुआ करता है अर्थात् उसमें घमंघम भाव न होने पर भी उसकी कल्पना करक उसी को धर्मी रूप से लक्ष्य एवं धर्म रूप स लक्षण कह देते हैं । इसी का नाम स्वरूप लक्षण है। दूसरा तटस्थ लक्षण होता है। इन दोनों में सत् चित् श्रानन्द इत्यादि ब्रह्म का स्वरूप है, धर्म नहीं । नैयायिकों के जैसे परमेश्वर को द्रव्य मानकर उसमें सत्ता जाति एवं चेतनता गुण हम नहीं मानते । सत् चित् आदि ब्रह्म का स्वरूप है और असत् जड़ दुःखादि से पृथक् करके ब्रह्म का प्रतिपादक होने से इसी को हम ब्रह्म का लक्षण भी मानते हैं । श्रुतिने ब्रह्म को सत्य ज्ञान तथा अनन्त शब्द से कहा है । सत्य का अर्थ त्रैकालिक अबाध्य होता है । ज्ञान का अर्थ चैतन्य होता है और अनन्त का अर्थ देशकाल वस्तु परिच्छेद से ननु स्वस्य स्वषृत्तित्वाभावे कथं लक्षणत्वमिति चेत् । न । स्वस्येव स्वापेक्षया धर्मिधमंभावकल्पनया लक्ष्यलक्षणत्वसम्भवात् । तदुक्तम्'आनन्दो विषयानुभवो नित्यत्वं चेति सन्ति धर्माः, अपृथक्त्वेऽपि चैतन्यात्पृथगिवावभासन्ते' इति । ननु असाधारणधर्मस्य लक्षणत्वात्स्वस्य च स्ववृत्तिधर्मत्वाभावात्कथं सत्यादिकं स्वरूपलक्षणमिति शङ्कते - नन्विति । धर्मे पारमार्थिकत्वविवक्षो गौरवान्मैवमित्याह - नेति । स्वोक्ते पद्मपादाचार्य संमतिमाह - तदुक्तमिति । अ० - स्त्र में स्व की वृत्ति न रहने पर सच्चिदादि कैसे ब्रह्म का लक्षण हो सकेगा ? - ऐसा कहना ठीक नहीं क्योंकि स्वयं की अपेक्षा से धर्मधर्मी भाव को कल्पना के द्वारा ( सच्चिदादि में ) लक्ष्यलक्षण भाव सम्भव हो जाता है । इसी को पद्मपादाचार्यजी ने कहा है कि प्रानन्द विषयानुभव तथा नित्यत्त्र ये धम है और ब्रह्मचैतन्य से भिन्न हैं फिर भी भिन्न के जैसे प्रतीत होते हैं । सु० - शून्य होता है । श्रानन्द ब्रह्म का गुण नहीं है किन्तु स्वरूप है; ऐसा तत्त्ववेत्ताओं ने जाना सत्यं का सत्ता वाला, ज्ञान का ज्ञानवाला अर्थ कर लेने पर मत्त्वर्थीय श्रच् प्रत्यय श्रुति को इष्ट होता तो 'आनन्दो ब्रह्म' यहां भी आनन्द शब्द से मत्वर्थीय अच् प्रत्यय करके 'नन्दं ब्रह्म' कहना चाहिये था अर्थात् आनन्द गुणवाला ब्रह्म है श्रानन्द स्वरूप नहीं है। किन्तु 'आनन्दो ब्रह्म' उस प्रकार श्रुति वाक्य देख लेने पर ब्रह्म श्रानन्द स्वरूप ही है ऐसा करना समुचित होगा । आनन्दः इसमें मत्वर्थीय अच् प्रत्यय होने के बाद भी पुल्लिङ्ग छान्दस है । ऐसा कहने पर कहीं भी ब्यवस्था नहीं बन सकेगी । छान्दसत्व की कल्पना अगतिक गति है । अतः छन्दसत्व को कल्पना एवं मत्वर्थीय अच् प्रत्यय के विना ही श्रुति वाक्य के श्रवण मात्र पर ब्रह्म सत्य चित् श्रानन्द अनन्त रूप निश्चित हो जाता है । यह ब्रह्म का स्वरूप लक्षण हुआ क्योंकि ब्रह्म का सच्चिदादि स्वरूप है, धर्म नहीं फिर भो असत् जड़ दुःखरूप प्रपञ्च से पृथक् करके ब्रह्म को बताता है इसी से इसे स्वरूप लक्षण कहते हैं । सच्चित् आनन्द से तीनों मिलाकर ब्रह्म का लक्षण है। ऐसा किसी का कहना है और कुछ लोग प्रत्येक को ब्रह्म का पृथक् पृथक् लक्षण मानते हैं । सर्वत्र सर्वलोक प्रसिद्ध असाधारण होने से लक्षण माने गये हैं यदि सच्चिदानन्द को ब्रह्म का स्वरूप मानोगे तो लोकप्रसिद्धि से विरुद्ध होने के कारण
सुशून्य - ज्ञानत्वं' कहा गया है अर्थात् जिसका पहले से ज्ञान न हो और जिसका बाघ भी न होता हो, तो ऐसी वस्तु के ज्ञान को प्रमा कहते हैं। उसके जनक प्रमाण दो प्रकार के हैं । एक व्यावहारिक रूप तत्व का बतलाने वाला । दो पारमार्थिक अबाधितत्व बाधितत्व रूप तत्व को बतलाने वाला । उक्त दोनों को यथार्थता का बोध प्रमाण होता है । भेद इतना ही है कि एक का विषय व्यवहार काल में बाधित न होने पर भी ब्रह्म ज्ञान से बाधित हो जाता है। दूसरे पारमार्थिक तत्व को बतलाने वाले उपनिषद् वाक्यों के विषय जीव ब्रह्म की एकता का भूत भविष्यत् वर्तमान किसी भी काल में बाध नहीं होता । प्रपञ्च के अधिष्ठान ब्रह्म का साक्षात्कार होने के बाद प्रपञ्च में मिथ्यात्व का निश्चय हो जाता है, किन्तु ब्रह्म में कभी भी मिथ्यात्व का निश्चय नहीं होता । अतः ब्रह्म पारमार्थिक सत्य है । ब्रह्म स्वरूप श्रात्मा के बतलाने वाले उपनिषद् वाक्य से भिन्न शब्द हो अथवा प्रत्यक्षादि प्रमाण हो, सभी में व्यावहारिक तत्त्वावेदकत्व रूप प्रामाण्य है। क्योंकि उनके विषय भूत भौतिक सभी वस्तुओं का व्यवहार काल में बाध नहीं होता । केवल जीव ब्रह्म की एकता बतलाने वाले 'सदेव सोम्येदमग्र आसीत्' 'एकमेवाद्वितीयम्' यहाँ से लेकर तत्त्वमसि इस वाक्य तक के सभी उपनिषद्वाक्यों में पारमार्थिक तत्वावेदकत्व रूप प्रामाण्य है । क्योंकि उपनिषदों का प्रतिपाद्य विषय जीव ब्रह्म की एकता किसी भी काल में किसी भी प्रमाण से बाधित नहीं हो सकती । 'वाक्यार्थ ज्ञाने पदार्थ ज्ञानं कारणम् इस नियम के अनुसार 'तत्त्वमसि' महावाक्य में स्थित तत् त्वम् आदि पदों के श्रथों का ज्ञान करना पहले आवश्यक हो जाता है । जिसे परिभाषाकार स्वयं ही विस्तार से बतलाएँगे । शंका - पृथक् पृथक् सभी पदों के अर्थ ज्ञान काल में पदार्थ का बोध होने पर भी उनके संसर्ग का भान न हो रहा था, उन पदार्थों के संसर्ग का बोध कराना वाक्य का काम है । अतः पदार्थों की अपेक्षा उनका संसर्ग हो वाक्यार्थ में वैशिष्टय है, किन्तु इस प्रकार का संसर्ग भान होना महावाक्यार्थं बोधकाल में वेदान्त को इष्ट नहीं है। फिर महावाक्यार्थ बोध में क्या विशेषता है एक इसका विचार आवश्यक हो जाता है । एवं इसमें महाविशेषण क्यों दिया गया । क्योंकि इन महावाक्यों का शरीर तो कादम्बरी के वाक्य के समान विशाल है नहीं । श्रतः शरीर कृत वैशिष्ट्य इसमें नहीं है । अर्थ की विशेषता सुशून्य - भी इसकी नहीं है क्योंकि इसका कोई लम्बा चौड़ा अर्थ नहीं । सम्बन्धकृत विशेषता तो वेदान्ती को इष्ट हो नहीं है, फिर इस दो अथवा तीन पद वाले वाक्य को महाविशेषण लगाकर महावाक्य क्यों कहा गया । समाशून्य - ठीक है, 'घटवद् भूतलम्' इस वाक्य 'घटवद् भूतलम्' इस वाक्य में घटवद् का अर्थ घड़ा वाला और भूतल पद का अर्थ पृथ्वी है । इन दोनों पदार्थों का पृथक् पृथक् बोध हो जाने पर इनका संयोग सम्बन्ध पदार्थज्ञान काल में नहीं दीखता किन्तु वाक्यार्थ बोध में दीखता है । अतः पदार्थ ज्ञान की अपेक्षा वाक्यार्थ बोध में उनका संसर्ग हो विशेष विषय पड़ता है । उस प्रकार के तत् और त्वं पदार्थों का संसर्ग भान होना वेदान्त को इष्ट नहीं है । यदि कदाचित् तत् पदार्थ ईश्वर और त्वं पदार्थ जीव के सम्बन्ध का बोधक इस महाबाक्य को मानें अर्थात् 'तस्य त्वं' 'तस्मिन् त्वं' 'तस्मात् त्वं' इत्यादि विग्रह करके स्वस्वामीभाव राधेयभाव एवं जन्यजनक भाव रूप सम्बन्ध का बोधक तत्त्वमसि महावाक्य को मानें, तो अन्य लौकिक वाक्य के समान होने से इसमें महाविशेषण देना व्यर्थ हो जायगा । अतः तत्त्वमसि श्रुतिवाक्य में समास की कल्पना कर उक्त सम्बन्ध बोधकता मान लेने से महाविशेषण कभी भी सार्थक नहीं हो सकता । साथ ही इस वाक्य में प्रमाण्य भी नहीं रहेगा, क्योंकि अन्य प्रमाण से जीवब्रह्म का भेद एवं सम्बन्ध सिद्ध है । उसी को यदि तत्त्वमसि महावाक्य भी बतलावे, तो इसमें अनुवादकत्व या जायगा, अलौकिकता न होने के कारण प्रामाण्य तो नष्ट ही हो जायगा । अतः उक्त महावाक्य में संसर्ग बोधकत्व की कल्पना विचारित रमणीय है । महावाक्य की विशेषता तो इसमें है कि लोक से एवं अन्य अवान्तर श्रुति वाक्य से सिद्ध जीव, ब्रह्म के भेद को दूर कर अखण्ड अर्थका बोधन कराता है जो किसी भी प्रमाण से हो नहीं सकता । भेद कराने वाले को संसार में बड़ा नहीं कहते, किन्तु भेद मिटाकर एकता एवं प्रभेद की स्थापना कराने वाले को बड़ा कहते हैं । तदनुसार तत्त्वमसि महावाक्य में भी विशेषता का एकमात्र कारण यही है कि यह अनादि काल से सिद्ध ज्ञान कृत जीव ब्रह्म के भेद को हटाकर अभेद प्रतिपादन करता है । अतः इसमें महाविशेषण देना सार्थक है । ऐसे ही महावाक्यों की विशेषता प्रसङ्गतः श्रागे भी बतलाई नायगी । तत्प्रदार्थ ब्रह्म के स्वरूप तथा तटस्थ लक्षण याक्यार्थ का प्रतिपादन है । श्रतः पहले तत्त्वमसि महावाक्य के तत् और त्वं पदों का अर्थ बतलाया जाता है । तच्चेक्यं तत्त्वंपदार्थज्ञानाधीनज्ञानमिति प्रथमं तत्पपदार्थो लक्षणप्रमाणाभ्यां निरूप्यते । तत्र लक्षणं द्विविधम् - स्वरूपलक्षणं तटस्थलक्षणं चेति । तत्र स्वरूपमेव लक्षणं स्वरूपलक्षणम्, यथा सत्यादिकं ब्रह्मस्वरूपलक्षणम् । 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म' 'आनन्दो ब्रह्मेति व्यजानात्' इति श्रुतेः । तत्प्रतिपादने पदार्थ प्रतिपादनाधीनमतः पदार्थो निरूप्यत इत्याह -- तच्चैक्यमिति । इति इतिहेतोः । प्रथमोपात्तत्वात्प्रत्यक्षद्यगोचरत्वादभ्यर्हितत्वाच्चादौ तत्पदार्थो निरूप्यते इत्यर्थः । तत्र - लक्षण प्रमाणयोः । असाधारणधर्मो लक्षणम् । स्वरूपं सद्व्यावर्तकमिति मुख्यत्वात्स्वरूपलक्षणं लक्षयति तत्रेति । तत्पदार्थलक्षणस्य प्रकृतत्वाल्लौकिकं प्रकृष्टप्रकाशश्चन्द्र इत्यनुदाहृत्य वैदिकमेतदुदाहरति - यथेत । आदिपदेन ज्ञानानन्तसङ्ग्रहः । सच्चिदनन्तात्मकमेकमेव लक्षणमिति केचित् । सत्यादिकं प्रत्येकलक्षणमित्यन्ये । अशून्य - जीव ब्रह्म की एकता तत् त्वम् पदों के अर्थ ज्ञान के आधीन है अतः पहले लक्षण एवं प्रमाण से पदार्थ का निरूपण किया जाता है। उनमें स्वरूप एवं तटस्थ भेद से लक्षण दो प्रकार के होते हैं । उन दोनों में से स्वरूप भूत लक्षण को स्वरूप लक्षण कहते हैं यथा सत् चित् श्रानन्दादि ब्रह्मका स्वरूप लक्षण है । अतएव 'ब्रह्म सत्य ज्ञान एवं अनन्त है 'ब्रह्मानन्द रूप है ऐसा उसे जाना' ऐसी श्रुतियां भी हैं । सुशून्य-किसी भी पदार्थ का निरूपण लक्षण और प्रमाण से होता है । अतः तत् त्वं पदार्थ निरूपण में भी प्रत्येक का लक्षण एवं प्रमाण बतलाना होगा । असाधारण धर्म का नाम लक्षण है । वह लक्षण कभी कभी स्वरूप भूत हुआ करता है अर्थात् उसमें घमंघम भाव न होने पर भी उसकी कल्पना करक उसी को धर्मी रूप से लक्ष्य एवं धर्म रूप स लक्षण कह देते हैं । इसी का नाम स्वरूप लक्षण है। दूसरा तटस्थ लक्षण होता है। इन दोनों में सत् चित् श्रानन्द इत्यादि ब्रह्म का स्वरूप है, धर्म नहीं । नैयायिकों के जैसे परमेश्वर को द्रव्य मानकर उसमें सत्ता जाति एवं चेतनता गुण हम नहीं मानते । सत् चित् आदि ब्रह्म का स्वरूप है और असत् जड़ दुःखादि से पृथक् करके ब्रह्म का प्रतिपादक होने से इसी को हम ब्रह्म का लक्षण भी मानते हैं । श्रुतिने ब्रह्म को सत्य ज्ञान तथा अनन्त शब्द से कहा है । सत्य का अर्थ त्रैकालिक अबाध्य होता है । ज्ञान का अर्थ चैतन्य होता है और अनन्त का अर्थ देशकाल वस्तु परिच्छेद से ननु स्वस्य स्वषृत्तित्वाभावे कथं लक्षणत्वमिति चेत् । न । स्वस्येव स्वापेक्षया धर्मिधमंभावकल्पनया लक्ष्यलक्षणत्वसम्भवात् । तदुक्तम्'आनन्दो विषयानुभवो नित्यत्वं चेति सन्ति धर्माः, अपृथक्त्वेऽपि चैतन्यात्पृथगिवावभासन्ते' इति । ननु असाधारणधर्मस्य लक्षणत्वात्स्वस्य च स्ववृत्तिधर्मत्वाभावात्कथं सत्यादिकं स्वरूपलक्षणमिति शङ्कते - नन्विति । धर्मे पारमार्थिकत्वविवक्षो गौरवान्मैवमित्याह - नेति । स्वोक्ते पद्मपादाचार्य संमतिमाह - तदुक्तमिति । अशून्य - स्त्र में स्व की वृत्ति न रहने पर सच्चिदादि कैसे ब्रह्म का लक्षण हो सकेगा ? - ऐसा कहना ठीक नहीं क्योंकि स्वयं की अपेक्षा से धर्मधर्मी भाव को कल्पना के द्वारा लक्ष्यलक्षण भाव सम्भव हो जाता है । इसी को पद्मपादाचार्यजी ने कहा है कि प्रानन्द विषयानुभव तथा नित्यत्त्र ये धम है और ब्रह्मचैतन्य से भिन्न हैं फिर भी भिन्न के जैसे प्रतीत होते हैं । सुशून्य - शून्य होता है । श्रानन्द ब्रह्म का गुण नहीं है किन्तु स्वरूप है; ऐसा तत्त्ववेत्ताओं ने जाना सत्यं का सत्ता वाला, ज्ञान का ज्ञानवाला अर्थ कर लेने पर मत्त्वर्थीय श्रच् प्रत्यय श्रुति को इष्ट होता तो 'आनन्दो ब्रह्म' यहां भी आनन्द शब्द से मत्वर्थीय अच् प्रत्यय करके 'नन्दं ब्रह्म' कहना चाहिये था अर्थात् आनन्द गुणवाला ब्रह्म है श्रानन्द स्वरूप नहीं है। किन्तु 'आनन्दो ब्रह्म' उस प्रकार श्रुति वाक्य देख लेने पर ब्रह्म श्रानन्द स्वरूप ही है ऐसा करना समुचित होगा । आनन्दः इसमें मत्वर्थीय अच् प्रत्यय होने के बाद भी पुल्लिङ्ग छान्दस है । ऐसा कहने पर कहीं भी ब्यवस्था नहीं बन सकेगी । छान्दसत्व की कल्पना अगतिक गति है । अतः छन्दसत्व को कल्पना एवं मत्वर्थीय अच् प्रत्यय के विना ही श्रुति वाक्य के श्रवण मात्र पर ब्रह्म सत्य चित् श्रानन्द अनन्त रूप निश्चित हो जाता है । यह ब्रह्म का स्वरूप लक्षण हुआ क्योंकि ब्रह्म का सच्चिदादि स्वरूप है, धर्म नहीं फिर भो असत् जड़ दुःखरूप प्रपञ्च से पृथक् करके ब्रह्म को बताता है इसी से इसे स्वरूप लक्षण कहते हैं । सच्चित् आनन्द से तीनों मिलाकर ब्रह्म का लक्षण है। ऐसा किसी का कहना है और कुछ लोग प्रत्येक को ब्रह्म का पृथक् पृथक् लक्षण मानते हैं । सर्वत्र सर्वलोक प्रसिद्ध असाधारण होने से लक्षण माने गये हैं यदि सच्चिदानन्द को ब्रह्म का स्वरूप मानोगे तो लोकप्रसिद्धि से विरुद्ध होने के कारण
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव इन दिनों किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके इलाज के लिए वे मंगलवार देर रात सिंगापुर पहुंचे, जहां बेटी रोहिणी आचार्या ने उनका स्वागत किया। लालू यादव के साथ उनकी पत्नी राबड़ी देवी, सांसद बेटी मीसा भारती के अलावा विधान पार्षद सुनील सिंह, सुभाष यादव भी सिंगापुर पहुंचे हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव इन दिनों किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके इलाज के लिए वे मंगलवार देर रात सिंगापुर पहुंचे, जहां बेटी रोहिणी आचार्या ने उनका स्वागत किया। लालू यादव के साथ उनकी पत्नी राबड़ी देवी, सांसद बेटी मीसा भारती के अलावा विधान पार्षद सुनील सिंह, सुभाष यादव भी सिंगापुर पहुंचे हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
अमृतसर रेलवे स्टेशन से करीब चार किलोमीटर दूर जोड़ा फाटक के पास दशहरा मेले में बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मना रहे दर्जनों लोगों के साथ रेल की पटरियों पर जो वीभत्स हादसा हुआ, उससे हर देशवासी का हृदय कांप उठा और आंखें नम हो गईं। पटाखों की गूंज और ढोल-नगाड़ों का यह उत्सव पलभर में ही कैसे मौत के मातम में तब्दील हो गया, किसी को कुछ समझने का अवसर तक नहीं मिला। हालांकि इस दर्दनाक हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए जा चुके हैं, किंतु सरसरी तौर पर देखें तो साफ पता चलता है कि इस हादसे के लिए स्थानीय प्रशासन, रेल तंत्र, समारोह के आयोजक और आमजन हर कोई कहीं न कहीं जिम्मेदार है, अपनी जिम्मेदारी से कोई भी भाग नहीं सकता। न केवल अमृतसर में ही, बल्कि उत्तर भारत में अनेक जगहों पर इसी तरह के आयोजन रेल की पटरियों के आसपास होते रहे हैं, किंतु प्रायः देखा जाता रहा है कि ऐसे समारोहों में सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा जाता। जब कभी अमृतसर जैसा कोई दिल दहलाने वाला भयावह हादसा सामने आता है, तो भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के प्रयासों पर चर्चा के बजाय राजनीतिक दलों द्वारा एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा करने की शर्मनाक राजनीति शुरू हो जाती है। विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों या धार्मिक मेलों में भयावह हादसे होते रहे हैं, किंतु अभी तक यह देखने में नहीं आया कि ऐसे हादसों के लिए किसी की स्पष्ट जवाबदेही तय की गई हो और दोषियों को दंडित किया गया हो। उल्टे ऐसे खौफनाक हादसों पर भी जब राजनीतिक रोटियां सेंकने की कवायद नजर आती है। अगर बात की जाए अमृतसर हादसे की तो अमृतसर में जोड़ा गेट के निकट अमृतसर और मानावाला के बीच लेवल क्रासिंग गेट पर जहां यह हादसा हुआ, वहां से करीब 60-70 मीटर की दूरी पर एक मैदान में पिछले कई वर्षों से इसी प्रकार दशहरे के दिन रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित होता रहा है। हैरानी की बात यह रही कि मैदान के एक हिस्से में वीआईपी मेहमानों के लिए मंच बनाया गया था और उसी मंच के पीछे से उनके आने-जाने की व्यवस्था थी, किंतु आम लोगों के लिए मैदान में आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था। मैदान की क्षमता करीब ढ़ाई हजार लोगों के एकत्र होने की ही है, लेकिन यहां करीब सात हजार लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। रेलवे लाइन और मैदान को अलग करने वाली मैदान में ही एक दीवार है और बड़ी संख्या में लोग उस दीवार के साथ-साथ रेलवे ट्रैक पर भी मौजूद थे। आयोजकों ने रेल पटरी की ओर घुमाकर एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई थी और यह स्क्रीन लगने से दर्शकों के देखने के लिए पटरी ही सबसे उपयुक्त जगह थी। आश्चर्य की बात है कि ढ़ाई हजार क्षमता वाले मैदान में सात हजार की भीड़ जमा थी, किंतु भीड़ का प्रबंधन करने के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। हर साल हो रहे दशहरा मेले में हजारों की भीड़ जुटने के बावजूद आयोजन स्थल से रेलवे ट्रैक की ओर तार फेंसिंग कराना जरूरी क्यों नहीं समझा गया? कहा जा रहा है कि आयोजकों ने प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली थी। ऐसे में गंभीर सवाल यह है कि अगर अनुमति नहीं थी, तो आयोजक कैसे हर साल इसी जगह पर आयोजन कर रहे थे और इस बार भी बगैर प्रशासनिक अनुमति के हो रहे आयोजन में हजारों लोगों की भीड़ जुटने के बाद भी पुलिस प्रशासन कहां सोया था? आयोजकों को भली-भांति यह मालूम था कि इसी ट्रैक से कई रेलगाडि़यां तीव्र गति से गुजरती हैं और लोगों की भीड़ इन्हीं ट्रैक पर जमा है, इसके बावजूद आयोजकों की ओर से ऐसे कोई प्रयास नहीं किए, जिससे लोगों को ट्रैक पर इकट्ठा होने से रोका जा सके, बल्कि कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनसे स्पष्ट है कि लोगों की भीड़ के रेलवे ट्रैक पर इकट्ठा होने से आयोजक इतने उत्साहित थे कि मंच से बोलते हुए एक व्यक्ति तो मंच पर मौजूद मुख्य अतिथि नवजोत कौर सिद्धू को कह रहा था कि मैडम यहां देखिए, इन लोगों को रेल पटरियों की भी कोई चिंता नहीं है, भले ही 500 ट्रेन भी यहां से गुजर जाएं, फिर भी 5000 लोग इसी तरह आपके लिए खड़े रहेंगे। आश्चर्य की बात यह रही कि इसके बाद भी पंजाब सरकार के विवादास्पद मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए लोगों से रेलवे ट्रैक से हटने की अपील करना मुनासिब नहीं समझा, बल्कि ट्रैक पर भयानक रेल हादसा होते ही वह वहां से नदारद हो गई। हैरानी यह देखकर भी होती है कि किस प्रकार अपनी पत्नी के गैर जिम्मेदाराना रुख पर पर्दा डालते हुए नवजोत सिंह सिद्धू इस भयानक रेल नरसंहार को प्राकृतिक आपदा साबित करते नजर आए, जबकि यह आईने की तरह साफ है कि अगर थोड़ी सावधानी भी बरती गई होती, तो इस दुर्भाग्यपूर्ण नरसंहार को टाला जा सकता था। हालांकि जहां तक रेल चालक की गलती की बात है तो रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी का कहना है कि यदि चालक इमरजेंसी ब्रेक लगा देता, तो इससे भी बड़ा हादसा हो सकता था, क्योंकि डीएमयू ट्रेन को रोकने के लिए कम से कम 625 मीटर पहले ड्राइवर को यह जानकारी मिल जानी चाहिए कि आगे रेलवे ट्रैक पर लोग जमा हैं। सवाल यह है कि अमृतसर हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है? अधिकांश लोग उस ट्रेन के चालक को प्रमुख रूप से जिम्मेदार मान रहे हैं, जो 'रावण एक्प्रेस' बनकर महज पांच सैकेंड के भीतर इतने सारे लोगों को रौंदती हुई गुजर गई, लेकिन देखा जाए तो हादसे के लिए ट्रेन चालक से बड़ी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन, पुलिस, आयोजक, मंच पर वाहवाही लूट रहे अतिथियों और उन आम नागरिकों की भी बनती है, जो मस्ती के मूड में रेल ट्रैक पर कब्जा किए थे। नियमानुसार रेल एक्ट के तहत रेलवे ट्रैक पर लोगों का आना अपराध है। अगर रेलवे की जिम्मेदारी की बात करें, तो चूंकि रेल विभाग द्वारा ट्रैक के आसपास होने वाले आयोजनों को लेकर कभी कोई सख्ती नहीं बरती जाती, इसलिए ऐसे हादसों के लिए रेल तंत्र भी कम जिम्मेदार नहीं है। देशभर में अनेक स्थानों पर रेल ट्रैक से 50 से 500 मीटर के दायरे में किसी न किसी प्रकार के उत्सवों, मेलों, सांस्कृतिक या धार्मिक कार्यक्रमों या खेलों का आयोजन हो रहा है, लेकिन रेल तंत्र के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन भी अमृतसर जैसे ही किसी दूसरे बड़े हादसे से बेखबर ऐसे आयोजनों पर मौन साधे रहे हैं। ऐसे कुछेक आयोजनों के लिए प्रशासन से अनुमति ली जाती है और रेलवे को सूचना दी जाती है अन्यथा अधिकांश जगहों पर ये आयोजन अमृतसर के दशहरा आयोजन की भांति ही होते रहते हैं। 19 अक्तूबर को दशहरा उत्सव के दौरान हुए दुर्भाग्यपूर्ण रेल हादसे के बाद देशभर में गमगीन माहौल है। साल दर साल ऐसे हादसे सामने आ रहे हैं, किंतु रेल पटरियों पर यह खूनी खेल बरसों से इसी प्रकार चला आ रहा है। रेल पटरियों पर होते ऐसे हादसों की बात करें, तो जब भी ऐसे किसी हादसे में ज्यादा लोग मारे जाते हैं तो सवाल रेल तंत्र पर ही उठते हैं, लेकिन इस बात की चर्चा नहीं होती कि आम लोग स्वयं कितने लापरवाह हैं। लोग खुद जान जोखिम में डालकर बेधड़क रेल पटरियां पार करते हैं। कई स्थानों पर फुटओवर ब्रिज होने के बावजूद लोग उनका इस्तेमाल करने के बजाय रेल पटरियां पार कर दूसरी ओर जाते हैं। बहरहाल, अब जरूरत इस बात की है कि अमृतसर हादसे से सबक लेकर ऐसे उपाय किए जाएं, जिससे इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति न हो।
