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स्नेही राकेश जी. स्थिति स्पष्ट कर दी है. आगे ध्यान रखूंगा. आभार.
आदरणीय प्रदीप जी,बहुत सुन्दर कविता लिखी है.
बहुत ही भावपूर्ण पंक्तियाँ हैं.
आदरणीय प्रदीप जी,
दुर्दांत समाज में मानव की विवशता का मार्मिक चित्रण। राकेश जी और अश्विनी जी से मैं भी सहमत हूँ कुछ सन्दर्भ समझ नहीं आये। आभार,
माननीय प्रदीप जी, सादर नमस्कार. बहुत ही सुंदर कविता है. बहुत अच्छा प्रयत्न. कहीं कहीं सन्दर्भ मई नही समझ पाया.
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स्नेही राकेश जी. स्थिति स्पष्ट कर दी है. आगे ध्यान रखूंगा. आभार. आदरणीय प्रदीप जी,बहुत सुन्दर कविता लिखी है. बहुत ही भावपूर्ण पंक्तियाँ हैं. आदरणीय प्रदीप जी, दुर्दांत समाज में मानव की विवशता का मार्मिक चित्रण। राकेश जी और अश्विनी जी से मैं भी सहमत हूँ कुछ सन्दर्भ समझ नहीं आये। आभार, माननीय प्रदीप जी, सादर नमस्कार. बहुत ही सुंदर कविता है. बहुत अच्छा प्रयत्न. कहीं कहीं सन्दर्भ मई नही समझ पाया.
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उत्तरी सिक्किम में सेना के सैनिकों के एक समूह को मारा गया है। बताया जा रहा है कि एक सैनिक को छोड़कर सभी सैनिकों को बचा लिया गया है, जो एक गहन तलाशी अभियान के बाद लापता बताया जा रहा है। बता दें कि ये घटना उत्तरी सिक्किम में मुगथांग के रास्ते पर लुगनाक ला में हुई।
सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि 17-18 सैनिक बर्फ के नीचे दब गया है। सेना के एक अधिकारी ने कहा कि 17-18 सैनिकों वाली एक गश्त-सह-बर्फ निकासी बर्फ की स्लाइड यानी की हिमस्खलन के नीचे आ गए हैं। बताया गया है कि एक सिपाही को छोड़कर सभी बरामद कर कर लिए हैं।
बता दें कि लुगनाक ला 16,700 फुट ऊंचा हिमालयी दर्रा है। पिछले एक सप्ताह में यह उत्तरी सिक्किम में तीसरा हादसा है, जो चीन को खत्म करने वाला एक उच्च पठार है। आए दिन यहां इस तरह के हादसे होते रहते हैं।
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उत्तरी सिक्किम में सेना के सैनिकों के एक समूह को मारा गया है। बताया जा रहा है कि एक सैनिक को छोड़कर सभी सैनिकों को बचा लिया गया है, जो एक गहन तलाशी अभियान के बाद लापता बताया जा रहा है। बता दें कि ये घटना उत्तरी सिक्किम में मुगथांग के रास्ते पर लुगनाक ला में हुई। सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि सत्रह-अट्ठारह सैनिक बर्फ के नीचे दब गया है। सेना के एक अधिकारी ने कहा कि सत्रह-अट्ठारह सैनिकों वाली एक गश्त-सह-बर्फ निकासी बर्फ की स्लाइड यानी की हिमस्खलन के नीचे आ गए हैं। बताया गया है कि एक सिपाही को छोड़कर सभी बरामद कर कर लिए हैं। बता दें कि लुगनाक ला सोलह,सात सौ फुट ऊंचा हिमालयी दर्रा है। पिछले एक सप्ताह में यह उत्तरी सिक्किम में तीसरा हादसा है, जो चीन को खत्म करने वाला एक उच्च पठार है। आए दिन यहां इस तरह के हादसे होते रहते हैं।
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बात को अपना सब से बड़ा सुख मानें कि हम दूसरों को सुखी बना सकते हैं ।
इस कर्त्तव्य का भी पालन सख्त नहीं है । परन्तु कोई भी कार्य जो श्रेष्ट और उच्च होता है सरल नहीं होता; और हमें कठिनाइयों को देख कर घबड़ाना नहीं चाहिए । कोई भी कठिनाई ऐसी नहीं है जिसे हम ईश्वर की सहायता से पार नहीं कर सकते हो । साथियों के प्रति अपने कर्तव्य का पालन इसलिये आसान नहीं है कि हमारे स्वभावों में पाप और स्वार्थ भरा हुआ है और पूर्ण वासनाओं से अंधे होकर हम अपने साथियों को तो बिलकुल भूल जाते हैं और अपने ही बारे मैं सोचने लगते हैं। और फिर ऐसा होता है कि अपने सांसारिक उद्देश्यों तथा अभ्युदय के अनुर में हम न केवल अपने साथियों का भला ही नहीं करते, बल्कि उनको हानि तक पहुँचा बैठते हैं ।
परन्तु आज से, मेरी प्रार्थना है कि, हम सब इस बात का प्रयत्न करें - और ईश्वर हमारी सहायता करेगा - कि हम अपने साथियों का अधिक विचार रखें और अपना कम । इरादा कर लोक से अपने-के लोगों के साथ कृपापूर्ण व्यवहार करेंगे । इरादा कर लो कि उनके लिए तुम्हारे कृपापूर्ण ही विचार होंगे। शायद यहाँ, पाठशाला के भीतर, हम इस अन्तिम दृष्टि से अपने कर्तव्य के सम्बन्ध में अधिक सावधान हो जाते हैं । तथापि, मेरे मित्रों ! अपने इस समाज में, जैसा कि
हमें यहाँ प्राप्त है, उदारता तथा सहानुभूति के भाव रखना हो हमारा विशेष कर्तव्य है । हम में से प्रत्येक को ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने मित्र की प्रतिष्ठा को प्रतिष्ठा क महत्त्व की बात समझे । यहाँ एक दूसरे के प्रति तुम्हारा कर्तव्य यह है कि तुम्हारा हृदय प्रेमपूर्ण, निस्वार्थ और दयावान् होअपने मित्र के उपभोग के लिए उस वस्तु को दे डालने को तैयार रहो, जिसे तुम अपने उपभोग के लिए चाहते हो; दूसरों के सुख में अपना सुख समझो; उनके चरित्र के श्रेष्ठ के ऊपर ही तुम्हारी दृष्टि जाए, न कि बुरे अंश के ऊपर; उनके सद्गुणों पर तुम विश्वास कर सको और उनके दुगुणों को क्षमा। मेरे मित्रों ! यदि तुम अपनी पाठशाला में इस प्रकार का व्यवहार रक्खोगे तो तुम में से हरेक इस पाठशाला में ही, यद्यपि अभी तुम लड़के ही हो, पृथ्वी पर एक देवदूत तथा मनुष्यों में देवता के समान हो जाएगा।
क्या तुमने इस प्रकार का व्यवहार करने की चेष्टा की है ? क्या तुमने दूसरों की बुराइयाँ सुन कर उनको सच मानने से इन्कार किया है ? क्या तुमने उनको फैलने से रोका है ? या फिर, इसके विपरीत, तुम्हारी इच्छा उन पर विश्वास करने और उन्हें दूसरों से कहने के लिए हुई है ? दूसरों की प्रशंसा सुन कर तुमको प्रसन्नता भी हुई है क्या ? अपने आपको प्रसन्न करने की अपेक्षा उनको प्रसन्न करने में ही तुमको कभी सुरू मिला है कि नहीं ? अपने खेल-कूद में तुमने हमेशा ईमानदारी का बर्ताव
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बात को अपना सब से बड़ा सुख मानें कि हम दूसरों को सुखी बना सकते हैं । इस कर्त्तव्य का भी पालन सख्त नहीं है । परन्तु कोई भी कार्य जो श्रेष्ट और उच्च होता है सरल नहीं होता; और हमें कठिनाइयों को देख कर घबड़ाना नहीं चाहिए । कोई भी कठिनाई ऐसी नहीं है जिसे हम ईश्वर की सहायता से पार नहीं कर सकते हो । साथियों के प्रति अपने कर्तव्य का पालन इसलिये आसान नहीं है कि हमारे स्वभावों में पाप और स्वार्थ भरा हुआ है और पूर्ण वासनाओं से अंधे होकर हम अपने साथियों को तो बिलकुल भूल जाते हैं और अपने ही बारे मैं सोचने लगते हैं। और फिर ऐसा होता है कि अपने सांसारिक उद्देश्यों तथा अभ्युदय के अनुर में हम न केवल अपने साथियों का भला ही नहीं करते, बल्कि उनको हानि तक पहुँचा बैठते हैं । परन्तु आज से, मेरी प्रार्थना है कि, हम सब इस बात का प्रयत्न करें - और ईश्वर हमारी सहायता करेगा - कि हम अपने साथियों का अधिक विचार रखें और अपना कम । इरादा कर लोक से अपने-के लोगों के साथ कृपापूर्ण व्यवहार करेंगे । इरादा कर लो कि उनके लिए तुम्हारे कृपापूर्ण ही विचार होंगे। शायद यहाँ, पाठशाला के भीतर, हम इस अन्तिम दृष्टि से अपने कर्तव्य के सम्बन्ध में अधिक सावधान हो जाते हैं । तथापि, मेरे मित्रों ! अपने इस समाज में, जैसा कि हमें यहाँ प्राप्त है, उदारता तथा सहानुभूति के भाव रखना हो हमारा विशेष कर्तव्य है । हम में से प्रत्येक को ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने मित्र की प्रतिष्ठा को प्रतिष्ठा क महत्त्व की बात समझे । यहाँ एक दूसरे के प्रति तुम्हारा कर्तव्य यह है कि तुम्हारा हृदय प्रेमपूर्ण, निस्वार्थ और दयावान् होअपने मित्र के उपभोग के लिए उस वस्तु को दे डालने को तैयार रहो, जिसे तुम अपने उपभोग के लिए चाहते हो; दूसरों के सुख में अपना सुख समझो; उनके चरित्र के श्रेष्ठ के ऊपर ही तुम्हारी दृष्टि जाए, न कि बुरे अंश के ऊपर; उनके सद्गुणों पर तुम विश्वास कर सको और उनके दुगुणों को क्षमा। मेरे मित्रों ! यदि तुम अपनी पाठशाला में इस प्रकार का व्यवहार रक्खोगे तो तुम में से हरेक इस पाठशाला में ही, यद्यपि अभी तुम लड़के ही हो, पृथ्वी पर एक देवदूत तथा मनुष्यों में देवता के समान हो जाएगा। क्या तुमने इस प्रकार का व्यवहार करने की चेष्टा की है ? क्या तुमने दूसरों की बुराइयाँ सुन कर उनको सच मानने से इन्कार किया है ? क्या तुमने उनको फैलने से रोका है ? या फिर, इसके विपरीत, तुम्हारी इच्छा उन पर विश्वास करने और उन्हें दूसरों से कहने के लिए हुई है ? दूसरों की प्रशंसा सुन कर तुमको प्रसन्नता भी हुई है क्या ? अपने आपको प्रसन्न करने की अपेक्षा उनको प्रसन्न करने में ही तुमको कभी सुरू मिला है कि नहीं ? अपने खेल-कूद में तुमने हमेशा ईमानदारी का बर्ताव
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बच्ची के जन्म के बाद एक फरवरी को अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) ने बेटी की पहली तस्वीर सोशल मीडिया में साझा की और उसका नाम भी अपने फैंस और फॉलोअर्स को बताया है. अब एक नेम प्लेट सुर्खियों में है.
बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma)काफी समय से पर्दे से दूर हैं, लेकिन वह सोशल मीडिया के जरिए फैंस के दिलों के अभी भी करीब हैं. हाल ही में अनुष्का शर्मा ने एक बेटी को जन्म दिया है. अपनी बेटी की तस्वीर उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर भी की थी. उन्होंने अपनी बेटी का नाम 'वामिका' (Vamika) रखा है. एक्ट्रेस ने हाल ही में मार्च में वामिका का दो महीने का जन्मदिन मनाया है. जबकि फैंस अभी तक उनके बच्चे का फर्स्ट लुक नहीं देख पा रहे हैं, लेकिन अब एक्ट्रेस की बेटी को लेकर एक खबर वायरल हो रही है.
एक्ट्रेस 11 जनवरी को मां बनी हैं. एक्ट्रेस प्रेग्नेंसी के दौरान आए दिन अपनी फोटोज शेयर करती रहती थीं. बच्ची के जन्म के बाद एक फरवरी को अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) ने बेटी की पहली तस्वीर सोशल मीडिया में साझा की और उसका नाम भी अपने फैंस और फॉलोअर्स को बताया है. अब एक नेम प्लेट सुर्खियों में है.
इन दिनों विराट कोहली इंग्लैंड के खिलाफ हो रही सीरीज में बिजी हैं. ऐसे में भारतीय टीम जिस होटल में रह रही है, उसने खिलाड़ियों को घर जैसा महसूस करने का फैसला लिया गया है. ऐसे में उन्होंने नेमप्लेट के साथ रूम नंबर बदल दिए हैं. जूम की खबर के अनुसार कप्तान विराट के कमरे के बाहर एक खास नेमप्लेट लगी है, जिसमें तीन नाम हैं, विराट, उनकी पत्नी और एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा और उनकी दो महीने की बेटी, वामिका का.
सोशल मीडिया पर एक फोटो भी वायरल हो रही है, जो नेमप्लेट की है और इसमें सबसे ऊपर नाम वामिका का ही लिखा नजर आ रहा है. फैंस के बीच ये फोटो तेजी से छा रही है. हाल ही में वामिका के दूसरे महीने के जन्मदिन के केक का एक स्नैप एक्ट्रेस ने साझा किया था.
रविवार को अनुष्का ने बेटी होने के बाद की अपनी प्यारी सी फोटो शेयर की है. इस फोटो में एक्ट्रेस काफी फिट नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस पहले की तरह से ही फिट और खूबसूरत नजर आ रही हैं. फोटो देखकर लग रहा है कि एक्ट्रेस से वर्कआउट के वक्त की ये फोटो है.
एक्ट्रेस की ये फोटो सेल्फी है. फोटो में अनुष्का पाउड बनातीं नजर आ रही हैं. इस फोटो में एक्ट्रेस ब्लैक अवतार में नजर आ रही हैं. अनुष्का की इस फोटो से फैंस नजरें नहीं हटा रहे हैं. अनुष्का की फिटनेट एक बार फिर से फैंस को दीवाना कर रही है. एक्ट्रेस की फोटो पर फैंस जमकर लाइक और कमेंट कर रहे हैं.
हाल ही में अनुष्का ने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उन्होंने बेटी को गोद में पकड़ा हुआ था. फोटो में अनुष्का और विराट मुस्कुराते हुए प्यार से बेटी को देख रहे थे. फोटो के साथ ही एक्ट्रेस ने बेटी के नाम का भी खुलासा किया था. विराट-अनुष्का ने अपनी लाड़ली को वामिका (Vamika) नाम दिया है. वामिका मां दुर्गा का पर्यायवाची है.
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बच्ची के जन्म के बाद एक फरवरी को अनुष्का शर्मा ने बेटी की पहली तस्वीर सोशल मीडिया में साझा की और उसका नाम भी अपने फैंस और फॉलोअर्स को बताया है. अब एक नेम प्लेट सुर्खियों में है. बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा काफी समय से पर्दे से दूर हैं, लेकिन वह सोशल मीडिया के जरिए फैंस के दिलों के अभी भी करीब हैं. हाल ही में अनुष्का शर्मा ने एक बेटी को जन्म दिया है. अपनी बेटी की तस्वीर उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर भी की थी. उन्होंने अपनी बेटी का नाम 'वामिका' रखा है. एक्ट्रेस ने हाल ही में मार्च में वामिका का दो महीने का जन्मदिन मनाया है. जबकि फैंस अभी तक उनके बच्चे का फर्स्ट लुक नहीं देख पा रहे हैं, लेकिन अब एक्ट्रेस की बेटी को लेकर एक खबर वायरल हो रही है. एक्ट्रेस ग्यारह जनवरी को मां बनी हैं. एक्ट्रेस प्रेग्नेंसी के दौरान आए दिन अपनी फोटोज शेयर करती रहती थीं. बच्ची के जन्म के बाद एक फरवरी को अनुष्का शर्मा ने बेटी की पहली तस्वीर सोशल मीडिया में साझा की और उसका नाम भी अपने फैंस और फॉलोअर्स को बताया है. अब एक नेम प्लेट सुर्खियों में है. इन दिनों विराट कोहली इंग्लैंड के खिलाफ हो रही सीरीज में बिजी हैं. ऐसे में भारतीय टीम जिस होटल में रह रही है, उसने खिलाड़ियों को घर जैसा महसूस करने का फैसला लिया गया है. ऐसे में उन्होंने नेमप्लेट के साथ रूम नंबर बदल दिए हैं. जूम की खबर के अनुसार कप्तान विराट के कमरे के बाहर एक खास नेमप्लेट लगी है, जिसमें तीन नाम हैं, विराट, उनकी पत्नी और एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा और उनकी दो महीने की बेटी, वामिका का. सोशल मीडिया पर एक फोटो भी वायरल हो रही है, जो नेमप्लेट की है और इसमें सबसे ऊपर नाम वामिका का ही लिखा नजर आ रहा है. फैंस के बीच ये फोटो तेजी से छा रही है. हाल ही में वामिका के दूसरे महीने के जन्मदिन के केक का एक स्नैप एक्ट्रेस ने साझा किया था. रविवार को अनुष्का ने बेटी होने के बाद की अपनी प्यारी सी फोटो शेयर की है. इस फोटो में एक्ट्रेस काफी फिट नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस पहले की तरह से ही फिट और खूबसूरत नजर आ रही हैं. फोटो देखकर लग रहा है कि एक्ट्रेस से वर्कआउट के वक्त की ये फोटो है. एक्ट्रेस की ये फोटो सेल्फी है. फोटो में अनुष्का पाउड बनातीं नजर आ रही हैं. इस फोटो में एक्ट्रेस ब्लैक अवतार में नजर आ रही हैं. अनुष्का की इस फोटो से फैंस नजरें नहीं हटा रहे हैं. अनुष्का की फिटनेट एक बार फिर से फैंस को दीवाना कर रही है. एक्ट्रेस की फोटो पर फैंस जमकर लाइक और कमेंट कर रहे हैं. हाल ही में अनुष्का ने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उन्होंने बेटी को गोद में पकड़ा हुआ था. फोटो में अनुष्का और विराट मुस्कुराते हुए प्यार से बेटी को देख रहे थे. फोटो के साथ ही एक्ट्रेस ने बेटी के नाम का भी खुलासा किया था. विराट-अनुष्का ने अपनी लाड़ली को वामिका नाम दिया है. वामिका मां दुर्गा का पर्यायवाची है.
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केन्द्रीय रसायन व उर्वरक, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने आज नई दिल्ली में कहा है कि सभी राज्यों में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। किसी भी आकस्मिक जरूरत से निपटने के लिए यह स्टॉक पर्याप्त है।
श्री गौड़ा ने कहा कि उर्वरक विभाग उर्वरकों के परिवहन के लिए भारतीय रेल के साथ दैनिक स्तर पर समन्वय कर रहा है। रबी मौसम को देखते हुए देश में पर्याप्त उर्वरक उपलब्धता की दैनिक स्तर पर निगरानी की जा रही है। श्री गौड़ा ने कहा कि कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग, उर्वरक विभाग तथा भारतीय रेल द्वारा 4 दिसंबर, 2018 को संयुक्त रूप से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी राज्यों ने उर्वरकों के पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने की सूचना दी है।
श्री गौड़ा ने कहा कि उर्वरकों के परिवहन के लिए भारतीय रेल के साथ दैनिक स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। खरीफ 2018 मौसम में 2017 के मुकाबले 250 अतिरिक्त रेल डिब्बों की व्यवस्था की गई है।
रबी 2018-19 (अक्टूबर, 2018 से मार्च, 2019 तक) के लिए यूरिया की अनुमानित जरूरत 155.84 एलएमटी है। कुल अनुमानित मात्रा का अधिकांश भाग घरेलू उत्पादन से पूरा हो जाएगा। यूरिया के घरेलू उत्पादन का अनुमान 129 एलएमटी है। शेष जरूरत को आयात से पूरा किया जाएगा।
मासिक आपूर्ति योजना के तहत उर्वरकों की आपूर्ति की जाती है। प्रत्येक महीने के प्रारंभ में आपूर्तिकर्ताओं की सलाह से मासिक आपूर्ति योजना तैयार की जाती है। प्रत्येक राज्य की अनुमानित जरूरत के हिसाब से उर्वरकों की आपूर्ति की जाती है। जब राज्य उर्वरक प्राप्त कर लेते है तो उनके राज्य में वितरण की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।
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केन्द्रीय रसायन व उर्वरक, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने आज नई दिल्ली में कहा है कि सभी राज्यों में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। किसी भी आकस्मिक जरूरत से निपटने के लिए यह स्टॉक पर्याप्त है। श्री गौड़ा ने कहा कि उर्वरक विभाग उर्वरकों के परिवहन के लिए भारतीय रेल के साथ दैनिक स्तर पर समन्वय कर रहा है। रबी मौसम को देखते हुए देश में पर्याप्त उर्वरक उपलब्धता की दैनिक स्तर पर निगरानी की जा रही है। श्री गौड़ा ने कहा कि कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग, उर्वरक विभाग तथा भारतीय रेल द्वारा चार दिसंबर, दो हज़ार अट्ठारह को संयुक्त रूप से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी राज्यों ने उर्वरकों के पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने की सूचना दी है। श्री गौड़ा ने कहा कि उर्वरकों के परिवहन के लिए भारतीय रेल के साथ दैनिक स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। खरीफ दो हज़ार अट्ठारह मौसम में दो हज़ार सत्रह के मुकाबले दो सौ पचास अतिरिक्त रेल डिब्बों की व्यवस्था की गई है। रबी दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के लिए यूरिया की अनुमानित जरूरत एक सौ पचपन.चौरासी एलएमटी है। कुल अनुमानित मात्रा का अधिकांश भाग घरेलू उत्पादन से पूरा हो जाएगा। यूरिया के घरेलू उत्पादन का अनुमान एक सौ उनतीस एलएमटी है। शेष जरूरत को आयात से पूरा किया जाएगा। मासिक आपूर्ति योजना के तहत उर्वरकों की आपूर्ति की जाती है। प्रत्येक महीने के प्रारंभ में आपूर्तिकर्ताओं की सलाह से मासिक आपूर्ति योजना तैयार की जाती है। प्रत्येक राज्य की अनुमानित जरूरत के हिसाब से उर्वरकों की आपूर्ति की जाती है। जब राज्य उर्वरक प्राप्त कर लेते है तो उनके राज्य में वितरण की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।
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जाति का लक्षण ।
भाष्य - जिससे (गोत्व आदि) जाति, और जातिके लिङ्ग (मुख आदि अवयव, पहचाने जाते हैं, उसको आकृति जाने। और वह द्रव्यके अवयवों और उनके अवयवोंकी जोनियत रचना है, उससे कोई अलग वस्तुनहीं। द्रव्यों के अवयव (शिर आदि) जो नियत अवयव रचना वाले हैं, वे जाति का लिङ्ग होते हैं, जैसे सिर से पाओं से गौ का अनुमान करते हैं। द्रव्य के अवयवोंकी नियत रचना के होते हुए गोत्व की प्रतीति होती है। और जहां जातिकी व्यञ्जक आकृति नहीं होती जैसे मट्टी, सोना, चांदी इत्यादि, उन में आकृति निवृत्त हो जाती है, पदार्थ नहीं होता (अर्थात् वहां जाति और व्यक्ति ही पदार्थ होते हैं आकृति पदार्थ नहीं होती) ।
समानप्रसवात्मिका जातिः ॥ ६७ ॥
( भिन्नों में ) समान बुद्धि के उत्पन्न करने वाली जाति है। भाष्य - जो भिन्न २ व्यक्तियों में समान बुद्धि को उत्पन्न करती है ( जैसे यह गौ है, वह गौ है, ऐसी समान बुद्धि ) । जिस से अनेक आपस में एक दूसरे से अलग नहीं होते ( अर्थात् एक ही नाम से बोले जाते हैं ) जो अर्थ अनेकों में एकाकार प्रतीति का निमित्त है, वह सामान्य है, और जो किसी से भेद और किसी से अभेद कराती है, वह सामान्य विशेष जाति है ( जाति के दो भेद हैं, सामान्य और सामान्यविशेष । पशु जाति सामान्य है, जो गौ घोड़े आदि भिन्न जाति वालों की व्यापक जाति है। गौ आदि सामान्यविशेष जाति है; क्योंकि गौ प्रतीति सारी गौओं में एक जैसी होती है पर घोड़े से यह प्रतीति निवृत्त हो जाती है।
इति वात्स्यायनीय न्यायभाध्ये द्वितीयोऽध्यायः
* आकृति के विषय में यह नियम है, कि वह सदा जाति की व्यञ्जक होती है, जाति के विषय में यह नियम नहीं, कि हरएक जाति आकृति से ही जानी जाती है, क्योंकि सोने चांदी के आकार में कोई भेद न होने पर भी रंग आदि से जाति का भेद ज्ञात होता है।
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जाति का लक्षण । भाष्य - जिससे जाति, और जातिके लिङ्ग जो नियत अवयव रचना वाले हैं, वे जाति का लिङ्ग होते हैं, जैसे सिर से पाओं से गौ का अनुमान करते हैं। द्रव्य के अवयवोंकी नियत रचना के होते हुए गोत्व की प्रतीति होती है। और जहां जातिकी व्यञ्जक आकृति नहीं होती जैसे मट्टी, सोना, चांदी इत्यादि, उन में आकृति निवृत्त हो जाती है, पदार्थ नहीं होता । समानप्रसवात्मिका जातिः ॥ सरसठ ॥ समान बुद्धि के उत्पन्न करने वाली जाति है। भाष्य - जो भिन्न दो व्यक्तियों में समान बुद्धि को उत्पन्न करती है । जिस से अनेक आपस में एक दूसरे से अलग नहीं होते जो अर्थ अनेकों में एकाकार प्रतीति का निमित्त है, वह सामान्य है, और जो किसी से भेद और किसी से अभेद कराती है, वह सामान्य विशेष जाति है ( जाति के दो भेद हैं, सामान्य और सामान्यविशेष । पशु जाति सामान्य है, जो गौ घोड़े आदि भिन्न जाति वालों की व्यापक जाति है। गौ आदि सामान्यविशेष जाति है; क्योंकि गौ प्रतीति सारी गौओं में एक जैसी होती है पर घोड़े से यह प्रतीति निवृत्त हो जाती है। इति वात्स्यायनीय न्यायभाध्ये द्वितीयोऽध्यायः * आकृति के विषय में यह नियम है, कि वह सदा जाति की व्यञ्जक होती है, जाति के विषय में यह नियम नहीं, कि हरएक जाति आकृति से ही जानी जाती है, क्योंकि सोने चांदी के आकार में कोई भेद न होने पर भी रंग आदि से जाति का भेद ज्ञात होता है।
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कोलंबो में भारतीय टीम के दो दिग्गज स्पिन गेंदबाज़ों के बीच भिड़त देखने को मिली।
नई दिल्ली, प्रदीप सहगल। श्रीलंका को कोलंबो में खेला गया दूसरा टेस्ट मैच टीम इंडिया ने पारी और 53 रन से अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने तीन टेस्ट मैच की सीरीज़ में 2-0 की अजेय बढ़त बनाते हुए सीरीज़ भी अपने नाम कर ली। इस टेस्ट मैच में भारतीय टीम के दो दिग्गज स्पिन गेंदबाज़ों के बीच भिड़त देखने को मिली। आर. अश्विन और रवींद्र जडेजा दोनों ने ही इस टेस्ट मैच में 7-7 विकेट लिए। लेकिन इन दोनों दिग्गजों की इस भिड़त को देख विराट कोहली खुश हो गए।
कोलंबो टेस्ट की पहली पारी में जब श्रीलंकाई टीम खेल रही थी, तो अश्विन ने अपनी फिरकी का ऐसा जाल बिछाया जिसमें मेजबान बल्लेबाज़ फंसते चले गए। लंका की पहली पारी में आर. अश्विन ने 5 विकेट अपने नाम किए, तो जडेजा को सिर्फ दो ही विकेट मिले। अश्विन ने पहली पारी में 'पंजा' लगाया तो दूसरी पारी में जडेजा कहां पीछे रहने वाले थे। लंका की दूसरी पारी में रवींद्र जडेजा ने अपनी फिरकी का जादू दिखाया और पांच-पांच श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों का शिकार कर लिया। दूसरी पारी में अश्विन की फिरकी के मुकाबला जडेजा का जादू श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों पर ज्यादा चला। दूसरी पारी में अश्विन सिर्फ दो ही विकेट ले पाए। यानि इन दोनों दिग्गजों ने मैच में 7-7 विकेट अपने नाम किए और इन दोनों गेंदबाज़ों के प्रदर्शन को देखते विराट कोहली खुश हो गए। क्योंकि इन दोनों गेंदबाज़ों का ये स्वस्थ कॉम्पिटीशन भारतीय टीम के लिए अच्छी बात है।
कोलंबो में तो अश्विन और जडेजा के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली ही, इसके साथ ही साथ एक और जगह इन दोनों के बीच एक स्वस्थ लड़ाई जारी है। आइसीसी की मौजूदा टेस्ट गेंदबाज़ों की रैंकिंग में जडेजा नंबर वन पर बरकरार है तो अश्विन नंबर दो पर बने हुए है। अब इन दोनों दिग्गजों के बीच एक दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ लगी हुई है। हालांकि अभी तक तो जडेजा इसमें आगे ही चल रहे हैं। पिछली बार श्रीलंकाई दिग्गज रंगना हेराछ ने अश्विन को पीछे छोड़ कर तीसरे नंबर पर धकेल दिया था, लेकिन इस बार अश्विन ने फिर से असरदार गेंदबाज़ी करते हुए वापस नंबर दो का स्थान हासिल कर लिया।
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कोलंबो में भारतीय टीम के दो दिग्गज स्पिन गेंदबाज़ों के बीच भिड़त देखने को मिली। नई दिल्ली, प्रदीप सहगल। श्रीलंका को कोलंबो में खेला गया दूसरा टेस्ट मैच टीम इंडिया ने पारी और तिरेपन रन से अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने तीन टेस्ट मैच की सीरीज़ में दो-शून्य की अजेय बढ़त बनाते हुए सीरीज़ भी अपने नाम कर ली। इस टेस्ट मैच में भारतीय टीम के दो दिग्गज स्पिन गेंदबाज़ों के बीच भिड़त देखने को मिली। आर. अश्विन और रवींद्र जडेजा दोनों ने ही इस टेस्ट मैच में सात-सात विकेट लिए। लेकिन इन दोनों दिग्गजों की इस भिड़त को देख विराट कोहली खुश हो गए। कोलंबो टेस्ट की पहली पारी में जब श्रीलंकाई टीम खेल रही थी, तो अश्विन ने अपनी फिरकी का ऐसा जाल बिछाया जिसमें मेजबान बल्लेबाज़ फंसते चले गए। लंका की पहली पारी में आर. अश्विन ने पाँच विकेट अपने नाम किए, तो जडेजा को सिर्फ दो ही विकेट मिले। अश्विन ने पहली पारी में 'पंजा' लगाया तो दूसरी पारी में जडेजा कहां पीछे रहने वाले थे। लंका की दूसरी पारी में रवींद्र जडेजा ने अपनी फिरकी का जादू दिखाया और पांच-पांच श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों का शिकार कर लिया। दूसरी पारी में अश्विन की फिरकी के मुकाबला जडेजा का जादू श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों पर ज्यादा चला। दूसरी पारी में अश्विन सिर्फ दो ही विकेट ले पाए। यानि इन दोनों दिग्गजों ने मैच में सात-सात विकेट अपने नाम किए और इन दोनों गेंदबाज़ों के प्रदर्शन को देखते विराट कोहली खुश हो गए। क्योंकि इन दोनों गेंदबाज़ों का ये स्वस्थ कॉम्पिटीशन भारतीय टीम के लिए अच्छी बात है। कोलंबो में तो अश्विन और जडेजा के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली ही, इसके साथ ही साथ एक और जगह इन दोनों के बीच एक स्वस्थ लड़ाई जारी है। आइसीसी की मौजूदा टेस्ट गेंदबाज़ों की रैंकिंग में जडेजा नंबर वन पर बरकरार है तो अश्विन नंबर दो पर बने हुए है। अब इन दोनों दिग्गजों के बीच एक दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ लगी हुई है। हालांकि अभी तक तो जडेजा इसमें आगे ही चल रहे हैं। पिछली बार श्रीलंकाई दिग्गज रंगना हेराछ ने अश्विन को पीछे छोड़ कर तीसरे नंबर पर धकेल दिया था, लेकिन इस बार अश्विन ने फिर से असरदार गेंदबाज़ी करते हुए वापस नंबर दो का स्थान हासिल कर लिया।
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कर्नाटक के जिस फ्लैट से फर्जी वोटर आईडी मिलने पर कांग्रेस-बीजेपी में ठनी हुई है। इस मामले में अब नया मोड़ आ गया है। दरअसल इस मामले में फ्लैट की मिल्कियत पर मंजुला नानजामरी सवालों में हैं। तो अब मंजुला ने भी कांग्रेस-बीजेपी की बहस पर अपनी सफाई पेश कर दी है। मंजुला ने कहा है कि 1997-2002 तक वो भाजपा के आशीर्वाद से पार्षद रहीं। लेकिन कांग्रेस से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
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कर्नाटक के जिस फ्लैट से फर्जी वोटर आईडी मिलने पर कांग्रेस-बीजेपी में ठनी हुई है। इस मामले में अब नया मोड़ आ गया है। दरअसल इस मामले में फ्लैट की मिल्कियत पर मंजुला नानजामरी सवालों में हैं। तो अब मंजुला ने भी कांग्रेस-बीजेपी की बहस पर अपनी सफाई पेश कर दी है। मंजुला ने कहा है कि एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे-दो हज़ार दो तक वो भाजपा के आशीर्वाद से पार्षद रहीं। लेकिन कांग्रेस से उनका कोई लेना-देना नहीं है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार ने कहा है कि अगर यमन युद्ध में पाकिस्तानी सेना भाग लेती तो उनके ही देश के शिया मुसलमानों के साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती।
विदेश मामलों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़, अमृतसर में आयोजित होने वाले हार्ट ऑफ एशिया के सम्मेलन में भाग लेने के लिए रविवार को भारत जाएंगे।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार ने कहा है कि भारत के साथ पिछले दरवाज़े से कोई कूटनैतिक बात नहीं चल रही है।
पाकिस्तान ने कहा है कि वह कश्मीर मामले में भारत के मु़क़ाबले में पीछे नहीं हटेगा।
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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार ने कहा है कि अगर यमन युद्ध में पाकिस्तानी सेना भाग लेती तो उनके ही देश के शिया मुसलमानों के साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती। विदेश मामलों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़, अमृतसर में आयोजित होने वाले हार्ट ऑफ एशिया के सम्मेलन में भाग लेने के लिए रविवार को भारत जाएंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार ने कहा है कि भारत के साथ पिछले दरवाज़े से कोई कूटनैतिक बात नहीं चल रही है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह कश्मीर मामले में भारत के मु़क़ाबले में पीछे नहीं हटेगा।
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भारतीय क्रिकेट इस समय अपनी बुलंदियों पर है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) एक साथ दो टीमों को मैदान पर उतारने की स्थिति में है। विराट कोहली की अगुवाई में भारत की एक टीम जहां इंग्लैंड दौरे पर है तो शिखर धवन की कप्तानी अगले महीने श्रीलंका दौरे पर सीमित ओवरों की सीरीज खेलेगी। इस सबके बीच पूर्व भारतीय चीफ सेलेक्टर चयनकर्ता एमएसके प्रसाद अरने कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर अहम बात कही है। बता दें कि 6 टेस्ट और 17 वनडे खेलने वाले प्रसाद की अनुभव की कमी होने पर काफी आलोचना हुई थी।
'चॉकलेट की तरह बांटे रहे इंडिया कैप'
एमएसके प्रसाद ने दैनिक दैनिक जागरण से बातचीत में अपने कार्यकाल के दौरान मिली आलोचनाओं को याद किया और बताया कि कैसे उस वक्त कई युवाओं को मौका देना अब टीम इंडिया के लिए मददगार साबित हो रहा है। दरअसल, प्रसाद से सवाल पूछा गया कि फिलहाल एक भारतीय टीम इंग्लैंड में है जबकि दूसरी श्रीलंका दौरे पर जाने लिए तैयार है। दोनों ही टीमों में शानदार खिलाड़ी हैं। आप इसे किस तरह देखते हैं? इसपर रिएक्ट करते हुए पूर्व चीफ सेलेक्टर ने कहा कि लोग बोला करते थे कि सेलेक्टर्स को एक्सपीरियंस नहीं है, इसलिए चॉकलेट की तरह भारतीय टीम की कैप बांटी जा रही हैं।
'एक खिलाड़ी के पीछे तीन-चार लगाए'
प्रसाद ने जवाब में कहा, 'यह बहुत खुशी की बात है कि हमारी दो टीमें बनकर आज खड़ी हुई हैं। मैं जब युवा खिलाडि़यों को मौके दे रहा था तो काफी आलोचनाओं का हमें सामना करना पड़ा। सब लोग कह रहे थे कि चयनकर्ताओं को अनुभव नहीं है और चॉकलेट की तरह ब्लू कैप (भारतीय टीम की पदार्पण टोपी) बांट रहे हैं। आज वही लोग कह रहे हैं कि नहीं बेंच स्ट्रेंथ काफी मजबूत है। हम लोग का यही था कि वर्तमान टीम इंडिया को किन्हीं और चयनकर्ताओं ने बनाया तो हमारा काम यह था कि इसके आगे क्या। हमने हमने एक-एक खिलाड़ी के पीछे तीन-तीन, चार-चार खिलाड़ी लगाए थे। हमारा कर्तव्य ही यही था। वह हमने पूरा किया। '
'कुलदीप यादव जरूर वापसी करेगा'
इसके अलावा प्रसाद ने बाएं हाथ के स्पिनर कुलदीप यादव को लेकर भी अपने विचार रखे। आईसीसी 2019 विश्व कप के बाद से कुलदीप को भारतीय टीम में कम ही मौके मिले हैं। प्रसाद ने कहा, 'आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के लिए खेलते हुए कुलदीप ने अपना फॉर्म खो दिया। वह ट्रेक पर संघर्ष कर रहा था। उसने अपना आत्मविश्वास खो दिया, क्योंकि वह अच्छी गेंदबाजी नहीं कर रहा था। उसके बाद कुलदीप वापसी नहीं कर सका। कुलदीप एक युवा क्रिकेटर है और मुझे विश्वास है कि वह अपनी गलतियों से सीखेगा और वापसी करेगा। उसने खेल के तीनों प्रारूपों में पांच विकेट लिए हैं। विश्व क्रिकेट में बहुत कम चाइनामैन गेंदबाज हैं और मुझे यकीन है कि वह जरूर वापसी करेगा। '
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भारतीय क्रिकेट इस समय अपनी बुलंदियों पर है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड एक साथ दो टीमों को मैदान पर उतारने की स्थिति में है। विराट कोहली की अगुवाई में भारत की एक टीम जहां इंग्लैंड दौरे पर है तो शिखर धवन की कप्तानी अगले महीने श्रीलंका दौरे पर सीमित ओवरों की सीरीज खेलेगी। इस सबके बीच पूर्व भारतीय चीफ सेलेक्टर चयनकर्ता एमएसके प्रसाद अरने कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर अहम बात कही है। बता दें कि छः टेस्ट और सत्रह वनडे खेलने वाले प्रसाद की अनुभव की कमी होने पर काफी आलोचना हुई थी। 'चॉकलेट की तरह बांटे रहे इंडिया कैप' एमएसके प्रसाद ने दैनिक दैनिक जागरण से बातचीत में अपने कार्यकाल के दौरान मिली आलोचनाओं को याद किया और बताया कि कैसे उस वक्त कई युवाओं को मौका देना अब टीम इंडिया के लिए मददगार साबित हो रहा है। दरअसल, प्रसाद से सवाल पूछा गया कि फिलहाल एक भारतीय टीम इंग्लैंड में है जबकि दूसरी श्रीलंका दौरे पर जाने लिए तैयार है। दोनों ही टीमों में शानदार खिलाड़ी हैं। आप इसे किस तरह देखते हैं? इसपर रिएक्ट करते हुए पूर्व चीफ सेलेक्टर ने कहा कि लोग बोला करते थे कि सेलेक्टर्स को एक्सपीरियंस नहीं है, इसलिए चॉकलेट की तरह भारतीय टीम की कैप बांटी जा रही हैं। 'एक खिलाड़ी के पीछे तीन-चार लगाए' प्रसाद ने जवाब में कहा, 'यह बहुत खुशी की बात है कि हमारी दो टीमें बनकर आज खड़ी हुई हैं। मैं जब युवा खिलाडि़यों को मौके दे रहा था तो काफी आलोचनाओं का हमें सामना करना पड़ा। सब लोग कह रहे थे कि चयनकर्ताओं को अनुभव नहीं है और चॉकलेट की तरह ब्लू कैप बांट रहे हैं। आज वही लोग कह रहे हैं कि नहीं बेंच स्ट्रेंथ काफी मजबूत है। हम लोग का यही था कि वर्तमान टीम इंडिया को किन्हीं और चयनकर्ताओं ने बनाया तो हमारा काम यह था कि इसके आगे क्या। हमने हमने एक-एक खिलाड़ी के पीछे तीन-तीन, चार-चार खिलाड़ी लगाए थे। हमारा कर्तव्य ही यही था। वह हमने पूरा किया। ' 'कुलदीप यादव जरूर वापसी करेगा' इसके अलावा प्रसाद ने बाएं हाथ के स्पिनर कुलदीप यादव को लेकर भी अपने विचार रखे। आईसीसी दो हज़ार उन्नीस विश्व कप के बाद से कुलदीप को भारतीय टीम में कम ही मौके मिले हैं। प्रसाद ने कहा, 'आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलते हुए कुलदीप ने अपना फॉर्म खो दिया। वह ट्रेक पर संघर्ष कर रहा था। उसने अपना आत्मविश्वास खो दिया, क्योंकि वह अच्छी गेंदबाजी नहीं कर रहा था। उसके बाद कुलदीप वापसी नहीं कर सका। कुलदीप एक युवा क्रिकेटर है और मुझे विश्वास है कि वह अपनी गलतियों से सीखेगा और वापसी करेगा। उसने खेल के तीनों प्रारूपों में पांच विकेट लिए हैं। विश्व क्रिकेट में बहुत कम चाइनामैन गेंदबाज हैं और मुझे यकीन है कि वह जरूर वापसी करेगा। '
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बिग बॉस-13 में बनी सिद्धार्थ शुक्ला और शहनाज गिल की जोड़ी खूब चर्चा में रही। शो में दोनों की दोस्ती को खूब पसंद किया गया। हालांकि कुछ लोगों को ये फेक फ्रेंडशिप भी लगी।
बिग बॉस-13 से बाहर आने के बाद सिद्धार्थ शुक्ला और शहनाज गिल का साथ में एक म्यूजिक एल्बम भुला दूंगा भी आ चुका है। दर्शन रावल द्वारा बनाए गए इस रोमांटिक वीडियो में सिद्धार्थ और शहनाज को एक साथ काफी पसंद किया गया। ये सॉन्ग चार्टबस्टर रहा और कई दिनों तक टॉप ट्रेंड में बना रहा।
Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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बिग बॉस-तेरह में बनी सिद्धार्थ शुक्ला और शहनाज गिल की जोड़ी खूब चर्चा में रही। शो में दोनों की दोस्ती को खूब पसंद किया गया। हालांकि कुछ लोगों को ये फेक फ्रेंडशिप भी लगी। बिग बॉस-तेरह से बाहर आने के बाद सिद्धार्थ शुक्ला और शहनाज गिल का साथ में एक म्यूजिक एल्बम भुला दूंगा भी आ चुका है। दर्शन रावल द्वारा बनाए गए इस रोमांटिक वीडियो में सिद्धार्थ और शहनाज को एक साथ काफी पसंद किया गया। ये सॉन्ग चार्टबस्टर रहा और कई दिनों तक टॉप ट्रेंड में बना रहा। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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नारनौल, 9 जुलाई (हप्र)
हरी चुनरी चौपाल के दूसरे चरण की शुरुआत 23 जुलाई को नांगल चौधरी के गांव नायन से होगी। इसमें मुख्य अतिथि बाढड़ा से जजपा विधायक नैना चौटाला होंगी। इस चौपाल की संयोजक सावित्री गुर्जर को बनाया गया है।
कार्यक्रम की सफलता के लिए रविवार को जजपा के सिंघाना रोड स्थित जिला कार्यालय में एक बैठक हुई, जिसमें मुख्य वक्ता जजपा के राष्ट्रीय संगठन सचिव, खादी बोर्ड के चेयरमैन एवं हरी चुनरी चौपाल के प्रभारी राजेंद्र लितानी थे। इस मौके पर महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष शीला भ्याण, जजपा एससी सैल के प्रदेश अध्यक्ष रमेश खटक, जिला प्रधान डा. मनीष शर्मा मौजूद थे। मीटिंग में नियामतपुर गांव के शहीद नरेश डाडवाल को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। नरेश जम्मू कश्मीर ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चेयरमैन राजेंद्र लितानी ने कहा कि हरी चुनरी चौपाल का पहला चरण पूरा हो चुका है तथा अब दूसरे चरण की शुरूआत नायन गांव से की जा रही है। चुनाव नजदीक आ रहे हैं तथा सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर जनता के बीच जाकर कार्य करना चाहिए। शीला भ्याण ने कहा कि हमारी सरकार ने उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम किए हैं।
एससी सैल के प्रदेश अध्यक्ष रमेश खटक ने प्रकोष्ठ की जिला स्तरीय मीटिंग ली तथा कहा कि संगठन की मजबूती के लिए सभी मिल-जुलकर कार्य करें और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करें।
बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कंवर सिंह कलवाड़ी, राष्ट्रीय महासचिव कमलेश सैनी, प्रदेश उपाध्यक्ष अभिमन्यु राव, प्रदेश महासचिव एडवोकेट तेजप्रकाश, जिला प्रवक्ता सिकंदर गहली, रमेश पालड़ी, प्रदेश सचिव अशोक सैनी, महिला जिलाध्यक्ष सुविधा शास्त्री, युवा जिलाध्यक्ष युद्धवीर पालड़ी, विजयपाल एडवोकेट, हलका अध्यक्ष सुरेंद्र पटीकरा, हजारी लाल लंबौरा, बेदू राता, विजय छिलरो, धर्मबीर प्रधान, कुलदीप कलवाड़ी, विष्णु डाबड़, अजय एडवोकेट, नवीन राव मौजूद थे।
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नारनौल, नौ जुलाई हरी चुनरी चौपाल के दूसरे चरण की शुरुआत तेईस जुलाई को नांगल चौधरी के गांव नायन से होगी। इसमें मुख्य अतिथि बाढड़ा से जजपा विधायक नैना चौटाला होंगी। इस चौपाल की संयोजक सावित्री गुर्जर को बनाया गया है। कार्यक्रम की सफलता के लिए रविवार को जजपा के सिंघाना रोड स्थित जिला कार्यालय में एक बैठक हुई, जिसमें मुख्य वक्ता जजपा के राष्ट्रीय संगठन सचिव, खादी बोर्ड के चेयरमैन एवं हरी चुनरी चौपाल के प्रभारी राजेंद्र लितानी थे। इस मौके पर महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष शीला भ्याण, जजपा एससी सैल के प्रदेश अध्यक्ष रमेश खटक, जिला प्रधान डा. मनीष शर्मा मौजूद थे। मीटिंग में नियामतपुर गांव के शहीद नरेश डाडवाल को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। नरेश जम्मू कश्मीर ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चेयरमैन राजेंद्र लितानी ने कहा कि हरी चुनरी चौपाल का पहला चरण पूरा हो चुका है तथा अब दूसरे चरण की शुरूआत नायन गांव से की जा रही है। चुनाव नजदीक आ रहे हैं तथा सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर जनता के बीच जाकर कार्य करना चाहिए। शीला भ्याण ने कहा कि हमारी सरकार ने उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम किए हैं। एससी सैल के प्रदेश अध्यक्ष रमेश खटक ने प्रकोष्ठ की जिला स्तरीय मीटिंग ली तथा कहा कि संगठन की मजबूती के लिए सभी मिल-जुलकर कार्य करें और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करें। बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कंवर सिंह कलवाड़ी, राष्ट्रीय महासचिव कमलेश सैनी, प्रदेश उपाध्यक्ष अभिमन्यु राव, प्रदेश महासचिव एडवोकेट तेजप्रकाश, जिला प्रवक्ता सिकंदर गहली, रमेश पालड़ी, प्रदेश सचिव अशोक सैनी, महिला जिलाध्यक्ष सुविधा शास्त्री, युवा जिलाध्यक्ष युद्धवीर पालड़ी, विजयपाल एडवोकेट, हलका अध्यक्ष सुरेंद्र पटीकरा, हजारी लाल लंबौरा, बेदू राता, विजय छिलरो, धर्मबीर प्रधान, कुलदीप कलवाड़ी, विष्णु डाबड़, अजय एडवोकेट, नवीन राव मौजूद थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइट पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों का चयन क्यों किया है इसके बारे में पूरी जानकारी दें। अदालत ने यह फैसला इसलिए दिया है क्योंकि पिछले चार राष्ट्रीय चुनावों में राजनीति के अपराधीकरण में काफी ज्यादा वृद्धि देखने को मिली है। शीर्ष अदालत का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को 48 घंटे के भीतर अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर विवरण अपलोड करना अनिवार्य होगा। पार्टियों को चुनाव आयोग को 72 घंटे के भीतर ब्यौरा देना होगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों को अखबारों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अपनी वेबसाइट पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन का कारण बताते हुए वेबसाइट पर उनका परिचय पत्र, उपलब्धियां और उनके अपराध का विवरण प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया है।
उच्चतम न्यायालय का कहना है कि यदि राजनीतिक दल आदेश का पालन नहीं करते हैं तो वह अवमानना के उत्तरदायी होंगे। अदालत ने चुनाव आयोग से कहा है कि यदि राजनीतिक पार्टियां आदेश का पालन करने में विफल रहती हैं तो वह अदालत में अवमानना याचिका दायर करे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन करने का कारण योग्यता के आधार पर होना चाहिए, न कि जीतने के आधार पर। जीतने की काबिलियत तर्कसंगत नहीं हो सकता। अदालत ने यह फैसला वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय और अन्य द्वारा दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनाया है।
जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा आठ दोषी राजनेताओं को चुनाव लड़ने से रोकती है। लेकिन ऐसे नेता जिन पर केवल मुकदमा चल रहा है, वे चुनाव लड़ने के लिये स्वतंत्र हैं। भले ही उनके ऊपर लगा आरोप कितना भी गंभीर है।
जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा आठ(1) और (2) के अंतर्गत प्रावधान है कि यदि कोई विधायिका सदस्य (सांसद अथवा विधायक) हत्या, दुष्कर्म, अस्पृश्यता, विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के उल्लंघन, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर शत्रुता पैदा करना, भारतीय संविधान का अपमान करना, प्रतिबंधित वस्तुओं का आयात या निर्यात करना, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना जैसे अपराधों में लिप्त होता है, तो उसे इस धारा के अंतर्गत अयोग्य माना जाएगा और छह वर्ष की अवधि के लिये अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा आठ(3) में प्रावधान है कि उपर्युक्त अपराधों के अलावा किसी भी अन्य अपराध के लिये दोषी ठहराए जाने वाले किसी भी विधायिका सदस्य को यदि दो वर्ष से अधिक के कारावास की सजा सुनाई जाती है तो उसे दोषी ठहराए जाने की तिथि से अयोग्य माना जाएगा। ऐसे व्यक्ति सजा पूरी किए जाने की तारीख से छह वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा आठ(4) के अनुसार यदि दोषी सदस्य निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ तीन महीने के भीतर हाईकोर्ट में अपील दायर कर देता है तो वह अपनी सीट पर बना रह सकता है। हालांकि इस धारा को 2013 में 'लिली थॉमस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया' के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताकर निरस्त कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइट पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों का चयन क्यों किया है इसके बारे में पूरी जानकारी दें। अदालत ने यह फैसला इसलिए दिया है क्योंकि पिछले चार राष्ट्रीय चुनावों में राजनीति के अपराधीकरण में काफी ज्यादा वृद्धि देखने को मिली है। शीर्ष अदालत का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को अड़तालीस घंटाटे के भीतर अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर विवरण अपलोड करना अनिवार्य होगा। पार्टियों को चुनाव आयोग को बहत्तर घंटाटे के भीतर ब्यौरा देना होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों को अखबारों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अपनी वेबसाइट पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन का कारण बताते हुए वेबसाइट पर उनका परिचय पत्र, उपलब्धियां और उनके अपराध का विवरण प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया है। उच्चतम न्यायालय का कहना है कि यदि राजनीतिक दल आदेश का पालन नहीं करते हैं तो वह अवमानना के उत्तरदायी होंगे। अदालत ने चुनाव आयोग से कहा है कि यदि राजनीतिक पार्टियां आदेश का पालन करने में विफल रहती हैं तो वह अदालत में अवमानना याचिका दायर करे। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन करने का कारण योग्यता के आधार पर होना चाहिए, न कि जीतने के आधार पर। जीतने की काबिलियत तर्कसंगत नहीं हो सकता। अदालत ने यह फैसला वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय और अन्य द्वारा दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनाया है। जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन की धारा आठ दोषी राजनेताओं को चुनाव लड़ने से रोकती है। लेकिन ऐसे नेता जिन पर केवल मुकदमा चल रहा है, वे चुनाव लड़ने के लिये स्वतंत्र हैं। भले ही उनके ऊपर लगा आरोप कितना भी गंभीर है। जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा आठ और के अंतर्गत प्रावधान है कि यदि कोई विधायिका सदस्य हत्या, दुष्कर्म, अस्पृश्यता, विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के उल्लंघन, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर शत्रुता पैदा करना, भारतीय संविधान का अपमान करना, प्रतिबंधित वस्तुओं का आयात या निर्यात करना, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना जैसे अपराधों में लिप्त होता है, तो उसे इस धारा के अंतर्गत अयोग्य माना जाएगा और छह वर्ष की अवधि के लिये अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा आठ में प्रावधान है कि उपर्युक्त अपराधों के अलावा किसी भी अन्य अपराध के लिये दोषी ठहराए जाने वाले किसी भी विधायिका सदस्य को यदि दो वर्ष से अधिक के कारावास की सजा सुनाई जाती है तो उसे दोषी ठहराए जाने की तिथि से अयोग्य माना जाएगा। ऐसे व्यक्ति सजा पूरी किए जाने की तारीख से छह वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा आठ के अनुसार यदि दोषी सदस्य निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ तीन महीने के भीतर हाईकोर्ट में अपील दायर कर देता है तो वह अपनी सीट पर बना रह सकता है। हालांकि इस धारा को दो हज़ार तेरह में 'लिली थॉमस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया' के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताकर निरस्त कर दिया था।
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शुक्रवार को राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदन में अनुपस्थित रहने वाले पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री संजीव कुमार बालयान को नसीहत दी.
नई दिल्लीः राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को सदन में राज्य मंत्री संजीव बालयान को नसीहत दे दी. सभापति वेंकैया नायडू जब आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवा रहे थे तब पिछले दिनों कार्यावलि में नाम होने के बावजूद सदन में अनुपस्थित रहने के लिए उन्होंने मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री संजीव बालयान को हिदायत दी.
सभापति ने शुक्रवार को संशोधित कार्यावलि के अनुसार दस्तावेज पटल पर रखवाते समय संजीव बालयान का नाम पुकारा. बालयान ने दस्तावेज पटल पर रखे. सभापति वेंकैया नायडू ने उनसे कहा कि हाल ही में कार्यावलि में नाम होने के बावजूद मंत्री सदन में उपस्थित नहीं थे. मंत्री जी कृपया ध्यान दें कि भविष्य में ऐसा नहीं होना चाहिए. राज्य मंत्री संजीव बालयान ने इस पर माफी मांगते हुए कहा कि वह आगे से इस बात का ध्यान रखेंगे.
संसद में केंद्रीय मंत्रियों की अनुपस्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नाराज़गी जताई. बीजेपी संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो मंत्री रोस्टर ड्यूटी पूरी नहीं करते, उनके बारे में उसी दिन शाम तक उन्हें बताया जाए. विपक्षी नेताओं ने की शिकायत पर मोदी ने यह सख़्ती दिखाई है. संसद सत्र के दौरान सांसदों के अनुपस्थित रहने पर मोदी पहले नाख़ुशी जता चुके हैं.
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शुक्रवार को राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदन में अनुपस्थित रहने वाले पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री संजीव कुमार बालयान को नसीहत दी. नई दिल्लीः राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को सदन में राज्य मंत्री संजीव बालयान को नसीहत दे दी. सभापति वेंकैया नायडू जब आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवा रहे थे तब पिछले दिनों कार्यावलि में नाम होने के बावजूद सदन में अनुपस्थित रहने के लिए उन्होंने मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री संजीव बालयान को हिदायत दी. सभापति ने शुक्रवार को संशोधित कार्यावलि के अनुसार दस्तावेज पटल पर रखवाते समय संजीव बालयान का नाम पुकारा. बालयान ने दस्तावेज पटल पर रखे. सभापति वेंकैया नायडू ने उनसे कहा कि हाल ही में कार्यावलि में नाम होने के बावजूद मंत्री सदन में उपस्थित नहीं थे. मंत्री जी कृपया ध्यान दें कि भविष्य में ऐसा नहीं होना चाहिए. राज्य मंत्री संजीव बालयान ने इस पर माफी मांगते हुए कहा कि वह आगे से इस बात का ध्यान रखेंगे. संसद में केंद्रीय मंत्रियों की अनुपस्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नाराज़गी जताई. बीजेपी संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो मंत्री रोस्टर ड्यूटी पूरी नहीं करते, उनके बारे में उसी दिन शाम तक उन्हें बताया जाए. विपक्षी नेताओं ने की शिकायत पर मोदी ने यह सख़्ती दिखाई है. संसद सत्र के दौरान सांसदों के अनुपस्थित रहने पर मोदी पहले नाख़ुशी जता चुके हैं.
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WWE News- Ric Flair ने डबल्यूडब्ल्यूई से खुद को रिलीज करने का किया अनुरोध, जानिए क्या है इसके पीछे का कारणः डब्ल्यूडब्ल्यूई (WWE) की ताजा खबर के मुताबिक डब्ल्यूडब्ल्यूई हॉल ऑफ फेमर और 16 बार के वर्ल्ड चैंपियन "द नेचर बॉय" रिक फ्लेयर (Ric Flair) को कंपनी ने रिलीज कर दिया है। रिक फ्लेयर आधिकारिक तौर पर अब डब्ल्यूडब्ल्यूई के कांट्रैक्ट (WWE Contract ) के अधीन नहीं हैं क्योंकि उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूई से खुद को रिलीज का अनुरोध किया था जिसे कंपनी ने मंजूर कर लिया है।
16 बार के विश्व चैंपियन ने पिछले साल कोविड-19 महामारी के दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूई टीवी पर अपनी कुछ उपस्थिति दर्ज कराई। जहां वह वाइपर रैंडी ऑर्टन के साथ एक स्टोरीलाइन में शामिल थे। जहां रैंडी ने रिक फ्लेयर को धोखा देते हुए उन पर हमला किया था।
डब्ल्यूडब्ल्यूई इस समय अपने कर्मचारियों को रिलीज करने के मिशन पर है। लेकिन रिक फ्लेयर (Ric Flair) की रिहाई उनके अपने अनुरोध पर हुई। डब्ल्यूडब्ल्यूई ने महामारी के बाद से कई सुपरस्टार्स को रिलीज किया है। हाल की रिपोर्टों में यह पता चला कि फ्लेयर लेसी इवांस और अपनी बेटी शार्लोट फ्लेयर के बीच चल रही आखिरी स्टोरीलाइन से खुश नहीं थे।
इवांस की वैध गर्भावस्था के बाद इस स्टोरी को हटा दिया गया था। जिसके बाद से फ्लेयर ने अपनी इस स्टोरी को लेकर कई इंटरव्यू में नाखुश होने की बात को स्वीकार किया है।
मई 2021 में एरियल हेलवानी के साथ एक इंटरव्यू में रिक फ्लेयर ने लेसी इवांस की कहानी के साथ अपनी असहमति के बारे में बात की।
" उसने भी अपना मन बना लिया था मुझे लगता है कि इसमें से बहुत कुछ था क्योंकि लेसी काफी कुछ कर सकती थीं । भगवान ही जानता है कि हम सेना में सेवा करने वाले लोगों को पर्याप्त रूप से वापस सबकुछ नहीं दे सकते हैं और मुझे लगता है कि वह चाहते थे कि वह सफल हो और कभी-कभी सफल होने का तरीका दो लोगों के लिए काफी अच्छा होता है जो मेहनत कर रहे हों।
डब्ल्यूसीडब्ल्यूई के दिनों से ही रिक फ्लेयर का इस कंपनी में जबरदस्त योगदान रहा है। लेकिन अब रिलीज होने के बाद रिक आगे क्या करते हैं यह देखना काफी दिलचस्प होगा।
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WWE News- Ric Flair ने डबल्यूडब्ल्यूई से खुद को रिलीज करने का किया अनुरोध, जानिए क्या है इसके पीछे का कारणः डब्ल्यूडब्ल्यूई की ताजा खबर के मुताबिक डब्ल्यूडब्ल्यूई हॉल ऑफ फेमर और सोलह बार के वर्ल्ड चैंपियन "द नेचर बॉय" रिक फ्लेयर को कंपनी ने रिलीज कर दिया है। रिक फ्लेयर आधिकारिक तौर पर अब डब्ल्यूडब्ल्यूई के कांट्रैक्ट के अधीन नहीं हैं क्योंकि उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूई से खुद को रिलीज का अनुरोध किया था जिसे कंपनी ने मंजूर कर लिया है। सोलह बार के विश्व चैंपियन ने पिछले साल कोविड-उन्नीस महामारी के दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूई टीवी पर अपनी कुछ उपस्थिति दर्ज कराई। जहां वह वाइपर रैंडी ऑर्टन के साथ एक स्टोरीलाइन में शामिल थे। जहां रैंडी ने रिक फ्लेयर को धोखा देते हुए उन पर हमला किया था। डब्ल्यूडब्ल्यूई इस समय अपने कर्मचारियों को रिलीज करने के मिशन पर है। लेकिन रिक फ्लेयर की रिहाई उनके अपने अनुरोध पर हुई। डब्ल्यूडब्ल्यूई ने महामारी के बाद से कई सुपरस्टार्स को रिलीज किया है। हाल की रिपोर्टों में यह पता चला कि फ्लेयर लेसी इवांस और अपनी बेटी शार्लोट फ्लेयर के बीच चल रही आखिरी स्टोरीलाइन से खुश नहीं थे। इवांस की वैध गर्भावस्था के बाद इस स्टोरी को हटा दिया गया था। जिसके बाद से फ्लेयर ने अपनी इस स्टोरी को लेकर कई इंटरव्यू में नाखुश होने की बात को स्वीकार किया है। मई दो हज़ार इक्कीस में एरियल हेलवानी के साथ एक इंटरव्यू में रिक फ्लेयर ने लेसी इवांस की कहानी के साथ अपनी असहमति के बारे में बात की। " उसने भी अपना मन बना लिया था मुझे लगता है कि इसमें से बहुत कुछ था क्योंकि लेसी काफी कुछ कर सकती थीं । भगवान ही जानता है कि हम सेना में सेवा करने वाले लोगों को पर्याप्त रूप से वापस सबकुछ नहीं दे सकते हैं और मुझे लगता है कि वह चाहते थे कि वह सफल हो और कभी-कभी सफल होने का तरीका दो लोगों के लिए काफी अच्छा होता है जो मेहनत कर रहे हों। डब्ल्यूसीडब्ल्यूई के दिनों से ही रिक फ्लेयर का इस कंपनी में जबरदस्त योगदान रहा है। लेकिन अब रिलीज होने के बाद रिक आगे क्या करते हैं यह देखना काफी दिलचस्प होगा।
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जैसा की आप अवगत हैं कि निपुण भारत मिशन के अंतर्गत बच्चों में भाषा, गणितीय दक्षता एवं लीडरशिप विकास पर विशेष बल दिया गया है। इसी क्रम में *January 24, 2023* से *'Project i-Smart'* प्रारम्भ किया जा रहा है।
*'Project i-Smart'* के अन्तर्गत प्रत्येक सप्ताह मंगलवार तथा गुरुवार को गणित, विज्ञान तथा भाषा विषयों के मासिक पाठ्यक्रम विभाजन के आधार पर पढ़ाए जाने वाले पाठ के महत्वपूर्ण प्रकरणों से सम्बंधित शॉर्ट लर्निंग कंटेंट तथा एसेसमेंट दीक्षा लिंक्स के माध्यम से उपलब्ध कराये जाएँगे।
समस्त शॉर्ट लर्निंग कंटेंट सामग्री साल भर के मासिक शिक्षण कैलेण्डर के अनुरूप बनाएं गए हैं।
लर्निंग कंटेंट का सहयोग लेते हुए शिक्षक अपने अगले दिन पढ़ाए जाने वाले पाठ को और अधिक व्यवस्थित शैली में बच्चों के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे तथा बच्चे भी पाठ से सम्बंधित प्रकरणों को बार-बार देखकर आसानी से समझ सकते हैं एवं एसेसमेंट लिंक्स के द्वारा स्वयं घर पर पढ़ाए गए पाठ के सम्बंधित प्रश्नों को हल करके स्वआकलन कर सकते हैं।
अतः सभी BSA, DIET प्राचार्य, DIET मेंटर, BEO, SRG, ARP साझा किए गए साप्ताहिक दीक्षा कंटेंट लिंक्स शिक्षकों, अभिभावकों एवं बच्चों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।
3. सभी शिक्षक उपर्युक्त कंटेंट लिंक्स को 10 अभिभावकों/बच्चों तक अनिवार्य रूप से साझा करें।
4. शिक्षक 10 अभिभावकों/बच्चों का दीक्षा पर लॉगिन प्रोफाइल बनाते हुए प्रोफाइल में अनिवार्य रूप से District, Block, School का चयन करें। (https://youtu.be/8sHuHUrkBxQ वीडियो लिंक का प्रयोग कर प्रोफाइल अपडेट करने की प्रक्रिया को समझ सकते हैं )
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जैसा की आप अवगत हैं कि निपुण भारत मिशन के अंतर्गत बच्चों में भाषा, गणितीय दक्षता एवं लीडरशिप विकास पर विशेष बल दिया गया है। इसी क्रम में *January चौबीस, दो हज़ार तेईस* से *'Project i-Smart'* प्रारम्भ किया जा रहा है। *'Project i-Smart'* के अन्तर्गत प्रत्येक सप्ताह मंगलवार तथा गुरुवार को गणित, विज्ञान तथा भाषा विषयों के मासिक पाठ्यक्रम विभाजन के आधार पर पढ़ाए जाने वाले पाठ के महत्वपूर्ण प्रकरणों से सम्बंधित शॉर्ट लर्निंग कंटेंट तथा एसेसमेंट दीक्षा लिंक्स के माध्यम से उपलब्ध कराये जाएँगे। समस्त शॉर्ट लर्निंग कंटेंट सामग्री साल भर के मासिक शिक्षण कैलेण्डर के अनुरूप बनाएं गए हैं। लर्निंग कंटेंट का सहयोग लेते हुए शिक्षक अपने अगले दिन पढ़ाए जाने वाले पाठ को और अधिक व्यवस्थित शैली में बच्चों के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे तथा बच्चे भी पाठ से सम्बंधित प्रकरणों को बार-बार देखकर आसानी से समझ सकते हैं एवं एसेसमेंट लिंक्स के द्वारा स्वयं घर पर पढ़ाए गए पाठ के सम्बंधित प्रश्नों को हल करके स्वआकलन कर सकते हैं। अतः सभी BSA, DIET प्राचार्य, DIET मेंटर, BEO, SRG, ARP साझा किए गए साप्ताहिक दीक्षा कंटेंट लिंक्स शिक्षकों, अभिभावकों एवं बच्चों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। तीन. सभी शिक्षक उपर्युक्त कंटेंट लिंक्स को दस अभिभावकों/बच्चों तक अनिवार्य रूप से साझा करें। चार. शिक्षक दस अभिभावकों/बच्चों का दीक्षा पर लॉगिन प्रोफाइल बनाते हुए प्रोफाइल में अनिवार्य रूप से District, Block, School का चयन करें।
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नई दिल्ली- राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में फतह हासिल करने के लिए परिवर्तन संकल्प यात्रा निकाल रही है। इस यात्रा को हरी झंडी दिखाने के लिए केंद्र के बड़े-बड़े दिग्गज नेता राजस्थान पहुंचे थे।
इस पूरी यात्रा को तीन चरण में निकाल गया था। पहले चरण में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा राजस्थान पहुंचे थे। तो वहीं दूसरी चरण की परिवर्तन संकल्प यात्रा को हरी झंडी दिखाने के लिए गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे थे। वहीं तीसरी चरण की हरी झंडी दिखाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे थे। और उसके बाद से लगातार परिवर्तन संकल्प यात्रा 200 विधानसभा पहुंचने का प्रयास कर रही है। और आए दिन विधानसभा वार नेता उसमें शामिल होकर उसका सहयोग करते दिखाई दे रहे इस बीच कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई ज्योति ने बड़ा बयान दिया है।
भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन संकल्प यात्रा में जन समर्थन जताने के लिए इसे हर विधानसभा वार्ड निकाला जा रहा है। इस सिलसिले में देर शाम परिवर्तन संकल्प यात्रा का रथ नागौर पहुंचे। यहां पर गाजियाबाद के साथ में कई मार्गो से होती हुई। सड़कों के मध्य गांधी चौक चौराहे पर इस यात्रा पर जोरदार स्वागत हुआ। देर रात आमसभा का आयोजन हुआ इस दौरान जनसभा में हाल ही में बीजेपी में शामिल हुई पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा का भाषण चर्चाओं में रहा है।
आम जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने सबसे पहले कहा कि भारतीय जनता पार्टी मेरा परिवार है। और परिवार के मुखिया देश के एससी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पूरा विश्व का मन बड़ा है। और भारत देश लगातार प्रगति की तरफ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अमित शाह जेपी नड्डा सहित पूरे भाजपा संगठन का मैं आभारी हूं। इस दौरान ज्योति मेड़ता ने आगे भाषण में कहा कि जिस सम्मेलन में भी भारत की ताकत पूरी दुनिया में दिखाई है।
इतना कहने के बाद ज्योति मिर्धा राजस्थान आ गई। और राजस्थान के सांसद हनुमान बेनीवाल पर जमकर आरोप लगा डालें उन्होंने कहा कि मुझ पर बयान बाजी कर लोग जो कह रहे हैं कि बाबा और पोती दल बदलू। तो मैं उनसे साफ कह देना चाहती हूं हम दल बदलू है या नहीं लेकिन संसद बेनीवाल का पूरा परिवार दलबदलू है। उन्होंने कहा कि चुनाव हर पार्टी से हर बार अलग-अलग कौन लड़ता आया है यही स्थिति नागौर सांसद की है। उन्होंने कहा इस बार पूरी ताकत से चुनाव मैदान में होंगे और एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी का परचम राजस्थान में फहराएंगे।
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नई दिल्ली- राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में फतह हासिल करने के लिए परिवर्तन संकल्प यात्रा निकाल रही है। इस यात्रा को हरी झंडी दिखाने के लिए केंद्र के बड़े-बड़े दिग्गज नेता राजस्थान पहुंचे थे। इस पूरी यात्रा को तीन चरण में निकाल गया था। पहले चरण में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा राजस्थान पहुंचे थे। तो वहीं दूसरी चरण की परिवर्तन संकल्प यात्रा को हरी झंडी दिखाने के लिए गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे थे। वहीं तीसरी चरण की हरी झंडी दिखाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे थे। और उसके बाद से लगातार परिवर्तन संकल्प यात्रा दो सौ विधानसभा पहुंचने का प्रयास कर रही है। और आए दिन विधानसभा वार नेता उसमें शामिल होकर उसका सहयोग करते दिखाई दे रहे इस बीच कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई ज्योति ने बड़ा बयान दिया है। भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन संकल्प यात्रा में जन समर्थन जताने के लिए इसे हर विधानसभा वार्ड निकाला जा रहा है। इस सिलसिले में देर शाम परिवर्तन संकल्प यात्रा का रथ नागौर पहुंचे। यहां पर गाजियाबाद के साथ में कई मार्गो से होती हुई। सड़कों के मध्य गांधी चौक चौराहे पर इस यात्रा पर जोरदार स्वागत हुआ। देर रात आमसभा का आयोजन हुआ इस दौरान जनसभा में हाल ही में बीजेपी में शामिल हुई पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा का भाषण चर्चाओं में रहा है। आम जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने सबसे पहले कहा कि भारतीय जनता पार्टी मेरा परिवार है। और परिवार के मुखिया देश के एससी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पूरा विश्व का मन बड़ा है। और भारत देश लगातार प्रगति की तरफ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अमित शाह जेपी नड्डा सहित पूरे भाजपा संगठन का मैं आभारी हूं। इस दौरान ज्योति मेड़ता ने आगे भाषण में कहा कि जिस सम्मेलन में भी भारत की ताकत पूरी दुनिया में दिखाई है। इतना कहने के बाद ज्योति मिर्धा राजस्थान आ गई। और राजस्थान के सांसद हनुमान बेनीवाल पर जमकर आरोप लगा डालें उन्होंने कहा कि मुझ पर बयान बाजी कर लोग जो कह रहे हैं कि बाबा और पोती दल बदलू। तो मैं उनसे साफ कह देना चाहती हूं हम दल बदलू है या नहीं लेकिन संसद बेनीवाल का पूरा परिवार दलबदलू है। उन्होंने कहा कि चुनाव हर पार्टी से हर बार अलग-अलग कौन लड़ता आया है यही स्थिति नागौर सांसद की है। उन्होंने कहा इस बार पूरी ताकत से चुनाव मैदान में होंगे और एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी का परचम राजस्थान में फहराएंगे।
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168 / शब्द-संसार की यायावरी
मुझको दो एक क्षण जिसमें में भेंट क जो कुछ में हूं उस सबसे आज बस इतना ही शेप फिर...
