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- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
2016 धीरे धीरे डार्क फिल्मों और सस्पेंस की तरफ बढ़ रहा है। और इसी कड़ी में रिलीज़ हुए हैं आने वाली दो फिल्मों के दो पोस्टर। धमाकेदार डायरेक्टर्स के साथ। दोनों का कॉमन पॉइंट हैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी।
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दूसरी फिल्म है सुजॉय घोष की तीन। फिल्म में हैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, अमिताभ बच्चन और विद्या बालन। फिल्म का पोस्टर जितना दिलचस्प है उतना ही पेचीदा भी। फिल्म जून में रिलीज़ हो रही है।
सुजॉय घोष और विद्या बालन एक साथ कहानी जैसी धमाकेदार फिल्म दे चुकी हैं वहीं अनुराग कश्यप ने नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को गैंग्स ऑफ वसेपुर से एक मुकाम दे दिया था।
फिल्में,
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Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? दो हज़ार सोलह धीरे धीरे डार्क फिल्मों और सस्पेंस की तरफ बढ़ रहा है। और इसी कड़ी में रिलीज़ हुए हैं आने वाली दो फिल्मों के दो पोस्टर। धमाकेदार डायरेक्टर्स के साथ। दोनों का कॉमन पॉइंट हैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी। दो. शून्य। है, थे। हैं। दूसरी फिल्म है सुजॉय घोष की तीन। फिल्म में हैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, अमिताभ बच्चन और विद्या बालन। फिल्म का पोस्टर जितना दिलचस्प है उतना ही पेचीदा भी। फिल्म जून में रिलीज़ हो रही है। सुजॉय घोष और विद्या बालन एक साथ कहानी जैसी धमाकेदार फिल्म दे चुकी हैं वहीं अनुराग कश्यप ने नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को गैंग्स ऑफ वसेपुर से एक मुकाम दे दिया था। फिल्में,
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पीलीभीत पुलिस ने सिख तीर्थयात्रियों से भरी बस से 11 युवकों को उतारा, लेकिन उनमें से केवल 10 ही मृत पाए गए, जबकि एक का कोई पता नहीं चल पाया है।
सीबीआई के वकील एस. सी. जायसवाल ने कहा कि 12 जुलाई 1991 को 25 सिख तीर्थयात्रियों का जत्था नानकमठ पटना साहिब, हजूर साहिब और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन कर बस से लौट रहा था. पीलीभीत के कच्छल घाट के पास पुलिस ने बस को रोक दिया और 11 युवकों को अपनी नीली बस में बिठा लिया. इनमें 10 शव मिले, जबकि शाहजहांपुर निवासी तलविंदर सिंह का आज तक पता नहीं चल सका है.
इस मामले को लेकर पुलिस ने पूरनपुर, नेवरिया और बिलसंडा थाने में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए थे. पुलिस ने इन मामलों में विवेचना के बाद फाइनल रिपोर्ट सौंपी थी।
एडवोकेट आर. एस। सोढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई 1992 को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने मामले की जांच के बाद सबूतों के आधार पर 57 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. शुक्रवार को कोर्ट ने 47 को दोषी करार दिया, जबकि 10 की मौत हो चुकी है।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में 178 गवाह पेश किए। पुलिसकर्मियों के हथियार, कारतूस समेत 101 साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी ने अपनी 58 पन्नों की चार्जशीट में सबूत के तौर पर 207 दस्तावेजों को भी शामिल किया था।
चार्जशीट के सुप्रीम कोर्ट में आने के बाद, इसने 12 जून 1995 को संज्ञान लिया और 3 फरवरी 2001 को सुनवाई के लिए सत्र न्यायालय को सौंप दिया। सत्र न्यायालय ने 20 जनवरी 2003 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए।
कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि हत्याएं हुई हैं, ये घटनाएं उन्हीं जगहों पर हुई हैं, जहां बताया गया है. सेवानिवृत्त सीएफएसएल वैज्ञानिक सत्य पाल शर्मा के बयान के विश्लेषण से साबित होता है कि जिस बस में 10 सिख युवकों को ले जाया गया था, उसी बस में गोलियों के निशान पाए गए थे.
प्रत्यक्षदर्शी डॉ. जीजी गोपालदास व फार्मासिस्ट डीपी अवस्थी के अनुसार घटना के समय नेवरिया थानाध्यक्ष जीपी सिंह का पीलीभीत जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज चल रहा था. जबकि एसएचओ खुद जी. डी. दर्ज किया था कि वे मौके पर मौजूद थे। कोर्ट ने कहा कि युवक की हत्या पहले ही की जा चुकी है। बस रात के आने और गुजर जाने का इंतजार था, ताकि एनकाउंटर को रात में होते दिखाया जा सके।
पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉ. विमल कुमार के बयानों के मुताबिक युवक के शरीर पर न सिर्फ गोली और चोट के निशान थे, बल्कि अन्य चोट के निशान भी थे. इस मामले में यह कहा जा सकता है कि युवकों को पहले पकड़ा गया और बाद में मार दिया गया.
पीएससी प्लाटून कमांडर दयान सिंह व पीएसी जवानों ने बताया कि घटना वाले दिन थाना आने व जाने का तीनों थाना क्षेत्रों में गलत उल्लेख किया गया था. पीएससी ने किसी मुठभेड़ में हिस्सा नहीं लिया, जबकि तीनों थानों की जीडी में पीएसी के आने और जाने को दिखाया गया, जबकि पीएसी के जवान अपने-अपने कैंप में आराम फरमा रहे थे. एनकाउंटर को जायज ठहराने के लिए पीएसी के जवानों को 13 जुलाई 1991 की सुबह 3 बजे थाने बुलाया गया और ड्यूटी शीट दी गई.
कोर्ट ने कहा कि जरूरत इस बात की है कि पीएससी के आगमन और प्रस्थान को तीनों संबंधित थानों के जीडी में गलत तरीके से दिखाया जाए। यह भी माना जा सकता है कि एक थाने के जीडी ने गलत समय दर्ज किया होगा, लेकिन तीनों थानों में गलत समय दर्ज करने से यह साबित होता है कि हत्याओं को मुठभेड़ के रूप में दिखाने के लिए फर्जी सबूत गढ़े गए थे।
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पीलीभीत पुलिस ने सिख तीर्थयात्रियों से भरी बस से ग्यारह युवकों को उतारा, लेकिन उनमें से केवल दस ही मृत पाए गए, जबकि एक का कोई पता नहीं चल पाया है। सीबीआई के वकील एस. सी. जायसवाल ने कहा कि बारह जुलाई एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे को पच्चीस सिख तीर्थयात्रियों का जत्था नानकमठ पटना साहिब, हजूर साहिब और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन कर बस से लौट रहा था. पीलीभीत के कच्छल घाट के पास पुलिस ने बस को रोक दिया और ग्यारह युवकों को अपनी नीली बस में बिठा लिया. इनमें दस शव मिले, जबकि शाहजहांपुर निवासी तलविंदर सिंह का आज तक पता नहीं चल सका है. इस मामले को लेकर पुलिस ने पूरनपुर, नेवरिया और बिलसंडा थाने में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए थे. पुलिस ने इन मामलों में विवेचना के बाद फाइनल रिपोर्ट सौंपी थी। एडवोकेट आर. एस। सोढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पंद्रह मई एक हज़ार नौ सौ बानवे को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने मामले की जांच के बाद सबूतों के आधार पर सत्तावन पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. शुक्रवार को कोर्ट ने सैंतालीस को दोषी करार दिया, जबकि दस की मौत हो चुकी है। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में एक सौ अठहत्तर गवाह पेश किए। पुलिसकर्मियों के हथियार, कारतूस समेत एक सौ एक साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी ने अपनी अट्ठावन पन्नों की चार्जशीट में सबूत के तौर पर दो सौ सात दस्तावेजों को भी शामिल किया था। चार्जशीट के सुप्रीम कोर्ट में आने के बाद, इसने बारह जून एक हज़ार नौ सौ पचानवे को संज्ञान लिया और तीन फरवरी दो हज़ार एक को सुनवाई के लिए सत्र न्यायालय को सौंप दिया। सत्र न्यायालय ने बीस जनवरी दो हज़ार तीन को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए। कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि हत्याएं हुई हैं, ये घटनाएं उन्हीं जगहों पर हुई हैं, जहां बताया गया है. सेवानिवृत्त सीएफएसएल वैज्ञानिक सत्य पाल शर्मा के बयान के विश्लेषण से साबित होता है कि जिस बस में दस सिख युवकों को ले जाया गया था, उसी बस में गोलियों के निशान पाए गए थे. प्रत्यक्षदर्शी डॉ. जीजी गोपालदास व फार्मासिस्ट डीपी अवस्थी के अनुसार घटना के समय नेवरिया थानाध्यक्ष जीपी सिंह का पीलीभीत जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज चल रहा था. जबकि एसएचओ खुद जी. डी. दर्ज किया था कि वे मौके पर मौजूद थे। कोर्ट ने कहा कि युवक की हत्या पहले ही की जा चुकी है। बस रात के आने और गुजर जाने का इंतजार था, ताकि एनकाउंटर को रात में होते दिखाया जा सके। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉ. विमल कुमार के बयानों के मुताबिक युवक के शरीर पर न सिर्फ गोली और चोट के निशान थे, बल्कि अन्य चोट के निशान भी थे. इस मामले में यह कहा जा सकता है कि युवकों को पहले पकड़ा गया और बाद में मार दिया गया. पीएससी प्लाटून कमांडर दयान सिंह व पीएसी जवानों ने बताया कि घटना वाले दिन थाना आने व जाने का तीनों थाना क्षेत्रों में गलत उल्लेख किया गया था. पीएससी ने किसी मुठभेड़ में हिस्सा नहीं लिया, जबकि तीनों थानों की जीडी में पीएसी के आने और जाने को दिखाया गया, जबकि पीएसी के जवान अपने-अपने कैंप में आराम फरमा रहे थे. एनकाउंटर को जायज ठहराने के लिए पीएसी के जवानों को तेरह जुलाई एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे की सुबह तीन बजे थाने बुलाया गया और ड्यूटी शीट दी गई. कोर्ट ने कहा कि जरूरत इस बात की है कि पीएससी के आगमन और प्रस्थान को तीनों संबंधित थानों के जीडी में गलत तरीके से दिखाया जाए। यह भी माना जा सकता है कि एक थाने के जीडी ने गलत समय दर्ज किया होगा, लेकिन तीनों थानों में गलत समय दर्ज करने से यह साबित होता है कि हत्याओं को मुठभेड़ के रूप में दिखाने के लिए फर्जी सबूत गढ़े गए थे।
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सचिन तेंदुलकर ने भारत के लिए इतने अरसे क्रिकेट खेला है कि एक पूरी पीढ़ी उन्हें देखते-देखते बड़ी हुई. वो पीढ़ी जिसने सचिन को देखकर बैट पकड़ना सीखा और उनके ही साथ मानो पूरी दुनिया की सैर भी की. सचिन के संग मानिए कि हमने भी इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, वेस्ट इंडीज़ जैसे देशों में शतक बनाए और 16 साल की उम्र में कराची के मैदान पर चोट खाने के बाद भी वसीम अकरम की गेंदों का सामना किया. टेनिस-एल्बो के साथ डगमगाते करियर से लेकर सौवां शतक बनाया और फिर 2011 वर्ल्ड कप की ट्रॉफ़ी थामी. इस पीढ़ी ने सचिन के हर संघर्ष और कामयाबी को महसूस किया. लेकिन दो दशकों में शायद ही किसी ने यह सोचा था कि एक दिन सचिन को 'एंटी नैशनल' का ख़िताब मिल जाएगा. पिछले दिनों ये भी हो गया.
चेहरे पर हमेशा मुस्कान रखने और हर हाल में नम्रता से बात करने वाले लिट्ल मास्टर ने ऐसा क्या कह दिया कि उनके नाम पर कीचड़ उछलने लगा. सचिन तेंदुलकर की राय में पुलवामा हमले और उससे जुड़े तनाव के बाद भी वर्ल्ड कप में पाकिस्तान से मैच का बहिष्कार ठीक नहीं है. उनके मुताबिक़ आईसीसी वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को बॉयकॉट करने का मतलब है अपने दो पॉइंट गंवांना जो विरोधी टीम की झोली में चले जाएंगे. वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सचिन इससे बेहतर और क्या कह सकते थे. पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का कहना है कि टूर्नामेंट में पाकिस्तान को हराना उसके बहिष्कार से कहीं बेहतर होगा. यह दो देशों का आपसी मामला है और आईसीसी ईवेंट में ऐसा करना माहौल किरकिरा करने वाली बात होगी.
सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गजों की ये बातें कितनी ही सुलझी हुई क्यों न हों, तनाव के इस माहौल में इन्हें सम्मान की नज़र से देखने वालों की तादात बहुत कम है. ज़ाहिर है सरहद के दोनों ही तरफ़ न्यूज़ चैनलों पर बैठे एंकर युद्ध की बातें कर रहे हैं. अगर दुश्मनी पाकिस्तान से है तो उनकी क्रिकेट टीम भी उसी का हिस्सा है और उसके सभी खिलाड़ी आपके निशाने पर है. ऐसे में एक बड़े हल्के की सोच यही है कि एक अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान का बहिष्कार हो ताकि उसकी छवि को चोट पहुंचे और आतंकवाद जैसा मुद्दा तमाम देशों की नज़र में आ जाए.
अब इसे क्रिकेट की नज़र से देखते हैं. आईसीसी वर्ल्ड कप 2019 पिछले टूर्नामेंट्स से कुछ अलग होगा. इसमें टीमों का बंटवारा 'ए' या 'बी' जैसे ग्रुप्स में नहीं होगा जहां भारत और पाकिस्तान को लीग मैचों में मिलने ना दिया जाए. इसमें 'राउंड-रॉबिन' मुक़ाबले खेले जाएंगे. इसका मतलब यह है कि 10 टीमों में सभी को एक-दूसरे से मैच खेलना होगा. कुल 45 मैच होंगे, हर टीम को नौ मैच खेलने होंगे और हर मुक़ाबले की अपनी अहमियत होगी. वे दो अंक भी बेहद अहम होंगे जिन्हें भारतीय टीम पाकिस्तान से ना खेलकर गंवा सकती है.
इस फ़ॉरमैट की सबसे बड़ी मिसाल आईपीएल है जहां लगातार लीग मैचों में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद बड़ी टीमें आख़िरी पड़ाव पर आकर वे दो अंक गंवा बैठती हैं जो उन्हें नॉकआउट तक ले जा सकते थे. दो ऐसे अंक जिनके लिए टीमें हर जोखिम उठाती हैं और उनके कप्तान अकसर अपना हेयरस्टाइल तक नहीं बदलते. जिनके लिए दूसरी टीम के पिछले प्रदर्शन के हिसाब से एक-एक ओवर की रणनीति तैयार होती है. मर-मिट कर भी इन दो अंकों को विरोधी टीम से छीनने के लिए हर टीम तैयार रहती है. ज़रा सोचिए, क्या आप चाहेंगे कि वर्ल्ड कप में पाकिस्तान से हमेशा जीतने वाली टीम इस बार बॉयकॉट के फेर में वह बाज़ी गंवा बैठे? शायद नहीं!
मामले का दूसरा पहलू यह है कि भारत का यह प्रस्ताव आईसीसी को बहुत महंगा पड़ सकता है. 16 जून को मैन्चेस्टर में होने वाले इस मैच के सभी टिकट बिक चुके हैं. टीवी-राइट्स के लिहाज़ से यह मुक़ाबला दुनिया के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले 'लाइव-इवेंट्स' में से एक है. और इस एक मैच के लिए दोनों देशों के हज़ारों फ़ैन्स मेज़बान देश इंग्लैंड आने की तैयारी में हैं. चार साल में होने वाले इस ख़ास मैच पर स्पॉन्सर्स का करोड़ों रुपया दांव पर लगा है. अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट संघ कभी नहीं चाहेगा कि भारत-पाकिस्तान के बीच का राजनीतिक तनाव क्रिकेट के इर्द-गिर्द चलने वाली एक पूरी दुनिया को भंग कर दे. मुमकिन है आर्थिक रूप से इसका ख़ामियाज़ा भारतीय निवेश को भी उठाना पड़े.
बहरहाल इमोशन्स के आगे इंसान की कहां चलती है. सो इस मामले को उस नज़रिये से समझना भी अहम हो जाता है. भारतीय जनता पाकिस्तान से नाराज़ है और कश्मीर में आतंकवाद के लिए उसे हरसंभव सबक़ सिखाना चाहती है. ऐसे में एक और 'सर्जिकल स्ट्राइक' के अलावा लगातार नदियों का पानी रोकने और बॉर्डर पार किसी भी तरह के व्यापार को ख़त्म करने की बातें हो रही हैं.
लेकिन अगर मुद्दा वाक़ई पाकिस्तान को सबक़ सिखाना है तो अपनी संवेदनाओं को सही दिशा क्रिकेट के मैदान पर ही क्यों ना दी जाए? ऐसे में मुक़ाबला जीतने से बेहतर और भला क्या होगा! क्रिकेट और युद्ध को एक ही तराज़ू में तौलने वाले शायद भूल गए हैं कि दोस्ती और स्वीकृति खेल में दोतरफ़ा या द्विपक्षीय सीरीज़ के रूप में होती है. जबकि भारत-पाकिस्तान के बीच साल 2012 से अब तक कोई दोतरफ़ा मुक़ाबला नहीं हुआ है. ये दोनों देश जब मिले, आईसीसी टूर्नामेंट में ही मिले.
1999 में करगिल युद्ध के दौरान भी यही सवाल उठे थे, लेकिन दोनों टीमें वर्ल्ड कप के मैदान पर थीं. इस बार भी शायद आख़िरी लम्हों तक गेंद सरकार के पाले में रहेगी. और टीम इंडिया और दर्शक इस बात का इंतज़ार करेंगे कि राजनीति और बॉर्डर का तनाव वर्ल्ड कप पर अपना क्या असर दिखाता है.
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सचिन तेंदुलकर ने भारत के लिए इतने अरसे क्रिकेट खेला है कि एक पूरी पीढ़ी उन्हें देखते-देखते बड़ी हुई. वो पीढ़ी जिसने सचिन को देखकर बैट पकड़ना सीखा और उनके ही साथ मानो पूरी दुनिया की सैर भी की. सचिन के संग मानिए कि हमने भी इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, वेस्ट इंडीज़ जैसे देशों में शतक बनाए और सोलह साल की उम्र में कराची के मैदान पर चोट खाने के बाद भी वसीम अकरम की गेंदों का सामना किया. टेनिस-एल्बो के साथ डगमगाते करियर से लेकर सौवां शतक बनाया और फिर दो हज़ार ग्यारह वर्ल्ड कप की ट्रॉफ़ी थामी. इस पीढ़ी ने सचिन के हर संघर्ष और कामयाबी को महसूस किया. लेकिन दो दशकों में शायद ही किसी ने यह सोचा था कि एक दिन सचिन को 'एंटी नैशनल' का ख़िताब मिल जाएगा. पिछले दिनों ये भी हो गया. चेहरे पर हमेशा मुस्कान रखने और हर हाल में नम्रता से बात करने वाले लिट्ल मास्टर ने ऐसा क्या कह दिया कि उनके नाम पर कीचड़ उछलने लगा. सचिन तेंदुलकर की राय में पुलवामा हमले और उससे जुड़े तनाव के बाद भी वर्ल्ड कप में पाकिस्तान से मैच का बहिष्कार ठीक नहीं है. उनके मुताबिक़ आईसीसी वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को बॉयकॉट करने का मतलब है अपने दो पॉइंट गंवांना जो विरोधी टीम की झोली में चले जाएंगे. वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सचिन इससे बेहतर और क्या कह सकते थे. पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का कहना है कि टूर्नामेंट में पाकिस्तान को हराना उसके बहिष्कार से कहीं बेहतर होगा. यह दो देशों का आपसी मामला है और आईसीसी ईवेंट में ऐसा करना माहौल किरकिरा करने वाली बात होगी. सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गजों की ये बातें कितनी ही सुलझी हुई क्यों न हों, तनाव के इस माहौल में इन्हें सम्मान की नज़र से देखने वालों की तादात बहुत कम है. ज़ाहिर है सरहद के दोनों ही तरफ़ न्यूज़ चैनलों पर बैठे एंकर युद्ध की बातें कर रहे हैं. अगर दुश्मनी पाकिस्तान से है तो उनकी क्रिकेट टीम भी उसी का हिस्सा है और उसके सभी खिलाड़ी आपके निशाने पर है. ऐसे में एक बड़े हल्के की सोच यही है कि एक अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान का बहिष्कार हो ताकि उसकी छवि को चोट पहुंचे और आतंकवाद जैसा मुद्दा तमाम देशों की नज़र में आ जाए. अब इसे क्रिकेट की नज़र से देखते हैं. आईसीसी वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस पिछले टूर्नामेंट्स से कुछ अलग होगा. इसमें टीमों का बंटवारा 'ए' या 'बी' जैसे ग्रुप्स में नहीं होगा जहां भारत और पाकिस्तान को लीग मैचों में मिलने ना दिया जाए. इसमें 'राउंड-रॉबिन' मुक़ाबले खेले जाएंगे. इसका मतलब यह है कि दस टीमों में सभी को एक-दूसरे से मैच खेलना होगा. कुल पैंतालीस मैच होंगे, हर टीम को नौ मैच खेलने होंगे और हर मुक़ाबले की अपनी अहमियत होगी. वे दो अंक भी बेहद अहम होंगे जिन्हें भारतीय टीम पाकिस्तान से ना खेलकर गंवा सकती है. इस फ़ॉरमैट की सबसे बड़ी मिसाल आईपीएल है जहां लगातार लीग मैचों में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद बड़ी टीमें आख़िरी पड़ाव पर आकर वे दो अंक गंवा बैठती हैं जो उन्हें नॉकआउट तक ले जा सकते थे. दो ऐसे अंक जिनके लिए टीमें हर जोखिम उठाती हैं और उनके कप्तान अकसर अपना हेयरस्टाइल तक नहीं बदलते. जिनके लिए दूसरी टीम के पिछले प्रदर्शन के हिसाब से एक-एक ओवर की रणनीति तैयार होती है. मर-मिट कर भी इन दो अंकों को विरोधी टीम से छीनने के लिए हर टीम तैयार रहती है. ज़रा सोचिए, क्या आप चाहेंगे कि वर्ल्ड कप में पाकिस्तान से हमेशा जीतने वाली टीम इस बार बॉयकॉट के फेर में वह बाज़ी गंवा बैठे? शायद नहीं! मामले का दूसरा पहलू यह है कि भारत का यह प्रस्ताव आईसीसी को बहुत महंगा पड़ सकता है. सोलह जून को मैन्चेस्टर में होने वाले इस मैच के सभी टिकट बिक चुके हैं. टीवी-राइट्स के लिहाज़ से यह मुक़ाबला दुनिया के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले 'लाइव-इवेंट्स' में से एक है. और इस एक मैच के लिए दोनों देशों के हज़ारों फ़ैन्स मेज़बान देश इंग्लैंड आने की तैयारी में हैं. चार साल में होने वाले इस ख़ास मैच पर स्पॉन्सर्स का करोड़ों रुपया दांव पर लगा है. अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट संघ कभी नहीं चाहेगा कि भारत-पाकिस्तान के बीच का राजनीतिक तनाव क्रिकेट के इर्द-गिर्द चलने वाली एक पूरी दुनिया को भंग कर दे. मुमकिन है आर्थिक रूप से इसका ख़ामियाज़ा भारतीय निवेश को भी उठाना पड़े. बहरहाल इमोशन्स के आगे इंसान की कहां चलती है. सो इस मामले को उस नज़रिये से समझना भी अहम हो जाता है. भारतीय जनता पाकिस्तान से नाराज़ है और कश्मीर में आतंकवाद के लिए उसे हरसंभव सबक़ सिखाना चाहती है. ऐसे में एक और 'सर्जिकल स्ट्राइक' के अलावा लगातार नदियों का पानी रोकने और बॉर्डर पार किसी भी तरह के व्यापार को ख़त्म करने की बातें हो रही हैं. लेकिन अगर मुद्दा वाक़ई पाकिस्तान को सबक़ सिखाना है तो अपनी संवेदनाओं को सही दिशा क्रिकेट के मैदान पर ही क्यों ना दी जाए? ऐसे में मुक़ाबला जीतने से बेहतर और भला क्या होगा! क्रिकेट और युद्ध को एक ही तराज़ू में तौलने वाले शायद भूल गए हैं कि दोस्ती और स्वीकृति खेल में दोतरफ़ा या द्विपक्षीय सीरीज़ के रूप में होती है. जबकि भारत-पाकिस्तान के बीच साल दो हज़ार बारह से अब तक कोई दोतरफ़ा मुक़ाबला नहीं हुआ है. ये दोनों देश जब मिले, आईसीसी टूर्नामेंट में ही मिले. एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में करगिल युद्ध के दौरान भी यही सवाल उठे थे, लेकिन दोनों टीमें वर्ल्ड कप के मैदान पर थीं. इस बार भी शायद आख़िरी लम्हों तक गेंद सरकार के पाले में रहेगी. और टीम इंडिया और दर्शक इस बात का इंतज़ार करेंगे कि राजनीति और बॉर्डर का तनाव वर्ल्ड कप पर अपना क्या असर दिखाता है. Share your perspective on this article with a post on ScrollStack, and send it to your followers.
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स्टेट डेस्क/लखनऊ। राज्य के जगह- जगह केंद्र सरकार की 'अग्निपथ' योजना को लेकर शुरू हुए हिंसक प्रदर्शन को लेकर खुफिया एजेंसियों को कुछ सुराग हाथ लगे हैं। जिसमें कुछ राजनैतिक दल और संगठन युवाओं को भड़काने में लगे हैं।
खबरों के अनुसार, साजिश के तहत इस योजना की आड़ में यूपी की कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की साजिश हो रही है। यूपी के एडीजी कानून व व्यवस्था प्रशांत कुमार का कहना है कि खुफिया एजेंसियों के हाथ कुछ सुराग लगे हैं, उनकी जांच की जा रही है।
केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं के द्वारा आक्रोश दिखाया गया है। प्रदर्शनकारी युवकों द्वारा अलीगढ़ की जट्टारी पुलिस चौकी में आग लगाने का मामला सामने आया है , मथुरा में कुछ जगहों पर धरना प्रदर्शन चल रहा है. सभी छात्रों को भर्ती प्रक्रिया के बारे में समझाया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों को कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के नाम से एक व्हाट्सएप चैट हाथ लगा है जिसमें 17 जनवरी को अग्निपथ योजना के खिलाफ सड़कों पर उतरने और माहौल को बिगाड़ने की बात कही गई है। अभी जांच को एजेंसी आगे बढ़ा रही हैं।
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स्टेट डेस्क/लखनऊ। राज्य के जगह- जगह केंद्र सरकार की 'अग्निपथ' योजना को लेकर शुरू हुए हिंसक प्रदर्शन को लेकर खुफिया एजेंसियों को कुछ सुराग हाथ लगे हैं। जिसमें कुछ राजनैतिक दल और संगठन युवाओं को भड़काने में लगे हैं। खबरों के अनुसार, साजिश के तहत इस योजना की आड़ में यूपी की कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की साजिश हो रही है। यूपी के एडीजी कानून व व्यवस्था प्रशांत कुमार का कहना है कि खुफिया एजेंसियों के हाथ कुछ सुराग लगे हैं, उनकी जांच की जा रही है। केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं के द्वारा आक्रोश दिखाया गया है। प्रदर्शनकारी युवकों द्वारा अलीगढ़ की जट्टारी पुलिस चौकी में आग लगाने का मामला सामने आया है , मथुरा में कुछ जगहों पर धरना प्रदर्शन चल रहा है. सभी छात्रों को भर्ती प्रक्रिया के बारे में समझाया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों को कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के नाम से एक व्हाट्सएप चैट हाथ लगा है जिसमें सत्रह जनवरी को अग्निपथ योजना के खिलाफ सड़कों पर उतरने और माहौल को बिगाड़ने की बात कही गई है। अभी जांच को एजेंसी आगे बढ़ा रही हैं।
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मेरे एक नए पड़ोसी इस बात के लिए बड़े उत्सुक रहते हैं कि उनका नौनिहाल कब बोलना सीखेगा। हर मां-बाप के लिए उस घड़ी का इंतजार कुछ खास होता है।
हालांकि समझदार लोग मेरे पड़ोसी को समझा रहे हैं कि फिक्र मत करो। अब बोलने का नहीं, चुप रहने का जमाना है। वैसे भी इन दिनों चुप्पी का धंधा खूब फल-फूल रहा है।
दरअसल बोलना मुसीबतों की जड़ है। चुप रहने के कई फायदे हैं। अभी पिछले ही चुनाव में आडवाणी जी ने कह दिया कि मनमोहन सिंह सबसे कमजोर प्रधानमंत्री हैं। आडवाणी जी पीएम इन वेटिंग ही रह गए, मनमोहन जी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं।
चुप रहकर राज करने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। किसी जमाने में नरसिंह राव चुप्पी की राजनीति के रोल मॉडल हुआ करते थे। उन्होंने भी पांच साल निष्कंटक राज किया।
चुप्पी का फायदा यह है कि कई दफा चुप रहकर आप खुद के समझदार होने का भ्रम बनाए रख सकते हैं। अभी ज्यादा समय नहीं गुजरा। अपनी टीम में मची महाभारत पर जब अन्ना जी से जवाब देते न बना, तो उन्होंने मौन धारण कर लिया।
सारी बोलचाल अगले आदेश तक स्थगित। मीडियावाले और समर्थक गुहार लगाते रह गए कि अन्ना जी, कुछ तो बोलिए। अन्ना जी ने खुद को साइलेंट मोड पर कर लिया।
गांधी जी का जमाना और था। उनका नैतिक बल इतना मजबूत था कि उनका मौन व्रत भी विरोध का प्रतीक माना जाता था। उस मौन ने फिरंगियों के दांत खट्टे कर दिए थे।
लेकिन राजनीति के उत्तर आधुनिक काल में मौन व्रत कब चुप्पी ओढ़ लेने में तब्दील हो गया, पता ही नहीं चला। सामने वाला सिर धुनता रह गया, पर बंदे ने जुबान न खोली। सारे राज, सारे किस्से, सारी जानकारियां बंदा चुप्पी में ही निगल गया।
इसलिए भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान चुप हैं, तो उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। उनकी चुप्पी का अपना अर्थशास्त्र है। आईपीएल ने समझा दिया है कि अर्थ के बगैर सब व्यर्थ है। इसीलिए तो वे चुप हैं, जिन्हें बोलना चाहिए, जबकि सारा देश बोल रहा है।
दरअसल चुप रहने का बड़ा फायदा सेहत के लिए यह भी है कि इससे बोलने में जाया होने वाली ऊर्जा बच जाती है।
वैसे भी अगर बोलने से इतना ही फायदा होता, तो इस दुनिया में मौन का अस्तित्व ही न रहता। कंपनियां भी मोबाइल फोन पर साइलेंट मोड का फीचर भला क्यों डालतीं?
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मेरे एक नए पड़ोसी इस बात के लिए बड़े उत्सुक रहते हैं कि उनका नौनिहाल कब बोलना सीखेगा। हर मां-बाप के लिए उस घड़ी का इंतजार कुछ खास होता है। हालांकि समझदार लोग मेरे पड़ोसी को समझा रहे हैं कि फिक्र मत करो। अब बोलने का नहीं, चुप रहने का जमाना है। वैसे भी इन दिनों चुप्पी का धंधा खूब फल-फूल रहा है। दरअसल बोलना मुसीबतों की जड़ है। चुप रहने के कई फायदे हैं। अभी पिछले ही चुनाव में आडवाणी जी ने कह दिया कि मनमोहन सिंह सबसे कमजोर प्रधानमंत्री हैं। आडवाणी जी पीएम इन वेटिंग ही रह गए, मनमोहन जी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं। चुप रहकर राज करने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। किसी जमाने में नरसिंह राव चुप्पी की राजनीति के रोल मॉडल हुआ करते थे। उन्होंने भी पांच साल निष्कंटक राज किया। चुप्पी का फायदा यह है कि कई दफा चुप रहकर आप खुद के समझदार होने का भ्रम बनाए रख सकते हैं। अभी ज्यादा समय नहीं गुजरा। अपनी टीम में मची महाभारत पर जब अन्ना जी से जवाब देते न बना, तो उन्होंने मौन धारण कर लिया। सारी बोलचाल अगले आदेश तक स्थगित। मीडियावाले और समर्थक गुहार लगाते रह गए कि अन्ना जी, कुछ तो बोलिए। अन्ना जी ने खुद को साइलेंट मोड पर कर लिया। गांधी जी का जमाना और था। उनका नैतिक बल इतना मजबूत था कि उनका मौन व्रत भी विरोध का प्रतीक माना जाता था। उस मौन ने फिरंगियों के दांत खट्टे कर दिए थे। लेकिन राजनीति के उत्तर आधुनिक काल में मौन व्रत कब चुप्पी ओढ़ लेने में तब्दील हो गया, पता ही नहीं चला। सामने वाला सिर धुनता रह गया, पर बंदे ने जुबान न खोली। सारे राज, सारे किस्से, सारी जानकारियां बंदा चुप्पी में ही निगल गया। इसलिए भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान चुप हैं, तो उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। उनकी चुप्पी का अपना अर्थशास्त्र है। आईपीएल ने समझा दिया है कि अर्थ के बगैर सब व्यर्थ है। इसीलिए तो वे चुप हैं, जिन्हें बोलना चाहिए, जबकि सारा देश बोल रहा है। दरअसल चुप रहने का बड़ा फायदा सेहत के लिए यह भी है कि इससे बोलने में जाया होने वाली ऊर्जा बच जाती है। वैसे भी अगर बोलने से इतना ही फायदा होता, तो इस दुनिया में मौन का अस्तित्व ही न रहता। कंपनियां भी मोबाइल फोन पर साइलेंट मोड का फीचर भला क्यों डालतीं?
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पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथी को भीष्म अष्टमी कहते हैं। इसी दिन भीष्म पितामह ने अपनी इच्छा से मृत्यु को गले लगाया था।
Bhishma Ashtami 2023: पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथी को भीष्म अष्टमी कहते हैं। इसी दिन भीष्म पितामह ने अपनी इच्छा से मृत्यु को गले लगाया था। महाभारत युद्ध के समय जब पितामाह घायल हुए तो उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने का इतंजार किया और माघ मास में अपने प्राणों का त्याग दिया। अतः इस दिन भीष्म अष्टमी का व्रत किया जाता है। आज के दिन जो व्यक्ति भीष्म पितामह के निमित्त तिलों के साथ तर्पण तथा श्राद्ध करता है, उसे संतान की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण के मुताबिक जीवित पिता वाले व्यक्ति को भी इस दिन भीष्म पितामह के लिये तर्पण करना चाहिए।
Bhishma Ashtami ka Shubh Muhurt भीष्म अष्टमी का शुभ मुहूर्तः हिंदू पंचांग के अनुसार भीष्म अष्टमी की तिथि 28 जनवरी की सुबह 08:43 से शुरू होकर 29 जनवरी को सुबह 9 बजे तक रहेगी। इस दिन अश्विनी नक्षत्र होने से सौम्य नाम का शुभ योग भी दिन भर रहेगा।
Bhishma Ashtami vrat vidhi भीष्म अष्टमी व्रत विधिः भीष्म अष्टमी के दिन सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो घर पर ही मंत्र बोलकर नहा लें। नहाते समय हाथ में तिल लेकर और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च।
गंगापुत्राय भीष्माय सर्वदा ब्रह्मचारिणे। ।
भीष्मः शान्तनवो वीरः सत्यवादी जितेन्द्रियः।
आभिरभिद्रवाप्नोतु पुत्रपौत्रोचितां क्रियाम्। ।
मंत्र बोलने के बाद गंगा पुत्र भीष्म को अर्घ्य देना चाहिए। हो सके तो आज के दिन व्रत भी जरूर रखना चाहिए।
Significance of Bhishma Ashtami भीष्म अष्टमी का महत्वः मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है, उसे संतान की प्राप्ति होती है और अंत समय में उसे मोक्ष प्रदान होता है। इस दिन पितामह भीष्म के लिए तर्पण, श्राद्ध करने से पापों का नाश होता है और पितृदोष से भी मुक्ति मिलती है।
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पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथी को भीष्म अष्टमी कहते हैं। इसी दिन भीष्म पितामह ने अपनी इच्छा से मृत्यु को गले लगाया था। Bhishma Ashtami दो हज़ार तेईस: पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथी को भीष्म अष्टमी कहते हैं। इसी दिन भीष्म पितामह ने अपनी इच्छा से मृत्यु को गले लगाया था। महाभारत युद्ध के समय जब पितामाह घायल हुए तो उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने का इतंजार किया और माघ मास में अपने प्राणों का त्याग दिया। अतः इस दिन भीष्म अष्टमी का व्रत किया जाता है। आज के दिन जो व्यक्ति भीष्म पितामह के निमित्त तिलों के साथ तर्पण तथा श्राद्ध करता है, उसे संतान की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण के मुताबिक जीवित पिता वाले व्यक्ति को भी इस दिन भीष्म पितामह के लिये तर्पण करना चाहिए। Bhishma Ashtami ka Shubh Muhurt भीष्म अष्टमी का शुभ मुहूर्तः हिंदू पंचांग के अनुसार भीष्म अष्टमी की तिथि अट्ठाईस जनवरी की सुबह आठ:तैंतालीस से शुरू होकर उनतीस जनवरी को सुबह नौ बजे तक रहेगी। इस दिन अश्विनी नक्षत्र होने से सौम्य नाम का शुभ योग भी दिन भर रहेगा। Bhishma Ashtami vrat vidhi भीष्म अष्टमी व्रत विधिः भीष्म अष्टमी के दिन सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो घर पर ही मंत्र बोलकर नहा लें। नहाते समय हाथ में तिल लेकर और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करना चाहिए। वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च। गंगापुत्राय भीष्माय सर्वदा ब्रह्मचारिणे। । भीष्मः शान्तनवो वीरः सत्यवादी जितेन्द्रियः। आभिरभिद्रवाप्नोतु पुत्रपौत्रोचितां क्रियाम्। । मंत्र बोलने के बाद गंगा पुत्र भीष्म को अर्घ्य देना चाहिए। हो सके तो आज के दिन व्रत भी जरूर रखना चाहिए। Significance of Bhishma Ashtami भीष्म अष्टमी का महत्वः मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है, उसे संतान की प्राप्ति होती है और अंत समय में उसे मोक्ष प्रदान होता है। इस दिन पितामह भीष्म के लिए तर्पण, श्राद्ध करने से पापों का नाश होता है और पितृदोष से भी मुक्ति मिलती है।
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हमीरपुर - सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि महिलाआें की सुरक्षा के लिए भाजपा सरकार एकमात्र विकल्प है। राज्य में महिलाओं से हुई शर्मनाक घटनाओं के बाद प्रदेश सहमा है। इस कारण अब मातृशक्ति की रक्षा के लिए भाजपा सरकार का बनना जरूरी है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि सत्ता में आने के बाद महिलाआें की सुरक्षा के लिए हमारी सरकार विशेष प्लान तैयार करेगी। सांसद बुधवार को सुजानपुर में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधिक मामले और इस पर शासन प्रशासन के लचर रवैये और गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी पर चिंता जाहिर की है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में चारों तरफ भय का माहौल है और यह कांग्रेस सरकार हर मोर्चे की तरह महिला सुरक्षा के मोर्चे पर भी बुरी तरह विफल हुई है। बिटिया प्रकरण दुनिया में हिमाचल के ऊपर एक ऐसा धब्बा है, जिसकी भरपाई करना असंभव है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन की तरफ से ऐसी बयानबाजी की कि रेप, हत्या यह सब आम बात है। मीडिया इसे तूल क्यों देता है। इनकी छोटी सोच और असंवेदनशीलता को दिखाता है। पहले हिमाचल में बेटियां कहीं भी बेखौफ आया-जाया करती थीं, मगर अब उन्हें अकेले बाहर निकलने में भी डर लगता है। यह हिमाचल की संस्कृति नहीं है। प्रदेश में बढ़ते असुरक्षा के माहौल के चलते पर्यटक यहां आने पर खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं, जिसका सीधा असर प्रदेश के पर्यटन उद्योग पर पड़ रहा है। प्रदेश में वन माफिया, खनन माफिया, तबादला माफिया, ड्रग्स माफिया लगातार प्रदेश को खोखला बना रहे हैं। इनके ऊपर इसकी रोकथाम की जिम्मेदारी थी, वह ऐसे गैर जिम्मेदारी भरा बयान देते फिर रहे हैं। हिमाचल की जनता इससे आहत है और इसका परिणाम आने वाले 18 दिसंबर को सत्ता परिवर्तन के रूप में देगी।
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हमीरपुर - सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि महिलाआें की सुरक्षा के लिए भाजपा सरकार एकमात्र विकल्प है। राज्य में महिलाओं से हुई शर्मनाक घटनाओं के बाद प्रदेश सहमा है। इस कारण अब मातृशक्ति की रक्षा के लिए भाजपा सरकार का बनना जरूरी है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि सत्ता में आने के बाद महिलाआें की सुरक्षा के लिए हमारी सरकार विशेष प्लान तैयार करेगी। सांसद बुधवार को सुजानपुर में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधिक मामले और इस पर शासन प्रशासन के लचर रवैये और गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी पर चिंता जाहिर की है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में चारों तरफ भय का माहौल है और यह कांग्रेस सरकार हर मोर्चे की तरह महिला सुरक्षा के मोर्चे पर भी बुरी तरह विफल हुई है। बिटिया प्रकरण दुनिया में हिमाचल के ऊपर एक ऐसा धब्बा है, जिसकी भरपाई करना असंभव है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन की तरफ से ऐसी बयानबाजी की कि रेप, हत्या यह सब आम बात है। मीडिया इसे तूल क्यों देता है। इनकी छोटी सोच और असंवेदनशीलता को दिखाता है। पहले हिमाचल में बेटियां कहीं भी बेखौफ आया-जाया करती थीं, मगर अब उन्हें अकेले बाहर निकलने में भी डर लगता है। यह हिमाचल की संस्कृति नहीं है। प्रदेश में बढ़ते असुरक्षा के माहौल के चलते पर्यटक यहां आने पर खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं, जिसका सीधा असर प्रदेश के पर्यटन उद्योग पर पड़ रहा है। प्रदेश में वन माफिया, खनन माफिया, तबादला माफिया, ड्रग्स माफिया लगातार प्रदेश को खोखला बना रहे हैं। इनके ऊपर इसकी रोकथाम की जिम्मेदारी थी, वह ऐसे गैर जिम्मेदारी भरा बयान देते फिर रहे हैं। हिमाचल की जनता इससे आहत है और इसका परिणाम आने वाले अट्ठारह दिसंबर को सत्ता परिवर्तन के रूप में देगी।
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अज्ञानी जिसके स्वरूप को नहीं जान सकते हैं, सदा उदयरूप है, कृत-कृत्य है, कल्याणरूप है, शांत है, शरीर रहित है, इन्द्रियों से प्रतीत है, समस्त संसार के क्लेशरूपी वृक्षों को जलाने के लिये अग्नि के समान है, शुद्ध है, कर्मलेप से रहित है, ज्ञानरूपी राज्य में स्थित है, निर्मल दर्पण में प्राप्त प्रतिबिम्ब की तरह प्रभावान है, ज्ञानज्योतिमय है, महावीर्यवान है, पूर्ण है, पुरातन है, सम्यक्तादि आठ गुण (सम्यक्त, ज्ञान, दर्शन, वीर्य, सूक्ष्मत्व, प्रगुरुलघुत्व, अव्याबाधत्व, अवगाहनत्व ) सहित है, उपाधि रहित है, रोगादि रहित है, प्रमाण अगोचर है, ज्ञानियों के द्वारा जानने योग्य है, सर्व तत्वों का निश्चय करने वाला है, जो बाहरी इन्द्रियादि से ग्रहरण करने योग्य नहीं है, अन्तरंग भावों से क्षरण मात्र में ग्रहरण योग्य है, ऐसा स्वभाव इस परमात्मस्वरूप प्रात्मा का है ।
शब्दवजितम् ।
प्रजं जन्मभ्रमातीतं निर्विकल्पं विचिन्तयेत् ॥३३-३१॥
भावार्थ :- आत्मा का स्वरूप वचनगोचर नहीं है, इन्द्रियों से व मन से प्रगट नहीं है, अनंत है, शब्द रहित है, जन्म रहित है, भव भ्रमरण से रहित है, निर्विकल्प है ऐसा विचारे ।
यः स्वयमेव समादत्ते नादतं यः स्वतोऽपरम् ।
निर्विकल्पः स विज्ञानी स्वसंवेद्योऽस्मि केवलम् ॥२७-३२॥
भावार्थ :- ज्ञानी ऐसा ध्याता है कि जो अपने को ही ग्रहण करता है तथा जो अपने से पर है उसको नहीं ग्रहरण करता है ऐसा मैं श्रात्मा हूँ, उसमें कोई विकल्प नहीं है, ज्ञानमय है तथा केवल एक अकेला है, और वह अपने से ही अनुभवगम्य है ।
यो विशुद्धः प्रसिद्धात्मा परं ज्योतिः सनातनः ।
सोऽहं तस्मात्प्रपश्यामि स्वस्मिन्नात्मानमच्युतम् ।।३५-३२॥ भावार्थ :- जो विशुद्ध है, प्रसिद्ध आत्मा है, परम ज्ञानमय ज्योति स्वरूप है, सनातन है सो ही मैं हूँ, इसलिये इस अविनाशी आत्मा को मैं अपने में ही देखता हूँ ।
जीर्णे रक्ते घने ध्वस्ते नात्मा जीर्णादिक पटे ।
एवं वपुषि जीर्णादौ नात्मा जीर्णादिकस्तथा ॥७२-३२॥
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अज्ञानी जिसके स्वरूप को नहीं जान सकते हैं, सदा उदयरूप है, कृत-कृत्य है, कल्याणरूप है, शांत है, शरीर रहित है, इन्द्रियों से प्रतीत है, समस्त संसार के क्लेशरूपी वृक्षों को जलाने के लिये अग्नि के समान है, शुद्ध है, कर्मलेप से रहित है, ज्ञानरूपी राज्य में स्थित है, निर्मल दर्पण में प्राप्त प्रतिबिम्ब की तरह प्रभावान है, ज्ञानज्योतिमय है, महावीर्यवान है, पूर्ण है, पुरातन है, सम्यक्तादि आठ गुण सहित है, उपाधि रहित है, रोगादि रहित है, प्रमाण अगोचर है, ज्ञानियों के द्वारा जानने योग्य है, सर्व तत्वों का निश्चय करने वाला है, जो बाहरी इन्द्रियादि से ग्रहरण करने योग्य नहीं है, अन्तरंग भावों से क्षरण मात्र में ग्रहरण योग्य है, ऐसा स्वभाव इस परमात्मस्वरूप प्रात्मा का है । शब्दवजितम् । प्रजं जन्मभ्रमातीतं निर्विकल्पं विचिन्तयेत् ॥तैंतीस-इकतीस॥ भावार्थ :- आत्मा का स्वरूप वचनगोचर नहीं है, इन्द्रियों से व मन से प्रगट नहीं है, अनंत है, शब्द रहित है, जन्म रहित है, भव भ्रमरण से रहित है, निर्विकल्प है ऐसा विचारे । यः स्वयमेव समादत्ते नादतं यः स्वतोऽपरम् । निर्विकल्पः स विज्ञानी स्वसंवेद्योऽस्मि केवलम् ॥सत्ताईस-बत्तीस॥ भावार्थ :- ज्ञानी ऐसा ध्याता है कि जो अपने को ही ग्रहण करता है तथा जो अपने से पर है उसको नहीं ग्रहरण करता है ऐसा मैं श्रात्मा हूँ, उसमें कोई विकल्प नहीं है, ज्ञानमय है तथा केवल एक अकेला है, और वह अपने से ही अनुभवगम्य है । यो विशुद्धः प्रसिद्धात्मा परं ज्योतिः सनातनः । सोऽहं तस्मात्प्रपश्यामि स्वस्मिन्नात्मानमच्युतम् ।।पैंतीस-बत्तीस॥ भावार्थ :- जो विशुद्ध है, प्रसिद्ध आत्मा है, परम ज्ञानमय ज्योति स्वरूप है, सनातन है सो ही मैं हूँ, इसलिये इस अविनाशी आत्मा को मैं अपने में ही देखता हूँ । जीर्णे रक्ते घने ध्वस्ते नात्मा जीर्णादिक पटे । एवं वपुषि जीर्णादौ नात्मा जीर्णादिकस्तथा ॥बहत्तर-बत्तीस॥
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प्रयत्न किया गया था। अन्त में स्वामीजी के लिये दुर्वचनों का समावेश था। पूर्वोक लाला कृष्णलाल इस व्यवस्था को लेकर स्वामीजी के पास पहुँचे। वह उसे देख कर पहले तो . ख़ूब हँसे और फिर उसका ऐसा खण्डन किया कि लाला कृष्णलाल अवाक रह गये । स्वामीजी ने तत्पश्चात् कहा कि काशी के पण्डितों की बहुत कुछ विद्या तो देखली, शेष वहाँ जाकर देख लूंगा ।
श्रीगोपाल ने इस व्यवस्थापत्र को लेकर बड़ा कोलाहल मचाया । वैशाख शुक्ला १२ संवत् १९२५ को एक विज्ञापन दिया कि हम और रेत में धर्मध्वजा मुम्शी ज्वालाप्रसाद स्वामी दयानन्द से शास्त्रार्थ करने को तैयार हैं। २२ मई सन् १८६८ वैशाख शुक्ला १४ संवत् १९२५ को बहुत बड़ी भीड़ लेकर टोका घाट पर पहुॅचा और रेत में एक झएडा गाड़ कर उस पर लिखा 'धर्मध्वजोऽयम्' । धर्मध्वज का अर्थ धर्म का ढोंग भरने वाले का है। यह शब्द उसने स्वामीजी के लिये प्रयुक्त किया था । उसी झण्डे पर उस व्यवस्था पत्र को लटकाया और एक बांस अलग गाड़ कर लोगों से कहा कि इस पर जल चढ़ाओ और कुछ मूर्खो ने उस पर जल चढ़ाया भी। उस दिन नृसिंह-चतुर्दशी का मेला भी था । इससे भी भीड़ अधिक थी ।
श्रीगोपाल के कुछ साथी स्वामीजी के पास गये और कहा कि नीचे रेती में शास्त्रार्थ कीजिये । स्वामीजी श्री गोपाल की यह सब लीला देख रहे थे। उन्होंने उस हुल्लड़ में जाना : पसन्द न किया और कह दिया कि यदि शास्त्रीजी को वास्तव में शास्त्रार्थ करना है तो यहाँ आकर शास्त्रार्थ करें, यहाँ सब प्रबन्ध भी है और शान्ति भी। लोगों ने यह बात शाबीजी से कही तो उन्होंने कहा कि स्वामीजी ने विश्रान्त कीलंदी है, मैं जाकर यदि शास्त्रार्थ करूँगा तो निश्चय ही मेरा पराजय होगा। यह उत्तर सुन कर समझदार लोग समझ गये कि शास्त्रीजी में वाळव में शास्त्रार्थ की योग्यता नहीं है। श्रीगोपाल इसी प्रकार हुड़ मचाता रहा और बार-बार यह कहता रहा "भाइयो, देखो यह काशी के पण्डितों की व्यवस्था है, दयानन्द परास्त हुआ, बोलो देबी की जय, काली की जय । "
जिला मजिस्ट्रेट ने इस गड़बड़ का वृत्तान्त सुन कर एक सब इन्सपेक्टर को नियत किया कि विश्रान्त पर जाकर प्रबन्ध करो जिससे शान्ति भङ्ग न होने पावे। तदनुसार सब-इन्सपेक्टर विश्रान्त पर गया। वह स्वयं तो बाहर रहा और एक कानस्टेबल को स्वामीजी के पास भेजा कि देखो कौन आया है, नित्य शास्त्रार्थ करता है, बड़ा जन समूह होता है, हमारे पास बुला लाओ। उसने आकर स्वामीजी से कहा कि कोतवाल साहब बुलाते हैं। स्वामीजी तो कुछ न बोले, उनके भक्तों में से एक ने कहा, यह किसी के पास नहीं आते जाते, यदि किसी को मिलना हो तो यहाँ आकर मिल जावे। इस पर कोतवाल स्वयं आया और उसने कहा कि बाबाजी तुम यहाँ क्या करते हो, दङ्गा बखेड़ा मचाया करते हो ? स्वामीजी ने कहा कि तू राज-श्राज्ञा से ऐसा कहता है बा स्वयं ही ? तब और लोगों ने कोतवाल को समझाया कि यह क्या किसी को बुलाते हैं। धूर्त्त लोग स्वयं ही यहाँ भाकर ऊधम मचाते है। इस पर कोतवाल ने कहा कि अपने पास धूत्तों को न आने दिया करो। स्वामीजी ने कहा १३७.
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प्रयत्न किया गया था। अन्त में स्वामीजी के लिये दुर्वचनों का समावेश था। पूर्वोक लाला कृष्णलाल इस व्यवस्था को लेकर स्वामीजी के पास पहुँचे। वह उसे देख कर पहले तो . ख़ूब हँसे और फिर उसका ऐसा खण्डन किया कि लाला कृष्णलाल अवाक रह गये । स्वामीजी ने तत्पश्चात् कहा कि काशी के पण्डितों की बहुत कुछ विद्या तो देखली, शेष वहाँ जाकर देख लूंगा । श्रीगोपाल ने इस व्यवस्थापत्र को लेकर बड़ा कोलाहल मचाया । वैशाख शुक्ला बारह संवत् एक हज़ार नौ सौ पच्चीस को एक विज्ञापन दिया कि हम और रेत में धर्मध्वजा मुम्शी ज्वालाप्रसाद स्वामी दयानन्द से शास्त्रार्थ करने को तैयार हैं। बाईस मई सन् एक हज़ार आठ सौ अड़सठ वैशाख शुक्ला चौदह संवत् एक हज़ार नौ सौ पच्चीस को बहुत बड़ी भीड़ लेकर टोका घाट पर पहुॅचा और रेत में एक झएडा गाड़ कर उस पर लिखा 'धर्मध्वजोऽयम्' । धर्मध्वज का अर्थ धर्म का ढोंग भरने वाले का है। यह शब्द उसने स्वामीजी के लिये प्रयुक्त किया था । उसी झण्डे पर उस व्यवस्था पत्र को लटकाया और एक बांस अलग गाड़ कर लोगों से कहा कि इस पर जल चढ़ाओ और कुछ मूर्खो ने उस पर जल चढ़ाया भी। उस दिन नृसिंह-चतुर्दशी का मेला भी था । इससे भी भीड़ अधिक थी । श्रीगोपाल के कुछ साथी स्वामीजी के पास गये और कहा कि नीचे रेती में शास्त्रार्थ कीजिये । स्वामीजी श्री गोपाल की यह सब लीला देख रहे थे। उन्होंने उस हुल्लड़ में जाना : पसन्द न किया और कह दिया कि यदि शास्त्रीजी को वास्तव में शास्त्रार्थ करना है तो यहाँ आकर शास्त्रार्थ करें, यहाँ सब प्रबन्ध भी है और शान्ति भी। लोगों ने यह बात शाबीजी से कही तो उन्होंने कहा कि स्वामीजी ने विश्रान्त कीलंदी है, मैं जाकर यदि शास्त्रार्थ करूँगा तो निश्चय ही मेरा पराजय होगा। यह उत्तर सुन कर समझदार लोग समझ गये कि शास्त्रीजी में वाळव में शास्त्रार्थ की योग्यता नहीं है। श्रीगोपाल इसी प्रकार हुड़ मचाता रहा और बार-बार यह कहता रहा "भाइयो, देखो यह काशी के पण्डितों की व्यवस्था है, दयानन्द परास्त हुआ, बोलो देबी की जय, काली की जय । " जिला मजिस्ट्रेट ने इस गड़बड़ का वृत्तान्त सुन कर एक सब इन्सपेक्टर को नियत किया कि विश्रान्त पर जाकर प्रबन्ध करो जिससे शान्ति भङ्ग न होने पावे। तदनुसार सब-इन्सपेक्टर विश्रान्त पर गया। वह स्वयं तो बाहर रहा और एक कानस्टेबल को स्वामीजी के पास भेजा कि देखो कौन आया है, नित्य शास्त्रार्थ करता है, बड़ा जन समूह होता है, हमारे पास बुला लाओ। उसने आकर स्वामीजी से कहा कि कोतवाल साहब बुलाते हैं। स्वामीजी तो कुछ न बोले, उनके भक्तों में से एक ने कहा, यह किसी के पास नहीं आते जाते, यदि किसी को मिलना हो तो यहाँ आकर मिल जावे। इस पर कोतवाल स्वयं आया और उसने कहा कि बाबाजी तुम यहाँ क्या करते हो, दङ्गा बखेड़ा मचाया करते हो ? स्वामीजी ने कहा कि तू राज-श्राज्ञा से ऐसा कहता है बा स्वयं ही ? तब और लोगों ने कोतवाल को समझाया कि यह क्या किसी को बुलाते हैं। धूर्त्त लोग स्वयं ही यहाँ भाकर ऊधम मचाते है। इस पर कोतवाल ने कहा कि अपने पास धूत्तों को न आने दिया करो। स्वामीजी ने कहा एक सौ सैंतीस.
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६१ वर्षा की जो बूँढ़ें सीपी में पड़ती हैं वे मोती बन जाती हैं। वे बूँदें ही पानी में पड़ती हैं तो पानी में मिल जाती हैं और पानी ही हो जाती हैं वैसे भाग्य में जो बढा है वही फल प्राप्त होगा ।
६२ जैसे लती हुई गाय के पास दूध दुहने के लिए बरतन ले जाएंगे तो वह ऐसी लात मारेगी कि हमें दूध तो मिलेगा नहीं उल्टे हमारे दाँत टूट जाएँगे । वैसे ही लोभी के पास जाकर कुछ माँगने से कोई प्रयोजन नहीं ।
६३ जो आदमी निम्न जाति में पैदा हुआ है, वह भी सम्पत्ति के कारण यश प्राप्त करता है। जिसके पास सम्पत्ति नहीं है उस आदमी का वर्ण भी निम्न स्तर का माना जाता है । इसलिए दुनिया में जाति से भी धन प्रधान माना जाता है ।
६४ दुष्ट आदमी को यदि हम अपने पास फटकने देते हैं तो उससे बड़े से बड़ा आदमी भी हानि उठाएगा जैसे मक्खी के पेट में जाने पर वह पेट को खराब कर डालती है ।
६५ अतिथियों के लिए बिना दाल का भोजन असह्य मालूम होता है। जिस दमी के सिर पर कर्ज का बोझ नहीं है, वही आधिक शक्तिशाली है और जिस आदमी के लिए मृत्यु का भय नहीं है वही है ।
१६ इस संसार में दूसरों को धोखा देकर धन कमाता है और उससे अपना पेट भरता है, यह ठीक नहीं है । जो मनुष्य सदा कर्ज ही लेता रहता है वह कदापि उन्नति नहीं कर सकता ।
६७ यदि पुत्र अपने पिता से भी योग्य हो तो उसका मान करना चाहिए जैसे वासुदेव (कृष्ण) को छोड़ कर कोई वसुदेव की पूजा करेगा ?
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इकसठ वर्षा की जो बूँढ़ें सीपी में पड़ती हैं वे मोती बन जाती हैं। वे बूँदें ही पानी में पड़ती हैं तो पानी में मिल जाती हैं और पानी ही हो जाती हैं वैसे भाग्य में जो बढा है वही फल प्राप्त होगा । बासठ जैसे लती हुई गाय के पास दूध दुहने के लिए बरतन ले जाएंगे तो वह ऐसी लात मारेगी कि हमें दूध तो मिलेगा नहीं उल्टे हमारे दाँत टूट जाएँगे । वैसे ही लोभी के पास जाकर कुछ माँगने से कोई प्रयोजन नहीं । तिरेसठ जो आदमी निम्न जाति में पैदा हुआ है, वह भी सम्पत्ति के कारण यश प्राप्त करता है। जिसके पास सम्पत्ति नहीं है उस आदमी का वर्ण भी निम्न स्तर का माना जाता है । इसलिए दुनिया में जाति से भी धन प्रधान माना जाता है । चौंसठ दुष्ट आदमी को यदि हम अपने पास फटकने देते हैं तो उससे बड़े से बड़ा आदमी भी हानि उठाएगा जैसे मक्खी के पेट में जाने पर वह पेट को खराब कर डालती है । पैंसठ अतिथियों के लिए बिना दाल का भोजन असह्य मालूम होता है। जिस दमी के सिर पर कर्ज का बोझ नहीं है, वही आधिक शक्तिशाली है और जिस आदमी के लिए मृत्यु का भय नहीं है वही है । सोलह इस संसार में दूसरों को धोखा देकर धन कमाता है और उससे अपना पेट भरता है, यह ठीक नहीं है । जो मनुष्य सदा कर्ज ही लेता रहता है वह कदापि उन्नति नहीं कर सकता । सरसठ यदि पुत्र अपने पिता से भी योग्य हो तो उसका मान करना चाहिए जैसे वासुदेव को छोड़ कर कोई वसुदेव की पूजा करेगा ?
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मैगलगंज। मिट्टी ढोकर ला रहे ट्रैक्टर-ट्राॅली का वीडियो बनाने पर गुरुदेवखेड़ा गांव में दो पक्ष आमने-सामने आ गए। गालीगलौज के बाद ईंट-पत्थर चलने लगे। आरोप है कि एक पक्ष ने दो राउंड फायरिंग भी की। सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों पक्ष के लोगों को थाने ले आई।
शुक्रवार की रात आठ बजे मैगलगंज के गुरुदेवखेड़ा गांव निवासी साजिम ट्रैक्टर-ट्राॅली में मिट्टी भरकर ला रहा था। गांव के ही इरफान का पुत्र ट्रैक्टर-ट्राॅली का वीडियो बनाने लगा। इसी बात पर दोनों पक्षों में विवाद होने लगा। गालीगलौज के बाद ईंट-पत्थर चलने लगे। आरोप है कि इरफान पक्ष के लोग घर में घुस गए और दरवाजा बंद कर दो राउंड फायर किए।
किसी ग्रामीण ने इस विवाद का वीडियो बनाया और वायरल कर दिया। वीडियो में एक घर के बंद गेट के सामने काफी संख्या में ग्रामीण गालीगलौज करते दिख रहे हैं। गोली चलने की आवाज भी सुनाई दे रही है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया और दोनों पक्षों के लोगों को हिरासत में लेकर थाने लाई। पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की तहरीर पर मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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मैगलगंज। मिट्टी ढोकर ला रहे ट्रैक्टर-ट्राॅली का वीडियो बनाने पर गुरुदेवखेड़ा गांव में दो पक्ष आमने-सामने आ गए। गालीगलौज के बाद ईंट-पत्थर चलने लगे। आरोप है कि एक पक्ष ने दो राउंड फायरिंग भी की। सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों पक्ष के लोगों को थाने ले आई। शुक्रवार की रात आठ बजे मैगलगंज के गुरुदेवखेड़ा गांव निवासी साजिम ट्रैक्टर-ट्राॅली में मिट्टी भरकर ला रहा था। गांव के ही इरफान का पुत्र ट्रैक्टर-ट्राॅली का वीडियो बनाने लगा। इसी बात पर दोनों पक्षों में विवाद होने लगा। गालीगलौज के बाद ईंट-पत्थर चलने लगे। आरोप है कि इरफान पक्ष के लोग घर में घुस गए और दरवाजा बंद कर दो राउंड फायर किए। किसी ग्रामीण ने इस विवाद का वीडियो बनाया और वायरल कर दिया। वीडियो में एक घर के बंद गेट के सामने काफी संख्या में ग्रामीण गालीगलौज करते दिख रहे हैं। गोली चलने की आवाज भी सुनाई दे रही है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया और दोनों पक्षों के लोगों को हिरासत में लेकर थाने लाई। पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की तहरीर पर मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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शिमला। नई दिल्ली में शुक्रवार को आम बजट को तैयार करने से पहले सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों (Finance Ministers of All States) के साथ बैठक हुई। इस बैठक में हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) बतौर वित्त मंत्री बैठक में शामिल हुए। यह बैठक केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में केंद्र सरकार के बजट सत्र के लिए सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों से सुझाव मांगे गए। वित्तीय वर्ष 2023-24 के वार्षिक बजट (Annual Budget) में किन-किन विषयों को राज्य शामिल करवाना चाहते हैं, इसको लेकर बैठक में लंबी चर्चा हुई।
बैठक के बाद जानकारी देते हुए सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि आम बजट को तैयार करने से पहले सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) की अध्यक्षता में बैठक की गई। इस बैठक में हमने हिमाचल की तरफ से सेब आयात शुल्क बढ़ाने, औद्योगिक पैकेज और जीएसटी मुआवजे की अवधि बढ़ाने के मामले उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और कनेक्टिविटी के मुद्दे पर चर्चा की गई है। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री (Packaging Material) के जीएसटी (GST) में वृद्धि पर बातचीत हुई। केंद्र सरकार से पैकेजिंग सामग्री के जीएसटी को 18 फीसदी से 12 फीसदी करने का अनुरोध किया गया है। ताकि हिमाचल के सेब बागवानों को काफी मदद मिलेगी।
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शिमला। नई दिल्ली में शुक्रवार को आम बजट को तैयार करने से पहले सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक हुई। इस बैठक में हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर बतौर वित्त मंत्री बैठक में शामिल हुए। यह बैठक केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में केंद्र सरकार के बजट सत्र के लिए सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों से सुझाव मांगे गए। वित्तीय वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के वार्षिक बजट में किन-किन विषयों को राज्य शामिल करवाना चाहते हैं, इसको लेकर बैठक में लंबी चर्चा हुई। बैठक के बाद जानकारी देते हुए सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि आम बजट को तैयार करने से पहले सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में बैठक की गई। इस बैठक में हमने हिमाचल की तरफ से सेब आयात शुल्क बढ़ाने, औद्योगिक पैकेज और जीएसटी मुआवजे की अवधि बढ़ाने के मामले उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और कनेक्टिविटी के मुद्दे पर चर्चा की गई है। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री के जीएसटी में वृद्धि पर बातचीत हुई। केंद्र सरकार से पैकेजिंग सामग्री के जीएसटी को अट्ठारह फीसदी से बारह फीसदी करने का अनुरोध किया गया है। ताकि हिमाचल के सेब बागवानों को काफी मदद मिलेगी।
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परिषदीय विद्यालयों में मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं के संतृप्तीकरण हेतु ग्राम पंचायत निधि के अन्तर्गत केन्द्रीय वित्त आयोग की धनराशि से वरीयता प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में।
अब ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों का और तेजी से विकास हो सकेगा। इन विद्यालयों के विकास पर राज्य वित्त के साथ ही केंद्रीय वित्त की धनराशि का भी प्राथमिकता के आधार पर उपयोग किया जा सकेगा। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय एवं पंचायती राज मंत्रालय की ओर से इसकी अनुमति दे दी गई है। यूपी की महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने सभी जिला प्रशासन को केंद्रीय वित्त का उपयोग कर स्कूलों का विकास कार्य जल्द पूरा करने को कहा है।
ग्राम पंचायत निधि से स्कूलों की दशा सुधारने का निर्देश दिया गया। नतीजा यह रहा कि राज्य वित्त से स्कूलों की मरम्मत के कार्य कराने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह धीरे-धीरे स्कूलों में टाइल्स, मेज-कुर्सी, आकर्षक व जागरूकता वाली पेंटिंग कराने, छत, शौचालयों की मरम्मत आदि तक पहुंच गया है।
स्कूलों की सूरत में अब बदलाव दिखने लगा है। अब केंद्रीय वित्त का धन भी स्कूलों पर खर्च करने की अनुमति मिलने के बाद बड़ा बदलाव दिखाई पड़ेग। विद्यालयों में विकास कार्य तेजी से हो सकें, इसके लिए केंद्रीय वित्त की धनराशि का प्राथमिकता के आधार पर उपयोग करने की अनुमति मिली है।
ग्राम पंचायतों में ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों के कायाकल्प पर फोकस किया जाएगा। महानिदेशक स्कूली शिक्षा की ओर से आए पत्र के बाद ग्राम पंचायतों में स्थित परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प के काम पर फोकस किए जाने की रणनीति तैयार की जाने लगी है। ग्राम पंचायत निधि के अंतर्गत केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से यह कायाकल्प के काम सुनिश्चित होंगे।
इसमें विद्यालय के रख रखाव के अलावा स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल, नल, जल आपूर्ति, हैंडवाश यूनिट, बालक, बालिकाओं के लिए अलग अलग शौचालय, मूत्रालय, सेनेटरी पैड, इंसीनेटर, दिव्यांग सुलभ शौचालय, विद्यालय परिसर में रैंप और रेलिंग का निर्माण, रसोई एवं मिड डे मील सेड, किचन वाटिका, बिजली संयोजन, कक्षा कक्ष व शौचालय, टायलीकरण, विद्यालय में खिड़की, दरवाजों का जीर्णोद्धार, मुख्य गेट के साथ बाउंड्रीवाल का निर्माण, खेल के मैदान का विकास और रख रखाव और विद्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के निर्माण पर केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि खर्च की जाएगी।
परिषदीय विद्यालयों में मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं के संतृप्तीकरण हेतु ग्राम पंचायत निधि के अन्तर्गत केन्द्रीय वित्त आयोग की धनराशि से वरीयता प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में Reviewed by sankalp gupta on 7:23 PM Rating:
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परिषदीय विद्यालयों में मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं के संतृप्तीकरण हेतु ग्राम पंचायत निधि के अन्तर्गत केन्द्रीय वित्त आयोग की धनराशि से वरीयता प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में। अब ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों का और तेजी से विकास हो सकेगा। इन विद्यालयों के विकास पर राज्य वित्त के साथ ही केंद्रीय वित्त की धनराशि का भी प्राथमिकता के आधार पर उपयोग किया जा सकेगा। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय एवं पंचायती राज मंत्रालय की ओर से इसकी अनुमति दे दी गई है। यूपी की महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने सभी जिला प्रशासन को केंद्रीय वित्त का उपयोग कर स्कूलों का विकास कार्य जल्द पूरा करने को कहा है। ग्राम पंचायत निधि से स्कूलों की दशा सुधारने का निर्देश दिया गया। नतीजा यह रहा कि राज्य वित्त से स्कूलों की मरम्मत के कार्य कराने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह धीरे-धीरे स्कूलों में टाइल्स, मेज-कुर्सी, आकर्षक व जागरूकता वाली पेंटिंग कराने, छत, शौचालयों की मरम्मत आदि तक पहुंच गया है। स्कूलों की सूरत में अब बदलाव दिखने लगा है। अब केंद्रीय वित्त का धन भी स्कूलों पर खर्च करने की अनुमति मिलने के बाद बड़ा बदलाव दिखाई पड़ेग। विद्यालयों में विकास कार्य तेजी से हो सकें, इसके लिए केंद्रीय वित्त की धनराशि का प्राथमिकता के आधार पर उपयोग करने की अनुमति मिली है। ग्राम पंचायतों में ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों के कायाकल्प पर फोकस किया जाएगा। महानिदेशक स्कूली शिक्षा की ओर से आए पत्र के बाद ग्राम पंचायतों में स्थित परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प के काम पर फोकस किए जाने की रणनीति तैयार की जाने लगी है। ग्राम पंचायत निधि के अंतर्गत केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से यह कायाकल्प के काम सुनिश्चित होंगे। इसमें विद्यालय के रख रखाव के अलावा स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल, नल, जल आपूर्ति, हैंडवाश यूनिट, बालक, बालिकाओं के लिए अलग अलग शौचालय, मूत्रालय, सेनेटरी पैड, इंसीनेटर, दिव्यांग सुलभ शौचालय, विद्यालय परिसर में रैंप और रेलिंग का निर्माण, रसोई एवं मिड डे मील सेड, किचन वाटिका, बिजली संयोजन, कक्षा कक्ष व शौचालय, टायलीकरण, विद्यालय में खिड़की, दरवाजों का जीर्णोद्धार, मुख्य गेट के साथ बाउंड्रीवाल का निर्माण, खेल के मैदान का विकास और रख रखाव और विद्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के निर्माण पर केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि खर्च की जाएगी। परिषदीय विद्यालयों में मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं के संतृप्तीकरण हेतु ग्राम पंचायत निधि के अन्तर्गत केन्द्रीय वित्त आयोग की धनराशि से वरीयता प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में Reviewed by sankalp gupta on सात:तेईस PM Rating:
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जबलपुर में NIA की छापेमारी में बड़ा खुलासा. (Representative Image) ( Image Source : एबीपी लाइव फाइल फोटो )
NIA Raid in Jabalpur: जबलपुर में एनआईए की रेड में बाधा डालने के आरोप में हाई कोर्ट के अधिवक्ता अहादुल्ला उस्मानी, बेटे अरहम उस्मानी और अमानउल्ला उस्मानी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है. एनआईए की कार्रवाई के दौरान उस्मानी परिवार ने दरवाजा बंद करके टीम को बहुत देर तक घर में घुसने नहीं दिया था. उनके घर से हथियारों का जखीरा भी जब्त किया गया है. वहीं,एक अन्य अधिवक्ता नईम खान को नोटिस देकर उनके बेटे शाहनवाज खान को बयान देने के लिए भोपाल बुलाया गया है.
यहां बताते चले कि जबलपुर के एडवोकेट अहादुल्ला उस्मानी के घर पर शुक्रवार एवं शनिवार को एनआईए और मध्यप्रदेश एटीएस की टीम ने आईएसआईएस के कनेक्शन में बड़ी छापेमारी छापेमारी की थी. इस दौरान आदिल उस्मानी को आईएसआईएस से जुड़े बड़े आतंकी मॉड्यूल को ऑपरेट करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था. इस दौरान अधिवक्ता अहादुल्ला उस्मानी के घर से कारतूसों का जखीरा मिला है, जो स्टोर रूम की अलमारी में छुपा कर रखा गया था. इसमें 59 जिंदा कारतूस पॉइंट 32 एमएम और पांच 5. 5 एमएम के कारतूस जब्त किए गए हैं.
सीएसपी आरडी भारद्वाज ने बताया कि एनआईए को रोकने और कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करने पर केस भी दर्ज हुआ है. अधिवक्ता अहदुल्ला उस्मानी, उनके भाई अधिवक्ता अमानुद्दीन व पुत्र अहरम को ओमती पुलिस थाना में एनआईए की तरफ से दर्ज एफआईआर में आरोपी बनाया गया है.
पुलिस के अनुसार शुक्रवार की रात ओमती निवासी अधिवक्ता अहदुल्ला उस्मानी के घर का दरवाजा काफी मशक्कत के बाद खोला गया था. दरवाजा खुलते ही अधिकारियों ने घर में प्रवेश किया और परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल फोन व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कब्जे में ले लिए थे. जाँच अधिकारियों का दावा है कि दरवाजा खुलने के पहले ही अधिवक्ता, उनके पुत्र और भाई ने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से महत्वपूर्ण जानकारियों की फाइलें व साक्ष्य डिलीट कर दिये थे. ये साक्ष्य विभिन्न प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों से संबंधित थे. एटीएस के डीएसपी स्तर के अधिकारी द्वारा सबूतों से छेड़खानी करने व शासकीय कार्य में बाधा पहुँचाने की धाराओं के तहत दो अलग-अलग मामले दर्ज कराए गए हैं.
पुलिस जानकारी के अनुसार आतंकी अबू सलेम व सिमी आतंकियों की पैरवी करने वाले अधिवक्ता नईम खान के घर छापेमारी भी एनआईए ने छापेमारी की थी. एनआईए को उनके बेटे शाहनवाज खान की तलाश थी. हालांकि,छापे के दौरान घर में केवल नई की पत्नी थी,जिन्हें नोटिस देकर शाहनवाज को भोपाल आकर बयान देने को कहा गया है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मध्य प्रदेश पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) के साथ मिलकर शुक्रवार को जबलपुर में आईएसआईएस (ISIS) से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था. एनआईए ने शुक्रवार और शनिवार को जबलपुर में 13 स्थानों पर छापेमारी करते हुए इस आतंकी मॉड्यूल से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. तलाशी के दौरान हथियार और कारतूस सहित आपत्तिजनक दस्तावेज एवं डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए.
एनआईए द्वारा बताया गया है कि खुफिया नेतृत्व वाले संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार आरोपी सैयद मामूर अली, मोहम्मद आदिल खान और मोहम्मद शाहिद को भोपाल में एनआईए की विशेष से 3 जून तक की रिमांड पर लिया गया है. बताया गया है कि अगस्त 2022 में एनआईए ने मोहम्मद आदिल खान की आईएसआईएस समर्थक गतिविधियों की पहचान की थी. जांच के बाद एनआईए ने 24 मई को मामला (आरसी-14/2023/एनआईए/डीएलआई) दर्ज किया था. एजेंसी के मुताबिक आदिल और उसके सहयोगी आईएसआईएस के इशारे पर भारत में हिंसक आतंकी हमले करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के साथ जमीनी 'दावा' कार्यक्रमों के माध्यम से प्रचार प्रसार में शामिल थे. उनका मॉड्यूल स्थानीय मस्जिदों और घरों में बैठकें करता था. वे देश में आतंक फैलाने की योजना और साजिशें रचते थे.
यह भी पढ़ेंः MP Election: इंदौर आए युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी, बोले- 'BJP चाहे कितनी कोशिश कर ले. . . '
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जबलपुर में NIA की छापेमारी में बड़ा खुलासा. NIA Raid in Jabalpur: जबलपुर में एनआईए की रेड में बाधा डालने के आरोप में हाई कोर्ट के अधिवक्ता अहादुल्ला उस्मानी, बेटे अरहम उस्मानी और अमानउल्ला उस्मानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. एनआईए की कार्रवाई के दौरान उस्मानी परिवार ने दरवाजा बंद करके टीम को बहुत देर तक घर में घुसने नहीं दिया था. उनके घर से हथियारों का जखीरा भी जब्त किया गया है. वहीं,एक अन्य अधिवक्ता नईम खान को नोटिस देकर उनके बेटे शाहनवाज खान को बयान देने के लिए भोपाल बुलाया गया है. यहां बताते चले कि जबलपुर के एडवोकेट अहादुल्ला उस्मानी के घर पर शुक्रवार एवं शनिवार को एनआईए और मध्यप्रदेश एटीएस की टीम ने आईएसआईएस के कनेक्शन में बड़ी छापेमारी छापेमारी की थी. इस दौरान आदिल उस्मानी को आईएसआईएस से जुड़े बड़े आतंकी मॉड्यूल को ऑपरेट करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था. इस दौरान अधिवक्ता अहादुल्ला उस्मानी के घर से कारतूसों का जखीरा मिला है, जो स्टोर रूम की अलमारी में छुपा कर रखा गया था. इसमें उनसठ जिंदा कारतूस पॉइंट बत्तीस एमएम और पांच पाँच. पाँच एमएम के कारतूस जब्त किए गए हैं. सीएसपी आरडी भारद्वाज ने बताया कि एनआईए को रोकने और कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करने पर केस भी दर्ज हुआ है. अधिवक्ता अहदुल्ला उस्मानी, उनके भाई अधिवक्ता अमानुद्दीन व पुत्र अहरम को ओमती पुलिस थाना में एनआईए की तरफ से दर्ज एफआईआर में आरोपी बनाया गया है. पुलिस के अनुसार शुक्रवार की रात ओमती निवासी अधिवक्ता अहदुल्ला उस्मानी के घर का दरवाजा काफी मशक्कत के बाद खोला गया था. दरवाजा खुलते ही अधिकारियों ने घर में प्रवेश किया और परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल फोन व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कब्जे में ले लिए थे. जाँच अधिकारियों का दावा है कि दरवाजा खुलने के पहले ही अधिवक्ता, उनके पुत्र और भाई ने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से महत्वपूर्ण जानकारियों की फाइलें व साक्ष्य डिलीट कर दिये थे. ये साक्ष्य विभिन्न प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों से संबंधित थे. एटीएस के डीएसपी स्तर के अधिकारी द्वारा सबूतों से छेड़खानी करने व शासकीय कार्य में बाधा पहुँचाने की धाराओं के तहत दो अलग-अलग मामले दर्ज कराए गए हैं. पुलिस जानकारी के अनुसार आतंकी अबू सलेम व सिमी आतंकियों की पैरवी करने वाले अधिवक्ता नईम खान के घर छापेमारी भी एनआईए ने छापेमारी की थी. एनआईए को उनके बेटे शाहनवाज खान की तलाश थी. हालांकि,छापे के दौरान घर में केवल नई की पत्नी थी,जिन्हें नोटिस देकर शाहनवाज को भोपाल आकर बयान देने को कहा गया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मध्य प्रदेश पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते के साथ मिलकर शुक्रवार को जबलपुर में आईएसआईएस से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था. एनआईए ने शुक्रवार और शनिवार को जबलपुर में तेरह स्थानों पर छापेमारी करते हुए इस आतंकी मॉड्यूल से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. तलाशी के दौरान हथियार और कारतूस सहित आपत्तिजनक दस्तावेज एवं डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए. एनआईए द्वारा बताया गया है कि खुफिया नेतृत्व वाले संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार आरोपी सैयद मामूर अली, मोहम्मद आदिल खान और मोहम्मद शाहिद को भोपाल में एनआईए की विशेष से तीन जून तक की रिमांड पर लिया गया है. बताया गया है कि अगस्त दो हज़ार बाईस में एनआईए ने मोहम्मद आदिल खान की आईएसआईएस समर्थक गतिविधियों की पहचान की थी. जांच के बाद एनआईए ने चौबीस मई को मामला दर्ज किया था. एजेंसी के मुताबिक आदिल और उसके सहयोगी आईएसआईएस के इशारे पर भारत में हिंसक आतंकी हमले करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के साथ जमीनी 'दावा' कार्यक्रमों के माध्यम से प्रचार प्रसार में शामिल थे. उनका मॉड्यूल स्थानीय मस्जिदों और घरों में बैठकें करता था. वे देश में आतंक फैलाने की योजना और साजिशें रचते थे. यह भी पढ़ेंः MP Election: इंदौर आए युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी, बोले- 'BJP चाहे कितनी कोशिश कर ले. . . '
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मानसा में मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे बेरोजगार ईटीटी शिक्षकों पर हुए लाठीचार्ज मामले की जांच के पंजाब सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी संगरूर के लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीसी) अनमोल सिंह धालीवाल को सौंपी गई है। सरकार ने जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में दाखिल करने के आदेश संगरूर के डीसी को दिए हैं।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी मानसा में विवादित सिंगर शुभदीप सिंह सिद्धू उर्फ सिद्धू मूसेवाला की रैली में गए थे।
वहां जैसे ही सीएम चन्नी ने भाषण देना शुरू किया तो टीचरों ने नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने टीचरों को पंडाल से बाहर निकाल दिया। अपनी मांगों को लेकर बेरोजगार्र ईटीटी शिक्षक पंडाल के बाहर प्रदर्शन करने लगे। जिसके बाद प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था। मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक डीएसपी ने बेरहमी से शिक्षकों को पीटना शुरू कर दिया। डीएसपी ने पहले सड़क पर टीचरों को पीटा, जिसके बाद भी गुस्सा शांत नहीं हुआ।
जब टीचरों को अरेस्ट कर बस में बिठा लिया गया तो वह खिड़की से डंडा घुसाकर टीचरों को पीटता रहा। डीएसपी की इस कारगुजारी का वीडियो सामने आने के बाद विरोधी दलों से लेकर किसान संगठनों ने चन्नी सरकार पर जमकर निशाना साधा। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों को लेकर मानसा में मुख्यमंत्री चन्नी ने चेतावनी दी थी कि इस तरह कोई मांग हल नहीं होगी। इससे पहले वह टंकी-टावर पर चढ़ने वालों पर केस दर्ज करने की धमकी दे चुके हैं।
वायरल वीडियो और विपक्ष के हमलों के बाद पंजाब सरकार ने इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग वर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 10 दिसंबर को मानसा में होने वाले लाठीचार्ज की जांच के लिए संगरूर के जिला मजिस्ट्रेट अनमोल सिंह धालीवाल को नियुक्त किया गया है। वह जांच कर रिपोर्ट एक सप्ताह में सरकार को सौंपेंगे।
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मानसा में मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे बेरोजगार ईटीटी शिक्षकों पर हुए लाठीचार्ज मामले की जांच के पंजाब सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी संगरूर के लिए जिला मजिस्ट्रेट अनमोल सिंह धालीवाल को सौंपी गई है। सरकार ने जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में दाखिल करने के आदेश संगरूर के डीसी को दिए हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी मानसा में विवादित सिंगर शुभदीप सिंह सिद्धू उर्फ सिद्धू मूसेवाला की रैली में गए थे। वहां जैसे ही सीएम चन्नी ने भाषण देना शुरू किया तो टीचरों ने नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने टीचरों को पंडाल से बाहर निकाल दिया। अपनी मांगों को लेकर बेरोजगार्र ईटीटी शिक्षक पंडाल के बाहर प्रदर्शन करने लगे। जिसके बाद प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था। मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक डीएसपी ने बेरहमी से शिक्षकों को पीटना शुरू कर दिया। डीएसपी ने पहले सड़क पर टीचरों को पीटा, जिसके बाद भी गुस्सा शांत नहीं हुआ। जब टीचरों को अरेस्ट कर बस में बिठा लिया गया तो वह खिड़की से डंडा घुसाकर टीचरों को पीटता रहा। डीएसपी की इस कारगुजारी का वीडियो सामने आने के बाद विरोधी दलों से लेकर किसान संगठनों ने चन्नी सरकार पर जमकर निशाना साधा। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों को लेकर मानसा में मुख्यमंत्री चन्नी ने चेतावनी दी थी कि इस तरह कोई मांग हल नहीं होगी। इससे पहले वह टंकी-टावर पर चढ़ने वालों पर केस दर्ज करने की धमकी दे चुके हैं। वायरल वीडियो और विपक्ष के हमलों के बाद पंजाब सरकार ने इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग वर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दस दिसंबर को मानसा में होने वाले लाठीचार्ज की जांच के लिए संगरूर के जिला मजिस्ट्रेट अनमोल सिंह धालीवाल को नियुक्त किया गया है। वह जांच कर रिपोर्ट एक सप्ताह में सरकार को सौंपेंगे।
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मोटापा( loose weight) कम करने के दौरान लोग बहुत फीका खाना खाने लगते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि लगता है कि सारे टेस्टी फूड्स अनहेल्दी होते हैं. जबकि ऐसा नहीं है. कई तरह के फूड्स ऐसे भी हैं जो हेल्दी भी होते हैं और टेस्टी भी. वहीं अगर आप की वेट लॉस डाइट फॉलो कर रहे हैं तो आप टेस्ट बदलने के लिए चाट की डाइट ले सकते हैं. ये चाट प्रोटीन( protein) और हाई फाइबर से भरपूर हैं. ये चाट आपका मोटापा बढ़ाएगा नहीं बल्कि कम करेगा.
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मोटापा कम करने के दौरान लोग बहुत फीका खाना खाने लगते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि लगता है कि सारे टेस्टी फूड्स अनहेल्दी होते हैं. जबकि ऐसा नहीं है. कई तरह के फूड्स ऐसे भी हैं जो हेल्दी भी होते हैं और टेस्टी भी. वहीं अगर आप की वेट लॉस डाइट फॉलो कर रहे हैं तो आप टेस्ट बदलने के लिए चाट की डाइट ले सकते हैं. ये चाट प्रोटीन और हाई फाइबर से भरपूर हैं. ये चाट आपका मोटापा बढ़ाएगा नहीं बल्कि कम करेगा.
