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अंदर सतुष्टि वो भावना जरूर है जिसकी वजह से में इसानो और मसलो में फ़िजूल की चीजा की परवाह नहीं करता। मुझे वी० के० नेहरू या उनकी तरह के लोगो की परवाह नहीं है। इस रवये से मुझे आमतौर पर फायदा ही हुआ है। उदाहरण के लिए, अमरीका मे उनसे टकराव का नतीजा उनकी मर्जी के खिलाफ हुआ। मामला जब अत मे श्रीमती गाधी के सामने रखा गया तो उन्होने कहा कि "व्यक्तित्व वा टकराव" इस अप्रिय काड की जड है। उन्होंने इसलिए मेरी तरक्को प्रथम श्रेणी मे करन और अल्जीरिया मे मुझे राजदूत नियुक्त करने वा आदेश दिया। कोई देश किसी व्यक्ति पर क्या प्रभाव डालता है, यह शायद इस पर निभर है कि उसका अपना दृष्टिकोण क्या है और उसका स्वभाव किस चीज से प्रभावित होता है। अगस्त 1967 में जब मैं एल्जियस पहुँचा तो सबसे पहले मुझ पर उसके महान संघप का प्रभाव पड़ा । 15 लाख व्यक्ति मारे गये थे, वहाँ दस लाख से ज्यादा बेवाएँ और यतीम थे । इतनी मुसीबता के बावजूद उनका अपनी कामयाबी पर जो नाज था वह उनसे कोई नही छीन सका। आजाद होने के लिए उन्होंने यह कीमत अदा की थी और यह कीमत अदा करके वे खश थे । स्थानीय राजनयिक कायविधि के प्रतिकूल, जहाँ काय भार संभालन के लिए आने वाले नये राजदूता को महीनो इतजार कराया जाता है, मैंने बिना किसी विलब के अपना परिचय पत्र पेश कर दिया । अल्जीरिया के राष्ट्रपति हरी बूमेदीन ने परिचय समारोह में ही दोस्ताना माहौल कायम कर दिया था। उनका रवैया बहुत सौहादपूर्ण था। अरब इसराइल विवाद और उसके हल के बारे मे वह जो सोचते थे और उन्हान जो कुछ कहा उससे पता चला कि उनका नजरिया बिलकुल भिन है। उन्हान कहा "जब तक हम अपने देश मे गरीबी और अभाव खत्म नही कर देते, हम इसराइल को नहीं हरा सक्ते । रहन सहन का स्तर ऊँचा उठाना हो पडेगा। हर इसराइली अपने देश के लिए लडने और मरने को तैयार है, क्योंकि वह महसूस करता है कि इसराइल की हार जीत से उसका भाग्य जुड़ा हुआ है। अरबो को भी ऐसा ही करना चाहिए । हमे जिंदगी की आनददायव चीज़ा से मामूली इसान के भावी को जोडना चाहिए । आज वह काहे के लिए लडे-अपनी गरीबी को मुसीबत और कुछ लोगो को सुख-सुविधा को कायम रखने के लिए? अल्जीरिया में हमने शुरुआत कर दी है और हम चाहते हैं कि हमारे एक करोड तीस लाख वाशिंदा को यह भरोसा हो कि वे मुल्क की दौलत के मालिक हैं । इस एहसास से नयी भावना पैदा होगी। सिर्फ यही वह चीज है जिसके बलबूते पर हम दुश्मना बोहरा सकेंगे।' इसलिए उनके नेताओ पर आर्थिक समृद्धि हासिल करने की धुन सवार हो गयो । एक नौजवान, नातजुवेंकार और अपरिपक्व दल को एक ऐसे देश की जिम्मेदारी मिली जिसका आकार भारत का तो एक तिहाई है लेक्नि उहान उनति के शिखर पर पहुँचान वाली काय प्रणाली बनान और नीतिया पर अमल करने की जिम्मेदारी प्रविधि विशेषनो को सौप दी। उन्होंने जल्दी ही अपन को ज़रूरता के हिसाब से ढाल लिया और शीघ्र हो वे दूसरों के लिए आदश बन गये । अपन दश के प्रतिनिधि के नाते मेरा पहला काम अमीर अब्दुल वादिर के सबबर पर फूल चढाना था । अमोर अब्दुल कादिर अल्जीरिया के उनीसवी सदी वे महान लोकनायव थे । फासीसी हुकूमत के खिलाफ़ सात साल की आजादी की लडाई म अपनी जान कुरवान करने वाले कई शहीदा के मक्बरे भी इसी वनिस्तान
अंदर सतुष्टि वो भावना जरूर है जिसकी वजह से में इसानो और मसलो में फ़िजूल की चीजा की परवाह नहीं करता। मुझे वीशून्य केशून्य नेहरू या उनकी तरह के लोगो की परवाह नहीं है। इस रवये से मुझे आमतौर पर फायदा ही हुआ है। उदाहरण के लिए, अमरीका मे उनसे टकराव का नतीजा उनकी मर्जी के खिलाफ हुआ। मामला जब अत मे श्रीमती गाधी के सामने रखा गया तो उन्होने कहा कि "व्यक्तित्व वा टकराव" इस अप्रिय काड की जड है। उन्होंने इसलिए मेरी तरक्को प्रथम श्रेणी मे करन और अल्जीरिया मे मुझे राजदूत नियुक्त करने वा आदेश दिया। कोई देश किसी व्यक्ति पर क्या प्रभाव डालता है, यह शायद इस पर निभर है कि उसका अपना दृष्टिकोण क्या है और उसका स्वभाव किस चीज से प्रभावित होता है। अगस्त एक हज़ार नौ सौ सरसठ में जब मैं एल्जियस पहुँचा तो सबसे पहले मुझ पर उसके महान संघप का प्रभाव पड़ा । पंद्रह लाख व्यक्ति मारे गये थे, वहाँ दस लाख से ज्यादा बेवाएँ और यतीम थे । इतनी मुसीबता के बावजूद उनका अपनी कामयाबी पर जो नाज था वह उनसे कोई नही छीन सका। आजाद होने के लिए उन्होंने यह कीमत अदा की थी और यह कीमत अदा करके वे खश थे । स्थानीय राजनयिक कायविधि के प्रतिकूल, जहाँ काय भार संभालन के लिए आने वाले नये राजदूता को महीनो इतजार कराया जाता है, मैंने बिना किसी विलब के अपना परिचय पत्र पेश कर दिया । अल्जीरिया के राष्ट्रपति हरी बूमेदीन ने परिचय समारोह में ही दोस्ताना माहौल कायम कर दिया था। उनका रवैया बहुत सौहादपूर्ण था। अरब इसराइल विवाद और उसके हल के बारे मे वह जो सोचते थे और उन्हान जो कुछ कहा उससे पता चला कि उनका नजरिया बिलकुल भिन है। उन्हान कहा "जब तक हम अपने देश मे गरीबी और अभाव खत्म नही कर देते, हम इसराइल को नहीं हरा सक्ते । रहन सहन का स्तर ऊँचा उठाना हो पडेगा। हर इसराइली अपने देश के लिए लडने और मरने को तैयार है, क्योंकि वह महसूस करता है कि इसराइल की हार जीत से उसका भाग्य जुड़ा हुआ है। अरबो को भी ऐसा ही करना चाहिए । हमे जिंदगी की आनददायव चीज़ा से मामूली इसान के भावी को जोडना चाहिए । आज वह काहे के लिए लडे-अपनी गरीबी को मुसीबत और कुछ लोगो को सुख-सुविधा को कायम रखने के लिए? अल्जीरिया में हमने शुरुआत कर दी है और हम चाहते हैं कि हमारे एक करोड तीस लाख वाशिंदा को यह भरोसा हो कि वे मुल्क की दौलत के मालिक हैं । इस एहसास से नयी भावना पैदा होगी। सिर्फ यही वह चीज है जिसके बलबूते पर हम दुश्मना बोहरा सकेंगे।' इसलिए उनके नेताओ पर आर्थिक समृद्धि हासिल करने की धुन सवार हो गयो । एक नौजवान, नातजुवेंकार और अपरिपक्व दल को एक ऐसे देश की जिम्मेदारी मिली जिसका आकार भारत का तो एक तिहाई है लेक्नि उहान उनति के शिखर पर पहुँचान वाली काय प्रणाली बनान और नीतिया पर अमल करने की जिम्मेदारी प्रविधि विशेषनो को सौप दी। उन्होंने जल्दी ही अपन को ज़रूरता के हिसाब से ढाल लिया और शीघ्र हो वे दूसरों के लिए आदश बन गये । अपन दश के प्रतिनिधि के नाते मेरा पहला काम अमीर अब्दुल वादिर के सबबर पर फूल चढाना था । अमोर अब्दुल कादिर अल्जीरिया के उनीसवी सदी वे महान लोकनायव थे । फासीसी हुकूमत के खिलाफ़ सात साल की आजादी की लडाई म अपनी जान कुरवान करने वाले कई शहीदा के मक्बरे भी इसी वनिस्तान
अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए मतदान हो रहे हैं। कोरोना महामारी के बीच भारी संख्या में वोटिंग हो रही है। 3 नवंबर के बाद अमेरिकावासियों को अगला राष्ट्रपति मिल जाएगा। इस बीच फेमस सिंगर और एक्टर लेडी गागा ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने अलग अंदाज में वोट देने की अपील की है, लेकिन फैंस का ध्यान किसी और बात ने खींचा है। इस ढाई मिनट के वीडियो में लेडी गागा ने उन लोगों के लिए ताली बजाई, जो वोट कर चुके हैं। साथ ही उन लोगों का भी जिक्र किया, जिन्होंने इलेक्शन को लेकर निराशावादी रवैया अपनाया हुआ है। उन्होंने कहा कि वोट देना हमारी जिम्मेदारी बनती है। इस वीडियो में सबसे ज्यादा ध्यान लेडी गागा की ड्रेसेज पर गया है। जी हां, उन्होंने ढाई मिनट की वीडियो में 9 बार ड्रेस बदली है। हर बार उनका अलग-अलग लुक देखने को मिला, जो फैंस को काफी पसंद आ रहा है। लेडी गागा ने सिस्टम से लेकर देश तक पर बात की। साथ ही कोरोना वायरस महामारी का भी जिक्र किया। इससे पहले भी उन्होंने एक वीडियो शेयर किया और लोगों को बताया कि वो अमेरिका के लिए वोट कर रही हैं। गौरतलब है कि पॉप स्टार लेडी गागा अपनी परफॉर्मेंस के साथ-साथ अलग स्टाइल के लिए भी जानी जाती हैं।
अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए मतदान हो रहे हैं। कोरोना महामारी के बीच भारी संख्या में वोटिंग हो रही है। तीन नवंबर के बाद अमेरिकावासियों को अगला राष्ट्रपति मिल जाएगा। इस बीच फेमस सिंगर और एक्टर लेडी गागा ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने अलग अंदाज में वोट देने की अपील की है, लेकिन फैंस का ध्यान किसी और बात ने खींचा है। इस ढाई मिनट के वीडियो में लेडी गागा ने उन लोगों के लिए ताली बजाई, जो वोट कर चुके हैं। साथ ही उन लोगों का भी जिक्र किया, जिन्होंने इलेक्शन को लेकर निराशावादी रवैया अपनाया हुआ है। उन्होंने कहा कि वोट देना हमारी जिम्मेदारी बनती है। इस वीडियो में सबसे ज्यादा ध्यान लेडी गागा की ड्रेसेज पर गया है। जी हां, उन्होंने ढाई मिनट की वीडियो में नौ बार ड्रेस बदली है। हर बार उनका अलग-अलग लुक देखने को मिला, जो फैंस को काफी पसंद आ रहा है। लेडी गागा ने सिस्टम से लेकर देश तक पर बात की। साथ ही कोरोना वायरस महामारी का भी जिक्र किया। इससे पहले भी उन्होंने एक वीडियो शेयर किया और लोगों को बताया कि वो अमेरिका के लिए वोट कर रही हैं। गौरतलब है कि पॉप स्टार लेडी गागा अपनी परफॉर्मेंस के साथ-साथ अलग स्टाइल के लिए भी जानी जाती हैं।
मनोहर पर्रिकर के निधन से बाद खाली हुई कुर्सी संभालने के लिए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रमोद सावंत को राज्य के नए मुख्यमंत्री के लिए चुना गया है। गोवा के नए मुख्यमंत्री बने प्रमोद सावंत ने सोमवार देर रात शपथ ली। सावंत ने गोवा राजभवन में राज्यपाल मृदुला सिन्हा की उपस्थिति में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इसके अलावा दस विधायकों ने भी मंत्रियों के रूप मे शपथ ली। इससे पहले उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा ने उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी दी है। सावंत ने कहा कि, उन्हें राजनीति में लाये जाने का श्रेय दिवंगत मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को है। बता दें कि, इससे पहले दिवंगत मुख्यमंत्री पर्रिकर एक गठबंधन सरकार चला रहे थे। इसमें भाजपा, जीएफपी, एमजीपी और तीन निर्दलीय शामिल थे। 40 सदस्यों वाली असेम्बली में भारतीय जनता पार्टी के 12 विधायक हैं। जबकि बीजेपी की मुख्य प्रतिद्वंदी कांग्रेस इस समय कांग्रेस 14 विधायकों के साथ राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है। भाजपा विधायक फ्रांसिस डिसूजा के निधन तथा रविवार को मनोहर पर्रिकर के निधन और बीते साल कांग्रेस के दो विधायकों सुभाष शिरोडकर तथा दयानंद सोप्ते के इस्तीफों के चलते विधानसभा के सदस्यों की संख्या घटकर 36 रह गई है। सावंत के अलावा पर्रिकर के नेतृत्व वाली कैबिनेट का हिस्सा रहे 11 विधायकों ने भी मंत्रियों के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण से पहले सावंत ने पत्रकारों से इस बात की पुष्टि की थी कि नई सरकार में दो उपमुख्यमंत्री होंगे। पहले यह शपथ ग्रहण समारोह सोमवार की रात 11 बजे होना था लेकिन कुछ कारणों के कारण इसमें विलंब हुआ। सावंत गोवा विधानसभा के अध्यक्ष थे।
मनोहर पर्रिकर के निधन से बाद खाली हुई कुर्सी संभालने के लिए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रमोद सावंत को राज्य के नए मुख्यमंत्री के लिए चुना गया है। गोवा के नए मुख्यमंत्री बने प्रमोद सावंत ने सोमवार देर रात शपथ ली। सावंत ने गोवा राजभवन में राज्यपाल मृदुला सिन्हा की उपस्थिति में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इसके अलावा दस विधायकों ने भी मंत्रियों के रूप मे शपथ ली। इससे पहले उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा ने उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी दी है। सावंत ने कहा कि, उन्हें राजनीति में लाये जाने का श्रेय दिवंगत मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को है। बता दें कि, इससे पहले दिवंगत मुख्यमंत्री पर्रिकर एक गठबंधन सरकार चला रहे थे। इसमें भाजपा, जीएफपी, एमजीपी और तीन निर्दलीय शामिल थे। चालीस सदस्यों वाली असेम्बली में भारतीय जनता पार्टी के बारह विधायक हैं। जबकि बीजेपी की मुख्य प्रतिद्वंदी कांग्रेस इस समय कांग्रेस चौदह विधायकों के साथ राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है। भाजपा विधायक फ्रांसिस डिसूजा के निधन तथा रविवार को मनोहर पर्रिकर के निधन और बीते साल कांग्रेस के दो विधायकों सुभाष शिरोडकर तथा दयानंद सोप्ते के इस्तीफों के चलते विधानसभा के सदस्यों की संख्या घटकर छत्तीस रह गई है। सावंत के अलावा पर्रिकर के नेतृत्व वाली कैबिनेट का हिस्सा रहे ग्यारह विधायकों ने भी मंत्रियों के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण से पहले सावंत ने पत्रकारों से इस बात की पुष्टि की थी कि नई सरकार में दो उपमुख्यमंत्री होंगे। पहले यह शपथ ग्रहण समारोह सोमवार की रात ग्यारह बजे होना था लेकिन कुछ कारणों के कारण इसमें विलंब हुआ। सावंत गोवा विधानसभा के अध्यक्ष थे।
बालाघाट। पूर्व जिला पंचायत संदस्य डाली दमाहे पर २८ फरवरी के दिन निकाली गई शिव बारात के दौरान कुछ लोगो के द्वारा धारधार हथियार से हमला कर घायल कर दिया था जिसे उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था । जहां से उसे गोंदिया रिफर किया गया था जिसके बाद 3 मार्च को उनका निधन हो गया है । बताया जा रहा है कि शिव बारात के समय हुए विवाद के चलते बब्बर सेना के अध्यक्ष व पूर्व जिला पंचायत सदस्य के साथ हिंदुवादी संगठन के पदाधिकारीयों के साथ विवाद हुआ था। और शंकरघाट के कार्यक्रम से वापस लौटने के बाद डाली दमाहे घर पर ही थे तभी रात्रि ११. ३० बजे कुछ लोग वाहनों से पहुंचकर धारधार हथियार से वार कर दिया। बताया गया कि जिसके बाद गोंदिया हॉस्पिटल में भर्ती थे लेकिन 3 मार्च को उनकी मौत हो गई वहीं दूसरी ओर जिले के लोधी समाज ने कार्यवाही की मांग पूलिस प्रशासन से की है अब देखना होगा कि डाली दमाहे की मौत के बाद क्या पुलिस हमलावरों पर क्या कार्यवाही करती है।
बालाघाट। पूर्व जिला पंचायत संदस्य डाली दमाहे पर अट्ठाईस फरवरी के दिन निकाली गई शिव बारात के दौरान कुछ लोगो के द्वारा धारधार हथियार से हमला कर घायल कर दिया था जिसे उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था । जहां से उसे गोंदिया रिफर किया गया था जिसके बाद तीन मार्च को उनका निधन हो गया है । बताया जा रहा है कि शिव बारात के समय हुए विवाद के चलते बब्बर सेना के अध्यक्ष व पूर्व जिला पंचायत सदस्य के साथ हिंदुवादी संगठन के पदाधिकारीयों के साथ विवाद हुआ था। और शंकरघाट के कार्यक्रम से वापस लौटने के बाद डाली दमाहे घर पर ही थे तभी रात्रि ग्यारह. तीस बजे कुछ लोग वाहनों से पहुंचकर धारधार हथियार से वार कर दिया। बताया गया कि जिसके बाद गोंदिया हॉस्पिटल में भर्ती थे लेकिन तीन मार्च को उनकी मौत हो गई वहीं दूसरी ओर जिले के लोधी समाज ने कार्यवाही की मांग पूलिस प्रशासन से की है अब देखना होगा कि डाली दमाहे की मौत के बाद क्या पुलिस हमलावरों पर क्या कार्यवाही करती है।
कुशीनगर। आगामी श्रावण मेला, बकरीद, मोहर्रम के दृष्टिगत कानून व्यवस्था के संबंध में आवश्यक बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई. बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने की. जिलाधिकारी ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए बताया कि आगामी त्योहारों के संदर्भ में विशेष सतर्कता की जरूरत है. जिससे जनपद में शांतिपूर्ण तरीकों से त्योहार संपन्न हो सकें. उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए बताया कि शिव मंदिर के लिए जहां से जल लेते हैं वहां साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, मार्ग की साफ सफाई की व्यवस्था, भीड़ की स्थिति, मंदिर, अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्था, रास्ते में पेयजल की व्यवस्था, एंबुलेंस, अस्थाई टॉयलेट्स, त्योहार के लिए जगह-जगह लगाए जाने वाले शिविरों में जलपान की व्यवस्था, कावड़ियों के संघ के साथ आवश्यक बैठक, पीस कमेटी की बैठक आदि व्यवस्थाएं आवश्यक रूप से देखी जाए. मोहर्रम, बकरीद को देखते हुए उन्होंने आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि ताज़िये के रास्ते की व्यवस्थाएं देख ली जाए. कहीं जर्जर तारों की समस्याएं ना हो, किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधियां नहीं होनी चाहिए. शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार संपन्न हो. डीएम ने बैठक में उपस्थित उप जिलाधिकारीगण और क्षेत्राधिकारियों से उनके क्षेत्रों में तैयारी व्यवस्थाओं का जायजा लेने के निर्देश दिए. वहीं पूरी सतर्कता के साथ त्यौहार व्यवस्थाओं को मॉनिटर करने का निर्देश दिया. इस क्रम में अधिशासी अधिकारियों को यह निर्देशित किया गया कि तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं के रास्ते मे जलभराव की समस्या ना हो. जलभराव की निकासी के लिए कार्य योजना बना लें. त्योहारों के दृष्टिगत रास्तों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था दुरुस्त हो. उन्होंने अधिशासी अभियंता विद्युत से जर्जर तारों की समस्या पर ध्यान देने को कहा. सड़कों पर ट्रांसफार्मर खुले में ना हो. सड़कों की जर्जर स्थिति के बारे में भी उन्होंने आवश्यक निर्देश दिए. सोशल मीडिया की नियमित तौर पर मॉनिटरिंग करने के लिए भी निर्देशित किया गया. वहीं किसी भी प्रकार के हथियार का प्रदर्शन मोहर्रम, कावड़ यात्रा आदि में ना हो. पुलिस अधीक्षक धवल जायसवाल ने अवैध बसों को संचालित होने पर रोक, कावड़ संघ की मीटिंग, कावड़ यात्रा, मुहर्रम की जुलूस में हथियार प्रतिबंध, असमर्थ, वृद्ध, कोविड से प्रभावित तीर्थ यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा करने की सलाह ना देने आदि के निर्देश दिए. इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी देवी दयाल वर्मा ने उपस्थित को संबोधित करते हुए कहा कि बकरीद, सावन मेला, मोहर्रम, रक्षाबंधन, जुमे की नमाज इन त्योहारों के दृष्टिगत विशेष सतर्कता की जरूरत है. विशेष रूप से संवेदनशीलता बरतें. सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. उक्त बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक रितेश कुमार सिंह, समस्त उप जिलाधिकारीगण, एआरटीओ मोहम्मद अजीम, जिला पंचायत राज अधिकारी अभय यादव, समस्त अधिशासी अधिकारी और संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे.
कुशीनगर। आगामी श्रावण मेला, बकरीद, मोहर्रम के दृष्टिगत कानून व्यवस्था के संबंध में आवश्यक बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई. बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने की. जिलाधिकारी ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए बताया कि आगामी त्योहारों के संदर्भ में विशेष सतर्कता की जरूरत है. जिससे जनपद में शांतिपूर्ण तरीकों से त्योहार संपन्न हो सकें. उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए बताया कि शिव मंदिर के लिए जहां से जल लेते हैं वहां साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, मार्ग की साफ सफाई की व्यवस्था, भीड़ की स्थिति, मंदिर, अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्था, रास्ते में पेयजल की व्यवस्था, एंबुलेंस, अस्थाई टॉयलेट्स, त्योहार के लिए जगह-जगह लगाए जाने वाले शिविरों में जलपान की व्यवस्था, कावड़ियों के संघ के साथ आवश्यक बैठक, पीस कमेटी की बैठक आदि व्यवस्थाएं आवश्यक रूप से देखी जाए. मोहर्रम, बकरीद को देखते हुए उन्होंने आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि ताज़िये के रास्ते की व्यवस्थाएं देख ली जाए. कहीं जर्जर तारों की समस्याएं ना हो, किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधियां नहीं होनी चाहिए. शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार संपन्न हो. डीएम ने बैठक में उपस्थित उप जिलाधिकारीगण और क्षेत्राधिकारियों से उनके क्षेत्रों में तैयारी व्यवस्थाओं का जायजा लेने के निर्देश दिए. वहीं पूरी सतर्कता के साथ त्यौहार व्यवस्थाओं को मॉनिटर करने का निर्देश दिया. इस क्रम में अधिशासी अधिकारियों को यह निर्देशित किया गया कि तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं के रास्ते मे जलभराव की समस्या ना हो. जलभराव की निकासी के लिए कार्य योजना बना लें. त्योहारों के दृष्टिगत रास्तों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था दुरुस्त हो. उन्होंने अधिशासी अभियंता विद्युत से जर्जर तारों की समस्या पर ध्यान देने को कहा. सड़कों पर ट्रांसफार्मर खुले में ना हो. सड़कों की जर्जर स्थिति के बारे में भी उन्होंने आवश्यक निर्देश दिए. सोशल मीडिया की नियमित तौर पर मॉनिटरिंग करने के लिए भी निर्देशित किया गया. वहीं किसी भी प्रकार के हथियार का प्रदर्शन मोहर्रम, कावड़ यात्रा आदि में ना हो. पुलिस अधीक्षक धवल जायसवाल ने अवैध बसों को संचालित होने पर रोक, कावड़ संघ की मीटिंग, कावड़ यात्रा, मुहर्रम की जुलूस में हथियार प्रतिबंध, असमर्थ, वृद्ध, कोविड से प्रभावित तीर्थ यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा करने की सलाह ना देने आदि के निर्देश दिए. इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी देवी दयाल वर्मा ने उपस्थित को संबोधित करते हुए कहा कि बकरीद, सावन मेला, मोहर्रम, रक्षाबंधन, जुमे की नमाज इन त्योहारों के दृष्टिगत विशेष सतर्कता की जरूरत है. विशेष रूप से संवेदनशीलता बरतें. सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. उक्त बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक रितेश कुमार सिंह, समस्त उप जिलाधिकारीगण, एआरटीओ मोहम्मद अजीम, जिला पंचायत राज अधिकारी अभय यादव, समस्त अधिशासी अधिकारी और संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे.
परिचित जींस के डिजाइन के लिए गैर-मानक दृष्टिकोण के कारण आइसबर्ग ब्रांड लोकप्रिय हो गया है। डिजाइनरों के प्रयासों को एक विविध विविध लाइनअप द्वारा दर्शाया जाता है, और प्रत्येक फैशन कलाकार आसानी से उज्ज्वल और यादगार छवियों की असीमित संख्या बना सकता है, जो उसकी व्यक्तित्व और शैली की भावना पर जोर देता है । सभी संग्रह न केवल महिलाओं के लिए, शरीर में युवा, बल्कि आत्मा में भी बनाए जाते हैं। खड़े होने और मूल होने से डरो मत! अभिनव और बोल्ड विचारों के लिए धन्यवाद, इस ब्रांड के डिजाइनरों ने सामान्य जीन्स को कला के वास्तविक काम में बदलने में कामयाब रहे। उन्होंने रंगीन प्रिंटों के साथ ऊब गए नीले डेनिम को पूरक किया, इसमें नया जीवन सांस लिया। ब्रांड की असली लोकप्रियता ने पॉप आर्ट और डिज्नी कार्टून पात्रों की शैली में एंडी वॉरहोल द्वारा पेंटिंग के टुकड़ों की छवियां लाईं। ऐसा लगता है कि इस तरह के एक असाधारण डिजाइन जींस सीमित लक्षित दर्शकों को प्रदान करता है और विशेष रूप से युवा लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है। फिर भी, मॉडल की विविधता आपको लगभग हर महिला के लिए सही विकल्प चुनने की अनुमति देती है। इसके अलावा, संगठन के नीचे और ऊपर का एक सफल संयोजन आपको न केवल चलने के लिए धनुष बनाने की अनुमति देगा, बल्कि काम करने के लिए भी वृद्धि करेगा, अगर यह सख्त ड्रेस कोड द्वारा प्रतिबंधित नहीं है। मूल डिजाइन के अलावा जीन्स आइसबर्ग, सिलाई में उपयोग की जाने वाली सामग्री और सहायक उपकरण की उच्चतम गुणवत्ता से प्रतिष्ठित हैं। वे पूरी तरह से मोजे के दौरान पूरी तरह आरामदायक महसूस करने की इजाजत देते हुए, स्त्री सिल्हूट पर जोर देते हुए आकृति पर फिट बैठते हैं।
परिचित जींस के डिजाइन के लिए गैर-मानक दृष्टिकोण के कारण आइसबर्ग ब्रांड लोकप्रिय हो गया है। डिजाइनरों के प्रयासों को एक विविध विविध लाइनअप द्वारा दर्शाया जाता है, और प्रत्येक फैशन कलाकार आसानी से उज्ज्वल और यादगार छवियों की असीमित संख्या बना सकता है, जो उसकी व्यक्तित्व और शैली की भावना पर जोर देता है । सभी संग्रह न केवल महिलाओं के लिए, शरीर में युवा, बल्कि आत्मा में भी बनाए जाते हैं। खड़े होने और मूल होने से डरो मत! अभिनव और बोल्ड विचारों के लिए धन्यवाद, इस ब्रांड के डिजाइनरों ने सामान्य जीन्स को कला के वास्तविक काम में बदलने में कामयाब रहे। उन्होंने रंगीन प्रिंटों के साथ ऊब गए नीले डेनिम को पूरक किया, इसमें नया जीवन सांस लिया। ब्रांड की असली लोकप्रियता ने पॉप आर्ट और डिज्नी कार्टून पात्रों की शैली में एंडी वॉरहोल द्वारा पेंटिंग के टुकड़ों की छवियां लाईं। ऐसा लगता है कि इस तरह के एक असाधारण डिजाइन जींस सीमित लक्षित दर्शकों को प्रदान करता है और विशेष रूप से युवा लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है। फिर भी, मॉडल की विविधता आपको लगभग हर महिला के लिए सही विकल्प चुनने की अनुमति देती है। इसके अलावा, संगठन के नीचे और ऊपर का एक सफल संयोजन आपको न केवल चलने के लिए धनुष बनाने की अनुमति देगा, बल्कि काम करने के लिए भी वृद्धि करेगा, अगर यह सख्त ड्रेस कोड द्वारा प्रतिबंधित नहीं है। मूल डिजाइन के अलावा जीन्स आइसबर्ग, सिलाई में उपयोग की जाने वाली सामग्री और सहायक उपकरण की उच्चतम गुणवत्ता से प्रतिष्ठित हैं। वे पूरी तरह से मोजे के दौरान पूरी तरह आरामदायक महसूस करने की इजाजत देते हुए, स्त्री सिल्हूट पर जोर देते हुए आकृति पर फिट बैठते हैं।
शेफचोविच के नेतृत्व में एक ईसी प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मास्को का दौरा किया। बैठक के दौरान गाज़प्रोम के प्रमुख अलेक्सी मिलर ने यूक्रेन को दरकिनार करते हुए तुर्की के माध्यम से सभी पारगमन गैस को पुनर्निर्देशित करने के रूस के इरादे की जानकारी दी। जवाब में, यूरोपीय अधिकारी ने कहा कि उन्हें "बहुत आश्चर्य हुआ", क्योंकि उनकी राय में, "गैस के ऐसे संस्करणों की शायद जरूरत नहीं है" या तो तुर्की या दक्षिण-पूर्वी यूरोप द्वारा। "इस परियोजना के मापदंडों (तुर्की स्ट्रीम) को दिसंबर में वापस घोषित किया गया था, और शेफचोविच और मिलर के बीच बैठक में कुछ भी नया नहीं सुना गया था। दक्षिण स्ट्रीम के माध्यम से परिवहन के लिए जिन योजनाओं की योजना बनाई गई थी, अर्थात् प्रति वर्ष 63 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस, अब तुर्की के माध्यम से पुनर्निर्देशित होगी। इस अर्थ में, हमारे दृष्टिकोण में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। मार्ग बदल गया है, लेकिन यह हमारे समय पर नहीं बदला है, "कुप्रियनोव ने कहा। जैसा कि आप जानते हैं, दिसंबर में, रूसी संघ ने यूरोपीय संघ की असंवैधानिक स्थिति के कारण दक्षिण स्ट्रीम का निर्माण करने से इनकार कर दिया था। बदले में, तुर्की के लिए एक पाइप शुरू करने और वहां (ग्रीस के साथ सीमा पर) बनाने का फैसला किया गया था जो दक्षिणी यूरोप के गैस उपभोक्ताओं के लिए एक केंद्र था।
शेफचोविच के नेतृत्व में एक ईसी प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मास्को का दौरा किया। बैठक के दौरान गाज़प्रोम के प्रमुख अलेक्सी मिलर ने यूक्रेन को दरकिनार करते हुए तुर्की के माध्यम से सभी पारगमन गैस को पुनर्निर्देशित करने के रूस के इरादे की जानकारी दी। जवाब में, यूरोपीय अधिकारी ने कहा कि उन्हें "बहुत आश्चर्य हुआ", क्योंकि उनकी राय में, "गैस के ऐसे संस्करणों की शायद जरूरत नहीं है" या तो तुर्की या दक्षिण-पूर्वी यूरोप द्वारा। "इस परियोजना के मापदंडों को दिसंबर में वापस घोषित किया गया था, और शेफचोविच और मिलर के बीच बैठक में कुछ भी नया नहीं सुना गया था। दक्षिण स्ट्रीम के माध्यम से परिवहन के लिए जिन योजनाओं की योजना बनाई गई थी, अर्थात् प्रति वर्ष तिरेसठ बिलियन क्यूबिक मीटर गैस, अब तुर्की के माध्यम से पुनर्निर्देशित होगी। इस अर्थ में, हमारे दृष्टिकोण में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। मार्ग बदल गया है, लेकिन यह हमारे समय पर नहीं बदला है, "कुप्रियनोव ने कहा। जैसा कि आप जानते हैं, दिसंबर में, रूसी संघ ने यूरोपीय संघ की असंवैधानिक स्थिति के कारण दक्षिण स्ट्रीम का निर्माण करने से इनकार कर दिया था। बदले में, तुर्की के लिए एक पाइप शुरू करने और वहां बनाने का फैसला किया गया था जो दक्षिणी यूरोप के गैस उपभोक्ताओं के लिए एक केंद्र था।
इससे पहले आज, हमारे सैन्य हेलीकॉप्टर को ऑपरेशन "ओलिव ब्रांच" के दौरान हटे प्रांत में गोली मार दी गई थी। वे इसके लिए पूरा भुगतान करेंगे। - अखबार हुर्रियत ने राष्ट्रपति के हवाले से लिखा है। एर्दोगन ने चालक दल के भाग्य के बारे में कुछ नहीं कहा। अखबार अन्य विवरण भी नहीं देता है। 20 जनवरी को, तुर्की ने उत्तरी सीरिया में कुर्द इकाइयों के खिलाफ ऑपरेशन ओलिव शाखा का शुभारंभ किया। धीरे-धीरे, "कम से कम समय में" बल की कार्रवाई को पूरा करने के वादों को उन बयानों द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था जो अंकारा ने खुद को एक समय सीमा तक सीमित करने का इरादा नहीं किया था। कुल मिलाकर, अफरीन क्षेत्र में नौ तुर्की सैनिक पहले ही मर चुके हैं। रिसेप तईप एर्दोगन का दावा है कि ऑपरेशन के दौरान लगभग 800 आतंकवादी मारे गए।
इससे पहले आज, हमारे सैन्य हेलीकॉप्टर को ऑपरेशन "ओलिव ब्रांच" के दौरान हटे प्रांत में गोली मार दी गई थी। वे इसके लिए पूरा भुगतान करेंगे। - अखबार हुर्रियत ने राष्ट्रपति के हवाले से लिखा है। एर्दोगन ने चालक दल के भाग्य के बारे में कुछ नहीं कहा। अखबार अन्य विवरण भी नहीं देता है। बीस जनवरी को, तुर्की ने उत्तरी सीरिया में कुर्द इकाइयों के खिलाफ ऑपरेशन ओलिव शाखा का शुभारंभ किया। धीरे-धीरे, "कम से कम समय में" बल की कार्रवाई को पूरा करने के वादों को उन बयानों द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था जो अंकारा ने खुद को एक समय सीमा तक सीमित करने का इरादा नहीं किया था। कुल मिलाकर, अफरीन क्षेत्र में नौ तुर्की सैनिक पहले ही मर चुके हैं। रिसेप तईप एर्दोगन का दावा है कि ऑपरेशन के दौरान लगभग आठ सौ आतंकवादी मारे गए।
Tuesday August 30, 2022, ठंड का सीजन शुरू होने में अब बस महीने से डेढ़ महीने का वक्त बचा है. ठंड शुरू होते ही शुरू हो जाएगी मटर की खेती. कोई मटर के पराठे बनाएगा तो कोई मटर से तमाम तरह की सब्जियां बनाएगा. यहां ध्यान देने की बात ये है कि ये मटर होती तो सिर्फ ठंड में है, लेकिन इसकी डिमांड पूरे साल बनी रहती है. ऐसे में अगर आप चाहें तो फ्रोजन मटर का बिजनेस (Frozen Green Peas Business Idea) कर के मोटी कमाई कर सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे कर सकते हैं ये बिजनेस (How to do Frozen Green Peas Business) और कमा सकते हैं तगड़ा मुनाफा. अगर आप खुद किसान हैं तो आप अपने बिजनेस के लिए खुद ही ढेर सारी मटर उगा सकते हैं. वहीं अगर आप किसान नहीं हैं तो आप बड़ी मात्रा में मटर खरीद सकते हैं. इसके दो तरीके हैं. या तो आप किसी सब्जी मंडी से थोक में मटर खरीद लें या फिर सीधे किसानों से मटर खरीदें. सीधे किसान से मटर खरीदने में आपको एक बड़ा फायदा ये होगा कि आप क्वालिटी कंट्रोल करवा सकते हैं. फ्रोजन मटर का बिजनेस करने से पहले आपको थोड़ी मार्केट रिसर्च जरूर करनी चाहिए, ताकि ये पता चल सके कि आपके इलाके में फ्रोजन मटर की कितनी डिमांड है. इससे आपको बिजनेस करने में आसानी होगी. साथ ही इससे आपको एक सही कीमत तय करने में भी मदद मिलेगी. पहले प्रोडक्ट बनाना फिर मार्केट में उसे बेचना, इस प्रैक्टिस में अक्सर नुकसान के चांस होते हैं. ऐसे में आप चाहे तो पहले ही कुछ दुकानदारों से कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं कि आप उन्हें फ्रोजन मटर मुहैया कराएंगे. ऐसे में आपको डिमांड का पहले से पता होगा तो आप उसी हिसाब से मटर खरीद कर उसे फ्रोजन में बदल पाएंगे. सबसे पहले आपको मटर को छीलना होगा. मटर छीलने के लिए आप मजदूरों की मदद ले सकते हैं या फिर बड़े लेवल पर बिजनेस करने की सोच रहे हैं तो ये काम मशीनों से भी हो सकता है. मटर छील लेने के बाद पहले उसे करीब 90 डिग्री के तापमान तक पर गर्म किया जाता है और फिर उस मटर को गर्म पानी से निकाल कर बेहद ठंडे (3-5 डिग्री) पानी में डाल दिया जाता है. जब मटर एक झटके में बेहद गर्म वातावरण से ठंडे वातावरण में आती है तो उसमें मौजूद बेक्टीरिया मर जाते हैं. इसके बाद मटर को करीब -40 डिग्री पर रखते हैं, जिसकी वजह से वह जम जाते हैं. इसके बाद मटर के दानों को अलग-अलग पैकेट में पैक कर के बेचा जाता है. अगर आप ठंड के सीजन में ही सब्जी मंडी से थोक में या फिर सीधे किसानों से मटर खरीदते हैं तो आपको वह मटर करीब 10-15 रुपये किलो के हिसाब से मिल जाएगी. प्रति किलो मटर में करीब आधा किलो दाने निकलते हैं. यानी प्रति किलो मटर के दाने आपको 20-30 रुपये के पड़ेंगे. इसके बाद इन्हें गर्म और ठंडा करने के बाद जमाकर मार्केट में बेचा जा सकता है. दानों को छीलने के लिए अगर आप मजदूर लगाते हैं तो सिर्फ 2 मजदूर मिलकर ही दिन भर में करीब 50 किलो मटर छील देंगे, मतलब आपके पास 25 किलो के करीब दाने होंगे. मजदूरों को अगर 400-400 रुपये भी देते हैं तो आपका 800 रुपये का खर्च आएगा. अब बारी आती है इसे गर्म और ठंडा करने की, जिसमें आपकी गैस या फ्रिज के ठंडे पानी के लिए करीब 100 रुपये की बिजली लगेगी. इसके बाद आपको अपने फ्रीजर में उसे जमने के लिए रख देना होगा. जमने के बाद उसे पैकेट्स में पैक कर के बेचना होगा. पैकिंग में छोटे लेवल पर खर्च करीब 5 रुपये का आ सकता है. यानी 50 किलो मटर खरीदने से लेकर उसे पैक करने तक वह आपका करीब इतना खर्च होगा. इस तरह आपको एक किलो मटर ज्यादा से ज्यादा 80 रुपये की पड़ेगी. वहीं आप इसे 120-150 रुपये किलो के भाव में दुकानों पर बेच सकेंगे. थोक में भी आप 100-120 रुपये किलो बेच सकते हैं. वहीं रिटेल में आपको इस मटर के लिए 170-180 रुपये तक की कीमत मिल जाएगी. यानी प्रति किलो पर आपको 20 से 80 रुपये तक का मुनाफा होगा. मान लेते हैं कि आप 150 रुपये के औसत भाव से मटर दुकानों पर बेच देते हैं तो आपको प्रति किलो 70 रुपये का मुनाफा होगा. मतलब आपको लागत से करीब दोगुना दाम मिलेगा. हालांकि, इस पूरे मामले में आपको डीप फ्रीजर, मटर को गर्म करने के लिए गैस चूल्हा या दूसरी कोई व्यवस्था और कुछ अन्य छोटी-मोटी चीजों के लिए कुछ खर्च करना होगा, लेकिन वह सिर्फ एक बार का खर्च होगा.
Tuesday August तीस, दो हज़ार बाईस, ठंड का सीजन शुरू होने में अब बस महीने से डेढ़ महीने का वक्त बचा है. ठंड शुरू होते ही शुरू हो जाएगी मटर की खेती. कोई मटर के पराठे बनाएगा तो कोई मटर से तमाम तरह की सब्जियां बनाएगा. यहां ध्यान देने की बात ये है कि ये मटर होती तो सिर्फ ठंड में है, लेकिन इसकी डिमांड पूरे साल बनी रहती है. ऐसे में अगर आप चाहें तो फ्रोजन मटर का बिजनेस कर के मोटी कमाई कर सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे कर सकते हैं ये बिजनेस और कमा सकते हैं तगड़ा मुनाफा. अगर आप खुद किसान हैं तो आप अपने बिजनेस के लिए खुद ही ढेर सारी मटर उगा सकते हैं. वहीं अगर आप किसान नहीं हैं तो आप बड़ी मात्रा में मटर खरीद सकते हैं. इसके दो तरीके हैं. या तो आप किसी सब्जी मंडी से थोक में मटर खरीद लें या फिर सीधे किसानों से मटर खरीदें. सीधे किसान से मटर खरीदने में आपको एक बड़ा फायदा ये होगा कि आप क्वालिटी कंट्रोल करवा सकते हैं. फ्रोजन मटर का बिजनेस करने से पहले आपको थोड़ी मार्केट रिसर्च जरूर करनी चाहिए, ताकि ये पता चल सके कि आपके इलाके में फ्रोजन मटर की कितनी डिमांड है. इससे आपको बिजनेस करने में आसानी होगी. साथ ही इससे आपको एक सही कीमत तय करने में भी मदद मिलेगी. पहले प्रोडक्ट बनाना फिर मार्केट में उसे बेचना, इस प्रैक्टिस में अक्सर नुकसान के चांस होते हैं. ऐसे में आप चाहे तो पहले ही कुछ दुकानदारों से कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं कि आप उन्हें फ्रोजन मटर मुहैया कराएंगे. ऐसे में आपको डिमांड का पहले से पता होगा तो आप उसी हिसाब से मटर खरीद कर उसे फ्रोजन में बदल पाएंगे. सबसे पहले आपको मटर को छीलना होगा. मटर छीलने के लिए आप मजदूरों की मदद ले सकते हैं या फिर बड़े लेवल पर बिजनेस करने की सोच रहे हैं तो ये काम मशीनों से भी हो सकता है. मटर छील लेने के बाद पहले उसे करीब नब्बे डिग्री के तापमान तक पर गर्म किया जाता है और फिर उस मटर को गर्म पानी से निकाल कर बेहद ठंडे पानी में डाल दिया जाता है. जब मटर एक झटके में बेहद गर्म वातावरण से ठंडे वातावरण में आती है तो उसमें मौजूद बेक्टीरिया मर जाते हैं. इसके बाद मटर को करीब -चालीस डिग्री पर रखते हैं, जिसकी वजह से वह जम जाते हैं. इसके बाद मटर के दानों को अलग-अलग पैकेट में पैक कर के बेचा जाता है. अगर आप ठंड के सीजन में ही सब्जी मंडी से थोक में या फिर सीधे किसानों से मटर खरीदते हैं तो आपको वह मटर करीब दस-पंद्रह रुपयापये किलो के हिसाब से मिल जाएगी. प्रति किलो मटर में करीब आधा किलो दाने निकलते हैं. यानी प्रति किलो मटर के दाने आपको बीस-तीस रुपयापये के पड़ेंगे. इसके बाद इन्हें गर्म और ठंडा करने के बाद जमाकर मार्केट में बेचा जा सकता है. दानों को छीलने के लिए अगर आप मजदूर लगाते हैं तो सिर्फ दो मजदूर मिलकर ही दिन भर में करीब पचास किलो मटर छील देंगे, मतलब आपके पास पच्चीस किलो के करीब दाने होंगे. मजदूरों को अगर चार सौ-चार सौ रुपयापये भी देते हैं तो आपका आठ सौ रुपयापये का खर्च आएगा. अब बारी आती है इसे गर्म और ठंडा करने की, जिसमें आपकी गैस या फ्रिज के ठंडे पानी के लिए करीब एक सौ रुपयापये की बिजली लगेगी. इसके बाद आपको अपने फ्रीजर में उसे जमने के लिए रख देना होगा. जमने के बाद उसे पैकेट्स में पैक कर के बेचना होगा. पैकिंग में छोटे लेवल पर खर्च करीब पाँच रुपयापये का आ सकता है. यानी पचास किलो मटर खरीदने से लेकर उसे पैक करने तक वह आपका करीब इतना खर्च होगा. इस तरह आपको एक किलो मटर ज्यादा से ज्यादा अस्सी रुपयापये की पड़ेगी. वहीं आप इसे एक सौ बीस-एक सौ पचास रुपयापये किलो के भाव में दुकानों पर बेच सकेंगे. थोक में भी आप एक सौ-एक सौ बीस रुपयापये किलो बेच सकते हैं. वहीं रिटेल में आपको इस मटर के लिए एक सौ सत्तर-एक सौ अस्सी रुपयापये तक की कीमत मिल जाएगी. यानी प्रति किलो पर आपको बीस से अस्सी रुपयापये तक का मुनाफा होगा. मान लेते हैं कि आप एक सौ पचास रुपयापये के औसत भाव से मटर दुकानों पर बेच देते हैं तो आपको प्रति किलो सत्तर रुपयापये का मुनाफा होगा. मतलब आपको लागत से करीब दोगुना दाम मिलेगा. हालांकि, इस पूरे मामले में आपको डीप फ्रीजर, मटर को गर्म करने के लिए गैस चूल्हा या दूसरी कोई व्यवस्था और कुछ अन्य छोटी-मोटी चीजों के लिए कुछ खर्च करना होगा, लेकिन वह सिर्फ एक बार का खर्च होगा.
नई दिल्ली। देश के अधिकांश हिस्सों में अब तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। इससे सर्दी में कमी देखने को मिल रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस साल मार्च से मई तक काफी लू चलने के आसार हैं। आईएमडी के अनुसार मंगलवार रात से पश्चिमी विक्षोभ उत्पन्न हो रहा है। इसके कारण उत्तर के अधिकांश हिस्सों में बारिश और बर्फबारी देखने को मिलेगी। आईएमडी के अनुसार पहाड़ी राज्यों में बारिश और बर्फबारी के आसार बनने का कारण एक बार फिर से पश्चिमी विक्षोभ है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम करवट ले रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक इस पश्चिमी विक्षोभ का असर 2 मार्च की रात से हिमालयी क्षेत्र में दिखना शुरू हो जाएगा। इसके कारण 3 और 4 मार्च को भी जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख और गिलगित, बाल्टिस्तान व मुजफ्फराबाद में बारिश व बर्फबारी संभव है। आईएमडी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में मार्च से मई तक लू चलने और दिन और रात के तापमान के सामान्य से अधिक रहने के आसार हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में तापमान सामान्य से 0. 5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक होने की 60 प्रतिशत संभावना है। आज का मौसमः आज जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में और उत्तराखंड में 1 या 2 स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और हिमपात के साथ एक या दो स्थानों पर भारी बारिश और हिमपात संभव है। दक्षिण तमिलनाडु, केरल, लक्षद्वीप, असम, अरुणाचल प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी हिस्सों में हल्की बारिश संभव है। उत्तर-पश्चिमी उत्तरप्रदेश और पंजाब के उत्तरी भागों में एक-दो स्थानों पर गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। अगले 48 घंटों के दौरान उत्तर पश्चिमी भारत में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आ सकती है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान 14. 1 डिग्री दर्ज : राष्ट्रीय राजधानी में गुरुवार की सुबह न्यूनतम तापमान 14. 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1 डिग्री अधिक है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। आईएमडी के मुताबिक दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में सुबह 9 बजे समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। मालूम हो कि शून्य से 50 के बीच एक्यूआई 'अच्छा', 51 से 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच 'मध्यम', 201 से 300 के बीच 'खराब', 301 से 400 के बीच 'बेहद खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' माना जाता है। आईएमडी के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में सुबह साढ़े आठ बजे सापेक्षिक आर्द्रता 89 फीसदी दर्ज की गई। (भाषा)
नई दिल्ली। देश के अधिकांश हिस्सों में अब तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। इससे सर्दी में कमी देखने को मिल रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार इस साल मार्च से मई तक काफी लू चलने के आसार हैं। आईएमडी के अनुसार मंगलवार रात से पश्चिमी विक्षोभ उत्पन्न हो रहा है। इसके कारण उत्तर के अधिकांश हिस्सों में बारिश और बर्फबारी देखने को मिलेगी। आईएमडी के अनुसार पहाड़ी राज्यों में बारिश और बर्फबारी के आसार बनने का कारण एक बार फिर से पश्चिमी विक्षोभ है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम करवट ले रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक इस पश्चिमी विक्षोभ का असर दो मार्च की रात से हिमालयी क्षेत्र में दिखना शुरू हो जाएगा। इसके कारण तीन और चार मार्च को भी जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख और गिलगित, बाल्टिस्तान व मुजफ्फराबाद में बारिश व बर्फबारी संभव है। आईएमडी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में मार्च से मई तक लू चलने और दिन और रात के तापमान के सामान्य से अधिक रहने के आसार हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में तापमान सामान्य से शून्य. पाँच डिग्री सेल्सियस तक अधिक होने की साठ प्रतिशत संभावना है। आज का मौसमः आज जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में और उत्तराखंड में एक या दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और हिमपात के साथ एक या दो स्थानों पर भारी बारिश और हिमपात संभव है। दक्षिण तमिलनाडु, केरल, लक्षद्वीप, असम, अरुणाचल प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी हिस्सों में हल्की बारिश संभव है। उत्तर-पश्चिमी उत्तरप्रदेश और पंजाब के उत्तरी भागों में एक-दो स्थानों पर गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। अगले अड़तालीस घंटाटों के दौरान उत्तर पश्चिमी भारत में न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट आ सकती है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान चौदह. एक डिग्री दर्ज : राष्ट्रीय राजधानी में गुरुवार की सुबह न्यूनतम तापमान चौदह. एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी। आईएमडी के मुताबिक दिल्ली में अधिकतम तापमान बत्तीस डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में सुबह नौ बजे समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक दो सौ एक दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। मालूम हो कि शून्य से पचास के बीच एक्यूआई 'अच्छा', इक्यावन से एक सौ के बीच 'संतोषजनक', एक सौ एक से दो सौ के बीच 'मध्यम', दो सौ एक से तीन सौ के बीच 'खराब', तीन सौ एक से चार सौ के बीच 'बेहद खराब' और चार सौ एक से पाँच सौ के बीच 'गंभीर' माना जाता है। आईएमडी के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में सुबह साढ़े आठ बजे सापेक्षिक आर्द्रता नवासी फीसदी दर्ज की गई।
द वायर बुलेटिनः आज की ज़रूरी ख़बरों का अपडेट. भाजपा ने होशियारपुर के पूर्व सांसद विजय सांपला को फगवाड़ा से टिकट दिया है. सांपला फरवरी 2021 से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष हैं, जिसके चलते उनकी उम्मीदवारी सवालों के घेरे में है. पार्टी ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा को भी रूपनगर सीट से उम्मीदवार बनाया है. राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि 1952 का पहला आम चुनाव समावेशी विकास, रोज़गार पर लड़ा गया था, लेकिन 70 साल बाद हम किस पर चुनाव लड़ रहे हैं? जिन्ना कहीं भी होंगे, सोच रहे होंगे कि जो जीते-जीते मैंने नहीं पाया, वो भाजपा वालों ने मुझे मरने के बाद दे दिया. झा ने रोज़गार मांगने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्यवाही को लेकर केंद्र की आलोचना भी की. यूपी में एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी के काफ़िले पर गोली चलाने के आरोपी सचिन पंडित का फेसबुक प्रोफाइल न केवल उसके कट्टरपंथी विचारों, बल्कि यूपी के प्रमुख भाजपा नेताओं से उनकी निकटता भी दिखाती है. पूर्व केंद्रीय मंत्रियों से लेकर पूर्व पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के साथ उसके फोटो सामने आए हैं. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव प्रचार में जहां भाजपा, सपा-रालोद और कांग्रेस लगातार मैदान में दिखाई दे रहे हैं, वहीं बसपा सुर्ख़ियों से ग़ायब-सी है. मणिपुर के एक एनजीओ अपुनबा इमागी मचासिंग का कहना है कि स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के सभी कर्मचारी अनुबंध के तहत काम कर रहे हैं जबकि कुछ की भर्तियां डेप्युटेशन के आधार पर की गई हैं. एनजीओ ने यूनिवर्सिटी की दयनीय स्थिति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भी भेजा है. द कश्मीर वाला न्यूज़ पोर्टल के संपादक फहद शाह को गिरफ़्तार करते हुए जम्मू कश्मीर पुलिस ने आरोप लगाया कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट 'आतंकी गतिविधियों का महिमामंडन' करते हैं और देश के ख़िलाफ़ 'दुर्भावना व अंसतोष' फैलाते हैं. पत्रकार संगठनों ने इसकी निंदा करते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को लोकसभा में पीठासीन अधिकारी रमा देवी द्वारा उन्हें भाषण पूरा करने के लिए तय समय न देने और उन्हें बीच में रोकने का आरोप लगाया था. अब महुआ का नाम लिए बिना लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि पीठासीन अध्यक्ष पर सदन के बाहर टिप्पणी करना सही नहीं है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह के इस बयान पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि क्या केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का यह नया पैंतरा है. पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि अपशब्द कहे, अपमानित किया, लाठियां बरसाईं, कीलें बिछवाईं, सड़कें खुदवाईं, किसान नहीं झुके तो साजिशें कीं! फिर थक हारकर 'काले क़ानून' वापस लिए. चुनाव हारने का डर है, तो अब एक और पैंतरा?
द वायर बुलेटिनः आज की ज़रूरी ख़बरों का अपडेट. भाजपा ने होशियारपुर के पूर्व सांसद विजय सांपला को फगवाड़ा से टिकट दिया है. सांपला फरवरी दो हज़ार इक्कीस से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष हैं, जिसके चलते उनकी उम्मीदवारी सवालों के घेरे में है. पार्टी ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा को भी रूपनगर सीट से उम्मीदवार बनाया है. राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ बावन का पहला आम चुनाव समावेशी विकास, रोज़गार पर लड़ा गया था, लेकिन सत्तर साल बाद हम किस पर चुनाव लड़ रहे हैं? जिन्ना कहीं भी होंगे, सोच रहे होंगे कि जो जीते-जीते मैंने नहीं पाया, वो भाजपा वालों ने मुझे मरने के बाद दे दिया. झा ने रोज़गार मांगने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्यवाही को लेकर केंद्र की आलोचना भी की. यूपी में एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी के काफ़िले पर गोली चलाने के आरोपी सचिन पंडित का फेसबुक प्रोफाइल न केवल उसके कट्टरपंथी विचारों, बल्कि यूपी के प्रमुख भाजपा नेताओं से उनकी निकटता भी दिखाती है. पूर्व केंद्रीय मंत्रियों से लेकर पूर्व पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के साथ उसके फोटो सामने आए हैं. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव प्रचार में जहां भाजपा, सपा-रालोद और कांग्रेस लगातार मैदान में दिखाई दे रहे हैं, वहीं बसपा सुर्ख़ियों से ग़ायब-सी है. मणिपुर के एक एनजीओ अपुनबा इमागी मचासिंग का कहना है कि स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के सभी कर्मचारी अनुबंध के तहत काम कर रहे हैं जबकि कुछ की भर्तियां डेप्युटेशन के आधार पर की गई हैं. एनजीओ ने यूनिवर्सिटी की दयनीय स्थिति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भी भेजा है. द कश्मीर वाला न्यूज़ पोर्टल के संपादक फहद शाह को गिरफ़्तार करते हुए जम्मू कश्मीर पुलिस ने आरोप लगाया कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट 'आतंकी गतिविधियों का महिमामंडन' करते हैं और देश के ख़िलाफ़ 'दुर्भावना व अंसतोष' फैलाते हैं. पत्रकार संगठनों ने इसकी निंदा करते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को लोकसभा में पीठासीन अधिकारी रमा देवी द्वारा उन्हें भाषण पूरा करने के लिए तय समय न देने और उन्हें बीच में रोकने का आरोप लगाया था. अब महुआ का नाम लिए बिना लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि पीठासीन अध्यक्ष पर सदन के बाहर टिप्पणी करना सही नहीं है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह के इस बयान पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि क्या केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का यह नया पैंतरा है. पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि अपशब्द कहे, अपमानित किया, लाठियां बरसाईं, कीलें बिछवाईं, सड़कें खुदवाईं, किसान नहीं झुके तो साजिशें कीं! फिर थक हारकर 'काले क़ानून' वापस लिए. चुनाव हारने का डर है, तो अब एक और पैंतरा?
