raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
किया करती थीं । बडी बहिन भी तो वेशर मा वे बाड़े में यहाँ बुछ महतो हैं, ऐसा हो यह कलह हो वेशर मा का सुख । अजित और और चिढता
चादन की घरवाली, बच्चे और वटनिया मा पहुचे थे, "लाला १ तुम आराम करो । " फिर वह बटनिया की ओर मुडी थी, "चटनिया, तू लाला का बिस्तर, किताबें ला दे इस कमरे मे। उधर मत जाने देना । बहुत गुस्से में हैं वह । 'फिर चादन की बह सीढिया उतरकर चली गयी थी। बच्चे भी ।
बटनिया वापस केशर मा की तरफ। फिर वह एक एक करके बिस्तर, तकिये, चारपाई ला लाकर अजित वे नमरे में रखने लगी थी। अजित बुत बना बैठा था दिन डूबने लगा था
बढनिया ने बिस्तरे लगाये, पानी को सुराही ला रखी, फिर सारी किताबें ले आयी
अजित और उसमे काई वातचीत नहीं हुई । न बटनिया के शरीर ने उसे मोहा, न उसकी चाल ने न रग ने ।
बटनिया ने अत मे एक लालटेन जलाकर ला रखी। थोड़ी देर अजित को देखती रही थी अजित उसे न देखक्र पुस्तक पढने लगा था।
घटनिया चली जाते जाते कह गयी थी, "कोई चीज तुझे चाहिए तो वेशर मा के कमरे मे मत जाना - -मुझे बुला लेना।" फिर वह जल्दी जल्दी सोढिया उतरकर गायब हो गयी ।
पुस्तक के वक पलटते हुए भी अजित का मन नहीं लगा था आखिर केशर मा अजित से यह दुन्यवहार क्या करती हैं ? इसलिए न कि अजित कमाता नही है ? इसलिए कि अजित मैट्रिक पास नहीं कर पा रहा है ? इसलिए कि अजित उनकी झूठी खुशामद नही कर सकता, जिस तरह कि और लोग करते रहते हैं ? अजित की मा को इस खुशामद की आदत है । तब से जब अजित के पिता जीवित थे । वडी बहिन कमला वतलाती है, 'बीस बीस नौतर रहते थे। मा तो बस, पलग पर बैठी हुकम दिया करती थो । जमीदारी का जमाना, वेगारी, सेवक, वारिदे क्तिन ही लोग पटिया की पेटिया फन आया करते। जी होता तो एकाध खाती, नही तो
नोक्रो को बटवा देती । सत्र हा म हा करते।"
भजित को लगता है, यही कारण है। वह सब बीत गया । जमीदारिया भी चली गयी। उससे पहले ही अजित के पिता को घाटा होने लगा था । दो बसें ले डाली थी उन्होने यहते हैं कि उन्हें किसीने सलाह दी थी कि बागरेस का राज जरूर आयेगा और जब वह आ जायेगा तो ये जमी दारिया, ठाठ-ठप्पे सब इन की महक की तरह उड जायेंगे । फाको की नौरत आ जायेगी। राजे रईस स्वभाव तो बदल नही पाते। वह इफरात कमान और खराब करने की आदत रहती है। इसी समय कोई धंधा कर लोगे तो ठीक रहेगा और धधा उहे वसो का सूझा था। सुझाया था अजित के चचेरे भाइयो और चाचा न हो। कहते हैं, सारी जमा-पूजी उसी मे लगा बैठे । बसें सम्हालने का काम दौड धूप का । अजित के पिता ठहरे नाजुब मिजाज रईस । मेहनत-मशक्कत नहीं, दिमाग से कमाया था हमेशा। होते होते चाचाओ, भाइया और फिर बाद में मामा ने रहा सहा सत्यानाश कर दिया । बसो ने वह घाटे दिये कि सब चौपट हो गया । जीजी कहती है - "घाटा बस न थोडे ही दिया था भजित ! घाटा दिया भाई बन्दा ने, अपने ही लहू ने । सब खा-पी गये । अपना घर बनाया, दादाजी को बरवाद कर दिया। नतीजा यह
और वह नतीजा अजित ने देखा है। घुघली धुधली याद बचपन षे ठाठ ठप्पा की है। फिर यह सब तो आखो के आगे ही घट रहा है । कमला जीजी कहती हैं ---"अब ये जो क्लेसी स्वभाव देख रहा है ना मा का? यह रुपये मे तो चार आने तो पहले से हो था, पर पैसो ने काफी कुछ सम्हाल रखा था अब जो तक्लीफा से घिर गयी है - ये मिजाज पूरे सोलह आने हो गया है। बाकी तू गडबड किये डाल रहा है। पढ़ लिख ले, यह चिन्ता भी उन्हें है।
अजित मा से हुए हर झगडे पर यह सब सोचता है। उसे तक्लीफ भी होती है, पर वह कक्श स्वभाव, चाटुकारी की आदत, अजित पर अविश्वास सब मिलाकर किसी भी बार अजित के मन मे केशर मा के प्रति सन्तोष नही जनम पाता। वह बिगडती हैं, अजित भी व्यग्र होता चला जाता
|
किया करती थीं । बडी बहिन भी तो वेशर मा वे बाड़े में यहाँ बुछ महतो हैं, ऐसा हो यह कलह हो वेशर मा का सुख । अजित और और चिढता चादन की घरवाली, बच्चे और वटनिया मा पहुचे थे, "लाला एक तुम आराम करो । " फिर वह बटनिया की ओर मुडी थी, "चटनिया, तू लाला का बिस्तर, किताबें ला दे इस कमरे मे। उधर मत जाने देना । बहुत गुस्से में हैं वह । 'फिर चादन की बह सीढिया उतरकर चली गयी थी। बच्चे भी । बटनिया वापस केशर मा की तरफ। फिर वह एक एक करके बिस्तर, तकिये, चारपाई ला लाकर अजित वे नमरे में रखने लगी थी। अजित बुत बना बैठा था दिन डूबने लगा था बढनिया ने बिस्तरे लगाये, पानी को सुराही ला रखी, फिर सारी किताबें ले आयी अजित और उसमे काई वातचीत नहीं हुई । न बटनिया के शरीर ने उसे मोहा, न उसकी चाल ने न रग ने । बटनिया ने अत मे एक लालटेन जलाकर ला रखी। थोड़ी देर अजित को देखती रही थी अजित उसे न देखक्र पुस्तक पढने लगा था। घटनिया चली जाते जाते कह गयी थी, "कोई चीज तुझे चाहिए तो वेशर मा के कमरे मे मत जाना - -मुझे बुला लेना।" फिर वह जल्दी जल्दी सोढिया उतरकर गायब हो गयी । पुस्तक के वक पलटते हुए भी अजित का मन नहीं लगा था आखिर केशर मा अजित से यह दुन्यवहार क्या करती हैं ? इसलिए न कि अजित कमाता नही है ? इसलिए कि अजित मैट्रिक पास नहीं कर पा रहा है ? इसलिए कि अजित उनकी झूठी खुशामद नही कर सकता, जिस तरह कि और लोग करते रहते हैं ? अजित की मा को इस खुशामद की आदत है । तब से जब अजित के पिता जीवित थे । वडी बहिन कमला वतलाती है, 'बीस बीस नौतर रहते थे। मा तो बस, पलग पर बैठी हुकम दिया करती थो । जमीदारी का जमाना, वेगारी, सेवक, वारिदे क्तिन ही लोग पटिया की पेटिया फन आया करते। जी होता तो एकाध खाती, नही तो नोक्रो को बटवा देती । सत्र हा म हा करते।" भजित को लगता है, यही कारण है। वह सब बीत गया । जमीदारिया भी चली गयी। उससे पहले ही अजित के पिता को घाटा होने लगा था । दो बसें ले डाली थी उन्होने यहते हैं कि उन्हें किसीने सलाह दी थी कि बागरेस का राज जरूर आयेगा और जब वह आ जायेगा तो ये जमी दारिया, ठाठ-ठप्पे सब इन की महक की तरह उड जायेंगे । फाको की नौरत आ जायेगी। राजे रईस स्वभाव तो बदल नही पाते। वह इफरात कमान और खराब करने की आदत रहती है। इसी समय कोई धंधा कर लोगे तो ठीक रहेगा और धधा उहे वसो का सूझा था। सुझाया था अजित के चचेरे भाइयो और चाचा न हो। कहते हैं, सारी जमा-पूजी उसी मे लगा बैठे । बसें सम्हालने का काम दौड धूप का । अजित के पिता ठहरे नाजुब मिजाज रईस । मेहनत-मशक्कत नहीं, दिमाग से कमाया था हमेशा। होते होते चाचाओ, भाइया और फिर बाद में मामा ने रहा सहा सत्यानाश कर दिया । बसो ने वह घाटे दिये कि सब चौपट हो गया । जीजी कहती है - "घाटा बस न थोडे ही दिया था भजित ! घाटा दिया भाई बन्दा ने, अपने ही लहू ने । सब खा-पी गये । अपना घर बनाया, दादाजी को बरवाद कर दिया। नतीजा यह और वह नतीजा अजित ने देखा है। घुघली धुधली याद बचपन षे ठाठ ठप्पा की है। फिर यह सब तो आखो के आगे ही घट रहा है । कमला जीजी कहती हैं ---"अब ये जो क्लेसी स्वभाव देख रहा है ना मा का? यह रुपये मे तो चार आने तो पहले से हो था, पर पैसो ने काफी कुछ सम्हाल रखा था अब जो तक्लीफा से घिर गयी है - ये मिजाज पूरे सोलह आने हो गया है। बाकी तू गडबड किये डाल रहा है। पढ़ लिख ले, यह चिन्ता भी उन्हें है। अजित मा से हुए हर झगडे पर यह सब सोचता है। उसे तक्लीफ भी होती है, पर वह कक्श स्वभाव, चाटुकारी की आदत, अजित पर अविश्वास सब मिलाकर किसी भी बार अजित के मन मे केशर मा के प्रति सन्तोष नही जनम पाता। वह बिगडती हैं, अजित भी व्यग्र होता चला जाता
|
सिडनी (आईएएनएस/सिन्हुआ)। पापुआ न्यू गिनी में रविवार को समुद्र के भीतर शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.9 मापी गई। जिसके बाद प्रशांत द्वीपीय देश और पड़ोसी देशों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई।
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) ने बताया कि पापुआ न्यू गिनी के बौगेनविले द्वीप में पांगुना से 40 किमी दूर पश्चिम में 153 किमी की गहराई पर स्थानीय समयानुसार तीन बज कर 30 मिनट पर भूकंप आया।
हवाई स्थित पैसिफिक सुनामी वार्निग सेंटर के अनुसार, "इस भूकंप के कारण खतरनाक सुनामी लहरें अगले तीन घंटों में पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीपों, नाउरु, वानूआतू और इंडोनेशिया तक पहुंच सकती हैं।"
यूएसजीएस ने अपने शुरुआती आकलन में यह जानकारी देते हुए बताया है कि बौगेनविले द्वीप में मामूली नुकसान की आशंका है।
प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (पीटीडब्ल्यूसी) ने पापुआ न्यू गिनी के कुछ तटीय इलाकों और समीपवर्ती सोलोमन द्वीपसमूह में 0.3 से लेकर एक मीटर तक ऊंची लहरें उठने की चेतावनी दी है।पीटीडब्ल्यूसी के अनुसार, अन्य समीपवर्ती देशों में छोटी लहरें उठ सकती हैं।
जियोसाइंस ऑस्ट्रेलिया के भूगर्भ विज्ञान विशेषज्ञ स्पाइरो स्पाइलियोपौलस ने बताया "यह 150 किमी की गहराई पर आया, बड़ा भूकंप होने की वजह से इसका असर सतह पर होगा।" उन्होंने कहा कि इससे कुछ नुकसान की आशंका है।
दिसंबर के मध्य दिसंबर में पापुआ न्यू गिनी के तट पर 7.9 तीव्रता का भूकंप आया लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई। शुरु में सुनामी का खतरा था जो नहीं आई। करीब 4,000 किमी लंबी पैसेफिक ऑस्ट्रेलिया प्लेट पर स्थित पापुआ न्यू गिनी के आसपास अक्सर भूकंप आते रहते हैं।
|
सिडनी । पापुआ न्यू गिनी में रविवार को समुद्र के भीतर शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर सात.नौ मापी गई। जिसके बाद प्रशांत द्वीपीय देश और पड़ोसी देशों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने बताया कि पापुआ न्यू गिनी के बौगेनविले द्वीप में पांगुना से चालीस किमी दूर पश्चिम में एक सौ तिरेपन किमी की गहराई पर स्थानीय समयानुसार तीन बज कर तीस मिनट पर भूकंप आया। हवाई स्थित पैसिफिक सुनामी वार्निग सेंटर के अनुसार, "इस भूकंप के कारण खतरनाक सुनामी लहरें अगले तीन घंटों में पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीपों, नाउरु, वानूआतू और इंडोनेशिया तक पहुंच सकती हैं।" यूएसजीएस ने अपने शुरुआती आकलन में यह जानकारी देते हुए बताया है कि बौगेनविले द्वीप में मामूली नुकसान की आशंका है। प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने पापुआ न्यू गिनी के कुछ तटीय इलाकों और समीपवर्ती सोलोमन द्वीपसमूह में शून्य.तीन से लेकर एक मीटर तक ऊंची लहरें उठने की चेतावनी दी है।पीटीडब्ल्यूसी के अनुसार, अन्य समीपवर्ती देशों में छोटी लहरें उठ सकती हैं। जियोसाइंस ऑस्ट्रेलिया के भूगर्भ विज्ञान विशेषज्ञ स्पाइरो स्पाइलियोपौलस ने बताया "यह एक सौ पचास किमी की गहराई पर आया, बड़ा भूकंप होने की वजह से इसका असर सतह पर होगा।" उन्होंने कहा कि इससे कुछ नुकसान की आशंका है। दिसंबर के मध्य दिसंबर में पापुआ न्यू गिनी के तट पर सात.नौ तीव्रता का भूकंप आया लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई। शुरु में सुनामी का खतरा था जो नहीं आई। करीब चार,शून्य किमी लंबी पैसेफिक ऑस्ट्रेलिया प्लेट पर स्थित पापुआ न्यू गिनी के आसपास अक्सर भूकंप आते रहते हैं।
|
।आनंदमयी (Anandmayee)
मंगल ग्रह मेष राशि का स्वामी माना जाता है। मेष राशि का आराध्य देव भगवान श्री गणेश को माना जाता है। आनंदमयी नाम की लड़कियाँ सर्दी का मौसम खत्म होने के बाद जन्म लेते हैं। आनंदमयी नाम की लड़कियाँ नींद से जुड़ी समस्याएं, दांतों में दर्द, बुखार आना, चोट लगना, खून के साफ़ न होने की वजह से होने वाले रोग आदि से ग्रस्त होने की सम्भावना अधिक होती है। आनंदमयी नाम की लड़कियों के मस्तिष्क, जबड़े और चेहरे बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। आनंदमयी नाम की लड़कियाँ अकसर खाने पीने में अनियमितता बरतते हैं और पाचन तंत्र के गड़बड़ी का शिकार हो जाते हैं। आनंदमयी नाम की लड़कियों में काम करने का जुनून होता है और ये किसी भी चीज़ की पहल करने से कतराते नहीं हैं।
अगर आप अपने बच्चे का नाम आनंदमयी रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि आनंदमयी का मतलब खुशी से भरे, खुशी से भरा हुआ होता है। अपनी संतान को आनंदमयी नाम देकर आप उसके जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं। अगर आप अपने बच्चे को आनंदमयी नाम देते हैं तो जीवनभर के लिए उसका संबंध इस नाम के मतलब यानी खुशी से भरे, खुशी से भरा हुआ से हो जाएगा। वेदों में भी ये बात कही गई कि शिशु को आनंदमयी देने से पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। कुछ सामाजिक अवधारणाओं के अनुसार आनंदमयी नाम का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा होता है, यानी कि आनंदमयी नाम का अर्थ खुशी से भरे, खुशी से भरा हुआ है तो आपके स्वभाव में भी इसकी झलक दिखेगी। आगे आनंदमयी नाम की राशि, आनंदमयी का लकी नंबर व इस नाम के खुशी से भरे, खुशी से भरा हुआ के बारे में संक्षेप में बताया है।
मंगल आनंदमयी नाम का ग्रह स्वामी है जबकि इसका शुभ अंक 9 है। मुश्किलों का सामना हिम्मत और जज्बे से करती हैं आनंदमयी नाम वाली महिलाएं। इनको किसी काम की शुरूआत में मेहनत करनी पड़ती है, पर अंत में आनंदमयी नाम की लड़कियों को सफलता हासिल होती है। आनंदमयी नाम वाली लड़कियां निडर होती हैं और कभी-कभी ये इनके लिए मुसीबत का कारण भी बन जाता है। इनमें नेतृत्व करने का गुण होता है और आनंदमयी नाम की महिलाएं बेहतरीन नेता बनने का गुण रखती हैं। 9 अंक वाली आनंदमयी नाम की लड़कियों को दोस्ती ही नहीं, दुश्मनी भी अच्छी तरह निभानी आती है।
आनंदमयी नाम के व्यक्ति की राशि मेष होती है और ये साहसी, आत्मविश्वासी, महत्वाकांक्षी व जिज्ञासु होते हैं। आनंदमयी की महिलाएं खतरों से खेलने का शौक रखती हैं। कोई भी नया कार्य शुरू करने में आनंदमयी नाम के युवतियां सबसे आगे रहती हैं। इन्हें चुनौतियों का सामना करना पसंद होता है। आनंदमयी नाम की महिलाओं में कभी भी ऊर्जा की कमी नहीं होती है। मेष राशि से सम्बंधित आनंदमयी नाम की महिलाएं हठी और घमंडी किस्म की होती हैं। आनंदमयी नाम महिलाओं को अपने करियर से समझौता करना पसंद नहीं होता है। पैसों के मामले में भी ये किसी पर भरोसा नहीं करती।
।सूर्य, सूर्य के प्रभु, सूर्य देवता (Adithi का पुत्र)
।सूर्य का पुत्र (सूर्य का पुत्र)
|
।आनंदमयी मंगल ग्रह मेष राशि का स्वामी माना जाता है। मेष राशि का आराध्य देव भगवान श्री गणेश को माना जाता है। आनंदमयी नाम की लड़कियाँ सर्दी का मौसम खत्म होने के बाद जन्म लेते हैं। आनंदमयी नाम की लड़कियाँ नींद से जुड़ी समस्याएं, दांतों में दर्द, बुखार आना, चोट लगना, खून के साफ़ न होने की वजह से होने वाले रोग आदि से ग्रस्त होने की सम्भावना अधिक होती है। आनंदमयी नाम की लड़कियों के मस्तिष्क, जबड़े और चेहरे बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। आनंदमयी नाम की लड़कियाँ अकसर खाने पीने में अनियमितता बरतते हैं और पाचन तंत्र के गड़बड़ी का शिकार हो जाते हैं। आनंदमयी नाम की लड़कियों में काम करने का जुनून होता है और ये किसी भी चीज़ की पहल करने से कतराते नहीं हैं। अगर आप अपने बच्चे का नाम आनंदमयी रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि आनंदमयी का मतलब खुशी से भरे, खुशी से भरा हुआ होता है। अपनी संतान को आनंदमयी नाम देकर आप उसके जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं। अगर आप अपने बच्चे को आनंदमयी नाम देते हैं तो जीवनभर के लिए उसका संबंध इस नाम के मतलब यानी खुशी से भरे, खुशी से भरा हुआ से हो जाएगा। वेदों में भी ये बात कही गई कि शिशु को आनंदमयी देने से पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। कुछ सामाजिक अवधारणाओं के अनुसार आनंदमयी नाम का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा होता है, यानी कि आनंदमयी नाम का अर्थ खुशी से भरे, खुशी से भरा हुआ है तो आपके स्वभाव में भी इसकी झलक दिखेगी। आगे आनंदमयी नाम की राशि, आनंदमयी का लकी नंबर व इस नाम के खुशी से भरे, खुशी से भरा हुआ के बारे में संक्षेप में बताया है। मंगल आनंदमयी नाम का ग्रह स्वामी है जबकि इसका शुभ अंक नौ है। मुश्किलों का सामना हिम्मत और जज्बे से करती हैं आनंदमयी नाम वाली महिलाएं। इनको किसी काम की शुरूआत में मेहनत करनी पड़ती है, पर अंत में आनंदमयी नाम की लड़कियों को सफलता हासिल होती है। आनंदमयी नाम वाली लड़कियां निडर होती हैं और कभी-कभी ये इनके लिए मुसीबत का कारण भी बन जाता है। इनमें नेतृत्व करने का गुण होता है और आनंदमयी नाम की महिलाएं बेहतरीन नेता बनने का गुण रखती हैं। नौ अंक वाली आनंदमयी नाम की लड़कियों को दोस्ती ही नहीं, दुश्मनी भी अच्छी तरह निभानी आती है। आनंदमयी नाम के व्यक्ति की राशि मेष होती है और ये साहसी, आत्मविश्वासी, महत्वाकांक्षी व जिज्ञासु होते हैं। आनंदमयी की महिलाएं खतरों से खेलने का शौक रखती हैं। कोई भी नया कार्य शुरू करने में आनंदमयी नाम के युवतियां सबसे आगे रहती हैं। इन्हें चुनौतियों का सामना करना पसंद होता है। आनंदमयी नाम की महिलाओं में कभी भी ऊर्जा की कमी नहीं होती है। मेष राशि से सम्बंधित आनंदमयी नाम की महिलाएं हठी और घमंडी किस्म की होती हैं। आनंदमयी नाम महिलाओं को अपने करियर से समझौता करना पसंद नहीं होता है। पैसों के मामले में भी ये किसी पर भरोसा नहीं करती। ।सूर्य, सूर्य के प्रभु, सूर्य देवता ।सूर्य का पुत्र
|
भारतीय घरों में मक्के (कॉर्न) के आटा का इस्तेमाल रोटी बनाने के लिए किया जाता है। जो खाने में काफी स्वादिष्ट लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं सर्दियों के मौसम में मक्के के आटे का सेवन सेहत को भी कई लाभ पहुंचाता है। जी हां क्योंकि मक्के का आटा पोषक तत्वों से भरपूर होता है। सर्दियों के मौसम में मक्के के आटे का सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है। क्योंकि मक्के के आटे में फाइबर की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, साथ ही मक्के के आटे में विटामिन ए, विटामिन बी, और विटामिन ई, आयरन, कॉपर, जिंक, मैग्नीशियम, सेलेनियम पोटेशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो आपको कई रोगों से बचाने में मदद करता है। तो आइए जानते हैं सर्दियों में मक्के का आटा खाने के क्या-क्या फायदे होते हैं।
सर्दियों के मौसम में मक्के के आटे का सेवन आंखों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि मक्के का आटा विटामिन ए से भरपूर होता है, जो आंखों की रोशनी (Eye Sight) में सुधार करने में मदद करता है, साथ ही इसके सेवन से आंखों से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती है।
कब्ज (Constipation) की शिकायत होने पर मक्के के आटे का सेवन फायदेमंद होता है। क्योंकि मक्के का आटा फाइबर से भरपूर होता है, जो मल को मुलायम बनाता है और कब्ज की समस्या को दूर करने में मददगार होता है।
सर्दियों के मौसम में कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) बढ़ने की समस्या ज्यादा लोगों में देखी जाती है, लेकिन कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर अगर आप मक्के के आटे का सेवन करते हैं, तो इससे खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। जिससे हार्ट संबंधी बीमारियों का जोखिम कम होता है।
शरीर में खून की कमी यानि एनीमिया (Anemia) की शिकायत होने पर मक्के के आटे का सेवन फायदेमंद होता है। क्योंकि मक्के का आटा आयरन से भरपूर होता है, जो हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे खून की कमी दूर होती है।
अगर आप अपने बढ़ते वजन (Weight) से परेशान हैं और वजन कम करना चाहते हैं, तो आपको मक्के के आटे का सेवन करना चाहिए। क्योंकि मक्के का आटा फाइबर से भरपूर होता है, जो वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।
ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) की समस्या होने पर मक्के के आटे का सेवन फायदेमंद होता है। क्योंकि मक्के के आटे में पोटेशियम और विटामिन बी पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
|
भारतीय घरों में मक्के के आटा का इस्तेमाल रोटी बनाने के लिए किया जाता है। जो खाने में काफी स्वादिष्ट लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं सर्दियों के मौसम में मक्के के आटे का सेवन सेहत को भी कई लाभ पहुंचाता है। जी हां क्योंकि मक्के का आटा पोषक तत्वों से भरपूर होता है। सर्दियों के मौसम में मक्के के आटे का सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है। क्योंकि मक्के के आटे में फाइबर की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, साथ ही मक्के के आटे में विटामिन ए, विटामिन बी, और विटामिन ई, आयरन, कॉपर, जिंक, मैग्नीशियम, सेलेनियम पोटेशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो आपको कई रोगों से बचाने में मदद करता है। तो आइए जानते हैं सर्दियों में मक्के का आटा खाने के क्या-क्या फायदे होते हैं। सर्दियों के मौसम में मक्के के आटे का सेवन आंखों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि मक्के का आटा विटामिन ए से भरपूर होता है, जो आंखों की रोशनी में सुधार करने में मदद करता है, साथ ही इसके सेवन से आंखों से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती है। कब्ज की शिकायत होने पर मक्के के आटे का सेवन फायदेमंद होता है। क्योंकि मक्के का आटा फाइबर से भरपूर होता है, जो मल को मुलायम बनाता है और कब्ज की समस्या को दूर करने में मददगार होता है। सर्दियों के मौसम में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या ज्यादा लोगों में देखी जाती है, लेकिन कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर अगर आप मक्के के आटे का सेवन करते हैं, तो इससे खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। जिससे हार्ट संबंधी बीमारियों का जोखिम कम होता है। शरीर में खून की कमी यानि एनीमिया की शिकायत होने पर मक्के के आटे का सेवन फायदेमंद होता है। क्योंकि मक्के का आटा आयरन से भरपूर होता है, जो हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे खून की कमी दूर होती है। अगर आप अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं और वजन कम करना चाहते हैं, तो आपको मक्के के आटे का सेवन करना चाहिए। क्योंकि मक्के का आटा फाइबर से भरपूर होता है, जो वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर मक्के के आटे का सेवन फायदेमंद होता है। क्योंकि मक्के के आटे में पोटेशियम और विटामिन बी पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
|
नई दिल्ली : भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में कप्तान कोहली ने उमेश यादव और युवा शार्दुल के कंधो पर तेज़ गेंदबाज़ी का भार सौंपा. लेकिन शार्दुल के चोटिल होने के बाद अकेले दम पर उमेश ने पूरी जिम्मेदारी उठा ली.
इस जिम्मेदारी के मिलते ही उमेश यादव ने अपने टेस्ट करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम भी दर्ज करवा लिया है. उमेश ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ इस टेस्ट में 88 रन देकर 6 विकेट चटकाए जो टेस्ट क्रिकेट में उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.
इस प्रदर्शन के साथ वो पिछले 5 सालों में भारत में एक पारी में 5 विकेट चटकाने वाले तीसरे गेंदबाज़ बन गए हैं. उनके अलावा पिछले 5 सालों में ऐसा सिर्फ मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार ही कर पाए हैं.
इसके साथ ही वो भारत के 14वें तेज़ गेंदबाज़ भी बन गए हैं जिन्होंने एक पारी में छह विकेट चटकाए हैं लेकिन सबसे अहम बात ये है कि भारत की सरज़मीं पर 1999 के बाद ये पहला मौका है जब किसी भारतीय तेज़ गेंदबाज़ ने एक पारी में छह विकेट चटकाए हैं. इससे पहले जवागल श्रीनाथ ने साल 1999 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ एक पारी में छह विकेट चटकाए थे.
आपको बता दें कि विडींज टीम 311 रन पर ऑलआउट हो गई है। वेस्टइंडीज ने दिन की शुरुआत सात विकेट के नुकसान पर 295 रनों के साथ की थी. दूसरे दिन की शुरुआत में ही उमेश यादव ने देवेन्द्र बिशु को बोल्ड कर दिया. इसके बाद 98 रनों के स्कोर पर खेलने उतरे रोस्टन चेज ने अगले ओवर में अपना शतक पूरा किया लेकिन इसके बाद वाले ओवर में वह उमेश की गेंद पर बोल्ड हो गए.
उन्होंने अपनी पारी में 189 गेंदें खेली और आठ चौकों के अलावा एक छक्का लगाया. मेहमान टीम के लिए सबसे ज्यादा 106 रन रोस्टन चेज ने बनाए. कप्तान जेसन होल्डर ने 52 रनों का योगदान दिया.
|
नई दिल्ली : भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में कप्तान कोहली ने उमेश यादव और युवा शार्दुल के कंधो पर तेज़ गेंदबाज़ी का भार सौंपा. लेकिन शार्दुल के चोटिल होने के बाद अकेले दम पर उमेश ने पूरी जिम्मेदारी उठा ली. इस जिम्मेदारी के मिलते ही उमेश यादव ने अपने टेस्ट करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम भी दर्ज करवा लिया है. उमेश ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ इस टेस्ट में अठासी रन देकर छः विकेट चटकाए जो टेस्ट क्रिकेट में उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. इस प्रदर्शन के साथ वो पिछले पाँच सालों में भारत में एक पारी में पाँच विकेट चटकाने वाले तीसरे गेंदबाज़ बन गए हैं. उनके अलावा पिछले पाँच सालों में ऐसा सिर्फ मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार ही कर पाए हैं. इसके साथ ही वो भारत के चौदहवें तेज़ गेंदबाज़ भी बन गए हैं जिन्होंने एक पारी में छह विकेट चटकाए हैं लेकिन सबसे अहम बात ये है कि भारत की सरज़मीं पर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के बाद ये पहला मौका है जब किसी भारतीय तेज़ गेंदबाज़ ने एक पारी में छह विकेट चटकाए हैं. इससे पहले जवागल श्रीनाथ ने साल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ एक पारी में छह विकेट चटकाए थे. आपको बता दें कि विडींज टीम तीन सौ ग्यारह रन पर ऑलआउट हो गई है। वेस्टइंडीज ने दिन की शुरुआत सात विकेट के नुकसान पर दो सौ पचानवे रनों के साथ की थी. दूसरे दिन की शुरुआत में ही उमेश यादव ने देवेन्द्र बिशु को बोल्ड कर दिया. इसके बाद अट्ठानवे रनों के स्कोर पर खेलने उतरे रोस्टन चेज ने अगले ओवर में अपना शतक पूरा किया लेकिन इसके बाद वाले ओवर में वह उमेश की गेंद पर बोल्ड हो गए. उन्होंने अपनी पारी में एक सौ नवासी गेंदें खेली और आठ चौकों के अलावा एक छक्का लगाया. मेहमान टीम के लिए सबसे ज्यादा एक सौ छः रन रोस्टन चेज ने बनाए. कप्तान जेसन होल्डर ने बावन रनों का योगदान दिया.
|
NewDelhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जी-7 शिखर सम्मेलन में एक धरती, एक स्वास्थ्य (One Earth, One Health) का मंत्र दिया. इस पर भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने तंज कसा कि क्या यह संदेश मांगा गया था? दरअसल सोशल मीडिया पर एक यूजर ने इससे जुड़ी खबर शेयर करते हुए भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को टैग कर दिया. इस पर स्वामी की प्रतिक्रिया आयी कि क्या यह संदेश मांगा गया था?
बता दें कि @GurudathShettyK ने सुब्रमण्यम स्वामी को टैग करते हुए लिखा कि प्रिय स्वामी जी, प्रधानमंत्री मोदी ने जी-7 सम्मलेन के अपने संदेश में वन अर्थ, वन हेल्थ की बात कही है. इस पर स्वामी ने कहा कि क्या यह संदेश मांगा गया था?
बता दें कि G-7 समिट में पीएम मोदी ने वन अर्थ-वन हेल्थ के विजन के साथ सभी देशों को एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया. G-7 देशों को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य में महामारी रोकने के लिए वैश्विक एकजुटता, नेतृत्व और तालमेल सबसे अधिक जरूरी है. महामारी से बचाने के लिए सभी देशों को पेटेंट छोड़ना होगा ताकि सभी की वैक्सीन की जरूरतें पूरी हो सके. पीएम डिजिटल सत्र को संबोधित कर रहे थे.
रविवार को पीएम मोदी जी-7 समिट के दूसरे सत्र में भी शामिल होंगे. जान लें कि जी-7 में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल हैं. जी-7 की अध्यक्षता कर रहे ब्रिटेन ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को अतिथि देश के तौर पर आमंत्रित किया है.
पीएम मोदी ने समिट में जी-7 देशों को एकजुट होकर महामारी से बचने के लिए अधिक से अधिक वैक्सीनेशन पर जोर दिया. इसके लिए डब्ल्यूटीओ को प्रस्ताव दिया कि वैक्सीन बनाने के लिए देशों को पेटेंट में छूट होनी चाहिए. प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए पेटेंट में छूट की भारत की मांग का अन्य देशों ने समर्थन किया. पीएम ने कहा कि बैठक से समूचे विश्व के लिए एक धरती, एक स्वास्थ्य का संदेश जाना चाहिए.
|
NewDelhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जी-सात शिखर सम्मेलन में एक धरती, एक स्वास्थ्य का मंत्र दिया. इस पर भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने तंज कसा कि क्या यह संदेश मांगा गया था? दरअसल सोशल मीडिया पर एक यूजर ने इससे जुड़ी खबर शेयर करते हुए भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को टैग कर दिया. इस पर स्वामी की प्रतिक्रिया आयी कि क्या यह संदेश मांगा गया था? बता दें कि @GurudathShettyK ने सुब्रमण्यम स्वामी को टैग करते हुए लिखा कि प्रिय स्वामी जी, प्रधानमंत्री मोदी ने जी-सात सम्मलेन के अपने संदेश में वन अर्थ, वन हेल्थ की बात कही है. इस पर स्वामी ने कहा कि क्या यह संदेश मांगा गया था? बता दें कि G-सात समिट में पीएम मोदी ने वन अर्थ-वन हेल्थ के विजन के साथ सभी देशों को एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया. G-सात देशों को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य में महामारी रोकने के लिए वैश्विक एकजुटता, नेतृत्व और तालमेल सबसे अधिक जरूरी है. महामारी से बचाने के लिए सभी देशों को पेटेंट छोड़ना होगा ताकि सभी की वैक्सीन की जरूरतें पूरी हो सके. पीएम डिजिटल सत्र को संबोधित कर रहे थे. रविवार को पीएम मोदी जी-सात समिट के दूसरे सत्र में भी शामिल होंगे. जान लें कि जी-सात में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल हैं. जी-सात की अध्यक्षता कर रहे ब्रिटेन ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को अतिथि देश के तौर पर आमंत्रित किया है. पीएम मोदी ने समिट में जी-सात देशों को एकजुट होकर महामारी से बचने के लिए अधिक से अधिक वैक्सीनेशन पर जोर दिया. इसके लिए डब्ल्यूटीओ को प्रस्ताव दिया कि वैक्सीन बनाने के लिए देशों को पेटेंट में छूट होनी चाहिए. प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए पेटेंट में छूट की भारत की मांग का अन्य देशों ने समर्थन किया. पीएम ने कहा कि बैठक से समूचे विश्व के लिए एक धरती, एक स्वास्थ्य का संदेश जाना चाहिए.
|
Ranchi : ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी खेलो इंडिया गेम्स के तीरंदाजी स्पर्धा में झारखंड की अंशिका कुमारी ने स्वर्ण पदक जीता है. 25 मई से 3 जून तक लखनऊ में आयोजित प्रतियोगिता में शुक्रवार को रिकर्व महिला वर्ग के फाइनल में गुजरात की भार्गवी को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया. बता दें कि झारखंड की अंशिका कुमारी कोल्हान यूनिवर्सिटी की छात्रा है. वर्तमान में एकलव्य तीरंदाजी एकेडमी सेल किरीबुरू में तीरंदाजी करती है. स्वर्ण पदक जीतने पर अंशिका को खेल निदेशक डॉ सरोजिनी लकड़ा ने बधाई और शुभकामनाएं दी. साथ ही झारखंड के सभी तीरंदाजी प्रशिक्षकों के अलावा झारखंड के खेल प्रेमियों ने बधाई दी.
|
Ranchi : ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी खेलो इंडिया गेम्स के तीरंदाजी स्पर्धा में झारखंड की अंशिका कुमारी ने स्वर्ण पदक जीता है. पच्चीस मई से तीन जून तक लखनऊ में आयोजित प्रतियोगिता में शुक्रवार को रिकर्व महिला वर्ग के फाइनल में गुजरात की भार्गवी को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया. बता दें कि झारखंड की अंशिका कुमारी कोल्हान यूनिवर्सिटी की छात्रा है. वर्तमान में एकलव्य तीरंदाजी एकेडमी सेल किरीबुरू में तीरंदाजी करती है. स्वर्ण पदक जीतने पर अंशिका को खेल निदेशक डॉ सरोजिनी लकड़ा ने बधाई और शुभकामनाएं दी. साथ ही झारखंड के सभी तीरंदाजी प्रशिक्षकों के अलावा झारखंड के खेल प्रेमियों ने बधाई दी.
|
भाजपा प्रत्याशी महेश जीना ने सल्ट विधानसभा उपचुनाव जीत लिया है। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस की गंगा पंचोली को 4697 मतों से हराया। तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा 721 वोट नोटा को पड़े। बाकी के सभी प्रत्याशी 700 वोटों के आंकड़े में ही सिमट कर रह गए और जमानत भी नहीं बचा पाए। कांग्रेस प्रत्याशी ने मतगणना में धांधली का आरोप लगाया। इसके चलते नतीजे आने में देरी भी हुई।
जीआईसी भिकियासैंण में रविवार सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई। पहले चक्र से ही भाजपा प्रत्याशी कांग्रेस प्रत्याशी से बढ़त बना ली थी। यह बढ़त आखिरी राउंड तक जारी रही। कुल 12 राउंड की गिनती के बाद भाजपा प्रत्याशी महेश जीना ने कांग्रेस को चार हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया।
महेश जीना को 21874 मत मिले, जबकि गंगा पंचोली को 17177 मतों पर संतोष करना पड़ा। इधर, कांग्रेस प्रत्याशी ने मतगणना में धांधली का आरोप लगाते हुए पांचवे राउंड की गिनती के बाद हंगामा काट दिया। इससे मतगणना में एक घंटे का व्यवधान हुआ। इसके बाद आठवें और 11वें राउंड की गिनती के बाद फिर कांग्रेसियों ने हंगामा किया।
इसके चलते अंतिम नतीजे आने में देरी भी हुई। इस दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी नितिन भदौरिया और एसएसपी पंकज भट्ट मतगणना केंद्र पर ही मौजूद रहे। विजय जुलूस पर पाबंदी के चलते भाजपाइयों ने महेश जीना को मिठाई खिलाने के साथ ही कुछ जगहों पर पटाखे फोड़ जीत की खुशी मनाई।
बता दें कि सल्ट विधानसभा सीट के उपचुनाव के नतीजे ज्यादा चौंकाने वाले नहीं रहे। भाजपा ने जो सहानुभूति का कार्ड चला था वह काम कर गया और यह सीट एक बार फिर से भाजपा की झोली में आ गिरी।
इससे पहले महेश जीना के भाई दिवंगत सुरेंद्र सिंह जीना सल्ट से दो बार लगातार चुनाव जीते हैं और अब एक बार फिर यह सीट भाजपा ने जीत ली है। दूसरी ओर, कांग्रेस की हार का सिलसिला जारी रहा। वह पिथौरागढ़ में हुए उपचुनाव के बाद इस सीट पर हार का मुंह देखने पड़ा।
विधानसभा चुनाव से करीब 10 माह पहले यह उपचुनाव भाजपा के लिए राहत भरे रहे। बूथ स्तर पर ही युद्ध स्तर की रणनीति ने भाजपा को इस चुनाव में आगे कर दिया। भाजपा नेताओं ने जब महेश जीना को टिकट दिया था तब से ही यह तय कर लिया था कि वह खुलकर उनके बड़े भाई सुरेंद्र जीना के नाम पर वोट मांगेगी।
भाजपा प्रत्याशी महेश जीना से लेकर सीएम तीरथ सिंह रावत ने तक ने जनता से सुरेंद्र जीना के नाम पर वोट मांगे और सहानुभूति का कार्ड असर गया। इधर, कांग्रेस प्रत्याशी ने जनता से जुड़े मुद्दों पर वोट मांगे।
|
भाजपा प्रत्याशी महेश जीना ने सल्ट विधानसभा उपचुनाव जीत लिया है। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस की गंगा पंचोली को चार हज़ार छः सौ सत्तानवे मतों से हराया। तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा सात सौ इक्कीस वोट नोटा को पड़े। बाकी के सभी प्रत्याशी सात सौ वोटों के आंकड़े में ही सिमट कर रह गए और जमानत भी नहीं बचा पाए। कांग्रेस प्रत्याशी ने मतगणना में धांधली का आरोप लगाया। इसके चलते नतीजे आने में देरी भी हुई। जीआईसी भिकियासैंण में रविवार सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई। पहले चक्र से ही भाजपा प्रत्याशी कांग्रेस प्रत्याशी से बढ़त बना ली थी। यह बढ़त आखिरी राउंड तक जारी रही। कुल बारह राउंड की गिनती के बाद भाजपा प्रत्याशी महेश जीना ने कांग्रेस को चार हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया। महेश जीना को इक्कीस हज़ार आठ सौ चौहत्तर मत मिले, जबकि गंगा पंचोली को सत्रह हज़ार एक सौ सतहत्तर मतों पर संतोष करना पड़ा। इधर, कांग्रेस प्रत्याशी ने मतगणना में धांधली का आरोप लगाते हुए पांचवे राउंड की गिनती के बाद हंगामा काट दिया। इससे मतगणना में एक घंटे का व्यवधान हुआ। इसके बाद आठवें और ग्यारहवें राउंड की गिनती के बाद फिर कांग्रेसियों ने हंगामा किया। इसके चलते अंतिम नतीजे आने में देरी भी हुई। इस दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी नितिन भदौरिया और एसएसपी पंकज भट्ट मतगणना केंद्र पर ही मौजूद रहे। विजय जुलूस पर पाबंदी के चलते भाजपाइयों ने महेश जीना को मिठाई खिलाने के साथ ही कुछ जगहों पर पटाखे फोड़ जीत की खुशी मनाई। बता दें कि सल्ट विधानसभा सीट के उपचुनाव के नतीजे ज्यादा चौंकाने वाले नहीं रहे। भाजपा ने जो सहानुभूति का कार्ड चला था वह काम कर गया और यह सीट एक बार फिर से भाजपा की झोली में आ गिरी। इससे पहले महेश जीना के भाई दिवंगत सुरेंद्र सिंह जीना सल्ट से दो बार लगातार चुनाव जीते हैं और अब एक बार फिर यह सीट भाजपा ने जीत ली है। दूसरी ओर, कांग्रेस की हार का सिलसिला जारी रहा। वह पिथौरागढ़ में हुए उपचुनाव के बाद इस सीट पर हार का मुंह देखने पड़ा। विधानसभा चुनाव से करीब दस माह पहले यह उपचुनाव भाजपा के लिए राहत भरे रहे। बूथ स्तर पर ही युद्ध स्तर की रणनीति ने भाजपा को इस चुनाव में आगे कर दिया। भाजपा नेताओं ने जब महेश जीना को टिकट दिया था तब से ही यह तय कर लिया था कि वह खुलकर उनके बड़े भाई सुरेंद्र जीना के नाम पर वोट मांगेगी। भाजपा प्रत्याशी महेश जीना से लेकर सीएम तीरथ सिंह रावत ने तक ने जनता से सुरेंद्र जीना के नाम पर वोट मांगे और सहानुभूति का कार्ड असर गया। इधर, कांग्रेस प्रत्याशी ने जनता से जुड़े मुद्दों पर वोट मांगे।
|
आईपीएल 2018 का सीजन काफी शानदार साबित हो रहा है. इसके हर मैच में कुछ नया देखने को मिलता है. सभी टीम आईपीएल का खिताब अपने नाम करने की कोशिशों में जुटी हुई हैं. उससे पहले टीमों को प्ले ऑफ में जाने की चिंता सता रही है.
साथ ही आईपीएल एक ऐसा मंच है जिसमें खिलाड़ी हर रोज़ नया रिकॉर्ड अपने नाम करते हैं. उसी रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए दूसरे खिलाड़ी कोशिशों में जुट जाते हैं. पर कुछ ऐसे भी खिलाड़ी हैं जो आईपीएल में अपना नाम अच्छा न कर खराब तरह से संजो रहे हैं. ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं रॉयल चैलेंजर बैंगलोर टीम के टिम साउथी.
बैंगलोर के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में सनरईसर्स हैदराबाद के खिलाफ खेले गए मैच में बैंगलोर के गेंदबाज साउथी को खिलाड़ियों के लिए जारी नियमों के तहत 2. 1. 8 के लेवल-1 नियम का दोषी पाया गया है. उनकी टीम के अधिकारियों ने इसे मंजूर कर लिया है.
साउदी ने अपनी गलती मानी है और अब इस मामले का आखिरी फैसला मैच रेफरी करेंगे. साथ ही उन्हें आईपीएल की आचार सहिता के उल्लंघन के लिए फटकार लगाई गई है. आईपीएल मीडिया की ओर से शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए इसकी जानकारी दी गई.
हालांकि इस घटना के ब्योरे को प्रकट नहीं किया गया है. 29 वर्षीय ने हैदराबाद की पारी में तीसरे ओवर में कैच पकड़ने का दावा किया था. पर उनकी गेंद हाथ में आने की जगह जमीन से जा लगी थी. जिसके बाद थर्ड एम्पायर ने फैसला हैदराबाद के हक़ में सुनाया था और साउथी को इसके परिणामस्वरूप सजा का हकदार माना जा रहा है.
पहले बल्लेबाजी करते हुए बैंगलोर टीम ने एबी डीविलियर्स ने 69 रन मोईन अली ने 65 और ग्रेंडहोम ने 40 रन की पारियों की मदद से 6 विकेट खोकर 218 रनों का स्कोर खड़ा किया. 219 के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स टीम की तरफ के कप्तान केन विलियमसन ने सबसे ज्यादा 81 रनों की पारी खेली, वहीं मनीष पांडे ने भी 62 रन बनाए. हालांकि इसके बाद भी टीम 20 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर केवल 204 रन ही बना सकी.
|
आईपीएल दो हज़ार अट्ठारह का सीजन काफी शानदार साबित हो रहा है. इसके हर मैच में कुछ नया देखने को मिलता है. सभी टीम आईपीएल का खिताब अपने नाम करने की कोशिशों में जुटी हुई हैं. उससे पहले टीमों को प्ले ऑफ में जाने की चिंता सता रही है. साथ ही आईपीएल एक ऐसा मंच है जिसमें खिलाड़ी हर रोज़ नया रिकॉर्ड अपने नाम करते हैं. उसी रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए दूसरे खिलाड़ी कोशिशों में जुट जाते हैं. पर कुछ ऐसे भी खिलाड़ी हैं जो आईपीएल में अपना नाम अच्छा न कर खराब तरह से संजो रहे हैं. ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं रॉयल चैलेंजर बैंगलोर टीम के टिम साउथी. बैंगलोर के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में सनरईसर्स हैदराबाद के खिलाफ खेले गए मैच में बैंगलोर के गेंदबाज साउथी को खिलाड़ियों के लिए जारी नियमों के तहत दो. एक. आठ के लेवल-एक नियम का दोषी पाया गया है. उनकी टीम के अधिकारियों ने इसे मंजूर कर लिया है. साउदी ने अपनी गलती मानी है और अब इस मामले का आखिरी फैसला मैच रेफरी करेंगे. साथ ही उन्हें आईपीएल की आचार सहिता के उल्लंघन के लिए फटकार लगाई गई है. आईपीएल मीडिया की ओर से शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए इसकी जानकारी दी गई. हालांकि इस घटना के ब्योरे को प्रकट नहीं किया गया है. उनतीस वर्षीय ने हैदराबाद की पारी में तीसरे ओवर में कैच पकड़ने का दावा किया था. पर उनकी गेंद हाथ में आने की जगह जमीन से जा लगी थी. जिसके बाद थर्ड एम्पायर ने फैसला हैदराबाद के हक़ में सुनाया था और साउथी को इसके परिणामस्वरूप सजा का हकदार माना जा रहा है. पहले बल्लेबाजी करते हुए बैंगलोर टीम ने एबी डीविलियर्स ने उनहत्तर रन मोईन अली ने पैंसठ और ग्रेंडहोम ने चालीस रन की पारियों की मदद से छः विकेट खोकर दो सौ अट्ठारह रनों का स्कोर खड़ा किया. दो सौ उन्नीस के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स टीम की तरफ के कप्तान केन विलियमसन ने सबसे ज्यादा इक्यासी रनों की पारी खेली, वहीं मनीष पांडे ने भी बासठ रन बनाए. हालांकि इसके बाद भी टीम बीस ओवर में तीन विकेट के नुकसान पर केवल दो सौ चार रन ही बना सकी.
|
1 सातवां आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप अब चंद घंटे दूर है. ऑस्ट्रेलिया में खेला जाने वाला यह टूर्नामेंट शुक्रवार को शुरू होने जा रहा है. इस टूर्नामेंट में भारत समेत 10 टीमें हिस्सा ले रही हैं 2 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बुधवार को एक बयान जारी कर बताया है कि अमेरिका के निसर्ग पटेल के गेंदबाजी एक्शन की स्वतंत्र जांच की गई, जिसमें उनके एक्शन को गलत पाया गया है और इसलिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में तुरंत प्रभाव से गेंदबाजी करने से प्रतिबंधित किया जाता है. 3 भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के साथ टेस्ट सीरीज के शुरू होने से पहले बुधवार को यहां भारतीय दूतावास का दौरा किया. इस अवसर पर भारतीय कप्तान विराट कोहली ने दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों और सम्मान की बात की. 4 अहमदाबाद के मोटेरा में सरदार पटेल स्टेडियम जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम बन जाएगा. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने मगंलवार को दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम मोटेरा की फोटो शेयर की. इस फोटो ने प्रशंसकों को खुश कर दिया. इस स्टेडियम में 1 लाख 10 हजार लोगों के बैठने की क्षमता है 5 ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली का कहना है कि भारतीय महिला टीम टी-20 विश्व कप में चौथा आयाम जोड़ेगी. उन्होंने आगे कहा कि शुक्रवार से शुरू होने जा रही प्रतियोगिता का पहला मुकाबला ऑस्ट्रेलिया और भारतीय टीम के बीच खेला जाना है जो कि टूर्नामेंट के लिए आगे की राह तय करेगा.
|
एक सातवां आईसीसी महिला टीबीस वर्ल्ड कप अब चंद घंटे दूर है. ऑस्ट्रेलिया में खेला जाने वाला यह टूर्नामेंट शुक्रवार को शुरू होने जा रहा है. इस टूर्नामेंट में भारत समेत दस टीमें हिस्सा ले रही हैं दो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बुधवार को एक बयान जारी कर बताया है कि अमेरिका के निसर्ग पटेल के गेंदबाजी एक्शन की स्वतंत्र जांच की गई, जिसमें उनके एक्शन को गलत पाया गया है और इसलिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में तुरंत प्रभाव से गेंदबाजी करने से प्रतिबंधित किया जाता है. तीन भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के साथ टेस्ट सीरीज के शुरू होने से पहले बुधवार को यहां भारतीय दूतावास का दौरा किया. इस अवसर पर भारतीय कप्तान विराट कोहली ने दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों और सम्मान की बात की. चार अहमदाबाद के मोटेरा में सरदार पटेल स्टेडियम जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम बन जाएगा. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने मगंलवार को दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम मोटेरा की फोटो शेयर की. इस फोटो ने प्रशंसकों को खुश कर दिया. इस स्टेडियम में एक लाख दस हजार लोगों के बैठने की क्षमता है पाँच ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली का कहना है कि भारतीय महिला टीम टी-बीस विश्व कप में चौथा आयाम जोड़ेगी. उन्होंने आगे कहा कि शुक्रवार से शुरू होने जा रही प्रतियोगिता का पहला मुकाबला ऑस्ट्रेलिया और भारतीय टीम के बीच खेला जाना है जो कि टूर्नामेंट के लिए आगे की राह तय करेगा.
|
Lakhimpur Violence तीन अक्तूबर को शांतिमय तरीके से प्रदर्शन कर रहे किसानों पर भाजपा नेता द्वारा गाड़ी चढ़ाने और चार किसानों की मौत के बाद भड़की हिंसा केस में मुख्यारोपी आशीष मिश्र को जमानत नहीं पाई। उसकी जमानत याचिका तीसरी बार खारिज हो गई।
इस केस में अगली सुनवाई अब दिवाली अवकाश के बाद 15 नवंबर को होगी। ज्ञात रहे कि आशीष मिश्र केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्र का बेटा है और लखीमपुर खीरी (तिकुनिया कांड) में मुख्यारोपी है।
आशीष पांडेय, लवकुश और आशीष मिश्र की जमानत अर्जी पर सुनवाई तीन नवंबर को जिला जज मुकेश मिश्र की अदालत में लगी हुई थी, जोकि टल गई। आशीष मिश्र के साथ मामले के दो अन्य आरोपी लवकुश और आशीष पांडे की जमानत अर्जी पर सुनवाई अब 15 नवंबर को होगी।
सभी 13 आरोपी जेल में रहेंगे (Lakhimpur Violence)
तिकुनिया कांड में मंगलवार को न्यायिक हिरासत पूरी होने पर पहली बार एक साथ तेरह हत्यारोपी सीजेएम अदालत में पेश हुए, जिन्हें अगले 14 दिन यानी 16 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
|
Lakhimpur Violence तीन अक्तूबर को शांतिमय तरीके से प्रदर्शन कर रहे किसानों पर भाजपा नेता द्वारा गाड़ी चढ़ाने और चार किसानों की मौत के बाद भड़की हिंसा केस में मुख्यारोपी आशीष मिश्र को जमानत नहीं पाई। उसकी जमानत याचिका तीसरी बार खारिज हो गई। इस केस में अगली सुनवाई अब दिवाली अवकाश के बाद पंद्रह नवंबर को होगी। ज्ञात रहे कि आशीष मिश्र केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्र का बेटा है और लखीमपुर खीरी में मुख्यारोपी है। आशीष पांडेय, लवकुश और आशीष मिश्र की जमानत अर्जी पर सुनवाई तीन नवंबर को जिला जज मुकेश मिश्र की अदालत में लगी हुई थी, जोकि टल गई। आशीष मिश्र के साथ मामले के दो अन्य आरोपी लवकुश और आशीष पांडे की जमानत अर्जी पर सुनवाई अब पंद्रह नवंबर को होगी। सभी तेरह आरोपी जेल में रहेंगे तिकुनिया कांड में मंगलवार को न्यायिक हिरासत पूरी होने पर पहली बार एक साथ तेरह हत्यारोपी सीजेएम अदालत में पेश हुए, जिन्हें अगले चौदह दिन यानी सोलह नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
|
- 22 min ago जब बिग बी के साथ रानी मुखर्जी ने दे दिया था लिप लॉक सीन, बोलीं- 'अमिताभ अंकल के साथ किसिंग सीन देना बहुत...'
Don't Miss!
- News PM मोदी ने किया पुनर्विकसित अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का उद्घाटन, जानें क्या-क्या है खासियत?
Falaq Naaz Cry Tunisha Sharma last rites:तुनिषा शर्मा सुसाइड केस में एक तरफ शीजान खान से लगातार सवालों का सिलसिला जारी है। तो वहीं 24 दिसंबर को हुई तुनिषा शर्मा के निधन के चार दिन बाद परिवार को पार्थिव शरीर दिया गया। टीवी की दुनिया के कई नामचीन चेहरे इस दौरान शमशान भूमि पर तुनिषा के लिए भावुक होते हुए दिखाई दिए। यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि इस मामले में पुलिस कस्टडी में मौजूद शीजान खान को भी अंतिम दर्शन के लिए लाया जाएगा।
लेकिन शीजान खान की जगह उनका पूरा परिवार तुनिषा को देखने शमशान घाट पहुंचा। शीजान खान की मां और दोनों बहनें फलक नाज और शफक नाज शमशान घाट पहुंचे। लेकिन इस दौरान जो नजारा देखने को मिला, उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। तुनिषा शर्मा और शीजान खान का रिश्ता उनके परिवार तक भी पहुंचा था। शीजान खान के परिवार के करीब थीं तुनिषा शर्मा।
खास तौर पर तुनिषा शर्मा और फलक नाज के बीच रिश्ता गहरा था। तुनिषा ने फलक के साथ अपनी कई सारी तस्वीरें भी इंस्टाग्राम पर साझा की हैं। ऐसे में जब फलक नाज ने शमशान भूमि पर तुनिषा शर्मा का पार्थिव शरीर देखा तो वह खुद को रोक नहीं पाईं। फलक नाज और शीजान खान की मां भी काफी भावुक दिखाई दीं। फलक नाज खुद को संभाल नहीं पाई और रोते भागते हुए शमशान भूमि से बाहर निकल गईं।
उनका यह वीडियो सामने आया है। आपको बता दें कि तुनिषा शर्मा की मां ने अलीबाबा शो के एक्टर शीजान खान पर उनकी बेटी को सुसाइड करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। बताया जाता है कि शीजान खान ही सबसे पहले तुनिषा शर्मा को अस्पताल लेकर पहुंचे थे। शूटिंग के दौरान चाय ब्रेक के समय शीजान खान के मेकअप रूम में ही तुनिषा शर्मा ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। पुलिस इस मामले में लगातार शीजान खान से ब्रेकअप की वजह और उनके रिश्ते पर कई सारे सवाल कर रही है।
|
- बाईस मिनट ago जब बिग बी के साथ रानी मुखर्जी ने दे दिया था लिप लॉक सीन, बोलीं- 'अमिताभ अंकल के साथ किसिंग सीन देना बहुत...' Don't Miss! - News PM मोदी ने किया पुनर्विकसित अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का उद्घाटन, जानें क्या-क्या है खासियत? Falaq Naaz Cry Tunisha Sharma last rites:तुनिषा शर्मा सुसाइड केस में एक तरफ शीजान खान से लगातार सवालों का सिलसिला जारी है। तो वहीं चौबीस दिसंबर को हुई तुनिषा शर्मा के निधन के चार दिन बाद परिवार को पार्थिव शरीर दिया गया। टीवी की दुनिया के कई नामचीन चेहरे इस दौरान शमशान भूमि पर तुनिषा के लिए भावुक होते हुए दिखाई दिए। यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि इस मामले में पुलिस कस्टडी में मौजूद शीजान खान को भी अंतिम दर्शन के लिए लाया जाएगा। लेकिन शीजान खान की जगह उनका पूरा परिवार तुनिषा को देखने शमशान घाट पहुंचा। शीजान खान की मां और दोनों बहनें फलक नाज और शफक नाज शमशान घाट पहुंचे। लेकिन इस दौरान जो नजारा देखने को मिला, उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। तुनिषा शर्मा और शीजान खान का रिश्ता उनके परिवार तक भी पहुंचा था। शीजान खान के परिवार के करीब थीं तुनिषा शर्मा। खास तौर पर तुनिषा शर्मा और फलक नाज के बीच रिश्ता गहरा था। तुनिषा ने फलक के साथ अपनी कई सारी तस्वीरें भी इंस्टाग्राम पर साझा की हैं। ऐसे में जब फलक नाज ने शमशान भूमि पर तुनिषा शर्मा का पार्थिव शरीर देखा तो वह खुद को रोक नहीं पाईं। फलक नाज और शीजान खान की मां भी काफी भावुक दिखाई दीं। फलक नाज खुद को संभाल नहीं पाई और रोते भागते हुए शमशान भूमि से बाहर निकल गईं। उनका यह वीडियो सामने आया है। आपको बता दें कि तुनिषा शर्मा की मां ने अलीबाबा शो के एक्टर शीजान खान पर उनकी बेटी को सुसाइड करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। बताया जाता है कि शीजान खान ही सबसे पहले तुनिषा शर्मा को अस्पताल लेकर पहुंचे थे। शूटिंग के दौरान चाय ब्रेक के समय शीजान खान के मेकअप रूम में ही तुनिषा शर्मा ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। पुलिस इस मामले में लगातार शीजान खान से ब्रेकअप की वजह और उनके रिश्ते पर कई सारे सवाल कर रही है।
|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 नवंबर मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन के वर्चुअल समिट में भाग लिया। समिट में पाकिस्तान, चीन,रुस समेत आठ सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया। भारत का चीन के साथ एलओसी पर काफी तनाव चल रहा है। इस बीच दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष वर्चुअल समिट में आमने-सामने आए। समिट की अध्य़क्षता रूस राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की।
आंतकवाद पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा कि "भारत का शांति, सुरक्षा और समृद्धि पर दृढ़ विश्वास है। और हमने हमेशा आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स और मनी लॉन्डरिंग के विरोध में आवाज उठाई है। भारत सीएओ चार्टर में निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार एससीओ के तहत काम करने की अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ रहा है"।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट में बोलते हुए कहा कि " यूनाटेड नेशन ने अपने 75 साल पूरे किए हैं। लेकिन अनेक सफलताओं के बाद भी संयुक्त राष्ट्र का मूल लक्ष्य अभी अधूरा है। महामारी की आर्थिक और सामाजिक पीड़ा से जूझ रहे विश्व की अपेक्षा है कि यूएन की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आए हैं"।
उन्होंने आगे कहा कि "अभूतपूर्व महामारी के इस अत्यंत कठिन समय में भारत के फार्मा उद्योग ने 150 से अधिक देशों को आवश्यक दवाएं भेजी हैं। दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के रूप में भारत अपनी वैक्सीन उत्पादन और वितरण क्षमता का उपयोग इस संकट से लड़ने में पूरी मानवता की मदद करने के लिए करेगा। परन्तु, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीएओ एजेंड़ा में बार-बार अनावश्यक रूप से द्विपक्षीय मुद्दों को लाने के प्रयास हो रहे हैं, जो सीएओ चार्टर और शंघाई स्प्रिट का उल्लंघन करते हैं। इस तरह के प्रयास एससीओ को परिभाषित करने वाली सर्वसम्मति और सहयोग की भावना के विपरीत हैं"।
|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दस नवंबर मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन के वर्चुअल समिट में भाग लिया। समिट में पाकिस्तान, चीन,रुस समेत आठ सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया। भारत का चीन के साथ एलओसी पर काफी तनाव चल रहा है। इस बीच दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष वर्चुअल समिट में आमने-सामने आए। समिट की अध्य़क्षता रूस राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की। आंतकवाद पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा कि "भारत का शांति, सुरक्षा और समृद्धि पर दृढ़ विश्वास है। और हमने हमेशा आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स और मनी लॉन्डरिंग के विरोध में आवाज उठाई है। भारत सीएओ चार्टर में निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार एससीओ के तहत काम करने की अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ रहा है"। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट में बोलते हुए कहा कि " यूनाटेड नेशन ने अपने पचहत्तर साल पूरे किए हैं। लेकिन अनेक सफलताओं के बाद भी संयुक्त राष्ट्र का मूल लक्ष्य अभी अधूरा है। महामारी की आर्थिक और सामाजिक पीड़ा से जूझ रहे विश्व की अपेक्षा है कि यूएन की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आए हैं"। उन्होंने आगे कहा कि "अभूतपूर्व महामारी के इस अत्यंत कठिन समय में भारत के फार्मा उद्योग ने एक सौ पचास से अधिक देशों को आवश्यक दवाएं भेजी हैं। दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के रूप में भारत अपनी वैक्सीन उत्पादन और वितरण क्षमता का उपयोग इस संकट से लड़ने में पूरी मानवता की मदद करने के लिए करेगा। परन्तु, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीएओ एजेंड़ा में बार-बार अनावश्यक रूप से द्विपक्षीय मुद्दों को लाने के प्रयास हो रहे हैं, जो सीएओ चार्टर और शंघाई स्प्रिट का उल्लंघन करते हैं। इस तरह के प्रयास एससीओ को परिभाषित करने वाली सर्वसम्मति और सहयोग की भावना के विपरीत हैं"।
|
हरिद्वार में 28 नवंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कनखल स्थित जगद्गुरु आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानन्द जी की मूर्ति का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म, संस्कृति और समाज का संरक्षण होना चाहिए। तीनों का एक-दूसरे से बहुत गहरा संबंध है। धर्म के संरक्षण से संस्कृति मजबूत होती है और जब संस्कृति सुरक्षित रहती है तो समाज भी अक्षुण्ण बना रहता है।
परमार्थ आश्रम के परमाध्यक्ष व पूर्व गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानन्द ने कहा कि आज हिन्दू समाज अपने अन्दर के बिखराव से पीडि़त है। आज कुछ राष्ट्र-विरोधी तत्व गड़बड़ी कर रहे हैं तो उसका भी कारण हमारे समाज के अन्दर का बिखराव ही है।
'संस्कृत का कार्य दैवीय कार्य है और प्रत्येक भाग्यशाली भारतीय इसका सम्मान ही करता है। 1947 से लेकर अब तक संस्कृत की अवहेलना ही हुई है। इस समृद्ध भाषा का दुर्भाग्य यह है कि कालिदास जैसे वैश्विक विद्वान का व्यक्तित्व एवं कृतित्व जनसाधारण तक नहीं पहंुच पाया है। जिस शून्य की कल्पना वेदों में है वह कुछ संस्कृतज्ञों ने इस भाषा में उपस्थित कर दिया है। जबकि वेद, पुराण, उपनिषद् समेत सारे संस्कृत वाङ्मय का सार्वकालिक महत्व है। '
|
हरिद्वार में अट्ठाईस नवंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कनखल स्थित जगद्गुरु आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानन्द जी की मूर्ति का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म, संस्कृति और समाज का संरक्षण होना चाहिए। तीनों का एक-दूसरे से बहुत गहरा संबंध है। धर्म के संरक्षण से संस्कृति मजबूत होती है और जब संस्कृति सुरक्षित रहती है तो समाज भी अक्षुण्ण बना रहता है। परमार्थ आश्रम के परमाध्यक्ष व पूर्व गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानन्द ने कहा कि आज हिन्दू समाज अपने अन्दर के बिखराव से पीडि़त है। आज कुछ राष्ट्र-विरोधी तत्व गड़बड़ी कर रहे हैं तो उसका भी कारण हमारे समाज के अन्दर का बिखराव ही है। 'संस्कृत का कार्य दैवीय कार्य है और प्रत्येक भाग्यशाली भारतीय इसका सम्मान ही करता है। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस से लेकर अब तक संस्कृत की अवहेलना ही हुई है। इस समृद्ध भाषा का दुर्भाग्य यह है कि कालिदास जैसे वैश्विक विद्वान का व्यक्तित्व एवं कृतित्व जनसाधारण तक नहीं पहंुच पाया है। जिस शून्य की कल्पना वेदों में है वह कुछ संस्कृतज्ञों ने इस भाषा में उपस्थित कर दिया है। जबकि वेद, पुराण, उपनिषद् समेत सारे संस्कृत वाङ्मय का सार्वकालिक महत्व है। '
|
A p
भावार्थ - मस्तक पर मोर मुकुट, कमर में पीताम्बर र हृदय पर सुन्दर वनमाला धारण किये हुए, गाते हुए श्रीकृष्ण को ग्राज गोपियों ने मार्ग में ग्राते हुए देखा ।
जो कविता में आदरत, साहित रीति बिचार । सो निहार लघु करि कह्यौ, निज मति के अनुसार ।।१७।। शब्दार्थ - आदरत - आदर करता हूँ । साहित= साहित्य, शास्त्र । रीति = रीति ग्रन्थ । निहार = देखकर । लघु = छोटा । मति = बुद्धि । भावार्थ - विक्रम कवि कहते हैं कि साहित्य-शास्त्र और रीतिग्रन्थों के आधार पर मैं जिस कविता का आदर करता हूँ, उसी को मैंने अपनी बुद्धि के अनुसार इस छोटे से दोहे छंद में कहा है ।
मनभावन आवन भवन, सुख सरसावन काज । सावन बरसावन सुखनि, समय सुहावन आज ।।१८।। शब्दार्थ - मनभावन - मन को भाने वाला, प्रियतम । बरसावन = बरसाने वाला । सुहावन == सुन्दर । भवन = घर ।
भावार्थ - विक्रम कवि सावन का वर्णन करते हुए कहते हैं कि सुखों की वर्षा करने वाला सावन का सुन्दर समय पहुँचा है और इसी समय सुख को सरसाने के लिए मनमोहन प्रियतम का भी घर पर आगमन हो गया है ।
कुंभकरन कौ देखि कपि, नासा करन-बिहीन। अट्टहास करि भू झुके, मन भौ मोद अधीन ।।१६।। शब्दार्थ - कपि = बन्दर । नासा = नासिका, नाक । करन == कर्ण, कान । विहीन - रहित अट्टहास - ज़ोर से खिलखिला कर हँसना । = पृथ्वी । मोद = आनन्द, खुशी भी हो गया ।
भावार्थ - विक्रम कवि कह हैं कि कुम्भकर्ण के नाक और कान
|
A p भावार्थ - मस्तक पर मोर मुकुट, कमर में पीताम्बर र हृदय पर सुन्दर वनमाला धारण किये हुए, गाते हुए श्रीकृष्ण को ग्राज गोपियों ने मार्ग में ग्राते हुए देखा । जो कविता में आदरत, साहित रीति बिचार । सो निहार लघु करि कह्यौ, निज मति के अनुसार ।।सत्रह।। शब्दार्थ - आदरत - आदर करता हूँ । साहित= साहित्य, शास्त्र । रीति = रीति ग्रन्थ । निहार = देखकर । लघु = छोटा । मति = बुद्धि । भावार्थ - विक्रम कवि कहते हैं कि साहित्य-शास्त्र और रीतिग्रन्थों के आधार पर मैं जिस कविता का आदर करता हूँ, उसी को मैंने अपनी बुद्धि के अनुसार इस छोटे से दोहे छंद में कहा है । मनभावन आवन भवन, सुख सरसावन काज । सावन बरसावन सुखनि, समय सुहावन आज ।।अट्ठारह।। शब्दार्थ - मनभावन - मन को भाने वाला, प्रियतम । बरसावन = बरसाने वाला । सुहावन == सुन्दर । भवन = घर । भावार्थ - विक्रम कवि सावन का वर्णन करते हुए कहते हैं कि सुखों की वर्षा करने वाला सावन का सुन्दर समय पहुँचा है और इसी समय सुख को सरसाने के लिए मनमोहन प्रियतम का भी घर पर आगमन हो गया है । कुंभकरन कौ देखि कपि, नासा करन-बिहीन। अट्टहास करि भू झुके, मन भौ मोद अधीन ।।सोलह।। शब्दार्थ - कपि = बन्दर । नासा = नासिका, नाक । करन == कर्ण, कान । विहीन - रहित अट्टहास - ज़ोर से खिलखिला कर हँसना । = पृथ्वी । मोद = आनन्द, खुशी भी हो गया । भावार्थ - विक्रम कवि कह हैं कि कुम्भकर्ण के नाक और कान
|
पटना। चारा घोटाले में सजा काट रहे आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद यादव को सीबीआई की विशेष अदालत ने जब से सात साल की सजा सुनाई है, तब से मानों बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है। ऐसे में लालू पुत्र और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने पिता की जान की दुहाई देते हुए कहा है कि जेल में उनके जान को खतरा है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी हमारे पिता की हत्या करवाना चाहती है। इसके लिए बीजेपी बड़े पैमाने पर साजिश रच रही है। साथ ही यह भी कहा कि लालू जी के जान को खतरा है और हमें नहीं लगता कि अंदर सब कुछ ठीक ठाक है।
राजधानी पटना में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए तेजस्वी ने सवांददाताओं को बताया कि हम सीबीआई के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। इसके अलावा आदेशों के चारों फैसलों को पढ़ने के बाद हम कानूनी कार्रवाई करने की रणनीति तैयार करेंगे।
वहीं लालू को सजा सुनाए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, 'कानून अपना काम करता है और मैं इस विषय पर किसी भी तरह का टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं।
लेकिन उन्होंने ये जरूर कहा कि यह किसी पार्टी का फैसला नहीं है बल्कि अदालत का फैसला है। ऐसे में जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा।
इसके अलावा बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति को पुलिस कस्टडी में होते हुए भी अपनी जान का खतरा महसूस होता है तो उसे कोर्ट में अपील करनी चाहिए।
यह भी पढ़ेंः- राज्यसभा जीतकर भी भाजपा के हाथ लगी शिकस्त, ये तीन बड़े कारण तख्तापलट के लिए काफी!
साथ ही उन्होंने पूछा कि लालू प्रसाद यादव को जेल में किस बात का डर है? जब उनसे किसी को मिलने भी नहीं दिया जा रहा है तो फिर खतरा किस बात का?
गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत ने घोटाले से जुड़े चौथे मामले में 7-7 साल की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने आरजेडी मुखिया लालू यादव पर 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
|
पटना। चारा घोटाले में सजा काट रहे आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद यादव को सीबीआई की विशेष अदालत ने जब से सात साल की सजा सुनाई है, तब से मानों बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है। ऐसे में लालू पुत्र और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने पिता की जान की दुहाई देते हुए कहा है कि जेल में उनके जान को खतरा है। तेजस्वी यादव ने कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी हमारे पिता की हत्या करवाना चाहती है। इसके लिए बीजेपी बड़े पैमाने पर साजिश रच रही है। साथ ही यह भी कहा कि लालू जी के जान को खतरा है और हमें नहीं लगता कि अंदर सब कुछ ठीक ठाक है। राजधानी पटना में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए तेजस्वी ने सवांददाताओं को बताया कि हम सीबीआई के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। इसके अलावा आदेशों के चारों फैसलों को पढ़ने के बाद हम कानूनी कार्रवाई करने की रणनीति तैयार करेंगे। वहीं लालू को सजा सुनाए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, 'कानून अपना काम करता है और मैं इस विषय पर किसी भी तरह का टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। लेकिन उन्होंने ये जरूर कहा कि यह किसी पार्टी का फैसला नहीं है बल्कि अदालत का फैसला है। ऐसे में जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा। इसके अलावा बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति को पुलिस कस्टडी में होते हुए भी अपनी जान का खतरा महसूस होता है तो उसे कोर्ट में अपील करनी चाहिए। यह भी पढ़ेंः- राज्यसभा जीतकर भी भाजपा के हाथ लगी शिकस्त, ये तीन बड़े कारण तख्तापलट के लिए काफी! साथ ही उन्होंने पूछा कि लालू प्रसाद यादव को जेल में किस बात का डर है? जब उनसे किसी को मिलने भी नहीं दिया जा रहा है तो फिर खतरा किस बात का? गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत ने घोटाले से जुड़े चौथे मामले में सात-सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने आरजेडी मुखिया लालू यादव पर साठ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
|
दिवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (Diwali Laxmi Puja Muhurat) :
दीपावली पूजन सरल विधि (Diwali Pujan Vidhi) :
दिवाली पूजन प्रदोष काल में किया जाता है। दिवाली की शाम को एक लकड़ी की साफ चौकी बिछाएं। उस चौकी पर गंगा जल से छिड़काव करें और इसके बाद भगवान गणेश, मां लक्ष्मी, सरस्वती के साथ कुबेर और श्री यंत्र भी स्थापित करें। पूजा स्थान पर एक जल से भरा तांबे या स्टील का कलश रखें। कलश पर रोली से सतिया बना लें और श्रीं लिखें। फिर इस कलश पर मोली की 5 गांठे बांधें। इसके बाद उस पर आम के पत्ते रखें। पुजा स्थान पर पंच मेवा, गुड़, फूल , मिठाई, घी, खील बताशे, फल आदि भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के सामने या आस पास रखें। हो सके तो मां लक्ष्मी को कमल का फूल जरूर अर्पित करे। इसके बाद भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के आगे पांच घी और पांच तेल के दीपक जलाएं। साथ ही तेल का एक बड़ा दीपक भी जलाएं। भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ मां सरस्वती, कुबेर, कृष्ण जी और राम दरबार की पूजा भी जरूर करें। लक्ष्मी पूजन के दौरान अपने गहनों और पैसों की भी पूजा करें। अंत में आरती उतार कर और भोग लगाकर पूजा संपन्न करें।
|
दिवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त : दीपावली पूजन सरल विधि : दिवाली पूजन प्रदोष काल में किया जाता है। दिवाली की शाम को एक लकड़ी की साफ चौकी बिछाएं। उस चौकी पर गंगा जल से छिड़काव करें और इसके बाद भगवान गणेश, मां लक्ष्मी, सरस्वती के साथ कुबेर और श्री यंत्र भी स्थापित करें। पूजा स्थान पर एक जल से भरा तांबे या स्टील का कलश रखें। कलश पर रोली से सतिया बना लें और श्रीं लिखें। फिर इस कलश पर मोली की पाँच गांठे बांधें। इसके बाद उस पर आम के पत्ते रखें। पुजा स्थान पर पंच मेवा, गुड़, फूल , मिठाई, घी, खील बताशे, फल आदि भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के सामने या आस पास रखें। हो सके तो मां लक्ष्मी को कमल का फूल जरूर अर्पित करे। इसके बाद भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के आगे पांच घी और पांच तेल के दीपक जलाएं। साथ ही तेल का एक बड़ा दीपक भी जलाएं। भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ मां सरस्वती, कुबेर, कृष्ण जी और राम दरबार की पूजा भी जरूर करें। लक्ष्मी पूजन के दौरान अपने गहनों और पैसों की भी पूजा करें। अंत में आरती उतार कर और भोग लगाकर पूजा संपन्न करें।
|
एलरोनड (ईजीएलडी) 31वीं रैंक वाला डिजिटल टोकन वर्तमान में क्रिप्टो पारिस्थितिकी तंत्र में शो चुरा रहा है। परियोजना खुद को नए इंटरनेट के लिए एक प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में वर्णित करती है। इसमें फिनटेक, विकेंद्रीकृत वित्त और इंटरनेट ऑफ थिंग्स शामिल हैं।
1/आज का दिन है।
शार्प्ड आर्किटेक्चर पर निर्मित अत्याधुनिक DEX, w/ 100% सामुदायिक स्वामित्व।
लोकप्रिय ब्लॉकचेन परियोजना Elrond ने इसके लिए बड़े पैमाने पर तरलता प्रोत्साहन कार्यक्रम की घोषणा की मैयर डेक्स डेफी प्लेटफॉर्म. यह कार्यक्रम अब लाइव है, और इसकी कुल कीमत लगभग 1.29 बिलियन डॉलर है। यह पहल क्रिप्टो स्पेस की "मौजूदा सीमाओं से परे" डीआईएफआई अपनाने को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़े कदम का प्रतिनिधित्व करती है। इसके अलावा, परियोजना धन हस्तांतरित करने के लिए अपनी उपयोगिता और शासन टोकन - एमईएक्स - का उपयोग करेगी।
के अनुसार बेनियामिन मिनकु, Elrond Network CEO, उक्त फंडिंग को खंडों में अलग किया जाएगा। उन्होंने इस प्रकार ट्वीट कियाः
3 / मैयर डीईएक्स अब तक का सबसे बड़ा डेफी प्रोत्साहन कार्यक्रम लेकर आया है, जो डेफी को अपनाने को वर्तमान सीमाओं से परे धकेलता है।
$ 1.29 बिलियन डॉलर मूल्य के MEX टोकन - जिनमें से पहले महीने में $ 282M - उन उपयोगकर्ताओं के साथ साझा किए जाएंगे जो तरलता प्रदान करते हैं $ईजीएलडी, MEX, LKMEX और लिपटे USDC।
जैसा पर प्रकाश डाला आधिकारिक ब्लॉग में, कार्यक्रम 20 नवंबर को शुरू हुआ। Elrond पहले ही दावा योग्य MEX टोकन के रूप में 60,000 से अधिक खातों में स्वामित्व वितरित कर चुका है। मिनकू ने आगे कहा,
दिलचस्प बात यह है कि एमईएक्स टोकनधारक अब मंच पर सभी महत्वपूर्ण उन्नयन पर सामुदायिक जनमत संग्रह में अपनी बात कहने में सक्षम हैं। इसका मतलब है कि मैयर एक उपयोगकर्ता-संचालित विकेन्द्रीकृत वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित हुआ है।
वास्तव में, Elrond Network टीम आशावादी है कि इस तरह के तरलता प्रोत्साहन कार्यक्रमों के साथ, DEX Maiar के पास अगला बनने का हर मौका है यूनिस्वैप या सुशी स्वैप.
कुल मिलाकर, यह उक्त नेटवर्क और यहां तक कि संपूर्ण क्रिप्टो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, इसे उत्कृष्टता और बढ़ी हुई तरलता की दिशा में एक समय में एक कदम के रूप में माना जा सकता है। बहरहाल, अभी भी कुछ विकास हैं जैसेः
"अभी भी कुछ ज्ञात बग हैं जिनकी हम जांच कर रहे हैं, और अत्यंत तत्परता के साथ संबोधित करेंगे," मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोड़ा.
फिर भी, समुदाय ने व्यक्त किया बुलिश आख्यान टोकन के साथ-साथ नेटवर्क के संबंध में।
नेटवर्क के मूल टोकन ने उसी आशावाद को दोहराया। प्रेस समय में, EGLD था व्यापार 24 घंटों में 11% से अधिक की वृद्धि के साथ $340 के निशान से थोड़ा पीछे। यहां तक कि ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी 107.94% की बढ़ोतरी हुई है।
|
एलरोनड इकतीसवीं रैंक वाला डिजिटल टोकन वर्तमान में क्रिप्टो पारिस्थितिकी तंत्र में शो चुरा रहा है। परियोजना खुद को नए इंटरनेट के लिए एक प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में वर्णित करती है। इसमें फिनटेक, विकेंद्रीकृत वित्त और इंटरनेट ऑफ थिंग्स शामिल हैं। एक/आज का दिन है। शार्प्ड आर्किटेक्चर पर निर्मित अत्याधुनिक DEX, w/ एक सौ% सामुदायिक स्वामित्व। लोकप्रिय ब्लॉकचेन परियोजना Elrond ने इसके लिए बड़े पैमाने पर तरलता प्रोत्साहन कार्यक्रम की घोषणा की मैयर डेक्स डेफी प्लेटफॉर्म. यह कार्यक्रम अब लाइव है, और इसकी कुल कीमत लगभग एक.उनतीस बिलियन डॉलर है। यह पहल क्रिप्टो स्पेस की "मौजूदा सीमाओं से परे" डीआईएफआई अपनाने को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़े कदम का प्रतिनिधित्व करती है। इसके अलावा, परियोजना धन हस्तांतरित करने के लिए अपनी उपयोगिता और शासन टोकन - एमईएक्स - का उपयोग करेगी। के अनुसार बेनियामिन मिनकु, Elrond Network CEO, उक्त फंडिंग को खंडों में अलग किया जाएगा। उन्होंने इस प्रकार ट्वीट कियाः तीन / मैयर डीईएक्स अब तक का सबसे बड़ा डेफी प्रोत्साहन कार्यक्रम लेकर आया है, जो डेफी को अपनाने को वर्तमान सीमाओं से परे धकेलता है। एक दशमलव उनतीस डॉलर बिलियन डॉलर मूल्य के MEX टोकन - जिनमें से पहले महीने में दो सौ बयासी डॉलरM - उन उपयोगकर्ताओं के साथ साझा किए जाएंगे जो तरलता प्रदान करते हैं $ईजीएलडी, MEX, LKMEX और लिपटे USDC। जैसा पर प्रकाश डाला आधिकारिक ब्लॉग में, कार्यक्रम बीस नवंबर को शुरू हुआ। Elrond पहले ही दावा योग्य MEX टोकन के रूप में साठ,शून्य से अधिक खातों में स्वामित्व वितरित कर चुका है। मिनकू ने आगे कहा, दिलचस्प बात यह है कि एमईएक्स टोकनधारक अब मंच पर सभी महत्वपूर्ण उन्नयन पर सामुदायिक जनमत संग्रह में अपनी बात कहने में सक्षम हैं। इसका मतलब है कि मैयर एक उपयोगकर्ता-संचालित विकेन्द्रीकृत वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित हुआ है। वास्तव में, Elrond Network टीम आशावादी है कि इस तरह के तरलता प्रोत्साहन कार्यक्रमों के साथ, DEX Maiar के पास अगला बनने का हर मौका है यूनिस्वैप या सुशी स्वैप. कुल मिलाकर, यह उक्त नेटवर्क और यहां तक कि संपूर्ण क्रिप्टो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, इसे उत्कृष्टता और बढ़ी हुई तरलता की दिशा में एक समय में एक कदम के रूप में माना जा सकता है। बहरहाल, अभी भी कुछ विकास हैं जैसेः "अभी भी कुछ ज्ञात बग हैं जिनकी हम जांच कर रहे हैं, और अत्यंत तत्परता के साथ संबोधित करेंगे," मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोड़ा. फिर भी, समुदाय ने व्यक्त किया बुलिश आख्यान टोकन के साथ-साथ नेटवर्क के संबंध में। नेटवर्क के मूल टोकन ने उसी आशावाद को दोहराया। प्रेस समय में, EGLD था व्यापार चौबीस घंटाटों में ग्यारह% से अधिक की वृद्धि के साथ तीन सौ चालीस डॉलर के निशान से थोड़ा पीछे। यहां तक कि ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी एक सौ सात.चौरानवे% की बढ़ोतरी हुई है।
|
नई दिल्ली। मंगलवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक देश की राजधानी के गरम पारे के बीच हुई। इन दिनों देश का तापमान वातावरण के लिहाज से बढ़ा तो है ही साथ ही राजनीतिक तौर पर भी मिजाज गरम है। बैठक में केन्द्र सरकार की नीतियों के साथ जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी मंथन किया गया। इसके साथ ही देश में केन्द्र सरकार के विरोध में कैसे विपक्ष को एकजुट होना है इस रणनीति पर भी बातचीत की गई।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केन्द्र सरकार पर बैठक में हमला बोलते हुए कहा कि कश्मीर के बिगड़े हालातों की जिम्मेदार केन्द्र की सरकार है। वहां की आवाम को अलग-थलग कर उनके साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। आज कश्मीर के हालातों की जिम्मेदार भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार और राज्य में भाजपा के सहयोग से बनी सरकार है। सरकार के विभाजनकारी एजेंडे ने घाटी में वर्षों किए गये कार्यों को बर्बाद कर दिया है। सरकार की गलत नीतियों के चलते कश्मीर जल रहा है। रोज सेना पर पत्थरबाजी होती है।
कश्मीर के हालात सरकार की नाकामी को साफ झलका रहे हैं। सरकार का असंवेदनशील रवैया वहां के युवाओं को फिर भटकाव की ओर ले जा रहा है। सरकार वहां के लोगों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर स्थानीय लोगों के साथ युवाओं को विरोधी बना रही है। सरकार की गलत नीतियों के चलते वहां पर बड़ी तादात में आम नागरिकों के साथ सेना के जवान मारे और घायल हो रहे है। हमने कश्मीर के हालत पर नजर रखने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में एक दल का गणन किया है।
|
नई दिल्ली। मंगलवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक देश की राजधानी के गरम पारे के बीच हुई। इन दिनों देश का तापमान वातावरण के लिहाज से बढ़ा तो है ही साथ ही राजनीतिक तौर पर भी मिजाज गरम है। बैठक में केन्द्र सरकार की नीतियों के साथ जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी मंथन किया गया। इसके साथ ही देश में केन्द्र सरकार के विरोध में कैसे विपक्ष को एकजुट होना है इस रणनीति पर भी बातचीत की गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केन्द्र सरकार पर बैठक में हमला बोलते हुए कहा कि कश्मीर के बिगड़े हालातों की जिम्मेदार केन्द्र की सरकार है। वहां की आवाम को अलग-थलग कर उनके साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। आज कश्मीर के हालातों की जिम्मेदार भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार और राज्य में भाजपा के सहयोग से बनी सरकार है। सरकार के विभाजनकारी एजेंडे ने घाटी में वर्षों किए गये कार्यों को बर्बाद कर दिया है। सरकार की गलत नीतियों के चलते कश्मीर जल रहा है। रोज सेना पर पत्थरबाजी होती है। कश्मीर के हालात सरकार की नाकामी को साफ झलका रहे हैं। सरकार का असंवेदनशील रवैया वहां के युवाओं को फिर भटकाव की ओर ले जा रहा है। सरकार वहां के लोगों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर स्थानीय लोगों के साथ युवाओं को विरोधी बना रही है। सरकार की गलत नीतियों के चलते वहां पर बड़ी तादात में आम नागरिकों के साथ सेना के जवान मारे और घायल हो रहे है। हमने कश्मीर के हालत पर नजर रखने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में एक दल का गणन किया है।
|
वेब सीरीज 'आश्रम' की बबिता यानी त्रिधा चौधरी (Tridha Choudhury) अपने हुस्न से इंटरनेट पर तहलका मचाती रहती हैं. वह रियल लाइफ में काफी बोल्ड हैं और अक्सर अपनी बोल्डनेस से फैंस को दीवाना बना लेती हैं. इस बार तो उन्होंने अपनी ऐसी फोटो पोस्ट कर दी है जिससे नजर हटाना मुश्किल हो जाएगा. उनकी ये फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. हॉट लुक में इंटरनेट का बढ़ाया तापमानत्रिधा (Tridha Choudhury) ने अपनी इस फोटो को इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है जिसमें उनका बोल्ड अंदाज देखकर फैंस मदहोश हो गए हैं. तस्वीर में त्रिधा ऑरेंज कलर की मोनोकिनी पहने हुए नजर आ रही हैं. वह समंदर किनारे सनग्लासेस पहने बेहद बोल्ड पोज दे रही हैं. उन्होंने फ्लोरल प्रिटेंड शर्ट पहनी हैं जिसके बटन खुले हैं.
कमेंट सेक्शन में जमकर हुई तारीफएक्ट्रेस ने अपने कालिताना अंदाज से इंटरनेट पर बवाल मचा दिया है. इस पोस्ट के कमेंट सेक्सन में फैंस भर-भरकर अपने रिएक्शंस दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, आप बहुत शानदार लग रही हैं. दूसरे ने कमेंट किया, हॉटी. वहीं कई यूजर्स ने हार्ट और फायर इमोजी से कमेंट सेक्शन को भर दिया है. मालूम हो कि त्रिधा चौधरी (Tridha Choudhury) सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी बोल्ड तस्वीरों को शेयर करती रहती हैं जिसे लाखों लाइक्स मिलते हैं.
बोल्ड सीन देकर मचाया था तहलका गौरतलब है कि त्रिधा चौधरी (Tridha Choudhury) ने वेब सीरीज 'आश्रम' में सीधी-सादी शिष्या बबिता का रोल निभाया था. सीरीज में उन्होंने बॉबी देओल के साथ जमकर इंटीमेंट सीन दिए थे जिससे वह चर्चा में आ गई थीं. 'आश्रम' से पहले त्रिधा चौधरी कई बंगाली और तेलुगू फिल्मों में काम कर चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के साथ एक म्यूजिक वीडियो में भी काम किया है.
|
वेब सीरीज 'आश्रम' की बबिता यानी त्रिधा चौधरी अपने हुस्न से इंटरनेट पर तहलका मचाती रहती हैं. वह रियल लाइफ में काफी बोल्ड हैं और अक्सर अपनी बोल्डनेस से फैंस को दीवाना बना लेती हैं. इस बार तो उन्होंने अपनी ऐसी फोटो पोस्ट कर दी है जिससे नजर हटाना मुश्किल हो जाएगा. उनकी ये फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. हॉट लुक में इंटरनेट का बढ़ाया तापमानत्रिधा ने अपनी इस फोटो को इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है जिसमें उनका बोल्ड अंदाज देखकर फैंस मदहोश हो गए हैं. तस्वीर में त्रिधा ऑरेंज कलर की मोनोकिनी पहने हुए नजर आ रही हैं. वह समंदर किनारे सनग्लासेस पहने बेहद बोल्ड पोज दे रही हैं. उन्होंने फ्लोरल प्रिटेंड शर्ट पहनी हैं जिसके बटन खुले हैं. कमेंट सेक्शन में जमकर हुई तारीफएक्ट्रेस ने अपने कालिताना अंदाज से इंटरनेट पर बवाल मचा दिया है. इस पोस्ट के कमेंट सेक्सन में फैंस भर-भरकर अपने रिएक्शंस दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, आप बहुत शानदार लग रही हैं. दूसरे ने कमेंट किया, हॉटी. वहीं कई यूजर्स ने हार्ट और फायर इमोजी से कमेंट सेक्शन को भर दिया है. मालूम हो कि त्रिधा चौधरी सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी बोल्ड तस्वीरों को शेयर करती रहती हैं जिसे लाखों लाइक्स मिलते हैं. बोल्ड सीन देकर मचाया था तहलका गौरतलब है कि त्रिधा चौधरी ने वेब सीरीज 'आश्रम' में सीधी-सादी शिष्या बबिता का रोल निभाया था. सीरीज में उन्होंने बॉबी देओल के साथ जमकर इंटीमेंट सीन दिए थे जिससे वह चर्चा में आ गई थीं. 'आश्रम' से पहले त्रिधा चौधरी कई बंगाली और तेलुगू फिल्मों में काम कर चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के साथ एक म्यूजिक वीडियो में भी काम किया है.
|
महाराष्ट्र के पुणे में फातिमा नगर स्थित नेक्सा के शोरूम में इन दिनों घमासान मचा है। यहां के मारूति सुजुकी डीलरशिप के मालिक पर उनके एक कर्मचारी को प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। आरोप है कि मालिक ने कर्मचारी का फोन छीन लिया और उसे धमकी दी।
पुणे महाराष्ट्र के पुणे में फातिमा नगर स्थित नेक्सा के शोरूम में इन दिनों घमासान मचा है। यहां के मारूति सुजुकी डीलरशिप के मालिक पर उनके एक कर्मचारी को प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। आरोप है कि मालिक ने कर्मचारी का फोन छीन लिया और उसे धमकी दी। इतना ही नहीं एक दूसरी महिला कर्मचारी ने तो मालिक पर शारीरिक शोषण और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। वहीं शोरूम के मालिक ने महिला कर्मचारी पर 1. 65 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया है।
शोरूम के मालिक निक्की सहगल की तरफ से सारिका के अलावा सीनियर रिलेशनशिप मैनेजर जयेश वेंगुर्कलर और डिलीवरी कॉर्डिनेटर संदीप शिंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसमें निक्की की तरफ से कहा गया है कि शोरूम की रिलेशनशिप मैनेजर रही सारिका शर्मा (37) ने 1. 65 करोड़ रुपये का गबन किया है। उन्हें संदेह तब हुआ जब उसने दो महीने में सबसे ज्यादा गाड़ियां बेंची। उसने एक महीने में 29 कारें बेचना दिखाया जबकि दूसरे सिर्फ 5 से 8 गाड़ियां ही बेच पाए।
निक्की ने कहा कि जब उन्होंने केजीएमजी से फरेंसिक जांच कराई तो उसका गबन सामने आया। पता चला कि सारिका ने बिना पूरा पेमेंट लिए ही कई गाड़ियां बेंच दीं। बिना सीईओ की अनुमति के उसने कारों में उसने बहुत ज्यादा डिस्काउंट दिया, ग्राहकों को बिना रिसीविंग दिए उनसे काफी संख्या में उनसे कैश लिया। उसने यह कैश कंपनी में न जमा करके खुद के पास रख लिया। इतना ही नहीं निक्की का आरोप है कि कर्मचारी ने कहा कि वह बिना पेमेंट के बलेनो ले गई।
वहीं दूसरी तरफ सारिका का कहना है कि उसे मामले में गलत फंसाया जा रहा है। उसने बताया कि कुछ लोगों ने उससे संपर्क किया। उन्होंने बल्क में अलग-अलग नामों से गाड़ियां बुक कराईं। उन्होंने बताया कि वे लोग उसके बॉस के दोस्त हैं। बाद में उसे पता चला कि शोरूम से बिना पूरा पेमेंट के गाड़ियां बाहर कर दी गईं। उसका आरोप है कि शोरूम का मालिक निक्की और उसके दोस्त मिलकर उसे फंसा रहे हैं।
उसने बताया कि सहगल की अनुमति से बिना पूरा भुगतान के गाड़ियां बाहर कर दी जाएं यह संभव नहीं है। वे सभी ग्राहक निक्की के दोस्त थे। सारिका का कहना है कि उस पर इतना दबाव बनाया गया कि उसने आत्हत्या करने का फैसला लिया लेकिन किसी तरह हिम्मत जुटाकर वह थाने गई। पुलिस ने उसकी कोई सुनवाई नहीं की। उसका कहना है कि वह पुलिस कमिश्नर के पास भी शिकायत लेकर गई थी लेकिन उसकी एफआईआर नहीं दर्ज की गई।
जयेश की तरफ से दर्ज करवाई गई एफआईआर में उसने कहा है कि 12 सितंबर 2017 क निक्की ने उसे फोन करके ऑफिस बुलाया। वहां निक्की का भाई जॉनी और 5 अन्य लोग मौजूद थे। उन लोगों ने उसकी पिटाई की। उन लोगों ने उससे उसके फोन का पासवर्ड मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उसने घोटाला किया है। उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया। वह पुलिस के पास तब से कई बार गया लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद वह कोर्ट गया। कोर्ट के आदेश के बाद उसकी एफआईआर दर्ज हुई।
निक्की से जब हमारे सहयोगी अखबार में संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि मामला अभी कोर्ट में है इसलिए वह कुछ नहीं कह सकते हैं। उन्होंने एक ऑडिट टीम से ऑडिट कराया है और रिपोर्ट कोर्ट में दे दी है।
|
महाराष्ट्र के पुणे में फातिमा नगर स्थित नेक्सा के शोरूम में इन दिनों घमासान मचा है। यहां के मारूति सुजुकी डीलरशिप के मालिक पर उनके एक कर्मचारी को प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। आरोप है कि मालिक ने कर्मचारी का फोन छीन लिया और उसे धमकी दी। पुणे महाराष्ट्र के पुणे में फातिमा नगर स्थित नेक्सा के शोरूम में इन दिनों घमासान मचा है। यहां के मारूति सुजुकी डीलरशिप के मालिक पर उनके एक कर्मचारी को प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। आरोप है कि मालिक ने कर्मचारी का फोन छीन लिया और उसे धमकी दी। इतना ही नहीं एक दूसरी महिला कर्मचारी ने तो मालिक पर शारीरिक शोषण और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। वहीं शोरूम के मालिक ने महिला कर्मचारी पर एक. पैंसठ करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया है। शोरूम के मालिक निक्की सहगल की तरफ से सारिका के अलावा सीनियर रिलेशनशिप मैनेजर जयेश वेंगुर्कलर और डिलीवरी कॉर्डिनेटर संदीप शिंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसमें निक्की की तरफ से कहा गया है कि शोरूम की रिलेशनशिप मैनेजर रही सारिका शर्मा ने एक. पैंसठ करोड़ रुपये का गबन किया है। उन्हें संदेह तब हुआ जब उसने दो महीने में सबसे ज्यादा गाड़ियां बेंची। उसने एक महीने में उनतीस कारें बेचना दिखाया जबकि दूसरे सिर्फ पाँच से आठ गाड़ियां ही बेच पाए। निक्की ने कहा कि जब उन्होंने केजीएमजी से फरेंसिक जांच कराई तो उसका गबन सामने आया। पता चला कि सारिका ने बिना पूरा पेमेंट लिए ही कई गाड़ियां बेंच दीं। बिना सीईओ की अनुमति के उसने कारों में उसने बहुत ज्यादा डिस्काउंट दिया, ग्राहकों को बिना रिसीविंग दिए उनसे काफी संख्या में उनसे कैश लिया। उसने यह कैश कंपनी में न जमा करके खुद के पास रख लिया। इतना ही नहीं निक्की का आरोप है कि कर्मचारी ने कहा कि वह बिना पेमेंट के बलेनो ले गई। वहीं दूसरी तरफ सारिका का कहना है कि उसे मामले में गलत फंसाया जा रहा है। उसने बताया कि कुछ लोगों ने उससे संपर्क किया। उन्होंने बल्क में अलग-अलग नामों से गाड़ियां बुक कराईं। उन्होंने बताया कि वे लोग उसके बॉस के दोस्त हैं। बाद में उसे पता चला कि शोरूम से बिना पूरा पेमेंट के गाड़ियां बाहर कर दी गईं। उसका आरोप है कि शोरूम का मालिक निक्की और उसके दोस्त मिलकर उसे फंसा रहे हैं। उसने बताया कि सहगल की अनुमति से बिना पूरा भुगतान के गाड़ियां बाहर कर दी जाएं यह संभव नहीं है। वे सभी ग्राहक निक्की के दोस्त थे। सारिका का कहना है कि उस पर इतना दबाव बनाया गया कि उसने आत्हत्या करने का फैसला लिया लेकिन किसी तरह हिम्मत जुटाकर वह थाने गई। पुलिस ने उसकी कोई सुनवाई नहीं की। उसका कहना है कि वह पुलिस कमिश्नर के पास भी शिकायत लेकर गई थी लेकिन उसकी एफआईआर नहीं दर्ज की गई। जयेश की तरफ से दर्ज करवाई गई एफआईआर में उसने कहा है कि बारह सितंबर दो हज़ार सत्रह क निक्की ने उसे फोन करके ऑफिस बुलाया। वहां निक्की का भाई जॉनी और पाँच अन्य लोग मौजूद थे। उन लोगों ने उसकी पिटाई की। उन लोगों ने उससे उसके फोन का पासवर्ड मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उसने घोटाला किया है। उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया। वह पुलिस के पास तब से कई बार गया लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद वह कोर्ट गया। कोर्ट के आदेश के बाद उसकी एफआईआर दर्ज हुई। निक्की से जब हमारे सहयोगी अखबार में संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि मामला अभी कोर्ट में है इसलिए वह कुछ नहीं कह सकते हैं। उन्होंने एक ऑडिट टीम से ऑडिट कराया है और रिपोर्ट कोर्ट में दे दी है।
|
कलंबूर भारतीय राज्य तमिलनाडु में पोलुर तालुक, तिरुवनमलाई जिले में एक पंचायत शहर है। कलंबूर शहर में एक सरकारी अस्पताल है जो 24 घंटे अपने मरीज की सेवा करता है। इस अस्पताल में कलंबूर और आसपास के ग्रामीण लोगों के लिए कई सुविधाएँ हैं।
2011 की भारत की जनगणना के अनुसार, कलांबुर की जनसंख्या 31751 थी। पुरुषों की आबादी का 49.6% और महिलाओं का 50.4% है। कलांबुर की औसत साक्षरता दर लगभग 85% थी, जो राष्ट्रीय औसत 75% से अधिक थी। 2011 में कलांबुर में, 11% आबादी 6 साल से कम उम्र की थी।
कलंबूर में सबसे महत्वपूर्ण चीज शिक्षा है। यहाँ कई सरकारी स्कूल हैं जो कलांबुर गाँव के छात्रों को ज्ञान और शिक्षा प्रदान करते हैं।
कलंबूर एक हरी भरी भूमि है जो कृषि के लिए उपयुक्त है। अधिकांश आबादी कृषि में लगी हुई है। शहर में 2 झीलें हैं जो सिंचाई के लिए शहर और आसपास के गाँवों में पानी पहुँचाती हैं।
कलंबूर में एक महत्वपूर्ण शिव मंदिर के साथ कई मंदिर हैं - काशी विश्वनाथ, विशालाची और वीरा अंजनेयार (हनुमान) मंदिर। शनिश्वर मंदिर कलम्बुर से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
कलंबूर चावल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। शहर में कई चावल मिलें हैं, लगभग 70 चावल मिलें हैं। कलंबूर के चावल की आपूर्ति तमिलनाडु के अन्य भागों में की जाती है। इसका निर्यात सिंगापुर और मलेशिया को भी किया जाता है। यह शहर स्थानीय रूप से अपनी सिल्क साड़ियों के लिए भी प्रसिद्ध है।
इस शहर के लगभग पूरे लोग तमिल नव वर्ष दिवस "चिथिरई मुदल नाल" या "लाखा दीपा थिरुविझा" मनाते हैं, इस व्रत पर लोग वीरा अंजनेयार से प्रार्थना करते हैं। यह हर साल मनाया जाने वाला महान और भव्य त्योहार है।
|
कलंबूर भारतीय राज्य तमिलनाडु में पोलुर तालुक, तिरुवनमलाई जिले में एक पंचायत शहर है। कलंबूर शहर में एक सरकारी अस्पताल है जो चौबीस घंटाटे अपने मरीज की सेवा करता है। इस अस्पताल में कलंबूर और आसपास के ग्रामीण लोगों के लिए कई सुविधाएँ हैं। दो हज़ार ग्यारह की भारत की जनगणना के अनुसार, कलांबुर की जनसंख्या इकतीस हज़ार सात सौ इक्यावन थी। पुरुषों की आबादी का उनचास.छः% और महिलाओं का पचास.चार% है। कलांबुर की औसत साक्षरता दर लगभग पचासी% थी, जो राष्ट्रीय औसत पचहत्तर% से अधिक थी। दो हज़ार ग्यारह में कलांबुर में, ग्यारह% आबादी छः साल से कम उम्र की थी। कलंबूर में सबसे महत्वपूर्ण चीज शिक्षा है। यहाँ कई सरकारी स्कूल हैं जो कलांबुर गाँव के छात्रों को ज्ञान और शिक्षा प्रदान करते हैं। कलंबूर एक हरी भरी भूमि है जो कृषि के लिए उपयुक्त है। अधिकांश आबादी कृषि में लगी हुई है। शहर में दो झीलें हैं जो सिंचाई के लिए शहर और आसपास के गाँवों में पानी पहुँचाती हैं। कलंबूर में एक महत्वपूर्ण शिव मंदिर के साथ कई मंदिर हैं - काशी विश्वनाथ, विशालाची और वीरा अंजनेयार मंदिर। शनिश्वर मंदिर कलम्बुर से लगभग एक दशमलव पाँच किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित है। कलंबूर चावल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। शहर में कई चावल मिलें हैं, लगभग सत्तर चावल मिलें हैं। कलंबूर के चावल की आपूर्ति तमिलनाडु के अन्य भागों में की जाती है। इसका निर्यात सिंगापुर और मलेशिया को भी किया जाता है। यह शहर स्थानीय रूप से अपनी सिल्क साड़ियों के लिए भी प्रसिद्ध है। इस शहर के लगभग पूरे लोग तमिल नव वर्ष दिवस "चिथिरई मुदल नाल" या "लाखा दीपा थिरुविझा" मनाते हैं, इस व्रत पर लोग वीरा अंजनेयार से प्रार्थना करते हैं। यह हर साल मनाया जाने वाला महान और भव्य त्योहार है।
|
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय पॉल शर्मा ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के कृषि विभाग के तत्त्वावधान में उत्तरी राज्यों के लिए रबी फसलों की मूल्य नीति 2024-25 के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि आयोग का मुख्य उद्देश्य कृषक समुदाय को आधुनिक तकनीक को अपनाने, उत्पादकता को बढ़ावा तथा देश में समग्र अनाजों को बढ़ावा देना है। आयोग विभिन्न वस्तुओं की मूल्य नीति की सिफारिश करते समय मूल्य और आपूर्ति, उत्पादन की लागत, बाजार में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उछाल और अंतर फसल मूल्य समता जैसे विभिन्न घटकों का विश्लेषण करता है। इसके अतिरिक्त कृषि और गैर कृषि व्यापार की शर्तें, उत्पादन लागत पर मार्जन के रूप में 50 प्रतिशत और उपभोक्ताओं पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के प्रभावों का भी विश्लेषण करता है। उन्होंने कहा कि किसानों को नवीनतम तकनीक और पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
खेती की लागत कम करने की दिशा में भी उन्हें जागरूक किया जा रहा है। इस अवसर पर कृषि सचिव राकेश कंवर ने कहा कि किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की दिशा में इस प्रकार की क्षेत्रीय बैठकें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों के उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार किसानों की आय को बढ़ाने की दिशा में किसान हितैषी नीतियां बना रही है। प्रदेश में एकीकृत एवं समग्र कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की दिशा में और उनके उत्पादों के विपणन के लिए अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएपीसी) के सदस्य डा. नवीन सिंह, रतन लाल डग्गा, अनुपम मित्रा और पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के कृषि विश्वविश्वविद्यालय के हितधारक विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर निदेशक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आर. के. गौतम, पुरस्कृत किसानों, कृषि एवं खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
|
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय पॉल शर्मा ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के कृषि विभाग के तत्त्वावधान में उत्तरी राज्यों के लिए रबी फसलों की मूल्य नीति दो हज़ार चौबीस-पच्चीस के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि आयोग का मुख्य उद्देश्य कृषक समुदाय को आधुनिक तकनीक को अपनाने, उत्पादकता को बढ़ावा तथा देश में समग्र अनाजों को बढ़ावा देना है। आयोग विभिन्न वस्तुओं की मूल्य नीति की सिफारिश करते समय मूल्य और आपूर्ति, उत्पादन की लागत, बाजार में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उछाल और अंतर फसल मूल्य समता जैसे विभिन्न घटकों का विश्लेषण करता है। इसके अतिरिक्त कृषि और गैर कृषि व्यापार की शर्तें, उत्पादन लागत पर मार्जन के रूप में पचास प्रतिशत और उपभोक्ताओं पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के प्रभावों का भी विश्लेषण करता है। उन्होंने कहा कि किसानों को नवीनतम तकनीक और पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। खेती की लागत कम करने की दिशा में भी उन्हें जागरूक किया जा रहा है। इस अवसर पर कृषि सचिव राकेश कंवर ने कहा कि किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की दिशा में इस प्रकार की क्षेत्रीय बैठकें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों के उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार किसानों की आय को बढ़ाने की दिशा में किसान हितैषी नीतियां बना रही है। प्रदेश में एकीकृत एवं समग्र कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की दिशा में और उनके उत्पादों के विपणन के लिए अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में कृषि लागत और मूल्य आयोग के सदस्य डा. नवीन सिंह, रतन लाल डग्गा, अनुपम मित्रा और पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के कृषि विश्वविश्वविद्यालय के हितधारक विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर निदेशक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आर. के. गौतम, पुरस्कृत किसानों, कृषि एवं खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
|
२८ मार्च, गाईघाट । उदयपुर जिला के रौतामाई गाउँपालिका-३ लाफागाउँ की १३ वर्षीया बालिका एल्जिना खड्का का बलात्कार के बाद हत्या करने के आरोप में दो किशोर को जिला अदालत ने जन्मकैद का फैसला सुनाया है । जिला अदालत उदयपुर ने जानकारी दिया कि बुधबार जिला अदालत उदयपुर का न्यायाधीश तेजेन्द्रप्रसाद शर्मा के इजालास ने बालिका खड्का के बलात्कार के बाद हत्या करने के आरोप में दो किशोर विरुद्ध जन्मकैद का फैसला सुनाया है ।
अदालत श्रेस्तेदार राजकुमार आचार्य ने बताया कि बालिका का बलात्कार तथा हत्या करने वाला १६ वर्षीय किशोर विरुद्ध १२ वर्ष क जेल सजाय और एक लाख रुपैया जरिवाना तथा दूसरे १७ वर्षीय किशोर विरुद्ध १६ वर्ष दो महीना जेल सजाय और ३० हजार रुपैया जरिवाना किया गया है । दानों किशोर १८ वर्ष से कम होने के कारण कानूनी व्यवस्था अनुसार एक प्रौढ व्यक्ति के जन्म कैद सजा का आधा सजाय दिया गया है ।
गत कार्तिक ६ गते १३ वर्षीय बालिका जंगल में बकरी चराने क्रम में उसी के कक्षा का दानों किशोर मिलकर उसके साथ बलात्कार कर हत्या किया था ।
|
अट्ठाईस मार्च, गाईघाट । उदयपुर जिला के रौतामाई गाउँपालिका-तीन लाफागाउँ की तेरह वर्षीया बालिका एल्जिना खड्का का बलात्कार के बाद हत्या करने के आरोप में दो किशोर को जिला अदालत ने जन्मकैद का फैसला सुनाया है । जिला अदालत उदयपुर ने जानकारी दिया कि बुधबार जिला अदालत उदयपुर का न्यायाधीश तेजेन्द्रप्रसाद शर्मा के इजालास ने बालिका खड्का के बलात्कार के बाद हत्या करने के आरोप में दो किशोर विरुद्ध जन्मकैद का फैसला सुनाया है । अदालत श्रेस्तेदार राजकुमार आचार्य ने बताया कि बालिका का बलात्कार तथा हत्या करने वाला सोलह वर्षीय किशोर विरुद्ध बारह वर्ष क जेल सजाय और एक लाख रुपैया जरिवाना तथा दूसरे सत्रह वर्षीय किशोर विरुद्ध सोलह वर्ष दो महीना जेल सजाय और तीस हजार रुपैया जरिवाना किया गया है । दानों किशोर अट्ठारह वर्ष से कम होने के कारण कानूनी व्यवस्था अनुसार एक प्रौढ व्यक्ति के जन्म कैद सजा का आधा सजाय दिया गया है । गत कार्तिक छः गते तेरह वर्षीय बालिका जंगल में बकरी चराने क्रम में उसी के कक्षा का दानों किशोर मिलकर उसके साथ बलात्कार कर हत्या किया था ।
|
अतीत में हमने अपनी वेबसाइट पर SUV, हैचबैक, सेडान और यहां तक कि दोपहिया वाहनों के कई ड्रैग रेस वीडियो प्रदर्शित किए हैं। ज्यादातर समय, रेस में भाग लेने वाले वाहन एक ही सेगमेंट के होते हैं लेकिन, यहाँ भी कुछ अपवाद हैं। हमने ऐसे वीडियो देखे हैं जहां उच्च क्षमता वाली मोटरसाइकिल को SUV या सेडान के साथ ड्रैग रेस में देखा जाता है। यहां हमारे पास एक ऐसा ड्रैग रेस वीडियो है जहां दो अलग-अलग सेगमेंट की कारें एक दूसरे के साथ ड्रैग रेस में प्रतिस्पर्धा करती हैं। वीडियो में Kia Seltos डीजल SUV और Maruti Suzuki Ciaz Petrol सेडान को ड्रैग रेस में दिखाया गया है।
वीडियो को Arun Panwar ने अपने YouTube चैनल पर अपलोड किया है। वीडियो की शुरुआत व्लॉगर द्वारा कारों को पेश करने से होती है। यहाँ इस्तेमाल किया गया Kia Seltos एक डीजल इंजन संस्करण है जो 1.5 लीटर टर्बोचार्ज्ड इंजन द्वारा संचालित है। इंजन 115 पीएस और 250 एनएम का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। वीडियो में यहां दिख रही Maruti Suzuki Ciaz एक Petrol वर्जन है और इसमें 1.5 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन का इस्तेमाल किया गया है जो 105 पीएस और 138 एनएम का पीक टॉर्क जेनरेट करता है।
Seltos को व्लॉगर चला रहा है जबकि Ciaz को उसका दोस्त चला रहा है। व्लॉगर कार को लाइन में खड़ा करता है और फिर वे दोनों रेसिंग शुरू करते हैं। दौड़ के दौरान दोनों कारों में एयर कंडीशनिंग बंद कर दी गई थी। पहले दौर में कुछ अप्रत्याशित हुआ। Ciaz में ईंधन कम चल रहा था और ऐसा लगता है कि मालिक को इसका एहसास तब तक नहीं हुआ जब तक कि वह दौड़ के बीच में ही नहीं रुक गई. फिर, वे Ciaz में ईंधन भरते हैं और फिर से रेसिंग शुरू करते हैं।
इस राउंड में Kia Seltos आगे निकल गई और Ciaz ड्राइवर को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह थर्ड गियर से चूक गया। जब रेस शुरू हुई थी तो दोनों कारें एक-दूसरे के बगल में थीं और यह केवल इसलिए था क्योंकि Ciaz ड्राइवर एक गियर से चूक गया था Kia Seltos आगे बढ़कर राउंड जीत गई। वे अगले दौर के लिए लाइन अप करते हैं और इस दौर में, Maruti Ciaz चालक ने कोई गियर नहीं छोड़ा और एक छोटे से अंतर से राउंड जीता। व्लॉगर फिर यह पता लगाने के लिए अंतिम दौर करने का फैसला करता है कि कौन सी कार इस दौड़ की विजेता होगी।
इस चक्कर में ड्राइवर कारों को भी स्विच करते हैं। Ciaz को व्लॉगर चला रहा था और उसका दोस्त Seltos के अंदर था। दौड़ शुरू होती है और अन्य दो राउंड की तरह, दोनों कारें लगभग एक ही समय में लाइन से हट जाती हैं। दोनों गाड़ियाँ एक-दूसरे के बगल में थीं और फिर कुछ ही सेकंड में Ciaz दूर जाने लगीं। Ciaz ने ड्रैग रेस जीता और Seltos के नहीं जीतने का कारण था वजन। Petrol इंजन Maruti Ciaz, Seltos की तुलना में काफी हल्का है और इसने Ciaz को वजन अनुपात में बेहतर शक्ति प्रदान की है। Ciaz के रेस जीतने का दूसरा कारण इसका डिज़ाइन था. Kia Seltos पर डिजाइन की तुलना में, Ciaz में एक बेहतर वायुगतिकीय डिजाइन है जो दौड़ के दौरान कम ड्रैग पैदा कर रहा था।
|
अतीत में हमने अपनी वेबसाइट पर SUV, हैचबैक, सेडान और यहां तक कि दोपहिया वाहनों के कई ड्रैग रेस वीडियो प्रदर्शित किए हैं। ज्यादातर समय, रेस में भाग लेने वाले वाहन एक ही सेगमेंट के होते हैं लेकिन, यहाँ भी कुछ अपवाद हैं। हमने ऐसे वीडियो देखे हैं जहां उच्च क्षमता वाली मोटरसाइकिल को SUV या सेडान के साथ ड्रैग रेस में देखा जाता है। यहां हमारे पास एक ऐसा ड्रैग रेस वीडियो है जहां दो अलग-अलग सेगमेंट की कारें एक दूसरे के साथ ड्रैग रेस में प्रतिस्पर्धा करती हैं। वीडियो में Kia Seltos डीजल SUV और Maruti Suzuki Ciaz Petrol सेडान को ड्रैग रेस में दिखाया गया है। वीडियो को Arun Panwar ने अपने YouTube चैनल पर अपलोड किया है। वीडियो की शुरुआत व्लॉगर द्वारा कारों को पेश करने से होती है। यहाँ इस्तेमाल किया गया Kia Seltos एक डीजल इंजन संस्करण है जो एक दशमलव पाँच लीटरटर टर्बोचार्ज्ड इंजन द्वारा संचालित है। इंजन एक सौ पंद्रह पीएस और दो सौ पचास एनएम का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। वीडियो में यहां दिख रही Maruti Suzuki Ciaz एक Petrol वर्जन है और इसमें एक दशमलव पाँच लीटरटर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन का इस्तेमाल किया गया है जो एक सौ पाँच पीएस और एक सौ अड़तीस एनएम का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। Seltos को व्लॉगर चला रहा है जबकि Ciaz को उसका दोस्त चला रहा है। व्लॉगर कार को लाइन में खड़ा करता है और फिर वे दोनों रेसिंग शुरू करते हैं। दौड़ के दौरान दोनों कारों में एयर कंडीशनिंग बंद कर दी गई थी। पहले दौर में कुछ अप्रत्याशित हुआ। Ciaz में ईंधन कम चल रहा था और ऐसा लगता है कि मालिक को इसका एहसास तब तक नहीं हुआ जब तक कि वह दौड़ के बीच में ही नहीं रुक गई. फिर, वे Ciaz में ईंधन भरते हैं और फिर से रेसिंग शुरू करते हैं। इस राउंड में Kia Seltos आगे निकल गई और Ciaz ड्राइवर को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह थर्ड गियर से चूक गया। जब रेस शुरू हुई थी तो दोनों कारें एक-दूसरे के बगल में थीं और यह केवल इसलिए था क्योंकि Ciaz ड्राइवर एक गियर से चूक गया था Kia Seltos आगे बढ़कर राउंड जीत गई। वे अगले दौर के लिए लाइन अप करते हैं और इस दौर में, Maruti Ciaz चालक ने कोई गियर नहीं छोड़ा और एक छोटे से अंतर से राउंड जीता। व्लॉगर फिर यह पता लगाने के लिए अंतिम दौर करने का फैसला करता है कि कौन सी कार इस दौड़ की विजेता होगी। इस चक्कर में ड्राइवर कारों को भी स्विच करते हैं। Ciaz को व्लॉगर चला रहा था और उसका दोस्त Seltos के अंदर था। दौड़ शुरू होती है और अन्य दो राउंड की तरह, दोनों कारें लगभग एक ही समय में लाइन से हट जाती हैं। दोनों गाड़ियाँ एक-दूसरे के बगल में थीं और फिर कुछ ही सेकंड में Ciaz दूर जाने लगीं। Ciaz ने ड्रैग रेस जीता और Seltos के नहीं जीतने का कारण था वजन। Petrol इंजन Maruti Ciaz, Seltos की तुलना में काफी हल्का है और इसने Ciaz को वजन अनुपात में बेहतर शक्ति प्रदान की है। Ciaz के रेस जीतने का दूसरा कारण इसका डिज़ाइन था. Kia Seltos पर डिजाइन की तुलना में, Ciaz में एक बेहतर वायुगतिकीय डिजाइन है जो दौड़ के दौरान कम ड्रैग पैदा कर रहा था।
|
समृद्धिशाली भक्त
पुनरुत्थान के प्रयासी गौडीय महानुभाव -
सांप्रदायिक गतिविधि - जैसा पहिले लिखा गया है, बलदेव विद्याभूषरण के पश्चात् इम सप्रदाय मे कोई ऐसा सर्वमान्य धर्माचार्य नही हुआ, जो साप्रदायिक गौरव बनाये रखने में समर्थ होता, और बगाल एव उडीसा के चैतन्य मतानुयायी भक्तो पर ब्रज का धार्मिक अनुशासन कायम रखता । फिर अहमदशाह अब्दाली के आक्रमरणो ने व्रज का ऐसा भीषरण विनाश किया कि उससे राजनैतिक और आर्थिक गतिरोध के साथ ही साथ धार्मिक ह्रास भी प्रचुर परिमाण मे हुआ था । यद्यपि उस काल मे ब्रज की धार्मिक स्थिति बडी शोचनीय हो गई थी, तथापि इसके पूर्व गौरव की व्यापक प्रसिद्धि के कारण अन्य स्थानों के चैतन्य - भक्त तब भी इसके प्रति श्रद्धावान बने रहे थे । उनमे से जिनको जब कभी सुविधा होती, वे अपने दूरस्थ प्रदेशो से यहां आकर बमते, और यहाँ की ह्रासोन्मुखी स्थिति के सुधारने में अपना महत्वपूर्ण योग देते थे । यहाँ आने वाले धर्मप्राण व्यक्तियो को ब्रज के तत्कालीन गौडीय धर्माचार्यों और विरक्त महात्माओ मे वडी प्रेरणा मिलती थी । उन सब के सामूहिक सहयोग से आधुनिक काल में इस संप्रदाय के पुनरुत्थान के जो प्रयत्न किये गये, उनका सक्षिप्त विवरण यहाँ दिया जाता है ।
समृद्धिशाली भक्तो के प्रयास - चैतन्य संप्रदाय के पुनरुत्थान के लिए समृद्धिशाली भक्तो द्वारा किये गये प्रयास सर्वप्रथम उल्लेखनीय है । औरगजेबी शासन मे इस सप्रदाय के जो प्रसिद्ध मंदिर नष्ट-भ्रष्ट किये गये थे, वे प्रचुर काल तक ध्वभावस्था मे पडे रहे थे । जैमा पहिले लिखा जा चुका है, उनके देव-विग्रहो को वृंदावन से हटा कर जयपुर में प्रतिष्ठित कर दिया गया था । उसके कारण ब्रज में निवास करने वाले गोडीय भक्तो को अपने उपास्य देवो की सेवापूजा करने का समुचित साधन नही रहा था। उस असुविधा को दूर करने के लिए इस संप्रदाय के समृद्धिशाली भक्तो ने वृदावन मे कितने ही मंदिर - देवालयो का निर्माण कराया था । ऐसे समृद्ध भक्तो मे नदकुमार वसु, कृष्णचद्र सिंह (लाला वावू ), शाह कुदनलाल - फुदनलाल (लनित किशोरीललित माधुरी), भैया वलवतराव सिंघे और वनमाली वाबू (तराश वाले ) के नाम अधिक प्रसिद्ध है।
नंदकुमार वसु - वह एक समृद्धिशाली बगाली भक्त था। जब वह तीर्थ यात्रा करते हुए वृदावन आया, तब यहाँ के मंदिर - देवालयो की दुर्दशा देख कर वह वडा दुखी हुआ था । उसने वृदावन के प्राचीन गौडीय देव-स्थानो के निकट नये मंदिरों का निर्माण करा कर उनमे मूल स्वरूपो के प्रतिभू विग्रह प्रतिष्ठित किये थे । इस प्रकार श्री गोविंददेव जी, श्री मदनमोहनजी और श्री गोपीनाथ जी के नये मंदिर स १८७७ मे बनवाये गये । वही मंदिर इस समय भी वृंदावन के गौडीय देव-स्थानो मे अग्रगण्य है। पुराने मंदिरों की देख-भाल भारत सरकार के पुरातत्त्व विभाग के नियंत्रण में होती है ।
कृष्णचंद्र सिंह ( लाला वावू ) - वह बंगाल के वनी-मानी कायस्थ परिवार वा र श्रद्धालु भक्त था । अपनी युवावस्था में ही घर के राजनी वैभव से विरक्त होकर वह स. १८७० के लगभग ब्रज-वास करने को आया था। उसने लाखो रुपया लगा कर यहाँ मंदिर धर्मशाला, घाट, कुड-सरोवर बादि का निर्माण कराया और क्षेत्र की व्यवस्था की थी। उनके व्यय के
लिए उसने बहुत बडी जिमीदारी खरीदी थी। वह 'लाला वाटु' नाम से प्रसिद्ध था। उसने
व्रज के धर्म संप्रदाय
वृदावन मे जो विशाल मंदिर बनवाया, वह 'लाला बाबू' का मंदिर कहलाता है। वह गोवर्धन के गौडीय महात्मा कृष्णदाम (सिद्ध बाबा) का बड़ा भक्त था, श्रोर मथुरा के गेठ मनीराम-लक्ष्मीचंद के से उसका मैत्री - भाव था । ऐसा कहा जाता है, किसी भूमि के स्वामित्व के संबध में लाना चाह और सेठो मे कुछ मनोमालिन्य हो गया था, जिसके कारण दोनों में बोल-चाल भी बंद हो गई थी । जब वह वात सिद्ध बाबा को ज्ञात हुई, तो उन्होंने लाना बाबू में कहा, 'तुम व्रज मे भक्ति-भावना करने को आये हो, या ईर्ष्या-द्वप करने ।" उन पर लाता बाबू सेठो से क्षमा मांगने उनके निवासस्थान पर गया। उसकी विनम्रता देख कर वे उसके पैसे पर गिर पड़े। इस प्रकार उन धर्मप्राण महापुरुषो का क्षणिक मनोमालिन्य पूर्ववत् स्नेह में परिवर्तित हो गया ।
गोवर्धन मे एक घोडे की अकस्मात लात लग जाने की चोट से हुआ था । उनका प्रतिम सस्कार वृदावन में किया गया। देहावमान के समय उसको आयु वेवन ४० वर्ष को धो ।
लगनक के धनाढ्य जोहरी थे । उनका जन्म क्रमश स १८८२ और न १८८५ मे हुआ था। अपनी युवावस्था में ही वे भक्ति मार्ग की ओर आकृष्ट हो गये थे। उन्होंने लखनऊ छोड कर वृदावन में निवास किया और अपनी धार्मिक एवं साहित्यिक देन ने व्रज को सास्कृतिक स्थिति को समृद्ध दिया था। उन्होंने वृदावन के राधारमणीय गोस्वामी राधागोविंद जी मे चैतन्य नप्रदाय की दीक्षा ली थो, ओर श्री राधारमण जी के मंदिर निर्माण में योग दिया था । स १९२५ मे उन्होंने वृदावन में सगमरमर का एक विशाल कलात्मक मंदिर बनवाया, जो 'शाह जी का मंदिर' कहलाता है। ये परम भक्त होने के साथ ही साथ ब्रजभाषा के सुकवि भी थे । उनके काव्योषनाम क्रमश 'ललित किशोरी' और 'ललित माधुरी' थे । उनका देहावमान क्रमश स १६३० और स १९४२ मे हुआ था । उनके वशज शाह गौरशरण वृदावन के प्रतिष्ठित नागरिक और उत्साही सार्वजनिक कार्यकर्ता है। भैया बलवतराव सिधे - वे ग्वालियर नरेश जयाजीराव मिधे के पुत्र थे। उनका जन्म स १९११ की आषाढ कृ. ११ को लश्कर मे हुआ था। राजकीय पुरुष होते हुए भी उनकी वृत्ति र से ही भक्ति और वैराग्य की ओर थी । वे व्रज के परमोपासक थे, और गोवर्धन वृदावन आदि लीला-स्थलो मे या कर भक्ति-साधना किया करते थे। उन्होंने महात्मा हरिच गादास जी से चैतन्य सप्रदाय की दीक्षा ली थी । वे धर्मनिष्ठ, साधुसेवी और उदारमना महापुरुष थे। उन्होंने व्रज मे लाखो रुपया धर्मार्थ लगा कर अपनी दानशीलता का परिचय दिया था। उनके धर्मार्थ कार्यों मे मथुरा का 'श्री राधा माधव भडार ट्रस्ट' और गोवर्धन का 'श्री कृष्ण चैतन्यालय ट्रस्ट' उल्लेखनीय है । मथुरा ट्रस्ट द्वारा १३५ भजनानदी साधुओ को मासिक वृत्ति देने की व्यवस्था है, और गोबर्धन ट्रस्ट द्वारा कुसुम सरोवर के देवालय की सेवा का प्रबंध किया जाता है। उक्त देवालय 'ग्वालियर वाला मंदिर' कहलाता है । इन ट्रस्टो की व्यवस्था और मंदिर निर्माण के अतिरिक्त उन्होने ब्रजभाषा भक्ति-काव्य की रचनाएं भी की थी । उनका देहावसान स १९८१ की पौष कृ. ११ को ७० वर्ष की आयु मे हुआ था ।
वनमाली बाबू - वे तराश जिला पावना के धनाढ्य वगाली भक्त थे । उनका जन्म स १९२१ मे हुआ था । वे शारभ से ही धार्मिक और उदार प्रवृत्ति के थे । स १९५२ मे उन्होने अपनी समस्त सम्पत्ति अपने उपास्य ठाकुर श्री राधाविनोद जी के नाम कर दी थी। फिर वे अपने परिवार और ठाकुर जी को लेकर व्रज मे श्रा गये थे। उन्होने पहिले व्रज के राधाकुड नामक
|
समृद्धिशाली भक्त पुनरुत्थान के प्रयासी गौडीय महानुभाव - सांप्रदायिक गतिविधि - जैसा पहिले लिखा गया है, बलदेव विद्याभूषरण के पश्चात् इम सप्रदाय मे कोई ऐसा सर्वमान्य धर्माचार्य नही हुआ, जो साप्रदायिक गौरव बनाये रखने में समर्थ होता, और बगाल एव उडीसा के चैतन्य मतानुयायी भक्तो पर ब्रज का धार्मिक अनुशासन कायम रखता । फिर अहमदशाह अब्दाली के आक्रमरणो ने व्रज का ऐसा भीषरण विनाश किया कि उससे राजनैतिक और आर्थिक गतिरोध के साथ ही साथ धार्मिक ह्रास भी प्रचुर परिमाण मे हुआ था । यद्यपि उस काल मे ब्रज की धार्मिक स्थिति बडी शोचनीय हो गई थी, तथापि इसके पूर्व गौरव की व्यापक प्रसिद्धि के कारण अन्य स्थानों के चैतन्य - भक्त तब भी इसके प्रति श्रद्धावान बने रहे थे । उनमे से जिनको जब कभी सुविधा होती, वे अपने दूरस्थ प्रदेशो से यहां आकर बमते, और यहाँ की ह्रासोन्मुखी स्थिति के सुधारने में अपना महत्वपूर्ण योग देते थे । यहाँ आने वाले धर्मप्राण व्यक्तियो को ब्रज के तत्कालीन गौडीय धर्माचार्यों और विरक्त महात्माओ मे वडी प्रेरणा मिलती थी । उन सब के सामूहिक सहयोग से आधुनिक काल में इस संप्रदाय के पुनरुत्थान के जो प्रयत्न किये गये, उनका सक्षिप्त विवरण यहाँ दिया जाता है । समृद्धिशाली भक्तो के प्रयास - चैतन्य संप्रदाय के पुनरुत्थान के लिए समृद्धिशाली भक्तो द्वारा किये गये प्रयास सर्वप्रथम उल्लेखनीय है । औरगजेबी शासन मे इस सप्रदाय के जो प्रसिद्ध मंदिर नष्ट-भ्रष्ट किये गये थे, वे प्रचुर काल तक ध्वभावस्था मे पडे रहे थे । जैमा पहिले लिखा जा चुका है, उनके देव-विग्रहो को वृंदावन से हटा कर जयपुर में प्रतिष्ठित कर दिया गया था । उसके कारण ब्रज में निवास करने वाले गोडीय भक्तो को अपने उपास्य देवो की सेवापूजा करने का समुचित साधन नही रहा था। उस असुविधा को दूर करने के लिए इस संप्रदाय के समृद्धिशाली भक्तो ने वृदावन मे कितने ही मंदिर - देवालयो का निर्माण कराया था । ऐसे समृद्ध भक्तो मे नदकुमार वसु, कृष्णचद्र सिंह , शाह कुदनलाल - फुदनलाल , भैया वलवतराव सिंघे और वनमाली वाबू के नाम अधिक प्रसिद्ध है। नंदकुमार वसु - वह एक समृद्धिशाली बगाली भक्त था। जब वह तीर्थ यात्रा करते हुए वृदावन आया, तब यहाँ के मंदिर - देवालयो की दुर्दशा देख कर वह वडा दुखी हुआ था । उसने वृदावन के प्राचीन गौडीय देव-स्थानो के निकट नये मंदिरों का निर्माण करा कर उनमे मूल स्वरूपो के प्रतिभू विग्रह प्रतिष्ठित किये थे । इस प्रकार श्री गोविंददेव जी, श्री मदनमोहनजी और श्री गोपीनाथ जी के नये मंदिर स एक हज़ार आठ सौ सतहत्तर मे बनवाये गये । वही मंदिर इस समय भी वृंदावन के गौडीय देव-स्थानो मे अग्रगण्य है। पुराने मंदिरों की देख-भाल भारत सरकार के पुरातत्त्व विभाग के नियंत्रण में होती है । कृष्णचंद्र सिंह - वह बंगाल के वनी-मानी कायस्थ परिवार वा र श्रद्धालु भक्त था । अपनी युवावस्था में ही घर के राजनी वैभव से विरक्त होकर वह स. एक हज़ार आठ सौ सत्तर के लगभग ब्रज-वास करने को आया था। उसने लाखो रुपया लगा कर यहाँ मंदिर धर्मशाला, घाट, कुड-सरोवर बादि का निर्माण कराया और क्षेत्र की व्यवस्था की थी। उनके व्यय के लिए उसने बहुत बडी जिमीदारी खरीदी थी। वह 'लाला वाटु' नाम से प्रसिद्ध था। उसने व्रज के धर्म संप्रदाय वृदावन मे जो विशाल मंदिर बनवाया, वह 'लाला बाबू' का मंदिर कहलाता है। वह गोवर्धन के गौडीय महात्मा कृष्णदाम का बड़ा भक्त था, श्रोर मथुरा के गेठ मनीराम-लक्ष्मीचंद के से उसका मैत्री - भाव था । ऐसा कहा जाता है, किसी भूमि के स्वामित्व के संबध में लाना चाह और सेठो मे कुछ मनोमालिन्य हो गया था, जिसके कारण दोनों में बोल-चाल भी बंद हो गई थी । जब वह वात सिद्ध बाबा को ज्ञात हुई, तो उन्होंने लाना बाबू में कहा, 'तुम व्रज मे भक्ति-भावना करने को आये हो, या ईर्ष्या-द्वप करने ।" उन पर लाता बाबू सेठो से क्षमा मांगने उनके निवासस्थान पर गया। उसकी विनम्रता देख कर वे उसके पैसे पर गिर पड़े। इस प्रकार उन धर्मप्राण महापुरुषो का क्षणिक मनोमालिन्य पूर्ववत् स्नेह में परिवर्तित हो गया । गोवर्धन मे एक घोडे की अकस्मात लात लग जाने की चोट से हुआ था । उनका प्रतिम सस्कार वृदावन में किया गया। देहावमान के समय उसको आयु वेवन चालीस वर्ष को धो । लगनक के धनाढ्य जोहरी थे । उनका जन्म क्रमश स एक हज़ार आठ सौ बयासी और न एक हज़ार आठ सौ पचासी मे हुआ था। अपनी युवावस्था में ही वे भक्ति मार्ग की ओर आकृष्ट हो गये थे। उन्होंने लखनऊ छोड कर वृदावन में निवास किया और अपनी धार्मिक एवं साहित्यिक देन ने व्रज को सास्कृतिक स्थिति को समृद्ध दिया था। उन्होंने वृदावन के राधारमणीय गोस्वामी राधागोविंद जी मे चैतन्य नप्रदाय की दीक्षा ली थो, ओर श्री राधारमण जी के मंदिर निर्माण में योग दिया था । स एक हज़ार नौ सौ पच्चीस मे उन्होंने वृदावन में सगमरमर का एक विशाल कलात्मक मंदिर बनवाया, जो 'शाह जी का मंदिर' कहलाता है। ये परम भक्त होने के साथ ही साथ ब्रजभाषा के सुकवि भी थे । उनके काव्योषनाम क्रमश 'ललित किशोरी' और 'ललित माधुरी' थे । उनका देहावमान क्रमश स एक हज़ार छः सौ तीस और स एक हज़ार नौ सौ बयालीस मे हुआ था । उनके वशज शाह गौरशरण वृदावन के प्रतिष्ठित नागरिक और उत्साही सार्वजनिक कार्यकर्ता है। भैया बलवतराव सिधे - वे ग्वालियर नरेश जयाजीराव मिधे के पुत्र थे। उनका जन्म स एक हज़ार नौ सौ ग्यारह की आषाढ कृ. ग्यारह को लश्कर मे हुआ था। राजकीय पुरुष होते हुए भी उनकी वृत्ति र से ही भक्ति और वैराग्य की ओर थी । वे व्रज के परमोपासक थे, और गोवर्धन वृदावन आदि लीला-स्थलो मे या कर भक्ति-साधना किया करते थे। उन्होंने महात्मा हरिच गादास जी से चैतन्य सप्रदाय की दीक्षा ली थी । वे धर्मनिष्ठ, साधुसेवी और उदारमना महापुरुष थे। उन्होंने व्रज मे लाखो रुपया धर्मार्थ लगा कर अपनी दानशीलता का परिचय दिया था। उनके धर्मार्थ कार्यों मे मथुरा का 'श्री राधा माधव भडार ट्रस्ट' और गोवर्धन का 'श्री कृष्ण चैतन्यालय ट्रस्ट' उल्लेखनीय है । मथुरा ट्रस्ट द्वारा एक सौ पैंतीस भजनानदी साधुओ को मासिक वृत्ति देने की व्यवस्था है, और गोबर्धन ट्रस्ट द्वारा कुसुम सरोवर के देवालय की सेवा का प्रबंध किया जाता है। उक्त देवालय 'ग्वालियर वाला मंदिर' कहलाता है । इन ट्रस्टो की व्यवस्था और मंदिर निर्माण के अतिरिक्त उन्होने ब्रजभाषा भक्ति-काव्य की रचनाएं भी की थी । उनका देहावसान स एक हज़ार नौ सौ इक्यासी की पौष कृ. ग्यारह को सत्तर वर्ष की आयु मे हुआ था । वनमाली बाबू - वे तराश जिला पावना के धनाढ्य वगाली भक्त थे । उनका जन्म स एक हज़ार नौ सौ इक्कीस मे हुआ था । वे शारभ से ही धार्मिक और उदार प्रवृत्ति के थे । स एक हज़ार नौ सौ बावन मे उन्होने अपनी समस्त सम्पत्ति अपने उपास्य ठाकुर श्री राधाविनोद जी के नाम कर दी थी। फिर वे अपने परिवार और ठाकुर जी को लेकर व्रज मे श्रा गये थे। उन्होने पहिले व्रज के राधाकुड नामक
|
Don't Miss!
ब्रह्मास्त्र से रणबीर कपूर का पहला लुक, अयान मुखर्जी ने जारी कर दिया है। फिल्म से रणबीर कपूर का ये लुक देख फैन्स काफी ज़्यादा खुश हैं। क्योंकि संजू के बाद रणबीर कपूर वापस अपने पुराने अंदाज़ में नज़र आ रहे हैं। उन्हें इस अंदाज़ में देखे काफी समय हो चुका है। फिल्म में रणबीर कपूर के किरदार का नाम है शिवा।
ब्रह्मास्त्र की स्टारकास्ट काफी दिलचस्प है। फिल्म में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के अलावा अमिताभ बच्चन, नागार्जुन, डिंपल कपाड़िया, मौनी रॉय भी मुख्य भूमिकाओं में नज़र आएंगे। फिल्म 20 दिसंबर को रिलीज़ हो रही है। और इस साल का अंत धमाकेदार तरीके से करेगी।
अयान मुखर्जी पांच सालों से ब्रह्मास्त्र पर का कर रहे हैं। इस फिल्म पर काफी बजट और उम्मीदें टिकी हुई है। इस फिल्म के लिए रणबीर ने कई फिल्मों को रिजेक्ट किया है।
|
Don't Miss! ब्रह्मास्त्र से रणबीर कपूर का पहला लुक, अयान मुखर्जी ने जारी कर दिया है। फिल्म से रणबीर कपूर का ये लुक देख फैन्स काफी ज़्यादा खुश हैं। क्योंकि संजू के बाद रणबीर कपूर वापस अपने पुराने अंदाज़ में नज़र आ रहे हैं। उन्हें इस अंदाज़ में देखे काफी समय हो चुका है। फिल्म में रणबीर कपूर के किरदार का नाम है शिवा। ब्रह्मास्त्र की स्टारकास्ट काफी दिलचस्प है। फिल्म में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के अलावा अमिताभ बच्चन, नागार्जुन, डिंपल कपाड़िया, मौनी रॉय भी मुख्य भूमिकाओं में नज़र आएंगे। फिल्म बीस दिसंबर को रिलीज़ हो रही है। और इस साल का अंत धमाकेदार तरीके से करेगी। अयान मुखर्जी पांच सालों से ब्रह्मास्त्र पर का कर रहे हैं। इस फिल्म पर काफी बजट और उम्मीदें टिकी हुई है। इस फिल्म के लिए रणबीर ने कई फिल्मों को रिजेक्ट किया है।
|
देश की ऑटोमोबाइल मार्केट में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के कारण इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की बिक्री में तेजी आ रही है। इस वजह से बहुत सी ऑटोमोबाइल कंपनियां अपने व्हीकल्स के इलेक्ट्रिक वेरिएंट लॉन्च करने के साथ ही इस सेगमेंट में नए मॉडल्स उतारने की भी योजना बना रही हैं।
से पता चलता है कि पिछले वर्ष दिसंबर में देश की इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट की वर्ष-दर-वर्ष आधार पर ग्रोथ लगभग 240 प्रतिशत की रही। दिसंबर में लगभग 50,800 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदे गए। यह आंकड़ा नवंबर में 42,000 यूनिट्स से कुछ अधिक का था। इससे पिछले वर्ष दिसंबर में देश भर में केवल 14,978 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स रजिस्टर्ड हुए थे। EV की बिक्री बढ़ने में बड़ा योगदान इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर का है। दिसंबर में EV की कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी 90. 3 प्रतिशत की थी। इनमें इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का योगदान 48. 6 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक पैसेंजर थ्री-व्हीलर्स का 41. 7 प्रतिशत था। इलेक्ट्रिक कारों और कार्गो व्हीकल्स की हिस्सेदरी क्रमशः लगभग 5 प्रतिशत और 4. 3 प्रतिशत की थी।
हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में Okinawa, हीरो इलेक्ट्रिक, TVS Motors, बजाज ऑटो, Ampere Vehicles, Ather Energy और रिवोल्ट प्रमुख कंपनियां थी। इस सेगमेंट में दिसंबर में 24,725 यूनिट्स बिकी। यह महीना-दर-महीना आधार पर लगभग 10 प्रतिशत और वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 444 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इलेक्ट्रिक कारों के सेगमेंट में टाटा मोटर्स का पहला स्थान बरकरार है। इस सेगमेंट में दिसंबर में 2,522 यूनिट्स की बिक्री हुई जिसमें टाटा मोटर्स की हिस्सेदारी लगभग 93 प्रतिशत की थी।
किया है। इससे पहले राजधानी दिल्ली में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को प्रोत्साहन देने के लिए उपायों की घोषणा की गई थी। दिल्ली सरकार ने 10 साल से पुराने डीजल इंजन वाले व्हीकल्स को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलने की अनुमति दी है। इससे इन डीजल इंजन वाले व्हीकल्स पर बैन के फैसले से बचा जा सकेगा। नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल की ओर से 2015 और सुप्रीम कोर्ट के 2018 में जारी ऑर्डर्स के तहत दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल इंजन वाले व्हीकल्स को चलाया नहीं जा सकता। हालांकि, पुरानी डीजल कारों में इलेक्ट्रिक किट तभी लगाने की अनुमति तभी मिलगी जब टेस्टिंग एजेंसी डीजल कार के इंजन को फिट घोषित करेगी। अप्रूवल मिलने के बाद ही इंजन को इलेक्ट्रिक सिस्टम के साथ बदला जा सकेगा।
|
देश की ऑटोमोबाइल मार्केट में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के कारण इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बिक्री में तेजी आ रही है। इस वजह से बहुत सी ऑटोमोबाइल कंपनियां अपने व्हीकल्स के इलेक्ट्रिक वेरिएंट लॉन्च करने के साथ ही इस सेगमेंट में नए मॉडल्स उतारने की भी योजना बना रही हैं। से पता चलता है कि पिछले वर्ष दिसंबर में देश की इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट की वर्ष-दर-वर्ष आधार पर ग्रोथ लगभग दो सौ चालीस प्रतिशत की रही। दिसंबर में लगभग पचास,आठ सौ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदे गए। यह आंकड़ा नवंबर में बयालीस,शून्य यूनिट्स से कुछ अधिक का था। इससे पिछले वर्ष दिसंबर में देश भर में केवल चौदह,नौ सौ अठहत्तर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स रजिस्टर्ड हुए थे। EV की बिक्री बढ़ने में बड़ा योगदान इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर का है। दिसंबर में EV की कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी नब्बे. तीन प्रतिशत की थी। इनमें इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का योगदान अड़तालीस. छः प्रतिशत और इलेक्ट्रिक पैसेंजर थ्री-व्हीलर्स का इकतालीस. सात प्रतिशत था। इलेक्ट्रिक कारों और कार्गो व्हीकल्स की हिस्सेदरी क्रमशः लगभग पाँच प्रतिशत और चार. तीन प्रतिशत की थी। हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में Okinawa, हीरो इलेक्ट्रिक, TVS Motors, बजाज ऑटो, Ampere Vehicles, Ather Energy और रिवोल्ट प्रमुख कंपनियां थी। इस सेगमेंट में दिसंबर में चौबीस,सात सौ पच्चीस यूनिट्स बिकी। यह महीना-दर-महीना आधार पर लगभग दस प्रतिशत और वर्ष-दर-वर्ष आधार पर चार सौ चौंतालीस प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इलेक्ट्रिक कारों के सेगमेंट में टाटा मोटर्स का पहला स्थान बरकरार है। इस सेगमेंट में दिसंबर में दो,पाँच सौ बाईस यूनिट्स की बिक्री हुई जिसमें टाटा मोटर्स की हिस्सेदारी लगभग तिरानवे प्रतिशत की थी। किया है। इससे पहले राजधानी दिल्ली में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को प्रोत्साहन देने के लिए उपायों की घोषणा की गई थी। दिल्ली सरकार ने दस साल से पुराने डीजल इंजन वाले व्हीकल्स को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलने की अनुमति दी है। इससे इन डीजल इंजन वाले व्हीकल्स पर बैन के फैसले से बचा जा सकेगा। नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल की ओर से दो हज़ार पंद्रह और सुप्रीम कोर्ट के दो हज़ार अट्ठारह में जारी ऑर्डर्स के तहत दिल्ली-एनसीआर में दस साल से पुराने डीजल और पंद्रह साल से पुराने पेट्रोल इंजन वाले व्हीकल्स को चलाया नहीं जा सकता। हालांकि, पुरानी डीजल कारों में इलेक्ट्रिक किट तभी लगाने की अनुमति तभी मिलगी जब टेस्टिंग एजेंसी डीजल कार के इंजन को फिट घोषित करेगी। अप्रूवल मिलने के बाद ही इंजन को इलेक्ट्रिक सिस्टम के साथ बदला जा सकेगा।
|
धमतरी - यह मामला धमतरी जिले के दुगली बिरनपारा का है. जहाँ जमीन विवाद के चलते चचेरे भाई ने युवक पर फावड़े से वार कर दिया। हमले से युवक गम्भीर रूप से घायल हो गया है. घायल युवक को गंभीर अवस्था में धमतरी अस्पताल में भर्ती किया गया है। फ़िलहाल इस मामले में पुलिस में शिकायत नहीं की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जमीन विवाद के चलते दुगली बिरनपारा के किशोर सलाम पिता रामकृष्णा उम्र 37 वर्ष को उसके चचेरे भाई अनूप सलाम पिता बरनु 28 वर्ष ने फावड़े से प्रहार कर घायल कर दिया। घटना बुधवार शाम 4:30 बजे के आसपास की है। युवक के सर व आंख में गंभीर चोट आई है। युवक को बोलने में भी तकलीफ है। घटना के बाद परिजनों ने 108 एम्बुलेंस को फोन लगाया। इसके बाद नगरी 108 की टीम तत्काल घटना स्थल पर पहुंची और युवक को जिला अस्पताल धमतरी में भर्ती कराया गया है।
|
धमतरी - यह मामला धमतरी जिले के दुगली बिरनपारा का है. जहाँ जमीन विवाद के चलते चचेरे भाई ने युवक पर फावड़े से वार कर दिया। हमले से युवक गम्भीर रूप से घायल हो गया है. घायल युवक को गंभीर अवस्था में धमतरी अस्पताल में भर्ती किया गया है। फ़िलहाल इस मामले में पुलिस में शिकायत नहीं की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जमीन विवाद के चलते दुगली बिरनपारा के किशोर सलाम पिता रामकृष्णा उम्र सैंतीस वर्ष को उसके चचेरे भाई अनूप सलाम पिता बरनु अट्ठाईस वर्ष ने फावड़े से प्रहार कर घायल कर दिया। घटना बुधवार शाम चार:तीस बजे के आसपास की है। युवक के सर व आंख में गंभीर चोट आई है। युवक को बोलने में भी तकलीफ है। घटना के बाद परिजनों ने एक सौ आठ एम्बुलेंस को फोन लगाया। इसके बाद नगरी एक सौ आठ की टीम तत्काल घटना स्थल पर पहुंची और युवक को जिला अस्पताल धमतरी में भर्ती कराया गया है।
|
- रक्षाबंधन और लाल सिंह चड्ढा की एडवांस बुकिंग शुरु- आमिर खान vs अक्षय कुमार, बॉक्स ऑफिस पर कौन किस पर भारी!
