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बिलासपुर -जिला में पुलिस कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए पात्र उम्मीदवारों के पर्सनेलिटी टेस्ट का शेड्यूल तय हो गया है। पांच और छह नवंबर को पुलिस लाइन बिलासपुर में यह टेस्ट लिया जाएगा। बिलासपुर में कुल 152 उम्मीदवार शारीरिक और लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करके अंतिम चरण में पहुंचे हैं। हालांकि शनिवा को जारी बयान के तहत पर्सनेलिटी टेस्ट पांच से सात नवंबर तक लखनपुर पुलिस लाइन में तय किया गया था, लेकिन रविवार को टेस्ट शेड्यूल में फेरबदल किया गया है, जिसके तहत अब यह टेस्ट पांच व छह नवंबर को ही होगा। उम्मीदवारों को कॉल लैटर भेजकर चरणबद्ध तरीके से बुलाया गया है। डीएसपी हैडक्वार्टर एवं जिला पुलिस प्रवक्ता संजय शर्मा ने बताया कि बिलासपुर जिला में पुलिस कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए शारीरिक और लिखित परीक्षा की मैरिट के आधार पर 152 उम्मीदवार पर्सनेलिटी टेस्ट के लिए चुने गए हैं। यह टेस्ट 15 अंकों का होगा। लखनपुर पुलिस लाइन में पांच व छह नवंबर तक होने वाले पर्सनेलिटी टेस्ट के लिए पात्र उम्मीदवारों को संबंधित पुलिस स्टेशनों के माध्यम से कॉल लैटर भेजे जा चुके हैं। यदि किसी अभ्यर्थी को रविवार तक कॉल लैटर नहीं मिलता है, तो वह संबंधित पुलिस स्टेशन से इसे प्राप्त कर सकता है। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार एनसीसी (सी) सर्टिफिकेट वाले अभ्यर्थियों को तीन, जबकि (बी) सर्टिटिफिकेट वाले उम्मीदवारों को दो अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। यदि किसी उम्मीदवार के पास दोनों सर्टिफिकेट हैं, तो उसे तीन ही अंक मिलेंगे। उम्मीदवारों को आयु प्रमाण पत्र के तौर पर दसवीं का सर्टिफिकेट साथ लाना होगा। इसके अलावा पासपोर्ट साइज के तीन फोटोग्राफस समेत उन्हें जमा-दो, हिमाचली बोनाफाइड तथा किसी भी आरक्षित वर्ग से संबंधित प्रमाण पत्र और रोजगार कार्यालय के पंजीकरण प्रमाण पत्र के साथ ही अन्य दस्तावेजों की मूल और सत्यापित कॉपियां लानी होंगी। पर्सनेलिटी टेस्ट से पहले अभ्यर्थियों के सभी दस्तावेज जांचे जाएंगे। इसमें किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर अभ्यर्थी को डिसक्वालिफाई कर दिया जाएगा।
बिलासपुर -जिला में पुलिस कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए पात्र उम्मीदवारों के पर्सनेलिटी टेस्ट का शेड्यूल तय हो गया है। पांच और छह नवंबर को पुलिस लाइन बिलासपुर में यह टेस्ट लिया जाएगा। बिलासपुर में कुल एक सौ बावन उम्मीदवार शारीरिक और लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करके अंतिम चरण में पहुंचे हैं। हालांकि शनिवा को जारी बयान के तहत पर्सनेलिटी टेस्ट पांच से सात नवंबर तक लखनपुर पुलिस लाइन में तय किया गया था, लेकिन रविवार को टेस्ट शेड्यूल में फेरबदल किया गया है, जिसके तहत अब यह टेस्ट पांच व छह नवंबर को ही होगा। उम्मीदवारों को कॉल लैटर भेजकर चरणबद्ध तरीके से बुलाया गया है। डीएसपी हैडक्वार्टर एवं जिला पुलिस प्रवक्ता संजय शर्मा ने बताया कि बिलासपुर जिला में पुलिस कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए शारीरिक और लिखित परीक्षा की मैरिट के आधार पर एक सौ बावन उम्मीदवार पर्सनेलिटी टेस्ट के लिए चुने गए हैं। यह टेस्ट पंद्रह अंकों का होगा। लखनपुर पुलिस लाइन में पांच व छह नवंबर तक होने वाले पर्सनेलिटी टेस्ट के लिए पात्र उम्मीदवारों को संबंधित पुलिस स्टेशनों के माध्यम से कॉल लैटर भेजे जा चुके हैं। यदि किसी अभ्यर्थी को रविवार तक कॉल लैटर नहीं मिलता है, तो वह संबंधित पुलिस स्टेशन से इसे प्राप्त कर सकता है। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार एनसीसी सर्टिफिकेट वाले अभ्यर्थियों को तीन, जबकि सर्टिटिफिकेट वाले उम्मीदवारों को दो अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। यदि किसी उम्मीदवार के पास दोनों सर्टिफिकेट हैं, तो उसे तीन ही अंक मिलेंगे। उम्मीदवारों को आयु प्रमाण पत्र के तौर पर दसवीं का सर्टिफिकेट साथ लाना होगा। इसके अलावा पासपोर्ट साइज के तीन फोटोग्राफस समेत उन्हें जमा-दो, हिमाचली बोनाफाइड तथा किसी भी आरक्षित वर्ग से संबंधित प्रमाण पत्र और रोजगार कार्यालय के पंजीकरण प्रमाण पत्र के साथ ही अन्य दस्तावेजों की मूल और सत्यापित कॉपियां लानी होंगी। पर्सनेलिटी टेस्ट से पहले अभ्यर्थियों के सभी दस्तावेज जांचे जाएंगे। इसमें किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर अभ्यर्थी को डिसक्वालिफाई कर दिया जाएगा।
यदि उपर्युक्त प्रकार प्रतिथिका संयोग न मिले तो मध्यम तथा जघन्य पात्रों एवं अन्य साधमियोंका यथायोग्य प्रादरपूर्वक चार प्रकार दान द्वारा वैयावृत्य करना या दुखितों व भूखोंको करुणाबुद्धिपूर्वक दान देना, यह सब प्रतिथिसंविभाग है। धर्मसाध्यकी सिद्धि के लिये प्रागममें चार प्रकारके दान निरूपण किये गये हैं : ( १ ) प्रौषधिदान ( २ ) शास्त्रदान ( ३ ) अभयदान (४) आहारदान । योग्य पात्रको आहारदान-प्रौषधि- शास्त्र (ज्ञान) तथा अभयदानमें से जिस समय जिसकी आवश्यकता हो, उस समय उसी प्रकारका दान देना योग्य है। इससे दातार तथा पात्र दोनोंके रत्नत्रयकी प्राप्ति, वृद्धि और रक्षा होती है इसी कारण ऐसा दान सत्पात्र दान या सुदान कहाता है। पात्र, दातार, द्रव्य, तथा देनेकी विधिके भेदसे दानके फलमें विशेषता होती है, इस कारण इन चारोंका विशेष रूपसे वर्णन किया जाता है। १. पात्र का वर्णन दानकी प्रवृत्ति करने के योग्य पात्र (स्थान) सात प्रकार के हैं : (१) पूजा, (२) प्रतिष्ठा, (३) तीर्थयात्रा, (४) पात्रदत्ति, (५) समदत्ति, (६) दयादत्ति, (७) सर्वदत्ति । ( १ ) पूजा -- अपनी शक्ति के अनुसार जलचन्दनादि अष्ट द्रव्यों या एक, दो आदि द्रव्योंसे देव, शास्त्र गुरु तथा सोलह कारण, दश लक्षण प्रादि प्रात्मगुणोंकी पूजा करना । जिनमन्दिर में पूजनके बर्तन, चंदोवा, छत्र, चमरादि धर्मोपकरण चढ़ाना । ( २ ) प्रतिष्ठा - जिस ग्राम में जैनी भाइयोंका समूह अच्छा हो और धर्मसाधनके निमित्त जिनमन्दिर न हो, वहां जिनमन्दिर बनवाना । । भगवान्के बिम्बकी प्रतिष्ठा कराके पधराना । यदि ग्राम छोटा हो, जैनी भाइयोंके १०- ५ ही घर हों, तो चैत्यालय बनाना, तथा प्रतिष्ठित मूर्ति दूसरे स्थान से लाकर, या किसी स्थानको प्रतिष्ठा में प्रतिष्ठा करा लाकर, विराजमान करना, अथवा प्राचीन मन्दिर जीर्ण हो गया हो तो उसका जीर्णोद्धार कराना, क्योंकि नूतन मन्दिर बंधानेकी अपेक्षा जीर्णोद्धारमें परिणामोंकी विशेष उज्ज्वलता होनेसे १०० गुणा अधिक पुण्य होता है, ऐसा प्रतिष्ठा पाठादि ग्रन्थों में कहा है । बारह बर्ती का वर्णन (३) तीर्थयात्रा - गृह जंजालोंकी चिन्ता छोड़ सिद्ध क्षेत्रों, प्रतिशय क्षेत्रोंके दर्शन-वंदना करना, शक्ति हो तो संघ निकालना, भाप पवित्र क्षेत्रों में जाकर निर्मल परिणामोंयुक्त धर्मसाधन करना तथा अन्य साधर्मी मंडलीको कराना । इससे सातिशय तीव्र पुण्यबंध होता है। (४) पात्रवति सामान्य रीतिसे पात्र तीन प्रकार के होते हैं : सुपात्र, कुपात्र और प्रपात्र । यहां पात्रदत्तसे सुपात्र ही का अभिप्राय जानना चाहिये, क्योंकि पात्रका लक्षण यह कहा है कि जो सम्यक्त्व और चारित्रयुक्त हो और दाता- दानके प्रेरकों एवं अनुमोदकों को नौकाकी तरह संसारसागरसे पार करे । ये लक्षण सुपात्र में ही पाये जाते हैं अतएव सुपात्र ही दान देने योग्य हैं । ये तीन प्रकार के होते हैं : उत्तम, मुनि आयिका । मध्यम, श्रावक-श्राविका । जघन्य, श्रव्रत सम्यग्दृष्टि ( इनके स्वरूपाचरण चारित्र होता है) । भाव- सम्यक्त्व रहित केवल बाह्य चारित्रके धारक द्रव्यलिंगी मुनि तथा द्रव्यलिंगी श्रावक वा द्रव्यसम्यग्दृष्टि कुपात्र कहाते हैं। जिसके सूक्ष्म ( प्रगट ) मिथ्यात्व हो, उसे तो हम छद्मस्थ जान ही नहीं सकते, इसलिये उसमें सुपात्र के समान प्रवृत्ति होती है, परन्तु जिसके स्थूल ( प्रगट ) द्रव्यमिथ्यात्व हो औौर बाह्य जिनधर्म में कहे हुए भेषका धारी हो तो वह कुपात्र है। (यहां व्यवहारमें व्यवहार सम्यक्त्व अथवा मिथ्यात्वकी अपेक्षा है।) जो सम्यक्त्व, चारित्र दोनोंसे भ्रष्ट हो, ऐसे मिथ्यादृष्टि भेषी, अपात्रको दान देना सर्वथा योग्य नहीं । ( ५ ) समदत्ति - जो प्रपने समान साधर्मी गृहस्थ प्रसक्तता कर्म के उदयसे दुःखी हों, उनकी धन-वस्त्रादिसे यथायोग्य सहायता करना । (६) दयादत्ति - दुखित व भूखे जीवोंको अन्न-वस्त्रादि से सहायता (७) सर्वदत्ति या मन्वयवत्ति-अपने पुत्र, भाई या गोत्री आदिको धनादि सर्वस्व सौंप परिग्रह से निर्ममत्व हो, उत्तम-श्राबकके व्रत या मुनिव्रत अंगीकार करना ।
यदि उपर्युक्त प्रकार प्रतिथिका संयोग न मिले तो मध्यम तथा जघन्य पात्रों एवं अन्य साधमियोंका यथायोग्य प्रादरपूर्वक चार प्रकार दान द्वारा वैयावृत्य करना या दुखितों व भूखोंको करुणाबुद्धिपूर्वक दान देना, यह सब प्रतिथिसंविभाग है। धर्मसाध्यकी सिद्धि के लिये प्रागममें चार प्रकारके दान निरूपण किये गये हैं : प्रौषधिदान शास्त्रदान अभयदान आहारदान । योग्य पात्रको आहारदान-प्रौषधि- शास्त्र तथा अभयदानमें से जिस समय जिसकी आवश्यकता हो, उस समय उसी प्रकारका दान देना योग्य है। इससे दातार तथा पात्र दोनोंके रत्नत्रयकी प्राप्ति, वृद्धि और रक्षा होती है इसी कारण ऐसा दान सत्पात्र दान या सुदान कहाता है। पात्र, दातार, द्रव्य, तथा देनेकी विधिके भेदसे दानके फलमें विशेषता होती है, इस कारण इन चारोंका विशेष रूपसे वर्णन किया जाता है। एक. पात्र का वर्णन दानकी प्रवृत्ति करने के योग्य पात्र सात प्रकार के हैं : पूजा, प्रतिष्ठा, तीर्थयात्रा, पात्रदत्ति, समदत्ति, दयादत्ति, सर्वदत्ति । पूजा -- अपनी शक्ति के अनुसार जलचन्दनादि अष्ट द्रव्यों या एक, दो आदि द्रव्योंसे देव, शास्त्र गुरु तथा सोलह कारण, दश लक्षण प्रादि प्रात्मगुणोंकी पूजा करना । जिनमन्दिर में पूजनके बर्तन, चंदोवा, छत्र, चमरादि धर्मोपकरण चढ़ाना । प्रतिष्ठा - जिस ग्राम में जैनी भाइयोंका समूह अच्छा हो और धर्मसाधनके निमित्त जिनमन्दिर न हो, वहां जिनमन्दिर बनवाना । । भगवान्के बिम्बकी प्रतिष्ठा कराके पधराना । यदि ग्राम छोटा हो, जैनी भाइयोंके दस- पाँच ही घर हों, तो चैत्यालय बनाना, तथा प्रतिष्ठित मूर्ति दूसरे स्थान से लाकर, या किसी स्थानको प्रतिष्ठा में प्रतिष्ठा करा लाकर, विराजमान करना, अथवा प्राचीन मन्दिर जीर्ण हो गया हो तो उसका जीर्णोद्धार कराना, क्योंकि नूतन मन्दिर बंधानेकी अपेक्षा जीर्णोद्धारमें परिणामोंकी विशेष उज्ज्वलता होनेसे एक सौ गुणा अधिक पुण्य होता है, ऐसा प्रतिष्ठा पाठादि ग्रन्थों में कहा है । बारह बर्ती का वर्णन तीर्थयात्रा - गृह जंजालोंकी चिन्ता छोड़ सिद्ध क्षेत्रों, प्रतिशय क्षेत्रोंके दर्शन-वंदना करना, शक्ति हो तो संघ निकालना, भाप पवित्र क्षेत्रों में जाकर निर्मल परिणामोंयुक्त धर्मसाधन करना तथा अन्य साधर्मी मंडलीको कराना । इससे सातिशय तीव्र पुण्यबंध होता है। पात्रवति सामान्य रीतिसे पात्र तीन प्रकार के होते हैं : सुपात्र, कुपात्र और प्रपात्र । यहां पात्रदत्तसे सुपात्र ही का अभिप्राय जानना चाहिये, क्योंकि पात्रका लक्षण यह कहा है कि जो सम्यक्त्व और चारित्रयुक्त हो और दाता- दानके प्रेरकों एवं अनुमोदकों को नौकाकी तरह संसारसागरसे पार करे । ये लक्षण सुपात्र में ही पाये जाते हैं अतएव सुपात्र ही दान देने योग्य हैं । ये तीन प्रकार के होते हैं : उत्तम, मुनि आयिका । मध्यम, श्रावक-श्राविका । जघन्य, श्रव्रत सम्यग्दृष्टि । भाव- सम्यक्त्व रहित केवल बाह्य चारित्रके धारक द्रव्यलिंगी मुनि तथा द्रव्यलिंगी श्रावक वा द्रव्यसम्यग्दृष्टि कुपात्र कहाते हैं। जिसके सूक्ष्म मिथ्यात्व हो, उसे तो हम छद्मस्थ जान ही नहीं सकते, इसलिये उसमें सुपात्र के समान प्रवृत्ति होती है, परन्तु जिसके स्थूल द्रव्यमिथ्यात्व हो औौर बाह्य जिनधर्म में कहे हुए भेषका धारी हो तो वह कुपात्र है। जो सम्यक्त्व, चारित्र दोनोंसे भ्रष्ट हो, ऐसे मिथ्यादृष्टि भेषी, अपात्रको दान देना सर्वथा योग्य नहीं । समदत्ति - जो प्रपने समान साधर्मी गृहस्थ प्रसक्तता कर्म के उदयसे दुःखी हों, उनकी धन-वस्त्रादिसे यथायोग्य सहायता करना । दयादत्ति - दुखित व भूखे जीवोंको अन्न-वस्त्रादि से सहायता सर्वदत्ति या मन्वयवत्ति-अपने पुत्र, भाई या गोत्री आदिको धनादि सर्वस्व सौंप परिग्रह से निर्ममत्व हो, उत्तम-श्राबकके व्रत या मुनिव्रत अंगीकार करना ।
बोर्ड परीक्षा अब अंतिम दौर पर है। इस बीच शनिवार 25 मार्च से कक्षा 10वीं व 12वीं के उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन किया जाएगा। मूल्यांकन को लेकर माशिमं ने कवर्धा शहर के स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल को मूल्यांकन केन्द्र बनाया है। इस केन्द्र में माशिमं ने 50 हजार उत्तरपुस्तिका भेजी है। मूल्यांकन केन्द्र से मिली जानकारी अनुसार आज शुक्रवार को मूल्यांकन के संबंध में माशिमं द्वारा वीसी के माध्यम से बैठक होगी। 25 मार्च से मूल्यांकन कार्य शुरू होगी व 17 अप्रैल तक मूल्यांकन कार्य पूर्ण करना है। प्रदेश में करीब 15 से अधिक जगहों में मूल्यांकन का कार्य किया जाता है। सभी जगहों में 17 अप्रैल तक कार्य पूरा किए जाएंगे। ऐसे में मई के पहले या दूसरे हफ्ते तक परीक्षा परिणाम जारी किए जाने की संभावना है। दूसरी ओर वर्तमान समय में जिले के केवल 12वीं की परीक्षा हो रही है। कक्षा 10वीं की परीक्षा खत्म हो गई है। जिले में बोर्ड परीक्षा को लेकर माशिमं द्वारा 70 परीक्षा केन्द्र बनाए गए थे। करीब 40 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
बोर्ड परीक्षा अब अंतिम दौर पर है। इस बीच शनिवार पच्चीस मार्च से कक्षा दसवीं व बारहवीं के उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन किया जाएगा। मूल्यांकन को लेकर माशिमं ने कवर्धा शहर के स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल को मूल्यांकन केन्द्र बनाया है। इस केन्द्र में माशिमं ने पचास हजार उत्तरपुस्तिका भेजी है। मूल्यांकन केन्द्र से मिली जानकारी अनुसार आज शुक्रवार को मूल्यांकन के संबंध में माशिमं द्वारा वीसी के माध्यम से बैठक होगी। पच्चीस मार्च से मूल्यांकन कार्य शुरू होगी व सत्रह अप्रैल तक मूल्यांकन कार्य पूर्ण करना है। प्रदेश में करीब पंद्रह से अधिक जगहों में मूल्यांकन का कार्य किया जाता है। सभी जगहों में सत्रह अप्रैल तक कार्य पूरा किए जाएंगे। ऐसे में मई के पहले या दूसरे हफ्ते तक परीक्षा परिणाम जारी किए जाने की संभावना है। दूसरी ओर वर्तमान समय में जिले के केवल बारहवीं की परीक्षा हो रही है। कक्षा दसवीं की परीक्षा खत्म हो गई है। जिले में बोर्ड परीक्षा को लेकर माशिमं द्वारा सत्तर परीक्षा केन्द्र बनाए गए थे। करीब चालीस हजार परीक्षार्थी शामिल हुए। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
वीर अर्जुन संवाददाता बरेली। शराब के नशे में धुत सपा विधायक भगवत शरण गंगवार के बेटे अतुल गंगवार ने अपने साथियों के साथ होंडा शोरूम पर ताबड़तोड़ गोलिया बरसाई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। हमलावरों ने शोरूम में जमकर तोड़फोड़ की। लोग जान बचाकर भागने लगे, ताबड़तोड फायरिंग की आवाज सुनकर बाजार में अफरातफरी मच गई। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके से विधायक के बेटे को लाइसेंसी राइफल के साथ गिरफ्तार कर लिया। जबकि उसके साथी फरार हो गए। कोतवाली का सिविल लाइंस मार्केट शाम को फायरिंग से दहल उ"ा। पुलिस के आला अफसरो ने घटना स्थल का मुआयना करने के बाद विधायक का पेट्रोल पंप सील कर दिया । देर रात शोरूम के मालिक अमन खंडेलवाल ने कोतवाली में अतुल गंगवार और उसके साथियों के खिलाफ तहरीर दी ।
वीर अर्जुन संवाददाता बरेली। शराब के नशे में धुत सपा विधायक भगवत शरण गंगवार के बेटे अतुल गंगवार ने अपने साथियों के साथ होंडा शोरूम पर ताबड़तोड़ गोलिया बरसाई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। हमलावरों ने शोरूम में जमकर तोड़फोड़ की। लोग जान बचाकर भागने लगे, ताबड़तोड फायरिंग की आवाज सुनकर बाजार में अफरातफरी मच गई। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके से विधायक के बेटे को लाइसेंसी राइफल के साथ गिरफ्तार कर लिया। जबकि उसके साथी फरार हो गए। कोतवाली का सिविल लाइंस मार्केट शाम को फायरिंग से दहल उ"ा। पुलिस के आला अफसरो ने घटना स्थल का मुआयना करने के बाद विधायक का पेट्रोल पंप सील कर दिया । देर रात शोरूम के मालिक अमन खंडेलवाल ने कोतवाली में अतुल गंगवार और उसके साथियों के खिलाफ तहरीर दी ।
मॉस्को, 30 जनवरी (आईएएनएस)। रूसी नौसेना के पहले डिप्टी कमांडर-इन-चीफ अलेक्जेंडर विटको ने बताया कि इस साल देश की नौसेना को कम से कम 40 नए जहाज प्राप्त होंगे। सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि विटको ने इस साल नौसेना बलों की विशेष योजनाओं पर बात करते हुए जिक्र किया कि ब्लैक सी फ्लीट को पांच से छह नई जहाजें मिलेंगी और पांचवी और छठी परियोजना 22160 के तहत गश्ती जहाजों का भी निर्माण जारी है। ब्लैक सी फ्लीट, रूसी नौसेना की एक बड़ी परिचालन रणनीति कमान है, जो भूमध्य सागर, ब्लैक सी और आजोव सागर पर सक्रिय है, जहां रूसी और नाटो युद्धपोत अकसर एक-दूसरे से भिड़ते हैं।
मॉस्को, तीस जनवरी । रूसी नौसेना के पहले डिप्टी कमांडर-इन-चीफ अलेक्जेंडर विटको ने बताया कि इस साल देश की नौसेना को कम से कम चालीस नए जहाज प्राप्त होंगे। सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि विटको ने इस साल नौसेना बलों की विशेष योजनाओं पर बात करते हुए जिक्र किया कि ब्लैक सी फ्लीट को पांच से छह नई जहाजें मिलेंगी और पांचवी और छठी परियोजना बाईस हज़ार एक सौ साठ के तहत गश्ती जहाजों का भी निर्माण जारी है। ब्लैक सी फ्लीट, रूसी नौसेना की एक बड़ी परिचालन रणनीति कमान है, जो भूमध्य सागर, ब्लैक सी और आजोव सागर पर सक्रिय है, जहां रूसी और नाटो युद्धपोत अकसर एक-दूसरे से भिड़ते हैं।
पश्चिम बंगाल के कोलकाता से हल्दीबाड़ी जा रही 12363 अप कोलकाता हल्दीबाड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस में आज मालदा स्टेशन पर पहुंचते ही ट्रेन में सवार यात्रियों में भगदड़ का माहौल बन गया। ट्रेन में सवार हर यात्री ट्रेन खाली कर प्लेटफॉर्म पर खड़ा हो गया। लोगों के अनुसार ट्रेन के डी-2 बोगी में एक काले रंग का लावारिस बैग रखा हुआ था। ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों ने बोगी में लावारिस पड़े बैग की जानकारी ट्रेन में टिकट चेक कर रहे टीटी को दी। जिसके बाद टीटी ने रेल पुलिस से संपर्क किया जिसके बाद पुलिस ने डॉग स्कॉर्ट टीम लेकर प्लेटफॉर्म पर पहुंच गई और जब बैग को चेक किया गया तो उसमें पुलिस को कपड़े मिले। जांच के बाद ट्रेन को छोड़ दिया गया। हम बता दें कि अलकायदा ने देश के बड़े-बड़े शहरों में आतंकी हमला करने की बात की है, जिसका उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया है। देश के इन बड़े शहरों में कोलकाता भी शामिल है। इस वीडियो के वायरल होने से लोगों में पहले से ही दहशत था लेकिन इसलिए लवारिश बैग के देखे जाने के बाद लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
पश्चिम बंगाल के कोलकाता से हल्दीबाड़ी जा रही बारह हज़ार तीन सौ तिरेसठ अप कोलकाता हल्दीबाड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस में आज मालदा स्टेशन पर पहुंचते ही ट्रेन में सवार यात्रियों में भगदड़ का माहौल बन गया। ट्रेन में सवार हर यात्री ट्रेन खाली कर प्लेटफॉर्म पर खड़ा हो गया। लोगों के अनुसार ट्रेन के डी-दो बोगी में एक काले रंग का लावारिस बैग रखा हुआ था। ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों ने बोगी में लावारिस पड़े बैग की जानकारी ट्रेन में टिकट चेक कर रहे टीटी को दी। जिसके बाद टीटी ने रेल पुलिस से संपर्क किया जिसके बाद पुलिस ने डॉग स्कॉर्ट टीम लेकर प्लेटफॉर्म पर पहुंच गई और जब बैग को चेक किया गया तो उसमें पुलिस को कपड़े मिले। जांच के बाद ट्रेन को छोड़ दिया गया। हम बता दें कि अलकायदा ने देश के बड़े-बड़े शहरों में आतंकी हमला करने की बात की है, जिसका उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया है। देश के इन बड़े शहरों में कोलकाता भी शामिल है। इस वीडियो के वायरल होने से लोगों में पहले से ही दहशत था लेकिन इसलिए लवारिश बैग के देखे जाने के बाद लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
Best ASUS Laptops In India - यदि लैपटॉप में आकर्षक डिजाइन और ट्रेंडी फीचर्स के साथ-साथ लंबी बैटरी लाइफ और फास्ट संचालन की सुविधा हो तो उसे कोई भी खरीदना चाहेगा। ASUS Laptop इस तरह की हर जरूरत को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। Best ASUS Laptops In India: कंप्यूटर हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता ASUS मूलतः ताईवान की मल्टीनेशनल कंपनी है, जिसका मुख्यालय ताइपेई में है। यह कंपनी लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाले डेस्कटॉप कंप्यूटर, नोटबुक, मोबाइल फोन और लैपटॉप की एक लंबी सीरीज का उत्पादन और बिक्री करती है। इस कंपनी के प्रोडक्ट बहुत ही किफायती और विश्वसनीय होते हैं और यही वजह है कि यह विश्व का छठा सबसे बड़ा PC वेण्डर है। ASUS भारत में भी अपना कारोबार करती है और स्मार्टफोन, मदरबोर्ड, डेस्कटॉप, कम्प्यूटर एसेसरीज और लैपटॉप की बिक्री करती है। चूंकि हमारे इस लेख का विषय ASUS Laptop है, इसलिए यहां पर हम आपको Best ASUS Laptops In India और ASUS Laptops Prices के बारे में बताने जा रहे हैं, ताकि आपको खरीददारी के वक्त किसी भी प्रकार की कोई समस्या ना हो। 10 Best Lenovo laptops In India के लिए यहां क्लिक करें. भारत में ASUS Laptop अपनी लंबी बैटरी लाइफ और गेमिंग नेचर के लिए जाने जाते हैं। हालाँकि यहां दिए गए लैपटॉप गेमर्स के साथ-साथ स्टूडेंट व प्रोफेशनल के लिए भी उपयोगी हैं। Best ASUS Laptops In India की लिस्ट में आप सबसे पहले इस ASUS VivoBook 15 Laptop पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि यह लैपटॉप बहुत ही किफायती है और आपकी सुविधा के लिए इसे विंडो 11 जैसे फीचर्स के साथ पेश किया जाता है। इस लैपटॉप में 6 घंटे तक का बैटरी बैकअप है, जो लंबे समय तक कार्य करने की अनुमति देता है। ASUS VivoBook 15 Laptop Price: Rs 25,990. क्यों खरीदें? इंटेल सेलेरॉन N4020 प्रोसेसर पर संचालित होने वाला यह आसुस लैपटॉप भी एक शानदार विकल्प है और आपको इसमें 11. 6 इंच की HD डिस्प्ले मिल जाती है, जो इसे एक कंप्लीट मिनी लैपटॉप बनाता है। इस लैपटॉप में आपको विंडो 10 और 12 घंटे तक की लंबी बैटरी लाइफ मिल जाती है, जो बिना रूके हुए काम करने की अनुमति देता है। ASUS Mini Laptop Price: Rs 28,250. क्यों खरीदें? यूजर्स ने इस ASUS Laptop को 5 में से 4 स्टार की दमदार रेटिंग दिया है और यह इंटेल कोर i5-1135G7 प्रोसेसर पर संचालित होता है, जो इसे फास्ट स्पीड देने में मदद करता है। इस लैपटॉप का वजन 1. 6 किलो है, जो इसे काफी हल्का बनाता है और कैरी करने में आसान है। ASUS VivoBook 14 Laptop Price: Rs 49,990. क्यों खरीदें? 10 Best Gaming Laptops In India के लिए यहां क्लिक करें. अगर आप एक नए गेमिंग लैपटॉप की तलाश में हैं तो यह ASUS Gaming Laptop आपकी इस आवश्यकता की पूर्ति करता है। इस लैपटॉप में आपको 14. 7 घंटे तक की एवरेज बैटरी लाइफ मिलती है, जो लंबे समय तक इसे इस्तेमाल करने की अनुमति देता है। इसका वजन 2. 3 किलो है। ASUS Gaming Laptop Price: Rs 56,999. क्यों खरीदें? फिलहाल Best ASUS Laptops In India की लिस्ट का यह सबसे महंगा विकल्प है, जिसे यूजर्स ने 5 में से 4. 3 स्टार की दमदार रेटिंग दी है। इस लैपटॉप में आपकी सुविधा के लिए विंडो 11 और एमएस ऑफिस आदि मिल जाता है। इसका वजन 2. 3Kg रखा गया है और यह 10th जेनरेशन वाले इंटेल कोर i5 10300H प्रोसेसर पर संचालित होता है। ASUS TUF Laptop Price: Rs 58,300. क्यों खरीदें? अमेजन पर आसुस के और भी लैपटॉप के लिए यहां क्लिक करें. Disclaimer: जागरण के पत्रकार इस लेख के निर्माण में शामिल नहीं थे। यहां कीमतें अमेज़ॅन के संबंध में परिवर्तन के अधीन हैं।
Best ASUS Laptops In India - यदि लैपटॉप में आकर्षक डिजाइन और ट्रेंडी फीचर्स के साथ-साथ लंबी बैटरी लाइफ और फास्ट संचालन की सुविधा हो तो उसे कोई भी खरीदना चाहेगा। ASUS Laptop इस तरह की हर जरूरत को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। Best ASUS Laptops In India: कंप्यूटर हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता ASUS मूलतः ताईवान की मल्टीनेशनल कंपनी है, जिसका मुख्यालय ताइपेई में है। यह कंपनी लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाले डेस्कटॉप कंप्यूटर, नोटबुक, मोबाइल फोन और लैपटॉप की एक लंबी सीरीज का उत्पादन और बिक्री करती है। इस कंपनी के प्रोडक्ट बहुत ही किफायती और विश्वसनीय होते हैं और यही वजह है कि यह विश्व का छठा सबसे बड़ा PC वेण्डर है। ASUS भारत में भी अपना कारोबार करती है और स्मार्टफोन, मदरबोर्ड, डेस्कटॉप, कम्प्यूटर एसेसरीज और लैपटॉप की बिक्री करती है। चूंकि हमारे इस लेख का विषय ASUS Laptop है, इसलिए यहां पर हम आपको Best ASUS Laptops In India और ASUS Laptops Prices के बारे में बताने जा रहे हैं, ताकि आपको खरीददारी के वक्त किसी भी प्रकार की कोई समस्या ना हो। दस Best Lenovo laptops In India के लिए यहां क्लिक करें. भारत में ASUS Laptop अपनी लंबी बैटरी लाइफ और गेमिंग नेचर के लिए जाने जाते हैं। हालाँकि यहां दिए गए लैपटॉप गेमर्स के साथ-साथ स्टूडेंट व प्रोफेशनल के लिए भी उपयोगी हैं। Best ASUS Laptops In India की लिस्ट में आप सबसे पहले इस ASUS VivoBook पंद्रह Laptop पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि यह लैपटॉप बहुत ही किफायती है और आपकी सुविधा के लिए इसे विंडो ग्यारह जैसे फीचर्स के साथ पेश किया जाता है। इस लैपटॉप में छः घंटाटे तक का बैटरी बैकअप है, जो लंबे समय तक कार्य करने की अनुमति देता है। ASUS VivoBook पंद्रह Laptop Price: पच्चीस रुपया,नौ सौ नब्बे. क्यों खरीदें? इंटेल सेलेरॉन Nचार हज़ार बीस प्रोसेसर पर संचालित होने वाला यह आसुस लैपटॉप भी एक शानदार विकल्प है और आपको इसमें ग्यारह. छः इंच की HD डिस्प्ले मिल जाती है, जो इसे एक कंप्लीट मिनी लैपटॉप बनाता है। इस लैपटॉप में आपको विंडो दस और बारह घंटाटे तक की लंबी बैटरी लाइफ मिल जाती है, जो बिना रूके हुए काम करने की अनुमति देता है। ASUS Mini Laptop Price: अट्ठाईस रुपया,दो सौ पचास. क्यों खरीदें? यूजर्स ने इस ASUS Laptop को पाँच में से चार स्टार की दमदार रेटिंग दिया है और यह इंटेल कोर iपाँच-एक हज़ार एक सौ पैंतीसGसात प्रोसेसर पर संचालित होता है, जो इसे फास्ट स्पीड देने में मदद करता है। इस लैपटॉप का वजन एक. छः किलो है, जो इसे काफी हल्का बनाता है और कैरी करने में आसान है। ASUS VivoBook चौदह Laptop Price: उनचास रुपया,नौ सौ नब्बे. क्यों खरीदें? दस Best Gaming Laptops In India के लिए यहां क्लिक करें. अगर आप एक नए गेमिंग लैपटॉप की तलाश में हैं तो यह ASUS Gaming Laptop आपकी इस आवश्यकता की पूर्ति करता है। इस लैपटॉप में आपको चौदह. सात घंटाटे तक की एवरेज बैटरी लाइफ मिलती है, जो लंबे समय तक इसे इस्तेमाल करने की अनुमति देता है। इसका वजन दो. तीन किलो है। ASUS Gaming Laptop Price: छप्पन रुपया,नौ सौ निन्यानवे. क्यों खरीदें? फिलहाल Best ASUS Laptops In India की लिस्ट का यह सबसे महंगा विकल्प है, जिसे यूजर्स ने पाँच में से चार. तीन स्टार की दमदार रेटिंग दी है। इस लैपटॉप में आपकी सुविधा के लिए विंडो ग्यारह और एमएस ऑफिस आदि मिल जाता है। इसका वजन दो. तीनKg रखा गया है और यह दसth जेनरेशन वाले इंटेल कोर iपाँच दस हज़ार तीन सौH प्रोसेसर पर संचालित होता है। ASUS TUF Laptop Price: अट्ठावन रुपया,तीन सौ. क्यों खरीदें? अमेजन पर आसुस के और भी लैपटॉप के लिए यहां क्लिक करें. Disclaimer: जागरण के पत्रकार इस लेख के निर्माण में शामिल नहीं थे। यहां कीमतें अमेज़ॅन के संबंध में परिवर्तन के अधीन हैं।
अनुबंध रद्द होने के बाद भी फिल्म अभिनेता डिनो मॉरियो की ऑनलाइन कंपनी 'आईभक्ति' की बेबसाइट पर विश्वनाथ मंदिर के प्रसाद की बुकिंग खुलेआम की जा रही है। इसमें लाल पेड़ा के अलावा सूखे मेवे भक्तों को बेचे जा रहे हैं। अब कुछ और ऑनलाइन कंपनियां भी आईभक्ति के साथ प्रसाद के कारोबार में जुड़ गई हैं। शिकायत मिलने के बाद मंदिर प्रशासन ने इस मामले की एनआईसी को जांच का निर्देश दिया है। इस मामले में आईभक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू हो गई है। आठ माह पहले प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) नवनीत सहगल के निर्देश पर मंदिर प्रशासन ने ऑनलाइन प्रसाद का अनुबंध निरस्त कर दिया था। अनुबंध निरस्त होने के बाद बाबा के भक्तों के साथ प्रसाद का गोरखधंधा जारी होने की जानकारी मिलने पर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने इस फर्जीवाड़े पर मंगलवार को कार्यपालक समिति के सभापति मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण से चर्चा की। पता चला है कि ऑनलाइन कंपनी ने काशी में अपनी सेवाओं का विस्तार गंगा पूजा के रूप में कर लिया है। कंपनी की वेबसाइट पर विश्वनाथ मंदिर के प्रसाद के साथ ही गंगोत्री के जल (गंगा जल) की भी बुकिंग की जा रही है। तीन सौ रुपये में तीन पैकिंग गंगा जल श्रद्धालुओं को दिया जा रहा है। इसके अलावा 550 रुपये में लाल पेड़ा और इतनी ही कीमत पर सूखा मेवा प्रसाद के रूप में दिया जा रहा है। करार रद्द होने के बाद आईभक्ति के इस धंधे की जानकारी मिलने के बाद न्यास परिषद के अलावा मंदिर प्रशासन ने जांच शुरू करा दी है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने बताया कि आईभक्ति की ओर से प्रसाद की ऑनलाइन बुकिंग करने की शिकायत की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट मिलते ही ऑनलाइन कंपनी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
अनुबंध रद्द होने के बाद भी फिल्म अभिनेता डिनो मॉरियो की ऑनलाइन कंपनी 'आईभक्ति' की बेबसाइट पर विश्वनाथ मंदिर के प्रसाद की बुकिंग खुलेआम की जा रही है। इसमें लाल पेड़ा के अलावा सूखे मेवे भक्तों को बेचे जा रहे हैं। अब कुछ और ऑनलाइन कंपनियां भी आईभक्ति के साथ प्रसाद के कारोबार में जुड़ गई हैं। शिकायत मिलने के बाद मंदिर प्रशासन ने इस मामले की एनआईसी को जांच का निर्देश दिया है। इस मामले में आईभक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू हो गई है। आठ माह पहले प्रमुख सचिव नवनीत सहगल के निर्देश पर मंदिर प्रशासन ने ऑनलाइन प्रसाद का अनुबंध निरस्त कर दिया था। अनुबंध निरस्त होने के बाद बाबा के भक्तों के साथ प्रसाद का गोरखधंधा जारी होने की जानकारी मिलने पर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने इस फर्जीवाड़े पर मंगलवार को कार्यपालक समिति के सभापति मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण से चर्चा की। पता चला है कि ऑनलाइन कंपनी ने काशी में अपनी सेवाओं का विस्तार गंगा पूजा के रूप में कर लिया है। कंपनी की वेबसाइट पर विश्वनाथ मंदिर के प्रसाद के साथ ही गंगोत्री के जल की भी बुकिंग की जा रही है। तीन सौ रुपये में तीन पैकिंग गंगा जल श्रद्धालुओं को दिया जा रहा है। इसके अलावा पाँच सौ पचास रुपयापये में लाल पेड़ा और इतनी ही कीमत पर सूखा मेवा प्रसाद के रूप में दिया जा रहा है। करार रद्द होने के बाद आईभक्ति के इस धंधे की जानकारी मिलने के बाद न्यास परिषद के अलावा मंदिर प्रशासन ने जांच शुरू करा दी है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने बताया कि आईभक्ति की ओर से प्रसाद की ऑनलाइन बुकिंग करने की शिकायत की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट मिलते ही ऑनलाइन कंपनी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जुबानी हमला करते हुए कहा कि अगर दिल्ली को बचाना है तो गिरगिट केजरीवाल को भगा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार अंगूर के नाम पर कद्दू बेच रही है। इस चुनाव में आपको केजरीवाल को कद्दू बनाना है। कैलाश विजयवर्गीय ने आम आदमी पार्टी के पूर्व मंत्रियों के खिलाफ चल रही जांच पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दो-तीन मंत्रियों को जेल हुई है. अभी दो-तीन मंत्रियों के लिए जेल के कमरों की सफाई की जा रही है। उन्होंने दिल्ली से आप को हटाने का नारा देते हुए कहा कि अगर दिल्ली को बचाना है तो गिरगिट केजरीवाल को भगाना होगा. सीएम केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, केजरीवाल से बड़ा पाखंडी मैंने आज तक नहीं देखा.
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जुबानी हमला करते हुए कहा कि अगर दिल्ली को बचाना है तो गिरगिट केजरीवाल को भगा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार अंगूर के नाम पर कद्दू बेच रही है। इस चुनाव में आपको केजरीवाल को कद्दू बनाना है। कैलाश विजयवर्गीय ने आम आदमी पार्टी के पूर्व मंत्रियों के खिलाफ चल रही जांच पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दो-तीन मंत्रियों को जेल हुई है. अभी दो-तीन मंत्रियों के लिए जेल के कमरों की सफाई की जा रही है। उन्होंने दिल्ली से आप को हटाने का नारा देते हुए कहा कि अगर दिल्ली को बचाना है तो गिरगिट केजरीवाल को भगाना होगा. सीएम केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, केजरीवाल से बड़ा पाखंडी मैंने आज तक नहीं देखा.
चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Realme कल भारत में दो धांसू स्मार्टफोन लॉन्च करने जा रही है. इन स्मार्टफोन्स को चार फरवरी को दोपहर 12:30 बजे वर्चुअल इवेंट में लॉन्च किया जाएगा. लॉन्च किए जाने वाले इन स्मार्टफोन्स का नाम Realme X7 5G और Realme X7 Pro 5G है. कंपनी Realme X7 5G को भारत में दो स्टोरेज वेरिएंट के साथ लॉन्च कर सकती है जिसमें 6GB + 128GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 20,000 रुपये और 8GB + 128GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 25,999 रुपये हो सकती है. ये स्मार्टफोन्स Dimensity 1000+ 5G प्रोसेसर से पावर्ड हो सकते हैं. इस स्मार्टफोन में सुपर AMOLED फुल HD डिस्प्ले दिया जाएगा जो MediaTek Dimensity 800U प्रोसेसर के साथ आएगा. इसमें 8GB रैम के साथ 128GB का इंटरनल स्टोरेज दिया जाएगा. इसके अलावा फोटोग्राफी के लिए इसमें क्वाड रियर कैमरा सेटअप दिया जा सकता है जिसमें 64 मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर, 8 मेगापिक्सल का वाइड एंगल लेंस, 2 मेगापिक्सल का डेप्थ सेंसर और 2 मेगापिक्सल का मैक्रो लेंस होगा. इसके अलावा फ्रंट में 32 मेगापिक्सल का कैमरा होगा. पावर देने के लिए इस स्मार्टफोन में 50W सुपरडार्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ 4310mAh की बैटरी दी जा सकती है. Realme X7 Pro के स्पेसिफिकेशन की बात करें तो यह MediaTek Dimensity 1000+ प्रोसेसर से पावर्ड होगा और इसमें सुपर एमोलेड डिस्प्ले दया जाएगा जो कि कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 5 से कोटेड होगा. इसके अलावा फोन में चार रियर कैमरे मिलेंगे और इसका प्राइमरी कैमरा 64MP का होगा जो कि Sony IMX686 सेंसर के साथ आएगा. इसके अलावा इसमें 8MP का वाइड एंगल लेंस, 2MP का रेट्रो पोट्रेट लेंस और 2MP का मैक्रो लेंस दिया जाएगा. सेल्फी के लिए इस स्मार्टफोन में 32MP का फ्रंट कैमरा उपलब्ध होगा. फोन को पावर देने के लिए इस स्मार्टफोन में 4,500mAh मिलेगी जो कि 65W अल्ट्रा फास्ट फ्लैश चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी. ये भी पढ़ेंः WhatsApp इस्तेमाल करने वाले हो जाएं सावधान, भूलकर भी न ओपन करें ये लिंक नहीं तो हैक हो जाएगा आपका फोन!
चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Realme कल भारत में दो धांसू स्मार्टफोन लॉन्च करने जा रही है. इन स्मार्टफोन्स को चार फरवरी को दोपहर बारह:तीस बजे वर्चुअल इवेंट में लॉन्च किया जाएगा. लॉन्च किए जाने वाले इन स्मार्टफोन्स का नाम Realme Xसात पाँचG और Realme Xसात Pro पाँचG है. कंपनी Realme Xसात पाँचG को भारत में दो स्टोरेज वेरिएंट के साथ लॉन्च कर सकती है जिसमें छःGB + एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत बीस,शून्य रुपयापये और आठGB + एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत पच्चीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये हो सकती है. ये स्मार्टफोन्स Dimensity एक हज़ार+ पाँचG प्रोसेसर से पावर्ड हो सकते हैं. इस स्मार्टफोन में सुपर AMOLED फुल HD डिस्प्ले दिया जाएगा जो MediaTek Dimensity आठ सौU प्रोसेसर के साथ आएगा. इसमें आठGB रैम के साथ एक सौ अट्ठाईसGB का इंटरनल स्टोरेज दिया जाएगा. इसके अलावा फोटोग्राफी के लिए इसमें क्वाड रियर कैमरा सेटअप दिया जा सकता है जिसमें चौंसठ मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर, आठ मेगापिक्सल का वाइड एंगल लेंस, दो मेगापिक्सल का डेप्थ सेंसर और दो मेगापिक्सल का मैक्रो लेंस होगा. इसके अलावा फ्रंट में बत्तीस मेगापिक्सल का कैमरा होगा. पावर देने के लिए इस स्मार्टफोन में पचास वाट सुपरडार्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ चार हज़ार तीन सौ दसmAh की बैटरी दी जा सकती है. Realme Xसात Pro के स्पेसिफिकेशन की बात करें तो यह MediaTek Dimensity एक हज़ार+ प्रोसेसर से पावर्ड होगा और इसमें सुपर एमोलेड डिस्प्ले दया जाएगा जो कि कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास पाँच से कोटेड होगा. इसके अलावा फोन में चार रियर कैमरे मिलेंगे और इसका प्राइमरी कैमरा चौंसठMP का होगा जो कि Sony IMXछः सौ छियासी सेंसर के साथ आएगा. इसके अलावा इसमें आठMP का वाइड एंगल लेंस, दोMP का रेट्रो पोट्रेट लेंस और दोMP का मैक्रो लेंस दिया जाएगा. सेल्फी के लिए इस स्मार्टफोन में बत्तीसMP का फ्रंट कैमरा उपलब्ध होगा. फोन को पावर देने के लिए इस स्मार्टफोन में चार,पाँच सौmAh मिलेगी जो कि पैंसठ वाट अल्ट्रा फास्ट फ्लैश चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी. ये भी पढ़ेंः WhatsApp इस्तेमाल करने वाले हो जाएं सावधान, भूलकर भी न ओपन करें ये लिंक नहीं तो हैक हो जाएगा आपका फोन!
...प्रवचन...शुद्ध,सात्विक,प्रेरक,प्रभावी और वासना मुक्त हो सकता है क्यूंकि ज़्यादातर यह अध्ययन और प्रस्तुत करने की मौलिक शैली पर आधारित होता है ! यह ज़रूरी नहीं कि प्रवचन कर्ता स्वयं प्रवचन में कही बातों की सात्विकता में विश्वास रखता हो / उसका अनुसरण करता ही हो ! पर उपदेश कुशल बहुतेरे ...के उदाहरणों से भरा पड़ा है हमारा आसारामी समाज ! हमें याद है यही आसाराम 'दामिनी' के मामले में 'बलात्कारी' के पैरों में गिरकर गिडगिडाने/भगवान का वास्ता देने की पीड़िता को सलाह दे रहे थे ...क्या इस सलाह के पीछे उनका कोई अपना 'अनुभव' छिपा था ? लोग गंभीर अपराध के लिए 'फांसी' की मांग करते हैं...बहस हो सकती है...मेरा मानना है...फांसी...सज़ा नहीं 'मुक्ति' है ! सज़ा का मूल उद्देश्य उसे 'भुगतने' में छुपा है...फांसी तो 'मोक्ष' सी लगती है ! कुछ- कुछ 'अमरता' की तरफ़ मुड़ती सी लगती है...फांसी ! दुनिया का जाना-माना कथित अर्थशास्त्री अपने देश की आर्थिक बदहाली के लिए विपक्ष और सीरिया के रासायनिक हथियारों को दोषी ठहराता है...? मेरी मांग है कि मनमोहन सर को 'चोर' भले ही न कहा जाए इनकी 'मार्कशीट' ज़रूर क्रॉस चैक की जाए ! ...हे भारतीयों ! पानी पीजो छान के और 'गुरू' कीजो 'जान' के ! अन्यथा विश्वास मानिए 'आशीर्वाद' के बहाने न जाने कितने आशाराम स्त्री की यौन सुचिता को दांव पर लगाते रहते हैं !
...प्रवचन...शुद्ध,सात्विक,प्रेरक,प्रभावी और वासना मुक्त हो सकता है क्यूंकि ज़्यादातर यह अध्ययन और प्रस्तुत करने की मौलिक शैली पर आधारित होता है ! यह ज़रूरी नहीं कि प्रवचन कर्ता स्वयं प्रवचन में कही बातों की सात्विकता में विश्वास रखता हो / उसका अनुसरण करता ही हो ! पर उपदेश कुशल बहुतेरे ...के उदाहरणों से भरा पड़ा है हमारा आसारामी समाज ! हमें याद है यही आसाराम 'दामिनी' के मामले में 'बलात्कारी' के पैरों में गिरकर गिडगिडाने/भगवान का वास्ता देने की पीड़िता को सलाह दे रहे थे ...क्या इस सलाह के पीछे उनका कोई अपना 'अनुभव' छिपा था ? लोग गंभीर अपराध के लिए 'फांसी' की मांग करते हैं...बहस हो सकती है...मेरा मानना है...फांसी...सज़ा नहीं 'मुक्ति' है ! सज़ा का मूल उद्देश्य उसे 'भुगतने' में छुपा है...फांसी तो 'मोक्ष' सी लगती है ! कुछ- कुछ 'अमरता' की तरफ़ मुड़ती सी लगती है...फांसी ! दुनिया का जाना-माना कथित अर्थशास्त्री अपने देश की आर्थिक बदहाली के लिए विपक्ष और सीरिया के रासायनिक हथियारों को दोषी ठहराता है...? मेरी मांग है कि मनमोहन सर को 'चोर' भले ही न कहा जाए इनकी 'मार्कशीट' ज़रूर क्रॉस चैक की जाए ! ...हे भारतीयों ! पानी पीजो छान के और 'गुरू' कीजो 'जान' के ! अन्यथा विश्वास मानिए 'आशीर्वाद' के बहाने न जाने कितने आशाराम स्त्री की यौन सुचिता को दांव पर लगाते रहते हैं !
भारत The Gazette of India असाधारण EXTRAORDINARY भाग II - खण्ड 3 - उप खण्ड (ii) PART II - Section 3 - Sub-section (ii) प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY नई दिल्ली, सोमवार, नवम्बर 11, 2019/कार्तिक 20, 1941 NEW DELHI, MONDAY, NOVEMBER 11, 2019/KARTIKA 20, 1941 पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय अधिसूचना नई दिल्ली, 8 नवम्बर, 2019 का.आ. 4075(अ).-प्रारुप अधिसूचना भारत के राजपत्र, असाधारण, भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन, मंत्रालय की अधिसूचना सं. का.आ. 3440(अ), तारीख 12 जुलाई, 2018, द्वारा प्रकाशित की गई थी जिसमें ऐसे सभी व्यक्तियों से, जिनकी उससे प्रभावित होने की संभावना थी, उस तारीख से, जिसको उक्त अधिसूचना को अन्तर्विष्ट करने वाले राजपत्र की प्रतियां जनता को उपलब्ध करा दी गई थीं, साठ दिन की अवधि के भीतर आक्षेप और सुझाव आमंत्रित किए गए थे; और, उक्त प्रारूप अधिसूचना को अन्तर्विष्ट करने वाले राजपत्र की प्रतियां जनता को तारीख 13 जुलाई, 2018 को उपलब्ध करा दी गई थी; और, प्रारुप अधिसूचना के उत्तर में व्यक्तियों और पणधारियों से कोई भी आक्षेप और सुझाव प्राप्त नहीं हुए; और, वल्लानाडू ब्लैकबक अभयारण्य थोथुकुडी वन संभाग के नियंत्रणाधीन थोथुकुडी जिला में एकमात्र रिज़र्व वन है। अभयारण्य का क्षेत्रफल 16.4121 वर्ग किलोमीटर या 1641.21 हेक्टेयर है। यह तिरुनेलवेली-थोथुकुडी राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट स्थित है। यह क्षेत्र जी. ओ. एमएस. सं. 1028 तारीख 28.9.1987 के अनुसार ब्लैकबक अभयारण्य घोषित किया गया था और तमिलनाडु सरकार के राजपत्र में 21 अक्टूबर 1987, और थोथुकुडी जिला के राजपत्र में 8 अगस्त 1996 में प्रकाशित किया गया; और, ब्लैकबक एक संकटापन्न प्रजाति है और भारतीय उपमहाद्वीप के लिए स्थानिक है। विश्व संरक्षण संघ (आई यू सी एन) रेड डॉटा बुक के अनुसार, काला हिरण को वी यू (असुरक्षित) स्थिति में निर्धारित किया गया है। वल्लानाडू रिज़र्व वन उपमहाद्वीप में दक्षिणीतम स्थान है जहां काला हिरण स्वाभाविक रूप से उपलब्ध है जो यह दर्शाता है कि एक निश्चिंत स्तर पर इसके संरक्षण की आवश्यकता है, क्योंकि विकास के दबाव को बनाए रखने के लिए आनुवांशिक रूप से संख्या कम होगी। वल्लानाडू रिज़र्व वन (पहाड़ी) का विशाल परिवेश काला हिरण के लिए एक पारंपरिक क्षेत्र है लेकिन अब पहाड़ी की ओर बढ़ता जा रहा हैं। काला हिरण अधिकांश समय में रिज़र्व वन के बजाए पूर्व की समीपवर्ती बंजर भूमि में रहते हैं; और, काला हिरण जो पहले पश्चिमी दिशा पर देखा गया था, मवेशी दबाव के कारण नीचे आ गया है। अब ये पहाड़ी की पूर्वी अवस्थिति में और उत्तरी (उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा) भाग में अधिक देखे जाते हैं। रिज़र्व वन सघन और पहाड़ी है जिसमें चारे की उपलब्धता कम हो गई है। बंजर भूमि के आसपास के क्षेत्र में उनकी उपस्थिति के लिए बेहतर स्थान है क्योंकि वह अधिक खुले हैं और यह घास पट्टी और कुछ एक्सरोफाईट झाड़ियाँ हैं। परित्यक्त पत्थर की खदानों जलछिद्र रिज़र्व वन के बाहर का क्षेत्र पशुओं का लिए चारा और जल प्रदान करता है लेकिन काला हिरण के लिए छुपने का स्थान नहीं है। पूर्वी क्षेत्र की समीपवर्ती बंजर भूमि तीव्रता से घट रही है क्योंकि वह राजमार्ग के निकट निजी स्वामित्व की है। कृषि गैर-लाभदायक होने के कारण, आवासीय भूखंडों के रूप में तीव्रता से परिवर्तित हो रहा है; और, अभयारण्य में वनस्पति और जीवजन्तुओं की विविधता है जिसमें पक्षी, सरीसृप, स्तनधारी, उभयचर शामिल हैं। वनस्पति के कुछ उदाहरण वेल्वेल (अकाकिया ल्यूकोसेफाला (रोक्सब.) वाइल्ड.), कुडाइवेल (अकाकिया प्लानिफ्रन्स विइट एंड अर्न.), उस्लाई (अल्बिज़िया अमारा (रोक्सब.) बी बॉविइन), थानेरविट्टन किज़हुंग (एस्पैरागस रेसमोसस वाइल्ड.), कट्टू कानागंबरम (बरलेरिया प्रिओनाइटिस एल.) आदि हैं; जीवजंतु के कुछ उदाहरण ब्लैकबक ( इंडियन एंटिलो प ( एंटिलोप कर्विकाप्रा), चित्तीदार हिरण (एक्सिस- एक्सिस), सांभर (कर्वस यूनिकोलर), सियार (कैनिस ऑरियस), भारतीय लोमड़ी (वल्प्स बेंगलेंसिस), जंगल बिल्ली (फेलिस चॉउस ) आदि हैं; पक्षी के उदाहरण में व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर (हैल्सीन स्मरिनेसिस), रेड-व्हिस्कीड बुलबुल ( पायकोनोटुसोजोकोसस), पीफॉल (पावो क्रिस्टेटस), ग्रेटर कूकल (सेंट्रोपस सीनेन्सिस), भारतीय कूकू (क्यूकुलस माइक्रोप्रेटस), रेड-वेंटेड बुलबुल ( पायकोनोटस कैफेर) आदि शामिल हैं; सरीसृप के उदाहरण में कोलेगेल ग्राउंड गेको (गेकोलोलाको लेगलेसेन्सी), रॉक आगामा (साइमोफिलस डोरसलिस), रेट स्नेक (एलिफ एस्लोटेट), कोबरा (नजानाजा), रसेल वाइपर (दाबोआ रुसेली) आदि शामिल हैं; और, पारिस्थितिकी संवेदी जोन के अंतर्गत वल्लानाडू रिज़र्व वन में अधिकांश बंजर भूमि, उपनिवेश का छोटा भाग, कृषि भूमि का छोटा भाग और शेष भाग है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन का 10% से कम क्षेत्र कृषि भूमि है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन के छोटे क्षेत्रों में मानक पटाखे कारखाने का उद्योग है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन से परे शेष सभी क्षेत्र बंजर भूमि है, क्षेत्र की महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि है; अतः, अब, केन्द्रीय सरकार, पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 के नियम 5 के उपनियम (3) के साथ पठित पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (1986 का 29) की धारा 3 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के खंड (v) और खंड (xiv) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, तमिलनाडु राज्य में वल्लानाडू ब्लैकबक अभयारण्य की सीमा के चारों ओर शून्य ( उत्तरी दिशा, एन एच 7ए के कारण) किलोमीटर से 2.00 किलोमीटर तक विस्तारित क्षेत्र को पारिस्थितिकी संवेदी जोन (जिसे इसके पश्चात् इस अधिसूचना में पारिस्थितिकी संवेदी जोन कहा गया है), के रूप में अधिसूचित करती है, जिसके विवरण निम्नानुसार है, अर्थात् :1. पारिस्थितिकी संवेदी जोन का विस्तार और सीमा (1) पारिस्थितिकी संवेदी जोन का विस्तार वल्लानाडू ब्लैकबक अभयारण्य के चारों ओर शून्य (उत्तरी दिशा, एन एच 7ए के कारण) किलोमीटर से 2.00 किलोमीटर तक है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन का क्षेत्रफल 12.03 वर्ग किलोमीटर है। (2) पारिस्थितिकी संवेदी जोन की सीमा का वर्णन उपाबंध-I के रूप में उपाबद्ध है। (3) पारिस्थितिकी संवेदी जोन का सीमांकन करने वाले संरक्षित क्षेत्र के मानचित्र उपाबंध-IIक-ङ के रूप में उपाबद्ध है। (4) पारिस्थितिकी संवेदी जोन और संरक्षित क्षेत्र की सीमा के भू निर्देशांक उपाबंध III की सारणी (क) और (ख) में दी गई
भारत The Gazette of India असाधारण EXTRAORDINARY भाग II - खण्ड तीन - उप खण्ड PART II - Section तीन - Sub-section प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY नई दिल्ली, सोमवार, नवम्बर ग्यारह, दो हज़ार उन्नीस/कार्तिक बीस, एक हज़ार नौ सौ इकतालीस NEW DELHI, MONDAY, NOVEMBER ग्यारह, दो हज़ार उन्नीस/KARTIKA बीस, एक हज़ार नौ सौ इकतालीस पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय अधिसूचना नई दिल्ली, आठ नवम्बर, दो हज़ार उन्नीस का.आ. चार हज़ार पचहत्तर.-प्रारुप अधिसूचना भारत के राजपत्र, असाधारण, भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन, मंत्रालय की अधिसूचना सं. का.आ. तीन हज़ार चार सौ चालीस, तारीख बारह जुलाई, दो हज़ार अट्ठारह, द्वारा प्रकाशित की गई थी जिसमें ऐसे सभी व्यक्तियों से, जिनकी उससे प्रभावित होने की संभावना थी, उस तारीख से, जिसको उक्त अधिसूचना को अन्तर्विष्ट करने वाले राजपत्र की प्रतियां जनता को उपलब्ध करा दी गई थीं, साठ दिन की अवधि के भीतर आक्षेप और सुझाव आमंत्रित किए गए थे; और, उक्त प्रारूप अधिसूचना को अन्तर्विष्ट करने वाले राजपत्र की प्रतियां जनता को तारीख तेरह जुलाई, दो हज़ार अट्ठारह को उपलब्ध करा दी गई थी; और, प्रारुप अधिसूचना के उत्तर में व्यक्तियों और पणधारियों से कोई भी आक्षेप और सुझाव प्राप्त नहीं हुए; और, वल्लानाडू ब्लैकबक अभयारण्य थोथुकुडी वन संभाग के नियंत्रणाधीन थोथुकुडी जिला में एकमात्र रिज़र्व वन है। अभयारण्य का क्षेत्रफल सोलह.चार हज़ार एक सौ इक्कीस वर्ग किलोमीटर या एक हज़ार छः सौ इकतालीस.इक्कीस हेक्टेयर है। यह तिरुनेलवेली-थोथुकुडी राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट स्थित है। यह क्षेत्र जी. ओ. एमएस. सं. एक हज़ार अट्ठाईस तारीख अट्ठाईस.नौ.एक हज़ार नौ सौ सत्तासी के अनुसार ब्लैकबक अभयारण्य घोषित किया गया था और तमिलनाडु सरकार के राजपत्र में इक्कीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ सत्तासी, और थोथुकुडी जिला के राजपत्र में आठ अगस्त एक हज़ार नौ सौ छियानवे में प्रकाशित किया गया; और, ब्लैकबक एक संकटापन्न प्रजाति है और भारतीय उपमहाद्वीप के लिए स्थानिक है। विश्व संरक्षण संघ रेड डॉटा बुक के अनुसार, काला हिरण को वी यू स्थिति में निर्धारित किया गया है। वल्लानाडू रिज़र्व वन उपमहाद्वीप में दक्षिणीतम स्थान है जहां काला हिरण स्वाभाविक रूप से उपलब्ध है जो यह दर्शाता है कि एक निश्चिंत स्तर पर इसके संरक्षण की आवश्यकता है, क्योंकि विकास के दबाव को बनाए रखने के लिए आनुवांशिक रूप से संख्या कम होगी। वल्लानाडू रिज़र्व वन का विशाल परिवेश काला हिरण के लिए एक पारंपरिक क्षेत्र है लेकिन अब पहाड़ी की ओर बढ़ता जा रहा हैं। काला हिरण अधिकांश समय में रिज़र्व वन के बजाए पूर्व की समीपवर्ती बंजर भूमि में रहते हैं; और, काला हिरण जो पहले पश्चिमी दिशा पर देखा गया था, मवेशी दबाव के कारण नीचे आ गया है। अब ये पहाड़ी की पूर्वी अवस्थिति में और उत्तरी भाग में अधिक देखे जाते हैं। रिज़र्व वन सघन और पहाड़ी है जिसमें चारे की उपलब्धता कम हो गई है। बंजर भूमि के आसपास के क्षेत्र में उनकी उपस्थिति के लिए बेहतर स्थान है क्योंकि वह अधिक खुले हैं और यह घास पट्टी और कुछ एक्सरोफाईट झाड़ियाँ हैं। परित्यक्त पत्थर की खदानों जलछिद्र रिज़र्व वन के बाहर का क्षेत्र पशुओं का लिए चारा और जल प्रदान करता है लेकिन काला हिरण के लिए छुपने का स्थान नहीं है। पूर्वी क्षेत्र की समीपवर्ती बंजर भूमि तीव्रता से घट रही है क्योंकि वह राजमार्ग के निकट निजी स्वामित्व की है। कृषि गैर-लाभदायक होने के कारण, आवासीय भूखंडों के रूप में तीव्रता से परिवर्तित हो रहा है; और, अभयारण्य में वनस्पति और जीवजन्तुओं की विविधता है जिसमें पक्षी, सरीसृप, स्तनधारी, उभयचर शामिल हैं। वनस्पति के कुछ उदाहरण वेल्वेल वाइल्ड.), कुडाइवेल , उस्लाई बी बॉविइन), थानेरविट्टन किज़हुंग , कट्टू कानागंबरम आदि हैं; जीवजंतु के कुछ उदाहरण ब्लैकबक , चित्तीदार हिरण , सांभर , सियार , भारतीय लोमड़ी , जंगल बिल्ली आदि हैं; पक्षी के उदाहरण में व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर , रेड-व्हिस्कीड बुलबुल , पीफॉल , ग्रेटर कूकल , भारतीय कूकू , रेड-वेंटेड बुलबुल आदि शामिल हैं; सरीसृप के उदाहरण में कोलेगेल ग्राउंड गेको , रॉक आगामा , रेट स्नेक , कोबरा , रसेल वाइपर आदि शामिल हैं; और, पारिस्थितिकी संवेदी जोन के अंतर्गत वल्लानाडू रिज़र्व वन में अधिकांश बंजर भूमि, उपनिवेश का छोटा भाग, कृषि भूमि का छोटा भाग और शेष भाग है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन का दस% से कम क्षेत्र कृषि भूमि है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन के छोटे क्षेत्रों में मानक पटाखे कारखाने का उद्योग है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन से परे शेष सभी क्षेत्र बंजर भूमि है, क्षेत्र की महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि है; अतः, अब, केन्द्रीय सरकार, पर्यावरण नियम, एक हज़ार नौ सौ छियासी के नियम पाँच के उपनियम के साथ पठित पर्यावरण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ छियासी की धारा तीन की उपधारा और उपधारा के खंड और खंड द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, तमिलनाडु राज्य में वल्लानाडू ब्लैकबक अभयारण्य की सीमा के चारों ओर शून्य किलोमीटर से दो दशमलव शून्य किलोग्राममीटर तक विस्तारित क्षेत्र को पारिस्थितिकी संवेदी जोन , के रूप में अधिसूचित करती है, जिसके विवरण निम्नानुसार है, अर्थात् :एक. पारिस्थितिकी संवेदी जोन का विस्तार और सीमा पारिस्थितिकी संवेदी जोन का विस्तार वल्लानाडू ब्लैकबक अभयारण्य के चारों ओर शून्य किलोमीटर से दो दशमलव शून्य किलोग्राममीटर तक है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन का क्षेत्रफल बारह.तीन वर्ग किलोमीटर है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन की सीमा का वर्णन उपाबंध-I के रूप में उपाबद्ध है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन का सीमांकन करने वाले संरक्षित क्षेत्र के मानचित्र उपाबंध-IIक-ङ के रूप में उपाबद्ध है। पारिस्थितिकी संवेदी जोन और संरक्षित क्षेत्र की सीमा के भू निर्देशांक उपाबंध III की सारणी और में दी गई
स्टेट डेस्क/पटना। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव, पूर्वमंत्री एवं विधायक तेजप्रताप यादव एवं राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने देश की आज़ादी के लिये कुर्बानी देने बाले बलदानिओं को 73वें गणतंत्र दिवस पर नमन किया। साथ ही उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश उनकी कुर्बानियों को कभी नहीं भूलेगा और उनके सपनों के भारत के निर्माण के लिये हमसब संकल्पित हैं। उन्होंने इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित आज़ादी के लाखों शूरवीर, दीवानों को भी याद किया और कहा कि आज के दिन हमसब इस संकल्प को पुनः दोहराते हैं कि देश की आज़ादी और अंखडता की रक्षा करेंगे, देश मे अमन शांति, विश्वास एवम भाईचारा के माहौल को मजबूत करेंगे। हम सब मिलकर देश को प्रगति और विकास के शीर्ष पर पहुचायेंगे। हमारी पहचान विभिन्नता मे एकता की है इसे और मज़बूत बनाएँगे। जो लोग विकास के दौर मे पीछे रह गये हैं उन्हें भी सामाजिक न्याय की दौर मे शामिल कर उनके घरों मे शिक्षा और सत्ता मे भागीदारी की किरण को पहुंचाएंगे। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि इस महान त्योहार को मिल-जुलकर कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए मनाएं और ईश्वर से प्राथना करें कि वह इस महान त्योहार को हम सबके लिये मुबारक करे और कोविड जैसी महामारी से देश एवं दुनिया को छुटकारा मिले।
स्टेट डेस्क/पटना। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव, पूर्वमंत्री एवं विधायक तेजप्रताप यादव एवं राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने देश की आज़ादी के लिये कुर्बानी देने बाले बलदानिओं को तिहत्तरवें गणतंत्र दिवस पर नमन किया। साथ ही उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश उनकी कुर्बानियों को कभी नहीं भूलेगा और उनके सपनों के भारत के निर्माण के लिये हमसब संकल्पित हैं। उन्होंने इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित आज़ादी के लाखों शूरवीर, दीवानों को भी याद किया और कहा कि आज के दिन हमसब इस संकल्प को पुनः दोहराते हैं कि देश की आज़ादी और अंखडता की रक्षा करेंगे, देश मे अमन शांति, विश्वास एवम भाईचारा के माहौल को मजबूत करेंगे। हम सब मिलकर देश को प्रगति और विकास के शीर्ष पर पहुचायेंगे। हमारी पहचान विभिन्नता मे एकता की है इसे और मज़बूत बनाएँगे। जो लोग विकास के दौर मे पीछे रह गये हैं उन्हें भी सामाजिक न्याय की दौर मे शामिल कर उनके घरों मे शिक्षा और सत्ता मे भागीदारी की किरण को पहुंचाएंगे। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि इस महान त्योहार को मिल-जुलकर कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए मनाएं और ईश्वर से प्राथना करें कि वह इस महान त्योहार को हम सबके लिये मुबारक करे और कोविड जैसी महामारी से देश एवं दुनिया को छुटकारा मिले।
झारखंड : झारखंड विधानसभाओं का मॉनसून सत्र 22 जुलाई से 26 जुलाई तक आहूत है. लोकसभा चुनाव के बाद सदन का नजारा बदला हुआ नजर आएगा. सदन में सतापक्ष का बेंच के सामने ही विपक्ष बैठेगा, लेकिन दोनों पक्ष में सदस्यों की संख्या में बदलाव दिखेगा. सतापक्ष के मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी की जगह आजसू कोटे से ही रामचरण सहिस सदस्यों के सवालों का जवाब देंगे और विभाग की तमाम बातों को रखेंगे. दूसरी तरफ विपक्षी बेंच में भी ज्यादा ही बदलाव दिखेगा. जय भारत समानता पार्टी की विधायक गीता कोड़ा विधानसभा के सदन में नजर नहीं आएंगी. लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की सदस्य बनकर कमाऊ पुत्री की तरह कांग्रेस की इज्जत बचाते हुए गीता कोड़ा सिंहभूम से सांसद निर्वाचित हो गई है. कांग्रेस नेताओं की पहल पर लोकसभा चुनाव से कुछ माह पूर्व ही गीता कोड़ा ने सदस्यता ली थी. कांग्रेस पार्टी ने उन्हें सिंहभूम से एक सीट पक्की मान कर प्रत्याशी घोषित किया और फायदे में रही. क्योंकि गीता इस काबिल थी की केवल अपने बलबूते पर सीट निकाल ले और यह निर्णय सही साबित हुआ. मोदी की सुनामी लहर में भी गीता कोड़ा ने कांग्रेस का प्रदेश में खाता खुलवा दिया. उन्होंने न केवल कांग्रेस को संजीवनी दी बल्कि उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा को कड़े मुकाबले में हरा दिया. झारखंड का इस बार भी अजीब स्थिति से सामना होगा संयोग ही है कि विधानसभा में सदन की कार्रवाई के दौरान विपक्षी खेमा का बेंच और सतापक्ष खेमा का बेंच पर निलंबित विधायक नजर भी आएंगे और शायद अपने ही दल के खिलाफ आवाज भी बुलंद करेंगे. विधानसभा परिसर में भी इसका असर दिखेगा क्योंकि मांडू से झामुमो के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल पार्टी लाइन से इतर जाने के कारण निष्कासित किए गए हैं. फिलहाल यह आजसू या भाजपा के साथ खड़े दिख रहे हैं झामुमो का सदस्य रहते हुए जयप्रकाश भाई ने भाजपा और मोदी के रंग में रंगते हुए लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की. और वो पार्टी की नजरों पर चढ़ गए. झामुमो ने तत्काल कार्रवाई करते हुये उन्हें निलम्बित कर दिया था. जयप्रकाश भाई पटेल की नजर गिरिडीह सीट पर थी, लेकिन झामुमो से टिकट नहीं मिलने के कारण उन्होंने बगावत कर एनडीए की सभाओं, कार्यक्रमों और रोड शो में शामिल होकर साबित कर दिया की वे अपनी पैतृक पार्टी से तलाक लेने का मूड बना चुके थे. उधर, तमाड़ से आजसू पार्टी के विधायक विकास सिंह मुंडा को भी आजसू पार्टी ने निलंबित कर दिया गया. उनपर दलीय अनुशासन तोडऩे का आरोप है. बदली राजनीतिक परिस्थिति में मुंडा झामुमो की राह पर है, और चुनाव आते-आते पूरी तरह से झामुमो के साथ खड़े हो जाएंगे. फिलहाल झारखंड विधानसभा में वे आजसू के मंत्री पर निशाना साधने के साथ साथ आजसू पार्टी और सरकार के विरोध में सदन के भीतर खड़े दिखाई देंगे. कुल मिलाकर झारखंड की राजनीति में पहली बार 5 साल बहुमत के साथ किसी भी सरकार ने कार्यकाल पूरा किया है. लेकिन लगभग पौने पांच साल के कार्यकाल में विपक्ष के आक्रोश आंदोलन का हिस्सा बन आखरी सत्र में सुर्खियां बटोर लेंगे.