थोप फिर ।
मुझको दो एक शब्द जिसमे मैं देख सकू
जन्म मरण
आज बस इतना ही
शेप फिर शेप फिर
दो रचनाएं जिनमें नयो और सार्थक उपमाओं का प्रयोग हुआ है~~-दृष्टव्य है। पहली रचना भारतरत्न भार्गव की है जिसमें दर्द की उपमा निबोली से दी है। लिखा है-~दर्द एक नीम की निम्बोली- सा कच्चा तो कड़वा है
पकने पर मोठा है
बहुत गुणकारी है
दूसरी रचना रामाचार्य की है जिसमें कवि ने साहित्यकार के संसद भवन का सागोपांग वर्णन किया है। विरोधी दल (आलोचक) के लिए कहा है कि हम उनकी चिन्ता नहीं करते हैं, क्योंकि---
हम लिख रहे हैं वे खौफ लिखते जाएंगे
घिस नही सकती कभी यह जिन्दगी की निब क्योकि स्याही से भरे पाताल झरने हैं
आंख की दोनों दवातों में ।
इस प्रकार लगभग पांच दशकों को लांधती हुई राजस्थान की काव्य-धारा
राजस्थान की हिन्दी कविता के प्रतिमान : एक भूमिका / 69
वीसवीं शती के अधुनातन काव्य तक आ गई है। इन पाँच दशकों की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि हम सभी असुविधाओं की मार झेल कर भी टूटे नही है और भविष्य को यत्किंचित आकृति देने की चेष्टा मे लगे हैं। हमारा यह संकल्प है कि. हम देश को श्रेष्ठ रचनाएं देने की हर संभव कोशिश करते रहेंगे।
1. यह मालेख राज साहित्य मकादमी द्वारा प्रकाशित 'राजस्थान के कवि : भाग 1' की भूमिका से उद्धृत है।
गुलेरीजी की कहानियों, कविताओं से गुजरते हुए
गुलेरीजी से हमारा परिचय लगभग पन्द्रह-सोलह वर्ष की आयु में होता है जबकि कहानी के जरिए प्रेम को दुनिया हमारे सामने खुलने को होती है। यह प्रेम की दुनिया स्मृतियों के सम्मोहन मे डूबती हुई, एक कुर्बानी के चमत्कार से उजली होती है। पन्द्रह-सोलह वर्ष की आयु में एक ऐसी दुनिया हमारे अन्दर भी होती है, हमारे अन्दर की वह दुनिया गुलेरीजी की कहानी वाली दुनिया से हूचन्हू मिल जाती है । हमे एक प्रमाण मिल जाता है कि हमारे अन्दर जो सपनों और आदर्शों की दुनिया है वह अविश्वसनीय नहीं है, बाहर भी एक अपार प्रेम, बलिदान की दुनिया फैली है । इस तरह एक कहानी, एक शब्दातीत अनुभव की साक्षी होती है और सम्भवतया इसीलिए वह एक मामूली बलिदान से ज्यादा विश्वसनीय बलिदान की कहानी बनती है ।
दृष्टव्य है कि प्रेम की इस दुनिया में किसी किस्म की क्रूरता नही है, न पश्चात्ताप, न शहादतनामा, न परपोड़न । यह टटपूजिये प्रेमियो की आत्मकेन्द्रित दुनिया नहीं है, आत्म-विज्ञापन क्रय-विक्रय की भी नही । आत्मानुकूलन की यह कहानी हमे उन सारी अर्थछवियों से जोड़ती है जो किशोर-आयु की अर्थछविया है और बाद में भी उस लहनासिंह से हमारा अटूट सम्बन्ध बनाए रखती है जो हमारी जिन्दगी का 'ध्वस्त पुरुष नहीं है और उस लड़की को भी एक मोहक प्रासंगिकता से हमारे साथ रखती है जो 'धत्' कहते-कहते एक सम्भावनाविरुद्ध उत्तर देती है-'हा हो गई' (सगाई ) । बाद मे यह लड़की वयस्क स्त्री (सूबेदारनी) हो जाती है और नाम पर जाता लहनासिंह जिसे 'मत्था टेकना कहता है - यही स्मृतियों की सारी धंध हटाती वह लड़की लौट आती है जिसकी 'कुड़माई' का समाचार सुनकर मगरे वाले लड़के ने "एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया, एक छाबड़ी वाले की दिन भर की कमाई खोई, एक कुत्ते पर पत्थर मारा और एक गोभी वाले के ठेले मे दूध उंडेल दिया। सामने नहाकर आती हुई किसी
वैष्णवी से टकरा कर अंधे की उपाधि पाई ।'
गुलेरीजी को कहानियों, कविताओं से गुजरते हुए / 71
नव-धनाढ्य वर्ग को लालची और क्रूर प्रेम कहानियों के संसार मे यह मौलिक प्रेम आख्यायिका हो सकता है कि कुछ अप्रासंगिक मालूम पड़े, लेकिन जो प्रेम को उत्सर्गमय स्पर्श देना चाहते हैं वे लहनासिंह की हमेशा एक व्यापक प्रासंगिकता से देखने की कोशिश करेंगे ।
'उसने कहा था' कहानी सिर्फ अन्तर्वस्तु को ऊर्जा के कारण ही नहीं बल्कि शिल्प की नफीज बुनावट के कारण भी बड़ी कहानी है। युद्ध की भयावहता, शत्रु पक्ष को चालाकियों, विदेशी भूमि की सीलन भरी खंदकों और घायलों को ढोने वाली गाड़ियों के बीच हंसी, गीत, प्रेम-स्मृतियों को कथ्य का हिस्सा बनाना और भाषायी उल्लास को उस गाम्भीयं तक जाने देना जो मृत्यु की उदासी को वहन करता हुआ भी निस्संगता का अनुभव नही होने देता बल्कि देश की जमीन, वनवनस्पतियों की सघन रिश्तेदारी से जोड़े रखता है।
कहानी के अन्त में उस जमादार लहनासिंह का मृत्यु- समाचार है जो बहुत सायंक जिन्दगी के हिस्से को खोलता है। यह कोई मामूली खाकीवर्दी वाला जमादार लहनासिंह नही है - वह एक ऐसा जमादार है जो पूरी जिन्दगी के युद्ध में मौत को जिन्दगी से अधिक महत्त्वपूर्ण बना देता है । यह तथ्य रेखांकित करने के "लिए है कि कहानी कोई मामूली शोकान्तिक नही है, वह ऐसी करुणा का हिस्सा - है जो मौत के समय जिन्दगी का मतलब पहचानने देती है और प्रार्थना के समय को मोमबत्ती सी लगती है ।
गुलेरीजी की इस महत्त्वपूर्ण कहानी के सामने उनकी दूसरी दो कहानियो की कलात्मक बुनावट कमजोर और कथावस्तु एक आयामी है । यह अचरज-सा लगता है कि दो कहानियों के बाद गुलेरीजी की तीसरी कहानी इतनी संश्लिष्ट और कलात्मक रचाव की विशिष्ट कृति होगी क्योकि प्रायः लम्बे समय तक लेखक दुहराने के सिवा ज्यादा नही कर पाते । कलाकृतियों में 'लम्बी छलांग' कठिन होती है लेकिन यह गुलेरीजी की अन्तर्दृष्टि थी कि वे एक परिपक्व जीवनानुभव तक पहुचकर उसे कला-रूप दे सके ।
'सुखमय जीवन' और 'बुद्ध का कांटा' कुछ सूक्तियों जैसी कहानियां हैं, अचरज में डालकर खुलती हुई, घटनाओं से जुड़ी, परिणाम को विश्वसनीय बनाने की कोशिश करती हुई ! 'मुखमय जीवन' के लेखक जयदेवशरण वर्मा की साइकिल पंक्चर हो गई, पंक्चर हुई साइकिल को घसीटते घिसटाते ये जा रहे थे कि एक लड़की मिली, सहानुभूति से घर खीच ले गई और पिता से मिलाया जो लेखक की पुस्तक 'सुखमय जीवन के प्रशंसक थे। पिता का विश्वास था कि जयदेवशरण वर्मा को 'सुखमय जीवन' नाम की पुस्तक एक गहरे गार्हस्थ्य-जीवन के अनुभवों से गुजरे लेखक की है और इस तरह उनका विश्वास हो गया था कि चर्मा विवाहित हैं । इधर वर्मा उस उपकारी लड़की को न केवल चाहने लगे हैं,
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एक सौ अड़सठ / शब्द-संसार की यायावरी मुझको दो एक क्षण जिसमें में भेंट क जो कुछ में हूं उस सबसे आज बस इतना ही शेप फिर... थोप फिर । मुझको दो एक शब्द जिसमे मैं देख सकू जन्म मरण आज बस इतना ही शेप फिर शेप फिर दो रचनाएं जिनमें नयो और सार्थक उपमाओं का प्रयोग हुआ है~~-दृष्टव्य है। पहली रचना भारतरत्न भार्गव की है जिसमें दर्द की उपमा निबोली से दी है। लिखा है-~दर्द एक नीम की निम्बोली- सा कच्चा तो कड़वा है पकने पर मोठा है बहुत गुणकारी है दूसरी रचना रामाचार्य की है जिसमें कवि ने साहित्यकार के संसद भवन का सागोपांग वर्णन किया है। विरोधी दल के लिए कहा है कि हम उनकी चिन्ता नहीं करते हैं, क्योंकि--- हम लिख रहे हैं वे खौफ लिखते जाएंगे घिस नही सकती कभी यह जिन्दगी की निब क्योकि स्याही से भरे पाताल झरने हैं आंख की दोनों दवातों में । इस प्रकार लगभग पांच दशकों को लांधती हुई राजस्थान की काव्य-धारा राजस्थान की हिन्दी कविता के प्रतिमान : एक भूमिका / उनहत्तर वीसवीं शती के अधुनातन काव्य तक आ गई है। इन पाँच दशकों की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि हम सभी असुविधाओं की मार झेल कर भी टूटे नही है और भविष्य को यत्किंचित आकृति देने की चेष्टा मे लगे हैं। हमारा यह संकल्प है कि. हम देश को श्रेष्ठ रचनाएं देने की हर संभव कोशिश करते रहेंगे। एक. यह मालेख राज साहित्य मकादमी द्वारा प्रकाशित 'राजस्थान के कवि : भाग एक' की भूमिका से उद्धृत है। गुलेरीजी की कहानियों, कविताओं से गुजरते हुए गुलेरीजी से हमारा परिचय लगभग पन्द्रह-सोलह वर्ष की आयु में होता है जबकि कहानी के जरिए प्रेम को दुनिया हमारे सामने खुलने को होती है। यह प्रेम की दुनिया स्मृतियों के सम्मोहन मे डूबती हुई, एक कुर्बानी के चमत्कार से उजली होती है। पन्द्रह-सोलह वर्ष की आयु में एक ऐसी दुनिया हमारे अन्दर भी होती है, हमारे अन्दर की वह दुनिया गुलेरीजी की कहानी वाली दुनिया से हूचन्हू मिल जाती है । हमे एक प्रमाण मिल जाता है कि हमारे अन्दर जो सपनों और आदर्शों की दुनिया है वह अविश्वसनीय नहीं है, बाहर भी एक अपार प्रेम, बलिदान की दुनिया फैली है । इस तरह एक कहानी, एक शब्दातीत अनुभव की साक्षी होती है और सम्भवतया इसीलिए वह एक मामूली बलिदान से ज्यादा विश्वसनीय बलिदान की कहानी बनती है । दृष्टव्य है कि प्रेम की इस दुनिया में किसी किस्म की क्रूरता नही है, न पश्चात्ताप, न शहादतनामा, न परपोड़न । यह टटपूजिये प्रेमियो की आत्मकेन्द्रित दुनिया नहीं है, आत्म-विज्ञापन क्रय-विक्रय की भी नही । आत्मानुकूलन की यह कहानी हमे उन सारी अर्थछवियों से जोड़ती है जो किशोर-आयु की अर्थछविया है और बाद में भी उस लहनासिंह से हमारा अटूट सम्बन्ध बनाए रखती है जो हमारी जिन्दगी का 'ध्वस्त पुरुष नहीं है और उस लड़की को भी एक मोहक प्रासंगिकता से हमारे साथ रखती है जो 'धत्' कहते-कहते एक सम्भावनाविरुद्ध उत्तर देती है-'हा हो गई' । बाद मे यह लड़की वयस्क स्त्री हो जाती है और नाम पर जाता लहनासिंह जिसे 'मत्था टेकना कहता है - यही स्मृतियों की सारी धंध हटाती वह लड़की लौट आती है जिसकी 'कुड़माई' का समाचार सुनकर मगरे वाले लड़के ने "एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया, एक छाबड़ी वाले की दिन भर की कमाई खोई, एक कुत्ते पर पत्थर मारा और एक गोभी वाले के ठेले मे दूध उंडेल दिया। सामने नहाकर आती हुई किसी वैष्णवी से टकरा कर अंधे की उपाधि पाई ।' गुलेरीजी को कहानियों, कविताओं से गुजरते हुए / इकहत्तर नव-धनाढ्य वर्ग को लालची और क्रूर प्रेम कहानियों के संसार मे यह मौलिक प्रेम आख्यायिका हो सकता है कि कुछ अप्रासंगिक मालूम पड़े, लेकिन जो प्रेम को उत्सर्गमय स्पर्श देना चाहते हैं वे लहनासिंह की हमेशा एक व्यापक प्रासंगिकता से देखने की कोशिश करेंगे । 'उसने कहा था' कहानी सिर्फ अन्तर्वस्तु को ऊर्जा के कारण ही नहीं बल्कि शिल्प की नफीज बुनावट के कारण भी बड़ी कहानी है। युद्ध की भयावहता, शत्रु पक्ष को चालाकियों, विदेशी भूमि की सीलन भरी खंदकों और घायलों को ढोने वाली गाड़ियों के बीच हंसी, गीत, प्रेम-स्मृतियों को कथ्य का हिस्सा बनाना और भाषायी उल्लास को उस गाम्भीयं तक जाने देना जो मृत्यु की उदासी को वहन करता हुआ भी निस्संगता का अनुभव नही होने देता बल्कि देश की जमीन, वनवनस्पतियों की सघन रिश्तेदारी से जोड़े रखता है। कहानी के अन्त में उस जमादार लहनासिंह का मृत्यु- समाचार है जो बहुत सायंक जिन्दगी के हिस्से को खोलता है। यह कोई मामूली खाकीवर्दी वाला जमादार लहनासिंह नही है - वह एक ऐसा जमादार है जो पूरी जिन्दगी के युद्ध में मौत को जिन्दगी से अधिक महत्त्वपूर्ण बना देता है । यह तथ्य रेखांकित करने के "लिए है कि कहानी कोई मामूली शोकान्तिक नही है, वह ऐसी करुणा का हिस्सा - है जो मौत के समय जिन्दगी का मतलब पहचानने देती है और प्रार्थना के समय को मोमबत्ती सी लगती है । गुलेरीजी की इस महत्त्वपूर्ण कहानी के सामने उनकी दूसरी दो कहानियो की कलात्मक बुनावट कमजोर और कथावस्तु एक आयामी है । यह अचरज-सा लगता है कि दो कहानियों के बाद गुलेरीजी की तीसरी कहानी इतनी संश्लिष्ट और कलात्मक रचाव की विशिष्ट कृति होगी क्योकि प्रायः लम्बे समय तक लेखक दुहराने के सिवा ज्यादा नही कर पाते । कलाकृतियों में 'लम्बी छलांग' कठिन होती है लेकिन यह गुलेरीजी की अन्तर्दृष्टि थी कि वे एक परिपक्व जीवनानुभव तक पहुचकर उसे कला-रूप दे सके । 'सुखमय जीवन' और 'बुद्ध का कांटा' कुछ सूक्तियों जैसी कहानियां हैं, अचरज में डालकर खुलती हुई, घटनाओं से जुड़ी, परिणाम को विश्वसनीय बनाने की कोशिश करती हुई ! 'मुखमय जीवन' के लेखक जयदेवशरण वर्मा की साइकिल पंक्चर हो गई, पंक्चर हुई साइकिल को घसीटते घिसटाते ये जा रहे थे कि एक लड़की मिली, सहानुभूति से घर खीच ले गई और पिता से मिलाया जो लेखक की पुस्तक 'सुखमय जीवन के प्रशंसक थे। पिता का विश्वास था कि जयदेवशरण वर्मा को 'सुखमय जीवन' नाम की पुस्तक एक गहरे गार्हस्थ्य-जीवन के अनुभवों से गुजरे लेखक की है और इस तरह उनका विश्वास हो गया था कि चर्मा विवाहित हैं । इधर वर्मा उस उपकारी लड़की को न केवल चाहने लगे हैं,
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सोनिया गांधी अस्पताल में भर्ती : अभी अभी इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है बताया जाता है कि कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सोनिया गांधी की तबीयत अचानक खराब हो गई है आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है. हिंदुस्तान अखबार के अनुसार कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें गुरुवार देर रात बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है।
चेस्ट मेडिसिन के डॉक्टर अरुप बसु और उनकी टीम की निगरानी में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख का इलाज किया जा रहा है। बुलेटिन में कहा गया है, सोनिया गांधी चिकित्सकों की निगरानी में हैं और उनकी जांच की जा रही है।
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सोनिया गांधी अस्पताल में भर्ती : अभी अभी इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है बताया जाता है कि कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सोनिया गांधी की तबीयत अचानक खराब हो गई है आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है. हिंदुस्तान अखबार के अनुसार कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें गुरुवार देर रात बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है। चेस्ट मेडिसिन के डॉक्टर अरुप बसु और उनकी टीम की निगरानी में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख का इलाज किया जा रहा है। बुलेटिन में कहा गया है, सोनिया गांधी चिकित्सकों की निगरानी में हैं और उनकी जांच की जा रही है।
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अगर आपके अंदर इनफॉर्मेशन को नेवीगेट और मैनेज करने की खूबी है तो लाइब्रेरी एण्ड इन्फॉर्मेशन साइंस की फील्ड आपके लिए परफेक्ट हो सकती है। अभी तक ये कोर्स सिर्फ कॉलेज लाइब्रेरीज तक ही सीमित समझा जाता रहा है. लेकिन हाल ही के प्लेसमेंट रिकॉड्र्स पर नजर डालें तो ये कोर्स करने के बाद कई और तरह के जॉब ऑप्शंस भी आपको मिल जाएंगे। इनमें इनफॉर्मेशन रिसोर्स स्पेशलिस्ट, रिसर्चर, मेटा-डेटा स्पेशलिस्ट और डॉक्यूमेंट स्पेशलिस्ट मुख्य हैं। आपको बता दें कि अपने ही तरीके का ये कोर्स सफीशिएंट जॉब ऑप्शंस के चलते यूथ के बीच आजकल हॉट इन डिमांड है। इसमें आप गे्रजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन, दोनों ही कर सकते हैं। डाक्टरेट का भी ऑप्शन है। यानि बीलिब के बाद एमलिब, और उसके बाद इसमें पीएचडी भी कर सकते हैं। इसके बाद आप आसानी से यूनिवर्सिटी या कॉलेज लेवल पर फैकल्टी बन सकते हैैं।
मान्यता- सीएसजेएमयू खुद ही इस कोर्स को संचालित कर रही है।
बेचलर ऑफ लाइब्रेरी एण्ड इन्फार्मेशन साइंस( 1 इयर)
मान्यता- सीएसजेएमयू से मान्य है।
बेचलर ऑफ लाइब्रेरी एण्ड इन्फॉर्मेशन साइंस (1 इयर)
मान्यता- सीएसजेएमयू से मान्यता मिली है।
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अगर आपके अंदर इनफॉर्मेशन को नेवीगेट और मैनेज करने की खूबी है तो लाइब्रेरी एण्ड इन्फॉर्मेशन साइंस की फील्ड आपके लिए परफेक्ट हो सकती है। अभी तक ये कोर्स सिर्फ कॉलेज लाइब्रेरीज तक ही सीमित समझा जाता रहा है. लेकिन हाल ही के प्लेसमेंट रिकॉड्र्स पर नजर डालें तो ये कोर्स करने के बाद कई और तरह के जॉब ऑप्शंस भी आपको मिल जाएंगे। इनमें इनफॉर्मेशन रिसोर्स स्पेशलिस्ट, रिसर्चर, मेटा-डेटा स्पेशलिस्ट और डॉक्यूमेंट स्पेशलिस्ट मुख्य हैं। आपको बता दें कि अपने ही तरीके का ये कोर्स सफीशिएंट जॉब ऑप्शंस के चलते यूथ के बीच आजकल हॉट इन डिमांड है। इसमें आप गे्रजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन, दोनों ही कर सकते हैं। डाक्टरेट का भी ऑप्शन है। यानि बीलिब के बाद एमलिब, और उसके बाद इसमें पीएचडी भी कर सकते हैं। इसके बाद आप आसानी से यूनिवर्सिटी या कॉलेज लेवल पर फैकल्टी बन सकते हैैं। मान्यता- सीएसजेएमयू खुद ही इस कोर्स को संचालित कर रही है। बेचलर ऑफ लाइब्रेरी एण्ड इन्फार्मेशन साइंस मान्यता- सीएसजेएमयू से मान्य है। बेचलर ऑफ लाइब्रेरी एण्ड इन्फॉर्मेशन साइंस मान्यता- सीएसजेएमयू से मान्यता मिली है।
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दुनियाभर में तेजी से फैल रही कोरोना की महामारी की मार हर एक खेल झेल रहा है। बीते दिनों कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते जापान ने टोक्यो ओलंपिक को एक साल तक के लिए स्थगित कर दिया है। तो वहीं इसके बाद अब दुनिया की सबसे महंगी लीग इंडियन प्रीमीयर को भी बीसीसीआई ने अनिश्चित समय के लिए स्थगित कर दिया है।
अब इस वायरस को लेकर टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री ने कहा कोविड-19 से निपटना विश्व कप जीतने का प्रयास करने की तरह है। रवि शास्त्री ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, आज कोरोना ने हमें ऐसी स्थिति में डाल दिया है जहां यह हम पर हावी है।
कोविड-19 से निपटना विश्व कप जीतने का प्रयास करने की तरह है। जहां सिर्फ 11 लोग नहीं खेल रहे बल्कि एक अरब 40 करोड़ लोग मैदान पर हैं और प्रतिस्पर्धा पेश कर रहे हैं। साथियों चलो एक साथ मिलकर ऐसा करें। एक अरब 40 करोड़ लोगों की सेना उतरे और इस कोरोना को हरा दे और मानवता का विश्व कप जीत ले।
आगे शास्त्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि, वह आगे बढ़कर चुनौती का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, साथियों हम इस लड़ाई को जीत सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको कुछ सामान्य नियमों का पालन करना होगा। हमारे पास ऐसे पीएम हैं जो आगे बढ़कर चुनौती का सामना कर रहे हैं, वह सबसे आगे हैं।
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दुनियाभर में तेजी से फैल रही कोरोना की महामारी की मार हर एक खेल झेल रहा है। बीते दिनों कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते जापान ने टोक्यो ओलंपिक को एक साल तक के लिए स्थगित कर दिया है। तो वहीं इसके बाद अब दुनिया की सबसे महंगी लीग इंडियन प्रीमीयर को भी बीसीसीआई ने अनिश्चित समय के लिए स्थगित कर दिया है। अब इस वायरस को लेकर टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री ने कहा कोविड-उन्नीस से निपटना विश्व कप जीतने का प्रयास करने की तरह है। रवि शास्त्री ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, आज कोरोना ने हमें ऐसी स्थिति में डाल दिया है जहां यह हम पर हावी है। कोविड-उन्नीस से निपटना विश्व कप जीतने का प्रयास करने की तरह है। जहां सिर्फ ग्यारह लोग नहीं खेल रहे बल्कि एक अरब चालीस करोड़ लोग मैदान पर हैं और प्रतिस्पर्धा पेश कर रहे हैं। साथियों चलो एक साथ मिलकर ऐसा करें। एक अरब चालीस करोड़ लोगों की सेना उतरे और इस कोरोना को हरा दे और मानवता का विश्व कप जीत ले। आगे शास्त्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि, वह आगे बढ़कर चुनौती का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, साथियों हम इस लड़ाई को जीत सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको कुछ सामान्य नियमों का पालन करना होगा। हमारे पास ऐसे पीएम हैं जो आगे बढ़कर चुनौती का सामना कर रहे हैं, वह सबसे आगे हैं।
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जस्टिन बीबर से भी ज़्यादा रंगीन हैं उनकी न्यू गर्लफ्रेंड। क्या हुआ हैरान हो गए ना आप लेकिन ये सच है जस्टिन बीबर को लंदन के एक नाइट क्लब में रात 4 बजे देखा गया जहां वो अपनी न्यू फ्रेंड ब्रोन्ट ब्लंपीड के साथ बहुत ही क्लोज़ दिखे। ये सुनहरे बालों वाली महिला कोई और नहीं बल्कि उनकी गर्लफ्रेंड सोफिया रिची की फ्रेंड बताई जा रही हैं। लेकिन इस पार्टी में कहीं भी सोफिया दिखाई नहीं दी। अभी कुछ समय पहले ही जस्टिन अपनी गर्लफ्रेंड सोफिया के लिए सोशल मीडिया पर अपने फेंस के ऊपर खूब भड़के थे और तो और अपनी एक्स गर्लफ्रेंड सेलेना गोमेज़ से भी टिवीटर पर खूब बहेस भी की और अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट कर दिया था। ऐसे में कई लोगो को ये लगना स्वाभाविक था की शायद इस बार जस्टिन सच में अपनी गर्लफ्रेंड से प्यार करते हैं। लेकिन आधी रात में हुए इस कांड के बाद जस्टिन के ऊपर आरोपो का लगना जायज है।
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जस्टिन बीबर से भी ज़्यादा रंगीन हैं उनकी न्यू गर्लफ्रेंड। क्या हुआ हैरान हो गए ना आप लेकिन ये सच है जस्टिन बीबर को लंदन के एक नाइट क्लब में रात चार बजे देखा गया जहां वो अपनी न्यू फ्रेंड ब्रोन्ट ब्लंपीड के साथ बहुत ही क्लोज़ दिखे। ये सुनहरे बालों वाली महिला कोई और नहीं बल्कि उनकी गर्लफ्रेंड सोफिया रिची की फ्रेंड बताई जा रही हैं। लेकिन इस पार्टी में कहीं भी सोफिया दिखाई नहीं दी। अभी कुछ समय पहले ही जस्टिन अपनी गर्लफ्रेंड सोफिया के लिए सोशल मीडिया पर अपने फेंस के ऊपर खूब भड़के थे और तो और अपनी एक्स गर्लफ्रेंड सेलेना गोमेज़ से भी टिवीटर पर खूब बहेस भी की और अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट कर दिया था। ऐसे में कई लोगो को ये लगना स्वाभाविक था की शायद इस बार जस्टिन सच में अपनी गर्लफ्रेंड से प्यार करते हैं। लेकिन आधी रात में हुए इस कांड के बाद जस्टिन के ऊपर आरोपो का लगना जायज है।
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सीएए और एनआरसी को लेकर विरोध शांत भी नहीं हुआ था कि केंद्र की मोदी सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करने का आदेश दे दिया। एक तरफ गृहमंत्री अमित शाह एनपीआर और एनआरसी के बीच कोई संबंध न होने की बात कह रहे हैं, तो वहीं विपक्ष सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कह रही है कि एनआरसी की दिशा में एनपीआर पहला कदम है।
जाहिर है एनआरसी और सीएए पर छिड़ी बहस के बीच एनपीआर को अपडेट करने का आदेश सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। इसी बीच वामपंथी दल भी इस मुद्दे को देश से खिसकती अपनी राजनीतिक जमीन को बचाने के अवसर के रुप में देख रही है। इसी सिलसिले में वामदलों ने 1 जनवरी से लेकर 7 जनवरी तक देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। जबकि 8 जनवरी को आर्थिक मंदी और आम लोगों से जुड़े मुद्दे पर वामपंथी दल धरना देगी।
बीते 18 दिसंबर को वामपंथी दल ने नागरिकता संशोधन विधेयक और एनआरसी के खिलाफ भारत बंद बुलाया था। इस बंद में अलग-अलग राजनीतिक दल और सामाजिक संस्थाओं ने समर्थन दिया था। इस बंद में देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा की खबरें सामने आयी थी। नागरिकता से जुड़े कानून के विरोध के कारण दिल्ली और उत्तर प्रदेश से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान और कई लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आयी।
नागरिकता संशोधन कानून में केंद्र की मोदी सरकार ने भारत में नागरिकता पाने की अवधि को 11 साल से घटाकर 5 साल कर दी। ये संशोधन केवल पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक प्रताड़ना से जूझ रहे अल्पसंख्यकों के लिए किया गया। इसमें मुस्लिम धर्म को छोड़कर बाकी बचे 6 धर्म हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, पारसी और बौद्ध को शामिल किया गया है। विपक्ष इसे मुस्लिमों के खतरा बता रहा है, तो वहीं सरकार इसे अल्पसंख्यकों के कल्याण की बात कर रही है। सरकार ने इस बिल को संसद के दोनों सदनों से पास कराकर विधेयक शक्ल दे चुकी है।
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सीएए और एनआरसी को लेकर विरोध शांत भी नहीं हुआ था कि केंद्र की मोदी सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करने का आदेश दे दिया। एक तरफ गृहमंत्री अमित शाह एनपीआर और एनआरसी के बीच कोई संबंध न होने की बात कह रहे हैं, तो वहीं विपक्ष सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कह रही है कि एनआरसी की दिशा में एनपीआर पहला कदम है। जाहिर है एनआरसी और सीएए पर छिड़ी बहस के बीच एनपीआर को अपडेट करने का आदेश सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। इसी बीच वामपंथी दल भी इस मुद्दे को देश से खिसकती अपनी राजनीतिक जमीन को बचाने के अवसर के रुप में देख रही है। इसी सिलसिले में वामदलों ने एक जनवरी से लेकर सात जनवरी तक देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। जबकि आठ जनवरी को आर्थिक मंदी और आम लोगों से जुड़े मुद्दे पर वामपंथी दल धरना देगी। बीते अट्ठारह दिसंबर को वामपंथी दल ने नागरिकता संशोधन विधेयक और एनआरसी के खिलाफ भारत बंद बुलाया था। इस बंद में अलग-अलग राजनीतिक दल और सामाजिक संस्थाओं ने समर्थन दिया था। इस बंद में देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा की खबरें सामने आयी थी। नागरिकता से जुड़े कानून के विरोध के कारण दिल्ली और उत्तर प्रदेश से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान और कई लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आयी। नागरिकता संशोधन कानून में केंद्र की मोदी सरकार ने भारत में नागरिकता पाने की अवधि को ग्यारह साल से घटाकर पाँच साल कर दी। ये संशोधन केवल पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक प्रताड़ना से जूझ रहे अल्पसंख्यकों के लिए किया गया। इसमें मुस्लिम धर्म को छोड़कर बाकी बचे छः धर्म हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, पारसी और बौद्ध को शामिल किया गया है। विपक्ष इसे मुस्लिमों के खतरा बता रहा है, तो वहीं सरकार इसे अल्पसंख्यकों के कल्याण की बात कर रही है। सरकार ने इस बिल को संसद के दोनों सदनों से पास कराकर विधेयक शक्ल दे चुकी है।
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लखनऊ, ब्यूरो। उत्तर पदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज इंदिरा गांधी पतिष्"ान में पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान एसोसिएशन, पेट्रोलियम एवं पाकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वाधान में एक माह तक चलने वाले `सरंक्षण क्षमता महोत्सव 2017' का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर स्कूली बच्चे, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, इण्डियन आयल, भारत पेट्रोलियम, और गेल (इण्डिया) लिमिटेड के अधिकारीगण, उनके डीलर्स और वितरकगण उपस्थित थे। महोत्सव की थीम `ईंधन संरक्षण की जिम्मेदारी, जनगण की भागीदारी' थी। राज्यपाल ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संरक्षण की दृष्टि से पतिज्ञा भी दिलायी तथा झण्डा दिखाकर रैली का शुभारम्भ किया। राज्यपाल ने कहा कि ``मुझे पेट्रोलियम परिवार के कार्पाम में आकर अत्यन्त पसन्नता हुयी। कार्पाम में आकर मुझे वही पसन्नता मिली है जैसे किसी को मायके आने पर होती है। जिस गति से पेट्रोलियम पदार्थों की खपत हो रही है उसी तरह पेट्रोलियम उत्पाद के ज्यादा से ज्यादा संरक्षण की जरूरत है। एक बूंद में भी महासागर जैसा तत्व होता है इसलिये बूंद-बूंद से बड़ी बचत हो सकती है। जैसे सेना के सिपाही देश का बचाव करते हैं उसी तरह पाकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम उत्पाद की बचत में जनता सहभागी बने। " देश में जिस गति से उपयोग और जनसंख्या बढ़ी है उत्पादन नहीं बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह विचार करने की आवश्यकता है कि स्वदेश में उत्पादन बढ़े और उपयोग को कम न करते हुये पेट्रोल की बचत कैसे हो। श्री नाईक ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय का पेट्रोल में ईथनाल मिलाने का निर्णय स्वागत योग्य है। यह पसन्नता की बात है कि देश में पेट्रोल के साथ 10 पतिशत ईथनाल का पयोग उत्तर पदेश में सबसे ज्यादा किया जा रहा है। ब्राजील में 25 से 30 पतिशत ईथनाल तेल में मिलाया जाता है। उन्होंने बताया कि जब वे पेट्रोलियम मंत्रालय के मंत्री थे तो उनके कार्यकाल में 70 पतिशत तेल आयात होता था और 30 पतिशत तेल देश में निर्मित होता था। अपने पेट्रोलियम मंत्री के कार्यकाल में उन्होंने पेट्रोल में 5 पतिशत इथनाल मिलाने का अभिनव पयोग किया था जिससे देश के गन्ना किसानों को भी लाभ हुआ और आयात करने में देश का पैसा भी बचता था। उन्होंने कहा कि शीरे को अक्षय ऊर्जा के रूप में पयोग कर सकते हैं। श्री अविनाश वर्मा, राज्य स्तरीय संयोजक ने विभाग द्वारा जनता को उपलब्ध करायी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बताया तथा राज्यपाल के पेट्रोलियम मंत्री रहते हुये लिये गये निर्णयों की सराहना भी की। इस अवसर पर राज्यपाल ने मार्डन पुलिस स्कूल पुलिस लाईन तथा पुलिस मार्डन स्कूल गोमती नगर की पधानाचार्या सैय्यदा रिज़वी व सरिता तिवारी को संरक्षण, क्षमता महारैली में भाग लेने के लिये स्मृति चिन्ह पदान किया। कार्पाम में नुक्कड नाटक मण्डली द्वारा एक पस्तुति भी दी गयी, जिसमें पेट्रोल, डीजल व ऊर्जा बचत का संदेश था।
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लखनऊ, ब्यूरो। उत्तर पदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज इंदिरा गांधी पतिष्"ान में पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान एसोसिएशन, पेट्रोलियम एवं पाकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वाधान में एक माह तक चलने वाले `सरंक्षण क्षमता महोत्सव दो हज़ार सत्रह' का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर स्कूली बच्चे, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, इण्डियन आयल, भारत पेट्रोलियम, और गेल लिमिटेड के अधिकारीगण, उनके डीलर्स और वितरकगण उपस्थित थे। महोत्सव की थीम `ईंधन संरक्षण की जिम्मेदारी, जनगण की भागीदारी' थी। राज्यपाल ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संरक्षण की दृष्टि से पतिज्ञा भी दिलायी तथा झण्डा दिखाकर रैली का शुभारम्भ किया। राज्यपाल ने कहा कि ``मुझे पेट्रोलियम परिवार के कार्पाम में आकर अत्यन्त पसन्नता हुयी। कार्पाम में आकर मुझे वही पसन्नता मिली है जैसे किसी को मायके आने पर होती है। जिस गति से पेट्रोलियम पदार्थों की खपत हो रही है उसी तरह पेट्रोलियम उत्पाद के ज्यादा से ज्यादा संरक्षण की जरूरत है। एक बूंद में भी महासागर जैसा तत्व होता है इसलिये बूंद-बूंद से बड़ी बचत हो सकती है। जैसे सेना के सिपाही देश का बचाव करते हैं उसी तरह पाकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम उत्पाद की बचत में जनता सहभागी बने। " देश में जिस गति से उपयोग और जनसंख्या बढ़ी है उत्पादन नहीं बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह विचार करने की आवश्यकता है कि स्वदेश में उत्पादन बढ़े और उपयोग को कम न करते हुये पेट्रोल की बचत कैसे हो। श्री नाईक ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय का पेट्रोल में ईथनाल मिलाने का निर्णय स्वागत योग्य है। यह पसन्नता की बात है कि देश में पेट्रोल के साथ दस पतिशत ईथनाल का पयोग उत्तर पदेश में सबसे ज्यादा किया जा रहा है। ब्राजील में पच्चीस से तीस पतिशत ईथनाल तेल में मिलाया जाता है। उन्होंने बताया कि जब वे पेट्रोलियम मंत्रालय के मंत्री थे तो उनके कार्यकाल में सत्तर पतिशत तेल आयात होता था और तीस पतिशत तेल देश में निर्मित होता था। अपने पेट्रोलियम मंत्री के कार्यकाल में उन्होंने पेट्रोल में पाँच पतिशत इथनाल मिलाने का अभिनव पयोग किया था जिससे देश के गन्ना किसानों को भी लाभ हुआ और आयात करने में देश का पैसा भी बचता था। उन्होंने कहा कि शीरे को अक्षय ऊर्जा के रूप में पयोग कर सकते हैं। श्री अविनाश वर्मा, राज्य स्तरीय संयोजक ने विभाग द्वारा जनता को उपलब्ध करायी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बताया तथा राज्यपाल के पेट्रोलियम मंत्री रहते हुये लिये गये निर्णयों की सराहना भी की। इस अवसर पर राज्यपाल ने मार्डन पुलिस स्कूल पुलिस लाईन तथा पुलिस मार्डन स्कूल गोमती नगर की पधानाचार्या सैय्यदा रिज़वी व सरिता तिवारी को संरक्षण, क्षमता महारैली में भाग लेने के लिये स्मृति चिन्ह पदान किया। कार्पाम में नुक्कड नाटक मण्डली द्वारा एक पस्तुति भी दी गयी, जिसमें पेट्रोल, डीजल व ऊर्जा बचत का संदेश था।
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लाहौर, 18 अप्रैल (Cricketnmore): पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज जहीर अब्बास ने कहा है कि वह प्रस्ताव मिलने पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) का अध्यक्ष बनने के लिए तैयार हैं। नेशन डॉट कॉम डॉट पीके ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अध्यक्ष अब्बास के 'वक्त न्यूज' को दिए गए बयान के हवाले से लिखा है, "मैं पीसीबी का अध्यक्ष बनने के लिए तैयार हूं, लेकिन अभी तक मुझसे किसी ने संपर्क नहीं किया है।"
अब्बास ने कहा कि वह आईसीसी अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई जिम्मेदारी निभाने के लिए खाली हो जाएंगे। वह पिछले साल जून में आईसीसी के अध्यक्ष बने थे। उनका कार्यकाल इस साल खत्म हो जाएगा।
अब्बास ने पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक को चयनसमिति का नया अध्यक्ष बनाने के कदम की भी सराहना की।
एशिया कप और हाल ही में खत्म हुए टी-20 विश्व कप में पाकिस्तान टीम के बुरे प्रदर्शन के बाद पीसीबी अध्यक्ष शहरयार खान की काफी आलोचनाएं हो रही हैं। टीम एशिया कप और विश्व कप, दोनों ही टूर्नामेंट में सेमीफाइनल तक भी नहीं पहुंच पाई थी।
पीसीबी के संरक्षक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी पीसीबी अध्यक्ष को बदलने की बात कही थी।
टीम के पूर्व कोच वकार यूनिस ने भी अपनी रिपोर्ट में पीसीबी अध्यक्ष की आलोचना की थी और कहा था कि पीसीबी के सर्वोच्च पदों पर बैठे शहरयान खान और नजम सेठी, पाकिस्तान क्रिकेट को बर्बाद कर रहे हैं।
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लाहौर, अट्ठारह अप्रैल : पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज जहीर अब्बास ने कहा है कि वह प्रस्ताव मिलने पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष बनने के लिए तैयार हैं। नेशन डॉट कॉम डॉट पीके ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष अब्बास के 'वक्त न्यूज' को दिए गए बयान के हवाले से लिखा है, "मैं पीसीबी का अध्यक्ष बनने के लिए तैयार हूं, लेकिन अभी तक मुझसे किसी ने संपर्क नहीं किया है।" अब्बास ने कहा कि वह आईसीसी अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई जिम्मेदारी निभाने के लिए खाली हो जाएंगे। वह पिछले साल जून में आईसीसी के अध्यक्ष बने थे। उनका कार्यकाल इस साल खत्म हो जाएगा। अब्बास ने पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक को चयनसमिति का नया अध्यक्ष बनाने के कदम की भी सराहना की। एशिया कप और हाल ही में खत्म हुए टी-बीस विश्व कप में पाकिस्तान टीम के बुरे प्रदर्शन के बाद पीसीबी अध्यक्ष शहरयार खान की काफी आलोचनाएं हो रही हैं। टीम एशिया कप और विश्व कप, दोनों ही टूर्नामेंट में सेमीफाइनल तक भी नहीं पहुंच पाई थी। पीसीबी के संरक्षक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी पीसीबी अध्यक्ष को बदलने की बात कही थी। टीम के पूर्व कोच वकार यूनिस ने भी अपनी रिपोर्ट में पीसीबी अध्यक्ष की आलोचना की थी और कहा था कि पीसीबी के सर्वोच्च पदों पर बैठे शहरयान खान और नजम सेठी, पाकिस्तान क्रिकेट को बर्बाद कर रहे हैं।
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Festive Sale: त्योहारों की वापसी हो चुकी है और ऑनलाइन फेस्टिव सेल भी आ गई हैं जिनमें आपको खरीदारी पर शानदार डिस्काउंट मिलते हैं और आपकी मनचाही चीजें कम पैसों में खरीदने का मौका मिलता है. आज यानी 26 सितंबर से नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो चुकी है और अमेजन ग्रेट इंडिया फेस्टिवल सेल और फ्लिपकार्ट बिग बिलियन डेज की शुरुआत 23 सितंबर से हो चुकी है जो 30 सितंबर तक चलेगी. जाहिर तौर पर आपके पास अपनी शॉपिंग लिस्ट होगी जिसमें अगर पैसों की बचत हो जाए तो मजा ही आ जाए. ऐसे में आपके लिए एक और तरीका भी है जो आपको खरीदारी पर ज्यादा ऑनलाइन डिस्कॉउंट दिला सकता है और आपको रिवॉर्ड दिला सकता है. ये तरीका है क्रेडिट कार्ड के जरिए शॉपिंग करने का. यहां आपको बेस्ट शॉपिंग क्रेडिट कार्ड्स के बारे में बताया जा रहा है जो रिवॉर्ड पॉइंट्स के साथ-साथ एक्स्ट्रा बेनेफिट्स भी दिलाते हैं.
फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड के जरिए आपको फ्लिपकार्ट और मिंत्रा पर 5 फीसदी कैशबैक का ऑफर मिलता है. इसके अलावा 4 फीसदी कैशबैक अन्य प्रीफर्ड मर्चेंट्स जैसे क्लियरट्रिप, पीवीआर, उबर पर दिया जा रहा है. वहीं 1. 5 फीसदी कैशबैक दूसरी सभी कैटेगरीज पर दिया जा रहा है. वहीं इसके साथ कार्ड एक्टिवेशन पर 1100 रुपये के वैल्कम बेनेफिट्स भी दिए जा रहे हैं. इस कार्ड के लिए सालाना फीस 500 रुपये है.
इस कार्ड के जरिए फ्लिपकार्ट, अमेजन, बिग बास्केट, रिलायंस स्मार्ट सुपर स्टोर और स्विगी पर 10 गुना कैश पॉइंट दिए जा रहे हैं. मर्चेंट लोकेशन पर ईएमआई स्पेंड पर 5 गुना कैश पॉइंट दिए जा रहे हैं. वहीं दूसरी सभ केटेगरी के लिए हरेक 150 रुपये के खर्च पर 2 कैश पॉइंट दिए जा रहे हैं. इसके अलावा एक तिमाही में 50,000 रुपये खर्च करने वाले यूजर्स को 500 रुपये का गिफ्ट वाउचर भी दिया जा रहा है. इस कार्ड के लिए एनुअल या सालाना फीस 500 रुपये है.
स्टैंडर्ड चार्टर्ड डिजीस्मार्ट क्रेडिट कार्ड के जरिए मिंत्रा से खरीदारी पर 20 फीसदी तक डिस्काउंट, ब्लिंकिट और जोमैटो से खरीदारी पर 10 फीसदी डिस्काउंट वो भी बिना किसी न्यूनतम खर्च की शर्त पर मिलता है. यूजर्स को इसके जरिए यात्रा से टिकट बुक करने पर डोमेस्टिक फ्लाइट टिकट बुक करने पर 20 फीसदी डिस्काउंट भी मिलता है. इस कार्ड की एनुअल फीस 588 रुपये है.
HSBC Cashback Credit Card के जरिए सारी ऑनलाइन शॉपिंग पर 1. 5 फीसदी कैशबैक मिलता है और अन्य सभी खरीदारी पर 1 फीसदी कैशबैक लिया जा सकता है. वैल्कम बेनेफिट्स के तौर पर बैंक 500 रुपये के अमेजन वाउचर, मिंत्रा के 1500 रुपये के वाउचर्स और Ajio के 3000 रुपये के वाउचर्स देता है. ब्लिंकइट से खरीदारी पर 100 रुपये तक का 10 फीसदी डिस्काउंट ये कार्ड दिलाता है और Pharmeasy एप के जरिए प्रिस्क्राइब्ड दवाओं पर आपको 150 रुपये तक का सीधा 10 फीसदी डिस्काउंट मिल सकता है. ये क्रेडिट कार्ड आपको 750 रुपये की सालाना फीस के आधार पर मिल सकता है.
एसबीआई कार्ड कैशबैक ऑफर्स का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये सभी ऑनलाइन शॉपिंग पर 5 फीसदी का कैशबैक दिलाता है जिसमें कोई मर्चेंट रेस्ट्रिक्शन भी नहीं होती है. इसके अलावा 1 फीसदी कैशबैक सभी तरह के अन्य खर्चों पर मिल सकता है. अगर एक साल में आप इस कार्ड से 2 लाख रुपये या इससे अधिक की शॉपिंग करते हैं तो रीन्यूअल फीस पूरी तरह माफ हो जाती है. इस कार्ड की सालाना फीस 999 रुपये की है.
नोटः ये सभी क्रेडिट कार्ड की सूचना 12 सितंबर 2022 तक की जानकारी के आधार पर दी गई है. सभी क्रेडिट कार्ड्स को उनकी सालाना फीस के हिसाब से बढ़ते क्रम में लगाया गया है. क्रेडिट कार्ड्स की ये लिस्ट उनके ऑफर्स, डिस्काउंट और कैशबैक के आधार पर बताई गई है.
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Festive Sale: त्योहारों की वापसी हो चुकी है और ऑनलाइन फेस्टिव सेल भी आ गई हैं जिनमें आपको खरीदारी पर शानदार डिस्काउंट मिलते हैं और आपकी मनचाही चीजें कम पैसों में खरीदने का मौका मिलता है. आज यानी छब्बीस सितंबर से नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो चुकी है और अमेजन ग्रेट इंडिया फेस्टिवल सेल और फ्लिपकार्ट बिग बिलियन डेज की शुरुआत तेईस सितंबर से हो चुकी है जो तीस सितंबर तक चलेगी. जाहिर तौर पर आपके पास अपनी शॉपिंग लिस्ट होगी जिसमें अगर पैसों की बचत हो जाए तो मजा ही आ जाए. ऐसे में आपके लिए एक और तरीका भी है जो आपको खरीदारी पर ज्यादा ऑनलाइन डिस्कॉउंट दिला सकता है और आपको रिवॉर्ड दिला सकता है. ये तरीका है क्रेडिट कार्ड के जरिए शॉपिंग करने का. यहां आपको बेस्ट शॉपिंग क्रेडिट कार्ड्स के बारे में बताया जा रहा है जो रिवॉर्ड पॉइंट्स के साथ-साथ एक्स्ट्रा बेनेफिट्स भी दिलाते हैं. फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड के जरिए आपको फ्लिपकार्ट और मिंत्रा पर पाँच फीसदी कैशबैक का ऑफर मिलता है. इसके अलावा चार फीसदी कैशबैक अन्य प्रीफर्ड मर्चेंट्स जैसे क्लियरट्रिप, पीवीआर, उबर पर दिया जा रहा है. वहीं एक. पाँच फीसदी कैशबैक दूसरी सभी कैटेगरीज पर दिया जा रहा है. वहीं इसके साथ कार्ड एक्टिवेशन पर एक हज़ार एक सौ रुपयापये के वैल्कम बेनेफिट्स भी दिए जा रहे हैं. इस कार्ड के लिए सालाना फीस पाँच सौ रुपयापये है. इस कार्ड के जरिए फ्लिपकार्ट, अमेजन, बिग बास्केट, रिलायंस स्मार्ट सुपर स्टोर और स्विगी पर दस गुना कैश पॉइंट दिए जा रहे हैं. मर्चेंट लोकेशन पर ईएमआई स्पेंड पर पाँच गुना कैश पॉइंट दिए जा रहे हैं. वहीं दूसरी सभ केटेगरी के लिए हरेक एक सौ पचास रुपयापये के खर्च पर दो कैश पॉइंट दिए जा रहे हैं. इसके अलावा एक तिमाही में पचास,शून्य रुपयापये खर्च करने वाले यूजर्स को पाँच सौ रुपयापये का गिफ्ट वाउचर भी दिया जा रहा है. इस कार्ड के लिए एनुअल या सालाना फीस पाँच सौ रुपयापये है. स्टैंडर्ड चार्टर्ड डिजीस्मार्ट क्रेडिट कार्ड के जरिए मिंत्रा से खरीदारी पर बीस फीसदी तक डिस्काउंट, ब्लिंकिट और जोमैटो से खरीदारी पर दस फीसदी डिस्काउंट वो भी बिना किसी न्यूनतम खर्च की शर्त पर मिलता है. यूजर्स को इसके जरिए यात्रा से टिकट बुक करने पर डोमेस्टिक फ्लाइट टिकट बुक करने पर बीस फीसदी डिस्काउंट भी मिलता है. इस कार्ड की एनुअल फीस पाँच सौ अठासी रुपयापये है. HSBC Cashback Credit Card के जरिए सारी ऑनलाइन शॉपिंग पर एक. पाँच फीसदी कैशबैक मिलता है और अन्य सभी खरीदारी पर एक फीसदी कैशबैक लिया जा सकता है. वैल्कम बेनेफिट्स के तौर पर बैंक पाँच सौ रुपयापये के अमेजन वाउचर, मिंत्रा के एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये के वाउचर्स और Ajio के तीन हज़ार रुपयापये के वाउचर्स देता है. ब्लिंकइट से खरीदारी पर एक सौ रुपयापये तक का दस फीसदी डिस्काउंट ये कार्ड दिलाता है और Pharmeasy एप के जरिए प्रिस्क्राइब्ड दवाओं पर आपको एक सौ पचास रुपयापये तक का सीधा दस फीसदी डिस्काउंट मिल सकता है. ये क्रेडिट कार्ड आपको सात सौ पचास रुपयापये की सालाना फीस के आधार पर मिल सकता है. एसबीआई कार्ड कैशबैक ऑफर्स का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये सभी ऑनलाइन शॉपिंग पर पाँच फीसदी का कैशबैक दिलाता है जिसमें कोई मर्चेंट रेस्ट्रिक्शन भी नहीं होती है. इसके अलावा एक फीसदी कैशबैक सभी तरह के अन्य खर्चों पर मिल सकता है. अगर एक साल में आप इस कार्ड से दो लाख रुपये या इससे अधिक की शॉपिंग करते हैं तो रीन्यूअल फीस पूरी तरह माफ हो जाती है. इस कार्ड की सालाना फीस नौ सौ निन्यानवे रुपयापये की है. नोटः ये सभी क्रेडिट कार्ड की सूचना बारह सितंबर दो हज़ार बाईस तक की जानकारी के आधार पर दी गई है. सभी क्रेडिट कार्ड्स को उनकी सालाना फीस के हिसाब से बढ़ते क्रम में लगाया गया है. क्रेडिट कार्ड्स की ये लिस्ट उनके ऑफर्स, डिस्काउंट और कैशबैक के आधार पर बताई गई है.
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- #Bollywood NewsBipasha Basu ने एयरपोर्ट पर हाथ से छिपाया बेटी देवी का चेहरा, पैप्स को कहा- 'बेटी की फोटो मत क्लिक करो'
Malaika Arora and Arjun Kapoor Love Story: बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर और उनकी गर्लफ्रेंड मलाइका अरोड़ा इस समय सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। दरअसल हाल ही में मलाइका अरोड़ा ने अपनी इंस्टा स्टोरी पर अपने बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर की बिना कपड़ों की एक तस्वीर पोस्ट की थी। इस तस्वीर को शेयर करते हुए मलाइका ने कैप्शन में लिखा था- ओह माय लेजी बॉय। वहीं अपना प्यार जताते हुए अर्जुन कपूर ने मलाइका का ये पोस्ट अपने इंस्टाग्राम पर हार्ट इमोजी के साथ रीशेयर किया था। आपको बता दें कि ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग इस कपल को लेकर तरह तरह की बातें कर रहे हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे शुरू हुई थी इस कपल की लव स्टोरी।
मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर इस समय बॉलीवुड इंडस्ट्री के हॉट कपल्स में से एक हैं। मलाइका अरोड़ा अपने बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर से 12 साल बड़ी हैं। साथ ही मलाइका अरोड़ा ने अपने पहले पति अरबाज खान को तलाक दे दिया है और उनका एक बेटा भी है। इन सबके बावजूद दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।
मलाइका अरोड़ा और उनके बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर को अक्सर हर इवेंट और पार्टीज में एकसाथ देखा जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों लिव-इन में रहते हैं। हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। कुछ दिनों पहले खबर आ रही थी कि दोनों जल्द ही शादी करने वाले हैं। लेकिन दोनों ने इस बारे में अभी तक मीडिया के सामने कुछ नहीं कहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अर्जुन कपूर का मलाइका अरोड़ा के साथ रिलेशनशिप से पहले सलमान खान की बहन अर्पिता खान के साथ अफेयर चल रहा था। इस दौरान वह अक्सर सलमान खान के घर आया जाया करते थे। उस समय मलाइका अरोड़ा बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के भाई अरबाज खान की पत्नी थीं और उसी घर में रहती थीं। फिर कुछ समय में ही अर्जुन और अर्पिता का ब्रेकअप हो गया था.
इसके बाद भी अर्जुन कपूर अक्सर सलमान के घर पर जाते रहते थे। वह अपने एक्टिंग डेब्यू को लेकर सलमान खान से कई तरह की एडवाइज लेते रहते थे। इसके बाद फिल्म 'इश्कजादे' की शूटिंग के समय भी कई बार अर्जुन कपूर सलमान खान के पास जाते थे। कहते हैं कि उसी समय से मलाइका अरोड़ा को अर्जुन कपूर अच्छे लगने लगे थे। दूसरी तरफ अरबाज खान और मलाइका के बीच में भी तकरार बढ़ने लगी थी। आखिरकार मलाइका और अरबाज खान ने एक दूसरे को तलाक दे दिया था।
बता दें कि मलाइका अरोड़ा ने तलाक लेने के कुछ समय बाद अर्जुन कपूर के साथ एक फैशन शो में रैंप वॉक किया था। इसे देखकर उनके फैंस काफी हैरान हुए थे। हालांकि तब तक इन दोनों के रिश्ते के बारें में किसी को भी पता नहीं था। जानकारी के अनुसार अर्जुन कपूर का फ्रेंड सर्किल भी मलाइका अरोड़ा से जुड़ा हुआ था। ऐसे में दोनों अक्सर एक दूसरे से मिलते रहते थे और यहीं से इन दोनों के प्यार की शुरुआत हुई थी।
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- #Bollywood NewsBipasha Basu ने एयरपोर्ट पर हाथ से छिपाया बेटी देवी का चेहरा, पैप्स को कहा- 'बेटी की फोटो मत क्लिक करो' Malaika Arora and Arjun Kapoor Love Story: बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर और उनकी गर्लफ्रेंड मलाइका अरोड़ा इस समय सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। दरअसल हाल ही में मलाइका अरोड़ा ने अपनी इंस्टा स्टोरी पर अपने बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर की बिना कपड़ों की एक तस्वीर पोस्ट की थी। इस तस्वीर को शेयर करते हुए मलाइका ने कैप्शन में लिखा था- ओह माय लेजी बॉय। वहीं अपना प्यार जताते हुए अर्जुन कपूर ने मलाइका का ये पोस्ट अपने इंस्टाग्राम पर हार्ट इमोजी के साथ रीशेयर किया था। आपको बता दें कि ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग इस कपल को लेकर तरह तरह की बातें कर रहे हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे शुरू हुई थी इस कपल की लव स्टोरी। मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर इस समय बॉलीवुड इंडस्ट्री के हॉट कपल्स में से एक हैं। मलाइका अरोड़ा अपने बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर से बारह साल बड़ी हैं। साथ ही मलाइका अरोड़ा ने अपने पहले पति अरबाज खान को तलाक दे दिया है और उनका एक बेटा भी है। इन सबके बावजूद दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। मलाइका अरोड़ा और उनके बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर को अक्सर हर इवेंट और पार्टीज में एकसाथ देखा जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों लिव-इन में रहते हैं। हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। कुछ दिनों पहले खबर आ रही थी कि दोनों जल्द ही शादी करने वाले हैं। लेकिन दोनों ने इस बारे में अभी तक मीडिया के सामने कुछ नहीं कहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अर्जुन कपूर का मलाइका अरोड़ा के साथ रिलेशनशिप से पहले सलमान खान की बहन अर्पिता खान के साथ अफेयर चल रहा था। इस दौरान वह अक्सर सलमान खान के घर आया जाया करते थे। उस समय मलाइका अरोड़ा बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के भाई अरबाज खान की पत्नी थीं और उसी घर में रहती थीं। फिर कुछ समय में ही अर्जुन और अर्पिता का ब्रेकअप हो गया था. इसके बाद भी अर्जुन कपूर अक्सर सलमान के घर पर जाते रहते थे। वह अपने एक्टिंग डेब्यू को लेकर सलमान खान से कई तरह की एडवाइज लेते रहते थे। इसके बाद फिल्म 'इश्कजादे' की शूटिंग के समय भी कई बार अर्जुन कपूर सलमान खान के पास जाते थे। कहते हैं कि उसी समय से मलाइका अरोड़ा को अर्जुन कपूर अच्छे लगने लगे थे। दूसरी तरफ अरबाज खान और मलाइका के बीच में भी तकरार बढ़ने लगी थी। आखिरकार मलाइका और अरबाज खान ने एक दूसरे को तलाक दे दिया था। बता दें कि मलाइका अरोड़ा ने तलाक लेने के कुछ समय बाद अर्जुन कपूर के साथ एक फैशन शो में रैंप वॉक किया था। इसे देखकर उनके फैंस काफी हैरान हुए थे। हालांकि तब तक इन दोनों के रिश्ते के बारें में किसी को भी पता नहीं था। जानकारी के अनुसार अर्जुन कपूर का फ्रेंड सर्किल भी मलाइका अरोड़ा से जुड़ा हुआ था। ऐसे में दोनों अक्सर एक दूसरे से मिलते रहते थे और यहीं से इन दोनों के प्यार की शुरुआत हुई थी।
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यदि आबादी के बड़े हिस्से को कोविड-19 प्रतिरोधी दवा लगा दी जाए तो इसको अपना फैलाव करने हेतु नए मानव शरीर नहीं मिल पाएंगे, जिससे समाज इस अलामत से निजात पा सकेगा। हालांकि, इसको लेकर कुछ संशय भी कायम हैं, क्योंकि जब वैक्सीन स्वस्थ लोगों को दी गई तो कुछेक की मौत अतिरंजित प्रतिक्रिया (एनाफिलेक्सिस) से हुई बताई गयी है और कुछ व्यक्तियों में अन्य दुष्प्रभाव और एलर्जी जैसे लक्षण पैदा होने की सूचनाएं हैं।
अध्ययन बताता है कि जिन लोगों को पहले कोरोना हो चुका है उनके शरीर में बनी स्वतः स्फूर्त प्रतिरोधात्मक शक्ति का स्तर 90 दिनों के भीतर कम होने लगता है। तो क्या टीकाकरण के बाद बनी प्रतिरोधात्मकता ज्यादा समय तक टिकी रह पाएगी? संशय व्यक्त करने वालों में अधिकांश धर्मभीरू, किसी खास राजनीतिक विचारधारा वाले, नैतिकतावादी और वे लोग हैं, जिनके पास भारतीयों पर वैक्सीन प्रयोग के तीसरे चरण के आंकड़े नहीं हैं। एक भ्रांति यह भी है कि किसी वैक्सीन से इंसान में नपुंसकता पैदा हो जाती है या इसे अपने धार्मिक विश्वास पर आघात ठहराया जाता है।
कोविड-19 वैक्सीन को विकसित करने में जिस तेजी से काम हुआ है, उसने अनेक भ्रांतियों को भी जन्म दिया है, जिन्होंने आगे संशयों को हवा दी है, खासकर कोविशील्ड और कोवैक्सीन के मामले में, जिन्हें हाल ही में मान्यता मिली है। लेकिन वैक्सीन को लेकर व्याप्त चिंताओं और मौजूदा हिचक के बीच यह खबर जनता के मनोबल को ऊंचा करने में बहुत बड़ा काम करेगी।
लेकिन जब कोरोना वायरस अपनी प्राकृतिक मौत मर रहा है, तो क्या जन-टीकाकरण जैसा जोखिम उठाना सही होगा? क्या थोड़ा रुककर विचार करना ज्यादा ठीक नहीं? क्या कमजोर और बीमार लोग अपनी सीमित रोग प्रतिरोधकता के चलते कोविड वैक्सीन से उत्पन्न होने वाली संभावित प्रतिक्रिया को झेल पाएंगे?
हालांकि, कुछ चिकित्सकों का मानना है कि ज्यादातर लोगों में तीव्र प्रतिक्रिया वाले लक्षण (एनाफिलेक्सिस) पैदा नहीं होंगे और वैक्सीन लगवाने के फायदे जोखिम उठाने की बनिस्बत कहीं अधिक हैं। ब्रिटेन के दवा नियामक का कहना है : 'आप इत्मीनान रखिए कि यह वैक्सीन नियामक द्वारा स्थापित सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता संबंधी कड़े मानदंडों पर खरी उतरी है'।
भारत में कोविड वैक्सीन विकसित करने में 30 से ज्यादा जगहों पर काम चल रहा है, जो विकास के विभिन्न चरणों पर है। पुणे स्थित जेन्नोआ नामक कंपनी, जो एम-आरएनए आधारित एचजीसीओ-19 दवा विकसित कर रही है, उसे काफी सुरक्षित माना जा रहा है क्योंकि इसे गैर-संक्रमित, गैर-संग्रहणीय पाया गया है और मानव शरीर में इसका क्षरण कोशिका तंत्र द्वारा प्राकृतिक रूप में होता है। कुछ अस्पतालों में मोनोक्लोनल एंटीबॉडीस को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नवीनतम हथियार बनाया है। प्रयोगशाला निर्मित यह प्रोटीन वायरस जैसे घातक एंटीजेन्स से लड़ने में शरीर के प्राकृतिक प्रतिरोधक तंत्र की नकल करता है।
भारत में 100 करोड़ से ज्यादा लोगों को एक से ज्यादा दफा टीका लगाना एक दुरूह और अभूतपूर्व चुनौती है। सालों से भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता रहा है और यूनीसेफ को दी जाने वाली कुछ वैक्सीनों का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा भारत में बनता आया है। पिछले कुछ वर्षों में जैव-विज्ञान विभाग, विज्ञान एवं तकनीक विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परिषद, राष्ट्रीय रोगप्रतिरोधक विज्ञान संस्थान, अखिल भारतीय हैजा एवं आंत्रशोथ रोग संस्थान और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान इत्यादि ने विभिन्न रोगों हेतु स्वदेशी वैक्सीनें विकसित करने के लिए शोधकर्ताओं को आवश्यक जानकारी मुहैया करवाते हुए महत्वपूर्ण साझेदारी और सहयोगात्मक भूमिका निभाई है।
विगत में देश में चेचक, खसरा और पोलियो के वैक्सीन अभियान सफलता की गाथा हैं। पिछले तीन सालों में भारतीय वैक्सीन उद्योग ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इस उपलब्धि में मुख के माध्यम से दी जाने वाली हैजा रोधक एक नई द्विसंयोजक (बाइवेलेंट) वैक्सीन, दिमागी बुखाररोधी-ए वैक्सीन और जापानी दिमागी बुखार के इलाज वाली वैक्सीन स्वदेश में विकसित की गई हैं। अब कोरोना के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ संयुक्त उपक्रम में भारतीय दवा निर्माता कंपनियों को लाइसेंस दिया गया है। वर्ष 2009 में एक नई द्विसंयोजक (ओ-1 और ओ-139) दवा जो हैजा पैदा करने वाले समस्त जीवाणुओं को मात्र दो खुराकों में नष्ट कर देती हैं, इनको लाइसेंस दिया गया था। बहुत कम दाम वाली मैनिनजाइटिस-ए नामक प्रभावशाली वैक्सीन, दरअसल विश्वभर में सबसे सस्ती वैक्सीन है और अफ्रीका महाद्वीप के दिमागी बुखार प्रभावित क्षेत्र में इसकी लगभग 10 करोड़ खुराकें आज तक दी जा चुकी हैं।
डॉ. एडवर्ड जेन्नर पहले व्यक्ति थे जिन्होंने गौर किया था कि दूध दुहने वाली जिन औरतों को पहले गो-चेचक (काउपॉक्स) हो चुकी है उन्हें आगे चेचक (स्मालपॉक्स) का रोग प्रभावित नहीं कर पाया। इससे वैक्सीन का विचार उत्पन्न हुआ था। वर्ष 1796 में जेन्नर ने एक बच्चे के शरीर में गो-चेचक का निरापद संस्करण प्रविष्ट किया ताकि उसका शरीर इस वायरस के गुणसूत्र को पहचान कर स्व-रोगप्रतिरोधात्मक शक्ति उत्पन्न कर सके। उन्होंने पाया कि यह बच्चा अनेकानेक चेचक रोगियों से बार-बार संपर्क में आने के बावजूद कभी इससे प्रभावित नहीं हुआ। इस तरह दुनिया की पहली वैक्सीन का आरंभ हुआ था। वर्ष 1853 में जब ब्रिटेन में सरकार ने सभी बच्चों को चेचक का टीका लगाना अनिवार्य बना दिया था, तो इसको लेकर जनाक्रोश पैदा हो गया। आगे चलकर, वैश्विक चेचक रोधी वैक्सीन कार्यक्रम की सफलता की बदौलत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 1989 में दुनिया को चेचक-रहित घोषित किया था। 20वीं सदी के आरंभ में चेचक का टीका लगाने वाले अभियान को विस्तार मिला। इसके साथ ही भारतीय सैनिकों में टायफॉयड की वैक्सीन के ट्रायल शुरू हुए और भारत के लगभग हर राज्यों में वैक्सीन संस्थान बनाए गए। आजादी के बाद वाले समय में बीसीजी वैक्सीन लैबोरेटरी और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना हुई थी। वर्ष 1977 में आखिरकार भारत चेचक-मुक्त घोषित किया गया।
यह वर्ष 1885 की बात है जब फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पास्चर ने रैबीज़ रोधी वैक्सीन का इजाद किया था। इसी प्रकार वर्ष 1920 के दशक में क्षय रोग, टिटनेस, डिप्थिरिया और काली खांसी की वैक्सीन इजाद हुई। टाइफॉयड की वैक्सीन 19वीं सदी के आखिर में पहले ही विकसित हो चुकी थी।
वर्ष 1944-45 में यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध लड़ रहे अमेरिकी सैनिकों के लिए पहली बार मौसमी फ्लू से बचाव का प्रतिरोधी टीका लगाने का कार्यक्रम चला था। वर्ष 1950 के दशक में पोलियो की वैक्सीन अमेरिकी प्रशासन की पहली प्राथमिकता रही थी। मशहूर गायक एल्विस प्रैस्ली ने प्रयोग के लिए खुद को प्रस्तुत किया था और टेलीविजन के प्राइम टाइम शो में टीका लगवाया था। 1970 के दशक में अमेरिकियों को स्वाइन फ्लू से बचाने के लिए सरकार ने वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू किया था, परंतु इसको बीच में रोकना पड़ा था क्योंकि एक तो यह बीमारी वैश्विक महामारी में तब्दील नहीं हो पाई थी दूसरा, जिनको वैक्सीन लगी थी, उनमें दुष्प्रभाव देखे गए।
वर्ष 1998 में प्रतिष्ठित लांसेट मेडिकल जर्नल में छपे एक अध्ययन के मुताबिक एमएमआर (मीज़ल्स, मम्स एंड रूबेला) की वैक्सीन और ऑस्टिजम के बीच संबंध है, लेकिन बाद में यह दावा झूठा निकला। वर्ष 2009 में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के प्रकोप ने दुनिया भर में खतरे की घंटी बजा दी थी।
चूंकि फ्लू के लिए विकसित की जाने वाली वैक्सीन की गति मंथर रही है और सीमित सफलता हाथ लगी है, इसलिए संशयवादियों को कोविड-19 वैक्सीन को लेकर जो भी संदेह हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए।
लेखक सोसायटी फॉर प्रोमोशन ऑफ एथिकल एंड एफोर्डेबल संस्था के अध्यक्ष हैं।
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यदि आबादी के बड़े हिस्से को कोविड-उन्नीस प्रतिरोधी दवा लगा दी जाए तो इसको अपना फैलाव करने हेतु नए मानव शरीर नहीं मिल पाएंगे, जिससे समाज इस अलामत से निजात पा सकेगा। हालांकि, इसको लेकर कुछ संशय भी कायम हैं, क्योंकि जब वैक्सीन स्वस्थ लोगों को दी गई तो कुछेक की मौत अतिरंजित प्रतिक्रिया से हुई बताई गयी है और कुछ व्यक्तियों में अन्य दुष्प्रभाव और एलर्जी जैसे लक्षण पैदा होने की सूचनाएं हैं। अध्ययन बताता है कि जिन लोगों को पहले कोरोना हो चुका है उनके शरीर में बनी स्वतः स्फूर्त प्रतिरोधात्मक शक्ति का स्तर नब्बे दिनों के भीतर कम होने लगता है। तो क्या टीकाकरण के बाद बनी प्रतिरोधात्मकता ज्यादा समय तक टिकी रह पाएगी? संशय व्यक्त करने वालों में अधिकांश धर्मभीरू, किसी खास राजनीतिक विचारधारा वाले, नैतिकतावादी और वे लोग हैं, जिनके पास भारतीयों पर वैक्सीन प्रयोग के तीसरे चरण के आंकड़े नहीं हैं। एक भ्रांति यह भी है कि किसी वैक्सीन से इंसान में नपुंसकता पैदा हो जाती है या इसे अपने धार्मिक विश्वास पर आघात ठहराया जाता है। कोविड-उन्नीस वैक्सीन को विकसित करने में जिस तेजी से काम हुआ है, उसने अनेक भ्रांतियों को भी जन्म दिया है, जिन्होंने आगे संशयों को हवा दी है, खासकर कोविशील्ड और कोवैक्सीन के मामले में, जिन्हें हाल ही में मान्यता मिली है। लेकिन वैक्सीन को लेकर व्याप्त चिंताओं और मौजूदा हिचक के बीच यह खबर जनता के मनोबल को ऊंचा करने में बहुत बड़ा काम करेगी। लेकिन जब कोरोना वायरस अपनी प्राकृतिक मौत मर रहा है, तो क्या जन-टीकाकरण जैसा जोखिम उठाना सही होगा? क्या थोड़ा रुककर विचार करना ज्यादा ठीक नहीं? क्या कमजोर और बीमार लोग अपनी सीमित रोग प्रतिरोधकता के चलते कोविड वैक्सीन से उत्पन्न होने वाली संभावित प्रतिक्रिया को झेल पाएंगे? हालांकि, कुछ चिकित्सकों का मानना है कि ज्यादातर लोगों में तीव्र प्रतिक्रिया वाले लक्षण पैदा नहीं होंगे और वैक्सीन लगवाने के फायदे जोखिम उठाने की बनिस्बत कहीं अधिक हैं। ब्रिटेन के दवा नियामक का कहना है : 'आप इत्मीनान रखिए कि यह वैक्सीन नियामक द्वारा स्थापित सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता संबंधी कड़े मानदंडों पर खरी उतरी है'। भारत में कोविड वैक्सीन विकसित करने में तीस से ज्यादा जगहों पर काम चल रहा है, जो विकास के विभिन्न चरणों पर है। पुणे स्थित जेन्नोआ नामक कंपनी, जो एम-आरएनए आधारित एचजीसीओ-उन्नीस दवा विकसित कर रही है, उसे काफी सुरक्षित माना जा रहा है क्योंकि इसे गैर-संक्रमित, गैर-संग्रहणीय पाया गया है और मानव शरीर में इसका क्षरण कोशिका तंत्र द्वारा प्राकृतिक रूप में होता है। कुछ अस्पतालों में मोनोक्लोनल एंटीबॉडीस को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नवीनतम हथियार बनाया है। प्रयोगशाला निर्मित यह प्रोटीन वायरस जैसे घातक एंटीजेन्स से लड़ने में शरीर के प्राकृतिक प्रतिरोधक तंत्र की नकल करता है। भारत में एक सौ करोड़ से ज्यादा लोगों को एक से ज्यादा दफा टीका लगाना एक दुरूह और अभूतपूर्व चुनौती है। सालों से भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता रहा है और यूनीसेफ को दी जाने वाली कुछ वैक्सीनों का साठ फीसदी से ज्यादा हिस्सा भारत में बनता आया है। पिछले कुछ वर्षों में जैव-विज्ञान विभाग, विज्ञान एवं तकनीक विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परिषद, राष्ट्रीय रोगप्रतिरोधक विज्ञान संस्थान, अखिल भारतीय हैजा एवं आंत्रशोथ रोग संस्थान और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान इत्यादि ने विभिन्न रोगों हेतु स्वदेशी वैक्सीनें विकसित करने के लिए शोधकर्ताओं को आवश्यक जानकारी मुहैया करवाते हुए महत्वपूर्ण साझेदारी और सहयोगात्मक भूमिका निभाई है। विगत में देश में चेचक, खसरा और पोलियो के वैक्सीन अभियान सफलता की गाथा हैं। पिछले तीन सालों में भारतीय वैक्सीन उद्योग ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इस उपलब्धि में मुख के माध्यम से दी जाने वाली हैजा रोधक एक नई द्विसंयोजक वैक्सीन, दिमागी बुखाररोधी-ए वैक्सीन और जापानी दिमागी बुखार के इलाज वाली वैक्सीन स्वदेश में विकसित की गई हैं। अब कोरोना के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ संयुक्त उपक्रम में भारतीय दवा निर्माता कंपनियों को लाइसेंस दिया गया है। वर्ष दो हज़ार नौ में एक नई द्विसंयोजक दवा जो हैजा पैदा करने वाले समस्त जीवाणुओं को मात्र दो खुराकों में नष्ट कर देती हैं, इनको लाइसेंस दिया गया था। बहुत कम दाम वाली मैनिनजाइटिस-ए नामक प्रभावशाली वैक्सीन, दरअसल विश्वभर में सबसे सस्ती वैक्सीन है और अफ्रीका महाद्वीप के दिमागी बुखार प्रभावित क्षेत्र में इसकी लगभग दस करोड़ खुराकें आज तक दी जा चुकी हैं। डॉ. एडवर्ड जेन्नर पहले व्यक्ति थे जिन्होंने गौर किया था कि दूध दुहने वाली जिन औरतों को पहले गो-चेचक हो चुकी है उन्हें आगे चेचक का रोग प्रभावित नहीं कर पाया। इससे वैक्सीन का विचार उत्पन्न हुआ था। वर्ष एक हज़ार सात सौ छियानवे में जेन्नर ने एक बच्चे के शरीर में गो-चेचक का निरापद संस्करण प्रविष्ट किया ताकि उसका शरीर इस वायरस के गुणसूत्र को पहचान कर स्व-रोगप्रतिरोधात्मक शक्ति उत्पन्न कर सके। उन्होंने पाया कि यह बच्चा अनेकानेक चेचक रोगियों से बार-बार संपर्क में आने के बावजूद कभी इससे प्रभावित नहीं हुआ। इस तरह दुनिया की पहली वैक्सीन का आरंभ हुआ था। वर्ष एक हज़ार आठ सौ तिरेपन में जब ब्रिटेन में सरकार ने सभी बच्चों को चेचक का टीका लगाना अनिवार्य बना दिया था, तो इसको लेकर जनाक्रोश पैदा हो गया। आगे चलकर, वैश्विक चेचक रोधी वैक्सीन कार्यक्रम की सफलता की बदौलत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ नवासी में दुनिया को चेचक-रहित घोषित किया था। बीसवीं सदी के आरंभ में चेचक का टीका लगाने वाले अभियान को विस्तार मिला। इसके साथ ही भारतीय सैनिकों में टायफॉयड की वैक्सीन के ट्रायल शुरू हुए और भारत के लगभग हर राज्यों में वैक्सीन संस्थान बनाए गए। आजादी के बाद वाले समय में बीसीजी वैक्सीन लैबोरेटरी और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना हुई थी। वर्ष एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में आखिरकार भारत चेचक-मुक्त घोषित किया गया। यह वर्ष एक हज़ार आठ सौ पचासी की बात है जब फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पास्चर ने रैबीज़ रोधी वैक्सीन का इजाद किया था। इसी प्रकार वर्ष एक हज़ार नौ सौ बीस के दशक में क्षय रोग, टिटनेस, डिप्थिरिया और काली खांसी की वैक्सीन इजाद हुई। टाइफॉयड की वैक्सीन उन्नीसवीं सदी के आखिर में पहले ही विकसित हो चुकी थी। वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस-पैंतालीस में यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध लड़ रहे अमेरिकी सैनिकों के लिए पहली बार मौसमी फ्लू से बचाव का प्रतिरोधी टीका लगाने का कार्यक्रम चला था। वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचास के दशक में पोलियो की वैक्सीन अमेरिकी प्रशासन की पहली प्राथमिकता रही थी। मशहूर गायक एल्विस प्रैस्ली ने प्रयोग के लिए खुद को प्रस्तुत किया था और टेलीविजन के प्राइम टाइम शो में टीका लगवाया था। एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में अमेरिकियों को स्वाइन फ्लू से बचाने के लिए सरकार ने वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू किया था, परंतु इसको बीच में रोकना पड़ा था क्योंकि एक तो यह बीमारी वैश्विक महामारी में तब्दील नहीं हो पाई थी दूसरा, जिनको वैक्सीन लगी थी, उनमें दुष्प्रभाव देखे गए। वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में प्रतिष्ठित लांसेट मेडिकल जर्नल में छपे एक अध्ययन के मुताबिक एमएमआर की वैक्सीन और ऑस्टिजम के बीच संबंध है, लेकिन बाद में यह दावा झूठा निकला। वर्ष दो हज़ार नौ में एचएकएनएक के प्रकोप ने दुनिया भर में खतरे की घंटी बजा दी थी। चूंकि फ्लू के लिए विकसित की जाने वाली वैक्सीन की गति मंथर रही है और सीमित सफलता हाथ लगी है, इसलिए संशयवादियों को कोविड-उन्नीस वैक्सीन को लेकर जो भी संदेह हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए। लेखक सोसायटी फॉर प्रोमोशन ऑफ एथिकल एंड एफोर्डेबल संस्था के अध्यक्ष हैं।
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सरकार ने जनता को सस्ते में सोना खरीदने का शानदार मौका देते हुए 20 जून 2022 से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम (Sovereign Gold Bond Scheme) को निवेश के लिए खोल दिया है. 24 जून इसमें निवेश करने की आखिरी तारीख रहेगी. चालू वित्त वर्ष के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना की पहली किस्त सोमवार से खुल चुकी है. इस बार इसका इश्यू प्राइस 5,091 रुपये प्रति ग्राम रखा गया है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SBG) स्कीम की 2022-23 सीरीज 20 जून से 24 जून, 2022 के दौरान सब्सक्रिप्शन के लिए खुली रहेगी.