- आमिर खान ने 'लाल सिंह चड्ढा' के अपने 14 साल के प्यार और मेहनत पर कहा- 'मैं थोड़ा उत्साहित और घबराया हुआ हूं'
Nora Fatehi: ముత్యాల వంటి డ్రెస్సులో నోరా ఫతేహి హొయలు. . హాట్ లుక్స్ వైరల్!
|
- रक्षाबंधन और लाल सिंह चड्ढा की एडवांस बुकिंग शुरु- आमिर खान vs अक्षय कुमार, बॉक्स ऑफिस पर कौन किस पर भारी! - आमिर खान ने 'लाल सिंह चड्ढा' के अपने चौदह साल के प्यार और मेहनत पर कहा- 'मैं थोड़ा उत्साहित और घबराया हुआ हूं' Nora Fatehi: ముత్యాల వంటి డ్రెస్సులో నోరా ఫతేహి హొయలు. . హాట్ లుక్స్ వైరల్!
|
नई दिल्ली : कुश्ती संघ के अध्यक्ष (WFI) बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के ऊपर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप का मामला बढ़ता ही जा रहा है। जहां एक तरफ अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के खिलाफ देश के कई नामी पहलवानों ने मोर्चा खोल रखा है। तो वहीं अब दूसरी तरफ बृजभूषण शरण सिंह आज बृजभूषण सिंह इस मामले में दोपहर 12 बजे प्रेस कान्फ्रेंस करने वाले हैं।
इस बात की जानकारी उन्होंने खुद अपने सोशल मीडिया से दी है। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह आज दोपहर 12 बजे उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नवाबगंज स्थित कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र में प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) करेंगे। गौरतलब है कि उन्होंने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी सांझा की है जो इस प्रकार है।
- वक्ता - बृजभूषण शरण सिंह सांसद (अध्यक्ष भारतीय कुश्ती संघ )
- विषय - कुश्ती और कुश्ती के खिलाफ साजिश करने और महिला पहलवानों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने की राजनैतिक साजिश का पर्दाफाश मीडिया के सभी साथी आमंत्रित है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पिछले दो दिनों से बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक और विनेश फोगाट समेत कई शीर्ष पहलवान कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं। इतना ही नहीं और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। आपको बता दें कि इन लोगों ने बृजभूषण शरण सिंह और कोचों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
इस सब को लेकर इन पहलवानों की मांग है कि इनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए। तो वहीं मामले को लेकर बृजभूषण शरण सिंह का कहना है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश की गई है। जिसका पर्दाफाश वो आज 12 बजे की प्रेस कान्फ्रेंस के जरिए करेंगे।
|
नई दिल्ली : कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के ऊपर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप का मामला बढ़ता ही जा रहा है। जहां एक तरफ अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के खिलाफ देश के कई नामी पहलवानों ने मोर्चा खोल रखा है। तो वहीं अब दूसरी तरफ बृजभूषण शरण सिंह आज बृजभूषण सिंह इस मामले में दोपहर बारह बजे प्रेस कान्फ्रेंस करने वाले हैं। इस बात की जानकारी उन्होंने खुद अपने सोशल मीडिया से दी है। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह आज दोपहर बारह बजे उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नवाबगंज स्थित कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। गौरतलब है कि उन्होंने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी सांझा की है जो इस प्रकार है। - वक्ता - बृजभूषण शरण सिंह सांसद - विषय - कुश्ती और कुश्ती के खिलाफ साजिश करने और महिला पहलवानों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने की राजनैतिक साजिश का पर्दाफाश मीडिया के सभी साथी आमंत्रित है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, पिछले दो दिनों से बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक और विनेश फोगाट समेत कई शीर्ष पहलवान कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं। इतना ही नहीं और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। आपको बता दें कि इन लोगों ने बृजभूषण शरण सिंह और कोचों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इस सब को लेकर इन पहलवानों की मांग है कि इनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए। तो वहीं मामले को लेकर बृजभूषण शरण सिंह का कहना है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश की गई है। जिसका पर्दाफाश वो आज बारह बजे की प्रेस कान्फ्रेंस के जरिए करेंगे।
|
उपर्युक्त कथन से यह ज्ञात होता है कि द्वैराज्य एक ही कुटुम्ब के दो व्यक्तियों द्वारा शासित राज्य होते थे। चाहे वह व्यक्ति पिता-पुत्र हों अथवा भाई-भाई जिनके मध्य होने वाली कलह कोटुम्बिक कलह होने के कारण उनके मंत्रियों के द्वारा सरलतापूर्वक निपटायी जा सकती थी। ऐसे राज्यों पर बाह्य शत्रुओं के द्वारा इतनी सरलतापूर्वक विजय प्राप्त नहीं की जा सकती थी। जितनी सरलता से वैराज्यों पर विजय प्राप्त की जा सकती थी । कौटिल्य के अनुसार विजेता राजा वैराज्य को अपना नहीं समझता था। यह कथन इस सिद्धान्त की स्थापना करता है कि वैराज्य नृपतन्त्रात्मक राज्य से भिन्न राज्य होता था । अतः विजेता राजा वैराज्य को अपना न समझकर उस राज्य को क्षीण कर देता था अर्थात् उसके साथ क्रूरता का व्यवहार करता था, कौटिल्य का यह कथन स्वाभाविक है। दो असमान सिद्धान्तों के आधार पर संघठित किए जाने वाले राज्यों में इस प्रकार का व्यवहार होना चाहिए। विजेता राजा यह प्रयत्न करता ही है कि विजित राज्य में उसी प्रकार की शासन प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए जैसी कि विजेता राजा के राज्य में प्रचलित होती है। इस उद्देश्य की पूर्ति के निमित्त वह विजित राज्य के प्रति क्रूरता - पूर्ण व्यवहार भी करता है । इतिहास इस बात का साक्षी है।
आधुनिक युग में यूरोप में सबसे बड़ी समस्या यही रही है। विश्व का प्रत्येक राज्य इस ओर निरन्तर प्रयत्नशील दिखलायी पडता है कि विश्व के विभिन्न भूभागों में ऐसे राज्यों की स्थापना होनी चाहिए जो कि शासन प्रणाली की दृष्टि से समान हो। इसी उद्देश्य के लिए विश्वव्यापी महायुद्ध भी होते रहे हैं। संयुक्त राज्य अमरीका और साम्यवादी रूस के मध्य जो आज पारस्परिक प्रतिद्वन्द्वता एवं कलह के चिन्ह दिखलायी पड़ रहे हैं उसका मूल कारण यही है कि इन दोनों राज्यों के मूल सिद्धान्तों में असमानता है।
इसलिए कौटिल्य के उपर्युक्त कथन से विदित होता है कि वैराज्य नृपतन्त्रात्मक राज्यों से भिन्न राज्य अवश्य रहे होंगे। इस विषय में कौटिल्य दूसरी बात यह कहते हैं कि इस प्रकार के राज्यों (वैराज्यों) को विजेता राजा अपने राज्य में सम्मिलित कर लेता है। परन्तु कौटिल्य ने पराजित राजा के प्रति विजेता राजा का कैसा व्यवहार होना चाहिए इस विषय में अपना मत प्रकट करते हुए इस प्रकार लिखा है कि पराजित राजा की भूमि द्रव्य, पुत्र और स्त्रियों पर विजेता राजा को कभी अधिकार नहीं करना चाहिए किन्तु पराजित राजा के वंशजों को उनकी योग्यता के अनुसार उचित पद पर नियुक्त कर देना चाहिए। यदि शत्रु युद्ध में राजा मारा जाए
तो उस राजा के पुत्र को ही उसके राज्य पर आसीन कर देना चाहिए।' परन्तु कौटिल्य के इन दोनों मतों में बहुत अन्तर है। इसका समाधान तभी हो सकता है जबकि ऐसा मान लिया जाए कि वैराज्य लोकतंत्रात्मक राज्य थे अन्यथा कौटिल्य इन राज्यों को विजेता राजा के राज्य में सम्मिलित करने का आदेश कदापि न देते।
वैराज्य के विषय में कौटिल्य तीसरी विशेष बात यह बतलाते हैं कि इन राज्यों की जनता को विजेता राजा के प्रति विरक्त हो जाने की भी संभावना रहती थी और उनकी यह वृत्ति इस पराकाष्ठा तक भी पहुँच जाती थी कि उन पर विजेता राजा द्वारा शासन किया जाना असंभव हो जाता था। इसका परिणाम यह होता था कि इस राज्य के लोगों को विजेता राजा अपने नियंत्रण में ले आने में असमर्थ समझकर उसको इस पराजित राज्य को त्याग कर चले जाने के लिए विवश हो जाना पड़ता था। इस वर्णन से भी इसी सिद्धान्त की पुष्टि होती है कि वैराज्य लोकतंत्रात्मक राज्य थे जिनमें राज्य की प्रभुता राज्य के निवासियों के अधीन थी और वहाँ के निवासी नृपतन्त्रात्मक राज्यों के नितान्त विरोधी थे।
इस प्रकार इस सिद्धान्त की स्थापना हो जाती है कि कौटिल्य के समय में कुछ ऐसे राज्य अवश्य रहे होंगे जो जनतन्त्रात्मक शासन सिद्धान्त के आधार पर संघठित एवं संचालित थे और जिनको उन्होंने सम्मान की भावना से न देखकर उपेक्षा की दृष्टि से देखा है। इन राज्यों के प्रति कौटिल्य द्वारा इस प्रकार का व्यवहार उचित ही था क्योंकि वह लोकतंत्रात्मक राज्यों के पोषक न थे। साम्राज्यवादी प्रत्येक व्यक्ति लोकतन्त्रात्मक राज्यों के प्रति स्वाभाविक रूप से इसी प्रकार का व्यवहार करेगा इसमें किचिंत मात्र भी सन्देह नहीं होना चाहिए।
वैराज्य शब्द की व्युत्पत्ति के आधार पर भी इस सिद्धान्त की पुष्टि होती है। वैराज्य संस्कृत के विराज शब्द से बना है जो "वि" और "राज" इन दो शब्दों का संयोग है। 'वि' उपसर्ग है जिसका अर्थ यहाँ "विगत" है । इस प्रकार वैराज्य की व्युत्पत्ति "विगत राजकं वैराज्यं" होगी जिसके अनुसार वैराज्य वह राज्य होगा जिसमें राजा नहीं होगा। इस प्रकार संस्कृत भाषा के व्याकरण शास्त्र के अनुसार वैराज्य को राजा रहित राज्य के अर्थ में लेना न्यायसंगत होगा।
न च हतस्य भूमिद्रव्य पुत्रदारानभिमन्यते ।। वुल्यानप्यस्य स्वेषु पात्रेषु स्थापयेत् ।। कर्मणि मृतस्य पुत्रं राज्ये स्थापयेत् ।।
अर्थ०, अधिo 7, अ० 16, वार्ता 42 / अर्थ०, अधिo 7, अ० 16, वार्ता 43 ।
अर्थ०, अधि0 7, अ० 16, वार्ता 44 ।
महाभारत में भी वैराज्य को एक विशेष प्रकार का राज्य माना है जिसका अधिपति राजा नहीं होता।"
ऐतरेय ब्राह्मण में भी वैराज्य को एक विशेष प्रकार का राज्य बताया गया है और वह नृपतन्त्रात्मक राज्य से नितान्त भिन्न माना गया है।
इस प्रकार हमारा यह दृढ़ अभिमत है कि वैराज्य लोकतन्त्रात्मक राज्यों में एक विशेष प्रकार के राज्य थे जिनकी आधुनिक युगीन प्रत्यक्ष लोकतन्त्रात्मक राज्य की धारणा से समानता की जा सकती है।
कौटिल्य ने वैराज्य के अतिरिक्त अन्य प्रकार के लोक - तंत्रात्मक राज्यों का भी उल्लेख किया है। इन राज्यों के विषय में उल्लेख करते हुए उन्होंने संघनीति पर विशेष प्रकाश डाला है।
प्रत्येक राज्य के समक्ष सर्वाधिक जटिल समस्या उसकी रक्षा का प्रश्न होता है। इस समस्या को सफलतापूर्वक सुलझाने के लिए राज्य को अनेक प्रकार की शक्तियों का संचय करना आवश्यक होता है। इन शक्तियों में सैन्यबल और मित्रबल का प्रमुख स्थान है।
परन्तु कौटिल्य उपर्युक्त मान्यता में आस्था नही रखते हैं। उन्होंने सैन्यबल और मित्रबल की अपेक्षा संघलाभ को अधिक उपयोगी माना है। उनका मत है कि जो राज्य संघवृत्त नियम के आधार पर संघठित होकर संघ बना लेते हैं उनका संघठन स्थायी होता है और वह शत्रु द्वारा दबाये नहीं जा सकते ।
उन्होंने संघवृत्त सिद्धान्त के आधार पर संघठित राज्यों के लिए साम और दाम की व्यवस्था दी है। संघवृत्त सिद्धान्त के आधार पर संघठित राज्यों में शान्ति और उदारता का व्यवहार होना चाहिए। ऐसे राज्यों में एक दूसरे को समझा बुझाकर एवं पारस्परिक सहयोग की नीति का पालन कर कार्य करना चाहिए। यदि संघ में किसी प्रकार भेद उत्पन्न हो जाय तो ऐसी दशा में कौटिल्य के मत से दण्ड और भेद नीति का आश्रय लेना उचित होता है।
न वैराज्यं न राजा असीन्न न च दण्डः न दण्डिकः !!
2. तानहमनु राज्याय साम्राश्याय भौज्याय स्वाराज्याय वैराज्याय
संघलाभो दण्डमित्रलनामानामुत्तमः ।।
4. संघा हि संहतत्वाधृष्याः परेषाम्।।
5. ताननुगुणान्भुब्जीत सामदानाम्याम् ।।
6. विगुणान्भेददण्डाभ्याम्।।
शा० पर्व, अ0 59, श्लोक 14 ।
11 ऐतरेय ब्राह्मण ।
अर्थ०, अधि0 11, अ01, वार्ता 1 ।
अर्थ०, अधिo 11, अ0 1, वार्ता 2 ।
अर्थ०, अधिo 11,अ0 1, वार्ता 3 ।
अर्थ०, अधिo 11, अ0 1, वार्ता 4 ।
कौटिल्य के इस कथन से ऐसा विदित होता है कि वह ऐसे अवसरों पर संघवृत्त सिद्धान्त के आधार पर संघठित राज्यों में भेद उत्पन्न कर संघ से वियुक्त होने की इच्छा रखने वाले राज्यों को संघठित न होने दें। इस प्रकार की व्यवस्था देखकर संघ से वियुक्त होने वाला राज्य अपने को असहाय समझकर पुनः उसी संघ में संयुक्त रहने के लिए बाध्य हो जाएगा। यदि वियुक्त होने वाला राज्य संघ-नियम को तोड़ता है और भेद नीति से भी वह संघ नियम के पालन करने में असमर्थता प्रकट करता हुआ संघविच्छेद करता है तो ऐसी दशा में संघ के अन्य राज्य उसे दण्डित करें और उसे संघ के नियम पालन करने के लिए विवश करें। सम्भवतः इसी दृष्टिकोण से कौटिल्य ने भेद और दण्डनीति का विधान इस प्रकार के संघराज्यों के लिए किया है । संघराज्य
कौटिल्य के समय में राज्यों के कतिपय संघ अस्तित्व में थे। जो राज्य इन संघराज्यों में संघीभूत हुए थे वह क्षेत्र की दृष्टि से बहुत छोटे थे। इनके समक्ष सर्वाधिक गहन समस्या इनकी रक्षा का प्रश्न था । इनमें से कुछ राज्यों ने अपनी रक्षा सम्बन्धी इस गहन समस्या को संघवृत्तनीति को अपनाकर सुलझाने का प्रयत्न किया था । कौटिल्य ने इस प्रकार के संघों की ओर संकेत किया गया है। इनमें से कुछ ऐसे संघ थे जिनमें वह गणराज्य सम्मिलित थे जिनकी जनता कृषि और व्यापार एवं शस्त्रों के द्वारा अपना जीविकोपार्जन करती थी । सम्भव है इन राज्यों की जनता को नैतिक शिक्षा की प्राप्ति अनिवार्य रही होगी, क्योंकि छोटे राज्यों की रक्षा के लिए यह सम्भव नहीं कि वह इतनी बड़ी सेना राज्य की ओर से रख सकें जिसके द्वारा वह बाह्य आक्रमणों से अपनी रक्षा कर सकते। ऐसी परिस्थिति में सबसे सुगम साधन यही सम्भव था कि ऐसे राज्यों में राज्य की ओर से ऐसी व्यवस्था की जाती थी कि राज्य के प्रत्येक वयस्क व्यक्ति के लिए सैनिक शिक्षा की प्राप्ति अनिवार्य कर दी जाती जिससे समय पड़ने पर राज्य का प्रत्येक नागरिक अपने राज्य की रक्षा के निमित्त सन्नद्ध रहता। ऐसे राज्यों में स्थायी सेना नाम के लिए ही होती होगी। युद्ध काल में समस्त नागरिक सैनिक रूप में परिणत होकर अपने राज्य की रक्षा के लिए कटिबद्ध होकर रणक्षेत्र में उपस्थित हो जाते होंगे।
यूनान देश के सुप्रसिद्ध वीर योद्धा सिकन्दर महान को भारत में आक्रमण करते समय कई ऐसे राज्यों से युद्ध करना पड़ा था जहाँ राज्य के नागरिकों ने युद्धस्थल में सिकन्दर के वीर सिपाहियों के दाँत खट्टे कर दिए थे। इस प्रकार के राज्यों का उदाहरण देते हुए कौटिल्य ने
|
उपर्युक्त कथन से यह ज्ञात होता है कि द्वैराज्य एक ही कुटुम्ब के दो व्यक्तियों द्वारा शासित राज्य होते थे। चाहे वह व्यक्ति पिता-पुत्र हों अथवा भाई-भाई जिनके मध्य होने वाली कलह कोटुम्बिक कलह होने के कारण उनके मंत्रियों के द्वारा सरलतापूर्वक निपटायी जा सकती थी। ऐसे राज्यों पर बाह्य शत्रुओं के द्वारा इतनी सरलतापूर्वक विजय प्राप्त नहीं की जा सकती थी। जितनी सरलता से वैराज्यों पर विजय प्राप्त की जा सकती थी । कौटिल्य के अनुसार विजेता राजा वैराज्य को अपना नहीं समझता था। यह कथन इस सिद्धान्त की स्थापना करता है कि वैराज्य नृपतन्त्रात्मक राज्य से भिन्न राज्य होता था । अतः विजेता राजा वैराज्य को अपना न समझकर उस राज्य को क्षीण कर देता था अर्थात् उसके साथ क्रूरता का व्यवहार करता था, कौटिल्य का यह कथन स्वाभाविक है। दो असमान सिद्धान्तों के आधार पर संघठित किए जाने वाले राज्यों में इस प्रकार का व्यवहार होना चाहिए। विजेता राजा यह प्रयत्न करता ही है कि विजित राज्य में उसी प्रकार की शासन प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए जैसी कि विजेता राजा के राज्य में प्रचलित होती है। इस उद्देश्य की पूर्ति के निमित्त वह विजित राज्य के प्रति क्रूरता - पूर्ण व्यवहार भी करता है । इतिहास इस बात का साक्षी है। आधुनिक युग में यूरोप में सबसे बड़ी समस्या यही रही है। विश्व का प्रत्येक राज्य इस ओर निरन्तर प्रयत्नशील दिखलायी पडता है कि विश्व के विभिन्न भूभागों में ऐसे राज्यों की स्थापना होनी चाहिए जो कि शासन प्रणाली की दृष्टि से समान हो। इसी उद्देश्य के लिए विश्वव्यापी महायुद्ध भी होते रहे हैं। संयुक्त राज्य अमरीका और साम्यवादी रूस के मध्य जो आज पारस्परिक प्रतिद्वन्द्वता एवं कलह के चिन्ह दिखलायी पड़ रहे हैं उसका मूल कारण यही है कि इन दोनों राज्यों के मूल सिद्धान्तों में असमानता है। इसलिए कौटिल्य के उपर्युक्त कथन से विदित होता है कि वैराज्य नृपतन्त्रात्मक राज्यों से भिन्न राज्य अवश्य रहे होंगे। इस विषय में कौटिल्य दूसरी बात यह कहते हैं कि इस प्रकार के राज्यों को विजेता राजा अपने राज्य में सम्मिलित कर लेता है। परन्तु कौटिल्य ने पराजित राजा के प्रति विजेता राजा का कैसा व्यवहार होना चाहिए इस विषय में अपना मत प्रकट करते हुए इस प्रकार लिखा है कि पराजित राजा की भूमि द्रव्य, पुत्र और स्त्रियों पर विजेता राजा को कभी अधिकार नहीं करना चाहिए किन्तु पराजित राजा के वंशजों को उनकी योग्यता के अनुसार उचित पद पर नियुक्त कर देना चाहिए। यदि शत्रु युद्ध में राजा मारा जाए तो उस राजा के पुत्र को ही उसके राज्य पर आसीन कर देना चाहिए।' परन्तु कौटिल्य के इन दोनों मतों में बहुत अन्तर है। इसका समाधान तभी हो सकता है जबकि ऐसा मान लिया जाए कि वैराज्य लोकतंत्रात्मक राज्य थे अन्यथा कौटिल्य इन राज्यों को विजेता राजा के राज्य में सम्मिलित करने का आदेश कदापि न देते। वैराज्य के विषय में कौटिल्य तीसरी विशेष बात यह बतलाते हैं कि इन राज्यों की जनता को विजेता राजा के प्रति विरक्त हो जाने की भी संभावना रहती थी और उनकी यह वृत्ति इस पराकाष्ठा तक भी पहुँच जाती थी कि उन पर विजेता राजा द्वारा शासन किया जाना असंभव हो जाता था। इसका परिणाम यह होता था कि इस राज्य के लोगों को विजेता राजा अपने नियंत्रण में ले आने में असमर्थ समझकर उसको इस पराजित राज्य को त्याग कर चले जाने के लिए विवश हो जाना पड़ता था। इस वर्णन से भी इसी सिद्धान्त की पुष्टि होती है कि वैराज्य लोकतंत्रात्मक राज्य थे जिनमें राज्य की प्रभुता राज्य के निवासियों के अधीन थी और वहाँ के निवासी नृपतन्त्रात्मक राज्यों के नितान्त विरोधी थे। इस प्रकार इस सिद्धान्त की स्थापना हो जाती है कि कौटिल्य के समय में कुछ ऐसे राज्य अवश्य रहे होंगे जो जनतन्त्रात्मक शासन सिद्धान्त के आधार पर संघठित एवं संचालित थे और जिनको उन्होंने सम्मान की भावना से न देखकर उपेक्षा की दृष्टि से देखा है। इन राज्यों के प्रति कौटिल्य द्वारा इस प्रकार का व्यवहार उचित ही था क्योंकि वह लोकतंत्रात्मक राज्यों के पोषक न थे। साम्राज्यवादी प्रत्येक व्यक्ति लोकतन्त्रात्मक राज्यों के प्रति स्वाभाविक रूप से इसी प्रकार का व्यवहार करेगा इसमें किचिंत मात्र भी सन्देह नहीं होना चाहिए। वैराज्य शब्द की व्युत्पत्ति के आधार पर भी इस सिद्धान्त की पुष्टि होती है। वैराज्य संस्कृत के विराज शब्द से बना है जो "वि" और "राज" इन दो शब्दों का संयोग है। 'वि' उपसर्ग है जिसका अर्थ यहाँ "विगत" है । इस प्रकार वैराज्य की व्युत्पत्ति "विगत राजकं वैराज्यं" होगी जिसके अनुसार वैराज्य वह राज्य होगा जिसमें राजा नहीं होगा। इस प्रकार संस्कृत भाषा के व्याकरण शास्त्र के अनुसार वैराज्य को राजा रहित राज्य के अर्थ में लेना न्यायसंगत होगा। न च हतस्य भूमिद्रव्य पुत्रदारानभिमन्यते ।। वुल्यानप्यस्य स्वेषु पात्रेषु स्थापयेत् ।। कर्मणि मृतस्य पुत्रं राज्ये स्थापयेत् ।। अर्थशून्य, अधिo सात, अशून्य सोलह, वार्ता बयालीस / अर्थशून्य, अधिo सात, अशून्य सोलह, वार्ता तैंतालीस । अर्थशून्य, अधिशून्य सात, अशून्य सोलह, वार्ता चौंतालीस । महाभारत में भी वैराज्य को एक विशेष प्रकार का राज्य माना है जिसका अधिपति राजा नहीं होता।" ऐतरेय ब्राह्मण में भी वैराज्य को एक विशेष प्रकार का राज्य बताया गया है और वह नृपतन्त्रात्मक राज्य से नितान्त भिन्न माना गया है। इस प्रकार हमारा यह दृढ़ अभिमत है कि वैराज्य लोकतन्त्रात्मक राज्यों में एक विशेष प्रकार के राज्य थे जिनकी आधुनिक युगीन प्रत्यक्ष लोकतन्त्रात्मक राज्य की धारणा से समानता की जा सकती है। कौटिल्य ने वैराज्य के अतिरिक्त अन्य प्रकार के लोक - तंत्रात्मक राज्यों का भी उल्लेख किया है। इन राज्यों के विषय में उल्लेख करते हुए उन्होंने संघनीति पर विशेष प्रकाश डाला है। प्रत्येक राज्य के समक्ष सर्वाधिक जटिल समस्या उसकी रक्षा का प्रश्न होता है। इस समस्या को सफलतापूर्वक सुलझाने के लिए राज्य को अनेक प्रकार की शक्तियों का संचय करना आवश्यक होता है। इन शक्तियों में सैन्यबल और मित्रबल का प्रमुख स्थान है। परन्तु कौटिल्य उपर्युक्त मान्यता में आस्था नही रखते हैं। उन्होंने सैन्यबल और मित्रबल की अपेक्षा संघलाभ को अधिक उपयोगी माना है। उनका मत है कि जो राज्य संघवृत्त नियम के आधार पर संघठित होकर संघ बना लेते हैं उनका संघठन स्थायी होता है और वह शत्रु द्वारा दबाये नहीं जा सकते । उन्होंने संघवृत्त सिद्धान्त के आधार पर संघठित राज्यों के लिए साम और दाम की व्यवस्था दी है। संघवृत्त सिद्धान्त के आधार पर संघठित राज्यों में शान्ति और उदारता का व्यवहार होना चाहिए। ऐसे राज्यों में एक दूसरे को समझा बुझाकर एवं पारस्परिक सहयोग की नीति का पालन कर कार्य करना चाहिए। यदि संघ में किसी प्रकार भेद उत्पन्न हो जाय तो ऐसी दशा में कौटिल्य के मत से दण्ड और भेद नीति का आश्रय लेना उचित होता है। न वैराज्यं न राजा असीन्न न च दण्डः न दण्डिकः !! दो. तानहमनु राज्याय साम्राश्याय भौज्याय स्वाराज्याय वैराज्याय संघलाभो दण्डमित्रलनामानामुत्तमः ।। चार. संघा हि संहतत्वाधृष्याः परेषाम्।। पाँच. ताननुगुणान्भुब्जीत सामदानाम्याम् ।। छः. विगुणान्भेददण्डाभ्याम्।। शाशून्य पर्व, अशून्य उनसठ, श्लोक चौदह । ग्यारह ऐतरेय ब्राह्मण । अर्थशून्य, अधिशून्य ग्यारह, अएक, वार्ता एक । अर्थशून्य, अधिo ग्यारह, अशून्य एक, वार्ता दो । अर्थशून्य, अधिo ग्यारह,अशून्य एक, वार्ता तीन । अर्थशून्य, अधिo ग्यारह, अशून्य एक, वार्ता चार । कौटिल्य के इस कथन से ऐसा विदित होता है कि वह ऐसे अवसरों पर संघवृत्त सिद्धान्त के आधार पर संघठित राज्यों में भेद उत्पन्न कर संघ से वियुक्त होने की इच्छा रखने वाले राज्यों को संघठित न होने दें। इस प्रकार की व्यवस्था देखकर संघ से वियुक्त होने वाला राज्य अपने को असहाय समझकर पुनः उसी संघ में संयुक्त रहने के लिए बाध्य हो जाएगा। यदि वियुक्त होने वाला राज्य संघ-नियम को तोड़ता है और भेद नीति से भी वह संघ नियम के पालन करने में असमर्थता प्रकट करता हुआ संघविच्छेद करता है तो ऐसी दशा में संघ के अन्य राज्य उसे दण्डित करें और उसे संघ के नियम पालन करने के लिए विवश करें। सम्भवतः इसी दृष्टिकोण से कौटिल्य ने भेद और दण्डनीति का विधान इस प्रकार के संघराज्यों के लिए किया है । संघराज्य कौटिल्य के समय में राज्यों के कतिपय संघ अस्तित्व में थे। जो राज्य इन संघराज्यों में संघीभूत हुए थे वह क्षेत्र की दृष्टि से बहुत छोटे थे। इनके समक्ष सर्वाधिक गहन समस्या इनकी रक्षा का प्रश्न था । इनमें से कुछ राज्यों ने अपनी रक्षा सम्बन्धी इस गहन समस्या को संघवृत्तनीति को अपनाकर सुलझाने का प्रयत्न किया था । कौटिल्य ने इस प्रकार के संघों की ओर संकेत किया गया है। इनमें से कुछ ऐसे संघ थे जिनमें वह गणराज्य सम्मिलित थे जिनकी जनता कृषि और व्यापार एवं शस्त्रों के द्वारा अपना जीविकोपार्जन करती थी । सम्भव है इन राज्यों की जनता को नैतिक शिक्षा की प्राप्ति अनिवार्य रही होगी, क्योंकि छोटे राज्यों की रक्षा के लिए यह सम्भव नहीं कि वह इतनी बड़ी सेना राज्य की ओर से रख सकें जिसके द्वारा वह बाह्य आक्रमणों से अपनी रक्षा कर सकते। ऐसी परिस्थिति में सबसे सुगम साधन यही सम्भव था कि ऐसे राज्यों में राज्य की ओर से ऐसी व्यवस्था की जाती थी कि राज्य के प्रत्येक वयस्क व्यक्ति के लिए सैनिक शिक्षा की प्राप्ति अनिवार्य कर दी जाती जिससे समय पड़ने पर राज्य का प्रत्येक नागरिक अपने राज्य की रक्षा के निमित्त सन्नद्ध रहता। ऐसे राज्यों में स्थायी सेना नाम के लिए ही होती होगी। युद्ध काल में समस्त नागरिक सैनिक रूप में परिणत होकर अपने राज्य की रक्षा के लिए कटिबद्ध होकर रणक्षेत्र में उपस्थित हो जाते होंगे। यूनान देश के सुप्रसिद्ध वीर योद्धा सिकन्दर महान को भारत में आक्रमण करते समय कई ऐसे राज्यों से युद्ध करना पड़ा था जहाँ राज्य के नागरिकों ने युद्धस्थल में सिकन्दर के वीर सिपाहियों के दाँत खट्टे कर दिए थे। इस प्रकार के राज्यों का उदाहरण देते हुए कौटिल्य ने
|
कंधमाल। जिले के बालिगुड़ा सब-डिवीजन के बड़गांव गांव में कल एक तेंदुए के खुले में घूमने की खबर से इलाके में दहशत फैल गई। जानकारी के मुताबिक, कल रात बड़गांव पंप हाउस के पास पंप हाउस के एक कर्मचारी ने तेंदुए को देखा। उस समय वह पंप चलाने के लिए नदी के पास गया था। उसने इस दौरान असामान्य आवाजें सुनने का दावा किया और जब उसने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च चालू की तो उसने पास में एक तेंदुए को दुबका हुआ देखा।
तेंदुए को इतने करीब से देखकर पंप हाउस वहां से भाग गया और इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी। वहीं, उनके वरिष्ठों ने बालिगुड़ा वन विभाग को घटना की जानकारी दी।
आनन-फानन में वन विभाग की एक टीम पंप हाउस पहुंची और जांच शुरू की। वन विभाग ने भी चेतावनी जारी कर लोगों को रात में अकेले नदी के पास नहीं जाने की हिदायत दी है।
घटना की जांच कर रहे वन प्रभारी सत्यनारायण मोहंती के नेतृत्व में वन विभाग की दो सदस्यीय टीम ने जानवर के पैरों के निशान मिलने पर संदेह जताया है। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि यह जानवर तेंदुआ है या लकड़बग्घा।
|
कंधमाल। जिले के बालिगुड़ा सब-डिवीजन के बड़गांव गांव में कल एक तेंदुए के खुले में घूमने की खबर से इलाके में दहशत फैल गई। जानकारी के मुताबिक, कल रात बड़गांव पंप हाउस के पास पंप हाउस के एक कर्मचारी ने तेंदुए को देखा। उस समय वह पंप चलाने के लिए नदी के पास गया था। उसने इस दौरान असामान्य आवाजें सुनने का दावा किया और जब उसने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च चालू की तो उसने पास में एक तेंदुए को दुबका हुआ देखा। तेंदुए को इतने करीब से देखकर पंप हाउस वहां से भाग गया और इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी। वहीं, उनके वरिष्ठों ने बालिगुड़ा वन विभाग को घटना की जानकारी दी। आनन-फानन में वन विभाग की एक टीम पंप हाउस पहुंची और जांच शुरू की। वन विभाग ने भी चेतावनी जारी कर लोगों को रात में अकेले नदी के पास नहीं जाने की हिदायत दी है। घटना की जांच कर रहे वन प्रभारी सत्यनारायण मोहंती के नेतृत्व में वन विभाग की दो सदस्यीय टीम ने जानवर के पैरों के निशान मिलने पर संदेह जताया है। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि यह जानवर तेंदुआ है या लकड़बग्घा।
|
जोधपुर. जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर आरएलपी कार्यकर्ताओं ने मिलकर पिछले दिनों हुए सीनियर टीचर एग्जाम के पेपर लीक प्रकरण को लेकर विरोध जताया। आरएलपी कार्यकर्ताओं ने इस पेपर लीक मामले को लेकर सीबीआई जांच की मांग राज्यपाल से की है। प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर सड़क पर ही लेट गए और पुतला जलाकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। बताया कि राजस्थान सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है आए दिन हो रहे पेपर लीक प्रकरण के बाद भी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में राजस्थान सरकार की जगह सीबीआई इस मामले की जांच कर पेपर लीक गिरोह का पर्दाफाश करें।
आरएलपी प्रदेश अध्यक्ष और भोपालगढ़ विधायक पुखराज गर्ग ने बताया कि पिछले 4 वर्षों में करीब 8 पेपर लीक हो चुके हैं। इसको लेकर सीबीआई जांच करते हुए सख्त सजा का प्रावधान करना चाहिए। वर्तमान सरकार ने नकल रोकने के लिए 1 साल पहले कानून भी बनाया लेकिन उस कानून के तहत अभी तक सख्त कार्यवाही नहीं की गई है इसके चलते नकल गिरोह पनप रहा है।
राजस्थान में रीट सहित कई भर्तियों के पेपर आउट हो चुके हैं। पेपर आउट होने की वजह से युवाओं की मेहनत पर पानी फिर रहा है। इन मामलों की निष्पक्ष जांच राजस्थान सरकार ने आज तक नहीं करवाई क्योंकि इसमें सरकार के कई मंत्री और अधिकारी भी भर्ती पेपर आउट करवाने में शामिल थे। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई ही कर सकती है। इसलिए जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
जोधपुर. जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर आरएलपी कार्यकर्ताओं ने मिलकर पिछले दिनों हुए सीनियर टीचर एग्जाम के पेपर लीक प्रकरण को लेकर विरोध जताया। आरएलपी कार्यकर्ताओं ने इस पेपर लीक मामले को लेकर सीबीआई जांच की मांग राज्यपाल से की है। प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर सड़क पर ही लेट गए और पुतला जलाकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। बताया कि राजस्थान सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है आए दिन हो रहे पेपर लीक प्रकरण के बाद भी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में राजस्थान सरकार की जगह सीबीआई इस मामले की जांच कर पेपर लीक गिरोह का पर्दाफाश करें। आरएलपी प्रदेश अध्यक्ष और भोपालगढ़ विधायक पुखराज गर्ग ने बताया कि पिछले चार वर्षों में करीब आठ पेपर लीक हो चुके हैं। इसको लेकर सीबीआई जांच करते हुए सख्त सजा का प्रावधान करना चाहिए। वर्तमान सरकार ने नकल रोकने के लिए एक साल पहले कानून भी बनाया लेकिन उस कानून के तहत अभी तक सख्त कार्यवाही नहीं की गई है इसके चलते नकल गिरोह पनप रहा है। राजस्थान में रीट सहित कई भर्तियों के पेपर आउट हो चुके हैं। पेपर आउट होने की वजह से युवाओं की मेहनत पर पानी फिर रहा है। इन मामलों की निष्पक्ष जांच राजस्थान सरकार ने आज तक नहीं करवाई क्योंकि इसमें सरकार के कई मंत्री और अधिकारी भी भर्ती पेपर आउट करवाने में शामिल थे। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई ही कर सकती है। इसलिए जांच सीबीआई को सौंपी जाए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
Don't Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
गर्भ निरोधक दवाएं लेने वाली महिलाएं ब्लड डोनेट कर सकती हैं। ऐसा कहना है मिलन की मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर कामिनी राव का। इसके अलावा एचआरटी (हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी) वाली महिलाओं के लिए भी यह सुरक्षित है। हालांकि लंबे समय से दवाएं ले रही महिलाओं को ब्लड डोनेट करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
अगर आप कोई दवा ले रही हैं, तो उसका कोर्स पूरा होने के एक हफ्ते बाद आप ब्लड डोनेट कर सकती हैं जबकि एंटीबायोटिक दवाओं के मामले में कम से कम एक हफ्ते तक ब्लड डोनेट करने से बचना चाहिए।
ब्लड डोनेट करने के लिए कुछ नियम हैं जिनका पालन किया जाना चाहिए। कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 18 से 60 साल है ब्लड डोनेट कर सकता है। इसके अलावा वो एचआईवी और हेमोफिलिया जैसी बीमारी से पीड़ित ना हो। गर्भवती महिलाओं को भी इससे बचने की सलाह दी जाती है। उन्हें कम से कम दो महीने तक ब्लड डोनेट नहीं करने की सलाह दी जाती है।
अगर आप बर्थ कंट्रोल पिल ले रही हैं, तो आपको ब्लड डोनेट करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
|
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! गर्भ निरोधक दवाएं लेने वाली महिलाएं ब्लड डोनेट कर सकती हैं। ऐसा कहना है मिलन की मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर कामिनी राव का। इसके अलावा एचआरटी वाली महिलाओं के लिए भी यह सुरक्षित है। हालांकि लंबे समय से दवाएं ले रही महिलाओं को ब्लड डोनेट करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरूर लेनी चाहिए। अगर आप कोई दवा ले रही हैं, तो उसका कोर्स पूरा होने के एक हफ्ते बाद आप ब्लड डोनेट कर सकती हैं जबकि एंटीबायोटिक दवाओं के मामले में कम से कम एक हफ्ते तक ब्लड डोनेट करने से बचना चाहिए। ब्लड डोनेट करने के लिए कुछ नियम हैं जिनका पालन किया जाना चाहिए। कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र अट्ठारह से साठ साल है ब्लड डोनेट कर सकता है। इसके अलावा वो एचआईवी और हेमोफिलिया जैसी बीमारी से पीड़ित ना हो। गर्भवती महिलाओं को भी इससे बचने की सलाह दी जाती है। उन्हें कम से कम दो महीने तक ब्लड डोनेट नहीं करने की सलाह दी जाती है। अगर आप बर्थ कंट्रोल पिल ले रही हैं, तो आपको ब्लड डोनेट करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
|
policy = नीति(noun) (Neeti)
1. ले जाने या ले चलने की क्रिया, भाव या ढंग ।
2. व्यवहार की रीति । आचारपद्धति । जैसे, सुनीति, दुर्नीति ।
3. व्यवहार की वह रीति जिससे अपना कल्याण हो और समाज को भो कोई बाधा न पहुँचे । वह चाल जिसे चलने से अपनी भलाई, प्रतिष्ठा आदि हो और दूसरे की कोई बुराई न हो । जैसे, - जाकी घन धरती हरी ताहि न लीजै संग । साई तहाँ न बैठिए जहँ कोउ देय उठाय । - गिरिधर (शब्द॰) ।
4. लोक या समाज के कल्याण के लिये उचित ठहराया हुआ आचार व्यवहार । लोकमर्यादा के अनुसार व्यवहार । सदाचार । अच्छी चाल । नय । उ॰ - सुनि मुनीस कह वचन सप्रीती । कस न राम राखहु तुम नीती । - तुलसी (शब्द॰) ।
5. राजा और प्रजा की रक्षा के लिये निर्धारित व्यवस्था । राज्य की रक्षा के लिये ठहराई हुई विधि । राजा का कर्तव्य । राजविद्या । विशेष - महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को नीतिशास्त्र की शिक्षा दी है जिसमें प्रजा के लिये कृषि, वाणिज्य आदि की व्यवस्था, अपराधियों को दंड, अमात्य, चर, गुप्तचर, सेना, सेनापति इत्यादि की नियुक्ति, दुष्टों का दमन, राष्ट्र, दुर्ग और कोश की रक्षा, धनिकों की देखरेख, दरिद्रों का भरण पोषण, युद्ध, शत्रुऔं को वश में करने के साम, दाम, दंड, भेद ये चार उपाय, साधुओं की पूजा, विद्वानों का आदर, समाज और उत्सव, सभा, व्यवहार तथा इसी प्रकार की और बहुत सी बातें आई हैं । नीति विषय पर कई प्राचीन पुस्तकें हैं । जैसे, उशना को शुक्रनीति, कौटिल्य का अर्थशास्त्र, कामंदकीय नीतिसार इत्यादि ।
6. राज्य की रक्षा के लिये काम में लाई जानेवाली युक्ति । राजाओं की चाल जो वे राज्य की प्राप्ति वा रक्षा के लिये चलते हैं । पालिसी । जैसे, मुद्राराक्षस नाटक में चाणक्य और राक्षस की नीति ।
7. किसी कार्य की सिद्धि के लिये चली जानेवाली चाल । युक्ति । उपाय । हिकमत ।
8. संबंध (को॰) ।
|
policy = नीति एक. ले जाने या ले चलने की क्रिया, भाव या ढंग । दो. व्यवहार की रीति । आचारपद्धति । जैसे, सुनीति, दुर्नीति । तीन. व्यवहार की वह रीति जिससे अपना कल्याण हो और समाज को भो कोई बाधा न पहुँचे । वह चाल जिसे चलने से अपनी भलाई, प्रतिष्ठा आदि हो और दूसरे की कोई बुराई न हो । जैसे, - जाकी घन धरती हरी ताहि न लीजै संग । साई तहाँ न बैठिए जहँ कोउ देय उठाय । - गिरिधर । चार. लोक या समाज के कल्याण के लिये उचित ठहराया हुआ आचार व्यवहार । लोकमर्यादा के अनुसार व्यवहार । सदाचार । अच्छी चाल । नय । उ॰ - सुनि मुनीस कह वचन सप्रीती । कस न राम राखहु तुम नीती । - तुलसी । पाँच. राजा और प्रजा की रक्षा के लिये निर्धारित व्यवस्था । राज्य की रक्षा के लिये ठहराई हुई विधि । राजा का कर्तव्य । राजविद्या । विशेष - महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को नीतिशास्त्र की शिक्षा दी है जिसमें प्रजा के लिये कृषि, वाणिज्य आदि की व्यवस्था, अपराधियों को दंड, अमात्य, चर, गुप्तचर, सेना, सेनापति इत्यादि की नियुक्ति, दुष्टों का दमन, राष्ट्र, दुर्ग और कोश की रक्षा, धनिकों की देखरेख, दरिद्रों का भरण पोषण, युद्ध, शत्रुऔं को वश में करने के साम, दाम, दंड, भेद ये चार उपाय, साधुओं की पूजा, विद्वानों का आदर, समाज और उत्सव, सभा, व्यवहार तथा इसी प्रकार की और बहुत सी बातें आई हैं । नीति विषय पर कई प्राचीन पुस्तकें हैं । जैसे, उशना को शुक्रनीति, कौटिल्य का अर्थशास्त्र, कामंदकीय नीतिसार इत्यादि । छः. राज्य की रक्षा के लिये काम में लाई जानेवाली युक्ति । राजाओं की चाल जो वे राज्य की प्राप्ति वा रक्षा के लिये चलते हैं । पालिसी । जैसे, मुद्राराक्षस नाटक में चाणक्य और राक्षस की नीति । सात. किसी कार्य की सिद्धि के लिये चली जानेवाली चाल । युक्ति । उपाय । हिकमत । आठ. संबंध ।
|
अगर आप क्रेटा खरीदना चाहते हैं तो आपको 30 सप्ताह का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं अगर आप ग्रैंड आई10 निओस को खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए आपको 18 सप्ताह तक का इंतजार करना पड़ सकता है। (जागरण फोटो)
नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। Hyundai Creta SUV और Grand i10 Nios हैचबैक देश में ब्रांड के पहले और तीसरे सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडल हैं। जनवरी 2023 में कंपनी ने क्रेटा के 15,037 यूनिट्स और ग्रांड विटारा की 8,760 यूनिट्स बिक्री की है। इन दोनों गाड़ियों की हाइ डिमांड के चलते इनके वेटिंग पीरियड भी अधिक है। अगर आप भी हुंडई की कार खरीदना चाहते हैं तो वेटिंग पीरियड जरूर जान लें।
अगर आप क्रेटा खरीदना चाहते हैं तो आपको 30 सप्ताह का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं अगर आप ग्रैंड आई10 निओस को खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए आपको 18 सप्ताह तक का इंतजार करना पड़ सकता है।
|
अगर आप क्रेटा खरीदना चाहते हैं तो आपको तीस सप्ताह का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं अगर आप ग्रैंड आईदस निओस को खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए आपको अट्ठारह सप्ताह तक का इंतजार करना पड़ सकता है। नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। Hyundai Creta SUV और Grand iदस Nios हैचबैक देश में ब्रांड के पहले और तीसरे सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडल हैं। जनवरी दो हज़ार तेईस में कंपनी ने क्रेटा के पंद्रह,सैंतीस यूनिट्स और ग्रांड विटारा की आठ,सात सौ साठ यूनिट्स बिक्री की है। इन दोनों गाड़ियों की हाइ डिमांड के चलते इनके वेटिंग पीरियड भी अधिक है। अगर आप भी हुंडई की कार खरीदना चाहते हैं तो वेटिंग पीरियड जरूर जान लें। अगर आप क्रेटा खरीदना चाहते हैं तो आपको तीस सप्ताह का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं अगर आप ग्रैंड आईदस निओस को खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए आपको अट्ठारह सप्ताह तक का इंतजार करना पड़ सकता है।
|
बिजनेस डेस्कः चीन ने घटिया क्वालिटी के 8. 9 करोड़ मास्क जब्त किये हैं। सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि दुनिया भर से कोविड-19 से निपटने के लिए चीन से गए सुरक्षा उपकरणों को लेकर शिकायतें आ रही हैं। दुनियाभर में सुरक्षात्मक उपकरणों की मांग में तेजी आई है क्योंकि विभिन्न देश कोविड-19 का मुकाबला कर रहे हैं और अबतक 29 लाख इसकी चपेट में आ चुके हैं।
मालूम हो कि, चीन द्वारा निर्यात किए गए घटिया क्वालिटी के मास्क की पूरी दुनिया से शिकायत आ रही है जिनका अधिकतर इस्तेमाल चिकित्सा पेशेवरों और सबसे अधिक असुरक्षित लोगों द्वारा किया जाना है। शुक्रवार को चीन में करीब 1. 6 करोड़ दुकानों का निरीक्षण किया और 8. 9 करोड़ मास्क और 4. 18 लाख व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) को जब्त किया।
इस दौरान 76 लाख युआन (लगभग 8 करोड़ रुपए) मूल्य के घटिया क्वालिटी के कीटनाशक जब्त किये। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि जब्त किए गए सामान का कितना हिस्सा विदेश निर्यात किया गया है। घटिया क्वालिटी के उत्पादों को हटाने के लिए चीन ने शनिवार को नये नियम जारी किए जिसके मुताबिक गैर चिकित्सा कार्य में इस्तेमाल मास्क भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होने चाहिए।
गौरतलब है कि चीन को सख्त नियम इसलिए बनाने पड़े क्योंकि स्पेन, नीदरलैंड, चेक गणराज्य और तुर्की सहित कई देशों को निर्यात उत्पाद की खराब क्वालिटी होने की वजह से उसे उन्हें मास्क वापस मंगाना पड़ा। कनाडा सरकार ने पिछले हफ्ते कहा कि उसने चीन से 10 लाख मास्क मंगाए थे लेकिन वे क्वालिटी के मामले में खरे नहीं उतरे। डेनमार्क ने भी चीन से आयातित पांच लाख मास्क खराब क्वालिटी की वजह से लौटा दिए थे।
चीन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वह रोजाना 11. 6 करोड़ मास्क का उत्पादन करता है। वह इस साल एक अरब से अधिक मास्क का निर्यात कर चुका है।
(फाइल फोटो)
|
बिजनेस डेस्कः चीन ने घटिया क्वालिटी के आठ. नौ करोड़ मास्क जब्त किये हैं। सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि दुनिया भर से कोविड-उन्नीस से निपटने के लिए चीन से गए सुरक्षा उपकरणों को लेकर शिकायतें आ रही हैं। दुनियाभर में सुरक्षात्मक उपकरणों की मांग में तेजी आई है क्योंकि विभिन्न देश कोविड-उन्नीस का मुकाबला कर रहे हैं और अबतक उनतीस लाख इसकी चपेट में आ चुके हैं। मालूम हो कि, चीन द्वारा निर्यात किए गए घटिया क्वालिटी के मास्क की पूरी दुनिया से शिकायत आ रही है जिनका अधिकतर इस्तेमाल चिकित्सा पेशेवरों और सबसे अधिक असुरक्षित लोगों द्वारा किया जाना है। शुक्रवार को चीन में करीब एक. छः करोड़ दुकानों का निरीक्षण किया और आठ. नौ करोड़ मास्क और चार. अट्ठारह लाख व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों को जब्त किया। इस दौरान छिहत्तर लाख युआन मूल्य के घटिया क्वालिटी के कीटनाशक जब्त किये। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि जब्त किए गए सामान का कितना हिस्सा विदेश निर्यात किया गया है। घटिया क्वालिटी के उत्पादों को हटाने के लिए चीन ने शनिवार को नये नियम जारी किए जिसके मुताबिक गैर चिकित्सा कार्य में इस्तेमाल मास्क भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होने चाहिए। गौरतलब है कि चीन को सख्त नियम इसलिए बनाने पड़े क्योंकि स्पेन, नीदरलैंड, चेक गणराज्य और तुर्की सहित कई देशों को निर्यात उत्पाद की खराब क्वालिटी होने की वजह से उसे उन्हें मास्क वापस मंगाना पड़ा। कनाडा सरकार ने पिछले हफ्ते कहा कि उसने चीन से दस लाख मास्क मंगाए थे लेकिन वे क्वालिटी के मामले में खरे नहीं उतरे। डेनमार्क ने भी चीन से आयातित पांच लाख मास्क खराब क्वालिटी की वजह से लौटा दिए थे। चीन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वह रोजाना ग्यारह. छः करोड़ मास्क का उत्पादन करता है। वह इस साल एक अरब से अधिक मास्क का निर्यात कर चुका है।
|
Best Attar Buy Online: भारत में प्राचीन समय से ही इत्र (Attar) का इस्तेमाल होता आरहा है. पुराने ज़माने में राजा-महाराजा और उनकी रानियों इत्र की शौक़ीन हुआ करती थीं. प्राचीन समय में जब रोल-ऑन इत्र की बोतलें नहीं होती थीं, तो लोग अपनी कलाई पर इत्र की बूंदे लगा लिया करते थे. आज के दौर में Deo, Perfume और Scent स्प्रे फ़ॉर्म में आते हैं, लेकिन पुराने ज़माने में इत्र की एक बूंद ही काफ़ी होती थी. आज मार्किट में कई तरह के सिंथेटिक इत्र भी मौजूद हैं, जो स्किन में जलन पैदा कर सकते हैं. लेकिन पुरुषों के लिए हर्बल और एग्ज़ॉटिक इत्र ही अच्छे माने जाते हैं. अगर आप भी यूनीक और बेहतरीब ख़ुशबू वाले इत्र की तलाश में हैं, तो आज हम आपके लिए कुछ नैचुरल इत्र लेकर आये हैं.
1- इत्र अल काबा (Attar Al Kaaba)
अरबी परंपरा में इस 'इत्र' को काफ़ी पसंद किया जाता है. इसे गिफ़्ट करना सम्मान और गुणवत्ता का प्रतीक समझा जाता है. इस इत्र को 'अगर की लकड़ी', 'गुलाब', 'मस्क' और 'केसर' मिलकर तैयार किया जाता है. अरब देशों में 'इत्र अल काबा' की ख़ुशबू मर्दाना समझी जाती है. लेकिन इसका उपयोग महिलाएं भी कर सकती हैं. यहां से ख़रीदेंः
2- अदरऊद इत्र (Adarood Attar)
उत्तर प्रदेश के कन्नौज में दुनिया का सबसे सस्ता से लेकर सबसे महंगा 'इत्र' बनाया जाता है. कन्नौज में बनने वाला अदरऊद इत्र दुनिया के सबसे महंगे इत्र में से एक है. इसके 1 ग्राम की क़ीमत 5,000 रुपये के क़रीब है. इसकी बाज़ार में क़ीमत 50 लाख रुपये प्रति किलो तक है. इसमें केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, यही इसकी ख़ासियत है. यहां से ख़रीदेंः
3- अल हरमैन मस्क (Al Haramain Musk)
अगर आप हल्की ख़ुशबू और फ़्रेशनेस से भरपूर लेकिन इत्र की तलाश कर रहे हैं तो अल हरमैन मस्क बेस्ट है. इसकी लोग लास्टिंग क़्वालिटी और मस्की नोट्स वाली ख़ुशबू इसे औरों से अलग बनती है. ये इत्र व्हाइट मस्क वैरायटी में आता है. मार्किट में में 'व्हाइट मस्क' की आपको कई वैरायटी मिल जाएंगी, लेकिन अल हरमैन मस्क को आप सबसे अलग पाएंगे. इसे महिलाएं और पुरुष दोनों इस्तेमाल कर सकते हैं. यहां से ख़रीदेंः
4- अल हरमैन हजर (Al Haramain Hajar)
अगर आप स्ट्रांग फ़्रेगरेंस वाले इत्र की तलाश कर रहे हैं अल हरमैन हजर अपनी लोग लॉन्ग लास्टिंग क़्वालिटी के साथ पेश है. एक बार इस्तेमाल करने से ही ये आपकी पहली पसंद बन सकता है. इस इत्र की एक बूंद ही आपको पूरे दिन तक ताज़गी देने के लिए काफ़ी है. इस इत्र में ढेर सारी फ़्रेगरेंस का परफ़ेक्ट ब्लेंड है. अल हरमैन हजर इत्र कांच की बेहद खूबसूरत बोतल में आता है. बोतल में रोल ऑन और स्क्रू कैप लगी होती है. यहां से ख़रीदेंः
5- अल हरमैन बदर (Al Haramain Badar)
ये लॉन्ग लास्टिंग फ़्रेगरेंस के साथ आने वाला यूनीसेक्स इत्र है. इसमें अंबर, मस्क, शहद, लैवेंडर और गुलाब के नोट्स मिलते हैं. ये इत्र लॉन्ग लास्टिंग फ़्रेगरेंस के साथ आता है. ताज़गी से भरपूर ये इत्र फूलों की भीनी सुगंध के साथ ही पैच्युली और शहद की ख़ुशबू का अहसास भी कराता है. 'अल हरमैन बदर' इत्र कांच की बोतल में रोल ऑन के साथ आता है. यहां से ख़रीदेंः
6- अल हरमैन मदीना (Al Haramain Madinah)
ये लॉन्ग लास्टिंग फ़्रेगरेंस और अल्कोहल फ़्री इत्र है. ये दुनिया के सबसे मशहूर और प्रीमियम ब्रांड क्वालिटी के परफ़्यूम ऑयल ब्रांड में से एक है. इस इत्र की ख़ुशबू में ऑर्किड, गुलाब, चमेली, केसर, चंदन और सीडरवुड की ख़ुशबू मिलती है. ये इत्र गर्मियों में लगाने के लिहाज से बेहतरीन है. इसकी बोतल में रोल ऑन और स्क्रू कैप लगी होती है. यहां से ख़रीदेंः
|
Best Attar Buy Online: भारत में प्राचीन समय से ही इत्र का इस्तेमाल होता आरहा है. पुराने ज़माने में राजा-महाराजा और उनकी रानियों इत्र की शौक़ीन हुआ करती थीं. प्राचीन समय में जब रोल-ऑन इत्र की बोतलें नहीं होती थीं, तो लोग अपनी कलाई पर इत्र की बूंदे लगा लिया करते थे. आज के दौर में Deo, Perfume और Scent स्प्रे फ़ॉर्म में आते हैं, लेकिन पुराने ज़माने में इत्र की एक बूंद ही काफ़ी होती थी. आज मार्किट में कई तरह के सिंथेटिक इत्र भी मौजूद हैं, जो स्किन में जलन पैदा कर सकते हैं. लेकिन पुरुषों के लिए हर्बल और एग्ज़ॉटिक इत्र ही अच्छे माने जाते हैं. अगर आप भी यूनीक और बेहतरीब ख़ुशबू वाले इत्र की तलाश में हैं, तो आज हम आपके लिए कुछ नैचुरल इत्र लेकर आये हैं. एक- इत्र अल काबा अरबी परंपरा में इस 'इत्र' को काफ़ी पसंद किया जाता है. इसे गिफ़्ट करना सम्मान और गुणवत्ता का प्रतीक समझा जाता है. इस इत्र को 'अगर की लकड़ी', 'गुलाब', 'मस्क' और 'केसर' मिलकर तैयार किया जाता है. अरब देशों में 'इत्र अल काबा' की ख़ुशबू मर्दाना समझी जाती है. लेकिन इसका उपयोग महिलाएं भी कर सकती हैं. यहां से ख़रीदेंः दो- अदरऊद इत्र उत्तर प्रदेश के कन्नौज में दुनिया का सबसे सस्ता से लेकर सबसे महंगा 'इत्र' बनाया जाता है. कन्नौज में बनने वाला अदरऊद इत्र दुनिया के सबसे महंगे इत्र में से एक है. इसके एक ग्राम की क़ीमत पाँच,शून्य रुपयापये के क़रीब है. इसकी बाज़ार में क़ीमत पचास लाख रुपये प्रति किलो तक है. इसमें केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, यही इसकी ख़ासियत है. यहां से ख़रीदेंः तीन- अल हरमैन मस्क अगर आप हल्की ख़ुशबू और फ़्रेशनेस से भरपूर लेकिन इत्र की तलाश कर रहे हैं तो अल हरमैन मस्क बेस्ट है. इसकी लोग लास्टिंग क़्वालिटी और मस्की नोट्स वाली ख़ुशबू इसे औरों से अलग बनती है. ये इत्र व्हाइट मस्क वैरायटी में आता है. मार्किट में में 'व्हाइट मस्क' की आपको कई वैरायटी मिल जाएंगी, लेकिन अल हरमैन मस्क को आप सबसे अलग पाएंगे. इसे महिलाएं और पुरुष दोनों इस्तेमाल कर सकते हैं. यहां से ख़रीदेंः चार- अल हरमैन हजर अगर आप स्ट्रांग फ़्रेगरेंस वाले इत्र की तलाश कर रहे हैं अल हरमैन हजर अपनी लोग लॉन्ग लास्टिंग क़्वालिटी के साथ पेश है. एक बार इस्तेमाल करने से ही ये आपकी पहली पसंद बन सकता है. इस इत्र की एक बूंद ही आपको पूरे दिन तक ताज़गी देने के लिए काफ़ी है. इस इत्र में ढेर सारी फ़्रेगरेंस का परफ़ेक्ट ब्लेंड है. अल हरमैन हजर इत्र कांच की बेहद खूबसूरत बोतल में आता है. बोतल में रोल ऑन और स्क्रू कैप लगी होती है. यहां से ख़रीदेंः पाँच- अल हरमैन बदर ये लॉन्ग लास्टिंग फ़्रेगरेंस के साथ आने वाला यूनीसेक्स इत्र है. इसमें अंबर, मस्क, शहद, लैवेंडर और गुलाब के नोट्स मिलते हैं. ये इत्र लॉन्ग लास्टिंग फ़्रेगरेंस के साथ आता है. ताज़गी से भरपूर ये इत्र फूलों की भीनी सुगंध के साथ ही पैच्युली और शहद की ख़ुशबू का अहसास भी कराता है. 'अल हरमैन बदर' इत्र कांच की बोतल में रोल ऑन के साथ आता है. यहां से ख़रीदेंः छः- अल हरमैन मदीना ये लॉन्ग लास्टिंग फ़्रेगरेंस और अल्कोहल फ़्री इत्र है. ये दुनिया के सबसे मशहूर और प्रीमियम ब्रांड क्वालिटी के परफ़्यूम ऑयल ब्रांड में से एक है. इस इत्र की ख़ुशबू में ऑर्किड, गुलाब, चमेली, केसर, चंदन और सीडरवुड की ख़ुशबू मिलती है. ये इत्र गर्मियों में लगाने के लिहाज से बेहतरीन है. इसकी बोतल में रोल ऑन और स्क्रू कैप लगी होती है. यहां से ख़रीदेंः
|
जुलाई 1983 में मैं गोरखपुर से लखनऊ आया और 'प्रतिदिन' सांध्य दैनिक में अखिलानंदजी और बाद में सुरेश द्विवेदी (पूर्व संपादक, नवजीवन) के सानिध्य में पत्रकारिता का ककहरा सीख रहा था. इसी दौर में जनसत्ता का दिल्ली से प्रकाशन शुरू हुआ था. लखनऊ में जनसत्ता दोपहर के बाद पहुंचता था और उसके चाहने वाले उसका बेसब्री से इंतजार करते थे. कारण जनसत्ता हिन्दी पत्रकारिता को लेखन की एक नई दिशा दे रहा था. उन्हीं दिनों श्रीपति मिश्र उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. 1984 में मुख्यमंत्री के बेटों ने अधिकारियों को प्रभाव में लेकर गलत तरीके से एक पुरानी इमारत, जहां खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का मुख्यालय था, के खाली पड़े भूभाग को अपने नाम करा लिया और उस पर आलीशान मकान बनवाना शुरू कर दिया. विपक्ष से जुड़े तमाम नेताओं ने इस मुद्दे पर हो-हल्ला तो शुरू किया लेकिन मीडिया चुप्पी साधे रही. मीडिया की चुप्पी के पीछे खास कारण एह रहा कि कतिपय बड़े पत्रकारों को इस खबर को दबाने के लिए गोमती नगर में प्रस्तावित पत्रकारपुरम में भूखण्ड देने का आश्वासन मिला था.
इसी दौरान मुख्यमंत्री के बेटों के उक्त अवैध निर्मित मकान से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मेरे हाथ लगे. मैंने इस संबंध में एक रिपोर्ट तो तैयार कर लिया लेकिन इसे कहां छपने को भेजू, यह समझ नहीं पा रहा था. एक वरिष्ठ पत्रकार, जिनका मुझ पर विशेष स्नेह रहा, से इस बारे में बातचीत की. उन्होंने सलाह दी कि इस तरह की खबर जनसत्ता ही छाप सकता है, इसलिए इसे प्रभाष जी के नाम से जनसत्ता, दिल्ली के पते पर भेज दिया. मुझे भरोसा नहीं था कि यह खबर जनसत्ता में छपेगी. कारण, लखनऊ के तेजजर्रार पत्रकार जयप्रकाश शाही यहां से संवाददाता थे और वे भी इस खबर को दबाना चाहते थे, नहीं तो यह खबर कबकी छप चुकी होती. बहरहाल करीब 15 दिन बाद मेरे एक साथी नरेन्द्र निर्मल ने दोपहर बाद मेरे आवास पर आकर बधाई देते हुए जनसत्ता अखबार दिया जिसके खोज-खबर पेज पर मेरी उक्त रिपोर्ट हू-ब-हू छपी हुई थी.
जनसत्ता जैसे अखबार में एक नये लड़के की धमाकेदार खबर छपनी बड़ी बात थी. मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा, कुछ वरिष्ठों ने उत्साहित किया, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी मिले जो डराने लगे कि मुझे लखनऊ छोड़ कर भाग जाना पड़ेगा. इसी बीच यह मामला शान-ए-सहारा में भी छप चुका था और जनसत्ता में छपने के बाद इतना तूल पकड़ा कि मुख्यमंत्री की छीछालेदर हो गई और प्रशासन को उनके बेटों के मकान का निर्माण रोकवाना पड़ा. चूंकि मामला मुख्यमंत्री से जुड़ा था, इसलिए मैं अंदर से डरने भी लगा था. इसी बीच मैने प्रभाष जोशीजी से संपर्क किया तो उन्होंने दूरभाष पर ऐसा अभयदान दिया कि मेरा डर काफूर हो गया. इसके बाद से जोशीजी के प्रति मेरे मन में जो भाव पैदा हुआ उसे शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता. जोशीजी के दर्शन की तमन्ना तभी से थी जो 28 नवंबर 2007 में तब पूरी हुई, जब आधी जिंदगी इधर-उधर गुजारने के बाद दिल्ली से शुरू होने वाली एक पत्रिका 'द इंडिया पोस्ट' से जुड़ा. पत्रिका का विमोचन समारोह इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेन्टर, लोदी रोड में होना था, जिसमें प्रभाषजी को ले जाने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई.
मैं सुबह 10 बजे निर्माण विहार स्थित जोशीजी के आवास पर पहुंच गया. आधे घंटे बाद जोशीजी नीचे उतरे और उन्हें करीब से देखकर मैं धन्य हो गया. पैर छूकर नमन करना चाहा तो उन्होंने कंधा पकड़ कर उठा लिया. मैं चाहता था कि गाड़ी में आगे बैठूं लेकिन जोशीजी ने अपने साथ पीछे बैठा लिया. रास्ते में उनके पूछने पर जब मैंने अपना नाम बताया तो उनका कहना था कि यह नाम तो जाना पहचाना लगता है. मैंने 1984 में फोन पर हुई बातचीत का जिक्र किया तो ऐसा लगा कि वे मेरे बारे में सब कुछ जान लेना चाहते हैं. गाड़ी चलती रही और मैं माया, सेवाग्राम, राजस्थान पत्रिका, न्याय, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा होते हुए दिल्ली तक पहुंचने की यात्रा कथा सुनाता रहा. घर-परिवार के बारे में पूरा तहकीकात करने के बाद जिन जगहों से होकर मैं गुजरा था वहां से जुड़ी कई स्मृतियों को सुनाते रहे.
विमोचन कार्यक्रम के बाद उन्हें दिल्ली दूरदर्शन में एक साक्षात्कार देना था. उनके साथ दूरदर्शन गया, जहां सुधांशु रंजन साक्षात्कार के लिए उनकी प्रतीक्षा में थे. दूरदर्शन से चलते समय जोशीजी ने चालक से कहां ऐसे रास्ते से चलो ताकि खेल गांव में चल रही तैयारी को देख सकू. खेल गांव देखते निर्माण विहार पहुंचते-पहुंचते पांच बज गये. इस तरह उस मनीषी, जिससे मिलने की अभिलाषा मैं 1984 से पाले हुए था, ना खाली पूरी हुई बल्कि उनके साथ कई घंटे इत्मिनान से गुजारने का सौभाग्य मिला. लेकिन जोशीजी से दोबारा मिलने की इच्छा अधूरी रह गई. जबसे पता चला था कि वे अब वसुंधरा में रहने लगे हैं, उत्साहित रहा लेकिन शुक्रवार को आफिस आते ही जैसे नेट पर प्रभाषजी के नहीं रहने की खबर देखा, हतप्रभ रह गया. विश्वास ही नहीं हो रहा कि प्रभाषजी नहीं रहे.... .
|
जुलाई एक हज़ार नौ सौ तिरासी में मैं गोरखपुर से लखनऊ आया और 'प्रतिदिन' सांध्य दैनिक में अखिलानंदजी और बाद में सुरेश द्विवेदी के सानिध्य में पत्रकारिता का ककहरा सीख रहा था. इसी दौर में जनसत्ता का दिल्ली से प्रकाशन शुरू हुआ था. लखनऊ में जनसत्ता दोपहर के बाद पहुंचता था और उसके चाहने वाले उसका बेसब्री से इंतजार करते थे. कारण जनसत्ता हिन्दी पत्रकारिता को लेखन की एक नई दिशा दे रहा था. उन्हीं दिनों श्रीपति मिश्र उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. एक हज़ार नौ सौ चौरासी में मुख्यमंत्री के बेटों ने अधिकारियों को प्रभाव में लेकर गलत तरीके से एक पुरानी इमारत, जहां खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का मुख्यालय था, के खाली पड़े भूभाग को अपने नाम करा लिया और उस पर आलीशान मकान बनवाना शुरू कर दिया. विपक्ष से जुड़े तमाम नेताओं ने इस मुद्दे पर हो-हल्ला तो शुरू किया लेकिन मीडिया चुप्पी साधे रही. मीडिया की चुप्पी के पीछे खास कारण एह रहा कि कतिपय बड़े पत्रकारों को इस खबर को दबाने के लिए गोमती नगर में प्रस्तावित पत्रकारपुरम में भूखण्ड देने का आश्वासन मिला था. इसी दौरान मुख्यमंत्री के बेटों के उक्त अवैध निर्मित मकान से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मेरे हाथ लगे. मैंने इस संबंध में एक रिपोर्ट तो तैयार कर लिया लेकिन इसे कहां छपने को भेजू, यह समझ नहीं पा रहा था. एक वरिष्ठ पत्रकार, जिनका मुझ पर विशेष स्नेह रहा, से इस बारे में बातचीत की. उन्होंने सलाह दी कि इस तरह की खबर जनसत्ता ही छाप सकता है, इसलिए इसे प्रभाष जी के नाम से जनसत्ता, दिल्ली के पते पर भेज दिया. मुझे भरोसा नहीं था कि यह खबर जनसत्ता में छपेगी. कारण, लखनऊ के तेजजर्रार पत्रकार जयप्रकाश शाही यहां से संवाददाता थे और वे भी इस खबर को दबाना चाहते थे, नहीं तो यह खबर कबकी छप चुकी होती. बहरहाल करीब पंद्रह दिन बाद मेरे एक साथी नरेन्द्र निर्मल ने दोपहर बाद मेरे आवास पर आकर बधाई देते हुए जनसत्ता अखबार दिया जिसके खोज-खबर पेज पर मेरी उक्त रिपोर्ट हू-ब-हू छपी हुई थी. जनसत्ता जैसे अखबार में एक नये लड़के की धमाकेदार खबर छपनी बड़ी बात थी. मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा, कुछ वरिष्ठों ने उत्साहित किया, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी मिले जो डराने लगे कि मुझे लखनऊ छोड़ कर भाग जाना पड़ेगा. इसी बीच यह मामला शान-ए-सहारा में भी छप चुका था और जनसत्ता में छपने के बाद इतना तूल पकड़ा कि मुख्यमंत्री की छीछालेदर हो गई और प्रशासन को उनके बेटों के मकान का निर्माण रोकवाना पड़ा. चूंकि मामला मुख्यमंत्री से जुड़ा था, इसलिए मैं अंदर से डरने भी लगा था. इसी बीच मैने प्रभाष जोशीजी से संपर्क किया तो उन्होंने दूरभाष पर ऐसा अभयदान दिया कि मेरा डर काफूर हो गया. इसके बाद से जोशीजी के प्रति मेरे मन में जो भाव पैदा हुआ उसे शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता. जोशीजी के दर्शन की तमन्ना तभी से थी जो अट्ठाईस नवंबर दो हज़ार सात में तब पूरी हुई, जब आधी जिंदगी इधर-उधर गुजारने के बाद दिल्ली से शुरू होने वाली एक पत्रिका 'द इंडिया पोस्ट' से जुड़ा. पत्रिका का विमोचन समारोह इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेन्टर, लोदी रोड में होना था, जिसमें प्रभाषजी को ले जाने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई. मैं सुबह दस बजे निर्माण विहार स्थित जोशीजी के आवास पर पहुंच गया. आधे घंटे बाद जोशीजी नीचे उतरे और उन्हें करीब से देखकर मैं धन्य हो गया. पैर छूकर नमन करना चाहा तो उन्होंने कंधा पकड़ कर उठा लिया. मैं चाहता था कि गाड़ी में आगे बैठूं लेकिन जोशीजी ने अपने साथ पीछे बैठा लिया. रास्ते में उनके पूछने पर जब मैंने अपना नाम बताया तो उनका कहना था कि यह नाम तो जाना पहचाना लगता है. मैंने एक हज़ार नौ सौ चौरासी में फोन पर हुई बातचीत का जिक्र किया तो ऐसा लगा कि वे मेरे बारे में सब कुछ जान लेना चाहते हैं. गाड़ी चलती रही और मैं माया, सेवाग्राम, राजस्थान पत्रिका, न्याय, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा होते हुए दिल्ली तक पहुंचने की यात्रा कथा सुनाता रहा. घर-परिवार के बारे में पूरा तहकीकात करने के बाद जिन जगहों से होकर मैं गुजरा था वहां से जुड़ी कई स्मृतियों को सुनाते रहे. विमोचन कार्यक्रम के बाद उन्हें दिल्ली दूरदर्शन में एक साक्षात्कार देना था. उनके साथ दूरदर्शन गया, जहां सुधांशु रंजन साक्षात्कार के लिए उनकी प्रतीक्षा में थे. दूरदर्शन से चलते समय जोशीजी ने चालक से कहां ऐसे रास्ते से चलो ताकि खेल गांव में चल रही तैयारी को देख सकू. खेल गांव देखते निर्माण विहार पहुंचते-पहुंचते पांच बज गये. इस तरह उस मनीषी, जिससे मिलने की अभिलाषा मैं एक हज़ार नौ सौ चौरासी से पाले हुए था, ना खाली पूरी हुई बल्कि उनके साथ कई घंटे इत्मिनान से गुजारने का सौभाग्य मिला. लेकिन जोशीजी से दोबारा मिलने की इच्छा अधूरी रह गई. जबसे पता चला था कि वे अब वसुंधरा में रहने लगे हैं, उत्साहित रहा लेकिन शुक्रवार को आफिस आते ही जैसे नेट पर प्रभाषजी के नहीं रहने की खबर देखा, हतप्रभ रह गया. विश्वास ही नहीं हो रहा कि प्रभाषजी नहीं रहे.... .
|
मोसियर, न्यू लेनोक्स, आईएल ने पूछाः
मेरा कार्यक्रम मुझे सुबह, दोपहर के भोजन पर, या काम के बाद उठाने की अनुमति देता है। मुझे कब काम करना चाहिए?