अमृतसर रेलवे स्टेशन से करीब चार किलोमीटर दूर जोड़ा फाटक के पास दशहरा मेले में बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मना रहे दर्जनों लोगों के साथ रेल की पटरियों पर जो वीभत्स हादसा हुआ, उससे हर देशवासी का हृदय कांप उठा और आंखें नम हो गईं। पटाखों की गूंज और ढोल-नगाड़ों का यह उत्सव पलभर में ही कैसे मौत के मातम में तब्दील हो गया, किसी को कुछ समझने का अवसर तक नहीं मिला। हालांकि इस दर्दनाक हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए जा चुके हैं, किंतु सरसरी तौर पर देखें तो साफ पता चलता है कि इस हादसे के लिए स्थानीय प्रशासन, रेल तंत्र, समारोह के आयोजक और आमजन हर कोई कहीं न कहीं जिम्मेदार है, अपनी जिम्मेदारी से कोई भी भाग नहीं सकता। न केवल अमृतसर में ही, बल्कि उत्तर भारत में अनेक जगहों पर इसी तरह के आयोजन रेल की पटरियों के आसपास होते रहे हैं, किंतु प्रायः देखा जाता रहा है कि ऐसे समारोहों में सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा जाता। जब कभी अमृतसर जैसा कोई दिल दहलाने वाला भयावह हादसा सामने आता है, तो भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के प्रयासों पर चर्चा के बजाय राजनीतिक दलों द्वारा एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा करने की शर्मनाक राजनीति शुरू हो जाती है। विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों या धार्मिक मेलों में भयावह हादसे होते रहे हैं, किंतु अभी तक यह देखने में नहीं आया कि ऐसे हादसों के लिए किसी की स्पष्ट जवाबदेही तय की गई हो और दोषियों को दंडित किया गया हो। उल्टे ऐसे खौफनाक हादसों पर भी जब राजनीतिक रोटियां सेंकने की कवायद नजर आती है। अगर बात की जाए अमृतसर हादसे की तो अमृतसर में जोड़ा गेट के निकट अमृतसर और मानावाला के बीच लेवल क्रासिंग गेट पर जहां यह हादसा हुआ, वहां से करीब साठ-सत्तर मीटर की दूरी पर एक मैदान में पिछले कई वर्षों से इसी प्रकार दशहरे के दिन रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित होता रहा है। हैरानी की बात यह रही कि मैदान के एक हिस्से में वीआईपी मेहमानों के लिए मंच बनाया गया था और उसी मंच के पीछे से उनके आने-जाने की व्यवस्था थी, किंतु आम लोगों के लिए मैदान में आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था। मैदान की क्षमता करीब ढ़ाई हजार लोगों के एकत्र होने की ही है, लेकिन यहां करीब सात हजार लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। रेलवे लाइन और मैदान को अलग करने वाली मैदान में ही एक दीवार है और बड़ी संख्या में लोग उस दीवार के साथ-साथ रेलवे ट्रैक पर भी मौजूद थे। आयोजकों ने रेल पटरी की ओर घुमाकर एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई थी और यह स्क्रीन लगने से दर्शकों के देखने के लिए पटरी ही सबसे उपयुक्त जगह थी। आश्चर्य की बात है कि ढ़ाई हजार क्षमता वाले मैदान में सात हजार की भीड़ जमा थी, किंतु भीड़ का प्रबंधन करने के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। हर साल हो रहे दशहरा मेले में हजारों की भीड़ जुटने के बावजूद आयोजन स्थल से रेलवे ट्रैक की ओर तार फेंसिंग कराना जरूरी क्यों नहीं समझा गया? कहा जा रहा है कि आयोजकों ने प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली थी। ऐसे में गंभीर सवाल यह है कि अगर अनुमति नहीं थी, तो आयोजक कैसे हर साल इसी जगह पर आयोजन कर रहे थे और इस बार भी बगैर प्रशासनिक अनुमति के हो रहे आयोजन में हजारों लोगों की भीड़ जुटने के बाद भी पुलिस प्रशासन कहां सोया था? आयोजकों को भली-भांति यह मालूम था कि इसी ट्रैक से कई रेलगाडि़यां तीव्र गति से गुजरती हैं और लोगों की भीड़ इन्हीं ट्रैक पर जमा है, इसके बावजूद आयोजकों की ओर से ऐसे कोई प्रयास नहीं किए, जिससे लोगों को ट्रैक पर इकट्ठा होने से रोका जा सके, बल्कि कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनसे स्पष्ट है कि लोगों की भीड़ के रेलवे ट्रैक पर इकट्ठा होने से आयोजक इतने उत्साहित थे कि मंच से बोलते हुए एक व्यक्ति तो मंच पर मौजूद मुख्य अतिथि नवजोत कौर सिद्धू को कह रहा था कि मैडम यहां देखिए, इन लोगों को रेल पटरियों की भी कोई चिंता नहीं है, भले ही पाँच सौ ट्रेन भी यहां से गुजर जाएं, फिर भी पाँच हज़ार लोग इसी तरह आपके लिए खड़े रहेंगे। आश्चर्य की बात यह रही कि इसके बाद भी पंजाब सरकार के विवादास्पद मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए लोगों से रेलवे ट्रैक से हटने की अपील करना मुनासिब नहीं समझा, बल्कि ट्रैक पर भयानक रेल हादसा होते ही वह वहां से नदारद हो गई। हैरानी यह देखकर भी होती है कि किस प्रकार अपनी पत्नी के गैर जिम्मेदाराना रुख पर पर्दा डालते हुए नवजोत सिंह सिद्धू इस भयानक रेल नरसंहार को प्राकृतिक आपदा साबित करते नजर आए, जबकि यह आईने की तरह साफ है कि अगर थोड़ी सावधानी भी बरती गई होती, तो इस दुर्भाग्यपूर्ण नरसंहार को टाला जा सकता था। हालांकि जहां तक रेल चालक की गलती की बात है तो रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी का कहना है कि यदि चालक इमरजेंसी ब्रेक लगा देता, तो इससे भी बड़ा हादसा हो सकता था, क्योंकि डीएमयू ट्रेन को रोकने के लिए कम से कम छः सौ पच्चीस मीटर पहले ड्राइवर को यह जानकारी मिल जानी चाहिए कि आगे रेलवे ट्रैक पर लोग जमा हैं। सवाल यह है कि अमृतसर हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है? अधिकांश लोग उस ट्रेन के चालक को प्रमुख रूप से जिम्मेदार मान रहे हैं, जो 'रावण एक्प्रेस' बनकर महज पांच सैकेंड के भीतर इतने सारे लोगों को रौंदती हुई गुजर गई, लेकिन देखा जाए तो हादसे के लिए ट्रेन चालक से बड़ी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन, पुलिस, आयोजक, मंच पर वाहवाही लूट रहे अतिथियों और उन आम नागरिकों की भी बनती है, जो मस्ती के मूड में रेल ट्रैक पर कब्जा किए थे। नियमानुसार रेल एक्ट के तहत रेलवे ट्रैक पर लोगों का आना अपराध है। अगर रेलवे की जिम्मेदारी की बात करें, तो चूंकि रेल विभाग द्वारा ट्रैक के आसपास होने वाले आयोजनों को लेकर कभी कोई सख्ती नहीं बरती जाती, इसलिए ऐसे हादसों के लिए रेल तंत्र भी कम जिम्मेदार नहीं है। देशभर में अनेक स्थानों पर रेल ट्रैक से पचास से पाँच सौ मीटर के दायरे में किसी न किसी प्रकार के उत्सवों, मेलों, सांस्कृतिक या धार्मिक कार्यक्रमों या खेलों का आयोजन हो रहा है, लेकिन रेल तंत्र के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन भी अमृतसर जैसे ही किसी दूसरे बड़े हादसे से बेखबर ऐसे आयोजनों पर मौन साधे रहे हैं। ऐसे कुछेक आयोजनों के लिए प्रशासन से अनुमति ली जाती है और रेलवे को सूचना दी जाती है अन्यथा अधिकांश जगहों पर ये आयोजन अमृतसर के दशहरा आयोजन की भांति ही होते रहते हैं। उन्नीस अक्तूबर को दशहरा उत्सव के दौरान हुए दुर्भाग्यपूर्ण रेल हादसे के बाद देशभर में गमगीन माहौल है। साल दर साल ऐसे हादसे सामने आ रहे हैं, किंतु रेल पटरियों पर यह खूनी खेल बरसों से इसी प्रकार चला आ रहा है। रेल पटरियों पर होते ऐसे हादसों की बात करें, तो जब भी ऐसे किसी हादसे में ज्यादा लोग मारे जाते हैं तो सवाल रेल तंत्र पर ही उठते हैं, लेकिन इस बात की चर्चा नहीं होती कि आम लोग स्वयं कितने लापरवाह हैं। लोग खुद जान जोखिम में डालकर बेधड़क रेल पटरियां पार करते हैं। कई स्थानों पर फुटओवर ब्रिज होने के बावजूद लोग उनका इस्तेमाल करने के बजाय रेल पटरियां पार कर दूसरी ओर जाते हैं। बहरहाल, अब जरूरत इस बात की है कि अमृतसर हादसे से सबक लेकर ऐसे उपाय किए जाएं, जिससे इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति न हो।
रणदीप गुलेरिया ने इंडिया टुडे टीवी को बताया था कि सितंबर तक बच्चों के लिए एक कोविड -19 वैक्सीन उपलब्ध होगी। Covaxin के अलावा, बच्चों के लिए Zydus Cadila के टीके का परीक्षण भी वर्तमान में देश में चल रहा है। 7 जून को, दिल्ली एम्स ने 2 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों की कोविड-19 वैक्सीन के परीक्षण के लिए स्क्रीनिंग शुरू की। 12 मई को, DCGI ने भारत बायोटेक को दो साल से कम उम्र के बच्चों पर कोवैक्सिन के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण करने की अनुमति दी थी। रणदीप गुलेरिया का यह बयान तब आया है जब कोवैक्सिन की दूसरी खुराक 2-6 साल के बच्चों को अगले सप्ताह दी जाने की संभावना है। दिल्ली स्थित एम्स में 6-12 साल की उम्र के बच्चों को कोवैक्सिन की दूसरी खुराक पहले ही दी जा चुकी है। भारत में कोरोना महामारी के खिलाफ कोवैक्सिन, कोविशील्ड और स्पूतनिक-वी के सहारे टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। संभावित तीसरी लहर से पहले बच्चों के लिए वैक्सीन पर भी तेजी से काम हो रहा है। एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के हवाले से कहा कि बच्चों पर भारत बायोटेक के कोवैक्सिन का परीक्षण चल रहा है और सितंबर तक परिणाम आने की उम्मीद है। परिणाम अगर पॉजिटिव आते हैं तो सितंबर या उसके अगले महीने से बच्चों को वैक्सीन दी जाने की पूरी उम्मीद है।
रणदीप गुलेरिया ने इंडिया टुडे टीवी को बताया था कि सितंबर तक बच्चों के लिए एक कोविड -उन्नीस वैक्सीन उपलब्ध होगी। Covaxin के अलावा, बच्चों के लिए Zydus Cadila के टीके का परीक्षण भी वर्तमान में देश में चल रहा है। सात जून को, दिल्ली एम्स ने दो से सत्रह वर्ष की आयु के बच्चों की कोविड-उन्नीस वैक्सीन के परीक्षण के लिए स्क्रीनिंग शुरू की। बारह मई को, DCGI ने भारत बायोटेक को दो साल से कम उम्र के बच्चों पर कोवैक्सिन के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण करने की अनुमति दी थी। रणदीप गुलेरिया का यह बयान तब आया है जब कोवैक्सिन की दूसरी खुराक दो-छः साल के बच्चों को अगले सप्ताह दी जाने की संभावना है। दिल्ली स्थित एम्स में छः-बारह साल की उम्र के बच्चों को कोवैक्सिन की दूसरी खुराक पहले ही दी जा चुकी है। भारत में कोरोना महामारी के खिलाफ कोवैक्सिन, कोविशील्ड और स्पूतनिक-वी के सहारे टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। संभावित तीसरी लहर से पहले बच्चों के लिए वैक्सीन पर भी तेजी से काम हो रहा है। एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के हवाले से कहा कि बच्चों पर भारत बायोटेक के कोवैक्सिन का परीक्षण चल रहा है और सितंबर तक परिणाम आने की उम्मीद है। परिणाम अगर पॉजिटिव आते हैं तो सितंबर या उसके अगले महीने से बच्चों को वैक्सीन दी जाने की पूरी उम्मीद है।
RANCHI: अगर आपका भी बच्चा सदर हॉस्पिटल में जन्म लेता है तो उसका आधार वहीं ऑन द स्पॉट बन जाएगा। इसके लिए सदर हॉस्पिटल में आधार केंद्र को चालू कर दिया गया है, जहां जाकर आप अपने बच्चों का आधार कार्ड बनवा सकते हैं। इसके अलावा आधार कार्ड में नाम करेक्शन व प्रिंट आउट भी ले सकेंगे। बच्चों के परिजनों की परेशानी को देखते हुए हॉस्पिटल प्रबंधन ने आधार सेंटर चालू कराया है। आधार कार्ड में गड़बड़ी होने पर अब टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। इसके लिए बिना किसी टेंशन सदर हॉस्पिटल स्थित आधार सेंटर पहुंच जाएं, जहां करेक्शन के लिए तय फीस देकर आधार में गड़बड़ी सुधार करा सकते हैं। इसके बाद आपका स्मार्ट कार्ड भी बनाया जाएगा, जिससे कि कार्ड लंबे समय तक ठीक रहेगा। बच्चों का आधार कार्ड बनाने में उनके मां-बाप को काफी परेशानी हो रही थी। अब आधार केंद्र चालू होने से उन्हें राहत मिलेगी। बिना किसी टेंशन के बच्चों का आधार कार्ड बना दिया जाएगा। सुबह से दोपहर तक यह सेंटर खुला रहेगा।
RANCHI: अगर आपका भी बच्चा सदर हॉस्पिटल में जन्म लेता है तो उसका आधार वहीं ऑन द स्पॉट बन जाएगा। इसके लिए सदर हॉस्पिटल में आधार केंद्र को चालू कर दिया गया है, जहां जाकर आप अपने बच्चों का आधार कार्ड बनवा सकते हैं। इसके अलावा आधार कार्ड में नाम करेक्शन व प्रिंट आउट भी ले सकेंगे। बच्चों के परिजनों की परेशानी को देखते हुए हॉस्पिटल प्रबंधन ने आधार सेंटर चालू कराया है। आधार कार्ड में गड़बड़ी होने पर अब टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। इसके लिए बिना किसी टेंशन सदर हॉस्पिटल स्थित आधार सेंटर पहुंच जाएं, जहां करेक्शन के लिए तय फीस देकर आधार में गड़बड़ी सुधार करा सकते हैं। इसके बाद आपका स्मार्ट कार्ड भी बनाया जाएगा, जिससे कि कार्ड लंबे समय तक ठीक रहेगा। बच्चों का आधार कार्ड बनाने में उनके मां-बाप को काफी परेशानी हो रही थी। अब आधार केंद्र चालू होने से उन्हें राहत मिलेगी। बिना किसी टेंशन के बच्चों का आधार कार्ड बना दिया जाएगा। सुबह से दोपहर तक यह सेंटर खुला रहेगा।
अगर आप अच्छा मोबाइल वो भी बेहतरीन कैमरे के साथ तो शियोमी ने Mi 11 सीरीज़ के तीन स्मार्टफोन Mi 11X Pro, Mi 11 X और Mi 11 Ultra लांच किया है। लखनऊः अगर आप अच्छा मोबाइल वो भी बेहतरीन कैमरे के साथ तो शियोमी ने Mi 11 सीरीज़ के तीन स्मार्टफोन Mi 11X Pro, Mi 11 X और Mi 11 Ultra लांच किया है। तीनों में सबसे महंगा और प्रीमियम मोबाइल Mi 11 ultra है। कंपनी ने भारत में Mi 11 Ultra को सिंगल वेरिएंट 12GB RAM+256GB स्टोरेज को लांच किया है, जिसकी कीमत 69,999 रुपये है। इस मोबाइल की बिक्री को लेकर कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। तो आइए आपको बताते हैं मोबाइल के फुल स्पेसिफिकेशंस के बारे में। Mi 11 Ultra में 6. 8 इंच का डिस्प्ले दिया गया है, जो कि 2K रेजोलूशन के साथ आता है। इस मोबाइल में Qualcomm Snapdragon 888 प्रोसेसर है। इसे 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट के साथ पेश किया गया है। यूज़र्स सेल्फी क्लिक करने के लिए व्यू फाइंडर के तौर पर यूज़ कर सकते हैं। ये ऑलवेज ऑन डिस्प्ले है जहां क्लॉक और नोटिफिकेशन्स मिलेंगे। मोबाइल में अब तक का सबसे बड़ा कैमरा बंप भी देखने को मिलता है। इस मोबाइल में तीन रियर कैमरा सेटअप दिया गया हैं। Mi 11 Ultra की बैटरी 5,000mAh की है, और खास बात ये है कि इसमें फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट दिया गया है जो 67W का है। बॉक्स में 55W का ही फास्ट चार्जर मिलेगा।
अगर आप अच्छा मोबाइल वो भी बेहतरीन कैमरे के साथ तो शियोमी ने Mi ग्यारह सीरीज़ के तीन स्मार्टफोन Mi ग्यारहX Pro, Mi ग्यारह X और Mi ग्यारह Ultra लांच किया है। लखनऊः अगर आप अच्छा मोबाइल वो भी बेहतरीन कैमरे के साथ तो शियोमी ने Mi ग्यारह सीरीज़ के तीन स्मार्टफोन Mi ग्यारहX Pro, Mi ग्यारह X और Mi ग्यारह Ultra लांच किया है। तीनों में सबसे महंगा और प्रीमियम मोबाइल Mi ग्यारह ultra है। कंपनी ने भारत में Mi ग्यारह Ultra को सिंगल वेरिएंट बारहGB RAM+दो सौ छप्पनGB स्टोरेज को लांच किया है, जिसकी कीमत उनहत्तर,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। इस मोबाइल की बिक्री को लेकर कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। तो आइए आपको बताते हैं मोबाइल के फुल स्पेसिफिकेशंस के बारे में। Mi ग्यारह Ultra में छः. आठ इंच का डिस्प्ले दिया गया है, जो कि दो केल्विन रेजोलूशन के साथ आता है। इस मोबाइल में Qualcomm Snapdragon आठ सौ अठासी प्रोसेसर है। इसे बारहGB रैम और दो सौ छप्पनGB स्टोरेज वेरिएंट के साथ पेश किया गया है। यूज़र्स सेल्फी क्लिक करने के लिए व्यू फाइंडर के तौर पर यूज़ कर सकते हैं। ये ऑलवेज ऑन डिस्प्ले है जहां क्लॉक और नोटिफिकेशन्स मिलेंगे। मोबाइल में अब तक का सबसे बड़ा कैमरा बंप भी देखने को मिलता है। इस मोबाइल में तीन रियर कैमरा सेटअप दिया गया हैं। Mi ग्यारह Ultra की बैटरी पाँच,शून्यmAh की है, और खास बात ये है कि इसमें फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट दिया गया है जो सरसठ वाट का है। बॉक्स में पचपन वाट का ही फास्ट चार्जर मिलेगा।
Don't Miss! - News Congress Maun Satyagraha Live: राहुल गांधी की अयोग्यता के खिलाफ कांग्रेस कर रही 'मौन सत्याग्रह' दिल्ली, सकते। हो। हुआ यूं कि शाहरूख खान &TV के गेम शो सबसे शाणा कौन की शूटिंग कर रहे थे कि चैनल के कुछ लोगों ने उन्हें चैनल के एक दूसरे शो रज़िया सुल्तान का सूत्रधार बन शो को इंट्रोड्यूस करने की पेशकश की। शाहरूख भी झट से मान गए क्योंकि मुग़ल इतिहास में उनकी खासा रूचि। शाहरूख ने नरेशन डब करना शुरू किया पर वो शो की नब्ज़ नहीं पकड़ पा रहे थे और इधर उनका गेम शो भी अधूरा था। ऐसे में उन्होंने पहले गेम शो की शूटिंग खत्म की और फिर जुट गए दिल्ली का दिल टटोलने में। काफी मशक्कत के बाद शाहरूख संतुष्ट हुए। शो से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इसके लिए शाहरूख ने काफी उतार चढ़ाव के साथ इन लाइनों को बोला। इतना ही नहीं उन्होंने इसके लिए शो की कुछ क्लिपिंग्स भी देखी। अंत में जाकर उन्होंने अपने डायलॉग्स को ओके किया। और ये सब सब करते करते 7 से 1 कब बज गए उन्हें पता भी नहीं चला।
Don't Miss! - News Congress Maun Satyagraha Live: राहुल गांधी की अयोग्यता के खिलाफ कांग्रेस कर रही 'मौन सत्याग्रह' दिल्ली, सकते। हो। हुआ यूं कि शाहरूख खान &TV के गेम शो सबसे शाणा कौन की शूटिंग कर रहे थे कि चैनल के कुछ लोगों ने उन्हें चैनल के एक दूसरे शो रज़िया सुल्तान का सूत्रधार बन शो को इंट्रोड्यूस करने की पेशकश की। शाहरूख भी झट से मान गए क्योंकि मुग़ल इतिहास में उनकी खासा रूचि। शाहरूख ने नरेशन डब करना शुरू किया पर वो शो की नब्ज़ नहीं पकड़ पा रहे थे और इधर उनका गेम शो भी अधूरा था। ऐसे में उन्होंने पहले गेम शो की शूटिंग खत्म की और फिर जुट गए दिल्ली का दिल टटोलने में। काफी मशक्कत के बाद शाहरूख संतुष्ट हुए। शो से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इसके लिए शाहरूख ने काफी उतार चढ़ाव के साथ इन लाइनों को बोला। इतना ही नहीं उन्होंने इसके लिए शो की कुछ क्लिपिंग्स भी देखी। अंत में जाकर उन्होंने अपने डायलॉग्स को ओके किया। और ये सब सब करते करते सात से एक कब बज गए उन्हें पता भी नहीं चला।
नेतृत्व के मुद्दे को लेकर उनके और उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के बीच चल रहे मतभेद से उपजा संकट बुधवार को समाप्त हो गया। अन्नाद्रमुक समन्वयक ने (मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में) खुद पलानीस्वामी के नाम की घोषणा की। चेन्नईः तमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी को 2021 के राज्य विधानसभा चुनाव के लिये अन्नाद्रमुक ने मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार नामित किया है। डीएमके ने एके स्टालिन को अपना सीएम घोषित किया है। इस तरह, नेतृत्व के मुद्दे को लेकर उनके और उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के बीच चल रहे मतभेद से उपजा संकट बुधवार को समाप्त हो गया। अन्नाद्रमुक समन्वयक ने (मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में) खुद पलानीस्वामी के नाम की घोषणा की। उन्होंने जोरदार तालियों के बीच बताया कि पार्टी के अध्यक्ष मंडल के अध्यक्ष ई मधुसूदन के नेतृत्व में विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि उनके अलावा पलानीस्वामी, पार्टी उप समन्वयक के पी मुनुसामी, आर वैथीलिंगम और संचालन समिति के सदस्यों ने पलानीस्वामी को उम्मीदवार बनाने का सर्वसम्मति से फैसला किया। पलानीस्वमी ने कहा कि समति का गठन अन्नाद्रमुक आम परिषद के प्रस्ताव के अनुरूप होगा। बाद में मत्स्य पालन मंत्री डी जयकुमार ने संवाददाताओं से कहा कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का चयन और समिति के गठन का फैसला परामर्श एवं आम सहमति पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि अगले मुख्यमंत्री के लिये उम्मीदवार और समति गठित किये जाने के मुद्दे पर 28 सितंबर को अन्नाद्रमुक कार्यकारी समिति की बैठक में पलानीस्वामी और पनीरसेल्वम के बीच कहा-सुनी हो गई थी। उन्होंने कहा कि उनके अलावा पलानीस्वामी, पार्टी उप समन्वयक के पी मुनुसामी, आर वैथीलिंगम और संचालन समिति के सदस्यों ने पलानीस्वामी को उम्मीदवार बनाने का सर्वसम्मति से फैसला किया। इस घोषणा के बाद सत्तारूढ़ पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार संबंधी अटकलों और पैनल गठित करने को लेकर पार्टी के भीतर मतभेदों को विराम लग गया है।
नेतृत्व के मुद्दे को लेकर उनके और उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के बीच चल रहे मतभेद से उपजा संकट बुधवार को समाप्त हो गया। अन्नाद्रमुक समन्वयक ने खुद पलानीस्वामी के नाम की घोषणा की। चेन्नईः तमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी को दो हज़ार इक्कीस के राज्य विधानसभा चुनाव के लिये अन्नाद्रमुक ने मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार नामित किया है। डीएमके ने एके स्टालिन को अपना सीएम घोषित किया है। इस तरह, नेतृत्व के मुद्दे को लेकर उनके और उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के बीच चल रहे मतभेद से उपजा संकट बुधवार को समाप्त हो गया। अन्नाद्रमुक समन्वयक ने खुद पलानीस्वामी के नाम की घोषणा की। उन्होंने जोरदार तालियों के बीच बताया कि पार्टी के अध्यक्ष मंडल के अध्यक्ष ई मधुसूदन के नेतृत्व में विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि उनके अलावा पलानीस्वामी, पार्टी उप समन्वयक के पी मुनुसामी, आर वैथीलिंगम और संचालन समिति के सदस्यों ने पलानीस्वामी को उम्मीदवार बनाने का सर्वसम्मति से फैसला किया। पलानीस्वमी ने कहा कि समति का गठन अन्नाद्रमुक आम परिषद के प्रस्ताव के अनुरूप होगा। बाद में मत्स्य पालन मंत्री डी जयकुमार ने संवाददाताओं से कहा कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का चयन और समिति के गठन का फैसला परामर्श एवं आम सहमति पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि अगले मुख्यमंत्री के लिये उम्मीदवार और समति गठित किये जाने के मुद्दे पर अट्ठाईस सितंबर को अन्नाद्रमुक कार्यकारी समिति की बैठक में पलानीस्वामी और पनीरसेल्वम के बीच कहा-सुनी हो गई थी। उन्होंने कहा कि उनके अलावा पलानीस्वामी, पार्टी उप समन्वयक के पी मुनुसामी, आर वैथीलिंगम और संचालन समिति के सदस्यों ने पलानीस्वामी को उम्मीदवार बनाने का सर्वसम्मति से फैसला किया। इस घोषणा के बाद सत्तारूढ़ पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार संबंधी अटकलों और पैनल गठित करने को लेकर पार्टी के भीतर मतभेदों को विराम लग गया है।
घुमारवीं - घुमारवीं उपमंडलीय पशु चिकित्सालय द्वारा जायका बिलासपुर के सहयोग से पशुपालकों को पशुओं के लिए चॉकलेट बनाने का एकदिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डा. मनदीप ने बताया कि यह शिविर जायका बिलासुपर के सहयोग से आयोजित किया गया। शिविर में पशुपालकों को पशुओं के लिए सर्दियों में खिलाने के लिए चॉकलेट बनाने की विधि प्रैक्टिकल कर बताई गई। सर्दियों में आम तौर पर पशुओं को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है तथा ठंड के कारण पशु कमजोर हो जाते हैं। यही नहीं इस मौसम में हरे घास की कमी भी हो जाती है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर पशु पलकों को विशेष रूप की चॉकलेट बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस चॉकलेट में गुड़, चोकर, खल, यूरिया, खनिज, लवण नमक आदि को मिलाकर तैयार किया गया। डा. मनदीप ने बताया कि सर्दियों में पशुओं को इस चॉकलेट को खिलाने पर पशु स्वस्थ रहता है तथा दूध उत्पादन भी कम नहीं होता है। इसको खिलाने से हरे चारे की कुछ हद तक कमी पूरी की जा सकती है। शिविर में लगभग 50 पशुपालकों ने चॉकलेट बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। डा. मनदीप ने वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को रखना, उनकी देखभाल, बीमारियों की रोकथाम, टीकाकरण, पशुओं की सर्दियों में देखभाल बारे विस्तृत जानकारी दी। कैंप में डा. शशि शर्मा, डा. देवराज, डा. चंदेल, प्रधान जायका यूनिट प्रकाश चंद, विवेक, विक्रांत, विशाल और सुरेंद्र आदि ने भाग लेकर पशु पालकों को जानकारी बांटी।
घुमारवीं - घुमारवीं उपमंडलीय पशु चिकित्सालय द्वारा जायका बिलासपुर के सहयोग से पशुपालकों को पशुओं के लिए चॉकलेट बनाने का एकदिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डा. मनदीप ने बताया कि यह शिविर जायका बिलासुपर के सहयोग से आयोजित किया गया। शिविर में पशुपालकों को पशुओं के लिए सर्दियों में खिलाने के लिए चॉकलेट बनाने की विधि प्रैक्टिकल कर बताई गई। सर्दियों में आम तौर पर पशुओं को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है तथा ठंड के कारण पशु कमजोर हो जाते हैं। यही नहीं इस मौसम में हरे घास की कमी भी हो जाती है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर पशु पलकों को विशेष रूप की चॉकलेट बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस चॉकलेट में गुड़, चोकर, खल, यूरिया, खनिज, लवण नमक आदि को मिलाकर तैयार किया गया। डा. मनदीप ने बताया कि सर्दियों में पशुओं को इस चॉकलेट को खिलाने पर पशु स्वस्थ रहता है तथा दूध उत्पादन भी कम नहीं होता है। इसको खिलाने से हरे चारे की कुछ हद तक कमी पूरी की जा सकती है। शिविर में लगभग पचास पशुपालकों ने चॉकलेट बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। डा. मनदीप ने वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को रखना, उनकी देखभाल, बीमारियों की रोकथाम, टीकाकरण, पशुओं की सर्दियों में देखभाल बारे विस्तृत जानकारी दी। कैंप में डा. शशि शर्मा, डा. देवराज, डा. चंदेल, प्रधान जायका यूनिट प्रकाश चंद, विवेक, विक्रांत, विशाल और सुरेंद्र आदि ने भाग लेकर पशु पालकों को जानकारी बांटी।
Pleurisy एक सूजन की बीमारी है जो फेफड़ों के बाहरी खोल की pleura को प्रभावित करता है। यह एक जटिल बीमारी है जो गंभीर जटिलताओं का कारण बनती हैः फुफ्फुसोनिया, फेफड़ों की गैंग्रीन और श्वसन तंत्र की अपरिवर्तनीय बीमारियां। इसलिए, फेफड़ों की फुफ्फुस के पहले लक्षणों को देखने के बाद, औषधीय और लोक दोनों विधियों के साथ उपचार तुरंत शुरू किया जाना चाहिए। जब pleurisy रोगियों हमेशा श्वसन आंदोलनों के साथ गंभीर तीव्र दर्द की शिकायत करते हैं। एक नियम के रूप में दर्द संवेदना, फाइब्रिनस ओवरलैपिंग के क्षेत्र में स्थानीयकृत होती है और इसे तेज गहरी प्रेरणा या झुकाव के साथ काफी बढ़ाया जाता है। इस बीमारी में, लगभग सभी मनाए जाते हैंः - सामान्य मलिनता; - कमजोरी; - बुखार; यदि आप इन लक्षणों की उपस्थिति के बाद फेफड़ों के सूखे, प्रभावशाली और शुद्ध फुफ्फुस के उपचार शुरू नहीं करते हैं, तो रोगी का सांस तेज और उथला हो जाता है, और सांस लेने के भ्रमण घाव के पक्ष में असमान रूप से सीमित हो जाएंगे। अपरिपक्व pleurisy में, जो तपेदिक की विशेषता है, trapezius या pectoral मांसपेशियों की दर्द है। दुर्लभ मामलों में छाती के पल्पेशन के दौरान, सांस लेने से जुड़े क्रिप्टेशन का पता लगाना संभव है। यह भी pleura के घर्षण के शोर की उपस्थिति संभव है। कभी-कभी उसे दूरी से सुना जाता है। जब ट्यूमर के उपचार के दौरान फेफड़ों की ऑन्कोलॉजी pleurisy खुद को सांस और खांसी की कमी जैसे लक्षणों के साथ प्रकट होता है। निमोनिया के कारण फुफ्फुसीय pleurisy का इलाज करने के लिए, एंटीबायोटिक्स निर्धारित हैंः Cefazolin या Abaktal। इस बीमारी के संधिशोथ रूप में ग्लुकोकोर्टिकोस्टेरॉइड्स या गैर-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लैमेटरी ड्रग्स (बीटामेथेसोन, माज़िप्रेडन, ट्राइमासिनोलोमा इत्यादि) के साथ इलाज किया जाता है। एक लक्षणपूर्ण लक्ष्य के साथ, रोगी एनाल्जेसिक, कार्डियोवैस्कुलर और मूत्रवर्धक ले रहा है। फेफड़ों के तपेदिक pleurisy का उपचार एक phthisiatrician की मदद से किया जाता है और इस तरह के दवाओं के साथ चिकित्सा में शामिल हैंः - रिफाम्पिसिन ; - आइसोनियाज़िड; - स्ट्रेप्टोमाइसिन। बड़ी मात्रा में प्रजनन के साथ exudate की उपस्थिति में, pleural puncture या जल निकासी प्रदर्शन करके अपने निकासी का सहारा लेना आवश्यक है। एक समय में निकालने की सिफारिश 1. 5 लीटर से अधिक नहीं है, क्योंकि यह प्रक्रिया कार्डियोवैस्कुलर जटिलताओं को उत्तेजित कर सकती है, क्योंकि फेफड़ों को तेजी से सीधा कर दिया जाता है, और फिर जल्दी से वापस ले जाया जाता है। एंटीबायोटिक दवाओं के उपचार के दौरान फेफड़ों की शुद्ध फुफ्फुस के साथ, फुफ्फुसीय गुहा धोना आवश्यक है। यह एंटीसेप्टिक समाधान की मदद से किया जाता है। इस तरह के एक बीमारी के पुराने रूप में सर्जरी का सहारा लेते हैं - फेफड़ों के विलुप्त होने के साथ pleurrectomy। रोग के शुरुआती चरण में, जब फेफड़ों की फुफ्फुस के पहले लक्षण प्रकट हुए, तो जटिलताओं के उपचार और रोकथाम जड़ी बूटियों के साथ किया जा सकता है। सामग्रीः - मां-और-सौतेली माँ की पत्तियां - 10 ग्राम; - लाइसोरिस के rhizomes - 10 ग्राम; - तीन पत्ते की घड़ी की पत्तियां - 10 ग्राम; - marshweed की पत्तियां - 10 ग्राम; - पर्वतारोही पक्षी की पत्तियां - 10 ग्राम; - elecampane के rhizomes - 20 ग्राम; - सेंट जॉन वॉर्ट की पत्तियां - 20 ग्राम; औषधीय जड़ी बूटी का मिश्रण उबलते पानी डालना। 6 घंटों के बाद, दिन में तीन बार, आधा चम्मच निकालें और खाएं। वायरल pleurisy के साथ, काकेशस के हेलेबोर से एक काढ़ा का उपयोग करना बेहतर है। सामग्रीः - काकेशस के हेलेबोर की जड़ों - 10 ग्राम; जड़ें पानी से डालें और मिश्रण उबालें ताकि वाष्पीकरण के बाद आपके पास 200 मिलीलीटर तरल हो। शोरबा दिन में तीन बार 10 मिलीलीटर लिया जाता है। फेफड़ों की फुफ्फुस के इलाज के लिए, आप एक कॉटेज पनीर संपीड़न जैसे लोक उपचार का उपयोग कर सकते हैं। इसे दिन में 3 बार तीन बार पीठ पर रखा जाना चाहिए।
