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चंडीगढ़, 19 अक्तूबर (ब्यूरो)
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के लिए यूटी गेस्ट हाउस में ड्रा की प्रक्रिया जारी है। अब तक 9 जनरल महिला वार्ड तय किए जा चुके हैं। वार्ड नंबर. 1, 4, 5, 6, 9, 18, 10, 22 और वार्ड नंबर 23 महिला उम्मीदवारों के लिए रिजर्व किए गए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने ड्रा से पहले सात आरक्षित वार्ड तय कर दिए हैं। अब इन वार्ड से कोई जनरल कैटेगरी का उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकेगा। ड्रा में उन्हीं वार्डों को आरक्षित वर्ग के लिए रिजर्व किया है जहां एससी जनसंख्या ज्यादा है। अभी तक सात वार्ड आरक्षित वर्ग के लिए रिजर्व किए गए हैं। इनमें से तीन वार्डों पर आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगी। सेक्टर. 25 (वार्ड 16), रामदरबार (वार्ड 19) , मलोया (वार्ड 28), डड्डूमाजरा (वार्ड 26), कजेहड़ी (वार्ड 31) अटावा (वार्ड 24) और मौलीजागरां (वार्ड 7) का विकास नगर को आरक्षित वर्ग के लिए रिजर्व किया गया है।
वहीं इन सात वार्डों में से तीन वार्ड सेक्टर. 25, रामदरबार, मलोया को महिला वर्ग के लिए रिजर्व किया गया है। ऐसे में 12 वार्डों पर महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगी। चुनाव आयोग पहले ही तय कर चुका है कि ड्रा के बाद नवंबर के अंतिम दिनों में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में मतदान 12 से 15 दिसंबर के बीच होगा। इस बार आयोग ने मतदान केंद्रों की संख्या 445 से बढ़ाकर 700 कर दी है। वार्ड की संख्या भी 26 से बढ़कर 35 हो गई है। क्योंकि सभी गांव नगर निगम में शामिल हो गए हैं। चुनाव आयोग पहले ही तय कर चुका है कि ड्रा के बाद नवंबर के अंतिम दिनों में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में मतदान 12 से 15 दिसंबर के बीच होगा।
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चंडीगढ़, उन्नीस अक्तूबर चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के लिए यूटी गेस्ट हाउस में ड्रा की प्रक्रिया जारी है। अब तक नौ जनरल महिला वार्ड तय किए जा चुके हैं। वार्ड नंबर. एक, चार, पाँच, छः, नौ, अट्ठारह, दस, बाईस और वार्ड नंबर तेईस महिला उम्मीदवारों के लिए रिजर्व किए गए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने ड्रा से पहले सात आरक्षित वार्ड तय कर दिए हैं। अब इन वार्ड से कोई जनरल कैटेगरी का उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकेगा। ड्रा में उन्हीं वार्डों को आरक्षित वर्ग के लिए रिजर्व किया है जहां एससी जनसंख्या ज्यादा है। अभी तक सात वार्ड आरक्षित वर्ग के लिए रिजर्व किए गए हैं। इनमें से तीन वार्डों पर आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगी। सेक्टर. पच्चीस , रामदरबार , मलोया , डड्डूमाजरा , कजेहड़ी अटावा और मौलीजागरां का विकास नगर को आरक्षित वर्ग के लिए रिजर्व किया गया है। वहीं इन सात वार्डों में से तीन वार्ड सेक्टर. पच्चीस, रामदरबार, मलोया को महिला वर्ग के लिए रिजर्व किया गया है। ऐसे में बारह वार्डों पर महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगी। चुनाव आयोग पहले ही तय कर चुका है कि ड्रा के बाद नवंबर के अंतिम दिनों में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में मतदान बारह से पंद्रह दिसंबर के बीच होगा। इस बार आयोग ने मतदान केंद्रों की संख्या चार सौ पैंतालीस से बढ़ाकर सात सौ कर दी है। वार्ड की संख्या भी छब्बीस से बढ़कर पैंतीस हो गई है। क्योंकि सभी गांव नगर निगम में शामिल हो गए हैं। चुनाव आयोग पहले ही तय कर चुका है कि ड्रा के बाद नवंबर के अंतिम दिनों में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में मतदान बारह से पंद्रह दिसंबर के बीच होगा।
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गोरखपुर. पूर्वोत्तर रेलवे कुल 6 रेलवे स्टेशनो को हाईटेक बनाने की तैयारी कर रहा है, जिसमे छपरा,गोमतीनगर,गोंडा, लखनऊ,काठगोदाम और गोरखपुर है. गोमतीनगर का कार्य प्रगति पर है. खास बात यह है की दुनिया के सबसे लंबे प्लेटफार्म के लिए पहचान रखने वाले गोरखपुर रेलवे स्टेशन को रेलवे सिटी सेंटर की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी में जुटा हुआ है, जो भवन बनेंगे वह एयरपोर्ट की तर्ज पर बनाए जाएंगे. इसके लिए प्रपोजल तैयार किया जा रहा है. यहा पर हाईटेक रेस्टोरेंट, रोड प्लाजा और कमर्शियल काम्प्लेक्स के साथ ही पार्किंग और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी. इसके साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने और गोरखपुर को सेंटर ऑफ सिटी बनाने की पहल को आगे बढ़ाते हुए पूर्वोत्तर रेलवे दोनों ओर खुलने वाले द्वार के एंट्रेंस भवन को ऐसा बनाने की कवायद में जुटे हैं, जिससे उसमें विश्व प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर और गीता प्रेस का अक्स दिखाई दे.
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि रेलवे स्टेशन को इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करने का प्रपोजल तैयार किया गया है. टेंडर होने के बाद काम शुरू हो जाएगा. पुनर्विकास के दौरान गोरखपुर रेलवे स्टेशन को सारी हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध होंगी जिसके तहत ग्रीन बिल्डिंग बनाकर सोलर पैनल लगाए जाएंगे. स्टेशन में जो बिजली की खपत हो वह सोलर पैनल से उपलब्ध हो सके. वन स्टेशन वन प्रोडक्ट के तहत स्टॉल की भी आकर्षक व्यवस्थाएं होंगी. वर्षा जल संचयन के लिए भी खास व्यवस्था यहां उपलब्ध होंगी कुल मिलाकर एक इंट्रिगेटेड मॉडल के रूप में इसका निर्माण होंगा की पब्लिक को कोई असुविधा न हो. आने वाले समय में मेट्रो की सुविधा को भी देखते हुए पूरा का पूरा काम किया जाएगा. साथ ही साथ स्थानीय संस्कृति और कला की झलक यहां दिखाई दे इसका भी खास ध्यान रखा जाएगा. आने वाले समय में गोरखपुर रेलवे स्टेशन एक बेहद आकर्षक और नए रेलवे स्टेशन के रूप में दिखेगा. इसके लिए तैयारियां की जा रही है। टेंडर होने के बाद 2 साल के अंदर पूरा काम समाप्त कर लिया जाएगा.
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गोरखपुर. पूर्वोत्तर रेलवे कुल छः रेलवे स्टेशनो को हाईटेक बनाने की तैयारी कर रहा है, जिसमे छपरा,गोमतीनगर,गोंडा, लखनऊ,काठगोदाम और गोरखपुर है. गोमतीनगर का कार्य प्रगति पर है. खास बात यह है की दुनिया के सबसे लंबे प्लेटफार्म के लिए पहचान रखने वाले गोरखपुर रेलवे स्टेशन को रेलवे सिटी सेंटर की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी में जुटा हुआ है, जो भवन बनेंगे वह एयरपोर्ट की तर्ज पर बनाए जाएंगे. इसके लिए प्रपोजल तैयार किया जा रहा है. यहा पर हाईटेक रेस्टोरेंट, रोड प्लाजा और कमर्शियल काम्प्लेक्स के साथ ही पार्किंग और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी. इसके साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने और गोरखपुर को सेंटर ऑफ सिटी बनाने की पहल को आगे बढ़ाते हुए पूर्वोत्तर रेलवे दोनों ओर खुलने वाले द्वार के एंट्रेंस भवन को ऐसा बनाने की कवायद में जुटे हैं, जिससे उसमें विश्व प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर और गीता प्रेस का अक्स दिखाई दे. मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि रेलवे स्टेशन को इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करने का प्रपोजल तैयार किया गया है. टेंडर होने के बाद काम शुरू हो जाएगा. पुनर्विकास के दौरान गोरखपुर रेलवे स्टेशन को सारी हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध होंगी जिसके तहत ग्रीन बिल्डिंग बनाकर सोलर पैनल लगाए जाएंगे. स्टेशन में जो बिजली की खपत हो वह सोलर पैनल से उपलब्ध हो सके. वन स्टेशन वन प्रोडक्ट के तहत स्टॉल की भी आकर्षक व्यवस्थाएं होंगी. वर्षा जल संचयन के लिए भी खास व्यवस्था यहां उपलब्ध होंगी कुल मिलाकर एक इंट्रिगेटेड मॉडल के रूप में इसका निर्माण होंगा की पब्लिक को कोई असुविधा न हो. आने वाले समय में मेट्रो की सुविधा को भी देखते हुए पूरा का पूरा काम किया जाएगा. साथ ही साथ स्थानीय संस्कृति और कला की झलक यहां दिखाई दे इसका भी खास ध्यान रखा जाएगा. आने वाले समय में गोरखपुर रेलवे स्टेशन एक बेहद आकर्षक और नए रेलवे स्टेशन के रूप में दिखेगा. इसके लिए तैयारियां की जा रही है। टेंडर होने के बाद दो साल के अंदर पूरा काम समाप्त कर लिया जाएगा.
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प्रतापगढ़। बिजली की बचत ही बिजली का उत्पादन है ये विद्युत निगम का ध्येय वाक्य है, लेकिन प्रतापगढ़ के सरकारी कारिन्दों को जैसे इन उपदेशों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। प्रतापगढ़ के माहात्मा गांधी मार्ग और विद्युत निगम कार्यालय के पास तिराहे पर दिन में भी हाईमास्ट लाइटें जलती रहती हैं। कई बार रोड लाइट के बल्ब भी दिन में जगमगाते रहते हैं। लोगों ने कई बार विद्युत निगम को इस बारे में अवगत कराया है लेकिन, अधिकारी-कर्मचारियों ने इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई है।
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प्रतापगढ़। बिजली की बचत ही बिजली का उत्पादन है ये विद्युत निगम का ध्येय वाक्य है, लेकिन प्रतापगढ़ के सरकारी कारिन्दों को जैसे इन उपदेशों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। प्रतापगढ़ के माहात्मा गांधी मार्ग और विद्युत निगम कार्यालय के पास तिराहे पर दिन में भी हाईमास्ट लाइटें जलती रहती हैं। कई बार रोड लाइट के बल्ब भी दिन में जगमगाते रहते हैं। लोगों ने कई बार विद्युत निगम को इस बारे में अवगत कराया है लेकिन, अधिकारी-कर्मचारियों ने इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई है।
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पंजाब में पार्टी के अंदर की कलह दूर होने के बाद कांग्रेस ने अब जनता के दिल में जगह बनाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जन शिकायतों को सुनने के लिए मंत्रियों की ड्यूटी लगाई गई है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने जन शिकायतों के लिए मंत्रियों का ड्यूटी चार्ट बनाया है। साथ ही इसको लेकर उन्होंने शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ भी चर्चा की।
नवजोत सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को कुलजीत नागरा और परगट सिंह के साथ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात की और पंजाब और पार्टी-सरकार समन्वय से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। मुलाकात के बाद सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर के साथ तस्वीर साझा करते हुए ट्विटर पर लिखा, 'पंजाब कांग्रेस भवन में मंत्रियों के रोस्टर के प्रस्ताव पर अत्यधिक सकारात्मक समन्वय बैठक हुई।'
इसके साथ ही सिद्धू ने मंत्रियों का प्रस्तावित ड्यूटी चार्ट भी जारी किया। ड्यूटी चार्ट में मंत्रियों को तीन-तीन घंटे पंजाब कांग्रेस दफ्तर में रहने के निर्देश दिए गए हैं। चार्ट के अनुसार 23 अगस्त से लोकल गवर्मेंट मिनिस्टर ब्रह्म मोहिन्दरा, 24 को मनप्रीत सिंह, 25 को साधू सिंह, 26 को तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, 27 को चरणजीत सिंह चन्नी, 30 को अरुणा चौधरी और 31 अगस्त को रजिया सुल्तान की ड्यूटी लगाई गई है। एक सितंबर ओपी सोनी, 2 सितंबर गुरमीत सिंह सोढ़ी, 3 को सुखजिंदर रंधावा, 6 गुरमीत सिंह, 7 को सुखबिंदर सिंह, 8 को बलवीर सिंह सिद्धू, 9 को विजय इंदर सिंघला, 10 को सुंदर शाम अरोड़ा और 13 सितंबर को भरत भूषण की ड्यूटी लगाई गई है। रोस्टर के अनुसार, मंत्री सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक पार्टी दफ्तर में बैठेंगे। पहले रोस्टर में कुल 16 मंत्रियों के नाम है।
यह भी पढ़ेंः केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का गहलोत-पायलट पर वार, कहा- दोनों लोगों के बीच चल रही है 'कुर्सी के लिए लड़ाई'
इसके अलावा सत्तारूढ़ दल और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और सुधार पहलों के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और राज्य प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने 10 सदस्यीय 'रणनीतिक नीति कमेटी' स्थापित करने पर भी सहमति व्यक्त की। सीएम के नेतृत्व में इस समूह में मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा, मनप्रीत सिंह बादल और अरुणा चौधरी सदस्य होंगे, साथ ही सिद्धू, चार-पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष- कुलजीत सिंह नागरा, सुखविंदर सिंह डैनी, संगत सिंह गिलजियान और अरुण गोयल के अलावा परगट सिंह सदस्य होंगे।
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स्व. बसंत सिंह डुमरांव विधान सभा क्षेत्र का लगातार तीन विधायक व राज्य सरकार का भवन निर्माण विभाग का मंत्री रह चुके थे।
बक्सर/विक्रांत। डुमरांव नगर के राजद कमिटी द्वारा बुधवार 5 जनवरी को क्षेत्र के जाने मानें समाजवादी नेंता व पूर्व मंत्री बंसत सिंह की तीसरी पुण्य तिथि स्थानीय शहीद स्मारक स्थल के पास मनाए जाने की तैयारियां पूरी हो चुकी है। स्व. सिंह डुमरांव विधान सभा क्षेत्र का विधायक के रूप में लगातार तीन बार जन प्रतिनिधित्व व राज्य सरकार का भवन निर्माण मंत्री भी थे।
पूर्व मंत्री चैंगाई गांव के जमींदार जगदेश्वर सिंह के बड़े पुत्र व प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी केशरियां सिंह के पौत्र थे। उन्होनेें डुमरांव विधान सभा क्षेत्र से बर्ष 1985 में कांग्रेस पार्टी, बर्ष 90 में जनता दल एवं 95 में राजद के टिकट पर चुनाव जीतने काम किया था। स्व. सिंह लालू प्रसाद के मुख्यमंत्रीत्व काल में भवन निर्माण विभाग के मंत्री थे। उनका निधन 5 जनवरी, 2019 को हो गया था।
उनके करीबी रह चुके राजद के कदद्ावर नेंता बद्री सिंह ने बताया कि स्व. सिंह समाजवादी विचार धारा के व्यक्तित्व थे। उनकी अनुपस्थिति आज की तारीख में क्षेत्र के लोगांे के बीच खटकती है। उधर डुमरांव राजद नगर कमिटी के अध्यक्ष मुन्ना खां ने बताया कि स्व. सिंह की तीसरी पुण्य तिथि कल 5 जनवरी को शहीद स्मारक पार्क में समारोह पूर्वक मनाई जाएगी।
दुसरी ओर सन् 42 के अमर शहीदों की याद में शहीद स्मारक पार्क निर्माण के पांचवे साल के मौके पर शहीद स्मारक समिति कपिलमुनि द्वार के बैनर तले एक समारोह मनाए जाने की तैयारियां जारी है। शहीद स्मारक समिति के संयोजक संजय चंद्रबंशी ने बताया कि कार्यक्रम में सभी दल के कार्यकर्ताओं सहित प्रबुद्ध नागरिको को आमंत्रित किया गया है।
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स्व. बसंत सिंह डुमरांव विधान सभा क्षेत्र का लगातार तीन विधायक व राज्य सरकार का भवन निर्माण विभाग का मंत्री रह चुके थे। बक्सर/विक्रांत। डुमरांव नगर के राजद कमिटी द्वारा बुधवार पाँच जनवरी को क्षेत्र के जाने मानें समाजवादी नेंता व पूर्व मंत्री बंसत सिंह की तीसरी पुण्य तिथि स्थानीय शहीद स्मारक स्थल के पास मनाए जाने की तैयारियां पूरी हो चुकी है। स्व. सिंह डुमरांव विधान सभा क्षेत्र का विधायक के रूप में लगातार तीन बार जन प्रतिनिधित्व व राज्य सरकार का भवन निर्माण मंत्री भी थे। पूर्व मंत्री चैंगाई गांव के जमींदार जगदेश्वर सिंह के बड़े पुत्र व प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी केशरियां सिंह के पौत्र थे। उन्होनेें डुमरांव विधान सभा क्षेत्र से बर्ष एक हज़ार नौ सौ पचासी में कांग्रेस पार्टी, बर्ष नब्बे में जनता दल एवं पचानवे में राजद के टिकट पर चुनाव जीतने काम किया था। स्व. सिंह लालू प्रसाद के मुख्यमंत्रीत्व काल में भवन निर्माण विभाग के मंत्री थे। उनका निधन पाँच जनवरी, दो हज़ार उन्नीस को हो गया था। उनके करीबी रह चुके राजद के कदद्ावर नेंता बद्री सिंह ने बताया कि स्व. सिंह समाजवादी विचार धारा के व्यक्तित्व थे। उनकी अनुपस्थिति आज की तारीख में क्षेत्र के लोगांे के बीच खटकती है। उधर डुमरांव राजद नगर कमिटी के अध्यक्ष मुन्ना खां ने बताया कि स्व. सिंह की तीसरी पुण्य तिथि कल पाँच जनवरी को शहीद स्मारक पार्क में समारोह पूर्वक मनाई जाएगी। दुसरी ओर सन् बयालीस के अमर शहीदों की याद में शहीद स्मारक पार्क निर्माण के पांचवे साल के मौके पर शहीद स्मारक समिति कपिलमुनि द्वार के बैनर तले एक समारोह मनाए जाने की तैयारियां जारी है। शहीद स्मारक समिति के संयोजक संजय चंद्रबंशी ने बताया कि कार्यक्रम में सभी दल के कार्यकर्ताओं सहित प्रबुद्ध नागरिको को आमंत्रित किया गया है। यह भी पढ़े. .
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प्रियंका चोपड़ा वैसे तो अपने फैशनसेंस की वजह से अक्सर चर्चा में रहती हैं, लेकिन कई बार वह अपने इसी अजीबोगरीब ड्रेस को लेकर ट्रोल भी हो जाती है। एक बार फिर सोशल मीडिया पर प्रियंका चोपड़ा लेटेस्ट फोटोज को लेकर ट्रोल हुईं, जहां फैंस ने प्रियंका चोपड़ा की फनी ड्रेस वाली फोटोज को शेयर किया।
प्रियंका चोपड़ा की ड्रेस को कुछ फैंस ने सूतली बम बताया। साथ ही फनी फोटोज को शेयर किया। प्रियंका चोपड़ा ने भी अपनी ड्रेस पर बने मीम्स को शेयर किया। प्रियंका चोपड़ा ने ढेर सारे तस्वीरों को ट्विटर पर साझा किया।
प्रियंका चोपड़ा इन फोटोज में ग्रीन पोलका राउंड ड्रेस में दिख रही है। इस ड्रेस के साथ ब्लैक रंग के स्टॉकिंग्स पहनी हैं और बालों को बांधा हुआ है। ये ड्रेस देखने में अजीबोगरीब है जिस पर फैंस ने जमकर मीम्स बनाएं।
सोशल मीडिया पर फैंस ने इस ड्रेस को लेकर प्रियंका चोपड़ा का मजाक उड़ाया। ढेर सारी फोटोज को शेयर किया जिसमें अलग अलग तरह से इस ड्रेस को जोड़कर फनी मीम्स बनाए गए।
प्रियंका चोपड़ा ने इन मीम्स को शेयर किया, साथ ही फैंस को थैंक्यू भी कहा। प्रियंका बोलीं, थैंक्यू मेरा आज का दिन बना दिया आप लोगों ने।
प्रियंका चोपड़ा की इस ड्रेस को कुछ फैंस ने सूतली बम कहा तो कुछ फैंस ने पॉकिमन बताया। वहीं कुछ ने तो पफर फिश बताया।
प्रियंका चोपड़ा कान्स में पहनी ड्रेस को लेकर भी बुरी तरह ट्रोल हुई थीं। इसके अलावा भी वह कई बार अलग अलग अजीबो गरीब फैशन को लेकर ट्रोल हो चुकी हैं।
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पाश्चात्य तर्कशास्त्र [अ० ६, वाक्य-प्रकरण
मरणशील है, इस वाक्य का यह अर्थ हुआ कि मनुष्यत्व धर्म के साथ मरणशीलत्व धर्म लगा हुआ है । अर्थात् मनुष्यत्व के साथ मरणशीलत्व का साहचर्य सम्बन्ध है । कोई मनुष्य पूर्ण नही है, इस वाक्य का यह अर्थ हुआ कि मनुष्यत्व धर्म का पूर्णत्व धर्म से बिल्कुल विरोध है । कुछ मनुष्य दयालु है, इस वाक्य का यह अर्थ हुआ कि मनुष्य के जो धर्म है उनमें दयालुता भी एक धर्म है । कुछ मनुष्य दयालु नही है, इस वाक्य का यह अर्थ हुआ कि मनुष्य के जो धर्म है उनमें कुछ का दयालुता वर्म से बिल्कुल विरोव है । इस सिद्धान्त के पोषक है प्रसिद्ध दार्शनिक मिल् ।
(३) समन्वय-वाद' -- यह मत पूर्व के दो मतो का सम्मिलित रूप है । इसके अनुसार वाक्य के दोनो पद व्यक्तिवोध और स्वभावबोध किसी भी अर्थ में लिए जा सकते है । इस मत का पोषक दार्शनिक हैमिल्टन लिखता है, "अव्यवसाय या वाक्य का लक्षण इस प्रकार कर सकते है कि यह उस व्यवसाय का फल है जिसमे हम दो प्रत्ययो को सूचित करते है, जिसमें एक उद्देश और दूसरा विधेय समझ लिया जाता है, जिसमें एक दूसरे के अन्तर्गत हो कर रहता है अथवा नही रहता है, या तो विस्तार की दृष्टि से या धर्म की दृष्टि से । "
'Denotative-Connotatire view
छठा अध्याय
दूसरा भाग
( वाक्य के प्रकार' )
जैसे हमने पद-प्रकरण में पदो को भिन्न भिन्न प्रकार से विभागो मे बाट कर उनकी परीक्षा की थी, वैसे ही यहा वाक्यो की भी करनी है । वाक्य निम्न छः प्रकार से विभागों मे वाटे जाते है, जिनकी परीक्षा लग अलग की जायगी -
१ रचना की दृष्टि से
२. सम्बन्ध की दृष्टि से
(क) शुद्ध - 'क' 'ख' है,
( ख ) मिश्र 'क' और 'ख' 'ग' है । (क) निरपेक्ष 'क' 'ख' है ।
(i) हेतुफलाश्रितयदि 'क' 'ख' है, तो 'ग' 'घ' है । ( 11 ) वैकल्पिक --- 'क' या तो 'ख' है या 'ग' ।
(ख) सापेक्ष
'Kinds of Propositions.
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पाश्चात्य तर्कशास्त्र [अशून्य छः, वाक्य-प्रकरण मरणशील है, इस वाक्य का यह अर्थ हुआ कि मनुष्यत्व धर्म के साथ मरणशीलत्व धर्म लगा हुआ है । अर्थात् मनुष्यत्व के साथ मरणशीलत्व का साहचर्य सम्बन्ध है । कोई मनुष्य पूर्ण नही है, इस वाक्य का यह अर्थ हुआ कि मनुष्यत्व धर्म का पूर्णत्व धर्म से बिल्कुल विरोध है । कुछ मनुष्य दयालु है, इस वाक्य का यह अर्थ हुआ कि मनुष्य के जो धर्म है उनमें दयालुता भी एक धर्म है । कुछ मनुष्य दयालु नही है, इस वाक्य का यह अर्थ हुआ कि मनुष्य के जो धर्म है उनमें कुछ का दयालुता वर्म से बिल्कुल विरोव है । इस सिद्धान्त के पोषक है प्रसिद्ध दार्शनिक मिल् । समन्वय-वाद' -- यह मत पूर्व के दो मतो का सम्मिलित रूप है । इसके अनुसार वाक्य के दोनो पद व्यक्तिवोध और स्वभावबोध किसी भी अर्थ में लिए जा सकते है । इस मत का पोषक दार्शनिक हैमिल्टन लिखता है, "अव्यवसाय या वाक्य का लक्षण इस प्रकार कर सकते है कि यह उस व्यवसाय का फल है जिसमे हम दो प्रत्ययो को सूचित करते है, जिसमें एक उद्देश और दूसरा विधेय समझ लिया जाता है, जिसमें एक दूसरे के अन्तर्गत हो कर रहता है अथवा नही रहता है, या तो विस्तार की दृष्टि से या धर्म की दृष्टि से । " 'Denotative-Connotatire view छठा अध्याय दूसरा भाग जैसे हमने पद-प्रकरण में पदो को भिन्न भिन्न प्रकार से विभागो मे बाट कर उनकी परीक्षा की थी, वैसे ही यहा वाक्यो की भी करनी है । वाक्य निम्न छः प्रकार से विभागों मे वाटे जाते है, जिनकी परीक्षा लग अलग की जायगी - एक रचना की दृष्टि से दो. सम्बन्ध की दृष्टि से शुद्ध - 'क' 'ख' है, मिश्र 'क' और 'ख' 'ग' है । निरपेक्ष 'क' 'ख' है । हेतुफलाश्रितयदि 'क' 'ख' है, तो 'ग' 'घ' है । वैकल्पिक --- 'क' या तो 'ख' है या 'ग' । सापेक्ष 'Kinds of Propositions.
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बालाघाट, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिले के किरनापुर के ग्राम भक्कूटोला की दुर्गम पहाडि़यों और घने जंगल में ट्रेनी विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना को 22 घंटे से अधिक का समय बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन (डीजीसीए, मुंबई) और न ही एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन बोर्ड (एएआइबी) के अधिकारी मौके पर पहुंच पाए हैं। हालांकि, संभावना व्यक्त की जा रही है टीम रविवार शाम तक या सोमवार को बालाघाट पहुंचेगी। बिरसी एयरपोर्ट के एयरपोर्ट इंचार्ज शफीक शाह ने बताया कि अभी तक डीजीसीए या एएआइबी की टीम नहीं पहुंची है। दरअसल, एएआइबी डीजीसीए का स्वतंत्र बोर्ड है, जो विमान हादसों की जांच करता है। साथ ही ऐसी जांच में डीजीसीए भी सहयोग करता है। एयरपोर्ट इंचार्ज ने बताया कि हादसे के बाद विमान का ब्लैक बाक्स पुलिस प्रशासन के पास सुरक्षित रखा गया है। घटनास्थल पहुंचने पर ब्लैक बाक्स सुपुर्द किया जाएगा, जिसमें हादसे से पहले प्रशिक्षक पायलट व महिला प्रशिक्षु पायलट के बीच बातचीत रिकार्ड है। इसी बाक्स की जांच के बाद हादसे के असल कारणों का पता लगेगा। बताया गया कि चार्टर एयरक्राफ्ट या अन्य किसी विमान में ब्लैक बाक्स में पायलट व को-पायलट के बीच हुए संवाद के रिकार्डिंग के अलावा एयरपोर्ट में डिजिटल वाइस रिकार्डर डिवाइस में भी उनकी बातचीत रिकार्ड होती है। डीजीसीए या एएआइबी की जांच के बाद रिपोर्ट मिनिस्ट्री आफ सिविल एविएशन को भेजी जाएगी। गौरतलब है कि शनिवार 18 मार्च को किरनापुर के भक्कूटोला के जंगल में बिरसी एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला ट्रेनी एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में प्रशिक्षक पायलट मोहित ठाकुर व महिला प्रशिक्षु पायलट वी. माहेश्वरी की दर्दनाक मौत हो गई थी। आज देर शाम पहुंचेंगे मृतकों के परिजनः
बिरसी एयरपोर्ट इंचार्ज शफीक शाह ने बताया कि मृतक मोहित ठाकुर और वी. माहेश्वरी के परिजनों को शनिवार शाम ही हादसे की जानकारी दे दी गई थी। अभी दोनों परिवार बालाघाट नहीं पहुंचे हैं, उनके देर शाम तक बालाघाट की संभावना है।
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बालाघाट, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिले के किरनापुर के ग्राम भक्कूटोला की दुर्गम पहाडि़यों और घने जंगल में ट्रेनी विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना को बाईस घंटाटे से अधिक का समय बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन और न ही एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन बोर्ड के अधिकारी मौके पर पहुंच पाए हैं। हालांकि, संभावना व्यक्त की जा रही है टीम रविवार शाम तक या सोमवार को बालाघाट पहुंचेगी। बिरसी एयरपोर्ट के एयरपोर्ट इंचार्ज शफीक शाह ने बताया कि अभी तक डीजीसीए या एएआइबी की टीम नहीं पहुंची है। दरअसल, एएआइबी डीजीसीए का स्वतंत्र बोर्ड है, जो विमान हादसों की जांच करता है। साथ ही ऐसी जांच में डीजीसीए भी सहयोग करता है। एयरपोर्ट इंचार्ज ने बताया कि हादसे के बाद विमान का ब्लैक बाक्स पुलिस प्रशासन के पास सुरक्षित रखा गया है। घटनास्थल पहुंचने पर ब्लैक बाक्स सुपुर्द किया जाएगा, जिसमें हादसे से पहले प्रशिक्षक पायलट व महिला प्रशिक्षु पायलट के बीच बातचीत रिकार्ड है। इसी बाक्स की जांच के बाद हादसे के असल कारणों का पता लगेगा। बताया गया कि चार्टर एयरक्राफ्ट या अन्य किसी विमान में ब्लैक बाक्स में पायलट व को-पायलट के बीच हुए संवाद के रिकार्डिंग के अलावा एयरपोर्ट में डिजिटल वाइस रिकार्डर डिवाइस में भी उनकी बातचीत रिकार्ड होती है। डीजीसीए या एएआइबी की जांच के बाद रिपोर्ट मिनिस्ट्री आफ सिविल एविएशन को भेजी जाएगी। गौरतलब है कि शनिवार अट्ठारह मार्च को किरनापुर के भक्कूटोला के जंगल में बिरसी एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला ट्रेनी एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में प्रशिक्षक पायलट मोहित ठाकुर व महिला प्रशिक्षु पायलट वी. माहेश्वरी की दर्दनाक मौत हो गई थी। आज देर शाम पहुंचेंगे मृतकों के परिजनः बिरसी एयरपोर्ट इंचार्ज शफीक शाह ने बताया कि मृतक मोहित ठाकुर और वी. माहेश्वरी के परिजनों को शनिवार शाम ही हादसे की जानकारी दे दी गई थी। अभी दोनों परिवार बालाघाट नहीं पहुंचे हैं, उनके देर शाम तक बालाघाट की संभावना है।
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सुधाकर सिंह ने याद दिलाया कि 17 सालों में उन्होंने चार बार कुर्सी छोड़ दी और फिर से कुर्सी को पकड़ लिया। इन 17 सालों में 4 बार गठबंधन बदले लेकिन सीएम पद पर काबिज व्यक्ति वही रहा।
Sudhakar Singh attacks on Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ बयान बाजी करके मंत्री पद गंवा चुके सुधाकर सिंह के तेवर काम नहीं हो रहे हैं। इसे लेकर सुधाकर सिंह अपनी ही पार्टी आरजेडी के कोप भाजन बन चुके हैं। पार्टी ने उन्हें नोटिस थमा कर 15 दिनों में जवाब मांगा है। लगता है कि सुधाकर सिंह पर पार्टी की नोटिस का कोई असर नहीं है। एक बार फिर उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा हमला बोला है।
आरा के शाहाबाद में शौर्य दिवस के कार्यक्रम में भाषण देते हुए सुधाकर सिंह ने नीतीश कुमार को छोटे कद वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दरवाजे से राजनीति करने वाले, विधान परिषद के रास्ते सत्ता में पहुंचे छोटे कद वाले लोग सरकार के प्रमुख पद पर बैठे हैं। उनका कद इतना छोटा है कि बिहार के विकास के लिए विशेष राज्य का नारा लगाकर केंद्र सरकार के आगे भीख मांगते हैं और दलबदल करते रहते हैं।
सुधाकर सिंह ने याद दिलाया कि 17 सालों में उन्होंने चार बार कुर्सी छोड़ दी और फिर से कुर्सी को पकड़ लिया। इन 17 सालों में 4 बार गठबंधन बदले लेकिन सीएम पद पर काबिज व्यक्ति वही रहा। गठबंधन तो बदलते रहे लेकिन बिहार की तकदीर नहीं बदली। पूर्व कृषि मंत्री ने साफ किया कि गठबंधन के मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महागठबंधन के बड़े साथी दल राजद के किसी भी विचार, सिद्धांत या नीति से सहमति नहीं है। उनका एकमात्र मकसद है कि सत्ता उनके हाथ में रहना चाहिए।
शनिवार को आरा के शाहाबाद किसान मोर्चा द्वारा शौर्य दिवस का आयोजन किया गया था। सुधाकर सिंह इसमें बतौर अतिथ बुलाए गए है। सभा में बोलते हुए. उन्होंने कहा कि पिछले 17 सालों में बिहार को बर्बाद किया गया। देश दुनिया में बहुत कुछ बदल गया लेकिन नहीं बदली तो सिर्फ बिहार की तकदीर। इस व्यक्ति ने सत्ता में बैठकर किसानों को बर्बाद कर दिया।
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सुधाकर सिंह ने याद दिलाया कि सत्रह सालों में उन्होंने चार बार कुर्सी छोड़ दी और फिर से कुर्सी को पकड़ लिया। इन सत्रह सालों में चार बार गठबंधन बदले लेकिन सीएम पद पर काबिज व्यक्ति वही रहा। Sudhakar Singh attacks on Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ बयान बाजी करके मंत्री पद गंवा चुके सुधाकर सिंह के तेवर काम नहीं हो रहे हैं। इसे लेकर सुधाकर सिंह अपनी ही पार्टी आरजेडी के कोप भाजन बन चुके हैं। पार्टी ने उन्हें नोटिस थमा कर पंद्रह दिनों में जवाब मांगा है। लगता है कि सुधाकर सिंह पर पार्टी की नोटिस का कोई असर नहीं है। एक बार फिर उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा हमला बोला है। आरा के शाहाबाद में शौर्य दिवस के कार्यक्रम में भाषण देते हुए सुधाकर सिंह ने नीतीश कुमार को छोटे कद वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दरवाजे से राजनीति करने वाले, विधान परिषद के रास्ते सत्ता में पहुंचे छोटे कद वाले लोग सरकार के प्रमुख पद पर बैठे हैं। उनका कद इतना छोटा है कि बिहार के विकास के लिए विशेष राज्य का नारा लगाकर केंद्र सरकार के आगे भीख मांगते हैं और दलबदल करते रहते हैं। सुधाकर सिंह ने याद दिलाया कि सत्रह सालों में उन्होंने चार बार कुर्सी छोड़ दी और फिर से कुर्सी को पकड़ लिया। इन सत्रह सालों में चार बार गठबंधन बदले लेकिन सीएम पद पर काबिज व्यक्ति वही रहा। गठबंधन तो बदलते रहे लेकिन बिहार की तकदीर नहीं बदली। पूर्व कृषि मंत्री ने साफ किया कि गठबंधन के मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महागठबंधन के बड़े साथी दल राजद के किसी भी विचार, सिद्धांत या नीति से सहमति नहीं है। उनका एकमात्र मकसद है कि सत्ता उनके हाथ में रहना चाहिए। शनिवार को आरा के शाहाबाद किसान मोर्चा द्वारा शौर्य दिवस का आयोजन किया गया था। सुधाकर सिंह इसमें बतौर अतिथ बुलाए गए है। सभा में बोलते हुए. उन्होंने कहा कि पिछले सत्रह सालों में बिहार को बर्बाद किया गया। देश दुनिया में बहुत कुछ बदल गया लेकिन नहीं बदली तो सिर्फ बिहार की तकदीर। इस व्यक्ति ने सत्ता में बैठकर किसानों को बर्बाद कर दिया।
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पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने 29 अक्टूबर की रात अफगानिस्तान को हराकर न सिर्फ जीत की हैट्रिक लगाई, बल्कि टीम इंडिया को भी पीछे छोड़ दिया। वहीं, उसके कप्तान बाबर आजम ने केन विलियमसन और एरोन फिंच को पीछे छोड़ते हुए विराट कोहली की बराबरी की है। पाकिस्तान ने इस जीत के साथ अफगानिस्तान का संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में टी20 इंटरनेशनल में पिछले 17 मैचों से चला आ रहा विजय अभियान भी रोक दिया।
अफगानिस्तान को यूएई में लगातार 17 जीत हासिल करने के बाद यह हार झेलनी पड़ी है। वहीं, पाकिस्तान ने यूएई में लगातार 14वीं जीत हासिल की। अफगानिस्तान के राशिद खान टी20 इंटरनेशनल में सबसे जल्दी 100 विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उन्होंने अपने 53वें मुकाबले में यह उपलब्धि हासिल की।
खास यह है कि वनडे में भी सबसे मैच में 100 विकेट लेने का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। राशिद ने 44वें वनडे में अपने 100 विकेट पूरे किए थे। टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में वह टिम साउदी के साथ संयुक्त रूप से तीसरे नंबर पर हैं। उनसे पहले शाकिब अल-हसन (117) और लसिथ मलिंगा (107) हैं। राशिद और साउदी के 100-100 विकेट हैं।
अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान की जीत टी20 वर्ल्ड कप में उसकी 22वीं विजय है। इस जीत के साथ उसने भारतीय टीम को पीछे छोड़ दिया। भारत ने टी20 वर्ल्ड कप में अब तक 21 मैच जीते हैं। इस मामले में श्रीलंकाई टीम शीर्ष पर है। उसके नाम 27 जीत दर्ज हैं।
बाबर आजम ने अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में अर्धशतकीय पारी खेली। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली की बराबरी की। वह टी20 इंटरनेशनल में बतौर कप्तान विराट कोहली के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा 50+ पारियां खेलने वाले बल्लेबाज बने। विराट कोहली और बाबर ने टी20 इंटरनेशनल में अब तक बतौर कप्तान 13-13 बार 50+ पारियां खेली हैं।
हालांकि, बाबर एक मामले में विराट से आगे निकल गए। उन्होंने 26 पारियों में यह मुकाम हासिल किया, जबकि विराट को यह उपलब्धि हासिल करने के लिए 44 पारियां खेलनी पड़ी थीं। हालांकि, टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा 50+ पारियां खेलने का रिकॉर्ड अब भी विराट कोहली के नाम है। कोहली ने अब तक 29 बार 50+ पारियां खेली हैं। रोहित शर्मा ने 26, बाबर आजम ने 23, डेविड वार्नर और पॉल स्टर्लिंग ने 20-20 50+ पारियां खेली हैं।
बाबर आजम पुरुषों के टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में कप्तान के रूप में 1000 रन बनाने वाले नौवें क्रिकेटर बन गए हैं। वह सिर्फ 26 पारियों में इस मुकाम तक पहुंचने वाले सबसे तेज खिलाड़ी हैं। पहले विराट कोहली सबसे तेज थे। उन्होंने 30 पारियों में यह मुकाम हासिल किया था।
इस मामले में ऑस्ट्रेलियाई कैप्टन एरोन फिंच (51 पारियां) और न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन (50 पारियां) संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं। दोनों ने बतौर कप्तान 11-11 बार 50+ पारियां पारियां खेली हैं। इंग्लैंड के कप्तान इयोन मॉर्गन ने बतौर कप्तान अब तक 9 बार 50+ पारियां पारियां खेली हैं। वह 60 पारियों में यहां तक पहुंचे हैं।
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पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने उनतीस अक्टूबर की रात अफगानिस्तान को हराकर न सिर्फ जीत की हैट्रिक लगाई, बल्कि टीम इंडिया को भी पीछे छोड़ दिया। वहीं, उसके कप्तान बाबर आजम ने केन विलियमसन और एरोन फिंच को पीछे छोड़ते हुए विराट कोहली की बराबरी की है। पाकिस्तान ने इस जीत के साथ अफगानिस्तान का संयुक्त अरब अमीरात में टीबीस इंटरनेशनल में पिछले सत्रह मैचों से चला आ रहा विजय अभियान भी रोक दिया। अफगानिस्तान को यूएई में लगातार सत्रह जीत हासिल करने के बाद यह हार झेलनी पड़ी है। वहीं, पाकिस्तान ने यूएई में लगातार चौदहवीं जीत हासिल की। अफगानिस्तान के राशिद खान टीबीस इंटरनेशनल में सबसे जल्दी एक सौ विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उन्होंने अपने तिरेपनवें मुकाबले में यह उपलब्धि हासिल की। खास यह है कि वनडे में भी सबसे मैच में एक सौ विकेट लेने का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। राशिद ने चौंतालीसवें वनडे में अपने एक सौ विकेट पूरे किए थे। टीबीस इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में वह टिम साउदी के साथ संयुक्त रूप से तीसरे नंबर पर हैं। उनसे पहले शाकिब अल-हसन और लसिथ मलिंगा हैं। राशिद और साउदी के एक सौ-एक सौ विकेट हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान की जीत टीबीस वर्ल्ड कप में उसकी बाईसवीं विजय है। इस जीत के साथ उसने भारतीय टीम को पीछे छोड़ दिया। भारत ने टीबीस वर्ल्ड कप में अब तक इक्कीस मैच जीते हैं। इस मामले में श्रीलंकाई टीम शीर्ष पर है। उसके नाम सत्ताईस जीत दर्ज हैं। बाबर आजम ने अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में अर्धशतकीय पारी खेली। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली की बराबरी की। वह टीबीस इंटरनेशनल में बतौर कप्तान विराट कोहली के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा पचास+ पारियां खेलने वाले बल्लेबाज बने। विराट कोहली और बाबर ने टीबीस इंटरनेशनल में अब तक बतौर कप्तान तेरह-तेरह बार पचास+ पारियां खेली हैं। हालांकि, बाबर एक मामले में विराट से आगे निकल गए। उन्होंने छब्बीस पारियों में यह मुकाम हासिल किया, जबकि विराट को यह उपलब्धि हासिल करने के लिए चौंतालीस पारियां खेलनी पड़ी थीं। हालांकि, टीबीस इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा पचास+ पारियां खेलने का रिकॉर्ड अब भी विराट कोहली के नाम है। कोहली ने अब तक उनतीस बार पचास+ पारियां खेली हैं। रोहित शर्मा ने छब्बीस, बाबर आजम ने तेईस, डेविड वार्नर और पॉल स्टर्लिंग ने बीस-बीस पचास+ पारियां खेली हैं। बाबर आजम पुरुषों के टीबीस इंटरनेशनल मुकाबलों में कप्तान के रूप में एक हज़ार रन बनाने वाले नौवें क्रिकेटर बन गए हैं। वह सिर्फ छब्बीस पारियों में इस मुकाम तक पहुंचने वाले सबसे तेज खिलाड़ी हैं। पहले विराट कोहली सबसे तेज थे। उन्होंने तीस पारियों में यह मुकाम हासिल किया था। इस मामले में ऑस्ट्रेलियाई कैप्टन एरोन फिंच और न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं। दोनों ने बतौर कप्तान ग्यारह-ग्यारह बार पचास+ पारियां पारियां खेली हैं। इंग्लैंड के कप्तान इयोन मॉर्गन ने बतौर कप्तान अब तक नौ बार पचास+ पारियां पारियां खेली हैं। वह साठ पारियों में यहां तक पहुंचे हैं।
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आज बैंक की छुट्टी होने से रोहित घर पर ही था । पड़ोसी वर्मा जी के घर चहल पहल देख कर उसने माँ से पूछा , उन्होंने बताया आज उनकी बेटी का रिश्ता पक्का करने कुछ लोग आ रहे है । ये सुनते ही वो उदास हो गया ,जूही और वो एक दूसरे को शुरू से पसंद करते थे ।
अब जब उसकी नौकरी लग गयी थी तो उसने सोचा था ,माँ को अपनी पसंद बता देगा । जूही भी अपनी माँ को कुछ बता नहीं पायी थी ।वो दिनभर अनमना ही रहा ।
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आज बैंक की छुट्टी होने से रोहित घर पर ही था । पड़ोसी वर्मा जी के घर चहल पहल देख कर उसने माँ से पूछा , उन्होंने बताया आज उनकी बेटी का रिश्ता पक्का करने कुछ लोग आ रहे है । ये सुनते ही वो उदास हो गया ,जूही और वो एक दूसरे को शुरू से पसंद करते थे । अब जब उसकी नौकरी लग गयी थी तो उसने सोचा था ,माँ को अपनी पसंद बता देगा । जूही भी अपनी माँ को कुछ बता नहीं पायी थी ।वो दिनभर अनमना ही रहा ।
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बर्मिंघम में 28 जुलाई से शुरू होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैराकी प्रतियोगिता में भारतीय टीम का तीन वर्गों में प्रतिनिधित्व करने वाले उत्तराखंड के लाल कुशाग्र से पदक की आस है। राष्ट्रीय खेलों में तीन गोल्ड और एक सिल्वर के साथ रिकॉर्ड कायम करने वाले कुशाग्र इन दिनों प्रशिक्षण के लिए मैनचेस्टर में हैं और वहीं से बर्मिंघम रवाना होंगे।
उत्तराखंड के चमोली जिले के कफलोड़ी गांव निवासी हुकुम सिंह रावत के बेटे कुशाग्र दिल्ली में पैदा हुए और वहीं से पढ़ाई-लिखाई और तैराकी के गुर सीखे। बचपन में दमे के मरीज रहे कुशाग्र के फेफड़े मजबूत करने के लिए पिता हुकुम सिंह ने इन्हें स्वीमिंग सिखाने का फैसला लिया, जो बाद में जुनून में बदल गया।
देखते ही देखते कुशाग्र तैराकी में चैंपियन हो गया और 2019 में उसने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया था। कोरोना काल में तैयारी प्रभावित हुईं, जिससे वह टोक्यो के लिए ए कट बनाने में विफल रहे। जून में वर्ल्ड चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ के लिए भी क्वालीफाई कर लिया था।
हंगरी में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। हालांकि, पिछले साल राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने जबरदस्त वापसी की और दिल्ली के लिए तीन गोल्ड के साथ एक सिल्वर जीतकर तीन रिकॉर्ड भी बनाए थे। कुशाग्र ने 400 मीटर, 800 मीटर और 1500 मीटर फ्रीस्टाइल में तीन स्पर्धाओं में बी टाइमिंग हासिल करते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देकर अपना दबदबा कायम किया। कुशाग्र ने बताया कि मुझे अपनी रफ्तार वापस मिल गई है, जिसका फायदा निश्चित ही राष्ट्रमंडल खेलों में मिलेगा।
हाल ही में स्टेट बैंक से बतौर मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए हुकुम सिंह रावत ने बताया कि बेटे की लगन को देखते हुए और तबादले की वजह से उसकी तैयारियों पर असर की आशंका के बीच कई बार प्रमोशन से मना कर दिया। बताया कि कोरोना के दौरान खिलाड़ियों को तैयारी के लिए छूट मिलती तो टोक्यो में निश्चित ही भारतीय टीम के पदकों की संख्या ज्यादा होती। फोन पर हुई बातचीत में बताया कि जून में ही पूजा में भाग लेने के लिए गांव आया था। बेटा पदक जीतकर लौटा तो उसे भी गांव लेकर आऊंगा।
स्कूल में होने वाली तैराकी प्रतियोगिताओं में अव्वल आने लगा तो 2012 में पेशेवर तरीके से तालकटोरा में स्वीमिंग शुरू कराई। उसकी पहली कोच एडना शर्मा थी। प्रशिक्षण के लिए ऑस्ट्रेलिया गया तो वहां ऑस्ट्रेलियाई टीम के कोच माइकल बोल ने दो महीने प्रशिक्षण दिया, वहां से प्रशिक्षण के लिए यूएस भी गया।
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बर्मिंघम में अट्ठाईस जुलाई से शुरू होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैराकी प्रतियोगिता में भारतीय टीम का तीन वर्गों में प्रतिनिधित्व करने वाले उत्तराखंड के लाल कुशाग्र से पदक की आस है। राष्ट्रीय खेलों में तीन गोल्ड और एक सिल्वर के साथ रिकॉर्ड कायम करने वाले कुशाग्र इन दिनों प्रशिक्षण के लिए मैनचेस्टर में हैं और वहीं से बर्मिंघम रवाना होंगे। उत्तराखंड के चमोली जिले के कफलोड़ी गांव निवासी हुकुम सिंह रावत के बेटे कुशाग्र दिल्ली में पैदा हुए और वहीं से पढ़ाई-लिखाई और तैराकी के गुर सीखे। बचपन में दमे के मरीज रहे कुशाग्र के फेफड़े मजबूत करने के लिए पिता हुकुम सिंह ने इन्हें स्वीमिंग सिखाने का फैसला लिया, जो बाद में जुनून में बदल गया। देखते ही देखते कुशाग्र तैराकी में चैंपियन हो गया और दो हज़ार उन्नीस में उसने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया था। कोरोना काल में तैयारी प्रभावित हुईं, जिससे वह टोक्यो के लिए ए कट बनाने में विफल रहे। जून में वर्ल्ड चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ के लिए भी क्वालीफाई कर लिया था। हंगरी में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। हालांकि, पिछले साल राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने जबरदस्त वापसी की और दिल्ली के लिए तीन गोल्ड के साथ एक सिल्वर जीतकर तीन रिकॉर्ड भी बनाए थे। कुशाग्र ने चार सौ मीटर, आठ सौ मीटर और एक हज़ार पाँच सौ मीटर फ्रीस्टाइल में तीन स्पर्धाओं में बी टाइमिंग हासिल करते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देकर अपना दबदबा कायम किया। कुशाग्र ने बताया कि मुझे अपनी रफ्तार वापस मिल गई है, जिसका फायदा निश्चित ही राष्ट्रमंडल खेलों में मिलेगा। हाल ही में स्टेट बैंक से बतौर मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए हुकुम सिंह रावत ने बताया कि बेटे की लगन को देखते हुए और तबादले की वजह से उसकी तैयारियों पर असर की आशंका के बीच कई बार प्रमोशन से मना कर दिया। बताया कि कोरोना के दौरान खिलाड़ियों को तैयारी के लिए छूट मिलती तो टोक्यो में निश्चित ही भारतीय टीम के पदकों की संख्या ज्यादा होती। फोन पर हुई बातचीत में बताया कि जून में ही पूजा में भाग लेने के लिए गांव आया था। बेटा पदक जीतकर लौटा तो उसे भी गांव लेकर आऊंगा। स्कूल में होने वाली तैराकी प्रतियोगिताओं में अव्वल आने लगा तो दो हज़ार बारह में पेशेवर तरीके से तालकटोरा में स्वीमिंग शुरू कराई। उसकी पहली कोच एडना शर्मा थी। प्रशिक्षण के लिए ऑस्ट्रेलिया गया तो वहां ऑस्ट्रेलियाई टीम के कोच माइकल बोल ने दो महीने प्रशिक्षण दिया, वहां से प्रशिक्षण के लिए यूएस भी गया।
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पाली में शुक्रवार रात को बिजली की आंख मिचौली ने शहरवासियों को परेशान कर दिया। लाइट आकर कुछ मिनटों में वापस जा रही थी। लाइट जाने से गर्मी से लोग परेशान हो गए। रात करीब 12 बजे लाइट बहाल हुई। तब जाकर लोगों को राहत मिली।
दरअसल, पिछले दो-तीन दिन से उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल है। कई घरों में रात को AC फिर से शुरू हो गए। गर्मी के कारण बिजली की खपत बढ़ गई। ऐसे में शुक्रवार रात को लोड बढ़ने से बार-बार लाइट ट्रीप हो रही थी। इधर मांगों को लेकर डिस्कॉमकर्मियों की हड़ताल ने और परेशानी बढ़ा दी। ऐसे में ठेकेदार को ने व्यवस्था संभाली। उन्होंने पणिहारी चौराहा और इंडस्ट्रियल एरिया में बने 132 केवी के जीएसएस की व्यवस्था संभाली। आदर्श नगर फीडर लोड खैरवा फीडर शिफ्ट किया। व्यवस्था दुरस्त होने के बाद रात करीब 12 बजे लाइट बहाल हुई।
शहर के राजेन्द्र नगर में गर्मी से परेशान लोग सड़कों पर उतर गए। उन्होंन तेज गर्मी में लाइट सप्लाई बाधित होने पर गुस्सा जाहिर किया। जब तक लाइट नहीं आई डिस्कॉम अधिकारियों के फोन पर लोगों के फोन आते रहे। सभी का एक ही जवाब था लाइट कब आएगी। गर्मी से परेशान हो रहे है। इस दौरान क्षेत्र के मुकेश गोस्वामी, राकेश शर्मा, देवेन्द्रसिंह, कैलाश, अनिल चौधरी, मनोज सैन, गौतम शर्मा, प्रकाश मेघवाल, विक्रमसिंह गोयल, प्रदम्युन वैष्णव,कालू भाट, श्रवण डांगी सहित कई लोग मौजूद रहे।
गुरुवार को पाली के निकट कई गांव जो खैरवा फीडर से जुड़े है। वहां भी लाइट व्यवस्था बदहाल रही। आकेली गांव में गुरुवार रात को 12 बजे के करीब लाइट गई जो दूसरे दिन सुबह ही आई। ऐसे में रात भर लोगों को नींद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा। शुकवार को ऐसी स्थिति पाली शहर में भी हो गई। गनीमत रही कि 12 बजे तक लाइट आ गई। जिससे लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
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पाली में शुक्रवार रात को बिजली की आंख मिचौली ने शहरवासियों को परेशान कर दिया। लाइट आकर कुछ मिनटों में वापस जा रही थी। लाइट जाने से गर्मी से लोग परेशान हो गए। रात करीब बारह बजे लाइट बहाल हुई। तब जाकर लोगों को राहत मिली। दरअसल, पिछले दो-तीन दिन से उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल है। कई घरों में रात को AC फिर से शुरू हो गए। गर्मी के कारण बिजली की खपत बढ़ गई। ऐसे में शुक्रवार रात को लोड बढ़ने से बार-बार लाइट ट्रीप हो रही थी। इधर मांगों को लेकर डिस्कॉमकर्मियों की हड़ताल ने और परेशानी बढ़ा दी। ऐसे में ठेकेदार को ने व्यवस्था संभाली। उन्होंने पणिहारी चौराहा और इंडस्ट्रियल एरिया में बने एक सौ बत्तीस केवी के जीएसएस की व्यवस्था संभाली। आदर्श नगर फीडर लोड खैरवा फीडर शिफ्ट किया। व्यवस्था दुरस्त होने के बाद रात करीब बारह बजे लाइट बहाल हुई। शहर के राजेन्द्र नगर में गर्मी से परेशान लोग सड़कों पर उतर गए। उन्होंन तेज गर्मी में लाइट सप्लाई बाधित होने पर गुस्सा जाहिर किया। जब तक लाइट नहीं आई डिस्कॉम अधिकारियों के फोन पर लोगों के फोन आते रहे। सभी का एक ही जवाब था लाइट कब आएगी। गर्मी से परेशान हो रहे है। इस दौरान क्षेत्र के मुकेश गोस्वामी, राकेश शर्मा, देवेन्द्रसिंह, कैलाश, अनिल चौधरी, मनोज सैन, गौतम शर्मा, प्रकाश मेघवाल, विक्रमसिंह गोयल, प्रदम्युन वैष्णव,कालू भाट, श्रवण डांगी सहित कई लोग मौजूद रहे। गुरुवार को पाली के निकट कई गांव जो खैरवा फीडर से जुड़े है। वहां भी लाइट व्यवस्था बदहाल रही। आकेली गांव में गुरुवार रात को बारह बजे के करीब लाइट गई जो दूसरे दिन सुबह ही आई। ऐसे में रात भर लोगों को नींद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा। शुकवार को ऐसी स्थिति पाली शहर में भी हो गई। गनीमत रही कि बारह बजे तक लाइट आ गई। जिससे लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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15 September 2022 Ka Dhanu Rashifal आज का धनु राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक के लिए नौकरी तथा व्यवसाय के क्षेत्र में लाभदायक और सफल दिन है। कार्यक्षेत्र में भरपूर आत्मविश्वास और दृढ़ मनोबल से आपका कार्य सरलतापूर्वक पूरा होगा। उच्च पदाधिकारियों द्वारा काम की कदर होगी। पदोन्नति की संभावनाएँ रहेंगी। पिता से लाभ होगा। जमीन तथा वाहन सम्बंधी कामकाज के लिए अनुकूल समय है।
- धनु राशि धन-संपत्ति ( Money) धनु राशि वाले आज जातक ट्रेड मील से जुड़े जातक का व्यापार अच्छा चलेगा।
- धनु राशि करियर (Career) धनु राशि वाले जातक आज करियर चढ़ाव पर है, विरोधी जलेंगे।
- धनु राशि प्यार (Love) धनु राशि वाले आज जातक जातक को पुराने प्यार की याद सताएगी।
- धनु राशि परिवार ( Family) धनु राशि वाले जातक आज के परिवार में लोग को अपनों की कमी सताएगी।
- धनु राशि का उपाय ( Remedy) धनु राशि के जातक आज गौदान करें या गौ को ताजा चारा खिलाएं।
- धनु राशि पूर्वाभास (Forecast)धनु राशि वाले जातक कहीं अचानक धन मिलेगा।
कल का धनु राशिफल 16 सितंबर 2022 (Sagittarius Horoscope Tomorrow) कल का धनु राशिफल की गणना के अनुसार जातक आजकल जातक को वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। व्यवसाय में लाभ मिलेगा।
क्या राशिफल सही होता है?
हम जो भी राशिफल देते है वो सामान्य दैनिक राशिफल ग्रहों की सटिक गणना पर आधारित होता है। जो नाम के आधार पर होता है। लेकिन दुनियाभर में करोड़ों लोगों के एक नाम और एक राशियां होती है तो जरूरी नहीं की फलादेश भी एक हो। यहां जो राशिफल दी जाती है वह सामान्य भविष्यफल है। किसी भी जातक को अपने भविष्य का सही फलादेश जन्म राशि नाम और जन्म तारीख और कुंडली के लग्न में स्थित ग्रह और राशि के आधार पर सटीक जानकारी ले सकते हैं।
राशिफल क्या होता है?
ज्योतिष विज्ञान की वह विधा जिसमें जातक के नाम राशि और ग्रहों के गोचरी की स्थिति को देखकर भविष्यवाणी की जाती है, उसे राशिफल कहते हैं। राशिफल के जरिए हम दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक घटनाओं की जानकारी लेते हैं। इसके लिए हर दिन 9 ग्रहों और 27 नक्षत्रों की गणना और चंद्रमा की राशि में स्थिति के आधार पर 12 राशियों की भविष्यवाणी की जाती है। ये 12 राशियां इस प्रकार है- मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ व मीन। इनके फलादेश को राशिफल कहते हैं।
क्या राशिफल नाम के अनुसार है ?
न्यूजट्रैक. कॉम पर हम हर रोज दैनिक राशिफल देते हैं। जो नाम पर आधारित होता है। यह कुंडली में लग्न के अनुसार जन्म राशि होती है, लेकिन जिसे अपनी जन्मराशि का ज्ञान न हो वह अपने नाम से भी दैनिक फलादेश देख सकते हैं।
राशिफल की गणना किस पर आधारित है?
जो दैनिक राशिफल दी जाती है वह चंद्र राशि पर आधारित होती है, ज्योतिषविद से पता लगा सकते है। लेकिन इसके लिए जरूरी है आपको जन्म तारीख, स्थान और समय का सही पता तो सही फलादेश मिलेगा।
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पंद्रह सितंबरtember दो हज़ार बाईस Ka Dhanu Rashifal आज का धनु राशिफल : आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक के लिए नौकरी तथा व्यवसाय के क्षेत्र में लाभदायक और सफल दिन है। कार्यक्षेत्र में भरपूर आत्मविश्वास और दृढ़ मनोबल से आपका कार्य सरलतापूर्वक पूरा होगा। उच्च पदाधिकारियों द्वारा काम की कदर होगी। पदोन्नति की संभावनाएँ रहेंगी। पिता से लाभ होगा। जमीन तथा वाहन सम्बंधी कामकाज के लिए अनुकूल समय है। - धनु राशि धन-संपत्ति धनु राशि वाले आज जातक ट्रेड मील से जुड़े जातक का व्यापार अच्छा चलेगा। - धनु राशि करियर धनु राशि वाले जातक आज करियर चढ़ाव पर है, विरोधी जलेंगे। - धनु राशि प्यार धनु राशि वाले आज जातक जातक को पुराने प्यार की याद सताएगी। - धनु राशि परिवार धनु राशि वाले जातक आज के परिवार में लोग को अपनों की कमी सताएगी। - धनु राशि का उपाय धनु राशि के जातक आज गौदान करें या गौ को ताजा चारा खिलाएं। - धनु राशि पूर्वाभास धनु राशि वाले जातक कहीं अचानक धन मिलेगा। कल का धनु राशिफल सोलह सितंबर दो हज़ार बाईस कल का धनु राशिफल की गणना के अनुसार जातक आजकल जातक को वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। व्यवसाय में लाभ मिलेगा। क्या राशिफल सही होता है? हम जो भी राशिफल देते है वो सामान्य दैनिक राशिफल ग्रहों की सटिक गणना पर आधारित होता है। जो नाम के आधार पर होता है। लेकिन दुनियाभर में करोड़ों लोगों के एक नाम और एक राशियां होती है तो जरूरी नहीं की फलादेश भी एक हो। यहां जो राशिफल दी जाती है वह सामान्य भविष्यफल है। किसी भी जातक को अपने भविष्य का सही फलादेश जन्म राशि नाम और जन्म तारीख और कुंडली के लग्न में स्थित ग्रह और राशि के आधार पर सटीक जानकारी ले सकते हैं। राशिफल क्या होता है? ज्योतिष विज्ञान की वह विधा जिसमें जातक के नाम राशि और ग्रहों के गोचरी की स्थिति को देखकर भविष्यवाणी की जाती है, उसे राशिफल कहते हैं। राशिफल के जरिए हम दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक घटनाओं की जानकारी लेते हैं। इसके लिए हर दिन नौ ग्रहों और सत्ताईस नक्षत्रों की गणना और चंद्रमा की राशि में स्थिति के आधार पर बारह राशियों की भविष्यवाणी की जाती है। ये बारह राशियां इस प्रकार है- मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ व मीन। इनके फलादेश को राशिफल कहते हैं। क्या राशिफल नाम के अनुसार है ? न्यूजट्रैक. कॉम पर हम हर रोज दैनिक राशिफल देते हैं। जो नाम पर आधारित होता है। यह कुंडली में लग्न के अनुसार जन्म राशि होती है, लेकिन जिसे अपनी जन्मराशि का ज्ञान न हो वह अपने नाम से भी दैनिक फलादेश देख सकते हैं। राशिफल की गणना किस पर आधारित है? जो दैनिक राशिफल दी जाती है वह चंद्र राशि पर आधारित होती है, ज्योतिषविद से पता लगा सकते है। लेकिन इसके लिए जरूरी है आपको जन्म तारीख, स्थान और समय का सही पता तो सही फलादेश मिलेगा।
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अभी लाया साहब ।
(अपनी मेज से एक बड़ा रजिस्टर लाकर हेमन्त के हाथ में देता है। हेमन्त क्षरण भर रजिस्टर के पन्ने पलट-पलट कर उसे देखता है।)
सदानन्द का नाम तमाखू की किस जिन्स में आता है मुन्शीजी ? में तो पंजाब से लेकर केरल तक की सब जिन्सें देख गया, पर मुझे समझ नहीं आया कि सदानन्द का नाम किस जिन्स में होना चाहिए ।
जी, आपने यह एक बहुत बड़ी बात यह दी मालिक । सच बात तो यह है कि सदानन्द तो सारे देश में फैला हुआ है । यह कहना सचमुच कठिन है कि वह पंजाब का है या केरल का । हिन्दुस्तान के पूरब का है, या पश्चिम का । वह तो एक प्रतीक है ।
आप भी एक जीनियस हैं मुन्शीजी । मैं तम्बाकू की एक कम्पनी का मैनिजिंग डाइरेक्टर हूँ । इससे आपने इन बेईमान सरकारी अफसरों का हिसाब रखने के लिए उनका नाम ही "कच्चा तम्बाकू" रखकर यह रजिस्टर खोल दिया है । क्या खूब नाम रखा है आपने ! हः हः हः । "कच्चा तम्बाकू" ! ये हरामखोर, बेईमान सरकारी अफसर सचमुच कच्चे तम्बाकू हैं ! हः हः हः !
मुन्शी (विनय के साथ) जी, मैं तो आपका बच्चा हूँ ।
(रजिस्टर बेखते हुए) यह बंगाली तम्बाकू नम्बर एक कौन है ?
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अभी लाया साहब । सदानन्द का नाम तमाखू की किस जिन्स में आता है मुन्शीजी ? में तो पंजाब से लेकर केरल तक की सब जिन्सें देख गया, पर मुझे समझ नहीं आया कि सदानन्द का नाम किस जिन्स में होना चाहिए । जी, आपने यह एक बहुत बड़ी बात यह दी मालिक । सच बात तो यह है कि सदानन्द तो सारे देश में फैला हुआ है । यह कहना सचमुच कठिन है कि वह पंजाब का है या केरल का । हिन्दुस्तान के पूरब का है, या पश्चिम का । वह तो एक प्रतीक है । आप भी एक जीनियस हैं मुन्शीजी । मैं तम्बाकू की एक कम्पनी का मैनिजिंग डाइरेक्टर हूँ । इससे आपने इन बेईमान सरकारी अफसरों का हिसाब रखने के लिए उनका नाम ही "कच्चा तम्बाकू" रखकर यह रजिस्टर खोल दिया है । क्या खूब नाम रखा है आपने ! हः हः हः । "कच्चा तम्बाकू" ! ये हरामखोर, बेईमान सरकारी अफसर सचमुच कच्चे तम्बाकू हैं ! हः हः हः ! मुन्शी जी, मैं तो आपका बच्चा हूँ । यह बंगाली तम्बाकू नम्बर एक कौन है ?