आपका शरीर लगातार अनुसूची पर सबसे अच्छा काम करता है, इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह समय चुनकर चिपके रहें। यदि आप सुबह के व्यक्ति हैं, तो शुरुआती कसरत सबसे अच्छा हो सकता है - आपके दिन की मांगों के रास्ते में आने से पहले। कैलोरी जलने में एक दिन की बढ़ोतरी के लिए आप अपने चयापचय को भी बढ़ाएंगे। दोपहर का भोजन खिड़की दिन को तोड़ने में मदद करता है और आपके शरीर और दिमाग को रिचार्ज करता है। चाहे आप किस समय काम करते हैं, भले ही एक मट्ठा-अलग शूटर लें और पोस्टवर्कआउट रिकवरी शेक के साथ अनुवर्ती हो - आप सुनिश्चित करेंगे कि आप अपने कसरत से अधिक लाभ उठा रहे हैं।
|
मोसियर, न्यू लेनोक्स, आईएल ने पूछाः मेरा कार्यक्रम मुझे सुबह, दोपहर के भोजन पर, या काम के बाद उठाने की अनुमति देता है। मुझे कब काम करना चाहिए? आपका शरीर लगातार अनुसूची पर सबसे अच्छा काम करता है, इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह समय चुनकर चिपके रहें। यदि आप सुबह के व्यक्ति हैं, तो शुरुआती कसरत सबसे अच्छा हो सकता है - आपके दिन की मांगों के रास्ते में आने से पहले। कैलोरी जलने में एक दिन की बढ़ोतरी के लिए आप अपने चयापचय को भी बढ़ाएंगे। दोपहर का भोजन खिड़की दिन को तोड़ने में मदद करता है और आपके शरीर और दिमाग को रिचार्ज करता है। चाहे आप किस समय काम करते हैं, भले ही एक मट्ठा-अलग शूटर लें और पोस्टवर्कआउट रिकवरी शेक के साथ अनुवर्ती हो - आप सुनिश्चित करेंगे कि आप अपने कसरत से अधिक लाभ उठा रहे हैं।
|
- #Gujaratदुनिया का सबसे विशाल निजी आवासीय पैलेस एक भारतीय के पास है, जानते हैं उनका नाम?
नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाने में इतने व्यस्त हैं कि दिल्ली में योग दिवस के कार्यक्रम और राजस्थान के कोटा में एक कार्यक्रम लिए समय नहीं दे सके। अमित शाह लगातार भाजपा नेताओं से फीडबैक लेने के लिए मुलाकात कर रहे हैं कि इस दिशा में और बेहतर क्या किया जा सकता है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जम्मू दौरे से पहले दो दिनों तक दिल्ली में हैं।
सूत्रों ने बताया कि अमित शाह को राजस्थान के कोटा में आयोजित योग दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भी आया था जिसमें सीएम वसुंधरा राजे और बाबा रामदेव शामिल हो रहे थे, लेकिन शाह नहीं जा सके। अमित शाह 2019 के लोकसभा चुनावों की रणनीति बनाने में काफी व्यस्त हैं और 20 जून को शाह ने अलग-अलग राज्यों के नेताओं से मुलाकात की।
सूत्रों ने बताया कि अमित शाह 22 जून को हरियाणा के नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में संगठन के महासचिव राम लाल, महा सचिव अनिल जैन, सीएम खट्टर आदि मौजूद रहेंगे और इस दौरान सांसदों के कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।
अमित शाह 24 जून को देहरादून में रहेंगे जबकि 25 और 26 जून को अहमदाबाद में रहेंगे जहां आपातकाल की तारीख को ब्लैक डे के रूप में मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में MISA के अंतर्गत जेल जाने वाले लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा। 27 और 28 जून को शाह पश्चिम बंगाल के पुरलिया में रैली करेंगे और मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता के परजनों से मुलाकात भी करेंगे। हालांकि इसकी अनुमति अभी राज्य सरकार द्वारा नहीं मिली है।
चीन में हद से ज्यादा घट रहे सामानों के दाम, आर्थिक मंदी में फंसेगा ड्रैगन, लोग क्यों नहीं कर रहे खरीददारी?
|
- #Gujaratदुनिया का सबसे विशाल निजी आवासीय पैलेस एक भारतीय के पास है, जानते हैं उनका नाम? नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाने में इतने व्यस्त हैं कि दिल्ली में योग दिवस के कार्यक्रम और राजस्थान के कोटा में एक कार्यक्रम लिए समय नहीं दे सके। अमित शाह लगातार भाजपा नेताओं से फीडबैक लेने के लिए मुलाकात कर रहे हैं कि इस दिशा में और बेहतर क्या किया जा सकता है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जम्मू दौरे से पहले दो दिनों तक दिल्ली में हैं। सूत्रों ने बताया कि अमित शाह को राजस्थान के कोटा में आयोजित योग दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भी आया था जिसमें सीएम वसुंधरा राजे और बाबा रामदेव शामिल हो रहे थे, लेकिन शाह नहीं जा सके। अमित शाह दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों की रणनीति बनाने में काफी व्यस्त हैं और बीस जून को शाह ने अलग-अलग राज्यों के नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों ने बताया कि अमित शाह बाईस जून को हरियाणा के नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में संगठन के महासचिव राम लाल, महा सचिव अनिल जैन, सीएम खट्टर आदि मौजूद रहेंगे और इस दौरान सांसदों के कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा। अमित शाह चौबीस जून को देहरादून में रहेंगे जबकि पच्चीस और छब्बीस जून को अहमदाबाद में रहेंगे जहां आपातकाल की तारीख को ब्लैक डे के रूप में मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में MISA के अंतर्गत जेल जाने वाले लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा। सत्ताईस और अट्ठाईस जून को शाह पश्चिम बंगाल के पुरलिया में रैली करेंगे और मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता के परजनों से मुलाकात भी करेंगे। हालांकि इसकी अनुमति अभी राज्य सरकार द्वारा नहीं मिली है। चीन में हद से ज्यादा घट रहे सामानों के दाम, आर्थिक मंदी में फंसेगा ड्रैगन, लोग क्यों नहीं कर रहे खरीददारी?
|
वाइन के लिए एरेटरः प्रकार शराब के लिए एयरेटर का क्या उपयोग है?
शराब के लिए वायुयान एक उपकरण है जिसके बिनाआधुनिक सोम्मेलीर भी इस पेय को चखने का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। यह उपकरण शराब के स्वाद में सुधार करने के लिए योगदान देता है, जो इसका अनूठा स्वाद प्रकट करता है।
शराब के लिए वायुयान का सिद्धांत पर आधारित हैनिम्नलिखित यह ज्ञात है कि यह पेय, एक सीलबंद कंटेनर में होने पर, ऑक्सीजन परिसंचरण से मुक्त है। यह अल्कोहल वाष्प, किण्वन उत्पादों, साथ ही साथ टैनिन के प्रतिधारण की सुविधा प्रदान करता है। ये पदार्थ पेय के स्वाद को प्रभावित करते हैं।
Uncorking के तुरंत बाद किसी भी घटना में शराबबोतलों को बोतलबंद नहीं किया जाना चाहिए। इस पेय के कुछ प्रशंसकों को गलती से विश्वास है कि इस तरह वे पेय के स्वाद के संरक्षित गुलदस्ते महसूस करेंगे। वास्तव में, यह पूरी तरह से गलत है।
अनुभवी सोमालियर दावा करते हैं कि शराब आवश्यक हैइसके लिए "खोलें" या "जीवन में आना" के लिए समय दें। वैज्ञानिक दृष्टि से, एक शराब पीने वाले शराब वाष्प, टैनिन और किण्वन उत्पादों से मुक्त किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों को जोर देते हैं कि शराब को अच्छी सांस लेनी चाहिए।
यह प्रक्रिया कुछ सेकंड से चल सकती हैकुछ घंटों तक। यह सब उपरोक्त पेय में टैनिन की मात्रा पर निर्भर करता है। यह पदार्थ शराब के स्वाद को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता हैः यह इसे एक विशेष अस्थिरता देता है। लेकिन बिना टैनिन के इस पेय के उत्पादन की प्रक्रिया असंभव है, क्योंकि यह शराब पकाने की प्रक्रिया में संरक्षित तत्व है। इसके अलावा, टैनिन वाइन में एक अवशेष बनाता है जो वर्षों से वृद्ध होता है।
मुझे क्या करना चाहिए विशेषज्ञों का तर्क है कि उपरोक्त कमाना एजेंट अधिक से अधिक पेय में, लंबे समय तक इसे हवा से संपर्क करने की आवश्यकता होती है। ऐसा करने के लिए, शीतल को शराब को एक विशेष पकवान - डिकेंटर में डालने की सिफारिश की जाती है। यह एक संकीर्ण लंबी गर्दन और व्यापक निचले हिस्से के साथ एक प्रकार का डिकेंटर है। मेज पर जाने से पहले इस तरह के एक जहाज में शराब को कई घंटों तक रखा जाना चाहिए। खैर, अगर ऐसा समय नहीं है तो क्या होगा? बचाव के लिए यहां एक विशेष उपकरण आता है। हाँ, हाँ, यह वायुयान है।
इसके अलावा, उपरोक्त डिवाइस एक बहुत ही मूल और सुरुचिपूर्ण बार सहायक की भूमिका निभाता है। यह उत्सव के स्वागत के लिए कुछ ठाठ जोड़ देगा और एक रोमांटिक मोमबत्ती की रोशनी रात का खाना सजाने के लिए।
चूंकि कई प्रकार हैंउपर्युक्त पेय पदार्थों के बाद, प्रत्येक सोम्मेलीयर को अपने विशेष डिवाइस का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। उदाहरण के लिए, एक लाल शराब वायुयान केवल एक सफेद महान पेय के लिए एक ही डिवाइस से अलग होता है। क्या?
- आंतरिक आयाम।
- बैंडविड्थ।
यह डिवाइस उपरोक्त पेय पदार्थों के त्वरित निर्वासन के लिए है। लगभग 30 सेकंड पहले से ही शराब के गुलदस्ता और सुगंध में सुधार होता है।
यह डिवाइस अलग-अलग और साफ करना आसान है। इसे डिशवॉशर में धोया जा सकता है।
उपरोक्त निर्माता इसकी पेशकश करता हैउपभोक्ताओं को मूल किट का उपयोग करने के लिए खरीदने के लिए मूल किट, जिसमें सफेद या लाल शराब के लिए एक वायुयान और एक विशेष सुरुचिपूर्ण बोतल स्टैंड शामिल है।
|
वाइन के लिए एरेटरः प्रकार शराब के लिए एयरेटर का क्या उपयोग है? शराब के लिए वायुयान एक उपकरण है जिसके बिनाआधुनिक सोम्मेलीर भी इस पेय को चखने का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। यह उपकरण शराब के स्वाद में सुधार करने के लिए योगदान देता है, जो इसका अनूठा स्वाद प्रकट करता है। शराब के लिए वायुयान का सिद्धांत पर आधारित हैनिम्नलिखित यह ज्ञात है कि यह पेय, एक सीलबंद कंटेनर में होने पर, ऑक्सीजन परिसंचरण से मुक्त है। यह अल्कोहल वाष्प, किण्वन उत्पादों, साथ ही साथ टैनिन के प्रतिधारण की सुविधा प्रदान करता है। ये पदार्थ पेय के स्वाद को प्रभावित करते हैं। Uncorking के तुरंत बाद किसी भी घटना में शराबबोतलों को बोतलबंद नहीं किया जाना चाहिए। इस पेय के कुछ प्रशंसकों को गलती से विश्वास है कि इस तरह वे पेय के स्वाद के संरक्षित गुलदस्ते महसूस करेंगे। वास्तव में, यह पूरी तरह से गलत है। अनुभवी सोमालियर दावा करते हैं कि शराब आवश्यक हैइसके लिए "खोलें" या "जीवन में आना" के लिए समय दें। वैज्ञानिक दृष्टि से, एक शराब पीने वाले शराब वाष्प, टैनिन और किण्वन उत्पादों से मुक्त किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों को जोर देते हैं कि शराब को अच्छी सांस लेनी चाहिए। यह प्रक्रिया कुछ सेकंड से चल सकती हैकुछ घंटों तक। यह सब उपरोक्त पेय में टैनिन की मात्रा पर निर्भर करता है। यह पदार्थ शराब के स्वाद को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता हैः यह इसे एक विशेष अस्थिरता देता है। लेकिन बिना टैनिन के इस पेय के उत्पादन की प्रक्रिया असंभव है, क्योंकि यह शराब पकाने की प्रक्रिया में संरक्षित तत्व है। इसके अलावा, टैनिन वाइन में एक अवशेष बनाता है जो वर्षों से वृद्ध होता है। मुझे क्या करना चाहिए विशेषज्ञों का तर्क है कि उपरोक्त कमाना एजेंट अधिक से अधिक पेय में, लंबे समय तक इसे हवा से संपर्क करने की आवश्यकता होती है। ऐसा करने के लिए, शीतल को शराब को एक विशेष पकवान - डिकेंटर में डालने की सिफारिश की जाती है। यह एक संकीर्ण लंबी गर्दन और व्यापक निचले हिस्से के साथ एक प्रकार का डिकेंटर है। मेज पर जाने से पहले इस तरह के एक जहाज में शराब को कई घंटों तक रखा जाना चाहिए। खैर, अगर ऐसा समय नहीं है तो क्या होगा? बचाव के लिए यहां एक विशेष उपकरण आता है। हाँ, हाँ, यह वायुयान है। इसके अलावा, उपरोक्त डिवाइस एक बहुत ही मूल और सुरुचिपूर्ण बार सहायक की भूमिका निभाता है। यह उत्सव के स्वागत के लिए कुछ ठाठ जोड़ देगा और एक रोमांटिक मोमबत्ती की रोशनी रात का खाना सजाने के लिए। चूंकि कई प्रकार हैंउपर्युक्त पेय पदार्थों के बाद, प्रत्येक सोम्मेलीयर को अपने विशेष डिवाइस का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। उदाहरण के लिए, एक लाल शराब वायुयान केवल एक सफेद महान पेय के लिए एक ही डिवाइस से अलग होता है। क्या? - आंतरिक आयाम। - बैंडविड्थ। यह डिवाइस उपरोक्त पेय पदार्थों के त्वरित निर्वासन के लिए है। लगभग तीस सेकंड पहले से ही शराब के गुलदस्ता और सुगंध में सुधार होता है। यह डिवाइस अलग-अलग और साफ करना आसान है। इसे डिशवॉशर में धोया जा सकता है। उपरोक्त निर्माता इसकी पेशकश करता हैउपभोक्ताओं को मूल किट का उपयोग करने के लिए खरीदने के लिए मूल किट, जिसमें सफेद या लाल शराब के लिए एक वायुयान और एक विशेष सुरुचिपूर्ण बोतल स्टैंड शामिल है।
|
आईपीएल के पहले सीजन में चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सबसे ज्यादा 9. 5 करोड़ रुपये में बिके थे। कप्तान धोनी सीएसके को फाइनल तक लेकर गए थे।
साल 2009 में आईपीएल के दूसरे सीजन में इंग्लिश ऑलराउंडर एंड्र्यू फ्लिंटॉफ और केविन पीटरसन सबसे ज्यादा महंगे खिलाड़ी बने थे। दोनों क्रिकेटरों को क्रमशः चेन्नई सुपरकिंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने 9. 8 करोड़ रुपये में खरीदा था।
साल 2010 में आईपीएल के तीसरे सीजन में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज शेन बॉन्ड और कैरेबियाई ऑलराउंडर किरोन पोलार्ड को क्रमशः कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस ने सबसे ज्यादा 4. 8 करोड़ रुपये में खरीदा था।
साल 2011 में कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान गौतम गंभीर सबसे ज्यादा महंगे बिकने वाले खिलाड़ी बने थे। केकआर की फ्रैंचाइजी ने इस बल्लेबाज को 14. 9 करोड़ रुपये की मोटी रकम खर्च कर अपने दल का मुखिया बनाया था।
|
आईपीएल के पहले सीजन में चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सबसे ज्यादा नौ. पाँच करोड़ रुपये में बिके थे। कप्तान धोनी सीएसके को फाइनल तक लेकर गए थे। साल दो हज़ार नौ में आईपीएल के दूसरे सीजन में इंग्लिश ऑलराउंडर एंड्र्यू फ्लिंटॉफ और केविन पीटरसन सबसे ज्यादा महंगे खिलाड़ी बने थे। दोनों क्रिकेटरों को क्रमशः चेन्नई सुपरकिंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने नौ. आठ करोड़ रुपये में खरीदा था। साल दो हज़ार दस में आईपीएल के तीसरे सीजन में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज शेन बॉन्ड और कैरेबियाई ऑलराउंडर किरोन पोलार्ड को क्रमशः कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस ने सबसे ज्यादा चार. आठ करोड़ रुपये में खरीदा था। साल दो हज़ार ग्यारह में कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान गौतम गंभीर सबसे ज्यादा महंगे बिकने वाले खिलाड़ी बने थे। केकआर की फ्रैंचाइजी ने इस बल्लेबाज को चौदह. नौ करोड़ रुपये की मोटी रकम खर्च कर अपने दल का मुखिया बनाया था।
|
Chhattisgarh Chunav 2018 विवाद की स्थिति को भांपकर मतगणना स्थल और उसके आसपास का पूरा इलाका छावनी में तब्दील रहेगा।
रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। छत्तीसगढ़ में 11 दिसंबर को विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान नक्सल इलाके से शहर तक की निगरानी ड्रोन से की जाएगी। नक्सल इलाकों के जिला मुख्यालयों पर कड़ी सुरक्षा की गई है, वहीं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सीट राजनांदगांव समेत रायपुर,दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर जैसी हाईप्रोफाइल सीटों पर विवाद की स्थिति निर्मित होने की खुफिया सूचना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
राज्य मुख्यालय से आला अफसर लगातार निगाह रख रहे हैं। अफसरों का तर्क है कि चुनाव के नतीजे कार्यकर्ताओं को आक्रोशित कर सकते हैं, इसे ध्यान में रख कर सुरक्षा की रणनीति बनाई गई है। ऐसे संबंधित जिला मुख्यालयों के मतगणना केंद्र वोटों की गिनती शुरू होने से पहले ही सुरक्षा के घेरे में रखा जाएगा। बवाल होने की स्थिति में जवानों को सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए हैं।
विवाद की स्थिति को भांपकर मतगणना स्थल और उसके आसपास का पूरा इलाका छावनी में तब्दील रहेगा। मतगणना के दौरान प्रत्याशियों के साथ उनके समर्थकों का जमावड़ा रहेगा। इस दौरान एक दूसरे पर छींटाकशी, आपत्तिजनक टिप्पणी करने से माहौल बिगड़ने की स्थिति में राज्य पुलिस व केंद्रीय सुरक्षा बल के हथियारबंद जवानों को खास अलर्ट किया गया है। किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को भीतर प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा।
रायपुर के सात विधानसभा सीटों की गिनती शासकीय इंजीनियरिंग कालेज सेजबहार में होगी। ईवीएम में प्रदेश के दो कद्दावर मंत्रियों की किस्मत बंद है। इसके साथ ही राजनांदगांव से प्रदेश के मुखिया, बिलासपुर व मुंगेली जिले से एक-एक मंत्री, भिलाई से एक मंत्री, धमतरी कुरूद से मंत्री,बस्तर क्षेत्र से दो मंत्रियों, प्रतापपुर से गृहमंत्री, बैंकुठपुर से खेल मंत्री समेत अंबिकापुर से नेता प्रतिपक्ष, पाटन से पीसीसी चीफ भूपेश बघेल की सीटों पर अफसरों के साथ पुलिस फोर्स की खास नजर लगी हुई है।
|
Chhattisgarh Chunav दो हज़ार अट्ठारह विवाद की स्थिति को भांपकर मतगणना स्थल और उसके आसपास का पूरा इलाका छावनी में तब्दील रहेगा। रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। छत्तीसगढ़ में ग्यारह दिसंबर को विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान नक्सल इलाके से शहर तक की निगरानी ड्रोन से की जाएगी। नक्सल इलाकों के जिला मुख्यालयों पर कड़ी सुरक्षा की गई है, वहीं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सीट राजनांदगांव समेत रायपुर,दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर जैसी हाईप्रोफाइल सीटों पर विवाद की स्थिति निर्मित होने की खुफिया सूचना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है। राज्य मुख्यालय से आला अफसर लगातार निगाह रख रहे हैं। अफसरों का तर्क है कि चुनाव के नतीजे कार्यकर्ताओं को आक्रोशित कर सकते हैं, इसे ध्यान में रख कर सुरक्षा की रणनीति बनाई गई है। ऐसे संबंधित जिला मुख्यालयों के मतगणना केंद्र वोटों की गिनती शुरू होने से पहले ही सुरक्षा के घेरे में रखा जाएगा। बवाल होने की स्थिति में जवानों को सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए हैं। विवाद की स्थिति को भांपकर मतगणना स्थल और उसके आसपास का पूरा इलाका छावनी में तब्दील रहेगा। मतगणना के दौरान प्रत्याशियों के साथ उनके समर्थकों का जमावड़ा रहेगा। इस दौरान एक दूसरे पर छींटाकशी, आपत्तिजनक टिप्पणी करने से माहौल बिगड़ने की स्थिति में राज्य पुलिस व केंद्रीय सुरक्षा बल के हथियारबंद जवानों को खास अलर्ट किया गया है। किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को भीतर प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा। रायपुर के सात विधानसभा सीटों की गिनती शासकीय इंजीनियरिंग कालेज सेजबहार में होगी। ईवीएम में प्रदेश के दो कद्दावर मंत्रियों की किस्मत बंद है। इसके साथ ही राजनांदगांव से प्रदेश के मुखिया, बिलासपुर व मुंगेली जिले से एक-एक मंत्री, भिलाई से एक मंत्री, धमतरी कुरूद से मंत्री,बस्तर क्षेत्र से दो मंत्रियों, प्रतापपुर से गृहमंत्री, बैंकुठपुर से खेल मंत्री समेत अंबिकापुर से नेता प्रतिपक्ष, पाटन से पीसीसी चीफ भूपेश बघेल की सीटों पर अफसरों के साथ पुलिस फोर्स की खास नजर लगी हुई है।
|
यह कभी भी बहुत देर तक नहीं होता है या न ही कभी सुई का काम सीखता है।जल्दी। शायद, यह इन विचारों से है कि विद्यालयों में लड़कियों को खाना पकाने, बुनाई, कढ़ाई और बेशक, अपने काम के सबक में सिलाई की मूल बातें सीखना है। इस अनुच्छेद में, हम एक एप्रन (ग्रेड 5) को कैसे सीवें करें, इसके बारे में बात करेंगे।
सरलतम विकल्पों के साथ कहानी को बेहतर बनाएं तो, आपको पता होना चाहिए कि एक एप्रन कैसे सीवे लगाया जाए? 5 वर्ग अभी भी उस समय, लड़कियों के कोड में किसी भी शिल्प कौशल का अच्छा ज्ञान नहीं है, इसलिए उत्पादों के पैटर्न जितना आसान हो उतना सरल होना चाहिए। इस विधि के लिए, आपको दो बुनियादी विवरण की आवश्यकता होगीः एक वर्ग (यह एक छाती होगी), दूसरा - एक आयताकार (कमर पर कट)। आपको दो लंबी संकीर्ण स्ट्रिप्स की भी आवश्यकता होगी - एक गर्दन (दोहन) के आसपास पहना जाएगा, दूसरा - यह एप्रन की बेल्ट है। इसलिए, ऊपर से काम शुरू करना बेहतर है - स्तन का हिस्सा आपको कपड़े से एक वर्ग या एक आयताकार कटौती की जरूरत है, यह सभी किनारों के आसपास लपेटें, एक पंक्ति शुरू करें इसके बाद, हमें उस एप्रन के उस हिस्से की लंबाई की गणना करने की आवश्यकता है जो गर्दन के चारों ओर पहना जाएगा, कपड़े काटकर, इसे आधा में बांटना और कपड़े किनारों पर अंदर घुमाएं। इसके अलावा, इस हिस्से के साथ एक अनुलग्नक रेखा देना आवश्यक है। शीर्ष भाग पर काम के अगले और अंतिम चरण में दो समाप्त भागों में शामिल होना है। ऐसा करने के लिए, दोहन को छाती से जोड़ा जाना चाहिए और कई पंक्तियों में सिले लगाया जाना चाहिए। अब आप एक बड़े, मूल विवरण के लिए आगे बढ़ सकते हैं। आपको वांछित लम्बाई के कपड़े का एक आयत भी तोड़ना होगा। चौड़ाई के लिए, यह अलग हो सकता है, क्योंकि एप्रन गोदामों में होगा (फैब्रिक की जितनी बड़ी चौड़ाई, उतना ही शानदार होगा जितना शानदार होगा)। हम आगे बढ़ते हैं, पता लगाते हैं कि एक एप्रन (ग्रेड 5) कैसे सीवे लगाया जाए। अब आपको गोदाम बनाने या विधानसभा बनाने की आवश्यकता है (वैकल्पिक)। गोदामों को पिन के साथ सुरक्षित किया जाना चाहिए (वे काउंटर या लगातार हो सकते हैं) विधानसभा को बनाने के लिए, आपको टाइपराइटर पर सबसे ज्यादा चौड़ाई डालने की जरूरत है, और नीचे धागा खींचकर कपड़े को वांछित चौड़ाई में संलग्न करें। पूरी तरह से एक एप्रन के निचले हिस्से को तैयार करने के बाद, एक बेल्ट बनाने के लिए आवश्यक है। यह गर्दन के चारों ओर एक दोहन के सिद्धांत के अनुसार किया जाता हैः आपको कपड़े का एक टुकड़ा चाहिए जो आधे में तुला हो, अंत में अंदर लपेटे जाएंगे, सभी टाइपराइटर पर एक सिलाई के साथ तय किया जाएगा। सभी भागों तैयार हैं, आप एक एप्रन बना सकते हैं। ऐसा करने के लिए, ऊपरी और निचले हिस्से को एक बेल्ट के साथ बांधा जाना चाहिए, नीचे एक पंक्ति दें, चोर - नीचे। एप्रन तैयार है!
एक अन्य आसान तरीका है,कैसे एक एप्रन (ग्रेड 5) सीवे हालांकि, इस अवतार में, लेख का एक टुकड़ा नहीं होगा, लेकिन पूरे कपड़े के एक टुकड़े से। ऐसा करने के लिए, आपको कपड़े का एक बहुत बड़ा कट तैयार करना होगा, एक झुका हुआ सेंकना जो कि किनारों के साथ-साथ एक दोहन और रिबन-संबंधों के साथ होता है।
हालांकि, सिलाई पर चलने से पहले, आपको इसकी ज़रूरत हैएक पैटर्न तैयार करें ऐसा करने के कई तरीके हैं पहली और सबसे सरलः के रूप में एक पैटर्न एक तैयार पसंदीदा माँ के एप्रन के रूप में काम कर सकते हैं, वह सिद्धांत हो सकता है और कपड़े कटौती करनी चाहिए। हालांकि, अनुभवी सीमस्ट्रेस कहेंगे कि यह गलत है। आप समझते हैं कि कैसे ठीक से और सभी नियमों के अनुसार एक एप्रन सीना की जरूरत है। कुछ मामलों के अनुसार इस मामले में पैटर्न मैन्युअल रूप से बनाया जाना चाहिए। 55 छाती अंतरिक्ष (लम्बाई) के ऊपरी भाग - - 20 सेमी, निचले हिस्से - इस प्रकार, स्कर्ट की चौड़ाई लगभग 50 सेमी, लंबाई है। 35 सेमी इसके अलावा, यह मुख्य भागों, अर्द्ध अंडाकार vyrisovalas मैन्युअल के लिए पसली से सुचारु बनाने के लिए आवश्यक हो जाएगा। यह सभी गणना है और अंत में एप्रन निकला सममित उत्पाद मुड़ा प्रपत्र के साथ बाहर काट किया जा रहा है हो सकता है।
तो, आपको एक एप्रन बनाने की क्या जरूरत है? अपने हाथों सीना या खरीदने के भी Bakey परोक्ष किया जाना चाहिए। सिरों पर आवक झुकने (क्योंकि यह बहुत अच्छा हो जाएगा) यह अपने आप को तैयार करने के लिए रखकर आप, पूर्वाग्रह आवश्यक पर कपड़े की एक पट्टी में कटौती लंबाई छमाही में यह गुना करने की जरूरत है। क्योंकि उत्पाद पूरी है, पूर्वाग्रह बाध्यकारी पर्याप्त होना चाहिए। सबसे पहले, वह अपने पक्ष और एप्रन के नीचे (कपड़े के ढकते हुए सेंकना को अपने किनारों के चारों ओर लिपटी पर रखी जाती है): पहले एक चिह्न बना दिया जाता है, तभी टाइपराइटर पर एक पंक्ति बनाई जाती है। दूसरा दृष्टिकोणः एप्रन के ऊपरी भाग को खड़ा किया गया है। यहाँ यह आवश्यक दोनों पक्षों पर संबंधों, साथ ही उसकी गर्दन में दोहन दिया पाइपिंग की अवधि की गणना करने के लिए है,। एक सर्कल में सब कुछ एक पंक्ति से सीने लगा है, जैसा कि यह था। एक सरल एप्रन तैयार है!
यह एक योग्यता के बारे में सोचने योग्य हैसजाने। तो, उसके लिए आपको एक जेब कर सकते हैं, या बस उत्पाद फीता पोशाक। एक जेब बनाने के लिए, तुम सिर्फ (जेब वर्ग, अर्ध-वृत्ताकार, आयताकार, और इतने पर। डी हो सकता है) कपड़े वांछित आकार में कटौती करने के लिए है, टक किनारों (ऊपर, आप या तो में टक कर सकते हैं, या बाध्यकारी एक ही पूर्वाग्रह को सजाने के लिए)। सामने की ओर उत्पाद पर जेब सिले। बस इतना ही किया है! कसकर यह उत्पाद के तल पर डाल करने के लिए और साथ ही बर्दाश्त, सिर्फ अपने लाइन सीना संभव है।
एक एप्रन सीना चाहते हैं, यह कुछ सरल नियमों को याद रखने योग्य हैः
|
यह कभी भी बहुत देर तक नहीं होता है या न ही कभी सुई का काम सीखता है।जल्दी। शायद, यह इन विचारों से है कि विद्यालयों में लड़कियों को खाना पकाने, बुनाई, कढ़ाई और बेशक, अपने काम के सबक में सिलाई की मूल बातें सीखना है। इस अनुच्छेद में, हम एक एप्रन को कैसे सीवें करें, इसके बारे में बात करेंगे। सरलतम विकल्पों के साथ कहानी को बेहतर बनाएं तो, आपको पता होना चाहिए कि एक एप्रन कैसे सीवे लगाया जाए? पाँच वर्ग अभी भी उस समय, लड़कियों के कोड में किसी भी शिल्प कौशल का अच्छा ज्ञान नहीं है, इसलिए उत्पादों के पैटर्न जितना आसान हो उतना सरल होना चाहिए। इस विधि के लिए, आपको दो बुनियादी विवरण की आवश्यकता होगीः एक वर्ग , दूसरा - एक आयताकार । आपको दो लंबी संकीर्ण स्ट्रिप्स की भी आवश्यकता होगी - एक गर्दन के आसपास पहना जाएगा, दूसरा - यह एप्रन की बेल्ट है। इसलिए, ऊपर से काम शुरू करना बेहतर है - स्तन का हिस्सा आपको कपड़े से एक वर्ग या एक आयताकार कटौती की जरूरत है, यह सभी किनारों के आसपास लपेटें, एक पंक्ति शुरू करें इसके बाद, हमें उस एप्रन के उस हिस्से की लंबाई की गणना करने की आवश्यकता है जो गर्दन के चारों ओर पहना जाएगा, कपड़े काटकर, इसे आधा में बांटना और कपड़े किनारों पर अंदर घुमाएं। इसके अलावा, इस हिस्से के साथ एक अनुलग्नक रेखा देना आवश्यक है। शीर्ष भाग पर काम के अगले और अंतिम चरण में दो समाप्त भागों में शामिल होना है। ऐसा करने के लिए, दोहन को छाती से जोड़ा जाना चाहिए और कई पंक्तियों में सिले लगाया जाना चाहिए। अब आप एक बड़े, मूल विवरण के लिए आगे बढ़ सकते हैं। आपको वांछित लम्बाई के कपड़े का एक आयत भी तोड़ना होगा। चौड़ाई के लिए, यह अलग हो सकता है, क्योंकि एप्रन गोदामों में होगा । हम आगे बढ़ते हैं, पता लगाते हैं कि एक एप्रन कैसे सीवे लगाया जाए। अब आपको गोदाम बनाने या विधानसभा बनाने की आवश्यकता है । गोदामों को पिन के साथ सुरक्षित किया जाना चाहिए विधानसभा को बनाने के लिए, आपको टाइपराइटर पर सबसे ज्यादा चौड़ाई डालने की जरूरत है, और नीचे धागा खींचकर कपड़े को वांछित चौड़ाई में संलग्न करें। पूरी तरह से एक एप्रन के निचले हिस्से को तैयार करने के बाद, एक बेल्ट बनाने के लिए आवश्यक है। यह गर्दन के चारों ओर एक दोहन के सिद्धांत के अनुसार किया जाता हैः आपको कपड़े का एक टुकड़ा चाहिए जो आधे में तुला हो, अंत में अंदर लपेटे जाएंगे, सभी टाइपराइटर पर एक सिलाई के साथ तय किया जाएगा। सभी भागों तैयार हैं, आप एक एप्रन बना सकते हैं। ऐसा करने के लिए, ऊपरी और निचले हिस्से को एक बेल्ट के साथ बांधा जाना चाहिए, नीचे एक पंक्ति दें, चोर - नीचे। एप्रन तैयार है! एक अन्य आसान तरीका है,कैसे एक एप्रन सीवे हालांकि, इस अवतार में, लेख का एक टुकड़ा नहीं होगा, लेकिन पूरे कपड़े के एक टुकड़े से। ऐसा करने के लिए, आपको कपड़े का एक बहुत बड़ा कट तैयार करना होगा, एक झुका हुआ सेंकना जो कि किनारों के साथ-साथ एक दोहन और रिबन-संबंधों के साथ होता है। हालांकि, सिलाई पर चलने से पहले, आपको इसकी ज़रूरत हैएक पैटर्न तैयार करें ऐसा करने के कई तरीके हैं पहली और सबसे सरलः के रूप में एक पैटर्न एक तैयार पसंदीदा माँ के एप्रन के रूप में काम कर सकते हैं, वह सिद्धांत हो सकता है और कपड़े कटौती करनी चाहिए। हालांकि, अनुभवी सीमस्ट्रेस कहेंगे कि यह गलत है। आप समझते हैं कि कैसे ठीक से और सभी नियमों के अनुसार एक एप्रन सीना की जरूरत है। कुछ मामलों के अनुसार इस मामले में पैटर्न मैन्युअल रूप से बनाया जाना चाहिए। पचपन छाती अंतरिक्ष के ऊपरी भाग - - बीस सेमी, निचले हिस्से - इस प्रकार, स्कर्ट की चौड़ाई लगभग पचास सेमी, लंबाई है। पैंतीस सेमी इसके अलावा, यह मुख्य भागों, अर्द्ध अंडाकार vyrisovalas मैन्युअल के लिए पसली से सुचारु बनाने के लिए आवश्यक हो जाएगा। यह सभी गणना है और अंत में एप्रन निकला सममित उत्पाद मुड़ा प्रपत्र के साथ बाहर काट किया जा रहा है हो सकता है। तो, आपको एक एप्रन बनाने की क्या जरूरत है? अपने हाथों सीना या खरीदने के भी Bakey परोक्ष किया जाना चाहिए। सिरों पर आवक झुकने यह अपने आप को तैयार करने के लिए रखकर आप, पूर्वाग्रह आवश्यक पर कपड़े की एक पट्टी में कटौती लंबाई छमाही में यह गुना करने की जरूरत है। क्योंकि उत्पाद पूरी है, पूर्वाग्रह बाध्यकारी पर्याप्त होना चाहिए। सबसे पहले, वह अपने पक्ष और एप्रन के नीचे : पहले एक चिह्न बना दिया जाता है, तभी टाइपराइटर पर एक पंक्ति बनाई जाती है। दूसरा दृष्टिकोणः एप्रन के ऊपरी भाग को खड़ा किया गया है। यहाँ यह आवश्यक दोनों पक्षों पर संबंधों, साथ ही उसकी गर्दन में दोहन दिया पाइपिंग की अवधि की गणना करने के लिए है,। एक सर्कल में सब कुछ एक पंक्ति से सीने लगा है, जैसा कि यह था। एक सरल एप्रन तैयार है! यह एक योग्यता के बारे में सोचने योग्य हैसजाने। तो, उसके लिए आपको एक जेब कर सकते हैं, या बस उत्पाद फीता पोशाक। एक जेब बनाने के लिए, तुम सिर्फ कपड़े वांछित आकार में कटौती करने के लिए है, टक किनारों । सामने की ओर उत्पाद पर जेब सिले। बस इतना ही किया है! कसकर यह उत्पाद के तल पर डाल करने के लिए और साथ ही बर्दाश्त, सिर्फ अपने लाइन सीना संभव है। एक एप्रन सीना चाहते हैं, यह कुछ सरल नियमों को याद रखने योग्य हैः
|
राजस्थान-हरियाणा में सूनसान क्षेत्र में लोगों को अकेला देख रुपए-गहने लूटने वाली अंतर्राज्जीय गैंग के दो शातिर बदमाशों को पाली पुलिस ने गिरफ्तार किया। आरोपियों ने प्रदेश के पाली, जोधपुर, अजमेर, जैसलमेर, सिरोही, जयपुर, बीकानेर सहित हरियाणा के रेवाड़ी में 50 से अधिक लूट की वारदातें करना स्वीकार की है। पुलिस ने उनके कब्जे से लूट के दौरान उपयोग में ली कार भी बरामद की।
SP डॉ. गगनदीप सिंगला ने बताया कि पाली शहर के इन्द्रा कॉलोनी विस्तार निवासी मोहनलाल पुत्र हगामीलाल ने सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें बताया कि 20 अगस्त 2022 को सुबह करीब साढ़े 9 बजे एक्टिवा से हेमावास की तरफ जा रहा था। तभी सफेद रंग की कार आई। जिसमें दो जने सवार थे। एक व्यक्ति साधु के वेश में था। जयपुर जाने का रास्ता पूछने के बहाने उसे रोका और मौका देखकर उसके गले में पहनी सोने की चैन लूट ली और उसे धक्का देकर फरार हो गए।
मामला दर्ज होने के बाद ASP बुगलाल मीणा के नेतृत्व में एक टीम गठित की। घटना स्थल के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले। कड़ी से कड़ी जोड़कर मामले में हरियाणा के रेवाड़ी जिले के कन्हौरा (लालारोड़ाई) निवासी 29 साल के अशोक नाथ पुत्र राजूनाथ उर्फ रघुनाथ और पाली जिले के भांवरी (रोहट) निवासी 23 साल के चतुरनाथ पुत्र किस्तूरनाथ को हिरासत में लिया। जिन्होंने हेमावास के निकट मोहनलाल से सोने की चैन लूटने के साथ ही राजस्थान व हरियाणा में 50 से ज्यादा लूट की वारदातें कराना स्वीकार की। इस पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और लूट के दौरान उपयोग ली कार भी जब्त की। रिमांड के दौरान आरोपियों से लूटे गए गहने व रुपए बरामद करने का पुलिस प्रयास करेगी।
SHO कोतवाली सुरेश चौधरी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी अशोक नाथ साधु के वेश में रहता था। जिससे की सूनसान क्षेत्र में रास्ता पूछने के लिए किसी को रोके तो साधु को देख शक नहीं करे और रूके जाए। जिसके बाद वे वारदात को अंजाम देकर भाग जाते थे।
50 से अधिक लूट की वारदातों को कुछ ही माह में अंजाम देने वाले बदमाश पुलिस पूछताछ में 23 वारदातें ही बात सके कि उन्होंने किसके साथ कहां लूट की। शेष वारदातें उन्हें खुद को याद नहीं थी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
राजस्थान-हरियाणा में सूनसान क्षेत्र में लोगों को अकेला देख रुपए-गहने लूटने वाली अंतर्राज्जीय गैंग के दो शातिर बदमाशों को पाली पुलिस ने गिरफ्तार किया। आरोपियों ने प्रदेश के पाली, जोधपुर, अजमेर, जैसलमेर, सिरोही, जयपुर, बीकानेर सहित हरियाणा के रेवाड़ी में पचास से अधिक लूट की वारदातें करना स्वीकार की है। पुलिस ने उनके कब्जे से लूट के दौरान उपयोग में ली कार भी बरामद की। SP डॉ. गगनदीप सिंगला ने बताया कि पाली शहर के इन्द्रा कॉलोनी विस्तार निवासी मोहनलाल पुत्र हगामीलाल ने सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें बताया कि बीस अगस्त दो हज़ार बाईस को सुबह करीब साढ़े नौ बजे एक्टिवा से हेमावास की तरफ जा रहा था। तभी सफेद रंग की कार आई। जिसमें दो जने सवार थे। एक व्यक्ति साधु के वेश में था। जयपुर जाने का रास्ता पूछने के बहाने उसे रोका और मौका देखकर उसके गले में पहनी सोने की चैन लूट ली और उसे धक्का देकर फरार हो गए। मामला दर्ज होने के बाद ASP बुगलाल मीणा के नेतृत्व में एक टीम गठित की। घटना स्थल के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले। कड़ी से कड़ी जोड़कर मामले में हरियाणा के रेवाड़ी जिले के कन्हौरा निवासी उनतीस साल के अशोक नाथ पुत्र राजूनाथ उर्फ रघुनाथ और पाली जिले के भांवरी निवासी तेईस साल के चतुरनाथ पुत्र किस्तूरनाथ को हिरासत में लिया। जिन्होंने हेमावास के निकट मोहनलाल से सोने की चैन लूटने के साथ ही राजस्थान व हरियाणा में पचास से ज्यादा लूट की वारदातें कराना स्वीकार की। इस पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और लूट के दौरान उपयोग ली कार भी जब्त की। रिमांड के दौरान आरोपियों से लूटे गए गहने व रुपए बरामद करने का पुलिस प्रयास करेगी। SHO कोतवाली सुरेश चौधरी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी अशोक नाथ साधु के वेश में रहता था। जिससे की सूनसान क्षेत्र में रास्ता पूछने के लिए किसी को रोके तो साधु को देख शक नहीं करे और रूके जाए। जिसके बाद वे वारदात को अंजाम देकर भाग जाते थे। पचास से अधिक लूट की वारदातों को कुछ ही माह में अंजाम देने वाले बदमाश पुलिस पूछताछ में तेईस वारदातें ही बात सके कि उन्होंने किसके साथ कहां लूट की। शेष वारदातें उन्हें खुद को याद नहीं थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
हैदराबाद. 25 साल के बिल्लापुरम नागराजू (B. Nagaraju) की सरेआम बेरहमी से हुई हत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर जहां मानवाधिकार और हिंदू कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं, वहीं सोशल मीडिया पर #JusticeForNagaraju नाम से पेज ट्रेंड हो रहा है। बता दें कि हैदराबाद के सरूरनगर ऑनर किलिंग(Hyderabad Saroornagar Honor Killing) मामले में दो आरोपियों को पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी सैयद मोबिन अहमद (30) और मोहम्मद मसूद अब्दुल हमीद (29) ने बुधवार को नागराजू की बीच सड़क हत्या कर दी थी। हत्या के बाद उसकी पत्नी आशरीन सुल्ताना (Ashrin sultana) उर्फ पल्लवी ने मीडिया के सामने आकर अपने भाइयों और रिश्तेदारों पर इस हत्या का आरोप लगाया है। पल्लवी ने कहा-"मेरे पति की दिनदहाड़े बीच सड़क पर हत्या कर दी। वहां हमारी मदद के लिए कोई नहीं आया। उन्होंने मेरी आंखों के सामने मेरे पति को बड़ी निर्दयता से मार दिया। मेरा भाई पहले से ही इस शादी को लेकर आक्रामक था। लेकिन नागराजू ने कहा था कि वो उसी के साथ जीएगा या मर जाएगा। " इस मामले ने राज्य में कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है। भाजपा नेता मुरलीधर राव(P Muralidhar Rao)ने कहा कि ओवैसी और टीआरएस से लेकर कांग्रेस तक गंगा-जमुनी गिरोह से कोई भी इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ नहीं बोल रहा है, क्यों यह युवक हिंदू था? तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य बंदी संजय कुमार ने कहा कि नागराजू को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने एक मुस्लिम महिला से शादी की। उन्होंने इसे धार्मिक हत्या करार दिया।
बुधवार की रात बी नागराजू अपनी पत्नी पल्लवी उर्फ सैयदा अश्रीन फातिमा उर्फ सुल्ताना के साथ बाइक पर जा रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया था। घटना के दौरान नागराजू को फावड़ियों से काटकर मार डाला गया। इसी साल जनवरी में बी नागराजू ने ओल्ड सिटी के आर्य समाज में सुल्ताना से शादी की थी। सुल्ताना का परिवार नागराजू से उसकी शादी से नाखुश था। वे लगातार उन्हें धमकी दे रहे थे।
इस घटना का एक वीडियो सामने आया है। इसमें दिखाई दिया कि बुधवार को दंपति पर हमला किया गया। नागराजू की मौके पर ही मौत हो गई। सुल्ताना ने अपने पति को बचाने की कोशिश की, लेकिन कोई बचाने नहीं आया। सुल्तान ने कहा-"सिग्नल पर पांच लोगां ने नागराजू की पिटाई कर दी। मैंने मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई आगे नहीं आया। मैंने उसे ढक कर बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मुझे दूर धकेल दिया। " इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 और एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि जांच जल्द पूरी कर ली जाएगी।
एससी-माला समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नागराजू और मुस्लिम समुदाय की सुल्ताना 5 साल से एक-दूसरे को प्यार करते थे। वे स्कूल और कॉलेज में साथ पढ़े थे। सुल्ताना एक आरोपी सैयद मोबिन अहमद की बहन है। पुलिस उपायुक्त (एलबी नगर जोन) सुनप्रीत सिंह(Sunpreet Singh) ने मीडिया से कहा कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट(fast-track court) में की जाएगी।
मोबिन अहमद ने पहले भी अपनी बहन को धमकाया था। इसके बाद सुल्ताना ने नागराजू से शादी की और अपना घर छोड़ दिया। हालांकि तब से मोबिन अहमद नागराजू के खिलाफ शिकायत कर रहा था। वो पहले से हत्या मंसूबा बना चुका था।
इस मामले में दो आरोपियों को पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार किया है। आरोपी सैयद मोबिन अहमद (30) और मोहम्मद मसूद अब्दुल हमीद (29) ने बुधवार को नागराजू की बीच सड़क हत्या कर दी थी। मोबिन सुल्ताना का भाई है।
|
हैदराबाद. पच्चीस साल के बिल्लापुरम नागराजू की सरेआम बेरहमी से हुई हत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर जहां मानवाधिकार और हिंदू कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं, वहीं सोशल मीडिया पर #JusticeForNagaraju नाम से पेज ट्रेंड हो रहा है। बता दें कि हैदराबाद के सरूरनगर ऑनर किलिंग मामले में दो आरोपियों को पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी सैयद मोबिन अहमद और मोहम्मद मसूद अब्दुल हमीद ने बुधवार को नागराजू की बीच सड़क हत्या कर दी थी। हत्या के बाद उसकी पत्नी आशरीन सुल्ताना उर्फ पल्लवी ने मीडिया के सामने आकर अपने भाइयों और रिश्तेदारों पर इस हत्या का आरोप लगाया है। पल्लवी ने कहा-"मेरे पति की दिनदहाड़े बीच सड़क पर हत्या कर दी। वहां हमारी मदद के लिए कोई नहीं आया। उन्होंने मेरी आंखों के सामने मेरे पति को बड़ी निर्दयता से मार दिया। मेरा भाई पहले से ही इस शादी को लेकर आक्रामक था। लेकिन नागराजू ने कहा था कि वो उसी के साथ जीएगा या मर जाएगा। " इस मामले ने राज्य में कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है। भाजपा नेता मुरलीधर रावने कहा कि ओवैसी और टीआरएस से लेकर कांग्रेस तक गंगा-जमुनी गिरोह से कोई भी इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ नहीं बोल रहा है, क्यों यह युवक हिंदू था? तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य बंदी संजय कुमार ने कहा कि नागराजू को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने एक मुस्लिम महिला से शादी की। उन्होंने इसे धार्मिक हत्या करार दिया। बुधवार की रात बी नागराजू अपनी पत्नी पल्लवी उर्फ सैयदा अश्रीन फातिमा उर्फ सुल्ताना के साथ बाइक पर जा रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया था। घटना के दौरान नागराजू को फावड़ियों से काटकर मार डाला गया। इसी साल जनवरी में बी नागराजू ने ओल्ड सिटी के आर्य समाज में सुल्ताना से शादी की थी। सुल्ताना का परिवार नागराजू से उसकी शादी से नाखुश था। वे लगातार उन्हें धमकी दे रहे थे। इस घटना का एक वीडियो सामने आया है। इसमें दिखाई दिया कि बुधवार को दंपति पर हमला किया गया। नागराजू की मौके पर ही मौत हो गई। सुल्ताना ने अपने पति को बचाने की कोशिश की, लेकिन कोई बचाने नहीं आया। सुल्तान ने कहा-"सिग्नल पर पांच लोगां ने नागराजू की पिटाई कर दी। मैंने मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई आगे नहीं आया। मैंने उसे ढक कर बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मुझे दूर धकेल दिया। " इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ दो और एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि जांच जल्द पूरी कर ली जाएगी। एससी-माला समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नागराजू और मुस्लिम समुदाय की सुल्ताना पाँच साल से एक-दूसरे को प्यार करते थे। वे स्कूल और कॉलेज में साथ पढ़े थे। सुल्ताना एक आरोपी सैयद मोबिन अहमद की बहन है। पुलिस उपायुक्त सुनप्रीत सिंह ने मीडिया से कहा कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाएगी। मोबिन अहमद ने पहले भी अपनी बहन को धमकाया था। इसके बाद सुल्ताना ने नागराजू से शादी की और अपना घर छोड़ दिया। हालांकि तब से मोबिन अहमद नागराजू के खिलाफ शिकायत कर रहा था। वो पहले से हत्या मंसूबा बना चुका था। इस मामले में दो आरोपियों को पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार किया है। आरोपी सैयद मोबिन अहमद और मोहम्मद मसूद अब्दुल हमीद ने बुधवार को नागराजू की बीच सड़क हत्या कर दी थी। मोबिन सुल्ताना का भाई है।
|
रतलाम। कार व बाइक में जोरदार भिंड़त बाइक सवार गम्भीर घायल हो गया ये पूरी घटना Cctv में कैद हो गई। हादसा नामली बायपास पंचेड़ फंटे पर हुआ। घायल को पुलिस वाहन में रतलाम जिला चिकित्सालय ले जाया गया। जहां से घायल को इंदौर रेफर किया गया। पुलिस ने हादसे के बाद वाहनों को एक ओर करवा कर यातायात सुचारू किया ,रतलाम के नामली में बीती रात बाइक और कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। जिसमें बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई उसे इंदौर रेफर किया गया। फोरलेन पर नामली का पंचेड़ फंटा अब दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। इससे पहले भी यहां कई हादसे हो चुके हैं जिसमें करीब दर्जन भर लोग अपनी जान गवा चुके हैं। फोरलेन के निर्माण की शुरुआत के साथ ही विसंगतियों के कारण इस क्रॉसिंग पर हादसे की संभावना हमेशा बनी रहती है।
|
रतलाम। कार व बाइक में जोरदार भिंड़त बाइक सवार गम्भीर घायल हो गया ये पूरी घटना Cctv में कैद हो गई। हादसा नामली बायपास पंचेड़ फंटे पर हुआ। घायल को पुलिस वाहन में रतलाम जिला चिकित्सालय ले जाया गया। जहां से घायल को इंदौर रेफर किया गया। पुलिस ने हादसे के बाद वाहनों को एक ओर करवा कर यातायात सुचारू किया ,रतलाम के नामली में बीती रात बाइक और कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। जिसमें बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई उसे इंदौर रेफर किया गया। फोरलेन पर नामली का पंचेड़ फंटा अब दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। इससे पहले भी यहां कई हादसे हो चुके हैं जिसमें करीब दर्जन भर लोग अपनी जान गवा चुके हैं। फोरलेन के निर्माण की शुरुआत के साथ ही विसंगतियों के कारण इस क्रॉसिंग पर हादसे की संभावना हमेशा बनी रहती है।
|
36 इंग्लैण्ड का आर्थिक विकास
हो विकास किया जाता तो रेलवे निर्माण और विस्तार से उन्हें काफी लाभ हो सकता था। लेकिन ब्रिटेन की नीति तो हर प्रकार से उपनिवेशो का आर्थिक शोषण करने की थी । अत रेलो द्वारा उपनिवेशो के कच्चे माल और खाद्यानो का निर्यात किया गया । रेलो के निर्माण पर जो व्यय किया गया उसका भार भी उपनिवेशो को जनता पर करो के रूप मे डाला गया ।
(9) ब्रिटेन की औपनिवेशिक नीति का मूल उद्देश्य यही रहा कि उपनिवेशो से ब्रिटेन की ओर सम्पत्ति का निष्कासन (Economic Drain ) रहे । सम्पत्ति के निष्कासन से उपनिवेशो का कितना शोषरण हुआ, इसका अनुमान हम अकेले भारत के उदाहरण से ही लगा सकते हैं। सन् 1867 मे दादाभाई नौरोजी ने कहा कि "भारत मे एकत्र की गई भाय का लगभग ½ भाग भारत मे शासन करने का मूल्य है जो देश के बाहर चला जाता है और इग्लैण्ड के साधनो मे जोड दिया जाता है।" सन् 1872 मे जस्टिस रानाडे ने बताया कि - "भारतीय राष्ट्रीय प्राय का एक तिहाई से भी अधिक भाग किसी न किसी रूप मे ब्रिटिश सरकार द्वारा ले जाया जाता है ।" विदेशी राजनीतिज्ञो और अर्थशास्त्रियो ने इस बात से सहमति प्रकट की है कि सम्पत्ति निष्कासन भारत की तथा अन्य उपनिवेशो की दरिद्रता का एक प्रमुख कारण था ।
( 10 ) ब्रिटिश सरकार ने उपनिवेशो के उद्योगो के प्रति घातक नीति अपनाकर वहाँ आर्थिक जड़ता की प्रत्येक स्थिति पैदा करदी है । उदाहरणार्थ, भारत मे वडे-बडे उद्योगो पर ब्रिटिश पूंजीपतियों ने ही अधिकार रखा। बड़े पैमाने पर स्थापित किए गए अन्य उद्योगो पर सरकार का प्रत्यक्ष नियन्त्रण रहा । भारतीय वस्त्र उद्योग को हर सम्भव उपाय से हतोत्साहित किया गया। ब्रिटेन को भेजे जाने वाले भारतीय सूत और रेशमी माल पर 40 से 60 प्रतिशत प्राय कर लगाया गया जबकि ब्रिटिश सूती माल पर भारत मे मुल्यानुसार केवल 32 प्रतिशत आयात कर आरोपित किया गया । वास्तव में ब्रिटेन की कपड़ा मिले भारतीय हितो की बलि देकर चलाई गई । भारतीय जहाजरानी उद्योग को भी इसी तरह की भेदपूर्ण नीति अपनाकर नष्ट कर दिया गया । भारत और इंग्लैण्ड के बीच होने वाले यापार में भारतीय जहाजो के उपयोग को निरुत्साहित किया गया। भारत में कच्चे लोहे को बहुलता रही, लेकिन अग्रेजो ने देश के सोहा उत्पादन पर कोई ध्यान नहीं दिया। भारत में ब्रिटिश शासन की यही नीति रही कि भारतीय उद्योगो के विस्तार के लिए आवश्यक पूंजी, कच्चे माल, तकनीकी सहायता, कल-पुर्जे व मशीन आदि की सुविधाएँ ब्रिटिश पूँजीपतियों के सहयोग से क संचालन पर उनके एकाधिकार देने पर ही प्राप्त की जा सकती थी । सन् 1923 से देश के उद्योगों के विकास में विभेदात्मक सरक्षण नीति अपनाई गई, किन्तु बहुत देर से और अपर्याप्त ढंग से अपनाई जाने के कारण यह भारतीय हितो को भागे बढ़ाने में अधिक समयं न हो सको ।
( 11 ) ब्रिटिश सरकार ने उपनिवेशों में वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा का
|
छत्तीस इंग्लैण्ड का आर्थिक विकास हो विकास किया जाता तो रेलवे निर्माण और विस्तार से उन्हें काफी लाभ हो सकता था। लेकिन ब्रिटेन की नीति तो हर प्रकार से उपनिवेशो का आर्थिक शोषण करने की थी । अत रेलो द्वारा उपनिवेशो के कच्चे माल और खाद्यानो का निर्यात किया गया । रेलो के निर्माण पर जो व्यय किया गया उसका भार भी उपनिवेशो को जनता पर करो के रूप मे डाला गया । ब्रिटेन की औपनिवेशिक नीति का मूल उद्देश्य यही रहा कि उपनिवेशो से ब्रिटेन की ओर सम्पत्ति का निष्कासन रहे । सम्पत्ति के निष्कासन से उपनिवेशो का कितना शोषरण हुआ, इसका अनुमान हम अकेले भारत के उदाहरण से ही लगा सकते हैं। सन् एक हज़ार आठ सौ सरसठ मे दादाभाई नौरोजी ने कहा कि "भारत मे एकत्र की गई भाय का लगभग ½ भाग भारत मे शासन करने का मूल्य है जो देश के बाहर चला जाता है और इग्लैण्ड के साधनो मे जोड दिया जाता है।" सन् एक हज़ार आठ सौ बहत्तर मे जस्टिस रानाडे ने बताया कि - "भारतीय राष्ट्रीय प्राय का एक तिहाई से भी अधिक भाग किसी न किसी रूप मे ब्रिटिश सरकार द्वारा ले जाया जाता है ।" विदेशी राजनीतिज्ञो और अर्थशास्त्रियो ने इस बात से सहमति प्रकट की है कि सम्पत्ति निष्कासन भारत की तथा अन्य उपनिवेशो की दरिद्रता का एक प्रमुख कारण था । ब्रिटिश सरकार ने उपनिवेशो के उद्योगो के प्रति घातक नीति अपनाकर वहाँ आर्थिक जड़ता की प्रत्येक स्थिति पैदा करदी है । उदाहरणार्थ, भारत मे वडे-बडे उद्योगो पर ब्रिटिश पूंजीपतियों ने ही अधिकार रखा। बड़े पैमाने पर स्थापित किए गए अन्य उद्योगो पर सरकार का प्रत्यक्ष नियन्त्रण रहा । भारतीय वस्त्र उद्योग को हर सम्भव उपाय से हतोत्साहित किया गया। ब्रिटेन को भेजे जाने वाले भारतीय सूत और रेशमी माल पर चालीस से साठ प्रतिशत प्राय कर लगाया गया जबकि ब्रिटिश सूती माल पर भारत मे मुल्यानुसार केवल बत्तीस प्रतिशत आयात कर आरोपित किया गया । वास्तव में ब्रिटेन की कपड़ा मिले भारतीय हितो की बलि देकर चलाई गई । भारतीय जहाजरानी उद्योग को भी इसी तरह की भेदपूर्ण नीति अपनाकर नष्ट कर दिया गया । भारत और इंग्लैण्ड के बीच होने वाले यापार में भारतीय जहाजो के उपयोग को निरुत्साहित किया गया। भारत में कच्चे लोहे को बहुलता रही, लेकिन अग्रेजो ने देश के सोहा उत्पादन पर कोई ध्यान नहीं दिया। भारत में ब्रिटिश शासन की यही नीति रही कि भारतीय उद्योगो के विस्तार के लिए आवश्यक पूंजी, कच्चे माल, तकनीकी सहायता, कल-पुर्जे व मशीन आदि की सुविधाएँ ब्रिटिश पूँजीपतियों के सहयोग से क संचालन पर उनके एकाधिकार देने पर ही प्राप्त की जा सकती थी । सन् एक हज़ार नौ सौ तेईस से देश के उद्योगों के विकास में विभेदात्मक सरक्षण नीति अपनाई गई, किन्तु बहुत देर से और अपर्याप्त ढंग से अपनाई जाने के कारण यह भारतीय हितो को भागे बढ़ाने में अधिक समयं न हो सको । ब्रिटिश सरकार ने उपनिवेशों में वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा का
|
LagatarDesk: भारत में गुजरात, दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में फिर से लॉकडाउन करने करने की घोषणा की गयी है. जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने सोमवार को कहा कि इससे भारत की आर्थिक सुधार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. नोमुरा के मुताबिक, बाजारी गतिविधियों को दोबारा पटरी में लाने की चिंता बनी रहेंगी. पिछले हफ्ते में सूचकांक ने हल्की बढ़ोतरी हासिल की है, लेकिन अभी भी भारत की आर्थिक स्थिति कोरोना पूर्व स्तर से नीचे है. उन्होंने बाजारी गतिविधियों में सुधार को मापने के लिए सूचकांक तैयार किया है. सूचकांक के अनुसार, गूगल में सुधार अभी भी जारी है. वहीं ऐप्पल में सुधार तेजी के साथ देखी जा रही है. नोमुरा ने चेतावनी दी कि लॉकडाउन अगले 2 से 3 महीने की सुधार की रफ्तार को कम कर देगा.
कोविड़ के बढ़ते मामलों के कारण बहुत से राज्यों में लॉकडाउन किया जा रहा है. महाराष्ट में सोमवार को सबसे अधिक कोरोना संक्रमण के मामले सामने आये हैं. इसलिए राज्यों से यात्रा करने वाले के लिए मानक परिचालन प्रोटोकॉल जारी किया गया है. जिन राज्यों में कोरोना के शुरुआती दिनों में सबसे अधिक संक्रमण के मामले आये थे. उन राज्यों ने भी चेतावनी जारी की है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर सुनामी की तरह आ सकती है. अगर महामारी की दूसरी लहर आती है तो राज्य पुनः लॉकडाउन कर सकते हैं.
पिछले 24 घंटे में कोरोना के 37975 नये मामले दर्ज किये गये हैं. सोमवार को कोरोना के 44059 नये मामले सामने आये थे. देश में संक्रमणमुक्त होने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 86 लाख के पार हो गयी है. वहीं देश में कोरोना से संक्रमित मराजों की संख्या बढ़कर 9177841 हो गयी है.
इसे भी पढ़ेंःक्या कोरोना कहीं से भी आपको ऐसी महामारी लग रही है?
|
LagatarDesk: भारत में गुजरात, दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में फिर से लॉकडाउन करने करने की घोषणा की गयी है. जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने सोमवार को कहा कि इससे भारत की आर्थिक सुधार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. नोमुरा के मुताबिक, बाजारी गतिविधियों को दोबारा पटरी में लाने की चिंता बनी रहेंगी. पिछले हफ्ते में सूचकांक ने हल्की बढ़ोतरी हासिल की है, लेकिन अभी भी भारत की आर्थिक स्थिति कोरोना पूर्व स्तर से नीचे है. उन्होंने बाजारी गतिविधियों में सुधार को मापने के लिए सूचकांक तैयार किया है. सूचकांक के अनुसार, गूगल में सुधार अभी भी जारी है. वहीं ऐप्पल में सुधार तेजी के साथ देखी जा रही है. नोमुरा ने चेतावनी दी कि लॉकडाउन अगले दो से तीन महीने की सुधार की रफ्तार को कम कर देगा. कोविड़ के बढ़ते मामलों के कारण बहुत से राज्यों में लॉकडाउन किया जा रहा है. महाराष्ट में सोमवार को सबसे अधिक कोरोना संक्रमण के मामले सामने आये हैं. इसलिए राज्यों से यात्रा करने वाले के लिए मानक परिचालन प्रोटोकॉल जारी किया गया है. जिन राज्यों में कोरोना के शुरुआती दिनों में सबसे अधिक संक्रमण के मामले आये थे. उन राज्यों ने भी चेतावनी जारी की है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर सुनामी की तरह आ सकती है. अगर महामारी की दूसरी लहर आती है तो राज्य पुनः लॉकडाउन कर सकते हैं. पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना के सैंतीस हज़ार नौ सौ पचहत्तर नये मामले दर्ज किये गये हैं. सोमवार को कोरोना के चौंतालीस हज़ार उनसठ नये मामले सामने आये थे. देश में संक्रमणमुक्त होने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर छियासी लाख के पार हो गयी है. वहीं देश में कोरोना से संक्रमित मराजों की संख्या बढ़कर इक्यानवे लाख सतहत्तर हज़ार आठ सौ इकतालीस हो गयी है. इसे भी पढ़ेंःक्या कोरोना कहीं से भी आपको ऐसी महामारी लग रही है?
|
नई दिल्लीः कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरनेम मामले में सूरत की एक अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने और संसद सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित किए जाने के बाद अपना आधिकारिक बंगला खाली करने का आदेश दिए जाने के बाद शुक्रवार को अपने 12, तुगलक लेन स्थित आवास से अपना सामान स्थानांतरित करना शुरू कर दिया।
समाचार एजेंसी एएनआई ने दो ट्रकों के राहुल गांधी के आवास में घुसने और फिर उनके सामान को उनकी मां के 10, जनपथ स्थित आवास पर ले जाने का एक वीडियो फुटेज साझा किया।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी बहुत जल्द उन्हें दिए गए आधिकारिक बंगले को पूरी तरह से खाली कर सकते हैं। राहुल गांधी ने कई घरों को देखा है और आखिरकार कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ रहने का विकल्प चुन सकते हैं। पद से अयोग्य घोषित किए जाने के बाद 22 अप्रैल मानहानि के मामले में सूरत की एक अदालत द्वारा दो साल की सजा और सजा के बाद सांसद लोकसभा मंत्रालय ने राहुल गांधी को परिसर खाली करने के लिए नोटिस भेजा था।
गुजरात के सूरत की एक स्थानीय अदालत ने राहुल गांधी को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कथित रूप से अपमानजनक भाषण देने के लिए दो साल की सजा सुनाई है, जिसमें उन्होंने सवाल किया था कि 'सभी चोरों का उपनाम मोदी कैसे होता है'।
कुछ साल पहले, प्रियंका गांधी वाड्रा को उनकी सुरक्षा द्वारा एसपीजी कवर हटा दिए जाने के बाद लोधी एस्टेट बंगला खाली करने के लिए कहा गया था।
|
नई दिल्लीः कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरनेम मामले में सूरत की एक अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने और संसद सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित किए जाने के बाद अपना आधिकारिक बंगला खाली करने का आदेश दिए जाने के बाद शुक्रवार को अपने बारह, तुगलक लेन स्थित आवास से अपना सामान स्थानांतरित करना शुरू कर दिया। समाचार एजेंसी एएनआई ने दो ट्रकों के राहुल गांधी के आवास में घुसने और फिर उनके सामान को उनकी मां के दस, जनपथ स्थित आवास पर ले जाने का एक वीडियो फुटेज साझा किया। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी बहुत जल्द उन्हें दिए गए आधिकारिक बंगले को पूरी तरह से खाली कर सकते हैं। राहुल गांधी ने कई घरों को देखा है और आखिरकार कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ रहने का विकल्प चुन सकते हैं। पद से अयोग्य घोषित किए जाने के बाद बाईस अप्रैल मानहानि के मामले में सूरत की एक अदालत द्वारा दो साल की सजा और सजा के बाद सांसद लोकसभा मंत्रालय ने राहुल गांधी को परिसर खाली करने के लिए नोटिस भेजा था। गुजरात के सूरत की एक स्थानीय अदालत ने राहुल गांधी को दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव से पहले कथित रूप से अपमानजनक भाषण देने के लिए दो साल की सजा सुनाई है, जिसमें उन्होंने सवाल किया था कि 'सभी चोरों का उपनाम मोदी कैसे होता है'। कुछ साल पहले, प्रियंका गांधी वाड्रा को उनकी सुरक्षा द्वारा एसपीजी कवर हटा दिए जाने के बाद लोधी एस्टेट बंगला खाली करने के लिए कहा गया था।
|
व्हाट्सऐप छोड़ लोग क्यों डाउनलोड कर रहे हैं टेलीग्राम?
तापमान -50 डिग्री सेल्सियस, ये है दुनिया का सबसे ठंडा शहर. . . . जानें सिर्फ बर्फ ही बर्फ में कैसे जीते हैं लोग ?
|
व्हाट्सऐप छोड़ लोग क्यों डाउनलोड कर रहे हैं टेलीग्राम? तापमान -पचास डिग्री सेल्सियस, ये है दुनिया का सबसे ठंडा शहर. . . . जानें सिर्फ बर्फ ही बर्फ में कैसे जीते हैं लोग ?
|
सूचना सुरक्षा के विषय पर हालिया दौर की एक तालिका में, निम्नलिखित धारणा को आवाज दी गई थीः
- यूक्रेन में, लोगों को कुछ मनोवैज्ञानिक प्रभाव से गुजरने की संभावना है, और बहुत शक्तिशाली है। रूस से उनके दोस्तों और रिश्तेदारों के कई कॉल यूक्रेनी वार्ताकारों की स्पष्ट अपर्याप्तता के बारे में बात करते हैं। लोग सिर्फ पहचानते नहीं हैं। वे शत्रुतापूर्ण हैं, किसी भी तर्क को नहीं सुनते हैं।
दरअसल, केवल पिछले पांच वर्षों में, रूस को एक वास्तविक दुश्मन मानने वालों की संख्या में लगभग 10 गुना वृद्धि हुई है, और अब ऐसे लोगों की संख्या 40% के क्षेत्र में है। यह एक सर्वेक्षण है, जिसमें शत्रुतापूर्ण रवैया बढ़ रहा है। लेकिन क्या मनोवैज्ञानिक दवाओं द्वारा लाखों लोगों को ऐसी अवस्था में लाया जा सकता है? यह अवास्तविक हैः इतना शक्तिशाली हथियारों और इतनी मात्रा में अभी तक मौजूद नहीं है। लेकिन वहाँ क्या है?
बड़े पैमाने पर प्रचार और प्रौद्योगिकी के तरीके हैं, पारंपरिक, सदियों और दशकों के लिए विकसित, पॉलिश, और नवीनतम - सूचना-मनोवैज्ञानिक युद्ध। इसके अलावा, यह सामाजिक-आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि और दक्षिण-पूर्वी यूक्रेन में सशस्त्र संघर्ष के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सैन्य टकराव स्वयं, सैकड़ों आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त, और सबसे अधिक संभावित हजारों पीड़ितों के साथ, उद्देश्यपूर्ण प्रचार के कई वर्षों का परिणाम है, "लोकतंत्र और नागरिक समाज के विकास के लिए कई पश्चिमी नींवों की मदद के बिना नहीं किया गया। " यह सब बीस साल पहले पुनर्लेखन के साथ शुरू हुआ था इतिहासजब एकजुट रूसी दुनिया को दो देशों - रूसी और यूक्रेनी, जहां पहली बार शाश्वत, कपटी हमलावर और बेईमान पड़ोसी है, युद्धरत सदियों के रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा।
रूस में, कई वर्षों तक वे "यूक्रेन के ग्लोब" के बारे में विडंबना और व्यंग्य के साथ बोलते थे, चोरी के सामानों के बारे में जो कथित रूप से आविष्कार किए गए थे और दुनिया में सब कुछ खोजा था - एक पहिया, एक हल, भाप, टूथपिक्स और, संभवतः, टॉयलेट पेपर। इतिहास की पाठ्यपुस्तक के ऐसे उद्धरण से कैसे संबंधित हैंः
- Ukrainians एक महान राष्ट्र हैं जो एक बार लगभग पूरे यूरोप में आबाद हैं। गालिस - गैलिसिया के निवासियों (गैलिशियंस - पश्चिमी Ukrainians), गैलिसिया (स्पेन में), गॉल - फ्रांस और उत्तरी इटली में और जैल - स्कॉट्स, साथ ही आयरिश - वे एक और एक ही लोग हैं। गैलिशियंस के हिस्से में थ्रेस का निवास था। तो स्पार्टक और बांदेरा हमारी मातृभूमि के राष्ट्रीय नायक हैं।
लेकिन प्रकृति में इस तरह की एक आदिम, पारलौकिक, राष्ट्रीय विशिष्टता का विचार, सामान्य ज्ञान के विपरीत, अधिक से अधिक कल भ्रातृ लोगों के दिल और दिमाग पर विजय प्राप्त करता है। लेकिन रूस, द्वारा और बड़े, ने सूचना क्षेत्र के इस पक्ष पर खेलने की कोशिश नहीं की, यह मानते हुए कि गैस अनुबंध की कीमत और शर्तों के बारे में बंद और खुली बातचीत में सब कुछ तय किया जा सकता है। और इस तरह के अंधापन के परिणामस्वरूप, इतिहास और आधुनिकता के सैकड़ों यूक्रेनी व्याख्याकार अपने पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं को व्यक्त करने में असफल रहे, उदाहरण के लिए, विचार जो कि यूक्रेनी नेशनल एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसर ओलेग सोसकिन लगातार दर्शकों को पसंद करते हैंः
- Muscovites ने भाषा, रूढ़िवादी विश्वास, यूक्रेनी लोगों से देश का नाम चुरा लिया और अब यह सब हमारे पास वापस आने का समय आ गया है। और उन्हें अपने फिनो-उग्रिक, तुर्किक नींव पर वापस जाना चाहिए। दस्यु पेट्र ने यूक्रेन से जेनेटिक नाम "रुस" चुराया, जिससे उनके साम्राज्य को लैटिन अक्षर रूस कहा गया, जिसे रोमन-जर्मनिक दुनिया में "रूस" कहा जाने लगा। और फिनो-उग्रिक लोगों ने उसे "रूस" में बदल दिया।
शायद कई लोगों का मानना था और अभी भी मानते हैं कि स्पष्ट रूप से निरक्षर प्रलाप से बहस करने का कोई मतलब नहीं है। कहो, क्या जीभ चुराना संभव है? यह ज्ञात है कि यह शासकों की इच्छा से परे विकसित होता है, अच्छाई या बुराई, कोई फर्क नहीं पड़ता। छड़ी के नीचे से लोगों को बोलना असंभव है। विश्वास के बारे में क्या? यह या तो वहां है या यह नहीं है, और यदि यह आम है, तो किसी को इस पर गर्व होना चाहिए। देश के नाम के साथ, प्रोफेसर के पास फिर से एक स्कूली बच्चे के योग्य ब्लंडर हैं। यह स्पष्ट है कि प्रोफेसर को "रोमानो-जर्मेनिक" वाक्यांश पसंद है, लेकिन वह स्पष्ट रूप से इसका अर्थ नहीं समझते हैं। "रश" अंग्रेजी में है, और "रुसलैंड" जर्मन भाषा में है। जहां एक ही समय में कुछ फिनो-उगरिक लोग थे जिन्होंने हमें "रूस" दिया, यह आमतौर पर अज्ञात है।
हालांकि, ऐसी बकवास, सब कुछ के विपरीत, एक प्रोफेसनल तरीके से बोलना, एक प्रवृत्ति और आधुनिक यूक्रेनी राजनीति का मुख्य प्रवचन है। इसलिए, Verkhovna Rada डिप्टी इवान Stoiko ने हाल ही में संसद की एक बैठक में घोषणा की कि उनका देश "मंगोलॉयड रेस" और "फासीवादी रूस" पर युद्ध लड़ रहा है, जो टिड्डियों की तरह, हमारे राज्य, हमारे राष्ट्र को नष्ट करने के लिए यूक्रेन में चढ़ रहे हैं। प्रोफेसर और डिप्टी के शब्दों में Shtetl Nazism बहुत स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया। यह घर-आधारित नस्लवादी सिद्धांत का एक मिश्रण है, जिसे एक ही समय में अपनी कथित असाधारणता और हीनता पर आरोपित किया जाता है। श्रेष्ठता और पवित्रता का मिश्रण, जब आपका अपना खेत ब्रह्मांड का केंद्र होता है, और आपका पड़ोसी हमेशा ईर्ष्या का कारण बनता है, जिससे कुरकुल नफरत पैदा होती है। और उसी समय, घोर अज्ञानता को बौद्धिक ज्ञान के शीर्ष के रूप में पारित किया जाता है। यह, संयोग से, Ukrainians की वर्तमान घटना है। बौद्धिक श्रेष्ठता का दावा किए बिना मस्कॉइट्स को नष्ट करने के आदिम विचार के साथ यह कल का बंदरिया नहीं है और एक ही समय में यह कहने के लिए प्रथागत है कि यूक्रेन, निश्चित रूप से, एक यूरोपीय देश है। यूरोपीय सहिष्णुता के साथ क्या करना है, जब दूसरे राष्ट्र और नस्ल के लिए शत्रुता इतनी ढोंग है। बेचारा यूरोप, जिसे उसने अपनी छाती पर गर्म किया था!