इस स्कीम के तहत आपको 1 ग्राम सोना 5,091 रुपये में मिलेगा. इसका मतलब अगर आप 10 ग्राम सोना खरीदनें के इक्षुक है तो इसके लिए आपको 50,910 रुपये चुकाने होंगे.
इस स्कीम में न्यूनतम निवेश (Minimum possible investment) 1 ग्राम सोना है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में प्रत्येक साल में इन्वेस्टमेंट की अधिकतम सीमा व्यक्तिगत और HUF के लिए 4 किलोग्राम, ट्रस्ट और ऐसी अन्य संस्थाओं के लिए 20 किलोग्राम होगी.
स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के तहत नवंबर 2015 में भारत सरकार (Central government) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना शुरू की थी. इस योजना के तहत, आरबीआई (RBI)द्वारा भारत सरकार के परामर्श से निर्गमों को अंशों में सदस्यता के लिए खुला रखा जाता है. आरबीआई समय-समय पर योजना के नियमों और शर्तों को अधिसूचित करता है. यह एक तरह का सरकारी बॉन्ड होता है. इसे आप सोने के वजन के रूप में खरीद सकते हैं. 5 ग्राम के बॉन्ड की कीमत 5 ग्राम गोल्ड के बराबर होगी.
कहां से खरीद सकते हैं ये बॉन्ड?
निवेशक इसे स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL), डाकघर और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchanges), NSE और BSE के माध्यम से खरीद सकते हैं. गौरतलब है कि स्माल फाइनेंस बैंक और पेमेंट बैंक में इनकी बिक्री नहीं होती है.
1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर सालाना कम से कम 2. 5 फीसदी का रिटर्न मिलेगा.
3. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के आधार पर बैंक से लोन ले सकते हैं.
4. फिजिकल गोल्ड की तरह मेकिंग चार्ज और GST का भुगतान नहीं करना पड़ता.
5. मैच्योरिटी के बाद जब चाहें, इसे कैश में तब्दील कर सकते हैं.
6. गोल्ड बॉन्ड को लॉकर में रखने का खर्च नहीं उठाना पड़ता.
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सरकार ने जनता को सस्ते में सोना खरीदने का शानदार मौका देते हुए बीस जून दो हज़ार बाईस से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम को निवेश के लिए खोल दिया है. चौबीस जून इसमें निवेश करने की आखिरी तारीख रहेगी. चालू वित्त वर्ष के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना की पहली किस्त सोमवार से खुल चुकी है. इस बार इसका इश्यू प्राइस पाँच,इक्यानवे रुपयापये प्रति ग्राम रखा गया है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की दो हज़ार बाईस-तेईस सीरीज बीस जून से चौबीस जून, दो हज़ार बाईस के दौरान सब्सक्रिप्शन के लिए खुली रहेगी. इस स्कीम के तहत आपको एक ग्राम सोना पाँच,इक्यानवे रुपयापये में मिलेगा. इसका मतलब अगर आप दस ग्राम सोना खरीदनें के इक्षुक है तो इसके लिए आपको पचास,नौ सौ दस रुपयापये चुकाने होंगे. इस स्कीम में न्यूनतम निवेश एक ग्राम सोना है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में प्रत्येक साल में इन्वेस्टमेंट की अधिकतम सीमा व्यक्तिगत और HUF के लिए चार किलोग्रामग्राम, ट्रस्ट और ऐसी अन्य संस्थाओं के लिए बीस किलोग्रामग्राम होगी. स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के तहत नवंबर दो हज़ार पंद्रह में भारत सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना शुरू की थी. इस योजना के तहत, आरबीआई द्वारा भारत सरकार के परामर्श से निर्गमों को अंशों में सदस्यता के लिए खुला रखा जाता है. आरबीआई समय-समय पर योजना के नियमों और शर्तों को अधिसूचित करता है. यह एक तरह का सरकारी बॉन्ड होता है. इसे आप सोने के वजन के रूप में खरीद सकते हैं. पाँच ग्राम के बॉन्ड की कीमत पाँच ग्राम गोल्ड के बराबर होगी. कहां से खरीद सकते हैं ये बॉन्ड? निवेशक इसे स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड , डाकघर और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज , NSE और BSE के माध्यम से खरीद सकते हैं. गौरतलब है कि स्माल फाइनेंस बैंक और पेमेंट बैंक में इनकी बिक्री नहीं होती है. एक. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर सालाना कम से कम दो. पाँच फीसदी का रिटर्न मिलेगा. तीन. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के आधार पर बैंक से लोन ले सकते हैं. चार. फिजिकल गोल्ड की तरह मेकिंग चार्ज और GST का भुगतान नहीं करना पड़ता. पाँच. मैच्योरिटी के बाद जब चाहें, इसे कैश में तब्दील कर सकते हैं. छः. गोल्ड बॉन्ड को लॉकर में रखने का खर्च नहीं उठाना पड़ता.
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SSC Stenographer Result 2022: कर्मचारी चयन आयोग ने (SSC) स्टेनोग्राफर ग्रेड सी और डी 2019 का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। अभ्यर्थी SSCकी आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जारी नतीजे चेक कर सकते हैं।
बता दें कि 7 अप्रैल 2022 को हुए स्किल टेस्ट के फाइनल रिजल्ट घोषित किए गए हैं। सफल अभ्यर्थियों को अब दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए स्टेनोग्राफर ग्रेड सी के 26 पदों और स्टेनोग्राफर ग्रेड डी के 473 रिक्त पदों को भरा जाएगा। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोटिस को चेक कर सकते हैं।
SSC Stenographer Result 2022 How to Check: ऐसे चेक करें रिजल्ट<br>1. सबसे पहले अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जाएं।
2. होम पेज पर दिए गए Stenographer Grade 'C' and 'D' Examination 2019 - Declaration of Final Result के लिंक पर क्लिक करें।
3. रिजल्ट आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा।
4. अब चेक करें और डाउनलोड करें।
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SSC Stenographer Result दो हज़ार बाईस: कर्मचारी चयन आयोग ने स्टेनोग्राफर ग्रेड सी और डी दो हज़ार उन्नीस का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। अभ्यर्थी SSCकी आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जारी नतीजे चेक कर सकते हैं। बता दें कि सात अप्रैल दो हज़ार बाईस को हुए स्किल टेस्ट के फाइनल रिजल्ट घोषित किए गए हैं। सफल अभ्यर्थियों को अब दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए स्टेनोग्राफर ग्रेड सी के छब्बीस पदों और स्टेनोग्राफर ग्रेड डी के चार सौ तिहत्तर रिक्त पदों को भरा जाएगा। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोटिस को चेक कर सकते हैं। SSC Stenographer Result दो हज़ार बाईस How to Check: ऐसे चेक करें रिजल्ट<br>एक. सबसे पहले अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जाएं। दो. होम पेज पर दिए गए Stenographer Grade 'C' and 'D' Examination दो हज़ार उन्नीस - Declaration of Final Result के लिंक पर क्लिक करें। तीन. रिजल्ट आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा। चार. अब चेक करें और डाउनलोड करें।
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Aligarh News: उत्साही सपा कार्यकर्ताओं ने शहर में जगह-जगह ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया। जेसेबी नुमा ट्रैक्टर पर लदकर सड़कों से गुजरे और अपनी व आम लोगों दोनों की जान खतरे में डाली।
Aligarh News: कोतवाली सिविल लाइंस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सोमवार को समाजवादी पार्टी के मेयर प्रत्याशी जमीर उल्लाह खान के समर्थन में रोड शो करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो हैरान करने वाली हैं। उत्साही सपा कार्यकर्ताओं ने शहर में जगह-जगह ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया। जेसेबी नुमा ट्रैक्टर पर लदकर सड़कों से गुजरे और अपनी व आम लोगों दोनों की जान खतरे में डाली।
जमालपुर और पुरानी चुंगी के बीच हुए इस रोड शो में चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए सपा कार्यकर्ता लोगों की जान जोखिम में डालते नजर आए। जेसीबी नुमा ट्रैक्टर में खतरनाक तरीके से लोगों को ट्रैक्टर के ऊपर बैठाकर शहर की सड़कों पर घूमा गया। जिसके बाद यातायात निरीक्षक कमलेश कुमार ने ट्रैक्टर चालक और रैली आयोजक के खिलाफ सिविल लाइन थाने पर धारा (279,336,171,188) के तहत मुकदमा दर्ज कराया।
आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी के मेयर प्रत्याशी जमीर उल्ला खान के समर्थन में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव यहां रोड-शो करने आए थे। सपा महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी के द्वारा जमालपुर से पुरानी चुंगी तक जुलूस रैली निकाले जाने के लिए परमिशन ली गई थी। इस जुलूस रैली में अब्दुल हमीद घोसी के द्वारा जेसीबी नुमा ट्रैक्टर की अनुमति नहीं ली गई थी। बिना अनुमति के जेसीबी नुमा ट्रैक्टर को रैली में शामिल करके चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया गया।
इस पूरे मामले पर सिविल लाइन क्षेत्राधिकारी तृतीय अशोक कुमार का कहना है कि समाजवादी पार्टी के रोड शो में जेसीबी मशीन नुमा ट्रैक्टर में खतरनाक तरीके से लोगों को ट्रैक्टर के ऊपर बैठाकर उनकी जान जोखिम में डालने का काम किया गया था। सिविल लाइन थाने पर मुकदमा पंजीकृत कराया गया है। पूरे मामले में पुलिस द्वारा विवेचना प्रचलित है।
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Aligarh News: उत्साही सपा कार्यकर्ताओं ने शहर में जगह-जगह ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया। जेसेबी नुमा ट्रैक्टर पर लदकर सड़कों से गुजरे और अपनी व आम लोगों दोनों की जान खतरे में डाली। Aligarh News: कोतवाली सिविल लाइंस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सोमवार को समाजवादी पार्टी के मेयर प्रत्याशी जमीर उल्लाह खान के समर्थन में रोड शो करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो हैरान करने वाली हैं। उत्साही सपा कार्यकर्ताओं ने शहर में जगह-जगह ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया। जेसेबी नुमा ट्रैक्टर पर लदकर सड़कों से गुजरे और अपनी व आम लोगों दोनों की जान खतरे में डाली। जमालपुर और पुरानी चुंगी के बीच हुए इस रोड शो में चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए सपा कार्यकर्ता लोगों की जान जोखिम में डालते नजर आए। जेसीबी नुमा ट्रैक्टर में खतरनाक तरीके से लोगों को ट्रैक्टर के ऊपर बैठाकर शहर की सड़कों पर घूमा गया। जिसके बाद यातायात निरीक्षक कमलेश कुमार ने ट्रैक्टर चालक और रैली आयोजक के खिलाफ सिविल लाइन थाने पर धारा के तहत मुकदमा दर्ज कराया। आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी के मेयर प्रत्याशी जमीर उल्ला खान के समर्थन में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव यहां रोड-शो करने आए थे। सपा महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी के द्वारा जमालपुर से पुरानी चुंगी तक जुलूस रैली निकाले जाने के लिए परमिशन ली गई थी। इस जुलूस रैली में अब्दुल हमीद घोसी के द्वारा जेसीबी नुमा ट्रैक्टर की अनुमति नहीं ली गई थी। बिना अनुमति के जेसीबी नुमा ट्रैक्टर को रैली में शामिल करके चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया गया। इस पूरे मामले पर सिविल लाइन क्षेत्राधिकारी तृतीय अशोक कुमार का कहना है कि समाजवादी पार्टी के रोड शो में जेसीबी मशीन नुमा ट्रैक्टर में खतरनाक तरीके से लोगों को ट्रैक्टर के ऊपर बैठाकर उनकी जान जोखिम में डालने का काम किया गया था। सिविल लाइन थाने पर मुकदमा पंजीकृत कराया गया है। पूरे मामले में पुलिस द्वारा विवेचना प्रचलित है।
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शिवपुरी। मध्यप्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष सुश्री हिना लिखीराम कावरे 03 फरवरी 2020 को झांसी से प्रस्थान कर शिवपुरी आएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विधानसभा उपाध्यक्ष सुश्री हिना लिखीराम कावरे 03 फरवरी को शाम 06 बजे शिवपुरी सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों से भेंट करेंगी। शाम 06. 30 बजे स्थानीय कार्यक्रम में सम्मिलित होंगी। इसके उपरांत शिवपुरी से झांसी के लिए प्रस्थान करेंगी।
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शिवपुरी। मध्यप्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष सुश्री हिना लिखीराम कावरे तीन फरवरी दो हज़ार बीस को झांसी से प्रस्थान कर शिवपुरी आएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विधानसभा उपाध्यक्ष सुश्री हिना लिखीराम कावरे तीन फरवरी को शाम छः बजे शिवपुरी सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों से भेंट करेंगी। शाम छः. तीस बजे स्थानीय कार्यक्रम में सम्मिलित होंगी। इसके उपरांत शिवपुरी से झांसी के लिए प्रस्थान करेंगी।
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पूर्व सैनिकों के निस्वार्थ कर्तव्य और राष्ट्र के प्रति उनके बलिदान के प्रति सम्मान और वीरों के परिजनों के प्रति एकजुटता के प्रतीक के रूप में 14 जनवरी, 2023 को देश भर में सातवां सशस्त्र बल भूतपूर्व सैनिक दिवस मनाया गया। यह समारोह नौ स्थानों पर मनाया गया जबकि देहरादून में आयोजित मुख्य समारोह की अध्यक्षता रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की। आयोजन के हिस्से के रूप में पूर्व सैनिकों की एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने उन सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने अद्वितीय साहस और बलिदान के साथ देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा की और उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस युद्ध में अपने कर्तव्यों के निर्वाह के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर किया। उन्होंने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले सशस्त्र बल के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों की सराहना की।
श्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के स्वतंत्रता सेनानियों, सैनिकों और पूर्व सैनिकों का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिन्होंने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अदम्य साहस और समर्पण का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली जी जैसे नायक जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों की सहायता की, उत्तराखंड के रहने वाले थे। कारगिल युद्ध के दौरान, राज्य के सैनिकों ने शत्रु के विरूद्ध मजबूती से खड़े होकर और अडिग भावना के साथ देश की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सशस्त्र बलों के जवानों की निस्वार्थ भक्ति और बलिदान के कारण, हमारे नागरिक सुरक्षित महसूस करते हैं और अपना सिर ऊंचा करके चलते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे वीर सैनिकों ने विश्वभर में भारत की छवि को एक शक्तिशाली और सम्मानित राष्ट्र के रूप में रूपांतरित करने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। आप सभी हमारी एकता और अखंडता के रक्षक हैं। आप राष्ट्र की परिसंपत्ति हैं। हम शांति से सोते हैं क्योंकि आप सीमा पर जाग रहे होते हैं।
श्री राजनाथ सिंह का मानना था कि पूर्व सैनिकों को प्रदान की जा रही पेंशन, चिकित्सा और अन्य सुविधाएं उनके द्वारा किए गए बलिदान और प्रतिबद्धता के प्रति देश के सम्मान का एक छोटा सा प्रतीक है, जो उन्हें उनके कल्याण के लिए सरकार की पूरी सहायता का भरोसा दिलाता है। उन्होंने कहा कि आज का हर सैनिक कल का सम्मानित पूर्व सैनिक है। उनका कल्याण और संतुष्टि सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है।
पूर्व सैनिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए रक्षा पेंशन शिकायत निवारण पोर्टल लॉंच किए जाने पर प्रकाश डाला। उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में लॉन्च किए गए 'मां भारती के सपूत' वेबसाइट का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि लोग पोर्टल के जरिए सशस्त्र सेना युद्ध हताहत कल्याण कोष में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने इसे पूर्व सैनिकों के कल्याणकारी प्रयासों से नागरिकों को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने सभी भूतपूर्व सैनिकों और सशस्त्र सेना के सेवारत कर्मियों को उनके समर्पण और बहादुरी के लिए धन्यवाद देते हुए अपने संबोधन का समापन किया।
रैली में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी; जीओसी, उत्तर भारत क्षेत्र लेफ्टिनेंट जनरल जेपी मैथ्यू; जीओसी, उत्तराखंड सब एरिया, मेजर जनरल संजीव खत्री; अध्यक्ष, उत्तराखंड पूर्व सैनिक लीग मेजर जनरल मोहन लाल असवाल (सेवानिवृत्त) और उत्तराखंड सैनिक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी और अन्य कई पूर्व सैनिक भी उपस्थित थे।
रैली के दौरान जसवंत मैदान में कई स्टॉल लगाए गए। श्री राजनाथ सिंह ने अपने दौरे के दौरान पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के साथ परस्पर बातचीत की। उन्होंने बहादुरी और समर्पण की सराहना करते हुए शहीद हुए सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने वीर सैनिकों के परिवारों और आश्रितों को सहायता प्रदान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
इससे पूर्व, एक पुष्पांजलि समारोह में रक्षा मंत्री ने देहरादून छावनी में सशस्त्र बलों को शौर्य स्थल समर्पित किया। नागरिक और सैन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ पूर्व सैनिकों के साथ, श्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के वीर सशस्त्र बलों के जवानों के सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करने के लिए पुष्पांजलि अर्पित की। उत्तराखंड के 2,300 से अधिक सेवा कर्मियों ने कर्तव्य के दौरान अपने जीवन का बलिदान दिया है। भारतीय सेना और छावनी बोर्ड शौर्य स्थल के पूर्ण प्रबंधन और रखरखाव और सभी गतिविधियों तथा समारोहों के संचालन के लिए उत्तरदायी होंगे।
रक्षा मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक पहल 'सोल ऑफ स्टील' अल्पाइन चैलेंज को भी लॉन्च किया। उन्होंने भारतीय सेना और पूर्व सैनिकों के एक संगठन के क्लॉ ग्लोबल की इस संयुक्त पहल के तहत विभिन्न रोमांचक कार्यकलापों के लिए इस पर हस्ताक्षर करने के लिए स्वयंसेवकों के लिए एक वेबसाइट लॉन्च की। भारतीय सेना और क्लॉ के एक संयुक्त अभियान दल के हिस्से के रूप में श्री राजनाथ सिंह ने 460 किलोमीटर लंबी कार रैली 'रोड टू द एंड' को भी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली अगले तीन दिनों में चमोली जिले के नीती गांव के पास गढ़वाल हिमालय में अपने गंतव्य स्थल तक पहुंचेगी।
चेन्नई में पूर्व सैनिक दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता रक्षा राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट ने की। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित कई पूर्व सैनिकों के साथ परस्पर बातचीत की।
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी, नौसेनाध्यक्ष एडमिरल आर हरि कुमार, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज पांडे, सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) श्री विजय कुमार सिंह और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के अध्यक्ष, चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीआईएससी) एयर मार्शल बीआर कृष्णा उपस्थित रहे। इस अवसर पर सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी, उनके निकट संबंधी, भूतपूर्व सैनिक और विभिन्न पूर्व सैनिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
तीनों सेना प्रमुखों ने सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों से संबंधित विभागों के तहत विभिन्न कल्याण विभागों द्वारा शुरू किए गए महत्वपूर्ण कल्याणकारी उपायों को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों द्वारा की गई निस्वार्थ सेवा की सराहना की। इस कार्यक्रम के दौरान सम्मान पत्रिका का विमोचन किया गया, जो भारतीय सेना के पूर्व सैनिक निदेशालय (डीआईएवी) द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक पत्रिका है, जिसमें सूचनात्मक लेख और पूर्व सैनिक समुदाय के लिए रुचि के विभिन्न विषय शामिल हैं। भारतीय वायु सेना ने वायु समवेदना पत्रिका का भी अनावरण किया।
प्रातः काल, समारोह के हिस्से के रूप में, नई दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तीनों सेना प्रमुखों, सीआईएससी और कुछ पूर्व सैनिकों ने पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
अन्य स्थान जहां तीनों सेना मुख्यालयों द्वारा समारोह आयोजित किए गए थे, झुंझुनू, जालंधर, चंडीगढ़, पानागढ़, भुवनेश्वर और मुंबई हैं। आयोजनों के दौरान, पूर्व सैनिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रमों के दौरान पूर्व सैनिकों के शौर्य और बलिदान को याद करने के लिए उनके सम्मान में 'वी फॉर वेटरन्स' राष्ट्रगान भी बजाया गया।
सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस प्रतिवर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है, क्योंकि 1953 में इसी दिन, भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल केएम करियप्पा, जिन्होंने 1947 के युद्ध में भारतीय सेना को जीत दिलाई थी, औपचारिक रूप से सेना से सेवानिवृत्त हुए थे। यह दिन देश के सम्मानित पूर्व सैनिकों को समर्पित है। पूर्व सैनिक दिवस का आयोजन 2017 से ही सेवानिवृत्त, सेवारत और राष्ट्र के बीच परस्पर सौहार्द की पुष्टि करने और सर्वोच्च बलिदान देने वाले तथा निःस्वार्थ रूप से देश की सेवा करने वाले नायकों का स्मरण और उनका सम्मान करने के लिए किया जाता है।
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Posted On: पूर्व सैनिकों के निस्वार्थ कर्तव्य और राष्ट्र के प्रति उनके बलिदान के प्रति सम्मान और वीरों के परिजनों के प्रति एकजुटता के प्रतीक के रूप में चौदह जनवरी, दो हज़ार तेईस को देश भर में सातवां सशस्त्र बल भूतपूर्व सैनिक दिवस मनाया गया। यह समारोह नौ स्थानों पर मनाया गया जबकि देहरादून में आयोजित मुख्य समारोह की अध्यक्षता रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की। आयोजन के हिस्से के रूप में पूर्व सैनिकों की एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने उन सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने अद्वितीय साहस और बलिदान के साथ देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा की और उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस युद्ध में अपने कर्तव्यों के निर्वाह के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर किया। उन्होंने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले सशस्त्र बल के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों की सराहना की। श्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के स्वतंत्रता सेनानियों, सैनिकों और पूर्व सैनिकों का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिन्होंने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अदम्य साहस और समर्पण का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली जी जैसे नायक जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों की सहायता की, उत्तराखंड के रहने वाले थे। कारगिल युद्ध के दौरान, राज्य के सैनिकों ने शत्रु के विरूद्ध मजबूती से खड़े होकर और अडिग भावना के साथ देश की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि सशस्त्र बलों के जवानों की निस्वार्थ भक्ति और बलिदान के कारण, हमारे नागरिक सुरक्षित महसूस करते हैं और अपना सिर ऊंचा करके चलते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे वीर सैनिकों ने विश्वभर में भारत की छवि को एक शक्तिशाली और सम्मानित राष्ट्र के रूप में रूपांतरित करने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। आप सभी हमारी एकता और अखंडता के रक्षक हैं। आप राष्ट्र की परिसंपत्ति हैं। हम शांति से सोते हैं क्योंकि आप सीमा पर जाग रहे होते हैं। श्री राजनाथ सिंह का मानना था कि पूर्व सैनिकों को प्रदान की जा रही पेंशन, चिकित्सा और अन्य सुविधाएं उनके द्वारा किए गए बलिदान और प्रतिबद्धता के प्रति देश के सम्मान का एक छोटा सा प्रतीक है, जो उन्हें उनके कल्याण के लिए सरकार की पूरी सहायता का भरोसा दिलाता है। उन्होंने कहा कि आज का हर सैनिक कल का सम्मानित पूर्व सैनिक है। उनका कल्याण और संतुष्टि सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है। पूर्व सैनिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए रक्षा पेंशन शिकायत निवारण पोर्टल लॉंच किए जाने पर प्रकाश डाला। उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में लॉन्च किए गए 'मां भारती के सपूत' वेबसाइट का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि लोग पोर्टल के जरिए सशस्त्र सेना युद्ध हताहत कल्याण कोष में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने इसे पूर्व सैनिकों के कल्याणकारी प्रयासों से नागरिकों को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने सभी भूतपूर्व सैनिकों और सशस्त्र सेना के सेवारत कर्मियों को उनके समर्पण और बहादुरी के लिए धन्यवाद देते हुए अपने संबोधन का समापन किया। रैली में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी; जीओसी, उत्तर भारत क्षेत्र लेफ्टिनेंट जनरल जेपी मैथ्यू; जीओसी, उत्तराखंड सब एरिया, मेजर जनरल संजीव खत्री; अध्यक्ष, उत्तराखंड पूर्व सैनिक लीग मेजर जनरल मोहन लाल असवाल और उत्तराखंड सैनिक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी और अन्य कई पूर्व सैनिक भी उपस्थित थे। रैली के दौरान जसवंत मैदान में कई स्टॉल लगाए गए। श्री राजनाथ सिंह ने अपने दौरे के दौरान पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के साथ परस्पर बातचीत की। उन्होंने बहादुरी और समर्पण की सराहना करते हुए शहीद हुए सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने वीर सैनिकों के परिवारों और आश्रितों को सहायता प्रदान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे पूर्व, एक पुष्पांजलि समारोह में रक्षा मंत्री ने देहरादून छावनी में सशस्त्र बलों को शौर्य स्थल समर्पित किया। नागरिक और सैन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ पूर्व सैनिकों के साथ, श्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के वीर सशस्त्र बलों के जवानों के सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करने के लिए पुष्पांजलि अर्पित की। उत्तराखंड के दो,तीन सौ से अधिक सेवा कर्मियों ने कर्तव्य के दौरान अपने जीवन का बलिदान दिया है। भारतीय सेना और छावनी बोर्ड शौर्य स्थल के पूर्ण प्रबंधन और रखरखाव और सभी गतिविधियों तथा समारोहों के संचालन के लिए उत्तरदायी होंगे। रक्षा मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक पहल 'सोल ऑफ स्टील' अल्पाइन चैलेंज को भी लॉन्च किया। उन्होंने भारतीय सेना और पूर्व सैनिकों के एक संगठन के क्लॉ ग्लोबल की इस संयुक्त पहल के तहत विभिन्न रोमांचक कार्यकलापों के लिए इस पर हस्ताक्षर करने के लिए स्वयंसेवकों के लिए एक वेबसाइट लॉन्च की। भारतीय सेना और क्लॉ के एक संयुक्त अभियान दल के हिस्से के रूप में श्री राजनाथ सिंह ने चार सौ साठ किलोग्राममीटर लंबी कार रैली 'रोड टू द एंड' को भी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली अगले तीन दिनों में चमोली जिले के नीती गांव के पास गढ़वाल हिमालय में अपने गंतव्य स्थल तक पहुंचेगी। चेन्नई में पूर्व सैनिक दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता रक्षा राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट ने की। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित कई पूर्व सैनिकों के साथ परस्पर बातचीत की। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी, नौसेनाध्यक्ष एडमिरल आर हरि कुमार, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज पांडे, सचिव श्री विजय कुमार सिंह और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के अध्यक्ष, चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी एयर मार्शल बीआर कृष्णा उपस्थित रहे। इस अवसर पर सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी, उनके निकट संबंधी, भूतपूर्व सैनिक और विभिन्न पूर्व सैनिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। तीनों सेना प्रमुखों ने सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों से संबंधित विभागों के तहत विभिन्न कल्याण विभागों द्वारा शुरू किए गए महत्वपूर्ण कल्याणकारी उपायों को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों द्वारा की गई निस्वार्थ सेवा की सराहना की। इस कार्यक्रम के दौरान सम्मान पत्रिका का विमोचन किया गया, जो भारतीय सेना के पूर्व सैनिक निदेशालय द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक पत्रिका है, जिसमें सूचनात्मक लेख और पूर्व सैनिक समुदाय के लिए रुचि के विभिन्न विषय शामिल हैं। भारतीय वायु सेना ने वायु समवेदना पत्रिका का भी अनावरण किया। प्रातः काल, समारोह के हिस्से के रूप में, नई दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तीनों सेना प्रमुखों, सीआईएससी और कुछ पूर्व सैनिकों ने पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। अन्य स्थान जहां तीनों सेना मुख्यालयों द्वारा समारोह आयोजित किए गए थे, झुंझुनू, जालंधर, चंडीगढ़, पानागढ़, भुवनेश्वर और मुंबई हैं। आयोजनों के दौरान, पूर्व सैनिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रमों के दौरान पूर्व सैनिकों के शौर्य और बलिदान को याद करने के लिए उनके सम्मान में 'वी फॉर वेटरन्स' राष्ट्रगान भी बजाया गया। सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस प्रतिवर्ष चौदह जनवरी को मनाया जाता है, क्योंकि एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में इसी दिन, भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल केएम करियप्पा, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस के युद्ध में भारतीय सेना को जीत दिलाई थी, औपचारिक रूप से सेना से सेवानिवृत्त हुए थे। यह दिन देश के सम्मानित पूर्व सैनिकों को समर्पित है। पूर्व सैनिक दिवस का आयोजन दो हज़ार सत्रह से ही सेवानिवृत्त, सेवारत और राष्ट्र के बीच परस्पर सौहार्द की पुष्टि करने और सर्वोच्च बलिदान देने वाले तथा निःस्वार्थ रूप से देश की सेवा करने वाले नायकों का स्मरण और उनका सम्मान करने के लिए किया जाता है।
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त्रिपुरा विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती अभी जारी है। बीजेपी साल 2018 के 36 सीटों के अपने आंकड़े को इस बार बेहतर करने के लिए उम्मीद जता रही है, लेकिन इस बीच बीजेपी के लिए एक निराशाजनक खबर आई है।
इस हादसे में बिप्लब देव के गनमैन त्रिपुरा पुलिस के इंस्पेक्टर को चोट आई है। घायल गनमैन के इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बता दें कि इस घटना की सूचना पाकर मौके पर प्रशासन व पुलिस की टीम पहुंची और स्थिति को संभालने का काम किया।
Tripura News: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को राज्यसभा उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामित किया है। वह माणिक साहा द्वारा खाली की गई सीट से चुनाव लड़ेंगे।
सुदीप रॉय बर्मन और आशीष साहा ने मंगलवार को दिल्ली आकर कांग्रेस जॉइन कर ली है। कांग्रेस जॉइन करने के बाद आशीष कुमार साहा ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए।
टीएमसी के वरिष्ठ नेता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी पार्टी अगले विधानसभा चुनावों में भाजपा को शिकस्त देगी और भगवा पार्टी के कुशासन को खत्म करेगी।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब की हत्या के प्रयास के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिप्लव देव ने कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह की श्रीलंका और नेपाल में सरकार बनाने की योजना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बिप्लब देव ने बताया कि 2018 में जब भारतीय जनता पार्टी त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही थी उस समय अमित शाह ने यह बात कही थी।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसपर आने वाले दिनों में भारी विवाद देखने को मिल सकता है।
पू्र्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा में बांस के बने बिस्कुट लॉन्च हुए हैं और खुद राज्य के मुख्यमंत्री बिप्लब देव ने शुक्रवार को विश्व बांस दिवस के मौके पर यह बिस्कुट लॉन्च किए हैं।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने खुद का कोरोना टेस्ट कराया है। उन्होंने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। दरअसल, उनके परिवार के दो सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिसके बाद उन्होंने ये कदम उठाया।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने सोमवार को दावा किया कि जो लोग राष्ट्रभाषा के तौर पर हिंदी का विरोध कर रहे हैं, वो देश से प्यार नहीं करते हैं।
अनुपम पॉल को त्रिपुरा पुलिस की अपराध शाखा ने बुधवार को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था। वह 26 अप्रैल से फरार था। पुलिस ने पॉल के फेसबुक पोस्ट के 25 अप्रैल को सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने के बाद फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी और षड्यंत्र करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की थी।
भाजपा महासचिव राम माधव ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी ने आम चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सेना की उपलब्धियों का सहारा नहीं लिया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी देश की आजादी के शताब्दी वर्ष 2047 तक सत्ता में बनी रहेगी।
देब ने यहां आए टूर ऑपरेटरों से कहा कि विश्व में गिद्धों की संख्या कम होती जा रही है लेकिन वे यहां पर्याप्त संख्या में पाए जाते हैं।
अपने बयानों से बार-बार विवादों में आने वाले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने एक बार फिर हैरान करने वाला बयान दिया है। अगरतला के एक कार्यक्रम में बिप्लब देव ने कहा कि बत्तखों के तैरने से ऑक्सीजन बढ़ता है।
यूजर्स ने भाजपा नेता के बयान का मजाक उड़ाने के लिए हिंदू धर्मग्रंथ से कृष्ण , अर्जुन और द्रौपदी जैसे किरदारों का वर्णन किया।
सीएम विप्लव देव की ओर से इसपर अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब हर किसी को इस बात का इंतजार है कि देवधर के ट्वीट और अनुरोध के बाद वह मामले की जांच के आदेश देते हैं या नहीं।
Biplab Kumar Deb took oath as the Tripura chief minister on Friday at the Assam Rifles ground. PM Narendra Modi, BJP president Amit Shah and chief ministers of BJP-ruled states in the northeastern region attended the ceremony. In order to protest "large-scale violence" in Tripura after the Assembly elections, the Left Front leaders boycotted the swearing-in of the BJP-led government.
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त्रिपुरा विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती अभी जारी है। बीजेपी साल दो हज़ार अट्ठारह के छत्तीस सीटों के अपने आंकड़े को इस बार बेहतर करने के लिए उम्मीद जता रही है, लेकिन इस बीच बीजेपी के लिए एक निराशाजनक खबर आई है। इस हादसे में बिप्लब देव के गनमैन त्रिपुरा पुलिस के इंस्पेक्टर को चोट आई है। घायल गनमैन के इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बता दें कि इस घटना की सूचना पाकर मौके पर प्रशासन व पुलिस की टीम पहुंची और स्थिति को संभालने का काम किया। Tripura News: भारतीय जनता पार्टी ने त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को राज्यसभा उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामित किया है। वह माणिक साहा द्वारा खाली की गई सीट से चुनाव लड़ेंगे। सुदीप रॉय बर्मन और आशीष साहा ने मंगलवार को दिल्ली आकर कांग्रेस जॉइन कर ली है। कांग्रेस जॉइन करने के बाद आशीष कुमार साहा ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए। टीएमसी के वरिष्ठ नेता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी पार्टी अगले विधानसभा चुनावों में भाजपा को शिकस्त देगी और भगवा पार्टी के कुशासन को खत्म करेगी। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब की हत्या के प्रयास के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिप्लव देव ने कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह की श्रीलंका और नेपाल में सरकार बनाने की योजना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बिप्लब देव ने बताया कि दो हज़ार अट्ठारह में जब भारतीय जनता पार्टी त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही थी उस समय अमित शाह ने यह बात कही थी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसपर आने वाले दिनों में भारी विवाद देखने को मिल सकता है। पू्र्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा में बांस के बने बिस्कुट लॉन्च हुए हैं और खुद राज्य के मुख्यमंत्री बिप्लब देव ने शुक्रवार को विश्व बांस दिवस के मौके पर यह बिस्कुट लॉन्च किए हैं। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने खुद का कोरोना टेस्ट कराया है। उन्होंने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। दरअसल, उनके परिवार के दो सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिसके बाद उन्होंने ये कदम उठाया। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने सोमवार को दावा किया कि जो लोग राष्ट्रभाषा के तौर पर हिंदी का विरोध कर रहे हैं, वो देश से प्यार नहीं करते हैं। अनुपम पॉल को त्रिपुरा पुलिस की अपराध शाखा ने बुधवार को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था। वह छब्बीस अप्रैल से फरार था। पुलिस ने पॉल के फेसबुक पोस्ट के पच्चीस अप्रैल को सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने के बाद फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी और षड्यंत्र करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की थी। भाजपा महासचिव राम माधव ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी ने आम चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सेना की उपलब्धियों का सहारा नहीं लिया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी देश की आजादी के शताब्दी वर्ष दो हज़ार सैंतालीस तक सत्ता में बनी रहेगी। देब ने यहां आए टूर ऑपरेटरों से कहा कि विश्व में गिद्धों की संख्या कम होती जा रही है लेकिन वे यहां पर्याप्त संख्या में पाए जाते हैं। अपने बयानों से बार-बार विवादों में आने वाले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने एक बार फिर हैरान करने वाला बयान दिया है। अगरतला के एक कार्यक्रम में बिप्लब देव ने कहा कि बत्तखों के तैरने से ऑक्सीजन बढ़ता है। यूजर्स ने भाजपा नेता के बयान का मजाक उड़ाने के लिए हिंदू धर्मग्रंथ से कृष्ण , अर्जुन और द्रौपदी जैसे किरदारों का वर्णन किया। सीएम विप्लव देव की ओर से इसपर अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब हर किसी को इस बात का इंतजार है कि देवधर के ट्वीट और अनुरोध के बाद वह मामले की जांच के आदेश देते हैं या नहीं। Biplab Kumar Deb took oath as the Tripura chief minister on Friday at the Assam Rifles ground. PM Narendra Modi, BJP president Amit Shah and chief ministers of BJP-ruled states in the northeastern region attended the ceremony. In order to protest "large-scale violence" in Tripura after the Assembly elections, the Left Front leaders boycotted the swearing-in of the BJP-led government.
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गैर-भाजपा नेताओं को निजी पत्र लिखा हैं जिसमें उन्होंने भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक संघवाद पर भाजपा और उसकी सरकार द्वारा "हमलों" को रेखांकित किया है। राज्य में दूसरे चरण के चुनाव से पहले बनर्जी का पत्र बुधवार को तृणमूल कांग्रेस ने जारी किया।
तीन पृष्ठ का यह पत्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राकांपा के नेता शरद पवार, द्रमुक के एमके स्टालिन, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी यादव, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, जेएमएम के हेमंत सोरेन, आप के नेता अरविंद केजरीवाल, बीजद के नवीन पटनायक, वाईएसआर कांग्रेस के जगन रेड्डी, नेकां के फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और भाकपा (माले) के दीपांकर भट्टाचार्य के नाम लिखा गया है। अपने पत्र में बनर्जी ने कहा कि 2014 और 2019 दोनों चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) से हारने के बावजूद, भाजपा लोगों के जनादेश को स्वीकार करने के लिए "अनिच्छुक" है।
उन्होंने कहा, "भाजपा ने मुख्यमंत्री को उपराज्यपाल के अधीन कर दिल्ली पर शासन करने का रास्ता चुना है। राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक भारतीय गणराज्य के संघीय ढांचे पर एक प्रत्यक्ष हमला है। यह लोकतंत्र का मजाक है। " उन्होंने कहा, "आप इस बात से भी सहमत होंगे कि भाजपा ने दिल्ली में जो किया है, वह अपवाद नहीं है, बल्कि एक नियम बन गया है। " बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने गैर-भाजपा दलों के नेताओं और पदाधिकारियों के खिलाफ सीबीआई, ईडी और अन्य संस्थानों का "बेशर्मी और बदले की भावना से दुरुपयोग" किया है।
उन्होंने कहा, "मोदी सरकार द्वारा राष्ट्र की संपत्तियों का निजीकरण करना भी लोकतंत्र पर हमला है क्योंकि ये संपत्तियां भारत की जनता की है। " उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर, केंद्र-राज्य संबंध, और केंद्र में सत्तारूढ पार्टी और विपक्षी दलों के बीच संबंध भी, स्वतंत्र भारत के इतिहास में कभी भी इतने बुरे नहीं रहे हैं जितने कि अब हैं, और इसके लिए प्रधानमंत्री के सत्तावादी आचरण को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। " पत्र में उन्होंने विपक्षी दलों से लोकतंत्र और संविधान पर भाजपा के हमलों के खिलाफ "एकजुट होकर और प्रभावशाली ढंग से" संघर्ष करने का आग्रह किया।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गैर-भाजपा नेताओं को निजी पत्र लिखा हैं जिसमें उन्होंने भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक संघवाद पर भाजपा और उसकी सरकार द्वारा "हमलों" को रेखांकित किया है। राज्य में दूसरे चरण के चुनाव से पहले बनर्जी का पत्र बुधवार को तृणमूल कांग्रेस ने जारी किया। तीन पृष्ठ का यह पत्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राकांपा के नेता शरद पवार, द्रमुक के एमके स्टालिन, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी यादव, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, जेएमएम के हेमंत सोरेन, आप के नेता अरविंद केजरीवाल, बीजद के नवीन पटनायक, वाईएसआर कांग्रेस के जगन रेड्डी, नेकां के फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और भाकपा के दीपांकर भट्टाचार्य के नाम लिखा गया है। अपने पत्र में बनर्जी ने कहा कि दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस दोनों चुनावों में आम आदमी पार्टी से हारने के बावजूद, भाजपा लोगों के जनादेश को स्वीकार करने के लिए "अनिच्छुक" है। उन्होंने कहा, "भाजपा ने मुख्यमंत्री को उपराज्यपाल के अधीन कर दिल्ली पर शासन करने का रास्ता चुना है। राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन विधेयक भारतीय गणराज्य के संघीय ढांचे पर एक प्रत्यक्ष हमला है। यह लोकतंत्र का मजाक है। " उन्होंने कहा, "आप इस बात से भी सहमत होंगे कि भाजपा ने दिल्ली में जो किया है, वह अपवाद नहीं है, बल्कि एक नियम बन गया है। " बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने गैर-भाजपा दलों के नेताओं और पदाधिकारियों के खिलाफ सीबीआई, ईडी और अन्य संस्थानों का "बेशर्मी और बदले की भावना से दुरुपयोग" किया है। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार द्वारा राष्ट्र की संपत्तियों का निजीकरण करना भी लोकतंत्र पर हमला है क्योंकि ये संपत्तियां भारत की जनता की है। " उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर, केंद्र-राज्य संबंध, और केंद्र में सत्तारूढ पार्टी और विपक्षी दलों के बीच संबंध भी, स्वतंत्र भारत के इतिहास में कभी भी इतने बुरे नहीं रहे हैं जितने कि अब हैं, और इसके लिए प्रधानमंत्री के सत्तावादी आचरण को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। " पत्र में उन्होंने विपक्षी दलों से लोकतंत्र और संविधान पर भाजपा के हमलों के खिलाफ "एकजुट होकर और प्रभावशाली ढंग से" संघर्ष करने का आग्रह किया।
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रियो डी जेनेरियो। ब्राजील की संकटपूर्ण अर्थव्यवस्था का असर ओलंपिक और पैरालम्पिक खेलों के आयोजन समारोहों पर भी होने जा रहा है। देश की खराब अर्थव्यवस्था को देखते हुए वर्ष 2016 में होने वाले ओलंपिक और इसी साल होने वाले पैरालम्पिक खेलों के आयोजन समारोह का बजट कम किया गया है। यह बजट लंदन में आयोजित ओलंपिक समारोहों के बजट से बहुत कम है। ओलंपिक समारोहों के निदेशकों ने इसके बजट में कटौती की जानकारी दी।
ब्राजील की अर्थव्यवस्था 2015 की शुरुआत से ही खराब है, जिसके कारण बाजार में निराशावादी दृष्टिकोण बढ़ा है। नए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ब्राजील की अर्थव्यवस्था में 2.1 प्रतिशत तक की गिरावट आएगी, वार्षिक महंगाई दर 9.25 प्रतिशत तक रहेगी और ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रॉसेफ के खिलाफ महाभियोग की मांग भी हो रही है।
रियो ओलंपिक समारोहों के निदेशकों में से एक फर्नाडो मिरेलेस हैं, जो साल 2000 में ऑस्कर के लिए नामित 'सिटी ऑफ गॉड' के निर्देशन के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अनुमान जताया कि तीन साल पहले लंदन में आयोजित ओलंपिक के चार समारोहों में खर्च की गई राशि का केवल 10 प्रतिशत ही रियो ओलंपिक के आयोजन समारोह में खर्च होगा।
हांगझोऊ। चीन के हांगझोऊ में चल रहे एशियाई खेल 2023 में भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है। चार दिन में भारत की झोली में 22 पदक आए। पांचवें दिन भी कई खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद है।
शूटिंग और घुड़सवारी में भारत को स्वर्ण पदक मिल चुके हैं और आज भी इन्हीं दो खेलों में पदक की उम्मीद सबसे ज्यादा है। प्रतियोगिता के पहले दिन भारत को पांच, दूसरे दिन छह, तीसरे दिन तीन और चौथे दिन आठ पदक मिले।
सरबजोत सिंह, अर्जुन चीमा और शिव नरवाल की पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल टीम ने चीन को एक अंक से हरा दिया है। भारत ने 1734 (स्वर्ण), चीन ने 1733 (रजत) और वियतनाम ने 1730 (कांस्य) के स्कोर के साथ पदक पर कब्जा जमाया।
10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग में भारत के दो खिलाड़ी फाइनल में पहुंच गए हैं। शुरुआत में पिछड़ने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार वापसी की है।
बैडमिंटन में भारत ने पहले मैच में मंगोलिया को 3-0 से हरा दिया है। भारत के लिए तीनों महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।
क्वार्टर फाइनल में अब भारत का सामना थाईलैंड से होगा। इस मैच में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है।
भारतीय निशानेबाज सरबजोत 10 मीटर एयर पिस्टल की निजी स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहे। वह करीबी अंतर से पदक जीतने से चूक गए। हालांकि, टीम इंडिया को स्वर्ण पदक दिलाने में उनका योगदान बेहद अहम था।
मनिका बत्रा और साथियान राउंड-16 के मुकाबले में सिंगापुर के क्लेरेंस च्यू और झेंग जियान से हार गए हैं। भारतीय टीम 2-0 से आगे थी और क्वार्टरफाइनल की ओर अग्रसर दिख रही थी, लेकिन सिंगापुर के खिलाड़ियों ने अंत में दमदार वापसी कर मुकाबला 13-11, 12-10, 11-3 से अपने नाम किया और टीम मुकाबले में सिंगापुर की वापसी कराई। मिश्रित युगल में, हरमीत देसाई और श्रीजा अकुला राउंड 16 में थाईलैंड के फाकपूम एस और ओरावन पी से हार गए।
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रियो डी जेनेरियो। ब्राजील की संकटपूर्ण अर्थव्यवस्था का असर ओलंपिक और पैरालम्पिक खेलों के आयोजन समारोहों पर भी होने जा रहा है। देश की खराब अर्थव्यवस्था को देखते हुए वर्ष दो हज़ार सोलह में होने वाले ओलंपिक और इसी साल होने वाले पैरालम्पिक खेलों के आयोजन समारोह का बजट कम किया गया है। यह बजट लंदन में आयोजित ओलंपिक समारोहों के बजट से बहुत कम है। ओलंपिक समारोहों के निदेशकों ने इसके बजट में कटौती की जानकारी दी। ब्राजील की अर्थव्यवस्था दो हज़ार पंद्रह की शुरुआत से ही खराब है, जिसके कारण बाजार में निराशावादी दृष्टिकोण बढ़ा है। नए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ब्राजील की अर्थव्यवस्था में दो.एक प्रतिशत तक की गिरावट आएगी, वार्षिक महंगाई दर नौ.पच्चीस प्रतिशत तक रहेगी और ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रॉसेफ के खिलाफ महाभियोग की मांग भी हो रही है। रियो ओलंपिक समारोहों के निदेशकों में से एक फर्नाडो मिरेलेस हैं, जो साल दो हज़ार में ऑस्कर के लिए नामित 'सिटी ऑफ गॉड' के निर्देशन के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अनुमान जताया कि तीन साल पहले लंदन में आयोजित ओलंपिक के चार समारोहों में खर्च की गई राशि का केवल दस प्रतिशत ही रियो ओलंपिक के आयोजन समारोह में खर्च होगा। हांगझोऊ। चीन के हांगझोऊ में चल रहे एशियाई खेल दो हज़ार तेईस में भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है। चार दिन में भारत की झोली में बाईस पदक आए। पांचवें दिन भी कई खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद है। शूटिंग और घुड़सवारी में भारत को स्वर्ण पदक मिल चुके हैं और आज भी इन्हीं दो खेलों में पदक की उम्मीद सबसे ज्यादा है। प्रतियोगिता के पहले दिन भारत को पांच, दूसरे दिन छह, तीसरे दिन तीन और चौथे दिन आठ पदक मिले। सरबजोत सिंह, अर्जुन चीमा और शिव नरवाल की पुरुषों की दस मीटर एयर पिस्टल टीम ने चीन को एक अंक से हरा दिया है। भारत ने एक हज़ार सात सौ चौंतीस , चीन ने एक हज़ार सात सौ तैंतीस और वियतनाम ने एक हज़ार सात सौ तीस के स्कोर के साथ पदक पर कब्जा जमाया। दस मीटर एयर पिस्टल शूटिंग में भारत के दो खिलाड़ी फाइनल में पहुंच गए हैं। शुरुआत में पिछड़ने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार वापसी की है। बैडमिंटन में भारत ने पहले मैच में मंगोलिया को तीन-शून्य से हरा दिया है। भारत के लिए तीनों महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल में अब भारत का सामना थाईलैंड से होगा। इस मैच में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है। भारतीय निशानेबाज सरबजोत दस मीटर एयर पिस्टल की निजी स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहे। वह करीबी अंतर से पदक जीतने से चूक गए। हालांकि, टीम इंडिया को स्वर्ण पदक दिलाने में उनका योगदान बेहद अहम था। मनिका बत्रा और साथियान राउंड-सोलह के मुकाबले में सिंगापुर के क्लेरेंस च्यू और झेंग जियान से हार गए हैं। भारतीय टीम दो-शून्य से आगे थी और क्वार्टरफाइनल की ओर अग्रसर दिख रही थी, लेकिन सिंगापुर के खिलाड़ियों ने अंत में दमदार वापसी कर मुकाबला तेरह-ग्यारह, बारह-दस, ग्यारह-तीन से अपने नाम किया और टीम मुकाबले में सिंगापुर की वापसी कराई। मिश्रित युगल में, हरमीत देसाई और श्रीजा अकुला राउंड सोलह में थाईलैंड के फाकपूम एस और ओरावन पी से हार गए।
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यूपी में दिन ब दिन अपराधियों का आतंक बढ़ता दा रहा है। न तो उन्हें पुलिस का खौफ है और न ही प्रसासन का। ऐसे में सरेआम अपराधी खूनी खेल को अंजाम देने से भी नहीं कतराते हैं। ताजा मामला राजधानी लखनऊ का है, जहां विधान भवन से कुछ ही दूर अपराधियों ने दिनदहाड़े पूर्व भाजपा विधायक के बेटे को गोलियों से भून डाला। गोली लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं खूनी वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी वहां से फरार होने में कामयाब रहे।
खबरों की मानें तो भाजपा के पूर्व विधायक जिप्पी तिवारी उर्फ प्रेम प्रकाश तिवारी के 28 साल के बेटे वैभव तिवारी की लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि मृतक वैभव तिवारी नरही के कसमंडा अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 322 में रहता था। जहां पहले अज्ञात युवकों ने वैभव को अपार्टमेंट के नीचे बुलाया और फिर गोली मार कर फरार हो गए। जिप्पी तिवारी डुमरियागंज से बीजेपी विधायक रह चुके हैं।
यह घटना जिस जगह हुई वह विधान भवन से तकरीबन 200 मीटर की दूरी पर ही स्थित है और इस समय विधानमंडल का शीत सत्र चल रहा है। हजरतगंज का इलाका लखनऊ का पॉश इलाकों में आता है। दिनदहाड़े जब यहां गोली चली तो लोगों में हड़कंप मच गया है। बता दें कि ये पूरा इलाका सीसीटीवी से लैस है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है।
अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन अभय प्रसाद ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह पता लगा है कि वैभव को कुछ लोगों ने कसमंडा हाउस स्थित उनके आवास से नीचे बुलाया और उनके बीच बातचीत के दौरान विवाद हो गया और उन्हें गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई।
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यूपी में दिन ब दिन अपराधियों का आतंक बढ़ता दा रहा है। न तो उन्हें पुलिस का खौफ है और न ही प्रसासन का। ऐसे में सरेआम अपराधी खूनी खेल को अंजाम देने से भी नहीं कतराते हैं। ताजा मामला राजधानी लखनऊ का है, जहां विधान भवन से कुछ ही दूर अपराधियों ने दिनदहाड़े पूर्व भाजपा विधायक के बेटे को गोलियों से भून डाला। गोली लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं खूनी वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी वहां से फरार होने में कामयाब रहे। खबरों की मानें तो भाजपा के पूर्व विधायक जिप्पी तिवारी उर्फ प्रेम प्रकाश तिवारी के अट्ठाईस साल के बेटे वैभव तिवारी की लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि मृतक वैभव तिवारी नरही के कसमंडा अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर तीन सौ बाईस में रहता था। जहां पहले अज्ञात युवकों ने वैभव को अपार्टमेंट के नीचे बुलाया और फिर गोली मार कर फरार हो गए। जिप्पी तिवारी डुमरियागंज से बीजेपी विधायक रह चुके हैं। यह घटना जिस जगह हुई वह विधान भवन से तकरीबन दो सौ मीटर की दूरी पर ही स्थित है और इस समय विधानमंडल का शीत सत्र चल रहा है। हजरतगंज का इलाका लखनऊ का पॉश इलाकों में आता है। दिनदहाड़े जब यहां गोली चली तो लोगों में हड़कंप मच गया है। बता दें कि ये पूरा इलाका सीसीटीवी से लैस है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है। अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन अभय प्रसाद ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह पता लगा है कि वैभव को कुछ लोगों ने कसमंडा हाउस स्थित उनके आवास से नीचे बुलाया और उनके बीच बातचीत के दौरान विवाद हो गया और उन्हें गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई।
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पंचायत चुनावों में सहकारी सोसायटी का डिफाल्टर व्यक्ति अब चुनाव नहीं लड़ पाएगा। अगर चुनाव लडऩे वाले व्यक्ति की सोसायटी द्वारा डिफाल्टर घोषित किया गया है, तो पंचायती के चुनाव लडऩे के लिए उसे नो डयूज सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने पंचायती राज निर्वाचन नियम 1994 के नियम 35 में संशोधन कर यह व्यवस्था बनाई है। प्रदेश सरकार की ओर से नियम 35 में किए गए संशोधन को ई-गजट पर प्रकाशित कर दिया है। पंचायतों के चुनावों में चुनाव लडऩे वाले व्यक्ति को पहले पंचायतों से नो डयूज सर्टिफिकेट लेना पड़ता था। यानी वह पंचायत स्तर पर किसी प्रकार का डिफाल्टर नहीं होना चाहिए, लेकिन सोसायटी के डिफाल्टर के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। सोसायटी से डिफाल्टर व्यक्ति पहले चुनाव लड़ सकता था। ऐसे में अब सरकार ने नियमों में संशोधन कर नई व्यवस्था लागू की है। इसके मुताबिक जो व्यक्ति पहले सहकारी सोसायटी द्वारा डिफाल्टर घोषित किया गया हो, वह अब चुनाव नहीं लड़ पाएगा।
चाहे वह गांव के स्तर की कोई सोसायटी हो, पंचायत स्तर की हो या फिर जिला व प्रदेश की स्तर की सोसायटी हो। ई-गजट पर प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार प्रदेश में संचालित की जाने वाली किसी भी सहकारी सोसायटी के डिफाल्टर को चुनाव लडऩे का अधिकार नहीं होगा। इसके अलावा पंचायत स्तर का चुनाव लडऩे से पहले सभी इच्छुक उम्मीदवारों को एक शपथ पत्र भी दायर करना पड़ेगा। इस शपथ पत्र में उसे बताना होगा कि वह किसी भी सहकारी सोसायटी से नकद, ऋण और अग्रिम के बाबत व्यतिक्रमी यानी डिफाल्टर नहीं है। गौरतलब है कि प्रदेश में वर्ष 2021 में हुए पंचायत चुनावों में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले व्यक्ति को भी चुनाव लडऩे से वंचित रखा गया था। हिमाचल प्रदेश में दादा-दादी, माता-पिता या पुत्र और अविवाहित बेटी ने अगर सरकारी जमीन पर कब्जा किया है, तो उस परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ सकता। अगर कोई इन मामलों में संलिप्त पाया जाता है, तो उनका नामांकन रद्द हो जाता है। वहीं सरकार ने अब सहकारी सोसायटी के डिफाल्टर पर भी चुनाव न लडऩे की पाबंदी लगा दी है।
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पंचायत चुनावों में सहकारी सोसायटी का डिफाल्टर व्यक्ति अब चुनाव नहीं लड़ पाएगा। अगर चुनाव लडऩे वाले व्यक्ति की सोसायटी द्वारा डिफाल्टर घोषित किया गया है, तो पंचायती के चुनाव लडऩे के लिए उसे नो डयूज सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने पंचायती राज निर्वाचन नियम एक हज़ार नौ सौ चौरानवे के नियम पैंतीस में संशोधन कर यह व्यवस्था बनाई है। प्रदेश सरकार की ओर से नियम पैंतीस में किए गए संशोधन को ई-गजट पर प्रकाशित कर दिया है। पंचायतों के चुनावों में चुनाव लडऩे वाले व्यक्ति को पहले पंचायतों से नो डयूज सर्टिफिकेट लेना पड़ता था। यानी वह पंचायत स्तर पर किसी प्रकार का डिफाल्टर नहीं होना चाहिए, लेकिन सोसायटी के डिफाल्टर के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। सोसायटी से डिफाल्टर व्यक्ति पहले चुनाव लड़ सकता था। ऐसे में अब सरकार ने नियमों में संशोधन कर नई व्यवस्था लागू की है। इसके मुताबिक जो व्यक्ति पहले सहकारी सोसायटी द्वारा डिफाल्टर घोषित किया गया हो, वह अब चुनाव नहीं लड़ पाएगा। चाहे वह गांव के स्तर की कोई सोसायटी हो, पंचायत स्तर की हो या फिर जिला व प्रदेश की स्तर की सोसायटी हो। ई-गजट पर प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार प्रदेश में संचालित की जाने वाली किसी भी सहकारी सोसायटी के डिफाल्टर को चुनाव लडऩे का अधिकार नहीं होगा। इसके अलावा पंचायत स्तर का चुनाव लडऩे से पहले सभी इच्छुक उम्मीदवारों को एक शपथ पत्र भी दायर करना पड़ेगा। इस शपथ पत्र में उसे बताना होगा कि वह किसी भी सहकारी सोसायटी से नकद, ऋण और अग्रिम के बाबत व्यतिक्रमी यानी डिफाल्टर नहीं है। गौरतलब है कि प्रदेश में वर्ष दो हज़ार इक्कीस में हुए पंचायत चुनावों में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले व्यक्ति को भी चुनाव लडऩे से वंचित रखा गया था। हिमाचल प्रदेश में दादा-दादी, माता-पिता या पुत्र और अविवाहित बेटी ने अगर सरकारी जमीन पर कब्जा किया है, तो उस परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ सकता। अगर कोई इन मामलों में संलिप्त पाया जाता है, तो उनका नामांकन रद्द हो जाता है। वहीं सरकार ने अब सहकारी सोसायटी के डिफाल्टर पर भी चुनाव न लडऩे की पाबंदी लगा दी है।
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डैन मैककैफर्टी का मंगलवार को 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया है।
हार्ड रॉक बैंड 'नाजरेथ' के प्रमुख गायक डैन मैककैफर्टी का मंगलवार को 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। डैन मैककैफर्टी को 70 के दशक की हिट फिल्मों में 'लव हर्ट्स' और 'हेयर ऑफ द डॉग' जैसे गानों को अपनी आवाज देने के रूप में जाना जाता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके निधन का कोई कारण नहीं बताया गया है। हालांकि वह लंबे समय से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी बीमारी से पीड़ित थे। इसी बीमारी के कारण उन्होंने 45 साल के अपने सफर के बाद साल 2013 में बैंड को छोड़ दिया था। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मैककैफर्टी स्कॉटिश बैंड के संस्थापक सदस्य थे। इस बैंड का गठन 1968 में हुआ था। गायक ने नौ साल पहले बैंड छोड़ दिया था क्योंकि वह अब लंबे समय तक नहीं गा सकते थे। लेकिन वह स्टूडियो में काम करते थे और उनका एक गाना साल 2019 में रिलीज किया गया था। यह उनका आखिरी रिकॉर्ड किया गया सिंगल था।
मैककैफर्टी के निधन की खबर की पुष्टी बैंड के सदस्य पीट एग्न्यू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करके दी है। उन्होंने बैंड के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा, 'डैन का आज 12:40 बजे निधन हो गया है। यह मेरी अब तक की सबसे दुखद घोषणा है। मैककैफर्टी की पत्नी मैरीन और उनके परिवार ने एक बेहद प्यार करने वाले पति और पिता को खो दिया है। मैंने अपना सबसे अच्छा दोस्त खो दिया है और दुनिया ने सबसे महान गायकों में से एक को खो दिया है। मैं कुछ भी कहने की स्तिथि में नहीं हूं। मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं। '
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिटार बजाने वाले मैनी चार्लटन और ड्रमर डेरेल स्वीट के साथ साल 1968 में स्कॉटलैंड के डनफर्मलाइन बैंड के साथ जुड़ने के बाद, 'नाजरेथ' ने साल 1970 में अपना खुदका पहला एल्बम जारी किया था। बैंड को साल 1973 में यूनाइटेड किंगडम में 'रजामनेज' की रिलीज के बाद सफलता मिली थी। यह डीप पर्पल के रोजर ग्लोवर द्वारा निर्मित तीसरा एल्बम था। इस एलबम के दो गाने 'बैड बैड बॉय' और 'ब्रोकन डाउन एंजेल' ब्रिटेन में टॉप 10 में पहुंचे थे। डैन हॉलीवुड के एक नामी गायक थे।
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डैन मैककैफर्टी का मंगलवार को छिहत्तर वर्ष की आयु में निधन हो गया है। हार्ड रॉक बैंड 'नाजरेथ' के प्रमुख गायक डैन मैककैफर्टी का मंगलवार को छिहत्तर वर्ष की आयु में निधन हो गया है। डैन मैककैफर्टी को सत्तर के दशक की हिट फिल्मों में 'लव हर्ट्स' और 'हेयर ऑफ द डॉग' जैसे गानों को अपनी आवाज देने के रूप में जाना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके निधन का कोई कारण नहीं बताया गया है। हालांकि वह लंबे समय से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी बीमारी से पीड़ित थे। इसी बीमारी के कारण उन्होंने पैंतालीस साल के अपने सफर के बाद साल दो हज़ार तेरह में बैंड को छोड़ दिया था। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मैककैफर्टी स्कॉटिश बैंड के संस्थापक सदस्य थे। इस बैंड का गठन एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में हुआ था। गायक ने नौ साल पहले बैंड छोड़ दिया था क्योंकि वह अब लंबे समय तक नहीं गा सकते थे। लेकिन वह स्टूडियो में काम करते थे और उनका एक गाना साल दो हज़ार उन्नीस में रिलीज किया गया था। यह उनका आखिरी रिकॉर्ड किया गया सिंगल था। मैककैफर्टी के निधन की खबर की पुष्टी बैंड के सदस्य पीट एग्न्यू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करके दी है। उन्होंने बैंड के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा, 'डैन का आज बारह:चालीस बजे निधन हो गया है। यह मेरी अब तक की सबसे दुखद घोषणा है। मैककैफर्टी की पत्नी मैरीन और उनके परिवार ने एक बेहद प्यार करने वाले पति और पिता को खो दिया है। मैंने अपना सबसे अच्छा दोस्त खो दिया है और दुनिया ने सबसे महान गायकों में से एक को खो दिया है। मैं कुछ भी कहने की स्तिथि में नहीं हूं। मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं। ' मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिटार बजाने वाले मैनी चार्लटन और ड्रमर डेरेल स्वीट के साथ साल एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में स्कॉटलैंड के डनफर्मलाइन बैंड के साथ जुड़ने के बाद, 'नाजरेथ' ने साल एक हज़ार नौ सौ सत्तर में अपना खुदका पहला एल्बम जारी किया था। बैंड को साल एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में यूनाइटेड किंगडम में 'रजामनेज' की रिलीज के बाद सफलता मिली थी। यह डीप पर्पल के रोजर ग्लोवर द्वारा निर्मित तीसरा एल्बम था। इस एलबम के दो गाने 'बैड बैड बॉय' और 'ब्रोकन डाउन एंजेल' ब्रिटेन में टॉप दस में पहुंचे थे। डैन हॉलीवुड के एक नामी गायक थे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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कौशिक, इंद्रजीत के साथ पहले दिन के स्कोर चार विकेट पर 262 रन से आगे खेलने उतरे और सधे अंदाज में पारी को आगे बढ़ाना शुरू किया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 125 रनों की साझेदारी निभाई।
इंद्रजीत का विकेट 323 के कुल योग पर अश्विन दास ने चटकाया। इसके बाद कौशिक ने नारायण के साथ भी 90 रनों की साझेदारी की। कौशिक 368 गेंदों पर 24 चौके लगाकर अश्विन दास का शिकार हुए।
मध्य प्रदेश की ओर से पदार्पण मैच खेल रहे अश्विन दास का वह तीसरा शिकार बने।
मध्य प्रदेश के लिए अश्विन ने सर्वाधिक तीन विकेट लिए हैं, जबकि हरप्रीत सिंह ने सबसे कसी हुई गेंदबाजी की। हरप्रीत ने 19 ओवरों में मात्र 32 रन दिए हैं और एक विकेट भी हासिल किया है।
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कौशिक, इंद्रजीत के साथ पहले दिन के स्कोर चार विकेट पर दो सौ बासठ रन से आगे खेलने उतरे और सधे अंदाज में पारी को आगे बढ़ाना शुरू किया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए एक सौ पच्चीस रनों की साझेदारी निभाई। इंद्रजीत का विकेट तीन सौ तेईस के कुल योग पर अश्विन दास ने चटकाया। इसके बाद कौशिक ने नारायण के साथ भी नब्बे रनों की साझेदारी की। कौशिक तीन सौ अड़सठ गेंदों पर चौबीस चौके लगाकर अश्विन दास का शिकार हुए। मध्य प्रदेश की ओर से पदार्पण मैच खेल रहे अश्विन दास का वह तीसरा शिकार बने। मध्य प्रदेश के लिए अश्विन ने सर्वाधिक तीन विकेट लिए हैं, जबकि हरप्रीत सिंह ने सबसे कसी हुई गेंदबाजी की। हरप्रीत ने उन्नीस ओवरों में मात्र बत्तीस रन दिए हैं और एक विकेट भी हासिल किया है।
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नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कर्नाटक में कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) का नेता चुनने के लिए मंगलवार को राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ मंत्रणा की. खड़गे के आवास पर बैठक में उनके और राहुल गांधी के अलावा पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और कुछ अन्य नेता मौजूद थे. उधर, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार दिल्ली पहुंचे. शिवकुमार ने खड़गे से उनके आवास पर मुलाकात की. वहीं, सूत्रों का कहना है कि सहमति न बनने के कारण एक-दो दिन में फैसला हो सकता है.
गौरतलब है कि शिवकुमार सोमवार को ही दिल्ली आने वाले थे, लेकिन पेट में संक्रमण का हवाला देते हुए उन्होंने अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी थी. पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सोमवार से ही दिल्ली में मौजूद हैं. ये दोनों नेता मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने पार्टी के तीनों पर्यवेक्षकों के साथ सोमवार को गहन मंत्रणा की थी, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका था. खड़गे ने कर्नाटक में कांग्रेस विधायक दल का नेता चुनने के लिए वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे, जितेंद्र सिंह और दीपक बाबरिया को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था.
तीनों पर्यवेक्षकों ने पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों से अलग-अलग बात कर उनकी राय जानी थी और फिर उन्होंने खड़गे को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. कांग्रेस विधायक दल की रविवार शाम बेंगलुरु के एक निजी होटल में हुई बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर पार्टी अध्यक्ष को विधायक दल का नेता चुनने का अधिकार दिया गया, जो कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री बनेगा. राज्य में 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को हुए चुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल करते हुए 135 सीट अपने नाम कीं, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा नीत जनता दल (सेक्युलर) ने क्रमशः 66 और 19 सीट जीतीं.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया और कर्नाटक में कांग्रेस को प्रचंड जीत दिलाने वाले राज्य पार्टी प्रमुख डी. के. शिवकुमार ने मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की. सिद्धारमैया राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने उनके आवास पर पहुंचे, जहां पार्टी में गहन मंथन जारी था. इससे पहले, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने खरगे से मुलाकात की. इस मुलाकात से पहले उन्होंने कहा कि कांग्रेस उनके लिए मां की तरह है और पार्टी से इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं है.
कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों को चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया. शिवकुमार मंगलवार दोपहर राष्ट्रीय राजधानी में पहले अपने भाई और पार्टी सांसद डीके सुरेश के आवास पर गए और शाम करीब पांच बजे खड़गे से मिलने उनके आवास पर पहुंचे. खड़गे के साथ उनकी मुलाकात से पहले राहुल गांधी, पार्टी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पार्टी प्रमुख के साथ सीएम पद को लेकर लंबी चर्चा की. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चली.
बता दें कि बेंगलुरु से दिल्ली रवाना होने से पहले शिवकुमार ने कहा कि पार्टी उनके लिए 'भगवान' है. शिवकुमार ने कहा, "हमारा घर एकजुट है. हमारी संख्या 135 है और मैं पार्टी अध्यक्ष हूं. कांग्रेस पार्टी मेरा मंदिर है. पार्टी मां की तरह है. मैंने अपना काम किया है. " उन्होंने कहा, "भगवान और मां जानते हैं कि बच्चों को क्या देना है. मैं मंदिर में अपने भगवान से मिलने जा रहा हूं. मैं अकेला जा रहा हूं. महासचिव ने मुझे वहां अकेले आने के लिए कहा था. "
पढ़ें- Karnataka Politics : सीएम पद की रेस में शिवकुमार पर भारी पड़ रहे सिद्धारमैया!
(पीटीआई-भाषा)
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नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कर्नाटक में कांग्रेस विधायक दल का नेता चुनने के लिए मंगलवार को राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ मंत्रणा की. खड़गे के आवास पर बैठक में उनके और राहुल गांधी के अलावा पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और कुछ अन्य नेता मौजूद थे. उधर, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार दिल्ली पहुंचे. शिवकुमार ने खड़गे से उनके आवास पर मुलाकात की. वहीं, सूत्रों का कहना है कि सहमति न बनने के कारण एक-दो दिन में फैसला हो सकता है. गौरतलब है कि शिवकुमार सोमवार को ही दिल्ली आने वाले थे, लेकिन पेट में संक्रमण का हवाला देते हुए उन्होंने अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी थी. पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सोमवार से ही दिल्ली में मौजूद हैं. ये दोनों नेता मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने पार्टी के तीनों पर्यवेक्षकों के साथ सोमवार को गहन मंत्रणा की थी, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका था. खड़गे ने कर्नाटक में कांग्रेस विधायक दल का नेता चुनने के लिए वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे, जितेंद्र सिंह और दीपक बाबरिया को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था. तीनों पर्यवेक्षकों ने पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों से अलग-अलग बात कर उनकी राय जानी थी और फिर उन्होंने खड़गे को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. कांग्रेस विधायक दल की रविवार शाम बेंगलुरु के एक निजी होटल में हुई बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर पार्टी अध्यक्ष को विधायक दल का नेता चुनने का अधिकार दिया गया, जो कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री बनेगा. राज्य में दो सौ चौबीस सदस्यीय विधानसभा के लिए दस मई को हुए चुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल करते हुए एक सौ पैंतीस सीट अपने नाम कीं, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा नीत जनता दल ने क्रमशः छयासठ और उन्नीस सीट जीतीं. कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया और कर्नाटक में कांग्रेस को प्रचंड जीत दिलाने वाले राज्य पार्टी प्रमुख डी. के. शिवकुमार ने मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की. सिद्धारमैया राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने उनके आवास पर पहुंचे, जहां पार्टी में गहन मंथन जारी था. इससे पहले, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने खरगे से मुलाकात की. इस मुलाकात से पहले उन्होंने कहा कि कांग्रेस उनके लिए मां की तरह है और पार्टी से इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं है. कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों को चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया. शिवकुमार मंगलवार दोपहर राष्ट्रीय राजधानी में पहले अपने भाई और पार्टी सांसद डीके सुरेश के आवास पर गए और शाम करीब पांच बजे खड़गे से मिलने उनके आवास पर पहुंचे. खड़गे के साथ उनकी मुलाकात से पहले राहुल गांधी, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पार्टी प्रमुख के साथ सीएम पद को लेकर लंबी चर्चा की. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चली. बता दें कि बेंगलुरु से दिल्ली रवाना होने से पहले शिवकुमार ने कहा कि पार्टी उनके लिए 'भगवान' है. शिवकुमार ने कहा, "हमारा घर एकजुट है. हमारी संख्या एक सौ पैंतीस है और मैं पार्टी अध्यक्ष हूं. कांग्रेस पार्टी मेरा मंदिर है. पार्टी मां की तरह है. मैंने अपना काम किया है. " उन्होंने कहा, "भगवान और मां जानते हैं कि बच्चों को क्या देना है. मैं मंदिर में अपने भगवान से मिलने जा रहा हूं. मैं अकेला जा रहा हूं. महासचिव ने मुझे वहां अकेले आने के लिए कहा था. " पढ़ें- Karnataka Politics : सीएम पद की रेस में शिवकुमार पर भारी पड़ रहे सिद्धारमैया!