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नीरज काकोटिया,बालाघाट। बालाघाट जिले के ग्राम पंचायत कुम्हारी के छोटी कुम्हारी में सरपंच सावन पिछोड़े के नेतृत्व में पिछले 6 महीने से शराबबंदी का निर्णय कर गांव में किसी भी तरह की अवैध शराब बिक्री नहीं होने दी जा रही है। इसी से नाराज अवैध शराब कारोबार में संलिप्त युवक भूरा भलावी ने आज रोड किनारे खड़े सरपंच को अपनी मोटरसाइकिल से कुचलने का प्रयास किया। जिससे ग्रामीण जन आक्रोशित हो गए और उन्होंने चक्का जाम प्रदर्शन कर दिया। इस दौरान रास्ता रोककर टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का कहना है कि युवक भूरा बुलावे अवैध शराब का कारोबार करता है। लेकिन गांव में शराबबंदी होने के बाद से वो बौखला गया है। इसी वजह से उसने सरपंच को मारने की कोशिश की है। वहीं आज सरपंच को एक्सीडेंट कर कुचलने का मामला सामने आने के बाद से ग्रामीण जन आक्रोशित हो गए और उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इधर चक्का जाम और प्रदर्शन होने से मार्ग के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई और बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा हो गया। घटनाक्रम की सूचना पर तत्काल कोतवाली थाना प्रभारी पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों की बात को सुनने के पश्चात संबंधित युवक को अपनी अभिरक्षा में लिया। उन्होंने युवक भूरा भलावी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। जिसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हो पाया।
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नीरज काकोटिया,बालाघाट। बालाघाट जिले के ग्राम पंचायत कुम्हारी के छोटी कुम्हारी में सरपंच सावन पिछोड़े के नेतृत्व में पिछले छः महीने से शराबबंदी का निर्णय कर गांव में किसी भी तरह की अवैध शराब बिक्री नहीं होने दी जा रही है। इसी से नाराज अवैध शराब कारोबार में संलिप्त युवक भूरा भलावी ने आज रोड किनारे खड़े सरपंच को अपनी मोटरसाइकिल से कुचलने का प्रयास किया। जिससे ग्रामीण जन आक्रोशित हो गए और उन्होंने चक्का जाम प्रदर्शन कर दिया। इस दौरान रास्ता रोककर टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि युवक भूरा बुलावे अवैध शराब का कारोबार करता है। लेकिन गांव में शराबबंदी होने के बाद से वो बौखला गया है। इसी वजह से उसने सरपंच को मारने की कोशिश की है। वहीं आज सरपंच को एक्सीडेंट कर कुचलने का मामला सामने आने के बाद से ग्रामीण जन आक्रोशित हो गए और उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इधर चक्का जाम और प्रदर्शन होने से मार्ग के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई और बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा हो गया। घटनाक्रम की सूचना पर तत्काल कोतवाली थाना प्रभारी पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों की बात को सुनने के पश्चात संबंधित युवक को अपनी अभिरक्षा में लिया। उन्होंने युवक भूरा भलावी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। जिसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हो पाया।
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नई दिल्ली (एएनआई)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से शुरू हो रही दो दिवसीय गुजरात यात्रा के दौरान विभिन्न विकास परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाएंगे। वह सूरत, भावनगर, अहमदाबाद और अंबाजी को कवर करेंगे और 29,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। जिसमें अहमदाबाद मेट्रो चरण I का शुभारंभ भी शामिल है। गुरुवार की सुबह वे सूरत में 3400 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। इनमें जल आपूर्ति और जल निकासी परियोजनाएं, ड्रीम सिटी, जैव विविधता पार्क और अन्य विकास परियोजनाएं जैसे सार्वजनिक आधारभूत संरचना, विरासत बहाली, सिटी बस/बीआरटीएस आधारभूत संरचना, और इलेक्ट्रिक वाहन आधारभूत संरचना के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त परियोजनाएं शामिल हैं।
रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के पहले चरण और डायमंड रिसर्च एंड मर्केंटाइल (ड्रीम) सिटी के मुख्य प्रवेश द्वार का भी उद्घाटन किया जाएगा। ड्रीम सिटी परियोजना सूरत में तेजी से बढ़ते हीरा व्यापार क्षेत्र के लिए वाणिज्यिक और आवासीय स्थान की बढ़ती मांग को पूरा करने के दृष्टिकोण के साथ शुरू की गई है। प्रधानमंत्री परियोजना के दूसरे चरण की आधारशिला भी रखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी सूरत के विज्ञान केंद्र में खोज संग्रहालय का उद्घाटन करने के अलावा 87 हेक्टेयर में बन रहे जैव विविधता पार्क की आधारशिला भी रखेंगे। बच्चों के लिए निर्मित, संग्रहालय में इंटरैक्टिव डिस्प्ले, पूछताछ-आधारित गतिविधियां और जिज्ञासा-आधारित होंगे।
इसके बाद, वह आधारशिला रखने और 5,200 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकासात्मक पहलों का उद्घाटन करने के लिए भावनगर की यात्रा करेंगे। प्रधानमंत्री शहर में दुनिया के पहले सीएनजी टर्मिनल और ब्राउनफील्ड बंदरगाह की आधारशिला रखेंगे। बंदरगाह को 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया जाएगा और इसमें सीएनजी टर्मिनल के लिए अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा होगा। बंदरगाह में एक अति-आधुनिक कंटेनर टर्मिनल, बहुउद्देश्यीय टर्मिनल और मौजूदा सड़क और रेलवे नेटवर्क के लिए सीधे डोर-स्टेप कनेक्टिविटी के साथ तरल टर्मिनल होगा। इसके अलावा पीएम मोदी अन्य कई योजनाओं का शुभारंभ भी करेंगे।
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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से शुरू हो रही दो दिवसीय गुजरात यात्रा के दौरान विभिन्न विकास परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाएंगे। वह सूरत, भावनगर, अहमदाबाद और अंबाजी को कवर करेंगे और उनतीस,शून्य करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। जिसमें अहमदाबाद मेट्रो चरण I का शुभारंभ भी शामिल है। गुरुवार की सुबह वे सूरत में तीन हज़ार चार सौ करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। इनमें जल आपूर्ति और जल निकासी परियोजनाएं, ड्रीम सिटी, जैव विविधता पार्क और अन्य विकास परियोजनाएं जैसे सार्वजनिक आधारभूत संरचना, विरासत बहाली, सिटी बस/बीआरटीएस आधारभूत संरचना, और इलेक्ट्रिक वाहन आधारभूत संरचना के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त परियोजनाएं शामिल हैं। रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के पहले चरण और डायमंड रिसर्च एंड मर्केंटाइल सिटी के मुख्य प्रवेश द्वार का भी उद्घाटन किया जाएगा। ड्रीम सिटी परियोजना सूरत में तेजी से बढ़ते हीरा व्यापार क्षेत्र के लिए वाणिज्यिक और आवासीय स्थान की बढ़ती मांग को पूरा करने के दृष्टिकोण के साथ शुरू की गई है। प्रधानमंत्री परियोजना के दूसरे चरण की आधारशिला भी रखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी सूरत के विज्ञान केंद्र में खोज संग्रहालय का उद्घाटन करने के अलावा सत्तासी हेक्टेयर में बन रहे जैव विविधता पार्क की आधारशिला भी रखेंगे। बच्चों के लिए निर्मित, संग्रहालय में इंटरैक्टिव डिस्प्ले, पूछताछ-आधारित गतिविधियां और जिज्ञासा-आधारित होंगे। इसके बाद, वह आधारशिला रखने और पाँच,दो सौ करोड़ रुपये से अधिक की कई विकासात्मक पहलों का उद्घाटन करने के लिए भावनगर की यात्रा करेंगे। प्रधानमंत्री शहर में दुनिया के पहले सीएनजी टर्मिनल और ब्राउनफील्ड बंदरगाह की आधारशिला रखेंगे। बंदरगाह को चार,शून्य करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया जाएगा और इसमें सीएनजी टर्मिनल के लिए अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा होगा। बंदरगाह में एक अति-आधुनिक कंटेनर टर्मिनल, बहुउद्देश्यीय टर्मिनल और मौजूदा सड़क और रेलवे नेटवर्क के लिए सीधे डोर-स्टेप कनेक्टिविटी के साथ तरल टर्मिनल होगा। इसके अलावा पीएम मोदी अन्य कई योजनाओं का शुभारंभ भी करेंगे।
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इंडिया न्यूज, प्रयागराज (Uttar Pradesh): संगम नगरी प्रयागराज पहुंचे पूर्व मंत्री व शहर पश्चिमी विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह का एयरपोर्ट पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। सिद्धार्थ नाथ सिंह निवेश के लिए विदेश गए हुए थे। जिसके बाद उनका जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। 2008 में जो टोटल एमआईयू साइन हुए थे। उन्होंने कहा कि विदेश के लोगों का प्रदेश के प्रति नजरिया बदला है ।
अखिलेश यादव ने ट्वीट करके लिखा था झूठे निवेश से विकास पैदा नहीं होता कागज की छपी मोमबत्ती से गुजारा नहीं होता। उस ट्वीट पर भी पलटवार करते हुए मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा अखिलेश जी के यहां अंधेरा आ चुका है। वे अंधकार में ही रहते हैं और अंधकार में सोचते हैं। कहा वे मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनको मालूम है कि हम जो भी निवेश लाते हैं। वह प्रदेश व जनता के लाते हैं। ना कि भाजपा के लिए लाते हैं। उनको स्वागत करना चाहिए और कहना चाहिए और ज्यादा लेकर आए। पहले समीक्षा करें, फिर टिप्पणी करें। क्योंकि जो विपक्ष बोलता है। उसे भी लोग सुनते हैं। एक माहौल बनाना जो यहां निवेश आना है। उसमें भी रुकावट आती है।
वहीं दूसरी तरफ प्रयागराज पहुंचे समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने भाजपा को गुंडा पार्टी बताते हुए निशाना साधा था। उस पर भी सिद्धार्थ नाथ सिंह ने पलटवार किया कि उनको मौका दिया गया था। लेकिन उन्होंने भतीजे का दामन थामा है। गुंडा कौन है और गुंडा कौन नहीं है। यह जनता फैसला कर चुकी है। मैं यह कहूंगा कि आप की पार्टी प्रसिद्ध ही है।
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इंडिया न्यूज, प्रयागराज : संगम नगरी प्रयागराज पहुंचे पूर्व मंत्री व शहर पश्चिमी विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह का एयरपोर्ट पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। सिद्धार्थ नाथ सिंह निवेश के लिए विदेश गए हुए थे। जिसके बाद उनका जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। दो हज़ार आठ में जो टोटल एमआईयू साइन हुए थे। उन्होंने कहा कि विदेश के लोगों का प्रदेश के प्रति नजरिया बदला है । अखिलेश यादव ने ट्वीट करके लिखा था झूठे निवेश से विकास पैदा नहीं होता कागज की छपी मोमबत्ती से गुजारा नहीं होता। उस ट्वीट पर भी पलटवार करते हुए मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा अखिलेश जी के यहां अंधेरा आ चुका है। वे अंधकार में ही रहते हैं और अंधकार में सोचते हैं। कहा वे मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनको मालूम है कि हम जो भी निवेश लाते हैं। वह प्रदेश व जनता के लाते हैं। ना कि भाजपा के लिए लाते हैं। उनको स्वागत करना चाहिए और कहना चाहिए और ज्यादा लेकर आए। पहले समीक्षा करें, फिर टिप्पणी करें। क्योंकि जो विपक्ष बोलता है। उसे भी लोग सुनते हैं। एक माहौल बनाना जो यहां निवेश आना है। उसमें भी रुकावट आती है। वहीं दूसरी तरफ प्रयागराज पहुंचे समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने भाजपा को गुंडा पार्टी बताते हुए निशाना साधा था। उस पर भी सिद्धार्थ नाथ सिंह ने पलटवार किया कि उनको मौका दिया गया था। लेकिन उन्होंने भतीजे का दामन थामा है। गुंडा कौन है और गुंडा कौन नहीं है। यह जनता फैसला कर चुकी है। मैं यह कहूंगा कि आप की पार्टी प्रसिद्ध ही है।
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मैं उनको सरस्वती दीदी कहता था. मैं उनसे कहता कि हम बचपन से मां सरस्वती जी पूजा करते आए हैं. आर्ट की देवी सरस्वती हैं. उनको देखा नहीं लेकिन, आपको देखने के बाद लगता है कि वह हमारे सामने बैठी हैं. वे मेरी बात सुनकर हंस पड़ती थी. मैं खुद को लकी मानता हूं कि मैं वायलिन बजा रहा हूं और लता जी की आवाज मेरे कानों में आ रही है. सोचिए उस पल से अच्छा भी क्या कोई पल हो सकता है. मैं अरेंजर रहा हूं. उस दौरान मेरे साथ उन्होंने बहुत गाने गाए हैं.
लता दीदी ने राजश्री फिल्मों के लिए गाना बन्द कर दिया था. एक लंबा अरसा गुज़र चुका है. फ़िल्म मैंने प्यार किया के दौरान सभी ने उन्हें मनाने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी थी. सभी को पता था कि वो मुझे बहुत प्यार करती थी. मैंने उन्हें अपने प्यार और रिश्ते का वास्ता देते हुए कहा था कि आपको मेरे लिए गाना गाना है और वो मान गयी थी. 17 साल के अंतराल के बाद उन्होंने राजश्री की किसी फिल्म के लिए गाना गाया था.
दीदी से रिकॉर्डिंग की डेट मैं ही लेता था. वो डेट देती थी और उसके बाद मैं अपने प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को बताता था. लता दीदी ने ये तारीख दी है. इसी दिन रिकॉर्डिंग करेंगे और उस दिन ये भी तय हो जाता था कि आप मुझे पौने ग्यारह बजे लेने भी आएंगे. ऐसा कुछ रिश्ता था हमारा. मैं पौने ग्यारह बजे उनके घर पहुंचता था और दीदी आधे मिनट में नीचे आ जाती थी. वो वक़्त की बहुत पाबंद थी. वे ना तो किसी का इंतज़ार करती थी और ना करवाती थी. वो दौर मोबाइल का नहीं था. वो मेरी कार में आगे मेरे साथ बैठती थी और दो पुलिस वाले पीछे बैठते थे.
रिकॉर्डिंग में आने से पहले वह उस गाने का पहले रियाज़ करती थी. उसके बाद ही वह रिकॉर्डिंग पर आती थी. कई बार उनको लगता कि आज गला ठीक नहीं तो वो रिकॉर्डिंग कैंसिल कर देती थी. वो रिकॉर्डिंग से किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकती थी. वो हमेशा रिकॉर्डिंग रूम के बाहर अपने जूते उतार देती थी. वे नंगे पैर गाती थी और खड़े होकर गाती थी बैठकर नहीं. रिकॉर्डिंग के दौरान जब तक कंपोजर उन्हें नहीं कहता कि इंट्रुमेंट्स थोड़ा ठीक करना है आप बैठ जाइए उसके बाद रिकॉर्डिंग फिर से करेंगे तब तक वो बैठती नहीं थी. दिल तो पागल है के दौरान उनकी उम्र 72 साल की रही होगी उस दौरान भी उन्होंने इसी तरह से गाया था. पूरे समय वो खड़ी थी. गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान वह हैवी खाने से बचती थी. उस दौरान वह सिर्फ शहद मिला गर्म पानी पीती थी.
दीदी के लिए संगीत एक पूजा एक तपस्या की तरह दिल तो पागल है के दौरान मैंने ये बात महसूस की थी. हमलोग गाने की रिकॉर्डिंग रहे थे थे अरे रे अरे. मैंने दीदी के पास जाकर कहा कि दीदी दूसरा अंतरा एक बार फिर से करते हैं. उन्होंने कहा कि दूसरा क्यों पूरा एक बार फिर से रिकॉर्ड करते हैं. उनकी उम्र 72 साल की थी और वो गाने की रिकॉर्डिंग खड़े होकर ही करती थी जैसा कि मैंने पहले ही बताया उन्होंने उस गाने को फिर से पूरा रिकॉर्ड किया. संगीत के प्रति उनकी यह तपस्या ही थी जो दुनिया का हर टीवी आज उनको ही दिखा रहा है.
गाने की रिकॉर्डिंग के बाद अच्छे खाने का प्लान भी पहले से तय होता था. क्योंकि लता दीदी खाने की बहुत शौकीन थी. खाने में चिकन,मटन,दही सब शामिल होता था. डेढ़ घंटे तक हमारा खाना भी चलता था. खाने के बाद उन्हें कोल्ड ड्रिंक पीना बहुत पसंद था. वो सामने से कहती कि स्प्राइट पिलाओ,कोका कोला पिलाओ. वो भी बर्फ डालकर. आमतौर पर सभी सिंगर्स ठंडा खाने से परहेज करते थे लेकिन दीदी नहीं उन्हें सरस्वती का वरदान था.
राम नाम की धुन भजन की रिकॉर्डिंग के दौरान वो गाना उन्हें इतना मोहित कर गया था कि उन्होंने उस गाने के लिए निर्माता से पैसे ही नहीं लिए थे. उन्होंने कहा कि इतना अच्छा भजन बनाया है. मैं इसके पैसे नहीं लुंगी . यह गाना मेरी तरफ से तोहफा समझो. वे अक्सर लोगों को गिट्स अलग अलग तरह से देती रहती थी. फिल्म पेंटर बाबू फिल्म जब हम साथ में कर रहे थे, तो वो मेरे लिए एक बड़ा सा गिफ्ट लेकर आयी थी. वो गिफ्ट पैक था तो मुझे पता नहीं था कि उसमें क्या है. घर जाकर देखा तो उसमें गुरुनानक जी की तस्वीर थी और वो पेंटिंग सिख समुदाय के बहुत बड़े पेंटर हैं नानक सिंह. उन्होंने गुरुनानक साहब की सबसे अच्छी तस्वीर इतिहास में बनायी है. वो अपने आसपास के लोगों का बहुत खयाल रखती थी.
उनको जोक्स सुनना बहुत पसंद था. उस दौरान मोबाइल तो था नहीं कि सारे जोक्स आपको एक बटन पर मिल जाए तो मैं उनको हर दिन कुछ नया जोक सुनाने की कोशिश करता था. मनोज कुमार साहब उनको बहुत जोक सुनाते थे. लता दीदी जिन्दगी को पूरी जिंदादिली से जीने में यकीन करती थी. मैंने उन्हें हंसते मुस्कुराते गाते गुनगुनाते देखा है, इसलिए जब उनकी बीमारी की खबर मुझे मिली तो मैं उनसे मिलने नहीं गया, क्योंकि मैं उन्हें ऐसे देख ही नहीं सकता था.
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मैं उनको सरस्वती दीदी कहता था. मैं उनसे कहता कि हम बचपन से मां सरस्वती जी पूजा करते आए हैं. आर्ट की देवी सरस्वती हैं. उनको देखा नहीं लेकिन, आपको देखने के बाद लगता है कि वह हमारे सामने बैठी हैं. वे मेरी बात सुनकर हंस पड़ती थी. मैं खुद को लकी मानता हूं कि मैं वायलिन बजा रहा हूं और लता जी की आवाज मेरे कानों में आ रही है. सोचिए उस पल से अच्छा भी क्या कोई पल हो सकता है. मैं अरेंजर रहा हूं. उस दौरान मेरे साथ उन्होंने बहुत गाने गाए हैं. लता दीदी ने राजश्री फिल्मों के लिए गाना बन्द कर दिया था. एक लंबा अरसा गुज़र चुका है. फ़िल्म मैंने प्यार किया के दौरान सभी ने उन्हें मनाने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी थी. सभी को पता था कि वो मुझे बहुत प्यार करती थी. मैंने उन्हें अपने प्यार और रिश्ते का वास्ता देते हुए कहा था कि आपको मेरे लिए गाना गाना है और वो मान गयी थी. सत्रह साल के अंतराल के बाद उन्होंने राजश्री की किसी फिल्म के लिए गाना गाया था. दीदी से रिकॉर्डिंग की डेट मैं ही लेता था. वो डेट देती थी और उसके बाद मैं अपने प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को बताता था. लता दीदी ने ये तारीख दी है. इसी दिन रिकॉर्डिंग करेंगे और उस दिन ये भी तय हो जाता था कि आप मुझे पौने ग्यारह बजे लेने भी आएंगे. ऐसा कुछ रिश्ता था हमारा. मैं पौने ग्यारह बजे उनके घर पहुंचता था और दीदी आधे मिनट में नीचे आ जाती थी. वो वक़्त की बहुत पाबंद थी. वे ना तो किसी का इंतज़ार करती थी और ना करवाती थी. वो दौर मोबाइल का नहीं था. वो मेरी कार में आगे मेरे साथ बैठती थी और दो पुलिस वाले पीछे बैठते थे. रिकॉर्डिंग में आने से पहले वह उस गाने का पहले रियाज़ करती थी. उसके बाद ही वह रिकॉर्डिंग पर आती थी. कई बार उनको लगता कि आज गला ठीक नहीं तो वो रिकॉर्डिंग कैंसिल कर देती थी. वो रिकॉर्डिंग से किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकती थी. वो हमेशा रिकॉर्डिंग रूम के बाहर अपने जूते उतार देती थी. वे नंगे पैर गाती थी और खड़े होकर गाती थी बैठकर नहीं. रिकॉर्डिंग के दौरान जब तक कंपोजर उन्हें नहीं कहता कि इंट्रुमेंट्स थोड़ा ठीक करना है आप बैठ जाइए उसके बाद रिकॉर्डिंग फिर से करेंगे तब तक वो बैठती नहीं थी. दिल तो पागल है के दौरान उनकी उम्र बहत्तर साल की रही होगी उस दौरान भी उन्होंने इसी तरह से गाया था. पूरे समय वो खड़ी थी. गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान वह हैवी खाने से बचती थी. उस दौरान वह सिर्फ शहद मिला गर्म पानी पीती थी. दीदी के लिए संगीत एक पूजा एक तपस्या की तरह दिल तो पागल है के दौरान मैंने ये बात महसूस की थी. हमलोग गाने की रिकॉर्डिंग रहे थे थे अरे रे अरे. मैंने दीदी के पास जाकर कहा कि दीदी दूसरा अंतरा एक बार फिर से करते हैं. उन्होंने कहा कि दूसरा क्यों पूरा एक बार फिर से रिकॉर्ड करते हैं. उनकी उम्र बहत्तर साल की थी और वो गाने की रिकॉर्डिंग खड़े होकर ही करती थी जैसा कि मैंने पहले ही बताया उन्होंने उस गाने को फिर से पूरा रिकॉर्ड किया. संगीत के प्रति उनकी यह तपस्या ही थी जो दुनिया का हर टीवी आज उनको ही दिखा रहा है. गाने की रिकॉर्डिंग के बाद अच्छे खाने का प्लान भी पहले से तय होता था. क्योंकि लता दीदी खाने की बहुत शौकीन थी. खाने में चिकन,मटन,दही सब शामिल होता था. डेढ़ घंटे तक हमारा खाना भी चलता था. खाने के बाद उन्हें कोल्ड ड्रिंक पीना बहुत पसंद था. वो सामने से कहती कि स्प्राइट पिलाओ,कोका कोला पिलाओ. वो भी बर्फ डालकर. आमतौर पर सभी सिंगर्स ठंडा खाने से परहेज करते थे लेकिन दीदी नहीं उन्हें सरस्वती का वरदान था. राम नाम की धुन भजन की रिकॉर्डिंग के दौरान वो गाना उन्हें इतना मोहित कर गया था कि उन्होंने उस गाने के लिए निर्माता से पैसे ही नहीं लिए थे. उन्होंने कहा कि इतना अच्छा भजन बनाया है. मैं इसके पैसे नहीं लुंगी . यह गाना मेरी तरफ से तोहफा समझो. वे अक्सर लोगों को गिट्स अलग अलग तरह से देती रहती थी. फिल्म पेंटर बाबू फिल्म जब हम साथ में कर रहे थे, तो वो मेरे लिए एक बड़ा सा गिफ्ट लेकर आयी थी. वो गिफ्ट पैक था तो मुझे पता नहीं था कि उसमें क्या है. घर जाकर देखा तो उसमें गुरुनानक जी की तस्वीर थी और वो पेंटिंग सिख समुदाय के बहुत बड़े पेंटर हैं नानक सिंह. उन्होंने गुरुनानक साहब की सबसे अच्छी तस्वीर इतिहास में बनायी है. वो अपने आसपास के लोगों का बहुत खयाल रखती थी. उनको जोक्स सुनना बहुत पसंद था. उस दौरान मोबाइल तो था नहीं कि सारे जोक्स आपको एक बटन पर मिल जाए तो मैं उनको हर दिन कुछ नया जोक सुनाने की कोशिश करता था. मनोज कुमार साहब उनको बहुत जोक सुनाते थे. लता दीदी जिन्दगी को पूरी जिंदादिली से जीने में यकीन करती थी. मैंने उन्हें हंसते मुस्कुराते गाते गुनगुनाते देखा है, इसलिए जब उनकी बीमारी की खबर मुझे मिली तो मैं उनसे मिलने नहीं गया, क्योंकि मैं उन्हें ऐसे देख ही नहीं सकता था.
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आगरा। गंगा जल परियोजना को लेकर सुर्खियों में रहने वाले भाजपा की योगेंद्र उपाध्याय अब एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने इस बार छत्रपति शिवाजी से जुड़े इतिहास पर सवाल उठाये है। एक प्रेसवार्ता के माध्यम से बताया विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने छत्रपति शिवाजी को लालकिले में नही बल्कि जयपुर के राजपरिवार के बंगले में रखा था। अब उन बंगलो में जीएसटी और आगरा विकास प्राधिकरण के कार्यालय है। विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने मांग की है कि इन दोनों कार्यलयों में छत्रपति शिवाजी का विशाल स्मारक बनाया जाए।
विधायक योगेंद्र उपाध्याय का कहना था कि हाल ही में छत्रपति शिवाजी को लेकर इतिहासकार प्रो अगम प्रशाद माथुर ने शोध किया था जिसमे यह तथ्य प्राप्त हुए है। इतना ही नही यहां तैनात रहे अधीक्षण पुरातत्वविद् भुवन विक्रम का भी यही मानना है।
जयपुर के राजपरिवार से यह संपत्ति किसी श्रीराम परिवार के हवाले हुई और 1970 में नगर निगम के हैंडओवर हो गयी और निगम ने यहाँ जयपुर हाउस कॉलोनी बनाई।
विधायक योगेंद्र उपाध्याय का कहना है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी वार्ता हो गयी है। उन्होंने इस सम्बंध में और तथ्य जुटाने के निर्देश दिए है। विधायक का कहना है कि इन तथ्यों के उजागर करने का मुख्य उद्देश्य है कि छात्रों को इतिहास की सही जानकारी मिले।
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आगरा। गंगा जल परियोजना को लेकर सुर्खियों में रहने वाले भाजपा की योगेंद्र उपाध्याय अब एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने इस बार छत्रपति शिवाजी से जुड़े इतिहास पर सवाल उठाये है। एक प्रेसवार्ता के माध्यम से बताया विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने छत्रपति शिवाजी को लालकिले में नही बल्कि जयपुर के राजपरिवार के बंगले में रखा था। अब उन बंगलो में जीएसटी और आगरा विकास प्राधिकरण के कार्यालय है। विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने मांग की है कि इन दोनों कार्यलयों में छत्रपति शिवाजी का विशाल स्मारक बनाया जाए। विधायक योगेंद्र उपाध्याय का कहना था कि हाल ही में छत्रपति शिवाजी को लेकर इतिहासकार प्रो अगम प्रशाद माथुर ने शोध किया था जिसमे यह तथ्य प्राप्त हुए है। इतना ही नही यहां तैनात रहे अधीक्षण पुरातत्वविद् भुवन विक्रम का भी यही मानना है। जयपुर के राजपरिवार से यह संपत्ति किसी श्रीराम परिवार के हवाले हुई और एक हज़ार नौ सौ सत्तर में नगर निगम के हैंडओवर हो गयी और निगम ने यहाँ जयपुर हाउस कॉलोनी बनाई। विधायक योगेंद्र उपाध्याय का कहना है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी वार्ता हो गयी है। उन्होंने इस सम्बंध में और तथ्य जुटाने के निर्देश दिए है। विधायक का कहना है कि इन तथ्यों के उजागर करने का मुख्य उद्देश्य है कि छात्रों को इतिहास की सही जानकारी मिले।
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तो, सबसे पहले आप उन कंपनियों का नाम देना चाहते हैं,जो जर्मन कारों का निर्माण करते हैं और वर्णमाला में सबसे पहले निर्माता एग्लेंडर है, जो एक पूरी तरह से अनूठी कैब्रिओल्ट्स तैयार करता है, जिसमें मूल प्राचीन शैली की विशेषता है।
एबीटी एक ट्यूनिंग कंपनी है जिसका विशेषज्ञ वोक्सवैगन, ऑडी, सीट और स्कोडा जैसी कंपनियां द्वारा निर्मित कारें स्टाइल कर रही हैं।
एक अन्य कंपनी है एल्पिना आदेश पर जर्मन जर्मन कारों का उत्पादन करती है यह कंपनी बीएमडब्ल्यू कारों के आधार पर चल रही है।
आर्टेगा - यह कंपनी केवल में ही अस्तित्व में थीछह साल, 2012 में इसे बंद कर दिया गया था हालांकि, विशेषज्ञों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियां बेहद रोचक और आशाजनक थीं। उस समय के समाज के लिए "बहुत उन्नत" भी था क्योंकि यह विचार खो नहीं था, वीडब्ल्यू एजी ने फर्म को खरीदा सभी तकनीकों का उपयोग इस चिंता की मशीनों में किया गया है।
और जो जर्मन कारें पहले से ही नहीं मिलती हैं? ये कारों को बरकास द्वारा निर्मित होती हैं - कंपनी ने वैन और मिनीबस का उत्पादन किया, साथ ही साथ विशेष वाहन भी। ट्रकों के साथ कारें कंपनी वास्तव में 30 वर्ष की थी, वैसे, 1 99 1 में इसे बंद कर दिया गया था।
बवेरिया, ब्रेनॉबर, डेमलर, डीकेडब्ल्यू, गेंब्ल्ला,Goliath, Gumpert अपोलो, Horch, Isdera, Magirus, आदमी, Multicar, स्मार्ट, Trabant, वेरिटास, Wartburg, Wiesmann - यह सब जर्मन कंपनियों है कि उत्पादन (या उत्पादित - कुछ बंद) कार, ट्रक, मोटरसाइकिल और अधिक। और उनमें से उद्यम एक अल्पज्ञात रूप में उल्लेख किया जाना चाहिए है, लेकिन सम्मान के हकदार।
प्रसिद्ध Bavarian चिंता! शायद, यदि आप किसी जर्मन कार के बारे में पूरी तरह से डेलेटेंट पूछते हैं, तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब देगाः "मर्सिडीज" और "बीएमडब्ल्यू।" दरअसल, ये दो ब्रांड पूरी दुनिया में बेहद लोकप्रिय हैं।
तो, पेशेवरों और विपक्ष क्या हैंइस ब्रांड की कारों के बारे में कहानी? आपको मालिकों की प्रतिक्रिया से निर्देशित किया जाना चाहिए। वे जो फायदे गाते हैं उनमें सेः प्रतिष्ठा, लालित्य, आरामदायक इंटीरियर, तकनीकी विशेषताओं। वास्तव में, बीएमडब्ल्यू उन लोगों के लिए एक कार है जो महत्वपूर्ण स्थिति और गति हैं। नुकसान क्या हैं? यह निम्नलिखित नोट करता हैः कुछ मॉडलों में एक बड़ी ईंधन खपत - बहुत कम लैंडिंग और आक्रामकता। जिन लोगों को एक शांत सवारी की जरूरत है, यह कार पसंद नहीं है। वह जगह से "आँसू", अचानक बंद हो जाता है, जब आप इस कार को चलाते हैं तो आप तनाव महसूस करते हैं। और इसके अलावा महंगा है।
अगर जर्मन असेंबली की कोई मशीनें और आप कर सकते हैंपंथ कहने के लिए, तो यह "मर्सिडीज" है। ये कारें लंबे समय से लक्जरी, धन और उत्कृष्ट स्वाद का पर्याय बन गई हैं। ब्राबस, एएमजी, लॉरिन्सर, कार्ल्सन ... दुनिया में सबसे अच्छे ट्यूनिंग स्टूडियो हमेशा प्रतिष्ठित स्टुटगार्ट चिंता द्वारा उत्पादित नवीनताएं लेते हैं। हूड के तहत सैकड़ों अश्वशक्ति, अवास्तविक रूप से आरामदायक लाउंज, जहां सब कुछ संभवतः क्षैतिज और आराम से डिजाइन किया गया है (जो मर्सिडीज 80 के दशक में प्रसिद्ध था), सही हैंडलिंग ... लेकिन इस कार के साथ क्या गलत है? यह आसान है - कीमत। अपने आप को "मर्सिडीज" को अनुमति देना मतलब है कि स्वचालित रूप से एक ठोस और अमीर व्यक्ति की स्थिति प्राप्त हो रही है। और फिर उस पर पैसा खर्च करें। ईंधन के लिए, रखरखाव के लिए, और यदि यह पुरानी कार है (उदाहरण के लिए, पौराणिक w124 की एक श्रृंखला से), तो यह कुछ विवरणों पर भी खर्च किया जाता है जो जल्द या बाद में अव्यवस्था में आते हैं और प्रतिस्थापन की आवश्यकता होती है। आम तौर पर, "मर्सिडीज" आश्चर्यजनक, अद्वितीय कारें पैदा करता है, लेकिन सभी मामलों में बहुत ही आर्थिक नहीं है।
यदि आप सबसे लोकप्रिय जर्मन के बारे में बात करते हैंरूस में कारें, फिर "ऑडी" निश्चित रूप से शीर्ष पांच में होगी। पिछली शताब्दी के अंत में, इस कंपनी ने अब ऐसी कारें नहीं बनाईं। लेकिन आज तक ऑडी प्रभावशाली परिणाम दिखा रहा है। कंपनी नए इंजन बनाती है, आधुनिक प्रौद्योगिकियों को लागू करती है, शैलियों में सुधार करती है - इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि उनमें रुचि क्यों बढ़ी है।
पेशेवरों? उपरोक्त मॉडल के समान ही। सभी मामलों में सुंदर, सुरुचिपूर्ण, प्रभावशाली। और फिर भी, यदि विचारों में "वयस्क" "ऑडी" खरीदने का विचार है, लेकिन संदेह हैं, तो उन्हें दूर फेंकना आवश्यक है। पुराने मॉडल बहुत मजबूत धातु से बने थे। यही कारण है कि आज, जंगलों और शरीर के दोषों के साथ इन मशीनों में से बहुत कम।
नुकसान? यहां अधिक विस्तार से यह संभव है। बहुत अधिक तेल खपत पहली जगह है। 1000 मीटर प्रति लीटर के बारे में! टाइमिंग बेल्ट को भी अक्सर बदला जाना चाहिए। 100,000 किलोमीटर की दौड़ के बाद टर्बो-डीजल इंजन हाइड्रोलिक रूप से चलते हैं, चेन ड्राइव पहनती है। आम तौर पर, "ऑडी" का मुख्य नुकसान यह है कि इसे निवेश और सावधानीपूर्वक देखभाल की आवश्यकता होती है। खासकर मॉडल जो एक नहीं हैं और दो साल पुराने नहीं हैं।
किस तरह की जर्मन कारों के बारे में बता रहा हैबहुत लोकप्रिय हैं, हम "ओपल" और "वोक्सवैगन" के ध्यान को ध्यान में रखकर विफल नहीं हो सकते हैं। बाद के बारे में, हालांकि, अब बात करना जरूरी नहीं है। सितंबर में उस संघर्ष के कारण। लेकिन अभी भी कुछ शब्द कहना जरूरी है! ध्यान दें कि "वोक्सवैगन" विश्वसनीय, भरोसेमंद, सुरक्षित कारें हैं जो मोटर चालकों की इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए बनाए गए थे। बहुत से लोग मानते हैं कि अब "डीजल घोटाला" की वजह से इस ब्रांड की कारों की विश्वसनीयता गिर जाएगी - लेकिन नहीं। थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन केवल। और बाकी में - पूर्ण आदेश। इसके अलावा, रूसी संघ में, वोक्सवैगन गोल्फ पांच सबसे लोकप्रिय और मांग की गई कारों में से एक है। और इसका मतलब कुछ है।
ओपल के बारे में क्या पता है? कई मजाक कर कहते हैं कि यह जर्मन "ज़ापोरोज़ेट्स" है। लेकिन हमारा मतलब केवल कीमत है, गुणवत्ता नहीं। दरअसल, ओपल के मुख्य फायदों में से एक उनका छोटा मूल्य है। आरामदायक, भरोसेमंद, अनावश्यक - इन कारों के लिए इन कारों और लोगों के साथ प्यार में गिर गया।
अच्छी बात यह है कि अब वह समय है जब आपको जरूरत नहीं हैयह सोचने के लिए कि जर्मन कार तोड़ने के लिए कितना खर्च होता है? यह कैसे करें? क्या आवश्यक है? आखिरकार, अब हमारे देश में वास्तव में एक जर्मन कार खरीदती है और तुरंत रूसी नंबर डालती है!
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तो, सबसे पहले आप उन कंपनियों का नाम देना चाहते हैं,जो जर्मन कारों का निर्माण करते हैं और वर्णमाला में सबसे पहले निर्माता एग्लेंडर है, जो एक पूरी तरह से अनूठी कैब्रिओल्ट्स तैयार करता है, जिसमें मूल प्राचीन शैली की विशेषता है। एबीटी एक ट्यूनिंग कंपनी है जिसका विशेषज्ञ वोक्सवैगन, ऑडी, सीट और स्कोडा जैसी कंपनियां द्वारा निर्मित कारें स्टाइल कर रही हैं। एक अन्य कंपनी है एल्पिना आदेश पर जर्मन जर्मन कारों का उत्पादन करती है यह कंपनी बीएमडब्ल्यू कारों के आधार पर चल रही है। आर्टेगा - यह कंपनी केवल में ही अस्तित्व में थीछह साल, दो हज़ार बारह में इसे बंद कर दिया गया था हालांकि, विशेषज्ञों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियां बेहद रोचक और आशाजनक थीं। उस समय के समाज के लिए "बहुत उन्नत" भी था क्योंकि यह विचार खो नहीं था, वीडब्ल्यू एजी ने फर्म को खरीदा सभी तकनीकों का उपयोग इस चिंता की मशीनों में किया गया है। और जो जर्मन कारें पहले से ही नहीं मिलती हैं? ये कारों को बरकास द्वारा निर्मित होती हैं - कंपनी ने वैन और मिनीबस का उत्पादन किया, साथ ही साथ विशेष वाहन भी। ट्रकों के साथ कारें कंपनी वास्तव में तीस वर्ष की थी, वैसे, एक निन्यानवे एक में इसे बंद कर दिया गया था। बवेरिया, ब्रेनॉबर, डेमलर, डीकेडब्ल्यू, गेंब्ल्ला,Goliath, Gumpert अपोलो, Horch, Isdera, Magirus, आदमी, Multicar, स्मार्ट, Trabant, वेरिटास, Wartburg, Wiesmann - यह सब जर्मन कंपनियों है कि उत्पादन कार, ट्रक, मोटरसाइकिल और अधिक। और उनमें से उद्यम एक अल्पज्ञात रूप में उल्लेख किया जाना चाहिए है, लेकिन सम्मान के हकदार। प्रसिद्ध Bavarian चिंता! शायद, यदि आप किसी जर्मन कार के बारे में पूरी तरह से डेलेटेंट पूछते हैं, तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब देगाः "मर्सिडीज" और "बीएमडब्ल्यू।" दरअसल, ये दो ब्रांड पूरी दुनिया में बेहद लोकप्रिय हैं। तो, पेशेवरों और विपक्ष क्या हैंइस ब्रांड की कारों के बारे में कहानी? आपको मालिकों की प्रतिक्रिया से निर्देशित किया जाना चाहिए। वे जो फायदे गाते हैं उनमें सेः प्रतिष्ठा, लालित्य, आरामदायक इंटीरियर, तकनीकी विशेषताओं। वास्तव में, बीएमडब्ल्यू उन लोगों के लिए एक कार है जो महत्वपूर्ण स्थिति और गति हैं। नुकसान क्या हैं? यह निम्नलिखित नोट करता हैः कुछ मॉडलों में एक बड़ी ईंधन खपत - बहुत कम लैंडिंग और आक्रामकता। जिन लोगों को एक शांत सवारी की जरूरत है, यह कार पसंद नहीं है। वह जगह से "आँसू", अचानक बंद हो जाता है, जब आप इस कार को चलाते हैं तो आप तनाव महसूस करते हैं। और इसके अलावा महंगा है। अगर जर्मन असेंबली की कोई मशीनें और आप कर सकते हैंपंथ कहने के लिए, तो यह "मर्सिडीज" है। ये कारें लंबे समय से लक्जरी, धन और उत्कृष्ट स्वाद का पर्याय बन गई हैं। ब्राबस, एएमजी, लॉरिन्सर, कार्ल्सन ... दुनिया में सबसे अच्छे ट्यूनिंग स्टूडियो हमेशा प्रतिष्ठित स्टुटगार्ट चिंता द्वारा उत्पादित नवीनताएं लेते हैं। हूड के तहत सैकड़ों अश्वशक्ति, अवास्तविक रूप से आरामदायक लाउंज, जहां सब कुछ संभवतः क्षैतिज और आराम से डिजाइन किया गया है , सही हैंडलिंग ... लेकिन इस कार के साथ क्या गलत है? यह आसान है - कीमत। अपने आप को "मर्सिडीज" को अनुमति देना मतलब है कि स्वचालित रूप से एक ठोस और अमीर व्यक्ति की स्थिति प्राप्त हो रही है। और फिर उस पर पैसा खर्च करें। ईंधन के लिए, रखरखाव के लिए, और यदि यह पुरानी कार है , तो यह कुछ विवरणों पर भी खर्च किया जाता है जो जल्द या बाद में अव्यवस्था में आते हैं और प्रतिस्थापन की आवश्यकता होती है। आम तौर पर, "मर्सिडीज" आश्चर्यजनक, अद्वितीय कारें पैदा करता है, लेकिन सभी मामलों में बहुत ही आर्थिक नहीं है। यदि आप सबसे लोकप्रिय जर्मन के बारे में बात करते हैंरूस में कारें, फिर "ऑडी" निश्चित रूप से शीर्ष पांच में होगी। पिछली शताब्दी के अंत में, इस कंपनी ने अब ऐसी कारें नहीं बनाईं। लेकिन आज तक ऑडी प्रभावशाली परिणाम दिखा रहा है। कंपनी नए इंजन बनाती है, आधुनिक प्रौद्योगिकियों को लागू करती है, शैलियों में सुधार करती है - इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि उनमें रुचि क्यों बढ़ी है। पेशेवरों? उपरोक्त मॉडल के समान ही। सभी मामलों में सुंदर, सुरुचिपूर्ण, प्रभावशाली। और फिर भी, यदि विचारों में "वयस्क" "ऑडी" खरीदने का विचार है, लेकिन संदेह हैं, तो उन्हें दूर फेंकना आवश्यक है। पुराने मॉडल बहुत मजबूत धातु से बने थे। यही कारण है कि आज, जंगलों और शरीर के दोषों के साथ इन मशीनों में से बहुत कम। नुकसान? यहां अधिक विस्तार से यह संभव है। बहुत अधिक तेल खपत पहली जगह है। एक हज़ार मीटर प्रति लीटर के बारे में! टाइमिंग बेल्ट को भी अक्सर बदला जाना चाहिए। एक सौ,शून्य किलोग्राममीटर की दौड़ के बाद टर्बो-डीजल इंजन हाइड्रोलिक रूप से चलते हैं, चेन ड्राइव पहनती है। आम तौर पर, "ऑडी" का मुख्य नुकसान यह है कि इसे निवेश और सावधानीपूर्वक देखभाल की आवश्यकता होती है। खासकर मॉडल जो एक नहीं हैं और दो साल पुराने नहीं हैं। किस तरह की जर्मन कारों के बारे में बता रहा हैबहुत लोकप्रिय हैं, हम "ओपल" और "वोक्सवैगन" के ध्यान को ध्यान में रखकर विफल नहीं हो सकते हैं। बाद के बारे में, हालांकि, अब बात करना जरूरी नहीं है। सितंबर में उस संघर्ष के कारण। लेकिन अभी भी कुछ शब्द कहना जरूरी है! ध्यान दें कि "वोक्सवैगन" विश्वसनीय, भरोसेमंद, सुरक्षित कारें हैं जो मोटर चालकों की इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए बनाए गए थे। बहुत से लोग मानते हैं कि अब "डीजल घोटाला" की वजह से इस ब्रांड की कारों की विश्वसनीयता गिर जाएगी - लेकिन नहीं। थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन केवल। और बाकी में - पूर्ण आदेश। इसके अलावा, रूसी संघ में, वोक्सवैगन गोल्फ पांच सबसे लोकप्रिय और मांग की गई कारों में से एक है। और इसका मतलब कुछ है। ओपल के बारे में क्या पता है? कई मजाक कर कहते हैं कि यह जर्मन "ज़ापोरोज़ेट्स" है। लेकिन हमारा मतलब केवल कीमत है, गुणवत्ता नहीं। दरअसल, ओपल के मुख्य फायदों में से एक उनका छोटा मूल्य है। आरामदायक, भरोसेमंद, अनावश्यक - इन कारों के लिए इन कारों और लोगों के साथ प्यार में गिर गया। अच्छी बात यह है कि अब वह समय है जब आपको जरूरत नहीं हैयह सोचने के लिए कि जर्मन कार तोड़ने के लिए कितना खर्च होता है? यह कैसे करें? क्या आवश्यक है? आखिरकार, अब हमारे देश में वास्तव में एक जर्मन कार खरीदती है और तुरंत रूसी नंबर डालती है!
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नई दिल्लीः अगर कोई पुरुष किसी महिला से शादी का वादा करता है, उस आधार पर उसके साथ यौन संबंध बनाने की सहमति लेता है और फिर उससे शादी करने से मना कर देता है, तो क्या यह बलात्कार है? यह एक पेचीदा सवाल है जिससे भारतीय अदालतें लंबे समय से जूझ रही हैं, लेकिन आम सहमति तक नहीं पहुंच पाई हैं.
शादी का झांसा देकर एक महिला से बलात्कार के आरोपी व्यक्ति को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति एस. के. पाणिग्रही ने पाया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375, जो बलात्कार के अपराध को परिभाषित करती है, में 'शादी के बहाने यौन क्रिया के लिए सहमति' का उल्लेख नहीं है.
हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ कई उच्च न्यायालयों ने उनके सामने लाए गए मामलों के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर इस मुद्दे पर अलग-अलग विचार रखे हैं.
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.
'विश्वासघात' या कछ और ?
उड़ीसा उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी एक ऐसे मामले के मद्देनजर आई है जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वह 2020 में ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक ऐसे व्यक्ति के साथ 'भाग' गई थी जिसने उससे शादी करने का वादा किया था.
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि भुवनेश्वर में, युगल कई बार एक-दूसरे के साथ शारीरिक रूप से अंतरंग थे, लेकिन कुछ दिनों के बाद पुरुष उसे छोड़ कर भाग गया. उस पर उसके शरीर की नग्न तस्वीरें लेने का भी आरोप है.
कथित तौर पर महिला को उसके भाई और पिता ने सूचित करने के बाद बचाया.
महिला की शिकायत पर मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज होने के बाद शख्स ने जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया.
लेकिन अदालत में, यह देखा गया कि आरोप 'उचित परीक्षण के बिना अस्पष्ट' लग रहे थे.
इधर, अदालत ने कहा, 'बलात्कार कानूनों का इस्तेमाल अंतरंग संबंधों को विनियमित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, खासकर उन मामलों में जहां महिलाओं की एजेंसी है और वे पसंद से रिश्ते में प्रवेश कर रही हैं'.
विशेष रूप से, इसी न्यायाधीश ने अप्रैल 2021 में इसी तरह की टिप्पणी की थी, जिसमें बलात्कार कानून में संशोधन की मांग की गई थी, जिसमें कहा गया था कि 'शादी के झूठे वादे' के बहाने 'संभोग' क्या है, यह कहते हुए कि एक निश्चित दृष्टिकोण तक नहीं पहुंचा गया था और मामला अभी भी असमंजस के घेरे में था.
उड़ीसा उच्च न्यायालय ने आरोपी व्यक्ति की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए, आईपीसी की धारा 90 (भय या गलत धारणा के तहत दी गई सहमति) के प्रावधानों के स्वतः विस्तार को आईपीसी की धारा 375 में फिर से जांचने की आवश्यकता पर कई टिप्पणियां कीं, जो बलात्कार का व्यवहार करता है.
उन्होंने यह भी कहा कि बलात्कार के लिए धारा 375 में बलात्कार को परिभाषित करने वाले 'घटकों' में से एक के रूप में शादी के झूठे वादे को शामिल नहीं करता है.
उन्होंने कहा, ये सात 'घटक', 'विवाह-प्रेरित यौन संभोग के झूठे-वादे-वादे को कवर नहीं करते हैं'.
न्यायमूर्ति पाणिग्रही ने आगे कहा कि कानून के निर्माताओं ने धारा 375 के संदर्भ में 'सहमति', 'सहमति नहीं' बनने पर विशेष रूप से परिस्थितियों को प्रदान किया है, लेकिन शादी के बहाने सेक्स के लिए सहमति इस खंड में उल्लिखित परिस्थितियों में से एक नहीं है.
हाईकोर्ट ने 'अनुराग सोनी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया, जहां इसने एक ऐसे वादे के बीच अंतर किया जो पूरा नहीं हुआ है, और एक जो शुरू से ही झूठा है.
एचसी ने 'प्रमोद सूर्यभान पवार बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर भरोसा किया, जहां शीर्ष अदालत ने कहा कि यह पता लगाने के लिए 'दो प्रस्तावों को स्थापित किया जाना चाहिए' तथ्य का पता लगाना चाहिए.
उड़ीसा उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए स्पष्ट किया है कि बलात्कार के आरोपों के आधार पर शादी के झूठे वादे को फिर से जांचने की जरूरत है, लेकिन अन्य उच्च न्यायालयों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग विचार रखे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल एक बलात्कार के मामले को खारिज करते हुए कहा था कि 'शादी का झूठा वादा जो इस समझ पर दिया जाता है कि यह टूट जाएगा' और 'वादे का उल्लंघन जो अच्छे विश्वास में किया जाता है लेकिन बाद पूरा नहीं किया गया में किया जाता है' के बीच अंतर था.
केरल उच्च न्यायालय ने भी पिछले साल एक 25 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार के एक मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि एक व्यक्ति का पहले से विवाहित महिला (जो अपने पति से अलग हो गई थी) से शादी करने का वादा धारा 376 के तहत बलात्कार के प्रावधानों को आकर्षित नहीं करेगा.
एक अजीबोगरीब मामले में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला से बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति को शादी के झूठे वादे पर जमानत दे दी, जिससे वह टिंडर पर मिला था, जबकि यह भी विचार करते हुए कि महिला के सोशल मीडिया ब्लॉग/पोस्ट यह दर्शाते हैं कि उसके पास आरक्षण था विवाह की संस्था के बारे में और लिव-इन संबंधों के विचार का समर्थन किया.
एक अन्य मामले में, जहां शिकायतकर्ता एक विकलांग महिला थी, जिसका आरोपी ने कथित तौर पर शादी के बहाने शोषण किया, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने व्यक्ति के कार्यों को समाज के खिलाफ 'गंभीर अपराध' बताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया.
पिछले साल नवंबर में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने शादी के बहाने एक महिला का यौन उत्पीड़न करने और उसका गर्भपात कराने के आरोपी एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि 'उसने कभी शादी करने का इरादा नहीं दिखाया और उसे गलत धारणा के तहत रखा'.
एक महत्वपूर्ण आदेश में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि शिक्षित होने से एक महिला धोखा खाने से सुरक्षित नहीं हो जाती है. इस मामले में कोर्ट ने शादी का झांसा देकर एक महिला से रेप के आरोपी भारतीय नौसेना अधिकारी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था.
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पिछले साल अगस्त में भी शादी के बहाने बलात्कार के आरोपी एक विकलांग व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया था, और रिश्ता खत्म करने के आरोपी के कारणों पर भी आश्चर्य व्यक्त किया था. जाति भेद का हवाला देकर युवक ने महिला से शादी से इनकार कर दिया था.
इस महीने की शुरुआत में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शादी के झूठे वादे पर बलात्कार करने और फिर महिला को धर्म परिवर्तन करने की धमकी देने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया.
(संपादन : ऋषभ राज)
(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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नई दिल्लीः अगर कोई पुरुष किसी महिला से शादी का वादा करता है, उस आधार पर उसके साथ यौन संबंध बनाने की सहमति लेता है और फिर उससे शादी करने से मना कर देता है, तो क्या यह बलात्कार है? यह एक पेचीदा सवाल है जिससे भारतीय अदालतें लंबे समय से जूझ रही हैं, लेकिन आम सहमति तक नहीं पहुंच पाई हैं. शादी का झांसा देकर एक महिला से बलात्कार के आरोपी व्यक्ति को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति एस. के. पाणिग्रही ने पाया कि भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ पचहत्तर, जो बलात्कार के अपराध को परिभाषित करती है, में 'शादी के बहाने यौन क्रिया के लिए सहमति' का उल्लेख नहीं है. हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ कई उच्च न्यायालयों ने उनके सामने लाए गए मामलों के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर इस मुद्दे पर अलग-अलग विचार रखे हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. 'विश्वासघात' या कछ और ? उड़ीसा उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी एक ऐसे मामले के मद्देनजर आई है जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वह दो हज़ार बीस में ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक ऐसे व्यक्ति के साथ 'भाग' गई थी जिसने उससे शादी करने का वादा किया था. शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि भुवनेश्वर में, युगल कई बार एक-दूसरे के साथ शारीरिक रूप से अंतरंग थे, लेकिन कुछ दिनों के बाद पुरुष उसे छोड़ कर भाग गया. उस पर उसके शरीर की नग्न तस्वीरें लेने का भी आरोप है. कथित तौर पर महिला को उसके भाई और पिता ने सूचित करने के बाद बचाया. महिला की शिकायत पर मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने के बाद शख्स ने जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया. लेकिन अदालत में, यह देखा गया कि आरोप 'उचित परीक्षण के बिना अस्पष्ट' लग रहे थे. इधर, अदालत ने कहा, 'बलात्कार कानूनों का इस्तेमाल अंतरंग संबंधों को विनियमित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, खासकर उन मामलों में जहां महिलाओं की एजेंसी है और वे पसंद से रिश्ते में प्रवेश कर रही हैं'. विशेष रूप से, इसी न्यायाधीश ने अप्रैल दो हज़ार इक्कीस में इसी तरह की टिप्पणी की थी, जिसमें बलात्कार कानून में संशोधन की मांग की गई थी, जिसमें कहा गया था कि 'शादी के झूठे वादे' के बहाने 'संभोग' क्या है, यह कहते हुए कि एक निश्चित दृष्टिकोण तक नहीं पहुंचा गया था और मामला अभी भी असमंजस के घेरे में था. उड़ीसा उच्च न्यायालय ने आरोपी व्यक्ति की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए, आईपीसी की धारा नब्बे के प्रावधानों के स्वतः विस्तार को आईपीसी की धारा तीन सौ पचहत्तर में फिर से जांचने की आवश्यकता पर कई टिप्पणियां कीं, जो बलात्कार का व्यवहार करता है. उन्होंने यह भी कहा कि बलात्कार के लिए धारा तीन सौ पचहत्तर में बलात्कार को परिभाषित करने वाले 'घटकों' में से एक के रूप में शादी के झूठे वादे को शामिल नहीं करता है. उन्होंने कहा, ये सात 'घटक', 'विवाह-प्रेरित यौन संभोग के झूठे-वादे-वादे को कवर नहीं करते हैं'. न्यायमूर्ति पाणिग्रही ने आगे कहा कि कानून के निर्माताओं ने धारा तीन सौ पचहत्तर के संदर्भ में 'सहमति', 'सहमति नहीं' बनने पर विशेष रूप से परिस्थितियों को प्रदान किया है, लेकिन शादी के बहाने सेक्स के लिए सहमति इस खंड में उल्लिखित परिस्थितियों में से एक नहीं है. हाईकोर्ट ने 'अनुराग सोनी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया, जहां इसने एक ऐसे वादे के बीच अंतर किया जो पूरा नहीं हुआ है, और एक जो शुरू से ही झूठा है. एचसी ने 'प्रमोद सूर्यभान पवार बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर भरोसा किया, जहां शीर्ष अदालत ने कहा कि यह पता लगाने के लिए 'दो प्रस्तावों को स्थापित किया जाना चाहिए' तथ्य का पता लगाना चाहिए. उड़ीसा उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए स्पष्ट किया है कि बलात्कार के आरोपों के आधार पर शादी के झूठे वादे को फिर से जांचने की जरूरत है, लेकिन अन्य उच्च न्यायालयों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग विचार रखे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल एक बलात्कार के मामले को खारिज करते हुए कहा था कि 'शादी का झूठा वादा जो इस समझ पर दिया जाता है कि यह टूट जाएगा' और 'वादे का उल्लंघन जो अच्छे विश्वास में किया जाता है लेकिन बाद पूरा नहीं किया गया में किया जाता है' के बीच अंतर था. केरल उच्च न्यायालय ने भी पिछले साल एक पच्चीस वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार के एक मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि एक व्यक्ति का पहले से विवाहित महिला से शादी करने का वादा धारा तीन सौ छिहत्तर के तहत बलात्कार के प्रावधानों को आकर्षित नहीं करेगा. एक अजीबोगरीब मामले में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला से बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति को शादी के झूठे वादे पर जमानत दे दी, जिससे वह टिंडर पर मिला था, जबकि यह भी विचार करते हुए कि महिला के सोशल मीडिया ब्लॉग/पोस्ट यह दर्शाते हैं कि उसके पास आरक्षण था विवाह की संस्था के बारे में और लिव-इन संबंधों के विचार का समर्थन किया. एक अन्य मामले में, जहां शिकायतकर्ता एक विकलांग महिला थी, जिसका आरोपी ने कथित तौर पर शादी के बहाने शोषण किया, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने व्यक्ति के कार्यों को समाज के खिलाफ 'गंभीर अपराध' बताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया. पिछले साल नवंबर में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने शादी के बहाने एक महिला का यौन उत्पीड़न करने और उसका गर्भपात कराने के आरोपी एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि 'उसने कभी शादी करने का इरादा नहीं दिखाया और उसे गलत धारणा के तहत रखा'. एक महत्वपूर्ण आदेश में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि शिक्षित होने से एक महिला धोखा खाने से सुरक्षित नहीं हो जाती है. इस मामले में कोर्ट ने शादी का झांसा देकर एक महिला से रेप के आरोपी भारतीय नौसेना अधिकारी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पिछले साल अगस्त में भी शादी के बहाने बलात्कार के आरोपी एक विकलांग व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया था, और रिश्ता खत्म करने के आरोपी के कारणों पर भी आश्चर्य व्यक्त किया था. जाति भेद का हवाला देकर युवक ने महिला से शादी से इनकार कर दिया था. इस महीने की शुरुआत में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शादी के झूठे वादे पर बलात्कार करने और फिर महिला को धर्म परिवर्तन करने की धमकी देने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया.
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जल्द ही वैलेंटाइन्स डे आने वाला है और ऐसे में सभी कपल्स इसे खास बनाने के लिए तैयारियों में जुट गए हैं. हर लवर इस प्यार के महीने को अपने पार्टनर के खास बनाना चाहता है और इसके लिए वो जी-जान से मेहनत करता है.
प्यार की शुरुआत गुलाब का फूल देने से होती है. अपने पार्टनर को इस दिन रोज़ देना बिलकुल भी ना भूले.
अब अगर आप किसी से प्यार करते है तो जाहिर सी बात है उससे अपने प्यार का इज़हार तो करेंगे ही न. तो इस दिन आप अपने पार्टनर को आई लव यू तो जरूर कहे.
लड़कियों को सबसे ज्यादा चॉकलेट पसंद होती है तो आप अपनी गर्लफ्रेंड को इस दिन चॉकलेट जरूर खिलाए.
बॉयफ्रेंड के बाद टेडी ही लड़कियों का साथी होता है तो इस दिन आप उन्हें टेडी जरूर गिफ्ट करे.
प्यार में कपल्स के बीच आपस में विश्वास होना सबसे ज्यादा जरुरी होता है. इसलिए आप अपने पार्टनर से प्यार निभाने का वादा जरूर करे.
इस दिन अपने पार्टनर को गले लगाकर उसे महसूस करवाए कि आप उससे कितना प्यार करते है.
अपने पार्टनर को इस दिन किस करके उससे अपना प्यार जताए. किस करने से आपके और पार्टनर के बीच क़रीबिया भी बढ़ेंगी.
इन सभी दिनों के बाद ये है वो खास दिन जिसका सभी कपल्स बेसब्री से इंतजार करते है. वैलेंटाइन डे को आप अपने पार्टनर के लिए और खास और यादगार बनाए.
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जल्द ही वैलेंटाइन्स डे आने वाला है और ऐसे में सभी कपल्स इसे खास बनाने के लिए तैयारियों में जुट गए हैं. हर लवर इस प्यार के महीने को अपने पार्टनर के खास बनाना चाहता है और इसके लिए वो जी-जान से मेहनत करता है. प्यार की शुरुआत गुलाब का फूल देने से होती है. अपने पार्टनर को इस दिन रोज़ देना बिलकुल भी ना भूले. अब अगर आप किसी से प्यार करते है तो जाहिर सी बात है उससे अपने प्यार का इज़हार तो करेंगे ही न. तो इस दिन आप अपने पार्टनर को आई लव यू तो जरूर कहे. लड़कियों को सबसे ज्यादा चॉकलेट पसंद होती है तो आप अपनी गर्लफ्रेंड को इस दिन चॉकलेट जरूर खिलाए. बॉयफ्रेंड के बाद टेडी ही लड़कियों का साथी होता है तो इस दिन आप उन्हें टेडी जरूर गिफ्ट करे. प्यार में कपल्स के बीच आपस में विश्वास होना सबसे ज्यादा जरुरी होता है. इसलिए आप अपने पार्टनर से प्यार निभाने का वादा जरूर करे. इस दिन अपने पार्टनर को गले लगाकर उसे महसूस करवाए कि आप उससे कितना प्यार करते है. अपने पार्टनर को इस दिन किस करके उससे अपना प्यार जताए. किस करने से आपके और पार्टनर के बीच क़रीबिया भी बढ़ेंगी. इन सभी दिनों के बाद ये है वो खास दिन जिसका सभी कपल्स बेसब्री से इंतजार करते है. वैलेंटाइन डे को आप अपने पार्टनर के लिए और खास और यादगार बनाए.
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कोतवाली क्षेत्र के कलेंडर तिराहे पर सोमवार की रात करीब दो बजे फल लदा ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में चालक और खलासी बाल-बाल बच गए। संयोग अच्छा था कि घटना रात में हुई अन्यथा भीड़-भाड़ वाले इलाके कलेंडर तिराहे पर बड़ी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता। ट्रक चालक बकरुद्दीन सेख निवासी जिला प्रतापगढ़ ने बताया की गुजरात से सेब लादकर बिहार जा रहा था। रात करीब दो बजे वह आजमगढ़ की तरफ से मऊ की तरफ जा रहा था। इसके पूर्व मुहम्मदाबाद गोहना कलेंडर तिराहे पर मऊ की तरफ से एक तेज रफ्तार स्कार्पियो आ रही थी। जिसे बचाने में ट्रक अनियंत्रित हो गया और कुछ दूर जाकर सड़क किनारे पलट गया। हादसे में चालक और खलासी बाल-बाल बच गए।
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कोतवाली क्षेत्र के कलेंडर तिराहे पर सोमवार की रात करीब दो बजे फल लदा ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में चालक और खलासी बाल-बाल बच गए। संयोग अच्छा था कि घटना रात में हुई अन्यथा भीड़-भाड़ वाले इलाके कलेंडर तिराहे पर बड़ी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता। ट्रक चालक बकरुद्दीन सेख निवासी जिला प्रतापगढ़ ने बताया की गुजरात से सेब लादकर बिहार जा रहा था। रात करीब दो बजे वह आजमगढ़ की तरफ से मऊ की तरफ जा रहा था। इसके पूर्व मुहम्मदाबाद गोहना कलेंडर तिराहे पर मऊ की तरफ से एक तेज रफ्तार स्कार्पियो आ रही थी। जिसे बचाने में ट्रक अनियंत्रित हो गया और कुछ दूर जाकर सड़क किनारे पलट गया। हादसे में चालक और खलासी बाल-बाल बच गए।
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प्रभाकरनः नायक या खलनायक?
प्रभाकरनः नायक या खलनायक?
वेलुपिल्लई प्रभाकरन का नाम आते ही किसी तरह की संतुलित प्रतिक्रिया की गुंजाइश लगभग ख़त्म हो जाती है.
कुछ लोगों की नज़र में वो एक ख़ूंख्वार आतंकवादी थे जिनकी नज़र में इंसानी जान की कोई कीमत नहीं थी तो कुछ लोगों ख़ास कर तमिल राष्ट्रवादियों की नज़र में वो एक महान योद्धा, स्वतंत्रता सेनानी और जननायक थे.
प्रभाकरन की 60 वीं वर्षगाँठ पर उनके जीवन से जुड़े कई पहलुओं को याद कर रहे हैं रेहान फ़ज़ल.
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प्रभाकरनः नायक या खलनायक? प्रभाकरनः नायक या खलनायक? वेलुपिल्लई प्रभाकरन का नाम आते ही किसी तरह की संतुलित प्रतिक्रिया की गुंजाइश लगभग ख़त्म हो जाती है. कुछ लोगों की नज़र में वो एक ख़ूंख्वार आतंकवादी थे जिनकी नज़र में इंसानी जान की कोई कीमत नहीं थी तो कुछ लोगों ख़ास कर तमिल राष्ट्रवादियों की नज़र में वो एक महान योद्धा, स्वतंत्रता सेनानी और जननायक थे. प्रभाकरन की साठ वीं वर्षगाँठ पर उनके जीवन से जुड़े कई पहलुओं को याद कर रहे हैं रेहान फ़ज़ल.
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तेलंगाना के कामारेड्डी पर थीं. यहां पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले को रोकने का प्रयास किया. जिसके बाद बीजेपी समर्थक भी सड़कों पर उतर आए. इसके बाद पुलिस ने उनके काफिले को वहां से रवाना किया.
तेलंगाना में आज कांग्रेस और बीजेपी समर्थक आमने सामने आ गए. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कामारेड्डी पहुंची हुईं थीं. यहां पर कांग्रेस समर्थकों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के काफिले को रोकने का प्रयास किया. सरगर्मी बढ़ने के बाद पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया. घटना के बीजेपी समर्थकों ने मंत्री के समर्थन में नारेबाजी की. पुलिस ने किसी तरह बीच बचाव कर रास्ता खाली करवाया.
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तेलंगाना के कामारेड्डी पर थीं. यहां पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले को रोकने का प्रयास किया. जिसके बाद बीजेपी समर्थक भी सड़कों पर उतर आए. इसके बाद पुलिस ने उनके काफिले को वहां से रवाना किया. तेलंगाना में आज कांग्रेस और बीजेपी समर्थक आमने सामने आ गए. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कामारेड्डी पहुंची हुईं थीं. यहां पर कांग्रेस समर्थकों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के काफिले को रोकने का प्रयास किया. सरगर्मी बढ़ने के बाद पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया. घटना के बीजेपी समर्थकों ने मंत्री के समर्थन में नारेबाजी की. पुलिस ने किसी तरह बीच बचाव कर रास्ता खाली करवाया.
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International Women's Day (Photo Credit: सोशल मीडिया)
नई दिल्लीः
International Women's Day 2023: 8 मार्च को दुनिया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाती है. यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों और सामान्य रूप से अस्तित्व का सम्मान करता है. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को दुनिया भर में एक सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास और महत्व की बात करें तो 28 फरवरी, 1909 को अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय महिला दिवस की स्थापना की. यह श्रम कार्यकर्ता थेरेसा मल्कील द्वारा परिधान श्रमिकों के खिलाफ शहरव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिए प्रस्तावित किया गया था.
बाद में उस वर्ष, अमेरिकी समाजवादियों से प्रेरणा लेते हुए, जर्मन प्रतिनिधियों ने महिला दिवस के विचार का प्रस्ताव रखा, हालांकि कोई विशेष तिथि निर्धारित नहीं की गई थी. संयुक्त राष्ट्र ने 1975 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाना शुरू किया और 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने महिलाओं के अधिकारों और वैश्विक शांति के समर्थन में 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में घोषित किया. तब से, संयुक्त राष्ट्र ने प्रत्येक वर्ष एक थीम स्थापित करके इस दिवस को मनाया है.
यह भी पढ़ेंः डरावने सपने कहीं बड़ी बीमारी का संकेत तो नहीं, जानें क्या कहता है शोध?
यह दिन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाता है, लैंगिक समानता के बारे में जागरूकता बढ़ाता है, और लैंगिक समानता को गति देता है, साथ ही साथ विभिन्न महिला-केंद्रित दान के लिए धन उगाहता है.
इस वर्ष महिला दिवस की थीम है 'डिजिटऑलः लैंगिक समानता के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी'. यह महिलाओं की स्थिति पर आयोग के आगामी 67वें सत्र (CSW-67) के लिए प्राथमिकता विषय के साथ संरेखित है, अर्थात 'लिंग समानता और सभी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए डिजिटल युग में नवाचार और तकनीकी परिवर्तन और शिक्षा लड़कियां'.
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का लक्ष्य महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाना और लैंगिक समानता की वकालत करना है. इस दिन का उद्देश्य लैंगिक समानता के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी है ताकि हमारे समाज के सबसे कमजोर सदस्यों को सभी क्षेत्रों में समान अधिकार मिले, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों में समान भागीदारी को बढ़ावा मिले.
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International Women's Day नई दिल्लीः International Women's Day दो हज़ार तेईस: आठ मार्च को दुनिया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाती है. यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों और सामान्य रूप से अस्तित्व का सम्मान करता है. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को दुनिया भर में एक सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास और महत्व की बात करें तो अट्ठाईस फरवरी, एक हज़ार नौ सौ नौ को अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय महिला दिवस की स्थापना की. यह श्रम कार्यकर्ता थेरेसा मल्कील द्वारा परिधान श्रमिकों के खिलाफ शहरव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिए प्रस्तावित किया गया था. बाद में उस वर्ष, अमेरिकी समाजवादियों से प्रेरणा लेते हुए, जर्मन प्रतिनिधियों ने महिला दिवस के विचार का प्रस्ताव रखा, हालांकि कोई विशेष तिथि निर्धारित नहीं की गई थी. संयुक्त राष्ट्र ने एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाना शुरू किया और एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने महिलाओं के अधिकारों और वैश्विक शांति के समर्थन में आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में घोषित किया. तब से, संयुक्त राष्ट्र ने प्रत्येक वर्ष एक थीम स्थापित करके इस दिवस को मनाया है. यह भी पढ़ेंः डरावने सपने कहीं बड़ी बीमारी का संकेत तो नहीं, जानें क्या कहता है शोध? यह दिन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाता है, लैंगिक समानता के बारे में जागरूकता बढ़ाता है, और लैंगिक समानता को गति देता है, साथ ही साथ विभिन्न महिला-केंद्रित दान के लिए धन उगाहता है. इस वर्ष महिला दिवस की थीम है 'डिजिटऑलः लैंगिक समानता के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी'. यह महिलाओं की स्थिति पर आयोग के आगामी सरसठवें सत्र के लिए प्राथमिकता विषय के साथ संरेखित है, अर्थात 'लिंग समानता और सभी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए डिजिटल युग में नवाचार और तकनीकी परिवर्तन और शिक्षा लड़कियां'. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का लक्ष्य महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाना और लैंगिक समानता की वकालत करना है. इस दिन का उद्देश्य लैंगिक समानता के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी है ताकि हमारे समाज के सबसे कमजोर सदस्यों को सभी क्षेत्रों में समान अधिकार मिले, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों में समान भागीदारी को बढ़ावा मिले.
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इस आर्टिकल के सहायक लेखक (co-author) हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स (researchers) टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं।
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यहाँ पर 8 रेफरेन्स दिए गए हैं जिन्हे आप आर्टिकल में नीचे देख सकते हैं।
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इसमें कोई दो राय नहीं है की बच्चों को पालने के लिए समय और कोशिश दोनों की ही ज़रुरत है । बच्चों को जन्म देना तो एक प्राकृतिक क्रिया है । पर उनको पालना काफी मुश्किल काम है । अगर आप जानना चाहते की बच्चों को कैसा बड़ा करें तो नीचे लिखे निर्देश पड़ें ।
1पहले बच्चे की परवरिश को मान्यता देंः यह आजकल की दुनिया में कर पाना बहुत मुश्किल है । अच्छे माँ बाप सोच समझ कर अपना वक़्त अपने बच्चों के साथ बिताते हैं । उनके लिए अपने बच्चे के चरित्र का विकास करना सबसे ज़रूरी हैं । जब आप माँ बाप बनते है तो आपको अपनी प्राथमिकताओं को अपने बच्चे की प्राथमिकताओं से नीचे रखना चाहिए , और अपना ख्याल रखने से ज्यादा अपने बच्चों का ख्याल रखने में वक़्त गुजारना चाहिए । इसका मतलब ये नहीं की अपना ख्याल न रखें बस अपने बच्चे की ज़रूरतों को मान्यता दें ।
- दोनों माँ बाप एक एक करके बच्चे का ख्याल रख सकते हैं ताकि दोनों को अपने लिए भी वक़्त मिल सके ।
- जब अपना साप्ताहिक कार्यक्रम बनाएं तो अपने बच्चे को ज़रूरतें और पसंदों का ख्याल सबसे पहले रखें ।
- एक बार आपका बच्चा पड़ना और लिखना सीख जाये तो उसे खुद आगे बढ़ने दें । हर 2 सेकंड बाद उसकी गलती न सुधारें नहीं तो उसका उत्साह कम हो जायेगा ।
- अगर आपका बच्चा मीनमेख निकल कर खाना खाता हो तो पूरा खाने का वक़्त उसको टोकने में और यह देखने में की वो कैसे खा रहा है न निकाल दें । इससे बच्चे को साथ में खाना खाने के प्रति अरुचि और बढ़ेगी ।
- बच्चे को खाने की प्रक्रिया में शामिल करें, खाने में मज़ा तब आएगा जब बच्चे का उसमें योगदान हो जैसे की आप सब्जी चयन करने में उसकी मदद ले सकती हैं या फिर टेबल को लगाने में । आप उन्हें सब्जी धोने जैसा छोटा काम भी दे सकती हैं करने के लिए । एक बड़ा बच्चा इससे ज्यादा काम संभाल सकता है । खाने में क्या बनना ये फैसला लेने में पूरे परिवार को शामिल करें ।
- खाना खाते वक़्त हलकी बातचीत ही करें । ज्यादा पूछताछ न करें , बस ऐसे पूछें "तुम्हारा दिन कैसा था?"