Pleurisy एक सूजन की बीमारी है जो फेफड़ों के बाहरी खोल की pleura को प्रभावित करता है। यह एक जटिल बीमारी है जो गंभीर जटिलताओं का कारण बनती हैः फुफ्फुसोनिया, फेफड़ों की गैंग्रीन और श्वसन तंत्र की अपरिवर्तनीय बीमारियां। इसलिए, फेफड़ों की फुफ्फुस के पहले लक्षणों को देखने के बाद, औषधीय और लोक दोनों विधियों के साथ उपचार तुरंत शुरू किया जाना चाहिए। जब pleurisy रोगियों हमेशा श्वसन आंदोलनों के साथ गंभीर तीव्र दर्द की शिकायत करते हैं। एक नियम के रूप में दर्द संवेदना, फाइब्रिनस ओवरलैपिंग के क्षेत्र में स्थानीयकृत होती है और इसे तेज गहरी प्रेरणा या झुकाव के साथ काफी बढ़ाया जाता है। इस बीमारी में, लगभग सभी मनाए जाते हैंः - सामान्य मलिनता; - कमजोरी; - बुखार; यदि आप इन लक्षणों की उपस्थिति के बाद फेफड़ों के सूखे, प्रभावशाली और शुद्ध फुफ्फुस के उपचार शुरू नहीं करते हैं, तो रोगी का सांस तेज और उथला हो जाता है, और सांस लेने के भ्रमण घाव के पक्ष में असमान रूप से सीमित हो जाएंगे। अपरिपक्व pleurisy में, जो तपेदिक की विशेषता है, trapezius या pectoral मांसपेशियों की दर्द है। दुर्लभ मामलों में छाती के पल्पेशन के दौरान, सांस लेने से जुड़े क्रिप्टेशन का पता लगाना संभव है। यह भी pleura के घर्षण के शोर की उपस्थिति संभव है। कभी-कभी उसे दूरी से सुना जाता है। जब ट्यूमर के उपचार के दौरान फेफड़ों की ऑन्कोलॉजी pleurisy खुद को सांस और खांसी की कमी जैसे लक्षणों के साथ प्रकट होता है। निमोनिया के कारण फुफ्फुसीय pleurisy का इलाज करने के लिए, एंटीबायोटिक्स निर्धारित हैंः Cefazolin या Abaktal। इस बीमारी के संधिशोथ रूप में ग्लुकोकोर्टिकोस्टेरॉइड्स या गैर-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लैमेटरी ड्रग्स के साथ इलाज किया जाता है। एक लक्षणपूर्ण लक्ष्य के साथ, रोगी एनाल्जेसिक, कार्डियोवैस्कुलर और मूत्रवर्धक ले रहा है। फेफड़ों के तपेदिक pleurisy का उपचार एक phthisiatrician की मदद से किया जाता है और इस तरह के दवाओं के साथ चिकित्सा में शामिल हैंः - रिफाम्पिसिन ; - आइसोनियाज़िड; - स्ट्रेप्टोमाइसिन। बड़ी मात्रा में प्रजनन के साथ exudate की उपस्थिति में, pleural puncture या जल निकासी प्रदर्शन करके अपने निकासी का सहारा लेना आवश्यक है। एक समय में निकालने की सिफारिश एक. पाँच लीटरटर से अधिक नहीं है, क्योंकि यह प्रक्रिया कार्डियोवैस्कुलर जटिलताओं को उत्तेजित कर सकती है, क्योंकि फेफड़ों को तेजी से सीधा कर दिया जाता है, और फिर जल्दी से वापस ले जाया जाता है। एंटीबायोटिक दवाओं के उपचार के दौरान फेफड़ों की शुद्ध फुफ्फुस के साथ, फुफ्फुसीय गुहा धोना आवश्यक है। यह एंटीसेप्टिक समाधान की मदद से किया जाता है। इस तरह के एक बीमारी के पुराने रूप में सर्जरी का सहारा लेते हैं - फेफड़ों के विलुप्त होने के साथ pleurrectomy। रोग के शुरुआती चरण में, जब फेफड़ों की फुफ्फुस के पहले लक्षण प्रकट हुए, तो जटिलताओं के उपचार और रोकथाम जड़ी बूटियों के साथ किया जा सकता है। सामग्रीः - मां-और-सौतेली माँ की पत्तियां - दस ग्राम; - लाइसोरिस के rhizomes - दस ग्राम; - तीन पत्ते की घड़ी की पत्तियां - दस ग्राम; - marshweed की पत्तियां - दस ग्राम; - पर्वतारोही पक्षी की पत्तियां - दस ग्राम; - elecampane के rhizomes - बीस ग्राम; - सेंट जॉन वॉर्ट की पत्तियां - बीस ग्राम; औषधीय जड़ी बूटी का मिश्रण उबलते पानी डालना। छः घंटाटों के बाद, दिन में तीन बार, आधा चम्मच निकालें और खाएं। वायरल pleurisy के साथ, काकेशस के हेलेबोर से एक काढ़ा का उपयोग करना बेहतर है। सामग्रीः - काकेशस के हेलेबोर की जड़ों - दस ग्राम; जड़ें पानी से डालें और मिश्रण उबालें ताकि वाष्पीकरण के बाद आपके पास दो सौ मिलीलीटर तरल हो। शोरबा दिन में तीन बार दस मिलीलीटर लिया जाता है। फेफड़ों की फुफ्फुस के इलाज के लिए, आप एक कॉटेज पनीर संपीड़न जैसे लोक उपचार का उपयोग कर सकते हैं। इसे दिन में तीन बार तीन बार पीठ पर रखा जाना चाहिए।
(37) चित्र 35 में भीतरी गड्ढे के वार्यों जोर दिखाई पडने वालो नफेड वन्तु है वज्रमणि का पूर्णत उल्लचित विशाल और वृन्दर खण्ड । यह कहना मुश्किल है कि यह किन काम आता था, किन्तु चोनियों को वज्रमणि सदैव अत्यधिक प्रिय था और इतनी ॠषसूरती से तराशा हुजा श्वेत खड क्मिो भो राजा को अभिमानपूर्ण सम्पत्ति हो नक्तो थी । की 'आन्त अस्थियों के नहुने । राखों या दरारों से पता चलता है कि प्रश्नों के उत्तर देने वाली दरारों की उत्पादक आग कहा लाई गई थी ।
चित्र पैंतीस में भीतरी गड्ढे के वार्यों जोर दिखाई पडने वालो नफेड वन्तु है वज्रमणि का पूर्णत उल्लचित विशाल और वृन्दर खण्ड । यह कहना मुश्किल है कि यह किन काम आता था, किन्तु चोनियों को वज्रमणि सदैव अत्यधिक प्रिय था और इतनी ॠषसूरती से तराशा हुजा श्वेत खड क्मिो भो राजा को अभिमानपूर्ण सम्पत्ति हो नक्तो थी । की 'आन्त अस्थियों के नहुने । राखों या दरारों से पता चलता है कि प्रश्नों के उत्तर देने वाली दरारों की उत्पादक आग कहा लाई गई थी ।
बांदा। यहां के 10 मेधावियों ने जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) एडवांस में अच्छी रैंक हासिल की है। अब वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में दाखिला पा सकेंगे। परिणाम घोषित होने पर मेधावियों ने खुशी जताई और इसका श्रेय अपने माता-पिता और कोचिंग गुरु राहुल चौहान को दिया। मेधावियों ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने नेट, यू-ट्यूब का भी सहारा लिया। ज्यादातर ऑनलाइन कोचिंग में पढ़ाई की। बच्चों की इस सफलता से उनके माता-पिता, गुरुजन और विद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है। शिक्षक राहुल चौहान ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल बच्चों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। फोटो-16बीएनडीपी-12 : सिद्धार्थ जैन। नाम- सिद्धार्थ जैन (छावनी) पिता- संजय जैन (व्यापारी) माता- सुषमा जैन (गृहणी) रैंक- 4016 (ईडब्ल्यूएस) नाम- दीपाली सिंह (इंदिरा नगर) पिता- राकेश कुमार (अध्यापक) माता- अंजनी (अध्यापक) रैंक-1497 (एसटी) नाम- स्पर्शिका प्रांजल (पुलिस लाइन) माता- नीलम वर्मा (प्रधानाध्यापक) रैंक- 2022 (एससी) नाम- शिवांशु गुप्ता (छोटी बाजार) पिता- सुनील कुमार गुप्ता (व्यापारी) माता- अर्चना गुप्ता (गृहणी) रैंक- 4754 (ईडब्ल्यूएस) नाम- हर्ष कुमार (कालूकुआं) पिता- श्रीकृष्ण कुमार यादव (अध्यापक) माता- सियाप्यारी (गृहणी) रैंक- 8200 (ओबीसी) स्कूल- जवाहर नवोदय विद्यालय (बांदा) नाम- आयुष अग्रवाल (कैलाशपुरी) पिता- राजीव अग्रवाल (अधिवक्ता) माता- मीना अग्रवाल (गृहणी) रैंक- 15843 (जनरल) नाम- उत्कर्ष कुमार अवस्थी (क्योटरा) पिता- अतुल कुमार अवस्थी (अध्यापक) माता- सविता अवस्थी (गृहणी) रैंक-16000 (जनरल) पिता- सुदेश अग्रवाल (व्यापारी) माता-आशा अग्रवाल (गृहणी) रैंक- 16397 (जनरल) नाम- शाश्वत अवस्थी (कालूकुआं) पिता- देवेंद्र अवस्थी (रीडर, जिला न्यायालय) माता-माया अवस्थी (गृहणी ) रैंक- 26043 (जनरल) नाम- संचिता सिंह (कालूकुआं) पिता- रणवीर सिंह (अध्यापक) माता- अंजू सिंह (अध्यापक) रैंक- 29391 (जनरल) हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
बांदा। यहां के दस मेधावियों ने जेईई एडवांस में अच्छी रैंक हासिल की है। अब वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में दाखिला पा सकेंगे। परिणाम घोषित होने पर मेधावियों ने खुशी जताई और इसका श्रेय अपने माता-पिता और कोचिंग गुरु राहुल चौहान को दिया। मेधावियों ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने नेट, यू-ट्यूब का भी सहारा लिया। ज्यादातर ऑनलाइन कोचिंग में पढ़ाई की। बच्चों की इस सफलता से उनके माता-पिता, गुरुजन और विद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है। शिक्षक राहुल चौहान ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल बच्चों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। फोटो-सोलहबीएनडीपी-बारह : सिद्धार्थ जैन। नाम- सिद्धार्थ जैन पिता- संजय जैन माता- सुषमा जैन रैंक- चार हज़ार सोलह नाम- दीपाली सिंह पिता- राकेश कुमार माता- अंजनी रैंक-एक हज़ार चार सौ सत्तानवे नाम- स्पर्शिका प्रांजल माता- नीलम वर्मा रैंक- दो हज़ार बाईस नाम- शिवांशु गुप्ता पिता- सुनील कुमार गुप्ता माता- अर्चना गुप्ता रैंक- चार हज़ार सात सौ चौवन नाम- हर्ष कुमार पिता- श्रीकृष्ण कुमार यादव माता- सियाप्यारी रैंक- आठ हज़ार दो सौ स्कूल- जवाहर नवोदय विद्यालय नाम- आयुष अग्रवाल पिता- राजीव अग्रवाल माता- मीना अग्रवाल रैंक- पंद्रह हज़ार आठ सौ तैंतालीस नाम- उत्कर्ष कुमार अवस्थी पिता- अतुल कुमार अवस्थी माता- सविता अवस्थी रैंक-सोलह हज़ार पिता- सुदेश अग्रवाल माता-आशा अग्रवाल रैंक- सोलह हज़ार तीन सौ सत्तानवे नाम- शाश्वत अवस्थी पिता- देवेंद्र अवस्थी माता-माया अवस्थी रैंक- छब्बीस हज़ार तैंतालीस नाम- संचिता सिंह पिता- रणवीर सिंह माता- अंजू सिंह रैंक- उनतीस हज़ार तीन सौ इक्यानवे हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Akshay Kumar : बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षय कुमार विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में पहुंचे। जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उसके बाद वह बद्रीनाथ धाम भी पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार (Akshay Kumar) पिछले दिनों ही बाबा केदारनाथ धाम पहुंचे थे। जहां उन्होंने भोलेनाथ के दर्शन किए। अब रविवार की सुबह एक्टर अल्मोड़ा स्थित प्रसिद्ध जागेश्वर धाम (Jageshwar Dham) पहुंचे। इसके बाद बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) दर्शन के लिए पहुंचे। यहां ज्योतिर्लिंग जगन्नाथ के दर्शन कर बदरी विशाल के द्वार पर मत्था टेकने के साथ ही उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उनके आने की सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन की टीम पहुंच गई। अक्षय की एक झलक को पाने के लिए स्थानीय लोगों की भीड़ जुटी रही।
Akshay Kumar : बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षय कुमार विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में पहुंचे। जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उसके बाद वह बद्रीनाथ धाम भी पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार पिछले दिनों ही बाबा केदारनाथ धाम पहुंचे थे। जहां उन्होंने भोलेनाथ के दर्शन किए। अब रविवार की सुबह एक्टर अल्मोड़ा स्थित प्रसिद्ध जागेश्वर धाम पहुंचे। इसके बाद बद्रीनाथ धाम दर्शन के लिए पहुंचे। यहां ज्योतिर्लिंग जगन्नाथ के दर्शन कर बदरी विशाल के द्वार पर मत्था टेकने के साथ ही उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उनके आने की सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन की टीम पहुंच गई। अक्षय की एक झलक को पाने के लिए स्थानीय लोगों की भीड़ जुटी रही।
प्रदेश में मानसून की बरसात के चलते लैंडस्लाइडिंग से काफी तबाही हो चुकी है। लेकिन, पिछले तीन चार दिन से शिमला में मौसम साफ रहने के बाबजूद लैंड़स्लाइड़िग की घटनाएं थमने का नाम नही ले रही हैं। बता दें कि आज सुबह शिमला से 80 किलोमीटर दूर जुब्बल के दोची गांव में साफ मौसम में लैंड़स्लाइड़िग हो गई है। इससे बहुत सा मलवा बड़ी पत्थर की चट्टान के साथ सड़क पर आ गिरा है। इससे जहां वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है तो साथ ही एक बिजली का खंबा भी चपेट में आ गया है। फिलहाल चट्टान को काटने का काम शुरू हो चुका है और उम्मीद जताई जा रही है कि दोपहर तक सड़क बहाल हो जाए। वहीं ट्रैफिक को वाया मंढोल भेजा जा रहा है। बता दें कि सड़क पर गुरूवार रात से ही मलबा गिरने शुरू हो गया था। प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी है कि इस सड़क पर सावधानी बरतें।
प्रदेश में मानसून की बरसात के चलते लैंडस्लाइडिंग से काफी तबाही हो चुकी है। लेकिन, पिछले तीन चार दिन से शिमला में मौसम साफ रहने के बाबजूद लैंड़स्लाइड़िग की घटनाएं थमने का नाम नही ले रही हैं। बता दें कि आज सुबह शिमला से अस्सी किलोग्राममीटर दूर जुब्बल के दोची गांव में साफ मौसम में लैंड़स्लाइड़िग हो गई है। इससे बहुत सा मलवा बड़ी पत्थर की चट्टान के साथ सड़क पर आ गिरा है। इससे जहां वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है तो साथ ही एक बिजली का खंबा भी चपेट में आ गया है। फिलहाल चट्टान को काटने का काम शुरू हो चुका है और उम्मीद जताई जा रही है कि दोपहर तक सड़क बहाल हो जाए। वहीं ट्रैफिक को वाया मंढोल भेजा जा रहा है। बता दें कि सड़क पर गुरूवार रात से ही मलबा गिरने शुरू हो गया था। प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी है कि इस सड़क पर सावधानी बरतें।
Itarsi News: इटारसी नवदुनिया प्रतिनिधि। शहर के एफसीआइ सूरजगंज रोड वाले मैदान पर कुछ शिकारियों द्वाराखुले मैदान में हथगोले ( विस्फोटक पदार्थ) बनाकर रखे जा रहे हैं। बुधवार को मैदान में चरने गई एक गाय ने यह बम निगल लिया, जिससे गोला उसके जबड़े में जाते ही फट गया, इससे गाय का पूरा जबड़ा फट गया है। लहुलुहान हालत में बेदम हो चुकी गाय को गोशाला में लाया गया है। गौ सेवक दीपू पठोदिया, लखन कश्यप उसका उपचार कर रहे हैं। दीपू पठोदिया ने बताया कि कुछ माह पहले भी इसी तरह एक हथगोला खाने से एक बछड़े का जबड़ा फट गया था, काफी इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। हिन्दू संगठन पहुंचे थानेः सूरजगंज एफसीआइ क्षेत्र के रिहायशी इलाके में विस्फोटक सामग्री और हथगोले रखने से लगातार गौवंशी मवेशी हादसे का शिकार हो रहे हैं। दूसरी बार इस तरह की घटना सामने आई है, इसके बाद हिन्दू संगठन के पदाधिकारियों ने थाने जाकर पुलिस को ज्ञापन देकर इस मामले की जांच करने एवं हथगोले बनाकर रखने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। युवाअों ने कहा कि इस तरह हथगोले खुले मैदान में रखने से बच्चे भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। बताया जाता है कि सूरजगंज एफसीआइ के पीछे रहने वाले कुछ परिवार कच्ची शराब उतारने का कारोबार करते हैं, साथ ही जंगल में जाकर ये लोग जंगली सुअर का शिकार भी करते हैं, सुअरों को मारने के लिए कम मारक क्षमता वाले हथगोले बनाए जाते हैं, फटने के डर से हथगोलों को आसपास मैदान में फेंक दिया जाता है, जिसे खाकर गौवंशी मवेशी हादसे का शिकार हो रहे हैं। बुधवार को हुई घटना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची, पिछली घटना से पुलिस अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया, जिससे दूसरी दफा यह हादसा हो गया। विस्फोटक अधिनियम का उल्लंघनः किसी भी तरह की विस्फोटक सामग्री, हथगोले या बारूद से बने खतरनाक बम इस तरह मैदान में नहीं रखे जा सकते हैं, इस मामले में विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है, जिससे आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, पुलिस की चूक कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
Itarsi News: इटारसी नवदुनिया प्रतिनिधि। शहर के एफसीआइ सूरजगंज रोड वाले मैदान पर कुछ शिकारियों द्वाराखुले मैदान में हथगोले बनाकर रखे जा रहे हैं। बुधवार को मैदान में चरने गई एक गाय ने यह बम निगल लिया, जिससे गोला उसके जबड़े में जाते ही फट गया, इससे गाय का पूरा जबड़ा फट गया है। लहुलुहान हालत में बेदम हो चुकी गाय को गोशाला में लाया गया है। गौ सेवक दीपू पठोदिया, लखन कश्यप उसका उपचार कर रहे हैं। दीपू पठोदिया ने बताया कि कुछ माह पहले भी इसी तरह एक हथगोला खाने से एक बछड़े का जबड़ा फट गया था, काफी इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। हिन्दू संगठन पहुंचे थानेः सूरजगंज एफसीआइ क्षेत्र के रिहायशी इलाके में विस्फोटक सामग्री और हथगोले रखने से लगातार गौवंशी मवेशी हादसे का शिकार हो रहे हैं। दूसरी बार इस तरह की घटना सामने आई है, इसके बाद हिन्दू संगठन के पदाधिकारियों ने थाने जाकर पुलिस को ज्ञापन देकर इस मामले की जांच करने एवं हथगोले बनाकर रखने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। युवाअों ने कहा कि इस तरह हथगोले खुले मैदान में रखने से बच्चे भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। बताया जाता है कि सूरजगंज एफसीआइ के पीछे रहने वाले कुछ परिवार कच्ची शराब उतारने का कारोबार करते हैं, साथ ही जंगल में जाकर ये लोग जंगली सुअर का शिकार भी करते हैं, सुअरों को मारने के लिए कम मारक क्षमता वाले हथगोले बनाए जाते हैं, फटने के डर से हथगोलों को आसपास मैदान में फेंक दिया जाता है, जिसे खाकर गौवंशी मवेशी हादसे का शिकार हो रहे हैं। बुधवार को हुई घटना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची, पिछली घटना से पुलिस अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया, जिससे दूसरी दफा यह हादसा हो गया। विस्फोटक अधिनियम का उल्लंघनः किसी भी तरह की विस्फोटक सामग्री, हथगोले या बारूद से बने खतरनाक बम इस तरह मैदान में नहीं रखे जा सकते हैं, इस मामले में विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है, जिससे आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, पुलिस की चूक कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
कोलकाता, दो दिसंबर विश्वभारती विश्वविद्यालय ने उसके द्वारा संचालित पीयर्सन मेमोरियल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनके प्रशासनिक अधिकार ले लिया है और अन्य वरिष्ठ डॉक्टर को सीएमओ का प्रभार संभालने को कहा है । वैसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीएमओ डॉ. एस एस देबनाथ के खिलाफ कार्रवाई करने की वजह नहीं बतायी है। लेकिन विश्वविद्यालय के सूत्रों का कहना है कि ऐसे आरोप हैं कि निर्देश के बावजूद डॉ देबनाथ ने कर्मचारियों के बीच कोविड-19 लक्षणों की नियमित जांच की व्यवस्था नहीं की, जिसके बाद उनके विरूद्ध कार्रवाई की गयी। डॉ देबनाथ से तत्काल चटर्जी को प्रभार सौंपने को कहा गया है। अब वह उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निस्तारण तक चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम करेंगे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
कोलकाता, दो दिसंबर विश्वभारती विश्वविद्यालय ने उसके द्वारा संचालित पीयर्सन मेमोरियल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनके प्रशासनिक अधिकार ले लिया है और अन्य वरिष्ठ डॉक्टर को सीएमओ का प्रभार संभालने को कहा है । वैसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीएमओ डॉ. एस एस देबनाथ के खिलाफ कार्रवाई करने की वजह नहीं बतायी है। लेकिन विश्वविद्यालय के सूत्रों का कहना है कि ऐसे आरोप हैं कि निर्देश के बावजूद डॉ देबनाथ ने कर्मचारियों के बीच कोविड-उन्नीस लक्षणों की नियमित जांच की व्यवस्था नहीं की, जिसके बाद उनके विरूद्ध कार्रवाई की गयी। डॉ देबनाथ से तत्काल चटर्जी को प्रभार सौंपने को कहा गया है। अब वह उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निस्तारण तक चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम करेंगे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, 19 अक्तूबर (एजेंसी) दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वायु प्रदूषण पर काबू के लिए सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ मासिक बैठकें करने का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे के हल के लिए राज्यों के स्तर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है। केजरीवाल ने एक डिजिटल संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पराली जलाने पर रोक और वायु प्रदूषण पर काबू के लिए प्रभावित राज्यों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर बहुत कम समय में काबू पाया जा सकता है। लेकिन ऐसा करने के लिए राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी दिखाई देती है। केजरीवाल ने कहा कि फसल अवशेषों को जैव-अपघटित किया जा सकता है या उसे बायोगैस, कोयले और यहां तक कि कार्डबोर्ड में भी बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि धान के पुआल को संपीडित (कंप्रेस) कर बायोगैस या कुकिंग कोल में बदला जा सकता है। हरियाणा के करनाल में कुछ कारखाने ऐसा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल अवशेषों को एक साल के भीतर अवसर में बदला जा सकता है, बशर्ते पराली जलाने पर रोक के लिए एक निश्चित समय-सीमा हो। केजरीवाल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ मासिक बैठकें करने का अनुरोध किया।
नयी दिल्ली, उन्नीस अक्तूबर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वायु प्रदूषण पर काबू के लिए सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ मासिक बैठकें करने का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे के हल के लिए राज्यों के स्तर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है। केजरीवाल ने एक डिजिटल संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पराली जलाने पर रोक और वायु प्रदूषण पर काबू के लिए प्रभावित राज्यों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर बहुत कम समय में काबू पाया जा सकता है। लेकिन ऐसा करने के लिए राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी दिखाई देती है। केजरीवाल ने कहा कि फसल अवशेषों को जैव-अपघटित किया जा सकता है या उसे बायोगैस, कोयले और यहां तक कि कार्डबोर्ड में भी बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि धान के पुआल को संपीडित कर बायोगैस या कुकिंग कोल में बदला जा सकता है। हरियाणा के करनाल में कुछ कारखाने ऐसा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल अवशेषों को एक साल के भीतर अवसर में बदला जा सकता है, बशर्ते पराली जलाने पर रोक के लिए एक निश्चित समय-सीमा हो। केजरीवाल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ मासिक बैठकें करने का अनुरोध किया।