टोरंटो। भारत के खिलाफ खालिस्तानी खतरा लगातार जारी है। कनाडा में भारत विरोधी तत्वों ने हाल ही में कायरता के प्रदर्शन में महात्मा गांधी की एक प्रतिमा को विरूपित कर दिया। डेली हंट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना गुरुवार तड़के ओंटारियो के हैमिल्टन शहर में सिटी हॉल के पास की बताई जा रही है, जहां भारत सरकार के द्वारा उपहार में दी गई प्रतिमा स्थित है। एक वीडियो के अनुसार, छह फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा से एक खालिस्तानी झंडा भी जुड़ा हुआ पाया गया, जिस पर महात्मा गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देने वाले पेंट और चित्रों से सराबोर कर दिया गया था। हैमिल्टन पुलिस ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खालिस्तानी समर्थकों द्वारा भारतीय प्रतिष्ठानों और मंदिरों पर हमले उत्तर अमेरिकी राष्ट्र में बढ़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 से पूरे कनाडा में हिंदू मंदिरों पर हमलों की एक श्रृंखला शुरू हो गई है, जिसमें बर्बरता, द्वेषपूर्ण भित्तिचित्र (हाथ से बनी पेंटिंग), सेंधमारी की करीब आधा दर्जन घटनाएं हुई हैं। इस साल जनवरी में, ब्रैम्पटन में गौरी शंकर मंदिर को निशााना बनाया गया था। मंदिर की दीवारों पर 'खालिस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान मुदार्बाद' के नारे हाथ से लिखे गए थे। इसके बाद फरवरी में मिसिसॉगा में राम मंदिर को निशाना बनाया गया था। इसके अलावा बीते साल भी मंदिरों को निशाना बनाया गया था। भारतीय मूल के सांसद चंद्र आर्य ने हाल ही में ओटावा सरकार से मामले को 'गंभीरता' से लेने का आह्वान किया था। आर्य ने कहा था कि ब्रैम्पटन में गौरी शंकर मंदिर पर हमला कनाडा में हिंदू विरोधी और भारत विरोधी समूहों द्वारा हिंदू मंदिरों पर किए गए हमलों में नवीनतम है। सोशल मीडिया पर नफरत से अब हिंदू मंदिरों पर हमले, आगे क्या? आगे कहा कि मैं इसे गंभीरता से लेना शुरू करने के लिए कनाडा में सरकार के स्तर पर आह्वान करता हूं।
टोरंटो। भारत के खिलाफ खालिस्तानी खतरा लगातार जारी है। कनाडा में भारत विरोधी तत्वों ने हाल ही में कायरता के प्रदर्शन में महात्मा गांधी की एक प्रतिमा को विरूपित कर दिया। डेली हंट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना गुरुवार तड़के ओंटारियो के हैमिल्टन शहर में सिटी हॉल के पास की बताई जा रही है, जहां भारत सरकार के द्वारा उपहार में दी गई प्रतिमा स्थित है। एक वीडियो के अनुसार, छह फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा से एक खालिस्तानी झंडा भी जुड़ा हुआ पाया गया, जिस पर महात्मा गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देने वाले पेंट और चित्रों से सराबोर कर दिया गया था। हैमिल्टन पुलिस ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खालिस्तानी समर्थकों द्वारा भारतीय प्रतिष्ठानों और मंदिरों पर हमले उत्तर अमेरिकी राष्ट्र में बढ़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साल दो हज़ार तेईस से पूरे कनाडा में हिंदू मंदिरों पर हमलों की एक श्रृंखला शुरू हो गई है, जिसमें बर्बरता, द्वेषपूर्ण भित्तिचित्र , सेंधमारी की करीब आधा दर्जन घटनाएं हुई हैं। इस साल जनवरी में, ब्रैम्पटन में गौरी शंकर मंदिर को निशााना बनाया गया था। मंदिर की दीवारों पर 'खालिस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान मुदार्बाद' के नारे हाथ से लिखे गए थे। इसके बाद फरवरी में मिसिसॉगा में राम मंदिर को निशाना बनाया गया था। इसके अलावा बीते साल भी मंदिरों को निशाना बनाया गया था। भारतीय मूल के सांसद चंद्र आर्य ने हाल ही में ओटावा सरकार से मामले को 'गंभीरता' से लेने का आह्वान किया था। आर्य ने कहा था कि ब्रैम्पटन में गौरी शंकर मंदिर पर हमला कनाडा में हिंदू विरोधी और भारत विरोधी समूहों द्वारा हिंदू मंदिरों पर किए गए हमलों में नवीनतम है। सोशल मीडिया पर नफरत से अब हिंदू मंदिरों पर हमले, आगे क्या? आगे कहा कि मैं इसे गंभीरता से लेना शुरू करने के लिए कनाडा में सरकार के स्तर पर आह्वान करता हूं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
BANKA: बड़ी खबर बांका से आ रही है, जहां भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। घटना रजौन थाना क्षेत्र के भागलपुर-हंसडीहा मुख्य मार्ग पर बनगांवा गांव के पास की है। यहां तेज गति से आ रही ट्रक ने एक कार में जोरदार टक्कर मार दी। जिससे एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई जबकि इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि पांच लोग कार पर सवार होकर कही जा रहे थे। जैसे ही कार बनगांव के पास पहुंची तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। जिससे कार के परखचे उड़ गए। स्थानीय लोग कार सवार लोगों को बचाने के लिए दौड़े हालांकि तबतक एक महिला की मौत हो चुकी थी। आनन-फानन में सभी को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई जबकि दो की हालत नाजुक बनी हुई है।
BANKA: बड़ी खबर बांका से आ रही है, जहां भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। घटना रजौन थाना क्षेत्र के भागलपुर-हंसडीहा मुख्य मार्ग पर बनगांवा गांव के पास की है। यहां तेज गति से आ रही ट्रक ने एक कार में जोरदार टक्कर मार दी। जिससे एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई जबकि इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि पांच लोग कार पर सवार होकर कही जा रहे थे। जैसे ही कार बनगांव के पास पहुंची तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। जिससे कार के परखचे उड़ गए। स्थानीय लोग कार सवार लोगों को बचाने के लिए दौड़े हालांकि तबतक एक महिला की मौत हो चुकी थी। आनन-फानन में सभी को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई जबकि दो की हालत नाजुक बनी हुई है।
राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में रोडवेज बस स्टैंड बनाये जाने की सुगबुगाहट से नाराज राणा थारु परिषद के कार्यकर्ताओं ने तहसील में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बाद तहसीलदार खीम सिंह बिष्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजकर विद्यालय में बस अड्डा न बनाये जाने की मांग की। सोमवार को राणा थारु परिषद अध्यक्ष गोपाल सिंह राणा चांदा के नेतृत्व में क्षेत्र के जनजाति समुदाय के लोग तहसील पहुंचे। उन्होंने कहा कि राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में रोडवेज बस स्टैंड बनाये जाने का पुरजोर विरोध किया जाएगा। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि विद्यालय में रोडवेज बस स्टैंड बनाये जाने पर जनजाति समुदाय सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा। परिषद सदस्यों ने कहा कि स्थानीय आश्रम पद्धति विद्यालय में क्षेत्र के जनजाति समुदाय के गरीब छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। राज्य सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधि साजिश के तहत विद्यालय के स्थान पर बस स्टैंड बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय के स्थान पर बस स्टैंड बनाये जाने से विद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। थारु समुदाय के लोगों ने कहा कि आश्रम पद्धति विद्यालय से छेड़खानी की गई तो वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे और सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान रमेश राणा, रविन्द्र राणा, पूनम राणा, बीना राणा, शीशराम राणा, लबरु सिंह राणा, कमल राणा, अरविंद राणा, राजवीर, अनुज राणा आदि मौजूद रहे।
राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में रोडवेज बस स्टैंड बनाये जाने की सुगबुगाहट से नाराज राणा थारु परिषद के कार्यकर्ताओं ने तहसील में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बाद तहसीलदार खीम सिंह बिष्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजकर विद्यालय में बस अड्डा न बनाये जाने की मांग की। सोमवार को राणा थारु परिषद अध्यक्ष गोपाल सिंह राणा चांदा के नेतृत्व में क्षेत्र के जनजाति समुदाय के लोग तहसील पहुंचे। उन्होंने कहा कि राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में रोडवेज बस स्टैंड बनाये जाने का पुरजोर विरोध किया जाएगा। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि विद्यालय में रोडवेज बस स्टैंड बनाये जाने पर जनजाति समुदाय सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा। परिषद सदस्यों ने कहा कि स्थानीय आश्रम पद्धति विद्यालय में क्षेत्र के जनजाति समुदाय के गरीब छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। राज्य सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधि साजिश के तहत विद्यालय के स्थान पर बस स्टैंड बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय के स्थान पर बस स्टैंड बनाये जाने से विद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। थारु समुदाय के लोगों ने कहा कि आश्रम पद्धति विद्यालय से छेड़खानी की गई तो वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे और सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान रमेश राणा, रविन्द्र राणा, पूनम राणा, बीना राणा, शीशराम राणा, लबरु सिंह राणा, कमल राणा, अरविंद राणा, राजवीर, अनुज राणा आदि मौजूद रहे।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। 2018 काउंटी चैम्पियनशिप, 2018 स्पेससेवर काउंटी चैंपियनशिप के रूप में प्रायोजक के कारण के लिए जाना जाता है, 119 वीं क्रिकेट काउंटी चैम्पियनशिप सीजन है। 2017 में, डिवीजन वन में आठ टीमों और डिवीजन टू की दस टीमें थीं, जिसमें दो टीमों को गठबंधन किया गया और सीजन के अंत में दो पदोन्नति हुई। मैचों का पहला दौर 13 अप्रैल को शुरू हुआ और 27 सितंबर को होने वाले मैच का अंतिम दौर समाप्त हो गया है। चैम्पियनशिप के अधिकतर मैच को दिन के मैचों के रूप में खेला जाएगा, हालांकि प्रत्येक टीम सीज़न के दौरान कुछ बिंदु पर एक दिवसीय-रात्रि मैच खेलेंगे। . शॉन एडवर्ड मार्श (जन्म 9 जुलाई 1 9 83) एक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर है जो ऑस्ट्रेलियाई घरेलू क्रिकेट में पश्चिमी योद्धाओं के लिए खेलते हैं और टेस्ट, एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय और ट्वेंटी -20 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करते हैं। एसओएस ("एसोसिएशन" का बेटा), वह एक बाएं हाथ के उद्घाटन के बल्लेबाज और बहुत ही कभार स्पिन गेंदबाज हैं। . काउंटी चैम्पियनशिप 2018 और शान मार्श आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): नाबाद, प्रथम श्रेणी क्रिकेट। क्रिकेट में एक बल्लेबाज नाबाद (not out) कहलाता है यदि वह पारी की समाप्ति तक बल्लेबाज़ी करता है। श्रेणीःक्रिकेट शब्दावली. प्रथम श्रेणी क्रिकेट तीन अथवा अधिक दिन का परिमित अवधि का क्रिकेट का एक प्रारूप है जिसमें दोनों टीमों के ग्यारह-ग्यारह खिलाड़ी खेलते हैं। इसमें दोनों टीमें पूर्ण पारियाँ खेलती हैं जबकी अभ्यास मैच में केवल एक पारी अथवा इच्छानुसार कम अधिक किया जा सकता है और इस प्रकार यह अभ्यास मैच से अलग है। टेस्ट क्रिकेट इसी का एक उच्चतम गुणवता वाला खेल है, यद्दपि प्रथम श्रेणी शब्द का उपयोग इसके घरेलू प्रतियोगिता होने की ओर इंगित करता है। . काउंटी चैम्पियनशिप 2018 84 संबंध है और शान मार्श 12 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 2.08% है = 2 / (84 + 12)। यह लेख काउंटी चैम्पियनशिप 2018 और शान मार्श के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। दो हज़ार अट्ठारह काउंटी चैम्पियनशिप, दो हज़ार अट्ठारह स्पेससेवर काउंटी चैंपियनशिप के रूप में प्रायोजक के कारण के लिए जाना जाता है, एक सौ उन्नीस वीं क्रिकेट काउंटी चैम्पियनशिप सीजन है। दो हज़ार सत्रह में, डिवीजन वन में आठ टीमों और डिवीजन टू की दस टीमें थीं, जिसमें दो टीमों को गठबंधन किया गया और सीजन के अंत में दो पदोन्नति हुई। मैचों का पहला दौर तेरह अप्रैल को शुरू हुआ और सत्ताईस सितंबर को होने वाले मैच का अंतिम दौर समाप्त हो गया है। चैम्पियनशिप के अधिकतर मैच को दिन के मैचों के रूप में खेला जाएगा, हालांकि प्रत्येक टीम सीज़न के दौरान कुछ बिंदु पर एक दिवसीय-रात्रि मैच खेलेंगे। . शॉन एडवर्ड मार्श एक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर है जो ऑस्ट्रेलियाई घरेलू क्रिकेट में पश्चिमी योद्धाओं के लिए खेलते हैं और टेस्ट, एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय और ट्वेंटी -बीस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करते हैं। एसओएस , वह एक बाएं हाथ के उद्घाटन के बल्लेबाज और बहुत ही कभार स्पिन गेंदबाज हैं। . काउंटी चैम्पियनशिप दो हज़ार अट्ठारह और शान मार्श आम में दो बातें हैं : नाबाद, प्रथम श्रेणी क्रिकेट। क्रिकेट में एक बल्लेबाज नाबाद कहलाता है यदि वह पारी की समाप्ति तक बल्लेबाज़ी करता है। श्रेणीःक्रिकेट शब्दावली. प्रथम श्रेणी क्रिकेट तीन अथवा अधिक दिन का परिमित अवधि का क्रिकेट का एक प्रारूप है जिसमें दोनों टीमों के ग्यारह-ग्यारह खिलाड़ी खेलते हैं। इसमें दोनों टीमें पूर्ण पारियाँ खेलती हैं जबकी अभ्यास मैच में केवल एक पारी अथवा इच्छानुसार कम अधिक किया जा सकता है और इस प्रकार यह अभ्यास मैच से अलग है। टेस्ट क्रिकेट इसी का एक उच्चतम गुणवता वाला खेल है, यद्दपि प्रथम श्रेणी शब्द का उपयोग इसके घरेलू प्रतियोगिता होने की ओर इंगित करता है। . काउंटी चैम्पियनशिप दो हज़ार अट्ठारह चौरासी संबंध है और शान मार्श बारह है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक दो.आठ% है = दो / । यह लेख काउंटी चैम्पियनशिप दो हज़ार अट्ठारह और शान मार्श के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
स्मैकडाउन लाइव में एजे स्टाइल्स को हराकर WWE चैंपियन बन चुके डेनियल ब्रायन अब सर्वाइवर सीरीज में ब्रॉक लैसनर के साथ चैंपियन बनाम चैंपियन मुकाबले में शामिल होंगे। सर्वाइवर सीरीज को शुरू होने में अब बस कुछ घंटों का ही समय बाकी रह गया है। ऐसे में फैंस का इस पीपीवी के लिए बेताब होना आम बात है। इस साल सर्वाइवर सीरीज़ 2018 18 नवंबर (भारत में 19 नवंबर) को लॉस एंजलिस के स्टेपल्स सैंटर से लाइव होगी। कंपनी ने इस पीपीवी के लिए दो चार नहीं बल्कि कई बड़े मुकाबले बुक किए है। उनमें से एक बड़ा मुकाबला डेनियल ब्रायन बनाम ब्रॉक लैसनर के बीच होने वाला है। पीपीवी के समय नजदीक आते ही यही सही समय होता है जब हम पीपीवी के तमाम पहलुओं पर नज़र डालें। डेनियल ब्रायन बनाम ब्रॉक लैसनर के मुकाबले में जीत किसकी होगी ये कहना तो थोड़ा मुश्किल है लेकिन कई फैंस यहां पर डेनियल ब्रायन को जीतते हुए देखना चाहते हैं। इसी कड़ी में आइए एक नज़र डालते हैं उन 5 तरीकों पर जिनसे डेनियल ब्रायन सर्वाइवर सीरीज में ब्रॉक लैसनर को हरा सकते हैं। पिछले एक साल से भी ज्यादा समय तक WWE चैंपियन रहने वाले एजे स्टाइल्स निश्चित रूप से स्मैकडाउन लाइव के टॉप सुपरस्टार हैं। डेनियल ब्रायन के हाथों टाइटल गंवाने के बाद वह सर्वाइवर सीरीज के मैच कार्ड से बाहर हो गए हैं। लेकिन WWE के पास उन्हें बुक करने का अच्छा मौका है। WWE एजे स्टाइल्स को सर्वाइवर सीरीज में ब्रॉक लैसनर को हराने के लिए डेनियल ब्रायन की मदद करने के लिए शामिल कर सकती है। इससे ना केवल डेनियल ब्रायन और एजे स्टाइल्स को फायदा होगा बल्कि यह स्मैकडाउन लाइव के नज़रिए से भी बेहतर होगा। एक फैन होने के नाते हम एजे स्टाइल्स को इस मुकाबले में डेनियल ब्रायन की मदद करते देखना चाहेंगे। यह शायद बताने की जरूरत नहीं है कि डेनियल ब्रायन रिंग में अपने मूव्स को किस तरह से यूज करते हैं। प्रोफेशनल रैसलिंग के सबसे शानदार परफॉर्मर के रूप में डेनियल ब्रायन अपने मूव्स को शानदार तरीके से करने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन डेनियल ब्रायन को द बीस्ट यानी ब्रॉक लैसनर के हराने के लिए कुछ अलग करना पड़ेगा। डेनियल ब्रायन के पास लो ब्लो यूज करने का विकल्प मौजूद है। वह चाहे तो लैसनर पर लो ब्लो यूज कर उन्हें रिंग में मात दे सकते हैं। ब्रॉक लैसनर भले ही द बीस्ट हो लेकिन लो ब्लो के बाद शायद ही वह इस मुकाबले में वापसी कर पाएं। लो ब्लो लगने के बाद किसी भी इंसान के लिए मुसीबत बढ़ जाती है। ऐसे में ब्रॉक लैसनर के भी लिए लो ब्लो से बच पाना काफी मुश्किल है। स्मैकडाउन लाइव के 1000वें एपिसोड में एवोल्यूशन की वापसी देखने को मिली थी, जहां ट्रिपल एच के साथ रिक फ्लेयर, रैंडी ऑर्टन और बतिस्ता नज़र आए थे। इस सैगमेंट के दौरान बतिस्ता और ट्रिपल एच के बीच थोड़ी गहमागहमी देखने को मिली, जिसके बाद रैसलमेनिया 35 में उनके मुकाबले की अफवाह उड़ने लगी। हालांकि ट्रिपल एच की चोट के चलते इस मुकाबले की संभावना कम हो गई है। लेकिन अगर बतिस्ता रैसलमेनिया 35 में आते हैं तो उनके लिए यूनिवर्सल चैंपियन ब्रॉक लैसनर से अच्छा प्रतिद्वंदी नहीं हो सकता है। WWE को चाहिए कि वह सर्वाइवर सीरीज में बतिस्ता का डेनियल ब्रायन बनाम ब्रॉक लैसनर के मुकाबले में दखल कराए। बतिस्ता के दखल से ना केवल डेनियल ब्रायन की जीत होगी बल्कि रैसलमेनिया 35 के लिए बतिस्ता बनाम ब्रॉक लैसनर के बीच मुकाबला बुक करने की शुरूआत हो सकती है। सर्वाइवर सीरीज से पहले हुए स्मैकडाउन लाइव के एपिसोड में पॉल हेमन नज़र आए थे जो फैंस के लिए काफी हैरानी की बात थी। स्मैकडाउन लाइव के इस एपिसोड में रॉ टीम ने स्मैकडाउन पर हमला तो नहीं किया लेकिन पॉल हेमन ने अपनी एंट्री से सभी फैंस को हैरान जरूर कर दिया था। अगर आपने ध्यान दिया हो तो पॉल हेमन ने एजे स्टाइल्स को शानदार परफॉर्मर बताया लेकिन डेनियल ब्रायन को नंबर वन बताया। पॉल हेमन की इस बात से अफवाहें यह चलनी शुरू हो गई हैं कि क्या पॉल हेमन अपने अगले क्लाइंट के रूप में डेनियल ब्रायन को चाहते हैं? पिछले काफी समय से हम देख रहे हैं कि ब्रॉक लैसनर एक मैनेजर के रूप में पॉल हेमन की वैल्यू पर ज्यादा प्रभाव नहीं डाल रहे हैं। ऐसे में वह सर्वाइवर सीरीज में ब्रॉक लैसनर के खिलाफ जाकर डेनियल ब्रायन को जीत हासिल करने में मदद कर सकते हैं। WWE के बड़े पीपीवी के दौरान अक्सर हमें NXT से नए स्टार्स की एंट्री देखने को मिलती है। पिछले काफी समय से NXT के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक लार्स सुलिवन के मेन रोस्टर में आने की अफवाहें चल रही हैं। हमारे ख्याल से मेन रोस्टर में एंट्री करने के लिए सर्वाइवर सीरीज से अच्छा समय नहीं हो सकता है। लॉर्स सुलिवन की एंट्री डेनियल ब्रायन बनाम ब्रॉक लैसनर के मुकाबले के दौरान कराई जाए जिससे ब्रॉक लैसनर का ध्यान भटक जाए और डेनियल ब्रायन इस मुकाबले में जीत हासिल कर लें। इसके बाद लॉर्स सलिवन रिंग में आकर ब्रॉक लैसनर पर हमला कर दें। हमारे ख्याल से लार्स सुलिवन के लिए इससे अच्छा डेब्यू नहीं हो सकता है। लार्स सुलिवन के आने के ब्रॉक लैसनर को WWE में एक नया प्रतिद्वंदी मिलेगा।
स्मैकडाउन लाइव में एजे स्टाइल्स को हराकर WWE चैंपियन बन चुके डेनियल ब्रायन अब सर्वाइवर सीरीज में ब्रॉक लैसनर के साथ चैंपियन बनाम चैंपियन मुकाबले में शामिल होंगे। सर्वाइवर सीरीज को शुरू होने में अब बस कुछ घंटों का ही समय बाकी रह गया है। ऐसे में फैंस का इस पीपीवी के लिए बेताब होना आम बात है। इस साल सर्वाइवर सीरीज़ दो हज़ार अट्ठारह अट्ठारह नवंबर को लॉस एंजलिस के स्टेपल्स सैंटर से लाइव होगी। कंपनी ने इस पीपीवी के लिए दो चार नहीं बल्कि कई बड़े मुकाबले बुक किए है। उनमें से एक बड़ा मुकाबला डेनियल ब्रायन बनाम ब्रॉक लैसनर के बीच होने वाला है। पीपीवी के समय नजदीक आते ही यही सही समय होता है जब हम पीपीवी के तमाम पहलुओं पर नज़र डालें। डेनियल ब्रायन बनाम ब्रॉक लैसनर के मुकाबले में जीत किसकी होगी ये कहना तो थोड़ा मुश्किल है लेकिन कई फैंस यहां पर डेनियल ब्रायन को जीतते हुए देखना चाहते हैं। इसी कड़ी में आइए एक नज़र डालते हैं उन पाँच तरीकों पर जिनसे डेनियल ब्रायन सर्वाइवर सीरीज में ब्रॉक लैसनर को हरा सकते हैं। पिछले एक साल से भी ज्यादा समय तक WWE चैंपियन रहने वाले एजे स्टाइल्स निश्चित रूप से स्मैकडाउन लाइव के टॉप सुपरस्टार हैं। डेनियल ब्रायन के हाथों टाइटल गंवाने के बाद वह सर्वाइवर सीरीज के मैच कार्ड से बाहर हो गए हैं। लेकिन WWE के पास उन्हें बुक करने का अच्छा मौका है। WWE एजे स्टाइल्स को सर्वाइवर सीरीज में ब्रॉक लैसनर को हराने के लिए डेनियल ब्रायन की मदद करने के लिए शामिल कर सकती है। इससे ना केवल डेनियल ब्रायन और एजे स्टाइल्स को फायदा होगा बल्कि यह स्मैकडाउन लाइव के नज़रिए से भी बेहतर होगा। एक फैन होने के नाते हम एजे स्टाइल्स को इस मुकाबले में डेनियल ब्रायन की मदद करते देखना चाहेंगे। यह शायद बताने की जरूरत नहीं है कि डेनियल ब्रायन रिंग में अपने मूव्स को किस तरह से यूज करते हैं। प्रोफेशनल रैसलिंग के सबसे शानदार परफॉर्मर के रूप में डेनियल ब्रायन अपने मूव्स को शानदार तरीके से करने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन डेनियल ब्रायन को द बीस्ट यानी ब्रॉक लैसनर के हराने के लिए कुछ अलग करना पड़ेगा। डेनियल ब्रायन के पास लो ब्लो यूज करने का विकल्प मौजूद है। वह चाहे तो लैसनर पर लो ब्लो यूज कर उन्हें रिंग में मात दे सकते हैं। ब्रॉक लैसनर भले ही द बीस्ट हो लेकिन लो ब्लो के बाद शायद ही वह इस मुकाबले में वापसी कर पाएं। लो ब्लो लगने के बाद किसी भी इंसान के लिए मुसीबत बढ़ जाती है। ऐसे में ब्रॉक लैसनर के भी लिए लो ब्लो से बच पाना काफी मुश्किल है। स्मैकडाउन लाइव के एक हज़ारवें एपिसोड में एवोल्यूशन की वापसी देखने को मिली थी, जहां ट्रिपल एच के साथ रिक फ्लेयर, रैंडी ऑर्टन और बतिस्ता नज़र आए थे। इस सैगमेंट के दौरान बतिस्ता और ट्रिपल एच के बीच थोड़ी गहमागहमी देखने को मिली, जिसके बाद रैसलमेनिया पैंतीस में उनके मुकाबले की अफवाह उड़ने लगी। हालांकि ट्रिपल एच की चोट के चलते इस मुकाबले की संभावना कम हो गई है। लेकिन अगर बतिस्ता रैसलमेनिया पैंतीस में आते हैं तो उनके लिए यूनिवर्सल चैंपियन ब्रॉक लैसनर से अच्छा प्रतिद्वंदी नहीं हो सकता है। WWE को चाहिए कि वह सर्वाइवर सीरीज में बतिस्ता का डेनियल ब्रायन बनाम ब्रॉक लैसनर के मुकाबले में दखल कराए। बतिस्ता के दखल से ना केवल डेनियल ब्रायन की जीत होगी बल्कि रैसलमेनिया पैंतीस के लिए बतिस्ता बनाम ब्रॉक लैसनर के बीच मुकाबला बुक करने की शुरूआत हो सकती है। सर्वाइवर सीरीज से पहले हुए स्मैकडाउन लाइव के एपिसोड में पॉल हेमन नज़र आए थे जो फैंस के लिए काफी हैरानी की बात थी। स्मैकडाउन लाइव के इस एपिसोड में रॉ टीम ने स्मैकडाउन पर हमला तो नहीं किया लेकिन पॉल हेमन ने अपनी एंट्री से सभी फैंस को हैरान जरूर कर दिया था। अगर आपने ध्यान दिया हो तो पॉल हेमन ने एजे स्टाइल्स को शानदार परफॉर्मर बताया लेकिन डेनियल ब्रायन को नंबर वन बताया। पॉल हेमन की इस बात से अफवाहें यह चलनी शुरू हो गई हैं कि क्या पॉल हेमन अपने अगले क्लाइंट के रूप में डेनियल ब्रायन को चाहते हैं? पिछले काफी समय से हम देख रहे हैं कि ब्रॉक लैसनर एक मैनेजर के रूप में पॉल हेमन की वैल्यू पर ज्यादा प्रभाव नहीं डाल रहे हैं। ऐसे में वह सर्वाइवर सीरीज में ब्रॉक लैसनर के खिलाफ जाकर डेनियल ब्रायन को जीत हासिल करने में मदद कर सकते हैं। WWE के बड़े पीपीवी के दौरान अक्सर हमें NXT से नए स्टार्स की एंट्री देखने को मिलती है। पिछले काफी समय से NXT के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक लार्स सुलिवन के मेन रोस्टर में आने की अफवाहें चल रही हैं। हमारे ख्याल से मेन रोस्टर में एंट्री करने के लिए सर्वाइवर सीरीज से अच्छा समय नहीं हो सकता है। लॉर्स सुलिवन की एंट्री डेनियल ब्रायन बनाम ब्रॉक लैसनर के मुकाबले के दौरान कराई जाए जिससे ब्रॉक लैसनर का ध्यान भटक जाए और डेनियल ब्रायन इस मुकाबले में जीत हासिल कर लें। इसके बाद लॉर्स सलिवन रिंग में आकर ब्रॉक लैसनर पर हमला कर दें। हमारे ख्याल से लार्स सुलिवन के लिए इससे अच्छा डेब्यू नहीं हो सकता है। लार्स सुलिवन के आने के ब्रॉक लैसनर को WWE में एक नया प्रतिद्वंदी मिलेगा।
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सरकार पर फिर से आतंकवाद को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल रही है। वर्तमान में देश की स्थिति को देखते हुए भारत जोड़ो यात्रा काफी महत्वपूर्ण है। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर से आतंकवाद को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने बुधवार को कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल रही है। सरकार इस मामले में अक्सर जनता से झूठ बोलती रहती है। मुफ्ती ने कहा कि जम्मू के सिधरा इलाके में सुबह हुई मुठभेड़ से यह साफ हो गया है कि सरकार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकी है, लेकिन सरकार दावा करती है कि हमने कश्मीर से आतंकियों को खत्म कर दिया है। 'मुस्लिम बहुल राज्य होने के बाद भी भारत में हुए शामिल' उन्होंने कहा कि यह देश के लिए निराशाजनक है कि आतंकवाद अब भी जम्मू क्षेत्र में फैला हुआ है। सरकार आतंकवाद को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत जोड़ो यात्रा को रोकने के लिए सरकार कोविड या आतंकवाद जैसे बहाने बना सकती है। वर्तमान स्थित को देखते हुए भारत जोड़ो यात्रा काफी जरूरी है। हमारा कर्तव्य है कि हम लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को इसके साथ खड़े हों। 1947 में जब भारत और पाकिस्तान में हिंदू और मुस्लिम मारे जा रहे थे तब कश्मीर ही एकमात्र ऐसी जगह थी, जहां पंडित, सिख, डोगरा कश्मीरियों द्वारा सुरक्षित थे। पीडीपी प्रमुख ने आगे कहा कि जब देश में धर्मनिरपेक्षता को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है तो जम्मू-कश्मीर के लोगों को इसका सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ता है। हम अकेले मुस्लिम बहुल राज्य होने के बाद भी भारत में शामिल हुए क्योंकि यह एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश है।
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सरकार पर फिर से आतंकवाद को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल रही है। वर्तमान में देश की स्थिति को देखते हुए भारत जोड़ो यात्रा काफी महत्वपूर्ण है। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर से आतंकवाद को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने बुधवार को कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल रही है। सरकार इस मामले में अक्सर जनता से झूठ बोलती रहती है। मुफ्ती ने कहा कि जम्मू के सिधरा इलाके में सुबह हुई मुठभेड़ से यह साफ हो गया है कि सरकार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकी है, लेकिन सरकार दावा करती है कि हमने कश्मीर से आतंकियों को खत्म कर दिया है। 'मुस्लिम बहुल राज्य होने के बाद भी भारत में हुए शामिल' उन्होंने कहा कि यह देश के लिए निराशाजनक है कि आतंकवाद अब भी जम्मू क्षेत्र में फैला हुआ है। सरकार आतंकवाद को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत जोड़ो यात्रा को रोकने के लिए सरकार कोविड या आतंकवाद जैसे बहाने बना सकती है। वर्तमान स्थित को देखते हुए भारत जोड़ो यात्रा काफी जरूरी है। हमारा कर्तव्य है कि हम लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को इसके साथ खड़े हों। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में जब भारत और पाकिस्तान में हिंदू और मुस्लिम मारे जा रहे थे तब कश्मीर ही एकमात्र ऐसी जगह थी, जहां पंडित, सिख, डोगरा कश्मीरियों द्वारा सुरक्षित थे। पीडीपी प्रमुख ने आगे कहा कि जब देश में धर्मनिरपेक्षता को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है तो जम्मू-कश्मीर के लोगों को इसका सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ता है। हम अकेले मुस्लिम बहुल राज्य होने के बाद भी भारत में शामिल हुए क्योंकि यह एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो दिवसीय दौरे के पहले दिन शनिवार को सहारनपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया और विकास एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा की। दोपहर करीब सवा बजे पुलिस लाइन पर बने हेलीपैड पर उतरने के बाद श्री योगी ने जिला अस्पताल का रूख किया जहां उन्होंने 30 मिनट तक बारीकी के साथ निरीक्षण किया। उन्होने इमरजेंसी, बच्चा वार्ड के अलावा आईसीयू का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती रोगियों और उनके तीमारदारों से अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के बावत सवाल-जवाब किए। मुख्यमंत्री ने रोगियों और तीमारदारों से पूछा कि उन्हें समय पर दवाइयां, चिकित्सा सुविधा और भोजन मिल रहा है या नहीं और उनकी यहां पर उचित देखरेख हो रही है या नहीं। मुख्यमंत्री ने एक बच्चे को गोद में उठाकर उसे दुलार-प्यार किया। वहीं सीएमओ बलजीत सोढ़ से जानना चाहा कि राज्य सरकार इस अस्पताल के लिए क्या अतिरिक्त सुविधाएं दे सकती है। सीएमओ ने बताया कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में रोगी आते हैं। यहां एमआरआई सुविधा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होने जिला अस्पताल को एमआरआई मशीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। जिला और देहात के सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों के रिक्त पड़ पदों को शीघ, भरे जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के साथ सहारनपुर के प्रभारी मंत्री प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, सहारनपुर मंडल के शामली जिले के थानाभवन सीट के विधायक और प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, सहारनपुर के नकुड़ के विधायक और प्रदेश के आयुष मंत्री डा. धर्मसिंह सैनी, सांसद प्रदीप चैधरी, कमिश्नर संजय कुमार, जिलाधिकारी आलोक पांडे आदि मौजूद रहे। सहारनपुर जिला अस्पताल से मुख्यमंत्री का काफिला सीधे सर्किट हाउस पहुंचा, जहां उन्होंने पौधा रोपण करने के बाद जनप्रतिनिधियों से भेंट की। इसके बाद श्री योगी ने विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक, राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों ने मुलाकात की। मीडिया को मुख्यमंत्री के पूरे कार्यक्रम से दूर रखा गया। विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों को भी मुख्यमंत्री से भेंट का निमंत्रण नहीं दिया गया। सपा विधायक संजय गर्ग ने बताया कि उन्होंने कल कमिश्नर और जिलाधिकारी से मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने की मांग की थी। दोनों अफसरों ने उनके इस विचार करने का भरोसा दिया था। विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों ने इस पर काफी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि हम लोग भी जनहित के कुछ ज्वलंत सवालों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराना चाहते थे। यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री को सरकारी दौरे के दौरान संपूर्ण मीडिया और विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को दूर रखा गया। मुख्यमंत्री ने सहारनपुर मंडल के विकास कार्यों और कानून व्यवस्था की समीक्षा भी की। मुख्यमंत्री की वरीयता वाले 18 बिंदुओं पर प्रशासन ने प्रगति रिपोर्ट से अवगत कराया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहारनपुर मंडल की चुस्त दुरूस्त कानून व्यवस्था और अपराधों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी नियंत्रण के लिए संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस विशेष सतर्कता और संवेदनशीलता दिखाए। श्री योगी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सुबह नौ बजे अपने कार्यालयों में पहुंचे और 11 बजे तक उनकी ज्वलंत समस्याओं का समाधान करें, जो अधिकारी इन नियमों का पालन नहीं करेगा उसका वेतन काटा जाएगा। मुख्यमंत्री ने रिक्त हुई गंगोह विधानसभा के उपचुनाव के लिए भी पार्टी के चुनिंदा पदाधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया और फीडबेक लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देर रात तक लोगों के प्रतिनिधि मंडलों से भेंट करेंगे और रात्रि विश्राम सहारनपुर के सर्किट हाउस में करने के बाद रविवार प्रातः मुरादाबाद के लिए रवाना होंगे। वहां पहुंचकर मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था एवं अन्य कार्यों की समीक्षा करेंगे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो दिवसीय दौरे के पहले दिन शनिवार को सहारनपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया और विकास एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा की। दोपहर करीब सवा बजे पुलिस लाइन पर बने हेलीपैड पर उतरने के बाद श्री योगी ने जिला अस्पताल का रूख किया जहां उन्होंने तीस मिनट तक बारीकी के साथ निरीक्षण किया। उन्होने इमरजेंसी, बच्चा वार्ड के अलावा आईसीयू का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती रोगियों और उनके तीमारदारों से अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के बावत सवाल-जवाब किए। मुख्यमंत्री ने रोगियों और तीमारदारों से पूछा कि उन्हें समय पर दवाइयां, चिकित्सा सुविधा और भोजन मिल रहा है या नहीं और उनकी यहां पर उचित देखरेख हो रही है या नहीं। मुख्यमंत्री ने एक बच्चे को गोद में उठाकर उसे दुलार-प्यार किया। वहीं सीएमओ बलजीत सोढ़ से जानना चाहा कि राज्य सरकार इस अस्पताल के लिए क्या अतिरिक्त सुविधाएं दे सकती है। सीएमओ ने बताया कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में रोगी आते हैं। यहां एमआरआई सुविधा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होने जिला अस्पताल को एमआरआई मशीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। जिला और देहात के सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों के रिक्त पड़ पदों को शीघ, भरे जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के साथ सहारनपुर के प्रभारी मंत्री प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, सहारनपुर मंडल के शामली जिले के थानाभवन सीट के विधायक और प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, सहारनपुर के नकुड़ के विधायक और प्रदेश के आयुष मंत्री डा. धर्मसिंह सैनी, सांसद प्रदीप चैधरी, कमिश्नर संजय कुमार, जिलाधिकारी आलोक पांडे आदि मौजूद रहे। सहारनपुर जिला अस्पताल से मुख्यमंत्री का काफिला सीधे सर्किट हाउस पहुंचा, जहां उन्होंने पौधा रोपण करने के बाद जनप्रतिनिधियों से भेंट की। इसके बाद श्री योगी ने विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक, राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों ने मुलाकात की। मीडिया को मुख्यमंत्री के पूरे कार्यक्रम से दूर रखा गया। विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों को भी मुख्यमंत्री से भेंट का निमंत्रण नहीं दिया गया। सपा विधायक संजय गर्ग ने बताया कि उन्होंने कल कमिश्नर और जिलाधिकारी से मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने की मांग की थी। दोनों अफसरों ने उनके इस विचार करने का भरोसा दिया था। विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों ने इस पर काफी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि हम लोग भी जनहित के कुछ ज्वलंत सवालों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराना चाहते थे। यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री को सरकारी दौरे के दौरान संपूर्ण मीडिया और विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को दूर रखा गया। मुख्यमंत्री ने सहारनपुर मंडल के विकास कार्यों और कानून व्यवस्था की समीक्षा भी की। मुख्यमंत्री की वरीयता वाले अट्ठारह बिंदुओं पर प्रशासन ने प्रगति रिपोर्ट से अवगत कराया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहारनपुर मंडल की चुस्त दुरूस्त कानून व्यवस्था और अपराधों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी नियंत्रण के लिए संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस विशेष सतर्कता और संवेदनशीलता दिखाए। श्री योगी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सुबह नौ बजे अपने कार्यालयों में पहुंचे और ग्यारह बजे तक उनकी ज्वलंत समस्याओं का समाधान करें, जो अधिकारी इन नियमों का पालन नहीं करेगा उसका वेतन काटा जाएगा। मुख्यमंत्री ने रिक्त हुई गंगोह विधानसभा के उपचुनाव के लिए भी पार्टी के चुनिंदा पदाधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया और फीडबेक लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देर रात तक लोगों के प्रतिनिधि मंडलों से भेंट करेंगे और रात्रि विश्राम सहारनपुर के सर्किट हाउस में करने के बाद रविवार प्रातः मुरादाबाद के लिए रवाना होंगे। वहां पहुंचकर मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था एवं अन्य कार्यों की समीक्षा करेंगे।
कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडे ने आज नई दिल्ली में एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने देश भर की महिला उद्यमियों को कौशल विकास में उनके द्वारा दिए गए योगदान, नौकरी की चाह रखने वाली महिलाओं से नौकरी देने वाली महिला उद्यमी बनकर अपने क्षेत्र में सफलता के नए प्रतिमान बनाने के लिए सम्मानित किया। डॉ. पांडे ने पूरे भारत में महिला उद्यमियों के ईमानदार और अथक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों को अवसर में बदला है। समारोह में डॉ महेंद्र नाथ पांडे ने उल्लेखनीय काम करने वाली महिला उद्यमियों को प्रशंसा पत्र दिया। इस अवसर पर, मंत्री ने सभी महिला पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और कहा कि एक स्वतंत्र महिला समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है और उसे आगे ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय, महिला और बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से, 10,000 दिव्यांग महिलाओं को आत्म निर्भर और नौकरी देने वाली उद्यमी बनाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार सभी जन कल्याणकारी योजनाओं के केंद्र में महिलाओं को रख रही है, जिससे वह सक्षम और सशक्त बन सके । उन्होंने कहा, "भारत सरकार के सभी मंत्रालय विभिन्न योजनाओं के माध्यम से देश की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि यह प्रयास लंबा रास्ता तय करेगा और आत्मनिर्भर भारत को हकीकत में बदलेगा। इस अवसर पर, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के सचिव श्री प्रवीण कुमार ने कहा कि "महिला उद्यमी न केवल स्वतंत्र बन गई हैं, बल्कि उन्होंने लिंग के कारण आने वाली बाधाओं को भी तोड़ दिया है"। उन्होंने कहा कि "प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत सफल प्रशिक्षुओं में से 20 प्रतिशत उद्यमी बन गए हैं"। इस अवसर पर, देश के विभिन्न हिस्सों से कई महिला उद्यमियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत सफलताओं को साझा किया और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उनके जीवन को बदलने के लिए कौशल विकास मंत्रालय को धन्यवाद दिया। अंत में मंत्री ने समारोह में उपस्थित सभी महिलाओं को बधाई दी और उन्हें खुद का उत्थान करने, कड़ी मेहनत करने, अपनी पहचान बनाने और जो वो चाहती हैं उसे हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडे ने आज नई दिल्ली में एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने देश भर की महिला उद्यमियों को कौशल विकास में उनके द्वारा दिए गए योगदान, नौकरी की चाह रखने वाली महिलाओं से नौकरी देने वाली महिला उद्यमी बनकर अपने क्षेत्र में सफलता के नए प्रतिमान बनाने के लिए सम्मानित किया। डॉ. पांडे ने पूरे भारत में महिला उद्यमियों के ईमानदार और अथक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों को अवसर में बदला है। समारोह में डॉ महेंद्र नाथ पांडे ने उल्लेखनीय काम करने वाली महिला उद्यमियों को प्रशंसा पत्र दिया। इस अवसर पर, मंत्री ने सभी महिला पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और कहा कि एक स्वतंत्र महिला समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है और उसे आगे ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय, महिला और बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से, दस,शून्य दिव्यांग महिलाओं को आत्म निर्भर और नौकरी देने वाली उद्यमी बनाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार सभी जन कल्याणकारी योजनाओं के केंद्र में महिलाओं को रख रही है, जिससे वह सक्षम और सशक्त बन सके । उन्होंने कहा, "भारत सरकार के सभी मंत्रालय विभिन्न योजनाओं के माध्यम से देश की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि यह प्रयास लंबा रास्ता तय करेगा और आत्मनिर्भर भारत को हकीकत में बदलेगा। इस अवसर पर, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के सचिव श्री प्रवीण कुमार ने कहा कि "महिला उद्यमी न केवल स्वतंत्र बन गई हैं, बल्कि उन्होंने लिंग के कारण आने वाली बाधाओं को भी तोड़ दिया है"। उन्होंने कहा कि "प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत सफल प्रशिक्षुओं में से बीस प्रतिशत उद्यमी बन गए हैं"। इस अवसर पर, देश के विभिन्न हिस्सों से कई महिला उद्यमियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत सफलताओं को साझा किया और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उनके जीवन को बदलने के लिए कौशल विकास मंत्रालय को धन्यवाद दिया। अंत में मंत्री ने समारोह में उपस्थित सभी महिलाओं को बधाई दी और उन्हें खुद का उत्थान करने, कड़ी मेहनत करने, अपनी पहचान बनाने और जो वो चाहती हैं उसे हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
नव वर्ष 2022 का पहला महीना व्रत त्योहार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस महीने मकर संक्रांति (जो धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्व है) और लोहड़ी पर्व मनाया जाएगा। January 2022 Calendar: नव वर्ष 2022 यानि नए साल का पहला महीना शनिवार से शुरू हो रहा है। यह महीना व्रत त्योहार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस महीने मकर संक्रांति (जो धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्व है) और लोहड़ी पर्व मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान का महत्व होता है, तो वहीं लोहड़ी पंजाब और उत्तरी भारत का महत्वपूर्ण लोक सांस्कृतिक पर्व है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण में आते हैं। कई जगहों पर इस दिन मेलों का आयोजन होता है।
नव वर्ष दो हज़ार बाईस का पहला महीना व्रत त्योहार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस महीने मकर संक्रांति और लोहड़ी पर्व मनाया जाएगा। January दो हज़ार बाईस Calendar: नव वर्ष दो हज़ार बाईस यानि नए साल का पहला महीना शनिवार से शुरू हो रहा है। यह महीना व्रत त्योहार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस महीने मकर संक्रांति और लोहड़ी पर्व मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान का महत्व होता है, तो वहीं लोहड़ी पंजाब और उत्तरी भारत का महत्वपूर्ण लोक सांस्कृतिक पर्व है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण में आते हैं। कई जगहों पर इस दिन मेलों का आयोजन होता है।
झारखंड विकास मोर्चा जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा के प्रत्याशी अभय सिंह ने गुरुवार को सिदगोड़ा, एग्रिको, बारीडीह, केबल टाउन और टिनप्लेट में पदयात्रा कर जनसंपर्क अभियान चलाया। चुनाव प्रचार के दौरान केबल टाउन मैदान में युवाओं से मिलकर उनकी समस्या जानने के साथ उन्होंने क्रिकेट का आनंद लिया। अभय सिंह ने जनसंपर्क के दौरान लोगों से कहा कि ऐसे चेहरे से सावधान रहने की जरूरत है, जो चुनावी मौसम में सिर्फ वोट मांगने आए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता के लिए 15 वर्षों से संघर्ष कर रहा हूं। अभय सिंह ने रघुवर दास सरकार को 86 बस्तियों को मालिकाना हक, बेरोजगारी दूर करने व केबुल कंपनी को खुलवाने का वादा याद दिलाते हुए कहा कि भाजपा ने हमेशा जनता से विश्वासघात किया है।
झारखंड विकास मोर्चा जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा के प्रत्याशी अभय सिंह ने गुरुवार को सिदगोड़ा, एग्रिको, बारीडीह, केबल टाउन और टिनप्लेट में पदयात्रा कर जनसंपर्क अभियान चलाया। चुनाव प्रचार के दौरान केबल टाउन मैदान में युवाओं से मिलकर उनकी समस्या जानने के साथ उन्होंने क्रिकेट का आनंद लिया। अभय सिंह ने जनसंपर्क के दौरान लोगों से कहा कि ऐसे चेहरे से सावधान रहने की जरूरत है, जो चुनावी मौसम में सिर्फ वोट मांगने आए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता के लिए पंद्रह वर्षों से संघर्ष कर रहा हूं। अभय सिंह ने रघुवर दास सरकार को छियासी बस्तियों को मालिकाना हक, बेरोजगारी दूर करने व केबुल कंपनी को खुलवाने का वादा याद दिलाते हुए कहा कि भाजपा ने हमेशा जनता से विश्वासघात किया है।
विधानसभा क्षेत्र नादौन की जनता कांग्रेस प्रत्याशी सुखविंद्र सिंह सुक्खू से पिछले 15 साल का हिसाब करने को तैयार बैठी है। लोगों ने भाजपा को यहां से प्रचंड बहुमत से विजयी बनाने का मन बना लिया है। यह कहना है नादौन से भाजपा प्रत्याशी विजय अग्निहोत्री का। उन्होंने कहा कि 15 साल से जो लीडर नादौन की जनता को चुनावों के समय छलता आया है, उसे इस बार एक एक वोट का हिसाब देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना काल में एक ओर जहां जनता डर के माहौल में थी, वहीं जनता के चुने हुए नुमाइंदे अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों में लोगों की सेवा में जुटे हुये थे। उस संकट काल में सुक्खू नादौन की जनता को भगवान भरोसे छोडक़र शिमला भाग गए। अग्निहोत्री ने सुक्खू से सीधा सवाल पूछते हुए नादौन की जागरूक जनता का आह्वान किया कि नैतिकता का यह कैसा तकाजा था जिसका परिचय सुक्खू ने दिया है। एक चुने हुए प्रतिनिधि द्वारा इस तरह से जनता को असहाय छोडक़र क्षेत्र से पलायन कर जाना क्या जायज़ है। उस मुश्किल घड़ी में जनता के बीच जाकर उनके साथ खड़े होकर क्या सेवा करना उनका फर्ज नहीं था। क्या नादौन की जनता ने उन्हें इसलिए जिताकर शिमला भेजा था। नादौन की जनता को ऐसा नुमाइंदा नहीं चाहिए जो उनके मुश्किल समय में यहां से भाग जाए। अग्निहोत्री ने बताया कि इस बार सुक्खू को अपनी जमीन खिसकती दिखाई दी तो लोगों को बरगलाने के लिए मुख्यमंत्री उम्मीदवार के शोशे हवा में उड़ाने शुरू कर दिये। इन झूठे सपनों की हकीकत जनता को पता चल चुकी है। भाजपा ने पूरी निष्ठा के साथ लोगों की सेवा में दिन रात एक कर दिया है इसलिए इस बार नादौन विधानसभा क्षेत्र में कमल का प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करेगा और प्रदेश में बनने जा रही नई सरकार में नादौन अग्रणी भूमिका निभाता नजर आएगा। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि झूठे सपने दिखाकर लोगों को बरगलाने में जुटे कांग्रेसियों की पोल खोलो अभियान चलाकर उन्हें बेनकाब करें और भाजपा को मजबूत करें।
विधानसभा क्षेत्र नादौन की जनता कांग्रेस प्रत्याशी सुखविंद्र सिंह सुक्खू से पिछले पंद्रह साल का हिसाब करने को तैयार बैठी है। लोगों ने भाजपा को यहां से प्रचंड बहुमत से विजयी बनाने का मन बना लिया है। यह कहना है नादौन से भाजपा प्रत्याशी विजय अग्निहोत्री का। उन्होंने कहा कि पंद्रह साल से जो लीडर नादौन की जनता को चुनावों के समय छलता आया है, उसे इस बार एक एक वोट का हिसाब देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना काल में एक ओर जहां जनता डर के माहौल में थी, वहीं जनता के चुने हुए नुमाइंदे अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों में लोगों की सेवा में जुटे हुये थे। उस संकट काल में सुक्खू नादौन की जनता को भगवान भरोसे छोडक़र शिमला भाग गए। अग्निहोत्री ने सुक्खू से सीधा सवाल पूछते हुए नादौन की जागरूक जनता का आह्वान किया कि नैतिकता का यह कैसा तकाजा था जिसका परिचय सुक्खू ने दिया है। एक चुने हुए प्रतिनिधि द्वारा इस तरह से जनता को असहाय छोडक़र क्षेत्र से पलायन कर जाना क्या जायज़ है। उस मुश्किल घड़ी में जनता के बीच जाकर उनके साथ खड़े होकर क्या सेवा करना उनका फर्ज नहीं था। क्या नादौन की जनता ने उन्हें इसलिए जिताकर शिमला भेजा था। नादौन की जनता को ऐसा नुमाइंदा नहीं चाहिए जो उनके मुश्किल समय में यहां से भाग जाए। अग्निहोत्री ने बताया कि इस बार सुक्खू को अपनी जमीन खिसकती दिखाई दी तो लोगों को बरगलाने के लिए मुख्यमंत्री उम्मीदवार के शोशे हवा में उड़ाने शुरू कर दिये। इन झूठे सपनों की हकीकत जनता को पता चल चुकी है। भाजपा ने पूरी निष्ठा के साथ लोगों की सेवा में दिन रात एक कर दिया है इसलिए इस बार नादौन विधानसभा क्षेत्र में कमल का प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करेगा और प्रदेश में बनने जा रही नई सरकार में नादौन अग्रणी भूमिका निभाता नजर आएगा। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि झूठे सपने दिखाकर लोगों को बरगलाने में जुटे कांग्रेसियों की पोल खोलो अभियान चलाकर उन्हें बेनकाब करें और भाजपा को मजबूत करें।
NATO DE RATEST NE तो थी वस्तुतः उसके उस महाव्रत की केवल भूमिका मात्र, जिसका कि पुराय संकल्प ले यह संत इस देश के ललाट पर से दुर्भाग्य की रेखाएँ मिटाने के लिए अग्रसर हुआ था ! वह अब तक जो एक-एक तिल अपने आपको जनकल्याण के हवनकुण्ड में लगातार होमता चला जा रहा था, उसकी पराकाष्ठा-उसकी पूर्णाहुति -का अन्तिम विनियोग तो अब भी शेष ही था ! क्योंकि इस धरती पर से विदेशी शासन का झंडा उखाड़ा जा चुका था तो क्या अब भी उसकी भीतरी आग तो ज्योंकी त्यों जल ही रही थी अब भी इस महापुरुष के अपने स्वप्रलोक का वह 'रामराज्य' तो मिद्ध होना शेष ही था, जिसका कि निर्देश वर्षों पूर्व ही इन स्मरणीय शब्दों में वह कर चुका था-'में तो देख रहा हूँ एक ऐसे भारत के निर्माण का स्वप्न, जिसके कि आँगन में गरीब से गरीब भी यह अनुभव कर सके कि यह उसकी ही अपनी धरती है; जिसके निर्धारण में सभी की भरपूर श्रावाज़ हो : जिसमें ऊँच-नीच के इस वर्गीकरण का नामोनिशान भी न हो, और जिसमें सभी जाति के लोग पूर्ण सामं जस्यपूर्वक मिल-जुलकर रह सकें !' किन्तु अभी कहाँ था उसके मनोराज्य का वह आदर्श भारत ? कितनी अधिक दूर थी अब भी उसके स्वप्नलोक के उस 'रामराज्य' की मंज़िल ? कारण, इस क्षण तो जिस प्रकार का भारत वह अपने चारों और पनपते देख रहा था, वह तो ऐसा भयावह था कि उसकी तुलना केवल एक ऐसे विनाशोन्मुख रोगी ही से की जा सकती थी, जो कि स्वयं उद्भ्रान्त अपने ही मनोविकारों से उत्पन्न भीषण ज्वर-ताप से संतप्त हो तेज़ी के साथ त्रिदोषजनित सन्निपात की अवस्था की ओर लुढ़कता चला जा रहा हो और उस भयंकर रोगाकान्त दशा में स्वयं अपने ही हाथ अपने अंग-प्रत्यंग पर छुरी चलाता हुआ मदिरा पिए हुए की भाँति श्रात्महनन की सर्वनाशक्रीड़ा में लीन हो ! यह तो ऐसा एक भारत था, जिसका कि आँगन रक्त-मजा से लथपथ था और जिसका घर अपने हो हाथों लगाई गई आग से धाँयधाँय जल रहा था ! यद्यपि यह बात सच थी कि डेढ़ सौ वर्षों से जो लौह कपाट उसके इस घरआँगन को एक विशद बंदीगृह में परिणत किए हुए थे, वे अब खुल चुक थे, किन्तु अपनी कलाइयों पर मूर्खता की जो हथकड़ियाँ अब भी उसने कस रक्खी थीं, वेतो उसके इस उशृंखल ताण्डव की उछलकूद में दिन पर दिन और भी अधिक कसती चली जा रही थीं ! तो फिर क्या इसी भारत का सपना अब तक हम सब देखते रहे ? इसी की सिद्धि के हेतु क्या इतना रक्त और पसीना बहाया गया और उसी के लिए पिछले तीस वर्षों में कोटि-कोटि नर-नारियों ने अपना सर्वस्व होमकर संसार के प्राङ्गण में रचा वह प्रचण्ड रण-यज्ञ ? रह-रहकर जी को कुरेदनेवाला यही प्रश्न अउहत्तर वर्ष के इस बूढ़े संत के हृदय में अब उठने लगा और फलतः वही जो कि 'जीवेम शरदः शतम्' के आर्ष मंत्र में अभिव्यक्त दीर्घ जीवन की कामना रखते हुए १२५ वर्ष की पूर्ण श्रायु तक जीवित रहने का अपना संकल्प अब तक दोहराया करता था, अब दिन प्रति दिन अपने बढ़ते चले जा रहे उस विष के ज्वार को देखकर ईश्वर से बारबार यही प्रार्थना करते देखा जाने लगा कि 'हे भगवन् या तो तू इस जहर को शान्त फर दे या फिर इस धरती पर से मुझे उठा ही ले. में अब जीना नहीं चाहता !' और कैसी अद्भुत थी उस प्रभु की लीला कि कुछ सप्ताहों के भीतर ही अंत में वह बात हो गई, जिसकी कि प्रतिध्वनि इस बूढ़े तपस्वी के उपयुक्त मनोव्यथाजनित शब्दों में इधर लगातार कई दिनों से हमें सुनाई देने लगी थी वह सचमुच ही एक दिन पलक मारते इस अभि शापग्रस्त अवनितल से सदा के लिए उठ गया और देखते-देखते महाकाश में लीन होकर इस कोलाहलमय जगती से उसने परम निर्वाण पा लिया ! किन्तु हा दुर्देव, कितनीफरता- कैसी निर्ममता के साथ तूने अपना वह विधान पूरा किया ! किस प्रकार गुग-युगान्त तक के लिए हमें रुलाकर-कैसा प्रतलस्पर्शी वाव हमारी छाती में कुरेद्रकर- तूने अपना वह काम पूरा किया ! हृदय फटने लगता है और लेखनी रो-सी पड़ती है उस दुर्घट घटना का वर्णन यहाँ करते हुए। वह कलंकमयी अभागी संध्या- ३० जनवरी, सन् १९४८ ई०, की वह अशुभ संध्या - जिसने कि इस युग के भारत के उस ज्वाज्वल्यमान सूर्य को सदा के
NATO DE RATEST NE तो थी वस्तुतः उसके उस महाव्रत की केवल भूमिका मात्र, जिसका कि पुराय संकल्प ले यह संत इस देश के ललाट पर से दुर्भाग्य की रेखाएँ मिटाने के लिए अग्रसर हुआ था ! वह अब तक जो एक-एक तिल अपने आपको जनकल्याण के हवनकुण्ड में लगातार होमता चला जा रहा था, उसकी पराकाष्ठा-उसकी पूर्णाहुति -का अन्तिम विनियोग तो अब भी शेष ही था ! क्योंकि इस धरती पर से विदेशी शासन का झंडा उखाड़ा जा चुका था तो क्या अब भी उसकी भीतरी आग तो ज्योंकी त्यों जल ही रही थी अब भी इस महापुरुष के अपने स्वप्रलोक का वह 'रामराज्य' तो मिद्ध होना शेष ही था, जिसका कि निर्देश वर्षों पूर्व ही इन स्मरणीय शब्दों में वह कर चुका था-'में तो देख रहा हूँ एक ऐसे भारत के निर्माण का स्वप्न, जिसके कि आँगन में गरीब से गरीब भी यह अनुभव कर सके कि यह उसकी ही अपनी धरती है; जिसके निर्धारण में सभी की भरपूर श्रावाज़ हो : जिसमें ऊँच-नीच के इस वर्गीकरण का नामोनिशान भी न हो, और जिसमें सभी जाति के लोग पूर्ण सामं जस्यपूर्वक मिल-जुलकर रह सकें !' किन्तु अभी कहाँ था उसके मनोराज्य का वह आदर्श भारत ? कितनी अधिक दूर थी अब भी उसके स्वप्नलोक के उस 'रामराज्य' की मंज़िल ? कारण, इस क्षण तो जिस प्रकार का भारत वह अपने चारों और पनपते देख रहा था, वह तो ऐसा भयावह था कि उसकी तुलना केवल एक ऐसे विनाशोन्मुख रोगी ही से की जा सकती थी, जो कि स्वयं उद्भ्रान्त अपने ही मनोविकारों से उत्पन्न भीषण ज्वर-ताप से संतप्त हो तेज़ी के साथ त्रिदोषजनित सन्निपात की अवस्था की ओर लुढ़कता चला जा रहा हो और उस भयंकर रोगाकान्त दशा में स्वयं अपने ही हाथ अपने अंग-प्रत्यंग पर छुरी चलाता हुआ मदिरा पिए हुए की भाँति श्रात्महनन की सर्वनाशक्रीड़ा में लीन हो ! यह तो ऐसा एक भारत था, जिसका कि आँगन रक्त-मजा से लथपथ था और जिसका घर अपने हो हाथों लगाई गई आग से धाँयधाँय जल रहा था ! यद्यपि यह बात सच थी कि डेढ़ सौ वर्षों से जो लौह कपाट उसके इस घरआँगन को एक विशद बंदीगृह में परिणत किए हुए थे, वे अब खुल चुक थे, किन्तु अपनी कलाइयों पर मूर्खता की जो हथकड़ियाँ अब भी उसने कस रक्खी थीं, वेतो उसके इस उशृंखल ताण्डव की उछलकूद में दिन पर दिन और भी अधिक कसती चली जा रही थीं ! तो फिर क्या इसी भारत का सपना अब तक हम सब देखते रहे ? इसी की सिद्धि के हेतु क्या इतना रक्त और पसीना बहाया गया और उसी के लिए पिछले तीस वर्षों में कोटि-कोटि नर-नारियों ने अपना सर्वस्व होमकर संसार के प्राङ्गण में रचा वह प्रचण्ड रण-यज्ञ ? रह-रहकर जी को कुरेदनेवाला यही प्रश्न अउहत्तर वर्ष के इस बूढ़े संत के हृदय में अब उठने लगा और फलतः वही जो कि 'जीवेम शरदः शतम्' के आर्ष मंत्र में अभिव्यक्त दीर्घ जीवन की कामना रखते हुए एक सौ पच्चीस वर्ष की पूर्ण श्रायु तक जीवित रहने का अपना संकल्प अब तक दोहराया करता था, अब दिन प्रति दिन अपने बढ़ते चले जा रहे उस विष के ज्वार को देखकर ईश्वर से बारबार यही प्रार्थना करते देखा जाने लगा कि 'हे भगवन् या तो तू इस जहर को शान्त फर दे या फिर इस धरती पर से मुझे उठा ही ले. में अब जीना नहीं चाहता !' और कैसी अद्भुत थी उस प्रभु की लीला कि कुछ सप्ताहों के भीतर ही अंत में वह बात हो गई, जिसकी कि प्रतिध्वनि इस बूढ़े तपस्वी के उपयुक्त मनोव्यथाजनित शब्दों में इधर लगातार कई दिनों से हमें सुनाई देने लगी थी वह सचमुच ही एक दिन पलक मारते इस अभि शापग्रस्त अवनितल से सदा के लिए उठ गया और देखते-देखते महाकाश में लीन होकर इस कोलाहलमय जगती से उसने परम निर्वाण पा लिया ! किन्तु हा दुर्देव, कितनीफरता- कैसी निर्ममता के साथ तूने अपना वह विधान पूरा किया ! किस प्रकार गुग-युगान्त तक के लिए हमें रुलाकर-कैसा प्रतलस्पर्शी वाव हमारी छाती में कुरेद्रकर- तूने अपना वह काम पूरा किया ! हृदय फटने लगता है और लेखनी रो-सी पड़ती है उस दुर्घट घटना का वर्णन यहाँ करते हुए। वह कलंकमयी अभागी संध्या- तीस जनवरी, सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस ईशून्य, की वह अशुभ संध्या - जिसने कि इस युग के भारत के उस ज्वाज्वल्यमान सूर्य को सदा के
Google Pixel 4 और Pixel 4 XL को लेकर जानकारी इंटरनेट पर सामने आई है, आपको बता देते हैं कि कुछ समय पहले भी इन फोंस को लेकर जानकारी सामने आई थी। हालाँकि अभी तक इसे लेकर जितने भी लीक सामने आये हैं, वह सब डिजाईन के आसपास की ही बात कर रहे थे। इसके अलावा अब आई नई जानकारी 9to5Google के माध्यम से सामने आ रही है। जिसके बाद Google Pixel 4 को लेकर कई नई जानकारी सामने आई हैं, इस डिवाइस को के स्पेक्स लीक के बाद इसकी डिस्प्ले, बैटरी और अन्य कई फीचर्स के बारे में भी जानकारी सामने आई है। अगर हम पिछले लीक पर नजर डालें तो आपको बता देते हैं कि इस डिवाइस यानी Google Pixel 4 में एक 5.7-इंच की FHD+ स्क्रीन के बारे में जिक्र था, हालाँकि अगर Pixel 4 XL की चर्चा करें तो इसमें आपको 6.3-इंच की एक Quad HD+ स्क्रीन के बारे में जानकारी सामने आ रही थी। हालाँकि एक नए लीक में ऐसा सामने आ रहा है कि Pixel 4 में आपको एक 90Hz AMOLED स्क्रीन मिलने वाली है। जिसे गूगल की ओर से स्मूद डिस्प्ले का नाम दिया अज रहा है। इसका मतलब है कि गूगल की ओर से यह डिवाइस एक हाई रिफ्रेश रेट के साथ आने वाला है। आपको बता देते हैं कि रिपोर्ट में ऐसा सामने आ रहा है कि Google Pixel 4 में आपको Pixel 3 के मुकाबले एक छोटी बैटरी मिलने वाली है। हालाँकि अगर हम Pixel 4 XL की चर्चा करें तो इसमें आपको एक बड़ी बैटरी मिलने वाली है। दोनों ही मोबाइल फोंस को 6GB रैम के साथ लॉन्च किये जाने की खबर आ रही है। इसके अलावा इन्हें 64/128GB स्टोरेज के साथ लाया जा सकता है। हालाँकि इतना ही नहीं इन फोंस में आपको क्वालकॉम स्नेपड्रैगन 855 चिपसेट मिलने के भी आसार हैं। साथ ही आपको इनमें स्टीरियो स्पीकर्स मिलने वाले हैं। अगर हम कैमरा आदि की बात करें तो आपको बता देते हैं कि Pixel 4 स्मार्टफोन में आपको एक 12MP का मेन सेंसर मिलने वला है, जो फेज डिटेक्शन ऑटोफोकस और 16MP के टेलीफोटो लेंस के साथ आने वाला है। इसके अलावा गूगल की ओर से इसे DSLR-जैसा कैमरा अटैचमेंट भी मिलने वाला है, जो Pixel 4 में आपको नजर आने वाला है, हालाँकि इसे अलग से एक एक्सेसरी के तौर पर सेल किया जाने वाला है।
Google Pixel चार और Pixel चार XL को लेकर जानकारी इंटरनेट पर सामने आई है, आपको बता देते हैं कि कुछ समय पहले भी इन फोंस को लेकर जानकारी सामने आई थी। हालाँकि अभी तक इसे लेकर जितने भी लीक सामने आये हैं, वह सब डिजाईन के आसपास की ही बात कर रहे थे। इसके अलावा अब आई नई जानकारी नौtoपाँचGoogle के माध्यम से सामने आ रही है। जिसके बाद Google Pixel चार को लेकर कई नई जानकारी सामने आई हैं, इस डिवाइस को के स्पेक्स लीक के बाद इसकी डिस्प्ले, बैटरी और अन्य कई फीचर्स के बारे में भी जानकारी सामने आई है। अगर हम पिछले लीक पर नजर डालें तो आपको बता देते हैं कि इस डिवाइस यानी Google Pixel चार में एक पाँच.सात-इंच की FHD+ स्क्रीन के बारे में जिक्र था, हालाँकि अगर Pixel चार XL की चर्चा करें तो इसमें आपको छः.तीन-इंच की एक Quad HD+ स्क्रीन के बारे में जानकारी सामने आ रही थी। हालाँकि एक नए लीक में ऐसा सामने आ रहा है कि Pixel चार में आपको एक नब्बे हर्ट्ज़ AMOLED स्क्रीन मिलने वाली है। जिसे गूगल की ओर से स्मूद डिस्प्ले का नाम दिया अज रहा है। इसका मतलब है कि गूगल की ओर से यह डिवाइस एक हाई रिफ्रेश रेट के साथ आने वाला है। आपको बता देते हैं कि रिपोर्ट में ऐसा सामने आ रहा है कि Google Pixel चार में आपको Pixel तीन के मुकाबले एक छोटी बैटरी मिलने वाली है। हालाँकि अगर हम Pixel चार XL की चर्चा करें तो इसमें आपको एक बड़ी बैटरी मिलने वाली है। दोनों ही मोबाइल फोंस को छःGB रैम के साथ लॉन्च किये जाने की खबर आ रही है। इसके अलावा इन्हें चौंसठ/एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज के साथ लाया जा सकता है। हालाँकि इतना ही नहीं इन फोंस में आपको क्वालकॉम स्नेपड्रैगन आठ सौ पचपन चिपसेट मिलने के भी आसार हैं। साथ ही आपको इनमें स्टीरियो स्पीकर्स मिलने वाले हैं। अगर हम कैमरा आदि की बात करें तो आपको बता देते हैं कि Pixel चार स्मार्टफोन में आपको एक बारहMP का मेन सेंसर मिलने वला है, जो फेज डिटेक्शन ऑटोफोकस और सोलहMP के टेलीफोटो लेंस के साथ आने वाला है। इसके अलावा गूगल की ओर से इसे DSLR-जैसा कैमरा अटैचमेंट भी मिलने वाला है, जो Pixel चार में आपको नजर आने वाला है, हालाँकि इसे अलग से एक एक्सेसरी के तौर पर सेल किया जाने वाला है।
हरियाणा भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने शुक्रवार को करनाल के कर्ण स्टेडियम में खेलो हरियाणा 2021 का शुभारंभ किया। करनाल : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने शुक्रवार को करनाल के कर्ण स्टेडियम में खेलो हरियाणा 2021 का शुभारंभ किया। धनखड़ ने करनाल में आयोजित हो रही तीन खेल स्पर्धाओं के विजेता खिलाड़ियों को पार्टी की ओर से मुर्राह नस्ल की भैंस, स्कूटी और स्पोर्ट्स साइकिल इनाम स्वरूप देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बॉक्सिंग में पुरूष व महिला वर्ग के टॉप केटेगरी के विजेता खिलाडिय़ों को मुर्राह नस्ल की एक-एक भैंस, टेबल टेनिस विजेताओं को एक-एक स्कूटी और फुटबाल की दोनों चैंपियन टीमों के खिलाडिय़ों को स्पोर्ट्स साइकिल प्रोत्साहन स्वरूप भारतीय जनता पार्टी की ओर से दी जाएंगी। धनखड़ ने कहा कि हरियाणा होनहार खिलाड़ियों, वीर सैनिकों और मेहकतकश किसानों की भूमि है। टोक्यो ओलंपिक में देश की ओर से 25 प्रतिशत भागीदारी हरियाणा के खिलाड़ियों की रही जबकि मेडल जीतने में हमारे खिलाडिय़ों की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार ने खिलाडिय़ों की तैयारी, भागीदारी और मेडल विजेताओं को नकद ईनाम और सम्मान देने के लिए सरकारी खजाने का मुंह खोला हुआ है। खिलाड़ी खेल में अपना सर्वश्रेष्ठ दें, देश और प्रदेश का नाम विश्व पटल पर रोशन करें, हमारी सरकार खिलाड़ियों के उज्जवल भविष्य को संरक्षित रखने को संकल्पित है। हमारे सीएम कबड्डी और डिप्टी सीएम क्रिकेट के खिलाड़ी रहे हैंं। हमारे खेल मंत्री हॉकी के ओलंपियन रहे हैं। इससे हमारे खिलाड़ियों में नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। धनखड़ ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप आज से ही 2024 पेरिस ओलंपिक की तैयारी मेंं जुट जाएं। पेरिस से विश्व विजेता बनकर वतन लौंटे, हम भी वर्ष 2024 में दिल्ली के एयरपोर्ट पर आपका विश्व विजेताओं की तरह स्वागत करेंगे। हम भी 2024 की तैयारी में जुटे हुए हैंं। डीसी निशांत यादव ने मुख्यअतिथि धनखड़ का स्वागत करते हुए बताया कि प्रशासन की ओर से खिलाडिय़ों के लिए बेहतर व्यवस्था की गई है। तीन खेल स्पर्धाओं में कुल 1232 खिलाड़ी भागीदारी कर रहे हैं। खेल विभाग के उपनिदेशक सत्येदव मलिक ने खेलो हरियाणा के शुभारंभ अवसर पर पंंहुचे सभी का आभार प्रकट किया।
हरियाणा भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने शुक्रवार को करनाल के कर्ण स्टेडियम में खेलो हरियाणा दो हज़ार इक्कीस का शुभारंभ किया। करनाल : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने शुक्रवार को करनाल के कर्ण स्टेडियम में खेलो हरियाणा दो हज़ार इक्कीस का शुभारंभ किया। धनखड़ ने करनाल में आयोजित हो रही तीन खेल स्पर्धाओं के विजेता खिलाड़ियों को पार्टी की ओर से मुर्राह नस्ल की भैंस, स्कूटी और स्पोर्ट्स साइकिल इनाम स्वरूप देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बॉक्सिंग में पुरूष व महिला वर्ग के टॉप केटेगरी के विजेता खिलाडिय़ों को मुर्राह नस्ल की एक-एक भैंस, टेबल टेनिस विजेताओं को एक-एक स्कूटी और फुटबाल की दोनों चैंपियन टीमों के खिलाडिय़ों को स्पोर्ट्स साइकिल प्रोत्साहन स्वरूप भारतीय जनता पार्टी की ओर से दी जाएंगी। धनखड़ ने कहा कि हरियाणा होनहार खिलाड़ियों, वीर सैनिकों और मेहकतकश किसानों की भूमि है। टोक्यो ओलंपिक में देश की ओर से पच्चीस प्रतिशत भागीदारी हरियाणा के खिलाड़ियों की रही जबकि मेडल जीतने में हमारे खिलाडिय़ों की पचास प्रतिशत हिस्सेदारी रही। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार ने खिलाडिय़ों की तैयारी, भागीदारी और मेडल विजेताओं को नकद ईनाम और सम्मान देने के लिए सरकारी खजाने का मुंह खोला हुआ है। खिलाड़ी खेल में अपना सर्वश्रेष्ठ दें, देश और प्रदेश का नाम विश्व पटल पर रोशन करें, हमारी सरकार खिलाड़ियों के उज्जवल भविष्य को संरक्षित रखने को संकल्पित है। हमारे सीएम कबड्डी और डिप्टी सीएम क्रिकेट के खिलाड़ी रहे हैंं। हमारे खेल मंत्री हॉकी के ओलंपियन रहे हैं। इससे हमारे खिलाड़ियों में नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। धनखड़ ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप आज से ही दो हज़ार चौबीस पेरिस ओलंपिक की तैयारी मेंं जुट जाएं। पेरिस से विश्व विजेता बनकर वतन लौंटे, हम भी वर्ष दो हज़ार चौबीस में दिल्ली के एयरपोर्ट पर आपका विश्व विजेताओं की तरह स्वागत करेंगे। हम भी दो हज़ार चौबीस की तैयारी में जुटे हुए हैंं। डीसी निशांत यादव ने मुख्यअतिथि धनखड़ का स्वागत करते हुए बताया कि प्रशासन की ओर से खिलाडिय़ों के लिए बेहतर व्यवस्था की गई है। तीन खेल स्पर्धाओं में कुल एक हज़ार दो सौ बत्तीस खिलाड़ी भागीदारी कर रहे हैं। खेल विभाग के उपनिदेशक सत्येदव मलिक ने खेलो हरियाणा के शुभारंभ अवसर पर पंंहुचे सभी का आभार प्रकट किया।
Medininagar (Palamu) : पांकी प्रखंड के सरकारी अस्पताल में हो रहे अनियमिता के खिलाफ इंकलाबी नौजवान सभा ने मोर्चा खोल दिया है. रविवार को इंकलाबी नौजवान सभा शहर के विभिन्न चौक चौराहों पर पोस्टर चिपका कर अव्यवस्था के प्रति अपनी नाराज़गी जतायी. इंकलाबी नौजवान सभा के इजहार अली हैदर ने बताया कि पांकी के सरकारी अस्पताल को बिचोलियों का अड्डा बना दिया गया है. अस्पताल में मरीजों की जांच की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है. यहां आने वाले मरीजों को रक्त की जांच से लेकर एक्स-रे तक के लिए भटकना पड़ता है. बावजूद इसके अस्पताल की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर चल रही है. सरकार सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का दावा करती रही है. इन्हीं दावों में शामिल है अस्पताल के ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में दवाओं की उपलब्धता तथा प्रत्येक मरीज की जांच का बेहतर इंतजाम. लेकिन सामुदायिक स्वास्थ अस्पताल पांकी में आने के बाद इस व्यवस्था की कलई खुलती नजर आती है. अस्पताल में प्रवेश के बाद मरीज जांच की व्यवस्था के लिए भटकते नजर आते हैं. यहां पर डॉक्टर के बैठने की कोई समय सीमा नहीं है. ये अपनी मर्जी से बैठते हैं. यहां के ग्रामीणों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है. प्रखंड में कई सारी उपस्वास्थ केंद्र पर डॉक्टर नहीं जाते हैं. अस्पताल के डॉक्टर गरीब मजदूरों से पैसा ऐंठने के लिए बाहर की दवाई लिख देते हैं. साथ में अरुण कुमार, संतोष कुमार, आइसा जिला अध्यक्ष गुड्डू भुइयां मौजूद थे.
