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उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा ने बीजापुर शहरवासियों को 11 करोड़ 30 लाख रूपए के विकास कार्यों की सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बीजापुर में अब तेजी से बदलाव हो रहा है। लोग मुख्यधारा से जुड़ते जा रहे हैं। अब यहां स्कूल की घंटियां सुनाई पड़ती हैं, उन्होेंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में आदिवासी अंचलों का विकास प्राथमिकता से हो रहा है। उद्योग मंत्री श्री लखमा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री बघेल के पहल से किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्ति मिली है, वनअधिकार पट्टे मिलने से आदिवासियों को खेती-किसानी से जुड़ते जा रहे हैं। भूमि समतलीकरण, डबरी निर्माण किया जा रहा है। किसानों की आमदनी में वृद्धि के लिए उन्हें बागवानी, उद्यानिकी फसलों एवं पशुपालन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एवं राजीव गांधी किसान न्याय योजना से किसान समृद्ध और खुशहाल हो रहे हैं। पंजीकृत किसानों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। पहली बार शहरी क्षेत्रों में भी वनअधिकार पट्टा दिया जा रहा है। वहीं किसान, गायता पेरमा मांझी को राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन मजदूर न्याय योजना में साल में 7 हजार रूपए दिए जा रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक श्री विक्रम मंडावी ने विकास कार्यों के सौगात देने के लिए उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा के प्रति आभार व्यक्त किया। उद्योग मंत्री श्री लखमा ने 9 करोड़ 62 लाख की लागत से 85 कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें मुख्य रूप से बीजापुर शहर के वार्डों में 4 करोड़ 96 लाख रूपए की लागत से सीसी सड़क, आरसीसी नाली एवं आरसीसी पुलिया निर्माण, एक करोड़ 92 लाख की लागत से नया बस स्टैण्ड बीजापुर में व्यवसायिक परिसर, लगभग दो करोड़ की लगात से विभिन्न वार्डों में सामुदायिक भवन, रंगमंच, सीसी सड़क, आरसीसी नाली एवं आरसीसी पुलिया निर्माा और 64. 74 लाख रूपए की लागत से जिला खनिज संस्थान न्यास निधि अर्न्तगत 05 कार्य शामिल है। इसी प्रकार उन्होंने डीएमएफ मद से एक करोड़ 70 लाख की लागत से विभिन्न वार्डो में निर्मित सीसी सड़क, आरसीसी नाली, मुक्तिधाम उन्नयन आदि के 18 कार्यों का लोकार्पण किया। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री शंकर कुड़ियम, उपाध्यक्ष श्री कमलेश कारम, जिला पंचायत एवं बस्तर विकास प्राधिकरण के सदस्य श्रीमती नीना रावतिया उद्दे, कृषक कल्याण बोर्ड के सदस्य श्री बसंत राव ताटी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री बेनहूर रावतिया, राज्य युवा आयोग के सदस्य प्रवीण डोंगरे, खाद्य आयोग के सदस्य श्री इम्तियाज खान सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा ने बीजापुर शहरवासियों को ग्यारह करोड़ तीस लाख रूपए के विकास कार्यों की सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बीजापुर में अब तेजी से बदलाव हो रहा है। लोग मुख्यधारा से जुड़ते जा रहे हैं। अब यहां स्कूल की घंटियां सुनाई पड़ती हैं, उन्होेंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में आदिवासी अंचलों का विकास प्राथमिकता से हो रहा है। उद्योग मंत्री श्री लखमा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री बघेल के पहल से किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्ति मिली है, वनअधिकार पट्टे मिलने से आदिवासियों को खेती-किसानी से जुड़ते जा रहे हैं। भूमि समतलीकरण, डबरी निर्माण किया जा रहा है। किसानों की आमदनी में वृद्धि के लिए उन्हें बागवानी, उद्यानिकी फसलों एवं पशुपालन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एवं राजीव गांधी किसान न्याय योजना से किसान समृद्ध और खुशहाल हो रहे हैं। पंजीकृत किसानों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। पहली बार शहरी क्षेत्रों में भी वनअधिकार पट्टा दिया जा रहा है। वहीं किसान, गायता पेरमा मांझी को राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन मजदूर न्याय योजना में साल में सात हजार रूपए दिए जा रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक श्री विक्रम मंडावी ने विकास कार्यों के सौगात देने के लिए उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा के प्रति आभार व्यक्त किया। उद्योग मंत्री श्री लखमा ने नौ करोड़ बासठ लाख की लागत से पचासी कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें मुख्य रूप से बीजापुर शहर के वार्डों में चार करोड़ छियानवे लाख रूपए की लागत से सीसी सड़क, आरसीसी नाली एवं आरसीसी पुलिया निर्माण, एक करोड़ बानवे लाख की लागत से नया बस स्टैण्ड बीजापुर में व्यवसायिक परिसर, लगभग दो करोड़ की लगात से विभिन्न वार्डों में सामुदायिक भवन, रंगमंच, सीसी सड़क, आरसीसी नाली एवं आरसीसी पुलिया निर्माा और चौंसठ. चौहत्तर लाख रूपए की लागत से जिला खनिज संस्थान न्यास निधि अर्न्तगत पाँच कार्य शामिल है। इसी प्रकार उन्होंने डीएमएफ मद से एक करोड़ सत्तर लाख की लागत से विभिन्न वार्डो में निर्मित सीसी सड़क, आरसीसी नाली, मुक्तिधाम उन्नयन आदि के अट्ठारह कार्यों का लोकार्पण किया। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री शंकर कुड़ियम, उपाध्यक्ष श्री कमलेश कारम, जिला पंचायत एवं बस्तर विकास प्राधिकरण के सदस्य श्रीमती नीना रावतिया उद्दे, कृषक कल्याण बोर्ड के सदस्य श्री बसंत राव ताटी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री बेनहूर रावतिया, राज्य युवा आयोग के सदस्य प्रवीण डोंगरे, खाद्य आयोग के सदस्य श्री इम्तियाज खान सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) की गिनती बेहद अनुशासित जजों में होती हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ समय के बेहद पाबंद हैं और उन्हें लेट-लतीफी पसंद नहीं है। खुद आगे बढ़कर इसकी मिसाल पेश करते हैं। CJI चंद्रचूड़ जरा सा लेट होते हैं, तो फौरन माफी मांगने से भी नहीं हिचकते। ऐसा ही एक वाकया कुछ महीने पहले का है। The Week की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक दिन जस्टिस चंद्रचूड़ को कोर्ट रूम में पहुंचने में 10 मिनट देरी हो गई। जब वह पहुंचे तो सबसे पहले सॉरी बोला। सीजेआई ने कहा, 'क्षमा कीजियेगा, मैं साथी जजों के साथ कुछ डिस्कस कर रहा था... इसलिए लेट हो गया'। सुप्रीम कोर्ट के किसी जज के लिए इतनी सी देरी पर माफी मांगना कोई सामान्य बात नहीं है, लेकिन जस्टिस चंद्रचूड़ अक्सर ऐसा करते हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस प्रदीप कुमार सिंह जस्टिस चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) को याद करते हुए कहते हैं कि वो बेहद अनुशासित हैं और कानून का सख्ती से पालन करते हैं। दूसरों से ऐसी ही उम्मीग भी रखते हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ के दूसरे साथी जज भी कहते हैं कि उन्हें सच्चाई कहने से जरा सी गुरेज नहीं होती है और मुस्कुराते हुए सच कह देते हैं। यही उनकी खासियत है। जस्टिस चंद्रचूड़ कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जज सप्ताह के सातों दिन काम करते हैं। पिछले दिनों इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में उन्होंने कहा कि हम कोर्ट की टाइमिंग यानी सुबह 10:30 से 4:00 तक जो काम करते हैंस वह हमारे काम का महज छोटा सा हिस्सा है। हमें अगले दिन जिन केसेज की सुनवाई करनी होती है, उनकी तैयारी में भी इतना ही वक्त लगता है। तमाम मामलों के फैसले रिजर्व होते हैं, जिसे शनिवार को तैयार करते हैं और फिर रविवार को सोमवार के मामलों के लिए तैयारी करनी होती है। इसी दौरान सीजेआई ने बताया था कि किस तरीके से वह पिछले विंटर वेकेशन के दौरान भी काम कर रहे थे। सीजेआई चंद्रचूड़ कहते हैं कि तमाम मामले ऐसे थे, जिनपर फैसला देना था। ऐसे में समय बचाने के लिए मैं छुट्टी के दौरान भी अपने जुडिशल क्लर्क के साथ जजमेंट पर काम कर रहा था। जस्टिस चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) को दिखावा पसंद नहीं है। इससे जुड़ा एक वाकया उनके साथ काम कर चुकीं एडवोकेट मानसी चौधरी अपने ब्लॉग में लिखती हैं। साल 2019 में सीजेआई चंद्रचूड़ के 60वें जन्मदिन के मौके पर लिखे ब्लॉग में बताती हैं कि एक बार वह अपने सहकर्मियों को दिल्ली के एक मशहूर रेस्टोरेंट में खाने पर ले गए। वहां साधारण आदमी की तरह लाइन में अपनी बारी का इंतजार किया। वह लिखती हैं जस्टिस चंद्रचूड़ चाहते तो एक फोन पर टेबल बुक करा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बकौल मानसी चौधरी, जस्टिस चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) अपने सहकर्मियों का पूरा ध्यान रखते हैं और छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखते हैं। मानसी लिखती हैं कि जस्टिस चंद्रचूड़ के साथ काम करते हुए एक दिन उन्हें बुखार आया। तबीयत इतनी बिगड़ी कि ऑफिस में ही उल्टी होने लगी। जस्टिस चंद्रचूड़ को जब पता लगा तो फौरन दवाई दी और अपने गेस्ट रूम में आराम करने के लिए ले गए। वह लिखती हैं कि जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से सिर्फ कानून ही नहीं दया और उदारता भी सीखी जा सकती है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ की गिनती बेहद अनुशासित जजों में होती हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ समय के बेहद पाबंद हैं और उन्हें लेट-लतीफी पसंद नहीं है। खुद आगे बढ़कर इसकी मिसाल पेश करते हैं। CJI चंद्रचूड़ जरा सा लेट होते हैं, तो फौरन माफी मांगने से भी नहीं हिचकते। ऐसा ही एक वाकया कुछ महीने पहले का है। The Week की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक दिन जस्टिस चंद्रचूड़ को कोर्ट रूम में पहुंचने में दस मिनट देरी हो गई। जब वह पहुंचे तो सबसे पहले सॉरी बोला। सीजेआई ने कहा, 'क्षमा कीजियेगा, मैं साथी जजों के साथ कुछ डिस्कस कर रहा था... इसलिए लेट हो गया'। सुप्रीम कोर्ट के किसी जज के लिए इतनी सी देरी पर माफी मांगना कोई सामान्य बात नहीं है, लेकिन जस्टिस चंद्रचूड़ अक्सर ऐसा करते हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस प्रदीप कुमार सिंह जस्टिस चंद्रचूड़ को याद करते हुए कहते हैं कि वो बेहद अनुशासित हैं और कानून का सख्ती से पालन करते हैं। दूसरों से ऐसी ही उम्मीग भी रखते हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ के दूसरे साथी जज भी कहते हैं कि उन्हें सच्चाई कहने से जरा सी गुरेज नहीं होती है और मुस्कुराते हुए सच कह देते हैं। यही उनकी खासियत है। जस्टिस चंद्रचूड़ कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जज सप्ताह के सातों दिन काम करते हैं। पिछले दिनों इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में उन्होंने कहा कि हम कोर्ट की टाइमिंग यानी सुबह दस:तीस से चार:शून्य तक जो काम करते हैंस वह हमारे काम का महज छोटा सा हिस्सा है। हमें अगले दिन जिन केसेज की सुनवाई करनी होती है, उनकी तैयारी में भी इतना ही वक्त लगता है। तमाम मामलों के फैसले रिजर्व होते हैं, जिसे शनिवार को तैयार करते हैं और फिर रविवार को सोमवार के मामलों के लिए तैयारी करनी होती है। इसी दौरान सीजेआई ने बताया था कि किस तरीके से वह पिछले विंटर वेकेशन के दौरान भी काम कर रहे थे। सीजेआई चंद्रचूड़ कहते हैं कि तमाम मामले ऐसे थे, जिनपर फैसला देना था। ऐसे में समय बचाने के लिए मैं छुट्टी के दौरान भी अपने जुडिशल क्लर्क के साथ जजमेंट पर काम कर रहा था। जस्टिस चंद्रचूड़ को दिखावा पसंद नहीं है। इससे जुड़ा एक वाकया उनके साथ काम कर चुकीं एडवोकेट मानसी चौधरी अपने ब्लॉग में लिखती हैं। साल दो हज़ार उन्नीस में सीजेआई चंद्रचूड़ के साठवें जन्मदिन के मौके पर लिखे ब्लॉग में बताती हैं कि एक बार वह अपने सहकर्मियों को दिल्ली के एक मशहूर रेस्टोरेंट में खाने पर ले गए। वहां साधारण आदमी की तरह लाइन में अपनी बारी का इंतजार किया। वह लिखती हैं जस्टिस चंद्रचूड़ चाहते तो एक फोन पर टेबल बुक करा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बकौल मानसी चौधरी, जस्टिस चंद्रचूड़ अपने सहकर्मियों का पूरा ध्यान रखते हैं और छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखते हैं। मानसी लिखती हैं कि जस्टिस चंद्रचूड़ के साथ काम करते हुए एक दिन उन्हें बुखार आया। तबीयत इतनी बिगड़ी कि ऑफिस में ही उल्टी होने लगी। जस्टिस चंद्रचूड़ को जब पता लगा तो फौरन दवाई दी और अपने गेस्ट रूम में आराम करने के लिए ले गए। वह लिखती हैं कि जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से सिर्फ कानून ही नहीं दया और उदारता भी सीखी जा सकती है।
सवत् १३८५ पोष सुदी ७ पद्मनन्दि जी गृहस्थ वर्ष १० मास ७ दीक्षा वर्ष २३ मास ५ पट्टस्थ वर्ष ६५ दिन १८ अन्तर दिन १० सर्व आयु वर्ष ६६ मास • दिन २८ । पद्मनन्दि पर सरस्वती का पूरा वरद हस्त था। एक बार उन्होंने पापाण की सरस्वती प्रतिमा को मुस से बुलाया था ऐसा उल्लेख मिलता है। आचार्य पद्मनन्दि अपने समय के बड़े विद्वान भट्टारक थे । इनके सघ मे अनेक साधु एन साध्विया थी । इनके चार शिष्य प्रधान थे। इनमें भट्टारक सकलकीर्ति ने ईडर मे, भ० शुभचन्द्र ने देहली मे, भ० देवेन्द्रकीर्ति ने सूरत मे भट्टारक गादी की स्थापना को । पद्मनन्दि की १५ रचनाये प्राप्त हो चुकी है जो सभी संस्कृत भाषा मे निबद्ध है । सागानेर के सघीजी के मन्दिर मे जो शान्तिनाथ की प्रतिमा है जिसकी प्रतिष्ठा इनही के द्वारा सवत् १४६४ मे अजमेर मे सम्पन्न हुई थी। इसी तरह इनके द्वारा प्रतिष्ठापित मूर्ति भरतपुर के पचायती मन्दिर मे भी विराजमान है । ३ भट्टारक धर्मकीति ये नागौर गादो के भट्टारक थे । सवत १५६० को चैत्र कृष्णा ७ को पट्टारुढ हुए थे । ये सण्डेलवाल जाति एव सेठी गोत्र मे उत्पन्न हुए थे । सवत् १६०१ की फाल्गुन शुक्ला ६ को इन्होने चन्द्रप्रभू मति की प्रतिष्ठा करायी थी 13 ४ भट्टारक विशालकीति विशालकीर्ति का पट्टाभिषेक संवत् १६०१ मे जोवनेर मे हुआ था । ये भी नागौर गादी के भट्टारक थे । जाति से खण्डेलवाल एव गौत्र पाटोदी पाषारण की सरस्वती मुखे बुलाई । जाति ब्राह्मरण पट्ट अजमेर मूर्ति पच सग्रह- महावीर सवन जयपुर, पृ० स० २६४ भट्टारक सम्प्रदाय पृष्ठ संख्या १२१ संवत् १६०१ वैशाख सुदी १ विशालकीति जी गृहस्थ वर्ष ६ दीक्षा वर्ष ५८ पट्ट वर्ष ६ माह १० दिवस २० अन्तर मास १ दिवस १० सर्व ७७ दिवस २३ जाति पाटौदी पट्ट जोवनेर । था। ये १० वर्षं तक भट्टारक रहे । ५ भट्टारक लक्ष्मीचन्द्र ये भट्टारक विशालकीर्ति के प्रमुख शिष्य थे । संवत् १६११ मे इनका भी जावनेर मे ही पट्टाभिषेक हुआ । ये खण्डेलवाल एव छावडा गौत्र के श्रावक थे । इन्होंने २० वर्ष तक भट्टारक पद पर रह कर साहित्य एव समाज की अपूर्व सेवा को थी । ६ भ. सहस्रकीर्तित जोवनेर मे पट्टस्थ होने वाले ये तीसरे भट्टारक थे । इनके गुरु भट्टारक लक्ष्मीचन्द्र थे । सवत् १६३१ जेष्ठ सुदी ५ को इनका वडे ठाट से पट्टाभिषेक हुआ । इसके पश्चात् ये १८ वर्ष तक भट्टारक रहे । इनका गौत्र पाटनी था । ७ भट्टारक नेमिचन्द्र जोबनेर मे ही पट्टस्थ होने वाले चौथे भट्टारक थे । अपने गुरु लक्ष्मीचन्द्र के समान ये भी खण्डेलवाल जाति के थे तथा ठोलिया इनका गौत्र था । संवत् १६५० की श्रावण शुक्ला १३ को इनका अभिषेक हुआ । ये २२ वर्ष तक भट्टारक पद पर रहे । ये साहित्य प्रेमी थे तथा अपने एव अपने शिष्यों के लिये प्रन्यो की पाण्डुलिपिया कराया करते थे । ८ भट्टारक यशकीर्ति ये नागौर गादी के भट्टारक ये तथा संवत् १६७२ की फाल्गुन शुक्ला ५ को इनका रेवासा नगर मे पट्टाभिषेक हुआ । एक भट्टारक पट्टावलि मे इनका परिचय निम्न प्रकार दिया " संवत् १६७२ फागुन सुदी ८ यश कीर्ति जो गृहस्थ वर्ष ६ दीक्षा वर्ष ४० पट्ट वर्ष १७ मास ६ दिवस ८ अन्तर दिवस २ सर्व वर्ण ६७ जाति पाटनी पट्ट रेवासा ।" रेवासा नगर के आदिनाथ जिन मन्दिर मे एक शिलालेख के अनुसार यशकोति के उपदेश से रायसाल के मुख्य मन्त्री देवीदास के दो पुत्र जीत एव नयमल ने मन्दिर का निर्माण कराया था । इनके प्रमुख शिप्य रूपा एव डूंगरसी
सवत् एक हज़ार तीन सौ पचासी पोष सुदी सात पद्मनन्दि जी गृहस्थ वर्ष दस मास सात दीक्षा वर्ष तेईस मास पाँच पट्टस्थ वर्ष पैंसठ दिन अट्ठारह अन्तर दिन दस सर्व आयु वर्ष छयासठ मास • दिन अट्ठाईस । पद्मनन्दि पर सरस्वती का पूरा वरद हस्त था। एक बार उन्होंने पापाण की सरस्वती प्रतिमा को मुस से बुलाया था ऐसा उल्लेख मिलता है। आचार्य पद्मनन्दि अपने समय के बड़े विद्वान भट्टारक थे । इनके सघ मे अनेक साधु एन साध्विया थी । इनके चार शिष्य प्रधान थे। इनमें भट्टारक सकलकीर्ति ने ईडर मे, भशून्य शुभचन्द्र ने देहली मे, भशून्य देवेन्द्रकीर्ति ने सूरत मे भट्टारक गादी की स्थापना को । पद्मनन्दि की पंद्रह रचनाये प्राप्त हो चुकी है जो सभी संस्कृत भाषा मे निबद्ध है । सागानेर के सघीजी के मन्दिर मे जो शान्तिनाथ की प्रतिमा है जिसकी प्रतिष्ठा इनही के द्वारा सवत् एक हज़ार चार सौ चौंसठ मे अजमेर मे सम्पन्न हुई थी। इसी तरह इनके द्वारा प्रतिष्ठापित मूर्ति भरतपुर के पचायती मन्दिर मे भी विराजमान है । तीन भट्टारक धर्मकीति ये नागौर गादो के भट्टारक थे । सवत एक हज़ार पाँच सौ साठ को चैत्र कृष्णा सात को पट्टारुढ हुए थे । ये सण्डेलवाल जाति एव सेठी गोत्र मे उत्पन्न हुए थे । सवत् एक हज़ार छः सौ एक की फाल्गुन शुक्ला छः को इन्होने चन्द्रप्रभू मति की प्रतिष्ठा करायी थी तेरह चार भट्टारक विशालकीति विशालकीर्ति का पट्टाभिषेक संवत् एक हज़ार छः सौ एक मे जोवनेर मे हुआ था । ये भी नागौर गादी के भट्टारक थे । जाति से खण्डेलवाल एव गौत्र पाटोदी पाषारण की सरस्वती मुखे बुलाई । जाति ब्राह्मरण पट्ट अजमेर मूर्ति पच सग्रह- महावीर सवन जयपुर, पृशून्य सशून्य दो सौ चौंसठ भट्टारक सम्प्रदाय पृष्ठ संख्या एक सौ इक्कीस संवत् एक हज़ार छः सौ एक वैशाख सुदी एक विशालकीति जी गृहस्थ वर्ष छः दीक्षा वर्ष अट्ठावन पट्ट वर्ष छः माह दस दिवस बीस अन्तर मास एक दिवस दस सर्व सतहत्तर दिवस तेईस जाति पाटौदी पट्ट जोवनेर । था। ये दस वर्षं तक भट्टारक रहे । पाँच भट्टारक लक्ष्मीचन्द्र ये भट्टारक विशालकीर्ति के प्रमुख शिष्य थे । संवत् एक हज़ार छः सौ ग्यारह मे इनका भी जावनेर मे ही पट्टाभिषेक हुआ । ये खण्डेलवाल एव छावडा गौत्र के श्रावक थे । इन्होंने बीस वर्ष तक भट्टारक पद पर रह कर साहित्य एव समाज की अपूर्व सेवा को थी । छः भ. सहस्रकीर्तित जोवनेर मे पट्टस्थ होने वाले ये तीसरे भट्टारक थे । इनके गुरु भट्टारक लक्ष्मीचन्द्र थे । सवत् एक हज़ार छः सौ इकतीस जेष्ठ सुदी पाँच को इनका वडे ठाट से पट्टाभिषेक हुआ । इसके पश्चात् ये अट्ठारह वर्ष तक भट्टारक रहे । इनका गौत्र पाटनी था । सात भट्टारक नेमिचन्द्र जोबनेर मे ही पट्टस्थ होने वाले चौथे भट्टारक थे । अपने गुरु लक्ष्मीचन्द्र के समान ये भी खण्डेलवाल जाति के थे तथा ठोलिया इनका गौत्र था । संवत् एक हज़ार छः सौ पचास की श्रावण शुक्ला तेरह को इनका अभिषेक हुआ । ये बाईस वर्ष तक भट्टारक पद पर रहे । ये साहित्य प्रेमी थे तथा अपने एव अपने शिष्यों के लिये प्रन्यो की पाण्डुलिपिया कराया करते थे । आठ भट्टारक यशकीर्ति ये नागौर गादी के भट्टारक ये तथा संवत् एक हज़ार छः सौ बहत्तर की फाल्गुन शुक्ला पाँच को इनका रेवासा नगर मे पट्टाभिषेक हुआ । एक भट्टारक पट्टावलि मे इनका परिचय निम्न प्रकार दिया " संवत् एक हज़ार छः सौ बहत्तर फागुन सुदी आठ यश कीर्ति जो गृहस्थ वर्ष छः दीक्षा वर्ष चालीस पट्ट वर्ष सत्रह मास छः दिवस आठ अन्तर दिवस दो सर्व वर्ण सरसठ जाति पाटनी पट्ट रेवासा ।" रेवासा नगर के आदिनाथ जिन मन्दिर मे एक शिलालेख के अनुसार यशकोति के उपदेश से रायसाल के मुख्य मन्त्री देवीदास के दो पुत्र जीत एव नयमल ने मन्दिर का निर्माण कराया था । इनके प्रमुख शिप्य रूपा एव डूंगरसी
भोग में मन न रम सका : ३३ का अनुभव कर रही थी। जब वे बाह्य सुख-साधनो पर दृष्टिपात करते, तो उनकी अन्तरात्मा पुकार उठती --"सच्चे सुख का मार्ग तो कोई और ही है। यदि यह वैभव-विलास सुखदायी होता, तो आजससारका जीवन दुख की जिन्दा तसवीर क्यों होता ? भारत का सामाजिक, नैतिक एव धार्मिक पतन उन्हें बेचैन किये हुए था । जब वे अपने चारो ओर को दुनिया पर एक समीक्षात्मक दृष्टि डालते, तो देखते कि ससार मे सब ओर एक गहरा अन्धकार परिव्यात है और मानवसमुदाय अपनी क्षुद्र वासनाओ की तृप्ति के फेर में पड़कर दूसरे प्राणियों के प्राणों के साथ खिलवाड कर रहा है । धर्म के नाम पर खुले आम हिसा-राक्षसी का नगा नाच हो रहा है; जिससे सर्वत्र हाहाकार का आर्तनाद सुनाई पड़ रहा है । यत्र-तत्र सर्वत्र स्वार्थ का खेल खेला जा रहा है । यह सब देखकर महावीर को जवानी विद्रोह कर उठी 1 उनके विचारो मे उथल-पुथल मच गई और आखिर, उन्होने दृढ़ निश्चय कर ही लिया कि- "कुछ भी हो, मुझे इस समस्त संसार से ऊपर उठता है और जगतो को भी इस दु.ख से उबारना है । ससार मे सुख-शान्ति और साम्य-भाव की गगा बहानी है। लेकिन, उसके लिए सर्वप्रथम मुझे स्वयं आत्म चल प्राप्त करना है।"
भोग में मन न रम सका : तैंतीस का अनुभव कर रही थी। जब वे बाह्य सुख-साधनो पर दृष्टिपात करते, तो उनकी अन्तरात्मा पुकार उठती --"सच्चे सुख का मार्ग तो कोई और ही है। यदि यह वैभव-विलास सुखदायी होता, तो आजससारका जीवन दुख की जिन्दा तसवीर क्यों होता ? भारत का सामाजिक, नैतिक एव धार्मिक पतन उन्हें बेचैन किये हुए था । जब वे अपने चारो ओर को दुनिया पर एक समीक्षात्मक दृष्टि डालते, तो देखते कि ससार मे सब ओर एक गहरा अन्धकार परिव्यात है और मानवसमुदाय अपनी क्षुद्र वासनाओ की तृप्ति के फेर में पड़कर दूसरे प्राणियों के प्राणों के साथ खिलवाड कर रहा है । धर्म के नाम पर खुले आम हिसा-राक्षसी का नगा नाच हो रहा है; जिससे सर्वत्र हाहाकार का आर्तनाद सुनाई पड़ रहा है । यत्र-तत्र सर्वत्र स्वार्थ का खेल खेला जा रहा है । यह सब देखकर महावीर को जवानी विद्रोह कर उठी एक उनके विचारो मे उथल-पुथल मच गई और आखिर, उन्होने दृढ़ निश्चय कर ही लिया कि- "कुछ भी हो, मुझे इस समस्त संसार से ऊपर उठता है और जगतो को भी इस दु.ख से उबारना है । ससार मे सुख-शान्ति और साम्य-भाव की गगा बहानी है। लेकिन, उसके लिए सर्वप्रथम मुझे स्वयं आत्म चल प्राप्त करना है।"
कोलारस। अभी-अभी खबर आ रही है कि जिले के पचाबली के पास स्थिति सिंध नदी के जर्जर हो चुके पुल को पार कर रहे एक साईकिल सबार युवक बिना रेंलिग के पुल से नीचे जा गिरा। जिससे युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है। इस घटना की सूचना स्थानीय लोगों ने ग्रामीणों को दी। जानकारी के अनुसार जगराम सिंह दांगी पुत्र मोहन सिंह दांगी उम्र 37 वर्ष निवासी पचावली अपनी साईकिल से देहरदा तिराहे से आटे का कट़्टा लेकर आ रहा था। तभी सामने से आ रहे बाहन की की रौशनी से युवक को आगे कुछ दिखाई नहीं दिया और युवक पुल से साईकिल सहित नदी में जा गिरा। यह घटना पीछे आ रहे कुछ लोगों ने देखी और इसकी सूचना गांव बालों को दी। गांव वालो ने उक्त घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुॅचकर घायल युवक को कोलारस भिजबाया। जहॉ युवक की गंभीर हालात को देखते हुए डॉक्टरों ने जिला चिकित्सालय रैफर कर दिया।
कोलारस। अभी-अभी खबर आ रही है कि जिले के पचाबली के पास स्थिति सिंध नदी के जर्जर हो चुके पुल को पार कर रहे एक साईकिल सबार युवक बिना रेंलिग के पुल से नीचे जा गिरा। जिससे युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है। इस घटना की सूचना स्थानीय लोगों ने ग्रामीणों को दी। जानकारी के अनुसार जगराम सिंह दांगी पुत्र मोहन सिंह दांगी उम्र सैंतीस वर्ष निवासी पचावली अपनी साईकिल से देहरदा तिराहे से आटे का कट़्टा लेकर आ रहा था। तभी सामने से आ रहे बाहन की की रौशनी से युवक को आगे कुछ दिखाई नहीं दिया और युवक पुल से साईकिल सहित नदी में जा गिरा। यह घटना पीछे आ रहे कुछ लोगों ने देखी और इसकी सूचना गांव बालों को दी। गांव वालो ने उक्त घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुॅचकर घायल युवक को कोलारस भिजबाया। जहॉ युवक की गंभीर हालात को देखते हुए डॉक्टरों ने जिला चिकित्सालय रैफर कर दिया।
Quick links: टीवी के फेमस एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला (Sidharth Shukla) ने ट्विटर पर कुछ ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब दिया है। फैंस उन्हें शहनाज गिल (Shehnaaz Gill) के साथ उनकी दोस्ती को लेकर चेतावनी दे रहे थे क्योंकि उनका मानना था कि यह उन्हें भविष्य में एक मुश्किल स्थिति में डाल सकता है। हालांकि, सिद्धार्थ ने उन फैंस को करारा जवाब दिया है और ये साफ कर दिया है कि वह शहनाज़ के साथ अपनी दोस्ती पर चर्चा पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि वे हर दोस्ती को गंभीरता से लेते हैं और उसका फायदा-नुकसान नहीं देखते। सिद्धार्थ शुक्ला ने हाल ही में शहनाज गिल के साथ उनकी दोस्ती पर सवाल उठाने वालों की बोलती बंद कर दी है। इसकी शुरूआत तब हुई जब एक्टर ने लिखा कि हमें दूसरों की राय से इतना प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये सोचने के लिए जिंदगी बहुत छोटी है कि दूसरे आपके बारे में क्या कहते हैं इसलिए उनकी परवाह ना करते हुए अपनी जिंदगी अच्छे से जीनी चाहिए। जब एक फैन ने उनके ट्वीट की सराहना की तो एक्टर ने जवाब देते हुए लिखा कि दूसरों को बदलने के बजाय खुद को संभालना ज्यादा बेहतर होता है। उन्होंने यह भी बताया कि वह अपने फैंस से मिले अंतहीन समर्थन के लिए कितने शुक्रगुज़ार हैं। हालांकि, इस बीच एक फैन ने लिखा कि वह नफरत फैलाने का काम करते हैं और इसलिए कुछ लोग उन्हें फॉलो नहीं करते। इस पर सिड ने जवाब दिया और स्पष्ट किया कि उन्हें उनसे सपोर्ट की जरूरत भी नहीं है। फिर जब किसी दूसरे फैन ने लिखा कि एक्टर को ऐसे लोगों की बातों से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है और उन्हें अनदेखा कर देना चाहिए तो एक्टर ने कहा कि वह केवल जवाब दे रहे थे और वह ऐसे नेगेटिव कमेंट्स से नाखुश नहीं हैं। इस दौरान, एक फैन ने सिद्धार्थ शुक्ला को बताया कि शहनाज गिल के साथ उन्हें दोस्ती महंगी पड़ रही है जिसपर एक्टर ने जवाब दिया कि एक बार जब वह किसी को अपना करीबी दोस्त बनाने का फैसला कर लें तो वह उसके नतीजे के बारे में नहीं सोचते।
Quick links: टीवी के फेमस एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला ने ट्विटर पर कुछ ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब दिया है। फैंस उन्हें शहनाज गिल के साथ उनकी दोस्ती को लेकर चेतावनी दे रहे थे क्योंकि उनका मानना था कि यह उन्हें भविष्य में एक मुश्किल स्थिति में डाल सकता है। हालांकि, सिद्धार्थ ने उन फैंस को करारा जवाब दिया है और ये साफ कर दिया है कि वह शहनाज़ के साथ अपनी दोस्ती पर चर्चा पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि वे हर दोस्ती को गंभीरता से लेते हैं और उसका फायदा-नुकसान नहीं देखते। सिद्धार्थ शुक्ला ने हाल ही में शहनाज गिल के साथ उनकी दोस्ती पर सवाल उठाने वालों की बोलती बंद कर दी है। इसकी शुरूआत तब हुई जब एक्टर ने लिखा कि हमें दूसरों की राय से इतना प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये सोचने के लिए जिंदगी बहुत छोटी है कि दूसरे आपके बारे में क्या कहते हैं इसलिए उनकी परवाह ना करते हुए अपनी जिंदगी अच्छे से जीनी चाहिए। जब एक फैन ने उनके ट्वीट की सराहना की तो एक्टर ने जवाब देते हुए लिखा कि दूसरों को बदलने के बजाय खुद को संभालना ज्यादा बेहतर होता है। उन्होंने यह भी बताया कि वह अपने फैंस से मिले अंतहीन समर्थन के लिए कितने शुक्रगुज़ार हैं। हालांकि, इस बीच एक फैन ने लिखा कि वह नफरत फैलाने का काम करते हैं और इसलिए कुछ लोग उन्हें फॉलो नहीं करते। इस पर सिड ने जवाब दिया और स्पष्ट किया कि उन्हें उनसे सपोर्ट की जरूरत भी नहीं है। फिर जब किसी दूसरे फैन ने लिखा कि एक्टर को ऐसे लोगों की बातों से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है और उन्हें अनदेखा कर देना चाहिए तो एक्टर ने कहा कि वह केवल जवाब दे रहे थे और वह ऐसे नेगेटिव कमेंट्स से नाखुश नहीं हैं। इस दौरान, एक फैन ने सिद्धार्थ शुक्ला को बताया कि शहनाज गिल के साथ उन्हें दोस्ती महंगी पड़ रही है जिसपर एक्टर ने जवाब दिया कि एक बार जब वह किसी को अपना करीबी दोस्त बनाने का फैसला कर लें तो वह उसके नतीजे के बारे में नहीं सोचते।
Tuesday July 21, 2020, कर्नाटक के चिक्कमगलुरु जिले में श्रृंगेरी के रहने वाले पीएचडी स्कॉलर, लेक्चरर और आंत्रप्रेन्योर भारद्वाज कारंत ने जुलाई 2017 में 'कारंथ्स फूड्स' (Karanth's Foods) को शुरू किया। 'फ्रूट ट्रीट' नाम के ब्रांड के तहत उन्होंने कटहल, केला, चीकू, भिंडी, पपीता, आम, शकरकंद, चुकंदर, और लहसुन के साथ स्नैक्स की 12 किस्मों का निर्माण शुरू किया। लगभग 100 टन उपज, 100 से अधिक किसानों से प्राप्त, कीटनाशक मुक्त की जाती है। इसके अलावा, चिप्स को वैक्यूम फ्राइंग विधि का उपयोग करके तैयार किया जाता है जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में लगभग 80-90 प्रतिशत कम तेल का उपयोग करता है। ये स्नैक्स भी 100 प्रतिशत प्राकृतिक हैं, जिसका अर्थ है कि इनमें कोई कृत्रिम योजक (artificial additives), शर्करा (sugar), संरक्षक (preservatives) या रंग नहीं हैं। ये प्रोडक्ट अब कैफे कॉफी डे आउटलेट, हवाई अड्डों, बिग बास्केट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफार्म्स और 100 से अधिक कंपनियों के कैफेटेरिया में बेचे जाते हैं। स्नैक्स को मिडल ईस्ट में भी एक्पोर्ट किया जा रहा है। द बेटर इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार कारंथ्स फूड्स के फाउंडर और सीईओ भारद्वाज कारंत ने बताया, जब कंपनी की स्थापना 2017 में हुई थी, तो इसे 'सुविधा फूड्स एंड बेवरेज्स' नाम दिया गया था। केवल जून 2019 में भारद्वाज ने एंटरप्राइज को एक कंपनी के रूप में रजिस्टर करने का फैसला किया और इसका नाम बदलकर कारंथ्स फूड्स प्राइवेट लिमिटेड कर दिया। 1,500 वर्ग फुट की किराए की जगह से काम शुरू करने के बाद उन्होंने हाल ही में इसी महीने से अपनी 7,000 वर्ग फुट की फैक्ट्री यूनिट में प्रोडक्शन शुरू किया है। भारद्वाज ने आगे बताया,
Tuesday July इक्कीस, दो हज़ार बीस, कर्नाटक के चिक्कमगलुरु जिले में श्रृंगेरी के रहने वाले पीएचडी स्कॉलर, लेक्चरर और आंत्रप्रेन्योर भारद्वाज कारंत ने जुलाई दो हज़ार सत्रह में 'कारंथ्स फूड्स' को शुरू किया। 'फ्रूट ट्रीट' नाम के ब्रांड के तहत उन्होंने कटहल, केला, चीकू, भिंडी, पपीता, आम, शकरकंद, चुकंदर, और लहसुन के साथ स्नैक्स की बारह किस्मों का निर्माण शुरू किया। लगभग एक सौ टन उपज, एक सौ से अधिक किसानों से प्राप्त, कीटनाशक मुक्त की जाती है। इसके अलावा, चिप्स को वैक्यूम फ्राइंग विधि का उपयोग करके तैयार किया जाता है जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में लगभग अस्सी-नब्बे प्रतिशत कम तेल का उपयोग करता है। ये स्नैक्स भी एक सौ प्रतिशत प्राकृतिक हैं, जिसका अर्थ है कि इनमें कोई कृत्रिम योजक , शर्करा , संरक्षक या रंग नहीं हैं। ये प्रोडक्ट अब कैफे कॉफी डे आउटलेट, हवाई अड्डों, बिग बास्केट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफार्म्स और एक सौ से अधिक कंपनियों के कैफेटेरिया में बेचे जाते हैं। स्नैक्स को मिडल ईस्ट में भी एक्पोर्ट किया जा रहा है। द बेटर इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार कारंथ्स फूड्स के फाउंडर और सीईओ भारद्वाज कारंत ने बताया, जब कंपनी की स्थापना दो हज़ार सत्रह में हुई थी, तो इसे 'सुविधा फूड्स एंड बेवरेज्स' नाम दिया गया था। केवल जून दो हज़ार उन्नीस में भारद्वाज ने एंटरप्राइज को एक कंपनी के रूप में रजिस्टर करने का फैसला किया और इसका नाम बदलकर कारंथ्स फूड्स प्राइवेट लिमिटेड कर दिया। एक,पाँच सौ वर्ग फुट की किराए की जगह से काम शुरू करने के बाद उन्होंने हाल ही में इसी महीने से अपनी सात,शून्य वर्ग फुट की फैक्ट्री यूनिट में प्रोडक्शन शुरू किया है। भारद्वाज ने आगे बताया,
PATNA: बिहार एसटीएफ के तेज तर्रार डीएसपी रमाकांत प्रसाद को मिलेगा पुलिस मैडल फ़ॉर गैलेंट्री। सबसे खास बात की रमाकांत प्रसाद को यह गैलेंट्री अवार्ड झारखंड से मिला है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस वर्ष के राष्ट्रपति पुरस्कारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में बिहार पुलिस के डीएसपी रमाकांत प्रसाद का भी नाम हैं। दरअसल रमाकांत प्रसाद को यह अवार्ड वर्ष 2000 में झारखंड में तैनाती के दौरान नक्सलियों के खिलाफ एक भीषण मुठभेड़ में जाबांजी दिखाने के लिए मिला है। वर्ष 2000 में रमाकांत प्रसाद झारखंड के बरही थाना में बतौर इंस्पेक्टर तैनात थे। उसी दौरान चौपारण में नक्सलियों के एरिया कमांडर मनोज भुइयां के दस्ते के होने की जानकारी मिली थी। सूचना के बाद रमाकांत प्रसाद और तब चौपारण के थाना प्रभारी रहे ज्योति प्रकाश(वर्तमान में बिहार में डीएसपी) ने मोर्चाबंदी करते हुए नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई की। दोनों तरफ से घंटो मुठभेड़ चला था जिस दौरान एक चौकीदार छोटेलाल पासवान भी मारा गया था। मुठभेड़ के दौरान एरिया कमांडर मनोज भुईया मारा गया था। उसके पास से हथियारों का जखीरा बरामद किया गया था। गृह मंत्रालय की सूची के अनुसार इस मुठभेड़ कांड में शामिल रहे रमाकांत प्रसाद के अलावा तत्कालीन थानेदार ज्योति प्रकाश ,सिपाही जफर इमाम खान और मरणोपरांत चौकीदार छोटेलाल पासवान को भी गैलेंट्री अवार्ड देने की घोषणा की गई है।
PATNA: बिहार एसटीएफ के तेज तर्रार डीएसपी रमाकांत प्रसाद को मिलेगा पुलिस मैडल फ़ॉर गैलेंट्री। सबसे खास बात की रमाकांत प्रसाद को यह गैलेंट्री अवार्ड झारखंड से मिला है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस वर्ष के राष्ट्रपति पुरस्कारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में बिहार पुलिस के डीएसपी रमाकांत प्रसाद का भी नाम हैं। दरअसल रमाकांत प्रसाद को यह अवार्ड वर्ष दो हज़ार में झारखंड में तैनाती के दौरान नक्सलियों के खिलाफ एक भीषण मुठभेड़ में जाबांजी दिखाने के लिए मिला है। वर्ष दो हज़ार में रमाकांत प्रसाद झारखंड के बरही थाना में बतौर इंस्पेक्टर तैनात थे। उसी दौरान चौपारण में नक्सलियों के एरिया कमांडर मनोज भुइयां के दस्ते के होने की जानकारी मिली थी। सूचना के बाद रमाकांत प्रसाद और तब चौपारण के थाना प्रभारी रहे ज्योति प्रकाश ने मोर्चाबंदी करते हुए नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई की। दोनों तरफ से घंटो मुठभेड़ चला था जिस दौरान एक चौकीदार छोटेलाल पासवान भी मारा गया था। मुठभेड़ के दौरान एरिया कमांडर मनोज भुईया मारा गया था। उसके पास से हथियारों का जखीरा बरामद किया गया था। गृह मंत्रालय की सूची के अनुसार इस मुठभेड़ कांड में शामिल रहे रमाकांत प्रसाद के अलावा तत्कालीन थानेदार ज्योति प्रकाश ,सिपाही जफर इमाम खान और मरणोपरांत चौकीदार छोटेलाल पासवान को भी गैलेंट्री अवार्ड देने की घोषणा की गई है।
जाकर अमितप्रभ महात्मा वाल्मीकि से सब कुछ कहा । मुनि ने सब सुनकर और राम की इच्छा को जानकर कहा कि ठीक है जैसा राम कहते हैं वैसा ही होगा । सीता वैसा ही करेगी, क्योंकि स्त्री का परम दैवत पति ही होता है। राजदूतों ने आकर राम को मुनि का कथन सुनाया। राम प्रसन्न हुए और एकत्रित ऋषियों ओर राजाओं से उन्होंने कहा, शिष्यों सहित सभी ऋषि तथा अपने परिकरों सहित नृपतिगण तथा और भी जो चाहते हों सभी आकर सीता का शपथ लेना ( पातिव्रत्य तथा शुद्धि का प्रमाण, प्रत्यय ) देखें । महात्मा राघव के उक्त वचन सुनकर महर्षियों तथा राजाओं में महान् साधुवाद हुआ। प्रभावशाली महान् राजा तथा मुनिश्रेष्ठगण राघव की प्रशंसा करने लगे । इसी काण्ड के ९६ वें सर्ग के उल्लेखानुसार रात के बीतते ही राम ने वसिष्ट, विश्वामित्र, वामदेव, जाबालि, कश्यप, दीर्घतमा, दुर्वासा, पुलस्त्य, शक्ति, भार्गव, दीर्घायु मार्कण्डेय, महायशा मौद्गल्य, गर्ग, च्यवन, शतानन्द, भरद्वाज, अग्निपुत्र सुप्रभ, नारद, पर्वत, गौतम आदि आदि मुनिवरों को बुलवाया और वे सब आये । महावीर्य राक्षस तथा महाबल वानर एवं अन्य सभी लोग कौतूहलवश आये । सहस्रों क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र तथा नाना देशों के ब्राह्मण सीता का शपथ देखने के लिये आये । सबके आने की बात जानकर सीता के साथ मुनिवर वाल्मीकि वहाँ आये । ऋषि के पीछे-पीछे राम को मन में रखकर अवाङ्मुखी क्रताञ्जलि, वाष्पकलायुक्त सीता आयीं । ब्रह्मा का अनुगमन करती हुई श्रुति के समान मुनि के पीछे-पीछे आती हुई सीता को देखकर जन-समूह में महान् साधुवाद हुआ । सोता और राम के जन्म से लेकर होनेवाले विशाल दुःख-परम्परा का चिन्तन करके सभी के अन्तःकरण क्षुब्ध हो उठे । कोई राम का ओर कोई सीता का साधुवाद करने लगे। कोई प्रेक्षक दोनों का साधुवाद करने लगे। उस समय उस महान् जनौघ में सीता को साथ लिए हुए वाल्मीकि बोले, "दाशरथे ! सीता सुव्रता एवं धर्मचारिणी है; अपवादभय से आप द्वारा मेरे आश्रम के समीप परित्यक्ता होकर मेरे आश्रम में रही, सीता आप के समक्ष अपने सतीत्व का प्रमाण, प्रत्यय देगी । ये दोनों बालक, कुरा और लव जानकी में उत्पन्न तुम्हारे पुत्र हैं । मैं प्रचेता का दसवाँ पुत्र हूँ - मैंने कभी अमृत वाक्य कहा हो तो इसका मुझे स्मरण नहीं होता; बहुत वर्षों तक मैंने तपश्चर्या की है; यदि मैथिली दृष्टा हो तो मैं उन तपश्चर्याओं का फल न पाऊँ मनसा, वाचा और कर्मणा मुझसे कभी किल्बिष नहीं हुआ यदि मैथिली निष्पाप है तो मैं उसका फल भोगूंगा, पञ्च ज्ञानन्द्रियों सहित मन से चिन्तन करके सीता को अत्यन्तशुद्धसमाचार एवं निष्पाप जानकर ही मैंने वन में उसे अपने आश्रम में रखा है । यद्यपि आप भी सीता को शुद्ध मानते हैं तो भी सीता प्रत्यय देगी । सर्ग ९७ में उल्लेख है; राम ने कहा ब्रह्मन्, आप के अकल्मष वचनों में मुझे पूर्ण विश्वास है । देवताओं के सन्निधान में जानकी ने पहले भी, लङ्का में, प्रत्यय दिया है तो भी लोकापवाद के भय से मैंने जानकी को निष्पाप जानते हुए भी उनका त्याग किया था। ये कुश और लव मेरे पुत्र हैं, यह भी मैं जानता हूँ । मेरा आशय विश्वेजानकर सीता - शपथ के प्रसङ्ग में सभी देवगण आये हैं । लोकपितामह ब्रह्मा को आगे कर आदित्य, वसु, रुद्र, देव, मरुद्गण तथा साध्य देवता एवं सभी परम महर्षि, नाग, सुपर्ण और सिद्ध सब आये हैं । राघव ने सबको देखकर कहा, "ऋषि के निष्कल्मष वाक्यों में हमें सीता के प्रति पूर्ण प्रत्यय ( विश्वास ) है और संसार में परम पवित्र सीता में मेरी स्थिर प्रीति है । उस समय दिव्य, शीतल, मन्द, सुगन्ध वायु जनौघ को आह्लादित करने दिव्य किया । वायु का अनुभव सुगन्ध लगा । सभी राष्ट्रों से आये हुए मानवों ने सत्ययुगीय उस अद्भुत शीतल, मन्द, काषायवसना सीता ने चतुर्दश भुवनस्थ जनसमुदाय को देखकर अवाङ्मुखी तथा अधोदृष्टि प्राञ्जलि-बद्ध होकर कहा मैं राघव से अन्य किसी का कभी मन से भी चिन्तन नहीं करती, यदि यह सत्य है तो माधवी धरित्री देवी मुझे अवकाश प्रदान करे । इस तरह सीता शपथ कर रही थी कि एक अद्भुतचमत्कार हुआ भूतल से एक अत्यन्त उत्तम दिव्य सिंहासन प्रकट हुआ। जिसे अमित विक्रमवाले दिव्य रत्नभूषित नागों ने अपने फणों पर धारण कर रखा
जाकर अमितप्रभ महात्मा वाल्मीकि से सब कुछ कहा । मुनि ने सब सुनकर और राम की इच्छा को जानकर कहा कि ठीक है जैसा राम कहते हैं वैसा ही होगा । सीता वैसा ही करेगी, क्योंकि स्त्री का परम दैवत पति ही होता है। राजदूतों ने आकर राम को मुनि का कथन सुनाया। राम प्रसन्न हुए और एकत्रित ऋषियों ओर राजाओं से उन्होंने कहा, शिष्यों सहित सभी ऋषि तथा अपने परिकरों सहित नृपतिगण तथा और भी जो चाहते हों सभी आकर सीता का शपथ लेना देखें । महात्मा राघव के उक्त वचन सुनकर महर्षियों तथा राजाओं में महान् साधुवाद हुआ। प्रभावशाली महान् राजा तथा मुनिश्रेष्ठगण राघव की प्रशंसा करने लगे । इसी काण्ड के छियानवे वें सर्ग के उल्लेखानुसार रात के बीतते ही राम ने वसिष्ट, विश्वामित्र, वामदेव, जाबालि, कश्यप, दीर्घतमा, दुर्वासा, पुलस्त्य, शक्ति, भार्गव, दीर्घायु मार्कण्डेय, महायशा मौद्गल्य, गर्ग, च्यवन, शतानन्द, भरद्वाज, अग्निपुत्र सुप्रभ, नारद, पर्वत, गौतम आदि आदि मुनिवरों को बुलवाया और वे सब आये । महावीर्य राक्षस तथा महाबल वानर एवं अन्य सभी लोग कौतूहलवश आये । सहस्रों क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र तथा नाना देशों के ब्राह्मण सीता का शपथ देखने के लिये आये । सबके आने की बात जानकर सीता के साथ मुनिवर वाल्मीकि वहाँ आये । ऋषि के पीछे-पीछे राम को मन में रखकर अवाङ्मुखी क्रताञ्जलि, वाष्पकलायुक्त सीता आयीं । ब्रह्मा का अनुगमन करती हुई श्रुति के समान मुनि के पीछे-पीछे आती हुई सीता को देखकर जन-समूह में महान् साधुवाद हुआ । सोता और राम के जन्म से लेकर होनेवाले विशाल दुःख-परम्परा का चिन्तन करके सभी के अन्तःकरण क्षुब्ध हो उठे । कोई राम का ओर कोई सीता का साधुवाद करने लगे। कोई प्रेक्षक दोनों का साधुवाद करने लगे। उस समय उस महान् जनौघ में सीता को साथ लिए हुए वाल्मीकि बोले, "दाशरथे ! सीता सुव्रता एवं धर्मचारिणी है; अपवादभय से आप द्वारा मेरे आश्रम के समीप परित्यक्ता होकर मेरे आश्रम में रही, सीता आप के समक्ष अपने सतीत्व का प्रमाण, प्रत्यय देगी । ये दोनों बालक, कुरा और लव जानकी में उत्पन्न तुम्हारे पुत्र हैं । मैं प्रचेता का दसवाँ पुत्र हूँ - मैंने कभी अमृत वाक्य कहा हो तो इसका मुझे स्मरण नहीं होता; बहुत वर्षों तक मैंने तपश्चर्या की है; यदि मैथिली दृष्टा हो तो मैं उन तपश्चर्याओं का फल न पाऊँ मनसा, वाचा और कर्मणा मुझसे कभी किल्बिष नहीं हुआ यदि मैथिली निष्पाप है तो मैं उसका फल भोगूंगा, पञ्च ज्ञानन्द्रियों सहित मन से चिन्तन करके सीता को अत्यन्तशुद्धसमाचार एवं निष्पाप जानकर ही मैंने वन में उसे अपने आश्रम में रखा है । यद्यपि आप भी सीता को शुद्ध मानते हैं तो भी सीता प्रत्यय देगी । सर्ग सत्तानवे में उल्लेख है; राम ने कहा ब्रह्मन्, आप के अकल्मष वचनों में मुझे पूर्ण विश्वास है । देवताओं के सन्निधान में जानकी ने पहले भी, लङ्का में, प्रत्यय दिया है तो भी लोकापवाद के भय से मैंने जानकी को निष्पाप जानते हुए भी उनका त्याग किया था। ये कुश और लव मेरे पुत्र हैं, यह भी मैं जानता हूँ । मेरा आशय विश्वेजानकर सीता - शपथ के प्रसङ्ग में सभी देवगण आये हैं । लोकपितामह ब्रह्मा को आगे कर आदित्य, वसु, रुद्र, देव, मरुद्गण तथा साध्य देवता एवं सभी परम महर्षि, नाग, सुपर्ण और सिद्ध सब आये हैं । राघव ने सबको देखकर कहा, "ऋषि के निष्कल्मष वाक्यों में हमें सीता के प्रति पूर्ण प्रत्यय है और संसार में परम पवित्र सीता में मेरी स्थिर प्रीति है । उस समय दिव्य, शीतल, मन्द, सुगन्ध वायु जनौघ को आह्लादित करने दिव्य किया । वायु का अनुभव सुगन्ध लगा । सभी राष्ट्रों से आये हुए मानवों ने सत्ययुगीय उस अद्भुत शीतल, मन्द, काषायवसना सीता ने चतुर्दश भुवनस्थ जनसमुदाय को देखकर अवाङ्मुखी तथा अधोदृष्टि प्राञ्जलि-बद्ध होकर कहा मैं राघव से अन्य किसी का कभी मन से भी चिन्तन नहीं करती, यदि यह सत्य है तो माधवी धरित्री देवी मुझे अवकाश प्रदान करे । इस तरह सीता शपथ कर रही थी कि एक अद्भुतचमत्कार हुआ भूतल से एक अत्यन्त उत्तम दिव्य सिंहासन प्रकट हुआ। जिसे अमित विक्रमवाले दिव्य रत्नभूषित नागों ने अपने फणों पर धारण कर रखा
जानवरों को कम ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है,एक व्यक्ति की तुलना में अगर हमें चिंता करने की कोई चीज है, तो हम इसके बारे में कह सकते हैं, मदद मांग सकते हैं। यदि चौगुनी पालतू जानवर को बीमार पड़ता है, तो उसे चुप्पी भुगतना पड़ेगा और वह मर भी सकता है अगर मालिक उसे पर्याप्त ध्यान नहीं देता। अक्सर, घरेलू कुत्तों को भुगतना पड़ता हैजिगर के घावों वे एक पुरानी या तीव्र रूप में प्रवाह करते हैं। उनकी घटना का सबसे आम कारण अनुचित भोजन और स्वतः प्रतिरक्षी बीमारियों के चरम प्रसार है। पशु चिकित्सकों के विभिन्न यकृत घावों के कई लक्षणों में अंतर हैः आवश्यक फ़ॉस्फोलाइपिड्स की सामग्री के कारण, कुत्तों के लिए "हेपेटोवेट" लिवर कोशिकाओं के उत्थान और संरक्षण को स्थिर करता है, जो उपरोक्त बीमारियों के इलाज में योगदान देता है। आवश्यक शब्द के बारे में एक अलग शब्द कहा जाना चाहिएफॉस्फोलिपिड। ये हेपेटोप्रोटेक्टर्स के वर्ग से संबंधित पदार्थ हैं। वे जिगर के विभिन्न नकारात्मक प्रभावों में प्रतिरोध को बढ़ाते हैं, हेपोटोटॉक्सिक दवा के नुकसान के बाद स्वयं स्वयं उपचार में योगदान करते हैं। दवा को थोड़ी मात्रा में भोजन के साथ मुंह से इंजेक्शन दिया जाता है, या खुराक सिरिंज के माध्यम से मजबूर किया जाता है। प्रवेश दिन में 2-3 बार किया जाता है, उपचार का कोर्स 4-5 सप्ताह होता है। दवा के खुराक की गणना वजन के आधार पर की जाती हैपशु। 10 किलोग्राम वजन वाले छोटे कुत्तों के लिए दवा की दैनिक खुराक, 1 मिलीलीटर, दिन में 2-3 बार बराबर होनी चाहिए। 10-20 किलोग्राम के पशु निलंबन के 2 मिलीलीटर, दिन में 4-6 बार प्राप्त करते हैं। 30 किलो वजन के वजन पर, एक खुराक 3 मिलीलीटर, दिन में 7 बार होती है। 40 किलो से बड़ी नस्लों के कुत्तों के लिए "हेपेटोवेट" 5 मिलीलीटर तक लागू होता है, जो 24 घंटों में 15 गुना तक होता है। जब एक खुराक याद आती है, दवा का उपयोग करेंअतिरिक्त हेरफेर के बिना निर्देशों के अनुसार जारी रखें। उपयोग से 3 मिनट पहले अच्छी तरह से हिलाओ। गंभीर लक्षणों के साथ, चिकित्सा के पाठ्यक्रम को 21 दिनों के अंतराल पर दोहराया जा सकता है। भोजन या अन्य additives की उपस्थिति के बावजूद हेपेटोप्रोटेक्टेंट किसी भी पालतू आहार के लिए उपयुक्त है। किसी भी प्रतिक्रिया के बिना, यह अन्य दवाओं के साथ बातचीत करता है। कुत्तों के लिए "हेपेटोवेट" एक पशुचिकित्सा द्वारा निर्धारित किया जाता हैसर्वेक्षण और विश्लेषण के परिणाम। अन्य चिकित्सीय और दवाओं के साथ संयोजन में दवा का उपयोग करने की सिफारिश की जाती है। संभावित स्वागत और विभिन्न उत्पत्ति के यकृत रोगों के लिए एक स्वतंत्र उपचार के रूप में, साथ ही जहर और अन्य घावों के बाद इसके उचित संचालन को बहाल करना। इसके अलावा, "हेपेटोवेट" का उपयोग उन दवाओं के प्रशासन के लिए एक समर्थन के रूप में किया जाता है जिनके यकृत पर जहरीले प्रभाव पड़ते हैं। तैयारी प्लास्टिक पॉलिमर बोतलों में एक निलंबन के रूप में बनाई जाती है जिसमें एक हर्मेटिकली सीलबंद ढक्कन होता है, जो कार्डबोर्ड पैक के साथ पैक किया जाता है, मापने वाले बीकर और सिरिंज-डिस्पेंसर के साथ पूरा होता है। पशु चिकित्सकों के बीच सबसे लोकप्रियद्वारा दवाओं पौधों पर आधारित। इन कुत्तों के लिए "Gepatovet" के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। निरूपण अमरता निकालने, थीस्ल बीज भोजन, आवश्यक फॉस्फोलिपिड, मेथिओनिन, L- ओर्निथिन भी शामिल है। अतिरिक्त पदार्थ सोडियम कार्बोक्सिमथिलसेल्यूलोज़, सोडियम बेंजोएट, शुद्ध पानी के रूप में हैं। दवाओं की एक छोटी सी श्रृंखला है, नहींकिसी भी प्रतिक्रिया जानवर के शरीर से नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का कारण बनता है। ऐसी दवाओं में कुत्तों के लिए "हेपेटोवेट" शामिल है। साइड इफेक्ट्स, बशर्ते कि निर्देश की आवश्यकताओं का सख्ती से पालन किया जाए, पता नहीं चला है। कुछ असाधारण मामलों में, जानवर बढ़े हुए लवण को प्रदर्शित कर सकता है, जो स्वचालित रूप से थोड़े समय में गुजरता है। एक एलर्जी प्रतिक्रिया हो सकती है। इस परिस्थिति में, दवा रद्द कर दिया गया नियुक्ति प्रत्यूर्जतारोधक दवाओं का पालन किया। Contraindicated कुत्ते जो मिर्गी, यकृत विफलता और तैयारी के घटकों को अतिसंवेदनशीलता चिह्नित मतलब है। कुत्तों के लिए "हेपेटोवेट" आश्रय में रखा जाता हैपराबैंगनी किरण सूखी जगह, भोजन से अलग, घरेलू रसायनों, फ़ीड, एक सकारात्मक तापमान (3 से 25 डिग्री) पर। भंडारण स्थान बच्चों के लिए सुलभ नहीं होना चाहिए। "हेपेटोवेट" की समाप्ति तिथि 24 महीने हैउत्पादन की तारीख से, बशर्ते पैकेजिंग को हर्मेटिक रूप से बंद कर दिया जाए। शीशी खोलने के बाद, निलंबन 21 दिनों से अधिक समय तक संग्रहीत किया जा सकता है। घरेलू उद्देश्यों के लिए एक कालबाह्य उत्पाद या एक विनाशकारी बोतल का उपयोग सख्ती से प्रतिबंधित है।
जानवरों को कम ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है,एक व्यक्ति की तुलना में अगर हमें चिंता करने की कोई चीज है, तो हम इसके बारे में कह सकते हैं, मदद मांग सकते हैं। यदि चौगुनी पालतू जानवर को बीमार पड़ता है, तो उसे चुप्पी भुगतना पड़ेगा और वह मर भी सकता है अगर मालिक उसे पर्याप्त ध्यान नहीं देता। अक्सर, घरेलू कुत्तों को भुगतना पड़ता हैजिगर के घावों वे एक पुरानी या तीव्र रूप में प्रवाह करते हैं। उनकी घटना का सबसे आम कारण अनुचित भोजन और स्वतः प्रतिरक्षी बीमारियों के चरम प्रसार है। पशु चिकित्सकों के विभिन्न यकृत घावों के कई लक्षणों में अंतर हैः आवश्यक फ़ॉस्फोलाइपिड्स की सामग्री के कारण, कुत्तों के लिए "हेपेटोवेट" लिवर कोशिकाओं के उत्थान और संरक्षण को स्थिर करता है, जो उपरोक्त बीमारियों के इलाज में योगदान देता है। आवश्यक शब्द के बारे में एक अलग शब्द कहा जाना चाहिएफॉस्फोलिपिड। ये हेपेटोप्रोटेक्टर्स के वर्ग से संबंधित पदार्थ हैं। वे जिगर के विभिन्न नकारात्मक प्रभावों में प्रतिरोध को बढ़ाते हैं, हेपोटोटॉक्सिक दवा के नुकसान के बाद स्वयं स्वयं उपचार में योगदान करते हैं। दवा को थोड़ी मात्रा में भोजन के साथ मुंह से इंजेक्शन दिया जाता है, या खुराक सिरिंज के माध्यम से मजबूर किया जाता है। प्रवेश दिन में दो-तीन बार किया जाता है, उपचार का कोर्स चार-पाँच सप्ताह होता है। दवा के खुराक की गणना वजन के आधार पर की जाती हैपशु। दस किलोग्रामग्राम वजन वाले छोटे कुत्तों के लिए दवा की दैनिक खुराक, एक मिलीलीटर, दिन में दो-तीन बार बराबर होनी चाहिए। दस-बीस किलोग्रामग्राम के पशु निलंबन के दो मिलीलीटर, दिन में चार-छः बार प्राप्त करते हैं। तीस किलो वजन के वजन पर, एक खुराक तीन मिलीलीटर, दिन में सात बार होती है। चालीस किलो से बड़ी नस्लों के कुत्तों के लिए "हेपेटोवेट" पाँच मिलीलीटर तक लागू होता है, जो चौबीस घंटाटों में पंद्रह गुना तक होता है। जब एक खुराक याद आती है, दवा का उपयोग करेंअतिरिक्त हेरफेर के बिना निर्देशों के अनुसार जारी रखें। उपयोग से तीन मिनट पहले अच्छी तरह से हिलाओ। गंभीर लक्षणों के साथ, चिकित्सा के पाठ्यक्रम को इक्कीस दिनों के अंतराल पर दोहराया जा सकता है। भोजन या अन्य additives की उपस्थिति के बावजूद हेपेटोप्रोटेक्टेंट किसी भी पालतू आहार के लिए उपयुक्त है। किसी भी प्रतिक्रिया के बिना, यह अन्य दवाओं के साथ बातचीत करता है। कुत्तों के लिए "हेपेटोवेट" एक पशुचिकित्सा द्वारा निर्धारित किया जाता हैसर्वेक्षण और विश्लेषण के परिणाम। अन्य चिकित्सीय और दवाओं के साथ संयोजन में दवा का उपयोग करने की सिफारिश की जाती है। संभावित स्वागत और विभिन्न उत्पत्ति के यकृत रोगों के लिए एक स्वतंत्र उपचार के रूप में, साथ ही जहर और अन्य घावों के बाद इसके उचित संचालन को बहाल करना। इसके अलावा, "हेपेटोवेट" का उपयोग उन दवाओं के प्रशासन के लिए एक समर्थन के रूप में किया जाता है जिनके यकृत पर जहरीले प्रभाव पड़ते हैं। तैयारी प्लास्टिक पॉलिमर बोतलों में एक निलंबन के रूप में बनाई जाती है जिसमें एक हर्मेटिकली सीलबंद ढक्कन होता है, जो कार्डबोर्ड पैक के साथ पैक किया जाता है, मापने वाले बीकर और सिरिंज-डिस्पेंसर के साथ पूरा होता है। पशु चिकित्सकों के बीच सबसे लोकप्रियद्वारा दवाओं पौधों पर आधारित। इन कुत्तों के लिए "Gepatovet" के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। निरूपण अमरता निकालने, थीस्ल बीज भोजन, आवश्यक फॉस्फोलिपिड, मेथिओनिन, L- ओर्निथिन भी शामिल है। अतिरिक्त पदार्थ सोडियम कार्बोक्सिमथिलसेल्यूलोज़, सोडियम बेंजोएट, शुद्ध पानी के रूप में हैं। दवाओं की एक छोटी सी श्रृंखला है, नहींकिसी भी प्रतिक्रिया जानवर के शरीर से नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का कारण बनता है। ऐसी दवाओं में कुत्तों के लिए "हेपेटोवेट" शामिल है। साइड इफेक्ट्स, बशर्ते कि निर्देश की आवश्यकताओं का सख्ती से पालन किया जाए, पता नहीं चला है। कुछ असाधारण मामलों में, जानवर बढ़े हुए लवण को प्रदर्शित कर सकता है, जो स्वचालित रूप से थोड़े समय में गुजरता है। एक एलर्जी प्रतिक्रिया हो सकती है। इस परिस्थिति में, दवा रद्द कर दिया गया नियुक्ति प्रत्यूर्जतारोधक दवाओं का पालन किया। Contraindicated कुत्ते जो मिर्गी, यकृत विफलता और तैयारी के घटकों को अतिसंवेदनशीलता चिह्नित मतलब है। कुत्तों के लिए "हेपेटोवेट" आश्रय में रखा जाता हैपराबैंगनी किरण सूखी जगह, भोजन से अलग, घरेलू रसायनों, फ़ीड, एक सकारात्मक तापमान पर। भंडारण स्थान बच्चों के लिए सुलभ नहीं होना चाहिए। "हेपेटोवेट" की समाप्ति तिथि चौबीस महीने हैउत्पादन की तारीख से, बशर्ते पैकेजिंग को हर्मेटिक रूप से बंद कर दिया जाए। शीशी खोलने के बाद, निलंबन इक्कीस दिनों से अधिक समय तक संग्रहीत किया जा सकता है। घरेलू उद्देश्यों के लिए एक कालबाह्य उत्पाद या एक विनाशकारी बोतल का उपयोग सख्ती से प्रतिबंधित है।
नदबई -हलेना रोड स्थित वनखंडी पर आज सैनी समाज द्वारा माता सावित्री बाई फुले की 126वीं पुण्य तिथि मनाई गई। सबसे पहले पार्षद हरिसिंह बादशाह के मुख्य आतिथ्य में माता सावित्री बाई फुले की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जगदीश प्रसाद सैनी द्वारा की गई। जगदीश प्रसाद सैनी ने माता सावित्री बाई फुले की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता सावित्री बाई फुले भारत देश की प्रथम महिला शिक्षिका, महान क्रांतिकारी समाज सेविका, मराठी कवयित्री थी। उस समय भारत में नारी शिक्षा का अभाव था, परन्तु उसके उपरांत पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर उन्होंने सर्व प्रथम 1848 में पुणे के भिड़ेवाडा में पहला भारतीय महिला स्कूल की स्थापना की। उसके अलावा कुल 18 स्कूल और खोले। उनका जीवन देश के उत्थान में संघर्षरत रहा। 10 मार्च 1897 उनका उनका निधन हो गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नदबई -हलेना रोड स्थित वनखंडी पर आज सैनी समाज द्वारा माता सावित्री बाई फुले की एक सौ छब्बीसवीं पुण्य तिथि मनाई गई। सबसे पहले पार्षद हरिसिंह बादशाह के मुख्य आतिथ्य में माता सावित्री बाई फुले की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जगदीश प्रसाद सैनी द्वारा की गई। जगदीश प्रसाद सैनी ने माता सावित्री बाई फुले की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता सावित्री बाई फुले भारत देश की प्रथम महिला शिक्षिका, महान क्रांतिकारी समाज सेविका, मराठी कवयित्री थी। उस समय भारत में नारी शिक्षा का अभाव था, परन्तु उसके उपरांत पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर उन्होंने सर्व प्रथम एक हज़ार आठ सौ अड़तालीस में पुणे के भिड़ेवाडा में पहला भारतीय महिला स्कूल की स्थापना की। उसके अलावा कुल अट्ठारह स्कूल और खोले। उनका जीवन देश के उत्थान में संघर्षरत रहा। दस मार्च एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे उनका उनका निधन हो गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Khatron Ke Khiladi 13 In South Africa: कलर्स टीवी पर आने वाला एडवेंचर्स रियलिटी शो खतरों के खिलाडी सीजन 13 की शूटिंग भारत से हजारों किलोमीटर दूर साउथ अफ्रीका में शुरू हो गई है. Khatron Ke Khiladi 13 Day 1: कलर्स टीवी का एडवेंचर रियलिटी शो खतरों की खिलाड़ी सीजन 13 छोटे पर्दे पर शुरू होने से पहले ही जमकर सूर्खियां बटोर रहा है. शो के पिछले सभी सीजन सफल साबित हुए हैं. इसी कड़ी में शो के अपकमिंग सीजन का भी दर्शक बेहद बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. खतरों की खिलाड़ी सीजन 13 में टेलीविजन, ओटीटी और फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकार शिरकत करते हुए नजर आने वाले हैं. खतरों के खिलाडी 13 में अर्चना गौतम, शीजान खान, रोहित रॉय, शिव ठाकरे, अंजली आंनद, अंजुम फैख, डेजी शाह और अरजीत तनेजा जैसे कई मशहूर सेलेब्स के नाम पर मुहर लग चुकी है. शो की शूटिंग के लिए सभी कंटेस्टेंट साउथ अफ्रीका पहुंच गए हैं. आपको बता दें, टास्क मास्टर रोहित शेट्टी की मौजूदगी में खतरों के खिलाडी की शूटिंग शुरू हो गई है. शो में पहला स्टंट रोहित रॉय परफॉर्म करेंगे. इस दौरान रोहित पानी के ऊपर अपना स्टंट दिखाते हुए नजर आएंगे. हालांकि स्टंट के बाद रोहित कांपने लगेंगे और अपना अनुभव सभी कंटेस्टेंट के साथ शेयर करते हुए वो कहेंगे कि, ठंडे पानी की वजह से उनके हाथ सुन्न हो गए हैं. आपको बता दें, रोहित रॉय खतरों के खिलाडी के इतिहास में सबसे सीनियर खिलाडी है. 54 साल की उम्र में वो इस शो में शामिल हुए हैं. खतरों के खिलाडी की शूटिंग के बिहाइंड द कैमरा वीडियोज दर्शकों को काफी एक्साइटेड कर रहे हैं. हालांकि ये शो देखने के लिए फैंस को थोड़ा इंतजार करना होगा. जुलाई के आखिरी हफ्ते में कलर्स टीवी पर इस शो को देखा जा सकता है. कलर्स टीवी के साथ साथ रोहित शेट्टी का ये शो जियो सिनेमा पर भी टेलीकास्ट होगा.
Khatron Ke Khiladi तेरह In South Africa: कलर्स टीवी पर आने वाला एडवेंचर्स रियलिटी शो खतरों के खिलाडी सीजन तेरह की शूटिंग भारत से हजारों किलोमीटर दूर साउथ अफ्रीका में शुरू हो गई है. Khatron Ke Khiladi तेरह Day एक: कलर्स टीवी का एडवेंचर रियलिटी शो खतरों की खिलाड़ी सीजन तेरह छोटे पर्दे पर शुरू होने से पहले ही जमकर सूर्खियां बटोर रहा है. शो के पिछले सभी सीजन सफल साबित हुए हैं. इसी कड़ी में शो के अपकमिंग सीजन का भी दर्शक बेहद बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. खतरों की खिलाड़ी सीजन तेरह में टेलीविजन, ओटीटी और फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकार शिरकत करते हुए नजर आने वाले हैं. खतरों के खिलाडी तेरह में अर्चना गौतम, शीजान खान, रोहित रॉय, शिव ठाकरे, अंजली आंनद, अंजुम फैख, डेजी शाह और अरजीत तनेजा जैसे कई मशहूर सेलेब्स के नाम पर मुहर लग चुकी है. शो की शूटिंग के लिए सभी कंटेस्टेंट साउथ अफ्रीका पहुंच गए हैं. आपको बता दें, टास्क मास्टर रोहित शेट्टी की मौजूदगी में खतरों के खिलाडी की शूटिंग शुरू हो गई है. शो में पहला स्टंट रोहित रॉय परफॉर्म करेंगे. इस दौरान रोहित पानी के ऊपर अपना स्टंट दिखाते हुए नजर आएंगे. हालांकि स्टंट के बाद रोहित कांपने लगेंगे और अपना अनुभव सभी कंटेस्टेंट के साथ शेयर करते हुए वो कहेंगे कि, ठंडे पानी की वजह से उनके हाथ सुन्न हो गए हैं. आपको बता दें, रोहित रॉय खतरों के खिलाडी के इतिहास में सबसे सीनियर खिलाडी है. चौवन साल की उम्र में वो इस शो में शामिल हुए हैं. खतरों के खिलाडी की शूटिंग के बिहाइंड द कैमरा वीडियोज दर्शकों को काफी एक्साइटेड कर रहे हैं. हालांकि ये शो देखने के लिए फैंस को थोड़ा इंतजार करना होगा. जुलाई के आखिरी हफ्ते में कलर्स टीवी पर इस शो को देखा जा सकता है. कलर्स टीवी के साथ साथ रोहित शेट्टी का ये शो जियो सिनेमा पर भी टेलीकास्ट होगा.