आज यूक्रेन में, सभी प्रमुख रूसी टेलीविजन चैनलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। और इसका अपना प्रचार (तटस्थ उद्देश्य पत्रकारिता के बारे में अब बात करने की कोई आवश्यकता नहीं है) टेलीविजन और रेडियो प्रसारण पर राष्ट्रीय परिषद और साथ ही स्वतंत्र मीडिया संघ की सिफारिशों का पालन कर रहा है। उनमें से एक में वे सलाह देते हैंः
- दुश्मन को यूक्रेन के नागरिकों की मदद करने में मदद न करें - उनमें से कई, बटालियन का नाम सुनकर, शक है कि यह यूक्रेनी या रूसी इकाइयाँ हैं। ऐसे बटालियन के नाम के रूप में "अय्यर", "डेनेप्र", "आज़ोव" के बजाय "यूक्रेनी सेना" वाक्यांश का उपयोग करना बेहतर है, "क्षेत्रीय बटालियनों में से एक", "यूक्रेनी सेना"। वोस्तोक बटालियन के बजाय, "कद्रोव व्यापारियों" कहना बेहतर है।
न केवल किसी को अभी तक कद्रोव के भाड़े के सैनिकों और रूसी एशियाई लोगों के काफिले को नहीं दिखाया गया है, वर्ष के 22 के 1941 से डॉ। गोएबल्स की सिफारिशें अभी भी अनजाने में पॉप अप कर रही हैं। उन्हें जर्मन समाचारपत्रों से संबोधित किया जाता है, जिन्हें साप्ताहिक समाचारपत्रों की शूटिंग के लिए युद्ध के सोवियत कैदियों के बीच चयन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, एशियाई और सेमिटिक चेहरों का उच्चारण किया जाता है, जिससे इस बात पर जोर दिया जाता है कि जर्मनी जंगली एशियाई-यहूदी बोल्शेविक भीड़ से यूरोप को बचाता है।
लेकिन कैसे वर्तमान यूक्रेनी, संक्षेप में, shtetl-Nazi प्रचार एक साधारण आदमी पर कार्य करता है? यहाँ ब्लॉग टिप्पणियों के कुछ उदाहरण हैंः
- हर कोई यह नहीं समझता है कि क्रेमलिन से हम और खरगोश कुत्ते परक्राम्य नहीं हैंः हमारे बीच एक सभ्यतागत रसातल है।
- हमारे बीच विरोधाभास इस तरह के हैं कि वे केवल युद्ध और पार्टियों में से किसी एक के विनाश से नष्ट हो सकते हैंः या तो पुतिन में या मास्को में मैदान में।
- यह अतीत के लिए एक युद्ध है - जो कीवान रस विरासत में मिला है।
- मॉस्को मानव जाति के शरीर पर एक कैंसर ट्यूमर है, जो इसके विकास पर मुख्य ब्रेक है।
- मॉस्को के परिसमापन के बिना (शहर नहीं, लेकिन सिद्धांत), मानव जाति आगे नहीं बढ़ेगी।
हम चल रहे कुछ सूचना युद्ध को संक्षेप में प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे। अगर एक साल पहले इस विषय पर चर्चा होती थीः जहां यूक्रेन जाना है - यूरेशियन संघ या यूरोपीय संघ के लिए, आज ऐसे विवाद मौजूद नहीं हैं। सभी नाटकीय घटनाओं के बाद, चुनाव औपचारिक रूप से और असमान रूप से परिभाषित किया गया है - यूरोपीय विकास पथ राष्ट्रपति पोरोशेंको द्वारा हस्ताक्षरित यूरोप के साथ संघ के समझौते पर आधारित है। हालांकि, तूफानी उत्साह के बाद, Verkhovna Rada द्वारा समझौते का अनुसमर्थन तुरंत नहीं हुआ, और यहां तक कि संसद में इस मुद्दे की चर्चा की तारीख अज्ञात है। स्पष्टीकरण सबसे अधिक संभावना इस तथ्य में निहित है कि अधिकारी समझौते के व्यावहारिक कार्यान्वयन के साथ आगे बढ़ने से डरते हैं। यूक्रेन दर्दनाक सुधारों के लिए तैयार नहीं है - दोनों आर्थिक, और राजनीतिक और कानूनी वास्तविकता में। यह कहने के लिए पर्याप्त है कि मानवाधिकारों के यूरोपीय न्यायालय के निर्णय के 90% यहां लागू नहीं हैं।
बेशक, यूरोप एक मुक्त व्यापार क्षेत्र से लाभ उठाता है, वे कहते हैं कि यह यूक्रेन के लिए फायदेमंद है। हालाँकि, आज देश असहनीय आर्थिक बोझ नहीं उठा पा रहा है और भारी नुकसान झेल रहा है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका, राजनीतिक क्षेत्र का दूसरा प्रमुख खिलाड़ी, एकजुट यूरोप द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के लिए बिल्कुल भी प्रयास नहीं करता है। अमेरिकियों को यूरोप की गैस की आपूर्ति के अपवाद के साथ यूक्रेनी अर्थव्यवस्था में कोई दिलचस्पी नहीं है, जिसे वे कम करना चाहते हैं। लेकिन आज उनका मुख्य कार्य रूस के लिए इस क्षेत्र में शत्रुता का एक सैन्य क्षेत्र बनाना है, भले ही यह एक राज्य के पतन के कारण हो। और यहाँ, जैसा कि पहले कभी नहीं हुआ, यूरेशियन संघ के विरोध का विषय प्रासंगिक है।
स्मरण करो कि 2012 वर्ष के अंत में, अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को समाप्त करते हुए, हिलेरी क्लिंटन ने सभी स्पष्टता के साथ कहा था कि अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिम को एक पूर्ण यूरेशियन संघ के निर्माण की अनुमति नहीं देनी चाहिए। हम कह सकते हैं कि पहला चरण पहले ही हासिल हो चुका है - हम यूरेशियन वेक्टर से यूक्रेन को दूर करने में कामयाब रहे। और वास्तव में, नया गठन अधिक से अधिक यूरोपीय हो रहा है।
लेकिन एक ही समय में रात भर अचानक एक दुर्भाग्यपूर्ण और दर्दनाक छींटे के रूप में उभरा, क्रीमिया के रूस में प्रवेश। आज, अमेरिकी हितों को स्पष्ट रूप से कीव में अधिकारियों द्वारा आवाज उठाई गई है। यह कहने के लिए पर्याप्त है कि एसबीयू के प्रमुख, वैलेंटाइन नेलीवाचेंको, फर्स्ट नेशनल टीवी चैनल के शस्टर लाइव कार्यक्रम में रूस के व्यक्ति में दुश्मन को स्पष्ट रूप से पहचानते हैं, जहां, उनके अनुसार, यूरेशियनवाद की आक्रामक विचारधारा और रूढ़िवादी कट्टरपंथियों की दुश्मनी यूक्रेन और पूरे सभ्य दुनिया के लिए बनाई गई थी। लैंगली को इस जागीरदार के बारे में भी पता नहीं है कि वह अपने स्वामी की कार्रवाई के निर्देशों को शब्दशः उद्धृत करता है, इस तथ्य से शर्मिंदा नहीं है कि यूक्रेन खुद भी एक रूढ़िवादी देश है। या कम से कम हाल तक।
कीव के लिए क्या करना है? सबसे पहले, विद्रोही डोनबास - न्यू रूस की समस्या को हल करना आवश्यक है, और दूसरा, फिर क्रीमिया से निपटने के लिए। इसके अलावा, हाल के वर्षों में, कीव की कार्रवाई तेजी से निर्णायक हो गई है और, महत्वपूर्ण रूप से, देश के कुलीन वर्ग के बीच काफी समर्थन मिल रहा है - कुलीन वर्ग जो सत्ता में चढ़ गए हैं। इस नीति को आबादी के काफी वर्गों का समर्थन है जो डोनबास के साथ विश्वासघात स्वीकार नहीं करते हैं। किसी भी मामले में, इस तरह की स्थिति वर्तमान में बढ़ रहे ukronacism का परिणाम है।
दक्षिण-पूर्व के मुद्दे पर रूस की स्थिति किसी भी तरह से आक्रामक नहीं है। यह मूल रूप से क्षेत्र में शांति की आवश्यकता के बारे में बयानबाजी करने के लिए आता है, जिसमें यूक्रेनी दंड के पीड़ितों और नागरिकों की पीड़ा को दिखाने पर जोर दिया गया है। रूस के सीमा क्षेत्रों के गोलाबारी की नियमित रिपोर्टें हैं। यूरोप बाह्य रूप से मास्को की आवाज सुनता है, प्रतिबंधों के अगले पैकेज को अपनाना, लेकिन कीव में और सबसे महत्वपूर्ण बात, वाशिंगटन में, रूस की स्थिति को ध्यान में नहीं रखा गया है। राष्ट्रपति पुतिन को पूरी तरह से ध्वस्त किया जा रहा है - यह हमारे दिन का हिटलर है, और अंतरराष्ट्रीय वार्ता में भाग लेने वाले लावरोव रिबेंट्रोप से ज्यादा कुछ नहीं है।
इसके अलावा, कीव, डोनबास में तीन महीने का सशस्त्र संघर्ष आज उद्देश्यपूर्ण रूप से लाभदायक है और आने वाले महीनों में और भी अधिक लाभदायक हो जाएगा, जब देश में आर्थिक और राजनीतिक स्थिति बढ़ जाती है। सत्तारूढ़ शासन के लिए एक बाहरी दुश्मन बेहद आवश्यक है और, इसके अलावा, कुलीन वर्गों और अधिकार क्षेत्र के कई सामंती सशस्त्र रूप का इस्तेमाल इसका मुकाबला करने के लिए किया जा सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका रूस के साथ युद्ध के लिए धन देगा, इसलिए आपको क्रीमिया की मुक्ति और उसके क्षेत्र पर दुश्मन पर हमला करने के लिए शानदार कॉल के बारे में शब्दों को खारिज नहीं करना चाहिए।
इस संबंध में, निकट भविष्य में, मॉस्को को स्पष्ट रूप से न्यू रूस, उसके नेताओं और वहां संघर्ष के तरीकों के संबंध में अपनी स्थिति विकसित करनी चाहिए। इसके अलावा, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन का गठन वास्तव में हर संभव तरीके से मजबूत किया जाना चाहिए। यहां, कदम न केवल वास्तविक अर्थव्यवस्था में, बल्कि नई शिक्षा की मूल्य प्राथमिकताओं को निर्धारित करने में भी महत्वपूर्ण हैं। इस मामले में, किसी प्रकार की नई विचारधारा के विकास के बारे में बात करना आवश्यक नहीं है - यहां मार्ग मृत है, क्योंकि रूस में अभी तक अपनी स्वयं की विचारधारा नहीं है।
रूस, बेलारूस और कजाकिस्तान के लोगों (साथ ही परिग्रहण की तैयारी करने वाले देश) और बिना किसी औपचारिक विचारधारा के लोग बहुत जुड़े हुए हैं। हम, बड़े और समान दृष्टिकोण वाले, आधुनिक पश्चिम के छद्म उदारवाद की अस्वीकृति में बहुत कुछ है, जो होने की नींव को दूषित करता है। लेकिन यह जुड़ाव नफरत से नहीं, बल्कि अपनी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान को बचाने में है। हम यूक्रेन के नकारात्मक अनुभव को दोहरा नहीं सकते हैं, जहां एक आक्रामक छोटे शहर नाजीवाद के गठन के तंत्र का उपयोग करते हुए, बैरिकेड्स के विपरीत किनारों पर पड़ोसी स्लाविक लोगों को रखना संभव था। अब जो हुआ उसे दूर करने में कई साल लगेंगे। और, दुर्भाग्य से, काफी बलिदान होंगे।
|
सूचना सुरक्षा के विषय पर हालिया दौर की एक तालिका में, निम्नलिखित धारणा को आवाज दी गई थीः - यूक्रेन में, लोगों को कुछ मनोवैज्ञानिक प्रभाव से गुजरने की संभावना है, और बहुत शक्तिशाली है। रूस से उनके दोस्तों और रिश्तेदारों के कई कॉल यूक्रेनी वार्ताकारों की स्पष्ट अपर्याप्तता के बारे में बात करते हैं। लोग सिर्फ पहचानते नहीं हैं। वे शत्रुतापूर्ण हैं, किसी भी तर्क को नहीं सुनते हैं। दरअसल, केवल पिछले पांच वर्षों में, रूस को एक वास्तविक दुश्मन मानने वालों की संख्या में लगभग दस गुना वृद्धि हुई है, और अब ऐसे लोगों की संख्या चालीस% के क्षेत्र में है। यह एक सर्वेक्षण है, जिसमें शत्रुतापूर्ण रवैया बढ़ रहा है। लेकिन क्या मनोवैज्ञानिक दवाओं द्वारा लाखों लोगों को ऐसी अवस्था में लाया जा सकता है? यह अवास्तविक हैः इतना शक्तिशाली हथियारों और इतनी मात्रा में अभी तक मौजूद नहीं है। लेकिन वहाँ क्या है? बड़े पैमाने पर प्रचार और प्रौद्योगिकी के तरीके हैं, पारंपरिक, सदियों और दशकों के लिए विकसित, पॉलिश, और नवीनतम - सूचना-मनोवैज्ञानिक युद्ध। इसके अलावा, यह सामाजिक-आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि और दक्षिण-पूर्वी यूक्रेन में सशस्त्र संघर्ष के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सैन्य टकराव स्वयं, सैकड़ों आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त, और सबसे अधिक संभावित हजारों पीड़ितों के साथ, उद्देश्यपूर्ण प्रचार के कई वर्षों का परिणाम है, "लोकतंत्र और नागरिक समाज के विकास के लिए कई पश्चिमी नींवों की मदद के बिना नहीं किया गया। " यह सब बीस साल पहले पुनर्लेखन के साथ शुरू हुआ था इतिहासजब एकजुट रूसी दुनिया को दो देशों - रूसी और यूक्रेनी, जहां पहली बार शाश्वत, कपटी हमलावर और बेईमान पड़ोसी है, युद्धरत सदियों के रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा। रूस में, कई वर्षों तक वे "यूक्रेन के ग्लोब" के बारे में विडंबना और व्यंग्य के साथ बोलते थे, चोरी के सामानों के बारे में जो कथित रूप से आविष्कार किए गए थे और दुनिया में सब कुछ खोजा था - एक पहिया, एक हल, भाप, टूथपिक्स और, संभवतः, टॉयलेट पेपर। इतिहास की पाठ्यपुस्तक के ऐसे उद्धरण से कैसे संबंधित हैंः - Ukrainians एक महान राष्ट्र हैं जो एक बार लगभग पूरे यूरोप में आबाद हैं। गालिस - गैलिसिया के निवासियों , गैलिसिया , गॉल - फ्रांस और उत्तरी इटली में और जैल - स्कॉट्स, साथ ही आयरिश - वे एक और एक ही लोग हैं। गैलिशियंस के हिस्से में थ्रेस का निवास था। तो स्पार्टक और बांदेरा हमारी मातृभूमि के राष्ट्रीय नायक हैं। लेकिन प्रकृति में इस तरह की एक आदिम, पारलौकिक, राष्ट्रीय विशिष्टता का विचार, सामान्य ज्ञान के विपरीत, अधिक से अधिक कल भ्रातृ लोगों के दिल और दिमाग पर विजय प्राप्त करता है। लेकिन रूस, द्वारा और बड़े, ने सूचना क्षेत्र के इस पक्ष पर खेलने की कोशिश नहीं की, यह मानते हुए कि गैस अनुबंध की कीमत और शर्तों के बारे में बंद और खुली बातचीत में सब कुछ तय किया जा सकता है। और इस तरह के अंधापन के परिणामस्वरूप, इतिहास और आधुनिकता के सैकड़ों यूक्रेनी व्याख्याकार अपने पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं को व्यक्त करने में असफल रहे, उदाहरण के लिए, विचार जो कि यूक्रेनी नेशनल एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसर ओलेग सोसकिन लगातार दर्शकों को पसंद करते हैंः - Muscovites ने भाषा, रूढ़िवादी विश्वास, यूक्रेनी लोगों से देश का नाम चुरा लिया और अब यह सब हमारे पास वापस आने का समय आ गया है। और उन्हें अपने फिनो-उग्रिक, तुर्किक नींव पर वापस जाना चाहिए। दस्यु पेट्र ने यूक्रेन से जेनेटिक नाम "रुस" चुराया, जिससे उनके साम्राज्य को लैटिन अक्षर रूस कहा गया, जिसे रोमन-जर्मनिक दुनिया में "रूस" कहा जाने लगा। और फिनो-उग्रिक लोगों ने उसे "रूस" में बदल दिया। शायद कई लोगों का मानना था और अभी भी मानते हैं कि स्पष्ट रूप से निरक्षर प्रलाप से बहस करने का कोई मतलब नहीं है। कहो, क्या जीभ चुराना संभव है? यह ज्ञात है कि यह शासकों की इच्छा से परे विकसित होता है, अच्छाई या बुराई, कोई फर्क नहीं पड़ता। छड़ी के नीचे से लोगों को बोलना असंभव है। विश्वास के बारे में क्या? यह या तो वहां है या यह नहीं है, और यदि यह आम है, तो किसी को इस पर गर्व होना चाहिए। देश के नाम के साथ, प्रोफेसर के पास फिर से एक स्कूली बच्चे के योग्य ब्लंडर हैं। यह स्पष्ट है कि प्रोफेसर को "रोमानो-जर्मेनिक" वाक्यांश पसंद है, लेकिन वह स्पष्ट रूप से इसका अर्थ नहीं समझते हैं। "रश" अंग्रेजी में है, और "रुसलैंड" जर्मन भाषा में है। जहां एक ही समय में कुछ फिनो-उगरिक लोग थे जिन्होंने हमें "रूस" दिया, यह आमतौर पर अज्ञात है। हालांकि, ऐसी बकवास, सब कुछ के विपरीत, एक प्रोफेसनल तरीके से बोलना, एक प्रवृत्ति और आधुनिक यूक्रेनी राजनीति का मुख्य प्रवचन है। इसलिए, Verkhovna Rada डिप्टी इवान Stoiko ने हाल ही में संसद की एक बैठक में घोषणा की कि उनका देश "मंगोलॉयड रेस" और "फासीवादी रूस" पर युद्ध लड़ रहा है, जो टिड्डियों की तरह, हमारे राज्य, हमारे राष्ट्र को नष्ट करने के लिए यूक्रेन में चढ़ रहे हैं। प्रोफेसर और डिप्टी के शब्दों में Shtetl Nazism बहुत स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया। यह घर-आधारित नस्लवादी सिद्धांत का एक मिश्रण है, जिसे एक ही समय में अपनी कथित असाधारणता और हीनता पर आरोपित किया जाता है। श्रेष्ठता और पवित्रता का मिश्रण, जब आपका अपना खेत ब्रह्मांड का केंद्र होता है, और आपका पड़ोसी हमेशा ईर्ष्या का कारण बनता है, जिससे कुरकुल नफरत पैदा होती है। और उसी समय, घोर अज्ञानता को बौद्धिक ज्ञान के शीर्ष के रूप में पारित किया जाता है। यह, संयोग से, Ukrainians की वर्तमान घटना है। बौद्धिक श्रेष्ठता का दावा किए बिना मस्कॉइट्स को नष्ट करने के आदिम विचार के साथ यह कल का बंदरिया नहीं है और एक ही समय में यह कहने के लिए प्रथागत है कि यूक्रेन, निश्चित रूप से, एक यूरोपीय देश है। यूरोपीय सहिष्णुता के साथ क्या करना है, जब दूसरे राष्ट्र और नस्ल के लिए शत्रुता इतनी ढोंग है। बेचारा यूरोप, जिसे उसने अपनी छाती पर गर्म किया था! आज यूक्रेन में, सभी प्रमुख रूसी टेलीविजन चैनलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। और इसका अपना प्रचार टेलीविजन और रेडियो प्रसारण पर राष्ट्रीय परिषद और साथ ही स्वतंत्र मीडिया संघ की सिफारिशों का पालन कर रहा है। उनमें से एक में वे सलाह देते हैंः - दुश्मन को यूक्रेन के नागरिकों की मदद करने में मदद न करें - उनमें से कई, बटालियन का नाम सुनकर, शक है कि यह यूक्रेनी या रूसी इकाइयाँ हैं। ऐसे बटालियन के नाम के रूप में "अय्यर", "डेनेप्र", "आज़ोव" के बजाय "यूक्रेनी सेना" वाक्यांश का उपयोग करना बेहतर है, "क्षेत्रीय बटालियनों में से एक", "यूक्रेनी सेना"। वोस्तोक बटालियन के बजाय, "कद्रोव व्यापारियों" कहना बेहतर है। न केवल किसी को अभी तक कद्रोव के भाड़े के सैनिकों और रूसी एशियाई लोगों के काफिले को नहीं दिखाया गया है, वर्ष के बाईस के एक हज़ार नौ सौ इकतालीस से डॉ। गोएबल्स की सिफारिशें अभी भी अनजाने में पॉप अप कर रही हैं। उन्हें जर्मन समाचारपत्रों से संबोधित किया जाता है, जिन्हें साप्ताहिक समाचारपत्रों की शूटिंग के लिए युद्ध के सोवियत कैदियों के बीच चयन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, एशियाई और सेमिटिक चेहरों का उच्चारण किया जाता है, जिससे इस बात पर जोर दिया जाता है कि जर्मनी जंगली एशियाई-यहूदी बोल्शेविक भीड़ से यूरोप को बचाता है। लेकिन कैसे वर्तमान यूक्रेनी, संक्षेप में, shtetl-Nazi प्रचार एक साधारण आदमी पर कार्य करता है? यहाँ ब्लॉग टिप्पणियों के कुछ उदाहरण हैंः - हर कोई यह नहीं समझता है कि क्रेमलिन से हम और खरगोश कुत्ते परक्राम्य नहीं हैंः हमारे बीच एक सभ्यतागत रसातल है। - हमारे बीच विरोधाभास इस तरह के हैं कि वे केवल युद्ध और पार्टियों में से किसी एक के विनाश से नष्ट हो सकते हैंः या तो पुतिन में या मास्को में मैदान में। - यह अतीत के लिए एक युद्ध है - जो कीवान रस विरासत में मिला है। - मॉस्को मानव जाति के शरीर पर एक कैंसर ट्यूमर है, जो इसके विकास पर मुख्य ब्रेक है। - मॉस्को के परिसमापन के बिना , मानव जाति आगे नहीं बढ़ेगी। हम चल रहे कुछ सूचना युद्ध को संक्षेप में प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे। अगर एक साल पहले इस विषय पर चर्चा होती थीः जहां यूक्रेन जाना है - यूरेशियन संघ या यूरोपीय संघ के लिए, आज ऐसे विवाद मौजूद नहीं हैं। सभी नाटकीय घटनाओं के बाद, चुनाव औपचारिक रूप से और असमान रूप से परिभाषित किया गया है - यूरोपीय विकास पथ राष्ट्रपति पोरोशेंको द्वारा हस्ताक्षरित यूरोप के साथ संघ के समझौते पर आधारित है। हालांकि, तूफानी उत्साह के बाद, Verkhovna Rada द्वारा समझौते का अनुसमर्थन तुरंत नहीं हुआ, और यहां तक कि संसद में इस मुद्दे की चर्चा की तारीख अज्ञात है। स्पष्टीकरण सबसे अधिक संभावना इस तथ्य में निहित है कि अधिकारी समझौते के व्यावहारिक कार्यान्वयन के साथ आगे बढ़ने से डरते हैं। यूक्रेन दर्दनाक सुधारों के लिए तैयार नहीं है - दोनों आर्थिक, और राजनीतिक और कानूनी वास्तविकता में। यह कहने के लिए पर्याप्त है कि मानवाधिकारों के यूरोपीय न्यायालय के निर्णय के नब्बे% यहां लागू नहीं हैं। बेशक, यूरोप एक मुक्त व्यापार क्षेत्र से लाभ उठाता है, वे कहते हैं कि यह यूक्रेन के लिए फायदेमंद है। हालाँकि, आज देश असहनीय आर्थिक बोझ नहीं उठा पा रहा है और भारी नुकसान झेल रहा है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका, राजनीतिक क्षेत्र का दूसरा प्रमुख खिलाड़ी, एकजुट यूरोप द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के लिए बिल्कुल भी प्रयास नहीं करता है। अमेरिकियों को यूरोप की गैस की आपूर्ति के अपवाद के साथ यूक्रेनी अर्थव्यवस्था में कोई दिलचस्पी नहीं है, जिसे वे कम करना चाहते हैं। लेकिन आज उनका मुख्य कार्य रूस के लिए इस क्षेत्र में शत्रुता का एक सैन्य क्षेत्र बनाना है, भले ही यह एक राज्य के पतन के कारण हो। और यहाँ, जैसा कि पहले कभी नहीं हुआ, यूरेशियन संघ के विरोध का विषय प्रासंगिक है। स्मरण करो कि दो हज़ार बारह वर्ष के अंत में, अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को समाप्त करते हुए, हिलेरी क्लिंटन ने सभी स्पष्टता के साथ कहा था कि अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिम को एक पूर्ण यूरेशियन संघ के निर्माण की अनुमति नहीं देनी चाहिए। हम कह सकते हैं कि पहला चरण पहले ही हासिल हो चुका है - हम यूरेशियन वेक्टर से यूक्रेन को दूर करने में कामयाब रहे। और वास्तव में, नया गठन अधिक से अधिक यूरोपीय हो रहा है। लेकिन एक ही समय में रात भर अचानक एक दुर्भाग्यपूर्ण और दर्दनाक छींटे के रूप में उभरा, क्रीमिया के रूस में प्रवेश। आज, अमेरिकी हितों को स्पष्ट रूप से कीव में अधिकारियों द्वारा आवाज उठाई गई है। यह कहने के लिए पर्याप्त है कि एसबीयू के प्रमुख, वैलेंटाइन नेलीवाचेंको, फर्स्ट नेशनल टीवी चैनल के शस्टर लाइव कार्यक्रम में रूस के व्यक्ति में दुश्मन को स्पष्ट रूप से पहचानते हैं, जहां, उनके अनुसार, यूरेशियनवाद की आक्रामक विचारधारा और रूढ़िवादी कट्टरपंथियों की दुश्मनी यूक्रेन और पूरे सभ्य दुनिया के लिए बनाई गई थी। लैंगली को इस जागीरदार के बारे में भी पता नहीं है कि वह अपने स्वामी की कार्रवाई के निर्देशों को शब्दशः उद्धृत करता है, इस तथ्य से शर्मिंदा नहीं है कि यूक्रेन खुद भी एक रूढ़िवादी देश है। या कम से कम हाल तक। कीव के लिए क्या करना है? सबसे पहले, विद्रोही डोनबास - न्यू रूस की समस्या को हल करना आवश्यक है, और दूसरा, फिर क्रीमिया से निपटने के लिए। इसके अलावा, हाल के वर्षों में, कीव की कार्रवाई तेजी से निर्णायक हो गई है और, महत्वपूर्ण रूप से, देश के कुलीन वर्ग के बीच काफी समर्थन मिल रहा है - कुलीन वर्ग जो सत्ता में चढ़ गए हैं। इस नीति को आबादी के काफी वर्गों का समर्थन है जो डोनबास के साथ विश्वासघात स्वीकार नहीं करते हैं। किसी भी मामले में, इस तरह की स्थिति वर्तमान में बढ़ रहे ukronacism का परिणाम है। दक्षिण-पूर्व के मुद्दे पर रूस की स्थिति किसी भी तरह से आक्रामक नहीं है। यह मूल रूप से क्षेत्र में शांति की आवश्यकता के बारे में बयानबाजी करने के लिए आता है, जिसमें यूक्रेनी दंड के पीड़ितों और नागरिकों की पीड़ा को दिखाने पर जोर दिया गया है। रूस के सीमा क्षेत्रों के गोलाबारी की नियमित रिपोर्टें हैं। यूरोप बाह्य रूप से मास्को की आवाज सुनता है, प्रतिबंधों के अगले पैकेज को अपनाना, लेकिन कीव में और सबसे महत्वपूर्ण बात, वाशिंगटन में, रूस की स्थिति को ध्यान में नहीं रखा गया है। राष्ट्रपति पुतिन को पूरी तरह से ध्वस्त किया जा रहा है - यह हमारे दिन का हिटलर है, और अंतरराष्ट्रीय वार्ता में भाग लेने वाले लावरोव रिबेंट्रोप से ज्यादा कुछ नहीं है। इसके अलावा, कीव, डोनबास में तीन महीने का सशस्त्र संघर्ष आज उद्देश्यपूर्ण रूप से लाभदायक है और आने वाले महीनों में और भी अधिक लाभदायक हो जाएगा, जब देश में आर्थिक और राजनीतिक स्थिति बढ़ जाती है। सत्तारूढ़ शासन के लिए एक बाहरी दुश्मन बेहद आवश्यक है और, इसके अलावा, कुलीन वर्गों और अधिकार क्षेत्र के कई सामंती सशस्त्र रूप का इस्तेमाल इसका मुकाबला करने के लिए किया जा सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका रूस के साथ युद्ध के लिए धन देगा, इसलिए आपको क्रीमिया की मुक्ति और उसके क्षेत्र पर दुश्मन पर हमला करने के लिए शानदार कॉल के बारे में शब्दों को खारिज नहीं करना चाहिए। इस संबंध में, निकट भविष्य में, मॉस्को को स्पष्ट रूप से न्यू रूस, उसके नेताओं और वहां संघर्ष के तरीकों के संबंध में अपनी स्थिति विकसित करनी चाहिए। इसके अलावा, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन का गठन वास्तव में हर संभव तरीके से मजबूत किया जाना चाहिए। यहां, कदम न केवल वास्तविक अर्थव्यवस्था में, बल्कि नई शिक्षा की मूल्य प्राथमिकताओं को निर्धारित करने में भी महत्वपूर्ण हैं। इस मामले में, किसी प्रकार की नई विचारधारा के विकास के बारे में बात करना आवश्यक नहीं है - यहां मार्ग मृत है, क्योंकि रूस में अभी तक अपनी स्वयं की विचारधारा नहीं है। रूस, बेलारूस और कजाकिस्तान के लोगों और बिना किसी औपचारिक विचारधारा के लोग बहुत जुड़े हुए हैं। हम, बड़े और समान दृष्टिकोण वाले, आधुनिक पश्चिम के छद्म उदारवाद की अस्वीकृति में बहुत कुछ है, जो होने की नींव को दूषित करता है। लेकिन यह जुड़ाव नफरत से नहीं, बल्कि अपनी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान को बचाने में है। हम यूक्रेन के नकारात्मक अनुभव को दोहरा नहीं सकते हैं, जहां एक आक्रामक छोटे शहर नाजीवाद के गठन के तंत्र का उपयोग करते हुए, बैरिकेड्स के विपरीत किनारों पर पड़ोसी स्लाविक लोगों को रखना संभव था। अब जो हुआ उसे दूर करने में कई साल लगेंगे। और, दुर्भाग्य से, काफी बलिदान होंगे।
|
चेन्नई/नई दिल्ली, रोजगार और बेहतर आमदनी के लिए सऊदी अरब भारतीय मजदूरों के लिए मुफीद जगह रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक करीब 20 हजार भारतीय मजदूर आनन फानन में सऊदी से भारत आने को तैयार हैं। इन मजदूरों में सबसे अधिक संख्या तमिलनाडू के मजदूरों की है। इसके अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश के मजदूर भी बड़ी तादाद में घर लौट रहे हैं। दरअसल सऊदी अरब में गलत तरीके से प्राप्त वीजा और वीजा की अवधि समाप्त होने के बावजूद वहां टिके मजदूरों पर सरकार ने सख्ती दिखाई है।
ऐसे मजदूरों को नब्बे दिनों के भीतर सऊदी अरब छोड़कर चले जाने को कहा गया है। हालांकि इस दौरान अवैध प्रवास कर रहे लोगों को राजमाफी प्रदान की जा रही है। वीजा नियमों के उल्लंघन को लेकर इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। भारत लौटने वालों में सबसे अधिक 1500 मजदूर तमिलनाडू से हैं। इन मजदूरों ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें बेहद खराब हालात में काम करने पड़े।
कई बार तो नियोक्ता ने उन्हें वाजिब मेहनताना भी नहीं दिया। अब वे खाली हाथ वतन वापसी कर रहे हैं। बावजूद इसके गम उनके चेहरे पर नजर नहीं आया, क्योंकि घर लौटने की खुशी उनपर हावी थी। इस तरह का प्रस्ताव साल 2013 में भी सऊदी सरकार ने दिया था। हालांकि तब ये प्रस्ताव सिर्फ रियाद और जेद्दाह में रहने वाले प्रवासियों के लिए ही था।
सरकारी घोषणा के बाद आनन फानन में भारतीय मजदूरों ने स्वदेश लौटने के लिए अर्जी दी है। ये मजदूर सऊदी सरकार का राजमाफी के लिए शुक्रिया अदा कर रहे हैं। सऊदी अरब सरकार ने भारतीय नागरिकों को फ्री में वनवे एग्जिट वीजा दिया है। लौटने वाले मजदूरों को सिर्फ फ्लाइट की टिकट की कीमत चुकानी है।
|
चेन्नई/नई दिल्ली, रोजगार और बेहतर आमदनी के लिए सऊदी अरब भारतीय मजदूरों के लिए मुफीद जगह रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक करीब बीस हजार भारतीय मजदूर आनन फानन में सऊदी से भारत आने को तैयार हैं। इन मजदूरों में सबसे अधिक संख्या तमिलनाडू के मजदूरों की है। इसके अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश के मजदूर भी बड़ी तादाद में घर लौट रहे हैं। दरअसल सऊदी अरब में गलत तरीके से प्राप्त वीजा और वीजा की अवधि समाप्त होने के बावजूद वहां टिके मजदूरों पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। ऐसे मजदूरों को नब्बे दिनों के भीतर सऊदी अरब छोड़कर चले जाने को कहा गया है। हालांकि इस दौरान अवैध प्रवास कर रहे लोगों को राजमाफी प्रदान की जा रही है। वीजा नियमों के उल्लंघन को लेकर इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। भारत लौटने वालों में सबसे अधिक एक हज़ार पाँच सौ मजदूर तमिलनाडू से हैं। इन मजदूरों ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें बेहद खराब हालात में काम करने पड़े। कई बार तो नियोक्ता ने उन्हें वाजिब मेहनताना भी नहीं दिया। अब वे खाली हाथ वतन वापसी कर रहे हैं। बावजूद इसके गम उनके चेहरे पर नजर नहीं आया, क्योंकि घर लौटने की खुशी उनपर हावी थी। इस तरह का प्रस्ताव साल दो हज़ार तेरह में भी सऊदी सरकार ने दिया था। हालांकि तब ये प्रस्ताव सिर्फ रियाद और जेद्दाह में रहने वाले प्रवासियों के लिए ही था। सरकारी घोषणा के बाद आनन फानन में भारतीय मजदूरों ने स्वदेश लौटने के लिए अर्जी दी है। ये मजदूर सऊदी सरकार का राजमाफी के लिए शुक्रिया अदा कर रहे हैं। सऊदी अरब सरकार ने भारतीय नागरिकों को फ्री में वनवे एग्जिट वीजा दिया है। लौटने वाले मजदूरों को सिर्फ फ्लाइट की टिकट की कीमत चुकानी है।
|
Gariaband News: गरियाबंद जिले के चौबेबांधा गांव में मिली सिर कुचली लाश के मामले में पुलिस ने राजफाश किया है। chhattisgarhThu, 25 May 2023 12:28 PM (IST)
कहकशां बानो असलम के चेहरे पर ब्लीच लगा रही थी। दुल्हन असलम से कह रही थी कि ब्लीच लगाने के बाद और स्मार्ट दिखोगे। chhattisgarhThu, 23 Feb 2023 05:09 PM (IST)
Kanker Crime News: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के घोटिया में 5 जनवरी की रात हुए हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। chhattisgarhTue, 10 Jan 2023 02:28 PM (IST)
राजधानी रायपुर के खमतराई इलाके के ट्रांसपोर्टनगर स्थित पार्किंग नंबर नौ में पिछले दिनों हुई ट्रक चालक की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। मामूली विवाद हत्या का कारण बना। पुलिस ने हत्याकांड के तीन आरोपितों को किया ह. . . chhattisgarhTue, 22 Nov 2022 01:46 PM (IST)
ग्राम रूदा में 12 वर्षीय समीर साहू उर्फ संतू की निर्मम हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलिस ने इस हत्याकांड में गांव के ही दो अपचारी बालकों को गिरफ्तार किया है। समीर कबड्डी का अच्छा खिलाड़ी था। इसलिए उसे मौत क. . . chhattisgarhWed, 09 Nov 2022 10:30 AM (IST)
परसदा स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के सुरक्षा गार्ड देवेश जांगड़े की हत्या का राज तीन साल बाद आखिरकार खुल गया। देवेश की हत्या उसके तीन साथियों ने ही मिलकर की थी। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. . . chhattisgarhMon, 07 Nov 2022 12:58 PM (IST)
अब मर्डर मिस्ट्री सॉल्व होगी बाजपेयी स्टाइल में, 15 अक्टूबर को 'साइलेंस : कैन यू हियर इट' के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के साथ!
मनोज बाजपेयी बताते हैं, "मैं अपनी हर परफॉर्मेंस में कुछ अलग और हटकर करने की कोशिश करता हूं, जिससे यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो जाती है और फिर पर्दे पर एक सधी हुई परफॉर्मेंस नजर आती है। मैं इस फिल्म में कुछ नया करना चाह र. . . entertainmentFri, 14 Oct 2022 01:01 PM (IST)
Sonali Phogat Murder Mystery: क्लिप में सोनाली लाल क्रॉप टॉप और नीले रंग की शॉर्ट्स पहने पब में लंगड़ाती हुई दिखाई दे रही है। nationalFri, 26 Aug 2022 07:12 PM (IST)
बरगी निवासी राजेश विश्वकर्मा की अंधी हत्या का खुलासा, मोपेड में बांधकर कुंए में फेंका था शवmadhya pradeshWed, 10 Aug 2022 08:45 AM (IST)
ग्राम चंदेरी निवासी रघुवीर मीना शनिवार शाम मवेशी चराकर घर नहीं लौटा तो गांववाले खोजने निकले। जंगल में मिला शव। madhya pradeshSun, 31 Jul 2022 03:24 PM (IST)
|
Gariaband News: गरियाबंद जिले के चौबेबांधा गांव में मिली सिर कुचली लाश के मामले में पुलिस ने राजफाश किया है। chhattisgarhThu, पच्चीस मई दो हज़ार तेईस बारह:अट्ठाईस PM कहकशां बानो असलम के चेहरे पर ब्लीच लगा रही थी। दुल्हन असलम से कह रही थी कि ब्लीच लगाने के बाद और स्मार्ट दिखोगे। chhattisgarhThu, तेईस फ़रवरी दो हज़ार तेईस पाँच:नौ PM Kanker Crime News: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के घोटिया में पाँच जनवरी की रात हुए हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। chhattisgarhTue, दस जनवरी दो हज़ार तेईस दो:अट्ठाईस PM राजधानी रायपुर के खमतराई इलाके के ट्रांसपोर्टनगर स्थित पार्किंग नंबर नौ में पिछले दिनों हुई ट्रक चालक की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। मामूली विवाद हत्या का कारण बना। पुलिस ने हत्याकांड के तीन आरोपितों को किया ह. . . chhattisgarhTue, बाईस नवंबर दो हज़ार बाईस एक:छियालीस PM ग्राम रूदा में बारह वर्षीय समीर साहू उर्फ संतू की निर्मम हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलिस ने इस हत्याकांड में गांव के ही दो अपचारी बालकों को गिरफ्तार किया है। समीर कबड्डी का अच्छा खिलाड़ी था। इसलिए उसे मौत क. . . chhattisgarhWed, नौ नवंबर दो हज़ार बाईस दस:तीस AM परसदा स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के सुरक्षा गार्ड देवेश जांगड़े की हत्या का राज तीन साल बाद आखिरकार खुल गया। देवेश की हत्या उसके तीन साथियों ने ही मिलकर की थी। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. . . chhattisgarhMon, सात नवंबर दो हज़ार बाईस बारह:अट्ठावन PM अब मर्डर मिस्ट्री सॉल्व होगी बाजपेयी स्टाइल में, पंद्रह अक्टूबर को 'साइलेंस : कैन यू हियर इट' के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के साथ! मनोज बाजपेयी बताते हैं, "मैं अपनी हर परफॉर्मेंस में कुछ अलग और हटकर करने की कोशिश करता हूं, जिससे यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो जाती है और फिर पर्दे पर एक सधी हुई परफॉर्मेंस नजर आती है। मैं इस फिल्म में कुछ नया करना चाह र. . . entertainmentFri, चौदह अक्टूबर दो हज़ार बाईस एक:एक PM Sonali Phogat Murder Mystery: क्लिप में सोनाली लाल क्रॉप टॉप और नीले रंग की शॉर्ट्स पहने पब में लंगड़ाती हुई दिखाई दे रही है। nationalFri, छब्बीस अगस्त दो हज़ार बाईस सात:बारह PM बरगी निवासी राजेश विश्वकर्मा की अंधी हत्या का खुलासा, मोपेड में बांधकर कुंए में फेंका था शवmadhya pradeshWed, दस अगस्त दो हज़ार बाईस आठ:पैंतालीस AM ग्राम चंदेरी निवासी रघुवीर मीना शनिवार शाम मवेशी चराकर घर नहीं लौटा तो गांववाले खोजने निकले। जंगल में मिला शव। madhya pradeshSun, इकतीस जुलाई दो हज़ार बाईस तीन:चौबीस PM
|
RANCHI : अरगोड़ा थाना क्षेत्र के हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित नंद नगर में बुधवार की सुबह एक्टिवा स्कूटी सवार दो अपराधियों ने गर्भवती महिला के गले से चेन छीन ली और फरार हो गये। लूट की शिकार महिला सीता कुमारी नंद नगर की ही रहने वाली है। इस घटना पर उसने अरगोड़ा थाने में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच की। अपराधियों ने भागने के लिए जिस रास्ते का इस्तेमाल किया है, उस रास्ते में स्थित घरों में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के सहारे पुलिस अब अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। हालांकि पुलिस को ऐसा कोई फुटेज नहीं मिला है जिससे अपराधियों की पहचान हो सके,
वहीं पुलिस को दिए आवेदन में पीडि़त महिला ने बताया है कि वह अपने मां के साथ सुबह 6. 30 बजे घर से निकलकर पटेल पार्क में मॉर्निग वॉक पर गई थी। लौटते समय घर से दस कदम पहले एक अंजान युवक उनके करीब पहुंचा और गले से चेन झपटकर भागने लगा। थोड़ी दूरी पर एक्टिवा स्कूटी सवार दूसरा अपराधी गाड़ी चालू कर खड़ा था। पैदल भाग रहा अपराधी तुरंत स्कूटी पर बैठ गया और दोनों फरार हो गये। पीडि़त महिला ने पुलिस को बताया कि चेन लूटने वाला अपराधी काला पैंट व उजला टीशर्ट पहन रखा था। रंग सांवला था और सर का बाल आगे से खड़ा था। वही उसका साथी जो स्कूटी चला रहा था उसे वह पहचान नहीं पाई। जिसके बाद पुलिस अपराधियों की तलाश में जुट गई है।
|
RANCHI : अरगोड़ा थाना क्षेत्र के हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित नंद नगर में बुधवार की सुबह एक्टिवा स्कूटी सवार दो अपराधियों ने गर्भवती महिला के गले से चेन छीन ली और फरार हो गये। लूट की शिकार महिला सीता कुमारी नंद नगर की ही रहने वाली है। इस घटना पर उसने अरगोड़ा थाने में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच की। अपराधियों ने भागने के लिए जिस रास्ते का इस्तेमाल किया है, उस रास्ते में स्थित घरों में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के सहारे पुलिस अब अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। हालांकि पुलिस को ऐसा कोई फुटेज नहीं मिला है जिससे अपराधियों की पहचान हो सके, वहीं पुलिस को दिए आवेदन में पीडि़त महिला ने बताया है कि वह अपने मां के साथ सुबह छः. तीस बजे घर से निकलकर पटेल पार्क में मॉर्निग वॉक पर गई थी। लौटते समय घर से दस कदम पहले एक अंजान युवक उनके करीब पहुंचा और गले से चेन झपटकर भागने लगा। थोड़ी दूरी पर एक्टिवा स्कूटी सवार दूसरा अपराधी गाड़ी चालू कर खड़ा था। पैदल भाग रहा अपराधी तुरंत स्कूटी पर बैठ गया और दोनों फरार हो गये। पीडि़त महिला ने पुलिस को बताया कि चेन लूटने वाला अपराधी काला पैंट व उजला टीशर्ट पहन रखा था। रंग सांवला था और सर का बाल आगे से खड़ा था। वही उसका साथी जो स्कूटी चला रहा था उसे वह पहचान नहीं पाई। जिसके बाद पुलिस अपराधियों की तलाश में जुट गई है।
|
कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और तटवर्ती आंध्र प्रदेश के अधिकांश इलाकों में मध्यम से भारी बौछारें जारी हैं। देश में दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून शुरू होने से पहले दक्षिणी राज्यों में पिछले कुछ दिनों में मॉनसून पूर्व वर्षा ने ज़ोर पकड़ लिया है। शनिवार को बंगलुरु में 66 मिमी बारिश दर्ज की गई, केरल के तिरुवनन्तपुरम में 98 मिमी के साथ भारी बारिश हुई है। आंध्र प्रदेश के नरसापुर में भी 74 मिमी बरसात देखने को मिली।
दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों में शनिवार की सुबह 8:30 से बीते 24 घंटों के दौरान दर्ज की गई के आंकड़े नीचे दी गई इस सारणी में देख सकते हैंः
स्काइमेट के अनुसार एक के बाद एक आ रहे मौसमी बदलावों के चलते इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। लक्षद्वीप और उससे सटे केरल पर बने एक चक्रवाती हवा के क्षेत्र के चलते कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के भागों में मध्यम से भारी बारिश हो रही है। जबकि बिहार से छत्तीसगढ़ और तेलंगाना होते हुये कर्नाटक तक बने एक ट्रफ के प्रभाव से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के हिस्सों में बारिश दर्ज की जा रही है। स्काइमेट का अनुमान है कि दक्षिणी राज्यों में अगले 24 घंटों तक मध्यम बारिश जारी रहेगी साथ ही कर्नाटक, केरल और तटीय आंध्र प्रदेश में एक-दो जगहों पर भारी बारिश होगी।
दक्षिण में बना यह चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अगले 48 घंटों में कमजोर होगा जिससे बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे घटेंगी। हालांकि हल्के से मध्यम वर्षा अगले 2 से 3 दिनों तक जारी रहने के आसार हैं।
|
कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और तटवर्ती आंध्र प्रदेश के अधिकांश इलाकों में मध्यम से भारी बौछारें जारी हैं। देश में दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून शुरू होने से पहले दक्षिणी राज्यों में पिछले कुछ दिनों में मॉनसून पूर्व वर्षा ने ज़ोर पकड़ लिया है। शनिवार को बंगलुरु में छयासठ मिमी बारिश दर्ज की गई, केरल के तिरुवनन्तपुरम में अट्ठानवे मिमी के साथ भारी बारिश हुई है। आंध्र प्रदेश के नरसापुर में भी चौहत्तर मिमी बरसात देखने को मिली। दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों में शनिवार की सुबह आठ:तीस से बीते चौबीस घंटाटों के दौरान दर्ज की गई के आंकड़े नीचे दी गई इस सारणी में देख सकते हैंः स्काइमेट के अनुसार एक के बाद एक आ रहे मौसमी बदलावों के चलते इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। लक्षद्वीप और उससे सटे केरल पर बने एक चक्रवाती हवा के क्षेत्र के चलते कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के भागों में मध्यम से भारी बारिश हो रही है। जबकि बिहार से छत्तीसगढ़ और तेलंगाना होते हुये कर्नाटक तक बने एक ट्रफ के प्रभाव से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के हिस्सों में बारिश दर्ज की जा रही है। स्काइमेट का अनुमान है कि दक्षिणी राज्यों में अगले चौबीस घंटाटों तक मध्यम बारिश जारी रहेगी साथ ही कर्नाटक, केरल और तटीय आंध्र प्रदेश में एक-दो जगहों पर भारी बारिश होगी। दक्षिण में बना यह चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अगले अड़तालीस घंटाटों में कमजोर होगा जिससे बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे घटेंगी। हालांकि हल्के से मध्यम वर्षा अगले दो से तीन दिनों तक जारी रहने के आसार हैं।
|
Hardoi News: हरदोई में सामने आया रिश्वतखोरी का मामला, ब्लॉक कार्यालय में क्लर्क का रिश्वत लेते वीडियो वायरल!
Hardoi News: व्यक्ति ने क्लर्क को पैसे तो दे दिए, लेकिन इसकी तस्वीरें मोबाइल कैमरे में कैद कर लीं और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
Hardoi News: यूपी के हरदोई के बिलग्राम ब्लॉक कार्यालय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो की मानें तो यहां तैनात एक क्लर्क ने एक शख्स से किसी काम के एवज में पांच हजार रिश्वत मांगी थी। उस व्यक्ति ने क्लर्क को पैसे तो दे दिए, लेकिन इसकी तस्वीरें मोबाइल कैमरे में कैद कर लीं और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। हालांकि 'न्यूजट्रैक' इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीरो टॉलरेंस की बात कही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रिश्वत लेने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश में किसी भी तरह की रिश्वतखोरी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन सूबे की राजधानी लखनऊ से सटे हरदोई जनपद में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। इसकी बानगी अक्सर सामने आती है और इन दिनों फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ऐसा ही कुछ दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो हरदोई के बिलग्राम से वायरल हुआ है। जिसमें एक सरकारी कर्मचारी खुलेआम रिश्वत ले रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से पैसों का हिसाब-किताब किया जा रहा है। इस सरकारी कर्मचारी को किसी का भी भय नहीं है। सूत्रों ने बताया कि रिश्वत लेता कर्मचारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को निलंबन का भय दिखाकर रिश्वत लेता है। इस बारे में संबंधित क्लर्क से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, लेकिन संवाददाता की उनसे बात नहीं हो सकी।
मीटिंग में की जाती है रिश्वत की मांग!
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो बिलग्राम ब्लॉक कार्यालय का बताया जा रहा है। जहां रिश्वतखोरी करने वाले बाबू खुद को बेहद मजबूत पहुंच रखने वाला वह बताते है। रिश्वत लेते वीडियो में जो कर्मचारी दिख रहा है वो सुरेंद्र दीक्षित नाम का बताया जा रहा है। वीडियो में साफ देखा और सुना जा सकता है कि किस कदर सुरेंद्र दीक्षित वसूली कर रहे हैं। सूत्र यहां तक बताते हैं कि यह वसूली मीटिंग के नाम पर की जाती है। जो कर्मचारी रिश्वत देने से मना कर देता है, उसे झूठे आरोपों में फंसाकर निलंबित कर दिया जाता है। ऐसा ही कुछ वाक्य बिलग्राम की एक महिला सेक्रेटरी के साथ हुआ है। आरोप है कि सुरेंद्र दीक्षित द्वारा 5000 की रिश्वत की मांग महिला सेक्रेटरी से की गई थी। जब महिला ने पैसे देने से मना कर दिया तो उसे निलंबित कर दिया गया। बहरहाल, जनपद में वायरल होता ये वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में आलाधिकारी क्या रूख लेते हैं, इसपर स्थानीय लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
|
Hardoi News: हरदोई में सामने आया रिश्वतखोरी का मामला, ब्लॉक कार्यालय में क्लर्क का रिश्वत लेते वीडियो वायरल! Hardoi News: व्यक्ति ने क्लर्क को पैसे तो दे दिए, लेकिन इसकी तस्वीरें मोबाइल कैमरे में कैद कर लीं और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। Hardoi News: यूपी के हरदोई के बिलग्राम ब्लॉक कार्यालय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो की मानें तो यहां तैनात एक क्लर्क ने एक शख्स से किसी काम के एवज में पांच हजार रिश्वत मांगी थी। उस व्यक्ति ने क्लर्क को पैसे तो दे दिए, लेकिन इसकी तस्वीरें मोबाइल कैमरे में कैद कर लीं और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। हालांकि 'न्यूजट्रैक' इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीरो टॉलरेंस की बात कही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रिश्वत लेने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश में किसी भी तरह की रिश्वतखोरी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन सूबे की राजधानी लखनऊ से सटे हरदोई जनपद में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। इसकी बानगी अक्सर सामने आती है और इन दिनों फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ऐसा ही कुछ दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो हरदोई के बिलग्राम से वायरल हुआ है। जिसमें एक सरकारी कर्मचारी खुलेआम रिश्वत ले रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से पैसों का हिसाब-किताब किया जा रहा है। इस सरकारी कर्मचारी को किसी का भी भय नहीं है। सूत्रों ने बताया कि रिश्वत लेता कर्मचारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को निलंबन का भय दिखाकर रिश्वत लेता है। इस बारे में संबंधित क्लर्क से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, लेकिन संवाददाता की उनसे बात नहीं हो सकी। मीटिंग में की जाती है रिश्वत की मांग! सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो बिलग्राम ब्लॉक कार्यालय का बताया जा रहा है। जहां रिश्वतखोरी करने वाले बाबू खुद को बेहद मजबूत पहुंच रखने वाला वह बताते है। रिश्वत लेते वीडियो में जो कर्मचारी दिख रहा है वो सुरेंद्र दीक्षित नाम का बताया जा रहा है। वीडियो में साफ देखा और सुना जा सकता है कि किस कदर सुरेंद्र दीक्षित वसूली कर रहे हैं। सूत्र यहां तक बताते हैं कि यह वसूली मीटिंग के नाम पर की जाती है। जो कर्मचारी रिश्वत देने से मना कर देता है, उसे झूठे आरोपों में फंसाकर निलंबित कर दिया जाता है। ऐसा ही कुछ वाक्य बिलग्राम की एक महिला सेक्रेटरी के साथ हुआ है। आरोप है कि सुरेंद्र दीक्षित द्वारा पाँच हज़ार की रिश्वत की मांग महिला सेक्रेटरी से की गई थी। जब महिला ने पैसे देने से मना कर दिया तो उसे निलंबित कर दिया गया। बहरहाल, जनपद में वायरल होता ये वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में आलाधिकारी क्या रूख लेते हैं, इसपर स्थानीय लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
|
PM Modi ने आज Kashi Vishwanath Corridor के पहले चरण का उद्घाटन किया, जो कि काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों को जोड़ेगा। पीएम मोदी आज दोपहर 1 बजे मंदिर पहुंचे और 339 करोड़ रुपये की लागत से बने श्री काशी विश्वनाथ धाम के पहले चरण का उद्घाटन किया। परियोजना के इस चरण में 23 भवनों का उद्घाटन किया गया जो कि लगभग पांच लाख वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी तुलना में पिछला परिसर 3,000 वर्ग फुट में फैला हुआ था।
Kashi Vishwanath Corridor: द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ मंदिर अनादिकाल से काशी में है। यह स्थान शिव और पार्वती का आदि स्थान है, इसीलिए काशी अविमुक्तेश्वर को ही प्रथम लिंग माना गया है। इसका वर्णन महाभारत और उपनिषद में भी मिलता है। ईसा पूर्व 11वीं सदी में राजा हरीशचन्द्र ने जिस विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था, उसका सम्राट विक्रमादित्य ने भी बाद में जीर्णोद्धार करवाया था। प्राचीन इतिहास के मुताबिक काशी विश्वनाथ मंदिर को साल 1194 में मोहम्मद गौरी ने लूटने के बाद तुड़वा दिया था।
त्री Narendra Modi, Kashi Vishwanath Corridor का उद्घाटन करने के लिए वाराणसी पहुंच गए हैं। वाराणसी पहुंच कर उन्होंने सबसे पहले काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना की और आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर पहुंच गए हैं और कुछ ही देर में इसका उद्घाटन करेंगे।
Allahabad High Court ने एनसीआर में पर्यावरण मानकों का उल्लंघन कर अवैध रूप से ईट भट्टों के संचालन पर Bulandshahr और Gautam Budh Nagar के जिलाधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने बुलंदशहर के डीएम Chandraprakash Singh और गौतम बुद्ध नगर के डीएम सुहास एल वाई को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है कि हाईकोर्ट द्वारा 2014 में दिए आदेश का पालन न किए जाने पर क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए?
Varanasi में काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) में सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Corridor) का उद्घाटन करेंगे। PM Modi के दौरे से पहले पिछले कई दिनों से तैयारियां हो रही हैं। Kashi Vishwanath Corridor के उद्घाटन के अवसर पर बीजेपी 'दिव्य काशी- भव्य काशी' अभियान शुरू करेगी। अभियान 13 दिसंबर से 14 जनवरी तक चलेगा। काशी में भव्य आयोजन से पहले वहां की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं।
प्रवाहित की जाएंगी। इसके लिए हरिद्वार के वीआईपी घाट पर अस्थी विसर्जन की सारी तैयारियां कर ली गई हैं। सुबह 11 बजे स्वर्गीय बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत की अस्थियां विसर्जित की जाएगी।
|
PM Modi ने आज Kashi Vishwanath Corridor के पहले चरण का उद्घाटन किया, जो कि काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों को जोड़ेगा। पीएम मोदी आज दोपहर एक बजे मंदिर पहुंचे और तीन सौ उनतालीस करोड़ रुपये की लागत से बने श्री काशी विश्वनाथ धाम के पहले चरण का उद्घाटन किया। परियोजना के इस चरण में तेईस भवनों का उद्घाटन किया गया जो कि लगभग पांच लाख वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी तुलना में पिछला परिसर तीन,शून्य वर्ग फुट में फैला हुआ था। Kashi Vishwanath Corridor: द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ मंदिर अनादिकाल से काशी में है। यह स्थान शिव और पार्वती का आदि स्थान है, इसीलिए काशी अविमुक्तेश्वर को ही प्रथम लिंग माना गया है। इसका वर्णन महाभारत और उपनिषद में भी मिलता है। ईसा पूर्व ग्यारहवीं सदी में राजा हरीशचन्द्र ने जिस विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था, उसका सम्राट विक्रमादित्य ने भी बाद में जीर्णोद्धार करवाया था। प्राचीन इतिहास के मुताबिक काशी विश्वनाथ मंदिर को साल एक हज़ार एक सौ चौरानवे में मोहम्मद गौरी ने लूटने के बाद तुड़वा दिया था। त्री Narendra Modi, Kashi Vishwanath Corridor का उद्घाटन करने के लिए वाराणसी पहुंच गए हैं। वाराणसी पहुंच कर उन्होंने सबसे पहले काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना की और आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर पहुंच गए हैं और कुछ ही देर में इसका उद्घाटन करेंगे। Allahabad High Court ने एनसीआर में पर्यावरण मानकों का उल्लंघन कर अवैध रूप से ईट भट्टों के संचालन पर Bulandshahr और Gautam Budh Nagar के जिलाधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने बुलंदशहर के डीएम Chandraprakash Singh और गौतम बुद्ध नगर के डीएम सुहास एल वाई को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है कि हाईकोर्ट द्वारा दो हज़ार चौदह में दिए आदेश का पालन न किए जाने पर क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए? Varanasi में काशी विश्वनाथ मंदिर में सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। PM Modi के दौरे से पहले पिछले कई दिनों से तैयारियां हो रही हैं। Kashi Vishwanath Corridor के उद्घाटन के अवसर पर बीजेपी 'दिव्य काशी- भव्य काशी' अभियान शुरू करेगी। अभियान तेरह दिसंबर से चौदह जनवरी तक चलेगा। काशी में भव्य आयोजन से पहले वहां की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं। प्रवाहित की जाएंगी। इसके लिए हरिद्वार के वीआईपी घाट पर अस्थी विसर्जन की सारी तैयारियां कर ली गई हैं। सुबह ग्यारह बजे स्वर्गीय बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत की अस्थियां विसर्जित की जाएगी।
|
का उपदेश भगवान् ने आपण कस्बे में विहार करते समय ही दिया था। यहीं पर केणिय जटिल भगवान् से मिलने आया था और उसने १२५० भिक्षुओं के सहित भगवान् को भोजन के लिये निमंत्रित किया था ।' जैसा हम अभी देखेंगे, भगवान् भद्दिय से अंगुत्तराप प्रदेश में चले गये थे, जहाँ कुछ दिन विचरण करने के बाद वे उसके कस्बे आपण में पहुँचे थे। इससे यह प्रकट होता है कि भद्दिय और आपण सड़क के मार्ग से जुड़े हुए थे, जो अंगुत्तराप प्रदेश में होकर गुजरती थी । भद्दिय से आपण जाते हुए जब भगवान, १२५० भिक्षुओं के सहित अंगुत्तराप प्रदेश में होकर गुजर रहे थे, तभी रास्ते में एक वन में मेण्डक गृहपति ने भिक्षु-संघ सहित भगवान बुद्ध का धारोष्ण दूध से सत्कार किया था।
ऊपर मज्झिम-निकाय के तीन सुत्तों (पोतलिय सुत्तन्त, लकुटिकोपम सुत्तन्त और सेल-सुत्तन्त) का हमने उल्लेख किया है, जिनका उपदेश भगवान् ने आपण में किया था। इन तीनों सुतों के आरंभ में यह कहा गया है "एक समयं भगवा अंगुत्तरापेस चारिक चरमानो... येन आपणं नाम अंगुत्तरापानं निगमो तदवसरि । अर्थात्" "एक समय भगवान्. अंगुत्तराप (देश) में चारिका करते हुए, जहाँ अंगुत्तरापों का आपण नामक निगम था, वहाँ पहुँचे।" यह अंगुत्तराप क्या था ? अंगुत्तराप वस्तुतः अंग देश काही वह भाग था, जो गंगा ( महामहीगंगा) नदी के उत्तर में अवस्थित था । इसके "अंगुत्तराप" नाम से भी यह बात स्पष्टतः विदित होती है । 'अंगुत्तराप' नाम की व्याख्या करते हुए सुत्तनिपात की अट्ठकथा में कहा गया है, "अंगा एवं सो जनपदो। गंगाय ( महामहो गंगाय) पन या उत्तरेण आपो, तासं अविदूरत्ता उत्तरापाति वुच्चति ।' इसका अर्थ यह है "अंग ही वह जनपद है। गंगा (महामही गंगा) नदी के उत्तर में जो पानी है, उसके अ-दूर उत्तर होने के कारण उत्तराप कहा जाता है"। इससे विदित
१. मज्झिम-निकाय (हिन्दी अनुवाद), पृष्ठ ३८१; शंल ब्राहमण के साथसाथ केणिय के भी आपण में दीक्षित किये जाने का उल्लेख अश्वघोष ने बुद्ध-चरित (२१११२) में किया है।
२. विनय पिटक (हिन्दी अनुवाद), पृष्ठ २४८-२५०।
३. परमत्वजोतिका (सुत्त-निपात को अट्ठकथा), जिल्ब दूसरी, पृष्ठ ४३७ ।
होता है कि अंगुत्तराप अंग के उत्तर में गंगा नदी के उस पार का, उसके खादर का प्रदेश था, जो अंग जनपद में हो सम्मिलित माना जाता था। डा० मललसेकर ने भी इसे गंगा नदी के उत्तर में अंग देश का ही एक भाग माना है। अंग के समान अंगुत्तराप भी मगघ राज्य के अन्तर्गत था, यह इस बात से विदित होता है कि केणिय जटिल ने १२५० भिक्षुओं के साथ भगवान् बुद्ध को भोजन के लिये निमंत्रित किया था और जब वह उसकी तैयारी में लगा था तो शैल नामक ब्राह्मण ने उससे पूछा था "क्या आपके यहाँ मगधराज श्रेणिक बिम्बिसार कल भोजन के लिये निमन्त्रित किये गये है ? " यह निश्चित हो जाने पर कि अंगुत्तराप अंग जनपद का ही गंगा नदी के उत्तर वाला भाग था, उसकी आधुनिक स्थिति का अनुमान लगाना कठिन नहीं है। महापण्डित राहुल सांकृत्यायन ने उसके सम्बन्ध में एक जगह लिखा है "कोसी (नदी) के पश्चिम तथा गंगा के उत्तर में अंगुत्तराप प्रदेश था "" और एक दूसरी जगह लिखा है, "अंगुत्तराप मुंगेर और भागलपुर जिलों का गंगा के उत्तर वाला भाग था।"* दोनों वर्णनों का एक ही अर्थ है और वह यह कि अंग देश का वह भाग जो गंगा नदी के उत्तर में स्थित था, अंगुत्तराप कहलाता था। अंग देश का गंगा के उत्तर वाला भाग अंगुत्तराप कहलाता था और दक्षिण का केवल अंग, यद्यपि अंगुत्तराप स्वयं अंग का ही एक भाग था । डा० मललसेकर ने सुझाव दिया है कि आपण अंगुत्तराप की राजधानी था। अंगुत्तराप को अंग जनपद का ही एक अंग मान लेने पर उसकी पृथक राजधानी की आवश्यकता नहीं जान पड़ती। हाँ, उसे अंगुत्तराप का प्रधान नगर हम मान सकते हैं। आपण की ठीक आधुनिक पहचान करने का प्रयत्न किसी विद्वान् ने अब तक नहीं किया है।
१. डिक्शनरी ऑव पालि प्रॉपर नेम्स, जिल्ब पहली, पृष्ठ २२, ७३४
२. मज्झिम-निकाय (हिन्दी अनुवाद), पृष्ठ ३८२ ।
३. मज्झिम-निकाय (हिन्दी अनुवाद), पृष्ठ छः ( प्राक्कचन ) ।
४. विनय पिटक (हिन्दी अनुवाद), पृष्ठ २४९, पद-संकेत २; मिलाइये
बुद्धचर्या, पृष्ठ १४४, पद-संकेत १; वहीं, पृष्ठ ५४२ भी ।
५. डिनरी ऑब पालि प्रॉपर नेम्स, चिल्द पहली, पृष्ठ २७७१
महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने आतुमा नामक गाँव या नगर को अंगुत्तराप में बताया है, जो ठीक नहीं जान पड़ता क्योंकि विनय पिटक में हम देखते हैं कि भगवान् आतुमा में कुसिनारा से आये थे और कुछ दिन आतुमा में निवास कर श्रावस्ती चले गये थे। इस आधार पर आतुमा को कुसिनारा और सार्वत्थि के बीच में कोई स्थान मानना ही ठीक होगा।" हम उसे मल्ल और कोसल राज्यों में से किसी एक में रख सकते हैं।
अंग देश के उपर्युक्त कस्बों में भगवान् की चारिकाओं की भौगोलिक रूपरेखा विनय पिटक के अनुसार कुछ इस प्रकार होगी। पहली बार भगवान् वाराणसी से भद्दिय आये और वहाँ कुछ दिन निवास कर श्रावस्ती चले गये ।' एक दूसरी बार भगवान् वैशाली से भद्दिय आये' और वहाँ से अंगुत्तराप चले गये। अंगुत्तराप के वन में कुछ दिन विहार करने के पश्चात् भगवान उसके कस्बे आपण में पहुँचे । आपण में कुछ दिन विहार करने के पश्चात हम भगवान् को कुसिनारा की ओर जाते देखते हैं।
बुद्ध-पूर्व काल में मगध अंग की अपेक्षा एक निर्बल राष्ट्र था और दोनों में सत्ता के लिये संघर्ष चला करता था, यह हम पहले देख चुके हैं। मगघ राज्य का विवरण देते समय हम यह भी देख चुके हैं कि किस प्रकार मगघराज
१. बुद्धचर्या, पृष्ठ ५४४
२. विनय पिटक (हिन्दी अनुवाद), पृष्ठ २५२-२५४।
३. मिलाइये मललसेकरः डिक्शनरी ऑव पालि प्रॉपर नेम्स, जिल्द पहली,
पृष्ठ २४४ ।
४. विनय पिटक (हिन्दी अनुवाद), पृष्ठ २०७१
५. वहीं, पृष्ठ २०८।
६. वहीं, पृष्ठ २४८।
७. वहीं, पृष्ठ २४९; मिलाइये धम्मपवट्ठकथा, जिल्द पहली, पृष्ठ ३८४ भी। ८. वहीं, पृष्ठ २५०; बेलिये धम्मपदवकमा, जिल्ब तीसरी, पृष्ठ ३६३ भी। ९. विनय-पिटक (हिन्दी अनुवाद), पृष्ठ २५२ ।
श्रेणिक बिम्बिसार द्वारा जीत लिये जाने पर बुद्ध के जीवन काल में अंग मगध राज्य का एक अंग मात्र हो गया और उसकी स्वतन्त्र राजनैतिक सत्ता समाप्त हो गई। यहाँ हम एक जनपद के रूप मे मगध का, या ठोक कहें तो मगधों का, मगध जनों का, पालि तिपिटक और उसकी अट्ठकथाओं के आधार पर विवरण प्रस्तुत करेंगे।
मगध जनपद का बौद्ध धर्म के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। वस्तुतः इसी जनपद में धम्म का आविर्भाव हुआ। विनय पिटक में कहा गया है "भगव में मलिन चित्त वालों से चिन्तित, पहले अशुद्ध धर्म पैदा हुआ था । अब अमृत के घर को खोलने वाले विमल ( पुरुष ) द्वारा जाने गये इस धर्म को लोक सुने । उरुवेला, जहाँ भगवान ने ज्ञान प्राप्त किया, मगध जनपद का ही एक स्थान था। इस जनपद के अनेक नगरों, निगमों और ग्रामों का, जो भगवान बुद्ध की स्मृति के कारण अमर हो गये है, हम पहले उल्लेख कर चुके हैं। भगवान् बुद्ध के अनेक शिष्य मगध-निवासी थे और बुद्ध धर्म का प्रारम्भिक प्रचार केन्द्र मगघ ही था, यह सब हम पहले निरूपित कर चुके हैं।
एक जनपद के रूप में मगध का विस्तार आधुनिक बिहार राज्य के गया और पटना जिलों के बराबर समझना चाहिये। उसके उत्तर मे गंगा नदी, पश्चिम में सोण नदी, दक्षिण में विन्ध्याचल पर्वत श्रेणी का बढ़ा हुआ भाग और पूर्व में चम्पा नदी थी ।
मगध जनपद का यह नाम क्यों पड़ा, इसका कारण देते हुए आचार्य बुद्धघोष कहा है कि इस सम्बन्ध में लोग अनेक प्रकार की किवदन्तियाँ प्रपंचित करते हैं । 'बहुधा पपंचन्ति' । इस प्रकार की एक किंवदन्ती यह है कि जब राजा चेतिय, जिसने प्रथम बार संसार में झूठ बोलना शुरू किया, अपने इस कार्य के कारण धरती में धंसने लगा, तो जो लोग उसके पास खड़े हुए थे उन्होंने उससे कहा 'मा गघं पविस' । इसी से मिलती हुई दूसरी किवदन्ती यह है कि जब राजा चेतिय धरती में प्रवेश
१. पातुरहोसि मगधेसु पुम्बे बम्मो असुद्धो समलेहि चिन्तितो । अपापुरेसं अमतस्स द्वारं सुणन्तु धम्मं विमलेनानुबुद्धं ॥ महावग्गो-विनय पिटकं, पठमो भागो, पृष्ठ ८ (बम्बई विश्वविद्यालय संस्करण ) ।
कर गया, तो कुछ लोगों ने जो धरती खोद रहे थे उसे देखा और उसने उनसे कहा, "मा गां करोथ" । इस प्रकार इन शब्दों 'मा गधं' के कारण मगध जनपद का यह नाम पड़ा। इन मनोरंजक अनुश्रुतियों का उल्लेख करने के बाद मगध के वास्तविक नामकरण का कारण बताते हुए आचार्य बुद्धघोष ने कहा है कि मगघ ( मगधा ) नामक क्षत्रिय जाति की निवास-भूमि होने के कारण यह जनपद 'मगध' कहलाया।' मगध जनपद के सम्बन्ध में अन्य सब आवश्यक बातों का उल्लेख हम मगध राज्य का विवरण देते समय कर चुके हैं।
काशी राष्ट्र (कासि रट्ठ) बुद्ध पूर्व युग का सम्भवतः सबसे अधिक शक्तिशाली जनपद था । परन्तु बुद्ध के जीवन काल में उसकी स्थिति राजनैतिक दृष्टि से अत्यन्त नीची गिर गई और उसको आय कोसल और मगध देश के राजाओं के झगड़े का कारण बन गई और जब तक काशी जनपद अन्तिम रूप से मगध राज्य का अंग न बन गया, यह झगड़ा चलता ही रहा।
काशी जनपद पूर्व में मगध और पश्चिम में वंस ( वत्स ) जनपद के बीच में स्थित था। उसके उत्तर में कोसल जनपद था और दक्षिण में उसको सीमा सम्भवतः सोज ( सोन) नदी तक थी, यद्यपि अस्सक जातक में जिस समय की स्थिति का वर्णन है, उसके अनुसार (बुद्ध-पूर्व काल में ) काशी राज्य का विस्तार दक्षिण में गोदावरी के तट तक हो गया था, क्योंकि इस जातक मे अस्तक राज्य की राजधानी पोतलि नगर को काशी राज्य का नगर बताया गया है। बज विहेठ जातक में काशी राज्य का विस्तार ३०० योजन बताया गया है।
जैसा हम पहले देख चुके हैं, कांसलराज प्रसेनजित के पिता महाकोसल के समय (छठी शताब्दी ईसवी-पूर्व के मध्य भाग ) में ही काशी जनपद कोसल राज्य का एक अंग हो गया था। हरितमातक जातक और वड् ढकि सूकर जातक के साक्ष्य पर हम देखते हैं कि महाकोसल ने अपनी पुत्री कोसला देवी का विवाह मगवराज बिम्बिसार से कर काशी-ग्राम की आय उसकी स्नान-सामग्री के व्यय के लिये दे दी थी। बाद में अजातशत्रु ने जब अपने पिता बिम्बसार को मार दिया तो कोसला देवी भी दुःखाभिभूत होकर मर गई। इस पर प्रसेनजित ने अपने
१. परमत्मजोतिका, जिल्द पहली, पृष्ठ १३५
मानजे अजातशत्रु से काशी ग्राम छीनना चाहा, जिस पर दोनों में काफी लम्बा संघर्ष चला और प्रसनजित की तीन बार हार हुई, परन्तु अन्त में प्रसेनजित् ने अजातशत्रु को बन्दी बना लिया और उदार नीति का अनुसरण कर उसे छोड़ दिया। इतना ही नहीं, अपनी पुत्री वजिरा का विवाह उसने अजातशत्रु के साथ कर दिया और काशी ग्राम पूर्ववत् उसके स्नान और सुगन्ध के व्यय के लिये दिया । इसके बाद प्रसेनजित् के सेनापति दीर्घ चारायण (पालि, दोष कारायन) ने, जिसके मामा बन्धुल मल्ल को (जो प्रसेनजित का भूतपूर्व सेनापति था) बिना किसी अपराध के प्रसेनजित् ने मरवा दिया था, राजा के विरुद्ध विडूडभ से अभिसंधि की और जब प्रसेनजित्, जिसको आयु उस समय अस्सी वर्ष की थी, भगवान बुद्ध से संलाप में मग्न था ( जो मज्झिम-निकाय के धम्मचेतिय सुत्तन्त में निहित है) दोध कारायन उसे छोड़कर चल दिया और श्रावस्ती में जाकर विड्रडम को राजा घोषित कर दिया। राजा प्रसेनजित, ने राजगृह में जाकर शरण लेनी चाही। दिन भर की थका हआ रात में राजगृह पहुँचा, जब कि उसके दरवाजे बन्द हो चुके थे। बाहर ही धर्मशाला में टिका और थका-माँदा उसी रात ठंड लग जाने से मर गया। अजातशत्रु ने उसकी दाह क्रिया की। उधर विडूडभ ने शाक्यों का विनाश कर अपनी प्रतिहिंसा की तृप्ति की और मार्ग में लौटते हुए आँधी और बाढ़ के बीच अचिरवती (रापती ) नदी में समन्य मृत्य प्राप्त की। इस प्रकार काशी के सहित कोसल राज्य, जिसको अधीनता में हो शाक्य जनपद था, सब मिलकर मगध राज्य में सम्मिलित हो गये ।
ऊपर हम देख चुके हैं कि काशी जनपद के पूर्व में भगघ, उत्तर में कोसल और पश्चिम में वंस जनपद थे। अतः इन तीनों जनपदों के साथ बुद्ध-पूर्व काल में काशी राज्य के अनेक संघर्ष चले, जिनका कुछ उल्लेख करना यहाँ आवश्यक होगा। बुद्ध-पूर्व काल में काशी एक स्वतंत्र और समृद्ध राष्ट्र था। वह सप्त ग्लों से युक्त था । पूर्व काल में काशी एक समृद्ध राष्ट्र था, इसका साक्ष्य
१. संयुत्त निकाय (हिन्दी अनुवाद) , पृष्ठ ७६-७८ ( पठम-संगाम-सुत्त तथा दुतिय संगाम-सुत) ; धम्मपदट्ठकथा, जिल्द तोसरी, पृष्ठ २६६१.