नई दिल्ली, 12 नवंबरः दिल्ली यूनिवर्सिटी ने डीयू पीजी एडमिशन 2021 शेड्यूल जारी कर दिया है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों (पीजी एडमिशन) के लिए पहली लिस्ट 17 नवंबर 2021 को जारी की जाएगी। उम्मीदवार जो प्रवेश परीक्षा के लिए उपस्थित हुए हैं या एडमिशन के लिए आवेद किए हैं, वे दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) की आधिकारिक वेबसाइट du. ac. in पर लिस्ट देख सकते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, विभाग / कॉलेज 18 नवंबर से 22 नवंबर 2021 तक पहली मेरिट सूची के लिए प्रवेश का सत्यापन और अनुमोदन करेंगे। वहीं पहली मेरिट लिस्ट के खिलाफ पेमेंट 23 नवंबर 2021 तक होगा। वहीं दूसरी लिस्ट 26 नवंबर, 2021 को जारी की जाएगी। विभाग / कॉलेज 4 दिसंबर से 6 दिसंबर 2021 तक पहली मेरिट सूची के खिलाफ डॉक्यूमेंट की जांच और अन्य प्रक्रिया की जाएगी। वहीं तीसरी लिस्ट के खिलाफ भुगतान 7 दिसंबर तक किया जाएगा। 1 दिसंबर 2021 से पहले सेमेस्टर पीजी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं शुरू करेगी। पहले सेमेस्टर की कक्षाएं 16 अप्रैल 2021 से शुरू होंगी। पहले सेमेस्टर की परीक्षा 30 मार्च से 12 अप्रैल, 2022 तक और प्रथम वर्ष में आयोजित की जाएगी। सम सेमेस्टर परीक्षा 12 अगस्त से 25 अगस्त 2022 तक आयोजित की जाएगी। दिल्ली विश्वविद्यालय के मुताबिक इस साल पीजी के एडमिशन के लिए 1,83,815 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इन नियमों के आधार पर एडमिशन की प्रक्रिया की जाएगी। -सबसे अधिक अंक वाले उम्मीदवारों को प्रवेश सूची में प्राथमिकता दी जाएगी। -स्नातक डिग्री के फाइनल इयर वाले उच्च प्रतिशत वाले उम्मीदवार को भी प्राथमिकता दी जाएगी। -अगर टाई रहता है तो कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में अधिर नंबर वाले उम्मीदवारों को वरीयता दी जाएगी।
नई दिल्ली, बारह नवंबरः दिल्ली यूनिवर्सिटी ने डीयू पीजी एडमिशन दो हज़ार इक्कीस शेड्यूल जारी कर दिया है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए पहली लिस्ट सत्रह नवंबर दो हज़ार इक्कीस को जारी की जाएगी। उम्मीदवार जो प्रवेश परीक्षा के लिए उपस्थित हुए हैं या एडमिशन के लिए आवेद किए हैं, वे दिल्ली यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट du. ac. in पर लिस्ट देख सकते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, विभाग / कॉलेज अट्ठारह नवंबर से बाईस नवंबर दो हज़ार इक्कीस तक पहली मेरिट सूची के लिए प्रवेश का सत्यापन और अनुमोदन करेंगे। वहीं पहली मेरिट लिस्ट के खिलाफ पेमेंट तेईस नवंबर दो हज़ार इक्कीस तक होगा। वहीं दूसरी लिस्ट छब्बीस नवंबर, दो हज़ार इक्कीस को जारी की जाएगी। विभाग / कॉलेज चार दिसंबर से छः दिसंबर दो हज़ार इक्कीस तक पहली मेरिट सूची के खिलाफ डॉक्यूमेंट की जांच और अन्य प्रक्रिया की जाएगी। वहीं तीसरी लिस्ट के खिलाफ भुगतान सात दिसंबर तक किया जाएगा। एक दिसंबर दो हज़ार इक्कीस से पहले सेमेस्टर पीजी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं शुरू करेगी। पहले सेमेस्टर की कक्षाएं सोलह अप्रैल दो हज़ार इक्कीस से शुरू होंगी। पहले सेमेस्टर की परीक्षा तीस मार्च से बारह अप्रैल, दो हज़ार बाईस तक और प्रथम वर्ष में आयोजित की जाएगी। सम सेमेस्टर परीक्षा बारह अगस्त से पच्चीस अगस्त दो हज़ार बाईस तक आयोजित की जाएगी। दिल्ली विश्वविद्यालय के मुताबिक इस साल पीजी के एडमिशन के लिए एक,तिरासी,आठ सौ पंद्रह छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इन नियमों के आधार पर एडमिशन की प्रक्रिया की जाएगी। -सबसे अधिक अंक वाले उम्मीदवारों को प्रवेश सूची में प्राथमिकता दी जाएगी। -स्नातक डिग्री के फाइनल इयर वाले उच्च प्रतिशत वाले उम्मीदवार को भी प्राथमिकता दी जाएगी। -अगर टाई रहता है तो कक्षा बारह की बोर्ड परीक्षा में अधिर नंबर वाले उम्मीदवारों को वरीयता दी जाएगी।
इन्द्रो मयूर सवृत्तो घर्मराजस्तु वायस । कृकलासो - धनाध्यक्षो हसरच वरुणोऽभवत् ॥ ओडिशा की किंवदन्ती के अनुसार सती के आत्महत्या कर डालने के बाद जब दक्षयज्ञ भग होता था, तब देवताओ और ऋपियो ने पशु-पक्षी का रूप धारण किया था। तत्र साहित्य के अनुसार सती के आग में जल जाने से तत्रपूजा प्रचलित हुई । यह प्रमाण मिलता है कि वेदरचना-काल में एक हृदयविदारक घटना हुई थी। उसके फलस्वरूप सती आग में जली और दक्षयज्ञ या नागधर्म ( प्राणायाम योग ) ध्वस करने की चेष्टा की गई थी। इसका उल्लेख लेखक के अप्रकाशित Indian culture and cult of Jagannath ग्रथ में है। यह इतना ही याद रखना चाहिए कि बुद्धदेव ने उत्कल के तपससु और मल्लिक को नाखून और केश दिये थे, और रामायण में वर्णित है कि पुरी में नख लोम-जात वैखानस और वालखिल्य ऋपि रहते थे । ब्रह्मपुराण के अनुसार पुरी में बालखिल्य ऋषि रहते थे। महाभारत में ( वन १९७ ) लिखा है कि नारायण ने कृष्ण केश देवकी को और शुक्ल केश रोहिणी को दिये थे । शायद ये वालखिल्य केशव सप्रदाय के अन्तर्भुक्त थे । महाभारत के अनुसार वालखिल्य ऋषि ऊपर की ओर पैर और नीचे की ओर सिर करके डालो में लटक कर सूर्य की मरीचि प्राप्त करते थे। इसलिए ये सव ऊर्ध्वमूल अश्वत्थ वृक्ष थे । गीता में इस अश्वत्थ वृक्ष की सहायता से पुरुषोत्तम योग की व्याख्या की गई है। गीता के उपदेश के अनुसार अश्वत्थ वृक्ष की डाल काटी गई है। वेद में वालखिल्य सूक्त होने से बुद्धदेव के केश देने के बारे में जो किंवदन्ती है वह वेद की परवर्ती नही हो सकती । पुरी की रथयात्रा को जैनो की रथयात्रा के साथ और गुडिया-मडप के उत्सव को रामायणोक्त नदिग्राम में भरतपादुका-पूजा करने की विधि के साथ तुलना करने के लिए यहाँ अवकाश नही है । बौद्धो की वाशेली अब पुरी की वाशेली साहि में पूजा पाती है। जैनो की विमला और शीतला को अव जगन्नाथमंदिर में वेदा के अन्दर स्थान मिला है। जिन्होने मूर्तिपूजा की प्रयोजनीयता स्वीकार नही की है, वे अलेख महिमा आदि विभिन्न सप्रदायो के अन्तर्भुक्त है । वे ओडिशा के भागवत धर्मावलम्बियो के समान शून्यवादी है। किसी का विश्वेतर ईश्वर विश्वास नही है । "महिमा" शब्द संस्कृत के महत् शब्द से उत्पन्न हुआ है । साख्य में वृद्धि को महत् कहते हैं । कृष्ण साख्य मतावलम्बी थे । महिमा धर्मावलम्बी लोग शून्यवादी होने पर भी मूर्तिपूजा का विरोध नही करते हैं । कटक जिले के लेम्वाल गाँव में इनकी गद्दी है । इस गद्दी के प्रतिष्ठाता षोडश शताब्दी के अच्युतानन्द दास ने अपने को सुदामा के अवतार रूप में वर्णन किया है। सुदामा ने "चावल भाजा" (लाई) समर्पण करके श्रीकृष्ण की कृपा पाई थी । वे चैतन्य सम्प्रदाय के समान ढोल, करताल लेकर राधाकृष्ण के प्रेम-कीर्तन, प्राणायाम, योगाभ्यास या ब्राह्मणो के समान साडम्वर पूजा नही करते थे । वे श्रीकृष्ण का ध्यान शून्यरूप में करते थे, लेकिन जगन्नाथ दास प्राणायाम योगाभ्यास करते थे । जगन्नाथ का सम्प्रदाय "अतिवडी" नाम से अभिहित है। यह सप्रदाय ढोल, करताल लेकर चैतन्य का नाम -कीर्तन करता था। लेकिन जीव और ब्रह्म के बीच चैतन्य जी के प्रचार किये हुए भेदाभेद मत को नही किरण या तेज नही मानते, क्योकि तेज सिर्फ ब्रह्म-रूप का प्रकाशक है । पदार्थों के रूप के अतिरिक्त अन्दर अरूप गुण भी है, इसलिए ये सव शून्य में अलेख या वर्णनातीत एक पदार्थ मानते है जिससे विश्व की उत्पत्ति रहना स्वीकार करते है। इस सप्रदाय के भीम भोई हैं । शरद उषुम नाहि रे सुमन शरद उषुम नाहि, सदा सम्पूर्णा से अरूपा देही सुमन रे । शून्य पुरे छन्ति रहि सुमन रे । उद्दालक ने वटवीज की परीक्षा द्वारा श्वेतकेतु को समझाया था कि विशाल वट वृक्ष वीज में, सूक्ष्म रूप में, निहित है । इसलिए विश्वास किया जा सकता है कि एक परम सूक्ष्म पदार्थ से विश्व की उत्पत्ति हुई है । बुद्धदेव ने नाखून और केश तपस्सु और भल्लि को दिये थे, इसलिए उन्हें शून्यवादी नही कहा जा सकता । इस धर्म के दूसरे विषय आलोचक के अप्रकाशित Indian culture and cult of Jagannath नामक ग्रन्थ में दिये गये है। देहातो में श्रमजीवी शूद्र लोग दण्डपूजा करते हैं । जो लोग यह पूजा करने के लिए व्रत ग्रहण करते हैं उन्हें भक्ता या भगता ( स० भक्त ) कहते हैं । यह पूजा मेरु या मेष सक्रान्ति के दिन समाप्त होती है। पूजा के दिन सख्या भक्तो की सुविधा पर निर्भर करती है । यह पूजा तीन दिन या इक्कीस दिन तक अनुष्ठित हो सकती है। इसमें तेरह भक्त अवश्य रहते है। पूजा के दिन वे लोग रोज एक बार हविष्यान्न खा कर स्त्रीससर्ग त्याग करके, पवित्र और निष्ठा पर रहते है और दोपहर को प्रखर कडी धूप में खेत जोतने, दौनी करने, खमार में धान रखने आदि कृषि कर्म का अभिनय दिखाते हैं। वे लोग सूर्यास्त के समय नदी या तालाव में नहाने के लिए जाते हैं। नहाने के बाद एक आदमी एक बेंत और दो आदमी चार मशालें लेकर आते है। मिट्टी हत्थे के सिरे में चिथडे लपेट कर देवता के रूप में एक आदमी पकडता है। लौटने के वक्त उच्च स्वर में हर एक देहाती की कल्याण कामना करके भीख माँगते हैं। रात को उनके साथ एक यात्रा दल मिलकर गाँवों में यात्रा दिखाते है । यात्रा में पूजा के आख्यान का गीत, अभिनय के रूप में, अभिव्यक्त करते है । आख्यान में उक्त है कि एक दिन एक शवर वन में पक्षी की हत्या करता था। उसकी इस वृत्ति को दूर करने के लिए शिव जी ने यह घर्म प्रवर्तित किया था । लेकिन अभिनय में शवर-शवरी में जो वार्तालाप होता है उससे मालूम होता है कि शवर पार्वत्य जाति की अप्राप्तवयस्का बालिकाओ पर पाशविक अत्याचार करता था । दण्डकारण्य की उत्पत्ति के बारे में रामायण की किंवदन्ती के अनुसार जिस वन में दण्ड नामक एक राजा ने अप्राप्य वयस्का भृगुकन्या को हरण किया था उस वन को दण्डकारण्य कहते हैं । हर एक आदिवासी भृगु या एक शिला की पूजा पितृ - चैत्य रूप में करता है, इसलिए भृगुकन्या का अर्थ आदिवासी श्रेणी की बालिका हो सकता है। शायद अपेक्षाकृत चतुर युवकगण आदिवासी वालिका लेकर इन्द्रिय का अपव्यवहार करते थे । अशोक ने युवको पर दृष्टि रखने के लिए तोपली शासनकर्ता को भी धउली- शिलालेख में आदेश दिया है। इससे मालूम होता उत्कल को धर्मगति मगला कोठी में या अपने अपने घर, जहाँ कलशी रखी हो वहाँ, स्त्रियां और पुरुष एकत्र सोते हैं । कलसी का नल कर्णस्वरूप होने के कारण और छ मास के अन्तर में पूजा की जाने पर यह रामायण में वर्णित छ मास में नीद से उठा हुमा कुम्भकर्ण हो सकता है । यह सत्य हो तो नहीं कहा जा सकता कि कितने प्राचीन धर्मों ने अब बदलकर कैसा रूप धारण कर लिया 1 मोडिशा में षोडश शताब्दी के आखिरी भाग से सप्तदश शताब्दी के मव्य भाग तक मुसलमान शासन प्रतिष्ठित था । उस वक्त ओडीशा में मुसलमान धर्म प्रचारित हुआ था। सालवेग नामक एक मुसलमान कवि ने भक्ति रस की भजन ओडिया में बनाया है। अव भी कटक में मुसलमानो के कदम रसूल नामक उपासना मंदिर में हिन्दू लोग पुण्य अर्जन के लिए जाते है। ओडिशा में अग्रेज राजत्व प्रतिष्ठित होने के बाद क्रिश्चियन धर्म प्रचारित हुआ । इस तरह भोडिशा में नाना प्रकार के धर्म-सप्रदायो का समावेश हुआ था । लेकिन ओडिया साप्रदायिक विद्वेप से हमेशा मुक्त रहा है। मेलो, यात्राओ, पर्वत्यौहारो, विवाह-व्रत और अच्छी मजलिसो में इनका उपयोग होने लगा। शिक्षित सम्प्रदाय में चर्चा या गवेषणा न होने से संगीत कला धीरे धीरे शास्त्रीय रीति से दूर हट गई, फिर भी 'महारो' और गोटिपुओ के द्वारा ओडीशी नृत्य की परपरा सुरक्षित रही । काफी अनुसंधान के बाद नृत्य के बारे में कई पाण्डुलिपियाँ, तालपत्र पोथियाँ सग्रहीत हो सकी है। इनमें से सगीत अभिनय-दर्पण को सपूर्ण शास्त्रीय मतापेक्षी कहा जा सकता है । इसके लेखक तुग राजवश के राजकुमार यदुनाथ राजसिंह है। इस पोथी में सब सस्कृत श्लोक ओडिया लिपि में लिखे हुए हैं । अभिनयचन्द्रिका नामक एक और नृत्य-सपकय ग्रन्थ मिला है। इसके लेखक 'महेश्वर' महापात्र है । लेखक ने ग्रन्थ की समाप्ति में खेमुण्डि अधिपति नारायण गजपति की प्रशस्ति गाई है। इससे मालूम होता है कि यह लेख संगीत-नारायण-कर्ता नारायण गणपति के राजत्वकाल १७।१८ ई० का है । सगीत अभिनय दर्पण का सठीक-काल निर्णय नही हो पाया, फिर भी यह विश्वास किया जाता है कि यह अभिनयचन्द्रिका की पूर्ववर्ती रचना है। अभिनयचन्द्रिका का वर्णन, अभिनय नामकरण आदि अनेक स्थलो में नाट्यशास्त्र से भिन्न है । लेकिन सगीत - अभिनय दर्पण में अधिकाश नाट्यशास्त्र और संगीत - रत्नाकर का साम्य वर्णन दिखाई पड़ता है। इनमें समता होने पर भी इसमें उत्कलीय परपरा की विशेषता है । इसके अतिरिक्त मंदिर गात्रो में खोदी हुई मूर्तियो को नृत्यभगी के सौसादृश्य का वर्णन इसमें है । इसमें नन्दिकेश्वरकृत अभिनय-दर्पण से जगह जगह अलग शिर, नेत्र, ग्रीवा, और हाथ के काम का वर्णन मिलता है । असयुत और सयुत हाथ को अलग अलग अभिनय-प्रदर्शन में विनियुक्त न करके स्थल-विशेष पर एक या दो हाथो का इसमें उपयोग किया गया है । सगीत-अभिनय दर्पण की यह विशेषता है कि अभिनेताओं को किस किस कार्य में कैसे विनियोग किया जाय, सिर्फ इतना ही देकर लेखक सन्तुष्ट नही रहे वल्कि किस प्रकार से अभिनय प्रदर्शित हो, इसका भी निर्देश दिया है । ओडीशी नृत्य उत्कल देश की वृत्ति, भाषा, रुचि और रीति-नीति की परपरा वहन करके शास्त्रानुमोदित क्रम से परिचालित है । यह नृत्य आगिक, वाचिक, आहार्य और सात्विक इन चार विभागो की रक्षा पूर्ण रूप से करता है । प्रचार और गवेषणा के अभाव के कारण ही वह आज तक विशेष रूप में लोकलोचन में नहीं आ सका है। लेकिन इसके पुरातनत्व और शास्त्रीयता के वारे में विवाद - विसवाद का अवकाश नही है । नृत्य - शिक्षा के लिए पात्र को कई परिमाण में पद और नेत्र का अभिनय या चालना रूप सावना करनी पड़ती है। ये सब देश-प्रचलित नाम के कारण अलग होते हुए भी शास्त्रीयपद्धति से अलग नहीं है । यथा - वइठा, ठिआ, चालि, बुडा, भसा, भंडरी, पालि, मोडीशी नाट र आठ वेलि ।
इन्द्रो मयूर सवृत्तो घर्मराजस्तु वायस । कृकलासो - धनाध्यक्षो हसरच वरुणोऽभवत् ॥ ओडिशा की किंवदन्ती के अनुसार सती के आत्महत्या कर डालने के बाद जब दक्षयज्ञ भग होता था, तब देवताओ और ऋपियो ने पशु-पक्षी का रूप धारण किया था। तत्र साहित्य के अनुसार सती के आग में जल जाने से तत्रपूजा प्रचलित हुई । यह प्रमाण मिलता है कि वेदरचना-काल में एक हृदयविदारक घटना हुई थी। उसके फलस्वरूप सती आग में जली और दक्षयज्ञ या नागधर्म ध्वस करने की चेष्टा की गई थी। इसका उल्लेख लेखक के अप्रकाशित Indian culture and cult of Jagannath ग्रथ में है। यह इतना ही याद रखना चाहिए कि बुद्धदेव ने उत्कल के तपससु और मल्लिक को नाखून और केश दिये थे, और रामायण में वर्णित है कि पुरी में नख लोम-जात वैखानस और वालखिल्य ऋपि रहते थे । ब्रह्मपुराण के अनुसार पुरी में बालखिल्य ऋषि रहते थे। महाभारत में लिखा है कि नारायण ने कृष्ण केश देवकी को और शुक्ल केश रोहिणी को दिये थे । शायद ये वालखिल्य केशव सप्रदाय के अन्तर्भुक्त थे । महाभारत के अनुसार वालखिल्य ऋषि ऊपर की ओर पैर और नीचे की ओर सिर करके डालो में लटक कर सूर्य की मरीचि प्राप्त करते थे। इसलिए ये सव ऊर्ध्वमूल अश्वत्थ वृक्ष थे । गीता में इस अश्वत्थ वृक्ष की सहायता से पुरुषोत्तम योग की व्याख्या की गई है। गीता के उपदेश के अनुसार अश्वत्थ वृक्ष की डाल काटी गई है। वेद में वालखिल्य सूक्त होने से बुद्धदेव के केश देने के बारे में जो किंवदन्ती है वह वेद की परवर्ती नही हो सकती । पुरी की रथयात्रा को जैनो की रथयात्रा के साथ और गुडिया-मडप के उत्सव को रामायणोक्त नदिग्राम में भरतपादुका-पूजा करने की विधि के साथ तुलना करने के लिए यहाँ अवकाश नही है । बौद्धो की वाशेली अब पुरी की वाशेली साहि में पूजा पाती है। जैनो की विमला और शीतला को अव जगन्नाथमंदिर में वेदा के अन्दर स्थान मिला है। जिन्होने मूर्तिपूजा की प्रयोजनीयता स्वीकार नही की है, वे अलेख महिमा आदि विभिन्न सप्रदायो के अन्तर्भुक्त है । वे ओडिशा के भागवत धर्मावलम्बियो के समान शून्यवादी है। किसी का विश्वेतर ईश्वर विश्वास नही है । "महिमा" शब्द संस्कृत के महत् शब्द से उत्पन्न हुआ है । साख्य में वृद्धि को महत् कहते हैं । कृष्ण साख्य मतावलम्बी थे । महिमा धर्मावलम्बी लोग शून्यवादी होने पर भी मूर्तिपूजा का विरोध नही करते हैं । कटक जिले के लेम्वाल गाँव में इनकी गद्दी है । इस गद्दी के प्रतिष्ठाता षोडश शताब्दी के अच्युतानन्द दास ने अपने को सुदामा के अवतार रूप में वर्णन किया है। सुदामा ने "चावल भाजा" समर्पण करके श्रीकृष्ण की कृपा पाई थी । वे चैतन्य सम्प्रदाय के समान ढोल, करताल लेकर राधाकृष्ण के प्रेम-कीर्तन, प्राणायाम, योगाभ्यास या ब्राह्मणो के समान साडम्वर पूजा नही करते थे । वे श्रीकृष्ण का ध्यान शून्यरूप में करते थे, लेकिन जगन्नाथ दास प्राणायाम योगाभ्यास करते थे । जगन्नाथ का सम्प्रदाय "अतिवडी" नाम से अभिहित है। यह सप्रदाय ढोल, करताल लेकर चैतन्य का नाम -कीर्तन करता था। लेकिन जीव और ब्रह्म के बीच चैतन्य जी के प्रचार किये हुए भेदाभेद मत को नही किरण या तेज नही मानते, क्योकि तेज सिर्फ ब्रह्म-रूप का प्रकाशक है । पदार्थों के रूप के अतिरिक्त अन्दर अरूप गुण भी है, इसलिए ये सव शून्य में अलेख या वर्णनातीत एक पदार्थ मानते है जिससे विश्व की उत्पत्ति रहना स्वीकार करते है। इस सप्रदाय के भीम भोई हैं । शरद उषुम नाहि रे सुमन शरद उषुम नाहि, सदा सम्पूर्णा से अरूपा देही सुमन रे । शून्य पुरे छन्ति रहि सुमन रे । उद्दालक ने वटवीज की परीक्षा द्वारा श्वेतकेतु को समझाया था कि विशाल वट वृक्ष वीज में, सूक्ष्म रूप में, निहित है । इसलिए विश्वास किया जा सकता है कि एक परम सूक्ष्म पदार्थ से विश्व की उत्पत्ति हुई है । बुद्धदेव ने नाखून और केश तपस्सु और भल्लि को दिये थे, इसलिए उन्हें शून्यवादी नही कहा जा सकता । इस धर्म के दूसरे विषय आलोचक के अप्रकाशित Indian culture and cult of Jagannath नामक ग्रन्थ में दिये गये है। देहातो में श्रमजीवी शूद्र लोग दण्डपूजा करते हैं । जो लोग यह पूजा करने के लिए व्रत ग्रहण करते हैं उन्हें भक्ता या भगता कहते हैं । यह पूजा मेरु या मेष सक्रान्ति के दिन समाप्त होती है। पूजा के दिन सख्या भक्तो की सुविधा पर निर्भर करती है । यह पूजा तीन दिन या इक्कीस दिन तक अनुष्ठित हो सकती है। इसमें तेरह भक्त अवश्य रहते है। पूजा के दिन वे लोग रोज एक बार हविष्यान्न खा कर स्त्रीससर्ग त्याग करके, पवित्र और निष्ठा पर रहते है और दोपहर को प्रखर कडी धूप में खेत जोतने, दौनी करने, खमार में धान रखने आदि कृषि कर्म का अभिनय दिखाते हैं। वे लोग सूर्यास्त के समय नदी या तालाव में नहाने के लिए जाते हैं। नहाने के बाद एक आदमी एक बेंत और दो आदमी चार मशालें लेकर आते है। मिट्टी हत्थे के सिरे में चिथडे लपेट कर देवता के रूप में एक आदमी पकडता है। लौटने के वक्त उच्च स्वर में हर एक देहाती की कल्याण कामना करके भीख माँगते हैं। रात को उनके साथ एक यात्रा दल मिलकर गाँवों में यात्रा दिखाते है । यात्रा में पूजा के आख्यान का गीत, अभिनय के रूप में, अभिव्यक्त करते है । आख्यान में उक्त है कि एक दिन एक शवर वन में पक्षी की हत्या करता था। उसकी इस वृत्ति को दूर करने के लिए शिव जी ने यह घर्म प्रवर्तित किया था । लेकिन अभिनय में शवर-शवरी में जो वार्तालाप होता है उससे मालूम होता है कि शवर पार्वत्य जाति की अप्राप्तवयस्का बालिकाओ पर पाशविक अत्याचार करता था । दण्डकारण्य की उत्पत्ति के बारे में रामायण की किंवदन्ती के अनुसार जिस वन में दण्ड नामक एक राजा ने अप्राप्य वयस्का भृगुकन्या को हरण किया था उस वन को दण्डकारण्य कहते हैं । हर एक आदिवासी भृगु या एक शिला की पूजा पितृ - चैत्य रूप में करता है, इसलिए भृगुकन्या का अर्थ आदिवासी श्रेणी की बालिका हो सकता है। शायद अपेक्षाकृत चतुर युवकगण आदिवासी वालिका लेकर इन्द्रिय का अपव्यवहार करते थे । अशोक ने युवको पर दृष्टि रखने के लिए तोपली शासनकर्ता को भी धउली- शिलालेख में आदेश दिया है। इससे मालूम होता उत्कल को धर्मगति मगला कोठी में या अपने अपने घर, जहाँ कलशी रखी हो वहाँ, स्त्रियां और पुरुष एकत्र सोते हैं । कलसी का नल कर्णस्वरूप होने के कारण और छ मास के अन्तर में पूजा की जाने पर यह रामायण में वर्णित छ मास में नीद से उठा हुमा कुम्भकर्ण हो सकता है । यह सत्य हो तो नहीं कहा जा सकता कि कितने प्राचीन धर्मों ने अब बदलकर कैसा रूप धारण कर लिया एक मोडिशा में षोडश शताब्दी के आखिरी भाग से सप्तदश शताब्दी के मव्य भाग तक मुसलमान शासन प्रतिष्ठित था । उस वक्त ओडीशा में मुसलमान धर्म प्रचारित हुआ था। सालवेग नामक एक मुसलमान कवि ने भक्ति रस की भजन ओडिया में बनाया है। अव भी कटक में मुसलमानो के कदम रसूल नामक उपासना मंदिर में हिन्दू लोग पुण्य अर्जन के लिए जाते है। ओडिशा में अग्रेज राजत्व प्रतिष्ठित होने के बाद क्रिश्चियन धर्म प्रचारित हुआ । इस तरह भोडिशा में नाना प्रकार के धर्म-सप्रदायो का समावेश हुआ था । लेकिन ओडिया साप्रदायिक विद्वेप से हमेशा मुक्त रहा है। मेलो, यात्राओ, पर्वत्यौहारो, विवाह-व्रत और अच्छी मजलिसो में इनका उपयोग होने लगा। शिक्षित सम्प्रदाय में चर्चा या गवेषणा न होने से संगीत कला धीरे धीरे शास्त्रीय रीति से दूर हट गई, फिर भी 'महारो' और गोटिपुओ के द्वारा ओडीशी नृत्य की परपरा सुरक्षित रही । काफी अनुसंधान के बाद नृत्य के बारे में कई पाण्डुलिपियाँ, तालपत्र पोथियाँ सग्रहीत हो सकी है। इनमें से सगीत अभिनय-दर्पण को सपूर्ण शास्त्रीय मतापेक्षी कहा जा सकता है । इसके लेखक तुग राजवश के राजकुमार यदुनाथ राजसिंह है। इस पोथी में सब सस्कृत श्लोक ओडिया लिपि में लिखे हुए हैं । अभिनयचन्द्रिका नामक एक और नृत्य-सपकय ग्रन्थ मिला है। इसके लेखक 'महेश्वर' महापात्र है । लेखक ने ग्रन्थ की समाप्ति में खेमुण्डि अधिपति नारायण गजपति की प्रशस्ति गाई है। इससे मालूम होता है कि यह लेख संगीत-नारायण-कर्ता नारायण गणपति के राजत्वकाल सत्रह।अट्ठारह ईशून्य का है । सगीत अभिनय दर्पण का सठीक-काल निर्णय नही हो पाया, फिर भी यह विश्वास किया जाता है कि यह अभिनयचन्द्रिका की पूर्ववर्ती रचना है। अभिनयचन्द्रिका का वर्णन, अभिनय नामकरण आदि अनेक स्थलो में नाट्यशास्त्र से भिन्न है । लेकिन सगीत - अभिनय दर्पण में अधिकाश नाट्यशास्त्र और संगीत - रत्नाकर का साम्य वर्णन दिखाई पड़ता है। इनमें समता होने पर भी इसमें उत्कलीय परपरा की विशेषता है । इसके अतिरिक्त मंदिर गात्रो में खोदी हुई मूर्तियो को नृत्यभगी के सौसादृश्य का वर्णन इसमें है । इसमें नन्दिकेश्वरकृत अभिनय-दर्पण से जगह जगह अलग शिर, नेत्र, ग्रीवा, और हाथ के काम का वर्णन मिलता है । असयुत और सयुत हाथ को अलग अलग अभिनय-प्रदर्शन में विनियुक्त न करके स्थल-विशेष पर एक या दो हाथो का इसमें उपयोग किया गया है । सगीत-अभिनय दर्पण की यह विशेषता है कि अभिनेताओं को किस किस कार्य में कैसे विनियोग किया जाय, सिर्फ इतना ही देकर लेखक सन्तुष्ट नही रहे वल्कि किस प्रकार से अभिनय प्रदर्शित हो, इसका भी निर्देश दिया है । ओडीशी नृत्य उत्कल देश की वृत्ति, भाषा, रुचि और रीति-नीति की परपरा वहन करके शास्त्रानुमोदित क्रम से परिचालित है । यह नृत्य आगिक, वाचिक, आहार्य और सात्विक इन चार विभागो की रक्षा पूर्ण रूप से करता है । प्रचार और गवेषणा के अभाव के कारण ही वह आज तक विशेष रूप में लोकलोचन में नहीं आ सका है। लेकिन इसके पुरातनत्व और शास्त्रीयता के वारे में विवाद - विसवाद का अवकाश नही है । नृत्य - शिक्षा के लिए पात्र को कई परिमाण में पद और नेत्र का अभिनय या चालना रूप सावना करनी पड़ती है। ये सब देश-प्रचलित नाम के कारण अलग होते हुए भी शास्त्रीयपद्धति से अलग नहीं है । यथा - वइठा, ठिआ, चालि, बुडा, भसा, भंडरी, पालि, मोडीशी नाट र आठ वेलि ।
नई दिल्लीः बॉलीवुड स्टार्स अक्सर मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं. फैंस उनकी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में जानने के लिए बेताब रहते हैं. फैंस अपने चेहते स्टार्स की लव लाइफ से लेकर उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं हर छोटी से बड़ी बात को जाने के लिए आतुर रहते हैं. हाल ही में जाह्नवी कपूर(Janhvi Kapoor)ने अपनी फिल्म गुड लक जेरी के एक इवेंट के दौरान अपनी पर्सनल लाइफ खासकर लव लाइफ को लेकर कई खुलासे किए हैं. आइए जानते हैं जाह्नवी कपूर की लव लाइफ के बारें. बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर को लेकर अक्सर खबरें आती रहती हैं एक्ट्रेस किसी स्टार्स या फिर बिजनेसमैन के साथ रिलेशनशिप में हैं लेकिन यह केवल अफवाह है. दरअसल एक्ट्रेस ने हाल ही में अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में खुलासा किया है. एक्ट्रेस ने बताया कि इस समय वह हैप्पली सिंगल हैं. बता दें कि कॉफी विद करण 7 में एक्ट्रेस ने अपने सिंगल होने की बात बताई थी. एक्ट्रेस ने हाल ही में एक शो के दौरान अपनी पर्सनल लाइफ पर बात करते हुए कहा कि मैं सिंगल रहकर ही खुश हूं. हां कभी-कभी अकेलापन महसूस करती हैं. ऐसे में कोई उनके करीब आना चाहता है तो बेहतर है उनसे दूर ही रहें. एक्ट्रेस ने आगे कहा कि अगर किसी को हीलिंग की जरूरत है तो कहीं और जाओ. यहां मत आओ. शो में जब जाह्नवी कपूर से पूछा गया था कि उनका बॉयफ्रेंड कैसा होना चाहिए. एक्ट्रेस ने कहा कि मेरे लिए अच्छा बनो, मुझे हंसाओ, मैं तुम्हारे के लिए अच्छी रहूंगी और हमेशा मैजूद रहूंगी. जाह्नवी कपूर का नाम शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर के साथ जुड़ चुका है. दोनों एक साथ फिल्म धड़क में नजर आए थे. उस दौरान दोनों के रिलेशनशिप की खबरें मीडिया की सुर्खियों में बने हुए थे.