"तो क्या हुआ तुम हो ही बौने " "नही भैय्या ऐसी बात नही है चंद्रिका ने कुछ मंत्र सा बोला और मुझे हवा उड़ा दिया था" निलेश कहता है "लेकिन अभी नही अभी वो नादान है जादुई शक्तियाँ नही संभाल पयेगी कही गजमोहीनी के जाल में न फंस जाऐ इसलिए समय आने दो सब बता दूंगा। चंद्रिका को ढुंढने में असफल रहा उसने पूरा कंचनापुर छान लिया पर वो कही नही मिली । गुस्से से तिलमिलाई गजमोहीनी ने उस छली सैनिक को वही मिट्टी का ढेर बना दिया। मन में विचार करती है आखिर एक ही दिन में वो कहाॅं गये जमीन निगल गयी या आसमान खा गया । जादूगरनी गजमोहीनी अपनी शक्तियो से उनका पता करती है पर उनके गुप्त स्थान का पता नहीं लगा पाती है और तिलमिला जाती है तब उसे ध्यान आता है कि इस काम में "मेरी मदद जादूगर गौन कर सकता है और वो ही बता सकता है वो सब कहाॅं छुपे है एक बार उनका पता चल जाऐ फिर बताती हूंँ आख़िर गजमोहीनी से बैर करना क्या होता है " जादूगरनी गजमोहीनी गौन कि छलावि गुफा में पहुंचती है और उससे मदद मांगती है । (जादूगर गौन के पास एक विशेष शक्ति थी जिससे वो किसी को भी खोज लेता था किंतु शापित होने कि वजह से किसी को खत्म नही कर सकता था) "आओ गजमोहीनी मेरी गुफा में कैसे आना हुआ" "गौन मुझे तुम्हारी मदद चाहिए मैं उस कंचना कि बेटी को खत्म करना चाहती हूँ पर वो न जाने कहाॅं छुपे बैठे हैं उनका पता बता दो इससे तुम्हारा भी बदला पूरा हो जाऐगा"" "हां !जरुर बताऊँगा आख़िर मुझे भी कंचना से अपना बदला लेना है" जादूगर गौन चंद्रिका का पता बताता है । "ओह!तो वो यमार पहाड़ी पर छुपे है " "क्या? तो वो वहां है आखिर कंचना अपनी बेटी को कबतक बचाएगी मैं यमार पहाड़ी नही जा सकती तो क्या हुआ मेरे सैनिक तो जा सकते है " "तुम्हारा धन्यावाद"
"तो क्या हुआ तुम हो ही बौने " "नही भैय्या ऐसी बात नही है चंद्रिका ने कुछ मंत्र सा बोला और मुझे हवा उड़ा दिया था" निलेश कहता है "लेकिन अभी नही अभी वो नादान है जादुई शक्तियाँ नही संभाल पयेगी कही गजमोहीनी के जाल में न फंस जाऐ इसलिए समय आने दो सब बता दूंगा। चंद्रिका को ढुंढने में असफल रहा उसने पूरा कंचनापुर छान लिया पर वो कही नही मिली । गुस्से से तिलमिलाई गजमोहीनी ने उस छली सैनिक को वही मिट्टी का ढेर बना दिया। मन में विचार करती है आखिर एक ही दिन में वो कहाॅं गये जमीन निगल गयी या आसमान खा गया । जादूगरनी गजमोहीनी अपनी शक्तियो से उनका पता करती है पर उनके गुप्त स्थान का पता नहीं लगा पाती है और तिलमिला जाती है तब उसे ध्यान आता है कि इस काम में "मेरी मदद जादूगर गौन कर सकता है और वो ही बता सकता है वो सब कहाॅं छुपे है एक बार उनका पता चल जाऐ फिर बताती हूंँ आख़िर गजमोहीनी से बैर करना क्या होता है " जादूगरनी गजमोहीनी गौन कि छलावि गुफा में पहुंचती है और उससे मदद मांगती है । "आओ गजमोहीनी मेरी गुफा में कैसे आना हुआ" "गौन मुझे तुम्हारी मदद चाहिए मैं उस कंचना कि बेटी को खत्म करना चाहती हूँ पर वो न जाने कहाॅं छुपे बैठे हैं उनका पता बता दो इससे तुम्हारा भी बदला पूरा हो जाऐगा"" "हां !जरुर बताऊँगा आख़िर मुझे भी कंचना से अपना बदला लेना है" जादूगर गौन चंद्रिका का पता बताता है । "ओह!तो वो यमार पहाड़ी पर छुपे है " "क्या? तो वो वहां है आखिर कंचना अपनी बेटी को कबतक बचाएगी मैं यमार पहाड़ी नही जा सकती तो क्या हुआ मेरे सैनिक तो जा सकते है " "तुम्हारा धन्यावाद"
भोजन का अधिकार अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून (International Human Rights) द्वारा स्थापित सिद्धांत है। यह सदस्य राज्य के लिये खाद्य सुरक्षा के अधिकार के सम्मान, संरक्षण और पूर्ति हेतु दायित्व का निर्धारण करता है। खाद्य सुरक्षा के सामान्य सिद्धांत के अंतर्गत चार प्रमुख आयामों यथा - पहुँच, उपलब्धता, उपयोग और स्थिरता को शामिल किया जाता है। सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणापत्र (Universal Declaration of Human Rights) और आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध (International Covenant on Economic, Social and Cultural Rights) के सदस्य के रूप में भारत पर भूख से मुक्त होने और पर्याप्त भोजन के अधिकार को सुनिश्चित करने का दायित्व है। 10 दिसंबर, 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ की समान्य सभा द्वारा मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत और घोषित किया गया। इस घोषणा से राष्ट्रों को मानवाधिकारों के संबंध में न केवल प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, बल्कि वे इन अधिकारों को अपने संविधान या अधिनियमों के द्वारा मान्यता देने तथा क्रियान्वित करने के लिये भी अग्रसर हुए। - संयुक्त राष्ट्र के अनुच्छेद 25 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे जीवन स्तर को प्राप्त करने का अधिकार है जो उसे और उसके परिवार के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिये पर्याप्त हो। - इसके अंतर्गत खाना, कपड़ा, मकान, चिकित्सा-संबंधी सुविधाएँ और आवश्यक सामाजिक सेवाओं को शामिल किया गया है। - सभी को बेकारी, बीमारी, असमर्थता, वैधव्य, बुढ़ापे या अन्य ऐसी किसी परिस्थिति में आजीविका का साधन न होने पर जो उसके काबू के बाहर हो, सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है। - इसके अनुसार, जच्चा और बच्चा को खास सहायता एवं सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है। प्रत्येक बच्चे को चाहे वह विवाहित माता से जन्मा हो या अविवाहित से, समान सामाजिक संरक्षण प्राप्त करने का अधिकार है। - भारत में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को दो पीढ़ियों में विभाजित किया जा सकता है। इस संबंध में किया गया सीमांकन सटीकता से बहुत दूर है, जो इस बात को इंगित करता है कि किस प्रकार समय के साथ खाद्य सुरक्षा के विभिन्न तत्त्वों को दिये जाने वाले महत्त्व में परिवर्तन होता गया। - जैसा कि हम सभी जानते हैं कि स्वतंत्रता के बाद के वर्ष भारत के लिये बेहद अशांत रहे। जहाँ एक ओर बंगाल अकाल की यादें ताज़ा थी वहीं दूसरी ओर खाद्यान्न की कमी का डर निरंतर बना हुआ था। भूख को अपर्याप्त खाद्य उत्पादन का पर्याय माना जाता था। - यही कारण रहा कि वर्ष 1974 में विश्व खाद्य सम्मेलन (World Food Conference-WFC) द्वारा उत्पादन के संदर्भ में खाद्य सुरक्षा को परिभाषित किया गया। डब्लूएफसी के अनुसार, विश्व खाद्य आपूर्ति की हर समय पर्याप्त उपलब्धता ही खाद्य सुरक्षा होती है। - स्पष्ट रूप से इन सभी परिस्थितियों ने भारत को खाद्य उत्पादन की दर में बढ़ोत्तरी करने के लिये विवश किया। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये भारत ने हरित क्रांति को शुरू करने का दृढ़ संकल्प लिया। लेकिन इस निर्णय ने तब एक अजीब स्थिति को जन्म दिया, जब यह कार्यक्रम देश के कुछ हिस्सों में चावल और गेहूँ के उत्पादन में नाटकीय वृद्धि हासिल करने में सफल हो गया और इसके विनाशकारी पर्यावरणीय प्रभाव के चलते इसकी बहुत अधिक आलोचना की गई। - वर्तमान की खाद्य सुरक्षा की स्थितियों को समझने और उसके संदर्भ में कार्यवाही करने का आधार 1980 और 1990 के दशक की दो घटनाओं ने प्रदान किया। सर्वप्रथम, जब सुप्रीम कोर्ट ने नाटकीय रूप से उन अधिकारों के दायरे में विस्तार करने का निर्णय लिया जो नागरिक को राज्य के खिलाफ दावा करने में सक्षम बनाते हैं। - हालाँकि इसके अंतर्गत 'भोजन के अधिकार' को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया तथापि इसमें मानव गरिमा के अभिन्न अंग के रूप में मूल अधिकारों में भोजन का उल्लेख किया गया। दूसरी घटना, पहुँच की समस्या के स्थान पर अब उपलब्धता की समस्या मुख्य मुद्दा बनकर उभरी। - राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश एक ऐतिहासिक पहल है जिसके ज़रिये जनता को पोषण खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। खाद्य सुरक्षा विधेयक का खास ज़ोर गरीब-से-गरीब व्यक्ति, महिलाओं और बच्चों की जरूरतें पूरी करने पर है। - इस विधेयक में शिकायत निवारण तंत्र की भी व्यवस्था है। अगर कोई जनसेवक या अधिकृत व्यक्ति इसका अनुपालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ शिकायत कर सुनवाई का प्रवधान किया गया है। - राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत गरीबों को 2 रुपए प्रति किलो गेहूँ और 3 रुपए प्रति किलो चावल देने की व्यवस्था की गई है। इस कानून के तहत व्यवस्था है कि लाभार्थियों को उनके लिये निर्धारित खाद्यान्न हर हाल में मिले, इसके लिये खाद्यान्न की आपूर्ति न होने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा भत्ते के भुगतान के नियम को जनवरी 2015 में लागू किया गया। - समाज के अति निर्धन वर्ग के हर परिवार को हर महीने अंत्योदय अन्न योजना में इस कानून के तहत सब्सिडी दरों पर यानी तीन रुपए, दो रुपए, एक रुपए प्रति किलो क्रमशः चावल, गेहूँ और मोटा अनाज मिल रहा है। - पूरे देश में यह कानून लागू होने के बाद 81.34 करोड़ लोगों को 2 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से गेहूँ और 3 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से चावल दिया जा रहा है। - 1980 और 1990 के दशक में खाद्य सुरक्षा का एक दूसरा पक्ष सामने आया जिसके अनुसार, खाद्य आपूर्ति में वृद्धि पर ध्यान दिये जाने के बाद भी भूख को कम करने में भारत सफल नहीं हो सका। इस संबंध में प्राप्त आँकड़ों के अनुसार भारत खाद्य घाटे वाले देश से एक खाद्य अधिशेष वाले देश के रूप में परिवर्तित हो गया है, लेकिन भूख की समस्या जस-की-तस बनी हुई है। - अमर्त्य सेन जैसे आर्थिक विशेषज्ञों द्वारा किये गए मौलिक शोधों से यह पता चला है कि भूख और खाद्य सुरक्षा मुख्य रूप से 'पहुँच' के मुद्दे से संबद्ध थे, अर्थात् पर्याप्त मात्रा में अनाज और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसे विभिन्न सरकारी प्रयासों के बावजूद लोग भुखमरी से मर रहे थे क्योंकि वे शारीरिक रूप से अथवा वित्तीय रूप से (या दोनों) इस भोजन तक पहुँचने में असमर्थ थे। - खाद्य सुरक्षा के इस दृष्टिकोण को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिबिंबित किया गया। वर्ष 1996 में आयोजित विश्व खाद्य शिखर सम्मेलन में भी इस मुद्दे पर प्रकाश डाला गया। सम्मेलन में स्पष्ट किया गया कि जब सभी लोगों की हर समय पर्याप्त, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन तक शारीरिक और आर्थिक पहुँच सुनिश्चित होगी तभी खाद्य सुरक्षा की स्थिति को प्राप्त किया जा सकता है। - वर्ष 2001 में एक मामला प्रकाश में आया जब पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज द्वारा दाखिल एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 'भोजन के अधिकार' के रूप में एक नए मौलिक अधिकार को प्रस्तुत करते हुए इसे संविधान के जीवन के अधिकार के साथ पढ़ा। - इसके बाद कोर्ट द्वारा जारी आदेशों और निर्देशों के परिणामस्वरूप वर्ष 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act-NFSA) को प्रस्तुत किया गया, जिसके अंतर्गत सभी भारतीयों को मात्रात्मक "भोजन के अधिकार" की गारंटी प्रदान की गई। - यहाँ एक और बात पर गौर किये जाने की आवश्यकता है कि NFSA को उस रूप में पेश नहीं किया जा सका जिस रूप में इससे उपेक्षा की गई थी। इसके मसौदे में गंभीर खामियाँ व्याप्त थीं, जो भारत में भोजन के अधिकार को कानूनी रूप देने के अपने उद्देश्य को पूरा करने में कमज़ोर साबित हुईं। - आश्चर्यजनक रूप से एनएफएसए भोजन के सार्वभौमिक अधिकार की गारंटी नहीं देता है। इसके बजाए यह कुछ मानदंडों के आधार पर पहचाने गए लोगों के लिये भोजन के अधिकार को सीमित करता है। - साथ ही, इसके अंतर्गत यह भी निर्दिष्ट किया गया है कि यह अधिनियम "युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, चक्रवात या भूकंप" की स्थिति में लागू नहीं होगा (विशेष रूप से, यह केंद्र सरकार के अनुमोदन के अंतर्गत आता है कि वह ऐसी किसी स्थिति के होने की घोषणा करे)। - यह देखते हुए कि उपरोक्त परिस्थितियों में भोजन का अधिकार सबसे अधिक मूल्यवान हो जाता है, यह संदिग्ध प्रतीत होता है कि यह अधिनियम उस अधिकार की गारंटी देने में प्रभावी है या नहीं। - एनएफएसए का एक और समस्याग्रस्त पहलू यह है कि इसके अंतर्गत कुछ ऐसे उद्देश्यों को शामिल किया गया है जिनके संबंध में प्रगतिशील रूप से कार्य किया जाना चाहिये। - इन उद्देश्यों अथवा प्रावधानों में कृषि सुधार, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और विकेंद्रीकृत खरीद को शामिल किया गया है, लेकिन इन उद्देश्यों अथवा प्रावधानों में हमारी कृषि प्रणालियों के बारे में मौलिक धारणाओं पर पुनर्विचार करने और खाद्य सुरक्षा को अधिक व्यापक तरीके से देखने की आवश्यकता का कोई जिक्र नहीं किया गया है। - सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से सस्ता खाद्यान्न आम लोगों तक पहुँचाया जाता है, जो केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की संयुक्त ज़िम्मेदारी है। - भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली खाद्यान्न वितरण के लिये विश्व में सबसे बड़ा नेटवर्क है। - केंद्र सरकार सस्ता खाद्यान्न उपलब्ध कराती है और उसका वितरण स्थानीय स्तर पर राज्य सरकारों द्वारा आवंटित उचित दर की दुकानों (राशन की दुकान) के द्वारा किया जाता है। - मूल रूप से यह योजना उस धन का दुरुपयोग रोकने के लिये है, जिसे किसी भी सरकारी योजना के लाभार्थी तक पहुँचने से पहले ही बिचौलिये तथा अन्य भ्रष्टाचारी हड़पने की जुगत में रहते हैं। - प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से जुड़ी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी बिचौलिये का कोई काम नहीं है और यह योजना सरकार एवं लाभार्थियों के बीच सीधे चलाई जा रही है। - इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में कर देती है। लाभार्थियों को भुगतान उनके आधार कार्ड के ज़रिये भी किया जा रहा है। - यह तर्कसंगत है कि "प्रगतिशील प्राप्ति" का मुद्दा खाद्य सुरक्षा में सुधार को अवरुद्ध करता है। ऐसा इसलिये है क्योंकि इसके तहत वर्णित कुछ तत्त्व पहले से ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कानूनों और नीतियों में शामिल हैं। - उन्हें "प्रगतिशील प्राप्ति" के दायित्व के रूप में वर्णित करने से विपरीत परिणाम सामने आएंगे, इसके परिणामस्वरूप जहाँ एक ओर राज्य एनएफएसए में वर्णित आवश्यक कार्यवाहियों को करने से बचेंगे वहीं, दूसरी ओर जिस उद्देश्य के साथ इस अधिनियम को लाया गया है उसे प्राप्त करना और अधिक कठिन हो जाएगा। - विचारणीय पक्ष यह है कि एनएफएसए को यदि केवल नागरिकों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिये सरकारी प्रतिबद्धता के रूप में स्थापित किया जाता है तो यह अदालतों की कार्रवाई को सीमित कर सकता है। - ऐसे में अधिनियम के तहत नागरिक अधिकारों को किस सीमा तक विस्तृत किया जा सकता है यह चिंता का विषय है। हाल ही में स्वराज अभियान के मामलों में यह डर सामने आया जब भारत में लगातार सूखे की स्थिति से निपटने में सरकारी विफलताओं के प्रभाव स्पष्ट हुए। - हालाँकि एनएफएसए के प्रावधानों को लागू करने के लिये अदालत ने कार्यकारी को आदेश भी जारी किया, लेकिन नागरिकों को क्या दिया जाना चाहिये इस सबका निर्धारण न्यायालय द्वारा नहीं किया जा सकता है। - यह देखते हुए कि एनएफएसए में मुख्य रूप से चावल और गेहूँ का उल्लेख किया गया है जो कि केवल कुछ नागरिकों के लिये ही है, इस चिंता को बढ़ावा प्रदान करता है। - अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि जब एनएफएसए के अंतर्गत पहुँच, उपलब्धता और यहाँ तक कि सामंजस्यपूर्ण रूप से उपयोग के मुद्दों को गहनता से संबोधित किया गया है, तो भी इसके अंतर्गत खाद्य आपूर्ति की स्थिरता के मुद्दे पर काफी कुछ किये जाने की आवश्यकता है। - वस्तुतः हमें एक "तीसरी पीढ़ी" के खाद्य सुरक्षा कानून को बनाने की आवश्यकता पर बल देना चाहिये जिसके अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं तथा जलवायु अनुकूलन सहित बहुत-से अन्य मुद्दों को शामिल करते हुए खाद्य सुरक्षा की समस्या को हल किया जाना चाहिये। - इस तरह का ढाँचा सभी चार आयामों में देश की खाद्य सुरक्षा का सामना करने वाली चुनौतियों का समाधान करेगा और इस तरह की विशेषता वाले छोटे-छोटे प्रयास करने की बजाय एक समन्वित प्रयास के तहत इन समस्याओं का हल किया जाना चाहिये। खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत बहुत से अन्य मुद्दे जैसे-असमानता, खाद्य विविधता, स्वदेशी अधिकार और पर्यावरण न्याय भी सम्मिलित होते हैं। कृषि और खाद्य सुरक्षा में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिये हर महीने अनाज की विशेष मात्रा प्रदान करने की बजाय इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिये कि गाँव खुद अपनी अवश्यकताओं की पूर्ति करें, जिससे भोजन के अभाव को दूर करने में सहायता मिलेगी। पूर्वोत्तर भारत को खाद्य उत्पादन में सक्षम बनाने के लिये रणनीतिक योजनाएँ और उनके समुचित कार्यान्वयन की आवश्यकता है। यह काम समेकित अनुसंधान और कार्यक्रम विस्तार के ज़रिये ही संभव होगा। 'मोदी सरकार के चार साल' खंड के संदर्भ में अन्य पक्षों को जानने के लिये पढ़ें :
भोजन का अधिकार अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून द्वारा स्थापित सिद्धांत है। यह सदस्य राज्य के लिये खाद्य सुरक्षा के अधिकार के सम्मान, संरक्षण और पूर्ति हेतु दायित्व का निर्धारण करता है। खाद्य सुरक्षा के सामान्य सिद्धांत के अंतर्गत चार प्रमुख आयामों यथा - पहुँच, उपलब्धता, उपयोग और स्थिरता को शामिल किया जाता है। सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणापत्र और आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध के सदस्य के रूप में भारत पर भूख से मुक्त होने और पर्याप्त भोजन के अधिकार को सुनिश्चित करने का दायित्व है। दस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस को संयुक्त राष्ट्र संघ की समान्य सभा द्वारा मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत और घोषित किया गया। इस घोषणा से राष्ट्रों को मानवाधिकारों के संबंध में न केवल प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, बल्कि वे इन अधिकारों को अपने संविधान या अधिनियमों के द्वारा मान्यता देने तथा क्रियान्वित करने के लिये भी अग्रसर हुए। - संयुक्त राष्ट्र के अनुच्छेद पच्चीस के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे जीवन स्तर को प्राप्त करने का अधिकार है जो उसे और उसके परिवार के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिये पर्याप्त हो। - इसके अंतर्गत खाना, कपड़ा, मकान, चिकित्सा-संबंधी सुविधाएँ और आवश्यक सामाजिक सेवाओं को शामिल किया गया है। - सभी को बेकारी, बीमारी, असमर्थता, वैधव्य, बुढ़ापे या अन्य ऐसी किसी परिस्थिति में आजीविका का साधन न होने पर जो उसके काबू के बाहर हो, सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है। - इसके अनुसार, जच्चा और बच्चा को खास सहायता एवं सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है। प्रत्येक बच्चे को चाहे वह विवाहित माता से जन्मा हो या अविवाहित से, समान सामाजिक संरक्षण प्राप्त करने का अधिकार है। - भारत में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को दो पीढ़ियों में विभाजित किया जा सकता है। इस संबंध में किया गया सीमांकन सटीकता से बहुत दूर है, जो इस बात को इंगित करता है कि किस प्रकार समय के साथ खाद्य सुरक्षा के विभिन्न तत्त्वों को दिये जाने वाले महत्त्व में परिवर्तन होता गया। - जैसा कि हम सभी जानते हैं कि स्वतंत्रता के बाद के वर्ष भारत के लिये बेहद अशांत रहे। जहाँ एक ओर बंगाल अकाल की यादें ताज़ा थी वहीं दूसरी ओर खाद्यान्न की कमी का डर निरंतर बना हुआ था। भूख को अपर्याप्त खाद्य उत्पादन का पर्याय माना जाता था। - यही कारण रहा कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में विश्व खाद्य सम्मेलन द्वारा उत्पादन के संदर्भ में खाद्य सुरक्षा को परिभाषित किया गया। डब्लूएफसी के अनुसार, विश्व खाद्य आपूर्ति की हर समय पर्याप्त उपलब्धता ही खाद्य सुरक्षा होती है। - स्पष्ट रूप से इन सभी परिस्थितियों ने भारत को खाद्य उत्पादन की दर में बढ़ोत्तरी करने के लिये विवश किया। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये भारत ने हरित क्रांति को शुरू करने का दृढ़ संकल्प लिया। लेकिन इस निर्णय ने तब एक अजीब स्थिति को जन्म दिया, जब यह कार्यक्रम देश के कुछ हिस्सों में चावल और गेहूँ के उत्पादन में नाटकीय वृद्धि हासिल करने में सफल हो गया और इसके विनाशकारी पर्यावरणीय प्रभाव के चलते इसकी बहुत अधिक आलोचना की गई। - वर्तमान की खाद्य सुरक्षा की स्थितियों को समझने और उसके संदर्भ में कार्यवाही करने का आधार एक हज़ार नौ सौ अस्सी और एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक की दो घटनाओं ने प्रदान किया। सर्वप्रथम, जब सुप्रीम कोर्ट ने नाटकीय रूप से उन अधिकारों के दायरे में विस्तार करने का निर्णय लिया जो नागरिक को राज्य के खिलाफ दावा करने में सक्षम बनाते हैं। - हालाँकि इसके अंतर्गत 'भोजन के अधिकार' को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया तथापि इसमें मानव गरिमा के अभिन्न अंग के रूप में मूल अधिकारों में भोजन का उल्लेख किया गया। दूसरी घटना, पहुँच की समस्या के स्थान पर अब उपलब्धता की समस्या मुख्य मुद्दा बनकर उभरी। - राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश एक ऐतिहासिक पहल है जिसके ज़रिये जनता को पोषण खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। खाद्य सुरक्षा विधेयक का खास ज़ोर गरीब-से-गरीब व्यक्ति, महिलाओं और बच्चों की जरूरतें पूरी करने पर है। - इस विधेयक में शिकायत निवारण तंत्र की भी व्यवस्था है। अगर कोई जनसेवक या अधिकृत व्यक्ति इसका अनुपालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ शिकायत कर सुनवाई का प्रवधान किया गया है। - राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, दो हज़ार तेरह के तहत गरीबों को दो रुपयापए प्रति किलो गेहूँ और तीन रुपयापए प्रति किलो चावल देने की व्यवस्था की गई है। इस कानून के तहत व्यवस्था है कि लाभार्थियों को उनके लिये निर्धारित खाद्यान्न हर हाल में मिले, इसके लिये खाद्यान्न की आपूर्ति न होने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा भत्ते के भुगतान के नियम को जनवरी दो हज़ार पंद्रह में लागू किया गया। - समाज के अति निर्धन वर्ग के हर परिवार को हर महीने अंत्योदय अन्न योजना में इस कानून के तहत सब्सिडी दरों पर यानी तीन रुपए, दो रुपए, एक रुपए प्रति किलो क्रमशः चावल, गेहूँ और मोटा अनाज मिल रहा है। - पूरे देश में यह कानून लागू होने के बाद इक्यासी.चौंतीस करोड़ लोगों को दो रुपयापए प्रति किलोग्राम की दर से गेहूँ और तीन रुपयापए प्रति किलोग्राम की दर से चावल दिया जा रहा है। - एक हज़ार नौ सौ अस्सी और एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक में खाद्य सुरक्षा का एक दूसरा पक्ष सामने आया जिसके अनुसार, खाद्य आपूर्ति में वृद्धि पर ध्यान दिये जाने के बाद भी भूख को कम करने में भारत सफल नहीं हो सका। इस संबंध में प्राप्त आँकड़ों के अनुसार भारत खाद्य घाटे वाले देश से एक खाद्य अधिशेष वाले देश के रूप में परिवर्तित हो गया है, लेकिन भूख की समस्या जस-की-तस बनी हुई है। - अमर्त्य सेन जैसे आर्थिक विशेषज्ञों द्वारा किये गए मौलिक शोधों से यह पता चला है कि भूख और खाद्य सुरक्षा मुख्य रूप से 'पहुँच' के मुद्दे से संबद्ध थे, अर्थात् पर्याप्त मात्रा में अनाज और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसे विभिन्न सरकारी प्रयासों के बावजूद लोग भुखमरी से मर रहे थे क्योंकि वे शारीरिक रूप से अथवा वित्तीय रूप से इस भोजन तक पहुँचने में असमर्थ थे। - खाद्य सुरक्षा के इस दृष्टिकोण को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिबिंबित किया गया। वर्ष एक हज़ार नौ सौ छियानवे में आयोजित विश्व खाद्य शिखर सम्मेलन में भी इस मुद्दे पर प्रकाश डाला गया। सम्मेलन में स्पष्ट किया गया कि जब सभी लोगों की हर समय पर्याप्त, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन तक शारीरिक और आर्थिक पहुँच सुनिश्चित होगी तभी खाद्य सुरक्षा की स्थिति को प्राप्त किया जा सकता है। - वर्ष दो हज़ार एक में एक मामला प्रकाश में आया जब पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज द्वारा दाखिल एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 'भोजन के अधिकार' के रूप में एक नए मौलिक अधिकार को प्रस्तुत करते हुए इसे संविधान के जीवन के अधिकार के साथ पढ़ा। - इसके बाद कोर्ट द्वारा जारी आदेशों और निर्देशों के परिणामस्वरूप वर्ष दो हज़ार तेरह में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को प्रस्तुत किया गया, जिसके अंतर्गत सभी भारतीयों को मात्रात्मक "भोजन के अधिकार" की गारंटी प्रदान की गई। - यहाँ एक और बात पर गौर किये जाने की आवश्यकता है कि NFSA को उस रूप में पेश नहीं किया जा सका जिस रूप में इससे उपेक्षा की गई थी। इसके मसौदे में गंभीर खामियाँ व्याप्त थीं, जो भारत में भोजन के अधिकार को कानूनी रूप देने के अपने उद्देश्य को पूरा करने में कमज़ोर साबित हुईं। - आश्चर्यजनक रूप से एनएफएसए भोजन के सार्वभौमिक अधिकार की गारंटी नहीं देता है। इसके बजाए यह कुछ मानदंडों के आधार पर पहचाने गए लोगों के लिये भोजन के अधिकार को सीमित करता है। - साथ ही, इसके अंतर्गत यह भी निर्दिष्ट किया गया है कि यह अधिनियम "युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, चक्रवात या भूकंप" की स्थिति में लागू नहीं होगा । - यह देखते हुए कि उपरोक्त परिस्थितियों में भोजन का अधिकार सबसे अधिक मूल्यवान हो जाता है, यह संदिग्ध प्रतीत होता है कि यह अधिनियम उस अधिकार की गारंटी देने में प्रभावी है या नहीं। - एनएफएसए का एक और समस्याग्रस्त पहलू यह है कि इसके अंतर्गत कुछ ऐसे उद्देश्यों को शामिल किया गया है जिनके संबंध में प्रगतिशील रूप से कार्य किया जाना चाहिये। - इन उद्देश्यों अथवा प्रावधानों में कृषि सुधार, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और विकेंद्रीकृत खरीद को शामिल किया गया है, लेकिन इन उद्देश्यों अथवा प्रावधानों में हमारी कृषि प्रणालियों के बारे में मौलिक धारणाओं पर पुनर्विचार करने और खाद्य सुरक्षा को अधिक व्यापक तरीके से देखने की आवश्यकता का कोई जिक्र नहीं किया गया है। - सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से सस्ता खाद्यान्न आम लोगों तक पहुँचाया जाता है, जो केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की संयुक्त ज़िम्मेदारी है। - भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली खाद्यान्न वितरण के लिये विश्व में सबसे बड़ा नेटवर्क है। - केंद्र सरकार सस्ता खाद्यान्न उपलब्ध कराती है और उसका वितरण स्थानीय स्तर पर राज्य सरकारों द्वारा आवंटित उचित दर की दुकानों के द्वारा किया जाता है। - मूल रूप से यह योजना उस धन का दुरुपयोग रोकने के लिये है, जिसे किसी भी सरकारी योजना के लाभार्थी तक पहुँचने से पहले ही बिचौलिये तथा अन्य भ्रष्टाचारी हड़पने की जुगत में रहते हैं। - प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से जुड़ी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी बिचौलिये का कोई काम नहीं है और यह योजना सरकार एवं लाभार्थियों के बीच सीधे चलाई जा रही है। - इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में कर देती है। लाभार्थियों को भुगतान उनके आधार कार्ड के ज़रिये भी किया जा रहा है। - यह तर्कसंगत है कि "प्रगतिशील प्राप्ति" का मुद्दा खाद्य सुरक्षा में सुधार को अवरुद्ध करता है। ऐसा इसलिये है क्योंकि इसके तहत वर्णित कुछ तत्त्व पहले से ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कानूनों और नीतियों में शामिल हैं। - उन्हें "प्रगतिशील प्राप्ति" के दायित्व के रूप में वर्णित करने से विपरीत परिणाम सामने आएंगे, इसके परिणामस्वरूप जहाँ एक ओर राज्य एनएफएसए में वर्णित आवश्यक कार्यवाहियों को करने से बचेंगे वहीं, दूसरी ओर जिस उद्देश्य के साथ इस अधिनियम को लाया गया है उसे प्राप्त करना और अधिक कठिन हो जाएगा। - विचारणीय पक्ष यह है कि एनएफएसए को यदि केवल नागरिकों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिये सरकारी प्रतिबद्धता के रूप में स्थापित किया जाता है तो यह अदालतों की कार्रवाई को सीमित कर सकता है। - ऐसे में अधिनियम के तहत नागरिक अधिकारों को किस सीमा तक विस्तृत किया जा सकता है यह चिंता का विषय है। हाल ही में स्वराज अभियान के मामलों में यह डर सामने आया जब भारत में लगातार सूखे की स्थिति से निपटने में सरकारी विफलताओं के प्रभाव स्पष्ट हुए। - हालाँकि एनएफएसए के प्रावधानों को लागू करने के लिये अदालत ने कार्यकारी को आदेश भी जारी किया, लेकिन नागरिकों को क्या दिया जाना चाहिये इस सबका निर्धारण न्यायालय द्वारा नहीं किया जा सकता है। - यह देखते हुए कि एनएफएसए में मुख्य रूप से चावल और गेहूँ का उल्लेख किया गया है जो कि केवल कुछ नागरिकों के लिये ही है, इस चिंता को बढ़ावा प्रदान करता है। - अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि जब एनएफएसए के अंतर्गत पहुँच, उपलब्धता और यहाँ तक कि सामंजस्यपूर्ण रूप से उपयोग के मुद्दों को गहनता से संबोधित किया गया है, तो भी इसके अंतर्गत खाद्य आपूर्ति की स्थिरता के मुद्दे पर काफी कुछ किये जाने की आवश्यकता है। - वस्तुतः हमें एक "तीसरी पीढ़ी" के खाद्य सुरक्षा कानून को बनाने की आवश्यकता पर बल देना चाहिये जिसके अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं तथा जलवायु अनुकूलन सहित बहुत-से अन्य मुद्दों को शामिल करते हुए खाद्य सुरक्षा की समस्या को हल किया जाना चाहिये। - इस तरह का ढाँचा सभी चार आयामों में देश की खाद्य सुरक्षा का सामना करने वाली चुनौतियों का समाधान करेगा और इस तरह की विशेषता वाले छोटे-छोटे प्रयास करने की बजाय एक समन्वित प्रयास के तहत इन समस्याओं का हल किया जाना चाहिये। खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत बहुत से अन्य मुद्दे जैसे-असमानता, खाद्य विविधता, स्वदेशी अधिकार और पर्यावरण न्याय भी सम्मिलित होते हैं। कृषि और खाद्य सुरक्षा में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिये हर महीने अनाज की विशेष मात्रा प्रदान करने की बजाय इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिये कि गाँव खुद अपनी अवश्यकताओं की पूर्ति करें, जिससे भोजन के अभाव को दूर करने में सहायता मिलेगी। पूर्वोत्तर भारत को खाद्य उत्पादन में सक्षम बनाने के लिये रणनीतिक योजनाएँ और उनके समुचित कार्यान्वयन की आवश्यकता है। यह काम समेकित अनुसंधान और कार्यक्रम विस्तार के ज़रिये ही संभव होगा। 'मोदी सरकार के चार साल' खंड के संदर्भ में अन्य पक्षों को जानने के लिये पढ़ें :
किसको चाह नहीं होती स्वर्ग में जाने कि सभी लोग चाहते हैं कि वह भी स्वर्ग में जाए या फिर एक बार तो स्वर्ग देखने को नसीब हों। कुछ ऐसी ही प्रकार कि जगह के बारे मे हम आपसे जिक्र करने जा रहे है। दरअसल यह ऐसी जगह है जहां पर पहुँच कर आपको किसी स्वर्ग में पहुचने जैसी फीलिंग आएगी। हम यहां जिस स्वर्ग की बात कर रहे है। वह चीन के तियानमेन माउंटेन पर बनी एक गुफा है। और इसकी खुबसूरती के कारण इसे स्वर्ग का दरवाजा कहा जाता है। आपको बता दें कि 253 ई. के आस-पास पहाड़ का कुछ हिस्सा टूट गया था और उसी समय इस गुफा का निर्माण हुआ था। इस गुफा कि लंबाई 196 फीट और ऊंचाई 431 फीट हैं। खास बात यह है कि 5000 फीट की ऊंचाई की वजह से ये गुफा बादलों से घिरी रहती है इसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे मानों स्वर्ग में आ गए हों। आपको बता दे कि यहां पहुंचने के लिए केबल वे का प्रयोग किया जाता है। और सड़कों से उतरने के बाद लोग 999 सीढ़ियां चढ़कर गुफा तक पहंुचते हैं। अगर आप भी स्वर्ग जैसी जगह से परिचित होना चाहते है तो यहां एक बार जरूर जाएं।
किसको चाह नहीं होती स्वर्ग में जाने कि सभी लोग चाहते हैं कि वह भी स्वर्ग में जाए या फिर एक बार तो स्वर्ग देखने को नसीब हों। कुछ ऐसी ही प्रकार कि जगह के बारे मे हम आपसे जिक्र करने जा रहे है। दरअसल यह ऐसी जगह है जहां पर पहुँच कर आपको किसी स्वर्ग में पहुचने जैसी फीलिंग आएगी। हम यहां जिस स्वर्ग की बात कर रहे है। वह चीन के तियानमेन माउंटेन पर बनी एक गुफा है। और इसकी खुबसूरती के कारण इसे स्वर्ग का दरवाजा कहा जाता है। आपको बता दें कि दो सौ तिरेपन ई. के आस-पास पहाड़ का कुछ हिस्सा टूट गया था और उसी समय इस गुफा का निर्माण हुआ था। इस गुफा कि लंबाई एक सौ छियानवे फीट और ऊंचाई चार सौ इकतीस फीट हैं। खास बात यह है कि पाँच हज़ार फीट की ऊंचाई की वजह से ये गुफा बादलों से घिरी रहती है इसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे मानों स्वर्ग में आ गए हों। आपको बता दे कि यहां पहुंचने के लिए केबल वे का प्रयोग किया जाता है। और सड़कों से उतरने के बाद लोग नौ सौ निन्यानवे सीढ़ियां चढ़कर गुफा तक पहंुचते हैं। अगर आप भी स्वर्ग जैसी जगह से परिचित होना चाहते है तो यहां एक बार जरूर जाएं।
80,000 से अधिक निवासियों के साथ, लुंड शहर Scania, स्वीडन के प्रांत में, लुंड नगर पालिका के प्रशासनिक केंद्र है. यह कई उच्च तकनीक अड्डों कंपनियों की है कि एक शहर है. लुंड 4 विश्वविद्यालयों की है. सतत प्रबंधन के लिए एक व्यापार की डिग्री है कि समय के साथ वर्तमान है। इस अध्ययन कैसे संसाधनों की स्थिरता का अभ्यास करने की इच्छा के साथ एक कंपनी की वित्तीय जरूरतों को संतुलित करने के लिए, एक व्यवसाय के गतिशील है कि पर्यावरण और ध्यान में समाज की भलाई लेता बनाने पर केंद्रित है। स्वीडन (Sverige) मिलियन 9.5 के बारे में की आबादी के साथ, नॉर्डिक देशों का सबसे बड़ा है. यह नार्वे और फिनलैंड सीमाओं और Øresund (Öresundsbron) के पुल के माध्यम से डेनमार्क से जुड़ा है. स्वीडन में एक खुला, अभी तक विचारशील देश होने का एक मजबूत परंपरा है. छात्रों के एक स्नातक की डिग्री कार्यक्रम पूरा करने के बाद स्नातकोत्तर किया है। एक परास्नातक प्राप्त करने के लिए, आप आमतौर पर अक्सर व्यापक परीक्षण और / या एक शोध पूरा शामिल है कि 12 से 18 कॉलेज के पाठ्यक्रम को पूरा करने की जरूरत है।
अस्सी,शून्य से अधिक निवासियों के साथ, लुंड शहर Scania, स्वीडन के प्रांत में, लुंड नगर पालिका के प्रशासनिक केंद्र है. यह कई उच्च तकनीक अड्डों कंपनियों की है कि एक शहर है. लुंड चार विश्वविद्यालयों की है. सतत प्रबंधन के लिए एक व्यापार की डिग्री है कि समय के साथ वर्तमान है। इस अध्ययन कैसे संसाधनों की स्थिरता का अभ्यास करने की इच्छा के साथ एक कंपनी की वित्तीय जरूरतों को संतुलित करने के लिए, एक व्यवसाय के गतिशील है कि पर्यावरण और ध्यान में समाज की भलाई लेता बनाने पर केंद्रित है। स्वीडन मिलियन नौ.पाँच के बारे में की आबादी के साथ, नॉर्डिक देशों का सबसे बड़ा है. यह नार्वे और फिनलैंड सीमाओं और Øresund के पुल के माध्यम से डेनमार्क से जुड़ा है. स्वीडन में एक खुला, अभी तक विचारशील देश होने का एक मजबूत परंपरा है. छात्रों के एक स्नातक की डिग्री कार्यक्रम पूरा करने के बाद स्नातकोत्तर किया है। एक परास्नातक प्राप्त करने के लिए, आप आमतौर पर अक्सर व्यापक परीक्षण और / या एक शोध पूरा शामिल है कि बारह से अट्ठारह कॉलेज के पाठ्यक्रम को पूरा करने की जरूरत है।
बर्मामाइंस के गोदाम एरिया स्थित बॉस सर्विस सेंटर में सोमवार शाम साढ़े सात बजे अचानक आग लग गई। घटना के दौरान सर्विस सेंटर बंद था। अंदर से आग निकलता देख मौके पर मौजूद गार्ड ने इसकी सूचना पुलिस और दमकल विभाग को दी। रात लगभग 10 बजे आग नियंत्रण में आ गया। आग से 15 वाहन जलकर खाक हो गये। कुछ कारें कोलकाता से मरम्मत के लिए आई हुई थीं। दमकल की आठ गाड़ी मौके पर पहुंची, इनमें टाटा मोटर्स की भी एक दमकल गाड़ी शामिल थी। आग की लपट देखते ही देखते छह से अधिक कार, जीप व अन्य वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। पास में प्लाइवुड की दुकान और गोदाम भी जलकर खाक हो गया।
बर्मामाइंस के गोदाम एरिया स्थित बॉस सर्विस सेंटर में सोमवार शाम साढ़े सात बजे अचानक आग लग गई। घटना के दौरान सर्विस सेंटर बंद था। अंदर से आग निकलता देख मौके पर मौजूद गार्ड ने इसकी सूचना पुलिस और दमकल विभाग को दी। रात लगभग दस बजे आग नियंत्रण में आ गया। आग से पंद्रह वाहन जलकर खाक हो गये। कुछ कारें कोलकाता से मरम्मत के लिए आई हुई थीं। दमकल की आठ गाड़ी मौके पर पहुंची, इनमें टाटा मोटर्स की भी एक दमकल गाड़ी शामिल थी। आग की लपट देखते ही देखते छह से अधिक कार, जीप व अन्य वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। पास में प्लाइवुड की दुकान और गोदाम भी जलकर खाक हो गया।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने खलीफा हफ्तर के लीबिया की राष्ट्रीय सेना से संबंधित पैंटीर-सी 1 रूसी विमानभेदी मिसाइल-बंदूक प्रणाली (जेडआरपीके) को लीबिया से जब्त और हटा दिया। यह ब्रिटिश अखबार द टाइम्स ने अपने स्वयं के स्रोतों का हवाला देते हुए बताया है। समाचार पत्र के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात से LNA द्वारा आपूर्ति की गई वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली को पिछले साल जुलाई में पकड़ लिया गया था और त्रिपोली के एक हवाई क्षेत्र पश्चिम से लीबिया के क्षेत्र से पूरी तरह से चालू हालत में हटा दिया गया था। ZRPK को अमेरिकी वायु सेना के C-17A ग्लोबमास्टर III परिवहन विमान द्वारा जर्मनी में अमेरिकी रामस्टीन एयरबेस में पहुंचाया गया, जहां यह अभी भी स्थित है। समाचार पत्र के सूत्रों के अनुसार, संयुक्त राज्य में, एंटी-एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स को जब्त करने की कार्रवाई को इस भय से समझाया गया था कि विमान-रोधी मिसाइल प्रणाली तस्करों के हाथों में आ सकती है हथियारों और नागरिक विमानों को नष्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है। उसी समय, अखबार ने जोर दिया कि यह विमान-रोधी परिसर अमेरिकी खुफिया के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि अमेरिकी विशेषज्ञों ने लंबे समय तक यूएई को अपनी डिलीवरी के बाद इन परिसरों का अध्ययन किया है। इस राज्य की सेना के लिए, रूस ने जर्मन मैन एसएक्स ट्रक के चेसिस पर विमान-विरोधी परिसर के निर्यात संस्करण की आपूर्ति की। यह ध्यान दिया जाता है कि मास्को कथित तौर पर ZRPK के अपहरण के बारे में जानता है। बदले में, द ड्राइव का सुझाव है कि रूसी-निर्मित एंटी-एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स का उपयोग "संभावित" तकनीक से निपटने के लिए रणनीति विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने खलीफा हफ्तर के लीबिया की राष्ट्रीय सेना से संबंधित पैंटीर-सी एक रूसी विमानभेदी मिसाइल-बंदूक प्रणाली को लीबिया से जब्त और हटा दिया। यह ब्रिटिश अखबार द टाइम्स ने अपने स्वयं के स्रोतों का हवाला देते हुए बताया है। समाचार पत्र के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात से LNA द्वारा आपूर्ति की गई वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली को पिछले साल जुलाई में पकड़ लिया गया था और त्रिपोली के एक हवाई क्षेत्र पश्चिम से लीबिया के क्षेत्र से पूरी तरह से चालू हालत में हटा दिया गया था। ZRPK को अमेरिकी वायु सेना के C-सत्रह एम्पीयर ग्लोबमास्टर III परिवहन विमान द्वारा जर्मनी में अमेरिकी रामस्टीन एयरबेस में पहुंचाया गया, जहां यह अभी भी स्थित है। समाचार पत्र के सूत्रों के अनुसार, संयुक्त राज्य में, एंटी-एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स को जब्त करने की कार्रवाई को इस भय से समझाया गया था कि विमान-रोधी मिसाइल प्रणाली तस्करों के हाथों में आ सकती है हथियारों और नागरिक विमानों को नष्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है। उसी समय, अखबार ने जोर दिया कि यह विमान-रोधी परिसर अमेरिकी खुफिया के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि अमेरिकी विशेषज्ञों ने लंबे समय तक यूएई को अपनी डिलीवरी के बाद इन परिसरों का अध्ययन किया है। इस राज्य की सेना के लिए, रूस ने जर्मन मैन एसएक्स ट्रक के चेसिस पर विमान-विरोधी परिसर के निर्यात संस्करण की आपूर्ति की। यह ध्यान दिया जाता है कि मास्को कथित तौर पर ZRPK के अपहरण के बारे में जानता है। बदले में, द ड्राइव का सुझाव है कि रूसी-निर्मित एंटी-एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स का उपयोग "संभावित" तकनीक से निपटने के लिए रणनीति विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
जीव विज्ञान 342 भूमिका रहती है। खाद्य उत्पादन में वृद्धि के लिए स्पष्टतः फसलों एवं जंतुओं के जीनप्ररूपों तथा उनके वातावरणों दोनों में ही उपयुक्त सुधार करना अनिवार्य होगा। उन्नत प्रबंधन विधियां (Improved management Practices) फसल उत्पादन एवं पशुपालन के बारे में आप पहले पढ़ चुके हैं। पौधे कार्बन एवं ऑक्सीजन वायु से, हाइड्रोजन जल से, एवं नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, मैंगनीज, लोहा, बोरॉन, जस्ता, तांबा, मॉलीब्डेनम एवं क्लोरीन मृदा से प्राप्त करते हैं। पौधों को उपयुक्त मात्रा में विभिन्न खनिज पोषक उपलब्ध कराने के लिए खादों एवं उर्वरकों का समुचित मात्रा में उपयोग करना जरूरी होता है। इसके अलावा उपयुक्त मात्रा में जल की आपूर्ति के लिए सिंचाई की जाती है। अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए फसलों में रोगों एवं खर-पतवारों का समुचित नियंत्रण भी जरूरी होता है। आप पशुओं के कुछ महत्त्वपूर्ण रोगों एवं उनके नियंत्रण की विधियों का अध्ययन कर चुके हैं। आपको यह स्पष्ट होगा कि फसल एवं पशु उत्पादन अपने वातावरण को रूपांतरित करते हैं। इस अध्याय में भी हम वातावरण के एक प्रमुख कारक, फसल एवं जंतु रोगों के नियंत्रण, की चर्चा कुछ अधिक विस्तार से करेंगे । जीनप्ररूप में सुधार (Improvement In Genotype ) किसी स्पीशीज़ के ग्राम्यन के बाद मनुष्य ने उसके उन लक्षणों के लिए वरण किया होगा, जो उसके स्वयं के लिए उपयोगी थे। उदाहरण के लिए, जंगली स्पीशीजों के पौधे अधिक संख्या में किंतु छोटे आकार के बीज उत्पादित करते हैं। लेकिन मनुष्य अपेक्षाकृत बड़े फलों एवं बीजों को पसंद करते हैं। जंगली पौधों के फल परिपक्व होने पर विशीर्ण हो जाते हैं, लेकिन यह लक्षण मानव के लिए उपयोगी नहीं है। अतः ग्राम्यित स्पीशीज़ों में मानव ने बड़े फलों एवं बीजों, तथा अविशरणीय फलों के लिए वरण किया होगा। इस प्रकार मानव द्वारा वरण किए गएं लक्षण प्रकृति द्वारा वरण किए जाने वाले लक्षणों से भिन्न होते हैं। किसी जीव की आकारकीय संरचनात्मक अथवा व्यवहारीय विशेषता को उसका लक्षण कहते हैं। उदाहरणार्थ, दानों की उपज आदि फसलों के महत्त्वपूर्ण लक्षण होते हैं। किसी समष्टि में उपस्थित विभिन्न जीनप्ररूपों की जनन दर में भिन्नता को वरण कहते हैं। लगातार वरण के कारण हमारी फसलें अपनी जंगली स्पीशीज़ों की तुलना में काफी भिन्न हो गई हैं। इन्हीं परिवर्तनों के कारण फसलें मानव के लिए काफी उपयोगी भी हो गई हैं। इसके विपरीत, फसलों से संबंधित जंगली जातियां खर-पतवार हैं, और ये कृषि में बाधक होती हैं। जब किसी जीव के जीनप्ररूप में इस प्रकार के परिवर्तन किए जाते हैं, जिनसे वह जीव मानव के लिए अधिक उपयोगी हो जाता है, तो इसे प्रजनन कहा जाता है। पादप प्रजनन द्वारा फसलों के जीनप्ररूप में सुधार किया जाता है, जबकि जंतु प्रजनन में पालतू जंतु स्पीशीज़ों के जीनप्ररूप में सुधार किया जाता है। 23, 2 उन्नत किस्में (Improved varieties) किसी किस्म के सभी पौधों का जीनप्ररूप एक समान अथवा आपस में काफी मिलता-जुलता होता है। इसके साथ ही, कोई किस्म दी गई फसल की अन्य किस्मों से एक अथवा एक से अधिक लक्षणों में स्पष्ट रूप से भिन्न होती है, जिससे वह सरलतापूर्वक पहचानी जा सकती है। लेकिन इसे किस्म तभी कहा जाता है जब यह किसी सक्षम समिति द्वारा किस्म के रूप में विमोचित की गई होती है। कोई भी उन्नत किस्म उसी फसल के पहले की किस्मों की तुलना में एक अथवा अधिक लक्षणों में उत्कृष्ट होती है। जैसा आप पहले पढ़ चुके हैं, किसी सुधरी किस्म के महत्त्वपूर्ण लक्षण कई होते हैं, जैसे उपज, गुणवत्ता, जल्दी पकना, रोग एवं कीटरोधिता आदि। प्रत्येक सुधरी किस्म एक सक्षम समिति द्वारा मान्यता प्राप्त एने sof चित्र 23.2 गेहूं की एक उन्नत किस्म (HUW 486) का छायाचित्र (डॉ. अरूण कुमार जोशी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के सौजन्य से)
जीव विज्ञान तीन सौ बयालीस भूमिका रहती है। खाद्य उत्पादन में वृद्धि के लिए स्पष्टतः फसलों एवं जंतुओं के जीनप्ररूपों तथा उनके वातावरणों दोनों में ही उपयुक्त सुधार करना अनिवार्य होगा। उन्नत प्रबंधन विधियां फसल उत्पादन एवं पशुपालन के बारे में आप पहले पढ़ चुके हैं। पौधे कार्बन एवं ऑक्सीजन वायु से, हाइड्रोजन जल से, एवं नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, मैंगनीज, लोहा, बोरॉन, जस्ता, तांबा, मॉलीब्डेनम एवं क्लोरीन मृदा से प्राप्त करते हैं। पौधों को उपयुक्त मात्रा में विभिन्न खनिज पोषक उपलब्ध कराने के लिए खादों एवं उर्वरकों का समुचित मात्रा में उपयोग करना जरूरी होता है। इसके अलावा उपयुक्त मात्रा में जल की आपूर्ति के लिए सिंचाई की जाती है। अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए फसलों में रोगों एवं खर-पतवारों का समुचित नियंत्रण भी जरूरी होता है। आप पशुओं के कुछ महत्त्वपूर्ण रोगों एवं उनके नियंत्रण की विधियों का अध्ययन कर चुके हैं। आपको यह स्पष्ट होगा कि फसल एवं पशु उत्पादन अपने वातावरण को रूपांतरित करते हैं। इस अध्याय में भी हम वातावरण के एक प्रमुख कारक, फसल एवं जंतु रोगों के नियंत्रण, की चर्चा कुछ अधिक विस्तार से करेंगे । जीनप्ररूप में सुधार किसी स्पीशीज़ के ग्राम्यन के बाद मनुष्य ने उसके उन लक्षणों के लिए वरण किया होगा, जो उसके स्वयं के लिए उपयोगी थे। उदाहरण के लिए, जंगली स्पीशीजों के पौधे अधिक संख्या में किंतु छोटे आकार के बीज उत्पादित करते हैं। लेकिन मनुष्य अपेक्षाकृत बड़े फलों एवं बीजों को पसंद करते हैं। जंगली पौधों के फल परिपक्व होने पर विशीर्ण हो जाते हैं, लेकिन यह लक्षण मानव के लिए उपयोगी नहीं है। अतः ग्राम्यित स्पीशीज़ों में मानव ने बड़े फलों एवं बीजों, तथा अविशरणीय फलों के लिए वरण किया होगा। इस प्रकार मानव द्वारा वरण किए गएं लक्षण प्रकृति द्वारा वरण किए जाने वाले लक्षणों से भिन्न होते हैं। किसी जीव की आकारकीय संरचनात्मक अथवा व्यवहारीय विशेषता को उसका लक्षण कहते हैं। उदाहरणार्थ, दानों की उपज आदि फसलों के महत्त्वपूर्ण लक्षण होते हैं। किसी समष्टि में उपस्थित विभिन्न जीनप्ररूपों की जनन दर में भिन्नता को वरण कहते हैं। लगातार वरण के कारण हमारी फसलें अपनी जंगली स्पीशीज़ों की तुलना में काफी भिन्न हो गई हैं। इन्हीं परिवर्तनों के कारण फसलें मानव के लिए काफी उपयोगी भी हो गई हैं। इसके विपरीत, फसलों से संबंधित जंगली जातियां खर-पतवार हैं, और ये कृषि में बाधक होती हैं। जब किसी जीव के जीनप्ररूप में इस प्रकार के परिवर्तन किए जाते हैं, जिनसे वह जीव मानव के लिए अधिक उपयोगी हो जाता है, तो इसे प्रजनन कहा जाता है। पादप प्रजनन द्वारा फसलों के जीनप्ररूप में सुधार किया जाता है, जबकि जंतु प्रजनन में पालतू जंतु स्पीशीज़ों के जीनप्ररूप में सुधार किया जाता है। तेईस, दो उन्नत किस्में किसी किस्म के सभी पौधों का जीनप्ररूप एक समान अथवा आपस में काफी मिलता-जुलता होता है। इसके साथ ही, कोई किस्म दी गई फसल की अन्य किस्मों से एक अथवा एक से अधिक लक्षणों में स्पष्ट रूप से भिन्न होती है, जिससे वह सरलतापूर्वक पहचानी जा सकती है। लेकिन इसे किस्म तभी कहा जाता है जब यह किसी सक्षम समिति द्वारा किस्म के रूप में विमोचित की गई होती है। कोई भी उन्नत किस्म उसी फसल के पहले की किस्मों की तुलना में एक अथवा अधिक लक्षणों में उत्कृष्ट होती है। जैसा आप पहले पढ़ चुके हैं, किसी सुधरी किस्म के महत्त्वपूर्ण लक्षण कई होते हैं, जैसे उपज, गुणवत्ता, जल्दी पकना, रोग एवं कीटरोधिता आदि। प्रत्येक सुधरी किस्म एक सक्षम समिति द्वारा मान्यता प्राप्त एने sof चित्र तेईस.दो गेहूं की एक उन्नत किस्म का छायाचित्र
एक्ट्रेस सनी लिओनी वैसे तो फिल्मों से नदारद हैं। बावजूद इसके सोशल मीडिया पर वह लगातार अपने फैन्स के साथ जुड़ी रहती हैं। पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल बातें तक बिंदास साझा करती हैं। मगर इस बार कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना शायद फैन्स ने भी नहीं की होगी। जी हां। सनी लिओनी की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई है। यह तस्वीर सनी लिओनी के बाथरूम में ली गई है। सनी इस दौरान बाथटब में नजर आ रही हैं। मगर यह जानकर आपको और भी ज्यादा हैरानी होगी कि यह तस्वीर खुद सनी ने फैन्स के साथ शेयर की है। सनी ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा कि मुझे लगता है कि मैंने कुछ ज्यादा ही बुलबले बना लिए हैं। हा हा हा। दरअसल इस फोटो में सनी पूरी तरह से बुलबुलों से ढंकी हुई नजर आ रही हैं। केवल एक दिल का आकार बना हुआ है। इसमें सनी लिओनी का चेहरा देखा जा सकता है। यह पहला मौका नहीं है, जब सनी ने इस तरह की तस्वीरें फैन्स के साथ शेयर की हो।
एक्ट्रेस सनी लिओनी वैसे तो फिल्मों से नदारद हैं। बावजूद इसके सोशल मीडिया पर वह लगातार अपने फैन्स के साथ जुड़ी रहती हैं। पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल बातें तक बिंदास साझा करती हैं। मगर इस बार कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना शायद फैन्स ने भी नहीं की होगी। जी हां। सनी लिओनी की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई है। यह तस्वीर सनी लिओनी के बाथरूम में ली गई है। सनी इस दौरान बाथटब में नजर आ रही हैं। मगर यह जानकर आपको और भी ज्यादा हैरानी होगी कि यह तस्वीर खुद सनी ने फैन्स के साथ शेयर की है। सनी ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा कि मुझे लगता है कि मैंने कुछ ज्यादा ही बुलबले बना लिए हैं। हा हा हा। दरअसल इस फोटो में सनी पूरी तरह से बुलबुलों से ढंकी हुई नजर आ रही हैं। केवल एक दिल का आकार बना हुआ है। इसमें सनी लिओनी का चेहरा देखा जा सकता है। यह पहला मौका नहीं है, जब सनी ने इस तरह की तस्वीरें फैन्स के साथ शेयर की हो।
(www. arya-tv. com) सितंबर के महीने में ETF यानी कि गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में 446 करोड़ रुपये का निवेश देखा गया है। देश में त्योहारी सीजन की वजह से मजबूत मांग के कारण आने वाले महीनों में यह इनफ्लो जारी रह सकता है। सितंबर महीने का यह आउटफ्लो पिछले महीने दर्ज किए गए 24 करोड़ रुपये के नेट आउटफ्लो से काफी अधिक था। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई में इस श्रेणी में 61. 5 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई थी। मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर मैनेजर हिमांशु श्रीवास्तव ने बताया कि इस साल जून में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज किया है जो कि आर्थिक मंदी के दौरान जब इक्विटी बाजार अस्थिर दौर से गुजरते हैं तो सोने को निवेश का एक सुरक्षित ठिकाना मान लिया जाता है। हालांकि, इक्विटी बाजारों में तेजी और आर्थिक सुधार की उम्मीद ने हाल के दिनों में सोने के लिए अच्छा संकेत नहीं दिया है। इसके अलावा, डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में उछाल ने सोने की कीमतों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
सितंबर के महीने में ETF यानी कि गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में चार सौ छियालीस करोड़ रुपये का निवेश देखा गया है। देश में त्योहारी सीजन की वजह से मजबूत मांग के कारण आने वाले महीनों में यह इनफ्लो जारी रह सकता है। सितंबर महीने का यह आउटफ्लो पिछले महीने दर्ज किए गए चौबीस करोड़ रुपये के नेट आउटफ्लो से काफी अधिक था। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई में इस श्रेणी में इकसठ. पाँच करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई थी। मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर मैनेजर हिमांशु श्रीवास्तव ने बताया कि इस साल जून में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज किया है जो कि आर्थिक मंदी के दौरान जब इक्विटी बाजार अस्थिर दौर से गुजरते हैं तो सोने को निवेश का एक सुरक्षित ठिकाना मान लिया जाता है। हालांकि, इक्विटी बाजारों में तेजी और आर्थिक सुधार की उम्मीद ने हाल के दिनों में सोने के लिए अच्छा संकेत नहीं दिया है। इसके अलावा, डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में उछाल ने सोने की कीमतों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
Blackberry (jamun). 3- To solve moles problem (muhaase) leaves of Basil (tulsi ke pattey) crushed with Butter (makkhan) and then acquire paste use as a scrubber on your face. 4 .At night take 2 spoons AMLA POWDER and put in water. At morning filter this water with clean cloth and then wash your face with it. It helps you to get rid of blemishes. 5.By applying milk cream with wheat pouder on face can solve blemish and dryness problem of your face. 6.By applying Coconut Oil (nariyal ka tail) with the juice of Lemon (nimbu) will increase inner beauty and make you face more beautiful. 7.If you have oily face then pour 3 drops of Vinegar (sirka) in water and wash your face with it and after this clean your face with soft towel. It will make your skin shiny. 8.If your face is dry and dull then drink one glass Carrot Juice everyday and continue it till 15 days. This will help °°°मुह धो लेने से झाई दूर हो जाती है. ५. दूध की मलाई में गेहूं का आटा मिलाकर लगाने से चेहरे की झाई और सूखापन दूर हो जाता है. ६. नारियल के तेल में नीबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चहरे का सौंदर्य बढ़ता है और कांति में वृद्धि होती है. ७. यदि चेहरा अधिक तैलीय हो तो पानी में सिरके की तीन बूँद डालकर चेहरा धो ले. फिर मुलायम तौलिए से धीरे धीरे चहरे को सुखा ले, चेहरा निखर जाता है. ८. यदि चेहरा सूखा हो और उस पर कोई कांति न हो तो १५ दिन तक नित्य १ गिलास गाजर का रस पीने से भी चेहरे की आभा बहुत बढ़ जाती है . ९. हरा धनिया पीसकर मस्से पर लगाने से मस्से दूर हो जाते हैं. १० नाखूनों को मजबूत बनाने के लिए उन पर नीबू के छिलके रगड़ना चाहिए. ११. नीबू के रस में बरगद की थोड़ी से जटा पीसकर उसे बालों पर लगा लें, फिर आधा घंटा बाद बालो को धो लें,और उन्हें सुखाकर नारियल का तेल लगाने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है. तथा बाद चमकदार और लंबे होने लगते हैं. 141 । Pag e Totaka Vigyan anyone rubs Dhatura (Harebell), Adrak (Ginger), Baad, Moonga (Coral) and its base portion of Moonga (Coral) and puts its Tilak on the forehead and goes in front of any rival, the rival will loose all the confidence... One can gain the Vashikaran power - Enchantment power (Power of hypnotism in which once person gets trapped performs the act according to the power ruler) by tying the Palash leaf on the hand in Hast Nakshatra... If on Bhojpatra, name of the rival is written and is dipped in honey, that rival comes in total control of the person... If anyone puts Tilak of Gular Root (Sycamore - Name of the tree) on the forehead, one can gain the power of Vashikaran (Enchantment)... १. धतुरा,अदरक,बाद और मूंगा की मूल संभाग लेकर पानी में घिसकर तिलक कर शत्रु के सामने जाये तो शत्रु भय ग्रस्त हो जाता है. २.हस्त नक्षत्र में पलाषा का पत्ता हाथ में बांधने से सर्व वशीकरण की क्रिया होती है. ३.भोजपत्र पर शत्रु का नाम लिखकर शहद में डुबोकर रखने से वह साधक के वश में हो जाता है. ४.गूलर की जड़ घिसकर तिलक करने से वशीकरण होता है. ५. वनगोभी और मयुरशिखा को मुह में या रखने या मस्तक पर धारण कर कोर्ट में अपने मुक़दमे के लिए जाने से कोर्ट के मामले में विजय प्राप्त होती है. ६. जिन व्यक्तियों को स्वप्नदोष की
Blackberry . तीन- To solve moles problem leaves of Basil crushed with Butter and then acquire paste use as a scrubber on your face. चार .At night take दो spoons AMLA POWDER and put in water. At morning filter this water with clean cloth and then wash your face with it. It helps you to get rid of blemishes. पाँच.By applying milk cream with wheat pouder on face can solve blemish and dryness problem of your face. छः.By applying Coconut Oil with the juice of Lemon will increase inner beauty and make you face more beautiful. सात.If you have oily face then pour तीन drops of Vinegar in water and wash your face with it and after this clean your face with soft towel. It will make your skin shiny. आठ.If your face is dry and dull then drink one glass Carrot Juice everyday and continue it till पंद्रह days. This will help °°°मुह धो लेने से झाई दूर हो जाती है. पाँच. दूध की मलाई में गेहूं का आटा मिलाकर लगाने से चेहरे की झाई और सूखापन दूर हो जाता है. छः. नारियल के तेल में नीबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चहरे का सौंदर्य बढ़ता है और कांति में वृद्धि होती है. सात. यदि चेहरा अधिक तैलीय हो तो पानी में सिरके की तीन बूँद डालकर चेहरा धो ले. फिर मुलायम तौलिए से धीरे धीरे चहरे को सुखा ले, चेहरा निखर जाता है. आठ. यदि चेहरा सूखा हो और उस पर कोई कांति न हो तो पंद्रह दिन तक नित्य एक गिलास गाजर का रस पीने से भी चेहरे की आभा बहुत बढ़ जाती है . नौ. हरा धनिया पीसकर मस्से पर लगाने से मस्से दूर हो जाते हैं. दस नाखूनों को मजबूत बनाने के लिए उन पर नीबू के छिलके रगड़ना चाहिए. ग्यारह. नीबू के रस में बरगद की थोड़ी से जटा पीसकर उसे बालों पर लगा लें, फिर आधा घंटा बाद बालो को धो लें,और उन्हें सुखाकर नारियल का तेल लगाने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है. तथा बाद चमकदार और लंबे होने लगते हैं. एक सौ इकतालीस । Pag e Totaka Vigyan anyone rubs Dhatura , Adrak , Baad, Moonga and its base portion of Moonga and puts its Tilak on the forehead and goes in front of any rival, the rival will loose all the confidence... One can gain the Vashikaran power - Enchantment power by tying the Palash leaf on the hand in Hast Nakshatra... If on Bhojpatra, name of the rival is written and is dipped in honey, that rival comes in total control of the person... If anyone puts Tilak of Gular Root on the forehead, one can gain the power of Vashikaran ... एक. धतुरा,अदरक,बाद और मूंगा की मूल संभाग लेकर पानी में घिसकर तिलक कर शत्रु के सामने जाये तो शत्रु भय ग्रस्त हो जाता है. दो.हस्त नक्षत्र में पलाषा का पत्ता हाथ में बांधने से सर्व वशीकरण की क्रिया होती है. तीन.भोजपत्र पर शत्रु का नाम लिखकर शहद में डुबोकर रखने से वह साधक के वश में हो जाता है. चार.गूलर की जड़ घिसकर तिलक करने से वशीकरण होता है. पाँच. वनगोभी और मयुरशिखा को मुह में या रखने या मस्तक पर धारण कर कोर्ट में अपने मुक़दमे के लिए जाने से कोर्ट के मामले में विजय प्राप्त होती है. छः. जिन व्यक्तियों को स्वप्नदोष की
बांदा। पत्नी से अनबन पर किसान ने जहर खाकर जान दे दी। वह घटना से पहले बच्चों को कमरे में ताला बंद करके निकला था। रात में परिजनों ने खोजबीन की तो खेत में पड़ा मिला। तिंदवारी पीएचसी से जिला अस्पताल लाते समय उसने दम तोड़ दिया। तिंदवारी थाना क्षेत्र के बहिंगा निवासी रामबाबू श्रीवास्तव (40) ने शनिवार रात 11 बजे खेत में जाकर कीटनाशक पी लिया। परिजन उसे तलाश करते पहुंचे तो गंभीर हालत में मिला। मृतक के बड़े भाई संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ दिनों से वह तनाव में था। शनिवार की शाम उसका पत्नी पूजा से खाना बनाने की बात पर विवाद हो गया। वह पत्नी और बच्चों को घर के कमरे में बंद करके ताला लगाकर चला गया। पत्नी ने अपने जेठ को फोन पर बताया तो उसकी खोज की। मृतक के दो पुत्रियां हैं। 16 बीघा खेती है। थानाध्यक्ष कौशल सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया जहर खाकर खुदकुशी की है। परिजन ठोस वजह नहीं बता पा रहे।
बांदा। पत्नी से अनबन पर किसान ने जहर खाकर जान दे दी। वह घटना से पहले बच्चों को कमरे में ताला बंद करके निकला था। रात में परिजनों ने खोजबीन की तो खेत में पड़ा मिला। तिंदवारी पीएचसी से जिला अस्पताल लाते समय उसने दम तोड़ दिया। तिंदवारी थाना क्षेत्र के बहिंगा निवासी रामबाबू श्रीवास्तव ने शनिवार रात ग्यारह बजे खेत में जाकर कीटनाशक पी लिया। परिजन उसे तलाश करते पहुंचे तो गंभीर हालत में मिला। मृतक के बड़े भाई संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ दिनों से वह तनाव में था। शनिवार की शाम उसका पत्नी पूजा से खाना बनाने की बात पर विवाद हो गया। वह पत्नी और बच्चों को घर के कमरे में बंद करके ताला लगाकर चला गया। पत्नी ने अपने जेठ को फोन पर बताया तो उसकी खोज की। मृतक के दो पुत्रियां हैं। सोलह बीघा खेती है। थानाध्यक्ष कौशल सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया जहर खाकर खुदकुशी की है। परिजन ठोस वजह नहीं बता पा रहे।
(अयोध्या में धारा 144 लागू, SSP ने दी जानकारी) Agnipath Scheme: अग्निपथ स्कीम (Agnipath Scheme) के विरोध को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन और आगजनी को लेकर अब पुलिस विभाग सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में जुटा है. अयोध्या (Ayodhya) में अभी इस तरह की कोई घटना देखने को नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन पहले से ही सतर्क हो गया है. अयोध्या में धारा 144 लागू कर दी गई है. ऐसे में किसी भी जगह पर 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने की मनाही है. इसके साथ ही पुलिस प्रशासन (Ayodhya Police) लोगों को समझा रहा है कि देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना देशभक्तों का काम नहीं है. अयोध्या के एसएसपी शैलेश पांडे ने लोगों को समझाते हुए कहा कि देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना देशभक्तों का कार्य नहीं है. ये अराजक तत्वों का कार्य है कुछ लोग ऐसे हैं जो सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए सेना भर्ती के अभ्यर्थियों और छात्रों को उकसा रहे हैं और भीड़ जमा करने की कोशिश कर रहे हैं ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है लिहाजा लोग ऐसी किसी भीड़ का हिस्सा ना बने क्योंकि जनपद अयोध्या में धारा 144 लागू है और किसी भी प्रकार के धरना प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक है. एसएसपी शैलेश पांडे ने कहा कि सेना भर्ती योजना अग्निपथ को लेकर कई जिलों में हिंसक प्रदर्शन हुए हैं. जिसमें ट्रेनों, रेलवे स्टेशनों, बसों और हाईवे पर चलने वाले वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया है. पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं हुई है ऐसे में हम अभ्यार्थियों से अनुरोध करते हैं कि ऐसे किसी कृत्य का हिस्सा न बने. सोशल मीडिया के जरिए लोगों को इकट्ठा करने की कोशिश की जा रही है. उनकी मंशा अयोध्या में भी कानून व्यवस्था को प्रभावित करना है. पुलिस की टीम ऐसे ग्रुप्स पर लगातार नजर बनाए हुए है. कुछ अराजक तत्वों को चिन्हित भी किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. एसएसपी ने अपील की लोग ऐसी किसी भीड़ का हिस्सा न बने. जनपद में किसी भी तरह के धरना प्रदर्शन पर रोक है. बिना अनुमति के इस तरह के कोई कार्यक्रम नहीं की जा सकते. उन्होंने कहा कि अगर आप फौज के अभ्यर्थी हैं तो उस देशभक्ति के जज्बे का ध्यान करें. एक देशभक्त कभी भी देश की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा सकता. आप अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से समझा सकते हैं. अयोध्या में धारा 144 लागू कर दी गई है. ऐसे में एक जगह पर 5 से ज्यादा की संख्या में इकट्ठा होने से बचे.
Agnipath Scheme: अग्निपथ स्कीम के विरोध को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन और आगजनी को लेकर अब पुलिस विभाग सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में जुटा है. अयोध्या में अभी इस तरह की कोई घटना देखने को नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन पहले से ही सतर्क हो गया है. अयोध्या में धारा एक सौ चौंतालीस लागू कर दी गई है. ऐसे में किसी भी जगह पर पाँच से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने की मनाही है. इसके साथ ही पुलिस प्रशासन लोगों को समझा रहा है कि देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना देशभक्तों का काम नहीं है. अयोध्या के एसएसपी शैलेश पांडे ने लोगों को समझाते हुए कहा कि देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना देशभक्तों का कार्य नहीं है. ये अराजक तत्वों का कार्य है कुछ लोग ऐसे हैं जो सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए सेना भर्ती के अभ्यर्थियों और छात्रों को उकसा रहे हैं और भीड़ जमा करने की कोशिश कर रहे हैं ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है लिहाजा लोग ऐसी किसी भीड़ का हिस्सा ना बने क्योंकि जनपद अयोध्या में धारा एक सौ चौंतालीस लागू है और किसी भी प्रकार के धरना प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक है. एसएसपी शैलेश पांडे ने कहा कि सेना भर्ती योजना अग्निपथ को लेकर कई जिलों में हिंसक प्रदर्शन हुए हैं. जिसमें ट्रेनों, रेलवे स्टेशनों, बसों और हाईवे पर चलने वाले वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया है. पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं हुई है ऐसे में हम अभ्यार्थियों से अनुरोध करते हैं कि ऐसे किसी कृत्य का हिस्सा न बने. सोशल मीडिया के जरिए लोगों को इकट्ठा करने की कोशिश की जा रही है. उनकी मंशा अयोध्या में भी कानून व्यवस्था को प्रभावित करना है. पुलिस की टीम ऐसे ग्रुप्स पर लगातार नजर बनाए हुए है. कुछ अराजक तत्वों को चिन्हित भी किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. एसएसपी ने अपील की लोग ऐसी किसी भीड़ का हिस्सा न बने. जनपद में किसी भी तरह के धरना प्रदर्शन पर रोक है. बिना अनुमति के इस तरह के कोई कार्यक्रम नहीं की जा सकते. उन्होंने कहा कि अगर आप फौज के अभ्यर्थी हैं तो उस देशभक्ति के जज्बे का ध्यान करें. एक देशभक्त कभी भी देश की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा सकता. आप अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से समझा सकते हैं. अयोध्या में धारा एक सौ चौंतालीस लागू कर दी गई है. ऐसे में एक जगह पर पाँच से ज्यादा की संख्या में इकट्ठा होने से बचे.