झारखंड : झारखंड विधानसभाओं का मॉनसून सत्र बाईस जुलाई से छब्बीस जुलाई तक आहूत है. लोकसभा चुनाव के बाद सदन का नजारा बदला हुआ नजर आएगा. सदन में सतापक्ष का बेंच के सामने ही विपक्ष बैठेगा, लेकिन दोनों पक्ष में सदस्यों की संख्या में बदलाव दिखेगा. सतापक्ष के मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी की जगह आजसू कोटे से ही रामचरण सहिस सदस्यों के सवालों का जवाब देंगे और विभाग की तमाम बातों को रखेंगे. दूसरी तरफ विपक्षी बेंच में भी ज्यादा ही बदलाव दिखेगा. जय भारत समानता पार्टी की विधायक गीता कोड़ा विधानसभा के सदन में नजर नहीं आएंगी. लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की सदस्य बनकर कमाऊ पुत्री की तरह कांग्रेस की इज्जत बचाते हुए गीता कोड़ा सिंहभूम से सांसद निर्वाचित हो गई है. कांग्रेस नेताओं की पहल पर लोकसभा चुनाव से कुछ माह पूर्व ही गीता कोड़ा ने सदस्यता ली थी. कांग्रेस पार्टी ने उन्हें सिंहभूम से एक सीट पक्की मान कर प्रत्याशी घोषित किया और फायदे में रही. क्योंकि गीता इस काबिल थी की केवल अपने बलबूते पर सीट निकाल ले और यह निर्णय सही साबित हुआ. मोदी की सुनामी लहर में भी गीता कोड़ा ने कांग्रेस का प्रदेश में खाता खुलवा दिया. उन्होंने न केवल कांग्रेस को संजीवनी दी बल्कि उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा को कड़े मुकाबले में हरा दिया. झारखंड का इस बार भी अजीब स्थिति से सामना होगा संयोग ही है कि विधानसभा में सदन की कार्रवाई के दौरान विपक्षी खेमा का बेंच और सतापक्ष खेमा का बेंच पर निलंबित विधायक नजर भी आएंगे और शायद अपने ही दल के खिलाफ आवाज भी बुलंद करेंगे. विधानसभा परिसर में भी इसका असर दिखेगा क्योंकि मांडू से झामुमो के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल पार्टी लाइन से इतर जाने के कारण निष्कासित किए गए हैं. फिलहाल यह आजसू या भाजपा के साथ खड़े दिख रहे हैं झामुमो का सदस्य रहते हुए जयप्रकाश भाई ने भाजपा और मोदी के रंग में रंगते हुए लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की. और वो पार्टी की नजरों पर चढ़ गए. झामुमो ने तत्काल कार्रवाई करते हुये उन्हें निलम्बित कर दिया था. जयप्रकाश भाई पटेल की नजर गिरिडीह सीट पर थी, लेकिन झामुमो से टिकट नहीं मिलने के कारण उन्होंने बगावत कर एनडीए की सभाओं, कार्यक्रमों और रोड शो में शामिल होकर साबित कर दिया की वे अपनी पैतृक पार्टी से तलाक लेने का मूड बना चुके थे. उधर, तमाड़ से आजसू पार्टी के विधायक विकास सिंह मुंडा को भी आजसू पार्टी ने निलंबित कर दिया गया. उनपर दलीय अनुशासन तोडऩे का आरोप है. बदली राजनीतिक परिस्थिति में मुंडा झामुमो की राह पर है, और चुनाव आते-आते पूरी तरह से झामुमो के साथ खड़े हो जाएंगे. फिलहाल झारखंड विधानसभा में वे आजसू के मंत्री पर निशाना साधने के साथ साथ आजसू पार्टी और सरकार के विरोध में सदन के भीतर खड़े दिखाई देंगे. कुल मिलाकर झारखंड की राजनीति में पहली बार पाँच साल बहुमत के साथ किसी भी सरकार ने कार्यकाल पूरा किया है. लेकिन लगभग पौने पांच साल के कार्यकाल में विपक्ष के आक्रोश आंदोलन का हिस्सा बन आखरी सत्र में सुर्खियां बटोर लेंगे.
प्रयागराज प्रयागराज में एक जिम ट्रेनर लड़की की दबंगों ने बुरी तरह पिटाई की है। डंडों और लात घूसों से पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है । इस वीडियो में कुछ लोग जिम के अंदर घुसते दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद एक लड़की को कुछ लड़के मिलकर पीटते हैं। यह घटना प्रयागराज के करेली इलाके के एक जिम की बताई जा रही है। पिटाई का वीडियो जिम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। जिस लड़की की पिटाई हो रही है वह जिम की ट्रेनर है। उसने अपने साथ हुई मारपीट की शिकायत प्रयागराज के करेली थाने में दर्ज कराई है। प्रयागराज करेली इलाके में पिछले कई सालों से ग्लोबल जिम चल रहा और इस जिम में आने वाले को ट्रेनिंग राजश्री मिश्रा देती हैं । हर दिन की तरह वह अपने जिम में लड़कियों को कसरत की बारीकियों के बारे में बता रही थीं। इसी दौरान जिम में ट्रेनी जीतू की किसी बात को लेकर जिम ट्रेनर से कहासुनी हो गई। उसके बाद जीतू ने फोन करके अपने भाई और उसके कुछ साथियों को बुला लिया। जीतू और उसके साथियों ने मिलकर जिम ट्रेनर की पिटाई कर दी। जिम ट्रेनर के अनुसार वह बार-बार कहती रही कि मैं कस्टमर के साथ बदतमीजी क्यों करूंगी , फिर भी अगर मेरी कोई बात बुरी लग गई तो उसके लिए माफी चाहती हूं। वह माफी मांगती रही लेकिन उसकी एक भी नहीं सुनी गई और उसकी पिटाई के बाद उसे धमकाते हुए आरोपी वहां से चले गए। पीड़िता जिम ट्रेनर ने पुलिस में की शिकायत ग्लोबल जिम में हुई इस घटना के बाद पीड़िता जिम ट्रेनर ने मारपीट की शिकायत प्रयागराज के करेली थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और जिम ट्रेनर की शिकायत के आधार पर करेली थाने में दो लोगों के खिलाफ एफ आईआर दर्ज की है। पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी। वहीं इस मारपीट के बाद जिम ट्रेनर काफी डरी हुई है और मीडिया के सामने आने से कतरा रही है। जिम ट्रेनर एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है और अपने परिवार को आर्थिक तंगी दूर करने के लिए जिम में काम करती है। जिम ट्रेनर को अपनी नौकरी जाने का खतरा भी सता रहा है। इस वजह से वह आपसी समझौते से मामले को खत्म करना चाहती है।
प्रयागराज प्रयागराज में एक जिम ट्रेनर लड़की की दबंगों ने बुरी तरह पिटाई की है। डंडों और लात घूसों से पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है । इस वीडियो में कुछ लोग जिम के अंदर घुसते दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद एक लड़की को कुछ लड़के मिलकर पीटते हैं। यह घटना प्रयागराज के करेली इलाके के एक जिम की बताई जा रही है। पिटाई का वीडियो जिम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। जिस लड़की की पिटाई हो रही है वह जिम की ट्रेनर है। उसने अपने साथ हुई मारपीट की शिकायत प्रयागराज के करेली थाने में दर्ज कराई है। प्रयागराज करेली इलाके में पिछले कई सालों से ग्लोबल जिम चल रहा और इस जिम में आने वाले को ट्रेनिंग राजश्री मिश्रा देती हैं । हर दिन की तरह वह अपने जिम में लड़कियों को कसरत की बारीकियों के बारे में बता रही थीं। इसी दौरान जिम में ट्रेनी जीतू की किसी बात को लेकर जिम ट्रेनर से कहासुनी हो गई। उसके बाद जीतू ने फोन करके अपने भाई और उसके कुछ साथियों को बुला लिया। जीतू और उसके साथियों ने मिलकर जिम ट्रेनर की पिटाई कर दी। जिम ट्रेनर के अनुसार वह बार-बार कहती रही कि मैं कस्टमर के साथ बदतमीजी क्यों करूंगी , फिर भी अगर मेरी कोई बात बुरी लग गई तो उसके लिए माफी चाहती हूं। वह माफी मांगती रही लेकिन उसकी एक भी नहीं सुनी गई और उसकी पिटाई के बाद उसे धमकाते हुए आरोपी वहां से चले गए। पीड़िता जिम ट्रेनर ने पुलिस में की शिकायत ग्लोबल जिम में हुई इस घटना के बाद पीड़िता जिम ट्रेनर ने मारपीट की शिकायत प्रयागराज के करेली थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और जिम ट्रेनर की शिकायत के आधार पर करेली थाने में दो लोगों के खिलाफ एफ आईआर दर्ज की है। पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी। वहीं इस मारपीट के बाद जिम ट्रेनर काफी डरी हुई है और मीडिया के सामने आने से कतरा रही है। जिम ट्रेनर एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है और अपने परिवार को आर्थिक तंगी दूर करने के लिए जिम में काम करती है। जिम ट्रेनर को अपनी नौकरी जाने का खतरा भी सता रहा है। इस वजह से वह आपसी समझौते से मामले को खत्म करना चाहती है।
सुल्तानपुर। बेसिक शिक्षा विभाग के 69,000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दूसरे चरण में नियुक्ति पत्र पाए 824 शिक्षकों का वेतन बिना विद्यालय में कार्यभार ग्रहण किए बनेगा। इन शिक्षकों को 3. 46 करोड़ रुपये वेतन के रूप में सिर्फ हाजिरी लगाने के लिए मिलेंगे। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में 69,000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत दूसरे चरण में 824 शिक्षकों को पिछले पांच दिसंबर को नियुक्ति पत्र मिला था। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनाने के बाद सात दिसंबर से नवनियुक्त शिक्षकों ने अपनी ज्वॉइनिंग भी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में दे दी थी। शासन की ओर से विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया नहीं होने की वजह से शिक्षकों को विद्यालय नहीं दिया जा सका है। बीते एक माह से रोजाना सुबह शिक्षकों को बीएसए कार्यालय में हाजिरी देनी पड़ रही है। शिक्षकों को नियुक्त हुए एक माह का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक शासन इन शिक्षकों को विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया का कोई आदेश नहीं दे पाया। दूर-दराज से आने वाले शिक्षक सुबह बीएसए कार्यालय में बनाए गए काउंटरों पर अपने नाम के सामने हस्ताक्षर करते हैं और घर चले जाते हैं। शिक्षक कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं। इसलिए इनका वेतन भी मिलना तय है। जब तक विद्यालय आवंटन नहीं होता, तब तक उन्हें बिना काम किए ही वेतन मिलता रहेगा। बशर्ते उन्हें बीएसए कार्यालय में अपनी उपस्थिति निरंतर दर्ज करानी होगी। बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी सीएम शुक्ल ने बताया कि लगभग 42,000 प्रति शिक्षक के हिसाब से वेतन मिलेगा। 69,000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के पहले चरण में नियुक्त 610 अध्यापकों के शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज हो गई है। बीएसए कार्यालय में दो सेट में शैक्षिक अभिलेखों को जमा कराया जा रहा है। जिन बोर्डो/विश्वविद्यालयों में सत्यापन के लिए शुल्क लगता है, वहां के लिए शिक्षकों से डिमांड ड्रॉफ्ट भी लिया जा रहा है। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शिक्षकों को वेतन रिलीज कर दिया जाएगा। 69,000 शिक्षक भर्ती में नियुक्त पहले चरण के शिक्षकों के विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया शासन स्तर से ही कराई गई थी। शासन के आदेश के बाद विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया निर्देश के मुताबिक ही अपनाई जाएगी।
सुल्तानपुर। बेसिक शिक्षा विभाग के उनहत्तर,शून्य शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दूसरे चरण में नियुक्ति पत्र पाए आठ सौ चौबीस शिक्षकों का वेतन बिना विद्यालय में कार्यभार ग्रहण किए बनेगा। इन शिक्षकों को तीन. छियालीस करोड़ रुपये वेतन के रूप में सिर्फ हाजिरी लगाने के लिए मिलेंगे। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में उनहत्तर,शून्य शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत दूसरे चरण में आठ सौ चौबीस शिक्षकों को पिछले पांच दिसंबर को नियुक्ति पत्र मिला था। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनाने के बाद सात दिसंबर से नवनियुक्त शिक्षकों ने अपनी ज्वॉइनिंग भी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में दे दी थी। शासन की ओर से विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया नहीं होने की वजह से शिक्षकों को विद्यालय नहीं दिया जा सका है। बीते एक माह से रोजाना सुबह शिक्षकों को बीएसए कार्यालय में हाजिरी देनी पड़ रही है। शिक्षकों को नियुक्त हुए एक माह का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक शासन इन शिक्षकों को विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया का कोई आदेश नहीं दे पाया। दूर-दराज से आने वाले शिक्षक सुबह बीएसए कार्यालय में बनाए गए काउंटरों पर अपने नाम के सामने हस्ताक्षर करते हैं और घर चले जाते हैं। शिक्षक कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं। इसलिए इनका वेतन भी मिलना तय है। जब तक विद्यालय आवंटन नहीं होता, तब तक उन्हें बिना काम किए ही वेतन मिलता रहेगा। बशर्ते उन्हें बीएसए कार्यालय में अपनी उपस्थिति निरंतर दर्ज करानी होगी। बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी सीएम शुक्ल ने बताया कि लगभग बयालीस,शून्य प्रति शिक्षक के हिसाब से वेतन मिलेगा। उनहत्तर,शून्य शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के पहले चरण में नियुक्त छः सौ दस अध्यापकों के शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज हो गई है। बीएसए कार्यालय में दो सेट में शैक्षिक अभिलेखों को जमा कराया जा रहा है। जिन बोर्डो/विश्वविद्यालयों में सत्यापन के लिए शुल्क लगता है, वहां के लिए शिक्षकों से डिमांड ड्रॉफ्ट भी लिया जा रहा है। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शिक्षकों को वेतन रिलीज कर दिया जाएगा। उनहत्तर,शून्य शिक्षक भर्ती में नियुक्त पहले चरण के शिक्षकों के विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया शासन स्तर से ही कराई गई थी। शासन के आदेश के बाद विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया निर्देश के मुताबिक ही अपनाई जाएगी।
टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने सोमवार को अपने ट्विटर हैंडल पर एक तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर में वह अपने बेटे अगस्त्य के साथ स्वीमिंग पूल में नजर आ रहे हैं। ट्विटर पर शेयर की गई इन दो तस्वीर में हार्दिक अपने बेटे अगस्त्य को गोदी में उठाए हुए हैं। इससे पहले भी हार्दिक ने अपने बेटे के साथ पहली हवाई यात्रा की तस्वीर साझा की थी, जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा था, 'मेरे बेटे की पहली हवाई यात्रा। ' दरअसल, हाल ही में हार्दिक पांड्या के पिता का निधन हो गया था। पिता के निधन के हार्दिक के बड़े भाई क्रुणाल पांड्या भी सैय्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी को बीच में ही छोड़कर वापस घर चले गए थे। अब हार्दिक पांड्या इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच खेलने की तैयारी में हैं। हालांकि, यह देखना होगा कि उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है या नहीं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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गैर-धात्विक थोक सामग्री निर्माण उद्योग में आवश्यक घटक हैं। रेत, कुचल पत्थर ठोस के निर्माण में इस्तेमाल और कंक्रीट प्रबलित, मोर्टार। इन सामग्रियों को जमीन उपचार, योजना, भूनिर्माण कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है। सड़क में इमारत मलबे roadbed underlayment परत के रूप में प्रयोग किया जाता है। कुछ बजरी के प्रकार आसपास के क्षेत्रों को परिष्कृत करने के लिए उपयोग किया जाता है। सभी ढीला निर्माण सामग्री कई मानदंडों के अनुसार वर्गीकृत कर रहे हैंः - मूल; - भौतिक यांत्रिक गुणों (घनत्व, स्थायित्व, ठंड प्रतिरोध, पानी तेज); - आकार और अनाज के आकार; - रेडियोधर्मिता का स्तर, कार्बनिक और अकार्बनिक अशुद्धियों की उपस्थिति। प्रकृति मूल बजरी प्रारंभिक सामग्री पर निर्भर करता है। से मलबे भेद चट्टानों, अयस्क मलबे, जो पुनर्चक्रण सामग्री और माध्यमिक धातु निर्माण कचरे (ठोस, ईंटों) पेराई करके प्राप्त किया जाता है। मलबे की भौतिक यांत्रिक गुणों सीधे इसके मूल सामग्री पर निर्भर हैं। सबसे लोकप्रिय सामग्री है, जो उच्च शक्ति चट्टानों पर आधारित होते हैं - यांत्रिक कार्रवाई से विरूपण और विनाश के लिए प्रतिरोधी। अनाज आकार बजरी कई प्रकार में विभाजित हैः छोड़ने वाले बच्चों (5 मिमी), मध्यम (5-25 मिमी) और बड़े (25-40 मिमी)। रेत मूल प्राकृतिक और कृत्रिम में विभाजित हैं। प्राकृतिक मुक्त बह सामग्री रेत या रेत और बजरी जमा के विकास में निर्मित है। घटना के आधार पर भेद समुद्र, नदी या पहाड़ रेत। पहले दो प्रकार अधिक गोल अनाज और अशुद्धियों को कम सामग्री खनन खदानों में सामग्री की तुलना में कर रहे हैं। रेत, बड़े मध्यम और छोटे आकार में छर्रों में बांटा गया है। प्राकृतिक गैर धातु थोक सामग्री के उत्पादन के कई चरणों शामिल हैः - खनन; - प्रसंस्करण और शोधन (यदि आवश्यक); - भंडारण। लगभग थोक सामग्री के सभी प्रकार खुला विधि से खनन कर रहे हैं। गड्ढे रेत उत्खनन या बुलडोजर द्वारा खनन किया जाता है। पहाड़ रेत, दोष और विभिन्न आकार के दानों का की बड़ी राशि के कारण के उत्पादन में, यह अतिरिक्त संसाधन और फ़ीड संवर्धन की आवश्यकता है। इस प्रक्रिया को धोने और सामग्री की छंटाई में होते हैं। सीमेंट के आधार पर निर्माण के मिश्रण के निर्माण में इस्तेमाल सबसे छोटा अंश के उत्पादन, रेत संभव अतिरिक्त पीसने रोलर कोल्हू के लिए। प्राकृतिक रेत, घोटाले होने का खतरा सामग्री को संदर्भित करता है तथापि के दौरान इसके उत्पादन अक्सर हॉपर थोक सामग्री के लिए प्रयोग किया जाता है - एक डिवाइस एक औंधा छोटा कर दिया पिरामिड के रूप में पकड़े और कण सामग्री की आपूर्ति के लिए। नदी रेत जलाशयों में जल रास्ता खनन किया जाता है। हाइड्रोलिक पंप के साथ बार्ज तट पर हाइड्रोलिक मेरा डंप में नदी के तल से कच्चे माल पंप। पानी नदी में वापस बहती है, और रेत के ढेर में रहता है। बहुत घने निचली सतह पर अतिरिक्त बाल्टी लिफ्ट का इस्तेमाल किया। असमान रूप से प्राकृतिक रेत की जमा की भौगोलिक स्थिति है, जो कुछ क्षेत्रों में इस सामग्री की कमी हो सकती है। कृत्रिम रेत का उत्पादन बड़े पैमाने पर आवश्यक जरूरतों को उपलब्ध कराने के द्वारा इस समस्या को हल करने की अनुमति देता। कृत्रिम कण सामग्री कठोर चट्टानों और अन्य कच्चे माल के स्रोतों को कुचल द्वारा उत्पादित। सामग्री के मूल पर निर्भर करता है कृत्रिम रेत के निम्नलिखित प्रकार हैंः - कुचल दिया। अम्लीय और सजावटी रचनाओं में प्रयुक्त। कुचल संगमरमर, एक प्रकार का खनिज, बेसाल्ट या घने धातु slags द्वारा उत्पादित। - प्रकाश रेत, कार्बनिक और अकार्बनिक। थोक सामग्री कुस्र्न, scoria, tuff, कृषि और लकड़ी कचरे से प्राप्त की है। - अवसादी रेत - चूना पत्थर पीसने का परिणाम है। - विस्तारित मिट्टी रेत कुचल चट्टानों द्वारा प्राप्त keramzite - उत्पादन ताप सामग्री, के लिए एक पूरक इंसुलेटिंग हल्के ठोस और मोर्टार। - लावा से पोरस रेत। कुचल खुली खदान खदानों विभिन्न चट्टानों में उत्पादित पत्थर के उत्पादन के लिए कच्चे माल। जमा और खनन रॉक की विशेषताओं के आधार पर जलाशय विकास के रास्ते चुना जाता है। विशेष रूप से के लिए हार्ड रॉक प्रारंभिक नष्ट प्रदर्शन किया। पूर्व drilled कुओं प्रभारी रखी है। रॉक के विस्फोट टुकड़े कि आगे की प्रक्रिया के लिए प्राप्त कर रहे हैं में टूट जाता है। निकाले कच्चे माल पीसने जो क्रशरों के विभिन्न प्रकार (रोल, जबड़े क्रशरों, प्रभाव, शंकु) के किया जाता है की आपूर्ति की। टेकनीक का चयन अंतिम उत्पाद के प्रकार पर निर्भर करता है। पेराई के बाद, मलबे के लिए तैयार छंटाई के लिए आता है। स्क्रीनिंग सामग्री की विधि अनाज आकार के अनुसार भागों में बांटा गया है। स्थापना अलग व्यास का छेद के साथ एक बड़े कई चलनी है। छोटी से छोटी अंश स्क्रीन के सभी स्तरों से गुजरता है, नाबदान में बसने। कुचल पत्थर अंश पर छँटाई प्रक्रिया दोष मिट्टी को हटाने के लिए धोया जा सकता है। वहाँ इन सामग्रियों के एक काफी बड़े समूह है, लेकिन उन के बीच मांग में सबसे अधिक निम्नलिखितः - ग्रेनाइट - magmatic मूल के सबसे टिकाऊ मलबे। क्वार्ट्ज, अभ्रक और स्फतीय - यह पर आधारित है। सबसे आम रंग - लाल, गुलाबी, ग्रे। क्योंकि इसके मूल स्थान, इस सामग्री का विकल्प है, विशेष रूप से ध्यान रेडियोधर्मिता का प्रमाण पत्र दिया जाना चाहिए। शारीरिक और यांत्रिक गुणों, मलबे का सबसे लोकप्रिय रूप के कारण। - बजरी। इस सामग्री को रॉक चट्टानों के आधार। दो तरह से मलबे के इस प्रकार का उत्पादन - चट्टानों (कुचल बजरी) और नदी या समुद्र जमीन (गोल बजरी) की स्क्रीनिंग कुचल। ग्रेनाइट के बल पर ज्यादा अवर लेकिन सस्ता कम पृष्ठभूमि विकिरण है। - क्वार्टजाइट। क्वार्ट्ज रॉक संरचनाओं के थोक सामग्री। शक्ति ग्रेनाइट से हीन नहीं है, लेकिन यह थोड़ा पृष्ठभूमि विकिरण है। मूल संरचना और आकर्षक colorings सजाने में बहुत लोकप्रिय करने के लिए धन्यवाद। - चूना पत्थर। तलछटी चट्टानों कुचल द्वारा उत्पादित। मलबे के अन्य सभी प्रकार से हीन बल पर। डोलोमाइट और चूने के आधार। अनुकूल अंतर - कम कीमत। गैर धातु थोक माल की आवेदनों की रेंज हैं बहुत बड़ी, लगभग सभी निर्माण और काम के अन्य प्रकार में पर्याप्त मांग के चरणों को कवरः - कंक्रीट की तैयारी विभिन्न ब्रांडों के। - ठोस उत्पादों का उत्पादन। - सड़क निर्माण। - उपकरण रेलवे, रनवे। - भूदृश्य। - पशुधन। - पर बर्फीले सड़क सतहों उपकरण सुरक्षात्मक परत। रेल (लंबी दूरी की), सड़क और नदी परिवहन से थोक माल परिवहन। स्वतः निर्वहन के साथ विशेष खुला वैगनों tipping द्वारा - रेल परिवहन के लिए सबसे उपयुक्त ट्रक कार, ट्रक, कारों डंप। रेत और बजरी सड़क डंप ट्रकों के परिवहन के लिए सबसे उपयुक्त हैं। नदी नौकाओं द्वारा थोक माल की डिलिवरी - सबसे सस्ता परिवहन विकल्प है, लेकिन केवल एक करीबी जलमार्ग स्थान के मामले में प्रासंगिक है। गाड़ी में आदेश नुकसान से बचने के लिए अन्य वाहनों में इन सामग्रियों डालना करने के लिए वितरण के स्थान के रास्ते पर अनुशंसित नहीं है। निष्कर्षण के बाद और, यदि आवश्यक हो, रूप है जो यह उपभोक्ता गोदाम के लिए भेजा देखता में रेत बजरी संवर्धन। प्रत्येक प्रकार के और अलग से संग्रहीत थोक माल की आंशिक रचना। संग्रहण क्षेत्रों चिकनी होना चाहिए, वे वर्षा का पानी इकट्ठा नहीं करना चाहिए। यदि आवश्यक हो, भूजल से अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करें। सर्दियों में, सामग्री बर्फ और बर्फ से मुक्त हैं। सबसे अधिक बार सड़क मार्ग से भंडारण से गैर धातु सामग्री की आपूर्ति। अपवाद निजी शाखा लाइनों के साथ बड़े उद्यमों हैं। अंतिम उपभोक्ता भंडारण सुविधाजनक पहुँच सड़कों के साथ सुसज्जित क्षेत्र के लिए सामग्री की सुरक्षित और सुविधाजनक लदान के लिए। आम तौर पर एकतरफा अंगूठी यातायात का आयोजन किया। आसान लोड करने के लिए और थोक सामग्री के लिए इस्तेमाल किया साइलो घोटाले को रोकने के लिए। कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था के लिए रात में प्रदान की जाती है।
गैर-धात्विक थोक सामग्री निर्माण उद्योग में आवश्यक घटक हैं। रेत, कुचल पत्थर ठोस के निर्माण में इस्तेमाल और कंक्रीट प्रबलित, मोर्टार। इन सामग्रियों को जमीन उपचार, योजना, भूनिर्माण कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है। सड़क में इमारत मलबे roadbed underlayment परत के रूप में प्रयोग किया जाता है। कुछ बजरी के प्रकार आसपास के क्षेत्रों को परिष्कृत करने के लिए उपयोग किया जाता है। सभी ढीला निर्माण सामग्री कई मानदंडों के अनुसार वर्गीकृत कर रहे हैंः - मूल; - भौतिक यांत्रिक गुणों ; - आकार और अनाज के आकार; - रेडियोधर्मिता का स्तर, कार्बनिक और अकार्बनिक अशुद्धियों की उपस्थिति। प्रकृति मूल बजरी प्रारंभिक सामग्री पर निर्भर करता है। से मलबे भेद चट्टानों, अयस्क मलबे, जो पुनर्चक्रण सामग्री और माध्यमिक धातु निर्माण कचरे पेराई करके प्राप्त किया जाता है। मलबे की भौतिक यांत्रिक गुणों सीधे इसके मूल सामग्री पर निर्भर हैं। सबसे लोकप्रिय सामग्री है, जो उच्च शक्ति चट्टानों पर आधारित होते हैं - यांत्रिक कार्रवाई से विरूपण और विनाश के लिए प्रतिरोधी। अनाज आकार बजरी कई प्रकार में विभाजित हैः छोड़ने वाले बच्चों , मध्यम और बड़े । रेत मूल प्राकृतिक और कृत्रिम में विभाजित हैं। प्राकृतिक मुक्त बह सामग्री रेत या रेत और बजरी जमा के विकास में निर्मित है। घटना के आधार पर भेद समुद्र, नदी या पहाड़ रेत। पहले दो प्रकार अधिक गोल अनाज और अशुद्धियों को कम सामग्री खनन खदानों में सामग्री की तुलना में कर रहे हैं। रेत, बड़े मध्यम और छोटे आकार में छर्रों में बांटा गया है। प्राकृतिक गैर धातु थोक सामग्री के उत्पादन के कई चरणों शामिल हैः - खनन; - प्रसंस्करण और शोधन ; - भंडारण। लगभग थोक सामग्री के सभी प्रकार खुला विधि से खनन कर रहे हैं। गड्ढे रेत उत्खनन या बुलडोजर द्वारा खनन किया जाता है। पहाड़ रेत, दोष और विभिन्न आकार के दानों का की बड़ी राशि के कारण के उत्पादन में, यह अतिरिक्त संसाधन और फ़ीड संवर्धन की आवश्यकता है। इस प्रक्रिया को धोने और सामग्री की छंटाई में होते हैं। सीमेंट के आधार पर निर्माण के मिश्रण के निर्माण में इस्तेमाल सबसे छोटा अंश के उत्पादन, रेत संभव अतिरिक्त पीसने रोलर कोल्हू के लिए। प्राकृतिक रेत, घोटाले होने का खतरा सामग्री को संदर्भित करता है तथापि के दौरान इसके उत्पादन अक्सर हॉपर थोक सामग्री के लिए प्रयोग किया जाता है - एक डिवाइस एक औंधा छोटा कर दिया पिरामिड के रूप में पकड़े और कण सामग्री की आपूर्ति के लिए। नदी रेत जलाशयों में जल रास्ता खनन किया जाता है। हाइड्रोलिक पंप के साथ बार्ज तट पर हाइड्रोलिक मेरा डंप में नदी के तल से कच्चे माल पंप। पानी नदी में वापस बहती है, और रेत के ढेर में रहता है। बहुत घने निचली सतह पर अतिरिक्त बाल्टी लिफ्ट का इस्तेमाल किया। असमान रूप से प्राकृतिक रेत की जमा की भौगोलिक स्थिति है, जो कुछ क्षेत्रों में इस सामग्री की कमी हो सकती है। कृत्रिम रेत का उत्पादन बड़े पैमाने पर आवश्यक जरूरतों को उपलब्ध कराने के द्वारा इस समस्या को हल करने की अनुमति देता। कृत्रिम कण सामग्री कठोर चट्टानों और अन्य कच्चे माल के स्रोतों को कुचल द्वारा उत्पादित। सामग्री के मूल पर निर्भर करता है कृत्रिम रेत के निम्नलिखित प्रकार हैंः - कुचल दिया। अम्लीय और सजावटी रचनाओं में प्रयुक्त। कुचल संगमरमर, एक प्रकार का खनिज, बेसाल्ट या घने धातु slags द्वारा उत्पादित। - प्रकाश रेत, कार्बनिक और अकार्बनिक। थोक सामग्री कुस्र्न, scoria, tuff, कृषि और लकड़ी कचरे से प्राप्त की है। - अवसादी रेत - चूना पत्थर पीसने का परिणाम है। - विस्तारित मिट्टी रेत कुचल चट्टानों द्वारा प्राप्त keramzite - उत्पादन ताप सामग्री, के लिए एक पूरक इंसुलेटिंग हल्के ठोस और मोर्टार। - लावा से पोरस रेत। कुचल खुली खदान खदानों विभिन्न चट्टानों में उत्पादित पत्थर के उत्पादन के लिए कच्चे माल। जमा और खनन रॉक की विशेषताओं के आधार पर जलाशय विकास के रास्ते चुना जाता है। विशेष रूप से के लिए हार्ड रॉक प्रारंभिक नष्ट प्रदर्शन किया। पूर्व drilled कुओं प्रभारी रखी है। रॉक के विस्फोट टुकड़े कि आगे की प्रक्रिया के लिए प्राप्त कर रहे हैं में टूट जाता है। निकाले कच्चे माल पीसने जो क्रशरों के विभिन्न प्रकार के किया जाता है की आपूर्ति की। टेकनीक का चयन अंतिम उत्पाद के प्रकार पर निर्भर करता है। पेराई के बाद, मलबे के लिए तैयार छंटाई के लिए आता है। स्क्रीनिंग सामग्री की विधि अनाज आकार के अनुसार भागों में बांटा गया है। स्थापना अलग व्यास का छेद के साथ एक बड़े कई चलनी है। छोटी से छोटी अंश स्क्रीन के सभी स्तरों से गुजरता है, नाबदान में बसने। कुचल पत्थर अंश पर छँटाई प्रक्रिया दोष मिट्टी को हटाने के लिए धोया जा सकता है। वहाँ इन सामग्रियों के एक काफी बड़े समूह है, लेकिन उन के बीच मांग में सबसे अधिक निम्नलिखितः - ग्रेनाइट - magmatic मूल के सबसे टिकाऊ मलबे। क्वार्ट्ज, अभ्रक और स्फतीय - यह पर आधारित है। सबसे आम रंग - लाल, गुलाबी, ग्रे। क्योंकि इसके मूल स्थान, इस सामग्री का विकल्प है, विशेष रूप से ध्यान रेडियोधर्मिता का प्रमाण पत्र दिया जाना चाहिए। शारीरिक और यांत्रिक गुणों, मलबे का सबसे लोकप्रिय रूप के कारण। - बजरी। इस सामग्री को रॉक चट्टानों के आधार। दो तरह से मलबे के इस प्रकार का उत्पादन - चट्टानों और नदी या समुद्र जमीन की स्क्रीनिंग कुचल। ग्रेनाइट के बल पर ज्यादा अवर लेकिन सस्ता कम पृष्ठभूमि विकिरण है। - क्वार्टजाइट। क्वार्ट्ज रॉक संरचनाओं के थोक सामग्री। शक्ति ग्रेनाइट से हीन नहीं है, लेकिन यह थोड़ा पृष्ठभूमि विकिरण है। मूल संरचना और आकर्षक colorings सजाने में बहुत लोकप्रिय करने के लिए धन्यवाद। - चूना पत्थर। तलछटी चट्टानों कुचल द्वारा उत्पादित। मलबे के अन्य सभी प्रकार से हीन बल पर। डोलोमाइट और चूने के आधार। अनुकूल अंतर - कम कीमत। गैर धातु थोक माल की आवेदनों की रेंज हैं बहुत बड़ी, लगभग सभी निर्माण और काम के अन्य प्रकार में पर्याप्त मांग के चरणों को कवरः - कंक्रीट की तैयारी विभिन्न ब्रांडों के। - ठोस उत्पादों का उत्पादन। - सड़क निर्माण। - उपकरण रेलवे, रनवे। - भूदृश्य। - पशुधन। - पर बर्फीले सड़क सतहों उपकरण सुरक्षात्मक परत। रेल , सड़क और नदी परिवहन से थोक माल परिवहन। स्वतः निर्वहन के साथ विशेष खुला वैगनों tipping द्वारा - रेल परिवहन के लिए सबसे उपयुक्त ट्रक कार, ट्रक, कारों डंप। रेत और बजरी सड़क डंप ट्रकों के परिवहन के लिए सबसे उपयुक्त हैं। नदी नौकाओं द्वारा थोक माल की डिलिवरी - सबसे सस्ता परिवहन विकल्प है, लेकिन केवल एक करीबी जलमार्ग स्थान के मामले में प्रासंगिक है। गाड़ी में आदेश नुकसान से बचने के लिए अन्य वाहनों में इन सामग्रियों डालना करने के लिए वितरण के स्थान के रास्ते पर अनुशंसित नहीं है। निष्कर्षण के बाद और, यदि आवश्यक हो, रूप है जो यह उपभोक्ता गोदाम के लिए भेजा देखता में रेत बजरी संवर्धन। प्रत्येक प्रकार के और अलग से संग्रहीत थोक माल की आंशिक रचना। संग्रहण क्षेत्रों चिकनी होना चाहिए, वे वर्षा का पानी इकट्ठा नहीं करना चाहिए। यदि आवश्यक हो, भूजल से अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करें। सर्दियों में, सामग्री बर्फ और बर्फ से मुक्त हैं। सबसे अधिक बार सड़क मार्ग से भंडारण से गैर धातु सामग्री की आपूर्ति। अपवाद निजी शाखा लाइनों के साथ बड़े उद्यमों हैं। अंतिम उपभोक्ता भंडारण सुविधाजनक पहुँच सड़कों के साथ सुसज्जित क्षेत्र के लिए सामग्री की सुरक्षित और सुविधाजनक लदान के लिए। आम तौर पर एकतरफा अंगूठी यातायात का आयोजन किया। आसान लोड करने के लिए और थोक सामग्री के लिए इस्तेमाल किया साइलो घोटाले को रोकने के लिए। कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था के लिए रात में प्रदान की जाती है।
नई दिल्ली । CEQUIN द्वारा दिल्ली डायनामोज़ और फुटबॉल इण्डिया के सहयोग से आयोजित अपनी तरह की पहली अंडर-13 दिल्ली गर्ल्स स्कूल फुटबॉल लीग के पहले संस्करण का सफल समापन करते हुए, एक महीने तक चले इस टूर्नामेन्ट के विजेताओं का ऐलान किया गया। फाइनल मैच का आयोजन संस्कृति स्कूल एवं शिव नादर स्कूल के बीच हुआ, जिसमें संस्कृति स्कूल ने शिव नादर को 3-2 से हराया। जानी मानी हस्तियों जैसे राहुल बोस, मीनाक्षी लेखी, ससंद सदस्य तथा रॉड हिल्टन, भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया के उप-उच्चायुक्त ने इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। लीग में चार ज़ोनों से 32 स्कूलों ने हिस्सा लिया। पिछले एक साल में CEQUIN ने दिल्ली के 25 सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए फुटबॉल और लीडरशिप कैम्प आयोजित किए हैं। 10 स्कूल टीमों को चुन कर गर्ल्स फुटबॉल टीम बनाई गई जिन्होंने लीग में हिस्सा लिया। लीग में सरकारी एवं निजी स्कूलों से लड़कियों ने हिस्सा लिया, जिन्हें प्रतिस्पर्धा के दौरान पाठ्येत्तर,सामाजिक एवं शैक्षणिक अनुभव पाने का मौका मिला। फुटबॉल दिल्ली द्वारा इस लीग के माध्यम से एक्सीलेन्स एकेडमी के लिए चुने गए 25 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने और फुटबॉल में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा। यह पहल भारत में महिला फुटबॉल के लिए राष्ट्रीय गठबंधन मिशन 2028 के मद्देनज़र महिला फुटबॉल को प्रोत्साहित करेगी और प्रतिभाशाली महिला फुटबॉलर्स को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कामयाबी हासिल करने में मदद करेगी। CEQUIN के बारे मेंः 2009 में स्थापित जय जवान और जय किसान की युनिट सेंटर फॉर इक्विटी एण्ड इन्क्लूज़न एक एनजीओ है जो सीमांत वर्गों विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों के समान अधिकारों के लिए काम करती है। यह उनके लिए हिंसा मुक्त जीवन, उनकी क्षमता विकास, संसाधनों के नियन्त्रण आदि को बढ़ावा देती है। यह महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करन वाले कई क्षेत्रों में सक्रिय है जैसे हिंसा, नेतृत्व, आर्थिक विकास, सशक्तीकरण एवं कल्याण। इन उद्देश्यों को हासिल करने के लिए ब्म्फन्प्छ किशोरियों, महिलाओं एवं अन्य हितधारकों के साथ काम करती है। वर्तमान में वे दिल्ली की झुग्गियों और हरियाणा के मेवात ज़िले में सक्रिय है। दिल्ली डायनामोज़ फुटबॉल क्लब के बारे मेंः डीडीएफसी दिल्ली में स्थित भारतीय पेशेवर फुटबॉल क्लब है जो इण्डियन सुपर लीग में प्रतिस्पर्धा करता है तथा उत्तरी भारत का एकमात्र आईएसएल क्लब है। यह 300 मिलियन से ज़्यादा लोगों को प्रभावित करता है।
नई दिल्ली । CEQUIN द्वारा दिल्ली डायनामोज़ और फुटबॉल इण्डिया के सहयोग से आयोजित अपनी तरह की पहली अंडर-तेरह दिल्ली गर्ल्स स्कूल फुटबॉल लीग के पहले संस्करण का सफल समापन करते हुए, एक महीने तक चले इस टूर्नामेन्ट के विजेताओं का ऐलान किया गया। फाइनल मैच का आयोजन संस्कृति स्कूल एवं शिव नादर स्कूल के बीच हुआ, जिसमें संस्कृति स्कूल ने शिव नादर को तीन-दो से हराया। जानी मानी हस्तियों जैसे राहुल बोस, मीनाक्षी लेखी, ससंद सदस्य तथा रॉड हिल्टन, भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया के उप-उच्चायुक्त ने इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। लीग में चार ज़ोनों से बत्तीस स्कूलों ने हिस्सा लिया। पिछले एक साल में CEQUIN ने दिल्ली के पच्चीस सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए फुटबॉल और लीडरशिप कैम्प आयोजित किए हैं। दस स्कूल टीमों को चुन कर गर्ल्स फुटबॉल टीम बनाई गई जिन्होंने लीग में हिस्सा लिया। लीग में सरकारी एवं निजी स्कूलों से लड़कियों ने हिस्सा लिया, जिन्हें प्रतिस्पर्धा के दौरान पाठ्येत्तर,सामाजिक एवं शैक्षणिक अनुभव पाने का मौका मिला। फुटबॉल दिल्ली द्वारा इस लीग के माध्यम से एक्सीलेन्स एकेडमी के लिए चुने गए पच्चीस प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने और फुटबॉल में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा। यह पहल भारत में महिला फुटबॉल के लिए राष्ट्रीय गठबंधन मिशन दो हज़ार अट्ठाईस के मद्देनज़र महिला फुटबॉल को प्रोत्साहित करेगी और प्रतिभाशाली महिला फुटबॉलर्स को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कामयाबी हासिल करने में मदद करेगी। CEQUIN के बारे मेंः दो हज़ार नौ में स्थापित जय जवान और जय किसान की युनिट सेंटर फॉर इक्विटी एण्ड इन्क्लूज़न एक एनजीओ है जो सीमांत वर्गों विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों के समान अधिकारों के लिए काम करती है। यह उनके लिए हिंसा मुक्त जीवन, उनकी क्षमता विकास, संसाधनों के नियन्त्रण आदि को बढ़ावा देती है। यह महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करन वाले कई क्षेत्रों में सक्रिय है जैसे हिंसा, नेतृत्व, आर्थिक विकास, सशक्तीकरण एवं कल्याण। इन उद्देश्यों को हासिल करने के लिए ब्म्फन्प्छ किशोरियों, महिलाओं एवं अन्य हितधारकों के साथ काम करती है। वर्तमान में वे दिल्ली की झुग्गियों और हरियाणा के मेवात ज़िले में सक्रिय है। दिल्ली डायनामोज़ फुटबॉल क्लब के बारे मेंः डीडीएफसी दिल्ली में स्थित भारतीय पेशेवर फुटबॉल क्लब है जो इण्डियन सुपर लीग में प्रतिस्पर्धा करता है तथा उत्तरी भारत का एकमात्र आईएसएल क्लब है। यह तीन सौ मिलियन से ज़्यादा लोगों को प्रभावित करता है।
नगर संवाददाता, गाजियाबाद शहर के कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल को दुरुस्त रखने का इंतजाम नगर निगम ने कर लिया है। ट्रैफिक सिग्नल के मेंटिनेंस का कार्य बीओटी पर दे दिया गया है। इसका फायदा यह होगा कि सिग्नल के खराब होने के तुरंत बाद इन्हें ठीक कर दिया जाएगा। नगर निगम सूत्रों ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस की ओर से शहर के प्रमुख छह चौराहों की ट्रैफिक सिग्नल को ठीक कराने के लिए लेटर लिखा गया था। एसपी ट्रैफिक किरन यादव का कहना है कि नगर निगम को खराब सिग्नलों को तुरंत ही ठीक करना चाहिए। बार-बार कई सिग्नल के खराब होने के कारण ट्रैफिक जाम की भी समस्या पैदा होती रही है। इस तरह की समस्याओं के निस्तारण के लिए नगर निगम ने स्थायी समाधान कर लिया है। हापुड़ चुंगी, संजय नगर कट, एनएच 24 लाल कुंआ, चौधरी मोड, नया बस अड्डा, सिहानी चुंगी चौराहों के ट्रैफिक सिग्नल को मेंटिनेंस करने के लिए नगर निगम ने इन्हें बीओटी पर दे दिया है। इनके रखरखाव के बदले नगर निगम संबंधित कंपनी को विज्ञापन लगाने का अधिकार दिया है। निगम का दावा है कि जैसे ही कोई सिग्नल खराब होगा उसे तुरंत संबंधित कंपनी को ठीक करना होगा।
नगर संवाददाता, गाजियाबाद शहर के कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल को दुरुस्त रखने का इंतजाम नगर निगम ने कर लिया है। ट्रैफिक सिग्नल के मेंटिनेंस का कार्य बीओटी पर दे दिया गया है। इसका फायदा यह होगा कि सिग्नल के खराब होने के तुरंत बाद इन्हें ठीक कर दिया जाएगा। नगर निगम सूत्रों ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस की ओर से शहर के प्रमुख छह चौराहों की ट्रैफिक सिग्नल को ठीक कराने के लिए लेटर लिखा गया था। एसपी ट्रैफिक किरन यादव का कहना है कि नगर निगम को खराब सिग्नलों को तुरंत ही ठीक करना चाहिए। बार-बार कई सिग्नल के खराब होने के कारण ट्रैफिक जाम की भी समस्या पैदा होती रही है। इस तरह की समस्याओं के निस्तारण के लिए नगर निगम ने स्थायी समाधान कर लिया है। हापुड़ चुंगी, संजय नगर कट, एनएच चौबीस लाल कुंआ, चौधरी मोड, नया बस अड्डा, सिहानी चुंगी चौराहों के ट्रैफिक सिग्नल को मेंटिनेंस करने के लिए नगर निगम ने इन्हें बीओटी पर दे दिया है। इनके रखरखाव के बदले नगर निगम संबंधित कंपनी को विज्ञापन लगाने का अधिकार दिया है। निगम का दावा है कि जैसे ही कोई सिग्नल खराब होगा उसे तुरंत संबंधित कंपनी को ठीक करना होगा।
पीएम मोदी ने नई दिल्ली से दोपहर में डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद मोदी ने एक हेलिकॉप्टर से सीधे बोगीबील के लिए उड़ान भरी और नदी के दक्षिणी किनारे से 4. 94 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर पुल का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को असम में डिब्रूगढ़ में बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी पर देश के सबसे लंबे रेल-रोड पुल का उद्घाटन किया है। पीएम मोदी ने नई दिल्ली से दोपहर में डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद मोदी ने एक हेलिकॉप्टर से सीधे बोगीबील के लिए उड़ान भरी और नदी के दक्षिणी किनारे से 4. 94 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर पुल का उद्घाटन किया। लोगों का अभिवादन करने के बाद मोदी कार से उतरे और असम के राज्यपाल जगदीश मुखी और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के साथ पुल पर कुछ मीटर तक चले। प्रधानमंत्री ने ब्रहमपुत्र के उत्तरी किनारे पर अपने काफिले के साथ पुल को पार किया जहां वह तिनसुकिया-नाहरलागुन इंटरसिटी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायेंगे। - ये पुल पुरी तरह वेल्डिंग के जरिये बनाया गया है। - दुनिया का सबसे लंबा संवर्द्धित (इंक्रीमेंटल लांच) इस्पात पुल भी है। - ब्रह्मपुत्र नदी पर बना यह 4. 94 किलोमीटर लंबा डबल-डेकर रणनीतिक पुल है। -बोगीबील पुल असम के ऊपरी हिस्से और अरुणाचल प्रदेश में रहने वाले करीब 50 लाख लोगों को बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध कराएगा। - एचसीसी के अनुसार इस पुल से राष्ट्रीय राजमार्गों एनएच-37 और एनएच-52 के बीच परिवहन दूरी 10 घंटे कम हो जाएगी। इससे लागत, समय और ईंधन की बचत होगी। - यह ट्रेन एक सप्ताह में पांच दिन चलेगी। - इसके क्रियान्वयन में देरी के कारण इस परियोजना की लागत 85 प्रतिशत तक बढ़ गई। - इसकी अनुमानित लागत 3,230. 02 करोड़ रुपये थी जो बढ़कर 5,960 करोड़ रुपये हो गई। - सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- कि इस पुल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे सैनिकों को दक्षिणी किनारे से उत्तरी किनारे जाने में आसानी होगी। -बताया जा रहा है कि रेल-सड़क पुल बोगीबील की मियाद कम से कम 120 वर्ष है। -बोगीबील पुल चीन के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है और सेना को इस पुल से जरूरत पड़ने पर खासी मदद मिलेगी। (समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)
पीएम मोदी ने नई दिल्ली से दोपहर में डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद मोदी ने एक हेलिकॉप्टर से सीधे बोगीबील के लिए उड़ान भरी और नदी के दक्षिणी किनारे से चार. चौरानवे किलोग्राममीटर लंबे डबल-डेकर पुल का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को असम में डिब्रूगढ़ में बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी पर देश के सबसे लंबे रेल-रोड पुल का उद्घाटन किया है। पीएम मोदी ने नई दिल्ली से दोपहर में डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद मोदी ने एक हेलिकॉप्टर से सीधे बोगीबील के लिए उड़ान भरी और नदी के दक्षिणी किनारे से चार. चौरानवे किलोग्राममीटर लंबे डबल-डेकर पुल का उद्घाटन किया। लोगों का अभिवादन करने के बाद मोदी कार से उतरे और असम के राज्यपाल जगदीश मुखी और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के साथ पुल पर कुछ मीटर तक चले। प्रधानमंत्री ने ब्रहमपुत्र के उत्तरी किनारे पर अपने काफिले के साथ पुल को पार किया जहां वह तिनसुकिया-नाहरलागुन इंटरसिटी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायेंगे। - ये पुल पुरी तरह वेल्डिंग के जरिये बनाया गया है। - दुनिया का सबसे लंबा संवर्द्धित इस्पात पुल भी है। - ब्रह्मपुत्र नदी पर बना यह चार. चौरानवे किलोग्राममीटर लंबा डबल-डेकर रणनीतिक पुल है। -बोगीबील पुल असम के ऊपरी हिस्से और अरुणाचल प्रदेश में रहने वाले करीब पचास लाख लोगों को बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध कराएगा। - एचसीसी के अनुसार इस पुल से राष्ट्रीय राजमार्गों एनएच-सैंतीस और एनएच-बावन के बीच परिवहन दूरी दस घंटाटे कम हो जाएगी। इससे लागत, समय और ईंधन की बचत होगी। - यह ट्रेन एक सप्ताह में पांच दिन चलेगी। - इसके क्रियान्वयन में देरी के कारण इस परियोजना की लागत पचासी प्रतिशत तक बढ़ गई। - इसकी अनुमानित लागत तीन,दो सौ तीस. दो करोड़ रुपये थी जो बढ़कर पाँच,नौ सौ साठ करोड़ रुपये हो गई। - सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- कि इस पुल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे सैनिकों को दक्षिणी किनारे से उत्तरी किनारे जाने में आसानी होगी। -बताया जा रहा है कि रेल-सड़क पुल बोगीबील की मियाद कम से कम एक सौ बीस वर्ष है। -बोगीबील पुल चीन के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है और सेना को इस पुल से जरूरत पड़ने पर खासी मदद मिलेगी।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने आज शाम को कॉमेडियन भारती सिंह Comedian Bharti Singh Arrested को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में भारती और उनके पति हर्ष ने गांजा लेने की बात कुबूल कर ली है। भारती के पति से अभी पूछताछ की जा रही है। भारती के प्रोडक्शन ऑफिस और घर से 86.5 ग्राम गांजा भी बरामद किया गया है। आप को बता दें कि फेसम टीवी कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति के घर (NCB) नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने छापा मारा था। बताया जा रहा है कि भारती सिंह (Bharti Singh) पर उनके पति हर्ष लिंबाचिया (Harsh Limbachiyaa) के साथ ड्रग्स लेने का आरोप लगा है। एनसीबी की टीम को यह जानकारी अपने सीक्रेट सोर्सेस द्वारा पता पड़ी थी, जिसके बाद उन्होंने भारती के घर छापा मारा। फिलहाल छापेमारी की कार्रवाई जारी है। यह रेड NCB के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने की है। इस रेड के बीच दोनों को समन किया गया है। सूत्रों ने बताया की सर्चिंग के दौरान एनसीबी को भारती सिंह के घर से (संदिग्ध पदार्थ) गांजा मिला है। NCB ने बताया है कि एजेंसी द्वारा अंधेरी, लोखंडवाला और वर्सोवा क्षेत्र सहित तीन अलग-अलग स्थानों पर छापे मारे जा रहे हैं।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने आज शाम को कॉमेडियन भारती सिंह Comedian Bharti Singh Arrested को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में भारती और उनके पति हर्ष ने गांजा लेने की बात कुबूल कर ली है। भारती के पति से अभी पूछताछ की जा रही है। भारती के प्रोडक्शन ऑफिस और घर से छियासी दशमलव पाँच ग्राम गांजा भी बरामद किया गया है। आप को बता दें कि फेसम टीवी कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति के घर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने छापा मारा था। बताया जा रहा है कि भारती सिंह पर उनके पति हर्ष लिंबाचिया के साथ ड्रग्स लेने का आरोप लगा है। एनसीबी की टीम को यह जानकारी अपने सीक्रेट सोर्सेस द्वारा पता पड़ी थी, जिसके बाद उन्होंने भारती के घर छापा मारा। फिलहाल छापेमारी की कार्रवाई जारी है। यह रेड NCB के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने की है। इस रेड के बीच दोनों को समन किया गया है। सूत्रों ने बताया की सर्चिंग के दौरान एनसीबी को भारती सिंह के घर से गांजा मिला है। NCB ने बताया है कि एजेंसी द्वारा अंधेरी, लोखंडवाला और वर्सोवा क्षेत्र सहित तीन अलग-अलग स्थानों पर छापे मारे जा रहे हैं।
You Searched For "स्ट्रॉबेरी" मजबूत और चमकदार दांत न सिर्फ खूबसूरती में चांद लगाते हैं बल्कि अच्छी सेहत की भी निशानी होते हैं। यह बात तो सब जानते हैं कि दांतों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम रिच फूड्स खाने की सलाह दी जाती है। स्ट्रॉबेरी क्रंबल रेसिपी एक ऐसी डिश है जिसे आप कभी भी बना सकते हैं. इसे बनाना बहुत ही आसान है. आप नए साल के जश्न के लिए इस डिश को बना सकते हैं.