- नीचे लिखे लेख को पड़ें ।
- अपनी दिनचर्या में थोडा शांत होने का भी वक़्त रखें । टीवी , गाने आदि सब बंद कर दें और अपने बच्चे को सुलाने से पहले उससे बात करें या किताब पढ़कर सुनाएं ।
- अपने बच्चे को सुलाने से पहले उसे मीठा न दें खाने के लिए इससे आपको उसे सुलाने में तकलीफ होगी ।
5अपने बच्चे को उसका हुनर विकसित करने में मदद करेंः इसका मतलब ये नहीं है की आप बच्चे को एक हफ्ते में 10 अलग गतिविधियों में डाल दें , आपको बस उसकी पसंद की 2-3 गतिविधियाँ ढूँढने की ज़रुरत है जिन्हें आप अपने बच्चे के साप्ताहिक कार्यकर्म में डाल सकें । इसमें आप उसको सॉकर में या कला सम्बन्धी क्लास में भी डाल सकते हैं , बस उसे वह करने में मज़ा आना चाहिए । आप अपने बच्चे का प्रोत्साहन करें और उसे बोलें की वो कितना अच्छा कर रहा है ।
- अपने बच्चे को अलग चीज़ें कराने से वह और बच्चों के साथ अच्छे से घुलना मिलना सीख जायेगा ।
- आलस में न आयें । मसलन अगर आपका बच्चा शिकायत करे की उससे पियानो क्लास के लिए नहीं जाना है पर आपको पता है की उसको वहां जाना अच्छा लगता हैं तो उसकी बात सिर्फ इसलिए न मान लें क्यूंकि आपको गाड़ी चला के जाने में आलस आ रहा है ।
6अपने बच्चे को हर दिन खेलने का काफी वक़्त देंः खेलना के वक़्त का मतलब ये नहीं की बच्चा टीवी के सामने बैठ कर खेल रहा है जबकी आप घर का कोई काम निबटा रही हों । खेलने के वक़्त का मतलब है की आप बच्चे को एक अलग कमरे में ऐसे खिलोने के साथ रखें जो उसके विकास में मदद करें । चाहे आप कितनी भी थकी हों यह ज़रूरी है की आप अपने बच्चे को खिलोनों से खेलना का महत्व समझाएं ताकि वो उनसे खुद से खेलना सीखे और उसकी बढ़त भी अच्छी हो ।
- यह ज़रूरी नहीं की आप अपने बच्चे के खेलने के लिए दुनिया के सारे खिलोने खरीद कर देदें । खिलोनों की गुणवत्ता देखें नाकि उनकी मात्रा । अंत में हो सकता है की आपका बच्चा टॉयलेट पेपर से ही खेल ले ।
1अपने बच्चे की हर बात को सुनेंः अपने बच्चे की ज़िन्दगी में एक असरदार प्रभाव छोड़ पाना आपकी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी । अपने बच्चों को अपनी ज़िन्दगी से अलग कर देना बहुत आसान है लेकिन ऐसा करके कहीं आप उसे कुछ अच्छा सिखाना का मौका न खो दें । अगर आप अपने बच्चे की बात कभी नहीं सुनेंगी और हमेशा उन पर चिल्लाते रहंगे तो उन्हें लगेगा की आपको उनकी न ज़रुरत है न परवाह ।
- अपने बच्चे को बात करने का प्रोत्साहन दें । उन्हें अपनी बातें सबके सामने रखना सिखाएं ताकि आगे चलके वे औरों से भी सही से बात कर पाएं ।
- अगर आप बच्चे को इज्ज़त देंगे तभी बच्चा भी आपको वह इज्ज़त दे पायेगा जो आप चाहते हैं ।
3ये याद रखें की आप कभी भी अपने बच्चे को बहुत ज्यादा प्यार नहीं कर सकते हैंः बहुत ज्यादा प्यार , प्रोत्साहन और ख्याल आपके बच्चे को बिगाड़ देगा यह बात एक छलावा है । आप अगर अपने बच्चे को खूब प्यार और ध्यान देंगे तो वह बड़े हो कर एक अच्छा इंसान बनेगा । बच्चे को प्यार की जगह खिलोने देने से या उसे उसकी गलती पर न डांटने से आपका बच्चा ज़रूर बिगड़ सकता है ।
- अपने बच्चे को कम से कम दिन में एक बार - या उससे ज्यादा बार भी बोलें की आप उसे प्यार करते हैं ।
4अपने बच्चे की हर गतिविधि में शामिल रहेः यह बहुत मेहनत और परिश्रम का काम है पर अगर आप अपने बच्चे को उसका चरित्र और शौक विकसित करने के लिए प्रोत्साहन देना चाहते हैं तो आपको उसका एक मज़बूत सहारा बनना पड़ेगा । इसका मतलब ये नहीं की आप साए की तरह बच्चे का पीछा करें बस उसके हर छोटे कदम में उसका साथ दें ।
- जैसे जैसे आपका बच्चा बड़ा होता जाये आप थोड़ी से उसे छूट दे सकते हैं और साथ के साथ उसके शौक़ पूरे करने के लिए उसे प्रोत्साहित भी कर सकते हैं ।
- अगर आप बच्चे को जल्दी स्वाधीन बनायेंगे तो वह बड़े होके अपने बारे में आसानी से सोच पायेगा ।
1ये बात जानलें की बच्चों को भी हदों की ज़रुरत होती हैः हो सकता है की कई बार वह अपनी हदों को भूल जायें। इसके लिए उन्हें हलकी सजा आप दे सकते हैं । बच्चों को यह मालूम होना चाहिए की सजा किसलिए दी गयी है और आप प्यार में उसको सजा दे रहे हैं ।
- अगर आपको बच्चे को किसी गलत काम से रोकना है तो उसको सजा भी ऐसी दें जो लाज़मी हो । एक बिना सर पैर की सजा देना से अच्छा है की उसका कोई विशेषाधिकार बंद कर के सजा दें । बच्चे को इस विशेषाधिकार के बंद होने का मतलब समझ आना चाहिए ।[६] X रिसर्च सोर्स "मसलन आप उसे कह सकते हैं "की अगर तुमने सड़क पर साइकिल चलाई तो बाकी के दिन के लिए तुम साइकिल नहीं चला पाओगे ।"
2अपने बच्चे के अच्छे व्यव्हार के लिए उसकी तारीफ़ करेंः अपने बच्चे को ख़राब व्यव्हार के लिए डांटने से ज्यादा ज़रूरी है उसको उसके अच्छे व्यव्हार के लिए उसकी तारीफ़ करना । ऐसा करने से उसे आगे के व्यव्हार को समझने में आसानी होगी । अगर आपका बच्चा कोई अच्छा काम करता है जैसे अपने खिलोनों को औरों से बांटना तो उसे यह ज़रूर बताएं, यह उसके किसी ख़राब काम के लिए उसे डांटने से भी ज़रूरी है ।
- अपने बच्चे की तारीफ करने की ज़रुरत को प्राथमिकता दें । यह कहना "मुझे इस काम के लिए तुम पर नाज़ है" आपके बच्चे को एहसास दिलाएगा की उसका अच्छा व्यवहार पसंद किया गया है ।
- आप अपने बच्चे को समय समय पर खिलोने और स्वीट दें पर आपके बच्चे को यह न लगे की उसे हर अच्छे काम पर खिलौना दीया जायेगा ।
3अपने व्यव्हार में समानता रखेंः अगर आप बच्चे को सही ढंग से अनुशासित रखना चाहते है तो आपको एक जैसा व्यव्हार रखना पड़ेगा । आप ऐसा नहीं कर सकते की एक काम के लिए आप उसे एक दिन डांटें और अगले दिन उसे न करने के लिए उसे टॉफ़ी दें और तीसरे दिन उसे कुछ न कहें क्यूंकि आप थके हुए हैं । अगर आपका बच्चा कोई अच्छा काम करे तो हर बार उसकी तारीफ करें । यह समानता ही अच्छे और बुरे बर्ताव में उसको फर्क करना सिखाएगी ।
- अगर दोनों माँ बाप बच्चे को साथ पाल रहे हों तो एकजुट होके रहें और एक जैसे तरीके आज़माएँ उसे अनुशासित करने के लिए ।
4अपने नियम बच्चे को सही से समझाएंः अगर आप चाहते हैं की बच्चा आपके अनुशासन के तरीकों को समझे तो आपको उसे ढंग से बताना पड़ेगा की क्यूँ वो कुछ चीज़ें नहीं कर सकता । खाली उसको ये न बताएं की सफाई करें या और बच्चों के साथ घुल मिल कर रहें । उसे यह भी बताएं की ऐसा उसे क्यूँ करना चाहिये और ऐसा करने से उसे, आपको और समाज को क्या फायदा होगा । अगर आप बच्चे को उसके व्यव्हार और उसके असर के बारे में समझा पाए तभी वो आपके फैसलों को मानेगा ।
5अपने बच्चे को उसके द्वारा किया गए कामों की ज़िम्मेदारी लेना सिखाएंः यह एक बहुत ज़रूरी हिस्सा है अपने बच्चे को अनुशासित करने का और उसका चरित्र विकसित करने का । अगर वो अपना खाना नीचे फेंकता है तो कोशिश करें की वह अपने व्यव्हार को माने और बताये की उसने ऐसा क्यूँ किया । बजाये इसके की वह उस हरकत से या तो मना करदे या फिर किसी और को उसके लिए ज़िम्मेदार ठहराए । अगर आपका बच्चा कुछ गलत करे तो उससे बात करें की ऐसा क्यूँ हुआ ।
- अपने बच्चे को समझाएं की हर कोई गलती करता हैं । गलती इतनी ज़रूरी नहीं जितना की यह जानना की बच्चा कैसे उसे संभालता है ।
1सिर्फ बातों से बच्चे को चरित्र का ज्ञान न देंः हम सदाचार अभ्यास से सीखते हैं । माँ बाप को अपने बच्चों को यह सिखाने के लिए आत्म अनुशासन , अच्छी आदतें , औरों के लिए दया और समाज सेवा की मदद लेनी चाहिए । किसी भी चरित्र निर्माण का मूल मंत्र है व्यव्हार-उनका व्यव्हार । अगर आपका बच्चा यह व्यव्हार समझने के लिए अभी छोटा है तो आप उसे दयावान होना तो सिखा ही सकते हैं ।
- पहले दिन से उसका प्रेरणास्रोत बनें । आपका बच्चा आपका भावों और व्यव्हार को जल्दी समझ पायेगा ।
3यह समझें की आपका बच्चा क्या सीख रहा हैंः बच्चे स्पंज जैसे होते हैं । वो जो भी देखते हैं उससे उनका चरित्र निर्माण होता है । किताबें , गाने , टीवी, इन्टरनेट और टेलीविज़न कोई न कोई सही या गलत सन्देश बच्चों को देते रहते हैं । अच्छे माँ बाप होने के नाते हमें देखना चाहिए की बच्चों पर कौनसी चीज़ कैसा असर डाल रही है ।
- अगर आप और आपका बच्चा कोई ख़राब चीज़ें देखें जैसे की दो लोगों में लड़ाई या फिर टीवी पर कोई हिंसक दृश्य तो अपने बच्चे को उस के बारे में ज़रूर बताएं ।
4बच्चों में अच्छी आदतें डालेंः अपने बच्चे को अगर आप थैंक यू और प्लीज कहने की आदत डालेंगे तो उसके लिए आगे चलके बहुत फायदेमंद रहेगा । अच्छी आदतें ज़िन्दगी भर साथ निभाती हैं इसलिए जितनी जल्दी डाल दी जाएँ उतना अच्छा । अपने से बड़ों की इज्ज़त करना और और बच्चों से नहीं लड़ना ऐसी आदतें डालना बच्चे के व्यक्तित्व के लिए बहुत अच्छा रहता है ।
- एक अच्छी आदत है अपनी सफाई खुद करना । अगर आप अपने बच्चे को 3 साल की उम्र में अपने खिलोने उठाना सिखायेंगे तो जब वह 23 का होगा तो उसे अच्छे मेहमान बनने की कला आ जायेगी।
5ऐसे शब्द ही बोलें जो आप अपने बच्चे के मुंह से सुनना चाहते हैः चाहे आपको किसी जान पहचान वाले को फ़ोन पर ही बुरा भला कहने का मन करे ध्यान रहे की आपका बच्चा सब सुन रहा है । अगर पति पत्नी के बीच में लड़ाई हो रही हो तो इस को बंद दरवाज़ों में करें ताकि बच्चे पर उसका असर न पड़े ।
- अगर आपके मुंह से कोई अपशब्द निकल भी जाये तो ऐसे न करें जैसे कुछ हुआ ही न हो । माफ़ी मांगे और कहें की दुबारा नहीं होगा । अगर आप कुछ नहीं कहेंगे तो बच्चा सोचेगा की यह शब्द सही हैं ।
6अपने बच्चे को दूसरों के साथ हमदर्दी करना सिखाएंः यह जितनी जल्दी आप सिखा दें उतना अच्छा । अगर आपका बच्चों औरों के साथ हमदर्दी रखेगा तभी वह लोगों पर जल्दी फैसले नहीं लेगा और उनकी नज़र से भी दुनिया को देख पायेगा मसलन अगर आपका बच्चे कहे की उसके दोस्त ने उसके साथ गलत व्यव्हार किया तो उसके साथ बात करके पूछें की क्या हुआ और उसके दोस्त को क्या लग रहा था जो उसने ऐसा व्यव्हार किया ।[१०] X रिसर्च सोर्स या फिर होटल में अगर वेट्रेस आपका आर्डर भूल गयी हो तो यह न बोलें की वो आलसी है यह बोलें की वो सारा दिन काम करती है इसलिए थक गयी है ।
7अपने बच्चे को एहसान मानना सिखाएंः सिर्फ बच्चे को थैंक यू बोलना सिखा देने से ही काम नहीं चलता । बच्चे को अहसान मानना सिखाने के लिए आपको खुद भी सबको थैंक यू बोलना चाहिए ताकि बच्चा ये अच्छा व्यव्हार देखे अगर आपका बच्चा शिकायत करे की स्कूल में सब के पास नया खिलौना है तो उसे समझाएं की कई लोग हैं इस दुनिया में जिन्हें यह भी नसीब नहीं है ।
- उसे सब तरीके के लोगों से मिलाएं ताकि उसे यह अंदाज़ा हो की वो कितनी किस्मत वाला है फिर चाहे आप उसे त्यौहार पर नया खिलौना नहीं दे रहे हो ।
- यह कहने से , "की मेने तुम्हें थैंक यू कहते नहीं सुना " से उतना प्रभाव नहीं पड़ेगा जितना उसको सुनाकर खुद थैंक यू बोलने से होगा ।
- अपने बच्चे के दोस्तों के माँ बाप से मिलें । हो सकता है आप की खुद से उनसे गहरी दोस्ती हो जाये पर फिर भी आपको यह तसल्ली रहेगी की वो उनके घर में सुरक्षित है ।
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इस आर्टिकल के सहायक लेखक हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं। wikiHow's Content Management Team बहुत ही सावधानी से हमारे एडिटोरियल स्टाफ द्वारा किये गए कार्य को मॉनिटर करती है ये सुनिश्चित करने के लिए कि सभी आर्टिकल्स में दी गई जानकारी उच्च गुणवत्ता की है कि नहीं। यहाँ पर आठ रेफरेन्स दिए गए हैं जिन्हे आप आर्टिकल में नीचे देख सकते हैं। यह आर्टिकल इक्कीस,नौ सौ अड़तीस बार देखा गया है। इसमें कोई दो राय नहीं है की बच्चों को पालने के लिए समय और कोशिश दोनों की ही ज़रुरत है । बच्चों को जन्म देना तो एक प्राकृतिक क्रिया है । पर उनको पालना काफी मुश्किल काम है । अगर आप जानना चाहते की बच्चों को कैसा बड़ा करें तो नीचे लिखे निर्देश पड़ें । एकपहले बच्चे की परवरिश को मान्यता देंः यह आजकल की दुनिया में कर पाना बहुत मुश्किल है । अच्छे माँ बाप सोच समझ कर अपना वक़्त अपने बच्चों के साथ बिताते हैं । उनके लिए अपने बच्चे के चरित्र का विकास करना सबसे ज़रूरी हैं । जब आप माँ बाप बनते है तो आपको अपनी प्राथमिकताओं को अपने बच्चे की प्राथमिकताओं से नीचे रखना चाहिए , और अपना ख्याल रखने से ज्यादा अपने बच्चों का ख्याल रखने में वक़्त गुजारना चाहिए । इसका मतलब ये नहीं की अपना ख्याल न रखें बस अपने बच्चे की ज़रूरतों को मान्यता दें । - दोनों माँ बाप एक एक करके बच्चे का ख्याल रख सकते हैं ताकि दोनों को अपने लिए भी वक़्त मिल सके । - जब अपना साप्ताहिक कार्यक्रम बनाएं तो अपने बच्चे को ज़रूरतें और पसंदों का ख्याल सबसे पहले रखें । - एक बार आपका बच्चा पड़ना और लिखना सीख जाये तो उसे खुद आगे बढ़ने दें । हर दो सेकंड बाद उसकी गलती न सुधारें नहीं तो उसका उत्साह कम हो जायेगा । - अगर आपका बच्चा मीनमेख निकल कर खाना खाता हो तो पूरा खाने का वक़्त उसको टोकने में और यह देखने में की वो कैसे खा रहा है न निकाल दें । इससे बच्चे को साथ में खाना खाने के प्रति अरुचि और बढ़ेगी । - बच्चे को खाने की प्रक्रिया में शामिल करें, खाने में मज़ा तब आएगा जब बच्चे का उसमें योगदान हो जैसे की आप सब्जी चयन करने में उसकी मदद ले सकती हैं या फिर टेबल को लगाने में । आप उन्हें सब्जी धोने जैसा छोटा काम भी दे सकती हैं करने के लिए । एक बड़ा बच्चा इससे ज्यादा काम संभाल सकता है । खाने में क्या बनना ये फैसला लेने में पूरे परिवार को शामिल करें । - खाना खाते वक़्त हलकी बातचीत ही करें । ज्यादा पूछताछ न करें , बस ऐसे पूछें "तुम्हारा दिन कैसा था?" - नीचे लिखे लेख को पड़ें । - अपनी दिनचर्या में थोडा शांत होने का भी वक़्त रखें । टीवी , गाने आदि सब बंद कर दें और अपने बच्चे को सुलाने से पहले उससे बात करें या किताब पढ़कर सुनाएं । - अपने बच्चे को सुलाने से पहले उसे मीठा न दें खाने के लिए इससे आपको उसे सुलाने में तकलीफ होगी । पाँचअपने बच्चे को उसका हुनर विकसित करने में मदद करेंः इसका मतलब ये नहीं है की आप बच्चे को एक हफ्ते में दस अलग गतिविधियों में डाल दें , आपको बस उसकी पसंद की दो-तीन गतिविधियाँ ढूँढने की ज़रुरत है जिन्हें आप अपने बच्चे के साप्ताहिक कार्यकर्म में डाल सकें । इसमें आप उसको सॉकर में या कला सम्बन्धी क्लास में भी डाल सकते हैं , बस उसे वह करने में मज़ा आना चाहिए । आप अपने बच्चे का प्रोत्साहन करें और उसे बोलें की वो कितना अच्छा कर रहा है । - अपने बच्चे को अलग चीज़ें कराने से वह और बच्चों के साथ अच्छे से घुलना मिलना सीख जायेगा । - आलस में न आयें । मसलन अगर आपका बच्चा शिकायत करे की उससे पियानो क्लास के लिए नहीं जाना है पर आपको पता है की उसको वहां जाना अच्छा लगता हैं तो उसकी बात सिर्फ इसलिए न मान लें क्यूंकि आपको गाड़ी चला के जाने में आलस आ रहा है । छःअपने बच्चे को हर दिन खेलने का काफी वक़्त देंः खेलना के वक़्त का मतलब ये नहीं की बच्चा टीवी के सामने बैठ कर खेल रहा है जबकी आप घर का कोई काम निबटा रही हों । खेलने के वक़्त का मतलब है की आप बच्चे को एक अलग कमरे में ऐसे खिलोने के साथ रखें जो उसके विकास में मदद करें । चाहे आप कितनी भी थकी हों यह ज़रूरी है की आप अपने बच्चे को खिलोनों से खेलना का महत्व समझाएं ताकि वो उनसे खुद से खेलना सीखे और उसकी बढ़त भी अच्छी हो । - यह ज़रूरी नहीं की आप अपने बच्चे के खेलने के लिए दुनिया के सारे खिलोने खरीद कर देदें । खिलोनों की गुणवत्ता देखें नाकि उनकी मात्रा । अंत में हो सकता है की आपका बच्चा टॉयलेट पेपर से ही खेल ले । एकअपने बच्चे की हर बात को सुनेंः अपने बच्चे की ज़िन्दगी में एक असरदार प्रभाव छोड़ पाना आपकी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी । अपने बच्चों को अपनी ज़िन्दगी से अलग कर देना बहुत आसान है लेकिन ऐसा करके कहीं आप उसे कुछ अच्छा सिखाना का मौका न खो दें । अगर आप अपने बच्चे की बात कभी नहीं सुनेंगी और हमेशा उन पर चिल्लाते रहंगे तो उन्हें लगेगा की आपको उनकी न ज़रुरत है न परवाह । - अपने बच्चे को बात करने का प्रोत्साहन दें । उन्हें अपनी बातें सबके सामने रखना सिखाएं ताकि आगे चलके वे औरों से भी सही से बात कर पाएं । - अगर आप बच्चे को इज्ज़त देंगे तभी बच्चा भी आपको वह इज्ज़त दे पायेगा जो आप चाहते हैं । तीनये याद रखें की आप कभी भी अपने बच्चे को बहुत ज्यादा प्यार नहीं कर सकते हैंः बहुत ज्यादा प्यार , प्रोत्साहन और ख्याल आपके बच्चे को बिगाड़ देगा यह बात एक छलावा है । आप अगर अपने बच्चे को खूब प्यार और ध्यान देंगे तो वह बड़े हो कर एक अच्छा इंसान बनेगा । बच्चे को प्यार की जगह खिलोने देने से या उसे उसकी गलती पर न डांटने से आपका बच्चा ज़रूर बिगड़ सकता है । - अपने बच्चे को कम से कम दिन में एक बार - या उससे ज्यादा बार भी बोलें की आप उसे प्यार करते हैं । चारअपने बच्चे की हर गतिविधि में शामिल रहेः यह बहुत मेहनत और परिश्रम का काम है पर अगर आप अपने बच्चे को उसका चरित्र और शौक विकसित करने के लिए प्रोत्साहन देना चाहते हैं तो आपको उसका एक मज़बूत सहारा बनना पड़ेगा । इसका मतलब ये नहीं की आप साए की तरह बच्चे का पीछा करें बस उसके हर छोटे कदम में उसका साथ दें । - जैसे जैसे आपका बच्चा बड़ा होता जाये आप थोड़ी से उसे छूट दे सकते हैं और साथ के साथ उसके शौक़ पूरे करने के लिए उसे प्रोत्साहित भी कर सकते हैं । - अगर आप बच्चे को जल्दी स्वाधीन बनायेंगे तो वह बड़े होके अपने बारे में आसानी से सोच पायेगा । एकये बात जानलें की बच्चों को भी हदों की ज़रुरत होती हैः हो सकता है की कई बार वह अपनी हदों को भूल जायें। इसके लिए उन्हें हलकी सजा आप दे सकते हैं । बच्चों को यह मालूम होना चाहिए की सजा किसलिए दी गयी है और आप प्यार में उसको सजा दे रहे हैं । - अगर आपको बच्चे को किसी गलत काम से रोकना है तो उसको सजा भी ऐसी दें जो लाज़मी हो । एक बिना सर पैर की सजा देना से अच्छा है की उसका कोई विशेषाधिकार बंद कर के सजा दें । बच्चे को इस विशेषाधिकार के बंद होने का मतलब समझ आना चाहिए ।[छः] X रिसर्च सोर्स "मसलन आप उसे कह सकते हैं "की अगर तुमने सड़क पर साइकिल चलाई तो बाकी के दिन के लिए तुम साइकिल नहीं चला पाओगे ।" दोअपने बच्चे के अच्छे व्यव्हार के लिए उसकी तारीफ़ करेंः अपने बच्चे को ख़राब व्यव्हार के लिए डांटने से ज्यादा ज़रूरी है उसको उसके अच्छे व्यव्हार के लिए उसकी तारीफ़ करना । ऐसा करने से उसे आगे के व्यव्हार को समझने में आसानी होगी । अगर आपका बच्चा कोई अच्छा काम करता है जैसे अपने खिलोनों को औरों से बांटना तो उसे यह ज़रूर बताएं, यह उसके किसी ख़राब काम के लिए उसे डांटने से भी ज़रूरी है । - अपने बच्चे की तारीफ करने की ज़रुरत को प्राथमिकता दें । यह कहना "मुझे इस काम के लिए तुम पर नाज़ है" आपके बच्चे को एहसास दिलाएगा की उसका अच्छा व्यवहार पसंद किया गया है । - आप अपने बच्चे को समय समय पर खिलोने और स्वीट दें पर आपके बच्चे को यह न लगे की उसे हर अच्छे काम पर खिलौना दीया जायेगा । तीनअपने व्यव्हार में समानता रखेंः अगर आप बच्चे को सही ढंग से अनुशासित रखना चाहते है तो आपको एक जैसा व्यव्हार रखना पड़ेगा । आप ऐसा नहीं कर सकते की एक काम के लिए आप उसे एक दिन डांटें और अगले दिन उसे न करने के लिए उसे टॉफ़ी दें और तीसरे दिन उसे कुछ न कहें क्यूंकि आप थके हुए हैं । अगर आपका बच्चा कोई अच्छा काम करे तो हर बार उसकी तारीफ करें । यह समानता ही अच्छे और बुरे बर्ताव में उसको फर्क करना सिखाएगी । - अगर दोनों माँ बाप बच्चे को साथ पाल रहे हों तो एकजुट होके रहें और एक जैसे तरीके आज़माएँ उसे अनुशासित करने के लिए । चारअपने नियम बच्चे को सही से समझाएंः अगर आप चाहते हैं की बच्चा आपके अनुशासन के तरीकों को समझे तो आपको उसे ढंग से बताना पड़ेगा की क्यूँ वो कुछ चीज़ें नहीं कर सकता । खाली उसको ये न बताएं की सफाई करें या और बच्चों के साथ घुल मिल कर रहें । उसे यह भी बताएं की ऐसा उसे क्यूँ करना चाहिये और ऐसा करने से उसे, आपको और समाज को क्या फायदा होगा । अगर आप बच्चे को उसके व्यव्हार और उसके असर के बारे में समझा पाए तभी वो आपके फैसलों को मानेगा । पाँचअपने बच्चे को उसके द्वारा किया गए कामों की ज़िम्मेदारी लेना सिखाएंः यह एक बहुत ज़रूरी हिस्सा है अपने बच्चे को अनुशासित करने का और उसका चरित्र विकसित करने का । अगर वो अपना खाना नीचे फेंकता है तो कोशिश करें की वह अपने व्यव्हार को माने और बताये की उसने ऐसा क्यूँ किया । बजाये इसके की वह उस हरकत से या तो मना करदे या फिर किसी और को उसके लिए ज़िम्मेदार ठहराए । अगर आपका बच्चा कुछ गलत करे तो उससे बात करें की ऐसा क्यूँ हुआ । - अपने बच्चे को समझाएं की हर कोई गलती करता हैं । गलती इतनी ज़रूरी नहीं जितना की यह जानना की बच्चा कैसे उसे संभालता है । एकसिर्फ बातों से बच्चे को चरित्र का ज्ञान न देंः हम सदाचार अभ्यास से सीखते हैं । माँ बाप को अपने बच्चों को यह सिखाने के लिए आत्म अनुशासन , अच्छी आदतें , औरों के लिए दया और समाज सेवा की मदद लेनी चाहिए । किसी भी चरित्र निर्माण का मूल मंत्र है व्यव्हार-उनका व्यव्हार । अगर आपका बच्चा यह व्यव्हार समझने के लिए अभी छोटा है तो आप उसे दयावान होना तो सिखा ही सकते हैं । - पहले दिन से उसका प्रेरणास्रोत बनें । आपका बच्चा आपका भावों और व्यव्हार को जल्दी समझ पायेगा । तीनयह समझें की आपका बच्चा क्या सीख रहा हैंः बच्चे स्पंज जैसे होते हैं । वो जो भी देखते हैं उससे उनका चरित्र निर्माण होता है । किताबें , गाने , टीवी, इन्टरनेट और टेलीविज़न कोई न कोई सही या गलत सन्देश बच्चों को देते रहते हैं । अच्छे माँ बाप होने के नाते हमें देखना चाहिए की बच्चों पर कौनसी चीज़ कैसा असर डाल रही है । - अगर आप और आपका बच्चा कोई ख़राब चीज़ें देखें जैसे की दो लोगों में लड़ाई या फिर टीवी पर कोई हिंसक दृश्य तो अपने बच्चे को उस के बारे में ज़रूर बताएं । चारबच्चों में अच्छी आदतें डालेंः अपने बच्चे को अगर आप थैंक यू और प्लीज कहने की आदत डालेंगे तो उसके लिए आगे चलके बहुत फायदेमंद रहेगा । अच्छी आदतें ज़िन्दगी भर साथ निभाती हैं इसलिए जितनी जल्दी डाल दी जाएँ उतना अच्छा । अपने से बड़ों की इज्ज़त करना और और बच्चों से नहीं लड़ना ऐसी आदतें डालना बच्चे के व्यक्तित्व के लिए बहुत अच्छा रहता है । - एक अच्छी आदत है अपनी सफाई खुद करना । अगर आप अपने बच्चे को तीन साल की उम्र में अपने खिलोने उठाना सिखायेंगे तो जब वह तेईस का होगा तो उसे अच्छे मेहमान बनने की कला आ जायेगी। पाँचऐसे शब्द ही बोलें जो आप अपने बच्चे के मुंह से सुनना चाहते हैः चाहे आपको किसी जान पहचान वाले को फ़ोन पर ही बुरा भला कहने का मन करे ध्यान रहे की आपका बच्चा सब सुन रहा है । अगर पति पत्नी के बीच में लड़ाई हो रही हो तो इस को बंद दरवाज़ों में करें ताकि बच्चे पर उसका असर न पड़े । - अगर आपके मुंह से कोई अपशब्द निकल भी जाये तो ऐसे न करें जैसे कुछ हुआ ही न हो । माफ़ी मांगे और कहें की दुबारा नहीं होगा । अगर आप कुछ नहीं कहेंगे तो बच्चा सोचेगा की यह शब्द सही हैं । छःअपने बच्चे को दूसरों के साथ हमदर्दी करना सिखाएंः यह जितनी जल्दी आप सिखा दें उतना अच्छा । अगर आपका बच्चों औरों के साथ हमदर्दी रखेगा तभी वह लोगों पर जल्दी फैसले नहीं लेगा और उनकी नज़र से भी दुनिया को देख पायेगा मसलन अगर आपका बच्चे कहे की उसके दोस्त ने उसके साथ गलत व्यव्हार किया तो उसके साथ बात करके पूछें की क्या हुआ और उसके दोस्त को क्या लग रहा था जो उसने ऐसा व्यव्हार किया ।[दस] X रिसर्च सोर्स या फिर होटल में अगर वेट्रेस आपका आर्डर भूल गयी हो तो यह न बोलें की वो आलसी है यह बोलें की वो सारा दिन काम करती है इसलिए थक गयी है । सातअपने बच्चे को एहसान मानना सिखाएंः सिर्फ बच्चे को थैंक यू बोलना सिखा देने से ही काम नहीं चलता । बच्चे को अहसान मानना सिखाने के लिए आपको खुद भी सबको थैंक यू बोलना चाहिए ताकि बच्चा ये अच्छा व्यव्हार देखे अगर आपका बच्चा शिकायत करे की स्कूल में सब के पास नया खिलौना है तो उसे समझाएं की कई लोग हैं इस दुनिया में जिन्हें यह भी नसीब नहीं है । - उसे सब तरीके के लोगों से मिलाएं ताकि उसे यह अंदाज़ा हो की वो कितनी किस्मत वाला है फिर चाहे आप उसे त्यौहार पर नया खिलौना नहीं दे रहे हो । - यह कहने से , "की मेने तुम्हें थैंक यू कहते नहीं सुना " से उतना प्रभाव नहीं पड़ेगा जितना उसको सुनाकर खुद थैंक यू बोलने से होगा । - अपने बच्चे के दोस्तों के माँ बाप से मिलें । हो सकता है आप की खुद से उनसे गहरी दोस्ती हो जाये पर फिर भी आपको यह तसल्ली रहेगी की वो उनके घर में सुरक्षित है ।
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Don't Miss!
OUCH: सलमान की फिल्म से पहले ही....मिल जाएगा ये तगड़ा डोज़!
सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अ जेंटलमैन के बारे में पहली बार बात की है। फिल्म को लेकर लोगों में ज़्यादा उत्साह नहीं दिख रहा है और इसलिए सिद्धार्थ ने पहली बार फिल्म में अपने रोल पर बात की।
अब सिद्धार्थ ने अपने किरदारों के बारे में बात करते हुए कहा कि ये कोई ऐसा वैसा डबल रोल नहीं है। ये थोड़ा हटके है। गौरतलब है कि लोगों को फिल्म का ट्रेलर ही नहीं पसंद आया तो सिद्धार्थ को डर है कि कहीं लोग फिल्म देखने आए ही नहीं तो क्या होगा।
यही कारण है कि सिद्धार्थ मल्होत्रा अपनी फिल्म की टीम को तगड़ी प्रमोशनल स्ट्रैटेजी बनाने की सलाह दे डाली है। बस अब देखना है कि सिद्धार्थ बॉक्स ऑफिस पर टिकते हैं या बिक जाते हैं।
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Don't Miss! OUCH: सलमान की फिल्म से पहले ही....मिल जाएगा ये तगड़ा डोज़! सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अ जेंटलमैन के बारे में पहली बार बात की है। फिल्म को लेकर लोगों में ज़्यादा उत्साह नहीं दिख रहा है और इसलिए सिद्धार्थ ने पहली बार फिल्म में अपने रोल पर बात की। अब सिद्धार्थ ने अपने किरदारों के बारे में बात करते हुए कहा कि ये कोई ऐसा वैसा डबल रोल नहीं है। ये थोड़ा हटके है। गौरतलब है कि लोगों को फिल्म का ट्रेलर ही नहीं पसंद आया तो सिद्धार्थ को डर है कि कहीं लोग फिल्म देखने आए ही नहीं तो क्या होगा। यही कारण है कि सिद्धार्थ मल्होत्रा अपनी फिल्म की टीम को तगड़ी प्रमोशनल स्ट्रैटेजी बनाने की सलाह दे डाली है। बस अब देखना है कि सिद्धार्थ बॉक्स ऑफिस पर टिकते हैं या बिक जाते हैं।
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- दिल्ली मेट्रो यात्रियों को कई सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
- महिला और दिव्यांग यात्रियों की सुविधाओं के मद्देनजर स्टेशन और ट्रेन में कई सेवाएं उपलब्ध हैं।
- मेट्रो ट्रेन में महिला और दिव्यांग यात्रियों के लिए सीट आरक्षित होती है।
महिला यात्रियों के लिए सुविधाएं (delhi metro facilities for woman)
- हर डिब्बे में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित होती हैं।
- अगर पुरुष महिला डिब्बे में यात्रा करते हैं, तो उन पर 250 रुपये का जुर्माना लगेगा।
- मेट्रो में शराब पीकर और उत्पात मचाने वालों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाता है।
- स्टेशनों, प्लेटफार्मों और रेलगाड़ी के डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।
- सूर्यास्त के बाद के सुरक्षा बलों (CISF) द्वारा प्लेटफॉर्म पर पेट्रोलिंग।
- अपराधियों को पकड़ने के लिए मेट्रो में त्वरित प्रतिक्रिया टीम (Quick reaction team) तैनात है।
- महिला यात्रियों की सुरक्षा जांच के लिए स्टेशनों पर महिला CISF स्टाफ को तैनात किया गया है।
- इतना ही नहीं, महिला डिब्बे में यात्रा कर रहे पुरुष यात्रियों की जांच के लिए भी दल तैनात किए गए हैं।
दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाएं (delhi metro facilities for disabled persons)
- मेट्रो स्टेशन और ट्रेन में दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाती है।
- स्टेशन में एंट्री और एग्जिट के लिए स्वतः फ्लैप गेट (Automatic Flap Gates) हैं, ताकि दिव्यांग यात्रियों को कोई दिक्कत न हो।
- दिव्यांग यात्रियों के लिए शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध है।
- नेत्रहीन यात्रियों के लिए मेट्रो में टैक्टाइल पाथ यानी पीले रंग की उबड़-खाबड़ टाइल्स लगी हैं।
- सीढ़ियों के साथ हैंड रेल भी लगे हैं।
- दिव्यांग यात्रियों के लिए मेट्रो में लिफ्ट की सुविधा भी है।
- इसके अलावा ट्रेन में दिव्यांग यात्रियों के लिए सीट भी आरक्षित हैं।
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- दिल्ली मेट्रो यात्रियों को कई सुविधाएं उपलब्ध कराती है। - महिला और दिव्यांग यात्रियों की सुविधाओं के मद्देनजर स्टेशन और ट्रेन में कई सेवाएं उपलब्ध हैं। - मेट्रो ट्रेन में महिला और दिव्यांग यात्रियों के लिए सीट आरक्षित होती है। महिला यात्रियों के लिए सुविधाएं - हर डिब्बे में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित होती हैं। - अगर पुरुष महिला डिब्बे में यात्रा करते हैं, तो उन पर दो सौ पचास रुपयापये का जुर्माना लगेगा। - मेट्रो में शराब पीकर और उत्पात मचाने वालों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाता है। - स्टेशनों, प्लेटफार्मों और रेलगाड़ी के डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। - सूर्यास्त के बाद के सुरक्षा बलों द्वारा प्लेटफॉर्म पर पेट्रोलिंग। - अपराधियों को पकड़ने के लिए मेट्रो में त्वरित प्रतिक्रिया टीम तैनात है। - महिला यात्रियों की सुरक्षा जांच के लिए स्टेशनों पर महिला CISF स्टाफ को तैनात किया गया है। - इतना ही नहीं, महिला डिब्बे में यात्रा कर रहे पुरुष यात्रियों की जांच के लिए भी दल तैनात किए गए हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाएं - मेट्रो स्टेशन और ट्रेन में दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाती है। - स्टेशन में एंट्री और एग्जिट के लिए स्वतः फ्लैप गेट हैं, ताकि दिव्यांग यात्रियों को कोई दिक्कत न हो। - दिव्यांग यात्रियों के लिए शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध है। - नेत्रहीन यात्रियों के लिए मेट्रो में टैक्टाइल पाथ यानी पीले रंग की उबड़-खाबड़ टाइल्स लगी हैं। - सीढ़ियों के साथ हैंड रेल भी लगे हैं। - दिव्यांग यात्रियों के लिए मेट्रो में लिफ्ट की सुविधा भी है। - इसके अलावा ट्रेन में दिव्यांग यात्रियों के लिए सीट भी आरक्षित हैं।
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गोड्डाः जिला मुख्यालय में एफएम रेडियो का उद्घाटन शुक्रवार को होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से ऑनलाइन उद्घाटन करेंगे।
मौके पर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर एवं राज्यमंत्री डॉ एल मुरूगन भी उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन समारोह के मौके पर स्थानीय भाजपा सांसद निशिकांत दुबे गोड्डा के एफएम रेडियो केंद्र पर उपस्थित रहेंगे।
उद्घाटन समारोह से एक दिन पूर्व गुरुवार को प्रसार भारती के अधिकारियों ने एफएम रेडियो स्टेशन केंद्र का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया। भाजपा नेताओं ने भी उद्घाटन स्थल का मुआयना किया।
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गोड्डाः जिला मुख्यालय में एफएम रेडियो का उद्घाटन शुक्रवार को होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से ऑनलाइन उद्घाटन करेंगे। मौके पर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर एवं राज्यमंत्री डॉ एल मुरूगन भी उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन समारोह के मौके पर स्थानीय भाजपा सांसद निशिकांत दुबे गोड्डा के एफएम रेडियो केंद्र पर उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन समारोह से एक दिन पूर्व गुरुवार को प्रसार भारती के अधिकारियों ने एफएम रेडियो स्टेशन केंद्र का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया। भाजपा नेताओं ने भी उद्घाटन स्थल का मुआयना किया।
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बैंगलोर का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में आईटी सेक्टर आता है, पर ऐसा नहीं है, यह शहर आईटी हब के साथ-साथ अपनी नाइट लाइफ के लिए भी जाना जाता है।
आज के युवाओं को नाइट लाइफ एन्जॉय करने का बहुत शौक होता है। इनमें वो युवा ज्यादा शामिल हैं जो वर्किंग होते हैं। दिन भर काम करने के बाद शाम को दोस्तों या किसी खास के साथ वे बार, पब, डिस्को या क्लब में जाना पसंद करते हैं। दिल्ली, मुंबई जैसी जगहों में ऐसे युवाओं की संख्या ज्यादा बढ़ गयी है। आज हम आपको देश भर के ऐसे ही जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां घूमने जाने के साथ आप यहां की नाईट लाइफ भी जमकर एन्जॉय कर सकते हैं। आइए जानते हैं भारत के उन शहरों के बारे में जो अपने कार्य क्षेत्र के साथ-साथ अपनी नाइट लाइफ के लिए भी ज्यादा जाने जाते हैं।
नाइट लाइफ के मामले में मुंबई भारत के सबसे ऊंचे पायदान पर आता है। मुंबई के विषय में एक बात कही जाती है कि यह शहर रात में भी नहीं सोता जिसका कारण यहां रोजाना बढ़ती युवाओं की आबादी है। मुंबई शहर अपने समुद्री तटो, मल्टीनेशनल कंपनी की शाखाओं, फिल्म जगत और करियर के बेहतर ऑप्शन के लिए जाना जाता है। यहां दिन के साथ साथ रातें भी व्यस्त होती हैं। यहां आपको ढेरों नाइट क्लब, पब, बार और डिस्को दिख जाएंगे जहां आप शानदार नाइट का अनुभव ले सकते हैं।
नाइट लाइफ के मामले में गोवा भारत के सबसे पसंदीदा शहरों में गिना जाता है। यहां के समुद्री बीच देश-विदेशी पर्यटकों के मध्य काफी प्रसिद्ध हैं। नाइट पार्टी, बूज़, क्लबों को गोवा का पर्याय कहा जा सकता है। नाइट लाइफ का बेस्ट अनुभव लेने के लिए आप गोवा की सैर कर सकते हैं। यहां के नाइट क्लब, पब देश-विदेश के सैलनियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इसके साथ आप यहां बेस्ट सी फूड्स का भी आनंद उठा सकते हैं।
नाइट लाइफ के मामले में भारत का उत्तरी शहर चंडीगढ़ भी किसी मामले में कम नहीं। यहां विकसित हो रहा आईटी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थान की बढ़ती संख्या ने इस शहर की नाइट लाइफ को रंगीन बना डाला है। यहां का एक बड़ा युवा वर्ग अपनी मौज मस्ती के लिए नाइट क्लब, पब,बार, डिस्कों की तरफ रूख कर रहा है। बदलते फैशन का एक नया दौर यहां देखा जा सकता है। चंडीगढ़ में बहुत सी शानदार जगहें हैं जहां आप नाइट लाइफ का आनंद ले सकते हैं।
महाराष्ट्र का पुणे शहर अपने बेहतरीन शहरी जीवन के लिए जाना जाता है। यह शहर एक बड़ी युवा आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। जिसका कारण है, कॉर्पोरेट केंद्रों और शैक्षिक संस्थाओं की बढ़ती संख्या। उन्नत शैक्षणिक संस्थानों की वजह से पुणे को 'पूर्व का ऑक्सफोर्ड' का दर्जा प्राप्त है। इसके अलावा यह शहर अपनी नाइट लाइफ के लिए भी जाना जाता है। यहां आपको 100 से भी ज्यादा नाइट क्लब, पब, बार दिख जाएंगे। दिन भले ही यहां व्स्यत हो पर शाम यहां की रंगीन गुजरती है।
बैंगलोर का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में आईटी सेक्टर आता है, पर ऐसा नहीं है यह शहर आईटी हब के साथ-साथ अपनी नाइट लाइफ के लिए भी जाना जाता है। शहर में बहुत सी ऐसी जगह हैं जहां आप बेस्ट नाइट एक्सपीरियंस कर सकते हैं। एमजी रोड, चर्चगेट, ब्रिगेड रोड और जेपी नगर में शानदार नाइट क्लब और पब मौजूद हैं। यहां आप अपनी शामों को रंगीन बना सकते हैं।
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बैंगलोर का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में आईटी सेक्टर आता है, पर ऐसा नहीं है, यह शहर आईटी हब के साथ-साथ अपनी नाइट लाइफ के लिए भी जाना जाता है। आज के युवाओं को नाइट लाइफ एन्जॉय करने का बहुत शौक होता है। इनमें वो युवा ज्यादा शामिल हैं जो वर्किंग होते हैं। दिन भर काम करने के बाद शाम को दोस्तों या किसी खास के साथ वे बार, पब, डिस्को या क्लब में जाना पसंद करते हैं। दिल्ली, मुंबई जैसी जगहों में ऐसे युवाओं की संख्या ज्यादा बढ़ गयी है। आज हम आपको देश भर के ऐसे ही जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां घूमने जाने के साथ आप यहां की नाईट लाइफ भी जमकर एन्जॉय कर सकते हैं। आइए जानते हैं भारत के उन शहरों के बारे में जो अपने कार्य क्षेत्र के साथ-साथ अपनी नाइट लाइफ के लिए भी ज्यादा जाने जाते हैं। नाइट लाइफ के मामले में मुंबई भारत के सबसे ऊंचे पायदान पर आता है। मुंबई के विषय में एक बात कही जाती है कि यह शहर रात में भी नहीं सोता जिसका कारण यहां रोजाना बढ़ती युवाओं की आबादी है। मुंबई शहर अपने समुद्री तटो, मल्टीनेशनल कंपनी की शाखाओं, फिल्म जगत और करियर के बेहतर ऑप्शन के लिए जाना जाता है। यहां दिन के साथ साथ रातें भी व्यस्त होती हैं। यहां आपको ढेरों नाइट क्लब, पब, बार और डिस्को दिख जाएंगे जहां आप शानदार नाइट का अनुभव ले सकते हैं। नाइट लाइफ के मामले में गोवा भारत के सबसे पसंदीदा शहरों में गिना जाता है। यहां के समुद्री बीच देश-विदेशी पर्यटकों के मध्य काफी प्रसिद्ध हैं। नाइट पार्टी, बूज़, क्लबों को गोवा का पर्याय कहा जा सकता है। नाइट लाइफ का बेस्ट अनुभव लेने के लिए आप गोवा की सैर कर सकते हैं। यहां के नाइट क्लब, पब देश-विदेश के सैलनियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इसके साथ आप यहां बेस्ट सी फूड्स का भी आनंद उठा सकते हैं। नाइट लाइफ के मामले में भारत का उत्तरी शहर चंडीगढ़ भी किसी मामले में कम नहीं। यहां विकसित हो रहा आईटी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थान की बढ़ती संख्या ने इस शहर की नाइट लाइफ को रंगीन बना डाला है। यहां का एक बड़ा युवा वर्ग अपनी मौज मस्ती के लिए नाइट क्लब, पब,बार, डिस्कों की तरफ रूख कर रहा है। बदलते फैशन का एक नया दौर यहां देखा जा सकता है। चंडीगढ़ में बहुत सी शानदार जगहें हैं जहां आप नाइट लाइफ का आनंद ले सकते हैं। महाराष्ट्र का पुणे शहर अपने बेहतरीन शहरी जीवन के लिए जाना जाता है। यह शहर एक बड़ी युवा आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। जिसका कारण है, कॉर्पोरेट केंद्रों और शैक्षिक संस्थाओं की बढ़ती संख्या। उन्नत शैक्षणिक संस्थानों की वजह से पुणे को 'पूर्व का ऑक्सफोर्ड' का दर्जा प्राप्त है। इसके अलावा यह शहर अपनी नाइट लाइफ के लिए भी जाना जाता है। यहां आपको एक सौ से भी ज्यादा नाइट क्लब, पब, बार दिख जाएंगे। दिन भले ही यहां व्स्यत हो पर शाम यहां की रंगीन गुजरती है। बैंगलोर का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में आईटी सेक्टर आता है, पर ऐसा नहीं है यह शहर आईटी हब के साथ-साथ अपनी नाइट लाइफ के लिए भी जाना जाता है। शहर में बहुत सी ऐसी जगह हैं जहां आप बेस्ट नाइट एक्सपीरियंस कर सकते हैं। एमजी रोड, चर्चगेट, ब्रिगेड रोड और जेपी नगर में शानदार नाइट क्लब और पब मौजूद हैं। यहां आप अपनी शामों को रंगीन बना सकते हैं।
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ढाका (भाषा)। बांग्लादेश के सिलहट शहर में इस्लामी आतंकवादियों के कब्जे वाली एक इमारत के बाहर हुए दो तीव्र विस्फोटों में छह लोगों की मौत हो गई और एक शीर्ष खुफिया अधिकारी सहित 40 व्यक्ति घायल हो गए हैं।
पहला विस्फोट कल शाम करीब सात बजे उस पांच मंजिला इमारत से 400 मीटर की दूरी पर हुआ, जहां आतंकवादी छुपे हुए थे। इस विस्फोट में भीड़ को निशाना बनाया गया था। आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए अभियान चलाया गया और वहां पुलिसबल भी तैनात किया गया।
दूसरा विस्फोट पहले विस्फोट के एक घंटे के बाद इमारत के सामने हुआ। इस हमले में दो पुलिस अधिकारियों सहित छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो पुलिस इंस्पेक्टर सहित चार आम नागरिक शामिल हैं, जिनमें से दो कॉलेज छात्र थे। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने अपनी समाचार एजेंसी 'अमाक' के माध्यम से ली है। इसमें कहा गया है कि यह हमला सुरक्षाबलों को निशाने पर रखकर किया गया था। पिछले आठ दिनों में यह तीसरा हमला है, जिसकी जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली है।
रेपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) के खुफिया विंग के प्रमुख लेफ्टिनेंट कर्नल अबुल कलाम इस हमले में गंभीर रुप से घायल हो गए हैं और उन्हें इलाज के लिए ढाका भेज दिया गया है। एक घायल के हवाले से बीडीन्यूज24 डॉट कॉम ने बताया कि दूसरा विस्फोट तब हुआ जब आरएबी और पुलिस कर्मी पहले विस्फोट के बाद जांच के तहत घटनास्थल पर पहुंचे।
पुलिस अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया, "इमारत के आसपास आम नागरिकों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और इमारत से आतंकवादियों को बाहर निकालने की अंतिम तैयारी चल रही है।" सिल्हट स्थित 17 इंफेंटरी डिविजन के मेजर जनरल अनवारुल मोमीन इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, जिन्हें पुलिस की एसडब्ल्यूएटी ईम और आतंकवादी निरोधी इकाई सहायता दे रही हैं। आरएबी भी अभियान में शामिल है। शुक्रवार को ढाका के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए आत्मघाती हमले के बाद ट्वाइलाइट अभियान शुरु किया गया है।
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ढाका । बांग्लादेश के सिलहट शहर में इस्लामी आतंकवादियों के कब्जे वाली एक इमारत के बाहर हुए दो तीव्र विस्फोटों में छह लोगों की मौत हो गई और एक शीर्ष खुफिया अधिकारी सहित चालीस व्यक्ति घायल हो गए हैं। पहला विस्फोट कल शाम करीब सात बजे उस पांच मंजिला इमारत से चार सौ मीटर की दूरी पर हुआ, जहां आतंकवादी छुपे हुए थे। इस विस्फोट में भीड़ को निशाना बनाया गया था। आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए अभियान चलाया गया और वहां पुलिसबल भी तैनात किया गया। दूसरा विस्फोट पहले विस्फोट के एक घंटे के बाद इमारत के सामने हुआ। इस हमले में दो पुलिस अधिकारियों सहित छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो पुलिस इंस्पेक्टर सहित चार आम नागरिक शामिल हैं, जिनमें से दो कॉलेज छात्र थे। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने अपनी समाचार एजेंसी 'अमाक' के माध्यम से ली है। इसमें कहा गया है कि यह हमला सुरक्षाबलों को निशाने पर रखकर किया गया था। पिछले आठ दिनों में यह तीसरा हमला है, जिसकी जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली है। रेपिड एक्शन बटालियन के खुफिया विंग के प्रमुख लेफ्टिनेंट कर्नल अबुल कलाम इस हमले में गंभीर रुप से घायल हो गए हैं और उन्हें इलाज के लिए ढाका भेज दिया गया है। एक घायल के हवाले से बीडीन्यूजचौबीस डॉट कॉम ने बताया कि दूसरा विस्फोट तब हुआ जब आरएबी और पुलिस कर्मी पहले विस्फोट के बाद जांच के तहत घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया, "इमारत के आसपास आम नागरिकों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और इमारत से आतंकवादियों को बाहर निकालने की अंतिम तैयारी चल रही है।" सिल्हट स्थित सत्रह इंफेंटरी डिविजन के मेजर जनरल अनवारुल मोमीन इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, जिन्हें पुलिस की एसडब्ल्यूएटी ईम और आतंकवादी निरोधी इकाई सहायता दे रही हैं। आरएबी भी अभियान में शामिल है। शुक्रवार को ढाका के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए आत्मघाती हमले के बाद ट्वाइलाइट अभियान शुरु किया गया है।
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Chaibasa (Ramendra Kumar Sinha) : सांसद गीता कोड़ा के निर्देश पर सदर प्रखंड अंतर्गत पंचायत टेकराहातु, ग्राम बड़ा खुंटा में विद्युत विभाग ने 25 केवीए का ट्रांसफार्मर बदला. ट्रांसफार्मर का विधिवत उद्घाटन सदर प्रखंड अध्यक्ष सह 20 सूत्री सदस्य दिकु सवैया ने किया. साथ में कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारीगण मोहन सिंह हेंब्रोम, सिकुर गोप, सिद्धेश्वर कालुडिया प्रखंड महासचिव, जितेंद्र बारी प्रखंड सचिव उपस्थित थे. ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर उपलब्ध हो जाने पर सांसद गीता कोड़ा एवं विद्युत विभाग के प्रति आभार जताया एवं प्रसन्नता जाहिर की.
इस अवसर पर ग्रामीण मुंडा सिकंदरी बारी, चरन बारी, किचोन बानरा, सुरजा मनीकुई, सीताकुई, बुधन सिंह बारी, सुखलाल बारी, चुमरू बारी, भुइयां बारी, हरिश बारी, पलवन बारी, सालुका बारी, मुचिया बारी, बबलू बारी, कैरा बानरा, नौरू बारी, जीरा महाराणा, पीताम्बर महाराणा, लंंबू गोप, कैशन बानरा, ग्रामीण कार्यक्रम स्थल पर सैकड़ों की संख्या में उपस्थित थे.
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Chaibasa : सांसद गीता कोड़ा के निर्देश पर सदर प्रखंड अंतर्गत पंचायत टेकराहातु, ग्राम बड़ा खुंटा में विद्युत विभाग ने पच्चीस केवीए का ट्रांसफार्मर बदला. ट्रांसफार्मर का विधिवत उद्घाटन सदर प्रखंड अध्यक्ष सह बीस सूत्री सदस्य दिकु सवैया ने किया. साथ में कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारीगण मोहन सिंह हेंब्रोम, सिकुर गोप, सिद्धेश्वर कालुडिया प्रखंड महासचिव, जितेंद्र बारी प्रखंड सचिव उपस्थित थे. ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर उपलब्ध हो जाने पर सांसद गीता कोड़ा एवं विद्युत विभाग के प्रति आभार जताया एवं प्रसन्नता जाहिर की. इस अवसर पर ग्रामीण मुंडा सिकंदरी बारी, चरन बारी, किचोन बानरा, सुरजा मनीकुई, सीताकुई, बुधन सिंह बारी, सुखलाल बारी, चुमरू बारी, भुइयां बारी, हरिश बारी, पलवन बारी, सालुका बारी, मुचिया बारी, बबलू बारी, कैरा बानरा, नौरू बारी, जीरा महाराणा, पीताम्बर महाराणा, लंंबू गोप, कैशन बानरा, ग्रामीण कार्यक्रम स्थल पर सैकड़ों की संख्या में उपस्थित थे.
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रूस और यूक्रेन को 11 महीने का समय हो गया है और ये जंग वैसे की ही वैसी जारी है और रूसी सेना ने अब तक यूक्रेन में भीषण तबाही मचाई है। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने कहा है कि रूस युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत को तैयार है और अब सबकुछ उन पर निर्भर करता है। हालांकि, इस दौरान रूस की तरफ से यूक्रेन पर हमले लगातार जारी है। लेकिन अब एक बार फिर से बुल्गारिया की भविष्यवक्ता बाबा वेंगा (Baba Vanga) की पुतिन और रूस को लेकर सालों पहले की गई भविष्यवाणी की एक बार फिर चर्चा होने लगी है।
बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों की मानें तो साल 2023 में व्लादिमीर पुतिन दुनियाभर में अपना वर्चस्व स्थापित कर सकते हैं। बाबा वेंगा ने सालों पहले इस बात की भविष्यवाणी कर दी थी व्लादिमीर पुतिन दुनिया के सबसे ताकतवर व्यक्ति बन सकते हैं, जो इस साल सही साबित हो सकती है।
बता दें, बाबा वेंगा ने तो सैलून सालों पहले इस बात की भी भविष्यवाणी कर दी थी कि रूस दुनिया पर राज करेगा। इसके साथ ही बाबा वेंगा ने रूस को 'Lord of the World' यानी दुनिया का स्वामी बनने की भी भविष्यवाणी की थी। रूस को कोई नहीं रोक सकता और वह सभी को रास्ते से हटा देगा। बाबा वेंगा ने अपनी भविष्यवाणी में कहा था, सब बर्फ की तरह पिघल जाएंगे, लेकिन केवल एक ही चीज अछूती रहेगी और वह है व्लादिमीर का गौरव। इसे जानकार व्लादिमीर पुतिन और रूस के सबसे ताकतवर होने से जोड़ रहे हैं।
बाबा वेंगा (Baba Vanga) मे अपनी मौत से पहले परमाणु हथियारों के इस्तेमाल और तीसरे विश्व युद्ध को लेकर भी भविष्यवाणी की थी। कई रिपोर्ट्स में इसे रूस और यूक्रेन युद्ध से जोड़ा गया है और दावा किया गया है कि यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकता है, जिस दौरान परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हो सकता है। बता दें कि रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच कई बार परमाणु हमले की चर्चा हो चुकी है।
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रूस और यूक्रेन को ग्यारह महीने का समय हो गया है और ये जंग वैसे की ही वैसी जारी है और रूसी सेना ने अब तक यूक्रेन में भीषण तबाही मचाई है। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत को तैयार है और अब सबकुछ उन पर निर्भर करता है। हालांकि, इस दौरान रूस की तरफ से यूक्रेन पर हमले लगातार जारी है। लेकिन अब एक बार फिर से बुल्गारिया की भविष्यवक्ता बाबा वेंगा की पुतिन और रूस को लेकर सालों पहले की गई भविष्यवाणी की एक बार फिर चर्चा होने लगी है। बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों की मानें तो साल दो हज़ार तेईस में व्लादिमीर पुतिन दुनियाभर में अपना वर्चस्व स्थापित कर सकते हैं। बाबा वेंगा ने सालों पहले इस बात की भविष्यवाणी कर दी थी व्लादिमीर पुतिन दुनिया के सबसे ताकतवर व्यक्ति बन सकते हैं, जो इस साल सही साबित हो सकती है। बता दें, बाबा वेंगा ने तो सैलून सालों पहले इस बात की भी भविष्यवाणी कर दी थी कि रूस दुनिया पर राज करेगा। इसके साथ ही बाबा वेंगा ने रूस को 'Lord of the World' यानी दुनिया का स्वामी बनने की भी भविष्यवाणी की थी। रूस को कोई नहीं रोक सकता और वह सभी को रास्ते से हटा देगा। बाबा वेंगा ने अपनी भविष्यवाणी में कहा था, सब बर्फ की तरह पिघल जाएंगे, लेकिन केवल एक ही चीज अछूती रहेगी और वह है व्लादिमीर का गौरव। इसे जानकार व्लादिमीर पुतिन और रूस के सबसे ताकतवर होने से जोड़ रहे हैं। बाबा वेंगा मे अपनी मौत से पहले परमाणु हथियारों के इस्तेमाल और तीसरे विश्व युद्ध को लेकर भी भविष्यवाणी की थी। कई रिपोर्ट्स में इसे रूस और यूक्रेन युद्ध से जोड़ा गया है और दावा किया गया है कि यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकता है, जिस दौरान परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हो सकता है। बता दें कि रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच कई बार परमाणु हमले की चर्चा हो चुकी है।
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भारत के संविधान में अनुसूचित जनजातियों हेतु दो प्रकार के प्रावधान किये गये हैं। एक प्रावधान व्यक्तिगत मूल अधिकार के अंतर्गत आते हैं एवं दूसरे सामुदायिक अधिकारों के अंतर्गत आते हैं। भारत की जनजातियों को संविधान के अनुच्छेद 342 के अनुसार चिह्नित किया गया है, जिसके तहत राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर उनकी पहचान को स्थापित करते हुए एक सूची जारी की जाती है। उस सूची में अनुसूचित जनजातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा संविधान के अनुरूप दिया गया है।
1935 के भारत शासन अधिनियम के अनुसार भारत के जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यतः दो भागों में बांटा गया है, जिसे हम आंशिक एक्सक्लूटेड ऐरिया और पूर्ण एक्सक्लूटेड ऐरिया के नाम से जानते हैं। इस मूल्य उद्देश्य जनजातीय बहुल क्षेत्रों में अंग्रेजों के द्वारा शासन व्यवस्था को कायम रखना था। परन्तु पर्दे के पीछे अंग्रेजों द्वारा कन्वर्जन जो की व्यवस्था थी, उसके सुचारू रूप से चलने के लिए यह व्यवस्थाएं की गई थीं। आजादी के पश्चात् जनजातियों के विकास को प्राथमिकता दी गई एवं उनकी संस्कृति, रीति-रिवाज, परंपराओं को नेपथ्य में डाल दिया गया। बेरियर एल्विन जैसे कई अंग्रेजी इवेंजलिस्ट भारत सरकार के सलाहकार नियुक्त कर दिये गये तथा जिन्होंने प्रमुखता से जनजातीय क्षेत्रों को पाश्चात्य विचारधारा के अनुसार विकसित करने का प्रयास किया।
कौन है असली जनजाति ?