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा बृहस्पतिवार को राज्य चुनाव समिति की बैठक में शामिल हुईं जिसमें यह निर्णय लिया गया कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जल्द ही जारी की जाएगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राज्य चुनाव समिति की बैठक हुई जिसमें फैसला किया गया कि उम्मीदवारों की पहली सूची जल्द जारी की जाएगी। उत्तर प्रदेश की अपनी यात्रा के चौथे दिन प्रियंका ने बंजारा, राजभर, निषाद सहित विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं और मुद्दों को सुना। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले, प्रियंका गांधी चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों की समीक्षा और चर्चा करने के लिए लखनऊ के पांच दिवसीय दौरे पर हैं। वह पार्टी कार्यालय और लखनऊ में अपने आवास कौल हाउस में लगातर बैठकें कर रही हैं। बैठकों के दौरान कांग्रेस महासचिव ने जमीनी स्तर से जानकारी जुटाने के लिए जिला स्तर पर Þवॉर रूमÞ स्थापित करने के बारे में भी चर्चा की ताकि चुनावी रणनीति के तहत आकस्मिक मुद्दों पर त्वरित निर्णय लिया जा सके। पार्टी की प्रस्तावित प्रतिज्ञा यात्रा के मार्गों पर भी चर्चा के बाद अंतिम रूप दिया गया। पार्टी के नेताओं ने बताया कि पार्टी के आला नेताओं ने चुनाव के लिए बूथ प्रबंधन रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की। तेरह सितंबर के बाद इस महीने प्रियंका का यह दूसरा दौरा है, जब वह पांच दिनों तक वह प्रदेश में रहीं। कांग्रेस पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में 2017 का उप्र विधानसभा चुनाव लड़ा था। सबसे पुरानी कांग्रेस ने 6. 25 प्रतिशत के वोट शेयर के साथ 114 सीटों में से सिर्फ सात पर जीत हासिल की थी। इस बार, कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि वह 2022 के चुनाव बिना किसी बड़े राजनीतिक दल के साथ गठबंधन किए लड़ेगी।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा बृहस्पतिवार को राज्य चुनाव समिति की बैठक में शामिल हुईं जिसमें यह निर्णय लिया गया कि दो हज़ार बाईस के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जल्द ही जारी की जाएगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राज्य चुनाव समिति की बैठक हुई जिसमें फैसला किया गया कि उम्मीदवारों की पहली सूची जल्द जारी की जाएगी। उत्तर प्रदेश की अपनी यात्रा के चौथे दिन प्रियंका ने बंजारा, राजभर, निषाद सहित विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं और मुद्दों को सुना। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले, प्रियंका गांधी चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों की समीक्षा और चर्चा करने के लिए लखनऊ के पांच दिवसीय दौरे पर हैं। वह पार्टी कार्यालय और लखनऊ में अपने आवास कौल हाउस में लगातर बैठकें कर रही हैं। बैठकों के दौरान कांग्रेस महासचिव ने जमीनी स्तर से जानकारी जुटाने के लिए जिला स्तर पर Þवॉर रूमÞ स्थापित करने के बारे में भी चर्चा की ताकि चुनावी रणनीति के तहत आकस्मिक मुद्दों पर त्वरित निर्णय लिया जा सके। पार्टी की प्रस्तावित प्रतिज्ञा यात्रा के मार्गों पर भी चर्चा के बाद अंतिम रूप दिया गया। पार्टी के नेताओं ने बताया कि पार्टी के आला नेताओं ने चुनाव के लिए बूथ प्रबंधन रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की। तेरह सितंबर के बाद इस महीने प्रियंका का यह दूसरा दौरा है, जब वह पांच दिनों तक वह प्रदेश में रहीं। कांग्रेस पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में दो हज़ार सत्रह का उप्र विधानसभा चुनाव लड़ा था। सबसे पुरानी कांग्रेस ने छः. पच्चीस प्रतिशत के वोट शेयर के साथ एक सौ चौदह सीटों में से सिर्फ सात पर जीत हासिल की थी। इस बार, कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि वह दो हज़ार बाईस के चुनाव बिना किसी बड़े राजनीतिक दल के साथ गठबंधन किए लड़ेगी।
लखनऊ। नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर लखनऊ में भयंकर प्रदर्शन चल रहा है। राजनीतिक पार्टियों समेत तमाम राजनीतिक और गैर-राजनीतिक लोग बड़ी संख्या में राजधानी के विभिन्न इलाकों में एकत्रित हुए हैं। परिवर्तन चैक पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के नेतृत्व में तमाम पार्टी कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया है। बता दें, बुधवार को ही प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी थी। बावजूद इसके आज बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है। लखनऊ में कई जगहों पर पथराव भी लोगों ने किया है। कुछ पुलिसवाले जख्मी भी हुए हैं। ज्यादातर इलाकों में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ता भी परिवर्तन चैक पर एनआरसी और सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, पुलिस ने पार्टी कार्यकर्ताओं समेत प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को हिरासत में ले लिया है। प्रदर्शन को देखते हुए केडी सिंह बाबू स्टेडियम मेट्रो स्टेशन शाम पांच बजे तक बंद कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि एनआरसी और सीएए का विरोध करने पर भाजपा सरकार ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया है। उन्होंने लिखा कि बिस्मिल,अशफाकुल्लाह खां,रोशन सिंह की सांझी विरासत को बचाने की लड़ाई रुकने वाली नहीं हैं। आज सीएए/एनआरसी जैसे काले कानून का विरोध करने पर प्रदेश की भाजपा सरकार ने हम सभी कॉंग्रेसजनों को परिवर्तन चैक से गिरफ्तार कर पुलिस लाईन में रखा हैं।
लखनऊ। नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर लखनऊ में भयंकर प्रदर्शन चल रहा है। राजनीतिक पार्टियों समेत तमाम राजनीतिक और गैर-राजनीतिक लोग बड़ी संख्या में राजधानी के विभिन्न इलाकों में एकत्रित हुए हैं। परिवर्तन चैक पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के नेतृत्व में तमाम पार्टी कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया है। बता दें, बुधवार को ही प्रशासन ने धारा एक सौ चौंतालीस लागू कर दी थी। बावजूद इसके आज बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है। लखनऊ में कई जगहों पर पथराव भी लोगों ने किया है। कुछ पुलिसवाले जख्मी भी हुए हैं। ज्यादातर इलाकों में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ता भी परिवर्तन चैक पर एनआरसी और सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, पुलिस ने पार्टी कार्यकर्ताओं समेत प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को हिरासत में ले लिया है। प्रदर्शन को देखते हुए केडी सिंह बाबू स्टेडियम मेट्रो स्टेशन शाम पांच बजे तक बंद कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि एनआरसी और सीएए का विरोध करने पर भाजपा सरकार ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया है। उन्होंने लिखा कि बिस्मिल,अशफाकुल्लाह खां,रोशन सिंह की सांझी विरासत को बचाने की लड़ाई रुकने वाली नहीं हैं। आज सीएए/एनआरसी जैसे काले कानून का विरोध करने पर प्रदेश की भाजपा सरकार ने हम सभी कॉंग्रेसजनों को परिवर्तन चैक से गिरफ्तार कर पुलिस लाईन में रखा हैं।
- News Delhi Weather Today: 'स्कूल बंद, खतरे के निशान से ऊपर यमुना', जानिए आज कैसा रहेगा मौसम? ऑडियो बाजार में मॉनेस्टर ने हेडफोन की रेंज में एक नई डिवाइस ऐड की है। कंपनी ने हेडफोन को गोल्ड और पिंक कलर ऑप्शन के साथ पेश किया है। हेडफोन की इयरबड को खास तरीके से डिजाइन किया गया है जिससे यूजर को देर हेडफोन लगाने में कोई परेशानी न हो। इसके साथ हेडफोन में टेंगल फ्री केबल दी गई है जो साधारण हेडफोन केबल की तरह उलझती नहीं है। मॉनेस्टर ने ग्रेटीट्युट हेडफोन को 12,000 रुपए की अनुमानित कीमत में लांच किया है।
- News Delhi Weather Today: 'स्कूल बंद, खतरे के निशान से ऊपर यमुना', जानिए आज कैसा रहेगा मौसम? ऑडियो बाजार में मॉनेस्टर ने हेडफोन की रेंज में एक नई डिवाइस ऐड की है। कंपनी ने हेडफोन को गोल्ड और पिंक कलर ऑप्शन के साथ पेश किया है। हेडफोन की इयरबड को खास तरीके से डिजाइन किया गया है जिससे यूजर को देर हेडफोन लगाने में कोई परेशानी न हो। इसके साथ हेडफोन में टेंगल फ्री केबल दी गई है जो साधारण हेडफोन केबल की तरह उलझती नहीं है। मॉनेस्टर ने ग्रेटीट्युट हेडफोन को बारह,शून्य रुपयापए की अनुमानित कीमत में लांच किया है।
मूत्र में विविध निमक मिलते है । व्यावहारिक और संप्राप्तिकदृष्टया उपयोगी वर्गीकरण ऊपर दिया है। मंत्र निसकों का श्राधार काचर द्रव्य { Hyaline matrix ] होता है और इतर प्रकार के द्रव्य या तो उसके अपजनन (Degeneration ) से या उसमें मूत्रगत या बाह्य द्रव्यों के फस जाने से बनते हैं । तनिमय (Fibrinons) करके निर्मोक का एक ) प्रकार किया जाता है। परन्तु यह नाम है क्योंकि तत्व से बनने वाला कोई निर्मक नहीं होता या जितने प्रकार के निर्मोक मिलते हैं उनमें तन्त्यि कहीं नहीं मिलती है। केवल रक्त ( Bloody ) निर्भीक इसके लिए प्रशतवाद हो सकते हैं। क्योंकि उनम लाल कणों को चिपकाने में तन्त्वि का कुछ अंश प्रयुक्त होता है। कभी कभी मन्त्र में मिलने वाले निर्मोक किसी एक वर्ग के न होकर समिश्र स्वरूप के या श्रवस्थान्तरवतिं ( Transitional ) भी होते है। जैसे कोई निर्मोक अंशतः काचर और शत अधिच्चीय रहता है । यद्यपि अधिक निर्मोक सरल तथा नलिकाकार होते है तथापि कुछ टेढ़े सवेल्लित ( Convoluted ), एक सिरम नुकीले या द्विशाखायुक्त [ Bifarcated भी रहते हैं। सत्र निर्मोक एक परिमाण के नहीं होते । कुछ बहुत पतले पतले श्रीर कुछ बहुत छोटे और कुछ बहुत लम्बे रहते हैं यहाँ तक कि एक निर्मोक अनेक क्षेत्रों में फैला हुआ पाया जाता है । १ ) काचर निर्मोक ( Hyaline casts ) - ये मंत्र में प्रायः पाये जानेवाले वाले निर्मोक हैं; स्वस्थ मनुष्यों के सूत्र में भी पाये जाते हैं, विशेष करके परिश्रम के त् तथा वृक्कों को टटोलने या दबाने पर इनके मिलने की सम्भावना बढ़ती है। ये प्राये रगहीन, फीके, अर्ध पारदर्शक और एकजिंसी { Homogeneous ] होते है । श्राकार में सरल रम्माकार होकर इनके दोनो सिरे गोल होते हैं । कचित् चक्र और संवेलित ( Conyoluted ) प्रकार भी दिखाई देते हैं। क्वचित् इनका एक सिरा नोकला भी रहता है जिससे ये रम्भाकाराम (Cylindroid ) भी मालूम होते हैं। इनकी रूपरेखा ( Contour ) बहुत ही स्पष्ट रहने से इनको देखने के लिए प्रकाश बहुत कुछ कम करना पड़ता है । मूत्र में जब पित्त होता है तब ये रंगीन हो जाते हैं। शुक्तिक अम्ल में ये शीघ्र घुल जाते हैं। किञ्चित का घोल छोड़ने से ये स्पष्ट हो मंत्र के रोग जाते हैं। इनकी उत्पत्ति के सम्नन्ध में मतभेद है। कुछ लोगों का यह मत है कि ये काचर श्रपजनन ( Hyaline degeneration ) हुए नलिकाओं के अधिच्छद से या उसके जमनेवाले स्राव से उत्पन्न होते है। कभी कभी ये निर्मोक बहुत चौड़े रहते हैं। इतने चौडे निमक या तो प्राकृत सग्रहण नलिकाओं से ( Collecting tubules ) श्राते हैं या तो मूत्रवह नलिकाओं का सम्पूर्ण विशल्कीभवन (Desquamation ) जो कि वृक्कशोथ की अन्तिम अवस्था में हुआ करता है, होने पर वन सकते हैं । पृष्ठ ४७६ चित्र नं० ७ निर्मीको के प्रकारों में वृक्कविकार की सूचना देनेवाला यह बहुत सामान्य प्रकार है। परन्तु नैदानिकीय दृष्टया इसका महत्व सबसे न्यून रहता है क्योंकि एक तो यह स्वस्थावस्था में भी पाया जाता है, वृक्क में प्रत्यल्प विकृति होने पर भी मिलता है और वृक्क विकृति का किसी भी विशिष्ट प्रकार का बोधक नहीं होता। फिर भी इनका बरावर मिलना कालिक अन्तरालीय ( Interstitial ) वृक्कशोथ का विशेष सूचक माना जाता है। जीवन के उत्तरकाल में वृक्कों में स्थान स्थान पर कालिक अन्तरालीय शोधसम परिवर्तन हो जाने के कारण वयातीत स्वस्थ मनुष्यों के मूत्र में ये निर्मोक वारंवार दिखाई देते हैं । ( २ ) सिक्थसम ( Waxy ) - काचर निर्मोकों के समान ये भी एकजिसी होते हैं। परन्तु कभी कभी इन पर कुछ दाने और क्वचित् एकाध कोशा दिखाई देते हैं । ये काचर की अपेक्षा अधिक पारान्ध ( Opaque ), चौंदे, छोटे और विषम क्टे हुए सिरे के ( Irregular broken ends ) होते हैं। कभी कभी ये खण्डित (Segmented) भी दिखाई देते हैं । काचर की अपेक्षा ये अधिक प्रकाश परावर्तक होते ( Refractile ) हैं । देखने में ये मोम के समान मन्द, सफेद या हरे होते हैं। इसलिए सिक्यसम कहलाते है । परन्तु सदैव ये मोम सदृश द्रव्य के होते हैं यह बात नहीं है। कभी कभी ये ऐसे द्रव्य के बनते है कि जो भण्डाम प्रतिक्रिया ( Amyloid reaction ) देते हैं। कभी कभी ये काचर निर्मोक ही होते हैं जो मूत्रवह नलिकाओं में दीर्घकाल रहे हों । काचर और सिक्स निर्मोक सदैव स्वतन्त्र होते हैं यह बात नहीं । इनके समिश्रण के भी अनेक प्रकार दिखाई देते हैं। सिक्थसम निमक बहुत
मूत्र में विविध निमक मिलते है । व्यावहारिक और संप्राप्तिकदृष्टया उपयोगी वर्गीकरण ऊपर दिया है। मंत्र निसकों का श्राधार काचर द्रव्य { Hyaline matrix ] होता है और इतर प्रकार के द्रव्य या तो उसके अपजनन से या उसमें मूत्रगत या बाह्य द्रव्यों के फस जाने से बनते हैं । तनिमय करके निर्मोक का एक ) प्रकार किया जाता है। परन्तु यह नाम है क्योंकि तत्व से बनने वाला कोई निर्मक नहीं होता या जितने प्रकार के निर्मोक मिलते हैं उनमें तन्त्यि कहीं नहीं मिलती है। केवल रक्त निर्भीक इसके लिए प्रशतवाद हो सकते हैं। क्योंकि उनम लाल कणों को चिपकाने में तन्त्वि का कुछ अंश प्रयुक्त होता है। कभी कभी मन्त्र में मिलने वाले निर्मोक किसी एक वर्ग के न होकर समिश्र स्वरूप के या श्रवस्थान्तरवतिं भी होते है। जैसे कोई निर्मोक अंशतः काचर और शत अधिच्चीय रहता है । यद्यपि अधिक निर्मोक सरल तथा नलिकाकार होते है तथापि कुछ टेढ़े सवेल्लित , एक सिरम नुकीले या द्विशाखायुक्त [ Bifarcated भी रहते हैं। सत्र निर्मोक एक परिमाण के नहीं होते । कुछ बहुत पतले पतले श्रीर कुछ बहुत छोटे और कुछ बहुत लम्बे रहते हैं यहाँ तक कि एक निर्मोक अनेक क्षेत्रों में फैला हुआ पाया जाता है । एक ) काचर निर्मोक - ये मंत्र में प्रायः पाये जानेवाले वाले निर्मोक हैं; स्वस्थ मनुष्यों के सूत्र में भी पाये जाते हैं, विशेष करके परिश्रम के त् तथा वृक्कों को टटोलने या दबाने पर इनके मिलने की सम्भावना बढ़ती है। ये प्राये रगहीन, फीके, अर्ध पारदर्शक और एकजिंसी { Homogeneous ] होते है । श्राकार में सरल रम्माकार होकर इनके दोनो सिरे गोल होते हैं । कचित् चक्र और संवेलित प्रकार भी दिखाई देते हैं। क्वचित् इनका एक सिरा नोकला भी रहता है जिससे ये रम्भाकाराम भी मालूम होते हैं। इनकी रूपरेखा बहुत ही स्पष्ट रहने से इनको देखने के लिए प्रकाश बहुत कुछ कम करना पड़ता है । मूत्र में जब पित्त होता है तब ये रंगीन हो जाते हैं। शुक्तिक अम्ल में ये शीघ्र घुल जाते हैं। किञ्चित का घोल छोड़ने से ये स्पष्ट हो मंत्र के रोग जाते हैं। इनकी उत्पत्ति के सम्नन्ध में मतभेद है। कुछ लोगों का यह मत है कि ये काचर श्रपजनन हुए नलिकाओं के अधिच्छद से या उसके जमनेवाले स्राव से उत्पन्न होते है। कभी कभी ये निर्मोक बहुत चौड़े रहते हैं। इतने चौडे निमक या तो प्राकृत सग्रहण नलिकाओं से श्राते हैं या तो मूत्रवह नलिकाओं का सम्पूर्ण विशल्कीभवन जो कि वृक्कशोथ की अन्तिम अवस्था में हुआ करता है, होने पर वन सकते हैं । पृष्ठ चार सौ छिहत्तर चित्र नंशून्य सात निर्मीको के प्रकारों में वृक्कविकार की सूचना देनेवाला यह बहुत सामान्य प्रकार है। परन्तु नैदानिकीय दृष्टया इसका महत्व सबसे न्यून रहता है क्योंकि एक तो यह स्वस्थावस्था में भी पाया जाता है, वृक्क में प्रत्यल्प विकृति होने पर भी मिलता है और वृक्क विकृति का किसी भी विशिष्ट प्रकार का बोधक नहीं होता। फिर भी इनका बरावर मिलना कालिक अन्तरालीय वृक्कशोथ का विशेष सूचक माना जाता है। जीवन के उत्तरकाल में वृक्कों में स्थान स्थान पर कालिक अन्तरालीय शोधसम परिवर्तन हो जाने के कारण वयातीत स्वस्थ मनुष्यों के मूत्र में ये निर्मोक वारंवार दिखाई देते हैं । सिक्थसम - काचर निर्मोकों के समान ये भी एकजिसी होते हैं। परन्तु कभी कभी इन पर कुछ दाने और क्वचित् एकाध कोशा दिखाई देते हैं । ये काचर की अपेक्षा अधिक पारान्ध , चौंदे, छोटे और विषम क्टे हुए सिरे के होते हैं। कभी कभी ये खण्डित भी दिखाई देते हैं । काचर की अपेक्षा ये अधिक प्रकाश परावर्तक होते हैं । देखने में ये मोम के समान मन्द, सफेद या हरे होते हैं। इसलिए सिक्यसम कहलाते है । परन्तु सदैव ये मोम सदृश द्रव्य के होते हैं यह बात नहीं है। कभी कभी ये ऐसे द्रव्य के बनते है कि जो भण्डाम प्रतिक्रिया देते हैं। कभी कभी ये काचर निर्मोक ही होते हैं जो मूत्रवह नलिकाओं में दीर्घकाल रहे हों । काचर और सिक्स निर्मोक सदैव स्वतन्त्र होते हैं यह बात नहीं । इनके समिश्रण के भी अनेक प्रकार दिखाई देते हैं। सिक्थसम निमक बहुत
बड़े होटलों में उसने खाना खाया था, गाना सुनते हुए, नाच देख हुए। और उसने समझा था कि वह कलकत्ता अच्छी तरह से देख रहा है। आज वह पैदल निकल पड़ा, कलकत्ता का शरीर देखने के लिए नहीं, कलकता की आत्मा देखने के लिए । वह घरमतला पहुंचा। दरो का समय हो चुका था, इसलिए वहाँ उतनी भीड न यो जितनी वह शाम के समय देखा करता था। और उसने वहाँ भिखमंगो का जमाव देखा। एक-दो-तीन चार अरे, इन भिखमंगों को सख्या की कोई सीमा नहीं ! एक ओर से आते हैं, दूसरी और चले जाते हैं - बूढ़े, अपाहिज, कोढी ! घरमतल्ला से वह चला चितपुर रोड की ओर। और उसने तंगगलियों को देखा जिनमें से बड़ी बदबू आ रही थी। करोड़पति व्यापारी को पान के सामने बैठा कराह रहा था कोदियों का मुहताज जन समुदाय । वह और आगे बढ़ा। अब वह बड़ा बाजार पहुंच गया था कलकत्ता के सातियों और करोड़ पतियों के मुहल्ले मे । एकाएक वह चौंक उठा; उसने मुड़कर देया, दाहिनी ओर हैरीसन रोड पर रिक्शायाला चिल्ला रहा था, 'दो सवारियाँ और चार पैसे ! डेढ मील रिक्शा सींचनी पड़ी है। और प्रभानाय ने देखा कि वह विशावाला दुबला-सा अधेड़ आदमी है, जिसके शरीर पर माँस नहीं है। उसके सामने दो मारवाडी सढ़े थे हरएक का वजन ढाई मन से कम न होगा। एक ने कहा, "चार पैसे दे दिए हैं- ठीक है। जाओ। मुकदमा दायर करो जाफर !' लोग एक तरफ़ से जाते थे और दूसरी तरफ़ चले जाते थे। रिक्शावाला रो रहा था और गालियाँ दे रहा था। किसी को फुरसत नहीं थी कि वह उस रिश्यावाले को फरियाद सुने। दोनों मारवाडी चल पडे। तब तक प्रमानाथ ने बढ़कर एक का हाथ पकड़ा, "क्यों जी, तुम्हें शरम नहीं आती !" उसने दृढ़ता के साथ कहा। जिस मारवाडी का हाथ पकड़ा था, उसने हाथ छुटाने की कोशिश करते हुए कहा, "तुम कौन हो ? छोड़ो मेरा हाथ ! " और उसने झटका दिया। लेकिन उसको ऐसा मालूम हुआ कि उसका हाथ फौलाद के शिफजे में कड़ा हुआ है। प्रभानाय ने कहा, "मैं कोई भी हूँ, इससे तुम्हें मतलब नहीं। मैं सिर्फ यह कहता हूँ कि क्या इस रिक्शावाले की मेहनत सिर्फ एक आना ही है ?" दूसरे मारवाडी ने कहा, "जाओ बाबू अपना काम देखो जाकर ! " जिस ढंग से और जिस स्वर में यह बात माहो गई थी, उससे प्रभावाथ को मुरा रागना स्वाभाविक ही था । उसने उससे डांटकर कहा, "चुप रहो !" और फिर यह रिक्यायाले की ओर मुड़ा, "क्यो जो, तुम्हारी मजदूरी कितनी होती है ?"
बड़े होटलों में उसने खाना खाया था, गाना सुनते हुए, नाच देख हुए। और उसने समझा था कि वह कलकत्ता अच्छी तरह से देख रहा है। आज वह पैदल निकल पड़ा, कलकत्ता का शरीर देखने के लिए नहीं, कलकता की आत्मा देखने के लिए । वह घरमतला पहुंचा। दरो का समय हो चुका था, इसलिए वहाँ उतनी भीड न यो जितनी वह शाम के समय देखा करता था। और उसने वहाँ भिखमंगो का जमाव देखा। एक-दो-तीन चार अरे, इन भिखमंगों को सख्या की कोई सीमा नहीं ! एक ओर से आते हैं, दूसरी और चले जाते हैं - बूढ़े, अपाहिज, कोढी ! घरमतल्ला से वह चला चितपुर रोड की ओर। और उसने तंगगलियों को देखा जिनमें से बड़ी बदबू आ रही थी। करोड़पति व्यापारी को पान के सामने बैठा कराह रहा था कोदियों का मुहताज जन समुदाय । वह और आगे बढ़ा। अब वह बड़ा बाजार पहुंच गया था कलकत्ता के सातियों और करोड़ पतियों के मुहल्ले मे । एकाएक वह चौंक उठा; उसने मुड़कर देया, दाहिनी ओर हैरीसन रोड पर रिक्शायाला चिल्ला रहा था, 'दो सवारियाँ और चार पैसे ! डेढ मील रिक्शा सींचनी पड़ी है। और प्रभानाय ने देखा कि वह विशावाला दुबला-सा अधेड़ आदमी है, जिसके शरीर पर माँस नहीं है। उसके सामने दो मारवाडी सढ़े थे हरएक का वजन ढाई मन से कम न होगा। एक ने कहा, "चार पैसे दे दिए हैं- ठीक है। जाओ। मुकदमा दायर करो जाफर !' लोग एक तरफ़ से जाते थे और दूसरी तरफ़ चले जाते थे। रिक्शावाला रो रहा था और गालियाँ दे रहा था। किसी को फुरसत नहीं थी कि वह उस रिश्यावाले को फरियाद सुने। दोनों मारवाडी चल पडे। तब तक प्रमानाथ ने बढ़कर एक का हाथ पकड़ा, "क्यों जी, तुम्हें शरम नहीं आती !" उसने दृढ़ता के साथ कहा। जिस मारवाडी का हाथ पकड़ा था, उसने हाथ छुटाने की कोशिश करते हुए कहा, "तुम कौन हो ? छोड़ो मेरा हाथ ! " और उसने झटका दिया। लेकिन उसको ऐसा मालूम हुआ कि उसका हाथ फौलाद के शिफजे में कड़ा हुआ है। प्रभानाय ने कहा, "मैं कोई भी हूँ, इससे तुम्हें मतलब नहीं। मैं सिर्फ यह कहता हूँ कि क्या इस रिक्शावाले की मेहनत सिर्फ एक आना ही है ?" दूसरे मारवाडी ने कहा, "जाओ बाबू अपना काम देखो जाकर ! " जिस ढंग से और जिस स्वर में यह बात माहो गई थी, उससे प्रभावाथ को मुरा रागना स्वाभाविक ही था । उसने उससे डांटकर कहा, "चुप रहो !" और फिर यह रिक्यायाले की ओर मुड़ा, "क्यो जो, तुम्हारी मजदूरी कितनी होती है ?"
कोरोना वायरस से जंग के बीच दो देश आपस में जंग में उलझे हैं. कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच लड़ाई चल रही है. इनके बीच नागोर्नो-काराबाख़ नाम के एक इलाके को लेकर सालों से विवाद चल रहा है पर अब ये युद्ध में बदल गया है. लड़ाई में टैंक तोप उतारे गए हैं, कई लोगों की जानें गई हैं और दो देशों की इस लड़ाई में कुछ दूसरे देश भी शामिल हो गए हैं. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
कोरोना वायरस से जंग के बीच दो देश आपस में जंग में उलझे हैं. कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच लड़ाई चल रही है. इनके बीच नागोर्नो-काराबाख़ नाम के एक इलाके को लेकर सालों से विवाद चल रहा है पर अब ये युद्ध में बदल गया है. लड़ाई में टैंक तोप उतारे गए हैं, कई लोगों की जानें गई हैं और दो देशों की इस लड़ाई में कुछ दूसरे देश भी शामिल हो गए हैं.
दरअसल, मलेशिया में इस्लामिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संजय लीला भंसाली की इस फिल्म को बैन करने का फैसला किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां कहा जा रहा है फिल्म में जिस तरह से अलाउद्दीन खिलजी के किरदार को पेश किया गया है, वह मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत कर सकता है। मलेशिया के बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद जाम्बेरी अब्दुल अजीज ने इस फिल्म को लेकर कहा है कि मुस्लिम बहुल देश मलयेशिया में फिल्म की स्टोरीलाइन चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि 'फिल्म की स्टोरीलाइन इस्लामिक भावनाओं को प्रभावित करती है। यह मलयेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देश में चिंता की बात है। ' इस बात से जाहिर हो गया है कि संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' अब भावनाओं को आहत करने के चलते मलेशिया में भी काफी दिनों तक सुर्खियां बटोरेगी। गौरतलब है कि भारत में करणी सेना ने फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। सेना का भी यही कहना था कि यह फिल्म राजपूत समाज की भावनाओं को आहत करने वाली है। इस फिल्म के प्रदर्शन के खिलाफ काफी दिनों तक विरोध किया गया, लेकन कोर्ट के फैसले के बाद फिल्म को आखिरकार 25 जनवरी को रिलीज कर दिया गया।
दरअसल, मलेशिया में इस्लामिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संजय लीला भंसाली की इस फिल्म को बैन करने का फैसला किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां कहा जा रहा है फिल्म में जिस तरह से अलाउद्दीन खिलजी के किरदार को पेश किया गया है, वह मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत कर सकता है। मलेशिया के बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद जाम्बेरी अब्दुल अजीज ने इस फिल्म को लेकर कहा है कि मुस्लिम बहुल देश मलयेशिया में फिल्म की स्टोरीलाइन चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि 'फिल्म की स्टोरीलाइन इस्लामिक भावनाओं को प्रभावित करती है। यह मलयेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देश में चिंता की बात है। ' इस बात से जाहिर हो गया है कि संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' अब भावनाओं को आहत करने के चलते मलेशिया में भी काफी दिनों तक सुर्खियां बटोरेगी। गौरतलब है कि भारत में करणी सेना ने फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। सेना का भी यही कहना था कि यह फिल्म राजपूत समाज की भावनाओं को आहत करने वाली है। इस फिल्म के प्रदर्शन के खिलाफ काफी दिनों तक विरोध किया गया, लेकन कोर्ट के फैसले के बाद फिल्म को आखिरकार पच्चीस जनवरी को रिलीज कर दिया गया।
GORAKHPUR: मेडिकल कॉलेज में इन दिनों संविदा पर वार्ड व्वॉय की वैकेंसी के लिए इंटरव्यू चल रहे हैं। क्फ् पदों के लिए अब तक ख्फ्00 से ज्यादा आवेदन आए हैं। जब आवेदन फॉर्म की जांच की गई तो उसके साथ अटैच ब्0 परसेंट से ज्यादा सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। भर्ती प्रक्रिया के दौरान अब टीम ने अब तक क्क् अभ्यर्थियों को फर्जी सर्टिफिकेट के साथ पकड़ा है। किस पद के लिए हो रही भर्ती- बीआरडी मेडिकल कॉलेज के क्00 बेड वाले वार्ड के लिए वार्ड ब्वॉय की भर्ती प्रक्रिया क्म् सितंबर से शुरू हुई है और यह ख्फ् सितंबर तक चलेगी। कुल कितने पद -संविदा में वार्ड ब्वॉय के कुल क्फ् पद हैं। इन पदों के लिए के लिए ख्फ्00 से ज्यादा आवेदन आए हैं। क्या चाहिए- आवेदक के पास किसी भी नर्सिग होम या डॉक्टर की क्लीनिक में एक साल काम करने का अनुभव होना चाहिए। इसके लिए संबंधित नर्रि्सग होम या क्लीनिक का सर्टिफिकेट लगाना है। होगा केवल इंटरव्यू-भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा नहीं होनी है बल्कि प्रमाण पत्र के साथ केवल इंटरव्यू होना है। वार्ड व्वॉय के लिए आवदेकों को नर्रि्सग होम या क्लीनिक का सर्टिफिकेट लगाना है। हैरत की बात यह है कि पीपीगंज के दो नर्सिग होम से अलग-अलग सौ से ज्यादा सर्टिफिकेट जारी किए गए है। जबकि उनके पास न इसका रिकॉर्ड है और न ही स्टॉफ की डिटेल। एक के बाद एक सैकड़ों सर्टिफिकेट की जब जांच की गई हो तो इसका खुलासा हुआ। भर्ती प्रक्रिया बीआरडी मेडिकल कॉलेज का स्टाफ एक मजिस्ट्रेट की निगरानी में हो रही है। एक ही जगह के सर्टिफिकेट मिलने पर मजिस्ट्रेट ने दोनों डॉक्टरों को फटकार लगाई। प्रमाण पत्र और अनुभव सर्टिफिकेट की जब जांच शुरू हुई तो आवेदन करने वाले चालीस प्रतिशत अभ्यार्थी बिना इंटरव्यू दिए ही खिसक गए। मेडिकल कॉलेज स्टाफ ने पिछले तीन दिनों में क्क् अभ्यर्थियों को फर्जी सर्टिफिकेट लगाने के मामले में पकड़ा है। हालांकि उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन पुलिस ने उनका नाम पता दर्ज कर लिया है। पकड़े जाने वाले अभ्यर्थियों ने बताया कि केवल क्00 रुपए खर्च कर वह नर्सिग होम के लेटरपैड पर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर लेते हैं। फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद भर्ती प्रक्रिया में प्रमाण पत्रों की चेकिंग सघन कर दी गई है।
GORAKHPUR: मेडिकल कॉलेज में इन दिनों संविदा पर वार्ड व्वॉय की वैकेंसी के लिए इंटरव्यू चल रहे हैं। क्फ् पदों के लिए अब तक ख्फ्शून्य से ज्यादा आवेदन आए हैं। जब आवेदन फॉर्म की जांच की गई तो उसके साथ अटैच ब्शून्य परसेंट से ज्यादा सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। भर्ती प्रक्रिया के दौरान अब टीम ने अब तक क्क् अभ्यर्थियों को फर्जी सर्टिफिकेट के साथ पकड़ा है। किस पद के लिए हो रही भर्ती- बीआरडी मेडिकल कॉलेज के क्शून्य बेड वाले वार्ड के लिए वार्ड ब्वॉय की भर्ती प्रक्रिया क्म् सितंबर से शुरू हुई है और यह ख्फ् सितंबर तक चलेगी। कुल कितने पद -संविदा में वार्ड ब्वॉय के कुल क्फ् पद हैं। इन पदों के लिए के लिए ख्फ्शून्य से ज्यादा आवेदन आए हैं। क्या चाहिए- आवेदक के पास किसी भी नर्सिग होम या डॉक्टर की क्लीनिक में एक साल काम करने का अनुभव होना चाहिए। इसके लिए संबंधित नर्रि्सग होम या क्लीनिक का सर्टिफिकेट लगाना है। होगा केवल इंटरव्यू-भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा नहीं होनी है बल्कि प्रमाण पत्र के साथ केवल इंटरव्यू होना है। वार्ड व्वॉय के लिए आवदेकों को नर्रि्सग होम या क्लीनिक का सर्टिफिकेट लगाना है। हैरत की बात यह है कि पीपीगंज के दो नर्सिग होम से अलग-अलग सौ से ज्यादा सर्टिफिकेट जारी किए गए है। जबकि उनके पास न इसका रिकॉर्ड है और न ही स्टॉफ की डिटेल। एक के बाद एक सैकड़ों सर्टिफिकेट की जब जांच की गई हो तो इसका खुलासा हुआ। भर्ती प्रक्रिया बीआरडी मेडिकल कॉलेज का स्टाफ एक मजिस्ट्रेट की निगरानी में हो रही है। एक ही जगह के सर्टिफिकेट मिलने पर मजिस्ट्रेट ने दोनों डॉक्टरों को फटकार लगाई। प्रमाण पत्र और अनुभव सर्टिफिकेट की जब जांच शुरू हुई तो आवेदन करने वाले चालीस प्रतिशत अभ्यार्थी बिना इंटरव्यू दिए ही खिसक गए। मेडिकल कॉलेज स्टाफ ने पिछले तीन दिनों में क्क् अभ्यर्थियों को फर्जी सर्टिफिकेट लगाने के मामले में पकड़ा है। हालांकि उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन पुलिस ने उनका नाम पता दर्ज कर लिया है। पकड़े जाने वाले अभ्यर्थियों ने बताया कि केवल क्शून्य रुपयापए खर्च कर वह नर्सिग होम के लेटरपैड पर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर लेते हैं। फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद भर्ती प्रक्रिया में प्रमाण पत्रों की चेकिंग सघन कर दी गई है।
नासिक में पीएम मोदी खूब बोले। उन्होंने सरकार के 100 दिन के काम का बखान तो किया ही। साथ ही उन्होंने कश्मीर को फिर से स्वर्ग बनाने की बात दोहराई। पीएम मोदी राम मंदिर को लेकर बयानबाजी करने वाले नेताओं पर भी भड़के। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा रखें।
नासिक में पीएम मोदी खूब बोले। उन्होंने सरकार के एक सौ दिन के काम का बखान तो किया ही। साथ ही उन्होंने कश्मीर को फिर से स्वर्ग बनाने की बात दोहराई। पीएम मोदी राम मंदिर को लेकर बयानबाजी करने वाले नेताओं पर भी भड़के। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा रखें।
अभी तक केवल घर के अंदर पौधों के कुछ प्रशंसकों ने हाल ही में पैलार्गोनियम हो गई। यह फूल एक "मध्यम वर्ग" और महान लोकप्रियता के संकेत नहीं लिया से एक था। यह देखने के लिए कि यह केवल स्कूलों या किंडरगार्टन में सिवाय इसके कि हो सकता है। आज पैलार्गोनियम बार फिर से लोकप्रिय और फैशनेबल होता जा रहा है। वहाँ, विभिन्न अक्सर बहुत ही सुंदर और आसान देखभाल किस्मों का एक बहुत था। उत्तरार्द्ध और पैलार्गोनियम ट्यूलिप (Tulipa पैलार्गोनियम) के अलावा। कभी कभी यह भी houseplants कहा जाता है के प्रेमियों का अनुभव नहीं है पैलार्गोनियम geranium, जो बिल्कुल गलत है। केप ऑफ गुड होप - फूल के जन्मस्थान की अफ्रीका सबसे दक्षिणी बिंदु है। यह यहाँ सदियों की एक जोड़ी पहले नाविकों यूरोपीय वनस्पति विज्ञानियों के लिए पहली पैलार्गोनियम खरीदना पड़ा। दरअसल, शुरू में, इस संयंत्र विशेष रूप से geraniums के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। इसकी चोंच फल है, जो इस परिवार की मुख्य विशेषता है के सभी मामले। बाद में, तथापि, शोधकर्ताओं जीनस Geranium दो भागों में विभाजित। पैलार्गोनियम - शीतकालीन-हार्डी पौधों उचित geranium और thermophilic कहा जाता है। बाह्य, पहले से नवीनतम सुविधाओं से प्रतिष्ठित किया जा सकता फूल संरचना की। कलियों की समानता - यह अलग geraniums है क्या है। सामान्य रूप में एक ही तरीके से पैलार्गोनियम ट्यूलिप, बड़े ऊपरी और निचले छोटे पंखुड़ी के साथ फूल है। आउटडोर, रूसी सर्दियों की स्थिति में इस किस्म नहीं कर सकता। वास्तव में, ट्यूलिप पैलार्गोनियम असामान्य, बहुत अच्छा आकार फूलों के लिए मुख्य रूप से कहा जाता है। सिद्धांत रूप में, उनमें से संरचना अन्य प्रजातियों में के समान है। हालांकि ट्यूलिप फूलों पैलार्गोनियम पूरी तरह से पता चला कभी नहीं। इस के कारण वे प्रभावी रूप से एक गुलदस्ता tyulpanchiki में एकत्र समान है। इस संयंत्र प्रेमियों की किस्मों इनडोर पौधों एक बड़ी राशि हो गई। पैलार्गोनियम कलियों एक बहुत ही शानदार या मामूली ब्रश में बनाया जा सकता है विभिन्न आकारों और रंगों की है। यह सामान्य ट्यूलिप किस्मों और टेरी के रूप में होता है। फार्म कलियों लगभग गोल या लम्बी हो सकती है। शाही और क्षेत्रः सभी बड़े हो गए घर के अंदर pelargoniums दो प्रमुख समूहों में विभाजित हैं। पहले बहुत नकचढ़ा है, और बाद के अपेक्षाकृत उदार है। तदनुसार, दो देखभाल प्रौद्योगिकियों इन रंगों को उगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जोनल पैलार्गोनियम ट्यूलिप शाही की तुलना में कम ध्यान देने की आवश्यकता geraniums की किस्मों। हालांकि, इस मामले में उत्पादन कुछ बारीकियों है। बाद में कैसे ठीक, सिंचाई खाद, कट और इस समूह में पौधों repot है के साथ विस्तार और सौदे में लेख में। कहाँ ट्यूलिप पैलार्गोनियम खरीदने के लिए - सवाल भी जटिल नहीं है। अक्सर, इन पौधों विशेष फूलों की दुकानों में बेचा जाता है। कुछ असामान्य किस्मों के बीज, आप भी इंटरनेट के माध्यम से बाहर लिख सकते हैं। कैसे इस तरह के बीज सामग्री से पैलार्गोनियम ट्यूलिप विकसित करने के लिए के बारे में नीचे का वर्णन। पैलार्गोनियम की Tulip किस्मों, पहले ही उल्लेख के रूप में, वहाँ कई हैं। सबसे इनडोर पौधों के प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय हैंः एम्मा Bengtsbo फ्रान। लिलियन एंड्रिया। Marbacka Tulpan। लाल भानुमती। पेट्रीसिया एंड्रिया। कई बार, उत्पादकों भी Herma की एक आकर्षक विविधता पैदा करें। जब घरेलू पौधे प्रेमियों की एक विशेष प्रकार का चयन एक फूल की उपस्थिति पर मुख्य रूप से लग रहे हो। गुलाबी टेरी जैसा कोई "tyulpanchiki" किसी लाल, किसी ने ठीक, और किसी बड़े। दरअसल वह इन सभी किस्मों की देखभाल कर रहा है लगभग एक ही है। लेकिन कुछ प्रजातियों अभी भी एक सा मनमौजी दूसरों हो सकता है। यह बहुत ही कॉम्पैक्ट, सरल विविधता है। उसकी पैलार्गोनियम Herma ट्यूलिप की लोकप्रियता एक बहुत सुडौल बड़े पुष्पक्रम पर जीत हासिल की, शानदार लाल-नारंगी कलियों से मिलकर। इस तरह के मूल्य न केवल एक शानदार उपस्थिति, लेकिन यह भी एक लंबे खिले हुए है। पौधों पर कलियों अप्रैल से सितंबर तक रहते हैं। यह एक बहुत ही दिग्गज संयंत्र है कि लगातार मुकुट गठन की आवश्यकता है। ठीक से ट्यूलिप पैलार्गोनियम कम कर दिए हैं जब (तस्वीर आप नीचे देख सकते) एम्मा फ्रान Bengtsbo बस करामाती है। छोड़ देता है उसे हरे रंग, चमकदार, अच्छी तरह से tyulpanchiki रंग आंख हल्का गुलाबी छाया और एक साफ आयताकार आकार के लिए बहुत भाता है। इस प्रजाति से थोड़ा भी बदतर है के अलावा अन्य किस्मों सिंचाई की कमी बर्दाश्त। पानी की कमी के साथ यह ऊपर की ओर कर्ल छोड़ देता है, और संयंत्र को प्रभावी ढंग से खो देता है। यह भी बहुत प्रभावी ग्रेड है। इसके फायदे एक कॉम्पैक्ट मुकुट, अच्छी तरह से झाड़ियों की क्षमता, बड़े interstices के अभाव में शामिल हैं। लिलियन एंड्रिया के फूल विविधता बहुत लंबा और प्रचुर मात्रा में है। कलियों सिर्फ एक शानदार अमीर लाल रंग पड़ा है। यह बहुत ही सुंदर और फूलों की बहुत रूप है, क्योंकि एक के शीर्ष पर प्रत्येक पत्ती थोड़ा ओर इशारा किया। geranium हरे, थोड़ा मख़मली की पत्तियों। यह किस्म इनडोर पौधों अदम्य गोरा कहा जाता है के कई प्रशंसकों है। "Tyulpanchiki" उन्होंने सफेद, एक मामूली गुलाबी रंग के साथ। प्रपत्र में वे शराबी अंडा कैप्सूल के समान है। इस किस्म की दौर चमकीले हरे पत्ते बहुत साफ लग रही है। "एम्मा" की तरह, ट्यूलिप पैलार्गोनियम Marbacka Tulpan - पौधों बढ़ी है और नियमित रूप से मुकुट गठन की आवश्यकता है। इस प्रजाति - सबसे सरल में से एक, इनडोर पौधों के प्रशंसकों के बीच इतना लोकप्रिय किस्मों ट्यूलिप। लाल भानुमती छोड़ देता है, ट्यूलिप पैलार्गोनियम क्लासिक गहरे हरे रंग की, और फूलों है - गोरा धारियाँ के साथ लाल। कलियों काफी खूबसूरत की फॉर्म - थोड़ा गोलाकार। ग्रेड लाल भानुमती आमतौर पर गुलाबी किस्मों के साथ एक साथ उगाए जाते हैं। साथ में, वे बहुत प्रभावशाली है। इस किस्म में फूलों की आकृति सरल, स्वच्छ, क्लासिक ट्यूलिप है। छोड़ देता है - प्रचंड किनारों के साथ चमकदार। महत्वपूर्ण पैलार्गोनियम ट्यूलिप पेट्रीसिया एंड्रिया मुख्य रूप से बहुत प्रभावी houseplants एमेच्योर, कारमाइन लाल, कलियों के रंग के नरम गुलाबी बौछार बारी। पहले से ही उल्लेख किया है, ज्यादातर मामलों में, घर के अंदर पौधों के इस समूह सत्यता अलग है। लेकिन किसी भी मामले में, उनके ट्यूलिप पैलार्गोनियम पर ध्यान देना अभी भी है। इन पौधों की देखभाल निम्नलिखित प्रक्रियाओं में शामिल हैंः पानी; खिला; झाड़ी के गठन; प्रत्यारोपण। इसके अलावा, pelargoniums के लिए सही जगह और जमीन का चयन करने की आवश्यकता होगी। इस तरह के ट्यूलिप पैलार्गोनियम के रूप में पौधों के लिए भूमि (फोटो पेज पर उपलब्ध है, का प्रदर्शन कितना सुंदर ठीक से नमूनों की खेती की जा सकती है) उपयुक्त केवल उपजाऊ मैदान या खाद है। ड्रेनेज बर्तन में आवश्यक है। सबसे आसान तरीका बराबर मात्रा में रेत, पीट, धरण और खाद मिट्टी की टंकी के मिश्रण में भरने के लिए। इस तरह के मिट्टी विशेष रूप से युवा पौधों के लिए, आदर्श है। खाद, पीट सब्सट्रेट softwood पृथ्वी और धरण से मिलकर एक मिश्रण करने के लिए पुराने पैलार्गोनियम अच्छा लग रहा है। ग्रीष्मकालीन ट्यूलिप पैलार्गोनियम सामान्य मैदान जमीन में घर के पास लगाए जा सकता है। यह यह करने के लिए देखने के लिए कि रंग के नीचे जमीन विशेष रूप से घने नहीं था महत्वपूर्ण है। मिट्टी में बहुत ज्यादा पीट किसी भी मामले में इसके लायक नहीं जोड़ने के लिए। एक बिस्तर पर या बर्तन में पानी बहना होगा, संयंत्र जड़ें सड़ने लगते हैं। जब इन इनडोर पौधे उगाने यह केवल मिट्टी potting नहीं चुनने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन बर्तन खुद को। यह सबसे अच्छा इन रंगों मिट्टी या लकड़ी के कंटेनर के लिए अनुकूल है। बहुत बड़ी एक बर्तन या बॉक्स पैलार्गोनियम ट्यूलिप के तहत नहीं लेना चाहिए। अन्यथा, संयंत्र बस खिलने नहीं होंगे। प्लास्टिक, और पैलार्गोनियम के तहत विशेष रूप से पारदर्शी कंटेनर में उपयोग के लिए अनुशंसित नहीं हैं। इस के लिए सटीक विवरण नहीं मिला है, लेकिन उत्पादकों देखा है कि इन बर्तनों में, इन पौधों बुरी तरह चोट करने के लिए शुरू। बेशक, कंटेनर बहुत छोटा नहीं होना चाहिए, अन्यथा फूल खराब बढ़ेगा। एक संयंत्र के लिए बर्तन का इष्टतम व्यास 12-14 सेमी है। इसके अलावा, उसकी ऊंचाई 10-15 सेमी होना चाहिए। अक्सर एक ही कंटेनर houseplants के प्रशंसकों में 2-3 पैलार्गोनियम उपजी। इस मामले में यह 22-25 सेमी की एक व्यास के साथ एक बर्तन लेने के लिए बेहतर है। तनों में जल का भंडारण करने की क्षमता - कुछ अलग ट्यूलिप पैलार्गोनियम है। इस संयंत्र के घर में देखभाल, इस प्रकार सिंचाई के संबंध में सटीकता के साथ अनुपालन की आवश्यकता है। किसी अन्य पैलार्गोनियम की तुलना में अधिक पानी की तरह Tulip किस्मों। हालांकि perezalivat वे अभी भी नहीं कर सकते। उनके नीचे वांछनीय जमीन नम जब उसके ऊपर परत (1. 5 सेमी) सूख जाता है। पानी जड़ें, और एक चटाई से खुद को रोक नहीं करना चाहिए। पिछले पानी डालना चाहिए। इसके बाद, के बारे में आधे घंटे के लिए एक पैन बर्तन में डाल दिया। सिंचाई के लिए पानी पहले से उबला हुआ या दिन भर स्थान दिया गया है, कमरे के तापमान के लिए लिया जाना चाहिए। एक बार से अधिक नहीं एक सप्ताह - पैलार्गोनियम ट्यूलिप के तहत ग्रीष्मकालीन जमीन सर्दियों में दिन में एक बार या दो सिक्त। अतिरिक्त पानी का एक संकेत पौधों की पत्तियों पर पानी कुशन की उपस्थिति हो सकता है। नमी की कमी के साथ कम पत्ते पीले रंग के हो। केवल गर्म महीनों के दौरान आमतौर पर ट्यूलिप पैलार्गोनियम खाद। इस खनिज और कार्बनिक यौगिकों के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह houseplants को खिलाने के लिए सबसे अच्छा है का मतलब है "Kemira", "जिक्रोन", "आदर्श", "Mikrassa"। पैसा उन पर खर्च नहीं करना चाहते हैं, का इस्तेमाल किया और घर का बना जैव उर्वरक जा सकता है। यह उदाहरण, अनावश्यक कार्य, सो चाय, आसव बिछुआ या सड़ खाद के लिए हो सकता है। पैलार्गोनियम साथ कंटेनर हमेशा अधिकतम उज्ज्वल कमरे के लिए निर्धारित किया है। पराबैंगनी इन पौधों की बहुत शौकीन हैं। हालांकि, पत्ते पर सूरज की किरणों गिरावट निर्देशित करने के लिए अनुमति देते हैं, नहीं है। अन्यथा, वे जल की वजह से हो सकता है। ट्यूलिप पैलार्गोनियम के अलावा पराबैंगनी अतिरिक्त में कर सकते हैं "sportanut"। यही कारण है, वे माता पिता का जीन जाग जाएगा और उनके फूल पूरी तरह से प्रकट होंगे। बेशक, इस मामले में, ट्यूलिप पैलार्गोनियम अपनी मौलिकता खो देते हैं। यदि ऐसा होता है, sportanuvshuyu ब्रश काट किया जाना चाहिए। अन्यथा, इस तरह के शाखाओं पूरी तरह से ट्यूलिप किस्म स्कोर कर सकते हैं। गरम महीनों में pelargoniums के बर्तन आमतौर पर बालकनी में लाने के लिए। यह तुरंत किया जा सकता है के बाद बाहर हवा का तापमान 15 डिग्री से ऊपर गरम हो गया है। किस्मों के तनों में उच्च लाठी-सहारा सेट किया जाना चाहिए। अन्यथा पैलार्गोनियम हवा तोड़ सकते हैं। सर्दियों में, पौधों एक ठंडे स्थान में जहाँ तक संभव हो रखना चाहिए (11-15 डिग्री कम है। )। कक्ष ठंड के मौसम में बहुत गर्म है, तो गर्मियों पैलार्गोनियम खिलते नहीं हो सकता है। संयंत्र पर एक संक्षिप्त photoperiod के साथ एक फ्लोरोसेंट लैंप लटका सिफारिश की है। बहुत गीला क्षेत्रों में, इन फूलों को भी अच्छा नहीं लग रहा है। पैलार्गोनियम शुष्क क्षेत्रों में स्थापित करना चाहिए। उसी कारण से, संयंत्र कभी नहीं छिड़काव किया। इसके अलावा वे पैलार्गोनियम ड्राफ्ट या हवा ठहराव पसंद नहीं है। पिंच या छंटाईः पैलार्गोनियम ट्यूलिप, सुंदर रसीला और कॉम्पैक्ट दो तरह से सुनिश्चित करें। पहले मामले में बस विकास बिंदु हटा दिया। यह जवान गोली मारता है के विकास भड़काती। पैलार्गोनियम ट्यूलिप अधिक शाखाओं और रसीला हो जाता है। खर्च 6-8 पत्ती पर फरवरी या मार्च में बाहर pinched। खतना तकनीक वयस्क संयंत्रों के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल किया। इस विधि मौलिक पैलार्गोनियम का आकार बदलने के लिए यह संभव बनाता है। इस मामले में, बुश बस पुरानी है और बहुत बड़ा शूटिंग को काट दिया। प्रत्येक डंठल पर के बारे में 5 गुर्दे के लिए छोड़ दिया है। जल्दी वसंत ऋतु में इस तरह के उपचार करें। स्वच्छ हाथ और छंटाई के साथ किया जा करने के लिए pinched - शराब उपकरण मला। सभी घाव जरूरी हरे रंग या लकड़ी का कोयला संसाधित। तुम भी कुछ कवकनाशी उपयोग कर सकते हैं। संयंत्र को खिलाने के लिए की जरूरत काटने के बाद। इस प्रकार, हम पता लगा लेंगे कैसे पैलार्गोनियम ट्यूलिप देखभाल के रूप में इस तरह के एक शानदार संयंत्र में किया जाता है। आप देख सकते हैं, यह अपेक्षाकृत आसान है। सरल प्रक्रिया अलग है और इन पौधों की प्रजनन है। रोपण सामग्री के रूप में आमतौर पर मां संयंत्र कलमों या बीज से लिया करते थे। पहले मामले में, पौधों दो या तीन पत्तियों के साथ खड़ी शूटिंग में कटौती कर रहे हैं। उन्हें बढ़ती सूची के साथ बेहतर साइट को अलग करें। हटाया कलमों के साथ पुष्पक्रम। लैंडिंग काटने के बाद कुछ घंटों का उत्पादन। साझा करना कुचल कोयला में पूर्व डूबा। अक्सर, युवा पैलार्गोनियम ट्यूलिप प्लास्टिक के कप में लगाया। दक्षिण खिड़की पर अंतिम स्थान पर, और एक छोटे से rostochku pritenyayut है। युवा पौधों की जड़ प्रणाली के कप भरने के बाद एक निरंतर क्षमता के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। बीज ट्यूलिप पैलार्गोनियम जनवरी या फरवरी में पॉट लगाया जाता है। वे मिट्टी की सतह पर रखा गया था और हल्के से छिड़के। अगला बॉक्स कांच या फिल्म के साथ कवर किया। पिकअप 2-4 पत्तियों के साथ युवा पौधों की उपस्थिति के बाद किया जाता है। लगाए pelargoniums, जबकि एक ही गहराई, जिस पर वे एक बॉक्स में बढ़ी पर ले जाने। 6-8 सप्ताह के बाद पौधों को एक स्थायी क्षमता में रखा जाता है। बालकनी बक्से वे 20-25 सेमी विविधता के आधार पर की दूरी पर बैठे हैं। पैलार्गोनियम ट्यूलिप - एक संयंत्र काफी साहसी और उदार। बीमार इन इनडोर पौधों दुर्लभ है। अक्सर पैलार्गोनियम ग्रे मोल्ड और जल्दी तुषार हड़ताली। प्रणालीगत fungicides के माध्यम से किया जाता है दोनों ही मामलों में उपचार। आप उदाहरण के लिए, "fundazol" के लिए उपयोग कर सकते हैं। कीड़ों के अलावा, इन फूलों एफिड्स या कण से प्रभावित हो सकता। पहले मामले में पैलार्गोनियम ट्यूलिप के रूप में "Akarin" या "decis" इस तरह के साधन का इलाज किया। "Zolon" का उपयोग के कण या "Ditoks" के खिलाफ।
अभी तक केवल घर के अंदर पौधों के कुछ प्रशंसकों ने हाल ही में पैलार्गोनियम हो गई। यह फूल एक "मध्यम वर्ग" और महान लोकप्रियता के संकेत नहीं लिया से एक था। यह देखने के लिए कि यह केवल स्कूलों या किंडरगार्टन में सिवाय इसके कि हो सकता है। आज पैलार्गोनियम बार फिर से लोकप्रिय और फैशनेबल होता जा रहा है। वहाँ, विभिन्न अक्सर बहुत ही सुंदर और आसान देखभाल किस्मों का एक बहुत था। उत्तरार्द्ध और पैलार्गोनियम ट्यूलिप के अलावा। कभी कभी यह भी houseplants कहा जाता है के प्रेमियों का अनुभव नहीं है पैलार्गोनियम geranium, जो बिल्कुल गलत है। केप ऑफ गुड होप - फूल के जन्मस्थान की अफ्रीका सबसे दक्षिणी बिंदु है। यह यहाँ सदियों की एक जोड़ी पहले नाविकों यूरोपीय वनस्पति विज्ञानियों के लिए पहली पैलार्गोनियम खरीदना पड़ा। दरअसल, शुरू में, इस संयंत्र विशेष रूप से geraniums के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। इसकी चोंच फल है, जो इस परिवार की मुख्य विशेषता है के सभी मामले। बाद में, तथापि, शोधकर्ताओं जीनस Geranium दो भागों में विभाजित। पैलार्गोनियम - शीतकालीन-हार्डी पौधों उचित geranium और thermophilic कहा जाता है। बाह्य, पहले से नवीनतम सुविधाओं से प्रतिष्ठित किया जा सकता फूल संरचना की। कलियों की समानता - यह अलग geraniums है क्या है। सामान्य रूप में एक ही तरीके से पैलार्गोनियम ट्यूलिप, बड़े ऊपरी और निचले छोटे पंखुड़ी के साथ फूल है। आउटडोर, रूसी सर्दियों की स्थिति में इस किस्म नहीं कर सकता। वास्तव में, ट्यूलिप पैलार्गोनियम असामान्य, बहुत अच्छा आकार फूलों के लिए मुख्य रूप से कहा जाता है। सिद्धांत रूप में, उनमें से संरचना अन्य प्रजातियों में के समान है। हालांकि ट्यूलिप फूलों पैलार्गोनियम पूरी तरह से पता चला कभी नहीं। इस के कारण वे प्रभावी रूप से एक गुलदस्ता tyulpanchiki में एकत्र समान है। इस संयंत्र प्रेमियों की किस्मों इनडोर पौधों एक बड़ी राशि हो गई। पैलार्गोनियम कलियों एक बहुत ही शानदार या मामूली ब्रश में बनाया जा सकता है विभिन्न आकारों और रंगों की है। यह सामान्य ट्यूलिप किस्मों और टेरी के रूप में होता है। फार्म कलियों लगभग गोल या लम्बी हो सकती है। शाही और क्षेत्रः सभी बड़े हो गए घर के अंदर pelargoniums दो प्रमुख समूहों में विभाजित हैं। पहले बहुत नकचढ़ा है, और बाद के अपेक्षाकृत उदार है। तदनुसार, दो देखभाल प्रौद्योगिकियों इन रंगों को उगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जोनल पैलार्गोनियम ट्यूलिप शाही की तुलना में कम ध्यान देने की आवश्यकता geraniums की किस्मों। हालांकि, इस मामले में उत्पादन कुछ बारीकियों है। बाद में कैसे ठीक, सिंचाई खाद, कट और इस समूह में पौधों repot है के साथ विस्तार और सौदे में लेख में। कहाँ ट्यूलिप पैलार्गोनियम खरीदने के लिए - सवाल भी जटिल नहीं है। अक्सर, इन पौधों विशेष फूलों की दुकानों में बेचा जाता है। कुछ असामान्य किस्मों के बीज, आप भी इंटरनेट के माध्यम से बाहर लिख सकते हैं। कैसे इस तरह के बीज सामग्री से पैलार्गोनियम ट्यूलिप विकसित करने के लिए के बारे में नीचे का वर्णन। पैलार्गोनियम की Tulip किस्मों, पहले ही उल्लेख के रूप में, वहाँ कई हैं। सबसे इनडोर पौधों के प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय हैंः एम्मा Bengtsbo फ्रान। लिलियन एंड्रिया। Marbacka Tulpan। लाल भानुमती। पेट्रीसिया एंड्रिया। कई बार, उत्पादकों भी Herma की एक आकर्षक विविधता पैदा करें। जब घरेलू पौधे प्रेमियों की एक विशेष प्रकार का चयन एक फूल की उपस्थिति पर मुख्य रूप से लग रहे हो। गुलाबी टेरी जैसा कोई "tyulpanchiki" किसी लाल, किसी ने ठीक, और किसी बड़े। दरअसल वह इन सभी किस्मों की देखभाल कर रहा है लगभग एक ही है। लेकिन कुछ प्रजातियों अभी भी एक सा मनमौजी दूसरों हो सकता है। यह बहुत ही कॉम्पैक्ट, सरल विविधता है। उसकी पैलार्गोनियम Herma ट्यूलिप की लोकप्रियता एक बहुत सुडौल बड़े पुष्पक्रम पर जीत हासिल की, शानदार लाल-नारंगी कलियों से मिलकर। इस तरह के मूल्य न केवल एक शानदार उपस्थिति, लेकिन यह भी एक लंबे खिले हुए है। पौधों पर कलियों अप्रैल से सितंबर तक रहते हैं। यह एक बहुत ही दिग्गज संयंत्र है कि लगातार मुकुट गठन की आवश्यकता है। ठीक से ट्यूलिप पैलार्गोनियम कम कर दिए हैं जब एम्मा फ्रान Bengtsbo बस करामाती है। छोड़ देता है उसे हरे रंग, चमकदार, अच्छी तरह से tyulpanchiki रंग आंख हल्का गुलाबी छाया और एक साफ आयताकार आकार के लिए बहुत भाता है। इस प्रजाति से थोड़ा भी बदतर है के अलावा अन्य किस्मों सिंचाई की कमी बर्दाश्त। पानी की कमी के साथ यह ऊपर की ओर कर्ल छोड़ देता है, और संयंत्र को प्रभावी ढंग से खो देता है। यह भी बहुत प्रभावी ग्रेड है। इसके फायदे एक कॉम्पैक्ट मुकुट, अच्छी तरह से झाड़ियों की क्षमता, बड़े interstices के अभाव में शामिल हैं। लिलियन एंड्रिया के फूल विविधता बहुत लंबा और प्रचुर मात्रा में है। कलियों सिर्फ एक शानदार अमीर लाल रंग पड़ा है। यह बहुत ही सुंदर और फूलों की बहुत रूप है, क्योंकि एक के शीर्ष पर प्रत्येक पत्ती थोड़ा ओर इशारा किया। geranium हरे, थोड़ा मख़मली की पत्तियों। यह किस्म इनडोर पौधों अदम्य गोरा कहा जाता है के कई प्रशंसकों है। "Tyulpanchiki" उन्होंने सफेद, एक मामूली गुलाबी रंग के साथ। प्रपत्र में वे शराबी अंडा कैप्सूल के समान है। इस किस्म की दौर चमकीले हरे पत्ते बहुत साफ लग रही है। "एम्मा" की तरह, ट्यूलिप पैलार्गोनियम Marbacka Tulpan - पौधों बढ़ी है और नियमित रूप से मुकुट गठन की आवश्यकता है। इस प्रजाति - सबसे सरल में से एक, इनडोर पौधों के प्रशंसकों के बीच इतना लोकप्रिय किस्मों ट्यूलिप। लाल भानुमती छोड़ देता है, ट्यूलिप पैलार्गोनियम क्लासिक गहरे हरे रंग की, और फूलों है - गोरा धारियाँ के साथ लाल। कलियों काफी खूबसूरत की फॉर्म - थोड़ा गोलाकार। ग्रेड लाल भानुमती आमतौर पर गुलाबी किस्मों के साथ एक साथ उगाए जाते हैं। साथ में, वे बहुत प्रभावशाली है। इस किस्म में फूलों की आकृति सरल, स्वच्छ, क्लासिक ट्यूलिप है। छोड़ देता है - प्रचंड किनारों के साथ चमकदार। महत्वपूर्ण पैलार्गोनियम ट्यूलिप पेट्रीसिया एंड्रिया मुख्य रूप से बहुत प्रभावी houseplants एमेच्योर, कारमाइन लाल, कलियों के रंग के नरम गुलाबी बौछार बारी। पहले से ही उल्लेख किया है, ज्यादातर मामलों में, घर के अंदर पौधों के इस समूह सत्यता अलग है। लेकिन किसी भी मामले में, उनके ट्यूलिप पैलार्गोनियम पर ध्यान देना अभी भी है। इन पौधों की देखभाल निम्नलिखित प्रक्रियाओं में शामिल हैंः पानी; खिला; झाड़ी के गठन; प्रत्यारोपण। इसके अलावा, pelargoniums के लिए सही जगह और जमीन का चयन करने की आवश्यकता होगी। इस तरह के ट्यूलिप पैलार्गोनियम के रूप में पौधों के लिए भूमि उपयुक्त केवल उपजाऊ मैदान या खाद है। ड्रेनेज बर्तन में आवश्यक है। सबसे आसान तरीका बराबर मात्रा में रेत, पीट, धरण और खाद मिट्टी की टंकी के मिश्रण में भरने के लिए। इस तरह के मिट्टी विशेष रूप से युवा पौधों के लिए, आदर्श है। खाद, पीट सब्सट्रेट softwood पृथ्वी और धरण से मिलकर एक मिश्रण करने के लिए पुराने पैलार्गोनियम अच्छा लग रहा है। ग्रीष्मकालीन ट्यूलिप पैलार्गोनियम सामान्य मैदान जमीन में घर के पास लगाए जा सकता है। यह यह करने के लिए देखने के लिए कि रंग के नीचे जमीन विशेष रूप से घने नहीं था महत्वपूर्ण है। मिट्टी में बहुत ज्यादा पीट किसी भी मामले में इसके लायक नहीं जोड़ने के लिए। एक बिस्तर पर या बर्तन में पानी बहना होगा, संयंत्र जड़ें सड़ने लगते हैं। जब इन इनडोर पौधे उगाने यह केवल मिट्टी potting नहीं चुनने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन बर्तन खुद को। यह सबसे अच्छा इन रंगों मिट्टी या लकड़ी के कंटेनर के लिए अनुकूल है। बहुत बड़ी एक बर्तन या बॉक्स पैलार्गोनियम ट्यूलिप के तहत नहीं लेना चाहिए। अन्यथा, संयंत्र बस खिलने नहीं होंगे। प्लास्टिक, और पैलार्गोनियम के तहत विशेष रूप से पारदर्शी कंटेनर में उपयोग के लिए अनुशंसित नहीं हैं। इस के लिए सटीक विवरण नहीं मिला है, लेकिन उत्पादकों देखा है कि इन बर्तनों में, इन पौधों बुरी तरह चोट करने के लिए शुरू। बेशक, कंटेनर बहुत छोटा नहीं होना चाहिए, अन्यथा फूल खराब बढ़ेगा। एक संयंत्र के लिए बर्तन का इष्टतम व्यास बारह-चौदह सेमी है। इसके अलावा, उसकी ऊंचाई दस-पंद्रह सेमी होना चाहिए। अक्सर एक ही कंटेनर houseplants के प्रशंसकों में दो-तीन पैलार्गोनियम उपजी। इस मामले में यह बाईस-पच्चीस सेमी की एक व्यास के साथ एक बर्तन लेने के लिए बेहतर है। तनों में जल का भंडारण करने की क्षमता - कुछ अलग ट्यूलिप पैलार्गोनियम है। इस संयंत्र के घर में देखभाल, इस प्रकार सिंचाई के संबंध में सटीकता के साथ अनुपालन की आवश्यकता है। किसी अन्य पैलार्गोनियम की तुलना में अधिक पानी की तरह Tulip किस्मों। हालांकि perezalivat वे अभी भी नहीं कर सकते। उनके नीचे वांछनीय जमीन नम जब उसके ऊपर परत सूख जाता है। पानी जड़ें, और एक चटाई से खुद को रोक नहीं करना चाहिए। पिछले पानी डालना चाहिए। इसके बाद, के बारे में आधे घंटे के लिए एक पैन बर्तन में डाल दिया। सिंचाई के लिए पानी पहले से उबला हुआ या दिन भर स्थान दिया गया है, कमरे के तापमान के लिए लिया जाना चाहिए। एक बार से अधिक नहीं एक सप्ताह - पैलार्गोनियम ट्यूलिप के तहत ग्रीष्मकालीन जमीन सर्दियों में दिन में एक बार या दो सिक्त। अतिरिक्त पानी का एक संकेत पौधों की पत्तियों पर पानी कुशन की उपस्थिति हो सकता है। नमी की कमी के साथ कम पत्ते पीले रंग के हो। केवल गर्म महीनों के दौरान आमतौर पर ट्यूलिप पैलार्गोनियम खाद। इस खनिज और कार्बनिक यौगिकों के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह houseplants को खिलाने के लिए सबसे अच्छा है का मतलब है "Kemira", "जिक्रोन", "आदर्श", "Mikrassa"। पैसा उन पर खर्च नहीं करना चाहते हैं, का इस्तेमाल किया और घर का बना जैव उर्वरक जा सकता है। यह उदाहरण, अनावश्यक कार्य, सो चाय, आसव बिछुआ या सड़ खाद के लिए हो सकता है। पैलार्गोनियम साथ कंटेनर हमेशा अधिकतम उज्ज्वल कमरे के लिए निर्धारित किया है। पराबैंगनी इन पौधों की बहुत शौकीन हैं। हालांकि, पत्ते पर सूरज की किरणों गिरावट निर्देशित करने के लिए अनुमति देते हैं, नहीं है। अन्यथा, वे जल की वजह से हो सकता है। ट्यूलिप पैलार्गोनियम के अलावा पराबैंगनी अतिरिक्त में कर सकते हैं "sportanut"। यही कारण है, वे माता पिता का जीन जाग जाएगा और उनके फूल पूरी तरह से प्रकट होंगे। बेशक, इस मामले में, ट्यूलिप पैलार्गोनियम अपनी मौलिकता खो देते हैं। यदि ऐसा होता है, sportanuvshuyu ब्रश काट किया जाना चाहिए। अन्यथा, इस तरह के शाखाओं पूरी तरह से ट्यूलिप किस्म स्कोर कर सकते हैं। गरम महीनों में pelargoniums के बर्तन आमतौर पर बालकनी में लाने के लिए। यह तुरंत किया जा सकता है के बाद बाहर हवा का तापमान पंद्रह डिग्री से ऊपर गरम हो गया है। किस्मों के तनों में उच्च लाठी-सहारा सेट किया जाना चाहिए। अन्यथा पैलार्गोनियम हवा तोड़ सकते हैं। सर्दियों में, पौधों एक ठंडे स्थान में जहाँ तक संभव हो रखना चाहिए । कक्ष ठंड के मौसम में बहुत गर्म है, तो गर्मियों पैलार्गोनियम खिलते नहीं हो सकता है। संयंत्र पर एक संक्षिप्त photoperiod के साथ एक फ्लोरोसेंट लैंप लटका सिफारिश की है। बहुत गीला क्षेत्रों में, इन फूलों को भी अच्छा नहीं लग रहा है। पैलार्गोनियम शुष्क क्षेत्रों में स्थापित करना चाहिए। उसी कारण से, संयंत्र कभी नहीं छिड़काव किया। इसके अलावा वे पैलार्गोनियम ड्राफ्ट या हवा ठहराव पसंद नहीं है। पिंच या छंटाईः पैलार्गोनियम ट्यूलिप, सुंदर रसीला और कॉम्पैक्ट दो तरह से सुनिश्चित करें। पहले मामले में बस विकास बिंदु हटा दिया। यह जवान गोली मारता है के विकास भड़काती। पैलार्गोनियम ट्यूलिप अधिक शाखाओं और रसीला हो जाता है। खर्च छः-आठ पत्ती पर फरवरी या मार्च में बाहर pinched। खतना तकनीक वयस्क संयंत्रों के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल किया। इस विधि मौलिक पैलार्गोनियम का आकार बदलने के लिए यह संभव बनाता है। इस मामले में, बुश बस पुरानी है और बहुत बड़ा शूटिंग को काट दिया। प्रत्येक डंठल पर के बारे में पाँच गुर्दे के लिए छोड़ दिया है। जल्दी वसंत ऋतु में इस तरह के उपचार करें। स्वच्छ हाथ और छंटाई के साथ किया जा करने के लिए pinched - शराब उपकरण मला। सभी घाव जरूरी हरे रंग या लकड़ी का कोयला संसाधित। तुम भी कुछ कवकनाशी उपयोग कर सकते हैं। संयंत्र को खिलाने के लिए की जरूरत काटने के बाद। इस प्रकार, हम पता लगा लेंगे कैसे पैलार्गोनियम ट्यूलिप देखभाल के रूप में इस तरह के एक शानदार संयंत्र में किया जाता है। आप देख सकते हैं, यह अपेक्षाकृत आसान है। सरल प्रक्रिया अलग है और इन पौधों की प्रजनन है। रोपण सामग्री के रूप में आमतौर पर मां संयंत्र कलमों या बीज से लिया करते थे। पहले मामले में, पौधों दो या तीन पत्तियों के साथ खड़ी शूटिंग में कटौती कर रहे हैं। उन्हें बढ़ती सूची के साथ बेहतर साइट को अलग करें। हटाया कलमों के साथ पुष्पक्रम। लैंडिंग काटने के बाद कुछ घंटों का उत्पादन। साझा करना कुचल कोयला में पूर्व डूबा। अक्सर, युवा पैलार्गोनियम ट्यूलिप प्लास्टिक के कप में लगाया। दक्षिण खिड़की पर अंतिम स्थान पर, और एक छोटे से rostochku pritenyayut है। युवा पौधों की जड़ प्रणाली के कप भरने के बाद एक निरंतर क्षमता के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। बीज ट्यूलिप पैलार्गोनियम जनवरी या फरवरी में पॉट लगाया जाता है। वे मिट्टी की सतह पर रखा गया था और हल्के से छिड़के। अगला बॉक्स कांच या फिल्म के साथ कवर किया। पिकअप दो-चार पत्तियों के साथ युवा पौधों की उपस्थिति के बाद किया जाता है। लगाए pelargoniums, जबकि एक ही गहराई, जिस पर वे एक बॉक्स में बढ़ी पर ले जाने। छः-आठ सप्ताह के बाद पौधों को एक स्थायी क्षमता में रखा जाता है। बालकनी बक्से वे बीस-पच्चीस सेमी विविधता के आधार पर की दूरी पर बैठे हैं। पैलार्गोनियम ट्यूलिप - एक संयंत्र काफी साहसी और उदार। बीमार इन इनडोर पौधों दुर्लभ है। अक्सर पैलार्गोनियम ग्रे मोल्ड और जल्दी तुषार हड़ताली। प्रणालीगत fungicides के माध्यम से किया जाता है दोनों ही मामलों में उपचार। आप उदाहरण के लिए, "fundazol" के लिए उपयोग कर सकते हैं। कीड़ों के अलावा, इन फूलों एफिड्स या कण से प्रभावित हो सकता। पहले मामले में पैलार्गोनियम ट्यूलिप के रूप में "Akarin" या "decis" इस तरह के साधन का इलाज किया। "Zolon" का उपयोग के कण या "Ditoks" के खिलाफ।
कांग्रेस विधायक ने कहा ये मामला रेयर ऑफ रेयरेस्ट है इसीलिए तहसीलदार कल्पेश जैन को संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत बिना नोटिस दिए नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाए. राजस्थान में अधिकारियों के एक के बाद एक रिश्वत लेने के मामले सामने आ रहे हैं. रिश्वतखोरी के मामले के उजागर होने के डर से सिरोही के पिंडवाड़ा में SDM के नोटो की गड्डियों को गैस पर जलाने वाले मामले में कांग्रेस विधायक ने SDM को बर्खास्त करने की मांग की है.सांगोद से कांग्रेस के विधायक भरत सिंह कुन्दनपुर ने इसे लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा है. भरत सिंह ने अपने पत्र में इस मामले को रेयर ऑफ रेयरेस्ट बताया है. उन्होंने कहा है कि ये मामला रेयर ऑफ रेयरेस्ट है इसीलिए SDM कल्पेश जैन को संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत बिना नोटिस दिए नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाए. भरत सिंह ने सीएम को लिखे अपने लेटर में लिखा है कि यह मामला रेयर ऑफ रेयरेस्ट है क्योंकि पूरे देश में इस तरह का दूसरा कोई मामला सामने नहीं आया है. तहसीलदार कल्पेश जैन ने खुद को बचाने के लिए 15 लाख रुपए के नोटो को जला दिया है. जबकि नोटो को नष्ट्र करना अपराध है. विधायक ने मांग की है कि कल्पेश को अनुच्छेद 311 का इस्तेमाल कर बिना नोटिस, सुनवाई और प्रक्रिया के बर्खास्त कर दिया जाए. बता दें कि रिश्वत में इज्जत मांगने वाले पुलिस ऑफिसर कैलाश चन्द बोहरा के मामले को राज्य सरकार ने रेयर ऑफ रेयरेस्ट बताते हुए उसे बर्खास्त करने की प्रोसेस शुरु कर दिया था. अब यही मांग कल्पेश जैन की लिए भी की जा रही है. सिरोही के पिंडवाड़ा में रिश्वतखोरी में पकड़े जाने के डर से SDM कल्पेश जैन ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर 15 लाख रुपए गैस चूल्हे पर रख जला दिए थे. दरअसल ACB की टीम ने रेवेन्यू इंस्पेक्टर पर्वत सिंह को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था, पर्वत सिंह ने पकड़े जाने के बाद ACB को बताया था कि वो तहसीलदार कल्पेश जैन के लिए रिश्वत ले रहा था. इस के बाद ACB की टीम जब कल्पेश जैन के घर पहुंची तो उसने टीम को आते देख अपने घर का दरवाजा बंद कर लिया और नोटों की गड्डियों को चूल्हे पर रखकर जला दिया.
कांग्रेस विधायक ने कहा ये मामला रेयर ऑफ रेयरेस्ट है इसीलिए तहसीलदार कल्पेश जैन को संविधान के अनुच्छेद तीन सौ ग्यारह के तहत बिना नोटिस दिए नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाए. राजस्थान में अधिकारियों के एक के बाद एक रिश्वत लेने के मामले सामने आ रहे हैं. रिश्वतखोरी के मामले के उजागर होने के डर से सिरोही के पिंडवाड़ा में SDM के नोटो की गड्डियों को गैस पर जलाने वाले मामले में कांग्रेस विधायक ने SDM को बर्खास्त करने की मांग की है.सांगोद से कांग्रेस के विधायक भरत सिंह कुन्दनपुर ने इसे लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा है. भरत सिंह ने अपने पत्र में इस मामले को रेयर ऑफ रेयरेस्ट बताया है. उन्होंने कहा है कि ये मामला रेयर ऑफ रेयरेस्ट है इसीलिए SDM कल्पेश जैन को संविधान के अनुच्छेद तीन सौ ग्यारह के तहत बिना नोटिस दिए नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाए. भरत सिंह ने सीएम को लिखे अपने लेटर में लिखा है कि यह मामला रेयर ऑफ रेयरेस्ट है क्योंकि पूरे देश में इस तरह का दूसरा कोई मामला सामने नहीं आया है. तहसीलदार कल्पेश जैन ने खुद को बचाने के लिए पंद्रह लाख रुपए के नोटो को जला दिया है. जबकि नोटो को नष्ट्र करना अपराध है. विधायक ने मांग की है कि कल्पेश को अनुच्छेद तीन सौ ग्यारह का इस्तेमाल कर बिना नोटिस, सुनवाई और प्रक्रिया के बर्खास्त कर दिया जाए. बता दें कि रिश्वत में इज्जत मांगने वाले पुलिस ऑफिसर कैलाश चन्द बोहरा के मामले को राज्य सरकार ने रेयर ऑफ रेयरेस्ट बताते हुए उसे बर्खास्त करने की प्रोसेस शुरु कर दिया था. अब यही मांग कल्पेश जैन की लिए भी की जा रही है. सिरोही के पिंडवाड़ा में रिश्वतखोरी में पकड़े जाने के डर से SDM कल्पेश जैन ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर पंद्रह लाख रुपए गैस चूल्हे पर रख जला दिए थे. दरअसल ACB की टीम ने रेवेन्यू इंस्पेक्टर पर्वत सिंह को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था, पर्वत सिंह ने पकड़े जाने के बाद ACB को बताया था कि वो तहसीलदार कल्पेश जैन के लिए रिश्वत ले रहा था. इस के बाद ACB की टीम जब कल्पेश जैन के घर पहुंची तो उसने टीम को आते देख अपने घर का दरवाजा बंद कर लिया और नोटों की गड्डियों को चूल्हे पर रखकर जला दिया.
बिहार/झारखंड स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, १९९६(अधिनियम संख्या-२, १९९७) इस लेख में बिहार/झारखंड स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, १९९६ की जानकारी दी गयी है। इस भाग में प्रवासी निर्वाचकों से जुड़े सवालों को शामिल किया गया है। इस भाग में पंचायत की सामाजिक भूमिकाएं एवं उसके कार्यों की जानकारी दी गयी है। इस लेख में किस प्रकार लैम्प्स लिमिटेड की उप-विधियों का प्रयोग किया जा सकता है, इसकी जानकारी दी गयी है। इस लेख में प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, कहानियों,कविताओं, चुटकुलों, जीव जन्तुओं का अनोखा संसार और विज्ञान बच्चों के लिए किये गए कुछ प्रयोगों का विस्तृत उल्लेख है। इस भाग में भेड़ की विभिन्न नस्लों सहित, एक वाणिज्यिक भेड़ फार्म की स्थापना करना, रोग प्रबंधन, चारा प्रबंधन और वित्तीय सहायता आदि की जानकारी को शामिल किया जाता है। सिद्ध प्रणाली भारत में दवा की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। 'सिद्ध' शब्द का अर्थ है उपलब्धियां और सिद्ध, संत पुरुष होते थे जो दवा में परिणाम हासिल करते थे। है। इस भाग में इन्हीं परिणामों और उनका वर्तमान उपयोग बताया गया है।
बिहार/झारखंड स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ छियानवे इस लेख में बिहार/झारखंड स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ छियानवे की जानकारी दी गयी है। इस भाग में प्रवासी निर्वाचकों से जुड़े सवालों को शामिल किया गया है। इस भाग में पंचायत की सामाजिक भूमिकाएं एवं उसके कार्यों की जानकारी दी गयी है। इस लेख में किस प्रकार लैम्प्स लिमिटेड की उप-विधियों का प्रयोग किया जा सकता है, इसकी जानकारी दी गयी है। इस लेख में प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, कहानियों,कविताओं, चुटकुलों, जीव जन्तुओं का अनोखा संसार और विज्ञान बच्चों के लिए किये गए कुछ प्रयोगों का विस्तृत उल्लेख है। इस भाग में भेड़ की विभिन्न नस्लों सहित, एक वाणिज्यिक भेड़ फार्म की स्थापना करना, रोग प्रबंधन, चारा प्रबंधन और वित्तीय सहायता आदि की जानकारी को शामिल किया जाता है। सिद्ध प्रणाली भारत में दवा की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। 'सिद्ध' शब्द का अर्थ है उपलब्धियां और सिद्ध, संत पुरुष होते थे जो दवा में परिणाम हासिल करते थे। है। इस भाग में इन्हीं परिणामों और उनका वर्तमान उपयोग बताया गया है।
आज के समय में अधिकतर ट्रांजैक्शन औनलाइन होते हैं. हर चीज औनलाइन शिफ्ट होने लगी है. यह सहूलियत तो दे देता है पर रिस्क के चांस भी बढ़ा देता है. इसी मौके को ताड़ते साइबर जालसाजों के ऐसे गुट खड़े हो गए हैं जो लोगों को अपने चंगुल में फंसा कर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं. ये गैंग लोगों को तत्काल कर्ज देने के नाम पर धोखाधड़ी करते हैं. हाल ही में मैनपुरी कोतवाली पुलिस ने ऐसे ही तत्काल कर्ज देने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह को पकड़ा. यह गैंग मैनपुरी ही नहीं बल्कि आसपास जिलों में भी ठगी करता था. लोगों को जब पता चलता तब तक उन की कमाई ले कर गैंग के ठग फरार हो जाते. इस तरह की ठगी छोटेछोटे कर्जों की शक्ल में हो रही हैं. अगर कोई सोशल मीडिया पर विज्ञापन देख कर 5 हजार रुपए का कर्ज लेता है तो उसे 7 दिनों के भीतर 7 हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं. यहां तक तो ठीक है पर दिक्कत इस के बाद खड़ी होती है. जिस एप्लीकेशन प्लेटफौर्म के माध्यम से यह सारा खेल चल रहा होता है उस के माध्यम से ही देनदारों के पास लेनदार की सारी निजी डिटेल पहुंच जाती है. उस के पास वे प्राइवेट पिन कोड भी पहुंच जाते हैं जो उस के खातों से जुड़े होते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इंस्टैंट लोन एप्लीकेशन से बचने हेतु अलर्ट जारी किया है. पुलिस ने जिस गैंग को पकड़ा है उस में ज्यादा अनधिकृत लोग हैं जिन्हें रिजर्व बैंक से लोन देने का कोई अधिकार नहीं मिला है. इस के बावजूद वे खुलेआम मिनटों में लोन का औफर दे कर लोगों को फंसा रहे हैं. लौकडाउन के दौरान से ये सारे एप्लीकेशन एक्टिवेट हुए हैं. साइबर क्रिमिनल पैसों की कमी से जू झ रहे लोगों को सस्ते दर पर लोन मुहैया कराने का झांसा दे कर अपने जाल में फंसा रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि ग्राहक ऐसे झांसों में न फंसें.