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नई दिल्ली । नए संसद भवन में सेंगोल को स्थापित करने से पहले अधिनम महंतों का आशीर्वाद लेते हुए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा सेंगोल को वाकिंग स्टिक के रूप में आनंद भवन में रख दिया गया था। आपका ये सेवक और हमारी सरकार अब उस सेंगोल को आनंद भवन से निकाल कर लाई है। आज आज़ादी के उस प्रथम पल को नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना के समय हमें फिर से पुनर्जीवित करने का मौका मिला है।
आज मेरे निवास स्थान पर आप सभी के चरण पड़े हैं ये मेरे लिए सौभाग्य का विषय है। मुझे इस बात की भी बहुत खुशी है कि कल नए संसद भवन के लोकार्पण के समय आप सभी वहां आकर आशीर्वाद देने वाले हैं। तमिल परंपरा में शासन चलाने वाले को सेंगोल दिया जाता था, सेंगोल इस बात का प्रतीक था कि उसे धारण करने वाले व्यक्ति पर देश के कल्याण की ज़िम्मेदारी है और वो कभी कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं होगा।
हमारे स्वतंत्रता संग्राम में तमिलनाडु की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत की आज़ादी में तमिल लोगों के योगदान को वो महत्व नहीं दिया गया जो दिया जाना चाहिए था। अब भाजपा ने इस विषय को प्रमुखता से उठाना शुरू किया है।
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नई दिल्ली । नए संसद भवन में सेंगोल को स्थापित करने से पहले अधिनम महंतों का आशीर्वाद लेते हुए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा सेंगोल को वाकिंग स्टिक के रूप में आनंद भवन में रख दिया गया था। आपका ये सेवक और हमारी सरकार अब उस सेंगोल को आनंद भवन से निकाल कर लाई है। आज आज़ादी के उस प्रथम पल को नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना के समय हमें फिर से पुनर्जीवित करने का मौका मिला है। आज मेरे निवास स्थान पर आप सभी के चरण पड़े हैं ये मेरे लिए सौभाग्य का विषय है। मुझे इस बात की भी बहुत खुशी है कि कल नए संसद भवन के लोकार्पण के समय आप सभी वहां आकर आशीर्वाद देने वाले हैं। तमिल परंपरा में शासन चलाने वाले को सेंगोल दिया जाता था, सेंगोल इस बात का प्रतीक था कि उसे धारण करने वाले व्यक्ति पर देश के कल्याण की ज़िम्मेदारी है और वो कभी कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं होगा। हमारे स्वतंत्रता संग्राम में तमिलनाडु की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत की आज़ादी में तमिल लोगों के योगदान को वो महत्व नहीं दिया गया जो दिया जाना चाहिए था। अब भाजपा ने इस विषय को प्रमुखता से उठाना शुरू किया है।
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रूस की राजधानी मॉस्को (Russian capital Moscow) से गोवा जाने वाली एक चार्टर्ड फ्लाइट को शनिवार को उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) के लिए डायवर्ट कर दिया गया। बम की धमकी के बाद शनिवार तड़के फ्लाइट को डायवर्ट किया गया।
अधिकारी ने कहा कि उड़ान (AZV2463) को भारतीय हवाई क्षेत्र (Indian air space) में प्रवेश करने से पहले डायवर्ट किया गया था। इसे गोवा के डाबोलिम हवाईअड्डे (Dabolim airport) पर सुबह सवा चार बजे उतरना था। एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, "डाबोलिम हवाईअड्डे के निदेशक द्वारा रात 12. 30 बजे एक ईमेल प्राप्त होने के बाद इसे डायवर्ट किया गया, जिसमें विमान में बम लगाए जाने का जिक्र था।
बता दें कि 11 ग्यारह दिनों में मास्को-गोवा उड़ान (Moscow-Goa flight) पर बम की धमकी की यह दूसरी घटना है। 9 जनवरी को मास्को से गोवा के लिए 244 यात्रियों और चालक दल के साथ एक चार्टर उड़ान ने जामनगर में आपातकालीन लैंडिंग की, जब गोवा वायु यातायात नियंत्रण को अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर बम की धमकी का दावा करने वाला एक ईमेल प्राप्त हुआ।
मॉस्को-गोवा चार्टर्ड फ्लाइट को रात करीब 9. 49 बजे सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। फ्लाइट में सवार सभी 244 यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया था। मौके पर बम स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड की टीमें पहुंच गई। इसके अलावा CISF के अधिकारी, कलेक्टर और एसपी एयरपोर्ट पर पहुंच गए थे।
इससे पहले दिल्ली में आईजीआई एयरपोर्ट पर रनवे नंबर 28 पर एक फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग की गई थी। विस्तारा की फ्लाइट दिल्ली से भुवनेश्वर जा रही थी। फ्लाइट में सोमवार शाम तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर पूरी तरह से इमरजेंसी घोषित कर दी गई थी।
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रूस की राजधानी मॉस्को से गोवा जाने वाली एक चार्टर्ड फ्लाइट को शनिवार को उज्बेकिस्तान के लिए डायवर्ट कर दिया गया। बम की धमकी के बाद शनिवार तड़के फ्लाइट को डायवर्ट किया गया। अधिकारी ने कहा कि उड़ान को भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले डायवर्ट किया गया था। इसे गोवा के डाबोलिम हवाईअड्डे पर सुबह सवा चार बजे उतरना था। एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, "डाबोलिम हवाईअड्डे के निदेशक द्वारा रात बारह. तीस बजे एक ईमेल प्राप्त होने के बाद इसे डायवर्ट किया गया, जिसमें विमान में बम लगाए जाने का जिक्र था। बता दें कि ग्यारह ग्यारह दिनों में मास्को-गोवा उड़ान पर बम की धमकी की यह दूसरी घटना है। नौ जनवरी को मास्को से गोवा के लिए दो सौ चौंतालीस यात्रियों और चालक दल के साथ एक चार्टर उड़ान ने जामनगर में आपातकालीन लैंडिंग की, जब गोवा वायु यातायात नियंत्रण को अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर बम की धमकी का दावा करने वाला एक ईमेल प्राप्त हुआ। मॉस्को-गोवा चार्टर्ड फ्लाइट को रात करीब नौ. उनचास बजे सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। फ्लाइट में सवार सभी दो सौ चौंतालीस यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया था। मौके पर बम स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड की टीमें पहुंच गई। इसके अलावा CISF के अधिकारी, कलेक्टर और एसपी एयरपोर्ट पर पहुंच गए थे। इससे पहले दिल्ली में आईजीआई एयरपोर्ट पर रनवे नंबर अट्ठाईस पर एक फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग की गई थी। विस्तारा की फ्लाइट दिल्ली से भुवनेश्वर जा रही थी। फ्लाइट में सोमवार शाम तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर पूरी तरह से इमरजेंसी घोषित कर दी गई थी।
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भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इटरनल यूनिवर्सिटी में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम मनाया गया। 12 मार्च भारत के गौरवशाली इतिहास में एक विशेष दिन है,क्योंकि 1930 में इसी दिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रतिष्ठित दांडी मार्च शुरू हुआ था। इस दौरान इटरनल यूनिवर्सिटी में देश भक्ति पर आधारित एक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें यूनिवर्सिटी की विभिन्न छात्राओं ने देश के महान देश भक्तों का भेस रचकर उनके महान जीवन को अभिनय के रूप में प्रस्तुत किया भी सेमिनार के दौरान करमजीत कौर ने भगत सिंह बनकर, तमन्ना चौहान ने सरदार वल्लभभाई पटेल बनकर, कल्पना शर्मा ने रानी लक्ष्मीबाई बनकर और जसपिंद्र कौर ने महात्मा गांधी के वेश में अपनी कला से सबको प्रभावित किया।
इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष रूप से ध्यान रखते हुए कार्यक्रम को सीमित उपस्थिति में ही मनाया गया। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी स्टाफ की तरफ से छात्रों को पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। संस्था के वाइस चांसलर डा. दविंदर सिंह ने कहा कि इस तरह के कार्यकर्मों से छात्राओं में देश भक्ति की भावना पैदा होती है और वह देश को आगे बढ़ाने में सदैव प्रयासरत रहतें हैं। जबकि इटरनल यूनिवर्सिटी के प्रो. वाइस चांसलर डा. अमरीक सिंह अहलूवालिया ने छात्राओं के अभिनय की सराहना की और इस कार्यक्रम की सफलता के लिए अपने सभी स्टाफ मेंबर्स का धन्यवाद किया।
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भारत की आजादी के पचहत्तर साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इटरनल यूनिवर्सिटी में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम मनाया गया। बारह मार्च भारत के गौरवशाली इतिहास में एक विशेष दिन है,क्योंकि एक हज़ार नौ सौ तीस में इसी दिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रतिष्ठित दांडी मार्च शुरू हुआ था। इस दौरान इटरनल यूनिवर्सिटी में देश भक्ति पर आधारित एक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें यूनिवर्सिटी की विभिन्न छात्राओं ने देश के महान देश भक्तों का भेस रचकर उनके महान जीवन को अभिनय के रूप में प्रस्तुत किया भी सेमिनार के दौरान करमजीत कौर ने भगत सिंह बनकर, तमन्ना चौहान ने सरदार वल्लभभाई पटेल बनकर, कल्पना शर्मा ने रानी लक्ष्मीबाई बनकर और जसपिंद्र कौर ने महात्मा गांधी के वेश में अपनी कला से सबको प्रभावित किया। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष रूप से ध्यान रखते हुए कार्यक्रम को सीमित उपस्थिति में ही मनाया गया। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी स्टाफ की तरफ से छात्रों को पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। संस्था के वाइस चांसलर डा. दविंदर सिंह ने कहा कि इस तरह के कार्यकर्मों से छात्राओं में देश भक्ति की भावना पैदा होती है और वह देश को आगे बढ़ाने में सदैव प्रयासरत रहतें हैं। जबकि इटरनल यूनिवर्सिटी के प्रो. वाइस चांसलर डा. अमरीक सिंह अहलूवालिया ने छात्राओं के अभिनय की सराहना की और इस कार्यक्रम की सफलता के लिए अपने सभी स्टाफ मेंबर्स का धन्यवाद किया।
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( काव्य संग्रह )
श्री राजेश माहेश्वरी की कविताएं भाव-प्रवण हैं। उनकी भावनाओं और उनके चिन्तन का संसार विस्तृत है। उनकी भावनाओं मे एक आदर्श है। वे स्वयं में एक आदर्श की परिकल्पना करते हैं साथ ही वे परिवार के सदस्यों के संदर्भ में, अपने नगर के संदर्भ में अपने देश के संदर्भ में और समग्र मानव जाति के संदर्भ में एक आदर्ष चरित्र एवं व्यवहार की परिकल्पना करते हैं।
वे देश, समाज, राजनीति और धर्म के भी उस स्वरूप की कल्पना करते हैं जहाँ कोई भेदभाव नहीं है और सभी को समानता के साथ जीने का अधिकार और साधन उपलब्ध हैं। यही कारण है कि जहाँ भी उन्हें अपने इन आदर्शो के दर्शन होते हैं वे उसकी सराहना करते हैं और जहाँ उन्हें कोई कमी नजर आती है वे उसको रेखांकित करते हुए उसमें संशोधन और संवर्धन की अपेक्षा रखते हैं। उनकी अभिधात्मक एवं सहृदय अभिव्यक्ति ही उनके काव्य का प्रमुख सौन्दर्य हैं और यही उन्हें सर्वग्राह्यता प्रदान करती है।
जय नगर, जबलपुर।
हे राम!
इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान,
मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम।
रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष,
विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष।
करें दुख में सुख का अहसास,
रहे तन-मन में यह आभास।
धर्म से कर्म, कर्म से सृजन, सृजन में हो समाज उत्थान,
चलूं जब दुनिया से हे राम! ध्यान में रहे तुम्हारा नाम।
विरह वियोग श्याम सुन्दर के, झर-झर आँसू बरसे।
इन अँसुवन से चरण तुम्हारे, धोने को मन तरसे।
काल का पहिया चलता जाए, तू कब मुझे बुलाए,
नाम तुम्हारा रटते-रटते ही यह जीवन जाए।
मीरा को नवजीवन दीन्हों, केवट को आशीष,
शबरी के बेरों को खाकर, तृप्त हुए जगदीश।
जीवन में बस यही कामना, दरस तुम्हारे पाऊँ।
गाते-गाते भजन तुम्हारे, तुम में ही खो जाऊँ।
अपने भीगे कपड़े सुखाने चली गई।
मेरी महान माँ!
कभी कोई गया होगा इस राह से,
सच्चाई के गन्तव्य तक।
तभी सपना टूट गया,
वह उठकर बैठ गया,
ना जाने कहाँ गायब हो गया ।
कहाँ खो गया?
सब कुछ बदल गया है।
खो गया है,
कोल्हू का बैल हो गया है।
पर लुप्त नहीं है।
प्रोत्साहन और उत्साहवर्धन की।
संस्कारधानी हो जाए।
क्या देख रहे हो?
प्रभु !
चारा, भूसा या सानी,
दूध में पानी।
ऐसा बुद्धिमत्तापूर्ण हुनर,
जा रहा हूँ धरती पर।
मजबूत बना लो।
ग्वाला तो गाय लेकर भाग जाएगा,
यमलोक पहुँचाएगा।
यहीं सुरक्षित रहो।
सत्य की स्थापना।
परन्तु ... दिग्ज्ञान नहीं।
एक विचार!
वह बचपन!
उजली सुबह की तरह।
सब कुछ था,
किसी खजाने की तरह।
और हमारा सृजन,
प्रभु के द्वारा हुआ सम्पन्न।
होता है जीवन का अंत।
कौए की कांव-कांव,
कोई मेहमान।
तभी पत्नी ने किया टीवी आन।
उसे देखते ही हम सकपका गए,
धरती पर आ गए।
अनाप-शनाप दाम,
यह आपने क्या कर दिया काम?
उतने ही अब भी हैं,
बढ़ती ही जा रही है।
जनसंख्या बढ़ाते हो।
ऐसे में कैसे कम होंगे दाम?
तो अपने आप दाम कम हो जाएंगे,
हम भी चैन की बंसी बजाएंगे।
कल भी रहेगा।
लम्हों की मधुर यादें,
और देगी दिशा का ज्ञान।
न कभी खत्म होगी।
कर रहा हूँ अलविदा,
खुदा हाफिज, नमस्कार!
स्वच्छ और सुन्दर सड़कों को।
हो जाते हैं दिग्भ्रमित।
सफल जीवन की संज्ञा।
विचलित और निरुत्साहित।
मुझे चक्कर आ गया।
यह लड्डू पाया था।
चापलूसी ही करवाएगी।
बांटी गई थी जलेबी।
मदर और फादर।
और फिर तीर्थ यात्रा पर ?
चले जायेंगे बद्रीनाथ।
बड़ी मुश्किल से निकल पाया था,
परीक्षा में थर्ड डिवीजन लाया था।
यह मंत्री बन जाएगा।
बादाम का हलुआ।
ढोता था गधा,
ढोयेगी जनता।
लोकतंत्र का नया रूप नजर आएगा,
लोक अब इस तंत्र का बोझा उठायेगा।
अंत से प्रारंभ।
देता था स्वर्ग की अनुभूति,
भरता था जीवन में स्फूर्ति।
अनन्त की ओर।
वह हो जाती थी परेशान,
वह खुशी से फूल जाती थी,
पीड़ित मानवता की सेवा,
देती थी शिक्षा।
पंचतत्वों में विलीन।
वह सामने आ जाती है,
सुला जाती है।
या अंत से प्रारंभ।
अब नेता कर रहा है।
गरीब की गरीब।
कमा रहा है धन,
परिवार का तन।
उजियारा ही उजियारा है।
अंधियारा ही अधियारा है।
जिससे आ जाए सच्चा लोकतंत्र,
है मेरे भाई!
गूँज उठता है एक नया नारा।
न जाने कहाँ खो गए,
मानो अतीत के गर्भ में सो गए।
नया नारा लगा रहे हैं।
अच्छे दिन कैसे होंगे?
कब आएंगे?
कोई नहीं समझा रहा,
स्वयं नहीं समझ पा रहा।
परिवर्तन ऐसे नहीं होता।
एक नये सूर्य का।
अनीतियों और कुरीतियों का होगा मर्दन।
मजबूत होकर उभरेंगे।
भारत देश महान।
विकास शून्य हो रहे हैं।
मजबूर होकर रह गए हैं।
विकास की जवाबदारी,
स्वप्न का सृजन।
और तब होगा गृह-युद्ध।
वापिस लाओ,
विकास की गंगा बहाओ।
जीवन के तीन रंग।
आनन्द का शुभारम्भ।
इससे हममें जागता है चिन्तन।
जिससे होगा इसका संहार।
तुम्हारे अस्तित्व को समाप्त कर देगी।
यही है मानव की आस।
यही बनेगा सफलता का उद्देश्य।
देती है तृप्ति।
वापिस चले जाते,
अपने घर की ओर,
नहीं है प्रबंध,
अगली प्रस्तुति के लिये,
जीवन का अन्त।
पा रहा है उष्णता का आभास,
अपनी अवस्था से नहीं , व्यवस्था से,
मनन और चिन्तन में।
उसका सपना साकार हो जाएगा।
सही रास्ता।
सफल कहलाता है।
विचलित या निरुत्साहित न हों।
पराजित नहीं होता,
जीवन-दान दे जाती है।
सृजनशीलता व विकास।
आत्मा को तृप्ति।
एहसास व आभास।
आस्था का प्रादुर्भाव,
नहीं है कोई पाप,
हमारी सफलता का प्रवेश द्वार।
कवि हो गया।
हो गया फक्कड़।
और अपने में ही करता रमण।
जैसे मिल गयी हो सारी दौलत।
यही है उसके जीवन का प्रवाह।
कर रही है प्रयास,
नेता कर रहे हैं बकवास।
कर रहा है प्रतीक्षा, मदद की,
भूख का निदान,
नए सूर्य का होगा उदय।
जय जवान जय किसान!
उद्देश्यपूर्ण और सारगर्भित।
हो रहा है शहीद,
बन सकेंगे,
सार्थक कर सकेंगे।
कम है दम।
वहीं रह जाती है।
प्रतीक्षा करती है।
बहुत कम है।
अपने ही घर में असुरक्षित।
अग्रसर करें,
नाम रौशन करें।
प्रभु की भक्ति में।
ले जाने का प्रयास,
भक्ति में लीन हो गया।
इतिहास का अंग।
उसका जीवन यापन होता है मूल्यहीन,
सफलता, मान-सम्मान और वैभव से परिपूर्ण।
युग पुरुष बनकर दिखाओ।
गौरवपूर्ण स्थान दिलाओ।
आ रहा नववर्ष!
करें इसका अभिनन्दन।
सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन,
उद्योगपतियों को मिले उचित सम्मान।
मंहगाई से मुक्त राष्ट्र का हो निर्माण,
परिश्रम को मिले उचित स्थान,
वास्तव में कर लेंगे स्वीकार,
तभी होगा साकार,
विकास का संकल्प,
बनेंगे भागीदार,
तभी होगा साकार।
प्रेम की गंगा।
होता है मधुर और प्रीतिमय,
होता है कभी खट्टा और कभी मीठा।
जिन्हें वक्त और जवानी ने दगा दे दिया।
आंसुओं का दरिया,
उन्हें जीना पड़ता है इसी मजबूरी मे,
छोड़ते है ठण्डी सांसें।
जो समझ लेते हैं समय को समय पर।
ऐसे लोग शहंशाह की तरह जीते हैं।
बहुत कम होते हैं।
समझकर जीते हैं।
जीना है।
सिर्फ इसलिये जीना है।
कविता बनती है।
बन जाती है संगीत।
उस भक्ति की अभिव्यक्ति।
मील के पत्थर थे।
इन्हें जकड़ लिया,
मिटा दिया।
उछल-कूद का साधन,
बदल दिया है इनका रूप।
हमारी संस्कृति।
काश ऐसा हो !
परमपिता की सर्वोत्तम कृति।
समन्वय हो,
मानव से आस।
आत्मा को तृप्ति देती हैं,
प्रारम्भ कर दिया विध्वंस।
बिखरा हुआ था आनन्द,
पूर्ण विराम।
सृजन चाहिए।
किसी को सुनाई नहीं देता।
राजनैतिक रोटियाँ।
सम्पन्न हो हमारा देश।
हो हमारा कर्म,
पुकारे सारा संसार।
वैसा फल देता है भगवान।
नहीं समझ पाता इन्सान।
बन रहे हैं आलीशान,
परेशान हैं भगवान,
दरिद्र नारायण के पास,
जहाँ है धन का निवास,
हम इन्हीं में भटकते हैं।
कभी नहीं फटकते हैं।
परमात्मा से मिलन,
होते हैं उसके दर्शन,
अनन्त में विलीन हो जाएंगे।
हे माँ नर्मदे!
हे माँ नर्मदे!
धर्म, जाति या संप्रदाय का भेदभाव,
सम्यता, संस्कृति और संस्कारों का प्रादुर्भाव,
अर्पित है नमन बारंबार।
नया जीवन।
रखना है देश के विकास की नींव।
ठण्ड गर्मी बरसात आंधी या भूकम्प।
समाज को सुखमय जीवन।
समय को खो रहा है।
लीन रहना चाहता है।
राह दिखलाता है।
मोक्ष की ओर अग्रसर करती हैं।
हो तुम्हारा साक्षात्कार।
प्रेमिका नहीं,
धन की उपोगिता नहीं,
प्रेमिका पर होता है धन कुर्बान,
पत्नी घर की रानी,
जीवन का सार।
आसानी से पहुंचाएगा।
सिर को झुकाएंगी।
और नहीं होगा जातिवाद।
वसुधैव सः कौटुम्बकम् की छाया।
तभी होगी हमारी सच्ची प्रगति।
लगा रहे हैं प्रश्नचिन्ह?
अमानवीयता की पराकाष्ठा है,
सभी धर्मों में यह है महापाप,
रूढ़ियों में लायें परिवर्तन,
सर्वस्व नष्ट कर बैठोगे।
जीवन जीने की कला।
फिर भी इसे कहते हैं संस्कारधानी।
बिजली का कभी भी कितना भी कट,
स्वच्छ और सुन्दर सड़क,
खोजना पड़ रहा है।
पानी के लिये हाय! हाय!
करके जनता को बाय-बाय!
सुन्दर और वास्तविक शहर।
कर लिया स्वीकार।
मनचाही सौगात,
हो गया नया प्रभात।
कार्यालय आने-जाने लगी,
मेरे काम में हाथ बंटाने लगी।
लगने लगे उसमें चार चाँद।
विशिष्ट स्थान बनाया।
या न देख सकूं,
अंधकार से प्रकाश की ओर।
चिन्तन और दर्शन करने दो।
पाप और पुण्य का,
अन्त से प्रारम्भ हो गया।
नष्ट नहीं कर पाते,
मेघों को,
लुप्त हो जाते हैं मेघ।
कठिनाइयाँ और परेशानियाँ,
जिस पर न हुआ हो प्रहार,
दोनों अटल हैं।
सकारात्मक और नकारात्मक दृष्टिकोण,
होता है गौरवान्वित,
नहीं रहता उसका कोई इतिहास।
कल भी चलता रहेगा।
और कल भी रहेगा।
अभावों में पनपते हैं अपराध।
कर देती है लिप्त।
लीला समाप्त हो,
लोग करें हमें याद।
सुख भी साथ-साथ होगा।
परिवर्तन को निहार रहा है,
बेच रहा है,
दो आंसू भी नहीं बहा रहा है,
समय पर नहीं कर रहा है,
आज भी पछता रहा है।
भ्रष्टाचार बढ़ रहा है।
करोड़ों का लेन-देन हो रहा है।
भ्रष्टाचार करा रहा है।
भ्रष्टाचार में लिप्त है।
साकार हो जाएगा।
सपना अपना पूरा हो।
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श्री राजेश माहेश्वरी की कविताएं भाव-प्रवण हैं। उनकी भावनाओं और उनके चिन्तन का संसार विस्तृत है। उनकी भावनाओं मे एक आदर्श है। वे स्वयं में एक आदर्श की परिकल्पना करते हैं साथ ही वे परिवार के सदस्यों के संदर्भ में, अपने नगर के संदर्भ में अपने देश के संदर्भ में और समग्र मानव जाति के संदर्भ में एक आदर्ष चरित्र एवं व्यवहार की परिकल्पना करते हैं। वे देश, समाज, राजनीति और धर्म के भी उस स्वरूप की कल्पना करते हैं जहाँ कोई भेदभाव नहीं है और सभी को समानता के साथ जीने का अधिकार और साधन उपलब्ध हैं। यही कारण है कि जहाँ भी उन्हें अपने इन आदर्शो के दर्शन होते हैं वे उसकी सराहना करते हैं और जहाँ उन्हें कोई कमी नजर आती है वे उसको रेखांकित करते हुए उसमें संशोधन और संवर्धन की अपेक्षा रखते हैं। उनकी अभिधात्मक एवं सहृदय अभिव्यक्ति ही उनके काव्य का प्रमुख सौन्दर्य हैं और यही उन्हें सर्वग्राह्यता प्रदान करती है। जय नगर, जबलपुर। हे राम! इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान, मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम। रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष, विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष। करें दुख में सुख का अहसास, रहे तन-मन में यह आभास। धर्म से कर्म, कर्म से सृजन, सृजन में हो समाज उत्थान, चलूं जब दुनिया से हे राम! ध्यान में रहे तुम्हारा नाम। विरह वियोग श्याम सुन्दर के, झर-झर आँसू बरसे। इन अँसुवन से चरण तुम्हारे, धोने को मन तरसे। काल का पहिया चलता जाए, तू कब मुझे बुलाए, नाम तुम्हारा रटते-रटते ही यह जीवन जाए। मीरा को नवजीवन दीन्हों, केवट को आशीष, शबरी के बेरों को खाकर, तृप्त हुए जगदीश। जीवन में बस यही कामना, दरस तुम्हारे पाऊँ। गाते-गाते भजन तुम्हारे, तुम में ही खो जाऊँ। अपने भीगे कपड़े सुखाने चली गई। मेरी महान माँ! कभी कोई गया होगा इस राह से, सच्चाई के गन्तव्य तक। तभी सपना टूट गया, वह उठकर बैठ गया, ना जाने कहाँ गायब हो गया । कहाँ खो गया? सब कुछ बदल गया है। खो गया है, कोल्हू का बैल हो गया है। पर लुप्त नहीं है। प्रोत्साहन और उत्साहवर्धन की। संस्कारधानी हो जाए। क्या देख रहे हो? प्रभु ! चारा, भूसा या सानी, दूध में पानी। ऐसा बुद्धिमत्तापूर्ण हुनर, जा रहा हूँ धरती पर। मजबूत बना लो। ग्वाला तो गाय लेकर भाग जाएगा, यमलोक पहुँचाएगा। यहीं सुरक्षित रहो। सत्य की स्थापना। परन्तु ... दिग्ज्ञान नहीं। एक विचार! वह बचपन! उजली सुबह की तरह। सब कुछ था, किसी खजाने की तरह। और हमारा सृजन, प्रभु के द्वारा हुआ सम्पन्न। होता है जीवन का अंत। कौए की कांव-कांव, कोई मेहमान। तभी पत्नी ने किया टीवी आन। उसे देखते ही हम सकपका गए, धरती पर आ गए। अनाप-शनाप दाम, यह आपने क्या कर दिया काम? उतने ही अब भी हैं, बढ़ती ही जा रही है। जनसंख्या बढ़ाते हो। ऐसे में कैसे कम होंगे दाम? तो अपने आप दाम कम हो जाएंगे, हम भी चैन की बंसी बजाएंगे। कल भी रहेगा। लम्हों की मधुर यादें, और देगी दिशा का ज्ञान। न कभी खत्म होगी। कर रहा हूँ अलविदा, खुदा हाफिज, नमस्कार! स्वच्छ और सुन्दर सड़कों को। हो जाते हैं दिग्भ्रमित। सफल जीवन की संज्ञा। विचलित और निरुत्साहित। मुझे चक्कर आ गया। यह लड्डू पाया था। चापलूसी ही करवाएगी। बांटी गई थी जलेबी। मदर और फादर। और फिर तीर्थ यात्रा पर ? चले जायेंगे बद्रीनाथ। बड़ी मुश्किल से निकल पाया था, परीक्षा में थर्ड डिवीजन लाया था। यह मंत्री बन जाएगा। बादाम का हलुआ। ढोता था गधा, ढोयेगी जनता। लोकतंत्र का नया रूप नजर आएगा, लोक अब इस तंत्र का बोझा उठायेगा। अंत से प्रारंभ। देता था स्वर्ग की अनुभूति, भरता था जीवन में स्फूर्ति। अनन्त की ओर। वह हो जाती थी परेशान, वह खुशी से फूल जाती थी, पीड़ित मानवता की सेवा, देती थी शिक्षा। पंचतत्वों में विलीन। वह सामने आ जाती है, सुला जाती है। या अंत से प्रारंभ। अब नेता कर रहा है। गरीब की गरीब। कमा रहा है धन, परिवार का तन। उजियारा ही उजियारा है। अंधियारा ही अधियारा है। जिससे आ जाए सच्चा लोकतंत्र, है मेरे भाई! गूँज उठता है एक नया नारा। न जाने कहाँ खो गए, मानो अतीत के गर्भ में सो गए। नया नारा लगा रहे हैं। अच्छे दिन कैसे होंगे? कब आएंगे? कोई नहीं समझा रहा, स्वयं नहीं समझ पा रहा। परिवर्तन ऐसे नहीं होता। एक नये सूर्य का। अनीतियों और कुरीतियों का होगा मर्दन। मजबूत होकर उभरेंगे। भारत देश महान। विकास शून्य हो रहे हैं। मजबूर होकर रह गए हैं। विकास की जवाबदारी, स्वप्न का सृजन। और तब होगा गृह-युद्ध। वापिस लाओ, विकास की गंगा बहाओ। जीवन के तीन रंग। आनन्द का शुभारम्भ। इससे हममें जागता है चिन्तन। जिससे होगा इसका संहार। तुम्हारे अस्तित्व को समाप्त कर देगी। यही है मानव की आस। यही बनेगा सफलता का उद्देश्य। देती है तृप्ति। वापिस चले जाते, अपने घर की ओर, नहीं है प्रबंध, अगली प्रस्तुति के लिये, जीवन का अन्त। पा रहा है उष्णता का आभास, अपनी अवस्था से नहीं , व्यवस्था से, मनन और चिन्तन में। उसका सपना साकार हो जाएगा। सही रास्ता। सफल कहलाता है। विचलित या निरुत्साहित न हों। पराजित नहीं होता, जीवन-दान दे जाती है। सृजनशीलता व विकास। आत्मा को तृप्ति। एहसास व आभास। आस्था का प्रादुर्भाव, नहीं है कोई पाप, हमारी सफलता का प्रवेश द्वार। कवि हो गया। हो गया फक्कड़। और अपने में ही करता रमण। जैसे मिल गयी हो सारी दौलत। यही है उसके जीवन का प्रवाह। कर रही है प्रयास, नेता कर रहे हैं बकवास। कर रहा है प्रतीक्षा, मदद की, भूख का निदान, नए सूर्य का होगा उदय। जय जवान जय किसान! उद्देश्यपूर्ण और सारगर्भित। हो रहा है शहीद, बन सकेंगे, सार्थक कर सकेंगे। कम है दम। वहीं रह जाती है। प्रतीक्षा करती है। बहुत कम है। अपने ही घर में असुरक्षित। अग्रसर करें, नाम रौशन करें। प्रभु की भक्ति में। ले जाने का प्रयास, भक्ति में लीन हो गया। इतिहास का अंग। उसका जीवन यापन होता है मूल्यहीन, सफलता, मान-सम्मान और वैभव से परिपूर्ण। युग पुरुष बनकर दिखाओ। गौरवपूर्ण स्थान दिलाओ। आ रहा नववर्ष! करें इसका अभिनन्दन। सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन, उद्योगपतियों को मिले उचित सम्मान। मंहगाई से मुक्त राष्ट्र का हो निर्माण, परिश्रम को मिले उचित स्थान, वास्तव में कर लेंगे स्वीकार, तभी होगा साकार, विकास का संकल्प, बनेंगे भागीदार, तभी होगा साकार। प्रेम की गंगा। होता है मधुर और प्रीतिमय, होता है कभी खट्टा और कभी मीठा। जिन्हें वक्त और जवानी ने दगा दे दिया। आंसुओं का दरिया, उन्हें जीना पड़ता है इसी मजबूरी मे, छोड़ते है ठण्डी सांसें। जो समझ लेते हैं समय को समय पर। ऐसे लोग शहंशाह की तरह जीते हैं। बहुत कम होते हैं। समझकर जीते हैं। जीना है। सिर्फ इसलिये जीना है। कविता बनती है। बन जाती है संगीत। उस भक्ति की अभिव्यक्ति। मील के पत्थर थे। इन्हें जकड़ लिया, मिटा दिया। उछल-कूद का साधन, बदल दिया है इनका रूप। हमारी संस्कृति। काश ऐसा हो ! परमपिता की सर्वोत्तम कृति। समन्वय हो, मानव से आस। आत्मा को तृप्ति देती हैं, प्रारम्भ कर दिया विध्वंस। बिखरा हुआ था आनन्द, पूर्ण विराम। सृजन चाहिए। किसी को सुनाई नहीं देता। राजनैतिक रोटियाँ। सम्पन्न हो हमारा देश। हो हमारा कर्म, पुकारे सारा संसार। वैसा फल देता है भगवान। नहीं समझ पाता इन्सान। बन रहे हैं आलीशान, परेशान हैं भगवान, दरिद्र नारायण के पास, जहाँ है धन का निवास, हम इन्हीं में भटकते हैं। कभी नहीं फटकते हैं। परमात्मा से मिलन, होते हैं उसके दर्शन, अनन्त में विलीन हो जाएंगे। हे माँ नर्मदे! हे माँ नर्मदे! धर्म, जाति या संप्रदाय का भेदभाव, सम्यता, संस्कृति और संस्कारों का प्रादुर्भाव, अर्पित है नमन बारंबार। नया जीवन। रखना है देश के विकास की नींव। ठण्ड गर्मी बरसात आंधी या भूकम्प। समाज को सुखमय जीवन। समय को खो रहा है। लीन रहना चाहता है। राह दिखलाता है। मोक्ष की ओर अग्रसर करती हैं। हो तुम्हारा साक्षात्कार। प्रेमिका नहीं, धन की उपोगिता नहीं, प्रेमिका पर होता है धन कुर्बान, पत्नी घर की रानी, जीवन का सार। आसानी से पहुंचाएगा। सिर को झुकाएंगी। और नहीं होगा जातिवाद। वसुधैव सः कौटुम्बकम् की छाया। तभी होगी हमारी सच्ची प्रगति। लगा रहे हैं प्रश्नचिन्ह? अमानवीयता की पराकाष्ठा है, सभी धर्मों में यह है महापाप, रूढ़ियों में लायें परिवर्तन, सर्वस्व नष्ट कर बैठोगे। जीवन जीने की कला। फिर भी इसे कहते हैं संस्कारधानी। बिजली का कभी भी कितना भी कट, स्वच्छ और सुन्दर सड़क, खोजना पड़ रहा है। पानी के लिये हाय! हाय! करके जनता को बाय-बाय! सुन्दर और वास्तविक शहर। कर लिया स्वीकार। मनचाही सौगात, हो गया नया प्रभात। कार्यालय आने-जाने लगी, मेरे काम में हाथ बंटाने लगी। लगने लगे उसमें चार चाँद। विशिष्ट स्थान बनाया। या न देख सकूं, अंधकार से प्रकाश की ओर। चिन्तन और दर्शन करने दो। पाप और पुण्य का, अन्त से प्रारम्भ हो गया। नष्ट नहीं कर पाते, मेघों को, लुप्त हो जाते हैं मेघ। कठिनाइयाँ और परेशानियाँ, जिस पर न हुआ हो प्रहार, दोनों अटल हैं। सकारात्मक और नकारात्मक दृष्टिकोण, होता है गौरवान्वित, नहीं रहता उसका कोई इतिहास। कल भी चलता रहेगा। और कल भी रहेगा। अभावों में पनपते हैं अपराध। कर देती है लिप्त। लीला समाप्त हो, लोग करें हमें याद। सुख भी साथ-साथ होगा। परिवर्तन को निहार रहा है, बेच रहा है, दो आंसू भी नहीं बहा रहा है, समय पर नहीं कर रहा है, आज भी पछता रहा है। भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। करोड़ों का लेन-देन हो रहा है। भ्रष्टाचार करा रहा है। भ्रष्टाचार में लिप्त है। साकार हो जाएगा। सपना अपना पूरा हो।
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Giridih: जड़ी-बूटी की तलाश में गये वैद्य का शव शुक्रवार को जंगल में मिला. मृतक की पहचान गिरिडीह के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र निवासी झरी मियां के रूप में होने की बात सामने आयी है. मृतक की उम्र 65 से 70 के बीच बतायी जा रही है. हालांकि इसका अधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पायी है.
घटना गिरिडीह के डुमरी थाना क्षेत्र के अरवाटांड जंगल में हुई. जंगल में जिस हालात में मृतक का शव मिला, उससे जंगली हाथियों द्वारा मारे जाने की आशंका जतायी जा रही है. लेकिन डुमरी वन विभाग के रेंजर की मानें तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि झरी की मौत कैसे हुई.
जानकारी के अनुसार जंगल से गुजर रहे एक ग्रामीण की नजर पड़ने के बाद ग्रामीण ने शव होने की जानकारी डुमरी थाना पुलिस को दी. इस दौरान घटनास्थल पहुंचे डुमरी थाना पुलिस ने वन विभाग के रेंजर को घटनास्थल बुलाया. पुलिस और वन विभाग ने किसी प्रकार मृतक की पहचान की और परिजनों को शव मिलने की जानकारी दी.
जानकारी के अनुसार मृतक झरी मियां एक वैद्य थे और दो दिन पहले ही जड़ी-बूटी की तलाश में डुमरी के अरवाटांड जंगल आये थे. लेकिन दो दिन से वह लापता थे, तो दूसरी तरफ उनके लापता होने से परिजन भी परेशान थे.
परिजनों द्वारा झरी मियां की तलाश की जा रही थी. इसी बीच दो दिनों बाद मृतक का शव अरवाटांड जंगल से बरामद हुआ. इसके बाद वन विभाग और डुमरी पुलिस ज्वाइंट रूप से मामले की जांच में जुट गयी है.
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Giridih: जड़ी-बूटी की तलाश में गये वैद्य का शव शुक्रवार को जंगल में मिला. मृतक की पहचान गिरिडीह के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र निवासी झरी मियां के रूप में होने की बात सामने आयी है. मृतक की उम्र पैंसठ से सत्तर के बीच बतायी जा रही है. हालांकि इसका अधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पायी है. घटना गिरिडीह के डुमरी थाना क्षेत्र के अरवाटांड जंगल में हुई. जंगल में जिस हालात में मृतक का शव मिला, उससे जंगली हाथियों द्वारा मारे जाने की आशंका जतायी जा रही है. लेकिन डुमरी वन विभाग के रेंजर की मानें तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि झरी की मौत कैसे हुई. जानकारी के अनुसार जंगल से गुजर रहे एक ग्रामीण की नजर पड़ने के बाद ग्रामीण ने शव होने की जानकारी डुमरी थाना पुलिस को दी. इस दौरान घटनास्थल पहुंचे डुमरी थाना पुलिस ने वन विभाग के रेंजर को घटनास्थल बुलाया. पुलिस और वन विभाग ने किसी प्रकार मृतक की पहचान की और परिजनों को शव मिलने की जानकारी दी. जानकारी के अनुसार मृतक झरी मियां एक वैद्य थे और दो दिन पहले ही जड़ी-बूटी की तलाश में डुमरी के अरवाटांड जंगल आये थे. लेकिन दो दिन से वह लापता थे, तो दूसरी तरफ उनके लापता होने से परिजन भी परेशान थे. परिजनों द्वारा झरी मियां की तलाश की जा रही थी. इसी बीच दो दिनों बाद मृतक का शव अरवाटांड जंगल से बरामद हुआ. इसके बाद वन विभाग और डुमरी पुलिस ज्वाइंट रूप से मामले की जांच में जुट गयी है.
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बीटेक छात्रा शुभी की मौत को परिजन और दोस्त भले ही सुसाइड बता रहे हों, लेकिन कई ऐसे सवाल है जो उसकी मौत और दोस्तों के बयानों को संदिग्ध बना रहे हैं।
शुभी को अस्पताल ले जाने वाले दोस्तों का कहना है कि शुभी फंदे पर लटकी हुई थी। शव के भार के चलते अक्सर चुन्नी या रस्सी को काटकर शव को नीचे उतारा जाता है। सुबह जांच करने पहुंची पुलिस को चुन्नी कमरे में एंगल पर बंधी हुई मिली। वह कहीं से कटी नहीं थी। शुभी के गले में बंधी गांठ इतनी इतनी आसानी से कैसे खुल गई। कमरे में एक स्टूल मिला।
मोबाइल बरामद नहीं, परिजनों ने दी सुसाइड की शिकायत पुलिस ने शुभी की मौत का सबसे अहम सबूत उसका मोबाइल ही कब्जे में नहीं लिया है। ऐसे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामला हत्या का निकलता है तो जांच अटक सकती है। शिप्रा सनसिटी चौकी प्रभारी दुष्यंत राणा का कहना है कि परिजनों ने डिप्रेशन में छात्रा के सुसाइड करने की शिकायत दी है। किसी के खिलाफ शिकायत नहीं तो पुलिस जांच कैसे करे।
पढ़ने में अव्वल थी शुभी पुलिस का कहना है कि एग्जाम खराब होने से शुभी ने आत्महत्या की है, जबकि शुभी ने 2010 में सीबीएससी बोर्ड से अलीगढ़ स्थित कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल टॉप किया था। वर्ष 2012 में डीपीएस आरके पुरम से बायोलॉजी (साइंस) स्ट्रीम में 12वीं भी अच्छे अंक से पास की थी। वह पढ़ाई में अव्वल थी।
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बीटेक छात्रा शुभी की मौत को परिजन और दोस्त भले ही सुसाइड बता रहे हों, लेकिन कई ऐसे सवाल है जो उसकी मौत और दोस्तों के बयानों को संदिग्ध बना रहे हैं। शुभी को अस्पताल ले जाने वाले दोस्तों का कहना है कि शुभी फंदे पर लटकी हुई थी। शव के भार के चलते अक्सर चुन्नी या रस्सी को काटकर शव को नीचे उतारा जाता है। सुबह जांच करने पहुंची पुलिस को चुन्नी कमरे में एंगल पर बंधी हुई मिली। वह कहीं से कटी नहीं थी। शुभी के गले में बंधी गांठ इतनी इतनी आसानी से कैसे खुल गई। कमरे में एक स्टूल मिला। मोबाइल बरामद नहीं, परिजनों ने दी सुसाइड की शिकायत पुलिस ने शुभी की मौत का सबसे अहम सबूत उसका मोबाइल ही कब्जे में नहीं लिया है। ऐसे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामला हत्या का निकलता है तो जांच अटक सकती है। शिप्रा सनसिटी चौकी प्रभारी दुष्यंत राणा का कहना है कि परिजनों ने डिप्रेशन में छात्रा के सुसाइड करने की शिकायत दी है। किसी के खिलाफ शिकायत नहीं तो पुलिस जांच कैसे करे। पढ़ने में अव्वल थी शुभी पुलिस का कहना है कि एग्जाम खराब होने से शुभी ने आत्महत्या की है, जबकि शुभी ने दो हज़ार दस में सीबीएससी बोर्ड से अलीगढ़ स्थित कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल टॉप किया था। वर्ष दो हज़ार बारह में डीपीएस आरके पुरम से बायोलॉजी स्ट्रीम में बारहवीं भी अच्छे अंक से पास की थी। वह पढ़ाई में अव्वल थी।
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बॉलीवुड में एक के बाद एक हिट आइटम सॉन्ग देने वाली एक्ट्रेस नोरा फतेही जहां एक तरफ अपने डांस मूव्स से सभी को घायल करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहीं वहीं इन दिनों अभिनेत्री की कुछ स्टाइलिश तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर बवाल मचा रही हैं। बीते दिनों नोरा को इंडियन आइडल के सेट पर देखा गया था, जहां उन्होंने अपने स्टाइलिश लुक से हर किसी का ध्यान खूब आकर्षित किया।
नोरा ने स्पेशल गेस्ट अपीयरेंस के लिए अपने लुक में खासा बदलाव किया था। वेस्टर्न ड्रेस को छोड़ इस बार नोरा ने देसी ऑउटफिट पहनने का मन बनाया, जिसके लिए उन्होंने फेमस डिज़ाइनर JJ Valaya की डिज़ाइन की हुई फ़्लोरल साड़ी को पहना था।
नोरा फतेही का स्टाइल स्टेटमेंट हमेशा से ही पॉइंट पर रहा है। ऐसा ही कुछ हमें इस नीले रंग की फ्लोरल साड़ी के साथ भी देखने को मिला। अपने लुक में ग्लैमर का तड़का लगाने के लिए नोरा ने फीनिक्स गोल्ड प्लेटेड साड़ी को स्टाइलिश बेल्ट के साथ पेअर किया था। बात करें ओवरऑल लुक की तो सटल मेकअप के साथ स्मोकी लिप्स, साइड पार्टेड हेयर्स में नोरा का लुक एकदम कमाल है।
अपने लुक में एक्स्ट्रा ग्लैम जोड़ने के लिए नोरा ने अपनी स्टाइलिश साड़ी के साथ मैचिंग की जूलरी पहनी हुई थी, जिसे खासतौर पर फैशन लेबल Apala ने डिज़ाइन किया था। जी हां, दिवा ने स्टेटमेंट ज्वैलरी के साथ अपने आउटफिट को चुनना पसंद किया।
नोरा को करीब से फॉलो करने वाले लोग इस बात को अच्छे से जानते होंगे कि एक्ट्रेस अपने स्टाइल के साथ-साथ अपने कम्फर्ट का भी पूरा ख्याल रखती हैं। नोरा की यह ड्रेस कंफर्ट और स्टाइल का एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन थी, जो अभिनेत्री पर काफी फब रही थी।
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बॉलीवुड में एक के बाद एक हिट आइटम सॉन्ग देने वाली एक्ट्रेस नोरा फतेही जहां एक तरफ अपने डांस मूव्स से सभी को घायल करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहीं वहीं इन दिनों अभिनेत्री की कुछ स्टाइलिश तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर बवाल मचा रही हैं। बीते दिनों नोरा को इंडियन आइडल के सेट पर देखा गया था, जहां उन्होंने अपने स्टाइलिश लुक से हर किसी का ध्यान खूब आकर्षित किया। नोरा ने स्पेशल गेस्ट अपीयरेंस के लिए अपने लुक में खासा बदलाव किया था। वेस्टर्न ड्रेस को छोड़ इस बार नोरा ने देसी ऑउटफिट पहनने का मन बनाया, जिसके लिए उन्होंने फेमस डिज़ाइनर JJ Valaya की डिज़ाइन की हुई फ़्लोरल साड़ी को पहना था। नोरा फतेही का स्टाइल स्टेटमेंट हमेशा से ही पॉइंट पर रहा है। ऐसा ही कुछ हमें इस नीले रंग की फ्लोरल साड़ी के साथ भी देखने को मिला। अपने लुक में ग्लैमर का तड़का लगाने के लिए नोरा ने फीनिक्स गोल्ड प्लेटेड साड़ी को स्टाइलिश बेल्ट के साथ पेअर किया था। बात करें ओवरऑल लुक की तो सटल मेकअप के साथ स्मोकी लिप्स, साइड पार्टेड हेयर्स में नोरा का लुक एकदम कमाल है। अपने लुक में एक्स्ट्रा ग्लैम जोड़ने के लिए नोरा ने अपनी स्टाइलिश साड़ी के साथ मैचिंग की जूलरी पहनी हुई थी, जिसे खासतौर पर फैशन लेबल Apala ने डिज़ाइन किया था। जी हां, दिवा ने स्टेटमेंट ज्वैलरी के साथ अपने आउटफिट को चुनना पसंद किया। नोरा को करीब से फॉलो करने वाले लोग इस बात को अच्छे से जानते होंगे कि एक्ट्रेस अपने स्टाइल के साथ-साथ अपने कम्फर्ट का भी पूरा ख्याल रखती हैं। नोरा की यह ड्रेस कंफर्ट और स्टाइल का एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन थी, जो अभिनेत्री पर काफी फब रही थी।
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बाड़मेर में प्रधानमंत्री आवास निर्माण में लापरवाही बरतने पर 17 ग्राम विकास अधिकारी को 17 सीसीए के तहत चार्ज शीट जारी की गई। जिले की अलग-अलग ग्राम पंचायत के VDO को पीएम आवास में सौ फीसदी टारगेट पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके सुधार नहीं किया गया। इन ग्राम विकास अधिकारियों को 15 दिन में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए है।
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ओमप्रकाश विश्नोई के मुताबिक पीएम आवास स्कीम ग्रामीण के तहत कम प्रगति वाली ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों की मीटिंग लेकर कई मर्तबा सुधार करने के साथ-साथ सौ फीसदी टारगेट पूरा करने के निर्देश दिए गए। उनके मुताबिक 1 फरवरी को आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान पाया गया कि बाड़मेर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों की 23 ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बावजूद आवास निर्माण संबंधित कार्यो में तेजी नहीं लाई जा रही है। इसको गंभीरता से लेते हुए 23 ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों को राजस्थान सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण अपील, नियम 17 के तहत आरोप पत्र जारी किए गए है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्नोई ने बताया कि धनाउ पंचायत समिति की ग्राम पंचायत एकलिया धोरा के ग्राम विकास अधिकारी रोहिताश्च, जालीला के नारायण राम, धोरीमन्ना पंचायत समिति की ग्राम पंचायत कोठाला के दीपाराम, अरणियाली के दमाराम सुथार, चेनपुरा के अशोक कुमार, भीमथल के भोमाराम,मीठड़ा खुर्द के विरधाराम, फागलिया पंचायत समिति की ग्राम पंचायत के मीठड़ी के ग्राम विकास अधिकारी हाकमदान, भंवरिया के नरेन्द्र कुमार, गिड़ा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत दानपुरा के ओमप्रकाश,खारड़ा भारतसिंह की ग्राम विकास अधिकारी श्रीमती गैरो, गुड़ामालानी पंचायत समिति की ग्राम पंचायत अरटावा के अचलाराम चौधरी, रामजी का गोल फांटा के अचलाराम चौधरी, पायलाकला की तालबानियों की ढाणी के ग्राम विकास अधिकारी मालाराम, सेड़वा में पांधी का निवाण ग्राम विकास अधिकारी किशनलाल जाखड़, शिव में पोशाल के हनुमानसिंह मीणा, बालासर के गोपाल सिंह, सिणधरी में खरंटिया के भीयाराम, लुखों की ढाणी के पोकरराम एवं सिणधरी ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी भीयाराम, आडेल में बांड ग्राम पंचायत के जय किशन, मंगले की बेरी के हरीश कुमार, चौहटन ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी पेमाराम को 17 सीसीए के तहत चार्जशीट जारी की गई है।
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बाड़मेर में प्रधानमंत्री आवास निर्माण में लापरवाही बरतने पर सत्रह ग्राम विकास अधिकारी को सत्रह सीसीए के तहत चार्ज शीट जारी की गई। जिले की अलग-अलग ग्राम पंचायत के VDO को पीएम आवास में सौ फीसदी टारगेट पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके सुधार नहीं किया गया। इन ग्राम विकास अधिकारियों को पंद्रह दिन में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमप्रकाश विश्नोई के मुताबिक पीएम आवास स्कीम ग्रामीण के तहत कम प्रगति वाली ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों की मीटिंग लेकर कई मर्तबा सुधार करने के साथ-साथ सौ फीसदी टारगेट पूरा करने के निर्देश दिए गए। उनके मुताबिक एक फरवरी को आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान पाया गया कि बाड़मेर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों की तेईस ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बावजूद आवास निर्माण संबंधित कार्यो में तेजी नहीं लाई जा रही है। इसको गंभीरता से लेते हुए तेईस ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों को राजस्थान सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण अपील, नियम सत्रह के तहत आरोप पत्र जारी किए गए है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्नोई ने बताया कि धनाउ पंचायत समिति की ग्राम पंचायत एकलिया धोरा के ग्राम विकास अधिकारी रोहिताश्च, जालीला के नारायण राम, धोरीमन्ना पंचायत समिति की ग्राम पंचायत कोठाला के दीपाराम, अरणियाली के दमाराम सुथार, चेनपुरा के अशोक कुमार, भीमथल के भोमाराम,मीठड़ा खुर्द के विरधाराम, फागलिया पंचायत समिति की ग्राम पंचायत के मीठड़ी के ग्राम विकास अधिकारी हाकमदान, भंवरिया के नरेन्द्र कुमार, गिड़ा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत दानपुरा के ओमप्रकाश,खारड़ा भारतसिंह की ग्राम विकास अधिकारी श्रीमती गैरो, गुड़ामालानी पंचायत समिति की ग्राम पंचायत अरटावा के अचलाराम चौधरी, रामजी का गोल फांटा के अचलाराम चौधरी, पायलाकला की तालबानियों की ढाणी के ग्राम विकास अधिकारी मालाराम, सेड़वा में पांधी का निवाण ग्राम विकास अधिकारी किशनलाल जाखड़, शिव में पोशाल के हनुमानसिंह मीणा, बालासर के गोपाल सिंह, सिणधरी में खरंटिया के भीयाराम, लुखों की ढाणी के पोकरराम एवं सिणधरी ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी भीयाराम, आडेल में बांड ग्राम पंचायत के जय किशन, मंगले की बेरी के हरीश कुमार, चौहटन ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी पेमाराम को सत्रह सीसीए के तहत चार्जशीट जारी की गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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25 December 2022 Ka Rashifal आज का राशिफल २५ दिसंबर २०२२ का राशिफल । हिंदू धर्म में पंचांग और ग्रह नक्षत्रों को मानने वाले लोग राशिफल के बारे में भी बहुत अधिक उत्सुक रहते हैं। उनको जानना होता है कि आज का राशिफल कैसा होगा। दैनिक राशिफल हर दिन का घटनाओं का फलित होता है। किस राशि को आज के दिन कुछ खास सावधानी बरतनी होगी और किस राशि के लिए आज का दिन बेहद खास होने वाला है। आज का राशिफल (Daily Horoscope) ग्रह गोचर आधारित होता है। इसके आधार पर जातक के स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन व प्रेम, धन-धान्य और समृद्धि, परिवार एवं व्यवसाय तथा नौकरी से जुड़ी जानकारी होती है।
25 December 2022 Ka Mesh Rashifal आज का मेष राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि आज इस राशि के जातक कि आपका जीवनसाथी इससे बेहतर पहले कभी नहीं हुआ जातक को किस्मत से लाभ मिलेगा। कई योजनाओं पर काम करेंगे और आशातीत लाभ मिलेगा। सेहत का ख्याल रखें। संतान सुख प्रबल रहेगा। आपके स्टाइल को लोग फॉलो करेंगे। । परिवार के साथ सहयोग मिलेगा और नहीं भी। पत्नी का साथ मिलेगा लेकिन रिश्तों मे खटास होगी। नौकरी व बिजनेस पर किस्मत से लाभ मिलेगा।
- मेष राशि धन-संपत्ति ( Money) मेष राशि वाले जातक बिजनेस में घाटे की भरपाई भूत में किये गए निवेश से कर पाएंगे।
- मेष राशि सेहत ( Health )मेष राशि वाले जातक आज सेहत समान्य रहेगा । खान पान पर ध्यान दें।
- मेष राशि करियर (Career) मेष राशि वाले जातक पढ़ाई और नौकरी में कुछ अलग रचनात्मक और कलात्मक करेंगे।
- मेष राशि प्यार (Love) मेष राशि वाले आज जातक आपके संबंधों में प्यार ही प्यार भरा दिन रहेगा।
- मेष राशि परिवार ( Family) मेष राशि वाले आज जातकआप दोस्तों और माता-पिता का ख्याल रखें।
- मेष राशि पूर्वाभास (Forecast) मेष राशि वाले जातक ज जातक कही दूर यात्रा पर जा सकते हैं।
25 December 2022 Ka Vrish Rashifal आज का वृष राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि आज इस राशि के जातक सामाजिक स्तर पर मेलजोल बढ़ेगा। छुट्टी के दिन का पूरा आंनद लेंगे। परिवार के साथ पूरे दिन मौजमस्ती व मनोरंजन करेंगे। संतान का ख्याल रखें। बिजनेस पर ध्यान दें नहीं तो कोई धोखा दे सकता है। परिवार के सहयोग से नौकरी मिलेगा। उसे पूरी लगन से करें। ससुराल वाले परेशान करेंगे। उनकी बातों को नजरअंदाज करें।
- वृष राशि धन-संपत्ति ( Money) वृष राशि वाले जातक व्यवसायिक मामलों में थोड़ा सतर्क रहें। निवेश करने से बचे।
- वृष राशि सेहत ( Health )वृष राशि आज जातक स्वास्थ्य के लिए एक अच्छा दिन है, लेकिन थोड़ा सुस्त महसूस करेंगे।
- वृष राशि करियर (Career) वृष राशि वाले जातक आज पढाई -नौकरी के लिए समय सही है। दोस्तों के साथ शुरूआत कर सकते हैं।
- वृष राशि प्यार (Love) वृष राशि वाले जातक आज आप निजी संबंधों मे मधुरता बनाए रखें।
- वृष राशि परिवार ( Family) वृष राशि वाले जातक आज परिवार में कुछ निजी मामलों में परेशानी बढने से काम बढ़ेगा।
- वृष राशि पूर्वाभास (Forecast)वृष राशि वाले आज जातकसंबंधों में ब्रेकअप की स्थिति बनेगी।
25 December 2022 Ka Mithun Rashifal आज का मिथुन राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक के जीवन में कई विषयों में बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। अचानक से धन प्राप्ति के योग हे है। पिता के साथ संबंध बेहतर होंगे। धार्मिक कामों में रुचि बढ़ेगी। गलत कार्य करने से बचें। आय साधनों में बढ़ोतरी होगी। रुकी हुई योजनाओं पर फिर से काम शुरु हो सकता है। यात्राओं से लाभ प्राप्त होगा। जीवनसाथी का ख्याल रखें।
- मिथुन राशि धन-संपत्ति ( Money) मिथुन राशि वाले जातक आज पैतृक बिजनेस में लाभ मिलेगा।
- मिथुन राशि सेहत ( Health )मिथुन राशि वाले जातक आज जातक आप खुद की छोड़ संतान की सेहत को लेकर परेशान रहेंगे ।
- मिथुन राशि करियर (Career) मिथुन राशि वाले जातक आज नौकरीपेशा लोगों को अपनी नौकरी में अच्छे परिणाम मिलेंगे।
- मिथुन राशि प्यार (Love) मिथुन राशि वाले जातक आज साथी विवाद न करें अलगाव हो सकता है।
- मिथुन राशि परिवार ( Family) मिथुन राशि वाले जातक के परिवार में घर परिवार में शांति रहेगी। मेहमानों का आना जाना लगा रहेगा।
- मिथुन राशि पूर्वाभास (Forecast)मिथुन राशि आज जातकदोस्तों से मुलाकात दिन बना देगा।
25 December 2022 Ka Rashifal आज का कर्क राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक जातक को धन लाभ होगा। दूसरों के सहयोग से काम बनेगा। मेहनत से सम्मान मिलेगा। ससुराल से रिश्तों को मधुर बनाए रखने के लिए प्रयास करेंगे। खानपान की आदतों पर विशेष ध्यान दें। पदोन्नति के योग बनेंगे। ऑफिस में जातक का प्रदर्शन सबसे उत्तम रहेगा। इसका लाभ मिलेगा। बिजनेस में परिश्रम करना होगा।
- कर्क राशि धन-संपत्ति ( Money) कर्क राशि वाले जातक व्यवसाय अच्छा चलेगा और आय के स्रोत बढ़ेंगे।
- कर्क राशि सेहत ( Health )कर्क राशि वाले आज किडनी की समस्या है तो निदान मिलेगा।
- कर्क राशि करियर (Career) कर्क राशि वाले आज जातक की नौकरी में आपकी उन्नति संभव है, पढ़ाई में अच्छे परिणाम मिलेंगे।
- कर्क राशि प्यार (Love) कर्क राशि वाले जातक जातक की प्रेम प्रसंग में भी लड़ाई हो सकता है।
- कर्क राशि परिवार ( Family) कर्क राशि वाले जातक आपके परिवार या आस-पड़ोस कलह का माहौल रहेगा।
- कर्क राशि पूर्वाभास (Forecast)कर्क राशि जातक आज गाड़ी चलाते वक्त सचेत रहें।
25 December 2022 Ka Singh Rashifal आज का सिंह राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि आज का दिन इस राशि के जातक को धीरे धीरे लाभ मिलेगा। पारिवार में माहौल खुशनूमा रहेगा। जीवन साथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे। भाई बहनों का सहयोग मिलेगा। धार्मिक यात्रा पर जाने के लिए समय अनुकूल है। संतान का स्वास्थ्य बेहतर होगा। साझेदारी के कामों में सफलता मिलेगा। । भाग्य के सहयोग से लाभ मिलने वाला है।
- सिंह राशि धन-संपत्ति ( Money) सिंह राशि वाले आज जातक व्यवसाय में विरोधी काम बिगाड़ने का प्रयास करेंगे, सतर्क रहें।
- सिंह राशि सेहत ( Health )सिंह राशि वाले जातक आज स्वास्थ्य का ध्यान रखें, क्योंकि चोट लगने की संभावना है।
- सिंह राशि करियर (Career) सिंह राशि वाले जातक आज ऑफिस में जातक के काम की सराहना होगी और आप काम में अच्छा लाभ देने वाला प्रदर्शन करेंगे।
- सिंह राशि प्यार (Love) सिंह राशि को वाले आज जातक प्यार के मामले में अकेला महसूस करेंगे। जीवनसाथी के साथ दूरी बनी रहेगी।
- सिंह राशि परिवार ( Family) सिंह राशि वाले आज जातक किसी दूर के रिश्तेदार से मुलाकात कर सकते हैं। विवादित मामले से बचें।
- सिंह राशि पूर्वाभास (Forecast)सिंह राशि आज जातक को कोई पुरस्कार मिल सकता है।
25 December 2022 Ka Kanya Rashifal आज का कन्या राशिफल :आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक जातक के लिए समय अनुकूल नहीं है। धार्मिक काम में मन लगेगा। मेहनत से धन लाभ होगा। बिजनेस में भी परिश्रम से ही लाभ मिलने वाला है। मां की सेहत के साथ खुद की सेहत पर भी ध्यान दें। नौकरी पर भी परिश्रम से ही लाभ मिलने वाला है।
- कन्या राशि सेहत ( Health )कन्या राशि के जातक सेहत का ख्याल रखें किसी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
- कन्या राशि करियर (Career) कन्या राशि वाले आज व्यापार में धनलाभ होने की पूरी संभावना है।
- कन्या राशि प्यार (Love) कन्या राशि वाले आज जातक युवाओं को मनपसंद रोमांटिक साथी मिलेगा।
- कन्या राशि परिवार ( Family) कन्या राशि वाले आज जातक घर में वाद-विवाद से बचेंगे तो अच्छा रहेगा।
- कन्या राशि का उपाय ( Remedy) कन्या राशि के जातक आज जरुरतमंदों को कुछ पैसे दें या खाना खिलाएं और धर्म-कर्म करें।
- कन्या राशि पूर्वाभास (Forecast)कन्या राशि वाले आज जातक का विवाह तय हो सकता है।
25 December 2022 Ka Tula Rashifal आज का तुला राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक जातक रुके हुए काम पूरे होंगे। ऑफिस में काम की वजह से जिम्मेदारियां व सफलताएं मिल सकती है। इससे परेशानियों का समाधान मिलेगा। यह समय धन लाभ और प्रतिष्ठा दोनों देगा। परिवार में मनमुटाव के योग बन रहे है। पिता की संपत्ति के विवाद बढ़ सकता है। किसी दोस्त या परिवार के सदस्य से उपहार मिल सकता है।
- तुला राशि धन-संपत्ति ( Money) तुला राशि वाले जातक आज आर्थिक मामलों में चंद्रमा की वजह से सबकुछ समान्य रहेगा।
- तुला राशि सेहत ( Health )तुला राशि वाले जातक आज सेहत का ख्याल रखें और खानपान में संतुलन बनायें।
- तुला राशि करियर (Career) तुला राशि वाले जातक नौकरी व व्यवसाय में लाभप्रद स्थिति रहेगी। पढाई में सफलता मिलेगी।
- तुला राशि प्यार (Love) तुला राशि वाले आज का दिन संबंधों में क्रोध व जिद को ना आने दें। नहीं तो अलगाव हो सकता है।
- तुला राशि परिवार ( Family) तुला राशि वाले जातक पिता की सेहत को लेकर परेशान रहेंगे। धार्मिक काम में मन लगेगा।
- तुला राशि का उपाय ( Remedy) तुला राशि के जातक पशु-पक्षियों को चारा दें और बेसहारों की मदद करें। ।
- तुला राशि पूर्वाभास (Forecast)तुला राशि वालों आज जातक सामाजिक सरोकार से जुड़ेंगे।
- वृश्चिक राशि धन-संपत्ति ( Money) वृश्चिक राशि वाले आज धन लाभ होगा कारोबार अच्छा चलेगा।
- वृश्चिक राशि सेहत ( Health )वृश्चिक राशि वाले आज जातक माइग्रेन से पूरा दिन बोझिल बन जाएगा।
- वृश्चिक राशि करियर (Career) वृश्चिक राशि वाले जातक आज नौकरी में राजनीति का शिकार होने की संभावना बन रही है।
- वृश्चिक राशि प्यार (Love) वृश्चिक राशि वाले आपका आज जातक साथी के साथ घूमने का प्लान बनाएंगे।
- वृश्चिक राशि परिवार ( Family) वृश्चिक राशि वाले जातक आज अपनी संतान के कारण समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ।
- वृश्चिक राशि का उपाय ( Remedy) वृश्चिक राशि के जातक आज माखन-मिश्री का भोग कान्हा को लगाएं।
- वृश्चिक राशि पूर्वाभास (Forecast)वृश्चिक राशि वाले आज पत्नी के लिए ज्वैलरी खरीदेंगे।
25 December 2022 Ka Dhanu Rashifal आज का धनु राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक सेहत सही रहेगा। दिया हुआ धन मिलेगा। धार्मिक कामों के आयोजन पर खर्च होगा। । आत्मविश्वास बढेगा। किसी यात्रा पर जाने के योग है। ऑफिस में आपके काम की सराहना होगा। निवेश भविष्य के लिए लाभप्रद है। परिवार से प्यार मिलेगा। संतान की सेहत का ख्याल रखें। बिजनेस में जातक के व्यवहार की सब तारीफ करेंगे।
- धनु राशि धन-संपत्ति ( Money) धनु राशि वाले आज जातक कारोबार के लिए दिन अनुकूल है।
- धनु राशि सेहत ( Health )धनु राशि वाले जातक आज सेहत को लेकर परेशान रहेंगे।
- धनु राशि करियर (Career) धनु राशि वाले जातक आज नकारात्मक विचार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक परिणाम देंगे। सावधान रहें।
- धनु राशि प्यार (Love) धनु राशि वाले जातक आज प्रेम नौकरी और शिक्षण के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे।
- धनु राशि परिवार ( Family) धनु राशि वाले जातक आज पारिवारिक माहौल सुखद और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।
- धनु राशि का उपाय ( Remedy) धनु राशि के जातक सूर्य को जल दें।
- धनु राशि पूर्वाभास (Forecast)धनु राशि वाले जातक दोस्त की मदद के लिए आगे आएंगे।
25 December 2022 Ka Makar Rashifal आज का मकर राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि आज इस राशि के जातक पैसों के मामले में मजबूत स्थिति में होंगे। नौकरी में बहुत सारे काम और ज़िम्मेदारियां होंगी जो तनाव के स्तर और भ्रम को बढ़ाएंगी। जातक का अपने पिता के साथ मनमुटाव हो सकता है और जातक संतानों को लेकर परेशान रहेंगे। सफलता न मिलने से पढने वाले जातक दुखी हो सकते हैं।
- मकर राशि धन-संपत्ति ( Money) मकर राशि वाले आज निवेश के लिए इंतजार करना होगा, वरना नुकसान तय है।
- मकर राशि सेहत ( Health )मकर राशि वाले आज जातक मानसिक तनाव बढ़ेगा। मां की सेहत का ख्याल रखें।
- मकर राशि करियर (Career) मकर राशि वाले आज नौकरी में लाभ मिलेगा और सरकारी काम बनेंगे।
- मकर राशि प्यार (Love) मकर राशि वाले आज प्रेम-संंबंध में जातक को साथी से धोखा मिलेगा।
- मकर राशि परिवार ( Family) मकर राशि वाले आज जातक का माता-पिता से अनबन हो सकती है।
- मकर राशि का उपाय ( Remedy) मकर राशि के जातक शिव भगवान का रूद्राभिषेक करवा सकते हैं।
- मकर राशि पूर्वाभास (Forecast)मकर राशि वाले जातक आज घर खरीदने की योजना सकार होगी।
25 December 2022 Ka Kumbh Rashifal आज का कुंभ राशिफल : आज का कुंभ राशिफल बताता है कि आज इस राशि जातक बहुत ऊर्जावान रहेंगे। शुरुआत में कुछ भ्रम और तनाव हो सकते हैं लेकिन आप उन को समय और अपनी क्षमताओं के साथ दूर कर लेंगे। जातक का माता या भाइयों से तनाव की स्थिति हो सकती है। निवेश के कारण लाभ होगा। आर्थिक समस्याएं हल हो जाएंगी।
- कुंभ राशि धन-संपत्ति ( Money) कुंभ राशि वाले आज जातक व्यापार में आशातीत सफलता मिलने की संभावना बन रही है।
- कुंभ राशि सेहत ( Health )कुंभ राशि वाले आज बढ़ती सर्दी में बीमारी इंतजार कर रही है।
- कुंभ राशि करियर (Career) कुंभ राशि वाले आज जातक अगर नौकरीपेशा है तो एक नया पद मिल सकता है।
- कुंभ राशि प्यार (Love) कुंभ राशि वाले जातक शादी के लिए मनचाहा जीवनसाथी मिलेगा।
- कुंभ राशि परिवार ( Family) कुंभ राशि वाले आज जातक आपकी खूबसूरती रिश्तेदारों में चर्चा का विषय रहेगा।
- कुंभ राशि का उपाय ( Remedy) कुंभ राशि वाले आज जातक को हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।
- कुंभ राशि पूर्वाभास (Forecast)कुंभ राशि वाले आज जातक गाड़ी खरीदने के योग बन रहे हैँ।
25 December 2022 Ka Meen Rashifal आज का मीन राशिफल : आज का मीन राशिफल बताता है कि आज इस राशि के जातक भाइयों की वजह से परेशान रहेंगे। नौकरी और व्यवसाय में चीजें बेहतरीन होंगी। दोपहर बाद जातक के खर्चे बढ़ेंगे। धार्मिक कार्यों पर खर्च कर सकते हैं। जातक जीवन साथी के लिए कुछ खरीद सकते हैं। जातक को माता-पिता का आशीर्वाद मिलेगा।
- मीन राशि धन-संपत्ति ( Money) मीन राशि आज जातक व्यवसायिक मामलों में नुकसान तय है।
- मीन राशि सेहत ( Health )मीन राशि के जातक आज बीमार रहेंगे और मां की कमी खलेगी।
- मीन राशि करियर (Career) मीन राशि वाले आज जातक को प्रमोशन मिल सकता है और काम का बोझ भी बढ़ सकता है।
- मीन राशि प्यार (Love) मीन राशि वाले आज जातक आपको पुराने प्यार की याद सताएगी, लेकिन अकेले रहने के निर्णय पर अटल रहेंगे।
- मीन राशि परिवार ( Family) मीन राशि वाले आज जातक पारिवारिक मामलों में निस्वार्थ काम करेंगे।
- मीन राशि का उपाय ( Remedy) मीन राशि वाले आज शिव मंदिर शिव ताडंव का जाप करें।
- मीन राशि पूर्वाभास (Forecast) मीन राशि के जातक जातक को विदेश से नौकरी का ऑफर मिल सकता है।
कल का मेष राशिफल 26 दिसंबर 2022 ( Aries Horoscope Tomorrow) कल का मेष राशिफल इस राशि के जातक मानसिक असन्तोष रहेगा। नौकरी में इच्छाविरुद्ध कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है। मेहनत अधिक रहेगी।
कल का वृष राशिफल 26 दिसंबर 2022 (Taurus Horoscope Tomorrow) कल का वृष राशिफल के अनुसार कल का दिन इस राशि के जातक वाणी में कठोरता का प्रभाव रहेगा। बातचीत में सन्तुलन बनाए रखें। अध्ययन में रुचि रहेगी। संचित धन में कमी आ सकती है।
कल का मिथुन राशिफल 26 दिसंबर 2022 (Gemini Horoscope Tomorrow) मिथुन राशिफल की कल की भविष्यवाणी इस राशि के जातक मन में निराशा एवं असन्तोष के भाव रहेंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। रहन-सहन कष्टमय रहेगा।
कल का कर्क राशिफल 26 दिसंबर 2022 (Leo Horoscope Tomorrow) कर्क राशिफल की 26 दिसंबर 2022 की गणना के अनुसार इस राशि के जातक मानसिक शान्ति रहेगी। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षा एवं साक्षात्कारादि कार्यों में सफलता मिलेगी।
कल का सिंह राशिफल 26 दिसंबर 2022 (Leo Horoscope Tomorrow) सिंह राशिफल की 26 दिसंबर 2022 की गणना के अनुसार इस राशि के जातक आत्मसंयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। परिवार में आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं। सन्तान सुख में वृद्धि होगी। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी।
कल का कन्या राशिफल 26 दिसंबर 2022 ( Virgo Horoscope Tomorrow) 26 दिसंबर 2022 की भविष्यवाणी के अनुसार कन्या राशिफल जातक पैतृक सम्पत्ति का लाभ हो सकता है। पिता का सहयोग मिलेगा। भौतिक सुखों में वृद्धि होगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा।
कल का तुला राशिफल 26 दिसंबर 2022 ( Libra Horoscope Tomorrow) तुला राशिफल की 26 दिसंबर की गणना के अनुसार कुछ जातक आशा-निराशा के मिश्रित के मिश्रित भाव मन में रहेंगे। भौतिक सुखों के विस्तार पर खर्च बढ़ सकते हैं। यात्रा लाभप्रद रहेगी। परिश्रम की अधिकता रहेगी।
कल का वृश्चिक राशिफल 26 दिसंबर 2022 (Scorpio Horoscope Tomorrow ) 26 दिसंबर का वृश्चिक राशिफल की गणना के अनुसार जातक नौकरी में स्थान परिवर्तन सम्भव है। परिवार से दूर जाना हो सकता है। धैर्यशीलता में कमी आयेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा।
कल का धनु राशिफल 26 दिसंबर 2022 (Sagittarius Horoscope Tomorrow) कल का धनु राशिफल की गणना के अनुसार जातक क्रोध की अधिकता रहेगी। बातचीत में संयत रहें। आय की स्थिति में सुधार होगा। पिता से मतभेद हो सकता है।
कल का मकर राशिफल 26 दिसंबर 2022 ( Capricorn Horoscope Tomorrow) कल का मकर राशिफल की गणना बताती है कि जातक जीवनसाथी को स्वास्थ्य विकार रहेंगे। स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहेगा। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। कार्यों में कठिनाइयां आएंगी।
कल का कुंभ राशिफल 26 दिसंबर 2022 ( Aquarius Horoscope Tomorrow) कुंभ राशिफल की कल की भविष्यवाणी जातक शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। लेकिन आत्मसंयत रहें। खर्चों की अधिकता रहेगी।
कल का मीन राशिफल 26 दिसंबर 2022 (Pisces Horoscope Tomorrow) मीन राशिफल की 26 दिसंबर 2022 की गणना के अनुसार जातक पारिवारिक समस्याएं रहेंगी। आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं। घर-परिवार में धार्मिक कार्य होंगे। भवन सुख में वृद्धि होगी।
क्या राशिफल सही होता है? हम जो भी राशिफल देते है वो सामान्य दैनिक राशिफल ग्रहों की सटिक गणना पर आधारित होता है। जो नाम के आधार पर होता है। लेकिन दुनियाभर में करोड़ों लोगों के एक नाम और एक राशियां होती है तो जरूरी नहीं की फलादेश भी एक हो। यहां जो राशिफल दी जाती है वह सामान्य भविष्यफल है। किसी भी जातक को अपने भविष्य का सही फलादेश जन्म राशि नाम और जन्म तारीख और कुंडली के लग्न में स्थित ग्रह और राशि के आधार पर सटीक जानकारी ले सकते हैं।
राशिफल क्या होता है?
ज्योतिष विज्ञान की वह विधा जिसमें जातक के नाम राशि और ग्रहों के गोचरी की स्थिति को देखकर भविष्यवाणी की जाती है, उसे राशिफल कहते हैं। राशिफल के जरिए हम दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक घटनाओं की जानकारी लेते हैं। इसके लिए हर दिन 9 ग्रहों और 27 नक्षत्रों की गणना और चंद्रमा की राशि में स्थिति के आधार पर 12 राशियों की भविष्यवाणी की जाती है। ये 12 राशियां इस प्रकार है- मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ व मीन। इनके फलादेश को राशिफल कहते हैं। क्या राशिफल नाम के अनुसार है ?
न्यूजट्रैक. कॉम पर हम हर रोज दैनिक राशिफल देते हैं। जो नाम पर आधारित होता है। यह कुंडली में लग्न के अनुसार जन्म राशि होती है, लेकिन जिसे अपनी जन्मराशि का ज्ञान न हो वह अपने नाम से भी दैनिक फलादेश देख सकते हैं।
राशिफल की गणना किस पर आधारित है?