You Searched For "स्ट्रॉबेरी" मजबूत और चमकदार दांत न सिर्फ खूबसूरती में चांद लगाते हैं बल्कि अच्छी सेहत की भी निशानी होते हैं। यह बात तो सब जानते हैं कि दांतों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम रिच फूड्स खाने की सलाह दी जाती है। स्ट्रॉबेरी क्रंबल रेसिपी एक ऐसी डिश है जिसे आप कभी भी बना सकते हैं. इसे बनाना बहुत ही आसान है. आप नए साल के जश्न के लिए इस डिश को बना सकते हैं.
अमेरिका में फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के पास एक फुट ओवरब्रिज के ढह जाने से उसमें दबकर चार लोगों की मौत हो गई. वहीं कई वाहन उसके मलबे में दब गए. अमेरिका के मियामी में फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में बना एक नव निर्मित पैदल यात्री पुल ढह गया जिसमें चार लोगों की मौत हो गई है. जानकारी के मुताबिक इस हादसे में 8 कारें चपेट में आ गईं और उसमें बैठे लोगों की मौत हो गई. कई जख्मी लोगों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. जानकारी के मुताबिक यह पुल नया था जिसे शनिवार को ही स्थापित किया गया था. हादसे के बाद बचाव के लिए मौके पर फायर ट्रक, पुलिस और अन्य कई आपातकालीन गाड़ियां पहुंचीं. हादसे के बाद एक छात्र ने ट्विटर पर हादसे की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि कुछ दिनों पहले ही मेरे स्कूल की तरफ से यह पुल बनकर तैयार हुआ था जो कि अब गिर गया है. मेरे साथ रहने वाले दोस्त और मैंने इसके गिरने की आवाज सुनी और हम दौड़कर बालकनी में गए. फ़िलहाल जांच की जा रही हो और मलबे को हटाने काम जोरों पर है,ताकि यदि कोई मलबे में दबा हो तो उसे जल्दी से बाहर निकाल लिया जाये. साथ ही ओवरब्रिज के ढह जाने के कारणों का भी पता लगाया जा रहा है .
अमेरिका में फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के पास एक फुट ओवरब्रिज के ढह जाने से उसमें दबकर चार लोगों की मौत हो गई. वहीं कई वाहन उसके मलबे में दब गए. अमेरिका के मियामी में फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में बना एक नव निर्मित पैदल यात्री पुल ढह गया जिसमें चार लोगों की मौत हो गई है. जानकारी के मुताबिक इस हादसे में आठ कारें चपेट में आ गईं और उसमें बैठे लोगों की मौत हो गई. कई जख्मी लोगों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. जानकारी के मुताबिक यह पुल नया था जिसे शनिवार को ही स्थापित किया गया था. हादसे के बाद बचाव के लिए मौके पर फायर ट्रक, पुलिस और अन्य कई आपातकालीन गाड़ियां पहुंचीं. हादसे के बाद एक छात्र ने ट्विटर पर हादसे की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि कुछ दिनों पहले ही मेरे स्कूल की तरफ से यह पुल बनकर तैयार हुआ था जो कि अब गिर गया है. मेरे साथ रहने वाले दोस्त और मैंने इसके गिरने की आवाज सुनी और हम दौड़कर बालकनी में गए. फ़िलहाल जांच की जा रही हो और मलबे को हटाने काम जोरों पर है,ताकि यदि कोई मलबे में दबा हो तो उसे जल्दी से बाहर निकाल लिया जाये. साथ ही ओवरब्रिज के ढह जाने के कारणों का भी पता लगाया जा रहा है .
विद्युत कोयला तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार बिजली की पहुंच और मांग में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बहुपक्षीय रणनीति पर बल दे रही है। श्री गोयल आज यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक सम्मेलन 2016 में वैश्विक साझेदारी के जरिये भारत को ऊर्जावान बनाने के बारे में आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। श्री गोयल ने कहा कि समग्र रणनीति में ऊर्जा क्षमता बढ़ाना, नवीकरणीय ऊर्जा पर बल और सतत वृद्धि सुनिश्चित करना शामिल है। श्री गोयल ने कहा कि हमारी प्रथम प्राथमिकता देश में गरीब से गरीब लोगों तक बिजली पहुंचाने की है और मुझे विश्वास है कि अगले वर्ष तक हम सभी गांव में बिजली ला देंगे। हमारा लक्ष्य 2019 तक प्रत्येक घर में बिजली पहुंचना है। औद्योगिक शुल्कों में कमी के बारे में श्री गोयल ने कहा कि अकुशलता की समस्या से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं। बिजली क्षेत्र के सुधार कार्यक्रम उदय से 2019 से सालाना 180,000 करोड़ रुपये की बचत होगी और इस बचत से शुल्क में कटौती में मदद मिलेगी। वर्ष 2015-16 की 9 उपलब्धियों की चर्चा करते हुए श्री गोयल ने कहा कि 2,800 गांव में बिजली देने के लक्ष्य की तुलना में 18,452 बिना बिजली वाले गांव में से 7,108 गांवों में बिजली दी गई है। ईईएसएल द्वारा 9 करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब वितरित किए गए हैं और इसमें 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पवन ऊर्जा क्षमता में अब तक का सबसे अधिक 3,200 मेगावॉट जोड़ा गया है। 24,171 मेगावॉट पारंपरिक बिजली जोड़ी गई है। पावर ग्रीड कारपोरेशन ने 39 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि करते हुए 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को चालू किया है। एक वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये मूल्य की ट्रांसमिशन बोली प्रक्रिया शुरू की गई है। श्री गोयल ने बताया कि देश में कोयले का बचत भंडार है। हमने एक वर्ष में 42 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया है। यह अब तक का सबसे अधिक है। हमने दो वर्षों में 74 मिलियन टन कोयला उत्पादन बढ़ाया है। 8.6 प्रतिशत वृद्धि दर के साथ कोल इंडिया ने 536.5 मिलियन कोयला उत्पादन किया है। यह 1988 के बाद से सबसे अधिक है। वर्ष में 21 जीडब्ल्यू से अधिक की सौर परियोजनाओं के लिए बोली प्रक्रिया शुरू की गई। श्री गोयल ने कहा कि हमारा बल बिजली की मांग बढ़ाने, पन बिजली विकसित करने और राज्य के अंदर ट्रांसमिशन बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा कि ब्रेक डाउन की समस्या से निपटने के लिए प्रणाली में बाहुल्यता लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र के लिए सार्वजनिक -निजी साझेदारी केंद्र बिन्दु में है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत 2017 तक 20 हजार मेगावॉट सौर ऊर्जा का लक्ष्य हासिल कर लेगा और 2022 तक 100 गीगावॉट का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। वैश्विक स्पर्धा तथा प्रौद्योगिकी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बारे में श्री गोयल ने कहा कि अमेरिका, जापान तथा ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों के साथ सरकार स्तर पर बातचीत के बाद अब सरकार से कारोबारी मंच तक संवाद होने लगा है। वैश्विक स्तर पर सहयोग के लिए भारत द्वारा शुरू किया गया अंतरराष्ट्रीय सौर गठजोर (आईएसए) प्रमुख कदम है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के लिए हम सरल, विश्वसनीय और मैत्रीपूर्ण नियामक ढांचा बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, क्योंकि अंततः भारत को विकास की राह पर उद्यमी ही ले जाएंगे।
विद्युत कोयला तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार बिजली की पहुंच और मांग में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बहुपक्षीय रणनीति पर बल दे रही है। श्री गोयल आज यहां भारतीय उद्योग परिसंघ के वार्षिक सम्मेलन दो हज़ार सोलह में वैश्विक साझेदारी के जरिये भारत को ऊर्जावान बनाने के बारे में आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। श्री गोयल ने कहा कि समग्र रणनीति में ऊर्जा क्षमता बढ़ाना, नवीकरणीय ऊर्जा पर बल और सतत वृद्धि सुनिश्चित करना शामिल है। श्री गोयल ने कहा कि हमारी प्रथम प्राथमिकता देश में गरीब से गरीब लोगों तक बिजली पहुंचाने की है और मुझे विश्वास है कि अगले वर्ष तक हम सभी गांव में बिजली ला देंगे। हमारा लक्ष्य दो हज़ार उन्नीस तक प्रत्येक घर में बिजली पहुंचना है। औद्योगिक शुल्कों में कमी के बारे में श्री गोयल ने कहा कि अकुशलता की समस्या से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं। बिजली क्षेत्र के सुधार कार्यक्रम उदय से दो हज़ार उन्नीस से सालाना एक सौ अस्सी,शून्य करोड़ रुपये की बचत होगी और इस बचत से शुल्क में कटौती में मदद मिलेगी। वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह की नौ उपलब्धियों की चर्चा करते हुए श्री गोयल ने कहा कि दो,आठ सौ गांव में बिजली देने के लक्ष्य की तुलना में अट्ठारह,चार सौ बावन बिना बिजली वाले गांव में से सात,एक सौ आठ गांवों में बिजली दी गई है। ईईएसएल द्वारा नौ करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब वितरित किए गए हैं और इसमें एक सौ पचास प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पवन ऊर्जा क्षमता में अब तक का सबसे अधिक तीन,दो सौ मेगावॉट जोड़ा गया है। चौबीस,एक सौ इकहत्तर मेगावॉट पारंपरिक बिजली जोड़ी गई है। पावर ग्रीड कारपोरेशन ने उनतालीस प्रतिशत वार्षिक वृद्धि करते हुए तीस,शून्य करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को चालू किया है। एक वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये मूल्य की ट्रांसमिशन बोली प्रक्रिया शुरू की गई है। श्री गोयल ने बताया कि देश में कोयले का बचत भंडार है। हमने एक वर्ष में बयालीस मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया है। यह अब तक का सबसे अधिक है। हमने दो वर्षों में चौहत्तर मिलियन टन कोयला उत्पादन बढ़ाया है। आठ.छः प्रतिशत वृद्धि दर के साथ कोल इंडिया ने पाँच सौ छत्तीस.पाँच मिलियन कोयला उत्पादन किया है। यह एक हज़ार नौ सौ अठासी के बाद से सबसे अधिक है। वर्ष में इक्कीस जीडब्ल्यू से अधिक की सौर परियोजनाओं के लिए बोली प्रक्रिया शुरू की गई। श्री गोयल ने कहा कि हमारा बल बिजली की मांग बढ़ाने, पन बिजली विकसित करने और राज्य के अंदर ट्रांसमिशन बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा कि ब्रेक डाउन की समस्या से निपटने के लिए प्रणाली में बाहुल्यता लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र के लिए सार्वजनिक -निजी साझेदारी केंद्र बिन्दु में है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत दो हज़ार सत्रह तक बीस हजार मेगावॉट सौर ऊर्जा का लक्ष्य हासिल कर लेगा और दो हज़ार बाईस तक एक सौ गीगावॉट का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। वैश्विक स्पर्धा तथा प्रौद्योगिकी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बारे में श्री गोयल ने कहा कि अमेरिका, जापान तथा ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों के साथ सरकार स्तर पर बातचीत के बाद अब सरकार से कारोबारी मंच तक संवाद होने लगा है। वैश्विक स्तर पर सहयोग के लिए भारत द्वारा शुरू किया गया अंतरराष्ट्रीय सौर गठजोर प्रमुख कदम है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के लिए हम सरल, विश्वसनीय और मैत्रीपूर्ण नियामक ढांचा बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, क्योंकि अंततः भारत को विकास की राह पर उद्यमी ही ले जाएंगे।
भी वस्तुमें पीछेसे नहीं आते, वे वस्तुके धर्म ही हैं और हमेशह वस्तुके साथ ही रहते हैं। वे वस्तुको छोड़कर जुदे २ नहीं रहते। उपरोक्त प्रश्न तब ही उठ सकता है और उसमें वतलाया हुआ दूपण भी तब ही लागु पड़ सकता है कि जब वस्तुसे वे उत्पाद वगैरह सर्वथा जदे हो और व समस्त वस्तुमात्रमें फिरसे उत्पन्न होते हो। परन्तु यहाँपर वस्तुस्थिति वैसी नहीं है, अतः उपरोक्त प्रश्न या एक भी दूपण लागू नहीं पड़ सकता । इस विषय में हम यह विदित करते हैं कि जो वस्तु उत्पत्तिरूप, स्थितिरूप और विनाशरूप हो वही अस्तित्व धारण कर सकती है और वैसी ही वस्तु अस्थित्व धारण करनेके योग्य है । अतः हमारे इस कथनमें किसी भी प्रकारके दूपण या प्रश्नको स्थान ही नहीं मिल सकता कोई भी पदार्थ अपने निजत्पको नष्ट नहीं कर सकता और उसमें नवीन निजत्व भी नहीं प्राता, अर्थात् मूल द्रव्यकी अपेक्षासे किसी वस्तुकी उत्पत्ति या विनाश नहीं हो सकता । जैसे घटका मूलरूप मट्टी है, यदि अब वह घड़ा फूट जाय तथापि मट्टीका नाश नहीं हो सकता, वैसे ही वह मट्टीरूप होनेसे उसमें यह कुछ नवीन नहीं आया। याने घटके परिवर्तित होते हुए अनेक रुपान्तरोंमें उसका मूलरूप सट्टी कायम ही मालूम दिया करती है, अतः यह मानना चाहिये कि मूलद्रव्यका कदापि नाश नहीं हो सकता । परन्तु जो परिवर्तन होता है वह मात्र उसके थाकारों में ही हुआ करता है । कदाचित् कोई यो कहे कि जैसे एक दफा नख उतराये वाद वह फिर या जाता है और उस वक्त हमें यह मालूम देता है कि यह नख वही है कि जो पहले था, वैसे ही मूल द्रव्य भी परिवर्तित हुआ ही करता है परन्तु उसके रूप वगैरह एकसरीखे होनेसे हम उस नखके समान भ्रमित बनते हैं कि यह चही मूलद्रव्य है । अर्थात् नखके समान ही मूलद्रव्यका भी नाश हो जाता है अतः मूलद्रव्यको स्थायी कैसे माना जाय ? इस कथनका उत्तर इस प्रकार हैनखका उदाहरण सर्वथा असत्य है, इसलिये वह यहाँपर चरितार्थ ही नहीं हो सकता। क्योंकि यह बात सव ही जानते हैं कि
भी वस्तुमें पीछेसे नहीं आते, वे वस्तुके धर्म ही हैं और हमेशह वस्तुके साथ ही रहते हैं। वे वस्तुको छोड़कर जुदे दो नहीं रहते। उपरोक्त प्रश्न तब ही उठ सकता है और उसमें वतलाया हुआ दूपण भी तब ही लागु पड़ सकता है कि जब वस्तुसे वे उत्पाद वगैरह सर्वथा जदे हो और व समस्त वस्तुमात्रमें फिरसे उत्पन्न होते हो। परन्तु यहाँपर वस्तुस्थिति वैसी नहीं है, अतः उपरोक्त प्रश्न या एक भी दूपण लागू नहीं पड़ सकता । इस विषय में हम यह विदित करते हैं कि जो वस्तु उत्पत्तिरूप, स्थितिरूप और विनाशरूप हो वही अस्तित्व धारण कर सकती है और वैसी ही वस्तु अस्थित्व धारण करनेके योग्य है । अतः हमारे इस कथनमें किसी भी प्रकारके दूपण या प्रश्नको स्थान ही नहीं मिल सकता कोई भी पदार्थ अपने निजत्पको नष्ट नहीं कर सकता और उसमें नवीन निजत्व भी नहीं प्राता, अर्थात् मूल द्रव्यकी अपेक्षासे किसी वस्तुकी उत्पत्ति या विनाश नहीं हो सकता । जैसे घटका मूलरूप मट्टी है, यदि अब वह घड़ा फूट जाय तथापि मट्टीका नाश नहीं हो सकता, वैसे ही वह मट्टीरूप होनेसे उसमें यह कुछ नवीन नहीं आया। याने घटके परिवर्तित होते हुए अनेक रुपान्तरोंमें उसका मूलरूप सट्टी कायम ही मालूम दिया करती है, अतः यह मानना चाहिये कि मूलद्रव्यका कदापि नाश नहीं हो सकता । परन्तु जो परिवर्तन होता है वह मात्र उसके थाकारों में ही हुआ करता है । कदाचित् कोई यो कहे कि जैसे एक दफा नख उतराये वाद वह फिर या जाता है और उस वक्त हमें यह मालूम देता है कि यह नख वही है कि जो पहले था, वैसे ही मूल द्रव्य भी परिवर्तित हुआ ही करता है परन्तु उसके रूप वगैरह एकसरीखे होनेसे हम उस नखके समान भ्रमित बनते हैं कि यह चही मूलद्रव्य है । अर्थात् नखके समान ही मूलद्रव्यका भी नाश हो जाता है अतः मूलद्रव्यको स्थायी कैसे माना जाय ? इस कथनका उत्तर इस प्रकार हैनखका उदाहरण सर्वथा असत्य है, इसलिये वह यहाँपर चरितार्थ ही नहीं हो सकता। क्योंकि यह बात सव ही जानते हैं कि
लिये जो सत्-कर्म, सत्-चर्चा और सत्-चिन्तन परमात्मप्राप्ति के किये जाते है, उनमें जडता ( असत् ) का आश्रय रहता ही है । - कारण यह है कि जड़ता ( स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर ) का आश्रय लिये बिना इनका होना सम्भव ही नहीं है । वास्तनमें इनकी सार्थकता जड़तासे सम्बन्धविच्छेद करानेमें ही हे । जड़तासे सम्बन्ध-निच्छेद तभी होगा, जन ये ( सत्-कर्म, सत्-चर्चा और सत्-चिन्तन ) केनल ससारके हित के लिये ही किये जायेंगे, अपने लिये कटापि नहीं । किसी विशेष साधन, गुण, योग्यता, लक्षण आदिके बदले में परमात्मप्रामि होगी - यह बिल्कुल गठत धारणा है । किसी मूल्यके बदलेमें जो वस्तु प्राप्त होती है, यह उस मूल्यसे कम मूल्यकी ही होती है- यह सिद्धान्त हे । अत यदि किसी विशेष साधन, योग्यता आदिके द्वारा ही परमात्मप्राप्तिका होना माना जाय, तो परमात्मा उस सापन, योग्यता आढिसे कम मूल्यके ( कमजोर ) ही सिद्ध होते हैं, जनकि परमात्मा किसीसे कम मूल्यके नहीं है। इसलिये वे किसी साधन आदिसे खरीदे नहीं जा सकते । इसके अतिरिक्त यदि किसी मूल्य (सान, योग्यता आदि ) के बदलेमें परमात्माकी प्रामि मानी जाय, तो उनसे हमें लाभ भी क्या होगा ? क्योकि उनसे अधिक मूल्यकी वस्तु ( साधन आदि ) तो हमारे पास पहलेसे है ही ! जैसे सासारिक पदार्थ कर्मोसे मिलते हैं ऐसे परमात्माकी प्राप्ति कर्मोंसे नहीं होती, क्योंकि परमात्मप्राप्ति किमी कर्मका फल नहीं है । * न त्वत्ममोऽस्त्यम्यधिक तोऽयो लोकत्रयेऽप्यप्रतिमप्रभाव ।। ( गीता ११ । ४३ )
लिये जो सत्-कर्म, सत्-चर्चा और सत्-चिन्तन परमात्मप्राप्ति के किये जाते है, उनमें जडता का आश्रय रहता ही है । - कारण यह है कि जड़ता का आश्रय लिये बिना इनका होना सम्भव ही नहीं है । वास्तनमें इनकी सार्थकता जड़तासे सम्बन्धविच्छेद करानेमें ही हे । जड़तासे सम्बन्ध-निच्छेद तभी होगा, जन ये केनल ससारके हित के लिये ही किये जायेंगे, अपने लिये कटापि नहीं । किसी विशेष साधन, गुण, योग्यता, लक्षण आदिके बदले में परमात्मप्रामि होगी - यह बिल्कुल गठत धारणा है । किसी मूल्यके बदलेमें जो वस्तु प्राप्त होती है, यह उस मूल्यसे कम मूल्यकी ही होती है- यह सिद्धान्त हे । अत यदि किसी विशेष साधन, योग्यता आदिके द्वारा ही परमात्मप्राप्तिका होना माना जाय, तो परमात्मा उस सापन, योग्यता आढिसे कम मूल्यके ही सिद्ध होते हैं, जनकि परमात्मा किसीसे कम मूल्यके नहीं है। इसलिये वे किसी साधन आदिसे खरीदे नहीं जा सकते । इसके अतिरिक्त यदि किसी मूल्य के बदलेमें परमात्माकी प्रामि मानी जाय, तो उनसे हमें लाभ भी क्या होगा ? क्योकि उनसे अधिक मूल्यकी वस्तु तो हमारे पास पहलेसे है ही ! जैसे सासारिक पदार्थ कर्मोसे मिलते हैं ऐसे परमात्माकी प्राप्ति कर्मोंसे नहीं होती, क्योंकि परमात्मप्राप्ति किमी कर्मका फल नहीं है । * न त्वत्ममोऽस्त्यम्यधिक तोऽयो लोकत्रयेऽप्यप्रतिमप्रभाव ।।
Vaccination : यूपी में टीकाकरण अभियान के प्रति सरकार की गंभीरता इसी बात से समझी जा सकती है कि योगी सरकार ने 31 अगस्त तक 10 करोड़ लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नई दिल्ली। देश में कोरोना के मामलों की रफ्तार तो जरूर कम हुई है लेकिन अभी भी कुछ राज्यों में कोरोना के मामले अधिक संख्या में देखे जा रहे हैं। मंगलवार को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि, पिछले 24 घंटों में, देश भर में 422 मौतों के साथ कुल 30,548 ताजा कोविड -19 मामले दर्ज किए गए। भारत लगातार 37 दिनों के लिए 50,000 से कम नए मामले दर्ज कर रहा है और सोमवार से 10,585 मामलों में गिरावट देखी गई जब भारत में कोविड-19 के 41,134 नए मामले और 424 मौतें दर्ज की गईं। वहीं अगर देश में कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण की बात करें तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार शाम को जानकारी दी कि, देश में कोविड वैक्सीनेशन का आंकड़ा 48 करोड़ के पार पहुंचकर (48,41,81,676) हो गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में आज कोरोना वायरस वैक्सीन की 22 लाख डोज़ लगाई गई। इस तरह से कोरोना टीकाकरण के मामले में यूपी ने रिकॉर्ड कायम कर दिया है। बता दें कि 25 करोड़ के आबादी वाले उत्तर प्रदेश से देश के दूसरे प्रदेश टीकाकरण में कहीं पीछे हैं। वेस्ट बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों में जहां काम आबादी होने के बावजूद टीकाकरण धीमी गति से चल रहा कहीं यूपी लगातार रिकॉर्ड बना रहा है। वेस्ट बंगाल में अब तक तीन करोड़ छह लाख, केरल में दो करोड़ नौ लाख, महाराष्ट्र में चार करोड़ 52 लाख, दिल्ली में एक करोड़ दो लाख और तमिलनाडु दो करोड़ 38 लाख ही वैक्सिनेशन किया गया है। वहीं योगी सरकार यूपी में कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर मेगा वैक्सीनेशन ड्राइव चला रही है। जिसके तहत एक दिन में 20 लाख लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। ऐसे में यूपी में 22 लाख अधिक वैक्सीन डोज दिए गए जो एक दिन में किया गया अब तक का सर्वाधिक टीकाकरण है। एक दिन में अब सबसे अधिक वैक्सीन की डोज लगाकर योगी सरकार ने बाकी राज्यों के लिए मिसाल कायम की है और रिकार्ड भी बनाया है। इसके अलावा यूपी में टीकाकरण अभियान के प्रति सरकार की गंभीरता इसी बात से समझी जा सकती है कि योगी सरकार ने 31 अगस्त तक 10 करोड़ लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मिशन जून के तहत प्रदेश सरकार ने एक करोड़ लोगों को वैक्सीन की डोज लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन प्रदेश में इससे कहीं अधिक एक करोड़ 29 हजार टीके की डोज दी गई।
Vaccination : यूपी में टीकाकरण अभियान के प्रति सरकार की गंभीरता इसी बात से समझी जा सकती है कि योगी सरकार ने इकतीस अगस्त तक दस करोड़ लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नई दिल्ली। देश में कोरोना के मामलों की रफ्तार तो जरूर कम हुई है लेकिन अभी भी कुछ राज्यों में कोरोना के मामले अधिक संख्या में देखे जा रहे हैं। मंगलवार को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि, पिछले चौबीस घंटाटों में, देश भर में चार सौ बाईस मौतों के साथ कुल तीस,पाँच सौ अड़तालीस ताजा कोविड -उन्नीस मामले दर्ज किए गए। भारत लगातार सैंतीस दिनों के लिए पचास,शून्य से कम नए मामले दर्ज कर रहा है और सोमवार से दस,पाँच सौ पचासी मामलों में गिरावट देखी गई जब भारत में कोविड-उन्नीस के इकतालीस,एक सौ चौंतीस नए मामले और चार सौ चौबीस मौतें दर्ज की गईं। वहीं अगर देश में कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण की बात करें तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार शाम को जानकारी दी कि, देश में कोविड वैक्सीनेशन का आंकड़ा अड़तालीस करोड़ के पार पहुंचकर हो गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में आज कोरोना वायरस वैक्सीन की बाईस लाख डोज़ लगाई गई। इस तरह से कोरोना टीकाकरण के मामले में यूपी ने रिकॉर्ड कायम कर दिया है। बता दें कि पच्चीस करोड़ के आबादी वाले उत्तर प्रदेश से देश के दूसरे प्रदेश टीकाकरण में कहीं पीछे हैं। वेस्ट बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों में जहां काम आबादी होने के बावजूद टीकाकरण धीमी गति से चल रहा कहीं यूपी लगातार रिकॉर्ड बना रहा है। वेस्ट बंगाल में अब तक तीन करोड़ छह लाख, केरल में दो करोड़ नौ लाख, महाराष्ट्र में चार करोड़ बावन लाख, दिल्ली में एक करोड़ दो लाख और तमिलनाडु दो करोड़ अड़तीस लाख ही वैक्सिनेशन किया गया है। वहीं योगी सरकार यूपी में कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर मेगा वैक्सीनेशन ड्राइव चला रही है। जिसके तहत एक दिन में बीस लाख लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। ऐसे में यूपी में बाईस लाख अधिक वैक्सीन डोज दिए गए जो एक दिन में किया गया अब तक का सर्वाधिक टीकाकरण है। एक दिन में अब सबसे अधिक वैक्सीन की डोज लगाकर योगी सरकार ने बाकी राज्यों के लिए मिसाल कायम की है और रिकार्ड भी बनाया है। इसके अलावा यूपी में टीकाकरण अभियान के प्रति सरकार की गंभीरता इसी बात से समझी जा सकती है कि योगी सरकार ने इकतीस अगस्त तक दस करोड़ लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मिशन जून के तहत प्रदेश सरकार ने एक करोड़ लोगों को वैक्सीन की डोज लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन प्रदेश में इससे कहीं अधिक एक करोड़ उनतीस हजार टीके की डोज दी गई।
जयदेव उनादकट ने साल 201o में आखिरी बार टीम इंडिया के लिए टेस्ट मैच खेला था. उन्हें अब तक सिर्फ एक टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला है जो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था. जयदेव उनादकट की कप्तानी में हाल ही में सौराष्ट्र ने महाराष्ट्र को हराकर विजय हजारे ट्रॉफी का खिताब जीता था. जयदेव उनादकट ने भारत के लिए एक टेस्ट, सात वनडे और 10 टी-20 मैच खेले हैं. टेस्ट में उनके नाम विकेट नहीं है, वहीं वनडे में आठ और टी-20 में उन्होंने 15 विकेट लिए हैं. उनका फर्स्ट क्लास करियर काफी शानदार रहा है. फर्स्ट क्लास के 96 मैच में उन्होंने 353 विकेट लिए हैं. हाल ही में विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने सौराष्ट्र की कप्तानी करते हुए सेमीफाइनल में कर्नाटक के खिलाफ चार विकेट लेकर टीम को फाइनल में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं हिमाचल प्रदेश के खिलाफ लीग मैच में उन्होंने सिर्फ 23 रन देकर पांच विकेट लिए थे.
जयदेव उनादकट ने साल दो सौ एकo में आखिरी बार टीम इंडिया के लिए टेस्ट मैच खेला था. उन्हें अब तक सिर्फ एक टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला है जो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था. जयदेव उनादकट की कप्तानी में हाल ही में सौराष्ट्र ने महाराष्ट्र को हराकर विजय हजारे ट्रॉफी का खिताब जीता था. जयदेव उनादकट ने भारत के लिए एक टेस्ट, सात वनडे और दस टी-बीस मैच खेले हैं. टेस्ट में उनके नाम विकेट नहीं है, वहीं वनडे में आठ और टी-बीस में उन्होंने पंद्रह विकेट लिए हैं. उनका फर्स्ट क्लास करियर काफी शानदार रहा है. फर्स्ट क्लास के छियानवे मैच में उन्होंने तीन सौ तिरेपन विकेट लिए हैं. हाल ही में विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने सौराष्ट्र की कप्तानी करते हुए सेमीफाइनल में कर्नाटक के खिलाफ चार विकेट लेकर टीम को फाइनल में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं हिमाचल प्रदेश के खिलाफ लीग मैच में उन्होंने सिर्फ तेईस रन देकर पांच विकेट लिए थे.
६८ स्थितिबन्धद्वार वे अनुक अनुक काल निम्नप्रकार है- मनुष्यगति और तिर्यज्ञगतिमें जब भुज्यमान आयुके दो भाग चीत जाते है, तत्र परभषकी आयुके re काल उपस्थित होता है । जैते, यदि कितो मनुष्यकी आयु ९९ वर्षकी है, तो उसमें से ६६ वर्ष वोतनेवर वह मनुष्य परभवको आयु इलते पहले उतके आयुकर्मका बन्ध नहीं हो सकता । इसीते मनुष्य और तिर्यचोंके बध्यमान आयुकर्मका अबाधाकाल एक पूर्वकोटिका तीसरा भाग चता है, क्योंकि कर्मभूनिज मनुष्य और तिर्यचकी आयु एक पूर्वकोटि की होती है और उसके त्रिभागने परभवको आयु बंधती है । यह तो हुई कर्मभूमिज मनुष्य और तिर्थयोंकी अपेक्षाते आयुकर्मकी अबाधाकी व्यवस्था । भोगभूमिज मनुष्य और तियंत्र तथा देव और नारक अपनी अपनी आयु के छह नात दोष रहनेपर परनवको आयु बांधते है। इसी अन्धकारने निरुपम आयुवा वध्यमान आयुका अवाधाका हमात बतलाया है। १ लन्ध तथा उसकी अदाधाके सन्दन्धनें मतभेदो दर्शाते हुए पञ्चसङ्ग्रह रोचक चर्चा है, जो इस प्रकार है"सुरनारयाउयार्ग अपरा तेत्तीस तिनि पलियाई । इयरार्ण चरतुवि पुष्कोडिसो अवाहा ॥ २४४ ॥ बोलीगेतुं दोतुं भागेतुं नाउयत्त जो बंधो । भगिनो असंभवाज न घडतो चक्के वि ॥ २४५ ॥ पलिपाखेज्जैसे बंधंति न साहिए नरतिरिच्छा । हम्मासे पुरा इयरा तदाउ तेसो पहुं होइ ॥ २४६ ॥ पुब्बाकोडी जैसि लाज सहिकि ते इन भरियं । भगिनं र जिग्राह आउं बंधति अमुचंता ॥ २४७ ।। निरुवकमा माला इनिदिलानं भवतिंसो । पलियासेन्जर्स युगधन्दीनं वयंतमे ॥ २४८॥" अर्थ- 'देवायु और नरवादु को उत्क्रास्थिति तेतीन सागर है। निर्मा आयुकर्मकी अबाधाके सम्बन्ध में जो दूसरी बात ध्यान में रखने योग्य है वह यह है कि सातकर्मोकी ऊपर जो स्थिति बतलाई गई हैं, उनमें उनका अबाधाकाल भी सम्मिलित है । जैसे, मिथ्यात्वमोहनीयकी उत्कृष्ट स्थिति सत्तर कोटिकोटि सागर बतलाई है और उसका अबाधाकाल सात हजार वर्ष है, तो ये सात हजार वर्ष उस सत्तर कोटिकोटि सागरमें ही सम्मिलित है । अतः यदि मिथ्यात्यकी अबाधारहित स्थिति, जिसे हम पहले 'अनुभवयोग्या' नामसे कह आये हैं, जानना हो तो सत्तर कोटिकोटि सागर में से सात हजार वर्ष कम कर देना चाहिये । किन्तु आयुकर्मकी और मनुष्यायुकी उत्कृष्टस्थिति तीन पत्य है । तथा चारों आयुओंकी एक पूर्व कोटिके विभाग प्रमाण अबाधा है । शङ्का-आयुके दो भाग बीतजाने पर जो आयुका बन्ध कहा है वह असंभव होनेसे चारों ही गतियों में नहीं घटता है। क्योंकि भोगभूमिया मनुष्य और तिर्यच कुछ अधिक पत्यका असंख्यातवां भाग शेष रहने पर परभवकी आयु नहीं बाँधते हैं किन्तु पत्यका असंख्यातवां भाग शेष रहने पर ही पर्भव की आयु बाँधते हैं। तथा देव, और नारक भी अपनी आयु के छह माह अधिक शेष रहने पर परभव की आयु नहीं बाँधते हैं किन्तु छहमाग आयु बाकी रहने पर ही परभव की आयु बाँधते हैं । किन्तु उनकी आयुध विभाग बहुत होना है। तियंन और मनुष्योंकी आयुका विभाग एक पव्य और देव तथा नाटककी आयुका विभाग ग्यारह गागर होता है । उत्तर-जिन नियंत और मनुष्यों की आयु एक पूर्व कोटि होती है, उनकी श्ररेशाने ही एक पूर्व कोटिके विभाग प्रमाण अबाधा बनाई है तथा यह अवाया अनुभूयमान भवगम्बन्धी आयु में ही जाननी चाहिये, परनव सस्य नवी आयुर्वे नहीं; क्योंकि परमवयम्बन्धी आयुची दळसना प्रथम गमय से ही होजानी है, उसमें अवाधावाद मम्मिलित नहीं है। अतः ए६ पूर्व कोडीडी श्रायुवाले दिन और मनुष्यी परमती आयुकी उन्ष्ट अवा यह बात नहीं है। आयुकर्मको तेतीत सागर, तीन पत्य, पत्यका असंख्यातवां भाग आदि जो स्थिति बतलाई है, तथा आगे भी बतलायेंगे, वह शुद्ध स्थिति है। उसमें अबाधाकाल सम्मिलित नहीं है। इस अन्तरका कारण पूर्व कोटिके विभाग प्रमाण होती है । शेष देव, नारक और भोगभूमियोंके परभवको आयुकी लवाघा छह मास होती है। और एकेन्द्रिय तथा विकलेन्द्रिय जीवोंके अपनी अपनी आयुके त्रिभाग प्रमाण उत्कृष्ट अवाधा होती है । अन्य साचार्य भोगभूमियोंके परभवकी आयुकी अवाधा पत्यके असंख्यातवें भाग प्रमाण कहते है । " चन्द्रसूर रचित संग्रहणीसूत्र में इसी बातको और भी स्पष्ट करके लिखा है"धंधंति देवनारय असं खनरतिरि छमाससेसाऊ । परभविवाज सेसा निरुवक्रमतिभागलेसाऊ ॥ ३०१ ॥ सोवामाच्या पुणे सेसतिभागे अहव नवमभागे । सचावीस इमेवा अंतमुहुत्तंतिमेवावि ॥ ३०२ । " अर्थात् - 'देव, नारक और असंख्यात वर्षकी युवाले मनुष्य और तिर्थध छह मासकी आयु बाकी रहने पर परभवको वायु दांधते है : शेष निरुपम आयु वाले जीव अपनी आयुका विभाग बाकी रहने पर परभवकी बांधते हैं। और तोपकम आयुवाले जीव अपनी आयुके त्रिभागमें अथवा नौवें भागनें, समदा सत्ताईसवें भागने परभवको आयु बांधते हैं। यदि इन विभागानें भी आदुध नहीं करपाते तो अंतिम अन्तर्मुहूर्तमें परभवको वायु बांधते हैं।" गो० कर्मकाण्डने लायुषन्ध के सम्बन्ध में साधारण तौर पर तो यही विचार प्रकट किये हैं। किन्तु देव, नारक और भोगभूमिजोकी छह मात प्रमाण वाबाधा को लेकर उसमें उस निरूपणसे मौलिक मतभेद है। कर्मकाण्ड के मतानुसार छह मातमें वायु बन्ध नहीं होता, किन्तु उसके
अड़सठ स्थितिबन्धद्वार वे अनुक अनुक काल निम्नप्रकार है- मनुष्यगति और तिर्यज्ञगतिमें जब भुज्यमान आयुके दो भाग चीत जाते है, तत्र परभषकी आयुके re काल उपस्थित होता है । जैते, यदि कितो मनुष्यकी आयु निन्यानवे वर्षकी है, तो उसमें से छयासठ वर्ष वोतनेवर वह मनुष्य परभवको आयु इलते पहले उतके आयुकर्मका बन्ध नहीं हो सकता । इसीते मनुष्य और तिर्यचोंके बध्यमान आयुकर्मका अबाधाकाल एक पूर्वकोटिका तीसरा भाग चता है, क्योंकि कर्मभूनिज मनुष्य और तिर्यचकी आयु एक पूर्वकोटि की होती है और उसके त्रिभागने परभवको आयु बंधती है । यह तो हुई कर्मभूमिज मनुष्य और तिर्थयोंकी अपेक्षाते आयुकर्मकी अबाधाकी व्यवस्था । भोगभूमिज मनुष्य और तियंत्र तथा देव और नारक अपनी अपनी आयु के छह नात दोष रहनेपर परनवको आयु बांधते है। इसी अन्धकारने निरुपम आयुवा वध्यमान आयुका अवाधाका हमात बतलाया है। एक लन्ध तथा उसकी अदाधाके सन्दन्धनें मतभेदो दर्शाते हुए पञ्चसङ्ग्रह रोचक चर्चा है, जो इस प्रकार है"सुरनारयाउयार्ग अपरा तेत्तीस तिनि पलियाई । इयरार्ण चरतुवि पुष्कोडिसो अवाहा ॥ दो सौ चौंतालीस ॥ बोलीगेतुं दोतुं भागेतुं नाउयत्त जो बंधो । भगिनो असंभवाज न घडतो चक्के वि ॥ दो सौ पैंतालीस ॥ पलिपाखेज्जैसे बंधंति न साहिए नरतिरिच्छा । हम्मासे पुरा इयरा तदाउ तेसो पहुं होइ ॥ दो सौ छियालीस ॥ पुब्बाकोडी जैसि लाज सहिकि ते इन भरियं । भगिनं र जिग्राह आउं बंधति अमुचंता ॥ दो सौ सैंतालीस ।। निरुवकमा माला इनिदिलानं भवतिंसो । पलियासेन्जर्स युगधन्दीनं वयंतमे ॥ दो सौ अड़तालीस॥" अर्थ- 'देवायु और नरवादु को उत्क्रास्थिति तेतीन सागर है। निर्मा आयुकर्मकी अबाधाके सम्बन्ध में जो दूसरी बात ध्यान में रखने योग्य है वह यह है कि सातकर्मोकी ऊपर जो स्थिति बतलाई गई हैं, उनमें उनका अबाधाकाल भी सम्मिलित है । जैसे, मिथ्यात्वमोहनीयकी उत्कृष्ट स्थिति सत्तर कोटिकोटि सागर बतलाई है और उसका अबाधाकाल सात हजार वर्ष है, तो ये सात हजार वर्ष उस सत्तर कोटिकोटि सागरमें ही सम्मिलित है । अतः यदि मिथ्यात्यकी अबाधारहित स्थिति, जिसे हम पहले 'अनुभवयोग्या' नामसे कह आये हैं, जानना हो तो सत्तर कोटिकोटि सागर में से सात हजार वर्ष कम कर देना चाहिये । किन्तु आयुकर्मकी और मनुष्यायुकी उत्कृष्टस्थिति तीन पत्य है । तथा चारों आयुओंकी एक पूर्व कोटिके विभाग प्रमाण अबाधा है । शङ्का-आयुके दो भाग बीतजाने पर जो आयुका बन्ध कहा है वह असंभव होनेसे चारों ही गतियों में नहीं घटता है। क्योंकि भोगभूमिया मनुष्य और तिर्यच कुछ अधिक पत्यका असंख्यातवां भाग शेष रहने पर परभवकी आयु नहीं बाँधते हैं किन्तु पत्यका असंख्यातवां भाग शेष रहने पर ही पर्भव की आयु बाँधते हैं। तथा देव, और नारक भी अपनी आयु के छह माह अधिक शेष रहने पर परभव की आयु नहीं बाँधते हैं किन्तु छहमाग आयु बाकी रहने पर ही परभव की आयु बाँधते हैं । किन्तु उनकी आयुध विभाग बहुत होना है। तियंन और मनुष्योंकी आयुका विभाग एक पव्य और देव तथा नाटककी आयुका विभाग ग्यारह गागर होता है । उत्तर-जिन नियंत और मनुष्यों की आयु एक पूर्व कोटि होती है, उनकी श्ररेशाने ही एक पूर्व कोटिके विभाग प्रमाण अबाधा बनाई है तथा यह अवाया अनुभूयमान भवगम्बन्धी आयु में ही जाननी चाहिये, परनव सस्य नवी आयुर्वे नहीं; क्योंकि परमवयम्बन्धी आयुची दळसना प्रथम गमय से ही होजानी है, उसमें अवाधावाद मम्मिलित नहीं है। अतः एछः पूर्व कोडीडी श्रायुवाले दिन और मनुष्यी परमती आयुकी उन्ष्ट अवा यह बात नहीं है। आयुकर्मको तेतीत सागर, तीन पत्य, पत्यका असंख्यातवां भाग आदि जो स्थिति बतलाई है, तथा आगे भी बतलायेंगे, वह शुद्ध स्थिति है। उसमें अबाधाकाल सम्मिलित नहीं है। इस अन्तरका कारण पूर्व कोटिके विभाग प्रमाण होती है । शेष देव, नारक और भोगभूमियोंके परभवको आयुकी लवाघा छह मास होती है। और एकेन्द्रिय तथा विकलेन्द्रिय जीवोंके अपनी अपनी आयुके त्रिभाग प्रमाण उत्कृष्ट अवाधा होती है । अन्य साचार्य भोगभूमियोंके परभवकी आयुकी अवाधा पत्यके असंख्यातवें भाग प्रमाण कहते है । " चन्द्रसूर रचित संग्रहणीसूत्र में इसी बातको और भी स्पष्ट करके लिखा है"धंधंति देवनारय असं खनरतिरि छमाससेसाऊ । परभविवाज सेसा निरुवक्रमतिभागलेसाऊ ॥ तीन सौ एक ॥ सोवामाच्या पुणे सेसतिभागे अहव नवमभागे । सचावीस इमेवा अंतमुहुत्तंतिमेवावि ॥ तीन सौ दो । " अर्थात् - 'देव, नारक और असंख्यात वर्षकी युवाले मनुष्य और तिर्थध छह मासकी आयु बाकी रहने पर परभवको वायु दांधते है : शेष निरुपम आयु वाले जीव अपनी आयुका विभाग बाकी रहने पर परभवकी बांधते हैं। और तोपकम आयुवाले जीव अपनी आयुके त्रिभागमें अथवा नौवें भागनें, समदा सत्ताईसवें भागने परभवको आयु बांधते हैं। यदि इन विभागानें भी आदुध नहीं करपाते तो अंतिम अन्तर्मुहूर्तमें परभवको वायु बांधते हैं।" गोशून्य कर्मकाण्डने लायुषन्ध के सम्बन्ध में साधारण तौर पर तो यही विचार प्रकट किये हैं। किन्तु देव, नारक और भोगभूमिजोकी छह मात प्रमाण वाबाधा को लेकर उसमें उस निरूपणसे मौलिक मतभेद है। कर्मकाण्ड के मतानुसार छह मातमें वायु बन्ध नहीं होता, किन्तु उसके
Ram Mandir Pujan in Ayodhya: अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन का शुभ समय बेहद करीब आ गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखेंगे, इसको लेकर अयोध्या में खासी तैयारियां हो रही हैं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को खुद अयोध्या जाकर वहां तैयारियों का जायजा लिया, वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी तैयारियों के बावत एक प्रेस कांफ्रेस कर अहम जानकारियां मीडिया के साथ साझा कीं। श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमने इकबाल अंसारी (अयोध्या भूमि विवाद मामले में पूर्व मुकदमा चलाने वाले) और पद्म श्री, मोहम्मद शरीफ को शिलान्यास समारोह में आमंत्रित किया है, साथ ही भूमि पूजन कार्यक्रम में यहां से लेकर नेपाल के संतों तक को बुलाया गया है उन्होंने कहा कि भारत के भूगोल का प्रत्येक हिस्सा 5 अगस्त को अयोध्या में होगा। चंपत राय ने कहा कि कुछ लोग संतों को भी दलित कहते हैं जबकि वो लोग भगवान के लोग हैं मैं बता दूं कि 5 अगस्त को भारत के भूगोल का हर हिस्सा यहां पर रहेगा संत महात्मा मिलाकर करीब 175 लोग शामिल होंगे, उन्होंने बताया कि पद्मश्री पा चुके फैजाबाद के मोहम्मद यूनुस को बुलाया गया है, वो लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करते हैं, वो चाहे जिस धर्म के हो। महासचिव चंपत राय ने सुरक्षा इंतजामों के बारे में कहा कि पूरे परिसर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैग की अनुमति नहीं होगी और हमने निमंत्रण कार्ड छपवाए हैं और प्रत्येक कार्ड में एक सुरक्षा कोड है जो केवल एक बार काम करेगा, एक बार अंदर जाने के बाद दोबारा वापस नहीं आ सकता और अंदर कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं जा सकता है। चंपत राय ने कहा कि कुछ लोगों ने रामलला के हरे वस्त्र पहनने पर भी सवाल उठाए हैं ये तो परम्परा से होता आया है ये पेड़ों की हरियाली क्या इस्लाम है? हरी साग सब्जी क्या इस्लाम खाना है? चंपत राय ने बताया कि आज से ये कार्ड अयोध्या में निवास करने वाले मेहमानों को दिया जा रहा है, बाहर वालों को फोन पर सूचना देकर बुलाया गया है, यहां आने पर कार्ड दिया जाएगा साथ ही किसी को भी वाहन का पास नहीं दिया गया है और सभी को वाहन बाहर ही छोड़ना होगा।
Ram Mandir Pujan in Ayodhya: अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन का शुभ समय बेहद करीब आ गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखेंगे, इसको लेकर अयोध्या में खासी तैयारियां हो रही हैं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को खुद अयोध्या जाकर वहां तैयारियों का जायजा लिया, वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी तैयारियों के बावत एक प्रेस कांफ्रेस कर अहम जानकारियां मीडिया के साथ साझा कीं। श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमने इकबाल अंसारी और पद्म श्री, मोहम्मद शरीफ को शिलान्यास समारोह में आमंत्रित किया है, साथ ही भूमि पूजन कार्यक्रम में यहां से लेकर नेपाल के संतों तक को बुलाया गया है उन्होंने कहा कि भारत के भूगोल का प्रत्येक हिस्सा पाँच अगस्त को अयोध्या में होगा। चंपत राय ने कहा कि कुछ लोग संतों को भी दलित कहते हैं जबकि वो लोग भगवान के लोग हैं मैं बता दूं कि पाँच अगस्त को भारत के भूगोल का हर हिस्सा यहां पर रहेगा संत महात्मा मिलाकर करीब एक सौ पचहत्तर लोग शामिल होंगे, उन्होंने बताया कि पद्मश्री पा चुके फैजाबाद के मोहम्मद यूनुस को बुलाया गया है, वो लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करते हैं, वो चाहे जिस धर्म के हो। महासचिव चंपत राय ने सुरक्षा इंतजामों के बारे में कहा कि पूरे परिसर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैग की अनुमति नहीं होगी और हमने निमंत्रण कार्ड छपवाए हैं और प्रत्येक कार्ड में एक सुरक्षा कोड है जो केवल एक बार काम करेगा, एक बार अंदर जाने के बाद दोबारा वापस नहीं आ सकता और अंदर कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं जा सकता है। चंपत राय ने कहा कि कुछ लोगों ने रामलला के हरे वस्त्र पहनने पर भी सवाल उठाए हैं ये तो परम्परा से होता आया है ये पेड़ों की हरियाली क्या इस्लाम है? हरी साग सब्जी क्या इस्लाम खाना है? चंपत राय ने बताया कि आज से ये कार्ड अयोध्या में निवास करने वाले मेहमानों को दिया जा रहा है, बाहर वालों को फोन पर सूचना देकर बुलाया गया है, यहां आने पर कार्ड दिया जाएगा साथ ही किसी को भी वाहन का पास नहीं दिया गया है और सभी को वाहन बाहर ही छोड़ना होगा।
मुंबई की तरह महानगर से सटे मीरा-भायंदर मनपा क्षेत्र में भी उत्तर भारतीय संघ (मुंबई) उत्तर भारतीय भवन बनाएगा। मीरा रोड में आयोजित उत्तर भारतीय संघ के कार्यक्रम में संघ के अध्यक्ष संतोष आरएन सिंह ने यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस भवन के निर्माण के लिए मैं अपने पिता पूर्व विधायक स्वर्गीय आरएन सिंह की स्मृति में 25 लाख रुपए दूंगा। उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष सिंह ने कहा कि राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुझे आश्वासन दिया है कि मीरा-भायंदर इलाके में उत्तर भारतीय भवन बनाने के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि मीरा रोड में उत्तर भारतीय संघ बनाकर मीरा रोड की जनता को सौंपना है। जिससे यहा की गरीब जनता को उसका फायदा मिल सके। सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र की धरती ने उत्तर भारतीय समाज को बहुत कुछ दिया है। साथ ही उत्तर भारतीय समाज ने अपनी कड़ी मेहनत से इस राज्य के विकास में अपना अहम योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि मीरा रोड में बनने वाले उत्तर भारतीय भवन का नामकरण उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष रहे पूर्व विधायक आरएन सिंह और पूर्व मंत्री डॉ राम मनोहर त्रिपाठी के नाम पर होगा। उत्तर भारतीय संघ के उपाध्यक्ष डा राधेश्याम तिवारी ने कहा कि मुंबई और आसपास के इलाकों में संघ की शाखाएं हैं ही अब नागपुर, औरंगाबाद, पुणे व नाशिक में भी उत्तर भारतीय संघ की शाखा खोलने पर विचार किया जाएगा। शिवसेना (शिंदे) नगरसेवक विक्रम प्रताप सिंह ने कहा कि मुंबई में रहने वाले जो भी उत्तर भारतीय विधायक और सांसद बने हैं उनके लिए उत्तर भारतीय संघ ने नर्सरी का काम किया है। उन्होंने कहा कि मीरा रोड में बनने वाले उत्तर भारतीय भवन के लिए मैं 5 लाख रुपए का दान दूंगा। इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष रवि व्यास, उत्तर भारतीय संघ युवा मोर्चा अध्यक्ष संजय सिंह, भाजपा नेता विनोद मिश्रा, देवेंद्र तिवारी प्रभारी, अनुराग त्रिपाठी, अक्षयबर तिवारी, फूल सिंह, डॉ हृदय नारायण मिश्रा, सूर्य नारायण तिवारी, एस बी गिरी, मनोज राम नारायण दूबे, राजेश सिंह, धर्मेंद्र चतुर्वेदी, बी के सिंह, बलवंत सिंह, अजय सिंह राजपूत, संघ के कोषाध्यक्ष अजय सिंह, भाजपा नेता रमाकांत सिंह आदि मौजूद थे।
मुंबई की तरह महानगर से सटे मीरा-भायंदर मनपा क्षेत्र में भी उत्तर भारतीय संघ उत्तर भारतीय भवन बनाएगा। मीरा रोड में आयोजित उत्तर भारतीय संघ के कार्यक्रम में संघ के अध्यक्ष संतोष आरएन सिंह ने यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस भवन के निर्माण के लिए मैं अपने पिता पूर्व विधायक स्वर्गीय आरएन सिंह की स्मृति में पच्चीस लाख रुपए दूंगा। उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष सिंह ने कहा कि राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुझे आश्वासन दिया है कि मीरा-भायंदर इलाके में उत्तर भारतीय भवन बनाने के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि मीरा रोड में उत्तर भारतीय संघ बनाकर मीरा रोड की जनता को सौंपना है। जिससे यहा की गरीब जनता को उसका फायदा मिल सके। सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र की धरती ने उत्तर भारतीय समाज को बहुत कुछ दिया है। साथ ही उत्तर भारतीय समाज ने अपनी कड़ी मेहनत से इस राज्य के विकास में अपना अहम योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि मीरा रोड में बनने वाले उत्तर भारतीय भवन का नामकरण उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष रहे पूर्व विधायक आरएन सिंह और पूर्व मंत्री डॉ राम मनोहर त्रिपाठी के नाम पर होगा। उत्तर भारतीय संघ के उपाध्यक्ष डा राधेश्याम तिवारी ने कहा कि मुंबई और आसपास के इलाकों में संघ की शाखाएं हैं ही अब नागपुर, औरंगाबाद, पुणे व नाशिक में भी उत्तर भारतीय संघ की शाखा खोलने पर विचार किया जाएगा। शिवसेना नगरसेवक विक्रम प्रताप सिंह ने कहा कि मुंबई में रहने वाले जो भी उत्तर भारतीय विधायक और सांसद बने हैं उनके लिए उत्तर भारतीय संघ ने नर्सरी का काम किया है। उन्होंने कहा कि मीरा रोड में बनने वाले उत्तर भारतीय भवन के लिए मैं पाँच लाख रुपए का दान दूंगा। इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष रवि व्यास, उत्तर भारतीय संघ युवा मोर्चा अध्यक्ष संजय सिंह, भाजपा नेता विनोद मिश्रा, देवेंद्र तिवारी प्रभारी, अनुराग त्रिपाठी, अक्षयबर तिवारी, फूल सिंह, डॉ हृदय नारायण मिश्रा, सूर्य नारायण तिवारी, एस बी गिरी, मनोज राम नारायण दूबे, राजेश सिंह, धर्मेंद्र चतुर्वेदी, बी के सिंह, बलवंत सिंह, अजय सिंह राजपूत, संघ के कोषाध्यक्ष अजय सिंह, भाजपा नेता रमाकांत सिंह आदि मौजूद थे।
मुंबई में टीम इंडिया को जीत दिलाते ही विराट कोहली ने एक और कमाल कर दिखाया है। भारत ने इंग्लैंड को 8 साल बाद टेस्ट सीरीज़ में मात देकर 3-0 की अजेय बढ़त बना ली है। नई दिल्ली, प्रदीप सहगल। भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ का चौथे टेस्ट मैच में इंग्लिश टीम को पारी और 36 रन से हराकर विराट कोहली ने एक और कमाल कर दिखाया है। भारत ने इंग्लैंड को 8 साल बाद टेस्ट सीरीज़ में मात देकर 3-0 की अजेय बढ़त बना ली है। मुंबई के चौथे मुकाबले में जीत हासिल करते ही कोहली की विराट सेना ने लगातार 17 टेस्ट मैच में अपराजित से अपराजित है। इस टीम इंडिया के सेनापति विराट कोहली दूसरे ऐसे कप्तान बन गए हैं। जिन्होंने ये कमाल कर दिखाया है। इससे पहले भारत ने कपिल देव की कप्तानी में 1985 से 1987 तक लगातार 17 मैचों में नहीं हारा था। तो मुंबई में भारतीय टीम ने लगभग 30 साल पुराने इस रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। अगले टेस्ट में टूटेगा गावस्कर का रिकॉर्ड? अब विराट के सामने सुनील गावस्कर के लगातार 18 टेस्ट मैचों में अपराजेय रहने के टीम इंडिया के रिकॉर्ड को तोड़ने की चुनौती रहेगी। गावस्कर की कप्तानी में टीम इंडिया ने 1976 से 1980 तक लगातार 18 टेस्ट मैचों में अपराजेय रहने का रिकॉर्ड बनाया था। भारत-इंग्लैंड के बीच खेली जा रही मौजूदा टेस्ट सीरीज़ में भारतीय टीम ने 3-0 की बढ़त ली है। भारतीय टीम ने पहले विशाखापत्तनम में जीत की पताका फहराई तो तीसरे टेस्ट में मोहाली में भी मैदान मार कर इंग्लैंड को पस्त कर दिया। इसके बाद मुंबई में भी इंग्लैंड पर महाजीत हासिल करते हुए उन्हें पारी और 36 रन से मात देकर सीरीज़ अपने नाम कर ली। भारतीय टीम की इस सफलता का श्रेय जाता है कप्तान विराट कोहली को। कोहली ने वाइजैग में शतक जमाया और फिर मोहाली में अपनी दमदार कप्तानी से इंग्लिश टीम के होश उड़ा दिए। उसके बाद मुंबई में दोहरा शतक जमाकर इंग्लैंड के गेंदबाज़ों के होश उड़ाते हुए कई रिकॉर्ड्स अपने नाम कर लिए।
मुंबई में टीम इंडिया को जीत दिलाते ही विराट कोहली ने एक और कमाल कर दिखाया है। भारत ने इंग्लैंड को आठ साल बाद टेस्ट सीरीज़ में मात देकर तीन-शून्य की अजेय बढ़त बना ली है। नई दिल्ली, प्रदीप सहगल। भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ का चौथे टेस्ट मैच में इंग्लिश टीम को पारी और छत्तीस रन से हराकर विराट कोहली ने एक और कमाल कर दिखाया है। भारत ने इंग्लैंड को आठ साल बाद टेस्ट सीरीज़ में मात देकर तीन-शून्य की अजेय बढ़त बना ली है। मुंबई के चौथे मुकाबले में जीत हासिल करते ही कोहली की विराट सेना ने लगातार सत्रह टेस्ट मैच में अपराजित से अपराजित है। इस टीम इंडिया के सेनापति विराट कोहली दूसरे ऐसे कप्तान बन गए हैं। जिन्होंने ये कमाल कर दिखाया है। इससे पहले भारत ने कपिल देव की कप्तानी में एक हज़ार नौ सौ पचासी से एक हज़ार नौ सौ सत्तासी तक लगातार सत्रह मैचों में नहीं हारा था। तो मुंबई में भारतीय टीम ने लगभग तीस साल पुराने इस रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। अगले टेस्ट में टूटेगा गावस्कर का रिकॉर्ड? अब विराट के सामने सुनील गावस्कर के लगातार अट्ठारह टेस्ट मैचों में अपराजेय रहने के टीम इंडिया के रिकॉर्ड को तोड़ने की चुनौती रहेगी। गावस्कर की कप्तानी में टीम इंडिया ने एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर से एक हज़ार नौ सौ अस्सी तक लगातार अट्ठारह टेस्ट मैचों में अपराजेय रहने का रिकॉर्ड बनाया था। भारत-इंग्लैंड के बीच खेली जा रही मौजूदा टेस्ट सीरीज़ में भारतीय टीम ने तीन-शून्य की बढ़त ली है। भारतीय टीम ने पहले विशाखापत्तनम में जीत की पताका फहराई तो तीसरे टेस्ट में मोहाली में भी मैदान मार कर इंग्लैंड को पस्त कर दिया। इसके बाद मुंबई में भी इंग्लैंड पर महाजीत हासिल करते हुए उन्हें पारी और छत्तीस रन से मात देकर सीरीज़ अपने नाम कर ली। भारतीय टीम की इस सफलता का श्रेय जाता है कप्तान विराट कोहली को। कोहली ने वाइजैग में शतक जमाया और फिर मोहाली में अपनी दमदार कप्तानी से इंग्लिश टीम के होश उड़ा दिए। उसके बाद मुंबई में दोहरा शतक जमाकर इंग्लैंड के गेंदबाज़ों के होश उड़ाते हुए कई रिकॉर्ड्स अपने नाम कर लिए।
यह विषय ई-शासन के विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देता है जो आंध्रप्रदेश के आम आदमी के लिए लाभकारी होंगी । इस भाग में मानव संसाधन प्रबंधन के अंतर्गत कंप्यूटर में डाटा एंट्री से संबंधित पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर विस्तृत रूप में दी गई है। इस पृष्ठ में राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना के अधीन प्रमुख उपलब्धियों का प्रभाव क्या है, इसकी जानकारी दी गयी है। यह विषय ई-शासन के विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देता है जो हिमाचल प्रदेश के आम आदमी के लिए लाभकारी होंगी । इस भाग में महाराष्ट्र में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के सफल प्रयास के बारे में जानकारी दी गई है। इस भाग में आयोजना का क्रियान्वयन और सड़कों के रखरखाव की जानकारी दी गई है।
यह विषय ई-शासन के विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देता है जो आंध्रप्रदेश के आम आदमी के लिए लाभकारी होंगी । इस भाग में मानव संसाधन प्रबंधन के अंतर्गत कंप्यूटर में डाटा एंट्री से संबंधित पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर विस्तृत रूप में दी गई है। इस पृष्ठ में राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना के अधीन प्रमुख उपलब्धियों का प्रभाव क्या है, इसकी जानकारी दी गयी है। यह विषय ई-शासन के विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देता है जो हिमाचल प्रदेश के आम आदमी के लिए लाभकारी होंगी । इस भाग में महाराष्ट्र में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के सफल प्रयास के बारे में जानकारी दी गई है। इस भाग में आयोजना का क्रियान्वयन और सड़कों के रखरखाव की जानकारी दी गई है।
'जो अनन्तगुगशाली भगवान् अपनी लीलासे त्रिभुवनकी सृष्टि, स्थिति और संहार करते रहते हैं, उनके लिये शत्रुपक्षका निग्रह करना कोई चमत्कारकी बात नहीं है, तथापि उन्होंने मनुष्यके समान युद्धमें असाधारण युद्धनैपुण्य दिसलाकर और विजय प्राप्त करके संसारके लोगोके सामने वीरताका आदर्श उपस्थित किया, इसीलिये उसका वर्णन किया जाता है ।। इस अलौकिक ऐश्वर्य-लीलाके बीच श्रीभगवान्ने जो अति विलक्षण प्रेम --माधुर्यकी लीना प्रदर्शित की है, उसका आभास श्रीउद्धवजीको व्रजमें दूत बनाकर भेजनेकी लीलामे मिलता है । भागवत, दशम स्कन्वके ४६वें अध्यायमे श्रीकृष्ण गोपियोको अपना संदेश भेजते समय अपने प्रिय सुखा भक्तप्रवर श्री उग्रजीसे कहते हैं - 'हे उद्भय ! तुम व्रजमें जाओ, मेरी विरह-विधुरा गोपिकाएँ मुझको न देखकर मृतवत् पड़ी हुई हैं। मेरी बात सुनाकर तुम उन्हें सान्त्वना दो । उनके मन प्राण-बुद्धि और आत्मा दिन-रात मुझमें ही अर्पित हैं । वास्तवमें मेरा मन ही उनका मन बना हुआ है, मेरे ही प्राणोसे वे अनुप्राणित है । मेरे सिवा और कुछ वे नहीं जानती; उन्होंने मेरे लिये लोकधर्म, वेदधर्म तथा देहधर्म सबका परित्याग कर दिया है । वे ब्रजबालाएँ दिन-रात केवल मेरा ही चिन्तन करती हैं, विरहकी उत्कण्ठा में वे विहल हो रही हैं; मेरे स्मरण में, मेरे ध्यान मे विमुग्ध पड़ी हुई हैं तथा मुझको देखनेकी आशामें अतिक्लेशसे जीवन-यापन कर रही है ।" श्रीकृष्ण के इस सरल हृदयगत भावोच्लाससे सहज ही जाना जाता है कि उनका हृदय प्रेम रस माधुर्यसे इतना परिपूर्ण है ! आगे चलकर एकादश स्कन्वके द्वादश अध्याय में श्रीकृष्ण पुनः उद्धवजीसे कहते हैं-- 'हे उद्भव ! ब्रजवालाओंकी बात मैं तुमसे क्या कहूँ । श्रीवृन्दावनमें वे सुदीर्घ कालतक मेरे सङ्ग-सुखको प्राप्त कर चुकनेके बाद भी उस सुदीर्घकालको एक क्षणके समान बीता हुआ समझती थीं। इस समय मेरे चले आनेके कारण आधा क्षण भी उनके लिये कोटि कल्पोंके समान क्लेशप्रद हो रहा है । उनको जब मेरा सङ्ग प्राप्त होता था, तब वे अपना गेह-देह-मन-प्राणआत्मा सब कुछ भूल जाती थीं । जिस प्रकार नदियाँ समुद्र में मिलकर अपनेको खो देती हैं, ध्यानमग्न मुनिगण जैसे समाधिमें अपने-आपको खो देते हैं, गोपियाँ भी मुझको पाकर उसी प्रकार आत्म-विस्मृत हो जाती थीं । हे उद्धव ! व्रजवालाओंके भाव-रस, ध्यान-धारणा योगीश्वरोंकी ध्यान-समाधिसे भी अधिक प्रगाढ़ हैं ।" इस कथासे श्रीकृष्ण के महागाम्भीर्यमय माधुर्यभावका परिचय प्राप्तः होता है। श्रीरासलीला में उन्होंने जिस महान् माधुर्यका निदर्शन प्रदर्शन किया है, उसकी तुलना कहीं नहीं है । उसको प्रकट करनेके लिये उपयुक्त भाषाका अभाव है, मानवी भाषामें कभी वह भात्र प्रकाशित ही नहीं किया जा सकता। रासलीलाके अवसानमें उन्होंने गोपी-प्रेमके महान् माधुर्यको अपने हृदय में अनुभव करके. कहा था कि 'मैं तुमलोगोंके प्रेमका सदाके लिये ऋणी हूँ । तुमलोगोंने दुरन्त - दुःछेय गृहशृङ्खला, समाज-बन्धन, लोक-धर्म और वेदधर्मका त्याग करके, [आर्यपथको छोड़कर मेरे प्रति जो प्रेम प्रदर्शित किया है, में कदापि तुम्हारे इस अनवच्छिन्न, अनवध, अव्यभिचारी प्रेमका बदला नहीं चुका सकता । मैं तुम्हारे प्रेमऋणका ऋणी होकर चिरकालके लिये तुम्हारे चरणों में बँध गया । इस ऋणके परिशोधका साधन मेरे पास नहीं है; तथापि यदि तुम्हारे भाव में तुम्हारा अनुशीलन कर सकूँ, रात, दिन तुम्हारे भायमे विभोर हो सकूँ, तुम्हारा गुण-कीर्तन करतेकरते, तुम्हारा नाम जपते जपते, तुम्हारा रूप-ध्यान करते-करते दिन-रात बिता सकूँ तो वही तुम्हारे सामने मेरा वृतज्ञताज्ञापन तथा आत्मप्रसाद-प्रामिका किचित् उपाय होगा।" सांदीपनि मुनिके आश्रम में रहते हुए श्रीकृष्ण सल्पकाढमें हो १४ विद्याओं और ६४ कलाओंमे पारंगत हो गये । हम ★ युद्ध-कलाकी शिक्षा के लिये सांदीपनि मुनिके गुरुकुलको धन्यवाद दें, अथवा यमुनातटस्थ केलिकुजसमलंकृत, गोपवालाविलसित रास-स्थलीको धन्यवाद दें - समझ में नहीं आता । जो रण-रङ्गमें रुद्रलीलाके ताण्डवनृत्य में विश्वविजयी महागुरु है, वे ही रासलीला में व्रजबालाओको नृत्यशिक्षा के लिये गुरुरूप वरण करते हैं इसका चिन्तन करते-करते मन भावना-सिन्धुकी तरङ्गोमें तरङ्गायमाण होने उगता है । श्रीकृष्णकी शिक्षा के सम्बन्ध में श्रीमद्भागवतमे जो वर्णन है, वह अद्भुत है। श्रीकृष्णकी राजनीतिके विषय में जगत्मे आन्दोलन और आलोचना होती आ रही है और होती रहेगी । परंतु महाभारत में जो हमें विशान्द, विपुल राजनीतिकी सामग्री प्राप्त होती है, व्यास-भीष्म आदि जो नीतिका उपदेश देते हैं, वह