आज के समय में अधिकतर ट्रांजैक्शन औनलाइन होते हैं. हर चीज औनलाइन शिफ्ट होने लगी है. यह सहूलियत तो दे देता है पर रिस्क के चांस भी बढ़ा देता है. इसी मौके को ताड़ते साइबर जालसाजों के ऐसे गुट खड़े हो गए हैं जो लोगों को अपने चंगुल में फंसा कर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं. ये गैंग लोगों को तत्काल कर्ज देने के नाम पर धोखाधड़ी करते हैं. हाल ही में मैनपुरी कोतवाली पुलिस ने ऐसे ही तत्काल कर्ज देने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह को पकड़ा. यह गैंग मैनपुरी ही नहीं बल्कि आसपास जिलों में भी ठगी करता था. लोगों को जब पता चलता तब तक उन की कमाई ले कर गैंग के ठग फरार हो जाते. इस तरह की ठगी छोटेछोटे कर्जों की शक्ल में हो रही हैं. अगर कोई सोशल मीडिया पर विज्ञापन देख कर पाँच हजार रुपए का कर्ज लेता है तो उसे सात दिनों के भीतर सात हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं. यहां तक तो ठीक है पर दिक्कत इस के बाद खड़ी होती है. जिस एप्लीकेशन प्लेटफौर्म के माध्यम से यह सारा खेल चल रहा होता है उस के माध्यम से ही देनदारों के पास लेनदार की सारी निजी डिटेल पहुंच जाती है. उस के पास वे प्राइवेट पिन कोड भी पहुंच जाते हैं जो उस के खातों से जुड़े होते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक ने इंस्टैंट लोन एप्लीकेशन से बचने हेतु अलर्ट जारी किया है. पुलिस ने जिस गैंग को पकड़ा है उस में ज्यादा अनधिकृत लोग हैं जिन्हें रिजर्व बैंक से लोन देने का कोई अधिकार नहीं मिला है. इस के बावजूद वे खुलेआम मिनटों में लोन का औफर दे कर लोगों को फंसा रहे हैं. लौकडाउन के दौरान से ये सारे एप्लीकेशन एक्टिवेट हुए हैं. साइबर क्रिमिनल पैसों की कमी से जू झ रहे लोगों को सस्ते दर पर लोन मुहैया कराने का झांसा दे कर अपने जाल में फंसा रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि ग्राहक ऐसे झांसों में न फंसें.
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत गरीब बच्चों के कांवेंट स्कूलों में प्रवेश को लेकर प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया। ऑनलाइन आवेदन की तिथि को कोरोना वॉयरस के चलते लॉक डाउन की वजह से बढ़ा दिया। अब आवेदन 24 मई तक किया जा सकता है। आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर तिथियां जारी की गई थी। कोरोना संकट की वजह से शिक्षण संस्थाएं बंद हैं। साइबर कैफों में ताले लटक रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया गतिशील नहीं हो सकी। लॉक डाउन को देखते हुए महानिदेशक ने आवेदन की तिथियों में संशोधन कर दिया है। पहले चरण में प्रवेश के लिए 24 मई तक आवेदन कर सकते हैं। बीएसए द्वारा पड़ताल के बाद बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। - पहले चरण के आवेदन 24 मई तक। - -आवेदनों का सतयापन 25 से 27 मई तक। - -लाटरी निकालने की तिथि 28 मई। - -निजी विद्यालयों में प्रवेश 10 जुलाई। - दूसरे चरण में 30 मई से 25 जून तक आवेदन होंगे। - सत्यापन 26 जून से 28 जून तक किया जाएगा। - 29 जून को लॉटरी निकलेगी और 20 जुलाई को प्रवेश कराया जाएगा।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत गरीब बच्चों के कांवेंट स्कूलों में प्रवेश को लेकर प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया। ऑनलाइन आवेदन की तिथि को कोरोना वॉयरस के चलते लॉक डाउन की वजह से बढ़ा दिया। अब आवेदन चौबीस मई तक किया जा सकता है। आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर तिथियां जारी की गई थी। कोरोना संकट की वजह से शिक्षण संस्थाएं बंद हैं। साइबर कैफों में ताले लटक रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया गतिशील नहीं हो सकी। लॉक डाउन को देखते हुए महानिदेशक ने आवेदन की तिथियों में संशोधन कर दिया है। पहले चरण में प्रवेश के लिए चौबीस मई तक आवेदन कर सकते हैं। बीएसए द्वारा पड़ताल के बाद बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। - पहले चरण के आवेदन चौबीस मई तक। - -आवेदनों का सतयापन पच्चीस से सत्ताईस मई तक। - -लाटरी निकालने की तिथि अट्ठाईस मई। - -निजी विद्यालयों में प्रवेश दस जुलाई। - दूसरे चरण में तीस मई से पच्चीस जून तक आवेदन होंगे। - सत्यापन छब्बीस जून से अट्ठाईस जून तक किया जाएगा। - उनतीस जून को लॉटरी निकलेगी और बीस जुलाई को प्रवेश कराया जाएगा।
e-Dukaan : नई दिल्ली। भारत के करोड़ों छोटे दुकानदारों के लिए अच्छी खबर है। सरकार छोटे दुकानदारों और खुदरा कारोबारियों के हितों की रक्षा करने, देश में डिजिटल और ई कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए नई ई-कॉमर्स पॉलिसी (e-Commerce Policy) लाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार के ई-दुकान पहल के चलते छोटे दुकानदारों की आमदनी सैकड़ों गुना तक बढ़ जाएगी। ई-कॉमर्स सेक्टर में अभी कुछ कंपनियों का दबदबा है। सरकार की योजना बड़ी कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने की है। इसके लिए सरकार बहुत जल्द खुद का ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस (e-Commerce Marketplace) लॉन्च करने जा रही है, जिसका नाम ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स यानी ONDC रखा गया है। ओएनडीसी एक तरह का ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस होगा, जहां छोटे से छोटे किराना व्यापारी अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसके लिए सरकार ने ओपन पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फ्रेमवर्क (Open Public Digital Infrastructure Framework) तैयार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इसका बीटा वर्जन अप्रैल में शुरू करने जा रही है, जबकि इसे पूरी तरह से अगस्त, 2022 में लॉन्च किया जाएगा। ओएनडीसी देश के करोड़ों छोटे दुकानदारों और रिटेलर्स को सरकारी ई-दुकान पर उपने उत्पाद और सामान को ऑनलाइन बेचने की सुविधा देगा। इससे उन करोड़ों छोटे दुकानदारों को लाभ होगा, जो ई-कॉमर्स इकोसिस्टम का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स यानी ONDC एक तरह की ओपन रजिस्ट्री होगी जिसमें दुकानदार खुद को रजिस्टर करा सकेंगे। इसका फायदा यह होगा कि किसी रिटेलर को ऑनलाइन सामान बेचने के लिए खुद के अलग-अलग ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर नहीं कराना होगा। अगर किसी ग्राहक को कुछ खरीदना होगा, तो वो अपने इलाके में इस ओपन रजिस्ट्री पर रजिस्टर रिटेलर को चेक कर सकेंगे। ग्राहक ऑर्डर को अलग अलग भी मंगा सकेंगे और खुद डिलीवरी का ऑप्शन भी चुन सकेंगे। डीपीआइटी में अतिरिक्त सचिव अनिल अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली बेंगलूरु कोयंबटूर, शिलॉन्ग और भोपाल से ओएनडीसी को शुरू करने की तैयारी की है।
e-Dukaan : नई दिल्ली। भारत के करोड़ों छोटे दुकानदारों के लिए अच्छी खबर है। सरकार छोटे दुकानदारों और खुदरा कारोबारियों के हितों की रक्षा करने, देश में डिजिटल और ई कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए नई ई-कॉमर्स पॉलिसी लाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार के ई-दुकान पहल के चलते छोटे दुकानदारों की आमदनी सैकड़ों गुना तक बढ़ जाएगी। ई-कॉमर्स सेक्टर में अभी कुछ कंपनियों का दबदबा है। सरकार की योजना बड़ी कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने की है। इसके लिए सरकार बहुत जल्द खुद का ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस लॉन्च करने जा रही है, जिसका नाम ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स यानी ONDC रखा गया है। ओएनडीसी एक तरह का ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस होगा, जहां छोटे से छोटे किराना व्यापारी अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसके लिए सरकार ने ओपन पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फ्रेमवर्क तैयार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इसका बीटा वर्जन अप्रैल में शुरू करने जा रही है, जबकि इसे पूरी तरह से अगस्त, दो हज़ार बाईस में लॉन्च किया जाएगा। ओएनडीसी देश के करोड़ों छोटे दुकानदारों और रिटेलर्स को सरकारी ई-दुकान पर उपने उत्पाद और सामान को ऑनलाइन बेचने की सुविधा देगा। इससे उन करोड़ों छोटे दुकानदारों को लाभ होगा, जो ई-कॉमर्स इकोसिस्टम का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स यानी ONDC एक तरह की ओपन रजिस्ट्री होगी जिसमें दुकानदार खुद को रजिस्टर करा सकेंगे। इसका फायदा यह होगा कि किसी रिटेलर को ऑनलाइन सामान बेचने के लिए खुद के अलग-अलग ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर नहीं कराना होगा। अगर किसी ग्राहक को कुछ खरीदना होगा, तो वो अपने इलाके में इस ओपन रजिस्ट्री पर रजिस्टर रिटेलर को चेक कर सकेंगे। ग्राहक ऑर्डर को अलग अलग भी मंगा सकेंगे और खुद डिलीवरी का ऑप्शन भी चुन सकेंगे। डीपीआइटी में अतिरिक्त सचिव अनिल अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली बेंगलूरु कोयंबटूर, शिलॉन्ग और भोपाल से ओएनडीसी को शुरू करने की तैयारी की है।
नोएडा पुलिस को सख्त हिदायत मिली है कि बाद में आना. . . देखते हैं कल्चर से बाज आएं। वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहें। थाने में आनेवाली हर शिकायत की रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। साथ ही पीड़ित को इसकी रिसीविंग भी देनी होगी। कमिश्नर ने हर थाने में ऐसा एक रजिस्टर बनाने का निर्देश भी दिया है।
नोएडा पुलिस को सख्त हिदायत मिली है कि बाद में आना. . . देखते हैं कल्चर से बाज आएं। वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहें। थाने में आनेवाली हर शिकायत की रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। साथ ही पीड़ित को इसकी रिसीविंग भी देनी होगी। कमिश्नर ने हर थाने में ऐसा एक रजिस्टर बनाने का निर्देश भी दिया है।
बलिया/बेगूसराय (बी के गुलशन) प्रखंड मुख्यालय अवस्थित लोहिया भवन में निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी 145 साहेबपुर कमाल विधानसभा सह अनुमंडल पदाधिकारी बलिया डॉक्टर उत्तम कुमार की अध्यक्षता में आगामी बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2020 हेतु स्वीप जागरुकता हेतु बैठक का आयोजन किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी बलिया द्वारा प्रवासी मजदूरों का मतदाता सूची में पंजीकरण करने , छूटे हुए अहर्ता प्राप्त व्यक्तियों को मतदाता सूची में नाम दर्ज करने, 80 वर्ष से अधिक आयु के मतदाता को चिन्हित करने, एक ही मतदाता के दोहरी प्रविष्टि को विलोपित करने तथा पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कम मतदान होने वाले बूथों पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाने हेतु निर्देश दिए गये। विकास कुमार प्रखंड विकास पदाधिकारी बलिया द्वारा निर्देश दिया गया कि अहर्ता तिथि 1-1 -2020 के आधार पर 18 से 19 वर्ष के आयु वाले व्यक्तियों को निर्वाचक सूची में नाम जोड़ा जाय। बैठक में श्री विकास कुमार प्रखंड विकास पदाधिकारी बलिया ,आर्य राज बाल विकास परियोजना पदाधिकारी बलिया, सुनील कुमार बीआरपी बलिया, मोहम्मद नासिर पर्यवेक्षक ,उत्तम कुमार झा पर्यवेक्षक जीविका के प्रतिनिधि, निर्वाचन कार्यालय के कर्मी विनोद कुमार, नरेश कुमार अंबुद, रामकिशोर चौधरी, बीएलओ कृष्णकांत मुरारी ,प्रभात रंजन, गुड्डी कुमारी पवन कुमार मधुबाला, संजय कुमार भगत, राजीव कुमार रंजन, राजेश कुमार, रंजन कुमारी, रजनी रानी ,रीना कुमारी सहित प्रखंड क्षेत्र के बीएलओ मौजूद थे।
बलिया/बेगूसराय प्रखंड मुख्यालय अवस्थित लोहिया भवन में निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी एक सौ पैंतालीस साहेबपुर कमाल विधानसभा सह अनुमंडल पदाधिकारी बलिया डॉक्टर उत्तम कुमार की अध्यक्षता में आगामी बिहार विधानसभा आम निर्वाचन दो हज़ार बीस हेतु स्वीप जागरुकता हेतु बैठक का आयोजन किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी बलिया द्वारा प्रवासी मजदूरों का मतदाता सूची में पंजीकरण करने , छूटे हुए अहर्ता प्राप्त व्यक्तियों को मतदाता सूची में नाम दर्ज करने, अस्सी वर्ष से अधिक आयु के मतदाता को चिन्हित करने, एक ही मतदाता के दोहरी प्रविष्टि को विलोपित करने तथा पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कम मतदान होने वाले बूथों पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाने हेतु निर्देश दिए गये। विकास कुमार प्रखंड विकास पदाधिकारी बलिया द्वारा निर्देश दिया गया कि अहर्ता तिथि एक-एक -दो हज़ार बीस के आधार पर अट्ठारह से उन्नीस वर्ष के आयु वाले व्यक्तियों को निर्वाचक सूची में नाम जोड़ा जाय। बैठक में श्री विकास कुमार प्रखंड विकास पदाधिकारी बलिया ,आर्य राज बाल विकास परियोजना पदाधिकारी बलिया, सुनील कुमार बीआरपी बलिया, मोहम्मद नासिर पर्यवेक्षक ,उत्तम कुमार झा पर्यवेक्षक जीविका के प्रतिनिधि, निर्वाचन कार्यालय के कर्मी विनोद कुमार, नरेश कुमार अंबुद, रामकिशोर चौधरी, बीएलओ कृष्णकांत मुरारी ,प्रभात रंजन, गुड्डी कुमारी पवन कुमार मधुबाला, संजय कुमार भगत, राजीव कुमार रंजन, राजेश कुमार, रंजन कुमारी, रजनी रानी ,रीना कुमारी सहित प्रखंड क्षेत्र के बीएलओ मौजूद थे।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 28 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल २,०१५ बार देखा गया है। ताश के पत्तों का घर बनाने के कई तरीके हैं। "क्लासिक (classic)" तरीका, जो आपने लोकप्रिय मीडिया में देखा होगा, कई तिकोने ट्रस (trusses) की एक श्रृंखला पर आधारित होता है, जिसमे एक कार्ड पिरमिड के जरिये, सभी एक शीर्ष (peak) पर पहुँचते हैं। हालांकि, कई प्रॉफेश्नल कार्ड-स्टैकर्स (card-stackers), आपने स्ट्रक्चर की शुरुआत एक चार-कार्ड की सेल या "लॉक बॉक्स (lock box)" से करते हैं, जो अधिक जटिल डिज़ाइन के लिए, अधिक स्थिर नींव (foundation) बनाती है। 2नींव (foundation) को बनाएँः दो पत्तों की बनी एक तिकोनी ट्रस की बराबर श्रृंखला बनाएँ। प्रत्येक तिकोन का पॉइंट, दूसरे तिकोन के पॉइंट से, एक पत्ते की लंबाई से अधिक नहीं होना चाहिए। नींव में बनाए गए तिकोन, ताश के पत्तों के घर की संभावित ऊंचाई को निर्धारित करता हैः प्रत्येक "फ्लोर" अपने नीचे की फ्लोर से एक कम तिकोन की बनेगी। उदाहरण के लिए, यदि आप तीन तिकोनों की नींव बनाते हैं, तो आप तीन "फ्लोर" तक जा पाएँगे, इसके पहले की घर एक पॉइंट तक पहुँच जाए; अगर आप छः-तिकोनों की नींव बनाते हैं, तो आपके पास बनाने के लिए अधिक स्थान उपलब्ध होगा, और आप छः मंजिल तक जा पाएंगे। शुरुआत तीन-मंज़िले घर से करें। - प्रत्येक नए तिकोन को, बगलवाले तिकोन के बगल में लगाएँ। अंततः, आपके पास तीन तिकोन होने चाहिए (कुल छः पत्तों का इस्तेमाल करके) जो सभी एक दूसरे को छूते हुए होंगे। - बहुत सचेत रहें। अगर आप नींव अच्छी बनाते हैं, तो वह, इन नए पत्तों का भार उठाने में, सक्षम होगी - लेकिन आपको पूरी चीज़ को हिलने या आकस्मिक मूवमेंट के कारण पूरी तरह गिरने से बचाना होगा। नए पत्तों को हल्के से और सावधानीपूर्वक रखें। - जब आपने दूसरा "फ्लोर" बनाना पूरा कर लिया हो, तब आपकी मिनार में 13 पत्ते होने चाहिएः पाँच तिकोन और तीन सपाट पत्ते। 5पॉइंट को जोड़ेंः अपने ताश के पत्तों के घर को पूरा करने के लिए, आपको इस स्ट्रक्चर के ऊपर एक और तिकोन को लगाना है। हल्के से और सावधानीपूर्वक, दो पत्तों को, पहले वाले तिकोनों के एंगल पर ही, साथ लगाएँ। उन्हें पकड़े रहें जब तक वह बराबर ना हो जाएँ, और फिर अपने हाथ हटा ले जब आप संतुष्ट हो की पॉइंट अपने आप खड़ा रहेगा। अगर स्ट्रक्चर खड़ा रहता है, तो आपने ताश के पत्तों का घर बना लिया है! यह सबसे स्थिर तरीका है, बड़े और जटिल, ताश के पत्तों के घर बनाने का। चार-पत्तों की सेल, 660 पाउंड प्रति वर्ग फुट तक सपोर्ट कर सकती है, जिस कारण एक ऐसी नींव बनती है जिसे आप दोहरा सकते हैं और उस पर आगे बना सकते हैं। कुछ प्रॉफेश्नल कार्ड-स्टैकर इस तरीके की कसम खाते हैं। 1सेल को बनाएँः पहले, दो पत्तों को हल्का सा ऑफ-सेंटर "T" के आकार में लगाएँ। पत्तों को हाथ में पकड़ें, हर हाथ में एक, जिससे की उनकी सपाट सतह, मेज के परपेंड़ीकुलर (perpendicular) हो। उनको एक दूसरे के सहारे रखें जिससे की एक और करीब करीब-T बने। आगे, एक तीसरा पत्ता, एक पत्ते के बीच से और रखें, एक और "T" बनाने के लिए। बॉक्स और "T" को चौथे पत्ते से बंद करे, जिससे आपके पास चार पत्ते हों एक दूसरे से लगे हुए, और जिनके बीच में वर्गाकार जगह हो। - यह बेसिक चार-पत्तों की सेल या "लॉक बॉक्स" है। यह एक बहुत ही स्ट्रक्चरेली (structurally) स्थिर नींव है जो आप अपने ताश के पत्तों के घर के लिए बना सकते हैं। इस सेल के बारे में एक पैटर्न के रूप में सोचें जिसे आप अपनी पूरी डिज़ाइन में दोहरा सकते हैं। 2एक "छत (roof)" या "सीलिंग (ceiling)" बनाएँः अपनी चार-पत्तों की सेल के ऊपर दो पत्ते एक के ऊपर एक, सपाट रखें। फिर दो और पत्ते रखें (90 डिग्री एंगल पर घुमाते हुए), छत को पूरा करने के लिए। एक "डबल-प्लाई (double-ply)" सपाट पर्त, आपके अंतिम स्ट्रक्चर को अधिक स्थिर बनाएगी। 3एक दूसरी मंज़िल जोड़ेंः सावधानीपूर्वक एक दूसरी चार-पत्तों की सेल को पहली पर्त के ऊपर बनाएँ। अब आपके पास एक स्थिर दो मंज़िला स्ट्रक्चर तैयार है। आप चाहे जितनी मंज़िल इसके ऊपर बनाएँ, जब तक की आपके पत्ते समाप्त ना हो जाएँ या आपको लगे की स्ट्रक्चर काफी ऊंचा हो गया है। चार-पत्तों की सेल बहुत मजबूत आधार होती है, इसलिए आप इस नींव के ऊपर, कई मंज़िलें और बना सकते हैं। - आधार ताल पर और टी-आकार को जोड़ कर, घर में कई "विंग्स (wings)" और जोड़ने की सोचें। जब भी कभी आप पत्तों के आकार को बनाएँ जो मेज के परपेंड़ी कुलर हो, तो सुनिश्चित करें की उसके ऊपर एक सपाट पर्त पत्तों की हो जो "सीलिंग" बन जाए। इससे पत्ते अधिक स्ट्रक्चरेली सुदृढ़ होंगे, और यह पूरी बिल्डिंग को ज्यादा घर जैसा दिखने वाला आकार देगा। - रचनात्मक बनें। इस तरीके में आकाश आपकी सीमा है - इसलिए यह देखें की आप कितना बड़ा घर बना सकते हैं! 1सस्ते ताश के पत्तों का इस्तेमाल करेंः महंगे, प्रो-क्वालिटी के पत्ते अधिकतर चिकने और चमकदार होते हैं, और उनके फिसल जाने की संभावना काफी है। सस्ते पत्ते दानेदार और कम चिकने होते हैं, और इस प्रकार साथ लगाने के लिए बेहतर होते हैं। 2अपनी सतह को सावधानीपूर्वक चुनेंः एक सुरक्षित, मजबूत जगह का चयन करें जो आपके पत्तों को रखने के दौरान खिसक नहीं जाएगी। थोड़ी दानेदार सतह पर बनाने का प्रयास करें, जैसे की बिल्लियर्ड्स टेबल, या फिर अध बनी लकड़ी की टेबल। चिकनी सतह, जैसे ग्लास टेबल से आपके पत्तों के फिसलने की संभावना है। चिकनी सतह को दानेदार सतह बनाने के लिए, टेबलक्लॉथ या प्लेस-मैट के इस्तेमाल पर विचार करें; लेकिन जानकार रहें की इस प्रकार के बिना जुड़े आधार के अचानक हट जाने की संभावना अधिक होती है। - सुनिश्चित करें की वहाँ हवा ना हो! अपना ताश के पत्तों का घर, अंदर बनाएँ, खुली खिडकियों, दरवाजे, पंखे और वेंट से दूर। आप अपनी कड़ी मेहनत को एक गलत समय पर आए हवा के झोंके से बरबाद होते नहीं देखना चाहेंगे। 3शांत रहेंः एक हिलता हुआ हाथ या एक आकस्मिक ऐठन (twitch) से आपका घर गिर सकता है। प्रत्येक पत्ते को हल्के से लेकिन अच्छी तरह से, अपने प्रमुख हाथ की दो उँगलियों के बीच पकड़ें। उसे आसानी से अपनी जगह पर "सरकाएँ (float)"। - आपको ग्लू, टेप, स्टेपल्स, पेपर क्लिप्स, या अन्य प्रकार के फास्टनर्स का उपयोग नहीं करना चाहिए। पत्तों को, एक दूसरे पर लटकने के लिए, ना ही मोड़ें, या उनपर खांचे (notches) बनाएँ जिससे वह एक दूसरे में फिट हो जाएँ। ऊपर की सभी विधियाँ 'छल (cheat)' के लिए हैं, और आप इनके कारण वैसे भी कुछ हासिल नहीं कर रहे हैं। - आप जैसे अपना ताश के पत्तों का घर बनाएँगे, तो उस पार सांस छोड़ने का प्रयास मत करें। सांस का एक प्रबल झोंका, आसानी से आपकी रचना को गिरा सकता है। - धैर्य रखें। अगर आप बहुत जल्दबाज़ी करेंगे, तो आप अपने घर को तोड़ सकते हैं! - लॉक बॉक्सः दो पत्तों को लें, प्रत्येक हाथ में एक, जिसमे लंबी साइड वाला किनारा, टेबल के समानान्तर (parallel) हो। उनको एक दूसरे के ऊपर टिकाएँ जिससे थोड़ा "ऑफ (off)" T बने। बहुत अच्छे। इसके बाद, एक तीसरे पत्ते को किस एक पत्ते के बीच में लगाएँ जिससे एक और टेढ़ा मेढ़ा T बने। बॉक्स को चौथे पत्ते से T बनाकर बंद करें।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, अट्ठाईस लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल दो,पंद्रह बार देखा गया है। ताश के पत्तों का घर बनाने के कई तरीके हैं। "क्लासिक " तरीका, जो आपने लोकप्रिय मीडिया में देखा होगा, कई तिकोने ट्रस की एक श्रृंखला पर आधारित होता है, जिसमे एक कार्ड पिरमिड के जरिये, सभी एक शीर्ष पर पहुँचते हैं। हालांकि, कई प्रॉफेश्नल कार्ड-स्टैकर्स , आपने स्ट्रक्चर की शुरुआत एक चार-कार्ड की सेल या "लॉक बॉक्स " से करते हैं, जो अधिक जटिल डिज़ाइन के लिए, अधिक स्थिर नींव बनाती है। दोनींव को बनाएँः दो पत्तों की बनी एक तिकोनी ट्रस की बराबर श्रृंखला बनाएँ। प्रत्येक तिकोन का पॉइंट, दूसरे तिकोन के पॉइंट से, एक पत्ते की लंबाई से अधिक नहीं होना चाहिए। नींव में बनाए गए तिकोन, ताश के पत्तों के घर की संभावित ऊंचाई को निर्धारित करता हैः प्रत्येक "फ्लोर" अपने नीचे की फ्लोर से एक कम तिकोन की बनेगी। उदाहरण के लिए, यदि आप तीन तिकोनों की नींव बनाते हैं, तो आप तीन "फ्लोर" तक जा पाएँगे, इसके पहले की घर एक पॉइंट तक पहुँच जाए; अगर आप छः-तिकोनों की नींव बनाते हैं, तो आपके पास बनाने के लिए अधिक स्थान उपलब्ध होगा, और आप छः मंजिल तक जा पाएंगे। शुरुआत तीन-मंज़िले घर से करें। - प्रत्येक नए तिकोन को, बगलवाले तिकोन के बगल में लगाएँ। अंततः, आपके पास तीन तिकोन होने चाहिए जो सभी एक दूसरे को छूते हुए होंगे। - बहुत सचेत रहें। अगर आप नींव अच्छी बनाते हैं, तो वह, इन नए पत्तों का भार उठाने में, सक्षम होगी - लेकिन आपको पूरी चीज़ को हिलने या आकस्मिक मूवमेंट के कारण पूरी तरह गिरने से बचाना होगा। नए पत्तों को हल्के से और सावधानीपूर्वक रखें। - जब आपने दूसरा "फ्लोर" बनाना पूरा कर लिया हो, तब आपकी मिनार में तेरह पत्ते होने चाहिएः पाँच तिकोन और तीन सपाट पत्ते। पाँचपॉइंट को जोड़ेंः अपने ताश के पत्तों के घर को पूरा करने के लिए, आपको इस स्ट्रक्चर के ऊपर एक और तिकोन को लगाना है। हल्के से और सावधानीपूर्वक, दो पत्तों को, पहले वाले तिकोनों के एंगल पर ही, साथ लगाएँ। उन्हें पकड़े रहें जब तक वह बराबर ना हो जाएँ, और फिर अपने हाथ हटा ले जब आप संतुष्ट हो की पॉइंट अपने आप खड़ा रहेगा। अगर स्ट्रक्चर खड़ा रहता है, तो आपने ताश के पत्तों का घर बना लिया है! यह सबसे स्थिर तरीका है, बड़े और जटिल, ताश के पत्तों के घर बनाने का। चार-पत्तों की सेल, छः सौ साठ पाउंड प्रति वर्ग फुट तक सपोर्ट कर सकती है, जिस कारण एक ऐसी नींव बनती है जिसे आप दोहरा सकते हैं और उस पर आगे बना सकते हैं। कुछ प्रॉफेश्नल कार्ड-स्टैकर इस तरीके की कसम खाते हैं। एकसेल को बनाएँः पहले, दो पत्तों को हल्का सा ऑफ-सेंटर "T" के आकार में लगाएँ। पत्तों को हाथ में पकड़ें, हर हाथ में एक, जिससे की उनकी सपाट सतह, मेज के परपेंड़ीकुलर हो। उनको एक दूसरे के सहारे रखें जिससे की एक और करीब करीब-T बने। आगे, एक तीसरा पत्ता, एक पत्ते के बीच से और रखें, एक और "T" बनाने के लिए। बॉक्स और "T" को चौथे पत्ते से बंद करे, जिससे आपके पास चार पत्ते हों एक दूसरे से लगे हुए, और जिनके बीच में वर्गाकार जगह हो। - यह बेसिक चार-पत्तों की सेल या "लॉक बॉक्स" है। यह एक बहुत ही स्ट्रक्चरेली स्थिर नींव है जो आप अपने ताश के पत्तों के घर के लिए बना सकते हैं। इस सेल के बारे में एक पैटर्न के रूप में सोचें जिसे आप अपनी पूरी डिज़ाइन में दोहरा सकते हैं। दोएक "छत " या "सीलिंग " बनाएँः अपनी चार-पत्तों की सेल के ऊपर दो पत्ते एक के ऊपर एक, सपाट रखें। फिर दो और पत्ते रखें , छत को पूरा करने के लिए। एक "डबल-प्लाई " सपाट पर्त, आपके अंतिम स्ट्रक्चर को अधिक स्थिर बनाएगी। तीनएक दूसरी मंज़िल जोड़ेंः सावधानीपूर्वक एक दूसरी चार-पत्तों की सेल को पहली पर्त के ऊपर बनाएँ। अब आपके पास एक स्थिर दो मंज़िला स्ट्रक्चर तैयार है। आप चाहे जितनी मंज़िल इसके ऊपर बनाएँ, जब तक की आपके पत्ते समाप्त ना हो जाएँ या आपको लगे की स्ट्रक्चर काफी ऊंचा हो गया है। चार-पत्तों की सेल बहुत मजबूत आधार होती है, इसलिए आप इस नींव के ऊपर, कई मंज़िलें और बना सकते हैं। - आधार ताल पर और टी-आकार को जोड़ कर, घर में कई "विंग्स " और जोड़ने की सोचें। जब भी कभी आप पत्तों के आकार को बनाएँ जो मेज के परपेंड़ी कुलर हो, तो सुनिश्चित करें की उसके ऊपर एक सपाट पर्त पत्तों की हो जो "सीलिंग" बन जाए। इससे पत्ते अधिक स्ट्रक्चरेली सुदृढ़ होंगे, और यह पूरी बिल्डिंग को ज्यादा घर जैसा दिखने वाला आकार देगा। - रचनात्मक बनें। इस तरीके में आकाश आपकी सीमा है - इसलिए यह देखें की आप कितना बड़ा घर बना सकते हैं! एकसस्ते ताश के पत्तों का इस्तेमाल करेंः महंगे, प्रो-क्वालिटी के पत्ते अधिकतर चिकने और चमकदार होते हैं, और उनके फिसल जाने की संभावना काफी है। सस्ते पत्ते दानेदार और कम चिकने होते हैं, और इस प्रकार साथ लगाने के लिए बेहतर होते हैं। दोअपनी सतह को सावधानीपूर्वक चुनेंः एक सुरक्षित, मजबूत जगह का चयन करें जो आपके पत्तों को रखने के दौरान खिसक नहीं जाएगी। थोड़ी दानेदार सतह पर बनाने का प्रयास करें, जैसे की बिल्लियर्ड्स टेबल, या फिर अध बनी लकड़ी की टेबल। चिकनी सतह, जैसे ग्लास टेबल से आपके पत्तों के फिसलने की संभावना है। चिकनी सतह को दानेदार सतह बनाने के लिए, टेबलक्लॉथ या प्लेस-मैट के इस्तेमाल पर विचार करें; लेकिन जानकार रहें की इस प्रकार के बिना जुड़े आधार के अचानक हट जाने की संभावना अधिक होती है। - सुनिश्चित करें की वहाँ हवा ना हो! अपना ताश के पत्तों का घर, अंदर बनाएँ, खुली खिडकियों, दरवाजे, पंखे और वेंट से दूर। आप अपनी कड़ी मेहनत को एक गलत समय पर आए हवा के झोंके से बरबाद होते नहीं देखना चाहेंगे। तीनशांत रहेंः एक हिलता हुआ हाथ या एक आकस्मिक ऐठन से आपका घर गिर सकता है। प्रत्येक पत्ते को हल्के से लेकिन अच्छी तरह से, अपने प्रमुख हाथ की दो उँगलियों के बीच पकड़ें। उसे आसानी से अपनी जगह पर "सरकाएँ "। - आपको ग्लू, टेप, स्टेपल्स, पेपर क्लिप्स, या अन्य प्रकार के फास्टनर्स का उपयोग नहीं करना चाहिए। पत्तों को, एक दूसरे पर लटकने के लिए, ना ही मोड़ें, या उनपर खांचे बनाएँ जिससे वह एक दूसरे में फिट हो जाएँ। ऊपर की सभी विधियाँ 'छल ' के लिए हैं, और आप इनके कारण वैसे भी कुछ हासिल नहीं कर रहे हैं। - आप जैसे अपना ताश के पत्तों का घर बनाएँगे, तो उस पार सांस छोड़ने का प्रयास मत करें। सांस का एक प्रबल झोंका, आसानी से आपकी रचना को गिरा सकता है। - धैर्य रखें। अगर आप बहुत जल्दबाज़ी करेंगे, तो आप अपने घर को तोड़ सकते हैं! - लॉक बॉक्सः दो पत्तों को लें, प्रत्येक हाथ में एक, जिसमे लंबी साइड वाला किनारा, टेबल के समानान्तर हो। उनको एक दूसरे के ऊपर टिकाएँ जिससे थोड़ा "ऑफ " T बने। बहुत अच्छे। इसके बाद, एक तीसरे पत्ते को किस एक पत्ते के बीच में लगाएँ जिससे एक और टेढ़ा मेढ़ा T बने। बॉक्स को चौथे पत्ते से T बनाकर बंद करें।
LUCKNOW: केजीएमयू के वीसी प्रो। रविकांत ने आंको सर्जरी के बाद डिपार्टमेंट ऑफ आर्गनट्रांसप्लांट का चार्ज भी खुद सम्भाल लिया है। अभी तक ये दोनों ही चार्ज सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी के एचओडी प्रो। अभिजीत चन्द्रा के पास था। केजीएमयू के सूत्रों की मानें तो एक दो दिनों में चिकित्सा अधीक्षकों का भी बदलाव सम्भव है। केजीएमयू में इस बात को लेकर चर्चा गर्म है।
LUCKNOW: केजीएमयू के वीसी प्रो। रविकांत ने आंको सर्जरी के बाद डिपार्टमेंट ऑफ आर्गनट्रांसप्लांट का चार्ज भी खुद सम्भाल लिया है। अभी तक ये दोनों ही चार्ज सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी के एचओडी प्रो। अभिजीत चन्द्रा के पास था। केजीएमयू के सूत्रों की मानें तो एक दो दिनों में चिकित्सा अधीक्षकों का भी बदलाव सम्भव है। केजीएमयू में इस बात को लेकर चर्चा गर्म है।
आज कल सोशल मीडिया पर चीजें एेसे वायरल होती हैं जैसे जंगल में अाग। सोशल मीडिया झूठ फैलाने का आजकल सबसे बड़ा साधन बनकर उभरा है। सबसे बड़ी बात तो यह भी है कि लोग बिना जांचे-परखे कोई भी जानकारी शेयर करते हैं आैर उसे सच भी मान लेते हैं। जिसका फायदा कुछ लोग उठाते हैं और जानकारी के नाम पर अफवाहें और झूठी खबरों का प्रचार करते हैं। एेसे ही इन दिनों में सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हो रही है। जिसके लिए लोग ये दावा कर रहे हैं कि यह दुनिया का सबसे ऊंचा पुल है जो कि सिक्किम में हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हाे रही फोटों की सच्चार्इ कुछ आैर हैं। बता दें कि यह स्काईवॉक दक्षिणी चीन के तियानमेन पहाड़ पर खोला गया है। 'कॉइलिंग ड्रैगन क्लिफ' नाम का यह स्काईवॉक साल 2016 में शुरू हुआ था। यह बेहद डरावना स्काईवॉक करीब 100 मीटर लंबा और मात्र 5 फीट चौड़ा है। इसकी ऊंचाई 46000 फुट हैं। कांच के फ्लोर वाले इस ब्रिज के एक ओर पहाड़ और दूसरी ओर गहरी खाई है। झांगजियाजी शहर के तयानमेनशान नेशनल पार्क में ब्रिज देखने के लिए सैकड़ों लोग आते हैं।
आज कल सोशल मीडिया पर चीजें एेसे वायरल होती हैं जैसे जंगल में अाग। सोशल मीडिया झूठ फैलाने का आजकल सबसे बड़ा साधन बनकर उभरा है। सबसे बड़ी बात तो यह भी है कि लोग बिना जांचे-परखे कोई भी जानकारी शेयर करते हैं आैर उसे सच भी मान लेते हैं। जिसका फायदा कुछ लोग उठाते हैं और जानकारी के नाम पर अफवाहें और झूठी खबरों का प्रचार करते हैं। एेसे ही इन दिनों में सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हो रही है। जिसके लिए लोग ये दावा कर रहे हैं कि यह दुनिया का सबसे ऊंचा पुल है जो कि सिक्किम में हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हाे रही फोटों की सच्चार्इ कुछ आैर हैं। बता दें कि यह स्काईवॉक दक्षिणी चीन के तियानमेन पहाड़ पर खोला गया है। 'कॉइलिंग ड्रैगन क्लिफ' नाम का यह स्काईवॉक साल दो हज़ार सोलह में शुरू हुआ था। यह बेहद डरावना स्काईवॉक करीब एक सौ मीटर लंबा और मात्र पाँच फीट चौड़ा है। इसकी ऊंचाई छियालीस हज़ार फुट हैं। कांच के फ्लोर वाले इस ब्रिज के एक ओर पहाड़ और दूसरी ओर गहरी खाई है। झांगजियाजी शहर के तयानमेनशान नेशनल पार्क में ब्रिज देखने के लिए सैकड़ों लोग आते हैं।
- 7 min ago एयरपोर्ट पर जाकर हसीना ने कैमरे के सामने उतारे कपड़े, फिर पैंट भी नीचे करके बोलीं- 'अब अच्छा लग रहा है' - 14 min ago इस हीरोइन ने खोले डर्टी फ़िल्म इंडस्ट्री के गंदे राज, कहा- मैं गंदी फिल्मों की एक्ट्रेस हूं और ये काम मेरे लिए. Don't Miss! Bollywood biggest flops of 2023: साल के पांच महीने गुजर चुके हैं और हिंदी बॉक्स ऑफिस के लिए ये पांच महीने औसत साबित हुए हैं। बॉलीवुड से अभी तक लगभग 1216 करोड़ तक का कलेक्शन किया जा चुका है। लेकिन खास बात है कि यह आंकड़ा सिर्फ दो बड़ी फिल्म की वजह से छुआ जा सका है, और वो है पठान और दे केरल स्टोरी। 2023 में जनवरी से मई के बीच केवल 18 हिंदी फिल्में रिलीज़ हुईं, जो कि पूर्व-महामारी काल (यानी 2019 तक) की तुलना में सबसे कम है। अब जबकि सिनेमाघर पूरी तरह से खुल चुके हैं, फिल्मों का आंकड़ा हैरान करता है। शाहरुख खान की पठान के बाद उम्मीद थी कि फरवरी में कार्तिक आर्यन की शहजादा और अक्षय कुमार की सेल्फी बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर दौड़ को जारी रखेगी. . लेकिन दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर पड़ी। जहां शहज़ादा ने महज 32. 50 करोड़ का कलेक्शन किया, वहीं, अक्षय कुमार जैसे सुपरस्टार की फिल्म 16. 85 करोड़ में सिमट गई। इन दोनों फिल्मों के फ्लॉप होने से बॉलीवुड को बड़ा झटका मिला। मार्च में फिल्म तू झूठी मैं मक्कार के साथ बॉलीवुड की रंगत वापस आई, लेकिन इसके बाद भी बॉक्स ऑफिस पर सूखा ही दिखा। फिर द केरल स्टोरी ने मई में शानदार प्रदर्शन किया और 230 करोड़ की कमाई के साथ सुपर डुपर रही। इन फिल्मों के अलावा कोई भी फिल्म का थिएटर बिजनेस 5 करोड़ का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाया है। ऑलमोस्ट प्यार विद डीजे मोहब्बत, फ़राज़, कुत्ते, ज्विगाटो, भीड, गांधी गोडसे एक युद्ध. . जैसी फिल्में कब आई और कब गई, किसी को पता भी नहीं चला। आईबी71- 16. 43 करोड़ (कमाई जारी है)
- सात मिनट ago एयरपोर्ट पर जाकर हसीना ने कैमरे के सामने उतारे कपड़े, फिर पैंट भी नीचे करके बोलीं- 'अब अच्छा लग रहा है' - चौदह मिनट ago इस हीरोइन ने खोले डर्टी फ़िल्म इंडस्ट्री के गंदे राज, कहा- मैं गंदी फिल्मों की एक्ट्रेस हूं और ये काम मेरे लिए. Don't Miss! Bollywood biggest flops of दो हज़ार तेईस: साल के पांच महीने गुजर चुके हैं और हिंदी बॉक्स ऑफिस के लिए ये पांच महीने औसत साबित हुए हैं। बॉलीवुड से अभी तक लगभग एक हज़ार दो सौ सोलह करोड़ तक का कलेक्शन किया जा चुका है। लेकिन खास बात है कि यह आंकड़ा सिर्फ दो बड़ी फिल्म की वजह से छुआ जा सका है, और वो है पठान और दे केरल स्टोरी। दो हज़ार तेईस में जनवरी से मई के बीच केवल अट्ठारह हिंदी फिल्में रिलीज़ हुईं, जो कि पूर्व-महामारी काल की तुलना में सबसे कम है। अब जबकि सिनेमाघर पूरी तरह से खुल चुके हैं, फिल्मों का आंकड़ा हैरान करता है। शाहरुख खान की पठान के बाद उम्मीद थी कि फरवरी में कार्तिक आर्यन की शहजादा और अक्षय कुमार की सेल्फी बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर दौड़ को जारी रखेगी. . लेकिन दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर पड़ी। जहां शहज़ादा ने महज बत्तीस. पचास करोड़ का कलेक्शन किया, वहीं, अक्षय कुमार जैसे सुपरस्टार की फिल्म सोलह. पचासी करोड़ में सिमट गई। इन दोनों फिल्मों के फ्लॉप होने से बॉलीवुड को बड़ा झटका मिला। मार्च में फिल्म तू झूठी मैं मक्कार के साथ बॉलीवुड की रंगत वापस आई, लेकिन इसके बाद भी बॉक्स ऑफिस पर सूखा ही दिखा। फिर द केरल स्टोरी ने मई में शानदार प्रदर्शन किया और दो सौ तीस करोड़ की कमाई के साथ सुपर डुपर रही। इन फिल्मों के अलावा कोई भी फिल्म का थिएटर बिजनेस पाँच करोड़ का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाया है। ऑलमोस्ट प्यार विद डीजे मोहब्बत, फ़राज़, कुत्ते, ज्विगाटो, भीड, गांधी गोडसे एक युद्ध. . जैसी फिल्में कब आई और कब गई, किसी को पता भी नहीं चला। आईबीइकहत्तर- सोलह. तैंतालीस करोड़
उसमें मथुरवावू पो सडे हुए देसवर एक छोटे बालप ये समान वे उनसे पूछने लगे, "वेहोशी में में कुछ अनुचित तो नही पर गया ?" मथुरबानू ने नमस्कार करते हुए कहा, "नही बाबा ! आपने बुछ नहीं किया । आप स्तोत्र पढ रहे थे, उसे विना समझे आपको बोई व्ययं वप्ट न दे इसलिए में यही गडा हो गया था।" श्रीरामकृष्ण की ज्वलन्त सगति से एक समय मथुरवानू पो वडा अद्भुत दर्शन प्राप्त हुआ, जिससे श्रीरामकृष्ण पर उनषा भक्ति- विश्वास सहस्र गुना बन गया। यह बात हमने प्रत्यक्ष श्रीरामकृष्ण में श्रीमुख से सुनी है। एक बार श्रीरामकृष्ण अपने हो विचारों में मग्न अपनी कोठरी के सामने के लम्बे बरामदे में से इधर से उधर टहल रहे थे । मन्दिर और पचवटी के बीच में एक अलग घर है--जिसे अब तप 'बाबू वापर पहने है - उसी के एक हिस्से में उस दिन मथुरबाबू अवेले बैठे थे। वहाँ से श्रीरामकृष्णा टहलना उन्हें स्पष्ट दोसता था। उस समय ये श्रीरामकृष्ण से सम्बन्ध में, तथा अन्य कामयाज के बारे में कुछ विचार पर रहे थे। मथुरवाबू ये यहाँ बैठे रहने की ओर श्रीरामकृष्ण या ध्यान विठकुल नहीं था। देखते देखते अपस्मात् मथुरवावू चौपर हो गये और दौड़ते हुए जावर श्रीरामकृष्ण के चरणों में लोटने लगे । तत्पश्चात् वे उठे और उनके दोनों पैरों को जोर से पडवर रोने लगे । श्रीरामकृष्ण बहते थे, "मै बोला- 'तू यह युवा पर रहा है ! तू इतना बडा आदमी, रानी वा दामाद, तू ही ऐसा करने लगा तो लोग क्या कहेंगे? शान्त हो, उठ P पर मेरी गुनता यौन है बहुत देर के बाद वह पुछ शान्त हुआ और बोग, 'अद्भुत दर्शन हुआ ! चावा ! आपटते समय सामने जाते थे तब ऐसा
उसमें मथुरवावू पो सडे हुए देसवर एक छोटे बालप ये समान वे उनसे पूछने लगे, "वेहोशी में में कुछ अनुचित तो नही पर गया ?" मथुरबानू ने नमस्कार करते हुए कहा, "नही बाबा ! आपने बुछ नहीं किया । आप स्तोत्र पढ रहे थे, उसे विना समझे आपको बोई व्ययं वप्ट न दे इसलिए में यही गडा हो गया था।" श्रीरामकृष्ण की ज्वलन्त सगति से एक समय मथुरवानू पो वडा अद्भुत दर्शन प्राप्त हुआ, जिससे श्रीरामकृष्ण पर उनषा भक्ति- विश्वास सहस्र गुना बन गया। यह बात हमने प्रत्यक्ष श्रीरामकृष्ण में श्रीमुख से सुनी है। एक बार श्रीरामकृष्ण अपने हो विचारों में मग्न अपनी कोठरी के सामने के लम्बे बरामदे में से इधर से उधर टहल रहे थे । मन्दिर और पचवटी के बीच में एक अलग घर है--जिसे अब तप 'बाबू वापर पहने है - उसी के एक हिस्से में उस दिन मथुरबाबू अवेले बैठे थे। वहाँ से श्रीरामकृष्णा टहलना उन्हें स्पष्ट दोसता था। उस समय ये श्रीरामकृष्ण से सम्बन्ध में, तथा अन्य कामयाज के बारे में कुछ विचार पर रहे थे। मथुरवाबू ये यहाँ बैठे रहने की ओर श्रीरामकृष्ण या ध्यान विठकुल नहीं था। देखते देखते अपस्मात् मथुरवावू चौपर हो गये और दौड़ते हुए जावर श्रीरामकृष्ण के चरणों में लोटने लगे । तत्पश्चात् वे उठे और उनके दोनों पैरों को जोर से पडवर रोने लगे । श्रीरामकृष्ण बहते थे, "मै बोला- 'तू यह युवा पर रहा है ! तू इतना बडा आदमी, रानी वा दामाद, तू ही ऐसा करने लगा तो लोग क्या कहेंगे? शान्त हो, उठ P पर मेरी गुनता यौन है बहुत देर के बाद वह पुछ शान्त हुआ और बोग, 'अद्भुत दर्शन हुआ ! चावा ! आपटते समय सामने जाते थे तब ऐसा
नई दिल्लीः विश्व कप (World Cup) के महामुकाबले में आज भारत-पाकिस्तान (Pakistan) की टीमें ओल्ड ट्रैफर्ड के मैदान पर भिड़ रही हैं. पाकिस्तान (Pakistan) के कप्तान सरफराज अहमद ने यहां ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर भारत के खिलाफ जारी विश्व कप (World Cup)-2019 के मैच में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अच्छी शुरुआत की और पहले विकेट के लिए 137 रन की साझेदारी की. यह विश्व कप (World Cup) मे पहली बार है जब भारत ने पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की है. वहीं भारत के लिए ओपनिंग करने आए रोहित शर्मा ने महज 34 गेंदो में अपना अर्धशतक पूरा किया और 85 गेंदो में अपने करियर का 24वां और विश्व कप का तीसरा शतक लगाया. रोहित शर्मा ने 100 रन पूरे करने के लिए 9 चौके और 3 छक्के लगाए. वनडे मैचो में यह उनका 24वां शतक है. इस विश्व कप (World Cup) में उनका यह दूसरा शतक है. वह इस विश्व कप (World Cup) में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक शतक भी लगा चुके हैं. रोहित शर्मा ने विश्व कप में पहली बार बांग्लादेश के खिलाफ 2015 में 137 रनों की पारी खेलकर पहला शतक लगाया था. पहली बार लोकेश राहुल के साथ पारी की शुरुआत करने पहुंचे रोहित शर्मा 31 ओवर की समाप्ति पर 102 रन बनाकर खेल रहे हैं. रोहित शर्मा ने हालात के मुताबिक बल्लेबाजी करते हुए विकेट भी बचाए रखा और मोहम्मद आमिर को सावधानी से खेलते हुए दूसरे गेंदबाजों पर जमकर हमले किए. 11वें ओवर में हालांकि वह रन आउट होने से बचे लेकिन इसके बाद वह सम्भल गए और राहुल के साथ मिलकर भारत को 17. 3 ओवर में 100 रनों तक पहुंचा दिया. न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत का पिछला मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया था. इस मैच में चोटिल शिखर धवन के स्थान पर विजय शंकर को टीम में जगह दी गई है. पाकिस्तान (Pakistan) ने दो बदलाव किए हैं. आसिफ अली और शाहीन अफरीदी के स्थान पर इमाद वसीम और शादाब खान खेलेंगे.
नई दिल्लीः विश्व कप के महामुकाबले में आज भारत-पाकिस्तान की टीमें ओल्ड ट्रैफर्ड के मैदान पर भिड़ रही हैं. पाकिस्तान के कप्तान सरफराज अहमद ने यहां ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर भारत के खिलाफ जारी विश्व कप -दो हज़ार उन्नीस के मैच में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अच्छी शुरुआत की और पहले विकेट के लिए एक सौ सैंतीस रन की साझेदारी की. यह विश्व कप मे पहली बार है जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की है. वहीं भारत के लिए ओपनिंग करने आए रोहित शर्मा ने महज चौंतीस गेंदो में अपना अर्धशतक पूरा किया और पचासी गेंदो में अपने करियर का चौबीसवां और विश्व कप का तीसरा शतक लगाया. रोहित शर्मा ने एक सौ रन पूरे करने के लिए नौ चौके और तीन छक्के लगाए. वनडे मैचो में यह उनका चौबीसवां शतक है. इस विश्व कप में उनका यह दूसरा शतक है. वह इस विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक शतक भी लगा चुके हैं. रोहित शर्मा ने विश्व कप में पहली बार बांग्लादेश के खिलाफ दो हज़ार पंद्रह में एक सौ सैंतीस रनों की पारी खेलकर पहला शतक लगाया था. पहली बार लोकेश राहुल के साथ पारी की शुरुआत करने पहुंचे रोहित शर्मा इकतीस ओवर की समाप्ति पर एक सौ दो रन बनाकर खेल रहे हैं. रोहित शर्मा ने हालात के मुताबिक बल्लेबाजी करते हुए विकेट भी बचाए रखा और मोहम्मद आमिर को सावधानी से खेलते हुए दूसरे गेंदबाजों पर जमकर हमले किए. ग्यारहवें ओवर में हालांकि वह रन आउट होने से बचे लेकिन इसके बाद वह सम्भल गए और राहुल के साथ मिलकर भारत को सत्रह. तीन ओवर में एक सौ रनों तक पहुंचा दिया. न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत का पिछला मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया था. इस मैच में चोटिल शिखर धवन के स्थान पर विजय शंकर को टीम में जगह दी गई है. पाकिस्तान ने दो बदलाव किए हैं. आसिफ अली और शाहीन अफरीदी के स्थान पर इमाद वसीम और शादाब खान खेलेंगे.
वैसे कहा ये भी जा रहा है कि ये किसी की शरारत भी हो सकती है। अब किसी की शरारत होने के संदेह में अभी कोई एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई है। इसके बावजूद क्योंकि मामला सलमान खान से जुड़ा है तो पुलिस तुरंत ही जांच-पड़ताल में लग गई है। सूत्रों से मिली जानकारी पर गौर करें तो पूरा मामला कुछ ऐसा है कि बीते हफ्ते किसी शख्स ने मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम से फोन करके ये कहा कि वह सलमान को जान से मार देगा। उसने ऐसा सिर्फ एक बार नहीं किया, बल्कि कई बार किया। इसके इतर उसने अपने बारे में कोई जानकारी नहीं दी और तुरंत फोन काट दिया। फोन को अटेंड करने वाले कर्मचारी ने इस बात की जानकारी अधिकारियों को दी। मामले को लेकर समझा ये भी जा रहा है कि यह किसी की महज शरारत भी हो सकती है। फिलहाल ताजा जानकारी के अनुसार पुलिस ने उस जगह का पता लगा लिया है जहां से फोन किया गया था। अब अन्य जानकारी आगे की छानबीन के बाद सामने आएगी।
वैसे कहा ये भी जा रहा है कि ये किसी की शरारत भी हो सकती है। अब किसी की शरारत होने के संदेह में अभी कोई एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई है। इसके बावजूद क्योंकि मामला सलमान खान से जुड़ा है तो पुलिस तुरंत ही जांच-पड़ताल में लग गई है। सूत्रों से मिली जानकारी पर गौर करें तो पूरा मामला कुछ ऐसा है कि बीते हफ्ते किसी शख्स ने मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम से फोन करके ये कहा कि वह सलमान को जान से मार देगा। उसने ऐसा सिर्फ एक बार नहीं किया, बल्कि कई बार किया। इसके इतर उसने अपने बारे में कोई जानकारी नहीं दी और तुरंत फोन काट दिया। फोन को अटेंड करने वाले कर्मचारी ने इस बात की जानकारी अधिकारियों को दी। मामले को लेकर समझा ये भी जा रहा है कि यह किसी की महज शरारत भी हो सकती है। फिलहाल ताजा जानकारी के अनुसार पुलिस ने उस जगह का पता लगा लिया है जहां से फोन किया गया था। अब अन्य जानकारी आगे की छानबीन के बाद सामने आएगी।
इस्राइल के तेल-अवीव शहर में एक फिलिस्तीनी नागरिक ने हमला कर दिया। हमले में सात लोग घायल हो गए। फिलिस्तीनी नागरिक ने पैदल चल रहे लोगों के ऊपर अपनी कार चढ़ा दी, जिसे गोली मारकर गिरा दिया गया। हमास ने घटना की सराहना की है। डॉक्टर मैगन डेविड एडोम ने बताया कि हमला तेल-अवीव शहर वाणिज्यिक क्षेत्र में हुआ था। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। घायल गंभीर हैं। बस स्टॉप के पास पांच लोग तो वहीं फुटपाथ पर एक महिला पड़ी थी। हमले में तीन लोगों की हालत काफी गंभीर है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की पहचान अबेद अल-वहाब खलीला के रूप में हुई है। वह कार से इलाके में पहुंचा। इस दौरान उसने पैदल चल रहे कुछ लोगों पर कार चढ़ा दी थी। इसके बाद वह कार से उतरा और आसपास के लोगों पर चाकू से हमला कर दिया। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उसका संबंध किसी आतंकी संगठन से है। हमास ने घटना की तारीफ की। तेल-अवीव ने मंगलवार को वेस्ट बैंक पर जोरदार हमला किया था। वेस्ट बैंक फिलिस्तीनी आतंकियों का गढ़ है, जहां उनके हथियारों का जखीरा भी रखा है। हमले में 11 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। वहीं, करीब 100 लोग घायल हैं। तेल-अवीव में हुए हमले को वेस्ट बैंक के हमले की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। बहरीन ने वेस्ट बैंक में हुए इस्राइली हमले की निंदा की है। हमले की आलोचना करते हुए बहरीन के विदेश मंत्रालय शांति की अपील की। मंत्रालय ने इस्राइल से आह्वान किया है कि वेस्ट बैंक में सैन्य अभियान को समाप्त करें। उन्होंने हिंसा रोकने की मांग की। विदेश मंत्रालय ने फिलिस्तीन की स्थिति के बारे में जानकारी ली। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
इस्राइल के तेल-अवीव शहर में एक फिलिस्तीनी नागरिक ने हमला कर दिया। हमले में सात लोग घायल हो गए। फिलिस्तीनी नागरिक ने पैदल चल रहे लोगों के ऊपर अपनी कार चढ़ा दी, जिसे गोली मारकर गिरा दिया गया। हमास ने घटना की सराहना की है। डॉक्टर मैगन डेविड एडोम ने बताया कि हमला तेल-अवीव शहर वाणिज्यिक क्षेत्र में हुआ था। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। घायल गंभीर हैं। बस स्टॉप के पास पांच लोग तो वहीं फुटपाथ पर एक महिला पड़ी थी। हमले में तीन लोगों की हालत काफी गंभीर है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की पहचान अबेद अल-वहाब खलीला के रूप में हुई है। वह कार से इलाके में पहुंचा। इस दौरान उसने पैदल चल रहे कुछ लोगों पर कार चढ़ा दी थी। इसके बाद वह कार से उतरा और आसपास के लोगों पर चाकू से हमला कर दिया। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उसका संबंध किसी आतंकी संगठन से है। हमास ने घटना की तारीफ की। तेल-अवीव ने मंगलवार को वेस्ट बैंक पर जोरदार हमला किया था। वेस्ट बैंक फिलिस्तीनी आतंकियों का गढ़ है, जहां उनके हथियारों का जखीरा भी रखा है। हमले में ग्यारह फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। वहीं, करीब एक सौ लोग घायल हैं। तेल-अवीव में हुए हमले को वेस्ट बैंक के हमले की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। बहरीन ने वेस्ट बैंक में हुए इस्राइली हमले की निंदा की है। हमले की आलोचना करते हुए बहरीन के विदेश मंत्रालय शांति की अपील की। मंत्रालय ने इस्राइल से आह्वान किया है कि वेस्ट बैंक में सैन्य अभियान को समाप्त करें। उन्होंने हिंसा रोकने की मांग की। विदेश मंत्रालय ने फिलिस्तीन की स्थिति के बारे में जानकारी ली। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
Quick links: Income Tax Return: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के लिए आज 31 जुलाई आखिरी तारीख तय की गई है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि अगर हम आखिरी तारीख को अपना रिटर्न नहीं दाखिल करते हैं तो क्या होगा? इसके अलावा अगर हम इस साल अपना आईटी रिटर्न दाखिल ही नहीं करना चाहते तो हमें कितना नुकसान हो सकता है। आइए इस स्टोरी में हम इन दोनों सवालों के जवाब जानते हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की एडवाइजरी में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपने रिटर्न की आखिरी तारीख मिस नहीं करनी चाहिए। हालांकि, अगर आप आखिरी तारीख को भी इनकम टैक्स रिटर्न भरना भूल जाते हैं, तो आप कुछ लेट फीस के साथ अपना रिटर्न बाद में भी फाइल कर सकते हैं। इसमें आपको नुकसान ये होगा कि आप इन्वेस्टमेंट जैसी स्थिति में अपने घाटे को अगले साल तक नहीं ले जा पाएंगे। पेनाल्टी की बात करें तो इनकम टैक्स भरने में देरी के कारण आपको इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 234एफ के अंतर्गत 5000 तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। इसके अलावा छोटे टैक्सपेयर, जिनका इनकम एक वित्तीय वर्ष में 5 लाख से कम है, उन्हें 1000 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। अगर टैक्सपेयर इस साल अपना रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो वो अपने इस साल के घाटे को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर सकते। इसके अलावा यदि करदाता अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने से चूक जाते हैं, तो उन्हें धारा 270ए के अंतर्गत कम बताई गई आय पर देय कर का 200 प्रतिशत जुर्माना भरना पड़ सकता है। ITR ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में फाइल किया जा सकता है। पर्सनल ITR फाइल करने के लिए दो कैटेगरी है। ITR-1 और ITR-4 कैटेगरी। ITR-1 में पर्सनल इंफो, ग्रॉस टोटल इनकम, टैक्स छूट की जानकारी, टैक्स भरने की जानकारी भरनी होगी। वहीं, ITR-4 में इन सभी जानकारियों के साथ डिस्क्लोजर भी फाइल करनी होगी। इसके अलावा किसी टैक्सपेयर्स को ITR फाइल करने में कोई पेरशानी आती है तो वो इनकैम टेक्स के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/help/offline-utility पर क्लिक कर सकते हैं। इसके बाद स्क्रीन पर शो हो रहे स्टेप्स को फॉलो करके भी ITR फाइल किया जा सकता है।
Quick links: Income Tax Return: इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए आज इकतीस जुलाई आखिरी तारीख तय की गई है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि अगर हम आखिरी तारीख को अपना रिटर्न नहीं दाखिल करते हैं तो क्या होगा? इसके अलावा अगर हम इस साल अपना आईटी रिटर्न दाखिल ही नहीं करना चाहते तो हमें कितना नुकसान हो सकता है। आइए इस स्टोरी में हम इन दोनों सवालों के जवाब जानते हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की एडवाइजरी में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपने रिटर्न की आखिरी तारीख मिस नहीं करनी चाहिए। हालांकि, अगर आप आखिरी तारीख को भी इनकम टैक्स रिटर्न भरना भूल जाते हैं, तो आप कुछ लेट फीस के साथ अपना रिटर्न बाद में भी फाइल कर सकते हैं। इसमें आपको नुकसान ये होगा कि आप इन्वेस्टमेंट जैसी स्थिति में अपने घाटे को अगले साल तक नहीं ले जा पाएंगे। पेनाल्टी की बात करें तो इनकम टैक्स भरने में देरी के कारण आपको इनकम टैक्स एक्ट, एक हज़ार नौ सौ इकसठ के सेक्शन दो सौ चौंतीसएफ के अंतर्गत पाँच हज़ार तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। इसके अलावा छोटे टैक्सपेयर, जिनका इनकम एक वित्तीय वर्ष में पाँच लाख से कम है, उन्हें एक हज़ार रुपयापये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। अगर टैक्सपेयर इस साल अपना रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो वो अपने इस साल के घाटे को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर सकते। इसके अलावा यदि करदाता अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने से चूक जाते हैं, तो उन्हें धारा दो सौ सत्तरए के अंतर्गत कम बताई गई आय पर देय कर का दो सौ प्रतिशत जुर्माना भरना पड़ सकता है। ITR ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में फाइल किया जा सकता है। पर्सनल ITR फाइल करने के लिए दो कैटेगरी है। ITR-एक और ITR-चार कैटेगरी। ITR-एक में पर्सनल इंफो, ग्रॉस टोटल इनकम, टैक्स छूट की जानकारी, टैक्स भरने की जानकारी भरनी होगी। वहीं, ITR-चार में इन सभी जानकारियों के साथ डिस्क्लोजर भी फाइल करनी होगी। इसके अलावा किसी टैक्सपेयर्स को ITR फाइल करने में कोई पेरशानी आती है तो वो इनकैम टेक्स के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/help/offline-utility पर क्लिक कर सकते हैं। इसके बाद स्क्रीन पर शो हो रहे स्टेप्स को फॉलो करके भी ITR फाइल किया जा सकता है।
भारत में परफॉरमेंस कार्स की बढती संख्या के साथ, इन्हें सड़क पर देखना आम हो गया है. भारत में इनकी बढती लोकप्रियता के साथ ही कार शौक़ीन भारत में और भी कार्स को इम्पोर्ट करा रहे हैं. भारत में आपको Ferrari 430 Scuderia और एक Aston Martin N340 जैसी एक्सोटिक कार्स भी मिल जायेंगी! हाल में ही, भारत की सड़कों पर एक नहीं बल्कि तीन Lamborghini Aventador SVJ सुपरकार्स देखने को मिलीं. SVJ का मतलब है Superveloce Jota. Superveloce का मतलब है "Super Fast" (सुपरफ़ास्ट) वहीँ Jota नाम 1970 के दशक में अपने आप में नायाब Lamborghini Miura से लिया गया है. Aventador SVJ भारत की सबसे महंगी स्पोर्ट्स कार है और इसकी कीमत नयी Rolls Royce Phantom से थोड़ी ही कम है. इतने ज्यादा टैक्स के साथ एक Lamborghini Aventador SVJ को भारत में इम्पोर्ट कराने का खर्च लगभग 9 करोड़ रूपए है. रोड टैक्स को जोड़ कर Aventador SVJ की कीमत 12 करोड़ रूपए पहुँच जाती है! पेश है एक विडियो जिसमें आप Lamborghini Aventador SVJ को टेम्पररी नम्बर प्लेट के साथ देख सकते हैं. Vipin Maben के इस विडियो में देखी गयी गाड़ी Arancio Argos (Orange) रंग की है. दुनियाभर में Aventador SVJ के केवल 900 यूनिट्स हैं जो इस गाड़ी को और भी ख़ास बनाता है. ये मॉडल Bangalore के एक मशहूर गेराज का है और ये गाड़ी इस शहर की दूसरी SVJ है. इस विडियो में देखी जाने वाली गाड़ी बिल्कुल नयी है और इसे अभी रजिस्ट्रेशन नम्बर भी नहीं मिला है. Lamborghini ने पिछले साल Aventador SVJ को आधिकारिक तौर पर पेश किया था और ये अब तक की सबसे तेज़ Lamborghini गाड़ी है. SVJ में एक विशाल 6.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन लगा हुआ है. ये अधिकतम 770 बीएचपी और 720 एनएम उत्पन्न करता है. इसमें एक 7-स्पीड औत्मैटिक सिंगल-क्लच गियरबॉक्स मिलता है. परफॉरमेंस के आंकड़ों की बात करें तो Lamborghini Aventador SVJ को 0-100 किमी/घंटे तक पहुँचने में केवल 2.8 सेकेंड्स लगते हैं जो Aventador S से 0.1 सेकेण्ड तेज़ है. इसकी टॉप स्पीड 349 किमी/घंटे की है. इस सुपरकार में Nireo व्हील्स लगे हैं जो कार्बन फाइबर और एल्युमीनियम से बने हैं. इसमें Pirelli P Zero Corsa टायर्स लगे हैं जिनकी ग्रिप बेहद अच्छी है. Lamborghini ने इसके एग्जॉस्ट सिस्टम को भी बदला है ताकि गाड़ी का बैक प्रेशर कम हो और गाड़ी ज्यादा आकर्षक आवाज़ निकाल सके.
भारत में परफॉरमेंस कार्स की बढती संख्या के साथ, इन्हें सड़क पर देखना आम हो गया है. भारत में इनकी बढती लोकप्रियता के साथ ही कार शौक़ीन भारत में और भी कार्स को इम्पोर्ट करा रहे हैं. भारत में आपको Ferrari चार सौ तीस Scuderia और एक Aston Martin Nतीन सौ चालीस जैसी एक्सोटिक कार्स भी मिल जायेंगी! हाल में ही, भारत की सड़कों पर एक नहीं बल्कि तीन Lamborghini Aventador SVJ सुपरकार्स देखने को मिलीं. SVJ का मतलब है Superveloce Jota. Superveloce का मतलब है "Super Fast" वहीँ Jota नाम एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में अपने आप में नायाब Lamborghini Miura से लिया गया है. Aventador SVJ भारत की सबसे महंगी स्पोर्ट्स कार है और इसकी कीमत नयी Rolls Royce Phantom से थोड़ी ही कम है. इतने ज्यादा टैक्स के साथ एक Lamborghini Aventador SVJ को भारत में इम्पोर्ट कराने का खर्च लगभग नौ करोड़ रूपए है. रोड टैक्स को जोड़ कर Aventador SVJ की कीमत बारह करोड़ रूपए पहुँच जाती है! पेश है एक विडियो जिसमें आप Lamborghini Aventador SVJ को टेम्पररी नम्बर प्लेट के साथ देख सकते हैं. Vipin Maben के इस विडियो में देखी गयी गाड़ी Arancio Argos रंग की है. दुनियाभर में Aventador SVJ के केवल नौ सौ यूनिट्स हैं जो इस गाड़ी को और भी ख़ास बनाता है. ये मॉडल Bangalore के एक मशहूर गेराज का है और ये गाड़ी इस शहर की दूसरी SVJ है. इस विडियो में देखी जाने वाली गाड़ी बिल्कुल नयी है और इसे अभी रजिस्ट्रेशन नम्बर भी नहीं मिला है. Lamborghini ने पिछले साल Aventador SVJ को आधिकारिक तौर पर पेश किया था और ये अब तक की सबसे तेज़ Lamborghini गाड़ी है. SVJ में एक विशाल छः.पाँच-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन लगा हुआ है. ये अधिकतम सात सौ सत्तर बीएचपी और सात सौ बीस एनएम उत्पन्न करता है. इसमें एक सात-स्पीड औत्मैटिक सिंगल-क्लच गियरबॉक्स मिलता है. परफॉरमेंस के आंकड़ों की बात करें तो Lamborghini Aventador SVJ को शून्य-एक सौ किमी/घंटे तक पहुँचने में केवल दो.आठ सेकेंड्स लगते हैं जो Aventador S से शून्य.एक सेकेण्ड तेज़ है. इसकी टॉप स्पीड तीन सौ उनचास किमी/घंटे की है. इस सुपरकार में Nireo व्हील्स लगे हैं जो कार्बन फाइबर और एल्युमीनियम से बने हैं. इसमें Pirelli P Zero Corsa टायर्स लगे हैं जिनकी ग्रिप बेहद अच्छी है. Lamborghini ने इसके एग्जॉस्ट सिस्टम को भी बदला है ताकि गाड़ी का बैक प्रेशर कम हो और गाड़ी ज्यादा आकर्षक आवाज़ निकाल सके.
सूत्रों के मुताबिक पुलिस की हिरासत में दोनों आरोपियों (Udaipur Murder Case) को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है. दोनों अब भी पुलिस के सामने अपने मज़हब को लेकर उद्देश्य को पूरा करने का दावा कर रहे हैं. राजस्थान (Rajasthan) के उदयपुर कन्हैयालाल हत्याकांड में अब तक की जांच को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को NIA टीम जयपुर कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी. जयपुर की स्पेशल NIA कोर्ट में दोनों आरोपियों के प्रोडक्शन वारंट के लिए NIA टीम अर्जी दाखिल करेगी. सूत्रों के मुताबिक अभी तक की जांच में पता चला है कि रियाज़ मोहम्मद और गौस मोहम्मद इस हत्याकांड (Udaipur Murder Case) में अकेले नहीं थे बल्कि इनका एक ग्रुप है. जिसमे एक दर्जन से ज्यादा लोग शामिल हैं. इनके ग्रुप में पाकिस्तान के कुछ ऐसे लोग भी है जिनके संबंध कई आतंकी ग्रुप से है. कन्हैया की हत्या के पीछे इनका मक़सद सिर्फ दहशत फैलाना था और इनके निशाने पर कन्हैया के अलावा एक नितिन जैन नाम का शख्स भी था. दोनों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी के बाद कन्हैयालाल की लाइव हत्या करने का मक़सद था, ताकि एक समुदाय में दहशत फैल जाए और दोनों अपने धर्म के हीरो बन जाएं. इस लोगों का ग्रुप पिछले काफी समय से हिंदू-मुस्लिम विवाद की खबरों पर सोशल मीडिया पर बात किया करता था. ये लोग पिछले काफी वक्त से कुछ बड़ा करने की साज़िश रच रहे थे. दोनों आरोपी भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने के लिए ISIS को अपना आदर्श मानते थे. दोनों आरोपी अक्सर ISIS और तालिबान के वीडियो देखा करते थे. ये दोनों हिंदुओं को काफ़िर समझते है. नूपुर शर्मा के बयान के बाद जब देश के कई हिस्सों में पथराव हुआ तो उनको लगा कि हिंदुओं में दहशत फैलाने का ये अच्छा मौका है. दोनों को लगा कि अपने मज़हब का हीरो बनने का इससे अच्छा मौका नहीं हो सकता. नूपुर शर्मा के पोस्ट पर कन्हैयालाल की प्रतिक्रिया के बाद दोनों ने उसे सबसे आसान टारगेट समझा. हालांकि इनके निशाने पर कई बड़े लोग भी थे लेकिन वो इनकी पहुंच से काफी दूर थे. सूत्रों के मुताबिक पुलिस की हिरासत में दोनों आरोपियों को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है. दोनों अब भी पुलिस के सामने अपने मज़हब को लेकर उद्देश्य को पूरा करने का दावा कर रहे हैं. इनका कहना है कि भले ही वे अपने धर्म के लिए कुर्बान हो जाएंगे लेकिन उसके बाद भी उनके ग्रुप के कई लोग है जो भारत को इस्लामिक देश बनाने में लगे हुए है. आने वाले दिनों में पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी करने वालो का अंजाम कन्हैयालाल से भी बुरा होगा. पुलिस के सूत्रों के मुताबिक आरोपी 2014 में ट्रेन के जरिए 45 दिनों के लिए पाकिस्तान गया था. वह वहां ज्यादातर उन लोगों के संपर्क में था, जो अलग अलग आतंकी गुट से किसी ना किसी तरह से जुड़े हुए थे. पाकिस्तान के आकाओं के आदेश पर पिछले कई सालों से ये दोनों राजस्थान में रहते हुए स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे थे. काफी समय से ये अपने आकाओं से अलग अलग एप्स के ज़रिए संपर्क में थे.इनका मकसद कन्हैयालाल की हत्या करने के बाद अजमेर में अल्लाह के सामने जाकर उसकी शान में गुस्ताखी करने वालों को सज़ा देकर आने का दावा करने का था. सूत्रों के मुताबिक पुलिस की पूछताछ में दोनों ने बताया कि ये साज़िश उन्होंने नूपुर शर्मा के बयान के बाद रची थी. जिसके बाद उदयपुर के सीपाटिया इलाके में वेल्डिंग फैक्टरी में उन्होंने हथियार बनाये और हत्या को अंजाम दिया. हत्या को अंजाम देने के बाद दोनों ने उस फैक्टरी के मालिक के ऑफिस में वीडियो बनाया. जांच एजेंसियों ने वहां से अपराध में इस्तेमाल हथियार बरामद कर लिए है.
सूत्रों के मुताबिक पुलिस की हिरासत में दोनों आरोपियों को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है. दोनों अब भी पुलिस के सामने अपने मज़हब को लेकर उद्देश्य को पूरा करने का दावा कर रहे हैं. राजस्थान के उदयपुर कन्हैयालाल हत्याकांड में अब तक की जांच को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को NIA टीम जयपुर कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी. जयपुर की स्पेशल NIA कोर्ट में दोनों आरोपियों के प्रोडक्शन वारंट के लिए NIA टीम अर्जी दाखिल करेगी. सूत्रों के मुताबिक अभी तक की जांच में पता चला है कि रियाज़ मोहम्मद और गौस मोहम्मद इस हत्याकांड में अकेले नहीं थे बल्कि इनका एक ग्रुप है. जिसमे एक दर्जन से ज्यादा लोग शामिल हैं. इनके ग्रुप में पाकिस्तान के कुछ ऐसे लोग भी है जिनके संबंध कई आतंकी ग्रुप से है. कन्हैया की हत्या के पीछे इनका मक़सद सिर्फ दहशत फैलाना था और इनके निशाने पर कन्हैया के अलावा एक नितिन जैन नाम का शख्स भी था. दोनों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी के बाद कन्हैयालाल की लाइव हत्या करने का मक़सद था, ताकि एक समुदाय में दहशत फैल जाए और दोनों अपने धर्म के हीरो बन जाएं. इस लोगों का ग्रुप पिछले काफी समय से हिंदू-मुस्लिम विवाद की खबरों पर सोशल मीडिया पर बात किया करता था. ये लोग पिछले काफी वक्त से कुछ बड़ा करने की साज़िश रच रहे थे. दोनों आरोपी भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने के लिए ISIS को अपना आदर्श मानते थे. दोनों आरोपी अक्सर ISIS और तालिबान के वीडियो देखा करते थे. ये दोनों हिंदुओं को काफ़िर समझते है. नूपुर शर्मा के बयान के बाद जब देश के कई हिस्सों में पथराव हुआ तो उनको लगा कि हिंदुओं में दहशत फैलाने का ये अच्छा मौका है. दोनों को लगा कि अपने मज़हब का हीरो बनने का इससे अच्छा मौका नहीं हो सकता. नूपुर शर्मा के पोस्ट पर कन्हैयालाल की प्रतिक्रिया के बाद दोनों ने उसे सबसे आसान टारगेट समझा. हालांकि इनके निशाने पर कई बड़े लोग भी थे लेकिन वो इनकी पहुंच से काफी दूर थे. सूत्रों के मुताबिक पुलिस की हिरासत में दोनों आरोपियों को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है. दोनों अब भी पुलिस के सामने अपने मज़हब को लेकर उद्देश्य को पूरा करने का दावा कर रहे हैं. इनका कहना है कि भले ही वे अपने धर्म के लिए कुर्बान हो जाएंगे लेकिन उसके बाद भी उनके ग्रुप के कई लोग है जो भारत को इस्लामिक देश बनाने में लगे हुए है. आने वाले दिनों में पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी करने वालो का अंजाम कन्हैयालाल से भी बुरा होगा. पुलिस के सूत्रों के मुताबिक आरोपी दो हज़ार चौदह में ट्रेन के जरिए पैंतालीस दिनों के लिए पाकिस्तान गया था. वह वहां ज्यादातर उन लोगों के संपर्क में था, जो अलग अलग आतंकी गुट से किसी ना किसी तरह से जुड़े हुए थे. पाकिस्तान के आकाओं के आदेश पर पिछले कई सालों से ये दोनों राजस्थान में रहते हुए स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे थे. काफी समय से ये अपने आकाओं से अलग अलग एप्स के ज़रिए संपर्क में थे.इनका मकसद कन्हैयालाल की हत्या करने के बाद अजमेर में अल्लाह के सामने जाकर उसकी शान में गुस्ताखी करने वालों को सज़ा देकर आने का दावा करने का था. सूत्रों के मुताबिक पुलिस की पूछताछ में दोनों ने बताया कि ये साज़िश उन्होंने नूपुर शर्मा के बयान के बाद रची थी. जिसके बाद उदयपुर के सीपाटिया इलाके में वेल्डिंग फैक्टरी में उन्होंने हथियार बनाये और हत्या को अंजाम दिया. हत्या को अंजाम देने के बाद दोनों ने उस फैक्टरी के मालिक के ऑफिस में वीडियो बनाया. जांच एजेंसियों ने वहां से अपराध में इस्तेमाल हथियार बरामद कर लिए है.