जो दैनिक राशिफल दी जाती है वह चंद्र राशि पर आधारित होती है। वैसे तो बहुत से लोगों की एक राशि होती है, इसलिए दैनिक राशिफल एक सामान्य भविष्यवाणी होती है। अगर अपने भविष्य की सटीक जानकारी जाननी हो तो आप कुंडली में स्थित ग्रह-गोचर स्थिति, लग्न भाव, करण, योग, नक्षत्र और ग्रहों की युति को जानकर किसी भी योग्य ज्योतिषविद से पता लगा सकते है। लेकिन इसके लिए जरूरी है आपको जन्म तारीख, स्थान और समय का सही पता तो सही फलादेश मिलेगा।
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पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Rashifal आज का राशिफल पच्चीस दिसंबर दो हज़ार बाईस का राशिफल । हिंदू धर्म में पंचांग और ग्रह नक्षत्रों को मानने वाले लोग राशिफल के बारे में भी बहुत अधिक उत्सुक रहते हैं। उनको जानना होता है कि आज का राशिफल कैसा होगा। दैनिक राशिफल हर दिन का घटनाओं का फलित होता है। किस राशि को आज के दिन कुछ खास सावधानी बरतनी होगी और किस राशि के लिए आज का दिन बेहद खास होने वाला है। आज का राशिफल ग्रह गोचर आधारित होता है। इसके आधार पर जातक के स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन व प्रेम, धन-धान्य और समृद्धि, परिवार एवं व्यवसाय तथा नौकरी से जुड़ी जानकारी होती है। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Mesh Rashifal आज का मेष राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि आज इस राशि के जातक कि आपका जीवनसाथी इससे बेहतर पहले कभी नहीं हुआ जातक को किस्मत से लाभ मिलेगा। कई योजनाओं पर काम करेंगे और आशातीत लाभ मिलेगा। सेहत का ख्याल रखें। संतान सुख प्रबल रहेगा। आपके स्टाइल को लोग फॉलो करेंगे। । परिवार के साथ सहयोग मिलेगा और नहीं भी। पत्नी का साथ मिलेगा लेकिन रिश्तों मे खटास होगी। नौकरी व बिजनेस पर किस्मत से लाभ मिलेगा। - मेष राशि धन-संपत्ति मेष राशि वाले जातक बिजनेस में घाटे की भरपाई भूत में किये गए निवेश से कर पाएंगे। - मेष राशि सेहत मेष राशि वाले जातक आज सेहत समान्य रहेगा । खान पान पर ध्यान दें। - मेष राशि करियर मेष राशि वाले जातक पढ़ाई और नौकरी में कुछ अलग रचनात्मक और कलात्मक करेंगे। - मेष राशि प्यार मेष राशि वाले आज जातक आपके संबंधों में प्यार ही प्यार भरा दिन रहेगा। - मेष राशि परिवार मेष राशि वाले आज जातकआप दोस्तों और माता-पिता का ख्याल रखें। - मेष राशि पूर्वाभास मेष राशि वाले जातक ज जातक कही दूर यात्रा पर जा सकते हैं। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Vrish Rashifal आज का वृष राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि आज इस राशि के जातक सामाजिक स्तर पर मेलजोल बढ़ेगा। छुट्टी के दिन का पूरा आंनद लेंगे। परिवार के साथ पूरे दिन मौजमस्ती व मनोरंजन करेंगे। संतान का ख्याल रखें। बिजनेस पर ध्यान दें नहीं तो कोई धोखा दे सकता है। परिवार के सहयोग से नौकरी मिलेगा। उसे पूरी लगन से करें। ससुराल वाले परेशान करेंगे। उनकी बातों को नजरअंदाज करें। - वृष राशि धन-संपत्ति वृष राशि वाले जातक व्यवसायिक मामलों में थोड़ा सतर्क रहें। निवेश करने से बचे। - वृष राशि सेहत वृष राशि आज जातक स्वास्थ्य के लिए एक अच्छा दिन है, लेकिन थोड़ा सुस्त महसूस करेंगे। - वृष राशि करियर वृष राशि वाले जातक आज पढाई -नौकरी के लिए समय सही है। दोस्तों के साथ शुरूआत कर सकते हैं। - वृष राशि प्यार वृष राशि वाले जातक आज आप निजी संबंधों मे मधुरता बनाए रखें। - वृष राशि परिवार वृष राशि वाले जातक आज परिवार में कुछ निजी मामलों में परेशानी बढने से काम बढ़ेगा। - वृष राशि पूर्वाभास वृष राशि वाले आज जातकसंबंधों में ब्रेकअप की स्थिति बनेगी। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Mithun Rashifal आज का मिथुन राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक के जीवन में कई विषयों में बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। अचानक से धन प्राप्ति के योग हे है। पिता के साथ संबंध बेहतर होंगे। धार्मिक कामों में रुचि बढ़ेगी। गलत कार्य करने से बचें। आय साधनों में बढ़ोतरी होगी। रुकी हुई योजनाओं पर फिर से काम शुरु हो सकता है। यात्राओं से लाभ प्राप्त होगा। जीवनसाथी का ख्याल रखें। - मिथुन राशि धन-संपत्ति मिथुन राशि वाले जातक आज पैतृक बिजनेस में लाभ मिलेगा। - मिथुन राशि सेहत मिथुन राशि वाले जातक आज जातक आप खुद की छोड़ संतान की सेहत को लेकर परेशान रहेंगे । - मिथुन राशि करियर मिथुन राशि वाले जातक आज नौकरीपेशा लोगों को अपनी नौकरी में अच्छे परिणाम मिलेंगे। - मिथुन राशि प्यार मिथुन राशि वाले जातक आज साथी विवाद न करें अलगाव हो सकता है। - मिथुन राशि परिवार मिथुन राशि वाले जातक के परिवार में घर परिवार में शांति रहेगी। मेहमानों का आना जाना लगा रहेगा। - मिथुन राशि पूर्वाभास मिथुन राशि आज जातकदोस्तों से मुलाकात दिन बना देगा। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Rashifal आज का कर्क राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक जातक को धन लाभ होगा। दूसरों के सहयोग से काम बनेगा। मेहनत से सम्मान मिलेगा। ससुराल से रिश्तों को मधुर बनाए रखने के लिए प्रयास करेंगे। खानपान की आदतों पर विशेष ध्यान दें। पदोन्नति के योग बनेंगे। ऑफिस में जातक का प्रदर्शन सबसे उत्तम रहेगा। इसका लाभ मिलेगा। बिजनेस में परिश्रम करना होगा। - कर्क राशि धन-संपत्ति कर्क राशि वाले जातक व्यवसाय अच्छा चलेगा और आय के स्रोत बढ़ेंगे। - कर्क राशि सेहत कर्क राशि वाले आज किडनी की समस्या है तो निदान मिलेगा। - कर्क राशि करियर कर्क राशि वाले आज जातक की नौकरी में आपकी उन्नति संभव है, पढ़ाई में अच्छे परिणाम मिलेंगे। - कर्क राशि प्यार कर्क राशि वाले जातक जातक की प्रेम प्रसंग में भी लड़ाई हो सकता है। - कर्क राशि परिवार कर्क राशि वाले जातक आपके परिवार या आस-पड़ोस कलह का माहौल रहेगा। - कर्क राशि पूर्वाभास कर्क राशि जातक आज गाड़ी चलाते वक्त सचेत रहें। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Singh Rashifal आज का सिंह राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि आज का दिन इस राशि के जातक को धीरे धीरे लाभ मिलेगा। पारिवार में माहौल खुशनूमा रहेगा। जीवन साथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे। भाई बहनों का सहयोग मिलेगा। धार्मिक यात्रा पर जाने के लिए समय अनुकूल है। संतान का स्वास्थ्य बेहतर होगा। साझेदारी के कामों में सफलता मिलेगा। । भाग्य के सहयोग से लाभ मिलने वाला है। - सिंह राशि धन-संपत्ति सिंह राशि वाले आज जातक व्यवसाय में विरोधी काम बिगाड़ने का प्रयास करेंगे, सतर्क रहें। - सिंह राशि सेहत सिंह राशि वाले जातक आज स्वास्थ्य का ध्यान रखें, क्योंकि चोट लगने की संभावना है। - सिंह राशि करियर सिंह राशि वाले जातक आज ऑफिस में जातक के काम की सराहना होगी और आप काम में अच्छा लाभ देने वाला प्रदर्शन करेंगे। - सिंह राशि प्यार सिंह राशि को वाले आज जातक प्यार के मामले में अकेला महसूस करेंगे। जीवनसाथी के साथ दूरी बनी रहेगी। - सिंह राशि परिवार सिंह राशि वाले आज जातक किसी दूर के रिश्तेदार से मुलाकात कर सकते हैं। विवादित मामले से बचें। - सिंह राशि पूर्वाभास सिंह राशि आज जातक को कोई पुरस्कार मिल सकता है। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Kanya Rashifal आज का कन्या राशिफल :आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक जातक के लिए समय अनुकूल नहीं है। धार्मिक काम में मन लगेगा। मेहनत से धन लाभ होगा। बिजनेस में भी परिश्रम से ही लाभ मिलने वाला है। मां की सेहत के साथ खुद की सेहत पर भी ध्यान दें। नौकरी पर भी परिश्रम से ही लाभ मिलने वाला है। - कन्या राशि सेहत कन्या राशि के जातक सेहत का ख्याल रखें किसी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। - कन्या राशि करियर कन्या राशि वाले आज व्यापार में धनलाभ होने की पूरी संभावना है। - कन्या राशि प्यार कन्या राशि वाले आज जातक युवाओं को मनपसंद रोमांटिक साथी मिलेगा। - कन्या राशि परिवार कन्या राशि वाले आज जातक घर में वाद-विवाद से बचेंगे तो अच्छा रहेगा। - कन्या राशि का उपाय कन्या राशि के जातक आज जरुरतमंदों को कुछ पैसे दें या खाना खिलाएं और धर्म-कर्म करें। - कन्या राशि पूर्वाभास कन्या राशि वाले आज जातक का विवाह तय हो सकता है। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Tula Rashifal आज का तुला राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक जातक रुके हुए काम पूरे होंगे। ऑफिस में काम की वजह से जिम्मेदारियां व सफलताएं मिल सकती है। इससे परेशानियों का समाधान मिलेगा। यह समय धन लाभ और प्रतिष्ठा दोनों देगा। परिवार में मनमुटाव के योग बन रहे है। पिता की संपत्ति के विवाद बढ़ सकता है। किसी दोस्त या परिवार के सदस्य से उपहार मिल सकता है। - तुला राशि धन-संपत्ति तुला राशि वाले जातक आज आर्थिक मामलों में चंद्रमा की वजह से सबकुछ समान्य रहेगा। - तुला राशि सेहत तुला राशि वाले जातक आज सेहत का ख्याल रखें और खानपान में संतुलन बनायें। - तुला राशि करियर तुला राशि वाले जातक नौकरी व व्यवसाय में लाभप्रद स्थिति रहेगी। पढाई में सफलता मिलेगी। - तुला राशि प्यार तुला राशि वाले आज का दिन संबंधों में क्रोध व जिद को ना आने दें। नहीं तो अलगाव हो सकता है। - तुला राशि परिवार तुला राशि वाले जातक पिता की सेहत को लेकर परेशान रहेंगे। धार्मिक काम में मन लगेगा। - तुला राशि का उपाय तुला राशि के जातक पशु-पक्षियों को चारा दें और बेसहारों की मदद करें। । - तुला राशि पूर्वाभास तुला राशि वालों आज जातक सामाजिक सरोकार से जुड़ेंगे। - वृश्चिक राशि धन-संपत्ति वृश्चिक राशि वाले आज धन लाभ होगा कारोबार अच्छा चलेगा। - वृश्चिक राशि सेहत वृश्चिक राशि वाले आज जातक माइग्रेन से पूरा दिन बोझिल बन जाएगा। - वृश्चिक राशि करियर वृश्चिक राशि वाले जातक आज नौकरी में राजनीति का शिकार होने की संभावना बन रही है। - वृश्चिक राशि प्यार वृश्चिक राशि वाले आपका आज जातक साथी के साथ घूमने का प्लान बनाएंगे। - वृश्चिक राशि परिवार वृश्चिक राशि वाले जातक आज अपनी संतान के कारण समस्या का सामना करना पड़ सकता है। । - वृश्चिक राशि का उपाय वृश्चिक राशि के जातक आज माखन-मिश्री का भोग कान्हा को लगाएं। - वृश्चिक राशि पूर्वाभास वृश्चिक राशि वाले आज पत्नी के लिए ज्वैलरी खरीदेंगे। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Dhanu Rashifal आज का धनु राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक सेहत सही रहेगा। दिया हुआ धन मिलेगा। धार्मिक कामों के आयोजन पर खर्च होगा। । आत्मविश्वास बढेगा। किसी यात्रा पर जाने के योग है। ऑफिस में आपके काम की सराहना होगा। निवेश भविष्य के लिए लाभप्रद है। परिवार से प्यार मिलेगा। संतान की सेहत का ख्याल रखें। बिजनेस में जातक के व्यवहार की सब तारीफ करेंगे। - धनु राशि धन-संपत्ति धनु राशि वाले आज जातक कारोबार के लिए दिन अनुकूल है। - धनु राशि सेहत धनु राशि वाले जातक आज सेहत को लेकर परेशान रहेंगे। - धनु राशि करियर धनु राशि वाले जातक आज नकारात्मक विचार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक परिणाम देंगे। सावधान रहें। - धनु राशि प्यार धनु राशि वाले जातक आज प्रेम नौकरी और शिक्षण के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे। - धनु राशि परिवार धनु राशि वाले जातक आज पारिवारिक माहौल सुखद और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। - धनु राशि का उपाय धनु राशि के जातक सूर्य को जल दें। - धनु राशि पूर्वाभास धनु राशि वाले जातक दोस्त की मदद के लिए आगे आएंगे। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Makar Rashifal आज का मकर राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि आज इस राशि के जातक पैसों के मामले में मजबूत स्थिति में होंगे। नौकरी में बहुत सारे काम और ज़िम्मेदारियां होंगी जो तनाव के स्तर और भ्रम को बढ़ाएंगी। जातक का अपने पिता के साथ मनमुटाव हो सकता है और जातक संतानों को लेकर परेशान रहेंगे। सफलता न मिलने से पढने वाले जातक दुखी हो सकते हैं। - मकर राशि धन-संपत्ति मकर राशि वाले आज निवेश के लिए इंतजार करना होगा, वरना नुकसान तय है। - मकर राशि सेहत मकर राशि वाले आज जातक मानसिक तनाव बढ़ेगा। मां की सेहत का ख्याल रखें। - मकर राशि करियर मकर राशि वाले आज नौकरी में लाभ मिलेगा और सरकारी काम बनेंगे। - मकर राशि प्यार मकर राशि वाले आज प्रेम-संंबंध में जातक को साथी से धोखा मिलेगा। - मकर राशि परिवार मकर राशि वाले आज जातक का माता-पिता से अनबन हो सकती है। - मकर राशि का उपाय मकर राशि के जातक शिव भगवान का रूद्राभिषेक करवा सकते हैं। - मकर राशि पूर्वाभास मकर राशि वाले जातक आज घर खरीदने की योजना सकार होगी। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Kumbh Rashifal आज का कुंभ राशिफल : आज का कुंभ राशिफल बताता है कि आज इस राशि जातक बहुत ऊर्जावान रहेंगे। शुरुआत में कुछ भ्रम और तनाव हो सकते हैं लेकिन आप उन को समय और अपनी क्षमताओं के साथ दूर कर लेंगे। जातक का माता या भाइयों से तनाव की स्थिति हो सकती है। निवेश के कारण लाभ होगा। आर्थिक समस्याएं हल हो जाएंगी। - कुंभ राशि धन-संपत्ति कुंभ राशि वाले आज जातक व्यापार में आशातीत सफलता मिलने की संभावना बन रही है। - कुंभ राशि सेहत कुंभ राशि वाले आज बढ़ती सर्दी में बीमारी इंतजार कर रही है। - कुंभ राशि करियर कुंभ राशि वाले आज जातक अगर नौकरीपेशा है तो एक नया पद मिल सकता है। - कुंभ राशि प्यार कुंभ राशि वाले जातक शादी के लिए मनचाहा जीवनसाथी मिलेगा। - कुंभ राशि परिवार कुंभ राशि वाले आज जातक आपकी खूबसूरती रिश्तेदारों में चर्चा का विषय रहेगा। - कुंभ राशि का उपाय कुंभ राशि वाले आज जातक को हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। - कुंभ राशि पूर्वाभास कुंभ राशि वाले आज जातक गाड़ी खरीदने के योग बन रहे हैँ। पच्चीस दिसंबरember दो हज़ार बाईस Ka Meen Rashifal आज का मीन राशिफल : आज का मीन राशिफल बताता है कि आज इस राशि के जातक भाइयों की वजह से परेशान रहेंगे। नौकरी और व्यवसाय में चीजें बेहतरीन होंगी। दोपहर बाद जातक के खर्चे बढ़ेंगे। धार्मिक कार्यों पर खर्च कर सकते हैं। जातक जीवन साथी के लिए कुछ खरीद सकते हैं। जातक को माता-पिता का आशीर्वाद मिलेगा। - मीन राशि धन-संपत्ति मीन राशि आज जातक व्यवसायिक मामलों में नुकसान तय है। - मीन राशि सेहत मीन राशि के जातक आज बीमार रहेंगे और मां की कमी खलेगी। - मीन राशि करियर मीन राशि वाले आज जातक को प्रमोशन मिल सकता है और काम का बोझ भी बढ़ सकता है। - मीन राशि प्यार मीन राशि वाले आज जातक आपको पुराने प्यार की याद सताएगी, लेकिन अकेले रहने के निर्णय पर अटल रहेंगे। - मीन राशि परिवार मीन राशि वाले आज जातक पारिवारिक मामलों में निस्वार्थ काम करेंगे। - मीन राशि का उपाय मीन राशि वाले आज शिव मंदिर शिव ताडंव का जाप करें। - मीन राशि पूर्वाभास मीन राशि के जातक जातक को विदेश से नौकरी का ऑफर मिल सकता है। कल का मेष राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस कल का मेष राशिफल इस राशि के जातक मानसिक असन्तोष रहेगा। नौकरी में इच्छाविरुद्ध कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है। मेहनत अधिक रहेगी। कल का वृष राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस कल का वृष राशिफल के अनुसार कल का दिन इस राशि के जातक वाणी में कठोरता का प्रभाव रहेगा। बातचीत में सन्तुलन बनाए रखें। अध्ययन में रुचि रहेगी। संचित धन में कमी आ सकती है। कल का मिथुन राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस मिथुन राशिफल की कल की भविष्यवाणी इस राशि के जातक मन में निराशा एवं असन्तोष के भाव रहेंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। रहन-सहन कष्टमय रहेगा। कल का कर्क राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस कर्क राशिफल की छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस की गणना के अनुसार इस राशि के जातक मानसिक शान्ति रहेगी। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षा एवं साक्षात्कारादि कार्यों में सफलता मिलेगी। कल का सिंह राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस सिंह राशिफल की छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस की गणना के अनुसार इस राशि के जातक आत्मसंयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। परिवार में आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं। सन्तान सुख में वृद्धि होगी। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। कल का कन्या राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस की भविष्यवाणी के अनुसार कन्या राशिफल जातक पैतृक सम्पत्ति का लाभ हो सकता है। पिता का सहयोग मिलेगा। भौतिक सुखों में वृद्धि होगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कल का तुला राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस तुला राशिफल की छब्बीस दिसंबर की गणना के अनुसार कुछ जातक आशा-निराशा के मिश्रित के मिश्रित भाव मन में रहेंगे। भौतिक सुखों के विस्तार पर खर्च बढ़ सकते हैं। यात्रा लाभप्रद रहेगी। परिश्रम की अधिकता रहेगी। कल का वृश्चिक राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस छब्बीस दिसंबर का वृश्चिक राशिफल की गणना के अनुसार जातक नौकरी में स्थान परिवर्तन सम्भव है। परिवार से दूर जाना हो सकता है। धैर्यशीलता में कमी आयेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कल का धनु राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस कल का धनु राशिफल की गणना के अनुसार जातक क्रोध की अधिकता रहेगी। बातचीत में संयत रहें। आय की स्थिति में सुधार होगा। पिता से मतभेद हो सकता है। कल का मकर राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस कल का मकर राशिफल की गणना बताती है कि जातक जीवनसाथी को स्वास्थ्य विकार रहेंगे। स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहेगा। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। कार्यों में कठिनाइयां आएंगी। कल का कुंभ राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस कुंभ राशिफल की कल की भविष्यवाणी जातक शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। लेकिन आत्मसंयत रहें। खर्चों की अधिकता रहेगी। कल का मीन राशिफल छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस मीन राशिफल की छब्बीस दिसंबर दो हज़ार बाईस की गणना के अनुसार जातक पारिवारिक समस्याएं रहेंगी। आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं। घर-परिवार में धार्मिक कार्य होंगे। भवन सुख में वृद्धि होगी। क्या राशिफल सही होता है? हम जो भी राशिफल देते है वो सामान्य दैनिक राशिफल ग्रहों की सटिक गणना पर आधारित होता है। जो नाम के आधार पर होता है। लेकिन दुनियाभर में करोड़ों लोगों के एक नाम और एक राशियां होती है तो जरूरी नहीं की फलादेश भी एक हो। यहां जो राशिफल दी जाती है वह सामान्य भविष्यफल है। किसी भी जातक को अपने भविष्य का सही फलादेश जन्म राशि नाम और जन्म तारीख और कुंडली के लग्न में स्थित ग्रह और राशि के आधार पर सटीक जानकारी ले सकते हैं। राशिफल क्या होता है? ज्योतिष विज्ञान की वह विधा जिसमें जातक के नाम राशि और ग्रहों के गोचरी की स्थिति को देखकर भविष्यवाणी की जाती है, उसे राशिफल कहते हैं। राशिफल के जरिए हम दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक घटनाओं की जानकारी लेते हैं। इसके लिए हर दिन नौ ग्रहों और सत्ताईस नक्षत्रों की गणना और चंद्रमा की राशि में स्थिति के आधार पर बारह राशियों की भविष्यवाणी की जाती है। ये बारह राशियां इस प्रकार है- मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ व मीन। इनके फलादेश को राशिफल कहते हैं। क्या राशिफल नाम के अनुसार है ? न्यूजट्रैक. कॉम पर हम हर रोज दैनिक राशिफल देते हैं। जो नाम पर आधारित होता है। यह कुंडली में लग्न के अनुसार जन्म राशि होती है, लेकिन जिसे अपनी जन्मराशि का ज्ञान न हो वह अपने नाम से भी दैनिक फलादेश देख सकते हैं। राशिफल की गणना किस पर आधारित है? जो दैनिक राशिफल दी जाती है वह चंद्र राशि पर आधारित होती है। वैसे तो बहुत से लोगों की एक राशि होती है, इसलिए दैनिक राशिफल एक सामान्य भविष्यवाणी होती है। अगर अपने भविष्य की सटीक जानकारी जाननी हो तो आप कुंडली में स्थित ग्रह-गोचर स्थिति, लग्न भाव, करण, योग, नक्षत्र और ग्रहों की युति को जानकर किसी भी योग्य ज्योतिषविद से पता लगा सकते है। लेकिन इसके लिए जरूरी है आपको जन्म तारीख, स्थान और समय का सही पता तो सही फलादेश मिलेगा। दोस्तों देश और दुनिया की खबरों को तेजी से जानने के लिए बने रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलो करने के 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हमीरपुर - प्राइवेट स्कूलों में नए सेशन से 25 फीसदी गरीब छात्रों को दाखिल किया जाएगा। शिक्षण संस्थान से डेढ़ किलोमीटर दायरे के आईआरडीपी छात्रों को फ्री में शिक्षा मुहैया करवाई जाएगी। छात्रों का खर्चा प्रदेश सरकार स्कूल प्रबंधन को देगी। आर्यन पब्लिक स्कूल भोटा में सोमवार को हमीरपुर जिला के सभी प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यातिथि के रूप में शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक रवित चंद कटोच ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूल को 2018-19 सत्र में 25 फीसदी गरीब छात्रों को स्कूलों में दाखिला देना सुनिश्चित करें। पहली से छठी कक्षा में नए सत्र से स्कूल अपने डेढ़ किलोमीटर दायरे में आईआरडीपी के छात्रों को दाखिल करना सुनिश्चित करें। गरीब छात्रों से स्कूल प्रबंधन द्वारा कोई भी फीस न वसूली जाए। छात्रों का स्कूल खर्च सरकार द्वारा स्कूलों को दिया जाएगा। इसके अलावा सत्र 2018-19 के लिए नई मान्यता व रिन्यूअल लेने के लिए 28 फरवरी तक स्कूल आवेदन कर सकते हैं। बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में जिला विज्ञान पर्यवेक्षक अश्वनी चंबियाल व जिला पब्लिक स्कूल संघ के प्रधान देवराज वर्मा, महासचिव राजेश ठाकुर ने भी अपने विचार रखे। बैठक में भोरंज, बिझडी़ व हमीरपुर के बीपीईओ सहित स्कूल प्रबंधकों ने भाग लिया।
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हमीरपुर - प्राइवेट स्कूलों में नए सेशन से पच्चीस फीसदी गरीब छात्रों को दाखिल किया जाएगा। शिक्षण संस्थान से डेढ़ किलोमीटर दायरे के आईआरडीपी छात्रों को फ्री में शिक्षा मुहैया करवाई जाएगी। छात्रों का खर्चा प्रदेश सरकार स्कूल प्रबंधन को देगी। आर्यन पब्लिक स्कूल भोटा में सोमवार को हमीरपुर जिला के सभी प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यातिथि के रूप में शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक रवित चंद कटोच ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूल को दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस सत्र में पच्चीस फीसदी गरीब छात्रों को स्कूलों में दाखिला देना सुनिश्चित करें। पहली से छठी कक्षा में नए सत्र से स्कूल अपने डेढ़ किलोमीटर दायरे में आईआरडीपी के छात्रों को दाखिल करना सुनिश्चित करें। गरीब छात्रों से स्कूल प्रबंधन द्वारा कोई भी फीस न वसूली जाए। छात्रों का स्कूल खर्च सरकार द्वारा स्कूलों को दिया जाएगा। इसके अलावा सत्र दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के लिए नई मान्यता व रिन्यूअल लेने के लिए अट्ठाईस फरवरी तक स्कूल आवेदन कर सकते हैं। बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में जिला विज्ञान पर्यवेक्षक अश्वनी चंबियाल व जिला पब्लिक स्कूल संघ के प्रधान देवराज वर्मा, महासचिव राजेश ठाकुर ने भी अपने विचार रखे। बैठक में भोरंज, बिझडी़ व हमीरपुर के बीपीईओ सहित स्कूल प्रबंधकों ने भाग लिया।
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Meerut। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे को लेकर परतापुर तिराहे के पास इंटरचेंज के लिए रेलवे लाइन पर गार्डर रखने का काम बुधवार को पूरा हो गया। लगातार चौथे दिन गार्डर रखने का काम जारी रहा और देर शाम तक रेलवे लाइन पर 12 गार्डर रखे गए। बीते रविवार को रेलवे लाइन पर गार्डर रखने का काम शुरु किया गया था। इस दौरान एनएचएआई और रेलवे के अधिकारी लगातार ड्रोन के सहारे निगरानी करते रहे।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के चौथे चरण में डासना से मेरठ के बीच रेलवे लाइन के ऊपर से गार्डर रखने का काम रविवार से शुरु किया गया था। इस क्रम में रविवार से रेलवे ब्लाक मिलने के बाद रोजाना तीन-तीन गार्डर रखने का काम शुरु किया गया। इस क्रम में बुधवार को 12 गार्डर रखने का काम देर शाम को पूरा हो गया।
अब गुरुवार से गार्डर जोड़ने का काम शुरु होगा। इस काम के लिए भी रेलवे से चार घंटे का ब्लॉक लिया गया है। गार्डर जोड़ने के बाद कार्यदायी संस्था इन गार्डर पर लेंटर डालने का काम करेगी जो कि मार्च माह में पूरा करने का टारगेट दिया गया है।
फोर लाइन रेलवे ट्रैक के करीब 48 मीटर का दायरा मान कर इस 48 मीटर को 12 गार्डर के सहारे कवर कर एक्सप्रेस-वे गुजारा जाएगा। इस दौरान रोजाना 3 से 4 घंटे का रेलवे ब्लॉक लेकर गार्डर रखने का काम पूरा किया गया। देर शाम बरसात की संभावना को देखते हुए यह काम शाम से पहले ही पूरा कर दिया गया। इस मौके पर एक्सप्रेस वे के परियोजना निदेशक आरपी सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद कुमार डिप्टी आदि मौजूद रहे।
गार्डर का काम पूरा हो गया है इसके बाद गार्डर को जोड़ने और लेंटर डालने का काम किया जाएगा। जोकि मार्च अंत तक पूरा हो जाएगा।
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Meerut। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे को लेकर परतापुर तिराहे के पास इंटरचेंज के लिए रेलवे लाइन पर गार्डर रखने का काम बुधवार को पूरा हो गया। लगातार चौथे दिन गार्डर रखने का काम जारी रहा और देर शाम तक रेलवे लाइन पर बारह गार्डर रखे गए। बीते रविवार को रेलवे लाइन पर गार्डर रखने का काम शुरु किया गया था। इस दौरान एनएचएआई और रेलवे के अधिकारी लगातार ड्रोन के सहारे निगरानी करते रहे। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के चौथे चरण में डासना से मेरठ के बीच रेलवे लाइन के ऊपर से गार्डर रखने का काम रविवार से शुरु किया गया था। इस क्रम में रविवार से रेलवे ब्लाक मिलने के बाद रोजाना तीन-तीन गार्डर रखने का काम शुरु किया गया। इस क्रम में बुधवार को बारह गार्डर रखने का काम देर शाम को पूरा हो गया। अब गुरुवार से गार्डर जोड़ने का काम शुरु होगा। इस काम के लिए भी रेलवे से चार घंटे का ब्लॉक लिया गया है। गार्डर जोड़ने के बाद कार्यदायी संस्था इन गार्डर पर लेंटर डालने का काम करेगी जो कि मार्च माह में पूरा करने का टारगेट दिया गया है। फोर लाइन रेलवे ट्रैक के करीब अड़तालीस मीटर का दायरा मान कर इस अड़तालीस मीटर को बारह गार्डर के सहारे कवर कर एक्सप्रेस-वे गुजारा जाएगा। इस दौरान रोजाना तीन से चार घंटाटे का रेलवे ब्लॉक लेकर गार्डर रखने का काम पूरा किया गया। देर शाम बरसात की संभावना को देखते हुए यह काम शाम से पहले ही पूरा कर दिया गया। इस मौके पर एक्सप्रेस वे के परियोजना निदेशक आरपी सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद कुमार डिप्टी आदि मौजूद रहे। गार्डर का काम पूरा हो गया है इसके बाद गार्डर को जोड़ने और लेंटर डालने का काम किया जाएगा। जोकि मार्च अंत तक पूरा हो जाएगा।
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बॉलीवुड की धक- धक गर्ल यानी माधुरी दीक्षित ने अपनी एक्टिंग और डांस से तो लाखों दर्शकों का मना मोहा ही है अब वे कॉमेड़ी कर लोंगो को खुश करने की तैयारी में हैं। बकौल माधुरी, मैं हर तरह के किरदार करना चाहती हैं, क्योंकि मैं एक जैसे किरदार नहीं करना चाहती। बहरहाल, माधुरी अपनी आने वाली फिल्मों में वे व्यस्त हैं, जिनमें उनको दो फिल्मों की शूटिंग भी जारी हैं। इनमें- गुलाब गैंग और डेढ़ इश्कियां शामिल है। कॉमेडी में हाथ आजमाने के लिए बेताब माधुरी कहती है कि अब वो लोंगो को हंसाना चाहती हैं। साथ ही उन्होंने अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में कहा कि वो काफी कुछ करना चाहती हूं, लेकिन डिपेंड करता है कि मुझे क्या ऑफर किया जाता है। उन्होंने आगे कहा, साथ ही मुझे क्या पसंद आता है और किस चीज़ पर मेरा दिल आ जाता है, वो ही फिल्में मैं करूंगी। तो करिए थोडा़ इंतजा़र, क्योंकि धक-धक गर्ल अब आपको हंसाने के लिए तैयार है।
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बॉलीवुड की धक- धक गर्ल यानी माधुरी दीक्षित ने अपनी एक्टिंग और डांस से तो लाखों दर्शकों का मना मोहा ही है अब वे कॉमेड़ी कर लोंगो को खुश करने की तैयारी में हैं। बकौल माधुरी, मैं हर तरह के किरदार करना चाहती हैं, क्योंकि मैं एक जैसे किरदार नहीं करना चाहती। बहरहाल, माधुरी अपनी आने वाली फिल्मों में वे व्यस्त हैं, जिनमें उनको दो फिल्मों की शूटिंग भी जारी हैं। इनमें- गुलाब गैंग और डेढ़ इश्कियां शामिल है। कॉमेडी में हाथ आजमाने के लिए बेताब माधुरी कहती है कि अब वो लोंगो को हंसाना चाहती हैं। साथ ही उन्होंने अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में कहा कि वो काफी कुछ करना चाहती हूं, लेकिन डिपेंड करता है कि मुझे क्या ऑफर किया जाता है। उन्होंने आगे कहा, साथ ही मुझे क्या पसंद आता है और किस चीज़ पर मेरा दिल आ जाता है, वो ही फिल्में मैं करूंगी। तो करिए थोडा़ इंतजा़र, क्योंकि धक-धक गर्ल अब आपको हंसाने के लिए तैयार है।
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१९५०-५१ क अतिरिक्त अनुदानों के लिए मांगों पर मतदान
श्री मदनमोहन उपाध्याय -- तो उस डिपार्टमेंट में क्या खराबी थी, यह तो में कहना नहीं चाहता हूं ।
श्री अध्यक्ष --अगर यह वाजिब है तो मानिये और गैरवाजिब है तो उसको बताइये कि क्यों ।
श्री मदनमोहन उपाध्याय --में वाजिब है या गैरवाजिब है इस पर नहीं जा रहा हूं। में इस पर जा रहा हूं कि यह खर्च न हो ।
उसको वित्त मंत्री या मुख्य मंत्री उसका जवाब देंगे जनरल
श्री पालिसी के बारे में ।
श्री दनमोहन उपाध्या -- इस पर मैं ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहता हूं। मजबूरी थी उनको खर्च करने की और उन्होंने खर्च किया। जहां तक इस आइटम के बारे में है। लेकिन में कांस्टीट्यूशनली इसकी मुखालिफत करता हूं और जैसा कि आपने कहा जब यह बिल प्रायेगा तब में बोलूंगा और में उस समय इस सारे सवाल को लूंगा और में एक घंटा बोलूंगा क्योंकि यह सबसे पहली ग्रान्ट इस प्रकार एक्सेस को है और एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है । (कुछ सदस्यों की ओर इशारा करके) हमारे माननीय सदस्य समझ नहीं रहे हैं। अगर पढ़ते तो समझते कि यह कितने महत्व की चीज है और क्या इसकी महत्ता है। मैं डिमोक्रेसी में विश्वास करता हूं और इस सदन की प्रतिष्ठा को कायम रखना चाहता हूं। इस सदन की जो पावर्स हैं उन पर बात करना चाहता हूं। और अगर इसके पावर्स पर कोई भी कोठाराघात करना चाहेगा तो उसका हम विरोध करेंगे। हां माफी मांगें, जैसा मानाय वित्त मंत्री जी ने कहा, यह बात दूसरी है । लेकिन यह कह देना कि नहीं साहब हम खर्च भी कर सकते आप करोड़ों रुपया खर्च कर दीजिये और हाउस की परवाह न कीजिये तो यह डिक्टेरशिप । बहुमत के बल पर आप मनमानी करना चाहते हैं । तो यह तो एक तरह से डिक्टेटरशिप नी । श्रीमन्, मैं यह भी जानना चाहता हूं कि इसका बिल कब आयेगा, अगर आजही जाय तब तो ठीक है । तब मैं कुछ कहूं ।
श्री अध्यक्ष - अनुदानों पर मतदान खत्म होते ही आज ही आजायगा ।
श्री मदनमोहन उपाध्याय --तो अध्यक्ष महोदय, जनरल डिस्क्शन पर मैं बहस करूंगा।
श्री ब्रजभूषण मिश्र - अध्यक्ष महोदय, में समझता हूं कि अगर उपाध्याय जी ने स्पष्टीकरण को पढ़ा होता तो इतना अधिक बोलते की आवश्यकता न होती। सारे लेनदेन का हिसाब तो ऐसा होता ही है । बनिया भी जब पर्ची काटता है तो नीचे लिखा होता है कि भूल चूक लेनी देनी । वही यहां पर भी है सीवासादा हिसाब है। उसमें न कोई व्याख्या की जरूरत है और न कोई गबन की बात, जैसा पहले माननीय उपाध्याय जी कह चुके हैं जिसको कि उन्होंने आपकी आज्ञा से वापस भो लिया । सीधी सी बात है १२ लाख के स्टाम्प बिके तो जितने बिकेंगे रुपया तो राजस्व में चला जायगा और कमीशन के खाते में पड़ेगा। कहीं रुपया नहीं गया। और न कहीं किसी ने गबन किया है। एक जेब से निकल कर दूसरी जेब में रखना है, केवल ( paper adjustment) का रूप है, सीधी सी बात है कि इतने के स्टाम्प बिके तो उनकी छपाई वगैरह में जो कागज और रुपया खर्च हुआ वह स्टाम्प की मद में बढ़ गया और यही टोटल मिल करके २२ हजार हो गया उसके वास्ते में समझता हूं कि यह मांग स्वीकार की जाप ।
* श्री नारायणदत्त तिवारी (जिला नैनीताल ) -- श्रीमन्, में आपकी आज्ञा से प्रस्तुत मांग का विरोध करने के लिये उपस्थित हुआ हूं । इस ग्रान्ट नम्बर ४ के अनुसार स्टाम्प ग्रान्ट के अधीन २२,१५८ रुपये की वृद्धि के सम्बन्ध में रुपये की मांग की गयी है। मैंने पब्लिक कमेटी की रिपोर्ट में यह ध्यान से देखने की चेष्टा की कि आखिर इस ग्रान्ट के सम्बन्ध में कोई प्रश्न उठा है या नहीं। लेकिन उस रिपोर्ट में सन् १९५०-५१ के बजट के सम्बन्ध में जो रिपोर्ट है एप्रोप्रियेशन आडिट रिपोर्ट, उसमें कोई व्योरा या विवरण न इस विभाग की ओर से और न कमेटी की तरफ से देखने को प्राप्त हुआ । तो इसलिये कम से कम इस प्रान्ट ४ के बारे में नहीं कहा जा सकता कि पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी के सामने कोई ब्योरा उपस्थित किया या स्पष्टीकरण मांगा। इसलिये मैं इतना अत्यन्त आवश्यक समझता हूं कि इस ग्रान्ट के बारे में माननीय मंत्री जी को पूरा ब्योरा सदन के सामने रखना चाहिये । यह जो स्पष्टीकरण दिया गया है यह केवल ५ लाइन का है और इतना अर्थहीन है, इतना अस्पष्ट है कि इससे कोई आवश्यकता नहीं महसूस होती है कि क्यों २२ हजार ही दिया जाय। यह हो सकता है कि डिटर जनरल ने या कम्पट्रोलर जनरल ने सारी फाइलें डिपार्टमेंट की देख ली हों उसके बाद कोई सिफारिश की हो। लेकिन सदन के सामने कोई सिफारिशों का व्योरा नहीं आया। मिसाल के लिये सन् १९५०-५१ में स्टाम्प्स को प्राइटम ग्रान्ट नम्बर ४ के लिये ५१,७०० रुपये की मांग की गयी। जिसमें २२ हजार की वृद्धि हुयी। कहा यह जाता है कि उस साल १२ लाख रुपये की अधिक आमदनी स्टाम्प बिकने से हुयी जिसके कारण स्टाम्प वेन्डर्स को डिस्काउन्ट दिया गया और स्टाम्प्स के बनने की कीमत जो थी वह और बढ़ गयी । तो इस ऐक्सप्लेनेशन से यह मालूम होना चाहिये था, अलग अलग स्पष्ट किया जाना चाहिये था ब्योरेवार कि कितना डिस्काउन्ट स्टाम्प वैन्डर्स को दिया गया और कितना बढ़ा और कितना जो मैन्युफैक्चरिंग कास्ट, प्रकाशन व्यय या वह कितना बढ़ा अलग अलग उसका ब्योरा दिया जाना चाहिये था कि इतना पहले था, इतना इसमें बढ़ गया । मैं जानना चाहूंगा कि माननीय मंत्री जी से कि २२,१५८ रुपये में से कितना रुपया ऐसा था जो कि उन्होंने डिस्काउन्ट के रूप में दिया और कितना रुपया ऐसा था जो कि उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग कास्ट के रूप में दिया ।
दूसरी बात यह है कि माननीय मन्त्री जी को यह बतलाना चाहिए कि पूरक अनुदानों को रूप में सन ५०-५१ से लेकर आज तक उन्होंने इस ग्रान्ट को क्यों नहीं मांगा और जब तक आडीटर जनरल ने उसको बतलाया नहीं कि एक्सेस ग्रान्ट खर्च कर चुके हो, उनके विभाग को पता क्यों नहीं लगा। यह आमदनी का आइटम था, १२ लाख आमदनी हुयी यह तो मालूम था उनके विभाग को, लेकिन जो ज्यादा खर्चा करना पड़ा यह उनके विभाग को नहीं मालूम हुआ। उनके विभाग को अपनी आमदनी जो बढ़ गयी है वह तो मालूम है, लेकिन जो खर्चा बड़ा वह नहीं मालूम हुआ जब तक कि आडटिर जनरल ने तीन साल तक उनके विभाग को नहीं बतलाया कि इतना ज्यादा खर्चा तुम कर चुके हो, मैं समझता हूं कि यह उनके विभाग के लिये बड़े शर्म की बात है। मैं जानना चाहता हूं कि सन् ५०-५१ के पूरक अनुदान जो प्रस्तुत हुये उनमें क्यों नहीं मांगा ? ५१-५२ का बजट आया, सप्लीमेंट्री उस समय आया उस समय क्यों नहीं मांगा। श्रापको ज्ञात होगा श्रीमन्, सप्लीमेंट्री स्टीमेट्स में तीन तीन साल पुराने प्राइम हमने मंजूर किये हैं और पिछले साल के कितने आइटम्स मंजूर करते रहे हैं। मैं तो सदन से विनीत निवेदन करूंगा कि जब तक माननीय मंत्री जी स्पष्टीकरण नहीं देते कि उनका विभाग सोया हुआ नहीं था, स्वप्नावस्था में विचरण नहीं कर रहा था जिस समय कि यह रुपया खर्च हुआ, अपने स्पष्टीकरण को और स्पष्ट नहीं करते तब तक हमको इस ग्रान्ट को मंजूर नहीं करना चाहिये ।
श्री गिरधारीलाल-अध्यक्ष महोदय, मुझे इस सिलसिले में बहुत ज्यादा नहीं कहना है । सिर्फ इतना ही बतलाना चाहता हूं कि सदन में जिस समय सब एक्सेस ग्रान्ट्स रखी गयी उसी * वक्ता ने भाषण का पुनर्वोक्षण नहीं किया।
समय यह भी रखी गयी और दूसरी खास बात उन्होंने यह कही कि यह अलग अलग कितना रुपया इसमें खर्च हुआ है । तो मैं उनको यह बता देना चाहता हूं कि १० हजार ७ सौ रुपया तो स्टाम्प वेंडर्स के कमोशन वगैरह में और १२ हजार ७ सौ ८३ रुपया मैन्युफैक्चरिंग कास्ट वगैरह में दिया गया है। और मं समझता हूं बाकी जितनी बातें इसके अलावा कही गयी वह सब वैसी ही बातें हैं और उनका स्पष्टीकरण देने की जरूरत नहीं है ।
श्री नारायणदत्त तिवारी -- मैं एक बात जानना चाहता हूं ? एक सवाल करना चाहता हूं कि कमीशन में केवल दस हजार रुपया खर्च होना और १२ हजार रुपये होना यह इतना आश्चर्यजनक है कि कैसे इसका स्पष्टीकरण दिया जा सकता है ?
श्री अध्यक्ष -- आपको कुछ जवाब देना है ?
गिरधारीलाल - जी नहीं, मुझे कोई जवाब नहीं देना है ।
श्री अध्यक्ष - प्रश्न यह है कि अनुदान संख्या ४ - स्टाम्प के अन्तर्गत २२,१५८ रुपये की मांग स्वीकार की जाय ।
( प्रश्न उपस्थित किया गया और हाथ उठा कर विभाजन होने पर निम्नलिखित मतानुसार
स्वीकृत हुआपक्ष में-- १२१, विपक्ष में-१४ ।)
अनुदान संख्या ६ -- रजिस्ट्री
श्री गिरधारीलाल - अध्यक्ष महोदय, में प्रस्ताव करता हूं कि ३१ मार्च, १९५१ को समाप्त हुये वर्ष के दौरान में अनुदान सं या २, रजिस्ट्री के अन्तर्गत व्यय बुद्धि को पूरा लिये राज्यपाल को ६,६३० रुपये की धनराशि दी जाय ।
इसके विषय में भी खास बात नहीं कहनी है, क्योंकि इसमें जो खास एक्सप्लेनेशन है वह संबंधित लिट्रेचर में दिया हुआ है।
श्री नारायणदत्त तिवारी - विधान की धारा २०३ के अनुसार गवर्नर महोदय की सिफारिश के अनुसार यह मांग नहीं हो रही है ।
श्री अध्यक्ष -- उन्होंने यह कह तो दिया । आपने सुना न होगा ।
* राजा वीरेंद्रशाह (जिला जालौन ) -- माननीय प्रध्यक्ष महोदय, जो रजिस्ट्री के सम्बन्ध म ६,६३० रुपये की मांग सरकार ने की मैं उसका विरोध करता हूं । विरोध करने का तात्पर्य यह है कि हम लोगों को इसमें तो कोई उम्र नहीं है कि ६,६३० रुपया खर्च किया गया, जरूरत पड़ने पर किया गया, लेकिन यह जो तरीका एक्सेस ग्रान्ट में मांगने का है, यह उचित नहीं है । तो सब विभागीय कर्मचारियों को मालूम होना चाहिये कि कितना खर्च होना चाहिये । यह कोई अच्छी चीज नहीं है कि एक्सेस ग्रान्ट हम विधान सभा में पेश करें और फिर वह पूरा किया जाय। यह तर्क देना कि हम भूल गये, तो तीन-तीन सप्लीमेंटरी डिमांड्स सरकार ने रखे हैं इस भवन के अन्दर सन् १९५०-५१ तक के खर्चे के और यह पता खर्चे का नहीं चल सका कि विलीन रियायतों के सम्बन्ध में क्या खर्चा इस बारे में हुआ। यह विभाग के लोग न जान सके, तो मैं समझता हूं कि यह जायज नहीं है और इसलिये विरोध करता हूं कि श्राइंदा ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिये ।
श्री गिरधारीलाल मुझे इसके विषय में भी कोई खास बात नहीं कहनी है। सिर्फ इतना ही है कि यह साफ जाहिर है कि जिस समय सदन के सामने बजट रखा जाता है उस समय
* वक्ता ने भाषण का पुनर्वोक्षण नहीं किया ।
[श्री गिरधारीलाल]
सरकार की कभी यह ख्वाहिश नहीं होती कि सप्लीमेंटरी ग्रान्ट या एक्सेस ग्रान्ट सदन के सामने रख कर सदन का समय लिया जाय । लेकिन साथ ही गवर्नमेंट का काम बिला इसके चल भी नहीं सकता । लिहाजा जब बहुत मजबूरी हो जाती है तभी ऐसी ग्रान्ट्स सदन के सामने पेश की जाती हैं ।
अध्यक्ष प्रश्न यह है कि अनुदान संख्या ६ - - रजिस्ट्री के अन्तर्गत ६,६३० रुपयों की अतिरिक्त मांग स्वीकार की जाय ।
( प्रश्न उपस्थित किया गया और स्वीकृत हुआ ।) अनुदान संख्या १२ - कमिश्नर और जिला प्रशासन
मुख्य मंत्री ( डाक्टर सम्पूर्णानन्द) --प्रध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि ३१ मार्च, १९५१ को समाप्त हुये वर्ष के दौरान में अनुदान संख्या १२ - - कमिश्नर और जिला प्रशासन के अन्तर्गत व्यय वृद्धि को पूरा करने के लिये राज्यपाल को ६२,१८६ रुपये की धनराशि दी जाय ।
इस सम्बन्ध में मैं दो एक बातें निवेदन करना चाहता हूं। पहली बात तो यह है कि यह बिल्कुल सही है कि बिना सदन की मंजूरी के रुपया खर्च नहीं होना चाहिये। अगर मूल बजट बनते वक्त वह चीज नहीं भी हो सके तो सप्लोमेंट्री के रूप में आनी चाहिये । लेकिन जिन लोगों ने कांस्टीट्यूशन बनाया उनको दुनियां के और देशों का भी अनुभव था और वे जानते थे इस बात को कि कांस्टीट्यूशन के अनुसार जो भी काम होता है वह श्रादमियों के हाथ से होता है और वे इस बात को समझते थे और मैं भी इस बात को कहता हूं कि दुनियां में कोई भी गवर्नमेंट कभी ऐसे नहीं चल सकती कि उससे कभी न कभी कुछ एक्सेस खर्च न हो जाय । इसीलिये हमारे कांस्टीट्यूशन में एक्सेस ग्रांट्स के लिये नियम रखा गया है । अगर एक्सेस ग्रान्स होनी ही हां चाहिये थीं तो उनका न यहां जिक्र होता, न केन्द्र में होता और न ब्रिटिश पार्लियामेंट में होता । एक बात और है समझने के लिये । यह एक्सेस ग्रान्ट ऐसी चीज है जो सप्लीमेंटरी ग्रान्ट के रूप में कदापि पेश नहीं हो सकती। अगर सप्लीमेंटरी ग्रान्ट के रूप में पेश हो सके तो उसे सप्लीमेंटरी ग्रान्ट के रूप में आना चाहिये । जब कोई योजना गवर्नमेंट की होती है जिसको वह चलाना चाहती है उसको तो गवर्नमेंट सदन के सामने पेश कर सकती है, अगर वह मूल बजट में न हो । मसलन् इंडस्ट्रीज की बात है, उसका दो करोड़ रुपये सालाना का बजट हो और बीच में अगर यह बात येक इंडस्ट्री को भी चलाना है और उसके लिये २० - २५ लाख रुपये की ज़रूरत है तो उसके लिये तो गवर्नमेंट सप्लीमेंटरी ग्रान्ट पेश कर सकती है। लेकिन बहुत से खर्चे ऐसे होते हैं जिनको करने की न तो गवर्नमेंट की इच्छा होती है और उसको पता भी नहीं होता है, लेकिन वह खर्च हो जाता है। मिसाल के लिये, इसी में लिखा है कि जमींदारी एबालिशन और ग्रो मोर फूड के सिलसिले में जो काम हुआ उनमें गाड़ियों में खर्चा हुआ। अब इस खर्च को करने वाले हमारे यहां ५१ जिले हैं और एक नायब तहसीलदार से लेकर कलेक्टर तक के हाथ से वह खर्चा हुआ। कहीं पेट्रोल में दो रुपये खर्च किये गये और कहीं सवारी में, और ये सब रुपये जोड़ कर इतने हो जाते हैं जिनका सरकार को पता नहीं होता। जब कहीं सारा हिसाब पूरा हो जाता है तब कहीं जाकर पता लगता है कि इस काम में इतने रुपये ज्यादा खर्च हो गये। फिर अगर एक अधिकारी के हाथ से खर्च होता हो तः भी कुछ हो सकता है कि उसे पता रहता है कि रुपया इस काम के लिये है, उसी के अन्दर खर्च करने की कोशिश करें, लेकिन जहां पर इतने श्रादमी खर्च करने वाले होते हैं वहां पर कभी-कभी ऐसा हो जाना प्राश्चर्य की बात नहीं है। इसी मद को लीजिये ९२, १८६ रुपये हम मांगते हैं। इसके लिये कुल खर्चा सदन ने २ करोड़ ८३ लाख का मंजूर किया था। उसके ऊपर ९२,१८६ रुपये और खर्च हये । उसको बतलाया गया है कि टेहरी गढ़वाल स्टेट का मर्जर हुआ और वह उत्तर प्रदेश में आयी। अब उसमें क्या खर्च होगा इसका कोई खास एस्टीमेट नहीं हो सकता था। जो समझ में प्रा सकता था वह तो बजट में रख
दिया गया या सप्लीमेंटरी बजट में रख दिया गया लेकिन वहां कैसी सड़कें हैं, और क्या-क्या खर्चे होंगे, इसका कुछ अंदाजा नहीं हो सकता था। इसलिये ऐसा हुआ और जैसा कि लिखा है कि जमींदारी प्रबालिशन के सिलसिले में, कलेक्शन के काम में तथा ग्रो मोर फूड के सिलसिले में सवारी में रुपया खर्च हुआ है । हिसाब तो एकाउन्टेन्ट जनरल के यहां रहता है और जब वहां से हिसाब आता है तो हम लिखते हैं। इसके अलावा और कोई दूसरा तरीका नहीं है कि हम रख सकें। इसलिये मैं आशा करता हूं कि सदन मेरी मांग को स्वीकार करेगा ।
श्री मदनमोहन उपाध्याय -- अध्यक्ष महोदय, मैं इस मांग का विरोध करता हूं और मुझे यह जानकर बड़ी खुशी हुयो कि माननीय मुख्य मंत्री जी ने स्वयं स्वीकार किया है कि ऐसा हो जाता है और अगर ऐसा डेमोक्रेसी में नहीं होता तो विधान में यह क्लाज आया हो नहीं होता। हमारी एक और शिकायत है कि बजट ३१ मार्च को खत्म होता है । ३१ मार्च तक जितना रुपया होता है वह खर्च हो जाता है या जो कुछ रुपया जितना बजट का सैक्शन होता है उससे कुछ ज्यादा खर्च हो गया हो तो ए०जी० के यहां किताबों में दर्ज हो जाता है। वह दो तीन महीने तक खुली रहती हैं। वैसे तो ३१ मार्च को बंद हो जानी चाहिये लेकिन अगस्त के महीने तक खुली रहती हैं। जहां पर डिपार्टमेंट्स की पिक्चर प्रा जाती है कि इस डिपार्टमेंट ने कितनी सेविंग की या एक्सेज किया ।
अध्यक्ष महोदय, मुझे दुख तो इस बात का है कि जो रोजन्स दिये गये हैं वह सब गलत हैं, इसलिये हमें शिकायत है । पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी के सामने यह मामला आया था और उसने सारे पहलू पर खूब अच्छी तरह से विचार किया था और देखा था कि स्टेट्स के मरजर पर क्या खर्चा हुआ और जमींदारी अबालिशन के सिलसिले में कलेक्शन में खर्चा हुआ था । उस सब को देखकर अन्त में पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी ने यह फैसला किया था कि यह जो ग्रान्ट है बहुत अनविल्डी है। सब कमीशन, लेजिस्लेचर वगैरह दुनियां भर के डिपार्टमेंट्स इस हेड में हैं । उसने यह फैसला किया कि यह डिपार्टमेंट बहुत अनविल्डी हो गया है इसलिये इसे डिसबर्स कर दिया जाय और छोटे-छोटे ग्रान्ट्स बना दिये जायं ।
मुझे आशा है कि माननीय मुख्य मंत्री जी जवाब देते समय यह बताने की कोशिश करेंगे कि सरकार ने इस पर क्या फैसला किया ? अध्यक्ष महोदय, आप देखें कि यह ऐसे रोजन्स हैं जिनसे हम कन्विन्स नहीं हो सकते हैं, वैसे बदनाम हमें किया गया है। इसमें लिखा है किः"A demand for an excess grant can be laid before the Legislative Assembly only after the Appropriation Accounts of the year have been made up and audited. The work of compilation .
श्री अध्यक्ष - - यह आप क्या पढ़ रहे हैं ?
श्री मदनमोहन उपाध्याय -- यह उन्होंने कहा कि क्यों देर हुयी
श्री अध्यक्ष - - वह हिन्दी में भी तो आया है ।
श्री मदनमोहन उपाध्याय -- जी हां, "संबंधित वर्ष के विनियोग लेखे ( एप्रोप्रियेशन एकाउन्ट्स) तैयार हो जाने और उनकी लेखा परीक्षा हो जाने के बाद ही अतिरिक्त अनुदान के लिये मांग विधान सभा के समक्ष रखी जा सकती है । नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कंट्रोलर ऐन्ड आडिटर जनरल) द्वारा विनियोग लेखों (एप्रोप्रियेशन एकाउन्ट्स ) के संकलन करने में तथा लोक लेखा समिति (पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी) द्वारा उन पर विचार करने में कुछ समय लगता है। चूंकि अतिरिक्त अनुदानों के लिये इन मांगों को संविधान के अनुसार सदन के समक्ष पहली बार प्रस्तुत किया जा रहा है, इसलिये भारत सरकार के परामर्श से इस सम्बन्ध में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया (प्रोसीजर) के निर्धारण में भी कुछ समय लगा है।"
अध्यक्ष महोदय, कांस्टीट्यूशन हमारे सामने है, हमें गवर्नमेंट आफ इंडिया से क्या पूछना है। पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी का सवाल है। अध्यक्ष महोदय, जैसे एकाउन्टटेन्ट जनरल
महोदय के बीच में और ऐड मिनिस्ट्रेटिव हेड्स के बीच में कारस्पांडेंस चलती है और जब एकाउन्टेंट जनरल के यहां किताबों में दर्ज हो जाता है कि इस डिपार्टमेंट ने कितनी सेविंग की है तो वह वहां लिखी जाती है, इसी तरह से किसी डिपार्टमेंट ने कितना ज्यादा खर्च कर दिया वह भी दर्ज हो जाता है और गवर्नमेंट को मालूम हो जाता है कि हमारे इस डिपार्टमेंट में एक्सेस हो गया। मेरे कहने का मतलब यह है कि १९५०-५१ में जो रुपया एक्सेस हुआ उस रुपये की सूचना गवर्नमेंट को हो चुकी थी कि इस डिपार्टमेंट में इतना एक्सेस हो गया । कोई कारण नहीं था कि इतने लम्बे समय तक वह पड़ी रहे और यहां पर हमारे सामने न आवे । गवर्नमेंट के पास आडिटर जनरल के दफ्तर से हिसाब-किताब आ गया होगा। यह जरूरी नहीं है कि इस तरह की ग्रान्ट पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी के सामने आवे । गवर्नमेंट और एकाउन्टेन्ट जनरल में खतोकिताबत होती रहती है और फिर आपस में ही इनका फैसला हो जाता है कि इस तरह से इसको ठीक कर लिया जाय । इसलिये मेरे कहने का मतलब यह है कि ५०-५१ के ऐक्सेस एकाउन्ड का हिसाब गवर्नमेंट को ५२ में हर हालत में पहुंच गया होगा। कोई कारण नहीं है कि आज तक इतने साल तक यह एक्सेस ग्रान्ट हमारे सामने न रखी जाती । इसमें पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी का कोई दोष नहीं है। यह तो उसी तरह से हुआ कि अगर इस साल कोई एक्सेस ग्रान्ट तो वह क एकाउन्ट्स कमेटी के पास तो जा नहीं सकती है, क्योंकि उसके पास एप्रोप्रियेशन एकाउण्टस नहीं है। पहले उसको आडिटर जनरल तैयार करें और फिर वह पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी के सामने आ और तब उस पर फैसला हो । फिर वह सरकार के पास जाय तब वह फैसला करे कि यह एक्सेस हो गया । तब मांग करे । तो वह एक्सेस यहां पर सन् ६२ में आयेगा तब तक न मालूम कौन गवर्नमेंट यहां पर बैठी रहेगी । इसलिये मेरी शिकायत है कि इस तरह से नहीं होना चाहिये । एक्सेस होता है, मैं भी मानता हूं, लेकिन इसका तरीका यह दोषपूर्ण है। जनरल डिस्क्शन के मौके पर मैं माननीय मंत्री जी को बताने की कोशिश करूंगा और सरकार ने उसको पालन किया तो फिर इस तरह की आपत्ति से वह बच सकती है । इन शब्दों के साथ जो ग्रान्ट यहां पर रखी गयी है, मैं उसका विरोध करता हूं ।
* श्री अवधेशप्रतापसिंह (जिला फैजाबाद) - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सच है कि किसी विधान सभा के लिये किसी न किसी समय उसको एक्सेस ग्रान्ट के लिये मंजूरी देनी होगी। भी जो बातें यहां पर माननीय मुख्य मंत्री ने कही हैं उससे न मुझे कोई विरोध है और न ऐसी बात है जिसके ऊपर कुछ कहा जा सकता है। मैं आपके द्वारा माननीय मंत्री जी का ध्यान इस ग्रान्ट के सम्बन्ध में प्राकर्षित करना चाहता हूं । वह यह है कि टेहरी गढ़वाल के सम्बन्ध में यह सच है कि वह नहीं बता सकते थे, विलीन होते हुये समय बहुत सी जानकारी उस रियासत के बारे में इस प्रदेश की सरकार को नहीं थी। सरकार उस समय उसके लिये पूरी और समुचित व्यवस्था नहीं कर सकती थी । परन्तु मैं आपके द्वारा माननीय मंत्री जी से यह दरियाफ्त करना चाहता हूं कि ग्रो मोर फूड कम्पेन के सम्बन्ध में क्या सरकार को जानकारी नहीं थी। आज की नहीं, यह उस समय की बात है जब कि महायुद्ध चल रहा था । तब से आजतक इसके लिये इस प्रदेश में काफी धन व्यय हो चुका है। इस सम्बन्ध में किस तरह से अपव्यय हुआ है और व्यय का दुरुपयोग हुआ है इसके कहने के लिये यह अवसर नहीं है ।
दूसरी बात जो और बताने वाली है वह यह है कि जमींदारी विनाश कोष के लिये सरकार को कौन सी आपत्ति प्रा गयी थी जिसके लिये सहसा इतनी मोटर गाड़ियां खरीदनी पड़ीं। जमीदारी विनाश कोष जिस समय चल रहा था उस समय हमारे माननीय ठाकुर हुकुम सिंह जिम्मेदार थे। इस सरकार ने उसके लिये भी प्रबंध किया था कि सरकार के कोष में रुपया संचित किया जाय। जब कि सरकार ने इसके लिये करोड़ों रुपया दिया तो इसके लिये कौन सी श्रापति प्रा पड़ी थी। जहां तक ज़मींदारी विनाश कोष का सम्बन्ध है मैं आपके द्वारा सरकार को यह बता
*वक्ता मे भाषण का पुनर्वीक्षण नहीं किया ।
देना चाहता हूं कि किस तरह से हमारी प्रदेशीय सरकार ने इसके सिलसिले में धन का दुरुपयोग किया। और अधिक अन्न उपजाओ और जमींदारी विनाश कोष के सिलसिले में माननीय मुख्य मंत्री जी का यह कहना कि उनको इस बात का ज्ञान नहीं था मैं समझता हूं कि इसमें कोई सार नहीं है । जब बजट प्राया था तो हो सकता था कि उस समय तक पूरा ज्ञान न हो पाया हो परन्तु यह कहना कि सप्लीमेंटरी ग्रान्ट जब आयी थी उस समय भी मंत्री महोदय को इसका ज्ञान न था. इसमें कोई तथ्य नहीं है। यह हो सकता है कि उस समय और आज भी ऐसी गलतियां हों, जिनकी वजह से यह हो सकता हो कि सरकार को पूरा ज्ञान नहीं हो पाता है। परन्तु किसी भी सरकार के लिये डेमोक्रेसी में रहना और पूरा ज्ञान प्राप्त न करना केवल यही कहा जा सकता है कि उधर की बेंचेंज पर जो लोग बैठे हुये हैं वे सब लोटस ईटर्स ही हैं, जिनको अपने कर्तव्य और कार्य का ज्ञान नहीं है। इसलिये केवल डेमोक्रेसी में यह कह कर पार लगना संभव नहीं है। माननीय मुख्य मंत्री जी का गढ़वाल के बारे में जो कहना है वह तो मान्य हो सकता है, लेकिन ठाकुर साहब के लिये यह क्या ग्राफत आ गयी कि वे मोटर पर मोटर खरीदते ही गये। जमीदारी मोटरों से थोड़े ही टूटनी थी, उसको तोड़ने के लिये तो स्वयं विराजमान ही थे। अधिक अन्न उपजाओ के सिलसिले में मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं कि उसके बारे में माननीय मुख्य मंत्री जी हर एक चीज को जानते थे। हां, किसी तरह की गलतियों पर आवरण डालने की बात तो समझ में प्रा सकती है और ऐसे समय में जो कुछ किया जाता है और करना पड़ता है, वह तो मैं जानता ही हूँ । श्रीमन्, अब मैं और अधिक समय नहीं लेना चाहता और इतना कह कर हो समाप्त करता हूं
श्री अध्यक्ष - मैं कार्यक्रम के बारे में कुछ कह देना चाहता हूँ । इन अनुदानों के ऊपर प्राप ४ बजे तक बहस करें । ४ बजे जो अनुदान रह जायेंगे उनके ऊपर बिना बहस में वोट ले लूंगा और उसके बाद फिर जैसा कि नियम है वह विनियमन विधेयक आयेगा । ४ बजे तक इसके ऊपर मतदान का कार्यक्रम समाप्त हो जाना चाहिये ।
( इस समय १ बजकर १८ मिनट पर सदन स्थगित हुआ और २ बजकर २५ मिनट पर उपाध्यक्ष श्री हरगोविंद पन्त की अध्यक्षता में सदन की कार्यवाही पुनः आरम्भ हुयी ।)
श्री नारायणदत्त तिवारी -- आदरणीय उपाध्यक्ष महोदय, में प्रस्तुत मांग का विरोध करने के लिये खड़ा हुआ हूँ । माननीय मुख्य मंत्री जी ने जिन सिद्धांत सम्बन्धी विचारों को उपस्थित किया है वे विचारणीय हैं। उन्होंने यह स्पष्ट कहा कि कोई भी सरकार, किसी भी देश की क्यों न हो उस के बजट में वृद्धियां होने की गुंजाइश रहती है और इसीलिये विधान में ऐसी व्यवस्था है कि उस के अनुसार वृद्धियों के लिये सदन के सम्मुख मांग की गुंजायश हो। यह सही है कि उनके लिये गुंजाइश होनी चाहिये । लेकिन प्रश्न यह है कि वह वृद्धियां कौन सी हों ? वह ऐसी न हों जिन को पूरक बजट में व्यवस्था हो सकती थी। उनका कहना है कि जिन विषयों में पूरक बजट में व्यवस्था हो सकती है वे अलग हैं और जिनकी मांग वृद्धियों में हो सकती है वे अलग होती हैं। मैं कहूंगा कि कुछ मामलों में ऐसा होना सम्भव भी है जैसे मिसाल के लिये एक है। जो मांग प्राज रखी जा रही है, इस में रोडवेज के सम्बन्ध में डिप्रोसिएशन एकाउन्ट का जिक्र है। इसके सम्बन्ध में यहां के फाइनेंस सेक्रेटरी ने पबलिक एकाउन्ट्स कमेटी के सामने जिक्र किया और ३ बार कहा कि यह बजट में आना चाहिये। यही नहीं है और भी आइटम्स हैं जो पूरक बजट में आ सकते हैं और वृद्धियों में नहीं आने चाहिये। देखना यह है कि प्रस्तुत मांग में कौन सी व्यवस्था है जो पूरक बजट में प्रा सकती थी। आप देखें कि इसमें लिखा है कि अधिक अन्न उपजाओ आंदोलन के सम्बन्ध में अपेक्षित मोटर गाड़ियों की व्यवस्था करने के सम्बन्ध में करना पड़ा । यह १२ हजार रुपया इस मद पर और विलीनीकृत रियासतों में अधिक व्यय के सम्बन्ध में व्यय हुआ । अगर मोटर गाड़ियाँ खरीदनी पड़ीं तो यह न्यू एक्सपेंडिचर आइटम हो जाता है और उसकी व्यवस्था पूरक बजट में होनी चाहिये थी और रखरखाव में हुआ तो सवाल दूसरा है । जिस तरह से स्पष्टीकरण में लिखा हुआ है उससे मालूम होता है कि नयी मोटर
गाड़ियां खरीदने की आवश्यकता हुयी, अगर यह होता कि नहीं खरीदो गयीं तो वृद्धि में ग्रा सकता था लेकिन मोटर गाड़ियों की व्यवस्था का अर्थ हो सकता है कि नयी खरीदो गयीं। सन् ५०-५१ का बजट हमारे सामने है, उसमें सामान्य प्रशासन के सम्बन्ध में २ करोड़ ५३ लाख की मांग की गयी है। उसके बाद एक पूरक बजट आया और उसमें इसके लिये २८ लाख दस हजार की और मांग की गयी थी। पूरक बजट में आप देखेंगे कि इन दोनों मांगों के लिये व्यवस्था की गयी है । एक तो जमींदारी विनाश कोष की उगाही की कार्यवाही के सम्बन्ध में पूरक बजट में १ लाख ५० हजार की मांग की गई थी फिर उन गाड़ियों के लिए पेट्रोल आदि के लिए २ लाख की मांग अलग की गई थी और उन मोटर गाड़ियों की मरम्मत आदि के लिए १ लाख रुपए के करीब और मांग की गई थी। इस तरह से मोटर गाड़ियों की मद में ही कुल अलग-अलग आइटम्स में उस सप्लीमेंटरी बजट में साढे ४ लाख रुपए की मांग की गई थी। तो जब सप्लीमेंटरी बजट, १९५०-५१ में इन्हीं मदों के लिये रुपया मांगा गया था और उस वृद्धि का अन्दाजा हो गया था कि ज्यादा रुपया खर्च होना चाहिये तो यह रुपया एक नये मद के रूप में खर्च नहीं होना चाहिये और अगर वृद्धि हुयी तो हमें यह जानने का अधिकार है कि यह वृद्धि किस प्रकार हुयी और क्या यह पूरक बजट में नहीं भ्रा सकती थी और यह पुराना खर्च किस उपशीर्षक के मातहत हुआ ? पहले तो यह आना हो नहीं चाहिये था और अगर आता भी है तो उसमें पूरा स्पष्टीकरण होना चाहिये था कि किस उपशीर्षक से यह धन आया है, क्योंकि पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी की रिपोर्ट में सभी मदों का पूरा ब्योरा नहीं होता। पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी की प्रोसीडिंग्ज इस साल काफी मोटी छपी हैं, लेकिन जहां तक उसकी रिपोर्ट होती है वह बहुत संक्षिप्त होती है और सभी बातें उसमें नहीं श्रा सकतीं । तो कम से कम स्पष्टीकरण बहुत स्पष्ट होना चाहिये। मैं चाहता हूं कि इसका स्पष्टीकरण माननीय मुख्य मंत्री जी दें और इसीलिये इसका विरोध करने के लिये मैं प्रस्तुत हुआ
डाक्टर सम्पूर्णानन्द -- उपाध्यक्ष महोदय, मुझको ऐसा लगता है कि मेरी इस मांग का विरोध करते हुये माननीय उपाध्यक्ष जी ने अपने साथ थोड़ा सा अन्याय किया है । उनको पब्लिक एकाउन्ट्स इत्यादि के विषय में जो ज्ञान है उससे उन्होंने पूरा-पूरा काम नहीं लिया। उन्होंने यह कहा यदि में उन्हें गलत नहीं समझ पाया हूं कि जब कोई वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाता है तो उसके चार-पांच महीने के भीतर हो सरकार को पता लग जाना चाहिये कि कितना रुपया कहां ज्यादा खर्च हुआ है ? मेरा निवेदन है कि ऐसा सम्भव नहीं है । क्लोज प्राफ दि ईयर के चार-पांच महीने के भीतर यह प्रन्दाजा लगता है मोटे तौर पर कि कितना अधिक व्यय हुआ है, लेकिन उपाध्याय जी को इसके बाद मालूम है, गवर्नमेंट के डिपार्टमेंट से एकाउन्टेन्ट जनरल से लिखा पढ़ी होती है और बाद में यह दोनों के खतोकिताबत करने से तय होता है कि किसकी गलती है ? यदि एकाउन्टेंट जनरल के हिसाब की जांच में गलती नहीं होती तो सरकार के उस विभाग को मालूम होता है कि रुपया ज्यादा खर्च किया है। इसमें कितने वक्त की आवश्यकता है तब जाकर वह मालूम होता है। इस वास्ते साल महोने में यह सम्भव भी नहीं है। उपाध्याय जी ने बजट मैनुअल जरूर देखा होगा। उसका जो सेक्शन १५७ है वह इस प्रकार है
"A demand for an excess grant differs from a demand for a supplementary grant in that, while the latter is essentially a demand for a grant the need for which is foreseen during the currency of a year and is presented in the year to which it relates, a demand for an excess grant is presented after the close of the financial year to which it relates in order to regularize expenditure in excess of the voted grant of that year or on a 'new service' in that year not covered have been made up and audited the work of compilation of the appropriation accounts by the of the Assembly. The need for an excess grant connot be known until the appropriation accounts by the Accountant Genral and their considera
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एक हज़ार नौ सौ पचास-इक्यावन क अतिरिक्त अनुदानों के लिए मांगों पर मतदान श्री मदनमोहन उपाध्याय -- तो उस डिपार्टमेंट में क्या खराबी थी, यह तो में कहना नहीं चाहता हूं । श्री अध्यक्ष --अगर यह वाजिब है तो मानिये और गैरवाजिब है तो उसको बताइये कि क्यों । श्री मदनमोहन उपाध्याय --में वाजिब है या गैरवाजिब है इस पर नहीं जा रहा हूं। में इस पर जा रहा हूं कि यह खर्च न हो । उसको वित्त मंत्री या मुख्य मंत्री उसका जवाब देंगे जनरल श्री पालिसी के बारे में । श्री दनमोहन उपाध्या -- इस पर मैं ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहता हूं। मजबूरी थी उनको खर्च करने की और उन्होंने खर्च किया। जहां तक इस आइटम के बारे में है। लेकिन में कांस्टीट्यूशनली इसकी मुखालिफत करता हूं और जैसा कि आपने कहा जब यह बिल प्रायेगा तब में बोलूंगा और में उस समय इस सारे सवाल को लूंगा और में एक घंटा बोलूंगा क्योंकि यह सबसे पहली ग्रान्ट इस प्रकार एक्सेस को है और एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है । हमारे माननीय सदस्य समझ नहीं रहे हैं। अगर पढ़ते तो समझते कि यह कितने महत्व की चीज है और क्या इसकी महत्ता है। मैं डिमोक्रेसी में विश्वास करता हूं और इस सदन की प्रतिष्ठा को कायम रखना चाहता हूं। इस सदन की जो पावर्स हैं उन पर बात करना चाहता हूं। और अगर इसके पावर्स पर कोई भी कोठाराघात करना चाहेगा तो उसका हम विरोध करेंगे। हां माफी मांगें, जैसा मानाय वित्त मंत्री जी ने कहा, यह बात दूसरी है । लेकिन यह कह देना कि नहीं साहब हम खर्च भी कर सकते आप करोड़ों रुपया खर्च कर दीजिये और हाउस की परवाह न कीजिये तो यह डिक्टेरशिप । बहुमत के बल पर आप मनमानी करना चाहते हैं । तो यह तो एक तरह से डिक्टेटरशिप नी । श्रीमन्, मैं यह भी जानना चाहता हूं कि इसका बिल कब आयेगा, अगर आजही जाय तब तो ठीक है । तब मैं कुछ कहूं । श्री अध्यक्ष - अनुदानों पर मतदान खत्म होते ही आज ही आजायगा । श्री मदनमोहन उपाध्याय --तो अध्यक्ष महोदय, जनरल डिस्क्शन पर मैं बहस करूंगा। श्री ब्रजभूषण मिश्र - अध्यक्ष महोदय, में समझता हूं कि अगर उपाध्याय जी ने स्पष्टीकरण को पढ़ा होता तो इतना अधिक बोलते की आवश्यकता न होती। सारे लेनदेन का हिसाब तो ऐसा होता ही है । बनिया भी जब पर्ची काटता है तो नीचे लिखा होता है कि भूल चूक लेनी देनी । वही यहां पर भी है सीवासादा हिसाब है। उसमें न कोई व्याख्या की जरूरत है और न कोई गबन की बात, जैसा पहले माननीय उपाध्याय जी कह चुके हैं जिसको कि उन्होंने आपकी आज्ञा से वापस भो लिया । सीधी सी बात है बारह लाख के स्टाम्प बिके तो जितने बिकेंगे रुपया तो राजस्व में चला जायगा और कमीशन के खाते में पड़ेगा। कहीं रुपया नहीं गया। और न कहीं किसी ने गबन किया है। एक जेब से निकल कर दूसरी जेब में रखना है, केवल का रूप है, सीधी सी बात है कि इतने के स्टाम्प बिके तो उनकी छपाई वगैरह में जो कागज और रुपया खर्च हुआ वह स्टाम्प की मद में बढ़ गया और यही टोटल मिल करके बाईस हजार हो गया उसके वास्ते में समझता हूं कि यह मांग स्वीकार की जाप । * श्री नारायणदत्त तिवारी -- श्रीमन्, में आपकी आज्ञा से प्रस्तुत मांग का विरोध करने के लिये उपस्थित हुआ हूं । इस ग्रान्ट नम्बर चार के अनुसार स्टाम्प ग्रान्ट के अधीन बाईस,एक सौ अट्ठावन रुपयापये की वृद्धि के सम्बन्ध में रुपये की मांग की गयी है। मैंने पब्लिक कमेटी की रिपोर्ट में यह ध्यान से देखने की चेष्टा की कि आखिर इस ग्रान्ट के सम्बन्ध में कोई प्रश्न उठा है या नहीं। लेकिन उस रिपोर्ट में सन् एक हज़ार नौ सौ पचास-इक्यावन के बजट के सम्बन्ध में जो रिपोर्ट है एप्रोप्रियेशन आडिट रिपोर्ट, उसमें कोई व्योरा या विवरण न इस विभाग की ओर से और न कमेटी की तरफ से देखने को प्राप्त हुआ । तो इसलिये कम से कम इस प्रान्ट चार के बारे में नहीं कहा जा सकता कि पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी के सामने कोई ब्योरा उपस्थित किया या स्पष्टीकरण मांगा। इसलिये मैं इतना अत्यन्त आवश्यक समझता हूं कि इस ग्रान्ट के बारे में माननीय मंत्री जी को पूरा ब्योरा सदन के सामने रखना चाहिये । यह जो स्पष्टीकरण दिया गया है यह केवल पाँच लाइन का है और इतना अर्थहीन है, इतना अस्पष्ट है कि इससे कोई आवश्यकता नहीं महसूस होती है कि क्यों बाईस हजार ही दिया जाय। यह हो सकता है कि डिटर जनरल ने या कम्पट्रोलर जनरल ने सारी फाइलें डिपार्टमेंट की देख ली हों उसके बाद कोई सिफारिश की हो। लेकिन सदन के सामने कोई सिफारिशों का व्योरा नहीं आया। मिसाल के लिये सन् एक हज़ार नौ सौ पचास-इक्यावन में स्टाम्प्स को प्राइटम ग्रान्ट नम्बर चार के लिये इक्यावन,सात सौ रुपयापये की मांग की गयी। जिसमें बाईस हजार की वृद्धि हुयी। कहा यह जाता है कि उस साल बारह लाख रुपये की अधिक आमदनी स्टाम्प बिकने से हुयी जिसके कारण स्टाम्प वेन्डर्स को डिस्काउन्ट दिया गया और स्टाम्प्स के बनने की कीमत जो थी वह और बढ़ गयी । तो इस ऐक्सप्लेनेशन से यह मालूम होना चाहिये था, अलग अलग स्पष्ट किया जाना चाहिये था ब्योरेवार कि कितना डिस्काउन्ट स्टाम्प वैन्डर्स को दिया गया और कितना बढ़ा और कितना जो मैन्युफैक्चरिंग कास्ट, प्रकाशन व्यय या वह कितना बढ़ा अलग अलग उसका ब्योरा दिया जाना चाहिये था कि इतना पहले था, इतना इसमें बढ़ गया । मैं जानना चाहूंगा कि माननीय मंत्री जी से कि बाईस,एक सौ अट्ठावन रुपयापये में से कितना रुपया ऐसा था जो कि उन्होंने डिस्काउन्ट के रूप में दिया और कितना रुपया ऐसा था जो कि उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग कास्ट के रूप में दिया । दूसरी बात यह है कि माननीय मन्त्री जी को यह बतलाना चाहिए कि पूरक अनुदानों को रूप में सन पचास-इक्यावन से लेकर आज तक उन्होंने इस ग्रान्ट को क्यों नहीं मांगा और जब तक आडीटर जनरल ने उसको बतलाया नहीं कि एक्सेस ग्रान्ट खर्च कर चुके हो, उनके विभाग को पता क्यों नहीं लगा। यह आमदनी का आइटम था, बारह लाख आमदनी हुयी यह तो मालूम था उनके विभाग को, लेकिन जो ज्यादा खर्चा करना पड़ा यह उनके विभाग को नहीं मालूम हुआ। उनके विभाग को अपनी आमदनी जो बढ़ गयी है वह तो मालूम है, लेकिन जो खर्चा बड़ा वह नहीं मालूम हुआ जब तक कि आडटिर जनरल ने तीन साल तक उनके विभाग को नहीं बतलाया कि इतना ज्यादा खर्चा तुम कर चुके हो, मैं समझता हूं कि यह उनके विभाग के लिये बड़े शर्म की बात है। मैं जानना चाहता हूं कि सन् पचास-इक्यावन के पूरक अनुदान जो प्रस्तुत हुये उनमें क्यों नहीं मांगा ? इक्यावन-बावन का बजट आया, सप्लीमेंट्री उस समय आया उस समय क्यों नहीं मांगा। श्रापको ज्ञात होगा श्रीमन्, सप्लीमेंट्री स्टीमेट्स में तीन तीन साल पुराने प्राइम हमने मंजूर किये हैं और पिछले साल के कितने आइटम्स मंजूर करते रहे हैं। मैं तो सदन से विनीत निवेदन करूंगा कि जब तक माननीय मंत्री जी स्पष्टीकरण नहीं देते कि उनका विभाग सोया हुआ नहीं था, स्वप्नावस्था में विचरण नहीं कर रहा था जिस समय कि यह रुपया खर्च हुआ, अपने स्पष्टीकरण को और स्पष्ट नहीं करते तब तक हमको इस ग्रान्ट को मंजूर नहीं करना चाहिये । श्री गिरधारीलाल-अध्यक्ष महोदय, मुझे इस सिलसिले में बहुत ज्यादा नहीं कहना है । सिर्फ इतना ही बतलाना चाहता हूं कि सदन में जिस समय सब एक्सेस ग्रान्ट्स रखी गयी उसी * वक्ता ने भाषण का पुनर्वोक्षण नहीं किया। समय यह भी रखी गयी और दूसरी खास बात उन्होंने यह कही कि यह अलग अलग कितना रुपया इसमें खर्च हुआ है । तो मैं उनको यह बता देना चाहता हूं कि दस हजार सात सौ रुपया तो स्टाम्प वेंडर्स के कमोशन वगैरह में और बारह हजार सात सौ तिरासी रुपयापया मैन्युफैक्चरिंग कास्ट वगैरह में दिया गया है। और मं समझता हूं बाकी जितनी बातें इसके अलावा कही गयी वह सब वैसी ही बातें हैं और उनका स्पष्टीकरण देने की जरूरत नहीं है । श्री नारायणदत्त तिवारी -- मैं एक बात जानना चाहता हूं ? एक सवाल करना चाहता हूं कि कमीशन में केवल दस हजार रुपया खर्च होना और बारह हजार रुपये होना यह इतना आश्चर्यजनक है कि कैसे इसका स्पष्टीकरण दिया जा सकता है ? श्री अध्यक्ष -- आपको कुछ जवाब देना है ? गिरधारीलाल - जी नहीं, मुझे कोई जवाब नहीं देना है । श्री अध्यक्ष - प्रश्न यह है कि अनुदान संख्या चार - स्टाम्प के अन्तर्गत बाईस,एक सौ अट्ठावन रुपयापये की मांग स्वीकार की जाय । अनुदान संख्या छः -- रजिस्ट्री श्री गिरधारीलाल - अध्यक्ष महोदय, में प्रस्ताव करता हूं कि इकतीस मार्च, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन को समाप्त हुये वर्ष के दौरान में अनुदान सं या दो, रजिस्ट्री के अन्तर्गत व्यय बुद्धि को पूरा लिये राज्यपाल को छः,छः सौ तीस रुपयापये की धनराशि दी जाय । इसके विषय में भी खास बात नहीं कहनी है, क्योंकि इसमें जो खास एक्सप्लेनेशन है वह संबंधित लिट्रेचर में दिया हुआ है। श्री नारायणदत्त तिवारी - विधान की धारा दो सौ तीन के अनुसार गवर्नर महोदय की सिफारिश के अनुसार यह मांग नहीं हो रही है । श्री अध्यक्ष -- उन्होंने यह कह तो दिया । आपने सुना न होगा । * राजा वीरेंद्रशाह -- माननीय प्रध्यक्ष महोदय, जो रजिस्ट्री के सम्बन्ध म छः,छः सौ तीस रुपयापये की मांग सरकार ने की मैं उसका विरोध करता हूं । विरोध करने का तात्पर्य यह है कि हम लोगों को इसमें तो कोई उम्र नहीं है कि छः,छः सौ तीस रुपयापया खर्च किया गया, जरूरत पड़ने पर किया गया, लेकिन यह जो तरीका एक्सेस ग्रान्ट में मांगने का है, यह उचित नहीं है । तो सब विभागीय कर्मचारियों को मालूम होना चाहिये कि कितना खर्च होना चाहिये । यह कोई अच्छी चीज नहीं है कि एक्सेस ग्रान्ट हम विधान सभा में पेश करें और फिर वह पूरा किया जाय। यह तर्क देना कि हम भूल गये, तो तीन-तीन सप्लीमेंटरी डिमांड्स सरकार ने रखे हैं इस भवन के अन्दर सन् एक हज़ार नौ सौ पचास-इक्यावन तक के खर्चे के और यह पता खर्चे का नहीं चल सका कि विलीन रियायतों के सम्बन्ध में क्या खर्चा इस बारे में हुआ। यह विभाग के लोग न जान सके, तो मैं समझता हूं कि यह जायज नहीं है और इसलिये विरोध करता हूं कि श्राइंदा ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिये । श्री गिरधारीलाल मुझे इसके विषय में भी कोई खास बात नहीं कहनी है। सिर्फ इतना ही है कि यह साफ जाहिर है कि जिस समय सदन के सामने बजट रखा जाता है उस समय * वक्ता ने भाषण का पुनर्वोक्षण नहीं किया । [श्री गिरधारीलाल] सरकार की कभी यह ख्वाहिश नहीं होती कि सप्लीमेंटरी ग्रान्ट या एक्सेस ग्रान्ट सदन के सामने रख कर सदन का समय लिया जाय । लेकिन साथ ही गवर्नमेंट का काम बिला इसके चल भी नहीं सकता । लिहाजा जब बहुत मजबूरी हो जाती है तभी ऐसी ग्रान्ट्स सदन के सामने पेश की जाती हैं । अध्यक्ष प्रश्न यह है कि अनुदान संख्या छः - - रजिस्ट्री के अन्तर्गत छः,छः सौ तीस रुपयापयों की अतिरिक्त मांग स्वीकार की जाय । अनुदान संख्या बारह - कमिश्नर और जिला प्रशासन मुख्य मंत्री --प्रध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि इकतीस मार्च, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन को समाप्त हुये वर्ष के दौरान में अनुदान संख्या बारह - - कमिश्नर और जिला प्रशासन के अन्तर्गत व्यय वृद्धि को पूरा करने के लिये राज्यपाल को बासठ,एक सौ छियासी रुपयापये की धनराशि दी जाय । इस सम्बन्ध में मैं दो एक बातें निवेदन करना चाहता हूं। पहली बात तो यह है कि यह बिल्कुल सही है कि बिना सदन की मंजूरी के रुपया खर्च नहीं होना चाहिये। अगर मूल बजट बनते वक्त वह चीज नहीं भी हो सके तो सप्लोमेंट्री के रूप में आनी चाहिये । लेकिन जिन लोगों ने कांस्टीट्यूशन बनाया उनको दुनियां के और देशों का भी अनुभव था और वे जानते थे इस बात को कि कांस्टीट्यूशन के अनुसार जो भी काम होता है वह श्रादमियों के हाथ से होता है और वे इस बात को समझते थे और मैं भी इस बात को कहता हूं कि दुनियां में कोई भी गवर्नमेंट कभी ऐसे नहीं चल सकती कि उससे कभी न कभी कुछ एक्सेस खर्च न हो जाय । इसीलिये हमारे कांस्टीट्यूशन में एक्सेस ग्रांट्स के लिये नियम रखा गया है । अगर एक्सेस ग्रान्स होनी ही हां चाहिये थीं तो उनका न यहां जिक्र होता, न केन्द्र में होता और न ब्रिटिश पार्लियामेंट में होता । एक बात और है समझने के लिये । यह एक्सेस ग्रान्ट ऐसी चीज है जो सप्लीमेंटरी ग्रान्ट के रूप में कदापि पेश नहीं हो सकती। अगर सप्लीमेंटरी ग्रान्ट के रूप में पेश हो सके तो उसे सप्लीमेंटरी ग्रान्ट के रूप में आना चाहिये । जब कोई योजना गवर्नमेंट की होती है जिसको वह चलाना चाहती है उसको तो गवर्नमेंट सदन के सामने पेश कर सकती है, अगर वह मूल बजट में न हो । मसलन् इंडस्ट्रीज की बात है, उसका दो करोड़ रुपये सालाना का बजट हो और बीच में अगर यह बात येक इंडस्ट्री को भी चलाना है और उसके लिये बीस - पच्चीस लाख रुपये की ज़रूरत है तो उसके लिये तो गवर्नमेंट सप्लीमेंटरी ग्रान्ट पेश कर सकती है। लेकिन बहुत से खर्चे ऐसे होते हैं जिनको करने की न तो गवर्नमेंट की इच्छा होती है और उसको पता भी नहीं होता है, लेकिन वह खर्च हो जाता है। मिसाल के लिये, इसी में लिखा है कि जमींदारी एबालिशन और ग्रो मोर फूड के सिलसिले में जो काम हुआ उनमें गाड़ियों में खर्चा हुआ। अब इस खर्च को करने वाले हमारे यहां इक्यावन जिले हैं और एक नायब तहसीलदार से लेकर कलेक्टर तक के हाथ से वह खर्चा हुआ। कहीं पेट्रोल में दो रुपये खर्च किये गये और कहीं सवारी में, और ये सब रुपये जोड़ कर इतने हो जाते हैं जिनका सरकार को पता नहीं होता। जब कहीं सारा हिसाब पूरा हो जाता है तब कहीं जाकर पता लगता है कि इस काम में इतने रुपये ज्यादा खर्च हो गये। फिर अगर एक अधिकारी के हाथ से खर्च होता हो तः भी कुछ हो सकता है कि उसे पता रहता है कि रुपया इस काम के लिये है, उसी के अन्दर खर्च करने की कोशिश करें, लेकिन जहां पर इतने श्रादमी खर्च करने वाले होते हैं वहां पर कभी-कभी ऐसा हो जाना प्राश्चर्य की बात नहीं है। इसी मद को लीजिये बानवे, एक सौ छियासी रुपयापये हम मांगते हैं। इसके लिये कुल खर्चा सदन ने दो करोड़ तिरासी लाख का मंजूर किया था। उसके ऊपर बानवे,एक सौ छियासी रुपयापये और खर्च हये । उसको बतलाया गया है कि टेहरी गढ़वाल स्टेट का मर्जर हुआ और वह उत्तर प्रदेश में आयी। अब उसमें क्या खर्च होगा इसका कोई खास एस्टीमेट नहीं हो सकता था। जो समझ में प्रा सकता था वह तो बजट में रख दिया गया या सप्लीमेंटरी बजट में रख दिया गया लेकिन वहां कैसी सड़कें हैं, और क्या-क्या खर्चे होंगे, इसका कुछ अंदाजा नहीं हो सकता था। इसलिये ऐसा हुआ और जैसा कि लिखा है कि जमींदारी प्रबालिशन के सिलसिले में, कलेक्शन के काम में तथा ग्रो मोर फूड के सिलसिले में सवारी में रुपया खर्च हुआ है । हिसाब तो एकाउन्टेन्ट जनरल के यहां रहता है और जब वहां से हिसाब आता है तो हम लिखते हैं। इसके अलावा और कोई दूसरा तरीका नहीं है कि हम रख सकें। इसलिये मैं आशा करता हूं कि सदन मेरी मांग को स्वीकार करेगा । श्री मदनमोहन उपाध्याय -- अध्यक्ष महोदय, मैं इस मांग का विरोध करता हूं और मुझे यह जानकर बड़ी खुशी हुयो कि माननीय मुख्य मंत्री जी ने स्वयं स्वीकार किया है कि ऐसा हो जाता है और अगर ऐसा डेमोक्रेसी में नहीं होता तो विधान में यह क्लाज आया हो नहीं होता। हमारी एक और शिकायत है कि बजट इकतीस मार्च को खत्म होता है । इकतीस मार्च तक जितना रुपया होता है वह खर्च हो जाता है या जो कुछ रुपया जितना बजट का सैक्शन होता है उससे कुछ ज्यादा खर्च हो गया हो तो एशून्यजीशून्य के यहां किताबों में दर्ज हो जाता है। वह दो तीन महीने तक खुली रहती हैं। वैसे तो इकतीस मार्च को बंद हो जानी चाहिये लेकिन अगस्त के महीने तक खुली रहती हैं। जहां पर डिपार्टमेंट्स की पिक्चर प्रा जाती है कि इस डिपार्टमेंट ने कितनी सेविंग की या एक्सेज किया । अध्यक्ष महोदय, मुझे दुख तो इस बात का है कि जो रोजन्स दिये गये हैं वह सब गलत हैं, इसलिये हमें शिकायत है । पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी के सामने यह मामला आया था और उसने सारे पहलू पर खूब अच्छी तरह से विचार किया था और देखा था कि स्टेट्स के मरजर पर क्या खर्चा हुआ और जमींदारी अबालिशन के सिलसिले में कलेक्शन में खर्चा हुआ था । उस सब को देखकर अन्त में पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी ने यह फैसला किया था कि यह जो ग्रान्ट है बहुत अनविल्डी है। सब कमीशन, लेजिस्लेचर वगैरह दुनियां भर के डिपार्टमेंट्स इस हेड में हैं । उसने यह फैसला किया कि यह डिपार्टमेंट बहुत अनविल्डी हो गया है इसलिये इसे डिसबर्स कर दिया जाय और छोटे-छोटे ग्रान्ट्स बना दिये जायं । मुझे आशा है कि माननीय मुख्य मंत्री जी जवाब देते समय यह बताने की कोशिश करेंगे कि सरकार ने इस पर क्या फैसला किया ? अध्यक्ष महोदय, आप देखें कि यह ऐसे रोजन्स हैं जिनसे हम कन्विन्स नहीं हो सकते हैं, वैसे बदनाम हमें किया गया है। इसमें लिखा है किः"A demand for an excess grant can be laid before the Legislative Assembly only after the Appropriation Accounts of the year have been made up and audited. The work of compilation . श्री अध्यक्ष - - यह आप क्या पढ़ रहे हैं ? श्री मदनमोहन उपाध्याय -- यह उन्होंने कहा कि क्यों देर हुयी श्री अध्यक्ष - - वह हिन्दी में भी तो आया है । श्री मदनमोहन उपाध्याय -- जी हां, "संबंधित वर्ष के विनियोग लेखे तैयार हो जाने और उनकी लेखा परीक्षा हो जाने के बाद ही अतिरिक्त अनुदान के लिये मांग विधान सभा के समक्ष रखी जा सकती है । नियंत्रक महालेखा परीक्षक द्वारा विनियोग लेखों के संकलन करने में तथा लोक लेखा समिति द्वारा उन पर विचार करने में कुछ समय लगता है। चूंकि अतिरिक्त अनुदानों के लिये इन मांगों को संविधान के अनुसार सदन के समक्ष पहली बार प्रस्तुत किया जा रहा है, इसलिये भारत सरकार के परामर्श से इस सम्बन्ध में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया के निर्धारण में भी कुछ समय लगा है।" अध्यक्ष महोदय, कांस्टीट्यूशन हमारे सामने है, हमें गवर्नमेंट आफ इंडिया से क्या पूछना है। पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी का सवाल है। अध्यक्ष महोदय, जैसे एकाउन्टटेन्ट जनरल महोदय के बीच में और ऐड मिनिस्ट्रेटिव हेड्स के बीच में कारस्पांडेंस चलती है और जब एकाउन्टेंट जनरल के यहां किताबों में दर्ज हो जाता है कि इस डिपार्टमेंट ने कितनी सेविंग की है तो वह वहां लिखी जाती है, इसी तरह से किसी डिपार्टमेंट ने कितना ज्यादा खर्च कर दिया वह भी दर्ज हो जाता है और गवर्नमेंट को मालूम हो जाता है कि हमारे इस डिपार्टमेंट में एक्सेस हो गया। मेरे कहने का मतलब यह है कि एक हज़ार नौ सौ पचास-इक्यावन में जो रुपया एक्सेस हुआ उस रुपये की सूचना गवर्नमेंट को हो चुकी थी कि इस डिपार्टमेंट में इतना एक्सेस हो गया । कोई कारण नहीं था कि इतने लम्बे समय तक वह पड़ी रहे और यहां पर हमारे सामने न आवे । गवर्नमेंट के पास आडिटर जनरल के दफ्तर से हिसाब-किताब आ गया होगा। यह जरूरी नहीं है कि इस तरह की ग्रान्ट पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी के सामने आवे । गवर्नमेंट और एकाउन्टेन्ट जनरल में खतोकिताबत होती रहती है और फिर आपस में ही इनका फैसला हो जाता है कि इस तरह से इसको ठीक कर लिया जाय । इसलिये मेरे कहने का मतलब यह है कि पचास-इक्यावन के ऐक्सेस एकाउन्ड का हिसाब गवर्नमेंट को बावन में हर हालत में पहुंच गया होगा। कोई कारण नहीं है कि आज तक इतने साल तक यह एक्सेस ग्रान्ट हमारे सामने न रखी जाती । इसमें पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी का कोई दोष नहीं है। यह तो उसी तरह से हुआ कि अगर इस साल कोई एक्सेस ग्रान्ट तो वह क एकाउन्ट्स कमेटी के पास तो जा नहीं सकती है, क्योंकि उसके पास एप्रोप्रियेशन एकाउण्टस नहीं है। पहले उसको आडिटर जनरल तैयार करें और फिर वह पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी के सामने आ और तब उस पर फैसला हो । फिर वह सरकार के पास जाय तब वह फैसला करे कि यह एक्सेस हो गया । तब मांग करे । तो वह एक्सेस यहां पर सन् बासठ में आयेगा तब तक न मालूम कौन गवर्नमेंट यहां पर बैठी रहेगी । इसलिये मेरी शिकायत है कि इस तरह से नहीं होना चाहिये । एक्सेस होता है, मैं भी मानता हूं, लेकिन इसका तरीका यह दोषपूर्ण है। जनरल डिस्क्शन के मौके पर मैं माननीय मंत्री जी को बताने की कोशिश करूंगा और सरकार ने उसको पालन किया तो फिर इस तरह की आपत्ति से वह बच सकती है । इन शब्दों के साथ जो ग्रान्ट यहां पर रखी गयी है, मैं उसका विरोध करता हूं । * श्री अवधेशप्रतापसिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सच है कि किसी विधान सभा के लिये किसी न किसी समय उसको एक्सेस ग्रान्ट के लिये मंजूरी देनी होगी। भी जो बातें यहां पर माननीय मुख्य मंत्री ने कही हैं उससे न मुझे कोई विरोध है और न ऐसी बात है जिसके ऊपर कुछ कहा जा सकता है। मैं आपके द्वारा माननीय मंत्री जी का ध्यान इस ग्रान्ट के सम्बन्ध में प्राकर्षित करना चाहता हूं । वह यह है कि टेहरी गढ़वाल के सम्बन्ध में यह सच है कि वह नहीं बता सकते थे, विलीन होते हुये समय बहुत सी जानकारी उस रियासत के बारे में इस प्रदेश की सरकार को नहीं थी। सरकार उस समय उसके लिये पूरी और समुचित व्यवस्था नहीं कर सकती थी । परन्तु मैं आपके द्वारा माननीय मंत्री जी से यह दरियाफ्त करना चाहता हूं कि ग्रो मोर फूड कम्पेन के सम्बन्ध में क्या सरकार को जानकारी नहीं थी। आज की नहीं, यह उस समय की बात है जब कि महायुद्ध चल रहा था । तब से आजतक इसके लिये इस प्रदेश में काफी धन व्यय हो चुका है। इस सम्बन्ध में किस तरह से अपव्यय हुआ है और व्यय का दुरुपयोग हुआ है इसके कहने के लिये यह अवसर नहीं है । दूसरी बात जो और बताने वाली है वह यह है कि जमींदारी विनाश कोष के लिये सरकार को कौन सी आपत्ति प्रा गयी थी जिसके लिये सहसा इतनी मोटर गाड़ियां खरीदनी पड़ीं। जमीदारी विनाश कोष जिस समय चल रहा था उस समय हमारे माननीय ठाकुर हुकुम सिंह जिम्मेदार थे। इस सरकार ने उसके लिये भी प्रबंध किया था कि सरकार के कोष में रुपया संचित किया जाय। जब कि सरकार ने इसके लिये करोड़ों रुपया दिया तो इसके लिये कौन सी श्रापति प्रा पड़ी थी। जहां तक ज़मींदारी विनाश कोष का सम्बन्ध है मैं आपके द्वारा सरकार को यह बता *वक्ता मे भाषण का पुनर्वीक्षण नहीं किया । देना चाहता हूं कि किस तरह से हमारी प्रदेशीय सरकार ने इसके सिलसिले में धन का दुरुपयोग किया। और अधिक अन्न उपजाओ और जमींदारी विनाश कोष के सिलसिले में माननीय मुख्य मंत्री जी का यह कहना कि उनको इस बात का ज्ञान नहीं था मैं समझता हूं कि इसमें कोई सार नहीं है । जब बजट प्राया था तो हो सकता था कि उस समय तक पूरा ज्ञान न हो पाया हो परन्तु यह कहना कि सप्लीमेंटरी ग्रान्ट जब आयी थी उस समय भी मंत्री महोदय को इसका ज्ञान न था. इसमें कोई तथ्य नहीं है। यह हो सकता है कि उस समय और आज भी ऐसी गलतियां हों, जिनकी वजह से यह हो सकता हो कि सरकार को पूरा ज्ञान नहीं हो पाता है। परन्तु किसी भी सरकार के लिये डेमोक्रेसी में रहना और पूरा ज्ञान प्राप्त न करना केवल यही कहा जा सकता है कि उधर की बेंचेंज पर जो लोग बैठे हुये हैं वे सब लोटस ईटर्स ही हैं, जिनको अपने कर्तव्य और कार्य का ज्ञान नहीं है। इसलिये केवल डेमोक्रेसी में यह कह कर पार लगना संभव नहीं है। माननीय मुख्य मंत्री जी का गढ़वाल के बारे में जो कहना है वह तो मान्य हो सकता है, लेकिन ठाकुर साहब के लिये यह क्या ग्राफत आ गयी कि वे मोटर पर मोटर खरीदते ही गये। जमीदारी मोटरों से थोड़े ही टूटनी थी, उसको तोड़ने के लिये तो स्वयं विराजमान ही थे। अधिक अन्न उपजाओ के सिलसिले में मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं कि उसके बारे में माननीय मुख्य मंत्री जी हर एक चीज को जानते थे। हां, किसी तरह की गलतियों पर आवरण डालने की बात तो समझ में प्रा सकती है और ऐसे समय में जो कुछ किया जाता है और करना पड़ता है, वह तो मैं जानता ही हूँ । श्रीमन्, अब मैं और अधिक समय नहीं लेना चाहता और इतना कह कर हो समाप्त करता हूं श्री अध्यक्ष - मैं कार्यक्रम के बारे में कुछ कह देना चाहता हूँ । इन अनुदानों के ऊपर प्राप चार बजे तक बहस करें । चार बजे जो अनुदान रह जायेंगे उनके ऊपर बिना बहस में वोट ले लूंगा और उसके बाद फिर जैसा कि नियम है वह विनियमन विधेयक आयेगा । चार बजे तक इसके ऊपर मतदान का कार्यक्रम समाप्त हो जाना चाहिये । श्री नारायणदत्त तिवारी -- आदरणीय उपाध्यक्ष महोदय, में प्रस्तुत मांग का विरोध करने के लिये खड़ा हुआ हूँ । माननीय मुख्य मंत्री जी ने जिन सिद्धांत सम्बन्धी विचारों को उपस्थित किया है वे विचारणीय हैं। उन्होंने यह स्पष्ट कहा कि कोई भी सरकार, किसी भी देश की क्यों न हो उस के बजट में वृद्धियां होने की गुंजाइश रहती है और इसीलिये विधान में ऐसी व्यवस्था है कि उस के अनुसार वृद्धियों के लिये सदन के सम्मुख मांग की गुंजायश हो। यह सही है कि उनके लिये गुंजाइश होनी चाहिये । लेकिन प्रश्न यह है कि वह वृद्धियां कौन सी हों ? वह ऐसी न हों जिन को पूरक बजट में व्यवस्था हो सकती थी। उनका कहना है कि जिन विषयों में पूरक बजट में व्यवस्था हो सकती है वे अलग हैं और जिनकी मांग वृद्धियों में हो सकती है वे अलग होती हैं। मैं कहूंगा कि कुछ मामलों में ऐसा होना सम्भव भी है जैसे मिसाल के लिये एक है। जो मांग प्राज रखी जा रही है, इस में रोडवेज के सम्बन्ध में डिप्रोसिएशन एकाउन्ट का जिक्र है। इसके सम्बन्ध में यहां के फाइनेंस सेक्रेटरी ने पबलिक एकाउन्ट्स कमेटी के सामने जिक्र किया और तीन बार कहा कि यह बजट में आना चाहिये। यही नहीं है और भी आइटम्स हैं जो पूरक बजट में आ सकते हैं और वृद्धियों में नहीं आने चाहिये। देखना यह है कि प्रस्तुत मांग में कौन सी व्यवस्था है जो पूरक बजट में प्रा सकती थी। आप देखें कि इसमें लिखा है कि अधिक अन्न उपजाओ आंदोलन के सम्बन्ध में अपेक्षित मोटर गाड़ियों की व्यवस्था करने के सम्बन्ध में करना पड़ा । यह बारह हजार रुपया इस मद पर और विलीनीकृत रियासतों में अधिक व्यय के सम्बन्ध में व्यय हुआ । अगर मोटर गाड़ियाँ खरीदनी पड़ीं तो यह न्यू एक्सपेंडिचर आइटम हो जाता है और उसकी व्यवस्था पूरक बजट में होनी चाहिये थी और रखरखाव में हुआ तो सवाल दूसरा है । जिस तरह से स्पष्टीकरण में लिखा हुआ है उससे मालूम होता है कि नयी मोटर गाड़ियां खरीदने की आवश्यकता हुयी, अगर यह होता कि नहीं खरीदो गयीं तो वृद्धि में ग्रा सकता था लेकिन मोटर गाड़ियों की व्यवस्था का अर्थ हो सकता है कि नयी खरीदो गयीं। सन् पचास-इक्यावन का बजट हमारे सामने है, उसमें सामान्य प्रशासन के सम्बन्ध में दो करोड़ तिरेपन लाख की मांग की गयी है। उसके बाद एक पूरक बजट आया और उसमें इसके लिये अट्ठाईस लाख दस हजार की और मांग की गयी थी। पूरक बजट में आप देखेंगे कि इन दोनों मांगों के लिये व्यवस्था की गयी है । एक तो जमींदारी विनाश कोष की उगाही की कार्यवाही के सम्बन्ध में पूरक बजट में एक लाख पचास हजार की मांग की गई थी फिर उन गाड़ियों के लिए पेट्रोल आदि के लिए दो लाख की मांग अलग की गई थी और उन मोटर गाड़ियों की मरम्मत आदि के लिए एक लाख रुपए के करीब और मांग की गई थी। इस तरह से मोटर गाड़ियों की मद में ही कुल अलग-अलग आइटम्स में उस सप्लीमेंटरी बजट में साढे चार लाख रुपए की मांग की गई थी। तो जब सप्लीमेंटरी बजट, एक हज़ार नौ सौ पचास-इक्यावन में इन्हीं मदों के लिये रुपया मांगा गया था और उस वृद्धि का अन्दाजा हो गया था कि ज्यादा रुपया खर्च होना चाहिये तो यह रुपया एक नये मद के रूप में खर्च नहीं होना चाहिये और अगर वृद्धि हुयी तो हमें यह जानने का अधिकार है कि यह वृद्धि किस प्रकार हुयी और क्या यह पूरक बजट में नहीं भ्रा सकती थी और यह पुराना खर्च किस उपशीर्षक के मातहत हुआ ? पहले तो यह आना हो नहीं चाहिये था और अगर आता भी है तो उसमें पूरा स्पष्टीकरण होना चाहिये था कि किस उपशीर्षक से यह धन आया है, क्योंकि पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी की रिपोर्ट में सभी मदों का पूरा ब्योरा नहीं होता। पब्लिक एकाउन्ट्स कमेटी की प्रोसीडिंग्ज इस साल काफी मोटी छपी हैं, लेकिन जहां तक उसकी रिपोर्ट होती है वह बहुत संक्षिप्त होती है और सभी बातें उसमें नहीं श्रा सकतीं । तो कम से कम स्पष्टीकरण बहुत स्पष्ट होना चाहिये। मैं चाहता हूं कि इसका स्पष्टीकरण माननीय मुख्य मंत्री जी दें और इसीलिये इसका विरोध करने के लिये मैं प्रस्तुत हुआ डाक्टर सम्पूर्णानन्द -- उपाध्यक्ष महोदय, मुझको ऐसा लगता है कि मेरी इस मांग का विरोध करते हुये माननीय उपाध्यक्ष जी ने अपने साथ थोड़ा सा अन्याय किया है । उनको पब्लिक एकाउन्ट्स इत्यादि के विषय में जो ज्ञान है उससे उन्होंने पूरा-पूरा काम नहीं लिया। उन्होंने यह कहा यदि में उन्हें गलत नहीं समझ पाया हूं कि जब कोई वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाता है तो उसके चार-पांच महीने के भीतर हो सरकार को पता लग जाना चाहिये कि कितना रुपया कहां ज्यादा खर्च हुआ है ? मेरा निवेदन है कि ऐसा सम्भव नहीं है । क्लोज प्राफ दि ईयर के चार-पांच महीने के भीतर यह प्रन्दाजा लगता है मोटे तौर पर कि कितना अधिक व्यय हुआ है, लेकिन उपाध्याय जी को इसके बाद मालूम है, गवर्नमेंट के डिपार्टमेंट से एकाउन्टेन्ट जनरल से लिखा पढ़ी होती है और बाद में यह दोनों के खतोकिताबत करने से तय होता है कि किसकी गलती है ? यदि एकाउन्टेंट जनरल के हिसाब की जांच में गलती नहीं होती तो सरकार के उस विभाग को मालूम होता है कि रुपया ज्यादा खर्च किया है। इसमें कितने वक्त की आवश्यकता है तब जाकर वह मालूम होता है। इस वास्ते साल महोने में यह सम्भव भी नहीं है। उपाध्याय जी ने बजट मैनुअल जरूर देखा होगा। उसका जो सेक्शन एक सौ सत्तावन है वह इस प्रकार है "A demand for an excess grant differs from a demand for a supplementary grant in that, while the latter is essentially a demand for a grant the need for which is foreseen during the currency of a year and is presented in the year to which it relates, a demand for an excess grant is presented after the close of the financial year to which it relates in order to regularize expenditure in excess of the voted grant of that year or on a 'new service' in that year not covered have been made up and audited the work of compilation of the appropriation accounts by the of the Assembly. The need for an excess grant connot be known until the appropriation accounts by the Accountant Genral and their considera
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By: ABP Live । Updated at : 13 Jun 2023 09:06 AM (IST)
Sunil Gavaskar On Ravichandran Ashwin: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर और अपने दौर के दिग्गज बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर का मानना है कि भारत में किसी दूसरे टॉप क्रिकेटर के साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया गया है, जैसा ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के साथ किया गया.