नई दिल्लीः बॉलीवुड स्टार्स अक्सर मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं. फैंस उनकी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में जानने के लिए बेताब रहते हैं. फैंस अपने चेहते स्टार्स की लव लाइफ से लेकर उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं हर छोटी से बड़ी बात को जाने के लिए आतुर रहते हैं. हाल ही में जाह्नवी कपूरने अपनी फिल्म गुड लक जेरी के एक इवेंट के दौरान अपनी पर्सनल लाइफ खासकर लव लाइफ को लेकर कई खुलासे किए हैं. आइए जानते हैं जाह्नवी कपूर की लव लाइफ के बारें. बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर को लेकर अक्सर खबरें आती रहती हैं एक्ट्रेस किसी स्टार्स या फिर बिजनेसमैन के साथ रिलेशनशिप में हैं लेकिन यह केवल अफवाह है. दरअसल एक्ट्रेस ने हाल ही में अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में खुलासा किया है. एक्ट्रेस ने बताया कि इस समय वह हैप्पली सिंगल हैं. बता दें कि कॉफी विद करण सात में एक्ट्रेस ने अपने सिंगल होने की बात बताई थी. एक्ट्रेस ने हाल ही में एक शो के दौरान अपनी पर्सनल लाइफ पर बात करते हुए कहा कि मैं सिंगल रहकर ही खुश हूं. हां कभी-कभी अकेलापन महसूस करती हैं. ऐसे में कोई उनके करीब आना चाहता है तो बेहतर है उनसे दूर ही रहें. एक्ट्रेस ने आगे कहा कि अगर किसी को हीलिंग की जरूरत है तो कहीं और जाओ. यहां मत आओ. शो में जब जाह्नवी कपूर से पूछा गया था कि उनका बॉयफ्रेंड कैसा होना चाहिए. एक्ट्रेस ने कहा कि मेरे लिए अच्छा बनो, मुझे हंसाओ, मैं तुम्हारे के लिए अच्छी रहूंगी और हमेशा मैजूद रहूंगी. जाह्नवी कपूर का नाम शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर के साथ जुड़ चुका है. दोनों एक साथ फिल्म धड़क में नजर आए थे. उस दौरान दोनों के रिलेशनशिप की खबरें मीडिया की सुर्खियों में बने हुए थे.
Amroha News: अमरोहा (Amroha) के सदर कोतवाली क्षेत्र के आजाद मार्ग पर सिनेमा घर में पठान फिल्म देखने आए दर्शकों के बीच कोल्ड ड्रिंक को लेकर बेल्ट और लाठी-डंडे चले. एक दर्जन से ज्यादा युवाओं ने सिनेमाघर में जमकर हुड़दंग मचाया. वीडियो वायरल होने पर हरकत में आई. पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. क्षेत्रीय अधिकारी विजय कुमार राणा ने बताया कि एक ही समुदाय के दो युवकों के बीच कोल्ड ड्रिंक को लेकर विवाद हो गया था. इस पूरे मामले में वीडियो के आधार पर दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया है. दरअसल, यह पूरा मामला अमरोहा सदर कोतवाली क्षेत्र के आजाद मार्ग का है जहां पर सिनेमा घर में पठान फिल्म देखने आए दर्शकों के बीच कैंटीन के बाहर कोल्ड ड्रिंक को लेकर दो पक्ष आमने-सामने हो गए, जहां उनमें जमकर लाठी-डंडे और बेल्ट चली. इसी के साथ दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. साथ ही पूरे मामले की जांच की जा रही है. वीडियो वायरल होने पर हरकत में आई पुलिस ने अमरोहा के रहने वाले रियाज और सलमान को गिरफ्तार कर लिया है, जिनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है. वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कैसे पठान फिल्म देखने के दौरान दो पक्ष आपस में भिड़ गए. साथ ही खूब लाठी-डंडे और बेल्ट चली. करीब एक दर्जन से ज्यादा युवक हुडदंग मचाते हुए नजर आ रहे हैं. मामले में क्षेत्रीय अधिकारी विजय कुमार राणा ने बताया कि एक ही समुदाय के दो युवकों के बीच कोल्ड ड्रिंक को लेकर विवाद हो गया था. इस पूरे मामले में वीडियो के आधार पर दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया है और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.
Amroha News: अमरोहा के सदर कोतवाली क्षेत्र के आजाद मार्ग पर सिनेमा घर में पठान फिल्म देखने आए दर्शकों के बीच कोल्ड ड्रिंक को लेकर बेल्ट और लाठी-डंडे चले. एक दर्जन से ज्यादा युवाओं ने सिनेमाघर में जमकर हुड़दंग मचाया. वीडियो वायरल होने पर हरकत में आई. पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. क्षेत्रीय अधिकारी विजय कुमार राणा ने बताया कि एक ही समुदाय के दो युवकों के बीच कोल्ड ड्रिंक को लेकर विवाद हो गया था. इस पूरे मामले में वीडियो के आधार पर दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया है. दरअसल, यह पूरा मामला अमरोहा सदर कोतवाली क्षेत्र के आजाद मार्ग का है जहां पर सिनेमा घर में पठान फिल्म देखने आए दर्शकों के बीच कैंटीन के बाहर कोल्ड ड्रिंक को लेकर दो पक्ष आमने-सामने हो गए, जहां उनमें जमकर लाठी-डंडे और बेल्ट चली. इसी के साथ दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. साथ ही पूरे मामले की जांच की जा रही है. वीडियो वायरल होने पर हरकत में आई पुलिस ने अमरोहा के रहने वाले रियाज और सलमान को गिरफ्तार कर लिया है, जिनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है. वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कैसे पठान फिल्म देखने के दौरान दो पक्ष आपस में भिड़ गए. साथ ही खूब लाठी-डंडे और बेल्ट चली. करीब एक दर्जन से ज्यादा युवक हुडदंग मचाते हुए नजर आ रहे हैं. मामले में क्षेत्रीय अधिकारी विजय कुमार राणा ने बताया कि एक ही समुदाय के दो युवकों के बीच कोल्ड ड्रिंक को लेकर विवाद हो गया था. इस पूरे मामले में वीडियो के आधार पर दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया है और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.
Ranchi: सूबे के 65 हजार पारा शिक्षकों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है. संघ ने कहा है कि मंत्री जगरनाथ महतो जल्द रांची लौटने वाले हैं और उन्होंने पारा शिक्षकों की समस्या दूर करने का आश्वासन दिया है. ऐसे में उनके आश्वासन का सम्मान करते हुए संघ ने 10 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास घेरने का कार्यक्रम वापस ले लिया है. एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी संजय दुबे ने बताया कि संघ ने रविवार को बैठक कर यह निर्णय लिया कि अगर उनकी मांगों पर बजट सत्र यानी की 26 फरवरी तक विचार नहीं किया गया तो वे सत्र के दौरान ही आंदोलन करेंगे. मालूम हो कि मंत्री जगरनाथ महतो चेन्नई के अस्पताल में इलाजरत हैं और उन्होंने वहां से ही पारा शिक्षकों से अपील की है कि वे अपना आंदोलन वापस ले लें. साथ ही यह भी भरोसा दिलाया है कि लौटते ही पारा शिक्षकों का काम सर्वप्रथम करेंगे. संध ने बताया कि शिक्षा मंत्री के लौटते हीं राज्य इकाई उनसे मुलाकात कर एक-एक समस्याओं पर चर्चा करेगा. जिसमें स्थायीकरण से लेकर वेतन बढ़ोतरी की मुख्य मांग शामिल है. मंत्री से मिलने के पश्चात राज्य इकाई की बैठक की जाएगी और आगे की रणनीति तैयार किया जाएगा. संघ की बैठक में बिनोद बिहारी महतो, संजय कुमार दुबे, हृषिकेश पाठक, प्रमोद कुमार, नरोत्तम सिंह मुंडा, दशरथ ठाकुर, मोहन मंडल, प्रद्युम्न कुमार सिंह (सिंटू) आदि मौजूद थे.
Ranchi: सूबे के पैंसठ हजार पारा शिक्षकों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है. संघ ने कहा है कि मंत्री जगरनाथ महतो जल्द रांची लौटने वाले हैं और उन्होंने पारा शिक्षकों की समस्या दूर करने का आश्वासन दिया है. ऐसे में उनके आश्वासन का सम्मान करते हुए संघ ने दस फरवरी को मुख्यमंत्री आवास घेरने का कार्यक्रम वापस ले लिया है. एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी संजय दुबे ने बताया कि संघ ने रविवार को बैठक कर यह निर्णय लिया कि अगर उनकी मांगों पर बजट सत्र यानी की छब्बीस फरवरी तक विचार नहीं किया गया तो वे सत्र के दौरान ही आंदोलन करेंगे. मालूम हो कि मंत्री जगरनाथ महतो चेन्नई के अस्पताल में इलाजरत हैं और उन्होंने वहां से ही पारा शिक्षकों से अपील की है कि वे अपना आंदोलन वापस ले लें. साथ ही यह भी भरोसा दिलाया है कि लौटते ही पारा शिक्षकों का काम सर्वप्रथम करेंगे. संध ने बताया कि शिक्षा मंत्री के लौटते हीं राज्य इकाई उनसे मुलाकात कर एक-एक समस्याओं पर चर्चा करेगा. जिसमें स्थायीकरण से लेकर वेतन बढ़ोतरी की मुख्य मांग शामिल है. मंत्री से मिलने के पश्चात राज्य इकाई की बैठक की जाएगी और आगे की रणनीति तैयार किया जाएगा. संघ की बैठक में बिनोद बिहारी महतो, संजय कुमार दुबे, हृषिकेश पाठक, प्रमोद कुमार, नरोत्तम सिंह मुंडा, दशरथ ठाकुर, मोहन मंडल, प्रद्युम्न कुमार सिंह आदि मौजूद थे.
18 जनवरी को बुध के मार्गी होने से मेष, मिथुन सहित 7 राशि के जातकों के उन्नति के मार्ग खुलेंगे. Budh Gochar 2023: बुध ग्रह का 18 जनवरी को शाम 06 बजकर 41 मिनट से चाल परिवर्तन हुआ है. बुध धनु राशि में मार्गी हुए हैं. 20 अप्रैल तक बुध सीधी चाल से चलेंगे. ये 07 फरवरी तक धनु राशि में रहने के बाद मकर में प्रवेश कर जाएंगे. मार्गी बुध सभी राशियों के जीवन में प्रभाव डालेंगे. उनके बिजनेस और नौकरी में तरक्की होगी. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि बुध मार्गी का सात राशियों पर क्या प्रभाव होगा. मेषः धनु राशि में बुध का मार्गी होना आपके लिए सफलतादायक है. शिक्षा के क्षेत्र में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं. प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए समय अनुकूल रहेगा. विदेश जाने का सपना पूरा हो सकता है. मिथुनः बुध के मार्गी होने से आपके जीवन में उन्नति होगी. बिजनेस में अपार सफलता प्राप्त होगी. वैवाहि जीवन सुखमय होगा. शादी के योग्य लोगों का विवाह तय हो सकता है. कार्य स्थल पर थोड़ा सजग रहने की जरूरत है. सिंहः बुध मार्गी होने से लव लाइफ अच्छी रहेगी. प्रेम विवाह का योग बनेगा. संबंधों में रोमांस बढ़ेगा. बुध की कृपा से शिक्षा प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी. आपके कार्यों की सराहना होगी. संतान प्राप्ति का योग भी बना हुआ है. आप जो भी कार्य करना चाहते हैं, उसमें परिजनों का साथ मिलेगा. तुलाः बुध के मार्गी होने से आपकी बुद्धि तेज होगी और निर्णय क्षमता में वृद्धि होगी. आपके लिए गए फैसले सराहनीय होंगे और उससे लाभ भी होगा. कार्यों में सफलता प्राप्त होगी. यश और कीर्ति बढ़ेगी. धार्मिक कार्यों में रुचि लेंगे. वृश्चिकः बुध मार्गी का सकारात्मक प्रभाव आपके जीवन में दिखाई देगा. आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा. अचानक धन लाभ का योग है. हो सकता है कि पुराना अटका हुआ पैसा वापस मिल जाए. आप अपने लिए कोई नई गाड़ी खरीद सकते हैं. हालांकि इस समय में किसी को पैसे देते हैं, तो वह फंस सकता है. धन लाभ के साथ धन हानि भी हो सकती है. कुंभः बुध देव के प्रभाव से आपका भाग्य प्रबल होगा. बड़े कार्यों में भाग्य का साथ मिलेगा और आप सफल रहेंगे. लच मैरिज का योग बन रहा है, प्रेम संबंध मजबूत होंगे. नौकरीपेशा लोगों का मनचाहे जगह पर ट्रांसफर हो सकता है. सरकार की ओर से आपको कोई बड़ा काम मिल सकता है. मीनः बुध के मार्गी होने से आपके लिए नए मकान का योग बन रहा है. आप कोई नया वाहन भी खरीद सकते हैं. पुराने काम सफल होने से आर्थिक पक्ष मजबूत होगा. शिक्षा प्रतियोगिता से जुड़े जातकों के लिए समय अनुकूल है. कोई खुशखबरी मिल सकती है. .
अट्ठारह जनवरी को बुध के मार्गी होने से मेष, मिथुन सहित सात राशि के जातकों के उन्नति के मार्ग खुलेंगे. Budh Gochar दो हज़ार तेईस: बुध ग्रह का अट्ठारह जनवरी को शाम छः बजकर इकतालीस मिनट से चाल परिवर्तन हुआ है. बुध धनु राशि में मार्गी हुए हैं. बीस अप्रैल तक बुध सीधी चाल से चलेंगे. ये सात फरवरी तक धनु राशि में रहने के बाद मकर में प्रवेश कर जाएंगे. मार्गी बुध सभी राशियों के जीवन में प्रभाव डालेंगे. उनके बिजनेस और नौकरी में तरक्की होगी. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि बुध मार्गी का सात राशियों पर क्या प्रभाव होगा. मेषः धनु राशि में बुध का मार्गी होना आपके लिए सफलतादायक है. शिक्षा के क्षेत्र में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं. प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए समय अनुकूल रहेगा. विदेश जाने का सपना पूरा हो सकता है. मिथुनः बुध के मार्गी होने से आपके जीवन में उन्नति होगी. बिजनेस में अपार सफलता प्राप्त होगी. वैवाहि जीवन सुखमय होगा. शादी के योग्य लोगों का विवाह तय हो सकता है. कार्य स्थल पर थोड़ा सजग रहने की जरूरत है. सिंहः बुध मार्गी होने से लव लाइफ अच्छी रहेगी. प्रेम विवाह का योग बनेगा. संबंधों में रोमांस बढ़ेगा. बुध की कृपा से शिक्षा प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी. आपके कार्यों की सराहना होगी. संतान प्राप्ति का योग भी बना हुआ है. आप जो भी कार्य करना चाहते हैं, उसमें परिजनों का साथ मिलेगा. तुलाः बुध के मार्गी होने से आपकी बुद्धि तेज होगी और निर्णय क्षमता में वृद्धि होगी. आपके लिए गए फैसले सराहनीय होंगे और उससे लाभ भी होगा. कार्यों में सफलता प्राप्त होगी. यश और कीर्ति बढ़ेगी. धार्मिक कार्यों में रुचि लेंगे. वृश्चिकः बुध मार्गी का सकारात्मक प्रभाव आपके जीवन में दिखाई देगा. आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा. अचानक धन लाभ का योग है. हो सकता है कि पुराना अटका हुआ पैसा वापस मिल जाए. आप अपने लिए कोई नई गाड़ी खरीद सकते हैं. हालांकि इस समय में किसी को पैसे देते हैं, तो वह फंस सकता है. धन लाभ के साथ धन हानि भी हो सकती है. कुंभः बुध देव के प्रभाव से आपका भाग्य प्रबल होगा. बड़े कार्यों में भाग्य का साथ मिलेगा और आप सफल रहेंगे. लच मैरिज का योग बन रहा है, प्रेम संबंध मजबूत होंगे. नौकरीपेशा लोगों का मनचाहे जगह पर ट्रांसफर हो सकता है. सरकार की ओर से आपको कोई बड़ा काम मिल सकता है. मीनः बुध के मार्गी होने से आपके लिए नए मकान का योग बन रहा है. आप कोई नया वाहन भी खरीद सकते हैं. पुराने काम सफल होने से आर्थिक पक्ष मजबूत होगा. शिक्षा प्रतियोगिता से जुड़े जातकों के लिए समय अनुकूल है. कोई खुशखबरी मिल सकती है. .
"जब केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क बढ़ाया और वह भी शुद्ध उत्पाद शुल्क से उपकर और अधिभार में स्थानांतरित कर दिया, पेट्रोल पर तीन गुना और डीजल पर 10 गुना, उन्होंने राज्यों से परामर्श भी नहीं किया। उन्होंने हमें दिए गए हिस्से में कटौती की। उस समय, उनके पास कोई दया नहीं थी, कोई विचार नहीं था। उनकी सात-आठ साल से खराब कर नीति है, अब जब मुर्गियां घर आ रही हैं, तो वे हमें नकली खलनायक बना रही हैं। यह अत्याचारी है। यह बेशर्म पाखंड है, "यह 9. 4 रुपये से बढ़कर 32. 5 रुपये हो गया, उन्होंने एक बार 5 रुपये और एक बार 8 रुपये की कटौती की। आप 13 रुपये लेते हैं, वह अभी भी 19 रुपये है। यह अभी भी उस दर से दोगुना है जिस पर इस सरकार के सत्ता में आने पर कर लगाया जा रहा था। आइए लेते हैं। डीजल। यह 3. 4 रुपये या कुछ और था, उन्होंने इसे 32 रुपये तक ले लिया, उन्होंने इसे 10 रुपये और अन्य 8 या 6 रुपये में कटौती की। इसलिए, वे अभी भी चार या पांच गुना हैं जहां वे थे, "श्रीमान त्यागराजन ने जोड़ा। डीएमके नेता की उग्र निकासी दो दिन बाद हुई जब सुश्री सीतारमण ने उच्च मुद्रास्फीति के बीच उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से बचाने के लिए ईंधन पर कर कटौती और महत्वपूर्ण वस्तुओं पर लेवी में बदलाव की घोषणा की। उन्होंने राज्यों से इसमें शामिल होने और अपना हिस्सा कम करने को भी कहा। उन्होंने ट्वीट की एक श्रृंखला में कहा कि पेट्रोल और डीजल पर नई कर व्यवस्था से सरकार को वार्षिक राजस्व में लगभग 1 ट्रिलियन भारतीय रुपये का नुकसान हो सकता है।
"जब केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क बढ़ाया और वह भी शुद्ध उत्पाद शुल्क से उपकर और अधिभार में स्थानांतरित कर दिया, पेट्रोल पर तीन गुना और डीजल पर दस गुना, उन्होंने राज्यों से परामर्श भी नहीं किया। उन्होंने हमें दिए गए हिस्से में कटौती की। उस समय, उनके पास कोई दया नहीं थी, कोई विचार नहीं था। उनकी सात-आठ साल से खराब कर नीति है, अब जब मुर्गियां घर आ रही हैं, तो वे हमें नकली खलनायक बना रही हैं। यह अत्याचारी है। यह बेशर्म पाखंड है, "यह नौ. चार रुपयापये से बढ़कर बत्तीस. पाँच रुपयापये हो गया, उन्होंने एक बार पाँच रुपयापये और एक बार आठ रुपयापये की कटौती की। आप तेरह रुपयापये लेते हैं, वह अभी भी उन्नीस रुपयापये है। यह अभी भी उस दर से दोगुना है जिस पर इस सरकार के सत्ता में आने पर कर लगाया जा रहा था। आइए लेते हैं। डीजल। यह तीन. चार रुपयापये या कुछ और था, उन्होंने इसे बत्तीस रुपयापये तक ले लिया, उन्होंने इसे दस रुपयापये और अन्य आठ या छः रुपयापये में कटौती की। इसलिए, वे अभी भी चार या पांच गुना हैं जहां वे थे, "श्रीमान त्यागराजन ने जोड़ा। डीएमके नेता की उग्र निकासी दो दिन बाद हुई जब सुश्री सीतारमण ने उच्च मुद्रास्फीति के बीच उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से बचाने के लिए ईंधन पर कर कटौती और महत्वपूर्ण वस्तुओं पर लेवी में बदलाव की घोषणा की। उन्होंने राज्यों से इसमें शामिल होने और अपना हिस्सा कम करने को भी कहा। उन्होंने ट्वीट की एक श्रृंखला में कहा कि पेट्रोल और डीजल पर नई कर व्यवस्था से सरकार को वार्षिक राजस्व में लगभग एक ट्रिलियन भारतीय रुपये का नुकसान हो सकता है।
कॉफी पीना तो बहुत लोगों को पसंद होता है, पर दुनिया की सबसे महंगी कॉफी (Most expensive coffee in the world) पीना हर किसी के बस की बात नहीं है! आज हम आपको उस कॉफी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी मूल्य इतनी अधिक है कि आम आदमी की सैलेरी उसके मूल्य जितनी होती है। ये कॉफी इसलिए इतनी महंगी है क्योंकि इसके बीन्स पेड़-पौधों पर नहीं उगते, बल्कि पक्षी के पेट से पॉटी (Coffee made from bird poop) के रास्ते निकलते हैं! इसे दुनिया की सबसे महंगी कॉफी में से एक माना जाता है। ये जानने के बाद क्या आप इस कॉफी को पी पाएंगे? आप भले ना पी पाएं, पर दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो इस कॉफी को पीने की ख्वाहिश रखते हैं, और जिन्होंने इसे पिया है, वो इसकी बहुत प्रशंसा भी करते हैं। ऑडिटी सेंट्रल न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक ये कॉफी जाकू पक्षी (Jacu Bird) के मल से बनती है। पर इसको बनाने की कहानी काफी रोचक है। ब्राजील के Espirito Santo राज्य में कैमोसिम कॉफी फार्म (Camocim coffee farm) है। इस फार्म के मालिक हैं हेनरीक स्लोपर (Henrique Sloper)। स्लोपर के कॉफी के बगीचों में जाकू पक्षी आने लगा जो कॉफी के पेड़ों को नष्ट करता था और कॉफी बीन्स खा जाता था। स्लोपर इससे काफी परेशान हो चुका था। उसने कई ढंग आजमाए जिससे पक्षी को भगाया जा सके, पर जब वो असफल रहा तो उसने दूसरा उपाय खोजा। उसने पक्षी को भगाने की स्थान पालना प्रारम्भ कर दिया। इसका कारण ये था कि वो जानता था कि दुनिया की सबसे महंगी कॉफी सिवेट पक्षी के मल से बनती है। उसे लगा कि वो जाकू पक्षी के मल से निकले बीज से कॉफी बनाएगा। बस उसने कर्मियों से बोला कि वो पक्षी के मल में निकले बीजों को जुटाएं। उसने पाया कि पक्षी के अंदर इतनी समझ थी कि वो बेहतर क्वलिटी के बीन्स को ही खाता था। पक्षी बीन्स से कैफिन हजम कर जाता था इसलिए जो बीन्स निकलता था, वो कैफीन रहित होता था और उसे अधिक फर्मेंट करने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। इस तरह ये फार्म दुनिया का सबसे बड़ा और एकलौता फार्म बन गया जहां जाकू पक्षी के मल से कॉफी बीन्स पैदा किए जाते थे। लगभग 10 वर्षों से यहां इस तरह से ही कॉफी बन रही है, और उसे फ्रांस, जापान और यूके में 1. 3 लाख रुपये प्रति 1 किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है।
कॉफी पीना तो बहुत लोगों को पसंद होता है, पर दुनिया की सबसे महंगी कॉफी पीना हर किसी के बस की बात नहीं है! आज हम आपको उस कॉफी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी मूल्य इतनी अधिक है कि आम आदमी की सैलेरी उसके मूल्य जितनी होती है। ये कॉफी इसलिए इतनी महंगी है क्योंकि इसके बीन्स पेड़-पौधों पर नहीं उगते, बल्कि पक्षी के पेट से पॉटी के रास्ते निकलते हैं! इसे दुनिया की सबसे महंगी कॉफी में से एक माना जाता है। ये जानने के बाद क्या आप इस कॉफी को पी पाएंगे? आप भले ना पी पाएं, पर दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो इस कॉफी को पीने की ख्वाहिश रखते हैं, और जिन्होंने इसे पिया है, वो इसकी बहुत प्रशंसा भी करते हैं। ऑडिटी सेंट्रल न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक ये कॉफी जाकू पक्षी के मल से बनती है। पर इसको बनाने की कहानी काफी रोचक है। ब्राजील के Espirito Santo राज्य में कैमोसिम कॉफी फार्म है। इस फार्म के मालिक हैं हेनरीक स्लोपर । स्लोपर के कॉफी के बगीचों में जाकू पक्षी आने लगा जो कॉफी के पेड़ों को नष्ट करता था और कॉफी बीन्स खा जाता था। स्लोपर इससे काफी परेशान हो चुका था। उसने कई ढंग आजमाए जिससे पक्षी को भगाया जा सके, पर जब वो असफल रहा तो उसने दूसरा उपाय खोजा। उसने पक्षी को भगाने की स्थान पालना प्रारम्भ कर दिया। इसका कारण ये था कि वो जानता था कि दुनिया की सबसे महंगी कॉफी सिवेट पक्षी के मल से बनती है। उसे लगा कि वो जाकू पक्षी के मल से निकले बीज से कॉफी बनाएगा। बस उसने कर्मियों से बोला कि वो पक्षी के मल में निकले बीजों को जुटाएं। उसने पाया कि पक्षी के अंदर इतनी समझ थी कि वो बेहतर क्वलिटी के बीन्स को ही खाता था। पक्षी बीन्स से कैफिन हजम कर जाता था इसलिए जो बीन्स निकलता था, वो कैफीन रहित होता था और उसे अधिक फर्मेंट करने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। इस तरह ये फार्म दुनिया का सबसे बड़ा और एकलौता फार्म बन गया जहां जाकू पक्षी के मल से कॉफी बीन्स पैदा किए जाते थे। लगभग दस वर्षों से यहां इस तरह से ही कॉफी बन रही है, और उसे फ्रांस, जापान और यूके में एक. तीन लाख रुपये प्रति एक किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है।
पटना. कभी नीतीश कुमार के बेहद खास नौकरशाह से राजनेता बने आरसीपी सिंह आज कल नीतीश कुमार के खिलाफ ताल ठोक रखा है. शायद ही कभी कोई ऐसा मौका आता है जब आरसीपी सिंह नीतीश कुमार पर निशाना ना साधते हों लेकिन नीतीश कुमार पर निशाना साधते-साधते आरसीपी सिंह अब नीतीश कुमार के लिए कविता लिखने लगे हैं. शनिवार को जैसे ही आज जातिगत गणना के दूसरे चरण की शुरुआत नीतीश कुमार ने की तो राज्य में दूसरी तरफ जहरीली शराब पीने से संदिग्ध हालात में 22 लोगों के मौत की खबर आई. फिर क्या था, आरसीपी सिंह ने निशाना साध दिया और जो लिखा वो बेहद दिलचस्प है. आरसीपी सिंह ने लिखा है. . नीतीश बाबू बिहार से अभी दो महत्वपूर्ण खबरें आईं। एक खबर जातीय गणना से संबंधित है। बख़्तियारपुर पहुंचकर आपने अपनी जाति सार्वजनिक की। कैसा लगा नीतीश बाबू अपनी जाति के बारे में अपने मुख से बखान करने में ? जरा सोचिए डॉ॰लोहिया जी को कैसा लगा होगा ? आप भूल गए कि डॉ॰ लोहिया जाति तोड़ो अभियान चलाते थे। खैर, लोहिया जी के विचारों से अब आपको क्या लेना देना ? उनके विचारों और सिद्धांतों को तो आप पहले ही दफना चुके हैं। मुझे अच्छा लगता नीतीश बाबू अगर आप अपनी जन्मस्थली ,बख़्तियारपुर से बिहार के युवा युवतियों को रोजगार देने के कार्यक्रम की शुरुआत करते. खैर आपको युवाओं युवतियों के भविष्य से क्या लेना देना ? नीतीश जी कैसे आपकी कुर्सी सुरक्षित रहे यही आपका एकमात्र लक्ष्य है. आरसीपी ने लिखा है, दूसरी खबर मोतिहारी से आ रही है. बताया जा रहा है कि जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत हो चुकी है. नीतीश बाबू इसके लिए कौन जिम्मेदार है. जब से बिहार में शराबबंदी की नीति आपने लागू की ,तब से ज़हरीली शराब पीने से कितने लोगों की मौतें हुई, इससे आपको क्या लेना देना ? आप तो इतने संवेदनहीन हो गए हैं कि कुछ दिनों पूर्व आपने बयान दिया था कि जो पियेगा वो मरेगा. पानी पीने से मौत नहीं हुई नीतीश बाबू. मौतें हुई हैं शराब पीने से. आप तो सहमत नहीं होंगे , लेकिन बिहार के सभी लोग इस बात को समझते हैं कि शराबबंदी की आपकी नीति पूर्ण रूप से विफल रही है. ये जगज़ाहिर है कि अवैध शराब का कारोबार पूरे बिहार में तेजी से फूला फला है. अवैध शराब के उत्पादन एवं बिक्री पर आप रोक लगाने में नाकाम रहे हैं. बिहार की अदालतों में सबसे ज़्यादा मुक़दमे या तो भूमि विवाद से हैं या शराब के। ग्रामीण इलाक़ों के कमज़ोर तबके के लोग अदालतों के चक्कर काट रहे हैं. नीतीश बाबू ,आपने कभी सोचा कि अदालतों के चक्कर काटने में गरीब लोगों को कितनी परेशानियों को झेलना पड़ता है तथा उनके ऊपर किस प्रकार का आर्थिक बोझ आ जाता है। प्रदेश को राजस्व का जो नुक़सान हो रहा है उसकी तो आपको चिंता ही नहीं है। ऐसा अनुमान है कि अगर शराबबंदी अभी लागू नहीं रहती तो आवकारी से बीस हज़ार करोड़ से ज़्यादा की आय प्रति वर्ष बिहार सरकार की होती । बिहार जैसे आर्थिक रूप से कमज़ोर प्रदेश को कितना बड़ा नुक़सान उठाना पड़ रहा है । आपको इससे क्या लेना देना ? शराब का अवैध कारोबारी मालामाल है , जनता का हाल बेहाल है ! शराबबंदी से गरीब त्रस्त हैं और आप मस्त हैं ! जातिवाद ज़िंदाबाद ! जातिवाद ज़िंदाबाद ! शराबबंदी ज़िंदाबाद ! शराबबंदी ज़िंदाबाद ! कुर्सीवाद ज़िंदाबाद ! कुर्सीवाद ज़िंदाबाद ! .