Medininagar : पांकी प्रखंड के सरकारी अस्पताल में हो रहे अनियमिता के खिलाफ इंकलाबी नौजवान सभा ने मोर्चा खोल दिया है. रविवार को इंकलाबी नौजवान सभा शहर के विभिन्न चौक चौराहों पर पोस्टर चिपका कर अव्यवस्था के प्रति अपनी नाराज़गी जतायी. इंकलाबी नौजवान सभा के इजहार अली हैदर ने बताया कि पांकी के सरकारी अस्पताल को बिचोलियों का अड्डा बना दिया गया है. अस्पताल में मरीजों की जांच की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है. यहां आने वाले मरीजों को रक्त की जांच से लेकर एक्स-रे तक के लिए भटकना पड़ता है. बावजूद इसके अस्पताल की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर चल रही है. सरकार सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का दावा करती रही है. इन्हीं दावों में शामिल है अस्पताल के ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में दवाओं की उपलब्धता तथा प्रत्येक मरीज की जांच का बेहतर इंतजाम. लेकिन सामुदायिक स्वास्थ अस्पताल पांकी में आने के बाद इस व्यवस्था की कलई खुलती नजर आती है. अस्पताल में प्रवेश के बाद मरीज जांच की व्यवस्था के लिए भटकते नजर आते हैं. यहां पर डॉक्टर के बैठने की कोई समय सीमा नहीं है. ये अपनी मर्जी से बैठते हैं. यहां के ग्रामीणों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है. प्रखंड में कई सारी उपस्वास्थ केंद्र पर डॉक्टर नहीं जाते हैं. अस्पताल के डॉक्टर गरीब मजदूरों से पैसा ऐंठने के लिए बाहर की दवाई लिख देते हैं. साथ में अरुण कुमार, संतोष कुमार, आइसा जिला अध्यक्ष गुड्डू भुइयां मौजूद थे.
NAWADA: मामला नवादा जिले का है, जहां शादी के 18 दिन बाद नवविवाहिता की हत्या कर दी गई. घटना को अंजाम देकर ससुराल वाले फरार हो गये हैं. लड़की के पिता ने पुलिस को सुचना दी कि उन्हें फोन पर बताया गया कि उनकी बेटी के पेट में दर्द है. लेकिन जब हमलोग वहां पहुंचे तो मेरी बेटी मृत पड़ी थी. पिता ने बताया कि सारा मामला दहेज़ का है. उन्होंने बताया कि दहेज़ से 40 हजार काट लिए गए थे, जिसके कारण ससुराल वालों ने इस घटना को अंजाम दिया है. घटना नवादा जिले के झुनठी गांव की है. मृतका की पहचान नालंदा जिले के गिरियक थाना क्षेत्र के इसुआ गांव के रहने वाले सुनील पंडित की बेटी सुषमा कुमारी के रूप में की गई है. आपको बता दें कि लड़की की शादी 6 जून को रामबरन कुमार से हुई थी. घटना के बाद पिता ने पुलिस को जानकारी दी जिसके बाद जांच शुरू हुई. मृतका के पिता ने बताया कि 6 जून को ही मैंने बेटी की शादी नवादा गांव के रामबरन के साथ बहुत ही धूम धाम से की थी. मुस्फिल थाना क्षेत्र झुनठी गांव निवासी चंद्रेश्वर पंडित के पुत्र रामबरन से हिन्दू रीति रिवाज के साथ शादी हुई थी. पिता ने आगे बताया की दहेज़ में मैंने 40 हजार काट लिए थे, जिसकी वजह से मेरी बेटी को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था. और शादी के 18 दिन होते ही ससुराल वालों ने उसे मौत के घाट उतार दिया. सुनील पंडित ने बताया कि उनकी बेटी के ससुराल से फ़ोन आया कि बेटी के पेट में दर्द हो रहा है. सूचना मिलते ही हम बेटी को देखने उसके ससुराल गये, जहां बेटी मृत पड़ी हुई थी और ससुराल वाले घर छोड़ कर फरार हो गये थे. उन्होंने बताया की बेटी के शव को देख कर लग रहा था की उसके मुह पर तकिया रख कर हत्या की गई है.
NAWADA: मामला नवादा जिले का है, जहां शादी के अट्ठारह दिन बाद नवविवाहिता की हत्या कर दी गई. घटना को अंजाम देकर ससुराल वाले फरार हो गये हैं. लड़की के पिता ने पुलिस को सुचना दी कि उन्हें फोन पर बताया गया कि उनकी बेटी के पेट में दर्द है. लेकिन जब हमलोग वहां पहुंचे तो मेरी बेटी मृत पड़ी थी. पिता ने बताया कि सारा मामला दहेज़ का है. उन्होंने बताया कि दहेज़ से चालीस हजार काट लिए गए थे, जिसके कारण ससुराल वालों ने इस घटना को अंजाम दिया है. घटना नवादा जिले के झुनठी गांव की है. मृतका की पहचान नालंदा जिले के गिरियक थाना क्षेत्र के इसुआ गांव के रहने वाले सुनील पंडित की बेटी सुषमा कुमारी के रूप में की गई है. आपको बता दें कि लड़की की शादी छः जून को रामबरन कुमार से हुई थी. घटना के बाद पिता ने पुलिस को जानकारी दी जिसके बाद जांच शुरू हुई. मृतका के पिता ने बताया कि छः जून को ही मैंने बेटी की शादी नवादा गांव के रामबरन के साथ बहुत ही धूम धाम से की थी. मुस्फिल थाना क्षेत्र झुनठी गांव निवासी चंद्रेश्वर पंडित के पुत्र रामबरन से हिन्दू रीति रिवाज के साथ शादी हुई थी. पिता ने आगे बताया की दहेज़ में मैंने चालीस हजार काट लिए थे, जिसकी वजह से मेरी बेटी को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था. और शादी के अट्ठारह दिन होते ही ससुराल वालों ने उसे मौत के घाट उतार दिया. सुनील पंडित ने बताया कि उनकी बेटी के ससुराल से फ़ोन आया कि बेटी के पेट में दर्द हो रहा है. सूचना मिलते ही हम बेटी को देखने उसके ससुराल गये, जहां बेटी मृत पड़ी हुई थी और ससुराल वाले घर छोड़ कर फरार हो गये थे. उन्होंने बताया की बेटी के शव को देख कर लग रहा था की उसके मुह पर तकिया रख कर हत्या की गई है.
अगले 10 दिनों में आखिर कहां जाएगा कोरोना? . . . प्रदेश सरकार ने खुद इस सबसे बड़े सवाल का जवाब दिया है। सरकार का अनुमान है कि जिस गति से संक्रमण फैल रहा है, उस हिसाब से 30 अप्रैल तक राजस्थान में 1. 29 लाख एक्टिव रोगी होंगे। यह आंकड़ा इतना भयानक है कि स्वास्थ्य सेवाओं को ध्वस्त कर सकता है। इससे बड़ी चिंता की बात ये है कि कोरोना सरकारी अंदाजे से भी तेज दौड़ रहा है। क्योंकि, सरकार के 19 अप्रैल के अनुमान से 6 हजार ज्यादा एक्टिव रोगी हो चुके। यानी 30 तक डेढ़ लाख पार जा सकते हैं। 1. जांच; एसएमएस अस्पताल के डॉ. सुधीर भंडारी बोले- 30-40% संक्रमितों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव है। 2. हवा से संक्रमण; लैंसेट का दावा, इस बार का वायरस हवा से भी फैल रहा है। कण हवा में 3-4 घंटे तक रहते हैं। 3. इंफ्रास्ट्रक्चर; स्पेन में 25% मरीजों ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। इटली में 30% मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पाए। 1. कुंभ; स्नान करके बड़ी संख्या में लोग गांव लौट रहे हैं। डर है कि इनमें से कई लोग अपने साथ संक्रमण भी ला रहे हैं। 2. ऑक्सीजन; सप्लाई सुधरने में अभी 15 दिन लगेंगे। अगर इसी गति से मरीज मिलते रहे, तो भारी कमी का खतरा है। 3. रेमडेसिविर; कंपनियों ने प्रोडेक्शन बढ़ा दिया है। 10 दिनों में जाकर ही इसकी मांग-आपूर्ति का अंतर पाटा जा सकेगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अगले दस दिनों में आखिर कहां जाएगा कोरोना? . . . प्रदेश सरकार ने खुद इस सबसे बड़े सवाल का जवाब दिया है। सरकार का अनुमान है कि जिस गति से संक्रमण फैल रहा है, उस हिसाब से तीस अप्रैल तक राजस्थान में एक. उनतीस लाख एक्टिव रोगी होंगे। यह आंकड़ा इतना भयानक है कि स्वास्थ्य सेवाओं को ध्वस्त कर सकता है। इससे बड़ी चिंता की बात ये है कि कोरोना सरकारी अंदाजे से भी तेज दौड़ रहा है। क्योंकि, सरकार के उन्नीस अप्रैल के अनुमान से छः हजार ज्यादा एक्टिव रोगी हो चुके। यानी तीस तक डेढ़ लाख पार जा सकते हैं। एक. जांच; एसएमएस अस्पताल के डॉ. सुधीर भंडारी बोले- तीस-चालीस% संक्रमितों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव है। दो. हवा से संक्रमण; लैंसेट का दावा, इस बार का वायरस हवा से भी फैल रहा है। कण हवा में तीन-चार घंटाटे तक रहते हैं। तीन. इंफ्रास्ट्रक्चर; स्पेन में पच्चीस% मरीजों ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। इटली में तीस% मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पाए। एक. कुंभ; स्नान करके बड़ी संख्या में लोग गांव लौट रहे हैं। डर है कि इनमें से कई लोग अपने साथ संक्रमण भी ला रहे हैं। दो. ऑक्सीजन; सप्लाई सुधरने में अभी पंद्रह दिन लगेंगे। अगर इसी गति से मरीज मिलते रहे, तो भारी कमी का खतरा है। तीन. रेमडेसिविर; कंपनियों ने प्रोडेक्शन बढ़ा दिया है। दस दिनों में जाकर ही इसकी मांग-आपूर्ति का अंतर पाटा जा सकेगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वायुसेना आज अपना 88वां स्थापना दिवस मना रही है. इस मौके पर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर कार्यक्रम हुआ. यहां वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने एयरफोर्स डे के मौके पर संबोधन दिया. वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना के सभी साथियों का वो सेवा के लिए धन्यवाद करते हैं. आज जिन जवानों को अवॉर्ड मिला है, उन्हें भी बधाई. आज वायुसेना बदलाव से गुजर रही है, हम ऐसे वक्त में हैं जो आगे का भविष्य तय करेगी. वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हम अपने रिटायर्ड जवानों का शुक्रिया करते हैं, जिन्होंने इतनी ताकतवर वायुसेना को खड़ा किया. ये साल काफी वजहों से अलग रहा है, देश ने इस साल कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. इसके साथ ही वायुसेना ने भी इस संकट के वक्त में एक्शन लिया, लॉकडाउन के वक्त आम लोगों की मदद की और जरूरी सामान लोगों तक पहुंचाया. वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया बोले कि हमारे क्षेत्र में खतरा बढ़ता जा रहा है, पड़ोसी देश के जरिए आतंकियों के खतरे को बढ़ाया जा रहा है तो वही साइबर स्पेस के चलते भी हमें नई चुनौतियां देखने को मिल रही हैं. वायुसेना हर मोर्चे पर अपने आप को तैयार कर रही है, साथ ही बॉर्डर पर पैनी निगाहें बनाई हुई है. वायुसेना प्रमुख ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों ने हमें और ताकतवर तैयारी करने के लिए सजग किया है. वायुसेना लगातार अपने बेड़े में नए विमानों को शामिल कर रही है, अपाचे और राफेल इसका ही उदाहरण हैं. कई पुराने एयरक्राफ्ट का अपग्रेडेशन भी किया जा रहा है. आत्मनिर्भर भारत को लेकर वायुसेना प्रमुख बोले कि आज वायुसेना में कई देसी मिसाइल और लड़ाकू विमान भी शामिल हैं जो वायुसेना को आत्मनिर्भर बनाते हैं. आने वाले वक्त में वायुसेना को कई और देसी और विदेशी विमान मिलेंगे.
वायुसेना आज अपना अठासीवां स्थापना दिवस मना रही है. इस मौके पर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर कार्यक्रम हुआ. यहां वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने एयरफोर्स डे के मौके पर संबोधन दिया. वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना के सभी साथियों का वो सेवा के लिए धन्यवाद करते हैं. आज जिन जवानों को अवॉर्ड मिला है, उन्हें भी बधाई. आज वायुसेना बदलाव से गुजर रही है, हम ऐसे वक्त में हैं जो आगे का भविष्य तय करेगी. वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हम अपने रिटायर्ड जवानों का शुक्रिया करते हैं, जिन्होंने इतनी ताकतवर वायुसेना को खड़ा किया. ये साल काफी वजहों से अलग रहा है, देश ने इस साल कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. इसके साथ ही वायुसेना ने भी इस संकट के वक्त में एक्शन लिया, लॉकडाउन के वक्त आम लोगों की मदद की और जरूरी सामान लोगों तक पहुंचाया. वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया बोले कि हमारे क्षेत्र में खतरा बढ़ता जा रहा है, पड़ोसी देश के जरिए आतंकियों के खतरे को बढ़ाया जा रहा है तो वही साइबर स्पेस के चलते भी हमें नई चुनौतियां देखने को मिल रही हैं. वायुसेना हर मोर्चे पर अपने आप को तैयार कर रही है, साथ ही बॉर्डर पर पैनी निगाहें बनाई हुई है. वायुसेना प्रमुख ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों ने हमें और ताकतवर तैयारी करने के लिए सजग किया है. वायुसेना लगातार अपने बेड़े में नए विमानों को शामिल कर रही है, अपाचे और राफेल इसका ही उदाहरण हैं. कई पुराने एयरक्राफ्ट का अपग्रेडेशन भी किया जा रहा है. आत्मनिर्भर भारत को लेकर वायुसेना प्रमुख बोले कि आज वायुसेना में कई देसी मिसाइल और लड़ाकू विमान भी शामिल हैं जो वायुसेना को आत्मनिर्भर बनाते हैं. आने वाले वक्त में वायुसेना को कई और देसी और विदेशी विमान मिलेंगे.
दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत में 2 युवकों की मौत हो गई, तीन गंभीर घायलों का इलाज जारी है। शुक्रवार को अलवर दिल्ली मेगा हाईवे पर स्थित रामगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम चौकी बास में कस्बा निवासी तीन युवकों की अलवर की ओर से आ रही मोटरसाइकिल पर सवार दो युवकों से भयंकर भिड़ंत हो गई। जिसमें रामगढ़ कस्बा निवासी एडवोकेट जयंत अलग की मृत्यु हो गई एवं उसके साथी आकाश जैन एवं प्रिंस दुआ गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं दूसरी ओर शानू सिंह पुत्र अवतार सिंह निवासी अलगाना क्षेत्र गोविंदगढ़ की भी इस सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई है। जबकि उसका साथी माखन पुत्र रणजीत सिंह गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है। शुक्रवार को शाम करीब 5 बजे रामगढ़ कस्बे से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चौकी बास में हुई इस भयानक सड़क दुर्घटना की खबर मिलते ही पुलिस प्रशासन फौरन मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के सहयोग से घायल पांचों युवकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां से अलवर रेफर कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत में दो युवकों की मौत हो गई, तीन गंभीर घायलों का इलाज जारी है। शुक्रवार को अलवर दिल्ली मेगा हाईवे पर स्थित रामगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत करीब तीन किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित ग्राम चौकी बास में कस्बा निवासी तीन युवकों की अलवर की ओर से आ रही मोटरसाइकिल पर सवार दो युवकों से भयंकर भिड़ंत हो गई। जिसमें रामगढ़ कस्बा निवासी एडवोकेट जयंत अलग की मृत्यु हो गई एवं उसके साथी आकाश जैन एवं प्रिंस दुआ गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं दूसरी ओर शानू सिंह पुत्र अवतार सिंह निवासी अलगाना क्षेत्र गोविंदगढ़ की भी इस सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई है। जबकि उसका साथी माखन पुत्र रणजीत सिंह गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है। शुक्रवार को शाम करीब पाँच बजे रामगढ़ कस्बे से करीब तीन किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित है। चौकी बास में हुई इस भयानक सड़क दुर्घटना की खबर मिलते ही पुलिस प्रशासन फौरन मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के सहयोग से घायल पांचों युवकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां से अलवर रेफर कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दुःख पावेगा. न्यायशास्त्रादि विद्या अन्य पदार्थ है और परमार्थका यथार्थ निर्णय अन्य पदार्थ है; क्या हुआ जो किसीने अनजानके सामने अपना झूठा पक्ष सिद्ध कर दिया किसी दिन विद्वानों के सामने दब जायगा. चर्चाका चार सत्यार्थ है ॥ ३२ ॥ अक्षराणामकारोऽस्मि द्वन्द्वः सामासिकस्य च ॥ अहमेवाक्षयः कालो धाताऽहं विश्वतोमुखः ॥ ३३ ॥ अक्षराणाम् १ अकारः २ अस्मि ३ सामासिकस्य ४ द्वन्द्वः ५ च ६ अहम् ७ एव ८ अक्षयः ९ कालः १० धाता ११ विश्वतोमुखः १२ अहम् १३ ॥ ३३ ॥ अ० अक्षरों में १ अकार २ मैं हूं ३. समास ४ द्वन्द्वसमास ५ मैंही हूं ६।७/८, अक्षय ९ काल १० सि० भी मैं हूं. पीछे काल वो कहा था कि जो संख्या में आता है. पल, घडी, दिन, रात्रि, वर्ष और युगादिको क्षयकाल कहते हैं. यहां अक्षय यह कालका विशेषण है. अथवा परमेश्वरका आम कालकाजी काल है* कर्मफल विधाता ११ विराट्र १२ में १३ सि० हूं * ॥ ३३ ॥ मृत्युः सर्वहरचाहमुद्भवःश्च भविष्यताम् ॥ कीर्तिः श्रीर्वाक् च नारीणां स्मृतिमेधा धृतिः क्षमा ॥ ३४ ॥ मृत्युः १ सर्वहरः २ च ३ अहम् ४ भविष्यताम् ५ उद्भवः ६ च ७ नारीणाम् ८ कीर्तिः ९ श्रीः १० वाक् ११ च १२ स्मृतिः १३ मेधा १४ श्रुतिः १५ क्षमा १६ ॥ ३४ ॥ अ० मृत्यु १ सबका हरनेवाला २ मैं ३।४ सि० हूं * होनेवाले पदार्थों में ५ अर्थात बढाई होनेते योग्य जो पदार्थ है, मोक्षकी प्राप्तिका हेतु उद्भव, उत्कर्ष अभ्युदयमी ६/७ सि० मैं हूं; * त्रिपोंमें ८ कीर्ति ९ अर्थात् महापुरुषमें शमदम औदार्य दानादि गुणाकी ख्याति -होना वो कीर्ति ९ सि० भगवतकी विभूति है * लक्ष्मी कांति या शोभा • मधुरवाणी ११ । १२ बहुत दिनोंकी बात याद रहना १३ ग्रन्थधारणाशक्ति १४ क्षुत्पिपासादिसमय में क्षोभ न होना, १५ अरमानादिसमय में क्षोभ न होना, १६ सि० ये सच परमेश्वरकी विभूतेि हैं. जिनके आभासमात्रसंबब्धसे स्त्री पुरुष श्रेष्ठ कहलाते हैं * ॥ ३४ ॥ आनंदगिरिकतभाचाटीका । बृहत्साम तथा सानां गायत्री छन्दसामहम् ।। मासानां मार्गशीषोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥ ३५ ॥ साम्नाम् १ तथा २ बृहत्साम ३ छंदसाम् ४ गायत्री ५ अहम् ६ मासानाम् ७ मार्गशीर्षः ८ अहम् ९ ऋतूनाम् १० कुसुमाकरः ११ ॥ ३५ ॥ अ० उ० वेदोंमें सामवेद में हूं, यह श्रीभगवान्ने पीछे कहा अब कहते हैं कि, सामवेद १ भी २ बृहत्सामऋचा ३ सि० में हूं * छन्दों में ४ गायत्री ५ मैं ६ सि० * महीनों में ७ अगहन ( मार्गशीर्ष ) ८ मैं १ सि० हूं * ऋतुओं १० वसन्तऋतु ११ सि० मैं हूं मीन और भेषका सूर्य जबतक वर्तता है. इनही दोनों महीनों को वसन्त कहते हैं. इसी ऋतु में यह टीका बनी है * ॥ ३५ ॥ द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् ॥ जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम् ॥ २६ ॥ छलयताम् १ द्यूतम् २ अस्मि ३ तेजस्विनाम् ४ तेजः ५ अहम६जयः • अस्मि ८ व्यवसायः ९ अस्मि १० सत्यवताम् ११ सत्त्वम् १२ अहम् १३ ॥ ३६ ॥ अ० छल करनेवालोंमें १ जुवा २ मैं हूं ३ तेजस्विपुरुषोंमें ४ तेज ५ मैं ६ सि० हूं. जीतनेवालोंने * जय ७ मैं हूं ८ सि • निश्चय करने - वालोंमें आत्मनिध्वय ९ मैं हूं १० सत्त्वगुणी पुरुषों में ११ सत्त्वगुणी १२ मैं हूं १३. टी० छलियालोगों के लिये जुवा अपनी विभूति परमेश्वरने कही है १।२ ॥ ३६ ॥ वृष्णीनां वासुदेवोऽस्मि पाण्डवानां धनंजयः ।। मुनीनामप्यहं व्यासः कवीनानुशना कविः ॥ ३७॥ वृष्णीनाम् १ वासुदेवः २ अस्मि ३ पांडवानाम् ४ धनंजयः ५ सुनीनाम् ६ अपि ७ अहम् ८ व्यासः ९ कवीनाम् १० उशना ११ कविः १२ ॥ ३७ ॥ अ० वृष्णियों में १ वासुदेव २ मैं हूं ३. अर्थात् श्रीकृष्णचन्द्रमहाराज शुद्ध सच्चिदानन्द पूर्णब्रह्म वसुदेवजीके मूर्तिमान पुत्र, कि जो अर्जु
दुःख पावेगा. न्यायशास्त्रादि विद्या अन्य पदार्थ है और परमार्थका यथार्थ निर्णय अन्य पदार्थ है; क्या हुआ जो किसीने अनजानके सामने अपना झूठा पक्ष सिद्ध कर दिया किसी दिन विद्वानों के सामने दब जायगा. चर्चाका चार सत्यार्थ है ॥ बत्तीस ॥ अक्षराणामकारोऽस्मि द्वन्द्वः सामासिकस्य च ॥ अहमेवाक्षयः कालो धाताऽहं विश्वतोमुखः ॥ तैंतीस ॥ अक्षराणाम् एक अकारः दो अस्मि तीन सामासिकस्य चार द्वन्द्वः पाँच च छः अहम् सात एव आठ अक्षयः नौ कालः दस धाता ग्यारह विश्वतोमुखः बारह अहम् तेरह ॥ तैंतीस ॥ अशून्य अक्षरों में एक अकार दो मैं हूं तीन. समास चार द्वन्द्वसमास पाँच मैंही हूं छः।सात/आठ, अक्षय नौ काल दस सिशून्य भी मैं हूं. पीछे काल वो कहा था कि जो संख्या में आता है. पल, घडी, दिन, रात्रि, वर्ष और युगादिको क्षयकाल कहते हैं. यहां अक्षय यह कालका विशेषण है. अथवा परमेश्वरका आम कालकाजी काल है* कर्मफल विधाता ग्यारह विराट्र बारह में तेरह सिशून्य हूं * ॥ तैंतीस ॥ मृत्युः सर्वहरचाहमुद्भवःश्च भविष्यताम् ॥ कीर्तिः श्रीर्वाक् च नारीणां स्मृतिमेधा धृतिः क्षमा ॥ चौंतीस ॥ मृत्युः एक सर्वहरः दो च तीन अहम् चार भविष्यताम् पाँच उद्भवः छः च सात नारीणाम् आठ कीर्तिः नौ श्रीः दस वाक् ग्यारह च बारह स्मृतिः तेरह मेधा चौदह श्रुतिः पंद्रह क्षमा सोलह ॥ चौंतीस ॥ अशून्य मृत्यु एक सबका हरनेवाला दो मैं तीन।चार सिशून्य हूं * होनेवाले पदार्थों में पाँच अर्थात बढाई होनेते योग्य जो पदार्थ है, मोक्षकी प्राप्तिका हेतु उद्भव, उत्कर्ष अभ्युदयमी छः/सात सिशून्य मैं हूं; * त्रिपोंमें आठ कीर्ति नौ अर्थात् महापुरुषमें शमदम औदार्य दानादि गुणाकी ख्याति -होना वो कीर्ति नौ सिशून्य भगवतकी विभूति है * लक्ष्मी कांति या शोभा • मधुरवाणी ग्यारह । बारह बहुत दिनोंकी बात याद रहना तेरह ग्रन्थधारणाशक्ति चौदह क्षुत्पिपासादिसमय में क्षोभ न होना, पंद्रह अरमानादिसमय में क्षोभ न होना, सोलह सिशून्य ये सच परमेश्वरकी विभूतेि हैं. जिनके आभासमात्रसंबब्धसे स्त्री पुरुष श्रेष्ठ कहलाते हैं * ॥ चौंतीस ॥ आनंदगिरिकतभाचाटीका । बृहत्साम तथा सानां गायत्री छन्दसामहम् ।। मासानां मार्गशीषोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥ पैंतीस ॥ साम्नाम् एक तथा दो बृहत्साम तीन छंदसाम् चार गायत्री पाँच अहम् छः मासानाम् सात मार्गशीर्षः आठ अहम् नौ ऋतूनाम् दस कुसुमाकरः ग्यारह ॥ पैंतीस ॥ अशून्य उशून्य वेदोंमें सामवेद में हूं, यह श्रीभगवान्ने पीछे कहा अब कहते हैं कि, सामवेद एक भी दो बृहत्सामऋचा तीन सिशून्य में हूं * छन्दों में चार गायत्री पाँच मैं छः सिशून्य * महीनों में सात अगहन आठ मैं एक सिशून्य हूं * ऋतुओं दस वसन्तऋतु ग्यारह सिशून्य मैं हूं मीन और भेषका सूर्य जबतक वर्तता है. इनही दोनों महीनों को वसन्त कहते हैं. इसी ऋतु में यह टीका बनी है * ॥ पैंतीस ॥ द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् ॥ जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम् ॥ छब्बीस ॥ छलयताम् एक द्यूतम् दो अस्मि तीन तेजस्विनाम् चार तेजः पाँच अहमछःजयः • अस्मि आठ व्यवसायः नौ अस्मि दस सत्यवताम् ग्यारह सत्त्वम् बारह अहम् तेरह ॥ छत्तीस ॥ अशून्य छल करनेवालोंमें एक जुवा दो मैं हूं तीन तेजस्विपुरुषोंमें चार तेज पाँच मैं छः सिशून्य हूं. जीतनेवालोंने * जय सात मैं हूं आठ सि • निश्चय करने - वालोंमें आत्मनिध्वय नौ मैं हूं दस सत्त्वगुणी पुरुषों में ग्यारह सत्त्वगुणी बारह मैं हूं तेरह. टीशून्य छलियालोगों के लिये जुवा अपनी विभूति परमेश्वरने कही है एक।दो ॥ छत्तीस ॥ वृष्णीनां वासुदेवोऽस्मि पाण्डवानां धनंजयः ।। मुनीनामप्यहं व्यासः कवीनानुशना कविः ॥ सैंतीस॥ वृष्णीनाम् एक वासुदेवः दो अस्मि तीन पांडवानाम् चार धनंजयः पाँच सुनीनाम् छः अपि सात अहम् आठ व्यासः नौ कवीनाम् दस उशना ग्यारह कविः बारह ॥ सैंतीस ॥ अशून्य वृष्णियों में एक वासुदेव दो मैं हूं तीन. अर्थात् श्रीकृष्णचन्द्रमहाराज शुद्ध सच्चिदानन्द पूर्णब्रह्म वसुदेवजीके मूर्तिमान पुत्र, कि जो अर्जु
एजेंसी ने 2023 के लिए चीन की GDP ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 5 फीसद कर दिया है. पहले 4.1 फीसद ग्रोथ का अनुमान था. कोरोना की मार से चीन की अर्थव्यवस्था को उबरते देख फिच रेटिंग्स ने चीन की ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया है. एजेंसी ने 2023 के लिए चीन की GDP ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 5 फीसद कर दिया है. पहले 4.1 फीसद ग्रोथ का अनुमान था. मनी9 की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में चीन की अर्थव्यवस्था में आ रही रिकवरी के कई आंकड़े सामने आए हैं. जिन्हें देखते हुए फिच रेटिंग्स ने चीन को अपग्रेड किया है. फिच रेटिंग्स के इस अपग्रेड के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देख जा रही है. ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 85 डॉलर तक पहुंच गया है. अमेरिका के बाद चीन दुनिया का दूसरा बड़ा क्रूड ऑयल कंज्यूमर है.
एजेंसी ने दो हज़ार तेईस के लिए चीन की GDP ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर पाँच फीसद कर दिया है. पहले चार.एक फीसद ग्रोथ का अनुमान था. कोरोना की मार से चीन की अर्थव्यवस्था को उबरते देख फिच रेटिंग्स ने चीन की ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया है. एजेंसी ने दो हज़ार तेईस के लिए चीन की GDP ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर पाँच फीसद कर दिया है. पहले चार.एक फीसद ग्रोथ का अनुमान था. मनीनौ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में चीन की अर्थव्यवस्था में आ रही रिकवरी के कई आंकड़े सामने आए हैं. जिन्हें देखते हुए फिच रेटिंग्स ने चीन को अपग्रेड किया है. फिच रेटिंग्स के इस अपग्रेड के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देख जा रही है. ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर पचासी डॉलर तक पहुंच गया है. अमेरिका के बाद चीन दुनिया का दूसरा बड़ा क्रूड ऑयल कंज्यूमर है.
कोलकाता : हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद पंचायत चुनाव में उम्मीदवार क्यों नहीं नामांकन दाखिल कर पाएं। जस्टिस राजाशेखर मंथा ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवायी करते हुए राज्य सरकार के एडवोकेट से इसका जवाब तलब किया। पुलिस की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हद तो यह है कि इस मामले में भांगड़ थाने में एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। जस्टिस मंथा ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि एफिडेविट दाखिल कर के जवाब दें कि इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है। जस्टिस मंथा ने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक दलों से जुड़ा मामला ही नहीं है। बल्कि कोर्ट के आदेश का उलंघन का मामला है। माकपा उम्मीदवारों की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्या ने कहा कि पुलिस ने कोर्ट के साथ धोका किया है। कोर्ट के आदेश के तहत उन्हें नामांकन दाखिल करने के लिए ले जाया गया लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस उन्हें दंगाइयों के हवाले कर के किनारे हट गई। कोर्ट में एक वीडिओ भी पेश किया गया जिसमें एक व्यक्ति कह रहा था कि उसे पांच हजार रुपए दे कर हमला करने के लिए यहां लाया गया है। नामांकन दाखिल करने वालों को एक कमरे में बंद कर दिया गया और इसके बाद उनकी जम कर पिटाई की गई। धारदार हथियारों से हमला किया गया। राज्य सरकार को जवाब देना पड़ेगा कि पुलिस कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं कर पायी। दंगाइयों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
कोलकाता : हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद पंचायत चुनाव में उम्मीदवार क्यों नहीं नामांकन दाखिल कर पाएं। जस्टिस राजाशेखर मंथा ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवायी करते हुए राज्य सरकार के एडवोकेट से इसका जवाब तलब किया। पुलिस की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हद तो यह है कि इस मामले में भांगड़ थाने में एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। जस्टिस मंथा ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि एफिडेविट दाखिल कर के जवाब दें कि इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है। जस्टिस मंथा ने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक दलों से जुड़ा मामला ही नहीं है। बल्कि कोर्ट के आदेश का उलंघन का मामला है। माकपा उम्मीदवारों की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्या ने कहा कि पुलिस ने कोर्ट के साथ धोका किया है। कोर्ट के आदेश के तहत उन्हें नामांकन दाखिल करने के लिए ले जाया गया लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस उन्हें दंगाइयों के हवाले कर के किनारे हट गई। कोर्ट में एक वीडिओ भी पेश किया गया जिसमें एक व्यक्ति कह रहा था कि उसे पांच हजार रुपए दे कर हमला करने के लिए यहां लाया गया है। नामांकन दाखिल करने वालों को एक कमरे में बंद कर दिया गया और इसके बाद उनकी जम कर पिटाई की गई। धारदार हथियारों से हमला किया गया। राज्य सरकार को जवाब देना पड़ेगा कि पुलिस कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं कर पायी। दंगाइयों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
इन दिनों इंग्लैंड में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2023 का फाइनल मुकाबला हो रहा है और इसी वजह से भारतीय खिलाड़ी काफी ज्यादा चर्चाओं में नज़र आ रहे हैं. वहीं भारतीय टीम के युवा बल्लेबाज शुभमन गिल भी इन दिनों काफी ज्यादा सुर्खियों में नज़र आ रहे है. दरअसल, शुभमन गिल और सारा तेंदुलकर को लेकर फैंस का मानना है कि उन दोनों के बीच कुछ चल रहा है और आईपीएल 2023 के दौरान वो दोनों इसी वजह से काफी ज्यादा सुर्खियों में रहे थे. हालांकि, इन दिनों सारा तेंदुलकर के एक हरकत के वजह से शुभमन गिल को लेकर फैंस जमकर मजाक बना रहे हैं. शुभमन गिल वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मुकाबला खेलने के लिए इंग्लैंड गए हुए हैं और वहीं सारा तेंदुलकर भी अपनी छुटियों को खत्म करने के बाद से अपने पढ़ाई के वजह से इंग्लैंड पहुंच चुकी हैं. हालांकि, इंग्लैंड पहुंचने के बाद से फैंस को लग रहा था की सारा तेंदुलकर और शुभमन गिल एक दूसरे के साथ नज़र आएंगे और एक दूसरे साथ टाइम बिताएंगे लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें सारा तेंदुलकर फैशन इंफ्लुएंसर ओरहान अवत्रमणि के साथ नज़र आ रही हैं. सारा इंग्लैंड पहुंचने के बाद से ओरहान अवत्रमणि के साथ पुरी रात पार्टी करते हुए नज़र आई और अब सारा और ओरहान की तस्वीरें वायरल होने के बाद से फैंस शुभमन गिल का मजाक भी उड़ा रहे हैं. आपको बता दें कि ओरहान अवत्रमणि काफी पॉपुलर फैशन इंफ्लुएंसर हैं और वो अक्सर बॉलीवुड के स्टार किड्स के साथ पार्टी करते हुए नज़र आते रहते हैं. बता दें कि आईपीएल 2023 में शुभमन गिल और सचिन तेंदुलकर की लाडली बेटी सारा तेंदुलकर ने काफी ज्यादा सुर्खियां बटोरा था. हालांकि, शुभमन गिल और सारा तेंदुलकर ने अब तक अपने रिश्ते के बारे में आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह की कोई जानकारी नहीं दी है लेकिन उन दोनों के फैंस को लगता है कि वो दोनों एक दूसरे के साथ काफी ज्यादा प्यार करते हैं. हालांकि, उन दोनों के बीच क्या चल रहा है इस बात कि जानकारी तो केवल शुभमन गिल और सारा तेंदुलकर ही दे पाएंगे लेकिन फैंस को उन दोनों की जोड़ी काफी ज्यादा पसंद आती है.
इन दिनों इंग्लैंड में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप दो हज़ार तेईस का फाइनल मुकाबला हो रहा है और इसी वजह से भारतीय खिलाड़ी काफी ज्यादा चर्चाओं में नज़र आ रहे हैं. वहीं भारतीय टीम के युवा बल्लेबाज शुभमन गिल भी इन दिनों काफी ज्यादा सुर्खियों में नज़र आ रहे है. दरअसल, शुभमन गिल और सारा तेंदुलकर को लेकर फैंस का मानना है कि उन दोनों के बीच कुछ चल रहा है और आईपीएल दो हज़ार तेईस के दौरान वो दोनों इसी वजह से काफी ज्यादा सुर्खियों में रहे थे. हालांकि, इन दिनों सारा तेंदुलकर के एक हरकत के वजह से शुभमन गिल को लेकर फैंस जमकर मजाक बना रहे हैं. शुभमन गिल वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मुकाबला खेलने के लिए इंग्लैंड गए हुए हैं और वहीं सारा तेंदुलकर भी अपनी छुटियों को खत्म करने के बाद से अपने पढ़ाई के वजह से इंग्लैंड पहुंच चुकी हैं. हालांकि, इंग्लैंड पहुंचने के बाद से फैंस को लग रहा था की सारा तेंदुलकर और शुभमन गिल एक दूसरे के साथ नज़र आएंगे और एक दूसरे साथ टाइम बिताएंगे लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें सारा तेंदुलकर फैशन इंफ्लुएंसर ओरहान अवत्रमणि के साथ नज़र आ रही हैं. सारा इंग्लैंड पहुंचने के बाद से ओरहान अवत्रमणि के साथ पुरी रात पार्टी करते हुए नज़र आई और अब सारा और ओरहान की तस्वीरें वायरल होने के बाद से फैंस शुभमन गिल का मजाक भी उड़ा रहे हैं. आपको बता दें कि ओरहान अवत्रमणि काफी पॉपुलर फैशन इंफ्लुएंसर हैं और वो अक्सर बॉलीवुड के स्टार किड्स के साथ पार्टी करते हुए नज़र आते रहते हैं. बता दें कि आईपीएल दो हज़ार तेईस में शुभमन गिल और सचिन तेंदुलकर की लाडली बेटी सारा तेंदुलकर ने काफी ज्यादा सुर्खियां बटोरा था. हालांकि, शुभमन गिल और सारा तेंदुलकर ने अब तक अपने रिश्ते के बारे में आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह की कोई जानकारी नहीं दी है लेकिन उन दोनों के फैंस को लगता है कि वो दोनों एक दूसरे के साथ काफी ज्यादा प्यार करते हैं. हालांकि, उन दोनों के बीच क्या चल रहा है इस बात कि जानकारी तो केवल शुभमन गिल और सारा तेंदुलकर ही दे पाएंगे लेकिन फैंस को उन दोनों की जोड़ी काफी ज्यादा पसंद आती है.
WWE Raw Live Streaming-इस हफ्ते रॉ होगा कैनसस सिटी, मिसौरी में टी-मोबाइल सेंटर से लाइव, जानिए भारत में कैसे देखें इसके लाइव स्ट्रीमिंगःकैनसस सिटी, मिसौरी में टी-मोबाइल सेंटर इस हफ्ते के डब्ल्यूडब्ल्यूई मंडे नाइट रॉ (WWE Monday Night RAW) की मेजबानी करेगा। पिछले हफ्ते यह घोषणा की गई थी कि एजे स्टाइल्स और ओमोस (AJ Styles And Omos) एक बार फिर वाइकिंग रेडर्स (Viking Raiders) के खिलाफ अपने टैग टीम टाइटल को डिफेंड करेंगे। इस घोषित मैच के अलावा द ऑल-माइटी डब्ल्यूडब्ल्यूई चैंपियन भी इस हफ्ते डब्ल्यूडब्ल्यूई यूनिवर्स को संबोधित करेंगे और गोल्डबर्ग के द्वारा दी गई चुनौती का जवाब देंगे। वहीं इसके अलावा पिछले हफ्ते निक्की ए. एस. एच ने भी अपने करियर में पहली बार रा विमेंस चैंपियन बनने के लिए शार्लेट फ्लेयर पर सफलतापूर्वक मनी इन द बैंक कांट्रैक्ट को कैश इन किया और इस हफ्ते वह अपनी इस जीत का जश्न मनाएंगी। इसके अलावा भी रॉ में बहुत कुछ होने वाला है। जिसे अगर आप लाइव देखना चाहते हैं तो आप हमारे द्वारा बताए गए तरीकों का इस्तेमाल करके आसानी से मंडे नाइट रॉ की लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं। WWE Raw Live Streaming: डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ शो कहां होगा? डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ का शो इस सोमवार को मिसौरी के कैनसस सिटी के टी-मोबाइल सेंटर में होगा। अगर इस एरिना में दर्शकों की क्षमता की बात करें तो 19000 से ज्यादा दर्शक इस एरिना में रॉ के शो का आनंद ले सकते हैं। WWE Raw Live Streaming: डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ शुरू होने की तारीख? इस हफ्ते डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ का प्रसारण यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में 26 जुलाई को होगा और वहीं भारत में इसका प्रसारण 27 जुलाई को होगा। WWE Raw Live Streaming: डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ के शुरू होने का समय? WWE Raw Live Streaming: डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ की लाइव स्ट्रीमिंग कहां देखें? डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ की लाइव स्ट्रीमिंग यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में फैंस यूएसए नेटवर्क पर देख सकते हैं। वहीं भारतीय दर्शक सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनलों पर डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ को लाइव देख सकते हैं। अंग्रेजी के लिए, दर्शक सोनी टेन 1/एचडी में ट्यून कर सकते हैं, जबकि हिंदी के लिए, दर्शक सोनी टेन 3/एचडी और तमिल और तेलगु के लिए सोनी टेन 4/एचडी पर इसे ट्यून कर सकते हैं। वेब दर्शक लाइव स्ट्रीमिंग के लिए Sony LIV ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।
WWE Raw Live Streaming-इस हफ्ते रॉ होगा कैनसस सिटी, मिसौरी में टी-मोबाइल सेंटर से लाइव, जानिए भारत में कैसे देखें इसके लाइव स्ट्रीमिंगःकैनसस सिटी, मिसौरी में टी-मोबाइल सेंटर इस हफ्ते के डब्ल्यूडब्ल्यूई मंडे नाइट रॉ की मेजबानी करेगा। पिछले हफ्ते यह घोषणा की गई थी कि एजे स्टाइल्स और ओमोस एक बार फिर वाइकिंग रेडर्स के खिलाफ अपने टैग टीम टाइटल को डिफेंड करेंगे। इस घोषित मैच के अलावा द ऑल-माइटी डब्ल्यूडब्ल्यूई चैंपियन भी इस हफ्ते डब्ल्यूडब्ल्यूई यूनिवर्स को संबोधित करेंगे और गोल्डबर्ग के द्वारा दी गई चुनौती का जवाब देंगे। वहीं इसके अलावा पिछले हफ्ते निक्की ए. एस. एच ने भी अपने करियर में पहली बार रा विमेंस चैंपियन बनने के लिए शार्लेट फ्लेयर पर सफलतापूर्वक मनी इन द बैंक कांट्रैक्ट को कैश इन किया और इस हफ्ते वह अपनी इस जीत का जश्न मनाएंगी। इसके अलावा भी रॉ में बहुत कुछ होने वाला है। जिसे अगर आप लाइव देखना चाहते हैं तो आप हमारे द्वारा बताए गए तरीकों का इस्तेमाल करके आसानी से मंडे नाइट रॉ की लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं। WWE Raw Live Streaming: डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ शो कहां होगा? डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ का शो इस सोमवार को मिसौरी के कैनसस सिटी के टी-मोबाइल सेंटर में होगा। अगर इस एरिना में दर्शकों की क्षमता की बात करें तो उन्नीस हज़ार से ज्यादा दर्शक इस एरिना में रॉ के शो का आनंद ले सकते हैं। WWE Raw Live Streaming: डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ शुरू होने की तारीख? इस हफ्ते डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ का प्रसारण यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में छब्बीस जुलाई को होगा और वहीं भारत में इसका प्रसारण सत्ताईस जुलाई को होगा। WWE Raw Live Streaming: डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ के शुरू होने का समय? WWE Raw Live Streaming: डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ की लाइव स्ट्रीमिंग कहां देखें? डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ की लाइव स्ट्रीमिंग यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में फैंस यूएसए नेटवर्क पर देख सकते हैं। वहीं भारतीय दर्शक सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनलों पर डब्ल्यूडब्ल्यूई रॉ को लाइव देख सकते हैं। अंग्रेजी के लिए, दर्शक सोनी टेन एक/एचडी में ट्यून कर सकते हैं, जबकि हिंदी के लिए, दर्शक सोनी टेन तीन/एचडी और तमिल और तेलगु के लिए सोनी टेन चार/एचडी पर इसे ट्यून कर सकते हैं। वेब दर्शक लाइव स्ट्रीमिंग के लिए Sony LIV ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।
उपराष्ट्रपति श्री मोहम्मद हामिद अंसारी ने आज यहां जाने माने कवि और पद्मश्री डॉ रविन्द्र नाथ श्रीवास्तव 'राजहंस' द्वारा लिखी गई पुस्तक 'गंदी बस्तियों में सूर्योदय' का विमोचन किया। इस मौके पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि गरीबी जहां कही भी, किसी भी रूप में हो, हमारे समाज की असफलता पर एक तीखी टिप्पणी है। गरीबी को अर्थशास्त्री और राजनीतिक लोग अपने अपने तरीके से देखते है। दोनों का नजरिया जायज होते हुए भी अपूर्ण होता है। गरीबी पर जब भी किसी लेखक और कवि ने लिखा है उसके नए मायने, नई भावनाएं उभरकर सामने आई है। इस पुस्तक का अन्य भाषाओं में अनुवाद इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएगा। यह पुस्तक डॉ श्रीवास्तव की हिंदी कविताओं का एक संकलन है। यह संकलन अपने आप में इसलिए अनूठा है क्योकि इसमें हिंदी की कविताओं और उनके अंग्रेजी अनुवाद को साथ-साथ एक ही पुस्तक में दिया गया है जिससे कि यह ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुंच सके। यह तीसरी दुनिया के देशों में रहने वाले असहाय और दीन-हीन गरीब बच्चों की दास्तां बयां करती है जो समाज के समृद्ध लोगों के सहारे को तलाशते हैं जिससे कि वे भी अपने बचपन के दिन एक सामान्य बच्चे की तरह गुजार सके।
उपराष्ट्रपति श्री मोहम्मद हामिद अंसारी ने आज यहां जाने माने कवि और पद्मश्री डॉ रविन्द्र नाथ श्रीवास्तव 'राजहंस' द्वारा लिखी गई पुस्तक 'गंदी बस्तियों में सूर्योदय' का विमोचन किया। इस मौके पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि गरीबी जहां कही भी, किसी भी रूप में हो, हमारे समाज की असफलता पर एक तीखी टिप्पणी है। गरीबी को अर्थशास्त्री और राजनीतिक लोग अपने अपने तरीके से देखते है। दोनों का नजरिया जायज होते हुए भी अपूर्ण होता है। गरीबी पर जब भी किसी लेखक और कवि ने लिखा है उसके नए मायने, नई भावनाएं उभरकर सामने आई है। इस पुस्तक का अन्य भाषाओं में अनुवाद इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएगा। यह पुस्तक डॉ श्रीवास्तव की हिंदी कविताओं का एक संकलन है। यह संकलन अपने आप में इसलिए अनूठा है क्योकि इसमें हिंदी की कविताओं और उनके अंग्रेजी अनुवाद को साथ-साथ एक ही पुस्तक में दिया गया है जिससे कि यह ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुंच सके। यह तीसरी दुनिया के देशों में रहने वाले असहाय और दीन-हीन गरीब बच्चों की दास्तां बयां करती है जो समाज के समृद्ध लोगों के सहारे को तलाशते हैं जिससे कि वे भी अपने बचपन के दिन एक सामान्य बच्चे की तरह गुजार सके।
पांवटा साहिब-पांवटा साहिब के विधायक और ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद पांवटा साहिब में हड़कंप मचा हुआ है। सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी भय में है जिस कारण सिविल अस्पताल पांवटा में सामान्य ओपीडी दो दिन के लिए बंद कर दी गई। वहीं मुख्य सरकारी कार्यालयों में भी लोगों को आपातकाल में ही आने का आह्वान किया गया है। शुक्रवार को पांवटा साहिब के सिविल अस्पताल सहित लोनिवि विश्राम गृह में सेनिटाइजेशन किया गया। शनिवार को अन्य कार्यालयों में भी सेनिटाइजेशन का कार्य होना है। जानकारी के मुताबिक तीन अगस्त को ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने सिविल अस्पताल में ट्रूनेट और टीबी की अत्याधुनिक मशीनों का शुभारंभ किया था। उसके बाद गुरुवार को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन में भी हड़कंप मच गया। शुक्रवार सुबह सामान्य ओपीडी बंद करने का निर्णय लिया गया जिस कारण दूरदराज से आए लोग बाहर परेशान रहे। यह निर्णय अस्पताल प्रबंधन ने लोगों की सुरक्षा के नजरिए से लिया। उसके बाद अस्पताल को सेनिटाइज किया गया। एसएमओ सिविल अस्पताल पांवटा साहिब डा. संजीव सहगल ने बताया कि सामान्य ओपीडी शुक्रवार और शनिवार को बंद रहेगी। अब सोमवार को ही सामान्य ओपीडी खुलेगी। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि आपातकाल में ही अस्पताल पहुंचे। वहीं दूसरी ओर विकास खंड पांवटा साहिब के सिविल नगर परिषद, एसडीएम कार्यालय, तहसील सहित सभी सरकारी दफ्तर सोमवार तक केवल आपात स्थिति के लिए ही खुले रहेंगे। इस दौरान सरकारी दफ्तरों को सैनेटाइज किया जाएगा। भीड़भाड़ से बचने के लिए प्रशासन ने ऐहतियातन कार्यालयों को सोमवार तक आपातकालीन सेवाओं के लिए खोलने का निर्णय लिया है। एसडीएम पांवटा साहिब एलआर वर्मा ने बताया कि दो दिन की वैसे छुट्टी है। सोमवार को दफ्तर खुले रहेंगे। हालांकि उन्होंने भी जनता से आह्वान किया है कि केवल जरूरी काम से ही दफ्तरों में आएं।
पांवटा साहिब-पांवटा साहिब के विधायक और ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद पांवटा साहिब में हड़कंप मचा हुआ है। सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी भय में है जिस कारण सिविल अस्पताल पांवटा में सामान्य ओपीडी दो दिन के लिए बंद कर दी गई। वहीं मुख्य सरकारी कार्यालयों में भी लोगों को आपातकाल में ही आने का आह्वान किया गया है। शुक्रवार को पांवटा साहिब के सिविल अस्पताल सहित लोनिवि विश्राम गृह में सेनिटाइजेशन किया गया। शनिवार को अन्य कार्यालयों में भी सेनिटाइजेशन का कार्य होना है। जानकारी के मुताबिक तीन अगस्त को ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने सिविल अस्पताल में ट्रूनेट और टीबी की अत्याधुनिक मशीनों का शुभारंभ किया था। उसके बाद गुरुवार को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन में भी हड़कंप मच गया। शुक्रवार सुबह सामान्य ओपीडी बंद करने का निर्णय लिया गया जिस कारण दूरदराज से आए लोग बाहर परेशान रहे। यह निर्णय अस्पताल प्रबंधन ने लोगों की सुरक्षा के नजरिए से लिया। उसके बाद अस्पताल को सेनिटाइज किया गया। एसएमओ सिविल अस्पताल पांवटा साहिब डा. संजीव सहगल ने बताया कि सामान्य ओपीडी शुक्रवार और शनिवार को बंद रहेगी। अब सोमवार को ही सामान्य ओपीडी खुलेगी। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि आपातकाल में ही अस्पताल पहुंचे। वहीं दूसरी ओर विकास खंड पांवटा साहिब के सिविल नगर परिषद, एसडीएम कार्यालय, तहसील सहित सभी सरकारी दफ्तर सोमवार तक केवल आपात स्थिति के लिए ही खुले रहेंगे। इस दौरान सरकारी दफ्तरों को सैनेटाइज किया जाएगा। भीड़भाड़ से बचने के लिए प्रशासन ने ऐहतियातन कार्यालयों को सोमवार तक आपातकालीन सेवाओं के लिए खोलने का निर्णय लिया है। एसडीएम पांवटा साहिब एलआर वर्मा ने बताया कि दो दिन की वैसे छुट्टी है। सोमवार को दफ्तर खुले रहेंगे। हालांकि उन्होंने भी जनता से आह्वान किया है कि केवल जरूरी काम से ही दफ्तरों में आएं।
कॉफी (Coffee) ना केवल मूड (mood booster food) बढ़ाने का काम करती है। तो, वहीं यह आपकी ब्यूटी प्रॉब्लम्स (Coffee for beauty) को भी ठीक करने में मदद करती है। यह ग्लोइंग स्किन दिलाने का काम कर सकती है। कमाल की बात यह है कि कॉफी बीन्स (Coffee for beauty) की तरह कॉफी पाउडर और कॉफी लिक्विड सभी का इस्तेमाल कर सकता है। यही नहीं, इन ब्यूटी मार्केट में कई ब्यूटी ट्रीटमेंट्स और स्किन केयर प्रॉडक्ट्स ऐसे भी हैं, जिनमें कॉफी एशेंस मिलाए जाते हैं। Skincare in Winters: सर्दियों में ड्राई स्किन की प्रॉब्लम से बचने के लिए ऐसे करें त्वचा की देखभाल ऑयली स्किन केयर के लिए भी टिप्स । जानें क्यों है, कॉफी एक स्किन टॉनिक (Coffee for beauty) : दरअसल, कॉफी में एक्सफॉलिएशन (Exfoliation) और स्किन की चमक बढ़ाने वाले तत्व होते हैं। जिसकी, वजह से यह स्किन केयर के लिए एक अच्छा इंग्रीडिएंट है। कॉफी में तत्व स्किन को सूरज की अल्ट्रा-वॉयलेट किरणों (UV Rays) के नुकसान से बचाता है। यह न्यू स्किन सेल्स को उभारने का भी काम करता है। इसमें, मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट्स स्किन को हर लिहाज से हेल्दी बनाने का काम करते हैं। (Coffee for beauty) कॉफी से बनाए बॉडी स्क्रबः स्किन की ऊपरी परत पर जमा डेड स्किन सेल्स की सफाई के लिए कॉफी के पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। बॉडी स्क्रबिंग के लिए 4 चम्मच कॉफी पाउडर और 2 चम्मच शहद को एक साथ मिक्स करें। इससे, बॉडी स्क्रबिंग करें। यह आपकी स्किन को साफ करने के अलावा, स्किन को मॉश्चराइज़ भी करता है। (Coffee for beauty) Black Salt Beauty Benefits: डैंड्रफ, फटी एड़ियों और डेड स्किन सेल्स की सफाई के लिए सर्दियों में इस्तेमाल करें काला नमक, जानें ब्लैक सॉल्ट के कुछ ब्यूटी बेनिफिट । कॉफी फेस मास्कः 4 चम्मच बादाम के तेल के साथ 4 चम्मच कॉफी पाउडर मिलाएं। इसे, अच्छी तरह मिक्स करके अपने चेहरे पर लगाएं। 10-15 मिनट के लिए इसे स्किन पर लगाएं। फिर, इसे हल्के गुनगुने पानी से साफ करें। एवोकाडो फेस मास्कः आधा एवोकाडो का फ्लेश या बटर लें। इसमें, 2 चम्मच ऑलिव ऑयल और 2 चम्मच कॉफी का पाउडर मिलाएं। इसे, फेस मास्क की तरह अपने चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद चेहरा धो लें। Health tips for Brides: जल्द बनने वाली हैं दुल्हन , तो फॉलो करें ये रूटीन, मिलेगी हेल्दी बॉडी और अच्छी स्किन । Total Wellness is now just a click away.
कॉफी ना केवल मूड बढ़ाने का काम करती है। तो, वहीं यह आपकी ब्यूटी प्रॉब्लम्स को भी ठीक करने में मदद करती है। यह ग्लोइंग स्किन दिलाने का काम कर सकती है। कमाल की बात यह है कि कॉफी बीन्स की तरह कॉफी पाउडर और कॉफी लिक्विड सभी का इस्तेमाल कर सकता है। यही नहीं, इन ब्यूटी मार्केट में कई ब्यूटी ट्रीटमेंट्स और स्किन केयर प्रॉडक्ट्स ऐसे भी हैं, जिनमें कॉफी एशेंस मिलाए जाते हैं। Skincare in Winters: सर्दियों में ड्राई स्किन की प्रॉब्लम से बचने के लिए ऐसे करें त्वचा की देखभाल ऑयली स्किन केयर के लिए भी टिप्स । जानें क्यों है, कॉफी एक स्किन टॉनिक : दरअसल, कॉफी में एक्सफॉलिएशन और स्किन की चमक बढ़ाने वाले तत्व होते हैं। जिसकी, वजह से यह स्किन केयर के लिए एक अच्छा इंग्रीडिएंट है। कॉफी में तत्व स्किन को सूरज की अल्ट्रा-वॉयलेट किरणों के नुकसान से बचाता है। यह न्यू स्किन सेल्स को उभारने का भी काम करता है। इसमें, मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट्स स्किन को हर लिहाज से हेल्दी बनाने का काम करते हैं। कॉफी से बनाए बॉडी स्क्रबः स्किन की ऊपरी परत पर जमा डेड स्किन सेल्स की सफाई के लिए कॉफी के पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। बॉडी स्क्रबिंग के लिए चार चम्मच कॉफी पाउडर और दो चम्मच शहद को एक साथ मिक्स करें। इससे, बॉडी स्क्रबिंग करें। यह आपकी स्किन को साफ करने के अलावा, स्किन को मॉश्चराइज़ भी करता है। Black Salt Beauty Benefits: डैंड्रफ, फटी एड़ियों और डेड स्किन सेल्स की सफाई के लिए सर्दियों में इस्तेमाल करें काला नमक, जानें ब्लैक सॉल्ट के कुछ ब्यूटी बेनिफिट । कॉफी फेस मास्कः चार चम्मच बादाम के तेल के साथ चार चम्मच कॉफी पाउडर मिलाएं। इसे, अच्छी तरह मिक्स करके अपने चेहरे पर लगाएं। दस-पंद्रह मिनट के लिए इसे स्किन पर लगाएं। फिर, इसे हल्के गुनगुने पानी से साफ करें। एवोकाडो फेस मास्कः आधा एवोकाडो का फ्लेश या बटर लें। इसमें, दो चम्मच ऑलिव ऑयल और दो चम्मच कॉफी का पाउडर मिलाएं। इसे, फेस मास्क की तरह अपने चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद चेहरा धो लें। Health tips for Brides: जल्द बनने वाली हैं दुल्हन , तो फॉलो करें ये रूटीन, मिलेगी हेल्दी बॉडी और अच्छी स्किन । Total Wellness is now just a click away.
रांची : राज्यपाल रमेश बैस ने भीड़ हिंसा रोकथाम और मॉब लिंचिंग विधेयक 2021 (मॉब लिंचिंग विधेयक 2021) पर आपत्ति जताते हुए इसे बिना स्वीकृति के राज्य सरकार को लौटा दिया है. साथ ही इसमें आवश्यक सुधार करने के लिए कहा है. राज्य सरकार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उक्त विधेयक को स्वीकृत कर राज्यपाल के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा था. राज्यपाल ने मुख्यतः दो बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए सरकार को विधेयक लौटा दिया है. (1) विधेयक के हिंदी संस्करण और अंग्रेजी संस्करण में अंतर/विभिन्नता है. इस पर राज्यपाल ने आपत्ति जतायी है. खंड 2 : उप खंड 1, उप खंड 12 गवाह संरक्षण योजना, जिसका विधेयक के अंग्रेजी संस्करण में जिक्र है, यह खंड 12 हिंदी संस्करण में नहीं है. इसकी वजह से विधेयक के हिंदी अौर अंग्रेजी संस्करण में असमानता है. इसे राज्य सरकार द्वारा सुधारने की आवश्यकता है, ताकि विधेयक के दोनों संस्करण में समानता हो. (2) इसके अलावा राज्यपाल श्री बैस ने विधेयक की धारा 2 (छह) में दी गयी भीड़ की परिभाषा पर आपत्ति जतायी है. राज्यपाल ने राज्य सरकार को इस पर फिर से विचार करने को कहा है. कहा गया है कि यह सुपरिभाषित कानूनी शब्दावली के अनुरूप नहीं है. दो या दो से अधिक व्यक्तियों के समूह को अशांत भीड़ नहीं कहा जा सकता. लोगों की बड़ी, गुस्सैल अौर उच्छृंखल भीड़ वह होती है, जो अक्सर बेकाबू या हिंसक होती है. राज्य सरकार को भीड़ की परिभाषा पर फिर से विचार करना चाहिए. 21 दिसंबर 2021 को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उक्त विधेयक को स्वीकृत कर राज्यपाल के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा गया. इस विधेयक में कहा गया है कि किसी ऐसी भीड़ द्वारा धार्मिक, रंग भेद, जाति, लिंग, जन्म स्थान या किसी अन्य आधार पर हिंसा करना मॉब लिंचिंग कहलायेगा. इस घटना को दो या दो से अधिक लोगों द्वारा किया जायेगा, तो वह मॉब लिंचिंग कहा जायेगा. इसमें दोषी पाये जानेवालों के लिए जुर्माना और संपत्ति कुर्की के अलावा तीन वर्ष से लेकर उम्रकैद तक जेल की सजा का प्रावधान है. इसके अतिरिक्त यह कानून शत्रुतापूर्ण वातावरण बनानेवालों के लिए तीन वर्ष तक कैद और जुर्माना की अनुमति देता है. शत्रुतापूर्ण वातावरण की परिभाषा में पीड़ित, पीड़ित के परिवार के सदस्यों, गवाह या गवाह/पीड़ित को सहायता प्रदान करनेवाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ धमकी या जबरदस्ती करना भी शामिल है. मॉब लिंचिंग विधेयक के मुद्दे पर विधानसभा में भी पक्ष-विपक्ष के बीच हंगामा हुआ था. इसके बाद भाजपा सहित कई सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने विधेयक में दिये गये प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए राज्यपाल को इसकी स्वीकृति नहीं देने का आग्रह किया था. राज्यपाल ने सभी संगठनों की बातें सुनने के बाद इस पर कानूनी राय ली. इसके बाद देश के अन्य राज्यों में इस तरह के विधेयक की समीक्षा भी की. इससे पूर्व राज्य सरकार द्वारा पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विवि विधेयक को भी राज्यपाल ने लौटाया है. इसमें भी हिंदी व अंग्रेजी संस्करण के कई बिंदुंओं में अंतर था. अब राज्य सरकार द्वारा उक्त विधेयक में आवश्यक सुधार कर फिर से चालू सत्र में इसे स्वीकृत करा कर राज्यपाल के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजे जाने की संभावना है.
रांची : राज्यपाल रमेश बैस ने भीड़ हिंसा रोकथाम और मॉब लिंचिंग विधेयक दो हज़ार इक्कीस पर आपत्ति जताते हुए इसे बिना स्वीकृति के राज्य सरकार को लौटा दिया है. साथ ही इसमें आवश्यक सुधार करने के लिए कहा है. राज्य सरकार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उक्त विधेयक को स्वीकृत कर राज्यपाल के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा था. राज्यपाल ने मुख्यतः दो बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए सरकार को विधेयक लौटा दिया है. विधेयक के हिंदी संस्करण और अंग्रेजी संस्करण में अंतर/विभिन्नता है. इस पर राज्यपाल ने आपत्ति जतायी है. खंड दो : उप खंड एक, उप खंड बारह गवाह संरक्षण योजना, जिसका विधेयक के अंग्रेजी संस्करण में जिक्र है, यह खंड बारह हिंदी संस्करण में नहीं है. इसकी वजह से विधेयक के हिंदी अौर अंग्रेजी संस्करण में असमानता है. इसे राज्य सरकार द्वारा सुधारने की आवश्यकता है, ताकि विधेयक के दोनों संस्करण में समानता हो. इसके अलावा राज्यपाल श्री बैस ने विधेयक की धारा दो में दी गयी भीड़ की परिभाषा पर आपत्ति जतायी है. राज्यपाल ने राज्य सरकार को इस पर फिर से विचार करने को कहा है. कहा गया है कि यह सुपरिभाषित कानूनी शब्दावली के अनुरूप नहीं है. दो या दो से अधिक व्यक्तियों के समूह को अशांत भीड़ नहीं कहा जा सकता. लोगों की बड़ी, गुस्सैल अौर उच्छृंखल भीड़ वह होती है, जो अक्सर बेकाबू या हिंसक होती है. राज्य सरकार को भीड़ की परिभाषा पर फिर से विचार करना चाहिए. इक्कीस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उक्त विधेयक को स्वीकृत कर राज्यपाल के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा गया. इस विधेयक में कहा गया है कि किसी ऐसी भीड़ द्वारा धार्मिक, रंग भेद, जाति, लिंग, जन्म स्थान या किसी अन्य आधार पर हिंसा करना मॉब लिंचिंग कहलायेगा. इस घटना को दो या दो से अधिक लोगों द्वारा किया जायेगा, तो वह मॉब लिंचिंग कहा जायेगा. इसमें दोषी पाये जानेवालों के लिए जुर्माना और संपत्ति कुर्की के अलावा तीन वर्ष से लेकर उम्रकैद तक जेल की सजा का प्रावधान है. इसके अतिरिक्त यह कानून शत्रुतापूर्ण वातावरण बनानेवालों के लिए तीन वर्ष तक कैद और जुर्माना की अनुमति देता है. शत्रुतापूर्ण वातावरण की परिभाषा में पीड़ित, पीड़ित के परिवार के सदस्यों, गवाह या गवाह/पीड़ित को सहायता प्रदान करनेवाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ धमकी या जबरदस्ती करना भी शामिल है. मॉब लिंचिंग विधेयक के मुद्दे पर विधानसभा में भी पक्ष-विपक्ष के बीच हंगामा हुआ था. इसके बाद भाजपा सहित कई सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने विधेयक में दिये गये प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए राज्यपाल को इसकी स्वीकृति नहीं देने का आग्रह किया था. राज्यपाल ने सभी संगठनों की बातें सुनने के बाद इस पर कानूनी राय ली. इसके बाद देश के अन्य राज्यों में इस तरह के विधेयक की समीक्षा भी की. इससे पूर्व राज्य सरकार द्वारा पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विवि विधेयक को भी राज्यपाल ने लौटाया है. इसमें भी हिंदी व अंग्रेजी संस्करण के कई बिंदुंओं में अंतर था. अब राज्य सरकार द्वारा उक्त विधेयक में आवश्यक सुधार कर फिर से चालू सत्र में इसे स्वीकृत करा कर राज्यपाल के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजे जाने की संभावना है.
बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश की राजनीति का केंद्र बिंदू माने जाने वाले बिलासपुर में इस बार भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेता धराशायी हो गए। जनता ने इन दिग्गज नेताओं को नापंसद करते हुए बड़े मार्जन से हराकर धूल चटा दी है, जबकि केवलमात्र नयनादेवी में भाजपा बड़े कम मार्जन से पिछड़ी है। नयनादेवी से भाजपा प्रत्याशी रणधीर शर्मा और घुमारवीं से कांग्रेस प्रत्याशी राजेश धर्माणी हैट्रिक लगाने से भी चूक गए, तो अपने राजनीतिक करियर की अंतिम पारी में जीत का परचम लहराने के लिए अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट झंडूता से कांग्रेस प्रत्याशी एवं दो बार के विधायक डा. वीरूराम किशोर को भी बड़ी हार का सामना करना पड़ा। तीन सीटों पर भगवा दल के नए चेहरों पर जनता ने अपनी स्वीकृति की मुहर लगाई है। नयनादेवी में राजनीतिक भविष्य के प्रति चिंतित कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता रामलाल ठाकुर को एक दशक की प्रतीक्षा के बाद इस बार संजीवनी मिल गई और मां नयना का आशीर्वाद भी। इसके चलते अब वह प्रदेश में विपक्षी दल के नेता के रूप में भी एक प्रबल दावेदार के रूप में सामने हैं। विधानसभा चुनाव 2017 इस बार न केवल बिलासपुर, बल्कि पूरे हिमाचल में दोनों ही प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेताओं को धूल चटा गया। बीजेपी में कई बड़े नेताओं के किले ध्वस्त होने के बाद नए चेहरों को सरकार में जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। बिलासपुर जिला में इस बार भारतीय जनता पार्टी ने नए चेहरों पर दांव चला और घुमारवीं से इस बार भी जेपी नड्डा के खासमखास राजेंद्र गर्ग पर पार्टी ने विश्वास जताया, जबकि झंडूता से रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जेआर कटवाल तो सदर से सुभाष ठाकुर को मैदान में उतारा गया। नयनादेवी सीट पर पार्टी के दिग्गज नेता रणधीर शर्मा मैदान में थे। कांग्रेस की तरफ से दिग्गज नेता रामलाल ठाकुर नयनादेवी तो सदर से विधायक बंबर ठाकुर, घुमारवीं से विधायक राजेश धर्माणी और झंडूता में इस बार भी पूर्व विधायक डा. वीरूराम किशोर को पार्टी ने मौका दिया। खासकर यह चुनाव कांग्रेस से रामलाल ठाकुर और डा. वीरूराम किशोर का राजनीतिक भविष्य तय करने वाला था तो वहीं, नयनादेवी से भाजपा के रणधीर शर्मा व घुमारवीं से कांग्रेस के राजेश धर्माणी हैट्रिक लगाने के लिए उत्सुक थे, लेकिन इस बार दिग्गज नेताओं को जनता ने धूल चटाते हुए नए चेहरों पर विश्वास जताया, जिस कारण रणधीर शर्मा का सरकार में बड़ा ओहदा पाने का सपना चकनाचूर हो गया, तो घुमारवीं से राजेश धर्माणी बड़ी हार के साथ चित हो गए। हालांकि चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल ने एक कार्यक्रम में रणधीर शर्मा को सरकार में बड़ा ओहदा देने की बात कही थी, जबकि घुमारवीं में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने धर्माणी के लिए यह शब्द कहे थे, लेकिन हैट्रिक बनाकर बड़े ओहदे पाने की दोनों ही इसके साथ ही झंडूता से कांग्रेस के पूर्व विधायक डा. वीरूराम किशोर को जनता ने नापसंद किया और बीजेपी द्वारा उतारे गए नए चेहरे जेआर कटवाल को विधानसभा पहुंचाया है। इसके चलते डा. किशोर अपने राजनीतिक करियर की अंतिम पारी में पिछड़ गए। ऐसा ही हाल सदर में हुआ है। यहां से युवा नेता तेजतर्रार विधायक बंबर ठाकुर को भी बड़ी हार का सामना करना पड़ा। सदर क्षेत्र में जिला मुख्यालय का विधायक होने के नाते इनकी यहां मजबूत पकड़ थी, लेकिन जनता ने नड्डा के खास सुभाष ठाकुर को रिकार्ड मतों से विजयी बनाकर विधानसभा पहुंचाया है। केवलमात्र नयनादेवी सीट पर कांग्रेस अपनी लाज बचाने में कामयाब हो सकी। यहां से करो या मरो वाली स्थिति से गुजर रहे दिग्गज नेता रामलाल ठाकुर पर जनता ने भरोसा जताया और उन्हें फिर से विधानसभा की सीढि़यां पार करवाई हैं ताकि जिला में कांग्रेस एक कददावर नेता के सहारे मजबूत बन सके। ऐसे में कांग्रेस में यहां अब रामलाल ठाकुर के नेतृत्व में ही कांग्रेस आगे बढ़ेगी, जबकि भाजपा में तीन नए चेहरे अपने राजनीतिक भविष्य की शुरूआत करेंगे। देखना होगा कि जनता के बीच विकास कार्यों व अपने व्यवहार की बदौलत कितनी पैठ बनाने में कामयाब रहते हैं।
बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश की राजनीति का केंद्र बिंदू माने जाने वाले बिलासपुर में इस बार भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेता धराशायी हो गए। जनता ने इन दिग्गज नेताओं को नापंसद करते हुए बड़े मार्जन से हराकर धूल चटा दी है, जबकि केवलमात्र नयनादेवी में भाजपा बड़े कम मार्जन से पिछड़ी है। नयनादेवी से भाजपा प्रत्याशी रणधीर शर्मा और घुमारवीं से कांग्रेस प्रत्याशी राजेश धर्माणी हैट्रिक लगाने से भी चूक गए, तो अपने राजनीतिक करियर की अंतिम पारी में जीत का परचम लहराने के लिए अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट झंडूता से कांग्रेस प्रत्याशी एवं दो बार के विधायक डा. वीरूराम किशोर को भी बड़ी हार का सामना करना पड़ा। तीन सीटों पर भगवा दल के नए चेहरों पर जनता ने अपनी स्वीकृति की मुहर लगाई है। नयनादेवी में राजनीतिक भविष्य के प्रति चिंतित कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता रामलाल ठाकुर को एक दशक की प्रतीक्षा के बाद इस बार संजीवनी मिल गई और मां नयना का आशीर्वाद भी। इसके चलते अब वह प्रदेश में विपक्षी दल के नेता के रूप में भी एक प्रबल दावेदार के रूप में सामने हैं। विधानसभा चुनाव दो हज़ार सत्रह इस बार न केवल बिलासपुर, बल्कि पूरे हिमाचल में दोनों ही प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेताओं को धूल चटा गया। बीजेपी में कई बड़े नेताओं के किले ध्वस्त होने के बाद नए चेहरों को सरकार में जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। बिलासपुर जिला में इस बार भारतीय जनता पार्टी ने नए चेहरों पर दांव चला और घुमारवीं से इस बार भी जेपी नड्डा के खासमखास राजेंद्र गर्ग पर पार्टी ने विश्वास जताया, जबकि झंडूता से रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जेआर कटवाल तो सदर से सुभाष ठाकुर को मैदान में उतारा गया। नयनादेवी सीट पर पार्टी के दिग्गज नेता रणधीर शर्मा मैदान में थे। कांग्रेस की तरफ से दिग्गज नेता रामलाल ठाकुर नयनादेवी तो सदर से विधायक बंबर ठाकुर, घुमारवीं से विधायक राजेश धर्माणी और झंडूता में इस बार भी पूर्व विधायक डा. वीरूराम किशोर को पार्टी ने मौका दिया। खासकर यह चुनाव कांग्रेस से रामलाल ठाकुर और डा. वीरूराम किशोर का राजनीतिक भविष्य तय करने वाला था तो वहीं, नयनादेवी से भाजपा के रणधीर शर्मा व घुमारवीं से कांग्रेस के राजेश धर्माणी हैट्रिक लगाने के लिए उत्सुक थे, लेकिन इस बार दिग्गज नेताओं को जनता ने धूल चटाते हुए नए चेहरों पर विश्वास जताया, जिस कारण रणधीर शर्मा का सरकार में बड़ा ओहदा पाने का सपना चकनाचूर हो गया, तो घुमारवीं से राजेश धर्माणी बड़ी हार के साथ चित हो गए। हालांकि चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल ने एक कार्यक्रम में रणधीर शर्मा को सरकार में बड़ा ओहदा देने की बात कही थी, जबकि घुमारवीं में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने धर्माणी के लिए यह शब्द कहे थे, लेकिन हैट्रिक बनाकर बड़े ओहदे पाने की दोनों ही इसके साथ ही झंडूता से कांग्रेस के पूर्व विधायक डा. वीरूराम किशोर को जनता ने नापसंद किया और बीजेपी द्वारा उतारे गए नए चेहरे जेआर कटवाल को विधानसभा पहुंचाया है। इसके चलते डा. किशोर अपने राजनीतिक करियर की अंतिम पारी में पिछड़ गए। ऐसा ही हाल सदर में हुआ है। यहां से युवा नेता तेजतर्रार विधायक बंबर ठाकुर को भी बड़ी हार का सामना करना पड़ा। सदर क्षेत्र में जिला मुख्यालय का विधायक होने के नाते इनकी यहां मजबूत पकड़ थी, लेकिन जनता ने नड्डा के खास सुभाष ठाकुर को रिकार्ड मतों से विजयी बनाकर विधानसभा पहुंचाया है। केवलमात्र नयनादेवी सीट पर कांग्रेस अपनी लाज बचाने में कामयाब हो सकी। यहां से करो या मरो वाली स्थिति से गुजर रहे दिग्गज नेता रामलाल ठाकुर पर जनता ने भरोसा जताया और उन्हें फिर से विधानसभा की सीढि़यां पार करवाई हैं ताकि जिला में कांग्रेस एक कददावर नेता के सहारे मजबूत बन सके। ऐसे में कांग्रेस में यहां अब रामलाल ठाकुर के नेतृत्व में ही कांग्रेस आगे बढ़ेगी, जबकि भाजपा में तीन नए चेहरे अपने राजनीतिक भविष्य की शुरूआत करेंगे। देखना होगा कि जनता के बीच विकास कार्यों व अपने व्यवहार की बदौलत कितनी पैठ बनाने में कामयाब रहते हैं।
Happy Teddy Day 2023 Hindi Wishes Status, Images, Quotes, Messages, Photos: वैलेंटाइन वीक की शुरुआत 7 फरवरी से होती है और चौथे दिन टेडी डे होता है। आप टेडी डे के मौके पर इस प्रकार शुभकामना संदेश भेज सकते है। Optical Illusion: 7 सेकंड में खोजना है Look, ढूंढ लिया तो कहलाएंगे 'रॉबिनहुड' Opinion India Ka : Atique ज़िंदा होता. . . तो भी खजाना नहीं बच पाता ! News Ki Pathshala । Sushant Sinha । रेसलर्स की जंग 2024 में Modi के खिलाफ इस्तेमाल ? वो मस्जिद जो टूटती तो है पर दिखाई नहीं देती ! News Ki Pathshala । Sushant Sinha । अब मोदी का इंडिया चीन को घर में घुसकर मारेगा ? S Jaishankar ने Russia-Ukraine War पर जानिए क्या कहा ?
Happy Teddy Day दो हज़ार तेईस Hindi Wishes Status, Images, Quotes, Messages, Photos: वैलेंटाइन वीक की शुरुआत सात फरवरी से होती है और चौथे दिन टेडी डे होता है। आप टेडी डे के मौके पर इस प्रकार शुभकामना संदेश भेज सकते है। Optical Illusion: सात सेकंड में खोजना है Look, ढूंढ लिया तो कहलाएंगे 'रॉबिनहुड' Opinion India Ka : Atique ज़िंदा होता. . . तो भी खजाना नहीं बच पाता ! News Ki Pathshala । Sushant Sinha । रेसलर्स की जंग दो हज़ार चौबीस में Modi के खिलाफ इस्तेमाल ? वो मस्जिद जो टूटती तो है पर दिखाई नहीं देती ! News Ki Pathshala । Sushant Sinha । अब मोदी का इंडिया चीन को घर में घुसकर मारेगा ? S Jaishankar ने Russia-Ukraine War पर जानिए क्या कहा ?
Mahabharat Ki Kahani: पांडवों की ओर से महारथी अर्जुन के सारथी श्री कृष्ण द्वारा शंखनाद हुआ। आइए ! इस पर गंभीरता से विचार करें। Mahabharat Ki Kahani in Hindi: हम सभी जानते हैं कि धृतराष्ट्र-पक्ष की ओर से उसके प्रधान सेनाध्यक्ष पितामह भीष्म ने सर्वप्रथम शंखनाद किया था, तो पांडव-पक्ष की ओर से भी उसके प्रधान सेनापति धृष्टद्युम्न द्वारा शंखनाद किया जाना चाहिए था। पर ऐसा नहीं हुआ। पांडवों की ओर से महारथी अर्जुन के सारथी श्री कृष्ण द्वारा शंखनाद हुआ। आइए ! इस पर गंभीरता से विचार करें। धृतराष्ट्र पक्ष की ओर से भीष्म जैसे श्रेष्ठ व्यक्ति द्वारा शंखनाद किया गया था, अतः पांडव-पक्ष की ओर से भीष्म से भी श्रेष्ठ व्यक्ति द्वारा शंखनाद किया जाना चाहिए था। इस दृष्टि से श्रीकृष्ण उपयुक्त थे। हम सभी जानते हैं कि हस्तिनापुर सभा में अग्रपूजा हेतु श्री कृष्ण का चयन स्वयं भीष्म ने ही किया था तथा उन्हें श्रेष्ठतम घोषित किया था। न हि केवलमस्माकयमर्च्यतमोऽच्युतः। त्रयाणामपि लोकानामर्चनीयो महाभुजः। । महाबाहु श्रीकृष्ण केवल हमारे लिए ही परम पूजनीय हों, ऐसी बात नहीं है। ये तो तीनों लोकों के पूजनीय हैं । गुणैवृद्धानतिक्रम्य हरिर्श्च्यतमो मतः। । श्री कृष्ण के गुणों को ही दृष्टि में रखते हुए हमने वयोवृद्ध पुरुषों का उल्लंघन करके इनको ही परम पूजनीय माना है। दानं साक्ष्यं श्रुतं शौर्यं ह्रीः कीर्तिर्बुद्धिरुत्तमा। सन्नतिः श्रीर्धृतिस्तुष्टि पुष्टिश्च नियताच्युते। । दान, दक्षता, शास्त्रज्ञान, शौर्य, लज्जा, कीर्ति, उत्तम बुद्धि, विनय, श्री, धृति, तुष्टि और पुष्टि - ये सभी सद्गुण भगवान श्रीकृष्ण में नित्य विद्यमान हैं। भगवान अच्युत ही सबसे बढ़कर पूजनीय हैं। इस दृष्टि से श्री कृष्ण भीष्म से श्रेष्ठ थे। युद्ध क्षेत्र में उपस्थित रहने के कारण पांडवों की श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए श्रीकृष्ण ने सर्वप्रथम शंखनाद किया। भगवान श्री कृष्ण स्वयं पांडव-पक्ष में सबसे आगे रहकर सारे पांडवों की रक्षा का भार अपने ऊपर ले कर धृतराष्ट्र- पक्ष को यह संदेश दे रहे हैं कि वास्तव में युद्ध तो मेरे साथ ही करना होगा। पांडव तो निमित्त मात्र हैं, युद्ध में उन ( श्रीकृष्ण ) के जीवित रहते कोई पांडवों का बाल बांका भी नहीं कर सकता। अतः भीष्म के आह्वान को, चुनौती को श्रीकृष्ण सहर्ष स्वीकार करते हैं। यदि धृतराष्ट्र-पक्ष पांडवों से हाथ मिलाने को अब भी तैयार हैं, तो पांडव भी तैयार हैं। यदि धृतराष्ट्र-पक्ष पांडवों से एक-एक हाथ करना चाहते हैं, तो वे इसके लिए भी प्रस्तुत हैं - यह संकेत श्री कृष्ण शंखनाद कर प्रकट करते हैं।
Mahabharat Ki Kahani: पांडवों की ओर से महारथी अर्जुन के सारथी श्री कृष्ण द्वारा शंखनाद हुआ। आइए ! इस पर गंभीरता से विचार करें। Mahabharat Ki Kahani in Hindi: हम सभी जानते हैं कि धृतराष्ट्र-पक्ष की ओर से उसके प्रधान सेनाध्यक्ष पितामह भीष्म ने सर्वप्रथम शंखनाद किया था, तो पांडव-पक्ष की ओर से भी उसके प्रधान सेनापति धृष्टद्युम्न द्वारा शंखनाद किया जाना चाहिए था। पर ऐसा नहीं हुआ। पांडवों की ओर से महारथी अर्जुन के सारथी श्री कृष्ण द्वारा शंखनाद हुआ। आइए ! इस पर गंभीरता से विचार करें। धृतराष्ट्र पक्ष की ओर से भीष्म जैसे श्रेष्ठ व्यक्ति द्वारा शंखनाद किया गया था, अतः पांडव-पक्ष की ओर से भीष्म से भी श्रेष्ठ व्यक्ति द्वारा शंखनाद किया जाना चाहिए था। इस दृष्टि से श्रीकृष्ण उपयुक्त थे। हम सभी जानते हैं कि हस्तिनापुर सभा में अग्रपूजा हेतु श्री कृष्ण का चयन स्वयं भीष्म ने ही किया था तथा उन्हें श्रेष्ठतम घोषित किया था। न हि केवलमस्माकयमर्च्यतमोऽच्युतः। त्रयाणामपि लोकानामर्चनीयो महाभुजः। । महाबाहु श्रीकृष्ण केवल हमारे लिए ही परम पूजनीय हों, ऐसी बात नहीं है। ये तो तीनों लोकों के पूजनीय हैं । गुणैवृद्धानतिक्रम्य हरिर्श्च्यतमो मतः। । श्री कृष्ण के गुणों को ही दृष्टि में रखते हुए हमने वयोवृद्ध पुरुषों का उल्लंघन करके इनको ही परम पूजनीय माना है। दानं साक्ष्यं श्रुतं शौर्यं ह्रीः कीर्तिर्बुद्धिरुत्तमा। सन्नतिः श्रीर्धृतिस्तुष्टि पुष्टिश्च नियताच्युते। । दान, दक्षता, शास्त्रज्ञान, शौर्य, लज्जा, कीर्ति, उत्तम बुद्धि, विनय, श्री, धृति, तुष्टि और पुष्टि - ये सभी सद्गुण भगवान श्रीकृष्ण में नित्य विद्यमान हैं। भगवान अच्युत ही सबसे बढ़कर पूजनीय हैं। इस दृष्टि से श्री कृष्ण भीष्म से श्रेष्ठ थे। युद्ध क्षेत्र में उपस्थित रहने के कारण पांडवों की श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए श्रीकृष्ण ने सर्वप्रथम शंखनाद किया। भगवान श्री कृष्ण स्वयं पांडव-पक्ष में सबसे आगे रहकर सारे पांडवों की रक्षा का भार अपने ऊपर ले कर धृतराष्ट्र- पक्ष को यह संदेश दे रहे हैं कि वास्तव में युद्ध तो मेरे साथ ही करना होगा। पांडव तो निमित्त मात्र हैं, युद्ध में उन के जीवित रहते कोई पांडवों का बाल बांका भी नहीं कर सकता। अतः भीष्म के आह्वान को, चुनौती को श्रीकृष्ण सहर्ष स्वीकार करते हैं। यदि धृतराष्ट्र-पक्ष पांडवों से हाथ मिलाने को अब भी तैयार हैं, तो पांडव भी तैयार हैं। यदि धृतराष्ट्र-पक्ष पांडवों से एक-एक हाथ करना चाहते हैं, तो वे इसके लिए भी प्रस्तुत हैं - यह संकेत श्री कृष्ण शंखनाद कर प्रकट करते हैं।
राजनंदगांवः जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक निगो डैम में अज्ञात बच्चे का शव बरामद किया गया है। शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्चे का शव को बरामद कर लिया है। मिली जानकारी के अनुसार, मामला राजनांनदगांव जिले के डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र का है। जहां बच्चे का शव पुलिस ने बरामद किया गया है। बच्चे ने स्कूल ड्रेस पहना हुआ है। पुलिस ने आशंका जताई है कि ये हत्या बच्चे का हत्या कर उसके शव को डैम में फेंक दिया गया है। बच्चे के हाथ पैर को नायलॉन की रस्सी से बांध कर और कमर में पत्थर बंधा था। लाश लगभग 3 से 4 दिन पुरानी हो सकती है। डोंगरगढ़ पुलिस ने गुम बच्चे के परिजनों से लाश की शिनाख्त करने में सहायता की अपील की है और आस पास के क्षेत्र से गुम हुए बच्चे के परिजनों को डोंगरगढ़ पुलिस थाना में संपर्क करने की बात कही है जिससे की पुलिस को सहायता प्राप्त हो सके।
राजनंदगांवः जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक निगो डैम में अज्ञात बच्चे का शव बरामद किया गया है। शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्चे का शव को बरामद कर लिया है। मिली जानकारी के अनुसार, मामला राजनांनदगांव जिले के डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र का है। जहां बच्चे का शव पुलिस ने बरामद किया गया है। बच्चे ने स्कूल ड्रेस पहना हुआ है। पुलिस ने आशंका जताई है कि ये हत्या बच्चे का हत्या कर उसके शव को डैम में फेंक दिया गया है। बच्चे के हाथ पैर को नायलॉन की रस्सी से बांध कर और कमर में पत्थर बंधा था। लाश लगभग तीन से चार दिन पुरानी हो सकती है। डोंगरगढ़ पुलिस ने गुम बच्चे के परिजनों से लाश की शिनाख्त करने में सहायता की अपील की है और आस पास के क्षेत्र से गुम हुए बच्चे के परिजनों को डोंगरगढ़ पुलिस थाना में संपर्क करने की बात कही है जिससे की पुलिस को सहायता प्राप्त हो सके।
अंतरिम रेल बजट में फरीदाबाद के लोगों और दैनिक यात्रियों को निराशा हाथ लगी है। यात्री संघों ने इस बजट को खानापूर्ति वाला बताया। दैनिक यात्रियों का कहना है कि वर्षों से उनकी अनदेखी की जा रही है। दिल्ली से लेकर कोसीकलां तक लोग शटल गाड़ियों में जानवरों की तरह और जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। दैनिक यात्री संघ फरीदाबाद के प्रधान बाबूलाल शर्मा ने कहा कि इस अंतरिम रेल बजट से उन्हें निराशा हाथ लगी है। करीब दो साल से केरला एक्सप्रेस, जीटी एक्सप्रेस और श्रीधाम एक्सप्रेस की फरीदाबाद में स्टॉपेज को लेकर कई बार रेल अधिकारियों से पत्राचार कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त दिल्ली से पलवल तक चलने वाली शटल गाड़ियों में बोगियों की संख्या बढ़ाकर 15-15 करने, कोसीकलां वाली शटल को मथुरा तक बढ़ाने और पलवल तक जाने वाली शटल को कोसीकलां तक बढ़ाने की मांग कर चुके हैं लेकिन अभी तक सरकार ने जनता की इन मांगों पर विचार तक नहीं किया। रेल पैसेंजर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान बिजेन्द्र सिंह रावत व प्रेस सचिव प्रकाश मंगला ने कहा कि अंतरिम रेल बजट ने फरीदाबाद और पलवल दोनों को निराश किया है। न तो किसी गाड़ी के स्टापेज की घोषणा की गई और न ही कोई शटल गाड़ी बढ़ाने की। बजट में क्षेत्रीय सांसदों की बात सुनी जाती है लेकिन हमारे सांसद को दैनिक यात्रियों की सुविधाओं से कोई लेना-देना नहीं है। दैनिक यात्री संघ होडल के प्रधान लेखराज शर्मा ने कहा कि रेल बजट में केंद्र सरकार ने दैनिक यात्रियों के साथ धोखा किया है। शटल गाड़ियों में बोगी की संख्या बढ़ाने और गाड़ियों की संख्या में इजाफा करने के लिए सांसद अवतार सिंह भड़ाना को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस अंतरिम रेल बजट से सभी दैनिक यात्री संघों में सरकार के प्रति नाराजगी है। जल्द ही सभी संघों से बात करके सांसद को ज्ञापन देकर अपना विरोध दर्ज कराऐंगे।
अंतरिम रेल बजट में फरीदाबाद के लोगों और दैनिक यात्रियों को निराशा हाथ लगी है। यात्री संघों ने इस बजट को खानापूर्ति वाला बताया। दैनिक यात्रियों का कहना है कि वर्षों से उनकी अनदेखी की जा रही है। दिल्ली से लेकर कोसीकलां तक लोग शटल गाड़ियों में जानवरों की तरह और जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। दैनिक यात्री संघ फरीदाबाद के प्रधान बाबूलाल शर्मा ने कहा कि इस अंतरिम रेल बजट से उन्हें निराशा हाथ लगी है। करीब दो साल से केरला एक्सप्रेस, जीटी एक्सप्रेस और श्रीधाम एक्सप्रेस की फरीदाबाद में स्टॉपेज को लेकर कई बार रेल अधिकारियों से पत्राचार कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त दिल्ली से पलवल तक चलने वाली शटल गाड़ियों में बोगियों की संख्या बढ़ाकर पंद्रह-पंद्रह करने, कोसीकलां वाली शटल को मथुरा तक बढ़ाने और पलवल तक जाने वाली शटल को कोसीकलां तक बढ़ाने की मांग कर चुके हैं लेकिन अभी तक सरकार ने जनता की इन मांगों पर विचार तक नहीं किया। रेल पैसेंजर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान बिजेन्द्र सिंह रावत व प्रेस सचिव प्रकाश मंगला ने कहा कि अंतरिम रेल बजट ने फरीदाबाद और पलवल दोनों को निराश किया है। न तो किसी गाड़ी के स्टापेज की घोषणा की गई और न ही कोई शटल गाड़ी बढ़ाने की। बजट में क्षेत्रीय सांसदों की बात सुनी जाती है लेकिन हमारे सांसद को दैनिक यात्रियों की सुविधाओं से कोई लेना-देना नहीं है। दैनिक यात्री संघ होडल के प्रधान लेखराज शर्मा ने कहा कि रेल बजट में केंद्र सरकार ने दैनिक यात्रियों के साथ धोखा किया है। शटल गाड़ियों में बोगी की संख्या बढ़ाने और गाड़ियों की संख्या में इजाफा करने के लिए सांसद अवतार सिंह भड़ाना को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस अंतरिम रेल बजट से सभी दैनिक यात्री संघों में सरकार के प्रति नाराजगी है। जल्द ही सभी संघों से बात करके सांसद को ज्ञापन देकर अपना विरोध दर्ज कराऐंगे।
वले । मुसलमानोंने देखा कि पीछे तो भवानन्दको पैदल सेना है और सामने महेंद्रकी बड़ी-बढ़ी तोपें गरज रही हैं । अब तो 'हे' साहबने देखा कि सर्वनाश उपस्थित है। उनकी सारी सुधबुध जाती रही - बल, वीर्य, साहस, कौशल, शिक्षा; अभिमान -- सबका दिवाला निकल गया । सारी फौजदारो, बादशाही; अँगरेजी, देशी, विला यती, काली और गोरी सेना गिर- गिरकर जमीन चूमने लगी। विधर्मियोंका दल भाग चला । जीवानन्द और धीरानन्द 'भार सार' करते हुए विधर्मी सेनाके पीछे दौड़ पड़े । सन्तानोंने उनकी कुल तोर्पे छीन लीं। बहुतसे अँगरेज और देशी सिपाही मारे गये । सर्वनाश समीप आया देख कप्तान 'हे' और वाटसनने भवानन्दके पास कहला भेजा - "हम सब तुम्हारे कैदी है, अब हमारी जानें छोड़ दो ।" जीवानन्दने भवानन्दके मुंहको ओर देखा । भवानन्दने मन-ही-मन कहा - नहीं; यह तो नहीं होगा। आज तो में मरनेके लिये तैयार हूं । यह सोचकर भवानन्द ऊपरको हाथ उठाये हरिहरि कहते हुए बोले - "मारो, मारो इन दुष्टों को " अब तो एक भी प्राणी जीता न बचा । केवल २०-३० गोरे सिपाही. एक जगह इकट्ठे होकर मन-ही-मन आत्मसमर्पण करने का निश्चय कर जानपर खेलकर लड़ रहे थे । जीवानन्दने कहा - "भवानन्द । हमारी तो जय हो चुकी अब लड़नेका कोई काम नहीं है । इन दो-चार व्यक्तियोंको छोड़कर और कोई जीता नहीं रहा । इनको प्राणदान दे दो और घर लौट चलो ।" : भवानन्दने कहा - "एकको भी जोता छोड़कर भवानन्द नहीं लौट सकता । जीवानन्द ! मैं तुम्हारी सौगन्ध खाकर कहता हूं तुम अलग हट - कर खड़े हो जाओ और तमाशा देखो मैं अकेला ही इन अंगरेजोंको मार गिरता हूं " कप्तान टामस घोड़ेकी पीठपर बंधा था। भवानन्दने हुक्म दिया - "उसे मेरे सामने ले भाभो । पहले उसकी जान लूंगा, फिर मैं तो मरूंगा हो ।"
वले । मुसलमानोंने देखा कि पीछे तो भवानन्दको पैदल सेना है और सामने महेंद्रकी बड़ी-बढ़ी तोपें गरज रही हैं । अब तो 'हे' साहबने देखा कि सर्वनाश उपस्थित है। उनकी सारी सुधबुध जाती रही - बल, वीर्य, साहस, कौशल, शिक्षा; अभिमान -- सबका दिवाला निकल गया । सारी फौजदारो, बादशाही; अँगरेजी, देशी, विला यती, काली और गोरी सेना गिर- गिरकर जमीन चूमने लगी। विधर्मियोंका दल भाग चला । जीवानन्द और धीरानन्द 'भार सार' करते हुए विधर्मी सेनाके पीछे दौड़ पड़े । सन्तानोंने उनकी कुल तोर्पे छीन लीं। बहुतसे अँगरेज और देशी सिपाही मारे गये । सर्वनाश समीप आया देख कप्तान 'हे' और वाटसनने भवानन्दके पास कहला भेजा - "हम सब तुम्हारे कैदी है, अब हमारी जानें छोड़ दो ।" जीवानन्दने भवानन्दके मुंहको ओर देखा । भवानन्दने मन-ही-मन कहा - नहीं; यह तो नहीं होगा। आज तो में मरनेके लिये तैयार हूं । यह सोचकर भवानन्द ऊपरको हाथ उठाये हरिहरि कहते हुए बोले - "मारो, मारो इन दुष्टों को " अब तो एक भी प्राणी जीता न बचा । केवल बीस-तीस गोरे सिपाही. एक जगह इकट्ठे होकर मन-ही-मन आत्मसमर्पण करने का निश्चय कर जानपर खेलकर लड़ रहे थे । जीवानन्दने कहा - "भवानन्द । हमारी तो जय हो चुकी अब लड़नेका कोई काम नहीं है । इन दो-चार व्यक्तियोंको छोड़कर और कोई जीता नहीं रहा । इनको प्राणदान दे दो और घर लौट चलो ।" : भवानन्दने कहा - "एकको भी जोता छोड़कर भवानन्द नहीं लौट सकता । जीवानन्द ! मैं तुम्हारी सौगन्ध खाकर कहता हूं तुम अलग हट - कर खड़े हो जाओ और तमाशा देखो मैं अकेला ही इन अंगरेजोंको मार गिरता हूं " कप्तान टामस घोड़ेकी पीठपर बंधा था। भवानन्दने हुक्म दिया - "उसे मेरे सामने ले भाभो । पहले उसकी जान लूंगा, फिर मैं तो मरूंगा हो ।"
Monday September 02, 2019, जून की तपती गर्मी, ऊबर-खाबड़ रास्ते, 25 दिनों की समय-सीमा और उत्तर प्रदेश के 75 ज़िले। अगर कानपुर के रहने वाले विकास सिंह चौहान के अनूठे रेकॉर्ड को कम से कम शब्दों में बयान करना हो तो इतना काफ़ी है, लेकिन इन 25 दिनों में विकास के असाधारण जज़्बे और लक्ष्य को पाने के रास्ते में आई चुनौतियों की कहानी बेहद चिलचस्प है। आपको बता दें कानपुर के रहने वाले 25 वर्षीय विकास सिंह चौहान ऐसे पहले शख़्स हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के सभी 75 ज़िलों से गुज़रते हुए 25 दिनों में 5278 किमी की दूरी अपनी 100 सीसी बाइक से तय की। विकास के इस रेकॉर्ड को एशिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है और विकास को उनकी इस उपलब्धि हेतु सम्मानित भी किया जा चुका है। एशिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स की ओर से विकास को 'ग्रैंडमास्टर' का ख़िताब दिया गया है। इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स द्वारा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश भारत के भूभाग के 7.33 प्रतिशत हिस्से के बराबर है। कैसे हुई शुरुआत? विकास ने योर स्टोरी को बताया, "मैं हमेशा से ही चाहता था कि ऐसी कोई उपलब्धि हो, जिसे पाने वालों में मेरा नाम शीर्ष पर हो। मुझे घूमने का शौक़ है और इसलिए मैं नई-नई रोमांचक जगहों के बारे में पढ़ता रहता हूं। साथ ही, मैं तरह-तरह के रेकॉर्ड्स बनाने वाले जुनूनी लोगों के बारे में जानकारी हासिल करता रहता हूं। इस शोध के दौरान ही मेरे ज़हन में अपने प्रदेश के सभी ज़िलों को बाइक से घूमने का ख़्याल आया और मैंने पाया कि इस तरह का काम पहले किसी ने नहीं किया है।" विकास बताते हैं कि इसके बाद से उन्होंने अपनी इस रेकॉर्ड यात्रा को अंजाम देने के लिए मेहनत शुरू कर दी। विकास ने 23 मार्च, 2019 से लेकर 16 अप्रैल, 2019 तक लगातार यात्रा की। उन्होंने बताया कि वह रोज़ाना औसत रूप से 250-300 किमी. की दूरी तय करते थे और इसके लिए उनको रोज़ 8-10 घंटे गाड़ी चलानी होती थी। अपने अनुभवों को साझा करने के दौरान विकास हंसते हुए कहते हैं, "इतनी लंबी यात्रा के दौरान आपको हर कहीं तो सड़क अच्छी नहीं मिल सकती और साथ ही, गर्मी का मौसम जब इतना मेहरबान हो तो यात्रा जारी रखने की प्रेरणा देने के लिए आपकी आत्मशक्ति को और भी मज़बूत होना पड़ता है। " विकास बताते हैं कि उनके इस रेकॉर्ड की एक और ख़ास बात यह है कि उन्होंने 12 साल पुरानी बाइक से यह उपलब्धि हासिल की है। इतना ही नहीं, वह बताते हैं कि उन्होंने पहले इस बाइक की मरम्मत करना सीखा ताकि अगर सफ़र में कहीं कोई दिक्कत आ जाए तो वह ख़ुद ही उसका समाधान खोज सकें। विकास कहते हैं कि सफ़र में सिर्फ़ मुश्क़िलों से ही नहीं, कई दिलचस्प वाक़यों से भी उनका सामना हुआ। सफ़र के दौरान हुईं अप्रत्याशित और रोचक घटनाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया, "फ़ोन का चार्जर घर पर भूलने से लेकर, अनजान दुकान में लैपटॉप भूलने जैसी कई घटनाएं हुईं। कई बार तो मुझे लगा कि मेरा काफ़ी समय इन सब कामों में खर्च हो जा रहा है और शायद अब मुझे वापस लौट जाना चाहिए, लेकिन हर बार मैंने ख़ुद को हिम्मत बंधाई और आगे बढ़ा। कहते हैं न कि बहादुर लोगों का भाग्य भी साथ देता है। ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ।" विकास आगे कहते हैं, "रास्ते में साक्ष्य जुटाने के दौरान मुझे स्थानीय लोगों से भी बात करनी होती थी, लेकिन छोटी जगहों पर लोग इन सब बातों को ढंग से समझ नहीं पाते और साथ ही, वे झिझकते भी हैं। जब मेरी यात्रा को थोड़ा समय बीत गया और अख़बारों-सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को मेरे बारे में पता चलने लगा, तब लोगों ने मेरा सहयोग करना शुरू किया।" अपनी यात्रा शुरू करने से पहले विकास ने रेकॉर्ड को प्रमाणित करने के लिए लगने वाले सभी ज़रूरी दस्तावेज़ों और साक्ष्यों की फ़ेहरिस्त बनाई। दरअसल, पूर्व में विकास राजस्थान के भी सभी ज़िलों को अपने दोपहिया वाहन से नाप चुके हैं, लेकिन उस समय जानकारी के अभाव में वह रेकॉर्ड का दावा करने के लिए साक्ष्य नहीं जुटा पाए थे। इस बार वह ऐसी कोई ग़लती नहीं करना चाहते थे। विकास ने जीपीएस का ट्रैक रेकॉर्ड, पेट्रोल बिल्स, पेट्रोल पंप के कर्मचारियों के साथ फ़ोटो और विडियो, खाने के बिल, हर ज़िले के दो स्थानीय लोगों के फ़ोन नंबर और विडियो साक्ष्य, हर टोल प्लाज़ा पर किसी अधिकारी या कर्मचारी के साथ प्रमाण के रूप में फ़ोटो, हर ज़िले के राजपत्रित अधिकारी की लिखित औपचारिक स्वीकृति, रास्ते में गाड़ी की सर्विस का रेकॉर्ड, होटल में प्रवेश के दौरान फ़ोटो और होटल मैनेजर का के साथ फ़ोटो और विडियो, साक्ष्य के रूप में एकत्रित किए और इसके बाद रेकॉर्ड्स के लिए दावे की पेशकश की। इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स, दोनों ही के द्वारा विकास के साक्ष्यों की पुष्टि की जा चुकी है और उन्हें ख़िताब से सम्मानित भी किया जा चुका है। अपने अगले लक्ष्य के विषय में बात करते हुए विकास ने बताया कि वह अपनी पुरानी राजदूत गाड़ी से बिहार के सभी ज़िलों का भ्रमण कर रेकॉर्ड बनाना चाहते हैं और साथ ही, उनका दूरगामी लक्ष्य है कि देश के अन्य शेष सभी राज्यों का दौरा वह अलग-अलग दोपहिया वाहनों से करें।
Monday September दो, दो हज़ार उन्नीस, जून की तपती गर्मी, ऊबर-खाबड़ रास्ते, पच्चीस दिनों की समय-सीमा और उत्तर प्रदेश के पचहत्तर ज़िले। अगर कानपुर के रहने वाले विकास सिंह चौहान के अनूठे रेकॉर्ड को कम से कम शब्दों में बयान करना हो तो इतना काफ़ी है, लेकिन इन पच्चीस दिनों में विकास के असाधारण जज़्बे और लक्ष्य को पाने के रास्ते में आई चुनौतियों की कहानी बेहद चिलचस्प है। आपको बता दें कानपुर के रहने वाले पच्चीस वर्षीय विकास सिंह चौहान ऐसे पहले शख़्स हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के सभी पचहत्तर ज़िलों से गुज़रते हुए पच्चीस दिनों में पाँच हज़ार दो सौ अठहत्तर किमी की दूरी अपनी एक सौ सीसी बाइक से तय की। विकास के इस रेकॉर्ड को एशिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है और विकास को उनकी इस उपलब्धि हेतु सम्मानित भी किया जा चुका है। एशिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स की ओर से विकास को 'ग्रैंडमास्टर' का ख़िताब दिया गया है। इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स द्वारा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश भारत के भूभाग के सात.तैंतीस प्रतिशत हिस्से के बराबर है। कैसे हुई शुरुआत? विकास ने योर स्टोरी को बताया, "मैं हमेशा से ही चाहता था कि ऐसी कोई उपलब्धि हो, जिसे पाने वालों में मेरा नाम शीर्ष पर हो। मुझे घूमने का शौक़ है और इसलिए मैं नई-नई रोमांचक जगहों के बारे में पढ़ता रहता हूं। साथ ही, मैं तरह-तरह के रेकॉर्ड्स बनाने वाले जुनूनी लोगों के बारे में जानकारी हासिल करता रहता हूं। इस शोध के दौरान ही मेरे ज़हन में अपने प्रदेश के सभी ज़िलों को बाइक से घूमने का ख़्याल आया और मैंने पाया कि इस तरह का काम पहले किसी ने नहीं किया है।" विकास बताते हैं कि इसके बाद से उन्होंने अपनी इस रेकॉर्ड यात्रा को अंजाम देने के लिए मेहनत शुरू कर दी। विकास ने तेईस मार्च, दो हज़ार उन्नीस से लेकर सोलह अप्रैल, दो हज़ार उन्नीस तक लगातार यात्रा की। उन्होंने बताया कि वह रोज़ाना औसत रूप से दो सौ पचास-तीन सौ किमी. की दूरी तय करते थे और इसके लिए उनको रोज़ आठ-दस घंटाटे गाड़ी चलानी होती थी। अपने अनुभवों को साझा करने के दौरान विकास हंसते हुए कहते हैं, "इतनी लंबी यात्रा के दौरान आपको हर कहीं तो सड़क अच्छी नहीं मिल सकती और साथ ही, गर्मी का मौसम जब इतना मेहरबान हो तो यात्रा जारी रखने की प्रेरणा देने के लिए आपकी आत्मशक्ति को और भी मज़बूत होना पड़ता है। " विकास बताते हैं कि उनके इस रेकॉर्ड की एक और ख़ास बात यह है कि उन्होंने बारह साल पुरानी बाइक से यह उपलब्धि हासिल की है। इतना ही नहीं, वह बताते हैं कि उन्होंने पहले इस बाइक की मरम्मत करना सीखा ताकि अगर सफ़र में कहीं कोई दिक्कत आ जाए तो वह ख़ुद ही उसका समाधान खोज सकें। विकास कहते हैं कि सफ़र में सिर्फ़ मुश्क़िलों से ही नहीं, कई दिलचस्प वाक़यों से भी उनका सामना हुआ। सफ़र के दौरान हुईं अप्रत्याशित और रोचक घटनाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया, "फ़ोन का चार्जर घर पर भूलने से लेकर, अनजान दुकान में लैपटॉप भूलने जैसी कई घटनाएं हुईं। कई बार तो मुझे लगा कि मेरा काफ़ी समय इन सब कामों में खर्च हो जा रहा है और शायद अब मुझे वापस लौट जाना चाहिए, लेकिन हर बार मैंने ख़ुद को हिम्मत बंधाई और आगे बढ़ा। कहते हैं न कि बहादुर लोगों का भाग्य भी साथ देता है। ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ।" विकास आगे कहते हैं, "रास्ते में साक्ष्य जुटाने के दौरान मुझे स्थानीय लोगों से भी बात करनी होती थी, लेकिन छोटी जगहों पर लोग इन सब बातों को ढंग से समझ नहीं पाते और साथ ही, वे झिझकते भी हैं। जब मेरी यात्रा को थोड़ा समय बीत गया और अख़बारों-सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को मेरे बारे में पता चलने लगा, तब लोगों ने मेरा सहयोग करना शुरू किया।" अपनी यात्रा शुरू करने से पहले विकास ने रेकॉर्ड को प्रमाणित करने के लिए लगने वाले सभी ज़रूरी दस्तावेज़ों और साक्ष्यों की फ़ेहरिस्त बनाई। दरअसल, पूर्व में विकास राजस्थान के भी सभी ज़िलों को अपने दोपहिया वाहन से नाप चुके हैं, लेकिन उस समय जानकारी के अभाव में वह रेकॉर्ड का दावा करने के लिए साक्ष्य नहीं जुटा पाए थे। इस बार वह ऐसी कोई ग़लती नहीं करना चाहते थे। विकास ने जीपीएस का ट्रैक रेकॉर्ड, पेट्रोल बिल्स, पेट्रोल पंप के कर्मचारियों के साथ फ़ोटो और विडियो, खाने के बिल, हर ज़िले के दो स्थानीय लोगों के फ़ोन नंबर और विडियो साक्ष्य, हर टोल प्लाज़ा पर किसी अधिकारी या कर्मचारी के साथ प्रमाण के रूप में फ़ोटो, हर ज़िले के राजपत्रित अधिकारी की लिखित औपचारिक स्वीकृति, रास्ते में गाड़ी की सर्विस का रेकॉर्ड, होटल में प्रवेश के दौरान फ़ोटो और होटल मैनेजर का के साथ फ़ोटो और विडियो, साक्ष्य के रूप में एकत्रित किए और इसके बाद रेकॉर्ड्स के लिए दावे की पेशकश की। इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स, दोनों ही के द्वारा विकास के साक्ष्यों की पुष्टि की जा चुकी है और उन्हें ख़िताब से सम्मानित भी किया जा चुका है। अपने अगले लक्ष्य के विषय में बात करते हुए विकास ने बताया कि वह अपनी पुरानी राजदूत गाड़ी से बिहार के सभी ज़िलों का भ्रमण कर रेकॉर्ड बनाना चाहते हैं और साथ ही, उनका दूरगामी लक्ष्य है कि देश के अन्य शेष सभी राज्यों का दौरा वह अलग-अलग दोपहिया वाहनों से करें।
इसके बजाय, इस्लाम को कुल पैकेज के हिस्से के रूप में स्थापित किया गया है, न कि स्तंभों पर । यह जानकारी बिल्कुल गलत है क्योंकि इस्लाम छह तत्वों पर आधारित है, जैसा कि मुहम्मद ने खुद सहीह अल-बुखारी, वॉल्यूम की निम्नलिखित हदीथ में बताया है। 1, पी. 13: أن أقاتل الناس : حتى يشهدوا أن لا إله إلا الله ، وأن محمدا رسول الله ، ويقيموا الصلاة ، ويؤتوا الزكاة ، فإذا فعلوا ذلك عصموا مني دماءهم وأموالهم إلا بحق . الإسلام ، وحسابهم على الله تعالى ) رواه البخاري و مسلم "मुझे अल्लाह ने आदेश दिया है कि सभी लोगों को मारने के लिए (जिहाद करते हुए) जब तक वे यह नहीं कहते कि अल्लाह के अलावा कोई भगवान नहीं है और मुहम्मद उनके दूत हैं, और वे नमाज़ की स्थापना करते हैं और ज़कात (पैसा) देते हैं। यदि वे करते हैं यह, उनका खून और उनकी संपत्ति ( उनका सम्मान) मुझसे सुरक्षित है। " जब हम इस हदीथ को देखते हैं, तो हम सीखते हैं कि मुहम्मद और इस्लाम पूरी मानव जाति से क्या चाहते हैं। इसलिए, यह है... इस्लामी संविधान 1. मुहम्मद का यह कर्तव्य है कि वह लोगों से लड़कर उनका जबरन धर्म परिवर्तन करवाए, या यदि वे विरोध करते हैं तो उन्हें मार डालें; 2. जब तक वे इस्लाम में परिवर्तित नहीं हो जातेः 3. जब तक वे यह न कह दें कि अल्लाह के सिवा कोई भगवान नहीं है । 4. और कहो कि मुहम्मद उसके दूत हैं; 5. फिर आपको अल्लाह से प्रार्थना करनी होगी या मुहम्मद अभी भी आपको मार डालेगा (यदि आप प्रार्थना नहीं करते हैं, तो मुहम्मद आपको मार डालेगा); 6. और तब, और केवल तभी, मुहम्मद और उसकी सेना से आपके पैसे और खून सुरक्षित हैं। इसलिए स्तंभ # 6 यह है कि इस्लाम में परिवर्तित होने के अलावा कोई भी मारे जाने से सुरक्षित नहीं है। आइए इसे अन्य तरीकों से देखें। क्या होगा यदि आप इस्लाम स्वीकार नहीं करते हैं? 1. मुसलमानों को तुमसे लड़ना है। मुहम्मद मर चुके हैं, लेकिन वे नहीं हैं, और यह हर मुसलमान का कर्तव्य है कि वह अपने पैगंबर का अनुसरण करे और जिहाद करे। कुरान 9:14 कहता है, "उनसे (तलवार से) लड़ो, और अल्लाह उन्हें तुम्हारे हाथों से दंडित करेगा, उन्हें अपमान
इसके बजाय, इस्लाम को कुल पैकेज के हिस्से के रूप में स्थापित किया गया है, न कि स्तंभों पर । यह जानकारी बिल्कुल गलत है क्योंकि इस्लाम छह तत्वों पर आधारित है, जैसा कि मुहम्मद ने खुद सहीह अल-बुखारी, वॉल्यूम की निम्नलिखित हदीथ में बताया है। एक, पी. तेरह: أن أقاتل الناس : حتى يشهدوا أن لا إله إلا الله ، وأن محمدا رسول الله ، ويقيموا الصلاة ، ويؤتوا الزكاة ، فإذا فعلوا ذلك عصموا مني دماءهم وأموالهم إلا بحق . الإسلام ، وحسابهم على الله تعالى ) رواه البخاري و مسلم "मुझे अल्लाह ने आदेश दिया है कि सभी लोगों को मारने के लिए जब तक वे यह नहीं कहते कि अल्लाह के अलावा कोई भगवान नहीं है और मुहम्मद उनके दूत हैं, और वे नमाज़ की स्थापना करते हैं और ज़कात देते हैं। यदि वे करते हैं यह, उनका खून और उनकी संपत्ति मुझसे सुरक्षित है। " जब हम इस हदीथ को देखते हैं, तो हम सीखते हैं कि मुहम्मद और इस्लाम पूरी मानव जाति से क्या चाहते हैं। इसलिए, यह है... इस्लामी संविधान एक. मुहम्मद का यह कर्तव्य है कि वह लोगों से लड़कर उनका जबरन धर्म परिवर्तन करवाए, या यदि वे विरोध करते हैं तो उन्हें मार डालें; दो. जब तक वे इस्लाम में परिवर्तित नहीं हो जातेः तीन. जब तक वे यह न कह दें कि अल्लाह के सिवा कोई भगवान नहीं है । चार. और कहो कि मुहम्मद उसके दूत हैं; पाँच. फिर आपको अल्लाह से प्रार्थना करनी होगी या मुहम्मद अभी भी आपको मार डालेगा ; छः. और तब, और केवल तभी, मुहम्मद और उसकी सेना से आपके पैसे और खून सुरक्षित हैं। इसलिए स्तंभ # छः यह है कि इस्लाम में परिवर्तित होने के अलावा कोई भी मारे जाने से सुरक्षित नहीं है। आइए इसे अन्य तरीकों से देखें। क्या होगा यदि आप इस्लाम स्वीकार नहीं करते हैं? एक. मुसलमानों को तुमसे लड़ना है। मुहम्मद मर चुके हैं, लेकिन वे नहीं हैं, और यह हर मुसलमान का कर्तव्य है कि वह अपने पैगंबर का अनुसरण करे और जिहाद करे। कुरान नौ:चौदह कहता है, "उनसे लड़ो, और अल्लाह उन्हें तुम्हारे हाथों से दंडित करेगा, उन्हें अपमान
अस्थमात्मक सर्दियों में "सांस ले सकते हैं" अंत में पराग ब्रेक और परेशान अस्थमा के लक्षण। लेकिन शीतकालीन खेलों की गतिविधियों में ठंडा मौसम और प्रयास भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। विशेष रूप से बच्चों को सर्दी में संरक्षित किया जाना चाहिए, क्योंकि ठंड और खांसी अस्थमा की बिगड़ सकती है। - शीतकालीन व्यायाम अस्थमा में ठंडा प्रेरित अस्थमा या व्यायाम से प्रेरित अस्थमा को ट्रिगर कर सकता है। अगर ठंड अस्थमा के हमलों का मुख्य कारण है, तो इसे ठंडा प्रेरित अस्थमा कहा जाता है। ठंड यह श्वसन पथ को परेशान कर सकता है, जिससे संकुचन हो सकता है। ठंडा प्रेरित अस्थमा शायद ही कभी शुद्ध रूप के रूप में होता है। कम तापमान अक्सर तनाव अस्थमा, एक्सोजेनस एलर्जिक अस्थमा या दवा एलर्जी वाले लोगों में भी असुविधा का कारण बनता है। ठंड सर्दियों के खेल में एक विशेष भूमिका निभाता है। स्वीडिश और नार्वेजियन क्रॉस-कंट्री स्कीयर की तुलना एक अध्ययन में की गई थीः नॉर्वे के आर्द्र और अपेक्षाकृत गर्म वातावरण में, अस्थमा आवृत्ति 12% थी, जबकि ठंड और शुष्क स्वीडन में यह 42% था। क्रॉस-कंट्री क्रॉस-कंट्री स्कीइंग टीम के कुल 79% ने अस्थमा के लक्षण या ब्रोन्कियल अतिसंवेदनशीलता को दिखाया। स्विट्ज़रलैंड के डेवोस (एकेडी) में अल्पाइन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों ने संदेह किया कि एथलीट अस्थमा के बढ़ते जोखिम के संपर्क में हैं। कारणों से Sportdisziplinspezifische प्रभाव और थर्मल कारक, विशेष रूप से ठंडा, निर्दिष्ट में। शीतकालीन ठंड एक्सपोजर एकेडी के मुताबिक, शारीरिक गतिविधि के दौरान कोई श्वसन अतिसंवेदनशीलता नहीं होती है, लेकिन ठंड अक्सर अन्य अस्थमा रूपों में स्थिति को खराब कर सकती है। अस्थमा के साथ ठंड के मौसम में जाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? चाहे श्लेष्म झिल्ली और प्रकोष्ठ में प्रत्यारोपित ठंडा वायरस शारीरिक संविधान पर भारी निर्भर करता है। और वर्तमान स्थिति भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। तनाव के तहत आप संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील हैं। लेकिन हाइपोथर्मिया, वातानुकूलित और गर्म कमरे और अल्कोहल की खपत, सिगरेट का धुआं और जीवन की अनियमित ताल शरीर पर एक बड़ा बोझ है और सामान्य सर्दी के लिए फायदेमंद हो सकती है। विशेष रूप से अस्थमाचारियों को इन जोखिम कारकों को ध्यान में रखना चाहिए। सफेद शीतकालीन भव्यता का आनंद लेने में सक्षम होने के लिए, निम्नलिखित युक्तियां भी मदद करती हैंः अस्थमाचारियों को सर्दियों के खेल चुनने के बारे में अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। नियमित प्रशिक्षण फेफड़ों के कार्य को बढ़ावा देता है और अस्थमा के दौरे के विकास के लिए दहलीज को कम करता है। शीतकालीन खेल गतिविधियों के बीच पर्याप्त ब्रेक की सिफारिश की जाती है। और इसे वास्तव में बर्फीले ठंडा होना चाहिए, तो आप इनडोर पूल में सक्रिय हो सकते हैं और इस प्रकार किसी भी अतिरिक्त जोखिम के लिए खुद को बेनकाब नहीं करते हैं। लगातार नाक सांस लेने से श्वसन वायु पहले से गरम हो जाती है और इस प्रकार श्वसन पथ की जलन रोकती है। पर्याप्त विटामिन सी लें, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। बहुत सारे फल और सब्जियां खाएं ताकि शरीर के सभी महत्वपूर्ण विटामिन और खनिज इसके निपटारे में हों। गर्म और ठंडे पानी के साथ शावर बदलना प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय और सक्रिय करता है। आपके स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद आवश्यक है। विशेष रूप से यदि आप ठंड के पहले संकेतों को देखते हैं, तो आपको पर्याप्त नींद लेने के लिए सावधान रहना चाहिए। अपने घर या कार्यस्थल में खींचने से बचें और गीले बालों के साथ बाहर न चलें। यदि आप दवा के साथ अपने शरीर का समर्थन करना चाहते हैं, तो आप इचिनेसिया अर्क से बने पूरक ले सकते हैं। हर्बल सप्लीमेंट्स प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं।
अस्थमात्मक सर्दियों में "सांस ले सकते हैं" अंत में पराग ब्रेक और परेशान अस्थमा के लक्षण। लेकिन शीतकालीन खेलों की गतिविधियों में ठंडा मौसम और प्रयास भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। विशेष रूप से बच्चों को सर्दी में संरक्षित किया जाना चाहिए, क्योंकि ठंड और खांसी अस्थमा की बिगड़ सकती है। - शीतकालीन व्यायाम अस्थमा में ठंडा प्रेरित अस्थमा या व्यायाम से प्रेरित अस्थमा को ट्रिगर कर सकता है। अगर ठंड अस्थमा के हमलों का मुख्य कारण है, तो इसे ठंडा प्रेरित अस्थमा कहा जाता है। ठंड यह श्वसन पथ को परेशान कर सकता है, जिससे संकुचन हो सकता है। ठंडा प्रेरित अस्थमा शायद ही कभी शुद्ध रूप के रूप में होता है। कम तापमान अक्सर तनाव अस्थमा, एक्सोजेनस एलर्जिक अस्थमा या दवा एलर्जी वाले लोगों में भी असुविधा का कारण बनता है। ठंड सर्दियों के खेल में एक विशेष भूमिका निभाता है। स्वीडिश और नार्वेजियन क्रॉस-कंट्री स्कीयर की तुलना एक अध्ययन में की गई थीः नॉर्वे के आर्द्र और अपेक्षाकृत गर्म वातावरण में, अस्थमा आवृत्ति बारह% थी, जबकि ठंड और शुष्क स्वीडन में यह बयालीस% था। क्रॉस-कंट्री क्रॉस-कंट्री स्कीइंग टीम के कुल उन्यासी% ने अस्थमा के लक्षण या ब्रोन्कियल अतिसंवेदनशीलता को दिखाया। स्विट्ज़रलैंड के डेवोस में अल्पाइन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों ने संदेह किया कि एथलीट अस्थमा के बढ़ते जोखिम के संपर्क में हैं। कारणों से Sportdisziplinspezifische प्रभाव और थर्मल कारक, विशेष रूप से ठंडा, निर्दिष्ट में। शीतकालीन ठंड एक्सपोजर एकेडी के मुताबिक, शारीरिक गतिविधि के दौरान कोई श्वसन अतिसंवेदनशीलता नहीं होती है, लेकिन ठंड अक्सर अन्य अस्थमा रूपों में स्थिति को खराब कर सकती है। अस्थमा के साथ ठंड के मौसम में जाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? चाहे श्लेष्म झिल्ली और प्रकोष्ठ में प्रत्यारोपित ठंडा वायरस शारीरिक संविधान पर भारी निर्भर करता है। और वर्तमान स्थिति भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। तनाव के तहत आप संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील हैं। लेकिन हाइपोथर्मिया, वातानुकूलित और गर्म कमरे और अल्कोहल की खपत, सिगरेट का धुआं और जीवन की अनियमित ताल शरीर पर एक बड़ा बोझ है और सामान्य सर्दी के लिए फायदेमंद हो सकती है। विशेष रूप से अस्थमाचारियों को इन जोखिम कारकों को ध्यान में रखना चाहिए। सफेद शीतकालीन भव्यता का आनंद लेने में सक्षम होने के लिए, निम्नलिखित युक्तियां भी मदद करती हैंः अस्थमाचारियों को सर्दियों के खेल चुनने के बारे में अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। नियमित प्रशिक्षण फेफड़ों के कार्य को बढ़ावा देता है और अस्थमा के दौरे के विकास के लिए दहलीज को कम करता है। शीतकालीन खेल गतिविधियों के बीच पर्याप्त ब्रेक की सिफारिश की जाती है। और इसे वास्तव में बर्फीले ठंडा होना चाहिए, तो आप इनडोर पूल में सक्रिय हो सकते हैं और इस प्रकार किसी भी अतिरिक्त जोखिम के लिए खुद को बेनकाब नहीं करते हैं। लगातार नाक सांस लेने से श्वसन वायु पहले से गरम हो जाती है और इस प्रकार श्वसन पथ की जलन रोकती है। पर्याप्त विटामिन सी लें, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। बहुत सारे फल और सब्जियां खाएं ताकि शरीर के सभी महत्वपूर्ण विटामिन और खनिज इसके निपटारे में हों। गर्म और ठंडे पानी के साथ शावर बदलना प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय और सक्रिय करता है। आपके स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद आवश्यक है। विशेष रूप से यदि आप ठंड के पहले संकेतों को देखते हैं, तो आपको पर्याप्त नींद लेने के लिए सावधान रहना चाहिए। अपने घर या कार्यस्थल में खींचने से बचें और गीले बालों के साथ बाहर न चलें। यदि आप दवा के साथ अपने शरीर का समर्थन करना चाहते हैं, तो आप इचिनेसिया अर्क से बने पूरक ले सकते हैं। हर्बल सप्लीमेंट्स प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं।
राकेश भाटिया ने दिव्य हिमाचल, अमृतसर से इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर एएसएम थे. उन्होंने अपनी नई पारी आज समाज, चंडीगढ़ के साथ शुरू की है. उन्हें मार्केटिंग डिपार्टमेंट में असिस्टेंट मैनेजर बनाया गया है. अपने छह साल के करियर में राकेश अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे समूहों के साथ भी हुड़े रहे हैं. राष्ट्रीय सहारा, चंदौली से मोहम्मद आरिफ ने इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर रिपोर्टर थे. आरिफ ब्यूरोचीफ के आश्वासन पर पिछले सात महीनों से अखबार के लिए रिपोर्टिंग कर रहे थे. बताया जा रहा है कि वादा पूरा नहीं होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. आरिफ ने अपने करियर की शुरुआत भारत दूत हिंदी दैनिक के साथ की थी.
राकेश भाटिया ने दिव्य हिमाचल, अमृतसर से इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर एएसएम थे. उन्होंने अपनी नई पारी आज समाज, चंडीगढ़ के साथ शुरू की है. उन्हें मार्केटिंग डिपार्टमेंट में असिस्टेंट मैनेजर बनाया गया है. अपने छह साल के करियर में राकेश अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे समूहों के साथ भी हुड़े रहे हैं. राष्ट्रीय सहारा, चंदौली से मोहम्मद आरिफ ने इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर रिपोर्टर थे. आरिफ ब्यूरोचीफ के आश्वासन पर पिछले सात महीनों से अखबार के लिए रिपोर्टिंग कर रहे थे. बताया जा रहा है कि वादा पूरा नहीं होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. आरिफ ने अपने करियर की शुरुआत भारत दूत हिंदी दैनिक के साथ की थी.
Oppo अपनी नई स्मार्टफोन सीरीज, Oppo Reno7 Series को भारत में लॉन्च करने जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस स्मार्टफोन सीरीज को चीन में पिछले साल ही लॉन्च कर दिया गया था. जहां आधिकारिक तौर पर इस सीरीज की लॉन्च डेट के बारे में कुछ नहीं कहा गया है लेकिन टिप्स्टर्स और लीकर्स के जरिए इस सीरीज की लॉन्च डेट और फीचर्स के बारे में जानकारी सामने आई है। READ MORE आपका जीमेल हैक है या नही, इस तरीके से करें पता? कैमरे के फीचर्स की बात करें तो इस सीरीज के दोनों स्मार्टफोन में आपको सेल्फी खींचने के लिए 32MP का फ्रंट कैमरा मिल सकता है। Reno7 में आपको 64MP के प्राइमेरी सेन्सर वाला ट्रिपल रीयर कैमरा सेटअप मिल सकता है और Reno7 Pro में भी एक ट्रिपल रीयर कैमरा सेटअप मिल सकता है। जिसमें मेन सेन्सर 50MP का हो सकता है। Oppo Reno7 6. 43-इंच के एफएचडी+ एमोलेड पैनल और 90Hz के रिफ्रेश रेट के साथ आ सकता है. Oppo Reno 7 Pro की बात करें, तो उसमें आपको 6. 55-इंच का एफएचडी+ एमोलेड स्क्रीन और 90Hz का रिफ्रेश रेट मिल सकता है. ये प्रो मॉडल मीडियाटेक डायमेंसिटी 1200 SoC पर काम करेगा। social media.
Oppo अपनी नई स्मार्टफोन सीरीज, Oppo Renoसात Series को भारत में लॉन्च करने जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस स्मार्टफोन सीरीज को चीन में पिछले साल ही लॉन्च कर दिया गया था. जहां आधिकारिक तौर पर इस सीरीज की लॉन्च डेट के बारे में कुछ नहीं कहा गया है लेकिन टिप्स्टर्स और लीकर्स के जरिए इस सीरीज की लॉन्च डेट और फीचर्स के बारे में जानकारी सामने आई है। READ MORE आपका जीमेल हैक है या नही, इस तरीके से करें पता? कैमरे के फीचर्स की बात करें तो इस सीरीज के दोनों स्मार्टफोन में आपको सेल्फी खींचने के लिए बत्तीसMP का फ्रंट कैमरा मिल सकता है। Renoसात में आपको चौंसठMP के प्राइमेरी सेन्सर वाला ट्रिपल रीयर कैमरा सेटअप मिल सकता है और Renoसात Pro में भी एक ट्रिपल रीयर कैमरा सेटअप मिल सकता है। जिसमें मेन सेन्सर पचासMP का हो सकता है। Oppo Renoसात छः. तैंतालीस-इंच के एफएचडी+ एमोलेड पैनल और नब्बे हर्ट्ज़ के रिफ्रेश रेट के साथ आ सकता है. Oppo Reno सात Pro की बात करें, तो उसमें आपको छः. पचपन-इंच का एफएचडी+ एमोलेड स्क्रीन और नब्बे हर्ट्ज़ का रिफ्रेश रेट मिल सकता है. ये प्रो मॉडल मीडियाटेक डायमेंसिटी एक हज़ार दो सौ SoC पर काम करेगा। social media.
KANPUR: हैलट इमरजेंसी के मेडिसिन विभाग में तबीयत खराब होने पर देर रात आए 100 साल के वृद्ध के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ। इस व्यवहार की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि वृद्ध के परिजनों ने प्राइवेट जांच कराने से मना कर दिया था। जिससे जेआर का गुस्सा वृद्ध पर फूट पड़ा और वृद्ध बिना कंबल और कुछ दिए ही वार्ड के लिए चलता कर दिया। हैलट में रहने वाली स्टॉफ नर्स के रिश्तेदार मलखान सिंह (100) मंडे देर रात डायरिया होने पर हैलट इमरजेंसी में भर्ती हुए थे। मेडिसिन विभाग में इलाज के दौरान जेआर ने उन्हें एक पर्चे पर प्राइवेट पैथालॉजी का नाम लिख कर कुछ जांचे करा के लाने के लिए कहा। मलखान के तीमार दार ने जब यह जांचे हैलट में सस्ती दरों पर होने की बात कही तो जेआर उखड़ गया और फौरन मेडिसिन वार्ड में मरीज को ले जाने के लिए कह दिया। इस दौरान वृद्ध को न तो कंबल दिया गया। बल्कि टूटी हुई गंदी स्ट्रेचर पर ही वार्ड भेज दिया। वहां पर भी उसे न तो कंबल मिला और न चादर ठंड की वजह से उसकी हालत और बिगड़ गई।
KANPUR: हैलट इमरजेंसी के मेडिसिन विभाग में तबीयत खराब होने पर देर रात आए एक सौ साल के वृद्ध के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ। इस व्यवहार की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि वृद्ध के परिजनों ने प्राइवेट जांच कराने से मना कर दिया था। जिससे जेआर का गुस्सा वृद्ध पर फूट पड़ा और वृद्ध बिना कंबल और कुछ दिए ही वार्ड के लिए चलता कर दिया। हैलट में रहने वाली स्टॉफ नर्स के रिश्तेदार मलखान सिंह मंडे देर रात डायरिया होने पर हैलट इमरजेंसी में भर्ती हुए थे। मेडिसिन विभाग में इलाज के दौरान जेआर ने उन्हें एक पर्चे पर प्राइवेट पैथालॉजी का नाम लिख कर कुछ जांचे करा के लाने के लिए कहा। मलखान के तीमार दार ने जब यह जांचे हैलट में सस्ती दरों पर होने की बात कही तो जेआर उखड़ गया और फौरन मेडिसिन वार्ड में मरीज को ले जाने के लिए कह दिया। इस दौरान वृद्ध को न तो कंबल दिया गया। बल्कि टूटी हुई गंदी स्ट्रेचर पर ही वार्ड भेज दिया। वहां पर भी उसे न तो कंबल मिला और न चादर ठंड की वजह से उसकी हालत और बिगड़ गई।
अभय राज (मुजफ्फरपुर): मुजफ्फरपुर में रेल पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी. टीम को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर स्टेशन के पास झाड़ियों में छिपा कर रखी लाखो की विदेशी अवैध शराब को जब्त किया गया है . रेल एसपी ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि मुजफ्फरपुर सीतामढ़ी रेल मार्ग के जुब्बा साहनी रेलवे स्टेशन के पास एक झाड़ि में विदेशी शराब छिपा कर रखी गई है. वही त्वरित कार्यवाई करते हुए एक टीम गठित किया गया. वही बताए गए जगह पर छापेमारी की गई. जिसमे 354 बोतल विदेशी शराब जब्त किया गया है. मामले में कोई गिरफ्तारी नही हुई है. छानबीन चल रहा है. आगे की कार्यवाई की जाएगी.
अभय राज : मुजफ्फरपुर में रेल पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी. टीम को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर स्टेशन के पास झाड़ियों में छिपा कर रखी लाखो की विदेशी अवैध शराब को जब्त किया गया है . रेल एसपी ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि मुजफ्फरपुर सीतामढ़ी रेल मार्ग के जुब्बा साहनी रेलवे स्टेशन के पास एक झाड़ि में विदेशी शराब छिपा कर रखी गई है. वही त्वरित कार्यवाई करते हुए एक टीम गठित किया गया. वही बताए गए जगह पर छापेमारी की गई. जिसमे तीन सौ चौवन बोतल विदेशी शराब जब्त किया गया है. मामले में कोई गिरफ्तारी नही हुई है. छानबीन चल रहा है. आगे की कार्यवाई की जाएगी.