गौरतलब है कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में दुनिया के नंबर वन टेस्ट गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन को प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया था. गावस्कर समेत कई दिग्गज इस ओवल में भारत की हार की वजह मानते हैं. अश्विन को फाइनल से बाहर रखने के फैसले को भारत और ऑस्ट्रेलिया के कई पूर्व क्रिकेटरों ने गलत करार दिया था.
सुनील गावस्कर ने मिड-डे के लिए अपने कॉलम में लिखा, "आधुनिक युग में किसी भी अन्य शीर्ष-श्रेणी के भारतीय क्रिकेटर के साथ अश्विन जैसा व्यवहार नहीं किया गया है. भारत ने टेस्ट क्रिकेट में दुनिया के नंबर एक गेंदबाज को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं दी, जबकि ऑस्ट्रेलियाई टीम पांच बाएं हाथ के बल्लेबाज थे और इन्होंने ही ऑस्ट्रेलिया को जीत दिलाई. पहली पारी में ट्रेविस हेड का शतक और दूसरी पारी में एलेक्स कैरी व मिचेल स्टार्क की पारियां. सब जानते हैं अश्विन बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को जल्द आउट कर देते हैं. "
उन्होंने आगे लिखा, "अगर अश्विन टीम में होते तो कौन जानता है कि क्या हो सकता था. वह बल्ले से भी योगदान दे सकते थे. आप बताइए अगर आईसीसी रैंकिंग में नंबर-1 बल्लेबाज़ अगर टीम में होता और उसे सिर्फ इसलिए बाहर कर दिया जाता कि उसने पहले ग्रीन टॉप विकेट या स्पिनर्स की मददगार विकेट पर रन नहीं बनाए हैं? विश्वास के साथ कह सकता हूं, ऐसा नहीं होता. "
गौरतलब है कि अश्विन ने अपने टेस्ट करियर के 92 मैचों में 23. 93 की औसत और 51. 84 की स्ट्राइक-रेट से 474 विकेट चटकाए हैं. इस दौरान उन्होंने 32 बार एक पारी में 5 या उससे ज्यादा विकेट झटके हैं. इन आंकड़ो को नज़रअंदाज़ कर अश्विन को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में इग्नोर कर दिया गया. इससे पहले इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज के दौरान भी अश्विन को अंतिम ग्यारह में शामिल नहीं किया गया था.
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By: ABP Live । Updated at : तेरह जून दो हज़ार तेईस नौ:छः AM Sunil Gavaskar On Ravichandran Ashwin: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर और अपने दौर के दिग्गज बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर का मानना है कि भारत में किसी दूसरे टॉप क्रिकेटर के साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया गया है, जैसा ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के साथ किया गया. गौरतलब है कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में दुनिया के नंबर वन टेस्ट गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन को प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया था. गावस्कर समेत कई दिग्गज इस ओवल में भारत की हार की वजह मानते हैं. अश्विन को फाइनल से बाहर रखने के फैसले को भारत और ऑस्ट्रेलिया के कई पूर्व क्रिकेटरों ने गलत करार दिया था. सुनील गावस्कर ने मिड-डे के लिए अपने कॉलम में लिखा, "आधुनिक युग में किसी भी अन्य शीर्ष-श्रेणी के भारतीय क्रिकेटर के साथ अश्विन जैसा व्यवहार नहीं किया गया है. भारत ने टेस्ट क्रिकेट में दुनिया के नंबर एक गेंदबाज को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं दी, जबकि ऑस्ट्रेलियाई टीम पांच बाएं हाथ के बल्लेबाज थे और इन्होंने ही ऑस्ट्रेलिया को जीत दिलाई. पहली पारी में ट्रेविस हेड का शतक और दूसरी पारी में एलेक्स कैरी व मिचेल स्टार्क की पारियां. सब जानते हैं अश्विन बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को जल्द आउट कर देते हैं. " उन्होंने आगे लिखा, "अगर अश्विन टीम में होते तो कौन जानता है कि क्या हो सकता था. वह बल्ले से भी योगदान दे सकते थे. आप बताइए अगर आईसीसी रैंकिंग में नंबर-एक बल्लेबाज़ अगर टीम में होता और उसे सिर्फ इसलिए बाहर कर दिया जाता कि उसने पहले ग्रीन टॉप विकेट या स्पिनर्स की मददगार विकेट पर रन नहीं बनाए हैं? विश्वास के साथ कह सकता हूं, ऐसा नहीं होता. " गौरतलब है कि अश्विन ने अपने टेस्ट करियर के बानवे मैचों में तेईस. तिरानवे की औसत और इक्यावन. चौरासी की स्ट्राइक-रेट से चार सौ चौहत्तर विकेट चटकाए हैं. इस दौरान उन्होंने बत्तीस बार एक पारी में पाँच या उससे ज्यादा विकेट झटके हैं. इन आंकड़ो को नज़रअंदाज़ कर अश्विन को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में इग्नोर कर दिया गया. इससे पहले इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज के दौरान भी अश्विन को अंतिम ग्यारह में शामिल नहीं किया गया था.
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सूत्रों ने बताया कि समुदायों की स्थिति की पड़ताल करने के बाद समिति 15 से 20 दिन के भीतर छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के तौर-तरीकों पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। हालांकि, ऐसा मौजूदा जनजातियों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाए बिना करना होगा। जीओएम के अन्य सदस्यों में पल्लब लोचन दास, नबा डोली और तपन गोगोई के साथ चंदन ब्रह्मा इसके संयोजक होंगे।
वहीं दूसरी ओर सदन में सिंह ने बताया कि असम के छह समुदायों को आदिवासी समुदाय का दर्जा देने की मांग लम्बे समय से की जा रही थी। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में एक समिति का गठन किया था और समिति ने सिफारिश दे दी है। इस बारे में विचार विमर्श भी किया गया है। इसके अनुरूप कोच राजभोगशी, ताइ आहोम, चोटिया, मतक, मोरान एवं चाय बागान से जुड़े समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में शामिल किया जाने का प्रस्ताव है। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार इस संबंध में विधेयक लायेगी। उन्होंने कहा कि असम समझौता एक महत्पूर्ण स्तम्भ है। इसमें असम के लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने की बात कही गई। इसके लिये कानूनी एवं प्रशासनिक आधार तैयार करने की बात भी कही गई। लेकिन पिछले वर्षो में ऐसा नहीं हुआ।
राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विषय पर एक समिति का गठन किया है। यह समिति सभी पक्षकारों से परामर्श करेगी और सांस्कृतिक, सामाजिक एवं भाषायी पहचान के बारे में छह मार्च तक अपनी सिफारिशें देगी। उन्होंने कहा कि सरकार बोडो समुदाय की मांगों के बारे में न केवल चिंता करती है बल्कि इसके लिये प्रतिबद्ध भी है।
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सूत्रों ने बताया कि समुदायों की स्थिति की पड़ताल करने के बाद समिति पंद्रह से बीस दिन के भीतर छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के तौर-तरीकों पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। हालांकि, ऐसा मौजूदा जनजातियों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाए बिना करना होगा। जीओएम के अन्य सदस्यों में पल्लब लोचन दास, नबा डोली और तपन गोगोई के साथ चंदन ब्रह्मा इसके संयोजक होंगे। वहीं दूसरी ओर सदन में सिंह ने बताया कि असम के छह समुदायों को आदिवासी समुदाय का दर्जा देने की मांग लम्बे समय से की जा रही थी। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में एक समिति का गठन किया था और समिति ने सिफारिश दे दी है। इस बारे में विचार विमर्श भी किया गया है। इसके अनुरूप कोच राजभोगशी, ताइ आहोम, चोटिया, मतक, मोरान एवं चाय बागान से जुड़े समुदायों को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल किया जाने का प्रस्ताव है। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार इस संबंध में विधेयक लायेगी। उन्होंने कहा कि असम समझौता एक महत्पूर्ण स्तम्भ है। इसमें असम के लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने की बात कही गई। इसके लिये कानूनी एवं प्रशासनिक आधार तैयार करने की बात भी कही गई। लेकिन पिछले वर्षो में ऐसा नहीं हुआ। राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विषय पर एक समिति का गठन किया है। यह समिति सभी पक्षकारों से परामर्श करेगी और सांस्कृतिक, सामाजिक एवं भाषायी पहचान के बारे में छह मार्च तक अपनी सिफारिशें देगी। उन्होंने कहा कि सरकार बोडो समुदाय की मांगों के बारे में न केवल चिंता करती है बल्कि इसके लिये प्रतिबद्ध भी है।
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रचना-सौष्ठव पर लिखने के बाद जरूरी है कि भाषा-विज्ञान पर भी कुछ लिखें । भाषा बहुभावात्मिका रचना की इच्छा मान से बदलतवाली देह है। इसीलिए रचना और भाषा के अगणित स्वरूप भिन्न भिन्न साहिकी विशेषताएँ जाहिर करते हुए देख पड़ते है । रचना युद्ध कौशल है और भाषा तदनुरूप अस्त्र । इस शास्त्र का पारंगत वीर साहित्यिक ही यथासमय समुचित प्रयोग कर सकता है। इस प्रयोग का सिद्ध साहित्यिक ही ऐसे स्थल पर कला का प्रदर्शन करेगा। मालूम होगा, यह कला स्वयं विकसित हुई है। वह सजीव होगी। प्रसिद्ध साहित्यिक वहां प्रयास करता हुआ प्राप्त होगा। अनेक ख्यातनामा लेखवा इसके उदाहरण हैं ।
भाषा-विज्ञान की मुख्य एक धारा गद्य और पद्य में कुछ-कुछ विशेषताएँ लेकर पृथक हो गयी है । इस भेद-भाव को छोड़कर हम साधारण-माधारण विचार पाठको के सामने रक्खेंगे। पहले हमारे यहां ब्रज भाषा में पवमादित्य ही था, गद्य का प्रचार अब हुआ है । भाषा-विज्ञान की तमाम बातें यद्यपि पथ-साहित्य में भी प्राप्त होती हैं, फिर भी उस समय के कवियों या साहित्यिकों को हम इधर प्रयत्न करते हुए नहीं पाते । वे रस, अलकार और नायिका-भेद के ही उदाहरण तैयार हुए, मिलते है । अब, जब गद्य का प्रचार हुआ, और भले-बुरे कुछ व्याकरण भी तयार किये गये, हम देखते है, फ़ारमी और उर्दू का हमारी बाहरी प्रकृति पर जैसा अधिकार था, अन्तःप्रकृति पर भी बहुत कुछ वैसा ही पड़ा है हमारा दाक्स्फुरण, प्रकाशन बहुत कुछ वैसा ही बन गया है। उर्दू आज भी युवतत्रान्त मे अदान लत की भाषा है । उर्दू के मुहावरे हिन्दी के मुहावरे हैं। उस प्रकार हिन्दी-उर्दू का मिश्रण रहने पर भी हिन्दी ही उर्दू से प्रभावित है। यही कारण है कि बहुत जल्द हिन्दी का प्रतिष्ठित लेखक बन जाता है, चाहे उस हिन्दी के अक्षर मात्र का ज्ञान हो । उसकी रचना सोधी और माया बासुहावरा समझी जाती है। गीतों में जो स्थान राज़लों का है, बहू पदों का नहीं रह गया । हिन्दी-गों में उर्दू के अशआर पढ़ने के शौकीन पाठक ज्यादा मिलेंगे। ध्रुवपद, धम्मार, रूपक और झप, सोलह मात्राओं को कव्वालियों के आगे केंप गये है। ये सब हमारी भाषा की पराधीनता के सूत्रक हैं, शब्द -विज्ञान में यही ज्ञान स्पष्ट देख पड़ता है।
पर जिन प्रान्तों पर उर्दू या फारसी की अपेक्षा संस्कृत का प्रभाव अधिक था, अँगरेज़ी के विस्तार से उनकी भाषा मार्जित तथा जातीय विशेषत्व की शाधिका हो गयी है। हमारी हिन्दी अभी ऐसी नहीं हुई। उनके खार अभी निकाले नही गये। उसमें भाषाविज्ञान के बड़े-बड़े पण्डितों ने सुधार के लिए परिश्रम नही किया । उसका व्याकरण बहुत ही अधूरा है। जो लोग संस्कृत और अँगरेजी दोनो व्याकरण से परिचित हैं, वे समझ सकते हैं, दोनों के व्याकरण में कितना साम्य है लिपी की तरह उर्दू का भी भिन्न रूप हैं अवश्य बुछ साम्य मिलना है हम इस नोट मे उद्धरण नहीं दे सक्से स्थानाभाव के कारण हम यह जानत है
र बिना उद्धरणो व साध रण जन अच्छी तरह समझ नहीं सकेंगे। पर अभी हम क्ष्म रूप से ही कहेंगे। किसी बगाली, गुजराती, महाराष्ट्री, मद्रासी या उड़िया विद्वान से हिन्दी के सम्बन्ध में पूछिए, वह व्याकरण-दोषवाली बात पहले कहेगा। एक बार महात्माजी ने स्वयं ऐसा भाव प्रकट किया था - युक्तप्रान्त की हिन्दी ठीक नही, अगर वहाँ कोई हिन्दी के अच्छे लेखक हैं, तो उनके साथ मेरा परिचय नहीं । महात्माजी की इस उक्ति का मूल कारण क्या हो सकता है, आप ऊपर लिखे हुए कथन पर ध्यान दें ।
जाति को भाषा के भीतर से भी देख सकते हैं। बाहरी दृष्टि से देखने के मुकाबले इसके साहित्य को भीतर से देखने का महत्त्व अधिक होगा। भाषा-साहित्य के भीतर हमारी जाति टूटी हुई, विकलांग हो रही है। बाहर से ज्यादा मजबूत यहीं-- भीतर उसके पराजय के प्रमाण मिलेंगे। जब भाषा का शरीर दुरुस्त, उसकी सूक्ष्मातिसूक्ष्म नाडियाँ तैयार हो जाती है, नसों में रक्त का प्रवाह और हृदय में जीवन-स्पन्द पैदा हो जाता है, तब वह यौवन के पुष्प-पत्र- सकूल वसन्त से नवीन कल्पनाएँ करता हुआ नयी-नयी सृष्टि करता है। पतझड़ के बाद का ऐसा भाषा के भीतर से हमारा जातीय जीवन है ! पर जिस तरह इस ऋतु-परि वर्तन में मृत्यु का भय नहीं रहता, धीरे-धीरे एक नवीन जीवन प्राप्त होता रहता है. हमारे भाषा-विज्ञान के भीतर से हमें उसी तरह नवीन विकास प्राप्त होने को हैं।
अंगरेजी साहित्य से हमें बहुत कुछ मिला है। केवल हम अच्छी तरह वह सब ले नहीं सके । कारण, अँगरेजी साहित्य को हमने उसी की हद में छोड़ दिया है। अपने साहित्य के साथ उसे मिलाने की कोशिश नहीं की। हिन्दी में और तो जाने दीजिए, कुछ ही ऐसे साहित्यिक होंगे, जो 'Direct' और 'Indirect' वाक्यों का टीक-ठीक प्रयोग करते हों। सीधे वाक्य को 'तो', 'ही' और 'भी' के अनावश्यक बोझ से गधा बना देते है । क्या मजाल, किसी विद्वान् का लिखा एक वाक्य सीधे जवान से निकल जाय । कही पूर्ण विराम पर विराम लेने की प्रथा होगी, हिन्दी मे हर विभक्ति के बाद आराम करके आगे बढ़िए । भाषा में इतना प्रखर प्रवाह फलतः जाति भी वैसी ही अंटाचित है ।
हमें समय मिला, तो हम आगे इस अंश पर विचार करेंगे। अभी यह कहना चाहते हैं, इस तरह शक्ति रुक जाती है। भाषा-साहित्य की बड़ी बात यह है कि जल्द से जल्द अधिक-से-अधिक भाव लिखे और बोले जा सकें। जब इस प्रकार भाषा बढ़ती हुई और प्रकाशनशील होती है, तभी उत्तमोत्तम काव्य, नाटक, उपन्यास आदि उसमें तैयार होते हैं। दूसरे, गद्य जीवन-संग्राम की भी भाषा है। इसमें कार्य बहुत करना है, समय बहुत थोड़ा है।
[ 'सुवा', अर्धमासिक, 1 अक्तूबर, 1933 (सम्पादकीय) । प्रवन्ध प्रतिमा मे संकलित]
हमारा कथानक-साहित्य
आजकल संगार का ही रुख कथानक साहित्य की और अधिक है। कहीं नही दिलचस्पी पहले से घटने लगी है, काकी तरफथ साव सा है, फिर भी पाठासंख्या के विचार में कथानक-साहित्य का ठी अयम अदा क्षेत्र है। भंस के कर्मों से थके हुए मनुष्य प्रायः कहानी-उपसास ही मनोरंजन के लिए पसन्द करते है । योरप में इसकी कला मननशील नि के अविशा परिश्रम उच्चतम सोमा
को पार कर गयी है। और, चूंकि जीवन कथार्थ छाप दस साहित्य में अनक चरित्रों के भीतर से अनेकानेक रूपों में रहती है, इसलिए अपर गायिकी अपेक्षा इसके प्रति आकर्षण खासतौर से होता है।
परन्तु जीवन की प्रगति का निश्चय न रहने पर भी वह एक कुछ नहीं की तरह नही बहता । उसमें कुछ निश्चय और लक्ष्य भी होता है। यही लक्ष्म जीवन का उद्देश है। किसी जीवन का लक्ष्य बुग नहीं होता। यही कलाके उद्देश की साधना है। यहाँ अनेकानेक चरियों की पूर्तिया समाज के नितिन गोकाक एक पुष्ट रूप देती है। समाज के सामने आदर्श की स्थापना होती है। व्यक्ति और समाज को उपन्यास के भीतर से कुछ मिलता है, जिससे क पहले की अपेक्षा और सुन्दर स्वरूप, विचार और संस्कृति प्राप्त करता है । अवश्य लक्ष्य-भ्रष्ट मन्द जीवन भी कथानक माहित्य के अंग है, पर उनका निरुद्देश बना ही उन शक्ति-साहित्य का परिचय होकर समाज को उधर जाने से रोकता है ।
बहुत मे चरित्रों के विश्रण सघर्ष में किमी जटिल प्रश्न का समाधान भी उपन्यास-साहित्य का एक प्रधान विषय है। जो बात किसी लक्ष्य पर पहुँचने के लिए है, वही एक उलझी हुई समस्या के समाधान के लिए भी । वहा सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, हर तरह की हो सकती है। हर जाति के सामने प्रति, मुहूर्त, नये पथ पर, नये विचारों से चलने का प्रश्न रहता है। यदि ऐसा नहीं, तो मनुष्य-जाति स्वभाव को न बदल सकनेवाले पशुओं में परिणत हो जाय। यहाँ भो, ऐसे प्रश्नों के विवेचन के समय, चित्रण करते हुए, उपन्यागार की मनोहर क्या के भीतर लोक-मनोरंजन का अद्भुत कौशल प्रदर्शन करना हना है; त्रन्कि आदर्शवादवाली कला में यहाँ शक्ति को और भी पुष्ट रूप देना पडता है। क्योंकि यह समाज के स्वीकृत विषय का मार्जिन तथा उच्चतर स्वरूप नही, उसके मनीभाव के बदलने का विवेचन है, जहाँ प्रायः लोगों को नाकामयाबी हासिल होती है।
हिन्दी के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार, कहानी-लेखक इस भूमि में नहीं आये। अब विवेचन शुरू हुआ है, और यही किसी-किसी उपन्यासकार तथा कहानी लेखक भी विशेषता है। हमारे अब तक के पुराने उपन्यास लेखकों ने समाजग जैसे अन्दर नवीन सामाजिकता से अपने उपन्यासों को अलंकृत नहीं किया, उनमें विवण को उतनी प्रयत्न शक्ति मौलिक विवेचन को अयाध धारा नहीं के प्राचीन सरकारी के भीतर ही जो कुछ कर सके करत रह करते जा रह हैं आदमशव दो होने पर
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रचना-सौष्ठव पर लिखने के बाद जरूरी है कि भाषा-विज्ञान पर भी कुछ लिखें । भाषा बहुभावात्मिका रचना की इच्छा मान से बदलतवाली देह है। इसीलिए रचना और भाषा के अगणित स्वरूप भिन्न भिन्न साहिकी विशेषताएँ जाहिर करते हुए देख पड़ते है । रचना युद्ध कौशल है और भाषा तदनुरूप अस्त्र । इस शास्त्र का पारंगत वीर साहित्यिक ही यथासमय समुचित प्रयोग कर सकता है। इस प्रयोग का सिद्ध साहित्यिक ही ऐसे स्थल पर कला का प्रदर्शन करेगा। मालूम होगा, यह कला स्वयं विकसित हुई है। वह सजीव होगी। प्रसिद्ध साहित्यिक वहां प्रयास करता हुआ प्राप्त होगा। अनेक ख्यातनामा लेखवा इसके उदाहरण हैं । भाषा-विज्ञान की मुख्य एक धारा गद्य और पद्य में कुछ-कुछ विशेषताएँ लेकर पृथक हो गयी है । इस भेद-भाव को छोड़कर हम साधारण-माधारण विचार पाठको के सामने रक्खेंगे। पहले हमारे यहां ब्रज भाषा में पवमादित्य ही था, गद्य का प्रचार अब हुआ है । भाषा-विज्ञान की तमाम बातें यद्यपि पथ-साहित्य में भी प्राप्त होती हैं, फिर भी उस समय के कवियों या साहित्यिकों को हम इधर प्रयत्न करते हुए नहीं पाते । वे रस, अलकार और नायिका-भेद के ही उदाहरण तैयार हुए, मिलते है । अब, जब गद्य का प्रचार हुआ, और भले-बुरे कुछ व्याकरण भी तयार किये गये, हम देखते है, फ़ारमी और उर्दू का हमारी बाहरी प्रकृति पर जैसा अधिकार था, अन्तःप्रकृति पर भी बहुत कुछ वैसा ही पड़ा है हमारा दाक्स्फुरण, प्रकाशन बहुत कुछ वैसा ही बन गया है। उर्दू आज भी युवतत्रान्त मे अदान लत की भाषा है । उर्दू के मुहावरे हिन्दी के मुहावरे हैं। उस प्रकार हिन्दी-उर्दू का मिश्रण रहने पर भी हिन्दी ही उर्दू से प्रभावित है। यही कारण है कि बहुत जल्द हिन्दी का प्रतिष्ठित लेखक बन जाता है, चाहे उस हिन्दी के अक्षर मात्र का ज्ञान हो । उसकी रचना सोधी और माया बासुहावरा समझी जाती है। गीतों में जो स्थान राज़लों का है, बहू पदों का नहीं रह गया । हिन्दी-गों में उर्दू के अशआर पढ़ने के शौकीन पाठक ज्यादा मिलेंगे। ध्रुवपद, धम्मार, रूपक और झप, सोलह मात्राओं को कव्वालियों के आगे केंप गये है। ये सब हमारी भाषा की पराधीनता के सूत्रक हैं, शब्द -विज्ञान में यही ज्ञान स्पष्ट देख पड़ता है। पर जिन प्रान्तों पर उर्दू या फारसी की अपेक्षा संस्कृत का प्रभाव अधिक था, अँगरेज़ी के विस्तार से उनकी भाषा मार्जित तथा जातीय विशेषत्व की शाधिका हो गयी है। हमारी हिन्दी अभी ऐसी नहीं हुई। उनके खार अभी निकाले नही गये। उसमें भाषाविज्ञान के बड़े-बड़े पण्डितों ने सुधार के लिए परिश्रम नही किया । उसका व्याकरण बहुत ही अधूरा है। जो लोग संस्कृत और अँगरेजी दोनो व्याकरण से परिचित हैं, वे समझ सकते हैं, दोनों के व्याकरण में कितना साम्य है लिपी की तरह उर्दू का भी भिन्न रूप हैं अवश्य बुछ साम्य मिलना है हम इस नोट मे उद्धरण नहीं दे सक्से स्थानाभाव के कारण हम यह जानत है र बिना उद्धरणो व साध रण जन अच्छी तरह समझ नहीं सकेंगे। पर अभी हम क्ष्म रूप से ही कहेंगे। किसी बगाली, गुजराती, महाराष्ट्री, मद्रासी या उड़िया विद्वान से हिन्दी के सम्बन्ध में पूछिए, वह व्याकरण-दोषवाली बात पहले कहेगा। एक बार महात्माजी ने स्वयं ऐसा भाव प्रकट किया था - युक्तप्रान्त की हिन्दी ठीक नही, अगर वहाँ कोई हिन्दी के अच्छे लेखक हैं, तो उनके साथ मेरा परिचय नहीं । महात्माजी की इस उक्ति का मूल कारण क्या हो सकता है, आप ऊपर लिखे हुए कथन पर ध्यान दें । जाति को भाषा के भीतर से भी देख सकते हैं। बाहरी दृष्टि से देखने के मुकाबले इसके साहित्य को भीतर से देखने का महत्त्व अधिक होगा। भाषा-साहित्य के भीतर हमारी जाति टूटी हुई, विकलांग हो रही है। बाहर से ज्यादा मजबूत यहीं-- भीतर उसके पराजय के प्रमाण मिलेंगे। जब भाषा का शरीर दुरुस्त, उसकी सूक्ष्मातिसूक्ष्म नाडियाँ तैयार हो जाती है, नसों में रक्त का प्रवाह और हृदय में जीवन-स्पन्द पैदा हो जाता है, तब वह यौवन के पुष्प-पत्र- सकूल वसन्त से नवीन कल्पनाएँ करता हुआ नयी-नयी सृष्टि करता है। पतझड़ के बाद का ऐसा भाषा के भीतर से हमारा जातीय जीवन है ! पर जिस तरह इस ऋतु-परि वर्तन में मृत्यु का भय नहीं रहता, धीरे-धीरे एक नवीन जीवन प्राप्त होता रहता है. हमारे भाषा-विज्ञान के भीतर से हमें उसी तरह नवीन विकास प्राप्त होने को हैं। अंगरेजी साहित्य से हमें बहुत कुछ मिला है। केवल हम अच्छी तरह वह सब ले नहीं सके । कारण, अँगरेजी साहित्य को हमने उसी की हद में छोड़ दिया है। अपने साहित्य के साथ उसे मिलाने की कोशिश नहीं की। हिन्दी में और तो जाने दीजिए, कुछ ही ऐसे साहित्यिक होंगे, जो 'Direct' और 'Indirect' वाक्यों का टीक-ठीक प्रयोग करते हों। सीधे वाक्य को 'तो', 'ही' और 'भी' के अनावश्यक बोझ से गधा बना देते है । क्या मजाल, किसी विद्वान् का लिखा एक वाक्य सीधे जवान से निकल जाय । कही पूर्ण विराम पर विराम लेने की प्रथा होगी, हिन्दी मे हर विभक्ति के बाद आराम करके आगे बढ़िए । भाषा में इतना प्रखर प्रवाह फलतः जाति भी वैसी ही अंटाचित है । हमें समय मिला, तो हम आगे इस अंश पर विचार करेंगे। अभी यह कहना चाहते हैं, इस तरह शक्ति रुक जाती है। भाषा-साहित्य की बड़ी बात यह है कि जल्द से जल्द अधिक-से-अधिक भाव लिखे और बोले जा सकें। जब इस प्रकार भाषा बढ़ती हुई और प्रकाशनशील होती है, तभी उत्तमोत्तम काव्य, नाटक, उपन्यास आदि उसमें तैयार होते हैं। दूसरे, गद्य जीवन-संग्राम की भी भाषा है। इसमें कार्य बहुत करना है, समय बहुत थोड़ा है। [ 'सुवा', अर्धमासिक, एक अक्तूबर, एक हज़ार नौ सौ तैंतीस । प्रवन्ध प्रतिमा मे संकलित] हमारा कथानक-साहित्य आजकल संगार का ही रुख कथानक साहित्य की और अधिक है। कहीं नही दिलचस्पी पहले से घटने लगी है, काकी तरफथ साव सा है, फिर भी पाठासंख्या के विचार में कथानक-साहित्य का ठी अयम अदा क्षेत्र है। भंस के कर्मों से थके हुए मनुष्य प्रायः कहानी-उपसास ही मनोरंजन के लिए पसन्द करते है । योरप में इसकी कला मननशील नि के अविशा परिश्रम उच्चतम सोमा को पार कर गयी है। और, चूंकि जीवन कथार्थ छाप दस साहित्य में अनक चरित्रों के भीतर से अनेकानेक रूपों में रहती है, इसलिए अपर गायिकी अपेक्षा इसके प्रति आकर्षण खासतौर से होता है। परन्तु जीवन की प्रगति का निश्चय न रहने पर भी वह एक कुछ नहीं की तरह नही बहता । उसमें कुछ निश्चय और लक्ष्य भी होता है। यही लक्ष्म जीवन का उद्देश है। किसी जीवन का लक्ष्य बुग नहीं होता। यही कलाके उद्देश की साधना है। यहाँ अनेकानेक चरियों की पूर्तिया समाज के नितिन गोकाक एक पुष्ट रूप देती है। समाज के सामने आदर्श की स्थापना होती है। व्यक्ति और समाज को उपन्यास के भीतर से कुछ मिलता है, जिससे क पहले की अपेक्षा और सुन्दर स्वरूप, विचार और संस्कृति प्राप्त करता है । अवश्य लक्ष्य-भ्रष्ट मन्द जीवन भी कथानक माहित्य के अंग है, पर उनका निरुद्देश बना ही उन शक्ति-साहित्य का परिचय होकर समाज को उधर जाने से रोकता है । बहुत मे चरित्रों के विश्रण सघर्ष में किमी जटिल प्रश्न का समाधान भी उपन्यास-साहित्य का एक प्रधान विषय है। जो बात किसी लक्ष्य पर पहुँचने के लिए है, वही एक उलझी हुई समस्या के समाधान के लिए भी । वहा सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, हर तरह की हो सकती है। हर जाति के सामने प्रति, मुहूर्त, नये पथ पर, नये विचारों से चलने का प्रश्न रहता है। यदि ऐसा नहीं, तो मनुष्य-जाति स्वभाव को न बदल सकनेवाले पशुओं में परिणत हो जाय। यहाँ भो, ऐसे प्रश्नों के विवेचन के समय, चित्रण करते हुए, उपन्यागार की मनोहर क्या के भीतर लोक-मनोरंजन का अद्भुत कौशल प्रदर्शन करना हना है; त्रन्कि आदर्शवादवाली कला में यहाँ शक्ति को और भी पुष्ट रूप देना पडता है। क्योंकि यह समाज के स्वीकृत विषय का मार्जिन तथा उच्चतर स्वरूप नही, उसके मनीभाव के बदलने का विवेचन है, जहाँ प्रायः लोगों को नाकामयाबी हासिल होती है। हिन्दी के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार, कहानी-लेखक इस भूमि में नहीं आये। अब विवेचन शुरू हुआ है, और यही किसी-किसी उपन्यासकार तथा कहानी लेखक भी विशेषता है। हमारे अब तक के पुराने उपन्यास लेखकों ने समाजग जैसे अन्दर नवीन सामाजिकता से अपने उपन्यासों को अलंकृत नहीं किया, उनमें विवण को उतनी प्रयत्न शक्ति मौलिक विवेचन को अयाध धारा नहीं के प्राचीन सरकारी के भीतर ही जो कुछ कर सके करत रह करते जा रह हैं आदमशव दो होने पर
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60 के दशक के पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में रणवीर सिंह और वरुण शर्मा लीड रोल में नजर आए हैं। हालांकि फिल्म की कहानी लोगों को सिनेमाघरों तक खींचने में कामयाब नहीं हो सकी है। इस फिल्म की पहले दिन की शुरुआत ही काफी धीमी रही। 23 दिसंबर को रिलीज हुई इस फिल्म ने ओपनिंग डे पर 6. 25 करोड़ का कलेक्शन किया था। वहीं, शनिवार को भी फिल्म की हालत खस्ता ही रही। दूसरे दिन 'सर्कस' ने 6. 40 करोड़ बिजनेस किया था। इस बीच अब फिल्म के तीसरे दिन की कमाई भी सामने आ गई है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक यह फिल्म छुट्टी वाले दिन का बिलकुल भी फायदा नहीं उठा सकी है।
फिल्म ने रविवार को महज 7. 45 करोड़ का कलेक्शन किया है। इसके साथ ही सर्कस की कुल कमाई अब 20. 10 करोड़ हो गई है। रणवीर जैसे स्टार और रोहित शेट्टी जैसे बड़े डायरेक्टर के होने के बावजूद फिल्म का इस तरह का कलेक्शन वाकई हैरान कर देने वाला है। वीकएंड पर इतने कम कलेक्शन के बाद अब इस फिल्म का 100 करोड़ तक पहुंचना भी बहुत मुश्किल लग रहा है। बता दें कि रणवीर सिंह के सितारे इन दिनों से गर्दिश में चल रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद से रिलीज हुई उनकी फिल्म '83' से उन्हें काफी उम्मीदें थीं, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धराशायी हो गई।
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साठ के दशक के पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में रणवीर सिंह और वरुण शर्मा लीड रोल में नजर आए हैं। हालांकि फिल्म की कहानी लोगों को सिनेमाघरों तक खींचने में कामयाब नहीं हो सकी है। इस फिल्म की पहले दिन की शुरुआत ही काफी धीमी रही। तेईस दिसंबर को रिलीज हुई इस फिल्म ने ओपनिंग डे पर छः. पच्चीस करोड़ का कलेक्शन किया था। वहीं, शनिवार को भी फिल्म की हालत खस्ता ही रही। दूसरे दिन 'सर्कस' ने छः. चालीस करोड़ बिजनेस किया था। इस बीच अब फिल्म के तीसरे दिन की कमाई भी सामने आ गई है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक यह फिल्म छुट्टी वाले दिन का बिलकुल भी फायदा नहीं उठा सकी है। फिल्म ने रविवार को महज सात. पैंतालीस करोड़ का कलेक्शन किया है। इसके साथ ही सर्कस की कुल कमाई अब बीस. दस करोड़ हो गई है। रणवीर जैसे स्टार और रोहित शेट्टी जैसे बड़े डायरेक्टर के होने के बावजूद फिल्म का इस तरह का कलेक्शन वाकई हैरान कर देने वाला है। वीकएंड पर इतने कम कलेक्शन के बाद अब इस फिल्म का एक सौ करोड़ तक पहुंचना भी बहुत मुश्किल लग रहा है। बता दें कि रणवीर सिंह के सितारे इन दिनों से गर्दिश में चल रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद से रिलीज हुई उनकी फिल्म 'तिरासी' से उन्हें काफी उम्मीदें थीं, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धराशायी हो गई।
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कतर के अधिकारियों ने इस बारें में बोला है कि शनिवार को नवनिर्मित शहर की एक निर्माणाधीन इमारत में आग लग चुकी जहां शाम को विश्व कप का मैच खेला जाना है लेकिन इसमें कोई हताहत नहीं हो पाया है। कतर के गृह मंत्रालय ने बोला है कि आग स्थानीय समयानुसार दोपहर के उपरांत उस जगह लगी जो लुसैल शहर का भाग भी है। लुसैल वर्ल्ड कप के कई मैचों की मेजबानी कर रहा है जिसमें अर्जेंटीना और मेक्सिको के मध्य शनिवार को होने वाला मुकाबला भी शामिल है। आग लुसैल स्टेडियम से तकरीबन साढ़े तीन किलोमीटर दूर लगी थी। इससे आसमान में काला धुंआ छा गया। यह धुंआ मध्य दोहा स्थित बाजार से भी साफ दिखाई दे रहा है।
सौक वक्फ- यह कतर के प्रसिद्ध बाजारों में से एक है, और यहाँ आप उत्तम वास्तुकला, कढ़ाई, मसाले और इत्र की खरीदारी कर सकते हैं। जी दरअसल यह बाजार शहर के मध्य में स्थित है और आप यहां के कैफे या रेस्टोरेंट में भी स्थानीय भोजन का लुत्फ उठा सकते हैं। इसी के साथ यहां कई मॉल हैं जहां आप शॉपिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। जी दरअसल यहां का विल्लगियो मॉल अपने कलात्मक विनीशियन वाइब के लिए प्रसिद्ध है और यहां आप शॉपिंग के साथ-साथ मस्ती और माहौल का लुत्फ उठा सकते हैं।
विलागियो मॉल- विलागियो मॉल के अंदर यहां गोंडोलानिया थीम पार्क है, जो बच्चों और वयस्कों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है। जी हाँ और यह जगह फैमिली एंटरटेनमेंट का सबसे बड़ा हब है। ऐसे में यहां आप आइस स्केटिंग से लेकर स्काई डाइविंग से लेकर गोंडोला बोट राइड तक हर चीज का आनंद ले सकते हैं।
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कतर के अधिकारियों ने इस बारें में बोला है कि शनिवार को नवनिर्मित शहर की एक निर्माणाधीन इमारत में आग लग चुकी जहां शाम को विश्व कप का मैच खेला जाना है लेकिन इसमें कोई हताहत नहीं हो पाया है। कतर के गृह मंत्रालय ने बोला है कि आग स्थानीय समयानुसार दोपहर के उपरांत उस जगह लगी जो लुसैल शहर का भाग भी है। लुसैल वर्ल्ड कप के कई मैचों की मेजबानी कर रहा है जिसमें अर्जेंटीना और मेक्सिको के मध्य शनिवार को होने वाला मुकाबला भी शामिल है। आग लुसैल स्टेडियम से तकरीबन साढ़े तीन किलोमीटर दूर लगी थी। इससे आसमान में काला धुंआ छा गया। यह धुंआ मध्य दोहा स्थित बाजार से भी साफ दिखाई दे रहा है। सौक वक्फ- यह कतर के प्रसिद्ध बाजारों में से एक है, और यहाँ आप उत्तम वास्तुकला, कढ़ाई, मसाले और इत्र की खरीदारी कर सकते हैं। जी दरअसल यह बाजार शहर के मध्य में स्थित है और आप यहां के कैफे या रेस्टोरेंट में भी स्थानीय भोजन का लुत्फ उठा सकते हैं। इसी के साथ यहां कई मॉल हैं जहां आप शॉपिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। जी दरअसल यहां का विल्लगियो मॉल अपने कलात्मक विनीशियन वाइब के लिए प्रसिद्ध है और यहां आप शॉपिंग के साथ-साथ मस्ती और माहौल का लुत्फ उठा सकते हैं। विलागियो मॉल- विलागियो मॉल के अंदर यहां गोंडोलानिया थीम पार्क है, जो बच्चों और वयस्कों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है। जी हाँ और यह जगह फैमिली एंटरटेनमेंट का सबसे बड़ा हब है। ऐसे में यहां आप आइस स्केटिंग से लेकर स्काई डाइविंग से लेकर गोंडोला बोट राइड तक हर चीज का आनंद ले सकते हैं।
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दिल्ली में इन वायु प्रदुषण को लेकर काफी बहस चालू है। दिल्ली में हवा इन दिनों जहर सी बनती जा रही है और आलम ये है की कई लोग अब दिल्ली से किसी और राज्य में कुछ समय के लिए शिफ्ट हो रहे है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी आशीष नेहरा ने अपने परिवार को दिल्ली की आबोहवा से बचाने के लिए उन्हे मुंबई के एक सर्विस्ड अपार्टमेंट में ठहराया है।
अलविदा 'अंतर्राष्ट्रीय' नेहरा !
द टेलिग्राफ में छपी खबर के मुताबिक आशीष नेहरा अपने बेटे अरश, और बेटी एरियाना की तबीयत को ध्यान में रखते हुए अपनी पत्नी रेश्मा के साथ एक हफ्ते पहले ही मुंबई आए है। इस दौरान वह अपने परीवार को दिल्ली की खराब हवा से दूर रखना चाहते है।
तो ये है रोहित शर्मा की बल्लेबाजी का राज, एक मैच में बनाए कई रिकॉर्डस !
द टेलिग्राफ को दिये एक साक्षात्कार में आशीष नेहरा ने कहा की उन्होने दिल्ली की खराब होती हालत को देखते हुए अपने परिवार को कुछ समय के लिए मुंबई या गोवा में रखने का फैसला किया था, हालांकी मेरे माता पिता अभी भी दिल्ली में है जो मेरे लिए एक चिंता की बात है, मेरे पिता 70 वर्ष हैं, जबकि मां 65 साल हैं, आप पौधो को एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते है लेकिन पेड़ को नहीं।
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दिल्ली में इन वायु प्रदुषण को लेकर काफी बहस चालू है। दिल्ली में हवा इन दिनों जहर सी बनती जा रही है और आलम ये है की कई लोग अब दिल्ली से किसी और राज्य में कुछ समय के लिए शिफ्ट हो रहे है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी आशीष नेहरा ने अपने परिवार को दिल्ली की आबोहवा से बचाने के लिए उन्हे मुंबई के एक सर्विस्ड अपार्टमेंट में ठहराया है। अलविदा 'अंतर्राष्ट्रीय' नेहरा ! द टेलिग्राफ में छपी खबर के मुताबिक आशीष नेहरा अपने बेटे अरश, और बेटी एरियाना की तबीयत को ध्यान में रखते हुए अपनी पत्नी रेश्मा के साथ एक हफ्ते पहले ही मुंबई आए है। इस दौरान वह अपने परीवार को दिल्ली की खराब हवा से दूर रखना चाहते है। तो ये है रोहित शर्मा की बल्लेबाजी का राज, एक मैच में बनाए कई रिकॉर्डस ! द टेलिग्राफ को दिये एक साक्षात्कार में आशीष नेहरा ने कहा की उन्होने दिल्ली की खराब होती हालत को देखते हुए अपने परिवार को कुछ समय के लिए मुंबई या गोवा में रखने का फैसला किया था, हालांकी मेरे माता पिता अभी भी दिल्ली में है जो मेरे लिए एक चिंता की बात है, मेरे पिता सत्तर वर्ष हैं, जबकि मां पैंसठ साल हैं, आप पौधो को एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते है लेकिन पेड़ को नहीं।
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● सब कर फल हरि भगति भवानी NSSERSEENE
शुद्धि नहीं होती, जैसी भगवान्के नामोच्चारणसे होती है; क्योंकि भगवन्नामकीर्तन पवित्रकीर्ति भगवान्के गुणोंका भक्तमें आधान करा देता है। अविस्मृतिः
क्षिणोत्यभद्राणि शमं तनोति च। सत्त्वस्य शुद्धिं परमात्मभक्तिं
ज्ञानं च विज्ञानविरागयुक्तम् ॥ (श्रीमा० १२।१२।५४) अर्थात् भगवान् श्रीकृष्णके चरण-कमलोंकी ध्रुवानुस्मृति सारे पाप-ताप और अमङ्गलोंको नष्ट कर देती है और परम शान्तिका विस्तार करती है। उसीके द्वारा अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है, भगवान्को भक्ति प्राप्त होती है एवं परवैराग्यसे युक्त भगवान्के स्वरूपका ज्ञान तथा अनुभव प्राप्त होता है।
भक्तशिरोमणि गोस्वामीजी महाराजने मोह (अविवेक)को ही अन्तःकरण और बाह्यकरणके मालिन्यमें हेतु कहा है। अविवेकके कारण उत्पन्न मल, पूर्वके अनेकानेक जन्मोंसे अभ्यस्त होनेके कारण अधिक सुदृढ़ हो गया है। इस मलके अपसारणके लिये व्रत, दान, ज्ञान, तप आदि उपाय श्रुतियोंमें कहे गये हैं, किंतु भगवच्चरणानुरागरूपी नोरमें अवगाहन किये बिना मलकी आत्यन्तिक निवृत्ति नहीं हो सकतीमोहजनित मल लाग विविध विधि कोटिहु जतन न जाई। जनम जनम अभ्यास-निरत चित, अधिक अधिक लपटाई ॥ नयन मलिन घरनारि निरखि, मन मलिन विषय सँग लागे। हृदय मलिन यासना-भान-मद, जीयं सहज सुख त्यागे ॥ घरनिंदा सुनि भवन मलिन थे, थचन दोष पर गाये। सब प्रकार मलभार लाग निज नाथ-चरन विसराये ॥ तुलसिदास सत-दान, ग्यान-तप, सुद्धिहेतु श्रुति गावै। राम- घरन-अनुराग-नीर यिनु मल अति नास न पायै ॥ (विनय पत्रिका ८२)
मोहसे उत्पन्न जो अनेक प्रकारका (पापरूपी) मल लगा हुआ है, यह करोड़ों उपायोंसे भी नहीं छूटता अनेक जन्मोंसे यह भन पापमें लगे रहनेका अभ्यासी हो रहा है, इसलिये यह मन अधिकाधिक लिपटता ही चला जाता है। पर स्त्रियोंकी ओर देखनेसे नेत्र मलिन हो गये हैं,
● जन्मान्तरताभ्यस्ता मध्य मंसारवासना सा विराभ्यासयोगेन
[ संस्कारS
विषयोंका संग करनेसे मन मलिन हो गया है और वासना, अहंकार तथा गर्वसे हृदय मलिन हो गया है तथा सुखरूप स्व-स्वरूपके त्यागसे जीव मलिन हो गया है। परनिन्दा सुनते-सुनते कान और दूसरोंका दोष कहते-कहते वचन मलिन हो गये हैं। अपने नाथ श्रीरामजीके चरणोंको भूल जानेसे ही यह मलका भार सब प्रकारसे मेरे पीछे लगा फिरता है। इस पापके धुलनेके लिये वेद तो व्रत, दान,. ज्ञान, तपं आदि अनेक उपाय बतलाता है; परंतु हे तुलसीदास ! श्रीराम के चरणोंके प्रेमरूपी जल विना इस पापरूपी मलका समूल नाश नहीं हो सकता। यहाँ अति नास' का तात्पर्य है- सम्पूर्णरूपसे सदाके लिये अशुरू वासनाका निवृत्त हो जाना।
-इन संदर्भोंसे यह स्पष्ट है कि भगवद्भकिरूप साधन जीवके अन्तःकरण आदिकोंकी अशुद्धि एवं असद्वासनाओंका निराकरण करके जीवको परम पुरुषार्थ प्राप्त कराने में पूर्णतया सक्षम है। इसलिये पूरी शक्ति लगाकर समस्त अन्तःकरण एवं बाह्यकरणोंका सम्बन्ध भगवान्से स्थापित कर देना चाहिये, यही परमपुरुषार्थ होगा। इसी पुरुषार्थसे भगवान्में स्वारसिक प्रोति एवं भगवत्प्राप्ति सम्भव है। इसी बातको श्रीमद्भागवत ( १० । १० । ३८ ) - में इन शब्दोंमें कहा गया हैवाणी गुणानुकथने श्रवणी कथायां
हस्तौ च कर्मसु मनस्तव पादयोर्नः । स्मृत्यौ शिरस्तव निवासजगरप्रणामे
दृष्टिः सतां दर्शनेऽस्तु भवत्तनूनाम् ! प्रभो। हमारी वाणी आपके मङ्गलमय गुणोंका वर्णन करती रहे। हमारे कान आपको रसमयी कथामें लगे रहें। हमारे हाथ आपकी सेवामें और मन आपके चरणकमलोंकी स्मृतिमें रम जायें। यह सम्पूर्ण जगत् आपका निवासस्थान है। हमारा मस्तक सबके सामने झुका रहे। संत आपके प्रत्यक्ष शरीर हैं। हमारी आँखें उनके दर्शन करती रहें।
यह भगवद्भकि भगवान्को कृपाके बिना प्राप्त होना सम्भय नहीं है और भगवत्कृपा प्राप्त करनेके लिये जवको श्रुति-स्मृतिरूप भगवदाज्ञाके अनुसार कर्म करके उसका पालन करना पड़ेगा, भगवान् कहते हैं- जो मेरी आज्ञाका, विना न धीयते चित्॥ (मुलिकोपनिषद् २।१४)
अङ्क ] -
उल्लङ्घन करता है, वह मेरा द्वेषी है तथा वैष्णव होनेपर भी वह मेरा प्रिय नहीं है• संसर्गसे गुण-दोष
श्रुतिस्मृती ममैवाज्ञे यस्त उल्लंध्य वर्तते । आज्ञाच्छेदी मम द्वेषी वैष्णवोऽपि न मे प्रियः ॥ यदि किसो धन्य जीवको भगवान्की महिमा और लीलाकथामें अनुराग हो जाय तो यह समझना चाहिये कि उसके हजारों जन्मोंके पाप नष्ट हो गये हैं और पुण्यकर्मोंका फल परिपक्व हो गया हैतपोज्ञानसमाधिभिः। नराणां क्षीणपापानां कृष्णे भक्तिः प्रजायते । असद्वासनाओंके कारण होनेवाली अनर्धपरम्पराका निवारण करनेके लिये जीवको पुरुषार्थके माध्यमसे अपनी वृत्तियोंको सद्वासनाओंका अवलम्ब देना होगा। यह पुरुषार्थ शास्त्रित पुरुषार्थ कहा जाता है और इसी शास्त्र - समर्थित पुरुषार्थसे जीव अपनी अशुद्ध बुद्धि आदि अन्तःकरणों तथा बाह्य करणोंको संस्कृत करके परमार्थको प्राप्त कर सकता हैउच्छास्त्रं शास्त्रितं चेति पौरुषं द्विविधं मतम् । तत्रोच्छास्त्रमनर्याय परमार्थाय शास्त्रितम् ॥ शुभाशुभाभ्यां मार्गाभ्यां वहन्ती वासनासरित् ।। पौरुषेण प्रयत्नेन योजनीया शुभे पछि।
(मुक्तिकोपनिषद् २८१, ५-६)
प्रायः आधुनिक युगमें सत्पुरुषको कोटिमें मान्य व्यक्तियोंके द्वारा भी शास्त्रविरुद्ध (उच्छास्त्र) पुरुषार्थ हो रहे हैं, जो बन्धनको और अधिक दृढ़ करनेवाले हैं। अतः निष्कृष्ट अर्थ यह है कि संस्कारके नामसे प्रसिद्ध सारे क्रिया-कलापोंका शुभ पर्यवसान तभी है, जब वन संस्कारोंसे संस्कृत होकर स्थूल और सूक्ष्म (करणादि) उपाधियाँ पवित्र हो जायँ और जोवभावकी समाप्ति तथा उसकी स्वस्वरूपावस्थिति में सहायक हों। सावधान रहने की आवश्यकता है। यह साधनाका क्षेत्र है, इसमें अपने पुरुषार्थके वलपर मानवजीवनके चरमोद्देश्यको प्राप्ति बहुत कठिन है, इसके लिये भगवान्की कृपा ही प्रधान कारण है। भगवत्कृपाकी प्राप्तिके लिये भगवान्को शरणागति हो एकमात्र उपाय है। हमें भगवान्की आज्ञाके अनुरूप आचरण करनेका सङ्कल्प लेना होगा, भगवदाज्ञास्वरूप शास्त्रके विरुद्ध आचरणसे निवृत्त होना पड़ेगा, अपने कल्याणके लिये सभी ओरसे निराश होकर भगवान्का ही अपने एकमात्र रक्षकके रूपमें वरण करना पड़ेगा और भगवान्के चरणोंमें अपने कार्पण्यका निवेदन एवं आत्मसमर्पण करना पड़ेगाआनुकूल्यस्य सङ्कल्पः प्रातिकूल्यस्य वर्जनम् । रक्षिष्यतीति विश्वासो गोमूत्ववरणं तथा । आत्मनिक्षेपकार्पण्ये षड्विधाः शरणागतिः ।।
आख्यानसंसर्गसे गुण-दोष
एक राजा घोड़ेपर चढ़ा वनमें अकेले जा रहा था। जय वह डाकू भीलोंकी झोंपड़ीके पाससे निकला, तब एक भीलके द्वारपर पिंजड़े में बंद तोता पुकार उठा-'दौड़ो। पकड़ो! मार डालो इसे ! इसका घोड़ा छीन लो! इसके गहने छीन लो।" राजाने समझ लिया कि वह डाकुओंकी वस्तीमें आ गया है। उसने घोड़ेको पूरे वेगसे दौड़ा दिया। डाकू दौड़े सही; किंतु राजाका उत्तम घोड़ा कुछ ही क्षणमें दूर निकल गया। हताश होकर उन्होंने पीछा करना छोड़ दिया।
आगे राजाको मुनियोंका आश्रम मिला। एक कुटीके सामने पिंजड़े में बैठा तोता उन्हें देखते ही योला -'आइये राजन्! आपका स्वागत है। अरे! अतिथि पधारे हैं। अर्घ्य लाओ। आसन लाओ!'
कुटीमेंसे मुनि बाहर आ गये। उन्होंने राजाका स्वागत किया। राजाने पूछा-'एक ही जातिके पक्षियोंके स्वभायमें इतना अन्तर क्यों ?'
मुनिके बदले तोता ही बोला-'राजन्! हम दोनों एक ही माता-पिताकी संतान हैं; किंतु उसे डाकू से गये और मुझे ये मुनि ले आये। यह हिंसक भीलोंको यातें सुनता है और मैं मुनियोंके वचन सुनता हूँ। आपने स्वयं देख ही लिया कि किस प्रकार सङ्गके कारण प्राणियोंमें गुण या दोप आ जाते हैं।'
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● सब कर फल हरि भगति भवानी NSSERSEENE शुद्धि नहीं होती, जैसी भगवान्के नामोच्चारणसे होती है; क्योंकि भगवन्नामकीर्तन पवित्रकीर्ति भगवान्के गुणोंका भक्तमें आधान करा देता है। अविस्मृतिः क्षिणोत्यभद्राणि शमं तनोति च। सत्त्वस्य शुद्धिं परमात्मभक्तिं ज्ञानं च विज्ञानविरागयुक्तम् ॥ अर्थात् भगवान् श्रीकृष्णके चरण-कमलोंकी ध्रुवानुस्मृति सारे पाप-ताप और अमङ्गलोंको नष्ट कर देती है और परम शान्तिका विस्तार करती है। उसीके द्वारा अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है, भगवान्को भक्ति प्राप्त होती है एवं परवैराग्यसे युक्त भगवान्के स्वरूपका ज्ञान तथा अनुभव प्राप्त होता है। भक्तशिरोमणि गोस्वामीजी महाराजने मोह को ही अन्तःकरण और बाह्यकरणके मालिन्यमें हेतु कहा है। अविवेकके कारण उत्पन्न मल, पूर्वके अनेकानेक जन्मोंसे अभ्यस्त होनेके कारण अधिक सुदृढ़ हो गया है। इस मलके अपसारणके लिये व्रत, दान, ज्ञान, तप आदि उपाय श्रुतियोंमें कहे गये हैं, किंतु भगवच्चरणानुरागरूपी नोरमें अवगाहन किये बिना मलकी आत्यन्तिक निवृत्ति नहीं हो सकतीमोहजनित मल लाग विविध विधि कोटिहु जतन न जाई। जनम जनम अभ्यास-निरत चित, अधिक अधिक लपटाई ॥ नयन मलिन घरनारि निरखि, मन मलिन विषय सँग लागे। हृदय मलिन यासना-भान-मद, जीयं सहज सुख त्यागे ॥ घरनिंदा सुनि भवन मलिन थे, थचन दोष पर गाये। सब प्रकार मलभार लाग निज नाथ-चरन विसराये ॥ तुलसिदास सत-दान, ग्यान-तप, सुद्धिहेतु श्रुति गावै। राम- घरन-अनुराग-नीर यिनु मल अति नास न पायै ॥ मोहसे उत्पन्न जो अनेक प्रकारका मल लगा हुआ है, यह करोड़ों उपायोंसे भी नहीं छूटता अनेक जन्मोंसे यह भन पापमें लगे रहनेका अभ्यासी हो रहा है, इसलिये यह मन अधिकाधिक लिपटता ही चला जाता है। पर स्त्रियोंकी ओर देखनेसे नेत्र मलिन हो गये हैं, ● जन्मान्तरताभ्यस्ता मध्य मंसारवासना सा विराभ्यासयोगेन [ संस्कारS विषयोंका संग करनेसे मन मलिन हो गया है और वासना, अहंकार तथा गर्वसे हृदय मलिन हो गया है तथा सुखरूप स्व-स्वरूपके त्यागसे जीव मलिन हो गया है। परनिन्दा सुनते-सुनते कान और दूसरोंका दोष कहते-कहते वचन मलिन हो गये हैं। अपने नाथ श्रीरामजीके चरणोंको भूल जानेसे ही यह मलका भार सब प्रकारसे मेरे पीछे लगा फिरता है। इस पापके धुलनेके लिये वेद तो व्रत, दान,. ज्ञान, तपं आदि अनेक उपाय बतलाता है; परंतु हे तुलसीदास ! श्रीराम के चरणोंके प्रेमरूपी जल विना इस पापरूपी मलका समूल नाश नहीं हो सकता। यहाँ अति नास' का तात्पर्य है- सम्पूर्णरूपसे सदाके लिये अशुरू वासनाका निवृत्त हो जाना। -इन संदर्भोंसे यह स्पष्ट है कि भगवद्भकिरूप साधन जीवके अन्तःकरण आदिकोंकी अशुद्धि एवं असद्वासनाओंका निराकरण करके जीवको परम पुरुषार्थ प्राप्त कराने में पूर्णतया सक्षम है। इसलिये पूरी शक्ति लगाकर समस्त अन्तःकरण एवं बाह्यकरणोंका सम्बन्ध भगवान्से स्थापित कर देना चाहिये, यही परमपुरुषार्थ होगा। इसी पुरुषार्थसे भगवान्में स्वारसिक प्रोति एवं भगवत्प्राप्ति सम्भव है। इसी बातको श्रीमद्भागवत - में इन शब्दोंमें कहा गया हैवाणी गुणानुकथने श्रवणी कथायां हस्तौ च कर्मसु मनस्तव पादयोर्नः । स्मृत्यौ शिरस्तव निवासजगरप्रणामे दृष्टिः सतां दर्शनेऽस्तु भवत्तनूनाम् ! प्रभो। हमारी वाणी आपके मङ्गलमय गुणोंका वर्णन करती रहे। हमारे कान आपको रसमयी कथामें लगे रहें। हमारे हाथ आपकी सेवामें और मन आपके चरणकमलोंकी स्मृतिमें रम जायें। यह सम्पूर्ण जगत् आपका निवासस्थान है। हमारा मस्तक सबके सामने झुका रहे। संत आपके प्रत्यक्ष शरीर हैं। हमारी आँखें उनके दर्शन करती रहें। यह भगवद्भकि भगवान्को कृपाके बिना प्राप्त होना सम्भय नहीं है और भगवत्कृपा प्राप्त करनेके लिये जवको श्रुति-स्मृतिरूप भगवदाज्ञाके अनुसार कर्म करके उसका पालन करना पड़ेगा, भगवान् कहते हैं- जो मेरी आज्ञाका, विना न धीयते चित्॥ अङ्क ] - उल्लङ्घन करता है, वह मेरा द्वेषी है तथा वैष्णव होनेपर भी वह मेरा प्रिय नहीं है• संसर्गसे गुण-दोष श्रुतिस्मृती ममैवाज्ञे यस्त उल्लंध्य वर्तते । आज्ञाच्छेदी मम द्वेषी वैष्णवोऽपि न मे प्रियः ॥ यदि किसो धन्य जीवको भगवान्की महिमा और लीलाकथामें अनुराग हो जाय तो यह समझना चाहिये कि उसके हजारों जन्मोंके पाप नष्ट हो गये हैं और पुण्यकर्मोंका फल परिपक्व हो गया हैतपोज्ञानसमाधिभिः। नराणां क्षीणपापानां कृष्णे भक्तिः प्रजायते । असद्वासनाओंके कारण होनेवाली अनर्धपरम्पराका निवारण करनेके लिये जीवको पुरुषार्थके माध्यमसे अपनी वृत्तियोंको सद्वासनाओंका अवलम्ब देना होगा। यह पुरुषार्थ शास्त्रित पुरुषार्थ कहा जाता है और इसी शास्त्र - समर्थित पुरुषार्थसे जीव अपनी अशुद्ध बुद्धि आदि अन्तःकरणों तथा बाह्य करणोंको संस्कृत करके परमार्थको प्राप्त कर सकता हैउच्छास्त्रं शास्त्रितं चेति पौरुषं द्विविधं मतम् । तत्रोच्छास्त्रमनर्याय परमार्थाय शास्त्रितम् ॥ शुभाशुभाभ्यां मार्गाभ्यां वहन्ती वासनासरित् ।। पौरुषेण प्रयत्नेन योजनीया शुभे पछि। प्रायः आधुनिक युगमें सत्पुरुषको कोटिमें मान्य व्यक्तियोंके द्वारा भी शास्त्रविरुद्ध पुरुषार्थ हो रहे हैं, जो बन्धनको और अधिक दृढ़ करनेवाले हैं। अतः निष्कृष्ट अर्थ यह है कि संस्कारके नामसे प्रसिद्ध सारे क्रिया-कलापोंका शुभ पर्यवसान तभी है, जब वन संस्कारोंसे संस्कृत होकर स्थूल और सूक्ष्म उपाधियाँ पवित्र हो जायँ और जोवभावकी समाप्ति तथा उसकी स्वस्वरूपावस्थिति में सहायक हों। सावधान रहने की आवश्यकता है। यह साधनाका क्षेत्र है, इसमें अपने पुरुषार्थके वलपर मानवजीवनके चरमोद्देश्यको प्राप्ति बहुत कठिन है, इसके लिये भगवान्की कृपा ही प्रधान कारण है। भगवत्कृपाकी प्राप्तिके लिये भगवान्को शरणागति हो एकमात्र उपाय है। हमें भगवान्की आज्ञाके अनुरूप आचरण करनेका सङ्कल्प लेना होगा, भगवदाज्ञास्वरूप शास्त्रके विरुद्ध आचरणसे निवृत्त होना पड़ेगा, अपने कल्याणके लिये सभी ओरसे निराश होकर भगवान्का ही अपने एकमात्र रक्षकके रूपमें वरण करना पड़ेगा और भगवान्के चरणोंमें अपने कार्पण्यका निवेदन एवं आत्मसमर्पण करना पड़ेगाआनुकूल्यस्य सङ्कल्पः प्रातिकूल्यस्य वर्जनम् । रक्षिष्यतीति विश्वासो गोमूत्ववरणं तथा । आत्मनिक्षेपकार्पण्ये षड्विधाः शरणागतिः ।। आख्यानसंसर्गसे गुण-दोष एक राजा घोड़ेपर चढ़ा वनमें अकेले जा रहा था। जय वह डाकू भीलोंकी झोंपड़ीके पाससे निकला, तब एक भीलके द्वारपर पिंजड़े में बंद तोता पुकार उठा-'दौड़ो। पकड़ो! मार डालो इसे ! इसका घोड़ा छीन लो! इसके गहने छीन लो।" राजाने समझ लिया कि वह डाकुओंकी वस्तीमें आ गया है। उसने घोड़ेको पूरे वेगसे दौड़ा दिया। डाकू दौड़े सही; किंतु राजाका उत्तम घोड़ा कुछ ही क्षणमें दूर निकल गया। हताश होकर उन्होंने पीछा करना छोड़ दिया। आगे राजाको मुनियोंका आश्रम मिला। एक कुटीके सामने पिंजड़े में बैठा तोता उन्हें देखते ही योला -'आइये राजन्! आपका स्वागत है। अरे! अतिथि पधारे हैं। अर्घ्य लाओ। आसन लाओ!' कुटीमेंसे मुनि बाहर आ गये। उन्होंने राजाका स्वागत किया। राजाने पूछा-'एक ही जातिके पक्षियोंके स्वभायमें इतना अन्तर क्यों ?' मुनिके बदले तोता ही बोला-'राजन्! हम दोनों एक ही माता-पिताकी संतान हैं; किंतु उसे डाकू से गये और मुझे ये मुनि ले आये। यह हिंसक भीलोंको यातें सुनता है और मैं मुनियोंके वचन सुनता हूँ। आपने स्वयं देख ही लिया कि किस प्रकार सङ्गके कारण प्राणियोंमें गुण या दोप आ जाते हैं।'
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कहते हैं जख्मी शेर ज्यादा खतरनाक होता है। कम से कम ऑस्ट्रेलिया इस बात को कभी नहीं भूलेगा। एडिलेड में मिली शर्मनाक हार को बीता किस्सा बताते हुए टीम इंडिया ने दूसरे मैच में विशाल जीत हासिल की। 26 दिसंबर से शुरू हुए बॉक्सिंग-डे टेस्ट का नतीजा चौथे दिन के दूसरे ही सेशन में आ गया। यह 2020 में भारत की पहली टेस्ट जीत है।
टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले गिल ने दोनों पारियों में ऑस्ट्रेलिया के खतरनाक तेज आक्रमण को बखूबी झेलकर साबित कर दिया कि वह भविष्य के सितारे हैं। वहीं उमेश यादव के चोटिल होने के बावजूद मोहम्मद सिराज ने उनकी कमी महसूस नहीं होने दी और पहले ही टेस्ट में प्रभावित किया, उन्होंने दोनों पारियों में कुल पांच विकेट (2+3) चटकाए।
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कहते हैं जख्मी शेर ज्यादा खतरनाक होता है। कम से कम ऑस्ट्रेलिया इस बात को कभी नहीं भूलेगा। एडिलेड में मिली शर्मनाक हार को बीता किस्सा बताते हुए टीम इंडिया ने दूसरे मैच में विशाल जीत हासिल की। छब्बीस दिसंबर से शुरू हुए बॉक्सिंग-डे टेस्ट का नतीजा चौथे दिन के दूसरे ही सेशन में आ गया। यह दो हज़ार बीस में भारत की पहली टेस्ट जीत है। टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले गिल ने दोनों पारियों में ऑस्ट्रेलिया के खतरनाक तेज आक्रमण को बखूबी झेलकर साबित कर दिया कि वह भविष्य के सितारे हैं। वहीं उमेश यादव के चोटिल होने के बावजूद मोहम्मद सिराज ने उनकी कमी महसूस नहीं होने दी और पहले ही टेस्ट में प्रभावित किया, उन्होंने दोनों पारियों में कुल पांच विकेट चटकाए।
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- Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate?
महिलाओं में अक्सर आयरन की कमी हो जाती है। अगर आपको लगता है कि आपके शरीर में आयरन की कमी है तो आप घर पर मेथी का पुलाव बना कर खुद भीऔर परिवार वालों को खिला सकती हैं। खून में हीमोग्लोबिन बढाने में मेथी का साग काफी प्रभावशाली माना जाता है। आज हम आपको मेथी पुलाव बनाना सिखाएंगे जिसमें ढेर सारे मेथी के साग का प्रयोग होता है। यह बनाने में काफी आसान है, आइये जानते हैं मेथी पुलाव बनान की विधि।
- पैन में तेल गरम करें, उसमें जीरा, तेज पत्ता, दालचीनी, हरी इलायची, लौंग डाल कर एक मिनट पकाएं।
- फिर हरी मिर्च और प्याज पेस्ट डाल कर 4-5 मिनट पकाए।
- उसके बाद कटे टमाटर, हल्दी पावडर, लाल मिर्च पावडर, जीरा पावडर और धनिया पावडर डाल कर 3 मिनट मध्यम आंच पर पकाएं।
- उसके बाद मेथी का साग डाल कर 4 मिनट पकाएं।
- फिर नमक डाल कर मिक्स करें। मेथी के साग को अच्छी तरह से पक जाने दें।
- अब उसमें पकाया गया ब्राउन राइस डाल कर हल्के हाथों से मिक्स करें।
- एक बार सब अच्छी तरह से मिक्स हो जाने के बाद गैस बंद करें।
- आपका टमैटो मेथी पुलाव तैयार है, इसे दही के साथ सर्व करें।
GET THE BEST BOLDSKY STORIES!
Today, we have a simple and nutritious rice recipe for you to try. This recipe gets ready in minutes and is a perfect dish for the working people who have no time for lengthy recipes.
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- Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? महिलाओं में अक्सर आयरन की कमी हो जाती है। अगर आपको लगता है कि आपके शरीर में आयरन की कमी है तो आप घर पर मेथी का पुलाव बना कर खुद भीऔर परिवार वालों को खिला सकती हैं। खून में हीमोग्लोबिन बढाने में मेथी का साग काफी प्रभावशाली माना जाता है। आज हम आपको मेथी पुलाव बनाना सिखाएंगे जिसमें ढेर सारे मेथी के साग का प्रयोग होता है। यह बनाने में काफी आसान है, आइये जानते हैं मेथी पुलाव बनान की विधि। - पैन में तेल गरम करें, उसमें जीरा, तेज पत्ता, दालचीनी, हरी इलायची, लौंग डाल कर एक मिनट पकाएं। - फिर हरी मिर्च और प्याज पेस्ट डाल कर चार-पाँच मिनट पकाए। - उसके बाद कटे टमाटर, हल्दी पावडर, लाल मिर्च पावडर, जीरा पावडर और धनिया पावडर डाल कर तीन मिनट मध्यम आंच पर पकाएं। - उसके बाद मेथी का साग डाल कर चार मिनट पकाएं। - फिर नमक डाल कर मिक्स करें। मेथी के साग को अच्छी तरह से पक जाने दें। - अब उसमें पकाया गया ब्राउन राइस डाल कर हल्के हाथों से मिक्स करें। - एक बार सब अच्छी तरह से मिक्स हो जाने के बाद गैस बंद करें। - आपका टमैटो मेथी पुलाव तैयार है, इसे दही के साथ सर्व करें। GET THE BEST BOLDSKY STORIES! Today, we have a simple and nutritious rice recipe for you to try. This recipe gets ready in minutes and is a perfect dish for the working people who have no time for lengthy recipes.
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यूपीः पीड़ित परिवार से मिलने के लिए हाथरस जाते समय कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के साथ हुई बदसलूकी की पुलिस आयुक्त कार्यालय जांच करेगा. नोएडा पुलिस ने इस मामले में जांच के आदेश देते हुए कहा है कि कोई सक्षम महिला अधिकारी इस मामले की जांच करेगी.
बीते शनिवार को हाथरस जा रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को रोकने के लिए डीएनडी पर भारी पुलिस बल तैनात की गई थी. इस दौरान पुलिस ने लाठियां भी चलाईं. इसी समय की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें एक पुलिसकर्मी ने प्रियंका गांधी के कुर्ते को पकड़ रखा था.
हालांकि, प्रियंका गांधी नोएडा पुलिस के ट्वीट का जवाब भी दे दिया है और सवाल पूछा है कि क्या उत्तर प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा नहीं कर पाने पर आपको पछतावा है? या यह सिर्फ़ लोगों की भावनाओं को शांत करने के लिए किया जाने वाला ट्वीट है.
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यूपीः पीड़ित परिवार से मिलने के लिए हाथरस जाते समय कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के साथ हुई बदसलूकी की पुलिस आयुक्त कार्यालय जांच करेगा. नोएडा पुलिस ने इस मामले में जांच के आदेश देते हुए कहा है कि कोई सक्षम महिला अधिकारी इस मामले की जांच करेगी. बीते शनिवार को हाथरस जा रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को रोकने के लिए डीएनडी पर भारी पुलिस बल तैनात की गई थी. इस दौरान पुलिस ने लाठियां भी चलाईं. इसी समय की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें एक पुलिसकर्मी ने प्रियंका गांधी के कुर्ते को पकड़ रखा था. हालांकि, प्रियंका गांधी नोएडा पुलिस के ट्वीट का जवाब भी दे दिया है और सवाल पूछा है कि क्या उत्तर प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा नहीं कर पाने पर आपको पछतावा है? या यह सिर्फ़ लोगों की भावनाओं को शांत करने के लिए किया जाने वाला ट्वीट है.
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२. ऐ के स्थानपर ए, अइ एव इ के प्रयोग । यथा - गेवज्ज < प्रवेयक ( १०/२०११६ ), वेरि < बैरी ( २।३।६ ), वेयड्ढ < वैताढ्य ( २११३१८ ), वरि < वैरी ( ३११५१७ ), वइसाह < वैशाख ( ९ २१११२) तइलोय < त्रैलोक्य ( ३१३१९ ), वइवस < वैवस्वत ( ६।११४ ) ।
३ औ ध्वनिके स्थानपर ओ एव अउ । यथा - कोत्थुह < कौस्तुभ ( ५११०/१), कोसल < कौशल ( ३।१६।६ ), कोसिय < कौशिक ( २०१८ । ११ ), पउर < पोर ( २।५।२२ ) ।
४ ड, न्, ण्, न्, एवम् के स्थान पर अनुस्वार । जैसे- पकय < पड्कय ( ३१३१७ ), चचल < चञ्चल ( २१२१५ ), चदकला < चन्द्रकला ( ६।६।१२ ), चडु <चण्ड ( १०१२४१५ ), सयपह < स्वयम्प्रभा ( ५।१।१५ ) ।
व्यजन वर्ण-विकार
" रकारके स्थान में क्वचित् लकार । यथा-चलण < चरण ( १११११ ) ( यह अर्धमागधी प्राकृतकी प्रवृत्ति है ) ।
६ श, ष एव स के स्थान में 'स' होता है । कही-कही षु के स्थान में छ भी होता है । यथासइ <शचि (१।६।२), सोस < शिष्य (२।१५।१०), सुमइ < सुमति ( ७४७८), छप्पय < षट्पद (११ १२ ११), छक्कम्म < षट्कर्म ( २११२१६ ), छट्टि < पष्ठी ( ९९७११४ ) ।
७ स के स्थान पर क्वचित् ह तथा सयुक्त त्स एव प्स के स्थान पर च्छ ।
जैसे - दह < दस ( २ । १६१४ ), वच्छा < वत्सा ( ७१११४ ), अच्छरा < अप्सरा ( २।१७।११ ) ।
८ ध्वनि परिवर्तनमें वर्ण- परिवर्तन कर देनेपर भी मात्राओकी संख्या प्राय समान ।
जैसे - घन्न < धन्य ( ८ाटा८ ), धम्म < धर्म ( २१६१९ ), निज्जिय < निर्जित ( २१२१६ ), दुद्ध < दुग्ध ( ४११५/१ ), लट्ठि < यष्टि ( अथवा लाठी ) ( ५११९९४ ), अप्प < आत्मन् ( २ । ११ । १ ), दुच्चरु < दुश्चर ( ८११७७३ ), अछरिउ < आश्चर्यम् ( १८५/१०, अपवाद ), तव < ताम्र ( १०३७१४, अपवाद ), अकोह < अक्रोध ( ८1१०1१०, अपवाद ), माणयभु < मानस्तम्भ ( १० २१४, अपवाद ), दिक्ख < दीक्षा ( १९१७ ११४, अपवाद ) ।
९ कुछ ध्वनियोका आमूल-चूल परिवर्तन तथा उनसे समीकरण एव विषमीकरणकी प्रवृत्तियाँ परिलक्षित होती है । यथा -
मउड < मुकुट ( ४१३१७), मउलिय < मुकुलित ( २११३१३), पुग्गल < पुद्गल ( ७१७७१२), पुहइ < पृथिवी ( १०।६।४ ), मउण < मौन ( १ । १६ । १२ ); पोम < पद्म ( १०1१५/३ ), इल < एला ( ११९११० ), चक्कि < चक्रो (६।७।११ ), पुरिस < पुरुष ( ३१९ । ११ ), सग्ग < स्वर्ग ( २१७७७), नम्मु < नम्र ( २ ।३।१३ ) ।
१० स्वरोका आदि, मध्य एव अन्त्य स्थानमें आगम । यथा - वासहर < वर्षधर ( ३ । १८१३ ), सुवण < स्वजन ( ६२ १९ ), सच्चरण < सदाचरण ( ८।३।३ ), दुज्जय < दुर्जेय ( १११ १२ ), उत्तिम < उत्तम ( १० १८०१३ ), निसुढ < निषध ( १०।१४।१० ), वरिसइ ८ वर्षति ( ५/५/१४ ), कसण < कृष्ण ( ११५/२० ), अग्गिमित < अग्निमित्र ( २।१८।१३ ), सरय < शरद् (१।१०।११), दय < दया ( १।१६।९ ) ।
११ माद्य एव मध्य व्यजन लोप । यथा - थी < स्त्री ( १०११८०४ ), थंभ < स्तम्भ" ( ३॥१५॥७ ), थिरयर < स्थिरता ( २।२१६ ), थण < स्तन ( १० ११ १२ ) , थंवइ १ स्थपति ( ८।४।४ ), थावर < स्थावर
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दो. ऐ के स्थानपर ए, अइ एव इ के प्रयोग । यथा - गेवज्ज < प्रवेयक , वेरि < बैरी , वेयड्ढ < वैताढ्य , वरि < वैरी , वइसाह < वैशाख तइलोय < त्रैलोक्य , वइवस < वैवस्वत । तीन औ ध्वनिके स्थानपर ओ एव अउ । यथा - कोत्थुह < कौस्तुभ , कोसल < कौशल , कोसिय < कौशिक , पउर < पोर । चार ड, न्, ण्, न्, एवम् के स्थान पर अनुस्वार । जैसे- पकय < पड्कय , चचल < चञ्चल , चदकला < चन्द्रकला , चडु <चण्ड , सयपह < स्वयम्प्रभा । व्यजन वर्ण-विकार " रकारके स्थान में क्वचित् लकार । यथा-चलण < चरण । छः श, ष एव स के स्थान में 'स' होता है । कही-कही षु के स्थान में छ भी होता है । यथासइ <शचि , सोस < शिष्य , सुमइ < सुमति , छप्पय < षट्पद , छक्कम्म < षट्कर्म , छट्टि < पष्ठी । सात स के स्थान पर क्वचित् ह तथा सयुक्त त्स एव प्स के स्थान पर च्छ । जैसे - दह < दस , वच्छा < वत्सा , अच्छरा < अप्सरा । आठ ध्वनि परिवर्तनमें वर्ण- परिवर्तन कर देनेपर भी मात्राओकी संख्या प्राय समान । जैसे - घन्न < धन्य , धम्म < धर्म , निज्जिय < निर्जित , दुद्ध < दुग्ध , लट्ठि < यष्टि , अप्प < आत्मन् , दुच्चरु < दुश्चर , अछरिउ < आश्चर्यम् , तव < ताम्र , अकोह < अक्रोध , माणयभु < मानस्तम्भ , दिक्ख < दीक्षा । नौ कुछ ध्वनियोका आमूल-चूल परिवर्तन तथा उनसे समीकरण एव विषमीकरणकी प्रवृत्तियाँ परिलक्षित होती है । यथा - मउड < मुकुट , मउलिय < मुकुलित , पुग्गल < पुद्गल , पुहइ < पृथिवी , मउण < मौन ; पोम < पद्म , इल < एला , चक्कि < चक्रो , पुरिस < पुरुष , सग्ग < स्वर्ग , नम्मु < नम्र । दस स्वरोका आदि, मध्य एव अन्त्य स्थानमें आगम । यथा - वासहर < वर्षधर , सुवण < स्वजन , सच्चरण < सदाचरण , दुज्जय < दुर्जेय , उत्तिम < उत्तम , निसुढ < निषध , वरिसइ आठ वर्षति , कसण < कृष्ण , अग्गिमित < अग्निमित्र , सरय < शरद् , दय < दया । ग्यारह माद्य एव मध्य व्यजन लोप । यथा - थी < स्त्री , थंभ < स्तम्भ" , थिरयर < स्थिरता , थण < स्तन , थंवइ एक स्थपति , थावर < स्थावर
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नरिमन पॉइंट - दसवीं और बारहवीं बोर्ड के विद्यार्थी पहले परीक्षा फॉर्म भरें, पैसे भरने की समय सीमा हमने बढ़ाई है। यह जानकारी शिक्षा मंत्री विनोद तावडे ने दी है।
500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद किए जाने से, परीक्षा फीस भरने में अभिभावकों और स्टुडेंट को समस्या हो रही थी। पर इस निर्णय से काफी राहत मिलेगी।
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नरिमन पॉइंट - दसवीं और बारहवीं बोर्ड के विद्यार्थी पहले परीक्षा फॉर्म भरें, पैसे भरने की समय सीमा हमने बढ़ाई है। यह जानकारी शिक्षा मंत्री विनोद तावडे ने दी है। पाँच सौ और एक हज़ार रुपयापए के पुराने नोट बंद किए जाने से, परीक्षा फीस भरने में अभिभावकों और स्टुडेंट को समस्या हो रही थी। पर इस निर्णय से काफी राहत मिलेगी।
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बाॅलीवुड एक्ट्रेस श्रीदेवी का निधन हो गया है। इसको लेकर बताया जा रहा है कि श्रीदेवी एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए दुबई गई थी,जहां पर उन्हें अचानक तबीयत बिगड़ने की शिकायत आने के बाद हार्ट अटैक आ गया और उनकी अचानक मौत हो गयी। गौरतलब है कि बाॅलीवुड अदाकारा श्रीदेवी का निधन 54 साल की उम्र में हुआ।
जैसे ही श्रीदेवी के निधन की खबर सोशल मीडिया पर आयी,लोगों की प्रतिक्रिया आने शुरू हो गई। इसके बीच बाॅलीवुड जगत के अलावा क्रिकेट से जुड़ी कई दिग्गज हस्तियों ने भी सोशल मीडिया के सहारे अपना दुख जताया,साथ ही उनके आत्मा की शांति के लिए भी बात कहीं.
पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी श्रीदेवी की अचानक निधन पर शोक जताया। प्रधानमंत्री के दफ्तर की ओर से किए गए ट्वीट पर दुख जताते हुए यह ट्वीट आया कि, प्रसिद्द अभिनेत्री श्रीदेवी के असमय निधन से दुखी हूं। लंबे करियर में उन्होंने अलग-अलग तरह के यादगार रोल निभाए। मैं इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ हूं। उनकी आत्मा को शांति मिले।
Shocked to hear about the demise of #Sridevi ji . Heartfelt Condolences to the family. Om Shanti !
Shocked to hear about the demise of #Sridevi ji . Condolences to her family and friends.
Very shocked to hear about the passing away of iconic actress #Sridevi ji. Condolences to her family and loved ones. May her soul rest in peace.
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बाॅलीवुड एक्ट्रेस श्रीदेवी का निधन हो गया है। इसको लेकर बताया जा रहा है कि श्रीदेवी एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए दुबई गई थी,जहां पर उन्हें अचानक तबीयत बिगड़ने की शिकायत आने के बाद हार्ट अटैक आ गया और उनकी अचानक मौत हो गयी। गौरतलब है कि बाॅलीवुड अदाकारा श्रीदेवी का निधन चौवन साल की उम्र में हुआ। जैसे ही श्रीदेवी के निधन की खबर सोशल मीडिया पर आयी,लोगों की प्रतिक्रिया आने शुरू हो गई। इसके बीच बाॅलीवुड जगत के अलावा क्रिकेट से जुड़ी कई दिग्गज हस्तियों ने भी सोशल मीडिया के सहारे अपना दुख जताया,साथ ही उनके आत्मा की शांति के लिए भी बात कहीं. पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी श्रीदेवी की अचानक निधन पर शोक जताया। प्रधानमंत्री के दफ्तर की ओर से किए गए ट्वीट पर दुख जताते हुए यह ट्वीट आया कि, प्रसिद्द अभिनेत्री श्रीदेवी के असमय निधन से दुखी हूं। लंबे करियर में उन्होंने अलग-अलग तरह के यादगार रोल निभाए। मैं इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ हूं। उनकी आत्मा को शांति मिले। Shocked to hear about the demise of #Sridevi ji . Heartfelt Condolences to the family. Om Shanti ! Shocked to hear about the demise of #Sridevi ji . Condolences to her family and friends. Very shocked to hear about the passing away of iconic actress #Sridevi ji. Condolences to her family and loved ones. May her soul rest in peace.
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लेबनान में है सलमान रुश्दी पर हमला करने वाले का पिता ( twitter. com/BookBrunch)
बेरूत. उपन्यासकार सलमान रुश्दी की हत्या के प्रयास के आरोप में पकड़े गए हादी मतार के पिता ने खुद को दक्षिणी लेबनान में अपने घर में बंद कर लिया है और किसी से बात करने से इनकार कर रहा है. शहर के मेयर अली तेहफे ने मीडिया को ये जानकारी दी. हादी मतार मूल रूप से लेबनान का रहने वाला है और उसका परिवार दक्षिण लेबनान के यारौन शहर में रहता है. शहर के मेयर तेहफे ने कहा कि हादी मतार के माता-पिता अमेरिका चले गए थे और मतार का जन्म और पालन-पोषण वहीं हुआ. कई साल पहले हादी मतार के पिता लेबनान लौट आए थे.
न्यूज एजेंसी रायटर्स की एक खबर के मुताबिक शहर के मेयर तेहफे ने कहा कि हादी मतार के पिता अब लेबनान में हैं. लेकिन ये खबर मिलने के बाद उन्होंने खुद को घर में बंद कर लिया है और किसी को भी किसी भी तरह की बात नहीं कर रहे हैं. हमने उनके साथ बात करने की कोशिश की, हमने लोगों को भेजा, हम गए और दरवाजा खटखटाया लेकिन वह कोई भी बात करने के लिए राजी नहीं है.
जबकि ईरान समर्थित लेबनानी हथियारबंद समूह हिज्बुल्लाह के एक अधिकारी ने कहा कि संगठन के पास रुश्दी पर हमले के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है. अधिकारी ने बताया कि उनको इस विषय के बारे में कुछ पता नहीं है. इसलिए वो इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. हिज्बुल्लाह को ईरान का समर्थन हासिल है. ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने 1989 में एक फतवा दिया था. जिसमें मुसलमानों से ईशनिंदा के लिए रुश्दी को मारने की अपील की गई थी.
यह पूछे जाने पर कि क्या मतार या उसके माता-पिता हिज्बुल्लाह से जुड़े हैं या उसका समर्थन करते हैं, तो मेयर तहफे ने कहा कि उन्हें मतार या उसके माता-पिता राजनीतिक विचारों के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं है.
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लेबनान में है सलमान रुश्दी पर हमला करने वाले का पिता बेरूत. उपन्यासकार सलमान रुश्दी की हत्या के प्रयास के आरोप में पकड़े गए हादी मतार के पिता ने खुद को दक्षिणी लेबनान में अपने घर में बंद कर लिया है और किसी से बात करने से इनकार कर रहा है. शहर के मेयर अली तेहफे ने मीडिया को ये जानकारी दी. हादी मतार मूल रूप से लेबनान का रहने वाला है और उसका परिवार दक्षिण लेबनान के यारौन शहर में रहता है. शहर के मेयर तेहफे ने कहा कि हादी मतार के माता-पिता अमेरिका चले गए थे और मतार का जन्म और पालन-पोषण वहीं हुआ. कई साल पहले हादी मतार के पिता लेबनान लौट आए थे. न्यूज एजेंसी रायटर्स की एक खबर के मुताबिक शहर के मेयर तेहफे ने कहा कि हादी मतार के पिता अब लेबनान में हैं. लेकिन ये खबर मिलने के बाद उन्होंने खुद को घर में बंद कर लिया है और किसी को भी किसी भी तरह की बात नहीं कर रहे हैं. हमने उनके साथ बात करने की कोशिश की, हमने लोगों को भेजा, हम गए और दरवाजा खटखटाया लेकिन वह कोई भी बात करने के लिए राजी नहीं है. जबकि ईरान समर्थित लेबनानी हथियारबंद समूह हिज्बुल्लाह के एक अधिकारी ने कहा कि संगठन के पास रुश्दी पर हमले के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है. अधिकारी ने बताया कि उनको इस विषय के बारे में कुछ पता नहीं है. इसलिए वो इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. हिज्बुल्लाह को ईरान का समर्थन हासिल है. ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने एक हज़ार नौ सौ नवासी में एक फतवा दिया था. जिसमें मुसलमानों से ईशनिंदा के लिए रुश्दी को मारने की अपील की गई थी. यह पूछे जाने पर कि क्या मतार या उसके माता-पिता हिज्बुल्लाह से जुड़े हैं या उसका समर्थन करते हैं, तो मेयर तहफे ने कहा कि उन्हें मतार या उसके माता-पिता राजनीतिक विचारों के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं है. .
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देश के प्रमुख जलाशयों का भंडारण (27-10-2011)
केन्द्रीय जल आयोग देश भर में फैले 81 महत्वपूर्ण जलाशयों में भंडारण की स्थिति की निगरानी कर रहा है। इनमें से 36 जलाशयों से पन बिजली को फायदा होता है, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 60 मेगावाट से ज्यादा है। इस समय भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में 108 प्रतिशत और इसी अवधि के दौरान पिछले दस वर्ष के औसत भंडारण का 119 प्रतिशत अधिक है।
उपलब्ध पानी से अधिक से अधिक फायदा लेने के लिए केन्द्रीय जल आयोग, कृषि विभाग से संपर्क बनाए हुए है और वह जल संसाधन योजना से जुड़े विभिन्न विभागों और मंत्रालयों को स्थिति से अवगत करा रहा है।
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देश के प्रमुख जलाशयों का भंडारण केन्द्रीय जल आयोग देश भर में फैले इक्यासी महत्वपूर्ण जलाशयों में भंडारण की स्थिति की निगरानी कर रहा है। इनमें से छत्तीस जलाशयों से पन बिजली को फायदा होता है, जिनमें प्रत्येक की क्षमता साठ मेगावाट से ज्यादा है। इस समय भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में एक सौ आठ प्रतिशत और इसी अवधि के दौरान पिछले दस वर्ष के औसत भंडारण का एक सौ उन्नीस प्रतिशत अधिक है। उपलब्ध पानी से अधिक से अधिक फायदा लेने के लिए केन्द्रीय जल आयोग, कृषि विभाग से संपर्क बनाए हुए है और वह जल संसाधन योजना से जुड़े विभिन्न विभागों और मंत्रालयों को स्थिति से अवगत करा रहा है।
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लाभ उठाया जा सकता है जहां किसानों के पास सौ दो सौ एकड़ ज़मीन हो और जिनमें एक ही प्रकार की फसल बोई जाती हो । जहां ऐसे बड़े खेत हों व जहां इस प्रकार एक ही फ़सल बोई जाती हो उन स्थानों में ऐसे यंत्र सहयोगी संस्थाओं द्वारा काम में लाये जा सकते हैं । इसी से ये यंत्र पंजाब में बड़ी सफलतापूर्वक काम में लाये जा रहे हैं पर उन्हें संयुक्त प्रांत और विहार में सफलता नहीं मिल सकती है। अन्यत्र गेहूँ काटने के एक और यंत्र का चित्र दे रहे हैं जो बहुधा भारतवर्ष में काम में लाया जाता है ।
काटने के बाद फ़सल खलिहान में ले जा कर रखी जाती है। आमतौर से खलिहान गांव के चारों तरफ़ के बाग़ बग़ीचों में होते हैं। या खेत में ही एक तरफ सफ़ाई करके फ़सल की ढेरी लगा देते हैं। वहां उसे फैलाकर रख देते हैं ताकि वह वहाँ अच्छी तरह से सूख जावे। फिर उसको गेहाई ( मड़ाई ) शुरू कर देते हैं । पाश्चात्य देशों में काटने के बाद फसल ढके हुये स्थानों में रक्खी जाती जिससे उसके पानी गिरने से सड़ जाने, चिलम की श्राग उड़ कर उसमें आग लग जाने तथा चूहे आदि जानवरों के काटे जाने का डर नहीं रहता । भारतीय किसान भी यदि अपनी गाढ़ी कमाई के फल को अन्त में बर्बादी से बचाना चाहते हैं तो उन्हें सहयोगी संस्था द्वारा प्रत्येक गांव पीछे एक या दो ऐसे ढके हुये स्थान बना कर अपनी फसल को सावधानी से रखना चाहिये । यह कई बार देखने में आया है कि फ़सल काफ़ी अच्छी हुई है। कट कर खलि हानों में आ गई है। पर इसके बाद पानी गिर जाने से सड़ कर सत्या नाश हो गई है। यदि किसान गेहाई आदि के होने तक अपनी फ़सल को ढके हुये स्थानों में रखने में असमर्थ है तो उसे कम से कम कूप बना कर तो अवश्य ही रख देना चाहिये जैसे संयुक्त प्रांत के बिजनौर, सद्दाग्रामीय अर्थशास्त्र
रनपुर आदि पश्चिमीय जिलों में होता है। यह कूप इस प्रकार बनाया जाता है। कटी हुई फ़सल को गुम्बज की तरह सजा देते हैं। ऊपर उसके पयाल को इस प्रकार छा देते हैं जिससे उसके ऊपर से पानी ढल जाता है और ढेरी के नीचे प्रवेश नहीं करने पाता ।
इस समय गेहाई या दायँ चलाने की प्रथा जो प्रचलित है वह एक प्रकार से कोई ख़राब नहीं है । हां, वह बैलों के लिये दुखदाई अवश्य ही है । खरीफ़ की गेहाई के साथ साथ रबी की बोई भी करनी पड़ती हैं तथा रबी की गेहाई कड़ाके की गरमी में होती है। इस प्रकार की गेहाई बैलों के लिये और भी दुखदाई है। इससे यदि किसी यंत्र से गेहाई की जावे तो बेलों का कष्ट तो दूर अवश्य ही हो । साथ ही रबो की जाताई बोआई में वे बेल अधिक ताकत के साथ काम कर सकेंगे । प्रत्येक प्रांतीय सरकारी कृषिविभाग के पास गेहाई का यंत्र होता है । संयुक्त प्रांत की सरकार मिश्र देश की गेहाई के यंत्र को अधिक पसंद करती है । वह इस प्रकार की बनी रहती है। एक चौखूंट में कई तवे लगे रहते हैं। उसे एक जोड़ बैल खींचते हैं। साधारण तौर से तीन जोड़ बैल जितना काम कर सकते हैं इतना इस यंत्र द्वारा एक ही जोड़ बैल कर सकते हैं। इससे बैलों के परिश्रम की बहुत बचत होती है। इस यंत्र के दाम लगभग ४२) बयालीस रुपये होते हैं ।
परतवाई या ओसाई
हमारे देश में परतवाई सूप से की जाती है। और यदि हवा परतवाई करते समय चलती हो तो बढ़ा सुभीता होता है। यदि हवा अनुकूल न चलती हो तो केवल सूप के सहारे परतवाई ठोक तरह से नहीं हो पाती और अनाज में बहुत भूसा और पयाल मिले रह जाते हैं । यदि परितबाई भी यंत्र द्वारा होने लगे तो किसी प्रकार भी अनाज में भूसा वग़ रह
मिला हुआ न रह सकेगा । परतवाई के लिये यंत्र बन चुके हैं। इससे काम जल्दी भी होता है ।
कृषि सुधार के अन्तर्गत कृषि कार्य की विधियों में किस प्रकार उन्नति की जा सकती है यह हम यहाँ तक बहुत कुछ कह चुके हैं। पाठकों ने हमारे इस अध्याय को पढ़कर यह देख लिया होगा कि हिंदुस्तान में खेती के जो तरीक़े और औज़ार चले आते हैं उन्हीं के आधार पर, उन तरीक़ों और औज़ारों से हमने उन्नति करने की सलाह दी है। पूरे परिवर्तन को सलाह केवल वहीं दी है जहां उसको नितान्त आवश्यकता है ।
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लाभ उठाया जा सकता है जहां किसानों के पास सौ दो सौ एकड़ ज़मीन हो और जिनमें एक ही प्रकार की फसल बोई जाती हो । जहां ऐसे बड़े खेत हों व जहां इस प्रकार एक ही फ़सल बोई जाती हो उन स्थानों में ऐसे यंत्र सहयोगी संस्थाओं द्वारा काम में लाये जा सकते हैं । इसी से ये यंत्र पंजाब में बड़ी सफलतापूर्वक काम में लाये जा रहे हैं पर उन्हें संयुक्त प्रांत और विहार में सफलता नहीं मिल सकती है। अन्यत्र गेहूँ काटने के एक और यंत्र का चित्र दे रहे हैं जो बहुधा भारतवर्ष में काम में लाया जाता है । काटने के बाद फ़सल खलिहान में ले जा कर रखी जाती है। आमतौर से खलिहान गांव के चारों तरफ़ के बाग़ बग़ीचों में होते हैं। या खेत में ही एक तरफ सफ़ाई करके फ़सल की ढेरी लगा देते हैं। वहां उसे फैलाकर रख देते हैं ताकि वह वहाँ अच्छी तरह से सूख जावे। फिर उसको गेहाई शुरू कर देते हैं । पाश्चात्य देशों में काटने के बाद फसल ढके हुये स्थानों में रक्खी जाती जिससे उसके पानी गिरने से सड़ जाने, चिलम की श्राग उड़ कर उसमें आग लग जाने तथा चूहे आदि जानवरों के काटे जाने का डर नहीं रहता । भारतीय किसान भी यदि अपनी गाढ़ी कमाई के फल को अन्त में बर्बादी से बचाना चाहते हैं तो उन्हें सहयोगी संस्था द्वारा प्रत्येक गांव पीछे एक या दो ऐसे ढके हुये स्थान बना कर अपनी फसल को सावधानी से रखना चाहिये । यह कई बार देखने में आया है कि फ़सल काफ़ी अच्छी हुई है। कट कर खलि हानों में आ गई है। पर इसके बाद पानी गिर जाने से सड़ कर सत्या नाश हो गई है। यदि किसान गेहाई आदि के होने तक अपनी फ़सल को ढके हुये स्थानों में रखने में असमर्थ है तो उसे कम से कम कूप बना कर तो अवश्य ही रख देना चाहिये जैसे संयुक्त प्रांत के बिजनौर, सद्दाग्रामीय अर्थशास्त्र रनपुर आदि पश्चिमीय जिलों में होता है। यह कूप इस प्रकार बनाया जाता है। कटी हुई फ़सल को गुम्बज की तरह सजा देते हैं। ऊपर उसके पयाल को इस प्रकार छा देते हैं जिससे उसके ऊपर से पानी ढल जाता है और ढेरी के नीचे प्रवेश नहीं करने पाता । इस समय गेहाई या दायँ चलाने की प्रथा जो प्रचलित है वह एक प्रकार से कोई ख़राब नहीं है । हां, वह बैलों के लिये दुखदाई अवश्य ही है । खरीफ़ की गेहाई के साथ साथ रबी की बोई भी करनी पड़ती हैं तथा रबी की गेहाई कड़ाके की गरमी में होती है। इस प्रकार की गेहाई बैलों के लिये और भी दुखदाई है। इससे यदि किसी यंत्र से गेहाई की जावे तो बेलों का कष्ट तो दूर अवश्य ही हो । साथ ही रबो की जाताई बोआई में वे बेल अधिक ताकत के साथ काम कर सकेंगे । प्रत्येक प्रांतीय सरकारी कृषिविभाग के पास गेहाई का यंत्र होता है । संयुक्त प्रांत की सरकार मिश्र देश की गेहाई के यंत्र को अधिक पसंद करती है । वह इस प्रकार की बनी रहती है। एक चौखूंट में कई तवे लगे रहते हैं। उसे एक जोड़ बैल खींचते हैं। साधारण तौर से तीन जोड़ बैल जितना काम कर सकते हैं इतना इस यंत्र द्वारा एक ही जोड़ बैल कर सकते हैं। इससे बैलों के परिश्रम की बहुत बचत होती है। इस यंत्र के दाम लगभग बयालीस) बयालीस रुपये होते हैं । परतवाई या ओसाई हमारे देश में परतवाई सूप से की जाती है। और यदि हवा परतवाई करते समय चलती हो तो बढ़ा सुभीता होता है। यदि हवा अनुकूल न चलती हो तो केवल सूप के सहारे परतवाई ठोक तरह से नहीं हो पाती और अनाज में बहुत भूसा और पयाल मिले रह जाते हैं । यदि परितबाई भी यंत्र द्वारा होने लगे तो किसी प्रकार भी अनाज में भूसा वग़ रह मिला हुआ न रह सकेगा । परतवाई के लिये यंत्र बन चुके हैं। इससे काम जल्दी भी होता है । कृषि सुधार के अन्तर्गत कृषि कार्य की विधियों में किस प्रकार उन्नति की जा सकती है यह हम यहाँ तक बहुत कुछ कह चुके हैं। पाठकों ने हमारे इस अध्याय को पढ़कर यह देख लिया होगा कि हिंदुस्तान में खेती के जो तरीक़े और औज़ार चले आते हैं उन्हीं के आधार पर, उन तरीक़ों और औज़ारों से हमने उन्नति करने की सलाह दी है। पूरे परिवर्तन को सलाह केवल वहीं दी है जहां उसको नितान्त आवश्यकता है ।
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चर्चा में क्यों?
7 सितंबर, 2021 को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को 'नील गगन के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस' (International Day of Clean Air for Blue Skies) पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिये।
- वायु प्रदूषण के कारण पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर विपरीत प्रभावों को देखते हुए यूनाइटेड नेशन एनवायरनमेंट प्रोग्राम (UNEP) द्वारा 19 दिसंबर, 2019 को संकल्प पारित कर 7 सितंबर को 'इंटरनेशनल-डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्कायस्' आयोजित करने का निश्चय किया गया था।
- पहली बार 7 सितंबर, 2020 को आयोजित पहले कार्यक्रम की थीम 'क्लीन एयर फॉर ऑल' थी, इस बार का विषय, 'हेल्दी एयर, फॉर हेल्दी प्लैनेट' है।
- अपर मुख्य सचिव मलय श्रीवास्तव ने क्षेत्रीय अधिकारियों को शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन के कारणों से आम जनता को जागरूक करने हेतु अधिकतम लोगों की सहभागिता के साथ वेबिनार आयोजित करने के निर्देश दिए।
- साथ ही उन्होंने परिवेशीय वायु गुणवत्ता में सुधार लाने की दृष्टि से 'नॉन अटेनमेंट सिटी' के लिये बनाए गए एक्शन प्लान के क्रियान्वयन से लोगों को परिचित कराने के निर्देश दिये।
- उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिये 'नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम' चलाया जा रहा है। इसमें देश के 132 शहरों में से मध्य प्रदेश के 6 शहर- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर एवं देवास शामिल हैं। इन शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिये कार्य-योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश के प्रमुख शहरों में परिवेशीय वायु गुणवत्ता मापन का कार्य भी किया जा रहा है।
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चर्चा में क्यों? सात सितंबर, दो हज़ार इक्कीस को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को 'नील गगन के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस' पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिये। - वायु प्रदूषण के कारण पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर विपरीत प्रभावों को देखते हुए यूनाइटेड नेशन एनवायरनमेंट प्रोग्राम द्वारा उन्नीस दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस को संकल्प पारित कर सात सितंबर को 'इंटरनेशनल-डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्कायस्' आयोजित करने का निश्चय किया गया था। - पहली बार सात सितंबर, दो हज़ार बीस को आयोजित पहले कार्यक्रम की थीम 'क्लीन एयर फॉर ऑल' थी, इस बार का विषय, 'हेल्दी एयर, फॉर हेल्दी प्लैनेट' है। - अपर मुख्य सचिव मलय श्रीवास्तव ने क्षेत्रीय अधिकारियों को शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन के कारणों से आम जनता को जागरूक करने हेतु अधिकतम लोगों की सहभागिता के साथ वेबिनार आयोजित करने के निर्देश दिए। - साथ ही उन्होंने परिवेशीय वायु गुणवत्ता में सुधार लाने की दृष्टि से 'नॉन अटेनमेंट सिटी' के लिये बनाए गए एक्शन प्लान के क्रियान्वयन से लोगों को परिचित कराने के निर्देश दिये। - उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिये 'नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम' चलाया जा रहा है। इसमें देश के एक सौ बत्तीस शहरों में से मध्य प्रदेश के छः शहर- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर एवं देवास शामिल हैं। इन शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिये कार्य-योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश के प्रमुख शहरों में परिवेशीय वायु गुणवत्ता मापन का कार्य भी किया जा रहा है।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
मनोज श्यामलन (Manoj Shyamalan, மனோஜ் ஷியாமளன், മനോജ് ശ്യാമളന്) या एम. द मेट्रिक्स (The Matrix) (1999) विज्ञान कथा पर आधारित एक एक्शन फ़िल्म है जिसका लेखन एवं निर्देशन लैरी तथा एंडी वाचोवस्की ने किया है तथा कियानू रीव्स, लॉरेंस फिशबर्न, कैरी-एन्नी मॉस, जो पैंटोलियानो एवं ह्यूगो वीविंग इसके मुख्य कलाकार हैं। इसे सर्वप्रथम 31 मार्च 1999 को अमेरिका में प्रदर्शित किया गया एवं फ़िल्मों, कॉमिक्स पुस्तकों, वीडियो गेमों तथा एनिमेशन की द मेट्रिक्स श्रृंखला की पहली कड़ी के रूप में उपयोग किया गया है। फ़िल्म एक भविष्य की व्याख्या करती है जिसमें मानवीय यथार्थ बोध वास्तविक रूप से मैट्रिक्स हैः सजीव मशीनों द्वारा सृजित एक अनुकृत यथार्थ जो मानवीय जनसंख्या को शान्त तथा अधीन करने के लिए तब सक्षम होता है जब उनके शरीर की उष्मा तथा विद्युतीय अभिक्रिया का उपयोग उर्जा के स्रोत के रूप में किया जाता है। इस सत्य को जानने के बाद, कंप्यूटर प्रोग्रामर "नियो" को अन्य लोगों के साथ मशीनों के खिलाफ विद्रोह में शामिल किया जाता है जिन्हें "स्वप्न लोक" से मुक्त करके यथार्थ स्थिति में भेजा गया था। फ़िल्म सामग्री में कई संदर्भों को शामिल किया गया है जैसे - साइबरपंक एवं हैकर उपसंस्कृति, दार्शनिक तथा धार्मिक विचार, एवं ऐलिसेज़ एड्वैन्चर्स इन वण्डरलैण्ड, हांगकांग एक्शन सिनेमा, स्पाघेटी वेस्टर्न्स, डिस्टोपियन कहानियां एवं जापानी एनिमेशन के प्रति आभार व्यतीत किया गया है। .
एम॰ नाइट श्यामलन और द मेट्रिक्स आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): संयुक्त राज्य, हिन्दू धर्म।
संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) (यू एस ए), जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य (United States) (यू एस) या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। 48 संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। 38 लाख वर्ग मील (98 लाख किमी2)"", U.S. Census Bureau, database as of August 2010, excluding the U.S. Minor Outlying Islands.
हिन्दू धर्म (संस्कृतः सनातन धर्म) एक धर्म (या, जीवन पद्धति) है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत,नेपाल और मॉरिशस में बहुमत में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है। विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है। यह धर्म अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है। इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं। इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नहीं है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है। .
एम॰ नाइट श्यामलन 4 संबंध है और द मेट्रिक्स 63 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 2.99% है = 2 / (4 + 63)।
यह लेख एम॰ नाइट श्यामलन और द मेट्रिक्स के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। मनोज श्यामलन या एम. द मेट्रिक्स विज्ञान कथा पर आधारित एक एक्शन फ़िल्म है जिसका लेखन एवं निर्देशन लैरी तथा एंडी वाचोवस्की ने किया है तथा कियानू रीव्स, लॉरेंस फिशबर्न, कैरी-एन्नी मॉस, जो पैंटोलियानो एवं ह्यूगो वीविंग इसके मुख्य कलाकार हैं। इसे सर्वप्रथम इकतीस मार्च एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे को अमेरिका में प्रदर्शित किया गया एवं फ़िल्मों, कॉमिक्स पुस्तकों, वीडियो गेमों तथा एनिमेशन की द मेट्रिक्स श्रृंखला की पहली कड़ी के रूप में उपयोग किया गया है। फ़िल्म एक भविष्य की व्याख्या करती है जिसमें मानवीय यथार्थ बोध वास्तविक रूप से मैट्रिक्स हैः सजीव मशीनों द्वारा सृजित एक अनुकृत यथार्थ जो मानवीय जनसंख्या को शान्त तथा अधीन करने के लिए तब सक्षम होता है जब उनके शरीर की उष्मा तथा विद्युतीय अभिक्रिया का उपयोग उर्जा के स्रोत के रूप में किया जाता है। इस सत्य को जानने के बाद, कंप्यूटर प्रोग्रामर "नियो" को अन्य लोगों के साथ मशीनों के खिलाफ विद्रोह में शामिल किया जाता है जिन्हें "स्वप्न लोक" से मुक्त करके यथार्थ स्थिति में भेजा गया था। फ़िल्म सामग्री में कई संदर्भों को शामिल किया गया है जैसे - साइबरपंक एवं हैकर उपसंस्कृति, दार्शनिक तथा धार्मिक विचार, एवं ऐलिसेज़ एड्वैन्चर्स इन वण्डरलैण्ड, हांगकांग एक्शन सिनेमा, स्पाघेटी वेस्टर्न्स, डिस्टोपियन कहानियां एवं जापानी एनिमेशन के प्रति आभार व्यतीत किया गया है। . एम॰ नाइट श्यामलन और द मेट्रिक्स आम में दो बातें हैं : संयुक्त राज्य, हिन्दू धर्म। संयुक्त राज्य अमेरिका , जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। अड़तालीस संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। अड़तीस लाख वर्ग मील "", U.S. Census Bureau, database as of August दो हज़ार दस, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. हिन्दू धर्म एक धर्म है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत,नेपाल और मॉरिशस में बहुमत में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है। विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है। यह धर्म अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है। इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं। इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नहीं है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है। . एम॰ नाइट श्यामलन चार संबंध है और द मेट्रिक्स तिरेसठ है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक दो.निन्यानवे% है = दो / । यह लेख एम॰ नाइट श्यामलन और द मेट्रिक्स के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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कानपुर कांग्रेस कमेटी अनुसूचित विभाग महानगर इकाई ने दलित समाज को मुख्य धारा से जोड़ने का संकल्प लिया। रविवार को पार्टी कार्यालय तिलक हॉल में हुई बैठक में प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष भगवती प्रसाद चौधरी ने कहा कि दलितों का सम्मान कायम रखने के लिए कांग्रेस पार्टी बूथ स्तर तक कार्य करेगी।
पूर्व सांसद राजाराम पाल ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा सर्वहारा समाज के विकास के लिए रही है। इसके उलट वर्तमान सरकार हिंदु-मुस्लिम के नाम पर लोगों को लड़ाने का काम कर ही है। विभाग के महानगर इकाई जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश भारत आजाद ने कहा कि बाबा साहब के संविधान का सम्मान तभी होगा जब दलित समाज मुख्य धारा से जुड़ेगा। इस मौके पर कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि उनकी पार्टी ने दलितों के लिए हमेशा से ही कार्य किया है। विभाग के उपाध्यक्ष डॉ. आरके जगत ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में दलितों के विकास और सम्मान को लेकर कई योजनाएं शुरू की गई।
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कानपुर कांग्रेस कमेटी अनुसूचित विभाग महानगर इकाई ने दलित समाज को मुख्य धारा से जोड़ने का संकल्प लिया। रविवार को पार्टी कार्यालय तिलक हॉल में हुई बैठक में प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष भगवती प्रसाद चौधरी ने कहा कि दलितों का सम्मान कायम रखने के लिए कांग्रेस पार्टी बूथ स्तर तक कार्य करेगी। पूर्व सांसद राजाराम पाल ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा सर्वहारा समाज के विकास के लिए रही है। इसके उलट वर्तमान सरकार हिंदु-मुस्लिम के नाम पर लोगों को लड़ाने का काम कर ही है। विभाग के महानगर इकाई जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश भारत आजाद ने कहा कि बाबा साहब के संविधान का सम्मान तभी होगा जब दलित समाज मुख्य धारा से जुड़ेगा। इस मौके पर कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि उनकी पार्टी ने दलितों के लिए हमेशा से ही कार्य किया है। विभाग के उपाध्यक्ष डॉ. आरके जगत ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में दलितों के विकास और सम्मान को लेकर कई योजनाएं शुरू की गई।
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छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल मैनपाट में सोमवार दोपहर तेज हवाओं के साथ झमाझम वर्षा हुई। तेज हवाओं के साथ वर्षा से मैनपाट का मौसम खुशनुमा हो गया। मैनपाट में वर्षा और तेज हवाओं की इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित फोटो और वीडियो देखकर सरगुजा के मैदानी क्षेत्र के लोग उत्साहित नजर आए। सरगुजा में इन दिनों प्रचंड गर्मी पढ़ रही है।
सुबह से झुलसाने वाली तेज धूप के कारण लोग बेचैन है। पिछले दो-तीन दिनों से दोपहर बाद आसमान में हल्के बादल छाने से शाम को उमस बढ़ रही है। उमस भरी गर्मी के कारण परेशान लोगों को देर रात तक राहत नहीं मिल पाती। रात 10 बजे के बाद तक शहरी क्षेत्र में गर्म हवा चलती रहती हैं।
सोमवार सुबह से सरगुजा के मैदानी क्षेत्रों में प्रचंड गर्मी पड़ रही है। तेज धूप के कारण कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। गर्मी से बेहाल सरगुजा के मैदानी क्षेत्र के लोग मैनपाट में हुई वर्षा के कारण उत्साहित नजर आ रहे हैं।
दरअसल सोमवार दोपहर छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल मैनपाट का मौसम अचानक बदल गया। आकाश में काले घने बादल छा गए। तेज हवाएं चलनी शुरू हो गई।
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छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल मैनपाट में सोमवार दोपहर तेज हवाओं के साथ झमाझम वर्षा हुई। तेज हवाओं के साथ वर्षा से मैनपाट का मौसम खुशनुमा हो गया। मैनपाट में वर्षा और तेज हवाओं की इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित फोटो और वीडियो देखकर सरगुजा के मैदानी क्षेत्र के लोग उत्साहित नजर आए। सरगुजा में इन दिनों प्रचंड गर्मी पढ़ रही है। सुबह से झुलसाने वाली तेज धूप के कारण लोग बेचैन है। पिछले दो-तीन दिनों से दोपहर बाद आसमान में हल्के बादल छाने से शाम को उमस बढ़ रही है। उमस भरी गर्मी के कारण परेशान लोगों को देर रात तक राहत नहीं मिल पाती। रात दस बजे के बाद तक शहरी क्षेत्र में गर्म हवा चलती रहती हैं। सोमवार सुबह से सरगुजा के मैदानी क्षेत्रों में प्रचंड गर्मी पड़ रही है। तेज धूप के कारण कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। गर्मी से बेहाल सरगुजा के मैदानी क्षेत्र के लोग मैनपाट में हुई वर्षा के कारण उत्साहित नजर आ रहे हैं। दरअसल सोमवार दोपहर छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल मैनपाट का मौसम अचानक बदल गया। आकाश में काले घने बादल छा गए। तेज हवाएं चलनी शुरू हो गई।
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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को विधान भवन में विधायी डिजिटल वीथिका का लोकार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वीथिका में लगी डिजिटल स्क्रीन का अवलोकन किया, फिर लघु फ़िल्म के माध्यम से यूपी के विधायी इतिहास की भी जानकारी ली।
लघु फ़िल्म के माध्यम से बताया गया कि 8 जनवरी 1887 में काउंसिल की पहली बैठक गवर्नर की अध्यक्षता में इलाहाबाद में हुई। 1892 में कॉउन्सिल के अधिकारों में वृद्धि की गई तथा विधायी कार्यों के अतिरिक्त सदस्यों को प्रश्न पूछने का अधिकार प्राप्त हुआ।
यूपी के विधायी इतिहास में 6 दिसंबर 1893 को राजा रामपाल सिंह द्वारा पहला प्रश्न पूछा गया। काउंसिल सदस्यों की संख्या 9 से बढ़ाकर 15 की गई। 1909 में इंडियन काउंसिल एक्ट में संशोधन करके सदस्यों की संख्या 50 की गई। इनका कार्यकाल 3 वर्ष कर दिया गया। सदस्यों के लिए अप्रत्यक्ष निर्वाचन का प्रावधान किया गया। उन्हें पूरक प्रश्न पूछने का अधिकार भी प्रदत्त किया गया।
इसके अलावा मुख्यमंत्री के समक्ष अन्य जानकारी भी रखी गई। कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, समाजवादी पार्टी के मनोज पांडेय, बसपा के उमाशंकर सिंह, जनसत्ता दल के रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया', निषाद पार्टी के अनिल त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को विधान भवन में विधायी डिजिटल वीथिका का लोकार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वीथिका में लगी डिजिटल स्क्रीन का अवलोकन किया, फिर लघु फ़िल्म के माध्यम से यूपी के विधायी इतिहास की भी जानकारी ली। लघु फ़िल्म के माध्यम से बताया गया कि आठ जनवरी एक हज़ार आठ सौ सत्तासी में काउंसिल की पहली बैठक गवर्नर की अध्यक्षता में इलाहाबाद में हुई। एक हज़ार आठ सौ बानवे में कॉउन्सिल के अधिकारों में वृद्धि की गई तथा विधायी कार्यों के अतिरिक्त सदस्यों को प्रश्न पूछने का अधिकार प्राप्त हुआ। यूपी के विधायी इतिहास में छः दिसंबर एक हज़ार आठ सौ तिरानवे को राजा रामपाल सिंह द्वारा पहला प्रश्न पूछा गया। काउंसिल सदस्यों की संख्या नौ से बढ़ाकर पंद्रह की गई। एक हज़ार नौ सौ नौ में इंडियन काउंसिल एक्ट में संशोधन करके सदस्यों की संख्या पचास की गई। इनका कार्यकाल तीन वर्ष कर दिया गया। सदस्यों के लिए अप्रत्यक्ष निर्वाचन का प्रावधान किया गया। उन्हें पूरक प्रश्न पूछने का अधिकार भी प्रदत्त किया गया। इसके अलावा मुख्यमंत्री के समक्ष अन्य जानकारी भी रखी गई। कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, समाजवादी पार्टी के मनोज पांडेय, बसपा के उमाशंकर सिंह, जनसत्ता दल के रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया', निषाद पार्टी के अनिल त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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आत्मानबीर भारत के लिए परिवर्तनकारी उच्च शिक्षा पर कुलपतियों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन कल भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेघालय (USTM) में किया जाएगा।
एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) द्वारा आयोजित और यूएसटीएम द्वारा 23 से 25 मार्च तक आयोजित इस मेगा उच्च शिक्षा कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के लगभग 600 कुलपति भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान 97वीं वार्षिक आम बैठक और एआईयू का 97वां स्थापना दिवस व्याख्यान भी होगा।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में असम सरकार के शिक्षा मंत्री डॉ रानोज पेगू विशेष संबोधन देंगे। एआईयू स्थापना दिवस व्याख्यान डॉ बिबेक देबरॉय, अध्यक्ष, प्रधान मंत्री, भारत सरकार की आर्थिक सलाहकार परिषद द्वारा दिया जाएगा, जबकि स्वागत भाषण यूएसटीएम के चांसलर महबूबुल हक द्वारा दिया जाएगा। अध्यक्षीय भाषण प्रोफेसर सुरंजन दास, अध्यक्ष एआईयू और कुलपति, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता द्वारा दिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ शीर्ष निकायों के प्रमुखों के बीच एक इंटरफेस होगा जहां विशेष वक्ता हैं, डॉ. अभय जेरे, उपाध्यक्ष, एआईसीटीई; डॉ. आर. सी. अग्रवाल, डीडीजी, आईसीएआर, डॉ. पोनमुदीराज, सलाहकार, नैक, प्रो. भोला थापा, कुलपति, काठमांडू विश्वविद्यालय, नेपाल; श्री आदित्य मलकानी क्षेत्रीय निदेशक, एसीयू।
सम्मेलन के तीसरे दिन समापन भाषण असम के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया करेंगे। समापन सत्र के सम्मानित अतिथि हैं, अतुल कोठारी, राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास; रक्कम ए संगमा, शिक्षा मंत्री, मेघालय सरकार, और डॉ. नानी गोपाल महंत, शिक्षा सलाहकार, असम सरकार। इस बैठक के संयोजक डॉ. पंकज मित्तल, महासचिव, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज और प्रोफेसर जीडी शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट, एआईयू और वाइस चांसलर, यूएसटीएम हैं।
सम्मेलन के सम्मेलन सत्रों के विषयों में शामिल हैंः अंतर्राष्ट्रीयकरणः जुड़ाव के तरीके; न्यूनतम सरकारः अधिकतम शासनः विश्वविद्यालयों के लिए इसका क्या अर्थ है; भारतीय भाषाओं का प्रचार; समग्र शिक्षा के लिए सुधार; अनुसंधान और उत्कृष्टता तथा शिक्षा, शिक्षण और कार्यस्थल के भविष्य के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना।
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आत्मानबीर भारत के लिए परिवर्तनकारी उच्च शिक्षा पर कुलपतियों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन कल भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेघालय में किया जाएगा। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज द्वारा आयोजित और यूएसटीएम द्वारा तेईस से पच्चीस मार्च तक आयोजित इस मेगा उच्च शिक्षा कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के लगभग छः सौ कुलपति भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान सत्तानवेवीं वार्षिक आम बैठक और एआईयू का सत्तानवेवां स्थापना दिवस व्याख्यान भी होगा। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में असम सरकार के शिक्षा मंत्री डॉ रानोज पेगू विशेष संबोधन देंगे। एआईयू स्थापना दिवस व्याख्यान डॉ बिबेक देबरॉय, अध्यक्ष, प्रधान मंत्री, भारत सरकार की आर्थिक सलाहकार परिषद द्वारा दिया जाएगा, जबकि स्वागत भाषण यूएसटीएम के चांसलर महबूबुल हक द्वारा दिया जाएगा। अध्यक्षीय भाषण प्रोफेसर सुरंजन दास, अध्यक्ष एआईयू और कुलपति, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता द्वारा दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ शीर्ष निकायों के प्रमुखों के बीच एक इंटरफेस होगा जहां विशेष वक्ता हैं, डॉ. अभय जेरे, उपाध्यक्ष, एआईसीटीई; डॉ. आर. सी. अग्रवाल, डीडीजी, आईसीएआर, डॉ. पोनमुदीराज, सलाहकार, नैक, प्रो. भोला थापा, कुलपति, काठमांडू विश्वविद्यालय, नेपाल; श्री आदित्य मलकानी क्षेत्रीय निदेशक, एसीयू। सम्मेलन के तीसरे दिन समापन भाषण असम के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया करेंगे। समापन सत्र के सम्मानित अतिथि हैं, अतुल कोठारी, राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास; रक्कम ए संगमा, शिक्षा मंत्री, मेघालय सरकार, और डॉ. नानी गोपाल महंत, शिक्षा सलाहकार, असम सरकार। इस बैठक के संयोजक डॉ. पंकज मित्तल, महासचिव, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज और प्रोफेसर जीडी शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट, एआईयू और वाइस चांसलर, यूएसटीएम हैं। सम्मेलन के सम्मेलन सत्रों के विषयों में शामिल हैंः अंतर्राष्ट्रीयकरणः जुड़ाव के तरीके; न्यूनतम सरकारः अधिकतम शासनः विश्वविद्यालयों के लिए इसका क्या अर्थ है; भारतीय भाषाओं का प्रचार; समग्र शिक्षा के लिए सुधार; अनुसंधान और उत्कृष्टता तथा शिक्षा, शिक्षण और कार्यस्थल के भविष्य के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना।
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एक रिसर्च के निष्कर्ष के अनुसार, प्रतिदिन एस्पिरिन लेने से मृत्यु, अपंगता या हृदय वाहिनी संबंधित बीमारी का खतरा कम नहीं होता।
हार्ट अटैक के रोगी को जब भी हार्ट अटैक पड़ने लगता है, वह एस्पिरीन की 1 गोली को मुंह में रख लेता है, जिससे दर्द गायब हो जाता है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में हुई एक रिसर्च के निष्कर्ष के अनुसार, प्रतिदिन एस्पिरिन लेने से मृत्यु, अपंगता या हृदय वाहिनी संबंधित बीमारी का खतरा कम नहीं होता। 5 साल चले ऑस्ट्रेलिया के इस सबसे बड़े क्लीनिकल ट्रायल का निष्कर्ष सार्वजनिक किया गया।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, मोनाश यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए 'एस्पिरिन इन रिड्यूसिंग इवेंट्स इन द एल्डरली' (एस्प्री) नामक शोध में लगभग 19,000 लोगों को शामिल किया गया था। अध्ययन में इससे धीरे-धीरे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ने का खुलासा हुआ।
मोनाश यूनिवर्सिटी में महामारी विज्ञान और निवारक दवा विभागाध्यक्ष जॉन मैकनील ने कहा कि शोध लंबा चला और उन्हें उम्मीद है कि निष्कर्षो से एस्पिरिन की सलाह देने वाले डॉक्टरों को हेल्प मिलेगी। मैकनील ने कहा, एस्पिरिन के 100 वर्ष से भी लंबे समय से मौजूद होने के तथ्य के बावजूद हमें यह नहीं पता था कि अधिक आयु के हेल्दी लोगों को लंबे समय तक उन्हें हेल्दी रखने के लिए यह दवाई लेनी चाहिए या नहीं।
मैकनील ने कहा, सभी निवारक दवाओं में सर्वाधिक इस्तेमाल एस्पिरिन का होता है और इस प्रश्न का उत्तर लंबे समय से लंबित था, और एसप्री ने इस उत्तर को मुहैया कराया है। पहले हुए शोध में यह बात भी सामने आयी थी कि एस्पिरिन कुछ खास किस्म के कैंसर का खतरा 40 फीसदी तक कम करता है, भले ही इसका सेवन दिन में एक बार ही क्यों न किया जाए। अमेरिका के हावर्ड रिसर्च में यह बात सामने आयी कि एस्पिरिन की मामूली खुराक भी पेट और बाउल कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करती है। लेकिन नए शोध से एस्प्रिन के प्रभाव पर प्रश्रचिन्ह लग गया है।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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एक रिसर्च के निष्कर्ष के अनुसार, प्रतिदिन एस्पिरिन लेने से मृत्यु, अपंगता या हृदय वाहिनी संबंधित बीमारी का खतरा कम नहीं होता। हार्ट अटैक के रोगी को जब भी हार्ट अटैक पड़ने लगता है, वह एस्पिरीन की एक गोली को मुंह में रख लेता है, जिससे दर्द गायब हो जाता है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में हुई एक रिसर्च के निष्कर्ष के अनुसार, प्रतिदिन एस्पिरिन लेने से मृत्यु, अपंगता या हृदय वाहिनी संबंधित बीमारी का खतरा कम नहीं होता। पाँच साल चले ऑस्ट्रेलिया के इस सबसे बड़े क्लीनिकल ट्रायल का निष्कर्ष सार्वजनिक किया गया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, मोनाश यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए 'एस्पिरिन इन रिड्यूसिंग इवेंट्स इन द एल्डरली' नामक शोध में लगभग उन्नीस,शून्य लोगों को शामिल किया गया था। अध्ययन में इससे धीरे-धीरे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ने का खुलासा हुआ। मोनाश यूनिवर्सिटी में महामारी विज्ञान और निवारक दवा विभागाध्यक्ष जॉन मैकनील ने कहा कि शोध लंबा चला और उन्हें उम्मीद है कि निष्कर्षो से एस्पिरिन की सलाह देने वाले डॉक्टरों को हेल्प मिलेगी। मैकनील ने कहा, एस्पिरिन के एक सौ वर्ष से भी लंबे समय से मौजूद होने के तथ्य के बावजूद हमें यह नहीं पता था कि अधिक आयु के हेल्दी लोगों को लंबे समय तक उन्हें हेल्दी रखने के लिए यह दवाई लेनी चाहिए या नहीं। मैकनील ने कहा, सभी निवारक दवाओं में सर्वाधिक इस्तेमाल एस्पिरिन का होता है और इस प्रश्न का उत्तर लंबे समय से लंबित था, और एसप्री ने इस उत्तर को मुहैया कराया है। पहले हुए शोध में यह बात भी सामने आयी थी कि एस्पिरिन कुछ खास किस्म के कैंसर का खतरा चालीस फीसदी तक कम करता है, भले ही इसका सेवन दिन में एक बार ही क्यों न किया जाए। अमेरिका के हावर्ड रिसर्च में यह बात सामने आयी कि एस्पिरिन की मामूली खुराक भी पेट और बाउल कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करती है। लेकिन नए शोध से एस्प्रिन के प्रभाव पर प्रश्रचिन्ह लग गया है। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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किसी तरह चौथे दर्जे के कर्मचारी भाग दौड़ दिखाकर तीमारदारों को कंट्रोल कर रहे हैं। जिससे काम के बढ़ते दबाव और जिले भर के मरीजों को एक स्थान पर देखते देखते स्वास्थ्य कर्मियों में भी मानसिक औसाद की स्थिति दिखने लगी है। ऐसी बदहाल व्यवस्था में नागरिकों की जान कैसे बचेगी यह एक बड़ा सवाल है?
रायबरेलीः कोरोना वायरस से इस समय लगातार मौतें हो रही है। जिला अस्पताल से लेकर लालगंज के एल टू तक हर रोज़ अनगिनत मरीज दम तोड़ रहे हैं। जिनमें कुछ पाज़िटिव तो बड़ी संख्या में मरने वालों में वायरस के सारे लक्षण होने पर भी उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। इसलिए श्मसान में जल रही चिताएं और प्रशासन के सरकारी आंकड़ों में भारी मतभेद है। फिर भी जिस अनुपात में जिले में मौत हो रही हैं उससे एक बात तो स्पष्ट है कि जिले के हालात सामान्य नहीं हैं। जिसमें सबसे ज्यादा अहम यह है कि इन मरने वालों में अधिकतर मौतें आक्सीजन के अभाव में हो रही हैं।
पिछले कई दिनों से जिला अस्पताल के इमरजेंसी में घंटे दो घंटे के लिए ही किसी भी मरीज को आक्सीजन मिल पा रहा है। उसमें भी सिलेंडर से सप्लाई इतनी सुस्त रखी जाती है कि मरीज अपने आप दम तोड़ देता है। इस बीच जिनका आक्सीजन लेवल ज्यादा वीक नहीं होता वो बचकर जब लालगंज पहुंचते हैं तो वहां एल-2 की अव्यवस्था उन्हें मार देती है। लगातार लालगंज में आक्सीजन न मिलने और समय पर इलाज के अभाव में लोगों के मरने की खबरें आ रही हैं। उसके बाद भी जिला प्रशासन आक्सीजन की कमी दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है। मजबूरन स्वास्थ्य विभाग के कर्मी तीमारदारों को संतुष्ट करने के लिए झूठे दिलासे से काम चला रहे हैं।
इसके अलावा लगभग 15 दिन से कोरोना वायरस जिले में कहर बरपा रहा और मरीजों के इलाज पर भी कोई पुख्ता रणनीति नहीं बन पाई है। आम दिनों की तरह आपातकालीन समय में सिंगल डाक्टर के सहारे ही एमरजेंसी चल रही है। इसीलिए मरीजों की भरमार से उनका नाम चढ़ाते, फार्म भरते और मरीज भर्ती करने में ही डाक्टर का सारा समय बीत रहा है।
इस बीच लोगों का इलाज एवं मरीजों को देखने की फुर्सत उन्हें नहीं मिलती। किसी तरह चौथे दर्जे के कर्मचारी भाग दौड़ दिखाकर तीमारदारों को कंट्रोल कर रहे हैं। जिससे काम के बढ़ते दबाव और जिले भर के मरीजों को एक स्थान पर देखते देखते स्वास्थ्य कर्मियों में भी मानसिक औसाद की स्थिति दिखने लगी है। ऐसी बदहाल व्यवस्था में नागरिकों की जान कैसे बचेगी यह एक बड़ा सवाल है?
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किसी तरह चौथे दर्जे के कर्मचारी भाग दौड़ दिखाकर तीमारदारों को कंट्रोल कर रहे हैं। जिससे काम के बढ़ते दबाव और जिले भर के मरीजों को एक स्थान पर देखते देखते स्वास्थ्य कर्मियों में भी मानसिक औसाद की स्थिति दिखने लगी है। ऐसी बदहाल व्यवस्था में नागरिकों की जान कैसे बचेगी यह एक बड़ा सवाल है? रायबरेलीः कोरोना वायरस से इस समय लगातार मौतें हो रही है। जिला अस्पताल से लेकर लालगंज के एल टू तक हर रोज़ अनगिनत मरीज दम तोड़ रहे हैं। जिनमें कुछ पाज़िटिव तो बड़ी संख्या में मरने वालों में वायरस के सारे लक्षण होने पर भी उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। इसलिए श्मसान में जल रही चिताएं और प्रशासन के सरकारी आंकड़ों में भारी मतभेद है। फिर भी जिस अनुपात में जिले में मौत हो रही हैं उससे एक बात तो स्पष्ट है कि जिले के हालात सामान्य नहीं हैं। जिसमें सबसे ज्यादा अहम यह है कि इन मरने वालों में अधिकतर मौतें आक्सीजन के अभाव में हो रही हैं। पिछले कई दिनों से जिला अस्पताल के इमरजेंसी में घंटे दो घंटे के लिए ही किसी भी मरीज को आक्सीजन मिल पा रहा है। उसमें भी सिलेंडर से सप्लाई इतनी सुस्त रखी जाती है कि मरीज अपने आप दम तोड़ देता है। इस बीच जिनका आक्सीजन लेवल ज्यादा वीक नहीं होता वो बचकर जब लालगंज पहुंचते हैं तो वहां एल-दो की अव्यवस्था उन्हें मार देती है। लगातार लालगंज में आक्सीजन न मिलने और समय पर इलाज के अभाव में लोगों के मरने की खबरें आ रही हैं। उसके बाद भी जिला प्रशासन आक्सीजन की कमी दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है। मजबूरन स्वास्थ्य विभाग के कर्मी तीमारदारों को संतुष्ट करने के लिए झूठे दिलासे से काम चला रहे हैं। इसके अलावा लगभग पंद्रह दिन से कोरोना वायरस जिले में कहर बरपा रहा और मरीजों के इलाज पर भी कोई पुख्ता रणनीति नहीं बन पाई है। आम दिनों की तरह आपातकालीन समय में सिंगल डाक्टर के सहारे ही एमरजेंसी चल रही है। इसीलिए मरीजों की भरमार से उनका नाम चढ़ाते, फार्म भरते और मरीज भर्ती करने में ही डाक्टर का सारा समय बीत रहा है। इस बीच लोगों का इलाज एवं मरीजों को देखने की फुर्सत उन्हें नहीं मिलती। किसी तरह चौथे दर्जे के कर्मचारी भाग दौड़ दिखाकर तीमारदारों को कंट्रोल कर रहे हैं। जिससे काम के बढ़ते दबाव और जिले भर के मरीजों को एक स्थान पर देखते देखते स्वास्थ्य कर्मियों में भी मानसिक औसाद की स्थिति दिखने लगी है। ऐसी बदहाल व्यवस्था में नागरिकों की जान कैसे बचेगी यह एक बड़ा सवाल है?
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खानखानाके नौकर शेख "चबदुल सलाम बादशाहने सहावत
हुक्म दिया । उत बिचारेने जान खो दो,
कि त्वरको चिट्ठियां
लखनवीके पास है ।"
लेने और कष्ट देनेकां परन्तु भेद न होला ।
खानखानाका नाम जगत में चिरायु हो गया है । प्रकवर के राज्य में तो उससे बडे बडे काम हुए, पर वहांगीरके राज्यसे कुछ न हुआ । बल्कि पूरी दुषि पौर अच्छी समझ होनेपर भी बहुतसे अपमान सहे । परन्तु राजकृष्णा नहीं छोडी ।
" वाहते है कि दरबारको खवरोका उसको बडा चसका पडा हुआ था। दो तीन आदमी नित्यप्रति डाक धौकीमें रोजनामचा भेजा करते थे। तो भी उसके दूत अदालतों, कवहरियों, चबूतरों, तली कूचों और बाजारोंसें लगे रहते घे और जो कुछ झूठे सर्व समाचार सुनते थे, लिख देते थे । खानखाना सन्ध्या होते ही उन सबको पढ़कर भाग में जला देता था।"
" कहते है, कि वहुवा चोजे उस रूमय उसके घरानेमें हो पक्षीका पर जिसको शाहनादोंदी सिवाय और कोई मस्तक पर नहीं लगा सकता था ।"
तजवरसेनीमें (१) लिखा है कि किसी मनुष्यने एक पुरुषको व्याकुल सा पिरता देखकर कारण पूछा तो उसने कहा कि मैं एक स्त्री पर मोहित ह ; परन्तु वह तो १ लाख रुपये लिये विना दात ही नही करतो इसका कोई उपाय जानते हो तो वतायो । इसमें कहा कि इसका उपाय तो बहुत सुगम है; जो तू काव्य रचना जानता हो तो अपना वृत्तान्त कहकर खानखानाके पास ले जा। वह तुरन्त एक छन्द बनाकर ले गया जिसका यह श्राभय था;
१ । यह अन्य कारमो कषियों के जीवन चरिषका है जिसको ते मोडमेन दोस्त सभलोमे बन् १९६३ हिजरी संवत् १८०७ में
बनाया था।
वनम ।
हे उदार खानखाना । एक चन्द्रमुखो मेरी प्यारी है। वह जान मागे तो कुछ सोच नहीं है रुपया मागतो हे यही मुमकिन है। "खानखानाने मुसकुरा कर पूछा कि कितना रुपया मांगती है उसने अरज की कि १ लाख । खानखानाने १०६०००) रुपये उ सको दिलाकर फरमाया कि १ लाख रुपये तो उसको सागनेके है और ६०००) रुपये तेरे भोग विलास के वास्ते है । "
कहते हैं कि खानखाना वर्षा काल लगते ही अपने सिपा. डियोंको ४ महीनेका वेतन देकर घर जानेको आज्ञा दे दिया करते थे कि बरसात भर आरामसे अपने जोरू बच्चों में रहें और जाडेके लगते ही नौकरी पर आ जावें । एक साल कोई लड़ाई होने वाली थी। इस कारण घर जानेको प्राज्ञा तो न दे सके, पर प्रति मनुष्य एक एक मोहर देकर कहा कि लौंडियां मोन लेकर यहीं उनके साथ मौज उडावे । उस समय एक सिपाहीने कहा कि मैं दो मोहरेरौं लूगा आपने उसको बुलाकर पूछा कि सबको एक एक मोहर मिली है ; तू २ क्यों मागता है ? उसने कहा कि १ से तो यहा मैं लडो खरीद कर मौज करू गा और दूहरो घर भेज दूगा जिससे एक गुलाम मोल लेकर वहा भी गुल छरें उड़ावे । इम पर आप बहुत इसे और सब सिपाहियोंको घर जानेकी छुट्टी दे दो।
४ । तारीख चगत्ता (१) लिखा है कि एक दिन एक कङ्गाल ब्राह्मणने खानखानाको ड्यौढी पर जाकर कहा कि नवाबसे को तुम्हारा साढ़ पाया है। नवाबने उसको बुलाकर बडे मान
१ । यह ग्रन्थ खड़ो भाषामें जयपुरके महाराजा सवाई माधोसिहजीको मात्रा से बनाया गया है। इसमें कई प्रकारके विषय । कुछ भभ इतिहासका भी है।
समान से पास बैठाया । किसीने पूछा कि यह मगता कहांस आपका सा हो गया १ नबावने कहा कि सम्पत्ति और विपत्ति दो बहने है । एक हमारे घर में है और दूसरी इसके घर में इस सम्बन्धसे यह हमारा साढ़ है ।
किसीने खानखानाको पालकीमें लोहेको पनसेरी फेंकी। छान मानाने उसे ५ सेर सोना दिला दिया । किसोने कहा कि इसने तो शर्दन सारनेका काम किया था और आपने ५ सेर सोना दियां यह भी खब हुआ । खानखानाने कहा कि इसने हमको पारम समझ कर ऐसा किया था।
५ । बूढी राज्य के इशिहास बश भास्कर (१) लिखा है वि जय बूदीके सहाराव राजा भोन प्रकबर वादशाह के दरवार में रहतेथे तब बादशाहका वजीर नवाब खानखाना था । वह बडा गुणवान था । संस्कृत पादि भाषाओको जानता था । वडा पति और पतौका कदरदान था । भवगुण किसीके नहीं देखता था; सबके दुःखोंमें पड़ जाता था । एक दिन एक दुर्बल ब्राह्मण मूखा प्यासा पडा हुआ मुसलमानोंको कोस रहा था । खामामाने हसको दोन दशा पर तरस खाकर कहा कि तुम को खाना पीना बहुत खिल जावेगा तुम हम लोगोपर दया रखो । ब्राह्मणने प्रसन्न होकर अपनी पागडी नबावके पास फेंक दो पर कहा कि मे तुम्हारी बातोंसे रुन्तुष्ट हुआ ह; परन्तु इम पगडीमे अधिक देने को मेरे पास कुछ नहीं है, क्योंकि हमारे काषन है कि आदमी जिसकी बातों से प्रसन्न होवे उसको शष देवे ।
१। यह पट भाषाका महत् काव्य हू दोके महाराव राजा श्रीराममि हजीकी से उनके पाश्रित मिश्रण गोतके चारण यदि सूर्यमका बनाया हुआ है जो बारहट किशनसि इजीकी कामचुका है।
वह पगडी सारी छेद छेद हो रही थी और इसके बदले उससे ऊपर सैल हो मैल चढ़ा हुआ था । तो भी नचायने अपने सिरसे वांधली और उसको बहुत सा रुपया आपने भी दिया और अपने अमीरोंसे भी दिलाया।
जैमा प्रच्छा वादशाह शकवर था वैसा ही पचाउनका यह वजीर भी था । इसके बराबर धर्मात्मा हिन्दू मुसलमानो मे कोई न था । बहुत ही सुशील और लज्जावान था । एक माड कारकी स्त्री इसको देखकर मोहित हो गयी थी । एक दिन उसने बुलाया तो यह गया और पूछा कि क्यों नेकवस्त ! मुझे वो याद किया । स्त्रोने शरमाकर कहा कि मैं तुमसे तुम्हारे जैसा बेटा मागती इ । नवाबने कहा कि नेकवद्भुत सुन । वेटा देना मेरे अलतियारमें नही है और जो ऐसा हो भी तो क्या मालूम कि वह मुझसा हो या न हो और तेरी टछल करे या न करे और तुको सुझ जैसा वेटा चाहिये सो मैहो तेरा बेटा होता हैं । आजते तू मेरी मा और मै तेरा वेटा ह । जो तू कहेगो सो ही करूगा । यह कहकर उसकी गोद में सिर रख दिया जिससे उसको भी लज्जा आगयी और वह अपने खोटे मन्तव्य से बहुत पछतायो ।
एसी बात न किसी योगीसे हो सकती हैन यतिसे जी नवाब खानखानाने उस स्वोसे की थी ;इस नवावने कवि गगके कबित्तोसे प्रसन्न होकर ३००००००) तीस लाख रुपये (१) उसको दिये थे ।
६ । मआसिर उलउमरामें जो यह बात लिखी है कि जान वाना हरेक भाषामें भाषण कर सकते थे इसका कुछ पता मेवाड और मारवाडमें भी मिलता है । वहा महङ शाखाका
१। खूब चन्द कविले खानखानाका गगको एक छप्पय के ऊपर २७ लाख देना इस कवित्तमें कहा है
मान दससाख दये दोहा हरनाथके पै । साथ घरनाथ दे कल कवि को ।।
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खानखानाके नौकर शेख "चबदुल सलाम बादशाहने सहावत हुक्म दिया । उत बिचारेने जान खो दो, कि त्वरको चिट्ठियां लखनवीके पास है ।" लेने और कष्ट देनेकां परन्तु भेद न होला । खानखानाका नाम जगत में चिरायु हो गया है । प्रकवर के राज्य में तो उससे बडे बडे काम हुए, पर वहांगीरके राज्यसे कुछ न हुआ । बल्कि पूरी दुषि पौर अच्छी समझ होनेपर भी बहुतसे अपमान सहे । परन्तु राजकृष्णा नहीं छोडी । " वाहते है कि दरबारको खवरोका उसको बडा चसका पडा हुआ था। दो तीन आदमी नित्यप्रति डाक धौकीमें रोजनामचा भेजा करते थे। तो भी उसके दूत अदालतों, कवहरियों, चबूतरों, तली कूचों और बाजारोंसें लगे रहते घे और जो कुछ झूठे सर्व समाचार सुनते थे, लिख देते थे । खानखाना सन्ध्या होते ही उन सबको पढ़कर भाग में जला देता था।" " कहते है, कि वहुवा चोजे उस रूमय उसके घरानेमें हो पक्षीका पर जिसको शाहनादोंदी सिवाय और कोई मस्तक पर नहीं लगा सकता था ।" तजवरसेनीमें लिखा है कि किसी मनुष्यने एक पुरुषको व्याकुल सा पिरता देखकर कारण पूछा तो उसने कहा कि मैं एक स्त्री पर मोहित ह ; परन्तु वह तो एक लाख रुपये लिये विना दात ही नही करतो इसका कोई उपाय जानते हो तो वतायो । इसमें कहा कि इसका उपाय तो बहुत सुगम है; जो तू काव्य रचना जानता हो तो अपना वृत्तान्त कहकर खानखानाके पास ले जा। वह तुरन्त एक छन्द बनाकर ले गया जिसका यह श्राभय था; एक । यह अन्य कारमो कषियों के जीवन चरिषका है जिसको ते मोडमेन दोस्त सभलोमे बन् एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ हिजरी संवत् एक हज़ार आठ सौ सात में बनाया था। वनम । हे उदार खानखाना । एक चन्द्रमुखो मेरी प्यारी है। वह जान मागे तो कुछ सोच नहीं है रुपया मागतो हे यही मुमकिन है। "खानखानाने मुसकुरा कर पूछा कि कितना रुपया मांगती है उसने अरज की कि एक लाख । खानखानाने एक लाख छः हज़ार) रुपये उ सको दिलाकर फरमाया कि एक लाख रुपये तो उसको सागनेके है और छः हज़ार) रुपये तेरे भोग विलास के वास्ते है । " कहते हैं कि खानखाना वर्षा काल लगते ही अपने सिपा. डियोंको चार महीनेका वेतन देकर घर जानेको आज्ञा दे दिया करते थे कि बरसात भर आरामसे अपने जोरू बच्चों में रहें और जाडेके लगते ही नौकरी पर आ जावें । एक साल कोई लड़ाई होने वाली थी। इस कारण घर जानेको प्राज्ञा तो न दे सके, पर प्रति मनुष्य एक एक मोहर देकर कहा कि लौंडियां मोन लेकर यहीं उनके साथ मौज उडावे । उस समय एक सिपाहीने कहा कि मैं दो मोहरेरौं लूगा आपने उसको बुलाकर पूछा कि सबको एक एक मोहर मिली है ; तू दो क्यों मागता है ? उसने कहा कि एक से तो यहा मैं लडो खरीद कर मौज करू गा और दूहरो घर भेज दूगा जिससे एक गुलाम मोल लेकर वहा भी गुल छरें उड़ावे । इम पर आप बहुत इसे और सब सिपाहियोंको घर जानेकी छुट्टी दे दो। चार । तारीख चगत्ता लिखा है कि एक दिन एक कङ्गाल ब्राह्मणने खानखानाको ड्यौढी पर जाकर कहा कि नवाबसे को तुम्हारा साढ़ पाया है। नवाबने उसको बुलाकर बडे मान एक । यह ग्रन्थ खड़ो भाषामें जयपुरके महाराजा सवाई माधोसिहजीको मात्रा से बनाया गया है। इसमें कई प्रकारके विषय । कुछ भभ इतिहासका भी है। समान से पास बैठाया । किसीने पूछा कि यह मगता कहांस आपका सा हो गया एक नबावने कहा कि सम्पत्ति और विपत्ति दो बहने है । एक हमारे घर में है और दूसरी इसके घर में इस सम्बन्धसे यह हमारा साढ़ है । किसीने खानखानाको पालकीमें लोहेको पनसेरी फेंकी। छान मानाने उसे पाँच सेर सोना दिला दिया । किसोने कहा कि इसने तो शर्दन सारनेका काम किया था और आपने पाँच सेर सोना दियां यह भी खब हुआ । खानखानाने कहा कि इसने हमको पारम समझ कर ऐसा किया था। पाँच । बूढी राज्य के इशिहास बश भास्कर लिखा है वि जय बूदीके सहाराव राजा भोन प्रकबर वादशाह के दरवार में रहतेथे तब बादशाहका वजीर नवाब खानखाना था । वह बडा गुणवान था । संस्कृत पादि भाषाओको जानता था । वडा पति और पतौका कदरदान था । भवगुण किसीके नहीं देखता था; सबके दुःखोंमें पड़ जाता था । एक दिन एक दुर्बल ब्राह्मण मूखा प्यासा पडा हुआ मुसलमानोंको कोस रहा था । खामामाने हसको दोन दशा पर तरस खाकर कहा कि तुम को खाना पीना बहुत खिल जावेगा तुम हम लोगोपर दया रखो । ब्राह्मणने प्रसन्न होकर अपनी पागडी नबावके पास फेंक दो पर कहा कि मे तुम्हारी बातोंसे रुन्तुष्ट हुआ ह; परन्तु इम पगडीमे अधिक देने को मेरे पास कुछ नहीं है, क्योंकि हमारे काषन है कि आदमी जिसकी बातों से प्रसन्न होवे उसको शष देवे । एक। यह पट भाषाका महत् काव्य हू दोके महाराव राजा श्रीराममि हजीकी से उनके पाश्रित मिश्रण गोतके चारण यदि सूर्यमका बनाया हुआ है जो बारहट किशनसि इजीकी कामचुका है। वह पगडी सारी छेद छेद हो रही थी और इसके बदले उससे ऊपर सैल हो मैल चढ़ा हुआ था । तो भी नचायने अपने सिरसे वांधली और उसको बहुत सा रुपया आपने भी दिया और अपने अमीरोंसे भी दिलाया। जैमा प्रच्छा वादशाह शकवर था वैसा ही पचाउनका यह वजीर भी था । इसके बराबर धर्मात्मा हिन्दू मुसलमानो मे कोई न था । बहुत ही सुशील और लज्जावान था । एक माड कारकी स्त्री इसको देखकर मोहित हो गयी थी । एक दिन उसने बुलाया तो यह गया और पूछा कि क्यों नेकवस्त ! मुझे वो याद किया । स्त्रोने शरमाकर कहा कि मैं तुमसे तुम्हारे जैसा बेटा मागती इ । नवाबने कहा कि नेकवद्भुत सुन । वेटा देना मेरे अलतियारमें नही है और जो ऐसा हो भी तो क्या मालूम कि वह मुझसा हो या न हो और तेरी टछल करे या न करे और तुको सुझ जैसा वेटा चाहिये सो मैहो तेरा बेटा होता हैं । आजते तू मेरी मा और मै तेरा वेटा ह । जो तू कहेगो सो ही करूगा । यह कहकर उसकी गोद में सिर रख दिया जिससे उसको भी लज्जा आगयी और वह अपने खोटे मन्तव्य से बहुत पछतायो । एसी बात न किसी योगीसे हो सकती हैन यतिसे जी नवाब खानखानाने उस स्वोसे की थी ;इस नवावने कवि गगके कबित्तोसे प्रसन्न होकर तीस लाख) तीस लाख रुपये उसको दिये थे । छः । मआसिर उलउमरामें जो यह बात लिखी है कि जान वाना हरेक भाषामें भाषण कर सकते थे इसका कुछ पता मेवाड और मारवाडमें भी मिलता है । वहा महङ शाखाका एक। खूब चन्द कविले खानखानाका गगको एक छप्पय के ऊपर सत्ताईस लाख देना इस कवित्तमें कहा है मान दससाख दये दोहा हरनाथके पै । साथ घरनाथ दे कल कवि को ।।
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हर इंटरनेशनल खिलाड़ी का एक ही सपना होता है, ICC इवेंट में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना. लेकिन गिने-चुने खिलाड़ियों का ही यह सपना पूरा हो पाता है. कई बार खिलाड़ी वैसे तो द्विपक्षीय सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं लेकिन ICC के टूर्नामेंटों में फुस्स हो जाते हैं लेकिन कुछ खिलाड़ी इन बड़े टूर्नामेंट में जबरदस्त प्रदर्शन करते हैं और अपनी टीम और देश का मान रखते हैं. इस लेख में हम आपको उन खिलाड़ियों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने ICC इवेंट्स में कमाल का प्रदर्शन किया है और सबसे ज्यादा बार मैन ऑफ द मैच बने हैं.
1. Mahela Jayawardene (महेला जयवर्धने)
श्रीलंका के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज महेला जयवर्धने ने अपनी टीम के लिए बड़े स्टेज पर हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है. बहुत कम खिलाड़ी होते हैं, जो बिग स्टेज पर अपनी टीम के लिए स्टैंडआउट प्रदर्शन करते हैं, श्रीलंका का यह खिलाड़ी उनमें से एक हैं. जयवर्धने ने 652 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं, इस दौरान उन्होंने श्रीलंका की तरफ से वनडे वर्ल्ड कप, टी-20 वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी में हिस्सा लिया. 2014 टी-20 विश्व कप में श्रीलंका को चैंपियन बनाने में जयवर्धने की अहम भूमिका रही थी. उन्होंने ICC इवेंट्स में 10 बार 'मैन ऑफ द मैच' ट्रॉफी जीते हैं.
2. Shane Watson (शेन वाटसन)
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर शेन वाटसन की गिनती विश्व के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में होती है. अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को कई मुकाबलों में जीत दिलाई है. वो ICC इवेंट्स में 10 बार 'मैन ऑफ द मैच' रहे. वाटसन के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 11000 रन और 300 से अधिक विकेट दर्ज हैं. 2007 और 2015 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया की जीत में वाटसन ने अहम भूमिका निभाई थी.
3. Sachin Tendulkar(सचिन तेंदुलकर)
महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के बारे में क्या बताएं, सबसे ज्यादा इंटरनेशनल रन, सबसे ज्यादा रन , सचिन के नाम क्रिकेट के न जाने कितने ही रिकॉर्ड दर्ज हैं , जिनमें से कुछ अभी तक अटूट हैं. अपने 24 साल के लंबे करियर में सचिन ने 6 बार विश्व कप टूर्नामेंट खेला और 10 बार 'मैन ऑफ द मैच बने'.
4. Chris Gayle (क्रिस गेल)
वेस्टइंडीज के विध्वंसक बल्लेबाज क्रिस गेल ने सबसे अधिक 11 बार ICC इवेंट्स में 'मैन ऑफ द मैच' का खिताब अपने नाम किया है. टी-20 क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज गेल ही हैं वहीं उनके नाम आईपीएल में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का भी रिकॉर्ड दर्ज है.
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हर इंटरनेशनल खिलाड़ी का एक ही सपना होता है, ICC इवेंट में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना. लेकिन गिने-चुने खिलाड़ियों का ही यह सपना पूरा हो पाता है. कई बार खिलाड़ी वैसे तो द्विपक्षीय सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं लेकिन ICC के टूर्नामेंटों में फुस्स हो जाते हैं लेकिन कुछ खिलाड़ी इन बड़े टूर्नामेंट में जबरदस्त प्रदर्शन करते हैं और अपनी टीम और देश का मान रखते हैं. इस लेख में हम आपको उन खिलाड़ियों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने ICC इवेंट्स में कमाल का प्रदर्शन किया है और सबसे ज्यादा बार मैन ऑफ द मैच बने हैं. एक. Mahela Jayawardene श्रीलंका के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज महेला जयवर्धने ने अपनी टीम के लिए बड़े स्टेज पर हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है. बहुत कम खिलाड़ी होते हैं, जो बिग स्टेज पर अपनी टीम के लिए स्टैंडआउट प्रदर्शन करते हैं, श्रीलंका का यह खिलाड़ी उनमें से एक हैं. जयवर्धने ने छः सौ बावन इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं, इस दौरान उन्होंने श्रीलंका की तरफ से वनडे वर्ल्ड कप, टी-बीस वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी में हिस्सा लिया. दो हज़ार चौदह टी-बीस विश्व कप में श्रीलंका को चैंपियन बनाने में जयवर्धने की अहम भूमिका रही थी. उन्होंने ICC इवेंट्स में दस बार 'मैन ऑफ द मैच' ट्रॉफी जीते हैं. दो. Shane Watson पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर शेन वाटसन की गिनती विश्व के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में होती है. अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को कई मुकाबलों में जीत दिलाई है. वो ICC इवेंट्स में दस बार 'मैन ऑफ द मैच' रहे. वाटसन के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में ग्यारह हज़ार रन और तीन सौ से अधिक विकेट दर्ज हैं. दो हज़ार सात और दो हज़ार पंद्रह वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया की जीत में वाटसन ने अहम भूमिका निभाई थी. तीन. Sachin Tendulkar महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के बारे में क्या बताएं, सबसे ज्यादा इंटरनेशनल रन, सबसे ज्यादा रन , सचिन के नाम क्रिकेट के न जाने कितने ही रिकॉर्ड दर्ज हैं , जिनमें से कुछ अभी तक अटूट हैं. अपने चौबीस साल के लंबे करियर में सचिन ने छः बार विश्व कप टूर्नामेंट खेला और दस बार 'मैन ऑफ द मैच बने'. चार. Chris Gayle वेस्टइंडीज के विध्वंसक बल्लेबाज क्रिस गेल ने सबसे अधिक ग्यारह बार ICC इवेंट्स में 'मैन ऑफ द मैच' का खिताब अपने नाम किया है. टी-बीस क्रिकेट में दस,शून्य रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज गेल ही हैं वहीं उनके नाम आईपीएल में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का भी रिकॉर्ड दर्ज है.
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आखिरकार गौहर खान ने ज़ैद दरबार के साथ अपनी शादी की अनाउंसमेंट कर दी है. 25 दिसंबर को ज़ैद के साथ निकाह को कुबूल करेंगी. इंस्टाग्राम पर उन्होनें ज़ैद के साथ रोमांटिक फोटो शेयर करते हुए शादी की अनाउंसमेंट की. फोटो शेयर करते हुए गौहर ने लिखा, '#25thDec2020 लोकेशनः आईटीसी मराठा.
शादी का खुलासा करते हुए गौहर खान ने बताया है कि मौजूदा हालातों को देखते हुए वो बेहद सादे तरीक से अपने परिजनों के बीच ही शादी करने वाली है. ये एक निजी कार्यक्रम होगा जिसमें करीबी लोग ही शामिल होंगे. इतना ही नहीं, गौहर खान ने ये खबर सुनाते हुए अपने चाहने वालों को उनकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद भी दिया है.
पिछले महीने गौहर ने ज़ैद के साथ अपने इंगेजमेंट की खबर फैंस के साथ साझा की थी. हाल ही में वो ज़ैद के साथ एक मिनी वेकेशन के लिए दुबई पहुंची थी. जहां से उन्होंने कई तस्वीरें शेयर की थी.
(Source: Instagram)
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आखिरकार गौहर खान ने ज़ैद दरबार के साथ अपनी शादी की अनाउंसमेंट कर दी है. पच्चीस दिसंबर को ज़ैद के साथ निकाह को कुबूल करेंगी. इंस्टाग्राम पर उन्होनें ज़ैद के साथ रोमांटिक फोटो शेयर करते हुए शादी की अनाउंसमेंट की. फोटो शेयर करते हुए गौहर ने लिखा, '#पच्चीसthDecदो हज़ार बीस लोकेशनः आईटीसी मराठा. शादी का खुलासा करते हुए गौहर खान ने बताया है कि मौजूदा हालातों को देखते हुए वो बेहद सादे तरीक से अपने परिजनों के बीच ही शादी करने वाली है. ये एक निजी कार्यक्रम होगा जिसमें करीबी लोग ही शामिल होंगे. इतना ही नहीं, गौहर खान ने ये खबर सुनाते हुए अपने चाहने वालों को उनकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद भी दिया है. पिछले महीने गौहर ने ज़ैद के साथ अपने इंगेजमेंट की खबर फैंस के साथ साझा की थी. हाल ही में वो ज़ैद के साथ एक मिनी वेकेशन के लिए दुबई पहुंची थी. जहां से उन्होंने कई तस्वीरें शेयर की थी.
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मणिपुर एवं जम्मू व कश्मीर जैसे अशांत क्षेत्रों में ऑपरेशन को अंजाम देने वाले सैन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने केखिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। करीब 700 सैन्य अधिकारियों की ओर से यह याचिका दायर की थी। मालूम हो कि मणिपुर एवं जम्मू व कश्मीर जैसे अशांत क्षेत्रों में आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) लागू है।
न्यायमर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने शुक्रवार को सैन्य अधिकारियों द्वारा इस याचिका को खारिज कर दिया। केंद्र सरकार ने भी सैन्य अधिकारियों की याचिका का समर्थन किया था। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इसे लेकर कोई क्रियाविधि होनी चाहिए, जिससे कि आतंकवाद से लड़ते वक्त हमारे सैन्य अधिकारियों विचलित न हो।
इस पर पीठ ने कहा कि ऐसा करने से सरकार को किसने रोका है। पीठ ने कहा कि इस पर विचार करना सरकार का काम है न कि अदालत का। याचिकाकर्ता सैन्यकर्मियों का कहना था कि अशांत क्षेत्रों में ड्यूटी निभाने पर उनकेखिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। सैन्यकर्मियों केखिलाफ एफआईआर दर्ज करना और उनके खिलाफ अभियोजन चलना आफस्पा के प्रावधानों के खिलाफ है क्योंकि ऑफिसियल ड्यूटी करने पर उनके खिलाफ अभियोजन नहीं चलाया जा सकता।
सैन्य अधिकारियों को इससे छूट मिली हुई है। सैन्य अधिकारियों के खिलाफ इस तरह का मुकदमा दर्ज होने से सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों का मनोबल गिरता है। मणिपुर जैसे अशांत इलाकों में सैन्यकर्मियों पर ज्यादती करने और फर्जी एनकाउंटर का मामला दर्ज किया जा रहा है।
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मणिपुर एवं जम्मू व कश्मीर जैसे अशांत क्षेत्रों में ऑपरेशन को अंजाम देने वाले सैन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने केखिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। करीब सात सौ सैन्य अधिकारियों की ओर से यह याचिका दायर की थी। मालूम हो कि मणिपुर एवं जम्मू व कश्मीर जैसे अशांत क्षेत्रों में आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट लागू है। न्यायमर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने शुक्रवार को सैन्य अधिकारियों द्वारा इस याचिका को खारिज कर दिया। केंद्र सरकार ने भी सैन्य अधिकारियों की याचिका का समर्थन किया था। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इसे लेकर कोई क्रियाविधि होनी चाहिए, जिससे कि आतंकवाद से लड़ते वक्त हमारे सैन्य अधिकारियों विचलित न हो। इस पर पीठ ने कहा कि ऐसा करने से सरकार को किसने रोका है। पीठ ने कहा कि इस पर विचार करना सरकार का काम है न कि अदालत का। याचिकाकर्ता सैन्यकर्मियों का कहना था कि अशांत क्षेत्रों में ड्यूटी निभाने पर उनकेखिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। सैन्यकर्मियों केखिलाफ एफआईआर दर्ज करना और उनके खिलाफ अभियोजन चलना आफस्पा के प्रावधानों के खिलाफ है क्योंकि ऑफिसियल ड्यूटी करने पर उनके खिलाफ अभियोजन नहीं चलाया जा सकता। सैन्य अधिकारियों को इससे छूट मिली हुई है। सैन्य अधिकारियों के खिलाफ इस तरह का मुकदमा दर्ज होने से सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों का मनोबल गिरता है। मणिपुर जैसे अशांत इलाकों में सैन्यकर्मियों पर ज्यादती करने और फर्जी एनकाउंटर का मामला दर्ज किया जा रहा है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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ओलंपिक में भारत को कड़ा झटका लगा है। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल सेमीफाइनल मुकाबले में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी चीन की वांग यिहान से हार गई। वांग ने नेहवाल को 21-13, 21-13 से हराया।
साइना नेहवाल अब कांस्य पदक के लिए दूसरे सेमीफाइनल के हारे हुए खिलाड़ी से भिड़ेंगी। इससे पहले गुरुवार को साइना ने डेनमार्क की बॉन ताइन को 21-15, 22-20 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। सेमीफाइनल में पहुंचने वाली साइना पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।
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ओलंपिक में भारत को कड़ा झटका लगा है। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल सेमीफाइनल मुकाबले में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी चीन की वांग यिहान से हार गई। वांग ने नेहवाल को इक्कीस-तेरह, इक्कीस-तेरह से हराया। साइना नेहवाल अब कांस्य पदक के लिए दूसरे सेमीफाइनल के हारे हुए खिलाड़ी से भिड़ेंगी। इससे पहले गुरुवार को साइना ने डेनमार्क की बॉन ताइन को इक्कीस-पंद्रह, बाईस-बीस से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। सेमीफाइनल में पहुंचने वाली साइना पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।
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Wednesday July 01, 2020,
आज से ठीक 5 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत सरकार ने 'डिजिटल इंडिया' पहल शुरू की थी, ताकि देश के तकनीकी क्षेत्र में लोगों के आत्म-सशक्तिकरण के साथ ही बुनियादी ढांचे में सुधार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए उन्हे प्रोत्साहित किया जा सके।
पिछले पांच वर्षों में सरकार ने न केवल देश के शहरी क्षेत्रों को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी उच्च गति वाली कनेक्टिविटी शुरू करके उन्हे प्रोत्साहित किया है, इस दौरान डिजिटल अपस्किलिंग और जमीनी स्तर की समस्याओं को हल करने के लिए तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिला है।
टेक उद्यमियों के लिए योरस्टोरी द्वारा आयोजित किए गए एक विशेष डिजिटल इंडिया टाउनहॉल में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी व कानून और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने डिजिटल समावेश और सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के महत्व को बड़ी बखूबी समझाया।
इस दौरान रविशंकर प्रसाद ने कहा, "डिजिटल इंडिया डिजिटल समावेश के लिए है। जब तक आम आदमी की डिजिटल इंडिया में हिस्सेदारी नहीं होगी, तब तक यह सफल नहीं होगा।"
रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा, 'डिजिटल इंडिया टाउनहॉल में मंत्री ने बताया कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को भारतीयों को टेक्नालजी की शक्ति के साथ सशक्त बनाने, डिजिटल खाई को पाटने और डिजिटल समावेश को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।'
डिजिटल इंडिया के शुभारंभ के पांच साल बाद सरकार की डिजिटल इंडिया ड्राइव के माध्यम से उपलब्धियों को लेकर एक "पूर्णता की भावना" है, इसी के साथ केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, "अब कोई भी नेता डिजिटल इंडिया का विरोध नहीं करता है।"
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लक्षित कार्यक्रम जैसे कि सामान्य सेवा केंद्र (CSC), जिसने डिजिटल उद्यमियों को बनाने में मदद की है और वन नेशन-वन राशन कार्ड ने राशन कार्ड के बुनियादी ढांचे को एकीकृत और केंद्रीकृत करने में मदद की है, इन सभी ने सरकार की देश और तकनीक के बीच एक मजबूत रिश्ता कायम करने में मदद की है।
MyGov.in - एक पोर्टल जो नागरिकों को नीतिगत चर्चाओं में संलग्न करने में सक्षम बनाता है और डिजी लॉकर - सरकार द्वारा जारी दस्तावेजों की महत्वपूर्ण ई-कॉपियों को स्टोर करने के लिए एक सुरक्षित सुविधा उपलब्ध कराता है, इनके जैसे अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे ई-हॉस्पिटल, नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल और ई-शिक्षा के साथ ही कुछ और उपकरण हैं जिन्हें सरकार ने भारत को डिजिटल बनाने के अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए बनाया है।
'डिजिटल इंडिया' मूवमेंट के हिस्से के रूप में किए गए उपायों की अन्य सफल श्रृंखला में जनधन-आधार-मोबाइल (जेएएम) भी शामिल है, जिसने एक अरब से अधिक नागरिकों को डिजिटल पहचान प्रदान की है और उन लोगों की मदद की है जिनके पास वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने के लिए कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है।
नवीनतम सरकारी अनुमानों के अनुसार 30 जून तक लगभग 125.84 करोड़ लोगों को आधार कार्ड जारी किए गए थे।
वास्तव में पिछले चार महीनों में भी जब से कोरोनोवायरस की महामारी ने देश प्रभावित किया है, तब डिजिटल इंडिया कार्यक्रम द्वारा उठाए गए कदम देश को सुचारू रूप से चलाने में सहायक रहे हैं। कोविड-जियोफेंसिंग, आरोग्य सेतु ऐप, ई-ऑफिस और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समाधान जैसे कि ईफाइल मैनेजमेंट, नॉलेज मैनेजमेंट, अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आरटीआई की सुनवाई, वर्चुअल क्लासरूम आदि ने लॉकडाउन के दौरान सभी की मुश्किलों को कम करने का काम किया है।
Self4society.mygov.in वेबसाइट भी एक ऐसा ही मंच है जो भारतीय नागरिकों को सामाजिक कारणों की दिशा में उनके प्रयासों को मदद करने के लिए शुरू किया गया था, यह कोविड-19 से लड़ने में सरकार के प्रयासों को बढ़ाने के लिए धन और स्वयंसेवकों को जुटाने के लिए उचित रहा है।
अब नए सामान्य तौर पर भारतीय स्टार्टअप्स के पास सरकार के मिशन को आगे बढ़ाने और अधिक तकनीक प्रेमी बनने और सभी के लिए डिजिटल समावेश सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी आह्वान करते हुए कहा है कि वह सरकार द्वारा 59 चीनी ऐप्स पर लगये गए प्रतिबंध के बाद डिजिटल शिक्षा, हेल्थटेक के साथ ही साथ ही स्वदेशी ऐप्स के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करें।
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Wednesday July एक, दो हज़ार बीस, आज से ठीक पाँच साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत सरकार ने 'डिजिटल इंडिया' पहल शुरू की थी, ताकि देश के तकनीकी क्षेत्र में लोगों के आत्म-सशक्तिकरण के साथ ही बुनियादी ढांचे में सुधार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए उन्हे प्रोत्साहित किया जा सके। पिछले पांच वर्षों में सरकार ने न केवल देश के शहरी क्षेत्रों को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी उच्च गति वाली कनेक्टिविटी शुरू करके उन्हे प्रोत्साहित किया है, इस दौरान डिजिटल अपस्किलिंग और जमीनी स्तर की समस्याओं को हल करने के लिए तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिला है। टेक उद्यमियों के लिए योरस्टोरी द्वारा आयोजित किए गए एक विशेष डिजिटल इंडिया टाउनहॉल में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी व कानून और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने डिजिटल समावेश और सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के महत्व को बड़ी बखूबी समझाया। इस दौरान रविशंकर प्रसाद ने कहा, "डिजिटल इंडिया डिजिटल समावेश के लिए है। जब तक आम आदमी की डिजिटल इंडिया में हिस्सेदारी नहीं होगी, तब तक यह सफल नहीं होगा।" रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा, 'डिजिटल इंडिया टाउनहॉल में मंत्री ने बताया कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को भारतीयों को टेक्नालजी की शक्ति के साथ सशक्त बनाने, डिजिटल खाई को पाटने और डिजिटल समावेश को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।' डिजिटल इंडिया के शुभारंभ के पांच साल बाद सरकार की डिजिटल इंडिया ड्राइव के माध्यम से उपलब्धियों को लेकर एक "पूर्णता की भावना" है, इसी के साथ केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, "अब कोई भी नेता डिजिटल इंडिया का विरोध नहीं करता है।" ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लक्षित कार्यक्रम जैसे कि सामान्य सेवा केंद्र , जिसने डिजिटल उद्यमियों को बनाने में मदद की है और वन नेशन-वन राशन कार्ड ने राशन कार्ड के बुनियादी ढांचे को एकीकृत और केंद्रीकृत करने में मदद की है, इन सभी ने सरकार की देश और तकनीक के बीच एक मजबूत रिश्ता कायम करने में मदद की है। MyGov.in - एक पोर्टल जो नागरिकों को नीतिगत चर्चाओं में संलग्न करने में सक्षम बनाता है और डिजी लॉकर - सरकार द्वारा जारी दस्तावेजों की महत्वपूर्ण ई-कॉपियों को स्टोर करने के लिए एक सुरक्षित सुविधा उपलब्ध कराता है, इनके जैसे अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे ई-हॉस्पिटल, नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल और ई-शिक्षा के साथ ही कुछ और उपकरण हैं जिन्हें सरकार ने भारत को डिजिटल बनाने के अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए बनाया है। 'डिजिटल इंडिया' मूवमेंट के हिस्से के रूप में किए गए उपायों की अन्य सफल श्रृंखला में जनधन-आधार-मोबाइल भी शामिल है, जिसने एक अरब से अधिक नागरिकों को डिजिटल पहचान प्रदान की है और उन लोगों की मदद की है जिनके पास वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने के लिए कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है। नवीनतम सरकारी अनुमानों के अनुसार तीस जून तक लगभग एक सौ पच्चीस.चौरासी करोड़ लोगों को आधार कार्ड जारी किए गए थे। वास्तव में पिछले चार महीनों में भी जब से कोरोनोवायरस की महामारी ने देश प्रभावित किया है, तब डिजिटल इंडिया कार्यक्रम द्वारा उठाए गए कदम देश को सुचारू रूप से चलाने में सहायक रहे हैं। कोविड-जियोफेंसिंग, आरोग्य सेतु ऐप, ई-ऑफिस और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समाधान जैसे कि ईफाइल मैनेजमेंट, नॉलेज मैनेजमेंट, अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आरटीआई की सुनवाई, वर्चुअल क्लासरूम आदि ने लॉकडाउन के दौरान सभी की मुश्किलों को कम करने का काम किया है। Selfचारsociety.mygov.in वेबसाइट भी एक ऐसा ही मंच है जो भारतीय नागरिकों को सामाजिक कारणों की दिशा में उनके प्रयासों को मदद करने के लिए शुरू किया गया था, यह कोविड-उन्नीस से लड़ने में सरकार के प्रयासों को बढ़ाने के लिए धन और स्वयंसेवकों को जुटाने के लिए उचित रहा है। अब नए सामान्य तौर पर भारतीय स्टार्टअप्स के पास सरकार के मिशन को आगे बढ़ाने और अधिक तकनीक प्रेमी बनने और सभी के लिए डिजिटल समावेश सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी आह्वान करते हुए कहा है कि वह सरकार द्वारा उनसठ चीनी ऐप्स पर लगये गए प्रतिबंध के बाद डिजिटल शिक्षा, हेल्थटेक के साथ ही साथ ही स्वदेशी ऐप्स के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करें।
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Don't Miss!