आज का प्रश्न बहुत जटिल है। प्रश्न यह है कि असली जनजाति कौन है? वे जो अपने रीति-रिवाज, धर्म, परम्परा त्यागकर विकसित हो चुके हैं और जिन्होंने मतांतरण कर लिया है अथवा वे जो आज भी उन रीति-रिवाज, संस्कृति, परम्पराओं को मानकर विकसित होने के साथ-साथ अपनी संस्कृति संरक्षण का कार्य करते हुए अपनी पहचान को बरकरार रखे हुए है।
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मतांतरित वनवासी शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से उस वनवासी से अधिक सम्पन्न है, जो अभी भी अपने मूल रीति-रिवाज, परम्पराओं के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आजादी के 70 वर्षों का इतिहास रहा है कि वनवासियों के लिए दी गई शिक्षा और नौकरी में आरक्षण की सारी सुविधाएं अधिकांश मतांतरित वनवासियों ने ग्रहण कर ली। इसके उलटे जिन्हें इसकी वास्तविक आवश्यकता थी उन्हें शिक्षा के अभाव एवं अन्य चीज़ों के अभाव के कारण अवसर प्राप्त नहीं हो सके।
पद्मश्री डॉ. बजाज ने अपनी रिपोर्ट में इन बातों को बहुत प्रमुखता से लिखा है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के वर्ग-एक, वर्ग-दो के महत्वपूर्ण पदों पर अधिकांश मतांतरित वनवासी ही कार्यरत हैं।
प्रश्न यह नहीं कि कोई अपनी स्वेच्छा से अपना कन्वर्जन कर ले। प्रश्न यह है कि वनवासी या जनजाति होने के मूल प्रश्न पर पर ही कुठाराघात किया गया है। यह सर्वविदित है कि वनवासी प्रकृतिपूजक होते हैं। वे प्रकृति के विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना करते हैं एवं यह उनके रीति-रिवाज, परम्परा, संस्कृति की मूल आस्था के केन्द्र हैं। मोटे शब्दों में कहा जाये, तो यह कहा जा सकता है कि भारत के वनवासी सूर्यपूजक, नागपूजक अथवा शिवपूजक हैं। इसके विपरीत पाश्चात्य के दो सिमेटिक धर्मग्रन्थों में इन प्रकार की पूजा अर्चनाओं की कतई अनुमति नहीं है। बशर्ते मतांतरित वनवासियों को यह धर्म धोखे में रखकर उन्हें यह दर्शा रहे हैं कि मतातंरित होने से भी उनकी मूल आस्थाएं खंडित नहीं होंगी।
वर्तमान में जो प्रश्न खड़े किये जा रहे हैं, जिसके तहत यह यह मांग की जा रही है कि जो लोग अपनी मूल धर्म-संस्कृति त्याग चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। यह मांग बाबा कार्तिक उरांव ने प्रमुखता से अपनी पुस्तक 'बीस वर्ष की काली रात' में लिखी। जिसमें यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार जेपीसी द्वारा भी इस बात को माना गया कि मतांतरित जनजाति को दोहरा लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। परन्तु आज के परिवेश में न्यायालयीन व्यवस्था के बीच इस उपबन्ध को या कहें कि अनुच्छेद 342 के संशोधन को माना पारित कर पाना एक कठिन कार्य है। इसका एक रास्ता तो संविधान संशोधन से निकलता है, जिसके तहत अनुच्छेद 341 के अनुरूप ही अनुच्छेद 342 में भी यह संशोधन कर दिये जायें कि जिस प्रकार अनुच्छेद-341 में विदेशी धर्म स्वीकार करने वालों को अनुसूचित जाति का लाभ नहीं दिया जाता, उसी प्रकार अनुच्छेद-342 में भी विदेशी धर्म अथवा वे धर्म जिसमें प्रकृति पूजा की अनुमति नहीं है, उन्हें स्वीकार करने वालों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा न दिया जाये। परन्तु हम सभी जानते हैं कि वर्तमान में मूल अधिकारों के किसी भी प्रकार के संशोधन पर अथवा मतांतरित व्यक्तियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए एक पूरा इको सिस्टम कार्य में लग जाता है तथा पूरे विश्व की शक्तियां इस बदलाव को रोकने के लिए सारे संसाधन को लेकर इस युद्ध में दौड़ पड़ते हैं।
इस बात में कतई संशय नहीं किया जा सकता कि जैसे ही डी-लिस्टिंग की मांग के लिए किसी भी प्रकार का प्रस्ताव लाया जायेगा, तो इस संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 15(4) एवं 16(4) के तहत मतांतरित वनवासियों को मिलने वाली शैक्षणिक एवं नौकरी में आरक्षण से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को संविधान के मूल ढांचे के साथ छेड़छाड़ कहते हुए कई संगठन सुप्रीम कोर्ट अथवा अन्य न्यायालयों में अपनी याचिकाएं दायर करेंगे, जिसके तहत इस संशोधन का मूल उद्देश्य ही रास्ते से भटक जायेगा।
मेरा मानना है कि आज डी-लिस्टिंग को जमीनी स्तर पर लाने के लिए हमें दो चरणों में कार्य करने की आवश्यकता है। पहला चरण अनुसूचित जनजातियों के मूल अधिकारों में संशोधन किए बिना उनके सामुदायिक अधिकारों में संशोधन की बात की जाये। उन्हें जनजाति समुदाय के हिस्सा होने के कारण जो लाभ प्रदाय किये जाते हैं, उससे वंछित रखा जाये। एवं उनके पैतृक सम्पत्ति एवं मूल अधिकारों के प्राप्ति पर संशोधन को दूसरे चरण की ओर रखा जाये। इन दोनों चरणों के बीच में एक रास्ता मतांतरित वनवासियों के वापस वनवासी संस्कृति पर लौटने के लिए भी खोला जा सके, ताकि जब सर्वसमाज में यह बात हो कि आज नहीं तो कल मतांतरित व्यक्ति आरक्षण का लाभ खो देगा, तो वे वापसी के लिए भी आ सकें। इस प्रकार की कोई व्यवस्था होना चाहिए।
सामुदायिक लाभों में दो प्रमुख लाभ हैं- राजनैतिक आरक्षण का लाभ। जिसे हम अनुच्छेद-340 के तहत लाभ कह सकते हैं। इस लाभ के अंतर्गत पंचायत से लेकर संसद तक अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को उसकी जनसंख्या के अनुपात में जनप्रतिनिधित्व करने के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं। मैं मानता हूं कि यह पीपल्स रिप्रजेंटेशन एक्ट यह संशोधन किया जा सकता है क्योंकि संविधान के यह अनुच्छेद शुरूआत में केवल 10 वर्षों के लिए थे एवं समयांतर में इन्हे 10-10 वर्षों के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है। राजनैतिक आरक्षण में हम लोकूर कमेटी द्वारा दिए गए लिटमस टेस्ट का भी उल्लेख कर सकते हैं। जिसके तहत इस बात को स्थापित किया गया है कि अनुसूचित जनजाति का कोई व्यक्ति सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक रूप से पिछड़े हुए होने चाहिए और यह बात किसी से छिपे हुए नहीं हैं। और यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मतांतरित व्यक्ति न ही सामाजिक रूप से और न ही आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। इसलिए उन्हें उन जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने हेतु योग्य नहीं माना जाना चाहिए जो मतांतरित नहीं हुए हैं।
मैं समझता हूं कि यह बात अगर पंचायत से संसद तक मतांतरित वनवासियों को उन वनवासियों का प्रतिनिधित्व करने से वंछित कर दे, जो मतातंरित हो चुके हैं, तो मूल अधिकारों में हम छेड़छाड़ से भी बच जायेंगे। और समाज में एक बहुत बड़ा संदेश यह जायेगा कि किसी भी मतांतरित व्यक्ति को गैर मतांतरित लोगों का प्रतिनिधित्व करने का कोई अधिकार नहीं है। इसका एक बड़ा प्रभाव निर्वाचन में जनजाति बहुल राज्यों में भी पड़ा, जिसका लाभ साफ तौर पर उन गैर मतांतरित वनवासियों को मिलेगा। जिसका प्रतिनिधित्व कहीं न कहीं मतातंरित व्यक्ति करके उनके व्यक्तित्व की आवाज को ही दबा देते हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि जयपाल सिंह मुंडा एक मतांतरित व्यक्ति थे कि किस प्रकार अनुच्छेद 342 में मतांतरण उपरांत आरक्षण की व्यवस्था चालू रहने के लिए मुखरता से अपना पक्ष रखा है। डीस्टिंग के अभियान में लड़ाई लम्बी होगी। क्योंकि मतांतरित व्यक्तियों का जो इकोसिस्टम है। पूरी दुनिया में फैला हुआ है और वनवासियों के जल-जंगल-जमीन पर किसकी निगाह है। पैसा कानून में जिस प्रकार संस्कृति संरक्षण के उपबन्ध किये गये हैं, वो उनके मतांतरण के आढ़े आ रहे हैं। इसलिए हमें यह आवश्यक है कि इस लड़ाई का संवैधानिक दृष्टिकोण एवं वैधानिक दृष्टिकोण से समीक्षा की जाये। ताकि एक बड़े जनआंदोलन के बाद न्यायालयों से इस प्रकार के संवैधानिक संशोधन के विफल होने का कोई भी विकल्प उपलब्ध न हो।
अन्त में यह बात तय है कि जिस प्रकार प्रलोभन देकर मतांतरण की व्यवस्था पिछले कई दशकों से चालू है उसमें रोक लग सकती है। बस आवश्यकता है कि अपनी रीति-रिवाज, संस्कृति को मानने वाले जनजातीय समाज को संगठित होकर राजनैतिक रूप से मतांतरित व्यक्तियों को बहिष्कृत करने की व्यवस्था है। मतांतरित व्यक्ति के पैतृक सम्पत्ति के अधिकार यथावत रहेंगे अथवा डी-लिस्टिंग उपरांत उसकी पैतृक सम्पत्ति भी डी-लिस्ट हो जायेगी। यह एक बड़ा जटिल प्रश्न है। अगर मतांतरित व्यक्ति को डी-लिस्टिंग के उपरांत भी उसकी पैतृक सम्पत्ति संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गैर जनजातीय होते हुए मिल गई, तो बड़ी संख्या में जनजातियों की भूमिका हस्तांतरण एवं क्रय-विक्रय गैर जनजातियों के हाथ में होने लगेगी। और यह एक बड़ा हथियार धर्मांतरण के लिए साबित होगा। इसलिए मैं उस मध्यमार्ग का पक्षधर हूँ। जहां पर मतांतरित व्यक्ति की पैतृक और मूल अधिकारों में छेड़छाड़ न करते हुए मतांरित व्यक्तियों के राजनैतिक आरक्षण पर कुठाराघात किया जाये, ताकि इस जटिल समस्या का समाधान संवैधानिक दायरे के भीतर रहकर किया जा सके।
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भारत के संविधान में अनुसूचित जनजातियों हेतु दो प्रकार के प्रावधान किये गये हैं। एक प्रावधान व्यक्तिगत मूल अधिकार के अंतर्गत आते हैं एवं दूसरे सामुदायिक अधिकारों के अंतर्गत आते हैं। भारत की जनजातियों को संविधान के अनुच्छेद तीन सौ बयालीस के अनुसार चिह्नित किया गया है, जिसके तहत राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर उनकी पहचान को स्थापित करते हुए एक सूची जारी की जाती है। उस सूची में अनुसूचित जनजातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा संविधान के अनुरूप दिया गया है। एक हज़ार नौ सौ पैंतीस के भारत शासन अधिनियम के अनुसार भारत के जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यतः दो भागों में बांटा गया है, जिसे हम आंशिक एक्सक्लूटेड ऐरिया और पूर्ण एक्सक्लूटेड ऐरिया के नाम से जानते हैं। इस मूल्य उद्देश्य जनजातीय बहुल क्षेत्रों में अंग्रेजों के द्वारा शासन व्यवस्था को कायम रखना था। परन्तु पर्दे के पीछे अंग्रेजों द्वारा कन्वर्जन जो की व्यवस्था थी, उसके सुचारू रूप से चलने के लिए यह व्यवस्थाएं की गई थीं। आजादी के पश्चात् जनजातियों के विकास को प्राथमिकता दी गई एवं उनकी संस्कृति, रीति-रिवाज, परंपराओं को नेपथ्य में डाल दिया गया। बेरियर एल्विन जैसे कई अंग्रेजी इवेंजलिस्ट भारत सरकार के सलाहकार नियुक्त कर दिये गये तथा जिन्होंने प्रमुखता से जनजातीय क्षेत्रों को पाश्चात्य विचारधारा के अनुसार विकसित करने का प्रयास किया। कौन है असली जनजाति ? आज का प्रश्न बहुत जटिल है। प्रश्न यह है कि असली जनजाति कौन है? वे जो अपने रीति-रिवाज, धर्म, परम्परा त्यागकर विकसित हो चुके हैं और जिन्होंने मतांतरण कर लिया है अथवा वे जो आज भी उन रीति-रिवाज, संस्कृति, परम्पराओं को मानकर विकसित होने के साथ-साथ अपनी संस्कृति संरक्षण का कार्य करते हुए अपनी पहचान को बरकरार रखे हुए है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मतांतरित वनवासी शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से उस वनवासी से अधिक सम्पन्न है, जो अभी भी अपने मूल रीति-रिवाज, परम्पराओं के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आजादी के सत्तर वर्षों का इतिहास रहा है कि वनवासियों के लिए दी गई शिक्षा और नौकरी में आरक्षण की सारी सुविधाएं अधिकांश मतांतरित वनवासियों ने ग्रहण कर ली। इसके उलटे जिन्हें इसकी वास्तविक आवश्यकता थी उन्हें शिक्षा के अभाव एवं अन्य चीज़ों के अभाव के कारण अवसर प्राप्त नहीं हो सके। पद्मश्री डॉ. बजाज ने अपनी रिपोर्ट में इन बातों को बहुत प्रमुखता से लिखा है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के वर्ग-एक, वर्ग-दो के महत्वपूर्ण पदों पर अधिकांश मतांतरित वनवासी ही कार्यरत हैं। प्रश्न यह नहीं कि कोई अपनी स्वेच्छा से अपना कन्वर्जन कर ले। प्रश्न यह है कि वनवासी या जनजाति होने के मूल प्रश्न पर पर ही कुठाराघात किया गया है। यह सर्वविदित है कि वनवासी प्रकृतिपूजक होते हैं। वे प्रकृति के विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना करते हैं एवं यह उनके रीति-रिवाज, परम्परा, संस्कृति की मूल आस्था के केन्द्र हैं। मोटे शब्दों में कहा जाये, तो यह कहा जा सकता है कि भारत के वनवासी सूर्यपूजक, नागपूजक अथवा शिवपूजक हैं। इसके विपरीत पाश्चात्य के दो सिमेटिक धर्मग्रन्थों में इन प्रकार की पूजा अर्चनाओं की कतई अनुमति नहीं है। बशर्ते मतांतरित वनवासियों को यह धर्म धोखे में रखकर उन्हें यह दर्शा रहे हैं कि मतातंरित होने से भी उनकी मूल आस्थाएं खंडित नहीं होंगी। वर्तमान में जो प्रश्न खड़े किये जा रहे हैं, जिसके तहत यह यह मांग की जा रही है कि जो लोग अपनी मूल धर्म-संस्कृति त्याग चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। यह मांग बाबा कार्तिक उरांव ने प्रमुखता से अपनी पुस्तक 'बीस वर्ष की काली रात' में लिखी। जिसमें यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार जेपीसी द्वारा भी इस बात को माना गया कि मतांतरित जनजाति को दोहरा लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। परन्तु आज के परिवेश में न्यायालयीन व्यवस्था के बीच इस उपबन्ध को या कहें कि अनुच्छेद तीन सौ बयालीस के संशोधन को माना पारित कर पाना एक कठिन कार्य है। इसका एक रास्ता तो संविधान संशोधन से निकलता है, जिसके तहत अनुच्छेद तीन सौ इकतालीस के अनुरूप ही अनुच्छेद तीन सौ बयालीस में भी यह संशोधन कर दिये जायें कि जिस प्रकार अनुच्छेद-तीन सौ इकतालीस में विदेशी धर्म स्वीकार करने वालों को अनुसूचित जाति का लाभ नहीं दिया जाता, उसी प्रकार अनुच्छेद-तीन सौ बयालीस में भी विदेशी धर्म अथवा वे धर्म जिसमें प्रकृति पूजा की अनुमति नहीं है, उन्हें स्वीकार करने वालों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा न दिया जाये। परन्तु हम सभी जानते हैं कि वर्तमान में मूल अधिकारों के किसी भी प्रकार के संशोधन पर अथवा मतांतरित व्यक्तियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए एक पूरा इको सिस्टम कार्य में लग जाता है तथा पूरे विश्व की शक्तियां इस बदलाव को रोकने के लिए सारे संसाधन को लेकर इस युद्ध में दौड़ पड़ते हैं। इस बात में कतई संशय नहीं किया जा सकता कि जैसे ही डी-लिस्टिंग की मांग के लिए किसी भी प्रकार का प्रस्ताव लाया जायेगा, तो इस संशोधन के द्वारा अनुच्छेद पंद्रह एवं सोलह के तहत मतांतरित वनवासियों को मिलने वाली शैक्षणिक एवं नौकरी में आरक्षण से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को संविधान के मूल ढांचे के साथ छेड़छाड़ कहते हुए कई संगठन सुप्रीम कोर्ट अथवा अन्य न्यायालयों में अपनी याचिकाएं दायर करेंगे, जिसके तहत इस संशोधन का मूल उद्देश्य ही रास्ते से भटक जायेगा। मेरा मानना है कि आज डी-लिस्टिंग को जमीनी स्तर पर लाने के लिए हमें दो चरणों में कार्य करने की आवश्यकता है। पहला चरण अनुसूचित जनजातियों के मूल अधिकारों में संशोधन किए बिना उनके सामुदायिक अधिकारों में संशोधन की बात की जाये। उन्हें जनजाति समुदाय के हिस्सा होने के कारण जो लाभ प्रदाय किये जाते हैं, उससे वंछित रखा जाये। एवं उनके पैतृक सम्पत्ति एवं मूल अधिकारों के प्राप्ति पर संशोधन को दूसरे चरण की ओर रखा जाये। इन दोनों चरणों के बीच में एक रास्ता मतांतरित वनवासियों के वापस वनवासी संस्कृति पर लौटने के लिए भी खोला जा सके, ताकि जब सर्वसमाज में यह बात हो कि आज नहीं तो कल मतांतरित व्यक्ति आरक्षण का लाभ खो देगा, तो वे वापसी के लिए भी आ सकें। इस प्रकार की कोई व्यवस्था होना चाहिए। सामुदायिक लाभों में दो प्रमुख लाभ हैं- राजनैतिक आरक्षण का लाभ। जिसे हम अनुच्छेद-तीन सौ चालीस के तहत लाभ कह सकते हैं। इस लाभ के अंतर्गत पंचायत से लेकर संसद तक अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को उसकी जनसंख्या के अनुपात में जनप्रतिनिधित्व करने के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं। मैं मानता हूं कि यह पीपल्स रिप्रजेंटेशन एक्ट यह संशोधन किया जा सकता है क्योंकि संविधान के यह अनुच्छेद शुरूआत में केवल दस वर्षों के लिए थे एवं समयांतर में इन्हे दस-दस वर्षों के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है। राजनैतिक आरक्षण में हम लोकूर कमेटी द्वारा दिए गए लिटमस टेस्ट का भी उल्लेख कर सकते हैं। जिसके तहत इस बात को स्थापित किया गया है कि अनुसूचित जनजाति का कोई व्यक्ति सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक रूप से पिछड़े हुए होने चाहिए और यह बात किसी से छिपे हुए नहीं हैं। और यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मतांतरित व्यक्ति न ही सामाजिक रूप से और न ही आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। इसलिए उन्हें उन जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने हेतु योग्य नहीं माना जाना चाहिए जो मतांतरित नहीं हुए हैं। मैं समझता हूं कि यह बात अगर पंचायत से संसद तक मतांतरित वनवासियों को उन वनवासियों का प्रतिनिधित्व करने से वंछित कर दे, जो मतातंरित हो चुके हैं, तो मूल अधिकारों में हम छेड़छाड़ से भी बच जायेंगे। और समाज में एक बहुत बड़ा संदेश यह जायेगा कि किसी भी मतांतरित व्यक्ति को गैर मतांतरित लोगों का प्रतिनिधित्व करने का कोई अधिकार नहीं है। इसका एक बड़ा प्रभाव निर्वाचन में जनजाति बहुल राज्यों में भी पड़ा, जिसका लाभ साफ तौर पर उन गैर मतांतरित वनवासियों को मिलेगा। जिसका प्रतिनिधित्व कहीं न कहीं मतातंरित व्यक्ति करके उनके व्यक्तित्व की आवाज को ही दबा देते हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि जयपाल सिंह मुंडा एक मतांतरित व्यक्ति थे कि किस प्रकार अनुच्छेद तीन सौ बयालीस में मतांतरण उपरांत आरक्षण की व्यवस्था चालू रहने के लिए मुखरता से अपना पक्ष रखा है। डीस्टिंग के अभियान में लड़ाई लम्बी होगी। क्योंकि मतांतरित व्यक्तियों का जो इकोसिस्टम है। पूरी दुनिया में फैला हुआ है और वनवासियों के जल-जंगल-जमीन पर किसकी निगाह है। पैसा कानून में जिस प्रकार संस्कृति संरक्षण के उपबन्ध किये गये हैं, वो उनके मतांतरण के आढ़े आ रहे हैं। इसलिए हमें यह आवश्यक है कि इस लड़ाई का संवैधानिक दृष्टिकोण एवं वैधानिक दृष्टिकोण से समीक्षा की जाये। ताकि एक बड़े जनआंदोलन के बाद न्यायालयों से इस प्रकार के संवैधानिक संशोधन के विफल होने का कोई भी विकल्प उपलब्ध न हो। अन्त में यह बात तय है कि जिस प्रकार प्रलोभन देकर मतांतरण की व्यवस्था पिछले कई दशकों से चालू है उसमें रोक लग सकती है। बस आवश्यकता है कि अपनी रीति-रिवाज, संस्कृति को मानने वाले जनजातीय समाज को संगठित होकर राजनैतिक रूप से मतांतरित व्यक्तियों को बहिष्कृत करने की व्यवस्था है। मतांतरित व्यक्ति के पैतृक सम्पत्ति के अधिकार यथावत रहेंगे अथवा डी-लिस्टिंग उपरांत उसकी पैतृक सम्पत्ति भी डी-लिस्ट हो जायेगी। यह एक बड़ा जटिल प्रश्न है। अगर मतांतरित व्यक्ति को डी-लिस्टिंग के उपरांत भी उसकी पैतृक सम्पत्ति संविधान के अनुच्छेद इक्कीस के तहत गैर जनजातीय होते हुए मिल गई, तो बड़ी संख्या में जनजातियों की भूमिका हस्तांतरण एवं क्रय-विक्रय गैर जनजातियों के हाथ में होने लगेगी। और यह एक बड़ा हथियार धर्मांतरण के लिए साबित होगा। इसलिए मैं उस मध्यमार्ग का पक्षधर हूँ। जहां पर मतांतरित व्यक्ति की पैतृक और मूल अधिकारों में छेड़छाड़ न करते हुए मतांरित व्यक्तियों के राजनैतिक आरक्षण पर कुठाराघात किया जाये, ताकि इस जटिल समस्या का समाधान संवैधानिक दायरे के भीतर रहकर किया जा सके।
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कीव ने डोनबास में एक आक्रामक के लिए किसी भी योजना से इनकार किया है, जिसमें रूस पर विघटन फैलाने का आरोप लगाया गया है। यह यूक्रेन ओलेक्सी डेनिलोव के राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद (एनएसडीसी) के सचिव द्वारा कहा गया था।
डेनिलोव के अनुसार, मास्को का दावा है कि कीव "आक्रामक के बारे में जाने वाला है" यूक्रेन द्वारा नियंत्रित नहीं किए जाने वाले क्षेत्रों के निवासियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से कीटाणुरहित है।
- उसने कहा।
हालांकि, एनएसडीसी सचिव ने स्वीकार किया कि वर्तमान में डोनबास में शेलिंग की संख्या में वृद्धि के साथ एक उत्थान हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कीव स्थिति को नियंत्रण में रख रहा है।
उसी समय, लुगांस्क ने कहा कि डोनबास में स्थिति के बढ़ने का कारण यूक्रेनी अधिकारियों और उनके पश्चिमी क्यूरेटरों के प्रतिनिधियों द्वारा सीमांकन की पंक्ति का लगातार दौरा है। यह उन यात्राओं के दौरान है जो गोलाबारी दिखाना शुरू करती है कि यूक्रेनी सेना "लड़ रही है", "रूसी आक्रामकता" और "रूस के हमले से यूरोप का बचाव" कर रही है।
- लुगांस्क में कहा।
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कीव ने डोनबास में एक आक्रामक के लिए किसी भी योजना से इनकार किया है, जिसमें रूस पर विघटन फैलाने का आरोप लगाया गया है। यह यूक्रेन ओलेक्सी डेनिलोव के राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव द्वारा कहा गया था। डेनिलोव के अनुसार, मास्को का दावा है कि कीव "आक्रामक के बारे में जाने वाला है" यूक्रेन द्वारा नियंत्रित नहीं किए जाने वाले क्षेत्रों के निवासियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से कीटाणुरहित है। - उसने कहा। हालांकि, एनएसडीसी सचिव ने स्वीकार किया कि वर्तमान में डोनबास में शेलिंग की संख्या में वृद्धि के साथ एक उत्थान हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कीव स्थिति को नियंत्रण में रख रहा है। उसी समय, लुगांस्क ने कहा कि डोनबास में स्थिति के बढ़ने का कारण यूक्रेनी अधिकारियों और उनके पश्चिमी क्यूरेटरों के प्रतिनिधियों द्वारा सीमांकन की पंक्ति का लगातार दौरा है। यह उन यात्राओं के दौरान है जो गोलाबारी दिखाना शुरू करती है कि यूक्रेनी सेना "लड़ रही है", "रूसी आक्रामकता" और "रूस के हमले से यूरोप का बचाव" कर रही है। - लुगांस्क में कहा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसी के साथ ऐसा करने वाले वे भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे।
वर्चुअली हो रही इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समुद्री सुरक्षा पर एक ओपन डिस्कशन की अध्यक्षता करेंगे। यूनाइटेड नेशन में भारत के पूर्व राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि 75 साल में ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारत का कोई प्रधानमंत्री UNSC मीटिंग की अध्यक्षता करेगा। 1 अगस्त को ही भारत के पास UNSC की अध्यक्षता आई है। पूरे अगस्त महीने तक भारत UNSC का अध्यक्ष रहेगा।
सबसे पहले समझिए UNSC क्या है?
UNSC यूनाइ़टेड नेशंस के 6 प्रमुख अंगों में से एक है। इसका काम दुनिया भर में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देकर देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्रोत्साहित करना है। दरअसल 20वीं सदी के शुरुआती 5 दशकों में ही दुनिया ने दो विश्वयुद्धों की भीषण त्रासदी देखी थी। इस वजह से कई देश पूरी तरह बर्बाद हो गए थे। पूरी दुनिया में अशांति का माहौल था। एक ऐसी संस्था की मांग उठने लगी थी जो देशों के बीच शांति और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में काम करे। इसी के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना हुई।
सुरक्षा परिषद की पहली बैठक 17 जनवरी 1946 को हुई थी। गठन के समय सुरक्षा परिषद में 11 सदस्य थे जिसे 1965 में बढ़ाकर 15 कर दिया गया।
कौन-कौन से देश सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं?
सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य देश हैं, जिन्हें स्थायी और अस्थायी सदस्यता दी गई है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन 5 स्थायी सदस्य हैं। स्थायी सदस्यों के पास वीटो पावर होता है। स्थायी सदस्य इसका इस्तेमाल कर किसी भी प्रस्ताव को पास होने से रोक सकते हैं।
इनके अलावा सुरक्षा परिषद में 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। इन अस्थायी सदस्यों का चयन क्षेत्रीय आधार पर किया जाता है। अफ्रीका और एशियाई देशों से 5, पूर्वी यूरोपीय देशों से 1, लैटिन अमेरिकी और कैरिबियाई देशों से 2 और पश्चिमी यूरोपीय और अन्य 2 देशों का चयन किया जाता है।
अस्थायी सदस्य बनने के लिए वोटिंग होती है। किसी देश को तभी सदस्य बनाया जाता है जब UN के दो-तिहाई देश उस देश के पक्ष में वोटिंग करते हैं। भारत इस साल जनवरी में ही UNSC का अस्थायी सदस्य बना है। पिछले साल जून में हुई वोटिंग में भारत को 192 में से 184 वोट मिले थे। भारत 31 दिसंबर 2022 तक सुरक्षा परिषद का सदस्य रहेगा।
अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल 2 साल का होता है। हर साल 5 नए सदस्यों के लिए चुनाव होता है।
भारत स्थायी सदस्य क्यों नहीं है?
भारत UNSC का स्थायी सदस्य नहीं है। भारत स्थायी सदस्य बनने के लिए काफी समय से प्रयास कर रहा है, लेकिन भारत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा चीन है। चीन हर बार अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर भारत को स्थायी सदस्य बनने से रोक देता है। चीन के अलावा फ्रांस, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने पर अपनी सहमति जता चुके हैं।
पिछले करीब 4 दशकों से UNSC के स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग भी उठती रही है। देशों का कहना है कि UNSC में स्थायी और अस्थायी सदस्य बनने का मॉडल प्रजातांत्रिक नहीं है। स्थायी सदस्यों को विशेष शक्तियां मिली हुई हैं जो भेदभावपूर्ण है।
साथ ही UNSC में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व भी कम है, लेकिन स्थायी सदस्य नहीं चाहते कि इसमें किसी तरह का बदलाव हो और किसी दूसरे देश को वीटो पावर मिले। भारत के अलावा जापान, जर्मनी और ब्राजील भी सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने का प्रयास कर रहे हैं।
भारत क्यों इसका परमानेंट मेंबर बनना चाहता है?
सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज, जेएनयू के प्रोफेसर डॉक्टर सुधीर सुथार के मुताबिक, इसके 3 कारण हैं।
चीन भारत का विरोध क्यों करता है?
चीन और भारत के रिश्तों में सीमा विवाद एक बड़ा मुद्दा है। चीन को डर है कि अगर भारत UNSC का स्थायी सदस्य बनेगा तो वो उसके समकक्ष आ जाएगा। इससे दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की वर्तमान स्थिति पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही चीन और पाकिस्तान की गुटबंदी भी इसकी वजह है। भारत का चीन और पाकिस्तान दोनों से सीमा विवाद चलता रहता है। अगर भारत स्थायी सदस्य बना तो चीन के दोस्त पाकिस्तान के लिए भी ये अच्छा नहीं होगा।
भारत का स्थायी सदस्य बनने से क्या बदलेगा?
दरअसल इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में किसी भी देश की भूमिका कई तरह के फैक्टर पर निर्भर करती है। आर्थिक स्थिति, डिप्लोमेटिक रिलेशंस, रिसर्च और डेवलपमेंट से लेकर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इसमें शामिल हैं। भारत के लिहाज से देखा जाए तो ये एक सिम्बॉलिक स्थिति होगी। इससे इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में भारत की भूमिका जरूर बढ़ेगी।
भारत कैसे बना है सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष?
दरअसल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता हर महीने बदलती रहती है। अंग्रेजी शब्दों के क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर के हिसाब से हर महीने नए सदस्य देश को अध्यक्षता मिलती है। भारत से पहले जुलाई में सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता फ्रांस के पास थी। सितंबर में आयरलैंड को यह जिम्मेदारी मिलेगी। अपने 2 साल के कार्यकाल में भारत 2 बार सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष बनेगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसी के साथ ऐसा करने वाले वे भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे। वर्चुअली हो रही इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समुद्री सुरक्षा पर एक ओपन डिस्कशन की अध्यक्षता करेंगे। यूनाइटेड नेशन में भारत के पूर्व राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि पचहत्तर साल में ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारत का कोई प्रधानमंत्री UNSC मीटिंग की अध्यक्षता करेगा। एक अगस्त को ही भारत के पास UNSC की अध्यक्षता आई है। पूरे अगस्त महीने तक भारत UNSC का अध्यक्ष रहेगा। सबसे पहले समझिए UNSC क्या है? UNSC यूनाइ़टेड नेशंस के छः प्रमुख अंगों में से एक है। इसका काम दुनिया भर में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देकर देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्रोत्साहित करना है। दरअसल बीसवीं सदी के शुरुआती पाँच दशकों में ही दुनिया ने दो विश्वयुद्धों की भीषण त्रासदी देखी थी। इस वजह से कई देश पूरी तरह बर्बाद हो गए थे। पूरी दुनिया में अशांति का माहौल था। एक ऐसी संस्था की मांग उठने लगी थी जो देशों के बीच शांति और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में काम करे। इसी के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना हुई। सुरक्षा परिषद की पहली बैठक सत्रह जनवरी एक हज़ार नौ सौ छियालीस को हुई थी। गठन के समय सुरक्षा परिषद में ग्यारह सदस्य थे जिसे एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में बढ़ाकर पंद्रह कर दिया गया। कौन-कौन से देश सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं? सुरक्षा परिषद में कुल पंद्रह सदस्य देश हैं, जिन्हें स्थायी और अस्थायी सदस्यता दी गई है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन पाँच स्थायी सदस्य हैं। स्थायी सदस्यों के पास वीटो पावर होता है। स्थायी सदस्य इसका इस्तेमाल कर किसी भी प्रस्ताव को पास होने से रोक सकते हैं। इनके अलावा सुरक्षा परिषद में दस अस्थायी सदस्य होते हैं। इन अस्थायी सदस्यों का चयन क्षेत्रीय आधार पर किया जाता है। अफ्रीका और एशियाई देशों से पाँच, पूर्वी यूरोपीय देशों से एक, लैटिन अमेरिकी और कैरिबियाई देशों से दो और पश्चिमी यूरोपीय और अन्य दो देशों का चयन किया जाता है। अस्थायी सदस्य बनने के लिए वोटिंग होती है। किसी देश को तभी सदस्य बनाया जाता है जब UN के दो-तिहाई देश उस देश के पक्ष में वोटिंग करते हैं। भारत इस साल जनवरी में ही UNSC का अस्थायी सदस्य बना है। पिछले साल जून में हुई वोटिंग में भारत को एक सौ बानवे में से एक सौ चौरासी वोट मिले थे। भारत इकतीस दिसंबर दो हज़ार बाईस तक सुरक्षा परिषद का सदस्य रहेगा। अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होता है। हर साल पाँच नए सदस्यों के लिए चुनाव होता है। भारत स्थायी सदस्य क्यों नहीं है? भारत UNSC का स्थायी सदस्य नहीं है। भारत स्थायी सदस्य बनने के लिए काफी समय से प्रयास कर रहा है, लेकिन भारत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा चीन है। चीन हर बार अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर भारत को स्थायी सदस्य बनने से रोक देता है। चीन के अलावा फ्रांस, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने पर अपनी सहमति जता चुके हैं। पिछले करीब चार दशकों से UNSC के स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग भी उठती रही है। देशों का कहना है कि UNSC में स्थायी और अस्थायी सदस्य बनने का मॉडल प्रजातांत्रिक नहीं है। स्थायी सदस्यों को विशेष शक्तियां मिली हुई हैं जो भेदभावपूर्ण है। साथ ही UNSC में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व भी कम है, लेकिन स्थायी सदस्य नहीं चाहते कि इसमें किसी तरह का बदलाव हो और किसी दूसरे देश को वीटो पावर मिले। भारत के अलावा जापान, जर्मनी और ब्राजील भी सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने का प्रयास कर रहे हैं। भारत क्यों इसका परमानेंट मेंबर बनना चाहता है? सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज, जेएनयू के प्रोफेसर डॉक्टर सुधीर सुथार के मुताबिक, इसके तीन कारण हैं। चीन भारत का विरोध क्यों करता है? चीन और भारत के रिश्तों में सीमा विवाद एक बड़ा मुद्दा है। चीन को डर है कि अगर भारत UNSC का स्थायी सदस्य बनेगा तो वो उसके समकक्ष आ जाएगा। इससे दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की वर्तमान स्थिति पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही चीन और पाकिस्तान की गुटबंदी भी इसकी वजह है। भारत का चीन और पाकिस्तान दोनों से सीमा विवाद चलता रहता है। अगर भारत स्थायी सदस्य बना तो चीन के दोस्त पाकिस्तान के लिए भी ये अच्छा नहीं होगा। भारत का स्थायी सदस्य बनने से क्या बदलेगा? दरअसल इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में किसी भी देश की भूमिका कई तरह के फैक्टर पर निर्भर करती है। आर्थिक स्थिति, डिप्लोमेटिक रिलेशंस, रिसर्च और डेवलपमेंट से लेकर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इसमें शामिल हैं। भारत के लिहाज से देखा जाए तो ये एक सिम्बॉलिक स्थिति होगी। इससे इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में भारत की भूमिका जरूर बढ़ेगी। भारत कैसे बना है सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष? दरअसल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता हर महीने बदलती रहती है। अंग्रेजी शब्दों के क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर के हिसाब से हर महीने नए सदस्य देश को अध्यक्षता मिलती है। भारत से पहले जुलाई में सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता फ्रांस के पास थी। सितंबर में आयरलैंड को यह जिम्मेदारी मिलेगी। अपने दो साल के कार्यकाल में भारत दो बार सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष बनेगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। भारतीय संगीत का जादू दुनियाभर में फैला हुआ है। बॉलीवुड ने इसे और विस्तार दिया है। लोग देश और भाषा की सीमा भूलकर इस संगीत की मधुरता में खो जाते हैं। फिर भला पाकिस्तानी कलाकार कैसे इसके तिलिस्म से बचे रह सकते हैं।
मखमली आवाज वाली पाकिस्तानी सिंगर शाए गिल (Shae gill) की गायकी इन दिनों जलवा अफरोज़ है। कोक स्टूडियो सीजन 14 (Coke Studio season 14) में अली सेठी (Ali Sethi) और शाए गिल के गीत पसूरी (pasoori) की धूम अब तक बरकरार है। इस बीच शाए गिल अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर गीत ग़ज़ल नज़्म शेयर करती रहती हैं। इनमें बॉलीवुड के भी कई सॉन्ग होते हैं। आज हम आपको उनकी आवाज में सुनाने जा रहे हैं 'ये वादा रहा' फिल्म का मशहूर गीत 'तू तू है वही दिल ने जिसे अपना कहा। ' शाए गिल ने इस गीत को अपनी मस्तीभरे अंदाज में गाया है और हमें यकीन है ये आपको भी झूमने पर मजबूर कर देगा।
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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। भारतीय संगीत का जादू दुनियाभर में फैला हुआ है। बॉलीवुड ने इसे और विस्तार दिया है। लोग देश और भाषा की सीमा भूलकर इस संगीत की मधुरता में खो जाते हैं। फिर भला पाकिस्तानी कलाकार कैसे इसके तिलिस्म से बचे रह सकते हैं। मखमली आवाज वाली पाकिस्तानी सिंगर शाए गिल की गायकी इन दिनों जलवा अफरोज़ है। कोक स्टूडियो सीजन चौदह में अली सेठी और शाए गिल के गीत पसूरी की धूम अब तक बरकरार है। इस बीच शाए गिल अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर गीत ग़ज़ल नज़्म शेयर करती रहती हैं। इनमें बॉलीवुड के भी कई सॉन्ग होते हैं। आज हम आपको उनकी आवाज में सुनाने जा रहे हैं 'ये वादा रहा' फिल्म का मशहूर गीत 'तू तू है वही दिल ने जिसे अपना कहा। ' शाए गिल ने इस गीत को अपनी मस्तीभरे अंदाज में गाया है और हमें यकीन है ये आपको भी झूमने पर मजबूर कर देगा।
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GORAKHPUR: भारतीय जीवन मूल्य में स्वयं के स्वार्थ की कोई जगह नहीं है। वही जीवन श्रेष्ठ है जो दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित हो। भारतीय संस्कृति की इसी लोक कल्याणकारी भावना से धर्म की वह शाश्वत व्यवस्था प्रतिष्ठित हुई जो परोपकार का मार्ग दिखाती है। यह बातें सीएम योगी आदित्यनाथ ने कही। वह रविवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित साप्ताहिक संगोष्ठी पर अपनी बातें रख रहे थे। महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ पुण्यतिथि समारोह के संगोष्ठी के पहले दिन 'लोक-कल्याण भारतीय संस्कृति की विशेषता है' विषय पर मंथन हुआ।
उन्होंने कहा कि यदि हम भारतीय संस्कृति का हम निचोड़ देखे तो वह परोपकार है। परोपकार लोक-कल्याण का ही पर्याय है। यह सदाचार की राह का अनुगामी बनाता है। कर्तव्यों का भान कराता है और नैतिक मूल्यों के प्रति आग्रही बनाता है। हमारे देश ने धर्म की इसी व्यापक अवधारणा को स्वीकारा है। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए रामकोट अयोध्या से आए जगद्गुरु राघवाचार्य ने कहा कि दोनों ब्रह्मालीन महंतों को वास्तविक श्रद्धांजलि यही है कि जिन जीवन मूल्यों के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया, उसे पूरा करने में अपनी स पूर्ण शक्ति लगा दें।
सुग्रीव किला अयोध्या से आए स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि धर्म, अध्यात्म, देश, समाज और राजनीति के क्षेत्र में गोरक्ष पीठ के आचार्यो ने सदैव अपनी सक्रिय भूमिका निभायी है। विशिष्ठ अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक मुकेश खाण्डेकर ने कहा कि भारतीय संस्कृति ऋषियों की तपस्या का प्रतिफल है। भारतीय संस्कृति सर्व समावेशी है, समरसता की प्रतीक है। इससे पहले प्रो। उदय प्रताप सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय के औचित्य पर प्रकाश डाला। मंच संचालन की जि मेदारी डॉ। श्री भगवान सिंह ने निभाई। गोरक्षाष्टक पाठ अवनीश पांडेय, प्रियांशु चौबे, दिग्विजयस्त्रोत पाठ शिवांश मिश्र, महन्त अवेद्यनाथ स्त्रोत पाठ प्रांगेश मिश्र ने किया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो। वीके सिंह, सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह, महंत गंगादास, अवधेश दास, महंत धर्मदास, महंत शांतिनाथ, महंत शिवनाथ, महंत राममिलन दास, स्वामी जयबक्श दास, महंत रवींद्र दास, महंत मिथिलेश नाथ आदि मौजूद रहे।
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GORAKHPUR: भारतीय जीवन मूल्य में स्वयं के स्वार्थ की कोई जगह नहीं है। वही जीवन श्रेष्ठ है जो दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित हो। भारतीय संस्कृति की इसी लोक कल्याणकारी भावना से धर्म की वह शाश्वत व्यवस्था प्रतिष्ठित हुई जो परोपकार का मार्ग दिखाती है। यह बातें सीएम योगी आदित्यनाथ ने कही। वह रविवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित साप्ताहिक संगोष्ठी पर अपनी बातें रख रहे थे। महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ पुण्यतिथि समारोह के संगोष्ठी के पहले दिन 'लोक-कल्याण भारतीय संस्कृति की विशेषता है' विषय पर मंथन हुआ। उन्होंने कहा कि यदि हम भारतीय संस्कृति का हम निचोड़ देखे तो वह परोपकार है। परोपकार लोक-कल्याण का ही पर्याय है। यह सदाचार की राह का अनुगामी बनाता है। कर्तव्यों का भान कराता है और नैतिक मूल्यों के प्रति आग्रही बनाता है। हमारे देश ने धर्म की इसी व्यापक अवधारणा को स्वीकारा है। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए रामकोट अयोध्या से आए जगद्गुरु राघवाचार्य ने कहा कि दोनों ब्रह्मालीन महंतों को वास्तविक श्रद्धांजलि यही है कि जिन जीवन मूल्यों के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया, उसे पूरा करने में अपनी स पूर्ण शक्ति लगा दें। सुग्रीव किला अयोध्या से आए स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि धर्म, अध्यात्म, देश, समाज और राजनीति के क्षेत्र में गोरक्ष पीठ के आचार्यो ने सदैव अपनी सक्रिय भूमिका निभायी है। विशिष्ठ अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक मुकेश खाण्डेकर ने कहा कि भारतीय संस्कृति ऋषियों की तपस्या का प्रतिफल है। भारतीय संस्कृति सर्व समावेशी है, समरसता की प्रतीक है। इससे पहले प्रो। उदय प्रताप सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय के औचित्य पर प्रकाश डाला। मंच संचालन की जि मेदारी डॉ। श्री भगवान सिंह ने निभाई। गोरक्षाष्टक पाठ अवनीश पांडेय, प्रियांशु चौबे, दिग्विजयस्त्रोत पाठ शिवांश मिश्र, महन्त अवेद्यनाथ स्त्रोत पाठ प्रांगेश मिश्र ने किया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो। वीके सिंह, सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह, महंत गंगादास, अवधेश दास, महंत धर्मदास, महंत शांतिनाथ, महंत शिवनाथ, महंत राममिलन दास, स्वामी जयबक्श दास, महंत रवींद्र दास, महंत मिथिलेश नाथ आदि मौजूद रहे।
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Tu Jhoothi Main Makkaar BO Day 11: रणबीर कपूर और श्रद्धा कपूर की फिल्म तू झूठी मैं मक्कार के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के आंकड़े सामने आ गए हैं. फिल्म ने 11 दिनों में 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है. ऐसा करने वाली ये रणबीर की छठीं फिल्म बन गई है.
Tu Jhoothi Main Makkaar BO Day 11: बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर पिछले एक दशक से फिल्म इंडस्ट्री में प्रॉमिसिंग एक्टर के तौर पर उभरे हैं. उनकी फिल्मों को फैंस काफी पसंद करते हैं. रोमांटिक फिल्मों में तो रणबीर फैंस का दिल जीत लेते हैं. एक बार फिर से ऐसा ही हुआ है. उनकी फिल्म तू झूठी मैं मक्कार को फैंस जमकर पसंद कर रहे हैं. उनकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर रही है. वहीं दूसरी तरफ कपिल शर्मा की फिल्म ज्विगाटो की बात करें तो इस फिल्म ने 2 दिनों में एक करोड़ का आंकड़ा पार किया है. आइये जानते हैं दोनों की कमाई के ताजा आंकड़े.
ट्रेड एनालिस्ट जोगिंदर टुटेजा ने ये खुशखबरी फैंस संग शेयर की. उन्होंने ट्विटर पर बताया कि फिल्म ने 11 दिनों में 100 करोड़ के क्लब में एंट्री मार ली है. इसी के साथ ये फिल्म 100 करोड़ का आंकड़ा पार करने वाली रणबीर कपूर के करियर की छठीं फिल्म बन गई है. इससे पहले साल 2022 में रणबीर कपूर की फिल्म ब्रह्मास्त्र रिलीज हुई थी जिसने 200 करोड़ से ज्यादा कमाए थे. इसके अलावा रणबीर की फिल्म बर्फी, संजू, ये जवानी है दीवानी और ये दिल है मुश्किल भी 100 करोड़ से ज्यादा कमा चुकी हैं.
#TuJhoothiMainMakkaar has entered the 100 Crore Club. Accomplishes the feat in 11 days.
This is also #RanbirKapoor and #ShraddhaKapoors 6th 100 crores film each.
ये भी पढ़ें- फ्री एंट्री भी नहीं करोड़ों खर्च कर भी मिली आखिरी सीट, Oscars में RRR की टीम के साथ ऐसा क्यों हुआ?
इसके अलावा कपिल शर्मा की फिल्म ज्विगाटो की बात करें तो इस फिल्म ने भी कमाई के मामले में 1 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है. फिल्म को ऐसा करने में 2 दिन का समय लगा. कपिल शर्मा की ये फिल्म मौजूदा समय में चर्चा में है. लेकिन इस फिल्म को मन मुताबिक ऑडियंस नहीं मिल पा रही है.
बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी ने हाल ही में फिल्म मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे से कमबैक किया है. इस फिल्म का भी फैंस से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. फिल्म ने रिलीज के 2 दिनों में 3 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है. फिल्म ने पहले दिन 1.27 करोड़ कमाए थे जबकी रिपोर्ट्स की मानें तो रिलीज के दूसरे दिन फिल्म ने 2.50 करोड़ कमा लिए हैं. इस लिहाज से फिल्म के दो दिनों का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 3.77 करोड़ का हो चुका है.
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Tu Jhoothi Main Makkaar BO Day ग्यारह: रणबीर कपूर और श्रद्धा कपूर की फिल्म तू झूठी मैं मक्कार के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के आंकड़े सामने आ गए हैं. फिल्म ने ग्यारह दिनों में एक सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है. ऐसा करने वाली ये रणबीर की छठीं फिल्म बन गई है. Tu Jhoothi Main Makkaar BO Day ग्यारह: बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर पिछले एक दशक से फिल्म इंडस्ट्री में प्रॉमिसिंग एक्टर के तौर पर उभरे हैं. उनकी फिल्मों को फैंस काफी पसंद करते हैं. रोमांटिक फिल्मों में तो रणबीर फैंस का दिल जीत लेते हैं. एक बार फिर से ऐसा ही हुआ है. उनकी फिल्म तू झूठी मैं मक्कार को फैंस जमकर पसंद कर रहे हैं. उनकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर रही है. वहीं दूसरी तरफ कपिल शर्मा की फिल्म ज्विगाटो की बात करें तो इस फिल्म ने दो दिनों में एक करोड़ का आंकड़ा पार किया है. आइये जानते हैं दोनों की कमाई के ताजा आंकड़े. ट्रेड एनालिस्ट जोगिंदर टुटेजा ने ये खुशखबरी फैंस संग शेयर की. उन्होंने ट्विटर पर बताया कि फिल्म ने ग्यारह दिनों में एक सौ करोड़ के क्लब में एंट्री मार ली है. इसी के साथ ये फिल्म एक सौ करोड़ का आंकड़ा पार करने वाली रणबीर कपूर के करियर की छठीं फिल्म बन गई है. इससे पहले साल दो हज़ार बाईस में रणबीर कपूर की फिल्म ब्रह्मास्त्र रिलीज हुई थी जिसने दो सौ करोड़ से ज्यादा कमाए थे. इसके अलावा रणबीर की फिल्म बर्फी, संजू, ये जवानी है दीवानी और ये दिल है मुश्किल भी एक सौ करोड़ से ज्यादा कमा चुकी हैं. #TuJhoothiMainMakkaar has entered the एक सौ Crore Club. Accomplishes the feat in ग्यारह days. This is also #RanbirKapoor and #ShraddhaKapoors छःth एक सौ crores film each. ये भी पढ़ें- फ्री एंट्री भी नहीं करोड़ों खर्च कर भी मिली आखिरी सीट, Oscars में RRR की टीम के साथ ऐसा क्यों हुआ? इसके अलावा कपिल शर्मा की फिल्म ज्विगाटो की बात करें तो इस फिल्म ने भी कमाई के मामले में एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है. फिल्म को ऐसा करने में दो दिन का समय लगा. कपिल शर्मा की ये फिल्म मौजूदा समय में चर्चा में है. लेकिन इस फिल्म को मन मुताबिक ऑडियंस नहीं मिल पा रही है. बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी ने हाल ही में फिल्म मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे से कमबैक किया है. इस फिल्म का भी फैंस से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. फिल्म ने रिलीज के दो दिनों में तीन करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है. फिल्म ने पहले दिन एक.सत्ताईस करोड़ कमाए थे जबकी रिपोर्ट्स की मानें तो रिलीज के दूसरे दिन फिल्म ने दो.पचास करोड़ कमा लिए हैं. इस लिहाज से फिल्म के दो दिनों का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन तीन.सतहत्तर करोड़ का हो चुका है.
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वीरेन जी कैसे एक विरोधाभासी दुनिया और शोर शराबे में सहज होकर हंसते हुए रह लेते थे यह शायद हम कभी न सीख पाएंगे. उनसे मिलकर ऐसा लगता था जैसे शिवजी के ब्याह से कोई बाराती लौटा हो. उनकी यारबाशी का दायरा भी शिव जी की बारात जैसा ही था. ये और बात है की उनके औपचारिक संपर्क की साहित्यिक गोलबन्दी में शायद ही कोई, दूर-दूर तक भी, उनके जैसा हो. उस गोलबन्दी में सहजता भी तनी हुई रस्सी जैसी लगती है. फिर भी वे सच में सहज रह पाए और एक भरे पूरे औपचारिक कवि जीवन का भी उन्होंने निर्वाह किया.
वीरेन जी के चाहने वाले उन्हें उनके व्यक्तिगत गुणों के कारण याद करते रहेंगे. उनकी कविताएं अक्सर साहित्य के कारोबारी व्याकरण को छोड़कर उनके अबाध्य गुणोंकी गुलेल पर चढ़ीं और "सनसनाते समोसों" की तरह दूर तक पंहुचीं. "मरते तो सभी हैं साथी - यह तो हुई वही पुरानी बात" लेकिन मनहूस महानता के इस दौर में दूर तक ख़लल बनकर तुम्हारी आवाज़ रहेगी - पाक़ीज़ा में रेलगाड़ी की तरह. "आशिक़ जैसी गर्म उसांसें - वह सीटी भरपूर".
उस मन्ज़रकशी में सरीर-ए-ख़ामा यहां तंग हो रही है.
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वीरेन जी कैसे एक विरोधाभासी दुनिया और शोर शराबे में सहज होकर हंसते हुए रह लेते थे यह शायद हम कभी न सीख पाएंगे. उनसे मिलकर ऐसा लगता था जैसे शिवजी के ब्याह से कोई बाराती लौटा हो. उनकी यारबाशी का दायरा भी शिव जी की बारात जैसा ही था. ये और बात है की उनके औपचारिक संपर्क की साहित्यिक गोलबन्दी में शायद ही कोई, दूर-दूर तक भी, उनके जैसा हो. उस गोलबन्दी में सहजता भी तनी हुई रस्सी जैसी लगती है. फिर भी वे सच में सहज रह पाए और एक भरे पूरे औपचारिक कवि जीवन का भी उन्होंने निर्वाह किया. वीरेन जी के चाहने वाले उन्हें उनके व्यक्तिगत गुणों के कारण याद करते रहेंगे. उनकी कविताएं अक्सर साहित्य के कारोबारी व्याकरण को छोड़कर उनके अबाध्य गुणोंकी गुलेल पर चढ़ीं और "सनसनाते समोसों" की तरह दूर तक पंहुचीं. "मरते तो सभी हैं साथी - यह तो हुई वही पुरानी बात" लेकिन मनहूस महानता के इस दौर में दूर तक ख़लल बनकर तुम्हारी आवाज़ रहेगी - पाक़ीज़ा में रेलगाड़ी की तरह. "आशिक़ जैसी गर्म उसांसें - वह सीटी भरपूर". उस मन्ज़रकशी में सरीर-ए-ख़ामा यहां तंग हो रही है.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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नई दिल्लीः दिल्ली में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई छापे के बाद सियासी पारा बढ़ा हुआ है। इस बीच शनिवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने 22 अगसत को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ गुजरात जाने की घोषणा की है। वह गुजरात में युवओं से संवाद करेंगे। बता दें कि दिसंबर 2022 में गुजरात में विधानसभा चुनाव हैं। जिसके मद्देनजर केजरीवाल लगातार पिछले कुछ माह में गुजरात के कई दौरे कर चुकें हैं।
हर बच्चे को मेरी तरफ से मुफ्त और अच्छी शिक्षा की गारंटी है। सरकारी स्कूलों को शानदार बनाया जाएगा और बड़े स्तर पर नए सरकारी स्कूल खोले जाएंगे। इससे पहले केजरीवाल ने कहा था कि "सारे प्राइवेट स्कूलों का ऑडिट कराया जाएगा, जिसने ज्यादा फीस ली हुई है उससे वापस कराएंगे और किसी भी स्कूल को नाजायज फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सभी स्कूल सरकार से इजाजत लेकर ही फीस बढ़ा पाएंगे।
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नई दिल्लीः दिल्ली में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई छापे के बाद सियासी पारा बढ़ा हुआ है। इस बीच शनिवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने बाईस अगसत को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ गुजरात जाने की घोषणा की है। वह गुजरात में युवओं से संवाद करेंगे। बता दें कि दिसंबर दो हज़ार बाईस में गुजरात में विधानसभा चुनाव हैं। जिसके मद्देनजर केजरीवाल लगातार पिछले कुछ माह में गुजरात के कई दौरे कर चुकें हैं। हर बच्चे को मेरी तरफ से मुफ्त और अच्छी शिक्षा की गारंटी है। सरकारी स्कूलों को शानदार बनाया जाएगा और बड़े स्तर पर नए सरकारी स्कूल खोले जाएंगे। इससे पहले केजरीवाल ने कहा था कि "सारे प्राइवेट स्कूलों का ऑडिट कराया जाएगा, जिसने ज्यादा फीस ली हुई है उससे वापस कराएंगे और किसी भी स्कूल को नाजायज फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सभी स्कूल सरकार से इजाजत लेकर ही फीस बढ़ा पाएंगे।
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मेरा नाम नेटा है, किसने रखा, शायद मेरे माता पिता ने रखा होगा। या शायद बाद में मेरे इंस्टीट्यूशन ने रखा हो। पर इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है, सच्चाई तो यूँ भी बदल नहीं जाएगी न और गया वक़्त भी वापस नहीं आएगा कभी। बहुत दिनों तो मुझे ही समझ नहीं आया ये क्यों हुआ, पर सच तो ये है कि ये हुआ है और जिस तरह से हुआ है, उन ज़ख्मों के निशान आज भी मेरे मन पर हैं।
मैं चौंक पड़ती हूँ। ये कौन है? कहाँ है? ये...ये... ये तो माँ की आवाज़ है।
मेरे मुंह से अनायास निकल जाता है। पर मेरी आवाज़ शून्य से टकराकर वापस लौट आती है।
मैं आँखों से बहते आंसू पोंछ लेती हूँ। आप मेरी कहानी सुनेंगे तो शायद आप भी भावुक हो जाएँगे। आइये, मैं आपको आज से पैंसठ साल पीछे ले चलती हूँ।
नॉर्दर्न टेरिटरी से एक सौ दस किलो मीटर दूर स्थित जंगली इलाके में अर्लतुंगा के इस छोटे से इलाके में मेरा परिवार रहता था। मेरे परिवार में माँ, पिता के अलावा मेरे दो बड़े भाई और बहन ज़ीटा थे। मुझे याद है उन दिनों दिन बहुत सुनहरे लगते थे और रातें चमकीली होतीं थीं। हम कभी हवाओं के साथ उड़ते, कभी पक्षियों की तरह नाचते। कभी पेड़ों पर चढ़ने की कोशिश करते और कभी रंग बिरंगे फूल चुन कर बालों में सजाते।
हमारी ट्राइब में जितने भी लोग थे वे हमारे परिवार जैसे ही थे, हम सब साथ रहते थे, खाते पीते थे, सुख दुःख बांटते थे। मेरे सगे भाई बहन के साथ और भी अनेक भाई बहन थे, शायद दो सौ लोग होंगे कुल मिलाकर। पुरुष मछली पकड़ने या शिकार के लिए निकल जाते, लड़कों के लिए काम सीखना ज़रूरी था तो भाई भी पिता के साथ चले जाते। माँ अन्य महिलाओं और लड़कियों के साथ हमें लेकर कभी शहद ढूँढने या झाड़ियों में उगी झड़बेरियाँ तोड़ने के लिए ले जाती। कभी - कभी हम मज़बूत डंडी से ज़मीन खोदते और ग्रब्स या कीड़े मकोड़े ढूँढ कर इकट्ठे करते।
हम बहनें माँ के साथ घर वापस आती, माँ खाना पकातीं और हम बाहर बैठ के कोई न कोई खेल खेलते।
"ज़ीटा, लगता है, आज माँ कुछ अच्छा पका रही है।" पांच साल की मैं हवा में आती खाने की ख़ुशबू को सूंघते हुए कहती।
मुझसे दो साल बड़ी ज़ीटा मुस्कुराते हुए जवाब देती।
हम दोनों लड़कियाँ गिट्टियाँ खेलने में मशगूल हो जातीं।
पिता शिकार से आते। हम सब बैठते, खाना खाते और जाने कितनी बातें करते। समय भी तो बस सूरज के उगने और ढलने पर निर्भर करता था। मौसम के झूले में झूलने का आनंद ही अलग था।
कई बार रात होते ही हम अलाव जलाकर दादा को घेर के बैठ जाते और उनसे कहानियाँ सुनते। क्रोकोडाइल, कोआला कैसे बने, टिडलिक मेंढक ने सारा पानी क्यों पी लिया आदि कहानियाँ हमें एक ही सीख सिखातीं "अच्छा काम करो" और एक ऐसे अदृश्य देवता की बात कहतीं जो प्रकृति में रचा बसा है और हमारी बातें सुनता रहता है। हमसे ग़लती होती है तो सजा देता है और कुछ अच्छा करते हैं तो हमें किसी न किसी तरह इनाम देता है।
बुजुर्ग कहते थे कि इस देश में हमारे जैसे अनेक कबीले भी हैं, जिनकी अपनी अलग भाषा है और अलग रिवाज़ हैं।
हम सब डरते थे और माँ की बात मानते थे। जब कभी विशेष उत्सव होते थे, विशेष रंगों से अपने शरीर को रंगा जाता था और अलाव जलाकर डिजरी डू और जेमबे (ढोल जैसे वाद्य यंत्र) के साथ गीत गए जाते थे। बड़ा मज़ा आता था जब हम सब साथ मिलकर नृत्य करते थे। मैं बड़े कौतूहल से उन्हें देखा करती थी। बड़ी होकर मैं भी अच्छा नृत्य कर सकूँ यही मेरी इच्छा थी। कभी कबीले की स्त्रियाँ मिल के गुफा की दीवारों पर रंगीन चित्र भी बनाती थीं। पिता कहते थे, प्रकृति हमारी सहेली है, हमारी शिक्षक भी है।
मुझे याद है कि एक दिन कबीले के एक व्यक्ति ने चोरी की। कबीले वाले बहुत नाराज़ हुए। बुजुर्गों ने उसे दंड दिया और भाले से उसकी जांघों में प्रहार किया। एक ऐसा घाव बना दिया जिसके भर जाने के बाद भी निशान उसे हमेशा याद दिलाता रहे कि उसे ऐसा दंडनीय कार्य नहीं करना है।
मैं और मेरी बहन ज़ीटा को समझ नहीं आता था और फिर वह दिन ... मैं कैसे भूल सकती हूँ जब मैं और मेरी बहन ज़ीटा घर के आँगन में एक दूसरे के पीछे भाग रहे थे, पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, खिलखिला रहे थे तो घर के बाहर बूटों की ठक सुनाई दी। इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते, दो गोरे अजनबियों ने हमारा हाथ पकड़ा और मोटर की तरफ़ ले जाने लगे।
हमने हाथ छुड़ा के भागने की कोशिश की। पर वे आदमी बहुत मज़बूत थे और हम छोटे और कमज़ोर। पिता तो शिकार पर गए थे, माँ ने हमारी आवाज़ें सुनीं और भागी आईं। मैंने दूर से उन्हें आते देखा, वे सड़क पर गाड़ी के पीछे दौड़ रहीं थीं। पर तब तक हमें मोटर के पिछले हिस्से में बंद कर दिया गया था। हम रो रहे थे, चिल्ला रहे थे, पर सब कुछ व्यर्थ था। यही वह पल था जब माँ को मैंने आख़िरी बार देखा था।
उस वक़्त हमें अच्छी चीज़ें नहीं, माँ चाहिए थी, हमारे आंसू रुकते नहीं थे, हिचकियाँ बंधी हुईं थीं। शीघ्र ही माँ ओझल हो गईं और बस आँखों के सामने रह गए हमारे साथ दौड़ते हुए पेड़। धीरे - धीरे पीछे छूटता हमारा घर, खुला आसमान।
और हम सहम गए । मैं बेहद डर गई थी। मैंने बहन का हाथ ज़ोर से पकड़ लिया। नज़र घुमाई तो देखा गाड़ी के पिछले हिस्से में कुल मिलाकर हम पांच बच्चे थे। आगे बैठे लोगों ने हमें बिस्किट का पैकेट दिया, डबडबाती आँखों से ज़ीटा ने मुझे बिस्किट पकड़ाया और जाने कब खाते - खाते मेरी आँखे बंद होने लगीं और मैं ज़ीटा के कंधे से अपना सर टिका कर सो गई।
जब डेढ़ घंटे बाद मोटर रुकी तो समझ ही नहीं आया हम कहाँ आ गए हैं। हमें गाड़ी से उतार के अंदर ले जाया गया। सब कुछ इतना अलग था कि मैं समझ नहीं पा रही थी। ज़ीटा सहमी हुई थी, मेरे आंसू बह रहे थे।
वहाँ हमारी तरह अनेक क्षेत्रों से लाए गए बहुत से बच्चे थे, सब अपने माँ बाप से बिछड़ जाने से दुखी थे। हमको पहले एलिस स्प्रिंग्स के पुराने टेलीग्राफ स्टेशन के बंगले में ले जाया गया, फिर बाद में गार्डन पॉइंट भेज दिया गया।
मुझे आज भी इंस्टीट्यूशन में वह रात याद है जब मैं बिस्तर में ज़ीटा का हाथ थाम के बैठी हुई थी। पहली बार हम माँ, पिताजी से दूर थे। बिल्कुल अनजान और अकेली दुनिया में, वहाँ आए सभी बच्चे हमारी तरह थे। जाने कितनी देर मैं ज़ीटा का हाथ थामे रोती रही। सब घबराए हुए थे। समझ नहीं पा रहे थे कि हमारे साथ ऐसा क्यों हुआ? हमने तो गलती नहीं की थी, कोई चोरी भी नहीं की थी। फिर हमें यह सजा क्यों मिल रही थी? वहाँ सभी दुखी थे, कोई भी हमारी बोली नहीं बोलता था।
अगले दिन सुबह - सुबह उठा दिया गया और हमारी नई दिनचर्या शुरू हो गई। हमें बताया गया कि हमारी भलाई के लिए हमें लाया गया हैं। ये भी कि हमारे माँ बाप हमें अपने पास नहीं रखना चाहते थे। घर में हमें ग़लत बातें सिखाई जा रहीं थीं। ये भी ठीक नहीं हैं कि हम मूर्तिपूजक हैं। हम शैतान के वंशज हैं और हमारी भाषा खराब है। हम अपनी भाषा में बात नहीं कर सकते थे। जब भी हमने अपनी भाषा में बात की, हमारी हर बार बेल्ट से पिटाई हुई। उनके सख्त अनुशासन में हम रोते हुए बच्चों के आंसू गाल पर हो सूख गए। कभी-कभी मेरा मन करता था इंस्टीट्यूशन छोड़ के भाग जाऊँ या उसी बेल्ट से उनकी पिटाई करके पूछूं, कोई दर्द हुआ क्या?
कभी हम दुखी होते, कभी डिप्रेस्ड हो जाते, कभी कोई रोने लगता तो सब उसे चुप कराते। मुझे याद है कि एक दिन एक किशोर ने तो आत्महत्या की कोशिश भी की। पर उसे बचा लिया गया। परिवार से अलग हो जाने का, अपनों से बिछुड़ जाने का और अकेलेपन का दुःख सिर्फ़ वही समझ सकता है जिसका परिवार उसके पास न हो। शायद ही कोई रात ऐसी होती जब मैं माँ को याद न करती। ऐसा नहीं कि इन जेल जैसे इंस्टीट्यूशंस से बच्चों ने भागने की कोशिश नहीं की। पर अधिकतर को ढूँढ कर वापस ले आया गया और फिर नशे में धुत्त सुपरवाइज़र्स के गुस्से का शिकार हुए। तेरह साल का एक लड़का, जो तीन बार भागने की कोशिश कर चुका था, उसकी इतनी पीटा गया कि मर गया। वैसे पिटाई होना तो आम बात थी, लड़के लड़कियों के साथ बलात्कार की घटनाएँ भी सुनाई देतीं थीं। वैलरी, जिसे फ़ॉस्टर घर में भेज दिया गया था, उसके पिता जैसे मालिक ने ही उसके साथ बलात्कार किया। जब उसने हिम्मत करके शिकायत की तब अधिकारी उसे वहाँ से हटा कर वापस ले आए। उसके बाद से उसकी सूनी आँखों में जैसे ग़म का सैलाब भरा रहता। हर वक़्त आसमान में देखती वह जाने किन अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर तलाशती रहती।
जाने कितनी बार मैं भागने की सोचती पर ज़ीटा मुझे समझाती, उससे मुझे हिम्मत मिलती। हम दोनों को कम से कम एक दूसरे का साथ तो था। हम शायद इसीलिए ठीक से पढ़ लिख भी पाए। हमारे अध्यापक और सुपरवाइज़र्स हमसे खुश रहते। ज़ीटा मुझे समझाती, कहती पहले अपने पैरों पर खड़े होना ज़रूरी है। ज़ीटा न होती तो मैं बागी हो जाती, अपने परिवार को ढूँढने भाग जाती। पर जाती भी कहाँ? घर का पता नहीं था। तब कंप्यूटर और इंटरनेट तो थे नहीं। कैसे नक़्शा निकालती और कैसे घर पहुँचती? धीरे - धीरे हम सभी वही करने लगे जैसा वे चाहते थे। वे हमें सभ्य बनाना चाहते थे, अपने रंग में रंगना चाहते थे। सुबह से शाम एक नियम में बंधे रहते। रात को थक कर सब सो जाते।
सोलह साल की होते - ज़ीटा काम पर जाने लगी और वहीं उसको एक नौजवान मिला। दोनों में प्रेम हुआ और जल्द शादी कर ली। ज़ीटा की ज़िन्दगी तो बदल गई पर मैं अब और अकेली हो गई। मुझे लगा, एक बार फिर मुझे माँ से छीन लिया गया है। मेरा दिल गुस्से और हताशा से भरा होता पर अक्सर मैं चुप रहती और काम में व्यस्त रहती। मेरे साथ की दो लड़कियाँ नन बनने के लिए और कुछ अमीरों के घर घरेलू कामों में मदद के लिए भेज दी गईं। हममें से कई लोगों को सस्ते श्रमिकों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, हमारे साथ के कई लोगों को परिवारों और संस्थानों के भीतर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा था।
मैंने काम में मन लगाया। दो साल बाद मुझे भी नौकरी मिल गई और एक दिन लोकल पब में ऑलिवर से मेरी मुलाकात हुई। वह ऑस्ट्रेलिया की आर्मी में था और छुट्टियों में घर आया हुआ था। उसने जब मेरी तारीफ की तो शुरू में तो मैंने उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। मुझे वह भी अपने सुपरवाइजर जैसा कुटिल लगता। पर बाद में लगा कि वह थोड़ा अलग है, सरल ह्रदय का होने के साथ - साथ खुले विचारों का है। ऑलिवर और मैं एक दूसरे से प्यार करने लगे। एक साल की मुलाकात के बाद हमने शादी कर ली। मुझे पत्नी के रूप में पूरा सम्मान दिया। मैं जैसी भी थी, उसे बहुत पसंद थी। मेरी ज़िन्दगी में ख़ुशी के फूल खिल गए। ऑलिवर ने मुझे सारी खुशियाँ दीं। दो खूबसूरत, स्वस्थ बच्चे भी दिए। बच्चे मेरी तरह काले रंग के नहीं थे और न ही ऑलिवर की तरह दूधिया सफ़ेद। उनके मिश्रित रंग और नाक नक्श सबको बहुत भाते थे। मैं उन्हें अपने दादा की कहानियाँ सुनाती थी। अपनी एबोरीजनल संस्कृति के बारे में जितना याद था और जो भी मैंने किताबों में पढ़ा था, उन्हें सिखाती थी।
यूँ तो सब कुछ ठीक चल रहा था पर 1964 वियतनाम का युद्ध शुरू हो गया। उत्तरी वियतनाम की सोवियत यूनियन और चीन ने सहायता दी जबकि दक्षिणी वियतनाम का साथ देने के लिए अमेरिका, फिलीपीन, साऊथ कोरिया, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी सैन्य शक्ति भेजी। ऑस्ट्रेलिया से भेजे गए चालीस हज़ार सैनिकों में ऑलिवर भी शामिल था और मेरी दुनिया में फिर से एक बड़ा बदलाव आया। बच्चों को अकेले पालना, नौकरी करना आसान नहीं था। युद्ध चल ही रहा था, पांच साल से हम सब बेसब्री से ऑलिवर की प्रतीक्षा कर रहे थे। ऑलिवर को छुट्टी न मिली और फिर आया भी तो उसकी मौत का समाचार। करीब सवा पांच सौ ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की जाने गई। मेरा ओली, मेरी ज़िन्दगी की एकमात्र ख़ुशी छिन गई। मेरे बच्चे मेरी तरह अनाथ बन गए। मैं अपनी क़िस्मत पर दुख भी कैसे बनाती? दोनों बच्चों का मुंह देखकर रोना आता था, पर कैसे रोती? उनके लिए मुझे मज़बूत रहना था। मेरा और बच्चों का दिल टूट गया। उसके बाद तो मैंने जैसे पूरा समय बच्चों की देखभाल में उन्हें खुश रखने में लगा दिया। मज़बूती से उनको पालना भी मुझे ही था। समय पलक झपकते बीतने लगा। अब बच्चे बड़े हो गए हैं दोनों की ज़िन्दगी व्यवस्थित हो गई है। बेटी ने शादी कर ली है।
बच्चे बड़े होते - होते मेरे अंतस की पीड़ा मुझे बेचैन करने लगी। मेरी अपने परिवार को ढूँढने की इच्छा फिर बलवती होने लगी। मेरे भीतर की नेटा उदास रहने लगी। मैं अक्सर सोचा करती कि उन्होंने हमारे साथ ऐसा क्यों किया? क्यों हम बच्चों को अपने घर परिवार माता पिता से छीन लिया? ये तो मुझे बड़े होने पर बाद में पता चला कि हम कैरोलिंगा और एलडोलांडा ट्राइब के *स्टोलेन जेनेरेशन के थे। कोलोनाइज़ेशन के बाद सरकार की यह धारणा थी कि हम एबोरीजनल लड़कियाँ जब बड़ी होंगी, तो अच्छे गोरे लड़कों से शादी करेंगी और हमारे बच्चे उनकी तरह होंगे। अंततः एक दिन हमारी प्रजाति और हमारा रंग समाप्त हो जाएगा । यह निष्कासन नीति ज़्यादातर महिलाओं पर आधारित थी क्योंकि महिलाएँ प्रजनन कर सकती थीं। हमारी ट्राइब के लड़के उनके यहाँ नौकर का काम करेंगे या उनकी परियोजनाओं में कर्मचारी बनेंगे, यही उनकी मंशा थी। हालाँकि वे इसे हमें अपने समाज से जोड़ने का हिस्सा मानते थे। शायद उन्होंने ये कभी नहीं सोचा था कि वे हमारा हमारे परिवार से अपहरण कर रहे हैं। हमारा शारीरिक और मानसिक ही नहीं भावात्मक शोषण भी कर रहे हैं।
मैं वह अपहृत बच्ची थी, जिसे न सिर्फ़ अपने परिवार से बल्कि अपनी सभ्यता और संस्कृति से उखाड़ कर फेंक दिया गया था। 'स्टोलेन जेनेरेशन' का हिस्सा थी मैं। एक दिन मैंने ज़ीटा से अपने मन की बात की।
मेरी आँखों में आंसू आ गए, मैं ज़ीटा के गले लग गई। मुझे लगा कि शायद इसी घड़ी का मुझे इंतज़ार था। मैंने ज़ीटा के साथ मिलकर अपने परिवार के बारे में जितनी सूचनाएँ मिल सकतीं थीं, सारी इकट्ठी कीं और अंततः एक दिन चल पड़ी अपने कबीले, अपने लोगों से मिलने।
_और आज... आज ... मैं ढूँढते - ढूँढते अपने कबीले, अपने गाँव तक पहुँच गई हूँ। मेरी आँखें आंसुओं से भरी हुई हैं। चीज़ें बदल गई हैं यहाँ, झोपड़ियाँ टूट - फूट गई हैं। कच्चे पक्के घर बन गए हैं । मैं आस पास के लोगों से अपनी माँ और पिता का नाम लेती हूँ। वे चौक कर मुझे देखते हैं और अंततः मुझे मेरे भाई वारु के पास ले जाते हैं। जो एक छोटे से पुराने टिन शेड में रह रहा था और जब मैंने उसे देखा और उसने मुझे, तो देखते ही उसने मुझे पहचान लिया और रोने लगा। मैं भी ख़ुद को संभाल नहीं पाई। जाने कितनी देर तक हम रोते रहे। उसने बताया कि हमें ज़बरदस्ती ले जाए जाने के बाद सब लोग बहुत दिन तक परेशान रहे। उन्होंने हमें बहुत ढूँढा, यहाँ तक कि पिता के साथ वह हमें ढूँढने डार्विन भी आया, पर उन्हें बताया गया कि हम मर चुके हैं। यह सुनकर मेरे पिता बहुत रोये और वापस लौट गए।
माँ ने ख़ुद को भाग्य के हवाले कर दिया और कुछ वर्ष पूर्व माँ और पिताजी चल बसे थे।
अब मैं उन्हें तो वापस नहीं ला सकती हूँ, पर उनकी आत्मा को प्रसन्न कर सकती हूँ। मुझे विश्वास है कि वे जहाँ भी हैं मुझे देख रहे हैं, मोइनी देवता की तरह और मैं उनसे जुड़ना चाहती हूँ। इतने सालों में जो कुछ छूट गया है, उसे झोली में भर लेना चाहती हूँ। मैं...मैं ... अपनी संस्कृति से जुड़ना चाहती हूँ। मैंने हिम्मत करके अपनी ट्राइब के लोगों से अनुरोध किया कि क्या वे मुझे स्वीकार कर लेंगे?