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अभिनेत्री उगुर असलान ने घोषणा की कि विनाशकारी भूकंपों के बाद, हटे में उनका आधा परिवार मलबे में गिर गया। असलान ने कहा, "कोई हमारी मदद क्यों नहीं कर रहा है?" उसने विद्रोह किया।
तुर्की 04.17 परिमाण के भूकंप से हिल गया था, जो कहारनमारस, पजारसिक में 7,7 पर और एलबिस्तान के केंद्र में 13.24 पर 7,6 था।
एएफएडी भूकंप जोखिम और न्यूनीकरण के महाप्रबंधक ओरहान तातार ने कहा कि एल्बिस्तान केंद्रित भूकंप एक स्वतंत्र भूकंप था।
10 और 7,7 तीव्रता के भूकंपों में, 7,6 प्रांतों को प्रभावित करने वाले कहारनमारास, पजारिकिक और एलबिस्तान में केंद्रित, 6 हजार 217 इमारतों को नष्ट कर दिया गया, यह घोषणा की गई कि अब तक 2 हजार 316 लोगों की जान चली गई है।
भयानक भूकंप से प्रभावित प्रांतों में से एक हाटे के बारे में अभिनेता उगुर असलान का एक बयान आया। इस बात पर जोर देते हुए कि हाटे में उनका आधा परिवार भूकंप के बाद ढह गया था, असलान ने कहा, "मेरा लगभग आधा परिवार हटे में ढह गया है। बचे हुए सभी लोगों का कहना है कि कोई हमारी मदद क्यों नहीं कर रहा है?" उसने विद्रोह किया।
असलान ने अपने द्वारा प्रकाशित वीडियो में निम्नलिखित भावों का उपयोग किया है;
हमारा बहुत बुरा दिन चल रहा है। खासतौर पर हटे को लेकर कई सवालिया निशान हैं। दुर्भाग्य से, मेरा परिवार बर्बाद हो गया है और अब हम उन्हें 'खोया' मानते हैं क्योंकि कोई भी प्रक्रिया जो उनके साथ हस्तक्षेप कर सकती थी दुर्भाग्य से काम नहीं किया।
बताया जा रहा है कि वहां कुछ नुकसान हुआ है। हमारे राज्यपाल द्वारा दिए गए कुछ बयान हैं; कहा गया कि इंफ्रास्ट्रक्चर में कमजोरियां हैं जिससे वहां मदद जा सके।
मेरी एकमात्र इच्छा है कि बाकी प्रक्रिया काम करेगी। मेरे परिवार से मिली जानकारी के अनुसार लोग अपने प्रयासों से लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थिति बहुत खराब है। हटे में गंभीरता से मदद की जरूरत है। कृपया समर्थन करें, मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है।
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अभिनेत्री उगुर असलान ने घोषणा की कि विनाशकारी भूकंपों के बाद, हटे में उनका आधा परिवार मलबे में गिर गया। असलान ने कहा, "कोई हमारी मदद क्यों नहीं कर रहा है?" उसने विद्रोह किया। तुर्की चार.सत्रह परिमाण के भूकंप से हिल गया था, जो कहारनमारस, पजारसिक में सात,सात पर और एलबिस्तान के केंद्र में तेरह.चौबीस पर सात,छः था। एएफएडी भूकंप जोखिम और न्यूनीकरण के महाप्रबंधक ओरहान तातार ने कहा कि एल्बिस्तान केंद्रित भूकंप एक स्वतंत्र भूकंप था। दस और सात,सात तीव्रता के भूकंपों में, सात,छः प्रांतों को प्रभावित करने वाले कहारनमारास, पजारिकिक और एलबिस्तान में केंद्रित, छः हजार दो सौ सत्रह इमारतों को नष्ट कर दिया गया, यह घोषणा की गई कि अब तक दो हजार तीन सौ सोलह लोगों की जान चली गई है। भयानक भूकंप से प्रभावित प्रांतों में से एक हाटे के बारे में अभिनेता उगुर असलान का एक बयान आया। इस बात पर जोर देते हुए कि हाटे में उनका आधा परिवार भूकंप के बाद ढह गया था, असलान ने कहा, "मेरा लगभग आधा परिवार हटे में ढह गया है। बचे हुए सभी लोगों का कहना है कि कोई हमारी मदद क्यों नहीं कर रहा है?" उसने विद्रोह किया। असलान ने अपने द्वारा प्रकाशित वीडियो में निम्नलिखित भावों का उपयोग किया है; हमारा बहुत बुरा दिन चल रहा है। खासतौर पर हटे को लेकर कई सवालिया निशान हैं। दुर्भाग्य से, मेरा परिवार बर्बाद हो गया है और अब हम उन्हें 'खोया' मानते हैं क्योंकि कोई भी प्रक्रिया जो उनके साथ हस्तक्षेप कर सकती थी दुर्भाग्य से काम नहीं किया। बताया जा रहा है कि वहां कुछ नुकसान हुआ है। हमारे राज्यपाल द्वारा दिए गए कुछ बयान हैं; कहा गया कि इंफ्रास्ट्रक्चर में कमजोरियां हैं जिससे वहां मदद जा सके। मेरी एकमात्र इच्छा है कि बाकी प्रक्रिया काम करेगी। मेरे परिवार से मिली जानकारी के अनुसार लोग अपने प्रयासों से लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थिति बहुत खराब है। हटे में गंभीरता से मदद की जरूरत है। कृपया समर्थन करें, मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है।
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छोटी बुरी आदतों से लड़ाई आरंभ करनी चाहिए और उनसे सरलता पूर्वक सफलता प्राप्त करते हुए क्रमशः अधिक कड़ी, अधिक पुरानी और अधिक प्रिय बुरी आदतों से लड़ाई लड़ते रहना चाहिए। छोटी सफलताएँ प्राप्त करते चलने से साहस एवं आत्म-विश्वास बढ़ता है और इस आधार पर अवांछनीयताओं के उन्मूलन एवं सत्प्रवृत्तियों के संस्थापन में सफलता मिलती चली जाती है। यह प्रयास देर तक जारी रहना चाहिए। थोड़ी सी सफलता से निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए। लाखों योनियों के कुसंस्कार विचार मात्र से समाप्त नहीं हो जाते। वे मार खाकर अंतर्मन के किसी कोने में जा छिपते हैं और अवसर पाते ही छापामारों की तरह घातक आक्रमण करते हैं । इनसे सतत सजग रहने की आवश्यकता है । यह सतर्कता अनवरत रूप से आजन्म बरती जानी चाहिए कि कहीं बेखबर पाकर दुर्बुद्धि और दुष्प्रवृत्ति की घातें फिर न पनपने लगे।
उपरोक्त प्रवचन पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित पुस्तक साधना से सिद्धि पृष्ठ- 39 से लिया गया है।
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छोटी बुरी आदतों से लड़ाई आरंभ करनी चाहिए और उनसे सरलता पूर्वक सफलता प्राप्त करते हुए क्रमशः अधिक कड़ी, अधिक पुरानी और अधिक प्रिय बुरी आदतों से लड़ाई लड़ते रहना चाहिए। छोटी सफलताएँ प्राप्त करते चलने से साहस एवं आत्म-विश्वास बढ़ता है और इस आधार पर अवांछनीयताओं के उन्मूलन एवं सत्प्रवृत्तियों के संस्थापन में सफलता मिलती चली जाती है। यह प्रयास देर तक जारी रहना चाहिए। थोड़ी सी सफलता से निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए। लाखों योनियों के कुसंस्कार विचार मात्र से समाप्त नहीं हो जाते। वे मार खाकर अंतर्मन के किसी कोने में जा छिपते हैं और अवसर पाते ही छापामारों की तरह घातक आक्रमण करते हैं । इनसे सतत सजग रहने की आवश्यकता है । यह सतर्कता अनवरत रूप से आजन्म बरती जानी चाहिए कि कहीं बेखबर पाकर दुर्बुद्धि और दुष्प्रवृत्ति की घातें फिर न पनपने लगे। उपरोक्त प्रवचन पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित पुस्तक साधना से सिद्धि पृष्ठ- उनतालीस से लिया गया है।
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लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदी दिवस क्यों और कब मनाया जाता है।
आइए जानते हैं हिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है और इससे जुड़ी कुछ खास बातें आपको बताते हैं।
हमारे भारत देश में हर साल हिंदी दिवस 14 सितम्बर को ही मनाया जाता है। हिंदी भाषा के इतिहासिक पलो को याद कर लोग इस दिवस को मनाते है।
1. हिंदी भाषा को 14 सितंबर, 1949 के दिन राजभाषा का दर्जा मिला था। तब से हर साल यह दिन हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसी दिन संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी।
इसी महत्वपूर्ण निर्णय के चलते सन् 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस भी मनाया जाता है।
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लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदी दिवस क्यों और कब मनाया जाता है। आइए जानते हैं हिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है और इससे जुड़ी कुछ खास बातें आपको बताते हैं। हमारे भारत देश में हर साल हिंदी दिवस चौदह सितम्बर को ही मनाया जाता है। हिंदी भाषा के इतिहासिक पलो को याद कर लोग इस दिवस को मनाते है। एक. हिंदी भाषा को चौदह सितंबर, एक हज़ार नौ सौ उनचास के दिन राजभाषा का दर्जा मिला था। तब से हर साल यह दिन हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसी दिन संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के चलते सन् एक हज़ार नौ सौ तिरेपन से संपूर्ण भारत में चौदह सितंबर को प्रतिवर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा दस जनवरी को विश्व हिंदी दिवस भी मनाया जाता है।
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कौषीतकि आरण्यक है जिसका कि कौषीतकि उपनिषद् एक भाग है (इसे कौषीतकिब्राह्मरण-उपनिषद् भी कहते हैं ) । १ कृष्ण यजुर्वेद में तैत्तिरीय आरण्यक तैत्तिरीय ब्राह्मण की ही अविच्छिन्न धारा से है और अन्त में इसने तैत्तिरीय उपनिषद् तथा महानारायण उपनिषद् का रूप ले लिया । शुक्ल यजुर्वेद के शतपथ ब्राह्मरण के चतुर्दश अध्याय का प्रथम एक-तिहाई भागारण्यक है और इस अध्याय का अन्तिम भाग बृहदारण्यक उपनिषद् है जो कि उपनिषदों में सबसे बड़ा और सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है । छान्दोग्य उपनिषद् का प्रथम भाग आरण्यक के अतिरिक्त कुछ नहीं है । यह उपनिषद् सामवेद के एक ब्राह्मरण, सम्भवतः ताण्ड्य महाब्राह्मरण से सम्बद्ध है । तथाकथित जैमिनीय उपनिषद् ब्राह्मण सामवेद की जैमिनीय या तलवकार शाखा का आरण्यक है; तथा केन-उपनिषद्, जिसे तलवकार उपनिषद् भी कहते हैं, इसका एक भाग है ।
महानारायण उपनिषद् तैत्तिरीय आरण्यक के साथ परवर्ती काल में जोड़ा गया । इसे छोड़कर अन्य सब उपरि-निर्दिष्ट उपनिषदों की प्राचीनतम उपनिषदों में गरगना होती है । भाषा और शैली की दृष्टि से वे ब्राह्मणों से मिलती-जुलती हैं। वे ब्राह्मणों का ही भाग हैं या इसी काल में ब्राह्मणों के साथ जोड़ी गई हैं। इनमें वैसा ही सीधा-सादा कुछ अनगढ़-सा गद्य है; परन्तु इसमें सौन्दर्य का प्रभाव नहीं है, विशेष रूप से आख्यानात्मक भागों में । केवल केन-उपनिषद् का आधा भाग छन्दोमय है और यह उपरि-परिगरिगत उपनिषदों में अर्वाचीनतम है; परन्तु इनमें किसी भी उपनिषद् के पाठ्य के सब भाग एक ही काल के नहीं हैं। इस विषय में डूसन का कथन है - "इन सब उपनिषदों में पूर्ववर्ती और परवर्ती पाठ्य मिले-जुले हैं । इसलिए काल निर्णय करते हुए प्रत्येक पर पृथक् रूप से विचार करना होगा ।" परन्तु यदि केवल भाषा के आधार पर विचार करें तो इन उपनिषदों के परवर्ती भाग भी अत्यन्त प्राचीन काल के सिद्ध होते हैं । यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि बृहदारण्यक और छान्दोग्य जैसी बड़ी-बड़ी उपनिषदें बड़ी तथा छोटी कई भिन्नभिन्न उपनिषदों को मिलाकर बनी हैं। यह तथ्य भी इसकी पुष्टि करता है कि कई बार संदर्भ कई उपनिषदों में ज्यों-के-त्यों मिलते हैं । बड़ी उपनिषदें, ब्राह्मणों तथा आरण्यक ग्रन्थों के काल से बहुत पीछे की नहीं हैं और निर्विवाद रूप से उनका काल बुद्ध से पूर्व है तथा पारिगनि से भी पूर्व है । ऐतरेय, बृहदारण्यक, छान्दोग्य, तैत्तिरीय, कौषीतकि तथा केन उपनिषद् साहित्य के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। इनमें तथाकथित वेदान्त सिद्धान्त अपने शुद्ध तथा मूल रूप में है ।
१. ऐतरेय आरण्यक अंग्रेजी अनुवाद सहित ए० वी० कीथ ने प्रकाशित किया है। इसके परिशिष्ट रूप में शाखायन-भारण्यक का एक भाग (७-१५) दिया गया है। शाखायन या कौषीतकि प्रारण्यक के विषय में देखिए S. Keith, JRAS, 1908, 353ff.
२. उपनिषदों की भाषा के विषय में निम्न विद्वानों के ग्रन्थ विशेष रूप से द्रष्टव्य हैंR. Liebich, Otto wecker, W. Kirfel, A. Fürst, Oldenberg.
कुछ उपनिषदें पूर्णतया या अधिकांशतः पद्य में लिखी हुई हैं । वे कुछ. परवर्ती काल की हैं तो भी उनका काल अत्यन्त प्राचीन है और सम्भवतः बुद्ध से पूर्व है । इनका भी किसी वैदिक शाखा से संबंध स्थापित किया जाता है, परन्तु सर्वदा ही किसी आरण्यक के भाग के रूप में ये हमें प्राप्त नहीं होतीं । कठया काठक' उपनिषद् इसी श्रेणी की है । इसके नाम से ही स्पष्ट है कि इसका कृष्ण यजुर्वेद की किसी शाखा से संबंध है। श्वेताश्वतर उपनिषद् तथा महानारायण उपनिषद् हमें तैत्तिरीय आरण्यक के परिशिष्ट रूप में उपलब्ध हैं। इनकी गणना भी कृष्णयजुर्वेद के पाठ्यों में होती है । ईश-उपनिषद् 3 बहुत छोटी है परन्तु महत्त्व की दृष्टि से सर्वोच्च है । यह वाजसनेय संहिता ( शुक्ल यजुर्वेद ) का अन्तिम अध्याय है । मुण्डक उपनिषद् तथा प्रश्न उपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध हैं । ये दोनों उपनिषदें अंशतः गद्य में, अंशतः पद्य में हैं। यद्यपि इन छः उपनिषदों में भी वेदान्त सिद्धान्त मलता है तथापि सांख्य तथा योग के सिद्धान्त तथा एकेश्वरवादी विचार इनमें ओतप्रोत हैं । भावी गवेषणाओं से यह स्पष्ट होगा कि इनमें कौन-कौन से विभिन्न दार्शनिक सिद्धान्त हैं और किनका परवर्ती काल में प्रक्षेप किया गया है। इनको पढ़ने से स्थान-स्थान पर प्रक्षेप का स्पष्ट भास होता है। उदाहरण के लिए महाके नारायण उपनिषद् के तीन विभिन्न पाठ मिलते हैं । इससे स्पष्ट है कि इनका पाठ कितना अनिश्चित है ।
मैत्रायणीय उपनिषद् का अपने शीर्षक के कारण से कृष्ण यजुर्वेद की
१. इसके पाठ की आलोचना के लिए देखिए R Fritzsche, ZDMG. 66, 1912, 727 f; Hillebrandt, ZDMG; 68, 1914, 579 ff and Hertel Dic weischeit der Upanischaden, pp. 42ff.
२. देखिए - Weber, Ind. Stu. 1 तथा R. G. Bhandarkar, Vaisnavism, Saivism and Minor Religious Systems ('Grundriss' 111, 6, 1913), pp, 106 ff.
३. द्रष्टव्य, श्रीअरविन्द का अंग्रेजी अनुवाद, सत्यभूषण योगी का ईशोपनिषद् भाष्य - ४. हर्टेल ने प्रथर्ववेद (१०. ७-८) के साथ संबंध की ओर निर्देश किया है। मुण्डक उपनिषद् का अर्थ संभवतः यह है - कि उस विद्वान् की उपनिषद् जिसने सिर मुँडाया हुआ है, अर्थात् उस सम्प्रदाय का व्यक्ति जिसके लोग अपने सिर को मुण्डित रखते थे। हर्टेल का सुझाव है कि मुण्डक उपनिषद् तथा जैनियों में कोई संबंध है ।
५. इस उपनिषद् में उपदेष्टा ऋषि के रूप में पिप्पलाद है । यह ऋषि अथर्ववद की पैप्पलाद शाखा का प्रवतंक है ।
६. इसके अन्य शीर्षक निम्न हैं - मैत्रायण-ब्राह्मण उप०, मैत्रायण उप० मैत्रायणी उप● तथा मैत्री उप० । इस उपनिषद् के अनेक पाठ्य मिलते हैं। इससे एक बिलकुल अलग ग्रन्थ मैत्रेय उप० मिलता है जो कि पक्ष में है, इसकी भूमिका गद्य में है। भूमिका का कुछ भाग मैत्रायणीय उप० से मिलता है ।
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कौषीतकि आरण्यक है जिसका कि कौषीतकि उपनिषद् एक भाग है । एक कृष्ण यजुर्वेद में तैत्तिरीय आरण्यक तैत्तिरीय ब्राह्मण की ही अविच्छिन्न धारा से है और अन्त में इसने तैत्तिरीय उपनिषद् तथा महानारायण उपनिषद् का रूप ले लिया । शुक्ल यजुर्वेद के शतपथ ब्राह्मरण के चतुर्दश अध्याय का प्रथम एक-तिहाई भागारण्यक है और इस अध्याय का अन्तिम भाग बृहदारण्यक उपनिषद् है जो कि उपनिषदों में सबसे बड़ा और सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है । छान्दोग्य उपनिषद् का प्रथम भाग आरण्यक के अतिरिक्त कुछ नहीं है । यह उपनिषद् सामवेद के एक ब्राह्मरण, सम्भवतः ताण्ड्य महाब्राह्मरण से सम्बद्ध है । तथाकथित जैमिनीय उपनिषद् ब्राह्मण सामवेद की जैमिनीय या तलवकार शाखा का आरण्यक है; तथा केन-उपनिषद्, जिसे तलवकार उपनिषद् भी कहते हैं, इसका एक भाग है । महानारायण उपनिषद् तैत्तिरीय आरण्यक के साथ परवर्ती काल में जोड़ा गया । इसे छोड़कर अन्य सब उपरि-निर्दिष्ट उपनिषदों की प्राचीनतम उपनिषदों में गरगना होती है । भाषा और शैली की दृष्टि से वे ब्राह्मणों से मिलती-जुलती हैं। वे ब्राह्मणों का ही भाग हैं या इसी काल में ब्राह्मणों के साथ जोड़ी गई हैं। इनमें वैसा ही सीधा-सादा कुछ अनगढ़-सा गद्य है; परन्तु इसमें सौन्दर्य का प्रभाव नहीं है, विशेष रूप से आख्यानात्मक भागों में । केवल केन-उपनिषद् का आधा भाग छन्दोमय है और यह उपरि-परिगरिगत उपनिषदों में अर्वाचीनतम है; परन्तु इनमें किसी भी उपनिषद् के पाठ्य के सब भाग एक ही काल के नहीं हैं। इस विषय में डूसन का कथन है - "इन सब उपनिषदों में पूर्ववर्ती और परवर्ती पाठ्य मिले-जुले हैं । इसलिए काल निर्णय करते हुए प्रत्येक पर पृथक् रूप से विचार करना होगा ।" परन्तु यदि केवल भाषा के आधार पर विचार करें तो इन उपनिषदों के परवर्ती भाग भी अत्यन्त प्राचीन काल के सिद्ध होते हैं । यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि बृहदारण्यक और छान्दोग्य जैसी बड़ी-बड़ी उपनिषदें बड़ी तथा छोटी कई भिन्नभिन्न उपनिषदों को मिलाकर बनी हैं। यह तथ्य भी इसकी पुष्टि करता है कि कई बार संदर्भ कई उपनिषदों में ज्यों-के-त्यों मिलते हैं । बड़ी उपनिषदें, ब्राह्मणों तथा आरण्यक ग्रन्थों के काल से बहुत पीछे की नहीं हैं और निर्विवाद रूप से उनका काल बुद्ध से पूर्व है तथा पारिगनि से भी पूर्व है । ऐतरेय, बृहदारण्यक, छान्दोग्य, तैत्तिरीय, कौषीतकि तथा केन उपनिषद् साहित्य के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। इनमें तथाकथित वेदान्त सिद्धान्त अपने शुद्ध तथा मूल रूप में है । एक. ऐतरेय आरण्यक अंग्रेजी अनुवाद सहित एशून्य वीशून्य कीथ ने प्रकाशित किया है। इसके परिशिष्ट रूप में शाखायन-भारण्यक का एक भाग दिया गया है। शाखायन या कौषीतकि प्रारण्यक के विषय में देखिए S. Keith, JRAS, एक हज़ार नौ सौ आठ, तीन सौ तिरेपनff. दो. उपनिषदों की भाषा के विषय में निम्न विद्वानों के ग्रन्थ विशेष रूप से द्रष्टव्य हैंR. Liebich, Otto wecker, W. Kirfel, A. Fürst, Oldenberg. कुछ उपनिषदें पूर्णतया या अधिकांशतः पद्य में लिखी हुई हैं । वे कुछ. परवर्ती काल की हैं तो भी उनका काल अत्यन्त प्राचीन है और सम्भवतः बुद्ध से पूर्व है । इनका भी किसी वैदिक शाखा से संबंध स्थापित किया जाता है, परन्तु सर्वदा ही किसी आरण्यक के भाग के रूप में ये हमें प्राप्त नहीं होतीं । कठया काठक' उपनिषद् इसी श्रेणी की है । इसके नाम से ही स्पष्ट है कि इसका कृष्ण यजुर्वेद की किसी शाखा से संबंध है। श्वेताश्वतर उपनिषद् तथा महानारायण उपनिषद् हमें तैत्तिरीय आरण्यक के परिशिष्ट रूप में उपलब्ध हैं। इनकी गणना भी कृष्णयजुर्वेद के पाठ्यों में होती है । ईश-उपनिषद् तीन बहुत छोटी है परन्तु महत्त्व की दृष्टि से सर्वोच्च है । यह वाजसनेय संहिता का अन्तिम अध्याय है । मुण्डक उपनिषद् तथा प्रश्न उपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध हैं । ये दोनों उपनिषदें अंशतः गद्य में, अंशतः पद्य में हैं। यद्यपि इन छः उपनिषदों में भी वेदान्त सिद्धान्त मलता है तथापि सांख्य तथा योग के सिद्धान्त तथा एकेश्वरवादी विचार इनमें ओतप्रोत हैं । भावी गवेषणाओं से यह स्पष्ट होगा कि इनमें कौन-कौन से विभिन्न दार्शनिक सिद्धान्त हैं और किनका परवर्ती काल में प्रक्षेप किया गया है। इनको पढ़ने से स्थान-स्थान पर प्रक्षेप का स्पष्ट भास होता है। उदाहरण के लिए महाके नारायण उपनिषद् के तीन विभिन्न पाठ मिलते हैं । इससे स्पष्ट है कि इनका पाठ कितना अनिश्चित है । मैत्रायणीय उपनिषद् का अपने शीर्षक के कारण से कृष्ण यजुर्वेद की एक. इसके पाठ की आलोचना के लिए देखिए R Fritzsche, ZDMG. छयासठ, एक हज़ार नौ सौ बारह, सात सौ सत्ताईस f; Hillebrandt, ZDMG; अड़सठ, एक हज़ार नौ सौ चौदह, पाँच सौ उन्यासी ff and Hertel Dic weischeit der Upanischaden, pp. बयालीसff. दो. देखिए - Weber, Ind. Stu. एक तथा R. G. Bhandarkar, Vaisnavism, Saivism and Minor Religious Systems , pp, एक सौ छः ff. तीन. द्रष्टव्य, श्रीअरविन्द का अंग्रेजी अनुवाद, सत्यभूषण योगी का ईशोपनिषद् भाष्य - चार. हर्टेल ने प्रथर्ववेद के साथ संबंध की ओर निर्देश किया है। मुण्डक उपनिषद् का अर्थ संभवतः यह है - कि उस विद्वान् की उपनिषद् जिसने सिर मुँडाया हुआ है, अर्थात् उस सम्प्रदाय का व्यक्ति जिसके लोग अपने सिर को मुण्डित रखते थे। हर्टेल का सुझाव है कि मुण्डक उपनिषद् तथा जैनियों में कोई संबंध है । पाँच. इस उपनिषद् में उपदेष्टा ऋषि के रूप में पिप्पलाद है । यह ऋषि अथर्ववद की पैप्पलाद शाखा का प्रवतंक है । छः. इसके अन्य शीर्षक निम्न हैं - मैत्रायण-ब्राह्मण उपशून्य, मैत्रायण उपशून्य मैत्रायणी उप● तथा मैत्री उपशून्य । इस उपनिषद् के अनेक पाठ्य मिलते हैं। इससे एक बिलकुल अलग ग्रन्थ मैत्रेय उपशून्य मिलता है जो कि पक्ष में है, इसकी भूमिका गद्य में है। भूमिका का कुछ भाग मैत्रायणीय उपशून्य से मिलता है ।
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दिल्ली नगर निगम कितना लापरवाह है, इसका उदाहरण मैं दे रहा हूं। मुकंदपुर गांव से आगे मुकंद विहार पार्ट-2 में बनी कॉलोनी के ठीक बीच में सिद्ध गोरक्षनाथ मंदिर के पीछे, खाली पड़े एक विशाल प्लाट में पिछले बरसात के मौसम में चार-चार फुट पानी भर गया था। इतना पानी तो कई जगह भरा था लेकिन वहां मलबा डालकर समस्या हल कर दी गई लेकिन इस जगह को लावारिस छोड़ दिया गया, पता नहीं क्यों? इस पानी की कहीं से भी कोई निकासी नहीं है। लोगों ने भी उसका लाभ उठाया और अपनी-अपनी गली का पानी भी उस प्लाट में ही काट दिया। उस पानी में बेहिसाब मच्छर पनपा और वहां के लोगों को बुखार जैसी महामारी ने आ घेरा। बेचारी जनता वहां कोई सरकारी डिस्पेंसरी न होने के कारण प्राइवेट कामचलाऊ डाक्टरों के सहारे जैसे-तैसे अपनी जिन्दगी काट रही है। मैंने दिल्ली निगमायुक्त को एक नहीं अनेक पत्र लिखकर मांग की थी कि उस प्लाट के पानी को निकालने का प्रबंध किया जाए लेकिन कार्यवाही तो दूर आज तक उन पत्रों की पावती तक नहीं आई। मैंने अंतिम पत्र दिनांक 20. 6. 2011 को लिखा है। पानी पिछले साल की बरसात में एकत्र हुआ था और जनता यह सोच कर चुप थी कि गर्मी पड़ेगी तो पानी सूख जाएगा लेकिन आज भी कम से कम एक डेढ़ फुट पानी वैसे ही खड़ा है। अभी भी समस्या जस की तस बनी हुई है। मेरा निवेदन है कि वहां से पानी निकलवाया जाए तथा आगे पानी वहां जमा न हो, इसका पुख्ता प्रबंध कराया जाए। -इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली।
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दिल्ली नगर निगम कितना लापरवाह है, इसका उदाहरण मैं दे रहा हूं। मुकंदपुर गांव से आगे मुकंद विहार पार्ट-दो में बनी कॉलोनी के ठीक बीच में सिद्ध गोरक्षनाथ मंदिर के पीछे, खाली पड़े एक विशाल प्लाट में पिछले बरसात के मौसम में चार-चार फुट पानी भर गया था। इतना पानी तो कई जगह भरा था लेकिन वहां मलबा डालकर समस्या हल कर दी गई लेकिन इस जगह को लावारिस छोड़ दिया गया, पता नहीं क्यों? इस पानी की कहीं से भी कोई निकासी नहीं है। लोगों ने भी उसका लाभ उठाया और अपनी-अपनी गली का पानी भी उस प्लाट में ही काट दिया। उस पानी में बेहिसाब मच्छर पनपा और वहां के लोगों को बुखार जैसी महामारी ने आ घेरा। बेचारी जनता वहां कोई सरकारी डिस्पेंसरी न होने के कारण प्राइवेट कामचलाऊ डाक्टरों के सहारे जैसे-तैसे अपनी जिन्दगी काट रही है। मैंने दिल्ली निगमायुक्त को एक नहीं अनेक पत्र लिखकर मांग की थी कि उस प्लाट के पानी को निकालने का प्रबंध किया जाए लेकिन कार्यवाही तो दूर आज तक उन पत्रों की पावती तक नहीं आई। मैंने अंतिम पत्र दिनांक बीस. छः. दो हज़ार ग्यारह को लिखा है। पानी पिछले साल की बरसात में एकत्र हुआ था और जनता यह सोच कर चुप थी कि गर्मी पड़ेगी तो पानी सूख जाएगा लेकिन आज भी कम से कम एक डेढ़ फुट पानी वैसे ही खड़ा है। अभी भी समस्या जस की तस बनी हुई है। मेरा निवेदन है कि वहां से पानी निकलवाया जाए तथा आगे पानी वहां जमा न हो, इसका पुख्ता प्रबंध कराया जाए। -इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली।
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विधानसभा का शीतकालीन सत्र अगले माह चार दिसंबर से होगा। सत्र के दौरान चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा।
देहरादून, राज्य ब्यूरो। विधानसभा का शीतकालीन सत्र अगले माह चार दिसंबर से होगा। सत्र के दौरान चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। विधानसभा के इस वर्ष तीसरे सत्र के लिए राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने अधिसूचना जारी की। सत्र दो दिन चार और पांच दिसंबर तक चलने की संभावना है।
विधानसभा सचिव जगदीश चंद्र ने बताया कि सत्र में मुख्य रूप से अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। उधर, अनुपूरक बजट के लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। वित्त विभाग सभी महकमों को आदेश जारी कर अनुपूरक बजट की मांग के लिए प्रस्ताव मांग चुका है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक अनुपूरक बजट डेढ़ से ढाई हजार करोड़ का हो सकता है। वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने अनुपूरक बजट को लेकर विभागों की तैयारी की समीक्षा भी की।
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक 24 नवंबर को सुबह 11 बजे से सचिवालय में होगी। बैठक में शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ ही विभिन्न मामलों पर चर्चा होगी। बैठक में अनुपूरक बजट को लेकर भी चर्चा संभावित है। विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने के चलते कैबिनेट के फैसलों की ब्रीफ्रिंग नहीं होगी।
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विधानसभा का शीतकालीन सत्र अगले माह चार दिसंबर से होगा। सत्र के दौरान चालू वित्तीय वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। देहरादून, राज्य ब्यूरो। विधानसभा का शीतकालीन सत्र अगले माह चार दिसंबर से होगा। सत्र के दौरान चालू वित्तीय वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। विधानसभा के इस वर्ष तीसरे सत्र के लिए राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने अधिसूचना जारी की। सत्र दो दिन चार और पांच दिसंबर तक चलने की संभावना है। विधानसभा सचिव जगदीश चंद्र ने बताया कि सत्र में मुख्य रूप से अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। उधर, अनुपूरक बजट के लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। वित्त विभाग सभी महकमों को आदेश जारी कर अनुपूरक बजट की मांग के लिए प्रस्ताव मांग चुका है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक अनुपूरक बजट डेढ़ से ढाई हजार करोड़ का हो सकता है। वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने अनुपूरक बजट को लेकर विभागों की तैयारी की समीक्षा भी की। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक चौबीस नवंबर को सुबह ग्यारह बजे से सचिवालय में होगी। बैठक में शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ ही विभिन्न मामलों पर चर्चा होगी। बैठक में अनुपूरक बजट को लेकर भी चर्चा संभावित है। विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने के चलते कैबिनेट के फैसलों की ब्रीफ्रिंग नहीं होगी।
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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की तिथि करीब आ गई है. 10 मई को मतदान होना है और चुनावी नतीजे 13 मई को आएंगे. दक्षिण भारत के इस अहम राज्य में महज 19 दिन बाद वोटिंग होनी है. इस बीच गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को साउथ का गेट वे कहे जाने वाले बेंगलुरु पहुंचे थे. यहां उन्होंने आज तक के खास कार्यक्रम कर्नाटक राउंडटेबल-2023 (Karnataka Roundtable) में शिरकत की.
इंडिया टुडे राउंडटेबल कर्नाटक कार्यक्रम के दौरान सूबे के चुनाव से लेकर देश की सियासत पर भी चर्चा हुई और सियासी सवाल-जवाब का दौर भी चला. गृह मंत्री शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला और साथ ही दिल्ली की अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार को भी खूब घेरा. उन्होंने कहा कि विकास के लिए जरूरी है कि डबल इंजन की सरकार बने. केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार हो और राज्य में भी बीजेपी की सरकार बने.
अमित शाह ने केंद्र की कल्याणकारी योजनाएं लागू नहीं करने वाली राज्य सरकारों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि कई राज्यों में ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं जो गरीब कल्याण की योजनाओं को सिर्फ इसलिए लागू नहीं करती हैं कि इसका श्रेय बीजेपी और पीएम मोदी को मिल जाएगा. गृह मंत्री शाह ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार के साथ ही पं. बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को भी घेरा.
उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयुष्मान योजना का लाभ जरूरतमंद नागरिकों को नहीं मिल पा रहा. गृह मंत्री ने कहा कि सीएम केजरीवाल को डर है कि इस योजना को लागू कर दिया तो पीएम मोदी की प्रसिद्धि बढ़ जाएगी. उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हमने किसान सम्मान निधि के लिए कहा.
गृह मंत्री शाह ने कहा कि कई साल तक पश्चिम बंगाल के किसान इस योजना का लाभ पाने से वंचित रहे क्योंकि ममता सरकार नहीं चाहती थी कि किसानों के खाते में पीएम मोदी की योजना का चेक जाए. उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना भी पश्चिम बंगाल में लागू नहीं हो रही है क्योंकि केंद्र की योजना होने के चलते इसका श्रेय बीजेपी और पीएम मोदी को चला जाएगा.
इस दौरान उनसे पूछा गया कि ऐसा करने के बावजूद ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल, ये दोनों नेता लोकप्रिय हो रहे हैं. ऐसा क्यों? इसके जवाब में गृह मंत्री ने कहा कि ठीक है, अभी ऐसा जरूर है मगर दोनों जगह हमने अपनी स्थिति बहुत इंप्रूव की है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हमारी दो सीटें थीं, आज 77 सीटें हैं.
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी के बेहतर प्रदर्शन की चर्चा की और कहा कि पश्चिम बंगाल में हमारी एक ही सीट थी. आज हमारी वहां 18 सीटें हैं और आप लिखकर ले लीजिए, 2024 के चुनाव में हम 35 से ज्यादा सीटें जीत कर आएंगे. उन्होंने दिल्ली की चर्चा करते हुए कहा कि हमने 2014 और 2019, दोनों ही बार सभी लोकसभा सीटें जीतीं.
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है. इस योजना के तहत पात्र किसानों को 6000 रुपये की आर्थिक सहायता सालाना दी जाती है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को दो-दो हजार रुपये का भुगतान हर चार महीने के अंतराल पर किया जाता है. गैर बीजेपी सरकार वाले कुछ राज्यों में ये योजना लागू नहीं की जा सकी थी जिनमें से एक पश्चिम बंगाल भी था.
आयुष्मान भारत सरकार की एक हेल्थ स्कीम है जिसके तहत सरकार आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड (Ayushman Bharat Golden Card) लोगों को प्रदान करती है. इस स्कीम के तहत आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को अस्पतालों में मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. इस योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त है.
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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की तिथि करीब आ गई है. दस मई को मतदान होना है और चुनावी नतीजे तेरह मई को आएंगे. दक्षिण भारत के इस अहम राज्य में महज उन्नीस दिन बाद वोटिंग होनी है. इस बीच गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को साउथ का गेट वे कहे जाने वाले बेंगलुरु पहुंचे थे. यहां उन्होंने आज तक के खास कार्यक्रम कर्नाटक राउंडटेबल-दो हज़ार तेईस में शिरकत की. इंडिया टुडे राउंडटेबल कर्नाटक कार्यक्रम के दौरान सूबे के चुनाव से लेकर देश की सियासत पर भी चर्चा हुई और सियासी सवाल-जवाब का दौर भी चला. गृह मंत्री शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला और साथ ही दिल्ली की अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार को भी खूब घेरा. उन्होंने कहा कि विकास के लिए जरूरी है कि डबल इंजन की सरकार बने. केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार हो और राज्य में भी बीजेपी की सरकार बने. अमित शाह ने केंद्र की कल्याणकारी योजनाएं लागू नहीं करने वाली राज्य सरकारों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि कई राज्यों में ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं जो गरीब कल्याण की योजनाओं को सिर्फ इसलिए लागू नहीं करती हैं कि इसका श्रेय बीजेपी और पीएम मोदी को मिल जाएगा. गृह मंत्री शाह ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार के साथ ही पं. बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को भी घेरा. उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयुष्मान योजना का लाभ जरूरतमंद नागरिकों को नहीं मिल पा रहा. गृह मंत्री ने कहा कि सीएम केजरीवाल को डर है कि इस योजना को लागू कर दिया तो पीएम मोदी की प्रसिद्धि बढ़ जाएगी. उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हमने किसान सम्मान निधि के लिए कहा. गृह मंत्री शाह ने कहा कि कई साल तक पश्चिम बंगाल के किसान इस योजना का लाभ पाने से वंचित रहे क्योंकि ममता सरकार नहीं चाहती थी कि किसानों के खाते में पीएम मोदी की योजना का चेक जाए. उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना भी पश्चिम बंगाल में लागू नहीं हो रही है क्योंकि केंद्र की योजना होने के चलते इसका श्रेय बीजेपी और पीएम मोदी को चला जाएगा. इस दौरान उनसे पूछा गया कि ऐसा करने के बावजूद ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल, ये दोनों नेता लोकप्रिय हो रहे हैं. ऐसा क्यों? इसके जवाब में गृह मंत्री ने कहा कि ठीक है, अभी ऐसा जरूर है मगर दोनों जगह हमने अपनी स्थिति बहुत इंप्रूव की है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हमारी दो सीटें थीं, आज सतहत्तर सीटें हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी के बेहतर प्रदर्शन की चर्चा की और कहा कि पश्चिम बंगाल में हमारी एक ही सीट थी. आज हमारी वहां अट्ठारह सीटें हैं और आप लिखकर ले लीजिए, दो हज़ार चौबीस के चुनाव में हम पैंतीस से ज्यादा सीटें जीत कर आएंगे. उन्होंने दिल्ली की चर्चा करते हुए कहा कि हमने दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस, दोनों ही बार सभी लोकसभा सीटें जीतीं. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है. इस योजना के तहत पात्र किसानों को छः हज़ार रुपयापये की आर्थिक सहायता सालाना दी जाती है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को दो-दो हजार रुपये का भुगतान हर चार महीने के अंतराल पर किया जाता है. गैर बीजेपी सरकार वाले कुछ राज्यों में ये योजना लागू नहीं की जा सकी थी जिनमें से एक पश्चिम बंगाल भी था. आयुष्मान भारत सरकार की एक हेल्थ स्कीम है जिसके तहत सरकार आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड लोगों को प्रदान करती है. इस स्कीम के तहत आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को अस्पतालों में मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. इस योजना के तहत पाँच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त है.
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मुलायम सिंह यादव ठेठ जमीनी नेता, जिनके ऊपर 'धरतीपुत्र' विशेषण एकदम सटीक बैठता है, वहीं अमिताभ बच्चन रुपहले पर्दे के बादशाह। दोनों में मेल कराया अमर सिंह ने। अमर सिंह नेता भी थे और नामजीन हस्तियों के साथ दोस्ती के लिए मशहूर भी।
कहा जाता है कि जिन दिनों अमिताभ बच्चन के करियर के बुरे दिन चल रहे थे उन्हीं दिनों उनकी मुलाकात अमर सिंह से हो गई। अमर सिंह ने उन्हें मुलायम सिंह से मिलवाया। यहीं दोनों परिवारों की मित्रता शुरू हुई।
यह दोस्ती जब परवान चढ़ी तो 1994 में यूपी के सीएम मुलायम सिंह यादव ने अमिताभ बच्चन के पिता और हिंदी के प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन को यूपी के यशभारती पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान किया। लेकिन सम्मान समारोह के ऐन पहले हरिवंश राय बच्चन की तबीयत बिगड़ गई। यह साफ हो गया कि वह समारोह में लखनऊ नहीं आ पाएंगे। जैसे ही सीएम मुलायम सिंह यादव को यह बात पता चली वह तुरंत फ्लाइट से अमिताभ बच्चन के मुंबई में जुहू स्थित बंगले पहुंचे और खुद हरिवंश राय बच्चन को सम्मानित किया।
रिश्ते और गहराए तो जब 2007 में ऐश्वर्य राय और अभिषेक बच्चन की शादी हुई तो मुलायम सिंह सपरिवार उसमें शामिल हुए। उससे पहले साल 2004 में जया बच्चन को सपा ने पहली बार राज्यसभा का सांसद बनवाया। जया तीन बार सपा से चुनकर राज्यसभा पहुंची हैं। मौजूदा समय में भी वह सपा सांसद हैं।
साल 2007 में ही अमिताभ बच्चन को मुलायम सिंह यादव ने यूपी का ब्रैंड एंबेसेडर बनाया। शायद यह पहली बार था कि कोई फिल्मी कलाकार किसी प्रदेश का ब्रैंड एंबेसेडर बना। अमिताभ बच्चन के कैंपन 'यूपी में दम है, क्योंकि जुर्म यहां कम है' का उलटा असर हुआ। यूपी की कानून व्यवस्था उस समय काफी लचर थी।
बहरहाल, अमिताभ बच्चन और मुलायम सिंह यादव परिवार के बीच इस समय रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी न रही हो तब भी दोनों के लिए एक-दूसरे के लिए सम्मान है। जया बच्चन मुलायम सिंह यादव को 'पिता तुल्य' कह कर संबोधित भी कर चुकी हैं। आज मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद दोनों परिवारों के रिश्ते क्या दिशा लेंगे यह तो समय ही बताएगा।
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मुलायम सिंह यादव ठेठ जमीनी नेता, जिनके ऊपर 'धरतीपुत्र' विशेषण एकदम सटीक बैठता है, वहीं अमिताभ बच्चन रुपहले पर्दे के बादशाह। दोनों में मेल कराया अमर सिंह ने। अमर सिंह नेता भी थे और नामजीन हस्तियों के साथ दोस्ती के लिए मशहूर भी। कहा जाता है कि जिन दिनों अमिताभ बच्चन के करियर के बुरे दिन चल रहे थे उन्हीं दिनों उनकी मुलाकात अमर सिंह से हो गई। अमर सिंह ने उन्हें मुलायम सिंह से मिलवाया। यहीं दोनों परिवारों की मित्रता शुरू हुई। यह दोस्ती जब परवान चढ़ी तो एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में यूपी के सीएम मुलायम सिंह यादव ने अमिताभ बच्चन के पिता और हिंदी के प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन को यूपी के यशभारती पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान किया। लेकिन सम्मान समारोह के ऐन पहले हरिवंश राय बच्चन की तबीयत बिगड़ गई। यह साफ हो गया कि वह समारोह में लखनऊ नहीं आ पाएंगे। जैसे ही सीएम मुलायम सिंह यादव को यह बात पता चली वह तुरंत फ्लाइट से अमिताभ बच्चन के मुंबई में जुहू स्थित बंगले पहुंचे और खुद हरिवंश राय बच्चन को सम्मानित किया। रिश्ते और गहराए तो जब दो हज़ार सात में ऐश्वर्य राय और अभिषेक बच्चन की शादी हुई तो मुलायम सिंह सपरिवार उसमें शामिल हुए। उससे पहले साल दो हज़ार चार में जया बच्चन को सपा ने पहली बार राज्यसभा का सांसद बनवाया। जया तीन बार सपा से चुनकर राज्यसभा पहुंची हैं। मौजूदा समय में भी वह सपा सांसद हैं। साल दो हज़ार सात में ही अमिताभ बच्चन को मुलायम सिंह यादव ने यूपी का ब्रैंड एंबेसेडर बनाया। शायद यह पहली बार था कि कोई फिल्मी कलाकार किसी प्रदेश का ब्रैंड एंबेसेडर बना। अमिताभ बच्चन के कैंपन 'यूपी में दम है, क्योंकि जुर्म यहां कम है' का उलटा असर हुआ। यूपी की कानून व्यवस्था उस समय काफी लचर थी। बहरहाल, अमिताभ बच्चन और मुलायम सिंह यादव परिवार के बीच इस समय रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी न रही हो तब भी दोनों के लिए एक-दूसरे के लिए सम्मान है। जया बच्चन मुलायम सिंह यादव को 'पिता तुल्य' कह कर संबोधित भी कर चुकी हैं। आज मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद दोनों परिवारों के रिश्ते क्या दिशा लेंगे यह तो समय ही बताएगा।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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भ्रष्टाचार से जुड़े 30 मामलों की जांच 5 साल से अधिक, 92 मामले 3 साल से अधिक, 76 मामले दो साल से ज्यादा, 155 मामले एक साल से अधिक समय से लंबित हैं. आयोग ने लंबे समय से पेंडिंग भ्रष्टाचार के मामलों को निपटाने की धीमी गति पर भी चिंता जताई है.
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की मंगलवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि सीबीआई के तहत भ्रष्टाचार के कुल मामले 683 हैं जिनकी जांच की जा रही है. ये आंकड़े 31 दिसंबर, 2020 तक के हैं. इनमें से 30 मामलों की जांच 5 साल से ज्यादा समय से चल रही है. सामान्य तौर पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को दर्ज मामलों की जांच एक साल के भीतर पूरी करनी होती है. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जांच पूरी होने का मतलब कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने तक होता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ मामलों में जांच पूरी होने में देरी हुई है.
सीवीसी की रिपोर्ट में जांच में देरी की वजह कोरोना महामारी, काम की अधिकता, मैनपावर की कमी, लेटर्स रोगेटरी (LR) के जवाब मिलने में देरी, आय से अधिक संपत्ति मामलों में कागजातों के वेरिफिकेशन, फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट मिलने में देरी, दूरस्थ जगहों पर रहने वाले गवाहों का पता लगाने जैसी चीजें शामिल हैं. CVC की वार्षिक रिपोर्ट-2020 को संसद में मानसून सत्र के दौरान पेश किया गया था और मंगलवार को यह आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर 2020 की स्थिति के अनुसार, भ्रष्टाचार से जुड़े 30 मामलों की जांच 5 साल से अधिक, 92 मामले 3 साल से अधिक, 76 मामले दो साल से ज्यादा, 155 मामले एक साल से अधिक समय से लंबित हैं. वहीं 330 मामले में एक साल से कम समय से लंबित हैं. इसके अलावा आयोग ने अदालतों के समक्ष लंबे समय से पेंडिंग भ्रष्टाचार के मामलों को निपटाने की धीमी गति पर भी चिंता जताई है.
CVC के अनुसार, देश की विभिन्न अदालतों में कुल 6,497 भ्रष्टाचार के मामलों में 212 मामले 20 साल से अधिक समय से लंबित हैं. वहीं 10 से 20 साल के बीच में 1,782 मामले, 5 से 10 साल के बीच में 2,168 मामले, 3 से 5 साल के बीच में 1,031 मामले और 3 साल से कम समय से 1,304 मामले लंबित हैं.
आयोग ने अदालतों के समक्ष मामलों में देरी की जो वजहें गिनाई हैं, उनमें सुनवाई की सीमित संख्या होने, गवाहों की अनुपलब्धता, कर्मचारियों की अपर्याप्त संख्या, एक अदालत से दूसरे अदालत में मामलों का ट्रांसफर के आवेदन और सुनवाई स्थगन शामिल हैं. सीवीसी ने यह भी कहा कि जांच में इस तरह की अधिक देरी विजिलांस एडमिनिस्ट्रेशन के उद्देश्य को विफल करता है और यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी बाधा है.
31 दिसंबर 2020 के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट और अलग-अलग हाई कोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों में कुल 11,578 केस अपील और पुनरीक्षण में हैं. CVC रिपोर्ट के मुताबिक, लंबित अपीलों और पुनरीक्षण में 397 मामले 20 साल से अधिक समय के, 643 मामले 15 साल से 20 साल के बीच में, 1,824 मामले 10 से 15 साल के बीच, 3,629 मामले 5 से 10 साल के बीच, 2,825 मामले 2 से 5 साल के बीच और 2,260 मामले 2 साल से कम समय के हैं.
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भ्रष्टाचार से जुड़े तीस मामलों की जांच पाँच साल से अधिक, बानवे मामले तीन साल से अधिक, छिहत्तर मामले दो साल से ज्यादा, एक सौ पचपन मामले एक साल से अधिक समय से लंबित हैं. आयोग ने लंबे समय से पेंडिंग भ्रष्टाचार के मामलों को निपटाने की धीमी गति पर भी चिंता जताई है. केंद्रीय सतर्कता आयोग की मंगलवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि सीबीआई के तहत भ्रष्टाचार के कुल मामले छः सौ तिरासी हैं जिनकी जांच की जा रही है. ये आंकड़े इकतीस दिसंबर, दो हज़ार बीस तक के हैं. इनमें से तीस मामलों की जांच पाँच साल से ज्यादा समय से चल रही है. सामान्य तौर पर केंद्रीय जांच ब्यूरो को दर्ज मामलों की जांच एक साल के भीतर पूरी करनी होती है. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जांच पूरी होने का मतलब कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने तक होता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ मामलों में जांच पूरी होने में देरी हुई है. सीवीसी की रिपोर्ट में जांच में देरी की वजह कोरोना महामारी, काम की अधिकता, मैनपावर की कमी, लेटर्स रोगेटरी के जवाब मिलने में देरी, आय से अधिक संपत्ति मामलों में कागजातों के वेरिफिकेशन, फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट मिलने में देरी, दूरस्थ जगहों पर रहने वाले गवाहों का पता लगाने जैसी चीजें शामिल हैं. CVC की वार्षिक रिपोर्ट-दो हज़ार बीस को संसद में मानसून सत्र के दौरान पेश किया गया था और मंगलवार को यह आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, इकतीस दिसंबर दो हज़ार बीस की स्थिति के अनुसार, भ्रष्टाचार से जुड़े तीस मामलों की जांच पाँच साल से अधिक, बानवे मामले तीन साल से अधिक, छिहत्तर मामले दो साल से ज्यादा, एक सौ पचपन मामले एक साल से अधिक समय से लंबित हैं. वहीं तीन सौ तीस मामले में एक साल से कम समय से लंबित हैं. इसके अलावा आयोग ने अदालतों के समक्ष लंबे समय से पेंडिंग भ्रष्टाचार के मामलों को निपटाने की धीमी गति पर भी चिंता जताई है. CVC के अनुसार, देश की विभिन्न अदालतों में कुल छः,चार सौ सत्तानवे भ्रष्टाचार के मामलों में दो सौ बारह मामले बीस साल से अधिक समय से लंबित हैं. वहीं दस से बीस साल के बीच में एक,सात सौ बयासी मामले, पाँच से दस साल के बीच में दो,एक सौ अड़सठ मामले, तीन से पाँच साल के बीच में एक,इकतीस मामले और तीन साल से कम समय से एक,तीन सौ चार मामले लंबित हैं. आयोग ने अदालतों के समक्ष मामलों में देरी की जो वजहें गिनाई हैं, उनमें सुनवाई की सीमित संख्या होने, गवाहों की अनुपलब्धता, कर्मचारियों की अपर्याप्त संख्या, एक अदालत से दूसरे अदालत में मामलों का ट्रांसफर के आवेदन और सुनवाई स्थगन शामिल हैं. सीवीसी ने यह भी कहा कि जांच में इस तरह की अधिक देरी विजिलांस एडमिनिस्ट्रेशन के उद्देश्य को विफल करता है और यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी बाधा है. इकतीस दिसंबर दो हज़ार बीस के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट और अलग-अलग हाई कोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों में कुल ग्यारह,पाँच सौ अठहत्तर केस अपील और पुनरीक्षण में हैं. CVC रिपोर्ट के मुताबिक, लंबित अपीलों और पुनरीक्षण में तीन सौ सत्तानवे मामले बीस साल से अधिक समय के, छः सौ तैंतालीस मामले पंद्रह साल से बीस साल के बीच में, एक,आठ सौ चौबीस मामले दस से पंद्रह साल के बीच, तीन,छः सौ उनतीस मामले पाँच से दस साल के बीच, दो,आठ सौ पच्चीस मामले दो से पाँच साल के बीच और दो,दो सौ साठ मामले दो साल से कम समय के हैं.
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1904 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, आधिकारिक तौर पर III ओलंपियाड के खेलों के नाम से जाना जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट कार्यक्रम था, जिसे संयुक्त राज्य में सेंट लुइस, मिसौरी में 29 अगस्त से 3 सितंबर, 1904 तक विस्तारित 1 जुलाई से 23 नवंबर, 1904 तक चलने वाले खेल कार्यक्रम, सेंट लुईस में वाशिंगटन विश्वविद्यालय के परिसर में अब फ्रांसिस फील्ड के नाम से जाना जाता है। यह पहली बार था कि ओलंपिक खेलों यूरोप के बाहर आयोजित किए गए थे। रशिया-जापान युद्ध की वजह से यूरोपीय तनाव, और सेंट लुईस में जाने की कठिनाई, दुनिया के शीर्ष एथलीटों में से अधिकांश को दूर रखा। प्रतिस्पर्धा करने वाले 650 एथलीटों में से केवल 62 उत्तरी अमेरिका के बाहर से आए थे, और सभी में केवल 12-15 देशों का प्रतिनिधित्व किया गया था। प्रतियोगियों का 80% संयुक्त राज्य अमेरिका से था, और आधे से अधिक घटनाओं में ये केवल प्रतियोगियों थे। कुछ मामलों में अमेरिकी राष्ट्रीय चैंपियनशिप को ओलंपिक चैंपियनशिप के साथ जोड़ा गया था। .
2 संबंधोंः 1900 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक, 1908 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक।
वेलोड्रम डे विंसेन्नेस 1900 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, जिन्हें आज आधिकारिक तौर पर द्वितीय ओलंपियाड के खेल के रूप में जाने जाता है की शुरआत सन १९०० में किसी भी उद्घाटन समारोह के बिना फ़्रांस के शहर पॅरिस में हुई थी। प्रतियोगिताओं की शुरुआत 14 मई को और समापन 28 अक्टूबर हुआ। एक हजार से अधिक प्रतियोगियों ने १९ विभिन्न खेलों में भाग लिया। ये खेल स्न १९०० के विश्व मेले के एक हिस्से थे।एक हज़ार से जयदा खिलाड़ियो ने १९ प्रतियोगिताओ में हिस्सा लिया। इन खेलो में महेलिओ ने भी हिस्सा लिया और शार्लट कॉपर पहली महिला ओलुंपीक चँपियन बनी। बहुत से विजेताओ को मेडल नहीं मिला उन्हे केवल कप्स और ट्रोफीस से ही संतोष करना पड़ा। कुछ विभिन्न प्रकार के खेल भी इस ओलिंपिक में खेले गये जैसे की क्रिकेट, पानी के अंदर तेराकी मोटरसाइकिल रेस आदि। .
1908 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, औपचारिक रूप से IV ओलंपियाड के खेलों, एक अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल आयोजन थे, जो 1908 में लंदन, यूनाइटेड किंगडम में 27 अप्रैल से 31 अक्टूबर 1908 तक आयोजित किया गया था। ये खेल मूल रूप से रोम में आयोजित होने के लिए निर्धारित थे, लेकिन वे 1906 में माउंट वसुवियस के विनाशकारी विस्फोट के बाद वित्तीय आधार पर फिर से स्थित थे। प्रस्तावित इंटरैकलेटेड गेम के वैकल्पिक चार साल के चक्र के विरोध में वे चार साल के चक्र स्वीकार किए जाते हैं, साथ ही वे चौथे कालानुक्रमिक आधुनिक ओलंपिक खेलों में शामिल थे। इन खेलों के लिए आईओसी अध्यक्ष बैरन पियरे डी कौबेर्टिन थे। कुल 187 दिन, या 6 महीने और 4 दिन तक चलने वाले, ये खेलों आधुनिक ओलंपिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक थे। .
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एक हज़ार नौ सौ चार ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, आधिकारिक तौर पर III ओलंपियाड के खेलों के नाम से जाना जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट कार्यक्रम था, जिसे संयुक्त राज्य में सेंट लुइस, मिसौरी में उनतीस अगस्त से तीन सितंबर, एक हज़ार नौ सौ चार तक विस्तारित एक जुलाई से तेईस नवंबर, एक हज़ार नौ सौ चार तक चलने वाले खेल कार्यक्रम, सेंट लुईस में वाशिंगटन विश्वविद्यालय के परिसर में अब फ्रांसिस फील्ड के नाम से जाना जाता है। यह पहली बार था कि ओलंपिक खेलों यूरोप के बाहर आयोजित किए गए थे। रशिया-जापान युद्ध की वजह से यूरोपीय तनाव, और सेंट लुईस में जाने की कठिनाई, दुनिया के शीर्ष एथलीटों में से अधिकांश को दूर रखा। प्रतिस्पर्धा करने वाले छः सौ पचास एथलीटों में से केवल बासठ उत्तरी अमेरिका के बाहर से आए थे, और सभी में केवल बारह-पंद्रह देशों का प्रतिनिधित्व किया गया था। प्रतियोगियों का अस्सी% संयुक्त राज्य अमेरिका से था, और आधे से अधिक घटनाओं में ये केवल प्रतियोगियों थे। कुछ मामलों में अमेरिकी राष्ट्रीय चैंपियनशिप को ओलंपिक चैंपियनशिप के साथ जोड़ा गया था। . दो संबंधोंः एक हज़ार नौ सौ ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक, एक हज़ार नौ सौ आठ ग्रीष्मकालीन ओलंपिक। वेलोड्रम डे विंसेन्नेस एक हज़ार नौ सौ ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, जिन्हें आज आधिकारिक तौर पर द्वितीय ओलंपियाड के खेल के रूप में जाने जाता है की शुरआत सन एक हज़ार नौ सौ में किसी भी उद्घाटन समारोह के बिना फ़्रांस के शहर पॅरिस में हुई थी। प्रतियोगिताओं की शुरुआत चौदह मई को और समापन अट्ठाईस अक्टूबर हुआ। एक हजार से अधिक प्रतियोगियों ने उन्नीस विभिन्न खेलों में भाग लिया। ये खेल स्न एक हज़ार नौ सौ के विश्व मेले के एक हिस्से थे।एक हज़ार से जयदा खिलाड़ियो ने उन्नीस प्रतियोगिताओ में हिस्सा लिया। इन खेलो में महेलिओ ने भी हिस्सा लिया और शार्लट कॉपर पहली महिला ओलुंपीक चँपियन बनी। बहुत से विजेताओ को मेडल नहीं मिला उन्हे केवल कप्स और ट्रोफीस से ही संतोष करना पड़ा। कुछ विभिन्न प्रकार के खेल भी इस ओलिंपिक में खेले गये जैसे की क्रिकेट, पानी के अंदर तेराकी मोटरसाइकिल रेस आदि। . एक हज़ार नौ सौ आठ ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, औपचारिक रूप से IV ओलंपियाड के खेलों, एक अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल आयोजन थे, जो एक हज़ार नौ सौ आठ में लंदन, यूनाइटेड किंगडम में सत्ताईस अप्रैल से इकतीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ आठ तक आयोजित किया गया था। ये खेल मूल रूप से रोम में आयोजित होने के लिए निर्धारित थे, लेकिन वे एक हज़ार नौ सौ छः में माउंट वसुवियस के विनाशकारी विस्फोट के बाद वित्तीय आधार पर फिर से स्थित थे। प्रस्तावित इंटरैकलेटेड गेम के वैकल्पिक चार साल के चक्र के विरोध में वे चार साल के चक्र स्वीकार किए जाते हैं, साथ ही वे चौथे कालानुक्रमिक आधुनिक ओलंपिक खेलों में शामिल थे। इन खेलों के लिए आईओसी अध्यक्ष बैरन पियरे डी कौबेर्टिन थे। कुल एक सौ सत्तासी दिन, या छः महीने और चार दिन तक चलने वाले, ये खेलों आधुनिक ओलंपिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक थे। .
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आखिकार कांगे्रस का चिंतन शिविर राहुल के भविष्य की चिंता में तब्दील होकर रह गया। सवा सौ साल पुराने राजनीतिक दल के लिए इस तरह व्यक्ति केंद्रित हो जाना शुभ लक्षण नहीं है। कांग्रेस में वैसे ही राहुल की हैसियत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बाद दूसरे नंबर पर थी। अब महज तकनीकी रूप से उपाध्यक्ष पद से नवाज दिए जाने के बाद कौन-सा चमत्कार हो जाने वाला है, यह कांग्रेस के रणनीतिकार ही जान सकते हैं। बड़ी जिम्मेवारी के बड़े अर्थ बड़े पद से कहीं ज्यादा जिम्मेवारी के यथार्थ की अनुभूति और उनके जमीनी अमल से जुड़े होते हैं। यह सही है कि वर्तमान भारत नौजवानों का देश है। 45 करोड़ युवा भविष्य के सुनहरे सपने लिए आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन इनके सपनों को यदि हकीकत में बदलने की कोई योजना राजनीतिक दृष्टा के मन-मस्तिष्क में नहीं है तो सपनों को यथार्थ में बदलना नामुमकिन ही है। राजनीति की पकी जमीन पर पूरे एक दशक तक खुला खेल खेलने का अवसर मिलना आसान नहीं है, लेकिन अवसर को भुनाने में नाकाम रहना जरूर राहुल की सोच और कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। अब लोकसभा चुनाव के करीब सवा साल पहले राहुल पार्टी का चेहरा घोषित कर दिए गए हैं। इस घोषणा में यह भी प्रतिध्वनित है कि कांग्रेस 2014 में बहुमत में आती है तो प्रधानमंत्री राहुल गांधी ही होंगे। इसके पहले उन्हें इसी साल होने वाले नौ विधानसभा के चुनावों में भी करिश्माई नेतृत्व दक्षता का परिचय देना होगा। उपाध्यक्ष पद के लिए मनोनीत हो जाने के अगले दिन बड़े नाटकीय अंदाज में राहुल ने शिविर के मंच से कहा, बीती रात मेरी मां मेरे कमरे में आई। उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और रोने लग गई। मां ने कहा, सत्ता जहर होती है। बावजूद हमें सत्ता का उपयोग आम लोगों को सबल बनाने में करना है।
भारतीय पुराणों में वर्णित समुद्र मंथन की कथा विश्व प्रसिद्ध है। इस अवसर पर अमृत तो देवता पी गए, लेकिन जीव जगत की रक्षा के लिए विष अकेले भगवान शिव को पीना पड़ा। इसी लोक कल्याण के कारण शिव को नीलकंठ भी कहा गया। साफ है, कांग्रेस की साख और आगामी लोकसभा चुनाव में उसकी बरकरारी बनाए रखने का चुनौतीपूर्ण काम राहुल के कंधों पर आ गया है। अब यदि सत्ता में कांग्रेस या संप्रग-2 की वापसी होती है तो सत्ता की मलाई तो पूरी कांगे्रस और उसके सहयोगी चखेंगे, लेकिन नाकामी मिलती है तो उसका गरल बेचारे राहुल को पीना पड़ेगा। जबकि सत्ता बहाली की जबाबदेही नौ साल से प्रधानमंत्री बने बैठे मनमोहन सिंह को सौंपनी चाहिए थी, क्योंकि जनाधार खोती जा रही कांग्रेस जिस दुर्दशा में है, उसके लिए जिम्मेवार राहुल को नहीं ठहराया जा सकता? मनमोहन सिंह की आर्थिक सुधार संबंधी नीतियां ऐसी हैं, जिनसे महंगाई लगातार बढ़ रही है और आम आदमी की कमर टूटती जा रही है। मनमोहन के कड़े फैसलों की कतार में कैसे संभव है कि राहुल कांग्रेस की जनहितकारी छवि को बहाल करें? राहुल ने भावुक और लोक-लुभावन जो भाषण चिंतन शिविर में दिया, उसे सुनने वालों की आंखें तो नम हो सकती हैं, लेकिन समस्याओं के समाधान के सूत्र नहीं तलाशे जा सकते? यह ठीक है कि कांग्रेस राहुल को युवाओं के सपनों का प्रतीक मानकर उन्हें देश का अगला प्रधानमंत्री बना देने की पुनीत मंशा पाले हुए है, लेकिन यह विडंबना ही है कि देश का यही 45 करोड़ युवा मतदाता कांग्रेस और राहुल गांधी से सबसे ज्यादा खफा है। विज्ञान और तकनीकी शिक्षा से जुड़ा यह युवा अब इतना नरम दिल भी नहीं रहा कि अतीत की भावुकता में बहाकर उसकी भावनाओं का आसानी से राहुल अपने हित में दोहन कर लें। उसमें प्रतिरोध की ताकत और स्वस्फूर्त प्रदर्शन की भावना अंगड़ाई ले रही है। यही युवा भ्रष्ट्राचार मुक्त भारत के लिए अन्ना आंदोलन में हुंकार भरता दिखाई देता है। राहुल इस दोहरे चरित्र के पाखंड को अवाज देते हुए बड़ी सटीक बात कहते हैं, भ्रष्ट लोग ही भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रहे हैं।
दूसरी तरफ महिलाओं के प्रति अनादर की भावना रखने वाले ही महिला सशक्तिकरण पर भाषण देते हैं। यदि राहुल के भाषण को इन युवाओं के आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो तमाम दिग्गज कांग्रेसियों ने भी तो इन आंदोलनों के चलते यही किया। श्रीप्रकाश जयसवाल और बेनीप्रसाद वर्मा ने खुले मंच से महिलाओं का अनादर किया। कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता मनीष तिवारी ने अन्ना हजारे को भ्रष्ट ठहराया और विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कानून मंत्री रहते हुए गैर कानूनी काम करके विकलांग कल्याण के लिए मिली राशि हड़प ली। इन सब हरकतों को अंजाम तब दिया गया, जब राहुल पार्टी के सबसे प्रभावशाली महासचिव थे। इन्हें दंडित करने की बात तो दूर, राहुल ने इनके मर्यादाहीन बयानों की निंदा तक नहीं की। यही वजह है कि आज के दौर का समझदार युवा नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कहीं ज्यादा निकट है। राहुल गांधी ने भरोसा जताया है कि अब 100 में 99 पैसे आप तक पहुंचेंगे और हम भ्रष्टाचार खत्म करेंगे, लेकिन संप्रग-2 के कार्यकाल में नित नए घपले-घोटाले सामने आए हैं। उनसे तो यही तय होता है कि व्यवस्था में सुधार और बदलाव की जो भी कोशिशें हुई हैं, सत्ता के बिचौलिए उतने ही शक्तिशाली हुए हैं। दरअसल, सत्ता में बैठे जिन भ्रष्टाचारियों और दलालों को ठिकाने लगाने के लिए जिन कड़े कानूनी उपायों की जरूरत है, उस लोकपाल को सालों से सभी राजनीतिक दल लंबित रखे हुए हैं। शासन-प्रशासन को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दलीलें देने वाले राहुल की इस लोकपाल को अमल में लाने के नजरिये से अभी तक कोई रुचि या भूमिका देखने में नहीं आई। अब कांग्रेस में वैधानिक रूप से नंबर दो की भूमिका में आ जाने के बाद राहुल का दायित्व बनता है कि वे वाकई अपने भाषण में कही बातें व्यावहारिक रूप में देखना चाहते हैं तो एक संकल्प लें और जरूरी हुआ तो हठ की हद पर आकर लोककल्याणकारी विधेयकों को संसद में पारित कराएं। उन्हें यहां गौर करने की जरूरत है कि जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जन भावना को नकारते हुए परमाणु बिजली और खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष पूंजी निवेश विधेयक को अमल में ला सकते हैं तो वे क्यों नहीं लोक कल्याण से जुड़े विधेयकों को पारित करा सकते हैं? राहुल गांधी ने सवाल उछाला है कि चुनाव से ठीक पहले दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को टिकट मिल जाता है। कई उम्मीदवार सीधे पैराशूट से उतर कर कार्यकर्ताओं पर थोप दिए जाते हैं। दलबदलू चुनाव हार जाते हैं तो वे अपने मूल दल में लौट जाते हैं और पैराशूट से थोपा उम्मीदवार जीतकर हवाई जहाज में उड़ जाता है। साफ है, ऐसे मौकापरस्त नेता, दल और कार्यकर्ताओं की हित चिंता क्यों करने लगे?