सुशांत के निधन पर एक्टर ने उड़ाई अवार्ड शो की धज्जियां- "खुद होस्ट करते हैं फिर अवार्ड भी लेते हैं"
युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने 6 महीने के डिप्रेशन के बाद खुदकुशी कर ली। इस कदम से उनका परिवार प्रशंसक खासा दुखी हैं। लेकिन सुशांत के निधन ने एक बार फिर बॉलीवुड पर नेपोटिज्म और भेदभाव की बहस को तेज कर दी है। सिर्फ 7 साल के फिल्मी करियर में जिस अभिनेता ने कई बड़े बड़े डायरेक्टर के साथ काम किया लेकिन कथित तौर पर काम के टेंशन में आकर खुद मौत के गले गए। सुशांत का ये कदम सभी को हैरान कर देता है और एक बार फिर बॉलीवुड स्टार्स और इंडस्ट्री के बीच गुटबाजी और आउटसाइडर्स के मुद्दे को उठाता है।
कंगना रनौत, शेखर कपूर के बाद एक्टर रणवीर शौरी ने भी नेपोटिज्म को लेकर बड़े सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर रणवीर शौरी ने फिल्म इंडस्ट्री को बेहद क्रूर और निर्दयी बताया। सुशांत और रणवीर शौरी दोनों सोनचिड़िया में साथ काम कर चुके हैं। दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझते थे, लेकिन सुशांत के जाने के बाद रणवीर ने अपनी प्रतिक्रिया से इंडस्ट्री पर सवाल खड़े किए। साथ ही मैनस्ट्रीम बॉलीवुड फैमिली के बारे में भी बताया।
(यदि आपको या आपके जानकारी में किसी व्यक्ति को मदद की जरूरत हो, तो अपने नजदीकी मानसिक स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। हेल्पलाइन- COOJ मेंटल हेल्थ फाउंडेशनः 0832-2252525, स्नेहा - 044-24640050/ 044-24640060, परिवर्तनः +91 7676 602 602 )
Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
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Don't Miss! सुशांत के निधन पर एक्टर ने उड़ाई अवार्ड शो की धज्जियां- "खुद होस्ट करते हैं फिर अवार्ड भी लेते हैं" युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने छः महीने के डिप्रेशन के बाद खुदकुशी कर ली। इस कदम से उनका परिवार प्रशंसक खासा दुखी हैं। लेकिन सुशांत के निधन ने एक बार फिर बॉलीवुड पर नेपोटिज्म और भेदभाव की बहस को तेज कर दी है। सिर्फ सात साल के फिल्मी करियर में जिस अभिनेता ने कई बड़े बड़े डायरेक्टर के साथ काम किया लेकिन कथित तौर पर काम के टेंशन में आकर खुद मौत के गले गए। सुशांत का ये कदम सभी को हैरान कर देता है और एक बार फिर बॉलीवुड स्टार्स और इंडस्ट्री के बीच गुटबाजी और आउटसाइडर्स के मुद्दे को उठाता है। कंगना रनौत, शेखर कपूर के बाद एक्टर रणवीर शौरी ने भी नेपोटिज्म को लेकर बड़े सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर रणवीर शौरी ने फिल्म इंडस्ट्री को बेहद क्रूर और निर्दयी बताया। सुशांत और रणवीर शौरी दोनों सोनचिड़िया में साथ काम कर चुके हैं। दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझते थे, लेकिन सुशांत के जाने के बाद रणवीर ने अपनी प्रतिक्रिया से इंडस्ट्री पर सवाल खड़े किए। साथ ही मैनस्ट्रीम बॉलीवुड फैमिली के बारे में भी बताया। Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
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किसी घटना के सभी कारणों को समझ पाना मानवीय मस्तिष्क के बस की बात नहीं । किन्तु इन कारणों को समझने की चाह मानवीय आत्मा का अभिन्न अंग है। मानवीय मस्तिष्क किसी घटना से सम्बन्धित असंख्य और जटिल परिस्थितियों की छानबीन किये बिना, जिनमें से प्रत्येक अपने पृथक रूप में उसका कारण प्रतीत हो सकती है, सबसे सर्वाधिक आसानी से समझ में आनेवाले पहले निकटवर्ती अनुमान को झपट लेता है और कह उठता है - यह रहा उसका कारण । ऐतिहासिक घटनाओं के मामले में ( जहां मानवीय कार्य-कलापों का अन्वेषण किया जाता है ) देवताओं की इच्छा को ही प्रथमतम कारण माना गया, इसके बाद उन लोगों की इच्छा को जिन्हें प्रमुखतम ऐतिहासिक स्थान प्राप्त है यानी इतिहास के वीरों-नायकों की इच्छा को । किन्तु प्रत्येक ऐतिहासिक घटना की तह में जाते ही अर्थात् उस घटना में भाग लेनेवाले सभी जनसाधारण की गतिविधियों की जांच करते ही हमें यह विश्वास हो जाता है कि ऐतिहासिक नायकों की इच्छा न केवल जनसाधारण के कार्य-कलाप का निर्देशन ही नहीं करती, बल्कि स्वयं निरन्तर निर्देशित होती है। ऐसा प्रतीत हो सकता है कि ऐतिहासिक घटनाओं को किस रूप में समझा जाता है, इससे फ़र्क़ ही क्या पड़ता है। किन्तु जो आदमी यह कहता है कि पश्चिम के लोग इसलिये पूरब की तरफ़ गये कि नेपोलियन की ऐसी इच्छा थी तथा दूसरी ओर यह माननेवाले आदमी में कि ऐसा इसलिये हुआ कि होना ही था, ही अन्तर है जितना उन लोगों के बीच जो यह मानते थे कि पृथ्वी एक ही जगह पर दृढ़ता से खड़ी है और दूसरे ग्रह उसके गिर्द घूमते हैं तथा जो यह कहते थे कि उन्हें मालूम नहीं कि पृथ्वी किस चीज़ पर टिकी हुई है, मगर जानते हैं कि ऐसे नियम हैं जो पृथ्वी और अन्य ग्रहों की गति को नियमित करते हैं। सभी कारणों के एकमात्र कारण
के सिवा ऐतिहासिक घटना का न तो कोई कारण है और न हो सकता है। किन्तु घटनाओं का संचालन करनेवाले कुछ नियम अवश्य हैं जिनमें से कुछ हमें अज्ञात हैं और कुछ को हम टटोल रहे हैं। इन नियमों की खोज तभी सम्भव हो सकती है, जब हम एक व्यक्ति की इच्छा में इनके कारण ढूंढ़ने से ठीक वैसे ही पूरी तरह इन्कार कर दें जैसे ग्रहों की गति के नियम खोजना तभी सम्भव हो सका था, जब लोगों ने पृथ्वी के एक ही जगह पर खड़ी होने की धारणा को एकदम नकार दिया था ।
बोरोदिनो की लड़ाई, मास्को पर दुश्मन के क़ब्ज़े और उसके जल जाने के बाद इतिहासकार १८१२ के युद्ध की जिस घटना को सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मानते हैं, वह है - रूसी सेना का याज़ान के मार्ग से कालूगा के मार्ग और तारूतिनो गांव के शिविर की तरफ़ बढ़ना यानी कास्नाया पाखरा गांव से आगे निकलकर उसका तथाकथित पार्श्व या बग़ली कूच । इतिहासकार विभिन्न लोगों को इस प्रतिभापूर्ण उपलब्धि का श्रेय देते हैं और इस बात पर विवाद करते हैं कि किसे इसका सम्मान दिया जाये। इस पार्श्व कूच की चर्चा करते हुए विदेशी, यहां तक कि फ़्रांसीसी इतिहासकार भी रूसी सेना - संचालकों की प्रतिभा को स्वीकार करते हैं । किन्तु यह समझ पाना बहुत मुश्किल है कि किस कारण सैनिक विषयों पर लिखनेवाले लेखक और उनका अनुकरण करते हुए बाक़ी सभी लोग भी क्यों ऐसा मानते हैं कि बड़ी कुशाग्रबुद्धि का परिचायक यह पाश्र्व कूच किसी एक व्यक्ति के दिमाग़ का अविष्कार था जिसने रूस को बचा लिया और नेपोलियन को तबाह कर डाला । सबसे पहले तो यही समझना कठिन है कि इस कूच में गहरी सूझ-बूझ और प्रतिभा की कौन-सी बात है। कारण यह कि इस चीज़ का अनुमान लगाने के हेतु कि किसी सेना के लिये ( जब उसपर हमला न किया जा रहा हो ) उसी जगह पर होना सबसे ज़्यादा अच्छा होगा, जहां ज़्यादा रसद मिल सके - किसी विशेष बौद्धिक प्रयास की आवश्यकता नहीं । हर कोई, यहां तक कि तेरह साल का कोई बुद्ध छोकरा भी यह अनुमान लगा सकता था कि १८१२ में मास्को से पीछे हटने के बाद सेना के लिये कालूगा के मार्ग पर बढ़ना ही सबसे ज्यादा लाभदायक था । इसलिये सर्वप्रथम तो यह समझना असम्भव है कि कौन-से निष्कर्ष इतिहासकारों
को इस युक्ति में बहुत गहरी सूझ-बूझ देखने को प्रेरित करते हैं । दूसरे, इस चीज़ को समझना तो और भी ज्यादा कठिन है कि इतिहासकार किसलिये इस युक्ति को रूसियों की रक्षा और फ़्रांसीसियों का नाश करनेवाली मानते हैं। कारण कि इस पाव कूच के पहले, कूच के समय या उसके बाद यदि कुछ अन्य परिस्थितियां होतीं तो यही कूच रूसियों को नष्ट कर सकता था और फ़्रांसीसियों को बचा सकता था। इस कूच के समय से यदि रूसी सेना की स्थिति बेहतर होने लगी तो इससे हरगिज़ यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि इसी कूच की बदौलत ऐसा हुआ ।
यदि दूसरी परिस्थितियां साथ न देतीं तो यह पार्श्व कूच रूसी सेना के लिये न केवल लाभदायक, बल्कि घातक भी हो सकता था । अगर मास्को न जल जाता तो क्या होता ? अगर रूसी सेना पर से म्युराट की नज़र न चूक जाती तो क्या होता ? * अगर नेपोलियन हाथ पर हाथ धरे न बैठा रहता तो क्या नतीजा सामने आता ? अगर बेनिग - सेन और बार्कले की सलाह पर रूसी सेना ने क्रास्नाया पाखरा गांव के निकट लड़ाई लड़ी होती तो स्थिति क्या करवट लेती ? रूसी सेना जिस वक़्त पाखरा नदी से आगे जा रही थी, उस वक़्त फ्रांसीसियों ने अगर उसपर हमला कर दिया होता तो क्या होता ? अगर बाद में, तारूतिनो पहुंचने पर नेपोलियन ने उस जोश के दसवें भाग से भी रूसी सेना पर हमला किया होता जिससे उसने स्मोलेन्स्क पर आक्रमण किया था तो क्या होता ? अगर फ़्रांसीसी पीटर्सबर्ग की तरफ़ बढ़ जाते तो क्या होता ?.. इन सभी परिस्थितियों में पार्श्व कूच रक्षात्मक होने के बजाय घातक हो सकता था ।
तीसरी सबसे ज़्यादा समझ में न आनेवाली बात यह है कि इतिहास का अध्ययन करनेवाले लोग किसलिये जान-बूझकर यह नहीं देखना चाहते कि इस पाव कूच का किसी भी एक व्यक्ति को श्रेय नहीं दिया जा सकता, कि किसी ने भी कभी इसकी पूर्वकल्पना नहीं की, कि वास्तव में फ़िली में हुई युद्ध - परिषद की बैठक में मास्को छोड़ने
म्युराट कुतूज़ोव की रणनीतिक चाल को भांप नहीं पाया जिन्होंने मुख्य सेनाओं को दूसरी दिशा में भेज दिया, जबकि पहलेवाली दिशा में सिर्फ़ दो रेजिमेंटें छोड़ दीं ।
के निर्णय की भांति यह युक्ति भी अपने सम्पूर्ण रूप में किसी के दिमाग़ में कभी नहीं आई थी, बल्कि एक के बाद एक क़दम, एक के बाद एक घटना, एक के बाद एक क्षण की अत्यधिक विविधतापूर्ण असंख्य परिस्थितियों का परिणाम थी । यह युक्ति पूरी हो जाने और अतीत का भाग बन जाने पर ही अपने सम्पूर्ण रूप में सामने आई।
फ़िली में हुई युद्ध - परिषद की बैठक में अधिकतर रूसी सेना - संचालकों के मन में निर्विवाद रूप से यही विचार था कि सीधे नीज्नी नोव्गोरोद के मार्ग पर पीछे हटा जाये । इसका प्रमाण यह है कि बहुमत ने इसी विचार का समर्थन किया था और सबसे महत्त्वपूर्ण तो वह बातचीत है जो परिषद की बैठक के बाद सेनापति और लान्स्की के बीच हुई जो उस समय रसद विभाग का अध्यक्ष था । लान्स्की ने सेनापति को सूचित किया कि मुख्य रूप से तो ओका नदी के तटवर्ती क्षेत्रों - तूला और कालूगा प्रान्तों में ही सेना के लिये रसद जमा की गयी है और नीज्नी नोव्गोरोद के मार्ग पर पीछे हटने से बड़ी ओका नदी के कारण, जिसे जाड़े के आरम्भ में पार करना सम्भव नहीं होता, रसद सेना की पहुंच से बाहर हो जायेगी । नीज्नी नोव्गोरोद के मार्ग पर पीछे हटने के इस समय तक सर्वथा स्वाभाविक प्रतीत होनेवाले निर्णय को बदलने की आवश्यकता का यह पहला संकेत था । रूसी सेना अधिक दक्षिण की ओर तथा रसद - भण्डारों के ज़्यादा नज़दीक रहती हुई र्याज़ान के मार्ग पर पीछे हटने लगी। बाद में फ्रांसीसियों की निष्क्रियता, जिन्हें यह तक मालूम नहीं रहा था कि रूसी सेनायें कहां हैं, तूला के हथियार बनानेवाले कारखाने की रक्षा की चिन्ता और सबसे बढ़कर तो अपने रसद - भण्डारों की निकटता के लाभों ने रूसी सेना को और भी ज़्यादा दक्षिण की तरफ़, तूला के मार्ग पर हट जाने को विवश कर दिया । पाख़रा नदी से आगे मजबूरन कूच करते हुए तूला के मार्ग पर आकर रूसी सेना-संचालकों ने पोदोल्स्क * में ही रुकने का इरादा बनाया और उनके मन में तारूतिनो में सेना को लडाई के लिये तैनात करने का विचार तक नहीं था । किन्तु अनगिनत परिस्थितियों और फ़्रांसीसी
'कुतूज़ोव की सेनायें ५-६ सितम्बर को रक्षात्मक स्थिति में तैनात कर दी गयी थीं । मास्को से दक्षिण-पूरब की ओर पोदोल्स्क नगर इनका केन्द्र बना । शुरू में यहीं लड़ाई लड़ने का ख़्याल था । - सं०
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किसी घटना के सभी कारणों को समझ पाना मानवीय मस्तिष्क के बस की बात नहीं । किन्तु इन कारणों को समझने की चाह मानवीय आत्मा का अभिन्न अंग है। मानवीय मस्तिष्क किसी घटना से सम्बन्धित असंख्य और जटिल परिस्थितियों की छानबीन किये बिना, जिनमें से प्रत्येक अपने पृथक रूप में उसका कारण प्रतीत हो सकती है, सबसे सर्वाधिक आसानी से समझ में आनेवाले पहले निकटवर्ती अनुमान को झपट लेता है और कह उठता है - यह रहा उसका कारण । ऐतिहासिक घटनाओं के मामले में देवताओं की इच्छा को ही प्रथमतम कारण माना गया, इसके बाद उन लोगों की इच्छा को जिन्हें प्रमुखतम ऐतिहासिक स्थान प्राप्त है यानी इतिहास के वीरों-नायकों की इच्छा को । किन्तु प्रत्येक ऐतिहासिक घटना की तह में जाते ही अर्थात् उस घटना में भाग लेनेवाले सभी जनसाधारण की गतिविधियों की जांच करते ही हमें यह विश्वास हो जाता है कि ऐतिहासिक नायकों की इच्छा न केवल जनसाधारण के कार्य-कलाप का निर्देशन ही नहीं करती, बल्कि स्वयं निरन्तर निर्देशित होती है। ऐसा प्रतीत हो सकता है कि ऐतिहासिक घटनाओं को किस रूप में समझा जाता है, इससे फ़र्क़ ही क्या पड़ता है। किन्तु जो आदमी यह कहता है कि पश्चिम के लोग इसलिये पूरब की तरफ़ गये कि नेपोलियन की ऐसी इच्छा थी तथा दूसरी ओर यह माननेवाले आदमी में कि ऐसा इसलिये हुआ कि होना ही था, ही अन्तर है जितना उन लोगों के बीच जो यह मानते थे कि पृथ्वी एक ही जगह पर दृढ़ता से खड़ी है और दूसरे ग्रह उसके गिर्द घूमते हैं तथा जो यह कहते थे कि उन्हें मालूम नहीं कि पृथ्वी किस चीज़ पर टिकी हुई है, मगर जानते हैं कि ऐसे नियम हैं जो पृथ्वी और अन्य ग्रहों की गति को नियमित करते हैं। सभी कारणों के एकमात्र कारण के सिवा ऐतिहासिक घटना का न तो कोई कारण है और न हो सकता है। किन्तु घटनाओं का संचालन करनेवाले कुछ नियम अवश्य हैं जिनमें से कुछ हमें अज्ञात हैं और कुछ को हम टटोल रहे हैं। इन नियमों की खोज तभी सम्भव हो सकती है, जब हम एक व्यक्ति की इच्छा में इनके कारण ढूंढ़ने से ठीक वैसे ही पूरी तरह इन्कार कर दें जैसे ग्रहों की गति के नियम खोजना तभी सम्भव हो सका था, जब लोगों ने पृथ्वी के एक ही जगह पर खड़ी होने की धारणा को एकदम नकार दिया था । बोरोदिनो की लड़ाई, मास्को पर दुश्मन के क़ब्ज़े और उसके जल जाने के बाद इतिहासकार एक हज़ार आठ सौ बारह के युद्ध की जिस घटना को सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मानते हैं, वह है - रूसी सेना का याज़ान के मार्ग से कालूगा के मार्ग और तारूतिनो गांव के शिविर की तरफ़ बढ़ना यानी कास्नाया पाखरा गांव से आगे निकलकर उसका तथाकथित पार्श्व या बग़ली कूच । इतिहासकार विभिन्न लोगों को इस प्रतिभापूर्ण उपलब्धि का श्रेय देते हैं और इस बात पर विवाद करते हैं कि किसे इसका सम्मान दिया जाये। इस पार्श्व कूच की चर्चा करते हुए विदेशी, यहां तक कि फ़्रांसीसी इतिहासकार भी रूसी सेना - संचालकों की प्रतिभा को स्वीकार करते हैं । किन्तु यह समझ पाना बहुत मुश्किल है कि किस कारण सैनिक विषयों पर लिखनेवाले लेखक और उनका अनुकरण करते हुए बाक़ी सभी लोग भी क्यों ऐसा मानते हैं कि बड़ी कुशाग्रबुद्धि का परिचायक यह पाश्र्व कूच किसी एक व्यक्ति के दिमाग़ का अविष्कार था जिसने रूस को बचा लिया और नेपोलियन को तबाह कर डाला । सबसे पहले तो यही समझना कठिन है कि इस कूच में गहरी सूझ-बूझ और प्रतिभा की कौन-सी बात है। कारण यह कि इस चीज़ का अनुमान लगाने के हेतु कि किसी सेना के लिये उसी जगह पर होना सबसे ज़्यादा अच्छा होगा, जहां ज़्यादा रसद मिल सके - किसी विशेष बौद्धिक प्रयास की आवश्यकता नहीं । हर कोई, यहां तक कि तेरह साल का कोई बुद्ध छोकरा भी यह अनुमान लगा सकता था कि एक हज़ार आठ सौ बारह में मास्को से पीछे हटने के बाद सेना के लिये कालूगा के मार्ग पर बढ़ना ही सबसे ज्यादा लाभदायक था । इसलिये सर्वप्रथम तो यह समझना असम्भव है कि कौन-से निष्कर्ष इतिहासकारों को इस युक्ति में बहुत गहरी सूझ-बूझ देखने को प्रेरित करते हैं । दूसरे, इस चीज़ को समझना तो और भी ज्यादा कठिन है कि इतिहासकार किसलिये इस युक्ति को रूसियों की रक्षा और फ़्रांसीसियों का नाश करनेवाली मानते हैं। कारण कि इस पाव कूच के पहले, कूच के समय या उसके बाद यदि कुछ अन्य परिस्थितियां होतीं तो यही कूच रूसियों को नष्ट कर सकता था और फ़्रांसीसियों को बचा सकता था। इस कूच के समय से यदि रूसी सेना की स्थिति बेहतर होने लगी तो इससे हरगिज़ यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि इसी कूच की बदौलत ऐसा हुआ । यदि दूसरी परिस्थितियां साथ न देतीं तो यह पार्श्व कूच रूसी सेना के लिये न केवल लाभदायक, बल्कि घातक भी हो सकता था । अगर मास्को न जल जाता तो क्या होता ? अगर रूसी सेना पर से म्युराट की नज़र न चूक जाती तो क्या होता ? * अगर नेपोलियन हाथ पर हाथ धरे न बैठा रहता तो क्या नतीजा सामने आता ? अगर बेनिग - सेन और बार्कले की सलाह पर रूसी सेना ने क्रास्नाया पाखरा गांव के निकट लड़ाई लड़ी होती तो स्थिति क्या करवट लेती ? रूसी सेना जिस वक़्त पाखरा नदी से आगे जा रही थी, उस वक़्त फ्रांसीसियों ने अगर उसपर हमला कर दिया होता तो क्या होता ? अगर बाद में, तारूतिनो पहुंचने पर नेपोलियन ने उस जोश के दसवें भाग से भी रूसी सेना पर हमला किया होता जिससे उसने स्मोलेन्स्क पर आक्रमण किया था तो क्या होता ? अगर फ़्रांसीसी पीटर्सबर्ग की तरफ़ बढ़ जाते तो क्या होता ?.. इन सभी परिस्थितियों में पार्श्व कूच रक्षात्मक होने के बजाय घातक हो सकता था । तीसरी सबसे ज़्यादा समझ में न आनेवाली बात यह है कि इतिहास का अध्ययन करनेवाले लोग किसलिये जान-बूझकर यह नहीं देखना चाहते कि इस पाव कूच का किसी भी एक व्यक्ति को श्रेय नहीं दिया जा सकता, कि किसी ने भी कभी इसकी पूर्वकल्पना नहीं की, कि वास्तव में फ़िली में हुई युद्ध - परिषद की बैठक में मास्को छोड़ने म्युराट कुतूज़ोव की रणनीतिक चाल को भांप नहीं पाया जिन्होंने मुख्य सेनाओं को दूसरी दिशा में भेज दिया, जबकि पहलेवाली दिशा में सिर्फ़ दो रेजिमेंटें छोड़ दीं । के निर्णय की भांति यह युक्ति भी अपने सम्पूर्ण रूप में किसी के दिमाग़ में कभी नहीं आई थी, बल्कि एक के बाद एक क़दम, एक के बाद एक घटना, एक के बाद एक क्षण की अत्यधिक विविधतापूर्ण असंख्य परिस्थितियों का परिणाम थी । यह युक्ति पूरी हो जाने और अतीत का भाग बन जाने पर ही अपने सम्पूर्ण रूप में सामने आई। फ़िली में हुई युद्ध - परिषद की बैठक में अधिकतर रूसी सेना - संचालकों के मन में निर्विवाद रूप से यही विचार था कि सीधे नीज्नी नोव्गोरोद के मार्ग पर पीछे हटा जाये । इसका प्रमाण यह है कि बहुमत ने इसी विचार का समर्थन किया था और सबसे महत्त्वपूर्ण तो वह बातचीत है जो परिषद की बैठक के बाद सेनापति और लान्स्की के बीच हुई जो उस समय रसद विभाग का अध्यक्ष था । लान्स्की ने सेनापति को सूचित किया कि मुख्य रूप से तो ओका नदी के तटवर्ती क्षेत्रों - तूला और कालूगा प्रान्तों में ही सेना के लिये रसद जमा की गयी है और नीज्नी नोव्गोरोद के मार्ग पर पीछे हटने से बड़ी ओका नदी के कारण, जिसे जाड़े के आरम्भ में पार करना सम्भव नहीं होता, रसद सेना की पहुंच से बाहर हो जायेगी । नीज्नी नोव्गोरोद के मार्ग पर पीछे हटने के इस समय तक सर्वथा स्वाभाविक प्रतीत होनेवाले निर्णय को बदलने की आवश्यकता का यह पहला संकेत था । रूसी सेना अधिक दक्षिण की ओर तथा रसद - भण्डारों के ज़्यादा नज़दीक रहती हुई र्याज़ान के मार्ग पर पीछे हटने लगी। बाद में फ्रांसीसियों की निष्क्रियता, जिन्हें यह तक मालूम नहीं रहा था कि रूसी सेनायें कहां हैं, तूला के हथियार बनानेवाले कारखाने की रक्षा की चिन्ता और सबसे बढ़कर तो अपने रसद - भण्डारों की निकटता के लाभों ने रूसी सेना को और भी ज़्यादा दक्षिण की तरफ़, तूला के मार्ग पर हट जाने को विवश कर दिया । पाख़रा नदी से आगे मजबूरन कूच करते हुए तूला के मार्ग पर आकर रूसी सेना-संचालकों ने पोदोल्स्क * में ही रुकने का इरादा बनाया और उनके मन में तारूतिनो में सेना को लडाई के लिये तैनात करने का विचार तक नहीं था । किन्तु अनगिनत परिस्थितियों और फ़्रांसीसी 'कुतूज़ोव की सेनायें पाँच-छः सितम्बर को रक्षात्मक स्थिति में तैनात कर दी गयी थीं । मास्को से दक्षिण-पूरब की ओर पोदोल्स्क नगर इनका केन्द्र बना । शुरू में यहीं लड़ाई लड़ने का ख़्याल था । - संशून्य
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सुशांत सिंह राजपूत मामले में सीबीआई ने जब से जांच शुरू की है, केस में कई नए नाटकीय मोड़ देखने को मिले हैं. जैसे-जैसे पूछताछ का दायरा बढ़ रहा है, वैसे ही केस की परतें भी खुलती दिख रही हैं. सीबीआई हर शख्स से पूछताछ कर रही है जो सुशांत के साथ काम करते थे या फिर किसी ना किसी तरह से एक्टर की जिंदगी से जुड़े हुए थे. इसी कड़ी में सीबीआई ने सुशांत के एक्स मैनेजर सैमुअल मिरांडा से लंबी पूछताछ की थी. सीबीआई को सैमुअल ने पूरी कहानी बताई थी, कैसे वे सुशांत से मिले, वे वहां क्या काम करते थे, सुशांत की मौत वाले दिन क्या हुआ.
पूछताछ के दौरान पता चला है कि सैमुअल सुशांत के यहां काम करने से पहले Royal Carribean cruise के साथ काम कर रहे थे. उन्होंने नौकरी के लिए इंटरनेट पर अप्लाई किया था. इसके बाद उन्हें सुशांत के घर से फोन आया और वे इंटरव्यू देने के लिए Capri Heights पहुंच गए. सैमुअल के मुताबिक वहां सुशांत की बहन प्रियंका और सिद्धार्थ ने उनका इंटरव्यू लिया और उन्हें हाउस मैनेजर की जॉब पर रख लिया. बताया गया कि सैमुअल को सुशांत मोटी सैलरी दे रहे थे. सैमुअल को 80 हजार के करीब सैलरी दी जा रही थी.
वहीं सीबीआई को सैमुअल ने ये भी बताया कि प्रियंका के सुशांत के स्टाफ संग ज्यादा अच्छे रिश्ते नहीं थे. वे बताते हैं कि एक बार प्रियंका के चिल्लाने की वजह से दीपेश और अब्बास ने उनका काम छोड़ दिया था. सैमुअल की माने तो सुशांत को भी प्रियंका का वो व्यहवार पसंद नहीं आता था. इसी वजह से दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ था और प्रियंका अपने पति संग सुशांत का घर छोड़ भी चली गई थीं.
सैमुअल ने सुशांत की विवादित यूरोप ट्रिप का भी जिक्र किया है. उन्होंने ने भी वहीं बताया है जो अभी तक सिद्धार्थ, रिया ने बताया है. सैमुअल के मुताबिक यूरोप ट्रिप के लिए सुशांत और रिया 2 अक्टूबर को रवाना हुए थे. 15 दिन बाद रिया के भाई ने भी उन्हें ज्वाइन कर लिया था. सैमुअल ने ये भी बताया कि सुशांत ने ही यूरोप ट्रिप का खर्चा उठाया था. लेकिन फिर सुशांत की तबीयत बिगड़ी और वे सभी वापस मुंबई आ गए.
वैसे सुशांत मामले में इस बात का भी कई बार जिक्र हुआ है कि एक्टर को उनका घर भूतिया लगता था. सुशांत के कुक नीरज ने भी इस बात को स्वीकार किया था. अब सैमुअल ने भी सीबीआई को इस बारे में बताया है. वो कहते हैं- मुझे Capri Hieghts पर काम कर रहे लोग और रिया ने बताया था कि वो घर भूतिया है. मुझे ये भी बताया गया था सुशांत अक्सर अपने रूम के बाहर आते और हनुमान जी की मूर्ति को गले लगाते.
उस घटना के बाद सुशांत, उस घर को छोड़ रिया के घर चले गए थे. लेकिन सुशांत की तबीयत कुछ खास नहीं रहती थी. वे किसी से भी ज्यादा बात नहीं कर रहे थे और अक्सर अपने कमरे में बंद रहते. सैमुअल ने ये भी बताया कि सुशांत कई बार रोया करते थे. वे काफी परेशान नजर आते थे. सुशांत की वो हालत देख ही रिया ने साइकेट्रिस्ट को बुलाया था. सैमुअल तो ये भी कहते हैं कि रिया के कहने पर ही सुशांत ने अपनी बहनों को वॉटरस्टोन क्लब बुलाया था. वहां पर सुशांत की बहन प्रियंका, नीतू और मीतू मौजूद थीं. सभी ने सुशांत से उनकी आर्थिक स्थिति जानने की कोशिश की थी. लेकिन सुशांत इतने परेशान थे कि वे सिर्फ रोते रहे.
सैमुअल के मुताबिक उन्होंने बहनों के अलावा सुशांत की भी वापस जाने की टिकट करवाई थी. उन्हें लगा था कि सुशांत भी अपनी बहनों संग जाएंगे. लेकिन हैरानी की बात ये थी कि सुशांत अपनी बहनों संग वापस नहीं गए. इस बात से सुशांत की बहने मायूस हो गई थीं और सभी अपने घर चली गईं. वहीं सुशांत दोबारा रिया के पास चले गए थे. लेकिन इस सब के बावजूद भी सुशांत की सेहत में ज्यादा सुधार नहीं था.
सैमुअल बताते हैं कि नवंबर 2019 में सुशांत को हिंदूजा अस्पताल में एडमिट करवाना पड़ा था. वे चार दिन तक अस्पताल में ही रहे थे. सुशांत कहा करते थे कि वे अस्पताल में नहीं रहना चाहते थे. इसके बाद सुशांत, रिया के साथ उनके घर चले गए थे. वहीं सैमुअल भी एक नए घर की तलाश में लग गए थे. सैमुअल की माने तो उन्हें Mount Blanc house पसंद आया था और दिसंबर में सुशांत-रिया वहीं शिफ्ट हो गए थे. सैमुअल ने उन पार्टियों के बारे में भी बताया जो अक्सर सुशांत के घर हुआ करती थीं.
वो बताते हैं कि रिया उन पॉर्टियों को इसलिए रखवाती थीं जिससे सुशांत का मूड बेहतर हो सके. वे चाहती थीं कि सुशांत अपने डिप्रेशन को भूल थोड़ा एन्जॉय करे. लेकिन सैमुअल की माने तो सुशांत उन पार्टियों के लिए ज्यादा बाहर नहीं आते थे. वे अपने कमरे में ही रहते थे. वहीं जनवरी आते-आते सुशांत की तबीयत और खराब हो गई थी. सैमुअल ने पूछताछ के दौरान उस दिन को भी याद किया है जब सुशांत ने उन से कहा था कि वे अपने घर की हर चीज बेचना चाहते हैं. वे पावना फॉर्म हाउस जाना चाहते थे. वे वहां पर सिर्फ केशव और नीरज को अपने साथ रखना चाहते थे. लेकिन सैमुअल के मुताबिक उन्होंने सुशांत की वो मांग नहीं मानी थी क्योंकि उन्हें पता था कि एक्टर की तबीयत ठीक नहीं चल रही थी.
इसके बाद रिया से बात कर ये फैसला लिया गया था कि सुशांत को केरल ले जाया जाएगा. सैमुअल के मुताबिक वहां पर एक हीलिंग सेंटर था और सुशांत को वहां इलाज के लिए ले जाने का फैसला हुआ था. सैमुअल बताते हैं सुशांत ने पहले तो हां बोला था लेकिन बाद में वे केरल नहीं गए थे. वहीं उन्होंने उस समय मीतू दी संग दिल्ली जाने का मन बनाया था.
मालूम हो कि ये सुशांत की वहीं ट्रिप है जो उन्होंने जनवरी में की थी. सुशांत, अपनी बहन मीतू, बॉडीगार्ड और सिद्धार्थ पिठानी संग दिल्ली गए थे. बताया गया था कि सुशांत उस ट्रिप पर खासा खुश थे और उन्होंने इस बात की जानकारी रिया तक को दी थी. लेकिन फिर 23 जनवरी को सुशांत ने मुंबई आने का फैसला किया था. लेकिन ट्रिप पर जाने से पहले सुशांत ने वकील प्रियंका खिमानी और संदी श्रीधर से ये पूछा था कि उनके पास जितने पैसे हैं, उसके साथ वे कितने दिनों तक जिंदा रह सकते हैं. उन्होंने ये सवाल क्यों पूछा था इसका खुलासा नहीं किया गया है.
इसके बाद सैमुअल ने सीबीआई के सामने उस फिल्म का भी जिक्र किया जो उन्हें रूमी जाफरी और वाशु भगनानी के द्वारा ऑफर की गई थी. सैमुअल की माने तो उस फिल्म की वजह से सुशांत काफी खुश थे. उन्होंने सैमुअल को खर्चा कम करने को भी कहा था. सैमुअल ने ये भी बताया कि सुशांत पापना डैम फॉर्महाउस की लीस कैंसिल करना चाहते थे. वहीं उस समय रिया ने भी सैमुअल को बताया था कि लॉकडाउन की वजह से उन्हें सैलरी नहीं दी जाएगी. इसके बाद मई में सुशांत और सैमुअल के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी. बस रिया की कभी-कबार सैमुअल से बात हुई थी.
फिर 11 जून को सैमुअल को दीपेश से एक फोन आया था. बताया गया था कि सुशांत पावना फॉर्म हाउस में मौजूद कुत्तो को ऐडॉप्शन को देना चाहते थे. वे सबकुछ बेचना भी चाह रहे थे. लेकिन तब सैमुअल की तरफ से बताया गया था कि लॉकडाउन के दौरान ये काम काफी मुश्किल होगा.
सैमुअल ने घटना वाले दिन को भी याद किया है. सीबीआई को उन्होंने बताया है कि 14 जून को 11:57 am पर सिद्धार्थ पिठानी का उन्हें फोन आया था. वे जानना चाहते थे अगर मेरे पास सुशांत के कमरे की कोई चाबी है. सिद्धार्थ ने बताया था कि सुशांत अपना कमरा नहीं खोल रहे थे. उस समय सैमुअल ने सिद्धार्थ को कहा था कि सुशांत जरूर सो रहे होंगे. लेकिन जब लगातार दरवाजा नहीं खोला गया तब सैमुअल ने सिद्धार्थ से पूछा था अगर वे वहां पर आ सकते हैं. सैमुअल के मुताबिक सुशांत की मौत की खबर उन्हें दीपेश के जरिए पता चली थी. इसके बाद सैमुअल Mount blanc के लिए रवाना हो गए थे.
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सुशांत सिंह राजपूत मामले में सीबीआई ने जब से जांच शुरू की है, केस में कई नए नाटकीय मोड़ देखने को मिले हैं. जैसे-जैसे पूछताछ का दायरा बढ़ रहा है, वैसे ही केस की परतें भी खुलती दिख रही हैं. सीबीआई हर शख्स से पूछताछ कर रही है जो सुशांत के साथ काम करते थे या फिर किसी ना किसी तरह से एक्टर की जिंदगी से जुड़े हुए थे. इसी कड़ी में सीबीआई ने सुशांत के एक्स मैनेजर सैमुअल मिरांडा से लंबी पूछताछ की थी. सीबीआई को सैमुअल ने पूरी कहानी बताई थी, कैसे वे सुशांत से मिले, वे वहां क्या काम करते थे, सुशांत की मौत वाले दिन क्या हुआ. पूछताछ के दौरान पता चला है कि सैमुअल सुशांत के यहां काम करने से पहले Royal Carribean cruise के साथ काम कर रहे थे. उन्होंने नौकरी के लिए इंटरनेट पर अप्लाई किया था. इसके बाद उन्हें सुशांत के घर से फोन आया और वे इंटरव्यू देने के लिए Capri Heights पहुंच गए. सैमुअल के मुताबिक वहां सुशांत की बहन प्रियंका और सिद्धार्थ ने उनका इंटरव्यू लिया और उन्हें हाउस मैनेजर की जॉब पर रख लिया. बताया गया कि सैमुअल को सुशांत मोटी सैलरी दे रहे थे. सैमुअल को अस्सी हजार के करीब सैलरी दी जा रही थी. वहीं सीबीआई को सैमुअल ने ये भी बताया कि प्रियंका के सुशांत के स्टाफ संग ज्यादा अच्छे रिश्ते नहीं थे. वे बताते हैं कि एक बार प्रियंका के चिल्लाने की वजह से दीपेश और अब्बास ने उनका काम छोड़ दिया था. सैमुअल की माने तो सुशांत को भी प्रियंका का वो व्यहवार पसंद नहीं आता था. इसी वजह से दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ था और प्रियंका अपने पति संग सुशांत का घर छोड़ भी चली गई थीं. सैमुअल ने सुशांत की विवादित यूरोप ट्रिप का भी जिक्र किया है. उन्होंने ने भी वहीं बताया है जो अभी तक सिद्धार्थ, रिया ने बताया है. सैमुअल के मुताबिक यूरोप ट्रिप के लिए सुशांत और रिया दो अक्टूबर को रवाना हुए थे. पंद्रह दिन बाद रिया के भाई ने भी उन्हें ज्वाइन कर लिया था. सैमुअल ने ये भी बताया कि सुशांत ने ही यूरोप ट्रिप का खर्चा उठाया था. लेकिन फिर सुशांत की तबीयत बिगड़ी और वे सभी वापस मुंबई आ गए. वैसे सुशांत मामले में इस बात का भी कई बार जिक्र हुआ है कि एक्टर को उनका घर भूतिया लगता था. सुशांत के कुक नीरज ने भी इस बात को स्वीकार किया था. अब सैमुअल ने भी सीबीआई को इस बारे में बताया है. वो कहते हैं- मुझे Capri Hieghts पर काम कर रहे लोग और रिया ने बताया था कि वो घर भूतिया है. मुझे ये भी बताया गया था सुशांत अक्सर अपने रूम के बाहर आते और हनुमान जी की मूर्ति को गले लगाते. उस घटना के बाद सुशांत, उस घर को छोड़ रिया के घर चले गए थे. लेकिन सुशांत की तबीयत कुछ खास नहीं रहती थी. वे किसी से भी ज्यादा बात नहीं कर रहे थे और अक्सर अपने कमरे में बंद रहते. सैमुअल ने ये भी बताया कि सुशांत कई बार रोया करते थे. वे काफी परेशान नजर आते थे. सुशांत की वो हालत देख ही रिया ने साइकेट्रिस्ट को बुलाया था. सैमुअल तो ये भी कहते हैं कि रिया के कहने पर ही सुशांत ने अपनी बहनों को वॉटरस्टोन क्लब बुलाया था. वहां पर सुशांत की बहन प्रियंका, नीतू और मीतू मौजूद थीं. सभी ने सुशांत से उनकी आर्थिक स्थिति जानने की कोशिश की थी. लेकिन सुशांत इतने परेशान थे कि वे सिर्फ रोते रहे. सैमुअल के मुताबिक उन्होंने बहनों के अलावा सुशांत की भी वापस जाने की टिकट करवाई थी. उन्हें लगा था कि सुशांत भी अपनी बहनों संग जाएंगे. लेकिन हैरानी की बात ये थी कि सुशांत अपनी बहनों संग वापस नहीं गए. इस बात से सुशांत की बहने मायूस हो गई थीं और सभी अपने घर चली गईं. वहीं सुशांत दोबारा रिया के पास चले गए थे. लेकिन इस सब के बावजूद भी सुशांत की सेहत में ज्यादा सुधार नहीं था. सैमुअल बताते हैं कि नवंबर दो हज़ार उन्नीस में सुशांत को हिंदूजा अस्पताल में एडमिट करवाना पड़ा था. वे चार दिन तक अस्पताल में ही रहे थे. सुशांत कहा करते थे कि वे अस्पताल में नहीं रहना चाहते थे. इसके बाद सुशांत, रिया के साथ उनके घर चले गए थे. वहीं सैमुअल भी एक नए घर की तलाश में लग गए थे. सैमुअल की माने तो उन्हें Mount Blanc house पसंद आया था और दिसंबर में सुशांत-रिया वहीं शिफ्ट हो गए थे. सैमुअल ने उन पार्टियों के बारे में भी बताया जो अक्सर सुशांत के घर हुआ करती थीं. वो बताते हैं कि रिया उन पॉर्टियों को इसलिए रखवाती थीं जिससे सुशांत का मूड बेहतर हो सके. वे चाहती थीं कि सुशांत अपने डिप्रेशन को भूल थोड़ा एन्जॉय करे. लेकिन सैमुअल की माने तो सुशांत उन पार्टियों के लिए ज्यादा बाहर नहीं आते थे. वे अपने कमरे में ही रहते थे. वहीं जनवरी आते-आते सुशांत की तबीयत और खराब हो गई थी. सैमुअल ने पूछताछ के दौरान उस दिन को भी याद किया है जब सुशांत ने उन से कहा था कि वे अपने घर की हर चीज बेचना चाहते हैं. वे पावना फॉर्म हाउस जाना चाहते थे. वे वहां पर सिर्फ केशव और नीरज को अपने साथ रखना चाहते थे. लेकिन सैमुअल के मुताबिक उन्होंने सुशांत की वो मांग नहीं मानी थी क्योंकि उन्हें पता था कि एक्टर की तबीयत ठीक नहीं चल रही थी. इसके बाद रिया से बात कर ये फैसला लिया गया था कि सुशांत को केरल ले जाया जाएगा. सैमुअल के मुताबिक वहां पर एक हीलिंग सेंटर था और सुशांत को वहां इलाज के लिए ले जाने का फैसला हुआ था. सैमुअल बताते हैं सुशांत ने पहले तो हां बोला था लेकिन बाद में वे केरल नहीं गए थे. वहीं उन्होंने उस समय मीतू दी संग दिल्ली जाने का मन बनाया था. मालूम हो कि ये सुशांत की वहीं ट्रिप है जो उन्होंने जनवरी में की थी. सुशांत, अपनी बहन मीतू, बॉडीगार्ड और सिद्धार्थ पिठानी संग दिल्ली गए थे. बताया गया था कि सुशांत उस ट्रिप पर खासा खुश थे और उन्होंने इस बात की जानकारी रिया तक को दी थी. लेकिन फिर तेईस जनवरी को सुशांत ने मुंबई आने का फैसला किया था. लेकिन ट्रिप पर जाने से पहले सुशांत ने वकील प्रियंका खिमानी और संदी श्रीधर से ये पूछा था कि उनके पास जितने पैसे हैं, उसके साथ वे कितने दिनों तक जिंदा रह सकते हैं. उन्होंने ये सवाल क्यों पूछा था इसका खुलासा नहीं किया गया है. इसके बाद सैमुअल ने सीबीआई के सामने उस फिल्म का भी जिक्र किया जो उन्हें रूमी जाफरी और वाशु भगनानी के द्वारा ऑफर की गई थी. सैमुअल की माने तो उस फिल्म की वजह से सुशांत काफी खुश थे. उन्होंने सैमुअल को खर्चा कम करने को भी कहा था. सैमुअल ने ये भी बताया कि सुशांत पापना डैम फॉर्महाउस की लीस कैंसिल करना चाहते थे. वहीं उस समय रिया ने भी सैमुअल को बताया था कि लॉकडाउन की वजह से उन्हें सैलरी नहीं दी जाएगी. इसके बाद मई में सुशांत और सैमुअल के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी. बस रिया की कभी-कबार सैमुअल से बात हुई थी. फिर ग्यारह जून को सैमुअल को दीपेश से एक फोन आया था. बताया गया था कि सुशांत पावना फॉर्म हाउस में मौजूद कुत्तो को ऐडॉप्शन को देना चाहते थे. वे सबकुछ बेचना भी चाह रहे थे. लेकिन तब सैमुअल की तरफ से बताया गया था कि लॉकडाउन के दौरान ये काम काफी मुश्किल होगा. सैमुअल ने घटना वाले दिन को भी याद किया है. सीबीआई को उन्होंने बताया है कि चौदह जून को ग्यारह:सत्तावन am पर सिद्धार्थ पिठानी का उन्हें फोन आया था. वे जानना चाहते थे अगर मेरे पास सुशांत के कमरे की कोई चाबी है. सिद्धार्थ ने बताया था कि सुशांत अपना कमरा नहीं खोल रहे थे. उस समय सैमुअल ने सिद्धार्थ को कहा था कि सुशांत जरूर सो रहे होंगे. लेकिन जब लगातार दरवाजा नहीं खोला गया तब सैमुअल ने सिद्धार्थ से पूछा था अगर वे वहां पर आ सकते हैं. सैमुअल के मुताबिक सुशांत की मौत की खबर उन्हें दीपेश के जरिए पता चली थी. इसके बाद सैमुअल Mount blanc के लिए रवाना हो गए थे.
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सावन का महीना शुरू होने वाला हैं, सावन माह शुरू होते ही मंदिरों में बम-भोले, जय शिव शंकर के जयकारे लगने लगते हैं। हर जगह भक्तिमय माहौल बना होता हैं और हर कोई शिव भक्ति में ही रमा हुआ दिखाई देता हैं, सावन के महीने में ही शिवभक्त हरिद्वार और नीलकंठ से कांवर में जल भर कर लाते हैं और भगवान शिव पर अर्पण कर देते हैं।
सावन के महीने में जो भक्त भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करता हैं तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं पर ऐसा क्या हैं कि भगवान शिव को सावन का महीना पसंद हैं, दरअसल इसके पीछे की कथा पौराणिक समय से जुड़ी हुई हैं, आज के इस लेख में हम आपको यह बताएंगे कि क्यो भगवान शिव को सावन का महीना अति प्रिय हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार माता सती ने शिव शंकर को हर जन्म में सच्चे दिल से अपना वर मान लिया था, पर माता के पिता राजा दक्ष शिव शंकर को बिल्कुल पसंद नहीं करती थे। माता सती ने अपने घर में ही अपनी योगशक्ति से प्राणों का त्याग कर दिया था, तत्पश्चात माता सती ने अगला जन्म हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में लिया। इसके बाद उन्होंने भगवान भोलेनाथ को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और वो तपस्या उन्होंने सावन के महीने में ही करी थी, माता पार्वती की तपस्या से कैलाशपति बहुत प्रसन्न हुए और उनसे विवाह कर लिया।
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ था तो वो सावन के महीने में हुआ था और मंथन से निकले विष को भोलेनाथ ने पी लिया था और पूरी सृष्टि को बचा लिया था। इसके अलावा ऐसा भी कहा जाता हैं भगवान शिव पहली बार अपनी ससुराल सावन के महीने में ही आए थे जब से हर साल सावन के महीने में शिव शंकर धरती पर अपनी ससुराल अवश्य आते हैं। इसके अलावा ऋषि मरकण्डु के पुत्र मार्कण्डेय ने सावन के महीने में ही बहुत कठोर तपस्या करके शिवजी से वरदान प्राप्त किया था।
सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा के अलावा बहुत से व्रत और पूजा भी की जाती हैं, शिव शंकर के भक्त सावन के सभी सोमवार का व्रत रखते हैं और मंदिर में बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं। सावन के महीने में मंगला गौरी और कोकिला व्रत भी रखा जाता हैं ये व्रत सुहागन महिलाओं के द्वारा किया जाता हैं और इन व्रतों को करने से मां पार्वती का आशीर्वाद मिलता हैं।
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सावन का महीना शुरू होने वाला हैं, सावन माह शुरू होते ही मंदिरों में बम-भोले, जय शिव शंकर के जयकारे लगने लगते हैं। हर जगह भक्तिमय माहौल बना होता हैं और हर कोई शिव भक्ति में ही रमा हुआ दिखाई देता हैं, सावन के महीने में ही शिवभक्त हरिद्वार और नीलकंठ से कांवर में जल भर कर लाते हैं और भगवान शिव पर अर्पण कर देते हैं। सावन के महीने में जो भक्त भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करता हैं तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं पर ऐसा क्या हैं कि भगवान शिव को सावन का महीना पसंद हैं, दरअसल इसके पीछे की कथा पौराणिक समय से जुड़ी हुई हैं, आज के इस लेख में हम आपको यह बताएंगे कि क्यो भगवान शिव को सावन का महीना अति प्रिय हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता सती ने शिव शंकर को हर जन्म में सच्चे दिल से अपना वर मान लिया था, पर माता के पिता राजा दक्ष शिव शंकर को बिल्कुल पसंद नहीं करती थे। माता सती ने अपने घर में ही अपनी योगशक्ति से प्राणों का त्याग कर दिया था, तत्पश्चात माता सती ने अगला जन्म हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में लिया। इसके बाद उन्होंने भगवान भोलेनाथ को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और वो तपस्या उन्होंने सावन के महीने में ही करी थी, माता पार्वती की तपस्या से कैलाशपति बहुत प्रसन्न हुए और उनसे विवाह कर लिया। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ था तो वो सावन के महीने में हुआ था और मंथन से निकले विष को भोलेनाथ ने पी लिया था और पूरी सृष्टि को बचा लिया था। इसके अलावा ऐसा भी कहा जाता हैं भगवान शिव पहली बार अपनी ससुराल सावन के महीने में ही आए थे जब से हर साल सावन के महीने में शिव शंकर धरती पर अपनी ससुराल अवश्य आते हैं। इसके अलावा ऋषि मरकण्डु के पुत्र मार्कण्डेय ने सावन के महीने में ही बहुत कठोर तपस्या करके शिवजी से वरदान प्राप्त किया था। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा के अलावा बहुत से व्रत और पूजा भी की जाती हैं, शिव शंकर के भक्त सावन के सभी सोमवार का व्रत रखते हैं और मंदिर में बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं। सावन के महीने में मंगला गौरी और कोकिला व्रत भी रखा जाता हैं ये व्रत सुहागन महिलाओं के द्वारा किया जाता हैं और इन व्रतों को करने से मां पार्वती का आशीर्वाद मिलता हैं।
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प्राप्त होती है, वह अनुपमेय है । नामके कृत्रिम घेरेसे हटकर यदि कीर्तन और लोक-गीतोंपर दृष्टिपात किया जाय तो यह स्पष्ट हो जाता है कि कुछको छोड़कर शेष लोकगीत संकीर्तन-वर्गके हैं और लोकगीतके रूपमें ही उन्हें विशेष गरिमा, लोकप्रियता, महत्त्व और अनिवार्यता प्राप्त हैं । ये गीत सामान्य जनताके हृदयमें भक्ति और श्रद्धा का संचार तो करते ही हैं, साथ ही भक्त - प्रवरोंको भी आकृष्ट करते हैं। भक्तशिरोमणि तुलसीदास - जीकी रचना 'जानकीमंगल', 'पार्वतीमगल' तथा 'रामढलानहछू' इन्हीं लोकगीतोंसे अनुप्राणित हैं और उन्होंमें निहित भावनाओंके साहित्यिक स्वरूप हैं । लोक-गीतका 'सोहर' भक्तवर सरदासजीके काव्यका 'सोहिलो' बन गया । प्राम्यगीतका नाम नारी-कण्ठसे निःसृत होकर तुलसीदासजीका 'वरवै' बन गया ।
भारत-भूमिमें हजारों वर्षोस भक्तिकी अजस्र धारा बहती चली आ रही है । यहाँ संतों, महापुरुषों, मनीषियोंने अपनी अमृतमयी वाणियोंसे इसे और भी अधिक पुष्ट और बलवती बनाया है । चैतन्य महाप्रभु, नरसी मेहता, सूरदास, मीरा-जैसे संतों एवं भक्तोंने तो अपने गीतों तथा भजनोंद्वारा इस भक्ति गङ्गामें विशेष अवगाहन किया है; वैसे तो सम्पूर्ण भारतमें ही भजनकीर्तनकी सरिताएँ बहती रही हैं तथा समय-समयपर मानव-मन इनमें निमज्जनकर अपनेको धन्य मानता रहा है। भारतवर्ष में अन्य प्रदेशोंकी भाँति मालव-धरतीपर भी भक्तिका अजस्र स्रोत बहता रहा है। साथ ही यह स्रोत गीतों, भजनों एवं संकीर्तनके माध्यम से प्रकट होकर अविरल धाराके रूप में प्रवाहित होता रहा है।
मालवा के देव-मन्दिरोंमें रामजन्म, कृष्णजन्म और अन्य धार्मिक उत्सवोंपर भजन मण्डलियोंद्वारा गीत और कीर्तनका आयोजन होता है । इस अवसरपर पौराणिक गाथाओंके बिभिन्न रोचक प्रसङ्गोंको विषय बनाकर वर्ण्य भजन गाये जाते हैं । सत्यनारायण कथा, रामायणपारायण, भागवत-कथा-जैसे धार्मिक आयोजनोंपर भी भजन-कीर्तनगाम्य-गीतोंकी, लोक-गीतोंकी सम्भावनाएँ युगके साथ उभरती आ रही हैं । वह दिन दूर नहीं जब लोकगीत अपने भीतरके संकीर्तनके विविध रूपको पूर्वग्रहतिमिर प्रसित रुमाजकी आँखोंमें अलोकित कर देगा ।
मालवी लोकजीवनमें संकीर्तनकी महिमा
(लेखक - श्रीरामप्रतापजी व्यास, व्याख्याता, एम्० ए०, एम्० एड्, साहित्यरत्न )
की धूम सी रहती है । जहाँ कथाकी समाप्तिपर पुरुषोंकी मण्डली ढोल-मजीरे लेकर हारमोनियमपर मधुर भजनोंद्वारा भक्तिका रस बहाती है, वहीं महिला वर्ग भी अपनी मीठी वाणीमें सरस गीर्तोद्वारा हरि-गुणगान करता है । निम्न भजनमें यह तथ्य उल्लेखनीय हैअणावो साँवलियाँ के पागा यो सोवे, तो पैसा की छवि म्यारी वो साँवलिया म्हारे मंदर आवो राम, भगति करांगा ।। अणाँवो साँवलियाके मोती भी सोहे, तो लाला की छवि न्यारी वो साँवलिया म्हारे मंदर आवो राम, भगति करांगा ॥ तेरी भगति करांगा भरपूर वो साँवलिया ।। 'रामजी ! आप मेरे घर पधारें । मैं आपकी भक्ति करूँगी । सत्यनारायण भगबान्की पाग शोभायमान हो रही है और उनमें पेंचोंकी छबि अलग ही दिखायी दे रही है । साँवलिया के मोती भी सोह रहे लालोंकी छवि न्यारी ही दिखायी देती है । इस प्रकार इस गीतमें साँवलियाकी शोभाका उल्लेख किया गया है। साथ ही उसकी भक्ति करनेकी अनुनय-विनय भी एक मालवी रमणीद्वारा व्यक्त की गयी है।
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प्राप्त होती है, वह अनुपमेय है । नामके कृत्रिम घेरेसे हटकर यदि कीर्तन और लोक-गीतोंपर दृष्टिपात किया जाय तो यह स्पष्ट हो जाता है कि कुछको छोड़कर शेष लोकगीत संकीर्तन-वर्गके हैं और लोकगीतके रूपमें ही उन्हें विशेष गरिमा, लोकप्रियता, महत्त्व और अनिवार्यता प्राप्त हैं । ये गीत सामान्य जनताके हृदयमें भक्ति और श्रद्धा का संचार तो करते ही हैं, साथ ही भक्त - प्रवरोंको भी आकृष्ट करते हैं। भक्तशिरोमणि तुलसीदास - जीकी रचना 'जानकीमंगल', 'पार्वतीमगल' तथा 'रामढलानहछू' इन्हीं लोकगीतोंसे अनुप्राणित हैं और उन्होंमें निहित भावनाओंके साहित्यिक स्वरूप हैं । लोक-गीतका 'सोहर' भक्तवर सरदासजीके काव्यका 'सोहिलो' बन गया । प्राम्यगीतका नाम नारी-कण्ठसे निःसृत होकर तुलसीदासजीका 'वरवै' बन गया । भारत-भूमिमें हजारों वर्षोस भक्तिकी अजस्र धारा बहती चली आ रही है । यहाँ संतों, महापुरुषों, मनीषियोंने अपनी अमृतमयी वाणियोंसे इसे और भी अधिक पुष्ट और बलवती बनाया है । चैतन्य महाप्रभु, नरसी मेहता, सूरदास, मीरा-जैसे संतों एवं भक्तोंने तो अपने गीतों तथा भजनोंद्वारा इस भक्ति गङ्गामें विशेष अवगाहन किया है; वैसे तो सम्पूर्ण भारतमें ही भजनकीर्तनकी सरिताएँ बहती रही हैं तथा समय-समयपर मानव-मन इनमें निमज्जनकर अपनेको धन्य मानता रहा है। भारतवर्ष में अन्य प्रदेशोंकी भाँति मालव-धरतीपर भी भक्तिका अजस्र स्रोत बहता रहा है। साथ ही यह स्रोत गीतों, भजनों एवं संकीर्तनके माध्यम से प्रकट होकर अविरल धाराके रूप में प्रवाहित होता रहा है। मालवा के देव-मन्दिरोंमें रामजन्म, कृष्णजन्म और अन्य धार्मिक उत्सवोंपर भजन मण्डलियोंद्वारा गीत और कीर्तनका आयोजन होता है । इस अवसरपर पौराणिक गाथाओंके बिभिन्न रोचक प्रसङ्गोंको विषय बनाकर वर्ण्य भजन गाये जाते हैं । सत्यनारायण कथा, रामायणपारायण, भागवत-कथा-जैसे धार्मिक आयोजनोंपर भी भजन-कीर्तनगाम्य-गीतोंकी, लोक-गीतोंकी सम्भावनाएँ युगके साथ उभरती आ रही हैं । वह दिन दूर नहीं जब लोकगीत अपने भीतरके संकीर्तनके विविध रूपको पूर्वग्रहतिमिर प्रसित रुमाजकी आँखोंमें अलोकित कर देगा । मालवी लोकजीवनमें संकीर्तनकी महिमा की धूम सी रहती है । जहाँ कथाकी समाप्तिपर पुरुषोंकी मण्डली ढोल-मजीरे लेकर हारमोनियमपर मधुर भजनोंद्वारा भक्तिका रस बहाती है, वहीं महिला वर्ग भी अपनी मीठी वाणीमें सरस गीर्तोद्वारा हरि-गुणगान करता है । निम्न भजनमें यह तथ्य उल्लेखनीय हैअणावो साँवलियाँ के पागा यो सोवे, तो पैसा की छवि म्यारी वो साँवलिया म्हारे मंदर आवो राम, भगति करांगा ।। अणाँवो साँवलियाके मोती भी सोहे, तो लाला की छवि न्यारी वो साँवलिया म्हारे मंदर आवो राम, भगति करांगा ॥ तेरी भगति करांगा भरपूर वो साँवलिया ।। 'रामजी ! आप मेरे घर पधारें । मैं आपकी भक्ति करूँगी । सत्यनारायण भगबान्की पाग शोभायमान हो रही है और उनमें पेंचोंकी छबि अलग ही दिखायी दे रही है । साँवलिया के मोती भी सोह रहे लालोंकी छवि न्यारी ही दिखायी देती है । इस प्रकार इस गीतमें साँवलियाकी शोभाका उल्लेख किया गया है। साथ ही उसकी भक्ति करनेकी अनुनय-विनय भी एक मालवी रमणीद्वारा व्यक्त की गयी है।
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हार्ट के 80 के दशक के गीत उत्पादन के दौरान, एन और नैन्सी विल्सन ने पेशेवर रचनाकारों से ठोस रचनाएं लेने और उन्हें 80 के दशक के बेहतरीन हिट में बदलने के लिए कक्षा और अनुग्रह के साथ अपने रचनात्मक उत्पादन में कमी का सामना किया। यह न्यूफाउंड पॉप ध्वनि हार्ट की हार्ड रॉक '70 के आला से प्रस्थान हो सकती है, लेकिन समूह ने पहले से गले लगाए गए कुंजीपटल-भारी क्षेत्र चट्टान में एक निर्विवाद गिटार रॉक पंच को कुशलतापूर्वक एकीकृत किया था।
यद्यपि 1 9 85 में अधिकतम पॉप अपील के साथ एक वास्तविक '80 के पॉप / रॉक बैंड के रूप में दृढ़ता से स्थापित किया गया था, लेकिन दिल ने बैंड के स्वयं-शीर्षक वाले एल्बम से इस स्कॉचर के साथ हार्ड रॉक एरिया में एक पैर को प्रभावी ढंग से रखा। यह 70 के दशक के दौरान "बरैकुडा" या "स्ट्रेट ऑन" को बढ़ावा देने वाले व्यक्ति की तुलना में एक चमकदार ध्वनि है, लेकिन एन विल्सन की गतिशील, एक तरह की गायन समूह के ट्रेडमार्क ड्राइविंग गिटार के साथ अच्छी तरह से गठबंधन करने के लिए गठबंधन करती है '80 के दशक रॉक गीत इसके बावजूद चाबियों की भारी खुराक, यह ट्रैक साबित करता है कि एक बदले हुए संस्करण में भी, विल्सन बहनों ने नर-वर्चस्व वाली चट्टान और रोल दुनिया में दृढ़ता से रॉक करने के तरीके पर दृढ़ संकल्प बनाए रखा। चूंकि 80 के दशक की पावर रॉक जाती है, यह उतनी ही अच्छी है जितनी इसे मिलती है।
दिल इस सुरुचिपूर्ण पावर बल्लाड के लिए काफी गति को धीमा कर देता है , जो 1 9 85 की गर्मियों में सबसे निश्चित रूप से सर्वव्यापी था। इस तथ्य के बावजूद कि 80 के दशक से बैंड की बड़ी हिट्स में से कोई भी लिखा नहीं गया था या विल्सन द्वारा सह-लिखित भी लिखा गया था, स्पष्ट करें कि समूह के करियर के इस चरण में धुन प्रदान करने के लिए किराए पर पेशेवर गीतकारों की आभासी सभी को मुख्यधारा के रॉक गीत के आसपास अपना रास्ता पता था। बेशक, यह भी मदद करता है कि इन गीतों के बैंड के प्रदर्शन, विशेष रूप से यह, कभी भी स्वतंत्र कलाकारों से अपेक्षाकृत सुस्त या उदासीनता का सुझाव नहीं देते हैं, जो अब अपनी सामग्री लिख रहे हैं। एन विल्सन के vocals कुछ भी चिल्लाओ अगर दृढ़ विश्वास नहीं है और उसका जुनून इस शीर्ष 10 हिट अच्छी तरह से सेवा करता है।
कुछ गाने '80 के दशक को सुखद डिग्री के लिए परिभाषित करते हैं जो हार्ट के मध्य -80 के हिट करते हैं, और इस गीत को शीर्ष 5 में अपनी जगह के लायक माना गया क्योंकि यह आत्मविश्वास से बैंड की नई पॉप दिशा की पुष्टि करता था। विल्सन बहनों के रूप में ईमानदारी से किसी ने भी बिजली की गेंदबाजी नहीं की थी, और वे निश्चित रूप से बाहरी सामग्री से बाहर निकलने के लिए क्रेडिट के लायक हैं, जो अन्य कलाकारों द्वारा व्याख्या किए जाने पर पुरानी हो सकती थीं। दिल पर उत्पादन निश्चित रूप से समूह के 70 के दशक के लिए महत्वपूर्ण काटने से काफी हद तक खो गया था, लेकिन विल्सन ने 80 के दशक की रॉक ध्वनि को इतनी पूरी तरह से और प्रामाणिक रूप से गले लगाया कि ग्लॉसी लिबास बहुत ही फायदेमंद है अगर किसी भी तरह से गाने के दिल के नवीनतम बैच के लिए फायदेमंद नहीं है।
यहां तक कि अगर उन्होंने अपने बैंड की 80 के दशक की वापसी के लिए अधिकांश गीत लेखन कर्तव्यों को आत्मसमर्पण कर दिया था, तो विल्सन बहनों ने गिटार रॉक एक्ट के रूप में समूह की स्थिति को बनाए रखने का एक निर्दोष काम किया था। यह मिड-टेम्पो ट्रैक कुछ चमकदार हुक और सौम्य हार्मोनियों पर सवारी करता है, लेकिन गिटार की परतें केवल पॉप की जगह रॉक श्रेणी में कार्यवाही को पूरी तरह से रखने में मदद करती हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि विल्सन के पास कितने गाने थे, जिसमें उन्होंने अपने 80 के दशक के रिटर्न के लिए रिकॉर्ड किए थे, लेकिन कोई अनुमान लगा सकता है कि प्रदर्शन के उनके अनुभवी समझदार और अनजान भावना को इन धुनों को निहित गुणवत्ता के रूप में करने के लिए बहुत कुछ करना था गीत लेखन स्वयं।
1 9 87 के खराब जानवरों को निश्चित रूप से पिछले एल्बम की तुलना में पॉपपियर होने का बहाना भी होगा, दिल की नई हुक हुक और मुख्यधारा की अपील की अत्यधिक सफलता के कारण। तो एक बार फिर, पर्याप्त क्रेडिट को बैंड में एक और गिटार रॉकर जारी करने के लिए जाना चाहिए, जैसे कि दुखी, दांतहीन प्रेम तालिकाओं की ओर आगे बढ़ने की बजाय। कुंजीपटल निश्चित रूप से यहां अपनी उपस्थिति महसूस करते हैं लेकिन कभी भी पुरानी हार्ट के रूप में स्थापित कोर इलेक्ट्रिक गिटार ध्वनि की कीमत पर कभी नहीं। लोग इस तरह की गणना, अत्यधिक विपणन योग्य चट्टान के लिए लगातार अपमान व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन किसी के लिए यह कठिन होगा लेकिन चुनिंदा कुछ क्षेत्र रॉक प्रतिभाओं को सुनने के लिए इसे चुनने के लिए चुनौती दी जाएगी।
पॉप और चट्टान के दिल का एकमात्र विवाह "अकेला" में इतनी निर्बाध रूप से चलाया जाता है कि यह दशक के बेहतरीन एकल में से एक के रूप में योग्य हो सकता है। अपील की इसकी चौड़ाई बहुत ही तेज है, जो एक सुरुचिपूर्ण पियानो खोलने और सुंदर, शांत छंद के साथ मुलायम रॉक श्रोताओं में खींच रही है, लेकिन फिर थंपिंग, आकर्षक कोरस के साथ चट्टान आकस्मिकता को पूरी तरह से संतुष्ट करती है। एन विल्सन की आवाज ने पिछले कुछ वर्षों में अपने किसी भी सहज जुनून को खो दिया है, और इस तरह के गीतों के तैयार उत्पादों को निश्चित रूप से उनके ध्यान के लायक हैं। कुछ दशकों की बेकार पहुंच के लिए बेचने के कुछ 80 के कलाकारों पर आरोप लगा सकते हैं, लेकिन ऐसा शुल्क विल्सन के मामले में नहीं टिकता है।
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हार्ट के अस्सी के दशक के गीत उत्पादन के दौरान, एन और नैन्सी विल्सन ने पेशेवर रचनाकारों से ठोस रचनाएं लेने और उन्हें अस्सी के दशक के बेहतरीन हिट में बदलने के लिए कक्षा और अनुग्रह के साथ अपने रचनात्मक उत्पादन में कमी का सामना किया। यह न्यूफाउंड पॉप ध्वनि हार्ट की हार्ड रॉक 'सत्तर के आला से प्रस्थान हो सकती है, लेकिन समूह ने पहले से गले लगाए गए कुंजीपटल-भारी क्षेत्र चट्टान में एक निर्विवाद गिटार रॉक पंच को कुशलतापूर्वक एकीकृत किया था। यद्यपि एक नौ पचासी में अधिकतम पॉप अपील के साथ एक वास्तविक 'अस्सी के पॉप / रॉक बैंड के रूप में दृढ़ता से स्थापित किया गया था, लेकिन दिल ने बैंड के स्वयं-शीर्षक वाले एल्बम से इस स्कॉचर के साथ हार्ड रॉक एरिया में एक पैर को प्रभावी ढंग से रखा। यह सत्तर के दशक के दौरान "बरैकुडा" या "स्ट्रेट ऑन" को बढ़ावा देने वाले व्यक्ति की तुलना में एक चमकदार ध्वनि है, लेकिन एन विल्सन की गतिशील, एक तरह की गायन समूह के ट्रेडमार्क ड्राइविंग गिटार के साथ अच्छी तरह से गठबंधन करने के लिए गठबंधन करती है 'अस्सी के दशक रॉक गीत इसके बावजूद चाबियों की भारी खुराक, यह ट्रैक साबित करता है कि एक बदले हुए संस्करण में भी, विल्सन बहनों ने नर-वर्चस्व वाली चट्टान और रोल दुनिया में दृढ़ता से रॉक करने के तरीके पर दृढ़ संकल्प बनाए रखा। चूंकि अस्सी के दशक की पावर रॉक जाती है, यह उतनी ही अच्छी है जितनी इसे मिलती है। दिल इस सुरुचिपूर्ण पावर बल्लाड के लिए काफी गति को धीमा कर देता है , जो एक नौ पचासी की गर्मियों में सबसे निश्चित रूप से सर्वव्यापी था। इस तथ्य के बावजूद कि अस्सी के दशक से बैंड की बड़ी हिट्स में से कोई भी लिखा नहीं गया था या विल्सन द्वारा सह-लिखित भी लिखा गया था, स्पष्ट करें कि समूह के करियर के इस चरण में धुन प्रदान करने के लिए किराए पर पेशेवर गीतकारों की आभासी सभी को मुख्यधारा के रॉक गीत के आसपास अपना रास्ता पता था। बेशक, यह भी मदद करता है कि इन गीतों के बैंड के प्रदर्शन, विशेष रूप से यह, कभी भी स्वतंत्र कलाकारों से अपेक्षाकृत सुस्त या उदासीनता का सुझाव नहीं देते हैं, जो अब अपनी सामग्री लिख रहे हैं। एन विल्सन के vocals कुछ भी चिल्लाओ अगर दृढ़ विश्वास नहीं है और उसका जुनून इस शीर्ष दस हिट अच्छी तरह से सेवा करता है। कुछ गाने 'अस्सी के दशक को सुखद डिग्री के लिए परिभाषित करते हैं जो हार्ट के मध्य -अस्सी के हिट करते हैं, और इस गीत को शीर्ष पाँच में अपनी जगह के लायक माना गया क्योंकि यह आत्मविश्वास से बैंड की नई पॉप दिशा की पुष्टि करता था। विल्सन बहनों के रूप में ईमानदारी से किसी ने भी बिजली की गेंदबाजी नहीं की थी, और वे निश्चित रूप से बाहरी सामग्री से बाहर निकलने के लिए क्रेडिट के लायक हैं, जो अन्य कलाकारों द्वारा व्याख्या किए जाने पर पुरानी हो सकती थीं। दिल पर उत्पादन निश्चित रूप से समूह के सत्तर के दशक के लिए महत्वपूर्ण काटने से काफी हद तक खो गया था, लेकिन विल्सन ने अस्सी के दशक की रॉक ध्वनि को इतनी पूरी तरह से और प्रामाणिक रूप से गले लगाया कि ग्लॉसी लिबास बहुत ही फायदेमंद है अगर किसी भी तरह से गाने के दिल के नवीनतम बैच के लिए फायदेमंद नहीं है। यहां तक कि अगर उन्होंने अपने बैंड की अस्सी के दशक की वापसी के लिए अधिकांश गीत लेखन कर्तव्यों को आत्मसमर्पण कर दिया था, तो विल्सन बहनों ने गिटार रॉक एक्ट के रूप में समूह की स्थिति को बनाए रखने का एक निर्दोष काम किया था। यह मिड-टेम्पो ट्रैक कुछ चमकदार हुक और सौम्य हार्मोनियों पर सवारी करता है, लेकिन गिटार की परतें केवल पॉप की जगह रॉक श्रेणी में कार्यवाही को पूरी तरह से रखने में मदद करती हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि विल्सन के पास कितने गाने थे, जिसमें उन्होंने अपने अस्सी के दशक के रिटर्न के लिए रिकॉर्ड किए थे, लेकिन कोई अनुमान लगा सकता है कि प्रदर्शन के उनके अनुभवी समझदार और अनजान भावना को इन धुनों को निहित गुणवत्ता के रूप में करने के लिए बहुत कुछ करना था गीत लेखन स्वयं। एक नौ सत्तासी के खराब जानवरों को निश्चित रूप से पिछले एल्बम की तुलना में पॉपपियर होने का बहाना भी होगा, दिल की नई हुक हुक और मुख्यधारा की अपील की अत्यधिक सफलता के कारण। तो एक बार फिर, पर्याप्त क्रेडिट को बैंड में एक और गिटार रॉकर जारी करने के लिए जाना चाहिए, जैसे कि दुखी, दांतहीन प्रेम तालिकाओं की ओर आगे बढ़ने की बजाय। कुंजीपटल निश्चित रूप से यहां अपनी उपस्थिति महसूस करते हैं लेकिन कभी भी पुरानी हार्ट के रूप में स्थापित कोर इलेक्ट्रिक गिटार ध्वनि की कीमत पर कभी नहीं। लोग इस तरह की गणना, अत्यधिक विपणन योग्य चट्टान के लिए लगातार अपमान व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन किसी के लिए यह कठिन होगा लेकिन चुनिंदा कुछ क्षेत्र रॉक प्रतिभाओं को सुनने के लिए इसे चुनने के लिए चुनौती दी जाएगी। पॉप और चट्टान के दिल का एकमात्र विवाह "अकेला" में इतनी निर्बाध रूप से चलाया जाता है कि यह दशक के बेहतरीन एकल में से एक के रूप में योग्य हो सकता है। अपील की इसकी चौड़ाई बहुत ही तेज है, जो एक सुरुचिपूर्ण पियानो खोलने और सुंदर, शांत छंद के साथ मुलायम रॉक श्रोताओं में खींच रही है, लेकिन फिर थंपिंग, आकर्षक कोरस के साथ चट्टान आकस्मिकता को पूरी तरह से संतुष्ट करती है। एन विल्सन की आवाज ने पिछले कुछ वर्षों में अपने किसी भी सहज जुनून को खो दिया है, और इस तरह के गीतों के तैयार उत्पादों को निश्चित रूप से उनके ध्यान के लायक हैं। कुछ दशकों की बेकार पहुंच के लिए बेचने के कुछ अस्सी के कलाकारों पर आरोप लगा सकते हैं, लेकिन ऐसा शुल्क विल्सन के मामले में नहीं टिकता है।
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EPFO Account Holder Good News: पीएफ खाताधारकों (PF account holders) के लिए अच्छी खबर है क्योंकि कई लोगों को वित्त वर्ष 2022 का ब्याज मिलने लगा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organization) ने पीएफ खातों में ब्याज जो जमा हुई है उसे लोगों को देना शुरू कर दिया है। 7 करोड़ ईपीएफओ ग्राहक जल्द ही अपने खातों में 81,000 रुपये तक की राशि आने की उम्मीद कर सकते हैं। कहा तो ऐसा जा रहा है कि इस महीने के अंत तक बड़ी खुशखबरी मिल सकती है।
81000 रुपये कैसे मिलेंगे?