अब मैं कुछ दिनों के लिए यहाँ रुक गई हूँ। मुझे बहुत ख़ुशी हुई, जब हमारे लोगों ने मुझे खुले मन से वापस स्वीकार कर लिया। अपनी परंपराएँ, रीति रिवाज़ और ड्रीमटाइम कहानियों के बारे में उनसे सीख रही हूँ।
कभी मैं आकाश से बातें करती हूँ, कभी पक्षियों-सी चहचहाती हूँ। कभी रात को कबीले के लोगों के साथ अलाव के पास बैठ जाती हूँ, कभी फूलों और पौधों से नैसर्गिक रंग बनाती हूँ। कभी छोटे - छोटे बच्चों के चेहरों को रंगती हूँ। उनके साथ खेलती हूँ और अपना बचपन ढूँढ लाती हूँ।
सच तो ये है कि यहाँ आकर मुझे जितनी शांति मिली है, वह किसी चर्च या धार्मिक स्थान पर जाकर भी नहीं मिलती। मुझे लगता है कि अंत में मुझे वह खज़ाना मिल गया है, जिसे मैं सालों से तलाश रही थी और ये खज़ाना इतना बेशकीमती है कि दुनिया की कोई भी दौलत मुझे इतनी ख़ुशी नहीं दे सकती।
- (यह कहानी ऑस्ट्रेलिया के एबोरीजनल्स (आदिवासी) समुदाय की स्टोलेन जेनेरेशन (चुराई हुई पीढ़ी) पर आधारित की कहानी है। सन 1900 से 1960 के मध्य अंग्रेजों द्वारा अनुमानतः तीन लाख आदिवासी बच्चों को उनके परिवार से जबरन छीन लिया गया ताकि वे अंग्रेज़ी समुदाय में सामंजस्य स्थापित कर सकें और उनके काम आ सकें।)
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मेरा नाम नेटा है, किसने रखा, शायद मेरे माता पिता ने रखा होगा। या शायद बाद में मेरे इंस्टीट्यूशन ने रखा हो। पर इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है, सच्चाई तो यूँ भी बदल नहीं जाएगी न और गया वक़्त भी वापस नहीं आएगा कभी। बहुत दिनों तो मुझे ही समझ नहीं आया ये क्यों हुआ, पर सच तो ये है कि ये हुआ है और जिस तरह से हुआ है, उन ज़ख्मों के निशान आज भी मेरे मन पर हैं। मैं चौंक पड़ती हूँ। ये कौन है? कहाँ है? ये...ये... ये तो माँ की आवाज़ है। मेरे मुंह से अनायास निकल जाता है। पर मेरी आवाज़ शून्य से टकराकर वापस लौट आती है। मैं आँखों से बहते आंसू पोंछ लेती हूँ। आप मेरी कहानी सुनेंगे तो शायद आप भी भावुक हो जाएँगे। आइये, मैं आपको आज से पैंसठ साल पीछे ले चलती हूँ। नॉर्दर्न टेरिटरी से एक सौ दस किलो मीटर दूर स्थित जंगली इलाके में अर्लतुंगा के इस छोटे से इलाके में मेरा परिवार रहता था। मेरे परिवार में माँ, पिता के अलावा मेरे दो बड़े भाई और बहन ज़ीटा थे। मुझे याद है उन दिनों दिन बहुत सुनहरे लगते थे और रातें चमकीली होतीं थीं। हम कभी हवाओं के साथ उड़ते, कभी पक्षियों की तरह नाचते। कभी पेड़ों पर चढ़ने की कोशिश करते और कभी रंग बिरंगे फूल चुन कर बालों में सजाते। हमारी ट्राइब में जितने भी लोग थे वे हमारे परिवार जैसे ही थे, हम सब साथ रहते थे, खाते पीते थे, सुख दुःख बांटते थे। मेरे सगे भाई बहन के साथ और भी अनेक भाई बहन थे, शायद दो सौ लोग होंगे कुल मिलाकर। पुरुष मछली पकड़ने या शिकार के लिए निकल जाते, लड़कों के लिए काम सीखना ज़रूरी था तो भाई भी पिता के साथ चले जाते। माँ अन्य महिलाओं और लड़कियों के साथ हमें लेकर कभी शहद ढूँढने या झाड़ियों में उगी झड़बेरियाँ तोड़ने के लिए ले जाती। कभी - कभी हम मज़बूत डंडी से ज़मीन खोदते और ग्रब्स या कीड़े मकोड़े ढूँढ कर इकट्ठे करते। हम बहनें माँ के साथ घर वापस आती, माँ खाना पकातीं और हम बाहर बैठ के कोई न कोई खेल खेलते। "ज़ीटा, लगता है, आज माँ कुछ अच्छा पका रही है।" पांच साल की मैं हवा में आती खाने की ख़ुशबू को सूंघते हुए कहती। मुझसे दो साल बड़ी ज़ीटा मुस्कुराते हुए जवाब देती। हम दोनों लड़कियाँ गिट्टियाँ खेलने में मशगूल हो जातीं। पिता शिकार से आते। हम सब बैठते, खाना खाते और जाने कितनी बातें करते। समय भी तो बस सूरज के उगने और ढलने पर निर्भर करता था। मौसम के झूले में झूलने का आनंद ही अलग था। कई बार रात होते ही हम अलाव जलाकर दादा को घेर के बैठ जाते और उनसे कहानियाँ सुनते। क्रोकोडाइल, कोआला कैसे बने, टिडलिक मेंढक ने सारा पानी क्यों पी लिया आदि कहानियाँ हमें एक ही सीख सिखातीं "अच्छा काम करो" और एक ऐसे अदृश्य देवता की बात कहतीं जो प्रकृति में रचा बसा है और हमारी बातें सुनता रहता है। हमसे ग़लती होती है तो सजा देता है और कुछ अच्छा करते हैं तो हमें किसी न किसी तरह इनाम देता है। बुजुर्ग कहते थे कि इस देश में हमारे जैसे अनेक कबीले भी हैं, जिनकी अपनी अलग भाषा है और अलग रिवाज़ हैं। हम सब डरते थे और माँ की बात मानते थे। जब कभी विशेष उत्सव होते थे, विशेष रंगों से अपने शरीर को रंगा जाता था और अलाव जलाकर डिजरी डू और जेमबे के साथ गीत गए जाते थे। बड़ा मज़ा आता था जब हम सब साथ मिलकर नृत्य करते थे। मैं बड़े कौतूहल से उन्हें देखा करती थी। बड़ी होकर मैं भी अच्छा नृत्य कर सकूँ यही मेरी इच्छा थी। कभी कबीले की स्त्रियाँ मिल के गुफा की दीवारों पर रंगीन चित्र भी बनाती थीं। पिता कहते थे, प्रकृति हमारी सहेली है, हमारी शिक्षक भी है। मुझे याद है कि एक दिन कबीले के एक व्यक्ति ने चोरी की। कबीले वाले बहुत नाराज़ हुए। बुजुर्गों ने उसे दंड दिया और भाले से उसकी जांघों में प्रहार किया। एक ऐसा घाव बना दिया जिसके भर जाने के बाद भी निशान उसे हमेशा याद दिलाता रहे कि उसे ऐसा दंडनीय कार्य नहीं करना है। मैं और मेरी बहन ज़ीटा को समझ नहीं आता था और फिर वह दिन ... मैं कैसे भूल सकती हूँ जब मैं और मेरी बहन ज़ीटा घर के आँगन में एक दूसरे के पीछे भाग रहे थे, पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, खिलखिला रहे थे तो घर के बाहर बूटों की ठक सुनाई दी। इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते, दो गोरे अजनबियों ने हमारा हाथ पकड़ा और मोटर की तरफ़ ले जाने लगे। हमने हाथ छुड़ा के भागने की कोशिश की। पर वे आदमी बहुत मज़बूत थे और हम छोटे और कमज़ोर। पिता तो शिकार पर गए थे, माँ ने हमारी आवाज़ें सुनीं और भागी आईं। मैंने दूर से उन्हें आते देखा, वे सड़क पर गाड़ी के पीछे दौड़ रहीं थीं। पर तब तक हमें मोटर के पिछले हिस्से में बंद कर दिया गया था। हम रो रहे थे, चिल्ला रहे थे, पर सब कुछ व्यर्थ था। यही वह पल था जब माँ को मैंने आख़िरी बार देखा था। उस वक़्त हमें अच्छी चीज़ें नहीं, माँ चाहिए थी, हमारे आंसू रुकते नहीं थे, हिचकियाँ बंधी हुईं थीं। शीघ्र ही माँ ओझल हो गईं और बस आँखों के सामने रह गए हमारे साथ दौड़ते हुए पेड़। धीरे - धीरे पीछे छूटता हमारा घर, खुला आसमान। और हम सहम गए । मैं बेहद डर गई थी। मैंने बहन का हाथ ज़ोर से पकड़ लिया। नज़र घुमाई तो देखा गाड़ी के पिछले हिस्से में कुल मिलाकर हम पांच बच्चे थे। आगे बैठे लोगों ने हमें बिस्किट का पैकेट दिया, डबडबाती आँखों से ज़ीटा ने मुझे बिस्किट पकड़ाया और जाने कब खाते - खाते मेरी आँखे बंद होने लगीं और मैं ज़ीटा के कंधे से अपना सर टिका कर सो गई। जब डेढ़ घंटे बाद मोटर रुकी तो समझ ही नहीं आया हम कहाँ आ गए हैं। हमें गाड़ी से उतार के अंदर ले जाया गया। सब कुछ इतना अलग था कि मैं समझ नहीं पा रही थी। ज़ीटा सहमी हुई थी, मेरे आंसू बह रहे थे। वहाँ हमारी तरह अनेक क्षेत्रों से लाए गए बहुत से बच्चे थे, सब अपने माँ बाप से बिछड़ जाने से दुखी थे। हमको पहले एलिस स्प्रिंग्स के पुराने टेलीग्राफ स्टेशन के बंगले में ले जाया गया, फिर बाद में गार्डन पॉइंट भेज दिया गया। मुझे आज भी इंस्टीट्यूशन में वह रात याद है जब मैं बिस्तर में ज़ीटा का हाथ थाम के बैठी हुई थी। पहली बार हम माँ, पिताजी से दूर थे। बिल्कुल अनजान और अकेली दुनिया में, वहाँ आए सभी बच्चे हमारी तरह थे। जाने कितनी देर मैं ज़ीटा का हाथ थामे रोती रही। सब घबराए हुए थे। समझ नहीं पा रहे थे कि हमारे साथ ऐसा क्यों हुआ? हमने तो गलती नहीं की थी, कोई चोरी भी नहीं की थी। फिर हमें यह सजा क्यों मिल रही थी? वहाँ सभी दुखी थे, कोई भी हमारी बोली नहीं बोलता था। अगले दिन सुबह - सुबह उठा दिया गया और हमारी नई दिनचर्या शुरू हो गई। हमें बताया गया कि हमारी भलाई के लिए हमें लाया गया हैं। ये भी कि हमारे माँ बाप हमें अपने पास नहीं रखना चाहते थे। घर में हमें ग़लत बातें सिखाई जा रहीं थीं। ये भी ठीक नहीं हैं कि हम मूर्तिपूजक हैं। हम शैतान के वंशज हैं और हमारी भाषा खराब है। हम अपनी भाषा में बात नहीं कर सकते थे। जब भी हमने अपनी भाषा में बात की, हमारी हर बार बेल्ट से पिटाई हुई। उनके सख्त अनुशासन में हम रोते हुए बच्चों के आंसू गाल पर हो सूख गए। कभी-कभी मेरा मन करता था इंस्टीट्यूशन छोड़ के भाग जाऊँ या उसी बेल्ट से उनकी पिटाई करके पूछूं, कोई दर्द हुआ क्या? कभी हम दुखी होते, कभी डिप्रेस्ड हो जाते, कभी कोई रोने लगता तो सब उसे चुप कराते। मुझे याद है कि एक दिन एक किशोर ने तो आत्महत्या की कोशिश भी की। पर उसे बचा लिया गया। परिवार से अलग हो जाने का, अपनों से बिछुड़ जाने का और अकेलेपन का दुःख सिर्फ़ वही समझ सकता है जिसका परिवार उसके पास न हो। शायद ही कोई रात ऐसी होती जब मैं माँ को याद न करती। ऐसा नहीं कि इन जेल जैसे इंस्टीट्यूशंस से बच्चों ने भागने की कोशिश नहीं की। पर अधिकतर को ढूँढ कर वापस ले आया गया और फिर नशे में धुत्त सुपरवाइज़र्स के गुस्से का शिकार हुए। तेरह साल का एक लड़का, जो तीन बार भागने की कोशिश कर चुका था, उसकी इतनी पीटा गया कि मर गया। वैसे पिटाई होना तो आम बात थी, लड़के लड़कियों के साथ बलात्कार की घटनाएँ भी सुनाई देतीं थीं। वैलरी, जिसे फ़ॉस्टर घर में भेज दिया गया था, उसके पिता जैसे मालिक ने ही उसके साथ बलात्कार किया। जब उसने हिम्मत करके शिकायत की तब अधिकारी उसे वहाँ से हटा कर वापस ले आए। उसके बाद से उसकी सूनी आँखों में जैसे ग़म का सैलाब भरा रहता। हर वक़्त आसमान में देखती वह जाने किन अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर तलाशती रहती। जाने कितनी बार मैं भागने की सोचती पर ज़ीटा मुझे समझाती, उससे मुझे हिम्मत मिलती। हम दोनों को कम से कम एक दूसरे का साथ तो था। हम शायद इसीलिए ठीक से पढ़ लिख भी पाए। हमारे अध्यापक और सुपरवाइज़र्स हमसे खुश रहते। ज़ीटा मुझे समझाती, कहती पहले अपने पैरों पर खड़े होना ज़रूरी है। ज़ीटा न होती तो मैं बागी हो जाती, अपने परिवार को ढूँढने भाग जाती। पर जाती भी कहाँ? घर का पता नहीं था। तब कंप्यूटर और इंटरनेट तो थे नहीं। कैसे नक़्शा निकालती और कैसे घर पहुँचती? धीरे - धीरे हम सभी वही करने लगे जैसा वे चाहते थे। वे हमें सभ्य बनाना चाहते थे, अपने रंग में रंगना चाहते थे। सुबह से शाम एक नियम में बंधे रहते। रात को थक कर सब सो जाते। सोलह साल की होते - ज़ीटा काम पर जाने लगी और वहीं उसको एक नौजवान मिला। दोनों में प्रेम हुआ और जल्द शादी कर ली। ज़ीटा की ज़िन्दगी तो बदल गई पर मैं अब और अकेली हो गई। मुझे लगा, एक बार फिर मुझे माँ से छीन लिया गया है। मेरा दिल गुस्से और हताशा से भरा होता पर अक्सर मैं चुप रहती और काम में व्यस्त रहती। मेरे साथ की दो लड़कियाँ नन बनने के लिए और कुछ अमीरों के घर घरेलू कामों में मदद के लिए भेज दी गईं। हममें से कई लोगों को सस्ते श्रमिकों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, हमारे साथ के कई लोगों को परिवारों और संस्थानों के भीतर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा था। मैंने काम में मन लगाया। दो साल बाद मुझे भी नौकरी मिल गई और एक दिन लोकल पब में ऑलिवर से मेरी मुलाकात हुई। वह ऑस्ट्रेलिया की आर्मी में था और छुट्टियों में घर आया हुआ था। उसने जब मेरी तारीफ की तो शुरू में तो मैंने उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। मुझे वह भी अपने सुपरवाइजर जैसा कुटिल लगता। पर बाद में लगा कि वह थोड़ा अलग है, सरल ह्रदय का होने के साथ - साथ खुले विचारों का है। ऑलिवर और मैं एक दूसरे से प्यार करने लगे। एक साल की मुलाकात के बाद हमने शादी कर ली। मुझे पत्नी के रूप में पूरा सम्मान दिया। मैं जैसी भी थी, उसे बहुत पसंद थी। मेरी ज़िन्दगी में ख़ुशी के फूल खिल गए। ऑलिवर ने मुझे सारी खुशियाँ दीं। दो खूबसूरत, स्वस्थ बच्चे भी दिए। बच्चे मेरी तरह काले रंग के नहीं थे और न ही ऑलिवर की तरह दूधिया सफ़ेद। उनके मिश्रित रंग और नाक नक्श सबको बहुत भाते थे। मैं उन्हें अपने दादा की कहानियाँ सुनाती थी। अपनी एबोरीजनल संस्कृति के बारे में जितना याद था और जो भी मैंने किताबों में पढ़ा था, उन्हें सिखाती थी। यूँ तो सब कुछ ठीक चल रहा था पर एक हज़ार नौ सौ चौंसठ वियतनाम का युद्ध शुरू हो गया। उत्तरी वियतनाम की सोवियत यूनियन और चीन ने सहायता दी जबकि दक्षिणी वियतनाम का साथ देने के लिए अमेरिका, फिलीपीन, साऊथ कोरिया, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी सैन्य शक्ति भेजी। ऑस्ट्रेलिया से भेजे गए चालीस हज़ार सैनिकों में ऑलिवर भी शामिल था और मेरी दुनिया में फिर से एक बड़ा बदलाव आया। बच्चों को अकेले पालना, नौकरी करना आसान नहीं था। युद्ध चल ही रहा था, पांच साल से हम सब बेसब्री से ऑलिवर की प्रतीक्षा कर रहे थे। ऑलिवर को छुट्टी न मिली और फिर आया भी तो उसकी मौत का समाचार। करीब सवा पांच सौ ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की जाने गई। मेरा ओली, मेरी ज़िन्दगी की एकमात्र ख़ुशी छिन गई। मेरे बच्चे मेरी तरह अनाथ बन गए। मैं अपनी क़िस्मत पर दुख भी कैसे बनाती? दोनों बच्चों का मुंह देखकर रोना आता था, पर कैसे रोती? उनके लिए मुझे मज़बूत रहना था। मेरा और बच्चों का दिल टूट गया। उसके बाद तो मैंने जैसे पूरा समय बच्चों की देखभाल में उन्हें खुश रखने में लगा दिया। मज़बूती से उनको पालना भी मुझे ही था। समय पलक झपकते बीतने लगा। अब बच्चे बड़े हो गए हैं दोनों की ज़िन्दगी व्यवस्थित हो गई है। बेटी ने शादी कर ली है। बच्चे बड़े होते - होते मेरे अंतस की पीड़ा मुझे बेचैन करने लगी। मेरी अपने परिवार को ढूँढने की इच्छा फिर बलवती होने लगी। मेरे भीतर की नेटा उदास रहने लगी। मैं अक्सर सोचा करती कि उन्होंने हमारे साथ ऐसा क्यों किया? क्यों हम बच्चों को अपने घर परिवार माता पिता से छीन लिया? ये तो मुझे बड़े होने पर बाद में पता चला कि हम कैरोलिंगा और एलडोलांडा ट्राइब के *स्टोलेन जेनेरेशन के थे। कोलोनाइज़ेशन के बाद सरकार की यह धारणा थी कि हम एबोरीजनल लड़कियाँ जब बड़ी होंगी, तो अच्छे गोरे लड़कों से शादी करेंगी और हमारे बच्चे उनकी तरह होंगे। अंततः एक दिन हमारी प्रजाति और हमारा रंग समाप्त हो जाएगा । यह निष्कासन नीति ज़्यादातर महिलाओं पर आधारित थी क्योंकि महिलाएँ प्रजनन कर सकती थीं। हमारी ट्राइब के लड़के उनके यहाँ नौकर का काम करेंगे या उनकी परियोजनाओं में कर्मचारी बनेंगे, यही उनकी मंशा थी। हालाँकि वे इसे हमें अपने समाज से जोड़ने का हिस्सा मानते थे। शायद उन्होंने ये कभी नहीं सोचा था कि वे हमारा हमारे परिवार से अपहरण कर रहे हैं। हमारा शारीरिक और मानसिक ही नहीं भावात्मक शोषण भी कर रहे हैं। मैं वह अपहृत बच्ची थी, जिसे न सिर्फ़ अपने परिवार से बल्कि अपनी सभ्यता और संस्कृति से उखाड़ कर फेंक दिया गया था। 'स्टोलेन जेनेरेशन' का हिस्सा थी मैं। एक दिन मैंने ज़ीटा से अपने मन की बात की। मेरी आँखों में आंसू आ गए, मैं ज़ीटा के गले लग गई। मुझे लगा कि शायद इसी घड़ी का मुझे इंतज़ार था। मैंने ज़ीटा के साथ मिलकर अपने परिवार के बारे में जितनी सूचनाएँ मिल सकतीं थीं, सारी इकट्ठी कीं और अंततः एक दिन चल पड़ी अपने कबीले, अपने लोगों से मिलने। _और आज... आज ... मैं ढूँढते - ढूँढते अपने कबीले, अपने गाँव तक पहुँच गई हूँ। मेरी आँखें आंसुओं से भरी हुई हैं। चीज़ें बदल गई हैं यहाँ, झोपड़ियाँ टूट - फूट गई हैं। कच्चे पक्के घर बन गए हैं । मैं आस पास के लोगों से अपनी माँ और पिता का नाम लेती हूँ। वे चौक कर मुझे देखते हैं और अंततः मुझे मेरे भाई वारु के पास ले जाते हैं। जो एक छोटे से पुराने टिन शेड में रह रहा था और जब मैंने उसे देखा और उसने मुझे, तो देखते ही उसने मुझे पहचान लिया और रोने लगा। मैं भी ख़ुद को संभाल नहीं पाई। जाने कितनी देर तक हम रोते रहे। उसने बताया कि हमें ज़बरदस्ती ले जाए जाने के बाद सब लोग बहुत दिन तक परेशान रहे। उन्होंने हमें बहुत ढूँढा, यहाँ तक कि पिता के साथ वह हमें ढूँढने डार्विन भी आया, पर उन्हें बताया गया कि हम मर चुके हैं। यह सुनकर मेरे पिता बहुत रोये और वापस लौट गए। माँ ने ख़ुद को भाग्य के हवाले कर दिया और कुछ वर्ष पूर्व माँ और पिताजी चल बसे थे। अब मैं उन्हें तो वापस नहीं ला सकती हूँ, पर उनकी आत्मा को प्रसन्न कर सकती हूँ। मुझे विश्वास है कि वे जहाँ भी हैं मुझे देख रहे हैं, मोइनी देवता की तरह और मैं उनसे जुड़ना चाहती हूँ। इतने सालों में जो कुछ छूट गया है, उसे झोली में भर लेना चाहती हूँ। मैं...मैं ... अपनी संस्कृति से जुड़ना चाहती हूँ। मैंने हिम्मत करके अपनी ट्राइब के लोगों से अनुरोध किया कि क्या वे मुझे स्वीकार कर लेंगे? अब मैं कुछ दिनों के लिए यहाँ रुक गई हूँ। मुझे बहुत ख़ुशी हुई, जब हमारे लोगों ने मुझे खुले मन से वापस स्वीकार कर लिया। अपनी परंपराएँ, रीति रिवाज़ और ड्रीमटाइम कहानियों के बारे में उनसे सीख रही हूँ। कभी मैं आकाश से बातें करती हूँ, कभी पक्षियों-सी चहचहाती हूँ। कभी रात को कबीले के लोगों के साथ अलाव के पास बैठ जाती हूँ, कभी फूलों और पौधों से नैसर्गिक रंग बनाती हूँ। कभी छोटे - छोटे बच्चों के चेहरों को रंगती हूँ। उनके साथ खेलती हूँ और अपना बचपन ढूँढ लाती हूँ। सच तो ये है कि यहाँ आकर मुझे जितनी शांति मिली है, वह किसी चर्च या धार्मिक स्थान पर जाकर भी नहीं मिलती। मुझे लगता है कि अंत में मुझे वह खज़ाना मिल गया है, जिसे मैं सालों से तलाश रही थी और ये खज़ाना इतना बेशकीमती है कि दुनिया की कोई भी दौलत मुझे इतनी ख़ुशी नहीं दे सकती। - समुदाय की स्टोलेन जेनेरेशन पर आधारित की कहानी है। सन एक हज़ार नौ सौ से एक हज़ार नौ सौ साठ के मध्य अंग्रेजों द्वारा अनुमानतः तीन लाख आदिवासी बच्चों को उनके परिवार से जबरन छीन लिया गया ताकि वे अंग्रेज़ी समुदाय में सामंजस्य स्थापित कर सकें और उनके काम आ सकें।)
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नई दिल्लीः पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बहु-परत त्वरित निपटान प्रक्रिया के माध्यम से अपवादों के साथ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की मांग की है।
मंत्रालय ने जनवरी में पहले प्रस्ताव दिया था कि राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरणों (एसईआईएए) को उस गति के आधार पर स्थान दिया जाए जिस गति से उन्होंने बोलियों को मंजूरी दी और परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय अनुमोदन प्रदान किया।
इस कार्रवाई का बचाव यह दावा करके किया गया था कि यह "एसईआईएए के कामकाज में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रोत्साहित करते हुए किसी भी नियामक सुरक्षा उपायों को कमजोर नहीं करेगा।
मंत्रालय की ओर से वन (संरक्षण) नियम, 2022 शीर्षक से एक घोषणा बुधवार देर रात जारी की गई। यह एक सलाहकार समिति, प्रत्येक एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय में एक क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति और राज्य / केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) सरकार के स्तर पर एक स्क्रीनिंग समिति के गठन का सुझाव देता है।
सलाहकार समिति की भूमिका उन प्रस्तावों के लिए लागू धाराओं के तहत अनुमोदन प्रदान करने के संबंध में सलाह प्रदान करने या सिफारिशें करने तक सीमित थी जिन्हें इसे संदर्भित किया गया था और साथ ही साथ वनों के संरक्षण से संबंधित किसी भी मुद्दे को केंद्र सरकार द्वारा संदर्भित किया गया था।
Ind Vs Eng: रोहित शर्मा की गैरमौजूदगी में भारत के लिए कौन करेगा ओपनिंग ?
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नई दिल्लीः पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बहु-परत त्वरित निपटान प्रक्रिया के माध्यम से अपवादों के साथ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की मांग की है। मंत्रालय ने जनवरी में पहले प्रस्ताव दिया था कि राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरणों को उस गति के आधार पर स्थान दिया जाए जिस गति से उन्होंने बोलियों को मंजूरी दी और परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय अनुमोदन प्रदान किया। इस कार्रवाई का बचाव यह दावा करके किया गया था कि यह "एसईआईएए के कामकाज में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रोत्साहित करते हुए किसी भी नियामक सुरक्षा उपायों को कमजोर नहीं करेगा। मंत्रालय की ओर से वन नियम, दो हज़ार बाईस शीर्षक से एक घोषणा बुधवार देर रात जारी की गई। यह एक सलाहकार समिति, प्रत्येक एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय में एक क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति और राज्य / केंद्र शासित प्रदेश सरकार के स्तर पर एक स्क्रीनिंग समिति के गठन का सुझाव देता है। सलाहकार समिति की भूमिका उन प्रस्तावों के लिए लागू धाराओं के तहत अनुमोदन प्रदान करने के संबंध में सलाह प्रदान करने या सिफारिशें करने तक सीमित थी जिन्हें इसे संदर्भित किया गया था और साथ ही साथ वनों के संरक्षण से संबंधित किसी भी मुद्दे को केंद्र सरकार द्वारा संदर्भित किया गया था। Ind Vs Eng: रोहित शर्मा की गैरमौजूदगी में भारत के लिए कौन करेगा ओपनिंग ?
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नई दिल्ली। देश की राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए केजरीवाल सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली सरकार ने जन सहयोग से दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ सक्रिय अभियान चलाने के लिए विंटर एक्शन प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है. इससे संबंधित पहली बैठक पर्यावरण विभाग, डीपीसीसी, विकास और वन विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ हुई. इस पर चर्चा हुई कि शीतकालीन कार्य योजना का फोकस प्वाइंट क्या होना चाहिए।
बैठक में आए सुझावों पर 10 सूत्रीय फोकस बिंदु तय किए गए हैं।
6. स्मॉग टावर (विशेषज्ञ समिति के माध्यम से होगा अध्ययन)
7. पड़ोसी राज्यों से संवाद स्थापित करें, (क्योंकि दिल्ली की समस्या सिर्फ दिल्ली का प्रदूषण नहीं है, अधिकारियों की एक टीम बनाएगी जो इन राज्यों से बात करेगी)
10. केंद्र और केंद्रीय आयोग के साथ संपर्क (क्योंकि हम केवल अन्य राज्यों के साथ संवाद कर सकते हैं, कार्यान्वयन केंद्र और आयोग द्वारा किया जा सकता है)
गोपाल राय ने आगे कहा कि सचिवालय 14 सितंबर को एमसीडी, डीडीए, पीडब्ल्यूडी, ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग, जल बोर्ड, सिंचाई और बाढ़, सीपीडब्ल्यूडी और एनएचआईए जैसे सभी संबंधित विभागों के साथ समीक्षा बैठक करेगा. ग्रीन एप पर पिछले एक साल में प्राप्त शिकायतों का समाधान कैसे हुआ, यह भी देखा जाएगा। शीतकालीन कार्य योजना को अंतिम रूप देने का लक्ष्य 30 सितंबर तक दिया गया है।
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नई दिल्ली। देश की राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए केजरीवाल सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली सरकार ने जन सहयोग से दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ सक्रिय अभियान चलाने के लिए विंटर एक्शन प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है. इससे संबंधित पहली बैठक पर्यावरण विभाग, डीपीसीसी, विकास और वन विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ हुई. इस पर चर्चा हुई कि शीतकालीन कार्य योजना का फोकस प्वाइंट क्या होना चाहिए। बैठक में आए सुझावों पर दस सूत्रीय फोकस बिंदु तय किए गए हैं। छः. स्मॉग टावर सात. पड़ोसी राज्यों से संवाद स्थापित करें, दस. केंद्र और केंद्रीय आयोग के साथ संपर्क गोपाल राय ने आगे कहा कि सचिवालय चौदह सितंबर को एमसीडी, डीडीए, पीडब्ल्यूडी, ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग, जल बोर्ड, सिंचाई और बाढ़, सीपीडब्ल्यूडी और एनएचआईए जैसे सभी संबंधित विभागों के साथ समीक्षा बैठक करेगा. ग्रीन एप पर पिछले एक साल में प्राप्त शिकायतों का समाधान कैसे हुआ, यह भी देखा जाएगा। शीतकालीन कार्य योजना को अंतिम रूप देने का लक्ष्य तीस सितंबर तक दिया गया है।
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) छोड़ते ही उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. एमपी-एमएलए कोर्ट ने स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. कोर्ट ने उनको आगामी 24 जनवरी तक पेश होने का आदेश दिया है. यहां क्लिक करके पढ़ें पूरी खबर.
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि हमने अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को उत्तर प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया है. सपा नीत गठबंधन के उम्मीदवारों की लिस्ट चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी. उन्होंने ये भी कहा कि मेरी पार्टी पहले और दूसरे चरण में चुनाव नहीं लड़ेगी.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी छोड़ने की बड़ी वजह दलितों की उपेक्षा बताई थी. हालांकि, बीजेपी ने इन आरोपों पर पलटवार किया है. योगी सरकार में मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, 'सपा या बसपा के मुकाबले बीजेपी ने दलितों के लिए ज्यादा काम किया है. स्वामी प्रसाद मौर्य 5 सालों तक योगी सरकार की तारीफ करते रहे. अब वह पार्टी छोड़ रहे हैं. बीजेपी पर इसका कोई असर पड़ने नहीं जा रहा. उत्तर प्रदेश में कमल खिलकर रहेगा, कोई इसे रोक नहीं सकता. '
स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी तो छोड़ दी है, लेकिन सपा में जाने के सवाल पर उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. उन्होंने कहा है कि 14 जनवरी को वह आखिरी फैसला करेंगे. मौर्य के इस रुख के बाद एक बार फिर राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को मौर्य के साथ तस्वीर ट्वीट कर उनके सपा में आने की बात कही थी. इससे ठीक पहले, मौर्य ने योगी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. मौर्य ने कहा, "14 जनवरी को वह घड़ी आएगी जब अंतिम धमाका होगा. जो भी निर्णय होगा, वो बीजेपी सरकार की ताबूत में आखिरी कील होगा. " सपा प्रमुख अखिलेश यादव के उनके साथ फोटो ट्वीट करने पर मौर्य ने कहा, "अगर किसी ने मुझे ट्वीट कर धन्यवाद किया है तो मैं धन्यवाद करता हूं, लेकिन मुझे जाना कहां है, यह निर्णय कार्यकर्ताओं से मिलकर होगा. अंतिम निर्णय कल शाम तक आ जाएगा, जिसे मैं 14 जनवरी को सुना दूंगा. "
इमरान मसूद के बाद एक और कांग्रेस विधायक सपा में जाने की तैयारी कर रहे हैं. इनका नाम है मसूद अख्तर. मसूद ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए सपा से गठबंधन की मांग की थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. उनके मुताबिक, इस बार चुनाव में सपा और बीजेपी में सीधी लड़ाई है, इस वजह से उन्होंने और इमरान मसूद ने सपा में जाने का फैसला किया. मसूद अख्तर के मुताबिक, उन्होंने आज सपा जॉइन के लिए अखिलेश यादव से वक्त मांगा है.
यूपी विधानसभा चुनाव से ऐन पहले सत्ताधारी बीजेपी को बड़ा झटका तब लगा जब कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी छोड़कर सपा का दामन थामने का ऐलान कर दिया. राजनीतिक जानकार इसे बीजेपी के लिए बड़ा नुकसान मान रहे हैं. आखिर क्या है इसकी वजह, जानने के लिए यहां क्लिक करें.
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के एक बयान ने सूबे की सियासत में गर्माहट ला दी है. योगी के मुताबिक, इस बार का चुनाव 80 फीसदी बनाम 20 फीसदी के बीच होगा. राजनीतिक जानकार और विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों की ओर इशारा बता रहे हैं. इस बयान को लेकर योगी जहां विपक्ष के निशाने पर हैं, वहीं कुछ राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस बयान से बीजेपी को ध्रुवीकरण का फायदा मिल सकता है. पूरे सियासी समीकरण को समझने के लिए देखें यह वीडियो.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने तारीखों की घोषणा कर दी है, मगर अब तक बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड के बीच साझा रूप से चुनाव लड़ने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है जिसको लेकर जनता दल यूनाइटेड में नाराजगी बढ़ती जा रही है. जेडीयू संसदीय दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड के बीच अब तक गठबंधन नहीं हो पाने को लेकर अपनी नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा, "हमारे पार्टी के नेता आरसीपी सिंह बीजेपी के साथ गठबंधन के मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहे हैं मगर अब तक इसको लेकर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है. अब तो उत्तर प्रदेश में चुनाव की घोषणा भी हो गई है. यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर गठबंधन कब तक होगा. " यूपी में बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड के बीच किसी प्रकार के गठबंधन की संभावना पर सवाल खड़े हो गए जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और जदयू के उत्तर प्रदेश प्रभारी केसी त्यागी ने यूपी चुनाव अकेले लड़ने के संकेत दे दिए और कहा कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. (रिपोर्ट- रोहित कुमार सिंह)
UP Election 2022: यूपी चुनाव को लेकर सपा ने कई दलों से गठबंधन किया है. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज दोपहर 12 बजे सपा मुख्यालय पर बैठक बुलाई है. उन्होंने सहयोगी दलों की मीटिंग बुलाई है, जिसमें आरएलडी को छोड़कर अन्य सभी दल शामिल होंगे. सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग पर चर्चा होगी. इस बैठक में कृष्णा पटेल, ओपी राजभर, संजय चौहान, केशव देव मौर्य मौजूद रहेंगे. (इनपुट- कुमार अभिषेक)
Swami Prasad Maurya News: बीजेपी के किसी बड़े नेता ने या केंद्रीय नेतृत्व ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ संपर्क नहीं किया है. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को स्वामी प्रसाद मौर्य के बीजेपी छोड़ने की भनक पहले से थी, इसलिए उनके इस्तीफे के बाद भी कोई संपर्क नहीं साधा गया है. (इनपुट- कुमार अभिषेक)
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भारतीय जनता पार्टी छोड़ते ही उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. एमपी-एमएलए कोर्ट ने स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. कोर्ट ने उनको आगामी चौबीस जनवरी तक पेश होने का आदेश दिया है. यहां क्लिक करके पढ़ें पूरी खबर. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि हमने अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया है. सपा नीत गठबंधन के उम्मीदवारों की लिस्ट चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी. उन्होंने ये भी कहा कि मेरी पार्टी पहले और दूसरे चरण में चुनाव नहीं लड़ेगी. स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी छोड़ने की बड़ी वजह दलितों की उपेक्षा बताई थी. हालांकि, बीजेपी ने इन आरोपों पर पलटवार किया है. योगी सरकार में मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, 'सपा या बसपा के मुकाबले बीजेपी ने दलितों के लिए ज्यादा काम किया है. स्वामी प्रसाद मौर्य पाँच सालों तक योगी सरकार की तारीफ करते रहे. अब वह पार्टी छोड़ रहे हैं. बीजेपी पर इसका कोई असर पड़ने नहीं जा रहा. उत्तर प्रदेश में कमल खिलकर रहेगा, कोई इसे रोक नहीं सकता. ' स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी तो छोड़ दी है, लेकिन सपा में जाने के सवाल पर उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. उन्होंने कहा है कि चौदह जनवरी को वह आखिरी फैसला करेंगे. मौर्य के इस रुख के बाद एक बार फिर राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को मौर्य के साथ तस्वीर ट्वीट कर उनके सपा में आने की बात कही थी. इससे ठीक पहले, मौर्य ने योगी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. मौर्य ने कहा, "चौदह जनवरी को वह घड़ी आएगी जब अंतिम धमाका होगा. जो भी निर्णय होगा, वो बीजेपी सरकार की ताबूत में आखिरी कील होगा. " सपा प्रमुख अखिलेश यादव के उनके साथ फोटो ट्वीट करने पर मौर्य ने कहा, "अगर किसी ने मुझे ट्वीट कर धन्यवाद किया है तो मैं धन्यवाद करता हूं, लेकिन मुझे जाना कहां है, यह निर्णय कार्यकर्ताओं से मिलकर होगा. अंतिम निर्णय कल शाम तक आ जाएगा, जिसे मैं चौदह जनवरी को सुना दूंगा. " इमरान मसूद के बाद एक और कांग्रेस विधायक सपा में जाने की तैयारी कर रहे हैं. इनका नाम है मसूद अख्तर. मसूद ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए सपा से गठबंधन की मांग की थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. उनके मुताबिक, इस बार चुनाव में सपा और बीजेपी में सीधी लड़ाई है, इस वजह से उन्होंने और इमरान मसूद ने सपा में जाने का फैसला किया. मसूद अख्तर के मुताबिक, उन्होंने आज सपा जॉइन के लिए अखिलेश यादव से वक्त मांगा है. यूपी विधानसभा चुनाव से ऐन पहले सत्ताधारी बीजेपी को बड़ा झटका तब लगा जब कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी छोड़कर सपा का दामन थामने का ऐलान कर दिया. राजनीतिक जानकार इसे बीजेपी के लिए बड़ा नुकसान मान रहे हैं. आखिर क्या है इसकी वजह, जानने के लिए यहां क्लिक करें. उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के एक बयान ने सूबे की सियासत में गर्माहट ला दी है. योगी के मुताबिक, इस बार का चुनाव अस्सी फीसदी बनाम बीस फीसदी के बीच होगा. राजनीतिक जानकार और विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों की ओर इशारा बता रहे हैं. इस बयान को लेकर योगी जहां विपक्ष के निशाने पर हैं, वहीं कुछ राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस बयान से बीजेपी को ध्रुवीकरण का फायदा मिल सकता है. पूरे सियासी समीकरण को समझने के लिए देखें यह वीडियो. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने तारीखों की घोषणा कर दी है, मगर अब तक बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड के बीच साझा रूप से चुनाव लड़ने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है जिसको लेकर जनता दल यूनाइटेड में नाराजगी बढ़ती जा रही है. जेडीयू संसदीय दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड के बीच अब तक गठबंधन नहीं हो पाने को लेकर अपनी नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा, "हमारे पार्टी के नेता आरसीपी सिंह बीजेपी के साथ गठबंधन के मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहे हैं मगर अब तक इसको लेकर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है. अब तो उत्तर प्रदेश में चुनाव की घोषणा भी हो गई है. यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर गठबंधन कब तक होगा. " यूपी में बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड के बीच किसी प्रकार के गठबंधन की संभावना पर सवाल खड़े हो गए जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और जदयू के उत्तर प्रदेश प्रभारी केसी त्यागी ने यूपी चुनाव अकेले लड़ने के संकेत दे दिए और कहा कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. UP Election दो हज़ार बाईस: यूपी चुनाव को लेकर सपा ने कई दलों से गठबंधन किया है. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज दोपहर बारह बजे सपा मुख्यालय पर बैठक बुलाई है. उन्होंने सहयोगी दलों की मीटिंग बुलाई है, जिसमें आरएलडी को छोड़कर अन्य सभी दल शामिल होंगे. सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग पर चर्चा होगी. इस बैठक में कृष्णा पटेल, ओपी राजभर, संजय चौहान, केशव देव मौर्य मौजूद रहेंगे. Swami Prasad Maurya News: बीजेपी के किसी बड़े नेता ने या केंद्रीय नेतृत्व ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ संपर्क नहीं किया है. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को स्वामी प्रसाद मौर्य के बीजेपी छोड़ने की भनक पहले से थी, इसलिए उनके इस्तीफे के बाद भी कोई संपर्क नहीं साधा गया है.
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Rohit Sharma (Photo Credit: ICC Twitter)
नई दिल्लीः
T20 World Cup 2022 Rohit Sharma: टीम इंडिया (Team India) मिशन टी20 वर्ल्ड के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे (Australia Tour) पर है. टीम इंडिया के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) पीठ में चोट के कारण टीम से बाहर हो गए थे. बुमराह का चोटिल होना टीम इंडिया के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. लेकिन राहत देने वाली खबर यह है कि उनकी जगह मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) को टीम में शामिल किया गया है और वह ऑस्ट्रेलिया में टीम के साथ जुड़ गए हैं. मोहम्मद शमी के पास बड़े मैचों का अनुभव है. ऐसे में वह टीम की जीत में योगदान दे सकते हैं.
टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने वर्ल्ड कप से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में जसप्रीत बुमराह और शमी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दिया. उन्होंने बुमराह की लेकर दिल छूने वाली कही है. उन्होंने कहा, 'बुमराह एक क्वालिटी गेंदबाज हैं. दुर्भाग्य से कोई चोटिल होता है, इसमें कुछ नहीं कर सकते. उनकी चोट को लेकर काफी स्पेशलिस्ट से बात की, लेकिन वहां से कोई अच्छा रिस्पॉन्स नहीं आया. वर्ल्ड कप जरूरी है, लेकिन उनका करियर हमारे लिए ज्यादा जरूरी है. अभी वह 27-28 साल के ही हैं. भविष्य में उनके आगे लंबा करियर है. हम ऐसे रिस्क नहीं ले सकते. स्पेशलिस्ट ने भी यही सुझाव दिया. वह आगे टीम के लिए कई मैच जिताएंगे. उनकी कमी जरूर खलेगी. '
रोहित ने मैचों को लेकर रहा, 'आपके पास यही होता है कि जितने खिलाड़ी टीम में मौजूद हैं, उनसे उनका बेस्ट परफॉर्मेंस लिया जाए. इसके अलावा आप कुछ नहीं कर सकते. 23 तारीख को होने वाले मैच (पाकिस्तान मैच) से पहले जो भी लड़के खेलने वाले हैं, उन्हें तैयार रहने के लिए कहा गया है. आपके पास यही सही तरीका होता है कि मौजूदा खिलाड़ियों को तैयार रहने के लिए कह दिया जाए. '
टूर्नामेंट का सबसे बड़ा हाईवोल्टेज वाला मुकाबला 23 अक्टूबर को मेलबर्न में होगा जब भारत और पाकिस्तान (Pakistan) की टीम एक दूसरे से भिड़ेगी. पिछले साल टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को 10 विकेट से करारी हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे में रोहित शर्मा (Rohit Sharma) की अगुवाई वाली टीम इंडिया उसका हिसाब बराबर करना चाहेगी.
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Rohit Sharma नई दिल्लीः Tबीस World Cup दो हज़ार बाईस Rohit Sharma: टीम इंडिया मिशन टीबीस वर्ल्ड के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे पर है. टीम इंडिया के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह पीठ में चोट के कारण टीम से बाहर हो गए थे. बुमराह का चोटिल होना टीम इंडिया के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. लेकिन राहत देने वाली खबर यह है कि उनकी जगह मोहम्मद शमी को टीम में शामिल किया गया है और वह ऑस्ट्रेलिया में टीम के साथ जुड़ गए हैं. मोहम्मद शमी के पास बड़े मैचों का अनुभव है. ऐसे में वह टीम की जीत में योगदान दे सकते हैं. टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने वर्ल्ड कप से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में जसप्रीत बुमराह और शमी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दिया. उन्होंने बुमराह की लेकर दिल छूने वाली कही है. उन्होंने कहा, 'बुमराह एक क्वालिटी गेंदबाज हैं. दुर्भाग्य से कोई चोटिल होता है, इसमें कुछ नहीं कर सकते. उनकी चोट को लेकर काफी स्पेशलिस्ट से बात की, लेकिन वहां से कोई अच्छा रिस्पॉन्स नहीं आया. वर्ल्ड कप जरूरी है, लेकिन उनका करियर हमारे लिए ज्यादा जरूरी है. अभी वह सत्ताईस-अट्ठाईस साल के ही हैं. भविष्य में उनके आगे लंबा करियर है. हम ऐसे रिस्क नहीं ले सकते. स्पेशलिस्ट ने भी यही सुझाव दिया. वह आगे टीम के लिए कई मैच जिताएंगे. उनकी कमी जरूर खलेगी. ' रोहित ने मैचों को लेकर रहा, 'आपके पास यही होता है कि जितने खिलाड़ी टीम में मौजूद हैं, उनसे उनका बेस्ट परफॉर्मेंस लिया जाए. इसके अलावा आप कुछ नहीं कर सकते. तेईस तारीख को होने वाले मैच से पहले जो भी लड़के खेलने वाले हैं, उन्हें तैयार रहने के लिए कहा गया है. आपके पास यही सही तरीका होता है कि मौजूदा खिलाड़ियों को तैयार रहने के लिए कह दिया जाए. ' टूर्नामेंट का सबसे बड़ा हाईवोल्टेज वाला मुकाबला तेईस अक्टूबर को मेलबर्न में होगा जब भारत और पाकिस्तान की टीम एक दूसरे से भिड़ेगी. पिछले साल टीबीस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को दस विकेट से करारी हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे में रोहित शर्मा की अगुवाई वाली टीम इंडिया उसका हिसाब बराबर करना चाहेगी.
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चर्चा में क्यों?
28 मार्च, 2023 को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने दस नये विस्तारित शहरों की प्लानिंग एरिया अथॉरिटी (आयोजना क्षेत्र प्राधिकार) को अधिसूचित कर दिया है, जिनमें नवादा, मधेपुरा, भागलपुर, जहानाबाद, गोपालगंज, बांका, सोनपुर, शेखपुरा, सुपौल और अरवल शामिल हैं।
- नये विस्तारित शहरों की प्रत्येक प्लानिंग एरिया अथॉरिटी में संबंधित ज़िले के डीएम अध्यक्ष, जबकि संबंधित प्लानिंग एरिया अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सदस्य सचिव बनाए गए हैं।
- इनके अलावा, संबंधित ज़िले के उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्त्ता (राजस्व), पथ निर्माण, पीएचईडी और ग्रामीण कार्य विभाग से संबंधित कार्यपालक अभियंता, संबंधित क्षेत्र में आने वाले नगर निकाय के कार्यपालक अभियंता, मुख्य नगर निवेशक तथा क्षेत्रीय निवेश संगठन या उनके प्रतिनिधि और नगर निवेशन का विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को अथॉरिटी का पदेन सदस्य बनाया गया है।
- प्लानिंग एरिया अथॉरिटी पर विस्तारित क्षेत्र के लिये मास्टर प्लान के साथ ही अन्य विकास योजनाओं की तैयारी, इसके क्रियान्वयन और अन्य नियमानुकूल कार्रवाई की जिम्मेदार होगी। इससे संबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण के लिये नक्शा भी अथॉरिटी ही पास करेगी।
- विदित है कि विभाग ने करीब दो महीने पहले ही संबंधित निकाय सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों को जोड़कर इन 10 आयोजना क्षेत्रों को अधिसूचित किया था। अब अथॉरिटी बनने से इन क्षेत्रों के विकास में तेजी आएगी।
- उल्लेखनीय है कि राज्य में पहले से 33 प्लानिंग एरिया अथॉरिटी अधिसूचित हैं। दस नये प्लानिंग एरिया की अथॉरिटी अधिसूचित होने पर इनकी कुल संख्या बढ़कर 43 हो गई है।
- अधिकारियों के मुताबिक प्लानिंग एरिया अथॉरिटी के फंक्शनल होने से संबंधित क्षेत्र का शहरीकरण तेज होगा और उनमें व्यावसायिक व आवासीय गतिविधियाँ बढ़ेंगी।
- डीएम की अध्यक्षता में गठित यह कमेटी सबसे पहले सर्वे कर क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार करेगी। फिर इलाके की विशेषताओं के मुताबिक शहरीकरण के तत्त्वों को बढ़ावा देगी। इसके अंतर्गत चयनित बड़ी योजनाओं की अनुशंसा राज्य सरकार से की जाएगी ताकि उसके लिये आवश्यक राशि का प्रबंध किया जा सके।
- राज्य के इन 43 नये शहरों में प्लानिंग अथॉरिटी गठित की गई है, जिसके अंतर्गत आरा, अररिया, औरंगाबाद, बगहा, बेगूसराय, बेतिया, भभुआ, बिहारशरीफ, बोधगया, बक्सर, छपरा, दरभंगा, डेहरी, फारबिसगंज, गया, हाजीपुर, जमुई, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधुबनी, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पटना, पूर्णिया, राजगीर, सहरसा, सासाराम, शिवहर, सीतामढ़ी, सीवान, नवादा, मधेपुरा, भागलपुर, जहानाबाद, गोपालगंज, बांका, सोनपुर, शेखपुरा, सुपौल और अरवल ज़िले शामिल हैं।
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चर्चा में क्यों? अट्ठाईस मार्च, दो हज़ार तेईस को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने दस नये विस्तारित शहरों की प्लानिंग एरिया अथॉरिटी को अधिसूचित कर दिया है, जिनमें नवादा, मधेपुरा, भागलपुर, जहानाबाद, गोपालगंज, बांका, सोनपुर, शेखपुरा, सुपौल और अरवल शामिल हैं। - नये विस्तारित शहरों की प्रत्येक प्लानिंग एरिया अथॉरिटी में संबंधित ज़िले के डीएम अध्यक्ष, जबकि संबंधित प्लानिंग एरिया अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सदस्य सचिव बनाए गए हैं। - इनके अलावा, संबंधित ज़िले के उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्त्ता , पथ निर्माण, पीएचईडी और ग्रामीण कार्य विभाग से संबंधित कार्यपालक अभियंता, संबंधित क्षेत्र में आने वाले नगर निकाय के कार्यपालक अभियंता, मुख्य नगर निवेशक तथा क्षेत्रीय निवेश संगठन या उनके प्रतिनिधि और नगर निवेशन का विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को अथॉरिटी का पदेन सदस्य बनाया गया है। - प्लानिंग एरिया अथॉरिटी पर विस्तारित क्षेत्र के लिये मास्टर प्लान के साथ ही अन्य विकास योजनाओं की तैयारी, इसके क्रियान्वयन और अन्य नियमानुकूल कार्रवाई की जिम्मेदार होगी। इससे संबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण के लिये नक्शा भी अथॉरिटी ही पास करेगी। - विदित है कि विभाग ने करीब दो महीने पहले ही संबंधित निकाय सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों को जोड़कर इन दस आयोजना क्षेत्रों को अधिसूचित किया था। अब अथॉरिटी बनने से इन क्षेत्रों के विकास में तेजी आएगी। - उल्लेखनीय है कि राज्य में पहले से तैंतीस प्लानिंग एरिया अथॉरिटी अधिसूचित हैं। दस नये प्लानिंग एरिया की अथॉरिटी अधिसूचित होने पर इनकी कुल संख्या बढ़कर तैंतालीस हो गई है। - अधिकारियों के मुताबिक प्लानिंग एरिया अथॉरिटी के फंक्शनल होने से संबंधित क्षेत्र का शहरीकरण तेज होगा और उनमें व्यावसायिक व आवासीय गतिविधियाँ बढ़ेंगी। - डीएम की अध्यक्षता में गठित यह कमेटी सबसे पहले सर्वे कर क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार करेगी। फिर इलाके की विशेषताओं के मुताबिक शहरीकरण के तत्त्वों को बढ़ावा देगी। इसके अंतर्गत चयनित बड़ी योजनाओं की अनुशंसा राज्य सरकार से की जाएगी ताकि उसके लिये आवश्यक राशि का प्रबंध किया जा सके। - राज्य के इन तैंतालीस नये शहरों में प्लानिंग अथॉरिटी गठित की गई है, जिसके अंतर्गत आरा, अररिया, औरंगाबाद, बगहा, बेगूसराय, बेतिया, भभुआ, बिहारशरीफ, बोधगया, बक्सर, छपरा, दरभंगा, डेहरी, फारबिसगंज, गया, हाजीपुर, जमुई, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधुबनी, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पटना, पूर्णिया, राजगीर, सहरसा, सासाराम, शिवहर, सीतामढ़ी, सीवान, नवादा, मधेपुरा, भागलपुर, जहानाबाद, गोपालगंज, बांका, सोनपुर, शेखपुरा, सुपौल और अरवल ज़िले शामिल हैं।
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बीएमडब्ल्यू के मिनी ब्रांड की कॉम्पैक्ट एसयूवी 'मिनी कंट्रीमैन' के नेक्स्ट जेन मॉडल को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया गया है। भारत में इस कार की कीमत 36. 5 लाख रुपए तय की गई है। इस कार को 2014 में न्यू यार्क ऑटो शो के दौरान प्रदर्शित किया गया था।
मिनी कॉपर एस कंट्रीमैन में 4 सिलेंडर, टर्बोचार्ज, डायरेक्ट इंजेक्शन और वैरिएबल कंट्रोल के साथ काम करती है, जो 190बीएचपी पावर देने में सक्षम है। गौरतलब है कि दुनियाभर में मशहूर आइकॉनिक कार मिनी को भारत के चेन्नई स्थित प्लांट में तैयार करने की व्यवस्था पहले की जा चुकी है।
मिनी कॉपर एस कंट्रीमैन कार के तीन डीजल वैरियंट मौजूद होंगे। इसके लिए खास एएलएल4 व्हील सिस्टम तैयार किया गया है जो ऑप्शनल होगा। एएलएल4 इलेक्ट्रिनिक मैनेजमेंट सिस्टम से होकर सीधे डीसीएसी यूनिट को पावर प्रदान करने का काम करता है। जिसके जरिए चंद सेकेंड में गति पा सकते हैं।
स्टैंडर्ड मॉडल के सभी इंजन 6 स्पीड मैन्युअल ट्रांसमिशन के साथ काम करते है। एक ऑप्शनल के साथ 6 गियर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की सुविधा दी गई है जो मिनी वन डी कंट्रीमैन को छोड़ सभी मॉडल में मौजूद होगा। साथ ही मैन्युअल सेलेक्शन के लिए पैडल शिफ्ट ऑप्शन भी मौजूद होगा।
पहले से मौजूद मिनी कंट्रीमैन के मॉडल की कीमतों की बात करें तो मिनी वन कंट्रीमैन जो पेट्रोल वैरियंट में है जिसकी कीमत 23. 50 लाख रुपए, जबकि डीजल वैरियंट मिनी कूपर डी कंट्रीमैन की कीमत 25. 60 लाख रुपए और मिनी कूपर डी कंट्रीमैन हाई की कीमत 28. 90 लाख रुपए है।
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बीएमडब्ल्यू के मिनी ब्रांड की कॉम्पैक्ट एसयूवी 'मिनी कंट्रीमैन' के नेक्स्ट जेन मॉडल को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया गया है। भारत में इस कार की कीमत छत्तीस. पाँच लाख रुपए तय की गई है। इस कार को दो हज़ार चौदह में न्यू यार्क ऑटो शो के दौरान प्रदर्शित किया गया था। मिनी कॉपर एस कंट्रीमैन में चार सिलेंडर, टर्बोचार्ज, डायरेक्ट इंजेक्शन और वैरिएबल कंट्रोल के साथ काम करती है, जो एक सौ नब्बेबीएचपी पावर देने में सक्षम है। गौरतलब है कि दुनियाभर में मशहूर आइकॉनिक कार मिनी को भारत के चेन्नई स्थित प्लांट में तैयार करने की व्यवस्था पहले की जा चुकी है। मिनी कॉपर एस कंट्रीमैन कार के तीन डीजल वैरियंट मौजूद होंगे। इसके लिए खास एएलएलचार व्हील सिस्टम तैयार किया गया है जो ऑप्शनल होगा। एएलएलचार इलेक्ट्रिनिक मैनेजमेंट सिस्टम से होकर सीधे डीसीएसी यूनिट को पावर प्रदान करने का काम करता है। जिसके जरिए चंद सेकेंड में गति पा सकते हैं। स्टैंडर्ड मॉडल के सभी इंजन छः स्पीड मैन्युअल ट्रांसमिशन के साथ काम करते है। एक ऑप्शनल के साथ छः गियर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की सुविधा दी गई है जो मिनी वन डी कंट्रीमैन को छोड़ सभी मॉडल में मौजूद होगा। साथ ही मैन्युअल सेलेक्शन के लिए पैडल शिफ्ट ऑप्शन भी मौजूद होगा। पहले से मौजूद मिनी कंट्रीमैन के मॉडल की कीमतों की बात करें तो मिनी वन कंट्रीमैन जो पेट्रोल वैरियंट में है जिसकी कीमत तेईस. पचास लाख रुपए, जबकि डीजल वैरियंट मिनी कूपर डी कंट्रीमैन की कीमत पच्चीस. साठ लाख रुपए और मिनी कूपर डी कंट्रीमैन हाई की कीमत अट्ठाईस. नब्बे लाख रुपए है।
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Bihar Assembly Election सुपौल में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष में मतदान के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। इसके लिए कार्यकर्ताओं की टीम उनके लिए काम कर रही है। कहा जाता है कि जो प्रत्याशी अपना वोट समेट लेंगे जीत उसी की होगी।
सुपौल [भरत कुमार झा]। Bihar Assembly Election : पिपरा अलग तरह के खाजा के लिए मशहूर एक छोटा सा बाजार है। रामकिसुन की प्रसिद्ध खाजा दुकान है। कोजागरे की सुबह है। आसपास के लोग वहीं बैठकी जमाए हैं और बगल वाली दुकान पर चाय बन रही है। एक ने जिज्ञासा वश रामकिसुन से कोजागरे पर खाजा की बिक्री के बारे में पूछा कैसा रहा कोजागरा। मिथिला में कोजागरा विशेष महत्व का पर्व है और इस मौके पर नव दूल्हे के घर दुल्हन पात्र के घर से विशेष सामग्री, मखान, मिठाई आदि भेजे जाने की प्रथा है। रामकिसुन बोलते तबतक दूसरे ने टपककर कहा कि क्या रहेगा हम तो दिनभर मक्खी ही मारते देखे। एक तो कोरोना शादी ब्याह का उमंग ही इस वर्ष खत्म कर दिया और फिर अब चुनाव। बस फिर क्या था शुरू हो गया चुनाव। एक तरफ एनडीए गठबंधन का वोट तो दूसरी तरफ महागठबंधन का वोट यहां बहस का मुख्य मुद्दा बन गया। आमने-सामने के लड़ाई की सीन बन रही है। जो अपना वोट समेट लेगा वह सीट निकाल ले जाएगा। बात कुछ समझ में नहीं आई तो थोड़ी जिज्ञासा बढ़ी। सामने वाले ने बिना हिचकिचाहट के आराम से समझा दिया। देखिए यहां महागठबंधन ने जिन्हें अपना प्रत्याशी बनाया है उनका अपने कुनबे पर अच्छी पकड़ है। इलाके का प्रतिनिधित्व लगातार किया है इसीलिए अपना वोट बैंक है सो अलग। उपर से महागठबंधन वाला वोट। उधर देखिए कि एनडीए का अपना वोट बैंक है। इस वोट बैंक की इस क्षेत्र में बाहुल्यता है। यानी जात-जमात और गठबंधन का वोट। वैसे विभिन्न दलों और तबके से उम्मीदवार के मैदान में डटे रहने से वोट के बिखराव से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। इसीलिए न बोले जो समेट लेगा अपना वोट सीट निकाल ले जाएगा।
यह सीट एनडीए गठबंधन के तहत पहले भाजपा के कोटे में जाने का अनुमान लगाया जा रहा था। यहां से 2015 के चुनाव में पूर्व सांसद विश्वमोहन कुमार ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि चुनाव यहां से राजद के उम्मीदवार ने जीता था। वे आशान्वित थे कि इस चुनाव भी यह सीट भाजपा के ही हिस्से में आएगी लेकिन गठबंधन के निर्णय के तहत यह सीट जदयू की झोली में जा गिरी। फिर क्या था विश्वमोहन कुमार ने राजद का दामन थाम लिया। वैसे पिपरा से पहला चुनाव 2010 में विश्वमोहन कुमार की धर्मपत्नी सुजाता देवी जदयू के टिकट पर जीती थी। विश्वमोहन कुमार इसके पुराने क्षेत्र त्रिवेणीगंज से तीन बार विधायक रह चुके हैं।
2010 से पूर्व यह त्रिवेणीगंज विधानसभा क्षेत्र का प्रमुख हिस्सा हुआ करता था। अब विधान सभा में इसका अपना वजूद है। इससे पूर्व दो-दो चुनाव इसने अपने नाम के देखे हैं। राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय और संवेदनशील माना जाता रहा है यह जगह। तभी न विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी पिपरा में चुनावी सभा करनी पड़ी थी। जब यह क्षेत्र त्रिवेणीगंज विधानसभा क्षेत्र हुआ करता था तो यहां के चुनाव का अपना समीकरण हुआ करता था। मतदाता सीधे तौर पर दो ध्रुवों में बंटे होते थे। यह काफी लंबे समय तक चलता रहा और कई राजनीतिक घराने इससे लाभान्वित होते रहे। अब तो बदलते समय ने हालात को भी बदलकर रख दिया है। इस चुनाव दोनों गठबंधन ने एक ही जमात के दो प्रत्याशियों को आमने-सामने कर दिया है। खैर यहां तीसरे चरण में मतदान होना है। चुनाव का समय नजदीक आते ही लोग अब जहां-तहां बड़ी गंभीरता से चुनावी चर्चा करते हैं और नतीजा देने में भी नहीं हिचकिचाते।
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Bihar Assembly Election सुपौल में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष में मतदान के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। इसके लिए कार्यकर्ताओं की टीम उनके लिए काम कर रही है। कहा जाता है कि जो प्रत्याशी अपना वोट समेट लेंगे जीत उसी की होगी। सुपौल [भरत कुमार झा]। Bihar Assembly Election : पिपरा अलग तरह के खाजा के लिए मशहूर एक छोटा सा बाजार है। रामकिसुन की प्रसिद्ध खाजा दुकान है। कोजागरे की सुबह है। आसपास के लोग वहीं बैठकी जमाए हैं और बगल वाली दुकान पर चाय बन रही है। एक ने जिज्ञासा वश रामकिसुन से कोजागरे पर खाजा की बिक्री के बारे में पूछा कैसा रहा कोजागरा। मिथिला में कोजागरा विशेष महत्व का पर्व है और इस मौके पर नव दूल्हे के घर दुल्हन पात्र के घर से विशेष सामग्री, मखान, मिठाई आदि भेजे जाने की प्रथा है। रामकिसुन बोलते तबतक दूसरे ने टपककर कहा कि क्या रहेगा हम तो दिनभर मक्खी ही मारते देखे। एक तो कोरोना शादी ब्याह का उमंग ही इस वर्ष खत्म कर दिया और फिर अब चुनाव। बस फिर क्या था शुरू हो गया चुनाव। एक तरफ एनडीए गठबंधन का वोट तो दूसरी तरफ महागठबंधन का वोट यहां बहस का मुख्य मुद्दा बन गया। आमने-सामने के लड़ाई की सीन बन रही है। जो अपना वोट समेट लेगा वह सीट निकाल ले जाएगा। बात कुछ समझ में नहीं आई तो थोड़ी जिज्ञासा बढ़ी। सामने वाले ने बिना हिचकिचाहट के आराम से समझा दिया। देखिए यहां महागठबंधन ने जिन्हें अपना प्रत्याशी बनाया है उनका अपने कुनबे पर अच्छी पकड़ है। इलाके का प्रतिनिधित्व लगातार किया है इसीलिए अपना वोट बैंक है सो अलग। उपर से महागठबंधन वाला वोट। उधर देखिए कि एनडीए का अपना वोट बैंक है। इस वोट बैंक की इस क्षेत्र में बाहुल्यता है। यानी जात-जमात और गठबंधन का वोट। वैसे विभिन्न दलों और तबके से उम्मीदवार के मैदान में डटे रहने से वोट के बिखराव से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। इसीलिए न बोले जो समेट लेगा अपना वोट सीट निकाल ले जाएगा। यह सीट एनडीए गठबंधन के तहत पहले भाजपा के कोटे में जाने का अनुमान लगाया जा रहा था। यहां से दो हज़ार पंद्रह के चुनाव में पूर्व सांसद विश्वमोहन कुमार ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि चुनाव यहां से राजद के उम्मीदवार ने जीता था। वे आशान्वित थे कि इस चुनाव भी यह सीट भाजपा के ही हिस्से में आएगी लेकिन गठबंधन के निर्णय के तहत यह सीट जदयू की झोली में जा गिरी। फिर क्या था विश्वमोहन कुमार ने राजद का दामन थाम लिया। वैसे पिपरा से पहला चुनाव दो हज़ार दस में विश्वमोहन कुमार की धर्मपत्नी सुजाता देवी जदयू के टिकट पर जीती थी। विश्वमोहन कुमार इसके पुराने क्षेत्र त्रिवेणीगंज से तीन बार विधायक रह चुके हैं। दो हज़ार दस से पूर्व यह त्रिवेणीगंज विधानसभा क्षेत्र का प्रमुख हिस्सा हुआ करता था। अब विधान सभा में इसका अपना वजूद है। इससे पूर्व दो-दो चुनाव इसने अपने नाम के देखे हैं। राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय और संवेदनशील माना जाता रहा है यह जगह। तभी न विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी पिपरा में चुनावी सभा करनी पड़ी थी। जब यह क्षेत्र त्रिवेणीगंज विधानसभा क्षेत्र हुआ करता था तो यहां के चुनाव का अपना समीकरण हुआ करता था। मतदाता सीधे तौर पर दो ध्रुवों में बंटे होते थे। यह काफी लंबे समय तक चलता रहा और कई राजनीतिक घराने इससे लाभान्वित होते रहे। अब तो बदलते समय ने हालात को भी बदलकर रख दिया है। इस चुनाव दोनों गठबंधन ने एक ही जमात के दो प्रत्याशियों को आमने-सामने कर दिया है। खैर यहां तीसरे चरण में मतदान होना है। चुनाव का समय नजदीक आते ही लोग अब जहां-तहां बड़ी गंभीरता से चुनावी चर्चा करते हैं और नतीजा देने में भी नहीं हिचकिचाते।
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बॉलीवुड के कद्दावर सितारे जैकी श्रॉफ (Jackie Shroff) , संजय दत्त ( Sanjay Dutt) , सनी देओल (Sunny Deol) और मिथुन चक्रवर्ती ( Mithun Chakraborty) को आप सभी एक साथ एक फिल्म में देखने वाले हैं. जी दरअसल ये तीनो अपनी अपकमिंग एक्शन ड्रामा 'बाप ऑफ ऑल फिल्म्स' (Baap Of All Films) की शूटिंग में व्यस्त हैं. तीनो ने इस फिल्म की शूटिंग को प्रारम्भ कर दिया है. अब इन सभी के बीच सितारों ने फिल्म के शूटिंग सेट से एक बिहाइंड वीडियो शेयर किया है. आप देख सकते हैं इसमें इन सभी को एक्शन के साथ मस्ती-मजाक करते हुए देखा जा सकता है.
आप सभी को यह भी बता दें कि विवेक चौहान के निर्देशन में बन रही 'बाप ऑफ ऑल फिल्म्स' फिल्म अगले वर्ष रिलीज होने वाली है. हालांकि फिल्म के रिलीज डेट की घोषणा अभी तक नहीं हुई है, लेकिन फिल्म का पोस्टर और अभिनेताओं के किरदारों का खुलासा पहले ही किया जा चुकी है. वहीं फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी बज बना हुआ है. आपको बता दें कि यह पहली बार है कि 90 के दशक की पुरानी यादों को ताजा करने के लिए सन्नी संजय, जैकी और मिथुन दा एक नयी फिल्म में साथ आ रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार फिल्म धमाकेदार होगी.
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बॉलीवुड के कद्दावर सितारे जैकी श्रॉफ , संजय दत्त , सनी देओल और मिथुन चक्रवर्ती को आप सभी एक साथ एक फिल्म में देखने वाले हैं. जी दरअसल ये तीनो अपनी अपकमिंग एक्शन ड्रामा 'बाप ऑफ ऑल फिल्म्स' की शूटिंग में व्यस्त हैं. तीनो ने इस फिल्म की शूटिंग को प्रारम्भ कर दिया है. अब इन सभी के बीच सितारों ने फिल्म के शूटिंग सेट से एक बिहाइंड वीडियो शेयर किया है. आप देख सकते हैं इसमें इन सभी को एक्शन के साथ मस्ती-मजाक करते हुए देखा जा सकता है. आप सभी को यह भी बता दें कि विवेक चौहान के निर्देशन में बन रही 'बाप ऑफ ऑल फिल्म्स' फिल्म अगले वर्ष रिलीज होने वाली है. हालांकि फिल्म के रिलीज डेट की घोषणा अभी तक नहीं हुई है, लेकिन फिल्म का पोस्टर और अभिनेताओं के किरदारों का खुलासा पहले ही किया जा चुकी है. वहीं फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी बज बना हुआ है. आपको बता दें कि यह पहली बार है कि नब्बे के दशक की पुरानी यादों को ताजा करने के लिए सन्नी संजय, जैकी और मिथुन दा एक नयी फिल्म में साथ आ रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार फिल्म धमाकेदार होगी.