ऐसे बाहु और अर्थबलियों को क्यों कांग्रेस के टिकट दिए जाएं? राहुल को अपनी यह पीड़ा दूर करने के लिए न तो संसद में विधेयक पेश करने की जरूरत है और न ही बहुमत की? यह नीति से कहीं ज्यादा नैतिकता से जुड़ी चिंता है। राहुल अब कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत पर तो हैं ही, लोकसभा और विधानसभा के टिकट वितरण कांग्रेस समिति के प्रभारी भी हैं। उनकी कथनी और करनी में फर्क पेश न आए, इसके लिए उन्हें ही संकल्प लेने की जरूरत है। इस संकल्प को कार्यरूप में अंजाम इसी साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव से दे सकते हैं। फरवरी में पूर्वोत्तर भारत के तीन प्रांतों और अप्रैल-मई में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हैं। राहुल को चाहिए कि वे एक भी दलबदलू, भ्रष्ट और महिला-अपमान से जुड़े नेता को टिकट न दें। यदि वे इन चार प्रांतों में अपने संकल्प का ढृढ़ता से पालन करते दिखते हैं तो देश के युवाओं में संदेश जाएगा कि राहुल चुनौतियों से रूबरू हो रहे हैं और बदलाव के लिए प्रतिबद्ध हैं। कांग्रेस की दशा सुधरने और दिशा सुनिश्चित होने का मार्ग इन्हीं विधानसभा चुनावों से होकर गुजरने वाला है। यदि राहुल कथनी-करनी में एकरूपता लाने में नाकाम रहते हैं तो सत्ता का जहर पीने को तैयार ही रहें।
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आखिकार कांगे्रस का चिंतन शिविर राहुल के भविष्य की चिंता में तब्दील होकर रह गया। सवा सौ साल पुराने राजनीतिक दल के लिए इस तरह व्यक्ति केंद्रित हो जाना शुभ लक्षण नहीं है। कांग्रेस में वैसे ही राहुल की हैसियत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बाद दूसरे नंबर पर थी। अब महज तकनीकी रूप से उपाध्यक्ष पद से नवाज दिए जाने के बाद कौन-सा चमत्कार हो जाने वाला है, यह कांग्रेस के रणनीतिकार ही जान सकते हैं। बड़ी जिम्मेवारी के बड़े अर्थ बड़े पद से कहीं ज्यादा जिम्मेवारी के यथार्थ की अनुभूति और उनके जमीनी अमल से जुड़े होते हैं। यह सही है कि वर्तमान भारत नौजवानों का देश है। पैंतालीस करोड़ युवा भविष्य के सुनहरे सपने लिए आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन इनके सपनों को यदि हकीकत में बदलने की कोई योजना राजनीतिक दृष्टा के मन-मस्तिष्क में नहीं है तो सपनों को यथार्थ में बदलना नामुमकिन ही है। राजनीति की पकी जमीन पर पूरे एक दशक तक खुला खेल खेलने का अवसर मिलना आसान नहीं है, लेकिन अवसर को भुनाने में नाकाम रहना जरूर राहुल की सोच और कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। अब लोकसभा चुनाव के करीब सवा साल पहले राहुल पार्टी का चेहरा घोषित कर दिए गए हैं। इस घोषणा में यह भी प्रतिध्वनित है कि कांग्रेस दो हज़ार चौदह में बहुमत में आती है तो प्रधानमंत्री राहुल गांधी ही होंगे। इसके पहले उन्हें इसी साल होने वाले नौ विधानसभा के चुनावों में भी करिश्माई नेतृत्व दक्षता का परिचय देना होगा। उपाध्यक्ष पद के लिए मनोनीत हो जाने के अगले दिन बड़े नाटकीय अंदाज में राहुल ने शिविर के मंच से कहा, बीती रात मेरी मां मेरे कमरे में आई। उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और रोने लग गई। मां ने कहा, सत्ता जहर होती है। बावजूद हमें सत्ता का उपयोग आम लोगों को सबल बनाने में करना है। भारतीय पुराणों में वर्णित समुद्र मंथन की कथा विश्व प्रसिद्ध है। इस अवसर पर अमृत तो देवता पी गए, लेकिन जीव जगत की रक्षा के लिए विष अकेले भगवान शिव को पीना पड़ा। इसी लोक कल्याण के कारण शिव को नीलकंठ भी कहा गया। साफ है, कांग्रेस की साख और आगामी लोकसभा चुनाव में उसकी बरकरारी बनाए रखने का चुनौतीपूर्ण काम राहुल के कंधों पर आ गया है। अब यदि सत्ता में कांग्रेस या संप्रग-दो की वापसी होती है तो सत्ता की मलाई तो पूरी कांगे्रस और उसके सहयोगी चखेंगे, लेकिन नाकामी मिलती है तो उसका गरल बेचारे राहुल को पीना पड़ेगा। जबकि सत्ता बहाली की जबाबदेही नौ साल से प्रधानमंत्री बने बैठे मनमोहन सिंह को सौंपनी चाहिए थी, क्योंकि जनाधार खोती जा रही कांग्रेस जिस दुर्दशा में है, उसके लिए जिम्मेवार राहुल को नहीं ठहराया जा सकता? मनमोहन सिंह की आर्थिक सुधार संबंधी नीतियां ऐसी हैं, जिनसे महंगाई लगातार बढ़ रही है और आम आदमी की कमर टूटती जा रही है। मनमोहन के कड़े फैसलों की कतार में कैसे संभव है कि राहुल कांग्रेस की जनहितकारी छवि को बहाल करें? राहुल ने भावुक और लोक-लुभावन जो भाषण चिंतन शिविर में दिया, उसे सुनने वालों की आंखें तो नम हो सकती हैं, लेकिन समस्याओं के समाधान के सूत्र नहीं तलाशे जा सकते? यह ठीक है कि कांग्रेस राहुल को युवाओं के सपनों का प्रतीक मानकर उन्हें देश का अगला प्रधानमंत्री बना देने की पुनीत मंशा पाले हुए है, लेकिन यह विडंबना ही है कि देश का यही पैंतालीस करोड़ युवा मतदाता कांग्रेस और राहुल गांधी से सबसे ज्यादा खफा है। विज्ञान और तकनीकी शिक्षा से जुड़ा यह युवा अब इतना नरम दिल भी नहीं रहा कि अतीत की भावुकता में बहाकर उसकी भावनाओं का आसानी से राहुल अपने हित में दोहन कर लें। उसमें प्रतिरोध की ताकत और स्वस्फूर्त प्रदर्शन की भावना अंगड़ाई ले रही है। यही युवा भ्रष्ट्राचार मुक्त भारत के लिए अन्ना आंदोलन में हुंकार भरता दिखाई देता है। राहुल इस दोहरे चरित्र के पाखंड को अवाज देते हुए बड़ी सटीक बात कहते हैं, भ्रष्ट लोग ही भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रहे हैं। दूसरी तरफ महिलाओं के प्रति अनादर की भावना रखने वाले ही महिला सशक्तिकरण पर भाषण देते हैं। यदि राहुल के भाषण को इन युवाओं के आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो तमाम दिग्गज कांग्रेसियों ने भी तो इन आंदोलनों के चलते यही किया। श्रीप्रकाश जयसवाल और बेनीप्रसाद वर्मा ने खुले मंच से महिलाओं का अनादर किया। कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता मनीष तिवारी ने अन्ना हजारे को भ्रष्ट ठहराया और विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कानून मंत्री रहते हुए गैर कानूनी काम करके विकलांग कल्याण के लिए मिली राशि हड़प ली। इन सब हरकतों को अंजाम तब दिया गया, जब राहुल पार्टी के सबसे प्रभावशाली महासचिव थे। इन्हें दंडित करने की बात तो दूर, राहुल ने इनके मर्यादाहीन बयानों की निंदा तक नहीं की। यही वजह है कि आज के दौर का समझदार युवा नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कहीं ज्यादा निकट है। राहुल गांधी ने भरोसा जताया है कि अब एक सौ में निन्यानवे पैसे आप तक पहुंचेंगे और हम भ्रष्टाचार खत्म करेंगे, लेकिन संप्रग-दो के कार्यकाल में नित नए घपले-घोटाले सामने आए हैं। उनसे तो यही तय होता है कि व्यवस्था में सुधार और बदलाव की जो भी कोशिशें हुई हैं, सत्ता के बिचौलिए उतने ही शक्तिशाली हुए हैं। दरअसल, सत्ता में बैठे जिन भ्रष्टाचारियों और दलालों को ठिकाने लगाने के लिए जिन कड़े कानूनी उपायों की जरूरत है, उस लोकपाल को सालों से सभी राजनीतिक दल लंबित रखे हुए हैं। शासन-प्रशासन को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दलीलें देने वाले राहुल की इस लोकपाल को अमल में लाने के नजरिये से अभी तक कोई रुचि या भूमिका देखने में नहीं आई। अब कांग्रेस में वैधानिक रूप से नंबर दो की भूमिका में आ जाने के बाद राहुल का दायित्व बनता है कि वे वाकई अपने भाषण में कही बातें व्यावहारिक रूप में देखना चाहते हैं तो एक संकल्प लें और जरूरी हुआ तो हठ की हद पर आकर लोककल्याणकारी विधेयकों को संसद में पारित कराएं। उन्हें यहां गौर करने की जरूरत है कि जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जन भावना को नकारते हुए परमाणु बिजली और खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष पूंजी निवेश विधेयक को अमल में ला सकते हैं तो वे क्यों नहीं लोक कल्याण से जुड़े विधेयकों को पारित करा सकते हैं? राहुल गांधी ने सवाल उछाला है कि चुनाव से ठीक पहले दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को टिकट मिल जाता है। कई उम्मीदवार सीधे पैराशूट से उतर कर कार्यकर्ताओं पर थोप दिए जाते हैं। दलबदलू चुनाव हार जाते हैं तो वे अपने मूल दल में लौट जाते हैं और पैराशूट से थोपा उम्मीदवार जीतकर हवाई जहाज में उड़ जाता है। साफ है, ऐसे मौकापरस्त नेता, दल और कार्यकर्ताओं की हित चिंता क्यों करने लगे? ऐसे बाहु और अर्थबलियों को क्यों कांग्रेस के टिकट दिए जाएं? राहुल को अपनी यह पीड़ा दूर करने के लिए न तो संसद में विधेयक पेश करने की जरूरत है और न ही बहुमत की? यह नीति से कहीं ज्यादा नैतिकता से जुड़ी चिंता है। राहुल अब कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत पर तो हैं ही, लोकसभा और विधानसभा के टिकट वितरण कांग्रेस समिति के प्रभारी भी हैं। उनकी कथनी और करनी में फर्क पेश न आए, इसके लिए उन्हें ही संकल्प लेने की जरूरत है। इस संकल्प को कार्यरूप में अंजाम इसी साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव से दे सकते हैं। फरवरी में पूर्वोत्तर भारत के तीन प्रांतों और अप्रैल-मई में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हैं। राहुल को चाहिए कि वे एक भी दलबदलू, भ्रष्ट और महिला-अपमान से जुड़े नेता को टिकट न दें। यदि वे इन चार प्रांतों में अपने संकल्प का ढृढ़ता से पालन करते दिखते हैं तो देश के युवाओं में संदेश जाएगा कि राहुल चुनौतियों से रूबरू हो रहे हैं और बदलाव के लिए प्रतिबद्ध हैं। कांग्रेस की दशा सुधरने और दिशा सुनिश्चित होने का मार्ग इन्हीं विधानसभा चुनावों से होकर गुजरने वाला है। यदि राहुल कथनी-करनी में एकरूपता लाने में नाकाम रहते हैं तो सत्ता का जहर पीने को तैयार ही रहें। Read More:
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यह काम एक स्ट्रेन माप सेंसर प्रस्तुत करता है जिसमें एक प्रवर्धन तंत्र और एक बेहतर 3 डी प्रिंटर का उपयोग करके निर्मित पॉलीडिमिथाइलसिलिऑक्सेन माइक्रोस्कोप शामिल है।
दो चरण ठोस तरल निर्माण भी इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोफार्मा, ऊर्जा, और रक्षा क्षेत्रों सहित अध्ययन के विभिन्न क्षेत्रों में संरचनात्मक माइक्रोस्फीयर सामग्री के निर्माण के लिए लागू किया जा सकता है । इस प्रणाली को तारों या विद्युत कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती है और माइक्रोस्ट्रक्चर विरूपण से संबंधित अनुप्रयोगों की एक विस्तृत श्रृंखला को मापा जा सकता है। प्रक्रिया शुरू करने से पहले, एक प्रयोगात्मक मंच का निर्माण करें जिसमें एक संशोधित 3-डी प्रिंटर, एक स्ट्रेन गेज संकेतक, एक ड्राइविंग डिवाइस, एक समर्थन फ्रेम, एक एल्यूमीनियम बार, एक पीडीएमएस लेंस, एक स्मार्टफोन, वजन, एक मुद्रित एम्पलीफायर और एक तनाव गेज शामिल है।
प्रिंटर में नायलॉन परत की ऊंचाई 0.05 मिलीमीटर तक सेट करें। प्रिंटिंग हेड का व्यास 0.2 मिलीमीटर तक सेट करें, और नोजल तापमान को 220 डिग्री सेल्सियस तक सेट करें। प्रिंटिंग की गति 2000 मिलीमीटर प्रति मिनट निर्धारित करें।
गोलाकार एक्सट्रूज़न हेड के ओरिएंटेशन को समायोजित करें ताकि धातु नोजल कम तापमान मंच का सामना करे और एक सामान्य निष्कासन सुनिश्चित करने के लिए एक समोच्च मुद्रित करे। इसके बाद नायलॉन को कॉलम पर लटका दें। धातु नोजल द्वारा पिघलने के लिए सामने के छोर को प्रिंटिंग कॉइल कंटेनर में प्रवेश करना होगा।
पीडीएमएस माइक्रोस्कोप को इकट्ठा करने के लिए, एक चुंबकीय उभारक का उपयोग एजेंट समाधान के इलाज के लिए पीडीएमएस अग्रदूत के 10 से एक वजन अनुपात मिश्रण करने के लिए और ४० मिनट के लिए मिश्रण डी गैस । जब सभी बुलबुले हटा दिए गए हों, तो मिश्रण को गोलाकार एक्सट्रूज़न हेड के पीडीएमएस कंटेनर में डालें और गोलाकार एक्सट्रूज़न सिर और मंच को घुमाएं ताकि प्लास्टिक नोजल उच्च तापमान मंच का सामना करे। प्लास्टिक नोजल वेतन वृद्धि को 50 माइक्रोलीटर तक सेट करें और जेड-एक्सिस में नोजल रोटेशन और स्टेपर मोटर का उपयोग करें ताकि पिपेट डिवाइस के निचले छोर को मोल्ड से 20 मिलीमीटर दूर रखा जा सके।
फिर उच्च तापमान मंच को गर्म करें और पीडीएमएस लेंस को प्रिंट करने के लिए पीडीएमएस कंटेनर को निचोड़ें। जब मुद्रित पीडीएमएस लेंस कमरे के तापमान को ठंडा कर दिया है, तो प्रिंटर से इसे हटाने के लिए रबर चिमटी का उपयोग करें। एक लोडिंग परीक्षण तनाव माप करने के लिए, एक 380 के एक छोर को 51 द्वारा 3.8 मिलीमीटर एल्यूमीनियम 6063-T83 बार ऑपरेटिंग टेबल पर ठीक करने के लिए नट और बोल्ट का उपयोग करें और केंद्र में एक क्रॉस और कैंटिलीवर बीम के मुक्त अंत से 160 मिलीमीटर आकर्षित करें।
बीम पर ऑक्साइड परत को हटाने के लिए, स्ट्रेन गेज वायर ग्रिड की दिशा से लगभग 45 डिग्री कोण पर ठीक सैंडपेपर के साथ सतह को पॉलिश करें। रेती कैंटिलीवर बीम की सतह और तनाव गेज पेस्ट की सतह को मिटाने के लिए एसीटोन में भिगोए गए सूती ऊन का उपयोग करें। इसके बाद ड्राइविंग डिवाइस और स्ट्रेन गेज इंडिकेटर को कनेक्ट कर पावर चालू कर दें।
इसके बाद, अपने निश्चित अंत में एल्यूमीनियम बार के केंद्र सतह पर एक तनाव गेज माउंट और केंद्रित बल इनपुट को नियंत्रित करने के लिए कैंटिलीवर बीम के मुक्त अंत करने के लिए एक मानक वजन तय करें। एक नायलॉन एम्पलीफायर के साथ तनाव गेज की जगह से पहले एक चौथाई पुल कनेक्शन विधि के साथ एक पारंपरिक तनाव गेज संकेतक का उपयोग कर एक बेसलाइन रीड-आउट रिकॉर्ड करें। 29 मिलीमीटर की फोकस दूरी पर आठ मेगापिक्सल सेंसर के साथ स्मार्टफोन कैमरे पर पीडीएमएस लेंस अटैच करें और एक स्पष्ट छवि प्राप्त होने तक कैमरे की फोकल लंबाई को समायोजित करें ।
इसके बाद पीडीएमएस माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल कर सूचक के विस्थापन को पढ़ें। एक परिमित तत्व विश्लेषण करने के लिए, सॉफ्टवेयर की सामग्री पुस्तकालय में कैंटिलीवर बीम और एम्पलिफिंग तंत्र आयात करें और उनके प्लेसमेंट पदों का अनुकरण करें। एक कैंटिलीवर बीम की कार्रवाई के तहत एम्पलीफाइंग मैकेनिज्म पॉइंटर के यांत्रिक गुणों का विश्लेषण करें और 3-डी ज्यामितीय मॉडल में उपयोग के लिए meshes उत्पन्न करने के लिए एक ठीक तत्व आकार के साथ टेट्राहेड्रल तत्वों का उपयोग करें।
फिर फ्लेक्सचर टिका को परिष्कृत करें, विशेष रूप से सूचक और अन्य निकायों के बीच काज, और कैंटिलीवर बीम के मुक्त अंत के केंद्र में एक न्यूटन का एक केंद्रित बल लागू करें। जैसे-जैसे प्लेटफ़ॉर्म तापमान बढ़ जाता है, बूंद व्यास और वक्रता त्रिज्या कम हो जाती है, और संपर्क कोण बढ़ जाता है। यहां नायलॉन के लिए एफईए सिमुलेशन के साथ प्रयोगात्मक विस्थापन माप की तुलना दिखाई गई है, जबकि यह ग्राफ एबीएस के लिए ढलानों के बीच न्यूनतम और अधिकतम विसंगतियों को दर्शाता है।
इस प्रतिनिधि प्रयोग में नायलॉन और एबीएस के लिए माप संवेदनशीलता निर्धारित की गई थी। पीडीएमएस लेंस के मोल्डिंग तापमान को नियंत्रित करना मुश्किल है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए एक गैर-संपर्क अवरक्त विकिरण थर्मामीटर और उच्च तापमान मंच का उपयोग करते हैं कि तापमान में परिवर्तन सहिष्णुता के भीतर हैं।
इस ठोस-तरल विनिर्माण विधि को बायोफार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में अध्ययन के लिए भी लागू किया जा सकता है, विशेष रूप से माइक्रोस्फीयर संरचनाओं की तैयारी के लिए।
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प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत पर ई- टॉयलेट टेंडर के जरिए धोखाधड़ी करने के आरोप के बाद राजस्थान में सियासी पारा चढ़ गया है। राजनीति गर्माने के बीच केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस खुलासे के बाद सीएम गहलोत पर पुत्रमोह का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने इसे लेकर ट्वीट करते हुए सीएम गहलोत से सफाई मांगी है। विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने मुख्यमंत्री गहलोत से इस बारे में जवाब मांगा है। कटारिया ने सीधे सीएम पर हमला बोलते हुए तंज कसा कि राजस्थान के गांधी बताएं कि उनके बेटे पर टेंडर दिलाने में ठगी का करोड़ों का केस कैसे दर्ज हुआ है? बीजेपी नेताओं की ओर से पूरे मामले में सरकार और सीएम को घेरने के लिए एक के बाद एक ट्वीट किए जा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस- बीजेपी के बीच अब राजस्थान में यह प्रकरण बड़े सियासी मुद्दे के तौर पर उभर कर सामने आएगा।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के खिलाफ महाराष्ट्र में दर्ज एफआईआर में वैभव पर नासिक के कारोबारी सुशील भालचंद्र पाटिल ने ई-टॉयलेट सहित सरकारी विभागों में टेंडर दिलाने के नाम पर 6 करोड़ 80 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। सुशील ने नासिक के गंगापुर थाने में वैभव गहलोत सहित 14 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज हुआ है। मुख्य आरोपी गुजरात कांग्रेस के सचिव सचिन पुरुषोत्तम वालेरा हैं। वालेरा के पिता पुरुषोत्तम भाई वालेरा भी वरिष्ठ कांग्रेस नेता रहे हैं।
नासिक में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, सचिन वालेरा ने खुद को एडवरटाइजिंग कारोबारी बताते हुए झांसा दिया कि उसके 13 राज्यों में पेट्रोल पंपों पर विज्ञापन का कॉन्ट्रैक्ट है। उसने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके बेटे वैभव से अच्छे संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि वो राजस्थान के मुख्यमंत्री के आर्थिक मामले भी देखता है। सचिन ने उसके काम में निवेश करने पर करोड़ों के मुनाफे का भरोसा दिलाया और कहा कि आपको केवल नाम के लिए टेंडर में भाग लेना है। बाकी का काम वैभव गहलोत देखेंगे। सचिन ने इस निवेश के बारे में सारी जानकारी दी। राजस्थान सरकार द्वारा जारी किए गए सर्कुलर दिखाए, जो बाद में फर्जी पाए गए थे।
एफआईआर के मुताबिक सुशील पाटिल ने सचिन वलेरा के उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में अलग-अलग समय पर पैसे ट्रांसफर कर दिए। यह रकम 6 करोड़ 80 लाख रुपए के आसपास थी। उस समय कई महीने तक सचिन वलेरा और वैभव गहलोत ने बैंक खाते में निवेश पर मासिक रिटर्न ट्रांसफर कर दिया था। इसे देखते हुए कई और सहयोगियों ने भी निवेश किया। आरोप है कि सचिन और वैभव ने अचानक मंथली भुगतान बंद कर दिया। एफआईआर में वैभव गहलोत पर जुआ खेलने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने कहा कि मुझे सूचना मिली कि वैभव गहलोत टी-20 क्रिकेट मैचों में 'बैट' लगाने के लिए अपना मासिक रिफंड इस पर खर्च करता है। इस बीच सचिन ने भुगतान करने के लिए समय मांगा। बाद में सचिन ने पैसा मांगने पर गालियां देनी शुरू कर दीं। उसने फोन उठाना भी बंद कर दिया।
सीएम अशोक गहलोत के बेटे और आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत के खिलाफ महाराष्ट्र के नासिक में धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज होने पर सियासत गरमा गई है। राजस्थान बीजेपी के सीनियर लीडर और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया ने कहा है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अपने आप को महात्मा गांधी को मानने वाला और उनकी जैसे जिन्दगी जीने वाले बताते हैं। राजस्थान के गांधी के बच्चे वैभव गहलोत के खिलाफ धारा 156-3 में कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के लिए नासिक के गंगापुर थाने के लिए आदेश जारी किए हैं। कटारिया ने कहा आज कांग्रेस की जो दुर्गति हुई है, राजनीति में उसमें सबसे बड़ा कारण मुझे यह समझ आता है कि कांग्रेस पार्टी, इसके नेता और उनके परिवार वाले इस देश को लूटने में जिस तरह से जुटे रहे हैं। उसके कारण पार्टी की आज दुर्गति हुई है। उत्तरप्रदेश जैसे राज्य में कांग्रेस के केवल 2 नमूने रह गए।
केन्द्रीय मंत्री और जोधपुर से सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी वैभव गहलोत का नाम ई-टॉयलेट टेंडर घोटाले में शामिल होने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा है। गजेन्द्र सिंह ने तंज कसा है कि पुत्रमोह धृतराष्ट्र बना देता है। ट्वीट कर शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव गहलोत पर राजस्थान में ई- टायलेट टेंडर घोटाले में शामिल होने का आरोप गंभीर है। गहलोत साहब को सफाई में ध्यान रखना होगा कि मामला कोर्ट के कहने पर दर्ज हुआ है। देखना होगा सीएम साहब बेटे को बचाने के लिए हमेशा की तरह पूरी सरकार लगा देंगे या सच कहेंगे। शेखावत ने कहा कि वैसे मुझे नहीं लगता वे सच कहेंगे। दूसरी तरफ वैभव गहलोत ने सफाई दी कि आरोप गलत है। इससे उनका कोई संबंध नहीं है।
उल्लेखनीय है कि पांच राज्यों में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद अब साल 2023 में राजस्थान में चुनाव है, जिसे लेकर बीजेपी- कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन इसी बीच सरकार पर ई- टॉयलेट को लेकर लगे भ्रष्टाचार के आरोप के बाद जानकारों का कहना है कि सीएम गहलोत पर यह मुद्दा भारी पड़ सकता है। इसके अलावा बीजेपी दूसरे भी ऐसे कई मुद्दे है, जिसे चुनावी समर में सीएम और सरकार के खिलाफ इस्तेमाल कर सकती है, इस रिपोर्ट में पढ़िये कांग्रेस सरकार बनने के बाद सीएम गहलोत पर कौन- कौन से बड़े आरोप लगे हैं।
सीएम गहलोत पर पहले भी कई बार पुत्रमोह के आरोप लग चुके हैं। वैभव को राजस्थान किक्रेट एसोसिएशन अध्यक्ष बनाए जाने पर भी यह आरोप लगा था। दरअसल लंबे अरसे के बाद जब आरसीए के चुनाव हुए, तब वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी और सीएम गहलोत के बेटे वैभव ने अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी पेश की। इस दौरान सीएम गहलोत और निवर्तमान अध्यक्ष सी पी जोशी ने सियासी दांवपेंच खेलकर को वैभव को अध्यक्ष बना दिया। इस दौरान डूडी गुट ने निवार्चन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग, मतदाताओं पर दबाव बनाने तथा प्रॉक्सी वोट करने के आरोप लगाये, लेकिन इन सभी आरोपों को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी पी जोशी ने सिरे से खारिज कर दिया था।
राजस्थान में शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर भी बवाल मचा हुआ है। इसमें पेपर लीक प्रमाणित होने के बावजूद सरकार सीबीआई जांच नहीं करा रही है। बीजेपी का आरोप है कि एसओजी छोटी मछलियों को फंसाकर वाहवाही लूट रही है, जबकि इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड को बचाया जा रहा है। राजस्थान एलिजिबिलिटी एग्जामिनेशन फॉर टीचर यानी रीट मामले में बीजेपी की आरोप है कि इस भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक के तार सीएमओ और गहलोत के करीबियों तक जुड़े हुए हैं। शिक्षक भर्ती में पेपर लीक होने की बात सामने आने के बाद एसओजी ने 40 से ज्यादा गिरफ्तारियां की है।
केंद्र सरकार के पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करके सस्ता करने के फैसले के बाद गहलोत ने प्रदेश में वैट कम करने से साफ मना कर दिया। सीएम केंद्र को ही एक्साइज ड्यूटी और कम करने का कहते रहे। प्रदेश में सबसे ज्यादा पेट्रोल-डीजल था। कांग्रेस समर्थित राज्यों में भी वैट कम करने से सरकार पर सवाल खड़े हुए। बीजेपी ने भी इसे मुद्दा बनाया। पड़ोसी और कांग्रेस शासित राज्य पंजाब ने एकदम से दाम घटा दिए। चौतरफा दबाव के बाद 9 नवंबर को जोधपुर जिले के दौरे में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने की घोषणा कर दी। बाद में वैट घटाकर पेट्रोल-डीजल पर 5 रुपए की कमी की गई। इसी प्रकार सचिन पायलट कैंप की बगावत के वक्त जिन दो मंत्रियों विश्वेन्द्र सिंह और रमेश मीणा को पद से हटा दिया था। इसका मुद्दा बनने और हाइकमान के दबाव के बाद गहलोत ने ही मंत्रिमंडल विस्तार के समय 16 माह बाद फिर से दोनों विधायकों को मंत्री बनाना पड़ा।
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प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत पर ई- टॉयलेट टेंडर के जरिए धोखाधड़ी करने के आरोप के बाद राजस्थान में सियासी पारा चढ़ गया है। राजनीति गर्माने के बीच केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस खुलासे के बाद सीएम गहलोत पर पुत्रमोह का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने इसे लेकर ट्वीट करते हुए सीएम गहलोत से सफाई मांगी है। विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने मुख्यमंत्री गहलोत से इस बारे में जवाब मांगा है। कटारिया ने सीधे सीएम पर हमला बोलते हुए तंज कसा कि राजस्थान के गांधी बताएं कि उनके बेटे पर टेंडर दिलाने में ठगी का करोड़ों का केस कैसे दर्ज हुआ है? बीजेपी नेताओं की ओर से पूरे मामले में सरकार और सीएम को घेरने के लिए एक के बाद एक ट्वीट किए जा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस- बीजेपी के बीच अब राजस्थान में यह प्रकरण बड़े सियासी मुद्दे के तौर पर उभर कर सामने आएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के खिलाफ महाराष्ट्र में दर्ज एफआईआर में वैभव पर नासिक के कारोबारी सुशील भालचंद्र पाटिल ने ई-टॉयलेट सहित सरकारी विभागों में टेंडर दिलाने के नाम पर छः करोड़ अस्सी लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। सुशील ने नासिक के गंगापुर थाने में वैभव गहलोत सहित चौदह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज हुआ है। मुख्य आरोपी गुजरात कांग्रेस के सचिव सचिन पुरुषोत्तम वालेरा हैं। वालेरा के पिता पुरुषोत्तम भाई वालेरा भी वरिष्ठ कांग्रेस नेता रहे हैं। नासिक में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, सचिन वालेरा ने खुद को एडवरटाइजिंग कारोबारी बताते हुए झांसा दिया कि उसके तेरह राज्यों में पेट्रोल पंपों पर विज्ञापन का कॉन्ट्रैक्ट है। उसने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके बेटे वैभव से अच्छे संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि वो राजस्थान के मुख्यमंत्री के आर्थिक मामले भी देखता है। सचिन ने उसके काम में निवेश करने पर करोड़ों के मुनाफे का भरोसा दिलाया और कहा कि आपको केवल नाम के लिए टेंडर में भाग लेना है। बाकी का काम वैभव गहलोत देखेंगे। सचिन ने इस निवेश के बारे में सारी जानकारी दी। राजस्थान सरकार द्वारा जारी किए गए सर्कुलर दिखाए, जो बाद में फर्जी पाए गए थे। एफआईआर के मुताबिक सुशील पाटिल ने सचिन वलेरा के उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में अलग-अलग समय पर पैसे ट्रांसफर कर दिए। यह रकम छः करोड़ अस्सी लाख रुपए के आसपास थी। उस समय कई महीने तक सचिन वलेरा और वैभव गहलोत ने बैंक खाते में निवेश पर मासिक रिटर्न ट्रांसफर कर दिया था। इसे देखते हुए कई और सहयोगियों ने भी निवेश किया। आरोप है कि सचिन और वैभव ने अचानक मंथली भुगतान बंद कर दिया। एफआईआर में वैभव गहलोत पर जुआ खेलने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने कहा कि मुझे सूचना मिली कि वैभव गहलोत टी-बीस क्रिकेट मैचों में 'बैट' लगाने के लिए अपना मासिक रिफंड इस पर खर्च करता है। इस बीच सचिन ने भुगतान करने के लिए समय मांगा। बाद में सचिन ने पैसा मांगने पर गालियां देनी शुरू कर दीं। उसने फोन उठाना भी बंद कर दिया। सीएम अशोक गहलोत के बेटे और आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत के खिलाफ महाराष्ट्र के नासिक में धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज होने पर सियासत गरमा गई है। राजस्थान बीजेपी के सीनियर लीडर और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया ने कहा है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अपने आप को महात्मा गांधी को मानने वाला और उनकी जैसे जिन्दगी जीने वाले बताते हैं। राजस्थान के गांधी के बच्चे वैभव गहलोत के खिलाफ धारा एक सौ छप्पन-तीन में कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के लिए नासिक के गंगापुर थाने के लिए आदेश जारी किए हैं। कटारिया ने कहा आज कांग्रेस की जो दुर्गति हुई है, राजनीति में उसमें सबसे बड़ा कारण मुझे यह समझ आता है कि कांग्रेस पार्टी, इसके नेता और उनके परिवार वाले इस देश को लूटने में जिस तरह से जुटे रहे हैं। उसके कारण पार्टी की आज दुर्गति हुई है। उत्तरप्रदेश जैसे राज्य में कांग्रेस के केवल दो नमूने रह गए। केन्द्रीय मंत्री और जोधपुर से सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी वैभव गहलोत का नाम ई-टॉयलेट टेंडर घोटाले में शामिल होने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा है। गजेन्द्र सिंह ने तंज कसा है कि पुत्रमोह धृतराष्ट्र बना देता है। ट्वीट कर शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव गहलोत पर राजस्थान में ई- टायलेट टेंडर घोटाले में शामिल होने का आरोप गंभीर है। गहलोत साहब को सफाई में ध्यान रखना होगा कि मामला कोर्ट के कहने पर दर्ज हुआ है। देखना होगा सीएम साहब बेटे को बचाने के लिए हमेशा की तरह पूरी सरकार लगा देंगे या सच कहेंगे। शेखावत ने कहा कि वैसे मुझे नहीं लगता वे सच कहेंगे। दूसरी तरफ वैभव गहलोत ने सफाई दी कि आरोप गलत है। इससे उनका कोई संबंध नहीं है। उल्लेखनीय है कि पांच राज्यों में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद अब साल दो हज़ार तेईस में राजस्थान में चुनाव है, जिसे लेकर बीजेपी- कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन इसी बीच सरकार पर ई- टॉयलेट को लेकर लगे भ्रष्टाचार के आरोप के बाद जानकारों का कहना है कि सीएम गहलोत पर यह मुद्दा भारी पड़ सकता है। इसके अलावा बीजेपी दूसरे भी ऐसे कई मुद्दे है, जिसे चुनावी समर में सीएम और सरकार के खिलाफ इस्तेमाल कर सकती है, इस रिपोर्ट में पढ़िये कांग्रेस सरकार बनने के बाद सीएम गहलोत पर कौन- कौन से बड़े आरोप लगे हैं। सीएम गहलोत पर पहले भी कई बार पुत्रमोह के आरोप लग चुके हैं। वैभव को राजस्थान किक्रेट एसोसिएशन अध्यक्ष बनाए जाने पर भी यह आरोप लगा था। दरअसल लंबे अरसे के बाद जब आरसीए के चुनाव हुए, तब वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी और सीएम गहलोत के बेटे वैभव ने अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी पेश की। इस दौरान सीएम गहलोत और निवर्तमान अध्यक्ष सी पी जोशी ने सियासी दांवपेंच खेलकर को वैभव को अध्यक्ष बना दिया। इस दौरान डूडी गुट ने निवार्चन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग, मतदाताओं पर दबाव बनाने तथा प्रॉक्सी वोट करने के आरोप लगाये, लेकिन इन सभी आरोपों को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी पी जोशी ने सिरे से खारिज कर दिया था। राजस्थान में शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर भी बवाल मचा हुआ है। इसमें पेपर लीक प्रमाणित होने के बावजूद सरकार सीबीआई जांच नहीं करा रही है। बीजेपी का आरोप है कि एसओजी छोटी मछलियों को फंसाकर वाहवाही लूट रही है, जबकि इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड को बचाया जा रहा है। राजस्थान एलिजिबिलिटी एग्जामिनेशन फॉर टीचर यानी रीट मामले में बीजेपी की आरोप है कि इस भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक के तार सीएमओ और गहलोत के करीबियों तक जुड़े हुए हैं। शिक्षक भर्ती में पेपर लीक होने की बात सामने आने के बाद एसओजी ने चालीस से ज्यादा गिरफ्तारियां की है। केंद्र सरकार के पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करके सस्ता करने के फैसले के बाद गहलोत ने प्रदेश में वैट कम करने से साफ मना कर दिया। सीएम केंद्र को ही एक्साइज ड्यूटी और कम करने का कहते रहे। प्रदेश में सबसे ज्यादा पेट्रोल-डीजल था। कांग्रेस समर्थित राज्यों में भी वैट कम करने से सरकार पर सवाल खड़े हुए। बीजेपी ने भी इसे मुद्दा बनाया। पड़ोसी और कांग्रेस शासित राज्य पंजाब ने एकदम से दाम घटा दिए। चौतरफा दबाव के बाद नौ नवंबर को जोधपुर जिले के दौरे में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने की घोषणा कर दी। बाद में वैट घटाकर पेट्रोल-डीजल पर पाँच रुपयापए की कमी की गई। इसी प्रकार सचिन पायलट कैंप की बगावत के वक्त जिन दो मंत्रियों विश्वेन्द्र सिंह और रमेश मीणा को पद से हटा दिया था। इसका मुद्दा बनने और हाइकमान के दबाव के बाद गहलोत ने ही मंत्रिमंडल विस्तार के समय सोलह माह बाद फिर से दोनों विधायकों को मंत्री बनाना पड़ा।
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ज्ञानवापी और मथुरा की शाही मस्जिद ईदगाह के बाद अब हिंदू पक्ष ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में ही एक अन्य मस्जिद को लेकर भी दावा पेश कर दिया है। अदालत इस पर 26 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल मामले) संजय गौड़ ने बताया कि अखिल भारत हिंदू महासभा के कोषाध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने सोमवार को सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) ज्योति सिंह की अदालत में नया दावा पेश करते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की 13. 37 एकड़ भूमि के दायरे में पूर्वी दिशा में स्थित एक अन्य मस्जिद को हटाने की मांग की है।
इस मस्जिद को मीना मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। गौड़ के मुताबिक, वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि द्वारा विरोध किए जाने के बाद अदालत ने प्रतिवादियों-उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और शाही ईदगाह की इंतजामिया कमेटी को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की है।
वही, गौड़ ने बताया कि शर्मा ने अपने दावे में कहा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने कृष्ण जन्मभूमि के मंदिर को तुड़वाकर वहां शाही ईदगाह को अतिक्रमण के रूप में खड़ा किया। शर्मा ने कहा है कि इसके बाद औरंगजेब के कथित वंशजों ने आजाद भारत में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर की पूर्वी सीमा पर मीना मस्जिद का निर्माण कर लिया।
हालांकि, शर्मा ने दावा किया है कि मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि की जमीन मदन मोहन मालवीय ने खरीदी थी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण कराया था, जबकि मुस्लिम पक्ष कृष्ण जन्मभूमि मंदिर को घेरकर कब्जा करना चाह रहा है। उन्होंने कहा है कि मुस्लिम पक्ष ने कृष्ण जन्मभूमि की जमीन पर उत्तर दिशा में शाही ईदगाह और पूर्वी सीमा पर कशिश मीना मस्जिद का निर्माण कर लिया।
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ज्ञानवापी और मथुरा की शाही मस्जिद ईदगाह के बाद अब हिंदू पक्ष ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में ही एक अन्य मस्जिद को लेकर भी दावा पेश कर दिया है। अदालत इस पर छब्बीस अक्टूबर को सुनवाई करेगी। जिला शासकीय अधिवक्ता संजय गौड़ ने बताया कि अखिल भारत हिंदू महासभा के कोषाध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने सोमवार को सिविल न्यायाधीश ज्योति सिंह की अदालत में नया दावा पेश करते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की तेरह. सैंतीस एकड़ भूमि के दायरे में पूर्वी दिशा में स्थित एक अन्य मस्जिद को हटाने की मांग की है। इस मस्जिद को मीना मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। गौड़ के मुताबिक, वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि द्वारा विरोध किए जाने के बाद अदालत ने प्रतिवादियों-उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और शाही ईदगाह की इंतजामिया कमेटी को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए छब्बीस अक्टूबर की तारीख तय की है। वही, गौड़ ने बताया कि शर्मा ने अपने दावे में कहा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने कृष्ण जन्मभूमि के मंदिर को तुड़वाकर वहां शाही ईदगाह को अतिक्रमण के रूप में खड़ा किया। शर्मा ने कहा है कि इसके बाद औरंगजेब के कथित वंशजों ने आजाद भारत में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर की पूर्वी सीमा पर मीना मस्जिद का निर्माण कर लिया। हालांकि, शर्मा ने दावा किया है कि मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि की जमीन मदन मोहन मालवीय ने खरीदी थी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण कराया था, जबकि मुस्लिम पक्ष कृष्ण जन्मभूमि मंदिर को घेरकर कब्जा करना चाह रहा है। उन्होंने कहा है कि मुस्लिम पक्ष ने कृष्ण जन्मभूमि की जमीन पर उत्तर दिशा में शाही ईदगाह और पूर्वी सीमा पर कशिश मीना मस्जिद का निर्माण कर लिया।
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पितृ दिवस यूं तो जैविक पिताओं को धन्यवाद देने के लिए है, किंतु चमचत्व को प्राप्त हो चुके कई चापलूस इस दिन ठेके देने वाले, टिकट बांटने वाले, कमीशन खिलाने वाले अपने आका को बाप मानते हुए धन्यवाद देते हैं. वे बाप के चरणों में लोटायमान होकर आशीर्वाद की गुहार लगाते हैं.
भारत एक उत्सवधर्मी देश है. साल में जितने दिन नहीं होते, उससे ज्यादा हिंदुस्तान में त्यौहार होते हैं. लेकिन, जिस तरह गोरी चमड़ी और गोरों की भाषा के मोहपाश में हम लोग आज तक बंधे हुए हैं, उसमें उनके छोड़े त्यौहार भी हमें अपने लगने लगे हैं. हाल ये हो गया है कि अगर वैलेंटाइंस डे, मदर्स डे और फादर्स डे मनाकर उसकी फोटो फेसबुक-ट्विटर पर न डालो तो लोग रूढ़िवादी समझने लगते हैं. वैलेंटाइंस और मदर्स डे बीत चुका है, और पिता को समर्पित फादर्स डे देहरी पर खड़ा है.
बाजार ने बताया है कि पितृ दिवस मनाना जरूरी है. लेकिन, आजकल बहुत कंफ्यूजन होता है कि बाप कौन है? छोटे परिवारों का जमाना है, जिसमें कई बाप बच्चे की जिद के आगे बेबस नजर आते हैं. एक जमाना था साहब, जब पिता का रौब हुआ करता था. उस जमाने में ठुकाई-पिटाई को संस्कारों की श्रेणी में रखा जाता था और भारतीय पिता बच्चों को संस्कारी बनाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखते थे. बच्चे बिना कोरोना के कहर के पिता से सुरक्षित दूरी बनाकर रखते थे. पिटाई के मामले में बच्चे भाग्य पर निर्भर रहा करते थे. मुहल्ले में दूसरे बच्चों से पिटकर बच्चा आया तो कई बाप बच्चे को ही फिर पीटते थे कि पिटकर क्यों आया?
पीटने वाला हमेशा बाप कहलाता था. इसी संदर्भ में एक मुहावरा चल निकला- हर बाप का एक बाप होता है. पितृ दिवस यूं तो जैविक पिताओं को धन्यवाद देने के लिए है, किंतु चमचत्व को प्राप्त हो चुके कई चापलूस इस दिन ठेके देने वाले, टिकट बांटने वाले, कमीशन खिलाने वाले अपने आका को बाप मानते हुए धन्यवाद देते हैं. वे बाप के चरणों में लोटायमान होकर आशीर्वाद की गुहार लगाते हैं. ऐसे चमचों का मानना होता है कि जैविक पिता सिर्फ जन्म देने के चक्कर में कुछ ज्यादा क्र ेडिट लेते हैं, जबकि असली आशीर्वाद दूसरे पिता से मिलता है.
पिता की भूमिका में होने वाला शख्स ज्ञान बांटने के लिए आॅथराइज होता है. राजनीतिक दलों में आलाकमान सबका बाप होता है, क्योंकि वो टिकट बांटता है. प्राइवेट दफ्तरों में बॉस ही पिता तुल्य माना जाता है. वो सर्वज्ञान संपन्न पिता होता है, जिसके ज्ञान को सहायक कर्मचारी इतनी शिद्दत से रात 11 बजे भी सुनते हैं कि वास्तविक पिता फुटेज देखकर उलझन में पड़ सकते हैं कि उन बच्चों का वास्तविक पिता है कौन?
उधर गरीबों को अरसे से एक पिता की तलाश है, जो वादों से इतर रोटी दे और अपनी छांव में इन्हें नागरिक होने का अहसास कराए. कितने ही फादर्स डे बीत गए, इन गरीबों को वो पिता नहीं मिला.
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पितृ दिवस यूं तो जैविक पिताओं को धन्यवाद देने के लिए है, किंतु चमचत्व को प्राप्त हो चुके कई चापलूस इस दिन ठेके देने वाले, टिकट बांटने वाले, कमीशन खिलाने वाले अपने आका को बाप मानते हुए धन्यवाद देते हैं. वे बाप के चरणों में लोटायमान होकर आशीर्वाद की गुहार लगाते हैं. भारत एक उत्सवधर्मी देश है. साल में जितने दिन नहीं होते, उससे ज्यादा हिंदुस्तान में त्यौहार होते हैं. लेकिन, जिस तरह गोरी चमड़ी और गोरों की भाषा के मोहपाश में हम लोग आज तक बंधे हुए हैं, उसमें उनके छोड़े त्यौहार भी हमें अपने लगने लगे हैं. हाल ये हो गया है कि अगर वैलेंटाइंस डे, मदर्स डे और फादर्स डे मनाकर उसकी फोटो फेसबुक-ट्विटर पर न डालो तो लोग रूढ़िवादी समझने लगते हैं. वैलेंटाइंस और मदर्स डे बीत चुका है, और पिता को समर्पित फादर्स डे देहरी पर खड़ा है. बाजार ने बताया है कि पितृ दिवस मनाना जरूरी है. लेकिन, आजकल बहुत कंफ्यूजन होता है कि बाप कौन है? छोटे परिवारों का जमाना है, जिसमें कई बाप बच्चे की जिद के आगे बेबस नजर आते हैं. एक जमाना था साहब, जब पिता का रौब हुआ करता था. उस जमाने में ठुकाई-पिटाई को संस्कारों की श्रेणी में रखा जाता था और भारतीय पिता बच्चों को संस्कारी बनाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखते थे. बच्चे बिना कोरोना के कहर के पिता से सुरक्षित दूरी बनाकर रखते थे. पिटाई के मामले में बच्चे भाग्य पर निर्भर रहा करते थे. मुहल्ले में दूसरे बच्चों से पिटकर बच्चा आया तो कई बाप बच्चे को ही फिर पीटते थे कि पिटकर क्यों आया? पीटने वाला हमेशा बाप कहलाता था. इसी संदर्भ में एक मुहावरा चल निकला- हर बाप का एक बाप होता है. पितृ दिवस यूं तो जैविक पिताओं को धन्यवाद देने के लिए है, किंतु चमचत्व को प्राप्त हो चुके कई चापलूस इस दिन ठेके देने वाले, टिकट बांटने वाले, कमीशन खिलाने वाले अपने आका को बाप मानते हुए धन्यवाद देते हैं. वे बाप के चरणों में लोटायमान होकर आशीर्वाद की गुहार लगाते हैं. ऐसे चमचों का मानना होता है कि जैविक पिता सिर्फ जन्म देने के चक्कर में कुछ ज्यादा क्र ेडिट लेते हैं, जबकि असली आशीर्वाद दूसरे पिता से मिलता है. पिता की भूमिका में होने वाला शख्स ज्ञान बांटने के लिए आॅथराइज होता है. राजनीतिक दलों में आलाकमान सबका बाप होता है, क्योंकि वो टिकट बांटता है. प्राइवेट दफ्तरों में बॉस ही पिता तुल्य माना जाता है. वो सर्वज्ञान संपन्न पिता होता है, जिसके ज्ञान को सहायक कर्मचारी इतनी शिद्दत से रात ग्यारह बजे भी सुनते हैं कि वास्तविक पिता फुटेज देखकर उलझन में पड़ सकते हैं कि उन बच्चों का वास्तविक पिता है कौन? उधर गरीबों को अरसे से एक पिता की तलाश है, जो वादों से इतर रोटी दे और अपनी छांव में इन्हें नागरिक होने का अहसास कराए. कितने ही फादर्स डे बीत गए, इन गरीबों को वो पिता नहीं मिला.
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(५४) उपर्युक्त विवेचनसे यह सिद्ध हुआ कि अनुभव से सस्कार और संस्कार अनुभवकी सत्यताका प्रवाह अज्ञान करके चल पड़ता है और इस सत्यबुद्धिसे कर्ता-भोक्तापन तथा कर्ता-भोक्तापनसे सत्यबुद्धि परस्पर दृढ होती चली जाती है। इस प्रकार अहुए कर्तृत्वाभिमान करके इस मिथ्या प्रवाहमे पड़ा हुआ यह जीव तृणके समान भटकता फिरता है, कही विश्राम नही पाता । इस स्थलपर फिर स्वाभाविक ही यह प्रश्न होता है कि मिथ्यामे सत्यबुद्धि हुई तो क्योकर ? और आप ही अपने गलेमे यह बन्धन डाला गया तो क्योकर ? इसका रहस्य यह है कि मायाके राज्य मे द्रष्टा - जीव ( अविद्या विशिष्ट-चेतन ) ही दृश्यरूप परिणामको प्राप्त होता है, जैसे मृत्तिका ही घटादि परिणामको प्राप्त होती है । आप ही देखनेवाला होता है और आप ही देखे जानेवाला, आप ही ज्ञाता होता है और आप ही ज्ञेय । जैसे रज्जुमे अविद्यावृत्ति आप ही सर्पाकार और ही जानाकार परिणामको प्राप्त होती है, अथवा जैसे स्वप्नमे यह जीव आप ही ज्ञानाकार व विषयाकार रूपको धारण करता है, जैसे दर्पण वृत्ति
आप ही मुखाकार व ज्ञानाकार होती है । ठीक इसी प्रकार यह द्रष्टा - जीव ही जाग्रत्मे ज्ञानाकार व विषयाकार परिणामको प्राप्त होता है । अर्थात् यह 'प्राज्ञ' जीव ही 'विश्व' रूपमे परिणत होता है और अपनी दृष्टिमात्र से अन्त करणको प्रमाता और इन्द्रियों को प्रमाणता का प्रमाणपत्र देता है। सूर्यको प्रकाश, चन्द्रमाको शीतलता, अग्निको उष्णता और जलको द्रवता प्रदान करता है । आकाशमे शून्यता, वायुमे स्पन्दता, पृथ्वी व पठाडोमे जडना सिद्ध करनेवाला यह आप ही है। रूपोको सौन्दर्य, फूलोको सुगन्ध,
जाता है, अपने पजोसे ग्राप ही पोरीको पकड़ लेता है और जानता है कि मुझे किसीने पकड़ लिया है। इतनेमे चिड़ीमार प्राकर उसप
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उपर्युक्त विवेचनसे यह सिद्ध हुआ कि अनुभव से सस्कार और संस्कार अनुभवकी सत्यताका प्रवाह अज्ञान करके चल पड़ता है और इस सत्यबुद्धिसे कर्ता-भोक्तापन तथा कर्ता-भोक्तापनसे सत्यबुद्धि परस्पर दृढ होती चली जाती है। इस प्रकार अहुए कर्तृत्वाभिमान करके इस मिथ्या प्रवाहमे पड़ा हुआ यह जीव तृणके समान भटकता फिरता है, कही विश्राम नही पाता । इस स्थलपर फिर स्वाभाविक ही यह प्रश्न होता है कि मिथ्यामे सत्यबुद्धि हुई तो क्योकर ? और आप ही अपने गलेमे यह बन्धन डाला गया तो क्योकर ? इसका रहस्य यह है कि मायाके राज्य मे द्रष्टा - जीव ही दृश्यरूप परिणामको प्राप्त होता है, जैसे मृत्तिका ही घटादि परिणामको प्राप्त होती है । आप ही देखनेवाला होता है और आप ही देखे जानेवाला, आप ही ज्ञाता होता है और आप ही ज्ञेय । जैसे रज्जुमे अविद्यावृत्ति आप ही सर्पाकार और ही जानाकार परिणामको प्राप्त होती है, अथवा जैसे स्वप्नमे यह जीव आप ही ज्ञानाकार व विषयाकार रूपको धारण करता है, जैसे दर्पण वृत्ति आप ही मुखाकार व ज्ञानाकार होती है । ठीक इसी प्रकार यह द्रष्टा - जीव ही जाग्रत्मे ज्ञानाकार व विषयाकार परिणामको प्राप्त होता है । अर्थात् यह 'प्राज्ञ' जीव ही 'विश्व' रूपमे परिणत होता है और अपनी दृष्टिमात्र से अन्त करणको प्रमाता और इन्द्रियों को प्रमाणता का प्रमाणपत्र देता है। सूर्यको प्रकाश, चन्द्रमाको शीतलता, अग्निको उष्णता और जलको द्रवता प्रदान करता है । आकाशमे शून्यता, वायुमे स्पन्दता, पृथ्वी व पठाडोमे जडना सिद्ध करनेवाला यह आप ही है। रूपोको सौन्दर्य, फूलोको सुगन्ध, जाता है, अपने पजोसे ग्राप ही पोरीको पकड़ लेता है और जानता है कि मुझे किसीने पकड़ लिया है। इतनेमे चिड़ीमार प्राकर उसप
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अगरतला(एजेंसी/वार्ता): त्रिपुरा में आठ मार्च को नई सरकार के शपथ लेने की संभावना जतायी गयर है। राजभवन में राज्यपाल रमैश बैस को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद शुक्रवार को राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेतृत्व वाली सरकार के निवर्तमान मुख्यमंत्री माणिक साहा ने यह जानकारी दी।
डॉ. साहा ने बताया कि भाजपा विधायक दल की बैठक में पार्टी के नेता चयन किया जाएगा। इसके बाद सरकार के गठन का दावा किया जाएगा। फिर शपथ ग्रहण समारोह की घोषणा सभी औपचारिकताओं के बाद की जाएगी।
पार्टी के सूत्रों ने हालांकि कहा कि भाजपा के केंद्रीय नेताओं ने तीन पूर्वोत्तर राज्यों के नेताओं और असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के साथ नयी दिल्ली में एक बैठक बुलाई और राज्यों में मंत्रिमंडलों के गठन का फैसला किया और आगामी सरकार के लिए रणनीतियों को अंतिम रूप दिया गया है।
-(एजेंसी/वार्ता)
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अगरतला: त्रिपुरा में आठ मार्च को नई सरकार के शपथ लेने की संभावना जतायी गयर है। राजभवन में राज्यपाल रमैश बैस को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद शुक्रवार को राज्य में भारतीय जनता पार्टी की नेतृत्व वाली सरकार के निवर्तमान मुख्यमंत्री माणिक साहा ने यह जानकारी दी। डॉ. साहा ने बताया कि भाजपा विधायक दल की बैठक में पार्टी के नेता चयन किया जाएगा। इसके बाद सरकार के गठन का दावा किया जाएगा। फिर शपथ ग्रहण समारोह की घोषणा सभी औपचारिकताओं के बाद की जाएगी। पार्टी के सूत्रों ने हालांकि कहा कि भाजपा के केंद्रीय नेताओं ने तीन पूर्वोत्तर राज्यों के नेताओं और असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के साथ नयी दिल्ली में एक बैठक बुलाई और राज्यों में मंत्रिमंडलों के गठन का फैसला किया और आगामी सरकार के लिए रणनीतियों को अंतिम रूप दिया गया है। - यह भी पढ़ें :- ड्रैगन फ्रूट के ये तीन फायदे जानकर आप हो जाएंगे हैरान, सेवन करने से इम्युनिटी होगी बूस्ट!
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नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत दी है। आज दोनों प्रमुख इंडेक्स हरे निशान पर खुले। बंबई शेयर बाजार का सूचकांक सेंसेक्स 50 अंकों की शुरुआती तेजी देखी गई। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 9200 के महत्वपूणर् स्तर के ऊपर खुला।
फिलहाल (सुबह 10. 05 बजे) बीएससी सेंसेक्स 52 अंकों की तेजी के साथ 29758 पर ट्रेड कर रहा है। वहीं निफ्टी 14 अंकों की तेजी के साथ 9213 पर है। बाजार के शुरुआती घंटे में सेंसेक्स में 120 अंकों की तेजी भी देखरी गई है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी आई है। इसके अलावा आईटी, ऑटो, बैंकिंग, मेटल, कैपिटल गुड्स, ऑयल एंड गैस और पावर शेयरों में खरीदारी आई है। बैंक निफ्टी 0. 2 फीसदी बढ़कर 21,4173. 5 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
आज सबसे ज्यादा चलने वाले शेयरों में फार्मा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मार्कसन फार्मा रही है, यह शेयर अभी करीब 6 फीसदी ऊपर है। वहीं डिवीज लैब 4. 1 फीसदी, अदानी ट्रांसमिशन 3. 75 फीसदी, जेकेटायर्स 3. 25 फीसदी और रेलिगेयर 3. 11 फीसदी ऊपर हैं।
आज की तेजी के बावजूद कुछ शेयरों में दबाव देखने को मिल रहा है। इसमें सोभा डेवलपर्स का शेयर सबसे ज्यादा 7. 59 फीसदी नीचे है। वहीं रिलायंस कम्युनिकेशंस, एडलवाइज फाइनेंस, डेल्टा कॉर्प और श्रीराम सिटी यूनियन का शेयर दो फीसदी से ज्यादा टूटे हैं।
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नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत दी है। आज दोनों प्रमुख इंडेक्स हरे निशान पर खुले। बंबई शेयर बाजार का सूचकांक सेंसेक्स पचास अंकों की शुरुआती तेजी देखी गई। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी नौ हज़ार दो सौ के महत्वपूणर् स्तर के ऊपर खुला। फिलहाल बीएससी सेंसेक्स बावन अंकों की तेजी के साथ उनतीस हज़ार सात सौ अट्ठावन पर ट्रेड कर रहा है। वहीं निफ्टी चौदह अंकों की तेजी के साथ नौ हज़ार दो सौ तेरह पर है। बाजार के शुरुआती घंटे में सेंसेक्स में एक सौ बीस अंकों की तेजी भी देखरी गई है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी आई है। इसके अलावा आईटी, ऑटो, बैंकिंग, मेटल, कैपिटल गुड्स, ऑयल एंड गैस और पावर शेयरों में खरीदारी आई है। बैंक निफ्टी शून्य. दो फीसदी बढ़कर इक्कीस,चार हज़ार एक सौ तिहत्तर. पाँच के स्तर पर कारोबार कर रहा है। आज सबसे ज्यादा चलने वाले शेयरों में फार्मा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मार्कसन फार्मा रही है, यह शेयर अभी करीब छः फीसदी ऊपर है। वहीं डिवीज लैब चार. एक फीसदी, अदानी ट्रांसमिशन तीन. पचहत्तर फीसदी, जेकेटायर्स तीन. पच्चीस फीसदी और रेलिगेयर तीन. ग्यारह फीसदी ऊपर हैं। आज की तेजी के बावजूद कुछ शेयरों में दबाव देखने को मिल रहा है। इसमें सोभा डेवलपर्स का शेयर सबसे ज्यादा सात. उनसठ फीसदी नीचे है। वहीं रिलायंस कम्युनिकेशंस, एडलवाइज फाइनेंस, डेल्टा कॉर्प और श्रीराम सिटी यूनियन का शेयर दो फीसदी से ज्यादा टूटे हैं।
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19वीं शताब्वी भारत में सामाजिक-राजनीतिक सुधार
भारत के एक सुधारक न्यायमूर्ति तेलंग के शब्दों में, "ये हरेक का कर्तव्य है कि वह अतीत को समझे और उसका मूल्यांकन करे और उसमें से उन चीजों को ही चुने जो संभव हो और आज की बदली हुई परिस्थितियों पर लागू हो। यह सब कुछ संयम, बुद्धिमत्ता और सही दिशा के साथ किया जाना था।
3.3.2 परिवर्तन और सुधारक का विचार
सुधारक विकास, परिवर्तन और प्रगति के नियम में विश्वास करते थे। वे कर्म अथवा पुनर्जन्म के हिन्दू सिद्धांत के आलोचक थे, जिसके अनुसार वर्तमान दुर्दशा को हमारे पिछले जीवन के कार्यों (कर्म) का कारण बताया जाता था और "माया" का विचार अथवा भौतिक संसार के भ्रांतिपूर्ण विचार के कारण ऐसे विश्वासों से लोग जीवन को निष्क्रिय होकर कबूल कर लेते थे, जो उनकी सृजनात्मक क्षमता को खत्म कर देता था। इसके बजाय सुधारक मानते थे कि व्यक्ति अपनी प्रगति को स्वयं तय कर सकता है और वह परिवर्तन का कारण भी स्वयं है। यह मानना कि हमारा वर्तमान हमारे अतीत से तय हुआ है और इस कारण हमें इसे चुपचाप स्वीकार कर लेना चाहिए का अर्थ हुआ, एक प्रेरणाहीन आदर्श में विश्वास करना, जो कि केवल यथास्थिति को बना कर रखेगा।
सुधारक प्रगति में विश्वास करते थे। दरअसल गोपाल कृष्ण गोखले प्रगति को एक ऐसा क्रांतिकारी विचार मानते थे, जिसे हमने पश्चिम से पाया । कोई व्यवस्था जो परिवर्तन से इंकार करती हो, और नई परिस्थितियों के अनुकूल अपने को नहीं ढालती हो, तो वह समाज की सुरक्षा और सेवा करने की बजाय उस पर बोझ बन जाती है।
सुधारकों ने भारतीय समाज के उन क्षेत्रों को बदलने की कोशिश की, जहाँ यथास्थिति न केवल समाज पर एक बोझ थी, बल्कि इससे राजनीतिक दमन और पिछड़ापन पैदा हो गया था। सुधारकों के लिए प्रगति और परिवर्तन जीवन, जीवंतता और सृजनात्मकता के चिह्न थे। रानाडे ने सामाजिक सुधार विचारधारा के इस पहलू का उपसंहार किया जब उन्होंने देखा कि "जिस परिवर्तन की हमें कोशिश करनी चाहिए वह परिवर्तन प्रतिबंध से स्वतंत्रता, भोलेपन से आस्था, हैसियत से अनुबंध, सत्ता से विवेक, असंगठित से संगठित जीवन, धर्मान्धता से सहिष्णुता, अंधभाग्यवाद से मानव सम्मान की भावना के लिए परिवर्तन था। समाज विकास का अर्थ, मैं समझता हूँ, इस देश के लोगों और समाज दोनों के लिए ही है। "
3.3.3 व्यक्ति तमाम चीजों के केन्द्र के रूप में
समाज सुधार विचारधारा व्यक्ति को तमाम लोक प्रयासों का केन्द्र मानती थी। समाज अपने सदस्यों के चारों तरफ घूमता है। इस दुनिया में व्यक्ति का कल्याण और सुख ही तमाम सामाजिक सुधारों का मुख्य प्रेरणा स्रोत बना । उदाहरणस्वरूप, सुधारक सनातनियों के इस तर्क को मानने से इंकार करते थे कि सती होना अगले जन्म में महिलाओं के लिए अच्छा साबित होगा। वे सती के खात्मे की वकालत करते थे, क्योंकि इससे महिलाओं को बहुत दुःख और पीड़ा पहुंचती थी। इस मायने में सुधारक व्यक्तिवाद के पश्चिमी और बैंथम के उपयोगितावाद सिद्धांत से बहुत ज्यादा प्रभावित थे।
सामाजिक सुधार के मुख्य लक्ष्य थे व्यक्ति की पुर्नखोज, उसकी बुद्धि को मुक्त करके उसे एक बार फिर एक मुक्त, सृजनात्मक ओर खुशहाल व्यक्ति बनाना। सुधारकों ने इस सोच को नकारा कि कोई काम सिर्फ इसलिए न हो क्योंकि मात्र सत्ता (पुजारियों या शास्त्रों) ने वैसा करने का आदेश दिया हो । सुधारकों ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी काम तब ही किया जाना चाहिए जब कि वह तर्क संगत हो और वह मानवता की वर्तमान समृद्धि और सुख के लिए हो। दूसरे शब्दों में, उन्होंने मध्ययुगीन संगठन का सिद्धांत जो कि सत्ता पर आधारित था, उसे नकारा और बदले में एक सुधरे हुये संगठन की वकालत की, जो कि तर्क पर आधारित हो ।
इसका अर्थ यह नहीं होता कि सुधारक धर्म या धार्मिक सत्ता के खिलाफ थे। वे तो सिर्फ विरोध कर रहे थे, उस अन्धी प्रवृत्ति का जो कि धर्म के नाम पर कुछ लोगों द्वारा गयी हर बात को मानने की सूचक थी। जैसे रानाडे उपदेश देते कि हम भगवान की संतान हैं, मनुष्य की नहीं, और सिर्फ भगवान की आवाज ही हम सुन सकते थे। इसीलिए, हम तमाम मानवीय सत्ता का आदर करते हैं और पैगम्बरों के रहस्योद्घाटनों को सम्मान देते
हैं। उनका तर्क था कि इस श्रद्धा और सम्मान को आत्मा की आवाज में आड़े नहीं आना चाहिए। यह अपने भीतर की विवेक की आवाज है जिसे उन्होंने हमारे भीतर के "आदेश"
कहा ।
3.3.4 क्या राजनीतिक सुधार से पहले सामाजिक सुधार होने चाहिए ?
एक सवाल जो बार-बार सुधार के काल में और आज तक उठाया जाता रहा है, वह यह हैः क्या सामाजिक सुधार अन्य सुधारों ( राजनीतिक, आर्थिक आदि) से पहले होने चाहिए ? एक मत जो बम्बई के विख्यात पारसी सुधारक मलवलि द्वारा प्रतिपादित किया गया, वह यह था कि राजनीतिक सुधार के पूर्व सामाजिक सुधार जरूरी है। यह तर्क दिया गया कि राज्य परिवार पर आधारित है और इसलिए राज्य को सुधारने के पूर्व यह कोशिश की जानी चाहिए कि परिवार को सुधारा जाये। ऐसे लोग जिनके परिवार दूषित हों, जिनकी महिलाएं अज्ञानी और अंधविश्वासी हों, जो तमाम पूर्वाग्रहों की बेड़ियों में बंधे हों और कर और अमानवीय परम्पराओं को झेल रहे हों, कभी भी उच्च राजनीतिक विशेषाधिकारों को भोगने या उपयोग करने की आशा अभी नहीं कर सकते हैं। इस मत का विश्वास था कि राजनीतिक सुधार (स्व-शासन ) की कोई भी कोशिश निश्चित रूप से निराशापूर्ण होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि सामाजिक सुधारक राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ थे या अंग्रेजों को भारत के बाहर कर रहे थे। वे स्व-शासन के पक्ष में थे, परन्तु महसूस करते थे कि असली राजनीतिक स्वतंत्रता या स्व-शासन तब ही संभव हो सकता है, जब समाज में नैतिक सुधार हों, और वह जातीय अयोग्यताओं और अंधविश्वासों से अपने आपको मुक्त करें। जैसा राजा राममोहन राय ने तर्क दिया, अंग्रेजी शासन के कुछ प्रशासनिक तरीके प्रतिबंधित करने लायक थे । परन्तु, लोगों की सामाजिक परिस्थितियाँ, जो अतार्किक और अमानवीय परम्पराओं द्वारा चिन्हित हैं, उसकी जीवन्तता को नजरअंदाज करती है और उनके आदेशों को दूषित करती हैं, निश्चित रूप से ज्यादा बुरी थीं। इसीलिए उन्होंने अंग्रेजों से संबंधों का न केवल स्वागत किया, बल्कि एक अल्पकालिक सुधार के तरीके के रूप में इनकी हिमायत भी की। गोखले यह भी मानते थे कि अंग्रेजी शासन हमारा "सौभाग्य" था जो भारतीयों को खुद को सुधारने की वैदिक योजना का एक हिस्सा था ।
इसके साथ ही, यह कहना भी गलत होगा कि सामाजिक सुधारकों ने समाज के विभिन्न . पहलुओं के बीच के अन्तर्संबंधों को महसूस नहीं किया। वे इस तथ्य के प्रति पूरी तरह सचेत थे। यह बात रानाडे के शब्दों से साफ हो जाती हैं, "आपके पास तब तक एक अच्छी सामाजिक व्यवस्था नहीं हो सकती, जब तक आप खुद को राजनीतिक अधिकारों के. हाशिए में नीचे पाते हैं, न ही आप राजनीतिक अधिकारों का उपयोग करने के लायक हैं। जब तक आपकी सामाजिक व्यवस्था तर्क और न्याय पर आधारित नहीं हों, आपके पास एक अच्छी अर्थव्यवस्था नहीं हो सकती। और जब आपकी सामाजिक व्यवस्था अपूर्ण हो । अगर आपके धार्मिक आदर्श निम्न या भ्रष्ट हो गए हों, आप सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक क्षेत्र में कामयाब नहीं हो सकते यह अन्तर निर्भरता कोई संयोग नहीं है, बल्कि हमारी ही प्रकृति का नियम हैं । " किन्तु, उनका मोटा नज़रिया कम से कम, विरोध का था । के.टी. तेलांग ने इस रणनीति की कुछ इस प्रकार से व्याख्या की "पहले उन सुधारों को प्राप्त करो, जो आसानी से हो जाएं और तब अपने प्रयासों को उन सुधारों की दिशा में लगाओ यहाँ ज़्यादा परेशानियां आड़े आएंगी। इस प्रकार कामियाबी से आपको सुधार के लिए ताकत मिलेगी, इस तरह बड़ी तेजी के साथ प्रगति का काम हो सकेगा, दूसरे ढंग से काम करने पर शायद न कर पाएं । "
इस काल के दूसरे महान् व्यक्ति दादा भाई नौरोजी, जो आमतौर पर "भारत के ग्रैंड ओल्ड मैत" के नाम से जाने जाते थे, ने कहा कि हमें अलग-अलग दोनों सुधारों, राजनीतिक और सामाजिक, के लिए काम करना होगा। दादा भाई ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को उन्हीं समस्याओं को उठाना चाहिए जिसमें सब लोगों का समान हित हो न कि ऐसी समस्याओं को जिनसे आपसी द्वंद्व बढ़ने की सम्भावना हो । दादा भाई उस आक्रमणशील प्रचार के खिलाफ बोल रहे थे, जो मलबारी ने "एज ऑफ कॉन्सेन्ट बिल", जिसमें भारतीय लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र निर्धारित करने की वकालत थी, के विरोध में भारत और इंग्लैंड में किया था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को संबोधित अपने प्रसिद्ध अध्यक्षीय भाषण में दादा भाई ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को उन्हीं सवालों तक सीमित रखना चाहिए जिसमें पूरा राष्ट्र सीधे तौर पर हिस्सा ले सके। राजनीतिक सुधार, या स्व-शासन की मांग और सामाजिक सुधार ऐसे ही मुद्दे हैं अन्य वर्गीय सवालों के समन्वय को उससे संबंधित संगठनों के सम्मेलनों के लिए छोड़ देना चाहिए।
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उन्नीसवीं शताब्वी भारत में सामाजिक-राजनीतिक सुधार भारत के एक सुधारक न्यायमूर्ति तेलंग के शब्दों में, "ये हरेक का कर्तव्य है कि वह अतीत को समझे और उसका मूल्यांकन करे और उसमें से उन चीजों को ही चुने जो संभव हो और आज की बदली हुई परिस्थितियों पर लागू हो। यह सब कुछ संयम, बुद्धिमत्ता और सही दिशा के साथ किया जाना था। तीन.तीन.दो परिवर्तन और सुधारक का विचार सुधारक विकास, परिवर्तन और प्रगति के नियम में विश्वास करते थे। वे कर्म अथवा पुनर्जन्म के हिन्दू सिद्धांत के आलोचक थे, जिसके अनुसार वर्तमान दुर्दशा को हमारे पिछले जीवन के कार्यों का कारण बताया जाता था और "माया" का विचार अथवा भौतिक संसार के भ्रांतिपूर्ण विचार के कारण ऐसे विश्वासों से लोग जीवन को निष्क्रिय होकर कबूल कर लेते थे, जो उनकी सृजनात्मक क्षमता को खत्म कर देता था। इसके बजाय सुधारक मानते थे कि व्यक्ति अपनी प्रगति को स्वयं तय कर सकता है और वह परिवर्तन का कारण भी स्वयं है। यह मानना कि हमारा वर्तमान हमारे अतीत से तय हुआ है और इस कारण हमें इसे चुपचाप स्वीकार कर लेना चाहिए का अर्थ हुआ, एक प्रेरणाहीन आदर्श में विश्वास करना, जो कि केवल यथास्थिति को बना कर रखेगा। सुधारक प्रगति में विश्वास करते थे। दरअसल गोपाल कृष्ण गोखले प्रगति को एक ऐसा क्रांतिकारी विचार मानते थे, जिसे हमने पश्चिम से पाया । कोई व्यवस्था जो परिवर्तन से इंकार करती हो, और नई परिस्थितियों के अनुकूल अपने को नहीं ढालती हो, तो वह समाज की सुरक्षा और सेवा करने की बजाय उस पर बोझ बन जाती है। सुधारकों ने भारतीय समाज के उन क्षेत्रों को बदलने की कोशिश की, जहाँ यथास्थिति न केवल समाज पर एक बोझ थी, बल्कि इससे राजनीतिक दमन और पिछड़ापन पैदा हो गया था। सुधारकों के लिए प्रगति और परिवर्तन जीवन, जीवंतता और सृजनात्मकता के चिह्न थे। रानाडे ने सामाजिक सुधार विचारधारा के इस पहलू का उपसंहार किया जब उन्होंने देखा कि "जिस परिवर्तन की हमें कोशिश करनी चाहिए वह परिवर्तन प्रतिबंध से स्वतंत्रता, भोलेपन से आस्था, हैसियत से अनुबंध, सत्ता से विवेक, असंगठित से संगठित जीवन, धर्मान्धता से सहिष्णुता, अंधभाग्यवाद से मानव सम्मान की भावना के लिए परिवर्तन था। समाज विकास का अर्थ, मैं समझता हूँ, इस देश के लोगों और समाज दोनों के लिए ही है। " तीन.तीन.तीन व्यक्ति तमाम चीजों के केन्द्र के रूप में समाज सुधार विचारधारा व्यक्ति को तमाम लोक प्रयासों का केन्द्र मानती थी। समाज अपने सदस्यों के चारों तरफ घूमता है। इस दुनिया में व्यक्ति का कल्याण और सुख ही तमाम सामाजिक सुधारों का मुख्य प्रेरणा स्रोत बना । उदाहरणस्वरूप, सुधारक सनातनियों के इस तर्क को मानने से इंकार करते थे कि सती होना अगले जन्म में महिलाओं के लिए अच्छा साबित होगा। वे सती के खात्मे की वकालत करते थे, क्योंकि इससे महिलाओं को बहुत दुःख और पीड़ा पहुंचती थी। इस मायने में सुधारक व्यक्तिवाद के पश्चिमी और बैंथम के उपयोगितावाद सिद्धांत से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। सामाजिक सुधार के मुख्य लक्ष्य थे व्यक्ति की पुर्नखोज, उसकी बुद्धि को मुक्त करके उसे एक बार फिर एक मुक्त, सृजनात्मक ओर खुशहाल व्यक्ति बनाना। सुधारकों ने इस सोच को नकारा कि कोई काम सिर्फ इसलिए न हो क्योंकि मात्र सत्ता ने वैसा करने का आदेश दिया हो । सुधारकों ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी काम तब ही किया जाना चाहिए जब कि वह तर्क संगत हो और वह मानवता की वर्तमान समृद्धि और सुख के लिए हो। दूसरे शब्दों में, उन्होंने मध्ययुगीन संगठन का सिद्धांत जो कि सत्ता पर आधारित था, उसे नकारा और बदले में एक सुधरे हुये संगठन की वकालत की, जो कि तर्क पर आधारित हो । इसका अर्थ यह नहीं होता कि सुधारक धर्म या धार्मिक सत्ता के खिलाफ थे। वे तो सिर्फ विरोध कर रहे थे, उस अन्धी प्रवृत्ति का जो कि धर्म के नाम पर कुछ लोगों द्वारा गयी हर बात को मानने की सूचक थी। जैसे रानाडे उपदेश देते कि हम भगवान की संतान हैं, मनुष्य की नहीं, और सिर्फ भगवान की आवाज ही हम सुन सकते थे। इसीलिए, हम तमाम मानवीय सत्ता का आदर करते हैं और पैगम्बरों के रहस्योद्घाटनों को सम्मान देते हैं। उनका तर्क था कि इस श्रद्धा और सम्मान को आत्मा की आवाज में आड़े नहीं आना चाहिए। यह अपने भीतर की विवेक की आवाज है जिसे उन्होंने हमारे भीतर के "आदेश" कहा । तीन.तीन.चार क्या राजनीतिक सुधार से पहले सामाजिक सुधार होने चाहिए ? एक सवाल जो बार-बार सुधार के काल में और आज तक उठाया जाता रहा है, वह यह हैः क्या सामाजिक सुधार अन्य सुधारों से पहले होने चाहिए ? एक मत जो बम्बई के विख्यात पारसी सुधारक मलवलि द्वारा प्रतिपादित किया गया, वह यह था कि राजनीतिक सुधार के पूर्व सामाजिक सुधार जरूरी है। यह तर्क दिया गया कि राज्य परिवार पर आधारित है और इसलिए राज्य को सुधारने के पूर्व यह कोशिश की जानी चाहिए कि परिवार को सुधारा जाये। ऐसे लोग जिनके परिवार दूषित हों, जिनकी महिलाएं अज्ञानी और अंधविश्वासी हों, जो तमाम पूर्वाग्रहों की बेड़ियों में बंधे हों और कर और अमानवीय परम्पराओं को झेल रहे हों, कभी भी उच्च राजनीतिक विशेषाधिकारों को भोगने या उपयोग करने की आशा अभी नहीं कर सकते हैं। इस मत का विश्वास था कि राजनीतिक सुधार की कोई भी कोशिश निश्चित रूप से निराशापूर्ण होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि सामाजिक सुधारक राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ थे या अंग्रेजों को भारत के बाहर कर रहे थे। वे स्व-शासन के पक्ष में थे, परन्तु महसूस करते थे कि असली राजनीतिक स्वतंत्रता या स्व-शासन तब ही संभव हो सकता है, जब समाज में नैतिक सुधार हों, और वह जातीय अयोग्यताओं और अंधविश्वासों से अपने आपको मुक्त करें। जैसा राजा राममोहन राय ने तर्क दिया, अंग्रेजी शासन के कुछ प्रशासनिक तरीके प्रतिबंधित करने लायक थे । परन्तु, लोगों की सामाजिक परिस्थितियाँ, जो अतार्किक और अमानवीय परम्पराओं द्वारा चिन्हित हैं, उसकी जीवन्तता को नजरअंदाज करती है और उनके आदेशों को दूषित करती हैं, निश्चित रूप से ज्यादा बुरी थीं। इसीलिए उन्होंने अंग्रेजों से संबंधों का न केवल स्वागत किया, बल्कि एक अल्पकालिक सुधार के तरीके के रूप में इनकी हिमायत भी की। गोखले यह भी मानते थे कि अंग्रेजी शासन हमारा "सौभाग्य" था जो भारतीयों को खुद को सुधारने की वैदिक योजना का एक हिस्सा था । इसके साथ ही, यह कहना भी गलत होगा कि सामाजिक सुधारकों ने समाज के विभिन्न . पहलुओं के बीच के अन्तर्संबंधों को महसूस नहीं किया। वे इस तथ्य के प्रति पूरी तरह सचेत थे। यह बात रानाडे के शब्दों से साफ हो जाती हैं, "आपके पास तब तक एक अच्छी सामाजिक व्यवस्था नहीं हो सकती, जब तक आप खुद को राजनीतिक अधिकारों के. हाशिए में नीचे पाते हैं, न ही आप राजनीतिक अधिकारों का उपयोग करने के लायक हैं। जब तक आपकी सामाजिक व्यवस्था तर्क और न्याय पर आधारित नहीं हों, आपके पास एक अच्छी अर्थव्यवस्था नहीं हो सकती। और जब आपकी सामाजिक व्यवस्था अपूर्ण हो । अगर आपके धार्मिक आदर्श निम्न या भ्रष्ट हो गए हों, आप सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक क्षेत्र में कामयाब नहीं हो सकते यह अन्तर निर्भरता कोई संयोग नहीं है, बल्कि हमारी ही प्रकृति का नियम हैं । " किन्तु, उनका मोटा नज़रिया कम से कम, विरोध का था । के.टी. तेलांग ने इस रणनीति की कुछ इस प्रकार से व्याख्या की "पहले उन सुधारों को प्राप्त करो, जो आसानी से हो जाएं और तब अपने प्रयासों को उन सुधारों की दिशा में लगाओ यहाँ ज़्यादा परेशानियां आड़े आएंगी। इस प्रकार कामियाबी से आपको सुधार के लिए ताकत मिलेगी, इस तरह बड़ी तेजी के साथ प्रगति का काम हो सकेगा, दूसरे ढंग से काम करने पर शायद न कर पाएं । " इस काल के दूसरे महान् व्यक्ति दादा भाई नौरोजी, जो आमतौर पर "भारत के ग्रैंड ओल्ड मैत" के नाम से जाने जाते थे, ने कहा कि हमें अलग-अलग दोनों सुधारों, राजनीतिक और सामाजिक, के लिए काम करना होगा। दादा भाई ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को उन्हीं समस्याओं को उठाना चाहिए जिसमें सब लोगों का समान हित हो न कि ऐसी समस्याओं को जिनसे आपसी द्वंद्व बढ़ने की सम्भावना हो । दादा भाई उस आक्रमणशील प्रचार के खिलाफ बोल रहे थे, जो मलबारी ने "एज ऑफ कॉन्सेन्ट बिल", जिसमें भारतीय लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र निर्धारित करने की वकालत थी, के विरोध में भारत और इंग्लैंड में किया था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को संबोधित अपने प्रसिद्ध अध्यक्षीय भाषण में दादा भाई ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को उन्हीं सवालों तक सीमित रखना चाहिए जिसमें पूरा राष्ट्र सीधे तौर पर हिस्सा ले सके। राजनीतिक सुधार, या स्व-शासन की मांग और सामाजिक सुधार ऐसे ही मुद्दे हैं अन्य वर्गीय सवालों के समन्वय को उससे संबंधित संगठनों के सम्मेलनों के लिए छोड़ देना चाहिए।
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देश में इन दिनों प्यार के नाम पर लव जिहाद का खेल जोर शोर से जारी है। बीते कुछ दिनों में लव जिहाद के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसपर अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने भोपुाल में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत प्रेम की भूमि थी है और रहेगी। प्यार के नाम पर हत्या और धर्मांतरण हो रहा है और लोग इसे लव जिहाद कह रहे हैं। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।
'धोखे में रखकर प्यार करना लव या धोखा"
RSS नेता इंद्रेश कुमार ने कहा, "क्या धोखे में रखकर पार्टनर से प्रेम करना ये प्रेम है या धोखा' आज प्रेम के नाम पर वासना का व्यापार चल रहा है। प्रेम को धूमिल किया जा रहा है। भारत प्रेम की भूमि थी, है और रहेगी। प्यार के नाम पर हत्या और धर्मांतरण हो रहा है और लोगों ने इसे लव जिहाद बताया है। हम प्यार के नाम पर धोखाधड़ी और हिंसा की निंदा करते हैं।"
कुछ दो दिन पहले ही मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक घटना सामने आई, जिसमें एक नेशनल बेसबॉल प्लेयर संजना ने राजन उर्फ बद्दो से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। संजना के पिता ने आरोप लगाया कि अब्दुल मंसूरी संजना को धर्मांतरण के लिए परेशान कर रहा था।
बेसबॉल प्लेयर संजना के पिता ने बताया है कि अब्दुल ने उनकी बेटी को अपना नाम राजन बताया था। हालांकि जब संजना को राजन के पीछे छिपे अब्दुल की सच्चाई पता चली तो उसने अपनी मां से ये बातें शेयर की। मृतक के पिता ने ये आरोप भी लगाए कि अब्दुल उनकी बेटी को धमकाया करता था।
देश में धर्मांतरण के मामले भी तूल पकड़ रही है। हाल ही में गाजियाबाद से एक मामला सामने आया, जिसमें बद्दो नाम का एक शख्स नाबालिग बच्चों को इस्लाम कबूल करने के लिए निशाना बनाता था। 'गेमिंग जिहाद' का मास्टरमाइंड बद्दो उर्फ शाहनवाज नाबालिगों पर टारगेट सेट करके ऑनलाइन गेमिंग के जरिए उनसे संपर्क बनाना और फिर उनका ब्रेनवॉश करके उन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर करता था।
बद्दो एक डिवाइस में इसका रिकॉर्ड भी रखता था। पुलिस कई दिनों से बद्दो और उस डिवाइस की तलाश में थी। हालांकि कल उसे महाराष्ट्र में पकड़ा गया है। गाजियाबाद पुलिस को ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति ने मौलवी और मुंबई निवासी बद्दो के खिलाफ अपने 17 साल के बेटे को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करने की शिकायत 30 मई को दर्ज कराई। इसके बाद जांच शुरू की गई। जांच में कई बड़े खुलासे हुए। वो बच्चों अपने धर्मांतरण की भी झूठी कहानी सुनाया करता था। कहानियां बना-बनाकर बच्चों का ब्रेनवाश करता था।
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देश में इन दिनों प्यार के नाम पर लव जिहाद का खेल जोर शोर से जारी है। बीते कुछ दिनों में लव जिहाद के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसपर अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने भोपुाल में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत प्रेम की भूमि थी है और रहेगी। प्यार के नाम पर हत्या और धर्मांतरण हो रहा है और लोग इसे लव जिहाद कह रहे हैं। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। 'धोखे में रखकर प्यार करना लव या धोखा" RSS नेता इंद्रेश कुमार ने कहा, "क्या धोखे में रखकर पार्टनर से प्रेम करना ये प्रेम है या धोखा' आज प्रेम के नाम पर वासना का व्यापार चल रहा है। प्रेम को धूमिल किया जा रहा है। भारत प्रेम की भूमि थी, है और रहेगी। प्यार के नाम पर हत्या और धर्मांतरण हो रहा है और लोगों ने इसे लव जिहाद बताया है। हम प्यार के नाम पर धोखाधड़ी और हिंसा की निंदा करते हैं।" कुछ दो दिन पहले ही मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक घटना सामने आई, जिसमें एक नेशनल बेसबॉल प्लेयर संजना ने राजन उर्फ बद्दो से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। संजना के पिता ने आरोप लगाया कि अब्दुल मंसूरी संजना को धर्मांतरण के लिए परेशान कर रहा था। बेसबॉल प्लेयर संजना के पिता ने बताया है कि अब्दुल ने उनकी बेटी को अपना नाम राजन बताया था। हालांकि जब संजना को राजन के पीछे छिपे अब्दुल की सच्चाई पता चली तो उसने अपनी मां से ये बातें शेयर की। मृतक के पिता ने ये आरोप भी लगाए कि अब्दुल उनकी बेटी को धमकाया करता था। देश में धर्मांतरण के मामले भी तूल पकड़ रही है। हाल ही में गाजियाबाद से एक मामला सामने आया, जिसमें बद्दो नाम का एक शख्स नाबालिग बच्चों को इस्लाम कबूल करने के लिए निशाना बनाता था। 'गेमिंग जिहाद' का मास्टरमाइंड बद्दो उर्फ शाहनवाज नाबालिगों पर टारगेट सेट करके ऑनलाइन गेमिंग के जरिए उनसे संपर्क बनाना और फिर उनका ब्रेनवॉश करके उन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर करता था। बद्दो एक डिवाइस में इसका रिकॉर्ड भी रखता था। पुलिस कई दिनों से बद्दो और उस डिवाइस की तलाश में थी। हालांकि कल उसे महाराष्ट्र में पकड़ा गया है। गाजियाबाद पुलिस को ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति ने मौलवी और मुंबई निवासी बद्दो के खिलाफ अपने सत्रह साल के बेटे को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करने की शिकायत तीस मई को दर्ज कराई। इसके बाद जांच शुरू की गई। जांच में कई बड़े खुलासे हुए। वो बच्चों अपने धर्मांतरण की भी झूठी कहानी सुनाया करता था। कहानियां बना-बनाकर बच्चों का ब्रेनवाश करता था।
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इनमें ब्राइट आई लाइनर से लेकर फ्रीज कटाई शैडो और फ्लैटरिंग ल आईलैशेस भी है, जो आपकी आंखों को खूबसूरत और जीवंत बना देंगे। आप भी अपनेआंखों को भी मृगनैनी बनाने के लिए इन Eye Makeup trends को फॉलो कर सकती हैं।
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Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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इनमें ब्राइट आई लाइनर से लेकर फ्रीज कटाई शैडो और फ्लैटरिंग ल आईलैशेस भी है, जो आपकी आंखों को खूबसूरत और जीवंत बना देंगे। आप भी अपनेआंखों को भी मृगनैनी बनाने के लिए इन Eye Makeup trends को फॉलो कर सकती हैं। L'Oreal Paris La Petite Eyeshadow: Maybelline Nudes Palette Eyeshadow: Europe Girl चालीस Color Cool Tone Eyeshadow: Maybelline Drama Gel Eyeline: Maybelline New York Colossal Bold Eyeliner: नोट : ब्यूटी स्टोर पर विजिट करने के लिए यहां क्लिक करें। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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मनोरंजन डेस्क । बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) द्वारा होस्ट किए जाने वाले एकता कपूर (Ekta Kapoor) के रियलिटी शो, 'लॉक अप' (Lock Upp) का रविवार (27 फरवरी) को 'ऑल्ट बालाजी' और 'एमएक्स प्लेयर' पर प्रीमियर हुआ था. अब इस शो का पहला 'नॉमिनेशन' देखने मिल रहा है. शो के पहले दिन ही पांच कंटेस्टेंट घर से बेघर होने के लिए नॉमिनेट हुए हैं. प्रत्येक कैदी कंटेस्टेंट्स को दो लोगों को नॉमिनेट करने के लिए कहा गया था. इन सभी कंटेस्टेंट्स को उन्हें बेदखल करना था जो उनके हिसाब से इस 'जेल' में रहने के लायक नहीं हैं. नॉमिनेशन के साथ साथ कंटेस्टेंट्स को उसके पीछे का कारण भी स्पष्ट करना था.