'जो अनन्तगुगशाली भगवान् अपनी लीलासे त्रिभुवनकी सृष्टि, स्थिति और संहार करते रहते हैं, उनके लिये शत्रुपक्षका निग्रह करना कोई चमत्कारकी बात नहीं है, तथापि उन्होंने मनुष्यके समान युद्धमें असाधारण युद्धनैपुण्य दिसलाकर और विजय प्राप्त करके संसारके लोगोके सामने वीरताका आदर्श उपस्थित किया, इसीलिये उसका वर्णन किया जाता है ।। इस अलौकिक ऐश्वर्य-लीलाके बीच श्रीभगवान्ने जो अति विलक्षण प्रेम --माधुर्यकी लीना प्रदर्शित की है, उसका आभास श्रीउद्धवजीको व्रजमें दूत बनाकर भेजनेकी लीलामे मिलता है । भागवत, दशम स्कन्वके छियालीसवें अध्यायमे श्रीकृष्ण गोपियोको अपना संदेश भेजते समय अपने प्रिय सुखा भक्तप्रवर श्री उग्रजीसे कहते हैं - 'हे उद्भय ! तुम व्रजमें जाओ, मेरी विरह-विधुरा गोपिकाएँ मुझको न देखकर मृतवत् पड़ी हुई हैं। मेरी बात सुनाकर तुम उन्हें सान्त्वना दो । उनके मन प्राण-बुद्धि और आत्मा दिन-रात मुझमें ही अर्पित हैं । वास्तवमें मेरा मन ही उनका मन बना हुआ है, मेरे ही प्राणोसे वे अनुप्राणित है । मेरे सिवा और कुछ वे नहीं जानती; उन्होंने मेरे लिये लोकधर्म, वेदधर्म तथा देहधर्म सबका परित्याग कर दिया है । वे ब्रजबालाएँ दिन-रात केवल मेरा ही चिन्तन करती हैं, विरहकी उत्कण्ठा में वे विहल हो रही हैं; मेरे स्मरण में, मेरे ध्यान मे विमुग्ध पड़ी हुई हैं तथा मुझको देखनेकी आशामें अतिक्लेशसे जीवन-यापन कर रही है ।" श्रीकृष्ण के इस सरल हृदयगत भावोच्लाससे सहज ही जाना जाता है कि उनका हृदय प्रेम रस माधुर्यसे इतना परिपूर्ण है ! आगे चलकर एकादश स्कन्वके द्वादश अध्याय में श्रीकृष्ण पुनः उद्धवजीसे कहते हैं-- 'हे उद्भव ! ब्रजवालाओंकी बात मैं तुमसे क्या कहूँ । श्रीवृन्दावनमें वे सुदीर्घ कालतक मेरे सङ्ग-सुखको प्राप्त कर चुकनेके बाद भी उस सुदीर्घकालको एक क्षणके समान बीता हुआ समझती थीं। इस समय मेरे चले आनेके कारण आधा क्षण भी उनके लिये कोटि कल्पोंके समान क्लेशप्रद हो रहा है । उनको जब मेरा सङ्ग प्राप्त होता था, तब वे अपना गेह-देह-मन-प्राणआत्मा सब कुछ भूल जाती थीं । जिस प्रकार नदियाँ समुद्र में मिलकर अपनेको खो देती हैं, ध्यानमग्न मुनिगण जैसे समाधिमें अपने-आपको खो देते हैं, गोपियाँ भी मुझको पाकर उसी प्रकार आत्म-विस्मृत हो जाती थीं । हे उद्धव ! व्रजवालाओंके भाव-रस, ध्यान-धारणा योगीश्वरोंकी ध्यान-समाधिसे भी अधिक प्रगाढ़ हैं ।" इस कथासे श्रीकृष्ण के महागाम्भीर्यमय माधुर्यभावका परिचय प्राप्तः होता है। श्रीरासलीला में उन्होंने जिस महान् माधुर्यका निदर्शन प्रदर्शन किया है, उसकी तुलना कहीं नहीं है । उसको प्रकट करनेके लिये उपयुक्त भाषाका अभाव है, मानवी भाषामें कभी वह भात्र प्रकाशित ही नहीं किया जा सकता। रासलीलाके अवसानमें उन्होंने गोपी-प्रेमके महान् माधुर्यको अपने हृदय में अनुभव करके. कहा था कि 'मैं तुमलोगोंके प्रेमका सदाके लिये ऋणी हूँ । तुमलोगोंने दुरन्त - दुःछेय गृहशृङ्खला, समाज-बन्धन, लोक-धर्म और वेदधर्मका त्याग करके, [आर्यपथको छोड़कर मेरे प्रति जो प्रेम प्रदर्शित किया है, में कदापि तुम्हारे इस अनवच्छिन्न, अनवध, अव्यभिचारी प्रेमका बदला नहीं चुका सकता । मैं तुम्हारे प्रेमऋणका ऋणी होकर चिरकालके लिये तुम्हारे चरणों में बँध गया । इस ऋणके परिशोधका साधन मेरे पास नहीं है; तथापि यदि तुम्हारे भाव में तुम्हारा अनुशीलन कर सकूँ, रात, दिन तुम्हारे भायमे विभोर हो सकूँ, तुम्हारा गुण-कीर्तन करतेकरते, तुम्हारा नाम जपते जपते, तुम्हारा रूप-ध्यान करते-करते दिन-रात बिता सकूँ तो वही तुम्हारे सामने मेरा वृतज्ञताज्ञापन तथा आत्मप्रसाद-प्रामिका किचित् उपाय होगा।" सांदीपनि मुनिके आश्रम में रहते हुए श्रीकृष्ण सल्पकाढमें हो चौदह विद्याओं और चौंसठ कलाओंमे पारंगत हो गये । हम ★ युद्ध-कलाकी शिक्षा के लिये सांदीपनि मुनिके गुरुकुलको धन्यवाद दें, अथवा यमुनातटस्थ केलिकुजसमलंकृत, गोपवालाविलसित रास-स्थलीको धन्यवाद दें - समझ में नहीं आता । जो रण-रङ्गमें रुद्रलीलाके ताण्डवनृत्य में विश्वविजयी महागुरु है, वे ही रासलीला में व्रजबालाओको नृत्यशिक्षा के लिये गुरुरूप वरण करते हैं इसका चिन्तन करते-करते मन भावना-सिन्धुकी तरङ्गोमें तरङ्गायमाण होने उगता है । श्रीकृष्णकी शिक्षा के सम्बन्ध में श्रीमद्भागवतमे जो वर्णन है, वह अद्भुत है। श्रीकृष्णकी राजनीतिके विषय में जगत्मे आन्दोलन और आलोचना होती आ रही है और होती रहेगी । परंतु महाभारत में जो हमें विशान्द, विपुल राजनीतिकी सामग्री प्राप्त होती है, व्यास-भीष्म आदि जो नीतिका उपदेश देते हैं, वह
प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? बढ़ती आबादी और तीव्र शहरीकरण के कारण भारतीय शहरों में नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (Municipal Solid Waste-MSW) के उत्पादन में व्यापक वृद्धि हुई है। - यह ध्यान रखना महत्त्वपूर्ण है कि संगठित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की भागीदारी शहरों में कम है, क्योंकि अपर्याप्त धन, कम क्षेत्रीय विकास और स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन व्यवसायों के बारे में जानकारी की कमी है। - इसलिये भारत सहित कई विकासशील देशों में अपशिष्ट संग्रह और वस्तु पुनर्चक्रण गतिविधियाँ मुख्य रूप से असंगठित अपशिष्ट क्षेत्र द्वारा की जाती हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में असंगठित क्षेत्र की भूमिकाः - परिचयः - असंगठित अपशिष्ट संग्रहकर्त्ताओं में ऐसे व्यक्ति, संघ या कचरा-व्यापारी शामिल हैं जो पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों की छँटाई, बिक्री और खरीद में शामिल हैं। - कचरा बीनने वाला व्यक्ति असंगठित रूप से अपशिष्ट उत्पादन के स्रोत से पुनः प्रयोज्य और पुनर्चक्रण योग्य ठोस अपशिष्ट के संग्रह तथा पुनर्प्राप्ति में लगा हुआ है, जो सीधे या बिचौलियों के माध्यम से पुनर्चक्रणकर्त्ताओं को अपशिष्ट की बिक्री करता है। - यह अनुमान है कि असंगठित अपशिष्ट अर्थव्यवस्था दुनिया भर में लगभग 0.5% - 2% शहरी आबादी को रोज़गार देती है। - असंगठित अपशिष्ट संग्रहकर्त्ताओं में ऐसे व्यक्ति, संघ या कचरा-व्यापारी शामिल हैं जो पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों की छँटाई, बिक्री और खरीद में शामिल हैं। - चुनौतियाँः - न्यूनतम आय वाले रोज़गारः - असंगठित क्षेत्र को अक्सर आधिकारिक तौर पर अनुमोदित, मान्यता प्राप्त और स्वीकार नहीं किया जाता है, जबकि वे पुनर्चक्रण मूल्य शृंखला में अपशिष्ट पदार्थों को इकट्ठा करने, छाँटने, प्रसंस्करण, भंडारण और व्यापार करके शहरों के अपशिष्ट पुनर्चक्रण प्रथाओं में योगदान करते हैं। - स्वास्थ्य चुनौतियाँः - असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले लोग अपशिष्ट के ढेर के पास रहतें हैं एवं अस्वच्छ तथा अस्वस्थ परिस्थितियों में काम करतें हैं। - श्रमिकों के पास पीने के जल या सार्वजनिक शौचालय तक पहुँच नहीं है। - उनके पास दस्ताने, गमबूट और एप्रन जैसे उपयुक्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPI) नहीं हैं। - निम्न स्तर का जीवनयापन और काम करने की स्थिति के कारण उनमें कुपोषण, एनीमिया और तपेदिक आम हैं। - सामाजिक उपचारः - उन्हें समाज में गंदे और अवांछित तत्त्वों के रूप में माना जाता है, साथ ही उन्हें शोषक सामाजिक व्यवहार से निपटना पड़ता है। - असंगठित अपशिष्ट-श्रमिकों के विभिन्न स्तरों की मज़दूरी और रहने की स्थिति बहुत भिन्न होती है। - अन्यः - इस क्षेत्र में बाल श्रम काफी प्रचलित है और जीवन प्रत्याशा कम है। - अपशिष्ट बीनने वाले किसी भी श्रम कानून के दायरे में नहीं आते हैं। - नतीजतन उन्हें सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा बीमा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। - न्यूनतम आय वाले रोज़गारः - परिचयः - ठोस अपशिष्ट में ठोस या अर्द्ध-ठोस घरेलू अपशिष्ट, स्वच्छता अपशिष्ट, वाणिज्यिक अपशिष्ट, संस्थागत अपशिष्ट, खानपान और बाज़ार अपशिष्ट एवं अन्य गैर-आवासीय अपशिष्ट, सड़क पर झाड़ू लगाना, सतही नालियों से हटाया या एकत्र किया गया गाद, बागवानी अपशिष्ट, कृषि तथा डेयरी अपशिष्ट, औद्योगिक अपशिष्ट को छोड़कर उपचारित जैव चिकित्सा अपशिष्ट और ई-अपशिष्ट, बैटरी अपशिष्ट, रेडियो-सक्रिय अपशिष्ट आदि शामिल हैं। - भारत की स्थितिः - अकेले शहरी भारत में प्रतिदिन लगभग 15 मिलियन टन नगरपालिका ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है। - अनुमान है कि देश में सालाना लगभग 62 मिलियन टन अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें से 5.6 मिलियन प्लास्टिक अपशिष्ट और 0.17 मिलियन बायोमेडिकल कचरा है। - इसके अलावा खतरनाक अपशिष्ट उत्पादन प्रतिवर्ष 7.90 मिलियन टन है और 15 लाख टन ई-अपशिष्ट है। - अपशिष्ट की मात्रा वर्ष 2031 तक 165 मिलियन टन और वर्ष 2050 तक 436 मिलियन टन तक पहुँचने का अनुमान है। - अपशिष्ट प्रबंधन में चुनौतियाँः - भारत में बढ़ते शहरीकरण के परिणामस्वरूप अति-उपभोक्तावाद की स्थिति है, जिसके परिणामस्वरूप अधिक अपशिष्ट उत्पादन होता है। - जैविक खेती और खाद बनाना भारतीय किसान के लिये आर्थिक रूप से आकर्षक नहीं है, क्योंकि रासायनिक कीटनाशकों पर भारी सब्सिडी दी जाती है तथा खाद का विपणन कुशलता से नहीं किया जाता है। - नगर निगमों/शहरी स्थानीय निकायों के पास वित्तीय संसाधनों की कमी के परिणामस्वरूप ठोस अपशिष्ट का संग्रहण, परिवहन और प्रबंधन की खराब स्थिति है। - कचरे को निम्नलिखित प्रकार से तीन श्रेणियों में अलग करने की जिम्मेदारी इसके उत्पादक की हैः - गीला (बायोडिग्रेडेबल) । - सूखा (प्लास्टिक, कागज़, धातु, लकड़ी आदि) । - घरेलू खतरनाक अपशिष्ट (डायपर, नैपकिन, खाली कंटेनर आदि) तथा अलग किये गए कचरे को अधिकृत कचरा बीनने वालों या कचरा संग्रहकर्ता या स्थानीय निकायों को सौंपना। - अपशिष्ट उत्पादकों को करना होगा भुगतानः - कचरा संग्रहणकर्त्ताओं को 'उपयोगकर्त्ता शुल्क'। - लिटरिंग और नॉन-सेग्रीगेशन के लिये 'स्पॉट फाइन'। - डायपर, सैनिटरी पैड जैसे इस्तेमाल किये गए सैनिटरी अपशिष्ट को निर्माताओं या इन उत्पादों के ब्रांड मालिकों द्वारा प्रदान किये गए पाउच में या उपयुक्त रैपिंग सामग्री में सुरक्षित रूप से लपेटा जाना चाहिये और इसे सूखे अपशिष्ट/गैर-जैव-अवक्रमणीय अपशिष्ट के लिये कूड़ादान (Bin) में रखा जाना चाहिये। - स्वच्छ भारत में साझेदारी की अवधारणा पेश की गई है। - थोक और संस्थागत उत्पादक, बाज़ार संघों, कार्यक्रम आयोजकों, होटल और रेस्तराँ को स्थानीय निकायों के साथ साझेदारी में अपशिष्ट को अलग करने, व्यवस्थित करने तथा प्रबंधन के लिये सीधे ज़िम्मेदार बनाया गया है। - टिन, काँच, प्लास्टिक पैकेजिंग आदि जैसे डिस्पोज़ेबल उत्पादों के निर्माता या ब्रांड मालिक जो ऐसे उत्पादों को बाज़ार में पेश करते हैं,अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की स्थापना हेतु स्थानीय अधिकारियों आवश्यक वित्तीय प्रदान करेंगे। - बायो-डिग्रेडेबल अपशिष्ट को जहाँ तक संभव हो परिसर के भीतर कंपोस्टिंग या बायो-मीथेनेशन के माध्यम से संसाधित, उपचारित तथा निपटाया जाना चाहिये। - अवशिष्ट कचरा स्थानीय प्राधिकरण के निर्देशानुसार कचरा संग्रहकर्त्ता या एजेंसी को दिया जाएगा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिये सरकार की पहलः - वेस्ट टू वेल्थ पोर्टलः - वेस्ट टू वेल्थ मिशन प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (PMSTIAC) के नौ वैज्ञानिक मिशनों में से एक है। - इसका उद्देश्य ऊर्जा उत्पन्न करने, सामग्रियों का पुनर्चक्रण करने और कचरे के उपचार हेतु प्रौद्योगिकियों की पहचान, विकास और तैनाती करना है। - राष्ट्रीय जल मिशनः - इसका उद्देश्य एकीकृत जल संसाधन विकास और प्रबंधन के माध्यम से जल का संरक्षण करना, अपव्यय को कम करना तथा राज्यों के बाहर भीतर जल का अधिक समान वितरण सुनिश्चित करना है। - अपशिष्ट से ऊर्जाः - एक अपशिष्ट-से-ऊर्जा या ऊर्जा-से-अपशिष्ट संयंत्र औद्योगिक प्रसंस्करण के लिये नगरपालिका एवं औद्योगिक ठोस अपशिष्ट को बिजली और/या गर्मी में परिवर्तित करता है। - प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (PWM) नियम, 2016: - यह प्लास्टिक कचरे के उत्पादन को कम करने, प्लास्टिक कचरे को फैलने से रोकने और अन्य उपायों के बीच स्रोत पर कचरे का अलग भंडारण सुनिश्चित करने के लिये कदम उठाने पर ज़ोर देता है। - यह प्लास्टिक कचरे के उत्पादन को कम करने, प्लास्टिक कचरे को फैलने से रोकने और अन्य उपायों के बीच स्रोत पर कचरे का अलग भंडारण सुनिश्चित करने के लिये कदम उठाने पर ज़ोर देता है। - असंगठित श्रमिकः - दशकों से कचरा बीनने वाले या 'रैग-पिकर्स' (Rag-Pickers) खतरनाक एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में कार्य करते हुए हमारी फेंकी हुई चीज़ों से अपनी आजीविका प्राप्त करते रहे हैं। - इसमें पानी, स्वच्छता एवं स्वच्छ जीवन और स्वास्थ्य बीमा जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के व्यावसायिक खतरों को कम करने के लिये संग्रह, पृथक्करण तथा PPE की छँटाई हेतु अनिवार्य पहचान पत्र तक पहुँच से संबंधित बुनियादी प्रावधान शामिल होने चाहिये। - कचरा बीनने वालों को शहर में निर्दिष्ट संग्रह और संघनन स्टेशनों (स्थानांतरण स्टेशन, सामग्री वसूली सुविधाओं) का उपयोग करने की अनुमति देकर औपचारिक रूप से पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं के पृथक्करण के लिये किया जाना चाहिये। - दशकों से कचरा बीनने वाले या 'रैग-पिकर्स' (Rag-Pickers) खतरनाक एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में कार्य करते हुए हमारी फेंकी हुई चीज़ों से अपनी आजीविका प्राप्त करते रहे हैं। - भागीदारीः - सरकार को कचरा बीनने वाले संगठनों के साथ साझेदारी स्थापित करनी चाहिये, जिसका उल्लेख SWM 2016 नियमों में भी किया गया है। - कचरा बीनने वालों की पहचान करने, उन्हें संगठित करने, प्रशिक्षित करने और उन्हें सशक्त बनाने की आवश्यकता है। - सरकार को कचरा बीनने वाले संगठनों के साथ साझेदारी स्थापित करनी चाहिये, जिसका उल्लेख SWM 2016 नियमों में भी किया गया है। - कचरे को आर्थिक अवसर के रूप में देखनाः - ऊर्जा उत्पादनः - अपशिष्ट का गैसीकरणः बायोगैस संयंत्रों के लिये कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाने वाला ठोस अपशिष्ट। - पुनर्चक्रण सामग्रियाँः - पृथक्करण के चरण में पुनर्चक्रण एक अच्छा आर्थिक अवसर प्रस्तुत करता है। - भारत द्वारा अपनाए गए चक्रीय अर्थव्यवस्था से 40 लाख करोड़ रुपए (अनुमानित) का वार्षिक लाभ हो सकता है। - पृथक्करण के चरण में पुनर्चक्रण एक अच्छा आर्थिक अवसर प्रस्तुत करता है। - आवश्यक संसाधनों की प्राप्तिः - ई-कचरे के प्रसंस्करण से तांबा, सोना, एल्युमिनियम आदि कीमती धातुओं का निष्कर्षण संभव हो सकता है। - ऊर्जा उत्पादनः यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न (पीवाईक्यू) प्रश्न. भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है? (2019) (a) अपशिष्ट उत्पादक को पाँच कोटियों में अपशिष्ट अलग-अलग करने होंगे। उत्तरः (c) प्रश्न. निरंतर उत्पन्न किये जा रहे और फेंके गए ठोस कचरे की विशाल मात्रा का निस्तारण करने में क्या-क्या बाधाएँ हैं? हम अपने रहने योग्य परिवेश में जमा होते जा रहे जहरीले अपशिष्टों को सुरक्षित रूप से किस प्रकार हटा सकते हैं? (2018 मुख्य परीक्षा) प्रिलिम्स के लियेः तर्कहीन फ्रीबीज़, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM), वित्त आयोग। मेन्स के लियेः फ्रीबीज़ और अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव। चर्चा में क्यों? हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या चुनाव अभियानों के दौरान तर्कहीन फ्रीबीज़ (मुफ्त उपहार) वितरित करना आर्थिक रूप से व्यवहार्य है। - इसने तर्कहीन चुनावी फ्रीबीज़ पर अंकुश लगाने में वित्त आयोग की विशेषज्ञता का उपयोग करने का भी उल्लेख किया है। - भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, क्या ऐसी नीतियाँ आर्थिक रूप से व्यवहार्य हैं या राज्य के आर्थिक स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव एक ऐसा प्रश्न है जिस पर राज्य के मतदाताओं को विचार करना और निर्णय लेना है। राजनीतिक दल लोगों के वोट को सुरक्षित करने के लिये मुफ्त बिजली/पानी की आपूर्त्ति, बेरोज़गारों, दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों और महिलाओं को भत्ता, साथ-साथ गैजेट जैसे- लैपटॉप, स्मार्टफोन आदि की पेशकश करने का वादा करते हैं। राज्यों को कर्जमाफी या मुफ्त बिजली, साइकिल, लैपटॉप, टीवी सेट आदि के रूप में मुफ्त उपहार देने की आदत हो गई है। - लोकलुभावन वादों या चुनावों को ध्यान में रखकर किये जाने वाले ऐसे कुछ खर्चों पर निश्चय ही प्रश्न उठाए जा सकते हैं। - लेकिन यह देखते हुए कि पिछले 30 वर्षों से देश में असमानता बढ़ रही है, सब्सिडी के रूप में आम आबादी को किसी प्रकार की राहत प्रदान करना अनुचित नहीं माना जा सकता, बल्कि वास्तव में अर्थव्यवस्था के विकास पथ पर बने रहने के लिये यह आवश्यक है। फ्रीबीज़ की आवश्यकताः - विकास को सुगम बनानाः ऐसे कुछ उदाहरण हैं जो दिखाते हैं कि कुछ व्यय, परिव्यय के समग्र लाभ के रूप में होते हैं जैसे कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली, रोज़गार गारंटी योजनाएँ, शिक्षा के लिये समर्थन और विशेष रूप से महामारी के दौरान स्वास्थ्य सुविधा के लिये किया गया परिव्यय। - अल्प विकसित राज्यों को मददः गरीबी से पीड़ित आबादी के एक बड़े हिस्से के साथ तुलनात्मक रूप से निम्न स्तर के विकास वाले राज्यों को इस तरह की निःशुल्क सुविधाएँ जरूरत/मांग परआधारित होती हैं और इस क्रम में उनका उत्थान करने के लिये उन्हें सब्सिडी प्रदान करना अपरिहार्य हो जाता है। - अपेक्षाओं की पूर्तिः भारत जैसे देश में जहाँ राज्यों में विकास का एक निश्चित स्तर होता है (अथवा नहीं होता है), चुनाव के अवसर पर किये गए लोकलुभावन वायदे से जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति की जाती है। फ्रीबीज़ की कमियाँः - समष्टि अर्थव्यवस्था के लिये अस्थिरः फ्रीबीज़ समष्टि अर्थव्यवस्था की स्थिरता के बुनियादी ढाँचे को कमजोर करते हैं, फ्रीबीज़ की राजनीति व्यय प्राथमिकताओं को विकृत करती है और यह परिव्यय किसी-न-किसी रूप में सब्सिडी पर केंद्रित रहता है। - राज्यों की वित्तीय स्थिति पर प्रभावः निःशुल्क उपहार देने से अंततः सरकारी खजाने पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और भारत के अधिकांश राज्यों में मज़बूत वित्तीय व्यवस्था नहीं है, अक्सर राजस्व के मामले में संसाधन बहुत सीमित होते हैं। - स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के खिलाफः चुनाव से पहले सार्वजनिक धन से तर्कहीन मुफ्त का वादा मतदाताओं को अनुचित रूप से प्रभावित करता है, सभी को समान अवसर की स्वतंत्रता में बाधा उत्पन्न करता है, तथा चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को नष्ट करता है। - पर्यावरण से दूरः जब मुफ्त बिज़ली दी जाएगी, तो इससे प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग होगा और अक्षय ऊर्जा प्रणाली से ध्यान भी विचलित हो जाएगा। - मुफ्त के आर्थिक प्रभावों को समझनाः यह इस बारे में नहीं है कि फ्रीबीज़ कितने सस्ते हैं बल्कि लंबे समय में अर्थव्यवस्था, जीवन की गुणवत्ता और सामाजिक सामंजस्य के लिये ये कितने महंगे हैं।. - इसके बजाय हमें लोकतंत्र और सशक्त संघवाद के माध्यम से दक्षता के लिये प्रयास करना चाहिये जहाँ राज्य अपने अधिकार का उपयोग नवीन विचारों और सामान्य समस्याओं के समाधान के लिये कर सकें तथा जिनका अन्य राज्य अनुकरण कर सकते हैं। - सब्सिडी और मुफ्त में अंतरः आर्थिक अर्थों में मुफ्त के प्रभावों को समझने और इसे करदाता के पैसे से जोड़ने की ज़रूरत है। - सब्सिडी और मुफ्त में अंतर करना भी आवश्यक है क्योंकि सब्सिडी के उचित और विशेष रूप से लक्षित लाभ हैं जो मांगों से उत्पन्न होते हैं। - सब्सिडी और मुफ्त में अंतर करना भी आवश्यक है क्योंकि सब्सिडी के उचित और विशेष रूप से लक्षित लाभ हैं जो मांगों से उत्पन्न होते हैं। UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्षों के प्रश्नः प्रश्न. सरकार द्वारा की जाने वाली निम्नलिखित कार्रवाइयों पर विचार कीजियेः (2010) उपर्युक्त कार्यों में से किसे/किन्हें "राजकोषीय प्रोत्साहन" पैकेज का हिस्सा माना जा सकता है? उत्तरः (a) प्रश्नः किस तरह से मूल्य सब्सिडी को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) में बदलने से भारत में सब्सिडी का परिदृश्य बदल सकता है? चर्चा कीजिये। (2015, मुख्य परीक्षा) प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? वायरल हेपेटाइटिस के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। - वर्ष 2022 की थीम "ब्रिंगिंग हेपेटाइटिस केयर क्लोज़र टू यू" (Bringing hepatitis care closer to you) है। - इसका उद्देश्य हेपेटाइटिस देखभाल को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं और समुदायों तक पहुँचाने की आवश्यकता को रेखांकित करना है, ताकि उपचार और देखभाल की बेहतर सुविधाएँ सुनिश्चित की जा सकें। - परिचयः - हेपेटाइटिस शब्द यकृत की किसी भी सूजन को संदर्भित करता है- किसी भी कारण से यकृत कोशिकाओं में होने वाली जलन या सूजन। - यह तीव्र भी हो सकता है (यकृत की सूजन जिस बीमारी की वजह से होती है उनमें पीलिया, बुखार, उल्टी आदि शामिल हैं) यकृत की सूजन छह महीने से अधिक समय तक भी रहती है, लेकिन अनिवार्य रूप से इसका कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है। - कारणः - आमतौर पर यह A, B, C, D और E सहित "हेपेटोट्रोपिक" (यकृत निर्देशित) वायरस के एक समूह के कारण होता है। - अन्य वायरस भी इसका कारण हो सकते हैं, जैसे कि वैरिकाला वायरस जो चिकन पॉक्स का कारण बनता है । - SARS-CoV-2, Covid-19 पैदा करने वाला वायरस भी यकृत को नुकसान पहुँचा सकता है। - अन्य कारणों में ड्रग्स और अल्कोहल का दुरुपयोग, यकृत में वसा का निर्माण (फैटी लीवर हेपेटाइटिस) या एक ऑटोइम्यून प्रक्रिया शामिल है जिसमें एक व्यक्ति का शरीर एंटीबॉडी बनाता है जो यकृत (ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस) पर हमला करता है। - हेपेटाइटिस एकमात्र संचारी रोग है जिसकी मृत्यु दर में वृद्धि हो रही है। - उपचारः - हेपेटाइटिस A और E स्व-सीमित रोग (self-limiting diseases) हैं (अर्थात् अपने आप दूर हो जाते हैं) और इसके लिये किसी विशिष्ट एंटीवायरल दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है। - हेपेटाइटिस B और C के लिये प्रभावी दवाएँ उपलब्ध हैं। - वैश्विक परिदृश्यः - लगभग 354 मिलियन लोग हेपेटाइटिस B और C से पीड़ित हैं। - दक्षिण-पूर्व एशिया में हेपेटाइटिस के वैश्विक रुग्णता बोझ का 20% है। - सभी हेपेटाइटिस से संबंधित मौतों में से लगभग 95% सिरोसिस तथा हेपेटाइटिस B और C वायरस की वजह से होने वाले यकृत कैंसर के कारण होती हैं। - भारतीय परिदृश्यः - वायरल हेपेटाइटिस, हेपेटाइटिस वायरस A और E के कारण होता है, जो अभी भी भारत में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। - भारत में हेपेटाइटिस बी सरफेस एंटीजन और अनुमानित 40 मिलियन पुराने HVB संक्रमित लोगों के लिये "मध्यवर्ती से उच्च स्थानिकता" है, जो अनुमानित वैश्विक भार का लगभग 11% है। - भारत में क्रोनिक HBV संक्रमण का प्रसार लगभग 3-4% जनसंख्या पर है। - चुनौतियाँः - स्वास्थ्य सेवाओं तक अक्सर समुदायों की पहुँच नहीं होती है क्योंकि वे आमतौर पर केंद्रीकृत/विशेषीकृत अस्पतालों में उच्च कीमत पर उपलब्ध होती हैं जिन्हें सभी द्वारा वहन नहीं किया जा सकता है। - देर से निदान या उचित उपचार की कमी के कारण लोगों की मौत हो जाती है। ऐसें में प्रारंभिक निदान, रोकथाम और सफल उपचार दोनों ही मामलों में आवश्यक है। - दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में हेपेटाइटिस वाले लगभग 10% लोग ही अपनी स्थिति के प्रति सजग हैं और उनमें से केवल 5% लोग इलाज करवा रहे हैं। - हेपेटाइटिस सी से ग्रसित अनुमानित 10.5 मिलियन लोगों में से केवल 7% ही अपनी स्थिति के प्रति सजग हैं, जिनमें से लगभग पाँच में से एक का इलाज चल रहा है। हेपेटाइटिस हेतु वैश्विक लक्ष्यः - परिचयः - वैश्विक लक्ष्य 2030 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में वायरल हेपेटाइटिस को खत्म करना है। - लक्ष्य की प्राप्तिः - वर्ष 2025 तक हमें हेपेटाइटिस बी और सी के नए संक्रमणों को 50% तक एवं यकृत कैंसर से होने वाली मौतों को 40% तक कम करना होगा, साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिये कि हेपेटाइटिस बी और सीपीड़ित 60% लोगों का निदान किया जाए और उनमें से आधे लोगों को उचित उपचार मिले। - क्षेत्र के सभी देशों में राजनीतिक प्रतिबद्धता बढ़ाने की आवश्यकता है औरः - हेपेटाइटिस के लिये निरंतर घरेलू वित्तपोषण सुनिश्चित करना। - कीमतों को और कम करके दवाओं एवं निदान तक पहुँच में सुधार करना। - जागरूकता प्रसार के लिये संचार रणनीतियों का विकास करना। - HIV में विभेदित और जन-केंद्रित सेवा वितरण विकल्पों का अधिकतम उपयोग के लिये सेवा वितरण में सुधार करना तथा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण के अनुरूप लोगों की ज़रूरतों एवं प्राथमिकताओं के अनुसार सेवाएँ प्रदान करना। - परिधीय स्वास्थ्य सुविधाओं, समुदाय-आधारित क्षेत्रों और अस्पताल से परे स्थानों पर हेपेटाइटिस देखभाल का विकेंद्रीकरण रोगियों को उनके घरों के करीब इलाज़ की सुविधा प्रदान करेगा। - WHO द्वारा वायरल हेपेटाइटिस, एचआईवी और यौन संचारित संक्रमण (STI) के निदान हेतु वर्ष 2022-2026 के लिये एकीकृत क्षेत्रीय कार्ययोजना विकसित की जा रही है। - यह क्षेत्र के लिये उपलब्ध सीमित संसाधनों का प्रभावी और कुशल उपयोग सुनिश्चित करेगा तथा देशों को रोग-विशिष्ट दृष्टिकोण के बजाय व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिये मार्गदर्शन करेगा। - स्वच्छ भोजन और उचित व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ साफ पानी एवं स्वच्छता हमें हेपेटाइटिस A और E से बचा सकती है। - हेपेटाइटिस B और C को रोकने के उपायों में जन्म की खुराक सहित हेपेटाइटिस B टीकाकरण के साथ-साथ सुरक्षित रक्त, सुरक्षित सेक्स और सुरक्षित सुई के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। - नई और शक्तिशाली एंटीवायरल दवाओं के साथ-साथ हेपेटाइटिस B को रोकने के लिये सुरक्षित और प्रभावी टीके मौज़ूद हैं जिनका उपयोग क्रोनिक हेपेटाइटिस B के प्रबंधन और हेपेटाइटिस C के अधिकांश मामलों के इलाज में किया जा सकता है। - प्रारंभिक निदान और जागरूकता अभियानों के साथ इन हस्तक्षेपों में वैश्विक स्तर पर वर्ष 2030 तक निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में 4.5 मिलियन समय पूर्व होने वाली मौतों को रोकने की क्षमता है। - प्रारंभिक निदान और जागरूकता अभियानों के साथ इन हस्तक्षेपों में वैश्विक स्तर पर वर्ष 2030 तक निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में 4.5 मिलियन समय पूर्व होने वाली मौतों को रोकने की क्षमता है। - हेपेटाइटिस बी को भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के तहत शामिल किया गया है। जो हीमोफिलस इन्फ्लुएंज़ा टाइप बी (Hib), खसरा, रूबेला, जापानी इंसेफेलाइटिस (JE), रोटावायरस डायरिया के कारण ग्यारह (हेपेटाइटिस B को छोड़कर) वैक्सीन-रोकथाम योग्य बीमारियों यानी तपेदिक, डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, पोलियो, निमोनिया और मेनिनजाइटिस के खिलाफ मुफ्त टीकाकरण प्रदान करता है। - बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और थाईलैंड विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में हेपेटाइटिस बी को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने वाले पहले चार देश बन गए हैं। - हाल ही में 'COBAS 6800' नामक एक स्वचालित कोरोनावायरस परीक्षण उपकरण लॉन्च किया गया था जो वायरल हेपेटाइटिस B और C का भी पता लगा सकता है। - यह ध्यान दिया जा सकता है कि केवल चार बीमारियों जैसे HIV-एड्स (1 दिसंबर), टीबी (24 मार्च), मलेरिया (25 अप्रैल), हेपेटाइटिस के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) आधिकारिक तौर पर रोग-विशिष्ट वैश्विक जागरूकता दिवसों का समर्थन करता है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, पिछले वर्ष के प्रश्न (पीवाईक्यू) प्रश्न. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही नहीं है? (a) यकृतशोध B विषाणु HIV की तरह ही संचरित होता है। उत्तरः (b) अतः विकल्प (b) सही उत्तर है। प्रिलिम्स के लियेः डोपिंग, नाडा, वाडा। मेन्स के लियेः राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक, 2021 के प्रावधान और संबंधित मुद्दे। चर्चा में क्यों? हाल ही में लोकसभा ने राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक, 2021 पारित किया, जो राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) के लिये वैधानिक ढाँचा तैयार करने का प्रयास करता है। - केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा इसे पहली बार दिसंबर, 2021 में लोकसभा में पेश किया गया था। - यह विधेयक खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करेगा क्योंकि यह उन्हें अपना पक्ष रखने के लिये पर्याप्त जगह प्रदान करेगा, खासकर जब वे डोपिंग रोधी आरोपों का सामना कर रहे हों। विधेयक की मुख्य विशेषताएँः - डोपिंग का निषेधः - विधेयक एथलीटों, एथलीट सपोर्ट कर्मियों और अन्य व्यक्तियों को खेल में डोपिंग में शामिल होने से रोकता है। - उल्लंघन के परिणामः - डोपिंग रोधी नियम के उल्लंघन के परिणामस्वरूप खिलाडी को अयोग्य ठहराया जा सकता है, जिसमें पदक, अंक और पुरस्कार की जब्ती, निर्धारित अवधि के लिये किसी प्रतियोगिता या कार्यक्रम में भाग लेने की अयोग्यता, वित्तीय प्रतिबंध आदि शामिल हैं। - राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी हेतु वैधानिक समर्थनः - विधेयक राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी को वैधानिक निकाय के रूप में गठित करने का प्रावधान करता है। - इसकी अध्यक्षता केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त महानिदेशक करेगा। एजेंसी के कार्यों में शामिल हैंः - डोपिंग रोधी गतिविधियों की योजना बनाना, उन्हें लागू करना और उनकी निगरानी करना। - डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन की जाँच। - डोपिंग रोधी अनुसंधान को बढ़ावा देना। - खेल में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी बोर्ड (National Board for Anti-Doping in Sports): - डोपिंग रोधी विनियमन और डोपिंग रोधी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुपालन पर सरकार को सिफारिशें करने के लिये विधेयक खेल क्षेत्र में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी बोर्ड की स्थापना करता है। - बोर्ड एजेंसी की गतिविधियों की निगरानी करेगा और उसे निर्देश जारी करेगा। - डोप परीक्षण प्रयोगशालाएँः - मौजूदा राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला को प्रमुख डोप परीक्षण प्रयोगशाला माना जाएगा। - केंद्र सरकार और अधिक राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित कर सकती है। विधेयक का महत्त्वः - डोपिंग से लड़ने में एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने के अलावा विधेयक एथलीटों को समयबद्ध न्याय प्राप्त करने का प्रयास करता है। - यह खेलों के लिये अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने हेतु भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने का भी एक प्रयास है। - यह विधेयक डोपिंग रोधी निर्णय के लिये एक मज़बूत, स्वतंत्र तंत्र स्थापित करने में मदद करेगा। - यह विधेयक नाडा और राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) के कामकाज को कानूनी मान्यता देगा। विधेयक से संबद्ध मुद्देः - महानिदेशक की योग्यता विधेयक में निर्दिष्ट नहीं हैं और नियमों के माध्यम से अधिसूचित करने के लिए छोड़ दी गई हैं। - केंद्र सरकार दुर्व्यवहार या अक्षमता या "ऐसे अन्य आधार" पर महानिदेशक को पद से हटा सकती है। - इन प्रावधानों को केंद्र सरकार के विवेक पर छोड़ने से महानिदेशक की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। - यह विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी के अधिदेश के विरुद्ध भी है कि ऐसे निकायों को अपने संचालन में स्वतंत्र होना चाहिये। - बिल के तहत बोर्ड के पास अनुशासन पैनल और अपील पैनल के सदस्यों को उन आधारों पर हटाने का अधिकार है जो विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किये जाएगे और बिल में निर्दिष्ट नहीं हैं। - इसके अलावा उन्हें सुनवाई का अवसर देने की आवश्यकता नहीं है। यह इन पैनलों के स्वतंत्र कामकाज को प्रभावित कर सकता है। डोपिंग और संबंधित एजेंसियाँः - परिचयः - प्रदर्शन बढ़ाने के लिये खिलाडियों द्वारा कुछ निषिद्ध पदार्थों का सेवन। - राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA): - राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) को भारत में डोप मुक्त खेलों के लिये एक जनादेश के साथ 24 नवंबर, 2005 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में स्थापित किया गया था। - इसका प्राथमिक उद्देश्य विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) कोड के अनुसार डोपिंग रोधी नियमों को लागू करना, डोप नियंत्रण कार्यक्रम को विनियमित करना, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा डोपिंग एवं इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करना है। - नाडा के पास इसके लिये आवश्यक अधिकार और ज़िम्मेदारी हैः - डोपिंग नियंत्रण में योजना, समन्वय, कार्यान्वयन, निगरानी और सुधार की वकालत करना; - अन्य प्रासंगिक राष्ट्रीय संगठनों, एजेंसियों और अन्य डोपिंग रोधी संगठनों आदि के साथ सहयोग करना। - वाडाः - नवंबर 1999 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के तहत विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) की स्थापना की गई थी। - खेल में डोपिंग के खिलाफ यूनेस्को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (2005) द्वारा WADA को मान्यता दी गई है। - WADA की प्राथमिक भूमिका सभी खेलों और देशों में एंटी-डोपिंग नियमों को विकसित करना, सामंजस्य तथा समन्वय स्थापित करना है। - यह विश्व डोपिंग रोधी संहिता (वाडा कोड) और उसके मानकों के उचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने, डोपिंग की घटनाओं की जाँच करने, डोपिंग पर शोध करने, खिलाड़ियों व संबंधित कर्मियों को डोपिंग रोधी नियमों के बारे में शिक्षित करने का कार्य करता है। प्रिलिम्स के लियेः मानव-पशु संघर्ष, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972। मेन्स के लियेः मानव-पशु संघर्ष और उसके प्रभाव। चर्चा में क्यों? हाल ही में वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री ने लोकसभा में जानकारी दी कि मानव- वन्यजीव संघर्षों की घटनाओं में वृद्धि हुई है। - परिचयः - मानव-वन्यजीव संघर्ष (HWC) उन संघर्षों को संदर्भित करता है जब वन्यजीवों की उपस्थिति या व्यवहार मानव हितों या ज़रूरतों के लिये वास्तव में या प्रत्यक्ष रूप से खतरों का कारण बनता है जिसके कारण लोगों, जानवरों, संसाधनों तथा आवास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। - कारणः - प्राकृतिक वास का नुकसान। - जंगली जानवरों की आबादी में वृद्धि। - जंगली जानवरों को खेत की ओर आकर्षित करने वाले फसल पैटर्न बदलना। - वन क्षेत्र से जंगली जानवरों का भोजन और चारे के लिये मानव-प्रधान भू-भागों में आना-जाना। - वनोपज के अवैध संग्रहण के लिये मनुष्यों का वनों की ओर आना-जाना। - आक्रामक विदेशी प्रजातियों आदि की वृद्धि के कारण आवास का क्षरण। - प्रभावः - जान गँवाना। - जानवर और इंसान दोनों को चोट लगना। - फसलों और कृषि भूमि को नुकसान। - जानवरों के खिलाफ हिंसा में वृद्धि। - संबंधित डेटाः - 2018-19 और 2020-21 के बीच देश भर में बिजली के करंट से 222 हाथियों की मौत हो गई। - इसके अलावा वर्ष 2019 और 2021 के बीच अवैध शिकार के चलते 29 बाघ मारे गए, जबकि 197 बाघों की मौत की जाँच की जा रही है। - जानवरों के साथ मानव के संघर्ष के दौरान हाथियों ने तीन वर्षों में 1,579 मनुष्यों को मार डाला- वर्ष 2019-20 में 585, 2020-21 में 461 और 2021-22 में 533। - 332 मौतों के साथ ओडिशा सबसे ऊपर है, इसके बाद 291 के साथ झारखंड और 240 के साथ पश्चिम बंगाल है। - जबकि वर्ष 2019 से 2021 के बीच बाघों ने रिज़र्व में 125 इंसानों को मार डाला। - इनमें से लगभग आधी मौतें महाराष्ट्र में हुईं है। संघर्ष से निपटने के लिये की गई पहलः - मानव-वन्यजीव संघर्ष (HWC) के प्रबंधन के लिये सलाहः यह राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (SC-NBWL) की स्थायी समिति द्वारा जारी किया गया है। - ग्राम पंचायतों को सशक्त बनानाः परामर्श में वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अनुसार समस्याग्रस्त जंगली जानवरों से निपटने के लिये ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने की परिकल्पना की गई है। - बीमा प्रदान करनाः HWC के कारण फसल क्षति के लिये मुआवज़े हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ऐड-ऑन कवरेज का उपयोग करना। - चारा बढ़ानाः वन क्षेत्रों के भीतर चारे और जल स्रोतों को बढ़ाने की परिकल्पना की गई है। - सक्रिय उपाय करनाः स्थानीय/राज्य स्तर पर अंतर-विभागीय समितियों को निर्धारित करना, पूर्व चेतावनी प्रणाली को अपनाना, बाधाओं का निर्माण, टोल-फ्री हॉटलाइन नंबरों के साथ समर्पित सर्कल-वार नियंत्रण कक्ष, हॉटस्पॉट की पहचान आदि। - तत्काल राहत प्रदान करनाः पीड़ित/परिवार को घटना के 24 घंटे के भीतर अंतरिम राहत के रूप में अनुग्रह राशि के एक हिस्से का भुगतान। - मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिये सबसे व्यापक तरीके शमन के रूप में खोजे जाते हैं या वन्यजीवों को उच्च घनत्व मानव आबादी या कृषि वाले क्षेत्रों से बाहर रखना है। - जनता के बीच शिक्षा और जागरूकता के प्रसार की आवश्यकता है ताकि उन्हें मानव-पशु संघर्ष के बारे में जागरूक किया जा सके, जिससे संघर्ष को रोकने के लिये दीर्घकालिक स्थायी समाधान विकसित होगा। - यह सुनिश्चित करना कि मनुष्यों और जानवरों के पास जीवन-निर्वाह के लिये पर्याप्त जगह है यह मानव-वन्यजीव संघर्ष समाधान का आधार है। - जंगली भूमि और प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना महत्त्वपूर्ण है, लेकिन जंगली और शहरी क्षेत्रों के बीच बफर ज़ोन बनाना भी महत्त्वपूर्ण है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्नः प्रश्न. वाणिज्य में प्राणिजात और वनस्पति-जात के व्यापार-संबंधी विश्लेषण (TRAFFIC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1- TRAFFIC, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अंतर्गत एक ब्यूरो है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? प्रिलिम्स के लियेः स्टार्टअप्स, स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान, नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशन (NIDHI), युवा और महत्त्वाकांक्षी इनोवेटर्स तथा स्टार्टअप्स (PRAYAS), अटल इनोवेशन मिशन को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स का विकास करना। मेन्स के लियेः स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और उसका महत्त्व। चर्चा में क्यों? सरकार के विभिन्न सुधारों और पहलों से भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी आई है। - परिचयः - स्टार्टअप शब्द एक कंपनी के संचालन के पहले चरण को संदर्भित करता है। स्टार्टअप एक या एक से अधिक उद्यमियों द्वारा स्थापित किये जाते हैं जो एक ऐसे उत्पाद या सेवा का विकास करना चाहते हैं जिसकी बाज़ार में मांग है। - ये कंपनियाँ आमतौर पर उच्च लागत और सीमित राजस्व के साथ शुरू होती हैं, यही वजह है कि वे उद्यम पूंजीपतियों जैसे विभिन्न स्रोतों से पूंजी की मांग करती हैं। - भारत में स्टार्टअप्स की वृद्धि : - उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) ने स्टार्टअप को मान्यता दी है जो 56 विविध क्षेत्रों से संबंधित हैं। - इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, एनालिटिक्स आदि जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित क्षेत्रों में 4,500 से अधिक स्टार्टअप को मान्यता प्रदान की गई है। - इस दिशा में निरंतर सरकारी प्रयासों के परिणामस्वरूप मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या वर्ष 2016 के 471 से बढ़कर वर्ष 2022 में 72,993 हो गई है। - उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) ने स्टार्टअप को मान्यता दी है जो 56 विविध क्षेत्रों से संबंधित हैं। स्टार्टअप-इंडिया योजना का भारत के स्टार्टअप्स के विकास में योगदानः स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार द्वारा शुरू किये गए विभिन्न कार्यक्रमों ने स्टार्टअप्स के विकास को सुगम बनाया हैः - स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लानः इसमें सरलीकरण, मार्गदर्शन, वित्तीय समर्थन, प्रोत्साहन और उद्योग शिक्षाविद, साझेदारी एवं इनक्यूबेशन जैसे क्षेत्रों में विस्तारित 19 घटक शामिल हैं। - कार्य योजना ने देश में एक जीवंत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिये परिकल्पित सरकारी सहायता, योजनाओं और प्रोत्साहनों की नींव रखी। - स्टार्टअप इंडिया हबः यह भारत में उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों के लिये एक-दूसरे को खोजने, जोड़ने और संलग्न करने हेतु अपनी तरह का एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। - ऑनलाइन हब स्टार्टअप, निवेशक, फंड, सलाहकार, शैक्षणिक संस्थान, इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर, कॉर्पोरेट, सरकारी निकायों को मेज़बानी प्रदान करता हैै। - 3 साल के लिए आयकर छूटः 1 अप्रैल, 2016 को या उसके बाद निगमित स्टार्टअप्स के निगमन के बाद से 10 वर्षों में से लगातार 3 वर्षों की अवधि के लिये आयकर से छूट दी गई है। - स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS): इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को अवधारणा के प्रमाण, प्रोटोटाइप विकास, उत्पाद परीक्षण, बाज़ार में प्रवेश और व्यावसायीकरण के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करना है। - भारतीय स्टार्टअप के लिये अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार पहुँचः स्टार्टअप इंडिया ने 15 से अधिक साझेदार देशों (ब्राजील, स्वीडन, रूस, पुर्तगाल, यूके, फिनलैंड, नीदरलैंड, सिंगापुर, इज़रायल, जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा, क्रोएशिया, कतर और संयुक्त अरब अमीरात) के साथ परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने में सहायता हेतु स्टार्टअप के लिये सॉफ्ट लैंडिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किये हैं।, स्टार्टअप्स को हैंडहोल्डिंग प्रदान करने वाले अन्य कारकः - सरकारी योजनाएँ : - विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने सफल स्टार्टअप में विचारों और नवाचारों (ज्ञान-आधारित एवं प्रौद्योगिकी-संचालित) को पोषित करने के लिये नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशन (NIDHI) नामक एक अम्ब्रेला कार्यक्रम शुरू किया था। - स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये युवा और महत्त्वाकांक्षी इनोवेटर्स एवं स्टार्टअप्स (PRAYAS) कार्यक्रम को बढ़ावा देना और उसे तेज़ी से शुरू किया गया था। - जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावाः - जैव प्रौद्योगिकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिये जैव प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी फर्मों को बढ़ावा देता है तथा उनका पोषण करता है। - रक्षा क्षेत्रः - रक्षा उत्पादन विभाग ने उद्योगों, R&D संस्थानों और शिक्षाविदों को शामिल करके तथा उन्हें R&D के लिये अनुदान प्रदान कर आत्मनिर्भरता प्राप्त करने, रक्षा एवं एयरोस्पेस में नवाचार तथा प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने के लिये रक्षा उत्कृष्टता के लिये नवाचार (iDEX) कार्यक्रम शुरू किया। - अटल नवाचार मिशन (AIM): - अटल नवाचार मिशन के तहत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में स्टार्टअप को इनक्यूबेट करने के लिये अटल इनक्यूबेशन सेंटर (AIC) की स्थापना की है। - इसने राष्ट्रीय महत्त्व और सामाजिक प्रासंगिकता की क्षेत्रीय चुनौतियों को हल करने वाले प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचारों के साथ स्टार्टअप्स को सीधे सहायता देने के लिये अटल न्यू इंडिया चैलेंज (ANIC) कार्यक्रम भी शुरू किया है। - विदेशी मुद्रा प्रवाह की भूमिकाः - भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में विशेष रूप से प्रमुख तकनीकी कंपनियों जैसे फेसबुक, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट से विदेशी मुद्रा का प्रवाह घरेलू बाज़ार की अपार संभावनाओं का संकेत देता है। - प्रौद्योगिकी की भूमिकाः - नए तकनीकी उपकरणों के साथ स्टार्टअप समुदाय व्यापक बाज़ार अंतराल को समाप्त करने हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, डेटा एनालिटिक्स, बिग डेटा, रोबोटिक्स आदि जैसे नए युग की तकनीकों का लाभ उठा रहा है। - स्टार्टअप्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है क्योंकि कई उद्यमी अपने परिवार और सामाजिक वातावरण द्वारा अपने शौक को पूरा करने से हतोत्साहित होते रहते हैं तथा नौकरी एवं जीवन शैली का चयन (जो अधिक स्थिरता प्रदान करने के लिये देखा जाता है) करने के लिये दबाव में होते हैं। - अवसर की इच्छा रखने वाले को अधिक पुरस्कृत किया जाना चाहिये और असफलता को नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिये। - इसके अलावा पूर्वाग्रहों को तोड़ना बढ़ती विविधता की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है, जो सफल होने के लिये आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र को प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। - देश के निर्माताओं, जोखिम उठाने वाली कंपनियों और फंडिंग एजेंसियों को घरेलू पूंजी की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये अनुकूल माहौल बनाने की ज़रूरत है। - नवाचार को प्रोत्साहित करने और उभरते व्यापार मॉडल को समर्थन देने वाले उपयुक्त नियमों को तैयार कर नियामकों को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। - नवाचार को प्रोत्साहित करने और उभरते व्यापार मॉडल को समर्थन देने वाले उपयुक्त नियमों को तैयार कर नियामकों को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्नः प्रश्न. उद्यम पूंजी से क्या तात्पर्य है? (2014) उत्तरः (b) स्रोतः पी.आई.बी. प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में एक याचिका कि सुनवाई में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। - न्यायालय ने रेखांकित किया कि आरोपी/अपराधी की बेगुनाही के सिद्धांत को एक मानव अधिकार के रूप में माना जाता है, लेकिन इस अवधारणा को संसद/विधायिका द्वारा बनाए गए कानून द्वारा बाधित किया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णयः - प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR): - प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ECIR) की तुलना प्राथमिकी से नहीं की जा सकती। - प्रत्येक मामले में संबंधित व्यक्ति को ECIR की आपूर्ति अनिवार्य नहीं है और "यह पर्याप्त है यदि प्रवर्तन निदेशालय (ED), गिरफ्तारी के समय, ऐसी गिरफ्तारी के आधार का खुलासा करता है"। - ECIR ईडी का एक आंतरिक दस्तावेज़ है और यह तथ्य कि अनुसूचित अपराध के संबंध में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, ईडी अधिकारियों के जाँच/परीक्षण शुरू करने के मामले में दखल नहीं करता है। - प्रत्येक मामले में संबंधित व्यक्ति को ECIR की आपूर्ति अनिवार्य नहीं है और "यह पर्याप्त है यदि प्रवर्तन निदेशालय (ED), गिरफ्तारी के समय, ऐसी गिरफ्तारी के आधार का खुलासा करता है"। - प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ECIR) की तुलना प्राथमिकी से नहीं की जा सकती। - PMLA अधिनियम की धारा 3: - PMLA अधिनियम 2002 की धारा 3 की व्यापक पहुँच है और यह दर्शाता है कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध आय से जुड़ी प्रक्रिया या गतिविधि के संबंध में एक स्वतंत्र अपराध है जो एक अनुसूचित अपराध से संबंधित या उसके संबंध में आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप प्राप्त किया गया था। - निर्णय ने यह भी स्पष्ट किया किः - धारा 3 के तहत अपराध "एक अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप संपत्ति के अवैध लाभ पर निर्भर है"। - वर्ष 2002 के अधिनियम के तहत प्राधिकरण किसी भी व्यक्ति पर काल्पनिक आधार पर या इस धारणा के आधार पर मुकदमा नहीं चला सकते हैं कि अपराध हुआ है लेकिन यह पुलिस के अधिकार क्षेत्र में पंजीकृत नहीं है और सक्षम मंच के समक्ष आपराधिक शिकायत जाँच लंबित है। - धारा 3 के तहत अपराध "एक अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप संपत्ति के अवैध लाभ पर निर्भर है"। - प्रवर्तन निदेशालय (ED): - पीठ ने अधिनियम की धारा 5 (अपराध की किसी भी आय की अस्थायी कुर्की का आदेश) के तहत ED की शक्ति को बरकरार रखा। - न्यायालय ने कहा कि धारा 5 व्यक्ति के हितों को सुरक्षित करने के लिये एक संतुलन व्यवस्था प्रदान करती है और यह भी सुनिश्चित करती है कि अपराध अधिनियम, 2002 द्वारा प्रदान किए गए तरीके से निपटने के लिये उपलब्ध रहे। - इसने इस तर्क को खारिज कर दिया कि ED अधिकारी पुलिस अधिकारी हैं और इसलिये अधिनियम की धारा 50 के तहत उनके द्वारा दर्ज बयान संविधान के अनुच्छेद 20 (3) से प्रभावित होगा, जिसमें कहा गया है कि अपराध का आरोपी कोई भी व्यक्ति अपने खिलाफ गवाह बनने के लिये मज़बूर नहीं किया जाएगा। - पीठ ने अधिनियम की धारा 5 (अपराध की किसी भी आय की अस्थायी कुर्की का आदेश) के तहत ED की शक्ति को बरकरार रखा। - यह आपराधिक कानून है जो धन शोधन/मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने और मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित मामलों से प्राप्त या इसमें शामिल संपत्ति की जब्ती का प्रावधान करने के लिए बनाया गया है। - यह मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिये भारत द्वारा स्थापित कानूनी ढाँचे का मूल है। - इस अधिनियम के प्रावधान सभी वित्तीय संस्थानों, बैंकों (RBI सहित), म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और उनके वित्तीय मध्यस्थों पर लागू होते हैं। - PMLA (संशोधन) अधिमियम, 2012: - इसमें 'रिपोर्टिंग इकाई' की अवधारणा शामिल है जिसमें बैंकिंग कंपनी, वित्तीय संस्थान, मध्यस्थ आदि शामिल होंगे। - PMLA, 2002 में 5 लाख रुपए तक का ज़ुर्माना लगाने का प्रावधान था, लेकिन संशोधन अधिनियम में इस ऊपरी सीमा को हटा दिया गया है। - इसमें गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति की संपत्ति की अस्थायी कुर्की और ज़ब्ती का प्रावधान किया गया है। प्रवर्तन निदेशालयः - संगठनात्मक इतिहासः - प्रवर्तन निदेशालय या ED एक बहु-अनुशासनात्मक संगठन है जो आर्थिक अपराधों की जाँच और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन के लिये अनिवार्य है। - इस निदेशालय की उत्पत्ति 1 मई, 1956 को हुई, जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 (फेरा '47) के तहत विनिमय नियंत्रण कानून के उल्लंघन से निपटने के लिये आर्थिक मामलों के विभाग में एक 'प्रवर्तन इकाई' का गठन किया गया। - समय बीतने के साथ, FERA'1947 कानून को FERA'1973 कानून द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। 04 साल की अवधि (1973-1977) के लिये निदेशालय कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में रहा। पुनः आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत के साथ, FERA'1973 (जो एक नियामक कानून था) निरस्त कर दिया गया और इसके स्थान पर 1 जून, 2000 से एक नया कानून-विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA) लागू किया गया। - हाल ही में विदेशों में शरण लेने वाले आर्थिक अपराधियों से संबंधित मामलों की संख्या में वृद्धि के साथ सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEOA) पारित किया है और ED को इसे लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है। - कार्यः - मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम, 2002 (PMLA): - इसके तहत धन शोधन के अपराधों की जाँच करना, संपत्ति की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई करना और मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा चलाना हैं। - विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA): - इसके तहत निदेशालय नामित अधिकारियों द्वारा फेमा के उल्लंघन के दोषियों की जाँच की जाती है और इसमें शामिल राशि का तीन गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है। - भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEOA): - इस अधिनियम का उद्देश्य ऐसे भगोड़े आर्थिक अपराधियों को दंडित करना है जो भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर कानून की प्रक्रिया से बचने के उपाय खोजते हैं। - COFEPOSA के तहत प्रायोजक एजेंसीः - FEMA के उल्लंघन के संबंध में विदेशी मुद्रा और संरक्षण गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974 (COFEPOSA) के तहत निवारक निरोध के प्रायोजक मामले देखना। - FEMA के उल्लंघन के संबंध में विदेशी मुद्रा और संरक्षण गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974 (COFEPOSA) के तहत निवारक निरोध के प्रायोजक मामले देखना। - मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम, 2002 (PMLA): विगत वर्ष के प्रश्न(PYQs) प्रारंभिक परीक्षाः भारत की विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि में निम्नलिखित में से कौन-सा एक मदसमूह सम्मिलित है? (2013) अतः विकल्प B सही है। प्रश्न. चर्चा कीजिये कि उभरती हुई प्रौद्योगिकियाँ और वैश्वीकरण धन शोधन में कैसे योगदान करते हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर धन शोधन की समस्या से निपटने के लिये विस्तृत उपाय सुझाइए। (2021, मुख्य परीक्षा) प्रश्न. दुनिया के दो सबसे बड़े अवैध अफीम उत्पादक राज्यों के साथ भारत की निकटता ने उसकी आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों जैसे- बंदूक रखना , मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के बीच संबंधों की व्याख्या कीजिये। इसे रोकने के लिये क्या उपाय किये जाने चाहिये? (2018, मुख्य परीक्षा)