२. अंगुत्तर -निकाय, जिल्द पहली, पृष्ठ २१३; जिल्द चौनी, पुष्ठ २५२, २५६, २६०
|
का उपदेश भगवान् ने आपण कस्बे में विहार करते समय ही दिया था। यहीं पर केणिय जटिल भगवान् से मिलने आया था और उसने एक हज़ार दो सौ पचास भिक्षुओं के सहित भगवान् को भोजन के लिये निमंत्रित किया था ।' जैसा हम अभी देखेंगे, भगवान् भद्दिय से अंगुत्तराप प्रदेश में चले गये थे, जहाँ कुछ दिन विचरण करने के बाद वे उसके कस्बे आपण में पहुँचे थे। इससे यह प्रकट होता है कि भद्दिय और आपण सड़क के मार्ग से जुड़े हुए थे, जो अंगुत्तराप प्रदेश में होकर गुजरती थी । भद्दिय से आपण जाते हुए जब भगवान, एक हज़ार दो सौ पचास भिक्षुओं के सहित अंगुत्तराप प्रदेश में होकर गुजर रहे थे, तभी रास्ते में एक वन में मेण्डक गृहपति ने भिक्षु-संघ सहित भगवान बुद्ध का धारोष्ण दूध से सत्कार किया था। ऊपर मज्झिम-निकाय के तीन सुत्तों का हमने उल्लेख किया है, जिनका उपदेश भगवान् ने आपण में किया था। इन तीनों सुतों के आरंभ में यह कहा गया है "एक समयं भगवा अंगुत्तरापेस चारिक चरमानो... येन आपणं नाम अंगुत्तरापानं निगमो तदवसरि । अर्थात्" "एक समय भगवान्. अंगुत्तराप में चारिका करते हुए, जहाँ अंगुत्तरापों का आपण नामक निगम था, वहाँ पहुँचे।" यह अंगुत्तराप क्या था ? अंगुत्तराप वस्तुतः अंग देश काही वह भाग था, जो गंगा नदी के उत्तर में अवस्थित था । इसके "अंगुत्तराप" नाम से भी यह बात स्पष्टतः विदित होती है । 'अंगुत्तराप' नाम की व्याख्या करते हुए सुत्तनिपात की अट्ठकथा में कहा गया है, "अंगा एवं सो जनपदो। गंगाय पन या उत्तरेण आपो, तासं अविदूरत्ता उत्तरापाति वुच्चति ।' इसका अर्थ यह है "अंग ही वह जनपद है। गंगा नदी के उत्तर में जो पानी है, उसके अ-दूर उत्तर होने के कारण उत्तराप कहा जाता है"। इससे विदित एक. मज्झिम-निकाय , पृष्ठ तीन सौ इक्यासी; शंल ब्राहमण के साथसाथ केणिय के भी आपण में दीक्षित किये जाने का उल्लेख अश्वघोष ने बुद्ध-चरित में किया है। दो. विनय पिटक , पृष्ठ दो सौ अड़तालीस-दो सौ पचास। तीन. परमत्वजोतिका , जिल्ब दूसरी, पृष्ठ चार सौ सैंतीस । होता है कि अंगुत्तराप अंग के उत्तर में गंगा नदी के उस पार का, उसके खादर का प्रदेश था, जो अंग जनपद में हो सम्मिलित माना जाता था। डाशून्य मललसेकर ने भी इसे गंगा नदी के उत्तर में अंग देश का ही एक भाग माना है। अंग के समान अंगुत्तराप भी मगघ राज्य के अन्तर्गत था, यह इस बात से विदित होता है कि केणिय जटिल ने एक हज़ार दो सौ पचास भिक्षुओं के साथ भगवान् बुद्ध को भोजन के लिये निमंत्रित किया था और जब वह उसकी तैयारी में लगा था तो शैल नामक ब्राह्मण ने उससे पूछा था "क्या आपके यहाँ मगधराज श्रेणिक बिम्बिसार कल भोजन के लिये निमन्त्रित किये गये है ? " यह निश्चित हो जाने पर कि अंगुत्तराप अंग जनपद का ही गंगा नदी के उत्तर वाला भाग था, उसकी आधुनिक स्थिति का अनुमान लगाना कठिन नहीं है। महापण्डित राहुल सांकृत्यायन ने उसके सम्बन्ध में एक जगह लिखा है "कोसी के पश्चिम तथा गंगा के उत्तर में अंगुत्तराप प्रदेश था "" और एक दूसरी जगह लिखा है, "अंगुत्तराप मुंगेर और भागलपुर जिलों का गंगा के उत्तर वाला भाग था।"* दोनों वर्णनों का एक ही अर्थ है और वह यह कि अंग देश का वह भाग जो गंगा नदी के उत्तर में स्थित था, अंगुत्तराप कहलाता था। अंग देश का गंगा के उत्तर वाला भाग अंगुत्तराप कहलाता था और दक्षिण का केवल अंग, यद्यपि अंगुत्तराप स्वयं अंग का ही एक भाग था । डाशून्य मललसेकर ने सुझाव दिया है कि आपण अंगुत्तराप की राजधानी था। अंगुत्तराप को अंग जनपद का ही एक अंग मान लेने पर उसकी पृथक राजधानी की आवश्यकता नहीं जान पड़ती। हाँ, उसे अंगुत्तराप का प्रधान नगर हम मान सकते हैं। आपण की ठीक आधुनिक पहचान करने का प्रयत्न किसी विद्वान् ने अब तक नहीं किया है। एक. डिक्शनरी ऑव पालि प्रॉपर नेम्स, जिल्ब पहली, पृष्ठ बाईस, सात सौ चौंतीस दो. मज्झिम-निकाय , पृष्ठ तीन सौ बयासी । तीन. मज्झिम-निकाय , पृष्ठ छः । चार. विनय पिटक , पृष्ठ दो सौ उनचास, पद-संकेत दो; मिलाइये बुद्धचर्या, पृष्ठ एक सौ चौंतालीस, पद-संकेत एक; वहीं, पृष्ठ पाँच सौ बयालीस भी । पाँच. डिनरी ऑब पालि प्रॉपर नेम्स, चिल्द पहली, पृष्ठ दो हज़ार सात सौ इकहत्तर महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने आतुमा नामक गाँव या नगर को अंगुत्तराप में बताया है, जो ठीक नहीं जान पड़ता क्योंकि विनय पिटक में हम देखते हैं कि भगवान् आतुमा में कुसिनारा से आये थे और कुछ दिन आतुमा में निवास कर श्रावस्ती चले गये थे। इस आधार पर आतुमा को कुसिनारा और सार्वत्थि के बीच में कोई स्थान मानना ही ठीक होगा।" हम उसे मल्ल और कोसल राज्यों में से किसी एक में रख सकते हैं। अंग देश के उपर्युक्त कस्बों में भगवान् की चारिकाओं की भौगोलिक रूपरेखा विनय पिटक के अनुसार कुछ इस प्रकार होगी। पहली बार भगवान् वाराणसी से भद्दिय आये और वहाँ कुछ दिन निवास कर श्रावस्ती चले गये ।' एक दूसरी बार भगवान् वैशाली से भद्दिय आये' और वहाँ से अंगुत्तराप चले गये। अंगुत्तराप के वन में कुछ दिन विहार करने के पश्चात् भगवान उसके कस्बे आपण में पहुँचे । आपण में कुछ दिन विहार करने के पश्चात हम भगवान् को कुसिनारा की ओर जाते देखते हैं। बुद्ध-पूर्व काल में मगध अंग की अपेक्षा एक निर्बल राष्ट्र था और दोनों में सत्ता के लिये संघर्ष चला करता था, यह हम पहले देख चुके हैं। मगघ राज्य का विवरण देते समय हम यह भी देख चुके हैं कि किस प्रकार मगघराज एक. बुद्धचर्या, पृष्ठ पाँच सौ चौंतालीस दो. विनय पिटक , पृष्ठ दो सौ बावन-दो सौ चौवन। तीन. मिलाइये मललसेकरः डिक्शनरी ऑव पालि प्रॉपर नेम्स, जिल्द पहली, पृष्ठ दो सौ चौंतालीस । चार. विनय पिटक , पृष्ठ दो हज़ार इकहत्तर पाँच. वहीं, पृष्ठ दो सौ आठ। छः. वहीं, पृष्ठ दो सौ अड़तालीस। सात. वहीं, पृष्ठ दो सौ उनचास; मिलाइये धम्मपवट्ठकथा, जिल्द पहली, पृष्ठ तीन सौ चौरासी भी। आठ. वहीं, पृष्ठ दो सौ पचास; बेलिये धम्मपदवकमा, जिल्ब तीसरी, पृष्ठ तीन सौ तिरेसठ भी। नौ. विनय-पिटक , पृष्ठ दो सौ बावन । श्रेणिक बिम्बिसार द्वारा जीत लिये जाने पर बुद्ध के जीवन काल में अंग मगध राज्य का एक अंग मात्र हो गया और उसकी स्वतन्त्र राजनैतिक सत्ता समाप्त हो गई। यहाँ हम एक जनपद के रूप मे मगध का, या ठोक कहें तो मगधों का, मगध जनों का, पालि तिपिटक और उसकी अट्ठकथाओं के आधार पर विवरण प्रस्तुत करेंगे। मगध जनपद का बौद्ध धर्म के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। वस्तुतः इसी जनपद में धम्म का आविर्भाव हुआ। विनय पिटक में कहा गया है "भगव में मलिन चित्त वालों से चिन्तित, पहले अशुद्ध धर्म पैदा हुआ था । अब अमृत के घर को खोलने वाले विमल द्वारा जाने गये इस धर्म को लोक सुने । उरुवेला, जहाँ भगवान ने ज्ञान प्राप्त किया, मगध जनपद का ही एक स्थान था। इस जनपद के अनेक नगरों, निगमों और ग्रामों का, जो भगवान बुद्ध की स्मृति के कारण अमर हो गये है, हम पहले उल्लेख कर चुके हैं। भगवान् बुद्ध के अनेक शिष्य मगध-निवासी थे और बुद्ध धर्म का प्रारम्भिक प्रचार केन्द्र मगघ ही था, यह सब हम पहले निरूपित कर चुके हैं। एक जनपद के रूप में मगध का विस्तार आधुनिक बिहार राज्य के गया और पटना जिलों के बराबर समझना चाहिये। उसके उत्तर मे गंगा नदी, पश्चिम में सोण नदी, दक्षिण में विन्ध्याचल पर्वत श्रेणी का बढ़ा हुआ भाग और पूर्व में चम्पा नदी थी । मगध जनपद का यह नाम क्यों पड़ा, इसका कारण देते हुए आचार्य बुद्धघोष कहा है कि इस सम्बन्ध में लोग अनेक प्रकार की किवदन्तियाँ प्रपंचित करते हैं । 'बहुधा पपंचन्ति' । इस प्रकार की एक किंवदन्ती यह है कि जब राजा चेतिय, जिसने प्रथम बार संसार में झूठ बोलना शुरू किया, अपने इस कार्य के कारण धरती में धंसने लगा, तो जो लोग उसके पास खड़े हुए थे उन्होंने उससे कहा 'मा गघं पविस' । इसी से मिलती हुई दूसरी किवदन्ती यह है कि जब राजा चेतिय धरती में प्रवेश एक. पातुरहोसि मगधेसु पुम्बे बम्मो असुद्धो समलेहि चिन्तितो । अपापुरेसं अमतस्स द्वारं सुणन्तु धम्मं विमलेनानुबुद्धं ॥ महावग्गो-विनय पिटकं, पठमो भागो, पृष्ठ आठ । कर गया, तो कुछ लोगों ने जो धरती खोद रहे थे उसे देखा और उसने उनसे कहा, "मा गां करोथ" । इस प्रकार इन शब्दों 'मा गधं' के कारण मगध जनपद का यह नाम पड़ा। इन मनोरंजक अनुश्रुतियों का उल्लेख करने के बाद मगध के वास्तविक नामकरण का कारण बताते हुए आचार्य बुद्धघोष ने कहा है कि मगघ नामक क्षत्रिय जाति की निवास-भूमि होने के कारण यह जनपद 'मगध' कहलाया।' मगध जनपद के सम्बन्ध में अन्य सब आवश्यक बातों का उल्लेख हम मगध राज्य का विवरण देते समय कर चुके हैं। काशी राष्ट्र बुद्ध पूर्व युग का सम्भवतः सबसे अधिक शक्तिशाली जनपद था । परन्तु बुद्ध के जीवन काल में उसकी स्थिति राजनैतिक दृष्टि से अत्यन्त नीची गिर गई और उसको आय कोसल और मगध देश के राजाओं के झगड़े का कारण बन गई और जब तक काशी जनपद अन्तिम रूप से मगध राज्य का अंग न बन गया, यह झगड़ा चलता ही रहा। काशी जनपद पूर्व में मगध और पश्चिम में वंस जनपद के बीच में स्थित था। उसके उत्तर में कोसल जनपद था और दक्षिण में उसको सीमा सम्भवतः सोज नदी तक थी, यद्यपि अस्सक जातक में जिस समय की स्थिति का वर्णन है, उसके अनुसार काशी राज्य का विस्तार दक्षिण में गोदावरी के तट तक हो गया था, क्योंकि इस जातक मे अस्तक राज्य की राजधानी पोतलि नगर को काशी राज्य का नगर बताया गया है। बज विहेठ जातक में काशी राज्य का विस्तार तीन सौ योजन बताया गया है। जैसा हम पहले देख चुके हैं, कांसलराज प्रसेनजित के पिता महाकोसल के समय में ही काशी जनपद कोसल राज्य का एक अंग हो गया था। हरितमातक जातक और वड् ढकि सूकर जातक के साक्ष्य पर हम देखते हैं कि महाकोसल ने अपनी पुत्री कोसला देवी का विवाह मगवराज बिम्बिसार से कर काशी-ग्राम की आय उसकी स्नान-सामग्री के व्यय के लिये दे दी थी। बाद में अजातशत्रु ने जब अपने पिता बिम्बसार को मार दिया तो कोसला देवी भी दुःखाभिभूत होकर मर गई। इस पर प्रसेनजित ने अपने एक. परमत्मजोतिका, जिल्द पहली, पृष्ठ एक सौ पैंतीस मानजे अजातशत्रु से काशी ग्राम छीनना चाहा, जिस पर दोनों में काफी लम्बा संघर्ष चला और प्रसनजित की तीन बार हार हुई, परन्तु अन्त में प्रसेनजित् ने अजातशत्रु को बन्दी बना लिया और उदार नीति का अनुसरण कर उसे छोड़ दिया। इतना ही नहीं, अपनी पुत्री वजिरा का विवाह उसने अजातशत्रु के साथ कर दिया और काशी ग्राम पूर्ववत् उसके स्नान और सुगन्ध के व्यय के लिये दिया । इसके बाद प्रसेनजित् के सेनापति दीर्घ चारायण ने, जिसके मामा बन्धुल मल्ल को बिना किसी अपराध के प्रसेनजित् ने मरवा दिया था, राजा के विरुद्ध विडूडभ से अभिसंधि की और जब प्रसेनजित्, जिसको आयु उस समय अस्सी वर्ष की थी, भगवान बुद्ध से संलाप में मग्न था दोध कारायन उसे छोड़कर चल दिया और श्रावस्ती में जाकर विड्रडम को राजा घोषित कर दिया। राजा प्रसेनजित, ने राजगृह में जाकर शरण लेनी चाही। दिन भर की थका हआ रात में राजगृह पहुँचा, जब कि उसके दरवाजे बन्द हो चुके थे। बाहर ही धर्मशाला में टिका और थका-माँदा उसी रात ठंड लग जाने से मर गया। अजातशत्रु ने उसकी दाह क्रिया की। उधर विडूडभ ने शाक्यों का विनाश कर अपनी प्रतिहिंसा की तृप्ति की और मार्ग में लौटते हुए आँधी और बाढ़ के बीच अचिरवती नदी में समन्य मृत्य प्राप्त की। इस प्रकार काशी के सहित कोसल राज्य, जिसको अधीनता में हो शाक्य जनपद था, सब मिलकर मगध राज्य में सम्मिलित हो गये । ऊपर हम देख चुके हैं कि काशी जनपद के पूर्व में भगघ, उत्तर में कोसल और पश्चिम में वंस जनपद थे। अतः इन तीनों जनपदों के साथ बुद्ध-पूर्व काल में काशी राज्य के अनेक संघर्ष चले, जिनका कुछ उल्लेख करना यहाँ आवश्यक होगा। बुद्ध-पूर्व काल में काशी एक स्वतंत्र और समृद्ध राष्ट्र था। वह सप्त ग्लों से युक्त था । पूर्व काल में काशी एक समृद्ध राष्ट्र था, इसका साक्ष्य एक. संयुत्त निकाय , पृष्ठ छिहत्तर-अठहत्तर ; धम्मपदट्ठकथा, जिल्द तोसरी, पृष्ठ दो हज़ार छः सौ इकसठ. दो. अंगुत्तर -निकाय, जिल्द पहली, पृष्ठ दो सौ तेरह; जिल्द चौनी, पुष्ठ दो सौ बावन, दो सौ छप्पन, दो सौ साठ
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
नयनादेवी में बुधवार से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। हालांकि अपेक्षा से कम श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। दूसरे नवरात्र के उपलक्ष्य पर बुधवार को माता ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की गई और नौ हजार श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में शीश नवाया। उन्होंने बताया कि नयनादेवी पहुंचने पर श्रद्धालुओं की स्क्रीनिंग की जा रही है और स्क्रीनिंग करने के बाद सेनेटाइजेशन के बाद ही श्रद्धालुओं को मंदिर भेजा जा रहा है। पुलिस और प्रशासन के द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर श्रद्धालु माताजी के दरबार में मास्क लगाकर ही पहुंचें। हालांकि कोविड-19 महामारी का दौर है जिसके चलते श्रद्धालुओं की संख्या इस बार के नवरात्र में अपेक्षा से कम है जिसके चलते स्थानीय दुकानदार एवं व्यापारी वर्ग के चेहरे पर परेशानी की लकीरें साफ नजर आ रही है। मेला अधिकारी मंदिर न्यास के अध्यक्ष एसडीएम सुभाष गौतम ने बताया कि मेला सुख शांति चल रहा है और श्रद्धालुओं की सुख सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को लाइनों में ही माता के दर्शनों के लिए भेजा जा रहा है जिससे सुव्यवस्था बनी हुई है।
उत्तरी भारत के तीर्थ स्थल नयनादेवी में चल रहे चैत्र नवरात्र धूमधाम से शुरू हो गए हैं। चैत्र नवरात्र के पहले दिन ही यात्रियों का भारी हुजूम मंदिर के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ा। लगभग 18000 यात्रियों ने माता नयनादेवी के दर्शन किए। मंदिर से मिली जानकारी के अनुसार न्यास को 939517 नकद तथा 24 ग्राम सोना एवं एक किलो 316 मिलीग्राम चांदी तथा दो अमेरिकी डॉलर चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुए इस दौरान बिजली पानी सफाई की व्यवस्था सुचारू रही मिला अधिकारी सुभाष गौतम ने बताया कि यात्री पूर्ण रूप से सरकारी आदेशों का पालन कर रहे हैं तथा मांस दैनिक कर ही उन्हें मंदिर के अंदर भेजा जा रहा है उधर, डीएसपी अभिमन्यु वर्मा ने कहा कि मंदिर को आने जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस तैनात है तथा पुणे आदेश जारी किए गए हैं कि वह यात्री को सुख सुविधा के अनुसार उन्हें मंदिर के दर्शनों के लिए भेजा जाए।
चिंतपूर्णी । चैत्र नवरात्र मेले के पहले दिन मंदिर न्यास को करीब नौ लाख रुपए का नकद चढ़ावा दान स्वरूप प्राप्त हुआ। माता रानी के दरबार में शीश नवाने आने वाले श्रद्धालु दिल खोलकर चढ़ावा चढ़ा रहे हंै। हिमाचल सहित अन्य राज्यों के भक्त मां के दरबार में आकर हाजिरी लगा रहे हंै और अपने परिवार के लिए मंगल कामनाएं कर रहे हैं। भक्तों के जयकारों से क्षेत्र की वादियां पूरी तरह से गूंजायमान हो गई है। हर तरफ मां के जयकारें सुनाई दे रहे हैं। उधर, मंदिर के सुपरिटेंडेंट जीवन कुमार ने बताया कि पहले नवरात्र को माता के भक्तों द्वारा दान स्वरूप 892960 नकदी चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुए। इसके साथ भक्तों द्वारा पांच ग्राम सोना और 610 ग्राम चांदी भी चढ़ाई गई। उन्होंने बताया कि विदेशी करंसी में ऑस्ट्रेलिया के पांच रियाल पांच कुवैत का एक डॉलर प्राप्त हुआ है।
चिंतपूर्णी। धार्मिक स्थल चिंतपूर्णी में चैत्र नवरात्र चले हुए हैं और इस दौरान मेला क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर देखने को मिल रही है। डीएसपी अंब सृष्टि पांडे के निर्देशों के बाद मंदिर रोड पर ट्रैफिक व्यवस्था में पहले से काफी सुधार देखने को मिला है। वहीं,थाना प्रभारी कुलदीप सिंह भी अपनी टीम के साथ समय-समय पर ट्रैफिक व्यवस्था का निरीक्षण कर रहे है।
|
नयनादेवी में बुधवार से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। हालांकि अपेक्षा से कम श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। दूसरे नवरात्र के उपलक्ष्य पर बुधवार को माता ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की गई और नौ हजार श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में शीश नवाया। उन्होंने बताया कि नयनादेवी पहुंचने पर श्रद्धालुओं की स्क्रीनिंग की जा रही है और स्क्रीनिंग करने के बाद सेनेटाइजेशन के बाद ही श्रद्धालुओं को मंदिर भेजा जा रहा है। पुलिस और प्रशासन के द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर श्रद्धालु माताजी के दरबार में मास्क लगाकर ही पहुंचें। हालांकि कोविड-उन्नीस महामारी का दौर है जिसके चलते श्रद्धालुओं की संख्या इस बार के नवरात्र में अपेक्षा से कम है जिसके चलते स्थानीय दुकानदार एवं व्यापारी वर्ग के चेहरे पर परेशानी की लकीरें साफ नजर आ रही है। मेला अधिकारी मंदिर न्यास के अध्यक्ष एसडीएम सुभाष गौतम ने बताया कि मेला सुख शांति चल रहा है और श्रद्धालुओं की सुख सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को लाइनों में ही माता के दर्शनों के लिए भेजा जा रहा है जिससे सुव्यवस्था बनी हुई है। उत्तरी भारत के तीर्थ स्थल नयनादेवी में चल रहे चैत्र नवरात्र धूमधाम से शुरू हो गए हैं। चैत्र नवरात्र के पहले दिन ही यात्रियों का भारी हुजूम मंदिर के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ा। लगभग अट्ठारह हज़ार यात्रियों ने माता नयनादेवी के दर्शन किए। मंदिर से मिली जानकारी के अनुसार न्यास को नौ लाख उनतालीस हज़ार पाँच सौ सत्रह नकद तथा चौबीस ग्राम सोना एवं एक किलो तीन सौ सोलह मिलीग्राम चांदी तथा दो अमेरिकी डॉलर चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुए इस दौरान बिजली पानी सफाई की व्यवस्था सुचारू रही मिला अधिकारी सुभाष गौतम ने बताया कि यात्री पूर्ण रूप से सरकारी आदेशों का पालन कर रहे हैं तथा मांस दैनिक कर ही उन्हें मंदिर के अंदर भेजा जा रहा है उधर, डीएसपी अभिमन्यु वर्मा ने कहा कि मंदिर को आने जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस तैनात है तथा पुणे आदेश जारी किए गए हैं कि वह यात्री को सुख सुविधा के अनुसार उन्हें मंदिर के दर्शनों के लिए भेजा जाए। चिंतपूर्णी । चैत्र नवरात्र मेले के पहले दिन मंदिर न्यास को करीब नौ लाख रुपए का नकद चढ़ावा दान स्वरूप प्राप्त हुआ। माता रानी के दरबार में शीश नवाने आने वाले श्रद्धालु दिल खोलकर चढ़ावा चढ़ा रहे हंै। हिमाचल सहित अन्य राज्यों के भक्त मां के दरबार में आकर हाजिरी लगा रहे हंै और अपने परिवार के लिए मंगल कामनाएं कर रहे हैं। भक्तों के जयकारों से क्षेत्र की वादियां पूरी तरह से गूंजायमान हो गई है। हर तरफ मां के जयकारें सुनाई दे रहे हैं। उधर, मंदिर के सुपरिटेंडेंट जीवन कुमार ने बताया कि पहले नवरात्र को माता के भक्तों द्वारा दान स्वरूप आठ लाख बानवे हज़ार नौ सौ साठ नकदी चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुए। इसके साथ भक्तों द्वारा पांच ग्राम सोना और छः सौ दस ग्राम चांदी भी चढ़ाई गई। उन्होंने बताया कि विदेशी करंसी में ऑस्ट्रेलिया के पांच रियाल पांच कुवैत का एक डॉलर प्राप्त हुआ है। चिंतपूर्णी। धार्मिक स्थल चिंतपूर्णी में चैत्र नवरात्र चले हुए हैं और इस दौरान मेला क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर देखने को मिल रही है। डीएसपी अंब सृष्टि पांडे के निर्देशों के बाद मंदिर रोड पर ट्रैफिक व्यवस्था में पहले से काफी सुधार देखने को मिला है। वहीं,थाना प्रभारी कुलदीप सिंह भी अपनी टीम के साथ समय-समय पर ट्रैफिक व्यवस्था का निरीक्षण कर रहे है।
|
देश के पूर्व रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की तबीयत बिगड़ने से उन्हें चाहने वाले काफी दुखी हैं। समाजवादी पार्टी की स्थापना के वक्त से उनके कदम से कदम मिलाकर चलने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व पर्यटन मंत्री और गाजीपुर जनपद के जमानिया विधानसभा के विधायक ओम प्रकाश सिंह ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।
9 साल तक समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव के साथ संगठन में काम कर चुके वरिष्ठ सपा नेता ओम प्रकाश सिंह ने कहा। मुलायम सिंह लोहिया, जयप्रकाश जी, चंद्रशेखर सिंह, जनेश्वर मिश्र के बाद समाजवादी परंपरा के, उस कड़ी के अंतिम नेता हैं। मुलायम सिंह जी से हम लोगों ने बहुत कुछ सीखा है।
गांव के प्रति,किसान के प्रति, नौजवान के प्रति, सैनिक के प्रति मुलायम सिंह यादव ने हम लोगों को ककहरा पढ़ाया है। मुलायम सिंह की योजनाएं आज भी पूरे देश में नकल की जाती है। हम लोगों की बस एक ही विनती है कि नेताजी स्वस्थ हो,दीर्घायु हो। जमानिया विधायक ओमप्रकाश सिंह ने आगे कहा कि मुलायम सिंह जी के साथ ऐसे यादगार पल हैं जो हम कहेंगे तो भावुक हो जाएंगे। उनकी एक खासियत यह भी रही कि वह नेता के साथ साथ एक अभिभावक की भूमिका में रहे।
बतौर रक्षा मंत्री रहते हुए मुलायम सिंह द्वारा सुखोई विमान खरीदने पर बाजपेई जी ने तारीफ ही नहीं की, बल्कि बधाई देकर सदन को गौरवान्वित किया था। आज अगर हमारे विधानसभा क्षेत्र की सेवराई तहसील बनी है तो इसमें भी नेता जी का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा है कि गांव को शहर बनाओगे तभी गांव की तरक्की होगी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
देश के पूर्व रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की तबीयत बिगड़ने से उन्हें चाहने वाले काफी दुखी हैं। समाजवादी पार्टी की स्थापना के वक्त से उनके कदम से कदम मिलाकर चलने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व पर्यटन मंत्री और गाजीपुर जनपद के जमानिया विधानसभा के विधायक ओम प्रकाश सिंह ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। नौ साल तक समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव के साथ संगठन में काम कर चुके वरिष्ठ सपा नेता ओम प्रकाश सिंह ने कहा। मुलायम सिंह लोहिया, जयप्रकाश जी, चंद्रशेखर सिंह, जनेश्वर मिश्र के बाद समाजवादी परंपरा के, उस कड़ी के अंतिम नेता हैं। मुलायम सिंह जी से हम लोगों ने बहुत कुछ सीखा है। गांव के प्रति,किसान के प्रति, नौजवान के प्रति, सैनिक के प्रति मुलायम सिंह यादव ने हम लोगों को ककहरा पढ़ाया है। मुलायम सिंह की योजनाएं आज भी पूरे देश में नकल की जाती है। हम लोगों की बस एक ही विनती है कि नेताजी स्वस्थ हो,दीर्घायु हो। जमानिया विधायक ओमप्रकाश सिंह ने आगे कहा कि मुलायम सिंह जी के साथ ऐसे यादगार पल हैं जो हम कहेंगे तो भावुक हो जाएंगे। उनकी एक खासियत यह भी रही कि वह नेता के साथ साथ एक अभिभावक की भूमिका में रहे। बतौर रक्षा मंत्री रहते हुए मुलायम सिंह द्वारा सुखोई विमान खरीदने पर बाजपेई जी ने तारीफ ही नहीं की, बल्कि बधाई देकर सदन को गौरवान्वित किया था। आज अगर हमारे विधानसभा क्षेत्र की सेवराई तहसील बनी है तो इसमें भी नेता जी का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा है कि गांव को शहर बनाओगे तभी गांव की तरक्की होगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
ऊना। हिमाचल प्रदेश में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी (प्रथम श्रेणी) के 105 पद अनुबंध आधार पर भरे जाएंगे। इस बारे जानकारी देते हुए जिला रोजगार अधिकारी ऊना अनीता गौतम ने बताया कि सामान्य श्रेणी से दिसंबर 2009 बैच के लिए 46 पद, सामान्य वर्ग में भूतपूर्व सैनिकों की श्रेणी से अब तक के बैच के लिए 12 पद, सामान्य वर्ग में स्वतंत्रता सेनानियों की श्रेणी से अब तक के बैच के लिए 1 पद, एससी श्रेणी से दिसंबर 2012 बैच के लिए 13 पद, एससी में भूतपूर्व सैनिकों की श्रेणी में अब तक के बैच के लिए 2 पद, एससी में स्वतंत्रता सेनानियों की श्रेणी में अब तक के बैच के लिए 1 पद, एसटी श्रेणी में दिसंबर 2015 बैच के लिए 6 पद, एसटी में भूतपूर्व सैनिकों की श्रेणी में अब तक के बैच के लिए 1 पद, ओबीसी श्रेणी से दिसंबर 2012 बैच के लिए 12 पद, ओबीसी वर्ग की भूतपूर्व सैनिकों की श्रेणी में अब तक के बैच के लिए 1 पद व ईडब्ल्यूएस श्रेणी में अब तक के बैच के लिए 10 पद भरे जाएंगे।
अनीता गौतम ने बताया कि इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता पांच साल की आयुर्वेद में बीएएमएस की डिग्री तथा रोटेटरी इंटरन्शिप होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा इंटरन्शिप के पूर्ण होने की तिथि से बैच मान्य होगा। इन पदों के लिए अधिकतम आयु 45 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त एससी/एसटी/ओबीसी व अन्य श्रेणियों को राज्य सरकार के मापदंडों अनुसार छूट दी जाएगी। इच्छुक एवं योग्य अभ्यार्थियों को अपना नाम संबंधित रोजगार कार्यालय में 4 जुलाई तक पंजीकरण करवा सकते हैं।
|
ऊना। हिमाचल प्रदेश में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी के एक सौ पाँच पद अनुबंध आधार पर भरे जाएंगे। इस बारे जानकारी देते हुए जिला रोजगार अधिकारी ऊना अनीता गौतम ने बताया कि सामान्य श्रेणी से दिसंबर दो हज़ार नौ बैच के लिए छियालीस पद, सामान्य वर्ग में भूतपूर्व सैनिकों की श्रेणी से अब तक के बैच के लिए बारह पद, सामान्य वर्ग में स्वतंत्रता सेनानियों की श्रेणी से अब तक के बैच के लिए एक पद, एससी श्रेणी से दिसंबर दो हज़ार बारह बैच के लिए तेरह पद, एससी में भूतपूर्व सैनिकों की श्रेणी में अब तक के बैच के लिए दो पद, एससी में स्वतंत्रता सेनानियों की श्रेणी में अब तक के बैच के लिए एक पद, एसटी श्रेणी में दिसंबर दो हज़ार पंद्रह बैच के लिए छः पद, एसटी में भूतपूर्व सैनिकों की श्रेणी में अब तक के बैच के लिए एक पद, ओबीसी श्रेणी से दिसंबर दो हज़ार बारह बैच के लिए बारह पद, ओबीसी वर्ग की भूतपूर्व सैनिकों की श्रेणी में अब तक के बैच के लिए एक पद व ईडब्ल्यूएस श्रेणी में अब तक के बैच के लिए दस पद भरे जाएंगे। अनीता गौतम ने बताया कि इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता पांच साल की आयुर्वेद में बीएएमएस की डिग्री तथा रोटेटरी इंटरन्शिप होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा इंटरन्शिप के पूर्ण होने की तिथि से बैच मान्य होगा। इन पदों के लिए अधिकतम आयु पैंतालीस वर्ष निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त एससी/एसटी/ओबीसी व अन्य श्रेणियों को राज्य सरकार के मापदंडों अनुसार छूट दी जाएगी। इच्छुक एवं योग्य अभ्यार्थियों को अपना नाम संबंधित रोजगार कार्यालय में चार जुलाई तक पंजीकरण करवा सकते हैं।
|
PATNA: ओबरा डैम स्टेशन के पास बुधवार को आधी रात हुई वाराणसी-इंटरसिटी कटनी पैसेंजर ट्रेन हादसे में ब्भ् वर्षीय संजय सिंह और ब्0 वर्षीय प्रमोद सिंह की मौत हो गई। दोनों राबर्ट्सगंज सोनभ्रद के रहने वाले थे। हादसे में म् अन्य लोग घायल हो गए, जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों को ओबरा परियोजना हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद ओबरा दिल्ली मेन लाइन प्रभावित हुई और ट्रेनों को लूप लाइन से चलाया जा रहा है। घटना के बाद मलबा हटा लिया गया है। मौके पर स्थानीय सीनियर रेल पुलिस व डिपार्टमेंट ऑफिसर भी पहुंचे थे। यह इलाका बेहद दुर्गम है और पास में ही ओबरा तापीय इलेक्ट्रिक परियोजना स्थित है।
पैसेंजर ट्रेन ओबरा डैम स्टेशन पर खड़ी थी, इसी बीच इंटरसिटी चोपन स्टेशन पर पहुंच गई। चोपन स्टेशन, जो ओबरा डैम स्टेशन से ठीक पहले पड़ता है। सूत्रो की मानें, तो जब पैसेंजर ट्रेन ओबरा स्टेशन छोड़ देती तब इंटरसिटी को चोपन से रवाना किया जाता। पर, ऐसा नहीं हुआ। इंटरसिटी को चोपन से रवाना कर दिया गया, जिससे ओबरा डैम स्टेशन पर खड़ी पैसेंजर ट्रेन के पीछे वाली बोगी से इंटरसिटी की जबरदस्त टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि इंटरसिटी का इंजन पैसेंजर ट्रेन की पिछली बोगी में जा घुसा।
|
PATNA: ओबरा डैम स्टेशन के पास बुधवार को आधी रात हुई वाराणसी-इंटरसिटी कटनी पैसेंजर ट्रेन हादसे में ब्भ् वर्षीय संजय सिंह और ब्शून्य वर्षीय प्रमोद सिंह की मौत हो गई। दोनों राबर्ट्सगंज सोनभ्रद के रहने वाले थे। हादसे में म् अन्य लोग घायल हो गए, जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों को ओबरा परियोजना हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद ओबरा दिल्ली मेन लाइन प्रभावित हुई और ट्रेनों को लूप लाइन से चलाया जा रहा है। घटना के बाद मलबा हटा लिया गया है। मौके पर स्थानीय सीनियर रेल पुलिस व डिपार्टमेंट ऑफिसर भी पहुंचे थे। यह इलाका बेहद दुर्गम है और पास में ही ओबरा तापीय इलेक्ट्रिक परियोजना स्थित है। पैसेंजर ट्रेन ओबरा डैम स्टेशन पर खड़ी थी, इसी बीच इंटरसिटी चोपन स्टेशन पर पहुंच गई। चोपन स्टेशन, जो ओबरा डैम स्टेशन से ठीक पहले पड़ता है। सूत्रो की मानें, तो जब पैसेंजर ट्रेन ओबरा स्टेशन छोड़ देती तब इंटरसिटी को चोपन से रवाना किया जाता। पर, ऐसा नहीं हुआ। इंटरसिटी को चोपन से रवाना कर दिया गया, जिससे ओबरा डैम स्टेशन पर खड़ी पैसेंजर ट्रेन के पीछे वाली बोगी से इंटरसिटी की जबरदस्त टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि इंटरसिटी का इंजन पैसेंजर ट्रेन की पिछली बोगी में जा घुसा।
|
'बिग बॉस' के घर में जाने के लिए टीवी शो 'साथ निभाना साथिया' एक्ट्रेस देवोलिना भट्टाचार्य तैयार हो गयी है लेकिन घर में एंट्री लेने से पहले देवोलिना शो के होस्ट सलमान को एक खास उपहार भेट करेंगी. दरअसल, देवोलिना सलमान को भेट स्वरूप गणेश जी की मूर्ति देंगी. रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि देवोलिना शो में गोपी बहु के किरदार में एंट्री लेंगी. सोर्सेज का कहना है कि इंट्रोडक्शन देने के बाद देवोलिना सलमान को गणेश जी की मूर्ति गिफ्ट करेंगी.
पिछले सीजन में शिल्पा शिंदे ने भी 'भाभी जी घर है' के किरदार में ही एंट्री ली थी. देखना होगा कि गोपी संस्कारी बहु बनकर दिखाई देंगी या दर्शकों को उनका अलग अवतारा देखने को मिलेगा.
|
'बिग बॉस' के घर में जाने के लिए टीवी शो 'साथ निभाना साथिया' एक्ट्रेस देवोलिना भट्टाचार्य तैयार हो गयी है लेकिन घर में एंट्री लेने से पहले देवोलिना शो के होस्ट सलमान को एक खास उपहार भेट करेंगी. दरअसल, देवोलिना सलमान को भेट स्वरूप गणेश जी की मूर्ति देंगी. रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि देवोलिना शो में गोपी बहु के किरदार में एंट्री लेंगी. सोर्सेज का कहना है कि इंट्रोडक्शन देने के बाद देवोलिना सलमान को गणेश जी की मूर्ति गिफ्ट करेंगी. पिछले सीजन में शिल्पा शिंदे ने भी 'भाभी जी घर है' के किरदार में ही एंट्री ली थी. देखना होगा कि गोपी संस्कारी बहु बनकर दिखाई देंगी या दर्शकों को उनका अलग अवतारा देखने को मिलेगा.
|
फरीदाबाद, 3 सितंबर (हप्र)
सेक्टर-86 स्थित सोसायटी में स्कूल की इमारत पर कब्जा कर कारोबारी से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने पर खेड़ी पुल थाना पुलिस ने 5 नामजद समेत अन्य के खिलाफ जबरन कब्जा, रंगदारी मांगने व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में केस दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में कारोबारी राजेश कुमार धनखड़ ने बताया कि 9 जून 2020 को उसने सेक्टर-86 स्थित सोसायटी में बिल्डर कंपनी से प्राथमिक स्कूल की इमारत खरीदी थी। सभी भुगतान पूरे होने के बाद बिल्डर कंपनी ने स्कूल के सभी अधिकार उन्हें सौंप दिए। आरोप है कि अब कुछ स्थानीय लोगों ने इमारत पर कब्जा कर लिया है। 25 जुलाई को राजेश इमारत की मरम्मत के लिए ठेकेदार के साथ पहुंचे तो बाउंसरों ने उन्हें रोक दिया। उन्हें बताया गया कि साकेत रमन, अनुराधा शर्मा, सौरभ दास, विनोद व केएम राय ने स्कूल की इमारत में किसी के घुसने पर रोक लगाई हुई है। खुद को आरडब्ल्यूए प्रधान बताने वाले साकेत रमन ने राजेश को मिलने के लिए क्लब में बुलाया। आरोप है वहां सभी ने उनसे 50 लाख रुपये की रंगदारी या स्कूल में हिस्सेदारी की मांग की। राजेश ने कहा कि जब उसने ऐसा करने से इंकार किया तो बाउंसरों ने धक्के मारकर उन्हें सोसायटी से बाहर कर दिया गया। दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी दी।
थाना खेड़ीपुल प्रभारी योगवेन्द्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है। जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
|
फरीदाबाद, तीन सितंबर सेक्टर-छियासी स्थित सोसायटी में स्कूल की इमारत पर कब्जा कर कारोबारी से पचास लाख रुपये की रंगदारी मांगने पर खेड़ी पुल थाना पुलिस ने पाँच नामजद समेत अन्य के खिलाफ जबरन कब्जा, रंगदारी मांगने व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में केस दर्ज किया है। पुलिस को दी शिकायत में कारोबारी राजेश कुमार धनखड़ ने बताया कि नौ जून दो हज़ार बीस को उसने सेक्टर-छियासी स्थित सोसायटी में बिल्डर कंपनी से प्राथमिक स्कूल की इमारत खरीदी थी। सभी भुगतान पूरे होने के बाद बिल्डर कंपनी ने स्कूल के सभी अधिकार उन्हें सौंप दिए। आरोप है कि अब कुछ स्थानीय लोगों ने इमारत पर कब्जा कर लिया है। पच्चीस जुलाई को राजेश इमारत की मरम्मत के लिए ठेकेदार के साथ पहुंचे तो बाउंसरों ने उन्हें रोक दिया। उन्हें बताया गया कि साकेत रमन, अनुराधा शर्मा, सौरभ दास, विनोद व केएम राय ने स्कूल की इमारत में किसी के घुसने पर रोक लगाई हुई है। खुद को आरडब्ल्यूए प्रधान बताने वाले साकेत रमन ने राजेश को मिलने के लिए क्लब में बुलाया। आरोप है वहां सभी ने उनसे पचास लाख रुपये की रंगदारी या स्कूल में हिस्सेदारी की मांग की। राजेश ने कहा कि जब उसने ऐसा करने से इंकार किया तो बाउंसरों ने धक्के मारकर उन्हें सोसायटी से बाहर कर दिया गया। दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी दी। थाना खेड़ीपुल प्रभारी योगवेन्द्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है। जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
|
सोनल चौहान अपने स्टाइलिश लुक्स के कारण अक्सर लाइमलाइट में बनी रहती हैं।
सोनल सोशल मीडिया फ्रेंडली हैं और वे आए दिन अपनी तस्वीरें और वीडियोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं।
सोनल अपने हर लुक में परफेक्ट लगती हैं फिर चाहे वे वेस्टर्न हो या फिर इंडियन।
अपनी लेटेस्ट तस्वीरों में सोनल ने अप्सरा लुक को कैरी किया है जिसमें वे बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं।
सोनल पर ये ब्लू ऑफ शोल्डर ड्रेस खूब फब रहा है। साथ ही हाई पोनीटेल हेयरस्टाइल उनके लुक को और भी ज्यादा गॉर्जियस बना रहा है।
सोनल ने एक बार फिर अपने हुस्न का जादू बिखेर दिया है जिसे देख फैंस खुद पर काबू नहीं कर पा रहे हैं।
|
सोनल चौहान अपने स्टाइलिश लुक्स के कारण अक्सर लाइमलाइट में बनी रहती हैं। सोनल सोशल मीडिया फ्रेंडली हैं और वे आए दिन अपनी तस्वीरें और वीडियोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं। सोनल अपने हर लुक में परफेक्ट लगती हैं फिर चाहे वे वेस्टर्न हो या फिर इंडियन। अपनी लेटेस्ट तस्वीरों में सोनल ने अप्सरा लुक को कैरी किया है जिसमें वे बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं। सोनल पर ये ब्लू ऑफ शोल्डर ड्रेस खूब फब रहा है। साथ ही हाई पोनीटेल हेयरस्टाइल उनके लुक को और भी ज्यादा गॉर्जियस बना रहा है। सोनल ने एक बार फिर अपने हुस्न का जादू बिखेर दिया है जिसे देख फैंस खुद पर काबू नहीं कर पा रहे हैं।
|
हिसुआ (नवादा) शनिवार को हिसुआ थाना में थानाध्यक्ष राजकुमार एवं अंचलाधिकारी नीतेश कुमार की अध्यक्षता में ईद को लेकर शांति समिति की बैठक की बैठक की गई। जिसमें प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों लोग शामिल हुए और तैयारियों को लेकर अपनी-अपनी बातों को अधिकारियों के सामने रखा। बैठक में सीओ नीतेश कुमार ने कहा कि इस समय कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से हमलोग लड़ रहे हैं ऐसे में ईद के मौके पर आपलोग सामूहिक रूप से नमाज अदा नही करें । अपने-अपने घरों में नमाज अदा कर शारीरिक दूरी बनाते हुए अपने त्योहार को शांति पूर्वक मनाये। थानाध्यक्ष ने उपस्थित लोगों से कहा कि थानाक्षेत्र में ईद का त्योहार शारीरिक दूरी व लॉकडाउन की सारी शर्तो को पूरी तरह से मानते हुए त्योहार मनायें त्योहार के मौके पर आपसी भाईचारा को बिगाड़ने वाले लोगो के विरुद्ध कड़ी कार्यवाई की जायेगी। बैठक में उपस्थित लोगों ने भी कहा कि हमलोग प्रशासन के द्वारा दिये हुए गाइडलाइन को ध्याना में रखते हुए त्योहार मनाएंगे। इस मौके पर बीडीओ डॉ. मृत्युंजय कुमार, नगर उपाध्यक्ष शंभू शर्मा, दिलीप कुमार, अशोक कुमार बिल्टु ,मोहम्मद नन्हु, पप्पू खान समेत अन्य लोग शामिल हुए ।
|
हिसुआ शनिवार को हिसुआ थाना में थानाध्यक्ष राजकुमार एवं अंचलाधिकारी नीतेश कुमार की अध्यक्षता में ईद को लेकर शांति समिति की बैठक की बैठक की गई। जिसमें प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों लोग शामिल हुए और तैयारियों को लेकर अपनी-अपनी बातों को अधिकारियों के सामने रखा। बैठक में सीओ नीतेश कुमार ने कहा कि इस समय कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से हमलोग लड़ रहे हैं ऐसे में ईद के मौके पर आपलोग सामूहिक रूप से नमाज अदा नही करें । अपने-अपने घरों में नमाज अदा कर शारीरिक दूरी बनाते हुए अपने त्योहार को शांति पूर्वक मनाये। थानाध्यक्ष ने उपस्थित लोगों से कहा कि थानाक्षेत्र में ईद का त्योहार शारीरिक दूरी व लॉकडाउन की सारी शर्तो को पूरी तरह से मानते हुए त्योहार मनायें त्योहार के मौके पर आपसी भाईचारा को बिगाड़ने वाले लोगो के विरुद्ध कड़ी कार्यवाई की जायेगी। बैठक में उपस्थित लोगों ने भी कहा कि हमलोग प्रशासन के द्वारा दिये हुए गाइडलाइन को ध्याना में रखते हुए त्योहार मनाएंगे। इस मौके पर बीडीओ डॉ. मृत्युंजय कुमार, नगर उपाध्यक्ष शंभू शर्मा, दिलीप कुमार, अशोक कुमार बिल्टु ,मोहम्मद नन्हु, पप्पू खान समेत अन्य लोग शामिल हुए ।
|
मैं इस मामले में भाग्यवान था कि मैं जिस वातावरण में पला-बढ़ा, वह मेरे मानसिक स्तर को विकसित करने में सहायक था। अपने बचपन में मैं अंग्रेजों, अंग्रेजी शिक्षा और अंग्रेजी संस्कृति के संपर्क में था, और इसके बाद मैं अपनी गौरवमयी तथा आधुनिक संस्कृति में वापस लौटा तथा जब मैं स्कूल में था, तब भी मेरे अंतरप्रांतीय संबंध और मित्रता थी।
यदि मैं बंगाल में रह रहा होता, तब मैं इनसे वंचित होता। और तो और, मुसलमानों के प्रति भी मेरा दृष्टिकोण मेरे शुरुआती संपर्कों से प्रभावित था। मैं जिस स्थान में रहता था, वह मुस्लिम बहुलता वाला था और हमारे अधिकतर पड़ोसी भी मुसलमान ही थे। वे सभी हमारे पिता को उसी रूप में देखते थे, जैसे कि एक आम ग्रामीण ग्राम कुलपति को देखता है। हम उनके मुहर्रम आदि में शामिल होते थे और उनके अखाड़े का मजा भी लेते थे।
हमारे नौकरों में से कुछ मुसलमान भी थे, जो कि दूसरों की ही तरह हमारे प्रति सेवाभाव रखते थे। स्कूल में भी मेरे मुस्लिम सहपाठी और शिक्षक थे, जिसके साथ हमारे संबंध बेहतर थे। वाकई मुझे याद नहीं है कि हमने उन्हें कभी अपने से अलग रूप में देखा। मेरे शुरुआती दिनों में हिंदुओं और मुसलमानों में विरोध की बात नहीं थी।
मैं जिस माहौल में पला-बढ़ा था, वह काफी मुक्त था और शायद ही मैं कभी किसी सामाजिक या पारिवारिक परंपरावादी विवाद में पड़ा था। मैं चौदह या पंद्रह साल का था कि तब की एक घटना मुझे याद है। मेरी कक्षा का एक मित्र, जो कि मेरा पड़ोसी भी था, उसने हममें से कुछ लोगों को घर पर खाने के लिए बुलाया था। मेरी माताजी को जब यह पता चला, तब उन्होंने हम में से किसी को भी वहाँ जाने से मना कर दिया था। इसका कारण शायद उनका सामाजिक स्तर हमसे कम होगा या फिर वह निचली जाति का होगा या शायद स्वास्थ्य के कारण हमें बाहर खाने से मना किया होगा। किंतु यह भी सत्य है कि हम मुश्किल से ही बाहर खाना खाते थे।
हालाँकि मुझे अपनी माँ का आदेश न्यायोचित नहीं लगा था और इसका विरोध करने में मुझे एक खास तरह के आनंद की अनुभूति हुई थी। जब से मैंने धर्म और योग को गंभीरतापूर्वक लिया और जहाँ कहीं भी मैं जाना चाहता या जिससे भी मिलने की स्वतंत्रता चाहता था, मैं अपने माता-पिता के निर्देशों के खिलाफ हो जाता था। अपने माता-पिता की अवज्ञा करने में उन दिनों मुझे विवेकानंद की प्रेरणा का असर लगता था, जिसके अनुसार, आत्मपूर्ति के लिए विद्रोह आवश्यक है, क्योंकि जब एक बच्चा पैदा होता है, तब इसका प्रत्येक रुदन उस बंधन के खिलाफ विद्रोह है, जिसमें वह स्वयं को पाता है। अपने स्कूल के दिनों की याद करते समय मुझे लगता है कि मैं जब भी किसी के सामने जाता था, तब मैं एक अड़ियल, मौजी और जिद्दी बच्चे के रूप में ही होता था। मुझसे यह उम्मीद की जाती थी कि मैं मैट्रिकुलेशन के इम्तिहान में अच्छा करूँगा और अपने स्कूल का नाम रौशन करूँगा, पर मेरे शिक्षकों को तब बहुत हताशा हुई, जब उन्होंने मुझे अपनी पढ़ाई की अनदेखी करते और भभूत लपेटे साधुओं के पीछे भागते देखा था। मेरे माता-पिता को भी लगता था कि उनके मेधावी लड़के का दिमाग खराब हो गया है, परंतु मुझपर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता था, मेरे लिए तो मेरे आंतरिक स्वप्न ही मायने रखते थे। मेरा जितना भी विरोध होता, मैं उतना ही जिद्दी होता जाता था। इस स्थिति में मेरे मात-पिता ने सोचा कि वातावरण का परिवर्तन शायद मुझमें कुछ बेहतर कर सके, इसलिए कलकत्ता के वातावरण में मैं अपनी सनक छोड़कर अपने बाकी लोगों की तरह ही सामान्य जीवन बिता सकूँगा।
सन् 1913 में मैं अपने मैट्रिकुलेशन के इम्तिहान में बैठा और विश्वविद्यालय में मेरा दूसरा स्थान था। मेरे माता-पिता बहुत खुश थे और फिर मैं कलकत्ता के लिए रवाना कर दिया गया।
स्रोत - सुभाष चंद्र बोस की अधूरी आत्मकथा( संपादक शिशिर कुमार बोस & सुगत बोस )
|
मैं इस मामले में भाग्यवान था कि मैं जिस वातावरण में पला-बढ़ा, वह मेरे मानसिक स्तर को विकसित करने में सहायक था। अपने बचपन में मैं अंग्रेजों, अंग्रेजी शिक्षा और अंग्रेजी संस्कृति के संपर्क में था, और इसके बाद मैं अपनी गौरवमयी तथा आधुनिक संस्कृति में वापस लौटा तथा जब मैं स्कूल में था, तब भी मेरे अंतरप्रांतीय संबंध और मित्रता थी। यदि मैं बंगाल में रह रहा होता, तब मैं इनसे वंचित होता। और तो और, मुसलमानों के प्रति भी मेरा दृष्टिकोण मेरे शुरुआती संपर्कों से प्रभावित था। मैं जिस स्थान में रहता था, वह मुस्लिम बहुलता वाला था और हमारे अधिकतर पड़ोसी भी मुसलमान ही थे। वे सभी हमारे पिता को उसी रूप में देखते थे, जैसे कि एक आम ग्रामीण ग्राम कुलपति को देखता है। हम उनके मुहर्रम आदि में शामिल होते थे और उनके अखाड़े का मजा भी लेते थे। हमारे नौकरों में से कुछ मुसलमान भी थे, जो कि दूसरों की ही तरह हमारे प्रति सेवाभाव रखते थे। स्कूल में भी मेरे मुस्लिम सहपाठी और शिक्षक थे, जिसके साथ हमारे संबंध बेहतर थे। वाकई मुझे याद नहीं है कि हमने उन्हें कभी अपने से अलग रूप में देखा। मेरे शुरुआती दिनों में हिंदुओं और मुसलमानों में विरोध की बात नहीं थी। मैं जिस माहौल में पला-बढ़ा था, वह काफी मुक्त था और शायद ही मैं कभी किसी सामाजिक या पारिवारिक परंपरावादी विवाद में पड़ा था। मैं चौदह या पंद्रह साल का था कि तब की एक घटना मुझे याद है। मेरी कक्षा का एक मित्र, जो कि मेरा पड़ोसी भी था, उसने हममें से कुछ लोगों को घर पर खाने के लिए बुलाया था। मेरी माताजी को जब यह पता चला, तब उन्होंने हम में से किसी को भी वहाँ जाने से मना कर दिया था। इसका कारण शायद उनका सामाजिक स्तर हमसे कम होगा या फिर वह निचली जाति का होगा या शायद स्वास्थ्य के कारण हमें बाहर खाने से मना किया होगा। किंतु यह भी सत्य है कि हम मुश्किल से ही बाहर खाना खाते थे। हालाँकि मुझे अपनी माँ का आदेश न्यायोचित नहीं लगा था और इसका विरोध करने में मुझे एक खास तरह के आनंद की अनुभूति हुई थी। जब से मैंने धर्म और योग को गंभीरतापूर्वक लिया और जहाँ कहीं भी मैं जाना चाहता या जिससे भी मिलने की स्वतंत्रता चाहता था, मैं अपने माता-पिता के निर्देशों के खिलाफ हो जाता था। अपने माता-पिता की अवज्ञा करने में उन दिनों मुझे विवेकानंद की प्रेरणा का असर लगता था, जिसके अनुसार, आत्मपूर्ति के लिए विद्रोह आवश्यक है, क्योंकि जब एक बच्चा पैदा होता है, तब इसका प्रत्येक रुदन उस बंधन के खिलाफ विद्रोह है, जिसमें वह स्वयं को पाता है। अपने स्कूल के दिनों की याद करते समय मुझे लगता है कि मैं जब भी किसी के सामने जाता था, तब मैं एक अड़ियल, मौजी और जिद्दी बच्चे के रूप में ही होता था। मुझसे यह उम्मीद की जाती थी कि मैं मैट्रिकुलेशन के इम्तिहान में अच्छा करूँगा और अपने स्कूल का नाम रौशन करूँगा, पर मेरे शिक्षकों को तब बहुत हताशा हुई, जब उन्होंने मुझे अपनी पढ़ाई की अनदेखी करते और भभूत लपेटे साधुओं के पीछे भागते देखा था। मेरे माता-पिता को भी लगता था कि उनके मेधावी लड़के का दिमाग खराब हो गया है, परंतु मुझपर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता था, मेरे लिए तो मेरे आंतरिक स्वप्न ही मायने रखते थे। मेरा जितना भी विरोध होता, मैं उतना ही जिद्दी होता जाता था। इस स्थिति में मेरे मात-पिता ने सोचा कि वातावरण का परिवर्तन शायद मुझमें कुछ बेहतर कर सके, इसलिए कलकत्ता के वातावरण में मैं अपनी सनक छोड़कर अपने बाकी लोगों की तरह ही सामान्य जीवन बिता सकूँगा। सन् एक हज़ार नौ सौ तेरह में मैं अपने मैट्रिकुलेशन के इम्तिहान में बैठा और विश्वविद्यालय में मेरा दूसरा स्थान था। मेरे माता-पिता बहुत खुश थे और फिर मैं कलकत्ता के लिए रवाना कर दिया गया। स्रोत - सुभाष चंद्र बोस की अधूरी आत्मकथा
|
खस्ते का नाम तो आपने अक्सर ही सुना होगा इसे लोग खस्ता कचौड़ी के नाम से भी जानते हैं, कुछ लोग इसे चाय के साथ लेना पसंद करते हैं तो कुछ लोग घर पर बनी शानदार आलू की सब्जी के साथ खाना पसंद करते हैं. आइए जानते हैं इस खस्ता कचौड़ी को घर पर कैसे बनाते हैं.
सबसे पहले उड़द के दाल को साफ करके 3-4 घंटे तक पानी में भिंगोकर रख दें, हरी मिर्च का डंडल हटाकर उसे धो लें, फिर उसे मोटा-मोटा काट लें.
अब भिंगी हुई उड़द के दाल से पानी को निकालकर उसे अच्छे से साफ करलें फिर उसमें अदरक, लहसून और हरी मिर्च डालकर ग्राइंड कर लें. अब एक कड़ाही को गर्म करें उसमें तेल और हींग डालकर उसे अच्छे से गर्म करें, उसके बाद उसमें पीसी हुई दाल डालकर चलाएं.
अब दाल को करीब 10 मिनट तक भूनें, जब दाल अच्छे से भून जाए तो उसमें नमक और सोड़ा डालकर अच्छे से चलाएं.
अब एक बर्तन में मैदा को डालें, फिर उसमें सूजी और खाने का सोडा डालें, अब इन्हें दोनों हाथों से अच्छे से मिलाएं, अब इसे सॉफ्ट करने के लिए इसमें मोयन डालें. अब उसमें पानी डालते हुए आटा को मुलायम करने तक गुंथे,
जब आटा गूंथ जाए तो उसमें फ्राई दाल डालकर लोई बनाएं फिर इसे पुरी का आकार देकर तेल में फ्राई कर लें. अब आपकी कचौड़ी बनकर तैयार है. आप इसे सर्व कर सकते हैं चटनी के साथ.
|
खस्ते का नाम तो आपने अक्सर ही सुना होगा इसे लोग खस्ता कचौड़ी के नाम से भी जानते हैं, कुछ लोग इसे चाय के साथ लेना पसंद करते हैं तो कुछ लोग घर पर बनी शानदार आलू की सब्जी के साथ खाना पसंद करते हैं. आइए जानते हैं इस खस्ता कचौड़ी को घर पर कैसे बनाते हैं. सबसे पहले उड़द के दाल को साफ करके तीन-चार घंटाटे तक पानी में भिंगोकर रख दें, हरी मिर्च का डंडल हटाकर उसे धो लें, फिर उसे मोटा-मोटा काट लें. अब भिंगी हुई उड़द के दाल से पानी को निकालकर उसे अच्छे से साफ करलें फिर उसमें अदरक, लहसून और हरी मिर्च डालकर ग्राइंड कर लें. अब एक कड़ाही को गर्म करें उसमें तेल और हींग डालकर उसे अच्छे से गर्म करें, उसके बाद उसमें पीसी हुई दाल डालकर चलाएं. अब दाल को करीब दस मिनट तक भूनें, जब दाल अच्छे से भून जाए तो उसमें नमक और सोड़ा डालकर अच्छे से चलाएं. अब एक बर्तन में मैदा को डालें, फिर उसमें सूजी और खाने का सोडा डालें, अब इन्हें दोनों हाथों से अच्छे से मिलाएं, अब इसे सॉफ्ट करने के लिए इसमें मोयन डालें. अब उसमें पानी डालते हुए आटा को मुलायम करने तक गुंथे, जब आटा गूंथ जाए तो उसमें फ्राई दाल डालकर लोई बनाएं फिर इसे पुरी का आकार देकर तेल में फ्राई कर लें. अब आपकी कचौड़ी बनकर तैयार है. आप इसे सर्व कर सकते हैं चटनी के साथ.
|
मेषः आज कार्यक्षेत्र की परिस्थितियां खराब हो सकती हैं इसलिए काम धीरे-धीरे ही निपटाएं। पैसे के लेन देन के मामले में सफलता के साथ खर्च के नए प्रस्ताव जुड़ेंगे। दूसरों की सहायता लेनी पड़ सकती है, चोर आदि से सावधानी रखें।
वृषभः आज ऑफिस में अच्छे लोगों से मेल मुलाकात होगी। सामाजिक प्रतिष्ठा के प्रति संवेदनशील रहेंगे। किसी प्रकार की बहसबाजी से बचें और दूसरों की भावनाओं को चोट न पहुंचाएं। पैसा बचाने के लिए हर संभव काम करें।
मिथुनः आज भाग्यवर्धक दिन है, इसलिए इसका पूरा फायदा उठाएं और कोई भी पल व्यर्थ न गवाएं। ऑफिस में आपकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और आपकी योजना के अनुसार कार्य संपन्न होगा। पार्टनर के साथ रिश्तों में टेंशन कुछ कम महसूस करेंगे।
कर्कः आज दोपहर बाद कुछ टेंशन कम होगी। बिजनेस में लाभ होगा। साहित्य में रूचि बढ़ेगी और पढ़ाई लिखाई में खूब मन लगेगा। ऑफिस में कोई महत्वपूर्ण सफलता धन लाभ देगी। भूमि जायदाद से लाभ होगा। ज्ञान विज्ञान में बढ़ोतरी होगी।
सिंहः आज दिन अच्छा ही गुजरेगा लेकिन दोपहर में कुछ शरारती लोग आपके काम में टांग अड़ाने की कोशिश करेंगे। सीनियर लोगों की मदद से समस्या को सुलझाने में मदद मिलेगी। धीरज से काम लें। पारिवारिक विवादों से बचना कठिन होगा।
कन्याः आज दोपहर बाद ही योजनाएं फायदा पहुंचाने लगेंगी। पारिवारिक असुविधाएं व घर से जुड़े कष्टों का हल खोजना आवश्यक होगा। मिलजुलकर सबका सहयोग लेना ही फायदे का सौदा साबित होगा। काम मे व्यस्तता तो बढ़ेगी लेकिन उसका लाभ आपके सारे तनाव को दूर करेगा।
तुलाः आज दोपहर तक किसी कारण से परेशानी होगी, लेकिन शाम तक उसका हल निकालने से खुशी भी उतनी ही मिलेगी। शुभ कार्य के लिए पैसों का इंतजाम करना पड़ेगा, इसलिए जल्द से जल्द जुट जाएं। बौद्धिक प्रयासों में सफलता मिलेगी।
वृश्चिकः आज किसी से उल्टा सीधा कहने से आपकी पर्सनेलिटी पर ही बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए आज जुबान को काबू में रखना ही फायदेमंद होगा। मन की चंचलता पर अंकुश रखकर ही नई समस्याओं का समाधान अच्छी तरह से कर पाएंगे।
धनुः आज का दिन महत्वपूर्ण है। दोस्तों और मित्रों का सहयोग और साथ बढ़ेगा और उन पर अपने अधिकार का सुख भी। काम में आने वाली रूकावटें दूर हो जाएंगी। मनपसन्द काम में कामयाबी मिलने से खुशी बनी रहेगी।
मकरः आज का दिन कुछ हटकर काम करने का है। कल की मौजमस्ती आपके आज पर टिकी है, तैयार रहें। आने जाने में बाधा नहीं आएगी। परिवार की उम्मीदें बढ़ेंगी। रिजल्ट अच्छा आएगा। किसी प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त करने की चिंता रहेगी। पारिवारिक जिम्मेदारियां निभानी होगी।
कुंभः आज आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है इसलिए खानपान पर ध्यान दें। योजनाएं पूरी कर लेंगे। संयोगवश सभी प्रकार के कठिन काम खुद ही बनते जाएंगे और सफलता से हैरानी होगी। बिना प्रशिक्षण के भी आप बहुत जानकारी रखते हैं।
मीनः आज दोपहर के बाद खर्च के मौके सामने आएंगे। किसी अभद्र व्यक्ति के कारण मूड खराब हो सकता है। अपने मान सम्मान को बचाकर रखना पड़ेगा। परिवार में शांति रहेगी। प्रिय के साथ एकांत के पल गुजारने से रिश्तों में मजबूती आएगी।
|
मेषः आज कार्यक्षेत्र की परिस्थितियां खराब हो सकती हैं इसलिए काम धीरे-धीरे ही निपटाएं। पैसे के लेन देन के मामले में सफलता के साथ खर्च के नए प्रस्ताव जुड़ेंगे। दूसरों की सहायता लेनी पड़ सकती है, चोर आदि से सावधानी रखें। वृषभः आज ऑफिस में अच्छे लोगों से मेल मुलाकात होगी। सामाजिक प्रतिष्ठा के प्रति संवेदनशील रहेंगे। किसी प्रकार की बहसबाजी से बचें और दूसरों की भावनाओं को चोट न पहुंचाएं। पैसा बचाने के लिए हर संभव काम करें। मिथुनः आज भाग्यवर्धक दिन है, इसलिए इसका पूरा फायदा उठाएं और कोई भी पल व्यर्थ न गवाएं। ऑफिस में आपकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और आपकी योजना के अनुसार कार्य संपन्न होगा। पार्टनर के साथ रिश्तों में टेंशन कुछ कम महसूस करेंगे। कर्कः आज दोपहर बाद कुछ टेंशन कम होगी। बिजनेस में लाभ होगा। साहित्य में रूचि बढ़ेगी और पढ़ाई लिखाई में खूब मन लगेगा। ऑफिस में कोई महत्वपूर्ण सफलता धन लाभ देगी। भूमि जायदाद से लाभ होगा। ज्ञान विज्ञान में बढ़ोतरी होगी। सिंहः आज दिन अच्छा ही गुजरेगा लेकिन दोपहर में कुछ शरारती लोग आपके काम में टांग अड़ाने की कोशिश करेंगे। सीनियर लोगों की मदद से समस्या को सुलझाने में मदद मिलेगी। धीरज से काम लें। पारिवारिक विवादों से बचना कठिन होगा। कन्याः आज दोपहर बाद ही योजनाएं फायदा पहुंचाने लगेंगी। पारिवारिक असुविधाएं व घर से जुड़े कष्टों का हल खोजना आवश्यक होगा। मिलजुलकर सबका सहयोग लेना ही फायदे का सौदा साबित होगा। काम मे व्यस्तता तो बढ़ेगी लेकिन उसका लाभ आपके सारे तनाव को दूर करेगा। तुलाः आज दोपहर तक किसी कारण से परेशानी होगी, लेकिन शाम तक उसका हल निकालने से खुशी भी उतनी ही मिलेगी। शुभ कार्य के लिए पैसों का इंतजाम करना पड़ेगा, इसलिए जल्द से जल्द जुट जाएं। बौद्धिक प्रयासों में सफलता मिलेगी। वृश्चिकः आज किसी से उल्टा सीधा कहने से आपकी पर्सनेलिटी पर ही बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए आज जुबान को काबू में रखना ही फायदेमंद होगा। मन की चंचलता पर अंकुश रखकर ही नई समस्याओं का समाधान अच्छी तरह से कर पाएंगे। धनुः आज का दिन महत्वपूर्ण है। दोस्तों और मित्रों का सहयोग और साथ बढ़ेगा और उन पर अपने अधिकार का सुख भी। काम में आने वाली रूकावटें दूर हो जाएंगी। मनपसन्द काम में कामयाबी मिलने से खुशी बनी रहेगी। मकरः आज का दिन कुछ हटकर काम करने का है। कल की मौजमस्ती आपके आज पर टिकी है, तैयार रहें। आने जाने में बाधा नहीं आएगी। परिवार की उम्मीदें बढ़ेंगी। रिजल्ट अच्छा आएगा। किसी प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त करने की चिंता रहेगी। पारिवारिक जिम्मेदारियां निभानी होगी। कुंभः आज आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है इसलिए खानपान पर ध्यान दें। योजनाएं पूरी कर लेंगे। संयोगवश सभी प्रकार के कठिन काम खुद ही बनते जाएंगे और सफलता से हैरानी होगी। बिना प्रशिक्षण के भी आप बहुत जानकारी रखते हैं। मीनः आज दोपहर के बाद खर्च के मौके सामने आएंगे। किसी अभद्र व्यक्ति के कारण मूड खराब हो सकता है। अपने मान सम्मान को बचाकर रखना पड़ेगा। परिवार में शांति रहेगी। प्रिय के साथ एकांत के पल गुजारने से रिश्तों में मजबूती आएगी।
|
लंबे समय से सोचा गया है कि काले बिल्लियों दुष्ट आत्माओं के अपरिवर्तनीय उपग्रह हैं। यहां तक कि किंवदंतियों और परी कथाओं में भी यह कहा जाता है कि प्रत्येक आत्म-सम्मानित चुड़ैल में अन्य दुनिया के बल के साथ संबंध का "गुण" रहता है। यही कारण है कि एक काला बिल्ली दुखी होने का एक हर्जर है, जो संकेतों के बारे में बताता है।
तो क्या काला बिल्ली भयानक है?