इस साल के लिए ब्याज दर 8. 1 फीसदी है, जो 40 साल में सबसे निचला स्तर है। जिन लोगों के खाते में 10 लाख रुपये हैं, उन्हें 81,000 रुपये का ब्याज मिलेगा। पीएफ खाते में 7 लाख रुपये रखने वालों के लिए 56,700 रुपये का ब्याज मिलेगा। इसी तरह, पीएफ खाते में 5 लाख रुपये के लिए ब्याज 40,500 रुपये होगा जबकि 1 लाख रुपये वाले के लिए ब्याज 8,100 रुपये होगा।
ऐसे कई तरीके हैं जिनसे ईपीएफओ सब्सक्राइबर अपना बैलेंस चेक कर सकते हैं और जान सकते हैं कि ब्याज का पैसा आ गया है या नहींः
पीएफ खाताधारक अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 011-22901406 नंबर पर मिस्ड कॉल दे सकते हैं। खाते का विवरण ईपीएफओ द्वारा एक एसएमएस के माध्यम से ग्राहक को भेजा जाएगा। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए सब्सक्राइबर्स के पास यूएएन, पैन और आधार लिंकिंग होना अनिवार्य है।
- इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए, खाताधारकों को अपना यूएएन ईपीएफओ के साथ पंजीकृत कराना होगा और अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर का उपयोग करना होगा।
- इस सेवा का लाभ कई भाषाओं में उठाया जा सकता है। अंग्रेजी के अलावा, हिंदी, मराठी, पंजाबी, कन्नड़, तमिल, बंगाली, तेलुगु, मलयालम उपलब्ध हैं।
खाताधारक UMANG (Unified Mobile Application for New-age Governance) ऐप पर अपना पीएफ बैलेंस चेक कर सकते हैं। देखेंः
- EPFO की आधिकारिक वेबसाइट (epfindia. gov. in) पर जाएं।
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EPFO Account Holder Good News: पीएफ खाताधारकों के लिए अच्छी खबर है क्योंकि कई लोगों को वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस का ब्याज मिलने लगा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पीएफ खातों में ब्याज जो जमा हुई है उसे लोगों को देना शुरू कर दिया है। सात करोड़ ईपीएफओ ग्राहक जल्द ही अपने खातों में इक्यासी,शून्य रुपयापये तक की राशि आने की उम्मीद कर सकते हैं। कहा तो ऐसा जा रहा है कि इस महीने के अंत तक बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। इक्यासी हज़ार रुपयापये कैसे मिलेंगे? इस साल के लिए ब्याज दर आठ. एक फीसदी है, जो चालीस साल में सबसे निचला स्तर है। जिन लोगों के खाते में दस लाख रुपये हैं, उन्हें इक्यासी,शून्य रुपयापये का ब्याज मिलेगा। पीएफ खाते में सात लाख रुपये रखने वालों के लिए छप्पन,सात सौ रुपयापये का ब्याज मिलेगा। इसी तरह, पीएफ खाते में पाँच लाख रुपये के लिए ब्याज चालीस,पाँच सौ रुपयापये होगा जबकि एक लाख रुपये वाले के लिए ब्याज आठ,एक सौ रुपयापये होगा। ऐसे कई तरीके हैं जिनसे ईपीएफओ सब्सक्राइबर अपना बैलेंस चेक कर सकते हैं और जान सकते हैं कि ब्याज का पैसा आ गया है या नहींः पीएफ खाताधारक अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ग्यारह-दो करोड़ उनतीस लाख एक हज़ार चार सौ छः नंबर पर मिस्ड कॉल दे सकते हैं। खाते का विवरण ईपीएफओ द्वारा एक एसएमएस के माध्यम से ग्राहक को भेजा जाएगा। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए सब्सक्राइबर्स के पास यूएएन, पैन और आधार लिंकिंग होना अनिवार्य है। - इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए, खाताधारकों को अपना यूएएन ईपीएफओ के साथ पंजीकृत कराना होगा और अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर का उपयोग करना होगा। - इस सेवा का लाभ कई भाषाओं में उठाया जा सकता है। अंग्रेजी के अलावा, हिंदी, मराठी, पंजाबी, कन्नड़, तमिल, बंगाली, तेलुगु, मलयालम उपलब्ध हैं। खाताधारक UMANG ऐप पर अपना पीएफ बैलेंस चेक कर सकते हैं। देखेंः - EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
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नेता प्रतिपक्ष ने प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद सदन से बहिर्गमन किया। सदन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमने संकल्प ही दिया था, पर सरकार तानाशाही पर उतर आई है।
मध्य प्रदेश विधानसभा (फाइल फोटो)
विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के खिलाफ कांग्रेस पार्टी द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव मंगलवार को अस्वीकार हो गया। दोपहर बाद संसदीय कार्य मंत्री ने अस्वीकार किए जाने का प्रस्ताव बहुमत से अस्वीकार कर दिया। हालांकि इससे पहले दोपहर में विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने व्यवस्था दी थी कि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार हो या अस्वीकार, इसके लिए 27 मार्च को चर्चा कराई जा रही है। सत्ता पक्ष के विरोध के बाद इसे बहुमत से अस्वीकार कर दिया गया। इसी बीच विपक्ष ने एकतरफा सदन चलाने का आरोप लगाते हुए बहिर्गमन कर दिया। विपक्ष के बहिर्गमन के बाद सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 का बजट, सभी विभागों की अनुदान मांगों और विनियोग विधेयक सहित सभी विधेयक पारित करा लिए। बजट और विधेयकों के पारित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी।
मंगलवार दोपहर ध्यानाकर्षण के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया था, उस पर चर्चा कब कराई जाएगी। इस पर विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा कि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं संकल्प लाया जाता है। जब मैं सदन में आ चुका था, इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। मैंने उसे अस्वीकार कर सचिवालय को भेज दिया है, लेकिन अगर विपक्ष चाहता है तो हम 27 मार्च को इस पर चर्चा करा सकते हैं। बता दें कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी के निलंबन के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह सहित कांग्रेस के 48 विधायकों ने हस्ताक्षर कर अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सूचना सचिवालय को दी थी।
मंगलवार दोपहर तीन बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि यह प्रस्ताव न तो नियम के अनुरूप है और न ही ऐसी कोई परंपरा है। यदि इसे स्वीकार किया जाता है तो गलत परंपरा बनेगी। कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी को बजट सत्र की शेष कार्यवाही से निलंबित करने का निर्णय अध्यक्ष का नहीं बल्कि सदन का था। इसके बाद डॉ. मिश्रा ने प्रस्ताव रखा कि इसे अस्वीकार किया जाए। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री डॉ. मिश्रा ने उक्त प्रस्ताव को अस्वीकार करने का प्रस्ताव रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया और प्रस्ताव अस्वीकृत हो गया।
नेता प्रतिपक्ष ने प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद सदन से बहिर्गमन किया। सदन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमने संकल्प ही दिया था, पर सरकार तानाशाही पर उतर आई है। कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। एकतरफा कार्यवाही संचालित की जा रही है। एक बार अध्यक्ष ने जब चर्चा की तारीख नियत कर दी, तब उसे अस्वीकार क्यों किया गया।
मंगलवार को शून्यकाल में एक बार फिर आदिवासियों पर अत्याचार का मामला सदन में गूंजा। प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने सागर कोठी में एक आदिवासी बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या करने का मामला उठाया। अध्यक्ष ने शून्यकाल में उठाने की व्यवस्था दी। शून्यकाल में बाला बच्चन, पांचीलाल मेढ़ा, कांतिलाल भूरिया सहित दर्जन भर से अधिक विधायकों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करने और सरकार पर आदिवासियों के खिलाफ हो रहे अत्याचार पर वक्तव्य देने और सख्त कार्रवाई करने की मांग की। पांचीलाल मेढ़ा दहित दर्जन भर विधायक गर्भगृह तक जा पहुंचे। चर्चा नहीं कराए जाने पर आठ विधायक बहिर्गमन कर गए। इस पर संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बताएं कि कांग्रेस ने बहिर्गमन किया है या नहीं। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने बहिर्गमन नहीं किया है, कुछ विधायक बाहर गए हैं।
मंगलवार को दोपहर बाद ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण संशोधन विधेयक, मप्र के नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) संशोधन विधेयक और मप्र नगर पालिका विधि संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है।
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नेता प्रतिपक्ष ने प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद सदन से बहिर्गमन किया। सदन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमने संकल्प ही दिया था, पर सरकार तानाशाही पर उतर आई है। मध्य प्रदेश विधानसभा विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के खिलाफ कांग्रेस पार्टी द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव मंगलवार को अस्वीकार हो गया। दोपहर बाद संसदीय कार्य मंत्री ने अस्वीकार किए जाने का प्रस्ताव बहुमत से अस्वीकार कर दिया। हालांकि इससे पहले दोपहर में विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने व्यवस्था दी थी कि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार हो या अस्वीकार, इसके लिए सत्ताईस मार्च को चर्चा कराई जा रही है। सत्ता पक्ष के विरोध के बाद इसे बहुमत से अस्वीकार कर दिया गया। इसी बीच विपक्ष ने एकतरफा सदन चलाने का आरोप लगाते हुए बहिर्गमन कर दिया। विपक्ष के बहिर्गमन के बाद सरकार ने वित्त वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस का बजट, सभी विभागों की अनुदान मांगों और विनियोग विधेयक सहित सभी विधेयक पारित करा लिए। बजट और विधेयकों के पारित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी। मंगलवार दोपहर ध्यानाकर्षण के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया था, उस पर चर्चा कब कराई जाएगी। इस पर विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा कि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं संकल्प लाया जाता है। जब मैं सदन में आ चुका था, इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। मैंने उसे अस्वीकार कर सचिवालय को भेज दिया है, लेकिन अगर विपक्ष चाहता है तो हम सत्ताईस मार्च को इस पर चर्चा करा सकते हैं। बता दें कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी के निलंबन के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह सहित कांग्रेस के अड़तालीस विधायकों ने हस्ताक्षर कर अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सूचना सचिवालय को दी थी। मंगलवार दोपहर तीन बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि यह प्रस्ताव न तो नियम के अनुरूप है और न ही ऐसी कोई परंपरा है। यदि इसे स्वीकार किया जाता है तो गलत परंपरा बनेगी। कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी को बजट सत्र की शेष कार्यवाही से निलंबित करने का निर्णय अध्यक्ष का नहीं बल्कि सदन का था। इसके बाद डॉ. मिश्रा ने प्रस्ताव रखा कि इसे अस्वीकार किया जाए। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री डॉ. मिश्रा ने उक्त प्रस्ताव को अस्वीकार करने का प्रस्ताव रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया और प्रस्ताव अस्वीकृत हो गया। नेता प्रतिपक्ष ने प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद सदन से बहिर्गमन किया। सदन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमने संकल्प ही दिया था, पर सरकार तानाशाही पर उतर आई है। कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। एकतरफा कार्यवाही संचालित की जा रही है। एक बार अध्यक्ष ने जब चर्चा की तारीख नियत कर दी, तब उसे अस्वीकार क्यों किया गया। मंगलवार को शून्यकाल में एक बार फिर आदिवासियों पर अत्याचार का मामला सदन में गूंजा। प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने सागर कोठी में एक आदिवासी बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या करने का मामला उठाया। अध्यक्ष ने शून्यकाल में उठाने की व्यवस्था दी। शून्यकाल में बाला बच्चन, पांचीलाल मेढ़ा, कांतिलाल भूरिया सहित दर्जन भर से अधिक विधायकों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करने और सरकार पर आदिवासियों के खिलाफ हो रहे अत्याचार पर वक्तव्य देने और सख्त कार्रवाई करने की मांग की। पांचीलाल मेढ़ा दहित दर्जन भर विधायक गर्भगृह तक जा पहुंचे। चर्चा नहीं कराए जाने पर आठ विधायक बहिर्गमन कर गए। इस पर संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बताएं कि कांग्रेस ने बहिर्गमन किया है या नहीं। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने बहिर्गमन नहीं किया है, कुछ विधायक बाहर गए हैं। मंगलवार को दोपहर बाद ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण संशोधन विधेयक, मप्र के नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति संशोधन विधेयक और मप्र नगर पालिका विधि संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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Bihar Election 2020 बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 12 साझा रैलियां तय की हैं। रैली में अमित शाह सहित कई दिग्गज नेता शामिल होंगे । 20 सीटों पर होगी एक रैली।
पटना, जेएनएन। Bihar Assembly Election 2020: भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। पार्टी ने इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की 12 साझा रैलियां तय की हैं। बीजेपी ने कुल 243 विधानसभा क्षेत्रों को लक्ष्य बनाकर 20 सीटों पर एक रैली का खाका तैयार किया है। पार्टी के रणनीतिकार एनडीए उम्मीदवारों की एक-एक सीट पर जीत तय करने के लिए दोनों दिग्गज नेताओं का कार्यक्रम तय करने में जुटे हैं। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि रैली कहां-कहां होगी और कब होगी।
बिहार बीजेपी द्वारा फिलवक्त तैयार कार्यक्रम के अनुसार 20 अक्टूबर के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां शुरू हो जाएंगी। इसके बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तीन हफ्ते में 12 चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री की रैलियों से संबंधित कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव, चुनाव प्रभारी व महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस शुक्रवार को जुटे रहे। पार्टी अपने सबसे बड़े नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को पूरी तरह भुनाने की तैयारी कर रही है। 2015 के विधानसभा चुनाव की तर्ज पर एक बार फिर सबसे बड़े ब्रांड मोदी से सर्वाधिक रैलियां करवाने की तैयारी है।
बीजेपी विधानसभा चुनाव को लेकर दृष्टि पत्र जारी करने के बाद रैलियों का कार्यक्रम घोषित करेगी। इस बीच दो शेष चरणों के लिए प्रत्याशियों के नाम की घोषणा पार्टी कर देगी। अभी बीजेपी ने 81 सीटों पर प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है। चुनाव प्रबंधन व संचालन से जुड़े पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक भाजपा प्रधानमंत्री की लोकप्रियता को भुनाना चाहती है। इसलिए सर्वाधिक रैलियां कर बिहार की जनता के साथ उनका सीधा संवाद करवाने की योजना है। पार्टी की कोशिश विकास और बीते छह वर्षों में देश में हुए किसान, छोटे कामगारों, महिलाओं, कारोबारियों, युवाओं आदि के लिए किए जनकल्याणकारी कार्यों को भुनाने की है।
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Bihar Election दो हज़ार बीस बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बारह साझा रैलियां तय की हैं। रैली में अमित शाह सहित कई दिग्गज नेता शामिल होंगे । बीस सीटों पर होगी एक रैली। पटना, जेएनएन। Bihar Assembly Election दो हज़ार बीस: भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। पार्टी ने इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बारह साझा रैलियां तय की हैं। बीजेपी ने कुल दो सौ तैंतालीस विधानसभा क्षेत्रों को लक्ष्य बनाकर बीस सीटों पर एक रैली का खाका तैयार किया है। पार्टी के रणनीतिकार एनडीए उम्मीदवारों की एक-एक सीट पर जीत तय करने के लिए दोनों दिग्गज नेताओं का कार्यक्रम तय करने में जुटे हैं। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि रैली कहां-कहां होगी और कब होगी। बिहार बीजेपी द्वारा फिलवक्त तैयार कार्यक्रम के अनुसार बीस अक्टूबर के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां शुरू हो जाएंगी। इसके बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तीन हफ्ते में बारह चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री की रैलियों से संबंधित कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव, चुनाव प्रभारी व महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस शुक्रवार को जुटे रहे। पार्टी अपने सबसे बड़े नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को पूरी तरह भुनाने की तैयारी कर रही है। दो हज़ार पंद्रह के विधानसभा चुनाव की तर्ज पर एक बार फिर सबसे बड़े ब्रांड मोदी से सर्वाधिक रैलियां करवाने की तैयारी है। बीजेपी विधानसभा चुनाव को लेकर दृष्टि पत्र जारी करने के बाद रैलियों का कार्यक्रम घोषित करेगी। इस बीच दो शेष चरणों के लिए प्रत्याशियों के नाम की घोषणा पार्टी कर देगी। अभी बीजेपी ने इक्यासी सीटों पर प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है। चुनाव प्रबंधन व संचालन से जुड़े पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक भाजपा प्रधानमंत्री की लोकप्रियता को भुनाना चाहती है। इसलिए सर्वाधिक रैलियां कर बिहार की जनता के साथ उनका सीधा संवाद करवाने की योजना है। पार्टी की कोशिश विकास और बीते छह वर्षों में देश में हुए किसान, छोटे कामगारों, महिलाओं, कारोबारियों, युवाओं आदि के लिए किए जनकल्याणकारी कार्यों को भुनाने की है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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राजनीतिक सामानवाद का उत्प काल
उल्लेख तो करता हो है साथ ही अपने प्रत्यक्ष प्रभु राणन वे राज्य का भी उल्लेख करता है । ११३४ में सिगर वत्सराज नामक एक गाहूडवाल सामन्त को भी रापडि विषय मे उही शर्तों पर एक अनुदान देते देखते हैं जिन त पर उनका गाहवाल प्रभु दता था, यद्यपि सम्भावना एसी है कि उसे अपने प्रभु से भूमि अनुदान प्राप्त न हुआ हो बल्कि प्रभु न उसके छीने हुए प्रवेश उसे फिर वापस कर दिय हा ।
च देलो के विपरीत गाहडवाल ताम्रपटा में कहीं भी राउतो को ग्राम अनुदान देन का कारण उनकी सनिव सेवा और शौयपूर्ण काय नहीं बताया गया है । इससे हम यह निष्क्ष निकाल सकते हैं कि सामान्य रूप से सभी तरह की सेवाग्रा के लिए दिय जाते थे। लेकिन गाह्डवाल अनुदानपत्राम राज्या धिकारियों की सूची मे राउता और राणका का उल्लेख नहीं हुआ है। इससे प्रकट होता है कि ये सोधे राज्य के नियनण में काम करने वाले सरकारी प्रमले न हो कर गाडवाला के सामत थे । चन्देला की अपेक्षा गाहडवालों के राज्य में राउता की सख्या बहुत अधिक थी ।
इस बात के कुछ प्रमाण मिनत हैं कि पुरोहिता में अतिरिक्त अन्य नियमित राज्याधिकारिया को भी ग्राम अनुदान दिये जाते थे । १०९२६३ के गाहटवाल ताम्रपटों मे विकरग्रामा ( करमुक्त गाँव ) शब्द के उल्लेख से यह निरक्ष निकाला जा सकता है। इन अनुदानपत्रा के अनुसार चन्द्रदेव ने ५०० ब्राह्मणा को एक पूरा पत्तल दान कर दिया। अनुदत्त क्षेत्र में इस पत्तल के व गाँव शामिल नही थे जो ब्राह्मणो और मन्दिरा के अधिकार में थे और जो करमुक्त थे। इस अनुदानपत्र म २५ गाँवो को मन्दिरो के अधीन, २ को ब्राह्मण के अधीन और ६ को करमुक्त बताया गया है। दयाराम साहनी ने इन गाँवा को कर हीन (जिनके हाथ न हो, ऐसे) लोगो के प्रधान माना है, किन्तु एसा मानने का कोई श्रौचित्य नही दिखाई देता वि कर शत का अथ तो करमुक्त
वही, पक्तियाँ २७ ३० ।
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राजनीतिक सामानवाद का उत्प काल उल्लेख तो करता हो है साथ ही अपने प्रत्यक्ष प्रभु राणन वे राज्य का भी उल्लेख करता है । एक हज़ार एक सौ चौंतीस में सिगर वत्सराज नामक एक गाहूडवाल सामन्त को भी रापडि विषय मे उही शर्तों पर एक अनुदान देते देखते हैं जिन त पर उनका गाहवाल प्रभु दता था, यद्यपि सम्भावना एसी है कि उसे अपने प्रभु से भूमि अनुदान प्राप्त न हुआ हो बल्कि प्रभु न उसके छीने हुए प्रवेश उसे फिर वापस कर दिय हा । च देलो के विपरीत गाहडवाल ताम्रपटा में कहीं भी राउतो को ग्राम अनुदान देन का कारण उनकी सनिव सेवा और शौयपूर्ण काय नहीं बताया गया है । इससे हम यह निष्क्ष निकाल सकते हैं कि सामान्य रूप से सभी तरह की सेवाग्रा के लिए दिय जाते थे। लेकिन गाह्डवाल अनुदानपत्राम राज्या धिकारियों की सूची मे राउता और राणका का उल्लेख नहीं हुआ है। इससे प्रकट होता है कि ये सोधे राज्य के नियनण में काम करने वाले सरकारी प्रमले न हो कर गाडवाला के सामत थे । चन्देला की अपेक्षा गाहडवालों के राज्य में राउता की सख्या बहुत अधिक थी । इस बात के कुछ प्रमाण मिनत हैं कि पुरोहिता में अतिरिक्त अन्य नियमित राज्याधिकारिया को भी ग्राम अनुदान दिये जाते थे । एक लाख नौ हज़ार दो सौ तिरेसठ के गाहटवाल ताम्रपटों मे विकरग्रामा शब्द के उल्लेख से यह निरक्ष निकाला जा सकता है। इन अनुदानपत्रा के अनुसार चन्द्रदेव ने पाँच सौ ब्राह्मणा को एक पूरा पत्तल दान कर दिया। अनुदत्त क्षेत्र में इस पत्तल के व गाँव शामिल नही थे जो ब्राह्मणो और मन्दिरा के अधिकार में थे और जो करमुक्त थे। इस अनुदानपत्र म पच्चीस गाँवो को मन्दिरो के अधीन, दो को ब्राह्मण के अधीन और छः को करमुक्त बताया गया है। दयाराम साहनी ने इन गाँवा को कर हीन लोगो के प्रधान माना है, किन्तु एसा मानने का कोई श्रौचित्य नही दिखाई देता वि कर शत का अथ तो करमुक्त वही, पक्तियाँ सत्ताईस तीस ।
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रविवार देर रात को मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि संजय बठला ने गेस्ट टीचरों के पास पहुंचे और उनकी मांगों को पूरा करवाने व CM से उनकी बात करवाने का आश्वासन देकर धरने को समाप्त करवाया। धरना समाप्त करने के बाद प्रदेश भर के गेस्ट टीचरों ने अपने आवासों की तरफ लौट गए।
अपनी मांगों को लेकर रविवार शाम को प्रदेश के गेस्ट टीचरों ने सेक्टर 12 से प्रेम नगर स्थित CM आवास को घेराव किया था। CM आवास से कुछ दूरी पर पुलिस ने गेस्ट टीचरों को ने बेरिकेटिंग कर दी। जिसके बाद प्रदेशभर के गेस्ट टीचर वहीं पर धरना लगा कर बैठ गए थे। प्रदेशभर के गेस्ट टीचरों के धरने को देखते हुए CM प्रतिनिधि संजय बठला ने मौके पर पहुंचकर गेस्ट टीचरों को आश्वान देकर उनका धरना समाप्त करवाया।
CM आवास के बाहर देर रात तक बैठे प्रदर्शनकारी अध्यापकों ने कहा कि हरियाणा में गेस्ट टीचरों की एक पॉलिसी थी, जिसके खिलाफ कोई भी नियमित अध्यापक नहीं आ सकता था। ग्रामीण क्षेत्र के लिए यह पॉलिसी बनाई गई थी, लेकिन इस पॉलिसी के विपरीत में गेस्ट टीचरों की ट्रांसफर कर दी।
अतिथि अध्यापकों के लिए 10-10 जिले मांगे गए और उसमें गृह जिला भी मांगा गया, लेकिन किसी को भी गृह जिला नहीं दिया गया। इसके अलावा 400 किलोमीटर दूर ट्रांसफर कर दी। जिसके विरोध में गेस्ट टीचर्स को प्रदर्शन करना पड़ रहा है। जब तक पॉलिसी वापिस नहीं होती तब तक यूं ही प्रदर्शन चलेगा।
रात के अंधेरे में CM आवास का घेराव करने के लिए पहुंचे गेस्ट टीचर ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ है और लगातार इस पॉलिसी का विरोध करते आ रहे है। लेकिन सरकार उनकी मांगें सुनने तक को भी तैयार नहीं है। रविवार शाम को प्रदेश भर के गेस्ट टीचरों ने करनाल के सेक्टर-12 पार्क से प्रदर्शन करते हुए प्रेमनगर में CM आवास तक पहुंचे।
जिसके बाद पुलिस हरकत में आ गई और पुलिस ने गेस्ट टीचरों को CM आवास से कुछ दूर पहले ही बेरिकेटिंग से रोक लिया। गेस्ट टीचर अपनी मांग पर अडिग रहे और कहा जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे।
देर रात को धरने पर बैठे अतिथि अध्यापकों ने कहा कि सरकार द्वारा उनसे 10-10 जिले मांगे गए और उसमें गृह जिला भी मांगा गया, लेकिन किसी को भी गृह जिला नहीं दिया गया। इसके अलावा 400 किलोमीटर दूर ट्रांसफर कर दी। जिसके विरोध में गेस्ट टीचर्स को प्रदर्शन करना पड़ रहा है। जब तक पॉलिसी वापस नहीं होती तब तक यूं ही प्रदर्शन चलेगा।
मुख्यमंत्री प्रतिनिधि संजय बठला ने बताया कि कुछ टीचर्स की ड्यूटी 200 किलोमीटर दूर तक भी लगी हुई है। टीचर मांग कर रहे है कि उन्हें होम डिस्ट्रिक्ट या फिर साथ लगते जिले में भेजा जाए। हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पॉलिसी बनाई भी हुई हैं कि गेस्ट टीचर्स को होम डिस्ट्रिक्ट में ही रखा, या दूर भी भेजना पड़ रहा हैं तो नजदीकी डिस्ट्रिक्ट में भेजा जाए लेकिन कुछ गेस्ट टीचर्स ने समस्या रखी।
जिसको लेकर मुख्यमंत्री से बात की जाएगी और समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि वह गेस्ट टीचरों के बीच पहुंचे और गेस्ट टीचरों की बात को ध्यान से सुना और उनकी मांग को लेकर ठोस आश्वासन दिया।
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रविवार देर रात को मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि संजय बठला ने गेस्ट टीचरों के पास पहुंचे और उनकी मांगों को पूरा करवाने व CM से उनकी बात करवाने का आश्वासन देकर धरने को समाप्त करवाया। धरना समाप्त करने के बाद प्रदेश भर के गेस्ट टीचरों ने अपने आवासों की तरफ लौट गए। अपनी मांगों को लेकर रविवार शाम को प्रदेश के गेस्ट टीचरों ने सेक्टर बारह से प्रेम नगर स्थित CM आवास को घेराव किया था। CM आवास से कुछ दूरी पर पुलिस ने गेस्ट टीचरों को ने बेरिकेटिंग कर दी। जिसके बाद प्रदेशभर के गेस्ट टीचर वहीं पर धरना लगा कर बैठ गए थे। प्रदेशभर के गेस्ट टीचरों के धरने को देखते हुए CM प्रतिनिधि संजय बठला ने मौके पर पहुंचकर गेस्ट टीचरों को आश्वान देकर उनका धरना समाप्त करवाया। CM आवास के बाहर देर रात तक बैठे प्रदर्शनकारी अध्यापकों ने कहा कि हरियाणा में गेस्ट टीचरों की एक पॉलिसी थी, जिसके खिलाफ कोई भी नियमित अध्यापक नहीं आ सकता था। ग्रामीण क्षेत्र के लिए यह पॉलिसी बनाई गई थी, लेकिन इस पॉलिसी के विपरीत में गेस्ट टीचरों की ट्रांसफर कर दी। अतिथि अध्यापकों के लिए दस-दस जिले मांगे गए और उसमें गृह जिला भी मांगा गया, लेकिन किसी को भी गृह जिला नहीं दिया गया। इसके अलावा चार सौ किलोग्राममीटर दूर ट्रांसफर कर दी। जिसके विरोध में गेस्ट टीचर्स को प्रदर्शन करना पड़ रहा है। जब तक पॉलिसी वापिस नहीं होती तब तक यूं ही प्रदर्शन चलेगा। रात के अंधेरे में CM आवास का घेराव करने के लिए पहुंचे गेस्ट टीचर ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ है और लगातार इस पॉलिसी का विरोध करते आ रहे है। लेकिन सरकार उनकी मांगें सुनने तक को भी तैयार नहीं है। रविवार शाम को प्रदेश भर के गेस्ट टीचरों ने करनाल के सेक्टर-बारह पार्क से प्रदर्शन करते हुए प्रेमनगर में CM आवास तक पहुंचे। जिसके बाद पुलिस हरकत में आ गई और पुलिस ने गेस्ट टीचरों को CM आवास से कुछ दूर पहले ही बेरिकेटिंग से रोक लिया। गेस्ट टीचर अपनी मांग पर अडिग रहे और कहा जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे। देर रात को धरने पर बैठे अतिथि अध्यापकों ने कहा कि सरकार द्वारा उनसे दस-दस जिले मांगे गए और उसमें गृह जिला भी मांगा गया, लेकिन किसी को भी गृह जिला नहीं दिया गया। इसके अलावा चार सौ किलोग्राममीटर दूर ट्रांसफर कर दी। जिसके विरोध में गेस्ट टीचर्स को प्रदर्शन करना पड़ रहा है। जब तक पॉलिसी वापस नहीं होती तब तक यूं ही प्रदर्शन चलेगा। मुख्यमंत्री प्रतिनिधि संजय बठला ने बताया कि कुछ टीचर्स की ड्यूटी दो सौ किलोग्राममीटर दूर तक भी लगी हुई है। टीचर मांग कर रहे है कि उन्हें होम डिस्ट्रिक्ट या फिर साथ लगते जिले में भेजा जाए। हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पॉलिसी बनाई भी हुई हैं कि गेस्ट टीचर्स को होम डिस्ट्रिक्ट में ही रखा, या दूर भी भेजना पड़ रहा हैं तो नजदीकी डिस्ट्रिक्ट में भेजा जाए लेकिन कुछ गेस्ट टीचर्स ने समस्या रखी। जिसको लेकर मुख्यमंत्री से बात की जाएगी और समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि वह गेस्ट टीचरों के बीच पहुंचे और गेस्ट टीचरों की बात को ध्यान से सुना और उनकी मांग को लेकर ठोस आश्वासन दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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आपने सही डाइट ली और खूब एक्सरसाइज की, लेकिन उसके बाद भी पीरियड के दौरान ब्लोटिंग रहती है। पीरियड के बाद वजन भी बढ़ा हुआ लगता है। ऐसा क्यों होता है, चलिए जानते हैं।
वजन घटाने के लिए हम सही डाइट ले रहे हैं और एक्सरसाइज भी कर रहे हैं। इसके बाद भी वजन घटता हुआ नजर नहीं आता है। कई बार वजन पहले से ज्यादा बढ़ा हुआ नजर आता है। पीरियड्स के दौरान तो और भी ज्यादा समस्या होने लगती है। पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम के बाद भी पीरियड्स के दौरान ब्लोटिंग रहती है। पेट फूला और अक्सर भरा-भरा लगता है। इसके बाद अचानक वजन बढ़ा हुआ लगता है। इस वजह से कपड़े भी टाइट होने लगते हैं और असहजता महसूस होती है।
अगर यह आपके साथ भी हो रहा है, तो आप अकेली नहीं हैं। पीरियड में वजन बढ़ना वास्तविक है और काफी सामान्य है। महीने के उन 5 दर्दनाक दिनों के करीब, ज्यादातर महिलाओं का वजन बढ़ता है लेकिन यह अस्थायी होता है। ऐसे में आपकी सही डाइट भी काम नहीं करती है, लेकिन ऐसा क्यों होता है, चलिए इस आर्टिकल में आपको बताएं।
पीरियड्स के दौरान, वजन का बढ़ना वॉटर रिटेंशन के कारण होता है। यह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के कारण होता है, जो पीरियड से पहले तेजी से घटते हैं। इन हार्मोन के स्तर में गिरावट आपके शरीर को बताती है कि मासिक धर्म शुरू होने का समय आ गया है। ये दो हार्मोन इलेक्ट्रोलाइट्स संतुलन के प्रबंधन के लिए भी जिम्मेदार हैं और इसमें उतार-चढ़ाव, टिश्यू को अधिक तरल पदार्थ जमा करने के लिए मजबूर करता है, जिसके कारण वॉटर रिटेंशन होता है। इससे स्तनों और पेट में सूजन आ जाती है।
लेखिका और अवॉर्ड विनिंग न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. विशाखा इंस्टाग्राम पर हेल्थ संबंधी तमाम जानकारी साझा करती रहती हैं। अपने एक पोस्ट में बताया है कि डाइट के बाद भी वजन बढ़ने का क्या कारण? वह बताती हैं, "महिलाओं को चक्र के समय के अनुसार हार्मोन को सिंक करने की आवश्यकता होती है। आपके चक्र के समय के आधार पर आपके हार्मोन बदलते हैं। इस दौरान इंसुलिन का लेवल बढ़ता है और वह जरूरी भी है, क्योंकि तभी आपकी प्रोजेस्टेरोन लेवन भी बढ़ेगा, जो आवश्यक है। पीरियड से हफ्ता भर पहले हमे ब्लोटिंग होती है और वॉटर वेट होने लगता है और इससे महिलाएं दुखी हो जाती हैं कि सब सही करने के बाद भी वेट नहीं घट रहा है। "
ऐसे में हम यह गलती करते हैं कि अपनी कैलोरी को और कम करने की कोशिश करते हैं। खाना कम कर देते हैं और एक्सरसाइज ज्यादा करने लगते हैं। इससे आपका कोर्टिसोल लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और प्रोजेस्टेरोन लेवल तेजी से घट जाता है। प्रोजेस्टेरोन लेवल कम होने का मतलब है कि आपकी पीरियड साइकिल बिगड़ जाती है। यही हार्मोनल व्यवधान पैदा करता है और आपकी जो साइकिल 28 या 38 दिनों की होती है, वो पूरी तरह से बदल जाती है। कभी आपको पीरियड देर से आते हैं और कभी आते ही नहीं।
पीरियड से पहले अगर आपको एक्सरसाइज नहीं करनी, तो न करें। अगर आपको चॉकलेट खाने का मन कर रहा है तो बिल्कुल खाएं। चॉकलेट में मैग्नीशियम होता है जो हमारे प्रोजेस्टेरोन लेवल के लिए जरूर है। इस तरह से ध्यान रखें कि हमारा शरीर बहुत स्मार्ट है और वह अपनी जरूरतों को जानता है। आपको समझने की जरूरत है कि क्या आपके साथ क्या हो रहा है। पीरियड के खत्म होने के बाद आपको खूब एक्सरसाइज करने का मन करता है और ऐसा आपको करना भी चाहिए। आपको फास्टिंग करने का मन करता है तो कीजिए, क्योंकि तब आपका एस्ट्रोजन लेवल आपके शरीर को ऐसा करने देता है। इसके लिए जरूर है कि आप आपनी हार्मोन प्रोफाइल को समझें।
इन बातों का ध्यान आप भी रखें और यदि आपको वजन न घटने की चिंता अब तक सता रही थी, तो उससे भी मुक्त हो जाइए। पीरियड्स के दौरान ही नहीं, आम दिनों में भी अपने आहार में पौष्टिक आहार शामिल करें।
हमें उम्मीद है यह जानकारी आपको पसंद आएगी। अगर यह लेख पसंद आया तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें और ऐसे ही लेख पढ़ने के लिए विजिट करें हरजिंदगी।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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आपने सही डाइट ली और खूब एक्सरसाइज की, लेकिन उसके बाद भी पीरियड के दौरान ब्लोटिंग रहती है। पीरियड के बाद वजन भी बढ़ा हुआ लगता है। ऐसा क्यों होता है, चलिए जानते हैं। वजन घटाने के लिए हम सही डाइट ले रहे हैं और एक्सरसाइज भी कर रहे हैं। इसके बाद भी वजन घटता हुआ नजर नहीं आता है। कई बार वजन पहले से ज्यादा बढ़ा हुआ नजर आता है। पीरियड्स के दौरान तो और भी ज्यादा समस्या होने लगती है। पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम के बाद भी पीरियड्स के दौरान ब्लोटिंग रहती है। पेट फूला और अक्सर भरा-भरा लगता है। इसके बाद अचानक वजन बढ़ा हुआ लगता है। इस वजह से कपड़े भी टाइट होने लगते हैं और असहजता महसूस होती है। अगर यह आपके साथ भी हो रहा है, तो आप अकेली नहीं हैं। पीरियड में वजन बढ़ना वास्तविक है और काफी सामान्य है। महीने के उन पाँच दर्दनाक दिनों के करीब, ज्यादातर महिलाओं का वजन बढ़ता है लेकिन यह अस्थायी होता है। ऐसे में आपकी सही डाइट भी काम नहीं करती है, लेकिन ऐसा क्यों होता है, चलिए इस आर्टिकल में आपको बताएं। पीरियड्स के दौरान, वजन का बढ़ना वॉटर रिटेंशन के कारण होता है। यह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के कारण होता है, जो पीरियड से पहले तेजी से घटते हैं। इन हार्मोन के स्तर में गिरावट आपके शरीर को बताती है कि मासिक धर्म शुरू होने का समय आ गया है। ये दो हार्मोन इलेक्ट्रोलाइट्स संतुलन के प्रबंधन के लिए भी जिम्मेदार हैं और इसमें उतार-चढ़ाव, टिश्यू को अधिक तरल पदार्थ जमा करने के लिए मजबूर करता है, जिसके कारण वॉटर रिटेंशन होता है। इससे स्तनों और पेट में सूजन आ जाती है। लेखिका और अवॉर्ड विनिंग न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. विशाखा इंस्टाग्राम पर हेल्थ संबंधी तमाम जानकारी साझा करती रहती हैं। अपने एक पोस्ट में बताया है कि डाइट के बाद भी वजन बढ़ने का क्या कारण? वह बताती हैं, "महिलाओं को चक्र के समय के अनुसार हार्मोन को सिंक करने की आवश्यकता होती है। आपके चक्र के समय के आधार पर आपके हार्मोन बदलते हैं। इस दौरान इंसुलिन का लेवल बढ़ता है और वह जरूरी भी है, क्योंकि तभी आपकी प्रोजेस्टेरोन लेवन भी बढ़ेगा, जो आवश्यक है। पीरियड से हफ्ता भर पहले हमे ब्लोटिंग होती है और वॉटर वेट होने लगता है और इससे महिलाएं दुखी हो जाती हैं कि सब सही करने के बाद भी वेट नहीं घट रहा है। " ऐसे में हम यह गलती करते हैं कि अपनी कैलोरी को और कम करने की कोशिश करते हैं। खाना कम कर देते हैं और एक्सरसाइज ज्यादा करने लगते हैं। इससे आपका कोर्टिसोल लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और प्रोजेस्टेरोन लेवल तेजी से घट जाता है। प्रोजेस्टेरोन लेवल कम होने का मतलब है कि आपकी पीरियड साइकिल बिगड़ जाती है। यही हार्मोनल व्यवधान पैदा करता है और आपकी जो साइकिल अट्ठाईस या अड़तीस दिनों की होती है, वो पूरी तरह से बदल जाती है। कभी आपको पीरियड देर से आते हैं और कभी आते ही नहीं। पीरियड से पहले अगर आपको एक्सरसाइज नहीं करनी, तो न करें। अगर आपको चॉकलेट खाने का मन कर रहा है तो बिल्कुल खाएं। चॉकलेट में मैग्नीशियम होता है जो हमारे प्रोजेस्टेरोन लेवल के लिए जरूर है। इस तरह से ध्यान रखें कि हमारा शरीर बहुत स्मार्ट है और वह अपनी जरूरतों को जानता है। आपको समझने की जरूरत है कि क्या आपके साथ क्या हो रहा है। पीरियड के खत्म होने के बाद आपको खूब एक्सरसाइज करने का मन करता है और ऐसा आपको करना भी चाहिए। आपको फास्टिंग करने का मन करता है तो कीजिए, क्योंकि तब आपका एस्ट्रोजन लेवल आपके शरीर को ऐसा करने देता है। इसके लिए जरूर है कि आप आपनी हार्मोन प्रोफाइल को समझें। इन बातों का ध्यान आप भी रखें और यदि आपको वजन न घटने की चिंता अब तक सता रही थी, तो उससे भी मुक्त हो जाइए। पीरियड्स के दौरान ही नहीं, आम दिनों में भी अपने आहार में पौष्टिक आहार शामिल करें। हमें उम्मीद है यह जानकारी आपको पसंद आएगी। अगर यह लेख पसंद आया तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें और ऐसे ही लेख पढ़ने के लिए विजिट करें हरजिंदगी। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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- #चीनये तस्वीरें क्या कहती हैं. . ? चीनी नेताओं से मिलते वक्त अमेरिकी विदेश और वित्त मंत्री की कमर डेढ़ी. .
- #चीनचीन लूट रहा था पाकिस्तान, रास्ते में डटकर खड़े रहे इमरान खान. . शी जिनपिंग ने लिया था पूर्व PM से बदला?
- #चीनExplainer: धीरे-धीरे बैठती जा रही है चीन की अर्थव्यवस्था, अमेरिका बना रहेगा सुपरपावर, भारत अगली शक्ति?
- #चीनना नौकरी मिलती है, ना कोई शादी के लिए देता है बेटी. . चीन के लोगों के लिए 35 साल की उम्र क्यों बनी अभिशाप?
ईरान और सऊदी अरब के बीच दोस्ती कराने के बाद अब चीन दुनिया के सबसे बड़े विवादों में से एक इजरायल-फिलिस्तीन विवाद को खत्म कराने में जुट गया है। चीनी विदेश मंत्री ने अपने इजरायली और फिलिस्तीनी समकक्षों से कहा कि उनका देश शांति वार्ता में मदद करने के लिए तैयार है।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी विदेश मंत्री क्विन गांग ने इजरायल और फिलिस्ती के अपने समकक्ष एली कोहेन और रियाद अल मालिकी से सोमवार को फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए कदम उठाने की अपील की।
चीनी विदेश मंत्री ने इस बातचीत के दौरान कहा कि चीन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने को तैयार है। इजरायल-फिलिस्तीनी शांति वार्ता 2014 से रुकी हुई है। उन्होंने कहा कि बीजिंग जल्द से जल्द वार्ता को फिर से शुरू करने का समर्थन करता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि क्विन ने दोनों विदेश मंत्रियों के साथ वार्ता के दौरान द्विराष्ट्र समाधान को लागू करने के आधार पर शांति वार्ता के लिए दबाव डाला। किन ने कहा, सभी पक्षों को शांति और संयम बनाए रखना चाहिए और अत्यधिक और उत्तेजक शब्दों और कार्यों को रोकना चाहिए।
चीनी विदेश मंत्री किन ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक सुरक्षा पहल को आगे बढ़ाया है। मानना है कि इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे को हल करने की कुंजी आम सुरक्षा की दृष्टि को बनाए रखने में निहित है।
चीनी मंत्री ने कहा कि इजरायल-फिलिस्तीन के मुद्दे पर चीन का कोई स्वार्थ नहीं है, और केवल यह उम्मीद करता है कि इजरायल और फिलिस्तीन शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रह सकते हैं और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की रक्षा कर सकते हैं।
कोहेन ने इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष के समाधान का समर्थन करने की इच्छा के लिए चीन को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल स्थिति को सामान्य करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इस समस्या को अल्पावधि में हल नहीं किया जा सकता है। कोहेन ने कहा कि इजरायल चीन के प्रभाव को महत्व देता है।
इजरायली विदेश मंत्री ने कहा कि इजरायल की चिंता ईरानी परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी है। वह चीन से इस मसले पर सकारात्मक भूमिका निभाने की उम्मीद करता है। इस बातचीत के दौरान चीनी मंत्री ने खासतौर पर कहा कि बीजिंग के बदौलत ही ईरान-अरब करीब आए हैं।
Iran-Saudi Arabia: चीन बना मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा पावर, क्या ये अमेरिका के पतन की शुरुआत है?
आपको बता दें कि चीन के प्रयास के बाद सऊदी अरब और ईरान करीब सात साल बाद औपचारिक रिश्तों की नई शुरुआत करने जा रहे हैं। इसी क्रम में एक ईरानी दूत सऊदी अरब पहुंचा और अब सऊदी अरब का एक प्रतिनिधिमंडल ईरान की यात्रा पर है। पिछले महीने चीन द्वारा मध्यस्थता किए जाने के बाद ईरान और सऊदी अरब के राजनयिक रिश्ते बहाल हो रहे हैं।
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- #चीनये तस्वीरें क्या कहती हैं. . ? चीनी नेताओं से मिलते वक्त अमेरिकी विदेश और वित्त मंत्री की कमर डेढ़ी. . - #चीनचीन लूट रहा था पाकिस्तान, रास्ते में डटकर खड़े रहे इमरान खान. . शी जिनपिंग ने लिया था पूर्व PM से बदला? - #चीनExplainer: धीरे-धीरे बैठती जा रही है चीन की अर्थव्यवस्था, अमेरिका बना रहेगा सुपरपावर, भारत अगली शक्ति? - #चीनना नौकरी मिलती है, ना कोई शादी के लिए देता है बेटी. . चीन के लोगों के लिए पैंतीस साल की उम्र क्यों बनी अभिशाप? ईरान और सऊदी अरब के बीच दोस्ती कराने के बाद अब चीन दुनिया के सबसे बड़े विवादों में से एक इजरायल-फिलिस्तीन विवाद को खत्म कराने में जुट गया है। चीनी विदेश मंत्री ने अपने इजरायली और फिलिस्तीनी समकक्षों से कहा कि उनका देश शांति वार्ता में मदद करने के लिए तैयार है। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी विदेश मंत्री क्विन गांग ने इजरायल और फिलिस्ती के अपने समकक्ष एली कोहेन और रियाद अल मालिकी से सोमवार को फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए कदम उठाने की अपील की। चीनी विदेश मंत्री ने इस बातचीत के दौरान कहा कि चीन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने को तैयार है। इजरायल-फिलिस्तीनी शांति वार्ता दो हज़ार चौदह से रुकी हुई है। उन्होंने कहा कि बीजिंग जल्द से जल्द वार्ता को फिर से शुरू करने का समर्थन करता है। रिपोर्ट में बताया गया कि क्विन ने दोनों विदेश मंत्रियों के साथ वार्ता के दौरान द्विराष्ट्र समाधान को लागू करने के आधार पर शांति वार्ता के लिए दबाव डाला। किन ने कहा, सभी पक्षों को शांति और संयम बनाए रखना चाहिए और अत्यधिक और उत्तेजक शब्दों और कार्यों को रोकना चाहिए। चीनी विदेश मंत्री किन ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक सुरक्षा पहल को आगे बढ़ाया है। मानना है कि इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे को हल करने की कुंजी आम सुरक्षा की दृष्टि को बनाए रखने में निहित है। चीनी मंत्री ने कहा कि इजरायल-फिलिस्तीन के मुद्दे पर चीन का कोई स्वार्थ नहीं है, और केवल यह उम्मीद करता है कि इजरायल और फिलिस्तीन शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रह सकते हैं और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की रक्षा कर सकते हैं। कोहेन ने इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष के समाधान का समर्थन करने की इच्छा के लिए चीन को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल स्थिति को सामान्य करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इस समस्या को अल्पावधि में हल नहीं किया जा सकता है। कोहेन ने कहा कि इजरायल चीन के प्रभाव को महत्व देता है। इजरायली विदेश मंत्री ने कहा कि इजरायल की चिंता ईरानी परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी है। वह चीन से इस मसले पर सकारात्मक भूमिका निभाने की उम्मीद करता है। इस बातचीत के दौरान चीनी मंत्री ने खासतौर पर कहा कि बीजिंग के बदौलत ही ईरान-अरब करीब आए हैं। Iran-Saudi Arabia: चीन बना मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा पावर, क्या ये अमेरिका के पतन की शुरुआत है? आपको बता दें कि चीन के प्रयास के बाद सऊदी अरब और ईरान करीब सात साल बाद औपचारिक रिश्तों की नई शुरुआत करने जा रहे हैं। इसी क्रम में एक ईरानी दूत सऊदी अरब पहुंचा और अब सऊदी अरब का एक प्रतिनिधिमंडल ईरान की यात्रा पर है। पिछले महीने चीन द्वारा मध्यस्थता किए जाने के बाद ईरान और सऊदी अरब के राजनयिक रिश्ते बहाल हो रहे हैं।
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"प्रार्यावर्त्त देश के इतिहास में ऐसे अनेक दृष्टान्त पाये जाते हैं कि जब यात भारत-सुधार के लिये महात्माओं का जन्म हुआ हो ।"
भगवान दयानन्द का जन्म भी एक परिवर्तन के युग में हुआ । इतिहास के विद्यार्थी अच्छी प्रकार जानते हैं कि उस समय भारत में एक बड़ा भारी विप्लव मचा हुआ था। राष्ट्रीय शक्ति किसी एक सूत्र में श्राद्ध न थी । सर्वत्र भिन्न २ नवीन शक्तियां अपने यौवनकाल पर लहरा रहीं थीं। महाराष्ट्र का महा बल शक्ति सम्पन्न अंग्रेजों से भिड़ने को कटिवद्ध हो चुका था । पञ्जाब केसरी महाराजा ग्गाजीनसिंह ने स्वदुंदुभिनाद् से उत्तरीय भारत के कोने कोने को प्रतिध्वनित कर दिया था । समरशालिनी संधिया शक्ति की स्वाधीनता का सूर्य अस्ताचल का आश्रय ले रहा था। ब्रह्मदेश के स्वाधीनताकाश को परसन्त्रता के मेघमण्डल ने आच्छादित कर दिया था। लुटेरों के अत्याचार, अहर्निश युद्ध के से सर्वत्र अशान्ति के समाचार कर्णगोचर होते थे। देशवासी इस प्रशान्तियुग में भयभीत और शंकित चित्त हो जीवनकाल की गणना उंगलियों पर कर रहे थे ।
भारत में सामाजिक दशा भी अत्यन्त शोचनीय थी । ऋऋषिभूमि भारत माता की गोद कुरीतियों की क्रीड़ाभूमि बन्न गई थी । विधाओं के विलाप, छोटी २ कन्याओं के अलाप, और दीन दुखित जनों के प्रलाप से भारत का कामडल
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"प्रार्यावर्त्त देश के इतिहास में ऐसे अनेक दृष्टान्त पाये जाते हैं कि जब यात भारत-सुधार के लिये महात्माओं का जन्म हुआ हो ।" भगवान दयानन्द का जन्म भी एक परिवर्तन के युग में हुआ । इतिहास के विद्यार्थी अच्छी प्रकार जानते हैं कि उस समय भारत में एक बड़ा भारी विप्लव मचा हुआ था। राष्ट्रीय शक्ति किसी एक सूत्र में श्राद्ध न थी । सर्वत्र भिन्न दो नवीन शक्तियां अपने यौवनकाल पर लहरा रहीं थीं। महाराष्ट्र का महा बल शक्ति सम्पन्न अंग्रेजों से भिड़ने को कटिवद्ध हो चुका था । पञ्जाब केसरी महाराजा ग्गाजीनसिंह ने स्वदुंदुभिनाद् से उत्तरीय भारत के कोने कोने को प्रतिध्वनित कर दिया था । समरशालिनी संधिया शक्ति की स्वाधीनता का सूर्य अस्ताचल का आश्रय ले रहा था। ब्रह्मदेश के स्वाधीनताकाश को परसन्त्रता के मेघमण्डल ने आच्छादित कर दिया था। लुटेरों के अत्याचार, अहर्निश युद्ध के से सर्वत्र अशान्ति के समाचार कर्णगोचर होते थे। देशवासी इस प्रशान्तियुग में भयभीत और शंकित चित्त हो जीवनकाल की गणना उंगलियों पर कर रहे थे । भारत में सामाजिक दशा भी अत्यन्त शोचनीय थी । ऋऋषिभूमि भारत माता की गोद कुरीतियों की क्रीड़ाभूमि बन्न गई थी । विधाओं के विलाप, छोटी दो कन्याओं के अलाप, और दीन दुखित जनों के प्रलाप से भारत का कामडल
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पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार सुबह को स्थानीय लोगों ने 62 वर्षीय व्यक्ति, उसकी 57 वर्षीय पत्नी और 12 वर्षीय पोती को मृत पाया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह कवर ने बताया कि जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर मोहगांव थाना क्षेत्र के पटादेई गांव में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात को हमलावरों ने अपने घर की छत पर सोते समय दंपति का गला काट दिया।
मोहगांव थाना प्रभारी एसएल मरकाम ने कहा कि हमलावरों ने महिला का सिर काट दिया और घर से एक किलोमीटर दूर एक खेत में पेड़ से लटका दिया। सूचना मिलने के बाद मंगलवार सुबह को पुलिस मौके पर पहुंची।
उन्होंने कहा कि पुलिस घटना की जांच कर रही है और मृतक के परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
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पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार सुबह को स्थानीय लोगों ने बासठ वर्षीय व्यक्ति, उसकी सत्तावन वर्षीय पत्नी और बारह वर्षीय पोती को मृत पाया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह कवर ने बताया कि जिला मुख्यालय से लगभग चालीस किलोग्राममीटर दूर मोहगांव थाना क्षेत्र के पटादेई गांव में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात को हमलावरों ने अपने घर की छत पर सोते समय दंपति का गला काट दिया। मोहगांव थाना प्रभारी एसएल मरकाम ने कहा कि हमलावरों ने महिला का सिर काट दिया और घर से एक किलोमीटर दूर एक खेत में पेड़ से लटका दिया। सूचना मिलने के बाद मंगलवार सुबह को पुलिस मौके पर पहुंची। उन्होंने कहा कि पुलिस घटना की जांच कर रही है और मृतक के परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
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यूक्रेनी राष्ट्रपति विक्टर Yanukovych के बयान, जो फरवरी 2014 में भाग गए थे, उनकी राजनीति में वापसी ने सभी को विस्मय में डाल दिया। रूसी, यूक्रेन के निवासी, डोनबास के निवासी। हर कोई Yanukovych की गुणवत्ता और नीति को समझने की कोशिश कर रहा है। आखिरकार, पूर्व राष्ट्रपति के लिए "प्रेम" का स्तर यह है कि जो यूक्रेन में हैं, कि उनके विरोधी, उसी के बारे में हैं।
मैदान के समर्थकों, वास्तव में, यानुकोविच के खिलाफ और मंचन का विरोध किया, और डोनबास में वे अपने विश्वासघात को कभी माफ नहीं करेंगे, जिसकी बदौलत मैदान-विरोधी ताकतें उस समय भी एकजुट नहीं हो सकीं, जब मैदान को कली में नंगा किया जा सकता था, जिसका परिणाम अंततः हुआ। ।
अपने साक्षात्कार में, जो रूसी टेलीविजन चैनलों पर दिखाया गया था, Yanukovych ने वर्षों में 2013 और 2015 के बीच कई सादृश्यताएं आयोजित कीं। विक्टर फेडोरोविच ने यूक्रेन में होने वाली प्रक्रियाओं की तुलना की। स्वाभाविक रूप से, उनके पक्ष में। यहां, जैसे कि बिल्कुल कुछ भी नहीं है, वास्तव में तुलना करने के लिए कुछ है। जब Yanukovych बेहतर था।
हालांकि, अगर विक्टर फेडोरोविच ने इसे ठीक से खेलने का फैसला किया, तो इस तरह की उम्मीदें दिखती हैं, इसे हल्के ढंग से कहने के लिए। इसके अलावा, Yanukovych खुद इसके लिए दोषी है।
अगर, उसके भागने के बाद, विक्टर फ्योडोरोविच को याद आया कि वह डोनबास से आया था, अगर वह उन लोगों में शामिल हो गया जो वास्तव में उस शासन का विरोध करने का फैसला करते थे जो उसे बदलने के लिए आया था, तो कोई कुछ उम्मीद कर सकता है।
डोनबास में पहले हफ्तों की तरह, उन्हें उम्मीद थी कि उनके देशवासी और वैध रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति डोनबेस में उन सभी ताकतों की रैली करने के लिए आएंगे जो जांटा का विरोध कर सकते हैं।
हालांकि, पहले डोनबास में Yanukovych ने रोस्तोव को पहले पसंद किया, और फिर मास्को। जहां वह शांत और शांत था। और उनकी सारी गतिविधि मीडिया में अस्पष्ट बयानों के एक जोड़े तक सीमित थी।
वैसे, मुझे याद है कि कैसे लोग डोनबस में उसके शब्दों का इंतजार करते थे और बाद में कैसे उगलते थे।
और पिछले कुछ समय से, राजनीतिक और सैन्य नेताओं ने डोनबास में विकास किया है। यह अच्छा है या बुरा यह एक और सवाल है। लेकिन वे वहीं बड़े हुए। और Yanukovych अभी भी रूस में यहाँ है। "कोई भी कॉल नहीं कर सकता" के रैंक में। यहां तक कि यूक्रेन की साल्वेशन कमेटी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधानमंत्री मायकोला अजरोव करते हैं, पूर्व राष्ट्रपति की तुलना में अधिक सम्मानित और चौकस है।
अपने बयान में, Yanukovych का उल्लेख है कि वह कथित रूप से उन लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करता है जो यूक्रेन में सताए गए हैं और जो लोग छोड़ने में कामयाब रहे। ये कुछ नहीं के बारे में शब्द हैं। किसी ने भी Yanukovych फाउंडेशन के बारे में नहीं सुना था, जो इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देगा, न ही उन लोगों में से जो विक्टर फेडोरोविच को यूक्रेन की सुरक्षा सेवा के काल कोठरी से बाहर निकलने में मदद करेंगे और न ही उनके खर्च पर बनने वाले डोनबास के मानवीय काफिले।
अफवाहों के अनुसार एक साधन बड़ा है। Rublevka पर एक मामूली घर में पर्याप्त। खैर, हाँ, यह विक्टर फेडोरोविच नहीं है, यह उसका बेटा है जिसने इसे खरीदा था। व्यापारी और उद्यमी। हालांकि, विक्टर फेडोरोविच, हम आपके पूर्व निवास में निगरानी कैमरों से हेलीकाप्टरों में बक्से लोड करने के साथ वीडियो को भी नहीं भूले। और अभी भी कमजोर रूप से मानते हैं कि राष्ट्रीय महत्व के दस्तावेज थे। कुछ इस तरह।
यह कहना मुश्किल है कि (या किसने) Yanukovych को इस भाषण में धकेल दिया, लेकिन आज हम केवल विश्वास के साथ कह सकते हैं कि वी. एफ. Yanukovych - 100% राजनीतिक लाश। दोनों यूक्रेन में और डोनबास में। हाँ, और रूस में भी, हालाँकि हमारे पास उसके लिए कुछ है?
जगह लेने के लिए "मैं वापस आऊंगा" के लिए, यह अब पुनर्जीवन टीम नहीं है, बल्कि एक अनुभवी नेक्रोमन्ट है। कोई और नहीं विक्टर फेडोरोविच की मदद कर सकता है। लेकिन आजकल नेक्रोमेंसी एक फिसलन भरा व्यवसाय है।
Yanukovych से लौह टर्मिनेटर तब भी काम नहीं किया, जलती हुई कीव में। यह अब काम नहीं करेगा, इस तथ्य के बावजूद कि समय बहुत बदल गया है। और इस तथ्य पर भरोसा करने के लिए कि, नए अधिकारियों द्वारा "डंक मारा गया", यूक्रेनी और डोनबास लोग अपने पूर्व राष्ट्रपति की बाहों में भाग जाएंगे, वे निश्चित रूप से इसके लायक नहीं हैं।
ईमानदारी से, विक्टर फेडोरोविच, यह सब क्यों? गर्म समय में मास्को में रुके थे, और अच्छे काम करते रहे। संस्मरण लिखे जा सकते हैं, पोते फिर से जुड़ जाते हैं। आपको इस नीति की आवश्यकता क्यों है? इसके अलावा, यह स्पष्ट नहीं है कि कहां और किसके साथ स्पष्ट नहीं है। और नेक्रोमेंसी के बारे में भूल जाओ, यह अच्छी बात नहीं है।
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यूक्रेनी राष्ट्रपति विक्टर Yanukovych के बयान, जो फरवरी दो हज़ार चौदह में भाग गए थे, उनकी राजनीति में वापसी ने सभी को विस्मय में डाल दिया। रूसी, यूक्रेन के निवासी, डोनबास के निवासी। हर कोई Yanukovych की गुणवत्ता और नीति को समझने की कोशिश कर रहा है। आखिरकार, पूर्व राष्ट्रपति के लिए "प्रेम" का स्तर यह है कि जो यूक्रेन में हैं, कि उनके विरोधी, उसी के बारे में हैं। मैदान के समर्थकों, वास्तव में, यानुकोविच के खिलाफ और मंचन का विरोध किया, और डोनबास में वे अपने विश्वासघात को कभी माफ नहीं करेंगे, जिसकी बदौलत मैदान-विरोधी ताकतें उस समय भी एकजुट नहीं हो सकीं, जब मैदान को कली में नंगा किया जा सकता था, जिसका परिणाम अंततः हुआ। । अपने साक्षात्कार में, जो रूसी टेलीविजन चैनलों पर दिखाया गया था, Yanukovych ने वर्षों में दो हज़ार तेरह और दो हज़ार पंद्रह के बीच कई सादृश्यताएं आयोजित कीं। विक्टर फेडोरोविच ने यूक्रेन में होने वाली प्रक्रियाओं की तुलना की। स्वाभाविक रूप से, उनके पक्ष में। यहां, जैसे कि बिल्कुल कुछ भी नहीं है, वास्तव में तुलना करने के लिए कुछ है। जब Yanukovych बेहतर था। हालांकि, अगर विक्टर फेडोरोविच ने इसे ठीक से खेलने का फैसला किया, तो इस तरह की उम्मीदें दिखती हैं, इसे हल्के ढंग से कहने के लिए। इसके अलावा, Yanukovych खुद इसके लिए दोषी है। अगर, उसके भागने के बाद, विक्टर फ्योडोरोविच को याद आया कि वह डोनबास से आया था, अगर वह उन लोगों में शामिल हो गया जो वास्तव में उस शासन का विरोध करने का फैसला करते थे जो उसे बदलने के लिए आया था, तो कोई कुछ उम्मीद कर सकता है। डोनबास में पहले हफ्तों की तरह, उन्हें उम्मीद थी कि उनके देशवासी और वैध रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति डोनबेस में उन सभी ताकतों की रैली करने के लिए आएंगे जो जांटा का विरोध कर सकते हैं। हालांकि, पहले डोनबास में Yanukovych ने रोस्तोव को पहले पसंद किया, और फिर मास्को। जहां वह शांत और शांत था। और उनकी सारी गतिविधि मीडिया में अस्पष्ट बयानों के एक जोड़े तक सीमित थी। वैसे, मुझे याद है कि कैसे लोग डोनबस में उसके शब्दों का इंतजार करते थे और बाद में कैसे उगलते थे। और पिछले कुछ समय से, राजनीतिक और सैन्य नेताओं ने डोनबास में विकास किया है। यह अच्छा है या बुरा यह एक और सवाल है। लेकिन वे वहीं बड़े हुए। और Yanukovych अभी भी रूस में यहाँ है। "कोई भी कॉल नहीं कर सकता" के रैंक में। यहां तक कि यूक्रेन की साल्वेशन कमेटी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधानमंत्री मायकोला अजरोव करते हैं, पूर्व राष्ट्रपति की तुलना में अधिक सम्मानित और चौकस है। अपने बयान में, Yanukovych का उल्लेख है कि वह कथित रूप से उन लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करता है जो यूक्रेन में सताए गए हैं और जो लोग छोड़ने में कामयाब रहे। ये कुछ नहीं के बारे में शब्द हैं। किसी ने भी Yanukovych फाउंडेशन के बारे में नहीं सुना था, जो इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देगा, न ही उन लोगों में से जो विक्टर फेडोरोविच को यूक्रेन की सुरक्षा सेवा के काल कोठरी से बाहर निकलने में मदद करेंगे और न ही उनके खर्च पर बनने वाले डोनबास के मानवीय काफिले। अफवाहों के अनुसार एक साधन बड़ा है। Rublevka पर एक मामूली घर में पर्याप्त। खैर, हाँ, यह विक्टर फेडोरोविच नहीं है, यह उसका बेटा है जिसने इसे खरीदा था। व्यापारी और उद्यमी। हालांकि, विक्टर फेडोरोविच, हम आपके पूर्व निवास में निगरानी कैमरों से हेलीकाप्टरों में बक्से लोड करने के साथ वीडियो को भी नहीं भूले। और अभी भी कमजोर रूप से मानते हैं कि राष्ट्रीय महत्व के दस्तावेज थे। कुछ इस तरह। यह कहना मुश्किल है कि Yanukovych को इस भाषण में धकेल दिया, लेकिन आज हम केवल विश्वास के साथ कह सकते हैं कि वी. एफ. Yanukovych - एक सौ% राजनीतिक लाश। दोनों यूक्रेन में और डोनबास में। हाँ, और रूस में भी, हालाँकि हमारे पास उसके लिए कुछ है? जगह लेने के लिए "मैं वापस आऊंगा" के लिए, यह अब पुनर्जीवन टीम नहीं है, बल्कि एक अनुभवी नेक्रोमन्ट है। कोई और नहीं विक्टर फेडोरोविच की मदद कर सकता है। लेकिन आजकल नेक्रोमेंसी एक फिसलन भरा व्यवसाय है। Yanukovych से लौह टर्मिनेटर तब भी काम नहीं किया, जलती हुई कीव में। यह अब काम नहीं करेगा, इस तथ्य के बावजूद कि समय बहुत बदल गया है। और इस तथ्य पर भरोसा करने के लिए कि, नए अधिकारियों द्वारा "डंक मारा गया", यूक्रेनी और डोनबास लोग अपने पूर्व राष्ट्रपति की बाहों में भाग जाएंगे, वे निश्चित रूप से इसके लायक नहीं हैं। ईमानदारी से, विक्टर फेडोरोविच, यह सब क्यों? गर्म समय में मास्को में रुके थे, और अच्छे काम करते रहे। संस्मरण लिखे जा सकते हैं, पोते फिर से जुड़ जाते हैं। आपको इस नीति की आवश्यकता क्यों है? इसके अलावा, यह स्पष्ट नहीं है कि कहां और किसके साथ स्पष्ट नहीं है। और नेक्रोमेंसी के बारे में भूल जाओ, यह अच्छी बात नहीं है।
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कोच्चि, 19 जुलाई केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को पुलिस को निर्देश दिया कि वह तिरुवनंतपुरम के एक निवासी को अपने घर की छत से पक्षियों को फिलहाल हटाने के लिए न कहें।
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी ने तिरुवनंतपुरम के करमाना थाना के थाना अधिकारी (एसएचओ) और क्षेत्र निरीक्षक को निर्देश जारी किया।
अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय और केरल पुलिस को भी नोटिस जारी कर उस व्यक्ति की याचिका पर अपना पक्ष रखने को कहा जिसमें उसने आरोप लगाया है कि उसे और उसके परिवार के सदस्यों को दो अधिकारी अपने घर में पालतू पक्षी रखने के लिए परेशान कर रहे हैं।
अदालत ने पुलिस की ओर से पेश वकील को इस बात की रिपोर्ट करने का निर्देश दिया कि क्या याचिकाकर्ता पक्षियों को पालतू बनाकर कानून के किसी प्रावधान का उल्लंघन कर रहा है।
अदालत ने कहा, "प्रतिवादी संख्या दो (क्षेत्र निरीक्षक) और तीन (एसएचओ) को निर्देश दिया जाए कि वे याचिकाकर्ता पर अपने घर की छत से पक्षियों को फिलहाल हटाने के लिए दबाव न डालें।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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कोच्चि, उन्नीस जुलाई केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को पुलिस को निर्देश दिया कि वह तिरुवनंतपुरम के एक निवासी को अपने घर की छत से पक्षियों को फिलहाल हटाने के लिए न कहें। न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी ने तिरुवनंतपुरम के करमाना थाना के थाना अधिकारी और क्षेत्र निरीक्षक को निर्देश जारी किया। अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय और केरल पुलिस को भी नोटिस जारी कर उस व्यक्ति की याचिका पर अपना पक्ष रखने को कहा जिसमें उसने आरोप लगाया है कि उसे और उसके परिवार के सदस्यों को दो अधिकारी अपने घर में पालतू पक्षी रखने के लिए परेशान कर रहे हैं। अदालत ने पुलिस की ओर से पेश वकील को इस बात की रिपोर्ट करने का निर्देश दिया कि क्या याचिकाकर्ता पक्षियों को पालतू बनाकर कानून के किसी प्रावधान का उल्लंघन कर रहा है। अदालत ने कहा, "प्रतिवादी संख्या दो और तीन को निर्देश दिया जाए कि वे याचिकाकर्ता पर अपने घर की छत से पक्षियों को फिलहाल हटाने के लिए दबाव न डालें। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नई दिल्ली : गुजरात के सूरत में एक शख्स ने अपनी सास का कत्ल सिर्फ इसलिए कर दिया क्योंकि वो आए दिन उसके साथ तकरार करती थी। लेकिन आरोपी अपनी सास से इतनी नफरत करता थी कि उसने सब्जी काटने वाले चाकू से चलती ट्रेन में अपनी सास पर 6 गहरे वार किए हैं। देखा जाये तो जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं मृतका की पहचान माथुरी देवी के रूप में हुई है।
बता दें की माथुरी देवी की बेटी चंपा का विवाह तीन साल पहले सूरत के ही पिंटू सोनकर से हुआ था। जहां ये सभी लोग शराब का काम करते थे। वहीं पिंटू की सास रोज सुबह काम के सिलसिले में दमण जाती थी। बीती 27 मार्च को पिंटू उसके साथ स्टेशन गया।
जहां ट्रेन का एसएलआर कोच में खाली था। लिहाजा वो माथुरी देवी के साथ उसी में बैठ गया। जैसे ही ट्रेन उधना से आगे निकली पिंटू ने अपनी जेब से सब्जी काटने वाला चाकू निकाला और माथुरी देवी पर टूट पड़ा हैं।
दरअसल उसने अपनी सास पर एक बाद एक 6 वार किए और उसे लहूलुहान करके उधना के पास ही चलती ट्रेन से कूद गया। लेकिन वारदात को अंजाम देकर पिंटू पिपलोद की तरफ भाग गया, जहां उसका घर था।
वहीं से वो अपनी पत्नी चंपा और तीन साल के बेटे को साथ लेकर अपने गांव मानिकपुर के लिए निकल पड़ा हैं। लेकिन पहले वो सूरत से मुंबई पहुंचे। फिर वो पैसेंजर ट्रेन से नागपुर चले गए।
इसके बाद वो नागपुर स्टेशन पर उतरे और बिना टिकट नागपुर-जयपुर एक्सप्रेस के एस10 कोच में सवार हो गए. हत्या के करीब 24 घंटे बीत जाने के बाद पिंटू ने ट्रेन में ही अपनी पत्नी को बताया कि उसने माथुरी देवी का मर्डर कर दिया है।
ये बात सुनते ही चंपा के होश उड़ गए। जहां उसने पिंटू पर वापस जाने का दबाव बनाया और वे इटारसी से सूरत जाने का प्लान बना रहे थे, लेकिन वहीं पुलिस ने उसे धरदबोचा।
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नई दिल्ली : गुजरात के सूरत में एक शख्स ने अपनी सास का कत्ल सिर्फ इसलिए कर दिया क्योंकि वो आए दिन उसके साथ तकरार करती थी। लेकिन आरोपी अपनी सास से इतनी नफरत करता थी कि उसने सब्जी काटने वाले चाकू से चलती ट्रेन में अपनी सास पर छः गहरे वार किए हैं। देखा जाये तो जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं मृतका की पहचान माथुरी देवी के रूप में हुई है। बता दें की माथुरी देवी की बेटी चंपा का विवाह तीन साल पहले सूरत के ही पिंटू सोनकर से हुआ था। जहां ये सभी लोग शराब का काम करते थे। वहीं पिंटू की सास रोज सुबह काम के सिलसिले में दमण जाती थी। बीती सत्ताईस मार्च को पिंटू उसके साथ स्टेशन गया। जहां ट्रेन का एसएलआर कोच में खाली था। लिहाजा वो माथुरी देवी के साथ उसी में बैठ गया। जैसे ही ट्रेन उधना से आगे निकली पिंटू ने अपनी जेब से सब्जी काटने वाला चाकू निकाला और माथुरी देवी पर टूट पड़ा हैं। दरअसल उसने अपनी सास पर एक बाद एक छः वार किए और उसे लहूलुहान करके उधना के पास ही चलती ट्रेन से कूद गया। लेकिन वारदात को अंजाम देकर पिंटू पिपलोद की तरफ भाग गया, जहां उसका घर था। वहीं से वो अपनी पत्नी चंपा और तीन साल के बेटे को साथ लेकर अपने गांव मानिकपुर के लिए निकल पड़ा हैं। लेकिन पहले वो सूरत से मुंबई पहुंचे। फिर वो पैसेंजर ट्रेन से नागपुर चले गए। इसके बाद वो नागपुर स्टेशन पर उतरे और बिना टिकट नागपुर-जयपुर एक्सप्रेस के एसदस कोच में सवार हो गए. हत्या के करीब चौबीस घंटाटे बीत जाने के बाद पिंटू ने ट्रेन में ही अपनी पत्नी को बताया कि उसने माथुरी देवी का मर्डर कर दिया है। ये बात सुनते ही चंपा के होश उड़ गए। जहां उसने पिंटू पर वापस जाने का दबाव बनाया और वे इटारसी से सूरत जाने का प्लान बना रहे थे, लेकिन वहीं पुलिस ने उसे धरदबोचा।
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अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले के मिगिंग में शुक्रवार(21 अक्टूबर 2022) सुबह सेना का एक हेलीकॉप्टर रुद्र दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलीकॉप्टर में 5 जवान सवार थे। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से चार के शव बरामद कर लिए गए हैं। एक की तलाश जारी है। इनमें से 2 पायलट हैं।
जानकारी के मुताबिक सेना के जवानों को ले जाने वाला एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) सिंगिंग गाँव के पास सुबह 10 बजकर 43 मिनट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सिंगिंग गाँव तुतिंग मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर है। हेलीकॉप्टर अपने नियमित उड़ान पर था।
पूर्वोत्तर के स्थानीय न्यूज पोर्टल के अनुसार, एएलएच रूद्र पर मेजर विकास भांबू और मेजर मुस्तफा के रूप दो पायलट सवार था। इसके साथ ही तीन तकनीशियन भी इसमें सवार थे। हेलीकॉप्टर ने लिकाबली शहर से उड़ान भरी थी और चीनी सीमा से लगभग 35 किमी दूर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दुर्घटना वाली जगह सडक मार्ग से कनेक्टेड नहीं है। इस वजह से बचाव व राहत कार्य में भी परेशानी आई।
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक ट्वीट में कहा कि अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में भारतीय सेना के उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बारे में बहुत परेशान करने वाली खबर मिली! मेरी गहरी प्रार्थना।
इस महीने राज्य में सेना के हेलीकॉप्टर दुर्घटना की यह दूसरी घटना है। 5 अक्टूबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके के पास चीता हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से भारतीय सेना के एक पायलट वीरगति को प्राप्त हो गए थे।
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अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले के मिगिंग में शुक्रवार सुबह सेना का एक हेलीकॉप्टर रुद्र दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलीकॉप्टर में पाँच जवान सवार थे। न्यूज अट्ठारह की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से चार के शव बरामद कर लिए गए हैं। एक की तलाश जारी है। इनमें से दो पायलट हैं। जानकारी के मुताबिक सेना के जवानों को ले जाने वाला एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर सिंगिंग गाँव के पास सुबह दस बजकर तैंतालीस मिनट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सिंगिंग गाँव तुतिंग मुख्यालय से पच्चीस किलोग्राममीटर दूर है। हेलीकॉप्टर अपने नियमित उड़ान पर था। पूर्वोत्तर के स्थानीय न्यूज पोर्टल के अनुसार, एएलएच रूद्र पर मेजर विकास भांबू और मेजर मुस्तफा के रूप दो पायलट सवार था। इसके साथ ही तीन तकनीशियन भी इसमें सवार थे। हेलीकॉप्टर ने लिकाबली शहर से उड़ान भरी थी और चीनी सीमा से लगभग पैंतीस किमी दूर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दुर्घटना वाली जगह सडक मार्ग से कनेक्टेड नहीं है। इस वजह से बचाव व राहत कार्य में भी परेशानी आई। केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक ट्वीट में कहा कि अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में भारतीय सेना के उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बारे में बहुत परेशान करने वाली खबर मिली! मेरी गहरी प्रार्थना। इस महीने राज्य में सेना के हेलीकॉप्टर दुर्घटना की यह दूसरी घटना है। पाँच अक्टूबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके के पास चीता हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से भारतीय सेना के एक पायलट वीरगति को प्राप्त हो गए थे।
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सीधी जिले में तेंदुए के जबड़े से अपने बच्चे की जान बचाने वाली बहादुर मां को पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। बहादुर किरण बैगा को उत्तम जीवन रक्षा मेडल देने की घोषणा की है। जल्द ही राष्ट्रपति सम्मानित करेंगे। यहां 26 जनवरी को विधायक कुंवर सिंह टेकाम ने किरण को श्रीफल, शाल व 5100 रुपये देकर सम्मानित किया। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी उनकी तारीफ की।
बहादुर माता कुसमी प्रखंड की हैं। यहां संजय टाइगर बफर जोन टमसार रेंज का गांव बाड़ी झरिया। यह तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है। 28 नवंबर 2021 को इसी गांव के शंकर बैगा की पत्नी किरण बैगा देर शाम अपने बच्चों के साथ आग के पास बैठी आग सेंक रही थी. किरण की गोद में एक बच्चा था। जबकि दो बच्चे पास में बैठे थे। इसी बीच अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया। तेंदुए ने एक बच्चे को मुंह में दबा लिया और भाग गया। किरण ने हिम्मत दिखाई और अंधेरे में तेंदुए के पीछे भागी। करीब 1 किमी तक तेंदुए का पीछा करने के बाद किरण अपने बच्चे को बचाने में सफल रही।
हमले में बच्चे के पीठ, गाल और एक आंख में गंभीर चोटें आई थी। घायल को इलाज के लिए कुसमी अस्पताल सहित चित्रकूट अस्पताल में भर्ती कराया गया। इधर जिले सहित पूरे प्रदेश में महिला की वीरता के चर्चे हुए, इस वीरता के लिए उन्हें राष्ट्रपति जीवन रक्षक पदक से नवाजा जाएगा।
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सीधी जिले में तेंदुए के जबड़े से अपने बच्चे की जान बचाने वाली बहादुर मां को पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। बहादुर किरण बैगा को उत्तम जीवन रक्षा मेडल देने की घोषणा की है। जल्द ही राष्ट्रपति सम्मानित करेंगे। यहां छब्बीस जनवरी को विधायक कुंवर सिंह टेकाम ने किरण को श्रीफल, शाल व पाँच हज़ार एक सौ रुपयापये देकर सम्मानित किया। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी उनकी तारीफ की। बहादुर माता कुसमी प्रखंड की हैं। यहां संजय टाइगर बफर जोन टमसार रेंज का गांव बाड़ी झरिया। यह तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है। अट्ठाईस नवंबर दो हज़ार इक्कीस को इसी गांव के शंकर बैगा की पत्नी किरण बैगा देर शाम अपने बच्चों के साथ आग के पास बैठी आग सेंक रही थी. किरण की गोद में एक बच्चा था। जबकि दो बच्चे पास में बैठे थे। इसी बीच अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया। तेंदुए ने एक बच्चे को मुंह में दबा लिया और भाग गया। किरण ने हिम्मत दिखाई और अंधेरे में तेंदुए के पीछे भागी। करीब एक किमी तक तेंदुए का पीछा करने के बाद किरण अपने बच्चे को बचाने में सफल रही। हमले में बच्चे के पीठ, गाल और एक आंख में गंभीर चोटें आई थी। घायल को इलाज के लिए कुसमी अस्पताल सहित चित्रकूट अस्पताल में भर्ती कराया गया। इधर जिले सहित पूरे प्रदेश में महिला की वीरता के चर्चे हुए, इस वीरता के लिए उन्हें राष्ट्रपति जीवन रक्षक पदक से नवाजा जाएगा।
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भारत में दिवाली का इंतजार लगभग सालभर किया जाता है। भारत के साथ दुनियाभर के भारतीय एक साथ दिवाली को खुशियों के रूप में मनाते हैं। इस साल दिवाली 24 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस रोशनी और प्रकाश के त्योहार पर मिठाईयों के साथ उपहार भी दिए जाते हैं। यदि आप भी अपने करीबियों को कोई यूजफुल गिफ्ट देने के बारे में सोच रहे हैं तो यह रिपोर्ट आपके लिए है। इस रिपोर्ट में हम आपको बेस्ट कॉलिंग स्मार्टवॉच के बारे में बताएंगे। चलिए जानते हैं।
3 हजार से कम कीमत में Crossbeats ignite Grit गिफ्ट के लिए बेस्ट ऑप्शन है। इस वॉच को 2,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। वॉच रोयल ब्लू, इंक ब्लू और रोज पिंक कलर ऑप्शन में आती है। वॉच के साथ ब्लूटूथ कॉलिंग की सुविधा मिलती है। वॉच में 1. 75 इंच का बड़ा स्क्वायर शेप डायल मिलता है, जो कि सुपर विविड AMOLED डिस्प्ले के साथ आता है। वॉच में वॉयस असिस्टेंट और ब्लूटूथ कॉलिंग के साथ 150 से ज्यादा स्पोर्ट्स मोड और 200 से ज्यादा वॉच फेसेज का सपोर्ट मिलता है। वॉच में एआई इनेबल्ड हेल्थ सेंसर्स के साथ ब्लड ऑक्सीजन ट्रैकर, हार्ट रेट मेजरमेंट, स्टॉप वॉच, टाइमर, कैमरा कंट्रोल, म्यूजिक प्लेबैक, रियल-टाइम वेदर, फाइंड योर फोन, कैलकुलेटर, फीमेल हेल्थ मॉनिटर और ड्रेनिंग वॉटर का सपोर्ट भी मिलता है।
इस वॉच को 1,899 रुपये की कीमत पर खरीदा जा सकता है। वॉच तीन ब्लैक, सिल्वर ग्रे और रोज पिंक कलर ऑप्शन के साथ राउंड डिस्प्ले और क्लासिक डिजाइन के साथ आती है। इस वॉच में 1. 3 इंच की एचडी डिस्प्ले और 7 दिन के बैटरी बैकअप के साथ 100 से ज्यादा स्पोर्ट्स मोड मिलते हैं। इस स्मार्टवॉच में 100 से ज्यादा क्लाउड बेस्ड वॉच फेसेस (Watch Faces) और वॉटर और डस्ट रेसिस्टेंट के लिए IP68 की रेटिंग देखने को मिलती है। Fire-Boltt Phoenix स्मार्टवॉच में हार्ट रेट मॉनिटर, ब्लड ऑक्सीजन ट्रैकिंग के लिए SpO2, स्ट्रेस, स्लीप मॉनिटर और फीमेल साइकल (Cycle) ट्रैकिंग जैसे हेल्थ ट्रैकिंग फीचर्स भी मिलते हैं।
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Noise Colorfit Icon Buzz 3 हजार से कम कीमत में एक शानदार वॉच है। इस वॉच को 1,599 रुपये की कीमत पर खरीदा जा सकता है। वॉच के साथ 1. 69 इंच की TFT LCD डिस्प्ले मिलती है। वॉच में ब्लड ऑक्सीजन मॉनिटर के लिए SpO2 सेंसर, 24x7 हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग जैसे फीचर देखने को मिलते हैं। वॉच के साथ 100 क्लाउड बेस्ज वॉच फेसेज और साइकलिंग, रनिंग जैसे 8 वर्कआउट मोड मिलते हैं। Noise Colorfit Icon Buzz में कनेक्टिविटी के लिए नॉयस हेल्थ सूट्स और वॉयस असिस्टेंट का सपोर्ट मिलता है। इसके अलावा Noise Colorfit Icon Buzz मे 7 दिन का बैटरी बैकअप मिलता है।
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भारत में दिवाली का इंतजार लगभग सालभर किया जाता है। भारत के साथ दुनियाभर के भारतीय एक साथ दिवाली को खुशियों के रूप में मनाते हैं। इस साल दिवाली चौबीस अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस रोशनी और प्रकाश के त्योहार पर मिठाईयों के साथ उपहार भी दिए जाते हैं। यदि आप भी अपने करीबियों को कोई यूजफुल गिफ्ट देने के बारे में सोच रहे हैं तो यह रिपोर्ट आपके लिए है। इस रिपोर्ट में हम आपको बेस्ट कॉलिंग स्मार्टवॉच के बारे में बताएंगे। चलिए जानते हैं। तीन हजार से कम कीमत में Crossbeats ignite Grit गिफ्ट के लिए बेस्ट ऑप्शन है। इस वॉच को दो,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में खरीदा जा सकता है। वॉच रोयल ब्लू, इंक ब्लू और रोज पिंक कलर ऑप्शन में आती है। वॉच के साथ ब्लूटूथ कॉलिंग की सुविधा मिलती है। वॉच में एक. पचहत्तर इंच का बड़ा स्क्वायर शेप डायल मिलता है, जो कि सुपर विविड AMOLED डिस्प्ले के साथ आता है। वॉच में वॉयस असिस्टेंट और ब्लूटूथ कॉलिंग के साथ एक सौ पचास से ज्यादा स्पोर्ट्स मोड और दो सौ से ज्यादा वॉच फेसेज का सपोर्ट मिलता है। वॉच में एआई इनेबल्ड हेल्थ सेंसर्स के साथ ब्लड ऑक्सीजन ट्रैकर, हार्ट रेट मेजरमेंट, स्टॉप वॉच, टाइमर, कैमरा कंट्रोल, म्यूजिक प्लेबैक, रियल-टाइम वेदर, फाइंड योर फोन, कैलकुलेटर, फीमेल हेल्थ मॉनिटर और ड्रेनिंग वॉटर का सपोर्ट भी मिलता है। इस वॉच को एक,आठ सौ निन्यानवे रुपयापये की कीमत पर खरीदा जा सकता है। वॉच तीन ब्लैक, सिल्वर ग्रे और रोज पिंक कलर ऑप्शन के साथ राउंड डिस्प्ले और क्लासिक डिजाइन के साथ आती है। इस वॉच में एक. तीन इंच की एचडी डिस्प्ले और सात दिन के बैटरी बैकअप के साथ एक सौ से ज्यादा स्पोर्ट्स मोड मिलते हैं। इस स्मार्टवॉच में एक सौ से ज्यादा क्लाउड बेस्ड वॉच फेसेस और वॉटर और डस्ट रेसिस्टेंट के लिए IPअड़सठ की रेटिंग देखने को मिलती है। Fire-Boltt Phoenix स्मार्टवॉच में हार्ट रेट मॉनिटर, ब्लड ऑक्सीजन ट्रैकिंग के लिए SpOदो, स्ट्रेस, स्लीप मॉनिटर और फीमेल साइकल ट्रैकिंग जैसे हेल्थ ट्रैकिंग फीचर्स भी मिलते हैं। रियलमी की यह वॉच दो,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये की कीमत पर मिलती है। दिवाली गिफ्ट के लिए यह भी बेस्ट ऑप्शन है। Realme Watch तीन के साथ बड़ी डिस्प्ले और पाँच सौ निट्स की ब्राइटनेस देखने को मिलती है। Realme Watch तीन अच्छी डिजाइन के साथ आती है, इसमें एक सौ दस से अधिक वॉच फेसेज और एक सौ दस फिटनेस मोड मिलते हैं। इस वॉच में चौबीस घंटाटे हार्ट रेट मॉनिटरिंग के अलावा स्टेप काउंटर, स्ट्रेम मॉनिटर और स्लीप ट्रैकिंग जैसे फीचर्स हैं। वॉटर रेसिस्टेंट के लिए इसमें IPअड़सठ की रेटिंग मिलती है। वॉच में सात दिन का बैटरी बैकअप भी दिया गया है। Noise Colorfit Icon Buzz तीन हजार से कम कीमत में एक शानदार वॉच है। इस वॉच को एक,पाँच सौ निन्यानवे रुपयापये की कीमत पर खरीदा जा सकता है। वॉच के साथ एक. उनहत्तर इंच की TFT LCD डिस्प्ले मिलती है। वॉच में ब्लड ऑक्सीजन मॉनिटर के लिए SpOदो सेंसर, चौबीसxसात हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग जैसे फीचर देखने को मिलते हैं। वॉच के साथ एक सौ क्लाउड बेस्ज वॉच फेसेज और साइकलिंग, रनिंग जैसे आठ वर्कआउट मोड मिलते हैं। Noise Colorfit Icon Buzz में कनेक्टिविटी के लिए नॉयस हेल्थ सूट्स और वॉयस असिस्टेंट का सपोर्ट मिलता है। इसके अलावा Noise Colorfit Icon Buzz मे सात दिन का बैटरी बैकअप मिलता है।
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बेल्थरारोड उभांव थाना क्षेत्र के मालीपुर ग्राम में अमृत महोत्सव के तहत ग्राम प्रधान की ओर से प्राथमिक विद्यालय मालीपुर में 75 पौधे लगाए गए थे। कुछ लोगों इन पौधों को उखाड़कर फेंक दिया। विरोध जताने पर प्रधान पति को जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस ने प्रधान की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ दर्ज केस दर्जकर छानबीन शुरू कर दी है। प्रधान अर्चना यादव का कहना है कि 15 अगस्त को अमृत बन के नाम से 75 फलदार पौधे प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में लगाए गए थे। इस दौरान ग्राम विकास अधिकारी भी मौजूद थे। प्रधान के अनुसार, हरीतिमा एप्स से सचिव द्वारा जियो टैग कराया जा चुका है। पौधों को उखाड़ फेंकने की जानकारी 16 अगस्त को एसडीएम को दी गई तो प्रधानपति को डराया धमकाया गया। प्रधान की तहरीर पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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बेल्थरारोड उभांव थाना क्षेत्र के मालीपुर ग्राम में अमृत महोत्सव के तहत ग्राम प्रधान की ओर से प्राथमिक विद्यालय मालीपुर में पचहत्तर पौधे लगाए गए थे। कुछ लोगों इन पौधों को उखाड़कर फेंक दिया। विरोध जताने पर प्रधान पति को जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने प्रधान की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ दर्ज केस दर्जकर छानबीन शुरू कर दी है। प्रधान अर्चना यादव का कहना है कि पंद्रह अगस्त को अमृत बन के नाम से पचहत्तर फलदार पौधे प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में लगाए गए थे। इस दौरान ग्राम विकास अधिकारी भी मौजूद थे। प्रधान के अनुसार, हरीतिमा एप्स से सचिव द्वारा जियो टैग कराया जा चुका है। पौधों को उखाड़ फेंकने की जानकारी सोलह अगस्त को एसडीएम को दी गई तो प्रधानपति को डराया धमकाया गया। प्रधान की तहरीर पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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यमुनानगर, 30 जनवरी (हप्र)
यमुनानगर में आज कोरोना के 9 नए मामले सामने आये जबकि 7 लोग ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किए गये। यमुनानगर का रिकवरी रेट 96.79 प्रतिशत हो गया है।
करनाल (निस) : जिला में शनिवार को 6 केस पॉजिटिव पाए गए हैं। अब 71 एक्टिव केस रह गये हैं।
कैथल (हप्र) : कैथल में आज कोरोना पॉजिटिव का कोई भी नया केस नहीं पाया गया। आज 9 रोगी स्वस्थ होकर अपने घरों को लौटे हैं।
सिरसा (निस) : जिला में शनिवार को कोरोना संक्रमण का एक मामला सामने आया है। वहीं, जिला में एक मरीज स्वस्थ हुआ है। जिला में कोरोना का रिकवरी रेट 98.40 प्रतिशत है।
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यमुनानगर, तीस जनवरी यमुनानगर में आज कोरोना के नौ नए मामले सामने आये जबकि सात लोग ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किए गये। यमुनानगर का रिकवरी रेट छियानवे.उन्यासी प्रतिशत हो गया है। करनाल : जिला में शनिवार को छः केस पॉजिटिव पाए गए हैं। अब इकहत्तर एक्टिव केस रह गये हैं। कैथल : कैथल में आज कोरोना पॉजिटिव का कोई भी नया केस नहीं पाया गया। आज नौ रोगी स्वस्थ होकर अपने घरों को लौटे हैं। सिरसा : जिला में शनिवार को कोरोना संक्रमण का एक मामला सामने आया है। वहीं, जिला में एक मरीज स्वस्थ हुआ है। जिला में कोरोना का रिकवरी रेट अट्ठानवे.चालीस प्रतिशत है।
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करनालः भारतीय किसान यूनियन (चारुनी) के नेताओं द्वारा राज्य परामर्शित कीमतों (एसएपी) में बढ़ोतरी के लिए शुरू आंदोलन बंद करने के फैसले के एक दिन बाद शुक्रवार को हरियाणा की अधिकांश चीनी मिलों में पेराई फिर से शुरू हो गई। अपनी मांग को लेकर बीकेयू पिछले एक सप्ताह से आंदोलन कर रहा था। पेराई बंद होने से पेराई सत्र में बेरोजगार हो गए हजारों मजदूरों को देखते हुए विरोध को वापस लेने का निर्णय लिया गया।
बीकेयू चारुनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चारुनी ने कुरुक्षेत्र में किसानों को संबोधित करते हुए कहा, सरकार द्वारा घोषित 10 रुपये की बढ़ोतरी संतोषजनक नहीं है, लेकिन (बेरोजगार मजदूरों की) स्थिति को देखते हुए, हमने विरोध खत्म करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को गन्ना एसएपी में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की घोषणा की थी, इस प्रकार एसएपी को 372 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था।
गन्ना एसएपी को बढ़ाकर ₹450 प्रति क्विंटल करने की मांग करते हुए, किसानों ने पिछले महीने बार-बार विरोध और रोड शो किया। पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी-जननायक जनता पार्टी की सरकार पर किसानों के जीवन को दयनीय बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि, उन्हें हर जायज मांग के लिए विरोध करने के लिए मजबूर किया जाता है। रोहतक में मीडिया से बातचीत करते हुए हुड्डा ने कहा कि, राज्य सरकार ने गन्ने की राज्य द्वारा सुझाई गई कीमत में महज 10 रुपये की बढ़ोतरी कर गन्ना किसानों के साथ क्रूर मजाक किया है।
हुड्डा ने कहा कि, कांग्रेस के शासन में गन्ने के रेट में 165 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। हमारी सरकार के दौरान, हरियाणा ने पूरे देश में किसानों को सबसे अधिक दर दी। आज हरियाणा के किसानों को पंजाब के बराबर कीमत भी नहीं मिल रही है।
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करनालः भारतीय किसान यूनियन के नेताओं द्वारा राज्य परामर्शित कीमतों में बढ़ोतरी के लिए शुरू आंदोलन बंद करने के फैसले के एक दिन बाद शुक्रवार को हरियाणा की अधिकांश चीनी मिलों में पेराई फिर से शुरू हो गई। अपनी मांग को लेकर बीकेयू पिछले एक सप्ताह से आंदोलन कर रहा था। पेराई बंद होने से पेराई सत्र में बेरोजगार हो गए हजारों मजदूरों को देखते हुए विरोध को वापस लेने का निर्णय लिया गया। बीकेयू चारुनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चारुनी ने कुरुक्षेत्र में किसानों को संबोधित करते हुए कहा, सरकार द्वारा घोषित दस रुपयापये की बढ़ोतरी संतोषजनक नहीं है, लेकिन स्थिति को देखते हुए, हमने विरोध खत्म करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को गन्ना एसएपी में दस रुपयापये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की घोषणा की थी, इस प्रकार एसएपी को तीन सौ बहत्तर रुपयापये प्रति क्विंटल तय किया था। गन्ना एसएपी को बढ़ाकर चार सौ पचास रुपया प्रति क्विंटल करने की मांग करते हुए, किसानों ने पिछले महीने बार-बार विरोध और रोड शो किया। पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी-जननायक जनता पार्टी की सरकार पर किसानों के जीवन को दयनीय बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि, उन्हें हर जायज मांग के लिए विरोध करने के लिए मजबूर किया जाता है। रोहतक में मीडिया से बातचीत करते हुए हुड्डा ने कहा कि, राज्य सरकार ने गन्ने की राज्य द्वारा सुझाई गई कीमत में महज दस रुपयापये की बढ़ोतरी कर गन्ना किसानों के साथ क्रूर मजाक किया है। हुड्डा ने कहा कि, कांग्रेस के शासन में गन्ने के रेट में एक सौ पैंसठ फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। हमारी सरकार के दौरान, हरियाणा ने पूरे देश में किसानों को सबसे अधिक दर दी। आज हरियाणा के किसानों को पंजाब के बराबर कीमत भी नहीं मिल रही है।
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हेनसांग ने चौद्धों को बड़ा दुःख देने वाले मिहिरकुल का भी वर्णन किया है। कुछ शताब्दी हुई कि मिहिरकुल ब पचn the aer a अधare अमाया । हवेनसांग कहता है कि इस भयानक मिहिरकुल ने पांचों खंडों में सब पुजेरियों का नाश करने की आज्ञा दी जिसमें कि बुद्ध के धर्म का अंत हो जाय और उसकी कोई बात शेष न रह जाय । इस प्रबल राजा ने मगध के राजा बालादित्य पर शाक्रमण किया परंतु वहां वह पकड़ा गया और मन के साथ छोड़ दिया गया और वह काश्मीर लौटा और वहां राजद्रोह खड़ा करके उसने राजा को मार डाला और स्वयं राजगद्दी पर बैठगया। उसने गान्धार को विजय किया, वहां के राज्य वंश को जड़ से उखाड़ डाला बौद्ध धर्म और स्तूपों तथा संघारामों का नाश किया और सिंध नदी के तटों पर तीन साख मनुष्यों का वध किया । इसमें बौद्ध लेखक की कुछ अत्युक्ति भी समझ लेनी चाहिए परन्तु इसमें कोई सन्देह नहीं हो सकता कि काश्मीर का मिहिरकुल बौद्धों का एक बड़ा विरोधक और नाश करने
वाला था ।
हवेनासांग शतद् ( सतलज ) राज्य से बड़ा प्रसन्न हुआ जो कि ४०० मील के घेरे का था और जिसकी राजधानी का घेरा साढ़े तीन मील था। इस देश में अन्न, फल, सोने चांदी और रत्न बहुतायत से थे। यहां के लोग चमकीले रेशम के बहु मूल्य और सुन्दर वस्त्र पहिनते थे। उनके आचरण नम्र और प्रसन्न करने वाले थे वे पुण्यात्मा ये और बुद्ध के धर्म पर विश्वास करते थे। परन्तु संघाराम शुन्य थे और उनमें बहुत ही कम पुजेरी रहते थे।
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हेनसांग ने चौद्धों को बड़ा दुःख देने वाले मिहिरकुल का भी वर्णन किया है। कुछ शताब्दी हुई कि मिहिरकुल ब पचn the aer a अधare अमाया । हवेनसांग कहता है कि इस भयानक मिहिरकुल ने पांचों खंडों में सब पुजेरियों का नाश करने की आज्ञा दी जिसमें कि बुद्ध के धर्म का अंत हो जाय और उसकी कोई बात शेष न रह जाय । इस प्रबल राजा ने मगध के राजा बालादित्य पर शाक्रमण किया परंतु वहां वह पकड़ा गया और मन के साथ छोड़ दिया गया और वह काश्मीर लौटा और वहां राजद्रोह खड़ा करके उसने राजा को मार डाला और स्वयं राजगद्दी पर बैठगया। उसने गान्धार को विजय किया, वहां के राज्य वंश को जड़ से उखाड़ डाला बौद्ध धर्म और स्तूपों तथा संघारामों का नाश किया और सिंध नदी के तटों पर तीन साख मनुष्यों का वध किया । इसमें बौद्ध लेखक की कुछ अत्युक्ति भी समझ लेनी चाहिए परन्तु इसमें कोई सन्देह नहीं हो सकता कि काश्मीर का मिहिरकुल बौद्धों का एक बड़ा विरोधक और नाश करने वाला था । हवेनासांग शतद् राज्य से बड़ा प्रसन्न हुआ जो कि चार सौ मील के घेरे का था और जिसकी राजधानी का घेरा साढ़े तीन मील था। इस देश में अन्न, फल, सोने चांदी और रत्न बहुतायत से थे। यहां के लोग चमकीले रेशम के बहु मूल्य और सुन्दर वस्त्र पहिनते थे। उनके आचरण नम्र और प्रसन्न करने वाले थे वे पुण्यात्मा ये और बुद्ध के धर्म पर विश्वास करते थे। परन्तु संघाराम शुन्य थे और उनमें बहुत ही कम पुजेरी रहते थे।
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प्रिलिम्स के लियेः
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
हाल ही में ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (Zoological Survey of India) के वैज्ञानिकों द्वारा पश्चिमी हिमालय में किये गए एक अध्ययन के परिणामों के आधार इस बात की संभावना व्यक्त की है कि वर्ष 2050 तक हिमालयन ब्राउन बियर (Himalayan Brown Bear) के निवास स्थान में लगभग 73% की भारी गिरावट आ सकती है।
प्रमुख बिंदुः
- यह अध्ययन हिमालयन ब्राउन बियर जिसका वैज्ञानिक नाम उर्सस आर्कटोस इसाबेलिनस (Ursus Arctos Isabellinus) है, के संदर्भ में किया गया।
- अध्ययन के परिणामों के आधार पर यह आशंका जताई गई है कि निकट भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण इनके आवास (Habitat ) एवं जैविक गलियारों (Biological Corridors) में कमी देखने को मिल सकती है।
- अध्ययन के अनुसार, संरक्षित क्षेत्रों (Protected Areas) के बीच कनेक्टिविटी के नुकसान/कमी के चलते 13 संरक्षित क्षेत्रों में स्थित निवास स्थानों (Habitat) में क्षति देखने को मिलेगी जिनमें से आठ निवास स्थान वर्ष 2050 तक पूरी तरह से निर्जन/आबादी रहित (Uninhabitable) हो जाएंगे।
- इस अध्ययन में हिमालयन ब्राउन बियर को एक उदाहरण के रूप में लेने का मुख्य कारण यह है कि यह उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला एक बड़े मांसाहारी जानवर है।
- जिन ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बियर/भालू की यह प्रजाति पाई जाती है वह ग्लोबल वार्मिंग की दृष्टि से सबसे अधिक असुरक्षित क्षेत्र है क्योंकि ये क्षेत्र हिमालय के अन्य ऊँचाई वाले क्षेत्रों की तुलना में अत्यधिक तेज़ी से गर्म हो रहे हैं।
- इस अध्ययन को अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका (International Science Journal) में 'हिमालयन ब्राउन बियर के संरक्षण के लिये संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क की अनुकूल स्थानिक योजना'(Adaptive spatial planning of protected area network for conserving the Himalayan Brown Bear) नामक शीर्षक में प्रकाशित किया गया है।
(Himalayan Brown Bear):
- हिमालयन ब्राउन बियर हिमालय के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में सबसे बड़े मांसाहारी जीवों में से एक है।
- भारत में यह पश्चिमी हिमालयी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 3000-5000 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है।
- इसकी छोटी एवं अलग-अलग आबादी भारत और पाकिस्तान के दूरदराज़ के ऊँचे हिमालय पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature-IUCN) द्वारा हिमालयन ब्राउन बियर को सुभेद्य (Vulnerable) प्रजाति की सूची में शामिल किया गया है।
- यह भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची 1 के तहत सूचीबद्ध है।
ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडियाः
- इसकी स्थापना 1 जुलाई, 1916 में की गई थी।
- इसका उद्देश्य असाधारण एवं प्राकृतिक रूप से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण विभिन्न जानवरों से संबंधित सर्वेक्षण एवं अनुसंधान द्वारा जानकारी इकट्ठा करना है।
- अध्ययन का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिकों को पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में प्रजातियों के संरक्षण के लिये एक संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क विकसित करने हेतु अनुकूल स्थानिक योजना का सुझाव देने के लिये प्रेरित करना है।
- संरक्षित क्षेत्रों के लिये 'अनुकूल स्थानिक योजना' का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के जोखिमों और अनिश्चितता को कम करना है।
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प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों द्वारा पश्चिमी हिमालय में किये गए एक अध्ययन के परिणामों के आधार इस बात की संभावना व्यक्त की है कि वर्ष दो हज़ार पचास तक हिमालयन ब्राउन बियर के निवास स्थान में लगभग तिहत्तर% की भारी गिरावट आ सकती है। प्रमुख बिंदुः - यह अध्ययन हिमालयन ब्राउन बियर जिसका वैज्ञानिक नाम उर्सस आर्कटोस इसाबेलिनस है, के संदर्भ में किया गया। - अध्ययन के परिणामों के आधार पर यह आशंका जताई गई है कि निकट भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण इनके आवास एवं जैविक गलियारों में कमी देखने को मिल सकती है। - अध्ययन के अनुसार, संरक्षित क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी के नुकसान/कमी के चलते तेरह संरक्षित क्षेत्रों में स्थित निवास स्थानों में क्षति देखने को मिलेगी जिनमें से आठ निवास स्थान वर्ष दो हज़ार पचास तक पूरी तरह से निर्जन/आबादी रहित हो जाएंगे। - इस अध्ययन में हिमालयन ब्राउन बियर को एक उदाहरण के रूप में लेने का मुख्य कारण यह है कि यह उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला एक बड़े मांसाहारी जानवर है। - जिन ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बियर/भालू की यह प्रजाति पाई जाती है वह ग्लोबल वार्मिंग की दृष्टि से सबसे अधिक असुरक्षित क्षेत्र है क्योंकि ये क्षेत्र हिमालय के अन्य ऊँचाई वाले क्षेत्रों की तुलना में अत्यधिक तेज़ी से गर्म हो रहे हैं। - इस अध्ययन को अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका में 'हिमालयन ब्राउन बियर के संरक्षण के लिये संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क की अनुकूल स्थानिक योजना' नामक शीर्षक में प्रकाशित किया गया है। : - हिमालयन ब्राउन बियर हिमालय के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में सबसे बड़े मांसाहारी जीवों में से एक है। - भारत में यह पश्चिमी हिमालयी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तीन हज़ार-पाँच हज़ार मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है। - इसकी छोटी एवं अलग-अलग आबादी भारत और पाकिस्तान के दूरदराज़ के ऊँचे हिमालय पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। - अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा हिमालयन ब्राउन बियर को सुभेद्य प्रजाति की सूची में शामिल किया गया है। - यह भारतीय वन्यजीव अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ बहत्तर की अनुसूची एक के तहत सूचीबद्ध है। ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडियाः - इसकी स्थापना एक जुलाई, एक हज़ार नौ सौ सोलह में की गई थी। - इसका उद्देश्य असाधारण एवं प्राकृतिक रूप से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण विभिन्न जानवरों से संबंधित सर्वेक्षण एवं अनुसंधान द्वारा जानकारी इकट्ठा करना है। - अध्ययन का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिकों को पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में प्रजातियों के संरक्षण के लिये एक संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क विकसित करने हेतु अनुकूल स्थानिक योजना का सुझाव देने के लिये प्रेरित करना है। - संरक्षित क्षेत्रों के लिये 'अनुकूल स्थानिक योजना' का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के जोखिमों और अनिश्चितता को कम करना है।
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कल्याण आयुर्वेद - गुप्त रोग चाहे फिर वो पुरुषों को हो या महिलाओं को यह वाकई चिंता जनक बात है. क्योंकि इस कारण न केवल यौन क्रिया के दौरान परेशानी होती है, बल्कि आपको मानसिक तनाव भी पहुंच सकता है. शीघ्रपतन पुरुषों में होने वाला एक आम यौन विकार है, जो पुरुषों को शारीरिक रूप के साथ साथ मानसिक रूप से भी परेशान करता है. इसके वजह से पुरुष खुद को दूसरों के मुकाबले कम आंकने लगते हैं. इसके अलावा कुछ स्तिथियों में मनोविकार का भी शिकार हो जाते हैं. शीघ्रपतन पुरुषों के साथ साथ महिलाओं को भी परेशान करता है. आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप इन समस्याओं को दूर कर सकते हैं.