प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? बढ़ती आबादी और तीव्र शहरीकरण के कारण भारतीय शहरों में नगरपालिका ठोस अपशिष्ट के उत्पादन में व्यापक वृद्धि हुई है। - यह ध्यान रखना महत्त्वपूर्ण है कि संगठित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की भागीदारी शहरों में कम है, क्योंकि अपर्याप्त धन, कम क्षेत्रीय विकास और स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन व्यवसायों के बारे में जानकारी की कमी है। - इसलिये भारत सहित कई विकासशील देशों में अपशिष्ट संग्रह और वस्तु पुनर्चक्रण गतिविधियाँ मुख्य रूप से असंगठित अपशिष्ट क्षेत्र द्वारा की जाती हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में असंगठित क्षेत्र की भूमिकाः - परिचयः - असंगठित अपशिष्ट संग्रहकर्त्ताओं में ऐसे व्यक्ति, संघ या कचरा-व्यापारी शामिल हैं जो पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों की छँटाई, बिक्री और खरीद में शामिल हैं। - कचरा बीनने वाला व्यक्ति असंगठित रूप से अपशिष्ट उत्पादन के स्रोत से पुनः प्रयोज्य और पुनर्चक्रण योग्य ठोस अपशिष्ट के संग्रह तथा पुनर्प्राप्ति में लगा हुआ है, जो सीधे या बिचौलियों के माध्यम से पुनर्चक्रणकर्त्ताओं को अपशिष्ट की बिक्री करता है। - यह अनुमान है कि असंगठित अपशिष्ट अर्थव्यवस्था दुनिया भर में लगभग शून्य.पाँच% - दो% शहरी आबादी को रोज़गार देती है। - असंगठित अपशिष्ट संग्रहकर्त्ताओं में ऐसे व्यक्ति, संघ या कचरा-व्यापारी शामिल हैं जो पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों की छँटाई, बिक्री और खरीद में शामिल हैं। - चुनौतियाँः - न्यूनतम आय वाले रोज़गारः - असंगठित क्षेत्र को अक्सर आधिकारिक तौर पर अनुमोदित, मान्यता प्राप्त और स्वीकार नहीं किया जाता है, जबकि वे पुनर्चक्रण मूल्य शृंखला में अपशिष्ट पदार्थों को इकट्ठा करने, छाँटने, प्रसंस्करण, भंडारण और व्यापार करके शहरों के अपशिष्ट पुनर्चक्रण प्रथाओं में योगदान करते हैं। - स्वास्थ्य चुनौतियाँः - असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले लोग अपशिष्ट के ढेर के पास रहतें हैं एवं अस्वच्छ तथा अस्वस्थ परिस्थितियों में काम करतें हैं। - श्रमिकों के पास पीने के जल या सार्वजनिक शौचालय तक पहुँच नहीं है। - उनके पास दस्ताने, गमबूट और एप्रन जैसे उपयुक्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण नहीं हैं। - निम्न स्तर का जीवनयापन और काम करने की स्थिति के कारण उनमें कुपोषण, एनीमिया और तपेदिक आम हैं। - सामाजिक उपचारः - उन्हें समाज में गंदे और अवांछित तत्त्वों के रूप में माना जाता है, साथ ही उन्हें शोषक सामाजिक व्यवहार से निपटना पड़ता है। - असंगठित अपशिष्ट-श्रमिकों के विभिन्न स्तरों की मज़दूरी और रहने की स्थिति बहुत भिन्न होती है। - अन्यः - इस क्षेत्र में बाल श्रम काफी प्रचलित है और जीवन प्रत्याशा कम है। - अपशिष्ट बीनने वाले किसी भी श्रम कानून के दायरे में नहीं आते हैं। - नतीजतन उन्हें सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा बीमा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। - न्यूनतम आय वाले रोज़गारः - परिचयः - ठोस अपशिष्ट में ठोस या अर्द्ध-ठोस घरेलू अपशिष्ट, स्वच्छता अपशिष्ट, वाणिज्यिक अपशिष्ट, संस्थागत अपशिष्ट, खानपान और बाज़ार अपशिष्ट एवं अन्य गैर-आवासीय अपशिष्ट, सड़क पर झाड़ू लगाना, सतही नालियों से हटाया या एकत्र किया गया गाद, बागवानी अपशिष्ट, कृषि तथा डेयरी अपशिष्ट, औद्योगिक अपशिष्ट को छोड़कर उपचारित जैव चिकित्सा अपशिष्ट और ई-अपशिष्ट, बैटरी अपशिष्ट, रेडियो-सक्रिय अपशिष्ट आदि शामिल हैं। - भारत की स्थितिः - अकेले शहरी भारत में प्रतिदिन लगभग पंद्रह मिलियन टन नगरपालिका ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है। - अनुमान है कि देश में सालाना लगभग बासठ मिलियन टन अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें से पाँच.छः मिलियन प्लास्टिक अपशिष्ट और शून्य.सत्रह मिलियन बायोमेडिकल कचरा है। - इसके अलावा खतरनाक अपशिष्ट उत्पादन प्रतिवर्ष सात.नब्बे मिलियन टन है और पंद्रह लाख टन ई-अपशिष्ट है। - अपशिष्ट की मात्रा वर्ष दो हज़ार इकतीस तक एक सौ पैंसठ मिलियन टन और वर्ष दो हज़ार पचास तक चार सौ छत्तीस मिलियन टन तक पहुँचने का अनुमान है। - अपशिष्ट प्रबंधन में चुनौतियाँः - भारत में बढ़ते शहरीकरण के परिणामस्वरूप अति-उपभोक्तावाद की स्थिति है, जिसके परिणामस्वरूप अधिक अपशिष्ट उत्पादन होता है। - जैविक खेती और खाद बनाना भारतीय किसान के लिये आर्थिक रूप से आकर्षक नहीं है, क्योंकि रासायनिक कीटनाशकों पर भारी सब्सिडी दी जाती है तथा खाद का विपणन कुशलता से नहीं किया जाता है। - नगर निगमों/शहरी स्थानीय निकायों के पास वित्तीय संसाधनों की कमी के परिणामस्वरूप ठोस अपशिष्ट का संग्रहण, परिवहन और प्रबंधन की खराब स्थिति है। - कचरे को निम्नलिखित प्रकार से तीन श्रेणियों में अलग करने की जिम्मेदारी इसके उत्पादक की हैः - गीला । - सूखा । - घरेलू खतरनाक अपशिष्ट तथा अलग किये गए कचरे को अधिकृत कचरा बीनने वालों या कचरा संग्रहकर्ता या स्थानीय निकायों को सौंपना। - अपशिष्ट उत्पादकों को करना होगा भुगतानः - कचरा संग्रहणकर्त्ताओं को 'उपयोगकर्त्ता शुल्क'। - लिटरिंग और नॉन-सेग्रीगेशन के लिये 'स्पॉट फाइन'। - डायपर, सैनिटरी पैड जैसे इस्तेमाल किये गए सैनिटरी अपशिष्ट को निर्माताओं या इन उत्पादों के ब्रांड मालिकों द्वारा प्रदान किये गए पाउच में या उपयुक्त रैपिंग सामग्री में सुरक्षित रूप से लपेटा जाना चाहिये और इसे सूखे अपशिष्ट/गैर-जैव-अवक्रमणीय अपशिष्ट के लिये कूड़ादान में रखा जाना चाहिये। - स्वच्छ भारत में साझेदारी की अवधारणा पेश की गई है। - थोक और संस्थागत उत्पादक, बाज़ार संघों, कार्यक्रम आयोजकों, होटल और रेस्तराँ को स्थानीय निकायों के साथ साझेदारी में अपशिष्ट को अलग करने, व्यवस्थित करने तथा प्रबंधन के लिये सीधे ज़िम्मेदार बनाया गया है। - टिन, काँच, प्लास्टिक पैकेजिंग आदि जैसे डिस्पोज़ेबल उत्पादों के निर्माता या ब्रांड मालिक जो ऐसे उत्पादों को बाज़ार में पेश करते हैं,अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की स्थापना हेतु स्थानीय अधिकारियों आवश्यक वित्तीय प्रदान करेंगे। - बायो-डिग्रेडेबल अपशिष्ट को जहाँ तक संभव हो परिसर के भीतर कंपोस्टिंग या बायो-मीथेनेशन के माध्यम से संसाधित, उपचारित तथा निपटाया जाना चाहिये। - अवशिष्ट कचरा स्थानीय प्राधिकरण के निर्देशानुसार कचरा संग्रहकर्त्ता या एजेंसी को दिया जाएगा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिये सरकार की पहलः - वेस्ट टू वेल्थ पोर्टलः - वेस्ट टू वेल्थ मिशन प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद के नौ वैज्ञानिक मिशनों में से एक है। - इसका उद्देश्य ऊर्जा उत्पन्न करने, सामग्रियों का पुनर्चक्रण करने और कचरे के उपचार हेतु प्रौद्योगिकियों की पहचान, विकास और तैनाती करना है। - राष्ट्रीय जल मिशनः - इसका उद्देश्य एकीकृत जल संसाधन विकास और प्रबंधन के माध्यम से जल का संरक्षण करना, अपव्यय को कम करना तथा राज्यों के बाहर भीतर जल का अधिक समान वितरण सुनिश्चित करना है। - अपशिष्ट से ऊर्जाः - एक अपशिष्ट-से-ऊर्जा या ऊर्जा-से-अपशिष्ट संयंत्र औद्योगिक प्रसंस्करण के लिये नगरपालिका एवं औद्योगिक ठोस अपशिष्ट को बिजली और/या गर्मी में परिवर्तित करता है। - प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, दो हज़ार सोलह: - यह प्लास्टिक कचरे के उत्पादन को कम करने, प्लास्टिक कचरे को फैलने से रोकने और अन्य उपायों के बीच स्रोत पर कचरे का अलग भंडारण सुनिश्चित करने के लिये कदम उठाने पर ज़ोर देता है। - यह प्लास्टिक कचरे के उत्पादन को कम करने, प्लास्टिक कचरे को फैलने से रोकने और अन्य उपायों के बीच स्रोत पर कचरे का अलग भंडारण सुनिश्चित करने के लिये कदम उठाने पर ज़ोर देता है। - असंगठित श्रमिकः - दशकों से कचरा बीनने वाले या 'रैग-पिकर्स' खतरनाक एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में कार्य करते हुए हमारी फेंकी हुई चीज़ों से अपनी आजीविका प्राप्त करते रहे हैं। - इसमें पानी, स्वच्छता एवं स्वच्छ जीवन और स्वास्थ्य बीमा जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के व्यावसायिक खतरों को कम करने के लिये संग्रह, पृथक्करण तथा PPE की छँटाई हेतु अनिवार्य पहचान पत्र तक पहुँच से संबंधित बुनियादी प्रावधान शामिल होने चाहिये। - कचरा बीनने वालों को शहर में निर्दिष्ट संग्रह और संघनन स्टेशनों का उपयोग करने की अनुमति देकर औपचारिक रूप से पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं के पृथक्करण के लिये किया जाना चाहिये। - दशकों से कचरा बीनने वाले या 'रैग-पिकर्स' खतरनाक एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में कार्य करते हुए हमारी फेंकी हुई चीज़ों से अपनी आजीविका प्राप्त करते रहे हैं। - भागीदारीः - सरकार को कचरा बीनने वाले संगठनों के साथ साझेदारी स्थापित करनी चाहिये, जिसका उल्लेख SWM दो हज़ार सोलह नियमों में भी किया गया है। - कचरा बीनने वालों की पहचान करने, उन्हें संगठित करने, प्रशिक्षित करने और उन्हें सशक्त बनाने की आवश्यकता है। - सरकार को कचरा बीनने वाले संगठनों के साथ साझेदारी स्थापित करनी चाहिये, जिसका उल्लेख SWM दो हज़ार सोलह नियमों में भी किया गया है। - कचरे को आर्थिक अवसर के रूप में देखनाः - ऊर्जा उत्पादनः - अपशिष्ट का गैसीकरणः बायोगैस संयंत्रों के लिये कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाने वाला ठोस अपशिष्ट। - पुनर्चक्रण सामग्रियाँः - पृथक्करण के चरण में पुनर्चक्रण एक अच्छा आर्थिक अवसर प्रस्तुत करता है। - भारत द्वारा अपनाए गए चक्रीय अर्थव्यवस्था से चालीस लाख करोड़ रुपए का वार्षिक लाभ हो सकता है। - पृथक्करण के चरण में पुनर्चक्रण एक अच्छा आर्थिक अवसर प्रस्तुत करता है। - आवश्यक संसाधनों की प्राप्तिः - ई-कचरे के प्रसंस्करण से तांबा, सोना, एल्युमिनियम आदि कीमती धातुओं का निष्कर्षण संभव हो सकता है। - ऊर्जा उत्पादनः यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न प्रश्न. भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, दो हज़ार सोलह के अनुसार, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है? अपशिष्ट उत्पादक को पाँच कोटियों में अपशिष्ट अलग-अलग करने होंगे। उत्तरः प्रश्न. निरंतर उत्पन्न किये जा रहे और फेंके गए ठोस कचरे की विशाल मात्रा का निस्तारण करने में क्या-क्या बाधाएँ हैं? हम अपने रहने योग्य परिवेश में जमा होते जा रहे जहरीले अपशिष्टों को सुरक्षित रूप से किस प्रकार हटा सकते हैं? प्रिलिम्स के लियेः तर्कहीन फ्रीबीज़, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन , वित्त आयोग। मेन्स के लियेः फ्रीबीज़ और अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव। चर्चा में क्यों? हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या चुनाव अभियानों के दौरान तर्कहीन फ्रीबीज़ वितरित करना आर्थिक रूप से व्यवहार्य है। - इसने तर्कहीन चुनावी फ्रीबीज़ पर अंकुश लगाने में वित्त आयोग की विशेषज्ञता का उपयोग करने का भी उल्लेख किया है। - भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, क्या ऐसी नीतियाँ आर्थिक रूप से व्यवहार्य हैं या राज्य के आर्थिक स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव एक ऐसा प्रश्न है जिस पर राज्य के मतदाताओं को विचार करना और निर्णय लेना है। राजनीतिक दल लोगों के वोट को सुरक्षित करने के लिये मुफ्त बिजली/पानी की आपूर्त्ति, बेरोज़गारों, दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों और महिलाओं को भत्ता, साथ-साथ गैजेट जैसे- लैपटॉप, स्मार्टफोन आदि की पेशकश करने का वादा करते हैं। राज्यों को कर्जमाफी या मुफ्त बिजली, साइकिल, लैपटॉप, टीवी सेट आदि के रूप में मुफ्त उपहार देने की आदत हो गई है। - लोकलुभावन वादों या चुनावों को ध्यान में रखकर किये जाने वाले ऐसे कुछ खर्चों पर निश्चय ही प्रश्न उठाए जा सकते हैं। - लेकिन यह देखते हुए कि पिछले तीस वर्षों से देश में असमानता बढ़ रही है, सब्सिडी के रूप में आम आबादी को किसी प्रकार की राहत प्रदान करना अनुचित नहीं माना जा सकता, बल्कि वास्तव में अर्थव्यवस्था के विकास पथ पर बने रहने के लिये यह आवश्यक है। फ्रीबीज़ की आवश्यकताः - विकास को सुगम बनानाः ऐसे कुछ उदाहरण हैं जो दिखाते हैं कि कुछ व्यय, परिव्यय के समग्र लाभ के रूप में होते हैं जैसे कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली, रोज़गार गारंटी योजनाएँ, शिक्षा के लिये समर्थन और विशेष रूप से महामारी के दौरान स्वास्थ्य सुविधा के लिये किया गया परिव्यय। - अल्प विकसित राज्यों को मददः गरीबी से पीड़ित आबादी के एक बड़े हिस्से के साथ तुलनात्मक रूप से निम्न स्तर के विकास वाले राज्यों को इस तरह की निःशुल्क सुविधाएँ जरूरत/मांग परआधारित होती हैं और इस क्रम में उनका उत्थान करने के लिये उन्हें सब्सिडी प्रदान करना अपरिहार्य हो जाता है। - अपेक्षाओं की पूर्तिः भारत जैसे देश में जहाँ राज्यों में विकास का एक निश्चित स्तर होता है , चुनाव के अवसर पर किये गए लोकलुभावन वायदे से जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति की जाती है। फ्रीबीज़ की कमियाँः - समष्टि अर्थव्यवस्था के लिये अस्थिरः फ्रीबीज़ समष्टि अर्थव्यवस्था की स्थिरता के बुनियादी ढाँचे को कमजोर करते हैं, फ्रीबीज़ की राजनीति व्यय प्राथमिकताओं को विकृत करती है और यह परिव्यय किसी-न-किसी रूप में सब्सिडी पर केंद्रित रहता है। - राज्यों की वित्तीय स्थिति पर प्रभावः निःशुल्क उपहार देने से अंततः सरकारी खजाने पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और भारत के अधिकांश राज्यों में मज़बूत वित्तीय व्यवस्था नहीं है, अक्सर राजस्व के मामले में संसाधन बहुत सीमित होते हैं। - स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के खिलाफः चुनाव से पहले सार्वजनिक धन से तर्कहीन मुफ्त का वादा मतदाताओं को अनुचित रूप से प्रभावित करता है, सभी को समान अवसर की स्वतंत्रता में बाधा उत्पन्न करता है, तथा चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को नष्ट करता है। - पर्यावरण से दूरः जब मुफ्त बिज़ली दी जाएगी, तो इससे प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग होगा और अक्षय ऊर्जा प्रणाली से ध्यान भी विचलित हो जाएगा। - मुफ्त के आर्थिक प्रभावों को समझनाः यह इस बारे में नहीं है कि फ्रीबीज़ कितने सस्ते हैं बल्कि लंबे समय में अर्थव्यवस्था, जीवन की गुणवत्ता और सामाजिक सामंजस्य के लिये ये कितने महंगे हैं।. - इसके बजाय हमें लोकतंत्र और सशक्त संघवाद के माध्यम से दक्षता के लिये प्रयास करना चाहिये जहाँ राज्य अपने अधिकार का उपयोग नवीन विचारों और सामान्य समस्याओं के समाधान के लिये कर सकें तथा जिनका अन्य राज्य अनुकरण कर सकते हैं। - सब्सिडी और मुफ्त में अंतरः आर्थिक अर्थों में मुफ्त के प्रभावों को समझने और इसे करदाता के पैसे से जोड़ने की ज़रूरत है। - सब्सिडी और मुफ्त में अंतर करना भी आवश्यक है क्योंकि सब्सिडी के उचित और विशेष रूप से लक्षित लाभ हैं जो मांगों से उत्पन्न होते हैं। - सब्सिडी और मुफ्त में अंतर करना भी आवश्यक है क्योंकि सब्सिडी के उचित और विशेष रूप से लक्षित लाभ हैं जो मांगों से उत्पन्न होते हैं। UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्षों के प्रश्नः प्रश्न. सरकार द्वारा की जाने वाली निम्नलिखित कार्रवाइयों पर विचार कीजियेः उपर्युक्त कार्यों में से किसे/किन्हें "राजकोषीय प्रोत्साहन" पैकेज का हिस्सा माना जा सकता है? उत्तरः प्रश्नः किस तरह से मूल्य सब्सिडी को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण में बदलने से भारत में सब्सिडी का परिदृश्य बदल सकता है? चर्चा कीजिये। प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? वायरल हेपेटाइटिस के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये प्रत्येक वर्ष अट्ठाईस जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। - वर्ष दो हज़ार बाईस की थीम "ब्रिंगिंग हेपेटाइटिस केयर क्लोज़र टू यू" है। - इसका उद्देश्य हेपेटाइटिस देखभाल को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं और समुदायों तक पहुँचाने की आवश्यकता को रेखांकित करना है, ताकि उपचार और देखभाल की बेहतर सुविधाएँ सुनिश्चित की जा सकें। - परिचयः - हेपेटाइटिस शब्द यकृत की किसी भी सूजन को संदर्भित करता है- किसी भी कारण से यकृत कोशिकाओं में होने वाली जलन या सूजन। - यह तीव्र भी हो सकता है यकृत की सूजन छह महीने से अधिक समय तक भी रहती है, लेकिन अनिवार्य रूप से इसका कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है। - कारणः - आमतौर पर यह A, B, C, D और E सहित "हेपेटोट्रोपिक" वायरस के एक समूह के कारण होता है। - अन्य वायरस भी इसका कारण हो सकते हैं, जैसे कि वैरिकाला वायरस जो चिकन पॉक्स का कारण बनता है । - SARS-CoV-दो, Covid-उन्नीस पैदा करने वाला वायरस भी यकृत को नुकसान पहुँचा सकता है। - अन्य कारणों में ड्रग्स और अल्कोहल का दुरुपयोग, यकृत में वसा का निर्माण या एक ऑटोइम्यून प्रक्रिया शामिल है जिसमें एक व्यक्ति का शरीर एंटीबॉडी बनाता है जो यकृत पर हमला करता है। - हेपेटाइटिस एकमात्र संचारी रोग है जिसकी मृत्यु दर में वृद्धि हो रही है। - उपचारः - हेपेटाइटिस A और E स्व-सीमित रोग हैं और इसके लिये किसी विशिष्ट एंटीवायरल दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है। - हेपेटाइटिस B और C के लिये प्रभावी दवाएँ उपलब्ध हैं। - वैश्विक परिदृश्यः - लगभग तीन सौ चौवन मिलियन लोग हेपेटाइटिस B और C से पीड़ित हैं। - दक्षिण-पूर्व एशिया में हेपेटाइटिस के वैश्विक रुग्णता बोझ का बीस% है। - सभी हेपेटाइटिस से संबंधित मौतों में से लगभग पचानवे% सिरोसिस तथा हेपेटाइटिस B और C वायरस की वजह से होने वाले यकृत कैंसर के कारण होती हैं। - भारतीय परिदृश्यः - वायरल हेपेटाइटिस, हेपेटाइटिस वायरस A और E के कारण होता है, जो अभी भी भारत में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। - भारत में हेपेटाइटिस बी सरफेस एंटीजन और अनुमानित चालीस मिलियन पुराने HVB संक्रमित लोगों के लिये "मध्यवर्ती से उच्च स्थानिकता" है, जो अनुमानित वैश्विक भार का लगभग ग्यारह% है। - भारत में क्रोनिक HBV संक्रमण का प्रसार लगभग तीन-चार% जनसंख्या पर है। - चुनौतियाँः - स्वास्थ्य सेवाओं तक अक्सर समुदायों की पहुँच नहीं होती है क्योंकि वे आमतौर पर केंद्रीकृत/विशेषीकृत अस्पतालों में उच्च कीमत पर उपलब्ध होती हैं जिन्हें सभी द्वारा वहन नहीं किया जा सकता है। - देर से निदान या उचित उपचार की कमी के कारण लोगों की मौत हो जाती है। ऐसें में प्रारंभिक निदान, रोकथाम और सफल उपचार दोनों ही मामलों में आवश्यक है। - दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में हेपेटाइटिस वाले लगभग दस% लोग ही अपनी स्थिति के प्रति सजग हैं और उनमें से केवल पाँच% लोग इलाज करवा रहे हैं। - हेपेटाइटिस सी से ग्रसित अनुमानित दस.पाँच मिलियन लोगों में से केवल सात% ही अपनी स्थिति के प्रति सजग हैं, जिनमें से लगभग पाँच में से एक का इलाज चल रहा है। हेपेटाइटिस हेतु वैश्विक लक्ष्यः - परिचयः - वैश्विक लक्ष्य दो हज़ार तीस तक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में वायरल हेपेटाइटिस को खत्म करना है। - लक्ष्य की प्राप्तिः - वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक हमें हेपेटाइटिस बी और सी के नए संक्रमणों को पचास% तक एवं यकृत कैंसर से होने वाली मौतों को चालीस% तक कम करना होगा, साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिये कि हेपेटाइटिस बी और सीपीड़ित साठ% लोगों का निदान किया जाए और उनमें से आधे लोगों को उचित उपचार मिले। - क्षेत्र के सभी देशों में राजनीतिक प्रतिबद्धता बढ़ाने की आवश्यकता है औरः - हेपेटाइटिस के लिये निरंतर घरेलू वित्तपोषण सुनिश्चित करना। - कीमतों को और कम करके दवाओं एवं निदान तक पहुँच में सुधार करना। - जागरूकता प्रसार के लिये संचार रणनीतियों का विकास करना। - HIV में विभेदित और जन-केंद्रित सेवा वितरण विकल्पों का अधिकतम उपयोग के लिये सेवा वितरण में सुधार करना तथा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण के अनुरूप लोगों की ज़रूरतों एवं प्राथमिकताओं के अनुसार सेवाएँ प्रदान करना। - परिधीय स्वास्थ्य सुविधाओं, समुदाय-आधारित क्षेत्रों और अस्पताल से परे स्थानों पर हेपेटाइटिस देखभाल का विकेंद्रीकरण रोगियों को उनके घरों के करीब इलाज़ की सुविधा प्रदान करेगा। - WHO द्वारा वायरल हेपेटाइटिस, एचआईवी और यौन संचारित संक्रमण के निदान हेतु वर्ष दो हज़ार बाईस-दो हज़ार छब्बीस के लिये एकीकृत क्षेत्रीय कार्ययोजना विकसित की जा रही है। - यह क्षेत्र के लिये उपलब्ध सीमित संसाधनों का प्रभावी और कुशल उपयोग सुनिश्चित करेगा तथा देशों को रोग-विशिष्ट दृष्टिकोण के बजाय व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिये मार्गदर्शन करेगा। - स्वच्छ भोजन और उचित व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ साफ पानी एवं स्वच्छता हमें हेपेटाइटिस A और E से बचा सकती है। - हेपेटाइटिस B और C को रोकने के उपायों में जन्म की खुराक सहित हेपेटाइटिस B टीकाकरण के साथ-साथ सुरक्षित रक्त, सुरक्षित सेक्स और सुरक्षित सुई के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। - नई और शक्तिशाली एंटीवायरल दवाओं के साथ-साथ हेपेटाइटिस B को रोकने के लिये सुरक्षित और प्रभावी टीके मौज़ूद हैं जिनका उपयोग क्रोनिक हेपेटाइटिस B के प्रबंधन और हेपेटाइटिस C के अधिकांश मामलों के इलाज में किया जा सकता है। - प्रारंभिक निदान और जागरूकता अभियानों के साथ इन हस्तक्षेपों में वैश्विक स्तर पर वर्ष दो हज़ार तीस तक निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में चार.पाँच मिलियन समय पूर्व होने वाली मौतों को रोकने की क्षमता है। - प्रारंभिक निदान और जागरूकता अभियानों के साथ इन हस्तक्षेपों में वैश्विक स्तर पर वर्ष दो हज़ार तीस तक निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में चार.पाँच मिलियन समय पूर्व होने वाली मौतों को रोकने की क्षमता है। - हेपेटाइटिस बी को भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया है। जो हीमोफिलस इन्फ्लुएंज़ा टाइप बी , खसरा, रूबेला, जापानी इंसेफेलाइटिस , रोटावायरस डायरिया के कारण ग्यारह वैक्सीन-रोकथाम योग्य बीमारियों यानी तपेदिक, डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, पोलियो, निमोनिया और मेनिनजाइटिस के खिलाफ मुफ्त टीकाकरण प्रदान करता है। - बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और थाईलैंड विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में हेपेटाइटिस बी को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने वाले पहले चार देश बन गए हैं। - हाल ही में 'COBAS छः हज़ार आठ सौ' नामक एक स्वचालित कोरोनावायरस परीक्षण उपकरण लॉन्च किया गया था जो वायरल हेपेटाइटिस B और C का भी पता लगा सकता है। - यह ध्यान दिया जा सकता है कि केवल चार बीमारियों जैसे HIV-एड्स , टीबी , मलेरिया , हेपेटाइटिस के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन आधिकारिक तौर पर रोग-विशिष्ट वैश्विक जागरूकता दिवसों का समर्थन करता है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, पिछले वर्ष के प्रश्न प्रश्न. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही नहीं है? यकृतशोध B विषाणु HIV की तरह ही संचरित होता है। उत्तरः अतः विकल्प सही उत्तर है। प्रिलिम्स के लियेः डोपिंग, नाडा, वाडा। मेन्स के लियेः राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक, दो हज़ार इक्कीस के प्रावधान और संबंधित मुद्दे। चर्चा में क्यों? हाल ही में लोकसभा ने राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक, दो हज़ार इक्कीस पारित किया, जो राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी के लिये वैधानिक ढाँचा तैयार करने का प्रयास करता है। - केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा इसे पहली बार दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस में लोकसभा में पेश किया गया था। - यह विधेयक खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करेगा क्योंकि यह उन्हें अपना पक्ष रखने के लिये पर्याप्त जगह प्रदान करेगा, खासकर जब वे डोपिंग रोधी आरोपों का सामना कर रहे हों। विधेयक की मुख्य विशेषताएँः - डोपिंग का निषेधः - विधेयक एथलीटों, एथलीट सपोर्ट कर्मियों और अन्य व्यक्तियों को खेल में डोपिंग में शामिल होने से रोकता है। - उल्लंघन के परिणामः - डोपिंग रोधी नियम के उल्लंघन के परिणामस्वरूप खिलाडी को अयोग्य ठहराया जा सकता है, जिसमें पदक, अंक और पुरस्कार की जब्ती, निर्धारित अवधि के लिये किसी प्रतियोगिता या कार्यक्रम में भाग लेने की अयोग्यता, वित्तीय प्रतिबंध आदि शामिल हैं। - राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी हेतु वैधानिक समर्थनः - विधेयक राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी को वैधानिक निकाय के रूप में गठित करने का प्रावधान करता है। - इसकी अध्यक्षता केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त महानिदेशक करेगा। एजेंसी के कार्यों में शामिल हैंः - डोपिंग रोधी गतिविधियों की योजना बनाना, उन्हें लागू करना और उनकी निगरानी करना। - डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन की जाँच। - डोपिंग रोधी अनुसंधान को बढ़ावा देना। - खेल में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी बोर्ड : - डोपिंग रोधी विनियमन और डोपिंग रोधी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुपालन पर सरकार को सिफारिशें करने के लिये विधेयक खेल क्षेत्र में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी बोर्ड की स्थापना करता है। - बोर्ड एजेंसी की गतिविधियों की निगरानी करेगा और उसे निर्देश जारी करेगा। - डोप परीक्षण प्रयोगशालाएँः - मौजूदा राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला को प्रमुख डोप परीक्षण प्रयोगशाला माना जाएगा। - केंद्र सरकार और अधिक राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित कर सकती है। विधेयक का महत्त्वः - डोपिंग से लड़ने में एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने के अलावा विधेयक एथलीटों को समयबद्ध न्याय प्राप्त करने का प्रयास करता है। - यह खेलों के लिये अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने हेतु भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने का भी एक प्रयास है। - यह विधेयक डोपिंग रोधी निर्णय के लिये एक मज़बूत, स्वतंत्र तंत्र स्थापित करने में मदद करेगा। - यह विधेयक नाडा और राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला के कामकाज को कानूनी मान्यता देगा। विधेयक से संबद्ध मुद्देः - महानिदेशक की योग्यता विधेयक में निर्दिष्ट नहीं हैं और नियमों के माध्यम से अधिसूचित करने के लिए छोड़ दी गई हैं। - केंद्र सरकार दुर्व्यवहार या अक्षमता या "ऐसे अन्य आधार" पर महानिदेशक को पद से हटा सकती है। - इन प्रावधानों को केंद्र सरकार के विवेक पर छोड़ने से महानिदेशक की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। - यह विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी के अधिदेश के विरुद्ध भी है कि ऐसे निकायों को अपने संचालन में स्वतंत्र होना चाहिये। - बिल के तहत बोर्ड के पास अनुशासन पैनल और अपील पैनल के सदस्यों को उन आधारों पर हटाने का अधिकार है जो विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किये जाएगे और बिल में निर्दिष्ट नहीं हैं। - इसके अलावा उन्हें सुनवाई का अवसर देने की आवश्यकता नहीं है। यह इन पैनलों के स्वतंत्र कामकाज को प्रभावित कर सकता है। डोपिंग और संबंधित एजेंसियाँः - परिचयः - प्रदर्शन बढ़ाने के लिये खिलाडियों द्वारा कुछ निषिद्ध पदार्थों का सेवन। - राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी : - राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी को भारत में डोप मुक्त खेलों के लिये एक जनादेश के साथ चौबीस नवंबर, दो हज़ार पाँच को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम एक हज़ार आठ सौ साठ के तहत एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में स्थापित किया गया था। - इसका प्राथमिक उद्देश्य विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी कोड के अनुसार डोपिंग रोधी नियमों को लागू करना, डोप नियंत्रण कार्यक्रम को विनियमित करना, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा डोपिंग एवं इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करना है। - नाडा के पास इसके लिये आवश्यक अधिकार और ज़िम्मेदारी हैः - डोपिंग नियंत्रण में योजना, समन्वय, कार्यान्वयन, निगरानी और सुधार की वकालत करना; - अन्य प्रासंगिक राष्ट्रीय संगठनों, एजेंसियों और अन्य डोपिंग रोधी संगठनों आदि के साथ सहयोग करना। - वाडाः - नवंबर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के तहत विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी की स्थापना की गई थी। - खेल में डोपिंग के खिलाफ यूनेस्को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन द्वारा WADA को मान्यता दी गई है। - WADA की प्राथमिक भूमिका सभी खेलों और देशों में एंटी-डोपिंग नियमों को विकसित करना, सामंजस्य तथा समन्वय स्थापित करना है। - यह विश्व डोपिंग रोधी संहिता और उसके मानकों के उचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने, डोपिंग की घटनाओं की जाँच करने, डोपिंग पर शोध करने, खिलाड़ियों व संबंधित कर्मियों को डोपिंग रोधी नियमों के बारे में शिक्षित करने का कार्य करता है। प्रिलिम्स के लियेः मानव-पशु संघर्ष, वन्यजीव अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ बहत्तर। मेन्स के लियेः मानव-पशु संघर्ष और उसके प्रभाव। चर्चा में क्यों? हाल ही में वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री ने लोकसभा में जानकारी दी कि मानव- वन्यजीव संघर्षों की घटनाओं में वृद्धि हुई है। - परिचयः - मानव-वन्यजीव संघर्ष उन संघर्षों को संदर्भित करता है जब वन्यजीवों की उपस्थिति या व्यवहार मानव हितों या ज़रूरतों के लिये वास्तव में या प्रत्यक्ष रूप से खतरों का कारण बनता है जिसके कारण लोगों, जानवरों, संसाधनों तथा आवास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। - कारणः - प्राकृतिक वास का नुकसान। - जंगली जानवरों की आबादी में वृद्धि। - जंगली जानवरों को खेत की ओर आकर्षित करने वाले फसल पैटर्न बदलना। - वन क्षेत्र से जंगली जानवरों का भोजन और चारे के लिये मानव-प्रधान भू-भागों में आना-जाना। - वनोपज के अवैध संग्रहण के लिये मनुष्यों का वनों की ओर आना-जाना। - आक्रामक विदेशी प्रजातियों आदि की वृद्धि के कारण आवास का क्षरण। - प्रभावः - जान गँवाना। - जानवर और इंसान दोनों को चोट लगना। - फसलों और कृषि भूमि को नुकसान। - जानवरों के खिलाफ हिंसा में वृद्धि। - संबंधित डेटाः - दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस और दो हज़ार बीस-इक्कीस के बीच देश भर में बिजली के करंट से दो सौ बाईस हाथियों की मौत हो गई। - इसके अलावा वर्ष दो हज़ार उन्नीस और दो हज़ार इक्कीस के बीच अवैध शिकार के चलते उनतीस बाघ मारे गए, जबकि एक सौ सत्तानवे बाघों की मौत की जाँच की जा रही है। - जानवरों के साथ मानव के संघर्ष के दौरान हाथियों ने तीन वर्षों में एक,पाँच सौ उन्यासी मनुष्यों को मार डाला- वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में पाँच सौ पचासी, दो हज़ार बीस-इक्कीस में चार सौ इकसठ और दो हज़ार इक्कीस-बाईस में पाँच सौ तैंतीस। - तीन सौ बत्तीस मौतों के साथ ओडिशा सबसे ऊपर है, इसके बाद दो सौ इक्यानवे के साथ झारखंड और दो सौ चालीस के साथ पश्चिम बंगाल है। - जबकि वर्ष दो हज़ार उन्नीस से दो हज़ार इक्कीस के बीच बाघों ने रिज़र्व में एक सौ पच्चीस इंसानों को मार डाला। - इनमें से लगभग आधी मौतें महाराष्ट्र में हुईं है। संघर्ष से निपटने के लिये की गई पहलः - मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन के लिये सलाहः यह राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति द्वारा जारी किया गया है। - ग्राम पंचायतों को सशक्त बनानाः परामर्श में वन्य जीवन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ बहत्तर के अनुसार समस्याग्रस्त जंगली जानवरों से निपटने के लिये ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने की परिकल्पना की गई है। - बीमा प्रदान करनाः HWC के कारण फसल क्षति के लिये मुआवज़े हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ऐड-ऑन कवरेज का उपयोग करना। - चारा बढ़ानाः वन क्षेत्रों के भीतर चारे और जल स्रोतों को बढ़ाने की परिकल्पना की गई है। - सक्रिय उपाय करनाः स्थानीय/राज्य स्तर पर अंतर-विभागीय समितियों को निर्धारित करना, पूर्व चेतावनी प्रणाली को अपनाना, बाधाओं का निर्माण, टोल-फ्री हॉटलाइन नंबरों के साथ समर्पित सर्कल-वार नियंत्रण कक्ष, हॉटस्पॉट की पहचान आदि। - तत्काल राहत प्रदान करनाः पीड़ित/परिवार को घटना के चौबीस घंटाटे के भीतर अंतरिम राहत के रूप में अनुग्रह राशि के एक हिस्से का भुगतान। - मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिये सबसे व्यापक तरीके शमन के रूप में खोजे जाते हैं या वन्यजीवों को उच्च घनत्व मानव आबादी या कृषि वाले क्षेत्रों से बाहर रखना है। - जनता के बीच शिक्षा और जागरूकता के प्रसार की आवश्यकता है ताकि उन्हें मानव-पशु संघर्ष के बारे में जागरूक किया जा सके, जिससे संघर्ष को रोकने के लिये दीर्घकालिक स्थायी समाधान विकसित होगा। - यह सुनिश्चित करना कि मनुष्यों और जानवरों के पास जीवन-निर्वाह के लिये पर्याप्त जगह है यह मानव-वन्यजीव संघर्ष समाधान का आधार है। - जंगली भूमि और प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना महत्त्वपूर्ण है, लेकिन जंगली और शहरी क्षेत्रों के बीच बफर ज़ोन बनाना भी महत्त्वपूर्ण है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्नः प्रश्न. वाणिज्य में प्राणिजात और वनस्पति-जात के व्यापार-संबंधी विश्लेषण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः एक- TRAFFIC, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अंतर्गत एक ब्यूरो है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? प्रिलिम्स के लियेः स्टार्टअप्स, स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान, नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशन , युवा और महत्त्वाकांक्षी इनोवेटर्स तथा स्टार्टअप्स , अटल इनोवेशन मिशन को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स का विकास करना। मेन्स के लियेः स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और उसका महत्त्व। चर्चा में क्यों? सरकार के विभिन्न सुधारों और पहलों से भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी आई है। - परिचयः - स्टार्टअप शब्द एक कंपनी के संचालन के पहले चरण को संदर्भित करता है। स्टार्टअप एक या एक से अधिक उद्यमियों द्वारा स्थापित किये जाते हैं जो एक ऐसे उत्पाद या सेवा का विकास करना चाहते हैं जिसकी बाज़ार में मांग है। - ये कंपनियाँ आमतौर पर उच्च लागत और सीमित राजस्व के साथ शुरू होती हैं, यही वजह है कि वे उद्यम पूंजीपतियों जैसे विभिन्न स्रोतों से पूंजी की मांग करती हैं। - भारत में स्टार्टअप्स की वृद्धि : - उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग ने स्टार्टअप को मान्यता दी है जो छप्पन विविध क्षेत्रों से संबंधित हैं। - इंटरनेट ऑफ थिंग्स , रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, एनालिटिक्स आदि जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित क्षेत्रों में चार,पाँच सौ से अधिक स्टार्टअप को मान्यता प्रदान की गई है। - इस दिशा में निरंतर सरकारी प्रयासों के परिणामस्वरूप मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या वर्ष दो हज़ार सोलह के चार सौ इकहत्तर से बढ़कर वर्ष दो हज़ार बाईस में बहत्तर,नौ सौ तिरानवे हो गई है। - उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग ने स्टार्टअप को मान्यता दी है जो छप्पन विविध क्षेत्रों से संबंधित हैं। स्टार्टअप-इंडिया योजना का भारत के स्टार्टअप्स के विकास में योगदानः स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार द्वारा शुरू किये गए विभिन्न कार्यक्रमों ने स्टार्टअप्स के विकास को सुगम बनाया हैः - स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लानः इसमें सरलीकरण, मार्गदर्शन, वित्तीय समर्थन, प्रोत्साहन और उद्योग शिक्षाविद, साझेदारी एवं इनक्यूबेशन जैसे क्षेत्रों में विस्तारित उन्नीस घटक शामिल हैं। - कार्य योजना ने देश में एक जीवंत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिये परिकल्पित सरकारी सहायता, योजनाओं और प्रोत्साहनों की नींव रखी। - स्टार्टअप इंडिया हबः यह भारत में उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों के लिये एक-दूसरे को खोजने, जोड़ने और संलग्न करने हेतु अपनी तरह का एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। - ऑनलाइन हब स्टार्टअप, निवेशक, फंड, सलाहकार, शैक्षणिक संस्थान, इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर, कॉर्पोरेट, सरकारी निकायों को मेज़बानी प्रदान करता हैै। - तीन साल के लिए आयकर छूटः एक अप्रैल, दो हज़ार सोलह को या उसके बाद निगमित स्टार्टअप्स के निगमन के बाद से दस वर्षों में से लगातार तीन वर्षों की अवधि के लिये आयकर से छूट दी गई है। - स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम : इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को अवधारणा के प्रमाण, प्रोटोटाइप विकास, उत्पाद परीक्षण, बाज़ार में प्रवेश और व्यावसायीकरण के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करना है। - भारतीय स्टार्टअप के लिये अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार पहुँचः स्टार्टअप इंडिया ने पंद्रह से अधिक साझेदार देशों के साथ परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने में सहायता हेतु स्टार्टअप के लिये सॉफ्ट लैंडिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किये हैं।, स्टार्टअप्स को हैंडहोल्डिंग प्रदान करने वाले अन्य कारकः - सरकारी योजनाएँ : - विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने सफल स्टार्टअप में विचारों और नवाचारों को पोषित करने के लिये नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशन नामक एक अम्ब्रेला कार्यक्रम शुरू किया था। - स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये युवा और महत्त्वाकांक्षी इनोवेटर्स एवं स्टार्टअप्स कार्यक्रम को बढ़ावा देना और उसे तेज़ी से शुरू किया गया था। - जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावाः - जैव प्रौद्योगिकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिये जैव प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी फर्मों को बढ़ावा देता है तथा उनका पोषण करता है। - रक्षा क्षेत्रः - रक्षा उत्पादन विभाग ने उद्योगों, R&D संस्थानों और शिक्षाविदों को शामिल करके तथा उन्हें R&D के लिये अनुदान प्रदान कर आत्मनिर्भरता प्राप्त करने, रक्षा एवं एयरोस्पेस में नवाचार तथा प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने के लिये रक्षा उत्कृष्टता के लिये नवाचार कार्यक्रम शुरू किया। - अटल नवाचार मिशन : - अटल नवाचार मिशन के तहत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में स्टार्टअप को इनक्यूबेट करने के लिये अटल इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की है। - इसने राष्ट्रीय महत्त्व और सामाजिक प्रासंगिकता की क्षेत्रीय चुनौतियों को हल करने वाले प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचारों के साथ स्टार्टअप्स को सीधे सहायता देने के लिये अटल न्यू इंडिया चैलेंज कार्यक्रम भी शुरू किया है। - विदेशी मुद्रा प्रवाह की भूमिकाः - भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में विशेष रूप से प्रमुख तकनीकी कंपनियों जैसे फेसबुक, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट से विदेशी मुद्रा का प्रवाह घरेलू बाज़ार की अपार संभावनाओं का संकेत देता है। - प्रौद्योगिकी की भूमिकाः - नए तकनीकी उपकरणों के साथ स्टार्टअप समुदाय व्यापक बाज़ार अंतराल को समाप्त करने हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, डेटा एनालिटिक्स, बिग डेटा, रोबोटिक्स आदि जैसे नए युग की तकनीकों का लाभ उठा रहा है। - स्टार्टअप्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है क्योंकि कई उद्यमी अपने परिवार और सामाजिक वातावरण द्वारा अपने शौक को पूरा करने से हतोत्साहित होते रहते हैं तथा नौकरी एवं जीवन शैली का चयन करने के लिये दबाव में होते हैं। - अवसर की इच्छा रखने वाले को अधिक पुरस्कृत किया जाना चाहिये और असफलता को नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिये। - इसके अलावा पूर्वाग्रहों को तोड़ना बढ़ती विविधता की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है, जो सफल होने के लिये आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र को प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। - देश के निर्माताओं, जोखिम उठाने वाली कंपनियों और फंडिंग एजेंसियों को घरेलू पूंजी की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये अनुकूल माहौल बनाने की ज़रूरत है। - नवाचार को प्रोत्साहित करने और उभरते व्यापार मॉडल को समर्थन देने वाले उपयुक्त नियमों को तैयार कर नियामकों को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। - नवाचार को प्रोत्साहित करने और उभरते व्यापार मॉडल को समर्थन देने वाले उपयुक्त नियमों को तैयार कर नियामकों को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्नः प्रश्न. उद्यम पूंजी से क्या तात्पर्य है? उत्तरः स्रोतः पी.आई.बी. प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में एक याचिका कि सुनवाई में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, दो हज़ार दो की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। - न्यायालय ने रेखांकित किया कि आरोपी/अपराधी की बेगुनाही के सिद्धांत को एक मानव अधिकार के रूप में माना जाता है, लेकिन इस अवधारणा को संसद/विधायिका द्वारा बनाए गए कानून द्वारा बाधित किया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णयः - प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट : - प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट की तुलना प्राथमिकी से नहीं की जा सकती। - प्रत्येक मामले में संबंधित व्यक्ति को ECIR की आपूर्ति अनिवार्य नहीं है और "यह पर्याप्त है यदि प्रवर्तन निदेशालय , गिरफ्तारी के समय, ऐसी गिरफ्तारी के आधार का खुलासा करता है"। - ECIR ईडी का एक आंतरिक दस्तावेज़ है और यह तथ्य कि अनुसूचित अपराध के संबंध में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, ईडी अधिकारियों के जाँच/परीक्षण शुरू करने के मामले में दखल नहीं करता है। - प्रत्येक मामले में संबंधित व्यक्ति को ECIR की आपूर्ति अनिवार्य नहीं है और "यह पर्याप्त है यदि प्रवर्तन निदेशालय , गिरफ्तारी के समय, ऐसी गिरफ्तारी के आधार का खुलासा करता है"। - प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट की तुलना प्राथमिकी से नहीं की जा सकती। - PMLA अधिनियम की धारा तीन: - PMLA अधिनियम दो हज़ार दो की धारा तीन की व्यापक पहुँच है और यह दर्शाता है कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध आय से जुड़ी प्रक्रिया या गतिविधि के संबंध में एक स्वतंत्र अपराध है जो एक अनुसूचित अपराध से संबंधित या उसके संबंध में आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप प्राप्त किया गया था। - निर्णय ने यह भी स्पष्ट किया किः - धारा तीन के तहत अपराध "एक अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप संपत्ति के अवैध लाभ पर निर्भर है"। - वर्ष दो हज़ार दो के अधिनियम के तहत प्राधिकरण किसी भी व्यक्ति पर काल्पनिक आधार पर या इस धारणा के आधार पर मुकदमा नहीं चला सकते हैं कि अपराध हुआ है लेकिन यह पुलिस के अधिकार क्षेत्र में पंजीकृत नहीं है और सक्षम मंच के समक्ष आपराधिक शिकायत जाँच लंबित है। - धारा तीन के तहत अपराध "एक अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप संपत्ति के अवैध लाभ पर निर्भर है"। - प्रवर्तन निदेशालय : - पीठ ने अधिनियम की धारा पाँच के तहत ED की शक्ति को बरकरार रखा। - न्यायालय ने कहा कि धारा पाँच व्यक्ति के हितों को सुरक्षित करने के लिये एक संतुलन व्यवस्था प्रदान करती है और यह भी सुनिश्चित करती है कि अपराध अधिनियम, दो हज़ार दो द्वारा प्रदान किए गए तरीके से निपटने के लिये उपलब्ध रहे। - इसने इस तर्क को खारिज कर दिया कि ED अधिकारी पुलिस अधिकारी हैं और इसलिये अधिनियम की धारा पचास के तहत उनके द्वारा दर्ज बयान संविधान के अनुच्छेद बीस से प्रभावित होगा, जिसमें कहा गया है कि अपराध का आरोपी कोई भी व्यक्ति अपने खिलाफ गवाह बनने के लिये मज़बूर नहीं किया जाएगा। - पीठ ने अधिनियम की धारा पाँच के तहत ED की शक्ति को बरकरार रखा। - यह आपराधिक कानून है जो धन शोधन/मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने और मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित मामलों से प्राप्त या इसमें शामिल संपत्ति की जब्ती का प्रावधान करने के लिए बनाया गया है। - यह मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिये भारत द्वारा स्थापित कानूनी ढाँचे का मूल है। - इस अधिनियम के प्रावधान सभी वित्तीय संस्थानों, बैंकों , म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और उनके वित्तीय मध्यस्थों पर लागू होते हैं। - PMLA अधिमियम, दो हज़ार बारह: - इसमें 'रिपोर्टिंग इकाई' की अवधारणा शामिल है जिसमें बैंकिंग कंपनी, वित्तीय संस्थान, मध्यस्थ आदि शामिल होंगे। - PMLA, दो हज़ार दो में पाँच लाख रुपए तक का ज़ुर्माना लगाने का प्रावधान था, लेकिन संशोधन अधिनियम में इस ऊपरी सीमा को हटा दिया गया है। - इसमें गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति की संपत्ति की अस्थायी कुर्की और ज़ब्ती का प्रावधान किया गया है। प्रवर्तन निदेशालयः - संगठनात्मक इतिहासः - प्रवर्तन निदेशालय या ED एक बहु-अनुशासनात्मक संगठन है जो आर्थिक अपराधों की जाँच और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन के लिये अनिवार्य है। - इस निदेशालय की उत्पत्ति एक मई, एक हज़ार नौ सौ छप्पन को हुई, जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस के तहत विनिमय नियंत्रण कानून के उल्लंघन से निपटने के लिये आर्थिक मामलों के विभाग में एक 'प्रवर्तन इकाई' का गठन किया गया। - समय बीतने के साथ, FERA'एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस कानून को FERA'एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर कानून द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। चार साल की अवधि के लिये निदेशालय कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में रहा। पुनः आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत के साथ, FERA'एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर निरस्त कर दिया गया और इसके स्थान पर एक जून, दो हज़ार से एक नया कानून-विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे लागू किया गया। - हाल ही में विदेशों में शरण लेने वाले आर्थिक अपराधियों से संबंधित मामलों की संख्या में वृद्धि के साथ सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, दो हज़ार अट्ठारह पारित किया है और ED को इसे लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है। - कार्यः - मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम, दो हज़ार दो : - इसके तहत धन शोधन के अपराधों की जाँच करना, संपत्ति की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई करना और मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा चलाना हैं। - विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे : - इसके तहत निदेशालय नामित अधिकारियों द्वारा फेमा के उल्लंघन के दोषियों की जाँच की जाती है और इसमें शामिल राशि का तीन गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है। - भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, दो हज़ार अट्ठारह : - इस अधिनियम का उद्देश्य ऐसे भगोड़े आर्थिक अपराधियों को दंडित करना है जो भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर कानून की प्रक्रिया से बचने के उपाय खोजते हैं। - COFEPOSA के तहत प्रायोजक एजेंसीः - FEMA के उल्लंघन के संबंध में विदेशी मुद्रा और संरक्षण गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर के तहत निवारक निरोध के प्रायोजक मामले देखना। - FEMA के उल्लंघन के संबंध में विदेशी मुद्रा और संरक्षण गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर के तहत निवारक निरोध के प्रायोजक मामले देखना। - मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम, दो हज़ार दो : विगत वर्ष के प्रश्न प्रारंभिक परीक्षाः भारत की विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि में निम्नलिखित में से कौन-सा एक मदसमूह सम्मिलित है? अतः विकल्प B सही है। प्रश्न. चर्चा कीजिये कि उभरती हुई प्रौद्योगिकियाँ और वैश्वीकरण धन शोधन में कैसे योगदान करते हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर धन शोधन की समस्या से निपटने के लिये विस्तृत उपाय सुझाइए। प्रश्न. दुनिया के दो सबसे बड़े अवैध अफीम उत्पादक राज्यों के साथ भारत की निकटता ने उसकी आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों जैसे- बंदूक रखना , मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के बीच संबंधों की व्याख्या कीजिये। इसे रोकने के लिये क्या उपाय किये जाने चाहिये?
बाड़मेर की एक मोबाइल की दुकान पर बैठे युवक पर तीन बदमाशों ने चाकु से पर दिनदहाड़े हमला कर दिया। युवक ने बहादुरी दिखाते हुए बदमाशों का सामना किया। चाकू को पकड़ लिया। इससे युवक के हाथ की उंगलियों पर चोट आई। दुकान में मालिक को आता देख युवक दुकान से भाग गए। पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी में कैद हो गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी के आधार पर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार खारी गांव निवासी श्रवण कुमार पुत्र बाबूलाल मंगलवार को दिन में धोरीमन्ना कस्बे में विश्नोई हेल्पलाइन सेंटर मोबाइल दुकान पर बैठा था। उस समय दुकान में कोई नहीं था। तभी तीन युवक दुकान के अंदर घुसे। चाकू निकालकर युवक पर हमला कर दिया। युवक ने चाकू को पकड़ लिया। इससे युवक के हाथ की अगुलियां कट गई। एक युवक दुकान के गेट पर खड़ा रहा। दो युवक उसके साथ मारपीट करने लगे। श्रवण के चिल्लाने पर युवक ने पिस्टल निकालकर हवाई फायर करने का भी प्रयास किया। चिल्लाने की आवाज सुनकर दुकान मालिक व अन्य लोग पहुंच गए। इनको आता देख तीनों बदमाश वहां से भाग गए। पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गया। धोरीमन्ना एएसआई अचलाराम के मुताबिक युवक के हाथ में चोटें आई है। युवक का मेडिकल करवा दिया है। युवक की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बाड़मेर की एक मोबाइल की दुकान पर बैठे युवक पर तीन बदमाशों ने चाकु से पर दिनदहाड़े हमला कर दिया। युवक ने बहादुरी दिखाते हुए बदमाशों का सामना किया। चाकू को पकड़ लिया। इससे युवक के हाथ की उंगलियों पर चोट आई। दुकान में मालिक को आता देख युवक दुकान से भाग गए। पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी में कैद हो गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी के आधार पर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार खारी गांव निवासी श्रवण कुमार पुत्र बाबूलाल मंगलवार को दिन में धोरीमन्ना कस्बे में विश्नोई हेल्पलाइन सेंटर मोबाइल दुकान पर बैठा था। उस समय दुकान में कोई नहीं था। तभी तीन युवक दुकान के अंदर घुसे। चाकू निकालकर युवक पर हमला कर दिया। युवक ने चाकू को पकड़ लिया। इससे युवक के हाथ की अगुलियां कट गई। एक युवक दुकान के गेट पर खड़ा रहा। दो युवक उसके साथ मारपीट करने लगे। श्रवण के चिल्लाने पर युवक ने पिस्टल निकालकर हवाई फायर करने का भी प्रयास किया। चिल्लाने की आवाज सुनकर दुकान मालिक व अन्य लोग पहुंच गए। इनको आता देख तीनों बदमाश वहां से भाग गए। पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गया। धोरीमन्ना एएसआई अचलाराम के मुताबिक युवक के हाथ में चोटें आई है। युवक का मेडिकल करवा दिया है। युवक की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
(www. arya-tv. com) यूपी में गर्मी अपना असर दिखा रही है। यहां अधिकतम पारा 46 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। लखनऊ में पारा 43 डिग्री रिकार्ड़ हुआ। मौसम के जानकारों के मुताबिक लखनऊ में अगले तीन दिन यानी शनिवार तक भीषण गर्मी पड़े़गी और पारा 44 डिग्री सेल्सियस पार कर सकता है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में तेज तपिश भरी हवाएं चलेंगी और मौसम सूखा रहेगा। गर्मी का आलम यह है कि, आसमान से आग की बारिश होने लगी है। प्रदेश में सबसे अधिक 45. 5 डिग्री सेल्सियस तापमान झांसी में रिकार्ड़ हुआ जो सामान्य से 3. 8 डिग्री ऊपर था। इसके अलावा कानपुर में 44. 9 डिग्री' प्रयागराज में 45 डिग्री, उरई में 44 डिग्री और वाराणसी में 44. 4 डिग्री रिकार्ड़ हुआ। बीती रात को प्रदेश में सबसे अधिक गर्मी लखीमपुर खीरी में पड़ी न्यूनतम तापमान 28 डिग्री रिकार्ड़ हुआ। लखनऊ में बीती रात को काफी गर्मी रही। यहां न्यूनतम तापमान 24. 6 डिग्री रिकार्ड़ हुआ।
यूपी में गर्मी अपना असर दिखा रही है। यहां अधिकतम पारा छियालीस डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। लखनऊ में पारा तैंतालीस डिग्री रिकार्ड़ हुआ। मौसम के जानकारों के मुताबिक लखनऊ में अगले तीन दिन यानी शनिवार तक भीषण गर्मी पड़े़गी और पारा चौंतालीस डिग्री सेल्सियस पार कर सकता है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में तेज तपिश भरी हवाएं चलेंगी और मौसम सूखा रहेगा। गर्मी का आलम यह है कि, आसमान से आग की बारिश होने लगी है। प्रदेश में सबसे अधिक पैंतालीस. पाँच डिग्री सेल्सियस तापमान झांसी में रिकार्ड़ हुआ जो सामान्य से तीन. आठ डिग्री ऊपर था। इसके अलावा कानपुर में चौंतालीस. नौ डिग्री' प्रयागराज में पैंतालीस डिग्री, उरई में चौंतालीस डिग्री और वाराणसी में चौंतालीस. चार डिग्री रिकार्ड़ हुआ। बीती रात को प्रदेश में सबसे अधिक गर्मी लखीमपुर खीरी में पड़ी न्यूनतम तापमान अट्ठाईस डिग्री रिकार्ड़ हुआ। लखनऊ में बीती रात को काफी गर्मी रही। यहां न्यूनतम तापमान चौबीस. छः डिग्री रिकार्ड़ हुआ।
सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने 551 रुपये का एक नया टैरिफ प्लान पेश किया है. ये एक डेटा प्लान है, इसमें कॉलिंग के फायदे ग्राहकों को नहीं दिए जाएंगे. हालांकि डेटा के साथ ग्राहकों को पूरी वैलिडिटी के दौरान कॉलर ट्यून लगाने का मौका जरूर मिलेगा. 551 रुपये वाले इस प्लान में ग्राहकों को रीचार्ज की तारीख से लेकर 90 दिनों के लिए प्रतिदिन 1. 5GB डेटा दिया जाएगा. इस तरह ग्राहकों को इस नए प्लान में कुल 135GB डेटा दिया जाएगा. फिलहाल इस प्लान को केरल सर्किल के लिए पेश किया गया है. इस प्लान को फायदा प्री-पेड यूजर्स ही उठा पाएंगे. साथ ही प्रतिदिन दिया जा रहा 1. 5GB डेटा खत्म होने के बाद ग्राहक 80 Kbps पर डेटा का फायदा उठा सकते हैं, बिल्कुल जियो की तरह. इसस पहले सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने 58 रुपये का प्रीपेड प्लान पेश किया था. कंपनी इसमें अनलिमिटेड फायदे ग्राहकों को उपलब्ध करा रही है. BSNL के इस प्लान का मुकाबला एयरटेल के 59 रुपये और रिलायंस जियो के 52 रुपये वाले प्लान से है. BSNL के 58 रुपये वाले प्लान में ग्राहकों को अनलिमिटेड वॉयस कॉल, प्रतिदिन 100 SMS और सात दिनों के लिए 500 MB डेटा दिया जा रहा है. कंपनी ने इस प्लान का प्लान 'द ओनली ट्रैवल पैक' रखा था. 58 रुपये वाले प्लान में ग्राहक किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉल कर पाएंगे. साथ ही यहां रोमिंग कॉल भी मुफ्त रहेगा. अनलिमिटेड कॉलिंग में किसी भी तरह कि कोई लिमिट भी नहीं रखी गई है. हालांकि रोमिंग कॉल्स का फायदा दिल्ली और मुंबई सर्किल्स में नहीं उठाया जा सकेगा. इसी तरह एयरटेल के 59 रुपये वाले प्लान की बात करें तो इसमें 500MB डेटा , प्रतिदिन 100SMS और किसी भी नेटवर्क पर मुफ्त कॉलिंग की सुविधा दी जाती है. इस प्लान की वैलिडिटी भी 7 दिनों की ही है. वहीं जियो 52 रुपये वाले प्लान में प्रतिदिन 150MB डेटा, किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉल और 70 SMS उपलब्ध कराता है. इस प्लान की वैलिडिटी भी 7 दिनों की ही है.
सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने पाँच सौ इक्यावन रुपयापये का एक नया टैरिफ प्लान पेश किया है. ये एक डेटा प्लान है, इसमें कॉलिंग के फायदे ग्राहकों को नहीं दिए जाएंगे. हालांकि डेटा के साथ ग्राहकों को पूरी वैलिडिटी के दौरान कॉलर ट्यून लगाने का मौका जरूर मिलेगा. पाँच सौ इक्यावन रुपयापये वाले इस प्लान में ग्राहकों को रीचार्ज की तारीख से लेकर नब्बे दिनों के लिए प्रतिदिन एक. पाँचGB डेटा दिया जाएगा. इस तरह ग्राहकों को इस नए प्लान में कुल एक सौ पैंतीसGB डेटा दिया जाएगा. फिलहाल इस प्लान को केरल सर्किल के लिए पेश किया गया है. इस प्लान को फायदा प्री-पेड यूजर्स ही उठा पाएंगे. साथ ही प्रतिदिन दिया जा रहा एक. पाँचGB डेटा खत्म होने के बाद ग्राहक अस्सी Kbps पर डेटा का फायदा उठा सकते हैं, बिल्कुल जियो की तरह. इसस पहले सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने अट्ठावन रुपयापये का प्रीपेड प्लान पेश किया था. कंपनी इसमें अनलिमिटेड फायदे ग्राहकों को उपलब्ध करा रही है. BSNL के इस प्लान का मुकाबला एयरटेल के उनसठ रुपयापये और रिलायंस जियो के बावन रुपयापये वाले प्लान से है. BSNL के अट्ठावन रुपयापये वाले प्लान में ग्राहकों को अनलिमिटेड वॉयस कॉल, प्रतिदिन एक सौ SMS और सात दिनों के लिए पाँच सौ MB डेटा दिया जा रहा है. कंपनी ने इस प्लान का प्लान 'द ओनली ट्रैवल पैक' रखा था. अट्ठावन रुपयापये वाले प्लान में ग्राहक किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉल कर पाएंगे. साथ ही यहां रोमिंग कॉल भी मुफ्त रहेगा. अनलिमिटेड कॉलिंग में किसी भी तरह कि कोई लिमिट भी नहीं रखी गई है. हालांकि रोमिंग कॉल्स का फायदा दिल्ली और मुंबई सर्किल्स में नहीं उठाया जा सकेगा. इसी तरह एयरटेल के उनसठ रुपयापये वाले प्लान की बात करें तो इसमें पाँच सौMB डेटा , प्रतिदिन एक सौSMS और किसी भी नेटवर्क पर मुफ्त कॉलिंग की सुविधा दी जाती है. इस प्लान की वैलिडिटी भी सात दिनों की ही है. वहीं जियो बावन रुपयापये वाले प्लान में प्रतिदिन एक सौ पचासMB डेटा, किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉल और सत्तर SMS उपलब्ध कराता है. इस प्लान की वैलिडिटी भी सात दिनों की ही है.