इस नॉमिनेशन प्रक्रिया में सभी घरवालों ने सिद्धार्थ शर्मा और शिवम का नाम लिया क्योंकि पहले ही दिन इन दोनों में काफी बड़ा झगड़ा हुआ था. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अंजलि अरोड़ा को सभी कैदी कंटेस्टेंट्स द्वारा 'सबसे कमजोर उम्मीदवार' करार दिया गया इसलिए अलावा कुछ कंटेस्टेंट्स को कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी से साथ बातचीत करना मुस्खिल लग रहा था. आपस में चर्चा करने के बाद इस हफ्ते के लिए कंटेस्टेंट सिद्धार्थ शर्मा (Siddharth Sharma), अंजलि अरोड़ा (Anjali Arora), स्वामी चक्रपाणि (Swami Chakrapani), शिवम शर्मा (Shivam Sharma) और मुनव्वर फारुकी (Munawar Faruqui) इन पांच कैदियों को नॉमिनेटेड किया गया.
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मनोरंजन डेस्क । बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत द्वारा होस्ट किए जाने वाले एकता कपूर के रियलिटी शो, 'लॉक अप' का रविवार को 'ऑल्ट बालाजी' और 'एमएक्स प्लेयर' पर प्रीमियर हुआ था. अब इस शो का पहला 'नॉमिनेशन' देखने मिल रहा है. शो के पहले दिन ही पांच कंटेस्टेंट घर से बेघर होने के लिए नॉमिनेट हुए हैं. प्रत्येक कैदी कंटेस्टेंट्स को दो लोगों को नॉमिनेट करने के लिए कहा गया था. इन सभी कंटेस्टेंट्स को उन्हें बेदखल करना था जो उनके हिसाब से इस 'जेल' में रहने के लायक नहीं हैं. नॉमिनेशन के साथ साथ कंटेस्टेंट्स को उसके पीछे का कारण भी स्पष्ट करना था. इस नॉमिनेशन प्रक्रिया में सभी घरवालों ने सिद्धार्थ शर्मा और शिवम का नाम लिया क्योंकि पहले ही दिन इन दोनों में काफी बड़ा झगड़ा हुआ था. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अंजलि अरोड़ा को सभी कैदी कंटेस्टेंट्स द्वारा 'सबसे कमजोर उम्मीदवार' करार दिया गया इसलिए अलावा कुछ कंटेस्टेंट्स को कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी से साथ बातचीत करना मुस्खिल लग रहा था. आपस में चर्चा करने के बाद इस हफ्ते के लिए कंटेस्टेंट सिद्धार्थ शर्मा , अंजलि अरोड़ा , स्वामी चक्रपाणि , शिवम शर्मा और मुनव्वर फारुकी इन पांच कैदियों को नॉमिनेटेड किया गया.
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मरणकण्डिका - ११४
मे प्रेम बढ़ता है, गुणो में अनुराग होने से सम्यग्दर्शन विशुद्ध होता है और उनके रत्नत्रय की अनुमोदना होती है। यह अनुमोदन पुण्य उपार्जन करने का सरल उपाय है।
प्रश्न - चैत्य की भक्ति क्यो करनी चाहिए ? इस विषय में आचार्यदेव ने क्या उपदेश दिया है ? उत्तर- आचार्यदेव दृष्टान्तपूर्वक समझा रहे हैं कि देखो। शत्रुओ और मित्रो की प्रतिकृति अर्थात् उनके चित्र या मूर्ति दिखाई देते ही मन में द्वेष या राग उत्पन्न हो जाता है, यद्यपि वे प्रतिकृतियाँ वर्तमान मे हमारा कोई अपकार या उपकार नहीं कर रही हैं तथापि उन शत्रुओ या मित्रो ने पूर्व मे जो अपकार या उपकार किये होते हैं उनके स्मरण मे वे प्रतिकृतियाँ निमित्त होती हैं। उसी प्रकार यद्यपि अर्हन्त एव सिद्ध प्रभु के प्रतिबिम्बो मे अरहन्त और सिद्ध भगवान के अनन्त चतुष्टयादि गुण नहीं हैं तथापि उन जिनेन्द्रो से सादृश्य होने के कारण और तदाकार स्थापना निक्षेप से वे अरहन्त और सिद्ध के गुण स्मरण कराने मे परम निमित्त होते है। वह गुणों का स्मरण अनुरागात्मक होता है, अत वह भक्त को ज्ञान और दर्शन में लगाता है और वे ज्ञान-दर्शन महान् सवर तथा निर्जरा करते हैं, अत आप सब चैत्य अर्थात् अर्हन्त और सिद्धो के कृत्रिम एव अकृत्रिम प्रतिबिम्बो की भावपूर्वक भक्ति करो ।
वात्सल्य का क्या भाव है और इसके लिए गुरु का क्या निर्देश है ?
उत्तर - यहाँ वात्सल्य का अभिप्राय प्रवचनवात्सल्य से है । इसके लिए गुरु कहते हैं कि हे मुनिगण जिन ग्रन्थो मे जीवादितत्त्वो का वर्णन है, जो जिनेन्द्र द्वारा कथित और ससारभीरु आचार्यो द्वारा लिखित हैं ऐसे ग्रन्थो का स्वाध्याय करने मे आप सब सदा प्रयत्नशील रहना। सोना, हँसना, खेलना, आलस्य और लोकव्यवहार इन सबका परित्याग कर मात्र स्वाध्याय करो और जिनेन्द्रकथित आगम पर ही अपना वात्सल्य रखो। स्वाध्याय मे रत रहने के लिए सकल्प करो कि मै हास्य, क्रीडा तथा गल्पवाद का त्याग करता हूँ। मै आलस्य का त्याग मै कर मुनिधर्म के योग्य क्रियाओ मे ही उद्यत रहने का सकल्प करता हूँ। मैं निद्रा को अच्छी नहीं मानता, अत उस पर विजय प्राप्त कर त्रैलोक्य मे महान् ऐसे जिनागम पर हृदय से प्रफुल्लित होते हुए स्वाध्याय मे रत होता हूँ, इत्यादि ।
परीषह सहन करने का उपदेश
मा स्म धर्मधुरं त्याक्षुरभिभूताः परीषहैः ।
दुस्सहै. कण्टकैस्तीक्ष्णैर्गामेयक-वचो- मयै. ॥३०६ ॥
अर्थ - भो मुनिगण । आप दु सह परीषहो से और ग्रामीणो द्वारा बोले गये तीक्ष्ण आक्रोश वचन रूपी कॉटो से पराभूत होकर भी धर्म की धुरा के भार को मत त्यागो ॥३०६ ॥
प्रश्न - परीषहो मे आक्रोशवचनजय परीषह का भी अन्तर्भाव हो जाता है, फिर उसे अलग से क्यो कहा गया है ?
क्षुधा-तृषा आदि परीषह सहन करना सहज है किन्तु हृदय को तीक्ष्ण काँटो सदृश विदीर्ण करनेवाले आक्रोश वचन सुनकर समता परिणाम रखना कठिन है, अत आचार्य समझा रहे हैं कि अन्य परीषहो
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मरणकण्डिका - एक सौ चौदह मे प्रेम बढ़ता है, गुणो में अनुराग होने से सम्यग्दर्शन विशुद्ध होता है और उनके रत्नत्रय की अनुमोदना होती है। यह अनुमोदन पुण्य उपार्जन करने का सरल उपाय है। प्रश्न - चैत्य की भक्ति क्यो करनी चाहिए ? इस विषय में आचार्यदेव ने क्या उपदेश दिया है ? उत्तर- आचार्यदेव दृष्टान्तपूर्वक समझा रहे हैं कि देखो। शत्रुओ और मित्रो की प्रतिकृति अर्थात् उनके चित्र या मूर्ति दिखाई देते ही मन में द्वेष या राग उत्पन्न हो जाता है, यद्यपि वे प्रतिकृतियाँ वर्तमान मे हमारा कोई अपकार या उपकार नहीं कर रही हैं तथापि उन शत्रुओ या मित्रो ने पूर्व मे जो अपकार या उपकार किये होते हैं उनके स्मरण मे वे प्रतिकृतियाँ निमित्त होती हैं। उसी प्रकार यद्यपि अर्हन्त एव सिद्ध प्रभु के प्रतिबिम्बो मे अरहन्त और सिद्ध भगवान के अनन्त चतुष्टयादि गुण नहीं हैं तथापि उन जिनेन्द्रो से सादृश्य होने के कारण और तदाकार स्थापना निक्षेप से वे अरहन्त और सिद्ध के गुण स्मरण कराने मे परम निमित्त होते है। वह गुणों का स्मरण अनुरागात्मक होता है, अत वह भक्त को ज्ञान और दर्शन में लगाता है और वे ज्ञान-दर्शन महान् सवर तथा निर्जरा करते हैं, अत आप सब चैत्य अर्थात् अर्हन्त और सिद्धो के कृत्रिम एव अकृत्रिम प्रतिबिम्बो की भावपूर्वक भक्ति करो । वात्सल्य का क्या भाव है और इसके लिए गुरु का क्या निर्देश है ? उत्तर - यहाँ वात्सल्य का अभिप्राय प्रवचनवात्सल्य से है । इसके लिए गुरु कहते हैं कि हे मुनिगण जिन ग्रन्थो मे जीवादितत्त्वो का वर्णन है, जो जिनेन्द्र द्वारा कथित और ससारभीरु आचार्यो द्वारा लिखित हैं ऐसे ग्रन्थो का स्वाध्याय करने मे आप सब सदा प्रयत्नशील रहना। सोना, हँसना, खेलना, आलस्य और लोकव्यवहार इन सबका परित्याग कर मात्र स्वाध्याय करो और जिनेन्द्रकथित आगम पर ही अपना वात्सल्य रखो। स्वाध्याय मे रत रहने के लिए सकल्प करो कि मै हास्य, क्रीडा तथा गल्पवाद का त्याग करता हूँ। मै आलस्य का त्याग मै कर मुनिधर्म के योग्य क्रियाओ मे ही उद्यत रहने का सकल्प करता हूँ। मैं निद्रा को अच्छी नहीं मानता, अत उस पर विजय प्राप्त कर त्रैलोक्य मे महान् ऐसे जिनागम पर हृदय से प्रफुल्लित होते हुए स्वाध्याय मे रत होता हूँ, इत्यादि । परीषह सहन करने का उपदेश मा स्म धर्मधुरं त्याक्षुरभिभूताः परीषहैः । दुस्सहै. कण्टकैस्तीक्ष्णैर्गामेयक-वचो- मयै. ॥तीन सौ छः ॥ अर्थ - भो मुनिगण । आप दु सह परीषहो से और ग्रामीणो द्वारा बोले गये तीक्ष्ण आक्रोश वचन रूपी कॉटो से पराभूत होकर भी धर्म की धुरा के भार को मत त्यागो ॥तीन सौ छः ॥ प्रश्न - परीषहो मे आक्रोशवचनजय परीषह का भी अन्तर्भाव हो जाता है, फिर उसे अलग से क्यो कहा गया है ? क्षुधा-तृषा आदि परीषह सहन करना सहज है किन्तु हृदय को तीक्ष्ण काँटो सदृश विदीर्ण करनेवाले आक्रोश वचन सुनकर समता परिणाम रखना कठिन है, अत आचार्य समझा रहे हैं कि अन्य परीषहो
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How to Follow Secure Initiative?
How to Self-evaluate your answer?
विषयः शिक्षा से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
1. भारत में किसी भी नीति के क्रियान्वयन में आने वाली सामान्य चुनौतियों को रेखांकित करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कुछ उपायों की विवेचना कीजिए। (250 शब्द)
निर्देशक शब्दः
विवेचना कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न के सभी पक्षों की तार्किक व्याख्या कीजिए।
उत्तर की संरचनाः
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बारे में संक्षेप में चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तुः
उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिएः
- सार्वजनिक नीति एवं उसकी चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन से पहले संभावित चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
- इसके कार्यान्वयन की राह में आने वाली संभावित चुनौतियों की व्याख्या कीजिए।
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषयः संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ।
2. भारत में महामारी एवं जीएसटी व्यवस्था के कार्यान्वयन के बाद राजकोषीय संघवाद को सशक्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से उपायों की सख्त आवश्यकता पर एक लेख लिखिए। (250 शब्द)
निर्देशक शब्दः
लेख लिखिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचनाः
प्रश्न का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तुः
भारत में राजकोषीय संघवाद द्वारा सामना किए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
इन मुद्दों के समाधान के लिए राजकोषीय संघवाद के सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा अपनाए जाने वाले प्रमुख उपायों पर प्रकाश डालिए।
सुझाव दीजिए कि क्या करने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष निकालिए कि भारत में राजकोषीय संघवाद को प्रोत्साहित करने के लिए तत्काल आवश्यक उपाय किए जाने चाहिए।
विषयः भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।
3. 97वें संविधान संशोधन को रद्द करना इस बात का संकेत है कि सहकारी समितियों को विनियमित करने की शक्ति राज्यों में ही निहित होनी चाहिए। क्या आप सहमत हैं? टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)
निर्देशक शब्दः
टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।
उत्तर की संरचनाः
97वें संविधान संशोधन की संक्षिप्त पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तुः
संशोधन क्यों रद्द किया गया था? समझाइए।
केंद्र सरकार के बढ़ते नियंत्रण के कारणों पर चर्चा कीजिए।
सहकारी क्षेत्र पर केंद्रीय नियंत्रण के मुद्दों पर प्रकाश डालिए।
निष्कर्ष निकालिए कि बेहतर यही होगा कि सरकार इस निर्णय को सही भावना से लें एवं नए मंत्रालय के निर्माण के बावजूद सहकारी क्षेत्र में भविष्य के हस्तक्षेप से दूर रहे।
विषयः सा.अ.2- द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।
सा.अ.3- उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।
4. एक मुख्य व्यापार समझौते के माध्यम से भारत-यूरोपीय संघ के द्विपक्षीय व्यापार संबंधों का विस्तार करने के लिए एक महत्वपूर्ण अप्रयुक्त क्षमता उपलब्ध है। स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)
निर्देशक शब्दः
स्पष्ट कीजिए- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।
उत्तर की संरचनाः
प्रश्न के संदर्भ की संक्षिप्त पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए।
विषय वस्तुः
- समझाइए कि एशियाई भागीदारों के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौतों से सीमित आर्थिक लाभ के बाद, भारत अपने मुक्त व्यापार समझौतों के विकल्पों का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है।
- चर्चा कीजिए कि मुक्त व्यापार समझौतों को इस तरह से अभिकल्पित करने की आवश्यकता है कि वे भागीदारों के बीच पूरकता बढ़ाएं एवं व्यापार को बाधित करने वाली नियामक बाधाओं को दूर करें।
- भारत-यूरोपीय संघ व्यापार संबंधों की क्षमता पर एक लेख लिखिए।
- इस क्षमता को साकार करने में भारत के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर प्रकाश डालिए।
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषयः संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।
5. विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों की उदाहरण सहित चर्चा कीजिए एवं भारत में इस संकट से लड़ने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव भी दीजिए। (250 शब्द)
निर्देशक शब्दः
चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचनाः
साइबर अपराधों से आप क्या समझते हैं? संक्षेप में चर्चा करते हुए उत्तर की शुरुआत कीजिए।
विषय वस्तुः
विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों की विवेचना कीजिए।
इन चुनौतियों के समाधान के लिए क्या किया जाना चाहिए? सुझाव दीजिए।
निष्कर्ष निकालिए कि वर्तमान युग में सूचना प्रौद्योगिकी की निर्भरता को देखते हुए, सरकारों के लिए यह समय की आवश्यकता है कि वे बैंकों और वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा के लिए कड़े साइबर सुरक्षा मानकों को स्थापित करते हुए साइबर सुरक्षा, डेटा अखंडता और डेटा सुरक्षा क्षेत्रों में मुख्य कौशल विकसित करें।
विषयः प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय।
6. भारतीय कृषि में राज्य के हस्तक्षेप के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
निर्देशक शब्दः
विश्लेषण कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए।
उत्तर की संरचनाः
प्रश्न के संदर्भ को संक्षेप में प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तुः
भारतीय कृषि प्रणाली में विशेष रूप से राज्य के हस्तक्षेप के संबंध में शामिल चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
समझाइए कि कैसे भारत को कृषि क्षेत्र के राष्ट्रीयकरण से दूर रखने के लिए यह एक अच्छी पहल रही है, लेकिन ग्रामीण संपत्ति के अधिकार, भूमि उपयोग और भूमि की सीमा में सरकार का अप्रत्यक्ष नियंत्रण रहा है।
कृषि क्षेत्र सरकारी प्रतिबंधों के प्रभाव में कैसे है? उदाहरण सहित चर्चा कीजिए।
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषयः केस स्टडी।
7. ऐसे समाज में जहां सरकार भोजन या काम उपलब्ध कराने में असमर्थ है, क्या भीख माँगने को एक अवरोध अथवा अपराध माना जा सकता है? जब सरकार सभी के लिए अच्छी आजीविका की पेशकश नहीं कर सकती है तो क्या गरीबों को अपराधी बनाना अनैतिक नहीं है ? नैतिक दृष्टिकोण से विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
निर्देशक शब्दः
चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचनाः
हमारे देश में भिक्षा याचन से सम्बंधित कानूनों पर प्रकाश डालते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तुः
समझाइए कि सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए ट्रैफिक लाइट, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर आवारा एवं बेघर लोगों को भीख मांगने से रोकने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
उपर्युक्त के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा कीजिए एवं अपने विचार भी प्रस्तुत कीजिए।
सदाचार एवं नैतिक रूप से उचित समाधानों के साथ निष्कर्ष निकालिए।
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How to Follow Secure Initiative? How to Self-evaluate your answer? विषयः शिक्षा से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय। एक. भारत में किसी भी नीति के क्रियान्वयन में आने वाली सामान्य चुनौतियों को रेखांकित करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस के समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कुछ उपायों की विवेचना कीजिए। निर्देशक शब्दः विवेचना कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न के सभी पक्षों की तार्किक व्याख्या कीजिए। उत्तर की संरचनाः राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस के बारे में संक्षेप में चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए। विषय वस्तुः उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिएः - सार्वजनिक नीति एवं उसकी चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। - राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस के कार्यान्वयन से पहले संभावित चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। - इसके कार्यान्वयन की राह में आने वाली संभावित चुनौतियों की व्याख्या कीजिए। आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए। विषयः संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ। दो. भारत में महामारी एवं जीएसटी व्यवस्था के कार्यान्वयन के बाद राजकोषीय संघवाद को सशक्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से उपायों की सख्त आवश्यकता पर एक लेख लिखिए। निर्देशक शब्दः लेख लिखिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें। उत्तर की संरचनाः प्रश्न का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए। विषय वस्तुः भारत में राजकोषीय संघवाद द्वारा सामना किए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कीजिए। इन मुद्दों के समाधान के लिए राजकोषीय संघवाद के सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा अपनाए जाने वाले प्रमुख उपायों पर प्रकाश डालिए। सुझाव दीजिए कि क्या करने की आवश्यकता है। निष्कर्ष निकालिए कि भारत में राजकोषीय संघवाद को प्रोत्साहित करने के लिए तत्काल आवश्यक उपाय किए जाने चाहिए। विषयः भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना। तीन. सत्तानवेवें संविधान संशोधन को रद्द करना इस बात का संकेत है कि सहकारी समितियों को विनियमित करने की शक्ति राज्यों में ही निहित होनी चाहिए। क्या आप सहमत हैं? टिप्पणी कीजिए। निर्देशक शब्दः टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए। उत्तर की संरचनाः सत्तानवेवें संविधान संशोधन की संक्षिप्त पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए। विषय वस्तुः संशोधन क्यों रद्द किया गया था? समझाइए। केंद्र सरकार के बढ़ते नियंत्रण के कारणों पर चर्चा कीजिए। सहकारी क्षेत्र पर केंद्रीय नियंत्रण के मुद्दों पर प्रकाश डालिए। निष्कर्ष निकालिए कि बेहतर यही होगा कि सरकार इस निर्णय को सही भावना से लें एवं नए मंत्रालय के निर्माण के बावजूद सहकारी क्षेत्र में भविष्य के हस्तक्षेप से दूर रहे। विषयः सा.अ.दो- द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार। सा.अ.तीन- उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव। चार. एक मुख्य व्यापार समझौते के माध्यम से भारत-यूरोपीय संघ के द्विपक्षीय व्यापार संबंधों का विस्तार करने के लिए एक महत्वपूर्ण अप्रयुक्त क्षमता उपलब्ध है। स्पष्ट कीजिए। निर्देशक शब्दः स्पष्ट कीजिए- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे। उत्तर की संरचनाः प्रश्न के संदर्भ की संक्षिप्त पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए। विषय वस्तुः - समझाइए कि एशियाई भागीदारों के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौतों से सीमित आर्थिक लाभ के बाद, भारत अपने मुक्त व्यापार समझौतों के विकल्पों का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। - चर्चा कीजिए कि मुक्त व्यापार समझौतों को इस तरह से अभिकल्पित करने की आवश्यकता है कि वे भागीदारों के बीच पूरकता बढ़ाएं एवं व्यापार को बाधित करने वाली नियामक बाधाओं को दूर करें। - भारत-यूरोपीय संघ व्यापार संबंधों की क्षमता पर एक लेख लिखिए। - इस क्षमता को साकार करने में भारत के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए। विषयः संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना। पाँच. विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों की उदाहरण सहित चर्चा कीजिए एवं भारत में इस संकट से लड़ने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव भी दीजिए। निर्देशक शब्दः चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें। उत्तर की संरचनाः साइबर अपराधों से आप क्या समझते हैं? संक्षेप में चर्चा करते हुए उत्तर की शुरुआत कीजिए। विषय वस्तुः विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों की विवेचना कीजिए। इन चुनौतियों के समाधान के लिए क्या किया जाना चाहिए? सुझाव दीजिए। निष्कर्ष निकालिए कि वर्तमान युग में सूचना प्रौद्योगिकी की निर्भरता को देखते हुए, सरकारों के लिए यह समय की आवश्यकता है कि वे बैंकों और वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा के लिए कड़े साइबर सुरक्षा मानकों को स्थापित करते हुए साइबर सुरक्षा, डेटा अखंडता और डेटा सुरक्षा क्षेत्रों में मुख्य कौशल विकसित करें। विषयः प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय। छः. भारतीय कृषि में राज्य के हस्तक्षेप के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए। निर्देशक शब्दः विश्लेषण कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए। उत्तर की संरचनाः प्रश्न के संदर्भ को संक्षेप में प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए। विषय वस्तुः भारतीय कृषि प्रणाली में विशेष रूप से राज्य के हस्तक्षेप के संबंध में शामिल चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। समझाइए कि कैसे भारत को कृषि क्षेत्र के राष्ट्रीयकरण से दूर रखने के लिए यह एक अच्छी पहल रही है, लेकिन ग्रामीण संपत्ति के अधिकार, भूमि उपयोग और भूमि की सीमा में सरकार का अप्रत्यक्ष नियंत्रण रहा है। कृषि क्षेत्र सरकारी प्रतिबंधों के प्रभाव में कैसे है? उदाहरण सहित चर्चा कीजिए। आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए। विषयः केस स्टडी। सात. ऐसे समाज में जहां सरकार भोजन या काम उपलब्ध कराने में असमर्थ है, क्या भीख माँगने को एक अवरोध अथवा अपराध माना जा सकता है? जब सरकार सभी के लिए अच्छी आजीविका की पेशकश नहीं कर सकती है तो क्या गरीबों को अपराधी बनाना अनैतिक नहीं है ? नैतिक दृष्टिकोण से विश्लेषण कीजिए। निर्देशक शब्दः चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें। उत्तर की संरचनाः हमारे देश में भिक्षा याचन से सम्बंधित कानूनों पर प्रकाश डालते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए। विषय वस्तुः समझाइए कि सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए ट्रैफिक लाइट, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर आवारा एवं बेघर लोगों को भीख मांगने से रोकने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। उपर्युक्त के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा कीजिए एवं अपने विचार भी प्रस्तुत कीजिए। सदाचार एवं नैतिक रूप से उचित समाधानों के साथ निष्कर्ष निकालिए।
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Don't Miss!
कार निर्माता कंपनी Skoda Auto India ने एक नया 1 मिनट का वीडियो जारी किया है, जो आगामी Skoda Slavia सेडान की कुछ प्रमुख फीचर्स का खुलासा करता है। वीडियो से यह स्पष्ट है कि Skoda Auto ने आगामी Slavia सेडान को कई ऐसे फीचर्स से लैस किया है, जिनका किसी भी भारतीय उपभोक्ता के लिए विरोध करना मुश्किल है।
Skoda द्वारा जारी किए गए वीडियो के अनुसार आगामी Slavia सेडान 8-इंच के फुली डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, वेंटिलेटेड फ्रंट सीटें, वायरलेस चार्जर, क्रूज़ कंट्रोल, रेन-सेंसिंग वाइपर, फ्रंट में दो यूएसबी-सी पोर्ट, क्लाइमेट कंट्रोल, रियर एसी वेंट्स, कीलेस एंट्री, एलईडी हेडलैम्प्स जैसे की अन्य फीचर्स से लैस है।
इसके अलावा Skoda Auto India ने देश में सेडान की मजबूत मांग की प्रत्याशा में Skoda Slavia का उत्पादन पहले ही शुरू कर दिया है, क्योंकि यह भारत में स्कोडा रैपिड को बदलने वाली है। Skoda के अनुसार Skoda Slavia का उत्पादन पुणे के चाकन में Skoda की अत्याधुनिक निर्माण फेसेलिटी में होता है।
Skoda Slavia के बारे में बात करते हुए, यह भारत के लिए चेक ब्रांड का दूसरा नया मॉडल है और सूत्रों के मुताबिक, ब्रांड फरवरी 2022 तक Skoda Slavia लॉन्च करने की उम्मीद कर रहा है और यह कंपनी की 'India 2. 0' रणनीति के तहत बनने वाली चेक ब्रांड की पहली सेडान है।
इस रणनीति के तहत, Skoda का लक्ष्य ब्रांड से जुड़ी ओवरऑल गुणवत्ता को प्रभावित किए बिना जितना संभव हो सके उत्पादन को आक्रामक रूप से स्थानीयकृत करके अपने वाहनों की निर्माण लागत को कम करके देश में एक लाभदायक व्यवसाय स्थापित करना है।
उत्पादन लागत को कम करने के बारे में बात करें तो Skoda Slavia चेक ब्रांड के बहुमुखी MQB-A0-IN प्लेटफॉर्म का उपयोग करती है। बता दें कि इसी प्लेटफॉर्म का हाल ही में लॉन्च की गई नई Skoda Kushaq SUV के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
MQB-A0 IN प्लेटफॉर्म को धन्यवाद करना चाहिए, क्योंकि हम यह भी उम्मीद करते हैं कि आगामी Skoda Slavia अच्छे इंटीरियर स्पेस और हाई ग्राउंड क्लीयरेंस के साथ आएगी। प्लेटफॉर्म शेयरिंग की बदौलत Skoda Slavia की प्रोडक्शन कॉस्ट बहुत कम होगी।
इसके अलावा, आगामी Skoda Slavia में भी उन्हीं दो इंजन विकल्पों द्वारा संचालित होने की संभावना है जो Skoda Kushaq SUV को शक्ति प्रदान करते हैं। इसका मतलब है कि आने वाली Skoda Slavia में पहला इंजन 1. 0-लीटर TSI पेट्रोल इंजन होगा, जो 113 बीएचपी की पावर और 178 न्यूटन मीटर का टार्क देता है।
वहीं दूसरा इंजन ज्यादा शक्तिशाली 1. 5-लीटर TSI पेट्रोल इंजन होगी, जो 148 बीएचपी की पावर और 250 न्यूटन मीटर टार्क प्रदान करता है। इन इंजनों के साथ Skoda Slavia में स्टैंडर्ड तौर पर 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स का विकल्प दिया जाएगा।
हालांकि, ज्यादा शक्तिशाली 1. 5-लीटर TSI इंजन में विकल्प के रूप में 7-स्पीड DSG गियरबॉक्स मिलेगा, जबकि 1. 0-लीटर संस्करण में 6-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स मिलेगा। उम्मीद की जा रही है कि Skoda की आगामी Skoda Slavia की कीमत आक्रामक रूप से लेगी।
फिर भी इसकी पर्याप्त और आकर्षक फीचर सूची के बावजूद Skoda Rapid की मौजूदा एक्स-शोरूम कीमत से थोड़ा ऊपर हो सकती है। हालांकि Skoda Kushaq एसयूवी और Skoda Slavia एक ही प्लेटफॉर्म पर बनी हैं, आने वाली सेडान स्पष्ट रूप से थोड़े अधिक फीचर्स के साथ आएगी।
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Don't Miss! कार निर्माता कंपनी Skoda Auto India ने एक नया एक मिनट का वीडियो जारी किया है, जो आगामी Skoda Slavia सेडान की कुछ प्रमुख फीचर्स का खुलासा करता है। वीडियो से यह स्पष्ट है कि Skoda Auto ने आगामी Slavia सेडान को कई ऐसे फीचर्स से लैस किया है, जिनका किसी भी भारतीय उपभोक्ता के लिए विरोध करना मुश्किल है। Skoda द्वारा जारी किए गए वीडियो के अनुसार आगामी Slavia सेडान आठ-इंच के फुली डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, वेंटिलेटेड फ्रंट सीटें, वायरलेस चार्जर, क्रूज़ कंट्रोल, रेन-सेंसिंग वाइपर, फ्रंट में दो यूएसबी-सी पोर्ट, क्लाइमेट कंट्रोल, रियर एसी वेंट्स, कीलेस एंट्री, एलईडी हेडलैम्प्स जैसे की अन्य फीचर्स से लैस है। इसके अलावा Skoda Auto India ने देश में सेडान की मजबूत मांग की प्रत्याशा में Skoda Slavia का उत्पादन पहले ही शुरू कर दिया है, क्योंकि यह भारत में स्कोडा रैपिड को बदलने वाली है। Skoda के अनुसार Skoda Slavia का उत्पादन पुणे के चाकन में Skoda की अत्याधुनिक निर्माण फेसेलिटी में होता है। Skoda Slavia के बारे में बात करते हुए, यह भारत के लिए चेक ब्रांड का दूसरा नया मॉडल है और सूत्रों के मुताबिक, ब्रांड फरवरी दो हज़ार बाईस तक Skoda Slavia लॉन्च करने की उम्मीद कर रहा है और यह कंपनी की 'India दो. शून्य' रणनीति के तहत बनने वाली चेक ब्रांड की पहली सेडान है। इस रणनीति के तहत, Skoda का लक्ष्य ब्रांड से जुड़ी ओवरऑल गुणवत्ता को प्रभावित किए बिना जितना संभव हो सके उत्पादन को आक्रामक रूप से स्थानीयकृत करके अपने वाहनों की निर्माण लागत को कम करके देश में एक लाभदायक व्यवसाय स्थापित करना है। उत्पादन लागत को कम करने के बारे में बात करें तो Skoda Slavia चेक ब्रांड के बहुमुखी MQB-Aशून्य-IN प्लेटफॉर्म का उपयोग करती है। बता दें कि इसी प्लेटफॉर्म का हाल ही में लॉन्च की गई नई Skoda Kushaq SUV के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। MQB-Aशून्य IN प्लेटफॉर्म को धन्यवाद करना चाहिए, क्योंकि हम यह भी उम्मीद करते हैं कि आगामी Skoda Slavia अच्छे इंटीरियर स्पेस और हाई ग्राउंड क्लीयरेंस के साथ आएगी। प्लेटफॉर्म शेयरिंग की बदौलत Skoda Slavia की प्रोडक्शन कॉस्ट बहुत कम होगी। इसके अलावा, आगामी Skoda Slavia में भी उन्हीं दो इंजन विकल्पों द्वारा संचालित होने की संभावना है जो Skoda Kushaq SUV को शक्ति प्रदान करते हैं। इसका मतलब है कि आने वाली Skoda Slavia में पहला इंजन एक. शून्य-लीटर TSI पेट्रोल इंजन होगा, जो एक सौ तेरह बीएचपी की पावर और एक सौ अठहत्तर न्यूटन मीटर का टार्क देता है। वहीं दूसरा इंजन ज्यादा शक्तिशाली एक. पाँच-लीटर TSI पेट्रोल इंजन होगी, जो एक सौ अड़तालीस बीएचपी की पावर और दो सौ पचास न्यूटन मीटर टार्क प्रदान करता है। इन इंजनों के साथ Skoda Slavia में स्टैंडर्ड तौर पर छः-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स का विकल्प दिया जाएगा। हालांकि, ज्यादा शक्तिशाली एक. पाँच-लीटर TSI इंजन में विकल्प के रूप में सात-स्पीड DSG गियरबॉक्स मिलेगा, जबकि एक. शून्य-लीटर संस्करण में छः-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स मिलेगा। उम्मीद की जा रही है कि Skoda की आगामी Skoda Slavia की कीमत आक्रामक रूप से लेगी। फिर भी इसकी पर्याप्त और आकर्षक फीचर सूची के बावजूद Skoda Rapid की मौजूदा एक्स-शोरूम कीमत से थोड़ा ऊपर हो सकती है। हालांकि Skoda Kushaq एसयूवी और Skoda Slavia एक ही प्लेटफॉर्म पर बनी हैं, आने वाली सेडान स्पष्ट रूप से थोड़े अधिक फीचर्स के साथ आएगी।
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परन्तु यह और भी कि जहां समय-समय पर, यथासशोधित, मध्यप्रदेश विद्युत् नियामक आयोग (ग्रिड संयोजित शुद्ध मापन) विनियम, 2015 के अनुसार शुद्ध मापन (नेट मीटरिंग) की सुविधा उपलब्ध कराई गई हो, वहां विद्युत् पारेषण और / या विद्युत् के चक्रण हेतु निर्बाध (खुली) पहुँच की अनुमति ऐसे परिसरों के लिए प्रदान नहीं की जाएगीः
परन्तु यह और भी कि निर्बाध (खुली) पहुँच उपभोक्ता यदि वे मिश्रित संभरक के माध्यम से पोषित होते हैं तो भी निर्बाध (खुली) पहुँच इस शर्त के अध्यधीन उपलब्ध कराई जाएगी कि वे प्रणाली की बाध्यताओं को स्वीकार करेंगे। ऐसे प्रकरणों में वितरण अनुज्ञप्तिधारी का कर्तव्य अधिनियम की धारा 42 ( 3 ) के अनुसार अविभेदकारी निर्बाध (खुली) पहुँच प्रदान करने वाले सामान्य संवाहक के बतौर होगा :
परन्तु यह और भी कि एक ऐसा व्यक्ति जिसे निर्बाध (खुली) पहुँच हेतु आवेदन प्रस्तुत करते समय बकाया देय राशि के कारण दिवालिया तथा / या शोधन अक्षम घोषित कर दिया गया हो या फिर वितरण / पारेषण अनुज्ञप्तिधारी या फिर राज्य भार प्रेषण केन्द्र के देयकों (बिलों) का भुगतान दो माह से अधिक अवधि के लिए लम्बित हो, को निर्बाध (खुली) पहुँच की पात्रता नहीं होगी।
आयोग ऐसे क्रेताओं / उपयोगकर्ताओं जिनकी आवश्यकता 1 मेगावाट से कम है, पारम्परिक स्त्रोतों से निर्बाध (खुली) पहुँच की अनुमति ऐसे समय पर जब वह परिचालन की परिस्थितियों एवं अन्य कारकों को दृष्टिगत रखते हुए व्यावहारिक समझे, प्रदान कर सकेगा।
इन विनियमों के प्रवृत्त होने पर वितरण अनुज्ञप्तिधारियों को अपने विद्यमान तथा भावी क्रेताओं की ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु पारेषण अनुज्ञप्तिधारी के तन्त्र (नेटवर्क) तक पहुँच हेतु संविदाओं / अनुबंधों के माध्यम से व्यवस्थाएं करना होंगी।
विद्यमान इकाइयों हेतु उपबंध. -
अ. विद्यमान वितरण एवं व्यापारिक अनुज्ञप्तिधारी
राज्य में पारेषण प्रणाली तथा वितरण प्रणाली का उपयोग करने वाले वितरण अनुज्ञप्तिधारी एवं व्यापारिक अनुज्ञप्तिधारी इन विनियमों के प्रवृत्त होने की तारीख से कतिपय विद्यमान अनुबंध अथवा व्यवस्था के अधीन निर्बाध (खुली ) पहँच व्यवस्था द्वारा ऐसी पारेषण तथा वितरण प्रणाली पर उन्हीं निबन्धनों तथा शर्तों द्वारा विद्यमान अनुबंध अथवा व्यवस्था के अधीन पारेषण प्रभारों, चक्रण प्रभारों तथा अन्य प्रभारों के भुगतान पर जैसा कि आयोग द्वारा समय-समय पर निर्धारित किया जाए, जारी रखेंगे ।
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परन्तु यह और भी कि जहां समय-समय पर, यथासशोधित, मध्यप्रदेश विद्युत् नियामक आयोग विनियम, दो हज़ार पंद्रह के अनुसार शुद्ध मापन की सुविधा उपलब्ध कराई गई हो, वहां विद्युत् पारेषण और / या विद्युत् के चक्रण हेतु निर्बाध पहुँच की अनुमति ऐसे परिसरों के लिए प्रदान नहीं की जाएगीः परन्तु यह और भी कि निर्बाध पहुँच उपभोक्ता यदि वे मिश्रित संभरक के माध्यम से पोषित होते हैं तो भी निर्बाध पहुँच इस शर्त के अध्यधीन उपलब्ध कराई जाएगी कि वे प्रणाली की बाध्यताओं को स्वीकार करेंगे। ऐसे प्रकरणों में वितरण अनुज्ञप्तिधारी का कर्तव्य अधिनियम की धारा बयालीस के अनुसार अविभेदकारी निर्बाध पहुँच प्रदान करने वाले सामान्य संवाहक के बतौर होगा : परन्तु यह और भी कि एक ऐसा व्यक्ति जिसे निर्बाध पहुँच हेतु आवेदन प्रस्तुत करते समय बकाया देय राशि के कारण दिवालिया तथा / या शोधन अक्षम घोषित कर दिया गया हो या फिर वितरण / पारेषण अनुज्ञप्तिधारी या फिर राज्य भार प्रेषण केन्द्र के देयकों का भुगतान दो माह से अधिक अवधि के लिए लम्बित हो, को निर्बाध पहुँच की पात्रता नहीं होगी। आयोग ऐसे क्रेताओं / उपयोगकर्ताओं जिनकी आवश्यकता एक मेगावाट से कम है, पारम्परिक स्त्रोतों से निर्बाध पहुँच की अनुमति ऐसे समय पर जब वह परिचालन की परिस्थितियों एवं अन्य कारकों को दृष्टिगत रखते हुए व्यावहारिक समझे, प्रदान कर सकेगा। इन विनियमों के प्रवृत्त होने पर वितरण अनुज्ञप्तिधारियों को अपने विद्यमान तथा भावी क्रेताओं की ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु पारेषण अनुज्ञप्तिधारी के तन्त्र तक पहुँच हेतु संविदाओं / अनुबंधों के माध्यम से व्यवस्थाएं करना होंगी। विद्यमान इकाइयों हेतु उपबंध. - अ. विद्यमान वितरण एवं व्यापारिक अनुज्ञप्तिधारी राज्य में पारेषण प्रणाली तथा वितरण प्रणाली का उपयोग करने वाले वितरण अनुज्ञप्तिधारी एवं व्यापारिक अनुज्ञप्तिधारी इन विनियमों के प्रवृत्त होने की तारीख से कतिपय विद्यमान अनुबंध अथवा व्यवस्था के अधीन निर्बाध पहँच व्यवस्था द्वारा ऐसी पारेषण तथा वितरण प्रणाली पर उन्हीं निबन्धनों तथा शर्तों द्वारा विद्यमान अनुबंध अथवा व्यवस्था के अधीन पारेषण प्रभारों, चक्रण प्रभारों तथा अन्य प्रभारों के भुगतान पर जैसा कि आयोग द्वारा समय-समय पर निर्धारित किया जाए, जारी रखेंगे ।
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बॉलीवुड से हॉलीवुड तक एक्टिंग का परचम लहरा चुकीं प्रियंका चोपड़ा ने मेट गाला Met Gala रेड कार्पेट पर दूसरी बार एंट्री मारी। इस बार वो डिजाइनर राल्फ लॉरेन के मरून रंग की वेलवेट ट्रेन गाउन में दिखीं लेकिन लोगों को उनका यह लुक कुछ खास पसंद नहीं आया, लोग उन्हें ट्रोल करने लगे।
दरअसल प्रियंका चोपड़ा ने मेट गाला 2018 की थीम 'Heavenly Bodies: Fashion and the Catholic Imagination' को फॉलो करते हुए ऐसी ड्रेस पहनी थी लेकिन इस आउटफिट को लेकर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। सोशल मीडिया पर प्रियंका पर मीम बनाए जाने लगे।
जानकारी के मुताबिक इस ड्रेस को बनाने में 250 घंटे लगे हैं। डिजाइनर ने खुद बताया कि इस कस्मट गाउन की एंब्रॉयडरी हाथ से बनाई गई है। यह भी बताया जा रहा है कि यह गाउन Jesus से प्रेरित है लेकिन फैंस को प्रियंका का ये अंदाज पसंद नहीं आया।
आप भी पढ़ें प्रियंका चोपड़ा की इस ड्रेस पर लोगों ने क्या क्या कमेंट किए। बता दें कि met gala 2018 में दीपिका पादुकोण ने भी रेड कार्पेट पर वॉक किया।
बता दें कि पिछले साल भी इसी इवेंट में प्रियंका अपनी ड्रेस की वजह से चर्चा में आईं थीं। प्रियंका को इस लुक को पसंद भी किया गया था लेकिन साथ ही उनका सोशल मीडिया पर मजाक भी उड़ाया गया। बाद में ट्रोलर्स को भी प्रियंका ने ट्रोलर्स को इसका जवाब भी दिया था।
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बॉलीवुड से हॉलीवुड तक एक्टिंग का परचम लहरा चुकीं प्रियंका चोपड़ा ने मेट गाला Met Gala रेड कार्पेट पर दूसरी बार एंट्री मारी। इस बार वो डिजाइनर राल्फ लॉरेन के मरून रंग की वेलवेट ट्रेन गाउन में दिखीं लेकिन लोगों को उनका यह लुक कुछ खास पसंद नहीं आया, लोग उन्हें ट्रोल करने लगे। दरअसल प्रियंका चोपड़ा ने मेट गाला दो हज़ार अट्ठारह की थीम 'Heavenly Bodies: Fashion and the Catholic Imagination' को फॉलो करते हुए ऐसी ड्रेस पहनी थी लेकिन इस आउटफिट को लेकर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। सोशल मीडिया पर प्रियंका पर मीम बनाए जाने लगे। जानकारी के मुताबिक इस ड्रेस को बनाने में दो सौ पचास घंटाटे लगे हैं। डिजाइनर ने खुद बताया कि इस कस्मट गाउन की एंब्रॉयडरी हाथ से बनाई गई है। यह भी बताया जा रहा है कि यह गाउन Jesus से प्रेरित है लेकिन फैंस को प्रियंका का ये अंदाज पसंद नहीं आया। आप भी पढ़ें प्रियंका चोपड़ा की इस ड्रेस पर लोगों ने क्या क्या कमेंट किए। बता दें कि met gala दो हज़ार अट्ठारह में दीपिका पादुकोण ने भी रेड कार्पेट पर वॉक किया। बता दें कि पिछले साल भी इसी इवेंट में प्रियंका अपनी ड्रेस की वजह से चर्चा में आईं थीं। प्रियंका को इस लुक को पसंद भी किया गया था लेकिन साथ ही उनका सोशल मीडिया पर मजाक भी उड़ाया गया। बाद में ट्रोलर्स को भी प्रियंका ने ट्रोलर्स को इसका जवाब भी दिया था।
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फिल्म 'पद्मावती' के रिलीज़ को लेकर बवाल बढ़ते ही जा रहा है. फिल्म को लेकर प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में फिल्म को लेकर करणी सेना ने एक नया बयान दिया है. अपने इस नये बयान में करणी सेना ने फिल्म 'पद्मावती' में रानी पद्मिनी का रोल निभा रही एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण को धमकी दे डाली. करणी सेना के राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष महिपाल मकराना ने कहा है कि, "जिस तरह लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी, ठीक उसी तरह करणी सैनिक भी उनकी नाक काट सकते हैं. "
महिपाल मकराना ने ये धमकी दीपिका के उस बयान पर दी जिसमे उन्होंने कहा था कि फिल्म तो हर हाल में रिलीज़ होगी. दीपिका ने कहा था कि कोई भी चीज फिल्म के प्रसारण पर रोक नहीं लगा सकती है. दीपिका ने कहा था कि, 'हम जिसके प्रति जवाबदेह हैं, वह सिर्फ सेंसर बोर्ड है. मैं जानती हूं और मेरा विश्वास है कि इस फिल्म की रिलीज को कोई रोक नहीं सकता. फिल्म इंडस्ट्री का सपोर्ट बताता है कि यह सिर्फ पद्मावती की बात नहीं है. हम इससे कहीं बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं. '
आपको बता दे इस फिल्म में दीपिका पादुकोण रानी पद्मावती का किरदार निभा रही हैं. रणवीर सिंह शासक अलाउद्दीन खिलजी का किरदार निभा रहे है और शाहिद कपूर राजा रावल रतन सिंह के किरदार में है. ये फिल्म 1 दिसंबर को रिलीज़ होगी.
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फिल्म 'पद्मावती' के रिलीज़ को लेकर बवाल बढ़ते ही जा रहा है. फिल्म को लेकर प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में फिल्म को लेकर करणी सेना ने एक नया बयान दिया है. अपने इस नये बयान में करणी सेना ने फिल्म 'पद्मावती' में रानी पद्मिनी का रोल निभा रही एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण को धमकी दे डाली. करणी सेना के राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष महिपाल मकराना ने कहा है कि, "जिस तरह लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी, ठीक उसी तरह करणी सैनिक भी उनकी नाक काट सकते हैं. " महिपाल मकराना ने ये धमकी दीपिका के उस बयान पर दी जिसमे उन्होंने कहा था कि फिल्म तो हर हाल में रिलीज़ होगी. दीपिका ने कहा था कि कोई भी चीज फिल्म के प्रसारण पर रोक नहीं लगा सकती है. दीपिका ने कहा था कि, 'हम जिसके प्रति जवाबदेह हैं, वह सिर्फ सेंसर बोर्ड है. मैं जानती हूं और मेरा विश्वास है कि इस फिल्म की रिलीज को कोई रोक नहीं सकता. फिल्म इंडस्ट्री का सपोर्ट बताता है कि यह सिर्फ पद्मावती की बात नहीं है. हम इससे कहीं बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं. ' आपको बता दे इस फिल्म में दीपिका पादुकोण रानी पद्मावती का किरदार निभा रही हैं. रणवीर सिंह शासक अलाउद्दीन खिलजी का किरदार निभा रहे है और शाहिद कपूर राजा रावल रतन सिंह के किरदार में है. ये फिल्म एक दिसंबर को रिलीज़ होगी.
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नई दिल्लीः रेलवे ट्रैक की मरम्मत, खराब मौसम और कुछ अन्य कारणों से आए दिन ट्रेनों के संचालन में व्यवधान पड़ता है. रेलवे को इस कारण कुछ ट्रेनों को कैंसिल करना पड़ता है, तो कुछ को डाइवर्ट करना पड़ता है. आज सोमवार (20 फरवरी) को भी रेलवे ने 574 ट्रेनों को कैंसिल कर दिया है. अमृतसर जंक्शन से कोलकाता टर्मिनल के मध्य चलने वाली दुर्गियाना एक्सप्रेस, देहरादून से हावड़ा जंक्शन के बीच चलने वाली कुंभ एक्सप्रेस, गया जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली महाबोधि एक्सप्रेस और गोरखपुर से आनंद विहार टर्मिनल आने वाली लिच्छवी एक्सप्रेस आज कैंसिल होने वाली मुख्य ट्रेनें हैं.
इंडियन रेलवे की वेबसाइट के मुताबिक, आज 498 ट्रेनों को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है. 76 रेलगाडि़यों को आंशिक रूप से निरस्त किया गया है. वहीं, भारतीय रेलवे ने आज 21 ट्रेनों को रिशैड्यूल भी किया है. इतना ही नहीं आज 7 ट्रेनों को उनके निर्धारित रूट की जगह दूसरे रास्ते से चलाया जा रहा है. आज जो ट्रेनें कैंसिल की गई हैं, उनमें पैसेंजर, मेल और सुपरफास्ट गाड़ियां शामिल हैं. बता दें कि, इंडियन रेलवे से संबंधित तक़रीबन हर जानकारी आज ऑनलाइन उपलब्ध है. कैंसिल, आंशिक रद्द और रूट डायवर्टिड ट्रेनों की जानकारी के लिए भी आप रेलवे और IRCTC की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं.
इसके साथ ही NTES App पर भी कैंसिल हुई ट्रेनों की जानकारी मिल जाती है. किसी भी ट्रेन की स्थिति की जानकारी रेलवे वेबसाइट https://enquiry. indianrail. gov. in/mntes पर या IRCTC की वेबसाइट के लिंक https://www. irctchelp. in/cancelled-trains-list/#list2 पर जाकर हासिल की जा सकती है.
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नई दिल्लीः रेलवे ट्रैक की मरम्मत, खराब मौसम और कुछ अन्य कारणों से आए दिन ट्रेनों के संचालन में व्यवधान पड़ता है. रेलवे को इस कारण कुछ ट्रेनों को कैंसिल करना पड़ता है, तो कुछ को डाइवर्ट करना पड़ता है. आज सोमवार को भी रेलवे ने पाँच सौ चौहत्तर ट्रेनों को कैंसिल कर दिया है. अमृतसर जंक्शन से कोलकाता टर्मिनल के मध्य चलने वाली दुर्गियाना एक्सप्रेस, देहरादून से हावड़ा जंक्शन के बीच चलने वाली कुंभ एक्सप्रेस, गया जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली महाबोधि एक्सप्रेस और गोरखपुर से आनंद विहार टर्मिनल आने वाली लिच्छवी एक्सप्रेस आज कैंसिल होने वाली मुख्य ट्रेनें हैं. इंडियन रेलवे की वेबसाइट के मुताबिक, आज चार सौ अट्ठानवे ट्रेनों को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है. छिहत्तर रेलगाडि़यों को आंशिक रूप से निरस्त किया गया है. वहीं, भारतीय रेलवे ने आज इक्कीस ट्रेनों को रिशैड्यूल भी किया है. इतना ही नहीं आज सात ट्रेनों को उनके निर्धारित रूट की जगह दूसरे रास्ते से चलाया जा रहा है. आज जो ट्रेनें कैंसिल की गई हैं, उनमें पैसेंजर, मेल और सुपरफास्ट गाड़ियां शामिल हैं. बता दें कि, इंडियन रेलवे से संबंधित तक़रीबन हर जानकारी आज ऑनलाइन उपलब्ध है. कैंसिल, आंशिक रद्द और रूट डायवर्टिड ट्रेनों की जानकारी के लिए भी आप रेलवे और IRCTC की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं. इसके साथ ही NTES App पर भी कैंसिल हुई ट्रेनों की जानकारी मिल जाती है. किसी भी ट्रेन की स्थिति की जानकारी रेलवे वेबसाइट https://enquiry. indianrail. gov. in/mntes पर या IRCTC की वेबसाइट के लिंक https://www. irctchelp. in/cancelled-trains-list/#listदो पर जाकर हासिल की जा सकती है.
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Happy Holi 2018: होली को रंगों का त्योहार माना जाता है। विक्रम संवंत के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को होली का पर्व मनाया जाता है। होली का पर्व दो तक मनाया जाता है जिसमें पहला दिन छोटी होली या होलिका दहन का होता है। वहीं दूसरा दिन को रंग वाली होली, धुलेटी या धुलंडी कहा जाता है। इस वर्ष 1 मार्च और 2 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा। रंगों और मस्ती के इस त्योहार का अपना एक धार्मिक और सामाजिक महत्व भी है। होली को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है। होली सिर्फ रंगों ही नहीं एकता, सद्भावना और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है।
होली शब्द होला से लिया गया है। जिसका शब्दार्थ भगवान से अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करना है। पौराणिक कथाओं के अनुसार राक्षस हिरण्यकश्यिपु को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया था। वह चाहता था कि उसे भगवान के रुप में पूजा जाए। वहीं उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। हिरण्यकश्यिपु अपने पुत्र को सबक सिखाना चाहता था तो उसने इसके लिए अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को ब्रह्म देव से अग्नि में ना जलने का वरदान प्राप्त था। हिरण्यकश्यिपु के कहने पर होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई। भगवान की कृपा से प्रहलाद बच गया लेकिन होलिका आग में भस्म हो गई। भगवान विष्णु ने प्रकट होकर हिरण्यकश्यिपु की वध कर दिया।
होलिका दहन के दिन अन्य मान्यता अनुसार भगवान को अच्छी फसल के लिए शुक्रिया किया जाता है। इस दिन होलिका दहन के दौरान पूजा की जाती है, जिसे छोटी होली भी कहा जाता है। छोटी होली की पूजा को कई लोग पिंगपूजा के नाम से भी जानते हैं। अगले दिन जिसे रंगपंचमी के नाम से जाना जाता है लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर खुशियां मनाते हैं। 1 मार्च 2018 को होलिका दहन किया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 16 मिनट से लेकर 8 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। होलिका दहन के समय होलिका की पांच से सात बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।
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Happy Holi दो हज़ार अट्ठारह: होली को रंगों का त्योहार माना जाता है। विक्रम संवंत के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को होली का पर्व मनाया जाता है। होली का पर्व दो तक मनाया जाता है जिसमें पहला दिन छोटी होली या होलिका दहन का होता है। वहीं दूसरा दिन को रंग वाली होली, धुलेटी या धुलंडी कहा जाता है। इस वर्ष एक मार्च और दो मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा। रंगों और मस्ती के इस त्योहार का अपना एक धार्मिक और सामाजिक महत्व भी है। होली को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है। होली सिर्फ रंगों ही नहीं एकता, सद्भावना और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है। होली शब्द होला से लिया गया है। जिसका शब्दार्थ भगवान से अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करना है। पौराणिक कथाओं के अनुसार राक्षस हिरण्यकश्यिपु को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया था। वह चाहता था कि उसे भगवान के रुप में पूजा जाए। वहीं उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। हिरण्यकश्यिपु अपने पुत्र को सबक सिखाना चाहता था तो उसने इसके लिए अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को ब्रह्म देव से अग्नि में ना जलने का वरदान प्राप्त था। हिरण्यकश्यिपु के कहने पर होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई। भगवान की कृपा से प्रहलाद बच गया लेकिन होलिका आग में भस्म हो गई। भगवान विष्णु ने प्रकट होकर हिरण्यकश्यिपु की वध कर दिया। होलिका दहन के दिन अन्य मान्यता अनुसार भगवान को अच्छी फसल के लिए शुक्रिया किया जाता है। इस दिन होलिका दहन के दौरान पूजा की जाती है, जिसे छोटी होली भी कहा जाता है। छोटी होली की पूजा को कई लोग पिंगपूजा के नाम से भी जानते हैं। अगले दिन जिसे रंगपंचमी के नाम से जाना जाता है लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर खुशियां मनाते हैं। एक मार्च दो हज़ार अट्ठारह को होलिका दहन किया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम छः बजकर सोलह मिनट से लेकर आठ बजकर सैंतालीस मिनट तक रहेगा। होलिका दहन के समय होलिका की पांच से सात बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।
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आसनसोल : बुधवार के दिन आसनसोल के गोदली गुरुद्वारा से गुरु ग्रंथ साहिब जी को पांच प्यारे की अगुवाई में नगर कीर्तन करते हुए शोभायात्रा के साथ आदर सम्मान से लाया गया। गुरु नानक कम्युनिटी हॉल रामबंधु आसनसोल में अखंड पाठ का आयोजन होगा। गुरु नानक साहिब जी के जन्म 552 उत्सव को मुख्य रखते हुए यह कार्यक्रम 2 दिन चलेगा। 19 तारीख को अखंड पाठ का समाप्ति होगा। इसके बाद गुरबाणी कीर्तन कथा का कार्यक्रम चलेगा। बाद में गुरुद्वारे में गुरु का लंगर भी खिलाया जाएगा। इस शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
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आसनसोल : बुधवार के दिन आसनसोल के गोदली गुरुद्वारा से गुरु ग्रंथ साहिब जी को पांच प्यारे की अगुवाई में नगर कीर्तन करते हुए शोभायात्रा के साथ आदर सम्मान से लाया गया। गुरु नानक कम्युनिटी हॉल रामबंधु आसनसोल में अखंड पाठ का आयोजन होगा। गुरु नानक साहिब जी के जन्म पाँच सौ बावन उत्सव को मुख्य रखते हुए यह कार्यक्रम दो दिन चलेगा। उन्नीस तारीख को अखंड पाठ का समाप्ति होगा। इसके बाद गुरबाणी कीर्तन कथा का कार्यक्रम चलेगा। बाद में गुरुद्वारे में गुरु का लंगर भी खिलाया जाएगा। इस शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
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टी20 विश्व कप से पहले टीम इंडिया के जिस बल्लेबाज को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह था और जिस पर सबसे ज्यादा नजरें थीं, उसने अपना जलवा दिखा ही दिया है. टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव ने ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर रंग जमाते हुए सभी उम्मीदों और अनुमानों को सही साबित किया है. (Photo: AFP)
साउथ अफ्रीका के खिलाफ मुश्किल परिस्थितियों में जोरदार पारी खेलकर अर्धशतक जमाने वाले सूर्या ने एक बार फिर टीम इंडिया को संभालते हुए जिम्बाब्वे के खिलाफ हैरतअंगेज पारी खेली और टूर्नामेंट में अपना तीसरा अर्धशतक ठोक दिया. (Photo: AFP)
सूर्या ने सिर्फ 23 गेंदों में तूफानी अर्धशतक जमाते हुए भारत को 186 रन तक पहुंचाया. सूर्या ने सिर्फ 25 गेंदों में नाबाद 61 रन कूटे जिसमें 6 चौके और 4 छक्के शामिल थे. भारत ने 14वें ओवर तक सिर्फ 101 रन बनाए थे और 4 विकेट गंवा दिए थे, लेकिन सूर्या ने अकेले दम पर भारत को इस स्थिति से बाहर निकालकर 186 रन तक पहुंचाया. (Photo: AFP)
इतना ही नहीं, इस पारी के साथ ही सूर्या ने इस साल टी20 इंटरनेशनल में अपने 1000 रन पूरे कर लिए. सूर्या ने सिर्फ 28 पारियों में 1026 रन बना लिए हैं, जिसमें औसत 44.60 और स्ट्राइक रेट 186 का है. उनसे पहले सिर्फ पाकिस्तान के मोहम्मद रिजवान ने एक साल में एक हजार से ज्यादा रन बनाए. (Photo: AFP)
इस विश्व कप में सूर्यकुमार भारत की ओर से लगातार रन बरसा रहे हैं और विराट कोहली के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय हैं. सूर्या ने 5 पारियों में 225 रन बना लिए हैं, जिसमें 3 अर्धशतक शामिल हैं और उनका स्ट्राइक रेट 193.96 का है. (Photo: AFP)
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टीबीस विश्व कप से पहले टीम इंडिया के जिस बल्लेबाज को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह था और जिस पर सबसे ज्यादा नजरें थीं, उसने अपना जलवा दिखा ही दिया है. टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव ने ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर रंग जमाते हुए सभी उम्मीदों और अनुमानों को सही साबित किया है. साउथ अफ्रीका के खिलाफ मुश्किल परिस्थितियों में जोरदार पारी खेलकर अर्धशतक जमाने वाले सूर्या ने एक बार फिर टीम इंडिया को संभालते हुए जिम्बाब्वे के खिलाफ हैरतअंगेज पारी खेली और टूर्नामेंट में अपना तीसरा अर्धशतक ठोक दिया. सूर्या ने सिर्फ तेईस गेंदों में तूफानी अर्धशतक जमाते हुए भारत को एक सौ छियासी रन तक पहुंचाया. सूर्या ने सिर्फ पच्चीस गेंदों में नाबाद इकसठ रन कूटे जिसमें छः चौके और चार छक्के शामिल थे. भारत ने चौदहवें ओवर तक सिर्फ एक सौ एक रन बनाए थे और चार विकेट गंवा दिए थे, लेकिन सूर्या ने अकेले दम पर भारत को इस स्थिति से बाहर निकालकर एक सौ छियासी रन तक पहुंचाया. इतना ही नहीं, इस पारी के साथ ही सूर्या ने इस साल टीबीस इंटरनेशनल में अपने एक हज़ार रन पूरे कर लिए. सूर्या ने सिर्फ अट्ठाईस पारियों में एक हज़ार छब्बीस रन बना लिए हैं, जिसमें औसत चौंतालीस.साठ और स्ट्राइक रेट एक सौ छियासी का है. उनसे पहले सिर्फ पाकिस्तान के मोहम्मद रिजवान ने एक साल में एक हजार से ज्यादा रन बनाए. इस विश्व कप में सूर्यकुमार भारत की ओर से लगातार रन बरसा रहे हैं और विराट कोहली के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय हैं. सूर्या ने पाँच पारियों में दो सौ पच्चीस रन बना लिए हैं, जिसमें तीन अर्धशतक शामिल हैं और उनका स्ट्राइक रेट एक सौ तिरानवे.छियानवे का है.
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उत्तरपूर्व के राज्यों में शिक्षा तो पहुंच गई पर रोजगार नहीं पहुंचे, इसलिए उच्चशिक्षा व नौकरियों के लिए उत्तरपूर्वी पहाड़ी इलाकों के युवा भारी संख्या में देश के दूसरे शहरों में आ रहे हैं. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहर, जो बाहर वाले लोगों को कुछ प्यार से तो कुछ मजबूरन अपना लेते हैं, उत्तरपूर्वी युवाओं से खफा रहते हैं. गोरे रंग के परे उन्मुक्त व खुले विचारों वाले इन कर्मठ युवाओं को अकसर बड़े पैमाने पर खुलेआम गुस्से और हिंसा का सामना करना पड़ता है.
दिल्ली में सभ्य से लाजपत नगर इलाके में नीडो तानिया नाम के युवा की बेरहमी से पिटाई, जिस से उस की मृत्यु हो गई, यह जताती है कि जो रंग, जाति, क्षेत्र का भेदभाव हम लोगों में कूटकूट कर भरा हुआ है वह तो अमेरिका में भी शायद कालों के प्रति न होगा.
हम अपना गुणगान कर लें कि यह देश सब संस्कृतियों का समावेश कर लेता है पर सच यह है कि यहां अपने से थोड़ा अलग अपने ही लोगों को मजाक का, वह भी फूहड़ मजाक का, निशाना बनाया जाता है.
जो भेदभाव इंगलैंड व अमेरिका में भारतीयों ने डौट बस्टरों के रूप में सहा होगा उस से कई गुना उत्तरपूर्व के ये पहाड़ी लोग लगातार सह रहे हैं और देश की कोई संस्था, कोई राजनीतिक दल, कोई समाजसेवी संगठन इन के लिए कुछ करने को तैयार नहीं है.
उत्तरपूर्व के इलाके वैसे गरीब हैं पर वहां के युवा थोड़े सलीके वाले हैं व साफसुथरे रहते हैं और यही उन को दूसरे लोगों से अलग करता है. बिहारी, उडि़या जहां हर तरह का अपमान पी जाते हैं वहीं पतली आंखों वाले पर मजबूत काठी के ये युवा मुकाबला करने को तैयार रहते हैं और इन की झड़पें अब कुछ ज्यादा होने लगी हैं. इन्हें अकसर चीनी समझ कर चिंकी कह दिया जाता है और कहने वाले यह नहीं समझ पाते कि वे किस तरह की चिंगारी लगा रहे हैं.
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उत्तरपूर्व के राज्यों में शिक्षा तो पहुंच गई पर रोजगार नहीं पहुंचे, इसलिए उच्चशिक्षा व नौकरियों के लिए उत्तरपूर्वी पहाड़ी इलाकों के युवा भारी संख्या में देश के दूसरे शहरों में आ रहे हैं. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहर, जो बाहर वाले लोगों को कुछ प्यार से तो कुछ मजबूरन अपना लेते हैं, उत्तरपूर्वी युवाओं से खफा रहते हैं. गोरे रंग के परे उन्मुक्त व खुले विचारों वाले इन कर्मठ युवाओं को अकसर बड़े पैमाने पर खुलेआम गुस्से और हिंसा का सामना करना पड़ता है. दिल्ली में सभ्य से लाजपत नगर इलाके में नीडो तानिया नाम के युवा की बेरहमी से पिटाई, जिस से उस की मृत्यु हो गई, यह जताती है कि जो रंग, जाति, क्षेत्र का भेदभाव हम लोगों में कूटकूट कर भरा हुआ है वह तो अमेरिका में भी शायद कालों के प्रति न होगा. हम अपना गुणगान कर लें कि यह देश सब संस्कृतियों का समावेश कर लेता है पर सच यह है कि यहां अपने से थोड़ा अलग अपने ही लोगों को मजाक का, वह भी फूहड़ मजाक का, निशाना बनाया जाता है. जो भेदभाव इंगलैंड व अमेरिका में भारतीयों ने डौट बस्टरों के रूप में सहा होगा उस से कई गुना उत्तरपूर्व के ये पहाड़ी लोग लगातार सह रहे हैं और देश की कोई संस्था, कोई राजनीतिक दल, कोई समाजसेवी संगठन इन के लिए कुछ करने को तैयार नहीं है. उत्तरपूर्व के इलाके वैसे गरीब हैं पर वहां के युवा थोड़े सलीके वाले हैं व साफसुथरे रहते हैं और यही उन को दूसरे लोगों से अलग करता है. बिहारी, उडि़या जहां हर तरह का अपमान पी जाते हैं वहीं पतली आंखों वाले पर मजबूत काठी के ये युवा मुकाबला करने को तैयार रहते हैं और इन की झड़पें अब कुछ ज्यादा होने लगी हैं. इन्हें अकसर चीनी समझ कर चिंकी कह दिया जाता है और कहने वाले यह नहीं समझ पाते कि वे किस तरह की चिंगारी लगा रहे हैं.