पटना. कभी नीतीश कुमार के बेहद खास नौकरशाह से राजनेता बने आरसीपी सिंह आज कल नीतीश कुमार के खिलाफ ताल ठोक रखा है. शायद ही कभी कोई ऐसा मौका आता है जब आरसीपी सिंह नीतीश कुमार पर निशाना ना साधते हों लेकिन नीतीश कुमार पर निशाना साधते-साधते आरसीपी सिंह अब नीतीश कुमार के लिए कविता लिखने लगे हैं. शनिवार को जैसे ही आज जातिगत गणना के दूसरे चरण की शुरुआत नीतीश कुमार ने की तो राज्य में दूसरी तरफ जहरीली शराब पीने से संदिग्ध हालात में बाईस लोगों के मौत की खबर आई. फिर क्या था, आरसीपी सिंह ने निशाना साध दिया और जो लिखा वो बेहद दिलचस्प है. आरसीपी सिंह ने लिखा है. . नीतीश बाबू बिहार से अभी दो महत्वपूर्ण खबरें आईं। एक खबर जातीय गणना से संबंधित है। बख़्तियारपुर पहुंचकर आपने अपनी जाति सार्वजनिक की। कैसा लगा नीतीश बाबू अपनी जाति के बारे में अपने मुख से बखान करने में ? जरा सोचिए डॉ॰लोहिया जी को कैसा लगा होगा ? आप भूल गए कि डॉ॰ लोहिया जाति तोड़ो अभियान चलाते थे। खैर, लोहिया जी के विचारों से अब आपको क्या लेना देना ? उनके विचारों और सिद्धांतों को तो आप पहले ही दफना चुके हैं। मुझे अच्छा लगता नीतीश बाबू अगर आप अपनी जन्मस्थली ,बख़्तियारपुर से बिहार के युवा युवतियों को रोजगार देने के कार्यक्रम की शुरुआत करते. खैर आपको युवाओं युवतियों के भविष्य से क्या लेना देना ? नीतीश जी कैसे आपकी कुर्सी सुरक्षित रहे यही आपका एकमात्र लक्ष्य है. आरसीपी ने लिखा है, दूसरी खबर मोतिहारी से आ रही है. बताया जा रहा है कि जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत हो चुकी है. नीतीश बाबू इसके लिए कौन जिम्मेदार है. जब से बिहार में शराबबंदी की नीति आपने लागू की ,तब से ज़हरीली शराब पीने से कितने लोगों की मौतें हुई, इससे आपको क्या लेना देना ? आप तो इतने संवेदनहीन हो गए हैं कि कुछ दिनों पूर्व आपने बयान दिया था कि जो पियेगा वो मरेगा. पानी पीने से मौत नहीं हुई नीतीश बाबू. मौतें हुई हैं शराब पीने से. आप तो सहमत नहीं होंगे , लेकिन बिहार के सभी लोग इस बात को समझते हैं कि शराबबंदी की आपकी नीति पूर्ण रूप से विफल रही है. ये जगज़ाहिर है कि अवैध शराब का कारोबार पूरे बिहार में तेजी से फूला फला है. अवैध शराब के उत्पादन एवं बिक्री पर आप रोक लगाने में नाकाम रहे हैं. बिहार की अदालतों में सबसे ज़्यादा मुक़दमे या तो भूमि विवाद से हैं या शराब के। ग्रामीण इलाक़ों के कमज़ोर तबके के लोग अदालतों के चक्कर काट रहे हैं. नीतीश बाबू ,आपने कभी सोचा कि अदालतों के चक्कर काटने में गरीब लोगों को कितनी परेशानियों को झेलना पड़ता है तथा उनके ऊपर किस प्रकार का आर्थिक बोझ आ जाता है। प्रदेश को राजस्व का जो नुक़सान हो रहा है उसकी तो आपको चिंता ही नहीं है। ऐसा अनुमान है कि अगर शराबबंदी अभी लागू नहीं रहती तो आवकारी से बीस हज़ार करोड़ से ज़्यादा की आय प्रति वर्ष बिहार सरकार की होती । बिहार जैसे आर्थिक रूप से कमज़ोर प्रदेश को कितना बड़ा नुक़सान उठाना पड़ रहा है । आपको इससे क्या लेना देना ? शराब का अवैध कारोबारी मालामाल है , जनता का हाल बेहाल है ! शराबबंदी से गरीब त्रस्त हैं और आप मस्त हैं ! जातिवाद ज़िंदाबाद ! जातिवाद ज़िंदाबाद ! शराबबंदी ज़िंदाबाद ! शराबबंदी ज़िंदाबाद ! कुर्सीवाद ज़िंदाबाद ! कुर्सीवाद ज़िंदाबाद ! .
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः चीन में शंघाई के बाद अब राजधानी बीजिंग में भी कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन स्वरूप ने कहर मचाना शुरू कर दिया है। सोमवार को शून्य कोविड नीति अपनाते हुए बीजिंग में सख्त प्रतिबंध लगा दिए गए। यहां रेस्तरां में खाना रोकते हुए नागरिकों से कहा गया है कि उन्हें सार्वजनिक स्थलों में प्रवेश के लिए कोरोना निगेटिव परीक्षण रिपोर्ट दिखानी होगी। हालांकि शंघाई में कुछ राहत है। चीन ने यह प्रतिबंध ऐसे समय पर लगाए हैं जब देश में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर 5 दिन की छुट्टियां शुरू हो गई हैं। देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना से 32 मौतें दर्ज की गई हैं जबकि 6,895 केस स्थानीय रूप से स्पर्शोन्मुखी संक्रमण के पाए गए। बीजिंग में दर्जनों आवासीय परिसरों व स्कूलों को बंद करने जैसे सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः चीन में शंघाई के बाद अब राजधानी बीजिंग में भी कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन स्वरूप ने कहर मचाना शुरू कर दिया है। सोमवार को शून्य कोविड नीति अपनाते हुए बीजिंग में सख्त प्रतिबंध लगा दिए गए। यहां रेस्तरां में खाना रोकते हुए नागरिकों से कहा गया है कि उन्हें सार्वजनिक स्थलों में प्रवेश के लिए कोरोना निगेटिव परीक्षण रिपोर्ट दिखानी होगी। हालांकि शंघाई में कुछ राहत है। चीन ने यह प्रतिबंध ऐसे समय पर लगाए हैं जब देश में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर पाँच दिन की छुट्टियां शुरू हो गई हैं। देश में पिछले चौबीस घंटाटों में कोरोना से बत्तीस मौतें दर्ज की गई हैं जबकि छः,आठ सौ पचानवे केस स्थानीय रूप से स्पर्शोन्मुखी संक्रमण के पाए गए। बीजिंग में दर्जनों आवासीय परिसरों व स्कूलों को बंद करने जैसे सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं।
Latehar: सूबे के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विगत कई वर्षों से छात्र संघ का चुनाव नहीं हुआ है. इससे न सिर्फ छात्र, बल्कि महाविद्यालय के संसाधनों पर भी असर पड़ा है. कई विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में तो प्रबंधन निरंकुश हो गया है. वहीं छात्र अपनी समस्याओं को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं. छात्रों की इस स्थिति के लिए चुनाव नहीं होना बड़ी वजह बतायी जा रही है. इसे लेकर लगातार मीडिया की टीम छात्रों से बात की और उनकी राय जानी. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता नवनीत कुमार ने कहा कि पलामू के नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में छात्र संघ का चुनाव होना बहुत ही आवश्यक है. उन्होने कहा कि चुनाव नहीं होने के कारण महाविद्यालयों में अराजकता की स्थिति हो गयी है. लातेहार के मनिका स्थित डिग्री कालेज में विगत कई वर्षों से विभिन्न विषयों के शिक्षक नहीं हैं. इसे लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन को कई बार लिखित रूप से जानकारी दी गयी है. धरना प्रदर्शन तक किया गया, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला. आज महाविद्यालय में छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है. अगर छात्र संघ होता तो महाविद्यालय प्रबंधन को शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बाध्य कर सकता था और अन्य संसाधन उपलब्ध करा सकता था. आजसू पलामू जिला छात्र संघ के अध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि छात्र संघ का चुनाव नहीं होने से छात्रों की परेशानी बढ़ गयी है. छात्रों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर किसके पास जाये. महाविद्यालय प्रबंधन उनकी एक नहीं सुनता है. ऐसे में छात्रों के समक्ष एक ऐसा छात्र नेता होना चाहिए जो उनकी समस्याओं का सामाधान कर सके. यह तभी संभव हो पायेगा जब छात्र संघ का चुनाव होगा. जब तक महाविद्यालयों में छात्र नेतृत्व नहीं होगा तब तक छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पायेगा. अभाविप के छात्र नेता कमलेश उरांव ने कहा कि आज महाविद्यालय की स्थिति दयनीय है. किसी महाविद्यालय में लाइब्रेरी दुरूस्त नहीं है. तो किसी महाविद्यालय में प्रयोगशाला का अस्तित्व मिट गया है. छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. ऐसे समय में ही छात्र संघ की जरूरत पड़ती है. जो मजबूती से छात्रों की समस्याओं को विश्वविद्यालय व महाविद्यालय प्रबंधन के समक्ष रख सके. कहा कि लातेहार जिला मुख्यालय में एक भी सरकारी महाविद्यालय नहीं है. विश्वविद्यालयों से मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के पास संसाधनों का अभाव है, लेकिन छात्र संघ नहीं रहने के कारण इन समस्यसाओं पर न तो विश्वविद्यालय और ना ही सरकार की नजर है.
Latehar: सूबे के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विगत कई वर्षों से छात्र संघ का चुनाव नहीं हुआ है. इससे न सिर्फ छात्र, बल्कि महाविद्यालय के संसाधनों पर भी असर पड़ा है. कई विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में तो प्रबंधन निरंकुश हो गया है. वहीं छात्र अपनी समस्याओं को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं. छात्रों की इस स्थिति के लिए चुनाव नहीं होना बड़ी वजह बतायी जा रही है. इसे लेकर लगातार मीडिया की टीम छात्रों से बात की और उनकी राय जानी. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता नवनीत कुमार ने कहा कि पलामू के नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में छात्र संघ का चुनाव होना बहुत ही आवश्यक है. उन्होने कहा कि चुनाव नहीं होने के कारण महाविद्यालयों में अराजकता की स्थिति हो गयी है. लातेहार के मनिका स्थित डिग्री कालेज में विगत कई वर्षों से विभिन्न विषयों के शिक्षक नहीं हैं. इसे लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन को कई बार लिखित रूप से जानकारी दी गयी है. धरना प्रदर्शन तक किया गया, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला. आज महाविद्यालय में छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है. अगर छात्र संघ होता तो महाविद्यालय प्रबंधन को शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बाध्य कर सकता था और अन्य संसाधन उपलब्ध करा सकता था. आजसू पलामू जिला छात्र संघ के अध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि छात्र संघ का चुनाव नहीं होने से छात्रों की परेशानी बढ़ गयी है. छात्रों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर किसके पास जाये. महाविद्यालय प्रबंधन उनकी एक नहीं सुनता है. ऐसे में छात्रों के समक्ष एक ऐसा छात्र नेता होना चाहिए जो उनकी समस्याओं का सामाधान कर सके. यह तभी संभव हो पायेगा जब छात्र संघ का चुनाव होगा. जब तक महाविद्यालयों में छात्र नेतृत्व नहीं होगा तब तक छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पायेगा. अभाविप के छात्र नेता कमलेश उरांव ने कहा कि आज महाविद्यालय की स्थिति दयनीय है. किसी महाविद्यालय में लाइब्रेरी दुरूस्त नहीं है. तो किसी महाविद्यालय में प्रयोगशाला का अस्तित्व मिट गया है. छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. ऐसे समय में ही छात्र संघ की जरूरत पड़ती है. जो मजबूती से छात्रों की समस्याओं को विश्वविद्यालय व महाविद्यालय प्रबंधन के समक्ष रख सके. कहा कि लातेहार जिला मुख्यालय में एक भी सरकारी महाविद्यालय नहीं है. विश्वविद्यालयों से मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के पास संसाधनों का अभाव है, लेकिन छात्र संघ नहीं रहने के कारण इन समस्यसाओं पर न तो विश्वविद्यालय और ना ही सरकार की नजर है.
उसके आगे दौड़ गया - परदेश में वह अकेलो-पास पैसा नहीं, और उससे टिकट तलब किया जा रहा है और वह नहीं जानती कि पति को कैसे सूचित करें कि वह कहाँ है । लेकिन क्षण ही भर मे इस डर का स्थान एक दूसरे डर ने ले लिया । कहो वे उस तेज चलती हुई गाड़ी पर सवार होने के लिए कूदे और ~... यह डर उससे नहीं सहा गया । वह जितना बाहर झुक सकती थी, झुककर रामलाल को देखने लगी- उसके पैरों का गति को देखने लगी... और उसके मन में यह होने लगा कि क्या उसने पति से प्यास की बात कही - यदि कुछ देर बैठ ! रहता तो मर न जाती... एकाएक रामलाल गाड़ा के कुछ और निकट आकर कूदा। इन्दु जरा और भुकी कि देखे, वह सवार हा गया कि नहीं और निश्चिन्त हो जाय। उसने देखा - अन्धकार-कुछ डूबता-सा - एक टीस-जॉध और कन्धे मे जैसे भीषण आग - फिर एक दूसरे प्रकार का अन्धकार । गाड़ी मानो दिवश क्रोध से चिचियाती हुई रुकी कि अनु भूतियों से बँधे हुए इस क्षुद्र चेतन संसार की एक घटना के लिए किसी ने चेन खीचकर उस जड़, निरीह और इसलिए अडिग शक्ति को क्यो रोक दिया है । गाड़ी के रुकने का कारण समझने उतरने से पहले ही राम लाल ने डिब्बे तक आकर देख लिया कि इन्दु उसमें नहीं है । रेल का पहिया जाँघ और कन्धे पर से निकल गया था .
उसके आगे दौड़ गया - परदेश में वह अकेलो-पास पैसा नहीं, और उससे टिकट तलब किया जा रहा है और वह नहीं जानती कि पति को कैसे सूचित करें कि वह कहाँ है । लेकिन क्षण ही भर मे इस डर का स्थान एक दूसरे डर ने ले लिया । कहो वे उस तेज चलती हुई गाड़ी पर सवार होने के लिए कूदे और ~... यह डर उससे नहीं सहा गया । वह जितना बाहर झुक सकती थी, झुककर रामलाल को देखने लगी- उसके पैरों का गति को देखने लगी... और उसके मन में यह होने लगा कि क्या उसने पति से प्यास की बात कही - यदि कुछ देर बैठ ! रहता तो मर न जाती... एकाएक रामलाल गाड़ा के कुछ और निकट आकर कूदा। इन्दु जरा और भुकी कि देखे, वह सवार हा गया कि नहीं और निश्चिन्त हो जाय। उसने देखा - अन्धकार-कुछ डूबता-सा - एक टीस-जॉध और कन्धे मे जैसे भीषण आग - फिर एक दूसरे प्रकार का अन्धकार । गाड़ी मानो दिवश क्रोध से चिचियाती हुई रुकी कि अनु भूतियों से बँधे हुए इस क्षुद्र चेतन संसार की एक घटना के लिए किसी ने चेन खीचकर उस जड़, निरीह और इसलिए अडिग शक्ति को क्यो रोक दिया है । गाड़ी के रुकने का कारण समझने उतरने से पहले ही राम लाल ने डिब्बे तक आकर देख लिया कि इन्दु उसमें नहीं है । रेल का पहिया जाँघ और कन्धे पर से निकल गया था .
राजधानी की ओर चले, "नाति प्रीतोऽभ्यगात्" ( अपने ऊपर ग्लानि का अनुभव ); सोना फैला था, ठीकरा गाँठ मे बाँधा; सायुज्य मोक्ष मिल रहा था, क्षुद्र कल्प-स्थायी राज्य माँगा ! खोए हुए बालक को लौटता सुन, हर्ष और ग्राश्चर्य से भरे, राजा, दोनो रार्नियों के साथ, सुरुचि के पुत्र उत्तम को लिये, मन्त्री आदि महापरिवार से परिवृत, रथों पर दौड़ते हुए, नगर के बाहर आये । रथ से उतर कर, प्रेमविह्वलः "परिरेमे अंगजं. दीर्घोत्कंठमनाः श्वसन्, अजिघन् मूर्ध्नि", प्रेम से विह्वल, वेटे को गले लगाया, चिरकाल की उत्कंठा से भरे मन को, दीर्घ श्वास छोड़ कर, हल्का किया, बालक का सिर सूँघा । सुनीति ने गले लगाया, माता के नेत्रों से पानी और स्तनों से दूध बहा । सुरुचि ने भी, ईर्ष्या मत्सर को दूर फेंक कर, बालक को छाती से चपकाया । उत्तम और ध्रुव, दोनो भाई, गले गले लपटे । सारे नगर मे, ध्रुव के पुण्य चरित से, श्राश्चर्य, श्रद्धा, भावी सुकाल, सुराज्य, और सुख सम्पत्ति के निश्चय से, घर घर आनन्द फैला; गीत, वाद्य, नृत्य, तोरण, पताका, फूल, माला, बढ़िया कपड़े, घरों की रँगाई चुँगाई-चारो ओर देख पड़ने लगे ( प्रीति और हर्ष के अनुभाव ) । यह अनुभवों के उदाहरण । चित्त के 'भाव' को, दशा को प्रकट करने वाली, भाव के अनु, पीछे लगी, शरीर की चेष्टा का, अवस्था का नाम, 'अनु-भाव' । श्रृङ्गारसम्बन्धी अनुभावों के उदाहरण, बिहारी आदि कवियों की कविता मे भरे पड़े हैं । यथा - छला छबीले छैल को नवल नेह लहि नारि, चूमति चाहति लाय उर, पहिरति धरति उतारि । इत तैं उत, उत तैं इतै, छिन न कहूँ ठहराति, जक न परत, चकई भई, फिर श्रावति, फिर जाति । इत्यादि । # उत्तानपाद, सुरुचि, सुनीति, उत्तम, ध्रुव - इन नामो मे छिपे श्र/धिदैविक (ज्योतिष शास्त्र-सम्बंधी ) तथा श्राध्यात्मिक अर्थ भी हो सकते हैं ।
राजधानी की ओर चले, "नाति प्रीतोऽभ्यगात्" ; सोना फैला था, ठीकरा गाँठ मे बाँधा; सायुज्य मोक्ष मिल रहा था, क्षुद्र कल्प-स्थायी राज्य माँगा ! खोए हुए बालक को लौटता सुन, हर्ष और ग्राश्चर्य से भरे, राजा, दोनो रार्नियों के साथ, सुरुचि के पुत्र उत्तम को लिये, मन्त्री आदि महापरिवार से परिवृत, रथों पर दौड़ते हुए, नगर के बाहर आये । रथ से उतर कर, प्रेमविह्वलः "परिरेमे अंगजं. दीर्घोत्कंठमनाः श्वसन्, अजिघन् मूर्ध्नि", प्रेम से विह्वल, वेटे को गले लगाया, चिरकाल की उत्कंठा से भरे मन को, दीर्घ श्वास छोड़ कर, हल्का किया, बालक का सिर सूँघा । सुनीति ने गले लगाया, माता के नेत्रों से पानी और स्तनों से दूध बहा । सुरुचि ने भी, ईर्ष्या मत्सर को दूर फेंक कर, बालक को छाती से चपकाया । उत्तम और ध्रुव, दोनो भाई, गले गले लपटे । सारे नगर मे, ध्रुव के पुण्य चरित से, श्राश्चर्य, श्रद्धा, भावी सुकाल, सुराज्य, और सुख सम्पत्ति के निश्चय से, घर घर आनन्द फैला; गीत, वाद्य, नृत्य, तोरण, पताका, फूल, माला, बढ़िया कपड़े, घरों की रँगाई चुँगाई-चारो ओर देख पड़ने लगे । यह अनुभवों के उदाहरण । चित्त के 'भाव' को, दशा को प्रकट करने वाली, भाव के अनु, पीछे लगी, शरीर की चेष्टा का, अवस्था का नाम, 'अनु-भाव' । श्रृङ्गारसम्बन्धी अनुभावों के उदाहरण, बिहारी आदि कवियों की कविता मे भरे पड़े हैं । यथा - छला छबीले छैल को नवल नेह लहि नारि, चूमति चाहति लाय उर, पहिरति धरति उतारि । इत तैं उत, उत तैं इतै, छिन न कहूँ ठहराति, जक न परत, चकई भई, फिर श्रावति, फिर जाति । इत्यादि । # उत्तानपाद, सुरुचि, सुनीति, उत्तम, ध्रुव - इन नामो मे छिपे श्र/धिदैविक तथा श्राध्यात्मिक अर्थ भी हो सकते हैं ।
सोलहवीं से अठारहवीं सदी के मध्य उत्तर भारत में कबीरपंथ का इतिहास इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डी. फिल् उपाधि हेतु प्रस्तुत शोध-प्रबन्ध अनन्त राम डॉ० संजय श्रीवास्तव वरिष्ठ प्रवक्ता, मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद QUOT RAMI TOT मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद । मै प्रमाणित करता हूँ कि अनन्त राम द्वारा लिखित शोध-प्रबन्ध सोलहवी रो अठारहवी रादी के मध्य उत्तर भारत मे कवीरपथ का इतिहास' उनका गौलिक कार्य हे । इस सामग्री का उपयोग वे यहाँ पहली बार कर रहे हैं। Amant Ram ( अनन्त राग ) ( डॉ० सजय श्रीवास्तव) वरिष्ठ प्रवक्ता मध्यकालीन एव आधुनिक इतिहास विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद ।
सोलहवीं से अठारहवीं सदी के मध्य उत्तर भारत में कबीरपंथ का इतिहास इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डी. फिल् उपाधि हेतु प्रस्तुत शोध-प्रबन्ध अनन्त राम डॉशून्य संजय श्रीवास्तव वरिष्ठ प्रवक्ता, मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद QUOT RAMI TOT मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद । मै प्रमाणित करता हूँ कि अनन्त राम द्वारा लिखित शोध-प्रबन्ध सोलहवी रो अठारहवी रादी के मध्य उत्तर भारत मे कवीरपथ का इतिहास' उनका गौलिक कार्य हे । इस सामग्री का उपयोग वे यहाँ पहली बार कर रहे हैं। Amant Ram वरिष्ठ प्रवक्ता मध्यकालीन एव आधुनिक इतिहास विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद ।
आज से विधानसभा का सानसून सत्र शुरु हुआ है। जिसमें हिस्सा लेने के लिए ओपी राजभर पहुंचे थे। वहीं ये सत्र सिर्फ 5 दिनों का है जिसमें सरकार नें पक्ष और विपक्ष से सार्थक चर्चा करने की अपील की हैं। डेस्क. मानसून सत्र का आज पहला दिन हैं। मानससूत्र के पहले दिन सत्र शुरु होने से पहले सुभसपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा ओपी राजभर योगी सरकार पर भी हमलावर रहे। ओपी राजभर मानसून सत्र में हिस्सा लेनें विधानभवन पहुंचने से पहले मीडिया से मुखातिब हुए और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला। सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर नें कहा कि सपा ने पिछड़ों को हिस्सा नहीं दिया और समाजवादी पार्टी की सरकार में गरीबों की जमीन लूटे गए हैं। ओपी राजभर नें कहा कि सरकार चली जाती है तो रिहर्सल करते हैं, नीतीश के फूलपुर से चुनाव लड़ने ओपी राजभर नें कहा कि बिहार के सीएम के यहां से चुनाव लड़ने पर असर नही है। सपा पर आक्रामक होते हुए राजभर नें कहा कि नफरत सपा को बर्बाद कर डालेगी. ओपी राजभर नें सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भूमाफियायों की आड़ में गरीबों को उजाड़ दिया गया। राजभर को अभी ST में शामिल नहीं किया गया। उत्तर प्रदेश को 4 भागों में बांटा जाए अखिलेश को राजभर से मर्यादा सीखना चाहिए। आपको बता दें कि आज से विधानसभा का सानसून सत्र शुरु हुआ है। जिसमें हिस्सा लेने के लिए ओपी राजभर पहुंचे थे. वहीं ये सत्र सिर्फ 5 दिनों का है जिसमें सरकार नें पक्ष और विपक्ष से सार्थक चर्चा करने की अपील की है। वहीं अखिलेश यादव नें विधानसभा सत्र से पहले पैदल मार्च करते हुए विधानसभा पहुंचने की कोशिश की हालांकि पुलिस और प्रशासन ने उनको जाने से रोका जिसके बाद वो धरने पर बैठ गए।
आज से विधानसभा का सानसून सत्र शुरु हुआ है। जिसमें हिस्सा लेने के लिए ओपी राजभर पहुंचे थे। वहीं ये सत्र सिर्फ पाँच दिनों का है जिसमें सरकार नें पक्ष और विपक्ष से सार्थक चर्चा करने की अपील की हैं। डेस्क. मानसून सत्र का आज पहला दिन हैं। मानससूत्र के पहले दिन सत्र शुरु होने से पहले सुभसपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा ओपी राजभर योगी सरकार पर भी हमलावर रहे। ओपी राजभर मानसून सत्र में हिस्सा लेनें विधानभवन पहुंचने से पहले मीडिया से मुखातिब हुए और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला। सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर नें कहा कि सपा ने पिछड़ों को हिस्सा नहीं दिया और समाजवादी पार्टी की सरकार में गरीबों की जमीन लूटे गए हैं। ओपी राजभर नें कहा कि सरकार चली जाती है तो रिहर्सल करते हैं, नीतीश के फूलपुर से चुनाव लड़ने ओपी राजभर नें कहा कि बिहार के सीएम के यहां से चुनाव लड़ने पर असर नही है। सपा पर आक्रामक होते हुए राजभर नें कहा कि नफरत सपा को बर्बाद कर डालेगी. ओपी राजभर नें सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भूमाफियायों की आड़ में गरीबों को उजाड़ दिया गया। राजभर को अभी ST में शामिल नहीं किया गया। उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटा जाए अखिलेश को राजभर से मर्यादा सीखना चाहिए। आपको बता दें कि आज से विधानसभा का सानसून सत्र शुरु हुआ है। जिसमें हिस्सा लेने के लिए ओपी राजभर पहुंचे थे. वहीं ये सत्र सिर्फ पाँच दिनों का है जिसमें सरकार नें पक्ष और विपक्ष से सार्थक चर्चा करने की अपील की है। वहीं अखिलेश यादव नें विधानसभा सत्र से पहले पैदल मार्च करते हुए विधानसभा पहुंचने की कोशिश की हालांकि पुलिस और प्रशासन ने उनको जाने से रोका जिसके बाद वो धरने पर बैठ गए।
बॉलीवुडः शादी के पूरे 15 साल बाद आज अभिनेता आमिर खान और किरण राव की शादी का अंत हो गया। दोनों से आपसी सहमति से तलाक लेने का फैसला किया है। दोनों ने एक ज्वाइंट स्टेटमेंट पोस्ट करके इस बात की जानकारी दी। आमिर और किरण के तलाक की खबर फैन्स के लिए बेहद शॉकिंग न्यूज है। हालांकि उन्होंने कहा कि हमारे कारोबारी रिश्ते बने रहेंगे। इसके अलावा हम बच्चे का पालन पोषण भी साथ मिलकर करेंगे। जानकारी के मुताबिक, आमिर खान और किरण राव ने अपने ज्वाइंट स्टेटमेंट में कहा है कि, "इन 15 खूबसूरत सालों में हमने एक साथ जीवन भर के अनुभव, आनंद और खुशी को शेयर किया है। हमारा रिश्ता सिर्फ विश्वास, सम्मान और प्यार में बढ़ा है। अब हम अपने जीवन में एक नया अध्याय शुरू करना चाहेंगे। पति-पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि सह-माता-पिता और परिवार के रूप में। हमने कुछ समय पहले अलग होने के फैसले पर निर्णय किया था। अब इस व्यवस्था को औपचारिक रूप देने में सहज महसूस कर रहे हैं। 'हम दोनों अलग-अलग रहने के बावजूद अपने जीवन को एक विस्तारित परिवार की तरह शेयर करेंगे। हम अपने बेटे आजाद के प्रति समर्पित माता-पिता हैं, जिनका पालन-पोषण हम मिलकर करेंगे। हम फिल्मों, पानी फाउंडेशन और अन्य परियोजनाओं पर भी सहयोगी के रूप में काम करना जारी रखेंगे, जिनके बारे में हम दिल से परवाह करते हैं। बता दें कि बॉलीवुड एक्टर आमिर खान और किरण राव की शादी 2005 में हुई थी। दोनों के एक बेटा आजाद भी है जिसका जन्म सरोगेसी से हुआ है। किरण राव की मुलाकात आमिर खान से आशुतोष गोवारिकर की फिल्म लगाने के दौरान हुई थी। 'लगान' फिल्म में किरण राव असिस्टेंट डायरेक्टर थीं। यह आमिर खान की दूसरी शादी थी। इससे पहले आमिर खान ने रीना दत्ता से शादी की थी और उनके साथ भी 15 साल बाद उनका तलाक हो गया था। आमिर खान की पहली शादी से उनके एक बेटा और बेटी है। ( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
बॉलीवुडः शादी के पूरे पंद्रह साल बाद आज अभिनेता आमिर खान और किरण राव की शादी का अंत हो गया। दोनों से आपसी सहमति से तलाक लेने का फैसला किया है। दोनों ने एक ज्वाइंट स्टेटमेंट पोस्ट करके इस बात की जानकारी दी। आमिर और किरण के तलाक की खबर फैन्स के लिए बेहद शॉकिंग न्यूज है। हालांकि उन्होंने कहा कि हमारे कारोबारी रिश्ते बने रहेंगे। इसके अलावा हम बच्चे का पालन पोषण भी साथ मिलकर करेंगे। जानकारी के मुताबिक, आमिर खान और किरण राव ने अपने ज्वाइंट स्टेटमेंट में कहा है कि, "इन पंद्रह खूबसूरत सालों में हमने एक साथ जीवन भर के अनुभव, आनंद और खुशी को शेयर किया है। हमारा रिश्ता सिर्फ विश्वास, सम्मान और प्यार में बढ़ा है। अब हम अपने जीवन में एक नया अध्याय शुरू करना चाहेंगे। पति-पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि सह-माता-पिता और परिवार के रूप में। हमने कुछ समय पहले अलग होने के फैसले पर निर्णय किया था। अब इस व्यवस्था को औपचारिक रूप देने में सहज महसूस कर रहे हैं। 'हम दोनों अलग-अलग रहने के बावजूद अपने जीवन को एक विस्तारित परिवार की तरह शेयर करेंगे। हम अपने बेटे आजाद के प्रति समर्पित माता-पिता हैं, जिनका पालन-पोषण हम मिलकर करेंगे। हम फिल्मों, पानी फाउंडेशन और अन्य परियोजनाओं पर भी सहयोगी के रूप में काम करना जारी रखेंगे, जिनके बारे में हम दिल से परवाह करते हैं। बता दें कि बॉलीवुड एक्टर आमिर खान और किरण राव की शादी दो हज़ार पाँच में हुई थी। दोनों के एक बेटा आजाद भी है जिसका जन्म सरोगेसी से हुआ है। किरण राव की मुलाकात आमिर खान से आशुतोष गोवारिकर की फिल्म लगाने के दौरान हुई थी। 'लगान' फिल्म में किरण राव असिस्टेंट डायरेक्टर थीं। यह आमिर खान की दूसरी शादी थी। इससे पहले आमिर खान ने रीना दत्ता से शादी की थी और उनके साथ भी पंद्रह साल बाद उनका तलाक हो गया था। आमिर खान की पहली शादी से उनके एक बेटा और बेटी है।
हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद सिंह हुड्डा ( Image Source : abp live ) Haryana News: हरियाणा में विधानसभा चुनाव 2024 में होगा लेकिन वहां के नेता अभी से चुनावी रेवड़ी बांटने लगे हैं. कहने का मतलब यह है कि विधानसभा चुनाव क लेकर अभी से राजनीति चरम पर है. हरियाणा के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के बाद हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनी तो दो लाख युवाओं को नौकरी देंगे. इतना ही नहीं, हमारी सरकार आम लोगों को रसोई गैस सिलेंडर 500 रुपए में मुहैया कराने का काम करेगी. वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन हर माह 6000 रुपये दिए जाएंगे. इस बात का एलान पूर्व सीएम हुड्डा ने रविवार को रोहतक के ओल्ड आईटीआई ग्राउंड में संत कबीर जयंती पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए किया. पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आगे कहा कि पूर्व में कांग्रेस सरकार ने एससी, पिछड़ा वर्ग और गरीब समाज के बच्चों को शिक्षित करने के लिए प्रत्येक गांव और मोहल्ले में सरकारी स्कूल खोलने का काम किया था. 20 लाख बच्चों के लिए पहली से 12वीं क्लास तक वजीफे की योजना शुरू की थी. हायर एजुकेशन में भी 14 हजार रुपए महीने तक स्कॉलरशिप की व्यवस्था की थी. इसके उलट बीजेपी की सरकार ने गरीबों के भलाई के लिए चलाई गई सभी योजनाओं को बंद कर दिया. सीएम खट्टर की सरकार एजुकेशन का निजीकरण करने पर उतारू है. खट्टर सरकार ने 5000 स्कूल बंद कर दिए. यूनिवर्सिटी शिक्षा की फीस बढ़ा दी. मेडिकल शिक्षा इतनी महंगी कर दी है कि अब गरीब का बच्चे डॉक्टर बनने का सपना भी नहीं देख सकते. उन्होंने कहा कि हरियाणा में कांग्रेस सरकार बनने पर ऐसे व्यवस्था करेंगे जिससे गरीब का बच्चा भी उच्च शिक्षा हासिल कर सके. कांग्रेस के नेता और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि उनकी सरकार के समय गरीब परिवारों को 100-100 गज के मुफ्त प्लॉट की योजना के जरिए 3 लाख 82 हजार परिवारों को मुफ्त प्लॉट दिए गए. बीजेपी सरकार ने एक भी प्लॉट नहीं दिया. कांग्रेस सरकार ने 11 हजार सफाईकर्मियों की भर्ती की थी, जिन्हें इस सरकार ने आज तक पक्का नहीं किया. कांग्रेस की सरकार बनने पर सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती भी होगी और उन्हें पक्का भी करेंगे. हरियाणा के किसान को लागत पर 50% मुनाफा जोड़कर एमएसपी देंगे. वहीं हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष उदयभान ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने पर कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने के साथ हर घर को 300 यूनिट बिजली मुफ्त देंगे.
हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद सिंह हुड्डा Haryana News: हरियाणा में विधानसभा चुनाव दो हज़ार चौबीस में होगा लेकिन वहां के नेता अभी से चुनावी रेवड़ी बांटने लगे हैं. कहने का मतलब यह है कि विधानसभा चुनाव क लेकर अभी से राजनीति चरम पर है. हरियाणा के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के बाद हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनी तो दो लाख युवाओं को नौकरी देंगे. इतना ही नहीं, हमारी सरकार आम लोगों को रसोई गैस सिलेंडर पाँच सौ रुपयापए में मुहैया कराने का काम करेगी. वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन हर माह छः हज़ार रुपयापये दिए जाएंगे. इस बात का एलान पूर्व सीएम हुड्डा ने रविवार को रोहतक के ओल्ड आईटीआई ग्राउंड में संत कबीर जयंती पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए किया. पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आगे कहा कि पूर्व में कांग्रेस सरकार ने एससी, पिछड़ा वर्ग और गरीब समाज के बच्चों को शिक्षित करने के लिए प्रत्येक गांव और मोहल्ले में सरकारी स्कूल खोलने का काम किया था. बीस लाख बच्चों के लिए पहली से बारहवीं क्लास तक वजीफे की योजना शुरू की थी. हायर एजुकेशन में भी चौदह हजार रुपए महीने तक स्कॉलरशिप की व्यवस्था की थी. इसके उलट बीजेपी की सरकार ने गरीबों के भलाई के लिए चलाई गई सभी योजनाओं को बंद कर दिया. सीएम खट्टर की सरकार एजुकेशन का निजीकरण करने पर उतारू है. खट्टर सरकार ने पाँच हज़ार स्कूल बंद कर दिए. यूनिवर्सिटी शिक्षा की फीस बढ़ा दी. मेडिकल शिक्षा इतनी महंगी कर दी है कि अब गरीब का बच्चे डॉक्टर बनने का सपना भी नहीं देख सकते. उन्होंने कहा कि हरियाणा में कांग्रेस सरकार बनने पर ऐसे व्यवस्था करेंगे जिससे गरीब का बच्चा भी उच्च शिक्षा हासिल कर सके. कांग्रेस के नेता और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि उनकी सरकार के समय गरीब परिवारों को एक सौ-एक सौ गज के मुफ्त प्लॉट की योजना के जरिए तीन लाख बयासी हजार परिवारों को मुफ्त प्लॉट दिए गए. बीजेपी सरकार ने एक भी प्लॉट नहीं दिया. कांग्रेस सरकार ने ग्यारह हजार सफाईकर्मियों की भर्ती की थी, जिन्हें इस सरकार ने आज तक पक्का नहीं किया. कांग्रेस की सरकार बनने पर सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती भी होगी और उन्हें पक्का भी करेंगे. हरियाणा के किसान को लागत पर पचास% मुनाफा जोड़कर एमएसपी देंगे. वहीं हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष उदयभान ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने पर कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने के साथ हर घर को तीन सौ यूनिट बिजली मुफ्त देंगे.
उत्तर प्रदेश के देवबंद में इन लड़कों के प्रयास से मस्जिद के किनारे अनार के पेड़ की छाव में मदरसा अरबिया इस्लामिया देवबंद (Deoband) का पहला सबक पढ़ाया गया। उत्तर प्रदेश के देवबंद में इन लड़कों के प्रयास से मस्जिद के किनारे अनार के पेड़ की छाव में मदरसा अरबिया इस्लामिया देवबंद (Deoband) का पहला सबक पढ़ाया गया। वर्ष 1866 में कुछ इस्लामिक स्कॉलर्स ने मुस्लिम लड़कों को शिक्षित करने के बारे में सोचा। इन्हीं लड़कों की अच्छी सोच का नतीजा है मदरसा। एक खास बात यह भी है कि मदरसा खोलने के लिए इन लड़कों ने मुहर्रम का दिन ही चुना था। उत्तर प्रदेश के देवबंद में इन लड़कों के प्रयास से मस्जिद के किनारे अनार के पेड़ की छाव में मदरसा अरबिया इस्लामिया देवबंद (Deoband) का पहला सबक पढ़ाया गया। आगे चलकर यह Deoband इस्लामिक शिक्षा और सुन्नी सुधारवादी आंदोलन का गढ़ बना। यह सच है कि देवबंद ने तब से लेकर आज तक कई तरह के उतार-चढ़ाव देखे हैं। आज देवबंद में करीब सौ से ज्यादा छोटे-बड़े मदरसे हैं। लेकिन यह दुर्भाग्य की ही बात है कि आजादी के बाद से अब तक देवबंद कई बार विवादों में भी रहा। बच्चों के जिस तालीम को लेकर देवबंद का निर्माण किया गया था अफसोस है कि कई बार देवबंद के अंदर दी जाने वाली शिक्षा को लेकर ही विवाद हुआ। पिछले आठ साल में 10 से ज्यादा आतंकी ऐसे पकड़े गए, जिन्होंने Deoband से तालीम पाई है। इसी वजह से एटीएस-एनआईए समेत तमाम शीर्ष सुरक्षा-खुफिया एजेंसियों की नजरें हर वक्त देवबंद पर गड़ी रहती हैं। यूपी एटीएस ने तीन मार्च-2019 को देवबंद से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली और आकिब अहमद मलिक को गिरफ्तार किया था। दोनों को पुलवामा में सीआरपीएफ दस्ते पर हुए हमले की पहले से जानकारी थी। इससे पहले दिसंबर-2018 में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) ने अमरोहा में आईएस के नए मॉड्यूल हरकत उल हर्ब-ए-इस्लाम का पर्दाफाश करते हुए 13 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ज्यादातर संदिग्ध आतंकियों ने देवबंद में रहकर शिक्षा ग्रहण की थी। कई साल पहले दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़े गए इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी एजाज शेख ने खुलासा किया था कि देवबंद में उसके तीन आतंकवादी साथी छात्र के रूप में रह रहे हैं। आईबी (IB) के इनपुट के अनुसार आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन और इंडियन मुजाहिदीन की वेस्ट यूपी में गहरी पैठ बनी हुई है। इनके कई स्लीपिंग मॉड्यूल मेरठ, देवबंद, शामली, गाजियाबाद, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, संभल और रामपुर में सक्रिय हैं। देवबन्द भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के सहारनपुर ज़िले में स्थित एक नगर है। यह दिल्ली से लगभग 150 किमी दूर है और सहारनपुर और मुज़फ़्फ़रनगर के बीच स्थित है। सहारनपुर से यह 52 किमी और मुज़फ़्फ़रनगर से 24 किमी दूर है। देवबंद एक प्रागैतिकहासिक नगर है, जिसकी कहानी मानव सभ्यता के अतीत से शुरु होती है। सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद यहां मदरसा दारुल उलूम देवबंद की स्थापना हुई जो प्रसिद्ध है। विभाजन के बाद पंजाबी समुदाय और सिक्ख समुदाय के लोग भी देवबंद में आकर बस गए। पंजाबी समुदाय की तादाद कम है और सिक्खों की तादाद तो बस गिनती की ही है। रेलवे रोड पर एक गुरूद्वारा भी है। देवबंद में दारूल उलूम मदरसा है। ऐसा माना जाता है कि मिस्र के इस्लामी मदरसे अल अज़हर के बाद ये दूसरा सबसे अहम इस्लामी शिक्षण संस्थान है।
उत्तर प्रदेश के देवबंद में इन लड़कों के प्रयास से मस्जिद के किनारे अनार के पेड़ की छाव में मदरसा अरबिया इस्लामिया देवबंद का पहला सबक पढ़ाया गया। उत्तर प्रदेश के देवबंद में इन लड़कों के प्रयास से मस्जिद के किनारे अनार के पेड़ की छाव में मदरसा अरबिया इस्लामिया देवबंद का पहला सबक पढ़ाया गया। वर्ष एक हज़ार आठ सौ छयासठ में कुछ इस्लामिक स्कॉलर्स ने मुस्लिम लड़कों को शिक्षित करने के बारे में सोचा। इन्हीं लड़कों की अच्छी सोच का नतीजा है मदरसा। एक खास बात यह भी है कि मदरसा खोलने के लिए इन लड़कों ने मुहर्रम का दिन ही चुना था। उत्तर प्रदेश के देवबंद में इन लड़कों के प्रयास से मस्जिद के किनारे अनार के पेड़ की छाव में मदरसा अरबिया इस्लामिया देवबंद का पहला सबक पढ़ाया गया। आगे चलकर यह Deoband इस्लामिक शिक्षा और सुन्नी सुधारवादी आंदोलन का गढ़ बना। यह सच है कि देवबंद ने तब से लेकर आज तक कई तरह के उतार-चढ़ाव देखे हैं। आज देवबंद में करीब सौ से ज्यादा छोटे-बड़े मदरसे हैं। लेकिन यह दुर्भाग्य की ही बात है कि आजादी के बाद से अब तक देवबंद कई बार विवादों में भी रहा। बच्चों के जिस तालीम को लेकर देवबंद का निर्माण किया गया था अफसोस है कि कई बार देवबंद के अंदर दी जाने वाली शिक्षा को लेकर ही विवाद हुआ। पिछले आठ साल में दस से ज्यादा आतंकी ऐसे पकड़े गए, जिन्होंने Deoband से तालीम पाई है। इसी वजह से एटीएस-एनआईए समेत तमाम शीर्ष सुरक्षा-खुफिया एजेंसियों की नजरें हर वक्त देवबंद पर गड़ी रहती हैं। यूपी एटीएस ने तीन मार्च-दो हज़ार उन्नीस को देवबंद से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली और आकिब अहमद मलिक को गिरफ्तार किया था। दोनों को पुलवामा में सीआरपीएफ दस्ते पर हुए हमले की पहले से जानकारी थी। इससे पहले दिसंबर-दो हज़ार अट्ठारह में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने अमरोहा में आईएस के नए मॉड्यूल हरकत उल हर्ब-ए-इस्लाम का पर्दाफाश करते हुए तेरह संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ज्यादातर संदिग्ध आतंकियों ने देवबंद में रहकर शिक्षा ग्रहण की थी। कई साल पहले दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़े गए इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी एजाज शेख ने खुलासा किया था कि देवबंद में उसके तीन आतंकवादी साथी छात्र के रूप में रह रहे हैं। आईबी के इनपुट के अनुसार आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन और इंडियन मुजाहिदीन की वेस्ट यूपी में गहरी पैठ बनी हुई है। इनके कई स्लीपिंग मॉड्यूल मेरठ, देवबंद, शामली, गाजियाबाद, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, संभल और रामपुर में सक्रिय हैं। देवबन्द भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के सहारनपुर ज़िले में स्थित एक नगर है। यह दिल्ली से लगभग एक सौ पचास किमी दूर है और सहारनपुर और मुज़फ़्फ़रनगर के बीच स्थित है। सहारनपुर से यह बावन किमी और मुज़फ़्फ़रनगर से चौबीस किमी दूर है। देवबंद एक प्रागैतिकहासिक नगर है, जिसकी कहानी मानव सभ्यता के अतीत से शुरु होती है। सन् एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद यहां मदरसा दारुल उलूम देवबंद की स्थापना हुई जो प्रसिद्ध है। विभाजन के बाद पंजाबी समुदाय और सिक्ख समुदाय के लोग भी देवबंद में आकर बस गए। पंजाबी समुदाय की तादाद कम है और सिक्खों की तादाद तो बस गिनती की ही है। रेलवे रोड पर एक गुरूद्वारा भी है। देवबंद में दारूल उलूम मदरसा है। ऐसा माना जाता है कि मिस्र के इस्लामी मदरसे अल अज़हर के बाद ये दूसरा सबसे अहम इस्लामी शिक्षण संस्थान है।
शब्द "रचना" लैटिन से आता है"कंपोजिटिओ", जिसका मतलब है बांधना या रचना करना सीधे शब्दों में कहें, एक रचना एक ऐसा चित्र बनाने का एक तरीका है जो दर्शक की अपनी धारणा को निर्धारित करता है। ललित कला के किसी भी काम में एक निश्चित संरचना होती है, जो इसके साजिश के अनुरूप होती है। दृश्य कला में रचना हैवैचारिक सिद्धांत के सभी फोकस के पहले कोई ड्राइंग, चाहे वह अभी भी जीवन या चित्र और परिदृश्य है, मॉडल की "फ़ोटो" कॉपी नहीं है विभिन्न विवरणों का चयन करना और उन्हें कैनवास पर कैसे तय करना है, कलाकार कलाकारों को सबसे पहले अपने चुने हुए, चुने हुए साजिश के लिए व्यक्तिगत दृष्टिकोण, अपनी समझ को दर्शाता है। वास्तविक बनाने के लिए, "लाइव"पेंटिंग, विज़ुअल आर्ट्स में एक संरचना का विशुद्ध रूप से तकनीकी है, कलाकार को भी एक गर्म दिल, मन होना चाहिए और स्वतंत्र रूप से और गहराई से सोचने में सक्षम होना चाहिए। सीधे शब्दों में कहें, तस्वीर की विचारधारा उसके विषय में ज्यादा नहीं है, जैसा कि कलाकार को उसके संबंध में और आम तौर पर सभी जीवन में भी। विचारधारा, विश्लेषण और अंतर्ज्ञान मौलिक हैंसिद्धांत जिसके द्वारा संरचना ललित कलाओं में अलग होती है। हालांकि, लगभग अपने पहले कानूनों को अंतिम उत्पाद की अखंडता माना जा सकता है। सभी तत्व एक विशिष्ट संबंध में होने चाहिए। न तो रंग और न ही फार्म एक-दूसरे से अलग-अलग हो सकते हैं। एक गंभीर तस्वीर केवल मकसद के उपकरण के सिद्धांत की खोज करके लिखी जा सकती है, इसकी "रचना योजना", प्रकृति द्वारा बनाई गई निर्माण की सद्भावना।
शब्द "रचना" लैटिन से आता है"कंपोजिटिओ", जिसका मतलब है बांधना या रचना करना सीधे शब्दों में कहें, एक रचना एक ऐसा चित्र बनाने का एक तरीका है जो दर्शक की अपनी धारणा को निर्धारित करता है। ललित कला के किसी भी काम में एक निश्चित संरचना होती है, जो इसके साजिश के अनुरूप होती है। दृश्य कला में रचना हैवैचारिक सिद्धांत के सभी फोकस के पहले कोई ड्राइंग, चाहे वह अभी भी जीवन या चित्र और परिदृश्य है, मॉडल की "फ़ोटो" कॉपी नहीं है विभिन्न विवरणों का चयन करना और उन्हें कैनवास पर कैसे तय करना है, कलाकार कलाकारों को सबसे पहले अपने चुने हुए, चुने हुए साजिश के लिए व्यक्तिगत दृष्टिकोण, अपनी समझ को दर्शाता है। वास्तविक बनाने के लिए, "लाइव"पेंटिंग, विज़ुअल आर्ट्स में एक संरचना का विशुद्ध रूप से तकनीकी है, कलाकार को भी एक गर्म दिल, मन होना चाहिए और स्वतंत्र रूप से और गहराई से सोचने में सक्षम होना चाहिए। सीधे शब्दों में कहें, तस्वीर की विचारधारा उसके विषय में ज्यादा नहीं है, जैसा कि कलाकार को उसके संबंध में और आम तौर पर सभी जीवन में भी। विचारधारा, विश्लेषण और अंतर्ज्ञान मौलिक हैंसिद्धांत जिसके द्वारा संरचना ललित कलाओं में अलग होती है। हालांकि, लगभग अपने पहले कानूनों को अंतिम उत्पाद की अखंडता माना जा सकता है। सभी तत्व एक विशिष्ट संबंध में होने चाहिए। न तो रंग और न ही फार्म एक-दूसरे से अलग-अलग हो सकते हैं। एक गंभीर तस्वीर केवल मकसद के उपकरण के सिद्धांत की खोज करके लिखी जा सकती है, इसकी "रचना योजना", प्रकृति द्वारा बनाई गई निर्माण की सद्भावना।
बेलगोरोद के ऊपर आकाश में वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा एक अज्ञात वस्तु को मार गिराया गया। क्षेत्र की परिचालन सेवाएं वर्तमान में जमीन पर परिणामों के बारे में जानकारी स्पष्ट कर रही हैं। टेलीग्राम चैनल मैश के अनुसार, वायु रक्षा बलों ने एक अज्ञात उड़ने वाली वस्तु पर काम किया जो बेलगोरोद के ऊपर हवाई क्षेत्र में थी। क्षेत्र के गवर्नर व्याचेस्लाव ग्लैडकोव ने वायु रक्षा के काम की पुष्टि की, हालांकि, उनके अनुसार, गिराए गए वस्तु के बारे में जानकारी अभी भी निर्दिष्ट की जा रही है। अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार, वस्तु बेलगॉरॉड-एरेना स्टेडियम के पास गिरी, जहां लगभग 1300 शरणार्थी स्थित हैं। इससे पहले बेलगॉरॉड के क्षेत्र में एक विस्फोट की सूचना मिली थी, जहां एक मानव रहित हवाई वाहन में विस्फोट हुआ और वह पृथ्वी की सतह से कुछ ही दूरी पर गिर गया। इस घटना के परिणामस्वरूप, दो लोग घायल हो गए, जिनमें से एक को संदिग्ध आघात के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया, और दूसरे ने चिकित्सा सहायता से इनकार कर दिया। कीव शासन के उग्रवादियों ने बेलगॉरॉड क्षेत्र की सीमावर्ती बस्तियों पर गोलाबारी बंद नहीं की। शेबेकिनो शहर में दिन के दौरान, गोले ने दो आवासीय भवनों में आग लगा दी। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। गोलाबारी के परिणामस्वरूप नोवाया तवोलझांका की बस्ती में 7 निजी घर, 2 बाहरी इमारतें और एक कार क्षतिग्रस्त हो गई। वायज़ोवो, क्रास्नोयारुज़्स्की जिले, बेलगोरोद जिले के गाँव में, शेल के टुकड़ों से कृषि मशीनरी क्षतिग्रस्त हो गई थी। वोल्कोनोव्स्की जिले के तिशंका गाँव में एक बिजली लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी।
बेलगोरोद के ऊपर आकाश में वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा एक अज्ञात वस्तु को मार गिराया गया। क्षेत्र की परिचालन सेवाएं वर्तमान में जमीन पर परिणामों के बारे में जानकारी स्पष्ट कर रही हैं। टेलीग्राम चैनल मैश के अनुसार, वायु रक्षा बलों ने एक अज्ञात उड़ने वाली वस्तु पर काम किया जो बेलगोरोद के ऊपर हवाई क्षेत्र में थी। क्षेत्र के गवर्नर व्याचेस्लाव ग्लैडकोव ने वायु रक्षा के काम की पुष्टि की, हालांकि, उनके अनुसार, गिराए गए वस्तु के बारे में जानकारी अभी भी निर्दिष्ट की जा रही है। अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार, वस्तु बेलगॉरॉड-एरेना स्टेडियम के पास गिरी, जहां लगभग एक हज़ार तीन सौ शरणार्थी स्थित हैं। इससे पहले बेलगॉरॉड के क्षेत्र में एक विस्फोट की सूचना मिली थी, जहां एक मानव रहित हवाई वाहन में विस्फोट हुआ और वह पृथ्वी की सतह से कुछ ही दूरी पर गिर गया। इस घटना के परिणामस्वरूप, दो लोग घायल हो गए, जिनमें से एक को संदिग्ध आघात के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया, और दूसरे ने चिकित्सा सहायता से इनकार कर दिया। कीव शासन के उग्रवादियों ने बेलगॉरॉड क्षेत्र की सीमावर्ती बस्तियों पर गोलाबारी बंद नहीं की। शेबेकिनो शहर में दिन के दौरान, गोले ने दो आवासीय भवनों में आग लगा दी। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। गोलाबारी के परिणामस्वरूप नोवाया तवोलझांका की बस्ती में सात निजी घर, दो बाहरी इमारतें और एक कार क्षतिग्रस्त हो गई। वायज़ोवो, क्रास्नोयारुज़्स्की जिले, बेलगोरोद जिले के गाँव में, शेल के टुकड़ों से कृषि मशीनरी क्षतिग्रस्त हो गई थी। वोल्कोनोव्स्की जिले के तिशंका गाँव में एक बिजली लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी।
दो दोस्त आपस में बात कर रहे थे तभी एक दोस्तः यार जब मैं बाहर से घर जाता हूं तो मेरी बीवी किस करने से नहीं चुकती। दूसरा दोस्तः इस धोके में मत रहना की वह तुम्हे बेहद प्यार करती है। वह परफ्यूम या लिपस्टिक की स्मैल चेक करती है। एक सरदारजी टैक्सी में घर से हवाई अड्डे के लिए निकले। जाते जाते रास्ते में ही ड्राइवर ने टैक्सी रोक दी। सरदारजीः क्या हुआ? ड्रायवरः साहब हम अब आगे नही जा सकते . . . क्योंकी पेट्रोल खत्म हो गया है। सरदारजीः कोई बात नहीं घर वापस चलो। एक सरदारजी उंचे पहाड़ पर बैठकर पढाई कर रहे थे। किसी ने उनसे पूछा. . क्या कर रहे हो? सरदारजी ने तुरंत जवाब दिया हायर स्टडीज़। Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए . पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.
दो दोस्त आपस में बात कर रहे थे तभी एक दोस्तः यार जब मैं बाहर से घर जाता हूं तो मेरी बीवी किस करने से नहीं चुकती। दूसरा दोस्तः इस धोके में मत रहना की वह तुम्हे बेहद प्यार करती है। वह परफ्यूम या लिपस्टिक की स्मैल चेक करती है। एक सरदारजी टैक्सी में घर से हवाई अड्डे के लिए निकले। जाते जाते रास्ते में ही ड्राइवर ने टैक्सी रोक दी। सरदारजीः क्या हुआ? ड्रायवरः साहब हम अब आगे नही जा सकते . . . क्योंकी पेट्रोल खत्म हो गया है। सरदारजीः कोई बात नहीं घर वापस चलो। एक सरदारजी उंचे पहाड़ पर बैठकर पढाई कर रहे थे। किसी ने उनसे पूछा. . क्या कर रहे हो? सरदारजी ने तुरंत जवाब दिया हायर स्टडीज़। Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए . पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.