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कल्याण आयुर्वेद - गुप्त रोग चाहे फिर वो पुरुषों को हो या महिलाओं को यह वाकई चिंता जनक बात है. क्योंकि इस कारण न केवल यौन क्रिया के दौरान परेशानी होती है, बल्कि आपको मानसिक तनाव भी पहुंच सकता है. शीघ्रपतन पुरुषों में होने वाला एक आम यौन विकार है, जो पुरुषों को शारीरिक रूप के साथ साथ मानसिक रूप से भी परेशान करता है. इसके वजह से पुरुष खुद को दूसरों के मुकाबले कम आंकने लगते हैं. इसके अलावा कुछ स्तिथियों में मनोविकार का भी शिकार हो जाते हैं. शीघ्रपतन पुरुषों के साथ साथ महिलाओं को भी परेशान करता है. आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप इन समस्याओं को दूर कर सकते हैं.
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राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कल शुक्रवार को बजट भाषण पर रिप्लाई भाषण देंगे। अब पचपदरा विधायक मदन प्रजापत और बालोतरा के लोगों की उम्मीद सीएम के बजट रिप्लाई भाषण पर टिकी हुई है। इससे पहले गुरुवार को पचपदरा विधायक मदन प्रजापत ने एक बार फिर बालोतरा जिला बनाने का मुद्दा सदन में उठाया। विधायक ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि कल मुख्यमंत्री बालोतरा को जिला बनाने की घोषणा करेंगे। बालोतरा जिला बनाने को लेकर पूरे जिले के विधायक एक मत है। सदन में विधायक मदन प्रजापत के बोलने के दौरान सदन के सदस्य ने चुटकी लेते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष आपकी अनुमति हो तो मैं एक जोड़ी चप्पल भेंट करना चाहता हूं।
दरअसल, बाड़मेर जिले के बालोतरा को लंबे समय से जिला बनाने की मांग होती रही है। राजनीतिक पार्टियां चुनाव के समय वादे करती है कि इस बार हमारी सरकार बनी तो बालोतरा को जिला बना दिया जाएगा। 40 सालों से राजनीतिक दल वादे कर रहे है, लेकिन मांग पूरी नहीं हो रही है। 2018 विधानसभा चुनावों में भी जनता से वादा किया था कि बालोतरा को जिला बना दिया जाएगा। साल 2022 में विधायक मदन प्रजापत ने बजट घोषणा से पहले विधानसभा में यह ऐलान किया था कि बालोतरा जिला बनाने की घोषणा नहीं हुई तो जिला नहीं बनने तक जूतें नहीं पहनूंगा और नंगे पैर ही रहूंगा। घोषणा नहीं होने पर विधायक मदन प्रजापत ने विधानसभा के बाहर जूते खोल दिए थे। तब से विधायक करीब एक साल से ज्यादा नंगे पैर चल रहे है। इस बजट सत्र के रिप्लाई भाषण में उम्मीद बची है। गुरुवार को पचपदरा विधायक मदन प्रजापत ने एक बार फिर सदन में मुद्दा उठाया है।
विधायक मदन प्रजापत ने सदन में शायरी बोलते हुए कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि कल सीएम अशोक गहलोत बजट भाषण के रिप्लाई देने के दौरान बालोतरा को जिला बनाने की घोषणा करेंगे। मुझे निराश नहीं करेंगे। एक जनप्रतिनिधि का धर्म होता है कि जनता के लिए पैरवी और मांग करें मैंने बालोतरा जिला बनाने की मांग की पैरवी की है। मुझे पूरा विश्वास है कि निराश नहीं करेंगे। हमारी बालोतरा को जिला बनाने की उम्मीद जल्द पूरी होगी।
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राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कल शुक्रवार को बजट भाषण पर रिप्लाई भाषण देंगे। अब पचपदरा विधायक मदन प्रजापत और बालोतरा के लोगों की उम्मीद सीएम के बजट रिप्लाई भाषण पर टिकी हुई है। इससे पहले गुरुवार को पचपदरा विधायक मदन प्रजापत ने एक बार फिर बालोतरा जिला बनाने का मुद्दा सदन में उठाया। विधायक ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि कल मुख्यमंत्री बालोतरा को जिला बनाने की घोषणा करेंगे। बालोतरा जिला बनाने को लेकर पूरे जिले के विधायक एक मत है। सदन में विधायक मदन प्रजापत के बोलने के दौरान सदन के सदस्य ने चुटकी लेते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष आपकी अनुमति हो तो मैं एक जोड़ी चप्पल भेंट करना चाहता हूं। दरअसल, बाड़मेर जिले के बालोतरा को लंबे समय से जिला बनाने की मांग होती रही है। राजनीतिक पार्टियां चुनाव के समय वादे करती है कि इस बार हमारी सरकार बनी तो बालोतरा को जिला बना दिया जाएगा। चालीस सालों से राजनीतिक दल वादे कर रहे है, लेकिन मांग पूरी नहीं हो रही है। दो हज़ार अट्ठारह विधानसभा चुनावों में भी जनता से वादा किया था कि बालोतरा को जिला बना दिया जाएगा। साल दो हज़ार बाईस में विधायक मदन प्रजापत ने बजट घोषणा से पहले विधानसभा में यह ऐलान किया था कि बालोतरा जिला बनाने की घोषणा नहीं हुई तो जिला नहीं बनने तक जूतें नहीं पहनूंगा और नंगे पैर ही रहूंगा। घोषणा नहीं होने पर विधायक मदन प्रजापत ने विधानसभा के बाहर जूते खोल दिए थे। तब से विधायक करीब एक साल से ज्यादा नंगे पैर चल रहे है। इस बजट सत्र के रिप्लाई भाषण में उम्मीद बची है। गुरुवार को पचपदरा विधायक मदन प्रजापत ने एक बार फिर सदन में मुद्दा उठाया है। विधायक मदन प्रजापत ने सदन में शायरी बोलते हुए कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि कल सीएम अशोक गहलोत बजट भाषण के रिप्लाई देने के दौरान बालोतरा को जिला बनाने की घोषणा करेंगे। मुझे निराश नहीं करेंगे। एक जनप्रतिनिधि का धर्म होता है कि जनता के लिए पैरवी और मांग करें मैंने बालोतरा जिला बनाने की मांग की पैरवी की है। मुझे पूरा विश्वास है कि निराश नहीं करेंगे। हमारी बालोतरा को जिला बनाने की उम्मीद जल्द पूरी होगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बॉलीवुड एक्ट्रेसेस कई बार अपनी बोल्ड और टॉपलेस तस्वीरें शेयर कर फैंस को न सिर्फ हैरान करती हैं बल्कि जबरदस्त ट्रोलिंग का भी सामना करती हैं। कुछ ऐसा ही हाल ही में बॉलीवुड की जानी मानी एक्ट्रेस ईशा गुप्ता के साथ हुआ है। हलांकि ईशा हमेशा से ही अपनी बोल्ड पर्सनैलिटी के लिए जानी जाती हैं। वह अक्सर ही अपनी हॉट और बिकिनी तस्वीरें पोस्ट कर फैंस के होश उड़ाती हैं। लेकिन इस बार तो ईशा ने बोल्डनेस की सारी हदें पार कर दी हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद फैंस उन्हें लगातार उन्हें ट्रोल कर भद्दे-भद्दे कमेंट्स कर रहे हैं।
ईशा हमेशा से ही अपनी बोल्ड पर्सनैलिटी के लिए जानी जाती हैं। वह अक्सर ही अपनी हॉट और बिकिनी तस्वीरें पोस्ट कर फैंस के होश उड़ाती हैं। लेकिन इस बार तो ईशा ने बोल्डनेस की सारी हदें पार कर दी हैं।
ईशा की तस्वीरों पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, 'पहाड़ों के तो मजे हैं। ' एक लिखता है, 'अब आएंगे फिल्मों के आफर। ' तो वहीं एक ने लिखा, 'बेचारी को काम नहीं मिल रहा कुछ तो करना पड़ेगा। ' एक ने लिखा, 'कपड़े पहनों ही मत। ' इस तरह के कई कमेंट कर यूजर्स ईशा पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
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बॉलीवुड एक्ट्रेसेस कई बार अपनी बोल्ड और टॉपलेस तस्वीरें शेयर कर फैंस को न सिर्फ हैरान करती हैं बल्कि जबरदस्त ट्रोलिंग का भी सामना करती हैं। कुछ ऐसा ही हाल ही में बॉलीवुड की जानी मानी एक्ट्रेस ईशा गुप्ता के साथ हुआ है। हलांकि ईशा हमेशा से ही अपनी बोल्ड पर्सनैलिटी के लिए जानी जाती हैं। वह अक्सर ही अपनी हॉट और बिकिनी तस्वीरें पोस्ट कर फैंस के होश उड़ाती हैं। लेकिन इस बार तो ईशा ने बोल्डनेस की सारी हदें पार कर दी हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद फैंस उन्हें लगातार उन्हें ट्रोल कर भद्दे-भद्दे कमेंट्स कर रहे हैं। ईशा हमेशा से ही अपनी बोल्ड पर्सनैलिटी के लिए जानी जाती हैं। वह अक्सर ही अपनी हॉट और बिकिनी तस्वीरें पोस्ट कर फैंस के होश उड़ाती हैं। लेकिन इस बार तो ईशा ने बोल्डनेस की सारी हदें पार कर दी हैं। ईशा की तस्वीरों पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, 'पहाड़ों के तो मजे हैं। ' एक लिखता है, 'अब आएंगे फिल्मों के आफर। ' तो वहीं एक ने लिखा, 'बेचारी को काम नहीं मिल रहा कुछ तो करना पड़ेगा। ' एक ने लिखा, 'कपड़े पहनों ही मत। ' इस तरह के कई कमेंट कर यूजर्स ईशा पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
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लीलया भवनद्वारे स्थितो sध्यास्य चतुष्किकाम् । स पश्यन्नुल्लसत्कान्ति प्रियावदनपङ्कजम् ॥१२ क्षणमेकमसौ स्थित्वा निजगाव मनः प्रियाम् । कुरङ्गि देहि में क्षिप्रं भोजनं कि विलम्बसे ॥१३
सा कृत्वा भृकुटीं भीमां यमस्येव धनुलंताम् । अवादीत्कुटिलस्वान्ता कान्तं पुरुषनाशिनी ॥ १४ स्वमातुर्भवने तस्या भुङ्क्ष्व दुष्टमते व्रज । यस्या निवेदिता वार्ता पूर्वी पालयता स्थितिम् ॥ १५ सुन्दर्याः स्वयमाख्याय वार्ता भन्ने चुकोप सा । योजयन्ति न कं दोषं जिते भर्तरि योषितः ॥१६
कृत्वा दोषं स्वयं दुष्टा पत्ये कुप्यति कामिनी । पूर्वमेव स्वभावेन स्वदोषविनिवृत्तये ॥१७
१२) १ आश्रितस्य ।
१३) १. मह्यम् । १४) १. भर्तारं प्रति ।
वह बहुधान्यक क्रीड़ापूर्वक जाकर कुरंगीके भवनके द्वारपर स्थित हो गया। फिर वह चौके ( रसोईघर) में जाकर कान्तिमान् प्रियाके मुखरूप कमलको देखता हुआ क्षणभरके लिए वहाँ स्थित हो गया और मनको प्रिय लगनेवाली पत्नीसे बोला कि द्दे कुरंगी ! मुझे जल्दी भोजन दे, देर क्यों करती है ? ।।१२-१३।।
इस पर मनमें कुटिल अभिप्रायको रखनेवाली वह पुरुषोंकी घातक कुरंगी यमराजकी धनुर्लता ( धनुषरूप बेल ) के समान भृकुटीको भयानक करके पतिसे बोली कि हे दुर्बुद्धि ! अपनी उस मौके घरपर जा करके भोजन कर जिसके पास स्थितिका पालन करनेवाले तूने पहले आनेका समाचार भेजा है ।।१४-१५।।
इस प्रकार वह सुन्दरीसे स्वयं ही उसके आने की बात कह करके पतिके ऊपर क्रोधित हुई। ठीक है-पतिके अपने अधीन हो जानेपर स्त्रियाँ कौन-कौनसे दोषका आयोजन नहीं करती हैं ? अर्थात् वे पति को वश में करके उसके ऊपर अनेक दोषोंका आरोपण किया करती हैं ॥ १६॥
दुष्ट कामुकी स्त्री स्वयं ही अपराध करके अपने दोषको दूर करनेके लिए स्वभावसे पहले ही पतिके ऊपर क्रोध किया करती है ।।१७।।
१२) इ कान्ति । १४) अ धनुर्मातां; व न्यवादीत्; क परुषभाषिणी । १५) व र्भुबने ; ढ सर्वां for पूर्वां; अ पालयिता । १७ ) अ पत्यै ।
तथा विधिन्त्य जल्पन्ति बिलयाः' कुटिलाशयाः । लियते भ्राम्यते चेतो यथा ज्ञानवतामपि ॥१८ क्रोधे मानमवज्ञां' स्त्री माने जानाति तस्वतः । सम्यकर्तुमवज्ञायां स्थिरतां परवुष्कराम् ॥१९ घोषया वज्यंते नोचो नरो रक्तो यथा यथा । तस्यास्तथा तथा याति मण्डूक' इव संमुखम् ॥ २० कषाययति सा रक्तं विचित्राश्चर्यकारिणी । कषायितं पुनः पुंसां सद्यो रञ्जयते मनः ॥ २१ प्रेम्णो विघटने शक्ता रामा संघटते पुनः । योजयित्वा महातापमयस्कार इवायसम्' ॥२२
१८) १. स्त्रियः । २. कुटिलचित्ताः ।
१९) १. अपमानम् । २०) १. क मीडका इव ।
२१) १. कषायिनं करोति । २२) १. लोहस्य ।
अन्तरंग में दुष्ट अभिप्राय रखनेवाली स्त्रियाँ इस प्रकारसे विचार करके बोलती हैं कि जिससे जानकार पुरुषोंका भी चित्त भ्रान्तिको प्राप्त होकर हरा जाता है ।।१८।।
स्त्री क्रोधके अवसरपर मान करना जानती है। मानके समय ( दूसरोंका ) अपमान करना जानती है। और जब स्वयं स्त्रीका अपमान दूसरोंसे होता है, तब वह अच्छी तरहसे स्तब्ध रह सकती है कि जो स्तब्धता अन्य कोई नहीं पाल सकेगा ।।१९।।
स्त्री नीच रक्त पुरुषको जैसे-जैसे रोकती है वैसे-वैसे वह मेंढक की तरह उसके सन्मुख जाता है ।।२०।।
विचित्र आश्चर्यको करनेवाली स्त्री रक्त पुरुपको कषाय सहित करती है और तत्पश्चात् कषाय सहित पुरुषोंके मनको शीघ्र ही अनुरंजायमान करती है ।।२१।।
जिस प्रकार लुहार महातापकी योजना करके - अग्निमें अतिशय तपाकर - लोहेको तोड़ता है और उसे जोड़ता भी है उसी प्रकार स्त्री प्रेमके नष्ट करने में समर्थ होकर उसे फिरसे जोड़ भी लेती है ।।२२।।
१८) अ भाव्यते चेतो.... ज्ञातवतां । १९ ) व इ क्रोध ; अस्वा मनो for स्त्री माने, क स्वमनो । २०). अ यथाथवा । २१) अ कषायितुं, ड कषायिना, इ कषायिता; इ पुसो । २२ ) ब प्राप्ता विघटते ; कड इ संघटने, क ड इवायसः ।
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लीलया भवनद्वारे स्थितो sध्यास्य चतुष्किकाम् । स पश्यन्नुल्लसत्कान्ति प्रियावदनपङ्कजम् ॥बारह क्षणमेकमसौ स्थित्वा निजगाव मनः प्रियाम् । कुरङ्गि देहि में क्षिप्रं भोजनं कि विलम्बसे ॥तेरह सा कृत्वा भृकुटीं भीमां यमस्येव धनुलंताम् । अवादीत्कुटिलस्वान्ता कान्तं पुरुषनाशिनी ॥ चौदह स्वमातुर्भवने तस्या भुङ्क्ष्व दुष्टमते व्रज । यस्या निवेदिता वार्ता पूर्वी पालयता स्थितिम् ॥ पंद्रह सुन्दर्याः स्वयमाख्याय वार्ता भन्ने चुकोप सा । योजयन्ति न कं दोषं जिते भर्तरि योषितः ॥सोलह कृत्वा दोषं स्वयं दुष्टा पत्ये कुप्यति कामिनी । पूर्वमेव स्वभावेन स्वदोषविनिवृत्तये ॥सत्रह बारह) एक आश्रितस्य । तेरह) एक. मह्यम् । चौदह) एक. भर्तारं प्रति । वह बहुधान्यक क्रीड़ापूर्वक जाकर कुरंगीके भवनके द्वारपर स्थित हो गया। फिर वह चौके में जाकर कान्तिमान् प्रियाके मुखरूप कमलको देखता हुआ क्षणभरके लिए वहाँ स्थित हो गया और मनको प्रिय लगनेवाली पत्नीसे बोला कि द्दे कुरंगी ! मुझे जल्दी भोजन दे, देर क्यों करती है ? ।।बारह-तेरह।। इस पर मनमें कुटिल अभिप्रायको रखनेवाली वह पुरुषोंकी घातक कुरंगी यमराजकी धनुर्लता के समान भृकुटीको भयानक करके पतिसे बोली कि हे दुर्बुद्धि ! अपनी उस मौके घरपर जा करके भोजन कर जिसके पास स्थितिका पालन करनेवाले तूने पहले आनेका समाचार भेजा है ।।चौदह-पंद्रह।। इस प्रकार वह सुन्दरीसे स्वयं ही उसके आने की बात कह करके पतिके ऊपर क्रोधित हुई। ठीक है-पतिके अपने अधीन हो जानेपर स्त्रियाँ कौन-कौनसे दोषका आयोजन नहीं करती हैं ? अर्थात् वे पति को वश में करके उसके ऊपर अनेक दोषोंका आरोपण किया करती हैं ॥ सोलह॥ दुष्ट कामुकी स्त्री स्वयं ही अपराध करके अपने दोषको दूर करनेके लिए स्वभावसे पहले ही पतिके ऊपर क्रोध किया करती है ।।सत्रह।। बारह) इ कान्ति । चौदह) अ धनुर्मातां; व न्यवादीत्; क परुषभाषिणी । पंद्रह) व र्भुबने ; ढ सर्वां for पूर्वां; अ पालयिता । सत्रह ) अ पत्यै । तथा विधिन्त्य जल्पन्ति बिलयाः' कुटिलाशयाः । लियते भ्राम्यते चेतो यथा ज्ञानवतामपि ॥अट्ठारह क्रोधे मानमवज्ञां' स्त्री माने जानाति तस्वतः । सम्यकर्तुमवज्ञायां स्थिरतां परवुष्कराम् ॥उन्नीस घोषया वज्यंते नोचो नरो रक्तो यथा यथा । तस्यास्तथा तथा याति मण्डूक' इव संमुखम् ॥ बीस कषाययति सा रक्तं विचित्राश्चर्यकारिणी । कषायितं पुनः पुंसां सद्यो रञ्जयते मनः ॥ इक्कीस प्रेम्णो विघटने शक्ता रामा संघटते पुनः । योजयित्वा महातापमयस्कार इवायसम्' ॥बाईस अट्ठारह) एक. स्त्रियः । दो. कुटिलचित्ताः । उन्नीस) एक. अपमानम् । बीस) एक. क मीडका इव । इक्कीस) एक. कषायिनं करोति । बाईस) एक. लोहस्य । अन्तरंग में दुष्ट अभिप्राय रखनेवाली स्त्रियाँ इस प्रकारसे विचार करके बोलती हैं कि जिससे जानकार पुरुषोंका भी चित्त भ्रान्तिको प्राप्त होकर हरा जाता है ।।अट्ठारह।। स्त्री क्रोधके अवसरपर मान करना जानती है। मानके समय अपमान करना जानती है। और जब स्वयं स्त्रीका अपमान दूसरोंसे होता है, तब वह अच्छी तरहसे स्तब्ध रह सकती है कि जो स्तब्धता अन्य कोई नहीं पाल सकेगा ।।उन्नीस।। स्त्री नीच रक्त पुरुषको जैसे-जैसे रोकती है वैसे-वैसे वह मेंढक की तरह उसके सन्मुख जाता है ।।बीस।। विचित्र आश्चर्यको करनेवाली स्त्री रक्त पुरुपको कषाय सहित करती है और तत्पश्चात् कषाय सहित पुरुषोंके मनको शीघ्र ही अनुरंजायमान करती है ।।इक्कीस।। जिस प्रकार लुहार महातापकी योजना करके - अग्निमें अतिशय तपाकर - लोहेको तोड़ता है और उसे जोड़ता भी है उसी प्रकार स्त्री प्रेमके नष्ट करने में समर्थ होकर उसे फिरसे जोड़ भी लेती है ।।बाईस।। अट्ठारह) अ भाव्यते चेतो.... ज्ञातवतां । उन्नीस ) व इ क्रोध ; अस्वा मनो for स्त्री माने, क स्वमनो । बीस). अ यथाथवा । इक्कीस) अ कषायितुं, ड कषायिना, इ कषायिता; इ पुसो । बाईस ) ब प्राप्ता विघटते ; कड इ संघटने, क ड इवायसः ।
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हिमाचल के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में शुक्रवार से श्रावण अष्टमी मेला शुरू हो गया है। मंदिर अधिकारी विचित्र सिंह ठाकुर ने मंदिर की परंपरा के अनुसार मां ज्वाला की पवित्र ज्योतियों की पूजा अर्चना करके मेले का शुभारंभ किया। वहीं, श्रावण अष्टमी मेले के पहले ही दिन भारी संख्या में श्रद्धालु मां ज्वाला के दर्शनों को पहुंचे। प्रशासन की ओर से मेटल डिटेक्टर से ही श्रद्धालुओं को दर्शनों के लिए भेजा जा रहा है।
सुरक्षा के मद्दे नजर लाउड स्पीकर पर प्रतिबंध लगाया गया है। मंदिर में नारियल ले जाने पर भी प्रतिबंध है। इसके साथ ही भिक्षा वृत्ति पर भी पूर्णतया प्रतिबंध लगाया गया है। ज्वालामुखी शहर को सेक्टरों में बांटा गया है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिन्हित पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। इसके अलावा श्रावण अष्टमी मेलों में श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क लंगर और निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी प्रबंध किया गया है। मेलों के दौरान 75 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी बुलाए गए हैं। इसके अलावा 45 सफाई कर्मी भी अतिरिक्त रखे गए हैं, जिससे सफाई व्यवस्था में कोई कमी ना रहे।
मंदिर अधिकारी विचित्र सिंह ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रद्धालुओं के लिए HRTC की मुद्रिका बस लगाई गई हैं ताकि बड़े वाहनों में आए हुए श्रद्धालुओं को मंदिर तक आने में कोई भी परेशानी न उठानी पड़े। उनके बड़े वाहन शहर के बाहर ही खड़े किए जा रहे हैं। श्रावण अष्टमी मेलों में मंदिर प्रशासन के व्यापक प्रबंध श्रद्धालुओं के लिए रहेंगे।
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हिमाचल के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में शुक्रवार से श्रावण अष्टमी मेला शुरू हो गया है। मंदिर अधिकारी विचित्र सिंह ठाकुर ने मंदिर की परंपरा के अनुसार मां ज्वाला की पवित्र ज्योतियों की पूजा अर्चना करके मेले का शुभारंभ किया। वहीं, श्रावण अष्टमी मेले के पहले ही दिन भारी संख्या में श्रद्धालु मां ज्वाला के दर्शनों को पहुंचे। प्रशासन की ओर से मेटल डिटेक्टर से ही श्रद्धालुओं को दर्शनों के लिए भेजा जा रहा है। सुरक्षा के मद्दे नजर लाउड स्पीकर पर प्रतिबंध लगाया गया है। मंदिर में नारियल ले जाने पर भी प्रतिबंध है। इसके साथ ही भिक्षा वृत्ति पर भी पूर्णतया प्रतिबंध लगाया गया है। ज्वालामुखी शहर को सेक्टरों में बांटा गया है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिन्हित पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। इसके अलावा श्रावण अष्टमी मेलों में श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क लंगर और निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी प्रबंध किया गया है। मेलों के दौरान पचहत्तर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी बुलाए गए हैं। इसके अलावा पैंतालीस सफाई कर्मी भी अतिरिक्त रखे गए हैं, जिससे सफाई व्यवस्था में कोई कमी ना रहे। मंदिर अधिकारी विचित्र सिंह ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रद्धालुओं के लिए HRTC की मुद्रिका बस लगाई गई हैं ताकि बड़े वाहनों में आए हुए श्रद्धालुओं को मंदिर तक आने में कोई भी परेशानी न उठानी पड़े। उनके बड़े वाहन शहर के बाहर ही खड़े किए जा रहे हैं। श्रावण अष्टमी मेलों में मंदिर प्रशासन के व्यापक प्रबंध श्रद्धालुओं के लिए रहेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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रीवा। पनामा पेपर्स के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल ने कार्तिकेय का नाम पनामा पेपर्स में होने की बात कही थी। इस मामले में कार्तिकेय ने बिना किसी देरी के राहुल पर हमला बोलते हुए कहा था कि राहुल मांफी मांगे वरना उन्हे मानहानि का दावा करना पड़ेगा। राहुल ने मांफी मांगने की बजाय 'मैं कन्फ्यूज हो गया' कहकर मामले को टालने का प्रयास किया, साथ ही यह भी कह दिया कि मानहानि का प्रकरण दायर होता है तो इसमें कोई समस्या नहीं है।
राहुल के कन्फ्यूजन वाले बयान पर पूरे देश से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस मामले में अधिकांश विवाद एवं बयानों से दूरी रखने वाले मध्यप्रदेश सरकार के उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल भी कूद चुके हैं। श्री शुक्ल ने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष बेतुकी बाते करते हैं, जिसकी वजह से उनका मजाक बन चुका है। श्री शुक्ल ने मुख्यमंत्री की तारीफें भी की। उद्योग मंत्री ने कहा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक ईमानदार नेता हैं। वे राजनीति को सेवा धर्म मानते हैं। ऐसे नेता को बदनाम करने की मंशा से कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा इस तरह से स्तरहीन आरोप लगाए थे, बाद में मानहानि के डर से मुकर गए। इस तरह की हरकतें उनकी कमजोर मानसिकता को प्रमाणित करता है।
श्री शुक्ल ने कहा कि हाल में ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ऑडिटोरियम के सामने रोड शो किया एवं उसकी भव्य इमारत की तारीफ की, फिर अचानक से वे कन्फ्यूज हो गए एवं ई-टेंडरिंग घोटाले जैसी बाते करते हुए यू-टर्न ले लिए। कांग्रेस अध्यक्ष ई-टेंडरिंग पर सवाल उठाने लगे। मंत्री ने कहा प्रदेश में ई-टेंडरिंग सुशासन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है एवं इस पर टिप्पणी करना राहुल गांधी जी की नासमझी है। वे रटा-रटाया बयान देते हैं, इस कारण प्रायः कन्फ्यूज हो जाते हैं, यह स्वाभाविक भी है।
पाकिस्तान-बांग्लादेश की फोटो डालकर प्रदेश को बदमान करते हैं कमलनाथ एवं दिग्विजय उद्योग मंत्री यहीं नहीं रूके उन्होने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर भी निशाना साधा। राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि कांग्रेसी सत्ता पाने के लिए छटपटा रहें हैं, इस कारण अनर्गल आरोपों की बौछार कर रहे हैं। कमलनाथ एवं दिग्विजय सिंह तो अपने प्रदेश को ही बदनाम करते हैं। इन द्वय के द्वारा पाकिस्तान एवं बांग्लादेश जैसे देशों की तस्वीरे ट्वीट कर प्रदेश को बदनाम करने की कोशिशें भी की गई हैं।
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रीवा। पनामा पेपर्स के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल ने कार्तिकेय का नाम पनामा पेपर्स में होने की बात कही थी। इस मामले में कार्तिकेय ने बिना किसी देरी के राहुल पर हमला बोलते हुए कहा था कि राहुल मांफी मांगे वरना उन्हे मानहानि का दावा करना पड़ेगा। राहुल ने मांफी मांगने की बजाय 'मैं कन्फ्यूज हो गया' कहकर मामले को टालने का प्रयास किया, साथ ही यह भी कह दिया कि मानहानि का प्रकरण दायर होता है तो इसमें कोई समस्या नहीं है। राहुल के कन्फ्यूजन वाले बयान पर पूरे देश से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस मामले में अधिकांश विवाद एवं बयानों से दूरी रखने वाले मध्यप्रदेश सरकार के उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल भी कूद चुके हैं। श्री शुक्ल ने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष बेतुकी बाते करते हैं, जिसकी वजह से उनका मजाक बन चुका है। श्री शुक्ल ने मुख्यमंत्री की तारीफें भी की। उद्योग मंत्री ने कहा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक ईमानदार नेता हैं। वे राजनीति को सेवा धर्म मानते हैं। ऐसे नेता को बदनाम करने की मंशा से कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा इस तरह से स्तरहीन आरोप लगाए थे, बाद में मानहानि के डर से मुकर गए। इस तरह की हरकतें उनकी कमजोर मानसिकता को प्रमाणित करता है। श्री शुक्ल ने कहा कि हाल में ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ऑडिटोरियम के सामने रोड शो किया एवं उसकी भव्य इमारत की तारीफ की, फिर अचानक से वे कन्फ्यूज हो गए एवं ई-टेंडरिंग घोटाले जैसी बाते करते हुए यू-टर्न ले लिए। कांग्रेस अध्यक्ष ई-टेंडरिंग पर सवाल उठाने लगे। मंत्री ने कहा प्रदेश में ई-टेंडरिंग सुशासन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है एवं इस पर टिप्पणी करना राहुल गांधी जी की नासमझी है। वे रटा-रटाया बयान देते हैं, इस कारण प्रायः कन्फ्यूज हो जाते हैं, यह स्वाभाविक भी है। पाकिस्तान-बांग्लादेश की फोटो डालकर प्रदेश को बदमान करते हैं कमलनाथ एवं दिग्विजय उद्योग मंत्री यहीं नहीं रूके उन्होने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर भी निशाना साधा। राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि कांग्रेसी सत्ता पाने के लिए छटपटा रहें हैं, इस कारण अनर्गल आरोपों की बौछार कर रहे हैं। कमलनाथ एवं दिग्विजय सिंह तो अपने प्रदेश को ही बदनाम करते हैं। इन द्वय के द्वारा पाकिस्तान एवं बांग्लादेश जैसे देशों की तस्वीरे ट्वीट कर प्रदेश को बदनाम करने की कोशिशें भी की गई हैं।
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न्यूयॉर्क, 16 नवंबर (एपी) पीएनसी फाइनेंशियल सर्विसेस ग्रुप स्पेन के बीबीवीए बैंक की अमेरिकी अनुषंगी को 11. 6 अरब डॉलर के नकद सौदे में खरीदेगा। कंपनी ने सोमवार को इसकी घोषणा की।
बीबीवीए अमेरिका में अपना परिचालन ह्यूस्टन, टेक्सास से करती है। उसकी अनुषंगी के पास 104 अरब डॉलर की परिसंपत्तियां और 637 शाखाएं हैं। बैंक की देश के दक्षिणी और दक्षिण पश्चिम इलाकों में अच्छी पकड़ है।
पीएनसी मुख्य तौर पर क्षेत्रीय बैंक की तरह काम करता है। यह पेन्सिलवेनिया के पिट्सबर्ग में स्थित है। इस सौदे के बाद उसे देशभर में बड़े बैंकों के साथ मौजूदगी दर्ज कराने में मदद मिलेगी।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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न्यूयॉर्क, सोलह नवंबर पीएनसी फाइनेंशियल सर्विसेस ग्रुप स्पेन के बीबीवीए बैंक की अमेरिकी अनुषंगी को ग्यारह. छः अरब डॉलर के नकद सौदे में खरीदेगा। कंपनी ने सोमवार को इसकी घोषणा की। बीबीवीए अमेरिका में अपना परिचालन ह्यूस्टन, टेक्सास से करती है। उसकी अनुषंगी के पास एक सौ चार अरब डॉलर की परिसंपत्तियां और छः सौ सैंतीस शाखाएं हैं। बैंक की देश के दक्षिणी और दक्षिण पश्चिम इलाकों में अच्छी पकड़ है। पीएनसी मुख्य तौर पर क्षेत्रीय बैंक की तरह काम करता है। यह पेन्सिलवेनिया के पिट्सबर्ग में स्थित है। इस सौदे के बाद उसे देशभर में बड़े बैंकों के साथ मौजूदगी दर्ज कराने में मदद मिलेगी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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(माही)
गर्मी की शुरुआत होते ही सबसे ज्यादा जरूरत ठंडे पानी की होती है । अब दिन के साथ-साथ सुबह और रात में भी उमस बढ़ गई है । इसलिए ठंडा पानी पीने की जरूरत ज्यादा बढ़ गई है । लेकिन बाहर जाते समय ठंडा पानी मिलना काफी मुश्किल हो जाता है । अगर बाहर हम खरीद भी लेते है ठंडे पानी की बोतल तो थोड़ी देर बाद वह फिर गर्म हो जाती है । इसलिए आज हम आपको कुछ एसी बॉटल्स के बारे में बताने जा रहे हैं ,जो 24 घंटों तक पानी को ठंडा रखती है , चाहे तपती गर्मी क्यों न हो । इन बॉटल्स को सालों-साल यूज किया जा सकता है और कैरी करना भी काफी आसान है । यह लीक-प्रूफ और बेस्ट क्वालिटी वाले बॉटल हैं ।
यह वॉटर बॉटल का लुक काफी स्टाइलिश है । यह स्टेनलेस स्टील से बनी है । इसमें यदि आप गर्म चीज़ रखते है तो गर्म बनी रहेगी और ठंडी चीज रखते है तो ठंडी बनी रहेगी । यह थर्मो वैक्यूम फ्लास्क लीकेज प्रूफ भी है । एक लीटर वाली इस बॉटल को फ्लिपकार्ट से 1,050 रुपये में खरीदा जा सकता है।
इस बॉटल में थर्मो वैक्यूम फ्लास्क लीकेज प्रूफ है । मिल्टन की यह बॉटल 900ML में आती है । इसको फ्लिपकार्ट पर 1,042 रुपये में खरीदा जा सकता है । गोल्डन कलर में यह काफी स्टाइलिश लगती है ।
इसमें डबल वॉल फ्लास्क है, जो ज्यादा गर्मी में भी पानी जो लंबे समय तक ठंडा रखने में मदद करती है. इसको 899 रुपये में खरीदा जा सकता है । Cello Swift Stainless Steel Double Walled Flask में आप 1000ml तक पानी को स्टोर को कर सकते हैं ।
यह लीकप्रूफ वस्क्यूम कैप के साथ आती है. यह वॉटर बॉटल स्मज रेजिस्टेंट भी है. यह वॉटर बॉटल ट्रैवेलिंग के समय भी कैरी करने के लिए बेस्ट मानी जाती है. 500ML वाली इस बॉटल को 859 रुपये में खरीदा जा सकता है ।
यह पूरे दिन पानी को ठंडा रख सकती है. एक लीटर वाली इस बॉटल को मात्र 969 रुपये में खरीदा जा सकता है. यह 1000ml की कैपेसिटी के साथ आती है. जिसे आप आसानी से पानी भर सकते हैं साथ ही इसे क्लीन भी कर सकते हैं ।
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गर्मी की शुरुआत होते ही सबसे ज्यादा जरूरत ठंडे पानी की होती है । अब दिन के साथ-साथ सुबह और रात में भी उमस बढ़ गई है । इसलिए ठंडा पानी पीने की जरूरत ज्यादा बढ़ गई है । लेकिन बाहर जाते समय ठंडा पानी मिलना काफी मुश्किल हो जाता है । अगर बाहर हम खरीद भी लेते है ठंडे पानी की बोतल तो थोड़ी देर बाद वह फिर गर्म हो जाती है । इसलिए आज हम आपको कुछ एसी बॉटल्स के बारे में बताने जा रहे हैं ,जो चौबीस घंटाटों तक पानी को ठंडा रखती है , चाहे तपती गर्मी क्यों न हो । इन बॉटल्स को सालों-साल यूज किया जा सकता है और कैरी करना भी काफी आसान है । यह लीक-प्रूफ और बेस्ट क्वालिटी वाले बॉटल हैं । यह वॉटर बॉटल का लुक काफी स्टाइलिश है । यह स्टेनलेस स्टील से बनी है । इसमें यदि आप गर्म चीज़ रखते है तो गर्म बनी रहेगी और ठंडी चीज रखते है तो ठंडी बनी रहेगी । यह थर्मो वैक्यूम फ्लास्क लीकेज प्रूफ भी है । एक लीटर वाली इस बॉटल को फ्लिपकार्ट से एक,पचास रुपयापये में खरीदा जा सकता है। इस बॉटल में थर्मो वैक्यूम फ्लास्क लीकेज प्रूफ है । मिल्टन की यह बॉटल नौ सौML में आती है । इसको फ्लिपकार्ट पर एक,बयालीस रुपयापये में खरीदा जा सकता है । गोल्डन कलर में यह काफी स्टाइलिश लगती है । इसमें डबल वॉल फ्लास्क है, जो ज्यादा गर्मी में भी पानी जो लंबे समय तक ठंडा रखने में मदद करती है. इसको आठ सौ निन्यानवे रुपयापये में खरीदा जा सकता है । Cello Swift Stainless Steel Double Walled Flask में आप एक हज़ार मिलीलीटर तक पानी को स्टोर को कर सकते हैं । यह लीकप्रूफ वस्क्यूम कैप के साथ आती है. यह वॉटर बॉटल स्मज रेजिस्टेंट भी है. यह वॉटर बॉटल ट्रैवेलिंग के समय भी कैरी करने के लिए बेस्ट मानी जाती है. पाँच सौML वाली इस बॉटल को आठ सौ उनसठ रुपयापये में खरीदा जा सकता है । यह पूरे दिन पानी को ठंडा रख सकती है. एक लीटर वाली इस बॉटल को मात्र नौ सौ उनहत्तर रुपयापये में खरीदा जा सकता है. यह एक हज़ार मिलीलीटर की कैपेसिटी के साथ आती है. जिसे आप आसानी से पानी भर सकते हैं साथ ही इसे क्लीन भी कर सकते हैं ।
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विक्की कौशल (Vicky Kaushal) और कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए. इस दौरान कपल कैजुअल लुक में दिखा. हालांकि, दोनों सितारे कहां जा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिली है.
विक्की कौशल ब्लैक टी-शर्ट और ग्रेट जैकेट में काफी कूल लगे. इसके साथ ही उन्होंने व्हाइट स्नीकर्स और ब्लैक कलर कैप पहनी थी. विक्की ने एक बैग भी कैरी किया था.
कैटरीना कैफ भी कैजुअल आउटफिट में नजर आईं. वह ब्लैक स्वेटशर्ट और ब्लैक में नजर आईं. उन्होंने बालों को बना बनाया हुआ था और ब्लैक कलर की कैप पहनी थी.
एयरपोर्ट पर विक्की कौशल और कैटरीना कैफ की बॉन्डिंग साफ नजर आई. उनकी इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर जमकर लाइक और शेयर किया जा रहा है.
कैटरीना कैफ और विक्की कौशल ने 9 दिसंबर, 2021 को राजस्थान में शादी रचाई थी जिसमें करीबी दोस्त और परिवार के लोग शामिल हुए थे.
कुछ दिनों पहले ही विक्की और कैटरीना ने शादी की पहली साल गिरह मनाई. इस दौरान विक्की ने कैटरीना के लिए एक स्पेशल नोट भी शेयर किया था.
वर्क फ्रंट की बात करें तो विक्की कौशल (Vicky Kaushal) की फिल्म गोविंदा नाम मेरा (Govinda Naam Mera) डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई है. वहीं, कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) पिछली बार फिल्म फोन भूत (Phone Bhoot) में दिखीं जिसमें उन्होंने ईशान खट्टर और सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ स्क्रीन शेयर किया है.
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विक्की कौशल और कैटरीना कैफ एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए. इस दौरान कपल कैजुअल लुक में दिखा. हालांकि, दोनों सितारे कहां जा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिली है. विक्की कौशल ब्लैक टी-शर्ट और ग्रेट जैकेट में काफी कूल लगे. इसके साथ ही उन्होंने व्हाइट स्नीकर्स और ब्लैक कलर कैप पहनी थी. विक्की ने एक बैग भी कैरी किया था. कैटरीना कैफ भी कैजुअल आउटफिट में नजर आईं. वह ब्लैक स्वेटशर्ट और ब्लैक में नजर आईं. उन्होंने बालों को बना बनाया हुआ था और ब्लैक कलर की कैप पहनी थी. एयरपोर्ट पर विक्की कौशल और कैटरीना कैफ की बॉन्डिंग साफ नजर आई. उनकी इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर जमकर लाइक और शेयर किया जा रहा है. कैटरीना कैफ और विक्की कौशल ने नौ दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस को राजस्थान में शादी रचाई थी जिसमें करीबी दोस्त और परिवार के लोग शामिल हुए थे. कुछ दिनों पहले ही विक्की और कैटरीना ने शादी की पहली साल गिरह मनाई. इस दौरान विक्की ने कैटरीना के लिए एक स्पेशल नोट भी शेयर किया था. वर्क फ्रंट की बात करें तो विक्की कौशल की फिल्म गोविंदा नाम मेरा डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई है. वहीं, कैटरीना कैफ पिछली बार फिल्म फोन भूत में दिखीं जिसमें उन्होंने ईशान खट्टर और सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ स्क्रीन शेयर किया है.
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बुब्बा वाटसन पीजीए दौरे पर सबसे ज्यादा हिटर्स में से एक है, जिसने गेंद को 313 गज की औसत भेज दी है। अप्रैल में मास्टर्स में, उनके गुलाबी शाफ्ट चालक और मेगा स्विंग ने उन्हें निकटतम प्रतियोगी से दूर खींचने में मदद की, और उन्हें तीन साल में दूसरी बार खिताब जीता।
लेकिन टोर बर्क, ऑरलैंडो, फ्लोरिडा के 27 वर्षीय, वाटसन के ड्राइव को क्रश करते हैं। मियामी बेसबॉल पिचर के पूर्व विश्वविद्यालय गोल्फ बॉल को 400 गज की दूरी पर भेजता है, प्रति घंटे 223 मील की रफ्तार से। हाँ, 233 मील प्रति घंटा।
हालांकि, आप जल्द ही वाटसन के बगल में हरे रंग के डालने पर उसे नहीं ढूंढ पाएंगे। बर्क एक लंबा चालक है। प्रतिस्पर्धी होने के लिए, आपको केवल एक चीज पर ध्यान देना होगाः गेंद को यथासंभव ड्राइविंग करना। और बर्क सबसे अच्छा है। पिछले साल, उन्होंने 427 गज की दूरी के साथ री / मैक्स वर्ल्ड लांग ड्राइव चैम्पियनशिप जीती।
बर्क का मानना है कि उनकी बेसबॉल पृष्ठभूमि ने उन्हें टी बॉक्स में प्राकृतिक बना दिया। "पिचिंग और लंबी ड्राइविंग एक ही अनुक्रम साझा करते हैंः कूल्हों, धड़, हथियार, और फिर रिलीज," वे कहते हैं। "मैं जमीन से बिजली उत्पन्न कर सकता हूं और बहुत सारे टोक़ बना सकता हूं।"
और जब उनका लंबा, मांसपेशी फ्रेम (वह 6'6 ", 230 पाउंड) उसकी मदद करता है, तो रिकॉर्ड खुद को सेट करने के लिए पर्याप्त नहीं है।" जबकि ताकत एक महत्वपूर्ण कारक है, यह लंबी ड्राइविंग की एकमात्र कुंजी नहीं है, "बिल हार्टमैन कहते हैं, सीएससीएस, पीटी, इंडियानापोलिस फिटनेस एंड स्पोर्ट्स ट्रेनिंग के सह-मालिक। "एक गोल्फ स्विंग केवल एक सेकंड लेता है, इसलिए आपके पास अपनी अधिकतम ताकत तक पहुंचने का समय कभी नहीं होगा।"
यही कारण है कि बर्क के ट्रेनर, ट्रेवर एंडरसन, प्रदर्शन बेहतर हर दिन स्वास्थ्य और प्रदर्शन के मालिक, ने एथलीट को "गोल्फलेटिसिज्म" में सुधार करने पर बल दिया है - ताकत, लचीलापन, स्थिरता, गति, नियंत्रण और शक्ति का संयोजन।
बर्क प्रशिक्षण सत्रों के दौरान वजन बढ़ाने और स्विंग क्लब नहीं उठा रहे हैं। वह केटलबेल चाल, चपलता कार्य, और शंकु ड्रिल जैसी चीजें भी कर रहा है जो उन्हें अपने ड्राइव के विशिष्ट पहलुओं के माध्यम से अधिक एथलेटिक रूप से स्थानांतरित करने में मदद करता है।
उदाहरण के लिए, इस बाध्य शंकु ड्रिल ले लो। आप लगभग 4 फीट के बारे में दो शंकु सेट करेंगे। एक शंकु के सामने, अपने दाहिने पैर पर अपने दाहिने घुटने के साथ थोड़ा झुकाएं और अपने बाएं पैर को फर्श से थोड़ा दूर रखें। अपने शरीर को फर्श की ओर कम करें, और फिर अपने दाहिने पैर को कूदकर अपने बाएं से बाध्य करें। जब आप अपने दाहिने हाथ से शंकु की ओर पहुंचते हैं तो अपने बाएं पैर पर जमीन। इस बार अपने दाहिने पैर पर लैंडिंग, दाईं ओर आंदोलन को पीछे की तरफ घुमाएं। वह एक प्रतिनिधि है। 5 प्रतिनिधि के 3 सेट करो।
एंडरसन कहते हैं, ड्रिल पार्श्व आंदोलन सिखाता है, जो बर्क के क्लब की गति में वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे बर्क स्विंग करता है, वह अपने दाहिने तरफ झुकता है, अपना दाहिना कूल्हे लोड करता है। यह उसे अपने ऊपरी शरीर और धड़ को हवा के लिए एक ठोस नींव देता है क्योंकि वह जल्दी से सत्ता को अपने बाएं तरफ स्थानांतरित करता है। एंडरसन बताते हैं कि जितना बेहतर वह बाद में आगे बढ़ सकता है, उतना तेज क्लब का सिर आगे बढ़ेगा और आगे की गेंद उड़ जाएगी।
लंबी ड्राइव के लिए आवश्यक कौशल के बारे में और जानना चाहते हैं? स्विंग के पीछे विज्ञान के टूटने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देखें।
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बुब्बा वाटसन पीजीए दौरे पर सबसे ज्यादा हिटर्स में से एक है, जिसने गेंद को तीन सौ तेरह गज की औसत भेज दी है। अप्रैल में मास्टर्स में, उनके गुलाबी शाफ्ट चालक और मेगा स्विंग ने उन्हें निकटतम प्रतियोगी से दूर खींचने में मदद की, और उन्हें तीन साल में दूसरी बार खिताब जीता। लेकिन टोर बर्क, ऑरलैंडो, फ्लोरिडा के सत्ताईस वर्षीय, वाटसन के ड्राइव को क्रश करते हैं। मियामी बेसबॉल पिचर के पूर्व विश्वविद्यालय गोल्फ बॉल को चार सौ गज की दूरी पर भेजता है, प्रति घंटे दो सौ तेईस मील की रफ्तार से। हाँ, दो सौ तैंतीस मील प्रति घंटा। हालांकि, आप जल्द ही वाटसन के बगल में हरे रंग के डालने पर उसे नहीं ढूंढ पाएंगे। बर्क एक लंबा चालक है। प्रतिस्पर्धी होने के लिए, आपको केवल एक चीज पर ध्यान देना होगाः गेंद को यथासंभव ड्राइविंग करना। और बर्क सबसे अच्छा है। पिछले साल, उन्होंने चार सौ सत्ताईस गज की दूरी के साथ री / मैक्स वर्ल्ड लांग ड्राइव चैम्पियनशिप जीती। बर्क का मानना है कि उनकी बेसबॉल पृष्ठभूमि ने उन्हें टी बॉक्स में प्राकृतिक बना दिया। "पिचिंग और लंबी ड्राइविंग एक ही अनुक्रम साझा करते हैंः कूल्हों, धड़, हथियार, और फिर रिलीज," वे कहते हैं। "मैं जमीन से बिजली उत्पन्न कर सकता हूं और बहुत सारे टोक़ बना सकता हूं।" और जब उनका लंबा, मांसपेशी फ्रेम उसकी मदद करता है, तो रिकॉर्ड खुद को सेट करने के लिए पर्याप्त नहीं है।" जबकि ताकत एक महत्वपूर्ण कारक है, यह लंबी ड्राइविंग की एकमात्र कुंजी नहीं है, "बिल हार्टमैन कहते हैं, सीएससीएस, पीटी, इंडियानापोलिस फिटनेस एंड स्पोर्ट्स ट्रेनिंग के सह-मालिक। "एक गोल्फ स्विंग केवल एक सेकंड लेता है, इसलिए आपके पास अपनी अधिकतम ताकत तक पहुंचने का समय कभी नहीं होगा।" यही कारण है कि बर्क के ट्रेनर, ट्रेवर एंडरसन, प्रदर्शन बेहतर हर दिन स्वास्थ्य और प्रदर्शन के मालिक, ने एथलीट को "गोल्फलेटिसिज्म" में सुधार करने पर बल दिया है - ताकत, लचीलापन, स्थिरता, गति, नियंत्रण और शक्ति का संयोजन। बर्क प्रशिक्षण सत्रों के दौरान वजन बढ़ाने और स्विंग क्लब नहीं उठा रहे हैं। वह केटलबेल चाल, चपलता कार्य, और शंकु ड्रिल जैसी चीजें भी कर रहा है जो उन्हें अपने ड्राइव के विशिष्ट पहलुओं के माध्यम से अधिक एथलेटिक रूप से स्थानांतरित करने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, इस बाध्य शंकु ड्रिल ले लो। आप लगभग चार फीट के बारे में दो शंकु सेट करेंगे। एक शंकु के सामने, अपने दाहिने पैर पर अपने दाहिने घुटने के साथ थोड़ा झुकाएं और अपने बाएं पैर को फर्श से थोड़ा दूर रखें। अपने शरीर को फर्श की ओर कम करें, और फिर अपने दाहिने पैर को कूदकर अपने बाएं से बाध्य करें। जब आप अपने दाहिने हाथ से शंकु की ओर पहुंचते हैं तो अपने बाएं पैर पर जमीन। इस बार अपने दाहिने पैर पर लैंडिंग, दाईं ओर आंदोलन को पीछे की तरफ घुमाएं। वह एक प्रतिनिधि है। पाँच प्रतिनिधि के तीन सेट करो। एंडरसन कहते हैं, ड्रिल पार्श्व आंदोलन सिखाता है, जो बर्क के क्लब की गति में वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे बर्क स्विंग करता है, वह अपने दाहिने तरफ झुकता है, अपना दाहिना कूल्हे लोड करता है। यह उसे अपने ऊपरी शरीर और धड़ को हवा के लिए एक ठोस नींव देता है क्योंकि वह जल्दी से सत्ता को अपने बाएं तरफ स्थानांतरित करता है। एंडरसन बताते हैं कि जितना बेहतर वह बाद में आगे बढ़ सकता है, उतना तेज क्लब का सिर आगे बढ़ेगा और आगे की गेंद उड़ जाएगी। लंबी ड्राइव के लिए आवश्यक कौशल के बारे में और जानना चाहते हैं? स्विंग के पीछे विज्ञान के टूटने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देखें।
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पलवल,16 जून (हप्र)
कुंडली- गाजियाबाद- पलवल (केजीपी) टोल पर लगे नाके को डंपर से तोड़ दिया और पुलिस टीम पर डंपर चढ़ाने का प्रयास किया। दोनों डंपरों को मौके पर ही काबू कर लिया जबकि चालक भागने में कामयाब हो गए। पुलिस ने अज्ञात चालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच अधिकारी जीतराम के अनुसार पुलिस लाइन में तैनात ईएएसआई हंसराज ने शिकायत दर्ज कराई है कि वह अपनी टीम के साथ केजीपी एक्सप्रेस वे पर गांव छज्जूनगर स्थित टोल पर ओवरलोड वाहनों की धरपकड़ के लिए नाके पर तैनात थे। उसी दौरान नूंह की तरफ से कई डंपर तेज गति से आते दिखाई दिए। पुलिस ने डंपर चालकों को रोकने का इशारा किया लेकिन चालकों ने तेज रफ्तार से चलाते हुए पुलिस पार्टी पर डंपर चढ़ाने का प्रयास किया और नाके को तोड़ते हुए आगे की तरफ निकल गए। पुलिस कर्मियों ने इधर-उधर कूदकर अपनी जान बचाई और पीछा कर दो डंपर नंबर (एचआर-73,ए-2736 व एचआर-73,ए-4405) को काबू कर लिया गया। चालक मौके से भागने में कामयाब हो गए। पुलिस ने अज्ञात चालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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पलवल,सोलह जून कुंडली- गाजियाबाद- पलवल टोल पर लगे नाके को डंपर से तोड़ दिया और पुलिस टीम पर डंपर चढ़ाने का प्रयास किया। दोनों डंपरों को मौके पर ही काबू कर लिया जबकि चालक भागने में कामयाब हो गए। पुलिस ने अज्ञात चालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस जांच अधिकारी जीतराम के अनुसार पुलिस लाइन में तैनात ईएएसआई हंसराज ने शिकायत दर्ज कराई है कि वह अपनी टीम के साथ केजीपी एक्सप्रेस वे पर गांव छज्जूनगर स्थित टोल पर ओवरलोड वाहनों की धरपकड़ के लिए नाके पर तैनात थे। उसी दौरान नूंह की तरफ से कई डंपर तेज गति से आते दिखाई दिए। पुलिस ने डंपर चालकों को रोकने का इशारा किया लेकिन चालकों ने तेज रफ्तार से चलाते हुए पुलिस पार्टी पर डंपर चढ़ाने का प्रयास किया और नाके को तोड़ते हुए आगे की तरफ निकल गए। पुलिस कर्मियों ने इधर-उधर कूदकर अपनी जान बचाई और पीछा कर दो डंपर नंबर को काबू कर लिया गया। चालक मौके से भागने में कामयाब हो गए। पुलिस ने अज्ञात चालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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C.M Redressal System ( RTI )
'अटल किसान-मजदूर कैंटीन'
हम विकेंद्रीकरण थ्योरी पर काम रहे हैं।
जनता की सुविधा के लिए डिजिलॉकर की व्यवस्था की गई है जिसमें सभी नागरिक अपने दस्तावेज रख सकेंगे।
E-way बिल के माध्यम से गलत माल की रास्ते में ही चेकिंग हो जाती है।
CM Manohar Lal participates in state level good governance day programme at Gurugram(25-12-19)
₹22 करोड़ एस्टीमेट वाले प्रोजेक्ट का ₹18 करोड़ में तैयार होना प्रसन्नता का विषय है।
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मैट्रोन मॉस्को प्यारे संतों में से एक हैरूसी रूढ़िवादी में पुरानी महिलाएं। उसके पास दूरदर्शिता का उपहार था और जो लोग बीमारियों से पीड़ित थे उन्हें ठीक कर सकते थे। आज, आप राजधानी के पोक्रोव्स्की मठ में बूढ़ी महिलाओं के अवशेषों का सम्मान कर सकते हैं। मैट्रोनुष्का के लिए ताजे फूल लाने की परंपरा है, क्योंकि अपने जीवनकाल में वह उनसे बहुत प्यार करती थीं। लेकिन आगंतुक संत से उपहार के बिना नहीं रहते हैं। मठ से बाहर निकलने पर प्रत्येक आगंतुक एक कली देता है। लेकिन हर कोई नहीं जानता कि मास्को के मैट्रोन से फूल के साथ क्या करना है।
मैट्रॉन मॉस्को कौन है?
धन्य माँ के पास उपचार का उपहार था औरदूरदर्शिता। वह जन्म से अंधी थी, लेकिन उसने लोगों की आत्मा को देखा। Matrona Moskovskaya ने अपना जीवन ज़रूरतमंदों और पीड़ितों, ग़रीबों और बिखरे हुए लोगों के लिए प्रार्थना करने में बिताया। रूसी गांवों में घूमते हुए, उसने हर घर में आराम और स्नेह किया। और आज, लोग संत की स्मृति का सम्मान करने के लिए दूर से आते हैं, वे मदद, सलाह और सुरक्षा के लिए उसकी ओर मुड़ते हैं।
मैट्रॉन निकोनोव का जन्म नवंबर में हुआ था1881। वह परिवार में चौथी संतान बन गई। लड़की अंधे पैदा हुई थी, और उसके माता-पिता ने शुरू में उसे एक अनाथालय में छोड़ने का इरादा किया था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया - मैट्रोन के जन्म के तुरंत बाद, उसकी माँ को एक अद्भुत और असामान्य सपना भेजा गया थाः उसने उसे बाहरी सुंदरता के एक बर्फ-सफेद पक्षी, लेकिन एक अंधा देखा, जो आसानी से उसके स्तन पर डूब गया।
लड़की के चुने जाने का एक और सबूत छाती पर एक असाधारण चिन्ह था, जो एक क्रॉस के जैसा था। और फ़ॉन्ट के बपतिस्मा के दौरान, जिसमें बच्चे को उतारा गया था, उज्ज्वल सुगंधित भाप का एक स्तंभ बच गया।
प्रभावित करता है कि पहले से ही सात साल की उम्र मेंलड़कियों ने दूरदर्शिता का उपहार और चंगा करने की क्षमता प्रकट की। लोग न केवल उसके पैतृक गांव, बल्कि पड़ोस से उसके पास आए। अंधे होने के नाते, उसकी एक विशेष दृष्टि थी, उसने सभी की आत्मा को देखा।
जीवन के अठारहवें वर्ष में, लड़की ने अपने पैर खो दिए, और वह अपने दिनों के अंत तक नहीं चल सकी।
आज देशभर से आए श्रद्धालुवे मदद के लिए संत की ओर मुड़ते हैं, असभ्य को मॉस्को के मैट्रॉन के पसंदीदा फूल लाते हैं। आखिरकार, सौ साल पहले वह लोगों की देखभाल कर रही थी। हालाँकि वह खुद अस्वस्थ थी, लेकिन किसी ने भी उसकी शिकायत नहीं सुनी, लेकिन केवल आराम के शब्द थे।
1917 की घटनाओं के बाद, मैट्रन और उसकी दोस्तलिडिया यनकोवा गरीब हो गई और, घर के बिना छोड़ दिया, वह जहां भी रहना चाहती थी। 1925 में, वे राजधानी में पहुंचे, जहाँ आगंतुक संत के दर्शन के लिए आते रहे - हर दिन लगभग चालीस लोग।
युद्ध के वर्षों के दौरान, मास्को के मैट्रॉन उसके साथ रहते थेसाथी ग्रामीणों - जिनेदा ज़दानोवा, जिन्होंने बाद में अपने संस्मरणों के संग्रह में संत द्वारा किए गए चमत्कारों का वर्णन किया। यहां तक कि गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद, उसने आवेदकों को स्वीकार करना जारी रखा।
मैट्रॉन ने उससे तीन दिन पहले अपनी मृत्यु का अनुमान लगाया। ब्लिसफुल ने 2 मई, 1952 को इस दुनिया को छोड़ दिया। उसे मास्को में डेनिलोव्स्की कब्रिस्तान में दफनाया गया था। मैट्रोन का मकबरा अपने प्रशंसकों के लिए तीर्थयात्रा के पसंदीदा स्थानों में से एक बन गया।
आज, कई लोगों को ज्ञात धन्य वृद्ध महिला का नामविश्वासियों। कई लोग रुचि रखते हैं कि कितने फूलों को मास्को के मैट्रॉन में ले जाना है और उन्हें क्या होना चाहिए। लोग पवित्र बूढ़ी महिला को श्रद्धेय मानते हैं और उसके प्रति आभारी हैं, क्योंकि अपने जीवन के दौरान उसने कई चमत्कार किए। आप उनके बारे में धन्य मैट्रॉन के जीवन से सीख सकते हैं।
इसलिए, एक बच्चे के रूप में, उसने एक आदमी को चंगा कियाजो नहीं चल सका। वे लिखते हैं कि वह पड़ोस के गाँवों में से एक में रहता था, मैट्रोन के घर से चार किलोमीटर दूर। उसने उससे कहा कि वह उसे क्रॉल करे - वह आदमी पहले ही अपने पैरों पर ठीक हो गया था।
मदर मैट्रन के बाद भी काम करना जारी हैउसकी मृत्यु। हजारों लोगों ने अपनी कहानियों को साझा किया कि कैसे प्रार्थना ने उन्हें एक गंभीर बीमारी का इलाज दिया, एक बच्चे को गर्भ धारण करने या जीवन साथी से मिलने में मदद की। इसकी चिकित्सा शक्ति का एक और सबूत मॉस्को के मठ के फूलों से है। बूढ़ी महिलाओं के अवशेषों का सम्मान करने के लिए क्या करना है और वे कहाँ स्थित हैं?
मास्को के मैट्रोन की शक्ति कहाँ है?
सत्रह साल पहले संत मैट्रोन के अवशेष थेराजधानी में डेनिलोव मठ के लिए ले जाया गया, और इसके बाद - पोक्रोव्स्की में। वहां उन्हें एक रजत क्रेफ़िश में रखा गया था; अगले फोटो के साथ प्रदर्शनी है। आप मास्को के मैट्रोन के अवशेषों को किसी भी दिन सुबह छह बजे से शाम आठ बजे तक देख सकते हैं। मठ में आकर, मास्को के मैट्रोन के पसंदीदा फूलों को अपने साथ लाने का रिवाज है। जैसा कि संत के जीवन में और समकालीनों के संस्मरणों में वर्णित है, उसने दूसरों के लिए गुलदाउदी, कैमोमाइल, कॉर्नफ्लॉवर और गुलाब पसंद किए।
लेकिन पोक्रोव्स्क मठ में न केवल पुराने अवशेषों को झुकना संभव है। उनके कण अन्य महानगरीय चर्चों में हैं। साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित मठों में भी अपूरणीय अवशेष लाए जाते हैं।
संत से मदद और हिमायत कैसे पूछें?
ऐसा माना जाता है कि मॉस्को का मैट्रॉनऐसे लोगों की सुरक्षा करता है, जिनका पेशा बच्चों की परवरिश और शिक्षा से जुड़ा है। इसके संरक्षण के तहत डॉक्टर, विशेष रूप से बाल रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, आर्थोपेडिस्ट हैं। पसंदीदा पवित्र महीना मई है। ऐसा माना जाता है कि तब पैदा हुए लोग उसकी मदद पर भरोसा कर सकते हैं।
एहसान कमाने के कई तरीके हैं।मास्को का मैट्रॉन। उनमें से पहला - सड़क या आवारा कुत्तों या कबूतरों को भिखारियों को खिलाना। संत को संबोधित करने से पहले, मंदिर में दान करना अच्छा है, जिसमें काली रोटी, नट्स, दूध, कुकीज़, शहद, कारमेल शामिल हैं।
हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उज्ज्वल इरादों और शुद्ध आत्मा के साथ मठ में जाने के लिए, ईमानदारी से विश्वास और श्रद्धा के साथ। आखिरकार, संत मैट्रोन ने लोगों की मदद करने और आराम करने से कभी इनकार नहीं किया।
मैट्रॉन क्या फूल ले जाता है?
आज अवशेषों को लाने का रिवाज हैउसके पसंदीदा फूल Matronushki। इसलिए, चैपल, जहां सिल्वर केकड़े को रखा जाता है, को पूरे साल ताजे गुलदस्ते में दफन किया जाता है। इसी समय, कुछ तीर्थयात्रियों के फूल दूसरों के लिए धन्य उपहार बन जाते हैं - जब मठ से बाहर निकलते हैं, तो नन को प्रत्येक आगंतुक को एक कली द्वारा सौंप दिया जाता है। इसलिए, मॉस्को के मैट्रोन से फूलों का उपयोग करने का सवाल इतना आम है।
कई सोच रहे हैं कि क्या यह मायने रखता है कि मास्को के मैट्रॉन को ले जाने के लिए कितने रंग हैं। जानकार लोगों का दावा है कि संख्या ज्यादा मायने नहीं रखती है, जब तक यह विषम है।
मैट्रन के फूल के साथ क्या करना है?
सभी आगंतुकों के साथ धन्य बूढ़ी महिलाओं के अवशेषमठ से पवित्र के पसंदीदा रंगों में से एक या अधिक फूल देते हैं। यह माना जाता है कि वे विशेष शक्ति से संपन्न हैं। इसलिए, लोग मास्को के मैट्रोन से फूल के साथ क्या करना चाहते हैं, इस पर रुचि रखते हैं।
आमतौर पर कलियों को सूखा जाता है और आइकन के बगल में संग्रहीत किया जाता है। वे यह भी कहते हैं कि आप उन्हें चाय में जोड़ सकते हैं या एक चिकित्सा काढ़ा तैयार कर सकते हैं, गले में धब्बे के लिए आवेदन कर सकते हैं। कुछ लोग तकिया में पवित्र स्थानों से फूल सीना, विश्वास करते हैं कि वे एक ताबीज बन जाएंगे जो बुराई और दुःख से बचाता है।
हर कोई चुनता है कि एक फूल के साथ क्या करना हैमास्को का मैट्रॉन। याद रखने वाली मुख्य बात यह है कि संरक्षित कलियों को किसी भी तरह से कचरे में नहीं फेंका जाना चाहिए। चरम मामलों में, आप उन्हें जमीन पर रख सकते हैं।
मैट्रन फूलों का उपयोग करने का तरीका जाननामास्को, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि उनके पास कितनी शक्ति है। वे कहते हैं कि मठ में प्राप्त कलियाँ विभिन्न रोगों को ठीक कर सकती हैं। इसके लिए आपको फूलों के काढ़े के साथ स्नान करने या उन्हें गले में जगह पर लागू करने की आवश्यकता है। पंखुड़ियों से अच्छी तरह से चाय।
यहां तक कि मास्को के मैट्रोन से फूल भविष्य की घटनाओं की भविष्यवाणी कर सकते हैं, अपने मालिकों को विशेष संकेत दे सकते हैं। यह माना जाता है कि वे लंबे समय तक वापस नहीं आते हैं - गुलदस्ते अक्सर एक महीने से अधिक समय तक अपनी ताजगी बनाए रखते हैं।
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मैट्रोन मॉस्को प्यारे संतों में से एक हैरूसी रूढ़िवादी में पुरानी महिलाएं। उसके पास दूरदर्शिता का उपहार था और जो लोग बीमारियों से पीड़ित थे उन्हें ठीक कर सकते थे। आज, आप राजधानी के पोक्रोव्स्की मठ में बूढ़ी महिलाओं के अवशेषों का सम्मान कर सकते हैं। मैट्रोनुष्का के लिए ताजे फूल लाने की परंपरा है, क्योंकि अपने जीवनकाल में वह उनसे बहुत प्यार करती थीं। लेकिन आगंतुक संत से उपहार के बिना नहीं रहते हैं। मठ से बाहर निकलने पर प्रत्येक आगंतुक एक कली देता है। लेकिन हर कोई नहीं जानता कि मास्को के मैट्रोन से फूल के साथ क्या करना है। मैट्रॉन मॉस्को कौन है? धन्य माँ के पास उपचार का उपहार था औरदूरदर्शिता। वह जन्म से अंधी थी, लेकिन उसने लोगों की आत्मा को देखा। Matrona Moskovskaya ने अपना जीवन ज़रूरतमंदों और पीड़ितों, ग़रीबों और बिखरे हुए लोगों के लिए प्रार्थना करने में बिताया। रूसी गांवों में घूमते हुए, उसने हर घर में आराम और स्नेह किया। और आज, लोग संत की स्मृति का सम्मान करने के लिए दूर से आते हैं, वे मदद, सलाह और सुरक्षा के लिए उसकी ओर मुड़ते हैं। मैट्रॉन निकोनोव का जन्म नवंबर में हुआ थाएक हज़ार आठ सौ इक्यासी। वह परिवार में चौथी संतान बन गई। लड़की अंधे पैदा हुई थी, और उसके माता-पिता ने शुरू में उसे एक अनाथालय में छोड़ने का इरादा किया था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया - मैट्रोन के जन्म के तुरंत बाद, उसकी माँ को एक अद्भुत और असामान्य सपना भेजा गया थाः उसने उसे बाहरी सुंदरता के एक बर्फ-सफेद पक्षी, लेकिन एक अंधा देखा, जो आसानी से उसके स्तन पर डूब गया। लड़की के चुने जाने का एक और सबूत छाती पर एक असाधारण चिन्ह था, जो एक क्रॉस के जैसा था। और फ़ॉन्ट के बपतिस्मा के दौरान, जिसमें बच्चे को उतारा गया था, उज्ज्वल सुगंधित भाप का एक स्तंभ बच गया। प्रभावित करता है कि पहले से ही सात साल की उम्र मेंलड़कियों ने दूरदर्शिता का उपहार और चंगा करने की क्षमता प्रकट की। लोग न केवल उसके पैतृक गांव, बल्कि पड़ोस से उसके पास आए। अंधे होने के नाते, उसकी एक विशेष दृष्टि थी, उसने सभी की आत्मा को देखा। जीवन के अठारहवें वर्ष में, लड़की ने अपने पैर खो दिए, और वह अपने दिनों के अंत तक नहीं चल सकी। आज देशभर से आए श्रद्धालुवे मदद के लिए संत की ओर मुड़ते हैं, असभ्य को मॉस्को के मैट्रॉन के पसंदीदा फूल लाते हैं। आखिरकार, सौ साल पहले वह लोगों की देखभाल कर रही थी। हालाँकि वह खुद अस्वस्थ थी, लेकिन किसी ने भी उसकी शिकायत नहीं सुनी, लेकिन केवल आराम के शब्द थे। एक हज़ार नौ सौ सत्रह की घटनाओं के बाद, मैट्रन और उसकी दोस्तलिडिया यनकोवा गरीब हो गई और, घर के बिना छोड़ दिया, वह जहां भी रहना चाहती थी। एक हज़ार नौ सौ पच्चीस में, वे राजधानी में पहुंचे, जहाँ आगंतुक संत के दर्शन के लिए आते रहे - हर दिन लगभग चालीस लोग। युद्ध के वर्षों के दौरान, मास्को के मैट्रॉन उसके साथ रहते थेसाथी ग्रामीणों - जिनेदा ज़दानोवा, जिन्होंने बाद में अपने संस्मरणों के संग्रह में संत द्वारा किए गए चमत्कारों का वर्णन किया। यहां तक कि गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद, उसने आवेदकों को स्वीकार करना जारी रखा। मैट्रॉन ने उससे तीन दिन पहले अपनी मृत्यु का अनुमान लगाया। ब्लिसफुल ने दो मई, एक हज़ार नौ सौ बावन को इस दुनिया को छोड़ दिया। उसे मास्को में डेनिलोव्स्की कब्रिस्तान में दफनाया गया था। मैट्रोन का मकबरा अपने प्रशंसकों के लिए तीर्थयात्रा के पसंदीदा स्थानों में से एक बन गया। आज, कई लोगों को ज्ञात धन्य वृद्ध महिला का नामविश्वासियों। कई लोग रुचि रखते हैं कि कितने फूलों को मास्को के मैट्रॉन में ले जाना है और उन्हें क्या होना चाहिए। लोग पवित्र बूढ़ी महिला को श्रद्धेय मानते हैं और उसके प्रति आभारी हैं, क्योंकि अपने जीवन के दौरान उसने कई चमत्कार किए। आप उनके बारे में धन्य मैट्रॉन के जीवन से सीख सकते हैं। इसलिए, एक बच्चे के रूप में, उसने एक आदमी को चंगा कियाजो नहीं चल सका। वे लिखते हैं कि वह पड़ोस के गाँवों में से एक में रहता था, मैट्रोन के घर से चार किलोमीटर दूर। उसने उससे कहा कि वह उसे क्रॉल करे - वह आदमी पहले ही अपने पैरों पर ठीक हो गया था। मदर मैट्रन के बाद भी काम करना जारी हैउसकी मृत्यु। हजारों लोगों ने अपनी कहानियों को साझा किया कि कैसे प्रार्थना ने उन्हें एक गंभीर बीमारी का इलाज दिया, एक बच्चे को गर्भ धारण करने या जीवन साथी से मिलने में मदद की। इसकी चिकित्सा शक्ति का एक और सबूत मॉस्को के मठ के फूलों से है। बूढ़ी महिलाओं के अवशेषों का सम्मान करने के लिए क्या करना है और वे कहाँ स्थित हैं? मास्को के मैट्रोन की शक्ति कहाँ है? सत्रह साल पहले संत मैट्रोन के अवशेष थेराजधानी में डेनिलोव मठ के लिए ले जाया गया, और इसके बाद - पोक्रोव्स्की में। वहां उन्हें एक रजत क्रेफ़िश में रखा गया था; अगले फोटो के साथ प्रदर्शनी है। आप मास्को के मैट्रोन के अवशेषों को किसी भी दिन सुबह छह बजे से शाम आठ बजे तक देख सकते हैं। मठ में आकर, मास्को के मैट्रोन के पसंदीदा फूलों को अपने साथ लाने का रिवाज है। जैसा कि संत के जीवन में और समकालीनों के संस्मरणों में वर्णित है, उसने दूसरों के लिए गुलदाउदी, कैमोमाइल, कॉर्नफ्लॉवर और गुलाब पसंद किए। लेकिन पोक्रोव्स्क मठ में न केवल पुराने अवशेषों को झुकना संभव है। उनके कण अन्य महानगरीय चर्चों में हैं। साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित मठों में भी अपूरणीय अवशेष लाए जाते हैं। संत से मदद और हिमायत कैसे पूछें? ऐसा माना जाता है कि मॉस्को का मैट्रॉनऐसे लोगों की सुरक्षा करता है, जिनका पेशा बच्चों की परवरिश और शिक्षा से जुड़ा है। इसके संरक्षण के तहत डॉक्टर, विशेष रूप से बाल रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, आर्थोपेडिस्ट हैं। पसंदीदा पवित्र महीना मई है। ऐसा माना जाता है कि तब पैदा हुए लोग उसकी मदद पर भरोसा कर सकते हैं। एहसान कमाने के कई तरीके हैं।मास्को का मैट्रॉन। उनमें से पहला - सड़क या आवारा कुत्तों या कबूतरों को भिखारियों को खिलाना। संत को संबोधित करने से पहले, मंदिर में दान करना अच्छा है, जिसमें काली रोटी, नट्स, दूध, कुकीज़, शहद, कारमेल शामिल हैं। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उज्ज्वल इरादों और शुद्ध आत्मा के साथ मठ में जाने के लिए, ईमानदारी से विश्वास और श्रद्धा के साथ। आखिरकार, संत मैट्रोन ने लोगों की मदद करने और आराम करने से कभी इनकार नहीं किया। मैट्रॉन क्या फूल ले जाता है? आज अवशेषों को लाने का रिवाज हैउसके पसंदीदा फूल Matronushki। इसलिए, चैपल, जहां सिल्वर केकड़े को रखा जाता है, को पूरे साल ताजे गुलदस्ते में दफन किया जाता है। इसी समय, कुछ तीर्थयात्रियों के फूल दूसरों के लिए धन्य उपहार बन जाते हैं - जब मठ से बाहर निकलते हैं, तो नन को प्रत्येक आगंतुक को एक कली द्वारा सौंप दिया जाता है। इसलिए, मॉस्को के मैट्रोन से फूलों का उपयोग करने का सवाल इतना आम है। कई सोच रहे हैं कि क्या यह मायने रखता है कि मास्को के मैट्रॉन को ले जाने के लिए कितने रंग हैं। जानकार लोगों का दावा है कि संख्या ज्यादा मायने नहीं रखती है, जब तक यह विषम है। मैट्रन के फूल के साथ क्या करना है? सभी आगंतुकों के साथ धन्य बूढ़ी महिलाओं के अवशेषमठ से पवित्र के पसंदीदा रंगों में से एक या अधिक फूल देते हैं। यह माना जाता है कि वे विशेष शक्ति से संपन्न हैं। इसलिए, लोग मास्को के मैट्रोन से फूल के साथ क्या करना चाहते हैं, इस पर रुचि रखते हैं। आमतौर पर कलियों को सूखा जाता है और आइकन के बगल में संग्रहीत किया जाता है। वे यह भी कहते हैं कि आप उन्हें चाय में जोड़ सकते हैं या एक चिकित्सा काढ़ा तैयार कर सकते हैं, गले में धब्बे के लिए आवेदन कर सकते हैं। कुछ लोग तकिया में पवित्र स्थानों से फूल सीना, विश्वास करते हैं कि वे एक ताबीज बन जाएंगे जो बुराई और दुःख से बचाता है। हर कोई चुनता है कि एक फूल के साथ क्या करना हैमास्को का मैट्रॉन। याद रखने वाली मुख्य बात यह है कि संरक्षित कलियों को किसी भी तरह से कचरे में नहीं फेंका जाना चाहिए। चरम मामलों में, आप उन्हें जमीन पर रख सकते हैं। मैट्रन फूलों का उपयोग करने का तरीका जाननामास्को, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि उनके पास कितनी शक्ति है। वे कहते हैं कि मठ में प्राप्त कलियाँ विभिन्न रोगों को ठीक कर सकती हैं। इसके लिए आपको फूलों के काढ़े के साथ स्नान करने या उन्हें गले में जगह पर लागू करने की आवश्यकता है। पंखुड़ियों से अच्छी तरह से चाय। यहां तक कि मास्को के मैट्रोन से फूल भविष्य की घटनाओं की भविष्यवाणी कर सकते हैं, अपने मालिकों को विशेष संकेत दे सकते हैं। यह माना जाता है कि वे लंबे समय तक वापस नहीं आते हैं - गुलदस्ते अक्सर एक महीने से अधिक समय तक अपनी ताजगी बनाए रखते हैं।
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दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज अलविरो पीटरसन ने कहा कि इस साल के बॉक्सिंग डे टेस्ट में प्रोटियाज टीम जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबला करेगी। एबी डीविलियर्स इस टेस्ट के माध्यम से दक्षिण अफ्रीका टीम में वापसी कर सकते हैं।
डीविलियर्स फिलहाल टेस्ट प्रारूप से ब्रेक पर हैं क्योंकि वो 2019 वर्ल्ड कप के लिए अपने आप को फिट रखना चाहते हैं। हालांकि, डीविलियर्स ने हाल ही में एक वीडियो में कहा था कि अक्टूबर के बाद वो राष्ट्रीय टीम के लिए तीनों प्रारूपों में नजर आएंगे।
की वापसी का खुलासा किया है। दाएं हाथ के बल्लेबाज ने तीन ट्वीट किए, जिसमें उन्होंने बताया कि बॉक्सिंग डे टेस्ट पोर्ट एलिजाबेथ के मैदान पर खेला जाएगा, जिसमें डीविलियर्स वापसी करते दिखाई देंगे।
बता दें कि अगर एबी डीविलियर्स वापसी करते हैं तो पिछले वर्ष सेंचूरियन में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट के बाद वो पहली बार टेस्ट खेलते नजर आएंगे। ऐसा माना जा रहा है कि भारतीय टीम दिसंबर में दक्षिण अफ्रीका का दौरा नहीं कर पाएगी। टीम इंडिया को दक्षिण अफ्रीका दौरे पर चार टेस्ट, पांच वन-डे और दो टी20 मैच खेलना है। मगर टीम इंडिया की श्रीलंका के खिलाफ सीरीज दिसंबर के अंत में खत्म होगी।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के एक अधिकारी ने कहा, 'हम समय पर दक्षिण अफ्रीका नहीं पहुंच पाएंगे। श्रीलंका दौरा 24 दिसंबर को खत्म होगा। इसके बाद हमारे खिलाड़ियों को कुछ आराम देने की जरुरत है। दक्षिण अफ्रीका दौरा बड़ा है, इसलिए खिलाड़ियों को वहां दो अभ्यास मैच खेलना जरुरी है। '
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दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज अलविरो पीटरसन ने कहा कि इस साल के बॉक्सिंग डे टेस्ट में प्रोटियाज टीम जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबला करेगी। एबी डीविलियर्स इस टेस्ट के माध्यम से दक्षिण अफ्रीका टीम में वापसी कर सकते हैं। डीविलियर्स फिलहाल टेस्ट प्रारूप से ब्रेक पर हैं क्योंकि वो दो हज़ार उन्नीस वर्ल्ड कप के लिए अपने आप को फिट रखना चाहते हैं। हालांकि, डीविलियर्स ने हाल ही में एक वीडियो में कहा था कि अक्टूबर के बाद वो राष्ट्रीय टीम के लिए तीनों प्रारूपों में नजर आएंगे। की वापसी का खुलासा किया है। दाएं हाथ के बल्लेबाज ने तीन ट्वीट किए, जिसमें उन्होंने बताया कि बॉक्सिंग डे टेस्ट पोर्ट एलिजाबेथ के मैदान पर खेला जाएगा, जिसमें डीविलियर्स वापसी करते दिखाई देंगे। बता दें कि अगर एबी डीविलियर्स वापसी करते हैं तो पिछले वर्ष सेंचूरियन में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट के बाद वो पहली बार टेस्ट खेलते नजर आएंगे। ऐसा माना जा रहा है कि भारतीय टीम दिसंबर में दक्षिण अफ्रीका का दौरा नहीं कर पाएगी। टीम इंडिया को दक्षिण अफ्रीका दौरे पर चार टेस्ट, पांच वन-डे और दो टीबीस मैच खेलना है। मगर टीम इंडिया की श्रीलंका के खिलाफ सीरीज दिसंबर के अंत में खत्म होगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, 'हम समय पर दक्षिण अफ्रीका नहीं पहुंच पाएंगे। श्रीलंका दौरा चौबीस दिसंबर को खत्म होगा। इसके बाद हमारे खिलाड़ियों को कुछ आराम देने की जरुरत है। दक्षिण अफ्रीका दौरा बड़ा है, इसलिए खिलाड़ियों को वहां दो अभ्यास मैच खेलना जरुरी है। '
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