PSL 2023 : पाकिस्तान सुपर लीग के 15वें मुकाबले में लाहौर कलंदर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पेशावर ज़ाल्मी को 40 रन से हरा दिया। इम मुकाबले में लाहौर कलंदर्स के कप्तान शाहीन अफरीदी ने पांच विकेट लेकर अपनी टीम को जीत की राह दिखाई। इसी मैच के दौरान एक ऐसा दृश्य भी देखने को मिला जब शाहीन ने अपनी तेज गेंदबाजी से बल्लेबाज का बैट को ही तोड़। इतना ही नहीं अगली गेंद पर स्टंप भी उड़ा दिया। इस मैच में पेशावर जाल्मी की टीम 242 रनों का पीछा करने के लिए मैदान में उतरी थी। शाहीन अफरीदी के ओवर की पहली गंद पर ल्लेबाज मोहम्मद हैरिस ने सामने की तरफ शॉट खेलने का प्रयास किया और इस दौरान उनका बल्ला ही टूट गया। शाहीन इतने पर भी नहीं रुके और अगली गेंद पर ही रिस को बोल्ड करते हुए स्टंप ही हवा में उड़ा दिए। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। नेटिजन्स वीडियो पर अगल-अलग तरह की प्रतिकिया दे रहे हैं। आपको बता दें कि तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी ने पीएसएल में शानदार प्रदर्शन किया है और अब तक खेले गए चार मुकाबलों में उन्होंने 10 विकेट लिए हैं। शाहीन ने पेशावर के खिलाफ 4 ओवरों में 40 रन देकर 5 विकेट अपने नाम किए।
PSL दो हज़ार तेईस : पाकिस्तान सुपर लीग के पंद्रहवें मुकाबले में लाहौर कलंदर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पेशावर ज़ाल्मी को चालीस रन से हरा दिया। इम मुकाबले में लाहौर कलंदर्स के कप्तान शाहीन अफरीदी ने पांच विकेट लेकर अपनी टीम को जीत की राह दिखाई। इसी मैच के दौरान एक ऐसा दृश्य भी देखने को मिला जब शाहीन ने अपनी तेज गेंदबाजी से बल्लेबाज का बैट को ही तोड़। इतना ही नहीं अगली गेंद पर स्टंप भी उड़ा दिया। इस मैच में पेशावर जाल्मी की टीम दो सौ बयालीस रनों का पीछा करने के लिए मैदान में उतरी थी। शाहीन अफरीदी के ओवर की पहली गंद पर ल्लेबाज मोहम्मद हैरिस ने सामने की तरफ शॉट खेलने का प्रयास किया और इस दौरान उनका बल्ला ही टूट गया। शाहीन इतने पर भी नहीं रुके और अगली गेंद पर ही रिस को बोल्ड करते हुए स्टंप ही हवा में उड़ा दिए। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। नेटिजन्स वीडियो पर अगल-अलग तरह की प्रतिकिया दे रहे हैं। आपको बता दें कि तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी ने पीएसएल में शानदार प्रदर्शन किया है और अब तक खेले गए चार मुकाबलों में उन्होंने दस विकेट लिए हैं। शाहीन ने पेशावर के खिलाफ चार ओवरों में चालीस रन देकर पाँच विकेट अपने नाम किए।
शहद का सेवन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इसके साथ ही ये त्वचा के लिए भी लाभकारी होता है। बता दें, शहद में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं। शहद (honey) एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जो त्वचा की परेशानी दूर करने में मदद करता है। अगर आप रात के समय अपने चेहरे (skin) पर शहद लगाते हैं तो इससे आपको बहुत लाभ मिलेगा जानते हैं इसके बारे में। त्वचा में नमी को लॉक करता है - शहद (honey )का उपयोग त्वचा के लिए एक बेहतरीन मॉइस्चराइजर के रूप में काम करता है। वहीं, रात में चेहरे पर शहद लगाना ड्राई स्किन वाले लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। यह त्वचा में नमी को लोक करने में मददगार है, साथ ही आपको के सॉफ्ट और सपल त्वचा पाने में भी मदद करता है। त्वचा की सफाई करता है - त्वचा को साफ करने के लिए आप शहद में नारियल का तेल (coconut oil) मिलाकर लगा सकते हैं। इससे रोम छिद्रों में जमा गंदगी को बाहर निकलने में मदद मिलती है। सोरायसिस और एक्जिमा में - शहद के एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सोरायसिस और एक्जिमा जैसी स्थितियों के उपचार में बहुत लाभकारी हैं। त्वचा को एक्सफोलिएट करता है - अगर अपनी त्वचा (skin) पर आप रात में सोने से पहले शहद लगाके हैं और फिर कुछ मिनट मसाज करते हैं, तो इससे आपकी त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद मिलती है और त्वचा की रंगत को बेहतर बनाती है। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
शहद का सेवन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इसके साथ ही ये त्वचा के लिए भी लाभकारी होता है। बता दें, शहद में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं। शहद एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जो त्वचा की परेशानी दूर करने में मदद करता है। अगर आप रात के समय अपने चेहरे पर शहद लगाते हैं तो इससे आपको बहुत लाभ मिलेगा जानते हैं इसके बारे में। त्वचा में नमी को लॉक करता है - शहद का उपयोग त्वचा के लिए एक बेहतरीन मॉइस्चराइजर के रूप में काम करता है। वहीं, रात में चेहरे पर शहद लगाना ड्राई स्किन वाले लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। यह त्वचा में नमी को लोक करने में मददगार है, साथ ही आपको के सॉफ्ट और सपल त्वचा पाने में भी मदद करता है। त्वचा की सफाई करता है - त्वचा को साफ करने के लिए आप शहद में नारियल का तेल मिलाकर लगा सकते हैं। इससे रोम छिद्रों में जमा गंदगी को बाहर निकलने में मदद मिलती है। सोरायसिस और एक्जिमा में - शहद के एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सोरायसिस और एक्जिमा जैसी स्थितियों के उपचार में बहुत लाभकारी हैं। त्वचा को एक्सफोलिएट करता है - अगर अपनी त्वचा पर आप रात में सोने से पहले शहद लगाके हैं और फिर कुछ मिनट मसाज करते हैं, तो इससे आपकी त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद मिलती है और त्वचा की रंगत को बेहतर बनाती है। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
आलयना दत्ता का बोल्ड अंदाज Alayna Dutta ने इंटरनेट पर लगाई आग एंटरटेनमेंट जगत की कई एक्ट्रेसेस ऐसी हैं, जो अपने डेब्यू से पहले ही सुर्खियों में रहती हैं. जैसे आज कल आलयना दत्ता (Aalayna Datta) की चर्चा है. आलयना जल्द ही भोजपुरी सिनेमा में डेब्यू करने वाली हैं. पर अपने डेब्यू से पहले ही वो चर्चा में आ चुकी हैं. एक्ट्रेस ये दिन सोशल मीडिया पर अपनी बोल्डनेस से लोगों के होश उड़ाती दिखती हैं. आलयना दत्ता की ग्लैमरस फोटोज देखने के बाद शायद ही कोई होगा, जो अपना दिल संभालकर रख पायेगा. इंस्टाग्राम पर आलयना दत्ता कभी बिकिनी पहनकर तहलका मचाती दिखती हैं, तो कभी किलर पोज देकर फैंस को सरप्राइज कर जाती हैं. आलयना की बोल्डनेस कई बॉलीवुड-हॉलीवुड हसीनाओं को टक्कर देती दिखती है. अटैक को सेंसर बोर्ड से UA सर्टिफिकेट जॉन अब्राहम की अटैक को सेंसर बोर्ड से UA सर्टिफिकेट मिला है। यह फिल्म 2 घंटे 13 मिनट की है। इस बात की जानकारी फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर दी है। अटैक 1 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में जॉन के अलावा रकुल प्रीत सिंह और जैकलीन फर्नांडिस हैं। रणबीर और आलिया की शादी से जुड़ी नई बात रणबीर कपूर और आलिया की शादी से जुड़ी एक नई बात फिर से सामने आई है. दरअसल ये कहा जा रहा है कि बी-टाउन का ये पॉपुलर कपल अगले महीने में सगाई करने वाला है. हालांकि पिछले काफी समय से अफवाह थी कि ये कपल अप्रैल में शादी के बंधन में बंधे वाला है.
आलयना दत्ता का बोल्ड अंदाज Alayna Dutta ने इंटरनेट पर लगाई आग एंटरटेनमेंट जगत की कई एक्ट्रेसेस ऐसी हैं, जो अपने डेब्यू से पहले ही सुर्खियों में रहती हैं. जैसे आज कल आलयना दत्ता की चर्चा है. आलयना जल्द ही भोजपुरी सिनेमा में डेब्यू करने वाली हैं. पर अपने डेब्यू से पहले ही वो चर्चा में आ चुकी हैं. एक्ट्रेस ये दिन सोशल मीडिया पर अपनी बोल्डनेस से लोगों के होश उड़ाती दिखती हैं. आलयना दत्ता की ग्लैमरस फोटोज देखने के बाद शायद ही कोई होगा, जो अपना दिल संभालकर रख पायेगा. इंस्टाग्राम पर आलयना दत्ता कभी बिकिनी पहनकर तहलका मचाती दिखती हैं, तो कभी किलर पोज देकर फैंस को सरप्राइज कर जाती हैं. आलयना की बोल्डनेस कई बॉलीवुड-हॉलीवुड हसीनाओं को टक्कर देती दिखती है. अटैक को सेंसर बोर्ड से UA सर्टिफिकेट जॉन अब्राहम की अटैक को सेंसर बोर्ड से UA सर्टिफिकेट मिला है। यह फिल्म दो घंटाटे तेरह मिनट की है। इस बात की जानकारी फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर दी है। अटैक एक अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में जॉन के अलावा रकुल प्रीत सिंह और जैकलीन फर्नांडिस हैं। रणबीर और आलिया की शादी से जुड़ी नई बात रणबीर कपूर और आलिया की शादी से जुड़ी एक नई बात फिर से सामने आई है. दरअसल ये कहा जा रहा है कि बी-टाउन का ये पॉपुलर कपल अगले महीने में सगाई करने वाला है. हालांकि पिछले काफी समय से अफवाह थी कि ये कपल अप्रैल में शादी के बंधन में बंधे वाला है.
बिलासपुर - केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की हिमाचल की राजनीति में डायरेक्ट इन्वॉल्वमेंट के चलते एक साल से बिलासपुर चुनावी रणनीति का गढ़ बना हुआ है। चाहे बीजेपी का कोर ग्रुप, प्रदेश कार्यकारिणी हो या फिर चुनाव प्रबंधन, सभी कमेटियों की बैठकें बिलासपुर में ही आयोजित की गई हैं। बड़ी बात यह है कि माफिया राज हटाओ और हिमाचल बचाओ अभियान के तहत 100 रैलियों की शुरुआत के लिए एक सुनियोजित रणनीति तैयार करने को बिलासपुर ही चुना गया। इस रैली अभियान का आगाज भी बिलासपुर सदर हलके से हुआ और अब कोड ऑफ कंडक्ट लगने से ठीक पहले टिकटों पर चर्चा को लेकर बुधवार को प्रदेश चुनाव कार्यसमिति की बैठक का आयोजन भी बिलासपुर में ही हो रहा है। ऐसे में जेपी नड्डा बैठक में टिकटों पर कमेटी के साथ विचार-विमर्श के बाद केंद्रीय हाइकमान के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। कांग्रेस के खिलाफ हमलावर रणनीति बिलासपुर में तैयार की गई थी, जिसके लिए बीजेपी के कोर गु्रप की एक बैठक बिलासपुर में आयोजित की गई थी, जिसमें माफिया राज हटाओ और बिलासपुर बचाओ अभियान का शुभारंभ बिलासपुर सदर में रैली करके किया गया था। बाद में प्रदेश भर में हलकावार इन रैलियों में धूमल, सत्ती, जेपी नड्डा सहित अन्य नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर तीखे हमले किए। इसके बाद बीजेपी के कोर ग्रुप की एक बैठक भी यहीं बिलासपुर के लेक व्यू कैफे में आयोजित की गई थी और उसके बाद हरेक कमेटी की बैठक का आयोजन भी राजनीति का केंद्र बिंदु बने बिलासपुर में ही हुआ। जब भी चुनाव को लेकर बीजेपी ने रणनीति तैयार करनी चाही तो बिलासपुर को चुना। ऐसे में बीजेपी की बैठकों में सीधे तौर पर जेपी नड्डा की मुख्य भूमिका रही है। इसलिए नड्डा प्रदेश की राजनीति में इन दिनों युग पुरुष की तरह छाए हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के खासमखास होने के चलते स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे अहम विभाग का कार्यभार संभालने के साथ-साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सचिव भी हैं। ऐसे में उनकी कद काठी के आगे प्रदेश का कोई नेता कहीं भी नहीं टिकता। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नड्डा की कार्यकुशलता के कायल हैं, जिसका संकेत प्रधानमंत्री बिलासपुर में एम्स शिलान्यास के मौके पर आभार रैली में नड्डा की कार्यप्रणाली की भूरि-भूरि प्रशंसा कर दे गए हैं। इससे सियासी हलकों में तूफान मच गया है, क्योंकि कभी धुर विरोधियों द्वारा चित्त किए गए नड्डा के आगे प्रदेश का कोई नेता नहीं टिक रहा।
बिलासपुर - केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की हिमाचल की राजनीति में डायरेक्ट इन्वॉल्वमेंट के चलते एक साल से बिलासपुर चुनावी रणनीति का गढ़ बना हुआ है। चाहे बीजेपी का कोर ग्रुप, प्रदेश कार्यकारिणी हो या फिर चुनाव प्रबंधन, सभी कमेटियों की बैठकें बिलासपुर में ही आयोजित की गई हैं। बड़ी बात यह है कि माफिया राज हटाओ और हिमाचल बचाओ अभियान के तहत एक सौ रैलियों की शुरुआत के लिए एक सुनियोजित रणनीति तैयार करने को बिलासपुर ही चुना गया। इस रैली अभियान का आगाज भी बिलासपुर सदर हलके से हुआ और अब कोड ऑफ कंडक्ट लगने से ठीक पहले टिकटों पर चर्चा को लेकर बुधवार को प्रदेश चुनाव कार्यसमिति की बैठक का आयोजन भी बिलासपुर में ही हो रहा है। ऐसे में जेपी नड्डा बैठक में टिकटों पर कमेटी के साथ विचार-विमर्श के बाद केंद्रीय हाइकमान के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। कांग्रेस के खिलाफ हमलावर रणनीति बिलासपुर में तैयार की गई थी, जिसके लिए बीजेपी के कोर गु्रप की एक बैठक बिलासपुर में आयोजित की गई थी, जिसमें माफिया राज हटाओ और बिलासपुर बचाओ अभियान का शुभारंभ बिलासपुर सदर में रैली करके किया गया था। बाद में प्रदेश भर में हलकावार इन रैलियों में धूमल, सत्ती, जेपी नड्डा सहित अन्य नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर तीखे हमले किए। इसके बाद बीजेपी के कोर ग्रुप की एक बैठक भी यहीं बिलासपुर के लेक व्यू कैफे में आयोजित की गई थी और उसके बाद हरेक कमेटी की बैठक का आयोजन भी राजनीति का केंद्र बिंदु बने बिलासपुर में ही हुआ। जब भी चुनाव को लेकर बीजेपी ने रणनीति तैयार करनी चाही तो बिलासपुर को चुना। ऐसे में बीजेपी की बैठकों में सीधे तौर पर जेपी नड्डा की मुख्य भूमिका रही है। इसलिए नड्डा प्रदेश की राजनीति में इन दिनों युग पुरुष की तरह छाए हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के खासमखास होने के चलते स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे अहम विभाग का कार्यभार संभालने के साथ-साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सचिव भी हैं। ऐसे में उनकी कद काठी के आगे प्रदेश का कोई नेता कहीं भी नहीं टिकता। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नड्डा की कार्यकुशलता के कायल हैं, जिसका संकेत प्रधानमंत्री बिलासपुर में एम्स शिलान्यास के मौके पर आभार रैली में नड्डा की कार्यप्रणाली की भूरि-भूरि प्रशंसा कर दे गए हैं। इससे सियासी हलकों में तूफान मच गया है, क्योंकि कभी धुर विरोधियों द्वारा चित्त किए गए नड्डा के आगे प्रदेश का कोई नेता नहीं टिक रहा।
Jamshedpur (Anand Mishra) : हेमंत सरकार की अगली कैबिनेट बैठक में अंगीभूत कालेजों के इंटरमीडिएट के शिक्षकों और कर्मचारियों के समायोजन का मुद्दा रखा जाएगा. इस मुद्दे को पारित भी करवाया जाएगा. यह आश्वासन शिक्षकों और कर्मचारियों को मंत्री बन्ना गुप्ता ने दिया है. यह जानकारी झारखंड अंगीभूत महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी मोर्चा ने दी है. मोर्चा के बैनर तले शिक्षक शिक्षिकाओं और शिक्षकेतर कर्मचारियों ने मंगलवार को मंत्री बन्ना गुप्ता से उनके रांची स्थित आवास पर मुलाकात की. मोर्चा ने बताया है कि इस दौरान अंगी भूत कॉलेजों के इंटरमीडिएट सेक्शन के शिक्षकों और कर्मचारियों के समायोजन को लेकर एक मांग पत्र भी सौंपा गया. वही मोर्चा की ओर से कहा गया है कि जब तक शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्या का धरातल पर ठोस समाधान नहीं हो जाता है तब तक सभी इंटर प्रभाग के शिक्षक और कर्मचारी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत काला बिल्ला लगाकर अपने-अपने महाविद्यालय में सेवा कार्य को जारी रखेंगे. इसी के तहत आज झारखंड के सभी 62 महाविद्यालय में इंटर के शिक्षक और कर्मचारी साथियों ने काला बिल्ला लगाकर झारखंड सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने का कार्य किया है. झारखंड के सभी 62 अंगीभूत महाविद्यालय में झारखंड सरकार के द्वारा इस वर्ष 11वीं में नामांकन बंद कर दिया गया है जिसके कारण 62 अंगीभूत महाविद्यालय के लगभग 5000 शिक्षक और कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं. इस कारण उनके समक्ष बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई है. अपनी इसी समस्या को लेकर झारखंड अंगीभूत महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेतर मोर्चा द्वारा प्रदेश स्तरीय पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत मंगलवार को शिक्षक और कर्मचारियों ने मंत्री बन्ना गुप्ता से रांची स्थित उनके आवास पर मुलाकात की. इस दौरान मोर्चा अध्यक्ष शालिनी नाग, महामंत्री रामानुज पांडे ,जावेद अख्तर अंसारी, अंजनी कुमार झा ,नवनीत कुमार सिंह ,राजीव कुमार दुबे ,कमलेश कुमार ,प्रभात रंजन तिवारी, संजलि कौसर,जितेन महतो ,चंदन जायसवाल, अनिमेष बक्शी, नीतीश कुमार ,शैशव सरकार, नीरज कुमार सहित रांची के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों की बहुत बड़ी संख्या उपस्थित थे.
Jamshedpur : हेमंत सरकार की अगली कैबिनेट बैठक में अंगीभूत कालेजों के इंटरमीडिएट के शिक्षकों और कर्मचारियों के समायोजन का मुद्दा रखा जाएगा. इस मुद्दे को पारित भी करवाया जाएगा. यह आश्वासन शिक्षकों और कर्मचारियों को मंत्री बन्ना गुप्ता ने दिया है. यह जानकारी झारखंड अंगीभूत महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी मोर्चा ने दी है. मोर्चा के बैनर तले शिक्षक शिक्षिकाओं और शिक्षकेतर कर्मचारियों ने मंगलवार को मंत्री बन्ना गुप्ता से उनके रांची स्थित आवास पर मुलाकात की. मोर्चा ने बताया है कि इस दौरान अंगी भूत कॉलेजों के इंटरमीडिएट सेक्शन के शिक्षकों और कर्मचारियों के समायोजन को लेकर एक मांग पत्र भी सौंपा गया. वही मोर्चा की ओर से कहा गया है कि जब तक शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्या का धरातल पर ठोस समाधान नहीं हो जाता है तब तक सभी इंटर प्रभाग के शिक्षक और कर्मचारी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत काला बिल्ला लगाकर अपने-अपने महाविद्यालय में सेवा कार्य को जारी रखेंगे. इसी के तहत आज झारखंड के सभी बासठ महाविद्यालय में इंटर के शिक्षक और कर्मचारी साथियों ने काला बिल्ला लगाकर झारखंड सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने का कार्य किया है. झारखंड के सभी बासठ अंगीभूत महाविद्यालय में झारखंड सरकार के द्वारा इस वर्ष ग्यारहवीं में नामांकन बंद कर दिया गया है जिसके कारण बासठ अंगीभूत महाविद्यालय के लगभग पाँच हज़ार शिक्षक और कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं. इस कारण उनके समक्ष बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई है. अपनी इसी समस्या को लेकर झारखंड अंगीभूत महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेतर मोर्चा द्वारा प्रदेश स्तरीय पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत मंगलवार को शिक्षक और कर्मचारियों ने मंत्री बन्ना गुप्ता से रांची स्थित उनके आवास पर मुलाकात की. इस दौरान मोर्चा अध्यक्ष शालिनी नाग, महामंत्री रामानुज पांडे ,जावेद अख्तर अंसारी, अंजनी कुमार झा ,नवनीत कुमार सिंह ,राजीव कुमार दुबे ,कमलेश कुमार ,प्रभात रंजन तिवारी, संजलि कौसर,जितेन महतो ,चंदन जायसवाल, अनिमेष बक्शी, नीतीश कुमार ,शैशव सरकार, नीरज कुमार सहित रांची के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों की बहुत बड़ी संख्या उपस्थित थे.
Delhi Jama Masjid Protest : दिल्ली की जामा मस्जिद में आज जुमे की नमाज के बाद नमाजी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये लोग नुपुर शर्मा और नवीन जिंदल के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि नुपुर शर्मा और नवीन जिंदल के खिलाफ पार्टी पहले ही एक्शन ले चुकी है। वहीं जामा मस्जिद के शाही इमाम का कहना है कि उन्होंने किसी तरह के विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया है। शाही इमाम का कहना है कि पता नहीं भीड़ कहां से आ गई। उन्होंने कहा कि भीड़ में ओवैसी के लोग हो सकते हैं। जामा मस्जिद के बाहर प्रदर्शनकारी नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। वहीं हालात की संवेदनशीलता के मद्देनजर जामा मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस भी पहुंच गई है। यह कोशिश की जा रही है कि हालात बेकाबू न हों। बताया जाता है कि नमाज के बाद अचानक गेट नंबर एक पर आकर लोग नारे लगाने लगे। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में पोस्टर भी लिए हुए थे। आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस ने नफरत फैलाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दो एफआई दर्ज की हैं। एक एफआईआर में भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता नुपुर शर्मा को आरोपी बनाया गया है, जबकि दूसरी प्राथमिकी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और विवादित पुजारी यति नरसिंहानंद समेत 31 लोगों को नामज़द किया गया है। दिल्ली पुलिस ने दूसरी एफआईआर में दिल्ली बीजेपी मीडिया सेल के पूर्व प्रमुख नवीन कुमार जिंदल, पत्रकार सबा नकवी और अन्य शामिल हैं। जिंदल को पैगंबर मोहम्मद पर अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
Delhi Jama Masjid Protest : दिल्ली की जामा मस्जिद में आज जुमे की नमाज के बाद नमाजी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये लोग नुपुर शर्मा और नवीन जिंदल के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि नुपुर शर्मा और नवीन जिंदल के खिलाफ पार्टी पहले ही एक्शन ले चुकी है। वहीं जामा मस्जिद के शाही इमाम का कहना है कि उन्होंने किसी तरह के विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया है। शाही इमाम का कहना है कि पता नहीं भीड़ कहां से आ गई। उन्होंने कहा कि भीड़ में ओवैसी के लोग हो सकते हैं। जामा मस्जिद के बाहर प्रदर्शनकारी नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। वहीं हालात की संवेदनशीलता के मद्देनजर जामा मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस भी पहुंच गई है। यह कोशिश की जा रही है कि हालात बेकाबू न हों। बताया जाता है कि नमाज के बाद अचानक गेट नंबर एक पर आकर लोग नारे लगाने लगे। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में पोस्टर भी लिए हुए थे। आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस ने नफरत फैलाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दो एफआई दर्ज की हैं। एक एफआईआर में भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता नुपुर शर्मा को आरोपी बनाया गया है, जबकि दूसरी प्राथमिकी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और विवादित पुजारी यति नरसिंहानंद समेत इकतीस लोगों को नामज़द किया गया है। दिल्ली पुलिस ने दूसरी एफआईआर में दिल्ली बीजेपी मीडिया सेल के पूर्व प्रमुख नवीन कुमार जिंदल, पत्रकार सबा नकवी और अन्य शामिल हैं। जिंदल को पैगंबर मोहम्मद पर अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
बेलारूसी नेता पावेल लातुश्का ने कहा, 'पता चलता है कि रूस के कब्जे वाले कम से कम 15 यूक्रेनी शहरों से 2,100 से अधिक यूक्रेनी बच्चों को लुकाशेंको की मंजूरी से जबरन बेलारूस ले जाया गया है। ' युद्धग्रस्त यूक्रेन से बच्चों को जबरन बेलारूस भेजे जाने का मामला गरमाता जा रहा है। बेलारूस के एक विपक्षी नेता ने कहा कि उन्होंने यूक्रेनी बच्चों को बेलारूस में जबरदस्ती भेजे जाने का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के सामने उठाया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको की संलिप्तता का विवरण देने संबंधी सामग्री उपलब्ध कराई गई है। हालांकि, बेलारूस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। लुकाशेंको रूस के सबसे करीबी सहयोगी रहे हैं। उन्होंने क्रेमलिन को यूक्रेन में सेना और हथियार भेजने के लिए बेलारूसी क्षेत्र का इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी। बेलारूस के पूर्व संस्कृति मंत्री पावेल लातुश्का ने कहा कि उन्होंने आईसीसी को जो सामग्री सौंपी है, उससे पता चलता है कि रूस के कब्जे वाले कम से कम 15 यूक्रेनी शहरों से 2,100 से अधिक यूक्रेनी बच्चों को लुकाशेंको की मंजूरी से जबरन बेलारूस ले जाया गया है। लातुश्का ने उम्मीद जताई कि इस सामग्री से आईसीसी लुकाशेंको की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी कर सकेगी। अदालत के अभियोजन कार्यालय ने बुधवार को लातुश्का की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्रियों की प्राप्ति की तुरंत पुष्टि नहीं की। 'लुकाशेंको ने डाक्यूमेंट्स पर किए साइन' लातुश्का ने 'एसोसिएटेड प्रेस' को बताया कि यूक्रेनी बच्चों को अवैध रूप से बेलारूस के क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, 'अभियोजकों को सौंपी गई सामग्री साबित करती है कि लुकाशेंको ने व्यक्तिगत रूप से उन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो यूक्रेनी बच्चों को बेलारूस में स्थानांतरित करने के लिए आधार प्रदान करते हैं। ' लुकाशेंको ने मंगलवार को लातुश्का के आरोपों को खारिज कर दिया। बेलारूसी नेता ने कहा कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से संपर्क किया है। वे देश के बजट से बेलारूस में बच्चों के रहने के लिए धनराशि देने पर सहमत हुए हैं। तानाशाह लुकाशेंको ने लातुश्का की निंदा की और उन पर उनके खिलाफ आईसीसी में मामला बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। वहीं, पूर्वी यूक्रेन के एक शहर में मशहूर रेस्तरां पर हुए रूसी मिसाइल हमले में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। यूक्रेन के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। क्रामातोर्स्क में मंगलवार शाम को हुए हमले में 61 लोग घायल भी हुए हैं। रूसी मिसाइल एक स्थानीय रेस्तरां पर गिरी जिसमें ज्यादातर पत्रकार, सहायताकर्मी और अभियान के लिए क्रामातोर्स्क को सैन्य अड्डे के रूप में इस्तेमाल करने वाले सैनिक आते थे। क्रामातोर्स्क शहर अग्रिम मोर्चा से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
बेलारूसी नेता पावेल लातुश्का ने कहा, 'पता चलता है कि रूस के कब्जे वाले कम से कम पंद्रह यूक्रेनी शहरों से दो,एक सौ से अधिक यूक्रेनी बच्चों को लुकाशेंको की मंजूरी से जबरन बेलारूस ले जाया गया है। ' युद्धग्रस्त यूक्रेन से बच्चों को जबरन बेलारूस भेजे जाने का मामला गरमाता जा रहा है। बेलारूस के एक विपक्षी नेता ने कहा कि उन्होंने यूक्रेनी बच्चों को बेलारूस में जबरदस्ती भेजे जाने का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के सामने उठाया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको की संलिप्तता का विवरण देने संबंधी सामग्री उपलब्ध कराई गई है। हालांकि, बेलारूस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। लुकाशेंको रूस के सबसे करीबी सहयोगी रहे हैं। उन्होंने क्रेमलिन को यूक्रेन में सेना और हथियार भेजने के लिए बेलारूसी क्षेत्र का इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी। बेलारूस के पूर्व संस्कृति मंत्री पावेल लातुश्का ने कहा कि उन्होंने आईसीसी को जो सामग्री सौंपी है, उससे पता चलता है कि रूस के कब्जे वाले कम से कम पंद्रह यूक्रेनी शहरों से दो,एक सौ से अधिक यूक्रेनी बच्चों को लुकाशेंको की मंजूरी से जबरन बेलारूस ले जाया गया है। लातुश्का ने उम्मीद जताई कि इस सामग्री से आईसीसी लुकाशेंको की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी कर सकेगी। अदालत के अभियोजन कार्यालय ने बुधवार को लातुश्का की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्रियों की प्राप्ति की तुरंत पुष्टि नहीं की। 'लुकाशेंको ने डाक्यूमेंट्स पर किए साइन' लातुश्का ने 'एसोसिएटेड प्रेस' को बताया कि यूक्रेनी बच्चों को अवैध रूप से बेलारूस के क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, 'अभियोजकों को सौंपी गई सामग्री साबित करती है कि लुकाशेंको ने व्यक्तिगत रूप से उन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो यूक्रेनी बच्चों को बेलारूस में स्थानांतरित करने के लिए आधार प्रदान करते हैं। ' लुकाशेंको ने मंगलवार को लातुश्का के आरोपों को खारिज कर दिया। बेलारूसी नेता ने कहा कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से संपर्क किया है। वे देश के बजट से बेलारूस में बच्चों के रहने के लिए धनराशि देने पर सहमत हुए हैं। तानाशाह लुकाशेंको ने लातुश्का की निंदा की और उन पर उनके खिलाफ आईसीसी में मामला बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। वहीं, पूर्वी यूक्रेन के एक शहर में मशहूर रेस्तरां पर हुए रूसी मिसाइल हमले में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर ग्यारह हो गई है। यूक्रेन के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। क्रामातोर्स्क में मंगलवार शाम को हुए हमले में इकसठ लोग घायल भी हुए हैं। रूसी मिसाइल एक स्थानीय रेस्तरां पर गिरी जिसमें ज्यादातर पत्रकार, सहायताकर्मी और अभियान के लिए क्रामातोर्स्क को सैन्य अड्डे के रूप में इस्तेमाल करने वाले सैनिक आते थे। क्रामातोर्स्क शहर अग्रिम मोर्चा से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
छिबरामऊ। नगर के मुख्य मार्ग पर स्थित पेट्रोल पंप के सामने लगे एटीएम से दोगुनी रकम निकलने की जानकारी पर हुजूम उमड़ पड़ा। रात में ही एटीएम के बाहर लाइन लग गई। कई लोगों ने एटीएम की इस दिक्कत का फायदा भी उठा लिया। हालांकि कुछ ही घंटे बाद मशीन में नकदी खत्म हो गई। नगर के मुख्य मार्ग पर पेट्रोल पंप के सामने स्थित एटीएम पर बुधवार की देर रात एक युवक रुपये निकालने गया। उसने दो हजार रुपये भरे, लेकिन चार हजार निकाल आए। युवक ने इसकी जानकारी दोस्तों को दे दी, जिसके बाद एटीएम पर लाइन लग गई। कई युवकों ने एटीएम के इस फॉल्ट का फायदा उठाकर दोगुनी नकदी निकाली। रात के समय एटीएम के बाहर लोगों की लाइन लगी रही। कुछ ही घंटों बाद एटीएम से रुपये निकलने बंद हो गए तो कुछ युवकों को लौटना पड़ा। यह मामला गुरुवार को दिन भर नगर में चर्चा का विषय बना रहा। इस संबंध में भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक विपिन कुमार शुक्ला ने बताया कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। एटीएम को प्राइवेट एजेंसी संचालित कर रही है। जांच करवाई जाएगी।
छिबरामऊ। नगर के मुख्य मार्ग पर स्थित पेट्रोल पंप के सामने लगे एटीएम से दोगुनी रकम निकलने की जानकारी पर हुजूम उमड़ पड़ा। रात में ही एटीएम के बाहर लाइन लग गई। कई लोगों ने एटीएम की इस दिक्कत का फायदा भी उठा लिया। हालांकि कुछ ही घंटे बाद मशीन में नकदी खत्म हो गई। नगर के मुख्य मार्ग पर पेट्रोल पंप के सामने स्थित एटीएम पर बुधवार की देर रात एक युवक रुपये निकालने गया। उसने दो हजार रुपये भरे, लेकिन चार हजार निकाल आए। युवक ने इसकी जानकारी दोस्तों को दे दी, जिसके बाद एटीएम पर लाइन लग गई। कई युवकों ने एटीएम के इस फॉल्ट का फायदा उठाकर दोगुनी नकदी निकाली। रात के समय एटीएम के बाहर लोगों की लाइन लगी रही। कुछ ही घंटों बाद एटीएम से रुपये निकलने बंद हो गए तो कुछ युवकों को लौटना पड़ा। यह मामला गुरुवार को दिन भर नगर में चर्चा का विषय बना रहा। इस संबंध में भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक विपिन कुमार शुक्ला ने बताया कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। एटीएम को प्राइवेट एजेंसी संचालित कर रही है। जांच करवाई जाएगी।
वॉशिंगटन. दुनियाभर में धूमधाम से नए साल का जश्न मनाया गया। एशिया से लेकर यूरोप के अलग-अलग देशों में आतिशबाजी के साथ साल का स्वागत हुआ। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वेयर में रात 12 बजते ही बॉल ड्रॉप इवेंट के साथ नया साल मनाना शुरू किया गया है। अमेरिका में बॉल ड्रॉप इवेंट काफी पॉपुलर है। इसमें नए साल की उल्टी गिनती शुरू होते ही बॉल ऊपर से नीचे की ओर आती है। 18वीं शताब्दी में बंदरगाहों पर हर दिन एक तय वक्त पर इसी तरह की बॉल ड्रॉप की जाती थी। इससे नाविकों को सिग्नल मिल जाता था और वे अपनी घड़ियों का टाइम सेट कर लेते थे। 1907 से न्यूयॉर्क टाइम्स ने न्यू ईयर सेलिब्रेशन शुरू किया। आतिशबाजी की राख से जब जश्न मनाने आए लोग परेशान होने लगे तो यह सोचा गया कि आतिशबाजी कम की जाए और नए साल की शुरुआत के सिम्बल के तौर पर टाइम बॉल ड्रॉप की जाए। यह इवेंट कुछ ही सालों में पॉपुलर हो गया। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में करीब 500 जोड़ों ने शादी रचाई। इसका आयोजन खुद सरकार ने किया। हालांकि, सुनामी की वजह से जान गंवाने वालों की याद में इस बार आतिशबाजी नहीं रखी गई। जापान में लोगों ने अमेरिकी बॉक्सिंग सुपरस्टार फ्लॉयड मेवेदर और जापानी फाइटर तेनशिन नसुकावा के बीच मैच देखकर नए साल का स्वागत किया। मेवेदर ने इस मैच में तेनशिन को आसानी से हरा दिया। थाईलैंड के नोनथाबुरी में कई लोगों ने नए साल पर अपने ही अंतिम संस्कार का आयोजन किया। इसमें लोग अपने ताबूतों में लेटे और फिर निकलकर एक-दूसरे को नए साल की बधाई दी। चीन के बीजिंग में भी बिना आतिशबाजी के सांस्कृतिक नृत्य के साथ लोगों ने नया साल मनाया। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में सबसे पहले न्यू ईयर का जश्न शुरू हुआ। यहां भारतीय समय के मुताबिक, शाम 4. 30 बजे साल 2019 का स्वागत किया गया। जश्न की शुरुआत आतिशबाजी के साथ की गई। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में भारतीय समयानुसार शाम 6. 30 बजे नया साल मनाया गया। न्यूजीलैंड का टाइम भारत से 7. 30 घंटे आगे है। इसीलिए हर बार सबसे पहले नए साल जश्न यहीं शुरू होता है। दिल्ली, मुंबई, भुवनेश्वर, लखनऊ, रायपुर, भोपाल, विजयवाड़ा, कोलकाता समेत पूरे देश में नए साल का जश्न मनाया गया। लोगों ने आतिशबाजी के साथ 2019 का स्वागत किया। इंडिया गेट को तिरंगे के रंग की लाइटों से सजाया गया। मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया पर भी हजारों लोग न्यू ईयर सेलिब्रेट करने के लिए इकट्ठा हुए। छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ जवानों ने आतिशबाजी के साथ नए साल का जश्न मनाया। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में हार्बर ब्रिज पर आतिशबाजी के साथ नए साल के जश्न की शुरुआत हुई। उत्तर कोरिया के प्योंगयांग में रात 8. 30 बजे (भारतीय समयानुसार) आतिशबाजी के साथ नए साल का स्वागत किया गया। स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग में करीब 80 हजार लोग पारंपरिक तरीके से नए साल का स्वागत करने के लिए जमा हुए। दुबई में भी कई जगहों पर बड़ी टीवी स्क्रीन लगाई गईं, जिन पर लोगों ने अरब और दुनियाभर की साल 2019 के जश्न की लाइव तस्वीरें देखीं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वॉशिंगटन. दुनियाभर में धूमधाम से नए साल का जश्न मनाया गया। एशिया से लेकर यूरोप के अलग-अलग देशों में आतिशबाजी के साथ साल का स्वागत हुआ। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वेयर में रात बारह बजते ही बॉल ड्रॉप इवेंट के साथ नया साल मनाना शुरू किया गया है। अमेरिका में बॉल ड्रॉप इवेंट काफी पॉपुलर है। इसमें नए साल की उल्टी गिनती शुरू होते ही बॉल ऊपर से नीचे की ओर आती है। अट्ठारहवीं शताब्दी में बंदरगाहों पर हर दिन एक तय वक्त पर इसी तरह की बॉल ड्रॉप की जाती थी। इससे नाविकों को सिग्नल मिल जाता था और वे अपनी घड़ियों का टाइम सेट कर लेते थे। एक हज़ार नौ सौ सात से न्यूयॉर्क टाइम्स ने न्यू ईयर सेलिब्रेशन शुरू किया। आतिशबाजी की राख से जब जश्न मनाने आए लोग परेशान होने लगे तो यह सोचा गया कि आतिशबाजी कम की जाए और नए साल की शुरुआत के सिम्बल के तौर पर टाइम बॉल ड्रॉप की जाए। यह इवेंट कुछ ही सालों में पॉपुलर हो गया। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में करीब पाँच सौ जोड़ों ने शादी रचाई। इसका आयोजन खुद सरकार ने किया। हालांकि, सुनामी की वजह से जान गंवाने वालों की याद में इस बार आतिशबाजी नहीं रखी गई। जापान में लोगों ने अमेरिकी बॉक्सिंग सुपरस्टार फ्लॉयड मेवेदर और जापानी फाइटर तेनशिन नसुकावा के बीच मैच देखकर नए साल का स्वागत किया। मेवेदर ने इस मैच में तेनशिन को आसानी से हरा दिया। थाईलैंड के नोनथाबुरी में कई लोगों ने नए साल पर अपने ही अंतिम संस्कार का आयोजन किया। इसमें लोग अपने ताबूतों में लेटे और फिर निकलकर एक-दूसरे को नए साल की बधाई दी। चीन के बीजिंग में भी बिना आतिशबाजी के सांस्कृतिक नृत्य के साथ लोगों ने नया साल मनाया। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में सबसे पहले न्यू ईयर का जश्न शुरू हुआ। यहां भारतीय समय के मुताबिक, शाम चार. तीस बजे साल दो हज़ार उन्नीस का स्वागत किया गया। जश्न की शुरुआत आतिशबाजी के साथ की गई। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में भारतीय समयानुसार शाम छः. तीस बजे नया साल मनाया गया। न्यूजीलैंड का टाइम भारत से सात. तीस घंटाटे आगे है। इसीलिए हर बार सबसे पहले नए साल जश्न यहीं शुरू होता है। दिल्ली, मुंबई, भुवनेश्वर, लखनऊ, रायपुर, भोपाल, विजयवाड़ा, कोलकाता समेत पूरे देश में नए साल का जश्न मनाया गया। लोगों ने आतिशबाजी के साथ दो हज़ार उन्नीस का स्वागत किया। इंडिया गेट को तिरंगे के रंग की लाइटों से सजाया गया। मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया पर भी हजारों लोग न्यू ईयर सेलिब्रेट करने के लिए इकट्ठा हुए। छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ जवानों ने आतिशबाजी के साथ नए साल का जश्न मनाया। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में हार्बर ब्रिज पर आतिशबाजी के साथ नए साल के जश्न की शुरुआत हुई। उत्तर कोरिया के प्योंगयांग में रात आठ. तीस बजे आतिशबाजी के साथ नए साल का स्वागत किया गया। स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग में करीब अस्सी हजार लोग पारंपरिक तरीके से नए साल का स्वागत करने के लिए जमा हुए। दुबई में भी कई जगहों पर बड़ी टीवी स्क्रीन लगाई गईं, जिन पर लोगों ने अरब और दुनियाभर की साल दो हज़ार उन्नीस के जश्न की लाइव तस्वीरें देखीं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मलाला से महिलाओं के अधिकार पर आवाज उठाने की माँग करने वाली लड़कियों के ट्विटर एकाउंट्स में अपने जननांगों की तस्वीरें भेजने वाले ये लोग पाकिस्तान और कश्मीर के युवा थे। भारतीय मीडिया गिरोह इन्हें भटके हुए युवाओं के नाम से जानता है, जो या तो किसी हेडमास्टर के बेटे निकल जाते हैं या फिर भारतीय सेना द्वारा सताए गए मजबूर युवा। नाबालिग लड़की ने बताया कि दोनों बहनों को शादी करने के लिए धमकाया गया था। साथ ही उनसे कहा गया था कि अगर शादी नहीं की तो माता-पिता समेत परिवार के सदस्यों को मार देंगे और दोनों के चेहरे पर तेजाब फेंक देंगे। इससे दोनों घबरा गईं थीं। यह निकाह कोलकाता के बुर्रा बाजार इलाके की 'बड़ी मस्जिद' में कराया गया। फसल को इसलिए कटवाया जा रहा है ताकि मायावती का विमान आसमान से वहाँ पर उतरे और उनका चुनावी भाषण जोर-शोर से वोटर्स को सुनाया जा सके। चिंता की बात यह भी है कि अभी फ़सल पकने का समय नहीं है, ऐसे में यह फ़सल मवेशियों के चारे के अलावा किसी काम में नहीं आ सकेगा। सोनिया गाँधी जी आपका यह वीडियो किस सन्दर्भ में था? जस्ट किडिंग, हमें तो पता ही है! खानदान विशेष के एहसानों और पुरस्कारों के बोझ तले दबा यह मीडिया गिरोह 2014 में सवाल नहीं पूछ पाया था, शायद तब तक कभी गाँधी परिवार ने इसे एहसास भी नहीं होने दिया था कि मीडिया का काम सवाल पूछना भी हो सकता है। सवाल पूछ पाने की यह वैचारिक क्रांति इस मीडिया गिरोह में 2014 के बाद ही देखने को मिली है। Hey न्यूयॉर्क टाइम्स f**k you, फिर से! भारत ने अंतरिक्ष में आज एक और कामयाबी का परचम लहराया है और मिशन शक्ति की सफलता के साथ अमेरिका, चीन, रूस के बाद भारत दुनिया का चौथा सबसे शक्तिशाली देश बन गया है। JNU वामपंथी की हालिया गतिविधियों के तार अगर एक सिरे से जोड़ते हुए देखा जाए, तो पता चलता है कि ये कोई विद्यार्थी या नेता या समाजवादी नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ एक शहरों में रहने वाला अनपढ़, कूप-मण्डूक, गतानुगतिक है, जिसे किसी भी हाल में क्रांति की तलाश थी और समय आने पर उसने अपनी क्रांति को परिभाषित भी कर डाला है, जिसका उदाहरण ऑन डिमांड आस्तिकता वाली शेहला राशिद है। किसानों और मजदूर संगठनों पर मजबूत पकड़ रमेंद्र सिंह राठौड़ के पक्ष में नजर आती दिख रही है। किसान और मजदूर संघर्ष समिति द्वारा चलाए गए आंदोलनों में भी राठौड़ सक्रिय भूमिका में रहे। इस कारण करीब 50,000 मजदूर और डेढ़ लाख किसानों को मिलाकर लगभग 2 लाख मतदाताओं तक इनकी सीधी पकड़ के कारण विरोधियों के लिए इनसे जीत पाना आसान नहीं होगा। जब हमने इस लाल डायरी की सत्यता प्रमाणित करने के लिए 'सॉल्ट न्यूज़' से सम्पर्क किया, तो उन्होंने डायरी से उठने वाली सौंधी-सौंधी महक से ही पहचान कर इसके 'वायरल' होने की आशंका के चलते इस का फैक्ट चेक किया।
मलाला से महिलाओं के अधिकार पर आवाज उठाने की माँग करने वाली लड़कियों के ट्विटर एकाउंट्स में अपने जननांगों की तस्वीरें भेजने वाले ये लोग पाकिस्तान और कश्मीर के युवा थे। भारतीय मीडिया गिरोह इन्हें भटके हुए युवाओं के नाम से जानता है, जो या तो किसी हेडमास्टर के बेटे निकल जाते हैं या फिर भारतीय सेना द्वारा सताए गए मजबूर युवा। नाबालिग लड़की ने बताया कि दोनों बहनों को शादी करने के लिए धमकाया गया था। साथ ही उनसे कहा गया था कि अगर शादी नहीं की तो माता-पिता समेत परिवार के सदस्यों को मार देंगे और दोनों के चेहरे पर तेजाब फेंक देंगे। इससे दोनों घबरा गईं थीं। यह निकाह कोलकाता के बुर्रा बाजार इलाके की 'बड़ी मस्जिद' में कराया गया। फसल को इसलिए कटवाया जा रहा है ताकि मायावती का विमान आसमान से वहाँ पर उतरे और उनका चुनावी भाषण जोर-शोर से वोटर्स को सुनाया जा सके। चिंता की बात यह भी है कि अभी फ़सल पकने का समय नहीं है, ऐसे में यह फ़सल मवेशियों के चारे के अलावा किसी काम में नहीं आ सकेगा। सोनिया गाँधी जी आपका यह वीडियो किस सन्दर्भ में था? जस्ट किडिंग, हमें तो पता ही है! खानदान विशेष के एहसानों और पुरस्कारों के बोझ तले दबा यह मीडिया गिरोह दो हज़ार चौदह में सवाल नहीं पूछ पाया था, शायद तब तक कभी गाँधी परिवार ने इसे एहसास भी नहीं होने दिया था कि मीडिया का काम सवाल पूछना भी हो सकता है। सवाल पूछ पाने की यह वैचारिक क्रांति इस मीडिया गिरोह में दो हज़ार चौदह के बाद ही देखने को मिली है। Hey न्यूयॉर्क टाइम्स f**k you, फिर से! भारत ने अंतरिक्ष में आज एक और कामयाबी का परचम लहराया है और मिशन शक्ति की सफलता के साथ अमेरिका, चीन, रूस के बाद भारत दुनिया का चौथा सबसे शक्तिशाली देश बन गया है। JNU वामपंथी की हालिया गतिविधियों के तार अगर एक सिरे से जोड़ते हुए देखा जाए, तो पता चलता है कि ये कोई विद्यार्थी या नेता या समाजवादी नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ एक शहरों में रहने वाला अनपढ़, कूप-मण्डूक, गतानुगतिक है, जिसे किसी भी हाल में क्रांति की तलाश थी और समय आने पर उसने अपनी क्रांति को परिभाषित भी कर डाला है, जिसका उदाहरण ऑन डिमांड आस्तिकता वाली शेहला राशिद है। किसानों और मजदूर संगठनों पर मजबूत पकड़ रमेंद्र सिंह राठौड़ के पक्ष में नजर आती दिख रही है। किसान और मजदूर संघर्ष समिति द्वारा चलाए गए आंदोलनों में भी राठौड़ सक्रिय भूमिका में रहे। इस कारण करीब पचास,शून्य मजदूर और डेढ़ लाख किसानों को मिलाकर लगभग दो लाख मतदाताओं तक इनकी सीधी पकड़ के कारण विरोधियों के लिए इनसे जीत पाना आसान नहीं होगा। जब हमने इस लाल डायरी की सत्यता प्रमाणित करने के लिए 'सॉल्ट न्यूज़' से सम्पर्क किया, तो उन्होंने डायरी से उठने वाली सौंधी-सौंधी महक से ही पहचान कर इसके 'वायरल' होने की आशंका के चलते इस का फैक्ट चेक किया।
KANPUR : सिटी में अब कोई भी राशन कार्ड होल्डर कहीं से भी राशन ले सकेगा। 5 जनवरी से इसकी शुरुआत हो जाएगी। फ्राइडे को सिटी की 3 राशन दुकानों में इसकी टेस्टिंग की गई, जो सक्सेस रही। यही नहीं अब 5 जिलों के राशन कार्ड होल्डर भी एक-दूसरे जिले में राशन ले सकेंगे। 1 महीने तक कानपुर, लखनऊ, उन्नाव, बाराबंकी, हापुड़ और गौतमबुद्ध नगर जिलों की किसी भी कोटे की दुकान से राशन लिया जा सकेगा। इसके बाद पूरे प्रदेश में कोई भी राशन कार्ड होल्डर किसी भी कोटे की दुकान से राशन ले सकेगा। जलापूर्ति अधिकारी अखिलेश कुमार ने बताया कि जिसका आधार कार्ड राशन कार्ड से लिंक है, वे सभी इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। कानपुर डिस्ट्रिक्ट में 6,95,000 राशन कार्ड होल्डर हैं। इसमें 777 सिटी और 686 कोटे की दुकानें रूरल एरियाज में हैं। फ्राइडे को कल्याणपुर, बिधनू और पनकी की दुकानों में नए सिस्टम की टेस्टिंग की गई। जिसमें सर्वर ने सक्सेसफुली काम किया। वहीं इस फैसेलिटी के तहत लोगों को सिर्फ राशन ही मिल सकेगा। केरोसिन जिस एड्रेस पर राशन कार्ड बना है, वहीं से मिलेगा।
KANPUR : सिटी में अब कोई भी राशन कार्ड होल्डर कहीं से भी राशन ले सकेगा। पाँच जनवरी से इसकी शुरुआत हो जाएगी। फ्राइडे को सिटी की तीन राशन दुकानों में इसकी टेस्टिंग की गई, जो सक्सेस रही। यही नहीं अब पाँच जिलों के राशन कार्ड होल्डर भी एक-दूसरे जिले में राशन ले सकेंगे। एक महीने तक कानपुर, लखनऊ, उन्नाव, बाराबंकी, हापुड़ और गौतमबुद्ध नगर जिलों की किसी भी कोटे की दुकान से राशन लिया जा सकेगा। इसके बाद पूरे प्रदेश में कोई भी राशन कार्ड होल्डर किसी भी कोटे की दुकान से राशन ले सकेगा। जलापूर्ति अधिकारी अखिलेश कुमार ने बताया कि जिसका आधार कार्ड राशन कार्ड से लिंक है, वे सभी इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। कानपुर डिस्ट्रिक्ट में छः,पचानवे,शून्य राशन कार्ड होल्डर हैं। इसमें सात सौ सतहत्तर सिटी और छः सौ छियासी कोटे की दुकानें रूरल एरियाज में हैं। फ्राइडे को कल्याणपुर, बिधनू और पनकी की दुकानों में नए सिस्टम की टेस्टिंग की गई। जिसमें सर्वर ने सक्सेसफुली काम किया। वहीं इस फैसेलिटी के तहत लोगों को सिर्फ राशन ही मिल सकेगा। केरोसिन जिस एड्रेस पर राशन कार्ड बना है, वहीं से मिलेगा।
भोरंज - राजकीय महाविद्यालय भोरंज (तरक्वाड़ी) में दो दिवसीय वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव उमंग-2019 का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने रंगोली, पोस्टर मेकिंग, नारा लेखन, स्पॉट पेंटिंग, प्रश्नोत्तरी, भाषण, वाद-विवाद और कविता पाठ प्रतियोगिताओं में भाग लिया। प्रतियोगिताओं का मुख्य थीम महिला सशक्तिकरण रखा गया। महाविद्यालय के महिला शिकायत और निवारण प्रकोष्ठ की संयोजक डा. दिव्या शर्मा ने इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों को महिला सशक्तिकरण के बारे में जागरूक किया। महाविद्यालय की प्राचार्य डा. अंजु सहगल ने भी इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। रंगोली प्रतियोगिता में सोनिया शर्मा ने प्रथम, रचना और शिवाली ने द्वितीय, ज्योति और रजनी बाला ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। पोस्टर मेकिंग में सलोनी ने प्रथम, रुपाली और मनीषा ने संयुक्त रूप से द्वितीय और शिखा और रवीना ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया। नारा लेखन प्रतियोगिता में वंदना ने प्रथम, विक्की और शिखा ने द्वितीय और सलोनी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। स्पॉट पेंटिंग प्रतियोगिता में परीक्षा ने प्रथम, तनुजा ने द्वितीय और शिखा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में कला संकाय की टीम नीरज, अमित और वीना ने प्रथम, विज्ञान संकाय की टीम योगेश, साक्षी और ऐना शर्मा ने द्वितीय और बीसीए की टीम मुनीश, सौरभ और सुमित ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता में कृतिका ने प्रथम, अभिषेक ने द्वित्तीय और रिशा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में अभिषेक ने प्रथम, रिया चंदेल ने द्वितीय और रुपाली ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कविता पाठ प्रतियोगिता में ज्योति ने प्रथम, अभिषेक ने द्वितीय और मनीषा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। उत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भोरंज - राजकीय महाविद्यालय भोरंज में दो दिवसीय वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव उमंग-दो हज़ार उन्नीस का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने रंगोली, पोस्टर मेकिंग, नारा लेखन, स्पॉट पेंटिंग, प्रश्नोत्तरी, भाषण, वाद-विवाद और कविता पाठ प्रतियोगिताओं में भाग लिया। प्रतियोगिताओं का मुख्य थीम महिला सशक्तिकरण रखा गया। महाविद्यालय के महिला शिकायत और निवारण प्रकोष्ठ की संयोजक डा. दिव्या शर्मा ने इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों को महिला सशक्तिकरण के बारे में जागरूक किया। महाविद्यालय की प्राचार्य डा. अंजु सहगल ने भी इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। रंगोली प्रतियोगिता में सोनिया शर्मा ने प्रथम, रचना और शिवाली ने द्वितीय, ज्योति और रजनी बाला ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। पोस्टर मेकिंग में सलोनी ने प्रथम, रुपाली और मनीषा ने संयुक्त रूप से द्वितीय और शिखा और रवीना ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया। नारा लेखन प्रतियोगिता में वंदना ने प्रथम, विक्की और शिखा ने द्वितीय और सलोनी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। स्पॉट पेंटिंग प्रतियोगिता में परीक्षा ने प्रथम, तनुजा ने द्वितीय और शिखा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में कला संकाय की टीम नीरज, अमित और वीना ने प्रथम, विज्ञान संकाय की टीम योगेश, साक्षी और ऐना शर्मा ने द्वितीय और बीसीए की टीम मुनीश, सौरभ और सुमित ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता में कृतिका ने प्रथम, अभिषेक ने द्वित्तीय और रिशा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में अभिषेक ने प्रथम, रिया चंदेल ने द्वितीय और रुपाली ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कविता पाठ प्रतियोगिता में ज्योति ने प्रथम, अभिषेक ने द्वितीय और मनीषा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। उत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि इस साल लोग किसी भी प्रकार के बड़े खर्चे से बचने की योजना बना रहे हैं। प्रॉपर्टी खरीदने से लेकर कार खरीदने तक लोग बड़ी रकम खर्च करने से कतरा रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, लगभग 80 फीसदी से ज्यादा परिवारों ने इस राय पर सहमति जताई है। हालांकि, सर्वे कंपनी के संस्थापक सचिन टापरिया ने कहा, ओमिक्रॉन वैरिएंट के साथ आई तीसरी लहर का आर्थिक स्थिति पर प्रभाव अस्थायी है। यह सर्वे लोकल सर्किल द्वारा देश के 47,000 परिवारों पर किया गया और नए साल में खर्च को लेकर उनसे सवाल पूछे। लोगों ने जो राय व्यक्त की वो चौंकाने वाली थी और इससे साफ होता है कि कहीं न कहीं कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने लोगों की खरीदारी की भावना को प्रभावित किया है। सर्वे में सामने आया कि 2022 में हर पांच परिवारों में से चार ने संपत्ति या फिर चार पहिया वाहन खरीदने के लिए मना कर दिया। इस सर्वे के दौरान इसमें शामिल 78 फीसदी परिवारों ने कहा कि उनकी नए साल में आभूषण खरीदने की कोई योजना नहीं है। यानी एक ओर जहां साल 2021 में भारतीय लोगों ने सोने की खरीदारी करने में बीते दस साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया, तो साल 2022 में आभूषण खरीदारी से कतरा रहे परिवारों को देख ये कहना गलत न होगा कि आभूषण उद्योग परेशानी में पहुंच सकता है। सर्वे के अनुसार, इसमें शामिल 47 हजार परिवारों में से केवल 15 प्रतिशत परिवार ऐसे थे जो कि किसी प्रकार की संपत्ति, नई कार या फिर अपने लिए आभूषण बनवाने के पर खर्च करना चाह रहे हैं। सात परिवारों में से एक ने आवासीय संपत्ति खरीदने के लिए हां कहा, तो दूसरी ओर हर छह में से एक परिवार चार पहिया वाहन खरीदने की अपनी इच्छा को जाहिर किया। कोविड-19 के मामलों तेजी के चलते सर्वे में शामिल ज्यादातर परिवार अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक नजर आए। इस सर्वेक्षण में सामने आया कि भारी बहुमत करीब 67 फीसदी अपने स्वास्थ्य बीमा को बरकरार रखना चाहते थे। हालांकि इनमें से केवल 15 प्रतिशत परिवार ही अपने स्वास्थ्य बीमा की कवरेज की राशि बढ़ाना चाहते थे। साल 2022 के लिए छह फीसदी परिवार इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की योजना बना रहे है, जो कि पेट्रोल कार खरीदने में दिलचस्पी रखने वालों से थोड़ा पीछे थे। वहीं डीजल कार की बात करें तो महज तीन फीसदी लोगों का कहना है कि वे इस नए साल में डीजल कार खरीदने के इच्छुक थे। सर्वेक्षण के अनुसार,40 फीसदी लोगों ने बचत जमा या सोने में अपना पैसा लगाने के बजाय स्टॉक और म्यूचुअल फंड खरीदने की योजना बनाई। इसकी वजह यह है कि सर्वे में शामिल 20 प्रतिशत लोग टियर-3 और4 शहरों और ग्रामीण स्थानों से थे।
एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि इस साल लोग किसी भी प्रकार के बड़े खर्चे से बचने की योजना बना रहे हैं। प्रॉपर्टी खरीदने से लेकर कार खरीदने तक लोग बड़ी रकम खर्च करने से कतरा रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, लगभग अस्सी फीसदी से ज्यादा परिवारों ने इस राय पर सहमति जताई है। हालांकि, सर्वे कंपनी के संस्थापक सचिन टापरिया ने कहा, ओमिक्रॉन वैरिएंट के साथ आई तीसरी लहर का आर्थिक स्थिति पर प्रभाव अस्थायी है। यह सर्वे लोकल सर्किल द्वारा देश के सैंतालीस,शून्य परिवारों पर किया गया और नए साल में खर्च को लेकर उनसे सवाल पूछे। लोगों ने जो राय व्यक्त की वो चौंकाने वाली थी और इससे साफ होता है कि कहीं न कहीं कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने लोगों की खरीदारी की भावना को प्रभावित किया है। सर्वे में सामने आया कि दो हज़ार बाईस में हर पांच परिवारों में से चार ने संपत्ति या फिर चार पहिया वाहन खरीदने के लिए मना कर दिया। इस सर्वे के दौरान इसमें शामिल अठहत्तर फीसदी परिवारों ने कहा कि उनकी नए साल में आभूषण खरीदने की कोई योजना नहीं है। यानी एक ओर जहां साल दो हज़ार इक्कीस में भारतीय लोगों ने सोने की खरीदारी करने में बीते दस साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया, तो साल दो हज़ार बाईस में आभूषण खरीदारी से कतरा रहे परिवारों को देख ये कहना गलत न होगा कि आभूषण उद्योग परेशानी में पहुंच सकता है। सर्वे के अनुसार, इसमें शामिल सैंतालीस हजार परिवारों में से केवल पंद्रह प्रतिशत परिवार ऐसे थे जो कि किसी प्रकार की संपत्ति, नई कार या फिर अपने लिए आभूषण बनवाने के पर खर्च करना चाह रहे हैं। सात परिवारों में से एक ने आवासीय संपत्ति खरीदने के लिए हां कहा, तो दूसरी ओर हर छह में से एक परिवार चार पहिया वाहन खरीदने की अपनी इच्छा को जाहिर किया। कोविड-उन्नीस के मामलों तेजी के चलते सर्वे में शामिल ज्यादातर परिवार अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक नजर आए। इस सर्वेक्षण में सामने आया कि भारी बहुमत करीब सरसठ फीसदी अपने स्वास्थ्य बीमा को बरकरार रखना चाहते थे। हालांकि इनमें से केवल पंद्रह प्रतिशत परिवार ही अपने स्वास्थ्य बीमा की कवरेज की राशि बढ़ाना चाहते थे। साल दो हज़ार बाईस के लिए छह फीसदी परिवार इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की योजना बना रहे है, जो कि पेट्रोल कार खरीदने में दिलचस्पी रखने वालों से थोड़ा पीछे थे। वहीं डीजल कार की बात करें तो महज तीन फीसदी लोगों का कहना है कि वे इस नए साल में डीजल कार खरीदने के इच्छुक थे। सर्वेक्षण के अनुसार,चालीस फीसदी लोगों ने बचत जमा या सोने में अपना पैसा लगाने के बजाय स्टॉक और म्यूचुअल फंड खरीदने की योजना बनाई। इसकी वजह यह है कि सर्वे में शामिल बीस प्रतिशत लोग टियर-तीन औरचार शहरों और ग्रामीण स्थानों से थे।
यूपी से लेकर बंगाल तक को दहला देने वाले भदोही विस्फोट में भदोही के भाजपा विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर हैंड ग्रेनेड मिले थे। नौ ग्रेनेड तो पुलिस ने पहले ही बरामद कर लिए थे, जबकि तीन मैंने खुद एडीजी को दिखाए, जिसे उन्होंने जांच के लिए पुलिस कस्टडी में रखवाया। सोमवार को भदोही स्टेशन पर आयोजित एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि रोटहां की घटना के पीछे कोई बड़ा नापाक मंसूबा पल रहा था। घटना के बाद जब मैं वहां पहुंचा तो हैंड ग्रेनेड के बारे में पता चला। नौ हथगोले पुलिस ने पहले से ही बरामद कर रखे थे, जबकि तीन हथगोलों के फोटो वहां के एक व्यापारी ने मुझे मोबाइल पर दिखाए। उसी दौरान एडीजी वाराणसी पहुंच गए। मैंने उन्हें रोककर फोटो दिखाया तो वह घबरा गए और जल्दी से जाकर उन तीनों को उठवा लिया। पुलिस ने उन्हें यूपी 100 की गाड़ी में रखवा दिया। विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि जहां यह घटना हुई है, वहां बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं। रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे लोगों को जिले से बाहर जाना होगा। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। इस घटना के बाद मैं यकीन के साथ कह सकता हूं कि किसी बड़े नापाक मंसूबे को अंजाम देने की साजिश रची जा रही थी, जो बाबा विश्वनाथ की कृपा से पूरी न हो सकी। हालांकि पुलिस और जांच अधिकारी जांच पड़ताल के बाद ही कुछ स्पष्ट होने की बात कर रहे हैं।
यूपी से लेकर बंगाल तक को दहला देने वाले भदोही विस्फोट में भदोही के भाजपा विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर हैंड ग्रेनेड मिले थे। नौ ग्रेनेड तो पुलिस ने पहले ही बरामद कर लिए थे, जबकि तीन मैंने खुद एडीजी को दिखाए, जिसे उन्होंने जांच के लिए पुलिस कस्टडी में रखवाया। सोमवार को भदोही स्टेशन पर आयोजित एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि रोटहां की घटना के पीछे कोई बड़ा नापाक मंसूबा पल रहा था। घटना के बाद जब मैं वहां पहुंचा तो हैंड ग्रेनेड के बारे में पता चला। नौ हथगोले पुलिस ने पहले से ही बरामद कर रखे थे, जबकि तीन हथगोलों के फोटो वहां के एक व्यापारी ने मुझे मोबाइल पर दिखाए। उसी दौरान एडीजी वाराणसी पहुंच गए। मैंने उन्हें रोककर फोटो दिखाया तो वह घबरा गए और जल्दी से जाकर उन तीनों को उठवा लिया। पुलिस ने उन्हें यूपी एक सौ की गाड़ी में रखवा दिया। विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि जहां यह घटना हुई है, वहां बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं। रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे लोगों को जिले से बाहर जाना होगा। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। इस घटना के बाद मैं यकीन के साथ कह सकता हूं कि किसी बड़े नापाक मंसूबे को अंजाम देने की साजिश रची जा रही थी, जो बाबा विश्वनाथ की कृपा से पूरी न हो सकी। हालांकि पुलिस और जांच अधिकारी जांच पड़ताल के बाद ही कुछ स्पष्ट होने की बात कर रहे हैं।
KAUSHAMBI : पूरामुफ्ती के महगांव में रविवार की रात दबंगों ने पड़ोसी के घर जमकर तांडव किया। कुनबे को बंधक बनाकर तोड-फोड़ करते हुए दंपति समेत बेटी-बेटे को पीटकर अधमरा कर दिया। चीख-पुकार सुन मौके पर पहुंचे गांव के अन्य लोगों को देखते ही हमलावर धमकी देते हुए भाग निकले। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल कुनबे को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। पीडि़त की तहरीर पर पुलिस ने हमलावर पिता-पुत्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है। पूरामुफ्ती के महगांव निवासी रहमत अली का पड़ोसी से पुराना विवाद चल रहा है। इसी अदावत में रविवार की रात पड़ोसी ने अपने चार बेटों के साथ धावा बोल दिया। कुनबे को बंधक बनाते हुए हमलावरों ने घर में रखा कूलर, टीवी, फ्रिज आदि क्षतिग्रस्त कर दिया। घर में घुसकर तोड़-फोड़ करने का विरोध करने पर हमलावरों ने रहमत अली 40, के साथ पत्नी रूआब बेगम 38, बेटा इरशाद 15, बेटी शबा 13 को पीटते हुए लहूलुहान कर दिया। पिटाई करने के बाद हमलावर घर में रखी 10 हजार नकदी के साथ सोने-चांदी के आभूषण लूट लिया। कुनबे की चीख सुन गांव के अन्य लोग भागकर घटना स्थल पहुंचे। ग्रामीणों को देख हमलावर कहीं भी शिकायत पर जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकले। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। भुक्तभोगी रहमत अली की तहरीर पर पुलिस ने हमलावर पड़ोसी और उसके चार बेटों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पूरामुफ्ती एसओ धर्मेद्र यादव ने बताया कि पुरानी रंजिश में मारपीट हुई है। पुलिस घटना की छानबीन और हमलावरों की तलाश कर रही है। घटना के बाद से पीडि़त कुनबा डरा-सहमा हुआ है।
KAUSHAMBI : पूरामुफ्ती के महगांव में रविवार की रात दबंगों ने पड़ोसी के घर जमकर तांडव किया। कुनबे को बंधक बनाकर तोड-फोड़ करते हुए दंपति समेत बेटी-बेटे को पीटकर अधमरा कर दिया। चीख-पुकार सुन मौके पर पहुंचे गांव के अन्य लोगों को देखते ही हमलावर धमकी देते हुए भाग निकले। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल कुनबे को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। पीडि़त की तहरीर पर पुलिस ने हमलावर पिता-पुत्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है। पूरामुफ्ती के महगांव निवासी रहमत अली का पड़ोसी से पुराना विवाद चल रहा है। इसी अदावत में रविवार की रात पड़ोसी ने अपने चार बेटों के साथ धावा बोल दिया। कुनबे को बंधक बनाते हुए हमलावरों ने घर में रखा कूलर, टीवी, फ्रिज आदि क्षतिग्रस्त कर दिया। घर में घुसकर तोड़-फोड़ करने का विरोध करने पर हमलावरों ने रहमत अली चालीस, के साथ पत्नी रूआब बेगम अड़तीस, बेटा इरशाद पंद्रह, बेटी शबा तेरह को पीटते हुए लहूलुहान कर दिया। पिटाई करने के बाद हमलावर घर में रखी दस हजार नकदी के साथ सोने-चांदी के आभूषण लूट लिया। कुनबे की चीख सुन गांव के अन्य लोग भागकर घटना स्थल पहुंचे। ग्रामीणों को देख हमलावर कहीं भी शिकायत पर जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकले। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। भुक्तभोगी रहमत अली की तहरीर पर पुलिस ने हमलावर पड़ोसी और उसके चार बेटों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पूरामुफ्ती एसओ धर्मेद्र यादव ने बताया कि पुरानी रंजिश में मारपीट हुई है। पुलिस घटना की छानबीन और हमलावरों की तलाश कर रही है। घटना के बाद से पीडि़त कुनबा डरा-सहमा हुआ है।
- अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ लालचंद राजपूत को राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का कोच नियुक्त किया हैं. अप्रैल 2016 में पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज़ इंजमाम उल हक ने अफगनिस्तान टीम के कोच का पद छोड़ा था. लालचंद का सबसे पहला काम होगा कि जुलाई, अगस्त में अफगानिस्तान की टीम स्कॉटलैंड, आयरलैंड और नीदरलैंड दौरे पर अच्छा प्रदर्शन करे. राजपूत को पिछले कोचिंग के अनुभव का फायदा मिला, राजपूत 2007 में टी-ट्वेंटी विश्वकप और भारत के 2007-2008 दौरे के दौरान टीम के मैनेजर थे. 17 वर्ष के अन्तर्राष्ट्रीय करियर के दौरान राजपूत मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव भी रह चुके हैं. राजपूत का कार्यकाल 2 वर्षो का होगा, लेकिन फैसले को अंतिम रूप यूरोप दौरे के बाद दिया जायेगा. अफगानिस्तान को स्कॉटलैंड और आयरलैंड के विरुद्ध 7 एकदिवसीय मैच खेलने हैं और उसके बाद नीदरलैंड के विरुद्ध इंटरकांटीनेंटल कप मैच खेलना हैं. राजपूत ने ईएसपीएन क्रिकइन्फो से बात करते हुए कहा "अन्तर्राष्ट्रीय टीम के साथ दोबारा काम करके मैं बहुत उत्साहित हूँ. अफगानिस्तान को टॉप 10 टीम बनाना चुनौती होगा. अफगानिस्तान के पास टेस्ट क्रिकेट का दर्जा नहीं है ऐसे में हमारा लक्ष्य होगा ऐसा कार्य करे जिससे आगे चलकर टेस्ट का दर्जा भी जल्द मिले". लालचंद राजपूत ने भारत के तरफ से 2 टेस्ट मैच और 4 एकदिवसीय मैच खेले हैं. राजपूत के नाम प्रथम श्रेणी क्रिकेट के 110 मैचो में 7988 रन दर्ज हैं. राजपूत मुंबई रणजी के कोच भी रह चुके हैं. राजपूत को कोचिंग का अच्छा अनुभव है, लालचंद भारतीय कोच की रेस में भी थे, लेकिन बीसीसीआई ने भारतीय महान गेंदबाज़ अनिल कुंबले की भारतीय टीम का कोच नियुक्त किया.
- अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ लालचंद राजपूत को राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का कोच नियुक्त किया हैं. अप्रैल दो हज़ार सोलह में पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज़ इंजमाम उल हक ने अफगनिस्तान टीम के कोच का पद छोड़ा था. लालचंद का सबसे पहला काम होगा कि जुलाई, अगस्त में अफगानिस्तान की टीम स्कॉटलैंड, आयरलैंड और नीदरलैंड दौरे पर अच्छा प्रदर्शन करे. राजपूत को पिछले कोचिंग के अनुभव का फायदा मिला, राजपूत दो हज़ार सात में टी-ट्वेंटी विश्वकप और भारत के दो हज़ार सात-दो हज़ार आठ दौरे के दौरान टीम के मैनेजर थे. सत्रह वर्ष के अन्तर्राष्ट्रीय करियर के दौरान राजपूत मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव भी रह चुके हैं. राजपूत का कार्यकाल दो वर्षो का होगा, लेकिन फैसले को अंतिम रूप यूरोप दौरे के बाद दिया जायेगा. अफगानिस्तान को स्कॉटलैंड और आयरलैंड के विरुद्ध सात एकदिवसीय मैच खेलने हैं और उसके बाद नीदरलैंड के विरुद्ध इंटरकांटीनेंटल कप मैच खेलना हैं. राजपूत ने ईएसपीएन क्रिकइन्फो से बात करते हुए कहा "अन्तर्राष्ट्रीय टीम के साथ दोबारा काम करके मैं बहुत उत्साहित हूँ. अफगानिस्तान को टॉप दस टीम बनाना चुनौती होगा. अफगानिस्तान के पास टेस्ट क्रिकेट का दर्जा नहीं है ऐसे में हमारा लक्ष्य होगा ऐसा कार्य करे जिससे आगे चलकर टेस्ट का दर्जा भी जल्द मिले". लालचंद राजपूत ने भारत के तरफ से दो टेस्ट मैच और चार एकदिवसीय मैच खेले हैं. राजपूत के नाम प्रथम श्रेणी क्रिकेट के एक सौ दस मैचो में सात हज़ार नौ सौ अठासी रन दर्ज हैं. राजपूत मुंबई रणजी के कोच भी रह चुके हैं. राजपूत को कोचिंग का अच्छा अनुभव है, लालचंद भारतीय कोच की रेस में भी थे, लेकिन बीसीसीआई ने भारतीय महान गेंदबाज़ अनिल कुंबले की भारतीय टीम का कोच नियुक्त किया.
Jamshedpur: जमशेदपुर में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर अभी जारी है. जिसके कारण पिछले तीन दिनों से शहर में धूप-छांव के साथ वर्षा का दौर चल रहा है. रविवार को 4 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई. सोमवार को वर्षा नहीं हुई. दिन में बादल छाए रहे. शाम में हल्की धूप निकली. मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार तक मौसम के ऐसे ही बने रहने के अनुमान हैं. सोमवार को वर्षा नहीं होने के कारण दिन का तापमान 1. 8 डिग्री सेल्सियस कल की अपेक्षा बढ़ा. रविवार को दिन का 20. 4 डिग्री सेल्सियस था. सोमवार को बढ़कर यह 21. 6 डिग्री सेल्सियस हो गया. हालांकि रात के तापमान में ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ है. रविवार के 15. 2 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले सोमवार को रात के तापमान में 0. 8 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी का अनुमान है. मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि झारखंड में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर के चलते आज झारखंड के उत्तर-पूर्वी तथा निकटवर्ती मध्य भाग में कहीं-कहीं वर्षा हुई. 25 जनवरी तक मौसम के ऐसे ही रहने के अनुमान है. उन्होंने बताया कि 26 से मौसम में परिवर्तन होगा. वर्षा का दौर खत्म हो जाएगा तथा दिन में धूप खिलेगी. यह स्थिति 28 जनवरी तक रहेगी. लेकिन इस दौरान बंगाल की खाड़ी में गर्म एवं ठंडी हवाओं के मिश्रण से बनी स्थित के कारण घना कोहरा का प्रभाव देखने को मिलेगा. उन्होंने बताया कि 26 जनवरी से झारखंड में ठंड की भी बढ़ोतरी होगी. 28 जनवरी तक दिन एवं रात के तापमान में 3-5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज होगी.
Jamshedpur: जमशेदपुर में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर अभी जारी है. जिसके कारण पिछले तीन दिनों से शहर में धूप-छांव के साथ वर्षा का दौर चल रहा है. रविवार को चार मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई. सोमवार को वर्षा नहीं हुई. दिन में बादल छाए रहे. शाम में हल्की धूप निकली. मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार तक मौसम के ऐसे ही बने रहने के अनुमान हैं. सोमवार को वर्षा नहीं होने के कारण दिन का तापमान एक. आठ डिग्री सेल्सियस कल की अपेक्षा बढ़ा. रविवार को दिन का बीस. चार डिग्री सेल्सियस था. सोमवार को बढ़कर यह इक्कीस. छः डिग्री सेल्सियस हो गया. हालांकि रात के तापमान में ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ है. रविवार के पंद्रह. दो डिग्री सेल्सियस के मुकाबले सोमवार को रात के तापमान में शून्य. आठ डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी का अनुमान है. मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि झारखंड में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर के चलते आज झारखंड के उत्तर-पूर्वी तथा निकटवर्ती मध्य भाग में कहीं-कहीं वर्षा हुई. पच्चीस जनवरी तक मौसम के ऐसे ही रहने के अनुमान है. उन्होंने बताया कि छब्बीस से मौसम में परिवर्तन होगा. वर्षा का दौर खत्म हो जाएगा तथा दिन में धूप खिलेगी. यह स्थिति अट्ठाईस जनवरी तक रहेगी. लेकिन इस दौरान बंगाल की खाड़ी में गर्म एवं ठंडी हवाओं के मिश्रण से बनी स्थित के कारण घना कोहरा का प्रभाव देखने को मिलेगा. उन्होंने बताया कि छब्बीस जनवरी से झारखंड में ठंड की भी बढ़ोतरी होगी. अट्ठाईस जनवरी तक दिन एवं रात के तापमान में तीन-पाँच डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज होगी.
यूपी के बागपत में पलायन की खबरों के बीच भीम आर्मी की विधानसभा इकाई के अध्यक्ष के परिवार के सदस्यों ने सरकार को चेतावनी दे है कि अगर उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई. परिवार का आरोप है कि उन्होंने हमलावरों की दहशत के चलते गांव से पलायन करने के लिए अपने करीब छह मकानों की दीवारों पर 'मकान बिकाऊ है' लिख दिया. दरअसल क्षेत्र के ग्राम हसनपुर मसूरी में 16 अप्रैल को भीम आर्मी की विधानसभा इकाई के अध्यक्ष सुरेंद्र को गांव के ही छह युवकों ने गोली मारकर घायल कर दिया था. इसके बाद घायल सुरेंद्र के पुत्र ने खेकड़ा कोतवाली में गांव के ही सात युवकों के खिलाफ पिता पर गोली मारकर हमला करने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया था. पीड़ित सुरेंद्र के परिजनों ने कहा कि आरोपी जमानत होने के बाद गांव में खुले घूम रहे हैं. मुकदमे में फैसला करने का दबाव बना रहे हैं. फैसला न करने पर पूरे परिवार को मारने की धमकी दी जा रही है, इससे परिवार दहशत में हैं. बुधवार को पीड़ित सुरेंद्र के परिजनों ने अपने छह मकानों के बाहर मकान बिकाऊ लिख दिया है. पीड़ित परिवार ने बताया कि अगर उन्हें दिन और रात के लिए सुरक्षा नहीं दिलवाई गई तो वह दहशत के चलते जल्द ही गांव से पलायन करेंगे. आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले योगी आदित्यनाथ ने पलायन की खबरों से इनकार किया था. उन्होंने आरोप को खारिज करते हुए कहा था कि बीजेपी के सत्ता में रहते किसी को भी कहीं से पलायन नहीं करना पड़ेगा. ये भी पढ़ेंः आपसी रंजिश में पिटा था आतिब, 'जय श्रीराम' नहीं बुलवाया गया! .
यूपी के बागपत में पलायन की खबरों के बीच भीम आर्मी की विधानसभा इकाई के अध्यक्ष के परिवार के सदस्यों ने सरकार को चेतावनी दे है कि अगर उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई. परिवार का आरोप है कि उन्होंने हमलावरों की दहशत के चलते गांव से पलायन करने के लिए अपने करीब छह मकानों की दीवारों पर 'मकान बिकाऊ है' लिख दिया. दरअसल क्षेत्र के ग्राम हसनपुर मसूरी में सोलह अप्रैल को भीम आर्मी की विधानसभा इकाई के अध्यक्ष सुरेंद्र को गांव के ही छह युवकों ने गोली मारकर घायल कर दिया था. इसके बाद घायल सुरेंद्र के पुत्र ने खेकड़ा कोतवाली में गांव के ही सात युवकों के खिलाफ पिता पर गोली मारकर हमला करने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया था. पीड़ित सुरेंद्र के परिजनों ने कहा कि आरोपी जमानत होने के बाद गांव में खुले घूम रहे हैं. मुकदमे में फैसला करने का दबाव बना रहे हैं. फैसला न करने पर पूरे परिवार को मारने की धमकी दी जा रही है, इससे परिवार दहशत में हैं. बुधवार को पीड़ित सुरेंद्र के परिजनों ने अपने छह मकानों के बाहर मकान बिकाऊ लिख दिया है. पीड़ित परिवार ने बताया कि अगर उन्हें दिन और रात के लिए सुरक्षा नहीं दिलवाई गई तो वह दहशत के चलते जल्द ही गांव से पलायन करेंगे. आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले योगी आदित्यनाथ ने पलायन की खबरों से इनकार किया था. उन्होंने आरोप को खारिज करते हुए कहा था कि बीजेपी के सत्ता में रहते किसी को भी कहीं से पलायन नहीं करना पड़ेगा. ये भी पढ़ेंः आपसी रंजिश में पिटा था आतिब, 'जय श्रीराम' नहीं बुलवाया गया! .
यहां तक कि निफ्टी बैंक भी अपने सपोर्ट जोन के करीब 40,820-41,830 के दायरे में ट्रेड कर रहा है। इन स्तरों को तोड़ने से निफ्टी बैंक को 37,770 - 39,180 के स्तर की ओर धकेलने की संभावना है। मौजूदा समय में बजट से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव नजर आ रहा है, इसलिए सावधानी से कारोबार करने की सलाह दी जाती है। जिन शेयरों में प्राइस वॉल्यूम ब्रेकआउट देखने को मिला है उनकी लिस्ट नीचे दी गई है। यह आर्टिकल भारत की नंबर 1 इनवेस्टमेंट मैग्जीन दलाल स्ट्रीट इन्वेस्टमेंट जर्नल द्वारा संचालित है। विनिंग स्टॉक्स और रिकोमेंडेशंस के बारे में नियमित रूप से अपडेट होने के लिए यहां क्लिक करें। (Disclaimer: This above is third party content and TIL hereby disclaims any and all warranties, express or implied, relating to the same. TIL does not guarantee, vouch for or endorse any of the above content or its accuracy nor is responsible for it in any manner whatsoever. The content does not constitute any investment advice or solicitation of any kind. Users are advised to check with certified experts before taking any investment decision and take all steps necessary to ascertain that any information and content provided is correct, updated and verified. )
यहां तक कि निफ्टी बैंक भी अपने सपोर्ट जोन के करीब चालीस,आठ सौ बीस-इकतालीस,आठ सौ तीस के दायरे में ट्रेड कर रहा है। इन स्तरों को तोड़ने से निफ्टी बैंक को सैंतीस,सात सौ सत्तर - उनतालीस,एक सौ अस्सी के स्तर की ओर धकेलने की संभावना है। मौजूदा समय में बजट से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव नजर आ रहा है, इसलिए सावधानी से कारोबार करने की सलाह दी जाती है। जिन शेयरों में प्राइस वॉल्यूम ब्रेकआउट देखने को मिला है उनकी लिस्ट नीचे दी गई है। यह आर्टिकल भारत की नंबर एक इनवेस्टमेंट मैग्जीन दलाल स्ट्रीट इन्वेस्टमेंट जर्नल द्वारा संचालित है। विनिंग स्टॉक्स और रिकोमेंडेशंस के बारे में नियमित रूप से अपडेट होने के लिए यहां क्लिक करें।
टोक्यो , भूकंप ने एकबार फिर अपने तेज झटकों से लोगों की नींद उड़ा दी है। जापान के ओगासवारा द्वीप समूह पर शनिवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। जापान की मौसम एजेंसी ने बताया कि भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6. 9 मापी गयी। भूकंप स्थानीय समयानुसार शाम 05:26 बजे आया। भूकंप का केंद्र 27. 2 उत्तरी अक्षांश और 104. 7 पूर्वी देशांतर पर सतह से 490 किलोमीटर की गहराई में था। अब तक सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की गयी है।
टोक्यो , भूकंप ने एकबार फिर अपने तेज झटकों से लोगों की नींद उड़ा दी है। जापान के ओगासवारा द्वीप समूह पर शनिवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। जापान की मौसम एजेंसी ने बताया कि भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर छः. नौ मापी गयी। भूकंप स्थानीय समयानुसार शाम पाँच:छब्बीस बजे आया। भूकंप का केंद्र सत्ताईस. दो उत्तरी अक्षांश और एक सौ चार. सात पूर्वी देशांतर पर सतह से चार सौ नब्बे किलोग्राममीटर की गहराई में था। अब तक सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की गयी है।
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वेलिंगटन, 10 सितम्बर (आईएएनएस)। न्यूजीलैंड के केर्माडेक द्वीप पर सोमवार को 6. 9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। रेडियो न्यूजीलैंड की रपट के मुताबिक, न्यूजीलैंड जियोनेट ने स्थानीय समयानुसार शाम 4. 18 बजे आए भूंकप की तीव्रता रिकॉर्ड की। भूकंप का केंद्र उत्तरी द्वीप में व्हाकटाने से 785 किमी दूर 123 किमी की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटकों को शुरू में 6. 8 तीव्रता का बताया गया, लेकिन बाद में इसे संशोधित किया गया। जियो नेट ने कहा कि भूंकप का अहसास पूरे देश में पूर्वी तट से दक्षिणी द्वीप तक हो सकता था। न्यूजीलैंड के सिविल डिफेंस मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान सूचना के आधार पर शुरुआती आंकलन में सुनामी के खतरे से इनकार किया गया है।
वेलिंगटन, दस सितम्बर । न्यूजीलैंड के केर्माडेक द्वीप पर सोमवार को छः. नौ तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। रेडियो न्यूजीलैंड की रपट के मुताबिक, न्यूजीलैंड जियोनेट ने स्थानीय समयानुसार शाम चार. अट्ठारह बजे आए भूंकप की तीव्रता रिकॉर्ड की। भूकंप का केंद्र उत्तरी द्वीप में व्हाकटाने से सात सौ पचासी किमी दूर एक सौ तेईस किमी की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटकों को शुरू में छः. आठ तीव्रता का बताया गया, लेकिन बाद में इसे संशोधित किया गया। जियो नेट ने कहा कि भूंकप का अहसास पूरे देश में पूर्वी तट से दक्षिणी द्वीप तक हो सकता था। न्यूजीलैंड के सिविल डिफेंस मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान सूचना के आधार पर शुरुआती आंकलन में सुनामी के खतरे से इनकार किया गया है।
विहीन होगी ही। यही कारण है कि हमारे अनेक बालक ऐसे निर्जीव होते हैं कि उनकी परवरिश करना बड़ी मुश्किल का काम होता है। इससे अनेक बालक अपने प्रथम वर्ष में ही समाप्त हो जाते हैं। यही परिणाम वेमेल विवाहों का है। योग्य अवस्था में पहुँचे विना जो लोग विवाह करें, उनकी अंलाद न जी सके, इसमें नई बात क्या ! ( ४ ) हमारी स्वच्छन्दता भी बाल मृत्युओं की संख्या ज़रूर बढ़ाती है। पश्चिमवाले धर्म के लिए न सही पर अपने शरीर सुख के लिए - अधिक सन्तति हो तो उसकी परवरिश करने में मुश्किल होगी, इस ख़याल से - सन्तानोत्पत्ति पर नियंत्रण रखते हैं। हमारे लिए स्वच्छन्दता रोकने का यह हेतु पूर्ण नहीं। परतु पश्चिम के देशों की अपेक्षा अधिक धार्मिक जीवन विताने का दावा करते हुए भी धर्म ने इस सम्बन्ध में जो अंकुश लगाने हैं, उनकी हम पर्वा नहीं करते। इससे अनेक माता-पिता धर्म या अर्थ का विचार किये वगैर विषयासक्त होकर समय-असमय सन्तानोत्पत्ति किया ही करते हैं। फलस्वरूप, जाने-अनजाने, रोगी बालकों का जन्म होता है, और वे बाल्यावस्था में ही मृत्यु शिकार होते हैं । (५) आरोग्य विषयक नियमों का पूरा ज्ञान मातापिता में से किसी को भी नहीं होता । जहाँ ज्ञान है भी, वहाँ उसे व्यवहार में लाने का आलस्य है; और जहाँ आ. लस्य भी नहीं, वहाँ साधनों का अभाव है। नतीजा यह का यही होता है कि देश में बाल मृत्युयें बढ़ती जाती हैं । अनेक बार सिर्फ़ अज्ञान दाई हो बाल-हत्या का कारण होती है। उसे प्रसव-विषयक पूरी जानकारी नहीं होती,.. जिससे सामान्य नियमों का भी वह माता से पालन नहीं करवाती । इससे जन्म से ही बालक प्रतिकूल परिस्थिति में परवरिश पाते हैं और फिर मृत्यु के शिकार हो पढ़ते हैं। पहले के दो महीनों में बालक बच भी जाय, तो दाई की ही तरह माता के अज्ञान का शिकार होता है; वह चाहे जैसे उसकी परवरिश करके उसे मार नहीं डालती तो भी रोगी तो ज़रूर बना देती है । (६) महँगाई के कारण दूध-वी आदि पौष्टिक पदार्थों के लाले पड़ते हैं। गेहूँ की खुराक की ज़रूरत है, वहाँ गेहूँ भी नहीं मिलते। और माता का दूध बन्द होने पर, माता को जानकारी होने पर भी, बच्चे को पूरा और अच्छा दूध नहीं मिलता। सर्दी में काफ़ी कपड़े नहीं मिलते । सुविधापूर्ण घर भी कहाँ ? इस प्रकार संयोगों की इतनी प्रतिकूलता है कि वाल मृत्युओं की इस भयावह मृत्यु संख्या से छुटकारा मुश्किल हो पड़ा है। डा० धर्मवीर ने मुख्यतः अज्ञान और दरिद्रता के पहल पर विचार किया है । इङ्गलैण्ड की स्थिति के तो आप विशेषज्ञ हैं ही, अतः आपने मुख्यतः उसीसे यहाँ की स्थिति की तुलना की है। वहाँ की मजूर स्त्रियों के चालक जन्म के समय लगभग ७३ पौण्ड भारी होते हैं, अक्सर १० पौण्ड तक भी होते हुए उन्होंने देखा है, जब कि भारत की ऐसी स्त्रियों के बालक लगभग ६ पौण्ड और अक्सर इससे भी कम ही होते हैं। इसके कारणों में और जो चाहे हो, पर माता को मिलने वाला भोजन और रहन-सहन की स्थिति अवश्य प्रधान हैं । इंग्लैण्ड की स्त्रियों की खुराक पौष्टिक है, रहन-सहन का दम उत्तम है, खाने-पीने की उतनी फ़िक नहीं करनी पड़ती । विरुद्ध इसके हमारे यहाँ रहन-सहन की तो असुविधायें हैं ही, खान-पान भी अधिकांश भारतीय माताओं का महा निकम्मा होता है। जो दूध सबसे पौष्टिक और * 'पीपुल'; १८ जुलाई, १६२६ । आवश्यक चीज़ है, वह हमारी कितनी माताओं को मिलता है ? दूध ही नहीं, अन्य पौष्टिक पदार्थ भी क्या उन्हें मिलते हैं ? घी नहीं, मेवा नहीं, फल नहीं, हमारे यहाँ की माताओं को तो आम तौर पर मिलती हैं सूखी दाल-रोटियाँ और थोड़ी-बहुन सब्जी ! ग़रीब भारत के पास और रहा भी क्या है ? हाँ, आश्चर्य नहीं, यदि यह भी पेट-भर न मिलता हो ! ऐसी दशा में पहले तो खुद माताओं में ही पूर्ण जीवनी शक्ति नहीं होती, फिर बेचारेः बच्चों को वे कहाँसे जीवन दें ? बच्चों के ऊपरी पौष्टिक भोजन के लिए तो ऐसी दशा में धरा ही क्या है ? फलतः बच्चा माँ के स्तन चूसता रहता है- तबतक, जबतक कि उनमें थोड़ा बहुत भी दूध निकलता रहे ! यह दूध पौष्टिक भी पर्याप्त कहाँ से हो, अतः तृप्ति न होने से जरा-जरा-सी देर में वह उसे शँझोड़ता है और फिर भी भूखा का भूखा ही रहता है ! नतीजा इसका यही होता है कि बीमारी कब्ज़ा कर लेती है। हाज़्मे की ख़राबी, निमोनिया, पीलिया इत्यादि पोषण के अभाव में होनेवाले उन नाना रोगों का वह शिकार हो पड़ता है, जिनके पूरे नाम तक निश्चित नहीं हुए हैं ! पतले और लम्बे हाथ-पैरों वाले और उनके परिमाण १९५ में भारी सिर के तथा बढ़े हुए पेट के अनेक भारतीय बालक हम देखते हैं, वे सब इसी दुःस्थिति के कुफल हैं। इसमें सन्देह नहीं कि ये सभी कारण हमारे यहाँ मौजूद हैं और काफ़ी परिमाण में हमारी छाती पर मूँग दल रहे हैं । परन्तु इनके सिवा भी एक कारण हैं, और वह है बाइस उन्न बालकों की मृत्यु का, जिन्हें आम तौर पर हम 'पाप की सन्तान' कहते हैं । यह है हमारी वैषयिक कमज़ोरी और उसे छिपाने की हमारी कायरता । हम पाप तो करते हैं, पर उसके परिणाम से मुँह छिपाते हैं । बलात् वैधन्य आदि के रूप में चाहे इसमें समाज की लापर्वाही भी थोड़ी-बहुत प्रोत्साहक हो, परन्तु इसमें सन्देह नहीं कि यह स्थिति भी न जाने कितनों के जीवन बिगाड़ने का कारण बन रही है । और लड़की पैदा होने पर उसे मार डालने की प्रथा का तो, चाहे वह कितनी ही न्यून क्यों न हो, निश्चय ही एकमात्र कारण हो सकता है - लड़कियों के विवाह में दिक्कृततलव दहेज आदि की खचली प्रथायें तथा लड़की के बाप की लड़के के बाप से होने वाली जिल्लत ! इन्हीं सब बातों का परिणाम है, जो आज हमारे बाल-हास के रूप में प्रकट हो यहाँ के अतुलनीय भयावह रहा है और हमें हीन से हीनतर बनाता चला जा रहा है । क्या यह स्थिति वाञ्छनीय है ? प्रत्येक समझदार यही हेगा - 'हगिज़ नहीं।"' परन्तु कितने हैं, जिन्होंने इसपर गम्भीरता से विचार कर कभी इसे दूर करने का इरादा किया हो ? उसपर अमल करना तो फिर उसके बाद की बात है । यही सबसे जबरदस्त कारण है, जो यह स्थिति मिटने के बजाय दिनोंदिन ज़ोर ही पकड़ती जा रही है । परन्तु अमुक व्यक्ति ने अभी तक कोई अच्छा काम नहीं किया तो आगे भी वह भच्छा काम नहीं करेगा, यह सोचना सहज भले ही हो, पर सत्य नहीं । 'Saint hasra past, Sinner a future प्रायः प्रत्येक सन्त-पुरुष अपने बीते हुए दिनों में कुछ-न-कुछ गिरा हुआ रहा होता है, और प्रत्येक पापी के लिए भविष्य में अपनेको सुधार लेना सम्भव होता है । बाल-ह्रास के प्रति भी हम कितने ही उदासीन क्यों न रहे हों, पर यह सोचना नामुनासिब होगा कि आगे भी हम इसपर ध्यान न देंगे । अग्नि तो प्रज्वलित हो ही चुकी है, किसी-न-किसी दिन यह इस पाप को भस्मसात् करके ही दम लेगी- इसमें रच्चमात्र सन्देह नहीं। परन्तु यह भावW श्यक है कि हम सच्चे दिल से इसके लिए प्रयत्नशील हॉजी-जान से इसे दूर करने के लिए भिड़ जायें । इसके लिए उन कारणों का दूर किया जाना अत्याव श्यक है, जो इसे जीवित और वृद्धिंगत बनाये हुए हैं। इस सम्बन्ध के अज्ञान को मिटाना सबसे ज़रूरी है और वह सार्वजनिक शिक्षा की दिशा में उपयुक्त परिवर्तन करने से भलीभांति हो सकता है। वायु-शुद्धि के लिए उपाय खोजने और अमल में लाने चाहिएँ, जो सुशिक्षा से सहज ही सम्भव हो सकते हैं । बाल-वेमेल विवाह तथा स्वच्छन्दता पर भी सु. शिक्षा अपना अच्छा असर ढाले बिना न रहेगी। खुराक और महँगाई पर शिक्षा का सीधा असर नहीं, पर परोक्ष रूप से इस दिशा में भी सुशिक्षा कुछ सहायता ही पहुँ चायगी । और 'पाप को सन्तान' तथा कन्या-वध की प्रथा पर भी सुशिक्षा का कोई असर न पढ़े, यह असम्भव है । परन्तु प्रश्न यह है, इसे करे कौन ? किसी भी सभ्य देश में यह उसकी सरकार का कर्तव्य होता है । इंग्लैण्ड आदि देशों की सरकारें अपनी इस ज़िम्मेदारी को समझती हो नहीं बल्कि अमली रूप भी दे रही हैं, परन्तु हमारी सरकार तो विदेशी है। कहने को वह हमारी कितना ही हिताकांक्षी बने, पर व्यवहार तो दूसरा ही चित्र सामने रखता है । डा० रुदरफोर्ड ने ठीक ही कहा है- "ब्रिटिश अधिकारयों को फ़ौज के लिए तो हमेशा धन मिल जाता है, जो उनकी शक्ति का सहारा है। अपनी तनख्वाह तथा भत्ते बढ़ाने को कभी धन की कमी नहीं पड़ती। लेकिन जब भारतीयों के घर और बाहर की सफ़ाई के रूप में भारतीयों के हित के लिए धन खर्च करने की ज़रूरत पड़ती है, तब विदेशी प्रभु 'रुको' चिल्ला पड़ते हैं और नौकरशाही किफायत की कुल्हाड़ी अपनी पैनी धार के साथ उसपर गिर पड़ती है।" और स्वयं सरकारी प्रकाशन विभाग के अध्यक्ष कोटमेन साहब के स्वर में स्वर मिलाकर कहें, तो 'धनाभाव' ही तो वह बहाना है, जिसके नाम पर सरकार इस प्रश्न को टाल देती है ! यही कारण है कि, हम देखते हैं, लेडी उफ़रन, लेडी कर्ज़न और लेडी चेम्सफ़ोर्ड के द्वारा इन कामों को उठाया गया है; स्वयं सरकार की तरफ से नहीं । दाई तैयार करने * 'माडर्न इंडिया'; पृष्ठ १६४ । + '१९२६-२७ में भारत', स्त्रियों को इलाज की मदद, शिशु-सप्ताह आदि प्रकरण 1 व शिशु-सप्ताह मनाने आदि के कुछ काम इनकी तरफ़ से हो। भी रहे हैं और उनके लिए हमें इन वाइसराय-पतियों की अवश्य प्रशंसा करनी चाहिए। परन्तु यह मानना होगा कि ये काम न तो पूरे सरकारी हैं और न पूरे गैर-सरकारी । ऐसी तीतर-चटेर-स्थिति सरकार और उसके पृष्ट-पोषकों के प्रोत्साहन से चली भले ही जाय, पर उससे कुछ विशेष लाभ शायद ही हो सकेगा । उचित तो यही है कि सरकार सीधे भारत की इस महत्वपूर्ण समस्या की ज़िम्मेदारी ग्रहण करे और भारतीयों के सहयोग से भारतीय रूप में सच्चाई के साथ इसे दूर करने का प्रयल करे। परन्तु शायद यह सम्भव नहीं, जबतक भारत की सरकार भारत के निवासियों के. प्रति ज़िम्मेदार न हो - जबतक भारत में स्वराज्य न हो । यह तो हो नहीं सकता कि स्वराज्य मिलने तक हम इस प्रश्न को टाले रहें । यह तो उलटे उसके मिलने में देर करने का ही कारण बनेगा । फिर स्वराज्य भिलने पर भी बिना हमारे प्रयल के ही यह सब एकदम मिट जाय, सो पात भी नहीं । अतः सरकार करे चाहे न करे, हमें तो अपने इस कलंक और अपनी इस भयावह दुरवस्था को मिटाने के लिए तुरन्त
विहीन होगी ही। यही कारण है कि हमारे अनेक बालक ऐसे निर्जीव होते हैं कि उनकी परवरिश करना बड़ी मुश्किल का काम होता है। इससे अनेक बालक अपने प्रथम वर्ष में ही समाप्त हो जाते हैं। यही परिणाम वेमेल विवाहों का है। योग्य अवस्था में पहुँचे विना जो लोग विवाह करें, उनकी अंलाद न जी सके, इसमें नई बात क्या ! हमारी स्वच्छन्दता भी बाल मृत्युओं की संख्या ज़रूर बढ़ाती है। पश्चिमवाले धर्म के लिए न सही पर अपने शरीर सुख के लिए - अधिक सन्तति हो तो उसकी परवरिश करने में मुश्किल होगी, इस ख़याल से - सन्तानोत्पत्ति पर नियंत्रण रखते हैं। हमारे लिए स्वच्छन्दता रोकने का यह हेतु पूर्ण नहीं। परतु पश्चिम के देशों की अपेक्षा अधिक धार्मिक जीवन विताने का दावा करते हुए भी धर्म ने इस सम्बन्ध में जो अंकुश लगाने हैं, उनकी हम पर्वा नहीं करते। इससे अनेक माता-पिता धर्म या अर्थ का विचार किये वगैर विषयासक्त होकर समय-असमय सन्तानोत्पत्ति किया ही करते हैं। फलस्वरूप, जाने-अनजाने, रोगी बालकों का जन्म होता है, और वे बाल्यावस्था में ही मृत्यु शिकार होते हैं । आरोग्य विषयक नियमों का पूरा ज्ञान मातापिता में से किसी को भी नहीं होता । जहाँ ज्ञान है भी, वहाँ उसे व्यवहार में लाने का आलस्य है; और जहाँ आ. लस्य भी नहीं, वहाँ साधनों का अभाव है। नतीजा यह का यही होता है कि देश में बाल मृत्युयें बढ़ती जाती हैं । अनेक बार सिर्फ़ अज्ञान दाई हो बाल-हत्या का कारण होती है। उसे प्रसव-विषयक पूरी जानकारी नहीं होती,.. जिससे सामान्य नियमों का भी वह माता से पालन नहीं करवाती । इससे जन्म से ही बालक प्रतिकूल परिस्थिति में परवरिश पाते हैं और फिर मृत्यु के शिकार हो पढ़ते हैं। पहले के दो महीनों में बालक बच भी जाय, तो दाई की ही तरह माता के अज्ञान का शिकार होता है; वह चाहे जैसे उसकी परवरिश करके उसे मार नहीं डालती तो भी रोगी तो ज़रूर बना देती है । महँगाई के कारण दूध-वी आदि पौष्टिक पदार्थों के लाले पड़ते हैं। गेहूँ की खुराक की ज़रूरत है, वहाँ गेहूँ भी नहीं मिलते। और माता का दूध बन्द होने पर, माता को जानकारी होने पर भी, बच्चे को पूरा और अच्छा दूध नहीं मिलता। सर्दी में काफ़ी कपड़े नहीं मिलते । सुविधापूर्ण घर भी कहाँ ? इस प्रकार संयोगों की इतनी प्रतिकूलता है कि वाल मृत्युओं की इस भयावह मृत्यु संख्या से छुटकारा मुश्किल हो पड़ा है। डाशून्य धर्मवीर ने मुख्यतः अज्ञान और दरिद्रता के पहल पर विचार किया है । इङ्गलैण्ड की स्थिति के तो आप विशेषज्ञ हैं ही, अतः आपने मुख्यतः उसीसे यहाँ की स्थिति की तुलना की है। वहाँ की मजूर स्त्रियों के चालक जन्म के समय लगभग तिहत्तर पौण्ड भारी होते हैं, अक्सर दस पौण्ड तक भी होते हुए उन्होंने देखा है, जब कि भारत की ऐसी स्त्रियों के बालक लगभग छः पौण्ड और अक्सर इससे भी कम ही होते हैं। इसके कारणों में और जो चाहे हो, पर माता को मिलने वाला भोजन और रहन-सहन की स्थिति अवश्य प्रधान हैं । इंग्लैण्ड की स्त्रियों की खुराक पौष्टिक है, रहन-सहन का दम उत्तम है, खाने-पीने की उतनी फ़िक नहीं करनी पड़ती । विरुद्ध इसके हमारे यहाँ रहन-सहन की तो असुविधायें हैं ही, खान-पान भी अधिकांश भारतीय माताओं का महा निकम्मा होता है। जो दूध सबसे पौष्टिक और * 'पीपुल'; अट्ठारह जुलाई, एक हज़ार छः सौ छब्बीस । आवश्यक चीज़ है, वह हमारी कितनी माताओं को मिलता है ? दूध ही नहीं, अन्य पौष्टिक पदार्थ भी क्या उन्हें मिलते हैं ? घी नहीं, मेवा नहीं, फल नहीं, हमारे यहाँ की माताओं को तो आम तौर पर मिलती हैं सूखी दाल-रोटियाँ और थोड़ी-बहुन सब्जी ! ग़रीब भारत के पास और रहा भी क्या है ? हाँ, आश्चर्य नहीं, यदि यह भी पेट-भर न मिलता हो ! ऐसी दशा में पहले तो खुद माताओं में ही पूर्ण जीवनी शक्ति नहीं होती, फिर बेचारेः बच्चों को वे कहाँसे जीवन दें ? बच्चों के ऊपरी पौष्टिक भोजन के लिए तो ऐसी दशा में धरा ही क्या है ? फलतः बच्चा माँ के स्तन चूसता रहता है- तबतक, जबतक कि उनमें थोड़ा बहुत भी दूध निकलता रहे ! यह दूध पौष्टिक भी पर्याप्त कहाँ से हो, अतः तृप्ति न होने से जरा-जरा-सी देर में वह उसे शँझोड़ता है और फिर भी भूखा का भूखा ही रहता है ! नतीजा इसका यही होता है कि बीमारी कब्ज़ा कर लेती है। हाज़्मे की ख़राबी, निमोनिया, पीलिया इत्यादि पोषण के अभाव में होनेवाले उन नाना रोगों का वह शिकार हो पड़ता है, जिनके पूरे नाम तक निश्चित नहीं हुए हैं ! पतले और लम्बे हाथ-पैरों वाले और उनके परिमाण एक सौ पचानवे में भारी सिर के तथा बढ़े हुए पेट के अनेक भारतीय बालक हम देखते हैं, वे सब इसी दुःस्थिति के कुफल हैं। इसमें सन्देह नहीं कि ये सभी कारण हमारे यहाँ मौजूद हैं और काफ़ी परिमाण में हमारी छाती पर मूँग दल रहे हैं । परन्तु इनके सिवा भी एक कारण हैं, और वह है बाइस उन्न बालकों की मृत्यु का, जिन्हें आम तौर पर हम 'पाप की सन्तान' कहते हैं । यह है हमारी वैषयिक कमज़ोरी और उसे छिपाने की हमारी कायरता । हम पाप तो करते हैं, पर उसके परिणाम से मुँह छिपाते हैं । बलात् वैधन्य आदि के रूप में चाहे इसमें समाज की लापर्वाही भी थोड़ी-बहुत प्रोत्साहक हो, परन्तु इसमें सन्देह नहीं कि यह स्थिति भी न जाने कितनों के जीवन बिगाड़ने का कारण बन रही है । और लड़की पैदा होने पर उसे मार डालने की प्रथा का तो, चाहे वह कितनी ही न्यून क्यों न हो, निश्चय ही एकमात्र कारण हो सकता है - लड़कियों के विवाह में दिक्कृततलव दहेज आदि की खचली प्रथायें तथा लड़की के बाप की लड़के के बाप से होने वाली जिल्लत ! इन्हीं सब बातों का परिणाम है, जो आज हमारे बाल-हास के रूप में प्रकट हो यहाँ के अतुलनीय भयावह रहा है और हमें हीन से हीनतर बनाता चला जा रहा है । क्या यह स्थिति वाञ्छनीय है ? प्रत्येक समझदार यही हेगा - 'हगिज़ नहीं।"' परन्तु कितने हैं, जिन्होंने इसपर गम्भीरता से विचार कर कभी इसे दूर करने का इरादा किया हो ? उसपर अमल करना तो फिर उसके बाद की बात है । यही सबसे जबरदस्त कारण है, जो यह स्थिति मिटने के बजाय दिनोंदिन ज़ोर ही पकड़ती जा रही है । परन्तु अमुक व्यक्ति ने अभी तक कोई अच्छा काम नहीं किया तो आगे भी वह भच्छा काम नहीं करेगा, यह सोचना सहज भले ही हो, पर सत्य नहीं । 'Saint hasra past, Sinner a future प्रायः प्रत्येक सन्त-पुरुष अपने बीते हुए दिनों में कुछ-न-कुछ गिरा हुआ रहा होता है, और प्रत्येक पापी के लिए भविष्य में अपनेको सुधार लेना सम्भव होता है । बाल-ह्रास के प्रति भी हम कितने ही उदासीन क्यों न रहे हों, पर यह सोचना नामुनासिब होगा कि आगे भी हम इसपर ध्यान न देंगे । अग्नि तो प्रज्वलित हो ही चुकी है, किसी-न-किसी दिन यह इस पाप को भस्मसात् करके ही दम लेगी- इसमें रच्चमात्र सन्देह नहीं। परन्तु यह भावW श्यक है कि हम सच्चे दिल से इसके लिए प्रयत्नशील हॉजी-जान से इसे दूर करने के लिए भिड़ जायें । इसके लिए उन कारणों का दूर किया जाना अत्याव श्यक है, जो इसे जीवित और वृद्धिंगत बनाये हुए हैं। इस सम्बन्ध के अज्ञान को मिटाना सबसे ज़रूरी है और वह सार्वजनिक शिक्षा की दिशा में उपयुक्त परिवर्तन करने से भलीभांति हो सकता है। वायु-शुद्धि के लिए उपाय खोजने और अमल में लाने चाहिएँ, जो सुशिक्षा से सहज ही सम्भव हो सकते हैं । बाल-वेमेल विवाह तथा स्वच्छन्दता पर भी सु. शिक्षा अपना अच्छा असर ढाले बिना न रहेगी। खुराक और महँगाई पर शिक्षा का सीधा असर नहीं, पर परोक्ष रूप से इस दिशा में भी सुशिक्षा कुछ सहायता ही पहुँ चायगी । और 'पाप को सन्तान' तथा कन्या-वध की प्रथा पर भी सुशिक्षा का कोई असर न पढ़े, यह असम्भव है । परन्तु प्रश्न यह है, इसे करे कौन ? किसी भी सभ्य देश में यह उसकी सरकार का कर्तव्य होता है । इंग्लैण्ड आदि देशों की सरकारें अपनी इस ज़िम्मेदारी को समझती हो नहीं बल्कि अमली रूप भी दे रही हैं, परन्तु हमारी सरकार तो विदेशी है। कहने को वह हमारी कितना ही हिताकांक्षी बने, पर व्यवहार तो दूसरा ही चित्र सामने रखता है । डाशून्य रुपयादरफोर्ड ने ठीक ही कहा है- "ब्रिटिश अधिकारयों को फ़ौज के लिए तो हमेशा धन मिल जाता है, जो उनकी शक्ति का सहारा है। अपनी तनख्वाह तथा भत्ते बढ़ाने को कभी धन की कमी नहीं पड़ती। लेकिन जब भारतीयों के घर और बाहर की सफ़ाई के रूप में भारतीयों के हित के लिए धन खर्च करने की ज़रूरत पड़ती है, तब विदेशी प्रभु 'रुको' चिल्ला पड़ते हैं और नौकरशाही किफायत की कुल्हाड़ी अपनी पैनी धार के साथ उसपर गिर पड़ती है।" और स्वयं सरकारी प्रकाशन विभाग के अध्यक्ष कोटमेन साहब के स्वर में स्वर मिलाकर कहें, तो 'धनाभाव' ही तो वह बहाना है, जिसके नाम पर सरकार इस प्रश्न को टाल देती है ! यही कारण है कि, हम देखते हैं, लेडी उफ़रन, लेडी कर्ज़न और लेडी चेम्सफ़ोर्ड के द्वारा इन कामों को उठाया गया है; स्वयं सरकार की तरफ से नहीं । दाई तैयार करने * 'माडर्न इंडिया'; पृष्ठ एक सौ चौंसठ । + 'एक हज़ार नौ सौ छब्बीस-सत्ताईस में भारत', स्त्रियों को इलाज की मदद, शिशु-सप्ताह आदि प्रकरण एक व शिशु-सप्ताह मनाने आदि के कुछ काम इनकी तरफ़ से हो। भी रहे हैं और उनके लिए हमें इन वाइसराय-पतियों की अवश्य प्रशंसा करनी चाहिए। परन्तु यह मानना होगा कि ये काम न तो पूरे सरकारी हैं और न पूरे गैर-सरकारी । ऐसी तीतर-चटेर-स्थिति सरकार और उसके पृष्ट-पोषकों के प्रोत्साहन से चली भले ही जाय, पर उससे कुछ विशेष लाभ शायद ही हो सकेगा । उचित तो यही है कि सरकार सीधे भारत की इस महत्वपूर्ण समस्या की ज़िम्मेदारी ग्रहण करे और भारतीयों के सहयोग से भारतीय रूप में सच्चाई के साथ इसे दूर करने का प्रयल करे। परन्तु शायद यह सम्भव नहीं, जबतक भारत की सरकार भारत के निवासियों के. प्रति ज़िम्मेदार न हो - जबतक भारत में स्वराज्य न हो । यह तो हो नहीं सकता कि स्वराज्य मिलने तक हम इस प्रश्न को टाले रहें । यह तो उलटे उसके मिलने में देर करने का ही कारण बनेगा । फिर स्वराज्य भिलने पर भी बिना हमारे प्रयल के ही यह सब एकदम मिट जाय, सो पात भी नहीं । अतः सरकार करे चाहे न करे, हमें तो अपने इस कलंक और अपनी इस भयावह दुरवस्था को मिटाने के लिए तुरन्त
Shahid Kapoor Video: शाहिद कपूर (Shahid Kapoor) सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं और अपने चाहने वालों के लिए मजेदार तस्वीरें और वीडियोज शेयर करते हैं। एक बार फिर शाहिद कपूर का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो अपने 'प्राइवेट पार्ट' को लेकर ऐसा कुछ कहते हुए सुनाई दे रहे हैं जो सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। Shershaah Release Date: सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी की अपकमिंग फिल्म 'शेरशाह' (Shershaah) की रिलीज डेट का ऐलान कर दिया गया है। फिल्म निर्माता और निर्देशक करण जौहर ने सोशल मीडिया पर 'शेरशाह' की रिलीज डेट का ऐलान किया है।
Shahid Kapoor Video: शाहिद कपूर सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं और अपने चाहने वालों के लिए मजेदार तस्वीरें और वीडियोज शेयर करते हैं। एक बार फिर शाहिद कपूर का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो अपने 'प्राइवेट पार्ट' को लेकर ऐसा कुछ कहते हुए सुनाई दे रहे हैं जो सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। Shershaah Release Date: सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी की अपकमिंग फिल्म 'शेरशाह' की रिलीज डेट का ऐलान कर दिया गया है। फिल्म निर्माता और निर्देशक करण जौहर ने सोशल मीडिया पर 'शेरशाह' की रिलीज डेट का ऐलान किया है।
उत्सव की शुरुआत ग्रीस, ग्रेट ब्रिटेन, रूस और फ्रांस के राष्ट्रीय ध्वज को पाइलोस के सिटी हॉल से हटाने और तीन एडमिरल्स के क्षेत्र में उनके उदय के साथ हुई। धन्य वर्जिन मैरी के चर्च में एकमात्र प्रार्थना सेवा मेट्रोपॉलिटन मेसिनिया क्राइसोस्टोम द्वारा आयोजित की गई थी, जिसके बाद ब्लैक सी नाविकों ने तीन आदिवासियों को स्मारक पर माल्यार्पण करने के समारोह में भाग लिया, जिन्होंने नेवरिनो की लड़ाई के दौरान मित्र देशों की टुकड़ियों की कमान संभाली। इस परेड के बाद मरीन कॉर्प्स और ब्लैक सी फ्लीट ऑर्केस्ट्रा की एक अलग ब्रिगेड से ऑनर गार्ड की परेड में हिस्सा लिया। फिर रूसी प्रतिनिधिमंडल और छुट्टी के मेहमानों ने नाव से सैफकटिरिया द्वीप को पार किया, जो रूसी नाविकों का आरामगाह बन गया, जो ग्रीस की स्वतंत्रता के लिए मर गए थे। ग्रीस में रूसी दूतावास के काउंसलर और दूत, येवगेनी युरकोव, ग्रीस में रूसी दूतावास में सैन्य अटैची, अभियान के कमांडर कर्नल गेन्नेडी मोजावेव, पिलोस सिटी हॉल के प्रतिनिधि कैप्टन एक्सएनयूएमएक्स रैंक एंड्री पालिय और रूसी नाविकों के दफन स्थान पर ग्रीक नौसेना ने माल्यार्पण किया। पाइलोस में रूसी जहाज की पार्किंग अक्टूबर 23 तक बढ़ा दी गई है। यह सब समय "KIL-158" स्थानीय निवासियों और शहर के मेहमानों द्वारा जाने के लिए खुला रहेगा।
उत्सव की शुरुआत ग्रीस, ग्रेट ब्रिटेन, रूस और फ्रांस के राष्ट्रीय ध्वज को पाइलोस के सिटी हॉल से हटाने और तीन एडमिरल्स के क्षेत्र में उनके उदय के साथ हुई। धन्य वर्जिन मैरी के चर्च में एकमात्र प्रार्थना सेवा मेट्रोपॉलिटन मेसिनिया क्राइसोस्टोम द्वारा आयोजित की गई थी, जिसके बाद ब्लैक सी नाविकों ने तीन आदिवासियों को स्मारक पर माल्यार्पण करने के समारोह में भाग लिया, जिन्होंने नेवरिनो की लड़ाई के दौरान मित्र देशों की टुकड़ियों की कमान संभाली। इस परेड के बाद मरीन कॉर्प्स और ब्लैक सी फ्लीट ऑर्केस्ट्रा की एक अलग ब्रिगेड से ऑनर गार्ड की परेड में हिस्सा लिया। फिर रूसी प्रतिनिधिमंडल और छुट्टी के मेहमानों ने नाव से सैफकटिरिया द्वीप को पार किया, जो रूसी नाविकों का आरामगाह बन गया, जो ग्रीस की स्वतंत्रता के लिए मर गए थे। ग्रीस में रूसी दूतावास के काउंसलर और दूत, येवगेनी युरकोव, ग्रीस में रूसी दूतावास में सैन्य अटैची, अभियान के कमांडर कर्नल गेन्नेडी मोजावेव, पिलोस सिटी हॉल के प्रतिनिधि कैप्टन एक्सएनयूएमएक्स रैंक एंड्री पालिय और रूसी नाविकों के दफन स्थान पर ग्रीक नौसेना ने माल्यार्पण किया। पाइलोस में रूसी जहाज की पार्किंग अक्टूबर तेईस तक बढ़ा दी गई है। यह सब समय "KIL-एक सौ अट्ठावन" स्थानीय निवासियों और शहर के मेहमानों द्वारा जाने के लिए खुला रहेगा।
वित्त वर्ष 2016-17 में 2. 82 करोड़ लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है। कर विभाग ने बताया कि नोटबंदी के बाद रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में 25% का इजाफा हुआ है। रिजर्व बैंक ने नोटबंदी को नाकाम बताया, हुआ करोड़ो का घाटा! इस बढ़ोतरी का कारण अब तक नोटबंदी बतलाया जा रहा था, लेकिन अब आयकर विभाग द्वारा जारी किये गए आंकड़ों से पता चला है की ऐसा नहीं है। ये बढ़ोतरी ज़्यादातर 5 लाख से कम कमाने वाले लोग और कंपनियों से हुआ है। इस रिपोर्ट से अब इस बातपर सवाल खड़े हो जाते हैं, की काले धन पर रोक लगाने में नोटबंदी का अभियान कितना सफल रहा? आयकर भरने वालों की संख्या में 25% बढ़ोतरी का कारण नोटबंदी बतलाया गया था, पर क्या ये बात सच है? वित्त वर्ष 2016-17 में 2. 82 करोड़ लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है। कर विभाग ने बताया कि नोटबंदी के बाद रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में 25% का इजाफा हुआ है।
वित्त वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह में दो. बयासी करोड़ लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है। कर विभाग ने बताया कि नोटबंदी के बाद रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में पच्चीस% का इजाफा हुआ है। रिजर्व बैंक ने नोटबंदी को नाकाम बताया, हुआ करोड़ो का घाटा! इस बढ़ोतरी का कारण अब तक नोटबंदी बतलाया जा रहा था, लेकिन अब आयकर विभाग द्वारा जारी किये गए आंकड़ों से पता चला है की ऐसा नहीं है। ये बढ़ोतरी ज़्यादातर पाँच लाख से कम कमाने वाले लोग और कंपनियों से हुआ है। इस रिपोर्ट से अब इस बातपर सवाल खड़े हो जाते हैं, की काले धन पर रोक लगाने में नोटबंदी का अभियान कितना सफल रहा? आयकर भरने वालों की संख्या में पच्चीस% बढ़ोतरी का कारण नोटबंदी बतलाया गया था, पर क्या ये बात सच है? वित्त वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह में दो. बयासी करोड़ लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है। कर विभाग ने बताया कि नोटबंदी के बाद रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में पच्चीस% का इजाफा हुआ है।
१०. एक भक्त को जब वह नमाज़ अदा करे । ११. भला देखो तो, यदि वह सीधे मार्ग पर हो १२. या अल्लाह से डरने का आदेश देता हो ? १३. और देखो तो, यदि उस ने झुठलाया तथा मुँह फेरा हो ? १४. क्या वह नहीं जानता कि अल्लाह उसे देख रहा है? १५. निश्चय यदि वह नहीं रुकता तो हम उसे माथे के बल घसीटेंगे। १६. झूठे और पापी माथे के बल। १७. तो वह अपनी सभा को बुला ले। १८. हम भी नरक के फ़रिश्तों को बुलायेंगे। १९. (हे भक्त) कदापि उस की बात न सुनो तथा सज्दा करो और मेरे समीप हो जाओ। (९-१३) इन आयतों में उन पर धिक्कार है जो नबी (सल्लाल्लाहु अलैहि व सल्लम) के विरोध पर तुल गये। और इस्लाम और मुसलमानों की राह में रुकावट न डालते और नमाज़ से रोकते है। (१४-१८) इन आयतों में स्तय के विरोधी को दुष्परिणाम की चेतावनी है। इस में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आप के माध्यम से साधारण मुसलमानों को निर्देश दिया गया है कि सहन शीलता के साथ किसी धमकी पर ध्यान देते हुये नमाज़ अदा करते रहो ताकि इस के द्वारा तुम अल्लाह के समीप हो जाओ। सूरह क़द्र सूरह क़द्र के संक्षिप्त विषय यह सूरह मक्की है, इस में ५ आयतें है । ' इस में सब से पहले बताया गया है कि कुरआन कितनी महान् रात्रि में अवतरित किया गया है। फिर इस शुभ रात की प्रधानता का वर्णन किया गया है और उसे भोर तक सर्वथा शान्ति की रात कहा गया है। इस से अभिप्राय यह बताना है कि जो ग्रन्थ इतनी शुभ रात में उतरा उस का पालन तथा आर न करना बड़े दुर्भाग्य की बात है। हदीस में है कि इस रात की खोज रमज़ान के महीने की दस अन्तिम रातों की विषभ (ताक़) रात में करो। (सहीह बुखारी, तथा सहीह मुस्लिम) दूसरी हदीस में है कि जो क़द्र की रात में ईमान के साथ पुन् प्राप्त करने के लिये नमाज़ पढ़ेगा उस के पहले के पाप क्षमा कर दिये जायेंगे । (सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम) इस सूरह को अधिकांश भाष्य कारों ने मक्की लिखा है। और कुछ ने मनी बताया है। परन्तु इस का प्रसंग मक्की होने के समर्थन में हो। इसी "लैलतुल कद्र" (सम्मानित रात्री) को सूरह दान में "लैलतुन मुबारकह" ( शुभ रात्री ) कहा गया है। यह शुभ रात्रि रमज़ान मुबारक ही की एक रात है। इसी कारण सूरह "बक़रः" में कहा गया है कि रमज़ान मुबारक के महीने में कुरआन शरीफ़ उतारा गया। अर्थात इसी रात्रि में सम्पूर्ण कुरआन उन फ़रिश्तों को दे दिया गया जो वह्यी (प्रकाशना) लाने के लिये नियुक्त थे। फिर २३ वर्ष में आवश्यकता के नुसार कुरआन उतारा जाता रहा । यदि इस का अर्थ यह लिया जाये कि इस के उतारने का आरम्भ रमजान मुबारक से हुआ तो यह भी सहीह है। दोनों में अर्थ यही निकलता है कि कुरआन रमज़ान मुबारक में उतरा। और इसी शुभ रात्री में सूरह अलक़ की प्रथम पाँच आयतें उतारी गईं। निःसंदेह हम ने उस (कुरआन) को "लैलतुल क़द्र" (सम्मानित रात्रि) में उतारा। और तुम क्या जानो कि वह "लैलतुल क़द्र" (सम्मानित रात्रि) क्या है ? लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) हज़ार मास से उत्तम है। उस में (हर काम को पूर्ण करने के लिये ) फ़रश्तेि तथा रुह (जिबरील) अपने पालनहार की आज्ञा से उतरते हैं। वह शान्ति की रात्री है, जो भोर होने तक रहती है। हज़ार मास से उत्तम होने का अर्थ यह है कि इस शुभ रात्रि में इबादत की बहुत बड़ी प्रधानता है। अबु हुरैरह (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत (उदघृत) है कि जो व्यक्ति इस रात में ईमान (सत्य विश्वास) के साथ तथा पुण्य की नीति से इबादत करे तो उस के सभी पहले के पाप क्षमा कर दिये जाते है। (सहीह मुस्लिम) "रुह" से अभिप्रायः जिब्रील अलैहिस्सलाम है। उन की प्रधानता के कारण सभी फ़रिश्तों से उन की अलग चर्चा की गई है। और यह भी बताया गया है कि वे स्वंय नही बल्कि अपने पालनहार की आज्ञा से ही उतरते है। इस का अर्थ यह है कि संध्या से भोर तक यह रात्रि सर्वथा शुभ तथा शान्तिमय होती है। सहीह हदीसों से स्पष्ट होता है कि यह शुभ रात्रि रमजान की अन्तिम दस रातों में से कोई एक रात है। इसलिये हमारे नबी सल्लाल्लाहु अलैहि व सल्लम इन दस रातों को अल्लाह की उपासना में बिताते थे।
दस. एक भक्त को जब वह नमाज़ अदा करे । ग्यारह. भला देखो तो, यदि वह सीधे मार्ग पर हो बारह. या अल्लाह से डरने का आदेश देता हो ? तेरह. और देखो तो, यदि उस ने झुठलाया तथा मुँह फेरा हो ? चौदह. क्या वह नहीं जानता कि अल्लाह उसे देख रहा है? पंद्रह. निश्चय यदि वह नहीं रुकता तो हम उसे माथे के बल घसीटेंगे। सोलह. झूठे और पापी माथे के बल। सत्रह. तो वह अपनी सभा को बुला ले। अट्ठारह. हम भी नरक के फ़रिश्तों को बुलायेंगे। उन्नीस. कदापि उस की बात न सुनो तथा सज्दा करो और मेरे समीप हो जाओ। इन आयतों में उन पर धिक्कार है जो नबी के विरोध पर तुल गये। और इस्लाम और मुसलमानों की राह में रुकावट न डालते और नमाज़ से रोकते है। इन आयतों में स्तय के विरोधी को दुष्परिणाम की चेतावनी है। इस में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आप के माध्यम से साधारण मुसलमानों को निर्देश दिया गया है कि सहन शीलता के साथ किसी धमकी पर ध्यान देते हुये नमाज़ अदा करते रहो ताकि इस के द्वारा तुम अल्लाह के समीप हो जाओ। सूरह क़द्र सूरह क़द्र के संक्षिप्त विषय यह सूरह मक्की है, इस में पाँच आयतें है । ' इस में सब से पहले बताया गया है कि कुरआन कितनी महान् रात्रि में अवतरित किया गया है। फिर इस शुभ रात की प्रधानता का वर्णन किया गया है और उसे भोर तक सर्वथा शान्ति की रात कहा गया है। इस से अभिप्राय यह बताना है कि जो ग्रन्थ इतनी शुभ रात में उतरा उस का पालन तथा आर न करना बड़े दुर्भाग्य की बात है। हदीस में है कि इस रात की खोज रमज़ान के महीने की दस अन्तिम रातों की विषभ रात में करो। दूसरी हदीस में है कि जो क़द्र की रात में ईमान के साथ पुन् प्राप्त करने के लिये नमाज़ पढ़ेगा उस के पहले के पाप क्षमा कर दिये जायेंगे । इस सूरह को अधिकांश भाष्य कारों ने मक्की लिखा है। और कुछ ने मनी बताया है। परन्तु इस का प्रसंग मक्की होने के समर्थन में हो। इसी "लैलतुल कद्र" को सूरह दान में "लैलतुन मुबारकह" कहा गया है। यह शुभ रात्रि रमज़ान मुबारक ही की एक रात है। इसी कारण सूरह "बक़रः" में कहा गया है कि रमज़ान मुबारक के महीने में कुरआन शरीफ़ उतारा गया। अर्थात इसी रात्रि में सम्पूर्ण कुरआन उन फ़रिश्तों को दे दिया गया जो वह्यी लाने के लिये नियुक्त थे। फिर तेईस वर्ष में आवश्यकता के नुसार कुरआन उतारा जाता रहा । यदि इस का अर्थ यह लिया जाये कि इस के उतारने का आरम्भ रमजान मुबारक से हुआ तो यह भी सहीह है। दोनों में अर्थ यही निकलता है कि कुरआन रमज़ान मुबारक में उतरा। और इसी शुभ रात्री में सूरह अलक़ की प्रथम पाँच आयतें उतारी गईं। निःसंदेह हम ने उस को "लैलतुल क़द्र" में उतारा। और तुम क्या जानो कि वह "लैलतुल क़द्र" क्या है ? लैलतुल क़द्र हज़ार मास से उत्तम है। उस में फ़रश्तेि तथा रुह अपने पालनहार की आज्ञा से उतरते हैं। वह शान्ति की रात्री है, जो भोर होने तक रहती है। हज़ार मास से उत्तम होने का अर्थ यह है कि इस शुभ रात्रि में इबादत की बहुत बड़ी प्रधानता है। अबु हुरैरह से रिवायत है कि जो व्यक्ति इस रात में ईमान के साथ तथा पुण्य की नीति से इबादत करे तो उस के सभी पहले के पाप क्षमा कर दिये जाते है। "रुह" से अभिप्रायः जिब्रील अलैहिस्सलाम है। उन की प्रधानता के कारण सभी फ़रिश्तों से उन की अलग चर्चा की गई है। और यह भी बताया गया है कि वे स्वंय नही बल्कि अपने पालनहार की आज्ञा से ही उतरते है। इस का अर्थ यह है कि संध्या से भोर तक यह रात्रि सर्वथा शुभ तथा शान्तिमय होती है। सहीह हदीसों से स्पष्ट होता है कि यह शुभ रात्रि रमजान की अन्तिम दस रातों में से कोई एक रात है। इसलिये हमारे नबी सल्लाल्लाहु अलैहि व सल्लम इन दस रातों को अल्लाह की उपासना में बिताते थे।
जफराबाद जौनपुर। क्षेत्र के बाबा बाजार में मंगलवार की सुबह आग से एक दिव्यांग की पान की गुमटी तथा एक रिहायशी मड़हा जलकर राख हो गया। आग से लगभग एक लाख का सामान जल गया। उक्त गांव निवासी चन्द्रमणि तथा उसकी पत्नी दिव्यांग है। वे अपने बच्चों के साथ उक्त मड़हे में एक पान की गुमटी रखकर रोजी रोटी चलाते है। सुबह गैस सिलेंडर में लीकेज के कारण अचानक आग लग गयी। आग से गुमटी तथा मड़हे में आग लग गयी। दोनों पति पत्नी किसी प्रकार बच्चों के साथ बाहर निकले। आग से पूरी दुकान का सामान,बिस्तर,खाद्यान्न,हजारों रु पए नगद आदि जल गया। दिव्यांग का परिवार का पूरा आशियाना जल गया। अब वे दूसरों की मदद पर निर्भर हो गए है।
जफराबाद जौनपुर। क्षेत्र के बाबा बाजार में मंगलवार की सुबह आग से एक दिव्यांग की पान की गुमटी तथा एक रिहायशी मड़हा जलकर राख हो गया। आग से लगभग एक लाख का सामान जल गया। उक्त गांव निवासी चन्द्रमणि तथा उसकी पत्नी दिव्यांग है। वे अपने बच्चों के साथ उक्त मड़हे में एक पान की गुमटी रखकर रोजी रोटी चलाते है। सुबह गैस सिलेंडर में लीकेज के कारण अचानक आग लग गयी। आग से गुमटी तथा मड़हे में आग लग गयी। दोनों पति पत्नी किसी प्रकार बच्चों के साथ बाहर निकले। आग से पूरी दुकान का सामान,बिस्तर,खाद्यान्न,हजारों रु पए नगद आदि जल गया। दिव्यांग का परिवार का पूरा आशियाना जल गया। अब वे दूसरों की मदद पर निर्भर हो गए है।
रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रायपुर सेंट्रल जेल में रविवार को राज्य स्तरीय वृहद जेल लोक अदालत लगी। इस लोक अदालत में सुनवाई के लिए कुल 107 प्रकरण रखे गए, जिनमें से 66 प्रकरणों का मौके पर ही निराकरण करते हुए 66 बंदियों की रिहाई का आदेश न्यायाधीश ने दिया। जेल से रिहा होने का आदेश सुनते ही बंदियों के आंखों से आंसू छलक उठे। देर शाम को सभी 66 बंदियों को जेल की चारदीवारी से हमेशा के लिए आजादी मिल गई। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर की ओर से रायपुर सेंट्रल जेल में राज्य स्तरीय वृहद जेल लोक अदालत लगाई गई। इसका शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष शर्मा ने दीप प्रज्जवलित करके किया। जेल लोक अदालत का शुभारंभ के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के अध्यक्ष संतोष शर्मा ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अभिरक्षा में अधिक समय से जेल में बंद बंदियों के प्रकरणांे का सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के जरिए जल्द से जल्द निराकरण करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बंदियों से यह भी कहा कि केवल अपराध करना किसी व्यक्ति के साथ संवैधानिक और कानूनी रूप से उपेक्षित व्यवहार करना अनुज्ञात नहीं करता है। हमारे देश का कानून और संविधान यह कहता है कि जेल बंदियों के भी मौलिक और कानूनी अधिकार है, जिनकी सुरक्षा के लिए जिला न्यायालय, विधिक सेवा प्राधिकरण लगातार काम कर रहा है। आप लोगों में से कई ऐसे हैं, जो अपने मामले की पैरवी के लिए अधिवक्ता की नियुक्ति, जमानत राशि की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आपकी हरसंभव सहायता करने को तैयार है। आपके मामले को सरल तरीके से निपटारा करने विधिक सहायता दी जाएगी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की यह अभिनव पहल है कि जेलों में क्षमता से अधिक रखे गए बंदियों की संख्यां को कम करने के लिए कम अवधि की सजा वाले मामलों को चिह्नांकित कर इसका निराकरण करने जेल लोक अदालत का आयोजन किया जाता है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेंद्र वासनीकर ने कहा कि प्रत्येक कार्य दिवस के शनिवार को भी जेल लोक अदालत का आयोजन होता है, जिसमें कोई भी बंदी अपने मामले का निराकरण करा सकता है। जेल लोक अदालत के माध्यम से केस का निराकरण करने के लिए आवेदन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में भेज सकते हैं। प्राधिकरण ऐसे मामलों में निश्शुल्क सेवा देती है। जेल अधीक्षक योगेश क्षत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से बंदियों के हित में जेल प्रशासन काम कर रहा है। बंदियों की अपील जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से जिला स्तर से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचाने का काम कर रहे हंै। लोक अदालत में रेलवे मजिस्ट्रेट निर्जेश प्रताप सिंह, वरिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश गिरीश कुमार मंडावी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रवीण मिश्रा, न्यायिक मजिस्ट्रेट शाश्वत दुबे, सिद्धार्थ आनंद सोनी समेत जेल के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।