यदि हम रॉयल स्पैनिश एकेडमी ( RAE ) द्वारा विकसित शब्दकोष में जाते हैं, तो यह जानने के लिए कि वल्गरिज़्म का विचार क्या कहता है, हम पाएंगे कि वल्गर आमतौर पर जिन भावों का उपयोग करते हैं, उनके लिए शब्द का अर्थ है। दूसरी ओर, यह धारणा (अशिष्ट) सामान्य लोगों से जुड़ी हुई है, जिनके पास विशेष संसाधन या ज्ञान नहीं है।किसी भी मामले में, अवधारणा के लिए विशेष रूप से उन शब्दों और शब्दों पर लागू किया जाना है जो सही वाक्यांशों और शब्दों को बदलने के लिए उपयोग किए जाते हैं। यह कहा जा सकता है कि, तब अशिष्टताएं त्रुटियां या दोष हैं, हालांकि अक्सर वे अज्ञानता का परिणाम नहीं होते हैं, बल्कि बोलने के क्षेत्रीय तरीकों या यहां तक कि उन परिवर्तनों के भी होते हैं जो भाषा इतिहास के पाठ्यक्रम के साथ अनुभव करती है। "मैं अपने आप से नाराज़ हूँ", उदाहरण के लिए, अशिष्ट है। इस प्रकार के गुस्से को व्यक्त करने का सही तरीका निम्नलिखित होगाः "मैं मुझसे नाराज हूं" । जैसा कि देखा जा सकता है, अशिष्टता आमतौर पर अभिव्यक्ति की समझ को बाधित नहीं करती है । "मैंने खुद को एक अबूजा के साथ पाला", "कुत्ते को खाना बंद करो ताकि आप भौंकना बंद कर दें!", "काश इस समय कोई रेस्तरां खुला होता", "डॉक्टर ने मुझे बताया कि मुझे भोजन करना है" और "यह सबसे अच्छा है" जीवन में मेरे साथ क्या हुआ " अन्य अभिव्यक्तियाँ हैं जिनमें अश्लीलता शामिल है और इसलिए, ऐसे शब्द प्रस्तुत करते हैं जो गलत हैं। इन अंतिम उदाहरणों में हमें क्रमशः सुई, डिनल, बीच, डॉक्टर और बदतर द्वारा एबुजा, डेलेन, हाइगा, डोटोर और पायोर की शर्तों को बदलना चाहिए। आइए कोष्ठक में सही अभिव्यक्ति के साथ एक से अधिक शब्दों से बना कुछ अश्लीलता देखेंः जो (जब); के बहाने (के बहाने); मैंने हड़प लिया और (तब); अधिक (अधिक) के खिलाफ ; निश्चित रूप से वह (निश्चित रूप से, निश्चित रूप से); आपके पक्ष में (आपके पक्ष में, आपके पक्ष में); शापित होना ( शापित होना); सबसे (सबसे)।
यदि हम रॉयल स्पैनिश एकेडमी द्वारा विकसित शब्दकोष में जाते हैं, तो यह जानने के लिए कि वल्गरिज़्म का विचार क्या कहता है, हम पाएंगे कि वल्गर आमतौर पर जिन भावों का उपयोग करते हैं, उनके लिए शब्द का अर्थ है। दूसरी ओर, यह धारणा सामान्य लोगों से जुड़ी हुई है, जिनके पास विशेष संसाधन या ज्ञान नहीं है।किसी भी मामले में, अवधारणा के लिए विशेष रूप से उन शब्दों और शब्दों पर लागू किया जाना है जो सही वाक्यांशों और शब्दों को बदलने के लिए उपयोग किए जाते हैं। यह कहा जा सकता है कि, तब अशिष्टताएं त्रुटियां या दोष हैं, हालांकि अक्सर वे अज्ञानता का परिणाम नहीं होते हैं, बल्कि बोलने के क्षेत्रीय तरीकों या यहां तक कि उन परिवर्तनों के भी होते हैं जो भाषा इतिहास के पाठ्यक्रम के साथ अनुभव करती है। "मैं अपने आप से नाराज़ हूँ", उदाहरण के लिए, अशिष्ट है। इस प्रकार के गुस्से को व्यक्त करने का सही तरीका निम्नलिखित होगाः "मैं मुझसे नाराज हूं" । जैसा कि देखा जा सकता है, अशिष्टता आमतौर पर अभिव्यक्ति की समझ को बाधित नहीं करती है । "मैंने खुद को एक अबूजा के साथ पाला", "कुत्ते को खाना बंद करो ताकि आप भौंकना बंद कर दें!", "काश इस समय कोई रेस्तरां खुला होता", "डॉक्टर ने मुझे बताया कि मुझे भोजन करना है" और "यह सबसे अच्छा है" जीवन में मेरे साथ क्या हुआ " अन्य अभिव्यक्तियाँ हैं जिनमें अश्लीलता शामिल है और इसलिए, ऐसे शब्द प्रस्तुत करते हैं जो गलत हैं। इन अंतिम उदाहरणों में हमें क्रमशः सुई, डिनल, बीच, डॉक्टर और बदतर द्वारा एबुजा, डेलेन, हाइगा, डोटोर और पायोर की शर्तों को बदलना चाहिए। आइए कोष्ठक में सही अभिव्यक्ति के साथ एक से अधिक शब्दों से बना कुछ अश्लीलता देखेंः जो ; के बहाने ; मैंने हड़प लिया और ; अधिक के खिलाफ ; निश्चित रूप से वह ; आपके पक्ष में ; शापित होना ; सबसे ।
आगरा, । निकाह के 1ृ3 साल बाद भी शौहर बीवी को अपने साथ विदेश लेकर नहीं गया। बीवी का आरोप है कि बाइक और दो लाख रुपये नहीं देने पर शौहर ने दूसरा निकाह करने की धमकी दी। जिसके चलते वह मायके में रहने को मजबूर है। छह दिन पहले ससुराल आने पर शौहर ने तीन तलाक बोलकर निकाल दिया। मामले में पीड़िता ने शौहर व ससुराल वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। एत्माद्दाैला थाना क्षेत्र की रहने वाली अफसाना ने मुकदमा दर्ज कराया है। जिसके अनुसार उसका निकाह अलीगढ़ के बन्ना देवी थाना क्षेत्र निवासी सलमान उर्फ इकरार के साथ दिसंबर 2009 में हुआ था। उसके पिता की मौत हो चुकी है। निकाह में मां व परिवार के लोगों ने दहेज में खूब सामान दिया था। इसके बावजूद ससुराल में कम दहेज का ताना दिया जाता। उससे दो लाख रुपये और बाइक की मांग की जाने लगी।
आगरा, । निकाह के एकृतीन साल बाद भी शौहर बीवी को अपने साथ विदेश लेकर नहीं गया। बीवी का आरोप है कि बाइक और दो लाख रुपये नहीं देने पर शौहर ने दूसरा निकाह करने की धमकी दी। जिसके चलते वह मायके में रहने को मजबूर है। छह दिन पहले ससुराल आने पर शौहर ने तीन तलाक बोलकर निकाल दिया। मामले में पीड़िता ने शौहर व ससुराल वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। एत्माद्दाैला थाना क्षेत्र की रहने वाली अफसाना ने मुकदमा दर्ज कराया है। जिसके अनुसार उसका निकाह अलीगढ़ के बन्ना देवी थाना क्षेत्र निवासी सलमान उर्फ इकरार के साथ दिसंबर दो हज़ार नौ में हुआ था। उसके पिता की मौत हो चुकी है। निकाह में मां व परिवार के लोगों ने दहेज में खूब सामान दिया था। इसके बावजूद ससुराल में कम दहेज का ताना दिया जाता। उससे दो लाख रुपये और बाइक की मांग की जाने लगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के पुत्र फैसल पटेल से प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने गुरुवार को दोबारा पूछताछ की। ईडी ने उनसे गुजरात की कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक के कथित धन शोधन और कई करोड़ रुपयों की बैंक धोखाधड़ी को लेकर सवाल जवाब किए। अधिकारियों ने बताया कि धन शोधन रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत फैसल के बयान तीसरी बार दर्ज किए गए। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के पुत्र फैसल पटेल से प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने गुरुवार को दोबारा पूछताछ की। ईडी ने उनसे गुजरात की कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक के कथित धन शोधन और कई करोड़ रुपयों की बैंक धोखाधड़ी को लेकर सवाल जवाब किए। अधिकारियों ने बताया कि धन शोधन रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत फैसल के बयान तीसरी बार दर्ज किए गए। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
4 मार्च, 2020 को देश में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया गया। यह दिवस भारतीय सुरक्षा बलों के काम का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। इसमें सभी सुरक्षाकर्मी, पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल, गार्ड, कमांडो, सेना के अधिकारी आदि शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस को सुरक्षा बलों को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिवस के द्वारा नागरिकों को देश के प्रति उनके मौलिक कर्तव्यों के बारे में स्मरण करवाया जाता है। इस दिवस पर देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले सुरक्षा जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है। सुरक्षा कर्मचारी विभिन्न प्रकार की सुरक्षा जैसे कि राजनीतिक, पारिस्थितिक, आर्थिक, कंप्यूटर, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जिम्मेदार हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस हर साल 4 मार्च को मनाया जाता है क्योंकि, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की स्थापना इसी दिन की गई थी। सुरक्षा परिषद भारत की आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक सुरक्षा चिंताओं पर विश्लेषण करती है। इसकी स्थापना 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी।
चार मार्च, दो हज़ार बीस को देश में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया गया। यह दिवस भारतीय सुरक्षा बलों के काम का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। इसमें सभी सुरक्षाकर्मी, पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल, गार्ड, कमांडो, सेना के अधिकारी आदि शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस को सुरक्षा बलों को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिवस के द्वारा नागरिकों को देश के प्रति उनके मौलिक कर्तव्यों के बारे में स्मरण करवाया जाता है। इस दिवस पर देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले सुरक्षा जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है। सुरक्षा कर्मचारी विभिन्न प्रकार की सुरक्षा जैसे कि राजनीतिक, पारिस्थितिक, आर्थिक, कंप्यूटर, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जिम्मेदार हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस हर साल चार मार्च को मनाया जाता है क्योंकि, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की स्थापना इसी दिन की गई थी। सुरक्षा परिषद भारत की आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक सुरक्षा चिंताओं पर विश्लेषण करती है। इसकी स्थापना एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी।
कारण आपने रावलपिण्डी में अपने बड़े भाई के पास परवरिश पाई । ये बचपन से ही बड़े फुर्तीले थे और खेल-कूद की ओर अधिक रुचि थी । १५ वर्ष की ही आयु में शादी हो जाने के बाद आप कुछ समय तक मकान पर ही बढ़ई का काम करते · रहे, और फिर बसरा चले गए । नानकाना साहब की घटना के बाद अकाली-आन्दोलन ने जोर पकड़ा और आप भी उसी में भाग लेने की इच्छा से देश को वापस आ गए। उस समय गुरु के बाग़ के सत्याग्रह में 'उन्हें भी छः महीने की सजा भुगतनी पड़ी थी । जेल में मार भी अच्छी खानी पड़ी । अस्तु, यहीं से आपके विचारों में 'परिवर्त्तन होना आरम्भ हो गया। उस नौजवान आत्माभिमानी ने देखा कि इस प्रकार निर्दय पुलिस वालों के डण्डे खाने से काम न चलेगा । अस्तु, जेल से बाहर आते ही आप किशनसिंह के बबर आकाली दल में सम्मिलित हो गए। उन्होंने अब - मार खाने की बात को छोड़कर मरने और मारने की शपथ ली। सत्याग्रह में सजा होने पर आपके भाई ने माफी माँग · कर छूट आने की सलाह दी । कहा - " बड़े भाई का शरीरान्स हो चुका है। लड़के की शादी करनी है । अस्तु, यदि ऐसी अवस्था में आप भी जेल चलो गए तो कुछ भी न हो सकेगा।" इस पर आपने उत्तर दिया- "यदि बड़े भाई के बिना शादी हो सकती है, तो मेरे बिना भी हो सकती है। इन शादी-जैसे घरेलू मामलों के लिए मैं क़ौम का काम रोकना नहीं चाहता।"
कारण आपने रावलपिण्डी में अपने बड़े भाई के पास परवरिश पाई । ये बचपन से ही बड़े फुर्तीले थे और खेल-कूद की ओर अधिक रुचि थी । पंद्रह वर्ष की ही आयु में शादी हो जाने के बाद आप कुछ समय तक मकान पर ही बढ़ई का काम करते · रहे, और फिर बसरा चले गए । नानकाना साहब की घटना के बाद अकाली-आन्दोलन ने जोर पकड़ा और आप भी उसी में भाग लेने की इच्छा से देश को वापस आ गए। उस समय गुरु के बाग़ के सत्याग्रह में 'उन्हें भी छः महीने की सजा भुगतनी पड़ी थी । जेल में मार भी अच्छी खानी पड़ी । अस्तु, यहीं से आपके विचारों में 'परिवर्त्तन होना आरम्भ हो गया। उस नौजवान आत्माभिमानी ने देखा कि इस प्रकार निर्दय पुलिस वालों के डण्डे खाने से काम न चलेगा । अस्तु, जेल से बाहर आते ही आप किशनसिंह के बबर आकाली दल में सम्मिलित हो गए। उन्होंने अब - मार खाने की बात को छोड़कर मरने और मारने की शपथ ली। सत्याग्रह में सजा होने पर आपके भाई ने माफी माँग · कर छूट आने की सलाह दी । कहा - " बड़े भाई का शरीरान्स हो चुका है। लड़के की शादी करनी है । अस्तु, यदि ऐसी अवस्था में आप भी जेल चलो गए तो कुछ भी न हो सकेगा।" इस पर आपने उत्तर दिया- "यदि बड़े भाई के बिना शादी हो सकती है, तो मेरे बिना भी हो सकती है। इन शादी-जैसे घरेलू मामलों के लिए मैं क़ौम का काम रोकना नहीं चाहता।"
Bharat Jodo Yatra: कई जगहों पर तो ठंड के साथ ही बर्फीली हवाओं और कोहरे की वजह से लोग आग सेकने को मजबूर हो गए थे लेकिन कड़ाके की ठंड में भी राहुल गांधी महज हाफ बाजू की टीशर्ट पहने दिखाई दिए। राहुल गांधी की इसी तस्वीर ने लोगों का काफी ध्यान खींचा था। सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों में भी राहुल गांधी की इस तस्वीर को लेकर चर्चा हो रही थी। नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी बीते काफी समय से भारत जोड़ों यात्रा में लगे हुए हैं। भारत जोड़ों के संकल्प के साथ शुरू हुई इस यात्रा को लेकर काफी विवाद भी हो चुके हैं। कई मौके पर जहां राहुल गांधी की सुरक्षा में सेंध हुई। तो कई बार राहुल गांधी अपने बयानों और वीडियोज को लेकर चर्चा में आए। कन्याकुमारी से शुरू हुई इस यात्रा के बीच राहुल गांधी की एक तस्वीर काफी चर्चा में आई थी। तस्वीर के चर्चा में आने की वजह राहुल गांधी का टीशर्ट पहनकर घूमना था। दरअसल, उत्तर भारत में इस वक्त ठंड की लहर है। बीते दिनों तो पारा (तापमान) 1. 6 डिग्री तक देखा गया। कई जगहों पर तो ठंड के साथ ही बर्फीली हवाओं और कोहरे की वजह से लोग आग सेकने को मजबूर हो गए थे लेकिन कड़ाके की ठंड में भी राहुल गांधी महज हाफ बाजू की टीशर्ट पहने दिखाई दिए। राहुल गांधी की इसी तस्वीर ने लोगों का काफी ध्यान खींचा था। सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों में भी राहुल गांधी की इस तस्वीर को लेकर चर्चा हो रही थी। जब एक मीडिया पर्सन ने राहुल गांधी से सवाल किया कि वो क्यों इतनी ठंड में भी जैकेट या स्वेटर नहीं पहन रहे तो कांग्रेस नेता ने जवाब देते हुए कहा था कि अभी टीर्शट से काम चल रहा है। जब इससे काम नहीं चलेगा तो पहन लूंगा। अब इस वक्त राहुल गांधी की भारत जोड़ों यात्रा जम्मू-कश्मीर में जारी है। सुबह यात्रा से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है जिसमें राहुल गांधी काले रंग की जैकेट जैसा पहने हुए दिखाई दे रहे हैं। अब एक बार फिर राहुल गांधी चर्चा में आ गए हैं। बता दें, सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का जैकेट पहने हुए एक वीडियो छाया हुआ है जो कि जम्मू-कश्मीर में जारी भारत जोड़ों यात्रा का है। वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया कई यूजर्स राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हुए कह रहे हैं कि 'राहुल गांधी को यहां आते ही ठंड लग गई'। तो वहीं, कई लोग राहुल गांधी की इस जैकेट को लेकर बहस कर रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं राहुल गांधी ने जैकेट पहना है। तो वहीं, कुछ कह रहे हैं कि यात्रा के दौरान बारिश हुई इस वजह से राहुल गांधी ने रेन कोट पहना है। अब ये जैकेट है या फिर रेन कोट ये तो आप खुद ही नीचे दिए गए वीडियो को देख अंदाजा लगा सकते हैं। ठण्ड से डर नहीं लगता साहब , बारिश से लगता है ? ? ?
Bharat Jodo Yatra: कई जगहों पर तो ठंड के साथ ही बर्फीली हवाओं और कोहरे की वजह से लोग आग सेकने को मजबूर हो गए थे लेकिन कड़ाके की ठंड में भी राहुल गांधी महज हाफ बाजू की टीशर्ट पहने दिखाई दिए। राहुल गांधी की इसी तस्वीर ने लोगों का काफी ध्यान खींचा था। सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों में भी राहुल गांधी की इस तस्वीर को लेकर चर्चा हो रही थी। नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी बीते काफी समय से भारत जोड़ों यात्रा में लगे हुए हैं। भारत जोड़ों के संकल्प के साथ शुरू हुई इस यात्रा को लेकर काफी विवाद भी हो चुके हैं। कई मौके पर जहां राहुल गांधी की सुरक्षा में सेंध हुई। तो कई बार राहुल गांधी अपने बयानों और वीडियोज को लेकर चर्चा में आए। कन्याकुमारी से शुरू हुई इस यात्रा के बीच राहुल गांधी की एक तस्वीर काफी चर्चा में आई थी। तस्वीर के चर्चा में आने की वजह राहुल गांधी का टीशर्ट पहनकर घूमना था। दरअसल, उत्तर भारत में इस वक्त ठंड की लहर है। बीते दिनों तो पारा एक. छः डिग्री तक देखा गया। कई जगहों पर तो ठंड के साथ ही बर्फीली हवाओं और कोहरे की वजह से लोग आग सेकने को मजबूर हो गए थे लेकिन कड़ाके की ठंड में भी राहुल गांधी महज हाफ बाजू की टीशर्ट पहने दिखाई दिए। राहुल गांधी की इसी तस्वीर ने लोगों का काफी ध्यान खींचा था। सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों में भी राहुल गांधी की इस तस्वीर को लेकर चर्चा हो रही थी। जब एक मीडिया पर्सन ने राहुल गांधी से सवाल किया कि वो क्यों इतनी ठंड में भी जैकेट या स्वेटर नहीं पहन रहे तो कांग्रेस नेता ने जवाब देते हुए कहा था कि अभी टीर्शट से काम चल रहा है। जब इससे काम नहीं चलेगा तो पहन लूंगा। अब इस वक्त राहुल गांधी की भारत जोड़ों यात्रा जम्मू-कश्मीर में जारी है। सुबह यात्रा से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है जिसमें राहुल गांधी काले रंग की जैकेट जैसा पहने हुए दिखाई दे रहे हैं। अब एक बार फिर राहुल गांधी चर्चा में आ गए हैं। बता दें, सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का जैकेट पहने हुए एक वीडियो छाया हुआ है जो कि जम्मू-कश्मीर में जारी भारत जोड़ों यात्रा का है। वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया कई यूजर्स राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हुए कह रहे हैं कि 'राहुल गांधी को यहां आते ही ठंड लग गई'। तो वहीं, कई लोग राहुल गांधी की इस जैकेट को लेकर बहस कर रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं राहुल गांधी ने जैकेट पहना है। तो वहीं, कुछ कह रहे हैं कि यात्रा के दौरान बारिश हुई इस वजह से राहुल गांधी ने रेन कोट पहना है। अब ये जैकेट है या फिर रेन कोट ये तो आप खुद ही नीचे दिए गए वीडियो को देख अंदाजा लगा सकते हैं। ठण्ड से डर नहीं लगता साहब , बारिश से लगता है ? ? ?
अमरावती/दि. 9- उबाठा शिवसेना के जिला संपर्क प्रमुख सुधीर सूर्यवंशी तथा कार्यकर्ताओं व्दारा किसान हित में महावितरण बिजली अभियंता के कक्ष में फांसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश व धमकी के मामले में गाडगेनगर पुलिस ने अधीक्षक अभियंता की शिकायत पर 15 कार्यकर्ताओं के विरुद्ध दफा 309 और 143, 135 के तहत अपराध दर्ज किया गया हैं. नामजद आरोपियों में प्रकाश मारोटकर, सुधीर सूर्यवंशी, अभिजीत ढेपे, श्रीकृष्ण सोलंके, मनदेव चव्हाण, अक्षय राणे, हेमंत ढेपे, मनोज ढोके, पिंटू तुपट, गुणवंत चांदूरकर, शुभम सावरकर और 15 कार्यकर्ता शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि दो रोज पहले उबाठा शिवसेना ने आंदोलन किया था. नांदगांव खंडेश्वर तहसील के विविध गांवों में कृषी पंप की बिजली नियमित करने की मांग अभियंता से की थी. बंद पडी डीपी को सुधारने और सिंगल फेस का सप्लाय नियमित करने की मांग की थी. पुलिस को दी गई शिकायत में अभियंता की तरफ से कहा गया कि आरोपी प्रकाश मारोटकर ने गले में नायलोन रस्सी से फांसी लेकर आत्महत्या की धमकी दी और उसकी स्वयं की जान चले जाए, ऐसी कोशिश की. फरियाद में कहा गया कि, आरोपियों ने पुलिस उपायुक्त के धारा 37, 1 और 3 निषेधाज्ञा का भी उल्लंघन किया हैं. गैर कानूनी रुप से लोगों को इकट्ठा कर पूर्व अनुमति न दिए बगैर इजाजत आंदोलन किया गया. इस मामले में पुलिस उपनिक्षक विजय गरुड आगे जांच कर रहे हैं.
अमरावती/दि. नौ- उबाठा शिवसेना के जिला संपर्क प्रमुख सुधीर सूर्यवंशी तथा कार्यकर्ताओं व्दारा किसान हित में महावितरण बिजली अभियंता के कक्ष में फांसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश व धमकी के मामले में गाडगेनगर पुलिस ने अधीक्षक अभियंता की शिकायत पर पंद्रह कार्यकर्ताओं के विरुद्ध दफा तीन सौ नौ और एक सौ तैंतालीस, एक सौ पैंतीस के तहत अपराध दर्ज किया गया हैं. नामजद आरोपियों में प्रकाश मारोटकर, सुधीर सूर्यवंशी, अभिजीत ढेपे, श्रीकृष्ण सोलंके, मनदेव चव्हाण, अक्षय राणे, हेमंत ढेपे, मनोज ढोके, पिंटू तुपट, गुणवंत चांदूरकर, शुभम सावरकर और पंद्रह कार्यकर्ता शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि दो रोज पहले उबाठा शिवसेना ने आंदोलन किया था. नांदगांव खंडेश्वर तहसील के विविध गांवों में कृषी पंप की बिजली नियमित करने की मांग अभियंता से की थी. बंद पडी डीपी को सुधारने और सिंगल फेस का सप्लाय नियमित करने की मांग की थी. पुलिस को दी गई शिकायत में अभियंता की तरफ से कहा गया कि आरोपी प्रकाश मारोटकर ने गले में नायलोन रस्सी से फांसी लेकर आत्महत्या की धमकी दी और उसकी स्वयं की जान चले जाए, ऐसी कोशिश की. फरियाद में कहा गया कि, आरोपियों ने पुलिस उपायुक्त के धारा सैंतीस, एक और तीन निषेधाज्ञा का भी उल्लंघन किया हैं. गैर कानूनी रुप से लोगों को इकट्ठा कर पूर्व अनुमति न दिए बगैर इजाजत आंदोलन किया गया. इस मामले में पुलिस उपनिक्षक विजय गरुड आगे जांच कर रहे हैं.
हम सब बहुत बचपन से शानदार मन्ना केक अच्छी तरह से जानते हैं और याद करते हैं। उस समय इस व्यंजन के बदलाव, बहुत कुछ नहीं था, लेकिन वास्तव में, शास्त्रीय व्यंजन बहुत से लोगों में से हैं। हमने उन्हें संबोधित करने और केफिर पर क्लासिक मैनीक्योर रेसिपी का पुनरुत्पादन करने का फैसला किया, जो विभिन्न किचनों में हैं, और आप हमारे सरल निर्देशों द्वारा निर्देशित जीवन में इस तरह की एक स्वादिष्टता का एहसास कर सकते हैं। इन सभी व्यंजनों में एकमात्र चीज जो एक आम लिंक बन जाएगी, वह सूजी और केफिर का आधार है। एक सुस्त मैननिक कोई विशेष खाना पकाने की तकनीक नहीं बनाता है, लेकिन आम आटा के रूप में, एक आम बेकिंग पाउडर जो सूजी उठाता है, भी तैयार है। सामग्रीः - मक्खन - 245 ग्राम; - दानेदार चीनी - 185 ग्राम; - अंडे - 4 टुकड़े; - आटा - 55 ग्राम; - बेकिंग पाउडर - 2 चम्मच; - रस और दो नारंगी का एक छील; - सूजी - 245 ग्राम; - जमीन बादाम - 170 ग्राम; आटा मिलाकर बिस्कुट तैयार करना है। कटोरे में जाने वाला पहला मक्खन और चीनी होता है, जो ब्लेंडर की अधिकतम गति से प्रेरित होता है, जो सफेद क्रीम में घुमाया जाता है। तैयार क्रीम आगे अंडे, सभी सूखे तत्व, साइट्रस का रस और उत्तेजना, साथ ही केफिर के साथ मिलती है। तैयार आटा को चर्मपत्र से ढके हुए रूप में वितरित किया जाता है और 170 डिग्री पर एक घंटे के लिए पकाया जाता है। जबकि मैननिक गर्म है, इसे चीनी सिरप के साथ लगाया जा सकता है, और आप इस तरह कट और सर्विस कर सकते हैं। क्लासिक मैननिक के इस तरह के एक नुस्खा को दोहराने के लिए यह संभव है और मल्टीवार्क में, क्योंकि इस मिश्रण को एक ग्रीस कटोरे में डाल दिया जाता है और 50 मिनट "बेकिंग" के लिए तैयार करने के लिए छोड़ दिया जाता है। पश्चिमी यूक्रेन और पोलैंड के लिए पारंपरिक पारंपरिक "स्टेफंका" कहा जाता है। इस पकवान में सूजी और कुकीज़ की परतें होती हैं। केक प्री-पके हुए केक के लिए मंक, क्योंकि केक बहुत नरम, घना होता है और नमी को अच्छी तरह से बरकरार रखता है। सामग्रीः - कुकीज़ - 230 ग्राम; - दूध - 740 मिलीलीटर; - केफिर - 75 मिलीलीटर; - सूजी - 145 ग्राम; - मक्खन - 155 ग्राम; - चीनी - 75 ग्राम; - डार्क चॉकलेट - 115 ग्राम; - तत्काल कॉफी - 1 बड़ा चम्मच। चम्मच। केफिर में सूजी डालो और सूजन छोड़ दें। चर्मपत्र से ढके हुए फॉर्म के आधार पर कुकी का एक तिहाई रखें। स्टोव पर, दूध को मक्खन और चीनी के साथ उबाल लें। दूध में कॉफी जोड़ें। गांठों के गठन से बचने के लिए, मन्ना द्रव्यमान को लगातार, लगातार और लगातार मिलाकर, तरल में स्थानांतरित करें। बिस्कुट पर आधा सूजी डालो। परतों को दोहराएं ताकि मैननिक का शीर्ष एक कुकी हो। सभी पिघला हुआ चॉकलेट डालो और रेफ्रिजरेटर में 3 घंटे के लिए छोड़ दें। यदि आपके पास ओवन नहीं है, तो आप एक साधारण बर्नर पर एक मैननिक बना सकते हैं। उचित और यहां तक कि बेकिंग की कुंजी बहुत मोटी और मोटी तल के साथ अच्छे व्यंजन नहीं है। सामग्रीः - सूजी - 85 ग्राम; - दानेदार चीनी - 65 ग्राम; - केफिर - 275 मिलीलीटर; - पानी 210 मिलीलीटर; - नारियल शेविंग - 1/2 सेंट; - अंडे - 2 टुकड़े; - जैतून का तेल - 45 मिलीलीटर। खाना पकाने से पहले आधे घंटे तक गर्म पानी के साथ सूजी डालो। थोड़ी देर के बाद, आटा तैयार करना शुरू करें। अंडे के साथ चीनी whisk और दही जोड़ें। इसके बाद, जैतून का तेल डालें और सूजी डाल दें। नारियल के छिद्र डालने, बार-बार परीक्षण के माध्यम से परीक्षण के माध्यम से चलना। तैयार आटा को एक greased कास्ट आयरन या अन्य मोटी दीवार वाले फ्राइंग पैन और मध्यम गर्मी पर जगह डालो, ढक्कन और एक पन्नी शीट से ढका। आधे घंटे के लिए सब कुछ छोड़ दो, और फिर केक को आग से हटा दें और इसे पहले से ही गर्मी स्रोत के बाहर ब्रू दें, लेकिन ढक्कन और पन्नी से ढका हुआ हो। 15 मिनट के बाद, आप ढक्कन को हटा सकते हैं और पूरी तरह से ठंडा होने तक इलाज छोड़ सकते हैं।
हम सब बहुत बचपन से शानदार मन्ना केक अच्छी तरह से जानते हैं और याद करते हैं। उस समय इस व्यंजन के बदलाव, बहुत कुछ नहीं था, लेकिन वास्तव में, शास्त्रीय व्यंजन बहुत से लोगों में से हैं। हमने उन्हें संबोधित करने और केफिर पर क्लासिक मैनीक्योर रेसिपी का पुनरुत्पादन करने का फैसला किया, जो विभिन्न किचनों में हैं, और आप हमारे सरल निर्देशों द्वारा निर्देशित जीवन में इस तरह की एक स्वादिष्टता का एहसास कर सकते हैं। इन सभी व्यंजनों में एकमात्र चीज जो एक आम लिंक बन जाएगी, वह सूजी और केफिर का आधार है। एक सुस्त मैननिक कोई विशेष खाना पकाने की तकनीक नहीं बनाता है, लेकिन आम आटा के रूप में, एक आम बेकिंग पाउडर जो सूजी उठाता है, भी तैयार है। सामग्रीः - मक्खन - दो सौ पैंतालीस ग्राम; - दानेदार चीनी - एक सौ पचासी ग्राम; - अंडे - चार टुकड़े; - आटा - पचपन ग्राम; - बेकिंग पाउडर - दो चम्मच; - रस और दो नारंगी का एक छील; - सूजी - दो सौ पैंतालीस ग्राम; - जमीन बादाम - एक सौ सत्तर ग्राम; आटा मिलाकर बिस्कुट तैयार करना है। कटोरे में जाने वाला पहला मक्खन और चीनी होता है, जो ब्लेंडर की अधिकतम गति से प्रेरित होता है, जो सफेद क्रीम में घुमाया जाता है। तैयार क्रीम आगे अंडे, सभी सूखे तत्व, साइट्रस का रस और उत्तेजना, साथ ही केफिर के साथ मिलती है। तैयार आटा को चर्मपत्र से ढके हुए रूप में वितरित किया जाता है और एक सौ सत्तर डिग्री पर एक घंटे के लिए पकाया जाता है। जबकि मैननिक गर्म है, इसे चीनी सिरप के साथ लगाया जा सकता है, और आप इस तरह कट और सर्विस कर सकते हैं। क्लासिक मैननिक के इस तरह के एक नुस्खा को दोहराने के लिए यह संभव है और मल्टीवार्क में, क्योंकि इस मिश्रण को एक ग्रीस कटोरे में डाल दिया जाता है और पचास मिनट "बेकिंग" के लिए तैयार करने के लिए छोड़ दिया जाता है। पश्चिमी यूक्रेन और पोलैंड के लिए पारंपरिक पारंपरिक "स्टेफंका" कहा जाता है। इस पकवान में सूजी और कुकीज़ की परतें होती हैं। केक प्री-पके हुए केक के लिए मंक, क्योंकि केक बहुत नरम, घना होता है और नमी को अच्छी तरह से बरकरार रखता है। सामग्रीः - कुकीज़ - दो सौ तीस ग्राम; - दूध - सात सौ चालीस मिलीलीटर; - केफिर - पचहत्तर मिलीलीटर; - सूजी - एक सौ पैंतालीस ग्राम; - मक्खन - एक सौ पचपन ग्राम; - चीनी - पचहत्तर ग्राम; - डार्क चॉकलेट - एक सौ पंद्रह ग्राम; - तत्काल कॉफी - एक बड़ा चम्मच। चम्मच। केफिर में सूजी डालो और सूजन छोड़ दें। चर्मपत्र से ढके हुए फॉर्म के आधार पर कुकी का एक तिहाई रखें। स्टोव पर, दूध को मक्खन और चीनी के साथ उबाल लें। दूध में कॉफी जोड़ें। गांठों के गठन से बचने के लिए, मन्ना द्रव्यमान को लगातार, लगातार और लगातार मिलाकर, तरल में स्थानांतरित करें। बिस्कुट पर आधा सूजी डालो। परतों को दोहराएं ताकि मैननिक का शीर्ष एक कुकी हो। सभी पिघला हुआ चॉकलेट डालो और रेफ्रिजरेटर में तीन घंटाटे के लिए छोड़ दें। यदि आपके पास ओवन नहीं है, तो आप एक साधारण बर्नर पर एक मैननिक बना सकते हैं। उचित और यहां तक कि बेकिंग की कुंजी बहुत मोटी और मोटी तल के साथ अच्छे व्यंजन नहीं है। सामग्रीः - सूजी - पचासी ग्राम; - दानेदार चीनी - पैंसठ ग्राम; - केफिर - दो सौ पचहत्तर मिलीलीटर; - पानी दो सौ दस मिलीलीटर; - नारियल शेविंग - एक/दो सेंट; - अंडे - दो टुकड़े; - जैतून का तेल - पैंतालीस मिलीलीटर। खाना पकाने से पहले आधे घंटे तक गर्म पानी के साथ सूजी डालो। थोड़ी देर के बाद, आटा तैयार करना शुरू करें। अंडे के साथ चीनी whisk और दही जोड़ें। इसके बाद, जैतून का तेल डालें और सूजी डाल दें। नारियल के छिद्र डालने, बार-बार परीक्षण के माध्यम से परीक्षण के माध्यम से चलना। तैयार आटा को एक greased कास्ट आयरन या अन्य मोटी दीवार वाले फ्राइंग पैन और मध्यम गर्मी पर जगह डालो, ढक्कन और एक पन्नी शीट से ढका। आधे घंटे के लिए सब कुछ छोड़ दो, और फिर केक को आग से हटा दें और इसे पहले से ही गर्मी स्रोत के बाहर ब्रू दें, लेकिन ढक्कन और पन्नी से ढका हुआ हो। पंद्रह मिनट के बाद, आप ढक्कन को हटा सकते हैं और पूरी तरह से ठंडा होने तक इलाज छोड़ सकते हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
मथुरा : यमुना एक्सप्रेस वे पर एक भीषण हादसा सामने आया है जहां थाना नौहझील इलाके में डीजल के टैंकर और इनोवा कार में जोरदार भिड़ंत हुई है जिसमें दर्दनाक 7 लोगों की मौत हो गई है। दर्दनाक हादसे के बाद घटना स्थल पर कोहराम मच गया है। थाना नौहझील में यमुना एक्सप्रेस वे पर देर रात हुए इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई है जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस से सभी सातों लोगों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बताया जा रहा है की यमुना एक्सप्रेसवे पर माइलस्टोन 68 के समीप आगरा की तरफ से एक टैंकर तेल लेकर जा रहा था बताते हैं कि तभी टैंकर अनियंत्रित होते हुए डिवाइडर तोड़कर दूसरी तरफ जा पहुंचा जिससे हुई घटना। बतादें की टैंकर ने नोएडा की तरफ से आ रही इनोवा में टक्कर मार दी जिसमे कार सवार 7 लोग हरियाणा के जींद निवासी थे, घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी नवनीत चहल एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर मौके पर पहुंच गए। एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर का कहना है यमुना एक्सप्रेस वे पर एक दुखद हादसा हो गया इसमे 5 पुरुषों के साथ 2 महिलाओं सहित 7 लोगों की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी। घटनास्थल का सभी उच्च अधिकारियों ने मुआयना किया और उनका कहना है कि टैंकर में आयल भरा होने की वजह से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रिफाइनरी की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। वहीं दूसरी तरफ हादसे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताया सभी अधिकारियों को दिए निर्देश पीड़ित की सहायता की जाएगी।
मथुरा : यमुना एक्सप्रेस वे पर एक भीषण हादसा सामने आया है जहां थाना नौहझील इलाके में डीजल के टैंकर और इनोवा कार में जोरदार भिड़ंत हुई है जिसमें दर्दनाक सात लोगों की मौत हो गई है। दर्दनाक हादसे के बाद घटना स्थल पर कोहराम मच गया है। थाना नौहझील में यमुना एक्सप्रेस वे पर देर रात हुए इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई है जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस से सभी सातों लोगों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बताया जा रहा है की यमुना एक्सप्रेसवे पर माइलस्टोन अड़सठ के समीप आगरा की तरफ से एक टैंकर तेल लेकर जा रहा था बताते हैं कि तभी टैंकर अनियंत्रित होते हुए डिवाइडर तोड़कर दूसरी तरफ जा पहुंचा जिससे हुई घटना। बतादें की टैंकर ने नोएडा की तरफ से आ रही इनोवा में टक्कर मार दी जिसमे कार सवार सात लोग हरियाणा के जींद निवासी थे, घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी नवनीत चहल एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर मौके पर पहुंच गए। एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर का कहना है यमुना एक्सप्रेस वे पर एक दुखद हादसा हो गया इसमे पाँच पुरुषों के साथ दो महिलाओं सहित सात लोगों की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी। घटनास्थल का सभी उच्च अधिकारियों ने मुआयना किया और उनका कहना है कि टैंकर में आयल भरा होने की वजह से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रिफाइनरी की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। वहीं दूसरी तरफ हादसे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताया सभी अधिकारियों को दिए निर्देश पीड़ित की सहायता की जाएगी।
महाराष्ट्र सीट बंटवाराः गोवा में बीजेपी के सहयोगी से शिवसेना को मिली सीख? कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी महाराष्ट्र के नांदेड़ से लड़ेंगे लोकसभा का चुनाव? एसपी-बीएसपी गठबंधन में RLD भी आएगी साथ! सीटों का फॉर्म्युला तय? लगता है आप ऑफलाइन हो चुके हैं।
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जीव, अपना भौतिक अस्तित्व स्वीकार करने के कारण अपने आध्यात्मिक अस्तित्व से पृथक स्थित हो गया है। किन्तु यदि वह यह समझता है कि परमेश्वर अपने परमात्मा स्वरूप में सर्वत्र स्थित है, अर्थात् यदि वह भगवान् की उपस्थिति प्रत्येक वस्तु में देखता है, तो वह विघटनकारी मानसिकता से अपने आपको नीचे नहीं गिराता, और इसलिए वह क्रमश बैकुण्ठ-लोक की ओर बढ़ता जाता है। सामान्यतया मन इन्द्रियतृतिकारी कार्यों में तीन रहता है, लेकिन जब वही मन परमात्मा की ओर उन्मुख होता है, तो मनुष्य आध्यात्मिक ज्ञान में आगे बढ़ जाता है। प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियामाणानि सर्वशः । यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ॥ ३०॥ प्रकृत्या-प्रकृति द्वारा; एव - निश्चय ही; च -भी; कर्माणि कार्य; क्रियमाणानिसम्पन्न किये गये; सर्वशः सभी प्रकार से, यः जो, पश्यति देखता है; तथा - भी; आत्मानम्-अपने आपको; अकर्तारम् अकर्ता; स. वह; पश्यति - अच्छी तरह देखता है। जो यह देखता है कि सारे कार्य शरीर द्वारा सम्पन्न किये जाते हैं, जिसकी उत्पत्ति प्रकृति से हुई है, और जो देखता है कि आत्मा कुछ भी नहीं करता, वही यधार्थ में देखता है। यह शरीर परमात्मा के निर्देशानुसार प्रकृति द्वारा बनाया गया और मनुष्य के शरीर के जितने भी कार्य सम्पन्न होते हैं, वे उसके द्वारा नहीं किये जाते । मनुष्य जो भी करता है, चाहे सुख के लिए करे. या दुख के लिए, वह शारीरिक रचना के कारण उसे करने के लिए बाध्य होता है। लेकिन आत्मा इन शारीरिक कार्यों से विलग रहता है। यह शरीर मनुष्य को पूर्व इच्छाओं के अनुसार प्राप्त होता है। इच्छाओं की पूर्ति के लिए शरीर मिलता है, जिससे वह इच्छानुसार कार्य करता है। एक तरह से शरीर एक यंत्र है, जिसे परमेश्वर ने इच्छाओं की पूर्ति के लिए निर्मित किया है। इच्छाओं के कारण ही मनुष्य दुख भोगता है या सुख पाता है। जब जीव में यह दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है, तो वह शारीरिक कार्यों से पृथक् हो जाता है। जिसमें ऐसी दृष्टि आ जाती है, वही वास्तविक द्रष्टा है। तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा ॥ ३१॥ यदा - जब; भूत-जीव के; पृथक्-भावम्-पृथक् स्वरूपों को; एक-स्थम् --एक स्थान पर; अनुपश्यति - किसी अधिकारी के माध्यम से देखने का प्रयास करता तत. एव - तत्पश्चात्; च-भी; विस्तारम् विस्तार को; ब्रह्म परब्रह्म, सम्पद्यते प्राप्त करता है; तदा - उस समय । जब विवेकवान् व्यक्ति विभिन्न भौतिक शरीरों के कारण विभिन्न स्वरूपों को देखना बन्द कर देता है, और यह देखता है कि किस प्रकार से जीव सर्वत्र फैले हुए हैं, तो वह ब्रह्म-बोध को प्राप्त होता है। जब मनुष्य यह देखता है कि विभिन्न जीवों के शरीर उस जीव की विभिन्न इच्छाओं के कारण उत्पन्न हुए है, और वे आत्मा से किसी तरह सम्बद्ध नहीं हैं, तो वह वास्तव मे देखता है। देहात्मबुद्धि के कारण हम किसी को देवता, किसी को मनुष्य, कुत्ता, बिल्ली आदि के रूप में देखते हैं। यह भौतिक दृष्टि है, वास्तविक दृष्टि नहीं है। यह भौतिक भेदभाव देहात्मबुद्धि के कारण है! भौतिक शरीर के विनाश के बाद आत्मा एक रहता है। यही आत्मा भौतिक प्रकृति के सम्पर्क से विभिन्न प्रकार के शरीर धारण करता है। जब कोई इसे देख पाता है, तो उसे आध्यात्मिक दृष्टि प्राप्त होती है। इस प्रकार जो मनुष्य, पशु, ऊँच, नीच आदि के भेदभाव से मुक्त हो जाता है उसकी चेतना शुद्ध हो जाती है और वह अपने आध्यात्मिक स्वरूप मे कृष्णभावनामृत विकसित करने में समर्थ होता है। तब वह वस्तुओं को जिस रूप में देखता है, उसे अगले श्लोक में बताया गया है। अनादित्वान्निर्गुणत्वात्परमात्मायमव्ययः । शरीरस्थोऽपि कौन्तेय न करोति न लिप्यते ॥३२॥ अनादित्वात् - नित्यता के कारण; निर्गुणत्वात् - दिव्य होने से, परम -- भौतिक प्रकृति से परे; आत्मा - आत्मा; अयम् यह; अव्ययः अविनाशी; शरीर स्थःशरीर मे वास करने वाला; अपि यद्यपि कौन्तेय - हे कुन्तीपुत्र; न करोति कुछ नहीं करता; न लिप्यते न ही लिप्त होता है। शाश्वत दृष्टिसम्पन्न लोग यह देख सकते हैं कि अविनाशी आत्मा दिव्य, शाश्वत तथा गुणों से अतीत है। हे अर्जुन! भौतिक शरीर के साथ सम्पर्क
जीव, अपना भौतिक अस्तित्व स्वीकार करने के कारण अपने आध्यात्मिक अस्तित्व से पृथक स्थित हो गया है। किन्तु यदि वह यह समझता है कि परमेश्वर अपने परमात्मा स्वरूप में सर्वत्र स्थित है, अर्थात् यदि वह भगवान् की उपस्थिति प्रत्येक वस्तु में देखता है, तो वह विघटनकारी मानसिकता से अपने आपको नीचे नहीं गिराता, और इसलिए वह क्रमश बैकुण्ठ-लोक की ओर बढ़ता जाता है। सामान्यतया मन इन्द्रियतृतिकारी कार्यों में तीन रहता है, लेकिन जब वही मन परमात्मा की ओर उन्मुख होता है, तो मनुष्य आध्यात्मिक ज्ञान में आगे बढ़ जाता है। प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियामाणानि सर्वशः । यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ॥ तीस॥ प्रकृत्या-प्रकृति द्वारा; एव - निश्चय ही; च -भी; कर्माणि कार्य; क्रियमाणानिसम्पन्न किये गये; सर्वशः सभी प्रकार से, यः जो, पश्यति देखता है; तथा - भी; आत्मानम्-अपने आपको; अकर्तारम् अकर्ता; स. वह; पश्यति - अच्छी तरह देखता है। जो यह देखता है कि सारे कार्य शरीर द्वारा सम्पन्न किये जाते हैं, जिसकी उत्पत्ति प्रकृति से हुई है, और जो देखता है कि आत्मा कुछ भी नहीं करता, वही यधार्थ में देखता है। यह शरीर परमात्मा के निर्देशानुसार प्रकृति द्वारा बनाया गया और मनुष्य के शरीर के जितने भी कार्य सम्पन्न होते हैं, वे उसके द्वारा नहीं किये जाते । मनुष्य जो भी करता है, चाहे सुख के लिए करे. या दुख के लिए, वह शारीरिक रचना के कारण उसे करने के लिए बाध्य होता है। लेकिन आत्मा इन शारीरिक कार्यों से विलग रहता है। यह शरीर मनुष्य को पूर्व इच्छाओं के अनुसार प्राप्त होता है। इच्छाओं की पूर्ति के लिए शरीर मिलता है, जिससे वह इच्छानुसार कार्य करता है। एक तरह से शरीर एक यंत्र है, जिसे परमेश्वर ने इच्छाओं की पूर्ति के लिए निर्मित किया है। इच्छाओं के कारण ही मनुष्य दुख भोगता है या सुख पाता है। जब जीव में यह दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है, तो वह शारीरिक कार्यों से पृथक् हो जाता है। जिसमें ऐसी दृष्टि आ जाती है, वही वास्तविक द्रष्टा है। तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा ॥ इकतीस॥ यदा - जब; भूत-जीव के; पृथक्-भावम्-पृथक् स्वरूपों को; एक-स्थम् --एक स्थान पर; अनुपश्यति - किसी अधिकारी के माध्यम से देखने का प्रयास करता तत. एव - तत्पश्चात्; च-भी; विस्तारम् विस्तार को; ब्रह्म परब्रह्म, सम्पद्यते प्राप्त करता है; तदा - उस समय । जब विवेकवान् व्यक्ति विभिन्न भौतिक शरीरों के कारण विभिन्न स्वरूपों को देखना बन्द कर देता है, और यह देखता है कि किस प्रकार से जीव सर्वत्र फैले हुए हैं, तो वह ब्रह्म-बोध को प्राप्त होता है। जब मनुष्य यह देखता है कि विभिन्न जीवों के शरीर उस जीव की विभिन्न इच्छाओं के कारण उत्पन्न हुए है, और वे आत्मा से किसी तरह सम्बद्ध नहीं हैं, तो वह वास्तव मे देखता है। देहात्मबुद्धि के कारण हम किसी को देवता, किसी को मनुष्य, कुत्ता, बिल्ली आदि के रूप में देखते हैं। यह भौतिक दृष्टि है, वास्तविक दृष्टि नहीं है। यह भौतिक भेदभाव देहात्मबुद्धि के कारण है! भौतिक शरीर के विनाश के बाद आत्मा एक रहता है। यही आत्मा भौतिक प्रकृति के सम्पर्क से विभिन्न प्रकार के शरीर धारण करता है। जब कोई इसे देख पाता है, तो उसे आध्यात्मिक दृष्टि प्राप्त होती है। इस प्रकार जो मनुष्य, पशु, ऊँच, नीच आदि के भेदभाव से मुक्त हो जाता है उसकी चेतना शुद्ध हो जाती है और वह अपने आध्यात्मिक स्वरूप मे कृष्णभावनामृत विकसित करने में समर्थ होता है। तब वह वस्तुओं को जिस रूप में देखता है, उसे अगले श्लोक में बताया गया है। अनादित्वान्निर्गुणत्वात्परमात्मायमव्ययः । शरीरस्थोऽपि कौन्तेय न करोति न लिप्यते ॥बत्तीस॥ अनादित्वात् - नित्यता के कारण; निर्गुणत्वात् - दिव्य होने से, परम -- भौतिक प्रकृति से परे; आत्मा - आत्मा; अयम् यह; अव्ययः अविनाशी; शरीर स्थःशरीर मे वास करने वाला; अपि यद्यपि कौन्तेय - हे कुन्तीपुत्र; न करोति कुछ नहीं करता; न लिप्यते न ही लिप्त होता है। शाश्वत दृष्टिसम्पन्न लोग यह देख सकते हैं कि अविनाशी आत्मा दिव्य, शाश्वत तथा गुणों से अतीत है। हे अर्जुन! भौतिक शरीर के साथ सम्पर्क
कंप्यूटर की सर्वव्यापीता के साथनेटवर्क, शब्द "बैंडविड्थ" हर किसी के लिए जाना जाता है। और यदि पहले ब्याज पूरी तरह से सैद्धांतिक था, अब सब कुछ पूरी तरह से अलग है। "नेटवर्क बैंडविड्थ" शब्दों के पीछे छिपी हुई चीज़ों को समझना आपको सर्वोत्तम उपलब्ध प्रदाता (इसके बाद स्थानीय नेटवर्क और इंटरनेट का तात्पर्य) चुनने के साथ-साथ नेटवर्क के साथ काम को बेहतर रूप से समायोजित करने की अनुमति देता है। सिद्धांत में जाने से पहले, विचार करेंव्यावहारिक स्थिति, जो, अक्सर, पूर्व सोवियत संघ के देशों में रहने वाले इंटरनेट उपयोगकर्ताओं द्वारा सामना की जाती है। जैसा कि आप जानते हैं, नेटवर्क एक्सेस सेवाओं से कनेक्ट करते समय, उनके टैरिफ योजनाओं में प्रदाता प्रीफिक्स्ड "टू" के साथ गति दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, "10 एमबी / एस तक", "50 एमबी / एस तक", इत्यादि। तार्किक परिणाम यह है कि हर किसी की गति नीचे गिरती है।घोषित (उपसर्ग "पहले" याद रखें)। कॉल असंतुष्ट ग्राहकों, संचार के साथ सामान्य समस्याएं आदि शुरू करते हैं। जवाब में, समर्थन सेवा प्रतिनिधियों का उल्लेख है कि चैनल क्षमता सीमित है। निश्चित रूप से, यह कई उपयोगकर्ताओं से परिचित है। इसके बारे में क्या है और गति क्यों गिरती है? 1 9 20 में अमेरिकीइलेक्ट्रॉनिक्स शोधकर्ता राल्फ हार्टले और भौतिक विज्ञानी हैरी निक्विस्ट, टेलीग्राफी में सूचना हस्तांतरण से निपटने, डेटा हस्तांतरण प्रक्रिया की मुख्य विशेषताएं तैयार की गईं। सिग्नल ट्रांसमिशन और समय की आवृत्ति के बीच संबंध सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए, हार्टले ने कानून तैयार किया, जिसके अनुसार प्रेषित डेटा की कुल राशि प्रयुक्त संचरण आवृत्ति और संचालन समय के समान होती है। 1 9 27 में, निकविस्ट ने स्पष्ट किया कि स्थानांतरित मात्रा आवृत्ति के मूल्य से दो गुना तक सीमित है (अर्थ प्रति यूनिट समय के डेटा के नुकसान के बिना ट्रांसमिशन)। केवल 1 9 40 में, शैनन ने अपने काम के परिणामों को सारांशित किया, डेटा ट्रांसमिशन के सिद्धांत को तैयार किया और "बैंडविड्थ संचार चैनल" की अवधारणा को तैयार किया। चैनल द्वारा उपयोग की जाने वाली आवृत्ति रेंजसूचना के संचरण को "बैंडविड्थ" कहा जाता है। शैनन के प्रमेय से, यह इस प्रकार है कि सिग्नल पावर, बैंडविड्थ, परजीवी शोर को कम करके अधिकतम गति की उपलब्धि संभव है। सिग्नल को संशोधित करके गति को बढ़ाना मुश्किल है, क्योंकि पल्स बढ़ाना प्रति इकाई समय की कुल संख्या को कम कर देता है, और जब एक एकल निर्वहन की अवधि को कम करके संपीड़ित किया जाता है, तो कंडक्टर में नुकसान की संख्या बढ़ जाती है। आम तौर पर, पल्स अवधि की गणना उस सूत्र का उपयोग करके की जाती है जो चयनित आवृत्ति को ध्यान में रखती है। यह बैंडविड्थ को ध्यान देने योग्य हैन केवल उपयोगी सिग्नल, बल्कि शोर भी शामिल है। ये विद्युत चुम्बकीय पिकअप, कंडक्टर गुण, प्रतिबिंब, एक गॉस प्रक्रिया आदि हो सकते हैं। रिसीवर पूर्ण सिग्नल प्रवाह को समझता है और वांछित घटक को समाप्त करता है।
कंप्यूटर की सर्वव्यापीता के साथनेटवर्क, शब्द "बैंडविड्थ" हर किसी के लिए जाना जाता है। और यदि पहले ब्याज पूरी तरह से सैद्धांतिक था, अब सब कुछ पूरी तरह से अलग है। "नेटवर्क बैंडविड्थ" शब्दों के पीछे छिपी हुई चीज़ों को समझना आपको सर्वोत्तम उपलब्ध प्रदाता चुनने के साथ-साथ नेटवर्क के साथ काम को बेहतर रूप से समायोजित करने की अनुमति देता है। सिद्धांत में जाने से पहले, विचार करेंव्यावहारिक स्थिति, जो, अक्सर, पूर्व सोवियत संघ के देशों में रहने वाले इंटरनेट उपयोगकर्ताओं द्वारा सामना की जाती है। जैसा कि आप जानते हैं, नेटवर्क एक्सेस सेवाओं से कनेक्ट करते समय, उनके टैरिफ योजनाओं में प्रदाता प्रीफिक्स्ड "टू" के साथ गति दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, "दस एमबी / एस तक", "पचास एमबी / एस तक", इत्यादि। तार्किक परिणाम यह है कि हर किसी की गति नीचे गिरती है।घोषित । कॉल असंतुष्ट ग्राहकों, संचार के साथ सामान्य समस्याएं आदि शुरू करते हैं। जवाब में, समर्थन सेवा प्रतिनिधियों का उल्लेख है कि चैनल क्षमता सीमित है। निश्चित रूप से, यह कई उपयोगकर्ताओं से परिचित है। इसके बारे में क्या है और गति क्यों गिरती है? एक नौ बीस में अमेरिकीइलेक्ट्रॉनिक्स शोधकर्ता राल्फ हार्टले और भौतिक विज्ञानी हैरी निक्विस्ट, टेलीग्राफी में सूचना हस्तांतरण से निपटने, डेटा हस्तांतरण प्रक्रिया की मुख्य विशेषताएं तैयार की गईं। सिग्नल ट्रांसमिशन और समय की आवृत्ति के बीच संबंध सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए, हार्टले ने कानून तैयार किया, जिसके अनुसार प्रेषित डेटा की कुल राशि प्रयुक्त संचरण आवृत्ति और संचालन समय के समान होती है। एक नौ सत्ताईस में, निकविस्ट ने स्पष्ट किया कि स्थानांतरित मात्रा आवृत्ति के मूल्य से दो गुना तक सीमित है । केवल एक नौ चालीस में, शैनन ने अपने काम के परिणामों को सारांशित किया, डेटा ट्रांसमिशन के सिद्धांत को तैयार किया और "बैंडविड्थ संचार चैनल" की अवधारणा को तैयार किया। चैनल द्वारा उपयोग की जाने वाली आवृत्ति रेंजसूचना के संचरण को "बैंडविड्थ" कहा जाता है। शैनन के प्रमेय से, यह इस प्रकार है कि सिग्नल पावर, बैंडविड्थ, परजीवी शोर को कम करके अधिकतम गति की उपलब्धि संभव है। सिग्नल को संशोधित करके गति को बढ़ाना मुश्किल है, क्योंकि पल्स बढ़ाना प्रति इकाई समय की कुल संख्या को कम कर देता है, और जब एक एकल निर्वहन की अवधि को कम करके संपीड़ित किया जाता है, तो कंडक्टर में नुकसान की संख्या बढ़ जाती है। आम तौर पर, पल्स अवधि की गणना उस सूत्र का उपयोग करके की जाती है जो चयनित आवृत्ति को ध्यान में रखती है। यह बैंडविड्थ को ध्यान देने योग्य हैन केवल उपयोगी सिग्नल, बल्कि शोर भी शामिल है। ये विद्युत चुम्बकीय पिकअप, कंडक्टर गुण, प्रतिबिंब, एक गॉस प्रक्रिया आदि हो सकते हैं। रिसीवर पूर्ण सिग्नल प्रवाह को समझता है और वांछित घटक को समाप्त करता है।
नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। देश की राजधानी नई दिल्ली के 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय में मायूसी छाई हुई है। खासतौर से राहुल गांधी की विशिष्ट मंडली में उनके करीबी बने बैठे बाहरी लोगों का पार्टी के पदाधिकारी मौन विरोध कर रहे हैं। इस मंडली में शामिल लोगों में शीर्ष स्तर पर राहुल गांधी के करीबी सहयोगी अलंकार सवाई हैं। आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व अधिकारी सवाई पार्टी अध्यक्ष के लिए दस्तावेजी और शोध कार्य के साथ-साथ विचार सुझाने और राजनीतिक रणनीति बनाने में मदद करते हैं। राहुल गांधी से मिलने का समय पाने में विफल नेता अपने लिए सारे दरवाजे बंद पाते हैं और वे इसके लिए कौशल विद्यार्थी या के. राजू पर दोष मढ़ते हैं। आम धारणा है कि यह मंडली नेता और उनके प्रति निष्ठावान भक्तों के बीच दीवार का काम करती है। ऑक्सफोर्ड से लौटे विद्यार्थी 2014 के चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद राहुल के निजी सचिव कनिष्क सिंह को दरकिनार करके उनके करीबी बने। इसके बाद पूर्व आईएएस अधिकारी के. राजू आए। 24 अकबर रोड में बैठने वाले पार्टी के पुराने लोगों को 12 तुगलक लेन स्थित राहुल गांधी के आवास पर शायद ही तवज्जो दिया जाता है। पार्टी कॉडर और दूसरे स्तर के कुछ नेताओं का मानना है कि राहुल के इर्द-गिर्द कई प्रमुख लोग हैं जो कम्युनिस्ट के विचारों से प्रेरित हैं। मसलन, संदीप सिंह को पार्टी में बाहरी माना जाता है। वह पहले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) में थे जो कम्युनिस्ट से जुड़ा संगठन है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नेता के रूप में संदीप ने 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को काला झंडा दिखाया था। वह इस समय राहुल गांधी के राजनीतिक सलाहकारों में शामिल हैं जो राहुल और प्रियंका के लिए भाषण तैयार करते हैं। राहुल के दरबार में अन्य शख्सों में पूर्व नौकरशाह धीरज श्रीवास्तव, निवेशक व बैंकर प्रवीण चक्रवर्ती, मिशिगन बिजनेस स्कूल के ग्रेजुएट सचिन राव और पूर्व एसपीजी अधिकारी के. बी. बायजू शामिल हैं जिन्हें पुराने पदाधिकारी बाहरी मानते हैं। संयुक्त प्रगतिशील गठबंन (संप्रग) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के सामने जब नेतृत्व के संकट का सवाल बना हुआ है, लिहाजा, बाहरियों के खिलाफ व्याप्त असंतोष के मद्देनजर लगता है पार्टी अध्यक्ष के दफ्तर में बदलाव हो सकता है। यह असंतोष खासतौर से उनके खिलाफ है जिनका झुकाव वामपंथ की तरफ है।
नई दिल्ली, उनतीस मई । देश की राजधानी नई दिल्ली के चौबीस अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय में मायूसी छाई हुई है। खासतौर से राहुल गांधी की विशिष्ट मंडली में उनके करीबी बने बैठे बाहरी लोगों का पार्टी के पदाधिकारी मौन विरोध कर रहे हैं। इस मंडली में शामिल लोगों में शीर्ष स्तर पर राहुल गांधी के करीबी सहयोगी अलंकार सवाई हैं। आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व अधिकारी सवाई पार्टी अध्यक्ष के लिए दस्तावेजी और शोध कार्य के साथ-साथ विचार सुझाने और राजनीतिक रणनीति बनाने में मदद करते हैं। राहुल गांधी से मिलने का समय पाने में विफल नेता अपने लिए सारे दरवाजे बंद पाते हैं और वे इसके लिए कौशल विद्यार्थी या के. राजू पर दोष मढ़ते हैं। आम धारणा है कि यह मंडली नेता और उनके प्रति निष्ठावान भक्तों के बीच दीवार का काम करती है। ऑक्सफोर्ड से लौटे विद्यार्थी दो हज़ार चौदह के चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद राहुल के निजी सचिव कनिष्क सिंह को दरकिनार करके उनके करीबी बने। इसके बाद पूर्व आईएएस अधिकारी के. राजू आए। चौबीस अकबर रोड में बैठने वाले पार्टी के पुराने लोगों को बारह तुगलक लेन स्थित राहुल गांधी के आवास पर शायद ही तवज्जो दिया जाता है। पार्टी कॉडर और दूसरे स्तर के कुछ नेताओं का मानना है कि राहुल के इर्द-गिर्द कई प्रमुख लोग हैं जो कम्युनिस्ट के विचारों से प्रेरित हैं। मसलन, संदीप सिंह को पार्टी में बाहरी माना जाता है। वह पहले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन में थे जो कम्युनिस्ट से जुड़ा संगठन है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नेता के रूप में संदीप ने दो हज़ार पाँच में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को काला झंडा दिखाया था। वह इस समय राहुल गांधी के राजनीतिक सलाहकारों में शामिल हैं जो राहुल और प्रियंका के लिए भाषण तैयार करते हैं। राहुल के दरबार में अन्य शख्सों में पूर्व नौकरशाह धीरज श्रीवास्तव, निवेशक व बैंकर प्रवीण चक्रवर्ती, मिशिगन बिजनेस स्कूल के ग्रेजुएट सचिन राव और पूर्व एसपीजी अधिकारी के. बी. बायजू शामिल हैं जिन्हें पुराने पदाधिकारी बाहरी मानते हैं। संयुक्त प्रगतिशील गठबंन की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के सामने जब नेतृत्व के संकट का सवाल बना हुआ है, लिहाजा, बाहरियों के खिलाफ व्याप्त असंतोष के मद्देनजर लगता है पार्टी अध्यक्ष के दफ्तर में बदलाव हो सकता है। यह असंतोष खासतौर से उनके खिलाफ है जिनका झुकाव वामपंथ की तरफ है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
बाँदा जिले के पलरा गॉंव के लोग हैं पानी की टंकी से परेशान। लोगों का कहना है कि इस टंकी के ज़रिये हर दिन उन्हें कोई न कोई मुसीबत का सामना करना पड़ता है। कभी उसके ज़रिये लोगों को गन्दा पानी मिलता है, कभी वहां ट्रांसफार्मर फुक जाता है तो कभी सप्लाई की पंखी भी टूट जाती है। सप्लाई ठीक न होने के कारण लोगों को नियमित रूप से पानी नहीं मिल रहा है। लोगों का ये भी आरोप है कि इस टंकी में हर महीने सप्लाई बंद हो जाता है जिसके चलते उन्होंने गॉंव में ट्यूबवेल की मांग की है।
बाँदा जिले के पलरा गॉंव के लोग हैं पानी की टंकी से परेशान। लोगों का कहना है कि इस टंकी के ज़रिये हर दिन उन्हें कोई न कोई मुसीबत का सामना करना पड़ता है। कभी उसके ज़रिये लोगों को गन्दा पानी मिलता है, कभी वहां ट्रांसफार्मर फुक जाता है तो कभी सप्लाई की पंखी भी टूट जाती है। सप्लाई ठीक न होने के कारण लोगों को नियमित रूप से पानी नहीं मिल रहा है। लोगों का ये भी आरोप है कि इस टंकी में हर महीने सप्लाई बंद हो जाता है जिसके चलते उन्होंने गॉंव में ट्यूबवेल की मांग की है।
बहराइच/रुपईडीहा। नेपाल में मधेस प्रदेश बनाने और संविधान मसौदे में संशोधन की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसक हो गया है। नेपाल के कैलाली जिले में एसएसपी समेत 24 लोगों की मौत के बाद प्रदर्शन प्रभावित बांके, बर्दिया समेत सभी जिलों में सोमवार रात कर्फ्यू लगा दिया गया। इस कारण मंगलवार सुबह रुपईडीहा के रास्ते नेपाल जाने वाले नेपालवासी और भारतवासी सीमा में प्रवेश नहीं कर सके। पांच घंटे कर्फ्यू में ढील देने के बाद सीमा पर फंसे लोग नेपाल जा सके। हालांकि, दोपहर बाद फिर कर्फ्यू लगा दिया गया है। वहीं, कैलाली में कुछ लोगों ने लोकतांत्रिक मधेस पार्टी के सांसद जनकराम चौधरी समेत कई घरों में घुसकर तोड़फोड़ करते हुए लूटपाट भी की। संघर्ष हिंसक होने के बाद से बहराइच से सटे बांके और बर्दिया जिले में हालात काफी नाजुक हैं। कई जगह झड़प और आगजनी भी हुई है। बहराइच से सटे नेपाल राष्ट्र के कैलाली जिले में सोमवार को हिंसक प्रदर्शन के दौरान एसएसपी समेत 24 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद बांके जिले में भी हालात नाजुक हो गए थे। धंबोजी और त्रिभुवन चौक के निकट भी पुलिस और प्रदर्शन कारियों में झड़प हुई थी। हालात गंभीर होते देख नेपाल सरकार ने कर्फ्यू लगाने का आदेश दे दिया, जिसके चलते रात नौ बजे बांके जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया। सुबह नौ बजे तक कर्फ्यू प्रभावी रहा। इसके चलते भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा नेपाल की ओर से सील कर दी गई। मंगलवार सुबह प्रतिदिन की तरह लोग सुबह सात बजे ही नेपाल में आवागमन के लिए पहुंच गए लेकिन नेपाल में कर्फ्यू लगे होने की सूचना पर सकते में आ गए। इसके चलते भारतीय सीमा क्षेत्र में काफी गहमागहमी रही। सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक जब कर्फ्यू में ढील दी गई तो लोग अपने गंतव्य को रवाना हुए। नेपाल के बांके जिले के एसपी बसंत पंत ने बताया कि सुरक्षा और शांति के मद्देनजर कर्फ्यू लगाया गया है। बुधवार सुबह छह बजे तक कर्फ्यू प्रभावी रहेगा। चप्पे चप्पे पर गश्त हो रही है। उधर, कर्फ्यू के बावजूद कैलाली जिले में अखंड सुदूर पश्चिम की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और सेना के जवानों की आड़ में लोकतांत्रिक मधेस पार्टी के संासद जनकराम चौधरी और नेपाल सद्भावना पार्टी के केंद्रीय सदस्य रमेश चौधरी के घर में तोड़फोड़ कर लूटपाट की। कई जगह आगजनी भी की गई। उपद्रवियों ने कैलाली के एफएम स्टेशन फुलवारी के ऑफिस में भी तोड़फोड़ की है। लैंड पर गश्त बढ़ा दी गई है। की एक कंपनी पीएसी भी रुपईडीहा पहुंच गई है। संयुक्त गश्त चल रही है। उधर, खुफिया एजेंसियां भी नेपाल के पल-पल के हालात की टोह ले रही हैं। तुलसीपुर-बलरामपुर। हालात पर नजर रखने का निर्देश पुलिस व प्रशासन को दिया है। बांके के जिलाधिकारी वेद प्रकाश लेखक ने कहा कि कर्फ्यू घोषित करने के बाद से हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। शीघ्र ही व्यवस्थाएं बेहतर हो सकेंगी।