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रेलवे में सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे लोगों के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड जल्द ही एडमिट कार्ड जारी कर सकता है। एडमिट कार्ड रेलवे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। एक बार एडमिट कार्ड जारी होने के बाद साफ हो जाएगा कि एग्जाम कब होना है, कौनसी शिफ्ट में होना है। कैंडिडेट्स एग्जाम की तैयारी लगातार करते रहें, क्योंकि एग्जाम की डेट कभी भी आ सकती है। आरआरबी के पुराने ट्रेंड को देखते हुए एडमिट कार्ड केवल 4 दिन पहले ही जारी किए जाएंगे।
बता दें कि, आरआरबी एनटीपीसी 2020, आरआरबी ग्रुप डी 2020 और आरआरबी एमआई 2020 एडमिट कार्ड रिलीज और परीक्षा तिथियां एक बार आगे के लिए टाल दी गई हैं। आरआरबी एनटीपीसी की भर्ती परीक्षा पहले अप्रैल-मई 2020 में आयोजित होने की उम्मीद थी लेकिन अब परीक्षा के लिए अभी अधिक समय लग सकता है। क्योंकि परीक्षा संचालन एजेंसी (ईसीए) भर्ती निविदा तिथियां भारतीय रेलवे द्वारा आधिकारिक रूप से बढ़ा दी गई हैं। हाल ही जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, ईसीए के लिए प्री-बिड कॉन्फ्रेंस की तारीख 07 अप्रैल 2020 कर दी गई है। वहीं प्री-बिड प्रश्नों पर प्रतिक्रियाओं और स्पष्टीकरण 21 अप्रैल 2020 को जारी किए जाएंगे।
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रेलवे में सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे लोगों के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड जल्द ही एडमिट कार्ड जारी कर सकता है। एडमिट कार्ड रेलवे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। एक बार एडमिट कार्ड जारी होने के बाद साफ हो जाएगा कि एग्जाम कब होना है, कौनसी शिफ्ट में होना है। कैंडिडेट्स एग्जाम की तैयारी लगातार करते रहें, क्योंकि एग्जाम की डेट कभी भी आ सकती है। आरआरबी के पुराने ट्रेंड को देखते हुए एडमिट कार्ड केवल चार दिन पहले ही जारी किए जाएंगे। बता दें कि, आरआरबी एनटीपीसी दो हज़ार बीस, आरआरबी ग्रुप डी दो हज़ार बीस और आरआरबी एमआई दो हज़ार बीस एडमिट कार्ड रिलीज और परीक्षा तिथियां एक बार आगे के लिए टाल दी गई हैं। आरआरबी एनटीपीसी की भर्ती परीक्षा पहले अप्रैल-मई दो हज़ार बीस में आयोजित होने की उम्मीद थी लेकिन अब परीक्षा के लिए अभी अधिक समय लग सकता है। क्योंकि परीक्षा संचालन एजेंसी भर्ती निविदा तिथियां भारतीय रेलवे द्वारा आधिकारिक रूप से बढ़ा दी गई हैं। हाल ही जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, ईसीए के लिए प्री-बिड कॉन्फ्रेंस की तारीख सात अप्रैल दो हज़ार बीस कर दी गई है। वहीं प्री-बिड प्रश्नों पर प्रतिक्रियाओं और स्पष्टीकरण इक्कीस अप्रैल दो हज़ार बीस को जारी किए जाएंगे।
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डांसर और अभिनेत्री नोरा फतेही ने बीते सोमवार को अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज पर दिल्ली की एक अदालत में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। नोरा का कहना है कि जैकलीन और सुकेश के साथ 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में उनका नाम गलत तरीके से घसीटा गया है। बता दें कि नोरा ने इस शिकायत में 15 मीडिया संगठनों का नाम भी घसीटा है। जैकलीन फर्नांडीज के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने के बाद वकील ने मामले के बारे में बात की है।
सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ के जबरन वसूली के मामले में नोरा और जैकलीन दोनों से प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले कुछ महीनों में पूछताछ की है। जैकलीन भी इस मामले में सह-आरोपी हैं। नोरा के आरोप लगाने के बाद जैकलीन के वकील ने इस मामले में जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी क्लाइंट ने कभी भी पब्लिक में नोरा के बारे में कुछ नहीं कहा है तो ऐसे में मानहानि का कोई केस नहीं बनता है।
एक इंटरव्यू के दौरान प्रशांत पाटिल ने कहा, 'जैकलीन ने नोरा या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ किसी भी इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट मीडिया के सामने कोई बयान नहीं दिया है। उसने जानबूझकर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बारे में बात करने से इनकार किया है। आज तक उन्होंने कानून की मर्यादा बनाए रखी है और चूंकि मामला विचाराधीन है, इसलिए उन्होंने कुछ भी बोलने से मना किया है।
जैकलीन के वकील ने आगे कहा, नोरा द्वारा दायर मुकदमे को लेकर आधिकारिक रूप से अभी तक हमें कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ है। एक बार जब हमें माननीय न्यायालय का आदेश मिल जाता है, तो हम कानूनी रूप से इसका जवाब देंगे।
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डांसर और अभिनेत्री नोरा फतेही ने बीते सोमवार को अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज पर दिल्ली की एक अदालत में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। नोरा का कहना है कि जैकलीन और सुकेश के साथ दो सौ करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में उनका नाम गलत तरीके से घसीटा गया है। बता दें कि नोरा ने इस शिकायत में पंद्रह मीडिया संगठनों का नाम भी घसीटा है। जैकलीन फर्नांडीज के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने के बाद वकील ने मामले के बारे में बात की है। सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े दो सौ करोड़ के जबरन वसूली के मामले में नोरा और जैकलीन दोनों से प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले कुछ महीनों में पूछताछ की है। जैकलीन भी इस मामले में सह-आरोपी हैं। नोरा के आरोप लगाने के बाद जैकलीन के वकील ने इस मामले में जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी क्लाइंट ने कभी भी पब्लिक में नोरा के बारे में कुछ नहीं कहा है तो ऐसे में मानहानि का कोई केस नहीं बनता है। एक इंटरव्यू के दौरान प्रशांत पाटिल ने कहा, 'जैकलीन ने नोरा या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ किसी भी इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट मीडिया के सामने कोई बयान नहीं दिया है। उसने जानबूझकर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बारे में बात करने से इनकार किया है। आज तक उन्होंने कानून की मर्यादा बनाए रखी है और चूंकि मामला विचाराधीन है, इसलिए उन्होंने कुछ भी बोलने से मना किया है। जैकलीन के वकील ने आगे कहा, नोरा द्वारा दायर मुकदमे को लेकर आधिकारिक रूप से अभी तक हमें कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ है। एक बार जब हमें माननीय न्यायालय का आदेश मिल जाता है, तो हम कानूनी रूप से इसका जवाब देंगे।
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दिल्ली में आप जिससे भी ये पूछेंगे कि बेस्ट non veg food कहां मिलता है तो लोग आपको झट से यही कहंगें चांदनी चौक। अरे भई चांदनी चौक तो ठीक है लेकिन चांदनी चौक में कहां जाएं? चलिए आपकी ये भी मुश्किल आसान कर देते हैं जानिए कि चांदनी चौक की वो मशहूर दुकाने कौन सी हैं जिनका स्वाद कई दशकों से मशहूर है।
चांदनी चौक में अल यूसूफ नाम से non-vegetarian food का स्वाद लोगों को कई दशकों से चखा रहे आरीफ भाई के यहां पर खाने का स्वाद जितना दमदार है उसके दाम उतने ही कम हैं। हो सकता है आपने कई बड़े रेस्टोरेंट और फाइव स्टार होटल्स में बिरयानी खाई हो लेकिन जैसी चिकन और मटन बिरयानी अल यूसूफ में खाने के लिए मिलेगी उसका स्वाद आपको और कहीं नहीं मिलेगा। इसके अलावा इनकी दुकान पर चिकन शोरमा रोल, जहांगिरी चिकन, मटन कोरमा भी लोगों को बहुत पसंद है। चांदनी चौक में बल्लीमारान में इनकी दुकान है। आप यहां पर किसी से भी इनकी दुकान का पता पूछ लें आसानी से आप वहां पहुंच जाएंगें।
साल 1957 से चांदनी चौक में नॉन वेजिटेरियन खाना परोस रहे हाजी शबरति निहारी वाले के नाम से मशहूर इस जगह पर आप जाकर खुश हो जाएंगे। यहां खाने की खूशबू सूंघते ही आपके मुंह में पानी आ जाएगा कश्मीरी रोटी के साथ बीफ का मीट आपको यहां खासतौर पर खाने के लिए मिलेगा। यहां पर निहारी खाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं खासकर इस दुकान पर ब्रेकफास्ट करने के लिए तो आप सुबह-सुबह जाकर अपने दिन की अच्छी शुरूआत कर ही सकते हैं। चांदनी चौक में इनकी दुकान हवेली अज़म खान, चितली कबर जामा मस्ज़िद के पास है।
अगर आप कबाब खाने के शौकीन हैं और आप ये सोच रही हैं कि कहां जाएं तो चांदनी चौक में उस्ताद मोइनुद्दीन कबाब खाने के लिए आप एक बार जरूर जा सकते हैं। यहां पर आपको कबाब की कई तरह की वैरायटी मिलेंगी। इतनी सारी वेरायटी देखने के बाद आप ये सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि क्या खाएं और क्या ना खाएं। आपको ये भी बता दें कि ये कबाब आपको चांदनी चौक में लाल कुआं गली कासिमजां चावड़ी बाज़ार में मिलेंगे और सिर्फ शाम के समय ही आपको यहां पर कबाब खाने के लिए मिलेंगे यहां पर आपको कबाब के साथ चटनी और प्याज भी सर्व किया जाएगा।
अगर आप दिल्ली में बेस्ट मुगलई खाना खाना चाहते हैं तो चांदनी चौक में अल-जवाहर पहुंच जाइए। यहां पर आपको गुर्दा कलेजी और मटन कोरमा के अलावा अच्छे से पका हुआ बेस्ट तंदूरी चिकन सब मिलेगा। चांदनी चौक में अल-जवाहर आपको जामा मस्जिद के गेट नंबर 1 के उल्टी तरफ मटिया महल रोड़ पर मिलेगी।
कोरमा खाने के लिए जाएं करीम्स (Karim's)
100 साल से भी पुरानी है चांदनी चौक में करीम्स की दुकान। यहां के कबाब देखते ही आपके होठों तक पानी आ जाएगा। शीरमल, मटन बिरयानी, कीमा परांठा, बटर चिकन यहां पर सबसे ज्यादा लोग खाने के लिए आते हैं। यहां के खाने का स्वाद और सुंगध दोनों ही आपका दिल खुश कर देंगें। चांदनी चौक में Karim's की दुकान 16 नंबर गली कबाबिआं जामा मस्जिद के पास है।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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दिल्ली में आप जिससे भी ये पूछेंगे कि बेस्ट non veg food कहां मिलता है तो लोग आपको झट से यही कहंगें चांदनी चौक। अरे भई चांदनी चौक तो ठीक है लेकिन चांदनी चौक में कहां जाएं? चलिए आपकी ये भी मुश्किल आसान कर देते हैं जानिए कि चांदनी चौक की वो मशहूर दुकाने कौन सी हैं जिनका स्वाद कई दशकों से मशहूर है। चांदनी चौक में अल यूसूफ नाम से non-vegetarian food का स्वाद लोगों को कई दशकों से चखा रहे आरीफ भाई के यहां पर खाने का स्वाद जितना दमदार है उसके दाम उतने ही कम हैं। हो सकता है आपने कई बड़े रेस्टोरेंट और फाइव स्टार होटल्स में बिरयानी खाई हो लेकिन जैसी चिकन और मटन बिरयानी अल यूसूफ में खाने के लिए मिलेगी उसका स्वाद आपको और कहीं नहीं मिलेगा। इसके अलावा इनकी दुकान पर चिकन शोरमा रोल, जहांगिरी चिकन, मटन कोरमा भी लोगों को बहुत पसंद है। चांदनी चौक में बल्लीमारान में इनकी दुकान है। आप यहां पर किसी से भी इनकी दुकान का पता पूछ लें आसानी से आप वहां पहुंच जाएंगें। साल एक हज़ार नौ सौ सत्तावन से चांदनी चौक में नॉन वेजिटेरियन खाना परोस रहे हाजी शबरति निहारी वाले के नाम से मशहूर इस जगह पर आप जाकर खुश हो जाएंगे। यहां खाने की खूशबू सूंघते ही आपके मुंह में पानी आ जाएगा कश्मीरी रोटी के साथ बीफ का मीट आपको यहां खासतौर पर खाने के लिए मिलेगा। यहां पर निहारी खाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं खासकर इस दुकान पर ब्रेकफास्ट करने के लिए तो आप सुबह-सुबह जाकर अपने दिन की अच्छी शुरूआत कर ही सकते हैं। चांदनी चौक में इनकी दुकान हवेली अज़म खान, चितली कबर जामा मस्ज़िद के पास है। अगर आप कबाब खाने के शौकीन हैं और आप ये सोच रही हैं कि कहां जाएं तो चांदनी चौक में उस्ताद मोइनुद्दीन कबाब खाने के लिए आप एक बार जरूर जा सकते हैं। यहां पर आपको कबाब की कई तरह की वैरायटी मिलेंगी। इतनी सारी वेरायटी देखने के बाद आप ये सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि क्या खाएं और क्या ना खाएं। आपको ये भी बता दें कि ये कबाब आपको चांदनी चौक में लाल कुआं गली कासिमजां चावड़ी बाज़ार में मिलेंगे और सिर्फ शाम के समय ही आपको यहां पर कबाब खाने के लिए मिलेंगे यहां पर आपको कबाब के साथ चटनी और प्याज भी सर्व किया जाएगा। अगर आप दिल्ली में बेस्ट मुगलई खाना खाना चाहते हैं तो चांदनी चौक में अल-जवाहर पहुंच जाइए। यहां पर आपको गुर्दा कलेजी और मटन कोरमा के अलावा अच्छे से पका हुआ बेस्ट तंदूरी चिकन सब मिलेगा। चांदनी चौक में अल-जवाहर आपको जामा मस्जिद के गेट नंबर एक के उल्टी तरफ मटिया महल रोड़ पर मिलेगी। कोरमा खाने के लिए जाएं करीम्स एक सौ साल से भी पुरानी है चांदनी चौक में करीम्स की दुकान। यहां के कबाब देखते ही आपके होठों तक पानी आ जाएगा। शीरमल, मटन बिरयानी, कीमा परांठा, बटर चिकन यहां पर सबसे ज्यादा लोग खाने के लिए आते हैं। यहां के खाने का स्वाद और सुंगध दोनों ही आपका दिल खुश कर देंगें। चांदनी चौक में Karim's की दुकान सोलह नंबर गली कबाबिआं जामा मस्जिद के पास है। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 'प्रधानमंत्री जन-धन योजना' का शुरभारंभ कर दिया है। इस योजना के तहत देश में जिन लोगो के पास अब तक बैंक अकाउंट नहीं हैं, उन सभी का बैंक अकाउंट खोला जा रहा है।इस मौके पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक दिन में डेढ़ करोड़ खाते खोलना रिकॉर्ड है। ये बीमा सेक्टर के लिए भी रिकॉर्ड है कि एक दिन में डेढ़ करो़ड़ लोगों का दुर्घटना बीमा हुआ। उन्होंने कहा कि इस योजना का नाम सुझाने के लिए इनाम पाने वालों में ज्यादातर गैर-हिंदी भाषी हैं, लेकिन उन्होंने नाम हिंदी में दिया है। यह राष्ट्रीय एकजुटता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जन-धन योजना की बदौलत गरीबों को गरीबी से लड़ने के लिए नई और अधिक शक्ति मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि 26 जनवरी, 2015 से पहले खाता खुलवाने वालों को एक लाख रुपये के दुर्घटना बीमा के अलावा 30,000 रुपये का जीवन बीमा भी मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का लक्ष्य है कि योजना के पहले दिन करीब 1 करोड़ लोगों को यह सुविधा मुहैया कराई जाए। इस योजना के तहत पूरे देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने करीब 77 हजार शिविर लगाए गए हैं। इस योजना को एक साथ 600 जिलों में लॉन्च किया गया।इस योजना के तह पूरे देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने करीब 60 हजार शिविर लगाए गए। इस योजना को एक साथ 600 जिलों में लॉन्च किया गया।
इस योजना के तहत हर खाताधारक को एक डेबिट कार्ड और एक लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। आगे चलकर उन्हें बीमा और पेंशन उत्पादों के दायरे में भी लाया जाएगा।प्रधानमंत्री जन-धन योजना का उद्देश्य देश में सभी परिवारों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराना और हर परिवार का एक बैंक खाता खोलना है। इस योजना के तहत कम-से-कम 7.5 करोड़ परिवारों को कवर किए जाने का अनुमान है।यह मिशन दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहला चरण 15 अगस्त 2014 से 14 अगस्त 2015 तक होगा। दूसरा चरण 15 अगस्त 2015 से 14 अगस्त 2018 तक होगा।
प्रधानमंत्री जन धन योजना के शुभारंभ बिहार के मुख्यमंत्री सीएम जीतन राम माझी नहीं पहुंचे। योजना का शुभारंभ उन्हीं के हाथों किया जाना था। उनके नहीं पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने योजना का शुभारंभ किया। रामविलास पासवान ने इस मौके पर कहा कि इस योजना से देश को लोगों का काफी विकास होगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 'प्रधानमंत्री जन-धन योजना' का शुरभारंभ कर दिया है। इस योजना के तहत देश में जिन लोगो के पास अब तक बैंक अकाउंट नहीं हैं, उन सभी का बैंक अकाउंट खोला जा रहा है।इस मौके पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक दिन में डेढ़ करोड़ खाते खोलना रिकॉर्ड है। ये बीमा सेक्टर के लिए भी रिकॉर्ड है कि एक दिन में डेढ़ करो़ड़ लोगों का दुर्घटना बीमा हुआ। उन्होंने कहा कि इस योजना का नाम सुझाने के लिए इनाम पाने वालों में ज्यादातर गैर-हिंदी भाषी हैं, लेकिन उन्होंने नाम हिंदी में दिया है। यह राष्ट्रीय एकजुटता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जन-धन योजना की बदौलत गरीबों को गरीबी से लड़ने के लिए नई और अधिक शक्ति मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि छब्बीस जनवरी, दो हज़ार पंद्रह से पहले खाता खुलवाने वालों को एक लाख रुपये के दुर्घटना बीमा के अलावा तीस,शून्य रुपयापये का जीवन बीमा भी मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का लक्ष्य है कि योजना के पहले दिन करीब एक करोड़ लोगों को यह सुविधा मुहैया कराई जाए। इस योजना के तहत पूरे देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने करीब सतहत्तर हजार शिविर लगाए गए हैं। इस योजना को एक साथ छः सौ जिलों में लॉन्च किया गया।इस योजना के तह पूरे देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने करीब साठ हजार शिविर लगाए गए। इस योजना को एक साथ छः सौ जिलों में लॉन्च किया गया। इस योजना के तहत हर खाताधारक को एक डेबिट कार्ड और एक लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। आगे चलकर उन्हें बीमा और पेंशन उत्पादों के दायरे में भी लाया जाएगा।प्रधानमंत्री जन-धन योजना का उद्देश्य देश में सभी परिवारों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराना और हर परिवार का एक बैंक खाता खोलना है। इस योजना के तहत कम-से-कम सात.पाँच करोड़ परिवारों को कवर किए जाने का अनुमान है।यह मिशन दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहला चरण पंद्रह अगस्त दो हज़ार चौदह से चौदह अगस्त दो हज़ार पंद्रह तक होगा। दूसरा चरण पंद्रह अगस्त दो हज़ार पंद्रह से चौदह अगस्त दो हज़ार अट्ठारह तक होगा। प्रधानमंत्री जन धन योजना के शुभारंभ बिहार के मुख्यमंत्री सीएम जीतन राम माझी नहीं पहुंचे। योजना का शुभारंभ उन्हीं के हाथों किया जाना था। उनके नहीं पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने योजना का शुभारंभ किया। रामविलास पासवान ने इस मौके पर कहा कि इस योजना से देश को लोगों का काफी विकास होगा।
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छपारा (नईदुनिया न्यूज)। जनपद पंचायत क्षेत्र से महाराष्ट्र के लातूर में मजदूरी करने गए ग्रामीणों को ठेकेदार द्वारा बंधक बनाकर मजदूरी का भुगतान नहीं करने व मजदूरी की मांग करने पर मारपीट कर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। छपारा थाना क्षेत्र निवासी मजदूरों के स्वजनों ने इसकी शिकायत चार दिन पूर्व दर्ज कराई थी। इस पर कार्रवाई करते हुए चार सदस्यीय पुलिस टीम को लातूर भेजा गया। जहां लातूर पहुंची टीम ने 11 आदिवासी मजदूरों को ठेकेदार के चंगुल से मुक्त कराकर वापस छपारा लाकर स्वजनों से मिला दिया गया है। इस मामले में आरोपितों पर प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
दिखावा साबित हो रही योजनाएंः
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र से ग्रामीणों का पलायन मजदूरी के लिए महानगरों में जारी है। रोजगार की तलाश में ग्रामीण बड़े शहरों व अन्य राज्यों में जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीणों का पलायन से सरकार की रोजगार मूलक योजनाओं की हकीकत सामने आ रही है। ग्रामीणों को गांव में रोजगार उपलब्ध कराने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। योजनाओं को क्रियान्वयन में विभागीय अमले की लापरवाही भी उजागर हो रही है।
छपारा पुलिस ने लातूर में बंधक बनाए गए 11 आदिवासी मजदूरों किरलाल पुत्र चमरा उइके (27), दुर्गा पति किरलाल उइके (24), इरलाल पुत्र चमरा उइके (25) व एक नाबालिग सभी मुंडाटोला निवासी, राजकुमार पुत्र कोमल इनवाती (28), उर्मिला पति राजकुमार इनवाती (24) बबईया निवासी के अलावा सरूप पुत्र बिहारीलाल इनवाती (35), यशोदा पति सरूप इनवाती (32), महेश पुत्र डब्बल पंद्रे (28), मेमा बाई पंद्रे (32), गीता पुत्री महेश पंद्रे (18) निवारी टोला लखनादौन निवासी को आरोपितों के कब्जे से मुक्त कराया है। मजदूरों के साथ मारपीट करने पर आरोपियों के खिलाफ थाना जलकोट लातूर महाराष्ट्र में धारा 324, 323, 504, 34 भादंवि में तहत प्रकरण दर्ज कराया गया है। प्रकरण में पहले तो महाराष्ट्र पुलिस ने छपारा पुलिस का सहयोग नहीं किया। लेकिन बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद महाराष्ट्र पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।
पुलिस के मुताबिक छपारा के गोरखपुर निवासी राजकुमार पुत्र कोमल इनवाती (28) अपनी पत्नी व बेटी के साथ मजदूरी करने महाराष्ट्र लातूर गया था। 20 दिसंबर की रात करीब 1 बजे सुमारा गांव में अन्य मजदूरों केरलाल, इरलाल उइके सभी आराम कर रहे थे कि तभी वहां संजय राठौर व उसका भाई बाबा राठौर आए और मजदूरों पर जाति सूचक शब्दों व अपशब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि, तुम अपने घर जाओगे या नहीं। हमसे पैसे मत मांगो हम पैसे नहीं देंगे। यह बोलकर दोनों ने आदिवासी मजदूरों के सिर, हाथ, छाती पर लात घूसों से हमला कर जख्मी कर दिया। दूसरे मजदूर बचाने आए, तो दोनों आरोपितों ने उनके साथ भी मारपीट की। इसमें केरलाल उइके को सिर व दाहिने हाथ में चोट आई हैं। पीड़ितों ने आरोपितों पर कठोर कार्रवाई करने छपारा थाने में एफआइआर दर्ज कराई है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मामले को जांच में ले लिया है।
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छपारा । जनपद पंचायत क्षेत्र से महाराष्ट्र के लातूर में मजदूरी करने गए ग्रामीणों को ठेकेदार द्वारा बंधक बनाकर मजदूरी का भुगतान नहीं करने व मजदूरी की मांग करने पर मारपीट कर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। छपारा थाना क्षेत्र निवासी मजदूरों के स्वजनों ने इसकी शिकायत चार दिन पूर्व दर्ज कराई थी। इस पर कार्रवाई करते हुए चार सदस्यीय पुलिस टीम को लातूर भेजा गया। जहां लातूर पहुंची टीम ने ग्यारह आदिवासी मजदूरों को ठेकेदार के चंगुल से मुक्त कराकर वापस छपारा लाकर स्वजनों से मिला दिया गया है। इस मामले में आरोपितों पर प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। दिखावा साबित हो रही योजनाएंः आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र से ग्रामीणों का पलायन मजदूरी के लिए महानगरों में जारी है। रोजगार की तलाश में ग्रामीण बड़े शहरों व अन्य राज्यों में जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीणों का पलायन से सरकार की रोजगार मूलक योजनाओं की हकीकत सामने आ रही है। ग्रामीणों को गांव में रोजगार उपलब्ध कराने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। योजनाओं को क्रियान्वयन में विभागीय अमले की लापरवाही भी उजागर हो रही है। छपारा पुलिस ने लातूर में बंधक बनाए गए ग्यारह आदिवासी मजदूरों किरलाल पुत्र चमरा उइके , दुर्गा पति किरलाल उइके , इरलाल पुत्र चमरा उइके व एक नाबालिग सभी मुंडाटोला निवासी, राजकुमार पुत्र कोमल इनवाती , उर्मिला पति राजकुमार इनवाती बबईया निवासी के अलावा सरूप पुत्र बिहारीलाल इनवाती , यशोदा पति सरूप इनवाती , महेश पुत्र डब्बल पंद्रे , मेमा बाई पंद्रे , गीता पुत्री महेश पंद्रे निवारी टोला लखनादौन निवासी को आरोपितों के कब्जे से मुक्त कराया है। मजदूरों के साथ मारपीट करने पर आरोपियों के खिलाफ थाना जलकोट लातूर महाराष्ट्र में धारा तीन सौ चौबीस, तीन सौ तेईस, पाँच सौ चार, चौंतीस भादंवि में तहत प्रकरण दर्ज कराया गया है। प्रकरण में पहले तो महाराष्ट्र पुलिस ने छपारा पुलिस का सहयोग नहीं किया। लेकिन बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद महाराष्ट्र पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस के मुताबिक छपारा के गोरखपुर निवासी राजकुमार पुत्र कोमल इनवाती अपनी पत्नी व बेटी के साथ मजदूरी करने महाराष्ट्र लातूर गया था। बीस दिसंबर की रात करीब एक बजे सुमारा गांव में अन्य मजदूरों केरलाल, इरलाल उइके सभी आराम कर रहे थे कि तभी वहां संजय राठौर व उसका भाई बाबा राठौर आए और मजदूरों पर जाति सूचक शब्दों व अपशब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि, तुम अपने घर जाओगे या नहीं। हमसे पैसे मत मांगो हम पैसे नहीं देंगे। यह बोलकर दोनों ने आदिवासी मजदूरों के सिर, हाथ, छाती पर लात घूसों से हमला कर जख्मी कर दिया। दूसरे मजदूर बचाने आए, तो दोनों आरोपितों ने उनके साथ भी मारपीट की। इसमें केरलाल उइके को सिर व दाहिने हाथ में चोट आई हैं। पीड़ितों ने आरोपितों पर कठोर कार्रवाई करने छपारा थाने में एफआइआर दर्ज कराई है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मामले को जांच में ले लिया है।
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असदुद्दीन ओवैसी का निशाना, बोले- अगर BJP गुजरात का श्रेय लेती है, तो मोरबी के लिए कौन जिम्मेदार?
Gujarat Election 2022: राहुल गांधी बोले, मोरबी में 150 मरे, पकड़े गए 2, अभी तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
MP प्री-नर्सिंग चयन परीक्षा के रिजल्ट ग्वालियर की हाईकोर्ट बेंच ने लगाई रोक, कहा-क्या प्रदेश सरकार पर नियम लागू नहीं होता ?
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असदुद्दीन ओवैसी का निशाना, बोले- अगर BJP गुजरात का श्रेय लेती है, तो मोरबी के लिए कौन जिम्मेदार? Gujarat Election दो हज़ार बाईस: राहुल गांधी बोले, मोरबी में एक सौ पचास मरे, पकड़े गए दो, अभी तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं? MP प्री-नर्सिंग चयन परीक्षा के रिजल्ट ग्वालियर की हाईकोर्ट बेंच ने लगाई रोक, कहा-क्या प्रदेश सरकार पर नियम लागू नहीं होता ? B. A. G Convergence Pvt. Ltd. दो हज़ार बाईस : All Rights Reserved.
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तार : भारत-मत्रीको
बुआजी और निर्मला दोनो यही हैं। महादेव और दुर्गा अपने गाँव गये है । बालकृष्ण तथा प्रभुदास सिंहगढमें है। स्वदेशीके कामके लिए गोविन्द बाबूको बम्बई रखा है ।
तुम्हारे कामका सिलसिला अब जम गया है न ? रामदास और मणिलालके सम्बन्धमे एन्ड्रयूज जो समाचार देते हैं वह सन्तोषजनक है। दोनोकी तबीयत भी ठीक है और दोनों फिलहाल 'इंडियन ओपिनियन' के काममे व्यस्त है ।
इस तरह आजके इस पत्रको में परिवार के सदस्योंके बारेमे जानकारी देकर ही समाप्त करता हूँ ।
गुजराती पत्र ( एस० एन० ७१६९ ) की फोटो-नकलसे ।
११३. तार : भारत- मंत्रीको
[ १५ अप्रैल, १९२० के बाद ]
मुझपर इस वातके लिए दबाव डाला जा रहा है कि मै इंग्लैंड जाऊँ, खिलाफत प्रश्नके बारेमे मन्त्रियों व जनतासे भेंट करूँ और दूसरे शिष्टमण्डलपर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने देते हुए वहाँके मंत्रियो और जनताको सच्ची हिन्दू मुस्लिम भावनासे परिचित कराऊँ और मुसलमानोकें प्रवल बहुमतकी भावनाके प्रतिकूल निर्णय होनेसे जो घातक परिणाम होगे उनकी ओर उनका ध्यान दिलाऊँ । कोई भी गम्भीर कदम उठाने से पहले मै मन्त्रियोसे मिलकर उन्हें इस महत्त्वपूर्ण मामलेपर अपनी भावना बताना और उनका दृष्टिकोण समझना पसन्द करूंगा। इसलिए मैने परमश्रेष्ठ वाइसराय महोदयसे अपने तथा साथियों के लिए [ इंग्लैंड जानेकी ] अनुमति और अपने मिशनपर सहमति देनेका अनुरोध किया। वाइसराय महोदय अनुमति देनेको तो राजी है परन्तु यह कहनेको तैयार नहीं है कि हमारे मिशनकी कोई उपादेयता है या नहीं। इस सम्बन्ध में कोई राय देनेमे में वाइसरायकी अनिच्छा समझ सकता हूँ परन्तु साथ ही इस कठिन कार्यमें सरकारसे प्रोत्साहन प्राप्त किये विना में इंग्लैंडके लिए प्रस्थान करना नहीं चाहता । क्या आप मुझे मंत्रियोके दृष्टिकोणसे अवगत करानेकी कृपा कर सकते है ?
बॉम्बे सीक्रेट एबस्ट्रेक्ट्स
१. स्पष्ट है कि यह तार गांधीजीके १३ अप्रैल, १९२० के तारका वाइसरायसे उत्तर मिल जानेके पश्चात् भेजा गया होगा। उत्तर १५ अप्रैलतक नहीं आया था। देखिए पिछला शीर्षक ।
११४. पत्र : अब्बास तैयबजीको '
प्रिय भाई,
इतने लम्बे अर्सेतक मैने आपको कोई चिट्ठी-पत्री नही लिखी । आगा है, इसके लिए क्षमा करेंगे। ऐसा कोई दिन नहीं वीता है जव में आपको एक स्नेह-पत्र लिखनेके लिए लालायित नही रहा हूँ । लेकिन कामका दवाव इतना रहा कि लिख नही सका । मैने सरलादेवीसे अनुरोध किया कि आपको मेरी ओरसे लिख दें, लेकिन उन्होंने कहा कि खुद मेरी लिखावटमे लिखे पत्रके विना काम नहीं चल सकता । इस तरह व्यस्ततामे दिनपर दिन वीतते गये और में आपको कोई पत्र नही लिख पाया । लेकिन आशा है रेहानाकी मार्फत आपको मेरा सन्देश मिल गया होगा । क्या शानदार लड़की है वह ! वास्तव में ठाकुर घराने और तैयवजीके घराने जैसे परिवार भारत में गिने-चुने ही है और ये परिवार देशके मित्र है । मेरा भी सौभाग्य ही है कि जहाँ-कही भी जाता इन लोगोसे भेट हो जाती है। लेकिन मै तबतक माननेवाला नही हूँ जवतक कि ये वच्चियाँ और श्रीमती अव्वास मेरे लिए कुछ कताईका काम नही करती । मे जानता हूँ, इसकी जिम्मेदारी आप मुझपर डालेगे । खैर, जो चाहिए कीजिए लेकिन आप किसी एक लड़कीको यहाँ कताई सीखनेके लिए भेजकर यह कठिनाई आसानी से दूर कर सकते है। अगर यह असम्भव हो तो मुझे वहाँ एक प्रशिक्षक भेजना ही पड़ेगा । कृपया सूचित करें कि क्या करूँ ।
और अव आपकी सेहत के वारेमे । रेहानाने बताया कि अभी भी आपकी सेहत गड़वड़ ही चल रही है । आप बहुत ज्यादा फिक्र करते हैं। मैं तो वस चुटकी बजाकर सारी फिक्र फुर्र कर दूंगा और अपनेको तथा दुनियाको भी भगवान्के भरोसे छोड़ दूंगा । इस अखिल संसृतिकी योजना में हमारा महत्त्व तो चीटियोसे भी कम है। इसलिए हमे जो काम सौंपा जाता है वह सिर्फ इसलिए कि हम परिणामोंके प्रति सर्वथा अनासक्त रहकर अपने-भर पूरी ताकत लगाकर देख लें । और यह नियम हमारी शारीरिक अस्वस्थताके साथ भी इतना ही लागू होता है जितना कि पंजावके मामलेके साथ । पहले मामले में आप डाक्टरकी सलाह लीजिए और निश्चिन्त हो जाइए; और दूसरे में आप पूरी साववानीके साथ एक उत्तम रिपोर्ट तैयार कर दीजिए
१. १८५३-१९३६; गुजरातके एक राष्ट्रवादी मुसलमान नेता; बड़ौदा उच्च न्यायालयके भूतपूर्व न्यायाधीश, पंजाबके उपद्रवोंपर रिपोर्ट देनेके लिए कांग्रेसकी पंजाव उप-समिति द्वारा नियुक्त कमिश्नरोंमें से एक 1
२. पत्र में पंजावके सम्वन्ध में रिपोर्ट तैयार करनेकी चर्चासे जान पड़ता है कि यह १९२० में ही लिखा गया ।
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तार : भारत-मत्रीको बुआजी और निर्मला दोनो यही हैं। महादेव और दुर्गा अपने गाँव गये है । बालकृष्ण तथा प्रभुदास सिंहगढमें है। स्वदेशीके कामके लिए गोविन्द बाबूको बम्बई रखा है । तुम्हारे कामका सिलसिला अब जम गया है न ? रामदास और मणिलालके सम्बन्धमे एन्ड्रयूज जो समाचार देते हैं वह सन्तोषजनक है। दोनोकी तबीयत भी ठीक है और दोनों फिलहाल 'इंडियन ओपिनियन' के काममे व्यस्त है । इस तरह आजके इस पत्रको में परिवार के सदस्योंके बारेमे जानकारी देकर ही समाप्त करता हूँ । गुजराती पत्र की फोटो-नकलसे । एक सौ तेरह. तार : भारत- मंत्रीको [ पंद्रह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ बीस के बाद ] मुझपर इस वातके लिए दबाव डाला जा रहा है कि मै इंग्लैंड जाऊँ, खिलाफत प्रश्नके बारेमे मन्त्रियों व जनतासे भेंट करूँ और दूसरे शिष्टमण्डलपर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने देते हुए वहाँके मंत्रियो और जनताको सच्ची हिन्दू मुस्लिम भावनासे परिचित कराऊँ और मुसलमानोकें प्रवल बहुमतकी भावनाके प्रतिकूल निर्णय होनेसे जो घातक परिणाम होगे उनकी ओर उनका ध्यान दिलाऊँ । कोई भी गम्भीर कदम उठाने से पहले मै मन्त्रियोसे मिलकर उन्हें इस महत्त्वपूर्ण मामलेपर अपनी भावना बताना और उनका दृष्टिकोण समझना पसन्द करूंगा। इसलिए मैने परमश्रेष्ठ वाइसराय महोदयसे अपने तथा साथियों के लिए [ इंग्लैंड जानेकी ] अनुमति और अपने मिशनपर सहमति देनेका अनुरोध किया। वाइसराय महोदय अनुमति देनेको तो राजी है परन्तु यह कहनेको तैयार नहीं है कि हमारे मिशनकी कोई उपादेयता है या नहीं। इस सम्बन्ध में कोई राय देनेमे में वाइसरायकी अनिच्छा समझ सकता हूँ परन्तु साथ ही इस कठिन कार्यमें सरकारसे प्रोत्साहन प्राप्त किये विना में इंग्लैंडके लिए प्रस्थान करना नहीं चाहता । क्या आप मुझे मंत्रियोके दृष्टिकोणसे अवगत करानेकी कृपा कर सकते है ? बॉम्बे सीक्रेट एबस्ट्रेक्ट्स एक. स्पष्ट है कि यह तार गांधीजीके तेरह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ बीस के तारका वाइसरायसे उत्तर मिल जानेके पश्चात् भेजा गया होगा। उत्तर पंद्रह अप्रैलतक नहीं आया था। देखिए पिछला शीर्षक । एक सौ चौदह. पत्र : अब्बास तैयबजीको ' प्रिय भाई, इतने लम्बे अर्सेतक मैने आपको कोई चिट्ठी-पत्री नही लिखी । आगा है, इसके लिए क्षमा करेंगे। ऐसा कोई दिन नहीं वीता है जव में आपको एक स्नेह-पत्र लिखनेके लिए लालायित नही रहा हूँ । लेकिन कामका दवाव इतना रहा कि लिख नही सका । मैने सरलादेवीसे अनुरोध किया कि आपको मेरी ओरसे लिख दें, लेकिन उन्होंने कहा कि खुद मेरी लिखावटमे लिखे पत्रके विना काम नहीं चल सकता । इस तरह व्यस्ततामे दिनपर दिन वीतते गये और में आपको कोई पत्र नही लिख पाया । लेकिन आशा है रेहानाकी मार्फत आपको मेरा सन्देश मिल गया होगा । क्या शानदार लड़की है वह ! वास्तव में ठाकुर घराने और तैयवजीके घराने जैसे परिवार भारत में गिने-चुने ही है और ये परिवार देशके मित्र है । मेरा भी सौभाग्य ही है कि जहाँ-कही भी जाता इन लोगोसे भेट हो जाती है। लेकिन मै तबतक माननेवाला नही हूँ जवतक कि ये वच्चियाँ और श्रीमती अव्वास मेरे लिए कुछ कताईका काम नही करती । मे जानता हूँ, इसकी जिम्मेदारी आप मुझपर डालेगे । खैर, जो चाहिए कीजिए लेकिन आप किसी एक लड़कीको यहाँ कताई सीखनेके लिए भेजकर यह कठिनाई आसानी से दूर कर सकते है। अगर यह असम्भव हो तो मुझे वहाँ एक प्रशिक्षक भेजना ही पड़ेगा । कृपया सूचित करें कि क्या करूँ । और अव आपकी सेहत के वारेमे । रेहानाने बताया कि अभी भी आपकी सेहत गड़वड़ ही चल रही है । आप बहुत ज्यादा फिक्र करते हैं। मैं तो वस चुटकी बजाकर सारी फिक्र फुर्र कर दूंगा और अपनेको तथा दुनियाको भी भगवान्के भरोसे छोड़ दूंगा । इस अखिल संसृतिकी योजना में हमारा महत्त्व तो चीटियोसे भी कम है। इसलिए हमे जो काम सौंपा जाता है वह सिर्फ इसलिए कि हम परिणामोंके प्रति सर्वथा अनासक्त रहकर अपने-भर पूरी ताकत लगाकर देख लें । और यह नियम हमारी शारीरिक अस्वस्थताके साथ भी इतना ही लागू होता है जितना कि पंजावके मामलेके साथ । पहले मामले में आप डाक्टरकी सलाह लीजिए और निश्चिन्त हो जाइए; और दूसरे में आप पूरी साववानीके साथ एक उत्तम रिपोर्ट तैयार कर दीजिए एक. एक हज़ार आठ सौ तिरेपन-एक हज़ार नौ सौ छत्तीस; गुजरातके एक राष्ट्रवादी मुसलमान नेता; बड़ौदा उच्च न्यायालयके भूतपूर्व न्यायाधीश, पंजाबके उपद्रवोंपर रिपोर्ट देनेके लिए कांग्रेसकी पंजाव उप-समिति द्वारा नियुक्त कमिश्नरोंमें से एक एक दो. पत्र में पंजावके सम्वन्ध में रिपोर्ट तैयार करनेकी चर्चासे जान पड़ता है कि यह एक हज़ार नौ सौ बीस में ही लिखा गया ।
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देखो, ब्रह्मत्वेन सब एक हैं और मिथ्यात्वेन भी सब एक हैं । इसलिए सब साधन ठीक हैं, अपनी-अपनी कक्षा में ।
स्वामी स्वरूपानन्दजीने एक फक्कड़से पूछा- महाराज, साधन क्या है ?
फक्कड़ - साधन गधा है।
मोकलपुरके बाबा कहते थे - गुरु बिना किये तो यह सब इतना हो गया । अब कुछ करोगे तो यह बढ़ेगा ही, घटेगा नहीं।
साधन करो, अवश्य करो और अपने-अपने सम्प्रदाय, गुरु शास्त्र के अनुसार करो । परन्तु वेदान्तको साधनसे सीमित मत करो । साधन-साध्य वेदान्त नहीं है। उस अद्वितीय आत्मतत्त्वको घेरे में मत वांघो !
हमसे एक साधुने कहा - 'हमको देवताने प्रत्यक्ष प्रकट होकर कहा कि वेदान्त मिथ्या है।' मैंने कहा- तुम्हारा देवता और तुम और उसका कथन सब मिथ्या हैं । दृश्यमात्र मिथ्या है ।
पञ्चदशीमें नाटकदीप प्रकरण में बताया कि अन्तःकरणके दीयेमं दासनाके तेल और प्रारब्धकी वत्तीसे यह ज्ञानात्मक प्रकाशरूप जीवन प्रज्वलित हो रहा है। यह जीवन उन्नत हो, इसके लिए साधन करो; परन्तु वेदान्तको संकुचित मत करो ।
उपनिषद् ब्रह्मविद्या है। वृद्धिका नाम विद्या नहीं होता । बुद्धि तो मनुष्यके भीतर रहती है । उस वृद्धि के संस्कारको जो प्रक्रिया है उसको विद्या बोलते हैं। बुद्धिमें स्वाभाविक हो जड़ता रहती है जिसके स्वरूप हैं - मोहादि विकार । इस जड़ताको मिटाने के लिए ( दोषापनयन ) और उसे सत्यान्मुख करनेके लिए ( गुणाधान ) कुछ विद्याएँ होती हैं, जिनकी गिनती अपर विद्याओं में होती है। परन्तु यह जो ब्रह्मविद्या है, वह अन्तःकरण,
अन्तःकरणका विषय ( देश, काल, वस्तु ) और अन्तःकरणका अभिमानी ( विश्व-तैजस प्राज्ञ या विराट् - हिरण्यगर्भ - ईश्वर ) रूप जो व्यष्टि और समष्टिरूप त्रिपुटियाँ हैं, उनको उनके अधिष्ठान और प्रकाशककी एकताके ज्ञानसे भस्म करने ( मिथ्या अनुभव कराने ) का काम करती है ।
ऐसी ब्रह्मविद्याको व्यक्तित्वके घेरेमें मत लाओ । व्यक्तित्व छोड़ना नहीं है क्योंकि छोड़नेवाला और छोड़ना दोनों व्यक्तित्व हो हैं । छोड़ना सांख्यसिद्धान्त है और छोड़कर स्थिर होना - यह योग सिद्धान्त है । और छोड़कर जो स्थिर है उसको ईश्वर में मिला देना, यह भक्ति-सिद्धान्त है । परन्तु त्याग, त्यक्त, त्यक्तस्थिर, त्यक्त-स्थिरकी ईश्वर के साथ तन्मयता, ईश्वर और तन्मयताको प्रक्रिया - ये सब जिस प्रत्यक् चैतन्याभिन्न वस्तुके ज्ञानसे मिथ्या हो जाते हैं, उस ज्ञानका नाम ब्रह्म-विचार है । इसलिए 'अथातो ब्रह्मजिज्ञासा' द्वारा सत्यका यथार्थ ज्ञान कराने के लिए प्रतिज्ञा है, न कि अन्तःकरणको किसी स्थितिको बनाने के लिए । इसलिए वेदान्तका किसी भी दर्शन में समावेश या समन्वय नहीं होता ( अन्य सब दर्शनोंका समन्वय वेदान्तमें होता है ) । समन्वय तो एक सामाजिक प्रक्रिया है जो उपस्थित विरोधके तनावको दूर करती है। परन्तु वेदान्त सत्य-वस्तुका यथार्थ ज्ञान है, यह कोई सामाजिक सम्मेलन नहीं है । वेदान्त काई सम्प्रदाय भी नहीं है । वेदान्त के ज्ञानसे यह बात समझ में आतो है कि अज्ञानको किसी-न-किसी कक्षा में सब सम्प्रदाय, सब सिद्धान्त, सब साधन-साध्य, सब धर्म और व्यवहार यथास्थान स्थित हैं और ज्ञानकी दृष्टिसे सब या तो मिथ्या है या आत्मरूपसे सत्य हैं। इसलिए जिज्ञासुको छोटे-बड़ेके रागद्वेषके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए । उसे तो सत्यकी ओर ही उन्मुख होना चाहिए । ●
जन्माद्यषिकरण भाष्यका उपसंहार ]
( ३.० ) शास्त्रयोनित्वाधिकरण
शास्त्रयोनित्वात् ( १.१.३. )
'शास्त्रका कारण होनेसे ब्रह्म सर्वज्ञ है ।
ब्रह्म केवल शास्त्रयोनि है अर्थात् ब्रह्म के विषय में केवल शास्त्र ही प्रमाण है।"
जगत्कारणत्वप्रदर्शनेन सर्वज्ञं ब्रह्मेत्युपक्षिप्तं तदेव द्रढयन्नाह - शास्त्रयोनित्वात् । महत ऋग्वेदादेः शास्त्रस्यानेक विद्यास्थानोपबृंहितस्य प्रदोपवत् सर्वार्थावद्योतिनः सर्वज्ञकल्पस्य योनिः कारणं ब्रह्म।
नहीवृशस्य शास्त्रस्यग्वैवाविलक्षणस्य सर्वज्ञगुणान्वितस्य सर्वज्ञादन्यः संभवोऽस्ति । यद्यद्विस्तराथं शास्त्रं यस्मात् पुरुष. विशेषात्सम्भवति, यथा व्याकरणावि पाणिन्यादेर्ज्ञेयैकदेशार्थमपि स ततोऽप्यधिकतरविज्ञान इति प्रसिद्धं लोके । किमु वक्तव्यमनेकशाखाभेवभिन्नस्य देवतियंङ् मनुष्यवर्णाश्रमादि प्रविभागहेतोः ऋग्वेदाद्याख्यस्य सर्वज्ञानाकरस्याप्रयत्नेनैव लोलान्यायेन पुरुषनिश्वासवद्यस्मान् महतो भूताद्योनेः सम्भवः, 'अस्य महतो भूतस्य निश्वसितमेतद्यदृग्वेदः' (बृहदा० २.४.१० ) इत्यादि श्रुतेः तस्य महतो भूतस्य निरतिशयं सर्वज्ञत्वं सर्वशक्तिमत्त्वं चेति । ( इति प्रथम वर्णकम् )
अथवा यथोक्तमृग्वेदादि शास्त्रं योनिः कारणं प्रमाणमस्य ब्रह्मणो यथावत् स्वरूपाधिगमे । शास्त्रादेव प्रमाणाज्जगतो जन्मादिकारणं ब्रह्माधिगम्यत इत्यभिप्रायः । शास्त्रमुदाहृतं पूर्वसूत्रेयतो वा इमानि भूतानि जायन्ते०' इत्यादि । किमर्थं तोंदं सूत्रम् ? यावता पूर्वसूत्र एवैवं जातोयकं शास्त्रमुदाहरता शास्त्रयोनित्वं ब्रह्मणो दर्शितम् ।
उच्यते - तत्र पूर्वसूत्राक्षरेण स्पष्टं शास्त्रस्यानुपादानाज्ञ्जन्मादि केवल मनुमानमुपन्यस्तमित्याशङ्ख्येत तामाशङ्कां निवर्तयितुमिदं सूत्रं प्रववृते शास्त्रयोनित्वादिति ॥३॥
अर्थ - जगत्कारणत्वदर्शन करनेसे ब्रह्म सर्वज्ञ है, यह अर्थतः प्राप्त हुआ । उसोको दृढ़ करते हुए कहते हैं- 'शास्त्रयोनित्वात्' ।
अनेक विद्यास्थानोंसे उपकृतदीपकके समान सब अर्थोंका प्रकाशन करनेमें समर्थ और सर्वज्ञके समान महान् ऋग्वेदादि शास्त्रका योनि अर्थात् कारण ब्रह्म है । ऐसे ऋग्वेदादिरूप सर्वगुणसम्पन्न शास्त्र की उत्पत्ति सर्वज्ञको छोड़कर किसी अन्यसे नहीं है। जो-जो विस्तारार्थ शास्त्र जिस पुरुष विशेषमें विरचित हैंशास्त्रयोनित्वाधिकरण ]
जैसे पाणिनि आदि के जयका एक अंशरूप अर्थसे युक्त व्याकरण आदि शास्त्र है, वह पुरुषविशेष उस स्वविरचित शास्त्रसे अधिक ज्ञानवान् होता है, यह लोकमें प्रसिद्ध है। तो अनेक शाखाभेदसे भिन्न-भिन्न देव, मनुष्य, पशु वर्ण, आश्रम आदि विभागोंके जो हेतु हैं और सर्वज्ञान के भण्डार हैं, ऐसे ऋग्वेदादि नामक वेदोंकी अनायास हो लीलान्यायसे पुरुष- निःश्वासकी तरह जिस महान् सद्रूप कारणसे उत्पत्ति होती है, क्योंकि 'अस्य महतो०' इत्यादि श्रुति हैं, उस महान् सद्रूप ब्रह्म के निरतिशय सर्वज्ञत्व और सर्वशक्तिमत्वके विषय में तो कहना ही क्या है । यह 'शास्त्रयोनित्वात् ' सूत्रका पहला अर्थ है ।
अथवा पूर्वोक्त ऋग्वेदादि शास्त्र इस ब्रह्मके यथार्थस्वरूपके ज्ञानमें योनि अर्थात् प्रमाण हैं ( यह 'शास्त्रयोनित्वात्' सूत्रका दूसरा अर्थ है ) । शास्त्र प्रमाणसे ही यह ज्ञात होता है कि जगत्के जन्मादिका कारण ब्रह्म है, यह अभिप्राय है । पूर्वसूत्र में 'यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते ०' इत्यादि शास्त्र उद्धृत हैं । ( शंका - ) जब पूर्वसूत्र में ही इस प्रकार शास्त्रका उदाहरण देते हुए सूत्रकारने 'ब्रह्म शास्त्र-योनि है' ऐसा दिखला दिया है तो फिर इस सूत्रका क्या प्रयोजन है ? उत्तर यह कि पूर्वसूत्रके अक्षरोंसे शास्त्रका स्पष्ट ग्रहण नहीं किया गया । इसलिए जगत्के जन्मादिका केवल अनुमानरूप से उपन्यास किया है, कोई ऐसी शंका करे तो उस शंकाको निवृत्ति के लिए 'शास्त्रयोनित्वात्' यह सूत्र प्रवृत्त हुआ है।
( ३. १ ) पूर्वसूत्रों के साथ सम्बन्ध
अथातो ब्रह्मजिज्ञासा, जन्माद्यस्यः यतः, शास्त्रयोनित्वात्, तत्तु समन्वयात् - यह वेदान्तदर्शनकी चतुःसूत्री कहलाती है। वेदान्तके विषय में चार-चारका प्रसंग बहुत है । ब्रह्म चतुष्पाद है - जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय अथवा विश्व, तेजस, प्राज्ञ और तुरीय । ब्रह्मसूत्रके चार अध्याय हैं। प्रत्येक अध्याय में चारचार पाद हैं। सारे ब्रह्मसूत्रका सार- अर्थ इन्हीं चार सूत्रोंमें आ गया है । यह महर्षि बादरायणका रचना-कौशल ही है ।
प्रथम सूत्र 'अथातो ब्रह्मजिज्ञासा' में बताया गया कि जीवन में विवेक होना आवश्यक है। अच्छे-बुरेका विवेक दूसरी चीज है । क्या कर्म ( करणीय ) है क्या अकर्म (अकरणीय ) है, इसमें जैसेजैसे उम्र और अनुभव बढ़ता जाता है वैसे-वैसे यह विवेक बुद्धि भी बढ़ती जाती है । धर्मके सम्बन्ध में भी ऐसा ही है । जो जितना समझता है उसके लिए उतना ही ठीक है। परन्तु वस्तु-विषयक ज्ञान वस्तुनिष्ठ होता है। इसलिए जबतक वस्तु जैसी है उसका वैसा हो ज्ञान न हो जाय तबतक चाहे कोई कुछ भी करें, कहे, समझे, सब अज्ञान ही रहता है । कर्त्तव्याकर्त्तव्यका ज्ञान और ( धर्माधर्मका ज्ञान ) भी भौगोलिक दृष्टि से अथवा साम्प्रदायिक दृष्टिसे अथवा जातीय या व्यक्तिगत दृष्टि से अलग-अलग हो जाता है, परन्तु वस्तुका ज्ञान एक ही रहता है। बल्कि उस ज्ञान में अलगाव ही अज्ञान है। इसलिए प्रथम सच्ची वस्तु क्या है और झूठी वस्तु क्या है - इसका विवेक किया जाना चाहिए । कालकी दृष्टिसे नित्य क्या है, अनित्य क्या है; देशकी दृष्टि से पूर्ण क्या है,
पुर्वसूत्रों के साथ सम्बन्ध ]
अपूर्ण क्या है, वस्तुको दृष्टि से 'अहम्' क्या है, इदं क्या है ? - इन तीनों प्रकार के विवेकका उदय होना चाहिए ।
विवेक के उदयका लक्षण है - वैराग्य । अनित्य, अपूर्ण और 'इदम्' में अरुचि - यही वैराग्य है । यह विवेकके परिणामस्वरूप जीवन में प्रवेश करता है। जो लोग वेदान्त पढ़कर यह ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं कि व्यापारमें चाहे जितना पाप कर लो, पाप नहीं लगेगा, वे लोग तो वेदान्तके अधिकारी ही नहीं हैं । वेदान्त उस अधिकारी के लिए है जो अनित्य, अपूर्ण और 'इदम्'को छोड़कर नित्य, पूर्ण और 'अहम् में रुचि रखनेवाला है। बिना विवेकके ऐसा हो नहीं सकता। इसलिए प्रथम कक्षा विवेककी है और दूसरी वैराग्यको ।
जत्र वैराग्य आता है तो छह बातें अपने आप जीवनमें आती हैं, इनको 'पट्सम्पत्ति' बोलते हैं। ये परमार्थ - पथिकको पूँजी हैं । ये हैं शम, दम, तितिक्षा, उपरति श्रद्धा और समाधान । परन्तु ये हमेशा रहतों नहीं । इसलिए तब यह इच्छा होता है कि इस चित्तसे ही हमको मुक्ति मिल जाय - यह मुमुक्षा है । ( इस प्रकार विवेक, वैराग्य, षट्सम्पत्ति और मुमुक्षासे सम्पन्न अधिकारी यह अथ-पदका अर्थ है ! ।
तब क्या करनेसे चित्तसे मुक्ति मिलेगी - यह एक पक्ष है। किस देवताको उपासना करनेसे चित्तसे मुक्ति मिलेगी? यह दूसरा पक्ष है । कहाँ बैठनेसे चित्तमे मुक्ति मिलेगो ? यह तीसरा पक्ष है । करन कर्म हैं, देवताकी आराधना उपासना है, वेडा योग है। इनमें कुछ करनेसे या उपासनासे वा योगमे किसी भी चित्त नहीं छूटेगा; क्योंकि ये सब चित्तके ही आवाही ।
हाथसे अनात्मपदार्थको पकड़े रखना भी चाहते हो और नुनि भी चाहते हो ! इसमें हाथ से और कर्तृत्वसे मुक्ति कहाँ मिलेगो :
वत : २
चित्तको देवताकार भी रखना चाहते हो और चित्तसे मुक्ति भी चाहते हो ! इसमें देवता कहाँसे छूटेगा ? शान्तिसे बैठे रहना भी चाहते हो और चित्तसे मुक्ति भी चाहते हो ! इसमें अज्ञान कहाँसे छूटेगा ?
यह समझमें आ जाना कि बिना तत्त्वज्ञान के मुक्ति नहीं हो सकती, यही 'अतः' पदका अर्थ है ।
इसके पश्चात् हो अनन्तको जिज्ञासा चित्तमें उदय होतो है । इसीको ब्रह्मजिज्ञासा बोलते हैं । ब्रह्म शब्दका अर्थ होता हैपरिच्छेद सामान्यात्यन्ताभावोपलक्षितत्वम् ब्रह्मत्वम् ।
देश, काल, द्रव्य, जीव-अजीव प्रत्यक्ष परोक्ष, अपरोक्ष वस्तुओंके जितने भी छोटे-छोटे टुकड़े हैं, सब परिच्छेद-सामान्य हैं । इन परिच्छेद-सामान्यके अत्यन्त अभावसे उपलक्षित ( उस अभावका प्रकाशक एवं अधिष्ठान ) जो चेतनतत्त्व है उसको ब्रह्म कहते है । यही जिज्ञास्य है ।
यह जिज्ञास्य ब्रह्म यदि प्रत्यक्-चैतन्यसे अभिन्न है तब तो पूर्ण है और यदि भिन्न है तो दोनों ही अधूरे हैं, कोई पूर्ण नहीं है । मान लो कि दोनों ही पूर्ण हैं तो किसको रखोगे ? आत्माको ( अपने आपको ) या ब्रह्मको ( अन्यको ) । अन्यको रखोगे तो वह आत्माके बिना मालूम ही नहीं पड़ेगा और अपना अभाव तुम सोच नहीं सकते, क्योंकि अभाव सोचनेवाला हो अपना आपा है। इसलिए अद्वितीय ब्रह्मका ज्ञान होनेपर अपना आपा ही अद्वितीय सिद्ध होता है। जबतक अपना आत्मा ही अद्वितीय ब्रह्म नहीं होगा तबतक अद्वितीयता हो सिद्ध नहीं हो सकती। इस प्रकार संक्षेपमें यह 'अथातो ब्रह्मजिज्ञासा' का भावार्थ हुआ ।
अब कहा कि ठीक है अपना आत्मा ब्रह्म है । परन्तु यह जगत् पूर्वसूत्रों के साथ सम्बन्ध ]
क्या है ? यह तो कुछ सिद्ध नहीं हुआ न ! इसपर कहा कि 'जन्माद्यस्य यतः'।
जहाँ आत्मा ब्रह्मसे अभिन्न समझने की जरूरत है वहाँ जगत् भी ब्रह्मसे अलग नहीं है, यह भी समझनेकी जरूरत है। अगर दुनिया ब्रह्मसे अलग है, तो ब्रह्म अद्वितीय कैसे ? और यदि जीव ब्रह्मसे अलग है तो ब्रह्म अद्वितीय कैसे ? इसमें गणित यह है कि आत्मासे प्रपञ्च जुदा नहीं है और ब्रह्मसे प्रपञ्च जुदा नहीं है, अतः आत्मासे ब्रह्म जुदा नहीं है । आत्मा हो प्रपञ्च, ब्रह्माण्ड, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, ईश्वर के रूप में प्रतीत हो रहा है । ज्ञानस्वरूपकी ही प्रतीति हो रही है - सर्वके रूप में !
यह अखण्ड आत्मबोध है । न यह आधिभौतिक शयन बनाम निद्रा है, न आधिदैविक शयन बनाम तल्लीनता है और न आध्यात्मिक शयन बनाम समाधि है ! इसमें आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिकका भेद नहीं है । यह तो ज्ञानका एक समुद्र है जिसमें प्रतीतिको लहरें हिलोरें मारती रहती हैं; परन्तु अधिष्ठान जल-रूप ज्ञानसे कभी अलग नहीं होतीं।
'जन्माद्यस्य यतः' । यह दुनिया परमात्मा से बिलकुल जुदा नहीं है । परन्तु समझानेको प्रक्रिया यह है कि पहले ब्रह्मको दुनियासे अलग बताया जाता है और फिर दुनिया ब्रह्मसे अलग नहीं है - यह समझाया जाता है । जैसे सोनेको पहचानने के लिए पहिले उसे नाम-रूपसे अलग बताया जाता है कि जेवरसे सोना अलग है । तदुपरान्त यह बात समझ में आजाती है कि सब जेवरोंके नामरूप सोनामें ही कर्लपित है । जेवरसे न्यारा सोना है, परन्तु सोनासे न्यारा जेवर नहीं है ।
जो कार्यंसें पृथक् करके परब्रह्म परमात्माको पहचान लेता है
वही फिर पहचान पाता है कि परब्रह्म परमात्मा से पृथक् जगत् नहीं है ।
तो 'यह' के रूपमें ( इदं रूपसे तथा इदं सम्बन्धित अहम् रूपसे ) जो प्रतीत होता है अथवा अनुभव होता है अथवा स्फुरित होता है, वह है जगत् । इस जगत्का ( अस्य ) जन्म, इस जगत्की स्थिति, इस जगत्का लय ( जन्मादि ) जिससे होता है ( यतः ) वह है ब्रह्म । 'जन्माद्यस्य यतः' ।
यह सृष्टि आत्मासे हुई या ईश्वरसे ? प्रकाशकी दृष्टि से आत्मासे और उत्पत्तिकी दृष्टि से ईश्वरसे । तो जगत् के दो कारण हुए - उपादान कारण ईश्वर और प्रकाशक ( निमित्त ) कारण आत्मा ? कौषीतकी उपनिषद् में बताया है कि जैसे सुषुप्तिकालमें सृष्टि आत्मामें लीन हो जाती है, वैसे ही प्रलयकाल में सृष्टि ईश्वरमें लीन हो जाती है । परन्तु इस समय इन्द्रियाँ अपने-अपने विषयों सहित सो जाती हैं, उस समम सुषुप्ति और प्रलयका भेद किसने देखा है ? इसलिए जो सुषुप्ति उपाधिक आत्मा है वही प्रलयोपाधिक आत्मा है । अतः इन्द्रियोंके सो जानेपर जो ईश्वर चैतन्य समष्टिमें शेष रहता है वही आत्म चैतन्यके रूपमें व्यष्टिमें शेष रहता है। अतएव आत्म-चैतन्य और ईश्वर- चैतन्य दोनों अलग-अलग वस्तुएं नहीं हैं, दोनों एक हैं ।
'सृष्टि 'इदं 'रूप है, उत्पत्ति, स्थिति, प्रलयवाली है । जो सृष्टिका कारण है ( 'यतः' ) वह 'अनिदम्' है । उत्पत्ति, स्थिति, प्रलयवाला नहीं है । यह 'जन्माद्यस्य यतः ' सूत्रसे बात निकलती है। अच्छा, यह कारण 'सः' है या 'अहम्' है ? तो बोले कि 'सः' भी 'इदम्' रूपसे ही वृत्तिमें प्रतीत होता है; वह भी जात-अजात होता है । परन्तु आत्मदेव तो ज्यों-के-त्यों मसंग ही रहते हैं। इसलिए ईश्वर भी आत्मदेवसे भिन्न नहीं हो सकते । इसलिए जब 'जन्माद्यस्य
यतः' बोलते हैं तो सृष्टि के अभिन्ननिमित्तोपादान कारणके रूपमें हो परमात्माका वर्णन करते हैं । माने सृष्टि बनानेवाला भी वही ओर बननेवाला भी वही । इसका यह अर्थ नहीं है कि वह दो रूपवाला है। 'बनानेवाला है' का अर्थ है कि वह सर्वज्ञ है और 'बननेवाला है' का अर्थ है कि उसमें सर्वभवनसामर्थ्य है अर्थात् वह सर्वशक्ति है ।
इसलिए 'जन्माद्यस्य यतः' में जो 'यत्' है बह सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान् है । कहो कि इसमें तो विरोध होगा, क्योंकि शक्ति बदलनेवाली चीज होती है और ज्ञान न बदलनेवाला होता है । तो इसका समाधान यह है कि 'ज्ञान' तो ब्रह्म का स्वरूप है और शक्ति विवर्त है। इसलिए ब्रह्म विवर्ती अभिन्ननिमित्तोपादान कारण है सृष्टिका । ज्ञानस्वरूप होनेके कारण ब्रह्म आत्मासे अभिन्न है और प्रपञ्च उसमें प्रतीतिमात्र है ।
इस प्रकार 'जन्माद्यस्य यतः से ब्रह्मको जगत् के कारणके रूप में निरूपण किया गया और उस निरूपणसे ब्रह्म सर्वज्ञ है यह अर्थतः प्राप्त भो हो गया, तथापि ब्रह्मको सर्वज्ञताका स्पष्ट निरूपण नहीं हुआ । अतः अपने मुखसे ही ब्रह्मकी सर्वज्ञताका निरूपण करनेके लिए अगला सूत्र प्रारम्भ होता है -
शास्त्रयोनित्वात् (१.१.३)
संस्कृत भाषा में सूत्रप्रणाली होने से थोड़े-से-थोड़े शब्दों में अधिकसे अधिक बात कह दी जाती है। ऐसी दूसरी किसी भाषामें नहीं है । हम तो खैर सब भाषाएँ नहीं जानते । परन्तु स्वामी भारतीकृष्ण तीर्थजी महाराज जो पुरीके शंकराचार्य भी थे, वे कोई १५-२० भाषाएँ जानते थे और सुनते हैं उन्होंने उन भाषाओं में परीक्षा भी दी थी । बाइबिल तो उनकी जुबानपर रहती थी । वे बताते थे कि सूत्रप्रणाली संस्कृत भाषाकी ही विशेषता है।
। ब्रह्मसुत्र प्रवचन :
सब भाषाएँ शब्दको अर्थ संकेतयुक्त' मानती हैं। अर्थ पहले रहता है फिर शब्द होता है, यह चार्वाकोंकी मान्यता है। पहले ( हृदय में संकल्पपूर्वक ) शब्द रहता है, बादमें उसका अर्थ होता
- यह वैयाकरणोंका मत है । शब्द और अर्थकी उत्पत्ति एक साथ होती है - ऐसा मीमांसक लोग कहते हैं । शब्द और अर्थ दोनों व्यावहारिक ही हैं - ऐसा बौद्ध लोग कहते हैं। दोनों संविद हैं - यह शैव-सम्प्रदाय है । शब्द और अर्थ दोनों ब्रह्म के विवर्त हैं - यह वेदान्त- सिद्धान्त है।
शब्दोंको भी अपनी एक विधा है और उसका ज्ञान होना बहुत आवश्यक है, खासकर सूत्रोंका अर्थ करने में । 'अर्थ अमित अति आखर थोरे ।' भगवान् शङ्कराचार्यजीने इस सूत्रके दो अर्थ किये हैं - ( १ ) ब्रह्म शास्त्रोंकी योनि अर्थात् कारण है, अतः ब्रह्मसर्वज्ञ है। दूसरा ( २ ) शास्त्र ब्रह्म के विषय में योनि अर्थात् प्रमाण है।
इन अर्थों की व्याख्या तो आपको आगे सुनायेंगे हो । परन्तु हम आपको यह बताना चाहते हैं कि आजकल जो वेदान्त कहानी- किस्से, छन्द, गजलके रूप में सुना या सुनाया जाता है उससे वेदान्त कुछ पल्ले नहीं पड़ता। इन वेदान्तवादियोंके अन्तःकरणके एक कोने में द्वैत पड़ा रहता है, आसक्ति पड़ी रहती है, और दूसरे कोने में अद्वैत भी पड़ा रहता है । जो अन्तःकरणसे खेलते हैं, वे वेदान्तकी छाया भी नहीं छूते । वेदान्त वह चोज है जिससे समस्त व्यक्तित्वका बाध होता है । इसके विपरीत धर्म, उपासना और योग सब व्यक्तित्वकी फुरना हैं । ये सब अव्यक्तमें लोन रहते हैं और अव्यक्त स्वयं परब्रह्म परमात्मा में एक फुरनामात्र है, प्रतीतिमात्र है । अव्यक्त नामकी कोई वस्तु ब्रह्ममें नहीं है।
यह जो परमात्मा है वह आनन्द होनेसे प्रत्यगात्मा है और ज्ञानस्वरूप होने से प्रत्यगात्मा है। सबके मिट जानेपर भी अपना आपा नहीं मिटता । अपने अभावकी प्रतीति कभी किसीको नहीं हो सकती । सारे जगत्की प्रतीति अपने-आपमें ही होती है । जगत् के उपादानको और उसके निमित्तकी दोनोंकी प्रतीति अपने में ही होती है। अनन्तकोटि ब्रह्माण्डकी प्रतीति अपने आपमें होती है और उनके कारण ईश्वरको भी प्रतीति अपने-आपमें होती है । यहाँतक कि यदि ब्रह्म भी अन्य हो तो उसकी प्रतीति भी अपने आपमें ही होगी। इसलिए देश, काल, वस्तुका परिच्छेद हुए बिना ही अपना जो स्वरूप है वह अखण्ड, अविनाशी और अद्वय है। अखण्ड अर्थात् देश-परिच्छेदसे रहित, अविनाशी अर्थात् काल-परिच्छेदसे रहित और अद्वय अर्थात् वस्तु-परिच्छेद से रहित ।
जो ज्ञान व्यक्ति के अधीन होता है वह स्वरूप नहीं है । अनुवादक ज्ञान भी स्वरूप नहीं है। अनुवादक ज्ञान क्या ? आँखसे जैसा घड़ा दीखा वैसा बुद्धिमें स्वीकृत हो गया । उसका वैसा ही वर्णन कर दिया। यह अनुवादक ज्ञान इन्द्रिय परतन्त्र है । परन्तु आत्माकी ब्रह्मताका जो ज्ञान है ( स्वरूप - ज्ञान ) वह पहलेसे जाने हुएका ज्ञान नहीं है । जो सबको जानकर स्वयं अनजान रह जाता है यह तो वह ज्ञान है । इसमें इन्द्रिय, मन या बुद्धि कोई काम नहीं देती। यह तो जिन्होंने अपने जीवन इस विषय के अनुसन्धान में समर्पित कर दिये, उन महापुरुषोंके द्वारा ही जाना जा सकता है। कोई खालाजीका घर नहीं है ब्रह्मज्ञान !
यह बात पहले कह चुके हैं कि 'जन्माद्यस्य यतः' में कार्यसे कारणका अनुमान नहीं है । यह दृश्यमान जगत् किसीसे बना,
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देखो, ब्रह्मत्वेन सब एक हैं और मिथ्यात्वेन भी सब एक हैं । इसलिए सब साधन ठीक हैं, अपनी-अपनी कक्षा में । स्वामी स्वरूपानन्दजीने एक फक्कड़से पूछा- महाराज, साधन क्या है ? फक्कड़ - साधन गधा है। मोकलपुरके बाबा कहते थे - गुरु बिना किये तो यह सब इतना हो गया । अब कुछ करोगे तो यह बढ़ेगा ही, घटेगा नहीं। साधन करो, अवश्य करो और अपने-अपने सम्प्रदाय, गुरु शास्त्र के अनुसार करो । परन्तु वेदान्तको साधनसे सीमित मत करो । साधन-साध्य वेदान्त नहीं है। उस अद्वितीय आत्मतत्त्वको घेरे में मत वांघो ! हमसे एक साधुने कहा - 'हमको देवताने प्रत्यक्ष प्रकट होकर कहा कि वेदान्त मिथ्या है।' मैंने कहा- तुम्हारा देवता और तुम और उसका कथन सब मिथ्या हैं । दृश्यमात्र मिथ्या है । पञ्चदशीमें नाटकदीप प्रकरण में बताया कि अन्तःकरणके दीयेमं दासनाके तेल और प्रारब्धकी वत्तीसे यह ज्ञानात्मक प्रकाशरूप जीवन प्रज्वलित हो रहा है। यह जीवन उन्नत हो, इसके लिए साधन करो; परन्तु वेदान्तको संकुचित मत करो । उपनिषद् ब्रह्मविद्या है। वृद्धिका नाम विद्या नहीं होता । बुद्धि तो मनुष्यके भीतर रहती है । उस वृद्धि के संस्कारको जो प्रक्रिया है उसको विद्या बोलते हैं। बुद्धिमें स्वाभाविक हो जड़ता रहती है जिसके स्वरूप हैं - मोहादि विकार । इस जड़ताको मिटाने के लिए और उसे सत्यान्मुख करनेके लिए कुछ विद्याएँ होती हैं, जिनकी गिनती अपर विद्याओं में होती है। परन्तु यह जो ब्रह्मविद्या है, वह अन्तःकरण, अन्तःकरणका विषय और अन्तःकरणका अभिमानी रूप जो व्यष्टि और समष्टिरूप त्रिपुटियाँ हैं, उनको उनके अधिष्ठान और प्रकाशककी एकताके ज्ञानसे भस्म करने का काम करती है । ऐसी ब्रह्मविद्याको व्यक्तित्वके घेरेमें मत लाओ । व्यक्तित्व छोड़ना नहीं है क्योंकि छोड़नेवाला और छोड़ना दोनों व्यक्तित्व हो हैं । छोड़ना सांख्यसिद्धान्त है और छोड़कर स्थिर होना - यह योग सिद्धान्त है । और छोड़कर जो स्थिर है उसको ईश्वर में मिला देना, यह भक्ति-सिद्धान्त है । परन्तु त्याग, त्यक्त, त्यक्तस्थिर, त्यक्त-स्थिरकी ईश्वर के साथ तन्मयता, ईश्वर और तन्मयताको प्रक्रिया - ये सब जिस प्रत्यक् चैतन्याभिन्न वस्तुके ज्ञानसे मिथ्या हो जाते हैं, उस ज्ञानका नाम ब्रह्म-विचार है । इसलिए 'अथातो ब्रह्मजिज्ञासा' द्वारा सत्यका यथार्थ ज्ञान कराने के लिए प्रतिज्ञा है, न कि अन्तःकरणको किसी स्थितिको बनाने के लिए । इसलिए वेदान्तका किसी भी दर्शन में समावेश या समन्वय नहीं होता । समन्वय तो एक सामाजिक प्रक्रिया है जो उपस्थित विरोधके तनावको दूर करती है। परन्तु वेदान्त सत्य-वस्तुका यथार्थ ज्ञान है, यह कोई सामाजिक सम्मेलन नहीं है । वेदान्त काई सम्प्रदाय भी नहीं है । वेदान्त के ज्ञानसे यह बात समझ में आतो है कि अज्ञानको किसी-न-किसी कक्षा में सब सम्प्रदाय, सब सिद्धान्त, सब साधन-साध्य, सब धर्म और व्यवहार यथास्थान स्थित हैं और ज्ञानकी दृष्टिसे सब या तो मिथ्या है या आत्मरूपसे सत्य हैं। इसलिए जिज्ञासुको छोटे-बड़ेके रागद्वेषके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए । उसे तो सत्यकी ओर ही उन्मुख होना चाहिए । ● जन्माद्यषिकरण भाष्यका उपसंहार ] शास्त्रयोनित्वाधिकरण शास्त्रयोनित्वात् 'शास्त्रका कारण होनेसे ब्रह्म सर्वज्ञ है । ब्रह्म केवल शास्त्रयोनि है अर्थात् ब्रह्म के विषय में केवल शास्त्र ही प्रमाण है।" जगत्कारणत्वप्रदर्शनेन सर्वज्ञं ब्रह्मेत्युपक्षिप्तं तदेव द्रढयन्नाह - शास्त्रयोनित्वात् । महत ऋग्वेदादेः शास्त्रस्यानेक विद्यास्थानोपबृंहितस्य प्रदोपवत् सर्वार्थावद्योतिनः सर्वज्ञकल्पस्य योनिः कारणं ब्रह्म। नहीवृशस्य शास्त्रस्यग्वैवाविलक्षणस्य सर्वज्ञगुणान्वितस्य सर्वज्ञादन्यः संभवोऽस्ति । यद्यद्विस्तराथं शास्त्रं यस्मात् पुरुष. विशेषात्सम्भवति, यथा व्याकरणावि पाणिन्यादेर्ज्ञेयैकदेशार्थमपि स ततोऽप्यधिकतरविज्ञान इति प्रसिद्धं लोके । किमु वक्तव्यमनेकशाखाभेवभिन्नस्य देवतियंङ् मनुष्यवर्णाश्रमादि प्रविभागहेतोः ऋग्वेदाद्याख्यस्य सर्वज्ञानाकरस्याप्रयत्नेनैव लोलान्यायेन पुरुषनिश्वासवद्यस्मान् महतो भूताद्योनेः सम्भवः, 'अस्य महतो भूतस्य निश्वसितमेतद्यदृग्वेदः' इत्यादि श्रुतेः तस्य महतो भूतस्य निरतिशयं सर्वज्ञत्वं सर्वशक्तिमत्त्वं चेति । अथवा यथोक्तमृग्वेदादि शास्त्रं योनिः कारणं प्रमाणमस्य ब्रह्मणो यथावत् स्वरूपाधिगमे । शास्त्रादेव प्रमाणाज्जगतो जन्मादिकारणं ब्रह्माधिगम्यत इत्यभिप्रायः । शास्त्रमुदाहृतं पूर्वसूत्रेयतो वा इमानि भूतानि जायन्तेशून्य' इत्यादि । किमर्थं तोंदं सूत्रम् ? यावता पूर्वसूत्र एवैवं जातोयकं शास्त्रमुदाहरता शास्त्रयोनित्वं ब्रह्मणो दर्शितम् । उच्यते - तत्र पूर्वसूत्राक्षरेण स्पष्टं शास्त्रस्यानुपादानाज्ञ्जन्मादि केवल मनुमानमुपन्यस्तमित्याशङ्ख्येत तामाशङ्कां निवर्तयितुमिदं सूत्रं प्रववृते शास्त्रयोनित्वादिति ॥तीन॥ अर्थ - जगत्कारणत्वदर्शन करनेसे ब्रह्म सर्वज्ञ है, यह अर्थतः प्राप्त हुआ । उसोको दृढ़ करते हुए कहते हैं- 'शास्त्रयोनित्वात्' । अनेक विद्यास्थानोंसे उपकृतदीपकके समान सब अर्थोंका प्रकाशन करनेमें समर्थ और सर्वज्ञके समान महान् ऋग्वेदादि शास्त्रका योनि अर्थात् कारण ब्रह्म है । ऐसे ऋग्वेदादिरूप सर्वगुणसम्पन्न शास्त्र की उत्पत्ति सर्वज्ञको छोड़कर किसी अन्यसे नहीं है। जो-जो विस्तारार्थ शास्त्र जिस पुरुष विशेषमें विरचित हैंशास्त्रयोनित्वाधिकरण ] जैसे पाणिनि आदि के जयका एक अंशरूप अर्थसे युक्त व्याकरण आदि शास्त्र है, वह पुरुषविशेष उस स्वविरचित शास्त्रसे अधिक ज्ञानवान् होता है, यह लोकमें प्रसिद्ध है। तो अनेक शाखाभेदसे भिन्न-भिन्न देव, मनुष्य, पशु वर्ण, आश्रम आदि विभागोंके जो हेतु हैं और सर्वज्ञान के भण्डार हैं, ऐसे ऋग्वेदादि नामक वेदोंकी अनायास हो लीलान्यायसे पुरुष- निःश्वासकी तरह जिस महान् सद्रूप कारणसे उत्पत्ति होती है, क्योंकि 'अस्य महतोशून्य' इत्यादि श्रुति हैं, उस महान् सद्रूप ब्रह्म के निरतिशय सर्वज्ञत्व और सर्वशक्तिमत्वके विषय में तो कहना ही क्या है । यह 'शास्त्रयोनित्वात् ' सूत्रका पहला अर्थ है । अथवा पूर्वोक्त ऋग्वेदादि शास्त्र इस ब्रह्मके यथार्थस्वरूपके ज्ञानमें योनि अर्थात् प्रमाण हैं । शास्त्र प्रमाणसे ही यह ज्ञात होता है कि जगत्के जन्मादिका कारण ब्रह्म है, यह अभिप्राय है । पूर्वसूत्र में 'यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते शून्य' इत्यादि शास्त्र उद्धृत हैं । जब पूर्वसूत्र में ही इस प्रकार शास्त्रका उदाहरण देते हुए सूत्रकारने 'ब्रह्म शास्त्र-योनि है' ऐसा दिखला दिया है तो फिर इस सूत्रका क्या प्रयोजन है ? उत्तर यह कि पूर्वसूत्रके अक्षरोंसे शास्त्रका स्पष्ट ग्रहण नहीं किया गया । इसलिए जगत्के जन्मादिका केवल अनुमानरूप से उपन्यास किया है, कोई ऐसी शंका करे तो उस शंकाको निवृत्ति के लिए 'शास्त्रयोनित्वात्' यह सूत्र प्रवृत्त हुआ है। पूर्वसूत्रों के साथ सम्बन्ध अथातो ब्रह्मजिज्ञासा, जन्माद्यस्यः यतः, शास्त्रयोनित्वात्, तत्तु समन्वयात् - यह वेदान्तदर्शनकी चतुःसूत्री कहलाती है। वेदान्तके विषय में चार-चारका प्रसंग बहुत है । ब्रह्म चतुष्पाद है - जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय अथवा विश्व, तेजस, प्राज्ञ और तुरीय । ब्रह्मसूत्रके चार अध्याय हैं। प्रत्येक अध्याय में चारचार पाद हैं। सारे ब्रह्मसूत्रका सार- अर्थ इन्हीं चार सूत्रोंमें आ गया है । यह महर्षि बादरायणका रचना-कौशल ही है । प्रथम सूत्र 'अथातो ब्रह्मजिज्ञासा' में बताया गया कि जीवन में विवेक होना आवश्यक है। अच्छे-बुरेका विवेक दूसरी चीज है । क्या कर्म है क्या अकर्म है, इसमें जैसेजैसे उम्र और अनुभव बढ़ता जाता है वैसे-वैसे यह विवेक बुद्धि भी बढ़ती जाती है । धर्मके सम्बन्ध में भी ऐसा ही है । जो जितना समझता है उसके लिए उतना ही ठीक है। परन्तु वस्तु-विषयक ज्ञान वस्तुनिष्ठ होता है। इसलिए जबतक वस्तु जैसी है उसका वैसा हो ज्ञान न हो जाय तबतक चाहे कोई कुछ भी करें, कहे, समझे, सब अज्ञान ही रहता है । कर्त्तव्याकर्त्तव्यका ज्ञान और भी भौगोलिक दृष्टि से अथवा साम्प्रदायिक दृष्टिसे अथवा जातीय या व्यक्तिगत दृष्टि से अलग-अलग हो जाता है, परन्तु वस्तुका ज्ञान एक ही रहता है। बल्कि उस ज्ञान में अलगाव ही अज्ञान है। इसलिए प्रथम सच्ची वस्तु क्या है और झूठी वस्तु क्या है - इसका विवेक किया जाना चाहिए । कालकी दृष्टिसे नित्य क्या है, अनित्य क्या है; देशकी दृष्टि से पूर्ण क्या है, पुर्वसूत्रों के साथ सम्बन्ध ] अपूर्ण क्या है, वस्तुको दृष्टि से 'अहम्' क्या है, इदं क्या है ? - इन तीनों प्रकार के विवेकका उदय होना चाहिए । विवेक के उदयका लक्षण है - वैराग्य । अनित्य, अपूर्ण और 'इदम्' में अरुचि - यही वैराग्य है । यह विवेकके परिणामस्वरूप जीवन में प्रवेश करता है। जो लोग वेदान्त पढ़कर यह ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं कि व्यापारमें चाहे जितना पाप कर लो, पाप नहीं लगेगा, वे लोग तो वेदान्तके अधिकारी ही नहीं हैं । वेदान्त उस अधिकारी के लिए है जो अनित्य, अपूर्ण और 'इदम्'को छोड़कर नित्य, पूर्ण और 'अहम् में रुचि रखनेवाला है। बिना विवेकके ऐसा हो नहीं सकता। इसलिए प्रथम कक्षा विवेककी है और दूसरी वैराग्यको । जत्र वैराग्य आता है तो छह बातें अपने आप जीवनमें आती हैं, इनको 'पट्सम्पत्ति' बोलते हैं। ये परमार्थ - पथिकको पूँजी हैं । ये हैं शम, दम, तितिक्षा, उपरति श्रद्धा और समाधान । परन्तु ये हमेशा रहतों नहीं । इसलिए तब यह इच्छा होता है कि इस चित्तसे ही हमको मुक्ति मिल जाय - यह मुमुक्षा है । जो चेतनतत्त्व है उसको ब्रह्म कहते है । यही जिज्ञास्य है । यह जिज्ञास्य ब्रह्म यदि प्रत्यक्-चैतन्यसे अभिन्न है तब तो पूर्ण है और यदि भिन्न है तो दोनों ही अधूरे हैं, कोई पूर्ण नहीं है । मान लो कि दोनों ही पूर्ण हैं तो किसको रखोगे ? आत्माको या ब्रह्मको । अन्यको रखोगे तो वह आत्माके बिना मालूम ही नहीं पड़ेगा और अपना अभाव तुम सोच नहीं सकते, क्योंकि अभाव सोचनेवाला हो अपना आपा है। इसलिए अद्वितीय ब्रह्मका ज्ञान होनेपर अपना आपा ही अद्वितीय सिद्ध होता है। जबतक अपना आत्मा ही अद्वितीय ब्रह्म नहीं होगा तबतक अद्वितीयता हो सिद्ध नहीं हो सकती। इस प्रकार संक्षेपमें यह 'अथातो ब्रह्मजिज्ञासा' का भावार्थ हुआ । अब कहा कि ठीक है अपना आत्मा ब्रह्म है । परन्तु यह जगत् पूर्वसूत्रों के साथ सम्बन्ध ] क्या है ? यह तो कुछ सिद्ध नहीं हुआ न ! इसपर कहा कि 'जन्माद्यस्य यतः'। जहाँ आत्मा ब्रह्मसे अभिन्न समझने की जरूरत है वहाँ जगत् भी ब्रह्मसे अलग नहीं है, यह भी समझनेकी जरूरत है। अगर दुनिया ब्रह्मसे अलग है, तो ब्रह्म अद्वितीय कैसे ? और यदि जीव ब्रह्मसे अलग है तो ब्रह्म अद्वितीय कैसे ? इसमें गणित यह है कि आत्मासे प्रपञ्च जुदा नहीं है और ब्रह्मसे प्रपञ्च जुदा नहीं है, अतः आत्मासे ब्रह्म जुदा नहीं है । आत्मा हो प्रपञ्च, ब्रह्माण्ड, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, ईश्वर के रूप में प्रतीत हो रहा है । ज्ञानस्वरूपकी ही प्रतीति हो रही है - सर्वके रूप में ! यह अखण्ड आत्मबोध है । न यह आधिभौतिक शयन बनाम निद्रा है, न आधिदैविक शयन बनाम तल्लीनता है और न आध्यात्मिक शयन बनाम समाधि है ! इसमें आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिकका भेद नहीं है । यह तो ज्ञानका एक समुद्र है जिसमें प्रतीतिको लहरें हिलोरें मारती रहती हैं; परन्तु अधिष्ठान जल-रूप ज्ञानसे कभी अलग नहीं होतीं। 'जन्माद्यस्य यतः' । यह दुनिया परमात्मा से बिलकुल जुदा नहीं है । परन्तु समझानेको प्रक्रिया यह है कि पहले ब्रह्मको दुनियासे अलग बताया जाता है और फिर दुनिया ब्रह्मसे अलग नहीं है - यह समझाया जाता है । जैसे सोनेको पहचानने के लिए पहिले उसे नाम-रूपसे अलग बताया जाता है कि जेवरसे सोना अलग है । तदुपरान्त यह बात समझ में आजाती है कि सब जेवरोंके नामरूप सोनामें ही कर्लपित है । जेवरसे न्यारा सोना है, परन्तु सोनासे न्यारा जेवर नहीं है । जो कार्यंसें पृथक् करके परब्रह्म परमात्माको पहचान लेता है वही फिर पहचान पाता है कि परब्रह्म परमात्मा से पृथक् जगत् नहीं है । तो 'यह' के रूपमें जो प्रतीत होता है अथवा अनुभव होता है अथवा स्फुरित होता है, वह है जगत् । इस जगत्का जन्म, इस जगत्की स्थिति, इस जगत्का लय जिससे होता है वह है ब्रह्म । 'जन्माद्यस्य यतः' । यह सृष्टि आत्मासे हुई या ईश्वरसे ? प्रकाशकी दृष्टि से आत्मासे और उत्पत्तिकी दृष्टि से ईश्वरसे । तो जगत् के दो कारण हुए - उपादान कारण ईश्वर और प्रकाशक कारण आत्मा ? कौषीतकी उपनिषद् में बताया है कि जैसे सुषुप्तिकालमें सृष्टि आत्मामें लीन हो जाती है, वैसे ही प्रलयकाल में सृष्टि ईश्वरमें लीन हो जाती है । परन्तु इस समय इन्द्रियाँ अपने-अपने विषयों सहित सो जाती हैं, उस समम सुषुप्ति और प्रलयका भेद किसने देखा है ? इसलिए जो सुषुप्ति उपाधिक आत्मा है वही प्रलयोपाधिक आत्मा है । अतः इन्द्रियोंके सो जानेपर जो ईश्वर चैतन्य समष्टिमें शेष रहता है वही आत्म चैतन्यके रूपमें व्यष्टिमें शेष रहता है। अतएव आत्म-चैतन्य और ईश्वर- चैतन्य दोनों अलग-अलग वस्तुएं नहीं हैं, दोनों एक हैं । 'सृष्टि 'इदं 'रूप है, उत्पत्ति, स्थिति, प्रलयवाली है । जो सृष्टिका कारण है वह 'अनिदम्' है । उत्पत्ति, स्थिति, प्रलयवाला नहीं है । यह 'जन्माद्यस्य यतः ' सूत्रसे बात निकलती है। अच्छा, यह कारण 'सः' है या 'अहम्' है ? तो बोले कि 'सः' भी 'इदम्' रूपसे ही वृत्तिमें प्रतीत होता है; वह भी जात-अजात होता है । परन्तु आत्मदेव तो ज्यों-के-त्यों मसंग ही रहते हैं। इसलिए ईश्वर भी आत्मदेवसे भिन्न नहीं हो सकते । इसलिए जब 'जन्माद्यस्य यतः' बोलते हैं तो सृष्टि के अभिन्ननिमित्तोपादान कारणके रूपमें हो परमात्माका वर्णन करते हैं । माने सृष्टि बनानेवाला भी वही ओर बननेवाला भी वही । इसका यह अर्थ नहीं है कि वह दो रूपवाला है। 'बनानेवाला है' का अर्थ है कि वह सर्वज्ञ है और 'बननेवाला है' का अर्थ है कि उसमें सर्वभवनसामर्थ्य है अर्थात् वह सर्वशक्ति है । इसलिए 'जन्माद्यस्य यतः' में जो 'यत्' है बह सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान् है । कहो कि इसमें तो विरोध होगा, क्योंकि शक्ति बदलनेवाली चीज होती है और ज्ञान न बदलनेवाला होता है । तो इसका समाधान यह है कि 'ज्ञान' तो ब्रह्म का स्वरूप है और शक्ति विवर्त है। इसलिए ब्रह्म विवर्ती अभिन्ननिमित्तोपादान कारण है सृष्टिका । ज्ञानस्वरूप होनेके कारण ब्रह्म आत्मासे अभिन्न है और प्रपञ्च उसमें प्रतीतिमात्र है । इस प्रकार 'जन्माद्यस्य यतः से ब्रह्मको जगत् के कारणके रूप में निरूपण किया गया और उस निरूपणसे ब्रह्म सर्वज्ञ है यह अर्थतः प्राप्त भो हो गया, तथापि ब्रह्मको सर्वज्ञताका स्पष्ट निरूपण नहीं हुआ । अतः अपने मुखसे ही ब्रह्मकी सर्वज्ञताका निरूपण करनेके लिए अगला सूत्र प्रारम्भ होता है - शास्त्रयोनित्वात् संस्कृत भाषा में सूत्रप्रणाली होने से थोड़े-से-थोड़े शब्दों में अधिकसे अधिक बात कह दी जाती है। ऐसी दूसरी किसी भाषामें नहीं है । हम तो खैर सब भाषाएँ नहीं जानते । परन्तु स्वामी भारतीकृष्ण तीर्थजी महाराज जो पुरीके शंकराचार्य भी थे, वे कोई पंद्रह-बीस भाषाएँ जानते थे और सुनते हैं उन्होंने उन भाषाओं में परीक्षा भी दी थी । बाइबिल तो उनकी जुबानपर रहती थी । वे बताते थे कि सूत्रप्रणाली संस्कृत भाषाकी ही विशेषता है। । ब्रह्मसुत्र प्रवचन : सब भाषाएँ शब्दको अर्थ संकेतयुक्त' मानती हैं। अर्थ पहले रहता है फिर शब्द होता है, यह चार्वाकोंकी मान्यता है। पहले शब्द रहता है, बादमें उसका अर्थ होता - यह वैयाकरणोंका मत है । शब्द और अर्थकी उत्पत्ति एक साथ होती है - ऐसा मीमांसक लोग कहते हैं । शब्द और अर्थ दोनों व्यावहारिक ही हैं - ऐसा बौद्ध लोग कहते हैं। दोनों संविद हैं - यह शैव-सम्प्रदाय है । शब्द और अर्थ दोनों ब्रह्म के विवर्त हैं - यह वेदान्त- सिद्धान्त है। शब्दोंको भी अपनी एक विधा है और उसका ज्ञान होना बहुत आवश्यक है, खासकर सूत्रोंका अर्थ करने में । 'अर्थ अमित अति आखर थोरे ।' भगवान् शङ्कराचार्यजीने इस सूत्रके दो अर्थ किये हैं - ब्रह्म शास्त्रोंकी योनि अर्थात् कारण है, अतः ब्रह्मसर्वज्ञ है। दूसरा शास्त्र ब्रह्म के विषय में योनि अर्थात् प्रमाण है। इन अर्थों की व्याख्या तो आपको आगे सुनायेंगे हो । परन्तु हम आपको यह बताना चाहते हैं कि आजकल जो वेदान्त कहानी- किस्से, छन्द, गजलके रूप में सुना या सुनाया जाता है उससे वेदान्त कुछ पल्ले नहीं पड़ता। इन वेदान्तवादियोंके अन्तःकरणके एक कोने में द्वैत पड़ा रहता है, आसक्ति पड़ी रहती है, और दूसरे कोने में अद्वैत भी पड़ा रहता है । जो अन्तःकरणसे खेलते हैं, वे वेदान्तकी छाया भी नहीं छूते । वेदान्त वह चोज है जिससे समस्त व्यक्तित्वका बाध होता है । इसके विपरीत धर्म, उपासना और योग सब व्यक्तित्वकी फुरना हैं । ये सब अव्यक्तमें लोन रहते हैं और अव्यक्त स्वयं परब्रह्म परमात्मा में एक फुरनामात्र है, प्रतीतिमात्र है । अव्यक्त नामकी कोई वस्तु ब्रह्ममें नहीं है। यह जो परमात्मा है वह आनन्द होनेसे प्रत्यगात्मा है और ज्ञानस्वरूप होने से प्रत्यगात्मा है। सबके मिट जानेपर भी अपना आपा नहीं मिटता । अपने अभावकी प्रतीति कभी किसीको नहीं हो सकती । सारे जगत्की प्रतीति अपने-आपमें ही होती है । जगत् के उपादानको और उसके निमित्तकी दोनोंकी प्रतीति अपने में ही होती है। अनन्तकोटि ब्रह्माण्डकी प्रतीति अपने आपमें होती है और उनके कारण ईश्वरको भी प्रतीति अपने-आपमें होती है । यहाँतक कि यदि ब्रह्म भी अन्य हो तो उसकी प्रतीति भी अपने आपमें ही होगी। इसलिए देश, काल, वस्तुका परिच्छेद हुए बिना ही अपना जो स्वरूप है वह अखण्ड, अविनाशी और अद्वय है। अखण्ड अर्थात् देश-परिच्छेदसे रहित, अविनाशी अर्थात् काल-परिच्छेदसे रहित और अद्वय अर्थात् वस्तु-परिच्छेद से रहित । जो ज्ञान व्यक्ति के अधीन होता है वह स्वरूप नहीं है । अनुवादक ज्ञान भी स्वरूप नहीं है। अनुवादक ज्ञान क्या ? आँखसे जैसा घड़ा दीखा वैसा बुद्धिमें स्वीकृत हो गया । उसका वैसा ही वर्णन कर दिया। यह अनुवादक ज्ञान इन्द्रिय परतन्त्र है । परन्तु आत्माकी ब्रह्मताका जो ज्ञान है वह पहलेसे जाने हुएका ज्ञान नहीं है । जो सबको जानकर स्वयं अनजान रह जाता है यह तो वह ज्ञान है । इसमें इन्द्रिय, मन या बुद्धि कोई काम नहीं देती। यह तो जिन्होंने अपने जीवन इस विषय के अनुसन्धान में समर्पित कर दिये, उन महापुरुषोंके द्वारा ही जाना जा सकता है। कोई खालाजीका घर नहीं है ब्रह्मज्ञान ! यह बात पहले कह चुके हैं कि 'जन्माद्यस्य यतः' में कार्यसे कारणका अनुमान नहीं है । यह दृश्यमान जगत् किसीसे बना,
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पश्चिम बंगाल अभी शांत नहीं हुआ है. वहां सियासी तकरार अभी भी जारी है. बीजेपी लगातार आरोप लगा रही है. इस बीच गुरुवार को जब राज्यपाल जगदीप धनखड़ हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने निकले तो उन्हें भी विरोध का सामना करना पड़ा. बता दें विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद कूचबिहार के कुछ हिस्सों में हिंसा देखने को मिली थी. इन्हीं जगहों का दौरा करने के लिए राजयपाल गए थे. हद तो तब हो गई जब कूचबिहार के दिनहटा में राज्यपाल धनखड़ के सामने 'गो बैक' के नारे लग लगने शुरू हो गए. उन्हें काले झंडे दिखाए गए. इससे नाराज होकर राज्यपाल ने सुरक्षा में तैनात एक इंस्पेक्टर को सरेआम डांट दिया.