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देवरिया। लाटरी का झांसा देकर 1. 08 लाख की ठगी करने वाले एक शातिर को शनिवार को साइबर टीम की मदद से खुखुंदू पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, दो सिम एवं 1200 रुपये बरामद किए गए हैं। उसकी पहचान विकास कुमार पुत्र मदनचंद निवासी सिकंदरपुर थाना मोहम्मदाबाद फर्रुखाबाद के रुप में हुई है।
शनिवार को पुलिस लाइन के मनोरंजन कक्ष में घटना का पर्दाफाश करते हुए एसपी डॉ. श्रीपति मिश्र ने बताया कि थाना खुखुंदू क्षेत्र के ग्राम मगहरा की शिल्पा चौहान पत्नी राजू चौहान ने शिकायत की थी कि 24 नंवबर को उनके नंबर पर एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा फोन कर के लॉटरी का झांसा दिया। फोन पर बताया गया कि उनका 2. 40 लाख रुपये एवं एक स्कूटी की लॉटरी लगी है। जिसको प्राप्त करने के नाम पर पीड़िता से कई खातों में 1,08,750 रुपये मंगा लिए गए। इस संबंध में खुखुंदू पुलिस ने फर्जीवाड़े और जिस खाते में रुपये भेजे गए उस खाताधारक गीता एवं विकास कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। मामले की जांच साइबर टीम की ओर से की जा रही थी। इसी बीच शनिवार को विवेचक की ओर से इस मामले के अभियुक्त विकास कुमार को मुसैला चौराहे से गिरफ्तार कर लिया गया।
कड़ाई से पूछताछ में उसने बताया कि वह लोगों को फोन करके उन्हें लॉटरी का झांसा देता है तथा जो उसके बहकावे में आ जाता है उससे वह रुपये कई बैंक खातों में स्थानांतरित कराकर निकाल लेता है। शनिवार को वह बिहार भागने की फिराक में था। इस मामले का पर्दाफाश करने वाली टीम को पांच हजार रुपये पुरस्कार देने की एसपी ने मौके पर घोषणा की।
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देवरिया। लाटरी का झांसा देकर एक. आठ लाख की ठगी करने वाले एक शातिर को शनिवार को साइबर टीम की मदद से खुखुंदू पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, दो सिम एवं एक हज़ार दो सौ रुपयापये बरामद किए गए हैं। उसकी पहचान विकास कुमार पुत्र मदनचंद निवासी सिकंदरपुर थाना मोहम्मदाबाद फर्रुखाबाद के रुप में हुई है। शनिवार को पुलिस लाइन के मनोरंजन कक्ष में घटना का पर्दाफाश करते हुए एसपी डॉ. श्रीपति मिश्र ने बताया कि थाना खुखुंदू क्षेत्र के ग्राम मगहरा की शिल्पा चौहान पत्नी राजू चौहान ने शिकायत की थी कि चौबीस नंवबर को उनके नंबर पर एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा फोन कर के लॉटरी का झांसा दिया। फोन पर बताया गया कि उनका दो. चालीस लाख रुपये एवं एक स्कूटी की लॉटरी लगी है। जिसको प्राप्त करने के नाम पर पीड़िता से कई खातों में एक,आठ,सात सौ पचास रुपयापये मंगा लिए गए। इस संबंध में खुखुंदू पुलिस ने फर्जीवाड़े और जिस खाते में रुपये भेजे गए उस खाताधारक गीता एवं विकास कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। मामले की जांच साइबर टीम की ओर से की जा रही थी। इसी बीच शनिवार को विवेचक की ओर से इस मामले के अभियुक्त विकास कुमार को मुसैला चौराहे से गिरफ्तार कर लिया गया। कड़ाई से पूछताछ में उसने बताया कि वह लोगों को फोन करके उन्हें लॉटरी का झांसा देता है तथा जो उसके बहकावे में आ जाता है उससे वह रुपये कई बैंक खातों में स्थानांतरित कराकर निकाल लेता है। शनिवार को वह बिहार भागने की फिराक में था। इस मामले का पर्दाफाश करने वाली टीम को पांच हजार रुपये पुरस्कार देने की एसपी ने मौके पर घोषणा की।
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Makar August Horoscope 2021 In Hindi: अगस्त का महीना शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। ये महीना कई राशि के जातकों के लिए शुभ साबित होने के संकेत मिल रहे हैं। कई राशि के जातकों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है तो वहीं कुछ राशियों को आर्थिक मामलों को लेकर सावधानी बरतनी की जरूरत पड़ेगी। यहां आप बात करने जा रहे हैं मकर राशि वालों की जिनके कामकाज के हिसाब से ये महीना काफी अच्छा साबित होगा। नौकरी में वेतन बढ़ोतरी के जबरदस्त योग बनते दिखाई दे रहे हैं।
मकर राशि वालों के लिए अगस्त का पहला सप्ताह थोड़ा मुश्किल रह सकता है। लेकिन दूसरे सप्ताह से सुधार आने के जबरदस्त आसार दिखाई दे रहे हैं। करियर के लिहाज से अगस्त महीना नौकरीपेशा लोगों के लिए अच्छा रहेगा। इस महीने काम-धंधे में खूब बरकत होगी। आर्थिक स्थिति इस माह अच्छी रहने की संभावना है। नौकरी करने वाले लोगों के वेतन-भत्तों में वृद्धि हो सकती है। कारोबार में अच्छा मुनाफा हासिल हो सकता है। लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत पड़ेगी।
11 अगस्त को शुक्र के कन्या राशि में वापस आने के बाद से आपकी स्थिति में जबरदस्त सुधार आएगा। अगर आप नौकरी बदलने की सोच रहे हैं तो ये महीना आपके इस काम के लिए अच्छा साबित हो सकता है। इस दौरान अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिलने की पूरी संभावना रहेगी। नए कारोबारी संबंध बन सकते हैं, जिनसे आगे चलकर लाभ मिलने के भी संकेत मिल रहे हैं। नियमित स्रोतों से आय होने के साथ-साथ नए स्रोतों से भी आय हो सकती है। इस अवधि में बोनस या इन्सेंटिव मिल सकता है। लेकिन पैसा खर्च करने के मामले में सावधानी बरतनी की जरूरत पड़ेगी। 26 अगस्त को बुध नवम भाव में चले जाएंगे। बुध का गोचर इस राशि के व्यापारियों के लिए काफी उत्तम साबित होगा। (यह भी पढ़ें- शनि साढ़े साती और शनि ढैय्या से पीड़ित इन राशियों के लिए सावन खास, इन उपायों से शनि पीड़ा से मुक्ति मिलने की है मान्यता)
मकर राशि वालों की लव लाइफ के लिए ये महीना काफी शानदार साबित हो सकता है। आपके संबंधों में गहराई आएगी। इस महीने अपने लव पार्टनर के साथ समय व्यतीत करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। इस महीने कहीं घूमने-फिरने का कार्यक्रम बन सकता है। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना होगा। बाहर का खाना खाने से बचें। पेट संबंधी रोग होने के आसार दिखाई दे रहे हैं।
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Makar August Horoscope दो हज़ार इक्कीस In Hindi: अगस्त का महीना शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। ये महीना कई राशि के जातकों के लिए शुभ साबित होने के संकेत मिल रहे हैं। कई राशि के जातकों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है तो वहीं कुछ राशियों को आर्थिक मामलों को लेकर सावधानी बरतनी की जरूरत पड़ेगी। यहां आप बात करने जा रहे हैं मकर राशि वालों की जिनके कामकाज के हिसाब से ये महीना काफी अच्छा साबित होगा। नौकरी में वेतन बढ़ोतरी के जबरदस्त योग बनते दिखाई दे रहे हैं। मकर राशि वालों के लिए अगस्त का पहला सप्ताह थोड़ा मुश्किल रह सकता है। लेकिन दूसरे सप्ताह से सुधार आने के जबरदस्त आसार दिखाई दे रहे हैं। करियर के लिहाज से अगस्त महीना नौकरीपेशा लोगों के लिए अच्छा रहेगा। इस महीने काम-धंधे में खूब बरकत होगी। आर्थिक स्थिति इस माह अच्छी रहने की संभावना है। नौकरी करने वाले लोगों के वेतन-भत्तों में वृद्धि हो सकती है। कारोबार में अच्छा मुनाफा हासिल हो सकता है। लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत पड़ेगी। ग्यारह अगस्त को शुक्र के कन्या राशि में वापस आने के बाद से आपकी स्थिति में जबरदस्त सुधार आएगा। अगर आप नौकरी बदलने की सोच रहे हैं तो ये महीना आपके इस काम के लिए अच्छा साबित हो सकता है। इस दौरान अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिलने की पूरी संभावना रहेगी। नए कारोबारी संबंध बन सकते हैं, जिनसे आगे चलकर लाभ मिलने के भी संकेत मिल रहे हैं। नियमित स्रोतों से आय होने के साथ-साथ नए स्रोतों से भी आय हो सकती है। इस अवधि में बोनस या इन्सेंटिव मिल सकता है। लेकिन पैसा खर्च करने के मामले में सावधानी बरतनी की जरूरत पड़ेगी। छब्बीस अगस्त को बुध नवम भाव में चले जाएंगे। बुध का गोचर इस राशि के व्यापारियों के लिए काफी उत्तम साबित होगा। मकर राशि वालों की लव लाइफ के लिए ये महीना काफी शानदार साबित हो सकता है। आपके संबंधों में गहराई आएगी। इस महीने अपने लव पार्टनर के साथ समय व्यतीत करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। इस महीने कहीं घूमने-फिरने का कार्यक्रम बन सकता है। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना होगा। बाहर का खाना खाने से बचें। पेट संबंधी रोग होने के आसार दिखाई दे रहे हैं।
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बाबा साहब ने सम्पूर्ण भारत वर्ष के लोगों को सामाजिक व्यवस्था की उन बेडि़यों से आजाद कराया जिनकी जकड़न ने लोगों को समता और सम्मान से महरूम कर दिया था। बाबा साहब ने समाज के शोषित वर्ग के साथ महिलाओं को न बल्कि समता औेर सम्मान का हक दिलाया अपितु सम्पूर्ण भारत वर्ष को एक नई दिशा भी दी।
भारत रत्न बाबा साहब डाॅक्टर भीमराव अम्बेडकर भारत के संविधान निर्माता और देश के प्रथम कानून मंत्री थें। लेकिन यह बात नई पीढ़ी के सामने नहीं लायी गई कि बाबा साहब भारत में मानव स्वतंत्रता के महानायक थे। उन्हें व्यक्ति की स्वतंत्रता में अटूट विश्वास था। उन्होंने अपना सर्वस्व मानव स्वतंत्रता के लिए अर्पित कर दिया था। उन्होंने समाज की रूढिवादी और जातिवादी कट्टर नीतियों की आलोचना की। बाबा साहब ने सम्पूर्ण भारत वर्ष के लोगों को सामाजिक व्यवस्था की उन बेडि़यों से आजाद कराया जिनकी जकड़न ने लोगों को समता और सम्मान से महरूम कर दिया था। मानव स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें "वन मैन आॅफ आर्मी" कहा जाता है। बाबा साहब ने समाज के शोषित वर्ग को न बल्कि समता अैोर सम्मान का हक दिलाया अपितु सम्पूर्ण भारत वर्ष को एक नई दिशा भी दी।
बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रेल 1891 को मध्य प्रदेश स्थित मऊ में हुआ था। बाबा साहब रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14 वीं संतान थे। वे हिन्दु समाज की अस्प्रश्य मानीे जाने वाली जाति से थे इस कारण उनके साथ आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। बाबा साहब अम्बेडकर को अपनी जाति के कारण हर स्तर पर सामाजिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। स्कूल में पढ़ाई के दौरान अध्यापकों द्वारा न तो ध्यान ही दिया जाता था, न ही कोई सहायता दी जाती थी। उनको कक्षा के अन्दर बैठने की अनुमति नहीं थी। उनको स्कूल में पीने को पानी तक नहीं दिया जाता था। पढाई में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद, अम्बेडकर लगातार अपने विरुद्ध हो रहे इस अलगाव और भेदभाव से व्यथित रहे। इन सब के बावजूद उन्होने बिना विचलित हुए अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पित रहे और देश विदेश से उच्च शिक्षा प्राप्त कर भारत के सर्वोच्च शिक्षित प्रमुख विद्वान के रूप में स्थापित हुए।
बाबा साहब अम्बेडकर के लिए ऊंच नींच, भेद-भाव और रूढिवादी सामाजिक व्यवस्था में जकड़ी भारत की बहुसंख्यक आवादी की स्वतंत्रता एक अहम और मुख्य बिन्दु था जिसके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। सन् 1919 से बाबा साहब ने बडे स्तर पर भारत में छुआछूत और जातिगत भेदभाव के विरूद्ध मुखर आन्दोलन की शुरूआत की और इसी के साथ ही उन्होंने अपने विरोधियों में एक हलचल पैदा कर दी। बाबा साहब ने 1927 में छुआछूत के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन शुरू किया।उन्होंने सार्वजनिक आंदोलनों और जुलूसों के द्वारा, पेयजल के सार्वजनिक संसाधन समाज के सभी लोगों के लिये खुलवाने के साथ ही उन्होनें सभी जाति के लोगों को मंदिरों में प्रवेश करने का अधिकार दिलाने के लिये भी संघर्ष किया।
अगस्त, 1930 को एक शोषित वर्ग के सम्मेलन के दौरान अम्बेडकर ने अपनी राजनीतिक दृष्टि को दुनिया के सामने रखा। बाबा साहब अम्बेडकर ने भारत की बहुसंख्यक आवादी को दासता की बेडि़यों से आजाद कराकर समता और सम्मान का हक दिलाया। यह देश की किसी भी आजादी से सबसे बड़ी आजादी की लड़ाई थी जिसको बाबा साहब अम्बेडकर ने अकेले दम पर लड़कर समाज को स्वतंत्र कराया जिसे मानव स्वतंत्रा के रूप में देख जाता है। और बाबा साहब डाॅक्टर भीमराव अम्बेडकर को मानव स्वतंत्रता के महानायक के रूप में।
बाबा साहब डाॅक्टर अम्बेडकर की प्रतिष्ठा एक अद्वितीय विद्वान और विधिवेत्ता की थी।जब, 15 अगस्त, 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार अस्तित्व मे आई तो उसने अम्बेडकर को देश का पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया। 29 अगस्त 1947 को, अम्बेडकर को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना के लिए बनी के संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। अम्बेडकर द्वारा तैयार किया गया संविधान पाठ में संवैधानिक गारंटी के साथ व्यक्तिगत नागरिकों को एक व्यापक श्रेणी की नागरिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा प्रदान की जिनमें, धार्मिक स्वतंत्रता, अस्पृश्यता का अंत और सभी प्रकार के भेदभावों को गैर कानूनी करार दिया गया। बाबा साहब ने संविधान में भारत के सभी नागरिको को उनके मूलभूत अधिकार प्रदान किए। अम्बेडकर ने महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक अधिकारों की वकालत की और 6 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया।
सम्मान प्रदान किए गए।
अगस्त 2012 में सीएनएन आईबीएन के द ग्रेटेस्ट इण्डियन सर्वे में डाॅक्टर भीमराव अम्बेडकर को सर्वाधिक वोट मिले थे।सम्पूर्ण भारत में की गई आम बोटिग में बाबा साहब अम्बेडकर के पक्ष में अन्य की अपेक्षा कई गुना अधिक बोट हांसिल हुए और बाबा साहब ग्रेटेस्ट इंण्डियन (महानतम् भारतीय) के रूप में सामने आए। और इस सर्वे में यह बात सामने आई कि देश भर के लोगों के दिलों में बाबा साहब अम्बेडकर का एक महत्वपूर्ण स्थान है और बाबा साहब एक रोल माॅडल के रूप में हैं।
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बाबा साहब ने सम्पूर्ण भारत वर्ष के लोगों को सामाजिक व्यवस्था की उन बेडि़यों से आजाद कराया जिनकी जकड़न ने लोगों को समता और सम्मान से महरूम कर दिया था। बाबा साहब ने समाज के शोषित वर्ग के साथ महिलाओं को न बल्कि समता औेर सम्मान का हक दिलाया अपितु सम्पूर्ण भारत वर्ष को एक नई दिशा भी दी। भारत रत्न बाबा साहब डाॅक्टर भीमराव अम्बेडकर भारत के संविधान निर्माता और देश के प्रथम कानून मंत्री थें। लेकिन यह बात नई पीढ़ी के सामने नहीं लायी गई कि बाबा साहब भारत में मानव स्वतंत्रता के महानायक थे। उन्हें व्यक्ति की स्वतंत्रता में अटूट विश्वास था। उन्होंने अपना सर्वस्व मानव स्वतंत्रता के लिए अर्पित कर दिया था। उन्होंने समाज की रूढिवादी और जातिवादी कट्टर नीतियों की आलोचना की। बाबा साहब ने सम्पूर्ण भारत वर्ष के लोगों को सामाजिक व्यवस्था की उन बेडि़यों से आजाद कराया जिनकी जकड़न ने लोगों को समता और सम्मान से महरूम कर दिया था। मानव स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें "वन मैन आॅफ आर्मी" कहा जाता है। बाबा साहब ने समाज के शोषित वर्ग को न बल्कि समता अैोर सम्मान का हक दिलाया अपितु सम्पूर्ण भारत वर्ष को एक नई दिशा भी दी। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का जन्म चौदह अप्रेल एक हज़ार आठ सौ इक्यानवे को मध्य प्रदेश स्थित मऊ में हुआ था। बाबा साहब रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की चौदह वीं संतान थे। वे हिन्दु समाज की अस्प्रश्य मानीे जाने वाली जाति से थे इस कारण उनके साथ आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। बाबा साहब अम्बेडकर को अपनी जाति के कारण हर स्तर पर सामाजिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। स्कूल में पढ़ाई के दौरान अध्यापकों द्वारा न तो ध्यान ही दिया जाता था, न ही कोई सहायता दी जाती थी। उनको कक्षा के अन्दर बैठने की अनुमति नहीं थी। उनको स्कूल में पीने को पानी तक नहीं दिया जाता था। पढाई में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद, अम्बेडकर लगातार अपने विरुद्ध हो रहे इस अलगाव और भेदभाव से व्यथित रहे। इन सब के बावजूद उन्होने बिना विचलित हुए अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पित रहे और देश विदेश से उच्च शिक्षा प्राप्त कर भारत के सर्वोच्च शिक्षित प्रमुख विद्वान के रूप में स्थापित हुए। बाबा साहब अम्बेडकर के लिए ऊंच नींच, भेद-भाव और रूढिवादी सामाजिक व्यवस्था में जकड़ी भारत की बहुसंख्यक आवादी की स्वतंत्रता एक अहम और मुख्य बिन्दु था जिसके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। सन् एक हज़ार नौ सौ उन्नीस से बाबा साहब ने बडे स्तर पर भारत में छुआछूत और जातिगत भेदभाव के विरूद्ध मुखर आन्दोलन की शुरूआत की और इसी के साथ ही उन्होंने अपने विरोधियों में एक हलचल पैदा कर दी। बाबा साहब ने एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में छुआछूत के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन शुरू किया।उन्होंने सार्वजनिक आंदोलनों और जुलूसों के द्वारा, पेयजल के सार्वजनिक संसाधन समाज के सभी लोगों के लिये खुलवाने के साथ ही उन्होनें सभी जाति के लोगों को मंदिरों में प्रवेश करने का अधिकार दिलाने के लिये भी संघर्ष किया। अगस्त, एक हज़ार नौ सौ तीस को एक शोषित वर्ग के सम्मेलन के दौरान अम्बेडकर ने अपनी राजनीतिक दृष्टि को दुनिया के सामने रखा। बाबा साहब अम्बेडकर ने भारत की बहुसंख्यक आवादी को दासता की बेडि़यों से आजाद कराकर समता और सम्मान का हक दिलाया। यह देश की किसी भी आजादी से सबसे बड़ी आजादी की लड़ाई थी जिसको बाबा साहब अम्बेडकर ने अकेले दम पर लड़कर समाज को स्वतंत्र कराया जिसे मानव स्वतंत्रा के रूप में देख जाता है। और बाबा साहब डाॅक्टर भीमराव अम्बेडकर को मानव स्वतंत्रता के महानायक के रूप में। बाबा साहब डाॅक्टर अम्बेडकर की प्रतिष्ठा एक अद्वितीय विद्वान और विधिवेत्ता की थी।जब, पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत की स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार अस्तित्व मे आई तो उसने अम्बेडकर को देश का पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया। उनतीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को, अम्बेडकर को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना के लिए बनी के संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। अम्बेडकर द्वारा तैयार किया गया संविधान पाठ में संवैधानिक गारंटी के साथ व्यक्तिगत नागरिकों को एक व्यापक श्रेणी की नागरिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा प्रदान की जिनमें, धार्मिक स्वतंत्रता, अस्पृश्यता का अंत और सभी प्रकार के भेदभावों को गैर कानूनी करार दिया गया। बाबा साहब ने संविधान में भारत के सभी नागरिको को उनके मूलभूत अधिकार प्रदान किए। अम्बेडकर ने महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक अधिकारों की वकालत की और छः नवंबर, एक हज़ार नौ सौ उनचास को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया। सम्मान प्रदान किए गए। अगस्त दो हज़ार बारह में सीएनएन आईबीएन के द ग्रेटेस्ट इण्डियन सर्वे में डाॅक्टर भीमराव अम्बेडकर को सर्वाधिक वोट मिले थे।सम्पूर्ण भारत में की गई आम बोटिग में बाबा साहब अम्बेडकर के पक्ष में अन्य की अपेक्षा कई गुना अधिक बोट हांसिल हुए और बाबा साहब ग्रेटेस्ट इंण्डियन के रूप में सामने आए। और इस सर्वे में यह बात सामने आई कि देश भर के लोगों के दिलों में बाबा साहब अम्बेडकर का एक महत्वपूर्ण स्थान है और बाबा साहब एक रोल माॅडल के रूप में हैं।
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इसलिए बढ़ती जा रही चिंतायह भी बताया गया है कि समुद्र के बढ़ते स्तर और जलवायु परिवर्तन के कारण गुजरात राज्य को तलछट के जमाव के कारण 208 हेक्टेयर भूमि का क्षेत्र प्राप्त होने का अनुमान है, जबकि कटाव के कारण राज्य ने 313 हेक्टेयर क्षेत्र खो दिया है।
46 पर्सेंट तट नष्ट हुआक्रुणाल पटेल और अन्य ने 42 साल के अवलोकन के एक अन्य शोध में कहा गया है कि सबसे अधिक तटीय कटाव कच्छ जिले में हुआ। राज्य का 45. 9 प्रतिशत तट नष्ट हो गया है। पटेल और अन्य ने वर्गीकृत किया है, समुद्र के स्तर में अनुमानित वृद्धि के कारण चार जोखिम वर्ग में गुजरात तट, 785 किमी उच्च जोखिम वाले उच्च जोखिम स्तर और 934 किमी मध्यम से निम्न जोखिम श्रेणी में आते हैं।
गुजरात के इन 10 जिलों पर संकटइस शोध के अनुसार, 16 तटीय जिलों में से 10 जिलों में कटाव से पीड़ित होने की सूचना है, कच्छ में सबसे ज्यादा, इसके बाद जामनगर, भरूच, वलसाड का स्थान है। यह कैम्बे की खाड़ी में समुद्र की सतह के तापमान (एसएसटी) में वृद्धि के कारण है। यह पिछले 160 वर्षो में उच्चतम 1. 50 सी, ए सौराष्ट्र तट 1 सी और कच्छ की खाड़ी 0. 75 सी है।
1969 में, अहमदाबाद जिले के मांडवीपुरा गांव के 8000 ग्रामीणों और भावनगर जिले के गुंडला गांव के 800 लोगों का पुनर्वास किया जाना था, क्योंकि कृषि भूमि और गांव के कुछ हिस्से समुद्र के पानी में डूब गए थे, एक सामाजिक कार्यकर्ता और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी प्रद्युम्नसिंह चुडासमा याद करते हैं।
वलसाड और नवसारी जिले के कई गांव खतरे मेंउन्हें डर है कि कैम्बे की खाड़ी के पश्चिमी तट पर बसे अहमदाबाद और भावनगर जिले के अन्य गांव भी समान रूप से जोखिम में हैं। मानसून के दौरान, बाढ़ के पानी और समुद्र के पानी के कारण इनमें से अधिकांश गांव बाढ़ में डूब जाते हैं। तालुका पंचायत के पूर्व अध्यक्ष, उमरगाम तालुका के सचिन माछी ने बताया कि दक्षिण गुजरात के वलसाड और नवसारी जिले के कई गांव खतरे में हैं। उमरगाम तालुका के कम से कम 15,000 लोगों का जीवन और आजीविका खतरे में है क्योंकि समुद्र का पानी घरों में घुस जाता है।
उन्हें लगता है कि जैसे दमन प्रशासन ने समुद्र तट के साथ 7 से 10 किमी की सुरक्षा दीवार का निर्माण किया है, गुजरात सरकार को ग्रामीणों के जीवन को बचाने के लिए उमरगाम तालुका में 22 किमी लंबी सुरक्षा दीवार का निर्माण करना चाहिए। दुमका के अनुसार राज्य और अहमदाबाद नगर निगम को पर्याप्त मात्रा में सतही जल सुनिश्चित करना चाहिए और भूमिगत जल निकालने पर रोक लगानी चाहिए।
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इसलिए बढ़ती जा रही चिंतायह भी बताया गया है कि समुद्र के बढ़ते स्तर और जलवायु परिवर्तन के कारण गुजरात राज्य को तलछट के जमाव के कारण दो सौ आठ हेक्टेयर भूमि का क्षेत्र प्राप्त होने का अनुमान है, जबकि कटाव के कारण राज्य ने तीन सौ तेरह हेक्टेयर क्षेत्र खो दिया है। छियालीस पर्सेंट तट नष्ट हुआक्रुणाल पटेल और अन्य ने बयालीस साल के अवलोकन के एक अन्य शोध में कहा गया है कि सबसे अधिक तटीय कटाव कच्छ जिले में हुआ। राज्य का पैंतालीस. नौ प्रतिशत तट नष्ट हो गया है। पटेल और अन्य ने वर्गीकृत किया है, समुद्र के स्तर में अनुमानित वृद्धि के कारण चार जोखिम वर्ग में गुजरात तट, सात सौ पचासी किमी उच्च जोखिम वाले उच्च जोखिम स्तर और नौ सौ चौंतीस किमी मध्यम से निम्न जोखिम श्रेणी में आते हैं। गुजरात के इन दस जिलों पर संकटइस शोध के अनुसार, सोलह तटीय जिलों में से दस जिलों में कटाव से पीड़ित होने की सूचना है, कच्छ में सबसे ज्यादा, इसके बाद जामनगर, भरूच, वलसाड का स्थान है। यह कैम्बे की खाड़ी में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण है। यह पिछले एक सौ साठ वर्षो में उच्चतम एक. पचास सी, ए सौराष्ट्र तट एक सी और कच्छ की खाड़ी शून्य. पचहत्तर सी है। एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में, अहमदाबाद जिले के मांडवीपुरा गांव के आठ हज़ार ग्रामीणों और भावनगर जिले के गुंडला गांव के आठ सौ लोगों का पुनर्वास किया जाना था, क्योंकि कृषि भूमि और गांव के कुछ हिस्से समुद्र के पानी में डूब गए थे, एक सामाजिक कार्यकर्ता और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी प्रद्युम्नसिंह चुडासमा याद करते हैं। वलसाड और नवसारी जिले के कई गांव खतरे मेंउन्हें डर है कि कैम्बे की खाड़ी के पश्चिमी तट पर बसे अहमदाबाद और भावनगर जिले के अन्य गांव भी समान रूप से जोखिम में हैं। मानसून के दौरान, बाढ़ के पानी और समुद्र के पानी के कारण इनमें से अधिकांश गांव बाढ़ में डूब जाते हैं। तालुका पंचायत के पूर्व अध्यक्ष, उमरगाम तालुका के सचिन माछी ने बताया कि दक्षिण गुजरात के वलसाड और नवसारी जिले के कई गांव खतरे में हैं। उमरगाम तालुका के कम से कम पंद्रह,शून्य लोगों का जीवन और आजीविका खतरे में है क्योंकि समुद्र का पानी घरों में घुस जाता है। उन्हें लगता है कि जैसे दमन प्रशासन ने समुद्र तट के साथ सात से दस किमी की सुरक्षा दीवार का निर्माण किया है, गुजरात सरकार को ग्रामीणों के जीवन को बचाने के लिए उमरगाम तालुका में बाईस किमी लंबी सुरक्षा दीवार का निर्माण करना चाहिए। दुमका के अनुसार राज्य और अहमदाबाद नगर निगम को पर्याप्त मात्रा में सतही जल सुनिश्चित करना चाहिए और भूमिगत जल निकालने पर रोक लगानी चाहिए।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
2016-17 ईरानी कप भारत में एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता के 55 वें मौसम हो जाएगा। यह 20 जनवरी से 24 जनवरी 2017 के बीच गुजरात (2016-17 रणजी ट्रॉफी के विजेताओं) और रेस्ट ऑफ़ इंडिया की टीम के लिए एक से एक मैच के रूप में खेला जाएगा। चेतेश्वर पुजारा रेस्ट ऑफ़ इंडिया की टीम के कप्तान होंगे। मैच ब्रेबोर्न स्टेडियम, मुंबई में आयोजित किया जाएगा। . गुजरात क्रिकेट टीम भारत के घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता रणजी ट्रॉफी में गुजरात राज्य का प्रतिनिधित्व करने तीन में से एक घरेलू क्रिकेट टीम है(अन्य दो टीम बड़ौदा क्रिकेट टीम और सौराष्ट्र क्रिकेट टीम है)। पार्थिव पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने 2016-17 सीजन को इंदौर में हुए फाइनल मुकबले में मुंबई को हरा कर रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। रणजी ट्राफी के फाइनल में मैच में सबसे ज्यादा सफल रन चेस था।.
ईरानी कप 2017 और गुजरात क्रिकेट टीम आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): पार्थिव पटेल।
पार्थिव अजय पटेल (जन्म 9 मार्च 1985 अहमदाबाद, गुजरात) एक भारतीय क्रिकेटर, विकेटकीपर-बल्लेबाज और भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्य हैं। वह एक बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और 160 सेमी के साथ काफी छोटे कद के हैं। जनवरी २०१८ में इन्हें २०१८ इंडियन प्रीमियर लीग की नीलामी में इन्हें रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने खरीदा है। .
ईरानी कप 2017 21 संबंध है और गुजरात क्रिकेट टीम 9 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 3.33% है = 1 / (21 + 9)।
यह लेख ईरानी कप 2017 और गुजरात क्रिकेट टीम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। दो हज़ार सोलह-सत्रह ईरानी कप भारत में एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता के पचपन वें मौसम हो जाएगा। यह बीस जनवरी से चौबीस जनवरी दो हज़ार सत्रह के बीच गुजरात और रेस्ट ऑफ़ इंडिया की टीम के लिए एक से एक मैच के रूप में खेला जाएगा। चेतेश्वर पुजारा रेस्ट ऑफ़ इंडिया की टीम के कप्तान होंगे। मैच ब्रेबोर्न स्टेडियम, मुंबई में आयोजित किया जाएगा। . गुजरात क्रिकेट टीम भारत के घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता रणजी ट्रॉफी में गुजरात राज्य का प्रतिनिधित्व करने तीन में से एक घरेलू क्रिकेट टीम है। पार्थिव पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने दो हज़ार सोलह-सत्रह सीजन को इंदौर में हुए फाइनल मुकबले में मुंबई को हरा कर रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। रणजी ट्राफी के फाइनल में मैच में सबसे ज्यादा सफल रन चेस था।. ईरानी कप दो हज़ार सत्रह और गुजरात क्रिकेट टीम आम में एक बात है : पार्थिव पटेल। पार्थिव अजय पटेल एक भारतीय क्रिकेटर, विकेटकीपर-बल्लेबाज और भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्य हैं। वह एक बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और एक सौ साठ सेमी के साथ काफी छोटे कद के हैं। जनवरी दो हज़ार अट्ठारह में इन्हें दो हज़ार अट्ठारह इंडियन प्रीमियर लीग की नीलामी में इन्हें रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने खरीदा है। . ईरानी कप दो हज़ार सत्रह इक्कीस संबंध है और गुजरात क्रिकेट टीम नौ है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक तीन.तैंतीस% है = एक / । यह लेख ईरानी कप दो हज़ार सत्रह और गुजरात क्रिकेट टीम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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हड़जोड़ का पेड़ शायद कभी न कभी हर किसी ने देखा होगा। लेकिन सेहत के लिए इसके फायदों के बारे में शायद ही ज्यादा लोग जानते होंगे। हड़जोड़ का पेड़ एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। आर्युवेद में इसका उपयोग दवाई बनाने के काम में किया जाता है। इसके नाम से ही जैसे की समझ में आ रहा है कि ये हड्डियों को जोड़ने के काम में लाया जाता है। इसके अलावा पेट की बीमारी, मोच, अल्सर, बवासीर आदि बीमारी में भी पेड़ बहुत काम आता है। आज आपको हम हड़जोड़ के ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं।
गठिया में लाभादयक (Beneficial in arthritis)- बढ़ती उम्र के साथ ही कुछ लोगों में गठिया की परेशानी होने लगती है। गठिया में जोंड़ो के में दर्द और जलन होती है। और एलोपैथी में भी इसका कोई खास उपचार नहीं है। लेकिन आयुर्वेदा में हड़जोड बहुत ही लाभदायक दवाई है। हड़जोड़ के सेवन से गठीया में बहुत आराम मिलता है।
टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने में लाभदायक (Beneficial in joining broken bones) - टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए बहुत कारगर होती है। इसका सेवन करने के लिए आप 10 से 15 मिली हड़जोड़ के रस को घी के साथ पिएं। इसके अलावा इसके रस में अलसी का तेल मिलाकर प्रभावित हिस्से पर लगाएं और इसे बांध दें। इससे टूटी हड्डियां जुड़ सकती है। साथ ही हड़जोड़ के चूर्ण को दूध के साथ मिलाकर पीने से टूटी हुई हड्डियां जुड़ सकती हैं।
बवासीर में फायदेमंद(Beneficial in piles) - बवासीर आजकल बहुत ही आम समस्या हो गई है। खानपान और दिनचर्या के चलते ये परेशानी ज्यादातर लोगों को हो रही है। ऐसे में हड़जोड़ की पत्तियों का रस निकालकर गाय के दूध के साथ मिलाकर पी लें।
महिलाओं में सफेद पानी की समस्या में लाभदायक (Beneficial in the problem of white discharge in women) - महिलाओं में सफेद पानी की समस्या काफी आम है। इसके कारण कमजोरी भी बहुत ज्यादा होने लगती है। लेकिन अगर कोई महिला हड़जोड़ का सेवन करती हैं, तो इस समस्या से बहुत आराम मिलता है।
पाचन के लिए लाभदायक (Good for digestion) - पाचन की समस्या आजकल ज्यादातर लोगों की परेशानी बन गया है। ऐसे में अगर आप हड़जोड़ का सेवन करते हैं, तो इस समस्या में बहुत हद तक आराम मिल सकता है।
मोच के दर्द में दिलाए राहत (Provide relief in sprain pain) - मोच आने पर हड़जोड़ का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए हड़जोड़ के रस को तिल के तेल में मिला लें। अब इस तेल को पकाकर छान लें। इसके बाद इस तेल को मोच से प्रभावित स्थान पर लगाएं। दर्द में बहुत आराम मिलेगा।
अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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हड़जोड़ का पेड़ शायद कभी न कभी हर किसी ने देखा होगा। लेकिन सेहत के लिए इसके फायदों के बारे में शायद ही ज्यादा लोग जानते होंगे। हड़जोड़ का पेड़ एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। आर्युवेद में इसका उपयोग दवाई बनाने के काम में किया जाता है। इसके नाम से ही जैसे की समझ में आ रहा है कि ये हड्डियों को जोड़ने के काम में लाया जाता है। इसके अलावा पेट की बीमारी, मोच, अल्सर, बवासीर आदि बीमारी में भी पेड़ बहुत काम आता है। आज आपको हम हड़जोड़ के ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं। गठिया में लाभादयक - बढ़ती उम्र के साथ ही कुछ लोगों में गठिया की परेशानी होने लगती है। गठिया में जोंड़ो के में दर्द और जलन होती है। और एलोपैथी में भी इसका कोई खास उपचार नहीं है। लेकिन आयुर्वेदा में हड़जोड बहुत ही लाभदायक दवाई है। हड़जोड़ के सेवन से गठीया में बहुत आराम मिलता है। टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने में लाभदायक - टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए बहुत कारगर होती है। इसका सेवन करने के लिए आप दस से पंद्रह मिली हड़जोड़ के रस को घी के साथ पिएं। इसके अलावा इसके रस में अलसी का तेल मिलाकर प्रभावित हिस्से पर लगाएं और इसे बांध दें। इससे टूटी हड्डियां जुड़ सकती है। साथ ही हड़जोड़ के चूर्ण को दूध के साथ मिलाकर पीने से टूटी हुई हड्डियां जुड़ सकती हैं। बवासीर में फायदेमंद - बवासीर आजकल बहुत ही आम समस्या हो गई है। खानपान और दिनचर्या के चलते ये परेशानी ज्यादातर लोगों को हो रही है। ऐसे में हड़जोड़ की पत्तियों का रस निकालकर गाय के दूध के साथ मिलाकर पी लें। महिलाओं में सफेद पानी की समस्या में लाभदायक - महिलाओं में सफेद पानी की समस्या काफी आम है। इसके कारण कमजोरी भी बहुत ज्यादा होने लगती है। लेकिन अगर कोई महिला हड़जोड़ का सेवन करती हैं, तो इस समस्या से बहुत आराम मिलता है। पाचन के लिए लाभदायक - पाचन की समस्या आजकल ज्यादातर लोगों की परेशानी बन गया है। ऐसे में अगर आप हड़जोड़ का सेवन करते हैं, तो इस समस्या में बहुत हद तक आराम मिल सकता है। मोच के दर्द में दिलाए राहत - मोच आने पर हड़जोड़ का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए हड़जोड़ के रस को तिल के तेल में मिला लें। अब इस तेल को पकाकर छान लें। इसके बाद इस तेल को मोच से प्रभावित स्थान पर लगाएं। दर्द में बहुत आराम मिलेगा। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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ट्रांसकारपथिया के रुसिनस्की आंदोलन के नेताओं ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर यूक्रेनी राष्ट्रपति के प्रशासन की दीवारों के पास कल एक कार्रवाई की, आरआईए नोवोस्ती ने पॉडरोबनोस्टीव्यू पोर्टल के एक संदेश की रिपोर्ट की . . . ।
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ट्रांसकारपथिया के रुसिनस्की आंदोलन के नेताओं ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर यूक्रेनी राष्ट्रपति के प्रशासन की दीवारों के पास कल एक कार्रवाई की, आरआईए नोवोस्ती ने पॉडरोबनोस्टीव्यू पोर्टल के एक संदेश की रिपोर्ट की . . . ।
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धनी राम मित्तल, यह नाम शायद आपने भी सुना हो, क्योंकि इसे हिंदुस्तान का सबसे शातिर चोर माना जाता है। एक ऐसा चोर, जो धोखाधड़ी से दो महीने तक जज की कुर्सी पर बैठकर फैसला सुनाता रहा। अब ऐसे चोर को शातिर दिमाग नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे। तो चलिए इस चोर के बारे में कुछ खास बातें जान लेते हैं।
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धनी राम मित्तल, यह नाम शायद आपने भी सुना हो, क्योंकि इसे हिंदुस्तान का सबसे शातिर चोर माना जाता है। एक ऐसा चोर, जो धोखाधड़ी से दो महीने तक जज की कुर्सी पर बैठकर फैसला सुनाता रहा। अब ऐसे चोर को शातिर दिमाग नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे। तो चलिए इस चोर के बारे में कुछ खास बातें जान लेते हैं।
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- लीजिए 'आप' भी हो गए वीआईपी!
कामयाबी ने अरविंद केजरीवाल व उनके सहयोगियों को इतना खास बना दिया कि उनके पास बात करने का भी वक्त नहीं है. अब आम आदमी करे भी तो क्या, उसे रोजगार चाहिए, अस्पताल में ठीक से इलाज, बच्चे का अच्छे स्कूल में दाखिला चाहिए, घर व बिजली-पानी चाहिए और रिश्वतखोरी से मुक्ति. जब तक ये बुनियादी जरूरतें वह अपने दम पर हासिल नहीं कर पाता तब तक वह किसी ऐसे शख्स के पास जाएगा ही, जिसे वह सक्षम समझता है.
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- लीजिए 'आप' भी हो गए वीआईपी! कामयाबी ने अरविंद केजरीवाल व उनके सहयोगियों को इतना खास बना दिया कि उनके पास बात करने का भी वक्त नहीं है. अब आम आदमी करे भी तो क्या, उसे रोजगार चाहिए, अस्पताल में ठीक से इलाज, बच्चे का अच्छे स्कूल में दाखिला चाहिए, घर व बिजली-पानी चाहिए और रिश्वतखोरी से मुक्ति. जब तक ये बुनियादी जरूरतें वह अपने दम पर हासिल नहीं कर पाता तब तक वह किसी ऐसे शख्स के पास जाएगा ही, जिसे वह सक्षम समझता है.
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२. उत्प्रेक्षितमपि तात्त्विकेन रूपेण परिवर्जितत्वात् निरूपाख्यप्रख्यं तत्समर्थनाय यदर्थान्तरन्वासोपादानं तत् आलेख्यमिव गगनतलेऽत्यन्तमसमीचीन मिति, निर्विषयत्वमेतस्यानुचितार्थतैव दोषः । यथा -
(ख) दिवाकाराद्रक्षति यो गुहासु लीनं दिवाभीतमिवान्धकारम् ।
क्षुद्रेऽपि नूनं शरणं प्रपन्ने ममत्वमुच्चैः शिरसामतीव ॥६००। अत्राचेतनस्य तमसो दिवाकरात् त्रास एव न सम्भवतीति कुत एव तत्प्रयोजितमद्रिणा परित्राणम् ? सम्भावितेन तु रूपेण प्रतिभासमानस्यास्य न काचिदनुपपत्तिख़तरतीति व्यर्थ एव तत्समर्थनायां यत्रः ।
(५) साधारणविशेषणवशादेव समासोक्तिरनुत्तमपि उपमानविशेषं प्रकाशयतीति तस्यात्र पुनरुपादाने प्रयोजनाभावात् अनुपादेयत्वं यत् तत् अपुष्टार्थत्वं पुनरुक्तं वा दोषः ।
विवक्षित होता है। वह केवल 'यथा' शब्दसे बोधित नहीं होता है। इसलिए यहाँ उत्प्रेक्षावाचक शब्दके रूपमें 'यथा' शब्द का प्रयोग करनेसे अवाचकत्व दोष होता है ।
२. [ उत्प्रेक्षालंकार में] उत्प्रेक्षित [अर्थ] भी वास्तविक रूपसे होन [केवल कल्पनात्मकमात्र] होनेसे [वन्ध्यापुत्र, ख-पुष्प आदिके समान] असत् जैसा ही होता है। उसके समर्थनके लिए जो कहीं अर्थान्तरन्यास [अलंकार] का आश्रय लिया जाता हैं वह [समर्थनीय अर्थ के असत् होनेसे] आकाशमें बनाये [निराधार ] चित्रके समान अत्यन्त अनुचित है। इसलिए [उत्प्रेक्षित अर्थका] निर्विषयत्व [ सर्वथा अविद्यमानत्व] [भी] अनुचितार्थत्व दोष ही होता है। जैसे(ख) जो [ हिमालय पर्वत] दिनमें [सूर्यसें] डरकर [हिमालयकी] गुफाओं में छिपे हुए अन्धकारको सूर्य से मानों बचाता है। क्योंकि ऊँचे सिग्वालों [अर्थात् महापुरुषों] की नीच शरणागतके प्रति भी अत्यन्त ममता हो जाती है [ इसलिए उन्नत शिरवाला हिमालय क्षुद्र अन्धकारकी भी सूर्यसे रक्षा करता है सो उचित ही है] 1६००
इसमें [वर्णित] अचेतन अन्धकार में सूर्यसे भय ही नहीं बनता है इसलिए उस [भय] से प्रयोजित हिमालयके द्वारा रक्षाकी बात ही कैसे बन सकती है ? और [केवल ] सम्भावित रूपसे प्रतीत होनेवाले इस [भय या परित्राणरूप वाक्यार्थ] में कोई अनुपपत्ति नहीं आती है इसलिए उसके समर्थनका [जो यत्न यहाँ अर्थान्तरन्यास द्वारा किया गया वह्] यत्न व्यर्थ ही है ।
(५) समासोक्तिके दोषका अन्तर्भावइस प्रकार उपमाके दोषको तथा उत्प्रेक्षा एवं अर्थान्तरन्यासके दोषोंको अलग माननेकी आवश्यकता नहीं है। इस बातका उपपादन यहाँतक किया। अब आगे समासोक्तिके दोषोंकी विवेचना करते हैं[ उपमान-उपमेय दोनों पक्षोंमें लगनेवाले] साधारण विशेषणोंके द्वारा समा
(क) स्पृशति तिग्मरुचौ ककुभः करैर्दयितयेव विजृम्भिततापया ।
अतनुमानपरिग्रहया स्थितं रुचिरया चिरयापि दिनश्रिया ।।६०१॥
अत्र तिग्मरुचेः ककुभां च यथा सशविशेषणवशेन व्यक्तिविशेषपरिग्रहेण च नायकतया नायिकात्वेन च व्यक्तिः तथा ग्रीष्मदिवसश्रियोऽपि प्रतिनायिकात्वेन भविष्यतीति किं दयितयेति स्वशब्दोपादानेन ?
सोक्ति [अलंकार] भी उपमानविशेषको प्रकाशित करती है इसलिए यहाँ [ समासोक्ति अलंकार में] उस [उपमानविशेष] का फिर [अलगमे] ग्रहण करने में कोई प्रयोजन न होने से [उस उपमानको शब्दतः ग्रहण करनेपर] जो 'अनुपादेयत्व' [नामका समासोक्तिका दोष प्राचीन आचायने माना] है । वह [प्रकृत में व्यर्थ या अनुपयुक्त होनेके कारण 'अपुष्टार्थत्व' अथवा [प्रकारान्तरसे प्रतीत अर्थका शब्दतः पुनः कथन हानेसे] 'पुनरुक्ति' दोष है। जैसेसूर्य [रूप नायक] के करो [हाथों और किरणों] द्वारा [नायिका रूप] दिशाओंका स्पर्श करनेपर [ग्रीष्म दिनांकी] प्रौढ़ा दिनश्री [रूप प्रतिनायिका] अत्यन्त सन्ताप [ मनःखेद तथा उष्णतातिशय] से भरी हुई और अत्यन्त मान [दिनोंकी दीर्घता और नायिकापक्ष में कोप] को धारण करके [दयितया इव] प्रेमिका के समान देरतक सुन्दर लगती रही । ६०१।
यहाँ [दोनों पक्षों में लग सकनेवाले] साधारण विशेषणोंके द्वारा और सूर्य तथा दिशाओं में [क्रमशः पुल्लिंग तथा स्त्रीलिंगरूप] लिंगविशेषका ग्रहण होनेसे सूर्य तथा दिशाओं में [क्रमशः] नायक तथा नायिकारूप से प्रतीति जैसे [ स्वयं ही] हो जाती उसी प्रकार ग्रीष्मकालकी दिनश्री में प्रतिनायिका रूपसे [स्वयं ही] हो जायगी इसलिए [उस प्रतिनायिकात्वको] 'दयितया' इस [उपमान-वाचक] स्वशब्दसे प्रतिपादन करनेसे क्या लाभ ? [इसलिए इस उदाहरण में जो 'दयितया' पदका ग्रहण किया गया है उसको प्राचीन आचायने समासोक्तिका 'अनुपादेयत्व' नामक अलंकारदोष माना है, परन्तु काव्यप्रकाशकारके मतमें वह 'अपुष्टार्थत्व' अथवा 'पुनरुक्तत्व' मेंसे किसी भी पूर्वोक्त दोषके अन्तर्गत हो सकता है] ।
श्लेषोपमा और समासोक्तिका भेद -
इस प्रकार 'स्पृशति तिग्मरुची' इत्यादि समासोक्ति अलंकारके उदाहरण में साधारण विशेषणों के द्वारा ही सूर्यमें नायकत्व, दिशाओं नायिकात्व, और ग्रीध्मदिनश्री में प्रतिनायिकाके व्यवहारकी प्रतीति सम्भव होनेपर भी जो उपमानवाचक 'दयितया इव' पदका प्रयोग किया गया वह प्राचीन आचार्यों के मतसे 'अनुपादेयत्व' नामक अलंकारदोषका और काव्यप्रकाशकार के मतसे 'अपुष्टार्थत्व' अथवा पुनरुक्तत्वका प्रयोजक है यह बात यहाँतक कही है।
इसपर यह शंका हो सकती है कि इस श्लोक में समासोक्ति अलंकार मानने में यदि दोष आता है तो उसको न माना जाय। उसके स्थानपर यहाँ 'इलेषोपमालंकार' मान लेना अधिक अच्छा होगा। 'जैसे किसी नायकके द्वारा नायिकाका स्पर्श किये जानेपर प्रतिनायिकाको सन्ताप होता है उसी प्रकार सूर्य के द्वारा दिशाओंका स्पर्श किये जानेपर ग्रीष्मकालकी दिनश्रीको उग्र सन्ताप हुआ' ।
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दो. उत्प्रेक्षितमपि तात्त्विकेन रूपेण परिवर्जितत्वात् निरूपाख्यप्रख्यं तत्समर्थनाय यदर्थान्तरन्वासोपादानं तत् आलेख्यमिव गगनतलेऽत्यन्तमसमीचीन मिति, निर्विषयत्वमेतस्यानुचितार्थतैव दोषः । यथा - दिवाकाराद्रक्षति यो गुहासु लीनं दिवाभीतमिवान्धकारम् । क्षुद्रेऽपि नूनं शरणं प्रपन्ने ममत्वमुच्चैः शिरसामतीव ॥छः सौ। अत्राचेतनस्य तमसो दिवाकरात् त्रास एव न सम्भवतीति कुत एव तत्प्रयोजितमद्रिणा परित्राणम् ? सम्भावितेन तु रूपेण प्रतिभासमानस्यास्य न काचिदनुपपत्तिख़तरतीति व्यर्थ एव तत्समर्थनायां यत्रः । साधारणविशेषणवशादेव समासोक्तिरनुत्तमपि उपमानविशेषं प्रकाशयतीति तस्यात्र पुनरुपादाने प्रयोजनाभावात् अनुपादेयत्वं यत् तत् अपुष्टार्थत्वं पुनरुक्तं वा दोषः । विवक्षित होता है। वह केवल 'यथा' शब्दसे बोधित नहीं होता है। इसलिए यहाँ उत्प्रेक्षावाचक शब्दके रूपमें 'यथा' शब्द का प्रयोग करनेसे अवाचकत्व दोष होता है । दो. [ उत्प्रेक्षालंकार में] उत्प्रेक्षित [अर्थ] भी वास्तविक रूपसे होन [केवल कल्पनात्मकमात्र] होनेसे [वन्ध्यापुत्र, ख-पुष्प आदिके समान] असत् जैसा ही होता है। उसके समर्थनके लिए जो कहीं अर्थान्तरन्यास [अलंकार] का आश्रय लिया जाता हैं वह [समर्थनीय अर्थ के असत् होनेसे] आकाशमें बनाये [निराधार ] चित्रके समान अत्यन्त अनुचित है। इसलिए [उत्प्रेक्षित अर्थका] निर्विषयत्व [ सर्वथा अविद्यमानत्व] [भी] अनुचितार्थत्व दोष ही होता है। जैसे जो [ हिमालय पर्वत] दिनमें [सूर्यसें] डरकर [हिमालयकी] गुफाओं में छिपे हुए अन्धकारको सूर्य से मानों बचाता है। क्योंकि ऊँचे सिग्वालों [अर्थात् महापुरुषों] की नीच शरणागतके प्रति भी अत्यन्त ममता हो जाती है [ इसलिए उन्नत शिरवाला हिमालय क्षुद्र अन्धकारकी भी सूर्यसे रक्षा करता है सो उचित ही है] एक हज़ार छः सौ इसमें [वर्णित] अचेतन अन्धकार में सूर्यसे भय ही नहीं बनता है इसलिए उस [भय] से प्रयोजित हिमालयके द्वारा रक्षाकी बात ही कैसे बन सकती है ? और [केवल ] सम्भावित रूपसे प्रतीत होनेवाले इस [भय या परित्राणरूप वाक्यार्थ] में कोई अनुपपत्ति नहीं आती है इसलिए उसके समर्थनका [जो यत्न यहाँ अर्थान्तरन्यास द्वारा किया गया वह्] यत्न व्यर्थ ही है । समासोक्तिके दोषका अन्तर्भावइस प्रकार उपमाके दोषको तथा उत्प्रेक्षा एवं अर्थान्तरन्यासके दोषोंको अलग माननेकी आवश्यकता नहीं है। इस बातका उपपादन यहाँतक किया। अब आगे समासोक्तिके दोषोंकी विवेचना करते हैं[ उपमान-उपमेय दोनों पक्षोंमें लगनेवाले] साधारण विशेषणोंके द्वारा समा स्पृशति तिग्मरुचौ ककुभः करैर्दयितयेव विजृम्भिततापया । अतनुमानपरिग्रहया स्थितं रुचिरया चिरयापि दिनश्रिया ।।छः सौ एक॥ अत्र तिग्मरुचेः ककुभां च यथा सशविशेषणवशेन व्यक्तिविशेषपरिग्रहेण च नायकतया नायिकात्वेन च व्यक्तिः तथा ग्रीष्मदिवसश्रियोऽपि प्रतिनायिकात्वेन भविष्यतीति किं दयितयेति स्वशब्दोपादानेन ? सोक्ति [अलंकार] भी उपमानविशेषको प्रकाशित करती है इसलिए यहाँ [ समासोक्ति अलंकार में] उस [उपमानविशेष] का फिर [अलगमे] ग्रहण करने में कोई प्रयोजन न होने से [उस उपमानको शब्दतः ग्रहण करनेपर] जो 'अनुपादेयत्व' [नामका समासोक्तिका दोष प्राचीन आचायने माना] है । वह [प्रकृत में व्यर्थ या अनुपयुक्त होनेके कारण 'अपुष्टार्थत्व' अथवा [प्रकारान्तरसे प्रतीत अर्थका शब्दतः पुनः कथन हानेसे] 'पुनरुक्ति' दोष है। जैसेसूर्य [रूप नायक] के करो [हाथों और किरणों] द्वारा [नायिका रूप] दिशाओंका स्पर्श करनेपर [ग्रीष्म दिनांकी] प्रौढ़ा दिनश्री [रूप प्रतिनायिका] अत्यन्त सन्ताप [ मनःखेद तथा उष्णतातिशय] से भरी हुई और अत्यन्त मान [दिनोंकी दीर्घता और नायिकापक्ष में कोप] को धारण करके [दयितया इव] प्रेमिका के समान देरतक सुन्दर लगती रही । छः सौ एक। यहाँ [दोनों पक्षों में लग सकनेवाले] साधारण विशेषणोंके द्वारा और सूर्य तथा दिशाओं में [क्रमशः पुल्लिंग तथा स्त्रीलिंगरूप] लिंगविशेषका ग्रहण होनेसे सूर्य तथा दिशाओं में [क्रमशः] नायक तथा नायिकारूप से प्रतीति जैसे [ स्वयं ही] हो जाती उसी प्रकार ग्रीष्मकालकी दिनश्री में प्रतिनायिका रूपसे [स्वयं ही] हो जायगी इसलिए [उस प्रतिनायिकात्वको] 'दयितया' इस [उपमान-वाचक] स्वशब्दसे प्रतिपादन करनेसे क्या लाभ ? [इसलिए इस उदाहरण में जो 'दयितया' पदका ग्रहण किया गया है उसको प्राचीन आचायने समासोक्तिका 'अनुपादेयत्व' नामक अलंकारदोष माना है, परन्तु काव्यप्रकाशकारके मतमें वह 'अपुष्टार्थत्व' अथवा 'पुनरुक्तत्व' मेंसे किसी भी पूर्वोक्त दोषके अन्तर्गत हो सकता है] । श्लेषोपमा और समासोक्तिका भेद - इस प्रकार 'स्पृशति तिग्मरुची' इत्यादि समासोक्ति अलंकारके उदाहरण में साधारण विशेषणों के द्वारा ही सूर्यमें नायकत्व, दिशाओं नायिकात्व, और ग्रीध्मदिनश्री में प्रतिनायिकाके व्यवहारकी प्रतीति सम्भव होनेपर भी जो उपमानवाचक 'दयितया इव' पदका प्रयोग किया गया वह प्राचीन आचार्यों के मतसे 'अनुपादेयत्व' नामक अलंकारदोषका और काव्यप्रकाशकार के मतसे 'अपुष्टार्थत्व' अथवा पुनरुक्तत्वका प्रयोजक है यह बात यहाँतक कही है। इसपर यह शंका हो सकती है कि इस श्लोक में समासोक्ति अलंकार मानने में यदि दोष आता है तो उसको न माना जाय। उसके स्थानपर यहाँ 'इलेषोपमालंकार' मान लेना अधिक अच्छा होगा। 'जैसे किसी नायकके द्वारा नायिकाका स्पर्श किये जानेपर प्रतिनायिकाको सन्ताप होता है उसी प्रकार सूर्य के द्वारा दिशाओंका स्पर्श किये जानेपर ग्रीष्मकालकी दिनश्रीको उग्र सन्ताप हुआ' ।
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ICC World Cup के शुरुआती दोनों मैचों में शानदार प्रदर्शन करने वाली टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। धुरंधर बल्लेबाज धवन चोट की वजह से अब तीन हफ्ते तक टीम का हिस्सा नहीं रहेंगे।
जानकारी के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच खेलते समय धवन को हाथ में चोट लगी थी, जिसके चलते वे तीन हफ्ते तक नहीं खेल पाएंगे। ऐसा भी कहा जा रहा है कि वे अब पूरे विश्वकप में ही नहीं खेल पाएंगे।
सूत्रों की मानें तो धवन के स्थान पर अब केएल राहुल रोहित शर्मा के साथ पारी की शुरुआत कर सकते हैं। यह कहा जा रहा है कि टीम इंडिया ने धवन के स्थान पर श्रेयर अय्यर की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि शिखर धवन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए 109 गेंदों पर 117 रन बनाए थे।
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ICC World Cup के शुरुआती दोनों मैचों में शानदार प्रदर्शन करने वाली टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। धुरंधर बल्लेबाज धवन चोट की वजह से अब तीन हफ्ते तक टीम का हिस्सा नहीं रहेंगे। जानकारी के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच खेलते समय धवन को हाथ में चोट लगी थी, जिसके चलते वे तीन हफ्ते तक नहीं खेल पाएंगे। ऐसा भी कहा जा रहा है कि वे अब पूरे विश्वकप में ही नहीं खेल पाएंगे। सूत्रों की मानें तो धवन के स्थान पर अब केएल राहुल रोहित शर्मा के साथ पारी की शुरुआत कर सकते हैं। यह कहा जा रहा है कि टीम इंडिया ने धवन के स्थान पर श्रेयर अय्यर की मांग की है। उल्लेखनीय है कि शिखर धवन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए एक सौ नौ गेंदों पर एक सौ सत्रह रन बनाए थे। Share this:
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अधिक रासायनिक खाद के इस्तेमाल की वजह से खेत की मिटटी की गुणवत्ता को नुकसान पहुँच रहा है. मिटटी की उपजाऊ क्षमता दिन पर दिन कम होती जा रही है. ऐसे में अब आर्गेनिक खाद (Organic Manure) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है.
देश के सभी राज्यों में आर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन अब खाद में गौमूत्र (Cow Urine In Compost) का इस्तेमाल किया जाएगा.
दरअसल, छत्तीसगढ़ के रायपुर में 27 कृषि विज्ञान केंद्रों में फसलों का प्रदर्शनी लगायी जा रही है, जिसमें सभी प्रकार की फसलों की प्रदर्शनी लगेगी. गौमूत्र से बनी आर्गेनिक खाद की गुणवत्ता जांचने के लिए प्रदर्शनी में शामिल सभी फसलों में गौमूत्र खाद का इस्तेमाल किया जाएगा.
विभाग की तरफ से मिली जानकरी में बताया गया है कि गौमूत्र से बनी आर्गेनिक खाद का ट्रायल कर हम गौमूत्र के गुण और उपलब्ध तत्वों (Properties And Available Elements Of Cow Urine) की मात्रा के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. इस बात की जानकारी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कामधेनु विश्वविद्यालय के साथ कृषि, पशुपालन व सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक की बैठक के दौरान दी.
गौमूत्र से मिटटी होगी उपजाऊ (Soil will be Fertile With Cow Urine)
अधिकारियों का कहना है कि गौमूत्र में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक पायी जाती है, एवं गौमूत्र में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी होती है, इसलिए इसके उपयोग से फसलों की उपज भी स्वास्थ्यवर्धक होगी.
सेहत भी सभी लोगों की अच्छी रहेगी, साथ ही मिटटी की उपजाऊ क्षमता भी अच्छी होगी. यूरिया के इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियों का भी प्रकोप बढ़ जात है. उन्होंने राज्य के कृषि वैज्ञानिकों से यूरिया के स्थान पर गौमूत्र के उपयोग की वैज्ञानिक तकनीक विकसित करने का भी जानकारी दी है.
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अधिक रासायनिक खाद के इस्तेमाल की वजह से खेत की मिटटी की गुणवत्ता को नुकसान पहुँच रहा है. मिटटी की उपजाऊ क्षमता दिन पर दिन कम होती जा रही है. ऐसे में अब आर्गेनिक खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है. देश के सभी राज्यों में आर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन अब खाद में गौमूत्र का इस्तेमाल किया जाएगा. दरअसल, छत्तीसगढ़ के रायपुर में सत्ताईस कृषि विज्ञान केंद्रों में फसलों का प्रदर्शनी लगायी जा रही है, जिसमें सभी प्रकार की फसलों की प्रदर्शनी लगेगी. गौमूत्र से बनी आर्गेनिक खाद की गुणवत्ता जांचने के लिए प्रदर्शनी में शामिल सभी फसलों में गौमूत्र खाद का इस्तेमाल किया जाएगा. विभाग की तरफ से मिली जानकरी में बताया गया है कि गौमूत्र से बनी आर्गेनिक खाद का ट्रायल कर हम गौमूत्र के गुण और उपलब्ध तत्वों की मात्रा के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. इस बात की जानकारी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कामधेनु विश्वविद्यालय के साथ कृषि, पशुपालन व सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक की बैठक के दौरान दी. गौमूत्र से मिटटी होगी उपजाऊ अधिकारियों का कहना है कि गौमूत्र में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक पायी जाती है, एवं गौमूत्र में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी होती है, इसलिए इसके उपयोग से फसलों की उपज भी स्वास्थ्यवर्धक होगी. सेहत भी सभी लोगों की अच्छी रहेगी, साथ ही मिटटी की उपजाऊ क्षमता भी अच्छी होगी. यूरिया के इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियों का भी प्रकोप बढ़ जात है. उन्होंने राज्य के कृषि वैज्ञानिकों से यूरिया के स्थान पर गौमूत्र के उपयोग की वैज्ञानिक तकनीक विकसित करने का भी जानकारी दी है.