बहराइच/रुपईडीहा। नेपाल में मधेस प्रदेश बनाने और संविधान मसौदे में संशोधन की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसक हो गया है। नेपाल के कैलाली जिले में एसएसपी समेत चौबीस लोगों की मौत के बाद प्रदर्शन प्रभावित बांके, बर्दिया समेत सभी जिलों में सोमवार रात कर्फ्यू लगा दिया गया। इस कारण मंगलवार सुबह रुपईडीहा के रास्ते नेपाल जाने वाले नेपालवासी और भारतवासी सीमा में प्रवेश नहीं कर सके। पांच घंटे कर्फ्यू में ढील देने के बाद सीमा पर फंसे लोग नेपाल जा सके। हालांकि, दोपहर बाद फिर कर्फ्यू लगा दिया गया है। वहीं, कैलाली में कुछ लोगों ने लोकतांत्रिक मधेस पार्टी के सांसद जनकराम चौधरी समेत कई घरों में घुसकर तोड़फोड़ करते हुए लूटपाट भी की। संघर्ष हिंसक होने के बाद से बहराइच से सटे बांके और बर्दिया जिले में हालात काफी नाजुक हैं। कई जगह झड़प और आगजनी भी हुई है। बहराइच से सटे नेपाल राष्ट्र के कैलाली जिले में सोमवार को हिंसक प्रदर्शन के दौरान एसएसपी समेत चौबीस लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद बांके जिले में भी हालात नाजुक हो गए थे। धंबोजी और त्रिभुवन चौक के निकट भी पुलिस और प्रदर्शन कारियों में झड़प हुई थी। हालात गंभीर होते देख नेपाल सरकार ने कर्फ्यू लगाने का आदेश दे दिया, जिसके चलते रात नौ बजे बांके जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया। सुबह नौ बजे तक कर्फ्यू प्रभावी रहा। इसके चलते भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा नेपाल की ओर से सील कर दी गई। मंगलवार सुबह प्रतिदिन की तरह लोग सुबह सात बजे ही नेपाल में आवागमन के लिए पहुंच गए लेकिन नेपाल में कर्फ्यू लगे होने की सूचना पर सकते में आ गए। इसके चलते भारतीय सीमा क्षेत्र में काफी गहमागहमी रही। सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक जब कर्फ्यू में ढील दी गई तो लोग अपने गंतव्य को रवाना हुए। नेपाल के बांके जिले के एसपी बसंत पंत ने बताया कि सुरक्षा और शांति के मद्देनजर कर्फ्यू लगाया गया है। बुधवार सुबह छह बजे तक कर्फ्यू प्रभावी रहेगा। चप्पे चप्पे पर गश्त हो रही है। उधर, कर्फ्यू के बावजूद कैलाली जिले में अखंड सुदूर पश्चिम की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और सेना के जवानों की आड़ में लोकतांत्रिक मधेस पार्टी के संासद जनकराम चौधरी और नेपाल सद्भावना पार्टी के केंद्रीय सदस्य रमेश चौधरी के घर में तोड़फोड़ कर लूटपाट की। कई जगह आगजनी भी की गई। उपद्रवियों ने कैलाली के एफएम स्टेशन फुलवारी के ऑफिस में भी तोड़फोड़ की है। लैंड पर गश्त बढ़ा दी गई है। की एक कंपनी पीएसी भी रुपईडीहा पहुंच गई है। संयुक्त गश्त चल रही है। उधर, खुफिया एजेंसियां भी नेपाल के पल-पल के हालात की टोह ले रही हैं। तुलसीपुर-बलरामपुर। हालात पर नजर रखने का निर्देश पुलिस व प्रशासन को दिया है। बांके के जिलाधिकारी वेद प्रकाश लेखक ने कहा कि कर्फ्यू घोषित करने के बाद से हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। शीघ्र ही व्यवस्थाएं बेहतर हो सकेंगी।
इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर शनिवार शाम मुर्गी के दाने से भरा ट्रक पलट गया। हादसे में वाहन चालक को चोंटें आई है। उसे उपचार के लिए बुरहानपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है तो वहीं हादसे के बाद इंदौर इच्छापुर हाईवे पर करीब 5 किमी लंबा जाम लग गया था जो रात करीब 9 बजे खुला। जिस स्थान पर जाम लगा था वहां कटी घाटी क्षेत्र होने से मोबाइल कवरेज भी नहीं मिलता। इसलिए लोग खासे परेशान हुए। पुलिस की मदद से रात 9 बजे ट्रक को साइड में करके जाम खुलवाया गया। जानकारी के अनुसार ट्रक इंदौर से विषाखापट्नम की ओर जा रहा था तभी षाम करीब 4 से 5 बजे के बीच कटी घाटी क्षेत्र में हसनपुरा के पास सामने से बाइक चालक आ गया उसे बचाने के चक्कर में मुर्गी के दाने से भरा ट्रक असंतुलित होकर करीब 50 फिट दूर जाकर पलट गया। हादसे में ट्रक चालक संदीप पिता भारत निवासी लखापुर घायल हो गया। उसे पुलिस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दौरान दोनों ओर से करीब 5-5 किमी लंबा जाम लग गया। रात करीब 9 बजे पुलिस की मदद से जाम हटाया गया और वाहनों का आवागमन सुचारु हो सका। बताया जा रहा है कि इस घटना के कारण करीब करीब एक हजार से ज्यादा वाहन 4 घंटे से भी अधिक समय तक फंसे रहे। इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। हसनपुरा के आगे जहां कटी घाटी क्षेत्र में ट्रक पलटा वहां मोबाइल कवरेज भी नहीं रहता। ऐसे में लोगों का किसी से संपर्क भी नहीं हो पाया। वाहन भी बीच में फंसे हुए थे। इंदौर इच्छापुर हाईवे काफी व्यस्ततम राजमार्ग है। यहां से प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। मप्र के अलावा महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के वाहन यहां से गुजरते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर शनिवार शाम मुर्गी के दाने से भरा ट्रक पलट गया। हादसे में वाहन चालक को चोंटें आई है। उसे उपचार के लिए बुरहानपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है तो वहीं हादसे के बाद इंदौर इच्छापुर हाईवे पर करीब पाँच किमी लंबा जाम लग गया था जो रात करीब नौ बजे खुला। जिस स्थान पर जाम लगा था वहां कटी घाटी क्षेत्र होने से मोबाइल कवरेज भी नहीं मिलता। इसलिए लोग खासे परेशान हुए। पुलिस की मदद से रात नौ बजे ट्रक को साइड में करके जाम खुलवाया गया। जानकारी के अनुसार ट्रक इंदौर से विषाखापट्नम की ओर जा रहा था तभी षाम करीब चार से पाँच बजे के बीच कटी घाटी क्षेत्र में हसनपुरा के पास सामने से बाइक चालक आ गया उसे बचाने के चक्कर में मुर्गी के दाने से भरा ट्रक असंतुलित होकर करीब पचास फिट दूर जाकर पलट गया। हादसे में ट्रक चालक संदीप पिता भारत निवासी लखापुर घायल हो गया। उसे पुलिस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दौरान दोनों ओर से करीब पाँच-पाँच किमी लंबा जाम लग गया। रात करीब नौ बजे पुलिस की मदद से जाम हटाया गया और वाहनों का आवागमन सुचारु हो सका। बताया जा रहा है कि इस घटना के कारण करीब करीब एक हजार से ज्यादा वाहन चार घंटाटे से भी अधिक समय तक फंसे रहे। इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। हसनपुरा के आगे जहां कटी घाटी क्षेत्र में ट्रक पलटा वहां मोबाइल कवरेज भी नहीं रहता। ऐसे में लोगों का किसी से संपर्क भी नहीं हो पाया। वाहन भी बीच में फंसे हुए थे। इंदौर इच्छापुर हाईवे काफी व्यस्ततम राजमार्ग है। यहां से प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। मप्र के अलावा महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के वाहन यहां से गुजरते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अजमल क़साब (पाकिस्तानी आतंकवादी) अजमल क़साब (पूरा नामः मुहम्मद अजमल आमिर क़साब, उर्दूः محمد اجمل امیر قصاب, जन्मः १३ जुलाई १९८७ ग्रामः फरीदकोट, पाकिस्तान - फांसीः २१ नवम्बर २०१२ यरवदा जेल, पुणे) २६/११/२००८ को ताज़ होटल मुंबई पर वीभत्स हमला करने वाला एक पाकिस्तानी आतंकवादी था। मुहम्मद आमिर क़साब उसके बाप का नाम था। वह कसाई जाति का मुसलमान था। "क़साब" (قصاب) शब्द अरबी भाषा का है जिसका हिन्दी में अर्थ कसाई या पशुओं की हत्या करने वाला होता है। साधारणतया लोगबाग उसे अजमल क़साब के नाम से ही जानते थे। क़साब पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त के ओकरा जिला स्थित फरीदकोट गाँव का मूल निवासी था और पिछले कुछ साल से आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त था। हमलों के बाद चलाये गये सेना के एक अभियान के दौरान यही एक मात्र ऐसा आतंकी था जो जिन्दा पुलिस के हत्थे चढ़ गया। इस अभियान में इसके सभी नौ अन्य साथी मारे गये थे। इसने और इसके साथियों ने इन हमलों में कुल १६६ निहत्थे लोगों की बर्बरतापूर्ण हत्या कर दी थी। पाकिस्तान सरकार ने पहले तो इस बात से इनकार किया कि क़साब पाकिस्तानी नागरिक है किन्तु जब भारत सरकार द्वारा सबूत पेश किये गये तो जनवरी २००९ में उसने स्वीकार कर लिया कि हाँ वह पाकिस्तान का ही मूल निवासी है। ३ मई २०१० को भारतीय न्यायालय ने उसे सामूहिक ह्त्याओं, भारत के विरुद्ध युद्ध करने तथा विस्फोटक सामग्री रखने जैसे अनेक आरोपों का दोषी ठहराया। ६ मई २०१० को उसी न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर मृत्यु दण्ड की सजा सुनायी। २६-११-२००८ को मुम्बई में ताज़ होटल पर हुए हमले में ९ आतंकवादियों के साथ कुल १६६ निरपराध लोगों की हत्या में उसके विरुद्ध एक मामले में ४ और दूसरे मामले में ५ हत्याओं का दोषी होना सिद्ध हुआ था। इसके अतिरिक्त नार्को टेस्ट में उसने ८० मामलों में अपनी संलिप्तता भी स्वीकार की थी। २१ फ़रवरी २०११ को मुम्बई उच्च न्यायालय ने उसकी फाँसी की सजा पर मोहर लगा दी। २९ अगस्त २०१२ को भारत के उच्चतम न्यायालय ने भी उसके मृत्यु दण्ड की पुष्टि कर दी। बाद में गृह मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास भिजवायी गयी। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा उसे अस्वीकार करने के बाद पुणे की यरवदा केन्द्रीय कारागार में २१ नवम्बर २०१२ को प्रातः ७ बजकर ३० मिनट पर उसे फाँसी दे दी गयी। . इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। 20 करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैंः पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर (तथाकथित आज़ाद कश्मीर) और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् 1947 में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् 1930 में कवि (शायर) मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान (सूबा-ए-सरहद) को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् 1933 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान (जो बाद में पाकिस्तान बना) शब्द का सृजन किया। सन् 1947 से 1970 तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् 1971 में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। . अजमल क़साब और पाकिस्तान आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): मुसलमान, उर्दू भाषा। मिसरी (ईजिप्ट) मुस्लिमान नमाज़ पढ रहे हैं, एक तस्वीर। मुसलमान (अरबीः مسلم، مسلمة फ़ारसीः مسلمان،, अंग्रेजीः Muslim) का मतलब वह व्यक्ति है जो इस्लाम में विश्वास रखता हो। हालाँकि मुसलमानों के आस्था के अनुसार इस्लाम ईश्वर का धर्म है और धर्म हज़रत मुहम्मद से पहले मौजूद था और जो लोग अल्लाह के धर्म का पालन करते रहे वह मुसलमान हैं। जैसे कुरान के अनुसार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम भी मुसलमान थे। मगर आजकल मुसलमान का मतलब उसे लिया जाता है जो हज़रत मुहम्मद लाए हुए दीन का पालन करता हो और विश्वास रखता हो। मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने भारत को हिन्द अथवा हिन्दुस्तान कहा है । . उर्दू भाषा हिन्द आर्य भाषा है। उर्दू भाषा हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप मानी जाती है। उर्दू में संस्कृत के तत्सम शब्द न्यून हैं और अरबी-फ़ारसी और संस्कृत से तद्भव शब्द अधिक हैं। ये मुख्यतः दक्षिण एशिया में बोली जाती है। यह भारत की शासकीय भाषाओं में से एक है, तथा पाकिस्तान की राष्ट्रभाषा है। इस के अतिरिक्त भारत के राज्य तेलंगाना, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश की अतिरिक्त शासकीय भाषा है। . अजमल क़साब 34 संबंध है और पाकिस्तान 111 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 1.38% है = 2 / (34 + 111)। यह लेख अजमल क़साब और पाकिस्तान के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अजमल क़साब अजमल क़साब छब्बीस नवंबर दो हज़ार आठ को ताज़ होटल मुंबई पर वीभत्स हमला करने वाला एक पाकिस्तानी आतंकवादी था। मुहम्मद आमिर क़साब उसके बाप का नाम था। वह कसाई जाति का मुसलमान था। "क़साब" शब्द अरबी भाषा का है जिसका हिन्दी में अर्थ कसाई या पशुओं की हत्या करने वाला होता है। साधारणतया लोगबाग उसे अजमल क़साब के नाम से ही जानते थे। क़साब पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त के ओकरा जिला स्थित फरीदकोट गाँव का मूल निवासी था और पिछले कुछ साल से आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त था। हमलों के बाद चलाये गये सेना के एक अभियान के दौरान यही एक मात्र ऐसा आतंकी था जो जिन्दा पुलिस के हत्थे चढ़ गया। इस अभियान में इसके सभी नौ अन्य साथी मारे गये थे। इसने और इसके साथियों ने इन हमलों में कुल एक सौ छयासठ निहत्थे लोगों की बर्बरतापूर्ण हत्या कर दी थी। पाकिस्तान सरकार ने पहले तो इस बात से इनकार किया कि क़साब पाकिस्तानी नागरिक है किन्तु जब भारत सरकार द्वारा सबूत पेश किये गये तो जनवरी दो हज़ार नौ में उसने स्वीकार कर लिया कि हाँ वह पाकिस्तान का ही मूल निवासी है। तीन मई दो हज़ार दस को भारतीय न्यायालय ने उसे सामूहिक ह्त्याओं, भारत के विरुद्ध युद्ध करने तथा विस्फोटक सामग्री रखने जैसे अनेक आरोपों का दोषी ठहराया। छः मई दो हज़ार दस को उसी न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर मृत्यु दण्ड की सजा सुनायी। छब्बीस नवंबर दो हज़ार आठ को मुम्बई में ताज़ होटल पर हुए हमले में नौ आतंकवादियों के साथ कुल एक सौ छयासठ निरपराध लोगों की हत्या में उसके विरुद्ध एक मामले में चार और दूसरे मामले में पाँच हत्याओं का दोषी होना सिद्ध हुआ था। इसके अतिरिक्त नार्को टेस्ट में उसने अस्सी मामलों में अपनी संलिप्तता भी स्वीकार की थी। इक्कीस फ़रवरी दो हज़ार ग्यारह को मुम्बई उच्च न्यायालय ने उसकी फाँसी की सजा पर मोहर लगा दी। उनतीस अगस्त दो हज़ार बारह को भारत के उच्चतम न्यायालय ने भी उसके मृत्यु दण्ड की पुष्टि कर दी। बाद में गृह मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास भिजवायी गयी। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा उसे अस्वीकार करने के बाद पुणे की यरवदा केन्द्रीय कारागार में इक्कीस नवम्बर दो हज़ार बारह को प्रातः सात बजकर तीस मिनट पर उसे फाँसी दे दी गयी। . इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। बीस करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैंः पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् एक हज़ार नौ सौ तीस में कवि मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् एक हज़ार नौ सौ तैंतीस में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान शब्द का सृजन किया। सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस से एक हज़ार नौ सौ सत्तर तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। . अजमल क़साब और पाकिस्तान आम में दो बातें हैं : मुसलमान, उर्दू भाषा। मिसरी मुस्लिमान नमाज़ पढ रहे हैं, एक तस्वीर। मुसलमान का मतलब वह व्यक्ति है जो इस्लाम में विश्वास रखता हो। हालाँकि मुसलमानों के आस्था के अनुसार इस्लाम ईश्वर का धर्म है और धर्म हज़रत मुहम्मद से पहले मौजूद था और जो लोग अल्लाह के धर्म का पालन करते रहे वह मुसलमान हैं। जैसे कुरान के अनुसार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम भी मुसलमान थे। मगर आजकल मुसलमान का मतलब उसे लिया जाता है जो हज़रत मुहम्मद लाए हुए दीन का पालन करता हो और विश्वास रखता हो। मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने भारत को हिन्द अथवा हिन्दुस्तान कहा है । . उर्दू भाषा हिन्द आर्य भाषा है। उर्दू भाषा हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप मानी जाती है। उर्दू में संस्कृत के तत्सम शब्द न्यून हैं और अरबी-फ़ारसी और संस्कृत से तद्भव शब्द अधिक हैं। ये मुख्यतः दक्षिण एशिया में बोली जाती है। यह भारत की शासकीय भाषाओं में से एक है, तथा पाकिस्तान की राष्ट्रभाषा है। इस के अतिरिक्त भारत के राज्य तेलंगाना, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश की अतिरिक्त शासकीय भाषा है। . अजमल क़साब चौंतीस संबंध है और पाकिस्तान एक सौ ग्यारह है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक एक.अड़तीस% है = दो / । यह लेख अजमल क़साब और पाकिस्तान के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) एसबीआई ने जन-धन खाताधारकों के लिए पैसे की निकासी से संबंधित शेड्यूल जारी किया है। कोविड-19 की स्थिती के कारण लुफ्थांसा समूह की एयरलाइंस में 4 मई से सभी यात्रियों को मुंह-नाक कवर कर यात्रा करना अनिवार्य हो जाएगा। कंपनी ने यात्रियों से पूरी यात्रा के दौरान यानी हवाई अड्डे पर उड़ान से पहले और बाद में भी मास्क पहनने को कहा है। कंपनियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लोगों को राहत मिलेगी और लाखों छोटे एवं मध्यम उपक्रमों व व्यापारियों को कारोबार फिर से शुरू करने में भी मदद मिलेगी। RIL के पास मार्च अंत तक कुल कर्ज 3. 36 लाख करोड़ और कुल नकदी 1. 75 लाख करोड़ रुपये है। ई-वाणिज्य कंपनी अमेजन का पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) का लाभ 29 प्रतिशत कम हो गया। कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेफ बेजोस ने कहा कि कंपनी अभी और अधिक खर्च करेगी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने चीन में ग्वांगझोऊ वोंदफो बायोटेक और झुहाई लिवसन डायग्नोस्टिक्स द्वारा बनाई कई कोविड-19 रैपिड एंटीबॉडी जांच किटों की आपूर्ति करने वाले दो आयातकों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक एसबीआई ने जन-धन खाताधारकों के लिए पैसे की निकासी से संबंधित शेड्यूल जारी किया है। कोविड-उन्नीस की स्थिती के कारण लुफ्थांसा समूह की एयरलाइंस में चार मई से सभी यात्रियों को मुंह-नाक कवर कर यात्रा करना अनिवार्य हो जाएगा। कंपनी ने यात्रियों से पूरी यात्रा के दौरान यानी हवाई अड्डे पर उड़ान से पहले और बाद में भी मास्क पहनने को कहा है। कंपनियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लोगों को राहत मिलेगी और लाखों छोटे एवं मध्यम उपक्रमों व व्यापारियों को कारोबार फिर से शुरू करने में भी मदद मिलेगी। RIL के पास मार्च अंत तक कुल कर्ज तीन. छत्तीस लाख करोड़ और कुल नकदी एक. पचहत्तर लाख करोड़ रुपये है। ई-वाणिज्य कंपनी अमेजन का पहली तिमाही का लाभ उनतीस प्रतिशत कम हो गया। कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेफ बेजोस ने कहा कि कंपनी अभी और अधिक खर्च करेगी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने चीन में ग्वांगझोऊ वोंदफो बायोटेक और झुहाई लिवसन डायग्नोस्टिक्स द्वारा बनाई कई कोविड-उन्नीस रैपिड एंटीबॉडी जांच किटों की आपूर्ति करने वाले दो आयातकों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।
मुजफ्फरपुर : राज्य में शराबबंदी के बाद से धंधेबाज शराब तस्करी को लेकर अक्सर नए-नए तरीके अपना रहे हैं। हालांकि इस बार शराब माफियाओं का जुगाड़ देख एक्साइज टीम भी हैरान रह गई। दरअसल माफियाओं ने शराब तस्करी के लिए सड़क के अंदर ही ब्रांडेड बोतलों का तहखाना बना रखा था। मामला मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है जहां दादर इलाके स्थित एक बस्ती में एक्साइज इंस्पेक्टर पिंकी कुमारी के नेतृत्व में एक्साइज टीम छापेमारी के लिए पहुंची। टीम को सूचना मिली थी कि इलाके में शराब की बड़ी खेप मौजूद है लेकिन टीम को छापेमारी में शराब नहीं मिली। इसी दौरान जब सड़क के बीच में बने एक गटर के ढक्कन को हटाया गया तो सभी के होश उड़ गए। सड़क के अंदर बने तहखाने से चार बोरी ब्रांडेड शराब की खेप को टीम ने बरामद कर लिया। उत्पाद निरीक्षक कुमार अभिनव ने बताया की गुप्त सूचना मिली थी की सड़क के नीचे गड्ढा बनाकर शराब का स्टॉक किया गया है। जमीन खोदकर तो कई बार शराब बरामद हो चुकी है। लेकिन, यह पहला मामला था जिसमे सड़क खोदने की बात पता लगी। सूचना के आधार पर छापेमारी टीम मौके पर पहुंची। वहां पर ढलाई वाला रोड था, जो बस्ती के अंदर जाता था। रोड के बीचोबीच गोल आकार का स्लैब रखा हुआ दिखा। इसे देखकर टीम को संदेह हुआ तो स्लैब हटाया गया। अंदर से चार बोरियां शराब बरामद की गई। उत्पाद निरीक्षक ने बताया की शराब महंगे ब्रांड की है। इसमें ब्लेंडर्स प्राइड, रॉयल स्टैग समेत अन्य ब्रांड थे। इसे जब्त कर लिया गया। उन्होंने कहा की घटनास्थल को देखकर प्रतीत हो रहा था की रोड बनने के बाद इसमें गड्ढा किया गया था। गड्ढे के अंदर छह फीट का गोल आकार का सीमेंट का ढाला हुआ रिंग मिला। इससे पानी का रिसाव होने से बचाने के लिए डाला गया था। आसपास के लोगों से पूछताछ की गई। लेकिन, किसी ने कोई ठोस जानकारी नहीं दी। आगे इस मामले में कारवाई जारी रहने की बात कही है।
मुजफ्फरपुर : राज्य में शराबबंदी के बाद से धंधेबाज शराब तस्करी को लेकर अक्सर नए-नए तरीके अपना रहे हैं। हालांकि इस बार शराब माफियाओं का जुगाड़ देख एक्साइज टीम भी हैरान रह गई। दरअसल माफियाओं ने शराब तस्करी के लिए सड़क के अंदर ही ब्रांडेड बोतलों का तहखाना बना रखा था। मामला मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है जहां दादर इलाके स्थित एक बस्ती में एक्साइज इंस्पेक्टर पिंकी कुमारी के नेतृत्व में एक्साइज टीम छापेमारी के लिए पहुंची। टीम को सूचना मिली थी कि इलाके में शराब की बड़ी खेप मौजूद है लेकिन टीम को छापेमारी में शराब नहीं मिली। इसी दौरान जब सड़क के बीच में बने एक गटर के ढक्कन को हटाया गया तो सभी के होश उड़ गए। सड़क के अंदर बने तहखाने से चार बोरी ब्रांडेड शराब की खेप को टीम ने बरामद कर लिया। उत्पाद निरीक्षक कुमार अभिनव ने बताया की गुप्त सूचना मिली थी की सड़क के नीचे गड्ढा बनाकर शराब का स्टॉक किया गया है। जमीन खोदकर तो कई बार शराब बरामद हो चुकी है। लेकिन, यह पहला मामला था जिसमे सड़क खोदने की बात पता लगी। सूचना के आधार पर छापेमारी टीम मौके पर पहुंची। वहां पर ढलाई वाला रोड था, जो बस्ती के अंदर जाता था। रोड के बीचोबीच गोल आकार का स्लैब रखा हुआ दिखा। इसे देखकर टीम को संदेह हुआ तो स्लैब हटाया गया। अंदर से चार बोरियां शराब बरामद की गई। उत्पाद निरीक्षक ने बताया की शराब महंगे ब्रांड की है। इसमें ब्लेंडर्स प्राइड, रॉयल स्टैग समेत अन्य ब्रांड थे। इसे जब्त कर लिया गया। उन्होंने कहा की घटनास्थल को देखकर प्रतीत हो रहा था की रोड बनने के बाद इसमें गड्ढा किया गया था। गड्ढे के अंदर छह फीट का गोल आकार का सीमेंट का ढाला हुआ रिंग मिला। इससे पानी का रिसाव होने से बचाने के लिए डाला गया था। आसपास के लोगों से पूछताछ की गई। लेकिन, किसी ने कोई ठोस जानकारी नहीं दी। आगे इस मामले में कारवाई जारी रहने की बात कही है।
दैनिक राशिफलः अकस्मात का योग है। किसी धार्मिक स्थान की यात्रा पर जाने के योग हैं। स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहेगा। परिवारजनों के साथ कलह होने की संभावना है। रहन-सहन में कष्टमय हो सकता है। आंखों में दिक्कत हो सकती है। आज आय कम और खर्च अधिक होगा। शुभ रंगः आपके लिए शुभ रंग है क्रीम और आपका भाग्य 84% होगा। लव राशिफलः पार्टनर को अपनी इच्छाओं और भावनाओं में बांधने की कोशिश न करें। आज पार्टनर की कोई बात बुरी लग सकती है। इसलिए वाणी पर संयम रखें। प्रेमी के साथ रिश्ते बेहतर होंगे। पति-पत्नी के बीच रिश्ते सामान्य रहेंगे। प्रेम संबंधों का बनाए रखने के लिए कुछ बातें इग्नोर करनी पड़ेगी। आज आपकी बातचीत से विपरित लिंग के लोग प्रभावित होंगे। वित्त राशिफलः आज आपको नौकरी में तरक्की मिल सकती है। आमदनी में इजाफा हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। धन निवेश कर सकते हैं, जिससे आपको लाभ मिल सकता है। टैरो राशिफलः नौकरी में अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। अधिकारियों से अच्छी बातचीत होगी। प्रेमी से अनबन हो सकती है। विवाह के योग बन रहे हैं। 'ऊं विकटाय नमः' मंत्र का जाप करते हुए गणपति जी को दूर्वा चढ़ाएं। स्वास्थ्य राशिफलः मानसिक तनाव हो सकता है। परिवार के साथ समय बिताएं। आज आपके परिवार वाले आपकी मदद करेंगे। इससे आपको अच्छा लगेगा।
दैनिक राशिफलः अकस्मात का योग है। किसी धार्मिक स्थान की यात्रा पर जाने के योग हैं। स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहेगा। परिवारजनों के साथ कलह होने की संभावना है। रहन-सहन में कष्टमय हो सकता है। आंखों में दिक्कत हो सकती है। आज आय कम और खर्च अधिक होगा। शुभ रंगः आपके लिए शुभ रंग है क्रीम और आपका भाग्य चौरासी% होगा। लव राशिफलः पार्टनर को अपनी इच्छाओं और भावनाओं में बांधने की कोशिश न करें। आज पार्टनर की कोई बात बुरी लग सकती है। इसलिए वाणी पर संयम रखें। प्रेमी के साथ रिश्ते बेहतर होंगे। पति-पत्नी के बीच रिश्ते सामान्य रहेंगे। प्रेम संबंधों का बनाए रखने के लिए कुछ बातें इग्नोर करनी पड़ेगी। आज आपकी बातचीत से विपरित लिंग के लोग प्रभावित होंगे। वित्त राशिफलः आज आपको नौकरी में तरक्की मिल सकती है। आमदनी में इजाफा हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। धन निवेश कर सकते हैं, जिससे आपको लाभ मिल सकता है। टैरो राशिफलः नौकरी में अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। अधिकारियों से अच्छी बातचीत होगी। प्रेमी से अनबन हो सकती है। विवाह के योग बन रहे हैं। 'ऊं विकटाय नमः' मंत्र का जाप करते हुए गणपति जी को दूर्वा चढ़ाएं। स्वास्थ्य राशिफलः मानसिक तनाव हो सकता है। परिवार के साथ समय बिताएं। आज आपके परिवार वाले आपकी मदद करेंगे। इससे आपको अच्छा लगेगा।
क्षेत्राधिकार -- अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का क्षेत्राधिकार विश्वव्यापी है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के सभी सदस्य इसके क्षेत्राधिकार में आते हैं। गैर सदस्य-राज्य भी यदि वे न्यायालय का प्रयोग करना चाहें तो कर सकते हैं । सदस्य-राज्य द्वारा रखे गये प्रत्येक कानून और न्यायिक प्रश्न पर विचार करना न्यायालय का पहला काम है । सदस्य राज्यो को अधिकार कि वे किसी राज्य के साथ अपने झगड़ों को न्यायालय के सामने निर्णय के लिए उपस्थित कर सके । यह विवाद अन्तर्राष्ट्रीय सन्धियों-समझौतो तथा परम्पराओं से सम्बद्ध भी हो सकता है। पर हर मामले में न्यायालय का क्षेत्राधिकार अनिवार्य नहीं है। वैसे ही मामलों में न्यायालय का क्षेत्राधिकार अनिवार्य होता है जिसको झगड़ो से सम्बद्ध राज्य ऐसा मान लेता है। यह व्यवस्था अन्तराष्ट्रीय न्यायालय के संगठन की सबसे बड़ी कमजोरी है। राज्यो को स्वतन्त्रता है कि वे अल्पकाल या सदा के लिए अपने मामलों का निर्णय इस न्यायालय से कराने का निश्चय करे । पर एक बार ऐसा निर्णय कर लेने के बाद ऐसे राज्यों के मामले स्वतः इस न्यायालय के विचाराधीन हो जाते हैं। इसके बाद यदि कोई राज्य अपने किसी मामले को न्यायालय के कार्यक्रम से हटाना लय के कार्यक्रम से हटाना चाहे तो उसको यह बतलाना पड़ता है कि अमुक विवाद न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नहीं है । यदि किसी दो राज्य में सन्धि की व्याख्या को लेकर कोई वाद-विवाद उपस्थित हो गया हो और वे यदि इसकी उचित व्याख्या अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय से कराने के लिए सहमत हो तो न्यायालय को उस प्रकार के किसी सन्धि की व्याख्या करने का अधिकार है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के विविध अगो को परामर्श देना अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का दूसरा प्रमुख कार्य है । साधारण सभा और सुरक्षा परिषद् किसी भी वैधानिक मामले पर अन्तर्राष्ट्रीय न्यायायल से परामर्श ले सकती है । पर, न्यायालय के परामर्श को मानने के लिए ये बाध्य नहीं है। इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र के अन्य अॅग (जैसे आर्थिक और सामाजिक परिषद्) भी न्यायालय से किसी वैधानिक विषय पर परामर्श ले सकते हैं । संयुक्त राष्ट्रसंघ के कार्यों के सम्पादन के लिए एक सचिवालय की स्थापना की गयी है। चार्टर के पन्द्रहवें अध्याय में धारा १७ से १०१ तक इसके संगठन का वर्णन है। इसका संगठन प्रायः वैसा ही है जंसा राष्ट्रसंघ के सचिवालय का था । सचिवालय में सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर साधारण सभा द्वारा नियुक्ति किया गया एक महासचिव और उतने पदाधिकारी होते है जितने इस संस्था के लिए आवश्यक समझे जायें। महासचिव सचिवालय की सहायता से अपना सारा कार्य करता है। यदि हम राष्ट्रमघ की सचिवालय से वर्तमान सचिवालय की तुलना करते हैं तो एक महत्त्वपूर्ण व्अन्तर मिलेगा और यह अन्तर महासचिव के कार्य और अधिकारों से सम्बन्धित है। संयुक्त राष्ट्रमंघ के अन्तर्गत महासचिव को कुछ ऐसे अधिकार मिले हैं और उनमें कुछ ऐसे कर्त्तव्यों का पालन करना है जिसका पुराने राष्ट्रसंघ में सर्वधा अभाव था। चार्टर के अनुसार महासचिव के निम्नलिखित कार्य है : (१) यदि महामचिव यह रामसे कि किसी मामले के कारण अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ सकता है तो वह सुरक्षा परिषद् का ध्यान इस ओर आकृष्ट कर सकता है। ( International Court of Justice ) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय - हेग स्थित अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्रसंघ का एक प्रमुख अग है। इसको प्रारम्भिक स्थापना प्रथम विश्वयुद्ध के बाद राष्ट्रसंघ के तत्वावधान में हुई थी । जिस समय (१६४५) संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना के विषय में बात चल रही थी, उस समय इस बात पर काफी वाद-विवाद चला कि पुराने अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय को ही संयुक्त राष्ट्रसंघ के अन्तर्गत रखा जाय या एक दूसरे नये न्यायालय की स्थापना की जाय । इस विषय पर दो मत थे । एक पक्ष का कहना था कि पुराने न्यायालय की ईमानदारी और निष्पक्षता की परम्परा देखकर उसी को कायम रखना ठीक होगा। दूसरे पक्ष का कहना था कि चूँकि पुराने न्यायालय नये के प्रति अमेरिका और सोवियत संघ का रुख अच्छा नहीं था, इसलिए उसको हटाकर एक न्यायालय की स्थापना करना ही अच्छा होगा । अन्त में दूसरे पक्ष के विचार को ही मान लिया गया और उसके अनुसार एक नये न्यायालय की स्थपाना की गयी। पर संयुक्त राष्ट्रसंघ के अन्तर्गत स्थापित न्यायालय को एक नया न्यायालय कहना उचित भी नहीं है। केवल नाम परिवर्तन को छोड़कर और पुराने न्यायालय के विधान में कुछ शाब्दिक परिवर्तन के अतिरिक्त नये न्यायालय मैं कोई नवीनता नही है । यह वही पुरानी अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय है जिसे राष्ट्रसंघ ने १९२१ में इंग में स्थापित किया था। संयुक्त राष्ट्रसंघ के चार्टर ने उक्त पुराने न्यायालय में जान डाली है । न्यायालय में पन्द्रह न्यायाधीश होते हैं। इनकी नियुक्ति संयुक्त राष्ट्रसंघ की साधारण सभा और सुरक्षा परिषद् द्वारा होती है। ये दो संस्थाएँ न्यायाधीशों का निर्वाचन करती हैं। अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश होने के लिए उम्मीदवारों को उच्च नैतिक चरित्र का व्यक्ति तथा अपने राज्य के कानून और अन्तर्राष्ट्रीय विधि का विशेषज्ञ होना चाहिए । न्यायाधीशो की निर्वाचन प्रणाली कुछ पेचीदी है। न्यायालय के सदस्यों को साधारण सभा और सुरक्षा परिषद् उन लोगों की सूची में से चुनती है, जिनको संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य राष्ट्र मनोनीत करते हैं। जिस व्यक्ति को साधारण सभा और सुरक्षा परिषद् में पूर्ण बहुमत प्राप्त हो जाता है वे न्यायालय के न्यायाधीश चुन लिये जाते हैं। पर इस चुनाव में यह ध्यान देना पड़ता है कि सभी सदस्य-राष्ट्रों को यथासम्भव न्यायालय में प्रतिनिधित्व मिल जाय । दो न्यायाधीश एक ही राज्य के नहीं होने चाहिये। न्यायाधीशों का साधारण कार्यकाल नौ वर्ष कर है । पर वे पुनः निर्वाचित हो सकते हैं। जहाँ तक न्यायालय की कार्यविधि का प्रश्न है, पन्द्रहों न्यायाधीश मिलकर मामले की सुनवाई करते हैं । कम-से-कम नौ न्यायाधीशों के उपस्थित रहने पर ही राय या निर्णय किया जा सकता है । उस देश का न्यायाधीश मामले के निर्णय में भाग नहीं ले सकता है जिस देश से सम्वद्ध झगड़े पर न्यायालय विचार कर रहा हो । पर यदि कोई ऐसा राज्य जिसको न्यायालय में प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं हो । और उससे सम्बद्ध कोई झगड़ा न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हो तो उसे देश के न्यायाधीशों को भी न्यायालय की कार्रवाई में भाग लेने लिए आमन्त्रित किया जा सकता है। उनसे सलाह ली जा सकती है, पर निर्णय में उनका कोई हाद नहीं होगा । क्षेत्राधिकार - अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का क्षेत्राधिकार विशव्यापी है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के सभी सदस्य इसके क्षेत्राधिकार में आते हैं। गैर सदस्य राज्य भी यदि वे न्यायालय का प्रयोग करना चाहें तो कर सकते हैं । सदस्य-राज्य द्वारा रखे गये प्रत्येक कानून और न्यायिक प्रश्न पर विचार करना न्यायालय का पहला काम है । सदस्य राज्यों को अधिकार कि वे किसी राज्य के साथ अपने झगड़ों को न्यायालय के सामने निर्णय के लिए उपस्थित कर सके । यह विवाद अन्तर्राष्ट्रीय सन्धियों समझौता तथा परम्पराओं से सम्बद्ध भी हो सकता पर हर मामले में न्यायालय का क्षेत्राधिकार अनिवार्य नहीं है । वैसे ही मामलो में न्यायालय का क्षेत्राधिकार अनिवार्य होता है जिसको झगड़ों से सम्बद्ध राज्य ऐसा मान लेता है। यह व्यवस्था अन्तराष्ट्रीय न्यायालय के संगठन की सबसे बड़ी कमजोरी है। राज्यों को स्वतन्त्रता है कि वे अल्पकाल या सदा के लिए अपने मामलों का निर्णय इस न्यायालय से कराने का निश्चय करे । पर एक बार ऐसा निर्णय कर लेने के बाद ऐसे राज्यों के मामले स्वतः इस न्यायालय के विचाराधीन हो जाते हैं। इसके बाद यदि कोई राज्य अपने किसी मामले को न्यायालय के कार्यक्रम से हटाना चाहे तो उसको यह बतलाना पड़ता है कि अमुक विवाद न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नहीं है । यदि किसी दो राज्य में सन्धि की व्याख्या को लेकर कोई वाद-विवाद उपस्थित हो गया हो और वे यदि इसकी उचित व्याख्या अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय से कराने के लिए सहमत हो तो न्यायालय को उस प्रकार के किसी सन्धि की व्याख्या करने का अधिकार है । संयुक्त राष्ट्रसंघ के विविध अंगो को परामर्श देना अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का दूसरा प्रमुख कार्य है । साधारण सभा और सुरक्षा परिषद् किसी भी वैधानिक मामले पर अन्तर्राष्ट्रीय न्यायायल से परामर्श ले सकती है। पर, न्यायालय के परामर्श को मानने के लिए ये वाध्य नहीं है। इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र के अन्य अंग (जैसे आर्थिक और सामाजिक परिषद्) भी न्यायालय से किसी वैधानिक विषय पर परामर्श ले सकते हैं । संयुक्त राष्ट्रसंघ के कार्यों के सम्पादन के लिए एक सचिवालय की स्थापना की गयी । चार्टर के पन्द्रहवें अध्याय में धारा १७ से १०१ तक इसके संगठन का वर्णन है। इसका संगठन प्रायः वैसा ही है जैसा राष्ट्रसंघ के सचिवालय का था । सचिवालय में सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर साधारण सभा द्वारा नियुक्ति किया गया एक महासचिव और उतने पदाधिकारी होते हैं जितने इस संस्था के लिए यावश्यक समझे जायें । महासचिव सचिवालय की सहायता से अपना सारा कार्य करता है। यदि हम राष्ट्रसघ को सचिवालय से वर्तमान सचिवालय की तुलना करते हैं तो एक महत्त्वपूर्ण अन्तर मिलेगा और यह यन्तर महामचिव के कार्य थोर अधिकारों से सम्बन्धित है। संयुक्त राष्ट्रमंघ के अन्तर्गत महासचिव को कुछ ऐसे अधिकार मिले हैं और उनमें कुछ ऐसे कर्त्तव्यों का पालन करना है जिसका पुराने राष्ट्रसंघ में गा अभाव था। चार्टर के अनुसार महामचित्र के निम्नलिखित कार्य है : (१) यदि महामचिव यह समझे कि किसी मामले के कारण अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ सकता है तो वह सुरक्षा परिषद् का ध्यान इस ओर करता है। यह महासचिव का सबसे बड़ा अधिकार है। इस तरह का कोई अधिकार राष्ट्रसंघ के महासचिव को न था । इस प्रकार संयुक्त राष्ट्रसंघका महासचित्र अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में व्यक्तिगत दिलचस्पी लेकर विश्व शांति कायम रखने की दिशा में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकता है। (२) महासचिव प्रति वर्ष संयुक्त राष्ट्रसंघ में कार्यों के सम्बन्ध के साधारण सभा को वार्षिक रिपोर्ट देता है। (३) संयुक्त राष्ट्रसंघ के विभिन्न अंग उसे जो काम सौंपते हैं, उन्हें पूरा करता है । ( ४ ) महासचिव संघ के पदाधिकारियों को नियुक्ति साधारण सभा द्वारा बनाये गये नियमों के अनुसार करता है। इन नियुक्तियों के समय उनकी कार्य निपुणता, योग्यता और ईमानदारी पर ध्यान दिया जाता है। इस पर भी ध्यान दिया जाता है कि जहाँ तक हो सके विश्व के विभिन्न देशों के कर्मचारी भर्ती किए जा सकें ताकि अधिकाधिक देशों को सचिवालय सेवाओं में प्रतिनिधित्व मिल सके। अपने कर्त्तव्य का पालन करते समय महासचिव और उनके स्टाफ से अपेक्षित है कि वे किसी भी सरकार अथवा संयुक्त राष्ट्र के बाहर किसी अन्य सत्ता से न तो आदेश ही प्राप्त करेंगे और न उनसे माँनेंगे। उनसे अपेक्षित है कि वे कोई भी ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे यह प्रतीत हो कि उनके काम पर किसी प्रकार का बाह्य प्रभाव है। उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय कर्मचारी के रूप में काम करना होता है लेकिन कई बार इस आदर्श के विपरीत काम हुआ है। कुछ वर्ष पहले कम्युनिस्ट विरोधी आन्दोलन बहुत उग्र होने पर संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुए महासचित्र की सहायता से संघ में कार्य करने वाले किन्तु कम्युस्टि प्रवृत्ति वाले कुछ अमरीकियों को सचिवालय से निष्कासित करा दिया था। संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने तय किया है कि वे इस बात का आदर करेंगे कि सचिवालय उत्तदायित्व पूर्ण रूप से अन्तर्राष्ट्रीय होगा और वे उन दायित्वों के निर्वाह में कमचारिय पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं डालेंगे । महासचिव की स्थिति -- संयुक्त राष्ट्रसंघ में महासचिव के पद पर अभी तक तीन व्यक्तियों को नियुक्ति हुई है । १ फरवरी, २९४६ को नावें के चित्रोली ( Trygve Lie ) पाँच वर्ष के लिए महासचिव के पद पर नियुक्त किये गये थे। एक नवम्बर १६५० को उनका कार्यकाल तीन वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया । १० नवम्बर, १९५२ को उन्होने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया । १० अप्रिल, १९५३ को स्वेडेन के डाग हैमरशोल्ड ( Dag Hammarskjoeld ) को उनके स्थान पर महासचिव नियुक्त किया गया । २६ सितम्बर, १९५७ को हैमरशोल्ड को १० अप्रिल, १६५८ से शुरू होने वाले पाँच वर्ष के लिए फिर से नियुक्त किया गया था। लेकिन १८ सितम्बर, १६६१ को हवाई दुर्घटना से उनको मृत्यु हो गयी। उनके स्थान पर बर्मा के यूथान्त ( U Thant ) को कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया गया। बाद में उनकी नियुक्ति पाँच वर्ष को पूरी अवधि तक कर दी गयो । अक्टूबर १९६६ में महासचिव यूथान्त का कार्यकाल पूरा हो रहा था। अगले वर्षों के लिए यह पद किसको दिया जाय यह एक कठिन समस्या थो । विश्व की विषम परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए यूथान्त ने निश्चय किया कि वे पुनः इस पद के लिए उम्मीदवार नही होगे । लेकिन चारों ओर से सभी देशो ने मिलकर अनुरोध किया कि वे दूसरे कार्यकाल को स्वीकार कर लें। यूथान्त को विश्व जनमत के समक्ष भुकना पड़ा और वे सर्वसम्मत्ति से पुनः संघ के महासचिव चुन लिए गये । सचिवालय में महासचिव के पद बड़े महत्त्व का है । उसे केवल प्रशानिक कार्य ही नही वरन राजनीतिक कार्य भी करने पड़ते हैं। वह शान्ति पर खतरा की स्थिति पर सुरक्षा परिषद् का ध्यान आकृष्ट करा सकता है । राजनीतिक मामलों में महासचिव कितनी बड़ी भूमिका अदा कर सकता है, यह एक दोतीन उदाहरणों से स्पष्ट हो जायगा । १६५० में जब रूस ने यह घोषणा की कि वह राष्ट्रसंघ को कार्यवाहियों में तब तक हिस्सा नहीं लेगा जब तक चीन की कम्युनिस्ट सरकार को प्रतिनिधित्व प्रदान नही किया जायगा तव राष्ट्रसंघ के समक्ष भयंकर संकट उपस्थित हो गया था। इस समस्या को हल करने के लिए महासचित्र त्रिग्वीली ने पर्याप्त प्रयास किया और बड़े देशों के प्रधानों के साथ बातचीत करने के लिए करीब-करीब आधे विश्व की यात्रा को । उन्होने सदस्य राज्यों से अपील की और समझौते के लिए योजनाएँ प्रस्तुत की। १९५० में भी जब कोरिया के सम्बन्ध में विचार करने के लिए सुरक्षा परिषद् की बैठक बुलाई गयी तो महासचिव त्रिी ने ही इस समस्या पर सर्वप्रथम प्रकाश डाला और उत्तरी कोरिया के विरुद्ध कार्यवाही करने की अपील की । उसके बाद जब परिषद् ने उत्तरी कोरिया के विरुद्ध सैन्य कार्यवाही करने की छूट दे दी तो उन सैन्य कार्यवाहियों के लिए सदस्य राज्यों का सहयोग हासिल करने और उसमें समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी महासचिव को ही उठानी पड़ी । इसी तरह कांगो में छिड़े गृह युद्ध के समय भी महासचिव को बहुत बड़ी जिम्मेवारी का निर्वाह करना पड़ा। वहाँ गृह युद्ध समाप्त करके शान्ति स्थापना की जिम्मेवारी संयुक्त राष्ट्रसंघ ने अपने ऊपर ली । कांगो में राष्ट्रसंघ की सेना भेजो गयी जहाँ उसे भयंकर युद्ध करने पड़े । महासचिव हैमरशोल्ड ने इस सैनिक अभियान का निर्देशन किया और अपने दायित्वो को पूरा करने के लिए उन्हें कई बार कांगो जाना पड़ा। इसी क्रम में उनकी मृत्यु भी हो गयी। इससे स्पष्ट है कि महासचिव पर कितनी बड़ी जिम्मेवारियाँ है तथा कैसी विकट परिस्थितियों में अपने दायित्वों को पूरा करना पड़ता है । महासचिव की राजनीतिक जिम्मेवारियों का ताजा मिशाल प्रस्तुत करता है १९६५ में भारतपाकिस्तान के युद्ध में उसका पार्ट। जब सितम्बर, १६६५ में दोनों देशों में युद्ध छिड़ा तो उनमें युद्ध बन्द करवाने के लिए महासचिव ने अनेक प्रयास किये । वस्तुतः भारत और पाकिस्तान के बीच लडाई बन्द कराने में महासचिव का पार्ट बहुत महत्त्वपूर्ण था। महासचिव को अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करने के अनेक मौके मिलते हैं । विभन्न देशों के प्रतिनिधिमण्डल के साथ उसका सम्पर्क बरावर रहता है। इसलिए वह संगठन के उद्देश्यों को प्राप्ति के लिए सरकारों को प्रभावित करने की स्थिति में होता है। उसे यह स्वतन्त्रता होती है कि वह सदस्य राज्यों के विदेश मन्त्रालय में जा सके और स्वतन्त्रतापूर्वक सलाह मशविरा कर सके। महासचिव सार्वजनिक भाषण भी दे सकता है। इस कारण वह विश्व के जनमत को प्रभावित कर सकता है। वह अपनी रिपोर्टों में इस तरह की सिफारिश भी कर सकता है कि संगठन को कौन-सी नीति या कार्यक्रम अपनाना चाहिए सचिवालय में सुधार की रूसी योजना - मंयुक्त राष्ट्रसंघ में महासचिव के पद का जो महत्त्व है उसे देखते हुए यदि उसमें चुनाव का प्रश्न पर कठिनाइयाँ उपस्थित करे तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। प्रथम बार तो महासचिव के चुनाव में कोई दिक्कत नहीं हुई । लेकिन १६५० में जब के फिर चुने जाने का प्रस्ताव आया तो रूस ने उसका विरोध किया। अमेरिका ने इस गतिरोध को दूर करने लिए यह प्रस्ताव रखा कि उनके कार्यकाल की अवधि, जो पाँच वर्षों की थी, बढ़ा दी जाय। माधारण सभा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, लेकिन इस निर्णय के कारण भयंकर कटुता उत्पन्न हो गयी । fare के बाद समझौते द्वारा हेमरशोल्ड महासचिव बनाये गये पर रूस उनसे भी सन्तुष्ट नहीं हुआ। सितम्बर १६६० में संयुक्त राष्ट्रसंघ की साधारण सभा में भाषण करते हुए रूस के प्रधानमन्त्री खुश्चेव ने कहा कि संघ के महासचिव "एकाधिकrcerat पूँजीवादियों के चाकर है और पश्चिमी शक्तियाँ महासचिव के पद का अपने स्वार्थों के लिए लाभ उठती हैं। महासचित्र डाग हैमरशोल्ड ने कांगो के मंकट का सामना करने के लिए क्रियान्वित किये जाने वाले उपायों में पक्षगत का प्रदर्शन किया है और उसने उपनिवेशवादियों तथा इनका समर्थन करने वाले देशों का साथ दिया है। अतः यह न्यायपूर्ण एवं उचित होगा कि महासचिव के पद पर एक व्यक्ति को न रखा जाय, किन्तु तीन व्यक्तियों को रखा जाय, एक व्यक्ति पश्चिमी राज्यों का प्रतिनिधि हो दूसरा कम्युनिष्ट देशो का तथा तीसरा तटस्थ देशों का । मयुक्त राष्ट्रसंघ के प्रधान कार्यालय का स्थान संयुक्त राज्य अमरीका में होने से बड़ी असुविधाएँ होती है। इसे किसी ऐसे स्थान में ले जाया जाना चाहिए, जहाँ इस अन्तर्राष्ट्रीय संगठन का कार्य अधिक क्षमता के साथ हो सके। स्विटजरलैंड या आस्ट्रिया ऐसे स्थान हो सकते हैं । यदि इसका मुख्य कार्यालय सोवियत यूनियन में रखा जाना उचित समझा जाय तो हम इस बातें का वचन देते हैं कि इसके कार्य के लिए सर्वोत्तम परिस्थितियाँ उत्पन्न की जायेंगी ।" इस प्रकार सोवियत संघ ने सचिवालय के नये सिरे से संगठन की मांग की। लेकिन इस प्रस्ताव का पूरे जोश के साथ कहीं से समर्थन नही मिला। इस प्रस्ताव में कई कठिनाइयाँ थीं। यदि महासचिव का पद तीन विभिन्न प्रवृत्तियों के व्यक्तियों में बाँट दिया जाता ठो संयुक्त राष्ट्रसंघ में पूरा गतिरोध पैदा हो जाता और उसका सारा काम ठप्प पड़ जाता। अतएव यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। कांगो के मामले को लेकर रूस ने हेमरशोल्ड पर सार्वजनिक रूप से अनेक आरोप लगाये तथा दोषारोपण किये। इससे इस्तीफा देने को मांग भी की गयी । और लेकिन हैमरशोल्ड इन आरोपों से जरा भी विचलित नही हुए और कांगो में बड़ी ता ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते रहे। इस क्रम में विमान दुर्घटना से उनको मृत्यु हो गयी । चार्टर के संशोधन की समस्या चार्टर में किसी भी संशोधन के स्वीकृत होने के लिए साधारण सभा का दो तिहाई बहुमत होना तथा सुरक्षा परिषद् का सात सदस्यों का बहुमत होना चाहिए । इन सात सदस्यों में पाँच स्थायी सदस्यों की सहमति आवश्यक है। धारा १०६ में कहा गया है कि जब कभी चाटर के संशोधन की आवश्यकता हो तो इसके लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्यों का एक सम्मेलन किया जायगा । इसके लागू होने के दसवें वर्ष में ऐसा सम्मेलन करने का प्रस्ताव साधारण सभा में पेश किया जा सकता 1 यदि इस सम्मेलन ने कोई संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत कर लिया तो उसको लागू होने के लिए साधारण सभा के दो-तिहाई बहुमत तथा स्थायी सदस्यों सहित सुरक्षा परिषद् के सात वोटों का समर्थन आवश्यक होगा । इस तरह का कोई सम्मेलन अभी तक नहीं हुआ है और न निकट भविष्य में होने को सम्भावना ही है। ३ जून, १९५७ को साधारण सभा में इस विषय पर एक प्रस्ताव पास हुआ और सम्मेलन के बुलाये जाने को १६५६ तक स्थगित कर दिया गया। चार्टर में कोई महत्त्वपूर्ण सुधार तबतक नही हो सकता जबतक शक्ति गुटों के संघर्ष की उम्रता में कमी नहीं आती। इसका कारण यह है कि चार्टर में कोई भी संशोधन तभी क्रियान्वित हो सकता है जब संयुक्त राष्ट्रसंघ के दो तिहाई सदस्यों का बहुमत तथा सुरक्षा परिषद् के पाँचों स्थायी मदस्य, अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस और कोमिन्तांग चीन तथा रूस चाहते हैं। किन्तु पहली चार शक्तियाँ जो परिवर्तन करना चाहेंगी, उन्हें सोवियत यूनियन नहीं स्वीकार करेगा और रूम के उपयु के प्रस्ताव पहली चार शक्तियों को मान्य नहीं हैं। इन पाँचों शक्तियों में इस विषय में कोई समझौता होना बहुत कठिन है। इस कठिनाई के बावजूद चार्टर में संशोधन की माँग दिनों-दिन बढ़ती हो गयी है। लेकिन संघ के जन्म के पाँच वर्षों के अन्दर किमी संशोधन के विषय में सोचना हो व्यर्थ था । काल में शीत युद्ध का चरम विकास हो चुका था। फिर भी इस काल में व्याख्या के द्वारा चार्टर के मूल स्वरूप में एक-दो परिवर्तन अवश्य हुए। उदाहरण के लिए सम रामय एक बात को लेकर बड़ा मतभेद था । यह कहना बड़ा कठिन था कि यदि सुरक्षा परिषद् की बैठक में कोई स्थायी सदस् अनुपस्थित रहे अथवा उपस्थित रहकर भी मतदान में किसी तरह भाग नहीं ले तो उसे निषेधाविकार का प्रयोग माना जायगा या नहीं। शुरू में इस सम्बन्ध में यह धारणा थी कि इसे "वटी" का प्रयोग ही मानना चाहिए। लेकिन १६५० के कोरिया युद्ध के समय इस प्रश्न का हल निकाल दिया गया। उस समय मोवियत संघ सुरक्षा परिषद् का बहिष्कार कर रहा था। उसकी अनुपस्थिति में परिषद् ने कई प्रस्ताव पास किये। बाद में जब सोवियत सघ परिषद की कार्यवाही में भाग लेने लगा तो उसने यह कहा कि अनुपस्थिति में जो प्रस्ताव हुए है चे सब वेध है क्योंकि उन प्रस्तावों को एक स्थायी सदस्य का समर्थन नहीं मिला है और उन पर पोटो प्रयोग मानना चाहिए । लेकिन सुरक्षा परिषद् को यह तर्क मान्य नहीं हुआ। उसने यह निश्चय किया कि स्थायी सदस्यों की अनुपस्थिति अथवा मतदान में भाग नहीं लेना टो प्रयोग नहीं माना जायगा । चार्टर के स्वरूप में एक महान परिवर्तन "शान्ति के लिए एकता के प्रस्ता हुआ। पिछले पृष्ठों में हमला चुके है की किस तरह इस प्रस्ताव ने साधारण सभा को सर