राज एक्स्प्रेस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) जी-7 के वार्षिक शिखर सम्मेलन (G-7 Summit) में भाग लेने के लिए जापान (Japan) के हिरोशिमा (Hiroshima) पहुंच गए हैं। पीएम मोदी ने बताया कि वो यहां जी-7 में हिस्सा लेने सहित कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी (PM Modi) जापान में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मिले। पीएम मोदी जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के न्योते पर हिरोशिमा आएं हैं। दरअसल जापान, जी-7 समूह के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में इसके शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और भारत को इसमें अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। हिरोशिमा में जी-7 देशों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद पीएम मोदी बहुपक्षी बैठकों में हिस्सा लेने के लिए पपुआ न्यूगिनी और आस्ट्रेलिया जाएंगे। मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और सौहार्द चीन के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए बहुत जरूरी है। भारत और चीन संबंधों में सुधार आपसी हितों और एक-दूसरे के सम्मान के साथ ही संभव है। उन्होंने कहा कि चीन के साथ संबंधों को सामान्य करने से क्षेत्र को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को लाभ होगा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सामान्य संबंध चाहता है। अब यह उन देशों की जिम्मेदारी है कि वे आतंकवाद और दुश्मनी से मुक्त एक अनुकूल माहौल निर्मित करें। इस संबंध में जरुरी कदम उठाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी जापान, पापुआ न्यू गिनी और ऑस्ट्रेलिया की साप्ताहिक यात्रा के पहले पड़ाव के रूप में हिरोशिमा पहुंच गए हैं। यहां वह जापान की अध्यक्षता में आयोजित किए जा रहे जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। पीएम का जापान का यह दौरा 19 से 21 मई तक रहेगा। जिसमें उनकी जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होगी। उनके अलावा समूह के कुछ अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ प्रधानमंत्री द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि हिरोशिमा में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमीर जेलेंस्की के बीच शनिवार को एक द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। बताया जाता है कि इसके लिए दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिक जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकात की संभावनाएं तलाश रहे हैं। अगर पीएम मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की हिरोशिमा में मिलते हैं तो यह रूस और यूक्रेन के बीच बीते करीब सालभर से अधिक समय से जारी विवाद के मध्य उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन विवाद के बाद से लेकर अब तक भारत ने सार्वजनिक रूप से रूस की निंदा नहीं की है। उसका कहना है कि इस विवाद का दोनों देशों को बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने समरकंद में एससीओ के राष्ट्रप्रमुखों की बैठक से इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में भी कहा था कि यह युद्ध का युग नहीं है। माना जा रहा है कि इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक यूक्रेन से अधिकारियों ने कहा कि भारत और यूक्रेन के राष्ट्रप्रमुखों की यह द्विपक्षीय वार्ता 20 मई को हो सकती है। अभी इस संबंध में कुछ भी तय नहीं हुआ है। दोनों पक्ष इससे संबंधित प्रस्ताव को अंतिम रूप देने को लेकर चर्चा कर रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमीर जेलेंस्की जापान के निमंत्रण पर जी-7 शिखर सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं। इस वर्ष जापान जी-7 का अध्यक्ष है। बताते चलें कि यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिन झापोरोवा ने पिछले अप्रैल महीने में भारत की यात्रा की थी। उक्त तनाव के बीच ये किसी यूक्रेनी मंत्री की पहली भारत यात्रा थी। झापरोवा ने नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी को राष्ट्रपति जेलेंस्की का प्रधानमंत्री मोदी को लिखा हुआ एक पत्र भी सौंपा था। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
राज एक्स्प्रेस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-सात के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जापान के हिरोशिमा पहुंच गए हैं। पीएम मोदी ने बताया कि वो यहां जी-सात में हिस्सा लेने सहित कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी जापान में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मिले। पीएम मोदी जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के न्योते पर हिरोशिमा आएं हैं। दरअसल जापान, जी-सात समूह के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में इसके शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और भारत को इसमें अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। हिरोशिमा में जी-सात देशों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद पीएम मोदी बहुपक्षी बैठकों में हिस्सा लेने के लिए पपुआ न्यूगिनी और आस्ट्रेलिया जाएंगे। मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और सौहार्द चीन के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए बहुत जरूरी है। भारत और चीन संबंधों में सुधार आपसी हितों और एक-दूसरे के सम्मान के साथ ही संभव है। उन्होंने कहा कि चीन के साथ संबंधों को सामान्य करने से क्षेत्र को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को लाभ होगा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सामान्य संबंध चाहता है। अब यह उन देशों की जिम्मेदारी है कि वे आतंकवाद और दुश्मनी से मुक्त एक अनुकूल माहौल निर्मित करें। इस संबंध में जरुरी कदम उठाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी जापान, पापुआ न्यू गिनी और ऑस्ट्रेलिया की साप्ताहिक यात्रा के पहले पड़ाव के रूप में हिरोशिमा पहुंच गए हैं। यहां वह जापान की अध्यक्षता में आयोजित किए जा रहे जी-सात शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। पीएम का जापान का यह दौरा उन्नीस से इक्कीस मई तक रहेगा। जिसमें उनकी जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होगी। उनके अलावा समूह के कुछ अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ प्रधानमंत्री द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि हिरोशिमा में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमीर जेलेंस्की के बीच शनिवार को एक द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। बताया जाता है कि इसके लिए दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिक जी-सात शिखर सम्मेलन से इतर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकात की संभावनाएं तलाश रहे हैं। अगर पीएम मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की हिरोशिमा में मिलते हैं तो यह रूस और यूक्रेन के बीच बीते करीब सालभर से अधिक समय से जारी विवाद के मध्य उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन विवाद के बाद से लेकर अब तक भारत ने सार्वजनिक रूप से रूस की निंदा नहीं की है। उसका कहना है कि इस विवाद का दोनों देशों को बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने समरकंद में एससीओ के राष्ट्रप्रमुखों की बैठक से इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में भी कहा था कि यह युद्ध का युग नहीं है। माना जा रहा है कि इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक यूक्रेन से अधिकारियों ने कहा कि भारत और यूक्रेन के राष्ट्रप्रमुखों की यह द्विपक्षीय वार्ता बीस मई को हो सकती है। अभी इस संबंध में कुछ भी तय नहीं हुआ है। दोनों पक्ष इससे संबंधित प्रस्ताव को अंतिम रूप देने को लेकर चर्चा कर रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमीर जेलेंस्की जापान के निमंत्रण पर जी-सात शिखर सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं। इस वर्ष जापान जी-सात का अध्यक्ष है। बताते चलें कि यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिन झापोरोवा ने पिछले अप्रैल महीने में भारत की यात्रा की थी। उक्त तनाव के बीच ये किसी यूक्रेनी मंत्री की पहली भारत यात्रा थी। झापरोवा ने नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी को राष्ट्रपति जेलेंस्की का प्रधानमंत्री मोदी को लिखा हुआ एक पत्र भी सौंपा था। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
बिलासपुर - नगर परिषद बिलासपुर एरिया में रेहड़ी-फड़ी वालों का सुनिश्चित तरीके से बसाव होगा। इस बाबत नगर परिषद प्रशासन स्ट्रीट वेंडर का सर्वेक्षण करवाएगी। यह सर्वे कार्य हरियाणा नवयुवक कला संगम द्वारा जीआईएस आधारित वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा। नौ फरवरी से सर्वे कार्य की शुरुआत की जाएगी। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी केआर ठाकुर ने खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद बिलासपुर में अगर किसी कारणवश स्ट्रीट वैंडर का सर्वे नहीं हुआ है, तो यह सर्वे चतुर्थ व अंतिम चरण में नौ फरवरी को हरियाणा नवयुवक कला संगम द्वारा जीआईएस आधारित वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा। श्री ठाकुर ने यह भी कहा है कि वंचित स्ट्रीट वेंडर नगर परिषद से संपर्क कर अपना सर्वे करवाने के लिए आगे आएं तथा सर्वेक्षण के दौरान अपने दो पहचान पत्र की फोटो प्रति एवं दो पासपोर्ट साइज फोटो अपने पास रखें तथा सर्वे के समय सर्वेकर्ता को दें। उन्होंने बताया कि उपरोक्त दस्तावेज के साथ सर्वेकर्ता विक्रय स्थल पर ही सर्वे फार्म भरेगा और फोटो भी खींचेगा। उसके बाद ही नगर परिषद द्वारा पहचान पत्र प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सर्वे कार्य पूरा करने के बाद इन्हें बसाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि शहर में जगह-जगह दुकानदारी सजाए बैठे रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए अलग से मार्केट विकसित की जाएगी।
बिलासपुर - नगर परिषद बिलासपुर एरिया में रेहड़ी-फड़ी वालों का सुनिश्चित तरीके से बसाव होगा। इस बाबत नगर परिषद प्रशासन स्ट्रीट वेंडर का सर्वेक्षण करवाएगी। यह सर्वे कार्य हरियाणा नवयुवक कला संगम द्वारा जीआईएस आधारित वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा। नौ फरवरी से सर्वे कार्य की शुरुआत की जाएगी। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी केआर ठाकुर ने खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद बिलासपुर में अगर किसी कारणवश स्ट्रीट वैंडर का सर्वे नहीं हुआ है, तो यह सर्वे चतुर्थ व अंतिम चरण में नौ फरवरी को हरियाणा नवयुवक कला संगम द्वारा जीआईएस आधारित वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा। श्री ठाकुर ने यह भी कहा है कि वंचित स्ट्रीट वेंडर नगर परिषद से संपर्क कर अपना सर्वे करवाने के लिए आगे आएं तथा सर्वेक्षण के दौरान अपने दो पहचान पत्र की फोटो प्रति एवं दो पासपोर्ट साइज फोटो अपने पास रखें तथा सर्वे के समय सर्वेकर्ता को दें। उन्होंने बताया कि उपरोक्त दस्तावेज के साथ सर्वेकर्ता विक्रय स्थल पर ही सर्वे फार्म भरेगा और फोटो भी खींचेगा। उसके बाद ही नगर परिषद द्वारा पहचान पत्र प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सर्वे कार्य पूरा करने के बाद इन्हें बसाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि शहर में जगह-जगह दुकानदारी सजाए बैठे रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए अलग से मार्केट विकसित की जाएगी।
महर्षि दयानन्द का सन्देश मनुष्य-समाज उन्नतिशील है। उसकी इच्छा हो या न हो, वह कोशिश करें या न करें, उसकी उन्नति एक प्राकृतिक नियम है । परन्तु उस उन्नति की गति समुद्र की लहरों की तरह सीधी और सदा आगे बढ़ने वाली नहीं देखी जाती, बल्कि सांप को चाल की तरह, नदी की धारा की तरह, या बिजली की लकीर की तरह टेढ़ी-मेढ़ी होती है । एक आदमी जब वेगवती नदी के प्रवाह में उस पार जाने के लिए बढ़ता है तब यह परले किनारे पर पहुँचता तो है; परन्तु कुछ नीचे बहकर इसी तरह मनुष्य समाज सृष्टि के घोर महा प्रवाह में पढ़कर अपने पुरुषार्थ के वल, पार तो लगता है. परन्तु नीचे छूटकर। इसका अर्थ वह हुआ कि मनुष्य समाज कि मनुष्य समाज के सब प्रयत्न सर्वदा एक ही दिशा में नहीं होते। कभी-कभी ये परस्पर विरुद्ध दिशाओं में भी होते हैं। उन्नति की दिशा में किये गए प्रयत्न को एमपुरा कहते हैं, अयोगति की दिशा में किये गए को पाव । इस पुरुष और पाप के थावान-प्रतिघात के कारण मानव समाज की उन्नति का रास्ता हो गया है। कभी यह आगे बढ़ता हुआ दिखाई देता है. कभी दावा यार्थी और। कभी-कभी पीछे हटता हुआ दिखाई देता है। जब वह वायें, बायें या पीछे गुढ़ना है तब उसमें आवश्यक पोषक और आरोग्यदायी तत्वों से भावचित होता है। समाज का हृदय उस भाव की
महर्षि दयानन्द का सन्देश मनुष्य-समाज उन्नतिशील है। उसकी इच्छा हो या न हो, वह कोशिश करें या न करें, उसकी उन्नति एक प्राकृतिक नियम है । परन्तु उस उन्नति की गति समुद्र की लहरों की तरह सीधी और सदा आगे बढ़ने वाली नहीं देखी जाती, बल्कि सांप को चाल की तरह, नदी की धारा की तरह, या बिजली की लकीर की तरह टेढ़ी-मेढ़ी होती है । एक आदमी जब वेगवती नदी के प्रवाह में उस पार जाने के लिए बढ़ता है तब यह परले किनारे पर पहुँचता तो है; परन्तु कुछ नीचे बहकर इसी तरह मनुष्य समाज सृष्टि के घोर महा प्रवाह में पढ़कर अपने पुरुषार्थ के वल, पार तो लगता है. परन्तु नीचे छूटकर। इसका अर्थ वह हुआ कि मनुष्य समाज कि मनुष्य समाज के सब प्रयत्न सर्वदा एक ही दिशा में नहीं होते। कभी-कभी ये परस्पर विरुद्ध दिशाओं में भी होते हैं। उन्नति की दिशा में किये गए प्रयत्न को एमपुरा कहते हैं, अयोगति की दिशा में किये गए को पाव । इस पुरुष और पाप के थावान-प्रतिघात के कारण मानव समाज की उन्नति का रास्ता हो गया है। कभी यह आगे बढ़ता हुआ दिखाई देता है. कभी दावा यार्थी और। कभी-कभी पीछे हटता हुआ दिखाई देता है। जब वह वायें, बायें या पीछे गुढ़ना है तब उसमें आवश्यक पोषक और आरोग्यदायी तत्वों से भावचित होता है। समाज का हृदय उस भाव की
यूनाइटेड किंगडम द्वारा अपनी गश्ती इकाइयों को महल में बुलाने के लिए बीटिंग रिट्रीट समारोह का इस्तेमाल किया जाता था। भारत इस समारोह का उपयोग अपने गणतंत्र दिवस समारोह को समाप्त करने के लिए करता है। भारत में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी 29 जनवरी को होती है। इस समारोह में भारतीय सेना के तीनों विंग भाग लेते हैं। तीनों सेनाओं के बैंड, यानी भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना इस इवेंट के प्राथमिक प्रतिभागी हैं। - यह समारोह रायसीना हिल्स पर आयोजित किया जाता है। रायसीना हिल्स में भारत सरकार की सबसे महत्वपूर्ण इमारतें जैसे राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण इमारतें हैं। इस समारोह के दौरान रायसीना हिल्स के उत्तर और दक्षिण ब्लॉक को रोशन किया गया। - भारतीय वायु सेना, भारतीय सेना और भारतीय नौसेना की बैंड सेवाओं ने बीटिंग रिट्रीट समारोह का आयोजन किया। प्रारंभ में, इस समारोह को वॉच सेटिंग कहा जाता था। यह सूर्यास्त के समय किया जाता था। इस समारोह के दौरान एक ही गोली चलाई जाती थी। इसकी आवाज सुनकर गश्त करने वाली इकाइयां महल में लौट आती थी। यह पहली बार सत्रहवीं शताब्दी के दौरान अभ्यास किया गया था। - यह समारोह 1955 में भारत में शुरू हुआ। - 2016 में, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने पहली बार रिट्रीट में भाग लिया।
यूनाइटेड किंगडम द्वारा अपनी गश्ती इकाइयों को महल में बुलाने के लिए बीटिंग रिट्रीट समारोह का इस्तेमाल किया जाता था। भारत इस समारोह का उपयोग अपने गणतंत्र दिवस समारोह को समाप्त करने के लिए करता है। भारत में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी उनतीस जनवरी को होती है। इस समारोह में भारतीय सेना के तीनों विंग भाग लेते हैं। तीनों सेनाओं के बैंड, यानी भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना इस इवेंट के प्राथमिक प्रतिभागी हैं। - यह समारोह रायसीना हिल्स पर आयोजित किया जाता है। रायसीना हिल्स में भारत सरकार की सबसे महत्वपूर्ण इमारतें जैसे राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण इमारतें हैं। इस समारोह के दौरान रायसीना हिल्स के उत्तर और दक्षिण ब्लॉक को रोशन किया गया। - भारतीय वायु सेना, भारतीय सेना और भारतीय नौसेना की बैंड सेवाओं ने बीटिंग रिट्रीट समारोह का आयोजन किया। प्रारंभ में, इस समारोह को वॉच सेटिंग कहा जाता था। यह सूर्यास्त के समय किया जाता था। इस समारोह के दौरान एक ही गोली चलाई जाती थी। इसकी आवाज सुनकर गश्त करने वाली इकाइयां महल में लौट आती थी। यह पहली बार सत्रहवीं शताब्दी के दौरान अभ्यास किया गया था। - यह समारोह एक हज़ार नौ सौ पचपन में भारत में शुरू हुआ। - दो हज़ार सोलह में, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने पहली बार रिट्रीट में भाग लिया।
(ब्यूरो कार्यालय) सिवनी (साई)। जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग श्री अभिजीत पचौरी ने बताया कि बाल अधिकारों के उल्लंघन संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिये माननीय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की बेंच / केम्प का आयोजन दिनांक 26 अगस्त 2022, दिन शुक्रवार, समय सुबह 9 बजे से कार्यालय कलेक्टर परिसर में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि माननीय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की बेंच / केम्प में कोई भी व्यक्ति (बच्चा स्वंय, माता-पिता, अभिभावक, पालक या कोई भी सामान्य व्यक्ति) बच्चों से संबंधित शिकायतें (NCPCR) आयोग के समक्ष रख सकते हैं,जिनका त्वरित निराकरण किया जावेगा । अधिक जानकारी के लिये नजदीकी महिला एवं बाल विकास अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।
सिवनी । जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग श्री अभिजीत पचौरी ने बताया कि बाल अधिकारों के उल्लंघन संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिये माननीय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की बेंच / केम्प का आयोजन दिनांक छब्बीस अगस्त दो हज़ार बाईस, दिन शुक्रवार, समय सुबह नौ बजे से कार्यालय कलेक्टर परिसर में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि माननीय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की बेंच / केम्प में कोई भी व्यक्ति बच्चों से संबंधित शिकायतें आयोग के समक्ष रख सकते हैं,जिनका त्वरित निराकरण किया जावेगा । अधिक जानकारी के लिये नजदीकी महिला एवं बाल विकास अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।
नवापारा राजिम :- स्थानीय नवापारा शहर सहित नगर भर के हनुमान मंदिरो व ग्रामीण अंचलो में भी चैत्र पूर्णिमा मंगलवार को संकट मोचन भगवान श्री हनुमान जी की जन्मोत्सव कार्यक्रम उनके भक्तो द्वारा बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया. लॉक डाउन के भयावह दौर में भी श्रद्धालु भक्तो ने अपने अपने सुविधानुसार घरों में रहकर तो गली मोहल्लो में सीमित संख्या में उपस्थित होकर बेहद ही सादगीपूर्ण ढंग से इस हनुमान जन्मोत्सव को यादगार बनाया. इसी तरह नगर के श्रीसालासर सुंदरकांड एवं जनकल्याण समिति, श्रीसंकटमोचन सुंदरकांड सेवा समिति, श्री दक्षिणमुखी सुंदरकांड समिति द्वारा भी हनुमान मंदिरो में कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए बहुत ही उत्साह के साथ यह जन्मोत्सव मनाया गया. इसके अलावा नगर के सभी मोहल्ले सहित ग्रामीण अंचलो में तर्री, दुलना, पटेवा, पारागांव, कुर्रा, छांटा, पिपरौद, सोनेसिली, आलेखूंटा आदि में भी यह जन्मोत्सव बहुत सुन्दर ढंग से मनाया गया. नगर के शीतलापारा स्थित जय श्रीराम नवयुवक समिति द्वारा संकट मोचन भगवान की मूर्ति सहित पुरे मंदिर परिसर को खास तरह से सजाया गया था. इस मोहल्ले के श्री राम सेना के नन्हे सेना जन्मोत्सव को यादगार बनाने दौड़ दौड़ कर काम कर रहे थे. जहाँ हनुमान जी की अद्भुत मूर्ति को पीपलपत्ते में राम लिखी माला पहनाया गया था वही मंदिर को आम पत्ते के तोरण व केला पत्र व फूलो से सजावट की गई थी. वही युवतियों द्वारा मंदिर के सामने आकर्षक रंगोली बनाई गई थी. मोहल्लेवासियों व समिति के सदस्यो की सीमित उपस्थिति में सबसे पहले तो मंदिर में सुंदरकांड, हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन हुआ. तत्पश्चात हवन पूजन और मंदिर में भगवान ध्वज फहराया गया. स्थानीय कसेरपारा स्टेशन पारा में स्थित श्री दक्षिणमुखी मारुति हनुमान मंदिर में हनुमान जी का जन्मोत्सव शासन के गाइड लाइन के मुताबिक हर्षोल्लास मनाया गया इस अवसर पर मंदिर समिति के द्वारा भगवान जी का चोला चढ़ाया गया वहीं पूजा अर्चना के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया बस स्टैंड स्थित श्री दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर शर्मा भोजनालय के बाजू, सुभाष चौक के पास स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर देना बैंक के सामने कुम्हारपारा सतनामी पारा इंदिरा मार्केट हनुमान मंदिर सहित अनेक जगहों पर स्थापित हनुमान मंदिरों में हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया गया. वही अंत में भक्तों द्वारा भगवान हनुमान की भव्य सामूहिक आरती भी की गई. उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति से प्रमुख रुप से अर्जुन साहू , धरम साहू ,विजय, रविकान्त, दिपक, सुरज, पप्पू, नागेश्वर, नागेन्द्र, निखिल, मुकेश, खिलेश, चन्दू, ओमकार, रामप्यारी दाई, कु. अंजली, दिपीका, पप्पी, राधारानी, हेमलता, दिपीका, गणेश, संतोष, मुकेश, हुकुमचंद साहू , धरम साहू व राकेश राजपूत सहित समिति के सभी सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा. नगर में गंज रोड स्थित श्री महावीर बजरंग अखाड़ा मे हनुमान जयंती श्रद्धा, भक्ति एवं पंडित ऋषि शर्मा के द्वारा विधि विधान एवं पूजा अर्चना के साथ मनाई गई। उल्लेखनीय है कि यह श्री महावीर बजरंग अखाड़ा विगत 100 वर्षों से संचालित है। इस अवसर पर उस्ताद लखन लाल निषाद अध्यक्षता लक्ष्मण सुंदरानी सरक्षकगण शिव कुमार पांडे कलिदान कंसारी ,हेमसिंग पटेल अध्यक्ष गोविंदा कंसारी उपाध्यक्ष रूपु जगत ,सिंटू जैन, सचिव भोलू यादव, राज पटेल, सहसचिव पवन कंसारी, कोषाध्यक्ष सन्तोष कंसारी, सलाहकार दिनेश टंडन, सूरज जगत, कार्यकर्तागण चेतन, गोलु, कार्तिक, गंगा राम सहित कई सदस्यगण उपस्थित थे।
नवापारा राजिम :- स्थानीय नवापारा शहर सहित नगर भर के हनुमान मंदिरो व ग्रामीण अंचलो में भी चैत्र पूर्णिमा मंगलवार को संकट मोचन भगवान श्री हनुमान जी की जन्मोत्सव कार्यक्रम उनके भक्तो द्वारा बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया. लॉक डाउन के भयावह दौर में भी श्रद्धालु भक्तो ने अपने अपने सुविधानुसार घरों में रहकर तो गली मोहल्लो में सीमित संख्या में उपस्थित होकर बेहद ही सादगीपूर्ण ढंग से इस हनुमान जन्मोत्सव को यादगार बनाया. इसी तरह नगर के श्रीसालासर सुंदरकांड एवं जनकल्याण समिति, श्रीसंकटमोचन सुंदरकांड सेवा समिति, श्री दक्षिणमुखी सुंदरकांड समिति द्वारा भी हनुमान मंदिरो में कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए बहुत ही उत्साह के साथ यह जन्मोत्सव मनाया गया. इसके अलावा नगर के सभी मोहल्ले सहित ग्रामीण अंचलो में तर्री, दुलना, पटेवा, पारागांव, कुर्रा, छांटा, पिपरौद, सोनेसिली, आलेखूंटा आदि में भी यह जन्मोत्सव बहुत सुन्दर ढंग से मनाया गया. नगर के शीतलापारा स्थित जय श्रीराम नवयुवक समिति द्वारा संकट मोचन भगवान की मूर्ति सहित पुरे मंदिर परिसर को खास तरह से सजाया गया था. इस मोहल्ले के श्री राम सेना के नन्हे सेना जन्मोत्सव को यादगार बनाने दौड़ दौड़ कर काम कर रहे थे. जहाँ हनुमान जी की अद्भुत मूर्ति को पीपलपत्ते में राम लिखी माला पहनाया गया था वही मंदिर को आम पत्ते के तोरण व केला पत्र व फूलो से सजावट की गई थी. वही युवतियों द्वारा मंदिर के सामने आकर्षक रंगोली बनाई गई थी. मोहल्लेवासियों व समिति के सदस्यो की सीमित उपस्थिति में सबसे पहले तो मंदिर में सुंदरकांड, हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन हुआ. तत्पश्चात हवन पूजन और मंदिर में भगवान ध्वज फहराया गया. स्थानीय कसेरपारा स्टेशन पारा में स्थित श्री दक्षिणमुखी मारुति हनुमान मंदिर में हनुमान जी का जन्मोत्सव शासन के गाइड लाइन के मुताबिक हर्षोल्लास मनाया गया इस अवसर पर मंदिर समिति के द्वारा भगवान जी का चोला चढ़ाया गया वहीं पूजा अर्चना के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया बस स्टैंड स्थित श्री दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर शर्मा भोजनालय के बाजू, सुभाष चौक के पास स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर देना बैंक के सामने कुम्हारपारा सतनामी पारा इंदिरा मार्केट हनुमान मंदिर सहित अनेक जगहों पर स्थापित हनुमान मंदिरों में हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया गया. वही अंत में भक्तों द्वारा भगवान हनुमान की भव्य सामूहिक आरती भी की गई. उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति से प्रमुख रुप से अर्जुन साहू , धरम साहू ,विजय, रविकान्त, दिपक, सुरज, पप्पू, नागेश्वर, नागेन्द्र, निखिल, मुकेश, खिलेश, चन्दू, ओमकार, रामप्यारी दाई, कु. अंजली, दिपीका, पप्पी, राधारानी, हेमलता, दिपीका, गणेश, संतोष, मुकेश, हुकुमचंद साहू , धरम साहू व राकेश राजपूत सहित समिति के सभी सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा. नगर में गंज रोड स्थित श्री महावीर बजरंग अखाड़ा मे हनुमान जयंती श्रद्धा, भक्ति एवं पंडित ऋषि शर्मा के द्वारा विधि विधान एवं पूजा अर्चना के साथ मनाई गई। उल्लेखनीय है कि यह श्री महावीर बजरंग अखाड़ा विगत एक सौ वर्षों से संचालित है। इस अवसर पर उस्ताद लखन लाल निषाद अध्यक्षता लक्ष्मण सुंदरानी सरक्षकगण शिव कुमार पांडे कलिदान कंसारी ,हेमसिंग पटेल अध्यक्ष गोविंदा कंसारी उपाध्यक्ष रूपु जगत ,सिंटू जैन, सचिव भोलू यादव, राज पटेल, सहसचिव पवन कंसारी, कोषाध्यक्ष सन्तोष कंसारी, सलाहकार दिनेश टंडन, सूरज जगत, कार्यकर्तागण चेतन, गोलु, कार्तिक, गंगा राम सहित कई सदस्यगण उपस्थित थे।
4 संबंधोंः बांद्रा (मुंबई), मुम्बई, कँगनी, अनाज। बांद्रा (मुंबई) बांदरा (वांद्रे) पश्चिम मुंबई का एक उपक्षेत्र है। इसे उपनगरों की रानी भी कहते हैं। यहां मुंबई उपनगरीय रेलवे की पश्चिम लाइन का रेलवे स्टेशन है, जिसे बांद्रा टर्मिनस रेलवे स्टेशन कहते हैं। बांदरा से मुंबई का दृश्य श्रेणीःमुम्बई श्रेणीःमुंबई के उपनगर श्रेणीःमुंबई में रेलवे स्टेशन श्रेणीःमहाराष्ट्र के रेलवे स्टेशन. भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुंंबई (पूर्व नाम बम्बई), भारतीय राज्य महाराष्ट्र की राजधानी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या ३ करोड़ २९ लाख है जो देश की पहली सर्वाधिक आबादी वाली नगरी है। इसका गठन लावा निर्मित सात छोटे-छोटे द्वीपों द्वारा हुआ है एवं यह पुल द्वारा प्रमुख भू-खंड के साथ जुड़ा हुआ है। मुम्बई बन्दरगाह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। मुम्बई का तट कटा-फटा है जिसके कारण इसका पोताश्रय प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। यूरोप, अमेरिका, अफ़्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आनेवाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है। मुम्बई भारत का सर्ववृहत्तम वाणिज्यिक केन्द्र है। जिसकी भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 5% की भागीदारी है। यह सम्पूर्ण भारत के औद्योगिक उत्पाद का 25%, नौवहन व्यापार का 40%, एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था के पूंजी लेनदेन का 70% भागीदार है। मुंबई विश्व के सर्वोच्च दस वाणिज्यिक केन्द्रों में से एक है। भारत के अधिकांश बैंक एवं सौदागरी कार्यालयों के प्रमुख कार्यालय एवं कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, बम्बई स्टॉक एक्स्चेंज, नेशनल स्टऑक एक्स्चेंज एवं अनेक भारतीय कम्पनियों के निगमित मुख्यालय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुम्बई में अवस्थित हैं। इसलिए इसे भारत की आर्थिक राजधानी भी कहते हैं। नगर में भारत का हिन्दी चलचित्र एवं दूरदर्शन उद्योग भी है, जो बॉलीवुड नाम से प्रसिद्ध है। मुंबई की व्यवसायिक अपॊर्ट्युनिटी, व उच्च जीवन स्तर पूरे भारतवर्ष भर के लोगों को आकर्षित करती है, जिसके कारण यह नगर विभिन्न समाजों व संस्कृतियों का मिश्रण बन गया है। मुंबई पत्तन भारत के लगभग आधे समुद्री माल की आवाजाही करता है। . कंगनी या टांगुन (वानस्पतिक नामः सेतिरिया इटालिका) मोटे अन्नों में दूसरी सबसे अधिक बोई जाने वाली फसल है, खासतौर पर पूर्वी एशिया में। चीन में तो इसे ईसा पूर्व ६००० वर्ष से उगाया जा रहा है, इसे 'चीनी बाजरा' भी कहते हैं। यह एकवर्षीय घास है जिसका पौधा ४ - ७ फीट ऊँचा होता है, बीज बहुत महीन लगभग २ मिलीमीटर के होते हैं, इनका रंग किस्म किस्म में भिन्न होता है, जिनपे पतला छिलका होता है जो आसानी से उतर जाता है। . अनाज खाद्य कृषि उत्पाद होते हैं, जिन्हें उनके फार के बीज के लिए उत्पादन किया जाता है। ये एकबीजपत्री परिवार से होते हैं।;देखेंः:श्रेणीःअनाज यह भी देखेंःदाल श्रेणीःअनाज श्रेणीःचित्र जोड़ें.
चार संबंधोंः बांद्रा , मुम्बई, कँगनी, अनाज। बांद्रा बांदरा पश्चिम मुंबई का एक उपक्षेत्र है। इसे उपनगरों की रानी भी कहते हैं। यहां मुंबई उपनगरीय रेलवे की पश्चिम लाइन का रेलवे स्टेशन है, जिसे बांद्रा टर्मिनस रेलवे स्टेशन कहते हैं। बांदरा से मुंबई का दृश्य श्रेणीःमुम्बई श्रेणीःमुंबई के उपनगर श्रेणीःमुंबई में रेलवे स्टेशन श्रेणीःमहाराष्ट्र के रेलवे स्टेशन. भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुंंबई , भारतीय राज्य महाराष्ट्र की राजधानी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या तीन करोड़ उनतीस लाख है जो देश की पहली सर्वाधिक आबादी वाली नगरी है। इसका गठन लावा निर्मित सात छोटे-छोटे द्वीपों द्वारा हुआ है एवं यह पुल द्वारा प्रमुख भू-खंड के साथ जुड़ा हुआ है। मुम्बई बन्दरगाह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। मुम्बई का तट कटा-फटा है जिसके कारण इसका पोताश्रय प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। यूरोप, अमेरिका, अफ़्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आनेवाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है। मुम्बई भारत का सर्ववृहत्तम वाणिज्यिक केन्द्र है। जिसकी भारत के सकल घरेलू उत्पाद में पाँच% की भागीदारी है। यह सम्पूर्ण भारत के औद्योगिक उत्पाद का पच्चीस%, नौवहन व्यापार का चालीस%, एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था के पूंजी लेनदेन का सत्तर% भागीदार है। मुंबई विश्व के सर्वोच्च दस वाणिज्यिक केन्द्रों में से एक है। भारत के अधिकांश बैंक एवं सौदागरी कार्यालयों के प्रमुख कार्यालय एवं कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, बम्बई स्टॉक एक्स्चेंज, नेशनल स्टऑक एक्स्चेंज एवं अनेक भारतीय कम्पनियों के निगमित मुख्यालय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुम्बई में अवस्थित हैं। इसलिए इसे भारत की आर्थिक राजधानी भी कहते हैं। नगर में भारत का हिन्दी चलचित्र एवं दूरदर्शन उद्योग भी है, जो बॉलीवुड नाम से प्रसिद्ध है। मुंबई की व्यवसायिक अपॊर्ट्युनिटी, व उच्च जीवन स्तर पूरे भारतवर्ष भर के लोगों को आकर्षित करती है, जिसके कारण यह नगर विभिन्न समाजों व संस्कृतियों का मिश्रण बन गया है। मुंबई पत्तन भारत के लगभग आधे समुद्री माल की आवाजाही करता है। . कंगनी या टांगुन मोटे अन्नों में दूसरी सबसे अधिक बोई जाने वाली फसल है, खासतौर पर पूर्वी एशिया में। चीन में तो इसे ईसा पूर्व छः हज़ार वर्ष से उगाया जा रहा है, इसे 'चीनी बाजरा' भी कहते हैं। यह एकवर्षीय घास है जिसका पौधा चार - सात फीट ऊँचा होता है, बीज बहुत महीन लगभग दो मिलीमीटर के होते हैं, इनका रंग किस्म किस्म में भिन्न होता है, जिनपे पतला छिलका होता है जो आसानी से उतर जाता है। . अनाज खाद्य कृषि उत्पाद होते हैं, जिन्हें उनके फार के बीज के लिए उत्पादन किया जाता है। ये एकबीजपत्री परिवार से होते हैं।;देखेंः:श्रेणीःअनाज यह भी देखेंःदाल श्रेणीःअनाज श्रेणीःचित्र जोड़ें.
प्रसूति और गर्भावस्था और जन्म की प्रक्रियाबच्चा - एक औरत के लिए पवित्र। यह अपने पवित्र उद्देश्य बताते हैं, यह है - अपने कार्य, अंतर्निहित प्रकृति। लेकिन कभी-कभी अनुभवी मां भी आश्चर्यचकित होती हैंः "क्यों सपना है कि मैं एक बच्चे को जन्म देता हूं?" आखिरकार, एक नए व्यक्ति के जन्म की पूरी तरह से शारीरिक प्रक्रिया बहुत दर्दनाक है, और मॉर्फियस साम्राज्य में अचानक इस प्रक्रिया के माध्यम से एक महिला इतनी मजबूत होनी चाहिए कि क्यों बहुत मजबूत होना चाहिए। अक्सर, सपनों के दुभाषियों को पूरी तरह सेयह मनोविज्ञान के क्षेत्र से इस प्रक्रिया के प्रतीकों किया जाता है। जन्म का मुख्य कार्य के बाद से एक नया जीवन की शुरुआत है, और इस विषय पर सपनों तदनुसार व्यवहार कर रहे हैं। यहाँ, उदाहरण के लिए, सपनों की व्याख्या Fel निम्नलिखित परिभाषा, एक सपना है जिसका अर्थ देता हैः यह एक नया व्यापार, जिसके दौरान कठिनाइयों (जन्म की गंभीरता अर्थ) पर काबू पाने की जरूरत की शुरुआत की भविष्यवाणी है, लेकिन फिर परिणाम एक बहुत ही महत्वपूर्ण और महत्वपूर्ण (एक नया जीवन के उद्भव के वजन) हो जाएगा । कामुक सपना किताब के कंपाइलर्स के अनुसार, के लिएकिसी भी महिला को जन्म देने वाले सपने में देखने के लिए, मूल रूप से नए ज्ञान की तेज़ी से प्राप्ति को दर्शाता है, जिसके माध्यम से एक सपने देखने वाला व्यक्ति पहले से अधिक सार्थक हो सकता है। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि जीवन में एक नए व्यक्ति का उद्भव - और प्रजनन की प्रक्रिया में अनुभवी भावनाओं के आधार पर, जो सपने देखता है, यह स्पष्ट होगा कि कोई नया परिचय मित्र बन जाएगा या नहीं।
प्रसूति और गर्भावस्था और जन्म की प्रक्रियाबच्चा - एक औरत के लिए पवित्र। यह अपने पवित्र उद्देश्य बताते हैं, यह है - अपने कार्य, अंतर्निहित प्रकृति। लेकिन कभी-कभी अनुभवी मां भी आश्चर्यचकित होती हैंः "क्यों सपना है कि मैं एक बच्चे को जन्म देता हूं?" आखिरकार, एक नए व्यक्ति के जन्म की पूरी तरह से शारीरिक प्रक्रिया बहुत दर्दनाक है, और मॉर्फियस साम्राज्य में अचानक इस प्रक्रिया के माध्यम से एक महिला इतनी मजबूत होनी चाहिए कि क्यों बहुत मजबूत होना चाहिए। अक्सर, सपनों के दुभाषियों को पूरी तरह सेयह मनोविज्ञान के क्षेत्र से इस प्रक्रिया के प्रतीकों किया जाता है। जन्म का मुख्य कार्य के बाद से एक नया जीवन की शुरुआत है, और इस विषय पर सपनों तदनुसार व्यवहार कर रहे हैं। यहाँ, उदाहरण के लिए, सपनों की व्याख्या Fel निम्नलिखित परिभाषा, एक सपना है जिसका अर्थ देता हैः यह एक नया व्यापार, जिसके दौरान कठिनाइयों पर काबू पाने की जरूरत की शुरुआत की भविष्यवाणी है, लेकिन फिर परिणाम एक बहुत ही महत्वपूर्ण और महत्वपूर्ण हो जाएगा । कामुक सपना किताब के कंपाइलर्स के अनुसार, के लिएकिसी भी महिला को जन्म देने वाले सपने में देखने के लिए, मूल रूप से नए ज्ञान की तेज़ी से प्राप्ति को दर्शाता है, जिसके माध्यम से एक सपने देखने वाला व्यक्ति पहले से अधिक सार्थक हो सकता है। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि जीवन में एक नए व्यक्ति का उद्भव - और प्रजनन की प्रक्रिया में अनुभवी भावनाओं के आधार पर, जो सपने देखता है, यह स्पष्ट होगा कि कोई नया परिचय मित्र बन जाएगा या नहीं।
बाहर निकल आया। यह लड़की और उसकी जात दोनों जैसे उसकी समझ के परे थे । हर्ष और उमंग के साथ सावन-भादों के पंख खोलकर चौमासा लौटने लगा। बेकार बैठने के दिन बीतने लगे । घोटुल के चेलिक और मोटियारियों को साल भर के लिए जो बनाना था, बना चुके । दिन भर चंग की थाप पर या ढोल और मांदर की आवाज़ पर कंठ के बेतुके राग छेड़ने का जमाना चला गया। सब पहले की तरह अपना लोन छोड़कर खुले आसमान में निकल पड़े । हलकी-हलकी ठंड पड़ने लगी । काम करने में उससे गति मिली। तीन चार महीने से सुलकसाए बेकार बैठा था । वह अपने मन में तब बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रहा था। उन्हें मूर्तरूप देने का अवसर अब आ गया था । सुलक ने एक दिन घोटुल के सारे सदस्यों और गांव भर के चुने हुए लोगों की सभा बुलाई। उसने बताया कि हमारा संगठन काफी मजबूत हो चुका है। बस, नेता के हुकुम मिलने की देर है । गुण्डा धूर कुछ साथियों के साथ यहां काम देखने आने वाला है । तब पूरी और पक्की रूपरेखा बनेगी सुलकसाए ने बताया कि उनके लिए यह जरूरी है कि वे अपने हथियार पैने कर लें और अधिक से अधिक तीर तथा कमान बनाकर रखें। बरसात में कुछ जगह यह काम हो चुका होगा। जहां नहीं हुआ, अब होना चाहिए । इस काम के लिए उसने गांव के पांच युवक चुने । प्रत्येक के जिम्मे पांच-पांच गांव दिए गए और उनसे कहा गया कि वे इन गांवों में जाकर वहां का पूरा-पूरा संगठन करें। संगठन के लिए बीस नये गांव चुने गए, जिनमें कई गांव वहां से काफी दूर जगदलपुर के पास थे। गांव के प्रत्येक व्यक्ति ने सुलक की बात को बड़े ध्यान से सुना और पूरी मदद करने की कसम खाई । दसेरा के दिन ही कितने बचे थे ! इस साल उनका नेता वहां आने वाला था, इसलिए उसके स्वागत को भी जोरदार तैयारियां शुरू हो गईं । सुलक ने कहा कि हम घोटुल में उसका स्वागत करेंगे। अभी खुलकर स्वागत करने से बात बिगड़ सकती है। इसलिए स्वागत की तैयारी करने का काम पाण्डू और तिलोका पर छोड़ा गया । सुलक ने चैन की सांस ली। कोरता पाण्डुम का परब आया। कोरता पाण्डुम' की रात नाच-गाने की होती है । जवान जोड़ों को तब अपने मन की साध पूरी करने का समय मिलता है । गांव के बाहर खुली चांदनी में एक भारी मजमा जमा हो गया । सब लोगों खूब लांदा ढाली भौर उचट-कूदकर खूब नाच किया । सुलक को इस समय भी अपने गांव की बड़ी याद माई । वहां उसने कई बार यह परब मनाया था । तब महुआ उसके साथ रहती थी और दोनों होड़ लगाकर नाचा - गाया करते थे । आज वह बिलकुल अकेला था । वैसे घोटुल में कई मोटयारियां थीं और प्रायः सभीने उसके साथ नाचने की इच्छा प्रकट की परन्तु उसका मन न हुआ । भीतर ही भीतर उसका मन कचोट रहा था । परन्तु तिलोका भला उसे कैसे अधूरा रहने देती ! हाथ पकड़ वह सुलक को मैदान में खींच ही लाई । सुलक को मैदान में उतरना पड़ा परन्तु उसके पैरों में कोई गति नहीं ला सका। एक सधा और मस्त नचैया आज अनाड़ी निकला । उसे मैदान छोड़ना पड़ा । सारी मोटयारियों ने ताली पीटकर उसकी बड़ी हंसी उड़ाई ।। कोरता पाण्डुम के खतम होते ही दन्तेश्वरी मइया के मंदिर की सफाई शुरू हो गई । उसे रंग-बिरंगी पताकाओं से सजाया गया। सुलक को पता लगा कि गुण्डा अपने साथ महुआ को भी ला रहा है। उसकी खुशी का अन्त नहीं । उसके सोए हाथ-पैर जैसे जाग उठे थे । उसने गांव वालों से कहा, 'तुम्हारा नेता रहा है। उसका बड़े में ही भरपूर स्वागत होना चाहिए । उसकी बात कौन टालता ! सुलक का एक-एक दिन मुश्किल में बीत रहा था । वह उस दिन की बड़ी उतावली से प्रतीक्षा करने लगा । तब घोटुल की रातें उसे और बेचैन करने लगी थीं । वह रात भर महुआ के सपने देखता था । वह सोचता था कि महुआ आएगी तो वह यह कहेगा, वह कहेगा। एक बड़ा पुराण ही जैसे वह अपने मस्तिष्क में लिख रहा था । बेचैनी के दिन कटे और वह दिन आ गया । गुण्डा अपने दस साथियों के १. सितम्बर अक्टूबर में मनाया जाने वाला पर्व । बरसात के बाद इस दिन सबसे पहली बार खुले मैदान में नाच होता है ।
बाहर निकल आया। यह लड़की और उसकी जात दोनों जैसे उसकी समझ के परे थे । हर्ष और उमंग के साथ सावन-भादों के पंख खोलकर चौमासा लौटने लगा। बेकार बैठने के दिन बीतने लगे । घोटुल के चेलिक और मोटियारियों को साल भर के लिए जो बनाना था, बना चुके । दिन भर चंग की थाप पर या ढोल और मांदर की आवाज़ पर कंठ के बेतुके राग छेड़ने का जमाना चला गया। सब पहले की तरह अपना लोन छोड़कर खुले आसमान में निकल पड़े । हलकी-हलकी ठंड पड़ने लगी । काम करने में उससे गति मिली। तीन चार महीने से सुलकसाए बेकार बैठा था । वह अपने मन में तब बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रहा था। उन्हें मूर्तरूप देने का अवसर अब आ गया था । सुलक ने एक दिन घोटुल के सारे सदस्यों और गांव भर के चुने हुए लोगों की सभा बुलाई। उसने बताया कि हमारा संगठन काफी मजबूत हो चुका है। बस, नेता के हुकुम मिलने की देर है । गुण्डा धूर कुछ साथियों के साथ यहां काम देखने आने वाला है । तब पूरी और पक्की रूपरेखा बनेगी सुलकसाए ने बताया कि उनके लिए यह जरूरी है कि वे अपने हथियार पैने कर लें और अधिक से अधिक तीर तथा कमान बनाकर रखें। बरसात में कुछ जगह यह काम हो चुका होगा। जहां नहीं हुआ, अब होना चाहिए । इस काम के लिए उसने गांव के पांच युवक चुने । प्रत्येक के जिम्मे पांच-पांच गांव दिए गए और उनसे कहा गया कि वे इन गांवों में जाकर वहां का पूरा-पूरा संगठन करें। संगठन के लिए बीस नये गांव चुने गए, जिनमें कई गांव वहां से काफी दूर जगदलपुर के पास थे। गांव के प्रत्येक व्यक्ति ने सुलक की बात को बड़े ध्यान से सुना और पूरी मदद करने की कसम खाई । दसेरा के दिन ही कितने बचे थे ! इस साल उनका नेता वहां आने वाला था, इसलिए उसके स्वागत को भी जोरदार तैयारियां शुरू हो गईं । सुलक ने कहा कि हम घोटुल में उसका स्वागत करेंगे। अभी खुलकर स्वागत करने से बात बिगड़ सकती है। इसलिए स्वागत की तैयारी करने का काम पाण्डू और तिलोका पर छोड़ा गया । सुलक ने चैन की सांस ली। कोरता पाण्डुम का परब आया। कोरता पाण्डुम' की रात नाच-गाने की होती है । जवान जोड़ों को तब अपने मन की साध पूरी करने का समय मिलता है । गांव के बाहर खुली चांदनी में एक भारी मजमा जमा हो गया । सब लोगों खूब लांदा ढाली भौर उचट-कूदकर खूब नाच किया । सुलक को इस समय भी अपने गांव की बड़ी याद माई । वहां उसने कई बार यह परब मनाया था । तब महुआ उसके साथ रहती थी और दोनों होड़ लगाकर नाचा - गाया करते थे । आज वह बिलकुल अकेला था । वैसे घोटुल में कई मोटयारियां थीं और प्रायः सभीने उसके साथ नाचने की इच्छा प्रकट की परन्तु उसका मन न हुआ । भीतर ही भीतर उसका मन कचोट रहा था । परन्तु तिलोका भला उसे कैसे अधूरा रहने देती ! हाथ पकड़ वह सुलक को मैदान में खींच ही लाई । सुलक को मैदान में उतरना पड़ा परन्तु उसके पैरों में कोई गति नहीं ला सका। एक सधा और मस्त नचैया आज अनाड़ी निकला । उसे मैदान छोड़ना पड़ा । सारी मोटयारियों ने ताली पीटकर उसकी बड़ी हंसी उड़ाई ।। कोरता पाण्डुम के खतम होते ही दन्तेश्वरी मइया के मंदिर की सफाई शुरू हो गई । उसे रंग-बिरंगी पताकाओं से सजाया गया। सुलक को पता लगा कि गुण्डा अपने साथ महुआ को भी ला रहा है। उसकी खुशी का अन्त नहीं । उसके सोए हाथ-पैर जैसे जाग उठे थे । उसने गांव वालों से कहा, 'तुम्हारा नेता रहा है। उसका बड़े में ही भरपूर स्वागत होना चाहिए । उसकी बात कौन टालता ! सुलक का एक-एक दिन मुश्किल में बीत रहा था । वह उस दिन की बड़ी उतावली से प्रतीक्षा करने लगा । तब घोटुल की रातें उसे और बेचैन करने लगी थीं । वह रात भर महुआ के सपने देखता था । वह सोचता था कि महुआ आएगी तो वह यह कहेगा, वह कहेगा। एक बड़ा पुराण ही जैसे वह अपने मस्तिष्क में लिख रहा था । बेचैनी के दिन कटे और वह दिन आ गया । गुण्डा अपने दस साथियों के एक. सितम्बर अक्टूबर में मनाया जाने वाला पर्व । बरसात के बाद इस दिन सबसे पहली बार खुले मैदान में नाच होता है ।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः देबिना बनर्जी और गुरमीत चौधरी टेलीविजन इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल्स में से एक हैं। हालांकि, उनकी दूसरी गर्भावस्था एक ऐसे समय में एक आशीर्वाद के रूप में आई, जब वह इसके लिए बिल्कुल भी योजना नहीं बना रही थीं, लेकिन देबिना को उनकी दूसरी गर्भावस्था की घोषणा के लिए बेरहमी से ट्रोल किया गया था, क्योंकि नेटिज़न्स ने उन्हें दूसरी बार गर्भवती होने का इंतजार नहीं करने के लिए काफी भला-बुरा कहा था। अब एक इंटरव्यू में देबिना बनर्जी ने अपनी दूसरी गर्भावस्था की घोषणा के बाद हुई ट्रोलिंग के बारे में बात की और साझा किया कि वह इससे कैसे निपटती हैं। इस दौरान देबिना ने कहा, मुझे लगता है कि ऐसी ट्रोलिंग की जरूरत नहीं थी लेकिन एक्टर्स होने के नाते हमने ऐसी ही दुनिया चुनी है जिसमें सबकुछ सबके सामने होता है। अगर मैं पब्लिक फिगर ना होती तो शायद लोग मुझे नहीं जानते और मेरी लाइफ में वो सब बातें ना करते जो कर रहे हैं। तारीफ के साथ-साथ ट्रोलिंग भी होगी और इतने सालों में मैंने ये बात जान ली है।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः देबिना बनर्जी और गुरमीत चौधरी टेलीविजन इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल्स में से एक हैं। हालांकि, उनकी दूसरी गर्भावस्था एक ऐसे समय में एक आशीर्वाद के रूप में आई, जब वह इसके लिए बिल्कुल भी योजना नहीं बना रही थीं, लेकिन देबिना को उनकी दूसरी गर्भावस्था की घोषणा के लिए बेरहमी से ट्रोल किया गया था, क्योंकि नेटिज़न्स ने उन्हें दूसरी बार गर्भवती होने का इंतजार नहीं करने के लिए काफी भला-बुरा कहा था। अब एक इंटरव्यू में देबिना बनर्जी ने अपनी दूसरी गर्भावस्था की घोषणा के बाद हुई ट्रोलिंग के बारे में बात की और साझा किया कि वह इससे कैसे निपटती हैं। इस दौरान देबिना ने कहा, मुझे लगता है कि ऐसी ट्रोलिंग की जरूरत नहीं थी लेकिन एक्टर्स होने के नाते हमने ऐसी ही दुनिया चुनी है जिसमें सबकुछ सबके सामने होता है। अगर मैं पब्लिक फिगर ना होती तो शायद लोग मुझे नहीं जानते और मेरी लाइफ में वो सब बातें ना करते जो कर रहे हैं। तारीफ के साथ-साथ ट्रोलिंग भी होगी और इतने सालों में मैंने ये बात जान ली है।
संयुक्त राष्ट्र संघ में मिस्र के प्रतिनिधि ने सीरिया में आतंकवादी गुटों से संघर्ष की मांग की है। हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ में मिस्र के स्थाई राजदूत अम्र अबुल अता ने बुधवार को सीरिया के उत्तरी शहर हलब की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि दुनिया के समस्त देशों को पूरी सच्चाई के साथ सीरिया संकट के समाधान का प्रयास करना चाहिए। अम्र अबुल अता ने सीरिया के बारे में सुरक्षा परिषद के क्रियाकलापों की आलोचना करते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद अबतक सीरिया में वर्तमान स्थिति से मुक्ति दिलाने में कोई भी समाधान पेश नहीं कर सकी है। मिस्र के स्थाई दूत ने कहा कि क़ाहिरा, अपने स्पेन और न्यूज़ीलैंड के सहयोगियों के साथ मिलकर सीरिया विशेषकर हलब के बारे में कम से सहमति तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं ताकि इस देश में मानवीय संकट कम हो सके। ज्ञात रहे कि सीरिया की सेना ने हालिया दिनों में पूर्वी हलब से पश्चिम समर्थित आतंकियों को खदेड़ दिया है। पूर्वी हलब से आतंकवादी गुटों और सशस्त्र विरोधियों से संबंधित सूत्रों ने रिपोर्ट दी है कि वह सीरिया की सरकार से वार्ता और हलब से निकलना चाहते हैं। (AK)
संयुक्त राष्ट्र संघ में मिस्र के प्रतिनिधि ने सीरिया में आतंकवादी गुटों से संघर्ष की मांग की है। हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ में मिस्र के स्थाई राजदूत अम्र अबुल अता ने बुधवार को सीरिया के उत्तरी शहर हलब की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि दुनिया के समस्त देशों को पूरी सच्चाई के साथ सीरिया संकट के समाधान का प्रयास करना चाहिए। अम्र अबुल अता ने सीरिया के बारे में सुरक्षा परिषद के क्रियाकलापों की आलोचना करते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद अबतक सीरिया में वर्तमान स्थिति से मुक्ति दिलाने में कोई भी समाधान पेश नहीं कर सकी है। मिस्र के स्थाई दूत ने कहा कि क़ाहिरा, अपने स्पेन और न्यूज़ीलैंड के सहयोगियों के साथ मिलकर सीरिया विशेषकर हलब के बारे में कम से सहमति तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं ताकि इस देश में मानवीय संकट कम हो सके। ज्ञात रहे कि सीरिया की सेना ने हालिया दिनों में पूर्वी हलब से पश्चिम समर्थित आतंकियों को खदेड़ दिया है। पूर्वी हलब से आतंकवादी गुटों और सशस्त्र विरोधियों से संबंधित सूत्रों ने रिपोर्ट दी है कि वह सीरिया की सरकार से वार्ता और हलब से निकलना चाहते हैं।
तथ्य यह है कि स्तन कैंसर के निदान के लिए उपयोग किए जाने वाले मैमोग्राफी उपकरण सभी व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए उपयुक्त नहीं हैं, विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी के पक्षाघात वाले व्यक्ति, स्तन कैंसर का शीघ्र निदान मुश्किल बनाते हैं। टर्किश स्पाइनल कॉर्ड पैरालिसिस एसोसिएशन के अध्यक्ष सेमरा etinkaya ने कहा, "तुर्की में हर 8 में से एक महिला को स्तन कैंसर का पता चलता है, लेकिन उनमें से केवल 35% का जल्द निदान किया जा सकता है। चूंकि हम खड़े नहीं हो सकते, इसलिए हम मैमोग्राफी नहीं करा सकते हैं और हमारे शीघ्र निदान की संभावना कम हो जाती है। इस वर्ष, स्तन कैंसर जागरूकता माह में, हम चाहते हैं कि सभी शारीरिक रूप से अक्षम महिलाओं, विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी के पक्षाघात से पीड़ित महिलाओं पर ध्यान दिया जाए। कहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में 1-31 अक्टूबर को स्तन कैंसर जागरूकता माह घोषित किया है। घोषित आंकड़ों के अनुसार, हमारे देश में पिछले 25 वर्षों में स्तन कैंसर में 3 गुना वृद्धि हुई है। जबकि हर 8 में से एक महिला में स्तन कैंसर का निदान किया जाता है, प्रारंभिक निदान की दर 35 प्रतिशत है। स्तन कैंसर के निदान में, जो दुनिया और तुर्की दोनों में सबसे आम कैंसर में से एक है, सभी शारीरिक रूप से अक्षम महिलाएं, विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी के पक्षाघात वाले लोगों को बड़ी कठिनाई होती है क्योंकि उपकरण उनकी अक्षमता के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं या मैमोग्राम तक पहुंचने में असमर्थ होते हैं। टर्किश स्पाइनल कॉर्ड पैरालिसिस एसोसिएशन के अध्यक्ष सेमरा etinkaya ने कहा, "हम चाहते हैं कि सभी शारीरिक रूप से अक्षम महिलाओं, विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी के पक्षाघात से पीड़ित महिलाओं को इस वर्ष स्तन कैंसर जागरूकता माह में देखा जाए।" "हम दो लोगों के बिना मैमोग्राम नहीं कर सकते" सेमरा etinkaya, जिन्होंने 1994 में एक दुर्घटना के परिणामस्वरूप एक रीढ़ की हड्डी के लकवाग्रस्त व्यक्ति के रूप में अपना जीवन जारी रखा और तुर्की स्पाइनल कॉर्ड पैरालिटिक्स एसोसिएशन के संस्थापकों में से एक हैं, ने भी इस प्रक्रिया में रीढ़ की हड्डी के पक्षाघात वाले व्यक्तियों की कठिनाइयों का अनुभव किया। उसके पास कैंसर की प्रक्रिया थी। यह व्यक्त करते हुए कि व्हीलचेयर के साथ जीवन के अनुकूल होना काफी कठिन है, etinkaya ने कहा, "हम जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अवरुद्ध हैं। हालांकि, जब इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य होता है, तो चीजें और भी मुश्किल हो जाती हैं। व्यक्तियों को मैमोग्राफी उपकरणों के लिए खड़े होने में सक्षम होना चाहिए। टोमोग्राफी या इमेजिंग उपकरणों में एक साथी होना आवश्यक है। हमें अन्य इमेजिंग उपकरणों की तरह मैमोग्राफी डिवाइस के लिए किसी साथी की जरूरत नहीं है। वाक्यांशों का इस्तेमाल किया। "हम शीघ्र निदान में समान स्थिति चाहते हैं" etinkaya ने कहा, "हमारे संघ को इस मुद्दे के बारे में भी सैकड़ों शिकायतें प्राप्त होती हैं"; "हम शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों की समस्याओं को देखने और घोषित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हम स्तन कैंसर के शीघ्र निदान के लिए मैमोग्राफी के महत्व से अवगत हैं। वर्तमान में, तुर्की के कुछ अस्पतालों में विशेष उपकरण हैं जो विकलांग व्यक्तियों को अकेले मैमोग्राफी करने की अनुमति देते हैं। रोगी-नियंत्रित मैमोग्राफी के साथ, व्यक्ति अपने व्हीलचेयर से उठे बिना संपीड़न को स्वयं समायोजित कर सकते हैं और न्यूनतम स्तर पर दर्द की अनुभूति महसूस कर सकते हैं। हम इन उपकरणों की संख्या में वृद्धि करना चाहते हैं, जो व्यक्ति को पूरे तुर्की में अपनी सीट से मैमोग्राफी लेने में सक्षम बनाता है, और यह सुनिश्चित करने के लिए कि विकलांग व्यक्तियों को स्तन कैंसर के शुरुआती निदान में समान स्थिति मिलती है।
तथ्य यह है कि स्तन कैंसर के निदान के लिए उपयोग किए जाने वाले मैमोग्राफी उपकरण सभी व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए उपयुक्त नहीं हैं, विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी के पक्षाघात वाले व्यक्ति, स्तन कैंसर का शीघ्र निदान मुश्किल बनाते हैं। टर्किश स्पाइनल कॉर्ड पैरालिसिस एसोसिएशन के अध्यक्ष सेमरा etinkaya ने कहा, "तुर्की में हर आठ में से एक महिला को स्तन कैंसर का पता चलता है, लेकिन उनमें से केवल पैंतीस% का जल्द निदान किया जा सकता है। चूंकि हम खड़े नहीं हो सकते, इसलिए हम मैमोग्राफी नहीं करा सकते हैं और हमारे शीघ्र निदान की संभावना कम हो जाती है। इस वर्ष, स्तन कैंसर जागरूकता माह में, हम चाहते हैं कि सभी शारीरिक रूप से अक्षम महिलाओं, विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी के पक्षाघात से पीड़ित महिलाओं पर ध्यान दिया जाए। कहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में एक-इकतीस अक्टूबर को स्तन कैंसर जागरूकता माह घोषित किया है। घोषित आंकड़ों के अनुसार, हमारे देश में पिछले पच्चीस वर्षों में स्तन कैंसर में तीन गुना वृद्धि हुई है। जबकि हर आठ में से एक महिला में स्तन कैंसर का निदान किया जाता है, प्रारंभिक निदान की दर पैंतीस प्रतिशत है। स्तन कैंसर के निदान में, जो दुनिया और तुर्की दोनों में सबसे आम कैंसर में से एक है, सभी शारीरिक रूप से अक्षम महिलाएं, विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी के पक्षाघात वाले लोगों को बड़ी कठिनाई होती है क्योंकि उपकरण उनकी अक्षमता के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं या मैमोग्राम तक पहुंचने में असमर्थ होते हैं। टर्किश स्पाइनल कॉर्ड पैरालिसिस एसोसिएशन के अध्यक्ष सेमरा etinkaya ने कहा, "हम चाहते हैं कि सभी शारीरिक रूप से अक्षम महिलाओं, विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी के पक्षाघात से पीड़ित महिलाओं को इस वर्ष स्तन कैंसर जागरूकता माह में देखा जाए।" "हम दो लोगों के बिना मैमोग्राम नहीं कर सकते" सेमरा etinkaya, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में एक दुर्घटना के परिणामस्वरूप एक रीढ़ की हड्डी के लकवाग्रस्त व्यक्ति के रूप में अपना जीवन जारी रखा और तुर्की स्पाइनल कॉर्ड पैरालिटिक्स एसोसिएशन के संस्थापकों में से एक हैं, ने भी इस प्रक्रिया में रीढ़ की हड्डी के पक्षाघात वाले व्यक्तियों की कठिनाइयों का अनुभव किया। उसके पास कैंसर की प्रक्रिया थी। यह व्यक्त करते हुए कि व्हीलचेयर के साथ जीवन के अनुकूल होना काफी कठिन है, etinkaya ने कहा, "हम जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अवरुद्ध हैं। हालांकि, जब इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य होता है, तो चीजें और भी मुश्किल हो जाती हैं। व्यक्तियों को मैमोग्राफी उपकरणों के लिए खड़े होने में सक्षम होना चाहिए। टोमोग्राफी या इमेजिंग उपकरणों में एक साथी होना आवश्यक है। हमें अन्य इमेजिंग उपकरणों की तरह मैमोग्राफी डिवाइस के लिए किसी साथी की जरूरत नहीं है। वाक्यांशों का इस्तेमाल किया। "हम शीघ्र निदान में समान स्थिति चाहते हैं" etinkaya ने कहा, "हमारे संघ को इस मुद्दे के बारे में भी सैकड़ों शिकायतें प्राप्त होती हैं"; "हम शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों की समस्याओं को देखने और घोषित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हम स्तन कैंसर के शीघ्र निदान के लिए मैमोग्राफी के महत्व से अवगत हैं। वर्तमान में, तुर्की के कुछ अस्पतालों में विशेष उपकरण हैं जो विकलांग व्यक्तियों को अकेले मैमोग्राफी करने की अनुमति देते हैं। रोगी-नियंत्रित मैमोग्राफी के साथ, व्यक्ति अपने व्हीलचेयर से उठे बिना संपीड़न को स्वयं समायोजित कर सकते हैं और न्यूनतम स्तर पर दर्द की अनुभूति महसूस कर सकते हैं। हम इन उपकरणों की संख्या में वृद्धि करना चाहते हैं, जो व्यक्ति को पूरे तुर्की में अपनी सीट से मैमोग्राफी लेने में सक्षम बनाता है, और यह सुनिश्चित करने के लिए कि विकलांग व्यक्तियों को स्तन कैंसर के शुरुआती निदान में समान स्थिति मिलती है।
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं राशन की दुकानों का जिम्मा सहित दुकानों को महिलाओं को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग प्रस्ताव तैयार कर चुका है। वितरण में लगातार मिल रही गड़बड़ियों को लेकर CM नाराजगी जाता चुके हैं। सीएम ने अपने भाषण में महिलाओं को जिम्मेदारी सौंपने की बात की थी। पिछड़े वर्ग के युवाओं को भी आज कैबिनेट में सौगात मिल सकती है। पिछले वर्ष के बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देकर विदेश में नौकरी दिलाने की तैयारी में सरकार है। इसको लेकर सरकार नयी योजना शुरू करने जा रही है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है। योजना के अंतर्गत कौशल विकास और प्रचलित भाषा का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। और भी कई प्रस्तावों को लेकर बैठक में मुहर लग सकती है।
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं राशन की दुकानों का जिम्मा सहित दुकानों को महिलाओं को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग प्रस्ताव तैयार कर चुका है। वितरण में लगातार मिल रही गड़बड़ियों को लेकर CM नाराजगी जाता चुके हैं। सीएम ने अपने भाषण में महिलाओं को जिम्मेदारी सौंपने की बात की थी। पिछड़े वर्ग के युवाओं को भी आज कैबिनेट में सौगात मिल सकती है। पिछले वर्ष के बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देकर विदेश में नौकरी दिलाने की तैयारी में सरकार है। इसको लेकर सरकार नयी योजना शुरू करने जा रही है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है। योजना के अंतर्गत कौशल विकास और प्रचलित भाषा का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। और भी कई प्रस्तावों को लेकर बैठक में मुहर लग सकती है।
केंद्रीय कानून मंत्रालय ने न्यायमूर्ति अकील अब्दुल हामिद कुरैशी को त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शुक्रवार को पदोन्नत कर दिया। मंत्रालय ने एक अलग अधिसूचना में यह भी कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहम्मद रफीक को मेघालय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने कुरैशी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। लेकिन सरकार द्वारा आपत्ति जताये जाने के बाद, कॉलेजियम ने अपनी सिफारिशों में संशोधन करते हुए उनका नाम त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए प्रस्तावित किया था। गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन (जीएचसीएए) ने कुछ महीने पहले शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि केंद्र न्यायमूर्ति कुरैशी की नियुक्ति में देरी कर रहा है। कॉलेजियम ने इस साल 10 मई को कुरैशी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की थी। याचिका में दावा किया गया था कि केंद्र ने न्यायमूर्ति कुरैशी की नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी और सात जून को न्यायमूर्ति रविशंकर झा को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किये जाने की अधिसूचना जारी कर दी। याचिका में कहा गया कि यह तय प्रक्रिया का और संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 217 का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति कुरैशी को त्रिपुरा उच्च न्यायालय भेजने की संशोधित सिफारिश बाद में शीर्ष न्यायालय के वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई और इसने कहा कि पांच सितंबर की कॉलेजियम की बैठक में फैसला लिया गया था। जीएससीएए प्रमुख यतीन ओझा ने कथित तौर पर कहा था कि 2010 में दिये एक फैसले को लेकर न्यायमूर्ति कुरैशी को निशाना बनाया गया। दरअसल, उन्होंने मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह को सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में पुलिस हिरासत में भेजा था। शाह को सीबीआई की एक अदालत ने 2014 में बरी कर दिया था। (यह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है।
केंद्रीय कानून मंत्रालय ने न्यायमूर्ति अकील अब्दुल हामिद कुरैशी को त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शुक्रवार को पदोन्नत कर दिया। मंत्रालय ने एक अलग अधिसूचना में यह भी कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहम्मद रफीक को मेघालय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने कुरैशी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। लेकिन सरकार द्वारा आपत्ति जताये जाने के बाद, कॉलेजियम ने अपनी सिफारिशों में संशोधन करते हुए उनका नाम त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए प्रस्तावित किया था। गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन ने कुछ महीने पहले शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि केंद्र न्यायमूर्ति कुरैशी की नियुक्ति में देरी कर रहा है। कॉलेजियम ने इस साल दस मई को कुरैशी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की थी। याचिका में दावा किया गया था कि केंद्र ने न्यायमूर्ति कुरैशी की नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी और सात जून को न्यायमूर्ति रविशंकर झा को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किये जाने की अधिसूचना जारी कर दी। याचिका में कहा गया कि यह तय प्रक्रिया का और संविधान के अनुच्छेद चौदह तथा दो सौ सत्रह का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति कुरैशी को त्रिपुरा उच्च न्यायालय भेजने की संशोधित सिफारिश बाद में शीर्ष न्यायालय के वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई और इसने कहा कि पांच सितंबर की कॉलेजियम की बैठक में फैसला लिया गया था। जीएससीएए प्रमुख यतीन ओझा ने कथित तौर पर कहा था कि दो हज़ार दस में दिये एक फैसले को लेकर न्यायमूर्ति कुरैशी को निशाना बनाया गया। दरअसल, उन्होंने मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह को सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में पुलिस हिरासत में भेजा था। शाह को सीबीआई की एक अदालत ने दो हज़ार चौदह में बरी कर दिया था। (यह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है।
अमरावती/दि. 10- मनपा आयुक्त डॉ. प्रवीण आष्टीकर पर गत रोज राजापेठ रेलवे ओवरब्रिज में स्याही फेंककर हमला किये जाने की घटना के निषेध में आज लगातार दूसरे दिन भी अमरावती मनपा के अधिकारियोें व कर्मचारियोें द्वारा काम बंद आंदोलन किया गया. जिसके तहत मनपा अधिकारियों व कर्मचारियों ने गुरूवार की सुबह सबसे पहले मनपा के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने उपस्थित रहकर गत रोज घटित हुई घटना के निषेध में अपने गुस्से का इजहार किया. वहीं इसके बाद संभागीय आयुक्त, जिलाधीश व पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपे गये. जिसमें इस मामले की जांच करने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कडी से कडी कार्रवाई करने की मांग की गई. आज सुबह मनपा के सभी अधिकारी व कर्मचारी अपने कार्यालयीन कामकाज के समय तक मनपा मुख्यालय में उपस्थित हुए. किंतु काम शुरू करने की बजाय सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का जमघट मुख्य प्रवेश द्वार के सामने लगा रहा. यहां पर मनपा के नेता प्रतिपक्ष बबलु शेखावत तथा पूर्व महापौर व पार्षद विलास इंगोले ने मनपा अधिकारियों व कर्मचारियों की भुमिका का समर्थन किया. वहीं जिस समय मनपा अधिकारियों व कर्मचारियों का प्रतिनिधि मंडल जिलाधीश पवनीत कौर को ज्ञापन सौंपने हेतु पहुंचा, तो वहां पर महापौर चेतन गावंडे तथा मनपा के सभागृह नेता तुषार भारतीय ने उपस्थित रहकर उन्हें अपना समर्थन दिया. यानी एक तरह से मनपा अधिकारियों व कर्मचारियों कोे इस मामले में मनपा के सत्ता पक्ष व विपक्ष का समर्थन प्राप्त हो गया है. इसके साथ ही इस प्रतिनिधि मंडल में पुलिस आयुक्त डॉ. आरती सिंह से भी मुलाकात करते हुए मामले की सघन जांच करने और आरोपियों को कडी सजा दिलाने की मांग की.
अमरावती/दि. दस- मनपा आयुक्त डॉ. प्रवीण आष्टीकर पर गत रोज राजापेठ रेलवे ओवरब्रिज में स्याही फेंककर हमला किये जाने की घटना के निषेध में आज लगातार दूसरे दिन भी अमरावती मनपा के अधिकारियोें व कर्मचारियोें द्वारा काम बंद आंदोलन किया गया. जिसके तहत मनपा अधिकारियों व कर्मचारियों ने गुरूवार की सुबह सबसे पहले मनपा के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने उपस्थित रहकर गत रोज घटित हुई घटना के निषेध में अपने गुस्से का इजहार किया. वहीं इसके बाद संभागीय आयुक्त, जिलाधीश व पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपे गये. जिसमें इस मामले की जांच करने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कडी से कडी कार्रवाई करने की मांग की गई. आज सुबह मनपा के सभी अधिकारी व कर्मचारी अपने कार्यालयीन कामकाज के समय तक मनपा मुख्यालय में उपस्थित हुए. किंतु काम शुरू करने की बजाय सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का जमघट मुख्य प्रवेश द्वार के सामने लगा रहा. यहां पर मनपा के नेता प्रतिपक्ष बबलु शेखावत तथा पूर्व महापौर व पार्षद विलास इंगोले ने मनपा अधिकारियों व कर्मचारियों की भुमिका का समर्थन किया. वहीं जिस समय मनपा अधिकारियों व कर्मचारियों का प्रतिनिधि मंडल जिलाधीश पवनीत कौर को ज्ञापन सौंपने हेतु पहुंचा, तो वहां पर महापौर चेतन गावंडे तथा मनपा के सभागृह नेता तुषार भारतीय ने उपस्थित रहकर उन्हें अपना समर्थन दिया. यानी एक तरह से मनपा अधिकारियों व कर्मचारियों कोे इस मामले में मनपा के सत्ता पक्ष व विपक्ष का समर्थन प्राप्त हो गया है. इसके साथ ही इस प्रतिनिधि मंडल में पुलिस आयुक्त डॉ. आरती सिंह से भी मुलाकात करते हुए मामले की सघन जांच करने और आरोपियों को कडी सजा दिलाने की मांग की.