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अभिनेता संजय दत्त की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। एक समय वह ड्रग्स की लत के शिकार हो गए थे। उनकी छवि पर भी इसका असर पड़ा था। इसे उनकी जिंदगी का सबसे खराब दौर माना जा सकता है। हालांकि, काफी समय पहले उन्होंने इस लत से छुटकारा पा लिया है। अब संजय ने खुद बताया है कि ड्रग्स की लत होने के कारण लोग उन्हें 'चरसी' कहकर बुलाते थे।
संजय ने लोकप्रिय यूट्यूबर और मोटिवेशनल स्पीकर रणवीर अल्लाहबादिया को दिए इंटरव्यू में इस संबंध में खुलासा किया है। संजय ने कहा कि उन्हें ड्रग्स की लत से मुक्ति पाने के लिए रीहैबिलिएशन सेंटर जाना पड़ता था। उन्होंने कहा कि वह लड़कियों के सामने कूल दिखने के लिए ड्रग्स का सेवन करते थे। उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि लोग उन्हें 'चरसी' कहकर बुलाने लगे थे। उनके लिए यह अनुभव काफी असहज करने वाला था।
संजय ने कहा, "जब मैं रीहैब सेंटर से वापस आया, तो लोग मुझे 'चरसी' बुलाते थे। मैं सोचता था कि यह गलत है। सड़क पर चल रहे लोग मुझे ऐसा बोल रहे हैं। कुछ करना पड़ेगा। तभी मैंने वर्कआउट करना शुरू कर दिया। फिर मैं 'चरसी' से एक ऐसा शख्स बन गया, जिसे देख लोग बोलते कि वाह, क्या स्वैग है, क्या बॉडी है। ' रीहैब सेंटर से वापस आने के बाद संजय ने अपनी बॉडी और फिटनेस पर ध्यान दिया।
संजय ने अपना दर्द साझा करते हुए कई खुलासे किए हैं। उन्होंने आगे कहा, "मैंने अपनी जिंदगी के 10 साल कमरे में या फिर बाथरूम में बिताए हैं। शूटिंग में मेरी दिलचस्पी खत्म हो गई थी, लेकिन जिंदगी यही है और फिर सबकुछ बदल गया। " ड्रग्स की लत के कारण वह अपने परिवार की नजरों में भी गिर गए थे। खासकर दिवंगत अभिनेता और संजय के पिता सुनील दत्त को बेटे की हरकत पर काफी निराशा हुई थी।
सुनील की पत्नी नरगिस दत्त ने बेटे संजय की ड्रग्स लेने की बात अपने पति से छिपाई थी। संजय की नशे की लत ने उनके पिता सुनील को बहुत बड़ा सदमा दिया था। एक दिन खुद संजय अपने पिता सुनील के पास गए और उन्होंने उन्हें बताया कि उन्हें ड्रग्स की लत लग चुकी है और वह इससे उबरना चाहते हैं। इसके बाद सुनील ने बेटे संजय को अमेरिका भेज दिया और फिर वहां से वह ठीक होकर वापस लौटे।
न्यूजबाइट्स प्लस (फैक्ट)
संजय कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। हाल में उन्होंने बताया कि जब उन्हें पता चला कि वह कैंसर से पीड़ित हो चुके हैं, तो वह फूट-फूटकर रोए थे। यह खबर सुन खुद संजय के पैरों तले जमीन खिसक गई थी।
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अभिनेता संजय दत्त की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। एक समय वह ड्रग्स की लत के शिकार हो गए थे। उनकी छवि पर भी इसका असर पड़ा था। इसे उनकी जिंदगी का सबसे खराब दौर माना जा सकता है। हालांकि, काफी समय पहले उन्होंने इस लत से छुटकारा पा लिया है। अब संजय ने खुद बताया है कि ड्रग्स की लत होने के कारण लोग उन्हें 'चरसी' कहकर बुलाते थे। संजय ने लोकप्रिय यूट्यूबर और मोटिवेशनल स्पीकर रणवीर अल्लाहबादिया को दिए इंटरव्यू में इस संबंध में खुलासा किया है। संजय ने कहा कि उन्हें ड्रग्स की लत से मुक्ति पाने के लिए रीहैबिलिएशन सेंटर जाना पड़ता था। उन्होंने कहा कि वह लड़कियों के सामने कूल दिखने के लिए ड्रग्स का सेवन करते थे। उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि लोग उन्हें 'चरसी' कहकर बुलाने लगे थे। उनके लिए यह अनुभव काफी असहज करने वाला था। संजय ने कहा, "जब मैं रीहैब सेंटर से वापस आया, तो लोग मुझे 'चरसी' बुलाते थे। मैं सोचता था कि यह गलत है। सड़क पर चल रहे लोग मुझे ऐसा बोल रहे हैं। कुछ करना पड़ेगा। तभी मैंने वर्कआउट करना शुरू कर दिया। फिर मैं 'चरसी' से एक ऐसा शख्स बन गया, जिसे देख लोग बोलते कि वाह, क्या स्वैग है, क्या बॉडी है। ' रीहैब सेंटर से वापस आने के बाद संजय ने अपनी बॉडी और फिटनेस पर ध्यान दिया। संजय ने अपना दर्द साझा करते हुए कई खुलासे किए हैं। उन्होंने आगे कहा, "मैंने अपनी जिंदगी के दस साल कमरे में या फिर बाथरूम में बिताए हैं। शूटिंग में मेरी दिलचस्पी खत्म हो गई थी, लेकिन जिंदगी यही है और फिर सबकुछ बदल गया। " ड्रग्स की लत के कारण वह अपने परिवार की नजरों में भी गिर गए थे। खासकर दिवंगत अभिनेता और संजय के पिता सुनील दत्त को बेटे की हरकत पर काफी निराशा हुई थी। सुनील की पत्नी नरगिस दत्त ने बेटे संजय की ड्रग्स लेने की बात अपने पति से छिपाई थी। संजय की नशे की लत ने उनके पिता सुनील को बहुत बड़ा सदमा दिया था। एक दिन खुद संजय अपने पिता सुनील के पास गए और उन्होंने उन्हें बताया कि उन्हें ड्रग्स की लत लग चुकी है और वह इससे उबरना चाहते हैं। इसके बाद सुनील ने बेटे संजय को अमेरिका भेज दिया और फिर वहां से वह ठीक होकर वापस लौटे। न्यूजबाइट्स प्लस संजय कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। हाल में उन्होंने बताया कि जब उन्हें पता चला कि वह कैंसर से पीड़ित हो चुके हैं, तो वह फूट-फूटकर रोए थे। यह खबर सुन खुद संजय के पैरों तले जमीन खिसक गई थी।
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१६६ ।। रंगमंच : कला और दृष्टि
साथ-साथ मंच संज्जा पर विशेष बल देने के कारण इसका प्रभाव भावपूर्ण होता है। जहाँ तक पारसी थियेटर को अभिनय शैली का सवाल है, इस पर शेक्सपियरीय अभिनय शैली का प्रभाव मुख्य है। मंच पर दृश्यत्व को प्रधानता देना वह अपना कर्त्तव्य समझता था जिससे रंग-साधनों का प्रचुर प्रयोग हुआ, सोन और सोनरी की भरमार हुई, झाँकी या टेब्लो दृश्यों का समावेश हुआ और युद्ध के भारी-भरकम दृश्यो की योजना को गयो । कुल मिलाकर को रस, हास्य और मनोरंजन सामग्री, गीत औौर नृत्य अंक के प्रारम्भ और अन्त में चौकानेवाली दृश्य-योजना, रूप-सज्जा, भडकीली वेशभूषा, अतिरंजित भभिनय पारसी थियेटर की चपनी विशेषता थी । पारसी थियेटर जनसाधारण की दृष्टि से बहुत ही लोकप्रिय रंगमंच था। प्रेक्षकों की भीड़ इन नाटको को देखने के लिए टूट पड़ती थी और कभी-कभी 'उस जमाने मे पच्चीस-पच्चीस रुपये मे भी टिकट हाथ न भ्राता था।"
फिर भी इस रंगमच का हिन्दी वालों ने फायदा उठाने के बजाय, उससे नाक मोह सिकोडा जिसका एक दुष्परिणाम यह हुआ कि एक जीवंत और समृद्ध रंग-परम्परा दिशा-निर्देश के प्रभाव में भ्रष्ट होकर रह गयी । कहा जाता है कि १८७५ मे जब विक्टोरिया नाटक-मंडली ने वाराणसी मे शकुन्तला प्रॉपेरा प्रस्तुत किया तो राजा-महाराजाम्रो और रईसों की भीड़ उमड़ प्रायी थी। इसी के अभिनय के सम्बन्ध में भारतेन्दु ने लिखा था : 'काशी में पारसी नाटक वालों ने नाचघर में जब शकुन्तला नाटक खेला और उसमें धीरोदात्त नायक दुष्यन्त खेमटेवालियो की तरह कमर पर हाथ रखकर मटक-मटककर नाचने और पतरी कमर थल खाय यह गाने लगा तो डा० थिबो, बाबू प्रमदादाम मित्र प्रभृति विद्वान् यह कहकर उठ आये कि अव देखा नहीं जाता। लोग कालिदास के गले पर छुरी फेर रहे है। 3
वस्तुत हिन्दी साहित्य सदा से शाकाहारी प्यूरिटनो के हाथ में रहा है । से भारतेन्दु को ऐसा परहेज नही होता ( व्यक्तिगत जीवन मे वे रसिया थे) तो सम्भवतः हिन्दी रगमंच की ग्राज यह स्थिति नहीं होती। यह ठीक है कि पारसी रंगम परिष्कृत नही था, पर राधेश्याम कथावाचक और बेताव की तरह अगर मारतेंदु और उनके साथ आगे प्रात तो क्या पारसी रंगमंच एक सही दिशा न प्राप्त कर लेता ? पारसी रंगमंच ने प्रेक्षकों की एक भीड़ खड़ी कर ली थी, रंग-विधान का एक पूरा ढांचा तैयार कर लिया था। उसको एक
१ उपेन्द्रनाथ अश्क : भूमिका, नये खिलाडी, १० ११ २. काशी पत्रिका, भाग १, सङ्ख्या २५० १६
३ भारतेन्दु ग्रथावलो, १० ७५३
हमारा हिन्दी रंगमंच -?! ] १६७
दिशा देने-भर की जरूरत थी । यदि ऐसा हो गया होता तो भाज रंगमंच की स्थापना के लिए हिन्दी वालो को इतनी विवशता न झेलनी पड़ती ।
सबसे विचित्र बात यह है कि जिस पारसी रंगमंच के नाटकों से भारतेन्दु और उनके सहयोगियों को परहेज था, स्वयं उनके अपने नाटक उन दोपों से युक्त थे। भारतेन्दु से लेकर प्रसाद तक पारसी रंगमंच को प्रवृत्तियों से ग्रस्त दिखाई देते हैं।' बाहर से पारसी नाटक का विरोध करने के बावजूद अन्दर से सभी उसकी प्रवृत्तियों से ग्रस्त थे। यह सत्य उस समय के प्रबुद्ध जनों से छिपा नहीं था । ललितकुमार सिंह 'नटवर' ने एक लेख मे ठीक हो लिखा याः 'हमारी अधिकांश नाटक समितियाँ पेशेवर पार्सी स्टेजों की भद्दी नकल हैं ।" जब सब कुछ भद्दी नकल ही था, या नकल को छिपाने के लिए जब केवल भाषा के भाभिजात्य का सहारा लिया गया था तो हिन्दी नाटककारों का दोप और भी बढ़ जाता है चाहे वे भारतेन्दु हों या प्रसाद ।
यह हिन्दी नाटककारों को श्रव्यावहारिक और बड़प्पन वाली दृष्टि का परिचायक ही था कि उन्होंने पारसी रंगमंच और नाटक को थियेटर और ड्रामा का निचला दर्जा दिया और स्वयं ऐसे नाटक लिख डाले जिसमे रंगमंच की जरूरत ही न पड़े। पारसी रंगमंच के भोर हिन्दी नाटककारों के रंगमंचविरहित नाटकों के कथ्य, कथावस्तु और चरित्र की तुलना की जाय तो यह स्पष्ट दोख पड़ेगा कि देश के पुनरुत्थान और प्रतीत गौरव का जो ठेका वे उठाने के लिए कटिबद्ध थे, राधेश्याम कथावाचक और बेताब जैसे पारसी रगमंच के नाटककार पहले से ही उस दायित्व को निभाते जा रहे थे। इस दृष्टि से भारतेंदु और प्रसाद ने कोई नया काम नहीं किया। पारसी रंगमंच का वे जब कथानक और रंगशिल्प मे अप्रत्यक्ष रूप से अनुकरण कर हो रहे थे, तो पूरे दिल से उसे स्वीकार कर वे उसे एक नया जीवन भी तो दे सकते थे। पर जिस होन प्रवृत्ति ने हमारे देश को वर्गों और वर्णो, ऊँच और नीच में वांटा है, उसी ने पारसी रंगमंच को हीन करार देकर छोड़ दिया। यह सदा से हमारे देश में उन लोगों का राष्ट्रीय चरित्र रहा है जो अपने को नियामक समझते रहे हैं।
इस प्रकार हिन्दी क्षेत्र में लोक नाट्य और पारसी रंगमच दोनों की समृद्ध परंपरा थी; किन्तु हिन्दी वाले उससे कुछ ग्रहण नहीं कर सके। कितनी बड़ी
4. देखिए मेरी पुस्तक 'प्रसाद के नाटक : स्वरूप मोर सरचना १० २६३-३०० २. माधुरी, चंशाख, ठुलसी सवत् ३०६ में 'हमारा रगमंच मोर अभिनय कला' लेख ।
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एक सौ छयासठ ।। रंगमंच : कला और दृष्टि साथ-साथ मंच संज्जा पर विशेष बल देने के कारण इसका प्रभाव भावपूर्ण होता है। जहाँ तक पारसी थियेटर को अभिनय शैली का सवाल है, इस पर शेक्सपियरीय अभिनय शैली का प्रभाव मुख्य है। मंच पर दृश्यत्व को प्रधानता देना वह अपना कर्त्तव्य समझता था जिससे रंग-साधनों का प्रचुर प्रयोग हुआ, सोन और सोनरी की भरमार हुई, झाँकी या टेब्लो दृश्यों का समावेश हुआ और युद्ध के भारी-भरकम दृश्यो की योजना को गयो । कुल मिलाकर को रस, हास्य और मनोरंजन सामग्री, गीत औौर नृत्य अंक के प्रारम्भ और अन्त में चौकानेवाली दृश्य-योजना, रूप-सज्जा, भडकीली वेशभूषा, अतिरंजित भभिनय पारसी थियेटर की चपनी विशेषता थी । पारसी थियेटर जनसाधारण की दृष्टि से बहुत ही लोकप्रिय रंगमंच था। प्रेक्षकों की भीड़ इन नाटको को देखने के लिए टूट पड़ती थी और कभी-कभी 'उस जमाने मे पच्चीस-पच्चीस रुपये मे भी टिकट हाथ न भ्राता था।" फिर भी इस रंगमच का हिन्दी वालों ने फायदा उठाने के बजाय, उससे नाक मोह सिकोडा जिसका एक दुष्परिणाम यह हुआ कि एक जीवंत और समृद्ध रंग-परम्परा दिशा-निर्देश के प्रभाव में भ्रष्ट होकर रह गयी । कहा जाता है कि एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर मे जब विक्टोरिया नाटक-मंडली ने वाराणसी मे शकुन्तला प्रॉपेरा प्रस्तुत किया तो राजा-महाराजाम्रो और रईसों की भीड़ उमड़ प्रायी थी। इसी के अभिनय के सम्बन्ध में भारतेन्दु ने लिखा था : 'काशी में पारसी नाटक वालों ने नाचघर में जब शकुन्तला नाटक खेला और उसमें धीरोदात्त नायक दुष्यन्त खेमटेवालियो की तरह कमर पर हाथ रखकर मटक-मटककर नाचने और पतरी कमर थल खाय यह गाने लगा तो डाशून्य थिबो, बाबू प्रमदादाम मित्र प्रभृति विद्वान् यह कहकर उठ आये कि अव देखा नहीं जाता। लोग कालिदास के गले पर छुरी फेर रहे है। तीन वस्तुत हिन्दी साहित्य सदा से शाकाहारी प्यूरिटनो के हाथ में रहा है । से भारतेन्दु को ऐसा परहेज नही होता तो सम्भवतः हिन्दी रगमंच की ग्राज यह स्थिति नहीं होती। यह ठीक है कि पारसी रंगम परिष्कृत नही था, पर राधेश्याम कथावाचक और बेताव की तरह अगर मारतेंदु और उनके साथ आगे प्रात तो क्या पारसी रंगमंच एक सही दिशा न प्राप्त कर लेता ? पारसी रंगमंच ने प्रेक्षकों की एक भीड़ खड़ी कर ली थी, रंग-विधान का एक पूरा ढांचा तैयार कर लिया था। उसको एक एक उपेन्द्रनाथ अश्क : भूमिका, नये खिलाडी, दस ग्यारह दो. काशी पत्रिका, भाग एक, सङ्ख्या दो सौ पचास सोलह तीन भारतेन्दु ग्रथावलो, दस सात सौ तिरेपन हमारा हिन्दी रंगमंच -?! ] एक सौ सरसठ दिशा देने-भर की जरूरत थी । यदि ऐसा हो गया होता तो भाज रंगमंच की स्थापना के लिए हिन्दी वालो को इतनी विवशता न झेलनी पड़ती । सबसे विचित्र बात यह है कि जिस पारसी रंगमंच के नाटकों से भारतेन्दु और उनके सहयोगियों को परहेज था, स्वयं उनके अपने नाटक उन दोपों से युक्त थे। भारतेन्दु से लेकर प्रसाद तक पारसी रंगमंच को प्रवृत्तियों से ग्रस्त दिखाई देते हैं।' बाहर से पारसी नाटक का विरोध करने के बावजूद अन्दर से सभी उसकी प्रवृत्तियों से ग्रस्त थे। यह सत्य उस समय के प्रबुद्ध जनों से छिपा नहीं था । ललितकुमार सिंह 'नटवर' ने एक लेख मे ठीक हो लिखा याः 'हमारी अधिकांश नाटक समितियाँ पेशेवर पार्सी स्टेजों की भद्दी नकल हैं ।" जब सब कुछ भद्दी नकल ही था, या नकल को छिपाने के लिए जब केवल भाषा के भाभिजात्य का सहारा लिया गया था तो हिन्दी नाटककारों का दोप और भी बढ़ जाता है चाहे वे भारतेन्दु हों या प्रसाद । यह हिन्दी नाटककारों को श्रव्यावहारिक और बड़प्पन वाली दृष्टि का परिचायक ही था कि उन्होंने पारसी रंगमंच और नाटक को थियेटर और ड्रामा का निचला दर्जा दिया और स्वयं ऐसे नाटक लिख डाले जिसमे रंगमंच की जरूरत ही न पड़े। पारसी रंगमंच के भोर हिन्दी नाटककारों के रंगमंचविरहित नाटकों के कथ्य, कथावस्तु और चरित्र की तुलना की जाय तो यह स्पष्ट दोख पड़ेगा कि देश के पुनरुत्थान और प्रतीत गौरव का जो ठेका वे उठाने के लिए कटिबद्ध थे, राधेश्याम कथावाचक और बेताब जैसे पारसी रगमंच के नाटककार पहले से ही उस दायित्व को निभाते जा रहे थे। इस दृष्टि से भारतेंदु और प्रसाद ने कोई नया काम नहीं किया। पारसी रंगमंच का वे जब कथानक और रंगशिल्प मे अप्रत्यक्ष रूप से अनुकरण कर हो रहे थे, तो पूरे दिल से उसे स्वीकार कर वे उसे एक नया जीवन भी तो दे सकते थे। पर जिस होन प्रवृत्ति ने हमारे देश को वर्गों और वर्णो, ऊँच और नीच में वांटा है, उसी ने पारसी रंगमंच को हीन करार देकर छोड़ दिया। यह सदा से हमारे देश में उन लोगों का राष्ट्रीय चरित्र रहा है जो अपने को नियामक समझते रहे हैं। इस प्रकार हिन्दी क्षेत्र में लोक नाट्य और पारसी रंगमच दोनों की समृद्ध परंपरा थी; किन्तु हिन्दी वाले उससे कुछ ग्रहण नहीं कर सके। कितनी बड़ी चार. देखिए मेरी पुस्तक 'प्रसाद के नाटक : स्वरूप मोर सरचना दस दो सौ तिरेसठ-तीन सौ दो. माधुरी, चंशाख, ठुलसी सवत् तीन सौ छः में 'हमारा रगमंच मोर अभिनय कला' लेख ।
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दिल्ली। एक सितंबर से शुरू होने वाले चौथे चरण के अनलॉक किए गए छूट से मेट्रो ट्रेन सेवाओं को 'अनलॉक 4' के चौथे चरण में संचालित करने की अनुमति मिलने की उम्मीद है, लेकिन निकट भविष्य में स्कूल और कॉलेज खुलने की संभावना नहीं है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। बार संचालकों को अपने काउंटरों पर शराब बेचने की अनुमति भी दी जा सकती है, लेकिन यह अनुमति ग्राहकों द्वारा इसे घर ले जाने के लिए दी जाएगी।
अब तक बार को खोलने की अनुमति नहीं दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा कि मेट्रो रेल सेवाओं को 1 सितंबर से संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है, जब कोरोना वायरस लॉकडाउन के क्रमिक माफी के चौथे चरण को अनलॉक किया जाएगा। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मार्च में मेट्रो सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था। इस महामारी के कारण देश में अब तक 3. 1 मिलियन से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं।
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दिल्ली। एक सितंबर से शुरू होने वाले चौथे चरण के अनलॉक किए गए छूट से मेट्रो ट्रेन सेवाओं को 'अनलॉक चार' के चौथे चरण में संचालित करने की अनुमति मिलने की उम्मीद है, लेकिन निकट भविष्य में स्कूल और कॉलेज खुलने की संभावना नहीं है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। बार संचालकों को अपने काउंटरों पर शराब बेचने की अनुमति भी दी जा सकती है, लेकिन यह अनुमति ग्राहकों द्वारा इसे घर ले जाने के लिए दी जाएगी। अब तक बार को खोलने की अनुमति नहीं दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा कि मेट्रो रेल सेवाओं को एक सितंबर से संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है, जब कोरोना वायरस लॉकडाउन के क्रमिक माफी के चौथे चरण को अनलॉक किया जाएगा। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मार्च में मेट्रो सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था। इस महामारी के कारण देश में अब तक तीन. एक मिलियन से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं।
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"घुमक्कड़ी का अंकुर क्या डंडे से पीटकर नष्ट किया जा सकता है?" अगर आप दुनिया घूमना चाहते हैं लेकिन घर से बाहर नहीं निकल पाते, क्योंकि आपकी माता आपको इमोशनल ब्लैकमेल करती हैं या आपके पिता डाँट-डपट कर आपको घर पर बैठा देते हैं तो यह लेख आपके और आपके माता-पिता के लिए बहुत ज़रूरी है.. बस, अपने माता-पिता को अपने रिस्क पर पढ़ाइएगा! ;)
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"घुमक्कड़ी का अंकुर क्या डंडे से पीटकर नष्ट किया जा सकता है?" अगर आप दुनिया घूमना चाहते हैं लेकिन घर से बाहर नहीं निकल पाते, क्योंकि आपकी माता आपको इमोशनल ब्लैकमेल करती हैं या आपके पिता डाँट-डपट कर आपको घर पर बैठा देते हैं तो यह लेख आपके और आपके माता-पिता के लिए बहुत ज़रूरी है.. बस, अपने माता-पिता को अपने रिस्क पर पढ़ाइएगा! ;)
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यूटिलिटी डेस्क. अब इंस्टॉलमेंट में पेमेंट करके टूर पैकेज बुक किया जा सकता है। अपने कस्टमर्स को यह सुविधा देने के लिए ट्रैवल कंपनी थॉमस कुक ने कई भारतीय बैंकों के साथ समझौता किया है। इसके लिए कस्टमर्स को एक रेकरिंग अकाउंट (आरडी) ओपन करना होगा। जिसमें पैकेज के 12 किस्त कस्टमर खुद जमा करेगा। जबकि 13वीं इस्टॉलमेंट का पेमेंट थॉमस कुक की तरफ से किया जाएगा।
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यूटिलिटी डेस्क. अब इंस्टॉलमेंट में पेमेंट करके टूर पैकेज बुक किया जा सकता है। अपने कस्टमर्स को यह सुविधा देने के लिए ट्रैवल कंपनी थॉमस कुक ने कई भारतीय बैंकों के साथ समझौता किया है। इसके लिए कस्टमर्स को एक रेकरिंग अकाउंट ओपन करना होगा। जिसमें पैकेज के बारह किस्त कस्टमर खुद जमा करेगा। जबकि तेरहवीं इस्टॉलमेंट का पेमेंट थॉमस कुक की तरफ से किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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मन को शान्ति
मन को अगान्ति का प्रभाव शरीर की बाह्यमुखी क्रियाओ पर भी पड़ता है। उनमे अव्यवस्था होने लगती है और व्यक्ति ठोक ढग से किसी भी कार्य को सम्पादन नही कर पाता । अतः मूल में मन को शान्ति आवश्यक है ।
अजमेर :- दि० ३ दिसम्बर १९७२
निजी परिस्थितियों का उत्पादक कौन ?
परिस्थिति के उद्भावक हमारे ज्ञाताज्ञात कर्म ही है । जैसे मकडी सवय जाला तैयार करती है और अन्त मे स्वय उसमे फसकर छटपटाती है। यही दशा मनुष्य की है। स्वय परिस्थितिया पैदाकर मानव स्त्रय दु.सी होता है। परन्तु पूछने पर वह यही उत्तर देता है - 'क्या करूँ' मै परिस्थिति से जकडा हुआ हूँ । इसका सीधा सा समाधान यही है कि परिस्थितियां पैदा न करो तो रान वन्धन-मुक्त रहोगे ।
अजमेर :- दि० ४ दिसम्बर १६७२
सत्कर्म और प्रतिष्ठा
प्रतिष्ठा पाने के लिए अपने स्तर को गिराने से रहीसही प्रतिष्ठा भी जाती रहती है । अतः अपने स्तर को उन्नत बनाते हुए तदनुकूल सत्कर्म करने से जो स्वाभाविक-सहज प्रतिष्ठा मिलती है. वही सच्ची प्रतिष्ठा है । उस सात्विक प्रतिष्ठा से जन-जन की श्रद्धा, स्नेह तथा सद्भावना भी प्राप्त होती है। अतः अपने सत्कर्मो पर ही विशेष गतिशील होना मानव के लिए हितावह हैं।
मोती भवन, नसीराबाद, अजमेर : - दि० ५ दिसम्बर १६७२ सहनशीलता और धैर्य
सहनशीलता और धैर्य ये दो महत्वपूर्ण गुण हैं । व्यक्ति मे इन दोनों का होना नितान्तावश्यक है। बहुधा व्यक्तियों से वार्तालाप तथा व्यवहार करते समय आकस्मिकरूपेण वातावरण मे कुछ गर्मी आ जाती है, जिससे वर्षो का आपसी स्नेह क्षण भर में टूट जाता है। ऐसी स्थिति मे सहनगीलता और धैर्य्य उस प्रेम की रक्षा करने में सहायक सिद्ध होते हैं ।
तवीजी :- दि० ६ दिसम्बर १९७२
निराशा की घड़ी में
अदम्य उत्साह और कठिन प्रयल से असभव भी सभव वन जाता है, यह सत्य है । परन्तु कभी-कभी इस सिद्धान्त का प्रतिफल न देखकर मन वडा निराश हो जाता है। ऐसी घडी मे हमे उस चीटी की कहानी याद रखनी चाहिए जो दाना लेकर दीवार पर कई वार चढी और गिरी परन्तु अन्त मे ऊपर चढने मे सफल हो गई ।
जेठाणां :- दि० ७ दिसम्बर १९७२
लक्ष्य-शुद्धि - विचार शुद्धि
लक्ष्य को विशुद्धि हमारे जीवन में सुन्दर और स्वस्य विचारों अतः यह भी एक तरीका है कि हम सुन्दर और स्वस्थ विचारों के उदय के लिए प्रथम सुन्दर लक्ष्म की स्थापना करे ।
जेठाणा : - दि० = दिसम्बर १६७२
योग्यता का सही प्रयोग
समाज, परिवार तथा व्यक्ति के सहयोग से जो कुछ योग्यता हमने प्राप्त की है, उसका सदुपयोग अपने जीवन निर्माण मे तथा समाज-परिवार निर्माण में करना एक प्रकार से ऋण-शोधन है । परन्तु केवल अपने को उच्च एव विशिष्ट प्रदर्शित करने की भावना से योग्यता का प्रयोग अह को उत्पन्न कर व्यक्तित्व को गिरा देने वाला होता है ।
खरवा :- दि० ६ दिसम्बर १९७२
मानापमान का अनुभव
मानापमान की चिनगारी जीवन की विनम्रता और सरलता के रेशम को जलाकर भस्म कर देती है । जो भी हमारा मानापमान करता है. वह अपनी योग्यतानुसार एव साधुताअसाधुता का परिचय देता है, उसके लिए हम दुःखी क्यो वने ?
व्यावर :- दि० १० दिसम्बर १९७२
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मन को शान्ति मन को अगान्ति का प्रभाव शरीर की बाह्यमुखी क्रियाओ पर भी पड़ता है। उनमे अव्यवस्था होने लगती है और व्यक्ति ठोक ढग से किसी भी कार्य को सम्पादन नही कर पाता । अतः मूल में मन को शान्ति आवश्यक है । अजमेर :- दिशून्य तीन दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ बहत्तर निजी परिस्थितियों का उत्पादक कौन ? परिस्थिति के उद्भावक हमारे ज्ञाताज्ञात कर्म ही है । जैसे मकडी सवय जाला तैयार करती है और अन्त मे स्वय उसमे फसकर छटपटाती है। यही दशा मनुष्य की है। स्वय परिस्थितिया पैदाकर मानव स्त्रय दु.सी होता है। परन्तु पूछने पर वह यही उत्तर देता है - 'क्या करूँ' मै परिस्थिति से जकडा हुआ हूँ । इसका सीधा सा समाधान यही है कि परिस्थितियां पैदा न करो तो रान वन्धन-मुक्त रहोगे । अजमेर :- दिशून्य चार दिसम्बर एक हज़ार छः सौ बहत्तर सत्कर्म और प्रतिष्ठा प्रतिष्ठा पाने के लिए अपने स्तर को गिराने से रहीसही प्रतिष्ठा भी जाती रहती है । अतः अपने स्तर को उन्नत बनाते हुए तदनुकूल सत्कर्म करने से जो स्वाभाविक-सहज प्रतिष्ठा मिलती है. वही सच्ची प्रतिष्ठा है । उस सात्विक प्रतिष्ठा से जन-जन की श्रद्धा, स्नेह तथा सद्भावना भी प्राप्त होती है। अतः अपने सत्कर्मो पर ही विशेष गतिशील होना मानव के लिए हितावह हैं। मोती भवन, नसीराबाद, अजमेर : - दिशून्य पाँच दिसम्बर एक हज़ार छः सौ बहत्तर सहनशीलता और धैर्य सहनशीलता और धैर्य ये दो महत्वपूर्ण गुण हैं । व्यक्ति मे इन दोनों का होना नितान्तावश्यक है। बहुधा व्यक्तियों से वार्तालाप तथा व्यवहार करते समय आकस्मिकरूपेण वातावरण मे कुछ गर्मी आ जाती है, जिससे वर्षो का आपसी स्नेह क्षण भर में टूट जाता है। ऐसी स्थिति मे सहनगीलता और धैर्य्य उस प्रेम की रक्षा करने में सहायक सिद्ध होते हैं । तवीजी :- दिशून्य छः दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ बहत्तर निराशा की घड़ी में अदम्य उत्साह और कठिन प्रयल से असभव भी सभव वन जाता है, यह सत्य है । परन्तु कभी-कभी इस सिद्धान्त का प्रतिफल न देखकर मन वडा निराश हो जाता है। ऐसी घडी मे हमे उस चीटी की कहानी याद रखनी चाहिए जो दाना लेकर दीवार पर कई वार चढी और गिरी परन्तु अन्त मे ऊपर चढने मे सफल हो गई । जेठाणां :- दिशून्य सात दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ बहत्तर लक्ष्य-शुद्धि - विचार शुद्धि लक्ष्य को विशुद्धि हमारे जीवन में सुन्दर और स्वस्य विचारों अतः यह भी एक तरीका है कि हम सुन्दर और स्वस्थ विचारों के उदय के लिए प्रथम सुन्दर लक्ष्म की स्थापना करे । जेठाणा : - दिशून्य = दिसम्बर एक हज़ार छः सौ बहत्तर योग्यता का सही प्रयोग समाज, परिवार तथा व्यक्ति के सहयोग से जो कुछ योग्यता हमने प्राप्त की है, उसका सदुपयोग अपने जीवन निर्माण मे तथा समाज-परिवार निर्माण में करना एक प्रकार से ऋण-शोधन है । परन्तु केवल अपने को उच्च एव विशिष्ट प्रदर्शित करने की भावना से योग्यता का प्रयोग अह को उत्पन्न कर व्यक्तित्व को गिरा देने वाला होता है । खरवा :- दिशून्य छः दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ बहत्तर मानापमान का अनुभव मानापमान की चिनगारी जीवन की विनम्रता और सरलता के रेशम को जलाकर भस्म कर देती है । जो भी हमारा मानापमान करता है. वह अपनी योग्यतानुसार एव साधुताअसाधुता का परिचय देता है, उसके लिए हम दुःखी क्यो वने ? व्यावर :- दिशून्य दस दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ बहत्तर
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Meerut। छोटी छोटी बातों में जिंदगी को खत्म कर लेने की टेंडेंसी समाज में इन दिनों बढ़ रही है. अपने हाथों जिंदगी को खत्म करने की चाहत सारी उम्मीदों को जमीदोंज कर देती है। आंकड़ों को मानें तो मेरठ में सबसे ज्यादा सुसाइड 16 साल की उम्र के किशोरों ने की है। यही नहीं, आत्म हत्या का मुख्य कारण प्यार में नाकामी है। मेरठ में साल 2016 में कुल 75 लोगों ने सुसाइड किया जो पूरे प्रदेश का 20 प्रतिशत है।
स्यूसाइड के ज्यादातर केसों में मानसिक बीमारियां ही हावी रहती हैं। डिप्रेशन, शिजोफ्रेनिया, बिपोलर, पीटीएसडी आदि हैं। वहीं,उदासीनता, सफलता, बेरोजगारी, पारिवारिक स्थिति भी बड़ा कारण बनती है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक लव अफेयर्स की वजह से प्रदेश में होने वाले सुसाइड का 20 प्रतिशत मेरठ में होता है। मेरठ में कुल इस साल जनवरी से अगस्त तक 75 सुसाइड हुए हैं। जो देशभर में हुए सुसाइड का 0. 4 परसेंट है। साल 2015 में 90 लोगों ने सुसाइड किया और 2016 में 75 लोगों ने सुसाइड किया।
-अगर कोई व्यक्ति उदास, गुमसुम, परेशान और खोया-खोया रहे और सबसे अलग रहना चाहे तो समझ लीजिए कि वो नॉरमल नहीं है।
-खुद को असहाय, निराश, अपने जीवन को बेकार माने या पहले कभी ऐसा प्रयास कर चुका हो तो, उसे कोई ड्रग या एल्कोहल लेने के लिए सख्ती से मना किया जाए तो भी वो ऐसे कदम उठा सकता है।
-सुसाइड करने वाले की मनोदशा बहुत अलग होती है। ये कुछ सेकेंडों का दौर होता है अगर किसी तरह उस समय को टाल दिया जाए तो व्यक्ति सुसाइड करने का इरादा बदल सकता है।
सबसे ज्यादा सुसाइड का कदम 15 से 22 साल की उम्र में वे लोग उठाते हैं, जिनमें ज्यादा सोचने समझने की क्षमता नहीं होती। इसलिए मन में तिरस्कृत की भावना आते ही वे सुसाइड कर लेते हैं। यदि उस समय उन्हे काउंसलिंग मिल जाए तो ऐसे लोगों को बचाया जा सकता है।
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Meerut। छोटी छोटी बातों में जिंदगी को खत्म कर लेने की टेंडेंसी समाज में इन दिनों बढ़ रही है. अपने हाथों जिंदगी को खत्म करने की चाहत सारी उम्मीदों को जमीदोंज कर देती है। आंकड़ों को मानें तो मेरठ में सबसे ज्यादा सुसाइड सोलह साल की उम्र के किशोरों ने की है। यही नहीं, आत्म हत्या का मुख्य कारण प्यार में नाकामी है। मेरठ में साल दो हज़ार सोलह में कुल पचहत्तर लोगों ने सुसाइड किया जो पूरे प्रदेश का बीस प्रतिशत है। स्यूसाइड के ज्यादातर केसों में मानसिक बीमारियां ही हावी रहती हैं। डिप्रेशन, शिजोफ्रेनिया, बिपोलर, पीटीएसडी आदि हैं। वहीं,उदासीनता, सफलता, बेरोजगारी, पारिवारिक स्थिति भी बड़ा कारण बनती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक लव अफेयर्स की वजह से प्रदेश में होने वाले सुसाइड का बीस प्रतिशत मेरठ में होता है। मेरठ में कुल इस साल जनवरी से अगस्त तक पचहत्तर सुसाइड हुए हैं। जो देशभर में हुए सुसाइड का शून्य. चार परसेंट है। साल दो हज़ार पंद्रह में नब्बे लोगों ने सुसाइड किया और दो हज़ार सोलह में पचहत्तर लोगों ने सुसाइड किया। -अगर कोई व्यक्ति उदास, गुमसुम, परेशान और खोया-खोया रहे और सबसे अलग रहना चाहे तो समझ लीजिए कि वो नॉरमल नहीं है। -खुद को असहाय, निराश, अपने जीवन को बेकार माने या पहले कभी ऐसा प्रयास कर चुका हो तो, उसे कोई ड्रग या एल्कोहल लेने के लिए सख्ती से मना किया जाए तो भी वो ऐसे कदम उठा सकता है। -सुसाइड करने वाले की मनोदशा बहुत अलग होती है। ये कुछ सेकेंडों का दौर होता है अगर किसी तरह उस समय को टाल दिया जाए तो व्यक्ति सुसाइड करने का इरादा बदल सकता है। सबसे ज्यादा सुसाइड का कदम पंद्रह से बाईस साल की उम्र में वे लोग उठाते हैं, जिनमें ज्यादा सोचने समझने की क्षमता नहीं होती। इसलिए मन में तिरस्कृत की भावना आते ही वे सुसाइड कर लेते हैं। यदि उस समय उन्हे काउंसलिंग मिल जाए तो ऐसे लोगों को बचाया जा सकता है।
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दाहोद-भोपाल और डॉ. आंबेडकरनगर-भोपाल के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत देने वाली खबर है। रेलवे ने इन दोनों ट्रेन में मासिक सीजन टिकट (एमएसटी) लागू कर दिया है। यह सुविधा 29 अक्टूबर से मिलने लगेगी।
पीआरओ के अनुसार दाहोद से चलने वाली ट्रेन नंबर 09339 दाहोद भोपाल स्पेशल एक्सप्रेस और डॉ. आंबेडकरनगर से चलने वाली ट्रेन नंबर 09323 डॉ. आंबेडकरनगर भोपाल स्पेशल एक्सप्रेस में एमएसटी को वैध किया है।
दोनों ट्रेन में सिर्फ भोपाल की ओर जाने के लिए ही मासिक सीजन टिकट को वैध किया गया है। वापसी में भोपाल से दाहोद और डॉ. आंबेडकरनगर के लिए चलने वाली सामान्य श्रेणी के कोच अभी आरक्षित रूप में चल रहे हैं। ऐसे में वापसी में मासिक सीजन टिकट मान्य नहीं होगा।
वापसी में दोनों ट्रेन में यह सुविधा नहीं मिलेगी। ऐसा इसलिए रहेगा कि पश्चिम मध्य रेलवे ने ट्रेन नंबर 09324 भोपाल डॉ. आंबेडकरनगर स्पेशल एक्सप्रेस और ट्रेन नंबर 09340 भोपाल दाहोद स्पेशल एक्सप्रेस के सामान्य श्रेणी कोच को अनारक्षित रूप में चलाने की घोषणा नहीं की है। इससे इन दोनों ट्रेन के अनारक्षित कोच में भी मासिक सीजन टिकट मान्य होंगे। मासिक सीजन टिकट धारकों को सिर्फ अनारक्षित कोच में ही यात्रा करने की अनुमति रहेगी क्योंकि आरक्षित कोच में यात्रा करने के लिए कन्फर्म टिकट का होना अनिवार्य है।
रतलाम मंडल पर चलने वाली आठ अनारक्षित ट्रेन में 15 सितंबर से मासिक सीजन टिकट की शुरुआत हो गई है। ट्रेन 09382, 09381 रतलाम-दाहोद-रतलाम स्पेशल मेमू, ट्रेन 09506, 09507 उज्जैन-इंदौर-उज्जैन स्पेशल पैसेंजर, ट्रेन 09390, 09389 रतलाम-डॉ. आंबेडकरनगर-रतलाम स्पेशल डेमू, ट्रेन 09384, 09383 उज्जैन-रतलाम-उज्जैन स्पेशल मेमू।
आठ ट्रेन के अलावा किसी अन्य ट्रेन में मासिक सीजन टिकट मान्य नहीं होंगे। एमएसटी के साथ यात्रा करते पाए जाने पर उन्हें बिना टिकट माना जाएगा। एमएसटी के साथ यात्रियों को कोविड-19 नियमों का पालन करना होगा। उन्हें मास्क लगाना होगा।
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दाहोद-भोपाल और डॉ. आंबेडकरनगर-भोपाल के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत देने वाली खबर है। रेलवे ने इन दोनों ट्रेन में मासिक सीजन टिकट लागू कर दिया है। यह सुविधा उनतीस अक्टूबर से मिलने लगेगी। पीआरओ के अनुसार दाहोद से चलने वाली ट्रेन नंबर नौ हज़ार तीन सौ उनतालीस दाहोद भोपाल स्पेशल एक्सप्रेस और डॉ. आंबेडकरनगर से चलने वाली ट्रेन नंबर नौ हज़ार तीन सौ तेईस डॉ. आंबेडकरनगर भोपाल स्पेशल एक्सप्रेस में एमएसटी को वैध किया है। दोनों ट्रेन में सिर्फ भोपाल की ओर जाने के लिए ही मासिक सीजन टिकट को वैध किया गया है। वापसी में भोपाल से दाहोद और डॉ. आंबेडकरनगर के लिए चलने वाली सामान्य श्रेणी के कोच अभी आरक्षित रूप में चल रहे हैं। ऐसे में वापसी में मासिक सीजन टिकट मान्य नहीं होगा। वापसी में दोनों ट्रेन में यह सुविधा नहीं मिलेगी। ऐसा इसलिए रहेगा कि पश्चिम मध्य रेलवे ने ट्रेन नंबर नौ हज़ार तीन सौ चौबीस भोपाल डॉ. आंबेडकरनगर स्पेशल एक्सप्रेस और ट्रेन नंबर नौ हज़ार तीन सौ चालीस भोपाल दाहोद स्पेशल एक्सप्रेस के सामान्य श्रेणी कोच को अनारक्षित रूप में चलाने की घोषणा नहीं की है। इससे इन दोनों ट्रेन के अनारक्षित कोच में भी मासिक सीजन टिकट मान्य होंगे। मासिक सीजन टिकट धारकों को सिर्फ अनारक्षित कोच में ही यात्रा करने की अनुमति रहेगी क्योंकि आरक्षित कोच में यात्रा करने के लिए कन्फर्म टिकट का होना अनिवार्य है। रतलाम मंडल पर चलने वाली आठ अनारक्षित ट्रेन में पंद्रह सितंबर से मासिक सीजन टिकट की शुरुआत हो गई है। ट्रेन नौ हज़ार तीन सौ बयासी, नौ हज़ार तीन सौ इक्यासी रतलाम-दाहोद-रतलाम स्पेशल मेमू, ट्रेन नौ हज़ार पाँच सौ छः, नौ हज़ार पाँच सौ सात उज्जैन-इंदौर-उज्जैन स्पेशल पैसेंजर, ट्रेन नौ हज़ार तीन सौ नब्बे, नौ हज़ार तीन सौ नवासी रतलाम-डॉ. आंबेडकरनगर-रतलाम स्पेशल डेमू, ट्रेन नौ हज़ार तीन सौ चौरासी, नौ हज़ार तीन सौ तिरासी उज्जैन-रतलाम-उज्जैन स्पेशल मेमू। आठ ट्रेन के अलावा किसी अन्य ट्रेन में मासिक सीजन टिकट मान्य नहीं होंगे। एमएसटी के साथ यात्रा करते पाए जाने पर उन्हें बिना टिकट माना जाएगा। एमएसटी के साथ यात्रियों को कोविड-उन्नीस नियमों का पालन करना होगा। उन्हें मास्क लगाना होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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फिल्म मजबूर में अमिताभ प्राण से कहते हैं, माइकल मैंने सुना था कि चोरों के भी कुछ उसूल होते हैं. प्राण जवाब देते हैं, तुमने ठीक ही सुना है बरखुरदार. चोरों के ही उसूल होते हैं. पेश हैं प्राण के कुछ डायलॉग जिन्हें भुलाए न भूलेंगे.
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फिल्म मजबूर में अमिताभ प्राण से कहते हैं, माइकल मैंने सुना था कि चोरों के भी कुछ उसूल होते हैं. प्राण जवाब देते हैं, तुमने ठीक ही सुना है बरखुरदार. चोरों के ही उसूल होते हैं. पेश हैं प्राण के कुछ डायलॉग जिन्हें भुलाए न भूलेंगे.
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भाषा प्रचलित है वैसी ही उस काल में भी थी । गानेवाले को हेलू गांव दिया गया। इस की उस काल की भाषा हुई 'रंगस्सहल्लुदिराणा ' ( ५ त० ४०२ श्लो० ) ।
पठतरंग में दिद्दारानी का उपद्रव और बहुत से राजाओ के नाम के पूर्व में शाहिपद ध्यान देने के योग्य है ।
सप्तमतरंग ( ५३ श्लो० ) में हम्मीर नाम का एक राजा तुंग के समय मे और ( १६० श्लो० ) अनन्त के समय मे भोज का राजा होना लिखा है । मान के हेतु लोगों को ठाकुर की पदवी दी जाती थी । ( ७ त० २६ श्लो० ) तुरुष्क देश से सोने का मुलम्मा करने को विद्या हर्ष के समय में आई । ( ७ त० ५३ श्लो० ) इसी के काल में खस लोगों ने पहले पहल बन्दूक का युद्ध किया ( ७ त० ६८४ लो० ) कलिंजर त० ६८४ लो० ) कलिंजर के राजा, राजा उदय सिंह आदि कई राजाओं के प्रसंग से ( १३०० श्लो० के आसपास ) नाम श्राए हैं । युद्ध हारने के समय क्षत्रानियां राजपुताने की भांति यहां भी जल जाती थी । ( ७ त० १५०० लो० )
अष्टम तरंग में भी कायस्थों की बहुत निन्दा की है । ( ८ त० लो० आदि ) कैदियों को भांग से रंग कर कपड़ा पहनाते थे । (८ त० १३ श्लो० ) कल्याण के हेतु लोग भीष्मस्तवराज, गजेन्द्र मोक्ष, दुर्गापाठ आदि का पाठ करते थे (८ त० १०६ श्लो० ) टकसाल का नाम टंकशाला । (८० १५२ लो० ) उस समय में भी राजाओं को इस बात का श्राग्रह होता था कि उन्ही के नाम के सिक्के का प्रचार विशेष हो । इस समय (बारहवीं शताब्दी वे मध्य में ) कालिंजर का राजा कल्ह था । (८० २०५ श्लो० ) कटार को कट्टार कहते थे । ( ८० ५१५ लो० ) हर्ष का सिर काट कर लोगों ने भाले पर चढ़ाया, किन्तु इस के पहले किसी राजा के सिर काटने की चाल नही थी । हर्ष का व्याख्यान इस तरंग में अवश्य पढ़ने के योग्य है, जिस से शृङ्गार वीर आदि
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भाषा प्रचलित है वैसी ही उस काल में भी थी । गानेवाले को हेलू गांव दिया गया। इस की उस काल की भाषा हुई 'रंगस्सहल्लुदिराणा ' । पठतरंग में दिद्दारानी का उपद्रव और बहुत से राजाओ के नाम के पूर्व में शाहिपद ध्यान देने के योग्य है । सप्तमतरंग में हम्मीर नाम का एक राजा तुंग के समय मे और अनन्त के समय मे भोज का राजा होना लिखा है । मान के हेतु लोगों को ठाकुर की पदवी दी जाती थी । तुरुष्क देश से सोने का मुलम्मा करने को विद्या हर्ष के समय में आई । इसी के काल में खस लोगों ने पहले पहल बन्दूक का युद्ध किया कलिंजर तशून्य छः सौ चौरासी लोशून्य ) कलिंजर के राजा, राजा उदय सिंह आदि कई राजाओं के प्रसंग से नाम श्राए हैं । युद्ध हारने के समय क्षत्रानियां राजपुताने की भांति यहां भी जल जाती थी । अष्टम तरंग में भी कायस्थों की बहुत निन्दा की है । कैदियों को भांग से रंग कर कपड़ा पहनाते थे । कल्याण के हेतु लोग भीष्मस्तवराज, गजेन्द्र मोक्ष, दुर्गापाठ आदि का पाठ करते थे टकसाल का नाम टंकशाला । उस समय में भी राजाओं को इस बात का श्राग्रह होता था कि उन्ही के नाम के सिक्के का प्रचार विशेष हो । इस समय कालिंजर का राजा कल्ह था । कटार को कट्टार कहते थे । हर्ष का सिर काट कर लोगों ने भाले पर चढ़ाया, किन्तु इस के पहले किसी राजा के सिर काटने की चाल नही थी । हर्ष का व्याख्यान इस तरंग में अवश्य पढ़ने के योग्य है, जिस से शृङ्गार वीर आदि
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समर सीजन में चेहरे पर निखार लाना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि इस मौसम में स्किन ऑयली हो जाती है। इस वजह से कोई भी क्रीम या मेकअप लॉन्ग टाइम तक स्टे नहीं कर पाते। ऐसे में बहुत जरूरी है कि होममेड फेस मास्क का इस्तेमाल करके स्किन ऑयल को कम किया जाए।
शहद में विटामिन, मिनरल्स, अमीनो एसिड, एंटीऑक्सिडेंट और कुछ एंजाइम होते हैं, जो स्किएन की अंदर से सफाई करते हैं। इस पैक को लगाने से न सिर्फ चेहरे के मुंहासे रोकने में मदद मिलती है बल्किस चेहरे पर इंस्टेंट ग्लो भी आता है।
एक चम्मच शहद में नींबू के रस की 3-4 बूंदें मिलाएं।
इसे अपने चेहरे पर लगाएं। फिर चेहरे को 20 मिनट के बाद धो लें।
ध्यान देंः नींबू का रस आपकी त्वचा को संवेदनशील बना सकता है। इसलिए बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन जरूर लगा लें।
एलोवेरा का फेस पैक मुंहासे को रोकने में मदद करता है। इसे अगर नींबू और शहद के साथ मिला कर लगाया जाए तो स्किपन पर ग्लोे आता है। एलोवेरा स्किन को नमी भी देता है।
एलोवेरा जेल, नींबू का रस और शहद को सीमित मात्रा में मिलाएं।
पैक को अपने चेहरे पर लगाएं।
पैक को 15 मिनट चेहरे पर रखने के बाद सादे पानी से धो लें।
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समर सीजन में चेहरे पर निखार लाना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि इस मौसम में स्किन ऑयली हो जाती है। इस वजह से कोई भी क्रीम या मेकअप लॉन्ग टाइम तक स्टे नहीं कर पाते। ऐसे में बहुत जरूरी है कि होममेड फेस मास्क का इस्तेमाल करके स्किन ऑयल को कम किया जाए। शहद में विटामिन, मिनरल्स, अमीनो एसिड, एंटीऑक्सिडेंट और कुछ एंजाइम होते हैं, जो स्किएन की अंदर से सफाई करते हैं। इस पैक को लगाने से न सिर्फ चेहरे के मुंहासे रोकने में मदद मिलती है बल्किस चेहरे पर इंस्टेंट ग्लो भी आता है। एक चम्मच शहद में नींबू के रस की तीन-चार बूंदें मिलाएं। इसे अपने चेहरे पर लगाएं। फिर चेहरे को बीस मिनट के बाद धो लें। ध्यान देंः नींबू का रस आपकी त्वचा को संवेदनशील बना सकता है। इसलिए बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन जरूर लगा लें। एलोवेरा का फेस पैक मुंहासे को रोकने में मदद करता है। इसे अगर नींबू और शहद के साथ मिला कर लगाया जाए तो स्किपन पर ग्लोे आता है। एलोवेरा स्किन को नमी भी देता है। एलोवेरा जेल, नींबू का रस और शहद को सीमित मात्रा में मिलाएं। पैक को अपने चेहरे पर लगाएं। पैक को पंद्रह मिनट चेहरे पर रखने के बाद सादे पानी से धो लें।
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पीलीभीत (उप्र) 23 मार्च उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले स्थित बीसलपुर कोतवाली इलाके में पुलिस ने मंगलवार को दो सगी बहनों का संदिग्ध परिस्थितियों में शव बरामद किया। यह जानकारी पुलिस ने दी है।
पीलीभीत जिले के बीसलपुर कोतवाली क्षेत्र में शाहजहांपुर हाईवे से सटे जसौली गांव में दो सगी बहनों का शव संदिग्ध परिस्थिति में मिलने से सनसनी फैल गई।
बीसलपुर पुलिस के अनुसार एक शव पेड़ पर फंदे से लटकता मिला है जबकि दूसरा शव पास में ही खेत में मिला है।
घटनास्थल पर पुलिस बल के साथ पहुंचे पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश यादव ने पत्रकारों को बताया कि मृत दोनों बहनों में एक 17 वर्ष की है जबकि दूसरी की उम्र 19 वर्ष है, लड़कियों का पिता एक ईंट भट्टे पर मजदूर है।
उन्होंने बताया कि घटना की जांच पड़ताल की जा रही है।
इस बीच, मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर पुलिस महानिरीक्षक राजेश कुमार पांडेय ने भी बीसलपुर जाकर मामले की छानबीन की।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बिलसंडा थाना क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला परिवार बीसलपुर के कासिमपुर के पास एक ईंट भट्ठे पर काम करता है।
परिजनों द्वारा पुलिस को दी गई जानकारी के हवाले से उन्होंने बताया कि सोमवार की देर शाम दोनों बहने शौच के लिए घर से निकली थीं और जब काफी देर तक दोनों वापस नहीं लौटीं तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की।
जानकारी के मुताबिक एक बहन का शव देर रात ईंट भट्ठे से कुछ दूरी पर मिला जबकि ग्रामीणों की मदद से मंगलवार की सुबह काफी देर तक ढूंढने के बाद दूसरी बहन का शव एक पेड़ से लटकता मिला।
बीसलपुर थाना पुलिस ने दोनों बहनों के शवों को लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि परिवार भट्टे पर ही रह कर काम करता है और रात से दोनों बहन लापता थीं लेकिन पुलिस को रात में सूचना नहीं दी गई।
उन्होंने बताया कि पुलिस एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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पीलीभीत तेईस मार्च उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले स्थित बीसलपुर कोतवाली इलाके में पुलिस ने मंगलवार को दो सगी बहनों का संदिग्ध परिस्थितियों में शव बरामद किया। यह जानकारी पुलिस ने दी है। पीलीभीत जिले के बीसलपुर कोतवाली क्षेत्र में शाहजहांपुर हाईवे से सटे जसौली गांव में दो सगी बहनों का शव संदिग्ध परिस्थिति में मिलने से सनसनी फैल गई। बीसलपुर पुलिस के अनुसार एक शव पेड़ पर फंदे से लटकता मिला है जबकि दूसरा शव पास में ही खेत में मिला है। घटनास्थल पर पुलिस बल के साथ पहुंचे पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश यादव ने पत्रकारों को बताया कि मृत दोनों बहनों में एक सत्रह वर्ष की है जबकि दूसरी की उम्र उन्नीस वर्ष है, लड़कियों का पिता एक ईंट भट्टे पर मजदूर है। उन्होंने बताया कि घटना की जांच पड़ताल की जा रही है। इस बीच, मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर पुलिस महानिरीक्षक राजेश कुमार पांडेय ने भी बीसलपुर जाकर मामले की छानबीन की। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बिलसंडा थाना क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला परिवार बीसलपुर के कासिमपुर के पास एक ईंट भट्ठे पर काम करता है। परिजनों द्वारा पुलिस को दी गई जानकारी के हवाले से उन्होंने बताया कि सोमवार की देर शाम दोनों बहने शौच के लिए घर से निकली थीं और जब काफी देर तक दोनों वापस नहीं लौटीं तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। जानकारी के मुताबिक एक बहन का शव देर रात ईंट भट्ठे से कुछ दूरी पर मिला जबकि ग्रामीणों की मदद से मंगलवार की सुबह काफी देर तक ढूंढने के बाद दूसरी बहन का शव एक पेड़ से लटकता मिला। बीसलपुर थाना पुलिस ने दोनों बहनों के शवों को लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि परिवार भट्टे पर ही रह कर काम करता है और रात से दोनों बहन लापता थीं लेकिन पुलिस को रात में सूचना नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि पुलिस एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नाहन - पांवटा साहिब के गांव किशनकोट में एक महिला ने पांवटा साहिब के ही भंगानी के मेहरूवाला गांव के एक निवासी कानून की अवहेलना कर बिना तलाक के दूसरी शादी करने का आरोप लगाया है। नाहन में आयोजित पत्रकार वार्ता में महिला ने कहा कि उसका विवाह पहली फरवरी, 2008 को हिंदु रीति-रिवाज के साथ उक्त व्यक्ति से हुआ था। शादी के तुरंत बाद उसके पति ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी तथा कहा कि वह किसी और से प्यार करता है तथा उससे शादी करना चाहता है। लगातार व्यक्ति उसे दहेज के नाम पर ही प्रताडि़त करता रहा तथा उसे छोड़ने की बात समय-समय पर करता रहा। इस बात से तंग होकर महला ने अक्तूबर, 2008 में इसकी शिकायत डीएसपी पांवटा साहिब को भी की थी, परंतु दिनेश कुमार ने राजनीतिक दबाव व अपने पेशे से पुलिस के पास दर्ज शिकायत को भी कमजोर कर दिया। महिला ने कहा कि व्यक्ति पेशे से वकील है तथा पांवटा के एक वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ कार्य करता है, जो राजनीतिक रसूख के चलते उसके मामले को कमजोर कर रहे हैं। महिला ने कहा कि उसने फिलहाल इस मामले में प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है तथा अभी उसके पति के साथ किसी भी प्रकार का तलाक नहीं हुआ है। बावजूद इसके उसके पति ने दस जून, 2016 को गैर कानूनी तौर पर विवाह किया। महिला ने कहा कि उसने पति के खिलाफ 2008 में 498ए के तहत भी पुलिस में मामला दर्ज करवाया है। वर्ष 2012 में उसके पति ने उसके खिलाफ तलाक का मामला नाहन में दर्ज किया, जो वर्तमान में प्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। पीडि़ता का कहना है कि उसके पास नौ साल का एक बेटा भी है तथा वह बमुश्किल अपने व अपने बेटे का गुजर बसर कर रही है। पीडि़ता ने प्रशसन से न्याय की गुहार लगाई है।
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नाहन - पांवटा साहिब के गांव किशनकोट में एक महिला ने पांवटा साहिब के ही भंगानी के मेहरूवाला गांव के एक निवासी कानून की अवहेलना कर बिना तलाक के दूसरी शादी करने का आरोप लगाया है। नाहन में आयोजित पत्रकार वार्ता में महिला ने कहा कि उसका विवाह पहली फरवरी, दो हज़ार आठ को हिंदु रीति-रिवाज के साथ उक्त व्यक्ति से हुआ था। शादी के तुरंत बाद उसके पति ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी तथा कहा कि वह किसी और से प्यार करता है तथा उससे शादी करना चाहता है। लगातार व्यक्ति उसे दहेज के नाम पर ही प्रताडि़त करता रहा तथा उसे छोड़ने की बात समय-समय पर करता रहा। इस बात से तंग होकर महला ने अक्तूबर, दो हज़ार आठ में इसकी शिकायत डीएसपी पांवटा साहिब को भी की थी, परंतु दिनेश कुमार ने राजनीतिक दबाव व अपने पेशे से पुलिस के पास दर्ज शिकायत को भी कमजोर कर दिया। महिला ने कहा कि व्यक्ति पेशे से वकील है तथा पांवटा के एक वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ कार्य करता है, जो राजनीतिक रसूख के चलते उसके मामले को कमजोर कर रहे हैं। महिला ने कहा कि उसने फिलहाल इस मामले में प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है तथा अभी उसके पति के साथ किसी भी प्रकार का तलाक नहीं हुआ है। बावजूद इसके उसके पति ने दस जून, दो हज़ार सोलह को गैर कानूनी तौर पर विवाह किया। महिला ने कहा कि उसने पति के खिलाफ दो हज़ार आठ में चार सौ अट्ठानवेए के तहत भी पुलिस में मामला दर्ज करवाया है। वर्ष दो हज़ार बारह में उसके पति ने उसके खिलाफ तलाक का मामला नाहन में दर्ज किया, जो वर्तमान में प्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। पीडि़ता का कहना है कि उसके पास नौ साल का एक बेटा भी है तथा वह बमुश्किल अपने व अपने बेटे का गुजर बसर कर रही है। पीडि़ता ने प्रशसन से न्याय की गुहार लगाई है।
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न्यूज डेस्कः स्वामी विवेकानंद कर्म पर भरोसा रखने वाले ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने अध्यात्मिक एवं धार्मिक ज्ञान के आधार पर समस्त संसार को प्रेरणा दी। उनके द्वारा बताये गए कुछ अनमोल विचार सभी युवा की जिंदगी को बदल सकता हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे स्वामी विवेकानंद के कुछ अनमोल विचार के बारे में। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।
स्वामी विवेकानंद के 10 अनमोल विचार।
1 . अपने इरादों को मज़बूत रखो। लोग जो कहेंगे उन्हें कहने दो। एक दिन वही लोग तुम्हारा गुणगान करेंगे।
2 . हम जैसा सोचते हैं बाहर की दुनिया बिलकुल वैसी ही है, हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं। सम्पूर्ण संसार हमारे अंदर समाया हुआ है, बस जरूरत है तो चीजों को सही रोशनी में रखकर देखने की।
3 . बार बार परमेश्वर का नाम लेने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता। जो व्यक्ति सत्यकर्म करता है वही धार्मिक है।
4 . यही आप मुझको पसंद करते हो तो, मैं आपके दिल में हूँ। यदि आप मुझसे नफरत करते हो , तो मैं आपके मन में हूँ।
5 . जो व्यक्ति गरीबों और असहाय के लिए रोता है, वही महान आत्मा है, अन्यथा वो दुरात्मा है।
6 . दिन में कम से कम एक बार खुद से जरूर बात करें अन्यथा आप एक उत्कृष्ट व्यक्ति के साथ एक बैठक गँवा देंगे।
7 . खुद को कमजोर मान लेता बहुत बड़ा पाप है।
8 . सच्चाई के लिए कुछ भी छोड़ देना चाहिए, पर किसी के लिए भी सच्चाई नहीं छोड़ना चाहिए।
9 . जब आप व्यस्त होते हैं तो सब कुछ आसान सा लगता है परन्तु आलसी होने पर कुछ भी आसान नहीं लगता है।
10 . धन्य हैं वह लोग जिनके शरीर दूसरों की सेवा करने में नष्ट हो जाते हैं।
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न्यूज डेस्कः स्वामी विवेकानंद कर्म पर भरोसा रखने वाले ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने अध्यात्मिक एवं धार्मिक ज्ञान के आधार पर समस्त संसार को प्रेरणा दी। उनके द्वारा बताये गए कुछ अनमोल विचार सभी युवा की जिंदगी को बदल सकता हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे स्वामी विवेकानंद के कुछ अनमोल विचार के बारे में। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से। स्वामी विवेकानंद के दस अनमोल विचार। एक . अपने इरादों को मज़बूत रखो। लोग जो कहेंगे उन्हें कहने दो। एक दिन वही लोग तुम्हारा गुणगान करेंगे। दो . हम जैसा सोचते हैं बाहर की दुनिया बिलकुल वैसी ही है, हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं। सम्पूर्ण संसार हमारे अंदर समाया हुआ है, बस जरूरत है तो चीजों को सही रोशनी में रखकर देखने की। तीन . बार बार परमेश्वर का नाम लेने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता। जो व्यक्ति सत्यकर्म करता है वही धार्मिक है। चार . यही आप मुझको पसंद करते हो तो, मैं आपके दिल में हूँ। यदि आप मुझसे नफरत करते हो , तो मैं आपके मन में हूँ। पाँच . जो व्यक्ति गरीबों और असहाय के लिए रोता है, वही महान आत्मा है, अन्यथा वो दुरात्मा है। छः . दिन में कम से कम एक बार खुद से जरूर बात करें अन्यथा आप एक उत्कृष्ट व्यक्ति के साथ एक बैठक गँवा देंगे। सात . खुद को कमजोर मान लेता बहुत बड़ा पाप है। आठ . सच्चाई के लिए कुछ भी छोड़ देना चाहिए, पर किसी के लिए भी सच्चाई नहीं छोड़ना चाहिए। नौ . जब आप व्यस्त होते हैं तो सब कुछ आसान सा लगता है परन्तु आलसी होने पर कुछ भी आसान नहीं लगता है। दस . धन्य हैं वह लोग जिनके शरीर दूसरों की सेवा करने में नष्ट हो जाते हैं।
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नौकरीपेशा लोगों के वर्किंग लाइफ में केंद्र सरकार कुछ जरूरी बदलाव करने वाली है। बता दें कि भारत सरकार जल्द ही नया श्रम कानून (New Labour Code) लागू कर सकती है। इस नए कानून के आने से कर्मचारियों को कई ऐसे बदलाव मिलेंगे जिससे भारत में वर्किंग कल्चर बिल्कुल बदल जाएगा।
नए श्रम कानून के अंदर कर्मचारियों को हफ्ते में चार दिन काम करना होगा और बाकी के दिन छुट्टी होगी। साथ ही महिलाओं के लिए भी कुछ ऐसे नियम होंगे जिससे उन्हें भी काम करने में आसानी रहेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने हाल ही में फ्लेक्सिबल वर्क प्लेसेज और फ्लेक्सिबल वर्किंग घंटे के बारे में कहा था कि इसको भविष्य में भारत में लागू करने की जरूरत है।
बता दें कि श्रम मंत्रालय ने नए श्रम कानून के नियमों पर काम करना शुरू कर दिया है। श्रम कानून का असर भारत में 50 करोड़ कामगारों पर पड़ेगा। बता दें कि यह संख्या चीन के बाद सबसे बड़ी संख्या है।
लेबर कोड के मुताबिक, देश में 41. 19 प्रतिशत लोग कृषि उद्योग, 32. 33 प्रतिशत सेवा क्षेत्र और 26. 18 प्रतिशत लोग उद्योग में काम कर रहे हैं।
हालांकि, अभी इस कानून पर सभी राज्यों से सहमति नहीं मिली है। कुछ राज्य नए श्रम कानून के कुछ पॉइंट्स पर आपत्ति जता रहे हैं।
बता दें कि अभी श्रम मंत्रालय ने नए कानून को लागू करने की तारीख की घोषणा नहीं की है।
नए श्रम कानून के अंदर कर्मचारियों को एक सप्ताह में तीन दिन की छुट्टी और चार दिन काम करना रहेगा। हालांकि, अभी इस पर चर्चा की जी रही है।
अगर यह कानून लागू हो जाता है तो कर्मचारियों को हफ्ते में तीन दिन की छुट्टियां मिलेगी, लेकिन उनकी शिफ्ट 12 घंटे की हो जाएगी। इसके आ जाने से एम्प्लोयी को एक सप्ताह में 48 घंटे काम करना होगा। साथ ही कर्मचारियों को इसके आने से दो बार आधे घंटे का ब्रेक भी मिलेगा।
अगर किसी महिला की नाइट में शिफ्त लगाई जाती है तो उसकी सहमति भी जरूरी होगी। यानी कंपनी अब अपनी इच्छा से जबरन किसी महिला को नाइट में नहीं बुला सकेंगे।
अभी तक किसी कर्मचारी को लंबी छुट्टी लेनी होती थी तो उसे कम से कम 240 दिन तक काम करना होता था। लेकिन नए लेबर कोड में इसे घटाकर 180 दिन करने की बात कही जा रही है।
नए श्रम कानून के अंदर केंद्र सरकार ने कर्मचारी की बेसिक सैलरी को उसकी कुल सैलेरी का 50 फीसदी या उससे ज्यादा का प्रावधन है।
बता दें कि बेसिक सैलरी के बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी के लिए कटने वाले रुपये भी अब बढ़ जाएंगे। सरकार नेकर्मचारियों के रिटायरमेंट को भी सुरक्षित रखने की भी बात की है। हालांकि, इस कानून को भविष्य के हिसाब से तैयार किया गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस बदलाव से भविष्य में आर्थिक रूप से भी मदद मिलेगी। हालांकि इसके कारण वर्तमान में मिलने वाली इन हैंड सैलरी पर असर पड़ेगा।
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नौकरीपेशा लोगों के वर्किंग लाइफ में केंद्र सरकार कुछ जरूरी बदलाव करने वाली है। बता दें कि भारत सरकार जल्द ही नया श्रम कानून लागू कर सकती है। इस नए कानून के आने से कर्मचारियों को कई ऐसे बदलाव मिलेंगे जिससे भारत में वर्किंग कल्चर बिल्कुल बदल जाएगा। नए श्रम कानून के अंदर कर्मचारियों को हफ्ते में चार दिन काम करना होगा और बाकी के दिन छुट्टी होगी। साथ ही महिलाओं के लिए भी कुछ ऐसे नियम होंगे जिससे उन्हें भी काम करने में आसानी रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में फ्लेक्सिबल वर्क प्लेसेज और फ्लेक्सिबल वर्किंग घंटे के बारे में कहा था कि इसको भविष्य में भारत में लागू करने की जरूरत है। बता दें कि श्रम मंत्रालय ने नए श्रम कानून के नियमों पर काम करना शुरू कर दिया है। श्रम कानून का असर भारत में पचास करोड़ कामगारों पर पड़ेगा। बता दें कि यह संख्या चीन के बाद सबसे बड़ी संख्या है। लेबर कोड के मुताबिक, देश में इकतालीस. उन्नीस प्रतिशत लोग कृषि उद्योग, बत्तीस. तैंतीस प्रतिशत सेवा क्षेत्र और छब्बीस. अट्ठारह प्रतिशत लोग उद्योग में काम कर रहे हैं। हालांकि, अभी इस कानून पर सभी राज्यों से सहमति नहीं मिली है। कुछ राज्य नए श्रम कानून के कुछ पॉइंट्स पर आपत्ति जता रहे हैं। बता दें कि अभी श्रम मंत्रालय ने नए कानून को लागू करने की तारीख की घोषणा नहीं की है। नए श्रम कानून के अंदर कर्मचारियों को एक सप्ताह में तीन दिन की छुट्टी और चार दिन काम करना रहेगा। हालांकि, अभी इस पर चर्चा की जी रही है। अगर यह कानून लागू हो जाता है तो कर्मचारियों को हफ्ते में तीन दिन की छुट्टियां मिलेगी, लेकिन उनकी शिफ्ट बारह घंटाटे की हो जाएगी। इसके आ जाने से एम्प्लोयी को एक सप्ताह में अड़तालीस घंटाटे काम करना होगा। साथ ही कर्मचारियों को इसके आने से दो बार आधे घंटे का ब्रेक भी मिलेगा। अगर किसी महिला की नाइट में शिफ्त लगाई जाती है तो उसकी सहमति भी जरूरी होगी। यानी कंपनी अब अपनी इच्छा से जबरन किसी महिला को नाइट में नहीं बुला सकेंगे। अभी तक किसी कर्मचारी को लंबी छुट्टी लेनी होती थी तो उसे कम से कम दो सौ चालीस दिन तक काम करना होता था। लेकिन नए लेबर कोड में इसे घटाकर एक सौ अस्सी दिन करने की बात कही जा रही है। नए श्रम कानून के अंदर केंद्र सरकार ने कर्मचारी की बेसिक सैलरी को उसकी कुल सैलेरी का पचास फीसदी या उससे ज्यादा का प्रावधन है। बता दें कि बेसिक सैलरी के बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी के लिए कटने वाले रुपये भी अब बढ़ जाएंगे। सरकार नेकर्मचारियों के रिटायरमेंट को भी सुरक्षित रखने की भी बात की है। हालांकि, इस कानून को भविष्य के हिसाब से तैयार किया गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस बदलाव से भविष्य में आर्थिक रूप से भी मदद मिलेगी। हालांकि इसके कारण वर्तमान में मिलने वाली इन हैंड सैलरी पर असर पड़ेगा।
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HAZARIBAGH: तेज रफ्तार ट्रक कार पर पलट गया. जिसके बाद दोनों गाड़ियों में आग लग गई. कार सवार 2 और ट्रक के ड्राइवर समेत तीन लोगों की मौत जलने से हो गई. हादसे में दो लोग गंभीर रुप से झुलस गए. घटना हजारीबाग के टाटीझरिया थाना क्षेत्र के एनएच 100 पर हुई.
घटना के बारे में बताया जा रहा है कि कार सवार लोग बीमार महिला को इलाज कराने के लिए गिरिडीह के सरिया थाना क्षेत्र से हजारीबाग जा रहे थे. इस दौरान रास्ते में ही हादसा हो गया. दोनों गाड़ियों में आग लगने के बाद फायर बिग्रेड की टीम ने आग बुझाई, लेकिन तब तक सबकुछ खत्म हो चुका था.
बताया जा रहा है कि हजारीबाग के केरेडारी का रहने वाला ट्रक ड्राइवर नशे में था और तेज आवाज में गाना बजाते हुए ट्रक चला रहा था. जिसके कारण यह हादसा हुआ।
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HAZARIBAGH: तेज रफ्तार ट्रक कार पर पलट गया. जिसके बाद दोनों गाड़ियों में आग लग गई. कार सवार दो और ट्रक के ड्राइवर समेत तीन लोगों की मौत जलने से हो गई. हादसे में दो लोग गंभीर रुप से झुलस गए. घटना हजारीबाग के टाटीझरिया थाना क्षेत्र के एनएच एक सौ पर हुई. घटना के बारे में बताया जा रहा है कि कार सवार लोग बीमार महिला को इलाज कराने के लिए गिरिडीह के सरिया थाना क्षेत्र से हजारीबाग जा रहे थे. इस दौरान रास्ते में ही हादसा हो गया. दोनों गाड़ियों में आग लगने के बाद फायर बिग्रेड की टीम ने आग बुझाई, लेकिन तब तक सबकुछ खत्म हो चुका था. बताया जा रहा है कि हजारीबाग के केरेडारी का रहने वाला ट्रक ड्राइवर नशे में था और तेज आवाज में गाना बजाते हुए ट्रक चला रहा था. जिसके कारण यह हादसा हुआ।
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उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को बाहरी आक्रमणकारियों के अलावा ठकुराइयों द्वारा एक दूसरे की गढ़ियों को हड़पने के लिए की जाने वाली लडाइयों का भी सामना करना पड़ता था. इन आक्रमणों का सामना करने में पहाड़ की चोटियों से बड़ी-बड़ी चट्टानों और पत्थरों को हमलावरों पर लुड़काना और फेंकने का बहुत महत्त्व होता था. (Budi Devi Worshiped in The Mountainous Regions of Uttarakhand)
वक़्त आने पर इस योजना को अमल में लाने के लिए बड़े-बूढ़ों द्वारा एक योजना बनायी गयी, जिसके तहत सभी दर्रों पर 'बूड़ीदेवी' के नाम से मंदिरों की स्थापना की जाती. दर्रा पार करने वाले हर व्यक्ति के लिए बूड़ी देवी को एक पत्थर की भेंट चढ़ाना जरूरी होता था. इस परम्परा से उस जगह पर पत्थरों का ढेर लग जाया करता था जो बाहरी हमले के समय दुश्मनों पर फेंकने के काम आया करते थे. इसके अलावा पत्थरों का यह ढेर मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाता था.
आधुनिक भारत में भी इस परंपरा का उदाहरण 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान देखने में आया, जब अल्मोड़ा की सालम पट्टी के जैती गांव में अंग्रेज सिपाही पहुंचे. जब ब्रिटिश सिपाही आन्दोलनकारियों को गिरफ्तार करने पहुंचे तो वे एक पहाड़ी चोटी पर चढ़ गए. स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार करने के लिए ब्रिटिश सैनिक जब भी पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश करते तो वे उन पर बड़े-बड़े पत्थर लुढ़का देते. इस लड़ाई में कई ब्रिटिश सैनिक मारे गए लेकिन स्वतंत्रता सेनानी उनके हाथ नहीं लगे.
वक़्त बदलने के साथ ही इस परम्परा की जरूरत ख़त्म हो गयी लेकिन प्रतीकात्मक रूप में आज भी बूड़ी देवी के मंदिर मौजूद हैं और उनकी पूजा कर भेंट चढ़ाई जाती है. पहाड़ में जहाँ आज भी रास्ता बताने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है वहां ये युक्ति रास्ता बताने के संकेत के रूप में काम किया करती है.
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उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को बाहरी आक्रमणकारियों के अलावा ठकुराइयों द्वारा एक दूसरे की गढ़ियों को हड़पने के लिए की जाने वाली लडाइयों का भी सामना करना पड़ता था. इन आक्रमणों का सामना करने में पहाड़ की चोटियों से बड़ी-बड़ी चट्टानों और पत्थरों को हमलावरों पर लुड़काना और फेंकने का बहुत महत्त्व होता था. वक़्त आने पर इस योजना को अमल में लाने के लिए बड़े-बूढ़ों द्वारा एक योजना बनायी गयी, जिसके तहत सभी दर्रों पर 'बूड़ीदेवी' के नाम से मंदिरों की स्थापना की जाती. दर्रा पार करने वाले हर व्यक्ति के लिए बूड़ी देवी को एक पत्थर की भेंट चढ़ाना जरूरी होता था. इस परम्परा से उस जगह पर पत्थरों का ढेर लग जाया करता था जो बाहरी हमले के समय दुश्मनों पर फेंकने के काम आया करते थे. इसके अलावा पत्थरों का यह ढेर मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाता था. आधुनिक भारत में भी इस परंपरा का उदाहरण एक हज़ार नौ सौ बयालीस के भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान देखने में आया, जब अल्मोड़ा की सालम पट्टी के जैती गांव में अंग्रेज सिपाही पहुंचे. जब ब्रिटिश सिपाही आन्दोलनकारियों को गिरफ्तार करने पहुंचे तो वे एक पहाड़ी चोटी पर चढ़ गए. स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार करने के लिए ब्रिटिश सैनिक जब भी पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश करते तो वे उन पर बड़े-बड़े पत्थर लुढ़का देते. इस लड़ाई में कई ब्रिटिश सैनिक मारे गए लेकिन स्वतंत्रता सेनानी उनके हाथ नहीं लगे. वक़्त बदलने के साथ ही इस परम्परा की जरूरत ख़त्म हो गयी लेकिन प्रतीकात्मक रूप में आज भी बूड़ी देवी के मंदिर मौजूद हैं और उनकी पूजा कर भेंट चढ़ाई जाती है. पहाड़ में जहाँ आज भी रास्ता बताने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है वहां ये युक्ति रास्ता बताने के संकेत के रूप में काम किया करती है.