क्षेत्राधिकार -- अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का क्षेत्राधिकार विश्वव्यापी है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के सभी सदस्य इसके क्षेत्राधिकार में आते हैं। गैर सदस्य-राज्य भी यदि वे न्यायालय का प्रयोग करना चाहें तो कर सकते हैं । सदस्य-राज्य द्वारा रखे गये प्रत्येक कानून और न्यायिक प्रश्न पर विचार करना न्यायालय का पहला काम है । सदस्य राज्यो को अधिकार कि वे किसी राज्य के साथ अपने झगड़ों को न्यायालय के सामने निर्णय के लिए उपस्थित कर सके । यह विवाद अन्तर्राष्ट्रीय सन्धियों-समझौतो तथा परम्पराओं से सम्बद्ध भी हो सकता है। पर हर मामले में न्यायालय का क्षेत्राधिकार अनिवार्य नहीं है। वैसे ही मामलों में न्यायालय का क्षेत्राधिकार अनिवार्य होता है जिसको झगड़ो से सम्बद्ध राज्य ऐसा मान लेता है। यह व्यवस्था अन्तराष्ट्रीय न्यायालय के संगठन की सबसे बड़ी कमजोरी है। राज्यो को स्वतन्त्रता है कि वे अल्पकाल या सदा के लिए अपने मामलों का निर्णय इस न्यायालय से कराने का निश्चय करे । पर एक बार ऐसा निर्णय कर लेने के बाद ऐसे राज्यों के मामले स्वतः इस न्यायालय के विचाराधीन हो जाते हैं। इसके बाद यदि कोई राज्य अपने किसी मामले को न्यायालय के कार्यक्रम से हटाना लय के कार्यक्रम से हटाना चाहे तो उसको यह बतलाना पड़ता है कि अमुक विवाद न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नहीं है । यदि किसी दो राज्य में सन्धि की व्याख्या को लेकर कोई वाद-विवाद उपस्थित हो गया हो और वे यदि इसकी उचित व्याख्या अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय से कराने के लिए सहमत हो तो न्यायालय को उस प्रकार के किसी सन्धि की व्याख्या करने का अधिकार है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के विविध अगो को परामर्श देना अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का दूसरा प्रमुख कार्य है । साधारण सभा और सुरक्षा परिषद् किसी भी वैधानिक मामले पर अन्तर्राष्ट्रीय न्यायायल से परामर्श ले सकती है । पर, न्यायालय के परामर्श को मानने के लिए ये बाध्य नहीं है। इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र के अन्य अॅग भी न्यायालय से किसी वैधानिक विषय पर परामर्श ले सकते हैं । संयुक्त राष्ट्रसंघ के कार्यों के सम्पादन के लिए एक सचिवालय की स्थापना की गयी है। चार्टर के पन्द्रहवें अध्याय में धारा सत्रह से एक सौ एक तक इसके संगठन का वर्णन है। इसका संगठन प्रायः वैसा ही है जंसा राष्ट्रसंघ के सचिवालय का था । सचिवालय में सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर साधारण सभा द्वारा नियुक्ति किया गया एक महासचिव और उतने पदाधिकारी होते है जितने इस संस्था के लिए आवश्यक समझे जायें। महासचिव सचिवालय की सहायता से अपना सारा कार्य करता है। यदि हम राष्ट्रमघ की सचिवालय से वर्तमान सचिवालय की तुलना करते हैं तो एक महत्त्वपूर्ण व्अन्तर मिलेगा और यह अन्तर महासचिव के कार्य और अधिकारों से सम्बन्धित है। संयुक्त राष्ट्रमंघ के अन्तर्गत महासचिव को कुछ ऐसे अधिकार मिले हैं और उनमें कुछ ऐसे कर्त्तव्यों का पालन करना है जिसका पुराने राष्ट्रसंघ में सर्वधा अभाव था। चार्टर के अनुसार महासचिव के निम्नलिखित कार्य है : यदि महामचिव यह रामसे कि किसी मामले के कारण अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ सकता है तो वह सुरक्षा परिषद् का ध्यान इस ओर आकृष्ट कर सकता है। अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय - हेग स्थित अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्रसंघ का एक प्रमुख अग है। इसको प्रारम्भिक स्थापना प्रथम विश्वयुद्ध के बाद राष्ट्रसंघ के तत्वावधान में हुई थी । जिस समय संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना के विषय में बात चल रही थी, उस समय इस बात पर काफी वाद-विवाद चला कि पुराने अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय को ही संयुक्त राष्ट्रसंघ के अन्तर्गत रखा जाय या एक दूसरे नये न्यायालय की स्थापना की जाय । इस विषय पर दो मत थे । एक पक्ष का कहना था कि पुराने न्यायालय की ईमानदारी और निष्पक्षता की परम्परा देखकर उसी को कायम रखना ठीक होगा। दूसरे पक्ष का कहना था कि चूँकि पुराने न्यायालय नये के प्रति अमेरिका और सोवियत संघ का रुख अच्छा नहीं था, इसलिए उसको हटाकर एक न्यायालय की स्थापना करना ही अच्छा होगा । अन्त में दूसरे पक्ष के विचार को ही मान लिया गया और उसके अनुसार एक नये न्यायालय की स्थपाना की गयी। पर संयुक्त राष्ट्रसंघ के अन्तर्गत स्थापित न्यायालय को एक नया न्यायालय कहना उचित भी नहीं है। केवल नाम परिवर्तन को छोड़कर और पुराने न्यायालय के विधान में कुछ शाब्दिक परिवर्तन के अतिरिक्त नये न्यायालय मैं कोई नवीनता नही है । यह वही पुरानी अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय है जिसे राष्ट्रसंघ ने एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में इंग में स्थापित किया था। संयुक्त राष्ट्रसंघ के चार्टर ने उक्त पुराने न्यायालय में जान डाली है । न्यायालय में पन्द्रह न्यायाधीश होते हैं। इनकी नियुक्ति संयुक्त राष्ट्रसंघ की साधारण सभा और सुरक्षा परिषद् द्वारा होती है। ये दो संस्थाएँ न्यायाधीशों का निर्वाचन करती हैं। अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश होने के लिए उम्मीदवारों को उच्च नैतिक चरित्र का व्यक्ति तथा अपने राज्य के कानून और अन्तर्राष्ट्रीय विधि का विशेषज्ञ होना चाहिए । न्यायाधीशो की निर्वाचन प्रणाली कुछ पेचीदी है। न्यायालय के सदस्यों को साधारण सभा और सुरक्षा परिषद् उन लोगों की सूची में से चुनती है, जिनको संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य राष्ट्र मनोनीत करते हैं। जिस व्यक्ति को साधारण सभा और सुरक्षा परिषद् में पूर्ण बहुमत प्राप्त हो जाता है वे न्यायालय के न्यायाधीश चुन लिये जाते हैं। पर इस चुनाव में यह ध्यान देना पड़ता है कि सभी सदस्य-राष्ट्रों को यथासम्भव न्यायालय में प्रतिनिधित्व मिल जाय । दो न्यायाधीश एक ही राज्य के नहीं होने चाहिये। न्यायाधीशों का साधारण कार्यकाल नौ वर्ष कर है । पर वे पुनः निर्वाचित हो सकते हैं। जहाँ तक न्यायालय की कार्यविधि का प्रश्न है, पन्द्रहों न्यायाधीश मिलकर मामले की सुनवाई करते हैं । कम-से-कम नौ न्यायाधीशों के उपस्थित रहने पर ही राय या निर्णय किया जा सकता है । उस देश का न्यायाधीश मामले के निर्णय में भाग नहीं ले सकता है जिस देश से सम्वद्ध झगड़े पर न्यायालय विचार कर रहा हो । पर यदि कोई ऐसा राज्य जिसको न्यायालय में प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं हो । और उससे सम्बद्ध कोई झगड़ा न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हो तो उसे देश के न्यायाधीशों को भी न्यायालय की कार्रवाई में भाग लेने लिए आमन्त्रित किया जा सकता है। उनसे सलाह ली जा सकती है, पर निर्णय में उनका कोई हाद नहीं होगा । क्षेत्राधिकार - अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का क्षेत्राधिकार विशव्यापी है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के सभी सदस्य इसके क्षेत्राधिकार में आते हैं। गैर सदस्य राज्य भी यदि वे न्यायालय का प्रयोग करना चाहें तो कर सकते हैं । सदस्य-राज्य द्वारा रखे गये प्रत्येक कानून और न्यायिक प्रश्न पर विचार करना न्यायालय का पहला काम है । सदस्य राज्यों को अधिकार कि वे किसी राज्य के साथ अपने झगड़ों को न्यायालय के सामने निर्णय के लिए उपस्थित कर सके । यह विवाद अन्तर्राष्ट्रीय सन्धियों समझौता तथा परम्पराओं से सम्बद्ध भी हो सकता पर हर मामले में न्यायालय का क्षेत्राधिकार अनिवार्य नहीं है । वैसे ही मामलो में न्यायालय का क्षेत्राधिकार अनिवार्य होता है जिसको झगड़ों से सम्बद्ध राज्य ऐसा मान लेता है। यह व्यवस्था अन्तराष्ट्रीय न्यायालय के संगठन की सबसे बड़ी कमजोरी है। राज्यों को स्वतन्त्रता है कि वे अल्पकाल या सदा के लिए अपने मामलों का निर्णय इस न्यायालय से कराने का निश्चय करे । पर एक बार ऐसा निर्णय कर लेने के बाद ऐसे राज्यों के मामले स्वतः इस न्यायालय के विचाराधीन हो जाते हैं। इसके बाद यदि कोई राज्य अपने किसी मामले को न्यायालय के कार्यक्रम से हटाना चाहे तो उसको यह बतलाना पड़ता है कि अमुक विवाद न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नहीं है । यदि किसी दो राज्य में सन्धि की व्याख्या को लेकर कोई वाद-विवाद उपस्थित हो गया हो और वे यदि इसकी उचित व्याख्या अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय से कराने के लिए सहमत हो तो न्यायालय को उस प्रकार के किसी सन्धि की व्याख्या करने का अधिकार है । संयुक्त राष्ट्रसंघ के विविध अंगो को परामर्श देना अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का दूसरा प्रमुख कार्य है । साधारण सभा और सुरक्षा परिषद् किसी भी वैधानिक मामले पर अन्तर्राष्ट्रीय न्यायायल से परामर्श ले सकती है। पर, न्यायालय के परामर्श को मानने के लिए ये वाध्य नहीं है। इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र के अन्य अंग भी न्यायालय से किसी वैधानिक विषय पर परामर्श ले सकते हैं । संयुक्त राष्ट्रसंघ के कार्यों के सम्पादन के लिए एक सचिवालय की स्थापना की गयी । चार्टर के पन्द्रहवें अध्याय में धारा सत्रह से एक सौ एक तक इसके संगठन का वर्णन है। इसका संगठन प्रायः वैसा ही है जैसा राष्ट्रसंघ के सचिवालय का था । सचिवालय में सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर साधारण सभा द्वारा नियुक्ति किया गया एक महासचिव और उतने पदाधिकारी होते हैं जितने इस संस्था के लिए यावश्यक समझे जायें । महासचिव सचिवालय की सहायता से अपना सारा कार्य करता है। यदि हम राष्ट्रसघ को सचिवालय से वर्तमान सचिवालय की तुलना करते हैं तो एक महत्त्वपूर्ण अन्तर मिलेगा और यह यन्तर महामचिव के कार्य थोर अधिकारों से सम्बन्धित है। संयुक्त राष्ट्रमंघ के अन्तर्गत महासचिव को कुछ ऐसे अधिकार मिले हैं और उनमें कुछ ऐसे कर्त्तव्यों का पालन करना है जिसका पुराने राष्ट्रसंघ में गा अभाव था। चार्टर के अनुसार महामचित्र के निम्नलिखित कार्य है : यदि महामचिव यह समझे कि किसी मामले के कारण अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ सकता है तो वह सुरक्षा परिषद् का ध्यान इस ओर करता है। यह महासचिव का सबसे बड़ा अधिकार है। इस तरह का कोई अधिकार राष्ट्रसंघ के महासचिव को न था । इस प्रकार संयुक्त राष्ट्रसंघका महासचित्र अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में व्यक्तिगत दिलचस्पी लेकर विश्व शांति कायम रखने की दिशा में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकता है। महासचिव प्रति वर्ष संयुक्त राष्ट्रसंघ में कार्यों के सम्बन्ध के साधारण सभा को वार्षिक रिपोर्ट देता है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के विभिन्न अंग उसे जो काम सौंपते हैं, उन्हें पूरा करता है । महासचिव संघ के पदाधिकारियों को नियुक्ति साधारण सभा द्वारा बनाये गये नियमों के अनुसार करता है। इन नियुक्तियों के समय उनकी कार्य निपुणता, योग्यता और ईमानदारी पर ध्यान दिया जाता है। इस पर भी ध्यान दिया जाता है कि जहाँ तक हो सके विश्व के विभिन्न देशों के कर्मचारी भर्ती किए जा सकें ताकि अधिकाधिक देशों को सचिवालय सेवाओं में प्रतिनिधित्व मिल सके। अपने कर्त्तव्य का पालन करते समय महासचिव और उनके स्टाफ से अपेक्षित है कि वे किसी भी सरकार अथवा संयुक्त राष्ट्र के बाहर किसी अन्य सत्ता से न तो आदेश ही प्राप्त करेंगे और न उनसे माँनेंगे। उनसे अपेक्षित है कि वे कोई भी ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे यह प्रतीत हो कि उनके काम पर किसी प्रकार का बाह्य प्रभाव है। उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय कर्मचारी के रूप में काम करना होता है लेकिन कई बार इस आदर्श के विपरीत काम हुआ है। कुछ वर्ष पहले कम्युनिस्ट विरोधी आन्दोलन बहुत उग्र होने पर संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुए महासचित्र की सहायता से संघ में कार्य करने वाले किन्तु कम्युस्टि प्रवृत्ति वाले कुछ अमरीकियों को सचिवालय से निष्कासित करा दिया था। संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने तय किया है कि वे इस बात का आदर करेंगे कि सचिवालय उत्तदायित्व पूर्ण रूप से अन्तर्राष्ट्रीय होगा और वे उन दायित्वों के निर्वाह में कमचारिय पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं डालेंगे । महासचिव की स्थिति -- संयुक्त राष्ट्रसंघ में महासचिव के पद पर अभी तक तीन व्यक्तियों को नियुक्ति हुई है । एक फरवरी, दो हज़ार नौ सौ छियालीस को नावें के चित्रोली पाँच वर्ष के लिए महासचिव के पद पर नियुक्त किये गये थे। एक नवम्बर एक हज़ार छः सौ पचास को उनका कार्यकाल तीन वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया । दस नवम्बर, एक हज़ार नौ सौ बावन को उन्होने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया । दस अप्रिल, एक हज़ार नौ सौ तिरेपन को स्वेडेन के डाग हैमरशोल्ड को उनके स्थान पर महासचिव नियुक्त किया गया । छब्बीस सितम्बर, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन को हैमरशोल्ड को दस अप्रिल, एक हज़ार छः सौ अट्ठावन से शुरू होने वाले पाँच वर्ष के लिए फिर से नियुक्त किया गया था। लेकिन अट्ठारह सितम्बर, एक हज़ार छः सौ इकसठ को हवाई दुर्घटना से उनको मृत्यु हो गयी। उनके स्थान पर बर्मा के यूथान्त को कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया गया। बाद में उनकी नियुक्ति पाँच वर्ष को पूरी अवधि तक कर दी गयो । अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ छयासठ में महासचिव यूथान्त का कार्यकाल पूरा हो रहा था। अगले वर्षों के लिए यह पद किसको दिया जाय यह एक कठिन समस्या थो । विश्व की विषम परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए यूथान्त ने निश्चय किया कि वे पुनः इस पद के लिए उम्मीदवार नही होगे । लेकिन चारों ओर से सभी देशो ने मिलकर अनुरोध किया कि वे दूसरे कार्यकाल को स्वीकार कर लें। यूथान्त को विश्व जनमत के समक्ष भुकना पड़ा और वे सर्वसम्मत्ति से पुनः संघ के महासचिव चुन लिए गये । सचिवालय में महासचिव के पद बड़े महत्त्व का है । उसे केवल प्रशानिक कार्य ही नही वरन राजनीतिक कार्य भी करने पड़ते हैं। वह शान्ति पर खतरा की स्थिति पर सुरक्षा परिषद् का ध्यान आकृष्ट करा सकता है । राजनीतिक मामलों में महासचिव कितनी बड़ी भूमिका अदा कर सकता है, यह एक दोतीन उदाहरणों से स्पष्ट हो जायगा । एक हज़ार छः सौ पचास में जब रूस ने यह घोषणा की कि वह राष्ट्रसंघ को कार्यवाहियों में तब तक हिस्सा नहीं लेगा जब तक चीन की कम्युनिस्ट सरकार को प्रतिनिधित्व प्रदान नही किया जायगा तव राष्ट्रसंघ के समक्ष भयंकर संकट उपस्थित हो गया था। इस समस्या को हल करने के लिए महासचित्र त्रिग्वीली ने पर्याप्त प्रयास किया और बड़े देशों के प्रधानों के साथ बातचीत करने के लिए करीब-करीब आधे विश्व की यात्रा को । उन्होने सदस्य राज्यों से अपील की और समझौते के लिए योजनाएँ प्रस्तुत की। एक हज़ार नौ सौ पचास में भी जब कोरिया के सम्बन्ध में विचार करने के लिए सुरक्षा परिषद् की बैठक बुलाई गयी तो महासचिव त्रिी ने ही इस समस्या पर सर्वप्रथम प्रकाश डाला और उत्तरी कोरिया के विरुद्ध कार्यवाही करने की अपील की । उसके बाद जब परिषद् ने उत्तरी कोरिया के विरुद्ध सैन्य कार्यवाही करने की छूट दे दी तो उन सैन्य कार्यवाहियों के लिए सदस्य राज्यों का सहयोग हासिल करने और उसमें समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी महासचिव को ही उठानी पड़ी । इसी तरह कांगो में छिड़े गृह युद्ध के समय भी महासचिव को बहुत बड़ी जिम्मेवारी का निर्वाह करना पड़ा। वहाँ गृह युद्ध समाप्त करके शान्ति स्थापना की जिम्मेवारी संयुक्त राष्ट्रसंघ ने अपने ऊपर ली । कांगो में राष्ट्रसंघ की सेना भेजो गयी जहाँ उसे भयंकर युद्ध करने पड़े । महासचिव हैमरशोल्ड ने इस सैनिक अभियान का निर्देशन किया और अपने दायित्वो को पूरा करने के लिए उन्हें कई बार कांगो जाना पड़ा। इसी क्रम में उनकी मृत्यु भी हो गयी। इससे स्पष्ट है कि महासचिव पर कितनी बड़ी जिम्मेवारियाँ है तथा कैसी विकट परिस्थितियों में अपने दायित्वों को पूरा करना पड़ता है । महासचिव की राजनीतिक जिम्मेवारियों का ताजा मिशाल प्रस्तुत करता है एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में भारतपाकिस्तान के युद्ध में उसका पार्ट। जब सितम्बर, एक हज़ार छः सौ पैंसठ में दोनों देशों में युद्ध छिड़ा तो उनमें युद्ध बन्द करवाने के लिए महासचिव ने अनेक प्रयास किये । वस्तुतः भारत और पाकिस्तान के बीच लडाई बन्द कराने में महासचिव का पार्ट बहुत महत्त्वपूर्ण था। महासचिव को अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करने के अनेक मौके मिलते हैं । विभन्न देशों के प्रतिनिधिमण्डल के साथ उसका सम्पर्क बरावर रहता है। इसलिए वह संगठन के उद्देश्यों को प्राप्ति के लिए सरकारों को प्रभावित करने की स्थिति में होता है। उसे यह स्वतन्त्रता होती है कि वह सदस्य राज्यों के विदेश मन्त्रालय में जा सके और स्वतन्त्रतापूर्वक सलाह मशविरा कर सके। महासचिव सार्वजनिक भाषण भी दे सकता है। इस कारण वह विश्व के जनमत को प्रभावित कर सकता है। वह अपनी रिपोर्टों में इस तरह की सिफारिश भी कर सकता है कि संगठन को कौन-सी नीति या कार्यक्रम अपनाना चाहिए सचिवालय में सुधार की रूसी योजना - मंयुक्त राष्ट्रसंघ में महासचिव के पद का जो महत्त्व है उसे देखते हुए यदि उसमें चुनाव का प्रश्न पर कठिनाइयाँ उपस्थित करे तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। प्रथम बार तो महासचिव के चुनाव में कोई दिक्कत नहीं हुई । लेकिन एक हज़ार छः सौ पचास में जब के फिर चुने जाने का प्रस्ताव आया तो रूस ने उसका विरोध किया। अमेरिका ने इस गतिरोध को दूर करने लिए यह प्रस्ताव रखा कि उनके कार्यकाल की अवधि, जो पाँच वर्षों की थी, बढ़ा दी जाय। माधारण सभा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, लेकिन इस निर्णय के कारण भयंकर कटुता उत्पन्न हो गयी । fare के बाद समझौते द्वारा हेमरशोल्ड महासचिव बनाये गये पर रूस उनसे भी सन्तुष्ट नहीं हुआ। सितम्बर एक हज़ार छः सौ साठ में संयुक्त राष्ट्रसंघ की साधारण सभा में भाषण करते हुए रूस के प्रधानमन्त्री खुश्चेव ने कहा कि संघ के महासचिव "एकाधिकrcerat पूँजीवादियों के चाकर है और पश्चिमी शक्तियाँ महासचिव के पद का अपने स्वार्थों के लिए लाभ उठती हैं। महासचित्र डाग हैमरशोल्ड ने कांगो के मंकट का सामना करने के लिए क्रियान्वित किये जाने वाले उपायों में पक्षगत का प्रदर्शन किया है और उसने उपनिवेशवादियों तथा इनका समर्थन करने वाले देशों का साथ दिया है। अतः यह न्यायपूर्ण एवं उचित होगा कि महासचिव के पद पर एक व्यक्ति को न रखा जाय, किन्तु तीन व्यक्तियों को रखा जाय, एक व्यक्ति पश्चिमी राज्यों का प्रतिनिधि हो दूसरा कम्युनिष्ट देशो का तथा तीसरा तटस्थ देशों का । मयुक्त राष्ट्रसंघ के प्रधान कार्यालय का स्थान संयुक्त राज्य अमरीका में होने से बड़ी असुविधाएँ होती है। इसे किसी ऐसे स्थान में ले जाया जाना चाहिए, जहाँ इस अन्तर्राष्ट्रीय संगठन का कार्य अधिक क्षमता के साथ हो सके। स्विटजरलैंड या आस्ट्रिया ऐसे स्थान हो सकते हैं । यदि इसका मुख्य कार्यालय सोवियत यूनियन में रखा जाना उचित समझा जाय तो हम इस बातें का वचन देते हैं कि इसके कार्य के लिए सर्वोत्तम परिस्थितियाँ उत्पन्न की जायेंगी ।" इस प्रकार सोवियत संघ ने सचिवालय के नये सिरे से संगठन की मांग की। लेकिन इस प्रस्ताव का पूरे जोश के साथ कहीं से समर्थन नही मिला। इस प्रस्ताव में कई कठिनाइयाँ थीं। यदि महासचिव का पद तीन विभिन्न प्रवृत्तियों के व्यक्तियों में बाँट दिया जाता ठो संयुक्त राष्ट्रसंघ में पूरा गतिरोध पैदा हो जाता और उसका सारा काम ठप्प पड़ जाता। अतएव यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। कांगो के मामले को लेकर रूस ने हेमरशोल्ड पर सार्वजनिक रूप से अनेक आरोप लगाये तथा दोषारोपण किये। इससे इस्तीफा देने को मांग भी की गयी । और लेकिन हैमरशोल्ड इन आरोपों से जरा भी विचलित नही हुए और कांगो में बड़ी ता ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते रहे। इस क्रम में विमान दुर्घटना से उनको मृत्यु हो गयी । चार्टर के संशोधन की समस्या चार्टर में किसी भी संशोधन के स्वीकृत होने के लिए साधारण सभा का दो तिहाई बहुमत होना तथा सुरक्षा परिषद् का सात सदस्यों का बहुमत होना चाहिए । इन सात सदस्यों में पाँच स्थायी सदस्यों की सहमति आवश्यक है। धारा एक सौ छः में कहा गया है कि जब कभी चाटर के संशोधन की आवश्यकता हो तो इसके लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्यों का एक सम्मेलन किया जायगा । इसके लागू होने के दसवें वर्ष में ऐसा सम्मेलन करने का प्रस्ताव साधारण सभा में पेश किया जा सकता एक यदि इस सम्मेलन ने कोई संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत कर लिया तो उसको लागू होने के लिए साधारण सभा के दो-तिहाई बहुमत तथा स्थायी सदस्यों सहित सुरक्षा परिषद् के सात वोटों का समर्थन आवश्यक होगा । इस तरह का कोई सम्मेलन अभी तक नहीं हुआ है और न निकट भविष्य में होने को सम्भावना ही है। तीन जून, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन को साधारण सभा में इस विषय पर एक प्रस्ताव पास हुआ और सम्मेलन के बुलाये जाने को एक हज़ार छः सौ छप्पन तक स्थगित कर दिया गया। चार्टर में कोई महत्त्वपूर्ण सुधार तबतक नही हो सकता जबतक शक्ति गुटों के संघर्ष की उम्रता में कमी नहीं आती। इसका कारण यह है कि चार्टर में कोई भी संशोधन तभी क्रियान्वित हो सकता है जब संयुक्त राष्ट्रसंघ के दो तिहाई सदस्यों का बहुमत तथा सुरक्षा परिषद् के पाँचों स्थायी मदस्य, अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस और कोमिन्तांग चीन तथा रूस चाहते हैं। किन्तु पहली चार शक्तियाँ जो परिवर्तन करना चाहेंगी, उन्हें सोवियत यूनियन नहीं स्वीकार करेगा और रूम के उपयु के प्रस्ताव पहली चार शक्तियों को मान्य नहीं हैं। इन पाँचों शक्तियों में इस विषय में कोई समझौता होना बहुत कठिन है। इस कठिनाई के बावजूद चार्टर में संशोधन की माँग दिनों-दिन बढ़ती हो गयी है। लेकिन संघ के जन्म के पाँच वर्षों के अन्दर किमी संशोधन के विषय में सोचना हो व्यर्थ था । काल में शीत युद्ध का चरम विकास हो चुका था। फिर भी इस काल में व्याख्या के द्वारा चार्टर के मूल स्वरूप में एक-दो परिवर्तन अवश्य हुए। उदाहरण के लिए सम रामय एक बात को लेकर बड़ा मतभेद था । यह कहना बड़ा कठिन था कि यदि सुरक्षा परिषद् की बैठक में कोई स्थायी सदस् अनुपस्थित रहे अथवा उपस्थित रहकर भी मतदान में किसी तरह भाग नहीं ले तो उसे निषेधाविकार का प्रयोग माना जायगा या नहीं। शुरू में इस सम्बन्ध में यह धारणा थी कि इसे "वटी" का प्रयोग ही मानना चाहिए। लेकिन एक हज़ार छः सौ पचास के कोरिया युद्ध के समय इस प्रश्न का हल निकाल दिया गया। उस समय मोवियत संघ सुरक्षा परिषद् का बहिष्कार कर रहा था। उसकी अनुपस्थिति में परिषद् ने कई प्रस्ताव पास किये। बाद में जब सोवियत सघ परिषद की कार्यवाही में भाग लेने लगा तो उसने यह कहा कि अनुपस्थिति में जो प्रस्ताव हुए है चे सब वेध है क्योंकि उन प्रस्तावों को एक स्थायी सदस्य का समर्थन नहीं मिला है और उन पर पोटो प्रयोग मानना चाहिए । लेकिन सुरक्षा परिषद् को यह तर्क मान्य नहीं हुआ। उसने यह निश्चय किया कि स्थायी सदस्यों की अनुपस्थिति अथवा मतदान में भाग नहीं लेना टो प्रयोग नहीं माना जायगा । चार्टर के स्वरूप में एक महान परिवर्तन "शान्ति के लिए एकता के प्रस्ता हुआ। पिछले पृष्ठों में हमला चुके है की किस तरह इस प्रस्ताव ने साधारण सभा को सर
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
मलारना डूंगर । कस्बे में रविवार को बरसात के बाद मौसम ठंडा हो गया। अपराह्न 4 बजे आकाश में काली घटा छा गई तथा थोड़ी देर के बाद ही बरसात शुरू हो गई। आधा घंटा तक मूसलाधार बरसात होती रही। बरसात का पानी नालियों और सड़कों पर बहने लगा। बरसात के पानी की आवक ज्यादा होने से बाजार में कई दुकानों में पानी घुस गया। उपखंड मुख्यालय पर आधा घंटे में 38 मिमी बरसात दर्ज की गई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मलारना डूंगर । कस्बे में रविवार को बरसात के बाद मौसम ठंडा हो गया। अपराह्न चार बजे आकाश में काली घटा छा गई तथा थोड़ी देर के बाद ही बरसात शुरू हो गई। आधा घंटा तक मूसलाधार बरसात होती रही। बरसात का पानी नालियों और सड़कों पर बहने लगा। बरसात के पानी की आवक ज्यादा होने से बाजार में कई दुकानों में पानी घुस गया। उपखंड मुख्यालय पर आधा घंटे में अड़तीस मिमी बरसात दर्ज की गई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि वैश्विक वित्तीय संकट का असर भारत पर भी पड़ा है लेकिन इससे निपटने के लिए सरकार हरसंभव क़दम उठा रही है. भारत में महंगाई की दर में लगातार पाँचवें हफ़्ते गिरावट आई है. चार महीने में पहली बार महंगाई की दर 11 फ़ीसदी से नीचे आ गई है. दुनिया की तीन बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों ने आधिकारिक हस्तक्षेप रोकने और ऑनलाइन पर बोलने की आज़ादी की सुरक्षा के लिए एक समझौते किया है. भारत के उद्योग और वाणिज्य मामलों से जुड़े संगठन एसोचैम के अनुसार भारत के विभिन्न सेक्टरों में 25 प्रतिशत नौकरियों की कटौती होंगी.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि वैश्विक वित्तीय संकट का असर भारत पर भी पड़ा है लेकिन इससे निपटने के लिए सरकार हरसंभव क़दम उठा रही है. भारत में महंगाई की दर में लगातार पाँचवें हफ़्ते गिरावट आई है. चार महीने में पहली बार महंगाई की दर ग्यारह फ़ीसदी से नीचे आ गई है. दुनिया की तीन बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों ने आधिकारिक हस्तक्षेप रोकने और ऑनलाइन पर बोलने की आज़ादी की सुरक्षा के लिए एक समझौते किया है. भारत के उद्योग और वाणिज्य मामलों से जुड़े संगठन एसोचैम के अनुसार भारत के विभिन्न सेक्टरों में पच्चीस प्रतिशत नौकरियों की कटौती होंगी.
Shri Krishna Janmabhoomi: भारत एक ऐसी भूमि है जहां कई खूबसूरत मंदिर हैं. देश भर में कई हिंदू मंदिर हैं, उन्हीं में से एक श्री कृष्ण जन्मस्थान भी है. उत्तर प्रदेश के मथुरा में मंदिर को श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. यह उस स्थान पर स्थित है जहां भगवान कृष्ण के माता-पिता देवकी और वासुदेव को कैद करके रखा गया था. इस लेख में, हम आपको श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं. भगवान कृष्ण एक योद्धा, एक दोस्त, एक संरक्षक, एक दार्शनिक, एक राजा, एक शूरवीर हैं. वह पूरे ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्होंने महाभारत में युद्ध की पूर्व संध्या पर अर्जुन को अपने कर्तव्य को समझने की कोशिश करते हुए एक संपूर्ण 'भगवद् गीता' का उपदेश दिया. भगवान कृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश के एक शहर मथुरा में हुआ था. भगवान कृष्ण के जन्म के समय, उनके मामा अत्याचारी राजा कंस का मथुरा पर शासन था. किवदंती के अनुसार आकाशवाणी ने देवकी के आठवें बच्चे के हाथों कंस की मृत्यु की भविष्यवाणी की थी. भयभीत कंस ने वासुदेव और देवकी को कैद कर लिया और उसके सभी बच्चों की एक- एक करके हत्या कर दी. हालांकि, देवकी ने आधी रात को भगवान कृष्ण को जन्म दिया और उस रात भगवान विष्णु के चमत्कार के कारण जेल के सभी दरवाजे खुले रह गए. उसी रात, वासुदेव के मित्र और गोप जनजाति के मुखिया नंदराज और उनकी पत्नी यशोदा ने एक बच्ची को जन्म दिया. वासुदेव ने गुप्त रूप से शिशु कृष्ण को एक टोकरी में ले जाकर यमुना नदी को पार किया. वह नंदराजा के घर गया और बच्चों की अदला- बदली की और बदले हुए बच्चे के साथ जेल वापस आ गया. भगवान कृष्ण ने उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के एक ऐतिहासिक शहर वृंदावन में अपना बचपन, किशोरावस्था और जवानी बिताया, जिसे बृजभूमि के रूप में भी जाना जाता है. मथुरा भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है, जिसमें कई हिंदू मंदिर हैं. यह यमुना नदी के तट पर स्थित है और अपने इतिहास, पुरातत्व, धार्मिक इतिहास, कला और मूर्तिकला के लिए फेमस है. मथुरा की प्राथमिक भाषाएं बृजभाषा और हिंदी हैं और होली वहां का सबसे प्रमुख त्योहार है. मथुरा की होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है, और दुनिया भर से लाखों लोग इस रंगारंग कार्यक्रम की खुशी और उत्साह का अनुभव करने के लिए वहां जाते हैं. श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर जेल की कोठरी पर केंद्रित है जहां भगवान कृष्ण के मामा कंस ने उनके माता-पिता देवकी और वासुदेव को कैद किया था. यह वह स्थान है जहां भगवान कृष्ण ने स्वयं को प्रकट किया था. 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से इस स्थान का धार्मिक महत्व रहा है, और मुख्य मंदिर और अन्य मंदिरों को पूरे इतिहास में कई बार नष्ट कर दिया गया था, हाल ही में मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा इसे कई बार नष्ट किया गया. श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर के बारे में रोचक तथ्य (Shri Krishna Janmabhoomi Facts) चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के शासनकाल के दौरान लगभग 400 ईस्वी में इसका पुनर्निर्माण किया गया था. यह कथित तौर पर 1017 ईस्वी में गजनी के आक्रमणकारी महमूद द्वारा नष्ट कर दिया गया था. मथुरा के सम्राट राजा धुरपेट देव जंजुआ ने 1150 ईस्वी में तीसरी बार मंदिर का निर्माण किया था, लेकिन कथित तौर पर इसे 16 वीं शताब्दी में दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोदी द्वारा फिर से ध्वस्त कर दिया गया था. 125 साल बाद, राजा वीर सिंह बुंदेला ने मुगल सम्राट जहांगीर के शासनकाल के दौरान इसे बहाल किया, लेकिन 1669 ईस्वी में, औरंगजेब ने कथित तौर पर इसे एक बार फिर से ध्वस्त कर दिया. 1815 में, जब अंग्रेजों ने मथुरा पर अधिकार कर लिया, तो मंदिर क्षेत्र की नीलामी की गई. 21 फरवरी, 1951 को पंडित मदन मोहन मालवीय ने 'श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट' की स्थापना कर मंदिर के पुनर्निर्माण की पहल की. कई लोगों के प्रयासों के कारण इमारत का निर्माण किया गया था. इसका निर्माण रामकृष्ण डालमिया ने शाही ईदगाह के दक्षिण में अपनी मां जठिया देवी डालमिया के सम्मान में किया था. इसका निर्माण 29 जून 1957 को शुरू हुआ और 6 सितंबर 1958 को इसे हनुमान प्रसाद पोद्दार ने समर्पित किया. यह वह स्थान है जहां जेल की कोठरी स्थित थी और जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था. साइट पर एक बड़े बरामदे के साथ एक संगमरमर का मंडप और एक भूमिगत जेल कक्ष है. पास में ही आठ भुजाओं वाली देवी योगमाया को समर्पित एक मंदिर है. मंदिर 11 फरवरी, 1965 को बनाया गया था और यह श्रीमद्भागवत को समर्पित है. इसके पांच मंदिर हैं, मुख्य मंदिर में राधा और भगवान कृष्ण की छह फुट ऊंची मूर्तियां हैं, जिसके दाईं ओर बलराम, सुभद्रा और जगन्नाथ का मंदिर है. बाईं ओर भगवान राम, लक्ष्मण और सीता का मंदिर, जगन्नाथ मंदिर के सामने गरुड़ स्तम्भ और चैतन्य महाप्रभु, और राम मंदिर के सामने हनुमान, दुर्गा मंदिर और शिवलिंग मंदिर है. असेंबली हॉल की छत, दीवारों और स्तंभों पर चित्र भगवान कृष्ण और उनके शिष्यों को दर्शाते हैं. इसके अलावा, परिक्रमा पथ की दीवारों पर भगवद गीता के छंदों के शिलालेख हैं. पोतरा कुंड या पवित्र कुंड जन्मस्थान मंदिर के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक विशाल और गहरे पानी की टंकी है. इसे शिशु कृष्ण का पहला स्नान स्थल माना जाता है. जन्माष्टमी होली बसंत पंचमी दीपावली राधाष्टमी गोपाष्टमी शरद पूर्णिमा मनाया जाता है. श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर जाने के लिए आपको टिकट खरीदने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह सभी भक्तों के लिए खुला है. मंदिर में अप्रैल से नवंबर तक का समय सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम को 4 बजे से 9:30 बजे तक होता है. गर्भ गृह में जाने का समय सुबह 5 बजे से रात 9:30 बजे तक है. नवंबर से अप्रैल तक मंदिर में आरती का समय सुबह 5:30 से दोपहर 12 बजे तक और शाम को 3 बजे से 8:30 बजे तक होता है. गर्भ गृह में जाने का समय सुबह 5:30 बजे से रात 8:30 बजे तक है. इसके अलावा, कृपया ध्यान दें कि मंगल आरती सुबह 5:30 बजे की जाती है.
Shri Krishna Janmabhoomi: भारत एक ऐसी भूमि है जहां कई खूबसूरत मंदिर हैं. देश भर में कई हिंदू मंदिर हैं, उन्हीं में से एक श्री कृष्ण जन्मस्थान भी है. उत्तर प्रदेश के मथुरा में मंदिर को श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. यह उस स्थान पर स्थित है जहां भगवान कृष्ण के माता-पिता देवकी और वासुदेव को कैद करके रखा गया था. इस लेख में, हम आपको श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं. भगवान कृष्ण एक योद्धा, एक दोस्त, एक संरक्षक, एक दार्शनिक, एक राजा, एक शूरवीर हैं. वह पूरे ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्होंने महाभारत में युद्ध की पूर्व संध्या पर अर्जुन को अपने कर्तव्य को समझने की कोशिश करते हुए एक संपूर्ण 'भगवद् गीता' का उपदेश दिया. भगवान कृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश के एक शहर मथुरा में हुआ था. भगवान कृष्ण के जन्म के समय, उनके मामा अत्याचारी राजा कंस का मथुरा पर शासन था. किवदंती के अनुसार आकाशवाणी ने देवकी के आठवें बच्चे के हाथों कंस की मृत्यु की भविष्यवाणी की थी. भयभीत कंस ने वासुदेव और देवकी को कैद कर लिया और उसके सभी बच्चों की एक- एक करके हत्या कर दी. हालांकि, देवकी ने आधी रात को भगवान कृष्ण को जन्म दिया और उस रात भगवान विष्णु के चमत्कार के कारण जेल के सभी दरवाजे खुले रह गए. उसी रात, वासुदेव के मित्र और गोप जनजाति के मुखिया नंदराज और उनकी पत्नी यशोदा ने एक बच्ची को जन्म दिया. वासुदेव ने गुप्त रूप से शिशु कृष्ण को एक टोकरी में ले जाकर यमुना नदी को पार किया. वह नंदराजा के घर गया और बच्चों की अदला- बदली की और बदले हुए बच्चे के साथ जेल वापस आ गया. भगवान कृष्ण ने उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के एक ऐतिहासिक शहर वृंदावन में अपना बचपन, किशोरावस्था और जवानी बिताया, जिसे बृजभूमि के रूप में भी जाना जाता है. मथुरा भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है, जिसमें कई हिंदू मंदिर हैं. यह यमुना नदी के तट पर स्थित है और अपने इतिहास, पुरातत्व, धार्मिक इतिहास, कला और मूर्तिकला के लिए फेमस है. मथुरा की प्राथमिक भाषाएं बृजभाषा और हिंदी हैं और होली वहां का सबसे प्रमुख त्योहार है. मथुरा की होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है, और दुनिया भर से लाखों लोग इस रंगारंग कार्यक्रम की खुशी और उत्साह का अनुभव करने के लिए वहां जाते हैं. श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर जेल की कोठरी पर केंद्रित है जहां भगवान कृष्ण के मामा कंस ने उनके माता-पिता देवकी और वासुदेव को कैद किया था. यह वह स्थान है जहां भगवान कृष्ण ने स्वयं को प्रकट किया था. छः वीं शताब्दी ईसा पूर्व से इस स्थान का धार्मिक महत्व रहा है, और मुख्य मंदिर और अन्य मंदिरों को पूरे इतिहास में कई बार नष्ट कर दिया गया था, हाल ही में मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा इसे कई बार नष्ट किया गया. श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर के बारे में रोचक तथ्य चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के शासनकाल के दौरान लगभग चार सौ ईस्वी में इसका पुनर्निर्माण किया गया था. यह कथित तौर पर एक हज़ार सत्रह ईस्वी में गजनी के आक्रमणकारी महमूद द्वारा नष्ट कर दिया गया था. मथुरा के सम्राट राजा धुरपेट देव जंजुआ ने एक हज़ार एक सौ पचास ईस्वी में तीसरी बार मंदिर का निर्माण किया था, लेकिन कथित तौर पर इसे सोलह वीं शताब्दी में दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोदी द्वारा फिर से ध्वस्त कर दिया गया था. एक सौ पच्चीस साल बाद, राजा वीर सिंह बुंदेला ने मुगल सम्राट जहांगीर के शासनकाल के दौरान इसे बहाल किया, लेकिन एक हज़ार छः सौ उनहत्तर ईस्वी में, औरंगजेब ने कथित तौर पर इसे एक बार फिर से ध्वस्त कर दिया. एक हज़ार आठ सौ पंद्रह में, जब अंग्रेजों ने मथुरा पर अधिकार कर लिया, तो मंदिर क्षेत्र की नीलामी की गई. इक्कीस फरवरी, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन को पंडित मदन मोहन मालवीय ने 'श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट' की स्थापना कर मंदिर के पुनर्निर्माण की पहल की. कई लोगों के प्रयासों के कारण इमारत का निर्माण किया गया था. इसका निर्माण रामकृष्ण डालमिया ने शाही ईदगाह के दक्षिण में अपनी मां जठिया देवी डालमिया के सम्मान में किया था. इसका निर्माण उनतीस जून एक हज़ार नौ सौ सत्तावन को शुरू हुआ और छः सितंबर एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन को इसे हनुमान प्रसाद पोद्दार ने समर्पित किया. यह वह स्थान है जहां जेल की कोठरी स्थित थी और जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था. साइट पर एक बड़े बरामदे के साथ एक संगमरमर का मंडप और एक भूमिगत जेल कक्ष है. पास में ही आठ भुजाओं वाली देवी योगमाया को समर्पित एक मंदिर है. मंदिर ग्यारह फरवरी, एक हज़ार नौ सौ पैंसठ को बनाया गया था और यह श्रीमद्भागवत को समर्पित है. इसके पांच मंदिर हैं, मुख्य मंदिर में राधा और भगवान कृष्ण की छह फुट ऊंची मूर्तियां हैं, जिसके दाईं ओर बलराम, सुभद्रा और जगन्नाथ का मंदिर है. बाईं ओर भगवान राम, लक्ष्मण और सीता का मंदिर, जगन्नाथ मंदिर के सामने गरुड़ स्तम्भ और चैतन्य महाप्रभु, और राम मंदिर के सामने हनुमान, दुर्गा मंदिर और शिवलिंग मंदिर है. असेंबली हॉल की छत, दीवारों और स्तंभों पर चित्र भगवान कृष्ण और उनके शिष्यों को दर्शाते हैं. इसके अलावा, परिक्रमा पथ की दीवारों पर भगवद गीता के छंदों के शिलालेख हैं. पोतरा कुंड या पवित्र कुंड जन्मस्थान मंदिर के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक विशाल और गहरे पानी की टंकी है. इसे शिशु कृष्ण का पहला स्नान स्थल माना जाता है. जन्माष्टमी होली बसंत पंचमी दीपावली राधाष्टमी गोपाष्टमी शरद पूर्णिमा मनाया जाता है. श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर जाने के लिए आपको टिकट खरीदने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह सभी भक्तों के लिए खुला है. मंदिर में अप्रैल से नवंबर तक का समय सुबह पाँच बजे से दोपहर बारह बजे तक और शाम को चार बजे से नौ:तीस बजे तक होता है. गर्भ गृह में जाने का समय सुबह पाँच बजे से रात नौ:तीस बजे तक है. नवंबर से अप्रैल तक मंदिर में आरती का समय सुबह पाँच:तीस से दोपहर बारह बजे तक और शाम को तीन बजे से आठ:तीस बजे तक होता है. गर्भ गृह में जाने का समय सुबह पाँच:तीस बजे से रात आठ:तीस बजे तक है. इसके अलावा, कृपया ध्यान दें कि मंगल आरती सुबह पाँच:तीस बजे की जाती है.
नई दिल्ली। साल 2019 में एक बार फिर मोदी सरकार का इम्तहान होना है। केंद्र की बीजेपी सरकार अपने चार साल पूरे कर चुकी है और इसी के साथ सत्ताधारी बीजेपी ने लोकसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। पिछले साल मोदी सरकार द्वारा लिए गए जीएसटी और नोटबंदी जैसे कड़े फैसलों के बाद विरोध के स्वर उठे लेकिन इसके बाद भी देश की जनता मोदी सरकार पर पूरा भरोसा करती है। इतना ही नहीं पीएम के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी जनता की पहली पसंद हैं। टाइम्स मेगा ऑनलाइन पोल में शामिल 8,44, 646 लोगों में से दो-तिहाई से ज्यादा लोगों (71. 9%) का कहना है कि वे एक बार फिर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट डालेंगे, वहीं 73. 3% लोगों का मानना है कि आज आम चुनाव हुए तो केंद्र में एक बार फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनेगी। प्रधानमंत्री पद के लिए जहां नरेंद्र मोदी पोल में काफी आगे रहे, वहीं 16. 1% लोगों का कहना था कि वे मोदी या राहुल गांधी के अलावा किसी और को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट डालेंगे। 11. 93% लोगों ने कहा कि वे राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट करेंगे। यह पोल टाइम्स ग्रुप की नौ भाषाओं की 9 साइटों पर 23-25 मई के बीच चलाया गया था।
नई दिल्ली। साल दो हज़ार उन्नीस में एक बार फिर मोदी सरकार का इम्तहान होना है। केंद्र की बीजेपी सरकार अपने चार साल पूरे कर चुकी है और इसी के साथ सत्ताधारी बीजेपी ने लोकसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। पिछले साल मोदी सरकार द्वारा लिए गए जीएसटी और नोटबंदी जैसे कड़े फैसलों के बाद विरोध के स्वर उठे लेकिन इसके बाद भी देश की जनता मोदी सरकार पर पूरा भरोसा करती है। इतना ही नहीं पीएम के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी जनता की पहली पसंद हैं। टाइम्स मेगा ऑनलाइन पोल में शामिल आठ,चौंतालीस, छः सौ छियालीस लोगों में से दो-तिहाई से ज्यादा लोगों का कहना है कि वे एक बार फिर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट डालेंगे, वहीं तिहत्तर. तीन% लोगों का मानना है कि आज आम चुनाव हुए तो केंद्र में एक बार फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनेगी। प्रधानमंत्री पद के लिए जहां नरेंद्र मोदी पोल में काफी आगे रहे, वहीं सोलह. एक% लोगों का कहना था कि वे मोदी या राहुल गांधी के अलावा किसी और को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट डालेंगे। ग्यारह. तिरानवे% लोगों ने कहा कि वे राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट करेंगे। यह पोल टाइम्स ग्रुप की नौ भाषाओं की नौ साइटों पर तेईस-पच्चीस मई के बीच चलाया गया था।
मनस्वी मंगई एक भारतीय मॉडल और अभिनेत्रीं हैं। वह 2010 में मिस फेमिना मिस इंडिया का विजेता हैं। मनस्वी मंगई का जन्म 10 अक्टूबर 1989 को नई दिल्ली में हुआ था। लेकिन उनका परिवार उत्तराखंड से ताल्लुकात रखता है। मनस्वी मंगई ने अपनी शुरूआती पढ़ाई चंडीगढ़ से संपन्न की है। वह अपने स्कूली दिनों से ही डांस और स्केटिंग में दिलचस्पी रखतीं थीं। Salaar 2 के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल?
मनस्वी मंगई एक भारतीय मॉडल और अभिनेत्रीं हैं। वह दो हज़ार दस में मिस फेमिना मिस इंडिया का विजेता हैं। मनस्वी मंगई का जन्म दस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ नवासी को नई दिल्ली में हुआ था। लेकिन उनका परिवार उत्तराखंड से ताल्लुकात रखता है। मनस्वी मंगई ने अपनी शुरूआती पढ़ाई चंडीगढ़ से संपन्न की है। वह अपने स्कूली दिनों से ही डांस और स्केटिंग में दिलचस्पी रखतीं थीं। Salaar दो के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल?
बुरी आदतों से छुटकारा पालना आसान नहीं है, खासकर यदि कोई महिला अचानक धूम्रपान छोड़ देती है, क्योंकि उसके स्वास्थ्य के नतीजे इस मामले में न केवल सकारात्मक हो सकते हैं। इसलिए, अगर एक लड़की ने अचानक एक बुरी आदत छोड़ दी है, तो उसे ऐसे परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिएः - महिला ने धूम्रपान छोड़ने का फैसला करने के पहले महीने में, स्वास्थ्य के परिणाम यह होगा कि उसका वजन नाटकीय रूप से बढ़ने की संभावना है। बेशक, इस नियम के लिए बहुत ही अपवाद हैं, क्योंकि कुछ पूरी तरह से अपनी भूख खो देते हैं, और वे न केवल वसा प्राप्त करते हैं, बल्कि वजन कम करते हैं। लेकिन, अक्सर नहीं, लड़की तनाव को जब्त करना शुरू कर देती है (क्योंकि बुरी आदतों से छुटकारा पाने से तनाव के अलावा कुछ भी नहीं होता है) और इससे शरीर के वजन में वृद्धि होती है। इसी अवधि के दौरान, मासिक धर्म चक्र परेशान हो सकता है, देरी हो सकती है या इसके विपरीत, मासिक लोग पहले आते हैं। यह सब एक ही तनाव से जुड़ा हुआ है जो शरीर में समान परिवर्तन का कारण बनता है। एक और नकारात्मक परिणाम अनिद्रा या गंभीर उनींदापन की घटना है, एकाग्रता में कमी, चिंता में वृद्धि हुई है। गलती एक ही तनाव कारक है। - दूसरे महीने में, वजन अभी भी बढ़ता जा सकता है, लेकिन अगर आप अपना आहार नियंत्रित करना शुरू करते हैं तो इस प्रक्रिया को रोकने का एक मौका पहले से ही है। इस बिंदु पर अन्य नकारात्मक अभिव्यक्तियां गायब होनी चाहिए, अगर ऐसा नहीं होता है, तो डॉक्टर को देखना सुनिश्चित करें, शायद आपको उसकी मदद चाहिए। संक्षेप में संक्षेप में, यह ध्यान दिया जा सकता है कि यदि आप धूम्रपान छोड़ देते हैं, तो सबसे खतरनाक परिणाम जो आपको धमकाता है वह तनाव है। आप इससे छुटकारा पा सकते हैं, सिगरेट के लिए लालसा की अवधि को अधिक आसान बनाते हैं, इसलिए एक विशेषज्ञ को बदलने के लिए आलसी मत बनो जो आपको एक शामक चुन सकता है, इसलिए सफलता की संभावनाएं बढ़ेगी।
बुरी आदतों से छुटकारा पालना आसान नहीं है, खासकर यदि कोई महिला अचानक धूम्रपान छोड़ देती है, क्योंकि उसके स्वास्थ्य के नतीजे इस मामले में न केवल सकारात्मक हो सकते हैं। इसलिए, अगर एक लड़की ने अचानक एक बुरी आदत छोड़ दी है, तो उसे ऐसे परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिएः - महिला ने धूम्रपान छोड़ने का फैसला करने के पहले महीने में, स्वास्थ्य के परिणाम यह होगा कि उसका वजन नाटकीय रूप से बढ़ने की संभावना है। बेशक, इस नियम के लिए बहुत ही अपवाद हैं, क्योंकि कुछ पूरी तरह से अपनी भूख खो देते हैं, और वे न केवल वसा प्राप्त करते हैं, बल्कि वजन कम करते हैं। लेकिन, अक्सर नहीं, लड़की तनाव को जब्त करना शुरू कर देती है और इससे शरीर के वजन में वृद्धि होती है। इसी अवधि के दौरान, मासिक धर्म चक्र परेशान हो सकता है, देरी हो सकती है या इसके विपरीत, मासिक लोग पहले आते हैं। यह सब एक ही तनाव से जुड़ा हुआ है जो शरीर में समान परिवर्तन का कारण बनता है। एक और नकारात्मक परिणाम अनिद्रा या गंभीर उनींदापन की घटना है, एकाग्रता में कमी, चिंता में वृद्धि हुई है। गलती एक ही तनाव कारक है। - दूसरे महीने में, वजन अभी भी बढ़ता जा सकता है, लेकिन अगर आप अपना आहार नियंत्रित करना शुरू करते हैं तो इस प्रक्रिया को रोकने का एक मौका पहले से ही है। इस बिंदु पर अन्य नकारात्मक अभिव्यक्तियां गायब होनी चाहिए, अगर ऐसा नहीं होता है, तो डॉक्टर को देखना सुनिश्चित करें, शायद आपको उसकी मदद चाहिए। संक्षेप में संक्षेप में, यह ध्यान दिया जा सकता है कि यदि आप धूम्रपान छोड़ देते हैं, तो सबसे खतरनाक परिणाम जो आपको धमकाता है वह तनाव है। आप इससे छुटकारा पा सकते हैं, सिगरेट के लिए लालसा की अवधि को अधिक आसान बनाते हैं, इसलिए एक विशेषज्ञ को बदलने के लिए आलसी मत बनो जो आपको एक शामक चुन सकता है, इसलिए सफलता की संभावनाएं बढ़ेगी।
अपर पक्षका कहना है कि 'जब तक ज्ञाता दृष्टा नही वन जाते तब तक अन्तरग-वहिरग साधनोंको जुटाना चाहिए । सो प्रवृत में अपर पक्षको यही तो समझना है कि जब तक जुटानेका विकल्प है तभी तक इस जीवको ज्ञाता दृष्टा स्वभावरूप परिणति न होकर रागरूप परिणति होती है और जिस क्षण यह जीव स्वभावमन्मुख हो अन्तरग-बहिरग साधनोके जुटाने के विकल्पसे मुक्त हो जाता है उमी क्षण यह जीव अबुद्धिपूर्वक रागके सद्भावमें भी ज्ञाता- दृष्टा बन जाता है । स्वभावसे तो यह जीव ज्ञाता- दृष्टा है हो । परिणित में भी इसे ज्ञात दृष्टा बनना है । किन्तु एक ओर ता जुटानेके विकल्पको उपादेय मानता रहे और दूसरी ओर मुखमे यह कहता रहे कि मै ज्ञाता- दृष्टा वननेके मार्गपर चल रहा हूँ - इसे मोक्षमार्गका उपहास ही कहा जायगा । यदि यथार्थमं ज्ञाता- दृष्टा वननेका अन्तरगसे भाव हुआ है तो सर्व प्रथम ज्ञातादृष्टा स्वभावके प्रति आदरवान् होकर ऐसे मार्गका अभ्यास करना चाहिए जिससे यह जीव जुटाने के विकल्पसे मुक्त होकर परिणति में भी ज्ञाता- दृष्टा वन सके । आचार्य अमृतचन्द्र समयसारको टोकामें उस मार्गका निर्देश करते हुए लिखते है - अयि कथमपि मृत्वा तत्त्वकौतूहली सन् अनुभव भवमूर्तेः पाश्र्ववर्ती मुहूर्तम् । पृथगथ विलसन्त स्व समालोक्य येन त्यजमि लगिति मृर्त्या साकमेकत्वमोहम् ॥ २३ ॥ हे भाई । तू किसी प्रकार महत् कष्टसे अथवा मरकर भी तत्त्वका कौतूहली होकर इस शरीरादि मूर्त द्रव्यका एक मुहूर्त ( दो घडो ) पडौसो बनकर आत्मानुभव कर कि जिससे सर्व पर द्रव्योसे भिन्न विलसते हुए अपने आत्माको देखकर इस शरीरादि मूर्तिक पुद्गल द्रव्यके साथ एकत्व के मोहको शीघ्र ही छोड़ देगा ।। २३ ।। यह स्वरूपको प्राप्त करनेका मार्ग है, अन्य सव रागके विकल्पोका ताना-बाना है । हमने अपने पिछले उत्तरमे उपादान और निमित्तिको विषम व्याप्तिका निषेधकर लिखा था कि प्रत्येक समय में उपादान और निमित्तकी प्रत्येक कार्यके प्रति अन्तरग और बहिरग व्याप्ति वनती रहती है जिससे कि प्रत्येक द्रव्य प्रत्येक समयमे उत्पाद व्ययरूप अपने-अपने कार्यको करता रहता है। किन्तु अपर पक्ष इसे माननेके लिए तैयार नहीं है । उस पक्षका कहना है कि 'निमित्तके अनुकूल उपादानका समागम होगा तो कार्य अवश्य होगा और उपादान के अनुकूल निमित्तका समागम होगा तो भो कार्य अवश्य होगा ।' इसपर पृच्छा यह है कि मान लो किसी समय निमित्त के अनुकूल उपादानका समागम नही हुआ तो कार्य होगा या नहीं ? और इसी प्रकार किसी समय उपादान के अनुकूल निमित्तका समागम नहीं हुमा तो भी कार्य होगा या नहीं ? अपर पक्ष यह तो कह नही सकना कि उम समय वह द्रव्य अपना कार्य ही नहीं करेगा, क्योकि ऐसा मानने पर वह द्रव्य अपरिणामो हो जायगा। किन्तु जैन शासन में किसी भी द्रव्यको अपरिणामो माना नही गया है । द्रव्यका लक्षण ही यह है - 'उत्पाद व्यय- ध्रौव्ययुक्त सत् । सवष्यलक्षणम् ।' त० सू० अतएव अपर पक्षको प्रकृतमें यही स्वीकार कर लेना चाहिए कि प्रत्येक समयमें प्रत्येक द्रव्य अपनेअपने कार्यका समय उपादान है और प्रत्येक समयमें उसके अनुकूल प्रयोगसे या विस्रसा वाह्य सामग्री भो
अपर पक्षका कहना है कि 'जब तक ज्ञाता दृष्टा नही वन जाते तब तक अन्तरग-वहिरग साधनोंको जुटाना चाहिए । सो प्रवृत में अपर पक्षको यही तो समझना है कि जब तक जुटानेका विकल्प है तभी तक इस जीवको ज्ञाता दृष्टा स्वभावरूप परिणति न होकर रागरूप परिणति होती है और जिस क्षण यह जीव स्वभावमन्मुख हो अन्तरग-बहिरग साधनोके जुटाने के विकल्पसे मुक्त हो जाता है उमी क्षण यह जीव अबुद्धिपूर्वक रागके सद्भावमें भी ज्ञाता- दृष्टा बन जाता है । स्वभावसे तो यह जीव ज्ञाता- दृष्टा है हो । परिणित में भी इसे ज्ञात दृष्टा बनना है । किन्तु एक ओर ता जुटानेके विकल्पको उपादेय मानता रहे और दूसरी ओर मुखमे यह कहता रहे कि मै ज्ञाता- दृष्टा वननेके मार्गपर चल रहा हूँ - इसे मोक्षमार्गका उपहास ही कहा जायगा । यदि यथार्थमं ज्ञाता- दृष्टा वननेका अन्तरगसे भाव हुआ है तो सर्व प्रथम ज्ञातादृष्टा स्वभावके प्रति आदरवान् होकर ऐसे मार्गका अभ्यास करना चाहिए जिससे यह जीव जुटाने के विकल्पसे मुक्त होकर परिणति में भी ज्ञाता- दृष्टा वन सके । आचार्य अमृतचन्द्र समयसारको टोकामें उस मार्गका निर्देश करते हुए लिखते है - अयि कथमपि मृत्वा तत्त्वकौतूहली सन् अनुभव भवमूर्तेः पाश्र्ववर्ती मुहूर्तम् । पृथगथ विलसन्त स्व समालोक्य येन त्यजमि लगिति मृर्त्या साकमेकत्वमोहम् ॥ तेईस ॥ हे भाई । तू किसी प्रकार महत् कष्टसे अथवा मरकर भी तत्त्वका कौतूहली होकर इस शरीरादि मूर्त द्रव्यका एक मुहूर्त पडौसो बनकर आत्मानुभव कर कि जिससे सर्व पर द्रव्योसे भिन्न विलसते हुए अपने आत्माको देखकर इस शरीरादि मूर्तिक पुद्गल द्रव्यके साथ एकत्व के मोहको शीघ्र ही छोड़ देगा ।। तेईस ।। यह स्वरूपको प्राप्त करनेका मार्ग है, अन्य सव रागके विकल्पोका ताना-बाना है । हमने अपने पिछले उत्तरमे उपादान और निमित्तिको विषम व्याप्तिका निषेधकर लिखा था कि प्रत्येक समय में उपादान और निमित्तकी प्रत्येक कार्यके प्रति अन्तरग और बहिरग व्याप्ति वनती रहती है जिससे कि प्रत्येक द्रव्य प्रत्येक समयमे उत्पाद व्ययरूप अपने-अपने कार्यको करता रहता है। किन्तु अपर पक्ष इसे माननेके लिए तैयार नहीं है । उस पक्षका कहना है कि 'निमित्तके अनुकूल उपादानका समागम होगा तो कार्य अवश्य होगा और उपादान के अनुकूल निमित्तका समागम होगा तो भो कार्य अवश्य होगा ।' इसपर पृच्छा यह है कि मान लो किसी समय निमित्त के अनुकूल उपादानका समागम नही हुआ तो कार्य होगा या नहीं ? और इसी प्रकार किसी समय उपादान के अनुकूल निमित्तका समागम नहीं हुमा तो भी कार्य होगा या नहीं ? अपर पक्ष यह तो कह नही सकना कि उम समय वह द्रव्य अपना कार्य ही नहीं करेगा, क्योकि ऐसा मानने पर वह द्रव्य अपरिणामो हो जायगा। किन्तु जैन शासन में किसी भी द्रव्यको अपरिणामो माना नही गया है । द्रव्यका लक्षण ही यह है - 'उत्पाद व्यय- ध्रौव्ययुक्त सत् । सवष्यलक्षणम् ।' तशून्य सूशून्य अतएव अपर पक्षको प्रकृतमें यही स्वीकार कर लेना चाहिए कि प्रत्येक समयमें प्रत्येक द्रव्य अपनेअपने कार्यका समय उपादान है और प्रत्येक समयमें उसके अनुकूल प्रयोगसे या विस्रसा वाह्य सामग्री भो
सम्पादकीय ईसुरी-तीन 'ईसुरी' तीन की सामग्री प्रेस में जाने के कुछ दिनों पहले जब मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा अनुदान आयोग के अध्यक्ष माननीय श्री श्यामाचरण दुबे सागर आये थे और मेरी उनसे भेंट हुई थी तो उन्होंने सबसे पहली बात जो मुझसे पूछी - वह थी कि 'क्या ईसुरी तीन की सामग्री प्रेस में चली गई ?' उसके कुछ ही दिनों पहले बंडा - बेलई के कवि और पत्रकार श्री मायूस सागरी प्रेमचंद की 'ईदगाह' नामक कहानी का अनुवाद लेकर आये थे और विलम्ब से अनुवाद कर सकने के लिये बहुत अफसोस प्रकट करते रहे थे । माननीय श्री श्यामाचरण दुबे अन्तर्राष्ट्रीय कीर्ति के समाजशास्त्री हैं, देश के शीर्षस्थ शिक्षाविद् हैं, अंग्रेजी और अनेक भारतीय भाषाओं के साहित्य के विदग्ध रसिक हैं । बंडा-बेलई के मायूस सागरी बुन्देली के कवि हैं और प्रतिबन्ध' नामक एक छोटी सी पत्रिका निकालते हैं । माननीय श्री दुबे और श्री मायूस सागरी के शिक्षा संस्कारों, जीवन-स्थितियों और पदप्रतिष्ठा में कहीं कोई साम्य नहीं है किन्तु 'ईसुरी' के प्रति उनकी आत्मीयता, सरोकार और चिन्ता एक जैसी है । 'ईसुरी' ने अपने दो वर्षों के संक्षिप्त अस्तित्व द्वारा लोक साहित्य एवं लोक संस्कृति के प्रति सामान्य रूप से और बुन्देली साहित्य और बुन्देली संस्कृति के प्रति विशेष रूप से जो शोधमूलक जिज्ञासा और सर्जनात्मक ऊर्जा उत्पन्न को है, वह 'ईसुरी' की सार्थकता के प्रति हमारे मन में गहरा आश्वासन उत्पन्न करती है । वास्तव में इन दिनों हमारे देश में और हिन्दी में विशेष रूप से जो शोधपरक गतिविधियाँ चल रही हैं, वे एक पुस्तक या पुस्तकालय में एकत्र ज्ञान की शुष्क, रुक्ष और नीरस अस्थियों को दूसरी पुस्तक में या जिसे गरिमा के साथ शोध प्रबन्ध या शोध आलेख कहा जाता है, स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया भर है। हमने 'ईसुरी' को सूखी रूखी बेस्वाद अस्थियों के स्थानान्तरण की इस उबाऊ और लगभग निरर्थक प्रक्रिया से संकल्पपूर्वक मुक्त रखा है। ज्ञान-विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में अस्थियों के स्थानान्तरण की वह प्रक्रिया भले ही थोड़ी बहुत काम की हो या कुछ मायने भी रखती हो, पर लोक साहित्य या लोक संस्कृति के सन्दर्भ में तो यह बिलकुल बेकार और बेमानी है । लोक साहित्य लोक के पास है और लोक संस्कृति भी लोक में रची-बसी है । अतः बिना लोक के पास गये या लोक को विश्वास में लिये लोक साहित्य और लोक संस्कृति के क्षेत्र में नया, सार्थक और उपयोगी कुछ नहीं किया जा सकता । यही कारण है कि 'ईसुरी का आग्रह अज्ञात या अल्पज्ञात कवियों, संगीतकारों, नर्तकों या गाथाओं अथवा पांडुलिपियों के संधान का और उनके विश्लेषण- व्याख्यान का रहा है । 'ईसुरी' में विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में कार्यरत विद्वानों और शोधकर्ताओं के प्रति हमारा कोई दुराव नहीं है किन्तु हमारा झुकाव उन संस्कृति प्रेमियों और साहित्य रसिकों की ओर अधिक है जो साइकिलों के पंक्चर ठीक कर रहे हैं या कहीं मृदंग बजा रहे हैं या कहीं गाँवों-खेड़ों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं । यही कारण है कि 'ईसुरी' जिन
सम्पादकीय ईसुरी-तीन 'ईसुरी' तीन की सामग्री प्रेस में जाने के कुछ दिनों पहले जब मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा अनुदान आयोग के अध्यक्ष माननीय श्री श्यामाचरण दुबे सागर आये थे और मेरी उनसे भेंट हुई थी तो उन्होंने सबसे पहली बात जो मुझसे पूछी - वह थी कि 'क्या ईसुरी तीन की सामग्री प्रेस में चली गई ?' उसके कुछ ही दिनों पहले बंडा - बेलई के कवि और पत्रकार श्री मायूस सागरी प्रेमचंद की 'ईदगाह' नामक कहानी का अनुवाद लेकर आये थे और विलम्ब से अनुवाद कर सकने के लिये बहुत अफसोस प्रकट करते रहे थे । माननीय श्री श्यामाचरण दुबे अन्तर्राष्ट्रीय कीर्ति के समाजशास्त्री हैं, देश के शीर्षस्थ शिक्षाविद् हैं, अंग्रेजी और अनेक भारतीय भाषाओं के साहित्य के विदग्ध रसिक हैं । बंडा-बेलई के मायूस सागरी बुन्देली के कवि हैं और प्रतिबन्ध' नामक एक छोटी सी पत्रिका निकालते हैं । माननीय श्री दुबे और श्री मायूस सागरी के शिक्षा संस्कारों, जीवन-स्थितियों और पदप्रतिष्ठा में कहीं कोई साम्य नहीं है किन्तु 'ईसुरी' के प्रति उनकी आत्मीयता, सरोकार और चिन्ता एक जैसी है । 'ईसुरी' ने अपने दो वर्षों के संक्षिप्त अस्तित्व द्वारा लोक साहित्य एवं लोक संस्कृति के प्रति सामान्य रूप से और बुन्देली साहित्य और बुन्देली संस्कृति के प्रति विशेष रूप से जो शोधमूलक जिज्ञासा और सर्जनात्मक ऊर्जा उत्पन्न को है, वह 'ईसुरी' की सार्थकता के प्रति हमारे मन में गहरा आश्वासन उत्पन्न करती है । वास्तव में इन दिनों हमारे देश में और हिन्दी में विशेष रूप से जो शोधपरक गतिविधियाँ चल रही हैं, वे एक पुस्तक या पुस्तकालय में एकत्र ज्ञान की शुष्क, रुक्ष और नीरस अस्थियों को दूसरी पुस्तक में या जिसे गरिमा के साथ शोध प्रबन्ध या शोध आलेख कहा जाता है, स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया भर है। हमने 'ईसुरी' को सूखी रूखी बेस्वाद अस्थियों के स्थानान्तरण की इस उबाऊ और लगभग निरर्थक प्रक्रिया से संकल्पपूर्वक मुक्त रखा है। ज्ञान-विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में अस्थियों के स्थानान्तरण की वह प्रक्रिया भले ही थोड़ी बहुत काम की हो या कुछ मायने भी रखती हो, पर लोक साहित्य या लोक संस्कृति के सन्दर्भ में तो यह बिलकुल बेकार और बेमानी है । लोक साहित्य लोक के पास है और लोक संस्कृति भी लोक में रची-बसी है । अतः बिना लोक के पास गये या लोक को विश्वास में लिये लोक साहित्य और लोक संस्कृति के क्षेत्र में नया, सार्थक और उपयोगी कुछ नहीं किया जा सकता । यही कारण है कि 'ईसुरी का आग्रह अज्ञात या अल्पज्ञात कवियों, संगीतकारों, नर्तकों या गाथाओं अथवा पांडुलिपियों के संधान का और उनके विश्लेषण- व्याख्यान का रहा है । 'ईसुरी' में विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में कार्यरत विद्वानों और शोधकर्ताओं के प्रति हमारा कोई दुराव नहीं है किन्तु हमारा झुकाव उन संस्कृति प्रेमियों और साहित्य रसिकों की ओर अधिक है जो साइकिलों के पंक्चर ठीक कर रहे हैं या कहीं मृदंग बजा रहे हैं या कहीं गाँवों-खेड़ों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं । यही कारण है कि 'ईसुरी' जिन
(current) USA के राज्य टेक्सास में कुदरत का कहर जारी है. तेज हवाओं के साथ ओले गिरने की घटना सामने आई है. Desh Ki Bahas : हिजाब के हिसाब में और कितना हंगामा? Desh Ki Bahas : हिजाब विवाद या कट्टर जिहाद? Desh Ki Bahas : 'कश्मीर के सच' से सेक्युलर खेमा परेशान?
USA के राज्य टेक्सास में कुदरत का कहर जारी है. तेज हवाओं के साथ ओले गिरने की घटना सामने आई है. Desh Ki Bahas : हिजाब के हिसाब में और कितना हंगामा? Desh Ki Bahas : हिजाब विवाद या कट्टर जिहाद? Desh Ki Bahas : 'कश्मीर के सच' से सेक्युलर खेमा परेशान?
बिहार बोर्ड की 10वीं की परीक्षाएं 17 से 24 फरवरी 2021 के बीच हुई थी. नई दिल्ली. बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड (Board School Examination Board, BSEB) ने कक्षा 12 के परिणाम के लिए स्क्रूटनी प्रक्रिया शुरू कर दी है. रिजल्ट 26 मार्च को घोषित किया गया था. BSEB के अपडेट के अनुसार, परिणाम जांच के लिए आवेदन विंडो 7 अप्रैल तक खुली रहेगी. जो अपने परिणामों से संतुष्ट नहीं हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट, biharboardonline. bihar. gov. in पर आवेदन कर अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करा सकते हैं. छात्रों को स्क्रूटनी के लिए प्रति विषय 70 रुपये का शुल्क देना होगा. -बीएसईबी की आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline. bihar. gov. in पर जाएं. -होम पेज पर, "Scrutiny Registration' लिंक पर जाएं. -डिटल भरें और बीएसईबी कक्षा 12 के लिए स्क्रूटनी फॉर्म 2021 भरें. -सबमिट बटन पर क्लिक करें. -शुल्क का भुगतान क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से करें. एक बार स्क्रूटनी परिणाम जांच के लिए आवेदन करने के बाद, कैंडिडेट्स अपनी इवैल्युएडेट उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी भी प्राप्त कर सकते हैं. जो छात्र एक या दो विषयों में असफल रहे, उन्हें कंपार्टमेंट परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी. इस साल बिहार बोर्ड कक्षा 12 का उत्तीर्ण प्रतिशत 78. 04 प्रतिशत रहा. पिछले साल कुल पास प्रतिशत 80. 44 प्रतिशत था. .
बिहार बोर्ड की दसवीं की परीक्षाएं सत्रह से चौबीस फरवरी दो हज़ार इक्कीस के बीच हुई थी. नई दिल्ली. बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड ने कक्षा बारह के परिणाम के लिए स्क्रूटनी प्रक्रिया शुरू कर दी है. रिजल्ट छब्बीस मार्च को घोषित किया गया था. BSEB के अपडेट के अनुसार, परिणाम जांच के लिए आवेदन विंडो सात अप्रैल तक खुली रहेगी. जो अपने परिणामों से संतुष्ट नहीं हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट, biharboardonline. bihar. gov. in पर आवेदन कर अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करा सकते हैं. छात्रों को स्क्रूटनी के लिए प्रति विषय सत्तर रुपयापये का शुल्क देना होगा. -बीएसईबी की आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline. bihar. gov. in पर जाएं. -होम पेज पर, "Scrutiny Registration' लिंक पर जाएं. -डिटल भरें और बीएसईबी कक्षा बारह के लिए स्क्रूटनी फॉर्म दो हज़ार इक्कीस भरें. -सबमिट बटन पर क्लिक करें. -शुल्क का भुगतान क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से करें. एक बार स्क्रूटनी परिणाम जांच के लिए आवेदन करने के बाद, कैंडिडेट्स अपनी इवैल्युएडेट उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी भी प्राप्त कर सकते हैं. जो छात्र एक या दो विषयों में असफल रहे, उन्हें कंपार्टमेंट परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी. इस साल बिहार बोर्ड कक्षा बारह का उत्तीर्ण प्रतिशत अठहत्तर. चार प्रतिशत रहा. पिछले साल कुल पास प्रतिशत अस्सी. चौंतालीस प्रतिशत था. .