नए साल की छुट्टियों के दौरान यहां झील महोत्सव भी होने जा रहा है, जो आपकी छुट्टियों के आनंद को दोगुना कर देगा। अब क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों में बरगी डेम पर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए झील महोत्सव और साहसिक वाटर स्पोर्ट्स के आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है। बरगी डैम से लगे जलग्रहण क्षेत्र में खंडवा के हनुवंतिया की तर्ज पर झील महोत्सव का आयोजन होगा। बरगी डैम के मैकल रिसॉर्ट से करीब किलोमीटर की दूरी पर वॉटर स्पोर्ट्स के लिए जगह चिन्हित की जा चुकी है। यहां टेंट सिटी के साथ पैराग्लाइडिंग के लिए भी पर्याप्त जगह हैं। पर्यटक बरगी डेम के पास न केवल टेंट सिटी में ठहर सकेंगे बल्कि साहसिक खेलों और सांस्कृतिक संध्या का भी लुत्फ उठाएंगे। जबलपुर के पर्यटन विभाग ने इसका प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा है, जिस पर अनुमति मिलते ही दिसंबर के अंतिम सप्ताह से जनवरी के दूसरे सप्ताह तक महोत्सव आयोजित होगा। इस दौरान यहां ठहरने, घूमने के अलावा वॉटर स्पोर्ट्स का लुत्फ भी पर्यटक उठा सकेंगे। बताया जाता है कि चार साल पहले भी बरगी डैम के पास झील महोत्सव आयोजित हुआ था। लेकिन समय अवधि कम होने के कारण यह अपेक्षित रूप से सफल नहीं हो सका था। इस बार पर्यटन विभाग इस आयोजन को लेकर हर स्तर पर तैयारियां कर रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक जुड़ सकें। सीईओ हेमंत सिंह के मुताबिक बरगी डैम में झील महोत्सव के आयोजन को लेकर प्रस्ताव बनाकर भोपाल मुख्यालय भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर इसका आयोजन किया जाएगा।
नए साल की छुट्टियों के दौरान यहां झील महोत्सव भी होने जा रहा है, जो आपकी छुट्टियों के आनंद को दोगुना कर देगा। अब क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों में बरगी डेम पर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए झील महोत्सव और साहसिक वाटर स्पोर्ट्स के आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है। बरगी डैम से लगे जलग्रहण क्षेत्र में खंडवा के हनुवंतिया की तर्ज पर झील महोत्सव का आयोजन होगा। बरगी डैम के मैकल रिसॉर्ट से करीब किलोमीटर की दूरी पर वॉटर स्पोर्ट्स के लिए जगह चिन्हित की जा चुकी है। यहां टेंट सिटी के साथ पैराग्लाइडिंग के लिए भी पर्याप्त जगह हैं। पर्यटक बरगी डेम के पास न केवल टेंट सिटी में ठहर सकेंगे बल्कि साहसिक खेलों और सांस्कृतिक संध्या का भी लुत्फ उठाएंगे। जबलपुर के पर्यटन विभाग ने इसका प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा है, जिस पर अनुमति मिलते ही दिसंबर के अंतिम सप्ताह से जनवरी के दूसरे सप्ताह तक महोत्सव आयोजित होगा। इस दौरान यहां ठहरने, घूमने के अलावा वॉटर स्पोर्ट्स का लुत्फ भी पर्यटक उठा सकेंगे। बताया जाता है कि चार साल पहले भी बरगी डैम के पास झील महोत्सव आयोजित हुआ था। लेकिन समय अवधि कम होने के कारण यह अपेक्षित रूप से सफल नहीं हो सका था। इस बार पर्यटन विभाग इस आयोजन को लेकर हर स्तर पर तैयारियां कर रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक जुड़ सकें। सीईओ हेमंत सिंह के मुताबिक बरगी डैम में झील महोत्सव के आयोजन को लेकर प्रस्ताव बनाकर भोपाल मुख्यालय भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर इसका आयोजन किया जाएगा।
ऐसा माना जाता है कि एनवीआईडीआईए ग्राफिक्स कार्ड के लिए ड्राइवरहटाने की जरूरत नहीं है। उदाहरण के लिए, अपग्रेड करते समय, पुराने संस्करणों को स्वचालित रूप से नए से बदल दिया जाता है। हालांकि, इस दृष्टिकोण के बावजूद, कुछ मामलों में वीडियो कार्ड को बदलने पर अपडेट, या सिस्टम समस्याएं (ड्राइवर संघर्ष) से संबंधित असफलताएं होती हैं। और फिर सबसे जरूरी सवाल यह है कि एनवीआईडीआईए ड्राइवर को पूरी तरह से अनइंस्टॉल कैसे करें। नीचे आपको किसी भी उपयोगकर्ता के लिए ऐसा करने का सबसे सरल और तेज़ तरीका मिलेगा। अद्यतन के दौरान NVIDIA ड्राइवर को अनइंस्टॉल कैसे करें? चलो सबसे सरल से शुरू करते हैं। मान लीजिए कि किसी कारण से स्वतः अद्यतन करना काम नहीं करता है। इस मामले में क्या करना है? शुरू करने के लिए, नवीनतम ड्राइवर डाउनलोड करेंडेवलपर की आधिकारिक वेबसाइट, और फिर स्थापना कार्यक्रम चलाएं। जब स्थापना के प्रकार का चयन करने के लिए विंडो प्रकट होती है, तो एक चुनिंदा स्थापना का उपयोग करें, और फिर "साफ" स्थापना निर्दिष्ट करें। इसके अलावा हम प्रक्रिया की समाप्ति की प्रतीक्षा करते हैं। इस मामले में, आप पूरी तरह से सुनिश्चित हो सकते हैं कि पुराने प्रोफाइल और ड्राइवर सिस्टम से पूरी तरह से हटा दिए जाएंगे और एक नए संस्करण के साथ बदल दिए जाएंगे। लेकिन जब समस्याएं ऊपर वर्णित होती हैं तो क्या करना हैरास्ता हल नहीं किया जाता है। आप डिवाइस प्रबंधक से ड्राइवर को हटा सकते हैं, लेकिन सिस्टम पुनरारंभ के दौरान इसे फिर से स्थापित करेगा। इस मामले में, आपको नियंत्रण कक्ष में प्रोग्राम और घटकों के मानक अनुभाग का उपयोग करने की आवश्यकता है। मैं एनवीआईडीआईए ड्राइवर को अनइंस्टॉल कैसे करूं? यह बहुत आसान है! एनवीआईडीआईए के सभी घटकों का चयन करना आवश्यक है, उन्हें डेवलपर के नाम से सॉर्ट करें, और फिर मानक अनइंस्टॉल प्रक्रिया का उपयोग करें। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस विधि के साथ हटाने हमेशा सुचारू रूप से नहीं जाती है। सबसे पहले, प्रत्येक घटक मैन्युअल रूप से हटा देना बहुत लंबा है। दूसरा, सभी घटकों को अनइंस्टॉल नहीं किया गया है (बहुत सारी कचरा फाइलें हैं, सिस्टम रजिस्ट्री में प्रविष्टियां इत्यादि हैं)। फिर अनइंस्टॉलेशन के बाद छोड़ी गई सभी चीज़ों को देखने के लिए, यह एक कृतज्ञ कार्य है। मदद मांगना बेहतर हैप्रोग्राम जो कंप्यूटर सिस्टम के उपयोगकर्ता के लिए सभी काम करेंगे। आप निश्चित रूप से, एप्लिकेशन ड्राइवर स्वीपर को सलाह दे सकते हैं, लेकिन यह विशेष रूप से विंडोज 7 और सिस्टम के पुराने संस्करणों में काम करता है, लेकिन आठवां और दसवां संशोधन समर्थन नहीं करता है। फिर प्रवेश कैसे करें? इस स्थिति के लिए, कैसे निकालना है इसका सवालसार्वभौमिक प्रोग्राम डिस्प्ले ड्राइवर अनइंस्टॉलर का उपयोग करके एनवीआईडीआईए ड्राइवर पूरी तरह से और पूरी तरह से हल हो गया है। हालांकि, सभी कार्यों को केवल एक सुरक्षित मोड में करना आवश्यक है। कार्यक्रम स्वचालित रूप से सिस्टम के बूट मोड को निर्धारित करता है और सामान्य शुरुआत में उपयोगकर्ता को सुरक्षित मोड पर जाने के लिए संकेत मिलता है। इसके बाद, उपयोगिता स्वचालित रूप से सभी उपलब्ध घटकों का पता लगाती है और बिना उपयोगकर्ता हस्तक्षेप के उन्हें अनइंस्टॉल करती है। यह एप्लिकेशन भी सुविधाजनक है क्योंकि यह आपको फिजएक्स के उपयोग से इनकार करने की अनुमति देता है। इस सवाल का हल कोई कम दिलचस्प नहीं हैअनइंस्टॉल एनवीआईडीआईए ड्राइवर, अपने प्रकार के आईओबीटी अनइंस्टॉलर प्रोग्राम के सबसे शक्तिशाली का उपयोग है। यदि आप प्रोग्राम अनुभाग देखते हैं, तो आप देखेंगे कि यह कुछ समान विंडोज विभाजन के मानक दृश्य जैसा दिखता है। अंतर यह है कि यहां आप तुरंत सभी घटकों का चयन कर सकते हैं, जिसके बाद मानक हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, और उसके बाद एक शक्तिशाली स्कैन का पालन किया जाएगा, जिसके दौरान सभी अवशिष्ट फाइलें और रजिस्ट्री कुंजियों का पता लगाया जाएगा। अनइंस्टॉल प्रक्रिया को पूरा करने के लिए, आपको मिली सभी ऑब्जेक्ट्स को हटाना होगा और फ़ाइल हटाना लाइन के सामने एक चेक मार्क डालना होगा।
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अबू ज़हबी के युवराज मोहम्मद बिन ज़ाएद आज अचानक रियाज़ के दौरे पर जा रहे हैं, जिसमें वह ईरान और गुट 4+1 के बीच वार्ता सहित क्षेत्र के अहम मामलों पर सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत करेंगे। ईरान की इस्लामी क्रांति संरक्षक फ़ोर्स आईआरजीसी ने पाकिस्तान की सीमा से लगने वाले दक्षिण-पूर्वी प्रांत सीस्तान व बलूचिस्तान में एक सशस्त्र गुट को तबाह कर दिया है। इराक़ में अमरीकी एयरबेस अल-असद पर रॉकेट हमला हुआ है, हालिया दिनों में अमरीकी सैनिकों पर यह ऐसा तीसरा हमला है। प्रेस टीवी ने एक जानकार सूत्र के हवाले से बताया है कि अगर अमरीका, ईरान के ख़िलाफ़ लगाए गए समस्त प्रतिबंधों को हटाने से इन्कार करता है, तो तेहरान परमाणु समझौते की बहाली के लिए वियना में जारी वार्ता से बाहर निकल जाएगा। तेहरान स्थित स्विट्ज़रलैंड के दूतावास में काम करने वाली एक वरिष्ठ कर्मचारी की एक गगनचुंबी इमारत से गिरकर मौत हो गई है। समाचार एजेंसी एसोशिएटेड प्रेस का कहना है कि वियना में वार्ता प्रक्रिया में प्रगति और कूटनैतिक संपर्कों से पता चलता है कि ईरान व अमरीका संभावित रूप से समझौते के क़रीब पहुंच गए हैं। आज अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली इब्ने अबी तालिब की शहादत की बरसी पर पूरा इस्लामी जगत शोकाकुल है। जो ज़ाहिरी हालात हैं उनसे बहुत सारे सवाल खड़े हो रहे हैं और जैसे जैसे घटनाएं होती हैं फिर नए सवाल खड़े हो जाते हैं। यह घटनाएं रणनैतिक नज़र से महत्वपूर्ण माने जाने वाले शहरों हैफ़ा, तेल अबीब और रमला में हुई हैं। लंदन स्थित अल-अरब अख़बार ने भविष्यवाणी की है कि ईरान और सऊदी अरब के रिश्तों में जल्दी ही बदलाव देखने को मिलेगा, जिसे सऊदी अधिकारियों के लहजे से महसूस किया जा सकता है। ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख सैय्यद इब्राहीम रईसी ने कहा है कि जनरल क़ासिम सुलैमानी दुश्मनों के ख़िलाफ़ कई सफलताओं के स्रोत थे।
अबू ज़हबी के युवराज मोहम्मद बिन ज़ाएद आज अचानक रियाज़ के दौरे पर जा रहे हैं, जिसमें वह ईरान और गुट चार+एक के बीच वार्ता सहित क्षेत्र के अहम मामलों पर सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत करेंगे। ईरान की इस्लामी क्रांति संरक्षक फ़ोर्स आईआरजीसी ने पाकिस्तान की सीमा से लगने वाले दक्षिण-पूर्वी प्रांत सीस्तान व बलूचिस्तान में एक सशस्त्र गुट को तबाह कर दिया है। इराक़ में अमरीकी एयरबेस अल-असद पर रॉकेट हमला हुआ है, हालिया दिनों में अमरीकी सैनिकों पर यह ऐसा तीसरा हमला है। प्रेस टीवी ने एक जानकार सूत्र के हवाले से बताया है कि अगर अमरीका, ईरान के ख़िलाफ़ लगाए गए समस्त प्रतिबंधों को हटाने से इन्कार करता है, तो तेहरान परमाणु समझौते की बहाली के लिए वियना में जारी वार्ता से बाहर निकल जाएगा। तेहरान स्थित स्विट्ज़रलैंड के दूतावास में काम करने वाली एक वरिष्ठ कर्मचारी की एक गगनचुंबी इमारत से गिरकर मौत हो गई है। समाचार एजेंसी एसोशिएटेड प्रेस का कहना है कि वियना में वार्ता प्रक्रिया में प्रगति और कूटनैतिक संपर्कों से पता चलता है कि ईरान व अमरीका संभावित रूप से समझौते के क़रीब पहुंच गए हैं। आज अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली इब्ने अबी तालिब की शहादत की बरसी पर पूरा इस्लामी जगत शोकाकुल है। जो ज़ाहिरी हालात हैं उनसे बहुत सारे सवाल खड़े हो रहे हैं और जैसे जैसे घटनाएं होती हैं फिर नए सवाल खड़े हो जाते हैं। यह घटनाएं रणनैतिक नज़र से महत्वपूर्ण माने जाने वाले शहरों हैफ़ा, तेल अबीब और रमला में हुई हैं। लंदन स्थित अल-अरब अख़बार ने भविष्यवाणी की है कि ईरान और सऊदी अरब के रिश्तों में जल्दी ही बदलाव देखने को मिलेगा, जिसे सऊदी अधिकारियों के लहजे से महसूस किया जा सकता है। ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख सैय्यद इब्राहीम रईसी ने कहा है कि जनरल क़ासिम सुलैमानी दुश्मनों के ख़िलाफ़ कई सफलताओं के स्रोत थे।
'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के नए 'तारक मेहता' बने टीवी एक्टर सचिन श्रॉफ ने दूसरी शादी कर ली है। 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के नए 'तारक मेहता' बने टीवी एक्टर सचिन श्रॉफ ने दूसरी शादी कर ली है। EntertainmentNews Highlights 26 February: मनोरंजन जगत की बड़ी खबरें यहां पढ़ें। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार इन दिनों अपनी फिल्म सेल्फी को लेकर चर्चा में हैं। बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह बॉलीवुड पर भड़कते नजर आ रहे हैं।
'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के नए 'तारक मेहता' बने टीवी एक्टर सचिन श्रॉफ ने दूसरी शादी कर ली है। 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के नए 'तारक मेहता' बने टीवी एक्टर सचिन श्रॉफ ने दूसरी शादी कर ली है। EntertainmentNews Highlights छब्बीस फ़रवरीruary: मनोरंजन जगत की बड़ी खबरें यहां पढ़ें। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार इन दिनों अपनी फिल्म सेल्फी को लेकर चर्चा में हैं। बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह बॉलीवुड पर भड़कते नजर आ रहे हैं।
कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से बचाने के लिए राज्यों में लागू किए गए लॉकडाउन और अन्य पाबंदियों ने व्यापार और व्यापारियों को खासा असर डाला है। इसी बीच कश्मीर के डेयरी किसान भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। कर्फ्यू में कम मांग का हवाला देते हुए डेयरी संयंत्रों ने दूध की खरीद कम कर दी है। इसका सीधा असर डेयरी किसानों पर पड़ रहा है। ऐसे में किसान प्रतिदिन हजारों लीटर दूध नाले में बहा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 29 अप्रैल को 11 जिलों में कोरोना कर्फ्यू का ऐलान किया था, लेकिन अगले दिन इसे सभी 20 जिलों में लागू कर दिया गया था। उसके बाद प्रशासन ने इसे पहले 17 मई और फिर बाद में 24 मई तक के लिए बढ़ा दिया था। इसके बाद सोमवार को प्रशासन ने इस कर्फ्यू को 31 मई तक के लिए बढ़ा दिया है। हालांकि, इसमें सुबह 6 से 11 बजे तक दुकानें खोलने की अनुमति दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू को लगातार बढ़ाए जाने से इसका सबसे ज्यादा असर डेयरी किसानों पर हुआ है। कर्फ्यू में मांग में कमी के कारण डेयरी संयंत्रयों ने किसानों से दूध खरीदना कम कर दिया है। हालात यह है कि लसीपोरा औद्योगिक क्षेत्र में संचालित जुम-जुम मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट कर्फ्यू से पहले प्रतिदिन 22,000 लीटर दूध की खरीद कर रहा था, लेकिन अब मांग में कमी का हवाला देते हुए महज 10,000 लीटर दूध ही खरीद रहा है। डेयरी प्लांट मालिक शफत शाह ने कहा, "हम दूध खरीदते हैं और मांग के आधार पर इकाई में उससे उत्पाद तैयार करते हैं। वर्तमान में कोरोना कर्फ्यू के कारण मांग में कमी आने से हम खरीद को 50-60 प्रतिशत कम करने के लिए मजबूर हैं। " डेयरी प्लांटों द्वारा दूध की कम खरीद करने से डेयरी किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मांग नहीं होने से दर्जनों किसान प्रतिदिन हजारों लीटर दूध नाले में बहा रहे हैं। डेयरी किसानों का कहना है कि दूध फेंकना मुश्किल है, लेकिन वह मजबूर हैं। ऐसे में सभी किसान प्रतिदिन बचे हुए दूध को नालों में बहा रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल से हस्तक्षेप करते हुए सभी डेयरी किसानों के हित में कदम उठाने की मांग की है। डेयरी किसान रफीक अहमद ने कहा, "पिछले एक महीने से हम केवल 40 फीसदी दूध ही बेच रहे हैं। लॉकडाउन के कारण कोई खरीदार नहीं है। मेरे पास 40 गाय हैं और दूध नहीं बिकने से मेरी आजीविका प्रभावित हुई है। सभी गायें भुखमरी के कगार पर हैं। " उन्होंने आगे कहा, "मेरे पास 40 गायों के लिए चारा खरीदने के पैसे नहीं हैं। परिवार पर भी रोजी-रोटी का संकट है। मैं प्रतिदिन 60 प्रतिशत दूध नाले में बहा रहा हूं। "
कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से बचाने के लिए राज्यों में लागू किए गए लॉकडाउन और अन्य पाबंदियों ने व्यापार और व्यापारियों को खासा असर डाला है। इसी बीच कश्मीर के डेयरी किसान भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। कर्फ्यू में कम मांग का हवाला देते हुए डेयरी संयंत्रों ने दूध की खरीद कम कर दी है। इसका सीधा असर डेयरी किसानों पर पड़ रहा है। ऐसे में किसान प्रतिदिन हजारों लीटर दूध नाले में बहा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उनतीस अप्रैल को ग्यारह जिलों में कोरोना कर्फ्यू का ऐलान किया था, लेकिन अगले दिन इसे सभी बीस जिलों में लागू कर दिया गया था। उसके बाद प्रशासन ने इसे पहले सत्रह मई और फिर बाद में चौबीस मई तक के लिए बढ़ा दिया था। इसके बाद सोमवार को प्रशासन ने इस कर्फ्यू को इकतीस मई तक के लिए बढ़ा दिया है। हालांकि, इसमें सुबह छः से ग्यारह बजे तक दुकानें खोलने की अनुमति दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू को लगातार बढ़ाए जाने से इसका सबसे ज्यादा असर डेयरी किसानों पर हुआ है। कर्फ्यू में मांग में कमी के कारण डेयरी संयंत्रयों ने किसानों से दूध खरीदना कम कर दिया है। हालात यह है कि लसीपोरा औद्योगिक क्षेत्र में संचालित जुम-जुम मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट कर्फ्यू से पहले प्रतिदिन बाईस,शून्य लीटरटर दूध की खरीद कर रहा था, लेकिन अब मांग में कमी का हवाला देते हुए महज दस,शून्य लीटरटर दूध ही खरीद रहा है। डेयरी प्लांट मालिक शफत शाह ने कहा, "हम दूध खरीदते हैं और मांग के आधार पर इकाई में उससे उत्पाद तैयार करते हैं। वर्तमान में कोरोना कर्फ्यू के कारण मांग में कमी आने से हम खरीद को पचास-साठ प्रतिशत कम करने के लिए मजबूर हैं। " डेयरी प्लांटों द्वारा दूध की कम खरीद करने से डेयरी किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मांग नहीं होने से दर्जनों किसान प्रतिदिन हजारों लीटर दूध नाले में बहा रहे हैं। डेयरी किसानों का कहना है कि दूध फेंकना मुश्किल है, लेकिन वह मजबूर हैं। ऐसे में सभी किसान प्रतिदिन बचे हुए दूध को नालों में बहा रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल से हस्तक्षेप करते हुए सभी डेयरी किसानों के हित में कदम उठाने की मांग की है। डेयरी किसान रफीक अहमद ने कहा, "पिछले एक महीने से हम केवल चालीस फीसदी दूध ही बेच रहे हैं। लॉकडाउन के कारण कोई खरीदार नहीं है। मेरे पास चालीस गाय हैं और दूध नहीं बिकने से मेरी आजीविका प्रभावित हुई है। सभी गायें भुखमरी के कगार पर हैं। " उन्होंने आगे कहा, "मेरे पास चालीस गायों के लिए चारा खरीदने के पैसे नहीं हैं। परिवार पर भी रोजी-रोटी का संकट है। मैं प्रतिदिन साठ प्रतिशत दूध नाले में बहा रहा हूं। "
Cyrus Mistry Death: टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री का सड़क हादसे में निधन हो गया। पालघर पुलिस अधिकारी ने बताया कि टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री अहमदाबाद से मुंबई जा रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी कार के डिवाइडर से टकरा गई। कार में 4 लोग मौजूद थे। दो की मौके पर ही मौत हो गई और दो को अस्पताल ले जाया गया। उद्योगपति सायरस मिस्त्री को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री की मुंबई के पास सड़क हादसे में मौत हो गई है। ये हादसा मुंबई के पास पालघर में हुआ। घटना कल दोपहर करीब तीन बजे की है। घटना के समय उनकी गाड़ी की स्पीड बेहद तेज थी, जिसके बाद डिवाइडर से उनकी कार टकरा गई। कहा ये भी जा रहा है कि घटना के समय ड्राइवर गाड़ी चला रहा था और उस समय गाड़ी में चार लोग सवार थे। मिस्त्री की उम्र 54 साल थी। पालघर पुलिस अधिकारी ने बताया कि टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री अहमदाबाद से मुंबई जा रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी कार के डिवाइडर से टकरा गई। कार में 4 लोग मौजूद थे। दो की मौके पर ही मौत हो गई और दो को अस्पताल ले जाया गया। पालघर पुलिस सूत्रों के मुताबिक, साइरस मिस्त्री के मृत्यु के मामले में प्राथमिक अनुमान है कि कार चालक ने नियंत्रण खो दिया। साइरस मिस्त्री का पार्थिव शरीर कासा के एक सरकारी अस्पताल में है। पुलिस द्वारा प्रक्रिया के अनुसार एक दुर्घटना मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की जा रही है। पालघर जिले के पुलिस अधीक्षक बालासाहेब पाटिल ने बताया कि दुर्घटना दोपहर 3. 15 बजे हुई। मिस्त्री अहमदाबाद से मुंबई जा रहे थे। हादसा सूर्या नदी पर बने पुल पर हुआ। दुर्घटना में मिस्त्री और एक अन्य की मौके पर ही मौत हो गई। ड्राइवर समेत दो अन्य घायल हैं। घायलों को इलाज के लिए गुजरात भेजा गया है। पुलिस के मुताबिक, कार को मुंबई की एक डॉक्टर चली रही थीं। (Cyrus Mistry Death) बताया जा रहा है कि हादसा कासा थाना क्षेत्र में सूर्या नदी पुल पर चरोटी नाका में हुआ। मिस्त्री की कार डिवाइडर से टकराने के बाद रिटेंशन वॉल से जा भिड़ी। हादसे में जान गंवाने वाले मिस्त्री और जहांगीर पंडोल के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए कासा ग्रामीण अस्पताल भेज दिया गया है। घायलों की पहचान ड्राइवर अनायता पंडोल और डेरियस पंडोल के रूप में हुई है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस से मामले की विस्तृत जांच करने को कहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस को उस सड़क दुर्घटना की विस्तृत जांच करने को कहा गया है, जिसमें सायरस मिस्त्री की मौत हुई है। मिस्त्री को 2011 में रतन टाटा के उत्तराधिकारी के तौर पर चुना गया था। इससे पहले भी वो प्रमुख कारोबारी समूह शापूरजी पालोंजी मिस्त्री कंपनी से जुड़े थे। चार जुलाई 1968 को मुंबई में जन्मे सायरस के पिता पालोंजी मिस्त्री भी बहुत बड़े बिजनेस टायकून थे। मिस्त्री के पास आयरलैंड की नागरिकता थी और वह भारत के स्थायी नागरिक थे। उनकी मां आयरलैंड में पैदा हुई थी, जिसके चलते उन्हें वहां की नागरिकता मिली थी। उनकी मां के भाई भारत की एक बड़ी शिपिंग कंपनी के प्रमुख थे। सायरस मिस्त्री ने 1992 में देश के विख्यात वकीलों में शामिल इकबाल चागला की बेटी रोहिका चागला से शादी की थी। उनके दो बच्चे हैं।
Cyrus Mistry Death: टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री का सड़क हादसे में निधन हो गया। पालघर पुलिस अधिकारी ने बताया कि टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री अहमदाबाद से मुंबई जा रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी कार के डिवाइडर से टकरा गई। कार में चार लोग मौजूद थे। दो की मौके पर ही मौत हो गई और दो को अस्पताल ले जाया गया। उद्योगपति सायरस मिस्त्री को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री की मुंबई के पास सड़क हादसे में मौत हो गई है। ये हादसा मुंबई के पास पालघर में हुआ। घटना कल दोपहर करीब तीन बजे की है। घटना के समय उनकी गाड़ी की स्पीड बेहद तेज थी, जिसके बाद डिवाइडर से उनकी कार टकरा गई। कहा ये भी जा रहा है कि घटना के समय ड्राइवर गाड़ी चला रहा था और उस समय गाड़ी में चार लोग सवार थे। मिस्त्री की उम्र चौवन साल थी। पालघर पुलिस अधिकारी ने बताया कि टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री अहमदाबाद से मुंबई जा रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी कार के डिवाइडर से टकरा गई। कार में चार लोग मौजूद थे। दो की मौके पर ही मौत हो गई और दो को अस्पताल ले जाया गया। पालघर पुलिस सूत्रों के मुताबिक, साइरस मिस्त्री के मृत्यु के मामले में प्राथमिक अनुमान है कि कार चालक ने नियंत्रण खो दिया। साइरस मिस्त्री का पार्थिव शरीर कासा के एक सरकारी अस्पताल में है। पुलिस द्वारा प्रक्रिया के अनुसार एक दुर्घटना मृत्यु रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। पालघर जिले के पुलिस अधीक्षक बालासाहेब पाटिल ने बताया कि दुर्घटना दोपहर तीन. पंद्रह बजे हुई। मिस्त्री अहमदाबाद से मुंबई जा रहे थे। हादसा सूर्या नदी पर बने पुल पर हुआ। दुर्घटना में मिस्त्री और एक अन्य की मौके पर ही मौत हो गई। ड्राइवर समेत दो अन्य घायल हैं। घायलों को इलाज के लिए गुजरात भेजा गया है। पुलिस के मुताबिक, कार को मुंबई की एक डॉक्टर चली रही थीं। बताया जा रहा है कि हादसा कासा थाना क्षेत्र में सूर्या नदी पुल पर चरोटी नाका में हुआ। मिस्त्री की कार डिवाइडर से टकराने के बाद रिटेंशन वॉल से जा भिड़ी। हादसे में जान गंवाने वाले मिस्त्री और जहांगीर पंडोल के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए कासा ग्रामीण अस्पताल भेज दिया गया है। घायलों की पहचान ड्राइवर अनायता पंडोल और डेरियस पंडोल के रूप में हुई है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस से मामले की विस्तृत जांच करने को कहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस को उस सड़क दुर्घटना की विस्तृत जांच करने को कहा गया है, जिसमें सायरस मिस्त्री की मौत हुई है। मिस्त्री को दो हज़ार ग्यारह में रतन टाटा के उत्तराधिकारी के तौर पर चुना गया था। इससे पहले भी वो प्रमुख कारोबारी समूह शापूरजी पालोंजी मिस्त्री कंपनी से जुड़े थे। चार जुलाई एक हज़ार नौ सौ अड़सठ को मुंबई में जन्मे सायरस के पिता पालोंजी मिस्त्री भी बहुत बड़े बिजनेस टायकून थे। मिस्त्री के पास आयरलैंड की नागरिकता थी और वह भारत के स्थायी नागरिक थे। उनकी मां आयरलैंड में पैदा हुई थी, जिसके चलते उन्हें वहां की नागरिकता मिली थी। उनकी मां के भाई भारत की एक बड़ी शिपिंग कंपनी के प्रमुख थे। सायरस मिस्त्री ने एक हज़ार नौ सौ बानवे में देश के विख्यात वकीलों में शामिल इकबाल चागला की बेटी रोहिका चागला से शादी की थी। उनके दो बच्चे हैं।
हरियाणा ब्यूरोः फरीदाबाद से गुजरने वाली आगरा कैनाल में तैरती हुई एक व्यक्ति की लाश को देखकर बाईपास से गुजरने वाले लोगों का हुजूम इकट्टा हो गया। लोगों ने पुलिस को सूचना दी और बताया कि चंदावली पुल और आईएमटी के बीच में एक व्यक्ति की लाश नहर में तैरती हुई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक व्यक्ति को नहर से निकालने का रैस्क्यू किया गया। घंटों कड़ी मेहनत के बाद पुलिस टीम ने मृत व्यक्ति को नहर से बाहर निकाला और पोस्टमार्डम के लिये सिविल अस्पताल भिजवा दिया। थाना सदर इंचार्ज जसवीर ने बताया कि अभी तक मृत व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई और न ही मौत के कारणों का पता लग पाया है।
हरियाणा ब्यूरोः फरीदाबाद से गुजरने वाली आगरा कैनाल में तैरती हुई एक व्यक्ति की लाश को देखकर बाईपास से गुजरने वाले लोगों का हुजूम इकट्टा हो गया। लोगों ने पुलिस को सूचना दी और बताया कि चंदावली पुल और आईएमटी के बीच में एक व्यक्ति की लाश नहर में तैरती हुई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक व्यक्ति को नहर से निकालने का रैस्क्यू किया गया। घंटों कड़ी मेहनत के बाद पुलिस टीम ने मृत व्यक्ति को नहर से बाहर निकाला और पोस्टमार्डम के लिये सिविल अस्पताल भिजवा दिया। थाना सदर इंचार्ज जसवीर ने बताया कि अभी तक मृत व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई और न ही मौत के कारणों का पता लग पाया है।
सस्कृत नाटकों की सुखान्तता २ दुखान्त नाटको का प्रभाव संस्कृत नाटका की प्रमुख विशेषनाम्रा मे से एक विशेषता है, दुखान्त नाटका का अभाव । कवन सुखा नाटका का अस्तित्व । इसका कारण यह है कि भारतीय मनीषिया न एहि पार्थों की व्याख्या करते समय आध्यात्मिक तत्त्वा को क्यमपि अवहलना नहीं की है। समार व रचनात्रम में उन्होंने न त को पाया है। व ससार की सम्पूर्ण किया और वायत्रमा म एक सामजस्य दम्वते हैं। अतएव जीव का उद्देश्य प्रय धम और मान्य प्राप्ति होता है। जीवन के ग्रन्त के पश्चात् भी अवश्य हो, की कामना मोल की सम्भवता में अतनिहित रहती है। भारतीय महर्षिया वासुन्दर से निन सुन्दर तर सुन्दरतर से सुन्दर तम सुन्दर जीवन का श्रम र सुन्दर सुतर जग जीवन । म अटल विश्वास रहा है। भारतीय दशन आशावादी रहा है। हिन्दू प्राचार शास्त्र कभी भी पाप की विजय नहीं रख सकता । मनएव दार्शनिक एवं लोक व्यवहार की दृष्टि से यहाँ अन्त में सुख स्मृद्धि और धम की विजय ही दिखायी जाती है । भारतीय सामाजिक व्यवस्था में सतोष परम सुखम् प्रादश माना गया। जहाँ पाश्चात्य भावक गंगा आवश्यक्ता हा आविष्कार की जननी है, कहत हैं वही भारतीय दशन अपरिग्रह के सिद्धान्ता का अनुसरण वाघनाय मानता है। अत भाज के पाश्चात्य समस्या नाटका जस नाटका की उत्पत्ति के अनुकूल यहा वातावरण ही नही था। इमालिय यहाँ दुखान और समस्या प्रधान नाटका का नित्तान्न अभाव रहा था। हा यहाँ जावन की शाश्वत समस्यामा और चिरन्तन पहेलिया को सुलजान था 1 पत - ग्रुजन
सस्कृत नाटकों की सुखान्तता दो दुखान्त नाटको का प्रभाव संस्कृत नाटका की प्रमुख विशेषनाम्रा मे से एक विशेषता है, दुखान्त नाटका का अभाव । कवन सुखा नाटका का अस्तित्व । इसका कारण यह है कि भारतीय मनीषिया न एहि पार्थों की व्याख्या करते समय आध्यात्मिक तत्त्वा को क्यमपि अवहलना नहीं की है। समार व रचनात्रम में उन्होंने न त को पाया है। व ससार की सम्पूर्ण किया और वायत्रमा म एक सामजस्य दम्वते हैं। अतएव जीव का उद्देश्य प्रय धम और मान्य प्राप्ति होता है। जीवन के ग्रन्त के पश्चात् भी अवश्य हो, की कामना मोल की सम्भवता में अतनिहित रहती है। भारतीय महर्षिया वासुन्दर से निन सुन्दर तर सुन्दरतर से सुन्दर तम सुन्दर जीवन का श्रम र सुन्दर सुतर जग जीवन । म अटल विश्वास रहा है। भारतीय दशन आशावादी रहा है। हिन्दू प्राचार शास्त्र कभी भी पाप की विजय नहीं रख सकता । मनएव दार्शनिक एवं लोक व्यवहार की दृष्टि से यहाँ अन्त में सुख स्मृद्धि और धम की विजय ही दिखायी जाती है । भारतीय सामाजिक व्यवस्था में सतोष परम सुखम् प्रादश माना गया। जहाँ पाश्चात्य भावक गंगा आवश्यक्ता हा आविष्कार की जननी है, कहत हैं वही भारतीय दशन अपरिग्रह के सिद्धान्ता का अनुसरण वाघनाय मानता है। अत भाज के पाश्चात्य समस्या नाटका जस नाटका की उत्पत्ति के अनुकूल यहा वातावरण ही नही था। इमालिय यहाँ दुखान और समस्या प्रधान नाटका का नित्तान्न अभाव रहा था। हा यहाँ जावन की शाश्वत समस्यामा और चिरन्तन पहेलिया को सुलजान था एक पत - ग्रुजन
Almonds Benefits for Health: बादाम जैसे नट्स हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत होते हैं इसलिए इनका सेवन करना शरीर को पौष्टिक तत्वों की जरूरत पूरी करने के लिए जरूरी होता है। यह शरीर के लिए कई तरह से लाभदायक होते हैं जैसे दिल के लिए सहायक और मसल्स के विकास के लिए लाभदायक। इसके अलावा बादाम में प्रोटीन, फाइबर, जिंक, ओमेगा 3 फैटी एसिड और विटामिन ई जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। यह आपके पाचन में भी काफी सहायक रहते हैं इसलिए इनका सेवन करना पाचन से जुड़ी समस्याओं को खत्म करने में लाभदायक माना जाता है। पुरुषों के लिए बदाम का सेवन करना और ज्यादा लाभदायक होता है। इनका सेवन भिगो कर और अगले दिन छील कर भी कर सकते हैं। आइए जानते हैं बादाम खाने के फायदे और इनका सेवन करने से कौन-कौन से शारीरिक लाभ मिलते हैं। पुरुषों के लिए सहायक (Good for Sexual Health) पुरुषों को सेक्सुअल हेल्थ (Sexual Health) में बादाम का सेवन करने से बहुत सारे लाभ मिल सकते हैं। इसलिए रात में इनका सेवन करना आपके लिए काफी अच्छा हो सकता है। बादाम में विटामिन ई, सेलेनियम और जिंक जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं जो टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। इसका सेवन करने से शरीर में ब्लड फ्लो भी सही होता है। मसल्स के विकास मेंसहायक (Helps In Muscles Growth) बादाम प्रोटीन का अच्छा स्रोत होते हैं और अगर आप मसल्स को ग्रो करना चाहते हैं तो शरीर को प्रोटीन की जरूरत होती है जिसे बादाम खा कर पूरा किया जा सकता है। इसलिए रात में सोते समय या फिर सुबह के समय आप दूध के साथ बादाम का सेवन कर सकते हैं जिसके कारण आपको मसल्स में ग्रोथ देखने को मिलेगी। स्किन के लिए फायदेमंद (Anti Aging Property) बादाम में विटामिन ई और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो स्किन के लिए काफी अच्छे होते हैं। बादाम जैसे पौष्टिक तत्वों से भरपूर नट्स का सेवन करने से स्किन ग्लो करती है और त्वचा जवान भी बनी रहती है। साथ में एजिंग के लक्षण भी काफी कम देखने को मिलते हैं। पाचन के लिए लाभदायक (Good for Digestion) अगर आप पाचन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो आपको बदाम का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है और फाइबर का सेवन करने से पाचन सुचारू रूप से होता है और कब्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। दिल की सेहत के लिए लाभदायक (Good For Heart) दिल की समस्याओं को कम करने में भी बादाम मदद करता है क्योंकि इसका सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल लेवल कम हो सकता है। इसका सेवन करने से बुरा कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है जिस के कारण दिल की सभी समस्याओं में राहत मिल सकती है। साथ ही भीगे हुए बादामों का सेवन करने से ब्लड प्रेसर का लेवल भी कम होता है। प्रेगनेंसी में लाभदायक (Good In Pregnancy) गर्भवती महिलाओं को भी बादाम का सेवन करने से कई सारे लाभ मिल सकते हैं। इसमें फोलिक एसिड होता है जो बच्चे के विकास के लिए लाभदायक होता है। यह बच्चे के दिमाग और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम के विकास में लाभदायक होता है। इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान इसका सेवन करने से मां के साथ बच्चे को भी मदद मिल सकती है। एजिंग लक्षणों को नियंत्रित करता है (Anti Aging property) बादामों में एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जिनका सेवन करने से उम्र के साथ आने वाले एजिंग के लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। इम्यूनिटी बढ़ाने में लाभदायक (Improves Immunity) बादाम का सेवन करने से इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसमें पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जिससे ब्लड क्लोटिंग से बचाव किया जा सकता है। इसमें प्रोटीन और आयरन की भी अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है जिससे शरीर को काफी लाभ मिलता है। एनर्जी लेवल बढ़ता है (Boosts Energy Level) अगर आपको शरीर में कमजोरी महसूस होती है और लगता है कि आपकी एनर्जी खत्म होती जा रही है तो आपको बादाम का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए। इसमें विटामिन और मैग्नीशियम पाए जाते हैं जिसकी मदद से थकान को कम किया जा सकता है। वजन कम करने के लिए (Helps In Weight Loss) बादाम का सेवन करने से भूख को कंट्रोल किया जा सकता है और अगर शाम को कुछ क्रंची खाने की क्रेविंग होती है और बादाम का सेवन किया जा सकता है। लेकिन बादाम में कैलोरीज़ की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए एक ही समय पर ज्यादा मात्रा में बदाम का सेवन करने से वजन कम होने की जगह बढ़ भी सकता है इसलिए केवल सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करें। कैंसर से बचाव में सहायक (Anti Cancerous Property) एक स्टडी में यह देखने को मिला कि बादाम में एंटी कैंसर प्रभाव पाए जाते हैं। इनका सेवन करने से कैंसर सेल्स को खत्म किया जा सकता है। कड़वे बादाम का सेवन करने से कैंसर से बचने में ज्यादा मदद मिल सकती है क्योंकि इसमें एमिग्दलीन नाम का तत्व होता है जो कैंसर के प्रभावों को कम करने में एक इलाज के रूप में काम आ सकता है। बादाम का सेवन करने से आपको बहुत सारे लाभ मिल सकते हैं। इनको या तो आप रात में दूध के साथ खा सकते हैं या फिर सुबह उठ कर खाली पेट खा सकते हैं। अगर गर्मियों में इनका सेवन कर रहे हैं तो उन्हें छिल कर ही खाएं। बादाम स्वास्थ्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं? बादाम एक प्रकार का सूपरफूड है जिसमें प्रोटीन, पोषक तत्व, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। बादाम से क्या क्या शारीरिक लाभ मिलते हैं? यह दिल के स्वास्थ्य, मस्तिष्क के विकास, वजन नियंत्रण, त्वचा की देखभाल और इम्यूनिटी मजबूती में मदद कर सकता है। बादाम में विटामिन और मिनरल कौन-कौन से होते हैं? बादाम में विटामिन ई, विटामिन बी6, फोलिक एसिड, रिबोफ्लेविन, नियासिन, पैंथोथेनिक एसिड और बी12 के साथ-साथ कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जिंक और सेलेनियम जैसे मिनरल भी होते हैं। बादाम का सेवन कैसे करें? बादाम को सबसे अच्छे तरीके से खाने के लिए आप इसे भूनकर, भिगोकर या रोस्ट करके खा सकते हैं। बादाम सेहत के लिए कितने खाने चाहिए? बादाम का आदर्श मात्रा दिन में 4 से 5 बादाम होती है। आप इसे खाली पेट या रात को सोने से पहले भी खा सकते हैं। क्या बादाम वजन कम करने में मदद कर सकते हैं? बादाम में पोषक तत्व और हेल्दी फैट्स होते हैं, जो वजन कम करने में मदद कर सकते हैं। यह मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में सहायक है। क्या बादाम दिल के लिए अच्छा होता है? हां, बादाम दिल के लिए बहुत अच्छा होता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन ई दिल की सेहत को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। बादाम के नियमित सेवन से हृदय रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है। क्या बदाम कर कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण करता है? हां बादाम को खाने से शरीर की कोलेस्ट्रॉल स्तर नियंत्रित रहता है और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है।
Almonds Benefits for Health: बादाम जैसे नट्स हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत होते हैं इसलिए इनका सेवन करना शरीर को पौष्टिक तत्वों की जरूरत पूरी करने के लिए जरूरी होता है। यह शरीर के लिए कई तरह से लाभदायक होते हैं जैसे दिल के लिए सहायक और मसल्स के विकास के लिए लाभदायक। इसके अलावा बादाम में प्रोटीन, फाइबर, जिंक, ओमेगा तीन फैटी एसिड और विटामिन ई जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। यह आपके पाचन में भी काफी सहायक रहते हैं इसलिए इनका सेवन करना पाचन से जुड़ी समस्याओं को खत्म करने में लाभदायक माना जाता है। पुरुषों के लिए बदाम का सेवन करना और ज्यादा लाभदायक होता है। इनका सेवन भिगो कर और अगले दिन छील कर भी कर सकते हैं। आइए जानते हैं बादाम खाने के फायदे और इनका सेवन करने से कौन-कौन से शारीरिक लाभ मिलते हैं। पुरुषों के लिए सहायक पुरुषों को सेक्सुअल हेल्थ में बादाम का सेवन करने से बहुत सारे लाभ मिल सकते हैं। इसलिए रात में इनका सेवन करना आपके लिए काफी अच्छा हो सकता है। बादाम में विटामिन ई, सेलेनियम और जिंक जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं जो टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। इसका सेवन करने से शरीर में ब्लड फ्लो भी सही होता है। मसल्स के विकास मेंसहायक बादाम प्रोटीन का अच्छा स्रोत होते हैं और अगर आप मसल्स को ग्रो करना चाहते हैं तो शरीर को प्रोटीन की जरूरत होती है जिसे बादाम खा कर पूरा किया जा सकता है। इसलिए रात में सोते समय या फिर सुबह के समय आप दूध के साथ बादाम का सेवन कर सकते हैं जिसके कारण आपको मसल्स में ग्रोथ देखने को मिलेगी। स्किन के लिए फायदेमंद बादाम में विटामिन ई और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो स्किन के लिए काफी अच्छे होते हैं। बादाम जैसे पौष्टिक तत्वों से भरपूर नट्स का सेवन करने से स्किन ग्लो करती है और त्वचा जवान भी बनी रहती है। साथ में एजिंग के लक्षण भी काफी कम देखने को मिलते हैं। पाचन के लिए लाभदायक अगर आप पाचन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो आपको बदाम का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है और फाइबर का सेवन करने से पाचन सुचारू रूप से होता है और कब्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। दिल की सेहत के लिए लाभदायक दिल की समस्याओं को कम करने में भी बादाम मदद करता है क्योंकि इसका सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल लेवल कम हो सकता है। इसका सेवन करने से बुरा कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है जिस के कारण दिल की सभी समस्याओं में राहत मिल सकती है। साथ ही भीगे हुए बादामों का सेवन करने से ब्लड प्रेसर का लेवल भी कम होता है। प्रेगनेंसी में लाभदायक गर्भवती महिलाओं को भी बादाम का सेवन करने से कई सारे लाभ मिल सकते हैं। इसमें फोलिक एसिड होता है जो बच्चे के विकास के लिए लाभदायक होता है। यह बच्चे के दिमाग और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम के विकास में लाभदायक होता है। इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान इसका सेवन करने से मां के साथ बच्चे को भी मदद मिल सकती है। एजिंग लक्षणों को नियंत्रित करता है बादामों में एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जिनका सेवन करने से उम्र के साथ आने वाले एजिंग के लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। इम्यूनिटी बढ़ाने में लाभदायक बादाम का सेवन करने से इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसमें पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जिससे ब्लड क्लोटिंग से बचाव किया जा सकता है। इसमें प्रोटीन और आयरन की भी अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है जिससे शरीर को काफी लाभ मिलता है। एनर्जी लेवल बढ़ता है अगर आपको शरीर में कमजोरी महसूस होती है और लगता है कि आपकी एनर्जी खत्म होती जा रही है तो आपको बादाम का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए। इसमें विटामिन और मैग्नीशियम पाए जाते हैं जिसकी मदद से थकान को कम किया जा सकता है। वजन कम करने के लिए बादाम का सेवन करने से भूख को कंट्रोल किया जा सकता है और अगर शाम को कुछ क्रंची खाने की क्रेविंग होती है और बादाम का सेवन किया जा सकता है। लेकिन बादाम में कैलोरीज़ की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए एक ही समय पर ज्यादा मात्रा में बदाम का सेवन करने से वजन कम होने की जगह बढ़ भी सकता है इसलिए केवल सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करें। कैंसर से बचाव में सहायक एक स्टडी में यह देखने को मिला कि बादाम में एंटी कैंसर प्रभाव पाए जाते हैं। इनका सेवन करने से कैंसर सेल्स को खत्म किया जा सकता है। कड़वे बादाम का सेवन करने से कैंसर से बचने में ज्यादा मदद मिल सकती है क्योंकि इसमें एमिग्दलीन नाम का तत्व होता है जो कैंसर के प्रभावों को कम करने में एक इलाज के रूप में काम आ सकता है। बादाम का सेवन करने से आपको बहुत सारे लाभ मिल सकते हैं। इनको या तो आप रात में दूध के साथ खा सकते हैं या फिर सुबह उठ कर खाली पेट खा सकते हैं। अगर गर्मियों में इनका सेवन कर रहे हैं तो उन्हें छिल कर ही खाएं। बादाम स्वास्थ्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं? बादाम एक प्रकार का सूपरफूड है जिसमें प्रोटीन, पोषक तत्व, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। बादाम से क्या क्या शारीरिक लाभ मिलते हैं? यह दिल के स्वास्थ्य, मस्तिष्क के विकास, वजन नियंत्रण, त्वचा की देखभाल और इम्यूनिटी मजबूती में मदद कर सकता है। बादाम में विटामिन और मिनरल कौन-कौन से होते हैं? बादाम में विटामिन ई, विटामिन बीछः, फोलिक एसिड, रिबोफ्लेविन, नियासिन, पैंथोथेनिक एसिड और बीबारह के साथ-साथ कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जिंक और सेलेनियम जैसे मिनरल भी होते हैं। बादाम का सेवन कैसे करें? बादाम को सबसे अच्छे तरीके से खाने के लिए आप इसे भूनकर, भिगोकर या रोस्ट करके खा सकते हैं। बादाम सेहत के लिए कितने खाने चाहिए? बादाम का आदर्श मात्रा दिन में चार से पाँच बादाम होती है। आप इसे खाली पेट या रात को सोने से पहले भी खा सकते हैं। क्या बादाम वजन कम करने में मदद कर सकते हैं? बादाम में पोषक तत्व और हेल्दी फैट्स होते हैं, जो वजन कम करने में मदद कर सकते हैं। यह मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में सहायक है। क्या बादाम दिल के लिए अच्छा होता है? हां, बादाम दिल के लिए बहुत अच्छा होता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन ई दिल की सेहत को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। बादाम के नियमित सेवन से हृदय रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है। क्या बदाम कर कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण करता है? हां बादाम को खाने से शरीर की कोलेस्ट्रॉल स्तर नियंत्रित रहता है और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है।
रीवा जिला दण्डाधिकारी मनोज पुष्प ने पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन के प्रतिवेदन पर अपराधी प्रकाश सिंह परिहार उर्फ लल्ला ठाकुर निवासी रायपुर कर्चुलियान हाल मुकाम आनंद नगर बोदाबाग रीवा के विरूद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्यवाही की है। तदनुक्रम में विश्वविद्यालय थाना प्रभारी विद्यावारिधि तिवारी ने अपराधी प्रकाश सिंह परिहार को रीवा शहर में घूमते हुए गिरफ्तार कर लिया है। अपराधी आबकारी एक्ट में फरार था तथा वह शहर के अन्य थानों में भी हत्या के प्रयास के मामलों में वांछित है। रीवा. मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री आर.सी. वाष्र्णेंय के मार्गदर्शन एवं श्री अहमद रजा, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के नेतृत्व में केन्द्रीय कारागार रीवा में विधिक साक्षरता शिविर एवं निरीक्षण किया गया। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई एवं जेल में प्रत्येक बैरक में जाकर निरीक्षण किया गया। जिला विधिक सहायता अधिकारी अभय कुमार मिश्रा ने बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता योजना के बारे में जानकारी दी। इस दौरान वेनिशन हेल्पिंग एण्ड नामक स्वयं सेवी संस्था एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सयुंक्त तत्वाधान में महिला बन्दियों के लिए सेनेटेरी पैड वितरित किया गया। इस दौरान जेल अधीक्षक एस.के. उपाध्याय, सचिव रेडक्रास एस.के. श्रीवास्तव, वरिष्ठ कल्याण अधिकारी डी.के. सारस, रविशंकर सिंह, संजू नायक, श्लेसा शुक्ला, सिद्धार्थ श्रीवास्तव बंदीगण उपस्थित रहे। पंचायत आम चुनाव में विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रथम चरण के मतदान के दौरान मतदान केन्द्र में मतदान दलों के लिए भोजन, बिजली की व्यवस्था, पेयजल, जनरेटर आदि की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिवों को दी गई थी। इसमें लापरवाही बरतने पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने दो ग्राम पंचायत सचिवों को निलंबित करने के आदेश दिए हैं। जारी अलग-अलग आदेशों के अनुसार रंगीले कोल ग्राम पंचायत सचिव दादर तथा रामबहादुर पटेल ग्राम पंचायत सचिव गोपला को निलंबित किया गया है। दोनों निलंबित ग्राम पंचायत सचिवों का मुख्यालय जनपद पंचायत हनुमना निर्धारित किया गया है। इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत की गई है।
रीवा जिला दण्डाधिकारी मनोज पुष्प ने पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन के प्रतिवेदन पर अपराधी प्रकाश सिंह परिहार उर्फ लल्ला ठाकुर निवासी रायपुर कर्चुलियान हाल मुकाम आनंद नगर बोदाबाग रीवा के विरूद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्यवाही की है। तदनुक्रम में विश्वविद्यालय थाना प्रभारी विद्यावारिधि तिवारी ने अपराधी प्रकाश सिंह परिहार को रीवा शहर में घूमते हुए गिरफ्तार कर लिया है। अपराधी आबकारी एक्ट में फरार था तथा वह शहर के अन्य थानों में भी हत्या के प्रयास के मामलों में वांछित है। रीवा. मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री आर.सी. वाष्र्णेंय के मार्गदर्शन एवं श्री अहमद रजा, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के नेतृत्व में केन्द्रीय कारागार रीवा में विधिक साक्षरता शिविर एवं निरीक्षण किया गया। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई एवं जेल में प्रत्येक बैरक में जाकर निरीक्षण किया गया। जिला विधिक सहायता अधिकारी अभय कुमार मिश्रा ने बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता योजना के बारे में जानकारी दी। इस दौरान वेनिशन हेल्पिंग एण्ड नामक स्वयं सेवी संस्था एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सयुंक्त तत्वाधान में महिला बन्दियों के लिए सेनेटेरी पैड वितरित किया गया। इस दौरान जेल अधीक्षक एस.के. उपाध्याय, सचिव रेडक्रास एस.के. श्रीवास्तव, वरिष्ठ कल्याण अधिकारी डी.के. सारस, रविशंकर सिंह, संजू नायक, श्लेसा शुक्ला, सिद्धार्थ श्रीवास्तव बंदीगण उपस्थित रहे। पंचायत आम चुनाव में विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रथम चरण के मतदान के दौरान मतदान केन्द्र में मतदान दलों के लिए भोजन, बिजली की व्यवस्था, पेयजल, जनरेटर आदि की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिवों को दी गई थी। इसमें लापरवाही बरतने पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने दो ग्राम पंचायत सचिवों को निलंबित करने के आदेश दिए हैं। जारी अलग-अलग आदेशों के अनुसार रंगीले कोल ग्राम पंचायत सचिव दादर तथा रामबहादुर पटेल ग्राम पंचायत सचिव गोपला को निलंबित किया गया है। दोनों निलंबित ग्राम पंचायत सचिवों का मुख्यालय जनपद पंचायत हनुमना निर्धारित किया गया है। इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम एक हज़ार नौ सौ पैंसठ के तहत की गई है।
नई दिल्ली. भारत लगातार रूस से भरपूर मात्रा में कच्चे तेल का आयात कर रहा है. इस मामले में खाड़ी के देश पीछे छूट गए हैं. दरअसल, भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात फरवरी में बढ़कर रिकॉर्ड 16 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है जो उसके परंपरागत सप्लायर्स इराक (Iraq) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) के कुल तेल आयात से भी ज्यादा है. तेल के आयात-निर्यात पर नजर रखने वाली संस्था वर्टेक्सा ने बताया कि भारत जितनी मात्रा में तेल आयात करता है उसकी एक तिहाई से अधिक सप्लाई अकेले रूस ने की है और वह लगातार पांचवें महीने भारत को कच्चे तेल का इकलौता सबसे बड़ा सप्लायर्स बना हुआ है. रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने से पहले तक भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम होती थी. लेकिन पिछले महीने फरवरी में यह 35 फीसदी बढ़कर 16. 20 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई. रूस से भारत का आयात बढ़ने का असर सऊदी अरब और अमेरिका से होने वाले तेल आयात पर पड़ा है. सऊदी अरब से आयात किया जाने वाला तेल मासिक आधार पर 16 फीसदी घट गया जबकि अमेरिका से होने वाले तेल आयात में 38 फीसदी की कमी आई है. एनर्जी कार्गो ट्रैकर वर्टेक्सा के मुताबिक, अब रूस से भारत जितना तेल आयात करता है वह दशकों से उसके सप्लायर्स रहे इराक और सऊदी अरब से किए जाने वाले कुल आयात से भी अधिक है. इराक ने फरवरी के महीने में 9,39,921 बैरल प्रतिदिन तेल की सप्लाई की जबकि सऊदी अरब ने 6,47,813 बैरल प्रतिदिन की सप्लाई की. यह बीते 16 महीनों में इराक और सऊदी अरब से हुई सबसे कम सप्लाई है. फरवरी, 2023 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भारत को 4,04,570 बैरल प्रतिदिन की सप्लाई कर अमेरिका को पीछे छोड़ दिया. अमेरिका ने 2,48,430 बैरल तेल प्रतिदिन की आपूर्ति की जो जनवरी की आपूर्ति 3,99,914 बैरल प्रतिदिन से कम है. रूस यूक्रेन पर हमले के बाद से पश्चिमी देशों की तरफ से लगाई गई आर्थिक पाबंदियों से निपटने के लिए इस समय भारत को रिकॉर्ड मात्रा में कच्चे तेल की बिक्री कर रहा है. .
नई दिल्ली. भारत लगातार रूस से भरपूर मात्रा में कच्चे तेल का आयात कर रहा है. इस मामले में खाड़ी के देश पीछे छूट गए हैं. दरअसल, भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात फरवरी में बढ़कर रिकॉर्ड सोलह लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है जो उसके परंपरागत सप्लायर्स इराक और सऊदी अरब के कुल तेल आयात से भी ज्यादा है. तेल के आयात-निर्यात पर नजर रखने वाली संस्था वर्टेक्सा ने बताया कि भारत जितनी मात्रा में तेल आयात करता है उसकी एक तिहाई से अधिक सप्लाई अकेले रूस ने की है और वह लगातार पांचवें महीने भारत को कच्चे तेल का इकलौता सबसे बड़ा सप्लायर्स बना हुआ है. रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी दो हज़ार बाईस में युद्ध शुरू होने से पहले तक भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम होती थी. लेकिन पिछले महीने फरवरी में यह पैंतीस फीसदी बढ़कर सोलह. बीस लाख बैरल प्रतिदिन हो गई. रूस से भारत का आयात बढ़ने का असर सऊदी अरब और अमेरिका से होने वाले तेल आयात पर पड़ा है. सऊदी अरब से आयात किया जाने वाला तेल मासिक आधार पर सोलह फीसदी घट गया जबकि अमेरिका से होने वाले तेल आयात में अड़तीस फीसदी की कमी आई है. एनर्जी कार्गो ट्रैकर वर्टेक्सा के मुताबिक, अब रूस से भारत जितना तेल आयात करता है वह दशकों से उसके सप्लायर्स रहे इराक और सऊदी अरब से किए जाने वाले कुल आयात से भी अधिक है. इराक ने फरवरी के महीने में नौ,उनतालीस,नौ सौ इक्कीस बैरल प्रतिदिन तेल की सप्लाई की जबकि सऊदी अरब ने छः,सैंतालीस,आठ सौ तेरह बैरल प्रतिदिन की सप्लाई की. यह बीते सोलह महीनों में इराक और सऊदी अरब से हुई सबसे कम सप्लाई है. फरवरी, दो हज़ार तेईस में संयुक्त अरब अमीरात ने भारत को चार,चार,पाँच सौ सत्तर बैरल प्रतिदिन की सप्लाई कर अमेरिका को पीछे छोड़ दिया. अमेरिका ने दो,अड़तालीस,चार सौ तीस बैरल तेल प्रतिदिन की आपूर्ति की जो जनवरी की आपूर्ति तीन,निन्यानवे,नौ सौ चौदह बैरल प्रतिदिन से कम है. रूस यूक्रेन पर हमले के बाद से पश्चिमी देशों की तरफ से लगाई गई आर्थिक पाबंदियों से निपटने के लिए इस समय भारत को रिकॉर्ड मात्रा में कच्चे तेल की बिक्री कर रहा है. .
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने गुरुवार को पूर्व कप्तान मोहम्मद यूसुफ को लाहौर स्थित राष्ट्रीय हाई परफोरमेन्स सेंटर का बल्लेबाजी कोच नियुक्त किया। टेस्ट क्रिकेट में 7530 और वनडे में 9720 रन बनाने वाले यूसुफ इस केंद्र में प्रशिक्षकों की अगुवाई करेंगे। यूसुफ के साथ पूर्व विकेटकीपर अतीक उज जमां और तेज गेंदबाज मोहम्मद जाहिद भी इस केंद्र से जुड़ेंगे। अतीक ने एक टेस्ट और तीन वनडे जबकि जाहिद ने पांच टेस्ट और 11 वनडे खेले हैं।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने गुरुवार को पूर्व कप्तान मोहम्मद यूसुफ को लाहौर स्थित राष्ट्रीय हाई परफोरमेन्स सेंटर का बल्लेबाजी कोच नियुक्त किया। टेस्ट क्रिकेट में सात हज़ार पाँच सौ तीस और वनडे में नौ हज़ार सात सौ बीस रन बनाने वाले यूसुफ इस केंद्र में प्रशिक्षकों की अगुवाई करेंगे। यूसुफ के साथ पूर्व विकेटकीपर अतीक उज जमां और तेज गेंदबाज मोहम्मद जाहिद भी इस केंद्र से जुड़ेंगे। अतीक ने एक टेस्ट और तीन वनडे जबकि जाहिद ने पांच टेस्ट और ग्यारह वनडे खेले हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश के भींड जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है. भिंड जिले के गोरमी इलाके के एक घर में भीषड़ आग लग गई. आग लगने की वजह से घर में मौजूद तीन बच्चे जिंदा जल गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई. बता दें कि मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गोरमी इलाके में एक घर में आग लग गई. आग लगने की वजह से घर में मौजूद तीन बच्चों की मौत हो गई है. आगजनी से 4 अन्य लोग घायल हो गए हैं. जिनका इलाज करवाया जा रहा है. आग लगने की वजह का पता नहीं लग पाया है कि लेकिन प्रथम दृष्टया गैस रिसाव का कारण माना जा रहा है.
भोपाल। मध्य प्रदेश के भींड जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है. भिंड जिले के गोरमी इलाके के एक घर में भीषड़ आग लग गई. आग लगने की वजह से घर में मौजूद तीन बच्चे जिंदा जल गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई. बता दें कि मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गोरमी इलाके में एक घर में आग लग गई. आग लगने की वजह से घर में मौजूद तीन बच्चों की मौत हो गई है. आगजनी से चार अन्य लोग घायल हो गए हैं. जिनका इलाज करवाया जा रहा है. आग लगने की वजह का पता नहीं लग पाया है कि लेकिन प्रथम दृष्टया गैस रिसाव का कारण माना जा रहा है.
नई दिल्ली। भारत से हारने के बाद पाकिस्तानी कैप्टन शाहिद अफरीदी की उनके देश में ही काफी आलोचना हो रही है लेकिन इन सारी बातों से बेपरवाह अफरीदी ने एक बार फिर से भारत की टीम की काफी तारीफ की है। अफरीदी ने कहा कि दवाब में कैसे खेलते हैं यह बात पाक टीम को भारत की क्रिकेट टीम से सीखनी चाहिए। अफरीदी ने कोलकाता मैच के मैन ऑफ द मैच रहे विराट कोहली की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कोहली ने शानदार पारी खेली। तो वहीं पाकिस्तान में हो रही आलोचनाओं के बारे में शाहिद ने कहा कि मैं इन बातों की परवाह नहीं करता और ना ही मैं फेसबुक और ट्विटर की प्रतिक्रियाओं पर ध्यान देता हूं। फिलहाल अभी मेरा पूरा फोकस टी 20 विश्वकप के बाकी मैचों पर हैं और हम कोशिश करेंगे हम अच्छा खेंले।
नई दिल्ली। भारत से हारने के बाद पाकिस्तानी कैप्टन शाहिद अफरीदी की उनके देश में ही काफी आलोचना हो रही है लेकिन इन सारी बातों से बेपरवाह अफरीदी ने एक बार फिर से भारत की टीम की काफी तारीफ की है। अफरीदी ने कहा कि दवाब में कैसे खेलते हैं यह बात पाक टीम को भारत की क्रिकेट टीम से सीखनी चाहिए। अफरीदी ने कोलकाता मैच के मैन ऑफ द मैच रहे विराट कोहली की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कोहली ने शानदार पारी खेली। तो वहीं पाकिस्तान में हो रही आलोचनाओं के बारे में शाहिद ने कहा कि मैं इन बातों की परवाह नहीं करता और ना ही मैं फेसबुक और ट्विटर की प्रतिक्रियाओं पर ध्यान देता हूं। फिलहाल अभी मेरा पूरा फोकस टी बीस विश्वकप के बाकी मैचों पर हैं और हम कोशिश करेंगे हम अच्छा खेंले।
रायपुर। Celebrity Cricket League (CCL ) हर तरह क्रिकेट का माहौल बना हुआ है। ऐसे में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लोग एक बार फिर क्रिकेट के रंग में रंगने वाले हैं। पर इस बार का रंग कुछ मनोरंजन वाला होने वाला है। वो इसलिए क्योंकि रायपुर में सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग होने जा रहा है। जी हां 18 और 19 फरवरी को सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग का आयोजन होने जा रहा है। आपको बता दें इसके लिए डायरेक्टर श्रीनिवासन ने CM भूपेश से मुलाकात की है। इस क्रिकेट लीग लगभग 150 फिल्मी कलाकार भाग लेंगे। इसके लिए CM को बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है। आपको बता दें जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इस साल सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग-CCL के मैच खेले जाने हैं। जो 18 और 19 फरवरी दो दिन रहेंगे। इसका आयोजन शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में होगा। इस मैच की सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें हिंदी सिनेमा के अलावा सात क्षेत्रीय फिल्म उद्योग के सितारे चौका-छक्का लगाते दिखेंगे। आपको बता दें सेलेब्रिटी क्रिकेट लीग के फाउंडर और डायरेक्टर श्रीनिवासन ने बीते दिन यानि 8 फरवरी बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की करके उन्हें 18 और 19 फरवरी को रायपुर में आयोजित होने वाली सेलेब्रिटी क्रिकेट लीग में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का न्यौता दिया है। आपको बता दें श्रीनिवासन के साथ आए आनंद बिहारी यादव द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी के अनुसार CCL में लगभग 150 फिल्मी कलाकार भाग लेंगें। आपको बता दें खेल के लिए दो टीमें बनाई जाएगी। जिनके बीच मुकाबला होगा। उन्होंने बताया कि इस लीग में सोनू सूद, रितेश देशमुख, बॉबी देओल, वेंकटेश, किच्चा सुदीप, मनोज तिवारी, दिनेश लाल यादव, सोहेल खान, जैसे फिल्म कलाकार शामिल होने रायपुर आएंगे।
रायपुर। Celebrity Cricket League हर तरह क्रिकेट का माहौल बना हुआ है। ऐसे में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लोग एक बार फिर क्रिकेट के रंग में रंगने वाले हैं। पर इस बार का रंग कुछ मनोरंजन वाला होने वाला है। वो इसलिए क्योंकि रायपुर में सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग होने जा रहा है। जी हां अट्ठारह और उन्नीस फरवरी को सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग का आयोजन होने जा रहा है। आपको बता दें इसके लिए डायरेक्टर श्रीनिवासन ने CM भूपेश से मुलाकात की है। इस क्रिकेट लीग लगभग एक सौ पचास फिल्मी कलाकार भाग लेंगे। इसके लिए CM को बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है। आपको बता दें जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इस साल सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग-CCL के मैच खेले जाने हैं। जो अट्ठारह और उन्नीस फरवरी दो दिन रहेंगे। इसका आयोजन शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में होगा। इस मैच की सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें हिंदी सिनेमा के अलावा सात क्षेत्रीय फिल्म उद्योग के सितारे चौका-छक्का लगाते दिखेंगे। आपको बता दें सेलेब्रिटी क्रिकेट लीग के फाउंडर और डायरेक्टर श्रीनिवासन ने बीते दिन यानि आठ फरवरी बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की करके उन्हें अट्ठारह और उन्नीस फरवरी को रायपुर में आयोजित होने वाली सेलेब्रिटी क्रिकेट लीग में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का न्यौता दिया है। आपको बता दें श्रीनिवासन के साथ आए आनंद बिहारी यादव द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी के अनुसार CCL में लगभग एक सौ पचास फिल्मी कलाकार भाग लेंगें। आपको बता दें खेल के लिए दो टीमें बनाई जाएगी। जिनके बीच मुकाबला होगा। उन्होंने बताया कि इस लीग में सोनू सूद, रितेश देशमुख, बॉबी देओल, वेंकटेश, किच्चा सुदीप, मनोज तिवारी, दिनेश लाल यादव, सोहेल खान, जैसे फिल्म कलाकार शामिल होने रायपुर आएंगे।
दोस्तों भारत की टेनिस सुपरस्टार सानिया मिर्ज़ा ने देश ही नही पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। सानिया मिर्ज़ा ने पाकिस्तान के क्रिकेटर शोएब मालिक से शादी की है लेकिन आज भी वे अपने देश भारत के लिए टेनिस खेलती है। सानिया मिर्ज़ा सिर्फ अपने खेल के लिए ही नही बल्कि उनकी खूबसूरती के लिए भी जानी जाती है। सानिया अब एक बच्चे की माँ भी बन चुकी है। आज हम आपको उनकी बहन से मिलवाने जा रहे है जो देखने में उनसे भी हॉट है। बता दे की सानिया मिर्जा की शादी पाकिस्तान क्रिकेट टीम के बेहतरीन खिलाड़ी शोएब मलिक के साथ हुई थी। सानिया मिर्जा की एक बहन और भी है जो दिखने में हूबहू सानिया मिर्जा की तरह दिखती हैं। खूबसूरती में भी इनका कोई मुकाबला नहीं है। सानिया मिर्जा के बाद उनकी छोटी बहन अनम मिर्जा जल्द ही शादी कर सकती हैं। बता दें कुछ साल पहले अनम की शादी नवम्बर 2016 को हैदराबाद के बिजनेसमैन अकबर राशिदीन से हुई थी। उनकी शादी में खेल से लेकर बॉलीवुड जगत तक के कई हस्तियों ने शिरकत की थी। लेकिन कुछ ही समय में इनका तलाक हो गया। और अब मीडिया में खबर है की अनम दूसरी शादी भी कर सकती है। बता दे की अनम मिर्जा दिखने में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और हॉट हैं। अनम मिर्जा पूर्व भारतीय क्रिकेटर अजहरुद्दीन के बेटे असद को डेट कर रही हैं। असद गोवा टीम के लिए रणजी खेलते हैं। असद और अनम दोनों ही एक दूसरे को लंबे समय से डेट कर रहे हैं। अनम और असद की अगर शादी होती है तो शोएब मलिक और असद एक दूसरे के साढ़ू बन जाएंगे। सानिया मिर्जा का जीजा बन सकता है भारत के इस कप्तान का बेटा, बहन दिखती है बेहद खूबसूरत! दोस्तों भारत की टेनिस सुपरस्टार सानिया मिर्ज़ा ने देश ही नही पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। सानिया मिर्ज़ा ने पाकिस्तान के क्रिकेटर शोएब मालिक से शादी की है लेकिन आज भी वे अपने देश भारत के लिए टेनिस खेलती है। सानिया मिर्ज़ा सिर्फ अपने खेल के लिए ही नही बल्कि उनकी खूबसूरती के लिए भी जानी जाती है। सानिया अब एक बच्चे की माँ भी बन चुकी है। आज हम आपको उनकी बहन से मिलवाने जा रहे है जो देखने में उनसे भी हॉट है।
दोस्तों भारत की टेनिस सुपरस्टार सानिया मिर्ज़ा ने देश ही नही पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। सानिया मिर्ज़ा ने पाकिस्तान के क्रिकेटर शोएब मालिक से शादी की है लेकिन आज भी वे अपने देश भारत के लिए टेनिस खेलती है। सानिया मिर्ज़ा सिर्फ अपने खेल के लिए ही नही बल्कि उनकी खूबसूरती के लिए भी जानी जाती है। सानिया अब एक बच्चे की माँ भी बन चुकी है। आज हम आपको उनकी बहन से मिलवाने जा रहे है जो देखने में उनसे भी हॉट है। बता दे की सानिया मिर्जा की शादी पाकिस्तान क्रिकेट टीम के बेहतरीन खिलाड़ी शोएब मलिक के साथ हुई थी। सानिया मिर्जा की एक बहन और भी है जो दिखने में हूबहू सानिया मिर्जा की तरह दिखती हैं। खूबसूरती में भी इनका कोई मुकाबला नहीं है। सानिया मिर्जा के बाद उनकी छोटी बहन अनम मिर्जा जल्द ही शादी कर सकती हैं। बता दें कुछ साल पहले अनम की शादी नवम्बर दो हज़ार सोलह को हैदराबाद के बिजनेसमैन अकबर राशिदीन से हुई थी। उनकी शादी में खेल से लेकर बॉलीवुड जगत तक के कई हस्तियों ने शिरकत की थी। लेकिन कुछ ही समय में इनका तलाक हो गया। और अब मीडिया में खबर है की अनम दूसरी शादी भी कर सकती है। बता दे की अनम मिर्जा दिखने में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और हॉट हैं। अनम मिर्जा पूर्व भारतीय क्रिकेटर अजहरुद्दीन के बेटे असद को डेट कर रही हैं। असद गोवा टीम के लिए रणजी खेलते हैं। असद और अनम दोनों ही एक दूसरे को लंबे समय से डेट कर रहे हैं। अनम और असद की अगर शादी होती है तो शोएब मलिक और असद एक दूसरे के साढ़ू बन जाएंगे। सानिया मिर्जा का जीजा बन सकता है भारत के इस कप्तान का बेटा, बहन दिखती है बेहद खूबसूरत! दोस्तों भारत की टेनिस सुपरस्टार सानिया मिर्ज़ा ने देश ही नही पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। सानिया मिर्ज़ा ने पाकिस्तान के क्रिकेटर शोएब मालिक से शादी की है लेकिन आज भी वे अपने देश भारत के लिए टेनिस खेलती है। सानिया मिर्ज़ा सिर्फ अपने खेल के लिए ही नही बल्कि उनकी खूबसूरती के लिए भी जानी जाती है। सानिया अब एक बच्चे की माँ भी बन चुकी है। आज हम आपको उनकी बहन से मिलवाने जा रहे है जो देखने में उनसे भी हॉट है।
कॉमेडी सुपरस्टार कपिल शर्मा अपने कॉमिक सेंस के चलते खासा मशहूर है। यही वजय है कि वो सालों से अपने चाहने वालों के दिलों पर राज करते आ रहे हैं। कपिल शर्मा की फैन फॉलोइंग का आलम ये है कि उन्हें ट्वीटर पर 16 मिलियन से भी ज्यादा लोग फॉलो करत हैं तो वहीं, इंस्टग्राम पर भी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है। कपिल शर्मा की कॉमेडी टाइमिंग के तो करोड़ों लोग दीवाने हैं। लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग ऐसे हैं जो कॉमेडी स्टार को भी ट्रोलिंग का निशाना बनाने से बाज नहीं आते। हाल ही में कपिल शर्मा ने कानपुर पुलिस हत्या मामले पर अपनी ओर से गुस्सा जाहिर करते हुए ट्वीट किया था। इस भद्दे ट्वीट पर रिएक्ट करते हुए कपिल शर्मा ने लिखा, 'डियर सर, मुझे सुशांत सिंह राजपूत के निधन की वजह नहीं पता। पर इतना पता है कि जो पुलिसवाले मारे गए वो अपनी ड्यूटी करने गए थे।' कपिल शर्मा यही नहीं रुके, उन्होंने दोबारा ट्वीट करते हुए हेटर को दिन में तारे जरुर दिखा दिए। इन ट्वीट्स की भाषा के चलते हम आपको इसे दिखा नहीं सकते। लेकिन इसकी एक झलक आप नीचे देख सकते हैं। बता दें कि कपिल शर्मा ने ये ट्वीट उस घटना की निंदा में किया था जिसमें उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में अपराधियों ने 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। इस दर्दनाक घटना में डीसीपी स्त के एक अधिकारी समेत 7 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
कॉमेडी सुपरस्टार कपिल शर्मा अपने कॉमिक सेंस के चलते खासा मशहूर है। यही वजय है कि वो सालों से अपने चाहने वालों के दिलों पर राज करते आ रहे हैं। कपिल शर्मा की फैन फॉलोइंग का आलम ये है कि उन्हें ट्वीटर पर सोलह मिलियन से भी ज्यादा लोग फॉलो करत हैं तो वहीं, इंस्टग्राम पर भी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है। कपिल शर्मा की कॉमेडी टाइमिंग के तो करोड़ों लोग दीवाने हैं। लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग ऐसे हैं जो कॉमेडी स्टार को भी ट्रोलिंग का निशाना बनाने से बाज नहीं आते। हाल ही में कपिल शर्मा ने कानपुर पुलिस हत्या मामले पर अपनी ओर से गुस्सा जाहिर करते हुए ट्वीट किया था। इस भद्दे ट्वीट पर रिएक्ट करते हुए कपिल शर्मा ने लिखा, 'डियर सर, मुझे सुशांत सिंह राजपूत के निधन की वजह नहीं पता। पर इतना पता है कि जो पुलिसवाले मारे गए वो अपनी ड्यूटी करने गए थे।' कपिल शर्मा यही नहीं रुके, उन्होंने दोबारा ट्वीट करते हुए हेटर को दिन में तारे जरुर दिखा दिए। इन ट्वीट्स की भाषा के चलते हम आपको इसे दिखा नहीं सकते। लेकिन इसकी एक झलक आप नीचे देख सकते हैं। बता दें कि कपिल शर्मा ने ये ट्वीट उस घटना की निंदा में किया था जिसमें उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में अपराधियों ने आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। इस दर्दनाक घटना में डीसीपी स्त के एक अधिकारी समेत सात पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
जगाधरी (निस) : उद्योग व्यापार मण्डल हरियाणा के अध्यक्ष महेंद्र मित्तल ने गत दिवस जगाधरी में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सभी व्यापारियों के प्रयासों से मुख्यमंत्री ने ट्रेड लाइसेंस खत्म करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इस बाबत सरकार ने अधिसूचना जारी नहीं की है। उन्होंने सरकार से नोटिफिकेशन जल्द जारी करने की मांग की। मित्तल ने कहा कि सरकार लक्कड़ मण्डी से 2 प्रतिशत मार्केट फीस समाप्त करे। अनाज मण्डी के व्यापारियों की दामी व मजदूरी का भुगतान खरीद के साथ ही किया जाये। अनाज मण्डी के व्यापारियों की आढ़त 3 प्रतिशत किया जाये।
जगाधरी : उद्योग व्यापार मण्डल हरियाणा के अध्यक्ष महेंद्र मित्तल ने गत दिवस जगाधरी में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सभी व्यापारियों के प्रयासों से मुख्यमंत्री ने ट्रेड लाइसेंस खत्म करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इस बाबत सरकार ने अधिसूचना जारी नहीं की है। उन्होंने सरकार से नोटिफिकेशन जल्द जारी करने की मांग की। मित्तल ने कहा कि सरकार लक्कड़ मण्डी से दो प्रतिशत मार्केट फीस समाप्त करे। अनाज मण्डी के व्यापारियों की दामी व मजदूरी का भुगतान खरीद के साथ ही किया जाये। अनाज मण्डी के व्यापारियों की आढ़त तीन प्रतिशत किया जाये।
वडोदरा को पहले बड़ौदा के नाम से जाना जाता था। वडोदरा अहमदाबाद और सूरत के बाद गुजरात में तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है।वडोदरा का इतिहास समृद्ध और प्रेरक है। वडोदरा क्षेत्र में गुप्त साम्राज्य पहला सत्ताधारी राजवंश था। चालुक्य वंश ने इस क्षेत्र पर शासन किया। अंत में, सोलंकी राजपूतों ने राज्य पर आक्रमण किया। इस समय तक पूरे भारत में मुस्लिम शासन फैल चुका था। इसके बाद गुजरात सल्तनत की स्थापना हुई। इन सुल्तानों ने लंबे समय तक शहर पर शासन किया। उसके बाद मुगलों ने यहाँ कब्जा कर लिया। शक्तिशाली मराठा पेशवाओं ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। वडोदरा मराठा गायकवाड़ की राजधानी बना। सयाजी राव III (1875-1939) ने इस क्षेत्र में कई सार्वजनिक और तकनीकी सुधार किए। अंग्रेजों के अंतर्गत वडोदरा स्वतंत्रता तक एक रियासत बना रहा। 812 के एक ग्रंथ में इसके नाम का उल्लेख था। 10 वीं शताब्दी में वडपद्रक ने मुख्य शहर के रूप में अंकोट्टाका की जगह ली। वडोदरा को कभी राजपूतों की दोर जनजाति के शासक राजा चंदन के नाम पर चंदनवती कहा जाता था। राजधानी का एक और नाम वीरक्षेत्र या वीरावती भी था। शुरुआती अंग्रेजी यात्रियों और व्यापारियों ने इस शहर का उल्लेख ब्रोडेरा के रूप में किया है और इसी से बड़ौदा नाम लिया गया है। 1974 में शहर का आधिकारिक नाम बदलकर वडोदरा कर दिया गया। माही नदी ने संभवतः उस युग के दौरान बाढ़ के मैदान का निर्माण किया था। वडोदरा के उत्तर-पूर्व में 10 से 20 किमी के भीतर कई स्थलों पर माही नदी घाटी में आदिम मानव के अस्तित्व के प्रमाण हैं। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के साथ, बड़ौदा राज्य के अंतिम शासक महाराजा का भारत में विलय हो गया। स्वतंत्रता के तुरंत बाद बड़ौदा राज्य को बॉम्बे राज्य में मिला दिया गया था, जिसे 1960 में गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों में अलग कर दिया गया था, वडोदरा गुजरात का हिस्सा बन गया था। शहर 26 जनवरी, 2001 को गुजरात में आए विनाशकारी भूकंप से प्रभावित था। भूकंप और उसके बाद के झटकों के कारण खराब बनी इमारतों के ढहने से कुछ हताहत हुए। ऐतिहासिक रूप से वडोदरा लोगों और संस्कृति में मदद करता है। पारंपरिक कहानियों के अलावा वडोदरा का इतिहास मुख्य रूप से जैन साहित्य और वडोदरा से संबंधित कुछ पुराने शिलालेखों पर आधारित है।
वडोदरा को पहले बड़ौदा के नाम से जाना जाता था। वडोदरा अहमदाबाद और सूरत के बाद गुजरात में तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है।वडोदरा का इतिहास समृद्ध और प्रेरक है। वडोदरा क्षेत्र में गुप्त साम्राज्य पहला सत्ताधारी राजवंश था। चालुक्य वंश ने इस क्षेत्र पर शासन किया। अंत में, सोलंकी राजपूतों ने राज्य पर आक्रमण किया। इस समय तक पूरे भारत में मुस्लिम शासन फैल चुका था। इसके बाद गुजरात सल्तनत की स्थापना हुई। इन सुल्तानों ने लंबे समय तक शहर पर शासन किया। उसके बाद मुगलों ने यहाँ कब्जा कर लिया। शक्तिशाली मराठा पेशवाओं ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। वडोदरा मराठा गायकवाड़ की राजधानी बना। सयाजी राव III ने इस क्षेत्र में कई सार्वजनिक और तकनीकी सुधार किए। अंग्रेजों के अंतर्गत वडोदरा स्वतंत्रता तक एक रियासत बना रहा। आठ सौ बारह के एक ग्रंथ में इसके नाम का उल्लेख था। दस वीं शताब्दी में वडपद्रक ने मुख्य शहर के रूप में अंकोट्टाका की जगह ली। वडोदरा को कभी राजपूतों की दोर जनजाति के शासक राजा चंदन के नाम पर चंदनवती कहा जाता था। राजधानी का एक और नाम वीरक्षेत्र या वीरावती भी था। शुरुआती अंग्रेजी यात्रियों और व्यापारियों ने इस शहर का उल्लेख ब्रोडेरा के रूप में किया है और इसी से बड़ौदा नाम लिया गया है। एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में शहर का आधिकारिक नाम बदलकर वडोदरा कर दिया गया। माही नदी ने संभवतः उस युग के दौरान बाढ़ के मैदान का निर्माण किया था। वडोदरा के उत्तर-पूर्व में दस से बीस किमी के भीतर कई स्थलों पर माही नदी घाटी में आदिम मानव के अस्तित्व के प्रमाण हैं। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत की स्वतंत्रता के साथ, बड़ौदा राज्य के अंतिम शासक महाराजा का भारत में विलय हो गया। स्वतंत्रता के तुरंत बाद बड़ौदा राज्य को बॉम्बे राज्य में मिला दिया गया था, जिसे एक हज़ार नौ सौ साठ में गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों में अलग कर दिया गया था, वडोदरा गुजरात का हिस्सा बन गया था। शहर छब्बीस जनवरी, दो हज़ार एक को गुजरात में आए विनाशकारी भूकंप से प्रभावित था। भूकंप और उसके बाद के झटकों के कारण खराब बनी इमारतों के ढहने से कुछ हताहत हुए। ऐतिहासिक रूप से वडोदरा लोगों और संस्कृति में मदद करता है। पारंपरिक कहानियों के अलावा वडोदरा का इतिहास मुख्य रूप से जैन साहित्य और वडोदरा से संबंधित कुछ पुराने शिलालेखों पर आधारित है।
सेंट लूसिया, 9 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम ने डैरेन सैमी क्रिकेट स्टेडियम पर खेले जा रहे चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला के तीसरे टेस्ट मैच के पहले दिन मंगलवार को लंच तक तीन विकेट खोकर 83 रन बना लिए हैं। उसकी तरफ से अंजिक्य रहाणे नाबाद 17 और इस श्रृंखला में अपना पहला मैच खेल रहे रोहित शर्मा नौ रनों पर नाबाद हैं। मेजबान वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और शेनान गेब्रियल ने कप्तान के फैसले को सही साबित किया। उन्होंने पारी के तीसरे ओवर में सलामी बल्लेबाज शिखर धवन (1) को विकेट के पीछे कैच करा भारतीय टीम को पहला झटका दिया। इसके बाद आए कप्तान विराट कोहली (3) भी ज्यादा देर क्रिज पर टिक नहीं सके। टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण कर रहे अल्जारी जोसेफ ने कोहली को पवेलियन भेजा। कोहली अतिरिक्त उछाल के सामने कुछ नहीं कर पाए और पहली स्लिप पर खड़े डारेन ब्रावो को कैच दे बैठे। इसके बाद दूसरे टेस्ट मैच के शतकवीर लोकेश राहुल (50) और रहाणे ने तीसरे विकेट के लिए 58 रनों की साझेदारी की जिसमें से 36 रन अकेले राहुल के थे। राहुल ने अपनी पारी के दौरान कई खूबसूरत शॉट लगाए। रोस्टन चेस ने राहुल की पारी का अंत किया। राहुल स्पिन के चाल में फंस कर ब्राथवेट को कैच दे बैठे। उन्होंने अपनी पारी में 65 गेंदों का सामना करते हुए छह चौके लगाए। .... . तो क्या सम्बन्ध है युवराज का रोहित की होने वाली पत्नी रितिका से? ? ? ? इसके बाद आए रोहित और राहणे के बीच चौथे विकेट के लिए 10 रनों की साझेदारी हो चुकी है। वेस्टइंडीज की तरफ से जोसेफ, गेब्रियल और चेस ने एक-एक विकेट अपने नाम किया।
सेंट लूसिया, नौ अगस्त । भारतीय क्रिकेट टीम ने डैरेन सैमी क्रिकेट स्टेडियम पर खेले जा रहे चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला के तीसरे टेस्ट मैच के पहले दिन मंगलवार को लंच तक तीन विकेट खोकर तिरासी रन बना लिए हैं। उसकी तरफ से अंजिक्य रहाणे नाबाद सत्रह और इस श्रृंखला में अपना पहला मैच खेल रहे रोहित शर्मा नौ रनों पर नाबाद हैं। मेजबान वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और शेनान गेब्रियल ने कप्तान के फैसले को सही साबित किया। उन्होंने पारी के तीसरे ओवर में सलामी बल्लेबाज शिखर धवन को विकेट के पीछे कैच करा भारतीय टीम को पहला झटका दिया। इसके बाद आए कप्तान विराट कोहली भी ज्यादा देर क्रिज पर टिक नहीं सके। टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण कर रहे अल्जारी जोसेफ ने कोहली को पवेलियन भेजा। कोहली अतिरिक्त उछाल के सामने कुछ नहीं कर पाए और पहली स्लिप पर खड़े डारेन ब्रावो को कैच दे बैठे। इसके बाद दूसरे टेस्ट मैच के शतकवीर लोकेश राहुल और रहाणे ने तीसरे विकेट के लिए अट्ठावन रनों की साझेदारी की जिसमें से छत्तीस रन अकेले राहुल के थे। राहुल ने अपनी पारी के दौरान कई खूबसूरत शॉट लगाए। रोस्टन चेस ने राहुल की पारी का अंत किया। राहुल स्पिन के चाल में फंस कर ब्राथवेट को कैच दे बैठे। उन्होंने अपनी पारी में पैंसठ गेंदों का सामना करते हुए छह चौके लगाए। .... . तो क्या सम्बन्ध है युवराज का रोहित की होने वाली पत्नी रितिका से? ? ? ? इसके बाद आए रोहित और राहणे के बीच चौथे विकेट के लिए दस रनों की साझेदारी हो चुकी है। वेस्टइंडीज की तरफ से जोसेफ, गेब्रियल और चेस ने एक-एक विकेट अपने नाम किया।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो) लोकसभा चुनाव की व्यस्तताओं के बीच कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी की राज्य इकाई के नेताओं की गुटबाजी का संज्ञान लिया है. इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए दैनिक जागरण ने लिखा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को अपने निवास पर बुलाया और उनकी नाराजगी दूर की. माना जा रहा है कि गुजरात के अहमदाबाद में मंगलवार होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हरियाणा को लेकर भी कुछ अहम फैसले हो सकते हैं. इस शीर्षक से प्रकाशित खबर में अमर उजाला ने लिखा है कि राशन वितरण कार्यक्रम में भगदड़ मचने से एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई. वहीं आयोजकों ने अमृतसर ट्रेन हादसे से कोई सबक नहीं लिया, और रेलवे लाइन के नजदीक पंडाल लगाया. मामला हरियाणा के रोहतक का है. बेटी के जन्मदिन पर समाजसेवी मोहित धनवंतरी ने चुनाव आचार संहिता लगने से दो घंटे पहले बिना अनुमति के झंग कॉलोनी में राशन बांटा. हरियाणा में सोमवार को पूरे दिन मौसम का मिजाज बदलता रहा. दोपहर को कभी धूप खिली तो कभी बरसात का मौसम बना रहा. शाम हल्की बरसात के साथ ओले भी पड़े. ग्रामीण एरिया में भी कई जगह हुई बरसात ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी. क्योंकि गेहूं और सरसों की फसल बिगड़ रहे मौसम से प्रभवित हो सकती है. उधर बरसात के साथ हुई हल्की ओलावृष्टि ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. शहर में कुछ देर के लिए बारिश के साथ कई स्थानों पर ओले गिरे. इसकी वजह से गेहूं व जौ की फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है. .