अपने आज तक इतने गजब के करतब नहीं देखे होंगे। इन्हें देखकर आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे। देखिए तस्वीरों में करतब। ये गजब के करतब सिख कौम के राष्ट्रीय पर्व होला मोहल्ला के समापन अवसर पर दिखाए गए। इस दौरान निहंग सिंहों ने जंगजू खेलों का प्रदर्शन किया गया। होला मोहल्ला के मौके पर आनंदपुर साहिब में लाखों की संख्या में संगत श्री आनंदपुर साहिब में तख्त श्री केसगढ़ साहिब और अन्य धार्मिक स्थानों पर नतमस्तक हुई। अंतिम दिन एसजीपीसी की ओर से विशाल नगर कीर्तन निकाला गया। इस दौरान निहंग सिंह गुलाल उड़ाते हुए और गुरु गोबिंद सिंह के जयकारे लगाते हुए श्री आनंदपुर साहिब के बाजारों से होते हुए चरन गंगा स्टेडियम में पहुंचे। नगर कीर्तन तख्त श्री केसगढ़ साहिब से शुरू होकर किला आनंदगढ़ साहिब से होता हुआ नई आबादी, कलगीधर मार्केट, मेन रोड से होता हुआ गुरुद्वारा किला होलगढ़ साहिब और माता जीतो में पहुंच कर संपन्न हुआ।
अपने आज तक इतने गजब के करतब नहीं देखे होंगे। इन्हें देखकर आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे। देखिए तस्वीरों में करतब। ये गजब के करतब सिख कौम के राष्ट्रीय पर्व होला मोहल्ला के समापन अवसर पर दिखाए गए। इस दौरान निहंग सिंहों ने जंगजू खेलों का प्रदर्शन किया गया। होला मोहल्ला के मौके पर आनंदपुर साहिब में लाखों की संख्या में संगत श्री आनंदपुर साहिब में तख्त श्री केसगढ़ साहिब और अन्य धार्मिक स्थानों पर नतमस्तक हुई। अंतिम दिन एसजीपीसी की ओर से विशाल नगर कीर्तन निकाला गया। इस दौरान निहंग सिंह गुलाल उड़ाते हुए और गुरु गोबिंद सिंह के जयकारे लगाते हुए श्री आनंदपुर साहिब के बाजारों से होते हुए चरन गंगा स्टेडियम में पहुंचे। नगर कीर्तन तख्त श्री केसगढ़ साहिब से शुरू होकर किला आनंदगढ़ साहिब से होता हुआ नई आबादी, कलगीधर मार्केट, मेन रोड से होता हुआ गुरुद्वारा किला होलगढ़ साहिब और माता जीतो में पहुंच कर संपन्न हुआ।
कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) और कियारा आडवाणी (Kiara Advani), फिल्म सत्यप्रेम की कथा (Satyaprem Ki Katha) के प्रमोशन में बिजी हैं। इसके एक इवेंट में लेट पहुंचे कार्तिक ने कैसे ऑडियंस का दिल जीता? बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) और एक्ट्रेस कियारा आडवाणी (Kiara Advani) इन दिनों अपकमिंग फिल्म सत्यप्रेम की कथा (Satyaprem Ki Katha) को लेकर चर्चा में हैं। कार्तिक और कियारा फिल्म का जोर शोर से प्रमोशन कर रहे हैं और फैन्स से रूबरू हो रहे हैं। बीते दिन मुंबई में फिल्म का म्यूजिक इवेंट रखा गया, जहां कार्तिक आर्यन करीब 3 घंटे लेट पहुंचे। कार्तिक के लेट होने की वजह से फैन्स थोड़ा नाराज और परेशान से दिखने लगे, लेकिन एक्टर ने इवेंट में आते ही सबके सामने स्टेज पर कुछ ऐसा काम कर दिया कि फैन्स उन पर दोगुना प्यार लुटाने लगे। बीती शाम, सत्यप्रेम की कथा का म्यूजिक इवेंट, नई मुंबई के नेरुल स्थित एक मॉल में रखा गया। नई मुंबई, मुंबई से करीब 30-40 किमी की दूरी (मुंबई में कहां से ट्रेवल कर रहे हैं, उस पर भी ये दूरी निर्भर करती है) पर है। ऐसे में बीती शाम को बारिश के साथ ही साथ भारी ट्रैफिक की वजह से कार्तिक को इवेंट में आने में करीब 3 घंटे देरी हुई। हालांकि इस दौरान कियारा के साथ ही साथ मीत ब्रदर्स, मनन भारद्वाज आदि ने लाइव परफॉर्मेंस से दर्शकों को बांधे रखा और खूब एंटरटेनमेंट किया। हालांकि कार्तिक के फैन्स करीब 3 घंटे तक एक्टर का इंतजार करते रहें। करीब 3 घंटे की देरी के बाद जब कार्तिक स्टेज पर पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले स्टेज से ही कान पकड़कर सभी फैन्स से सॉरी कहा और बताया कि वो ट्रैफिक और बारिश की वजह से लेट हो गए। कार्तिक ने कहा कि वो करीब 3 घंटे तक ट्रैफिक से जूझते रहे। इसके बाद कार्तिक ने सभी फैन्स को दिल से शुक्रिया कहा और फिर धमाकेदार परफॉर्मेंसेस दी। इस खास मौके पर कार्तिक-कियारा कुछ फैन्स से स्टेज पर ही रूबरू भी हुए। वहीं कार्तिक ने नई मुंबई से भी उनका कनेक्शन बताया। ये सब देख फैन्स का एक्टर के लिए प्यार दोगुना हो गया और फैन्स 'लव यू लव यू' चिल्लाने लगे। गौरतलब है कि सत्यप्रेम की कथा, 30 जून को रिलीज हो रही है।
कार्तिक आर्यन और कियारा आडवाणी , फिल्म सत्यप्रेम की कथा के प्रमोशन में बिजी हैं। इसके एक इवेंट में लेट पहुंचे कार्तिक ने कैसे ऑडियंस का दिल जीता? बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन और एक्ट्रेस कियारा आडवाणी इन दिनों अपकमिंग फिल्म सत्यप्रेम की कथा को लेकर चर्चा में हैं। कार्तिक और कियारा फिल्म का जोर शोर से प्रमोशन कर रहे हैं और फैन्स से रूबरू हो रहे हैं। बीते दिन मुंबई में फिल्म का म्यूजिक इवेंट रखा गया, जहां कार्तिक आर्यन करीब तीन घंटाटे लेट पहुंचे। कार्तिक के लेट होने की वजह से फैन्स थोड़ा नाराज और परेशान से दिखने लगे, लेकिन एक्टर ने इवेंट में आते ही सबके सामने स्टेज पर कुछ ऐसा काम कर दिया कि फैन्स उन पर दोगुना प्यार लुटाने लगे। बीती शाम, सत्यप्रेम की कथा का म्यूजिक इवेंट, नई मुंबई के नेरुल स्थित एक मॉल में रखा गया। नई मुंबई, मुंबई से करीब तीस-चालीस किमी की दूरी पर है। ऐसे में बीती शाम को बारिश के साथ ही साथ भारी ट्रैफिक की वजह से कार्तिक को इवेंट में आने में करीब तीन घंटाटे देरी हुई। हालांकि इस दौरान कियारा के साथ ही साथ मीत ब्रदर्स, मनन भारद्वाज आदि ने लाइव परफॉर्मेंस से दर्शकों को बांधे रखा और खूब एंटरटेनमेंट किया। हालांकि कार्तिक के फैन्स करीब तीन घंटाटे तक एक्टर का इंतजार करते रहें। करीब तीन घंटाटे की देरी के बाद जब कार्तिक स्टेज पर पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले स्टेज से ही कान पकड़कर सभी फैन्स से सॉरी कहा और बताया कि वो ट्रैफिक और बारिश की वजह से लेट हो गए। कार्तिक ने कहा कि वो करीब तीन घंटाटे तक ट्रैफिक से जूझते रहे। इसके बाद कार्तिक ने सभी फैन्स को दिल से शुक्रिया कहा और फिर धमाकेदार परफॉर्मेंसेस दी। इस खास मौके पर कार्तिक-कियारा कुछ फैन्स से स्टेज पर ही रूबरू भी हुए। वहीं कार्तिक ने नई मुंबई से भी उनका कनेक्शन बताया। ये सब देख फैन्स का एक्टर के लिए प्यार दोगुना हो गया और फैन्स 'लव यू लव यू' चिल्लाने लगे। गौरतलब है कि सत्यप्रेम की कथा, तीस जून को रिलीज हो रही है।
मुंबईःभले ही अभिनेता प्रभास और कृति सेनन की आदिपुरुष की आलोचना हो रही हो, लेकिन फिल्म ने पहले दिन शुक्रवार को बॉक्स ऑफिस पर 37.25 करोड़ रुपये की कमाई की। ओम राउत द्वारा निर्देशित यह फिल्म महाकाव्य रामायण पर आधारित एक पौराणिक एक्शन फिल्म है। हिंदी और तेलुगु में एक साथ फिल्माई गई इस फिल्म में प्रभास, सैफ अली खान, कृति सेनन, सनी सिंह और देवदत्त नाग ने अभिनय किया है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्विटर पर फिल्म के कलेक्शन के बारे में बताया। ट्वीट में उन्होंने लिखा, प्रचार के कारण एक बड़ी शुरुआत निश्चित थी और अग्रिम बुकिंग इस तथ्य की ओर इशारा कर रही थी.. जैसा कि अपेक्षित था, आदिपुरुष ने पहले दिन की शानदार शुरुआत की है.. शुक्रवार 37.25 करोड़ रुपये। इंडिया बिजनेस। नेट बीओसी। नोटः हिंदी वर्जन। बॉक्सऑफिस। उन्होंने कहा, आदिपुरुष नेशनल चेन्स में.. पहले दिन.. पीवीआरः 6.75 करोड़, आईनॉक्सः 5.60 करोड़, सिनेपोलिसः 3.10 करोड़। कुलः 15.45 करोड़। कलेक्शंस के बावजूद 16 जून को रिलीज हुई यह फिल्म अपने डायलॉग्स की वजह से सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हो रही है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे टपोरी और छपरी बताया है जो रामायण की प्रकृति या कद से मेल नहीं खाता। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मुंबईःभले ही अभिनेता प्रभास और कृति सेनन की आदिपुरुष की आलोचना हो रही हो, लेकिन फिल्म ने पहले दिन शुक्रवार को बॉक्स ऑफिस पर सैंतीस.पच्चीस करोड़ रुपये की कमाई की। ओम राउत द्वारा निर्देशित यह फिल्म महाकाव्य रामायण पर आधारित एक पौराणिक एक्शन फिल्म है। हिंदी और तेलुगु में एक साथ फिल्माई गई इस फिल्म में प्रभास, सैफ अली खान, कृति सेनन, सनी सिंह और देवदत्त नाग ने अभिनय किया है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्विटर पर फिल्म के कलेक्शन के बारे में बताया। ट्वीट में उन्होंने लिखा, प्रचार के कारण एक बड़ी शुरुआत निश्चित थी और अग्रिम बुकिंग इस तथ्य की ओर इशारा कर रही थी.. जैसा कि अपेक्षित था, आदिपुरुष ने पहले दिन की शानदार शुरुआत की है.. शुक्रवार सैंतीस.पच्चीस करोड़ रुपये। इंडिया बिजनेस। नेट बीओसी। नोटः हिंदी वर्जन। बॉक्सऑफिस। उन्होंने कहा, आदिपुरुष नेशनल चेन्स में.. पहले दिन.. पीवीआरः छः.पचहत्तर करोड़, आईनॉक्सः पाँच.साठ करोड़, सिनेपोलिसः तीन.दस करोड़। कुलः पंद्रह.पैंतालीस करोड़। कलेक्शंस के बावजूद सोलह जून को रिलीज हुई यह फिल्म अपने डायलॉग्स की वजह से सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हो रही है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे टपोरी और छपरी बताया है जो रामायण की प्रकृति या कद से मेल नहीं खाता। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
जनतंत्र डेस्क, नई दिल्लीः Cricket: भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट और वनडे सीरीज खेलने साउथ अफ्रीका पहुंच गई है। BCCI ने टीम इंडिया के दिल्ली से जोहान्सबर्ग तक के सफर का मजेदार वीडियो शेयर किया है। वीडियो में देखा जा सकता है टीम इंडिया के खिलाड़ी किस तरह मस्ती कर रहे हैं। वीडियों में ये भी देखा जा सकता है साउथ अफ्रीका में भारतीय क्रिकेटर्स का खास तरिके से स्वागत किया जा रहा है। बीसीसीआई की ओर से शेयर किए गए वीडियो में देख सकते हैं कप्तान विराट कोहली सीनियर पेसर ईशांत शर्मा के साथ मस्ती कर रहे हैं। इस दौरान ईशांत शर्मा अपने बैग में कुछ ढूंढते हैं तो विराट उनके बैग में झांकने लगते हैं। जिस पर ईशांत कहते हैं सुबह-सुबह ये मत कर ना यार। वीडियो में कोच राहुल द्रविड़ बल्लेबाज श्रेयस अय्यर के साथ बैठकर हंस रहे हैं। इनके अलावा चेतेश्वर पुजारा और अंजिक्य रहाणे भी काफी खुश नजर आ रहे हैं। भारतीय टीम के अफ्रीका पहुंचने पर सभी क्रिकेटर्स का उनका अनोखे तरीके से स्वागत किया जा रहा है। भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत और अनुष्का शर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो शेयर किया, जो एक झील के किनारे का है। ये झील टीम इंडिया के होटल के पास है। पहला टेस्टः 26 से 30 दिसंबर, 2021 (सेंचूरियन) दूसरा टेस्टः 3 से 7 जनवरी, 2022 (जोहान्सबर्ग ) तीसरा टेस्टः 11 से 15 जनवरी, 2022 (केप टाउन) पहला वनडेः 19 जनवरी, 2022 (पार्ल) दूसरा वनडेः 21 जनवरी, 2022 (पार्ल) तीसरा वनडेः 23 जनवरी, 2022 (केप टाउन)
जनतंत्र डेस्क, नई दिल्लीः Cricket: भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट और वनडे सीरीज खेलने साउथ अफ्रीका पहुंच गई है। BCCI ने टीम इंडिया के दिल्ली से जोहान्सबर्ग तक के सफर का मजेदार वीडियो शेयर किया है। वीडियो में देखा जा सकता है टीम इंडिया के खिलाड़ी किस तरह मस्ती कर रहे हैं। वीडियों में ये भी देखा जा सकता है साउथ अफ्रीका में भारतीय क्रिकेटर्स का खास तरिके से स्वागत किया जा रहा है। बीसीसीआई की ओर से शेयर किए गए वीडियो में देख सकते हैं कप्तान विराट कोहली सीनियर पेसर ईशांत शर्मा के साथ मस्ती कर रहे हैं। इस दौरान ईशांत शर्मा अपने बैग में कुछ ढूंढते हैं तो विराट उनके बैग में झांकने लगते हैं। जिस पर ईशांत कहते हैं सुबह-सुबह ये मत कर ना यार। वीडियो में कोच राहुल द्रविड़ बल्लेबाज श्रेयस अय्यर के साथ बैठकर हंस रहे हैं। इनके अलावा चेतेश्वर पुजारा और अंजिक्य रहाणे भी काफी खुश नजर आ रहे हैं। भारतीय टीम के अफ्रीका पहुंचने पर सभी क्रिकेटर्स का उनका अनोखे तरीके से स्वागत किया जा रहा है। भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत और अनुष्का शर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो शेयर किया, जो एक झील के किनारे का है। ये झील टीम इंडिया के होटल के पास है। पहला टेस्टः छब्बीस से तीस दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस दूसरा टेस्टः तीन से सात जनवरी, दो हज़ार बाईस तीसरा टेस्टः ग्यारह से पंद्रह जनवरी, दो हज़ार बाईस पहला वनडेः उन्नीस जनवरी, दो हज़ार बाईस दूसरा वनडेः इक्कीस जनवरी, दो हज़ार बाईस तीसरा वनडेः तेईस जनवरी, दो हज़ार बाईस
छत्तीसगढ़ शासन ने जल संसाधन विभाग के 13 इंजीनियरों का ट्रांसफर किया है। इनमें से कुछ के प्रभार में परिवर्तन करके दूसरे जिलों में भेजा गया है तो कुछ अफसरों की जिम्मेदारी बदलकर मूल जिले में ही पोस्टिंग दी गई है। इस आदेश में अधीक्षण अभियंता आर. के इंदवार को रायगढ़ से प्रभारी मुख्य अभियंता बनाकर अंबिकापुर भेजा गया है। वहीं रायपुर में पोस्टेड एच आर यादव,अनुविभागीय अधिकारी को प्रभारी कार्यपालन अभियंता बनाकर महासमुंद भेजा गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
छत्तीसगढ़ शासन ने जल संसाधन विभाग के तेरह इंजीनियरों का ट्रांसफर किया है। इनमें से कुछ के प्रभार में परिवर्तन करके दूसरे जिलों में भेजा गया है तो कुछ अफसरों की जिम्मेदारी बदलकर मूल जिले में ही पोस्टिंग दी गई है। इस आदेश में अधीक्षण अभियंता आर. के इंदवार को रायगढ़ से प्रभारी मुख्य अभियंता बनाकर अंबिकापुर भेजा गया है। वहीं रायपुर में पोस्टेड एच आर यादव,अनुविभागीय अधिकारी को प्रभारी कार्यपालन अभियंता बनाकर महासमुंद भेजा गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने पिछले दिनों जोड़े की याचिका को ठुकरा दिया था. इसमें पुलिस और महिला के पिता को उनकी शादी में बाधा नहीं डालने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था. अदालत ने कहा कि महज शादी के लिए धर्मांतरण (Conversion) मान्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें सिर्फ शादी के लिए धर्मांतरण (Conversion) करने को अमान्य ठहराया दिया गया है. इससे संबंधित एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि अगर अदालत एक व्यक्ति को खुले तौर पर अपना धर्म चुनने की आजादी नहीं देती है, तो यह संविधान के तहत उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. मालूम हो कि ये याचिका एक मामले से संबंधित थे. इस मामले में एक मुस्लिम महिला ने हिंदू धर्म अपनाकर हिंदू युवक से शादी की थी. याचिका में इस जोड़े को तुरंत पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया. इस मामले में पहले डाली गई एक याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था. वकील अल्दनीश रेन ने विवाहित जोड़े को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के इनकार के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. मालूम हो कि हाईकोर्ट ने पिछले दिनों जोड़े की याचिका को ठुकरा दिया था. इसमें पुलिस और महिला के पिता को उनकी शादी में बाधा नहीं डालने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था. अदालत ने कहा कि महज शादी के लिए धर्मांतरण मान्य नहीं है. याचिका में कहा गया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में विशेष विवाह कानून 1954 के प्रावधानों को चुनौती देने वाले लंबित सभी मामलों को इस न्यायालय में स्थानांतरित किया जाना चाहिए. इस पर सुनवाई होनी चाहिए ताकि समूचे देश में कानून में एकरूपता लाई जाए. कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इसमें उचित संशोधन की सिफारिश को लेकर विकल्प के तौर पर एक कमेटी का गठन होना चाहिए.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले दिनों जोड़े की याचिका को ठुकरा दिया था. इसमें पुलिस और महिला के पिता को उनकी शादी में बाधा नहीं डालने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था. अदालत ने कहा कि महज शादी के लिए धर्मांतरण मान्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें सिर्फ शादी के लिए धर्मांतरण करने को अमान्य ठहराया दिया गया है. इससे संबंधित एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि अगर अदालत एक व्यक्ति को खुले तौर पर अपना धर्म चुनने की आजादी नहीं देती है, तो यह संविधान के तहत उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. मालूम हो कि ये याचिका एक मामले से संबंधित थे. इस मामले में एक मुस्लिम महिला ने हिंदू धर्म अपनाकर हिंदू युवक से शादी की थी. याचिका में इस जोड़े को तुरंत पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया. इस मामले में पहले डाली गई एक याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था. वकील अल्दनीश रेन ने विवाहित जोड़े को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के इनकार के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. मालूम हो कि हाईकोर्ट ने पिछले दिनों जोड़े की याचिका को ठुकरा दिया था. इसमें पुलिस और महिला के पिता को उनकी शादी में बाधा नहीं डालने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था. अदालत ने कहा कि महज शादी के लिए धर्मांतरण मान्य नहीं है. याचिका में कहा गया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में विशेष विवाह कानून एक हज़ार नौ सौ चौवन के प्रावधानों को चुनौती देने वाले लंबित सभी मामलों को इस न्यायालय में स्थानांतरित किया जाना चाहिए. इस पर सुनवाई होनी चाहिए ताकि समूचे देश में कानून में एकरूपता लाई जाए. कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इसमें उचित संशोधन की सिफारिश को लेकर विकल्प के तौर पर एक कमेटी का गठन होना चाहिए.
है। कृषि उद्योग अविकसित है और वर्षा पर अधिक निर्भर है जिसने उसका स्वरूप अधिक मौसमी है। कृषि की इस पिछी हुई अवस्था के कारण इसमें अधिक लोगो को रोजगार प्रदान नहीं किया जा सकता । 3. दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली- हमारी शिक्षा प्रणाली दोषपूर्ण है, क्योंकि वह अधिकतर साहिन्गिक है व्यावसायिक नही । जिसके फलस्वरूप शिक्षित बेकारी देश में अधिक है। प्रत्येक वर्ष हमारे विश्वविद्यालयों से हजारो विद्यार्थी बी० ए० एम० ए० पास करते है । फलत प्रतिवर्ष शिक्षित वर्ग में कार्य ढूंढ़ने वाले तथा कार्य के अवसरो में अन्तर बढ़ता जाता । 5. विनियोग का निम्न स्तर अर्थ व्यवस्था में रोजगार के अवसरों का विस्तार विनियोग के स्तर पर निर्भर करता है। भारत को बेरोजगारी का एक प्रमुख कारण विनियोग के निम्न स्तर को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। 1972-71 मे अर्थ-व्यवस्था मे राष्ट्रीय आय का 1155 विनियोग किया गया था। प्रति व्यक्ति आय के वर्तमान स्तर को बनाये रखने के लिए 10% विनियोग करना आवश्यक है । इस प्रकार रोजगार के अवसरा में विस्तार के लिये केवल 35% विनियोग बचती है, जो कि बेरोजगारी की समस्या की गहनता को ध्यान में रखते हुए बहुत अपर्याप्त है । चौथी योजना के सम्बन्ध में सरकार ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि विनियोग की कुल मात्रा में उत्पादन में उतनी वृद्धि नहीं हो पाई जितनी कि आरम्भ मे सोचा गया था। इससे रोजगार के अवसरों में भी पर्याप्त विस्तार नहीं हो पाया है। 5. प्रतिकूल उत्पादन तकनीकी की चुनराव-भारत में विभिन्न योजनाओ मे उत्पादन के क्षेत्र में विकसित पाश्चात्य तकनीकी का प्रयोग किया गया। फलत. उपभोग वस्तु उद्योगों व भारी उद्योगों में क्षेत्रीकरण इतना अधिक हो गया कि वर्तमान समय में उपभोग वस्तुओं व मशीन बनाने वाले उद्योगों में विनियोग के प्रति इकाई रोजगार प्रदान करने की क्षमता बहुत कम है। योजनाओं की अवधि में राष्ट्रीय आय तथा बेरोजगारी में एक साथ वृद्धि होने का एक कारण यह है कि योजनाओं के अंतर्गत चुने गये तकनीक उत्पादन की मात्रा में तो वृद्धि करते हैं परन्तु इनसे श्रम की आवश्यकता कम हो जाती है । 6. अन्य कारण --उपरोक्त आधारभून कारणों के अतिरिक्त देश में व्याप्त बेरोजगारी समस्या के लिये निम्न कारण उत्तरदायी है :(क) ब्रिटिश काल मे जो नीति अपनाई गई उससे हमारे देश में कुटीर व लघु उद्योगों का ह्रास हुआ है, वे अभी तक पर्याप्त मात्रा मे उचित ढंग से विकसित नही हो सके हैं । गया है । ( ख ) देश के प्राकृतिक साधनो की क्षमता का पूर्णतया उपयोग नहीं किया (ग) कृषि तथा अन्य उद्योगों में पूंजी का अभाव है । (घ) भारत मे श्रमिकों की गतिशीलता का अभाव है । (ङ) देश में अशिक्षित व अकुशल श्रमिको का आधिक्य है ।
है। कृषि उद्योग अविकसित है और वर्षा पर अधिक निर्भर है जिसने उसका स्वरूप अधिक मौसमी है। कृषि की इस पिछी हुई अवस्था के कारण इसमें अधिक लोगो को रोजगार प्रदान नहीं किया जा सकता । तीन. दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली- हमारी शिक्षा प्रणाली दोषपूर्ण है, क्योंकि वह अधिकतर साहिन्गिक है व्यावसायिक नही । जिसके फलस्वरूप शिक्षित बेकारी देश में अधिक है। प्रत्येक वर्ष हमारे विश्वविद्यालयों से हजारो विद्यार्थी बीशून्य एशून्य एमशून्य एशून्य पास करते है । फलत प्रतिवर्ष शिक्षित वर्ग में कार्य ढूंढ़ने वाले तथा कार्य के अवसरो में अन्तर बढ़ता जाता । पाँच. विनियोग का निम्न स्तर अर्थ व्यवस्था में रोजगार के अवसरों का विस्तार विनियोग के स्तर पर निर्भर करता है। भारत को बेरोजगारी का एक प्रमुख कारण विनियोग के निम्न स्तर को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। एक हज़ार नौ सौ बहत्तर-इकहत्तर मे अर्थ-व्यवस्था मे राष्ट्रीय आय का एक हज़ार एक सौ पचपन विनियोग किया गया था। प्रति व्यक्ति आय के वर्तमान स्तर को बनाये रखने के लिए दस% विनियोग करना आवश्यक है । इस प्रकार रोजगार के अवसरा में विस्तार के लिये केवल पैंतीस% विनियोग बचती है, जो कि बेरोजगारी की समस्या की गहनता को ध्यान में रखते हुए बहुत अपर्याप्त है । चौथी योजना के सम्बन्ध में सरकार ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि विनियोग की कुल मात्रा में उत्पादन में उतनी वृद्धि नहीं हो पाई जितनी कि आरम्भ मे सोचा गया था। इससे रोजगार के अवसरों में भी पर्याप्त विस्तार नहीं हो पाया है। पाँच. प्रतिकूल उत्पादन तकनीकी की चुनराव-भारत में विभिन्न योजनाओ मे उत्पादन के क्षेत्र में विकसित पाश्चात्य तकनीकी का प्रयोग किया गया। फलत. उपभोग वस्तु उद्योगों व भारी उद्योगों में क्षेत्रीकरण इतना अधिक हो गया कि वर्तमान समय में उपभोग वस्तुओं व मशीन बनाने वाले उद्योगों में विनियोग के प्रति इकाई रोजगार प्रदान करने की क्षमता बहुत कम है। योजनाओं की अवधि में राष्ट्रीय आय तथा बेरोजगारी में एक साथ वृद्धि होने का एक कारण यह है कि योजनाओं के अंतर्गत चुने गये तकनीक उत्पादन की मात्रा में तो वृद्धि करते हैं परन्तु इनसे श्रम की आवश्यकता कम हो जाती है । छः. अन्य कारण --उपरोक्त आधारभून कारणों के अतिरिक्त देश में व्याप्त बेरोजगारी समस्या के लिये निम्न कारण उत्तरदायी है : ब्रिटिश काल मे जो नीति अपनाई गई उससे हमारे देश में कुटीर व लघु उद्योगों का ह्रास हुआ है, वे अभी तक पर्याप्त मात्रा मे उचित ढंग से विकसित नही हो सके हैं । गया है । देश के प्राकृतिक साधनो की क्षमता का पूर्णतया उपयोग नहीं किया कृषि तथा अन्य उद्योगों में पूंजी का अभाव है । भारत मे श्रमिकों की गतिशीलता का अभाव है । देश में अशिक्षित व अकुशल श्रमिको का आधिक्य है ।
के अनुसार उनका प्रयोग करना चाहिये । उनकी सम्मति में खून की कमी वाले रोगों में घियातोरी का प्रयोग श्रेष्ठ है और पेट के रोगों में धारतोरी अधिक लाभदायक सिद्ध होती है।" सूखी तीरी में से बीज निकाल कर रातभर मुलेटी के कार्ड में तथा कचनार आदि के काढ़े में गुड़ सहित रात भर पड़ा रहने दें । सुबह मल छान कर वायु गोला, पेट के रोग और कफ के अन्य रोगों में दें। उलटियों को रोकने और हृदय के रोगों को शान्ति के लिये इसे भोजन के साथ देना चाहिये । (ग) दस्त और पेचिस आमातिसार में बीज दिये जाते हैं। मोहिदीन शरीफ ने पेनिस (प्रवाहिका) में इपिकाकुना के प्रतिनिधि रूप में बीजों को अत्यन्त उपयोगी बताया है । गिरियों को पानी के साथ खरल कर लेई सी ( इमल्शन ) बना कर देना अच्छा रहता है। प्रनिलम्ब ( इमलशन ) का रंग हरा सा सफेद होता है । डा० वा० ग० देसाई ने दिखाया है कि तोरी को अल्प प्रमाण में देने से भूख लगती है, मल साफ होता है और पेट के अवयवों की क्रिया सुधरती है । (घ) पेशाब के रोग उपवृक्क (acdrenal ) सम्बन्धी मधुमेह में गरम की हुई तोरी का रस अच्छा होता है । ताजी बेल और पत्तों का फाण्ट खूब पेशाब लाता है । मीनोट ( बुलेटीन इकोनो इण्डोचीन, १९२९, ...... ..प्रवर कोठफलं च पाण्डुषु ॥ उदरे कृतवेधनं हितं............ सि० ० ११, १२-१३। ....जीर्णशुष्काणामतः कल्पः प्रवक्ष्यते ॥ मधुकस्य क षायेण बीजकण्ठोद्धृत फलम् । सगुडं व्युषितं रात्रि कोविदारदिभिस्तथा ॥ दद्याद् गुल्मोदरातभ्यो ये चाप्यन्ये कफामयाः । दद्यादनेन संयुक्त छदिहृद्रोगशान्तये ।। च०, क० ४, ७-९। पृ० २५६) धारतोरी को प्रयोग करने की एक प्रसिद्ध कम्बोडियन विधि इस प्रकार बताते हैं पूरा बड़ा फल लेकर उसका एक सिरा काट दें । इसके अन्दर एक औंस यवक्षार ( दहातु भूमीय nitrate of potash) भर दें । सिरे को बन्द करके दहकप्ते कोयलों पर स्विन्न कर लें । दिन में इस गूदे को डेढ़-दो छटांक खा लें। यह मूत्रल का काम करता है। जावा में धारतोरी के पत्तों का काढ़ा रक्तता (यूरीमिया ) में दिया जाता है । (ङ) जिगर और तिल्ली के रोग पत्तों के कल्क में शहद मिला कर तिल्ली में देना लाभकारी समझा जाता है। बीजों को अथवा पत्तों को पीस कर गरम लेप करने से तिल्ली की सूजन मिटती है । बीज समेत फल को पानी में पका कर बनाये काढ़े को एक तोला सुबह और एक तोला शाम को पन्द्रह-बीस दिन लगातार पिलाने से जिगर और तिल्ली के विकारों में तथा जलोदर में बड़ा लाभ पहुँचता है । यकृछाल्युदर, प्लीहोदर और यकृत की विकृति से उत्पन्न जलोदर में तोरी का निष्कर्ष (टिक्चर) लाभदायक होता है। पहले बड़ी मात्रा में देना चाहिये और फिर मल तथा मूत्र के परिमाण का ध्यान करते हुए मात्रा को घटाया या बढ़ाया जा सकता है । श्वपशु ( dropsy ) में जड़ का प्रयोग किया जाता है । पीलिया ( कामला, जोण्डिस) में सुखे फल की नुस्वार दी जाती है । (च) खांसी गिरियों में क्योंकि शिवति ( एल्ब्युमिन) और तेल होता है इसलिये थोड़ी मात्राओं में ये कफ निस्सारक समझी जाती हैं। क्षुब्ध श्वास प्रणालियों पर इनका शामक प्रभाव होता है । इनके सेवन से सूखी खांसी भी मिटती है । खांसी में गिरियों का चूर्ण सामान्यतया ढाई से पांच रत्ती की मात्राओं में दिया घेयं वा जालिनी फलम् ।
के अनुसार उनका प्रयोग करना चाहिये । उनकी सम्मति में खून की कमी वाले रोगों में घियातोरी का प्रयोग श्रेष्ठ है और पेट के रोगों में धारतोरी अधिक लाभदायक सिद्ध होती है।" सूखी तीरी में से बीज निकाल कर रातभर मुलेटी के कार्ड में तथा कचनार आदि के काढ़े में गुड़ सहित रात भर पड़ा रहने दें । सुबह मल छान कर वायु गोला, पेट के रोग और कफ के अन्य रोगों में दें। उलटियों को रोकने और हृदय के रोगों को शान्ति के लिये इसे भोजन के साथ देना चाहिये । दस्त और पेचिस आमातिसार में बीज दिये जाते हैं। मोहिदीन शरीफ ने पेनिस में इपिकाकुना के प्रतिनिधि रूप में बीजों को अत्यन्त उपयोगी बताया है । गिरियों को पानी के साथ खरल कर लेई सी बना कर देना अच्छा रहता है। प्रनिलम्ब का रंग हरा सा सफेद होता है । डाशून्य वाशून्य गशून्य देसाई ने दिखाया है कि तोरी को अल्प प्रमाण में देने से भूख लगती है, मल साफ होता है और पेट के अवयवों की क्रिया सुधरती है । पेशाब के रोग उपवृक्क सम्बन्धी मधुमेह में गरम की हुई तोरी का रस अच्छा होता है । ताजी बेल और पत्तों का फाण्ट खूब पेशाब लाता है । मीनोट धारतोरी को प्रयोग करने की एक प्रसिद्ध कम्बोडियन विधि इस प्रकार बताते हैं पूरा बड़ा फल लेकर उसका एक सिरा काट दें । इसके अन्दर एक औंस यवक्षार भर दें । सिरे को बन्द करके दहकप्ते कोयलों पर स्विन्न कर लें । दिन में इस गूदे को डेढ़-दो छटांक खा लें। यह मूत्रल का काम करता है। जावा में धारतोरी के पत्तों का काढ़ा रक्तता में दिया जाता है । जिगर और तिल्ली के रोग पत्तों के कल्क में शहद मिला कर तिल्ली में देना लाभकारी समझा जाता है। बीजों को अथवा पत्तों को पीस कर गरम लेप करने से तिल्ली की सूजन मिटती है । बीज समेत फल को पानी में पका कर बनाये काढ़े को एक तोला सुबह और एक तोला शाम को पन्द्रह-बीस दिन लगातार पिलाने से जिगर और तिल्ली के विकारों में तथा जलोदर में बड़ा लाभ पहुँचता है । यकृछाल्युदर, प्लीहोदर और यकृत की विकृति से उत्पन्न जलोदर में तोरी का निष्कर्ष लाभदायक होता है। पहले बड़ी मात्रा में देना चाहिये और फिर मल तथा मूत्र के परिमाण का ध्यान करते हुए मात्रा को घटाया या बढ़ाया जा सकता है । श्वपशु में जड़ का प्रयोग किया जाता है । पीलिया में सुखे फल की नुस्वार दी जाती है । खांसी गिरियों में क्योंकि शिवति और तेल होता है इसलिये थोड़ी मात्राओं में ये कफ निस्सारक समझी जाती हैं। क्षुब्ध श्वास प्रणालियों पर इनका शामक प्रभाव होता है । इनके सेवन से सूखी खांसी भी मिटती है । खांसी में गिरियों का चूर्ण सामान्यतया ढाई से पांच रत्ती की मात्राओं में दिया घेयं वा जालिनी फलम् ।
नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की जीत के बाद अब बधाई देने का सिलसिला शुरू हो चूका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीत के लिए ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को बधाई दी है. उन्होंने कहा, केंद्र लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और COVID-19 महामारी पर काबू पाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को हर संभव समर्थन देगा. भाजपा (BJP) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने भी पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत के लिए ममता बनर्जी और तमिलनाडु में द्रमुक की जीत के लिए एम के स्टालिन को बधाई दी है. सिलसिलेवार ट्वीट में सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), भाजपा प्रमुख जे पी नड्डा (JP Nadda) और असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को भी जीत की बधाई दी.
नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की जीत के बाद अब बधाई देने का सिलसिला शुरू हो चूका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल कांग्रेस की जीत के लिए ममता बनर्जी को बधाई दी है. उन्होंने कहा, केंद्र लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और COVID-उन्नीस महामारी पर काबू पाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को हर संभव समर्थन देगा. भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत के लिए ममता बनर्जी और तमिलनाडु में द्रमुक की जीत के लिए एम के स्टालिन को बधाई दी है. सिलसिलेवार ट्वीट में सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , भाजपा प्रमुख जे पी नड्डा और असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को भी जीत की बधाई दी.