नकारात्मक के बारे में प्रतिनिधित्व, जो कथित रूप से, एक काले बिल्ली पर भालू, वास्तव में, वास्तविकता के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा, यह काले बिल्लियों है जो मनुष्य से परेशानी को दूर करने में सक्षम हैं। तो, अगर काला बिल्ली घर में है, तो इसके साथ क्या संकेत हैं।
- बस ध्यान दें कि एक काला बिल्ली जो एक घर में रहती है, एक नियम के रूप में, अपने स्वामी को भाग्य लाती है, बशर्ते कि वे अपने चार पैर वाले परिवार के सदस्य से प्यार करें।
- निवास की एक नई जगह पर जाने के दौरान, यह काले बिल्लियों थी जो घर में प्रवेश करने वाले पहले व्यक्ति थेः हमारे पूर्वजों को पता था कि ये जानवर घर में होने पर नकारात्मक ऊर्जा लेने में सक्षम हैं। अन्यथा, घर परिवार के पुराने सदस्य को "ले सकता"।
- घर में एक काले बिल्ली ने दिलचस्प संकेतों और अंधविश्वासों को जन्म दिया, जो अभी भी जीवित हैं।
- वे कहते हैं कि काले रंग की बिल्ली अपने मालिकों को बुरी और ईर्ष्या से बचाती है।
- अगर एक बेघर काले बिल्ली का बच्चा घर पर खींचा जाता है तो इसे एक बड़ी सफलता माना जाता था - इसका मतलब है कि बुराई बलों से सुरक्षा विशेष रूप से इस घर को निर्देशित की जाती है।
- ऐसा माना जाता था कि एक काले बिल्ली , जिसने एक युवा लड़की के लिए अपना रास्ता खो दिया था, एक निश्चित संकेत था कि वह प्रशंसकों के साथ सफलता का आनंद उठाएगी।
- एक बिल्ली, जिसका रंग चेरनोज़ेम के रंग के समान होता है, को प्रजनन क्षमता और अच्छी फसल का प्रतीक माना जाता था।
यदि काला, बल्कि, एक सकारात्मक संकेत, काले बिल्लियों के लिए नकारात्मक दृष्टिकोण कहाँ से आया? यह पता चला है कि यह जांच के दौरान यूरोप को "प्रबुद्ध" यूरोप से आया था, जब महिलाओं को हिस्सेदारी पर जला दिया गया था, जादूगर के आरोपी, और काले बिल्लियों ने शैतान के दूतावासों जैसे यूरोपीय लोगों को आतंक लाया था। यही कारण है कि जब काला बिल्ली सड़क पार कर गई, तो हस्ताक्षर ने खुद को दैविक प्रभाव से "रक्षा" करने की मांग कीः अपनी जेब में आंकड़ा मोड़ो, अपने बाएं कंधे पर तीन बार थूकें या बस दूसरी तरफ जाएं। लेकिन यह - मध्य युग के पूर्वाग्रह, और हम, आधुनिक लोगों, उन्हें जरूरत नहीं है।
|
लंबे समय से सोचा गया है कि काले बिल्लियों दुष्ट आत्माओं के अपरिवर्तनीय उपग्रह हैं। यहां तक कि किंवदंतियों और परी कथाओं में भी यह कहा जाता है कि प्रत्येक आत्म-सम्मानित चुड़ैल में अन्य दुनिया के बल के साथ संबंध का "गुण" रहता है। यही कारण है कि एक काला बिल्ली दुखी होने का एक हर्जर है, जो संकेतों के बारे में बताता है। तो क्या काला बिल्ली भयानक है? नकारात्मक के बारे में प्रतिनिधित्व, जो कथित रूप से, एक काले बिल्ली पर भालू, वास्तव में, वास्तविकता के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा, यह काले बिल्लियों है जो मनुष्य से परेशानी को दूर करने में सक्षम हैं। तो, अगर काला बिल्ली घर में है, तो इसके साथ क्या संकेत हैं। - बस ध्यान दें कि एक काला बिल्ली जो एक घर में रहती है, एक नियम के रूप में, अपने स्वामी को भाग्य लाती है, बशर्ते कि वे अपने चार पैर वाले परिवार के सदस्य से प्यार करें। - निवास की एक नई जगह पर जाने के दौरान, यह काले बिल्लियों थी जो घर में प्रवेश करने वाले पहले व्यक्ति थेः हमारे पूर्वजों को पता था कि ये जानवर घर में होने पर नकारात्मक ऊर्जा लेने में सक्षम हैं। अन्यथा, घर परिवार के पुराने सदस्य को "ले सकता"। - घर में एक काले बिल्ली ने दिलचस्प संकेतों और अंधविश्वासों को जन्म दिया, जो अभी भी जीवित हैं। - वे कहते हैं कि काले रंग की बिल्ली अपने मालिकों को बुरी और ईर्ष्या से बचाती है। - अगर एक बेघर काले बिल्ली का बच्चा घर पर खींचा जाता है तो इसे एक बड़ी सफलता माना जाता था - इसका मतलब है कि बुराई बलों से सुरक्षा विशेष रूप से इस घर को निर्देशित की जाती है। - ऐसा माना जाता था कि एक काले बिल्ली , जिसने एक युवा लड़की के लिए अपना रास्ता खो दिया था, एक निश्चित संकेत था कि वह प्रशंसकों के साथ सफलता का आनंद उठाएगी। - एक बिल्ली, जिसका रंग चेरनोज़ेम के रंग के समान होता है, को प्रजनन क्षमता और अच्छी फसल का प्रतीक माना जाता था। यदि काला, बल्कि, एक सकारात्मक संकेत, काले बिल्लियों के लिए नकारात्मक दृष्टिकोण कहाँ से आया? यह पता चला है कि यह जांच के दौरान यूरोप को "प्रबुद्ध" यूरोप से आया था, जब महिलाओं को हिस्सेदारी पर जला दिया गया था, जादूगर के आरोपी, और काले बिल्लियों ने शैतान के दूतावासों जैसे यूरोपीय लोगों को आतंक लाया था। यही कारण है कि जब काला बिल्ली सड़क पार कर गई, तो हस्ताक्षर ने खुद को दैविक प्रभाव से "रक्षा" करने की मांग कीः अपनी जेब में आंकड़ा मोड़ो, अपने बाएं कंधे पर तीन बार थूकें या बस दूसरी तरफ जाएं। लेकिन यह - मध्य युग के पूर्वाग्रह, और हम, आधुनिक लोगों, उन्हें जरूरत नहीं है।
|
भारतीय टेस्ट टीम के उप कप्तान अजिंक्य रहाणे का चौथे टेस्ट का हिस्सा रहने वाले हैं। भारत के लिए चौथे टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करना जरुरी है, ऐसे में टीम के अनुभवी व टेस्ट स्पेशलिस्ट बल्लेबाजों में शुमार अजिंक्य रहाणे पर नजरें रहेंगी। अब वह इस आखिरी मैच में बड़ी पारी खेलकर टीम को जीत दिलाने के उद्देश्य के साथ मैदान पर उतरना चाहेंगे।
भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत का भी चौथे टेस्ट में खेलना तय है। पंत पिंक बॉल टेस्ट मैच में कुछ खास रन नहीं बना सके। लेकिन अब आखिरी टेस्ट मैच में उनसे एक बड़ी और विस्फोटक पारी की उम्मीद रहेगी। साथ ही उनकी विकेटकीपिंग पर एक बार फिर सभी की नजरें टिकी होंगी।
|
भारतीय टेस्ट टीम के उप कप्तान अजिंक्य रहाणे का चौथे टेस्ट का हिस्सा रहने वाले हैं। भारत के लिए चौथे टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करना जरुरी है, ऐसे में टीम के अनुभवी व टेस्ट स्पेशलिस्ट बल्लेबाजों में शुमार अजिंक्य रहाणे पर नजरें रहेंगी। अब वह इस आखिरी मैच में बड़ी पारी खेलकर टीम को जीत दिलाने के उद्देश्य के साथ मैदान पर उतरना चाहेंगे। भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत का भी चौथे टेस्ट में खेलना तय है। पंत पिंक बॉल टेस्ट मैच में कुछ खास रन नहीं बना सके। लेकिन अब आखिरी टेस्ट मैच में उनसे एक बड़ी और विस्फोटक पारी की उम्मीद रहेगी। साथ ही उनकी विकेटकीपिंग पर एक बार फिर सभी की नजरें टिकी होंगी।
|
जम्मू कश्मीर के सोपोर में सोमवार सुबह आतंकियों ने बीएसएनएल टॉवर के पास फायरिंग की. मौके पर पहुंची पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की. सुरक्षाबल और आतंकी मुठभेड़ में एक की मौत, तीन जख्मी हो गए हैं.
गौरतलब है कि यह फायरिंग बस स्टैंड के पास की गई है. लिहाजा भीड़भाड़ वाले इस इलाके में आम नागरिकों को नुकसान हो रहा है. ऐहतियातन सुरक्षा बल ने पूरे इलाके को घेर लिया है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, 'कुपवाड़ा के सोगीपोरा के रहने वाले मुहम्मद रफीक भट्ट ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया. ' अधिकारी ने बताया, 'दो अन्य घायलों का इलाज श्रीनगर के अस्पताल में किया जा रहा. ' डॉक्टरों का कहना है कि घायलों की हालत बेहद नाजुक है. गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से आतंकी कश्मीर के मोबाइल टॉवरों को निशाना बना रहे हैं. इससे पहले शनिवार को इसी बीएसएनएल टॉपर पर दो हाथगोले से हमला किया गया था. अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकियों ने हमला किया, लेकिन बम फटा नहीं और उनका प्लान फेल हो गया. बाद में हैंड ग्रेनेड को निष्क्रिय कर दिया गया.
|
जम्मू कश्मीर के सोपोर में सोमवार सुबह आतंकियों ने बीएसएनएल टॉवर के पास फायरिंग की. मौके पर पहुंची पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की. सुरक्षाबल और आतंकी मुठभेड़ में एक की मौत, तीन जख्मी हो गए हैं. गौरतलब है कि यह फायरिंग बस स्टैंड के पास की गई है. लिहाजा भीड़भाड़ वाले इस इलाके में आम नागरिकों को नुकसान हो रहा है. ऐहतियातन सुरक्षा बल ने पूरे इलाके को घेर लिया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, 'कुपवाड़ा के सोगीपोरा के रहने वाले मुहम्मद रफीक भट्ट ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया. ' अधिकारी ने बताया, 'दो अन्य घायलों का इलाज श्रीनगर के अस्पताल में किया जा रहा. ' डॉक्टरों का कहना है कि घायलों की हालत बेहद नाजुक है. गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से आतंकी कश्मीर के मोबाइल टॉवरों को निशाना बना रहे हैं. इससे पहले शनिवार को इसी बीएसएनएल टॉपर पर दो हाथगोले से हमला किया गया था. अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकियों ने हमला किया, लेकिन बम फटा नहीं और उनका प्लान फेल हो गया. बाद में हैंड ग्रेनेड को निष्क्रिय कर दिया गया.
|
भूल भुल्लैया (2008)(U/A)
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
|
भूल भुल्लैया *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
|
जकार्ता. इंडोनेशिया (Indonesia) दुनिया का वो देश है जहां दुनिया की सबसे ज्यादा मुस्लिम (Muslim) जनसंख्या रहती है. यहां की 90% से भी ज्यादा आबादी मुस्लिम ही है. हालांकि यहां के शहर बाली में बड़ी संख्या में हिंदू (Hindu) भी रहते हैं और यहां ढेर सारे हिंदू मंदिर भी मौजूद हैं. इंडोनेशिया में बाली सिर्फ अकेला ऐसा द्वीप है जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं. बाली का नया साल (Bali New Year) भी शक संवत् पंचांग से तय होता है, जो चंद्रमा की गति पर आधारित है.
बता दें कि शक राजवंश की स्थापना 78 ईस्वी में भारतीय राजा कनिष्क ने की थी. हिंदू धर्म प्रचारक इसे लेकर जावा पहुंचे थे और वहां से यह बाली पहुंचा. BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संक्रमण के इस समय में इंडोनेशिया के लोग बाली के कल्चर और परंपराओं की काफी तारीफ कर रहे हैं. खासकर बाली के 'मौन दिवस; की काफी चर्चाएं हैं. इस दिन लोग पूरे दिन अपने घरों में 24 घंटे के लिए चुपचाप रहते हैं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं.
इस रिपोर्ट के मुताबिक जहां दुनिया भर के लोग कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन सिस्टम से तंग नज़र आ रहे हैं वहीं यहां के लोगों के लिए सामान्य बात है. हर साल न्येपी (मौन रखने का दिन) के मौक़े पर यह द्वीप ख़ामोश हो जाता है. किसी को घर से बाहर निकलने की इजाज़त नहीं दी जाती. इस दिन न तो घर में लाइट जलाई जाती है और आग जलाने की भी मनाही होती है. इस दिन सभी को चिंतन करना होता है इसलिए मनोरंजन की भी मनाही होती है. न सिर्फ दुकानें बल्कि 24 घंटे के लिए हवाई अड्डे भी बंद रखे जाते हैं.
न्येपी के दिन स्थानीय पुलिस सड़कों पर और समुद्र तटों पर गश्त करती है ताकि कोई व्यक्ति नियम न तोड़े. बाली में तबनान के एक गांव में पली-बढ़ी हिंदू महिला श्री दरविती कहती हैं, 'इस समय का मौन ध्यान लगाने का सबसे अच्छा तरीक़ा है. मैं पिछले 40 साल से न्येपी मना रही हूं. जैसे-जैसे मेरी उम्र हो रही है, मैं इसके पीछे के महत्व को समझ रही हूं. ' इंडोनेशिया की सोशल मीडिया पर इस त्योहार का जिक्र करके इस तरह की पोस्ट वायरल हो रही हैं जिसमें इन परंपराओं की तरफदारी की जा रही है. बाली में सोशल डिस्टेंसिंग के उपाय लागू हैं. कोरोना वायरस के कारण इस साल न्येपी को एक दिन के लिए बढ़ा दिया गया था. मौन दिवस के फ़ायदे भी बढ़े हैं.
.
|
जकार्ता. इंडोनेशिया दुनिया का वो देश है जहां दुनिया की सबसे ज्यादा मुस्लिम जनसंख्या रहती है. यहां की नब्बे% से भी ज्यादा आबादी मुस्लिम ही है. हालांकि यहां के शहर बाली में बड़ी संख्या में हिंदू भी रहते हैं और यहां ढेर सारे हिंदू मंदिर भी मौजूद हैं. इंडोनेशिया में बाली सिर्फ अकेला ऐसा द्वीप है जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं. बाली का नया साल भी शक संवत् पंचांग से तय होता है, जो चंद्रमा की गति पर आधारित है. बता दें कि शक राजवंश की स्थापना अठहत्तर ईस्वी में भारतीय राजा कनिष्क ने की थी. हिंदू धर्म प्रचारक इसे लेकर जावा पहुंचे थे और वहां से यह बाली पहुंचा. BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संक्रमण के इस समय में इंडोनेशिया के लोग बाली के कल्चर और परंपराओं की काफी तारीफ कर रहे हैं. खासकर बाली के 'मौन दिवस; की काफी चर्चाएं हैं. इस दिन लोग पूरे दिन अपने घरों में चौबीस घंटाटे के लिए चुपचाप रहते हैं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक जहां दुनिया भर के लोग कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन सिस्टम से तंग नज़र आ रहे हैं वहीं यहां के लोगों के लिए सामान्य बात है. हर साल न्येपी के मौक़े पर यह द्वीप ख़ामोश हो जाता है. किसी को घर से बाहर निकलने की इजाज़त नहीं दी जाती. इस दिन न तो घर में लाइट जलाई जाती है और आग जलाने की भी मनाही होती है. इस दिन सभी को चिंतन करना होता है इसलिए मनोरंजन की भी मनाही होती है. न सिर्फ दुकानें बल्कि चौबीस घंटाटे के लिए हवाई अड्डे भी बंद रखे जाते हैं. न्येपी के दिन स्थानीय पुलिस सड़कों पर और समुद्र तटों पर गश्त करती है ताकि कोई व्यक्ति नियम न तोड़े. बाली में तबनान के एक गांव में पली-बढ़ी हिंदू महिला श्री दरविती कहती हैं, 'इस समय का मौन ध्यान लगाने का सबसे अच्छा तरीक़ा है. मैं पिछले चालीस साल से न्येपी मना रही हूं. जैसे-जैसे मेरी उम्र हो रही है, मैं इसके पीछे के महत्व को समझ रही हूं. ' इंडोनेशिया की सोशल मीडिया पर इस त्योहार का जिक्र करके इस तरह की पोस्ट वायरल हो रही हैं जिसमें इन परंपराओं की तरफदारी की जा रही है. बाली में सोशल डिस्टेंसिंग के उपाय लागू हैं. कोरोना वायरस के कारण इस साल न्येपी को एक दिन के लिए बढ़ा दिया गया था. मौन दिवस के फ़ायदे भी बढ़े हैं. .
|
के बीच में पीटर्सबर्ग और Tsarskoye सेलोकैथरीन II ने लंबी यात्रा के दौरान आराम के लिए एक परिसर का निर्माण किया। रूसी बेड़े की जीत की 10 वीं वर्षगांठ के सम्मान में, "चेसमे चर्च" और "चेसमे पैलेस" नाम दिखाई दिए, जो रूसी बेड़े की सैन्य महिमा को याद करते हैं। महल ने अलग-अलग समय का अनुभव किया, लेकिन हमेशा सेंट पीटर्सबर्ग का एक आभूषण बना रहा।
इस तथ्य के बावजूद कि परिसर को एक ट्रैक के रूप में बनाया गया था,आज सेंट पीटर्सबर्ग में चेसमे पैलेस है (इसका पता 15 गैस्टेलो स्ट्रीट है)। और कैथरीन द ग्रेट के समय में, यह एक निर्जन, दलदली भूमि थी। यह क्षेत्र उत्तरी युद्ध के परिणामस्वरूप रूस में चला गया और राजा का अधिकार बन गया।
इस जगह को फिनिश किकिकिकसेन में कहा जाता था, जिसका अनुवाद "मेंढक दल" था, यही वजह है कि हरे मेंढक भविष्य के महल का प्रतीक बन गया।
1717 में, Tsarskoye Selo में निवास के लिए एक मार्ग रखा गया था, और इसी से नामित स्थान को बसाने का इतिहास शुरू हुआ। आज, जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है, चेसमे पैलेस सेंट पीटर्सबर्ग की सीमाओं के भीतर स्थित है।
ताकि उनकी गर्मियों में आराम से सवारी की जा सकेTsarskoye Selo में निवास, कैथरीन द ग्रेट ने ट्रैक एस्टेट बनाने के लिए राजधानी से सात मील की दूरी पर ऑर्डर किया। इसी तरह सेंट पीटर्सबर्ग में चेसमे पैलेस की कल्पना की गई थी, जिसका इतिहास लंबा और दिलचस्प था।
मूल रूप से इसे ग्रीष्मकालीन निवास कहा जाता था। लेकिन जब महल के निर्माण पर काम पूरा हो गया, तो चेसमेन की लड़ाई में रूसी बेड़े की जीत के बारे में खबर आई। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि तुर्की की जीत रूस के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी। यद्यपि इस युद्ध के दौरान कॉन्स्टेंटिनोपल पर विजय प्राप्त करना संभव नहीं था, क्योंकि यह सपना देखा गया था, यहां तक कि केर्च और आज़ोव की विजय भी बहुत महत्वपूर्ण थी। अब रूसी व्यापारी जहाज काला सागर से होकर जा सकते थे, और इससे काफी लाभ का वादा किया गया था।
रूस में, हर बड़ी जीत में एक परंपरा थीकिसी भी स्मारक को मनाने के लिए तुर्की युद्ध। इस प्रकार, एक तुर्की झरना और एक मंडप, क्रिमियन और चेसमे स्तंभ Tsarskoye Selo में दिखाई दिए, और बीजान्टिन और ओरिएंटल शैलियों में इमारतों को बड़प्पन के सम्पदा पर खड़ा किया गया था। इसलिए, नए ट्रैवलिंग पैलेस चेसमेंस्की को कॉल करना काफी तर्कसंगत था, साथ ही इसके बगल में बना चर्च।
कैथरीन द ग्रेट अपने दायरे और निर्माण के लिए महान प्रेम के लिए जाना जाता है। उसके शासन के दौरान, पूरे देश और विशेष रूप से पीटर्सबर्ग को कुछ शानदार इमारतें और महल प्राप्त हुए।
रानी को निर्माण के कई कारण मिलेनए घर, जैसे कि राजधानी से सार्सोकेय सेलो की लंबी यात्रा। वह अनुचित स्थानों पर नहीं रहना चाहती थी, क्योंकि वह हर जगह सहज महसूस करना चाहती थी। जब साम्राज्ञी ने एक नया महल बनाने का फैसला किया - "डचा" - वह राजधानी के मुख्य वास्तुकारों में से एक यूरी मतवेविच फेल्टेन के पास गया।
वास्तुकार ने कला अकादमी में अध्ययन किया, कईबरसों बाद उन्होंने रस्त्रेली के साथ मिलकर काम किया, उनकी मृत्यु के बाद, उन्होंने महान वास्तुकार का निर्माण पूरा किया। अनुभव और प्रतिभा ने फेल्टेन को वॉलन-डेलमोट के साथ सेंट पीटर्सबर्ग के प्रमुख वास्तुकार बनाया। 1774 तक, सेंट कैथरीन के लुथेरन और अर्मेनियाई चर्च, लघु और बड़े हरमिटेज, पैलेस तटबंध और प्रसिद्ध समर गार्डन बाड़ जैसी इमारतें पहले से ही उसके कब्जे में थीं।
चेसमे पैलेस को सौंपा गया था जो वास्तुकार के लिए एक प्रयोग था। दरअसल, राजधानी में गोथिक शैली में एक महल बनाने के लिए यह अकल्पनीय होगा, लेकिन शहर के बाहर ऐसी स्वतंत्रता की अनुमति थी।
Chesme के ट्रैवलिंग पैलेस की स्थापना 1774 में हुई थीवर्ष, और तीन साल बाद महारानी ने गृहिणी का जश्न मनाया। निर्माण की गति को इस तथ्य से सुनिश्चित किया गया था कि वास्तुकार यू। एम। फेलटेन सक्षम रूप से कार्य की योजना बनाने में सक्षम थे। और, ज़ाहिर है, निर्माण की गति ने निर्माण पर खर्च की गई बड़ी राशि का बहुत योगदान दिया, जिसे कैथरीन ने खर्च किया।
महल के नीचे के क्षेत्र को सबसे अधिक आवंटित नहीं किया गया थासफल, इसलिए, पहले चरण में, भूखंड को सूखा जाना था, साइट की परिधि के चारों ओर एक खाई भी खोदी गई थी, ताकि भविष्य में दलदल महल को नुकसान न पहुंचे। महल की सनसनी शाफ्ट की नकल से बढ़ जाती है, जो कि गड्ढे की पृथ्वी से बनाई गई है।
महल परिसर में दो का मुख्य भवन शामिल थाएक गुंबद और कोने के टावरों के साथ फर्श, जॉन द बैपटिस्ट के नेटिविटी के पत्थर चर्च और कई कार्यालय भवन। महल परिसर में सड़क से एक रास्ता था, गोथिक शैली में दो पत्थर के फाटकों के साथ सबसे ऊपर।
चेसमे पैलेस की कल्पना छद्म गोथिक में की गई थीशैली, और वास्तुकार इस विचार को बनाए रखने में कामयाब रहे। आर्किटेक्ट के लिए प्रेरणा का स्रोत बोस्फोरस के तट पर पूर्वी महल थे। ओरिएंटल तत्व गॉथिक शैली में उत्कीर्ण हैं, वे हड़ताली नहीं हैं, लेकिन केवल एक सूक्ष्म संकेत हैं।
मुख्य महल भवन के संदर्भ में हैकोनों में खामियों के साथ गोल टावरों के साथ एक समभुज त्रिकोण है। प्रत्येक टॉवर अर्धवृत्ताकार गुंबदों के साथ एक लालटेन के साथ पूरा हुआ। इमारत की बाहरी दीवारें मूल दांतेदार मुकुट के रूप में संरचना की ऊंचाई से ऊपर उभरी हुई हैं। महल की निचली मंजिल को जंग से सजाया गया था, ऊपरी मंजिल पर ईंटों का प्लास्टर किया गया था। सुंदर लांसेट खिड़कियां एक मध्यकालीन महल की भावना पैदा करती हैं। Chesme पैलेस की स्मारकीय और ठोस वास्तुकला एक विश्वसनीय महल-किले की छाप देती है।
वैसे, चेसमे पैलेस (पीटर्सबर्ग), बाहरी रूप सेएक झूठी-गॉथिक शैली में सजाया गया, अंदर गॉथिक का मामूली संकेत नहीं है। इंटीरियर को शुरुआती क्लासिकवाद की शैली में डिज़ाइन किया गया है, जो कैथरीन द्वारा प्रिय है।
दीवारों पर आप पैनल, पदक देख सकते हैं,cornices, पुष्पांजलि और फूल माला, जो यू। एम। फेलटेन का ट्रेडमार्क बन गया। घर के त्रिकोण का मुख्य वॉल्यूम परेड हॉल द्वारा कब्जा कर लिया गया है, इसे रूस के महान राजकुमारों और राजाओं को दर्शाते हुए एफ शुबिन द्वारा मूर्तियों की गैलरी के साथ सजाया गया है।
सभी हॉल औरमहल के महल, उन्होंने लंबे समय तक फर्नीचर और वस्त्र उठाए जो महल के अंदरूनी हिस्सों को पर्याप्त रूप से सजाएंगे। विशेष रूप से अपने नए निवास के लिए, कैथरीन ने इंग्लिश वेजवुड पोर्सिलेन फैक्ट्री में 952 वस्तुओं के एक सेट का आदेश दिया, प्रत्येक में एक मेंढक - चेसमे पैलेस का प्रतीक। आज यह सेवा हर्मिटेज संग्रह की सजावट है।
एक खूबसूरत इंटीरियर के साथ कहानी कठिन है।महल। इसमें थोड़ा संरक्षित है - चित्रों और मूर्तियों को संग्रहालयों में स्थानांतरित किया गया था, फर्नीचर धीरे-धीरे भ्रमित हो गया था। लेकिन 2005 में निवास के मुख्य हॉल को बहाल कर दिया गया था, अब इसे सेंट जॉर्ज कहा जाता है।
सेंट पीटर्सबर्ग का चेसमे पैलेस महारानी की पसंदीदा जगहों में से एक बन गया। वह बहुत बार उनसे मिलने गई, और उनके साथ उत्सव, उत्सव थे।
और 1792 में कैथरीन ने महल को अध्याय के हवाले कर दिया।सेंट जॉर्ज का आदेश। तब से, यहां, दूसरी मंजिल पर गोल हॉल में, इस आदेश के शूरवीरों की बैठकें होने लगीं, जिसमें अक्सर महारानी ने भाग लिया। तुरंत उनके प्रबंधन, संग्रह और खजाने को रखा।
कैथरीन द ग्रेट की मृत्यु के बाद, महल, दुर्भाग्य से, उजाड़ में था।
पॉल, जो सत्ता में आया था, स्पष्ट रूप से महल का उपयोग नहीं करना चाहता था। अलेक्जेंडर द सेकंड के तहत, महल भी खाली था, केवल दो बार कैथरीन इंस्टीट्यूट की लड़कियों ने इसमें आराम किया था।
निकोलस द फर्स्ट के तहत, महल चर्च बन गयामहान राजकुमारों के दफन की तैयारी के लिए उपयोग करें। यहाँ ज़ार अलेक्जेंडर के भाई की लाश रात बिताई, यहाँ उन्हें एक शानदार ताबूत में स्थानांतरित किया गया और यहाँ से अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। एलिजाबेथ एलेक्सेवेनी के शरीर के साथ भी यही कहानी थी।
सम्राट पॉल को वह सब कुछ पसंद नहीं था, जिसकी याद दिलाता थामाँ, इसलिए वह चेसमे पैलेस में उपस्थित नहीं हुईं, और गैचीना में समय बिताना पसंद किया। यहां तक कि वह गरीबों के लिए महल देना चाहता था, लेकिन इस परियोजना को लागू नहीं किया गया था। आयोग ने पानी की कमी से विफलता को स्पष्ट करते हुए इसे व्यवस्थित करना असंभव पाया।
यह विचार निकोलस I द्वारा याद किया गया था, जिन्होंने 1830 में किया थावर्ष ने 1812 के देशभक्ति युद्ध के विकलांगों और बुजुर्गों के लिए चेसमे पैलेस सैन्य भवन में स्थापना पर एक निर्णय जारी किया। इसलिए निर्माण के महल के इतिहास को समाप्त कर दिया।
महल में क्षेत्र की सुविधा और वृद्धि के लिएएक प्रमुख समायोजन आयोजित किया। आर्किटेक्ट ए। स्टुबर्ट को विकलांगों के लिए महल को एक होटल में बदलने का आदेश मिला। वह तीन समान दो मंजिला इमारतों को पूरा करता है, उन्हें कोने के टावरों के माध्यम से नए मार्ग से जोड़ता है। टूथ पैरापेट्स को स्वयं टावरों से हटा दिया गया और गुंबदों के साथ बदल दिया गया। ईंटों की जगह नई, कच्चा लोहा।
शीतकालीन चर्च को दूसरी मंजिल पर संरक्षित किया गया था। भवन के सामने जंगल और घास के मैदान के बजाय, निवासियों के चलने के लिए एक नियमित पार्क स्थापित किया गया है। चार साल बाद, खराब हाऊस तैयार हो गया, 400 मेहमान इसमें बैठ सकते थे। कुछ समय बाद, प्रत्येक विंग के ऊपर 2 और फर्श बनाए गए। धीरे-धीरे, इसके आसपास अतिरिक्त इमारतें खड़ी कर दी गईं और एक कब्रिस्तान को तोड़ दिया गया। तो वास्तुशिल्प परिसर का अंत हो गया - कैथरीन के समय का सबसे सुंदर, रोमांटिक मनोर।
1919 में, चेसमे पैलेस नए की प्रतीक्षा कर रहा थापरीक्षण। गरीबों के घर को बंद कर दिया गया था और नई सरकार के कैदियों और दुश्मनों के लिए संपत्ति में एक शिविर स्थापित किया गया था। Chesme चर्च में तोड़फोड़ की गई थी, एक क्रॉस को हटा दिया गया था, नए समय के प्रतीक के रूप में पिंकर्स और हथौड़ा को अपने स्थान पर फहराया।
1930 में, पूर्व चेसमे पैलेस का निर्माणरोड इंस्टीट्यूट को सौंप दिया। स्कूल की जरूरतों के लिए, पंखों को फिर से बनाया गया था। और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, चर्च और महल बमबारी से बुरी तरह प्रभावित हुए थे। युद्ध के बाद, कॉम्प्लेक्स को लेनिनग्राद एविएशन इंस्ट्रूमेंट इंस्टीट्यूट को दिया गया था।
1946 में, महल की मरम्मत की गई थी, हालांकि मूल उपस्थिति के संरक्षण के बारे में विशेष रूप से चिंता नहीं की गई थी। इन कार्यों की देखरेख वास्तुकार ए। कोरयागिन द्वारा की गई थी।
चेसमे पैलेस, जिसकी तस्वीर केवल एक दूरस्थ डिग्री तक आर्किटेक्ट के मूल डिजाइन से मिलती जुलती है, आज भी एयरोस्पेस इंस्ट्रूमेंटेशन विश्वविद्यालय के अंतर्गत आता है।
मनोर पार्क सार्वजनिक उपयोग के लिए खुला है। और 1994 में, जब चेसमे चर्च को रूढ़िवादी चर्च में लौटाया गया, तो चर्च के अंदरूनी और बाहरी हिस्सों की बहाली शुरू हुई। आज, बाह्य रूप से, यह लगभग पूरी तरह से 18 वीं शताब्दी के निर्माण के साथ मेल खाता है।
|
के बीच में पीटर्सबर्ग और Tsarskoye सेलोकैथरीन II ने लंबी यात्रा के दौरान आराम के लिए एक परिसर का निर्माण किया। रूसी बेड़े की जीत की दस वीं वर्षगांठ के सम्मान में, "चेसमे चर्च" और "चेसमे पैलेस" नाम दिखाई दिए, जो रूसी बेड़े की सैन्य महिमा को याद करते हैं। महल ने अलग-अलग समय का अनुभव किया, लेकिन हमेशा सेंट पीटर्सबर्ग का एक आभूषण बना रहा। इस तथ्य के बावजूद कि परिसर को एक ट्रैक के रूप में बनाया गया था,आज सेंट पीटर्सबर्ग में चेसमे पैलेस है । और कैथरीन द ग्रेट के समय में, यह एक निर्जन, दलदली भूमि थी। यह क्षेत्र उत्तरी युद्ध के परिणामस्वरूप रूस में चला गया और राजा का अधिकार बन गया। इस जगह को फिनिश किकिकिकसेन में कहा जाता था, जिसका अनुवाद "मेंढक दल" था, यही वजह है कि हरे मेंढक भविष्य के महल का प्रतीक बन गया। एक हज़ार सात सौ सत्रह में, Tsarskoye Selo में निवास के लिए एक मार्ग रखा गया था, और इसी से नामित स्थान को बसाने का इतिहास शुरू हुआ। आज, जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है, चेसमे पैलेस सेंट पीटर्सबर्ग की सीमाओं के भीतर स्थित है। ताकि उनकी गर्मियों में आराम से सवारी की जा सकेTsarskoye Selo में निवास, कैथरीन द ग्रेट ने ट्रैक एस्टेट बनाने के लिए राजधानी से सात मील की दूरी पर ऑर्डर किया। इसी तरह सेंट पीटर्सबर्ग में चेसमे पैलेस की कल्पना की गई थी, जिसका इतिहास लंबा और दिलचस्प था। मूल रूप से इसे ग्रीष्मकालीन निवास कहा जाता था। लेकिन जब महल के निर्माण पर काम पूरा हो गया, तो चेसमेन की लड़ाई में रूसी बेड़े की जीत के बारे में खबर आई। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि तुर्की की जीत रूस के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी। यद्यपि इस युद्ध के दौरान कॉन्स्टेंटिनोपल पर विजय प्राप्त करना संभव नहीं था, क्योंकि यह सपना देखा गया था, यहां तक कि केर्च और आज़ोव की विजय भी बहुत महत्वपूर्ण थी। अब रूसी व्यापारी जहाज काला सागर से होकर जा सकते थे, और इससे काफी लाभ का वादा किया गया था। रूस में, हर बड़ी जीत में एक परंपरा थीकिसी भी स्मारक को मनाने के लिए तुर्की युद्ध। इस प्रकार, एक तुर्की झरना और एक मंडप, क्रिमियन और चेसमे स्तंभ Tsarskoye Selo में दिखाई दिए, और बीजान्टिन और ओरिएंटल शैलियों में इमारतों को बड़प्पन के सम्पदा पर खड़ा किया गया था। इसलिए, नए ट्रैवलिंग पैलेस चेसमेंस्की को कॉल करना काफी तर्कसंगत था, साथ ही इसके बगल में बना चर्च। कैथरीन द ग्रेट अपने दायरे और निर्माण के लिए महान प्रेम के लिए जाना जाता है। उसके शासन के दौरान, पूरे देश और विशेष रूप से पीटर्सबर्ग को कुछ शानदार इमारतें और महल प्राप्त हुए। रानी को निर्माण के कई कारण मिलेनए घर, जैसे कि राजधानी से सार्सोकेय सेलो की लंबी यात्रा। वह अनुचित स्थानों पर नहीं रहना चाहती थी, क्योंकि वह हर जगह सहज महसूस करना चाहती थी। जब साम्राज्ञी ने एक नया महल बनाने का फैसला किया - "डचा" - वह राजधानी के मुख्य वास्तुकारों में से एक यूरी मतवेविच फेल्टेन के पास गया। वास्तुकार ने कला अकादमी में अध्ययन किया, कईबरसों बाद उन्होंने रस्त्रेली के साथ मिलकर काम किया, उनकी मृत्यु के बाद, उन्होंने महान वास्तुकार का निर्माण पूरा किया। अनुभव और प्रतिभा ने फेल्टेन को वॉलन-डेलमोट के साथ सेंट पीटर्सबर्ग के प्रमुख वास्तुकार बनाया। एक हज़ार सात सौ चौहत्तर तक, सेंट कैथरीन के लुथेरन और अर्मेनियाई चर्च, लघु और बड़े हरमिटेज, पैलेस तटबंध और प्रसिद्ध समर गार्डन बाड़ जैसी इमारतें पहले से ही उसके कब्जे में थीं। चेसमे पैलेस को सौंपा गया था जो वास्तुकार के लिए एक प्रयोग था। दरअसल, राजधानी में गोथिक शैली में एक महल बनाने के लिए यह अकल्पनीय होगा, लेकिन शहर के बाहर ऐसी स्वतंत्रता की अनुमति थी। Chesme के ट्रैवलिंग पैलेस की स्थापना एक हज़ार सात सौ चौहत्तर में हुई थीवर्ष, और तीन साल बाद महारानी ने गृहिणी का जश्न मनाया। निर्माण की गति को इस तथ्य से सुनिश्चित किया गया था कि वास्तुकार यू। एम। फेलटेन सक्षम रूप से कार्य की योजना बनाने में सक्षम थे। और, ज़ाहिर है, निर्माण की गति ने निर्माण पर खर्च की गई बड़ी राशि का बहुत योगदान दिया, जिसे कैथरीन ने खर्च किया। महल के नीचे के क्षेत्र को सबसे अधिक आवंटित नहीं किया गया थासफल, इसलिए, पहले चरण में, भूखंड को सूखा जाना था, साइट की परिधि के चारों ओर एक खाई भी खोदी गई थी, ताकि भविष्य में दलदल महल को नुकसान न पहुंचे। महल की सनसनी शाफ्ट की नकल से बढ़ जाती है, जो कि गड्ढे की पृथ्वी से बनाई गई है। महल परिसर में दो का मुख्य भवन शामिल थाएक गुंबद और कोने के टावरों के साथ फर्श, जॉन द बैपटिस्ट के नेटिविटी के पत्थर चर्च और कई कार्यालय भवन। महल परिसर में सड़क से एक रास्ता था, गोथिक शैली में दो पत्थर के फाटकों के साथ सबसे ऊपर। चेसमे पैलेस की कल्पना छद्म गोथिक में की गई थीशैली, और वास्तुकार इस विचार को बनाए रखने में कामयाब रहे। आर्किटेक्ट के लिए प्रेरणा का स्रोत बोस्फोरस के तट पर पूर्वी महल थे। ओरिएंटल तत्व गॉथिक शैली में उत्कीर्ण हैं, वे हड़ताली नहीं हैं, लेकिन केवल एक सूक्ष्म संकेत हैं। मुख्य महल भवन के संदर्भ में हैकोनों में खामियों के साथ गोल टावरों के साथ एक समभुज त्रिकोण है। प्रत्येक टॉवर अर्धवृत्ताकार गुंबदों के साथ एक लालटेन के साथ पूरा हुआ। इमारत की बाहरी दीवारें मूल दांतेदार मुकुट के रूप में संरचना की ऊंचाई से ऊपर उभरी हुई हैं। महल की निचली मंजिल को जंग से सजाया गया था, ऊपरी मंजिल पर ईंटों का प्लास्टर किया गया था। सुंदर लांसेट खिड़कियां एक मध्यकालीन महल की भावना पैदा करती हैं। Chesme पैलेस की स्मारकीय और ठोस वास्तुकला एक विश्वसनीय महल-किले की छाप देती है। वैसे, चेसमे पैलेस , बाहरी रूप सेएक झूठी-गॉथिक शैली में सजाया गया, अंदर गॉथिक का मामूली संकेत नहीं है। इंटीरियर को शुरुआती क्लासिकवाद की शैली में डिज़ाइन किया गया है, जो कैथरीन द्वारा प्रिय है। दीवारों पर आप पैनल, पदक देख सकते हैं,cornices, पुष्पांजलि और फूल माला, जो यू। एम। फेलटेन का ट्रेडमार्क बन गया। घर के त्रिकोण का मुख्य वॉल्यूम परेड हॉल द्वारा कब्जा कर लिया गया है, इसे रूस के महान राजकुमारों और राजाओं को दर्शाते हुए एफ शुबिन द्वारा मूर्तियों की गैलरी के साथ सजाया गया है। सभी हॉल औरमहल के महल, उन्होंने लंबे समय तक फर्नीचर और वस्त्र उठाए जो महल के अंदरूनी हिस्सों को पर्याप्त रूप से सजाएंगे। विशेष रूप से अपने नए निवास के लिए, कैथरीन ने इंग्लिश वेजवुड पोर्सिलेन फैक्ट्री में नौ सौ बावन वस्तुओं के एक सेट का आदेश दिया, प्रत्येक में एक मेंढक - चेसमे पैलेस का प्रतीक। आज यह सेवा हर्मिटेज संग्रह की सजावट है। एक खूबसूरत इंटीरियर के साथ कहानी कठिन है।महल। इसमें थोड़ा संरक्षित है - चित्रों और मूर्तियों को संग्रहालयों में स्थानांतरित किया गया था, फर्नीचर धीरे-धीरे भ्रमित हो गया था। लेकिन दो हज़ार पाँच में निवास के मुख्य हॉल को बहाल कर दिया गया था, अब इसे सेंट जॉर्ज कहा जाता है। सेंट पीटर्सबर्ग का चेसमे पैलेस महारानी की पसंदीदा जगहों में से एक बन गया। वह बहुत बार उनसे मिलने गई, और उनके साथ उत्सव, उत्सव थे। और एक हज़ार सात सौ बानवे में कैथरीन ने महल को अध्याय के हवाले कर दिया।सेंट जॉर्ज का आदेश। तब से, यहां, दूसरी मंजिल पर गोल हॉल में, इस आदेश के शूरवीरों की बैठकें होने लगीं, जिसमें अक्सर महारानी ने भाग लिया। तुरंत उनके प्रबंधन, संग्रह और खजाने को रखा। कैथरीन द ग्रेट की मृत्यु के बाद, महल, दुर्भाग्य से, उजाड़ में था। पॉल, जो सत्ता में आया था, स्पष्ट रूप से महल का उपयोग नहीं करना चाहता था। अलेक्जेंडर द सेकंड के तहत, महल भी खाली था, केवल दो बार कैथरीन इंस्टीट्यूट की लड़कियों ने इसमें आराम किया था। निकोलस द फर्स्ट के तहत, महल चर्च बन गयामहान राजकुमारों के दफन की तैयारी के लिए उपयोग करें। यहाँ ज़ार अलेक्जेंडर के भाई की लाश रात बिताई, यहाँ उन्हें एक शानदार ताबूत में स्थानांतरित किया गया और यहाँ से अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। एलिजाबेथ एलेक्सेवेनी के शरीर के साथ भी यही कहानी थी। सम्राट पॉल को वह सब कुछ पसंद नहीं था, जिसकी याद दिलाता थामाँ, इसलिए वह चेसमे पैलेस में उपस्थित नहीं हुईं, और गैचीना में समय बिताना पसंद किया। यहां तक कि वह गरीबों के लिए महल देना चाहता था, लेकिन इस परियोजना को लागू नहीं किया गया था। आयोग ने पानी की कमी से विफलता को स्पष्ट करते हुए इसे व्यवस्थित करना असंभव पाया। यह विचार निकोलस I द्वारा याद किया गया था, जिन्होंने एक हज़ार आठ सौ तीस में किया थावर्ष ने एक हज़ार आठ सौ बारह के देशभक्ति युद्ध के विकलांगों और बुजुर्गों के लिए चेसमे पैलेस सैन्य भवन में स्थापना पर एक निर्णय जारी किया। इसलिए निर्माण के महल के इतिहास को समाप्त कर दिया। महल में क्षेत्र की सुविधा और वृद्धि के लिएएक प्रमुख समायोजन आयोजित किया। आर्किटेक्ट ए। स्टुबर्ट को विकलांगों के लिए महल को एक होटल में बदलने का आदेश मिला। वह तीन समान दो मंजिला इमारतों को पूरा करता है, उन्हें कोने के टावरों के माध्यम से नए मार्ग से जोड़ता है। टूथ पैरापेट्स को स्वयं टावरों से हटा दिया गया और गुंबदों के साथ बदल दिया गया। ईंटों की जगह नई, कच्चा लोहा। शीतकालीन चर्च को दूसरी मंजिल पर संरक्षित किया गया था। भवन के सामने जंगल और घास के मैदान के बजाय, निवासियों के चलने के लिए एक नियमित पार्क स्थापित किया गया है। चार साल बाद, खराब हाऊस तैयार हो गया, चार सौ मेहमान इसमें बैठ सकते थे। कुछ समय बाद, प्रत्येक विंग के ऊपर दो और फर्श बनाए गए। धीरे-धीरे, इसके आसपास अतिरिक्त इमारतें खड़ी कर दी गईं और एक कब्रिस्तान को तोड़ दिया गया। तो वास्तुशिल्प परिसर का अंत हो गया - कैथरीन के समय का सबसे सुंदर, रोमांटिक मनोर। एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में, चेसमे पैलेस नए की प्रतीक्षा कर रहा थापरीक्षण। गरीबों के घर को बंद कर दिया गया था और नई सरकार के कैदियों और दुश्मनों के लिए संपत्ति में एक शिविर स्थापित किया गया था। Chesme चर्च में तोड़फोड़ की गई थी, एक क्रॉस को हटा दिया गया था, नए समय के प्रतीक के रूप में पिंकर्स और हथौड़ा को अपने स्थान पर फहराया। एक हज़ार नौ सौ तीस में, पूर्व चेसमे पैलेस का निर्माणरोड इंस्टीट्यूट को सौंप दिया। स्कूल की जरूरतों के लिए, पंखों को फिर से बनाया गया था। और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, चर्च और महल बमबारी से बुरी तरह प्रभावित हुए थे। युद्ध के बाद, कॉम्प्लेक्स को लेनिनग्राद एविएशन इंस्ट्रूमेंट इंस्टीट्यूट को दिया गया था। एक हज़ार नौ सौ छियालीस में, महल की मरम्मत की गई थी, हालांकि मूल उपस्थिति के संरक्षण के बारे में विशेष रूप से चिंता नहीं की गई थी। इन कार्यों की देखरेख वास्तुकार ए। कोरयागिन द्वारा की गई थी। चेसमे पैलेस, जिसकी तस्वीर केवल एक दूरस्थ डिग्री तक आर्किटेक्ट के मूल डिजाइन से मिलती जुलती है, आज भी एयरोस्पेस इंस्ट्रूमेंटेशन विश्वविद्यालय के अंतर्गत आता है। मनोर पार्क सार्वजनिक उपयोग के लिए खुला है। और एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में, जब चेसमे चर्च को रूढ़िवादी चर्च में लौटाया गया, तो चर्च के अंदरूनी और बाहरी हिस्सों की बहाली शुरू हुई। आज, बाह्य रूप से, यह लगभग पूरी तरह से अट्ठारह वीं शताब्दी के निर्माण के साथ मेल खाता है।
|
(दि16 डेटलाइन में तारीख में सुधार के साथ रिपीट)
नयी दिल्ली, सात जुलाई केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बुधवार की शाम को होने वाले फेरबदल व विस्तार से पहले, मंत्री पद के संभावित चेहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने उनके आधिकारिक आवास पर पहुंचे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा भी प्रधानमंत्री आवास पर मौजूद हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास पहुंचने वालों में भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव, मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया, महाराष्ट्र से राज्यसभा के सदस्य नारायण राणे, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर, हरियाणा के सिरसा से सांसद सुनीता दुग्गल, दिल्ली से भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी, उत्तराखंड से सांसद अजय भट्ट, कर्नाटक से सांसद शोभा करंदलाजे, महाराष्ट्र से सांसद प्रीतम मुंडे, अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल, लोक जनशक्ति पार्टी के पारस गुट के पशुपति पारस और जनता दल (यूनाइटेड) के आरसीपी सिंह सहित कुछ अन्य नेता शामिल हैं।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे सभी नेता, शाम छह बजे राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में, मंत्री पद की शपथ लेंगे।
प्रधानमंत्री के रूप में मई 2019 में 57 मंत्रियों के साथ अपना दूसरा कार्यकाल आरंभ करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल व विस्तार करने वाले हैं।
मौजूदा मंत्रिपरिषद में कर्नाटक के राज्यपाल बनाए गए केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत सहित कुल 53 मंत्री हैं और नियमानुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम मंत्रियों की संख्या 81 हो सकती है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
नयी दिल्ली, सात जुलाई केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बुधवार की शाम को होने वाले फेरबदल व विस्तार से पहले, मंत्री पद के संभावित चेहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने उनके आधिकारिक आवास पर पहुंचे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा भी प्रधानमंत्री आवास पर मौजूद हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास पहुंचने वालों में भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव, मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया, महाराष्ट्र से राज्यसभा के सदस्य नारायण राणे, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर, हरियाणा के सिरसा से सांसद सुनीता दुग्गल, दिल्ली से भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी, उत्तराखंड से सांसद अजय भट्ट, कर्नाटक से सांसद शोभा करंदलाजे, महाराष्ट्र से सांसद प्रीतम मुंडे, अपना दल की अनुप्रिया पटेल, लोक जनशक्ति पार्टी के पारस गुट के पशुपति पारस और जनता दल के आरसीपी सिंह सहित कुछ अन्य नेता शामिल हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे सभी नेता, शाम छह बजे राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में, मंत्री पद की शपथ लेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में मई दो हज़ार उन्नीस में सत्तावन मंत्रियों के साथ अपना दूसरा कार्यकाल आरंभ करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल व विस्तार करने वाले हैं। मौजूदा मंत्रिपरिषद में कर्नाटक के राज्यपाल बनाए गए केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत सहित कुल तिरेपन मंत्री हैं और नियमानुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम मंत्रियों की संख्या इक्यासी हो सकती है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
भिक्षुओंको चुनकर, महाकाश्यप स्थविरकी भाँति, यश स्थविरकी भाँति, धर्म और विनयका सङ्गायन किया। इस प्रकारसे धर्म और विनयका समायनकर सभी शासन-मला (= धर्मकी मिलावट ) को शोधकर, ( ई. पू. २४८ में ) तृतीय सङ्गीतिको किया ।...1 यह सङ्गीति नौ मासमें समाप्त हुई।
स्थविर - चाद-परम्परा । विदेश में धर्म प्रचार । ताम्रपर्णी-द्वीपमें महेन्द्र । त्रिपिटकका लेख-बद्ध करना । ( ई. पू. २६० - १) ।
यह आचार्य परम्परा है ।...
( १ ) बुद्ध, ( २ ) उपाली, ( ३ ) दासक, (४) सोणक, ( ५ ) सिग्गव, और ( ६ ) मोग्गलिपुत्त तिस्प यह विजयी हैं। श्री जंबूद्वीपमें तृतीय संगीति तक इस अटूट परम्परासे विनय आया तृतीय संगीतिसे आगे इसे इस ( लंका ) द्वोपमें महेन्द्र आदि लाये । महेन्द्रसे सोखकर कुछ कालतक अरिष्ट स्थविर आदि द्वारा चला। उनसे उनके ही शिष्योंकी परम्परावाली आचार्य परम्परामें आजतक ( विनय ) आया । जैसा कि पुराने ( आचार्यों ) ने कहा है"तब ( ७ ) महिन्द्र, इटिय, उत्तिय, संबल, और भद्द यह महाप्रज्ञ जंबूद्वीप ( = भारत ) से यहाँ आये। उन्होंने तम्त्रपण्णी (ताम्रपणी = लंका ) द्वीपमें विनय पिटक बँचाया (= पढ़ाया ), पाँच निकायों ( = दीघ आदि ) को पढ़ाया, और सात प्रकरणों = धम्म संगणी आदि सात अभिधर्म-पिटककी पुस्तकों ) को भी । तव आर्य ( ८ तिष्यदत्त, ( ९ ) काल सुमन, (१०) दीर्घ स्थविर, ( ११ ) दीर्घ सुमन, ... ( १२ ) काल सुमन, ( १३ ) नाग स्थविर, (१४ ) बुन्दरक्षित, (१५ ) तिष्य स्थविर, ( १६ ) देव स्थविर, (१७ ) सुमन, ( १८ ) चूल नाग, ( १९ ) धर्मपालित, ( २० ) रोहण, ( २१ ) खेम ( = क्षेम ), ( २२ ) उपतिष्य, ( २३ ) फुस्स ( २४ ) सुमन, ( २५ ) पुष्य, . ( ६ ) महासीव ( = शिव ), ' ( २८ ) महानाग, ( २९ ) अभय, ( ३० ) तिष्य, ( ३१ ) पुष्य, ( ३२ ) चूल अभय, (३३ ) तिष्य स्थविर, ( ३४ ) चूल देव, ( ३५ ) शिव स्थविर, इन महाप्राज्ञ, विनयज्ञ, मार्ग कोविदाने, ताम्रपर्णी द्वीपमें विनयपिटकको प्रकाशित किया ।...
( विदेश में धर्म प्रचार । )
..."मोग्गलिपुत्त स्थविरने इस तृतीय संगीतिको ( समाप्त ) कर ( ई. पू. २४८ में ) सोचा..." कैसे प्रत्यन्त ( = सीमान्त ) देशों में शासन ( = धर्म ) सुप्रतिष्ठित (= चिर१. समन्त पासादिका ( आरम्भ ) । २. समंतपासादिका ( आरम्भ ) ।
|
भिक्षुओंको चुनकर, महाकाश्यप स्थविरकी भाँति, यश स्थविरकी भाँति, धर्म और विनयका सङ्गायन किया। इस प्रकारसे धर्म और विनयका समायनकर सभी शासन-मला को शोधकर, तृतीय सङ्गीतिको किया ।...एक यह सङ्गीति नौ मासमें समाप्त हुई। स्थविर - चाद-परम्परा । विदेश में धर्म प्रचार । ताम्रपर्णी-द्वीपमें महेन्द्र । त्रिपिटकका लेख-बद्ध करना । । यह आचार्य परम्परा है ।... बुद्ध, उपाली, दासक, सोणक, सिग्गव, और मोग्गलिपुत्त तिस्प यह विजयी हैं। श्री जंबूद्वीपमें तृतीय संगीति तक इस अटूट परम्परासे विनय आया तृतीय संगीतिसे आगे इसे इस द्वोपमें महेन्द्र आदि लाये । महेन्द्रसे सोखकर कुछ कालतक अरिष्ट स्थविर आदि द्वारा चला। उनसे उनके ही शिष्योंकी परम्परावाली आचार्य परम्परामें आजतक आया । जैसा कि पुराने ने कहा है"तब महिन्द्र, इटिय, उत्तिय, संबल, और भद्द यह महाप्रज्ञ जंबूद्वीप से यहाँ आये। उन्होंने तम्त्रपण्णी द्वीपमें विनय पिटक बँचाया , पाँच निकायों को पढ़ाया, और सात प्रकरणों = धम्म संगणी आदि सात अभिधर्म-पिटककी पुस्तकों ) को भी । तव आर्य काल सुमन, दीर्घ स्थविर, दीर्घ सुमन, ... काल सुमन, नाग स्थविर, बुन्दरक्षित, तिष्य स्थविर, देव स्थविर, सुमन, चूल नाग, धर्मपालित, रोहण, खेम , उपतिष्य, फुस्स सुमन, पुष्य, . महासीव , ' महानाग, अभय, तिष्य, पुष्य, चूल अभय, तिष्य स्थविर, चूल देव, शिव स्थविर, इन महाप्राज्ञ, विनयज्ञ, मार्ग कोविदाने, ताम्रपर्णी द्वीपमें विनयपिटकको प्रकाशित किया ।... ..."मोग्गलिपुत्त स्थविरने इस तृतीय संगीतिको कर सोचा..." कैसे प्रत्यन्त देशों में शासन सुप्रतिष्ठित । दो. समंतपासादिका ।
|
नागपुर/प्रतिनिधि दि. १४ - कोरोना महामारी को रोकने के लिए मास्क का उपयोग करना अनिवार्य किया गया है. बावजूद इसके मास्क गलत ढंग से लगाए जाने से अनेक लोगों को कान दर्द की शिकायतें होने लगी है.
बता दें कि मास्क दोनों बाजू में कान के मध्य अटकाया जाता है, लेकिन मास्क में उपयोग में लाया जाने वाल इलॉस्टीक काफी मजबूत होता है, जिससे कान खिंच जाते है और कान पर तनाव बढता है. कान के पीछे की त्वचा लगातार खिंची जाती है. जिससे त्वचा लाल होने, खूजली की समस्या भी बढने लगती है. लता मंगेशकर अस्पताल की उपअधिष्ठाता व नाक, कान, गला विशेषज्ञ डॉ. नितीन देवस्थली ने बताया कि मास्क के उपयोग से कान की समस्याएं बडे पैमाने पर निर्माण हुई है, ऐसा नहीं है. हालांकि कुछ मरीजों को कान दर्द की परेशानियों का सामना करना पड रहा है. हालिया घडी में मास्क का उपयोग करना आवश्यक है, लेकिन मास्क का चयन उचित ढंग से किया जाना चाहिए. मास्क खरीदी करने से पहले वह चेहरे पर लगाकर देखना आवश्यक होता है. जिससे कभी कभी मजबूत या फिर कम चौडाईवाले मास्क मिलते है. मजबूत इलॉस्टिक वाले मास्क तन जाता है. व मास्क बिठाने के लिए इलॉस्टिक को खिंचकर कान के पीछे ले जाना पडता है. जिससे कानों पर भी तान पडता है. जिससे कान दर्द की शिकायतें बढ रही है.
|
नागपुर/प्रतिनिधि दि. चौदह - कोरोना महामारी को रोकने के लिए मास्क का उपयोग करना अनिवार्य किया गया है. बावजूद इसके मास्क गलत ढंग से लगाए जाने से अनेक लोगों को कान दर्द की शिकायतें होने लगी है. बता दें कि मास्क दोनों बाजू में कान के मध्य अटकाया जाता है, लेकिन मास्क में उपयोग में लाया जाने वाल इलॉस्टीक काफी मजबूत होता है, जिससे कान खिंच जाते है और कान पर तनाव बढता है. कान के पीछे की त्वचा लगातार खिंची जाती है. जिससे त्वचा लाल होने, खूजली की समस्या भी बढने लगती है. लता मंगेशकर अस्पताल की उपअधिष्ठाता व नाक, कान, गला विशेषज्ञ डॉ. नितीन देवस्थली ने बताया कि मास्क के उपयोग से कान की समस्याएं बडे पैमाने पर निर्माण हुई है, ऐसा नहीं है. हालांकि कुछ मरीजों को कान दर्द की परेशानियों का सामना करना पड रहा है. हालिया घडी में मास्क का उपयोग करना आवश्यक है, लेकिन मास्क का चयन उचित ढंग से किया जाना चाहिए. मास्क खरीदी करने से पहले वह चेहरे पर लगाकर देखना आवश्यक होता है. जिससे कभी कभी मजबूत या फिर कम चौडाईवाले मास्क मिलते है. मजबूत इलॉस्टिक वाले मास्क तन जाता है. व मास्क बिठाने के लिए इलॉस्टिक को खिंचकर कान के पीछे ले जाना पडता है. जिससे कानों पर भी तान पडता है. जिससे कान दर्द की शिकायतें बढ रही है.
|
PATNA CITY: गांधी सेतु पर बस और ट्रक की टक्कर में ट्रक ड्राइवर समेत पांच लोग घायल हो गए। जबकि बस में सवार ख्भ् पैसेंजर्स को चोट लगी है। तूफान एक्सप्रेस की बस खगडि़या से रांची जा रही थी, जबकि ट्रक पटना से हाजीपुर जा रहा था। गांधी सेतु पर मंडे की रात ढाई-तीन बजे के बीच पाया नंबर ब्0-ब्क् के बीच हादसा हुआ। ट्रैफिक पुलिस की मानें तो बस-ट्रक दोनों स्पीड में थे। जिस कारण हादसा हुआ। इसके बाद सेतु पर जाम लग गया।
स्पीड अधिक होने से जबरदस्त टक्कर हुई। बस और ट्रक के ड्राइवर साइड का हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। बस ड्राइवर अखिलेश और ट्रक ड्राइवर स्टेयरिंग के पास बुरी तरह फंसने से दोनों घायल हो गए। जिन्हें लोगों ने पीएमसीएच भेजा। दोनों ड्राइवर समेत पांच लोग घायल हैं। दोनों ड्राइवर को पीएमसीएच और अन्य पैसेंजर्स को एनएमसीएच में एडमिट कराया गया है। रांची के गवर्नमेंट स्कूल के टीचर विभूति भूषण कुमार और लाल मिस्त्री एनएमसीएच से निकल प्राइवेट हॉस्पीटल में इलाज करा रहे हैं।
बस में ब्0 पैसेंजर्स थे। हादसे में आनंद, जेमनी देवी, जॉनी, प्राची कुमारी, मयंक, दुग्गी, मालती देवी, लांबा, शत्रुघ्न, विपली कुमारी और आश्रिता देवी सहित ख्भ् पैसेंजर्स को चोट लगी है। पैसेंजर्स ने नाइट शिफ्ट में सेतु पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस के जवानों पर कोई मदद नहीं करने का आरोप लगाया है। जबकि मॉर्निग शिफ्ट के जवानों ने काफी मदद की। रांची जाने वाले पैसेंजर्स को सुबह साढ़े आठ बजे के बाद दूसरी बस से भेजा गया।
|
PATNA CITY: गांधी सेतु पर बस और ट्रक की टक्कर में ट्रक ड्राइवर समेत पांच लोग घायल हो गए। जबकि बस में सवार ख्भ् पैसेंजर्स को चोट लगी है। तूफान एक्सप्रेस की बस खगडि़या से रांची जा रही थी, जबकि ट्रक पटना से हाजीपुर जा रहा था। गांधी सेतु पर मंडे की रात ढाई-तीन बजे के बीच पाया नंबर ब्शून्य-ब्क् के बीच हादसा हुआ। ट्रैफिक पुलिस की मानें तो बस-ट्रक दोनों स्पीड में थे। जिस कारण हादसा हुआ। इसके बाद सेतु पर जाम लग गया। स्पीड अधिक होने से जबरदस्त टक्कर हुई। बस और ट्रक के ड्राइवर साइड का हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। बस ड्राइवर अखिलेश और ट्रक ड्राइवर स्टेयरिंग के पास बुरी तरह फंसने से दोनों घायल हो गए। जिन्हें लोगों ने पीएमसीएच भेजा। दोनों ड्राइवर समेत पांच लोग घायल हैं। दोनों ड्राइवर को पीएमसीएच और अन्य पैसेंजर्स को एनएमसीएच में एडमिट कराया गया है। रांची के गवर्नमेंट स्कूल के टीचर विभूति भूषण कुमार और लाल मिस्त्री एनएमसीएच से निकल प्राइवेट हॉस्पीटल में इलाज करा रहे हैं। बस में ब्शून्य पैसेंजर्स थे। हादसे में आनंद, जेमनी देवी, जॉनी, प्राची कुमारी, मयंक, दुग्गी, मालती देवी, लांबा, शत्रुघ्न, विपली कुमारी और आश्रिता देवी सहित ख्भ् पैसेंजर्स को चोट लगी है। पैसेंजर्स ने नाइट शिफ्ट में सेतु पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस के जवानों पर कोई मदद नहीं करने का आरोप लगाया है। जबकि मॉर्निग शिफ्ट के जवानों ने काफी मदद की। रांची जाने वाले पैसेंजर्स को सुबह साढ़े आठ बजे के बाद दूसरी बस से भेजा गया।
|
12 सितंबर को होने वाली NEET (UG) की परीक्षा स्थगित नहीं की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इंडिया टीवी को इसकी पुष्टि की है।
12 सितंबर को होने वाली NEET (UG) की परीक्षा स्थगित नहीं की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इंडिया टीवी को इसकी पुष्टि की है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा आयोजित कक्षा 12वीं की प्राइवेट, पत्राचार परीक्षा रद्द करने की समीक्षा याचिका खारिज कर दी।
आईआईटी में दाखिले के लिये जेईई-एडवांस परीक्षा तीन अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ये जानकारी ट्वीट करके दी है।
सैकेण्डरी व सीनियर सैकेण्डरी (शैक्षिक) एवं हरियाणा मुक्त विद्यालय परीक्षा अगस्त-2021 के लिए परीक्षार्थी अपना आवेदन बोर्ड की वेबसाइट www. bseh. org. in पर 24 जुलाई से 30 जुलाई 2021 तक कर सकते हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने इस साल मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के लिए दुबई में एक केंद्र जोड़ने का फैसला किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
झारखंड अधिविद्य परिषद रांची की ओर से आज गुरुवार को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की गई। पूर्व में आयोजित वार्षिक माध्यमिक/इंटरमीडिएट प्रायोगिक परीक्षा से वंचित छात्र/छात्राओं की परीक्षा के आयोजन को लेकर चर्चा की गई।
केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि 2020 में सिविल सेवा परीक्षा में शामिल नहीं हो सके उम्मीदवारों को एक और अवसर देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं और 12वीं के प्राइवेट स्टूडेंट्स को झटका दिया है।
SBI Clerk Exam 2021: भारतीय स्टेट बैंक ने क्लर्क मुख्य परीक्षा 2021 को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया है।
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालयों की छठवीं क्लास में एडमिश के लिए होने वाली ये प्रवेश परीक्षा 11 हजार 182 केंद्रों पर आयोजित की जाएगी।
केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि जेईई मेन चौथे चरण की इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन स्थगित कर दी गई है, अब यह 26 अगस्त से 2 सितंबर, 2021 के बीच होगी।
NEET (UG) के बाद अब NEET (PG) की परीक्षा की तारीख का भी ऐलान कर दिया गया है। NEET (PG) की परीक्षा 11 सितंबर 2021 को होगी।
जो परीक्षार्थी इस साल NEET परीक्षा के लिए आवेदन करना चाहते हैं उन्हें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की वेबसाइट पर विजिट करके या फिर NTANEET. NIC. IN पर विजिट करके ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
मेडिकल कोर्सेस में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थी नीट यूजी 2021 परीक्षा के लिए 13 जुलाई यानि मंगलवार से आवेदन कर सकेंगे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि NEET परीक्षा का आयोजन 12 सितंबर को कराया जाएगा और परीक्षा में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन होगा।
|
बारह सितंबर को होने वाली NEET की परीक्षा स्थगित नहीं की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इंडिया टीवी को इसकी पुष्टि की है। बारह सितंबर को होने वाली NEET की परीक्षा स्थगित नहीं की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इंडिया टीवी को इसकी पुष्टि की है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित कक्षा बारहवीं की प्राइवेट, पत्राचार परीक्षा रद्द करने की समीक्षा याचिका खारिज कर दी। आईआईटी में दाखिले के लिये जेईई-एडवांस परीक्षा तीन अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ये जानकारी ट्वीट करके दी है। सैकेण्डरी व सीनियर सैकेण्डरी एवं हरियाणा मुक्त विद्यालय परीक्षा अगस्त-दो हज़ार इक्कीस के लिए परीक्षार्थी अपना आवेदन बोर्ड की वेबसाइट www. bseh. org. in पर चौबीस जुलाई से तीस जुलाई दो हज़ार इक्कीस तक कर सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय ने इस साल मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के लिए दुबई में एक केंद्र जोड़ने का फैसला किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। झारखंड अधिविद्य परिषद रांची की ओर से आज गुरुवार को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की गई। पूर्व में आयोजित वार्षिक माध्यमिक/इंटरमीडिएट प्रायोगिक परीक्षा से वंचित छात्र/छात्राओं की परीक्षा के आयोजन को लेकर चर्चा की गई। केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि दो हज़ार बीस में सिविल सेवा परीक्षा में शामिल नहीं हो सके उम्मीदवारों को एक और अवसर देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं के प्राइवेट स्टूडेंट्स को झटका दिया है। SBI Clerk Exam दो हज़ार इक्कीस: भारतीय स्टेट बैंक ने क्लर्क मुख्य परीक्षा दो हज़ार इक्कीस को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया है। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालयों की छठवीं क्लास में एडमिश के लिए होने वाली ये प्रवेश परीक्षा ग्यारह हजार एक सौ बयासी केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि जेईई मेन चौथे चरण की इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन स्थगित कर दी गई है, अब यह छब्बीस अगस्त से दो सितंबर, दो हज़ार इक्कीस के बीच होगी। NEET के बाद अब NEET की परीक्षा की तारीख का भी ऐलान कर दिया गया है। NEET की परीक्षा ग्यारह सितंबर दो हज़ार इक्कीस को होगी। जो परीक्षार्थी इस साल NEET परीक्षा के लिए आवेदन करना चाहते हैं उन्हें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की वेबसाइट पर विजिट करके या फिर NTANEET. NIC. IN पर विजिट करके ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मेडिकल कोर्सेस में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थी नीट यूजी दो हज़ार इक्कीस परीक्षा के लिए तेरह जुलाई यानि मंगलवार से आवेदन कर सकेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि NEET परीक्षा का आयोजन बारह सितंबर को कराया जाएगा और परीक्षा में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन होगा।
|
राजस्थान के रहने वाले 39 साल के विक्रम पोद्दार की जिंदगी एकदम फिल्मी लगती है, हंसी और गुदगुदी से भरी हुई, लेकिन उनकी जिंदगी का रील देखने से पता चलता है कि वे हंसी के जो गुब्बारे वो फोड़ते हैं, असल में वह गहरी पीड़ा से निकले हैं।
बोर्ड रूम कॉमेडी के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रम कहते हैं 'नौकरी जा चुकी थी। पिता मर रहे थे। कुछ और करने को था नहीं, तो लोगों को हंसाना शुरू कर दिया। कॉमेडी के रूप में नहीं, बल्कि धंधे की तरह। एकदम शुद्ध बिजनेस बनाकर। कुमार मंगलम, आदित्य बिड़ला, अरुंधती भट्टाचार्य, रतन टाटा जैसे लोग भी मेरी कॉमेडी के दीवाने हैं और सालाना 50 लाख रुपए से ज्यादा टर्नओवर।
विक्रम कहते हैं कि मैं अच्छी खासी फैमिली से ताल्लुक रखता हूं। हमारे पापा को बिट्स पिलानी से स्कॉलरशिप मिली थी, लेकिन ज्यादातर पैसे उनकी सौतेली मां ले लेती थी। इससे परेशान होकर वे घर से भाग गए और IIM अहमदाबाद में दाखिला ले लिया। पढाई के बाद उन्होंने खुद से अपनी शादी भी की। उन्हें एक बेटी और एक बेटा (विक्रम) हुआ।
वे कहते हैं कि जब मैं तीन साल का था, तो पापा की किडनी फेल हो गई। मुंबई के एक अस्पताल में उनके किडनी को ट्रांसप्लांट किया गया। हालांकि परिवार से किसी ने साथ नहीं दिया। मां दिनभर अस्पताल से घर और घर से अस्पताल के चक्कर लगाती रहती। घर में नौकर मेरे हिस्से का दूध पी जाते थे और मुझे भूखे सोना पड़ता था।
कुछ महीने बाद पापा अस्पताल से वापस घर तो लौट आए, लेकिन सेहत खराब रहने के चलते नौकरी करने में समर्थ नहीं थे। फिर उन्होंने फैक्स मशीन और थर्मल पेपर इंपोर्ट करना शुरू किया। पापा को बिजनेस की अच्छी-खासी समझ थी। जल्द ही उनका यह बिजनेस चल गया। वे एनआरआई और एचएनआई इन्वेस्टमेंट भी लेकर आए।
तब हमारी काफी अच्छी स्थिति हो गई थी। यहां तक कि तब हम लोग इंटरनेट यूज करने वाले भारत के पहले 500 परिवारों में शामिल थे। इसका फायदा विक्रम ने भी भरपूर उठाया और 11 साल की उम्र में ही कंप्यूटर पर महारथ हासिल कर ली। ट्रेडिंग सीख ली थी। साल 1994 तक वे डिजिटिलाइज हो चुके थे। विश्व इतिहास और साहित्य की कई किताबें पढ़ चुके थे।
हालांकि ये अच्छे दिन ज्यादा नहीं चला। जितना तेजी से बिजनेस बढ़ा था, उतना ही तेजी से डूब भी गया। विक्रम के पिता ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में उनके एमडी रवि नारायण के कहने पर लोन उठाकर काफी पैसा इंवेस्ट कर दिया था। रवि नारायण को CBI ने गिरफ्तार कर लिया और विक्रम के पिता का सारा पैसा डूब गया। उन्होंने अपनी जमा पूंजी, लोन और रिश्तेदारों से कर्ज लेकर पैसा इन्वेस्ट किया था।
तब विक्रम की उम्र तकरीबन 14 साल रही होगी। अब परिवार चलाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पिता के कहने पर उन्होंने दूसरों के बच्चों को इंटरनेट चलाने की क्लासेस देना शुरू किया, लेकिन इससे कहां कुछ होने वाला था। पिता की दवाई का खर्चा, बैंक का कर्ज और ऊपर से ऑफिस और घर की नीलामी का नोटिस पर नोटिस।
विक्रम कहते हैं कि तब हालात ऐसे थे कि उसके दर्द को शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं है। लोग कहते थे कि पैसे दे दो नहीं तो तुम्हारी मां को उठा लेंगे। मैं हाथ जोड़कर लोगों से कहता था कि थोड़ा तो रहम करिए। जिस उम्र में बच्चे खिलौने से खेलते हैं, उस उम्र में मैं अपने ऑफिस और घर बचाने की कोशिश कर रहा था, ताकि कर्ज उतार सकूं।
जैसे-तैसे पढ़ाई पूरी करने के बाद विक्रम ने पहली नौकरी आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल फंड में की। इसके बाद एवलान, इन्वेस्टमेंट बैंकिग समेत कई कॉर्पोरेट हाउसेज में काम किया और मार्केटिंग की अच्छी-खासी समझ डेवलप कर ली।
इसी बीच साल 2012 में उनके पिता को ब्रेन हेमरेज हो गया। साथ ही विक्रम की नौकरी भी छूटने की कगार पर आ गई। नौकरी बचाने के लिए थॉम्स कुक इंडिया की डील ब्रेक करने का टास्क मिला। कई दिनों तक उन्होंने दिन-रात मेहनत की और वे इस डील को पूरा करने में कामयाब रहे। तब करीब 176 मिलियन डॉलर डील उन्होंने की थी।
विक्रम कहते हैं कि तब नौकरी तो बच गई, लेकिन आगे की लाइफ के लिए एक बड़ी सीख भी मिल गई कि कुछ एक्सट्रा नहीं किया तो किसी भी दिन ये नौकरी जा सकती है। इस वजह से अक्सर वे परेशान रहने लगे। कई बार काफी स्ट्रेस में आ जाते थे।
जब विक्रम के पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने सुझाव दिया कि तुम अच्छा बोलते हो। तुम्हें पब्लिक प्लेटफॉर्म पर स्पीच देनी चाहिए। इससे मन भी बहलेगा और कुछ नया करने को भी मिलेगा। इसके बाद विक्रम ने एक टोस्ट मास्टर में हिस्सा लिया। उनकी पहली स्पीच ठीक-ठाक पसंद की गई। फिर वे अक्सर टोस्ट मास्टर में जाने लगे। वहां उनके कई नए दोस्त बने। कई लोग उनसे कहने लगे कि यार तुम बहुत फनी बोलते हो।
विक्रम कहते हैं कि उन दिनों मुंबई में कॉमेडी स्टोर का बहुत बोलबाला था। यहां सिर्फ फॉरेनर्स ही कॉमेडी शो किया करते थे। इसके मालिक डॉन वार्ड की बेटी शारलेट इसका कामकाज देखा करती थीं। शारलेट ने स्थानीय कॉमेडियंस को भी कुछ मिनट का स्लॉट देना शुरू किया था। मैंने तय किया कि इस शो में भी परफॉर्म किया जाए, लेकिन यहां एंट्री आसान नहीं थी।
काफी मशक्कत के बाद आखिरकार विक्रम को कॉमेडी स्टोर में हिस्सा लेने का मौका मिल गया। शुरूआत में वे बच्चों वाले जोक सुनाया करते थे।
कुछ दिनों बाद विक्रम को पता लगा कि एक साथी कलाकार डेनियल ने कॉमेडी के लिए नौकरी छोड़ दी। तब विक्रम को रियलाइज हुआ कि इसमें पैसा काफी है, तभी लोग नौकरी छोड़ रहे हैं। अब तक विक्रम की अच्छी खासी पहचान बन गई थी और देश के टॉप 50 अंग्रेजी स्टैंडअप कॉमेडियन में शामिल हो चुके थे।
इधर विक्रम के बॉस ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। यानी अब नौकरी करना मुश्किल हो रहा था। कुछ वक्त बाद नौकरी चली भी गई।
इसी बीच एक दिन उनके पास कॉर्पोरेट ट्रेनिंग के लिए कॉल आया। एक कंपनी के कर्मचारियों को स्पीकिंग स्किल की ट्रेनिंग देनी थी। यहां से उनके दिमाग में नया बिजनेस मॉडल घूमने लगा। वे कहते हैं कि तब मैंने तय किया कि अब कॉर्पोरेट सेक्टर में घूसना है। सिर्फ कला से पेट नहीं भरेगा, इसे बेचना पड़ेगा।
यहां से उन्होंने कॉमेडी को बिजनेस के रूप में आगे बढ़ाना शुरू किया। अपने काम को निखारने के लिए हर छोटे-बड़े कॉमेडियन की परफॉर्मेंस देखनी शुरू कर दी। अलग-अलग तरह की किताबें पढ़ने लगे। कॉर्पोरेट सेक्टर के लोगों से मिलने लगे। उनकी पार्टीज में जाने लगें। उनके साथ घंटों बिताने लगे।
इतना ही नहीं उन्होंने समाज के हर तबके के आदमी के साथ उठना बैठना शुरू किया। जैसे पलंबर, बिजली वाला, रिक्शा वाला, टैक्सी वाला। ताकि वह उससे उसके बारे में जान सकें और उनकी बातों को अपने जोक्स में डाल सकें।
विक्रम कहते हैं कि तब कॉमेडी फील्ड में वीरदास का नाम था। मेरा अगला टारगेट था उनके साथ जुड़ना और उनकी कंपनी में काम करना। बहुत कोशिश के बाद उनके ऑफिस में पहुंच गया। वीरदास ने मुझसे कहा कि वे आदित्य बिड़ला ग्रुप के लिए एक शो होस्ट करने वाले हैं। आप उसके लिए एक कॉपी लिखिए। मैंने कॉपी लिखी और उन्होंने शो होस्ट किया। शो सुपरहिट गया। जिसके बाद वीरदास ने मुझे बतौर कंटेंट राइटर नौकरी पर रख लिया। साथ में अपना शो भी कर रहा था।
इस बीच उनके पिता की किडनी फिर से खराब हो गई। अब विक्रम के सामने फिर से मुश्किलों का पहाड़ खड़ा हो गया। कभी पिता की देखभाल के लिए अस्पताल में सारी रात रहना पड़ता तो कभी ऑफिस से ही फुर्सत नहीं मिलती थी। ऊपर से उनका खुद का शो, लेकिन वे सबकुछ इस उम्मीद से कर रहे थे कि कल को सब ठीक हो जाएगा। उनके पिता स्वस्थ हो जाएंगे। हालांकि ऐसा हुआ नहीं और साल 2015 में उनके पिता की मौत हो गई।
इसके बाद विक्रम ने खुद को संभाला और तय किया कि वे अपनी कंपनी बनाएंगे। बिजनेस और मार्केटिंग पकड़ बना चुके थे। अपनी सेविंग्स से करीब 1. 5 लाख रुपए खर्च किए और बोर्ड रूम कॉमेडी नाम से कंपनी बना दी।
वे कहते हैं कि कंपनी की वेबसाइट बनाने में करीब 70 हजार रुपए खर्च हुए थे और लोगो बनाने में भी करीब 70 हजार रुपए लगे थे। इसके बाद ऑफिस वैगर का खर्च थोड़ा बहुत आया था। फिर उन्होंने पांच कंटेंट राइटर रखे। वीडियो प्रोडक्शन और सोशल मीडिया की टीम रखी और अपनी कॉमेडी को बेचना शुरू कर दिया। वे कॉमेडी शो के साथ-साथ कॉर्पोरेट ट्रेनिंग भी प्रोवाइड कराने लगे। वह बताते हैं कि SBI के लिए तैयार किए गए शो में 'रामायण नेरेटेड बाय इंवेस्टमेंट बैंकर' जबरदस्त हिट हुआ था।
विक्रम कहते हैं कि कॉर्पोरेट शो में एचआर पर उनके जोक जबरदस्त हिट होते थे, क्योंकि कर्मचारी एचआर के मुंह पर जो बोलना चाहते थे, वे बोल नहीं पाते थे और जब मैं बोलता था तो उन्हें बहुत मजा आता था। विक्रम के शो के हिट होने की दूसरी वजह थी कि उनका पब्लिक रिलेशन। हर वर्ग के लोगों से उनका रेगुलर मिलना जुलना था। लिहाजा उन्हें पता था कि कब और किस मंच पर क्या बोलना है। ताकि लोगों को हंसा सके।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
राजस्थान के रहने वाले उनतालीस साल के विक्रम पोद्दार की जिंदगी एकदम फिल्मी लगती है, हंसी और गुदगुदी से भरी हुई, लेकिन उनकी जिंदगी का रील देखने से पता चलता है कि वे हंसी के जो गुब्बारे वो फोड़ते हैं, असल में वह गहरी पीड़ा से निकले हैं। बोर्ड रूम कॉमेडी के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रम कहते हैं 'नौकरी जा चुकी थी। पिता मर रहे थे। कुछ और करने को था नहीं, तो लोगों को हंसाना शुरू कर दिया। कॉमेडी के रूप में नहीं, बल्कि धंधे की तरह। एकदम शुद्ध बिजनेस बनाकर। कुमार मंगलम, आदित्य बिड़ला, अरुंधती भट्टाचार्य, रतन टाटा जैसे लोग भी मेरी कॉमेडी के दीवाने हैं और सालाना पचास लाख रुपए से ज्यादा टर्नओवर। विक्रम कहते हैं कि मैं अच्छी खासी फैमिली से ताल्लुक रखता हूं। हमारे पापा को बिट्स पिलानी से स्कॉलरशिप मिली थी, लेकिन ज्यादातर पैसे उनकी सौतेली मां ले लेती थी। इससे परेशान होकर वे घर से भाग गए और IIM अहमदाबाद में दाखिला ले लिया। पढाई के बाद उन्होंने खुद से अपनी शादी भी की। उन्हें एक बेटी और एक बेटा हुआ। वे कहते हैं कि जब मैं तीन साल का था, तो पापा की किडनी फेल हो गई। मुंबई के एक अस्पताल में उनके किडनी को ट्रांसप्लांट किया गया। हालांकि परिवार से किसी ने साथ नहीं दिया। मां दिनभर अस्पताल से घर और घर से अस्पताल के चक्कर लगाती रहती। घर में नौकर मेरे हिस्से का दूध पी जाते थे और मुझे भूखे सोना पड़ता था। कुछ महीने बाद पापा अस्पताल से वापस घर तो लौट आए, लेकिन सेहत खराब रहने के चलते नौकरी करने में समर्थ नहीं थे। फिर उन्होंने फैक्स मशीन और थर्मल पेपर इंपोर्ट करना शुरू किया। पापा को बिजनेस की अच्छी-खासी समझ थी। जल्द ही उनका यह बिजनेस चल गया। वे एनआरआई और एचएनआई इन्वेस्टमेंट भी लेकर आए। तब हमारी काफी अच्छी स्थिति हो गई थी। यहां तक कि तब हम लोग इंटरनेट यूज करने वाले भारत के पहले पाँच सौ परिवारों में शामिल थे। इसका फायदा विक्रम ने भी भरपूर उठाया और ग्यारह साल की उम्र में ही कंप्यूटर पर महारथ हासिल कर ली। ट्रेडिंग सीख ली थी। साल एक हज़ार नौ सौ चौरानवे तक वे डिजिटिलाइज हो चुके थे। विश्व इतिहास और साहित्य की कई किताबें पढ़ चुके थे। हालांकि ये अच्छे दिन ज्यादा नहीं चला। जितना तेजी से बिजनेस बढ़ा था, उतना ही तेजी से डूब भी गया। विक्रम के पिता ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में उनके एमडी रवि नारायण के कहने पर लोन उठाकर काफी पैसा इंवेस्ट कर दिया था। रवि नारायण को CBI ने गिरफ्तार कर लिया और विक्रम के पिता का सारा पैसा डूब गया। उन्होंने अपनी जमा पूंजी, लोन और रिश्तेदारों से कर्ज लेकर पैसा इन्वेस्ट किया था। तब विक्रम की उम्र तकरीबन चौदह साल रही होगी। अब परिवार चलाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पिता के कहने पर उन्होंने दूसरों के बच्चों को इंटरनेट चलाने की क्लासेस देना शुरू किया, लेकिन इससे कहां कुछ होने वाला था। पिता की दवाई का खर्चा, बैंक का कर्ज और ऊपर से ऑफिस और घर की नीलामी का नोटिस पर नोटिस। विक्रम कहते हैं कि तब हालात ऐसे थे कि उसके दर्द को शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं है। लोग कहते थे कि पैसे दे दो नहीं तो तुम्हारी मां को उठा लेंगे। मैं हाथ जोड़कर लोगों से कहता था कि थोड़ा तो रहम करिए। जिस उम्र में बच्चे खिलौने से खेलते हैं, उस उम्र में मैं अपने ऑफिस और घर बचाने की कोशिश कर रहा था, ताकि कर्ज उतार सकूं। जैसे-तैसे पढ़ाई पूरी करने के बाद विक्रम ने पहली नौकरी आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल फंड में की। इसके बाद एवलान, इन्वेस्टमेंट बैंकिग समेत कई कॉर्पोरेट हाउसेज में काम किया और मार्केटिंग की अच्छी-खासी समझ डेवलप कर ली। इसी बीच साल दो हज़ार बारह में उनके पिता को ब्रेन हेमरेज हो गया। साथ ही विक्रम की नौकरी भी छूटने की कगार पर आ गई। नौकरी बचाने के लिए थॉम्स कुक इंडिया की डील ब्रेक करने का टास्क मिला। कई दिनों तक उन्होंने दिन-रात मेहनत की और वे इस डील को पूरा करने में कामयाब रहे। तब करीब एक सौ छिहत्तर मिलियन डॉलर डील उन्होंने की थी। विक्रम कहते हैं कि तब नौकरी तो बच गई, लेकिन आगे की लाइफ के लिए एक बड़ी सीख भी मिल गई कि कुछ एक्सट्रा नहीं किया तो किसी भी दिन ये नौकरी जा सकती है। इस वजह से अक्सर वे परेशान रहने लगे। कई बार काफी स्ट्रेस में आ जाते थे। जब विक्रम के पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने सुझाव दिया कि तुम अच्छा बोलते हो। तुम्हें पब्लिक प्लेटफॉर्म पर स्पीच देनी चाहिए। इससे मन भी बहलेगा और कुछ नया करने को भी मिलेगा। इसके बाद विक्रम ने एक टोस्ट मास्टर में हिस्सा लिया। उनकी पहली स्पीच ठीक-ठाक पसंद की गई। फिर वे अक्सर टोस्ट मास्टर में जाने लगे। वहां उनके कई नए दोस्त बने। कई लोग उनसे कहने लगे कि यार तुम बहुत फनी बोलते हो। विक्रम कहते हैं कि उन दिनों मुंबई में कॉमेडी स्टोर का बहुत बोलबाला था। यहां सिर्फ फॉरेनर्स ही कॉमेडी शो किया करते थे। इसके मालिक डॉन वार्ड की बेटी शारलेट इसका कामकाज देखा करती थीं। शारलेट ने स्थानीय कॉमेडियंस को भी कुछ मिनट का स्लॉट देना शुरू किया था। मैंने तय किया कि इस शो में भी परफॉर्म किया जाए, लेकिन यहां एंट्री आसान नहीं थी। काफी मशक्कत के बाद आखिरकार विक्रम को कॉमेडी स्टोर में हिस्सा लेने का मौका मिल गया। शुरूआत में वे बच्चों वाले जोक सुनाया करते थे। कुछ दिनों बाद विक्रम को पता लगा कि एक साथी कलाकार डेनियल ने कॉमेडी के लिए नौकरी छोड़ दी। तब विक्रम को रियलाइज हुआ कि इसमें पैसा काफी है, तभी लोग नौकरी छोड़ रहे हैं। अब तक विक्रम की अच्छी खासी पहचान बन गई थी और देश के टॉप पचास अंग्रेजी स्टैंडअप कॉमेडियन में शामिल हो चुके थे। इधर विक्रम के बॉस ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। यानी अब नौकरी करना मुश्किल हो रहा था। कुछ वक्त बाद नौकरी चली भी गई। इसी बीच एक दिन उनके पास कॉर्पोरेट ट्रेनिंग के लिए कॉल आया। एक कंपनी के कर्मचारियों को स्पीकिंग स्किल की ट्रेनिंग देनी थी। यहां से उनके दिमाग में नया बिजनेस मॉडल घूमने लगा। वे कहते हैं कि तब मैंने तय किया कि अब कॉर्पोरेट सेक्टर में घूसना है। सिर्फ कला से पेट नहीं भरेगा, इसे बेचना पड़ेगा। यहां से उन्होंने कॉमेडी को बिजनेस के रूप में आगे बढ़ाना शुरू किया। अपने काम को निखारने के लिए हर छोटे-बड़े कॉमेडियन की परफॉर्मेंस देखनी शुरू कर दी। अलग-अलग तरह की किताबें पढ़ने लगे। कॉर्पोरेट सेक्टर के लोगों से मिलने लगे। उनकी पार्टीज में जाने लगें। उनके साथ घंटों बिताने लगे। इतना ही नहीं उन्होंने समाज के हर तबके के आदमी के साथ उठना बैठना शुरू किया। जैसे पलंबर, बिजली वाला, रिक्शा वाला, टैक्सी वाला। ताकि वह उससे उसके बारे में जान सकें और उनकी बातों को अपने जोक्स में डाल सकें। विक्रम कहते हैं कि तब कॉमेडी फील्ड में वीरदास का नाम था। मेरा अगला टारगेट था उनके साथ जुड़ना और उनकी कंपनी में काम करना। बहुत कोशिश के बाद उनके ऑफिस में पहुंच गया। वीरदास ने मुझसे कहा कि वे आदित्य बिड़ला ग्रुप के लिए एक शो होस्ट करने वाले हैं। आप उसके लिए एक कॉपी लिखिए। मैंने कॉपी लिखी और उन्होंने शो होस्ट किया। शो सुपरहिट गया। जिसके बाद वीरदास ने मुझे बतौर कंटेंट राइटर नौकरी पर रख लिया। साथ में अपना शो भी कर रहा था। इस बीच उनके पिता की किडनी फिर से खराब हो गई। अब विक्रम के सामने फिर से मुश्किलों का पहाड़ खड़ा हो गया। कभी पिता की देखभाल के लिए अस्पताल में सारी रात रहना पड़ता तो कभी ऑफिस से ही फुर्सत नहीं मिलती थी। ऊपर से उनका खुद का शो, लेकिन वे सबकुछ इस उम्मीद से कर रहे थे कि कल को सब ठीक हो जाएगा। उनके पिता स्वस्थ हो जाएंगे। हालांकि ऐसा हुआ नहीं और साल दो हज़ार पंद्रह में उनके पिता की मौत हो गई। इसके बाद विक्रम ने खुद को संभाला और तय किया कि वे अपनी कंपनी बनाएंगे। बिजनेस और मार्केटिंग पकड़ बना चुके थे। अपनी सेविंग्स से करीब एक. पाँच लाख रुपए खर्च किए और बोर्ड रूम कॉमेडी नाम से कंपनी बना दी। वे कहते हैं कि कंपनी की वेबसाइट बनाने में करीब सत्तर हजार रुपए खर्च हुए थे और लोगो बनाने में भी करीब सत्तर हजार रुपए लगे थे। इसके बाद ऑफिस वैगर का खर्च थोड़ा बहुत आया था। फिर उन्होंने पांच कंटेंट राइटर रखे। वीडियो प्रोडक्शन और सोशल मीडिया की टीम रखी और अपनी कॉमेडी को बेचना शुरू कर दिया। वे कॉमेडी शो के साथ-साथ कॉर्पोरेट ट्रेनिंग भी प्रोवाइड कराने लगे। वह बताते हैं कि SBI के लिए तैयार किए गए शो में 'रामायण नेरेटेड बाय इंवेस्टमेंट बैंकर' जबरदस्त हिट हुआ था। विक्रम कहते हैं कि कॉर्पोरेट शो में एचआर पर उनके जोक जबरदस्त हिट होते थे, क्योंकि कर्मचारी एचआर के मुंह पर जो बोलना चाहते थे, वे बोल नहीं पाते थे और जब मैं बोलता था तो उन्हें बहुत मजा आता था। विक्रम के शो के हिट होने की दूसरी वजह थी कि उनका पब्लिक रिलेशन। हर वर्ग के लोगों से उनका रेगुलर मिलना जुलना था। लिहाजा उन्हें पता था कि कब और किस मंच पर क्या बोलना है। ताकि लोगों को हंसा सके। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
राजस्थान की कांग्रेस सरकार में सियासी हलचल बढ़ गई है. अशोक गहलोत सरकार के 3 वरिष्ठ मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राजस्थान में मंत्रिमंडल के पुनर्गठन की कवायद के बीच स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर रघु शर्मा, राजस्व मंत्री हरीश चौधरी और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपना मंत्री पद छोड़ने की पेशकश की है.
राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन ने कहा राजस्थान कैबिनेट के तीन मंत्रियों गोविंद सिंह डोटासरा, रघु शर्मा और हरीश चौधरी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपने पदों से हटने और सगंठन में काम करने की इच्छा जताई है. उन्होंने कहा कांग्रेस पार्टी इनका सम्मान करती है. हमें खुशी है कि ऐसे होनहार लोग हैं जो पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं.
सूत्रों के मुताबिक खबर ये भी है कि आज शाम तक गहलोत सरकार के सभी मंत्री इस्तीफा दे सकते हैं. आज शाम 5 बजे मंत्रिमंडल की बैठक है जिसमें इस्तीफों की पेशकश हो सकती है.
हाल ही में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने दिल्ली में सोनिया गांधी से अलग-अलग समय पर मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद से ही राजस्थान के सियासी गलियारे में कैबिनेट विस्तार की चर्चा है. माना जा रहा है कि इसके साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चल रही तनातनी पर विराम लग जाएगा.
|
राजस्थान की कांग्रेस सरकार में सियासी हलचल बढ़ गई है. अशोक गहलोत सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राजस्थान में मंत्रिमंडल के पुनर्गठन की कवायद के बीच स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर रघु शर्मा, राजस्व मंत्री हरीश चौधरी और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपना मंत्री पद छोड़ने की पेशकश की है. राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन ने कहा राजस्थान कैबिनेट के तीन मंत्रियों गोविंद सिंह डोटासरा, रघु शर्मा और हरीश चौधरी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपने पदों से हटने और सगंठन में काम करने की इच्छा जताई है. उन्होंने कहा कांग्रेस पार्टी इनका सम्मान करती है. हमें खुशी है कि ऐसे होनहार लोग हैं जो पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक खबर ये भी है कि आज शाम तक गहलोत सरकार के सभी मंत्री इस्तीफा दे सकते हैं. आज शाम पाँच बजे मंत्रिमंडल की बैठक है जिसमें इस्तीफों की पेशकश हो सकती है. हाल ही में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने दिल्ली में सोनिया गांधी से अलग-अलग समय पर मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद से ही राजस्थान के सियासी गलियारे में कैबिनेट विस्तार की चर्चा है. माना जा रहा है कि इसके साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चल रही तनातनी पर विराम लग जाएगा.
|
क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू, इमरान के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए पाकिस्तान पहुंच चुके हैं। लाहौर में सिद्धू ने कहा, मैं अपने मित्र (इमरान) के आमंत्रण पर पाकिस्तान आया हूं। यह बहुत खास क्षण है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी और कलाकार दूरियां (देशों के बीच) मिटा देते हैं। यहां पाकिस्तानी लोगों के लिए प्यार का संदेश लेकर आया हूं।
इस सप्ताह के शुरू में पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने कहा था कि वह शपथ ग्रहण में भाग नहीं ले रहे हैं। उन्होंने इसके पीछे निजी कारणों का हवाला दिया। कपिल देव उन तीन भारतीय क्रिकेटरों में शामिल हैं, जिन्हें इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए बुलाया गया है। कपिल के साथ, सिद्धू और सुनील गावस्कर को भी आमंत्रण मिला है। गावस्कर ने भी इमरान को सूचित कर दिया था कि वे शपथ ग्रहण में भाग नहीं लेंगे।
|
क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू, इमरान के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए पाकिस्तान पहुंच चुके हैं। लाहौर में सिद्धू ने कहा, मैं अपने मित्र के आमंत्रण पर पाकिस्तान आया हूं। यह बहुत खास क्षण है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी और कलाकार दूरियां मिटा देते हैं। यहां पाकिस्तानी लोगों के लिए प्यार का संदेश लेकर आया हूं। इस सप्ताह के शुरू में पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने कहा था कि वह शपथ ग्रहण में भाग नहीं ले रहे हैं। उन्होंने इसके पीछे निजी कारणों का हवाला दिया। कपिल देव उन तीन भारतीय क्रिकेटरों में शामिल हैं, जिन्हें इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए बुलाया गया है। कपिल के साथ, सिद्धू और सुनील गावस्कर को भी आमंत्रण मिला है। गावस्कर ने भी इमरान को सूचित कर दिया था कि वे शपथ ग्रहण में भाग नहीं लेंगे।
|
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी मुहिम के तहत जालंधर बिजली विभाग में तैनात एक अधिकारी पर शिकंजा कसा है। विजिलेंस ब्यूरो ने जालंधर में तैनात PSPCL के अतिरिक्त अधीक्षक इंजीनियर (ASE) को रिश्वत के साथ पकड़ा है। ASE सुखविंदर सिंह मुल्तानी के पास विजिलेंस को 15 लाख रुपए रिश्वत के मिले हैं।
विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि ASE सुखविंदर मुल्तानी से 15 लाख तो पकड़े हैं, इन्होंने शिकायतकर्ता से 20 लाख रुपए और देने की भी मांग की थी। लेकिन उससे पहले ही इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। विजिलेंस के प्रवक्ता ने बताया कि मुल्तानी पहले कार्यकारी इंजीनियर (एक्सियन) तकनीकी ऑडिट, PSPCL जालंधर में स्टोर कीपर के तौर पर तैनात था।
इसके खिलाफ PSPCL वेरका, अमृतसर के स्टोर कीपर शरणजीत सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता शरणजीत ने मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी नंबर पर ऑडियो-वीडियो सबूत के साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उक्त अधिकारी ने एक्सियन के पद पर रहने के दौरान स्टोर के सामान की निरीक्षण रिपोर्ट अपने पक्ष में भेजने के एवज में 15 लाख रुपए की रिश्वत ली थी।
अब शिकायतकर्ता को नौकरी से बहाल करने की सिफारिश के बदले में 20 लाख और मांग रहा था। क्योंकि शिकायतकर्ता को स्टॉक सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर निलंबित कर दिया गया था।
विजिलेंस ब्यूरो प्रवक्ता ने बताया कि विजिलेंस ने आरोपों की जांच की तो पता चला कि सुखविंदर सिंह मुल्तानी ने शिकायतकर्ता शरणजीत सिंह से बहाली के लिए तीन किश्तों में रिश्वत ली थी। शरणजीत ने मुल्तानी को 15 लाख रुपए तीन किश्तों में अदा किए थे, लेकिन मुल्तानी के मन में इतना लालच आ गया कि उसने शरणजीत की बहाली रिपोर्ट बनाने की एवज में 20 लाख रुपए और मांग लिए।
प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी मुहिम के तहत जालंधर बिजली विभाग में तैनात एक अधिकारी पर शिकंजा कसा है। विजिलेंस ब्यूरो ने जालंधर में तैनात PSPCL के अतिरिक्त अधीक्षक इंजीनियर को रिश्वत के साथ पकड़ा है। ASE सुखविंदर सिंह मुल्तानी के पास विजिलेंस को पंद्रह लाख रुपए रिश्वत के मिले हैं। विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि ASE सुखविंदर मुल्तानी से पंद्रह लाख तो पकड़े हैं, इन्होंने शिकायतकर्ता से बीस लाख रुपए और देने की भी मांग की थी। लेकिन उससे पहले ही इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। विजिलेंस के प्रवक्ता ने बताया कि मुल्तानी पहले कार्यकारी इंजीनियर तकनीकी ऑडिट, PSPCL जालंधर में स्टोर कीपर के तौर पर तैनात था। इसके खिलाफ PSPCL वेरका, अमृतसर के स्टोर कीपर शरणजीत सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता शरणजीत ने मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी नंबर पर ऑडियो-वीडियो सबूत के साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उक्त अधिकारी ने एक्सियन के पद पर रहने के दौरान स्टोर के सामान की निरीक्षण रिपोर्ट अपने पक्ष में भेजने के एवज में पंद्रह लाख रुपए की रिश्वत ली थी। अब शिकायतकर्ता को नौकरी से बहाल करने की सिफारिश के बदले में बीस लाख और मांग रहा था। क्योंकि शिकायतकर्ता को स्टॉक सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर निलंबित कर दिया गया था। विजिलेंस ब्यूरो प्रवक्ता ने बताया कि विजिलेंस ने आरोपों की जांच की तो पता चला कि सुखविंदर सिंह मुल्तानी ने शिकायतकर्ता शरणजीत सिंह से बहाली के लिए तीन किश्तों में रिश्वत ली थी। शरणजीत ने मुल्तानी को पंद्रह लाख रुपए तीन किश्तों में अदा किए थे, लेकिन मुल्तानी के मन में इतना लालच आ गया कि उसने शरणजीत की बहाली रिपोर्ट बनाने की एवज में बीस लाख रुपए और मांग लिए। प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
धारणी/ दि. 1 - धारणी पुलिस थाना क्षेत्र के वन परिसर के कुएं में अकोट के पार्षद के भाई की डूबकर मौत हो गई. जबकि मृत शेख शकील के दोस्त को तैरना आता था, इस वजह से वह बचकर कुएं के बाहर आ गया. परिजनों को सूचना देने के बाद सभी लोग मौके पर पहुंचे. पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से लाश बाहर निकालने के बाद घटनास्थल का पंचनामा करते हुए लाश पोस्टमार्टम के लिए उपजिला अस्पताल रवाना की.
शेख शकील शेख मुमताज (अकोट) यह कुएं में डूबकर मरने वाले व्यक्ति का नाम है. सूत्रों का कहना है कि मृतक शेख शकील एक पार्षद का भाई है. जानकारी के अनुसार घटना के समय मृतक शेख शकील और उसका दोस्त अकोट की ओर जा रहे थे, लेकिन इस दौरान उन्हें कुछ समझ नहीं आया और वे दोनों कुएं में जा गिरे, लेकिन शेख शकील के दोस्त को तेैरना आता था. इसलिए वह कुएं से बाहर निकलकर अकोट पहुंचा और परिजनों को घटना की जानकारी दी. इसके बाद शेख शकील के परिजन धारणी पहुंचे. इस समय मौके पर पहूंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से लाश कुएं से बाहर निकली. पुलिस फिलहाल मामले की तहकीकात कर रही है.
|
धारणी/ दि. एक - धारणी पुलिस थाना क्षेत्र के वन परिसर के कुएं में अकोट के पार्षद के भाई की डूबकर मौत हो गई. जबकि मृत शेख शकील के दोस्त को तैरना आता था, इस वजह से वह बचकर कुएं के बाहर आ गया. परिजनों को सूचना देने के बाद सभी लोग मौके पर पहुंचे. पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से लाश बाहर निकालने के बाद घटनास्थल का पंचनामा करते हुए लाश पोस्टमार्टम के लिए उपजिला अस्पताल रवाना की. शेख शकील शेख मुमताज यह कुएं में डूबकर मरने वाले व्यक्ति का नाम है. सूत्रों का कहना है कि मृतक शेख शकील एक पार्षद का भाई है. जानकारी के अनुसार घटना के समय मृतक शेख शकील और उसका दोस्त अकोट की ओर जा रहे थे, लेकिन इस दौरान उन्हें कुछ समझ नहीं आया और वे दोनों कुएं में जा गिरे, लेकिन शेख शकील के दोस्त को तेैरना आता था. इसलिए वह कुएं से बाहर निकलकर अकोट पहुंचा और परिजनों को घटना की जानकारी दी. इसके बाद शेख शकील के परिजन धारणी पहुंचे. इस समय मौके पर पहूंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से लाश कुएं से बाहर निकली. पुलिस फिलहाल मामले की तहकीकात कर रही है.
|
बीजिंगः चीन ने शनिवार को घोषणा की है कि उपराष्ट्रपति वांग किशान महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में राष्ट्रपति शी चिनफिंग के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर शामिल होंगे। चीन द्वारा प्रतिबंधित किए गए ब्रिटिश सांसदों के एक समूह ने अंतिम संस्कार के लिए चीनी सरकार को आमंत्रित किए जाने पर चिंता व्यक्त की है।
एक सांसद ने कहा कि चीन के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों से दुर्व्यवहार और मानवाधिकार उल्लंघनों को देखते हुए निमंत्रण रद्द किया जाना चाहिए। शी के करीबी वांग सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की सात सदस्यीय शक्तिशाली पोलितब्यूरो स्थायी समिति के 2012 से लेकर 2017 तक सदस्य रहे।
उस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई की थी। वांग को 2018 में उपराष्ट्रपति नामित किया गया और वह अक्सर शी की ओर से कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। चीन में उपराष्ट्रपति का पद व्यापक रूप से रस्मी होता है।
|
बीजिंगः चीन ने शनिवार को घोषणा की है कि उपराष्ट्रपति वांग किशान महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में राष्ट्रपति शी चिनफिंग के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर शामिल होंगे। चीन द्वारा प्रतिबंधित किए गए ब्रिटिश सांसदों के एक समूह ने अंतिम संस्कार के लिए चीनी सरकार को आमंत्रित किए जाने पर चिंता व्यक्त की है। एक सांसद ने कहा कि चीन के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों से दुर्व्यवहार और मानवाधिकार उल्लंघनों को देखते हुए निमंत्रण रद्द किया जाना चाहिए। शी के करीबी वांग सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की सात सदस्यीय शक्तिशाली पोलितब्यूरो स्थायी समिति के दो हज़ार बारह से लेकर दो हज़ार सत्रह तक सदस्य रहे। उस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई की थी। वांग को दो हज़ार अट्ठारह में उपराष्ट्रपति नामित किया गया और वह अक्सर शी की ओर से कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। चीन में उपराष्ट्रपति का पद व्यापक रूप से रस्मी होता है।
|
जयपुर - -मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने सेना दिवस (15 जनवरी) के अवसर पर देश की सरहदों की रक्षा में प्राण न्यौछावर करने वाले अमर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है।
श्रीमती राजे ने सैन्य अधिकारियों एवं उनके परिजनों को सेना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्र की जनता को अपनी बहादुर सेना तथा उसके जवानों पर नाज़ है। उन्होंने कहा कि इन साहसी जवानों की वजह से ही हम स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ हमारे सैनिक देश के अंदर भी राहत एवं बचाव कार्यों सहित विभिन्न अभियानों में भागीदारी कर शांति तथा आपसी सद्भाव की परम्परा को आगे बढ़ाते हैं। सभी देशवासियों को अपनी सेना पर गर्व है।
|
जयपुर - -मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने सेना दिवस के अवसर पर देश की सरहदों की रक्षा में प्राण न्यौछावर करने वाले अमर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है। श्रीमती राजे ने सैन्य अधिकारियों एवं उनके परिजनों को सेना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्र की जनता को अपनी बहादुर सेना तथा उसके जवानों पर नाज़ है। उन्होंने कहा कि इन साहसी जवानों की वजह से ही हम स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ हमारे सैनिक देश के अंदर भी राहत एवं बचाव कार्यों सहित विभिन्न अभियानों में भागीदारी कर शांति तथा आपसी सद्भाव की परम्परा को आगे बढ़ाते हैं। सभी देशवासियों को अपनी सेना पर गर्व है।
|
Voting Drang Himachal Election 2022 हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए शाम पांच बजे तक मतदान हुआ। जिला मंडी में सराज के अलावा द्रंग भी हाट सीट है। यहां प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर 11वीं बार चुनावी रण में हैं। शाम पांच बजे तक 66 प्रतिशत वोटिंग हुई।
मंडी, जागरण संवाददाता। Voting Drang, Himachal Election 2022, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर 11वीं बार चुनावी रण में हैं। इस बार उनका सीधा मुकाबला भाजपा प्रत्याशी पूर्ण चंद ठाकुर से है। पिछली बार भी जवाहर ठाकुर ने उनकी पीठ लगाई थी। उन्हें 6541 मतों से हार का सामना करना पड़ा था। मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई है। कौल सिंह ठाकुर ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1977 के विधानसभा चुनाव से की थी। उन्होंने जगजीवन राम की कांग्रेस फार डेमोक्रेसी (सीएफडी) पार्टी से पहला चुनाव द्रंग विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था। सीएफडी जनता पार्टी का सहयोगी दल था। पहले ही चुनाव में वह जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में छह प्रत्याशी मैदान में थे। उनका मुकाबला निर्दलीय दीनानाथ गौतम से हुआ था। कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहा था। कौल सिंह को 44. 92 व निर्दलीय प्रत्याशी दीनानाथ गौतम को 41. 30 प्रतिशत मत मिले थे।
- द्रग हलके में शाम पांच बजे तक 66 प्रतिशत मतदान रिकार्ड किया गया है।
- द्रंग विधानसभा क्षेत्र में तीन बजे तक 62. 50 प्रतिशत मतदान हुआ।
- द्रंग में एक बजे तक 43% वोटिंग हुई। धूप खिलने के साथ पोलिंग ने रफ्तार पकड़ी है।
- द्रंग विधानसभा क्षेत्र में सुबह नौ बजे तक 6. 30% मतदान हुआ।
एक बार विधानसभा अध्यक्ष व दो बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं। प्रदेश के किसी नेता ने विधानसभा के 11 चुनाव नहीं लड़े हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा के जवाहर ठाकुर को 47. 14 व कौल सिंह को 37. 14 प्रतिशत मत मिले थे। कांग्रेस पार्टी का अगर जनता का समर्थन मिलता है तो कौल सिंह ठाकुर वरिष्ठता के लिहाज से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे।
1982 के चुनाव से पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस में रहकर अपने राजनीतिक सफर को उन्होंने आगे बढ़ाया। द्रंग की जनता ने उन्हें आठ बार विधायक चुना। 1990 व 2017 में भाजपा की लहर में वह अपनी सीट नहीं बचा पाए। 1990 के चुनाव में भाजपा के दीनानाथ शास्त्री ने शिकस्त दी थी। दीनानाथ शास्त्री को 53. 72 व कौल सिंह को 44. 44 प्रतिशत मत मिले थे। करीब 33 माह बाद हुए चुनाव में कौल सिंह ठाकुर ने दीनानाथ शास्त्री को पराजित किया था। वह वीरभद्र सरकार में जलशक्ति, स्वास्थ्य, कानून मंत्री रहे।
|
Voting Drang Himachal Election दो हज़ार बाईस हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए शाम पांच बजे तक मतदान हुआ। जिला मंडी में सराज के अलावा द्रंग भी हाट सीट है। यहां प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर ग्यारहवीं बार चुनावी रण में हैं। शाम पांच बजे तक छयासठ प्रतिशत वोटिंग हुई। मंडी, जागरण संवाददाता। Voting Drang, Himachal Election दो हज़ार बाईस, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर ग्यारहवीं बार चुनावी रण में हैं। इस बार उनका सीधा मुकाबला भाजपा प्रत्याशी पूर्ण चंद ठाकुर से है। पिछली बार भी जवाहर ठाकुर ने उनकी पीठ लगाई थी। उन्हें छः हज़ार पाँच सौ इकतालीस मतों से हार का सामना करना पड़ा था। मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई है। कौल सिंह ठाकुर ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर के विधानसभा चुनाव से की थी। उन्होंने जगजीवन राम की कांग्रेस फार डेमोक्रेसी पार्टी से पहला चुनाव द्रंग विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था। सीएफडी जनता पार्टी का सहयोगी दल था। पहले ही चुनाव में वह जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में छह प्रत्याशी मैदान में थे। उनका मुकाबला निर्दलीय दीनानाथ गौतम से हुआ था। कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहा था। कौल सिंह को चौंतालीस. बानवे व निर्दलीय प्रत्याशी दीनानाथ गौतम को इकतालीस. तीस प्रतिशत मत मिले थे। - द्रग हलके में शाम पांच बजे तक छयासठ प्रतिशत मतदान रिकार्ड किया गया है। - द्रंग विधानसभा क्षेत्र में तीन बजे तक बासठ. पचास प्रतिशत मतदान हुआ। - द्रंग में एक बजे तक तैंतालीस% वोटिंग हुई। धूप खिलने के साथ पोलिंग ने रफ्तार पकड़ी है। - द्रंग विधानसभा क्षेत्र में सुबह नौ बजे तक छः. तीस% मतदान हुआ। एक बार विधानसभा अध्यक्ष व दो बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं। प्रदेश के किसी नेता ने विधानसभा के ग्यारह चुनाव नहीं लड़े हैं। दो हज़ार सत्रह के चुनाव में भाजपा के जवाहर ठाकुर को सैंतालीस. चौदह व कौल सिंह को सैंतीस. चौदह प्रतिशत मत मिले थे। कांग्रेस पार्टी का अगर जनता का समर्थन मिलता है तो कौल सिंह ठाकुर वरिष्ठता के लिहाज से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे। एक हज़ार नौ सौ बयासी के चुनाव से पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस में रहकर अपने राजनीतिक सफर को उन्होंने आगे बढ़ाया। द्रंग की जनता ने उन्हें आठ बार विधायक चुना। एक हज़ार नौ सौ नब्बे व दो हज़ार सत्रह में भाजपा की लहर में वह अपनी सीट नहीं बचा पाए। एक हज़ार नौ सौ नब्बे के चुनाव में भाजपा के दीनानाथ शास्त्री ने शिकस्त दी थी। दीनानाथ शास्त्री को तिरेपन. बहत्तर व कौल सिंह को चौंतालीस. चौंतालीस प्रतिशत मत मिले थे। करीब तैंतीस माह बाद हुए चुनाव में कौल सिंह ठाकुर ने दीनानाथ शास्त्री को पराजित किया था। वह वीरभद्र सरकार में जलशक्ति, स्वास्थ्य, कानून मंत्री रहे।
|
दशमलव विशेषण को उस संदर्भ के साथ लागू किया जा सकता है जो दस समान भागों में से एक है जिसमें कुछ विभाजित है। इस शब्द का प्रयोग अक्सर गणित के क्षेत्र में किया जाता है।एक दशमलव संख्या वह है जिसमें पूर्णांक भाग और एक आंशिक भाग होता है, जिसे अल्पविराम ( , ) या एक अवधि ( । ) द्वारा अलग किया जाता है। संख्या 5, 8, उदाहरण के लिए, एक पूर्णांक भाग ( 5 ) और एक अंश या दशमलव भाग ( 0, 8 ) है।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भिन्नात्मक भाग और पूरे भाग के बीच अलगाव को चिह्नित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रतीक को दशमलव विभाजक के रूप में जाना जाता है। कुछ देशों में, दशमलव प्रतीक अल्पविराम है, जबकि अन्य में बिंदु का उपयोग किया जाता है। इस तरह, कुछ क्षेत्रों में 5.8 की संख्या 5.8 लिखी जा सकती है।
दशमलव संख्याओं की अपनी नामकरण प्रणाली भी होती है, जो प्रत्येक स्थिति को एक अलग नाम देती है। अल्पविराम के बाईं ओर के आंकड़ों के संबंध में (या संबंधित दशमलव विभाजक, क्षेत्र के आधार पर), ऊपर वर्णित समान लेबल का उपयोग किया जाता है; दूसरी ओर स्थितियां, दाहिनी ओर स्थित हैं, दसवीं, सौवीं, हजारवीं और इसी तरह के हैं।
दूसरी ओर, मीट्रिक प्रणाली, माप और भार की एक प्रणाली है, जिसमें किलोग्राम और मीटर आधार इकाइयों के रूप में होते हैं, जिनकी इकाइयाँ विभाजक या दस की गुणक होती हैं।
|
दशमलव विशेषण को उस संदर्भ के साथ लागू किया जा सकता है जो दस समान भागों में से एक है जिसमें कुछ विभाजित है। इस शब्द का प्रयोग अक्सर गणित के क्षेत्र में किया जाता है।एक दशमलव संख्या वह है जिसमें पूर्णांक भाग और एक आंशिक भाग होता है, जिसे अल्पविराम या एक अवधि द्वारा अलग किया जाता है। संख्या पाँच, आठ, उदाहरण के लिए, एक पूर्णांक भाग और एक अंश या दशमलव भाग है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भिन्नात्मक भाग और पूरे भाग के बीच अलगाव को चिह्नित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रतीक को दशमलव विभाजक के रूप में जाना जाता है। कुछ देशों में, दशमलव प्रतीक अल्पविराम है, जबकि अन्य में बिंदु का उपयोग किया जाता है। इस तरह, कुछ क्षेत्रों में पाँच.आठ की संख्या पाँच.आठ लिखी जा सकती है। दशमलव संख्याओं की अपनी नामकरण प्रणाली भी होती है, जो प्रत्येक स्थिति को एक अलग नाम देती है। अल्पविराम के बाईं ओर के आंकड़ों के संबंध में , ऊपर वर्णित समान लेबल का उपयोग किया जाता है; दूसरी ओर स्थितियां, दाहिनी ओर स्थित हैं, दसवीं, सौवीं, हजारवीं और इसी तरह के हैं। दूसरी ओर, मीट्रिक प्रणाली, माप और भार की एक प्रणाली है, जिसमें किलोग्राम और मीटर आधार इकाइयों के रूप में होते हैं, जिनकी इकाइयाँ विभाजक या दस की गुणक होती हैं।
|
अगले महीने से कतर में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप शुरू होने जा रहा है. 20 नवंबर से 18 दिसंबर तक होने वाले फुटबॉल के इस सबसे बड़े आयोजन में शामिल होने के लिए 10 लाख से ज्यादा फैंस कतर पहुंच सकते हैं. खाड़ी के इस छोटे देश के लिए 10 लाख मेहमान एक बड़ी संख्या होगी.
वर्ल्ड कप के कारण दोहा में अभी से मकानों और अपार्टमेंटों का किराया काफी बढ़ गया है. वर्ल्ड कप से पैसा कमाने के लिए कई मकान मालिकों ने अब अपने किरायेदारों से घर खाली करने को कह दिया है, वह भी कुछ ही दिन को नोटिस पर.
रीम विदेशी कामगार हैं और वह कतर की एक बड़ी कंपनी में काम करती हैं. अपनी पहचान छुपाने के लिए दूसरे नाम का सहारा लेने वाली रीम ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उन्हें कुछ ही दिन के भीतर घर छोड़ना पड़ा. घर एक अपार्टमेंट बिल्डिंग में था. रियल एस्टेट कंपनी चाहती थी कि वह फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए इमारत किराये पर दे, इसीलिए बहुत लोगों से घर खाली करवा दिया गया. रीम कहती है, "हमने अपमानित महूसस किया. "
रीम की कंपनी ने अब उन्हें एक होटल में रखा है. उनसे कहा गया है कि वर्ल्ड कप शुरू होने से ठीक पहले होटल भी छोड़ना होगा और किसी अस्थायी अपार्टमेंट में जाना होगा, "घर छोड़ना वो भी अपनी सारी चीजों को बैगों और पेटियों में समेटकर और फिर होटल के एक कमरे में रहना, ये एक त्रासदी है. "
कतर में रहने वाले कई किरायेदारों ने भी समाचार एजेंसी एएफपी को अपने अनुभव बताए हैं. ज्यादातर लोगों को "महंगा किराया देने या घर खाली करने" को कहा गया है. रीम जिस टावर में रहती थीं, अब बुकिंग डॉट कॉम पर वर्ल्ड कप के दौरान उसका किराया 1,700 डॉलर प्रति रात है और कम से कम 14 दिन के स्टे की शर्त रखी गई है. रीम दो साल इस टावर में रहीं हैं और उन्होंने हर महीने 2,500 डॉलर किराया दिया.
वर्ल्ड कप के लिए आने वाले ज्यादातर फुटबॉल फैंस अपार्टमेंट्स और होटलों के साथ साथ क्रूज शिप्स और रेगिस्तानी कैंपों में रहेंगे. बुकिंग कतर के आधिकारिक वर्ल्ड कप पोर्टल के जरिए भी की जा रही है. कतर की कुल आबादी 28 लाख है. आयोजक बार बार दावा करते आ रहे हैं कि फुटबॉल फैंस के लिए पर्याप्त जगह होगी.
अब कतर की सरकार भी मान रही है कि वर्ल्ड कप के कारण छत की डिमांड बहुत बढ़ चुकी है, लेकिन निकाले जा रहे किरायेदारों के बारे में उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. एक सरकारी अधिकारी ने इतना ही कहा कि "कोई भी किरायेदार रेंटल डिसप्यूट सेंटलमेंट कमेटी ऑफिस में शिकायत दर्ज करा सकता है. "
इस किल्लत को टालने के लिए फीफा ने हजारों होटल रूम रिलीज किए हैं. ये रूम फीफा ने रिजर्व किए थे लेकिन अब होटलों को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए फीफा ने अपना रिजर्वेशन कैंसल कर दिया है.
कुछ फैंस स्टेडियमों के पास दोहा के गगनचुबी इमारतों में लक्जरी अपार्टमेंट खोज रहे हैं. एयरबीएनबी की वेबसाइट पर दो लोगों के लिए ऐसे अपार्टमेंट का किराया हर रात 2,500 डॉलर है. पूरे वर्ल्ड कप के दौरान 29 दिनों के लिए एक विला बुक करने का दाम कम से कम 13,000 डॉलर है और आने वाले दिनों में ये कीमत लगातार ऊपर जा सकती है.
दोहा के कुछ मकान मालिक अपना फ्लैट किराये पर देकर एक महीने के लिए कतर से बाहर जा रहे हैं. नवंबर दिसंबर के महीने में किराये के मकानों के कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू किए जाते हैं. कतर के कानून के मुताबिक लीज रिन्यू करने पर किराया 10 फीसदी बढ़ाया जा सकता है. कतर में इंटरनेशनल कंसल्टेंसी फर्म वालुस्ट्रैट के रिसर्च हेड अनुम हसन कहते हैं कि दोहा के कई इलाकों में बीते एक साल में 40 फीसदी ज्यादा दाम पर लीज रिन्यू की गई है.
दोहा में तैनात एक विदेशी राजनयिक के मुताबिक, "उनके दूतावास के कर्मचारियों ने भी तनख्वाह बढ़ाने की मांग की है ताकि वे किराया दे सकें. "
59 साल के लेबनानी अमेरिकन नबील घोरा दोहा के पॉश इलाके पर्ल डिस्ट्रिक्ट में रहते हैं. वह कहते हैं, "किराया. . . . कुछ समय तक महंगा ही रहेगा. मुझे लगता है कि लोग मौका का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन ये तो दुनिया में हर जगह होता है, वो भी फुटबॉल वर्ल्ड कप जैसे आयोजन के वक्त. "
|
अगले महीने से कतर में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप शुरू होने जा रहा है. बीस नवंबर से अट्ठारह दिसंबर तक होने वाले फुटबॉल के इस सबसे बड़े आयोजन में शामिल होने के लिए दस लाख से ज्यादा फैंस कतर पहुंच सकते हैं. खाड़ी के इस छोटे देश के लिए दस लाख मेहमान एक बड़ी संख्या होगी. वर्ल्ड कप के कारण दोहा में अभी से मकानों और अपार्टमेंटों का किराया काफी बढ़ गया है. वर्ल्ड कप से पैसा कमाने के लिए कई मकान मालिकों ने अब अपने किरायेदारों से घर खाली करने को कह दिया है, वह भी कुछ ही दिन को नोटिस पर. रीम विदेशी कामगार हैं और वह कतर की एक बड़ी कंपनी में काम करती हैं. अपनी पहचान छुपाने के लिए दूसरे नाम का सहारा लेने वाली रीम ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उन्हें कुछ ही दिन के भीतर घर छोड़ना पड़ा. घर एक अपार्टमेंट बिल्डिंग में था. रियल एस्टेट कंपनी चाहती थी कि वह फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए इमारत किराये पर दे, इसीलिए बहुत लोगों से घर खाली करवा दिया गया. रीम कहती है, "हमने अपमानित महूसस किया. " रीम की कंपनी ने अब उन्हें एक होटल में रखा है. उनसे कहा गया है कि वर्ल्ड कप शुरू होने से ठीक पहले होटल भी छोड़ना होगा और किसी अस्थायी अपार्टमेंट में जाना होगा, "घर छोड़ना वो भी अपनी सारी चीजों को बैगों और पेटियों में समेटकर और फिर होटल के एक कमरे में रहना, ये एक त्रासदी है. " कतर में रहने वाले कई किरायेदारों ने भी समाचार एजेंसी एएफपी को अपने अनुभव बताए हैं. ज्यादातर लोगों को "महंगा किराया देने या घर खाली करने" को कहा गया है. रीम जिस टावर में रहती थीं, अब बुकिंग डॉट कॉम पर वर्ल्ड कप के दौरान उसका किराया एक,सात सौ डॉलर प्रति रात है और कम से कम चौदह दिन के स्टे की शर्त रखी गई है. रीम दो साल इस टावर में रहीं हैं और उन्होंने हर महीने दो,पाँच सौ डॉलर किराया दिया. वर्ल्ड कप के लिए आने वाले ज्यादातर फुटबॉल फैंस अपार्टमेंट्स और होटलों के साथ साथ क्रूज शिप्स और रेगिस्तानी कैंपों में रहेंगे. बुकिंग कतर के आधिकारिक वर्ल्ड कप पोर्टल के जरिए भी की जा रही है. कतर की कुल आबादी अट्ठाईस लाख है. आयोजक बार बार दावा करते आ रहे हैं कि फुटबॉल फैंस के लिए पर्याप्त जगह होगी. अब कतर की सरकार भी मान रही है कि वर्ल्ड कप के कारण छत की डिमांड बहुत बढ़ चुकी है, लेकिन निकाले जा रहे किरायेदारों के बारे में उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. एक सरकारी अधिकारी ने इतना ही कहा कि "कोई भी किरायेदार रेंटल डिसप्यूट सेंटलमेंट कमेटी ऑफिस में शिकायत दर्ज करा सकता है. " इस किल्लत को टालने के लिए फीफा ने हजारों होटल रूम रिलीज किए हैं. ये रूम फीफा ने रिजर्व किए थे लेकिन अब होटलों को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए फीफा ने अपना रिजर्वेशन कैंसल कर दिया है. कुछ फैंस स्टेडियमों के पास दोहा के गगनचुबी इमारतों में लक्जरी अपार्टमेंट खोज रहे हैं. एयरबीएनबी की वेबसाइट पर दो लोगों के लिए ऐसे अपार्टमेंट का किराया हर रात दो,पाँच सौ डॉलर है. पूरे वर्ल्ड कप के दौरान उनतीस दिनों के लिए एक विला बुक करने का दाम कम से कम तेरह,शून्य डॉलर है और आने वाले दिनों में ये कीमत लगातार ऊपर जा सकती है. दोहा के कुछ मकान मालिक अपना फ्लैट किराये पर देकर एक महीने के लिए कतर से बाहर जा रहे हैं. नवंबर दिसंबर के महीने में किराये के मकानों के कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू किए जाते हैं. कतर के कानून के मुताबिक लीज रिन्यू करने पर किराया दस फीसदी बढ़ाया जा सकता है. कतर में इंटरनेशनल कंसल्टेंसी फर्म वालुस्ट्रैट के रिसर्च हेड अनुम हसन कहते हैं कि दोहा के कई इलाकों में बीते एक साल में चालीस फीसदी ज्यादा दाम पर लीज रिन्यू की गई है. दोहा में तैनात एक विदेशी राजनयिक के मुताबिक, "उनके दूतावास के कर्मचारियों ने भी तनख्वाह बढ़ाने की मांग की है ताकि वे किराया दे सकें. " उनसठ साल के लेबनानी अमेरिकन नबील घोरा दोहा के पॉश इलाके पर्ल डिस्ट्रिक्ट में रहते हैं. वह कहते हैं, "किराया. . . . कुछ समय तक महंगा ही रहेगा. मुझे लगता है कि लोग मौका का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन ये तो दुनिया में हर जगह होता है, वो भी फुटबॉल वर्ल्ड कप जैसे आयोजन के वक्त. "
|
कौन बनेगा करोड़पति 13 (Kaun Banega Crorepati 13) में शानदार शुक्रवार में कपिल शर्मा (Kapil Sharma) और सोनू सूद (Sonu Sood) धमाल मचाने के लिए आने वाले हैं. दोनों अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के साथ ढेर सारी मस्ती की.
क्विज रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति 13 (Kaun Banega Crorepati 13) में हर हफ्ते शानदार शुक्रवार मनाया जाता है. जिसमें कई सेलेब्रिटीज आते हैं और शो से जीती हुई राशि का इस्तेमाल किसी नेक काम के लिए करते हैं. आज के एपिसोड में खास मेहमान बनकर कॉमेडियन कपिल शर्मा (kapil Sharma) और एक्टर सोनू सूद (Sonu Sood) आने वाले हैं.
कौन बनेगा करोड़पति 13 में कपिल शर्मा और सोनू सूद होस्ट अमिताभ बच्चन के साथ खूब मस्ती करते हुए नजर आएंगे. कपिल शर्मा से बिग बी को एक शिकायत है. जिसके बारे में उन्होंने शो में बताया. उन्होंने कहा कपिल कभी भी समय पर नहीं आते हैं.
सोनी टीवी ने कौन बनेगा करोड़पति 13 का नया प्रोमो शेयर किया है. जिसमें बिग बी कपिल और सोनू से कहते हैं कि स्वागत है आपका. जिस पर कपिल कहते हैं कि सर आपका बहुत बहुत धन्यवाद. जब जब आप हमे बुलाते हैं हमारा प्राइज बढ़ जाता है. उसके बाद बिग बी कपिल से कहते हैं कि सर मुझे इस बात की बड़ी खुशी हुई कि आप टाइम पर आए हैं. आपको हमने मिलना था 12 बजे और आप ठीक 4:30 बजे आ गए. जिसके बाद सभी लोग जोर-जोर से हंसने लगते हैं.
बिग बी हर जगह टाइम पर पहुंच जाते हैं. कपिल शर्मा ने बताया कि एक बार अमिताभ बच्चन को उनके शो में आना था. हम लोगों के प्रोमो शूट करने का समय था 9 बजे. मैं 6 बजे पहुंच गया, सूट पहनकर तैयार हो गया. बच्चन साहब आए 9 बजकर 2 मिनट पर और आकर उन्होंने ऐसी बात बोली जो मैं आजतक नहीं भूल पाया हूं. उन्होंने कहा माफ कीजिएगा मैं दो मिनट लेट हो गया. मैंने कहा दो मिनट भी कोई लेट होता है.
सोनू सूद ने एक किस्सा शो में बताया. उन्होंने बिग बी को बताया कि एक बार मैं कपिल शर्मा के शो में गया था तो मैंने इन्हें कहा पाजी अब थोड़ा फिटनेस की तरफ ध्यान दो. थोड़ा जिम जाओ. तो कपिल ने मुझसे कहा कि नहीं पाजी जिम में क्या रखा है कुछ नहीं है ये सब. इस पर कपिल ने हंसते हुए कहा- रेटिंग ठीक आ रही थी मैंने सोचा क्या करना है. कपिल की ये बात सुनकर बिग बी जोर से हंस पड़ते हैं.
|
कौन बनेगा करोड़पति तेरह में शानदार शुक्रवार में कपिल शर्मा और सोनू सूद धमाल मचाने के लिए आने वाले हैं. दोनों अमिताभ बच्चन के साथ ढेर सारी मस्ती की. क्विज रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति तेरह में हर हफ्ते शानदार शुक्रवार मनाया जाता है. जिसमें कई सेलेब्रिटीज आते हैं और शो से जीती हुई राशि का इस्तेमाल किसी नेक काम के लिए करते हैं. आज के एपिसोड में खास मेहमान बनकर कॉमेडियन कपिल शर्मा और एक्टर सोनू सूद आने वाले हैं. कौन बनेगा करोड़पति तेरह में कपिल शर्मा और सोनू सूद होस्ट अमिताभ बच्चन के साथ खूब मस्ती करते हुए नजर आएंगे. कपिल शर्मा से बिग बी को एक शिकायत है. जिसके बारे में उन्होंने शो में बताया. उन्होंने कहा कपिल कभी भी समय पर नहीं आते हैं. सोनी टीवी ने कौन बनेगा करोड़पति तेरह का नया प्रोमो शेयर किया है. जिसमें बिग बी कपिल और सोनू से कहते हैं कि स्वागत है आपका. जिस पर कपिल कहते हैं कि सर आपका बहुत बहुत धन्यवाद. जब जब आप हमे बुलाते हैं हमारा प्राइज बढ़ जाता है. उसके बाद बिग बी कपिल से कहते हैं कि सर मुझे इस बात की बड़ी खुशी हुई कि आप टाइम पर आए हैं. आपको हमने मिलना था बारह बजे और आप ठीक चार:तीस बजे आ गए. जिसके बाद सभी लोग जोर-जोर से हंसने लगते हैं. बिग बी हर जगह टाइम पर पहुंच जाते हैं. कपिल शर्मा ने बताया कि एक बार अमिताभ बच्चन को उनके शो में आना था. हम लोगों के प्रोमो शूट करने का समय था नौ बजे. मैं छः बजे पहुंच गया, सूट पहनकर तैयार हो गया. बच्चन साहब आए नौ बजकर दो मिनट पर और आकर उन्होंने ऐसी बात बोली जो मैं आजतक नहीं भूल पाया हूं. उन्होंने कहा माफ कीजिएगा मैं दो मिनट लेट हो गया. मैंने कहा दो मिनट भी कोई लेट होता है. सोनू सूद ने एक किस्सा शो में बताया. उन्होंने बिग बी को बताया कि एक बार मैं कपिल शर्मा के शो में गया था तो मैंने इन्हें कहा पाजी अब थोड़ा फिटनेस की तरफ ध्यान दो. थोड़ा जिम जाओ. तो कपिल ने मुझसे कहा कि नहीं पाजी जिम में क्या रखा है कुछ नहीं है ये सब. इस पर कपिल ने हंसते हुए कहा- रेटिंग ठीक आ रही थी मैंने सोचा क्या करना है. कपिल की ये बात सुनकर बिग बी जोर से हंस पड़ते हैं.
|
बिहार शिक्षक भर्ती में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने की अनुमति देने के सरकार के फैसला का बिहार में जोरदार विरोध हो रहा है। इस परीक्षा में शामिल होने वाले बिहार के अभ्यर्थियों ने पटना में इसका विरोध प्रदर्शन किया।
बिहार पुलिस ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज किया। जिसमें कई अभ्यर्थी घायल हो गए।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी भर्ती में अधिवास नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं। मध्य पटना स्थित डाक बंगला चौराहे पर युवाओं और युवतियों ने जमकर प्रदर्शन किया, जिसकी वजह से यातायात बाधित हुआ। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बलप्रयोग किया और हंगामा कर रहे कुछ अभ्यर्थियों को हिरासत में भी लिया।
बता दे कि राजधानी पटना के गांधी मैदान और डाकबंगला चौराहा पर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे शिक्षक अभ्यर्थी सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें 20 से अधिक छात्र घायल हो गए।
पुलिस उपाधीक्षक(विधि व्यवस्था) नुरुल हक ने कहा कि प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे और शहर के व्यस्त मार्गों पर यातायात को बाधित कर रहे थे इसलिए पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया।
वही प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि वे पूर्व में आयोजित स्क्रीनिंग परीक्षा में शामिल हुए थे और उन्हें स्कूल शिक्षक के रूप में नियुक्त होने के लिए पात्र घोषित किया गया था। तीन से चार साल के लंबे इंतजार के बाद उन्हें फिर से स्कूल शिक्षक के रूप में नियुक्त होने के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा आयोजित परीक्षा में बैठने के लिए कहा जा रहा है, जो उन्हें मंजूर नहीं है।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने कहा कि यह और भी अधिक परेशान करने वाली बात है कि जो लोग शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल नहीं हुए थे उन्हें भी बीपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई। उन्होंने कहा कि अब बिहार के बाहर के छात्रों को भी भर्ती परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई है, जो उनके साथ घोर अन्याय है।
इस बीच लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) रामविलास के अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान ने शिक्षक अभ्यर्थियों पर पुलिस लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि नीतीश सरकार ने 20 लाख लोगों को सरकारी नौकरी और रोजगार देने का वादा किया था लेकिन नौकरी देना तो दूर जो लोग नौकरी की मांग कर रहे हैं या उनके वादों को याद दिला रहे हैं उनपर उनकी पुलिस लाठी बरसा रही है, यह बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि जो अभ्यार्थी तीन-चार साल पूर्व शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण हो गए और वे नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे उन्हें फिर से पात्रता परीक्षा के लिए में शामिल होने के लिए कहना तथा इस परीक्षा में दूसरे प्रदेशों के छात्रों को भी अनुमति देने का नीतीश सरकार का फैसला बिहार के छात्रों के साथ अन्याय है।
नीतीश कुमार सरकार का यह फैसला बिहार के छात्रों के साथ अन्याय है।
श्री पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या तो अपना वादा पूरा करें या मुख्यमंत्री के पद से तुरंत इस्तीफा दें।
|
बिहार शिक्षक भर्ती में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने की अनुमति देने के सरकार के फैसला का बिहार में जोरदार विरोध हो रहा है। इस परीक्षा में शामिल होने वाले बिहार के अभ्यर्थियों ने पटना में इसका विरोध प्रदर्शन किया। बिहार पुलिस ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज किया। जिसमें कई अभ्यर्थी घायल हो गए। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी भर्ती में अधिवास नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं। मध्य पटना स्थित डाक बंगला चौराहे पर युवाओं और युवतियों ने जमकर प्रदर्शन किया, जिसकी वजह से यातायात बाधित हुआ। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बलप्रयोग किया और हंगामा कर रहे कुछ अभ्यर्थियों को हिरासत में भी लिया। बता दे कि राजधानी पटना के गांधी मैदान और डाकबंगला चौराहा पर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे शिक्षक अभ्यर्थी सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें बीस से अधिक छात्र घायल हो गए। पुलिस उपाधीक्षक नुरुल हक ने कहा कि प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे और शहर के व्यस्त मार्गों पर यातायात को बाधित कर रहे थे इसलिए पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया। वही प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि वे पूर्व में आयोजित स्क्रीनिंग परीक्षा में शामिल हुए थे और उन्हें स्कूल शिक्षक के रूप में नियुक्त होने के लिए पात्र घोषित किया गया था। तीन से चार साल के लंबे इंतजार के बाद उन्हें फिर से स्कूल शिक्षक के रूप में नियुक्त होने के लिए बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में बैठने के लिए कहा जा रहा है, जो उन्हें मंजूर नहीं है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने कहा कि यह और भी अधिक परेशान करने वाली बात है कि जो लोग शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल नहीं हुए थे उन्हें भी बीपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई। उन्होंने कहा कि अब बिहार के बाहर के छात्रों को भी भर्ती परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई है, जो उनके साथ घोर अन्याय है। इस बीच लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान ने शिक्षक अभ्यर्थियों पर पुलिस लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि नीतीश सरकार ने बीस लाख लोगों को सरकारी नौकरी और रोजगार देने का वादा किया था लेकिन नौकरी देना तो दूर जो लोग नौकरी की मांग कर रहे हैं या उनके वादों को याद दिला रहे हैं उनपर उनकी पुलिस लाठी बरसा रही है, यह बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि जो अभ्यार्थी तीन-चार साल पूर्व शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण हो गए और वे नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे उन्हें फिर से पात्रता परीक्षा के लिए में शामिल होने के लिए कहना तथा इस परीक्षा में दूसरे प्रदेशों के छात्रों को भी अनुमति देने का नीतीश सरकार का फैसला बिहार के छात्रों के साथ अन्याय है। नीतीश कुमार सरकार का यह फैसला बिहार के छात्रों के साथ अन्याय है। श्री पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या तो अपना वादा पूरा करें या मुख्यमंत्री के पद से तुरंत इस्तीफा दें।
|
केंद्र सरकार द्वारा अग्निपथ के विरोध तथा आर्मी भर्ती को रद्द करने पर जवाली के युवाओं में भी आक्रोश देखने को मिला। आर्मी भर्ती को रद्द करने तथा अग्निपथ के विरोध में युवाओं ने कैहरियां चौक पर रोष प्रदर्शन किया तथा जवाली बाजार में केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एसएचओ जवाली सुरजीत सिंह ने मौके पर पहुंचकर आक्रोषित युवाओं को समझाने का प्रयत्न किया तो युवाओं ने विधायक अर्जुन सिंह को मौका पर बुलाने को अड़ गए। इसके बाद कैहरियां चौक छावनी में तबदील हो गया।
|
केंद्र सरकार द्वारा अग्निपथ के विरोध तथा आर्मी भर्ती को रद्द करने पर जवाली के युवाओं में भी आक्रोश देखने को मिला। आर्मी भर्ती को रद्द करने तथा अग्निपथ के विरोध में युवाओं ने कैहरियां चौक पर रोष प्रदर्शन किया तथा जवाली बाजार में केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एसएचओ जवाली सुरजीत सिंह ने मौके पर पहुंचकर आक्रोषित युवाओं को समझाने का प्रयत्न किया तो युवाओं ने विधायक अर्जुन सिंह को मौका पर बुलाने को अड़ गए। इसके बाद कैहरियां चौक छावनी में तबदील हो गया।
|
बीटीसी 2015 में दाखिले के लिए आयोजित हुई काउंसिलिंग में हिस्सा लेने वाले अभ्यर्थियों की पहली चयनित अनंतिम सूची गुरुवार को जारी होगी। जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की प्राचार्य ललिता प्रदीप ने बताया कि वेबसाइट पर चयनित हुए अभ्यर्थियों की अनंतिम सूची जारी की जाएगी। इसमें चयनित हुए अभ्यर्थी आगे सरकारी व निजी बीटीसी कॉलेजों में दाखिला लेंगे। डायट प्राचार्य ललिता प्रदीप ने बताया कि कुल 2250 सीटों के मुकाबले करीब आठ हजार पुरूष व महिला अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग में हिस्सा लिया है। अब इसमें से टॉप अभ्यर्थी चयनित किए जाएंगे। फिलहाल बुधवार को पहली प्रवेश काउंसिलिंग खत्म हो गई।
|
बीटीसी दो हज़ार पंद्रह में दाखिले के लिए आयोजित हुई काउंसिलिंग में हिस्सा लेने वाले अभ्यर्थियों की पहली चयनित अनंतिम सूची गुरुवार को जारी होगी। जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान की प्राचार्य ललिता प्रदीप ने बताया कि वेबसाइट पर चयनित हुए अभ्यर्थियों की अनंतिम सूची जारी की जाएगी। इसमें चयनित हुए अभ्यर्थी आगे सरकारी व निजी बीटीसी कॉलेजों में दाखिला लेंगे। डायट प्राचार्य ललिता प्रदीप ने बताया कि कुल दो हज़ार दो सौ पचास सीटों के मुकाबले करीब आठ हजार पुरूष व महिला अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग में हिस्सा लिया है। अब इसमें से टॉप अभ्यर्थी चयनित किए जाएंगे। फिलहाल बुधवार को पहली प्रवेश काउंसिलिंग खत्म हो गई।
|
मुल्तानी मिट्टी एक प्रकार की नेचुरल मिट्टी होती है. जिसमें भरपूर मात्रा में गुणकारी तत्व मौजूद होते हैं. मुल्तानी मिट्टी में आयरन, सिलिका, मैग्नीशियम, कैल्शियम, डोलोमाइट और कैल्सीसाइट जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं. इसे लगाने से त्वचा और बालों को बहुत सारे फायदे मिलते हैं.
1- जिन लड़कियों की त्वचा ऑयली होती है उन्हें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऑयली स्किन पर धूल मिट्टी के कण आसानी से चिपक जाते हैं. जो पिंपल्स की समस्या का कारण बनते हैं. ऑयली त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी बहुत फायदेमंद होती है. मुल्तानी मिट्टी में थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बना लें. अब इसे अपने चेहरे पर लगाकर सूखने दें. जब ये सूख जाये तो इसे गुनगुने पानी से धो लें. ऐसा करने से आपकी त्वचा में मौजूद एक्स्ट्रा ऑयल बाहर निकल जाएगा और आपकी त्वचा खूबसूरत और चमकदार हो जाएगी.
2- चेहरे पर काले दाग धब्बों को दूर करने के लिए मुल्तानी मिट्टी में थोड़ा सा गाजर का रस और जैतून का तेल मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं. बाद में अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. हफ्ते में दो बार ऐसा करने से आपकी त्वचा पर मौजूद काले दाग धब्बे दूर हो जाएंगे.
3- अपनी रंगत में निखार लाने के लिए मुल्तानी मिट्टी में दो चम्मच दूध और एक चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें. अब इसे अपने चेहरे पर लगा कर आधे घंटे के लिए छोड़ दें. बाद में इसे ठंडे पानी से धो लें. ऐसा करने से आपकी त्वचा में निखार आएगा और आपके चेहरे की चमक बरकरार रहेगी.
4- पिंपल्स की समस्या को दूर करने के लिए मुल्तानी मिट्टी में नीम की पत्तियों का पेस्ट और गुलाब जल मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं. 15 मिनट बाद इसे गुनगुने पानी से धो लें. ऐसा करने से आपकी पिंपल्स की समस्या दूर हो जाएगी.
|
मुल्तानी मिट्टी एक प्रकार की नेचुरल मिट्टी होती है. जिसमें भरपूर मात्रा में गुणकारी तत्व मौजूद होते हैं. मुल्तानी मिट्टी में आयरन, सिलिका, मैग्नीशियम, कैल्शियम, डोलोमाइट और कैल्सीसाइट जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं. इसे लगाने से त्वचा और बालों को बहुत सारे फायदे मिलते हैं. एक- जिन लड़कियों की त्वचा ऑयली होती है उन्हें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऑयली स्किन पर धूल मिट्टी के कण आसानी से चिपक जाते हैं. जो पिंपल्स की समस्या का कारण बनते हैं. ऑयली त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी बहुत फायदेमंद होती है. मुल्तानी मिट्टी में थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बना लें. अब इसे अपने चेहरे पर लगाकर सूखने दें. जब ये सूख जाये तो इसे गुनगुने पानी से धो लें. ऐसा करने से आपकी त्वचा में मौजूद एक्स्ट्रा ऑयल बाहर निकल जाएगा और आपकी त्वचा खूबसूरत और चमकदार हो जाएगी. दो- चेहरे पर काले दाग धब्बों को दूर करने के लिए मुल्तानी मिट्टी में थोड़ा सा गाजर का रस और जैतून का तेल मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं. बाद में अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. हफ्ते में दो बार ऐसा करने से आपकी त्वचा पर मौजूद काले दाग धब्बे दूर हो जाएंगे. तीन- अपनी रंगत में निखार लाने के लिए मुल्तानी मिट्टी में दो चम्मच दूध और एक चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें. अब इसे अपने चेहरे पर लगा कर आधे घंटे के लिए छोड़ दें. बाद में इसे ठंडे पानी से धो लें. ऐसा करने से आपकी त्वचा में निखार आएगा और आपके चेहरे की चमक बरकरार रहेगी. चार- पिंपल्स की समस्या को दूर करने के लिए मुल्तानी मिट्टी में नीम की पत्तियों का पेस्ट और गुलाब जल मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं. पंद्रह मिनट बाद इसे गुनगुने पानी से धो लें. ऐसा करने से आपकी पिंपल्स की समस्या दूर हो जाएगी.
|
ढाकाः एक तस्वीर हाल ही सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुई थी। ये तस्वीर बारिश में रोमांस कर रहे एक कपल की है, जोकि एक-दूसरे को किस कर रहे हैं। ऐसे में एक फोटो जर्नलिस्ट उनके इस मोमेंट को अपने कैमरे में कैद कर लिया। वहीं, कपल की ऐसी तस्वीर क्लिक करने के लिए उसे नौकरी से निकाल दिया गया है।
ये मामला बांग्लादेश का है, जहां जिबॉन अहमद नाम के एक फोटो जर्नलिस्ट ने ढाका यूनिवर्सिटी के टीचर्स एंड स्टूडेंट्स सेंटर के सामने यह तस्वीर क्लिक की थी। इसके बाद उन्होंने ये तस्वीर अपने बॉस को भेजी लेकिन उन्होंने इसे इसकी प्रतिक्रिया ठीक नहीं होने को लेकर पब्लिश करने से मना कर दिया।
ऐसे में जिबॉन ने इसे अपने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया। वहीं, इस तस्वीर को पोस्ट करने के बाद जिबॉन पर कुछ साथी फोटो जर्नलिस्ट ने इस तरह की तस्वीर खींचने के लिए पिटाई भी कर दी। जब इस बात का पता जिबॉन के बॉस को चला तो उन्होंने मदद की बात कही।
हालांकि, तब तक उनसे उनका आइडेंटिटी कार्ड और लैपटॉप वापस ले लिया गया था। वहीं, जहां कुछ लोग जिबॉन की इस तस्वीर को नपसंद कर रहे हैं तो वहीं कुछ इसे पसंद भी कर रहे हैं। साथ ही, इस मामले में किस कर रहे कपल को भी तस्वीर से कोई दिक्कत नहीं है।
|
ढाकाः एक तस्वीर हाल ही सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुई थी। ये तस्वीर बारिश में रोमांस कर रहे एक कपल की है, जोकि एक-दूसरे को किस कर रहे हैं। ऐसे में एक फोटो जर्नलिस्ट उनके इस मोमेंट को अपने कैमरे में कैद कर लिया। वहीं, कपल की ऐसी तस्वीर क्लिक करने के लिए उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। ये मामला बांग्लादेश का है, जहां जिबॉन अहमद नाम के एक फोटो जर्नलिस्ट ने ढाका यूनिवर्सिटी के टीचर्स एंड स्टूडेंट्स सेंटर के सामने यह तस्वीर क्लिक की थी। इसके बाद उन्होंने ये तस्वीर अपने बॉस को भेजी लेकिन उन्होंने इसे इसकी प्रतिक्रिया ठीक नहीं होने को लेकर पब्लिश करने से मना कर दिया। ऐसे में जिबॉन ने इसे अपने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया। वहीं, इस तस्वीर को पोस्ट करने के बाद जिबॉन पर कुछ साथी फोटो जर्नलिस्ट ने इस तरह की तस्वीर खींचने के लिए पिटाई भी कर दी। जब इस बात का पता जिबॉन के बॉस को चला तो उन्होंने मदद की बात कही। हालांकि, तब तक उनसे उनका आइडेंटिटी कार्ड और लैपटॉप वापस ले लिया गया था। वहीं, जहां कुछ लोग जिबॉन की इस तस्वीर को नपसंद कर रहे हैं तो वहीं कुछ इसे पसंद भी कर रहे हैं। साथ ही, इस मामले में किस कर रहे कपल को भी तस्वीर से कोई दिक्कत नहीं है।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.