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा चुनाव की व्यस्तताओं के बीच कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी की राज्य इकाई के नेताओं की गुटबाजी का संज्ञान लिया है. इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए दैनिक जागरण ने लिखा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को अपने निवास पर बुलाया और उनकी नाराजगी दूर की. माना जा रहा है कि गुजरात के अहमदाबाद में मंगलवार होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हरियाणा को लेकर भी कुछ अहम फैसले हो सकते हैं. इस शीर्षक से प्रकाशित खबर में अमर उजाला ने लिखा है कि राशन वितरण कार्यक्रम में भगदड़ मचने से एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई. वहीं आयोजकों ने अमृतसर ट्रेन हादसे से कोई सबक नहीं लिया, और रेलवे लाइन के नजदीक पंडाल लगाया. मामला हरियाणा के रोहतक का है. बेटी के जन्मदिन पर समाजसेवी मोहित धनवंतरी ने चुनाव आचार संहिता लगने से दो घंटे पहले बिना अनुमति के झंग कॉलोनी में राशन बांटा. हरियाणा में सोमवार को पूरे दिन मौसम का मिजाज बदलता रहा. दोपहर को कभी धूप खिली तो कभी बरसात का मौसम बना रहा. शाम हल्की बरसात के साथ ओले भी पड़े. ग्रामीण एरिया में भी कई जगह हुई बरसात ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी. क्योंकि गेहूं और सरसों की फसल बिगड़ रहे मौसम से प्रभवित हो सकती है. उधर बरसात के साथ हुई हल्की ओलावृष्टि ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. शहर में कुछ देर के लिए बारिश के साथ कई स्थानों पर ओले गिरे. इसकी वजह से गेहूं व जौ की फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है. .
क्लाइड विलियम टॉमबॉ (Clyde William Tombaugh, जन्मः ४ फ़रवरी १९०६, देहांतः१७ जनवरी १९९७) एक अमेरिकी खगोलशास्त्री थे, जिन्होने १९३० में प्लूटो (बौने ग्रह) की खोज की। यह हमारे सौर मंडल के काइपर घेरे में पाई जाने वाली सर्वप्रथम वस्तु थी। इसके अतिरिक्त उन्होने कई क्षुद्रग्रहों की भी खोज की थी। . 11 संबंधोंः टॉमबॉ रीजिओ, न्यू मेक्सिको, प्लूटो (बौना ग्रह), संयुक्त राज्य, सौर मण्डल, खगोल शास्त्र, खगोल विज्ञानी, खगोलीय वस्तु, इलिनॉय, काइपर घेरा, क्षुद्रग्रह। टॉमबॉ रीजिओ का न्यू होराइज़न्स अंतरिक्षयान द्वारा लिया गया एक रंग-रहित चित्र टॉमबॉ रीजिओ (Tombaugh Regio) प्लूटो (बौने ग्रह) पर स्थित एक समतल दिखने वाला क्षेत्र है। अपने आकार के कारण इसे प्लूटो का हृदय भी कहते हैं। यह प्लूटो की भूमध्य रेखा से उत्तर में स्थित है और इसका पश्चिमी हिस्सा 'स्पुत्निक प्लैनम' कहलाता है। इस क्षेत्र का नाम प्लूटो का खोज करने वाले खगोलशास्त्री क्लाइड टॉमबॉ पर रखा गया था। . अमेरिका के नक्शे में स्थिति न्यू मेक्सिको (New Mexico और Nuevo México) एक राज्य है जो संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है। यूरोपीय खोज से हजारों साल पहले तक यहाँ मूल अमेरिकी निवास करते थे। न्यू मैक्सिको का 1598 में स्पेनिश द्वारा उपनिवेशीकरण किया गया था। बाद में यह स्वतंत्र मेक्सिको का हिस्सा बना। 1848 में अमेरिका से अपनी हार के पश्चात् यह इलाका मेक्सिको ने अमेरिका को सौंप दिया। यह 6 जनवरी 1912 को 47वें राज्य के रूप में संघ में भर्ती किया गया था। न्यू मेक्सिको अमेरिका का पाँचवां सबसे बड़ा राज्य है। 2016 के अनुमान के मुताबिक राज्य की जनसंख्या 20,81,015 हैं। इससे इसका सब राज्यों में 36वां स्थान हुआ। 69.7% लोगों द्वारा अंग्रेज़ी और 28.5% द्वारा स्पेनी मातृभाषा के रूप में बोली जाती है। नावाजो एक मूल अमेरिकी भाषा 3.5% जनता द्वारा बोली जाती हैं। लगभग 80% जनता ईसाई धर्म को मानती हैं। . प्लूटो (बौना ग्रह) यम या प्लूटो सौर मण्डल का दुसरा सबसे बड़ा बौना ग्रह है (सबसे बड़ा ऍरिस है)। प्लूटो को कभी सौर मण्डल का सबसे बाहरी ग्रह माना जाता था, लेकिन अब इसे सौर मण्डल के बाहरी काइपर घेरे की सब से बड़ी खगोलीय वस्तु माना जाता है। काइपर घेरे की अन्य वस्तुओं की तरह प्लूटो का अकार और द्रव्यमान काफ़ी छोटा है - इसका आकार पृथ्वी के चन्द्रमा से सिर्फ़ एक-तिहाई है। सूरज के इर्द-गिर्द इसकी परिक्रमा की कक्षा भी थोड़ी बेढंगी है - यह कभी तो वरुण (नॅप्टयून) की कक्षा के अन्दर जाकर सूरज से ३० खगोलीय इकाई (यानि ४.४ अरब किमी) दूर होता है और कभी दूर जाकर सूर्य से ४५ ख॰ई॰ (यानि ७.४ अरब किमी) पर पहुँच जाता है। प्लूटो काइपर घेरे की अन्य वस्तुओं की तरह अधिकतर जमी हुई नाइट्रोजन की बर्फ़, पानी की बर्फ़ और पत्थर का बना हुआ है। प्लूटो को सूरज की एक पूरी परिक्रमा करते हुए २४८.०९ वर्ष लग जाते हैं। . संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) (यू एस ए), जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य (United States) (यू एस) या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। 48 संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। 38 लाख वर्ग मील (98 लाख किमी2)"", U.S. Census Bureau, database as of August 2010, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है। इन पिंडों में आठ ग्रह, उनके 166 ज्ञात उपग्रह, पाँच बौने ग्रह और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। इन छोटे पिंडों में क्षुद्रग्रह, बर्फ़ीला काइपर घेरा के पिंड, धूमकेतु, उल्कायें और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं। सौर मंडल के चार छोटे आंतरिक ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह जिन्हें स्थलीय ग्रह कहा जाता है, मुख्यतया पत्थर और धातु से बने हैं। और इसमें क्षुद्रग्रह घेरा, चार विशाल गैस से बने बाहरी गैस दानव ग्रह, काइपर घेरा और बिखरा चक्र शामिल हैं। काल्पनिक और्ट बादल भी सनदी क्षेत्रों से लगभग एक हजार गुना दूरी से परे मौजूद हो सकता है। सूर्य से होने वाला प्लाज़्मा का प्रवाह (सौर हवा) सौर मंडल को भेदता है। यह तारे के बीच के माध्यम में एक बुलबुला बनाता है जिसे हेलिओमंडल कहते हैं, जो इससे बाहर फैल कर बिखरी हुई तश्तरी के बीच तक जाता है। . चन्द्र संबंधी खगोल शास्त्रः यह बडा क्रेटर है डेडलस। १९६९ में चन्द्रमा की प्रदक्षिणा करते समय अपोलो ११ के चालक-दल (क्रू) ने यह चित्र लिया था। यह क्रेटर पृथ्वी के चन्द्रमा के मध्य के नज़दीक है और इसका व्यास (diameter) लगभग ९३ किलोमीटर या ५८ मील है। खगोल शास्त्र, एक ऐसा शास्त्र है जिसके अंतर्गत पृथ्वी और उसके वायुमण्डल के बाहर होने वाली घटनाओं का अवलोकन, विश्लेषण तथा उसकी व्याख्या (explanation) की जाती है। यह वह अनुशासन है जो आकाश में अवलोकित की जा सकने वाली तथा उनका समावेश करने वाली क्रियाओं के आरंभ, बदलाव और भौतिक तथा रासायनिक गुणों का अध्ययन करता है। बीसवीं शताब्दी के दौरान, व्यावसायिक खगोल शास्त्र को अवलोकिक खगोल शास्त्र तथा काल्पनिक खगोल तथा भौतिक शास्त्र में बाँटने की कोशिश की गई है। बहुत कम ऐसे खगोल शास्त्री है जो दोनो करते है क्योंकि दोनो क्षेत्रों में अलग अलग प्रवीणताओं की आवश्यकता होती है, पर ज़्यादातर व्यावसायिक खगोलशास्त्री अपने आप को दोनो में से एक पक्ष में पाते है। खगोल शास्त्र ज्योतिष शास्त्र से अलग है। ज्योतिष शास्त्र एक छद्म-विज्ञान (Pseudoscience) है जो किसी का भविष्य ग्रहों के चाल से जोड़कर बताने कि कोशिश करता है। हालाँकि दोनों शास्त्रों का आरंभ बिंदु एक है फिर भी वे काफ़ी अलग है। खगोल शास्त्री जहाँ वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हैं जबकि ज्योतिषी केवल अनुमान आधारित गणनाओं का सहारा लेते हैं। . खगोल विज्ञानी अथवा खगोल शास्त्री वे वैज्ञानिक अध्ययनकर्ता हैं जी आकाशीय पिण्डों, उनकी गतियों और अंतरिक्ष में मौजूद विविध प्रकार की चीजों की खोज और अध्ययन का कार्य करते हैं। पश्चिमी संस्कृति में गैलीलियो नामक खगोल विज्ञानी को आधुनिक खगोलशास्त्र का पिता माना जाता है। हालाँकि कुछ लोग यह नाम कॉपरनिकस को देते हैं। . आकाशगंगा सब से बड़ी खगोलीय वस्तुएँ होती हैं - एन॰जी॰सी॰ ४४१४ हमारे सौर मण्डल से ६ करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर एक ५५,००० प्रकाश-वर्ष के व्यास की आकाशगंगा है खगोलीय वस्तु ऐसी वस्तु को कहा जाता है जो ब्रह्माण्ड में प्राकृतिक रूप से पायी जाती है, यानि जिसकी रचना मनुष्यों ने नहीं की होती है। इसमें तारे, ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, गैलेक्सी आदि शामिल हैं। . thumbnail इलिनाय (Illinois) अमरीका का एक राज्य है। इसकी राजधानी स्प्रिंगफील्ड है। इस राज्य में शिकागो सबसे बड़ा शहर है। इसे 1818 में राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। यह 6वां सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य और भूमि क्षेत्र के मामले में 25वां सबसे बड़ा राज्य है। इलिनोइस का एक विविध आर्थिक आधार है और यह एक प्रमुख परिवहन केंद्र है। शिकागो का बंदरगाह विशाल झीलों के माध्यम से राज्य को अन्य वैश्विक बंदरगाहों से जोड़ता है। दशकों से ओ'हारे अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा को दुनिया के सबसे व्यस्ततम हवाई अड्डों में से एक के रूप में गिना जाता है। सबसे पहले 17वीं और 18वीं शताब्दी में यूरोपीय जनसंख्या राज्य के पश्चिम में मिसिसिपी नदी पर बसी, जो कि फ्रांसीसी कनाडाई उपनिवेशवादी थे। अमेरिकी क्रन्तिकारी युद्ध के पश्चात् संयुक्त राज्य की स्थापना हुई और अमेरिकी आबादकार 1810 के दशक में एपलाशियन पर्वतमाला को पार करके बसना शुरू हुए। शिकागो की 1830 के दशक में शिकागो नदी के तट पर स्थापना की गई जो कि दक्षिणी मिशिगन झील पर चुनिंदा प्राकृतिक बंदरगाहों में से एक है। जॉन डेयर के नए प्रकार के स्टील के हल के आविष्कार ने इलिनोइस के समृद्ध प्रेरी को दुनिया के सबसे अधिक उत्पादक पूर्ण और मूल्यवान खेतों में बदल दिया, जिसने जर्मनी और स्वीडन के नए आप्रवासी किसानों को आकर्षित किया। इलिनोइस में रहने के दौरान तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों का निर्वाचिन हुआ हैः अब्राहम लिंकन, युलीसेस सिंपसन ग्रांट, और बराक ओबामा। इसके अतिरिक्त रोनाल्ड रीगन, जिनका राजनीतिक कैरियर कैलिफोर्निया में स्थित था, इलिनोइस में पैदा और पले-बढ़े हुए एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति है। अब इलिनोइस ने लिंकन को अपने आधिकारिक नारे, लैंड ऑफ़ लिंकन के साथ सम्मानित किया है जो कि 1954 से उसके लाइसेंस प्लेटों पर प्रदर्शित किया जा रहा है। . काइपर घेरे की ज्ञात वस्तुएँ - मुख्य घेरे की वस्तुएँ हरे रंग में, घेरे की बिखरी हुई वस्तुएँ नारंगी रंग में, सौर मण्डल के चार बाहरी ग्रह नीले रंग में, वरुण (नॅप्ट्यून) के इर्द-गिर्द की वस्तुएँ पीले रंग में और बृहस्पति के इर्द-गिर्द की वस्तुएँ गुलाबी रंग में दिखाई गयी हैं काइपर घेरा, काइपर-ऍजवर्थ घेरा या काइपर बॅल्ट हमारे सौर मण्डल का एक बाहरी क्षेत्र है जो वरुण ग्रह (नॅप्ट्यून) की कक्षा (जो सूरज से लगभग ३० खगोलीय इकाई दूर है) से लेकर सूर्य से ५५ ख॰इ॰ तक फैला हुआ है। क्षुद्रग्रह घेरे की तरह इसमें भी हज़ारों-लाखों छोटी-बड़ी खगोलीय वस्तुएँ हैं जो सौर मण्डल के ग्रहों के सृजनात्मक दौर से बची हुई रह गयी। काइपर घेरा का क्षेत्र क्षुद्रग्रह घेरे के क्षेत्र से २० गुना चौड़ा और २०० गुना ज़्यादा फैला हुआ है। जहाँ क्षुद्रग्रह घेरे की वस्तुएँ पत्थर और धातुओं की बनी हुई हैं, वहाँ काइपर घेरे की वस्तुएँ सर्दी की सख्ती से जमे हुए पानी, मीथेन और अमोनिया की मिली-जुली बर्फ़ों की बनी हुई हैं। सौर मण्डल के ज्ञात बौने ग्रहों में से तीन - यम, हउमेया और माकेमाके - काइपर घेरे के निवासी हैं। वैज्ञानिकों का यह भी मानना है के सौर मण्डल के कुछ प्राकृतिक उपग्रह भी इसी घेरे में जन्मे और घुमते-फिरते अपने ग्रहों के निटक पहुँच कर उनके गुरुत्वाकर्षण में फँस कर उनकी परिक्रमा करने लगे, जैसे की वरुण (नॅप्ट्यून) का उपग्रह ट्राइटन और शनि का उपग्रह फ़ीबी। काइपर घेरे का नाम डच-अमेरिकी खगोलशास्त्री जेरार्ड काइपर के नाम पर रखा गया हालाँकि, वास्तव में खुद उन्होंने इसके अस्तित्व की भविष्यवाणी नहीं की थी। वर्ष 1992 में, यम के बाद खोजा जाने वाला पहला काइपर घेरा वस्तु (केबीओ) था। इसकी खोज के बाद से अब तक, ज्ञात काइपर घेरा वस्तुओं (केबीओ'स) की संख्या हज़ार से अधिक हो चुकी है और से अधिक व्यास वाले 1,00,000 से अधिक केबीओ'स के होने का अनुमान है। प्रारम्भ में यह सोचा गया था कि काइपर बेल्ट ही उन सावधिक धूमकेतुओं का भण्डार है जिनकी कक्षायें 200 सालों से कम अवधि वाली हैं। हालाँकि, नब्बे के दशक के बाद के अध्ययनों ने दर्शाया है कि यह घेरा गतिशीलता की दृष्टि से स्थायित्व वाला है, और धूमकेतुओं की उत्पत्ति का वास्तविक स्थल एक प्रकीर्ण डिस्क है जो नेपच्यून की बहिर्मुखी गति द्वारा 4.5 बिलियन वर्ष पूर्व निर्मित, गतिशीलता के दृष्टि से एक सक्रिय मंडल है; इस प्रकीर्ण डिस्क के कुछ पिण्डों, जैसे कि ऍरिस इत्यादि, की विकेन्द्रता अत्यंत अधिक है और वे अपने परिक्रमा पथ में सूर्य से 100 AU तक की दूरी तक भी चले जाते हैं। . क्षुद्रग्रह क्षुद्रग्रह (English: Asteroid) अथवा ऐस्टरौएड एक खगोलिय पिंड होते है जो ब्रह्माण्ड में विचरण करते रहते हे। यह आपने आकार में ग्रहो से छोटे और उल्का पिंडो से बड़े होते है। खोजा जाने वाला पहला क्षुद्रग्रह, सेरेस, 1819 में ग्यूसेप पियाज़ी द्वारा पाया गया था और इसे मूल रूप से एक नया ग्रह माना जाता था। इसके बाद अन्य समान निकायों की खोज के बाद, जो समय के उपकरण के साथ, प्रकाश के अंक होने लगते हैं, जैसे सितारों, छोटे या कोई ग्रहिक डिस्क नहीं दिखाते हैं, हालांकि उनके स्पष्ट गति के कारण सितारों से आसानी से अलग हो सकते हैं। इसने खगोल विज्ञानी सर विलियम हर्शल को "ग्रह", शब्द को प्रस्तावित करने के लिए प्रेरित किया, जिसे ग्रीस में ἀστεροειδής या एस्टरियोइड्स के रूप में तब्दील किया गया, जिसका अर्थ है 'तारा-जैसे, तारा-आकार', और प्राचीन ग्रीक ἀστήρ astér 'तारा, ग्रह से व्युत्पन्न '। उन्नीसवीं सदी के शुरुआती छमाही में, शब्द "क्षुद्रग्रह" और "ग्रह" (हमेशा "नाबालिग" के रूप में योग्य नहीं) अभी भी एक दूसरे का प्रयोग किया गया था पिछले दो शताब्दियों में एस्टरॉयड डिस्कवरी विधियों में नाटकीय रूप से सुधार हुआ है 18 वीं शताब्दी के आखिरी वर्षों में, बैरन फ्रांज एक्सवेर वॉन जैच ने 24 खगोलविदों के समूह को एक ग्रह का आयोजन किया, जिसमें आकाश के बारे में 2.8 एयू के बारे में अनुमानित ग्रह के लिए आकाश की खोज थी, जिसे टिटियस-बोद कानून द्वारा आंशिक रूप से खोज की गई थी। कानून द्वारा अनुमानित दूरी पर ग्रह यूरेनस के 1781 में सर विलियम हर्शल। इस काम के लिए ज़ोनियाकल बैंड के सभी सितारों के लिए हाथों से तैयार हुए आकाश चार्ट तैयार किए जाने की आवश्यकता है, जो कि संवेदनाहीनता की सीमा के नीचे है। बाद की रातों में, आकाश फिर से सनदी जाएगा और किसी भी चलती वस्तु को उम्मीद है, देखा जाना चाहिए। लापता ग्रह की उम्मीद की गति प्रति घंटे 30 सेकंड का चाप था, पर्यवेक्षकों द्वारा आसानी से पता चला। मंगल ग्रह से पहले क्षुद्रग्रह छवि (सेरेस और वेस्ता) - जिज्ञासा (20 अप्रैल 2014) द्वारा देखा गया। पहला उद्देश्य, सेरेस, समूह के किसी सदस्य द्वारा नहीं खोजा गया था, बल्कि 1801 में सिसिली में पालेर्मो के वेधशाला के निदेशक ग्यूसेप पियाज़ी ने दुर्घटना के कारण नहीं खोजा था। उन्होंने वृषभ में एक नया सितारा की तरह वस्तु की खोज की और कई वस्तुओं के दौरान इस ऑब्जेक्ट के विस्थापन का अनुसरण किया। उस वर्ष बाद, कार्ल फ्रेडरिक गॉस ने इस अज्ञात वस्तु की कक्षा की गणना करने के लिए इन टिप्पणियों का इस्तेमाल किया, जो मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच पाया गया था। पियाजी ने इसे कृषि के रोमन देवी सेरेस के नाम पर रखा था। अगले कुछ वर्षों में तीनों क्षुद्रग्रहों (2 पल्लस, 3 जूनो और 4 वेस्ता) की खोज की गई, साथ में वेस्ता को 1807 में मिला। आठ वर्षों के व्यर्थ खोजों के बाद, अधिकांश खगोलविदों ने मान लिया था कि अब और नहीं और आगे की खोजों को छोड़ दिया गया था। हालांकि, कार्ल लुडविग हेन्के ने दृढ़ किया, और 1830 में अधिक क्षुद्रग्रहों की खोज करना शुरू कर दिया। पन्द्रह वर्ष बाद, उन्हें 38 अस्वास्थापों में पहला नया क्षुद्रग्रह पाया गया, जो 5 अस्त्रिया पाए गए। उन्होंने यह भी पाया 6 हेबे कम से कम दो साल बाद इसके बाद, अन्य खगोलविदों ने खोज में शामिल हो गए और इसके बाद हर वर्ष कम से कम एक नया क्षुद्रग्रह पाया गया (युद्धकालीन वर्ष 1 9 45 को छोड़कर) इस शुरुआती युग के उल्लेखनीय क्षुद्रग्रह शिकारी जे आर हिंद, एनीबेल डी गैसपरिस, रॉबर्ट लूथर, एचएमएस गोल्डस्मिथ, जीन चिकार्नाक, जेम्स फर्ग्यूसन, नॉर्मन रॉबर्ट पॉगसन, ईडब्ल्यू टेम्पाल, जेसी वाटसन, सीएफ़एफ़ पीटर्स, ए। बोरलिलली, जे। पॉलिसा, हेनरी भाई और अगस्टे चार्लोइस 1891 में, मैक्स वुल्फ ने क्षुद्रग्रहों का पता लगाने के लिए "आस्ट्रोफ़ोटोग्राफी" के इस्तेमाल की शुरुआत की, जो लंबे समय तक एक्सपोजर फोटोग्राफिक प्लेट्स पर छोटी धारियों के रूप में दिखाई दिए। इससे पहले दृश्य तरीकों की तुलना में नाटकीय रूप से पहचान की दर में वृद्धि हुईः वुल्फ ने केवल 248 क्षुद्रग्रहों की खोज की, 323 ब्रुसिया से शुरुआत करते हुए, जबकि उस समय तक केवल 300 से थोड़ा अधिक की खोज की गई थी यह ज्ञात था कि वहां बहुत अधिक थे, लेकिन अधिकांश खगोलविदों ने उनके साथ परेशान नहीं किया, उन्हें "आसमान की किरण" कहा, एडुआर्ड सूसे और एडमंड वेज़ के लिए अलग-अलग वाक्यांशों का श्रेय। यहां तक कि एक सदी बाद, केवल कुछ हज़ार क्षुद्रग्रहों की पहचान की गई,क्षुद्रग्रह छोटे ग्रह हैं, विशेषकर इनर सौर मंडल के बड़े लोगों को ग्रहोइड कहा जाता है इन शब्दों को ऐतिहासिक रूप से किसी भी खगोलीय वस्तु पर लागू किया गया है जो कि सूर्य की परिक्रमा करता है, जो कि किसी ग्रह की डिस्क नहीं दिखाया था और सक्रिय धूमकेतु की विशेषताओं को देखते हुए नहीं देखा गया था। के रूप में बाहरी सौर मंडल में छोटे ग्रहों की खोज की गई और उन्हें ज्वालामुखी-आधारित सतहों को मिला जो कि धूमकेतु के समान थे, वे अक्सर क्षुद्रग्रह बेल्ट के क्षुद्रग्रहों से अलग थे। इस लेख में, "एस्टरॉयड" शब्द का अर्थ आंतरिक सौर मंडल के छोटे ग्रहों को संदर्भित करता है जिसमें उन सह-कक्षाओं में बृहस्पति शामिल हैं। वहाँ लाखों क्षुद्रग्रह हैं, बहुत से ग्रहों के बिखर अवशेष, सूर्य के सौर नेब्यूला के भीतर निकाले जाने वाले शरीर के रूप में माना जाता है, जो कि ग्रह बनने के लिए बड़े पैमाने पर कभी बड़ा नहीं बनता था। मंगल और बृहस्पति के कक्षाओं के बीच क्षुद्रग्रहों के बेल्ट में ज्ञात क्षुद्रग्रहों की बड़ी संख्या, या बृहस्पति (बृहस्पति ट्रोजन) के साथ सह-कक्षीय हैं। हालांकि, अन्य कक्षीय परिवारों में पास-पृथ्वी ऑब्जेक्ट्स सहित महत्वपूर्ण आबादी मौजूद है। व्यक्तिगत क्षुद्रग्रहों को उनके विशिष्ट स्पेक्ट्रा द्वारा वर्गीकृत किया जाता है, जिनमें बहुमत तीन मुख्य समूहों में आती हैः सी-टाइप, एम-प्रकार और एस-टाइप। इसका नाम क्रमशः कार्बन-समृद्ध, धातु, और सिलिकेट (पत्थर) रचनाओं के नाम पर रखा गया था। क्षुद्रग्रहों का आकार बहुत भिन्न होता है, कुछ तक पहुंचते हुए 1000 किमी तक पहुंचते हैं। क्षुद्रग्रहों को धूमकेतु और मेटोरोइड से विभेदित किया जाता है धूमकेतु के मामले में, अंतर संरचना में से एक हैः जबकि क्षुद्रग्रह मुख्य रूप से खनिज और चट्टान से बना है, धूमकेतु धूल और बर्फ से बना है इसके अलावा, क्षुद्रग्रहों ने सूरज के करीब का गठन किया, जो कि ऊपर उल्लिखित धूमकेतू बर्फ के विकास को रोकता है। क्षुद्रग्रहों और meteorids के बीच का अंतर मुख्य रूप से आकार में से एक हैः उल्कापिंडों का एक मीटर से कम का व्यास है, जबकि क्षुद्रग्रहों का एक मीटर से अधिक का व्यास है। अंत में, उल्कामी द्रव्य या तो समृद्ध या क्षुद्रग्रहयुक्त पदार्थों से बना हो सकता है। केवल एक क्षुद्रग्रह, 4 वेस्ता, जो एक अपेक्षाकृत चिंतनशील सतह है, आमतौर पर नग्न आंखों के लिए दिखाई देता है, और यह केवल बहुत ही अंधेरे आसमान में है जब यह अनुकूल स्थिति है शायद ही, छोटे क्षुद्रग्रह पृथ्वी के नजदीक से गुजरते हैं, कम समय के लिए नग्न आंखों में दिखाई दे सकते हैं। मार्च 2016 तक, माइनर प्लैनेट सेंटर के आंतरिक और बाहरी सौर मंडल में 1.3 मिलियन से अधिक ऑब्जेक्ट्स पर डेटा था, जिसमें से 750,000 में पर्याप्त जानकारी दी गई पदनामों की जानी थी। संयुक्त राष्ट्र ने 30 जून को अंतर्राष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस की घोषणा की ताकि क्षुद्रग्रहों के बारे में जनता को शिक्षित किया जा सके। अंतर्राष्ट्रीय एस्टरॉयड दिवस की तारीख 30 जून 1 9 08 को साइबेरिया, रूसी संघ पर टंगुस्का क्षुद्रग्रह की सालगिरह की स्मृति मनाई जाती है। .
क्लाइड विलियम टॉमबॉ एक अमेरिकी खगोलशास्त्री थे, जिन्होने एक हज़ार नौ सौ तीस में प्लूटो की खोज की। यह हमारे सौर मंडल के काइपर घेरे में पाई जाने वाली सर्वप्रथम वस्तु थी। इसके अतिरिक्त उन्होने कई क्षुद्रग्रहों की भी खोज की थी। . ग्यारह संबंधोंः टॉमबॉ रीजिओ, न्यू मेक्सिको, प्लूटो , संयुक्त राज्य, सौर मण्डल, खगोल शास्त्र, खगोल विज्ञानी, खगोलीय वस्तु, इलिनॉय, काइपर घेरा, क्षुद्रग्रह। टॉमबॉ रीजिओ का न्यू होराइज़न्स अंतरिक्षयान द्वारा लिया गया एक रंग-रहित चित्र टॉमबॉ रीजिओ प्लूटो पर स्थित एक समतल दिखने वाला क्षेत्र है। अपने आकार के कारण इसे प्लूटो का हृदय भी कहते हैं। यह प्लूटो की भूमध्य रेखा से उत्तर में स्थित है और इसका पश्चिमी हिस्सा 'स्पुत्निक प्लैनम' कहलाता है। इस क्षेत्र का नाम प्लूटो का खोज करने वाले खगोलशास्त्री क्लाइड टॉमबॉ पर रखा गया था। . अमेरिका के नक्शे में स्थिति न्यू मेक्सिको एक राज्य है जो संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है। यूरोपीय खोज से हजारों साल पहले तक यहाँ मूल अमेरिकी निवास करते थे। न्यू मैक्सिको का एक हज़ार पाँच सौ अट्ठानवे में स्पेनिश द्वारा उपनिवेशीकरण किया गया था। बाद में यह स्वतंत्र मेक्सिको का हिस्सा बना। एक हज़ार आठ सौ अड़तालीस में अमेरिका से अपनी हार के पश्चात् यह इलाका मेक्सिको ने अमेरिका को सौंप दिया। यह छः जनवरी एक हज़ार नौ सौ बारह को सैंतालीसवें राज्य के रूप में संघ में भर्ती किया गया था। न्यू मेक्सिको अमेरिका का पाँचवां सबसे बड़ा राज्य है। दो हज़ार सोलह के अनुमान के मुताबिक राज्य की जनसंख्या बीस,इक्यासी,पंद्रह हैं। इससे इसका सब राज्यों में छत्तीसवां स्थान हुआ। उनहत्तर.सात% लोगों द्वारा अंग्रेज़ी और अट्ठाईस.पाँच% द्वारा स्पेनी मातृभाषा के रूप में बोली जाती है। नावाजो एक मूल अमेरिकी भाषा तीन.पाँच% जनता द्वारा बोली जाती हैं। लगभग अस्सी% जनता ईसाई धर्म को मानती हैं। . प्लूटो यम या प्लूटो सौर मण्डल का दुसरा सबसे बड़ा बौना ग्रह है । प्लूटो को कभी सौर मण्डल का सबसे बाहरी ग्रह माना जाता था, लेकिन अब इसे सौर मण्डल के बाहरी काइपर घेरे की सब से बड़ी खगोलीय वस्तु माना जाता है। काइपर घेरे की अन्य वस्तुओं की तरह प्लूटो का अकार और द्रव्यमान काफ़ी छोटा है - इसका आकार पृथ्वी के चन्द्रमा से सिर्फ़ एक-तिहाई है। सूरज के इर्द-गिर्द इसकी परिक्रमा की कक्षा भी थोड़ी बेढंगी है - यह कभी तो वरुण की कक्षा के अन्दर जाकर सूरज से तीस खगोलीय इकाई दूर होता है और कभी दूर जाकर सूर्य से पैंतालीस ख॰ई॰ पर पहुँच जाता है। प्लूटो काइपर घेरे की अन्य वस्तुओं की तरह अधिकतर जमी हुई नाइट्रोजन की बर्फ़, पानी की बर्फ़ और पत्थर का बना हुआ है। प्लूटो को सूरज की एक पूरी परिक्रमा करते हुए दो सौ अड़तालीस.नौ वर्ष लग जाते हैं। . संयुक्त राज्य अमेरिका , जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। अड़तालीस संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। अड़तीस लाख वर्ग मील "", U.S. Census Bureau, database as of August दो हज़ार दस, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है। इन पिंडों में आठ ग्रह, उनके एक सौ छयासठ ज्ञात उपग्रह, पाँच बौने ग्रह और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। इन छोटे पिंडों में क्षुद्रग्रह, बर्फ़ीला काइपर घेरा के पिंड, धूमकेतु, उल्कायें और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं। सौर मंडल के चार छोटे आंतरिक ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह जिन्हें स्थलीय ग्रह कहा जाता है, मुख्यतया पत्थर और धातु से बने हैं। और इसमें क्षुद्रग्रह घेरा, चार विशाल गैस से बने बाहरी गैस दानव ग्रह, काइपर घेरा और बिखरा चक्र शामिल हैं। काल्पनिक और्ट बादल भी सनदी क्षेत्रों से लगभग एक हजार गुना दूरी से परे मौजूद हो सकता है। सूर्य से होने वाला प्लाज़्मा का प्रवाह सौर मंडल को भेदता है। यह तारे के बीच के माध्यम में एक बुलबुला बनाता है जिसे हेलिओमंडल कहते हैं, जो इससे बाहर फैल कर बिखरी हुई तश्तरी के बीच तक जाता है। . चन्द्र संबंधी खगोल शास्त्रः यह बडा क्रेटर है डेडलस। एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में चन्द्रमा की प्रदक्षिणा करते समय अपोलो ग्यारह के चालक-दल ने यह चित्र लिया था। यह क्रेटर पृथ्वी के चन्द्रमा के मध्य के नज़दीक है और इसका व्यास लगभग तिरानवे किलोग्राममीटर या अट्ठावन मील है। खगोल शास्त्र, एक ऐसा शास्त्र है जिसके अंतर्गत पृथ्वी और उसके वायुमण्डल के बाहर होने वाली घटनाओं का अवलोकन, विश्लेषण तथा उसकी व्याख्या की जाती है। यह वह अनुशासन है जो आकाश में अवलोकित की जा सकने वाली तथा उनका समावेश करने वाली क्रियाओं के आरंभ, बदलाव और भौतिक तथा रासायनिक गुणों का अध्ययन करता है। बीसवीं शताब्दी के दौरान, व्यावसायिक खगोल शास्त्र को अवलोकिक खगोल शास्त्र तथा काल्पनिक खगोल तथा भौतिक शास्त्र में बाँटने की कोशिश की गई है। बहुत कम ऐसे खगोल शास्त्री है जो दोनो करते है क्योंकि दोनो क्षेत्रों में अलग अलग प्रवीणताओं की आवश्यकता होती है, पर ज़्यादातर व्यावसायिक खगोलशास्त्री अपने आप को दोनो में से एक पक्ष में पाते है। खगोल शास्त्र ज्योतिष शास्त्र से अलग है। ज्योतिष शास्त्र एक छद्म-विज्ञान है जो किसी का भविष्य ग्रहों के चाल से जोड़कर बताने कि कोशिश करता है। हालाँकि दोनों शास्त्रों का आरंभ बिंदु एक है फिर भी वे काफ़ी अलग है। खगोल शास्त्री जहाँ वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हैं जबकि ज्योतिषी केवल अनुमान आधारित गणनाओं का सहारा लेते हैं। . खगोल विज्ञानी अथवा खगोल शास्त्री वे वैज्ञानिक अध्ययनकर्ता हैं जी आकाशीय पिण्डों, उनकी गतियों और अंतरिक्ष में मौजूद विविध प्रकार की चीजों की खोज और अध्ययन का कार्य करते हैं। पश्चिमी संस्कृति में गैलीलियो नामक खगोल विज्ञानी को आधुनिक खगोलशास्त्र का पिता माना जाता है। हालाँकि कुछ लोग यह नाम कॉपरनिकस को देते हैं। . आकाशगंगा सब से बड़ी खगोलीय वस्तुएँ होती हैं - एन॰जी॰सी॰ चार हज़ार चार सौ चौदह हमारे सौर मण्डल से छः करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर एक पचपन,शून्य प्रकाश-वर्ष के व्यास की आकाशगंगा है खगोलीय वस्तु ऐसी वस्तु को कहा जाता है जो ब्रह्माण्ड में प्राकृतिक रूप से पायी जाती है, यानि जिसकी रचना मनुष्यों ने नहीं की होती है। इसमें तारे, ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, गैलेक्सी आदि शामिल हैं। . thumbnail इलिनाय अमरीका का एक राज्य है। इसकी राजधानी स्प्रिंगफील्ड है। इस राज्य में शिकागो सबसे बड़ा शहर है। इसे एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह में राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। यह छःवां सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य और भूमि क्षेत्र के मामले में पच्चीसवां सबसे बड़ा राज्य है। इलिनोइस का एक विविध आर्थिक आधार है और यह एक प्रमुख परिवहन केंद्र है। शिकागो का बंदरगाह विशाल झीलों के माध्यम से राज्य को अन्य वैश्विक बंदरगाहों से जोड़ता है। दशकों से ओ'हारे अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा को दुनिया के सबसे व्यस्ततम हवाई अड्डों में से एक के रूप में गिना जाता है। सबसे पहले सत्रहवीं और अट्ठारहवीं शताब्दी में यूरोपीय जनसंख्या राज्य के पश्चिम में मिसिसिपी नदी पर बसी, जो कि फ्रांसीसी कनाडाई उपनिवेशवादी थे। अमेरिकी क्रन्तिकारी युद्ध के पश्चात् संयुक्त राज्य की स्थापना हुई और अमेरिकी आबादकार एक हज़ार आठ सौ दस के दशक में एपलाशियन पर्वतमाला को पार करके बसना शुरू हुए। शिकागो की एक हज़ार आठ सौ तीस के दशक में शिकागो नदी के तट पर स्थापना की गई जो कि दक्षिणी मिशिगन झील पर चुनिंदा प्राकृतिक बंदरगाहों में से एक है। जॉन डेयर के नए प्रकार के स्टील के हल के आविष्कार ने इलिनोइस के समृद्ध प्रेरी को दुनिया के सबसे अधिक उत्पादक पूर्ण और मूल्यवान खेतों में बदल दिया, जिसने जर्मनी और स्वीडन के नए आप्रवासी किसानों को आकर्षित किया। इलिनोइस में रहने के दौरान तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों का निर्वाचिन हुआ हैः अब्राहम लिंकन, युलीसेस सिंपसन ग्रांट, और बराक ओबामा। इसके अतिरिक्त रोनाल्ड रीगन, जिनका राजनीतिक कैरियर कैलिफोर्निया में स्थित था, इलिनोइस में पैदा और पले-बढ़े हुए एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति है। अब इलिनोइस ने लिंकन को अपने आधिकारिक नारे, लैंड ऑफ़ लिंकन के साथ सम्मानित किया है जो कि एक हज़ार नौ सौ चौवन से उसके लाइसेंस प्लेटों पर प्रदर्शित किया जा रहा है। . काइपर घेरे की ज्ञात वस्तुएँ - मुख्य घेरे की वस्तुएँ हरे रंग में, घेरे की बिखरी हुई वस्तुएँ नारंगी रंग में, सौर मण्डल के चार बाहरी ग्रह नीले रंग में, वरुण के इर्द-गिर्द की वस्तुएँ पीले रंग में और बृहस्पति के इर्द-गिर्द की वस्तुएँ गुलाबी रंग में दिखाई गयी हैं काइपर घेरा, काइपर-ऍजवर्थ घेरा या काइपर बॅल्ट हमारे सौर मण्डल का एक बाहरी क्षेत्र है जो वरुण ग्रह की कक्षा से लेकर सूर्य से पचपन ख॰इ॰ तक फैला हुआ है। क्षुद्रग्रह घेरे की तरह इसमें भी हज़ारों-लाखों छोटी-बड़ी खगोलीय वस्तुएँ हैं जो सौर मण्डल के ग्रहों के सृजनात्मक दौर से बची हुई रह गयी। काइपर घेरा का क्षेत्र क्षुद्रग्रह घेरे के क्षेत्र से बीस गुना चौड़ा और दो सौ गुना ज़्यादा फैला हुआ है। जहाँ क्षुद्रग्रह घेरे की वस्तुएँ पत्थर और धातुओं की बनी हुई हैं, वहाँ काइपर घेरे की वस्तुएँ सर्दी की सख्ती से जमे हुए पानी, मीथेन और अमोनिया की मिली-जुली बर्फ़ों की बनी हुई हैं। सौर मण्डल के ज्ञात बौने ग्रहों में से तीन - यम, हउमेया और माकेमाके - काइपर घेरे के निवासी हैं। वैज्ञानिकों का यह भी मानना है के सौर मण्डल के कुछ प्राकृतिक उपग्रह भी इसी घेरे में जन्मे और घुमते-फिरते अपने ग्रहों के निटक पहुँच कर उनके गुरुत्वाकर्षण में फँस कर उनकी परिक्रमा करने लगे, जैसे की वरुण का उपग्रह ट्राइटन और शनि का उपग्रह फ़ीबी। काइपर घेरे का नाम डच-अमेरिकी खगोलशास्त्री जेरार्ड काइपर के नाम पर रखा गया हालाँकि, वास्तव में खुद उन्होंने इसके अस्तित्व की भविष्यवाणी नहीं की थी। वर्ष एक हज़ार नौ सौ बानवे में, यम के बाद खोजा जाने वाला पहला काइपर घेरा वस्तु था। इसकी खोज के बाद से अब तक, ज्ञात काइपर घेरा वस्तुओं की संख्या हज़ार से अधिक हो चुकी है और से अधिक व्यास वाले एक,शून्य,शून्य से अधिक केबीओ'स के होने का अनुमान है। प्रारम्भ में यह सोचा गया था कि काइपर बेल्ट ही उन सावधिक धूमकेतुओं का भण्डार है जिनकी कक्षायें दो सौ सालों से कम अवधि वाली हैं। हालाँकि, नब्बे के दशक के बाद के अध्ययनों ने दर्शाया है कि यह घेरा गतिशीलता की दृष्टि से स्थायित्व वाला है, और धूमकेतुओं की उत्पत्ति का वास्तविक स्थल एक प्रकीर्ण डिस्क है जो नेपच्यून की बहिर्मुखी गति द्वारा चार.पाँच बिलियन वर्ष पूर्व निर्मित, गतिशीलता के दृष्टि से एक सक्रिय मंडल है; इस प्रकीर्ण डिस्क के कुछ पिण्डों, जैसे कि ऍरिस इत्यादि, की विकेन्द्रता अत्यंत अधिक है और वे अपने परिक्रमा पथ में सूर्य से एक सौ AU तक की दूरी तक भी चले जाते हैं। . क्षुद्रग्रह क्षुद्रग्रह अथवा ऐस्टरौएड एक खगोलिय पिंड होते है जो ब्रह्माण्ड में विचरण करते रहते हे। यह आपने आकार में ग्रहो से छोटे और उल्का पिंडो से बड़े होते है। खोजा जाने वाला पहला क्षुद्रग्रह, सेरेस, एक हज़ार आठ सौ उन्नीस में ग्यूसेप पियाज़ी द्वारा पाया गया था और इसे मूल रूप से एक नया ग्रह माना जाता था। इसके बाद अन्य समान निकायों की खोज के बाद, जो समय के उपकरण के साथ, प्रकाश के अंक होने लगते हैं, जैसे सितारों, छोटे या कोई ग्रहिक डिस्क नहीं दिखाते हैं, हालांकि उनके स्पष्ट गति के कारण सितारों से आसानी से अलग हो सकते हैं। इसने खगोल विज्ञानी सर विलियम हर्शल को "ग्रह", शब्द को प्रस्तावित करने के लिए प्रेरित किया, जिसे ग्रीस में ἀστεροειδής या एस्टरियोइड्स के रूप में तब्दील किया गया, जिसका अर्थ है 'तारा-जैसे, तारा-आकार', और प्राचीन ग्रीक ἀστήρ astér 'तारा, ग्रह से व्युत्पन्न '। उन्नीसवीं सदी के शुरुआती छमाही में, शब्द "क्षुद्रग्रह" और "ग्रह" अभी भी एक दूसरे का प्रयोग किया गया था पिछले दो शताब्दियों में एस्टरॉयड डिस्कवरी विधियों में नाटकीय रूप से सुधार हुआ है अट्ठारह वीं शताब्दी के आखिरी वर्षों में, बैरन फ्रांज एक्सवेर वॉन जैच ने चौबीस खगोलविदों के समूह को एक ग्रह का आयोजन किया, जिसमें आकाश के बारे में दो.आठ एयू के बारे में अनुमानित ग्रह के लिए आकाश की खोज थी, जिसे टिटियस-बोद कानून द्वारा आंशिक रूप से खोज की गई थी। कानून द्वारा अनुमानित दूरी पर ग्रह यूरेनस के एक हज़ार सात सौ इक्यासी में सर विलियम हर्शल। इस काम के लिए ज़ोनियाकल बैंड के सभी सितारों के लिए हाथों से तैयार हुए आकाश चार्ट तैयार किए जाने की आवश्यकता है, जो कि संवेदनाहीनता की सीमा के नीचे है। बाद की रातों में, आकाश फिर से सनदी जाएगा और किसी भी चलती वस्तु को उम्मीद है, देखा जाना चाहिए। लापता ग्रह की उम्मीद की गति प्रति घंटे तीस सेकंड का चाप था, पर्यवेक्षकों द्वारा आसानी से पता चला। मंगल ग्रह से पहले क्षुद्रग्रह छवि - जिज्ञासा द्वारा देखा गया। पहला उद्देश्य, सेरेस, समूह के किसी सदस्य द्वारा नहीं खोजा गया था, बल्कि एक हज़ार आठ सौ एक में सिसिली में पालेर्मो के वेधशाला के निदेशक ग्यूसेप पियाज़ी ने दुर्घटना के कारण नहीं खोजा था। उन्होंने वृषभ में एक नया सितारा की तरह वस्तु की खोज की और कई वस्तुओं के दौरान इस ऑब्जेक्ट के विस्थापन का अनुसरण किया। उस वर्ष बाद, कार्ल फ्रेडरिक गॉस ने इस अज्ञात वस्तु की कक्षा की गणना करने के लिए इन टिप्पणियों का इस्तेमाल किया, जो मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच पाया गया था। पियाजी ने इसे कृषि के रोमन देवी सेरेस के नाम पर रखा था। अगले कुछ वर्षों में तीनों क्षुद्रग्रहों की खोज की गई, साथ में वेस्ता को एक हज़ार आठ सौ सात में मिला। आठ वर्षों के व्यर्थ खोजों के बाद, अधिकांश खगोलविदों ने मान लिया था कि अब और नहीं और आगे की खोजों को छोड़ दिया गया था। हालांकि, कार्ल लुडविग हेन्के ने दृढ़ किया, और एक हज़ार आठ सौ तीस में अधिक क्षुद्रग्रहों की खोज करना शुरू कर दिया। पन्द्रह वर्ष बाद, उन्हें अड़तीस अस्वास्थापों में पहला नया क्षुद्रग्रह पाया गया, जो पाँच अस्त्रिया पाए गए। उन्होंने यह भी पाया छः हेबे कम से कम दो साल बाद इसके बाद, अन्य खगोलविदों ने खोज में शामिल हो गए और इसके बाद हर वर्ष कम से कम एक नया क्षुद्रग्रह पाया गया इस शुरुआती युग के उल्लेखनीय क्षुद्रग्रह शिकारी जे आर हिंद, एनीबेल डी गैसपरिस, रॉबर्ट लूथर, एचएमएस गोल्डस्मिथ, जीन चिकार्नाक, जेम्स फर्ग्यूसन, नॉर्मन रॉबर्ट पॉगसन, ईडब्ल्यू टेम्पाल, जेसी वाटसन, सीएफ़एफ़ पीटर्स, ए। बोरलिलली, जे। पॉलिसा, हेनरी भाई और अगस्टे चार्लोइस एक हज़ार आठ सौ इक्यानवे में, मैक्स वुल्फ ने क्षुद्रग्रहों का पता लगाने के लिए "आस्ट्रोफ़ोटोग्राफी" के इस्तेमाल की शुरुआत की, जो लंबे समय तक एक्सपोजर फोटोग्राफिक प्लेट्स पर छोटी धारियों के रूप में दिखाई दिए। इससे पहले दृश्य तरीकों की तुलना में नाटकीय रूप से पहचान की दर में वृद्धि हुईः वुल्फ ने केवल दो सौ अड़तालीस क्षुद्रग्रहों की खोज की, तीन सौ तेईस ब्रुसिया से शुरुआत करते हुए, जबकि उस समय तक केवल तीन सौ से थोड़ा अधिक की खोज की गई थी यह ज्ञात था कि वहां बहुत अधिक थे, लेकिन अधिकांश खगोलविदों ने उनके साथ परेशान नहीं किया, उन्हें "आसमान की किरण" कहा, एडुआर्ड सूसे और एडमंड वेज़ के लिए अलग-अलग वाक्यांशों का श्रेय। यहां तक कि एक सदी बाद, केवल कुछ हज़ार क्षुद्रग्रहों की पहचान की गई,क्षुद्रग्रह छोटे ग्रह हैं, विशेषकर इनर सौर मंडल के बड़े लोगों को ग्रहोइड कहा जाता है इन शब्दों को ऐतिहासिक रूप से किसी भी खगोलीय वस्तु पर लागू किया गया है जो कि सूर्य की परिक्रमा करता है, जो कि किसी ग्रह की डिस्क नहीं दिखाया था और सक्रिय धूमकेतु की विशेषताओं को देखते हुए नहीं देखा गया था। के रूप में बाहरी सौर मंडल में छोटे ग्रहों की खोज की गई और उन्हें ज्वालामुखी-आधारित सतहों को मिला जो कि धूमकेतु के समान थे, वे अक्सर क्षुद्रग्रह बेल्ट के क्षुद्रग्रहों से अलग थे। इस लेख में, "एस्टरॉयड" शब्द का अर्थ आंतरिक सौर मंडल के छोटे ग्रहों को संदर्भित करता है जिसमें उन सह-कक्षाओं में बृहस्पति शामिल हैं। वहाँ लाखों क्षुद्रग्रह हैं, बहुत से ग्रहों के बिखर अवशेष, सूर्य के सौर नेब्यूला के भीतर निकाले जाने वाले शरीर के रूप में माना जाता है, जो कि ग्रह बनने के लिए बड़े पैमाने पर कभी बड़ा नहीं बनता था। मंगल और बृहस्पति के कक्षाओं के बीच क्षुद्रग्रहों के बेल्ट में ज्ञात क्षुद्रग्रहों की बड़ी संख्या, या बृहस्पति के साथ सह-कक्षीय हैं। हालांकि, अन्य कक्षीय परिवारों में पास-पृथ्वी ऑब्जेक्ट्स सहित महत्वपूर्ण आबादी मौजूद है। व्यक्तिगत क्षुद्रग्रहों को उनके विशिष्ट स्पेक्ट्रा द्वारा वर्गीकृत किया जाता है, जिनमें बहुमत तीन मुख्य समूहों में आती हैः सी-टाइप, एम-प्रकार और एस-टाइप। इसका नाम क्रमशः कार्बन-समृद्ध, धातु, और सिलिकेट रचनाओं के नाम पर रखा गया था। क्षुद्रग्रहों का आकार बहुत भिन्न होता है, कुछ तक पहुंचते हुए एक हज़ार किमी तक पहुंचते हैं। क्षुद्रग्रहों को धूमकेतु और मेटोरोइड से विभेदित किया जाता है धूमकेतु के मामले में, अंतर संरचना में से एक हैः जबकि क्षुद्रग्रह मुख्य रूप से खनिज और चट्टान से बना है, धूमकेतु धूल और बर्फ से बना है इसके अलावा, क्षुद्रग्रहों ने सूरज के करीब का गठन किया, जो कि ऊपर उल्लिखित धूमकेतू बर्फ के विकास को रोकता है। क्षुद्रग्रहों और meteorids के बीच का अंतर मुख्य रूप से आकार में से एक हैः उल्कापिंडों का एक मीटर से कम का व्यास है, जबकि क्षुद्रग्रहों का एक मीटर से अधिक का व्यास है। अंत में, उल्कामी द्रव्य या तो समृद्ध या क्षुद्रग्रहयुक्त पदार्थों से बना हो सकता है। केवल एक क्षुद्रग्रह, चार वेस्ता, जो एक अपेक्षाकृत चिंतनशील सतह है, आमतौर पर नग्न आंखों के लिए दिखाई देता है, और यह केवल बहुत ही अंधेरे आसमान में है जब यह अनुकूल स्थिति है शायद ही, छोटे क्षुद्रग्रह पृथ्वी के नजदीक से गुजरते हैं, कम समय के लिए नग्न आंखों में दिखाई दे सकते हैं। मार्च दो हज़ार सोलह तक, माइनर प्लैनेट सेंटर के आंतरिक और बाहरी सौर मंडल में एक.तीन मिलियन से अधिक ऑब्जेक्ट्स पर डेटा था, जिसमें से सात सौ पचास,शून्य में पर्याप्त जानकारी दी गई पदनामों की जानी थी। संयुक्त राष्ट्र ने तीस जून को अंतर्राष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस की घोषणा की ताकि क्षुद्रग्रहों के बारे में जनता को शिक्षित किया जा सके। अंतर्राष्ट्रीय एस्टरॉयड दिवस की तारीख तीस जून एक नौ आठ को साइबेरिया, रूसी संघ पर टंगुस्का क्षुद्रग्रह की सालगिरह की स्मृति मनाई जाती है। .