जब राजयपाल ही ये कह रहे हैं कि कि यहां कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है. मैं ऐसी घटना कभी सोच भी नहीं सकता था. वो कह रहे हैं कि मैंने लोगों की आंखों में पुलिस का डर देखा. वे पुलिस के पास जाने तक से डरते हैं. धनखड़ ने आरोप लगाया कि उनके घरों को लूटा गया. यह लोकतंत्र का विनाश है.
इस बीच राज्यपाल ने मीडिया से कहा कि जब मैंने राज्य सरकार से कहा कि मैं चुनाव के बाद हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करूंगा, तो सीएम ने कहा कि राज्यपाल राज्य सरकार की अनुमति के बिना क्षेत्रों का दौरा नहीं कर सकते. ये सुनकर मैं दंग रह गया था. मैंने सीएम को लिखा और उसे बताया कि यह असंवैधानिक है.
वहीं टीएमसी अब राजयपाल की कारवाही पर सवाल उठा रहे हैं. जिस बंगाल में आए दिन हिंसा की खबरें आ रही हो. जिस बंगाल में राजपयाल ये कहने की लिए मजबूर हो कि कानून व्यवस्था हो ध्वस्तचुकी है. जिस बंगाल में दूसरी पार्टियों को बाहरी बता दिया जाए, सोचिये इतने आरोपों के बाद भी टीएमसी कुछ करने की जगह सिर्फ आरोप प्र्यारोप का खेला खेला रही है.
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पश्चिम बंगाल अभी शांत नहीं हुआ है. वहां सियासी तकरार अभी भी जारी है. बीजेपी लगातार आरोप लगा रही है. इस बीच गुरुवार को जब राज्यपाल जगदीप धनखड़ हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने निकले तो उन्हें भी विरोध का सामना करना पड़ा. बता दें विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद कूचबिहार के कुछ हिस्सों में हिंसा देखने को मिली थी. इन्हीं जगहों का दौरा करने के लिए राजयपाल गए थे. हद तो तब हो गई जब कूचबिहार के दिनहटा में राज्यपाल धनखड़ के सामने 'गो बैक' के नारे लग लगने शुरू हो गए. उन्हें काले झंडे दिखाए गए. इससे नाराज होकर राज्यपाल ने सुरक्षा में तैनात एक इंस्पेक्टर को सरेआम डांट दिया. जब राजयपाल ही ये कह रहे हैं कि कि यहां कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है. मैं ऐसी घटना कभी सोच भी नहीं सकता था. वो कह रहे हैं कि मैंने लोगों की आंखों में पुलिस का डर देखा. वे पुलिस के पास जाने तक से डरते हैं. धनखड़ ने आरोप लगाया कि उनके घरों को लूटा गया. यह लोकतंत्र का विनाश है. इस बीच राज्यपाल ने मीडिया से कहा कि जब मैंने राज्य सरकार से कहा कि मैं चुनाव के बाद हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करूंगा, तो सीएम ने कहा कि राज्यपाल राज्य सरकार की अनुमति के बिना क्षेत्रों का दौरा नहीं कर सकते. ये सुनकर मैं दंग रह गया था. मैंने सीएम को लिखा और उसे बताया कि यह असंवैधानिक है. वहीं टीएमसी अब राजयपाल की कारवाही पर सवाल उठा रहे हैं. जिस बंगाल में आए दिन हिंसा की खबरें आ रही हो. जिस बंगाल में राजपयाल ये कहने की लिए मजबूर हो कि कानून व्यवस्था हो ध्वस्तचुकी है. जिस बंगाल में दूसरी पार्टियों को बाहरी बता दिया जाए, सोचिये इतने आरोपों के बाद भी टीएमसी कुछ करने की जगह सिर्फ आरोप प्र्यारोप का खेला खेला रही है.
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कोलकाता। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शाहरुख खान ने कहा है कि उन्होंने अपनी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के समर्थन के लिए फिल्मों की शूटिंग से तीन महीने की छुट्टी ले ली है।
शाहरुख ने कहा, "मैंने फिल्मों की शूटिंग के कार्यक्रम से तीन महीने के लिए छुट्टी ले ली है। मैं अपनी युवा टीम के साथ खड़ा रहना चाहता हूं और हर जीत की खुशी मनाना चाहता हूं।"
ज्ञात हो कि शाहरुख की कोलकता नाइट राइडर्स ने रविवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के चौथे संस्करण में लगातार तीसरी जीत हासिल की। शाहरुख ने कहा, "मैं वास्तव में यह महसूस करता हूं कि टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी पूरी टीम को एकजुट रखने में सफल रहेंगे। मैं अजमेर शरीफ से हाल ही में लौटा हूं। मैंने अपनी टीम की जीत के लिए दुआ मांगी है।
Know when the festival of colors, Holi, is being observed in 2020 and read its mythological significance. Find out Holi puja muhurat and rituals to follow.
मकर संक्रांति 2020 में 15 जनवरी को पूरे भारत वर्ष में मनाया जाएगा। जानें इस त्योहार का धार्मिक महत्व, मान्यताएं और इसे मनाने का तरीका।
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कोलकाता। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शाहरुख खान ने कहा है कि उन्होंने अपनी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के समर्थन के लिए फिल्मों की शूटिंग से तीन महीने की छुट्टी ले ली है। शाहरुख ने कहा, "मैंने फिल्मों की शूटिंग के कार्यक्रम से तीन महीने के लिए छुट्टी ले ली है। मैं अपनी युवा टीम के साथ खड़ा रहना चाहता हूं और हर जीत की खुशी मनाना चाहता हूं।" ज्ञात हो कि शाहरुख की कोलकता नाइट राइडर्स ने रविवार को इंडियन प्रीमियर लीग के चौथे संस्करण में लगातार तीसरी जीत हासिल की। शाहरुख ने कहा, "मैं वास्तव में यह महसूस करता हूं कि टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी पूरी टीम को एकजुट रखने में सफल रहेंगे। मैं अजमेर शरीफ से हाल ही में लौटा हूं। मैंने अपनी टीम की जीत के लिए दुआ मांगी है। Know when the festival of colors, Holi, is being observed in दो हज़ार बीस and read its mythological significance. Find out Holi puja muhurat and rituals to follow. मकर संक्रांति दो हज़ार बीस में पंद्रह जनवरी को पूरे भारत वर्ष में मनाया जाएगा। जानें इस त्योहार का धार्मिक महत्व, मान्यताएं और इसे मनाने का तरीका।
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मुंबईः बॉलीवुड बॉयकॉट ने हिंदी फिल्मों के व्यापार को काफी नुकसान पहुंचाया है। कुछ को छोड़कर ज्यादातर फिल्म का कलेक्शन काफी निराशाजनक रहा। ऐसे में अभिनेताओं-निर्माताओं से उनकी रिलीज होनेवाली फिल्मों को लेकर बॉयकॉट ट्रेंड पर सवाल जरूर पूछा जा रहा है। इससे दक्षिण की फिल्म इंडस्ट्री भी अछूती नहीं है।
दक्षिण स्टार विक्रम की एक फिल्म आने वाली है जिसका नाम है- कोबरा। विक्रम इस फिल्म का काफी प्रचार कर रहे हैं। ऐसे ही हैदराबाद के एक इवेंट में उनसे बॉयकॉट बॉलीवुड को लेकर सवाल किया गया जिसका उन्होंने मजाकिया लहजे में जवाब दिया।
विक्रम ने कहा कि "मैं नहीं जानता कि बॉयकॉट क्या है? " उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "मैं जानता हूं कि बॉय क्या है, मैं बहुत अच्छे से जानता हूं कि लड़की क्या है? मैं जानता हूं कि कॉट क्या है? " विक्रम ने वाल का सीधेतौर पर जवाब देने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि आप कौन सी भाषा बोल रहे हैं। इससे (बहिष्कार) आपका क्या मतलब है ? मुझे पता है कि लड़का क्या है। मुझे अच्छी तरह पता है कि लड़की क्या होती है। मैं बहुत अच्छी तरह जानता हूं, कॉट क्या है। लेकिन, मुझे नहीं पता कि बॉयकॉट क्या है। "
हाल के दिनों में कई बॉलीवुड फिल्मों को सोशल मीडिया पर बॉयकॉट का सामना करना पड़ा है, जिनमें लाल सिंह चड्ढा, रक्षा बंधन, दोबारा और डार्लिंग्स शामिल हैं। आमिर खान ने अपनी फिल्म को बॉयकॉट नहीं करने की अपील करते हुए लोगों से माफी मांगी थी। फिल्म को देखने की अपील की थी। वहीं अक्षय कुमार ने बॉयकॉट पर कहा था कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
कोबरा में, विक्रम एक प्रतिभाशाली गणितज्ञ की भूमिका निभा रहे हैं जो हत्या की होड़ में अलग-अलग भेष धारण करते हुए अपना अपराध करता है। बुधवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली इस फिल्म का निर्देशन अजय ज्ञानमुथु ने किया है। इसमें श्रीनिधि शेट्टी और पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज इरफान पठान भी हैं, जो एक पुलिस वाले की भूमिका निभाते नजर आएंगे। रोशन मैथ्यू, जिन्हें हाल ही में नेटफ्लिक्स फिल्म डार्लिंग्स में देखा गया था, निगेटिव किरदार में दिखाई देंगे। बड़े बजट में शूट की गई इस फिल्म में संगीत एआर रहमान ने दिया है।
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मुंबईः बॉलीवुड बॉयकॉट ने हिंदी फिल्मों के व्यापार को काफी नुकसान पहुंचाया है। कुछ को छोड़कर ज्यादातर फिल्म का कलेक्शन काफी निराशाजनक रहा। ऐसे में अभिनेताओं-निर्माताओं से उनकी रिलीज होनेवाली फिल्मों को लेकर बॉयकॉट ट्रेंड पर सवाल जरूर पूछा जा रहा है। इससे दक्षिण की फिल्म इंडस्ट्री भी अछूती नहीं है। दक्षिण स्टार विक्रम की एक फिल्म आने वाली है जिसका नाम है- कोबरा। विक्रम इस फिल्म का काफी प्रचार कर रहे हैं। ऐसे ही हैदराबाद के एक इवेंट में उनसे बॉयकॉट बॉलीवुड को लेकर सवाल किया गया जिसका उन्होंने मजाकिया लहजे में जवाब दिया। विक्रम ने कहा कि "मैं नहीं जानता कि बॉयकॉट क्या है? " उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "मैं जानता हूं कि बॉय क्या है, मैं बहुत अच्छे से जानता हूं कि लड़की क्या है? मैं जानता हूं कि कॉट क्या है? " विक्रम ने वाल का सीधेतौर पर जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि आप कौन सी भाषा बोल रहे हैं। इससे आपका क्या मतलब है ? मुझे पता है कि लड़का क्या है। मुझे अच्छी तरह पता है कि लड़की क्या होती है। मैं बहुत अच्छी तरह जानता हूं, कॉट क्या है। लेकिन, मुझे नहीं पता कि बॉयकॉट क्या है। " हाल के दिनों में कई बॉलीवुड फिल्मों को सोशल मीडिया पर बॉयकॉट का सामना करना पड़ा है, जिनमें लाल सिंह चड्ढा, रक्षा बंधन, दोबारा और डार्लिंग्स शामिल हैं। आमिर खान ने अपनी फिल्म को बॉयकॉट नहीं करने की अपील करते हुए लोगों से माफी मांगी थी। फिल्म को देखने की अपील की थी। वहीं अक्षय कुमार ने बॉयकॉट पर कहा था कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। कोबरा में, विक्रम एक प्रतिभाशाली गणितज्ञ की भूमिका निभा रहे हैं जो हत्या की होड़ में अलग-अलग भेष धारण करते हुए अपना अपराध करता है। बुधवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली इस फिल्म का निर्देशन अजय ज्ञानमुथु ने किया है। इसमें श्रीनिधि शेट्टी और पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज इरफान पठान भी हैं, जो एक पुलिस वाले की भूमिका निभाते नजर आएंगे। रोशन मैथ्यू, जिन्हें हाल ही में नेटफ्लिक्स फिल्म डार्लिंग्स में देखा गया था, निगेटिव किरदार में दिखाई देंगे। बड़े बजट में शूट की गई इस फिल्म में संगीत एआर रहमान ने दिया है।
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उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में हिंदी युवा वाहिनी ने एक प्रेसवार्ता का आयोजन कर यूपी की योगी सरकार के कामकाज की जमकर तारीफ की। पढ़िये पूरी खबर. .
राजधानी दिल्ली में डाइनामाइट न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए भाजपा विधायक सगीत सोम ने कहा कि सपा-बसपा का गठबंधन अवसरवादिता का परिचायक है।
यूपी पावर कारपोरेशन ने घाटे से उबरने के लिए एक कड़ा कदम उठा लिया है। पढ़िये पूरी खबर. .
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उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में हिंदी युवा वाहिनी ने एक प्रेसवार्ता का आयोजन कर यूपी की योगी सरकार के कामकाज की जमकर तारीफ की। पढ़िये पूरी खबर. . राजधानी दिल्ली में डाइनामाइट न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए भाजपा विधायक सगीत सोम ने कहा कि सपा-बसपा का गठबंधन अवसरवादिता का परिचायक है। यूपी पावर कारपोरेशन ने घाटे से उबरने के लिए एक कड़ा कदम उठा लिया है। पढ़िये पूरी खबर. .
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Dhanbad : धनबाद के बाघमारा के कतरास अंचल अंतर्गत काटापहाड़ी स्थित नया प्राथमिक विद्यालय में बच्चे मौत के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं.
विद्यालय के चार रूम में से एक में पिछले दिनों गोफ बन गया था, जिससे जगरीली गैस का रिसाव हो रहा है, इसके बावजूद बगल के दो कमरों में कक्षाएं चलायी जा रही हैं.
हालांकि रिसाव वाले कमरे को बंद रखा जा रहा है, लेकिन दीवारों में जगह-जगह दरारें पड़ी हुई हैं जिससे गैस आने का खतरा तो है ही, भवन के ढहने की भी डर बना हुआ है.
विद्यालय के शिक्षकों ने सीमेंट देकर दरारों को छिपाने की कोशिश की है, जो साफ दिखता है.
विद्यालय के ही कमरे कमरे में मिड डे मिल का चावल ऐसे रखा है जैसे गाय-बकरी को खाने के लिए छोड़ दिया गया हो. बरसात का पानी कमरे में रिसता रहता है जिससे अनाज के खराब हो सकता है.
पानी रिसाव के बीच एक से पांच क्लास तक के बच्चे पढ़ाई करते हैं. पांच क्लास तक के विद्यालय में शिक्षक मात्र दो हैं- एक प्रिंसिपल दूसरे पारा शिक्षक.
गोफ वाले कमरे से सटे एक छोटे कमरे में प्रधानाचार्य का कार्यालय है. विद्यालय के प्रिंसिपल शत्रुघ्न प्रसाद सिन्हा विद्यालय के बंद कमरे में गोफ बनने से इनकार करते रहे. सीमेंट भराई पर गोल-मोल जवाब दिया.
प्रिंसिपल भले ही इस जोखिम भरा नहीं मानते हों पर बीसीसीएल ने क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित कर रखा है. हर जगह गोफ व गैस रिसाव होता है. रोज-रोज की ब्लास्टिंग से कमरों की दरारें बढ़ती ही जा रही हैं.
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Dhanbad : धनबाद के बाघमारा के कतरास अंचल अंतर्गत काटापहाड़ी स्थित नया प्राथमिक विद्यालय में बच्चे मौत के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. विद्यालय के चार रूम में से एक में पिछले दिनों गोफ बन गया था, जिससे जगरीली गैस का रिसाव हो रहा है, इसके बावजूद बगल के दो कमरों में कक्षाएं चलायी जा रही हैं. हालांकि रिसाव वाले कमरे को बंद रखा जा रहा है, लेकिन दीवारों में जगह-जगह दरारें पड़ी हुई हैं जिससे गैस आने का खतरा तो है ही, भवन के ढहने की भी डर बना हुआ है. विद्यालय के शिक्षकों ने सीमेंट देकर दरारों को छिपाने की कोशिश की है, जो साफ दिखता है. विद्यालय के ही कमरे कमरे में मिड डे मिल का चावल ऐसे रखा है जैसे गाय-बकरी को खाने के लिए छोड़ दिया गया हो. बरसात का पानी कमरे में रिसता रहता है जिससे अनाज के खराब हो सकता है. पानी रिसाव के बीच एक से पांच क्लास तक के बच्चे पढ़ाई करते हैं. पांच क्लास तक के विद्यालय में शिक्षक मात्र दो हैं- एक प्रिंसिपल दूसरे पारा शिक्षक. गोफ वाले कमरे से सटे एक छोटे कमरे में प्रधानाचार्य का कार्यालय है. विद्यालय के प्रिंसिपल शत्रुघ्न प्रसाद सिन्हा विद्यालय के बंद कमरे में गोफ बनने से इनकार करते रहे. सीमेंट भराई पर गोल-मोल जवाब दिया. प्रिंसिपल भले ही इस जोखिम भरा नहीं मानते हों पर बीसीसीएल ने क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित कर रखा है. हर जगह गोफ व गैस रिसाव होता है. रोज-रोज की ब्लास्टिंग से कमरों की दरारें बढ़ती ही जा रही हैं.
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ज्योतिषविद् डॉ. विनय कुमार पाण्डेय बताते हैं कि वैसे तो अंग्रेजी महीने का ज्योतिष में कोई महत्व नहीं है. लेकिन तिथि के अनुसार जनवरी से दिसंबर तक का समय लोगों के लिए सामान्यतः शुभ ही रहेगा. ग्रहों की स्थिति ऐसी कुछ खास बनती नहीं दिखाई दे रही है जिससे लोगों की परेशानियों में इजाफा होगा. हां, नये साल में दस अप्रैल से सात मई, जून का अंत व अक्टूबर का अंत और नवंबर की शुरुआत में पंच ग्रहों का योग कुछ अनिष्ट का कारण बन सकता है. इसमें लोगों में आक्रोश या आगजनी, बाढ़ या बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल सकता है.
ज्योतिषविद् पं. विमल जैन बताते हैं कि नये साल में मुख्य ग्रह शनि और राहु तुला राशि में रहेंगे. शुक्र की राशि में दोनों ग्रहों का मिलन शुभ फलदायी रहेगा. एक जनवरी को सुबह धनु लग्न उदित हो रहा है जो बुधादित्य योग बना रहा है. यह प्रबल राजयोग का कारक ग्रह माना जाता है. साल के अधिकतर महीने लोगों के लिए शुभ रहेंगे. वहीं कुछ महीनों में देश पर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों के बादल दिखाई दे सकते हैं.
कन्याः शनि की साढ़़े साती, चोट चपेट की संभावना लेकिन बृहस्पति परिस्थितियों को सामान्य करने में सहायक होगा.
तुलाः शनि की साढ़े साती, शनि ही समस्याएं लायेंगे लेकिन समाधान भी वही निकालेंगे.
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ज्योतिषविद् डॉ. विनय कुमार पाण्डेय बताते हैं कि वैसे तो अंग्रेजी महीने का ज्योतिष में कोई महत्व नहीं है. लेकिन तिथि के अनुसार जनवरी से दिसंबर तक का समय लोगों के लिए सामान्यतः शुभ ही रहेगा. ग्रहों की स्थिति ऐसी कुछ खास बनती नहीं दिखाई दे रही है जिससे लोगों की परेशानियों में इजाफा होगा. हां, नये साल में दस अप्रैल से सात मई, जून का अंत व अक्टूबर का अंत और नवंबर की शुरुआत में पंच ग्रहों का योग कुछ अनिष्ट का कारण बन सकता है. इसमें लोगों में आक्रोश या आगजनी, बाढ़ या बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल सकता है. ज्योतिषविद् पं. विमल जैन बताते हैं कि नये साल में मुख्य ग्रह शनि और राहु तुला राशि में रहेंगे. शुक्र की राशि में दोनों ग्रहों का मिलन शुभ फलदायी रहेगा. एक जनवरी को सुबह धनु लग्न उदित हो रहा है जो बुधादित्य योग बना रहा है. यह प्रबल राजयोग का कारक ग्रह माना जाता है. साल के अधिकतर महीने लोगों के लिए शुभ रहेंगे. वहीं कुछ महीनों में देश पर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों के बादल दिखाई दे सकते हैं. कन्याः शनि की साढ़़े साती, चोट चपेट की संभावना लेकिन बृहस्पति परिस्थितियों को सामान्य करने में सहायक होगा. तुलाः शनि की साढ़े साती, शनि ही समस्याएं लायेंगे लेकिन समाधान भी वही निकालेंगे.
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ग्वालियर। लम्बे समय से वार्ड 55 क्षेत्र की अनदेखी के कारण सड़को की हुई दुर्दशा को दूर करने के लिए क्षेत्र के पूर्व पार्षद मनोज तोमर ने मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचकर निगम कमिश्नर के नाम ज्ञापन सौपा। वार्ड 55 की बदहाली की दास्तान सुनाती जर्जर सड़कें शहर में बारिश होने के बाद स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती हैं। बारिश होने पर या नाले, सीवर आदि का पानी रोड़ पर आने से कीचड़ के कारण गंदगी फैल जाती है। जिसके कारण क्षेत्र के लोगो को आने जाने में असुविधा का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने ज्ञापन सौपते हुए इस क्षेत्र में सड़को का हाल लिखा है एवं इन्हे अतिशीघ्र बनवाने का आग्रह किया हैं।
1. पीली कोठी अवाड़पुरा से खटीक मोहल्ला डामर रोड़ निर्माण।
2. गुड़ी गुड़ा नाका मैन रोड़ से सब्जी मंडी कुआं तक एवं गनी चक्की वाली गली में सी सी रोड़ निर्माण।
3. साईं कॉलोनी से बिजली घर तक अमृत योजना अन्तर्गत बिछाई गई सीवर लाइन के लिए खोदी गयी रोड़ को पुनः निर्माण हेतु।
4. आरटीओ रोड़ पर बिछाई गई सीवर लाइन के लिए खोदी गयी रोड़ का पुनः निर्माण हेतु।
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ग्वालियर। लम्बे समय से वार्ड पचपन क्षेत्र की अनदेखी के कारण सड़को की हुई दुर्दशा को दूर करने के लिए क्षेत्र के पूर्व पार्षद मनोज तोमर ने मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचकर निगम कमिश्नर के नाम ज्ञापन सौपा। वार्ड पचपन की बदहाली की दास्तान सुनाती जर्जर सड़कें शहर में बारिश होने के बाद स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती हैं। बारिश होने पर या नाले, सीवर आदि का पानी रोड़ पर आने से कीचड़ के कारण गंदगी फैल जाती है। जिसके कारण क्षेत्र के लोगो को आने जाने में असुविधा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने ज्ञापन सौपते हुए इस क्षेत्र में सड़को का हाल लिखा है एवं इन्हे अतिशीघ्र बनवाने का आग्रह किया हैं। एक. पीली कोठी अवाड़पुरा से खटीक मोहल्ला डामर रोड़ निर्माण। दो. गुड़ी गुड़ा नाका मैन रोड़ से सब्जी मंडी कुआं तक एवं गनी चक्की वाली गली में सी सी रोड़ निर्माण। तीन. साईं कॉलोनी से बिजली घर तक अमृत योजना अन्तर्गत बिछाई गई सीवर लाइन के लिए खोदी गयी रोड़ को पुनः निर्माण हेतु। चार. आरटीओ रोड़ पर बिछाई गई सीवर लाइन के लिए खोदी गयी रोड़ का पुनः निर्माण हेतु।
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भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने बुधवार को पार्ल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले वनडे में वेंकटेश अय्यर को गेंदबाजी नहीं देने के भारतीय टीम प्रबंधन के फैसले पर सवाल उठाया। वेंकटेश अय्यर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच में वनडे डेब्यू किया है। भारतीय गेंदबाज बोलैंड पार्क में धीमी पिच का फायदा नहीं उठा सके और विकेट हासिल करने के लिए संघर्ष करते रहे, इसके बावजूद वेंकटेश को गेंदबाजी का मौका नहीं मिला।
स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए आकाश चोपड़ा ने हैरानी जाहिर की, कि क्या टीम प्रबंधन वेंकटेश अय्यर को एक ऑलराउंडर के रूप में भी मानता है? उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ रोहित शर्मा की कप्तानी में उनकी पहली टी20 सीरीज में उन्हें गेंदबाजी करने के लिए बहुत अधिक ओवर नहीं दिए गए थे।
कप्तान तेम्बा बावुमा (110) और रैसी वान डेर डुसेन (नाबाद 129) के शानदार शतकों तथा उनके बीच चौथे विकेट के लिए 204 रन की जबरदस्त साझेदारी की बदौलत दक्षिण अफ्रीका ने भारत के खिलाफ पहले वनडे में बुधवार को 50 ओवर में चार विकेट पर 296 रन का मजबूत स्कोर बनाया।
भारत के लिए सबसे सफल गेंदबाज जसप्रीत बुमराह रहे जिन्होंने 48 रन देकर दो विकेट चटकाए। रविचंद्रन अश्विन ने 53 रन देकर एक विकेट चटकाया लेकिन अन्य गेंदबाज सफलता हासिल करने के लिए जूझते नजर आए।
अय्यर ने आईपीएल 2021 के दूसरे हाफ में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए शानदार प्रदर्शन करके सबका ध्यान खींचा था। उन्होंने इस सीजन की शुरुआत में घरेलू टूर्नामेंटों में बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन किया।
आकाश चोपड़ा ने कहा, "इसने मुझे चौंका दिया। वेंकटेश अय्यर को गेंदबाजी नहीं करने के मामले में सिर्फ केएल राहुल ही नहीं है, रोहित शर्मा ने भी न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टी20 मैचों में भी यही काम किया था। सीरीज जीतने के बाद उन्हें गेंदबाजी करने का मौका दिया गाय। "
उन्होंने कहा, "मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में केएल राहुल ने कहा था कि वह वेंकटेश अय्यर को छठे गेंदबाजी विकल्प के रूप में इस्तेमाल करेंगे। इस मैच में कई मौके थे, यह देखने के लिए कि वह वास्तव में क्या कर सकता है। वह कुछ रन लीक कर सकता था लेकिन वनडे एक ऐसा प्रारूप है जो गेंदबाज को कुछ रन लीक करने और बाद में वापसी करने की अनुमति देता है। "
उन्होने आगे कहा, "तो, यह सिर्फ हम हैं जो वेंकटेश अय्यर को एक ऑलराउंडर के रूप में देख रहे हैं। ऐसा लगता है कि भारतीय थिंक टेक, टीम प्रबंधन और नेतृत्व समूह, वे उन्हें एक ऑलराउंडर के रूप में नहीं देखते हैं ऐसा बाहर से देखने से लग रहा है। यह अब भारत के लिए उनका चौथा गेम है और वह करीब 110 ओवरों के लिए मैदान पर रहे हैं, उसने केवल 2-3 ओवर फेंके हैं और वह भी अच्छी परिस्थितियो में। अगर वह गेंदबाजी नहीं करने जा रहा है, तो सूर्यकुमार यादव या ईशान किशन में से किसी एक को खिलाएं। "
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भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने बुधवार को पार्ल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले वनडे में वेंकटेश अय्यर को गेंदबाजी नहीं देने के भारतीय टीम प्रबंधन के फैसले पर सवाल उठाया। वेंकटेश अय्यर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच में वनडे डेब्यू किया है। भारतीय गेंदबाज बोलैंड पार्क में धीमी पिच का फायदा नहीं उठा सके और विकेट हासिल करने के लिए संघर्ष करते रहे, इसके बावजूद वेंकटेश को गेंदबाजी का मौका नहीं मिला। स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए आकाश चोपड़ा ने हैरानी जाहिर की, कि क्या टीम प्रबंधन वेंकटेश अय्यर को एक ऑलराउंडर के रूप में भी मानता है? उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ रोहित शर्मा की कप्तानी में उनकी पहली टीबीस सीरीज में उन्हें गेंदबाजी करने के लिए बहुत अधिक ओवर नहीं दिए गए थे। कप्तान तेम्बा बावुमा और रैसी वान डेर डुसेन के शानदार शतकों तथा उनके बीच चौथे विकेट के लिए दो सौ चार रन की जबरदस्त साझेदारी की बदौलत दक्षिण अफ्रीका ने भारत के खिलाफ पहले वनडे में बुधवार को पचास ओवर में चार विकेट पर दो सौ छियानवे रन का मजबूत स्कोर बनाया। भारत के लिए सबसे सफल गेंदबाज जसप्रीत बुमराह रहे जिन्होंने अड़तालीस रन देकर दो विकेट चटकाए। रविचंद्रन अश्विन ने तिरेपन रन देकर एक विकेट चटकाया लेकिन अन्य गेंदबाज सफलता हासिल करने के लिए जूझते नजर आए। अय्यर ने आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे हाफ में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए शानदार प्रदर्शन करके सबका ध्यान खींचा था। उन्होंने इस सीजन की शुरुआत में घरेलू टूर्नामेंटों में बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन किया। आकाश चोपड़ा ने कहा, "इसने मुझे चौंका दिया। वेंकटेश अय्यर को गेंदबाजी नहीं करने के मामले में सिर्फ केएल राहुल ही नहीं है, रोहित शर्मा ने भी न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टीबीस मैचों में भी यही काम किया था। सीरीज जीतने के बाद उन्हें गेंदबाजी करने का मौका दिया गाय। " उन्होंने कहा, "मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में केएल राहुल ने कहा था कि वह वेंकटेश अय्यर को छठे गेंदबाजी विकल्प के रूप में इस्तेमाल करेंगे। इस मैच में कई मौके थे, यह देखने के लिए कि वह वास्तव में क्या कर सकता है। वह कुछ रन लीक कर सकता था लेकिन वनडे एक ऐसा प्रारूप है जो गेंदबाज को कुछ रन लीक करने और बाद में वापसी करने की अनुमति देता है। " उन्होने आगे कहा, "तो, यह सिर्फ हम हैं जो वेंकटेश अय्यर को एक ऑलराउंडर के रूप में देख रहे हैं। ऐसा लगता है कि भारतीय थिंक टेक, टीम प्रबंधन और नेतृत्व समूह, वे उन्हें एक ऑलराउंडर के रूप में नहीं देखते हैं ऐसा बाहर से देखने से लग रहा है। यह अब भारत के लिए उनका चौथा गेम है और वह करीब एक सौ दस ओवरों के लिए मैदान पर रहे हैं, उसने केवल दो-तीन ओवर फेंके हैं और वह भी अच्छी परिस्थितियो में। अगर वह गेंदबाजी नहीं करने जा रहा है, तो सूर्यकुमार यादव या ईशान किशन में से किसी एक को खिलाएं। "
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जड़े हुए हैं। पर एक फूलवारी लगायी गयी है, जिसमें तरह-तरह के टम वाले गमले लाकर रंगे गये हैं। एम. एल. ए. माहब की बोदी अपनी पेरानी टीक करती हुई रोज अपने नगोल पर चढ़ती है और अपने पति के पौधों को प्यार करती है।
लेकिन इस मकान का निचना हिस्सा पुराने ढंग का है। एम. एल. ए. साहब का विचार पा कि नीचे खूप बड़ागा डाइनिंग हाल बनाया जाये और उमी में सटा हुआ ड्राइंग रूम बने, लेकिन हाजी मतीउल्ला और हाजी मिनिस्टर नाराज हो गये। उन्होंने हाजी अमोहल्ला से बातचीत की और सुझाव दिया कि नये फैशन मे बहकर अपने जातीय गुणों का त्याग कर देना बुद्धिमानी का काम नहीं है। हालांकि हाजी हवीबुल्ला को इस मकान वफान में कोई रुचि नही थी लेकिन इस सम्बन्ध में उनकी राय भी अपने अन्य भाइयों की राय से मेस गा रही थी । भरानवाली यह समस्या सरदार महतो तक के कान में जा पहुंची और शरफुद्दीन को वनाएँ धराशायी हो गयो । मकान का निचला हिस्सा उन्हें पारम्परिक ढंग से हो यनवाना पड़ा, अर्थात बीच में एक खूब बडा-सा योगन और आंगन के चारों ओर चार बड़ेबड़े कमरे । रिवाज के अनुसार यौगन की ओर गुलनेवाले तीन-तीन दरवाजे सभी कमरों में होने चाहिए। शरफुद्दीन ने जब यह कहा कि ड्राइंग रूम में तो आँगन को ओर एक ही दरवाजा होगा तो बड़े-बूढ़ों ने राय दी कि तब दीवार पर दो दरवाज के निशान बनाये जाने चाहिए, वरना परम्परा का उल्लंघन होगा। फिर मकान बन जाने के बाद यह भी मसला सामने आया कि शरफुद्दीन जिसे बार-बार ड्राइंग रूम' कह रहा था उसको सजावट कैसी होनी चाहिए ? एम. एल. ए. साहब को राय थी कि इस कमरे में एक आलीशान मोफासेट होना चाहिए और एक ओर सनमारका की मेज तथा मूविंग चेयर। लेकिन हाजी अमीरल्ला को राय थी कि "कोठरी' में गद्दी विष्ठी होनी चाहिए और बाहर की ओर से नहीं, बल्कि अंगिन की ओर से प्रवेश होना चाहिए, ताकि लोग आँगन में जूते उतारकर 'ड्राइंग रूम वाली 'कोठरी' मे जा सकें। इस मसले पर देर तक बहस-मुबाइसा होता रहा। फिर यह तय पाया कि दोनों की इच्छाओं में समन्वय स्थापित करके इस महत्त्वपूर्ण मसले को खत्म किया जाय। और इस तरह जो नया विचार बना वह यह था कि कमरे मे गद्दी नहीं, सोफासेट ही होना चाहिए, पर प्रवेश आँगन की ओर से ही होना चाहिए और जूते उतारकर !
तो हम तरह यह 'इंगलिश-कम-अंसारी-स्टादल' का मकान तैयार हुआ और सेठ गजाधर प्रसाद की राय से बाकायदा 'गृह प्रवेश' का आयोजन भी किया गया, लेकिन शुद्ध इस्लामिक ढंग से उम रोज फजिर बाद में हो कुरमान वानी शुरू हो गयी, जो दोपहर तक चलती रही। कुरआन पहनेवाने लौंडों को इमिरनी वांटो गयी और बाद में एक यास दाबत हुई, जिसमें बड़े-बड़े लोग उपस्थित हुए। फिर
झोनी-सोनी बीनी चदरिया / 239
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जड़े हुए हैं। पर एक फूलवारी लगायी गयी है, जिसमें तरह-तरह के टम वाले गमले लाकर रंगे गये हैं। एम. एल. ए. माहब की बोदी अपनी पेरानी टीक करती हुई रोज अपने नगोल पर चढ़ती है और अपने पति के पौधों को प्यार करती है। लेकिन इस मकान का निचना हिस्सा पुराने ढंग का है। एम. एल. ए. साहब का विचार पा कि नीचे खूप बड़ागा डाइनिंग हाल बनाया जाये और उमी में सटा हुआ ड्राइंग रूम बने, लेकिन हाजी मतीउल्ला और हाजी मिनिस्टर नाराज हो गये। उन्होंने हाजी अमोहल्ला से बातचीत की और सुझाव दिया कि नये फैशन मे बहकर अपने जातीय गुणों का त्याग कर देना बुद्धिमानी का काम नहीं है। हालांकि हाजी हवीबुल्ला को इस मकान वफान में कोई रुचि नही थी लेकिन इस सम्बन्ध में उनकी राय भी अपने अन्य भाइयों की राय से मेस गा रही थी । भरानवाली यह समस्या सरदार महतो तक के कान में जा पहुंची और शरफुद्दीन को वनाएँ धराशायी हो गयो । मकान का निचला हिस्सा उन्हें पारम्परिक ढंग से हो यनवाना पड़ा, अर्थात बीच में एक खूब बडा-सा योगन और आंगन के चारों ओर चार बड़ेबड़े कमरे । रिवाज के अनुसार यौगन की ओर गुलनेवाले तीन-तीन दरवाजे सभी कमरों में होने चाहिए। शरफुद्दीन ने जब यह कहा कि ड्राइंग रूम में तो आँगन को ओर एक ही दरवाजा होगा तो बड़े-बूढ़ों ने राय दी कि तब दीवार पर दो दरवाज के निशान बनाये जाने चाहिए, वरना परम्परा का उल्लंघन होगा। फिर मकान बन जाने के बाद यह भी मसला सामने आया कि शरफुद्दीन जिसे बार-बार ड्राइंग रूम' कह रहा था उसको सजावट कैसी होनी चाहिए ? एम. एल. ए. साहब को राय थी कि इस कमरे में एक आलीशान मोफासेट होना चाहिए और एक ओर सनमारका की मेज तथा मूविंग चेयर। लेकिन हाजी अमीरल्ला को राय थी कि "कोठरी' में गद्दी विष्ठी होनी चाहिए और बाहर की ओर से नहीं, बल्कि अंगिन की ओर से प्रवेश होना चाहिए, ताकि लोग आँगन में जूते उतारकर 'ड्राइंग रूम वाली 'कोठरी' मे जा सकें। इस मसले पर देर तक बहस-मुबाइसा होता रहा। फिर यह तय पाया कि दोनों की इच्छाओं में समन्वय स्थापित करके इस महत्त्वपूर्ण मसले को खत्म किया जाय। और इस तरह जो नया विचार बना वह यह था कि कमरे मे गद्दी नहीं, सोफासेट ही होना चाहिए, पर प्रवेश आँगन की ओर से ही होना चाहिए और जूते उतारकर ! तो हम तरह यह 'इंगलिश-कम-अंसारी-स्टादल' का मकान तैयार हुआ और सेठ गजाधर प्रसाद की राय से बाकायदा 'गृह प्रवेश' का आयोजन भी किया गया, लेकिन शुद्ध इस्लामिक ढंग से उम रोज फजिर बाद में हो कुरमान वानी शुरू हो गयी, जो दोपहर तक चलती रही। कुरआन पहनेवाने लौंडों को इमिरनी वांटो गयी और बाद में एक यास दाबत हुई, जिसमें बड़े-बड़े लोग उपस्थित हुए। फिर झोनी-सोनी बीनी चदरिया / दो सौ उनतालीस
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नई दिल्ली : बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने संसद की कार्यवाही में शामिल ना होने वाले बीजेपी के सासंदों की जमकर क्लास ली और जोरदार फटकार भी लगाई. दरअसल सोमवार को राज्यसभा में सरकार की किरकिरी होने से अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खासा नाराज थे.
सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष का एक संशोधन उस वक्त पास हो गया जब वोटिंग के दौरान सरकार हार गई. कल की कार्यवाही में सदन में एनडीए के कई सांसद मौजूद नहीं थे, इसका अच्छा खासा फायदा विपक्ष को मिल गया और राज्यसभा में कल पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का संविधान संशोधन बिल पास हो गया.
जिसके बाद पीएम मोदी ने सांसदों की गैरहाजिरी पर नाराजगी जाहिर की थी. मोदी की नाराजगी को गंभीरता से लेते हुए अमित शाह ने बीजेपी के सांसदों की क्लास लगाई. उन्होंने कहा कि सभी सांसदों को सदन की कार्यवाही में मौजूद रहना चाहिेए था.
शाह ने कहा कि सदन की कार्यवाही शुरू होने से लेकर समाप्त होने तक सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहना चाहिए था. उन्होंने उन सभी सांसदों को जो सोमवार के दिन राज्यसभा की कार्यवाही से नदारद थे उन्हें अलग से बुलाने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए यह अच्छा नहीं है. शाह ने कहा कि आप सभी सांसद जनता के प्रतिनिथि हैं, आपके ना होने से गलत संदेश गया है.
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नई दिल्ली : बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने संसद की कार्यवाही में शामिल ना होने वाले बीजेपी के सासंदों की जमकर क्लास ली और जोरदार फटकार भी लगाई. दरअसल सोमवार को राज्यसभा में सरकार की किरकिरी होने से अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खासा नाराज थे. सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष का एक संशोधन उस वक्त पास हो गया जब वोटिंग के दौरान सरकार हार गई. कल की कार्यवाही में सदन में एनडीए के कई सांसद मौजूद नहीं थे, इसका अच्छा खासा फायदा विपक्ष को मिल गया और राज्यसभा में कल पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का संविधान संशोधन बिल पास हो गया. जिसके बाद पीएम मोदी ने सांसदों की गैरहाजिरी पर नाराजगी जाहिर की थी. मोदी की नाराजगी को गंभीरता से लेते हुए अमित शाह ने बीजेपी के सांसदों की क्लास लगाई. उन्होंने कहा कि सभी सांसदों को सदन की कार्यवाही में मौजूद रहना चाहिेए था. शाह ने कहा कि सदन की कार्यवाही शुरू होने से लेकर समाप्त होने तक सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहना चाहिए था. उन्होंने उन सभी सांसदों को जो सोमवार के दिन राज्यसभा की कार्यवाही से नदारद थे उन्हें अलग से बुलाने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए यह अच्छा नहीं है. शाह ने कहा कि आप सभी सांसद जनता के प्रतिनिथि हैं, आपके ना होने से गलत संदेश गया है.
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Colpitis श्लेष्म में एक भड़काऊ प्रक्रिया हैयोनि की म्यान यह प्रजनन उम्र की महिलाओं के बीच सबसे आम विकृति है और विभिन्न रोगजनकों के कारण होता हैः क्लैमाइडिया, मायकोप्लास्मास, स्ट्रेप्टोकोकी और स्टेफिलकोसी, एक हेमोफिलिक रॉड।
सभी उम्र में संक्रमण देखा जाता हैसमूहों, यह utero में संक्रमण संचारित करने के लिए संभव है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि प्रजनन उम्र की महिलाओं में योनि की सूजन तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है, अन्यथा रोग प्रक्रिया गर्भाशय ग्रीवा नहर, गर्भाशय और उसके परिशिष्टों तक फैली हुई है। यह एंडोमेट्रैटिस का कारण बनता है, गर्भाशय ग्रीवा का क्षरण और यहां तक कि बांझपन भी।
इस बीमारी के विकास को उत्तेजित करने वाले कारकों में निम्नलिखित की पहचान करेंः
• अन्य संक्रामक रोग;
• योनि श्लेष्मा या इसके पोषण के व्यवधान के लिए यांत्रिक आघात;
• योनि की संरचना में रचनात्मक परिवर्तन;
• एंडोक्राइन विकार;
• लंबे समय तक एंटीबायोटिक थेरेपी;
• कंडोम, योनि suppositories और क्रीम के लिए एलर्जी;
• व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन न करें;
• निम्न स्तर प्रतिरक्षा स्थिति;
• कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन चयापचय का उल्लंघन;
• विटामिन की कमी;
• हार्मोनल असंतुलन;
• बुजुर्ग उम्र।
मुझे कहना होगा कि उपर्युक्त कारकों के प्रभाव में, न केवल कैंडीडा कोलाइटिस (थ्रश) विकसित होता है, बल्कि वाल्वाइटिस, एंडोकर्विसिस भी होता है।
इस के मुख्य नैदानिक अभिव्यक्तियों में सेपैथोलॉजीज जलन, खुजली, योनि में दर्द और भारी चीज निर्वहन देते हैं। जब स्त्री रोग संबंधी परीक्षा यह ध्यान देने योग्य है कि श्लेष्म झिल्ली edematous और लाल है। इसके अलावा, महत्वपूर्ण सफेद कोटिंग्स उन्हें हटाते समय पाए जाते हैं, अपरिवर्तनीय सतहें बनती हैं। निदान की पुष्टि करने के लिए, योनि से swabs कवक का पता लगाने के लिए लिया जाता है।
समाधान के साथ स्थानीय चिकित्साNystatin। यह भी निर्धारित किया गया है कि विटामिन और एंटीहिस्टामाइन्स, एंटीफंगल एजेंट प्रवेश के लिए एंटीफंगल एजेंट (उदाहरण के लिए, लेवोरिन 500 हजार इकाइयां दिन में तीन बार 20 दिनों के लिए)।
सतही कैंडिडिआसिस के साथ अक्सर इस्तेमाल किया जाता हैडेकामाइन, जिसे योनि श्लेष्म के लिए आवेदन के लिए 1% मलम के रूप में निर्धारित किया जाता है। थ्रश dekamin भी कारमेल के रूप है, जो मौखिक गुहा में धीरे-धीरे भंग चाहिए में किए जा सकते हैं। उसी समय, सामान्य पुनर्स्थापना चिकित्सा का प्रदर्शन किया जाता है।
गर्भावस्था के दौरान कैंडिडा कोलाइटिसः पहले तिमाही में उपचार nystatin, pimafucin, हेक्सिकन या terzhinan के साथ किया जा सकता है। गर्भ धारण करने के 3-4 महीने के साथ, इसे मेट्रोनिडाज़ोल, क्लोट्रिमेज़ोल, मेरेटिन कोम्बी का उपयोग करने की अनुमति है। यह ध्यान देने योग्य है कि कैमोमाइल और कैलेंडुला के एक डेकोक्शन के साथ शामक स्नान में सकारात्मक चिकित्सीय प्रभाव होता है।
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Colpitis श्लेष्म में एक भड़काऊ प्रक्रिया हैयोनि की म्यान यह प्रजनन उम्र की महिलाओं के बीच सबसे आम विकृति है और विभिन्न रोगजनकों के कारण होता हैः क्लैमाइडिया, मायकोप्लास्मास, स्ट्रेप्टोकोकी और स्टेफिलकोसी, एक हेमोफिलिक रॉड। सभी उम्र में संक्रमण देखा जाता हैसमूहों, यह utero में संक्रमण संचारित करने के लिए संभव है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि प्रजनन उम्र की महिलाओं में योनि की सूजन तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है, अन्यथा रोग प्रक्रिया गर्भाशय ग्रीवा नहर, गर्भाशय और उसके परिशिष्टों तक फैली हुई है। यह एंडोमेट्रैटिस का कारण बनता है, गर्भाशय ग्रीवा का क्षरण और यहां तक कि बांझपन भी। इस बीमारी के विकास को उत्तेजित करने वाले कारकों में निम्नलिखित की पहचान करेंः • अन्य संक्रामक रोग; • योनि श्लेष्मा या इसके पोषण के व्यवधान के लिए यांत्रिक आघात; • योनि की संरचना में रचनात्मक परिवर्तन; • एंडोक्राइन विकार; • लंबे समय तक एंटीबायोटिक थेरेपी; • कंडोम, योनि suppositories और क्रीम के लिए एलर्जी; • व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन न करें; • निम्न स्तर प्रतिरक्षा स्थिति; • कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन चयापचय का उल्लंघन; • विटामिन की कमी; • हार्मोनल असंतुलन; • बुजुर्ग उम्र। मुझे कहना होगा कि उपर्युक्त कारकों के प्रभाव में, न केवल कैंडीडा कोलाइटिस विकसित होता है, बल्कि वाल्वाइटिस, एंडोकर्विसिस भी होता है। इस के मुख्य नैदानिक अभिव्यक्तियों में सेपैथोलॉजीज जलन, खुजली, योनि में दर्द और भारी चीज निर्वहन देते हैं। जब स्त्री रोग संबंधी परीक्षा यह ध्यान देने योग्य है कि श्लेष्म झिल्ली edematous और लाल है। इसके अलावा, महत्वपूर्ण सफेद कोटिंग्स उन्हें हटाते समय पाए जाते हैं, अपरिवर्तनीय सतहें बनती हैं। निदान की पुष्टि करने के लिए, योनि से swabs कवक का पता लगाने के लिए लिया जाता है। समाधान के साथ स्थानीय चिकित्साNystatin। यह भी निर्धारित किया गया है कि विटामिन और एंटीहिस्टामाइन्स, एंटीफंगल एजेंट प्रवेश के लिए एंटीफंगल एजेंट । सतही कैंडिडिआसिस के साथ अक्सर इस्तेमाल किया जाता हैडेकामाइन, जिसे योनि श्लेष्म के लिए आवेदन के लिए एक% मलम के रूप में निर्धारित किया जाता है। थ्रश dekamin भी कारमेल के रूप है, जो मौखिक गुहा में धीरे-धीरे भंग चाहिए में किए जा सकते हैं। उसी समय, सामान्य पुनर्स्थापना चिकित्सा का प्रदर्शन किया जाता है। गर्भावस्था के दौरान कैंडिडा कोलाइटिसः पहले तिमाही में उपचार nystatin, pimafucin, हेक्सिकन या terzhinan के साथ किया जा सकता है। गर्भ धारण करने के तीन-चार महीने के साथ, इसे मेट्रोनिडाज़ोल, क्लोट्रिमेज़ोल, मेरेटिन कोम्बी का उपयोग करने की अनुमति है। यह ध्यान देने योग्य है कि कैमोमाइल और कैलेंडुला के एक डेकोक्शन के साथ शामक स्नान में सकारात्मक चिकित्सीय प्रभाव होता है।
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Chakuliya : नगर पंचायत क्षेत्र के नामोपाड़ा रास मंदिर में रास पूर्णिमा के उपलक्ष्य पर 8 नवंबर को मंदिर कमेटी द्वारा रास पूर्णिमा उत्सव का आयोजन किया गया है. उत्सव को लेकर मंदिर कमेटी द्वारा तैयारियां की जा रही हैं. वहीं, 9 से 15 नवंबर तक हंसानंद महराज द्वारा श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जाएगा. इस दौरान हंसानंद महराज दोपहर 3 बजे से संध्या 7 बजे तक कथा का वाचन करेंगे. कार्यक्रम को सफल बनाने में कमेटी के संरक्षक लक्ष्मीनारायण दास, चन्द्रदेव महतो, देवदास पंडा, अध्यक्ष पतित पावन दास, सचिव दिलीप दास, कोषाध्यक्ष उत्पल पंडा पशुपति बेरा, पंकज दास, शंकर चंद्र दास, कांचन पांडा, निमाई दास, रंजीत दास, राजु दास, चंदन दास समेत अन्य जुटे हुए हैं.
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Chakuliya : नगर पंचायत क्षेत्र के नामोपाड़ा रास मंदिर में रास पूर्णिमा के उपलक्ष्य पर आठ नवंबर को मंदिर कमेटी द्वारा रास पूर्णिमा उत्सव का आयोजन किया गया है. उत्सव को लेकर मंदिर कमेटी द्वारा तैयारियां की जा रही हैं. वहीं, नौ से पंद्रह नवंबर तक हंसानंद महराज द्वारा श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जाएगा. इस दौरान हंसानंद महराज दोपहर तीन बजे से संध्या सात बजे तक कथा का वाचन करेंगे. कार्यक्रम को सफल बनाने में कमेटी के संरक्षक लक्ष्मीनारायण दास, चन्द्रदेव महतो, देवदास पंडा, अध्यक्ष पतित पावन दास, सचिव दिलीप दास, कोषाध्यक्ष उत्पल पंडा पशुपति बेरा, पंकज दास, शंकर चंद्र दास, कांचन पांडा, निमाई दास, रंजीत दास, राजु दास, चंदन दास समेत अन्य जुटे हुए हैं.
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जेईई मेन 2013 को आयोजन सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन (CBSE) ने 81 शहरों में किया. जिनमें से चार बहरीन, दुबई, रियाद और मस्कट विदेश में हैं.
जेईई के जरिए स्टूडेंट्स आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और अन्य केंद्रीय सहायता प्राप्त तकनीकी सहायता संस्थानों के बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग, बीटेक और आर्किटेक्चर कोर्सेज में एडमिशन ले सकेंगे.
2013 में 15 आईआईटी, आईटी बीएचयू और आईएसएम धनबाद में 9647 अंडरग्रेजुएट सीटें हैं वहीं देश भर में फैले 30 एनआईटी में 15678 सीटें हैं.
जेईई मेन ने एआईईईई और जेईई एडवांस्ड ने आईआईटी जेईई को रिप्लेस किया है. 2 जून 2013 को होने वाले जेईई एडवांस में मेन के टॉप डेढ़ लाख स्टूडेंट्स ही हिस्सा ले सकेंगे.
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जेईई मेन दो हज़ार तेरह को आयोजन सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन ने इक्यासी शहरों में किया. जिनमें से चार बहरीन, दुबई, रियाद और मस्कट विदेश में हैं. जेईई के जरिए स्टूडेंट्स आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और अन्य केंद्रीय सहायता प्राप्त तकनीकी सहायता संस्थानों के बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग, बीटेक और आर्किटेक्चर कोर्सेज में एडमिशन ले सकेंगे. दो हज़ार तेरह में पंद्रह आईआईटी, आईटी बीएचयू और आईएसएम धनबाद में नौ हज़ार छः सौ सैंतालीस अंडरग्रेजुएट सीटें हैं वहीं देश भर में फैले तीस एनआईटी में पंद्रह हज़ार छः सौ अठहत्तर सीटें हैं. जेईई मेन ने एआईईईई और जेईई एडवांस्ड ने आईआईटी जेईई को रिप्लेस किया है. दो जून दो हज़ार तेरह को होने वाले जेईई एडवांस में मेन के टॉप डेढ़ लाख स्टूडेंट्स ही हिस्सा ले सकेंगे.
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भाजपा और जेडीयू 1998 में पहली बार एक साथ आए थे। तब से कई बार नीतीश कुमार अपना पाला बदल चुके हैं। साल 2013 में जब भाजपा ने नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनावों की जिम्मेदारी दी तब भी नीतीश कुमार खफा हो गए थे। और 17 साल पुराने रिश्ते को तोड़कर आरजेडी से हाथ मिलाया था।
नीतीश कुमार ने साल 2015 में राजनीति के अपने बड़े भाई और पुराने सहयोगी लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर विधानसभा का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में बिहार की राजनीति में बदलाव आया और महागठबंधन को बड़ी जीत हासिल हुई।
साल 2017 में महागठबंधन में दरार पड़ी। नीतीश ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। उस दौरान भ्रष्टाचार के आरोप में डिप्टी सीएम तेजस्वी से इस्तीफे की मांग बढ़ने लगी थी। बाद में नीतीश कुमार ने कहा था कि ऐसे माहौल में काम करना मुश्किल हो गया था। फिर नीतीश ने भाजपा का साथ लिया और सहयोगियों की मदद से बिहार के सीएम बने।
नीतीश का फिर से बीजेपी से मतभेद क्यों?
साल 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू को कम सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बीजेपी ने उन्हें चुनाव में 43 सीटों पर जीत के बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया, लेकिन महज दो साल बाद ही मतभेद फिर से उभरकर सामने आए हैं। अब चर्चा है कि लालू यादव की पार्टी आरजेडी और कांग्रेस के सहयोग से नीतीश नई सरकार बना सकते हैं। आरसीपी सिंह से नीतीश कुमार काफी नाराज बताए जाते हैं।
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भाजपा और जेडीयू एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में पहली बार एक साथ आए थे। तब से कई बार नीतीश कुमार अपना पाला बदल चुके हैं। साल दो हज़ार तेरह में जब भाजपा ने नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनावों की जिम्मेदारी दी तब भी नीतीश कुमार खफा हो गए थे। और सत्रह साल पुराने रिश्ते को तोड़कर आरजेडी से हाथ मिलाया था। नीतीश कुमार ने साल दो हज़ार पंद्रह में राजनीति के अपने बड़े भाई और पुराने सहयोगी लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर विधानसभा का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में बिहार की राजनीति में बदलाव आया और महागठबंधन को बड़ी जीत हासिल हुई। साल दो हज़ार सत्रह में महागठबंधन में दरार पड़ी। नीतीश ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। उस दौरान भ्रष्टाचार के आरोप में डिप्टी सीएम तेजस्वी से इस्तीफे की मांग बढ़ने लगी थी। बाद में नीतीश कुमार ने कहा था कि ऐसे माहौल में काम करना मुश्किल हो गया था। फिर नीतीश ने भाजपा का साथ लिया और सहयोगियों की मदद से बिहार के सीएम बने। नीतीश का फिर से बीजेपी से मतभेद क्यों? साल दो हज़ार बीस में बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू को कम सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बीजेपी ने उन्हें चुनाव में तैंतालीस सीटों पर जीत के बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया, लेकिन महज दो साल बाद ही मतभेद फिर से उभरकर सामने आए हैं। अब चर्चा है कि लालू यादव की पार्टी आरजेडी और कांग्रेस के सहयोग से नीतीश नई सरकार बना सकते हैं। आरसीपी सिंह से नीतीश कुमार काफी नाराज बताए जाते हैं।
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सूरज सिन्हा-बेमेतरा। जिस पर लोगों के और सरकार के पैसे की हिफाजत का जिम्मा हो, वही यदि चोरी पर उतारू हो जाए तो फिर पैसों को लुटने से कौन बचा सकता है। जी हां ऐसा हुआ है यहां एक बैंक में, जहां मैनेजर ने ही चार किसानों को साथ मिलाकर बैंक के 14 करोड़ रुपयों का गबन कर दिया। बैंक की आडिट में अब जाकर इस बात का खुलासा हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय बेमेतरा में स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास ने जिले के चार ग्रामीणों के साथ मिलकर अपने ही बैंक को 14 करोड़ का चूना लगा दिया। इसके लिए उन्होंने बाकायदा लोन के नाम पर बैंक के 180 खाता धारकों के खाते में पैसे ट्रांसफर किए।
आडिट में मामला उजागर होने के बाद अब वर्तमान शाखा प्रबंधक राजू पाटनकर ने सिटी कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास ने ग्रामीण कमलेश सिन्हा, सोहन वर्मा, नागेश वर्मा और टीकाराम माथुर के साथ मिलकर बैंक के 180 खातों में रुपए के हेरफेर कर बैंक को 14 करोड़ का नुकसान पहुंचाया है। बैंक मैनेजर की शिकायत पर बेमेतरा पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक के शाखा प्रबंधक के आवेदन और दस्तावेजों के अनुसार 5 लोगों पर मामला दर्ज कर विवेचना में लिया है।
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सूरज सिन्हा-बेमेतरा। जिस पर लोगों के और सरकार के पैसे की हिफाजत का जिम्मा हो, वही यदि चोरी पर उतारू हो जाए तो फिर पैसों को लुटने से कौन बचा सकता है। जी हां ऐसा हुआ है यहां एक बैंक में, जहां मैनेजर ने ही चार किसानों को साथ मिलाकर बैंक के चौदह करोड़ रुपयों का गबन कर दिया। बैंक की आडिट में अब जाकर इस बात का खुलासा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय बेमेतरा में स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास ने जिले के चार ग्रामीणों के साथ मिलकर अपने ही बैंक को चौदह करोड़ का चूना लगा दिया। इसके लिए उन्होंने बाकायदा लोन के नाम पर बैंक के एक सौ अस्सी खाता धारकों के खाते में पैसे ट्रांसफर किए। आडिट में मामला उजागर होने के बाद अब वर्तमान शाखा प्रबंधक राजू पाटनकर ने सिटी कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास ने ग्रामीण कमलेश सिन्हा, सोहन वर्मा, नागेश वर्मा और टीकाराम माथुर के साथ मिलकर बैंक के एक सौ अस्सी खातों में रुपए के हेरफेर कर बैंक को चौदह करोड़ का नुकसान पहुंचाया है। बैंक मैनेजर की शिकायत पर बेमेतरा पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक के शाखा प्रबंधक के आवेदन और दस्तावेजों के अनुसार पाँच लोगों पर मामला दर्ज कर विवेचना में लिया है।
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Publish Date: Wed, 27 Feb 2019 22:47:27 (IST)
कानपुर (आईएएनएस)। मंगला विहार निवासी कॉर्पोरल दीपक पांडे की बुधवार सुबह जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में भारतीय वायु सेना के एमआई -17 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण मौत हो गई। एक करीबी रिश्तेदार के मुताबिक दीपक की मौत की सूचना जब उनके पिता रामप्रकाश पांडे और परिजनों को मिली तो घर में कोहराम मच गया। बता दें कि दीपक के पिता प्राइवेट नौकरी से सेवानिवृत्त हैं। दीपक पांडे अपने घर के एकलोते चिराग थे, और पांच साल पहले उन्होंने भारतीय वायुसेना ज्वाइन की थी और इस वक्त उनकी तैनाती श्रीनगर एयरबेस में थी। दीपक की मौत पर उत्तर प्रदेश सरकार के उद्योग मंत्री सतीश महाना और कई वरिष्ठ अधिकारी दीपक के घर पुहंचे और परिवार के सदस्यों को सांत्वना दी और कहा कि इस दुख की घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ है।
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Publish Date: Wed, सत्ताईस फ़रवरी दो हज़ार उन्नीस बाईस:सैंतालीस:सत्ताईस कानपुर । मंगला विहार निवासी कॉर्पोरल दीपक पांडे की बुधवार सुबह जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में भारतीय वायु सेना के एमआई -सत्रह हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण मौत हो गई। एक करीबी रिश्तेदार के मुताबिक दीपक की मौत की सूचना जब उनके पिता रामप्रकाश पांडे और परिजनों को मिली तो घर में कोहराम मच गया। बता दें कि दीपक के पिता प्राइवेट नौकरी से सेवानिवृत्त हैं। दीपक पांडे अपने घर के एकलोते चिराग थे, और पांच साल पहले उन्होंने भारतीय वायुसेना ज्वाइन की थी और इस वक्त उनकी तैनाती श्रीनगर एयरबेस में थी। दीपक की मौत पर उत्तर प्रदेश सरकार के उद्योग मंत्री सतीश महाना और कई वरिष्ठ अधिकारी दीपक के घर पुहंचे और परिवार के सदस्यों को सांत्वना दी और कहा कि इस दुख की घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ है। .
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करौली जिले में पिछले 3 दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। रविवार सुबह दिन की शुरुआत होने पर बादल छाए हुए थे और ठंडी हवा चलने से मौसम खुशनुमा बना हुआ था। सुबह करीब 7 बजे रिमझिम बारिश का दौर शुरू हो गया, जो रुक-रुक कर काफी देर तक चलता रहा। रिमझिम बारिश के साथ ठंडी हवा चलने से तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हो गया। हर साल मई महीने में झुलसा देने वाली गर्मी की जगह इस पर मौसम ठंडा बना हुआ है। मौसम विभाग ने आगामी एक-दो दिन मेघ गर्जना के साथ हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की चेतावनी दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र हिंडौन के डॉ. एम के नायक ने बताया कि 28 और 29 को मौसम विभाग ने नए विक्षोभ के कारण 80 से 100 किलोमीटर की रफ्तार तूफानी हवा और बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकलें। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटे में जिले में सबसे ज्यादा 34MM बारिश टोडाभीम में हुई है। इसके अलावा हिंडौन सिटी में 2MM, करौली में 6MM, मासलपुर में 8MM, नादौती में 1MM, सूरौठ में 3MM और मंडरायल में 15MM बारिश हुई है।
नायक ने बताया कि 25 मई को आए तूफान की रफ्तार 96 किलोमीटर प्रति घंटे की थी। राज्य में तूफान के कारण 14 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और करोड़ों रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
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करौली जिले में पिछले तीन दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। रविवार सुबह दिन की शुरुआत होने पर बादल छाए हुए थे और ठंडी हवा चलने से मौसम खुशनुमा बना हुआ था। सुबह करीब सात बजे रिमझिम बारिश का दौर शुरू हो गया, जो रुक-रुक कर काफी देर तक चलता रहा। रिमझिम बारिश के साथ ठंडी हवा चलने से तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हो गया। हर साल मई महीने में झुलसा देने वाली गर्मी की जगह इस पर मौसम ठंडा बना हुआ है। मौसम विभाग ने आगामी एक-दो दिन मेघ गर्जना के साथ हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की चेतावनी दी है। कृषि विज्ञान केंद्र हिंडौन के डॉ. एम के नायक ने बताया कि अट्ठाईस और उनतीस को मौसम विभाग ने नए विक्षोभ के कारण अस्सी से एक सौ किलोग्राममीटर की रफ्तार तूफानी हवा और बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकलें। उन्होंने बताया कि पिछले चौबीस घंटाटे में जिले में सबसे ज्यादा चौंतीसMM बारिश टोडाभीम में हुई है। इसके अलावा हिंडौन सिटी में दोMM, करौली में छःMM, मासलपुर में आठMM, नादौती में एकMM, सूरौठ में तीनMM और मंडरायल में पंद्रहMM बारिश हुई है। नायक ने बताया कि पच्चीस मई को आए तूफान की रफ्तार छियानवे किलोग्राममीटर प्रति घंटे की थी। राज्य में तूफान के कारण चौदह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और करोड़ों रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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