जर्मन विंग्स का स्पेन के बार्सिलोना से डुजलडॉर्फ जा रहा एयरबस ए 320 का क्रेश हो गया है। विमान में 142 यात्री और 6 क्रू मेंबर सवार थे। बताया गया है कि विमान में सवार सभी लोग मारे गए । विमान के दक्षिण फ्रांस के डीन शहर के पास एल्प्स पर्वतों की पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर है। मीडिया के मुताबिक वहां विमान का मलबा भी मिला है। फ्रांस की पुलिस और विमानन अधिकारियों का कहना है कि विमान दक्षिणी फ्रांस में एल्प्स पर्वत श्रंखला में बार्सिलोन्ने और डीन के बीच हादसे का शिकार हुआ है।
जर्मन विंग्स का स्पेन के बार्सिलोना से डुजलडॉर्फ जा रहा एयरबस ए तीन सौ बीस का क्रेश हो गया है। विमान में एक सौ बयालीस यात्री और छः क्रू मेंबर सवार थे। बताया गया है कि विमान में सवार सभी लोग मारे गए । विमान के दक्षिण फ्रांस के डीन शहर के पास एल्प्स पर्वतों की पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर है। मीडिया के मुताबिक वहां विमान का मलबा भी मिला है। फ्रांस की पुलिस और विमानन अधिकारियों का कहना है कि विमान दक्षिणी फ्रांस में एल्प्स पर्वत श्रंखला में बार्सिलोन्ने और डीन के बीच हादसे का शिकार हुआ है।
साल 2017 में आई फिल्म 'सिमरन' के निर्देशक हंसल मेहता ने कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को लेकर बड़ा बयान दिया है. इस फिल्म में कंगना लीड रोल में थीं. बॉलीरवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अपने बेबाक बयानों के चलते ज्यादातर सुर्खियों में रहती हैं. कंगना रनौत बिना किसी झिझक के अपनी बात रखती हैं. अपनी तेज-तर्रार बयानों के साथ-साथ कंगना रनौत (Kangana Ranaut) जबरदस्त स्क्रीन प्रेसेंस के लिए भी जानी जाती हैं. कंगना रनौत की रुचि एक्टिंग के साथ-साथ निर्देशन के क्षेत्र में भी है. वह अपनी फिल्म से जुड़े हर बड़े फैसले में शामिल होती हैं. इस बीच, साल 2017 में आई फिल्म 'सिमरन' के निर्देशक हंसल मेहता ने कंगना रनौत को लेकर बड़ा बयान दिया है. इस फिल्म में कंगना लीड रोल में थीं. हालांकि, ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा कमाल नहीं कर पाई. निर्देशक हंसल मेहता ने कंगना के साथ फिल्म 'सिमरन' में काम किया था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुए. बता दें कि 'सिमरन' 2017 में रिलीज हुई थी. हंसल मेहता ने कंगना के साथ काम करने को लेकर कहा कि वह उनकी बहुत बड़ी गलती थी. साथ ही उन्होंने माना कि कंगना अभी भी एक बड़ी स्टार हैं. इससे पहले 'सिमरन 'के लेखक अपूर्वा असरानी ने दावा किया था कि हंसल के प्रोजेक्ट से हटने के बाद कंगना ने डायरेक्टर का पद टेकओवर कर लिया था. यह पूछे जाने पर कि क्या कंगना ने फिल्म प्रोडक्शन का काम अपने हाथ में ले लिया था, तो इसके जवाब में हंसल मेहता ने कहा किउनके पास संभालने के लिए कुछ नहीं बचा था क्योंकि उन्होंने केवल वही शूट किया था, जो वह शूट करना चाहती थीं. एक ऑनलाइन पोर्टल से बात करते हुए निर्देशक हंसल मेहता ने कहा कि कंगना एक 'प्रतिभाशाली' एक्ट्रेस हैं. लेकिन उन्हें लगता है कि उन्होंने अपने बारे में फिल्में बनाकर खुद को सीमित कर लिया है. उन्होंने आगे कहा, 'आपको सभी कैरेक्टर को वैसा बनाने की ज़रूरत नहीं है जैसा आप विश्वास करना चाहते हैं कि आप हैं. हंसल मेहता ने आगे कहा किवह सिर्फ अपने बारे में बात कर रही हैं. उन्होंने कहा कि यह उनकी आलोचना करने की जगह नहीं है कि वह क्या ऑप्शन चुनती हैं. आपको बता दें कि डायरेक्टर हंसल मेहता को फिल्म 'शाहिद' और 'सिटी लाइट्स' के लिए जाना जाता है. इसके अलावा उनकी वेब सीरीज 'स्कैम 1992' को काफी सराहा गया. इस वेब सीरीज में प्रतीक गांधी लीड रोल में थे. जिसके बाद उनकी गिनती सफल अभिनेताओं में होने लगी. बहरहाल, फिल्म सिमरन के निर्देशक हंसल मेहतना एक्ट्रेस कंगना रनौत को लेकर बड़ा बयान दिया.
साल दो हज़ार सत्रह में आई फिल्म 'सिमरन' के निर्देशक हंसल मेहता ने कंगना रनौत को लेकर बड़ा बयान दिया है. इस फिल्म में कंगना लीड रोल में थीं. बॉलीरवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अपने बेबाक बयानों के चलते ज्यादातर सुर्खियों में रहती हैं. कंगना रनौत बिना किसी झिझक के अपनी बात रखती हैं. अपनी तेज-तर्रार बयानों के साथ-साथ कंगना रनौत जबरदस्त स्क्रीन प्रेसेंस के लिए भी जानी जाती हैं. कंगना रनौत की रुचि एक्टिंग के साथ-साथ निर्देशन के क्षेत्र में भी है. वह अपनी फिल्म से जुड़े हर बड़े फैसले में शामिल होती हैं. इस बीच, साल दो हज़ार सत्रह में आई फिल्म 'सिमरन' के निर्देशक हंसल मेहता ने कंगना रनौत को लेकर बड़ा बयान दिया है. इस फिल्म में कंगना लीड रोल में थीं. हालांकि, ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा कमाल नहीं कर पाई. निर्देशक हंसल मेहता ने कंगना के साथ फिल्म 'सिमरन' में काम किया था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुए. बता दें कि 'सिमरन' दो हज़ार सत्रह में रिलीज हुई थी. हंसल मेहता ने कंगना के साथ काम करने को लेकर कहा कि वह उनकी बहुत बड़ी गलती थी. साथ ही उन्होंने माना कि कंगना अभी भी एक बड़ी स्टार हैं. इससे पहले 'सिमरन 'के लेखक अपूर्वा असरानी ने दावा किया था कि हंसल के प्रोजेक्ट से हटने के बाद कंगना ने डायरेक्टर का पद टेकओवर कर लिया था. यह पूछे जाने पर कि क्या कंगना ने फिल्म प्रोडक्शन का काम अपने हाथ में ले लिया था, तो इसके जवाब में हंसल मेहता ने कहा किउनके पास संभालने के लिए कुछ नहीं बचा था क्योंकि उन्होंने केवल वही शूट किया था, जो वह शूट करना चाहती थीं. एक ऑनलाइन पोर्टल से बात करते हुए निर्देशक हंसल मेहता ने कहा कि कंगना एक 'प्रतिभाशाली' एक्ट्रेस हैं. लेकिन उन्हें लगता है कि उन्होंने अपने बारे में फिल्में बनाकर खुद को सीमित कर लिया है. उन्होंने आगे कहा, 'आपको सभी कैरेक्टर को वैसा बनाने की ज़रूरत नहीं है जैसा आप विश्वास करना चाहते हैं कि आप हैं. हंसल मेहता ने आगे कहा किवह सिर्फ अपने बारे में बात कर रही हैं. उन्होंने कहा कि यह उनकी आलोचना करने की जगह नहीं है कि वह क्या ऑप्शन चुनती हैं. आपको बता दें कि डायरेक्टर हंसल मेहता को फिल्म 'शाहिद' और 'सिटी लाइट्स' के लिए जाना जाता है. इसके अलावा उनकी वेब सीरीज 'स्कैम एक हज़ार नौ सौ बानवे' को काफी सराहा गया. इस वेब सीरीज में प्रतीक गांधी लीड रोल में थे. जिसके बाद उनकी गिनती सफल अभिनेताओं में होने लगी. बहरहाल, फिल्म सिमरन के निर्देशक हंसल मेहतना एक्ट्रेस कंगना रनौत को लेकर बड़ा बयान दिया.
हैदराबाद में भी दिल्ली के श्रद्धा मर्डर केस जैसी एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां भी एक शख्स ने आफताब पूनावाला की तरह ही अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या कर दी और उसके शरीर को पत्थर काटने वाली मशीन से टुकड़ों में काटकर फ्रिज में रखा। फिर शरीर के उन टुकड़ों को फ्रिज से निकालकर वह अलग-अलग जगहों पर फेंक देता था। आरोपी ने पीड़िता की हत्या कर पैर और हाथ काटकर अपने घर के एक रेफ्रिजरेटर में रख दिए थे और बदबू से बचने के लिए उस पर इत्र का छिड़काव करता था। इस घटना का खुलासा तब हुआ जब हैदराबाद पुलिस को 17 मई को शहर में मुसी नदी के पास एक कटा हुआ सिर मिला था। इस रहस्य को सुलझाने के बाद गुरुवार को यह चौंकाने वाला अपराध सामने आया है। DCP दक्षिण पूर्व क्षेत्र, सीएच रूपेश ने बताया कि हमें मुसी नदी के पास एक महिला का कटा हुआ सिर मिलने की सूचना मिली थी। एक हफ्ते की तफ्तीश के बाद हमे संकेत मिला जिसके आधार पर हमने आरोपी(चंद्र मोहन) को गिरफ़्तार किया। मामला पेसों की लेनदेन का है। काफी समय पहले अपने पति से अलग रहने वाली महिला चंद्र मोहन के साथ दिलसुखनगर स्थित चैतन्यपुरी कॉलोनी स्थित उसके घर में रह रही थी। आरोपी चंद्र मोहन 15 साल से लिव इन रिलेशन में रह रहा था। आरोपी ने 2018 के बाद से मृतका से करीब 7 लाख रुपए लिए और वापस नहीं किये। बार-बार मांगने पर भी चंद्र मोहन ने पैसे नहीं लौटाए, इसके बाद योजना के अनुसार 12 मई को दोपहर में मोहन ने मृतका से झगड़ा किया। उसने सीने और पेट पर चाकू से वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई। हत्या करने के बाद आरोपी ने शव को टुकड़ों में काटकर ठिकाने लगाने के लिए पत्थर काटने की दो छोटी मशीनें खरीदीं। उसने धड़ से सिर काटकर काले पॉलीथिन के कवर में रख दिया। फिर उसने टांगों और हाथों को धड़ से अलग किया, टांगों और हाथों को रेफ्रिजरेटर में रख दिया और डिस्पोजल के लिए धड़ को एक सूटकेस में रख दिया। आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने पीड़िता के शरीर के अंगों को उसके घर से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 15 मई को आरोपी ऑटोरिक्शा से मुसी नदी के पास पहुंचा और अनुराधा का कटा सिर वहीं फेंककर चला गया। इसके बाद आरोपी ने फिनाइल, डेटॉल, परफ्यूम अगरबत्ती और कपूर खरीदा और उन्हें नियमित रूप से अनुराधा के कटे शरीर के अंगों पर छिड़कता रहा, ताकि आसपास के क्षेत्र में बदबू न फैले। उसने सोशल मीडिया पर शरीर के अंगों को कैसे डिस्पोज किया जाए, इस पर वीडियो भी देखा था। पुलिस ने शेयर बाजार में ऑनलाइन ट्रेडिंग करने वाले अविवाहित बी. चंद्र मोहन को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की। पुलिस के मुताबिक, वह मृतका के मोबाइल फोन से उसके जानने वाले लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए संदेश भेजता रहा कि वह जीवित है और कहीं और रह रही है। 17 मई को मुसी नदी के पास अफजल नगर कम्युनिटी हॉल के सामने कूड़ा फेंकने की जगह पर सफाई कर्मचारियों को महिला का कटा हुआ सिर मिला था, जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी गई। मलकपेट पुलिस ने मामला दर्ज किया और मामले को सुलझाने के लिए आठ टीमों का गठन किया। सीसीटीवी फुटेज की स्कैनिंग और अन्य तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल से जुड़ी गहन जांच के बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान की।
हैदराबाद में भी दिल्ली के श्रद्धा मर्डर केस जैसी एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां भी एक शख्स ने आफताब पूनावाला की तरह ही अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या कर दी और उसके शरीर को पत्थर काटने वाली मशीन से टुकड़ों में काटकर फ्रिज में रखा। फिर शरीर के उन टुकड़ों को फ्रिज से निकालकर वह अलग-अलग जगहों पर फेंक देता था। आरोपी ने पीड़िता की हत्या कर पैर और हाथ काटकर अपने घर के एक रेफ्रिजरेटर में रख दिए थे और बदबू से बचने के लिए उस पर इत्र का छिड़काव करता था। इस घटना का खुलासा तब हुआ जब हैदराबाद पुलिस को सत्रह मई को शहर में मुसी नदी के पास एक कटा हुआ सिर मिला था। इस रहस्य को सुलझाने के बाद गुरुवार को यह चौंकाने वाला अपराध सामने आया है। DCP दक्षिण पूर्व क्षेत्र, सीएच रूपेश ने बताया कि हमें मुसी नदी के पास एक महिला का कटा हुआ सिर मिलने की सूचना मिली थी। एक हफ्ते की तफ्तीश के बाद हमे संकेत मिला जिसके आधार पर हमने आरोपी को गिरफ़्तार किया। मामला पेसों की लेनदेन का है। काफी समय पहले अपने पति से अलग रहने वाली महिला चंद्र मोहन के साथ दिलसुखनगर स्थित चैतन्यपुरी कॉलोनी स्थित उसके घर में रह रही थी। आरोपी चंद्र मोहन पंद्रह साल से लिव इन रिलेशन में रह रहा था। आरोपी ने दो हज़ार अट्ठारह के बाद से मृतका से करीब सात लाख रुपए लिए और वापस नहीं किये। बार-बार मांगने पर भी चंद्र मोहन ने पैसे नहीं लौटाए, इसके बाद योजना के अनुसार बारह मई को दोपहर में मोहन ने मृतका से झगड़ा किया। उसने सीने और पेट पर चाकू से वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई। हत्या करने के बाद आरोपी ने शव को टुकड़ों में काटकर ठिकाने लगाने के लिए पत्थर काटने की दो छोटी मशीनें खरीदीं। उसने धड़ से सिर काटकर काले पॉलीथिन के कवर में रख दिया। फिर उसने टांगों और हाथों को धड़ से अलग किया, टांगों और हाथों को रेफ्रिजरेटर में रख दिया और डिस्पोजल के लिए धड़ को एक सूटकेस में रख दिया। आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने पीड़िता के शरीर के अंगों को उसके घर से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पंद्रह मई को आरोपी ऑटोरिक्शा से मुसी नदी के पास पहुंचा और अनुराधा का कटा सिर वहीं फेंककर चला गया। इसके बाद आरोपी ने फिनाइल, डेटॉल, परफ्यूम अगरबत्ती और कपूर खरीदा और उन्हें नियमित रूप से अनुराधा के कटे शरीर के अंगों पर छिड़कता रहा, ताकि आसपास के क्षेत्र में बदबू न फैले। उसने सोशल मीडिया पर शरीर के अंगों को कैसे डिस्पोज किया जाए, इस पर वीडियो भी देखा था। पुलिस ने शेयर बाजार में ऑनलाइन ट्रेडिंग करने वाले अविवाहित बी. चंद्र मोहन को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की। पुलिस के मुताबिक, वह मृतका के मोबाइल फोन से उसके जानने वाले लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए संदेश भेजता रहा कि वह जीवित है और कहीं और रह रही है। सत्रह मई को मुसी नदी के पास अफजल नगर कम्युनिटी हॉल के सामने कूड़ा फेंकने की जगह पर सफाई कर्मचारियों को महिला का कटा हुआ सिर मिला था, जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी गई। मलकपेट पुलिस ने मामला दर्ज किया और मामले को सुलझाने के लिए आठ टीमों का गठन किया। सीसीटीवी फुटेज की स्कैनिंग और अन्य तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल से जुड़ी गहन जांच के बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान की।
नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और रन मशीन के नाम से मशहूर विराट कोहली इस साल अक्टूबर-नवंबर में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 विश्व कप का हिस्सा होंगे या नहीं ? यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा, मगर उससे पहले इस बात को लेकर बहस शुरू हो गई है कि क्या उनकी मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उन्हें टीम में बने रहना चाहिए या नहीं? कई दिग्गज क्रिकेटर इस पर अपनी राय रख चुके हैं। विश्व विजेता भारतीय कप्तान कपिल देव तो स्पष्ट शब्दों में कह चुके हैं, कि किसी भी खिलाड़ी का नाम इतना बड़ा नहीं होता, जो वह अपने नाम के दम पर टीम में बने रहे। वहीं, इंग्लैंड के खिलाफ रविवार को खेले गए तीसरे टी20 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले के बाद सहवाग द्वारा किए गए ट्वीट में भले ही विराट का नाम ना हो, मगर ऐसा लग रहा है कि यह ट्वीट कोहली के लिए ही किया गया है। दरअसल, सहवाग ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि, 'भारत के पास कई सारे ऐसे बैट्समैन हैं, जो शुरुआत से ही तेज खेल सकते हैं, मगर उनमें से कुछ ऐसे हैं जो दुर्भाग्य से बाहर बैठे हुए हैं। टी20 में बेस्ट फॉर्म के हिसाब से हमें उपलब्ध खिलाड़ियों को लेकर खेलने को लेकर रणनीति तैयार करनी होगी। ' हालाँकि, भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने लगातार विराट का बचाव ही किया है। लेकिन, दिग्गजों का कहना है कि, सूर्यकुमार यादव, संजू सैमसन और ऐसे तमाम खिलाड़ी हैं, जो विराट के स्थान पर अच्छा खेल सकते हैं। जब गांगुली-सहवाग-युवराज को टीम से बाहर किया जा सकता है, तो कोहली को क्यों नहीं ?
नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और रन मशीन के नाम से मशहूर विराट कोहली इस साल अक्टूबर-नवंबर में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टीबीस विश्व कप का हिस्सा होंगे या नहीं ? यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा, मगर उससे पहले इस बात को लेकर बहस शुरू हो गई है कि क्या उनकी मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उन्हें टीम में बने रहना चाहिए या नहीं? कई दिग्गज क्रिकेटर इस पर अपनी राय रख चुके हैं। विश्व विजेता भारतीय कप्तान कपिल देव तो स्पष्ट शब्दों में कह चुके हैं, कि किसी भी खिलाड़ी का नाम इतना बड़ा नहीं होता, जो वह अपने नाम के दम पर टीम में बने रहे। वहीं, इंग्लैंड के खिलाफ रविवार को खेले गए तीसरे टीबीस अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले के बाद सहवाग द्वारा किए गए ट्वीट में भले ही विराट का नाम ना हो, मगर ऐसा लग रहा है कि यह ट्वीट कोहली के लिए ही किया गया है। दरअसल, सहवाग ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि, 'भारत के पास कई सारे ऐसे बैट्समैन हैं, जो शुरुआत से ही तेज खेल सकते हैं, मगर उनमें से कुछ ऐसे हैं जो दुर्भाग्य से बाहर बैठे हुए हैं। टीबीस में बेस्ट फॉर्म के हिसाब से हमें उपलब्ध खिलाड़ियों को लेकर खेलने को लेकर रणनीति तैयार करनी होगी। ' हालाँकि, भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने लगातार विराट का बचाव ही किया है। लेकिन, दिग्गजों का कहना है कि, सूर्यकुमार यादव, संजू सैमसन और ऐसे तमाम खिलाड़ी हैं, जो विराट के स्थान पर अच्छा खेल सकते हैं। जब गांगुली-सहवाग-युवराज को टीम से बाहर किया जा सकता है, तो कोहली को क्यों नहीं ?
दूसरा कुछ नहीं होगा । जितना अन्तर एक अंगरेज, एक फ्रांसीसी या एक जर्मन के बीच है उससे कहीं बड़ा अन्तर भारत के एक अफगान, एक सिख, एक पंजाबी, एक बंगाली तथा एक द्रविड़ के बीच है। इन सभी को मिलाकर एक हिन्दू जाति है । यदि हम सभी भारतीयों के लिये किसी भी एक निन्दासूचक विशेषण का प्रयोग करते हैं तो उसका तात्पर्यं यह होता है कि हमने सभी को एक ही लाठी से हॉकने का प्रयत्न किया है। आप ही लोग सोचे कि जिस जाति में इतने अधिक प्रकार के लोग शामिल हों उसकी भली या बुरी विशेषता एक ही शब्द में कैसे की जा सकती हैं। मेरी इच्छा हे कि मैं आप लोगो के सामने पर जान मालकम द्वारा लिखित कुछ चाक्यों को दुहराऊँ । उन्होंने कहा है कि "जिन लोगो के पास देखने वाली आंखे हैं, वे बड़ी ही सरलता से देख सकते हैं कि जिन वर्गों को मिलकर हिन्दू जाति बनी है, उनमें अनेक चारित्रिक वैभिन्य है । जिस हिन्दू राष्ट्र जाति के लिये हम इस प्रकार के अनादरसूचक शब्दों का प्रयोग करते है, उसमें इतने अधिक भिन्न प्रकार के लोग हैं कि उन्हें एक ही डंडे से हाँकना अवश्य ही भारी भूल होगी ।" सर जान मालकम के अनुसार बंगाल के लोग शारिरिक दृष्टि से कमजोर होते हैं परन्तु उनका मस्तिष्क अत्यधिक विकसित होता है और थोड़ी भीरुता उनमें अवश्य होती हैं । दक्षिण बंगाल में हिन्दुओं की निम्न जातियों का निवास है परन्तु उनकी भी विशेषतायें उच्च हिन्दुओ की ही तरह है। अपने विवरण को चालू रखते हुए उन्होन लिखा ह कि "ज्याही ग्राप बिहार प्रान्त के जिलों में प्रवेश करते हैं त्यांही आपको हिन्दू एक जाति के रूप में दिखायी देने लगते हैं। सामान्यतया उनका कद ही अधिक ऊँचा नहीं होता और न ही केवल उनकी शारीरिक बनावट ही सुगठित होती है, बल्कि वे मानसिक रूप से भी बंगालियों से भिन्न होते हैं और उनमें मानवता के अनेक दुर्लभ गुण पाये जाते हैं। वे साहसी, उदार, मानवतापूर्ण एवम् अतिथि सेवी होते हे और उनकी सत्यनिष्ठा उतनी ही प्रशंसनीय हे जितना उनका साहस ।" अपने इस द्वितीय भाषण के क्रम में मैने जो कुछ कहा है उससे इतना तो आप समझ ही गये होंगे कि हिमालय से लेकर लंका तक के हिन्दुओं के प्रति हमारे लोगों के मन में जो एक प्रकार की दुर्भावना बद्धमूल हो गयी ह, में उसे हटा देने का प्रयत्न कर रहा । यह सत्य है परन्तु मेरे इस प्रकार के प्रयत्न का ऐसा अर्थ लगा लेने की भूल आप लोग न कर बैठे कि में भारत का एक आदर्श रूप आप लोगों के समक्ष उपस्थित करने जा रहा हूँ, जिसकी सभी कालिमाएँ धो-पोंछ कर साफ कर दी गयी हों ओर जिसमें केवल अपरिमित माधुर्य व प्रकाश मात्र ही दिखाया गया हो । मैं स्वयम् कभी भारत नहीं गया हूँ अतः मैं केवल इतिहास कर्ताओं के अधिकार एवम् कर्तव्य मात्र पालन करने का दावा कर सकता हैं और वह अधिकार यह है कि किसी भी विषय का विवरण प्रस्तुत करते हुए उसके सम्बन्ध की सभी प्राप्त सूचनाओं को एकत्रित कर लिया जाय। सूचनाओं को एकत्रित कर लेने के बाद इतिहास लसक का कर्तव्य हो जाता है कि ऐतिहासिक समालोचना के नियमो के अनुसार उन्हें क्रम से सजा कर पाठकों के हाथा में दे । सुदूर अतीत कालीन हिन्दुआ के चरित्र का विवरण प्रस्तुत करते हुए मैं उसी अधिकार एवम उसी कर्तव्य का पालन मात्र कर रहा है और इस कार्य के लिए मुझको यूनानी लेखक एवम भारतीय विद्वानी की कृतियों का सहारा लेना पड़ेगा। अर्वाचीन भारत के लोगो के चारित्रिक विवरा देने में लिये हमे अश्य हो उन विजयिनी जातियों के लेनका का सहारा लेना पड़ेगा जिन्हाने हिन्दुओं को जीतना अपेक्षाकृत सरल पाया परन्तु उन पर शासन करने जिन्हें अभूतपूर्व कठिनाइयों की अनुभूति हुई। पिछली सदी के प्रारम्भ में वर्तमान तक का विवरण प्रस्तुत करने के लिए हमें कुछ तो सहारा लेना पड़ेगा उन महानुभावो का जिन्होंने कुछ वर्षों तक भारत एवम् भारतीयों में प्रशासनाधिकारी या सैनिक अधिकारी के रूप में रह ह और बड़ा से लौटने के पश्चात् अपने भारत ग्यम् भारतीय सम्बन्धी अनुभवों को पुरतकाकार कृपया कर हम सबको लाभान्वित किया है तथा कुछ महारा हमें उन भारतीय मित्रों का भी लना पड़ेगा जिनकी व्यक्तिगत मित्रता तथा जिनके व्यक्तिगत परिचय का रसास्वादन करने का अवसर मुझ इंग्लैंड, फ्रांस तथा जर्मनी में मिल चुका है। यही पर मुझे इस बात को भी स्पष्ट कर देना चाहिये कि चूकि में उन लोगा क सामने बोल रहा है, जो अनि निकट भविष्य में भारत के शासक व प्रशासक हागे । अतः म आप सबसे अनुमति मार्ग गा कि मुझउन थोद में भारतीय नागरिक यम सैनिक सेवा विशिष्ट अधिकारियों को उन करने दे जो लम्बे समय तक भारत म बहको का एवम उनके निवासियों का सूक्ष्म अध्ययन कर चुके है और अपनअन्ययनकान म जिन्होंने न तो अपना विवेक गोया है और संगम तथा जिनकी विचार पति किमी मी पूर्वगामी लेखक के विचारा सदपित नही हई । सौभाग्य में उन लोगा न भी इस विषय को हाथ में लिया है जिस पर हम हम समय विचार कर रह । अर्थान उन्होंने भी भारतीयों की सत्य प्रियता या असत्य प्रियता पर अपना विचार प्रगद किया है । लोगा को जानन, उनसे परि चित होने एवम उनमें से कितना ही से मित्रता स्थापित करने का सौभाग्य व आनन्द मुके मिला जो ईस्ट इंडिया कम्पनी की श्रीनग्य भारतीय सेना म भारत जाकर मना बड़ा कु वर्षों तक रह कर इस देश म लौट छ । उनी बाना से मुक्त पता चला कि उन्होंने नटिक लोगा को समीप में देखा और परमा है। उन लोगा न उनको उनक शिष्टाचार की तथा उनकी चारित्रिक विशेषताओं का अध्ययन उन लोगों से अधिक गम्भीर रूप से किया है जो अभी केवल पचीस वर्ष पूर्व यहा में पास होकर गये है और इनन दिना म नाम व श्रम कमाकर स्वदेश को लौट रह ह । एक जमाना था कि भारत हम बहुत दूर था, उस समय किसी भी अंगरन का भारत जाना प्रकाशन्नर म निर्वासनही माना जाता था, परन्तु
दूसरा कुछ नहीं होगा । जितना अन्तर एक अंगरेज, एक फ्रांसीसी या एक जर्मन के बीच है उससे कहीं बड़ा अन्तर भारत के एक अफगान, एक सिख, एक पंजाबी, एक बंगाली तथा एक द्रविड़ के बीच है। इन सभी को मिलाकर एक हिन्दू जाति है । यदि हम सभी भारतीयों के लिये किसी भी एक निन्दासूचक विशेषण का प्रयोग करते हैं तो उसका तात्पर्यं यह होता है कि हमने सभी को एक ही लाठी से हॉकने का प्रयत्न किया है। आप ही लोग सोचे कि जिस जाति में इतने अधिक प्रकार के लोग शामिल हों उसकी भली या बुरी विशेषता एक ही शब्द में कैसे की जा सकती हैं। मेरी इच्छा हे कि मैं आप लोगो के सामने पर जान मालकम द्वारा लिखित कुछ चाक्यों को दुहराऊँ । उन्होंने कहा है कि "जिन लोगो के पास देखने वाली आंखे हैं, वे बड़ी ही सरलता से देख सकते हैं कि जिन वर्गों को मिलकर हिन्दू जाति बनी है, उनमें अनेक चारित्रिक वैभिन्य है । जिस हिन्दू राष्ट्र जाति के लिये हम इस प्रकार के अनादरसूचक शब्दों का प्रयोग करते है, उसमें इतने अधिक भिन्न प्रकार के लोग हैं कि उन्हें एक ही डंडे से हाँकना अवश्य ही भारी भूल होगी ।" सर जान मालकम के अनुसार बंगाल के लोग शारिरिक दृष्टि से कमजोर होते हैं परन्तु उनका मस्तिष्क अत्यधिक विकसित होता है और थोड़ी भीरुता उनमें अवश्य होती हैं । दक्षिण बंगाल में हिन्दुओं की निम्न जातियों का निवास है परन्तु उनकी भी विशेषतायें उच्च हिन्दुओ की ही तरह है। अपने विवरण को चालू रखते हुए उन्होन लिखा ह कि "ज्याही ग्राप बिहार प्रान्त के जिलों में प्रवेश करते हैं त्यांही आपको हिन्दू एक जाति के रूप में दिखायी देने लगते हैं। सामान्यतया उनका कद ही अधिक ऊँचा नहीं होता और न ही केवल उनकी शारीरिक बनावट ही सुगठित होती है, बल्कि वे मानसिक रूप से भी बंगालियों से भिन्न होते हैं और उनमें मानवता के अनेक दुर्लभ गुण पाये जाते हैं। वे साहसी, उदार, मानवतापूर्ण एवम् अतिथि सेवी होते हे और उनकी सत्यनिष्ठा उतनी ही प्रशंसनीय हे जितना उनका साहस ।" अपने इस द्वितीय भाषण के क्रम में मैने जो कुछ कहा है उससे इतना तो आप समझ ही गये होंगे कि हिमालय से लेकर लंका तक के हिन्दुओं के प्रति हमारे लोगों के मन में जो एक प्रकार की दुर्भावना बद्धमूल हो गयी ह, में उसे हटा देने का प्रयत्न कर रहा । यह सत्य है परन्तु मेरे इस प्रकार के प्रयत्न का ऐसा अर्थ लगा लेने की भूल आप लोग न कर बैठे कि में भारत का एक आदर्श रूप आप लोगों के समक्ष उपस्थित करने जा रहा हूँ, जिसकी सभी कालिमाएँ धो-पोंछ कर साफ कर दी गयी हों ओर जिसमें केवल अपरिमित माधुर्य व प्रकाश मात्र ही दिखाया गया हो । मैं स्वयम् कभी भारत नहीं गया हूँ अतः मैं केवल इतिहास कर्ताओं के अधिकार एवम् कर्तव्य मात्र पालन करने का दावा कर सकता हैं और वह अधिकार यह है कि किसी भी विषय का विवरण प्रस्तुत करते हुए उसके सम्बन्ध की सभी प्राप्त सूचनाओं को एकत्रित कर लिया जाय। सूचनाओं को एकत्रित कर लेने के बाद इतिहास लसक का कर्तव्य हो जाता है कि ऐतिहासिक समालोचना के नियमो के अनुसार उन्हें क्रम से सजा कर पाठकों के हाथा में दे । सुदूर अतीत कालीन हिन्दुआ के चरित्र का विवरण प्रस्तुत करते हुए मैं उसी अधिकार एवम उसी कर्तव्य का पालन मात्र कर रहा है और इस कार्य के लिए मुझको यूनानी लेखक एवम भारतीय विद्वानी की कृतियों का सहारा लेना पड़ेगा। अर्वाचीन भारत के लोगो के चारित्रिक विवरा देने में लिये हमे अश्य हो उन विजयिनी जातियों के लेनका का सहारा लेना पड़ेगा जिन्हाने हिन्दुओं को जीतना अपेक्षाकृत सरल पाया परन्तु उन पर शासन करने जिन्हें अभूतपूर्व कठिनाइयों की अनुभूति हुई। पिछली सदी के प्रारम्भ में वर्तमान तक का विवरण प्रस्तुत करने के लिए हमें कुछ तो सहारा लेना पड़ेगा उन महानुभावो का जिन्होंने कुछ वर्षों तक भारत एवम् भारतीयों में प्रशासनाधिकारी या सैनिक अधिकारी के रूप में रह ह और बड़ा से लौटने के पश्चात् अपने भारत ग्यम् भारतीय सम्बन्धी अनुभवों को पुरतकाकार कृपया कर हम सबको लाभान्वित किया है तथा कुछ महारा हमें उन भारतीय मित्रों का भी लना पड़ेगा जिनकी व्यक्तिगत मित्रता तथा जिनके व्यक्तिगत परिचय का रसास्वादन करने का अवसर मुझ इंग्लैंड, फ्रांस तथा जर्मनी में मिल चुका है। यही पर मुझे इस बात को भी स्पष्ट कर देना चाहिये कि चूकि में उन लोगा क सामने बोल रहा है, जो अनि निकट भविष्य में भारत के शासक व प्रशासक हागे । अतः म आप सबसे अनुमति मार्ग गा कि मुझउन थोद में भारतीय नागरिक यम सैनिक सेवा विशिष्ट अधिकारियों को उन करने दे जो लम्बे समय तक भारत म बहको का एवम उनके निवासियों का सूक्ष्म अध्ययन कर चुके है और अपनअन्ययनकान म जिन्होंने न तो अपना विवेक गोया है और संगम तथा जिनकी विचार पति किमी मी पूर्वगामी लेखक के विचारा सदपित नही हई । सौभाग्य में उन लोगा न भी इस विषय को हाथ में लिया है जिस पर हम हम समय विचार कर रह । अर्थान उन्होंने भी भारतीयों की सत्य प्रियता या असत्य प्रियता पर अपना विचार प्रगद किया है । लोगा को जानन, उनसे परि चित होने एवम उनमें से कितना ही से मित्रता स्थापित करने का सौभाग्य व आनन्द मुके मिला जो ईस्ट इंडिया कम्पनी की श्रीनग्य भारतीय सेना म भारत जाकर मना बड़ा कु वर्षों तक रह कर इस देश म लौट छ । उनी बाना से मुक्त पता चला कि उन्होंने नटिक लोगा को समीप में देखा और परमा है। उन लोगा न उनको उनक शिष्टाचार की तथा उनकी चारित्रिक विशेषताओं का अध्ययन उन लोगों से अधिक गम्भीर रूप से किया है जो अभी केवल पचीस वर्ष पूर्व यहा में पास होकर गये है और इनन दिना म नाम व श्रम कमाकर स्वदेश को लौट रह ह । एक जमाना था कि भारत हम बहुत दूर था, उस समय किसी भी अंगरन का भारत जाना प्रकाशन्नर म निर्वासनही माना जाता था, परन्तु
शिवपुरी-प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्वाल समाज लुधावली शिवपुरी द्वारा भव्य रूप से भगवान श्रीगणेश की स्थापना पूजा-अर्चना के साथ गई। यहां श्रीगणेश ग्वाल समिति के तत्वाधान में इस बार विशाल 6 फुट की प्रतिमा से सुसज्जित भगवान श्रीगणेश शंख पर विराजमान है। श्रीगणेश जी की स्थापना भी भगवान भोलेनाथ के दरबार में की गई है जहां ग्वाल समाज के मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ यहां ग्वाल बन्धुओं द्वारा भजन-कीर्तन भी किए जा रहे है। बड़े उत्साह के साथ ग्वाल समाज के श्रीगणेश जी के दर्शन करने को शहर सहित आसपास के अन्य जगहों से धर्मप्रेमीजन आ रहे है और प्रतिदिन श्रीगणेश महोत्सव में शामिल होकर आर्शीवाद ले रहे है। सभी नगरवासियों से आग्रह है कि वह भी लुधावली स्थित श्रीगणेश जी की आकर्षक प्रतिमा के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करें।
शिवपुरी-प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्वाल समाज लुधावली शिवपुरी द्वारा भव्य रूप से भगवान श्रीगणेश की स्थापना पूजा-अर्चना के साथ गई। यहां श्रीगणेश ग्वाल समिति के तत्वाधान में इस बार विशाल छः फुट की प्रतिमा से सुसज्जित भगवान श्रीगणेश शंख पर विराजमान है। श्रीगणेश जी की स्थापना भी भगवान भोलेनाथ के दरबार में की गई है जहां ग्वाल समाज के मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ यहां ग्वाल बन्धुओं द्वारा भजन-कीर्तन भी किए जा रहे है। बड़े उत्साह के साथ ग्वाल समाज के श्रीगणेश जी के दर्शन करने को शहर सहित आसपास के अन्य जगहों से धर्मप्रेमीजन आ रहे है और प्रतिदिन श्रीगणेश महोत्सव में शामिल होकर आर्शीवाद ले रहे है। सभी नगरवासियों से आग्रह है कि वह भी लुधावली स्थित श्रीगणेश जी की आकर्षक प्रतिमा के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करें।
शिव वंदना पर कत्थक, ठुमरी, शिव तांडव, डीजे, डांस, फिल्मी गाने,ग़ज़ल,चाय पकौड़े के साथ मौज मस्ती का निराला अंदाज छात्रों को झुमा गया। एक्यूरेट कालेज में कल बी.टेक, बी.फार्मा,डी.फार्मा,बी.बी.ए, बी.सी.ए और पालीटेक्निक के नवप्रवेशित छात्रों की फ्रेशर्स पार्टी में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कलाओं का इजहार किया। उनके परफार्मेंस के आधार पर मिस्टर फ्रेशर और मिस फ्रेशर का चुनाव किया गया। लखनऊ घराने के कलाकार अभिषेक सिंह ने शिव स्तुति और शिव तांडव पर गजब के क्लासिकल कत्थक और ठुमरी पर डांस किया। पूरा माहौल भक्ति भाव से झूम उठा। सुप्रसिद्ध यू-ट्यूवर अमन भाटी ने छात्रों को खूब झुमाया। प्रसिद्ध बालीवुड सिंगर शाहिद माल्या ने अपने लाजवाब गानों पर छात्रों को खूब नचाया। सभी छात्र बड़े तन्मय, उत्साहित और आनंदित थे। कोऱोना महामारी के भीषण प्रकोप के बाद छात्रों के अपनी कला प्रदर्शन, नाचने-गाने और झूमने का ये मौका बहुत इंतजार के बाद आया था इसलिए सबने मिलकर आनंद उठाया। कयी राउण्ड की चयन प्रक्रिया के बाद तुषार को मिस्टर फ्रेशर और अदिति को मिस फ्रेशर घोषित किया गया। कालेज की चेयरपर्सन पूनम शर्मा ने दोनों विजेताओं को बधाई व सभी छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। कालेज के डायरेक्टर डॉ विजय शुक्ला के साथ कालेज प्रबंधन पदाधिकारियों के दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम शुभारंभ हुआ तथा रात्रि में स्टार परफार्मेंस के बाद डिनर के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। नवप्रवेशित छात्र ये प्रोफेशनल, कल्चरल और म्यूजिकल माहौल देखकर चकाचौंध थे।।
शिव वंदना पर कत्थक, ठुमरी, शिव तांडव, डीजे, डांस, फिल्मी गाने,ग़ज़ल,चाय पकौड़े के साथ मौज मस्ती का निराला अंदाज छात्रों को झुमा गया। एक्यूरेट कालेज में कल बी.टेक, बी.फार्मा,डी.फार्मा,बी.बी.ए, बी.सी.ए और पालीटेक्निक के नवप्रवेशित छात्रों की फ्रेशर्स पार्टी में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कलाओं का इजहार किया। उनके परफार्मेंस के आधार पर मिस्टर फ्रेशर और मिस फ्रेशर का चुनाव किया गया। लखनऊ घराने के कलाकार अभिषेक सिंह ने शिव स्तुति और शिव तांडव पर गजब के क्लासिकल कत्थक और ठुमरी पर डांस किया। पूरा माहौल भक्ति भाव से झूम उठा। सुप्रसिद्ध यू-ट्यूवर अमन भाटी ने छात्रों को खूब झुमाया। प्रसिद्ध बालीवुड सिंगर शाहिद माल्या ने अपने लाजवाब गानों पर छात्रों को खूब नचाया। सभी छात्र बड़े तन्मय, उत्साहित और आनंदित थे। कोऱोना महामारी के भीषण प्रकोप के बाद छात्रों के अपनी कला प्रदर्शन, नाचने-गाने और झूमने का ये मौका बहुत इंतजार के बाद आया था इसलिए सबने मिलकर आनंद उठाया। कयी राउण्ड की चयन प्रक्रिया के बाद तुषार को मिस्टर फ्रेशर और अदिति को मिस फ्रेशर घोषित किया गया। कालेज की चेयरपर्सन पूनम शर्मा ने दोनों विजेताओं को बधाई व सभी छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। कालेज के डायरेक्टर डॉ विजय शुक्ला के साथ कालेज प्रबंधन पदाधिकारियों के दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम शुभारंभ हुआ तथा रात्रि में स्टार परफार्मेंस के बाद डिनर के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। नवप्रवेशित छात्र ये प्रोफेशनल, कल्चरल और म्यूजिकल माहौल देखकर चकाचौंध थे।।
सोमवार देर रात को हरिद्वार में आकाशीय बिजली गिरने से हर की पौड़ी पर 80 फीट की दीवार गिर गई। ये हादसा हर की पौड़ी में ब्रह्मकुंड के पास हुआ। गनीमत की बात ये रही कि रात का वक्त होने का कारण यहां पर भीड़ नहीं थी, ऐसे में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा। बिजली गिरने के साथ ही तेज बारिश भी रिकाॅर्ड की गई। हादसे के बाद अखाड़ा परिषद के श्रीमहंत नरेंद्र गिरी भी हर की पौड़ी पहुंचे, उन्होंने यहां के हालात का जायजा लिया। स्थानीय प्रशासन की मदद से मलबे को हटाया जा रहा है और पूरे इलाके को फिर से ठीक किया जा रहा है। हर की पौड़ी पर सावन के महीने में अक्सर भीड़ रहती है, लेकिन इस बार कोरोना संकट के कारण कांवड़ियों को आने से मना किया गया है। हालांकि, फिर भी स्थानीय श्रद्धालु लगातार हरिद्वार पहुंच रहे हैं।
सोमवार देर रात को हरिद्वार में आकाशीय बिजली गिरने से हर की पौड़ी पर अस्सी फीट की दीवार गिर गई। ये हादसा हर की पौड़ी में ब्रह्मकुंड के पास हुआ। गनीमत की बात ये रही कि रात का वक्त होने का कारण यहां पर भीड़ नहीं थी, ऐसे में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा। बिजली गिरने के साथ ही तेज बारिश भी रिकाॅर्ड की गई। हादसे के बाद अखाड़ा परिषद के श्रीमहंत नरेंद्र गिरी भी हर की पौड़ी पहुंचे, उन्होंने यहां के हालात का जायजा लिया। स्थानीय प्रशासन की मदद से मलबे को हटाया जा रहा है और पूरे इलाके को फिर से ठीक किया जा रहा है। हर की पौड़ी पर सावन के महीने में अक्सर भीड़ रहती है, लेकिन इस बार कोरोना संकट के कारण कांवड़ियों को आने से मना किया गया है। हालांकि, फिर भी स्थानीय श्रद्धालु लगातार हरिद्वार पहुंच रहे हैं।
इसमें धर्मनगरी से अर्द्धकुंवारी तक बनाए गए नए मार्ग के इस्तेमाल के विरोध संबंधी चर्चा की गई। बैठक में फैसला किया गया कि जल्द ही एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसके नेतृत्व में आगामी रणनीति तय की जाएगी। बैठक को संबोधित करतेहुए विधायक नंदा ने कहा कि श्राइन बोर्ड की जनविरोधी कार्यप्रणाली चिंता का विषय है। इसको अभी से गंभीरता से लेने की जरूरत है। श्राइन बोर्ड को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि नए मार्ग संबंधित बोर्र्ड द्वारा सपष्टीकरण नहीं देने के साथ कई अन्य प्रमुख मुद्दे भी हैं, जिनपर जनता को एकजुट होने की आवश्यकता है। इसी बात के मद्देनजर जनता की एक कमेटी का गठन करने का निर्णय लिया गया। वहीं पूर्व विधायक बलदेव राज शर्मा ने स्पष्ट किया कि बोर्ड द्वारा योयनाबद्ध तरीके से एनजीटी (नेशनल ग्रीन टिब्यूनल) की आड़ में नए मार्ग को शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। घोड़ों की आवाजाही को भी इसी मुद्दे पर प्रहार किया जा रहा है। उन्होंने जनता से आग्रह कि एनजीटी द्वारा दायर याचिका में जनता को भी पार्टी बनने की आवश्यकता है। इस पर भी जल्द निर्णय लेने का फैसला किया गया। बैठक में पूर्व नपा प्रधान आशु मगोत्रा, राकेश वजीर, शाम केसर, प्रताप शर्मा, वरिंद्र केसर, राना समोत्रा, अजय बडू, शशि गुप्ता आदि विशेष रूप से मौजूद थे।
इसमें धर्मनगरी से अर्द्धकुंवारी तक बनाए गए नए मार्ग के इस्तेमाल के विरोध संबंधी चर्चा की गई। बैठक में फैसला किया गया कि जल्द ही एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसके नेतृत्व में आगामी रणनीति तय की जाएगी। बैठक को संबोधित करतेहुए विधायक नंदा ने कहा कि श्राइन बोर्ड की जनविरोधी कार्यप्रणाली चिंता का विषय है। इसको अभी से गंभीरता से लेने की जरूरत है। श्राइन बोर्ड को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि नए मार्ग संबंधित बोर्र्ड द्वारा सपष्टीकरण नहीं देने के साथ कई अन्य प्रमुख मुद्दे भी हैं, जिनपर जनता को एकजुट होने की आवश्यकता है। इसी बात के मद्देनजर जनता की एक कमेटी का गठन करने का निर्णय लिया गया। वहीं पूर्व विधायक बलदेव राज शर्मा ने स्पष्ट किया कि बोर्ड द्वारा योयनाबद्ध तरीके से एनजीटी की आड़ में नए मार्ग को शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। घोड़ों की आवाजाही को भी इसी मुद्दे पर प्रहार किया जा रहा है। उन्होंने जनता से आग्रह कि एनजीटी द्वारा दायर याचिका में जनता को भी पार्टी बनने की आवश्यकता है। इस पर भी जल्द निर्णय लेने का फैसला किया गया। बैठक में पूर्व नपा प्रधान आशु मगोत्रा, राकेश वजीर, शाम केसर, प्रताप शर्मा, वरिंद्र केसर, राना समोत्रा, अजय बडू, शशि गुप्ता आदि विशेष रूप से मौजूद थे।
देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने श्रीनगर (पौड़ी) में सशस्त्र सीमा बल केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र के 11वें बुनियादी रंगरूट प्रशिक्षण कोर्स के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर आयोजित परेड का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने सेना में बेटियों की बढ़ती भागीदारी को देशहित में बताया। उन्होंने कहा कि सेना में बेटियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारे को साकार कर रहा है। 42 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के बाद 101 रंगरूट एसएसबी की मुख्य धारा का हिस्सा बने। इस दौरान मुख्यमंत्री ने रंगरूट प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रशिक्षुओं को ट्राफी देकर सम्मानित भी किया। समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आज का दिन हमारे जवानों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर, तथा हम सब के लिए गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि अपने सैन्य बलों पर हमें गर्व है। ऐसे कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने के लिए उनकी उत्सुकता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि देव भूमि में बसी इस सीटीसी में 44 सप्ताह का प्रशिक्षण ग्रहण करते समय यहां की मनोहर प्रकृति ने आपको अवश्य प्रेरणा दी होगी। इस अवसर पर देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी, कर्णप्रयाग विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी, जिलाधिकारी सुशील कुमार, आईजी एसएसबी प्रेमस्वरूप सिंह नेगी, सहित एसएसबी के अधिकारी व जवानों साहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने श्रीनगर में सशस्त्र सीमा बल केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र के ग्यारहवें बुनियादी रंगरूट प्रशिक्षण कोर्स के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर आयोजित परेड का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने सेना में बेटियों की बढ़ती भागीदारी को देशहित में बताया। उन्होंने कहा कि सेना में बेटियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारे को साकार कर रहा है। बयालीस सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के बाद एक सौ एक रंगरूट एसएसबी की मुख्य धारा का हिस्सा बने। इस दौरान मुख्यमंत्री ने रंगरूट प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रशिक्षुओं को ट्राफी देकर सम्मानित भी किया। समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आज का दिन हमारे जवानों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर, तथा हम सब के लिए गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि अपने सैन्य बलों पर हमें गर्व है। ऐसे कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने के लिए उनकी उत्सुकता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि देव भूमि में बसी इस सीटीसी में चौंतालीस सप्ताह का प्रशिक्षण ग्रहण करते समय यहां की मनोहर प्रकृति ने आपको अवश्य प्रेरणा दी होगी। इस अवसर पर देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी, कर्णप्रयाग विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी, जिलाधिकारी सुशील कुमार, आईजी एसएसबी प्रेमस्वरूप सिंह नेगी, सहित एसएसबी के अधिकारी व जवानों साहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कुरुक्षेत्र के मैदान की दोनों छावनियों के बीच एक छोटी-सी टेकरी थी । टेकरी की एक खोह में एक टिटहरी ने अपना घोंसला बनाया था, और बच्चों के साथ वह उसमें रहती थी । युद्ध की तैयारियां देख कर टिटहरी बहुत ही घबरा गई - "ऐसे महाभारत युद्ध में जो सनसनाते हुए तीर छूटेंगे, उनसे बिचकर मैं मर भी जाऊ तो मुझे दुःख न होगा; किन्तु मेरे इन बच्चों का क्या हो ?" बच्चों की सारसंभाल के विचार से टिटहरी का मातृ-हृदय विकल हो उठा- "किन्तु, मै क्या करूं ? इतने सारे छोटे-छोटे बच्चों को कहीं ले भी तो नहीं जा सकती । हे भगवन्, ये सांड यहां लड़ेंगे और इनसे हमें कौन बचायेगा ? हम कैसे वचेंगे ? इन अनगिनत हाथियों और घोड़ों का खुन जहां बहेगा, वहां मेरे इन बच्चों की चिन्ता करनेवाला भला कौन हो सकता है ?" पर टिटहरी तो बच्चों की मां ठहरी ! चाहे आशा छोड़ दे; किन्तु ऋन्दन कैसे छोड़े ? टिटहरी बराबर रोती और बिलखती रही । क्या टिटहरी के इस विलाप को सुननेवाले कोई कान वहां नहीं थे ? मारो-काटो के उस वातावरण में इस छोटे से प्राणी के चन्दन के लिए कोई अवकाश न था ? टिटहरी का वह कन्दन, उसका वह विलाप, श्रीकृष्ण के कानो तक पहुंचा। समूचा ग्रह्मांड भी इस धर्म-युद्ध में नष्ट हो जाय, तो जिसका रोआं न फड़के, जिसे रंच मात्र विपाद न हो, उन्हीं श्रीकृष्ण का हृदय इस टिटहरी के आर्तनाद से द्रवित हो उठा। माता के अन्तस्तल की गहरी चीत्कार ने उनको कंपा दिया । श्रीकृष्ण टिटहरी के घोंसले के पास गये और टिटहरी पर व उसके बच्चों पर एक बहुत बड़ा-सा टोकना ढांक आये । अठारह दिन तक महाभारत की लड़ाई चलती रही। भारतवर्ष के 'मृदूनि कसुमादपि' असंख्य योद्धा उस युद्ध में स्वर्ग सिधारे। हाथियों और घोटों को तो गिनती हो क्या थी ? सारे कोरव रणाय्या पर सोये थे, भीम और होग-जैसे भी काल के मुंह में समा गये थे। किन्तु टिटहरी का और उसके बच्चों या तो बाल भी बांका न हुआ था । ऐसे-ऐसे महाभारत युद्धों की रचना करनेवाले श्रीकृष्ण के हृदय में टिटहरी-जैसों के लिए स्थान था, इसमें उनकी प्रभूता है । गृहस्थाश्रम बड़ा या संन्यासाश्रम एक था राजा । राजा के नगर में बहुतेरी धर्मशालायें थीं, बहुतेरे अन्न क्षेत्र, और वहुतेरे साधुओं के अखाड़े । देश-परदेश के साधु, संत, दण्डी, परमहंस, संन्यासी सभी नगर में आते और जाते; कोई रात वसेरा लेकर चला जाता, तो कोई चातुर्मास वहीं बिताता, कोई वेदान्त की कथा करता, तो कोई सारा दिन यहां-वहां भटककर ही बिता डालता । एक बार राजा के मन में विचार आया--"यह गृहस्थाश्रम ज्यादा अच्छा या संन्यास ज्यादा अच्छा ? शास्त्र में तो गृहस्थाश्रम को समचे जीवन की नींव माना है। गृहस्य के धर्मों का पालन करना तलवार की धार पर चलने के समान है। फिर भी लोग मान-सम्मान तो संन्यासियों का हो करते है । चेचारा वह ब्राह्मण सारा दिन गांव के लड़कों को पढ़ाता है और गांव में आटा मांगता है; तोन बच्चे है, और दो जने खुद है। पांच प्राणियों को पेट भर रोटी भी हिस्से नहीं आती । लेकिन दरवाजे में किसी गेरुए वस्त्रवारी ने पैर रखखा कि लोग दौड़े ही समझिये- 'हे महाराज ! मेरे घर भिक्षा पाने की कृपा कोजियेगा ।' अगर संन्याम ही अधिक अच्छा हो तो फिर राज-पाट छोड़कर मै मंन्यास हो क्यों न ले लूं ? संन्यास से हो मोक्ष मित्रता हो, तो मुझे भी यह सव छोड़कर चल पड़ना चाहिए।" गृहस्थाश्रम बढ़ा या संन्यासाश्रम राजा तो गहरे सोच में पढ़ गया और सोच हो सोच में उमने आशा दे डाली - "आज से हमारे नगर में जो कोई साघु-संन्यासी आवे, वह नोपा मेरे पास लाया जाय । में उसके साथ इस प्रश्न पर घर्चा करूंगा कि गृहत्याश्रम बढ़ा है या सन्यामाश्रम ? अगर कोई संन्यासी सिद्ध कर देगा कि संन्यासाश्रम बढा है, तो में राजपाट छोड़कर संन्यामी बन जाऊंगा किन्तु यदि यह निश्चय हुआ कि गृहन्याश्रम घटा है, तो उस संन्यासी के गैरए यन्त्र उतरवा पर उसे घर गृहस्थी वाला बना दूंगा ।" राजाज्ञा के छूटने हो को देर थी। नगर के द्वार पर पहरा देनेवाले सिपाही एक-के-बाद-एक साधु-संन्यासियों को हाजिर करने लगे। राजा की राजसभा - उसका दरवार-गृहस्याश्रम और संन्यासाश्रम को चर्चा का स्थान बन गई । राजा ने अपने शास्त्रज्ञान से अच्छे संन्यासियो को मात कर दिया; बहुतेरे भग्गू सन्यासियो पत नंन्यान छुडाकर उन्हें गृहस्य बना दिया, कुछ निर्मल संन्यासी शास्त्र को इन उपेडवुन में न पढ़ने के विचार से राजा के नगर को छँक कर हो जाने लगे। परिणाम यह जाि १०-१२ महीनों के अन्दर हो नगर में मंन्यासी नाम के प्राणी पाजाना हो बन्द हो गया, अप्रक्षेत्र और धर्मशालायें हो गई और य मानो एक तरह की न्यूनता अनुभव करने का। राजा के ये समाचार देश-परदेश में चारो तरफनो ने पहा -"राजा सन्यानियों को सता कर पाप की दूसरे किसी ने कहा- "अच्छा हो हुआ, जो ने पकड़ा ! " एक तीसरी भाषाज डटो- "भाग राजा नायापत्त्ची में पड़ा है ?" चाँपी आवाज आ है, और यह हाथ धोकर इनके पीछे पढ़ गया है। लियो का आना-जाना प्राय बन्द हो गया तो हुआ ही नहीं। इसी बीच एक बार विशुद्धानन्द नामका एक संन्यासी नगर में आ पहुंचा। कोई चौबीस वर्ष की उम्र, गोरा रंग, सुन्दर मुखमुद्रा, आंख में और सारे शरीर में शुद्ध ब्रह्मचर्य का ओजस्, हाथ में दण्ड-कमण्डल और शरीर पर गेरुआ वस्त्र ! ज्योंही विशुद्धानन्द ने नगर के प्रवेश-द्वार में पैर रक्खा, त्योही सिपाही ने राजा को आज्ञा सुनाई और उन्हें राजा के पास ले गया। विशुद्धानन्द को इस सबकी कल्पना तो थी ही ! राजा दरबार में बैठा था, तभी विशुद्धानन्द को लेकर सिपाही वहा पहुंचा। संन्यासी को आता देखकर राजा खड़ा हो गया और उन्हें आदरपूर्वक आसन पर बैठाया। "राजन् ! मुझे यहां क्यों बुलाया है ?" विशुद्धानन्द ने चर्चा छेड़ी । "महाराज ! मेरे सिपाही ने आपसे सारी बात कही ही होगी। मेरे मन में इस बात को लेकर संशय उत्पन्न हो गया है कि गृहस्थाश्रम बड़ा या संन्यासाश्रम बड़ा ? इस संशय के मारे मैने बहुतेरी शास्त्रीय चर्चायें करके देखों, इस संशय के वश होकर मैने अनेक त्यागियों को रागो बना दिया, इस संशय के कारण ही आज संन्यासियों ने मेरे द्वार पर आना छोड़ दिया है ! मुझे तय करना है कि गृहस्थाश्रम बड़ा है या संन्यासाश्रम; किन्तु यह निरे वाणि-विनोद के रूप में नहीं। यदि यह सिद्ध हो जाय कि संन्यास बड़ा है, तो राजपाट छोड़कर मुझे संन्यास लेना है, और अगर यह सिद्ध हो कि गृहस्थाश्रम बड़ा है, तो आपको इन गेरुए वस्त्रों का त्याग करके गृही बनना हूं - घर बसाना है। इसीलिए आपको यहां हाजिर किया गया है।" "राजन् ! तुम्हारा प्रश्न बहुत गम्भीर है ।" विशुद्धानन्द ने गम्भीर स्वर मे कहा। "इस प्रश्न का उत्तर में तुम्हें छः महीने में दूंगा । किन्तु उसमे पहले
कुरुक्षेत्र के मैदान की दोनों छावनियों के बीच एक छोटी-सी टेकरी थी । टेकरी की एक खोह में एक टिटहरी ने अपना घोंसला बनाया था, और बच्चों के साथ वह उसमें रहती थी । युद्ध की तैयारियां देख कर टिटहरी बहुत ही घबरा गई - "ऐसे महाभारत युद्ध में जो सनसनाते हुए तीर छूटेंगे, उनसे बिचकर मैं मर भी जाऊ तो मुझे दुःख न होगा; किन्तु मेरे इन बच्चों का क्या हो ?" बच्चों की सारसंभाल के विचार से टिटहरी का मातृ-हृदय विकल हो उठा- "किन्तु, मै क्या करूं ? इतने सारे छोटे-छोटे बच्चों को कहीं ले भी तो नहीं जा सकती । हे भगवन्, ये सांड यहां लड़ेंगे और इनसे हमें कौन बचायेगा ? हम कैसे वचेंगे ? इन अनगिनत हाथियों और घोड़ों का खुन जहां बहेगा, वहां मेरे इन बच्चों की चिन्ता करनेवाला भला कौन हो सकता है ?" पर टिटहरी तो बच्चों की मां ठहरी ! चाहे आशा छोड़ दे; किन्तु ऋन्दन कैसे छोड़े ? टिटहरी बराबर रोती और बिलखती रही । क्या टिटहरी के इस विलाप को सुननेवाले कोई कान वहां नहीं थे ? मारो-काटो के उस वातावरण में इस छोटे से प्राणी के चन्दन के लिए कोई अवकाश न था ? टिटहरी का वह कन्दन, उसका वह विलाप, श्रीकृष्ण के कानो तक पहुंचा। समूचा ग्रह्मांड भी इस धर्म-युद्ध में नष्ट हो जाय, तो जिसका रोआं न फड़के, जिसे रंच मात्र विपाद न हो, उन्हीं श्रीकृष्ण का हृदय इस टिटहरी के आर्तनाद से द्रवित हो उठा। माता के अन्तस्तल की गहरी चीत्कार ने उनको कंपा दिया । श्रीकृष्ण टिटहरी के घोंसले के पास गये और टिटहरी पर व उसके बच्चों पर एक बहुत बड़ा-सा टोकना ढांक आये । अठारह दिन तक महाभारत की लड़ाई चलती रही। भारतवर्ष के 'मृदूनि कसुमादपि' असंख्य योद्धा उस युद्ध में स्वर्ग सिधारे। हाथियों और घोटों को तो गिनती हो क्या थी ? सारे कोरव रणाय्या पर सोये थे, भीम और होग-जैसे भी काल के मुंह में समा गये थे। किन्तु टिटहरी का और उसके बच्चों या तो बाल भी बांका न हुआ था । ऐसे-ऐसे महाभारत युद्धों की रचना करनेवाले श्रीकृष्ण के हृदय में टिटहरी-जैसों के लिए स्थान था, इसमें उनकी प्रभूता है । गृहस्थाश्रम बड़ा या संन्यासाश्रम एक था राजा । राजा के नगर में बहुतेरी धर्मशालायें थीं, बहुतेरे अन्न क्षेत्र, और वहुतेरे साधुओं के अखाड़े । देश-परदेश के साधु, संत, दण्डी, परमहंस, संन्यासी सभी नगर में आते और जाते; कोई रात वसेरा लेकर चला जाता, तो कोई चातुर्मास वहीं बिताता, कोई वेदान्त की कथा करता, तो कोई सारा दिन यहां-वहां भटककर ही बिता डालता । एक बार राजा के मन में विचार आया--"यह गृहस्थाश्रम ज्यादा अच्छा या संन्यास ज्यादा अच्छा ? शास्त्र में तो गृहस्थाश्रम को समचे जीवन की नींव माना है। गृहस्य के धर्मों का पालन करना तलवार की धार पर चलने के समान है। फिर भी लोग मान-सम्मान तो संन्यासियों का हो करते है । चेचारा वह ब्राह्मण सारा दिन गांव के लड़कों को पढ़ाता है और गांव में आटा मांगता है; तोन बच्चे है, और दो जने खुद है। पांच प्राणियों को पेट भर रोटी भी हिस्से नहीं आती । लेकिन दरवाजे में किसी गेरुए वस्त्रवारी ने पैर रखखा कि लोग दौड़े ही समझिये- 'हे महाराज ! मेरे घर भिक्षा पाने की कृपा कोजियेगा ।' अगर संन्याम ही अधिक अच्छा हो तो फिर राज-पाट छोड़कर मै मंन्यास हो क्यों न ले लूं ? संन्यास से हो मोक्ष मित्रता हो, तो मुझे भी यह सव छोड़कर चल पड़ना चाहिए।" गृहस्थाश्रम बढ़ा या संन्यासाश्रम राजा तो गहरे सोच में पढ़ गया और सोच हो सोच में उमने आशा दे डाली - "आज से हमारे नगर में जो कोई साघु-संन्यासी आवे, वह नोपा मेरे पास लाया जाय । में उसके साथ इस प्रश्न पर घर्चा करूंगा कि गृहत्याश्रम बढ़ा है या सन्यामाश्रम ? अगर कोई संन्यासी सिद्ध कर देगा कि संन्यासाश्रम बढा है, तो में राजपाट छोड़कर संन्यामी बन जाऊंगा किन्तु यदि यह निश्चय हुआ कि गृहन्याश्रम घटा है, तो उस संन्यासी के गैरए यन्त्र उतरवा पर उसे घर गृहस्थी वाला बना दूंगा ।" राजाज्ञा के छूटने हो को देर थी। नगर के द्वार पर पहरा देनेवाले सिपाही एक-के-बाद-एक साधु-संन्यासियों को हाजिर करने लगे। राजा की राजसभा - उसका दरवार-गृहस्याश्रम और संन्यासाश्रम को चर्चा का स्थान बन गई । राजा ने अपने शास्त्रज्ञान से अच्छे संन्यासियो को मात कर दिया; बहुतेरे भग्गू सन्यासियो पत नंन्यान छुडाकर उन्हें गृहस्य बना दिया, कुछ निर्मल संन्यासी शास्त्र को इन उपेडवुन में न पढ़ने के विचार से राजा के नगर को छँक कर हो जाने लगे। परिणाम यह जाि दस-बारह महीनों के अन्दर हो नगर में मंन्यासी नाम के प्राणी पाजाना हो बन्द हो गया, अप्रक्षेत्र और धर्मशालायें हो गई और य मानो एक तरह की न्यूनता अनुभव करने का। राजा के ये समाचार देश-परदेश में चारो तरफनो ने पहा -"राजा सन्यानियों को सता कर पाप की दूसरे किसी ने कहा- "अच्छा हो हुआ, जो ने पकड़ा ! " एक तीसरी भाषाज डटो- "भाग राजा नायापत्त्ची में पड़ा है ?" चाँपी आवाज आ है, और यह हाथ धोकर इनके पीछे पढ़ गया है। लियो का आना-जाना प्राय बन्द हो गया तो हुआ ही नहीं। इसी बीच एक बार विशुद्धानन्द नामका एक संन्यासी नगर में आ पहुंचा। कोई चौबीस वर्ष की उम्र, गोरा रंग, सुन्दर मुखमुद्रा, आंख में और सारे शरीर में शुद्ध ब्रह्मचर्य का ओजस्, हाथ में दण्ड-कमण्डल और शरीर पर गेरुआ वस्त्र ! ज्योंही विशुद्धानन्द ने नगर के प्रवेश-द्वार में पैर रक्खा, त्योही सिपाही ने राजा को आज्ञा सुनाई और उन्हें राजा के पास ले गया। विशुद्धानन्द को इस सबकी कल्पना तो थी ही ! राजा दरबार में बैठा था, तभी विशुद्धानन्द को लेकर सिपाही वहा पहुंचा। संन्यासी को आता देखकर राजा खड़ा हो गया और उन्हें आदरपूर्वक आसन पर बैठाया। "राजन् ! मुझे यहां क्यों बुलाया है ?" विशुद्धानन्द ने चर्चा छेड़ी । "महाराज ! मेरे सिपाही ने आपसे सारी बात कही ही होगी। मेरे मन में इस बात को लेकर संशय उत्पन्न हो गया है कि गृहस्थाश्रम बड़ा या संन्यासाश्रम बड़ा ? इस संशय के मारे मैने बहुतेरी शास्त्रीय चर्चायें करके देखों, इस संशय के वश होकर मैने अनेक त्यागियों को रागो बना दिया, इस संशय के कारण ही आज संन्यासियों ने मेरे द्वार पर आना छोड़ दिया है ! मुझे तय करना है कि गृहस्थाश्रम बड़ा है या संन्यासाश्रम; किन्तु यह निरे वाणि-विनोद के रूप में नहीं। यदि यह सिद्ध हो जाय कि संन्यास बड़ा है, तो राजपाट छोड़कर मुझे संन्यास लेना है, और अगर यह सिद्ध हो कि गृहस्थाश्रम बड़ा है, तो आपको इन गेरुए वस्त्रों का त्याग करके गृही बनना हूं - घर बसाना है। इसीलिए आपको यहां हाजिर किया गया है।" "राजन् ! तुम्हारा प्रश्न बहुत गम्भीर है ।" विशुद्धानन्द ने गम्भीर स्वर मे कहा। "इस प्रश्न का उत्तर में तुम्हें छः महीने में दूंगा । किन्तु उसमे पहले
मुंबई। अभिनेता शाहिद कपूर की पत्नी मीरा ने मंगलवार को शादी की पांचवीं सालगिरह पर पति के लिए एक नोट लिखा। मीरा ने लिखा, "5 साल, 4 सोल, 3 घर, 2 बच्चे और 1 खूबसूरत परिवार। ऐसा कोई नहीं है जिसके साथ जिंदगी के इस सफर में मैं होती, सिवाय तुम्हारे मेरे प्यार। मैं हर रोज तुम्हारे प्यार में और ज्यादा पड़ती हूं। " मीरा ने आगे कहा कि शाहिद को पाकर वह खुद को दुनिया की सबसे खुशकिस्मत लड़की मानती हैं। शाहिद और मीरा ने 2015 में शादी रचाई थी। दोनों की पहली संतान बेटी मीशा का जन्म 2016 में हुआ और दो साल बाद बेटे जैन का जन्म हुआ। (आईएएनएस)
मुंबई। अभिनेता शाहिद कपूर की पत्नी मीरा ने मंगलवार को शादी की पांचवीं सालगिरह पर पति के लिए एक नोट लिखा। मीरा ने लिखा, "पाँच साल, चार सोल, तीन घर, दो बच्चे और एक खूबसूरत परिवार। ऐसा कोई नहीं है जिसके साथ जिंदगी के इस सफर में मैं होती, सिवाय तुम्हारे मेरे प्यार। मैं हर रोज तुम्हारे प्यार में और ज्यादा पड़ती हूं। " मीरा ने आगे कहा कि शाहिद को पाकर वह खुद को दुनिया की सबसे खुशकिस्मत लड़की मानती हैं। शाहिद और मीरा ने दो हज़ार पंद्रह में शादी रचाई थी। दोनों की पहली संतान बेटी मीशा का जन्म दो हज़ार सोलह में हुआ और दो साल बाद बेटे जैन का जन्म हुआ।