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 249 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल ११,७४० बार देखा गया है। अच्छा श्रोता होना आपको दूसरों की आँखों से दुनिया देखने का एक मौका देता है। यह आपकी समझ और सहानभूति की क्षमता को बढ़ाता है। यह आपको अपनी संवाद क्षमता को बढ़ा कर अपने संपर्कों को बढ़ाने में भी सहायता करता है। किसी को सुनने की क्षमता आपको किसी और व्यक्ति की परिस्तिति को अच्छे से समझने, और क्या कहना है और क्या नहीं समझने में भी सहायता करता है। सुनना आसान लग सकता है (और स्वीकृति करना), विशेषतः तब जब मतभेद हो जाए, ऐसे में यह करने के लिए अच्छे खासे प्रयास और अभ्यास की जरूरत पड़ती है। अगर आप जानना चाहते है की अच्छा श्रोता कैसे बनना है, तो जानने के लिए आगे पढ़ें!! 1खुद को किसी दूसरे के स्थान पर रखकर देखेंः खुद में खो जाना और कही जा रही बात के खुद पर पड़ने वाले प्रभाव पर ही सोचना, आसान है। पर आपकी आंतरिक बातचीत आपके सक्रियता से सुनने को रोक देती है। इसके बजाय, आपको ध्यान से समस्या को सामने वाले के परिपेक्ष्य से देखना चाहिए। यह नहीं कि हम पहले ही मान लें की आप सामने वाली की जगह होते तो आपने ज्यादा जल्दी समस्या का हल निकाल लिया होता। अच्छा श्रोता होना किसी व्यक्ति के बारे में अधिक जान कर आपको अच्छे दोस्त बनाने में भी मदद करता है। - याद रखे की आपके पास दो कान और एक मुहं होने का एक कारण है। इसका मतलब है कि आपको बोलने से ज्यादा सुनना चाहिए। सुनना बोलने से ज्यादा फायदेमंद है। लोगों को सुनते वक़्त, बातचीत में स्वयं को लगाये और आँखों का संपर्क बनाये जिससे उन्हें लगे कि आप उनकी ध्यान दे रहे है (चाहे आपको परवाह न भी हो, यह फिर भी विनम्रता है)। लोग जो ज्यादा सुनते है ज्यादा चौकस होते हैं और इसलिए ज्यादा विचारवान होते हैं और चीजों को बेहतर ढंग से समझते है। सुनिश्चित करे कि आप सचमुच सुन रहे है और इसके अलावा कुछ नहीं कर रहे। यह सुनिश्चित करने का प्रयास करें कि आपका पूरा ध्यान उस व्यक्ति की ओर हो जो बोल रहा है और वह भटक नहीं रहा। - तुरंत वक्ता के बारें में निर्णय कर लेने, या सीधे कोई हल सुझाने के बजाय, सुनने और स्तिति को दुसरे व्यक्ति के परिपेक्ष्य से देखने का समय निकालें। सोचे कि यह जान कर आपको कैसा लगेगा कि कोई चुपचाप आप पर निर्णय कर रहा है। इससे उपस्थित स्तिति को सच में समझने से पहले अपना मत बना लेने की बजाय आपको सच में उस व्यक्ति को सुनने में मदद मिलेगी। 2दूसरे व्यक्ति के अनुभव से अपने अनुभव की तुलना करने से बचेः आपको ऐसा लग सकता है कि बोलने वाले की बात सुनने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग यही है कि आप अपने अनुभव से उसकी तुलना करें, पर यह सच नहीं है। यदि कोई व्यक्ति परिवार में हुई किसी मृत्यु से उबरने पर बात कर रहा है, तो आप सहानुभूति व्यक्त कर सकते है, पर ऐसा कहने से बचे, "यह बिलकुल वैसा ही है जैसा मेरे साथ था..." आपका किसी की बहुत गंभीर स्तिति से अपनी कम गंभीर स्तिति की तुलना करना अति असंवेदनशील और अपमानजनक है, जैसे किसी के तलाक की अपने तीन महीने के संबंधों से तुलना करना, वक्ता को बहुत असहज बना देगा। - आपको लग सकता है कि किसी की मदद करने और स्तिति सम्भालनें का यह सर्वश्रेष्ठ मार्ग है, परन्तु इससे रिश्ते बिगड़ सकते है और वक्ता को ऐसा लगेगा कि आप उसकी बात सुन ही नहीं रहे। - बहुत ज्यादा "मैं" और "मेरा" कहने से बचिए। यह इस बात का संकेत है कि आप दूसरों की स्तिति की अपेक्षा सिर्फ खुद के बारे में सोच रहे हैं। - यदि व्यक्ति जानता है कि आप भी वैसे ही अनुभव से गुजर चुके है, तो वह आपसे स्वयं ही आपकी राय पूछ सकता/सकती है। ऐसे में आप अपनी बात रख सकते है, पर अंपने अनुभव को ऐसे प्रदर्शित करने में सावधान रहे जैसे वे बिलकुल दूसरे के जैसे ही थे। इस से ऐसा लगेगा कि आप सिर्फ मददगार लगने के लिए एक कृत्रिम परिस्तिति के निर्माण करने का प्रयास कर रहे है। 3तुरंत मदद करने की कोशिश न करेंः कुछ लोगो को लगता है, कि जब वे सुन रहे हैं,उन्हें तब ही किसी व्यक्ति की समस्या को सुलझाने का तेज और आसान उपाय ढूढंते रहना चाहिए। इसके बजाय जब कोई व्यक्ति बोल रहा है तो आपको उसकी बात ठीक से समझनी चाहिए, और उसके बोलते हुए उसके हल पर विचार नहीं करना चाहिए --ऐसा तभी करना चाहिए जब वह व्यक्ति ऐसा चाहता हो। यदि आप व्यग्रतापूर्वक उस व्यक्ति की समस्याओं के एकदम शीघ्र हलों पर सोचने लगते है, तो आप वास्तव में सुन ही नहीं रहे होंगे। - व्यक्ति आपसे क्या कह रहा है उस सब को आत्मसात करने पर ध्यान दें। केवल इसके बाद ही आपको मदद करने की कोशिश करनी चाहिए। 4सहानुभूति रखेंः उचित समयों पर अपना सर हिला कर उन्हें दिखाए की आपको परवाह है, जिससे व्यक्त हो कि आप सुन रहे है। इसके अलावा कुछ छोटी बातें कहें जैसे "सही है" जब व्यक्ति कोई ऐसी बात कर रहा हो जिस पर वो आपकी सहमति चाहता हो, या "ओह" कहें जब व्यक्ति कोई दुखद या अपने प्रति किसी बुरे काम का जिक्र कर रहा हो। इन शब्दों से उन्हें भरोसा हो जायेगा कि आप सिर्फ सुन ही नहीं रहे ध्यान भी दे रहे है। इन शब्दों को उचित समय पर और सौम्य तरीके से बोले ताकि आप अहंकारी या हस्तक्षेप करने वाले न प्रतीत हों। अपने संवेदनशील पक्ष को प्रकट करें और यदि व्यक्ति तनाव में है तो उसे सहज करने का प्रयास करें। दूसरी ओर कई लोग रहम के पात्र दिखना नहीं चाहते। इसलिए उन्हें सहज करें, परन्तु स्वयं को उनसे ऊँचा दिखने की कोशिश न करें। 5बताये गए तथ्यों को याद रखेंः व्यक्ति ने आपसे जो कहा है उसे सचमुच आत्मसात करना, अच्छे श्रोता बनने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए जब एक व्यक्ति आपको अपने सबसे अच्छे दोस्त जैक के साथ उसकी समस्या के बारे में बता रहा है, और आप उसे नहीं जानते, आप कम से कम उसका नाम याद रख सकते हैं। इससे बात निकलने पर आप उसका नाम लेकर ऐसा प्रदर्शित कर पाएंगे की आप स्तिति से वाकिफ हैं। अगर आप कोई नाम, विवरण, या महत्वपूर्ण घटना याद नहीं करते, तो ऐसा प्रतीत होगा कि आप सुन नहीं रहें है। - अगर आपकी याददाश्त बहुत तेज नहीं है तो कोई बात नहीं है। फिर भी अगर आप लोगो को रोक कर स्पष्टीकरण मांगते रहते है या लोगों के नाम भूल जाते है, तो हाँ, आप एक अच्छे श्रोता की तरह नहीं पहचाने जायेंगे। आपको हर छोटी बात याद रखने की जरूरत नहीं है, लेकिन ऐसा भी नहीं होना चाहिए की आपके सामने बोल रहे व्यक्ति को कई बार अपनी बात दोहरानी पड़े। 6अनुशरणः अच्छा श्रोता बनने का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि आप किसी व्यक्ति को सिर्फ सुनने से आगे जाएँ। यह नहीं कि बात सुनी, बात की और आगे बढ़ गए और फिर कभी उस बात पर विचार नहीं किया। यदि आप सचमुच दिखाना चाहते है कि आपको परवाह है तो उस व्यक्ति से अगली मुलाकात में आपको उससे उस स्तिति के बारे में पूछना चाहिए, या फिर आप उसे एक मेसेज या फ़ोन करके भी पूछ सकते है कि वर्तमान स्तिति क्या है। यदि यह कोई गंभीर बात है जैसे निकटवर्ती तलाक, नौकरी की तलाश, या चाहे स्वास्थ्य की समस्या, तो अपनी परवाह दिखने का बहुत अच्छा तरीका है उन व्यक्ति से जाके मिलना, भले ही आपको बुलाया न गया हो। अगर वे न चाहे तो पीछे न पड़े, उनके निर्णय को स्वीकार करें पर उन्हें बता दे कि आप हमेशा उनके साथ हैं। - व्यक्ति जिसने आपसे बात की, वो यह जान कर बहुत प्रभावित हो सकता है कि आपने बातचीत की हद से बढ़ के उसके बारे में सोचा और वो कैसा/कैसी है ये देखने उसके घर तक आये। यह आपकी सुनने की क्षमता को अगले स्तर तक ले जाता है। - निसंदेह, किसी व्यक्ति के अनुसरण में और छिद्रान्वेषण में फर्क है। अगर एक व्यक्ति ने आपको बताया था की वो कैसे अपनी नौकरी छोड़ना चाह रही है, तो आप उससे रोज मेसेज भेज के ये पूछना नहीं चाहेंगे की क्या उसने नौकरी छोड़ दी, नहीं तो आप स्तिति पर अनावश्यक दबाब बनाएंगे और मदद की जगह तनाव पैदा करेंगे। 7जाने कि क्या नहीं करना हैः जब आप एक अच्छा श्रोता बनने का प्रयास कर रहे हो, तो यह जानना कि क्या नहीं करना है भी लगभग उतना ही मददगार होता है जितना यह जानना कि क्या करना है। यदि आप चाहते है कि वक्ता आपको गंभीरता से ले और सोचे की आप सम्मान दे रहे है, तो ये बचने के लिए कुछ बिंदु ये रहेः - एक मुद्दे पर बीच में न बोलें। - व्यक्ति से पूछताछ ना करें। इसके बजाय जब जरूरत हो नरमी से प्रश्न करें(उस समय जब व्यक्ति बात न कर रह हो)। - विषय बदलने की कोशिश न करे, भले यह थोड़ा असहज हो। - ये कहने से बचे"यह दुनियाँ का अंत नहीं है" या "आप सुबह अच्छा महसूस करेंगे।" इससे व्यक्ति की समस्या कमतर होती है और उसे बुरा लगता है। व्यक्ति से आँखें मिलाये जिससे उसे समझ आ जाये कि आप रूचि ले रहे है और सुन रहे है। 1पहले चुप रहेः यह घिसा-पिटा और स्पष्ट लग सकता है, पर आवेग में आये हुए विचारों को बोलने की इच्छा को रोकना, सुनने में सबसे बड़ी बाधा है। ठीक ऐसे ही, कई लोग स्वयं के वैसे ही अनुभव बाँट कर झूठी सहानुभूति प्रदर्शित करते है।"मन" की दोनों ही प्रतिक्रियाएं सहायक हो सकती है, पर सामान्यतः वे जरूरत से ज्यादा उपयोग की जाती है और अंत में दुरूपयोग की जाती है। - अपनी जरूरतों को एक तरफ रख दें, और "धैर्य से प्रतीक्षा" करते हुए दूसरे व्यक्ति को अपनी गति, और तरीके से अपने विचार व्यक्त करने का मौका दें। 2अपनी गोपनीयता के प्रति व्यक्ति को पुनः आश्वासन देंः यदि व्यक्ति आपसे कोई बहुत निजी या महत्वपूर्ण बात कर रहा है, तो आपको यह स्पष्ट करना चाहिए कि आप एक विश्वसनीय व्यक्ति है जो अपना मुहं बंद रख सकते है। कहिये कि वो व्यक्ति आप पर विश्वास कर सकता है और जो बात हुई है वो आप दोनों के बीच ही रहेगी और ये आपका वायदा हैं। यदि व्यक्ति आप पर विश्वास करने को लेकर आशंकित है तो आपके सामने उसके खुलने की सम्भावना कम है। यह भी ध्यान रखे की आप किसी पर अपने सामने खुलने के लिए जोर न डालें क्योंकि यह उन्हें असहज या नाराज कर सकता है। - निसंदेह, जब आप कहें कि व्यक्ति द्वारा कहीं बातें गोपनीय रहेगी, यह सच होना चाहिए, सिवाय तब जब परिस्थितियाँ ऐसी हो जो आपको बात अपने तक रखने से रोकती हो, जैसे व्यक्ति आत्महत्या करने वाला हो या आप बहुत ज्यादा चिंतित हों। यद्यपि यदि आप पर सामान्य तौर पर विश्वास नहीं किया जा सकता तो आप कभी अच्छे श्रोता नहीं हो सकते। 3जब आप "बोले" तो प्रोत्साहक बनेः बात-चीत के दौरान सही अंतराल पर सहानुभूतिपूर्ण हामी भरना महत्वपूर्ण है जिससे वक्ता को ये न लगे की आप बिलकुल सुन ही नहीं रहे हैं। मुख्य बिन्दुओं को "संक्षेपित करना" या "दुबारा कहना" या "दोहराना" और "प्रोत्साहित करना" मददगार होता है। इससे बातचीत का प्रवाह बनेगा और वक्ता का संकोच कम होगाःआपको क्या करना है, वे बिंदु ये रहेः - "दोहराये और प्रोत्साहित करेंः" वक्ता द्वारा कही किसी बात को दोहराइए और उसके साथ, प्रोत्साहन के तौर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दें। उदाहरण के लिए, आप कह सकते है, "मैं समझ रहा हूँ कि आपको इल्जाम अपने सर लेना अच्छा नहीं लगा, मुझे भी नहीं लगता" इस तकनीक का सावधानी से उपयोग करें। सहानुभूति ध्वनि को समय समय पर उपयोग करते रहे, क्योंकि इस तकनीक के ज्यादा उपयोग से लगेगा कि आप कृपालु बन रहे है। - "संक्षेपित करे और दोहरायेः कहने वाले ने क्या कहा इसे अपनी समझ के अनुसार संक्षेपित करना और इस अपने शब्दों में दोहराना बहुत मददगार होता है। यह वक्ता को भरोसा देता है की आप सच में उसकी बात सुन रहे थे और "समझ गएँ है"। इससे वक्त को आपकी गलत मान्यतायें और धारणाओं को सही करने का मौका भी मिलता है। - सुनिश्चित करें कि आप ऐसे वाक्यो से जैसे "मैं गलत हो सकता हूँ , लेकिन...:"या"...अगर मैं गलत हूँ तो कृपया सुधारे।" यह तकनीक विशेष रूप से तब ज्यादा उपयोगी है जब आप खुद को हताश पा रहे हो या आपको लगे कि आपका ध्यान सुनने से भटक रहा है। 4अर्थपूर्ण और सशक्त बनाने वाले सवाल पूछेः जांच-पड़ताल से दूर रहे या दूसरे व्यक्ति को सुरक्षात्मक न बनने दें। इसके बजाय ऐसे प्रश्नो का उपयोग करने का लक्ष्य बनाये जिनसे वक्ता उठाये जा रहे मुद्दे पर स्वयं के निष्कर्ष पर पहुचना शुरू कर सके। इस से वक्ता को स्वयं को निर्णायक न दिखाते हुए और दबाब डाले बिना अपने निष्कर्ष पर पहुँचने में सहायता मिलेगी। ये रही ध्यान में रखने लायक कुछ बातेंः - एक बार समानुभूतिपूर्ण श्रोता दिखने के बाद, अब सशक्त श्रोता होने का समय हैः अपने प्रश्नो का वाक्य विन्यास बदलें। उदाहरण के लिए, "आपको इल्जाम अपने सर लेना पसंद नहीं आया। पर मैं यह समझ नहीं पा रहा हूँ कि आपको सिर्फ किसी काम को किसी तरीके से करने पर मना करने पर आपने ऐसा क्यों महसूस किया कि इल्जाम लगाया गया है।" - प्रश्न के ऐसे शब्द विन्यास से वक्ता को "आपकी" कोई बात न समझ पाने की स्तिति पर सीधी प्रतिक्रिया देनी होगी। प्रतिक्रिया की प्रक्रिया में, वक्ता को अधिक भावनात्मक प्रतिक्रिया से अधिक तार्किक और रचनात्मक प्रतिक्रिया की ओर बढ़ना चाहिए। 5व्यक्ति के खुलने का इन्तजार करेंः एक रचनात्मक प्रतिक्रिया को प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया में, एक सक्रिय श्रोता को इतना ज्यादा धैर्यवान होना चाहिए कि वह वक्ता को अपने विचारो, भावनाओं और उपायों के प्रवाह में आ जाने का उपयुक्त समय दे। ये धीमे धीमे शुरू होकर पूरे प्रवाह में आने में लम्बा समय ले सकता है।अगर आप बहुत जल्दी दबाब डालें, बहुत ज्यादा व्यक्तिगत या जांच-पड़ताल भरे प्रश्न पूछे तो इसका परिणाम इच्छित नहीं होगा और इससे वक्ता कुछ भी बताने के लिए बचाव की मुद्रा में आ जायेगा और संकोच महसूस करेगा। - धैर्य रखें और खुद वक्ता की जगह रख कर सोचें। कई बार इससे यह समझने में मदद मिलती है कि बताने वाले ने इस स्तिति में जो किया वो क्यों किया। 6अपनी राय या सोच को लेकर हस्तक्षेप न करेः इसके बजाय संवाद का प्रवाह तोड़ने से पहले दूसरे व्यक्ति को आपकी राय पूछनें दें। सक्रिय श्रोता को अपनी राय को अस्थाई रूप से पर रख के धैर्यपूर्वक बातचीत में आने वाले सही अंतराल का इन्तजार करना चाहिए। जब ऐसा अंतराल आये तब अपनी बात संक्षेप में रखे या समानभूतिक सहमति जताएं। - यदि आप व्यक्ति की बात में बहुत जल्दी हस्तक्षेप करते है, तो वह हताश हो जायेगा और आपके कहे को पूरी तरह नहीं समझेगा। व्यक्ति अपनी बात जल्दी ख़त्म करना चाहेगा और आप परेशानी और ध्यान हटाने का कारण बन जायेंगे। - सीधी सलाह देने से बचें (जब तक आपसे इसके लिए कहा न जाये) । इसके बजाय व्यक्ति को उसके तरीके से बात करने दें। इस से आप और वह व्यक्ति दोनों सशक्त होंगे। यह स्तिति संभवतः आप और वक्ता दोनों के लिए फायदेमंद परिवर्तन और स्वयं के प्रति समझ देने वाली साबित होगी। 7वक्ता को आश्वासन देंः बातचीत का जो भी निष्कर्ष निकले, वक्ता को बताये कि आप सुन कर और वार्ता में शामिल होकर खुश हैं। स्पष्ट करे कि आवश्यक होने पर आप आगे भी इस पर चर्चा करने को तैयार है, लेकिन आप उस पर कोई भी दबाब नहीं डालेंगे। इसके अतिरिक्त, चर्चा को गोपनीय रखने की आपकी मंशा पर भी वक्ता को आश्वासन दें। अगर वक्ता बहुत बुरी स्तिति में भी हो तब भी ऐसा कुछ कहना "सब ठीक हो जायेगा" बिलकुल गलत लगता है, आप फिर भी यह कह कर कि सुनने और मदद के लिए आप हैं, उसे आश्वस्त कर सकते है। - आप वक्ता के हाँथ या घुटने पर थपकी भी दे सकते है, उसके गले में हाँथ डाल सकते है, या कोई अन्य भरोसा देने वाले तरीके से छू सकते हैं। स्तिति के अनुरूप जो सही हो वो करें। छूने में आप अपनी सीमाये न लांघें। - यदि आपके पास साम्यर्थ, समय और दक्षता हो तो कुछ हल करने का प्रस्ताव रखें। यद्यपि "झूठी उम्मीद मत बंधाये"। अगर आप सिर्फ उनकी बात सुनकर ही उनकी सहायता कर सकते है, तो इसे बिलकुल स्पष्ट कर दें। यह खुद में एक बड़ी और मूल्यवान सहायता है। 8जब सलाह दें तो याद रखे कि आपकी सलाह आपके खुद के अनुभवों से बहुत अधिक प्रभावित न होकर तटस्थ होः ऐसी स्तिति में आप क्या करते, इसकी बजाय सोचें कि वक्ता के लिए सर्वश्रेष्ठ मार्ग क्या है। 1नजरें मिलाएंः जब आप सुन रहे हैं तो नजरें मिलाना जरूरी है।अगर आप अपने दोस्त को ऐसा इम्प्रेशन देते है कि आपको उस में कोई रूचि नहीं है और आपका ध्यान कहीं और है, तो हो सकता है वे आपके सामने फिर कभी भी न खुले। जब कोई आपसे बात कर रहा हो, सीधा उनकी आँखों में देखे जिससे वो निश्चित रूप से यह जान लें कि आप हर शब्द को आत्मसात कर रहे है। अगर विषय आपकी रूचि का न भी हो तो भी, कम से कम सम्मान करें और सच में वक्ता की बात सुनें। - अपने आँख, कान और विचारों को सिर्फ वक्ता पर केंद्रित करें और अच्छे श्रोता बने। इस बात पर ध्यान केंद्रित न करें की आगे आप क्या कहने वाले है, इसकी बजाय, दूसरा व्यक्ति क्या कह रहा है इस पर पूरा ध्यान दें। (याद रखे की ये आपके बारे में नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के बारे में हैं।) 2अपना पूरा ध्यान वक्ता को देंः अगर आप अच्छे श्रोता बनना चाहते है, तो एक सुखद शारीरिक और मानसिक वातावरण बनाना जरूरी है। ध्यानभंग करने वाली हर चीज को हटा दे और अपना सारा ध्यान उस व्यकि की तरफ लगाये जो आपसे कुछ कह रहा है। संपर्क के साधन बंद कर दें (मोबाइल फ़ोन भी) और बात करने के लिए ऐसे किसी स्थान का उपयोग करें जहाँ ध्यान बटाने वाली कोई चीज़ न हो। एक बार आमने-सामने होने पर, अपना दिमाग शांत करें और दूसरे व्यक्ति के द्वारा कही जा रही बातों पर ध्यान दें। उन्हें दिखाए की आप मददगार है। - ऐसा स्थान चुने ध्यानभंग करने वाली कोई चीज या लोग न हो जो आपका ध्यान खीच सकें। अगर आप एक कॉफी शॉप में जाते हैं, सुनिश्चित करें कि आपका ध्यान आते जाते लोगों पर न होकर वक्ता पर हो। - यदि आप किसी सार्वजनिक स्थान जैसे रेस्टोरेंट या कैफ़े में बात कर रहे है, तो ऐसी जगह बैठने से बचे जहाँ टीवी चल रहा हो। भले ही आप अपना ध्यान उस व्यक्ति को देने के प्रति संकल्पित हों, फिर भी टीवी पर चल रहे अपने प्रिय कार्यक्रम को एक नजर देखने का लालच तो आ ही सकता है। 3शरीर के आव-भाव से वक्ता को प्रोत्साहित करेंः अपना सर हिलाना इस बात का संकेत है कि आप वक्ता की बात आप समझ रहें है, और ये उन्हें बोलते रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा। वक्ता के जैसी शरीर की भावभंगिमा, हावभाव, गति (mirroring) वक्ता को सहज महसूस करवा के और ज्यादा खुल कर बात करने में सहायता करता है। सीधे उनकी आँखों में देखने का प्रयास करें। यह न सिर्फ प्रदर्शित करेगा कि आप सुन रहे है, लेकिन यह भी दिखायेगा कि आप उनकी कही बातों में सचमुच रूचि ले रहे हैं। - प्रोत्साहक शारीरिक भावभंगिमा का एक तरीका है अपने शरीर को वक्ता की ओर झुका लेना। अगर आप वक्ता से दूर होते है, तो लगेगा कि आप वहां से चले जाना चाहते है। उदाहरण के लिए अगर आप अपने पैर क्रॉस करते है तो वक्ता की तरफ करें, किसी और तरफ नहीं। - अपनी बाँहों को भी अपनी छाती पर क्रॉस न करे। इससे आपका रूखापन और उलझन दिखेगी भले आप ऐसा महसूस न कर रहे हो। 4अपनी रूचि प्रकट करने के लिए सक्रियता से सुनेंः सक्रिय सुनने में आपका पूरा शरीर और चेहरा शामिल होता है -- आपका और वक्ता का। आप शांत रहकर भी अहसास करवा सकते है की आप वक्ता द्वारा कहा गया हर शब्द सुन रहे है। सक्रिय श्रोता बन के कैसे किसी स्थिति का अधिकतम लाभ ले, उसके कुछ बिंदु निम्न हैः - "आपके शब्द": यद्यपि जरूरी नहीं कि आप हर पाच सेकंड में , "जी," "अच्छा," सही है," कहें, नहीं तो यह कष्टप्रद हो जायेगा, यह दिखाने के लिए कि आप सुन रहे है आप यदा कदा प्रोत्साहक शब्दों का उपयोग कर सकते हैं। यदि वह व्यक्ति जिससे आप बात कर रहे है, आपके लिए कोई मायने रखता है, तो आप निश्चित उस पर ध्यान देंगे और अगर कोई समस्या है तो उसे सुलझाने में भी सहायता करेंगे। - "आपकी भावभंगिमा": रूचि से परिपूर्ण दिखे और समय समय पर वक्ता की ओर देखते रहे, उसे घूरते न रहे, लेकिन जो आप सुन रहे है उसके प्रति अपना दोस्ताना व्यवहार और खुलापन प्रदर्शित करें। - "लाइनो के बीच में पढ़ें": उन चीजो का ध्यान रखे जो अनकही रह गयी और उन संकेतो का भी जो आपको वक्ता की असली भावनाए समझने में मदद कर सकते है। बताने वाले के चेहरे और शरीर के भाव देखें और सब जानकारी एकत्र करने की कोशिश करें सिर्फ शब्दों से नहीं। कल्पना करें कि कैसी मानसिक अवस्था आपको इन हाव-भाव, आवाज और भावभंगिमाओं में ले आती। - "दूसरे व्यक्ति के बराबर की ऊर्जा स्तर रख कर बोलें। इस तरीके से वो समझ पाएंगे कि उनका सन्देश पहुंच रहा है और उसे दोहराने की जरूरत नहीं है। 5उनसे एकदम खुल जाने की उम्मीद न करेंः बिना कोई सलाह दिए, धैर्य और सुनने की इच्छा रखे। - दूसरा जो कह रहा है उसे दोहराये ताकि अर्थ स्पष्ट हो सके। कई बार एक शब्द के दो मानी होते है। बातचीत करने वालो में पुष्टि करने और ग़लतफ़हमी से बचने का सबसे अच्छा उपाय है दूसरे व्यक्ति की कही बात को दोहराना इससे दूसरा व्यक्ति जान जायेगा कि आप सुन रहे थे और आप दोनों एक ही आईडिया पर है। - उनकी परिस्थितियों पर विचार करे। अगर वो अतिसंवेदनशील है, तो उन्हें अधिक परेशान न करे। - लोग समझने की लिए नहीं सुनते, वो जवाब देने के लिए सुनते है। इस पर विचार करें। - अपने आसपास से ध्यान हटाने वाली सभी चीजों को हटा दें। इसका अर्थ है आपका मोबाइल फ़ोन बंद करें, खिड़की के बाहर देखने और अपनी पेन्सिल से खेलने से बचे। - कल्पना करे की यहाँ अभी इस विषय पर एक पॉप क्विज होने वाला है। यह आपको पूरी तरह वहां होने में, मुख्य बिन्दुओ पर ध्यान केंद्रित करने में और विवरणों के प्रति सचेत रहने में मदद करेगा। - सुनना जितना कठिन हो जाये, सुनना उतना ही महत्वपूर्ण होता जाता है। - तोते की तरह वाक्यों को शब्द शब्द दोहराने से बचे। यह बहुत खीज दिलाने वाला हो सकता है। - जब आप उस व्यक्ति को देखे जिसे आप सुन रहे है, उनकी आँखों में देखें। दूसरे चल रहे घटनाक्रम के बजाय यह वक्ता पर आपका 100% ध्यान प्रदर्शित करता है। - अपनी आँखें मृदुल रखे और घूरने या अविश्वास भरी नजरों से देखने से बचे। जो कहा गया है उस के साथ जितना संभव हो सहज रहे। - याद रखे कई बार हमें "लाइन्स के बीच" में जो कहा जा रहा है (मतलब जो कहा नहीं जा रहा) उसे सुनने की जरूरत होती है, लेकिन कई बार सामने कही जा रही सीधी बात आत्मसात करने की और वक्ता के प्रवाह के साथ चलने की आवश्यकता होती है। - यदि दूसरे व्यक्ति के बोलते हुए आप सोच रहे हैं कि अब आपको क्या कहना है, तो आप सुन नहीं रहे है। आपने अपनी क्षमता को बाँट दिया है। - अगर आप अपने करियर में उन्नति चाहते है और लोगो के साथ अर्थपूर्ण रिश्ते बनाना चाहते है तो अच्छा श्रोता होना सबसे महत्वपूर्ण गुणो में से एक है। - कभी अपनी "कमाल" की सलाह न दे (जब तक मांगी न गयी हो)। लोग सुना जाना चाहते है, लेक्चर सुनना नहीं। - सिर्फ यह बात कि कोई आपसे अपनी समस्या पर बात कर रहा है, इसका जरूरी अर्थ यह नहीं है कि वो आपसे उनके हलों पर सब सुझाव चाहता है या चाहता है कि आप ही उनके लिए सब समस्याओ को हल कर दें। कभी कभी उन्हें बस एक सुनने वाले की जरूरत होती है। - तोते की तरह वाक्यों को शब्द शब्द दोहराने से बचे। यह बहुत खीज दिलाने वाला हो सकता है। - जब आप उस व्यक्ति को देखे जिसे आप सुन रहे है, उनकी आँखों में देखें। यह उन पर आपका 100% ध्यान प्रदर्शित करता है, बजाय दुसरे चल रहे घटनाक्रम के। - अपनी आँखें मृदुल रखे और घूरने या अविश्वास भरी नजरों से देखने से बचे। जो कहा गया है उस के साथ जितना संभव हो सहज रहे। - याद रखे कई बार हमें "लाइन्स के बीच" में जो कहा जा रहा है (मतलब जो कहा नहीं जा रहा) उसे सुनने की जरूरत होती है, लेकिन कई बार सामने कही जा रही सीधी बात आत्मसात करने की और वक्ता के प्रवाह के साथ चलने की आवश्यकता होती है। - यदि दूसरे व्यक्ति के बोलते हुए आप सोच रहे हैं कि अब आपको क्या कहना है, तो आप सुन नहीं रहे है। आपने अपनी क्षमता को बाँट दिया है। - महत्व कम करने से बचे। ऐसी टिप्पणी से बचे जैसे,"ऐसी समस्या हजारों लोगों को है", इसलिए इसकी चिंता न करे। - अगर आप सुनने के मूड में नहीं है तो महत्वपूर्ण बातचीत टाल दें। अगर आप तैयार नहीं है तो बात न करना ही बेहतर है।जब आपका ध्यान भावनाओ,चिन्ताओ और बाहरी चीजो से पहले से ही खिन्न हो ऐसे में जबरदस्ती बात करने का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलेगा। - सलाह थोपने से बचे। - जो व्यक्ति बोल रहा है उससे प्रश्न करके या बीच में ही अपनी कहानी सुना के हस्तक्षेप न करें। - आपको ग्रहणशील बनना होगा और हर बात सुननी होगी , सिर्फ वे ही बातें नहीं जो आप सुनना चाहते है। वो सब जो आप सुनना चाहते है जरूरी नहीं कि फायदेमंद हो और वो सब जो आप नहीं सुनना चाहते जरूरी नहीं की नुकसानदायक हो। कई बार सबसे मूल्यवान सलाह ठीक वही होती है जो आप नहीं सुनना चाहते।अधिकतर लोग आपको वही बताते है जो आप सुनना चाहते है क्योंकि वो आपको चोट नहीं पहुँचाना चाहते। - उनकी आँखों में देखे और अपनी विशेष रूचि दिखाने के लिए और बताने के लिए की आप अधिक सुनना चाहते है, प्रायः अपना सर हिलाये। - स्वयं उन पर प्रश्नो की बौछार करने से पहले वे जितना चाहे उन्हें बोलने दें। आप बोलने के पहले, उनकी अनुमति लें। - अशिष्ट न बने, जितना संभव हो सके उदार बने। - दूसरों की कही बातों की ईमानदारी से कद्र करे, अगर विषय आपको उबाऊ लगे तो कम से कम विनीत बने और ऐसा दिखाए की आप कद्र करते हैं। - अगर आपको किसी व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा की जा रही बात से कोई भी मतलब न हो, तब भी सुने!!! - लोग जब आपसे बात कर रहे हों, नजरें मिलाएं, जिससे वो जान लें कि आप सुन रहे है। - जब लोग आपको अपनी कोई महत्वपूर्ण बात आपको बता रहे हो तो बहुत ज्यादा बात करने का प्रयास न करें। वे आप पर इंतना विश्वास करते हैं कि अपनी किसी गंभीर बात को आपके साथ बाँट रहे हैं, और यदि आप उनका किसी भी तरह से अपमान करते है या ऐसे पेश आते है कि आपको कोई परवाह ही नहीं है (भले आपका मतलब वो न हो), तो उन्हें लगेगा कि वे आपको अब और कुछ भी नहीं बता सकते और इससे आपकी दोस्ती को नुकसान हो सकता है और आगे भी आपके दोस्त बनें रहने के मौके हमेशा के लिए भी समाप्त हो सकते है। अगर विषय उनके लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है तो आप कुछ ऐसी टिप्पणियाँ इस्तेमाल करें जो उनके चेहरे के एक्सप्रेशन के अनुरूप हों और उनसे सहमत दिखने का प्रयास करें। - नजरें मिलाएं। अगर आप उसकी आँखों में नहीं देख रहे है तो व्यक्ति को लग सकता है कि आप सुन नहीं रहे। - अगर उसके द्वारा बताई जा रही कहानी रूचि बनाये रखने के लिए "बहुत लम्बी" है, क्या कहा जा रहा है सुनने की सबसे अच्छी कोशिश करें। आप शायद नहीं जानते कि उनकी बात सुनने के लिए आप उनकी प्रशंसा के पात्र बनेगें। यह आप दोनों के संबंधों को मजबूत बनाएगा। - अपने दिमाग को साफ़ करने का प्रयास करते हुए दूसरे पक्ष ओर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करें;आप अपना ध्यान इस पर इस तरह केंद्रित करे जैसे आपका जीवन इसी पर निर्भर करता है। - यदि आप अपने आपको अपनी प्रतिक्रिया पर काम करते हुए पाएं जबकि सामने वाला बोल रहा हो, तो आप वास्तव में सुन नहीं रहे है। अपनी बात या टिप्पणी रखने के पहले उनकी बात खत्म होने दें। अपना दिमाग साफ़ करेंः इसे बिलकुल खाली करे और नयी शुरुवात करें। - सिर्फ हाँ, हाँ न कहे या सिर्फ सर न हिलाये क्योंकि लोगो को लग सकता है कि आपका ध्यान कहीं और है और आप सच में सुन नहीं रहे है।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, दो सौ उनचास लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल ग्यारह,सात सौ चालीस बार देखा गया है। अच्छा श्रोता होना आपको दूसरों की आँखों से दुनिया देखने का एक मौका देता है। यह आपकी समझ और सहानभूति की क्षमता को बढ़ाता है। यह आपको अपनी संवाद क्षमता को बढ़ा कर अपने संपर्कों को बढ़ाने में भी सहायता करता है। किसी को सुनने की क्षमता आपको किसी और व्यक्ति की परिस्तिति को अच्छे से समझने, और क्या कहना है और क्या नहीं समझने में भी सहायता करता है। सुनना आसान लग सकता है , विशेषतः तब जब मतभेद हो जाए, ऐसे में यह करने के लिए अच्छे खासे प्रयास और अभ्यास की जरूरत पड़ती है। अगर आप जानना चाहते है की अच्छा श्रोता कैसे बनना है, तो जानने के लिए आगे पढ़ें!! एकखुद को किसी दूसरे के स्थान पर रखकर देखेंः खुद में खो जाना और कही जा रही बात के खुद पर पड़ने वाले प्रभाव पर ही सोचना, आसान है। पर आपकी आंतरिक बातचीत आपके सक्रियता से सुनने को रोक देती है। इसके बजाय, आपको ध्यान से समस्या को सामने वाले के परिपेक्ष्य से देखना चाहिए। यह नहीं कि हम पहले ही मान लें की आप सामने वाली की जगह होते तो आपने ज्यादा जल्दी समस्या का हल निकाल लिया होता। अच्छा श्रोता होना किसी व्यक्ति के बारे में अधिक जान कर आपको अच्छे दोस्त बनाने में भी मदद करता है। - याद रखे की आपके पास दो कान और एक मुहं होने का एक कारण है। इसका मतलब है कि आपको बोलने से ज्यादा सुनना चाहिए। सुनना बोलने से ज्यादा फायदेमंद है। लोगों को सुनते वक़्त, बातचीत में स्वयं को लगाये और आँखों का संपर्क बनाये जिससे उन्हें लगे कि आप उनकी ध्यान दे रहे है । लोग जो ज्यादा सुनते है ज्यादा चौकस होते हैं और इसलिए ज्यादा विचारवान होते हैं और चीजों को बेहतर ढंग से समझते है। सुनिश्चित करे कि आप सचमुच सुन रहे है और इसके अलावा कुछ नहीं कर रहे। यह सुनिश्चित करने का प्रयास करें कि आपका पूरा ध्यान उस व्यक्ति की ओर हो जो बोल रहा है और वह भटक नहीं रहा। - तुरंत वक्ता के बारें में निर्णय कर लेने, या सीधे कोई हल सुझाने के बजाय, सुनने और स्तिति को दुसरे व्यक्ति के परिपेक्ष्य से देखने का समय निकालें। सोचे कि यह जान कर आपको कैसा लगेगा कि कोई चुपचाप आप पर निर्णय कर रहा है। इससे उपस्थित स्तिति को सच में समझने से पहले अपना मत बना लेने की बजाय आपको सच में उस व्यक्ति को सुनने में मदद मिलेगी। दोदूसरे व्यक्ति के अनुभव से अपने अनुभव की तुलना करने से बचेः आपको ऐसा लग सकता है कि बोलने वाले की बात सुनने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग यही है कि आप अपने अनुभव से उसकी तुलना करें, पर यह सच नहीं है। यदि कोई व्यक्ति परिवार में हुई किसी मृत्यु से उबरने पर बात कर रहा है, तो आप सहानुभूति व्यक्त कर सकते है, पर ऐसा कहने से बचे, "यह बिलकुल वैसा ही है जैसा मेरे साथ था..." आपका किसी की बहुत गंभीर स्तिति से अपनी कम गंभीर स्तिति की तुलना करना अति असंवेदनशील और अपमानजनक है, जैसे किसी के तलाक की अपने तीन महीने के संबंधों से तुलना करना, वक्ता को बहुत असहज बना देगा। - आपको लग सकता है कि किसी की मदद करने और स्तिति सम्भालनें का यह सर्वश्रेष्ठ मार्ग है, परन्तु इससे रिश्ते बिगड़ सकते है और वक्ता को ऐसा लगेगा कि आप उसकी बात सुन ही नहीं रहे। - बहुत ज्यादा "मैं" और "मेरा" कहने से बचिए। यह इस बात का संकेत है कि आप दूसरों की स्तिति की अपेक्षा सिर्फ खुद के बारे में सोच रहे हैं। - यदि व्यक्ति जानता है कि आप भी वैसे ही अनुभव से गुजर चुके है, तो वह आपसे स्वयं ही आपकी राय पूछ सकता/सकती है। ऐसे में आप अपनी बात रख सकते है, पर अंपने अनुभव को ऐसे प्रदर्शित करने में सावधान रहे जैसे वे बिलकुल दूसरे के जैसे ही थे। इस से ऐसा लगेगा कि आप सिर्फ मददगार लगने के लिए एक कृत्रिम परिस्तिति के निर्माण करने का प्रयास कर रहे है। तीनतुरंत मदद करने की कोशिश न करेंः कुछ लोगो को लगता है, कि जब वे सुन रहे हैं,उन्हें तब ही किसी व्यक्ति की समस्या को सुलझाने का तेज और आसान उपाय ढूढंते रहना चाहिए। इसके बजाय जब कोई व्यक्ति बोल रहा है तो आपको उसकी बात ठीक से समझनी चाहिए, और उसके बोलते हुए उसके हल पर विचार नहीं करना चाहिए --ऐसा तभी करना चाहिए जब वह व्यक्ति ऐसा चाहता हो। यदि आप व्यग्रतापूर्वक उस व्यक्ति की समस्याओं के एकदम शीघ्र हलों पर सोचने लगते है, तो आप वास्तव में सुन ही नहीं रहे होंगे। - व्यक्ति आपसे क्या कह रहा है उस सब को आत्मसात करने पर ध्यान दें। केवल इसके बाद ही आपको मदद करने की कोशिश करनी चाहिए। चारसहानुभूति रखेंः उचित समयों पर अपना सर हिला कर उन्हें दिखाए की आपको परवाह है, जिससे व्यक्त हो कि आप सुन रहे है। इसके अलावा कुछ छोटी बातें कहें जैसे "सही है" जब व्यक्ति कोई ऐसी बात कर रहा हो जिस पर वो आपकी सहमति चाहता हो, या "ओह" कहें जब व्यक्ति कोई दुखद या अपने प्रति किसी बुरे काम का जिक्र कर रहा हो। इन शब्दों से उन्हें भरोसा हो जायेगा कि आप सिर्फ सुन ही नहीं रहे ध्यान भी दे रहे है। इन शब्दों को उचित समय पर और सौम्य तरीके से बोले ताकि आप अहंकारी या हस्तक्षेप करने वाले न प्रतीत हों। अपने संवेदनशील पक्ष को प्रकट करें और यदि व्यक्ति तनाव में है तो उसे सहज करने का प्रयास करें। दूसरी ओर कई लोग रहम के पात्र दिखना नहीं चाहते। इसलिए उन्हें सहज करें, परन्तु स्वयं को उनसे ऊँचा दिखने की कोशिश न करें। पाँचबताये गए तथ्यों को याद रखेंः व्यक्ति ने आपसे जो कहा है उसे सचमुच आत्मसात करना, अच्छे श्रोता बनने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए जब एक व्यक्ति आपको अपने सबसे अच्छे दोस्त जैक के साथ उसकी समस्या के बारे में बता रहा है, और आप उसे नहीं जानते, आप कम से कम उसका नाम याद रख सकते हैं। इससे बात निकलने पर आप उसका नाम लेकर ऐसा प्रदर्शित कर पाएंगे की आप स्तिति से वाकिफ हैं। अगर आप कोई नाम, विवरण, या महत्वपूर्ण घटना याद नहीं करते, तो ऐसा प्रतीत होगा कि आप सुन नहीं रहें है। - अगर आपकी याददाश्त बहुत तेज नहीं है तो कोई बात नहीं है। फिर भी अगर आप लोगो को रोक कर स्पष्टीकरण मांगते रहते है या लोगों के नाम भूल जाते है, तो हाँ, आप एक अच्छे श्रोता की तरह नहीं पहचाने जायेंगे। आपको हर छोटी बात याद रखने की जरूरत नहीं है, लेकिन ऐसा भी नहीं होना चाहिए की आपके सामने बोल रहे व्यक्ति को कई बार अपनी बात दोहरानी पड़े। छःअनुशरणः अच्छा श्रोता बनने का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि आप किसी व्यक्ति को सिर्फ सुनने से आगे जाएँ। यह नहीं कि बात सुनी, बात की और आगे बढ़ गए और फिर कभी उस बात पर विचार नहीं किया। यदि आप सचमुच दिखाना चाहते है कि आपको परवाह है तो उस व्यक्ति से अगली मुलाकात में आपको उससे उस स्तिति के बारे में पूछना चाहिए, या फिर आप उसे एक मेसेज या फ़ोन करके भी पूछ सकते है कि वर्तमान स्तिति क्या है। यदि यह कोई गंभीर बात है जैसे निकटवर्ती तलाक, नौकरी की तलाश, या चाहे स्वास्थ्य की समस्या, तो अपनी परवाह दिखने का बहुत अच्छा तरीका है उन व्यक्ति से जाके मिलना, भले ही आपको बुलाया न गया हो। अगर वे न चाहे तो पीछे न पड़े, उनके निर्णय को स्वीकार करें पर उन्हें बता दे कि आप हमेशा उनके साथ हैं। - व्यक्ति जिसने आपसे बात की, वो यह जान कर बहुत प्रभावित हो सकता है कि आपने बातचीत की हद से बढ़ के उसके बारे में सोचा और वो कैसा/कैसी है ये देखने उसके घर तक आये। यह आपकी सुनने की क्षमता को अगले स्तर तक ले जाता है। - निसंदेह, किसी व्यक्ति के अनुसरण में और छिद्रान्वेषण में फर्क है। अगर एक व्यक्ति ने आपको बताया था की वो कैसे अपनी नौकरी छोड़ना चाह रही है, तो आप उससे रोज मेसेज भेज के ये पूछना नहीं चाहेंगे की क्या उसने नौकरी छोड़ दी, नहीं तो आप स्तिति पर अनावश्यक दबाब बनाएंगे और मदद की जगह तनाव पैदा करेंगे। सातजाने कि क्या नहीं करना हैः जब आप एक अच्छा श्रोता बनने का प्रयास कर रहे हो, तो यह जानना कि क्या नहीं करना है भी लगभग उतना ही मददगार होता है जितना यह जानना कि क्या करना है। यदि आप चाहते है कि वक्ता आपको गंभीरता से ले और सोचे की आप सम्मान दे रहे है, तो ये बचने के लिए कुछ बिंदु ये रहेः - एक मुद्दे पर बीच में न बोलें। - व्यक्ति से पूछताछ ना करें। इसके बजाय जब जरूरत हो नरमी से प्रश्न करें। - विषय बदलने की कोशिश न करे, भले यह थोड़ा असहज हो। - ये कहने से बचे"यह दुनियाँ का अंत नहीं है" या "आप सुबह अच्छा महसूस करेंगे।" इससे व्यक्ति की समस्या कमतर होती है और उसे बुरा लगता है। व्यक्ति से आँखें मिलाये जिससे उसे समझ आ जाये कि आप रूचि ले रहे है और सुन रहे है। एकपहले चुप रहेः यह घिसा-पिटा और स्पष्ट लग सकता है, पर आवेग में आये हुए विचारों को बोलने की इच्छा को रोकना, सुनने में सबसे बड़ी बाधा है। ठीक ऐसे ही, कई लोग स्वयं के वैसे ही अनुभव बाँट कर झूठी सहानुभूति प्रदर्शित करते है।"मन" की दोनों ही प्रतिक्रियाएं सहायक हो सकती है, पर सामान्यतः वे जरूरत से ज्यादा उपयोग की जाती है और अंत में दुरूपयोग की जाती है। - अपनी जरूरतों को एक तरफ रख दें, और "धैर्य से प्रतीक्षा" करते हुए दूसरे व्यक्ति को अपनी गति, और तरीके से अपने विचार व्यक्त करने का मौका दें। दोअपनी गोपनीयता के प्रति व्यक्ति को पुनः आश्वासन देंः यदि व्यक्ति आपसे कोई बहुत निजी या महत्वपूर्ण बात कर रहा है, तो आपको यह स्पष्ट करना चाहिए कि आप एक विश्वसनीय व्यक्ति है जो अपना मुहं बंद रख सकते है। कहिये कि वो व्यक्ति आप पर विश्वास कर सकता है और जो बात हुई है वो आप दोनों के बीच ही रहेगी और ये आपका वायदा हैं। यदि व्यक्ति आप पर विश्वास करने को लेकर आशंकित है तो आपके सामने उसके खुलने की सम्भावना कम है। यह भी ध्यान रखे की आप किसी पर अपने सामने खुलने के लिए जोर न डालें क्योंकि यह उन्हें असहज या नाराज कर सकता है। - निसंदेह, जब आप कहें कि व्यक्ति द्वारा कहीं बातें गोपनीय रहेगी, यह सच होना चाहिए, सिवाय तब जब परिस्थितियाँ ऐसी हो जो आपको बात अपने तक रखने से रोकती हो, जैसे व्यक्ति आत्महत्या करने वाला हो या आप बहुत ज्यादा चिंतित हों। यद्यपि यदि आप पर सामान्य तौर पर विश्वास नहीं किया जा सकता तो आप कभी अच्छे श्रोता नहीं हो सकते। तीनजब आप "बोले" तो प्रोत्साहक बनेः बात-चीत के दौरान सही अंतराल पर सहानुभूतिपूर्ण हामी भरना महत्वपूर्ण है जिससे वक्ता को ये न लगे की आप बिलकुल सुन ही नहीं रहे हैं। मुख्य बिन्दुओं को "संक्षेपित करना" या "दुबारा कहना" या "दोहराना" और "प्रोत्साहित करना" मददगार होता है। इससे बातचीत का प्रवाह बनेगा और वक्ता का संकोच कम होगाःआपको क्या करना है, वे बिंदु ये रहेः - "दोहराये और प्रोत्साहित करेंः" वक्ता द्वारा कही किसी बात को दोहराइए और उसके साथ, प्रोत्साहन के तौर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दें। उदाहरण के लिए, आप कह सकते है, "मैं समझ रहा हूँ कि आपको इल्जाम अपने सर लेना अच्छा नहीं लगा, मुझे भी नहीं लगता" इस तकनीक का सावधानी से उपयोग करें। सहानुभूति ध्वनि को समय समय पर उपयोग करते रहे, क्योंकि इस तकनीक के ज्यादा उपयोग से लगेगा कि आप कृपालु बन रहे है। - "संक्षेपित करे और दोहरायेः कहने वाले ने क्या कहा इसे अपनी समझ के अनुसार संक्षेपित करना और इस अपने शब्दों में दोहराना बहुत मददगार होता है। यह वक्ता को भरोसा देता है की आप सच में उसकी बात सुन रहे थे और "समझ गएँ है"। इससे वक्त को आपकी गलत मान्यतायें और धारणाओं को सही करने का मौका भी मिलता है। - सुनिश्चित करें कि आप ऐसे वाक्यो से जैसे "मैं गलत हो सकता हूँ , लेकिन...:"या"...अगर मैं गलत हूँ तो कृपया सुधारे।" यह तकनीक विशेष रूप से तब ज्यादा उपयोगी है जब आप खुद को हताश पा रहे हो या आपको लगे कि आपका ध्यान सुनने से भटक रहा है। चारअर्थपूर्ण और सशक्त बनाने वाले सवाल पूछेः जांच-पड़ताल से दूर रहे या दूसरे व्यक्ति को सुरक्षात्मक न बनने दें। इसके बजाय ऐसे प्रश्नो का उपयोग करने का लक्ष्य बनाये जिनसे वक्ता उठाये जा रहे मुद्दे पर स्वयं के निष्कर्ष पर पहुचना शुरू कर सके। इस से वक्ता को स्वयं को निर्णायक न दिखाते हुए और दबाब डाले बिना अपने निष्कर्ष पर पहुँचने में सहायता मिलेगी। ये रही ध्यान में रखने लायक कुछ बातेंः - एक बार समानुभूतिपूर्ण श्रोता दिखने के बाद, अब सशक्त श्रोता होने का समय हैः अपने प्रश्नो का वाक्य विन्यास बदलें। उदाहरण के लिए, "आपको इल्जाम अपने सर लेना पसंद नहीं आया। पर मैं यह समझ नहीं पा रहा हूँ कि आपको सिर्फ किसी काम को किसी तरीके से करने पर मना करने पर आपने ऐसा क्यों महसूस किया कि इल्जाम लगाया गया है।" - प्रश्न के ऐसे शब्द विन्यास से वक्ता को "आपकी" कोई बात न समझ पाने की स्तिति पर सीधी प्रतिक्रिया देनी होगी। प्रतिक्रिया की प्रक्रिया में, वक्ता को अधिक भावनात्मक प्रतिक्रिया से अधिक तार्किक और रचनात्मक प्रतिक्रिया की ओर बढ़ना चाहिए। पाँचव्यक्ति के खुलने का इन्तजार करेंः एक रचनात्मक प्रतिक्रिया को प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया में, एक सक्रिय श्रोता को इतना ज्यादा धैर्यवान होना चाहिए कि वह वक्ता को अपने विचारो, भावनाओं और उपायों के प्रवाह में आ जाने का उपयुक्त समय दे। ये धीमे धीमे शुरू होकर पूरे प्रवाह में आने में लम्बा समय ले सकता है।अगर आप बहुत जल्दी दबाब डालें, बहुत ज्यादा व्यक्तिगत या जांच-पड़ताल भरे प्रश्न पूछे तो इसका परिणाम इच्छित नहीं होगा और इससे वक्ता कुछ भी बताने के लिए बचाव की मुद्रा में आ जायेगा और संकोच महसूस करेगा। - धैर्य रखें और खुद वक्ता की जगह रख कर सोचें। कई बार इससे यह समझने में मदद मिलती है कि बताने वाले ने इस स्तिति में जो किया वो क्यों किया। छःअपनी राय या सोच को लेकर हस्तक्षेप न करेः इसके बजाय संवाद का प्रवाह तोड़ने से पहले दूसरे व्यक्ति को आपकी राय पूछनें दें। सक्रिय श्रोता को अपनी राय को अस्थाई रूप से पर रख के धैर्यपूर्वक बातचीत में आने वाले सही अंतराल का इन्तजार करना चाहिए। जब ऐसा अंतराल आये तब अपनी बात संक्षेप में रखे या समानभूतिक सहमति जताएं। - यदि आप व्यक्ति की बात में बहुत जल्दी हस्तक्षेप करते है, तो वह हताश हो जायेगा और आपके कहे को पूरी तरह नहीं समझेगा। व्यक्ति अपनी बात जल्दी ख़त्म करना चाहेगा और आप परेशानी और ध्यान हटाने का कारण बन जायेंगे। - सीधी सलाह देने से बचें । इसके बजाय व्यक्ति को उसके तरीके से बात करने दें। इस से आप और वह व्यक्ति दोनों सशक्त होंगे। यह स्तिति संभवतः आप और वक्ता दोनों के लिए फायदेमंद परिवर्तन और स्वयं के प्रति समझ देने वाली साबित होगी। सातवक्ता को आश्वासन देंः बातचीत का जो भी निष्कर्ष निकले, वक्ता को बताये कि आप सुन कर और वार्ता में शामिल होकर खुश हैं। स्पष्ट करे कि आवश्यक होने पर आप आगे भी इस पर चर्चा करने को तैयार है, लेकिन आप उस पर कोई भी दबाब नहीं डालेंगे। इसके अतिरिक्त, चर्चा को गोपनीय रखने की आपकी मंशा पर भी वक्ता को आश्वासन दें। अगर वक्ता बहुत बुरी स्तिति में भी हो तब भी ऐसा कुछ कहना "सब ठीक हो जायेगा" बिलकुल गलत लगता है, आप फिर भी यह कह कर कि सुनने और मदद के लिए आप हैं, उसे आश्वस्त कर सकते है। - आप वक्ता के हाँथ या घुटने पर थपकी भी दे सकते है, उसके गले में हाँथ डाल सकते है, या कोई अन्य भरोसा देने वाले तरीके से छू सकते हैं। स्तिति के अनुरूप जो सही हो वो करें। छूने में आप अपनी सीमाये न लांघें। - यदि आपके पास साम्यर्थ, समय और दक्षता हो तो कुछ हल करने का प्रस्ताव रखें। यद्यपि "झूठी उम्मीद मत बंधाये"। अगर आप सिर्फ उनकी बात सुनकर ही उनकी सहायता कर सकते है, तो इसे बिलकुल स्पष्ट कर दें। यह खुद में एक बड़ी और मूल्यवान सहायता है। आठजब सलाह दें तो याद रखे कि आपकी सलाह आपके खुद के अनुभवों से बहुत अधिक प्रभावित न होकर तटस्थ होः ऐसी स्तिति में आप क्या करते, इसकी बजाय सोचें कि वक्ता के लिए सर्वश्रेष्ठ मार्ग क्या है। एकनजरें मिलाएंः जब आप सुन रहे हैं तो नजरें मिलाना जरूरी है।अगर आप अपने दोस्त को ऐसा इम्प्रेशन देते है कि आपको उस में कोई रूचि नहीं है और आपका ध्यान कहीं और है, तो हो सकता है वे आपके सामने फिर कभी भी न खुले। जब कोई आपसे बात कर रहा हो, सीधा उनकी आँखों में देखे जिससे वो निश्चित रूप से यह जान लें कि आप हर शब्द को आत्मसात कर रहे है। अगर विषय आपकी रूचि का न भी हो तो भी, कम से कम सम्मान करें और सच में वक्ता की बात सुनें। - अपने आँख, कान और विचारों को सिर्फ वक्ता पर केंद्रित करें और अच्छे श्रोता बने। इस बात पर ध्यान केंद्रित न करें की आगे आप क्या कहने वाले है, इसकी बजाय, दूसरा व्यक्ति क्या कह रहा है इस पर पूरा ध्यान दें। दोअपना पूरा ध्यान वक्ता को देंः अगर आप अच्छे श्रोता बनना चाहते है, तो एक सुखद शारीरिक और मानसिक वातावरण बनाना जरूरी है। ध्यानभंग करने वाली हर चीज को हटा दे और अपना सारा ध्यान उस व्यकि की तरफ लगाये जो आपसे कुछ कह रहा है। संपर्क के साधन बंद कर दें और बात करने के लिए ऐसे किसी स्थान का उपयोग करें जहाँ ध्यान बटाने वाली कोई चीज़ न हो। एक बार आमने-सामने होने पर, अपना दिमाग शांत करें और दूसरे व्यक्ति के द्वारा कही जा रही बातों पर ध्यान दें। उन्हें दिखाए की आप मददगार है। - ऐसा स्थान चुने ध्यानभंग करने वाली कोई चीज या लोग न हो जो आपका ध्यान खीच सकें। अगर आप एक कॉफी शॉप में जाते हैं, सुनिश्चित करें कि आपका ध्यान आते जाते लोगों पर न होकर वक्ता पर हो। - यदि आप किसी सार्वजनिक स्थान जैसे रेस्टोरेंट या कैफ़े में बात कर रहे है, तो ऐसी जगह बैठने से बचे जहाँ टीवी चल रहा हो। भले ही आप अपना ध्यान उस व्यक्ति को देने के प्रति संकल्पित हों, फिर भी टीवी पर चल रहे अपने प्रिय कार्यक्रम को एक नजर देखने का लालच तो आ ही सकता है। तीनशरीर के आव-भाव से वक्ता को प्रोत्साहित करेंः अपना सर हिलाना इस बात का संकेत है कि आप वक्ता की बात आप समझ रहें है, और ये उन्हें बोलते रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा। वक्ता के जैसी शरीर की भावभंगिमा, हावभाव, गति वक्ता को सहज महसूस करवा के और ज्यादा खुल कर बात करने में सहायता करता है। सीधे उनकी आँखों में देखने का प्रयास करें। यह न सिर्फ प्रदर्शित करेगा कि आप सुन रहे है, लेकिन यह भी दिखायेगा कि आप उनकी कही बातों में सचमुच रूचि ले रहे हैं। - प्रोत्साहक शारीरिक भावभंगिमा का एक तरीका है अपने शरीर को वक्ता की ओर झुका लेना। अगर आप वक्ता से दूर होते है, तो लगेगा कि आप वहां से चले जाना चाहते है। उदाहरण के लिए अगर आप अपने पैर क्रॉस करते है तो वक्ता की तरफ करें, किसी और तरफ नहीं। - अपनी बाँहों को भी अपनी छाती पर क्रॉस न करे। इससे आपका रूखापन और उलझन दिखेगी भले आप ऐसा महसूस न कर रहे हो। चारअपनी रूचि प्रकट करने के लिए सक्रियता से सुनेंः सक्रिय सुनने में आपका पूरा शरीर और चेहरा शामिल होता है -- आपका और वक्ता का। आप शांत रहकर भी अहसास करवा सकते है की आप वक्ता द्वारा कहा गया हर शब्द सुन रहे है। सक्रिय श्रोता बन के कैसे किसी स्थिति का अधिकतम लाभ ले, उसके कुछ बिंदु निम्न हैः - "आपके शब्द": यद्यपि जरूरी नहीं कि आप हर पाच सेकंड में , "जी," "अच्छा," सही है," कहें, नहीं तो यह कष्टप्रद हो जायेगा, यह दिखाने के लिए कि आप सुन रहे है आप यदा कदा प्रोत्साहक शब्दों का उपयोग कर सकते हैं। यदि वह व्यक्ति जिससे आप बात कर रहे है, आपके लिए कोई मायने रखता है, तो आप निश्चित उस पर ध्यान देंगे और अगर कोई समस्या है तो उसे सुलझाने में भी सहायता करेंगे। - "आपकी भावभंगिमा": रूचि से परिपूर्ण दिखे और समय समय पर वक्ता की ओर देखते रहे, उसे घूरते न रहे, लेकिन जो आप सुन रहे है उसके प्रति अपना दोस्ताना व्यवहार और खुलापन प्रदर्शित करें। - "लाइनो के बीच में पढ़ें": उन चीजो का ध्यान रखे जो अनकही रह गयी और उन संकेतो का भी जो आपको वक्ता की असली भावनाए समझने में मदद कर सकते है। बताने वाले के चेहरे और शरीर के भाव देखें और सब जानकारी एकत्र करने की कोशिश करें सिर्फ शब्दों से नहीं। कल्पना करें कि कैसी मानसिक अवस्था आपको इन हाव-भाव, आवाज और भावभंगिमाओं में ले आती। - "दूसरे व्यक्ति के बराबर की ऊर्जा स्तर रख कर बोलें। इस तरीके से वो समझ पाएंगे कि उनका सन्देश पहुंच रहा है और उसे दोहराने की जरूरत नहीं है। पाँचउनसे एकदम खुल जाने की उम्मीद न करेंः बिना कोई सलाह दिए, धैर्य और सुनने की इच्छा रखे। - दूसरा जो कह रहा है उसे दोहराये ताकि अर्थ स्पष्ट हो सके। कई बार एक शब्द के दो मानी होते है। बातचीत करने वालो में पुष्टि करने और ग़लतफ़हमी से बचने का सबसे अच्छा उपाय है दूसरे व्यक्ति की कही बात को दोहराना इससे दूसरा व्यक्ति जान जायेगा कि आप सुन रहे थे और आप दोनों एक ही आईडिया पर है। - उनकी परिस्थितियों पर विचार करे। अगर वो अतिसंवेदनशील है, तो उन्हें अधिक परेशान न करे। - लोग समझने की लिए नहीं सुनते, वो जवाब देने के लिए सुनते है। इस पर विचार करें। - अपने आसपास से ध्यान हटाने वाली सभी चीजों को हटा दें। इसका अर्थ है आपका मोबाइल फ़ोन बंद करें, खिड़की के बाहर देखने और अपनी पेन्सिल से खेलने से बचे। - कल्पना करे की यहाँ अभी इस विषय पर एक पॉप क्विज होने वाला है। यह आपको पूरी तरह वहां होने में, मुख्य बिन्दुओ पर ध्यान केंद्रित करने में और विवरणों के प्रति सचेत रहने में मदद करेगा। - सुनना जितना कठिन हो जाये, सुनना उतना ही महत्वपूर्ण होता जाता है। - तोते की तरह वाक्यों को शब्द शब्द दोहराने से बचे। यह बहुत खीज दिलाने वाला हो सकता है। - जब आप उस व्यक्ति को देखे जिसे आप सुन रहे है, उनकी आँखों में देखें। दूसरे चल रहे घटनाक्रम के बजाय यह वक्ता पर आपका एक सौ% ध्यान प्रदर्शित करता है। - अपनी आँखें मृदुल रखे और घूरने या अविश्वास भरी नजरों से देखने से बचे। जो कहा गया है उस के साथ जितना संभव हो सहज रहे। - याद रखे कई बार हमें "लाइन्स के बीच" में जो कहा जा रहा है उसे सुनने की जरूरत होती है, लेकिन कई बार सामने कही जा रही सीधी बात आत्मसात करने की और वक्ता के प्रवाह के साथ चलने की आवश्यकता होती है। - यदि दूसरे व्यक्ति के बोलते हुए आप सोच रहे हैं कि अब आपको क्या कहना है, तो आप सुन नहीं रहे है। आपने अपनी क्षमता को बाँट दिया है। - अगर आप अपने करियर में उन्नति चाहते है और लोगो के साथ अर्थपूर्ण रिश्ते बनाना चाहते है तो अच्छा श्रोता होना सबसे महत्वपूर्ण गुणो में से एक है। - कभी अपनी "कमाल" की सलाह न दे । लोग सुना जाना चाहते है, लेक्चर सुनना नहीं। - सिर्फ यह बात कि कोई आपसे अपनी समस्या पर बात कर रहा है, इसका जरूरी अर्थ यह नहीं है कि वो आपसे उनके हलों पर सब सुझाव चाहता है या चाहता है कि आप ही उनके लिए सब समस्याओ को हल कर दें। कभी कभी उन्हें बस एक सुनने वाले की जरूरत होती है। - तोते की तरह वाक्यों को शब्द शब्द दोहराने से बचे। यह बहुत खीज दिलाने वाला हो सकता है। - जब आप उस व्यक्ति को देखे जिसे आप सुन रहे है, उनकी आँखों में देखें। यह उन पर आपका एक सौ% ध्यान प्रदर्शित करता है, बजाय दुसरे चल रहे घटनाक्रम के। - अपनी आँखें मृदुल रखे और घूरने या अविश्वास भरी नजरों से देखने से बचे। जो कहा गया है उस के साथ जितना संभव हो सहज रहे। - याद रखे कई बार हमें "लाइन्स के बीच" में जो कहा जा रहा है उसे सुनने की जरूरत होती है, लेकिन कई बार सामने कही जा रही सीधी बात आत्मसात करने की और वक्ता के प्रवाह के साथ चलने की आवश्यकता होती है। - यदि दूसरे व्यक्ति के बोलते हुए आप सोच रहे हैं कि अब आपको क्या कहना है, तो आप सुन नहीं रहे है। आपने अपनी क्षमता को बाँट दिया है। - महत्व कम करने से बचे। ऐसी टिप्पणी से बचे जैसे,"ऐसी समस्या हजारों लोगों को है", इसलिए इसकी चिंता न करे। - अगर आप सुनने के मूड में नहीं है तो महत्वपूर्ण बातचीत टाल दें। अगर आप तैयार नहीं है तो बात न करना ही बेहतर है।जब आपका ध्यान भावनाओ,चिन्ताओ और बाहरी चीजो से पहले से ही खिन्न हो ऐसे में जबरदस्ती बात करने का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलेगा। - सलाह थोपने से बचे। - जो व्यक्ति बोल रहा है उससे प्रश्न करके या बीच में ही अपनी कहानी सुना के हस्तक्षेप न करें। - आपको ग्रहणशील बनना होगा और हर बात सुननी होगी , सिर्फ वे ही बातें नहीं जो आप सुनना चाहते है। वो सब जो आप सुनना चाहते है जरूरी नहीं कि फायदेमंद हो और वो सब जो आप नहीं सुनना चाहते जरूरी नहीं की नुकसानदायक हो। कई बार सबसे मूल्यवान सलाह ठीक वही होती है जो आप नहीं सुनना चाहते।अधिकतर लोग आपको वही बताते है जो आप सुनना चाहते है क्योंकि वो आपको चोट नहीं पहुँचाना चाहते। - उनकी आँखों में देखे और अपनी विशेष रूचि दिखाने के लिए और बताने के लिए की आप अधिक सुनना चाहते है, प्रायः अपना सर हिलाये। - स्वयं उन पर प्रश्नो की बौछार करने से पहले वे जितना चाहे उन्हें बोलने दें। आप बोलने के पहले, उनकी अनुमति लें। - अशिष्ट न बने, जितना संभव हो सके उदार बने। - दूसरों की कही बातों की ईमानदारी से कद्र करे, अगर विषय आपको उबाऊ लगे तो कम से कम विनीत बने और ऐसा दिखाए की आप कद्र करते हैं। - अगर आपको किसी व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा की जा रही बात से कोई भी मतलब न हो, तब भी सुने!!! - लोग जब आपसे बात कर रहे हों, नजरें मिलाएं, जिससे वो जान लें कि आप सुन रहे है। - जब लोग आपको अपनी कोई महत्वपूर्ण बात आपको बता रहे हो तो बहुत ज्यादा बात करने का प्रयास न करें। वे आप पर इंतना विश्वास करते हैं कि अपनी किसी गंभीर बात को आपके साथ बाँट रहे हैं, और यदि आप उनका किसी भी तरह से अपमान करते है या ऐसे पेश आते है कि आपको कोई परवाह ही नहीं है , तो उन्हें लगेगा कि वे आपको अब और कुछ भी नहीं बता सकते और इससे आपकी दोस्ती को नुकसान हो सकता है और आगे भी आपके दोस्त बनें रहने के मौके हमेशा के लिए भी समाप्त हो सकते है। अगर विषय उनके लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है तो आप कुछ ऐसी टिप्पणियाँ इस्तेमाल करें जो उनके चेहरे के एक्सप्रेशन के अनुरूप हों और उनसे सहमत दिखने का प्रयास करें। - नजरें मिलाएं। अगर आप उसकी आँखों में नहीं देख रहे है तो व्यक्ति को लग सकता है कि आप सुन नहीं रहे। - अगर उसके द्वारा बताई जा रही कहानी रूचि बनाये रखने के लिए "बहुत लम्बी" है, क्या कहा जा रहा है सुनने की सबसे अच्छी कोशिश करें। आप शायद नहीं जानते कि उनकी बात सुनने के लिए आप उनकी प्रशंसा के पात्र बनेगें। यह आप दोनों के संबंधों को मजबूत बनाएगा। - अपने दिमाग को साफ़ करने का प्रयास करते हुए दूसरे पक्ष ओर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करें;आप अपना ध्यान इस पर इस तरह केंद्रित करे जैसे आपका जीवन इसी पर निर्भर करता है। - यदि आप अपने आपको अपनी प्रतिक्रिया पर काम करते हुए पाएं जबकि सामने वाला बोल रहा हो, तो आप वास्तव में सुन नहीं रहे है। अपनी बात या टिप्पणी रखने के पहले उनकी बात खत्म होने दें। अपना दिमाग साफ़ करेंः इसे बिलकुल खाली करे और नयी शुरुवात करें। - सिर्फ हाँ, हाँ न कहे या सिर्फ सर न हिलाये क्योंकि लोगो को लग सकता है कि आपका ध्यान कहीं और है और आप सच में सुन नहीं रहे है।
कुछ कैदियों की अदला-बदली में मध्यस्थता करने में मदद की है और परिवारों को फिर से जोड़ने के लिए "मानवीय रूप से जो कुछ भी संभव है" वह करेगा। पोप फ्रांसिस ने खुलासा किया है कि यूक्रेन में रूस के युद्ध में एक गुप्त शांति "मिशन" चल रहा था, हालांकि उन्होंने कोई विवरण नहीं दिया और कहा कि वेटिकन युद्ध के दौरान रूस में ले जाए गए यूक्रेनी बच्चों की वापसी में मदद करने को तैयार है। "मैं कुछ भी करने के लिए उपलब्ध हूं," फ्रांसिस ने रविवार को हंगरी से घर के रास्ते में एक हवाई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा। "एक ऐसा मिशन है जो सार्वजनिक नहीं है जो चल रहा है; जब यह सार्वजनिक होगा तो मैं इसके बारे में बात करूंगा। फ्रांसिस से यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने इस सप्ताह के अंत में बुडापेस्ट में हंगरी के प्रधान मंत्री विक्टर ओरबान या हंगरी में रूसी रूढ़िवादी चर्च के प्रतिनिधि के साथ शांति पहल के बारे में बात की थी, कोई विवरण नहीं दिया। रूस द्वारा पिछले साल यूक्रेन पर आक्रमण किए जाने के बाद से यूक्रेनी बच्चों का निर्वासन एक चिंता का विषय रहा है। फ्रांसिस ने कहा कि परमधर्मपीठ ने पहले ही कुछ कैदियों की अदला-बदली में मध्यस्थता करने में मदद की है और परिवारों को फिर से जोड़ने के लिए "मानवीय रूप से जो कुछ भी संभव है" वह करेगा।
कुछ कैदियों की अदला-बदली में मध्यस्थता करने में मदद की है और परिवारों को फिर से जोड़ने के लिए "मानवीय रूप से जो कुछ भी संभव है" वह करेगा। पोप फ्रांसिस ने खुलासा किया है कि यूक्रेन में रूस के युद्ध में एक गुप्त शांति "मिशन" चल रहा था, हालांकि उन्होंने कोई विवरण नहीं दिया और कहा कि वेटिकन युद्ध के दौरान रूस में ले जाए गए यूक्रेनी बच्चों की वापसी में मदद करने को तैयार है। "मैं कुछ भी करने के लिए उपलब्ध हूं," फ्रांसिस ने रविवार को हंगरी से घर के रास्ते में एक हवाई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा। "एक ऐसा मिशन है जो सार्वजनिक नहीं है जो चल रहा है; जब यह सार्वजनिक होगा तो मैं इसके बारे में बात करूंगा। फ्रांसिस से यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने इस सप्ताह के अंत में बुडापेस्ट में हंगरी के प्रधान मंत्री विक्टर ओरबान या हंगरी में रूसी रूढ़िवादी चर्च के प्रतिनिधि के साथ शांति पहल के बारे में बात की थी, कोई विवरण नहीं दिया। रूस द्वारा पिछले साल यूक्रेन पर आक्रमण किए जाने के बाद से यूक्रेनी बच्चों का निर्वासन एक चिंता का विषय रहा है। फ्रांसिस ने कहा कि परमधर्मपीठ ने पहले ही कुछ कैदियों की अदला-बदली में मध्यस्थता करने में मदद की है और परिवारों को फिर से जोड़ने के लिए "मानवीय रूप से जो कुछ भी संभव है" वह करेगा।
शर्फुद्दीनपुर गुदरी बाजार पर गुरुवार घात लगाए कुछ युवकों ने बाजार के शंभू चौधरी के पुत्र अमन कुमार पर जानलेवा हमला कर दिया। घायल अमन कुमार के अनुसार 10 से 12 की संख्या में आए अज्ञात हमलावरों ने उसे बीच सड़क पर रॉड व ईंट से मारकर घायल कर दिया। इसके बाद गर्दन पर चाकू से वार किया। लेकिन वह बाल-बाल बच गया । सूचना मिलने पर उसके परिजन जब दौड़कर आए तो हमलावर भाग निकले। पुलिस को दिये गये बयान में अमन कुमार ने बताया कि आसपास की दुकानों में वे लोग पहले से बैठे थे और उसके आने का इंतजार कर रहे थे। वहां दुकानों के सीसीटीवी फुटेज से लोग व पुलिस बदमाशों की पहचान करने की कोशिश में हैं । स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ माह पहले बाजार में एक मोबाइल दुकान में चोरी हुई थी जिसमें चोरी करने वालों की निशानदेही हुई थी और ठीकरा अमन के सर ही फूटा था । लोगों की माने तो अमन पर उन्हीं लोगों ने हमला किया है। थानाध्यक्ष राजेश रंजन ने बताया कि चार लड़के बाइक से बाजार पर जा रहे थे उसे अमन ने रोका और बकझक मारपीट में तब्दील हो गई।
शर्फुद्दीनपुर गुदरी बाजार पर गुरुवार घात लगाए कुछ युवकों ने बाजार के शंभू चौधरी के पुत्र अमन कुमार पर जानलेवा हमला कर दिया। घायल अमन कुमार के अनुसार दस से बारह की संख्या में आए अज्ञात हमलावरों ने उसे बीच सड़क पर रॉड व ईंट से मारकर घायल कर दिया। इसके बाद गर्दन पर चाकू से वार किया। लेकिन वह बाल-बाल बच गया । सूचना मिलने पर उसके परिजन जब दौड़कर आए तो हमलावर भाग निकले। पुलिस को दिये गये बयान में अमन कुमार ने बताया कि आसपास की दुकानों में वे लोग पहले से बैठे थे और उसके आने का इंतजार कर रहे थे। वहां दुकानों के सीसीटीवी फुटेज से लोग व पुलिस बदमाशों की पहचान करने की कोशिश में हैं । स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ माह पहले बाजार में एक मोबाइल दुकान में चोरी हुई थी जिसमें चोरी करने वालों की निशानदेही हुई थी और ठीकरा अमन के सर ही फूटा था । लोगों की माने तो अमन पर उन्हीं लोगों ने हमला किया है। थानाध्यक्ष राजेश रंजन ने बताया कि चार लड़के बाइक से बाजार पर जा रहे थे उसे अमन ने रोका और बकझक मारपीट में तब्दील हो गई।
Magh Mela 2023: प्रयागराज में माघ मेले के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की संभावना है। प्रशासन ने भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कमर कस ली है। प्रशासन की ओर से सभी रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। यहां पर लोगों की भीड़ अधिक होने पर रोका जाएगा। प्रयागराज के माघ मेले में प्रथम स्नान पर प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने कसी कमर (फाइल फोटो) सिर्फ 'टाइगर' ही खोज पाएगा Egg की भीड़ में Ego, ढूंढ लिया तो कहलाएंगे 'सुल्तान'
Magh Mela दो हज़ार तेईस: प्रयागराज में माघ मेले के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की संभावना है। प्रशासन ने भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कमर कस ली है। प्रशासन की ओर से सभी रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। यहां पर लोगों की भीड़ अधिक होने पर रोका जाएगा। प्रयागराज के माघ मेले में प्रथम स्नान पर प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने कसी कमर सिर्फ 'टाइगर' ही खोज पाएगा Egg की भीड़ में Ego, ढूंढ लिया तो कहलाएंगे 'सुल्तान'
भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने पुलिस-प्रशासन को हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब के इंदौर स्थित वाणिज्यिक प्रतिष्ठान 48 घंटे के भीतर बंद कराने का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि उन्होंने शहर में हबीब के प्रतिष्ठान नहीं चलने देने का संकल्प लिया है. वहीं, जयपुर की पूर्व महापौर एवं कांग्रेस नेता ज्योति खंडेलवाल ने महिला के बालों में थूकने के मामले में हबीब के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है. पुणे पुलिस ने बताया कि भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के सोशल मीडिया सेल के समन्वयक जितेन गजारिया के ख़िलाफ़ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे, शरद पवार, अजीत पवार आदि के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक और मानहानिकारक पोस्ट करने का मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने कुछ पोस्ट दो समूहों के बीच नफ़रत पैदा करने के उद्देश्य से भी किए हैं. प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक हुई है. इस सवाल को रैली में कितने लोग आए, कितने नहीं आए इसे लेकर ज़्यादा बहस की ज़रूरत नहीं. सुरक्षा इंतज़ामों में पंजाब सरकार की भूमिका हो सकती है लेकिन यह एसपीजी के अधीन होती है. प्रधानमंत्री कहां जाएंगे और उनके बगल में कौन बैठेगा यह सब एसपीजी तय करती है. इसलिए सबसे पहले कार्रवाई केंद्र सरकार की तरफ से होनी चाहिए. चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च की सीमा 70 लाख रुपये से बढ़ाकर 95 लाख रुपये कर दी है. वहीं, विधानसभा चुनाव में यह सीमा 28 लाख रुपये के स्थान पर 40 लाख रुपये होगी. आयोग ने क़ानून मंत्रालय की अधिसूचना का हवाला देते हुए यह जानकारी दी. द वायर ने दो वर्षों की पड़ताल के बाद स्रोतों की मदद से एक गोपनीय ऐप टेक फॉग का ख़ुलासा किया, जिसका इस्तेमाल सत्ताधारी दल से संबद्ध लोगों द्वारा कृत्रिम रूप से पार्टी की लोकप्रियता बढ़ाने, इसके आलोचकों को प्रताड़ित करने और प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर जनधारणाओं को एक ओर मोड़ने के लिए किया जाता है. एक्सक्लूसिवः द वायर ने उन दावों की पड़ताल की है, जिसमें कहा गया है कि ऑनलाइन कार्यकर्ताओं द्वारा प्रमुख सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को हाईजैक करने और घरेलू उपयोगकर्ताओं के बीच दक्षिणपंथी प्रोपगैंडा को बढ़ावा देने के लिए एक बेहद परिष्कृत ऐप 'टेक फॉग' का इस्तेमाल किया जा रहा है. देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के मद्देनज़र कांग्रेस ने पांच चुनावी राज्यों में अगले 15 दिनों के लिए बड़ी जनसभा और कार्यक्रमों का आयोजन न करने की घोषणा की है. शिक्षा मंत्रालय ने 'आजादी का अमृत महोत्सव' के बैनर तले 30 राज्यों में सूर्य नमस्कार की एक योजना बनाई है, जिसमें 30 हज़ार स्कूलों को शामिल किया जाएगा. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि इस्लाम और देश के अन्य अल्पसंख्यक न सूर्य को देवता मानते हैं और न ही उसकी उपासना को सही मानते हैं. इसलिए सरकार का यह कर्तव्य है कि वह ऐसे निर्देश वापस लेकर देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का सम्मान करे. बीते कुछ हफ़्तों में भाजपा के नौ विधायकों ने पार्टी के वॉट्सऐप ग्रुप छोड़े थे, जिनमें से पांच- मुकुटमोनी अधिकारी, सुब्रत ठाकुर, अंबिका रॉय, अशोक कीर्तनिया और असीम सरकार उन्हें राज्य समिति से बाहर निकालने जाने से असंतुष्ट हैं. इनमें से अधिकतर मतुआ समुदाय से हैं. त्रिपुरा के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुशांत चौधरी ने बीते सोमवार को 'एक त्रिपुरा, श्रेष्ठ त्रिपुरा' के प्रधानमंत्री के आह्वान के लिए सभा में शामिल होने को कहा था. इस बीच तृणमूल कांग्रेस की त्रिपुरा इकाई ने कोविड 19 के बढ़ते मामलों के बीच सभा में जुटी भारी भीड़ पर प्रधानमंत्री और भाजपा की प्रदेश सरकार की आलोचना की है. तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष बी. संजय कुमार को दो जनवरी की रात उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह अन्य भाजपा नेताओं के साथ राज्य सरकार के एक आदेश के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे, जो नए बनाए गए ज़िलों में सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के संबंध में था. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव हताशा में यह कार्रवाई कर रहे हैं. लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच कर रही एसआईटी ने बीते सोमवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा 'टेनी' के बेटे आशीष मिश्रा समेत 14 आरोपियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल किया है. इस हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी. एसआईटी ने आशीष को घटना के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए मुख्य आरोपी बनाया है. उत्तराखंड के लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि राज्य के पर्यावरण मंत्री हरक सिंह रावत उनके निर्वाचन क्षेत्र की अनदेखी कर रहे हैं. आरोपों पर मंत्री ने कहा है कि अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन विधायक अपने कार्यकाल के अंत में इस मुद्दे को क्यों उठा रहे हैं, जब चुनाव काफी नज़दीक हैं. युवतियों के विवाह की क़ानूनी आयु को बढ़ाकर 21 साल करने संबंधी विधेयक की जांच पड़ताल करने वाली संसद की स्थायी समिति के 31 सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव अकेली महिला हैं. देव ने कहा कि समिति में और महिला सांसद होतीं तो बेहतर होता.
भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने पुलिस-प्रशासन को हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब के इंदौर स्थित वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अड़तालीस घंटाटे के भीतर बंद कराने का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि उन्होंने शहर में हबीब के प्रतिष्ठान नहीं चलने देने का संकल्प लिया है. वहीं, जयपुर की पूर्व महापौर एवं कांग्रेस नेता ज्योति खंडेलवाल ने महिला के बालों में थूकने के मामले में हबीब के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है. पुणे पुलिस ने बताया कि भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के सोशल मीडिया सेल के समन्वयक जितेन गजारिया के ख़िलाफ़ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे, शरद पवार, अजीत पवार आदि के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक और मानहानिकारक पोस्ट करने का मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने कुछ पोस्ट दो समूहों के बीच नफ़रत पैदा करने के उद्देश्य से भी किए हैं. प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक हुई है. इस सवाल को रैली में कितने लोग आए, कितने नहीं आए इसे लेकर ज़्यादा बहस की ज़रूरत नहीं. सुरक्षा इंतज़ामों में पंजाब सरकार की भूमिका हो सकती है लेकिन यह एसपीजी के अधीन होती है. प्रधानमंत्री कहां जाएंगे और उनके बगल में कौन बैठेगा यह सब एसपीजी तय करती है. इसलिए सबसे पहले कार्रवाई केंद्र सरकार की तरफ से होनी चाहिए. चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च की सीमा सत्तर लाख रुपये से बढ़ाकर पचानवे लाख रुपये कर दी है. वहीं, विधानसभा चुनाव में यह सीमा अट्ठाईस लाख रुपये के स्थान पर चालीस लाख रुपये होगी. आयोग ने क़ानून मंत्रालय की अधिसूचना का हवाला देते हुए यह जानकारी दी. द वायर ने दो वर्षों की पड़ताल के बाद स्रोतों की मदद से एक गोपनीय ऐप टेक फॉग का ख़ुलासा किया, जिसका इस्तेमाल सत्ताधारी दल से संबद्ध लोगों द्वारा कृत्रिम रूप से पार्टी की लोकप्रियता बढ़ाने, इसके आलोचकों को प्रताड़ित करने और प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर जनधारणाओं को एक ओर मोड़ने के लिए किया जाता है. एक्सक्लूसिवः द वायर ने उन दावों की पड़ताल की है, जिसमें कहा गया है कि ऑनलाइन कार्यकर्ताओं द्वारा प्रमुख सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को हाईजैक करने और घरेलू उपयोगकर्ताओं के बीच दक्षिणपंथी प्रोपगैंडा को बढ़ावा देने के लिए एक बेहद परिष्कृत ऐप 'टेक फॉग' का इस्तेमाल किया जा रहा है. देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के मद्देनज़र कांग्रेस ने पांच चुनावी राज्यों में अगले पंद्रह दिनों के लिए बड़ी जनसभा और कार्यक्रमों का आयोजन न करने की घोषणा की है. शिक्षा मंत्रालय ने 'आजादी का अमृत महोत्सव' के बैनर तले तीस राज्यों में सूर्य नमस्कार की एक योजना बनाई है, जिसमें तीस हज़ार स्कूलों को शामिल किया जाएगा. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि इस्लाम और देश के अन्य अल्पसंख्यक न सूर्य को देवता मानते हैं और न ही उसकी उपासना को सही मानते हैं. इसलिए सरकार का यह कर्तव्य है कि वह ऐसे निर्देश वापस लेकर देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का सम्मान करे. बीते कुछ हफ़्तों में भाजपा के नौ विधायकों ने पार्टी के वॉट्सऐप ग्रुप छोड़े थे, जिनमें से पांच- मुकुटमोनी अधिकारी, सुब्रत ठाकुर, अंबिका रॉय, अशोक कीर्तनिया और असीम सरकार उन्हें राज्य समिति से बाहर निकालने जाने से असंतुष्ट हैं. इनमें से अधिकतर मतुआ समुदाय से हैं. त्रिपुरा के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुशांत चौधरी ने बीते सोमवार को 'एक त्रिपुरा, श्रेष्ठ त्रिपुरा' के प्रधानमंत्री के आह्वान के लिए सभा में शामिल होने को कहा था. इस बीच तृणमूल कांग्रेस की त्रिपुरा इकाई ने कोविड उन्नीस के बढ़ते मामलों के बीच सभा में जुटी भारी भीड़ पर प्रधानमंत्री और भाजपा की प्रदेश सरकार की आलोचना की है. तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष बी. संजय कुमार को दो जनवरी की रात उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह अन्य भाजपा नेताओं के साथ राज्य सरकार के एक आदेश के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे, जो नए बनाए गए ज़िलों में सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के संबंध में था. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव हताशा में यह कार्रवाई कर रहे हैं. लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच कर रही एसआईटी ने बीते सोमवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा 'टेनी' के बेटे आशीष मिश्रा समेत चौदह आरोपियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल किया है. इस हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी. एसआईटी ने आशीष को घटना के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए मुख्य आरोपी बनाया है. उत्तराखंड के लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि राज्य के पर्यावरण मंत्री हरक सिंह रावत उनके निर्वाचन क्षेत्र की अनदेखी कर रहे हैं. आरोपों पर मंत्री ने कहा है कि अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन विधायक अपने कार्यकाल के अंत में इस मुद्दे को क्यों उठा रहे हैं, जब चुनाव काफी नज़दीक हैं. युवतियों के विवाह की क़ानूनी आयु को बढ़ाकर इक्कीस साल करने संबंधी विधेयक की जांच पड़ताल करने वाली संसद की स्थायी समिति के इकतीस सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव अकेली महिला हैं. देव ने कहा कि समिति में और महिला सांसद होतीं तो बेहतर होता.
इंदौर, 26 अक्तूबर (एजेंसी) मध्य प्रदेश में एक महिला नेता से कथित दुष्कर्म के मामले में उज्जैन जिले के कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के फरार बेटे करण मोरवाल को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया। शादी का झांसा देकर महिला नेता से दुष्कर्म का आरोपी पिछले साढ़े छह महीने से फरार था और उसकी गिरफ्तारी पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित था। स्थानीय महिला थाने की प्रभारी ज्योति शर्मा ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर करण मोरवाल (30) को इंदौर से करीब 80 किलोमीटर दूर मक्सी के पास से उस वक्त पकड़ा गया जब वह कार से कहीं जा रहा था। उन्होंने बताया कि पुलिस को इस कार में करण के साथ राहुल राठौड़ नाम का व्यक्ति भी मिला और विधायक पुत्र के फरार होने में राठौड़ की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि करण के खिलाफ इंदौर के महिला थाने में दो अप्रैल को दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था।
इंदौर, छब्बीस अक्तूबर मध्य प्रदेश में एक महिला नेता से कथित दुष्कर्म के मामले में उज्जैन जिले के कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के फरार बेटे करण मोरवाल को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया। शादी का झांसा देकर महिला नेता से दुष्कर्म का आरोपी पिछले साढ़े छह महीने से फरार था और उसकी गिरफ्तारी पर पच्चीस,शून्य रुपयापये का इनाम घोषित था। स्थानीय महिला थाने की प्रभारी ज्योति शर्मा ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर करण मोरवाल को इंदौर से करीब अस्सी किलोग्राममीटर दूर मक्सी के पास से उस वक्त पकड़ा गया जब वह कार से कहीं जा रहा था। उन्होंने बताया कि पुलिस को इस कार में करण के साथ राहुल राठौड़ नाम का व्यक्ति भी मिला और विधायक पुत्र के फरार होने में राठौड़ की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि करण के खिलाफ इंदौर के महिला थाने में दो अप्रैल को दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था।
INTERFAX. RU के अनुसार, यूक्रेनी राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने "लुहान्स्क और डोनेट्स्क क्षेत्रों के वैध अधिकारियों" के साथ एक बैठक में देश के पूर्व में स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान के लिए एक योजना प्रस्तुत की . . . ।
INTERFAX. RU के अनुसार, यूक्रेनी राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने "लुहान्स्क और डोनेट्स्क क्षेत्रों के वैध अधिकारियों" के साथ एक बैठक में देश के पूर्व में स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान के लिए एक योजना प्रस्तुत की . . . ।
सोलन के राजगढ़ रोड स्थित एक स्टेशनरी की दुकान में आग लगने से करीब 15 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। आग सुबह उस समय लगी जब दुकान बंद थी। दुकान के अंदर से निकल रहे धुएं को देखकर आसपास के लोगों ने घटना की सूचना दुकान मालिक विजय गुप्ता को व फायर विभाग को करीब एक बजे दी, जिसके बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का कार्य शुरू किया। दुकान के अंदर स्टेशनरी का सामान होने के कारण लगभग सारा सामान जलकर राख हो गया। मौके पर पहुंचे फायर विभाग के अधिकारी राजाराम ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलने के बाद फायर विभाग के 3 वाहन मौके पर पहुंच गए थे। आग स्टेशनरी की दुकान में लगी होने के कारण जबरदस्त फैली हुई थी, जिसे काबू पाने में करीब 1 घंटे का समय लग गया। उन्होंने कहा कि दुकान के अंदर रखा लगभग सारा सामान आग की भेंट चढ़ गया है। वहीं आग किन कारणों से लगी इसका फिलहाल अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। हिमाचलः स्टेशनरी की दुकान में लगी भीषण आग, लाखों का हुआ नुक्सान Reviewed by news himachali on December 04, 2019 Rating:
सोलन के राजगढ़ रोड स्थित एक स्टेशनरी की दुकान में आग लगने से करीब पंद्रह लाख रुपए का नुकसान हुआ है। आग सुबह उस समय लगी जब दुकान बंद थी। दुकान के अंदर से निकल रहे धुएं को देखकर आसपास के लोगों ने घटना की सूचना दुकान मालिक विजय गुप्ता को व फायर विभाग को करीब एक बजे दी, जिसके बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का कार्य शुरू किया। दुकान के अंदर स्टेशनरी का सामान होने के कारण लगभग सारा सामान जलकर राख हो गया। मौके पर पहुंचे फायर विभाग के अधिकारी राजाराम ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलने के बाद फायर विभाग के तीन वाहन मौके पर पहुंच गए थे। आग स्टेशनरी की दुकान में लगी होने के कारण जबरदस्त फैली हुई थी, जिसे काबू पाने में करीब एक घंटाटे का समय लग गया। उन्होंने कहा कि दुकान के अंदर रखा लगभग सारा सामान आग की भेंट चढ़ गया है। वहीं आग किन कारणों से लगी इसका फिलहाल अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। हिमाचलः स्टेशनरी की दुकान में लगी भीषण आग, लाखों का हुआ नुक्सान Reviewed by news himachali on December चार, दो हज़ार उन्नीस Rating:
सदर के नवनिर्वाचित विधायक नीरज नैय्यर ने मंगलवार को ग्राम पंचायत बरौर, चंबी, जडेरा, सुंगल व पलूहीं का दौरा कर चुनावों में सहयोग के लिए कार्यकर्ताओं सहित जनता का आभार जताया। नीरज नैयर ने सभी मतदाताओं का आभार जताते हुए विश्वास दिलाया कि जनता ने जिन उम्मीदों के साथ उन्हें चुनाव में जिताकर विधानसभा में भेजा है वह उस पर पूरी तरह से खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि चंबा विधानसभा क्षेत्र की जनसमस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। वह चंबा विधानसभा क्षेत्र को विकास के मामले में प्रदेश का अग्रणी विधानसभा बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि हलके के विकास में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी और मतदाता व विधायक के बीच बनी दीवार को हटाया जाएगा। लोग विधायक के समक्ष अब सीधे अपनी समस्या रख सकेंगे। नीरज नैय्यर ने कहा कि वह हलके के हरेक बूथ पर जाकर मतदाता का आभार प्रकट करेंगे। इस अवसर पर विधायक के पारिवारिक सदस्यों संग बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सदर के नवनिर्वाचित विधायक नीरज नैय्यर ने मंगलवार को ग्राम पंचायत बरौर, चंबी, जडेरा, सुंगल व पलूहीं का दौरा कर चुनावों में सहयोग के लिए कार्यकर्ताओं सहित जनता का आभार जताया। नीरज नैयर ने सभी मतदाताओं का आभार जताते हुए विश्वास दिलाया कि जनता ने जिन उम्मीदों के साथ उन्हें चुनाव में जिताकर विधानसभा में भेजा है वह उस पर पूरी तरह से खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि चंबा विधानसभा क्षेत्र की जनसमस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। वह चंबा विधानसभा क्षेत्र को विकास के मामले में प्रदेश का अग्रणी विधानसभा बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि हलके के विकास में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी और मतदाता व विधायक के बीच बनी दीवार को हटाया जाएगा। लोग विधायक के समक्ष अब सीधे अपनी समस्या रख सकेंगे। नीरज नैय्यर ने कहा कि वह हलके के हरेक बूथ पर जाकर मतदाता का आभार प्रकट करेंगे। इस अवसर पर विधायक के पारिवारिक सदस्यों संग बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
UP Nikay Chunav Results: उत्तर प्रदेश में हुए निकाय चुनावों में विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया है। बाबा के बुलडोजर (Bulldozer) की ताकत के बलबूते भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में क्लीन स्वीप किया है। नगर निगम मेयर की सभी 17 सीटों पर बीजेपी (BJP) ने डंका बजाया है। सभी जगह बीजेपी के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता बृजेश पाठक (Uttar Pradesh Deputy CM Brajesh Pathak) ने निकाय चुनावों में जीत की वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र की नीतियों और राज्य की कानून व्यवस्था को बताया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि बीजेपी ने 17 में से 17 नगर निगम में जीत गई है। नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में भी बीजेपी ने पिछली बार से अच्छा प्रदर्शन किया है और जीत हासिल की है। मैं प्रदेश की जनता का आभार व्यक्त करता हूं और उन्हें बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गरीब कल्याण योजनाओं को जन जन तक पहुंचाएगी। राज्य में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा। ब्रजेश पाठक ने कहा कि बीजेपी हर स्थिति में प्रदेश की जनता के साथ खड़ी हुई है। ये जीत दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार की नीतियों और राज्य की कानून व्यवस्था की जीत है। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री योगी एक-एक कार्यकर्ता को लेकर जनता में गए। बीजेपी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हम सभी नगर निगम में जीत रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हम जीत के आधार पर टिकट देते हैं, मुस्लिम भाई बहनों को भी दिया और वो जीतकर आए। उन्होंने कहा कि यूपी में कानून व्यवस्था जरूरी मुद्दा रहा है। यूपी में निकाय चुनाव दो चरणों में 4 और 11 मई को हुए थे। राज्य में नगर पालिका परिषदों के 198 अध्यक्षों और 5,260 सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान हुआ। मतदाताओं ने नगर पंचायतों के 542 अध्यक्षों और नगर पंचायतों के 7,104 सदस्यों के भाग्य का फैसला करने के लिए भी मतदान किया। कुल मिलाकर, 162 जनप्रतिनिधि निर्विरोध चुने गए, जबकि 14,522 पदों के लिए 83,378 उम्मीदवार मैदान में थे। उत्तर प्रदेश में मेयर का चुनाव आगरा, झांसी, शाहजहांपुर, फिरोजाबाद, सहारनपुर, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन नगर निगम में हुआ।
UP Nikay Chunav Results: उत्तर प्रदेश में हुए निकाय चुनावों में विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया है। बाबा के बुलडोजर की ताकत के बलबूते भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में क्लीन स्वीप किया है। नगर निगम मेयर की सभी सत्रह सीटों पर बीजेपी ने डंका बजाया है। सभी जगह बीजेपी के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता बृजेश पाठक ने निकाय चुनावों में जीत की वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र की नीतियों और राज्य की कानून व्यवस्था को बताया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि बीजेपी ने सत्रह में से सत्रह नगर निगम में जीत गई है। नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में भी बीजेपी ने पिछली बार से अच्छा प्रदर्शन किया है और जीत हासिल की है। मैं प्रदेश की जनता का आभार व्यक्त करता हूं और उन्हें बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गरीब कल्याण योजनाओं को जन जन तक पहुंचाएगी। राज्य में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा। ब्रजेश पाठक ने कहा कि बीजेपी हर स्थिति में प्रदेश की जनता के साथ खड़ी हुई है। ये जीत दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार की नीतियों और राज्य की कानून व्यवस्था की जीत है। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री योगी एक-एक कार्यकर्ता को लेकर जनता में गए। बीजेपी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हम सभी नगर निगम में जीत रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हम जीत के आधार पर टिकट देते हैं, मुस्लिम भाई बहनों को भी दिया और वो जीतकर आए। उन्होंने कहा कि यूपी में कानून व्यवस्था जरूरी मुद्दा रहा है। यूपी में निकाय चुनाव दो चरणों में चार और ग्यारह मई को हुए थे। राज्य में नगर पालिका परिषदों के एक सौ अट्ठानवे अध्यक्षों और पाँच,दो सौ साठ सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान हुआ। मतदाताओं ने नगर पंचायतों के पाँच सौ बयालीस अध्यक्षों और नगर पंचायतों के सात,एक सौ चार सदस्यों के भाग्य का फैसला करने के लिए भी मतदान किया। कुल मिलाकर, एक सौ बासठ जनप्रतिनिधि निर्विरोध चुने गए, जबकि चौदह,पाँच सौ बाईस पदों के लिए तिरासी,तीन सौ अठहत्तर उम्मीदवार मैदान में थे। उत्तर प्रदेश में मेयर का चुनाव आगरा, झांसी, शाहजहांपुर, फिरोजाबाद, सहारनपुर, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन नगर निगम में हुआ।