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पत्र : प्रेमा कंटकको
यदि कोई बात समझमें न आये तो मुझे अवश्य लिखना । मुझे सोदपुरके पतेपर ही लिखना।
तुम्हारा पोस्ट कार्ड आज मिला है। उसमें तुमने जो प्रश्न पूछे है उनका जवाब ऊपर आ गया है।
मैंने यह पत्र दुबारा नही पढ़ा है।
वापूके आशीर्वाद गुजरातीकी फोटो-नकल ( जी० एन० ८६२२ ) से । सी० डब्ल्यू० ७१९५ से भी सौजन्य : मुन्नालाल गं० शाह
३६४. पत्रः प्रेमा कंटकको
तेरा ता० १७-१२-४५ का पत्र विचित्र है, भाषा भी विचित्र है। ऐसा तेरा यह पहला ही पत्र है । तू काममें बहुत व्यस्त है। यह कितने आश्चर्य और दुःख, की बात है कि तू सेविका होने का दावा करती है और समय-समयपर पैसे माँगने में शरमाती है ? सेवाकी खातिर पैसे मांगने में शर्म कैसी ? रेलगाड़ीसे सिर निकालकर पैसा - पैसा माँगते तूने मुझे देखा तो है ही। भीख माँगने में तूने मदद भी की है। परन्तु जिस पत्रका में उत्तर दे रहा हूँ वह तो किसी सेठका पत्र मालूम होता है। अपने स्वार्थके लिए तू पैसे माँगे और शरमाये, इसे तो मैं समझ सकता हूँ। परन्तु सेवाकी खातिर तो सौ बार पैसे माँगे तो भी क्या ज्यादा कहा जायेगा? तूने जो अतिरिक्त पैसोंकी मांग की है उसकी नकल भी नहीं भेजी । यदि तूने मुझे अध्यक्षके नाते पत्र लिखा हो तो तुझे नियमानुसार मन्त्रीको लिखना चाहिए था । मन्त्रीकी मार्फत आये हुए पत्रका उत्तर में तुरन्त दे सकता हूँ। यदि तूने मुझे बुजुर्गंके नाते लिखा हो तो मुझे इतना व्योरा देना चाहिए जिससे में तुरन्त पैसे भेज सकूँ ।
मैंने तो तुझे पुत्री, साथी और सुशीलाकी सगी वहनसे भी ज्यादा घनिष्ठ मानकर तुझसे मार्गदर्शन पाना चाहा था। किन्तु मार्गदर्शन करने के बजाय तूने ऐसी पत्र लिखा, मानो हम एक-दूसरेको जानते ही न हों। यह क्या है, समझमें नहीं आता। इस पत्रका उत्तर सोदपुरके पतेपर भेजना। मैं बंगालका दौरा कर रहा होऊंगा और यहाँसे पत्र वहीं पहुंचा दिया जायेगा ।
गुजरातीकी फोटो-नकल (जी० एन० १०४४२ ) से। भी सौजन्य : प्रेमा कंटक
बापूके आशीर्वाद सी० डब्ल्यू ० ६८८१ से
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पत्र : प्रेमा कंटकको यदि कोई बात समझमें न आये तो मुझे अवश्य लिखना । मुझे सोदपुरके पतेपर ही लिखना। तुम्हारा पोस्ट कार्ड आज मिला है। उसमें तुमने जो प्रश्न पूछे है उनका जवाब ऊपर आ गया है। मैंने यह पत्र दुबारा नही पढ़ा है। वापूके आशीर्वाद गुजरातीकी फोटो-नकल से । सीशून्य डब्ल्यूशून्य सात हज़ार एक सौ पचानवे से भी सौजन्य : मुन्नालाल गंशून्य शाह तीन सौ चौंसठ. पत्रः प्रेमा कंटकको तेरा ताशून्य सत्रह दिसंबर पैंतालीस का पत्र विचित्र है, भाषा भी विचित्र है। ऐसा तेरा यह पहला ही पत्र है । तू काममें बहुत व्यस्त है। यह कितने आश्चर्य और दुःख, की बात है कि तू सेविका होने का दावा करती है और समय-समयपर पैसे माँगने में शरमाती है ? सेवाकी खातिर पैसे मांगने में शर्म कैसी ? रेलगाड़ीसे सिर निकालकर पैसा - पैसा माँगते तूने मुझे देखा तो है ही। भीख माँगने में तूने मदद भी की है। परन्तु जिस पत्रका में उत्तर दे रहा हूँ वह तो किसी सेठका पत्र मालूम होता है। अपने स्वार्थके लिए तू पैसे माँगे और शरमाये, इसे तो मैं समझ सकता हूँ। परन्तु सेवाकी खातिर तो सौ बार पैसे माँगे तो भी क्या ज्यादा कहा जायेगा? तूने जो अतिरिक्त पैसोंकी मांग की है उसकी नकल भी नहीं भेजी । यदि तूने मुझे अध्यक्षके नाते पत्र लिखा हो तो तुझे नियमानुसार मन्त्रीको लिखना चाहिए था । मन्त्रीकी मार्फत आये हुए पत्रका उत्तर में तुरन्त दे सकता हूँ। यदि तूने मुझे बुजुर्गंके नाते लिखा हो तो मुझे इतना व्योरा देना चाहिए जिससे में तुरन्त पैसे भेज सकूँ । मैंने तो तुझे पुत्री, साथी और सुशीलाकी सगी वहनसे भी ज्यादा घनिष्ठ मानकर तुझसे मार्गदर्शन पाना चाहा था। किन्तु मार्गदर्शन करने के बजाय तूने ऐसी पत्र लिखा, मानो हम एक-दूसरेको जानते ही न हों। यह क्या है, समझमें नहीं आता। इस पत्रका उत्तर सोदपुरके पतेपर भेजना। मैं बंगालका दौरा कर रहा होऊंगा और यहाँसे पत्र वहीं पहुंचा दिया जायेगा । गुजरातीकी फोटो-नकल से। भी सौजन्य : प्रेमा कंटक बापूके आशीर्वाद सीशून्य डब्ल्यू शून्य छः हज़ार आठ सौ इक्यासी से
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हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में अब अलग-अलग ड्रेस कोड लागू होगा। नया ड्रेस कोड डॉक्टरों समेत टेक्नीशियन, सफाई कर्मचारी, ड्राइवर, माली, फील्ड वर्कर आदि पर भी लागू होगा। ड्रेस कोड की अवहेलना पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। दोषी को उस दिन अनुपस्थित माना जाएगा। किसी भी तरह की जींस, स्कर्ट, शॉर्ट्स और पलाजो भी ड्रेस का हिस्सा नहीं होंगे। नए नियमों के मुताबिक अस्पताल में गैर चिकित्सीय कार्य करने वाले कर्मचारी फॉर्मल ड्रेस पहनेंगे, लेकिन जींस और टी-शर्ट पर प्रतिबंध रहेगा। ड्यूटी के दौरान महिलाओं के छोटे कपड़े पहनने, बालों में ज्यादा फैशन करने, नाखून बढ़ाने, भारी मेकअप और भारी-भरकम गहने पहनने पर रोक होगी।
ड्यूटी के दौरान सभी कर्मचारियों को नेम प्लेट पहनना जरूरी होगी। हरियाणा सरकार द्वारा अस्पतालों में लागू किए गए अलग-अलग ड्रेस कोड का अस्पताल का नर्सिंग और डाक्टर स्टाफ स्वागत करता हुआ नजर आ रहा है। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि अलग-अलग ड्रेस कोड लागू होने से मरीजों को काफी हद तक राहत मिलेगी, क्योंकि सही ड्रेस कोड न होने के चलते मरीजों को यह पता करना मुश्किल हो जाता है कि डॉक्टर कौन है, वार्ड बॉय कौन है। उन्होंने कहा कि इन ऑर्डर्स के लागू होने से अस्पतालों में स्टाफ को लेकर कन्फ्यूजन दूर होगी। ड्रेस कोड के नए नियमों को लेकर डाक्टरों का कहना है कि सरकार के इन आदेशों का वे स्वागत करते हैं। इससे अस्पतालों में अनुशासन आएगा और मरीजों को इसका काफी लाभ पहुंचेगा।
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हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में अब अलग-अलग ड्रेस कोड लागू होगा। नया ड्रेस कोड डॉक्टरों समेत टेक्नीशियन, सफाई कर्मचारी, ड्राइवर, माली, फील्ड वर्कर आदि पर भी लागू होगा। ड्रेस कोड की अवहेलना पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। दोषी को उस दिन अनुपस्थित माना जाएगा। किसी भी तरह की जींस, स्कर्ट, शॉर्ट्स और पलाजो भी ड्रेस का हिस्सा नहीं होंगे। नए नियमों के मुताबिक अस्पताल में गैर चिकित्सीय कार्य करने वाले कर्मचारी फॉर्मल ड्रेस पहनेंगे, लेकिन जींस और टी-शर्ट पर प्रतिबंध रहेगा। ड्यूटी के दौरान महिलाओं के छोटे कपड़े पहनने, बालों में ज्यादा फैशन करने, नाखून बढ़ाने, भारी मेकअप और भारी-भरकम गहने पहनने पर रोक होगी। ड्यूटी के दौरान सभी कर्मचारियों को नेम प्लेट पहनना जरूरी होगी। हरियाणा सरकार द्वारा अस्पतालों में लागू किए गए अलग-अलग ड्रेस कोड का अस्पताल का नर्सिंग और डाक्टर स्टाफ स्वागत करता हुआ नजर आ रहा है। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि अलग-अलग ड्रेस कोड लागू होने से मरीजों को काफी हद तक राहत मिलेगी, क्योंकि सही ड्रेस कोड न होने के चलते मरीजों को यह पता करना मुश्किल हो जाता है कि डॉक्टर कौन है, वार्ड बॉय कौन है। उन्होंने कहा कि इन ऑर्डर्स के लागू होने से अस्पतालों में स्टाफ को लेकर कन्फ्यूजन दूर होगी। ड्रेस कोड के नए नियमों को लेकर डाक्टरों का कहना है कि सरकार के इन आदेशों का वे स्वागत करते हैं। इससे अस्पतालों में अनुशासन आएगा और मरीजों को इसका काफी लाभ पहुंचेगा।
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महाराष्ट्र के ठाणे जिले के वसई की पुलिस ने एक नाबालिग लड़की से कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप में एक 35 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है.
वालिव पुलिस थाने के इंस्पेक्टर नारायण पाटिल ने कहा कि आरोपी राजेश विश्वकर्मा वसई के बोइडापाड़ के उसी इलाके का रहने वाला है, जहां पर 11 वर्षीय पीड़िता रहती है. आरोपी गुरुवार को उसके घर गया, उस समय पीड़िता के माता-पिता घर पर नहीं थे. आरोपी ने पीड़िता से खाना बनाने के लिए कहा, क्योंकि उसकी पत्नी ने खाना नहीं बनाया था.
पाटिल ने बताया कि विश्वकर्मा ने घर को अंदर से बंद किया और लड़की के साथ छेड़छाड़ करने लगा. लड़की के साथ उसकी एक सहेली उस वक्त घर में मौजूद थी. दोनों वहां से किसी तरह भाग कर किराना की एक दुकान में छुप गईं. पुलिस ने कहा कि आरोपी ने उनका पीछा किया और लड़की को वहां से खींचकर एक आश्रम के पास एक खाली कमरे में ले गया. जहां उसने लड़की के साथ बलात्कार किया. बाद में लड़की अपने माता-पिता के साथ पुलिस थाने आई और उसकी शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को पकड़ा.
पुलिस ने बताया कि विश्वकर्मा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 354 (ए) (1) और 452 के अलावा अनुसूचित जाति और जनजाति कानून की धारा 3(2)(1) तथा यौन अपराध से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम 2012 की धारा 4 और 8 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
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महाराष्ट्र के ठाणे जिले के वसई की पुलिस ने एक नाबालिग लड़की से कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप में एक पैंतीस वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. वालिव पुलिस थाने के इंस्पेक्टर नारायण पाटिल ने कहा कि आरोपी राजेश विश्वकर्मा वसई के बोइडापाड़ के उसी इलाके का रहने वाला है, जहां पर ग्यारह वर्षीय पीड़िता रहती है. आरोपी गुरुवार को उसके घर गया, उस समय पीड़िता के माता-पिता घर पर नहीं थे. आरोपी ने पीड़िता से खाना बनाने के लिए कहा, क्योंकि उसकी पत्नी ने खाना नहीं बनाया था. पाटिल ने बताया कि विश्वकर्मा ने घर को अंदर से बंद किया और लड़की के साथ छेड़छाड़ करने लगा. लड़की के साथ उसकी एक सहेली उस वक्त घर में मौजूद थी. दोनों वहां से किसी तरह भाग कर किराना की एक दुकान में छुप गईं. पुलिस ने कहा कि आरोपी ने उनका पीछा किया और लड़की को वहां से खींचकर एक आश्रम के पास एक खाली कमरे में ले गया. जहां उसने लड़की के साथ बलात्कार किया. बाद में लड़की अपने माता-पिता के साथ पुलिस थाने आई और उसकी शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को पकड़ा. पुलिस ने बताया कि विश्वकर्मा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ छिहत्तर, तीन सौ चौवन और चार सौ बावन के अलावा अनुसूचित जाति और जनजाति कानून की धारा तीन तथा यौन अपराध से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम दो हज़ार बारह की धारा चार और आठ के तहत मामला दर्ज किया गया है.
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नेहा कक्कड़ और रोहनप्रीत सिंह की परिवार के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह तस्वीर दोनों के रोका सेरेमनी की है.
बॉलीवुड सिंगर नेहा कक्कड़ हमेशा सुर्खियों का हिस्सा बनी रहती हैं. कभी अपने गानों, फोटोज को लेकर तो कभी अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर. रिपोर्ट्स के मुताबिक नेहा कक्कड़ 'राइजिंग स्टार' रोहनप्रीत सिंह से शादी करने जा रही हैं. दोनों 24 अक्टूबर को शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. अब नेहा कक्कड़ की रोहनप्रीत के परिवार के साथ एक तस्वीर वायरल हो रही है. कहा जा रहा है दोनों का रोका हो गया है.
वायरल तस्वीर में नेहा कक्कड़ रोहनप्रीत और उनके माता-पिता के साथ सोफे पर बैठी हुई हैं. नेहा के एक हाथ में बैग है और दूसरा हाथ रोहनप्रीत ने पकड़ा हुआ है.
रोहनप्रीत और नेहा कक्कड़ के रिलेशनशिप की खबरें एक वीडियो शेयर करने के बाद से आने लगी थीं. वीडियो में रोहन नेहा को रिंग पहनाते हुए नजर आ रहे थे और दोनों काफी खुश भी थे.
रिपोर्ट्स के मुताबिक नेहा और रोहन 24 अक्टूबर को दिल्ली में शादी करने वाले हैं. हालांकि अभी तक नेहा और रोहन दोनों में से किसी ने इस बात की पुष्टि नहीं की है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दिल्ली में इस महीने के आखिरी में शादी के बंधन में बंधेंगे. कोरोना महामारी के चलते शादी में परिवार के लोग ही शामिल होंगे.
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नेहा कक्कड़ और रोहनप्रीत सिंह की परिवार के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह तस्वीर दोनों के रोका सेरेमनी की है. बॉलीवुड सिंगर नेहा कक्कड़ हमेशा सुर्खियों का हिस्सा बनी रहती हैं. कभी अपने गानों, फोटोज को लेकर तो कभी अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर. रिपोर्ट्स के मुताबिक नेहा कक्कड़ 'राइजिंग स्टार' रोहनप्रीत सिंह से शादी करने जा रही हैं. दोनों चौबीस अक्टूबर को शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. अब नेहा कक्कड़ की रोहनप्रीत के परिवार के साथ एक तस्वीर वायरल हो रही है. कहा जा रहा है दोनों का रोका हो गया है. वायरल तस्वीर में नेहा कक्कड़ रोहनप्रीत और उनके माता-पिता के साथ सोफे पर बैठी हुई हैं. नेहा के एक हाथ में बैग है और दूसरा हाथ रोहनप्रीत ने पकड़ा हुआ है. रोहनप्रीत और नेहा कक्कड़ के रिलेशनशिप की खबरें एक वीडियो शेयर करने के बाद से आने लगी थीं. वीडियो में रोहन नेहा को रिंग पहनाते हुए नजर आ रहे थे और दोनों काफी खुश भी थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक नेहा और रोहन चौबीस अक्टूबर को दिल्ली में शादी करने वाले हैं. हालांकि अभी तक नेहा और रोहन दोनों में से किसी ने इस बात की पुष्टि नहीं की है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दिल्ली में इस महीने के आखिरी में शादी के बंधन में बंधेंगे. कोरोना महामारी के चलते शादी में परिवार के लोग ही शामिल होंगे.
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Flipkart की ओर से उसकी 4-दिवसीय बिग शॉपिंग डेज़ सेल की शुरुआत कर दी गई है, जो स्मार्टफ़ोन, टैबलेट, लैपटॉप, एलईडी टीवी और अन्य पर आपको बेस्ट डील्स और ऑफर्स प्रदान कर रही है। अभी कुछ दिन पहले ही फ्लिप्कार्ट ने प्री-बुकिंग ऑफर शुरू किया था, जिससे ग्राहकों को कम कीमत पर उत्पाद मिलते थे। हालाँकि इसके लिए यूजर्स को पहले ही भुगतान करना पड़ रहा था। अब कंपनी ने अपनी नई सेल की शुरुआत आज से ही कर दी है। इस सेल का अगर आप लाभ उठाना चाहते हैं तो उठा सकते हैं। इस सेल में आपको कुछ सबसे बेस्ट ऑफर्स और डील्स मिल रही हैं। आइये जानते हैं इन डील्स के बारे में।
स्मार्टफोंस पर मिल रही बेस्ट डील्स (Flipkart Big Shopping Days Sale)
इस सेल में आपको सैमसंग के कई स्मार्टफोंस पर बेस्ट डील्स और ऑफर्स का लाभ मिल रहा है, जिनके बारे में आप यहाँ सारी जानकारी ले सकते हैं.
इसके अलावा इस सेल में आपको LG के भी फोंस पर छूट मिल रही है, अगर आप LG G7+ ThinQ स्मार्टफोन को खरीदना चाहते हैं तो आपको बता देते हैं कि इस सेल में आप इसे भी खरीद सकते हैं। फोन को खरीदने के लिए यहाँ क्लिक करें।
Apple के फोंस को भी इस सेल में रखा गया है। अब अगर आप iPhone 7, iPhone 8, या iPhone XS को खरीदना चाहते हैं तो आपके पास कुछ बेस्ट डील्स और ऑफर्स हैं जो आप इन फोंस पर लाभ के तौर पर इस्तेमाल में ले सकते हैं। ज्यादा डील्स के लिए यहाँ जाएँ।
Xiaomi और POCO के फोंस को भी इस सेल में रखा गया है। जैसे कि हमने आपको बताया है कि आप POCO X2 स्मार्टफोन को 19-22 मार्च के बीच ओपन सेल में खरीद सकते हैं। इसके साथ ही आप Redmi के कई फोंस पर और Mi Mix 2 जैसे फोंस के अलावा POCO F1 और अन्य पर भी बेस्ट डील्स और ऑफर्स का लाभ उठा सकते हैं।
Realme के भी कई फोंस पर आपको बेस्ट ऑफर्स और डील्स मिल रही हैं, आपको बता देते हैं कि वैसे तो कई Realme फोंस पर आपको बेस्ट ऑफर्स मिल रहे हैं लेकिन यहाँ हम आपको Realme 5, Realme C2, Realme X और Realme XT पर मिलने वाली बेस्ट डील्स और ऑफर्स के बारे में ही बता रहे हैं। ज्यादा जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें।
इसके अलावा इस सेल में Asus, Vivo, Oppo और Lenovo के अलावा Motorola के फोंस को भी रखा गया है, आप यहाँ इन फोंस पर मिल रही बेस्ट डील्स और ऑफर्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, इतना ही नहीं अगर आप इन फोंस को खरीदना चाहते हैं तो आप इन्हें खरीद भी सकते हैं, खरीदने के लिए यहाँ क्लिक करें।
बैंक ऑफर (Flipkart Big Shopping Days Sale)
इस सेल के दौरान आपको Rs 4999 के मिनिमम कार्ट वैल्यू पर 10 फीसदी का इंस्टेंट डिस्काउंट यानी लगभग Rs 1,500 तक का डिस्काउंट मिल रहा है। यह आपको SBI बैंक के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने पर मिल रहा है, इसके अलावा आपको EMI ऑप्शन भी मिल रहा है। यह सेल 19 मार्च से शुरू होकर 22 मार्च तक चलने वाली है, असल में यह सेल अभी के लिए Flipkart Plus के मेम्बर्स के लिए शुरू हो चुकी है। हालाँकि अगर अन्य लोग भी इस सेल में भाग लेना चाहते हैं तो वह भी ले सकते हैं।
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Flipkart की ओर से उसकी चार-दिवसीय बिग शॉपिंग डेज़ सेल की शुरुआत कर दी गई है, जो स्मार्टफ़ोन, टैबलेट, लैपटॉप, एलईडी टीवी और अन्य पर आपको बेस्ट डील्स और ऑफर्स प्रदान कर रही है। अभी कुछ दिन पहले ही फ्लिप्कार्ट ने प्री-बुकिंग ऑफर शुरू किया था, जिससे ग्राहकों को कम कीमत पर उत्पाद मिलते थे। हालाँकि इसके लिए यूजर्स को पहले ही भुगतान करना पड़ रहा था। अब कंपनी ने अपनी नई सेल की शुरुआत आज से ही कर दी है। इस सेल का अगर आप लाभ उठाना चाहते हैं तो उठा सकते हैं। इस सेल में आपको कुछ सबसे बेस्ट ऑफर्स और डील्स मिल रही हैं। आइये जानते हैं इन डील्स के बारे में। स्मार्टफोंस पर मिल रही बेस्ट डील्स इस सेल में आपको सैमसंग के कई स्मार्टफोंस पर बेस्ट डील्स और ऑफर्स का लाभ मिल रहा है, जिनके बारे में आप यहाँ सारी जानकारी ले सकते हैं. इसके अलावा इस सेल में आपको LG के भी फोंस पर छूट मिल रही है, अगर आप LG Gसात+ ThinQ स्मार्टफोन को खरीदना चाहते हैं तो आपको बता देते हैं कि इस सेल में आप इसे भी खरीद सकते हैं। फोन को खरीदने के लिए यहाँ क्लिक करें। Apple के फोंस को भी इस सेल में रखा गया है। अब अगर आप iPhone सात, iPhone आठ, या iPhone XS को खरीदना चाहते हैं तो आपके पास कुछ बेस्ट डील्स और ऑफर्स हैं जो आप इन फोंस पर लाभ के तौर पर इस्तेमाल में ले सकते हैं। ज्यादा डील्स के लिए यहाँ जाएँ। Xiaomi और POCO के फोंस को भी इस सेल में रखा गया है। जैसे कि हमने आपको बताया है कि आप POCO Xदो स्मार्टफोन को उन्नीस-बाईस मार्च के बीच ओपन सेल में खरीद सकते हैं। इसके साथ ही आप Redmi के कई फोंस पर और Mi Mix दो जैसे फोंस के अलावा POCO Fएक और अन्य पर भी बेस्ट डील्स और ऑफर्स का लाभ उठा सकते हैं। Realme के भी कई फोंस पर आपको बेस्ट ऑफर्स और डील्स मिल रही हैं, आपको बता देते हैं कि वैसे तो कई Realme फोंस पर आपको बेस्ट ऑफर्स मिल रहे हैं लेकिन यहाँ हम आपको Realme पाँच, Realme Cदो, Realme X और Realme XT पर मिलने वाली बेस्ट डील्स और ऑफर्स के बारे में ही बता रहे हैं। ज्यादा जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें। इसके अलावा इस सेल में Asus, Vivo, Oppo और Lenovo के अलावा Motorola के फोंस को भी रखा गया है, आप यहाँ इन फोंस पर मिल रही बेस्ट डील्स और ऑफर्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, इतना ही नहीं अगर आप इन फोंस को खरीदना चाहते हैं तो आप इन्हें खरीद भी सकते हैं, खरीदने के लिए यहाँ क्लिक करें। बैंक ऑफर इस सेल के दौरान आपको चार हज़ार नौ सौ निन्यानवे रुपया के मिनिमम कार्ट वैल्यू पर दस फीसदी का इंस्टेंट डिस्काउंट यानी लगभग एक रुपया,पाँच सौ तक का डिस्काउंट मिल रहा है। यह आपको SBI बैंक के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने पर मिल रहा है, इसके अलावा आपको EMI ऑप्शन भी मिल रहा है। यह सेल उन्नीस मार्च से शुरू होकर बाईस मार्च तक चलने वाली है, असल में यह सेल अभी के लिए Flipkart Plus के मेम्बर्स के लिए शुरू हो चुकी है। हालाँकि अगर अन्य लोग भी इस सेल में भाग लेना चाहते हैं तो वह भी ले सकते हैं।
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दस्तक टाइम्स एजेन्सी/ यूनाइटेड नेशनः संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने एक बयान में कहा है कि स्तनपान में लाइफ सेविंग गुण होते हैं। यूनिसेफ के पोषण प्रमुख वार्नर शलटिक ने वीकली मेडिकल पत्रिका 'द लैन्सिट' में छपी एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि "स्तनपान का महिलाओं व बच्चों दोनों के स्वास्थ्य पर पॉजिटिव असर पड़ता है"।
बच्चें के जीवन, स्वास्थ्य और विकास में स्तनपान बहुत लाभकारी है। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, स्तनपान शिशुओं की जिंदगी बचाता है और यह जन्मे बच्चे की मृत्यू और आंत्र रोग के खतरे को भी कम करता है।
एक शोध में पाया गया है कि चीन में 2003 और 2008 के बीच स्तनपान में पांच फीसदी तक की कमी आई है। अगर स्तनपान को 10 फीसदी बढ़ा दिया जाए, तो सिर्फ शहरी चीन में ही बच्चों के इलाज पर होने वाले खर्च को करीब तीन करोड़ डॉलर तक कम किया जा सकता है।
यूनिसेफ की ओर से कहा गया कि स्तनपान से संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) को पाने में मदद मिल सकती है।
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दस्तक टाइम्स एजेन्सी/ यूनाइटेड नेशनः संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने एक बयान में कहा है कि स्तनपान में लाइफ सेविंग गुण होते हैं। यूनिसेफ के पोषण प्रमुख वार्नर शलटिक ने वीकली मेडिकल पत्रिका 'द लैन्सिट' में छपी एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि "स्तनपान का महिलाओं व बच्चों दोनों के स्वास्थ्य पर पॉजिटिव असर पड़ता है"। बच्चें के जीवन, स्वास्थ्य और विकास में स्तनपान बहुत लाभकारी है। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, स्तनपान शिशुओं की जिंदगी बचाता है और यह जन्मे बच्चे की मृत्यू और आंत्र रोग के खतरे को भी कम करता है। एक शोध में पाया गया है कि चीन में दो हज़ार तीन और दो हज़ार आठ के बीच स्तनपान में पांच फीसदी तक की कमी आई है। अगर स्तनपान को दस फीसदी बढ़ा दिया जाए, तो सिर्फ शहरी चीन में ही बच्चों के इलाज पर होने वाले खर्च को करीब तीन करोड़ डॉलर तक कम किया जा सकता है। यूनिसेफ की ओर से कहा गया कि स्तनपान से संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य को पाने में मदद मिल सकती है।
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Nirahua - Amrapali Dubey Holi song: आज यानि 8 मार्च 2023 को देशभर में होली का त्यौहार बड़े ही धूम - धाम के साथ मनाया जा रहा है। होली में निरहुआ और आम्रपाली का गाना ना सुना जाये ऐसा हो ही नहीं सकता है। मार्केट में निरहुआ और आम्रपाली दुबे के होली सॉन्ग ने धूम मचा दी है। भोजपुरी जुबली स्टार निरहुआ और आम्रपाली के गानों के बिना होली का त्योहार अधूरा सा लगता है।
निरहुआ और आम्रपाली का एक सुपरहिट गाना आज हम आपके लिए होली के मौके पर लेकर आये हैं। निरहुआ का ये गाना यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है। निरहुआ (nirahua) और आम्रपाली (amrapali dubey) की जोड़ी ने इस समय धमाल मचा रखी हुई है।
इस जोड़ी का गाना रंग डलब त देहब हजार गारी (Rang Dalba T Dehab Hajar Gaari) एक बार फिर से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस गाने को निरहुआ और अंतरा सिंह प्रियंका ने अपनी आवाज दी है, जबकि गाने के बोल प्यारे लाल यादव के हैं, वहीं संगीत से सजाया है आशीष वर्मा ने।
निरहुआ के इस गाने को अभी तक 4,844,294 से अधिक बार देखा जा चुका है। गाने को Nirahua Official नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है। गाने में निरहुआ और आम्रपाली होली खेलते हुए नजर आ रहे हैं।
एक्ट्रेस इस गाने के वीडियो में हमेशा की तरह बेहद ही खुबसुरत नजर आ रही हैं। गाने में निरहुआ और आम्रपाली दुबे रोमांटिक होते हुए दिख रहे हैं। लोग इनका रोमांस देख कर काफी मजे भी ले रहे हैं। आपको बता दें कि आम्रपाली सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव भी रहती हैं, फैंस के लिए आये दिन वीडियो और तस्वीरें भी शेयर करती रहती हैं। एक्ट्रेस के चाहने वाले करोड़ो की संख्या में है। लोग आम्रपाली की एक झलक पाने को हमेशा बेताब रहते हैं।
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Nirahua - Amrapali Dubey Holi song: आज यानि आठ मार्च दो हज़ार तेईस को देशभर में होली का त्यौहार बड़े ही धूम - धाम के साथ मनाया जा रहा है। होली में निरहुआ और आम्रपाली का गाना ना सुना जाये ऐसा हो ही नहीं सकता है। मार्केट में निरहुआ और आम्रपाली दुबे के होली सॉन्ग ने धूम मचा दी है। भोजपुरी जुबली स्टार निरहुआ और आम्रपाली के गानों के बिना होली का त्योहार अधूरा सा लगता है। निरहुआ और आम्रपाली का एक सुपरहिट गाना आज हम आपके लिए होली के मौके पर लेकर आये हैं। निरहुआ का ये गाना यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है। निरहुआ और आम्रपाली की जोड़ी ने इस समय धमाल मचा रखी हुई है। इस जोड़ी का गाना रंग डलब त देहब हजार गारी एक बार फिर से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस गाने को निरहुआ और अंतरा सिंह प्रियंका ने अपनी आवाज दी है, जबकि गाने के बोल प्यारे लाल यादव के हैं, वहीं संगीत से सजाया है आशीष वर्मा ने। निरहुआ के इस गाने को अभी तक चार,आठ सौ चौंतालीस,दो सौ चौरानवे से अधिक बार देखा जा चुका है। गाने को Nirahua Official नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है। गाने में निरहुआ और आम्रपाली होली खेलते हुए नजर आ रहे हैं। एक्ट्रेस इस गाने के वीडियो में हमेशा की तरह बेहद ही खुबसुरत नजर आ रही हैं। गाने में निरहुआ और आम्रपाली दुबे रोमांटिक होते हुए दिख रहे हैं। लोग इनका रोमांस देख कर काफी मजे भी ले रहे हैं। आपको बता दें कि आम्रपाली सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव भी रहती हैं, फैंस के लिए आये दिन वीडियो और तस्वीरें भी शेयर करती रहती हैं। एक्ट्रेस के चाहने वाले करोड़ो की संख्या में है। लोग आम्रपाली की एक झलक पाने को हमेशा बेताब रहते हैं।
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कटक. जिले के नियाली प्रखंड के कृष्णप्रसाद ग्राम पंचायत के पुरुनासतंगा गांव के समीप एक तालाब से गुरुवार को एक महिला व उसके 8 वर्षीय बेटे का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गयी है.
जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान रीता मिश्रा और उनके बेटे रंजीत मिश्रा के रूप में हुई है. यह आज सुबह विश्वनाथ मंदिर गए थे, लेकिन बाद में उनके शव तालाब में तैरते पाए गए. बताया गया है कि शादी के बाद पुरी जिले के काकटपुर की रहने वाली रीता अपने पैतृक घर पुरुनासतंगा में गई थी. लोगों को संदेह है कि वह और उसका बेटा तालाब में डूब गए थे. हालांकि स्पष्ट रूप से कुछ पता नहीं चल पाया था. इस घटना की सूचना मिलते ही नियाली पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने यह भी पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि यह एक दुर्घटना थी या कोई साजिश थी.
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कटक. जिले के नियाली प्रखंड के कृष्णप्रसाद ग्राम पंचायत के पुरुनासतंगा गांव के समीप एक तालाब से गुरुवार को एक महिला व उसके आठ वर्षीय बेटे का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गयी है. जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान रीता मिश्रा और उनके बेटे रंजीत मिश्रा के रूप में हुई है. यह आज सुबह विश्वनाथ मंदिर गए थे, लेकिन बाद में उनके शव तालाब में तैरते पाए गए. बताया गया है कि शादी के बाद पुरी जिले के काकटपुर की रहने वाली रीता अपने पैतृक घर पुरुनासतंगा में गई थी. लोगों को संदेह है कि वह और उसका बेटा तालाब में डूब गए थे. हालांकि स्पष्ट रूप से कुछ पता नहीं चल पाया था. इस घटना की सूचना मिलते ही नियाली पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने यह भी पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि यह एक दुर्घटना थी या कोई साजिश थी.
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नई दिल्लीः
कियारा आडवाणी (Kiara Advani) अपनी फिल्म 'जुग जुग जीयो' (Jug Jugg Jeeyo) को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं. जिसका सॉन्ग 'नाच पंजाबन' (The Punjaabban Song) हाल ही में रिलीज हुआ था. जिस पर लोग थिरकते नज़र आ रहे हैं. जिसके बाद अब लोगों को डांस करने के लिए एक और सॉन्ग मिल गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस फिल्म का एक नया सॉन्ग 'दुपट्टा' (Duppata song out) रिलीज कर दिया गया है. जिसे फैंस काफी ज्यादा पसंद कर रहे हैं. साथ ही जमकर प्यार भी लुटा रहे हैं.
बता दें कियारा ने कुछ ही समय पहले इस सॉन्ग को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज (Kiara Advani instagram page) से शेयर किया. लेकिन उतनी ही देर में इस पर लाखों व्यूज आ गए हैं. कियारा (Kiara Advani latest video) ने इसकी वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, 'दुपट्टा आउट हो गया है. अपने डांस पार्टनर के साथ तैयार हो जाइए क्योंकि समय आ गया है झूमने का.' वीडियो में कियारा आडवाणी, वरुण धवन, अनिल कपूर, मनीष पॉल के साथ देखा जा सकता है. आपको बता दें कि कियारा ने इससे पहले सॉन्ग का टीजर भी रिलीज किया था. जिसे देखने के बाद लोग इस सॉन्ग के लिए काफी ज्यादा एक्साइटेड हो गए थे. वहीं, अब उनका इंतजार खत्म हो गया है और लोगों को ये सॉन्ग काफी ज्यादा पसंद भी आ रहा है. सोशल मीडिया यूजर्स कमेंट सेक्शन में सॉन्ग की जमकर तारीफ कर रहे हैं.
खैर, बात की जाए इस फिल्म की तो इसमें वरुण धवन, कियारा आडवाणी, प्राजक्ता कोहली, नीतू सिंह, अनिल कपूर, मनीष पॉल, टिस्का चोपड़ा लीड रोल (Jug Jugg Jeeyo starcast) में हैं. इस फिल्म को राज मेहता ने डायरेक्ट किया है. जबकि हीरू यश जौहर, करण जौहर, अपूर्व मेहता ने इसे प्रोड्यूस किया है. ये फिल्म आने वाली 24 जून, 2022 को रिलीज (Jug Jugg Jeeyo release date) होने वाली है. ऐसे में फिल्म की पूरी टीम इसके प्रमोशन में लगी हुई है. दर्शक इस फिल्म के लिए काफी ज्यादा एक्साइटेड हैं. वे लगातार अपनी एक्साइटमेंट सोशल मीडिया पर जाहिर करते रहते हैं.
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नई दिल्लीः कियारा आडवाणी अपनी फिल्म 'जुग जुग जीयो' को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं. जिसका सॉन्ग 'नाच पंजाबन' हाल ही में रिलीज हुआ था. जिस पर लोग थिरकते नज़र आ रहे हैं. जिसके बाद अब लोगों को डांस करने के लिए एक और सॉन्ग मिल गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस फिल्म का एक नया सॉन्ग 'दुपट्टा' रिलीज कर दिया गया है. जिसे फैंस काफी ज्यादा पसंद कर रहे हैं. साथ ही जमकर प्यार भी लुटा रहे हैं. बता दें कियारा ने कुछ ही समय पहले इस सॉन्ग को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज से शेयर किया. लेकिन उतनी ही देर में इस पर लाखों व्यूज आ गए हैं. कियारा ने इसकी वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, 'दुपट्टा आउट हो गया है. अपने डांस पार्टनर के साथ तैयार हो जाइए क्योंकि समय आ गया है झूमने का.' वीडियो में कियारा आडवाणी, वरुण धवन, अनिल कपूर, मनीष पॉल के साथ देखा जा सकता है. आपको बता दें कि कियारा ने इससे पहले सॉन्ग का टीजर भी रिलीज किया था. जिसे देखने के बाद लोग इस सॉन्ग के लिए काफी ज्यादा एक्साइटेड हो गए थे. वहीं, अब उनका इंतजार खत्म हो गया है और लोगों को ये सॉन्ग काफी ज्यादा पसंद भी आ रहा है. सोशल मीडिया यूजर्स कमेंट सेक्शन में सॉन्ग की जमकर तारीफ कर रहे हैं. खैर, बात की जाए इस फिल्म की तो इसमें वरुण धवन, कियारा आडवाणी, प्राजक्ता कोहली, नीतू सिंह, अनिल कपूर, मनीष पॉल, टिस्का चोपड़ा लीड रोल में हैं. इस फिल्म को राज मेहता ने डायरेक्ट किया है. जबकि हीरू यश जौहर, करण जौहर, अपूर्व मेहता ने इसे प्रोड्यूस किया है. ये फिल्म आने वाली चौबीस जून, दो हज़ार बाईस को रिलीज होने वाली है. ऐसे में फिल्म की पूरी टीम इसके प्रमोशन में लगी हुई है. दर्शक इस फिल्म के लिए काफी ज्यादा एक्साइटेड हैं. वे लगातार अपनी एक्साइटमेंट सोशल मीडिया पर जाहिर करते रहते हैं.
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नई दिल्ली, 15 नवंबर (CRICKETNMORE)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद ने आस्ट्रेलिया के डेविड वार्नर को आगामी 2019 सीजन के लिए रिटेन करने का फैसला किया है जबकि टेस्ट विकेटकीपर रिद्धिमान साहा को रिलीज कर दिया है।
नई दिल्ली, 15 नवंबर (CRICKETNMORE)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद ने आस्ट्रेलिया के डेविड वार्नर को आगामी 2019 सीजन के लिए रिटेन करने का फैसला किया है जबकि टेस्ट विकेटकीपर रिद्धिमान साहा को रिलीज कर दिया है।
साहा के अलावा फ्रेंचाइजी ने इंग्लैंड के एलेक्स हेल्स, क्रिस जोर्डन और वेस्टइंडीज के कार्लोस ब्राथवेट को भी बाहर का रास्ता दिखाया है।
वार्नर के अलावा फ्रेंचाइजी ने छह विदेशी खिलाड़ियों को रिटेन किया है जिनमें बिली स्टानलेक, केन विलियमसन, शाकिब अल हसन, राशिद खान और मोहम्मद नबी के नाम शामिल हैं।
जिन खिलाड़ियों को रिलीज किया गया है उनमें सचिन बेबी, तन्यम अग्रवाल, बिपुल शर्मा और मेहेदी हसन हैं।
सनराइजर्स ने इससे पहले विजय शंकर, अभिषेक शर्मा, शाहबाज नदीम के बदले शिखर धवन को दिल्ली डेयरडेविल्स को दे दिया है।
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नई दिल्ली, पंद्रह नवंबर । इंडियन प्रीमियर लीग की फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद ने आस्ट्रेलिया के डेविड वार्नर को आगामी दो हज़ार उन्नीस सीजन के लिए रिटेन करने का फैसला किया है जबकि टेस्ट विकेटकीपर रिद्धिमान साहा को रिलीज कर दिया है। नई दिल्ली, पंद्रह नवंबर । इंडियन प्रीमियर लीग की फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद ने आस्ट्रेलिया के डेविड वार्नर को आगामी दो हज़ार उन्नीस सीजन के लिए रिटेन करने का फैसला किया है जबकि टेस्ट विकेटकीपर रिद्धिमान साहा को रिलीज कर दिया है। साहा के अलावा फ्रेंचाइजी ने इंग्लैंड के एलेक्स हेल्स, क्रिस जोर्डन और वेस्टइंडीज के कार्लोस ब्राथवेट को भी बाहर का रास्ता दिखाया है। वार्नर के अलावा फ्रेंचाइजी ने छह विदेशी खिलाड़ियों को रिटेन किया है जिनमें बिली स्टानलेक, केन विलियमसन, शाकिब अल हसन, राशिद खान और मोहम्मद नबी के नाम शामिल हैं। जिन खिलाड़ियों को रिलीज किया गया है उनमें सचिन बेबी, तन्यम अग्रवाल, बिपुल शर्मा और मेहेदी हसन हैं। सनराइजर्स ने इससे पहले विजय शंकर, अभिषेक शर्मा, शाहबाज नदीम के बदले शिखर धवन को दिल्ली डेयरडेविल्स को दे दिया है।
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आपकी ख़बर, शिमला।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज आदर्श बाल गृह और वृद्धाश्रम, नारी सेवा सदन मशोबरा और विशेष योग्यता वाले बच्चों के संस्थान ढली, शिमला का दौरा किया। उन्होंने इन संस्थानों में रहने वालों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने मशोबरा स्थित नारी सेवा सदन, वृद्धाश्रम व आदर्श बाल गृह मंे रहने वालों से बातचीत भी की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन संस्थानों में रहने वालों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाएं। इसके उपरान्त, मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित ऐसे संस्थानों में रहने वालों कोे राज्य सरकार फेस्टिव अलाउंस प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इससे इन लोगों में इस भावना का संचार होगा कि सरकार उनके कल्याण और बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध है।
सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि निराश्रित महिलाओं, अनाथ बच्चों और विशेष रूप से सक्षम बच्चों को अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में तीन एकीकृत समाज कल्याण संस्थान खोले जाएंगे ताकि वे इन संस्थानों में घर जैसा महसूस कर सकें। उन्होंने कहा कि उन्होंने संबंधित विभागों को ऐसे संस्थानों के लिए बनने वाले भवनों की उचित योजना व डिजाइनिंग इत्यादि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मशोबरा स्थित नारी सेवा सदन में रहने वालों को कम्बल एवं मिठाईयां भी वितरित की। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, विधायक अनिरुद्ध सिंह, अजय सोलंकी, हरीश जनारथा, मुख्य सचिव आर. डी. धीमान, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुभासीष पंडा, सचिव सामाजिक न्याय और अधिकारिता सुश्री एम. सुधा देवी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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आपकी ख़बर, शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज आदर्श बाल गृह और वृद्धाश्रम, नारी सेवा सदन मशोबरा और विशेष योग्यता वाले बच्चों के संस्थान ढली, शिमला का दौरा किया। उन्होंने इन संस्थानों में रहने वालों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने मशोबरा स्थित नारी सेवा सदन, वृद्धाश्रम व आदर्श बाल गृह मंे रहने वालों से बातचीत भी की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन संस्थानों में रहने वालों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाएं। इसके उपरान्त, मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित ऐसे संस्थानों में रहने वालों कोे राज्य सरकार फेस्टिव अलाउंस प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इससे इन लोगों में इस भावना का संचार होगा कि सरकार उनके कल्याण और बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि निराश्रित महिलाओं, अनाथ बच्चों और विशेष रूप से सक्षम बच्चों को अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में तीन एकीकृत समाज कल्याण संस्थान खोले जाएंगे ताकि वे इन संस्थानों में घर जैसा महसूस कर सकें। उन्होंने कहा कि उन्होंने संबंधित विभागों को ऐसे संस्थानों के लिए बनने वाले भवनों की उचित योजना व डिजाइनिंग इत्यादि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मशोबरा स्थित नारी सेवा सदन में रहने वालों को कम्बल एवं मिठाईयां भी वितरित की। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार नरेश चौहान, विधायक अनिरुद्ध सिंह, अजय सोलंकी, हरीश जनारथा, मुख्य सचिव आर. डी. धीमान, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुभासीष पंडा, सचिव सामाजिक न्याय और अधिकारिता सुश्री एम. सुधा देवी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल विमान हादसे में मृतकों के परिवार को बड़ी राहत प्रदान की है। मुख्यमंत्री योगी ने गाजीपुर के रहने वाले मृतकों के परिवार को 5 लाख की आर्थिक मदद की घोषणा की है।
लखनऊ, जागरण ऑनलाइन डेस्कः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल विमान हादसे में मृतकों के परिवार को बड़ी राहत प्रदान की है। मुख्यमंत्री योगी ने गाजीपुर के रहने वाले मृतकों के परिवार को 5 लाख की आर्थिक मदद की घोषणा की है। इसके साथ ही मृतकों के पार्थिव शव को लाने में होने वाले खर्चे को भी राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि मृतकों का परिवार शव लेने के लिए नेपाल पहुंच चुका है, जिनकी डीएनए टेस्टिंग से पहचान के बाद शव सौंपा जाएगा।
मालूम हो कि 15 जनवरी को नेपाल में हुए विमान हादसे में गाजीपुर के रहने वाले सोनू जायसवाल, अनिल राजभर, अभिषेक कुशवाह और विशाल शर्मा की मौत हो गई थी। यह सभी आपस में दोस्त थे और 12 जनवरी को नेपाल घूमने गए थे। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए अनिल राजभर के पिता ने बताया, 'मैं अनिल राजभर का पिता हूं। जिला प्रशासन के अधिकारी हमें नेपाल ले जा रहे हैं। '
नेपाल के पोखरा में हुए प्लेन हादसे में 70 लोगों ने जान गंवाई है। जान गंवाने वाले लोगों में 5 भारतीय भी शामिल हैं। इस प्लेन हादसे में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के 4 युवकों की जान चली गई। इन चार युवकों का शव लेने के लिए परिजन नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंच चुके हैं। शवों की डीएनए टेस्टिंग काठमांडू में होगी। परिवार के लोगों के साथ एक रिटायर्ड कानूनगो भी मौके पर गए हुए हैं।
बता दें कि नेपाल की यति एयरलाइंस का 72 सीटर प्लेन काठमांडू से 205 किमी दूर पोखरा में क्रैश हो गया। लैंडिंग से महज 10 सेकेंड पहले विमान पहाड़ी से टकरा गया था, जिसके बाद प्लेन में आग लग गई और वह खाई में गिर गया। एयरलाइंस के विमान का ब्लैक बॉक्स नेपाल सेना ने नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अधिकारियों को सौंप दिया जा चुका है।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल विमान हादसे में मृतकों के परिवार को बड़ी राहत प्रदान की है। मुख्यमंत्री योगी ने गाजीपुर के रहने वाले मृतकों के परिवार को पाँच लाख की आर्थिक मदद की घोषणा की है। लखनऊ, जागरण ऑनलाइन डेस्कः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल विमान हादसे में मृतकों के परिवार को बड़ी राहत प्रदान की है। मुख्यमंत्री योगी ने गाजीपुर के रहने वाले मृतकों के परिवार को पाँच लाख की आर्थिक मदद की घोषणा की है। इसके साथ ही मृतकों के पार्थिव शव को लाने में होने वाले खर्चे को भी राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि मृतकों का परिवार शव लेने के लिए नेपाल पहुंच चुका है, जिनकी डीएनए टेस्टिंग से पहचान के बाद शव सौंपा जाएगा। मालूम हो कि पंद्रह जनवरी को नेपाल में हुए विमान हादसे में गाजीपुर के रहने वाले सोनू जायसवाल, अनिल राजभर, अभिषेक कुशवाह और विशाल शर्मा की मौत हो गई थी। यह सभी आपस में दोस्त थे और बारह जनवरी को नेपाल घूमने गए थे। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए अनिल राजभर के पिता ने बताया, 'मैं अनिल राजभर का पिता हूं। जिला प्रशासन के अधिकारी हमें नेपाल ले जा रहे हैं। ' नेपाल के पोखरा में हुए प्लेन हादसे में सत्तर लोगों ने जान गंवाई है। जान गंवाने वाले लोगों में पाँच भारतीय भी शामिल हैं। इस प्लेन हादसे में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के चार युवकों की जान चली गई। इन चार युवकों का शव लेने के लिए परिजन नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंच चुके हैं। शवों की डीएनए टेस्टिंग काठमांडू में होगी। परिवार के लोगों के साथ एक रिटायर्ड कानूनगो भी मौके पर गए हुए हैं। बता दें कि नेपाल की यति एयरलाइंस का बहत्तर सीटर प्लेन काठमांडू से दो सौ पाँच किमी दूर पोखरा में क्रैश हो गया। लैंडिंग से महज दस सेकेंड पहले विमान पहाड़ी से टकरा गया था, जिसके बाद प्लेन में आग लग गई और वह खाई में गिर गया। एयरलाइंस के विमान का ब्लैक बॉक्स नेपाल सेना ने नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अधिकारियों को सौंप दिया जा चुका है।
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जम्मू, 21 दिसंबर गुपकर घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) की मंगलवार को यहां बैठक हो रही है और इसके एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि बैठक में जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात एवं केंद्रशासित प्रदेश के लिए विधानसभा क्षेत्रों की सीमा नए सिरे से निर्धारित करने के मकसद से गठित परिसीमन आयोग की सिफारिशों पर चर्चा की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के पांच राजनीतिक दलों के इस गठबंधन में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि परिसीमन आयोग ने सोमवार को पीएजीडी के घटकों के साथ सोमवार को जिस 'पेपर-1' पर चर्चा की थी, उसमें उसने जम्मू-कश्मीर में 16 सीट अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए आरक्षित करते हुए जम्मू क्षेत्र में छह अतिरिक्त सीट और कश्मीर घाटी में एक अतिरिक्त सीट का प्रस्ताव रखा है। परिसीमन आयोग की इस सिफारिश के बाद पीएजीडी की बैठक हो रही है।
यह पीएजीडी की 2019 में गठन के बाद से जम्मू में दूसरी बैठक है। इससे पहले, पिछले साल नवंबर में इसकी बैठक हुई थी। बैठक यहां नेकां अध्यक्ष एवं पीएजीडी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के भटंडी आवास पर हो रही है। पीएजीडी की मांग है कि पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा बहाल किया जाए, जिसे केंद्र ने अगस्त 2019 में समाप्त कर दिया था।
इस बैठक में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता एम वाई तारिगामी भी हैं। इस बीच, राष्ट्रीय बजरंग दल के अध्यक्ष राकेश बजरंगी के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ताओं के एक छोटे समूह ने बैठक स्थल से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर विरोध प्रदर्शन किया।
घाटी में मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने इन सिफारिशों पर निराशा जताई है और आरोप लगाया है कि ये सिफारिश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने वाली प्रतीत होती हैं।
इस बीच, बजरंगी ने "देशद्रोहियों को गोली मारो" के नारों के बीच कहा कि वे जम्मू में बैठक कर रहे पीएजीडी नेतृत्व का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि "वे देशद्रोहियों का समूह" हैं।
उन्होंने कहा, "वे केवल देश के खिलाफ बोल रहे हैं और सरकार पर पाकिस्तान से बात करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। " उन्होंने परिसीमन संबंधी सिफारिशों पर गठबंधन के रुख की भी निंदा की।
बजरंगी ने कहा, "हम क्षेत्र के साथ भेदभाव को समाप्त करने के लिए जम्मू क्षेत्र में सभी सात सीट जाने के पक्ष में थे।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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जम्मू, इक्कीस दिसंबर गुपकर घोषणापत्र गठबंधन की मंगलवार को यहां बैठक हो रही है और इसके एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि बैठक में जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात एवं केंद्रशासित प्रदेश के लिए विधानसभा क्षेत्रों की सीमा नए सिरे से निर्धारित करने के मकसद से गठित परिसीमन आयोग की सिफारिशों पर चर्चा की जाएगी। जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के पांच राजनीतिक दलों के इस गठबंधन में नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि परिसीमन आयोग ने सोमवार को पीएजीडी के घटकों के साथ सोमवार को जिस 'पेपर-एक' पर चर्चा की थी, उसमें उसने जम्मू-कश्मीर में सोलह सीट अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए आरक्षित करते हुए जम्मू क्षेत्र में छह अतिरिक्त सीट और कश्मीर घाटी में एक अतिरिक्त सीट का प्रस्ताव रखा है। परिसीमन आयोग की इस सिफारिश के बाद पीएजीडी की बैठक हो रही है। यह पीएजीडी की दो हज़ार उन्नीस में गठन के बाद से जम्मू में दूसरी बैठक है। इससे पहले, पिछले साल नवंबर में इसकी बैठक हुई थी। बैठक यहां नेकां अध्यक्ष एवं पीएजीडी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के भटंडी आवास पर हो रही है। पीएजीडी की मांग है कि पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा बहाल किया जाए, जिसे केंद्र ने अगस्त दो हज़ार उन्नीस में समाप्त कर दिया था। इस बैठक में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता एम वाई तारिगामी भी हैं। इस बीच, राष्ट्रीय बजरंग दल के अध्यक्ष राकेश बजरंगी के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ताओं के एक छोटे समूह ने बैठक स्थल से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर विरोध प्रदर्शन किया। घाटी में मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने इन सिफारिशों पर निराशा जताई है और आरोप लगाया है कि ये सिफारिश भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने वाली प्रतीत होती हैं। इस बीच, बजरंगी ने "देशद्रोहियों को गोली मारो" के नारों के बीच कहा कि वे जम्मू में बैठक कर रहे पीएजीडी नेतृत्व का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि "वे देशद्रोहियों का समूह" हैं। उन्होंने कहा, "वे केवल देश के खिलाफ बोल रहे हैं और सरकार पर पाकिस्तान से बात करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। " उन्होंने परिसीमन संबंधी सिफारिशों पर गठबंधन के रुख की भी निंदा की। बजरंगी ने कहा, "हम क्षेत्र के साथ भेदभाव को समाप्त करने के लिए जम्मू क्षेत्र में सभी सात सीट जाने के पक्ष में थे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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शाहजहांपुर। समाजवादी पार्टी (hold on) के महानगर अध्यक्ष सहित उनकी टीम ने भाजपा का दामन थाम लिया। वही लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव पंकज वर्मा सर्राफ ने भी अपनी टीम के भाजपा की सदस्यता (hold on) ग्रहण कर ली। कांग्रेसी नेता संजय वर्मा ने भी भाजपा की सदस्यता ली। गुरुवार को राजभवन में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सपा छोड़कर आये नेताओं को भाजपा पटका पहनाकर अपने कुनबे में शामिल कराया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि कपिल वर्मा व पंकज वर्मा के भाजपा में आने से पार्टी और मजबूत होगी और मेयर का चुनाव भाजपा एकतरफा जीत की ओर अग्रसर है। इस दौरान राजभवन में सभी सपाईयों का माला पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान राजीव सिंह, राजीव खन्ना, संजय वर्मा, दीपक सिंह, जीतू सिंह, अनमोल सोनी, जवाहर सिंह टुटेजा, वरुण दीक्षित, मोहित सिंह, साहिल खान, हाफिज सहरोज, असीम मौलाना, मोहम्मद बब्बू खान, अफरोज खान, खुश नवाज खान, मोनू तिवारी, अविनाश शर्मा, विकास, आनंद सक्सेना, बलविंदर सिंह, विकास मोरे, अनुज मिश्रा, उत्कर्ष दीक्षित, सुधांशु दीक्षित, सजल दीक्षित, अभय सिंह, सेठ अनुपम सिंह, पटुटू सरदार, अर्पित टण्डन, अमित अवस्थी, शिवम वर्मा, जहीर अब्बास, आरिफ सिद्दीकी, अपूर्व अग्रवाल, नवीन खान, मुनीर खान, अनस खान आदि लोग मौजूद रहे।
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शाहजहांपुर। समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष सहित उनकी टीम ने भाजपा का दामन थाम लिया। वही लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव पंकज वर्मा सर्राफ ने भी अपनी टीम के भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। कांग्रेसी नेता संजय वर्मा ने भी भाजपा की सदस्यता ली। गुरुवार को राजभवन में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सपा छोड़कर आये नेताओं को भाजपा पटका पहनाकर अपने कुनबे में शामिल कराया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कपिल वर्मा व पंकज वर्मा के भाजपा में आने से पार्टी और मजबूत होगी और मेयर का चुनाव भाजपा एकतरफा जीत की ओर अग्रसर है। इस दौरान राजभवन में सभी सपाईयों का माला पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान राजीव सिंह, राजीव खन्ना, संजय वर्मा, दीपक सिंह, जीतू सिंह, अनमोल सोनी, जवाहर सिंह टुटेजा, वरुण दीक्षित, मोहित सिंह, साहिल खान, हाफिज सहरोज, असीम मौलाना, मोहम्मद बब्बू खान, अफरोज खान, खुश नवाज खान, मोनू तिवारी, अविनाश शर्मा, विकास, आनंद सक्सेना, बलविंदर सिंह, विकास मोरे, अनुज मिश्रा, उत्कर्ष दीक्षित, सुधांशु दीक्षित, सजल दीक्षित, अभय सिंह, सेठ अनुपम सिंह, पटुटू सरदार, अर्पित टण्डन, अमित अवस्थी, शिवम वर्मा, जहीर अब्बास, आरिफ सिद्दीकी, अपूर्व अग्रवाल, नवीन खान, मुनीर खान, अनस खान आदि लोग मौजूद रहे।
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Hyundai ने अपने उपभोक्ताओं को झटका दिया है। सबसे मशहूर SUV- क्रेटा का रेड कलर वेरिएंट बंद कर दिया गया है, अब क्रेटा रेड कलर में नहीं मिलेगी। लाल रंग की क्रेटा पहले सिंगल और डुअल टोन विकल्पों के साथ उपलब्ध थी, मगर अब उपलब्ध नहीं है। 2023 क्रेटा अब 5 सिंगल-टोन और 1 डुअल-टोन एक्सटीरियर कलर ऑप्शन में उपलब्ध है। सिंगल टोन में व्हाइट, ब्लू, ब्लैक, ग्रे और सिल्वर रंग जबकि डुअल टोन ब्लैक रूफ के साथ व्हाइट हो जाता है।
इनमें फ्रंट वेंटिलेटेड सीटें, 10. 25-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी, 7-इंच सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, केबिन एयर प्यूरीफायर, 8-वे पावर-एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, 6 एयरबैग (स्टैंडर्ड) शामिल हैं। ऊंचाई। यह फ्रंट सीटबेल्ट, 17-इंच डुअल-टोन अलॉय व्हील, पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस चार्जिंग, रियर विंडो सनशेड और एलईडी हेडलैंप/टेललैंप जैसी एडजस्टेबल सुविधाओं के साथ आता है।
Hyundai ने हाल ही में Creta को नए रोड ड्राइविंग एमिशन (RDE) नॉर्म्स और E20 फ्यूल-रेडी इंजन के साथ अपडेट किया है। अब यह दो इंजन ऑप्शन (पेट्रोल और डीजल) में उपलब्ध है। इसका 1. 5L टर्बो डीजल इंजन 4000rpm पर 116PS की पावर और 1500rpm से 2750rpm के बीच 250Nm का टार्क जनरेट करता है।
तो, 1. 5L पेट्रोल इंजन अब E20 ईंधन-तैयार है, जो 6300rpm पर 115PS की शक्ति और 4500rpm पर 144Nm का टार्क पैदा करता है। डीजल इंजन 2 ट्रांसमिशन विकल्पों के साथ उपलब्ध है। 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक। वहीं, पेट्रोल इंजन 6-स्पीड मैनुअल और सीवीटी ट्रांसमिशन के साथ उपलब्ध है।
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Hyundai ने अपने उपभोक्ताओं को झटका दिया है। सबसे मशहूर SUV- क्रेटा का रेड कलर वेरिएंट बंद कर दिया गया है, अब क्रेटा रेड कलर में नहीं मिलेगी। लाल रंग की क्रेटा पहले सिंगल और डुअल टोन विकल्पों के साथ उपलब्ध थी, मगर अब उपलब्ध नहीं है। दो हज़ार तेईस क्रेटा अब पाँच सिंगल-टोन और एक डुअल-टोन एक्सटीरियर कलर ऑप्शन में उपलब्ध है। सिंगल टोन में व्हाइट, ब्लू, ब्लैक, ग्रे और सिल्वर रंग जबकि डुअल टोन ब्लैक रूफ के साथ व्हाइट हो जाता है। इनमें फ्रंट वेंटिलेटेड सीटें, दस. पच्चीस-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी, सात-इंच सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, केबिन एयर प्यूरीफायर, आठ-वे पावर-एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, छः एयरबैग शामिल हैं। ऊंचाई। यह फ्रंट सीटबेल्ट, सत्रह-इंच डुअल-टोन अलॉय व्हील, पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस चार्जिंग, रियर विंडो सनशेड और एलईडी हेडलैंप/टेललैंप जैसी एडजस्टेबल सुविधाओं के साथ आता है। Hyundai ने हाल ही में Creta को नए रोड ड्राइविंग एमिशन नॉर्म्स और Eबीस फ्यूल-रेडी इंजन के साथ अपडेट किया है। अब यह दो इंजन ऑप्शन में उपलब्ध है। इसका एक. पाँचL टर्बो डीजल इंजन चार हज़ारrpm पर एक सौ सोलहPS की पावर और एक हज़ार पाँच सौrpm से दो हज़ार सात सौ पचासrpm के बीच दो सौ पचासNm का टार्क जनरेट करता है। तो, एक. पाँचL पेट्रोल इंजन अब Eबीस ईंधन-तैयार है, जो छः हज़ार तीन सौrpm पर एक सौ पंद्रहPS की शक्ति और चार हज़ार पाँच सौrpm पर एक सौ चौंतालीसNm का टार्क पैदा करता है। डीजल इंजन दो ट्रांसमिशन विकल्पों के साथ उपलब्ध है। छः-स्पीड मैनुअल और छः-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक। वहीं, पेट्रोल इंजन छः-स्पीड मैनुअल और सीवीटी ट्रांसमिशन के साथ उपलब्ध है।
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Indonesia News: 6. 9 तीव्रता के भूकंप से पश्चिम इंडोनेशिया की धरती कांप गई. इस भूकंप से किसी भी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ. (सांकेतिक तस्वीर)
जकार्ता. पश्चिम इंडोनेशिया में शुक्रवार की रात समुद्र के नीचे जोरदार भूकंप आया लेकिन, इससे जानमाल के किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं है. अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि भूकंप की तीव्रता 6. 9 थी. उसका केंद्र दक्षिण बेंगकुलू के दक्षिण पश्चिम में 202 किलोमीटर दूर 25 किलोमीटर की गहराई में था.
उसने बताया कि इसके बाद एक और झटका आया, जिसकी तीव्रता 5. 4 थी. इंडोनेशिया की 'मीटियोरोलोजी, क्लाइमेटोलोजी एंड जियोफिजिक्स एजेंसी' ने सुनामी का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है. यूएसजीएस ने कहा कि जानमाल के गंभीर नुकसान की बहुत कम आशंका है.
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Indonesia News: छः. नौ तीव्रता के भूकंप से पश्चिम इंडोनेशिया की धरती कांप गई. इस भूकंप से किसी भी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ. जकार्ता. पश्चिम इंडोनेशिया में शुक्रवार की रात समुद्र के नीचे जोरदार भूकंप आया लेकिन, इससे जानमाल के किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं है. अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण ने बताया कि भूकंप की तीव्रता छः. नौ थी. उसका केंद्र दक्षिण बेंगकुलू के दक्षिण पश्चिम में दो सौ दो किलोग्राममीटर दूर पच्चीस किलोग्राममीटर की गहराई में था. उसने बताया कि इसके बाद एक और झटका आया, जिसकी तीव्रता पाँच. चार थी. इंडोनेशिया की 'मीटियोरोलोजी, क्लाइमेटोलोजी एंड जियोफिजिक्स एजेंसी' ने सुनामी का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है. यूएसजीएस ने कहा कि जानमाल के गंभीर नुकसान की बहुत कम आशंका है. .
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पैट कमिंस को आईपीएल 2020 नीलामी में मोटा पैसा मिला है.
नई दिल्ली. ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज पैट कमिंस (Pat Cummins) पर आईपीएल 2020 नीलामी (IPL 2020 Auction) के दौरान रिकॉर्डतोड़ बोली लगी है. उन्हें शाहरुख खान के सह स्वामित्व वाली कोलकाता नाइटराइर्स (Kolkata Knight Riders) ने 15. 50 करोड़ रुपये में खरीदा. यह आईपीएल इतिहास में किसी भी गेंदबाज पर लगी सबसे बड़ी बोली है. वह आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी युवराज सिंह (16 करोड़) का रिकॉर्ड तोड़ने से महज 50 लाख रुपये दूर रह गए. कमिंस को खरीदने के लिए सबसे पहले दिल्ली कैपिटल्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच मुकाबला हुआ. लेकिन बोली की रकम 12 करोड़ रुपये के पार होने के बाद दिल्ली ने हाथ खींच लिए.
ऐसे में लग रहा था कि कमिंस विराट कोहली की कप्तानी वाली आरसीबी से खेलेंगे. लेकिन तभी कोलकाता नाइटराइडर्स बोली में शामिल हो गई. ऐसे में बोली की रकम 15 करोड़ रुपये के पार चली गई. ऐसे में कोलकाता ने 15. 50 करोड़ रुपये का दांव लगाकर कमिंस को अपनी टीम में शामिल कर लिया.
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पैट कमिंस को आईपीएल दो हज़ार बीस नीलामी में मोटा पैसा मिला है. नई दिल्ली. ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज पैट कमिंस पर आईपीएल दो हज़ार बीस नीलामी के दौरान रिकॉर्डतोड़ बोली लगी है. उन्हें शाहरुख खान के सह स्वामित्व वाली कोलकाता नाइटराइर्स ने पंद्रह. पचास करोड़ रुपये में खरीदा. यह आईपीएल इतिहास में किसी भी गेंदबाज पर लगी सबसे बड़ी बोली है. वह आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी युवराज सिंह का रिकॉर्ड तोड़ने से महज पचास लाख रुपये दूर रह गए. कमिंस को खरीदने के लिए सबसे पहले दिल्ली कैपिटल्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच मुकाबला हुआ. लेकिन बोली की रकम बारह करोड़ रुपये के पार होने के बाद दिल्ली ने हाथ खींच लिए. ऐसे में लग रहा था कि कमिंस विराट कोहली की कप्तानी वाली आरसीबी से खेलेंगे. लेकिन तभी कोलकाता नाइटराइडर्स बोली में शामिल हो गई. ऐसे में बोली की रकम पंद्रह करोड़ रुपये के पार चली गई. ऐसे में कोलकाता ने पंद्रह. पचास करोड़ रुपये का दांव लगाकर कमिंस को अपनी टीम में शामिल कर लिया. .
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केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव की बैठक में झपकी लेते हुए पकड़े गए बीएसएनएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले लिया है। मंत्रिमंडल द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के लिए 1. 64 लाख करोड़ रुपए के पैकेज को मंजूरी देने के बाद वैष्णव की बैठक में अधिकारी ने झपकी की थी।
केंद्रीय मंत्री ने अगस्त के पहले सप्ताह में अखिल भारतीय मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) स्तर की बैठक में बीएसएनएल कर्मचारियों से बेहतरीन प्रदर्शन करने और दो साल में कंपनी की कायापलट करने या फिर वीआरएस का विकल्प चुनने को कहा था। सूत्र ने बताया, 'बैठक में मंत्री ने एक सीजीएम को झपकी लेते हुए पकड़ा और उन्हें तुरंत कमरे से निकालकर वीआरएस लेने को कहा था।
आज उनके वीआरएस को मंजूरी दे दी गई। ' अधिकारी बंगलुरु में गुणवत्ता आश्वासन और निरीक्षण (सीजीएम) के रूप में कार्यरत थे। इस संबंध में दूरसंचार मंत्रालय और बीएसएनएल को ईमेल से भेजे गए सवालों का खबर लिखने तक जवाब नहीं आया।
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केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव की बैठक में झपकी लेते हुए पकड़े गए बीएसएनएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लिया है। मंत्रिमंडल द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के लिए एक. चौंसठ लाख करोड़ रुपए के पैकेज को मंजूरी देने के बाद वैष्णव की बैठक में अधिकारी ने झपकी की थी। केंद्रीय मंत्री ने अगस्त के पहले सप्ताह में अखिल भारतीय मुख्य महाप्रबंधक स्तर की बैठक में बीएसएनएल कर्मचारियों से बेहतरीन प्रदर्शन करने और दो साल में कंपनी की कायापलट करने या फिर वीआरएस का विकल्प चुनने को कहा था। सूत्र ने बताया, 'बैठक में मंत्री ने एक सीजीएम को झपकी लेते हुए पकड़ा और उन्हें तुरंत कमरे से निकालकर वीआरएस लेने को कहा था। आज उनके वीआरएस को मंजूरी दे दी गई। ' अधिकारी बंगलुरु में गुणवत्ता आश्वासन और निरीक्षण के रूप में कार्यरत थे। इस संबंध में दूरसंचार मंत्रालय और बीएसएनएल को ईमेल से भेजे गए सवालों का खबर लिखने तक जवाब नहीं आया।
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