रायपुर । रायपुर सेंट्रल जेल में रविवार को राज्य स्तरीय वृहद जेल लोक अदालत लगी। इस लोक अदालत में सुनवाई के लिए कुल एक सौ सात प्रकरण रखे गए, जिनमें से छयासठ प्रकरणों का मौके पर ही निराकरण करते हुए छयासठ बंदियों की रिहाई का आदेश न्यायाधीश ने दिया। जेल से रिहा होने का आदेश सुनते ही बंदियों के आंखों से आंसू छलक उठे। देर शाम को सभी छयासठ बंदियों को जेल की चारदीवारी से हमेशा के लिए आजादी मिल गई। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर की ओर से रायपुर सेंट्रल जेल में राज्य स्तरीय वृहद जेल लोक अदालत लगाई गई। इसका शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष शर्मा ने दीप प्रज्जवलित करके किया। जेल लोक अदालत का शुभारंभ के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के अध्यक्ष संतोष शर्मा ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अभिरक्षा में अधिक समय से जेल में बंद बंदियों के प्रकरणांे का सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के जरिए जल्द से जल्द निराकरण करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बंदियों से यह भी कहा कि केवल अपराध करना किसी व्यक्ति के साथ संवैधानिक और कानूनी रूप से उपेक्षित व्यवहार करना अनुज्ञात नहीं करता है। हमारे देश का कानून और संविधान यह कहता है कि जेल बंदियों के भी मौलिक और कानूनी अधिकार है, जिनकी सुरक्षा के लिए जिला न्यायालय, विधिक सेवा प्राधिकरण लगातार काम कर रहा है। आप लोगों में से कई ऐसे हैं, जो अपने मामले की पैरवी के लिए अधिवक्ता की नियुक्ति, जमानत राशि की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आपकी हरसंभव सहायता करने को तैयार है। आपके मामले को सरल तरीके से निपटारा करने विधिक सहायता दी जाएगी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की यह अभिनव पहल है कि जेलों में क्षमता से अधिक रखे गए बंदियों की संख्यां को कम करने के लिए कम अवधि की सजा वाले मामलों को चिह्नांकित कर इसका निराकरण करने जेल लोक अदालत का आयोजन किया जाता है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेंद्र वासनीकर ने कहा कि प्रत्येक कार्य दिवस के शनिवार को भी जेल लोक अदालत का आयोजन होता है, जिसमें कोई भी बंदी अपने मामले का निराकरण करा सकता है। जेल लोक अदालत के माध्यम से केस का निराकरण करने के लिए आवेदन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में भेज सकते हैं। प्राधिकरण ऐसे मामलों में निश्शुल्क सेवा देती है। जेल अधीक्षक योगेश क्षत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से बंदियों के हित में जेल प्रशासन काम कर रहा है। बंदियों की अपील जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से जिला स्तर से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचाने का काम कर रहे हंै। लोक अदालत में रेलवे मजिस्ट्रेट निर्जेश प्रताप सिंह, वरिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश गिरीश कुमार मंडावी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रवीण मिश्रा, न्यायिक मजिस्ट्रेट शाश्वत दुबे, सिद्धार्थ आनंद सोनी समेत जेल के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।
[ काव्य में बेदनामाधुर्य व्यक्तिगत वेदना के एक सजज छोर को पकड़कर सर्वात्म के विद्वानंदमय विषाद के इस छोर को भी करतलगत कर लिया जहाँ उनी व्यष्टि दिव्य समष्टि का स्त्रीय स्वरूप बन जाती है । इस चरम अनुभूति की परिणति में इस परम सत्य की तदाकारता में विलीन होकर महादेवीजी क्यों न अपने प्रियतम की समता करें ? उस 'प्रियतम के समय गुण उनमें गये : उमड़ता मेरे हों में बरसता घनश्याम में जो; अधर में मेरे खिला नव इंद्रधनु अभिराम जो : बोलता मुझमे वही जग मौन में जिसको बुलाता ! अपने ससीम व्यक्तित्व को 'प्रिय' के असीम व्यक्तित्व में लय करके उनमें कैसा अभाव कौनस' 'पूर्ण अवशेष रह गया है फिर क्यों" की करुणा सदय के लिए प्राकुल होवें जैन न विच की अधरने छलकनी मुसकान सकान में प्रकृति के है और जिन भाँनि उसकशि विवाद चरचर की वेदना का उत्म स्थान है. इसी ति क्या उनके भावों की परियाप्ति संभृति के आवर्तन परिवर्तन में नहीं ? जीवन के चपल नयों के हिपेंड पर नहीं ? जीवन के अंतस्नल में निहिन सत्य तो नृजनात्मक है
[ काव्य में बेदनामाधुर्य व्यक्तिगत वेदना के एक सजज छोर को पकड़कर सर्वात्म के विद्वानंदमय विषाद के इस छोर को भी करतलगत कर लिया जहाँ उनी व्यष्टि दिव्य समष्टि का स्त्रीय स्वरूप बन जाती है । इस चरम अनुभूति की परिणति में इस परम सत्य की तदाकारता में विलीन होकर महादेवीजी क्यों न अपने प्रियतम की समता करें ? उस 'प्रियतम के समय गुण उनमें गये : उमड़ता मेरे हों में बरसता घनश्याम में जो; अधर में मेरे खिला नव इंद्रधनु अभिराम जो : बोलता मुझमे वही जग मौन में जिसको बुलाता ! अपने ससीम व्यक्तित्व को 'प्रिय' के असीम व्यक्तित्व में लय करके उनमें कैसा अभाव कौनस' 'पूर्ण अवशेष रह गया है फिर क्यों" की करुणा सदय के लिए प्राकुल होवें जैन न विच की अधरने छलकनी मुसकान सकान में प्रकृति के है और जिन भाँनि उसकशि विवाद चरचर की वेदना का उत्म स्थान है. इसी ति क्या उनके भावों की परियाप्ति संभृति के आवर्तन परिवर्तन में नहीं ? जीवन के चपल नयों के हिपेंड पर नहीं ? जीवन के अंतस्नल में निहिन सत्य तो नृजनात्मक है
मुंबई, 22 अप्रैल । अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने आगामी फिल्म सरदार का ग्रैंडसन के सेट पर एक ट्रक चलाया। रकुल ने कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से ड्राइविंग करना बहुत पसंद करती हूं और पूरी प्रक्रिया बहुत मजेदार थी जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। ट्रक चलाना आसान नहीं है, लेकिन मैं इसे आत्मविश्वास से कर रही थी। उसने कहा, हमारे पास एक ट्रक ड्राइवर था जो हमें ट्रैंड करने के लिए सेट था कि बड़े ट्रक को कैसे चलाया जाए, जिससे मुझे इसे चलाने में मदद मिली। सेट पर, लोग मेरे ड्राइविंग कौशल से आश्चर्यचकित थे! यह मेरे लिए जीवन भर के अनुभवों में से एक था। अमृत सिंह (अर्जुन कपूर द्वारा अभिनीत) और उनकी दादी रूपिंदर कौर (नीना गुप्ता) के बीच के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती एक कॉमेडी फिल्म है, जिसके आलौकिक व्यवहार ने सभी को पागल कर दिया। राकुल शांत और समझदार लड़की राधा का किरदार निभाती है। सरदार का ग्रैंडसन काश्वी नायर द्वारा निर्देशित है और इसमें जॉन अब्राहम, अदिति राव हैदरी, कंवलजीत सिंह और कुमुद मिश्रा भी हैं। यह फिल्म 18 मई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
मुंबई, बाईस अप्रैल । अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने आगामी फिल्म सरदार का ग्रैंडसन के सेट पर एक ट्रक चलाया। रकुल ने कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से ड्राइविंग करना बहुत पसंद करती हूं और पूरी प्रक्रिया बहुत मजेदार थी जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। ट्रक चलाना आसान नहीं है, लेकिन मैं इसे आत्मविश्वास से कर रही थी। उसने कहा, हमारे पास एक ट्रक ड्राइवर था जो हमें ट्रैंड करने के लिए सेट था कि बड़े ट्रक को कैसे चलाया जाए, जिससे मुझे इसे चलाने में मदद मिली। सेट पर, लोग मेरे ड्राइविंग कौशल से आश्चर्यचकित थे! यह मेरे लिए जीवन भर के अनुभवों में से एक था। अमृत सिंह और उनकी दादी रूपिंदर कौर के बीच के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती एक कॉमेडी फिल्म है, जिसके आलौकिक व्यवहार ने सभी को पागल कर दिया। राकुल शांत और समझदार लड़की राधा का किरदार निभाती है। सरदार का ग्रैंडसन काश्वी नायर द्वारा निर्देशित है और इसमें जॉन अब्राहम, अदिति राव हैदरी, कंवलजीत सिंह और कुमुद मिश्रा भी हैं। यह फिल्म अट्ठारह मई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
इमरान ने आरोप लगाया कि अगर 80 लाख यूरोपियन, जेविस या अमेरिकन घरों में कैद होते तो वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया दूसरी होती। उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी पर कश्मीर से प्रतिबंध हटाने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है। ' पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का 'मिशन कश्मीर' फेल हो गया है। उन्होंने मंगलवार को निराशा व्यक्त करते हुए अपनी हार स्वीकार कर ली। इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सच कहूं तो मैं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से थोड़ा निराश हूं। इमरान ने आरोप लगाया कि अगर 80 लाख यूरोपियन, जेविस या अमेरिकन घरों में कैद होते तो वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया दूसरी होती। उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी पर कश्मीर से प्रतिबंध हटाने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है। ' हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जब इमरान से पूछा गया कि अगर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय प्रतिक्रिया नहीं देता तो उनके पास क्या रास्ते हैं? इस सवाल के जवाब में इमरान खान ने कहा, 'भारत पर हमले के अलावा और क्या विकल्प हो सकता है। हम लड़ाई शुरू करने से पहले मामले के मामले को सुलझाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। ' 'मिशन कश्मीर' के तहत इमरान खान और उनके प्रतिनिधि मंडल ने कमोबेश हर राष्ट्र प्रमुख से मुलाकात और फोरम में कश्मीर का मुद्दा उठाया। लेकिन सिर्फ ट्रंप ने उनके आमंत्रण पर मध्यस्थता की बात कही। अन्य देशों ने उनकी बात पर ज्यादा तवज्जो नहीं दी। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ट्रंप और खान ने सोमवार को मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्ते, कश्मीर मुद्दे तथा लड़खड़ाती अफगान शांति प्रक्रिया पर चर्चा की। भारत सरकार की ओर से जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को खत्म करने से नाराज पाकिस्तानी मीडिया ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान घाटी की स्थिति को लेकर ट्रंप पर सवालों की बौछार कर दी।
इमरान ने आरोप लगाया कि अगर अस्सी लाख यूरोपियन, जेविस या अमेरिकन घरों में कैद होते तो वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया दूसरी होती। उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी पर कश्मीर से प्रतिबंध हटाने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है। ' पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का 'मिशन कश्मीर' फेल हो गया है। उन्होंने मंगलवार को निराशा व्यक्त करते हुए अपनी हार स्वीकार कर ली। इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सच कहूं तो मैं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से थोड़ा निराश हूं। इमरान ने आरोप लगाया कि अगर अस्सी लाख यूरोपियन, जेविस या अमेरिकन घरों में कैद होते तो वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया दूसरी होती। उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी पर कश्मीर से प्रतिबंध हटाने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है। ' हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जब इमरान से पूछा गया कि अगर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय प्रतिक्रिया नहीं देता तो उनके पास क्या रास्ते हैं? इस सवाल के जवाब में इमरान खान ने कहा, 'भारत पर हमले के अलावा और क्या विकल्प हो सकता है। हम लड़ाई शुरू करने से पहले मामले के मामले को सुलझाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। ' 'मिशन कश्मीर' के तहत इमरान खान और उनके प्रतिनिधि मंडल ने कमोबेश हर राष्ट्र प्रमुख से मुलाकात और फोरम में कश्मीर का मुद्दा उठाया। लेकिन सिर्फ ट्रंप ने उनके आमंत्रण पर मध्यस्थता की बात कही। अन्य देशों ने उनकी बात पर ज्यादा तवज्जो नहीं दी। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ट्रंप और खान ने सोमवार को मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्ते, कश्मीर मुद्दे तथा लड़खड़ाती अफगान शांति प्रक्रिया पर चर्चा की। भारत सरकार की ओर से जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को खत्म करने से नाराज पाकिस्तानी मीडिया ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान घाटी की स्थिति को लेकर ट्रंप पर सवालों की बौछार कर दी।
2 मार्च, गुरुवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, लेकिन इस दिन व्रत नहीं किया जाएगा। गुरुवार को पहले आर्द्रा नक्षत्र होने से काण नाम का अशुभ योग और इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र होने से सिद्धि नाम का शुभ योग इस दिन बन रहा है। मेष राशिफल (Aries Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि आज सितारों की चाल आपके पक्ष में रहेगी लेकिन कुछ गड़बड़ी हो सकती है। आज आप किसी चिंता में डूबे रहेंगे और इसलिए आपके जीवन में निराशा और सुस्ती रहेगी, लेकिन दोपहर के बाद आपकी ऊर्जा लौट आएगी और ख़र्चों में कमी और चिंताएँ कम होंगी। आप खूब मेहनत करेंगे। परिवार में चल रहा तनाव कम होगा। लव लाइफ में दिक्कतें आएंगी। शादीशुदा लोगों को अपने जीवन साथी का साथ और भरोसा महसूस होगा और साथ में घूमने फिरने जाएंगे। वृषभ राशिफल (Taurus Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा क्योंकि ग्रहों की चाल आपका साथ देगी। आपका व्यवहार अच्छा रहेगा, जो लोगों को आकर्षित करेगा। किसी बात को लेकर परिवार के बड़ों से चर्चा करें। किसी का बिगड़ता स्वास्थ्य भी आपकी चिंता का कारण बनेगा। प्रेम जीवन जीने वालों को भी आज सुख मिलेगा और प्रेम में नई योजनाएं बनाएंगे। परिवार के सदस्य आपका सहयोग करेंगे। वे आपकी आय बढ़ाने में योगदान देंगे। शादीशुदा लोगों को आज अपने जीवनसाथी के लिए कुछ करना होगा क्योंकि वह कुछ सुस्त महसूस कर रहे हैं। मिथुन राशिफल (Gemini Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि सितारे आज आपको कुछ नया सिखाएंगे और आप कुछ नई योजनाओं पर काम करेंगे। आपको अपने काम में पूरी तरह से व्यस्त देखकर आपके साथ काम करने वाले लोग भी आपकी सराहना करेंगे। यदि परिवार के सदस्य आपके काम या व्यापार में सहयोग करते हैं तो आपको बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे। विदेश से आपको लाभ होगा। खर्चों में बढ़ोतरी जरूर होगी, लेकिन आमदनी भी ठीक-ठाक रहेगी। कर्क राशिफल (Cancer Daily horoscope) गणेशजी कहते हैं कि आज के दिन आप परिवार के छोटे सदस्यों के साथ काफी समय व्यतीत करेंगे। आप उनके दिल का हाल फोन पर उनके दोस्तों को भी सुनाएंगे। स्वास्थ्य भी मजबूत रहेगा। कार्यों में सफलता मिलेगी। नौकरी में चल रही दिक्कतों से राहत मिलेगी। अगर आप व्यापार करते हैं तो आपको सुखद परिणाम मिलेंगे। पारिवारिक माहौल भी अच्छा रहेगा और आपकी आमदनी भी अच्छी होगी। आज आप अपने लिए समय निकालेंगे और मन हल्का महसूस करेंगे। सिंह राशिफल (Leo Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि ग्रहों की स्थिति आज आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। दोपहर तक आप काफी आत्मविश्वास से काम लेंगे, लेकिन दोपहर बाद आपके काम में कुछ दिक्कतें आएंगी। हालांकि आप अपने प्रयासों से हारी हुई बाजी जीतने में सफल रहेंगे। व्यापार में भी आज का दिन बहुत ही फायदेमंद रहेगा। नौकरी के सिलसिले में आपको सुखद परिणाम मिलेंगे। बेवजह की बातें करके अपना निजी जीवन खराब करने से बचें। आपके स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है, लेकिन आपके प्रिय का साथ आपको प्रेम जीवन में मजबूती देगा और आप रिश्ते को लेकर अच्छा महसूस करेंगे। कन्या राशिफल (Virgo Daily horoscope) गणेशजी कहते हैं कि आज आप शाम के समय उत्तम भोजन का आनंद उठाएंगे। काम के सिलसिले में अपनी बुद्धि का पूरा इस्तेमाल करेंगे और अपनी चातुर्य से सबको अपना मुरीद बना लेंगे। व्यापार के मामले में भी दिन प्रगतिशील रहेगा। परिवार में कुछ दिक्कतें आएंगी लेकिन शादीशुदा लोगों का घरेलू जीवन सुखमय रहेगा। लव लाइफ में कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। तुला राशिफल(Libra Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि आज ग्रह आपके पक्ष में रहेंगे जिससे आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। गृहस्थ जीवन में नजदीकियां बढ़ेंगी। आप अपने जीवन साथी के साथ काफी रोमांटिक समय बिताएंगे। पारिवारिक जीवन में तनाव बढ़ता रहेगा, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। प्रेम जीवन जीने वालों को आज कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। अपने तेज दिमाग और चतुराई के इस्तेमाल से आपको व्यापार में अच्छा मुनाफ़ा मिलेगा। वृश्चिक राशिफल (Scorpio Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि यदि आपके भाग्य का सितारा बुलंद है तो आप कम मेहनत में कई काम पूरे कर पाएंगे। काम के सिलसिले में जमकर मेहनत करें और आज आपको अच्छे परिणाम की प्राप्ति होगी। आपको कोई अच्छा जॉब ऑफर मिल सकता है। कारोबार के लिहाज से दिन अच्छा रहेगा। दांपत्य जीवन में भी प्रेम बढ़ेगा और परिवार भी तनाव से बाहर आकर शांति की राह पर आगे बढ़ेगा। प्रेम जीवन जीने वालों को आज अपने प्रिय के मन की बात सुननी होगी अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है। धनु राशिफल (Sagittarius Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि आज आप खुद पर ज्यादा ध्यान देंगे और अपने लिए कुछ नई योजनाएं बनाएंगे। अपनी कुछ आदतों को बदलने के बारे में सोचें जिससे अच्छे परिणाम मिलेंगे। अपने परिवार का भी पूरा ध्यान रखेंगे और घर में ही खर्च करेंगे। पारिवारिक वातावरण अच्छा रहेगा। वैवाहिक जीवन में तनाव से राहत मिलेगी। प्रेम जीवन जीने वालों के लिए आज का दिन सामान्य रहेगा। व्यापार को लेकर किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचें और कोई भी बड़ा काम आज हाथ में न लें। मकर राशिफल (Capricorn Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि आज के दिन आप मानसिक रूप से मजबूत रहेंगे और पूजा-पाठ के कार्यों में मन लगाएंगे। आपको मानसिक शांति की अनुभूति होगी। छोटी-छोटी बातों पर आपको गुस्सा भी आ सकता है, इसलिए सावधान रहें। गृहस्थ जीवन में स्थितियां उतार-चढ़ाव से भरी रहेंगी, लेकिन प्रेम जीवन जीने वालों को आज बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे। नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन अच्छा है। आज आपको अपनी अच्छाई का लाभ मिलेगा और आपके रुके हुए काम बनेंगे। कुंभ राशिफल (Aquarius Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि दिन की शुरुआत में आप व्यर्थ की चिंताओं से परेशान रहेंगे। इससे आपकी सेहत भी गिरेगी और आप कमजोर महसूस करेंगे। कामकाज में रुकावट आने से मन खिन्न रहेगा, लेकिन दोपहर बाद स्थिति विपरीत होगी और आपका मानसिक तनाव भी कुछ कम होगा। आपके परिवार के सदस्य भी आपका समर्थन करेंगे। खर्चे तेज रहेंगे लेकिन आमदनी भी अच्छी रहेगी। लव लाइफ सामान्य रहेगी। प्रिय से मिलने की योजना बनेगी। मीन राशिफल (Pisces Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि आज का दिन ग्रहों की कृपा से आपके पक्ष में रहेगा। आप अपने जीवन साथी के साथ अच्छा समय बिताएंगे और अपने मन की सारी बातें उनसे कह देंगे, जिससे रिश्ते में अपनेपन का एहसास होगा। यह भी जानने की कोशिश करें कि उनके मन में क्या है। अगर आप पेशा करते हैं तो आज आपको अच्छा मुनाफा मिल सकता है। कारण आमदनी में वृद्धि होने से प्रसन्नता रहेगी। परिवार के छोटों के साथ आप प्यार से पेश आएंगे। प्रेम जीवन में प्रिय से मनमुटाव की संभावना रहेगी। Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
दो मार्च, गुरुवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, लेकिन इस दिन व्रत नहीं किया जाएगा। गुरुवार को पहले आर्द्रा नक्षत्र होने से काण नाम का अशुभ योग और इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र होने से सिद्धि नाम का शुभ योग इस दिन बन रहा है। मेष राशिफल गणेशजी कहते हैं कि आज सितारों की चाल आपके पक्ष में रहेगी लेकिन कुछ गड़बड़ी हो सकती है। आज आप किसी चिंता में डूबे रहेंगे और इसलिए आपके जीवन में निराशा और सुस्ती रहेगी, लेकिन दोपहर के बाद आपकी ऊर्जा लौट आएगी और ख़र्चों में कमी और चिंताएँ कम होंगी। आप खूब मेहनत करेंगे। परिवार में चल रहा तनाव कम होगा। लव लाइफ में दिक्कतें आएंगी। शादीशुदा लोगों को अपने जीवन साथी का साथ और भरोसा महसूस होगा और साथ में घूमने फिरने जाएंगे। वृषभ राशिफल गणेशजी कहते हैं कि आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा क्योंकि ग्रहों की चाल आपका साथ देगी। आपका व्यवहार अच्छा रहेगा, जो लोगों को आकर्षित करेगा। किसी बात को लेकर परिवार के बड़ों से चर्चा करें। किसी का बिगड़ता स्वास्थ्य भी आपकी चिंता का कारण बनेगा। प्रेम जीवन जीने वालों को भी आज सुख मिलेगा और प्रेम में नई योजनाएं बनाएंगे। परिवार के सदस्य आपका सहयोग करेंगे। वे आपकी आय बढ़ाने में योगदान देंगे। शादीशुदा लोगों को आज अपने जीवनसाथी के लिए कुछ करना होगा क्योंकि वह कुछ सुस्त महसूस कर रहे हैं। मिथुन राशिफल गणेशजी कहते हैं कि सितारे आज आपको कुछ नया सिखाएंगे और आप कुछ नई योजनाओं पर काम करेंगे। आपको अपने काम में पूरी तरह से व्यस्त देखकर आपके साथ काम करने वाले लोग भी आपकी सराहना करेंगे। यदि परिवार के सदस्य आपके काम या व्यापार में सहयोग करते हैं तो आपको बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे। विदेश से आपको लाभ होगा। खर्चों में बढ़ोतरी जरूर होगी, लेकिन आमदनी भी ठीक-ठाक रहेगी। कर्क राशिफल गणेशजी कहते हैं कि आज के दिन आप परिवार के छोटे सदस्यों के साथ काफी समय व्यतीत करेंगे। आप उनके दिल का हाल फोन पर उनके दोस्तों को भी सुनाएंगे। स्वास्थ्य भी मजबूत रहेगा। कार्यों में सफलता मिलेगी। नौकरी में चल रही दिक्कतों से राहत मिलेगी। अगर आप व्यापार करते हैं तो आपको सुखद परिणाम मिलेंगे। पारिवारिक माहौल भी अच्छा रहेगा और आपकी आमदनी भी अच्छी होगी। आज आप अपने लिए समय निकालेंगे और मन हल्का महसूस करेंगे। सिंह राशिफल गणेशजी कहते हैं कि ग्रहों की स्थिति आज आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। दोपहर तक आप काफी आत्मविश्वास से काम लेंगे, लेकिन दोपहर बाद आपके काम में कुछ दिक्कतें आएंगी। हालांकि आप अपने प्रयासों से हारी हुई बाजी जीतने में सफल रहेंगे। व्यापार में भी आज का दिन बहुत ही फायदेमंद रहेगा। नौकरी के सिलसिले में आपको सुखद परिणाम मिलेंगे। बेवजह की बातें करके अपना निजी जीवन खराब करने से बचें। आपके स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है, लेकिन आपके प्रिय का साथ आपको प्रेम जीवन में मजबूती देगा और आप रिश्ते को लेकर अच्छा महसूस करेंगे। कन्या राशिफल गणेशजी कहते हैं कि आज आप शाम के समय उत्तम भोजन का आनंद उठाएंगे। काम के सिलसिले में अपनी बुद्धि का पूरा इस्तेमाल करेंगे और अपनी चातुर्य से सबको अपना मुरीद बना लेंगे। व्यापार के मामले में भी दिन प्रगतिशील रहेगा। परिवार में कुछ दिक्कतें आएंगी लेकिन शादीशुदा लोगों का घरेलू जीवन सुखमय रहेगा। लव लाइफ में कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। तुला राशिफल गणेशजी कहते हैं कि आज ग्रह आपके पक्ष में रहेंगे जिससे आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। गृहस्थ जीवन में नजदीकियां बढ़ेंगी। आप अपने जीवन साथी के साथ काफी रोमांटिक समय बिताएंगे। पारिवारिक जीवन में तनाव बढ़ता रहेगा, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। प्रेम जीवन जीने वालों को आज कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। अपने तेज दिमाग और चतुराई के इस्तेमाल से आपको व्यापार में अच्छा मुनाफ़ा मिलेगा। वृश्चिक राशिफल गणेशजी कहते हैं कि यदि आपके भाग्य का सितारा बुलंद है तो आप कम मेहनत में कई काम पूरे कर पाएंगे। काम के सिलसिले में जमकर मेहनत करें और आज आपको अच्छे परिणाम की प्राप्ति होगी। आपको कोई अच्छा जॉब ऑफर मिल सकता है। कारोबार के लिहाज से दिन अच्छा रहेगा। दांपत्य जीवन में भी प्रेम बढ़ेगा और परिवार भी तनाव से बाहर आकर शांति की राह पर आगे बढ़ेगा। प्रेम जीवन जीने वालों को आज अपने प्रिय के मन की बात सुननी होगी अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है। धनु राशिफल गणेशजी कहते हैं कि आज आप खुद पर ज्यादा ध्यान देंगे और अपने लिए कुछ नई योजनाएं बनाएंगे। अपनी कुछ आदतों को बदलने के बारे में सोचें जिससे अच्छे परिणाम मिलेंगे। अपने परिवार का भी पूरा ध्यान रखेंगे और घर में ही खर्च करेंगे। पारिवारिक वातावरण अच्छा रहेगा। वैवाहिक जीवन में तनाव से राहत मिलेगी। प्रेम जीवन जीने वालों के लिए आज का दिन सामान्य रहेगा। व्यापार को लेकर किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचें और कोई भी बड़ा काम आज हाथ में न लें। मकर राशिफल गणेशजी कहते हैं कि आज के दिन आप मानसिक रूप से मजबूत रहेंगे और पूजा-पाठ के कार्यों में मन लगाएंगे। आपको मानसिक शांति की अनुभूति होगी। छोटी-छोटी बातों पर आपको गुस्सा भी आ सकता है, इसलिए सावधान रहें। गृहस्थ जीवन में स्थितियां उतार-चढ़ाव से भरी रहेंगी, लेकिन प्रेम जीवन जीने वालों को आज बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे। नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन अच्छा है। आज आपको अपनी अच्छाई का लाभ मिलेगा और आपके रुके हुए काम बनेंगे। कुंभ राशिफल गणेशजी कहते हैं कि दिन की शुरुआत में आप व्यर्थ की चिंताओं से परेशान रहेंगे। इससे आपकी सेहत भी गिरेगी और आप कमजोर महसूस करेंगे। कामकाज में रुकावट आने से मन खिन्न रहेगा, लेकिन दोपहर बाद स्थिति विपरीत होगी और आपका मानसिक तनाव भी कुछ कम होगा। आपके परिवार के सदस्य भी आपका समर्थन करेंगे। खर्चे तेज रहेंगे लेकिन आमदनी भी अच्छी रहेगी। लव लाइफ सामान्य रहेगी। प्रिय से मिलने की योजना बनेगी। मीन राशिफल गणेशजी कहते हैं कि आज का दिन ग्रहों की कृपा से आपके पक्ष में रहेगा। आप अपने जीवन साथी के साथ अच्छा समय बिताएंगे और अपने मन की सारी बातें उनसे कह देंगे, जिससे रिश्ते में अपनेपन का एहसास होगा। यह भी जानने की कोशिश करें कि उनके मन में क्या है। अगर आप पेशा करते हैं तो आज आपको अच्छा मुनाफा मिल सकता है। कारण आमदनी में वृद्धि होने से प्रसन्नता रहेगी। परिवार के छोटों के साथ आप प्यार से पेश आएंगे। प्रेम जीवन में प्रिय से मनमुटाव की संभावना रहेगी। Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
कोरोना महामारी के बीच खेल की दुनिया से एक विवाद सामने आया है. यह विवाद इतना आगे बढ़ गया कि खुद खेल मंत्री को इसे सुलझाने के लिए बीच में आना पड़ा. राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के कामकाज में मंत्रालय के दखल की आईओए की शिकायत के बाद तनाव कम करने की कवायद में खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संस्थागत तालमेल के रास्ते में व्यक्तियों का अवांछित आचरण बाधा नहीं बनना चाहिए। रिजिजू ने कहा कि आईओए अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने मीडिया रिपोर्ट उनकी जानकारी में लाई है जिसमें कुछ एनएसएफ ने चिंता जताई है कि मंत्रालय और साई उनके कामकाज पर नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं। Chhattisgarh: सर्दी-जुकाम या गंभीर श्वसन बीमारी है तो हो जाएं सावधान! होगा स्वास्थ्य परीक्षण. . रिजिजू ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों के बीच नियमित मशविरा और चर्चा जरूरी है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आपसी तालमेल और यह भावना बाधित नहीं होना चाहिए। खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया ने एनएसएफ के आरोपों पर कहा था कि दखल के आरोप लगाने से पहले उन्हें सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाएं छोड़ देनी चाहिए। इस मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब बत्रा ने साइ की टॉप्स (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) के सीईओ राजेश राजागोपालन पर महासंघों के कामकाज में दखल देने का आरोप लगाया। रिजिजू ने हालांकि कहा कि सरकार का राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज में दखल देने का कोई इरादा नहीं है। रिजिजू ने कहा कि आईओए, मंत्रालय और राष्ट्रीय खेल महासंघों का साझा लक्ष्य देश में खेलों के ढांचे को बेहतर बनाकर भारत को खेल महाशक्ति बनाना है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए और इसके लिए सबके बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए।
कोरोना महामारी के बीच खेल की दुनिया से एक विवाद सामने आया है. यह विवाद इतना आगे बढ़ गया कि खुद खेल मंत्री को इसे सुलझाने के लिए बीच में आना पड़ा. राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज में मंत्रालय के दखल की आईओए की शिकायत के बाद तनाव कम करने की कवायद में खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संस्थागत तालमेल के रास्ते में व्यक्तियों का अवांछित आचरण बाधा नहीं बनना चाहिए। रिजिजू ने कहा कि आईओए अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने मीडिया रिपोर्ट उनकी जानकारी में लाई है जिसमें कुछ एनएसएफ ने चिंता जताई है कि मंत्रालय और साई उनके कामकाज पर नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं। Chhattisgarh: सर्दी-जुकाम या गंभीर श्वसन बीमारी है तो हो जाएं सावधान! होगा स्वास्थ्य परीक्षण. . रिजिजू ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों के बीच नियमित मशविरा और चर्चा जरूरी है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आपसी तालमेल और यह भावना बाधित नहीं होना चाहिए। खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया ने एनएसएफ के आरोपों पर कहा था कि दखल के आरोप लगाने से पहले उन्हें सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाएं छोड़ देनी चाहिए। इस मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब बत्रा ने साइ की टॉप्स के सीईओ राजेश राजागोपालन पर महासंघों के कामकाज में दखल देने का आरोप लगाया। रिजिजू ने हालांकि कहा कि सरकार का राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज में दखल देने का कोई इरादा नहीं है। रिजिजू ने कहा कि आईओए, मंत्रालय और राष्ट्रीय खेल महासंघों का साझा लक्ष्य देश में खेलों के ढांचे को बेहतर बनाकर भारत को खेल महाशक्ति बनाना है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए और इसके लिए सबके बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए।
सूत्रों ने बताया है कि 10वीं में 19 स्किल बेस्ड सब्जेक्ट और 12वीं में 39 सब्जेक्ट को शामिल किया जाएगा। कहा जा रहा है कि न्यू सब्जेक्ट के कारण एमपी बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के स्टूडेंट का ऑल राउंड डेवलपमेंट होगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा एक बार फिर से नए सत्र 2022-23 के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें, कि मध्य प्रदेश बोर्ड 10वीं और 12वीं सहित व्यावसायिक परीक्षाओं के प्रवेश और परीक्षा को लेकर नवीन दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। माशिमं की ओर से निर्देश के अनुसार सभी संस्थानों को आदेश की कार्रवाई पूर्ण करने के विशेष निर्देश प्रदान किए गए हैं। जानकारी के अनुसार माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर से आदेश जारी किए गए हैं। इस पत्र के मुताबिक सभी छात्र-छात्राओं को भाषा विषय में हिंदी और अंग्रेजी लेना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा शेष भाषा में वे तृतीय भाषा के रूप में किसी एक भाषा का चयन कर सकेंगे। साथ में ही माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि कौशल आधारित विषय का चयन तृतीय भाषा के स्थान पर किया जा सकेगा। इसके अलावा कौशल आधारित विषय का चयन करने वाले विद्यार्थियों को एक महत्वपूर्ण विषय का ध्यान रखना बेहद अनिवार्य है। माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा आदेश जारी कर सभी मान्यता प्राप्त संस्थान को उपरोक्त कार्रवाई सुनिश्चित करने सहित विशेष निर्देश का यथावत ध्यान रखने के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
सूत्रों ने बताया है कि दसवीं में उन्नीस स्किल बेस्ड सब्जेक्ट और बारहवीं में उनतालीस सब्जेक्ट को शामिल किया जाएगा। कहा जा रहा है कि न्यू सब्जेक्ट के कारण एमपी बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के स्टूडेंट का ऑल राउंड डेवलपमेंट होगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा एक बार फिर से नए सत्र दो हज़ार बाईस-तेईस के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें, कि मध्य प्रदेश बोर्ड दसवीं और बारहवीं सहित व्यावसायिक परीक्षाओं के प्रवेश और परीक्षा को लेकर नवीन दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। माशिमं की ओर से निर्देश के अनुसार सभी संस्थानों को आदेश की कार्रवाई पूर्ण करने के विशेष निर्देश प्रदान किए गए हैं। जानकारी के अनुसार माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर से आदेश जारी किए गए हैं। इस पत्र के मुताबिक सभी छात्र-छात्राओं को भाषा विषय में हिंदी और अंग्रेजी लेना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा शेष भाषा में वे तृतीय भाषा के रूप में किसी एक भाषा का चयन कर सकेंगे। साथ में ही माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि कौशल आधारित विषय का चयन तृतीय भाषा के स्थान पर किया जा सकेगा। इसके अलावा कौशल आधारित विषय का चयन करने वाले विद्यार्थियों को एक महत्वपूर्ण विषय का ध्यान रखना बेहद अनिवार्य है। माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा आदेश जारी कर सभी मान्यता प्राप्त संस्थान को उपरोक्त कार्रवाई सुनिश्चित करने सहित विशेष निर्देश का यथावत ध्यान रखने के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
चूरू जिले के रतनगढ़ थाना क्षेत्र के दाउदसर गांव में नाबालिग ने अपने दो चचेरे भाई और एक पड़ोसी के खिलाफ रतनगढ़ पुलिस थाना में पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज करवाया है। पुलिस को दी रिपोर्ट में पीड़िता ने बताया कि जब भी वह घर से स्कूल जाती थी, तो आरोपी उस पर बाइक से कीचड़ उछाल देते। उससे रास्ते में अश्लील हरकतें और इशारे करते थे। यही हरकत स्कूल से वापिस आते समय भी करते थे। मना करने पर उसे डराते हुए कहते है कि ज्यादा करेगी तो अपहरण कर दुष्कर्म कर देंगे। पुलिस ने युवकों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज जांच शुरू कर दी है। चाइल्ड हेल्प लाइन की जिला समन्वयक रूकैया पठान ने बताया कि शुक्रवार रात को दाउदसर गांव से नाबालिग के परिजनों का फोन आया था। शनिवार को दाउदसर जाने पर स्थिति का खुलासा हुआ था। पठान ने बताया कि गांव की निजी स्कूल की कक्षा 12 में पढ़ने वाली छात्रा को उसके परिवार में सगे ताउ के दो बेटे और एक पड़ोसी पिछले एक महीने से परेशान कर रहे थे। रोज-रोज की छेड़छाड़ की हरकतों से परेशान होकर नाबालिग ने स्कूल जाना बंद कर दिया था। नाबालिग ने अपनी शादीशुदा बड़ी बहन को आपबीती बताई। जिसने संस्था प्रधान को भी इसकी शिकायत की। इस पर संस्था प्रधान ने कहा कि आप नाबालिग को स्कूल तक छोड़कर जाया करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चूरू जिले के रतनगढ़ थाना क्षेत्र के दाउदसर गांव में नाबालिग ने अपने दो चचेरे भाई और एक पड़ोसी के खिलाफ रतनगढ़ पुलिस थाना में पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज करवाया है। पुलिस को दी रिपोर्ट में पीड़िता ने बताया कि जब भी वह घर से स्कूल जाती थी, तो आरोपी उस पर बाइक से कीचड़ उछाल देते। उससे रास्ते में अश्लील हरकतें और इशारे करते थे। यही हरकत स्कूल से वापिस आते समय भी करते थे। मना करने पर उसे डराते हुए कहते है कि ज्यादा करेगी तो अपहरण कर दुष्कर्म कर देंगे। पुलिस ने युवकों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज जांच शुरू कर दी है। चाइल्ड हेल्प लाइन की जिला समन्वयक रूकैया पठान ने बताया कि शुक्रवार रात को दाउदसर गांव से नाबालिग के परिजनों का फोन आया था। शनिवार को दाउदसर जाने पर स्थिति का खुलासा हुआ था। पठान ने बताया कि गांव की निजी स्कूल की कक्षा बारह में पढ़ने वाली छात्रा को उसके परिवार में सगे ताउ के दो बेटे और एक पड़ोसी पिछले एक महीने से परेशान कर रहे थे। रोज-रोज की छेड़छाड़ की हरकतों से परेशान होकर नाबालिग ने स्कूल जाना बंद कर दिया था। नाबालिग ने अपनी शादीशुदा बड़ी बहन को आपबीती बताई। जिसने संस्था प्रधान को भी इसकी शिकायत की। इस पर संस्था प्रधान ने कहा कि आप नाबालिग को स्कूल तक छोड़कर जाया करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वीर अर्जुन संवाददाता अलवर। केन्दीय गृह राज्यमंत्री जितेन्द सिंह ने कहा है कि अलवर वाहिनी की अनूठी पहल की शुरुआत से देश व पदेश के अन्य शहर भी इससे पेरणा लेगे ताकि वे अपने-अपने शहरों में आमजन को बेहतरीन सुविधाजनक वाहन सुविधा उपलब्ध करवा सकें। केन्दीय गृह राज्यमंत्री आज यहॉ स्थानीय इन्दिरा गॉधी स्टेडियम में जिला पशासन एवं पीएनबी के संयुक्त तत्वावधान में अलवर वाहिनी का विधिवत शुभारम्भ के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे। इस अवसर पर पदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ए. ए. खान,जिला पमुख मती साफिया खान,जिला कलक्टर आशुतोष ए. टी. पेडणेकर,विधायक टीकाराम जूली,पूर्व विधायक जुबेर खान,बीस सूत्री कार्यकम समिति के जिला उपाध्यक्ष कृष्ण मुरारी गंगावत, नरेन्द शर्मा सहित अनेक जन पतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक एवं अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि अलवर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में होने के नाते यहॉ के आमजन को बेहतरीन वाहन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए जिला पशासन द्वारा कडी मेहनत की इसके लिए हम सभी आभारी हैं । उन्होंने कहा कि अलवर के इतिहास एवं पुरातत्व महत्व के स्थलों को विश्व के मानचित्र की अग्रिम पंक्ति में लाने के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्री से बातचीत चल रही है तथा शीघ्र ही सर्वे होगा। पर्यटन मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद अलवर के ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास पर लगभग 30-40 करोड रुपये खर्च होंगे जिससे यहॉ के पर्यटन को बढावा मिलने के साथ डिस्पले के माध्यम से अलवर के इतिहास का देश व विदेश के लोग जानकारी ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि अलवर में मत्स्य विश्वविधालय खुलवाने के लिए पयासरत होने के साथ उनकी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बातचीत हो चुकी है तथा अलवर में चम्बल व यमुना का पानी उपलब्ध करवाने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री ने सहमति पकट कर दी हैं । केन्दीय गृहराज्यमंत्री जितेन्द सिंह ने कहा कि यहॉ के युवा बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए केन्दीय सुरक्षा बल की विभिन्न बटालियनों एवं यूनिटों के कार्यालय खोले जायेंगे तथा मेरा यह पयास रहेगा कि अलवर जिले के पत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक केन्दीय सुरक्षा बलों के युनिट खुले ताकि क्षेत्र का विकास होने के साथ अन्य सुविधाओं का विस्तार हो सके। इस अवसर पर जिला कलक्टर आशुतोष ए. टी. पेडणेकर ने कहा कि अलवर में आमजन को बेहतरीन एवं सुविधाजनक वाहन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए अलवर वाहिनी की एक अनोखी पहल की शुरुआत की है इसमें पीएनबी एवं टाटा मोटर्स व महिन्दा मोटर्स का सहयोग लिया गया हैं ।
वीर अर्जुन संवाददाता अलवर। केन्दीय गृह राज्यमंत्री जितेन्द सिंह ने कहा है कि अलवर वाहिनी की अनूठी पहल की शुरुआत से देश व पदेश के अन्य शहर भी इससे पेरणा लेगे ताकि वे अपने-अपने शहरों में आमजन को बेहतरीन सुविधाजनक वाहन सुविधा उपलब्ध करवा सकें। केन्दीय गृह राज्यमंत्री आज यहॉ स्थानीय इन्दिरा गॉधी स्टेडियम में जिला पशासन एवं पीएनबी के संयुक्त तत्वावधान में अलवर वाहिनी का विधिवत शुभारम्भ के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे। इस अवसर पर पदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ए. ए. खान,जिला पमुख मती साफिया खान,जिला कलक्टर आशुतोष ए. टी. पेडणेकर,विधायक टीकाराम जूली,पूर्व विधायक जुबेर खान,बीस सूत्री कार्यकम समिति के जिला उपाध्यक्ष कृष्ण मुरारी गंगावत, नरेन्द शर्मा सहित अनेक जन पतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक एवं अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि अलवर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में होने के नाते यहॉ के आमजन को बेहतरीन वाहन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए जिला पशासन द्वारा कडी मेहनत की इसके लिए हम सभी आभारी हैं । उन्होंने कहा कि अलवर के इतिहास एवं पुरातत्व महत्व के स्थलों को विश्व के मानचित्र की अग्रिम पंक्ति में लाने के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्री से बातचीत चल रही है तथा शीघ्र ही सर्वे होगा। पर्यटन मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद अलवर के ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास पर लगभग तीस-चालीस करोड रुपये खर्च होंगे जिससे यहॉ के पर्यटन को बढावा मिलने के साथ डिस्पले के माध्यम से अलवर के इतिहास का देश व विदेश के लोग जानकारी ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि अलवर में मत्स्य विश्वविधालय खुलवाने के लिए पयासरत होने के साथ उनकी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बातचीत हो चुकी है तथा अलवर में चम्बल व यमुना का पानी उपलब्ध करवाने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री ने सहमति पकट कर दी हैं । केन्दीय गृहराज्यमंत्री जितेन्द सिंह ने कहा कि यहॉ के युवा बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए केन्दीय सुरक्षा बल की विभिन्न बटालियनों एवं यूनिटों के कार्यालय खोले जायेंगे तथा मेरा यह पयास रहेगा कि अलवर जिले के पत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक केन्दीय सुरक्षा बलों के युनिट खुले ताकि क्षेत्र का विकास होने के साथ अन्य सुविधाओं का विस्तार हो सके। इस अवसर पर जिला कलक्टर आशुतोष ए. टी. पेडणेकर ने कहा कि अलवर में आमजन को बेहतरीन एवं सुविधाजनक वाहन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए अलवर वाहिनी की एक अनोखी पहल की शुरुआत की है इसमें पीएनबी एवं टाटा मोटर्स व महिन्दा मोटर्स का सहयोग लिया गया हैं ।
सुप्रिया पाण्डेय, रायपुर। देश भर में कोराना के टीके लगाए जा रहे हैं। टीका लगने के बाद कई लोगों में इसका प्रतिकूल प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ में कोरोना वैक्सीनेशन के बाद एक स्वास्थ्य कर्मी को पैरालिसिस अटैक आने का मामला सामने आया है। जिसे इलाज के लिए रायपुर एम्स में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि धमतरी जिले के कुरुद में फार्मेसिस्ट के पद पर पदस्थ एक व्यक्ति ने गुरूवार को पास के ही एक वैक्सीनेशन सेंटर में कोरोना का टीका लगवाया था। तकरीबन 4 घंटे बाद जब वे वाशरुम जा रहे थे उसी दौरान उन्हें चक्कर आया और वे गिर गए। उनकी हालत को देखते हुए आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए रायपुर एम्स भेजा गया। जहां अभी उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि उन्हें ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की बीमारी पहले से ही थी। उधर इस मामले में रायपुर में पदस्थ जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी मीरा बघेल ने वैक्सीन के साइड इफैक्ट से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन लगने के बाद आधे से एक घंटे के भीतर उसका साइड इफेक्ट होता है। साइड इफेक्ट जैसे बुखार आना, जहां वैक्सीन लगी है उस जगह पर दर्द करना जैसी चीजें शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी दवा से एलर्जी है तो उसे वैक्सीन नहीं लगानी चाहिए। किसी व्यक्ति को कोरोना भी हुआ है तो उसे भी डेढ़ महिनों के बाद ही वैक्सीन लगानी चाहिए साथ ही किसी को ब्लड प्रेशर या शुगर की बीमारी है तो उसे कंट्रोल कर वैक्सीन लगानी चाहिए।
सुप्रिया पाण्डेय, रायपुर। देश भर में कोराना के टीके लगाए जा रहे हैं। टीका लगने के बाद कई लोगों में इसका प्रतिकूल प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ में कोरोना वैक्सीनेशन के बाद एक स्वास्थ्य कर्मी को पैरालिसिस अटैक आने का मामला सामने आया है। जिसे इलाज के लिए रायपुर एम्स में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि धमतरी जिले के कुरुद में फार्मेसिस्ट के पद पर पदस्थ एक व्यक्ति ने गुरूवार को पास के ही एक वैक्सीनेशन सेंटर में कोरोना का टीका लगवाया था। तकरीबन चार घंटाटे बाद जब वे वाशरुम जा रहे थे उसी दौरान उन्हें चक्कर आया और वे गिर गए। उनकी हालत को देखते हुए आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए रायपुर एम्स भेजा गया। जहां अभी उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि उन्हें ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की बीमारी पहले से ही थी। उधर इस मामले में रायपुर में पदस्थ जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी मीरा बघेल ने वैक्सीन के साइड इफैक्ट से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन लगने के बाद आधे से एक घंटे के भीतर उसका साइड इफेक्ट होता है। साइड इफेक्ट जैसे बुखार आना, जहां वैक्सीन लगी है उस जगह पर दर्द करना जैसी चीजें शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी दवा से एलर्जी है तो उसे वैक्सीन नहीं लगानी चाहिए। किसी व्यक्ति को कोरोना भी हुआ है तो उसे भी डेढ़ महिनों के बाद ही वैक्सीन लगानी चाहिए साथ ही किसी को ब्लड प्रेशर या शुगर की बीमारी है तो उसे कंट्रोल कर वैक्सीन लगानी चाहिए।
तुमसे कहता हूं, मांस व रक्त परमात्माके राज्यको नहीं ले सक्ते । वास्तव में हम सब सोएंगे नहीं किंतु बदल जावेंगे । ( 6 ) Cornithians It Ch. 2-17 Now the Lord is that spirit and where the spirit of the Lord is. There is liberty, 18. But we all, with open face beholding as in a glass the glory of the Lord, are changed into the same image from glory to glory, even by the spirit of the ford Ch, 13-11 be perfect, be of good comfort, be of one mind, live in the peace and the God of love and peace shall be with you. भावाथ - कोर निथियंस (२) कहते हैं, परमात्मा वही वह आत्मा है जहां परमात्मा रूप आत्मा है, वहीं स्वाधीनता है। किंतु हम सब जब खुले हुए मुखमें दर्पणकी तरह परमात्माके ऐश्वर्यका दर्शन करते रहते हैं, उसी रूप में बदल जाते हैं । परमात्मामई आत्माके द्वारा ज्योतिसे ज्योति रूप होजाते हैं - पूर्ण हो, उत्तम सुखी हो, एकाग्र हो, शांतिमें रहो, प्रेम व शांतिमई परमात्मा तुम्हारे साथ रहेगा । (7) Galatians Ch. 5-21- Envying, murder, drunkenness, etc. that they which do such things shall not inherit the kingdom of God 5 For every mass shall bear his own burden. गैलेशियन्स - कहते हैं । ईर्षा, हिंसा, मद्यपानादि जो ऐसे काम करते हैं वे परमात्माके राज्यको नहीं प्राप्त करसक्ते । क्योंकि हरएक मानवको अपना ही भार स्वयं सहना होगा । शिष्य इन पापोंसे तो यही सिद्ध होता है कि ही मोक्षका उपाय है व अहिंसा ही धर्म है । यही बात जैन सिद्धांतने वताई है, फिर ईसाइयोंका ध्यान इस तत्वपर क्यों नहीं है ?
तुमसे कहता हूं, मांस व रक्त परमात्माके राज्यको नहीं ले सक्ते । वास्तव में हम सब सोएंगे नहीं किंतु बदल जावेंगे । Cornithians It Ch. दो-सत्रह Now the Lord is that spirit and where the spirit of the Lord is. There is liberty, अट्ठारह. But we all, with open face beholding as in a glass the glory of the Lord, are changed into the same image from glory to glory, even by the spirit of the ford Ch, तेरह-ग्यारह be perfect, be of good comfort, be of one mind, live in the peace and the God of love and peace shall be with you. भावाथ - कोर निथियंस कहते हैं, परमात्मा वही वह आत्मा है जहां परमात्मा रूप आत्मा है, वहीं स्वाधीनता है। किंतु हम सब जब खुले हुए मुखमें दर्पणकी तरह परमात्माके ऐश्वर्यका दर्शन करते रहते हैं, उसी रूप में बदल जाते हैं । परमात्मामई आत्माके द्वारा ज्योतिसे ज्योति रूप होजाते हैं - पूर्ण हो, उत्तम सुखी हो, एकाग्र हो, शांतिमें रहो, प्रेम व शांतिमई परमात्मा तुम्हारे साथ रहेगा । Galatians Ch. पाँच-इक्कीस- Envying, murder, drunkenness, etc. that they which do such things shall not inherit the kingdom of God पाँच For every mass shall bear his own burden. गैलेशियन्स - कहते हैं । ईर्षा, हिंसा, मद्यपानादि जो ऐसे काम करते हैं वे परमात्माके राज्यको नहीं प्राप्त करसक्ते । क्योंकि हरएक मानवको अपना ही भार स्वयं सहना होगा । शिष्य इन पापोंसे तो यही सिद्ध होता है कि ही मोक्षका उपाय है व अहिंसा ही धर्म है । यही बात जैन सिद्धांतने वताई है, फिर ईसाइयोंका ध्यान इस तत्वपर क्यों नहीं है ?
कहने के लिए कि गाजर चाय सबसे ज्यादा हैहमारे जीवन में आम पेय, हम नहीं कर सकते। हालांकि, कुछ प्रशंसकों ने सभी सर्दियों के लिए पूरे बगीचे इस रूट फसल संयंत्र, तो उसका स्वाद और सुगंध का आनंद लेने के लिए तैयार कर रहे हैं। और उनमें से कई का दावा है कि गर्म पेय लंबे अपने नियमित चाय की जगह है। आइए यह पता लगाने की कोशिश करें कि गाजर की चाय कैसा है, इसे कैसे पकाएं और इससे क्या फायदा होता है। सूखे जड़ सब्जियों से गर्म पेय लेंः लाभ गाजर (फास्फोरस, आयोडीन, कैल्शियम), कैरोटीन, flavonoids, अमीनो एसिड और विटामिन से सूक्ष्म पोषक सामग्री के द्वारा प्राप्त किया। गाजर चाय के निरंतर उपयोग के साथ, हंसमुखता का एक फ्लश, प्रतिरक्षा में सुधार और मानव हड्डी प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए उल्लेख किया जाता है। एकमात्र कारक जो पेय के उपयोग को प्रभावित करता है -रूट फसल की गुणवत्ता। छोटे या मध्यम आकार के गाजर खरीदें, जितना बड़ा, सबसे अधिक संभावना है, रासायनिक उर्वरकों की भागीदारी के साथ उगाया गया था। गाजर चाय का उपयोग नहीं करना चाहिए? केवल विरोधाभास 3: रूट के लिए एलर्जी, गर्भावस्था की अवधि और स्तनपान कराने की अवधि। और नुस्खा में संकेतित मानक में वृद्धि के साथ, एक व्यक्ति मतली, उल्टी और सिरदर्द का अनुभव कर सकता है। इसलिए, गाजर चाय का उपयोग भोजन के बीच सख्ती से 200 मिलीलीटर (ग्लास) होना चाहिए। आवश्यक सामग्री की सूचीः एक grater के माध्यम से गाजर छील और रस बाहर निचोड़। कटा हुआ सब्जी को एक बेकिंग शीट पर रखें, इसे धूप के स्थान में 3 घंटे तक रखें, फिर इसे ओवन में सूखने के लिए भेजें। खिड़की सर्दियों और अवसरों के दौरान क्या करना हैक्या आप सूरज में जड़ सूखना चाहते हैं? आप एक और तरीके से सब्जी पकाने की तैयारी कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, गाजर को बारीक से काट लें और इसे 200 डिग्री के तापमान पर 20 मिनट के लिए तीन चरणों में ओवन में सूखा दें। प्रक्रिया का पालन करना न भूलें, अन्यथा कटा हुआ जड़ जला देगा। पके हुए चाय की पत्तियों को प्राकृतिक तरीके से ठंडा किया जाता है औरएक गिलास या टिन भंडारण कंटेनर में स्थानांतरित कर रहे हैं। इसे सामान्य तरीके से खींचाः 2-3 छोटा चम्मच। उबलते पानी डालें और जलसेक के लिए 10 मिनट के लिए छोड़ दें। तैयार पेय में एक सुखद फल छाया है, और इसे साधारण चाय से अलग करना असंभव है। बच्चे इसे दूध और शहद से पी सकते हैं। गाजर चाय को आप किस जड़ी बूटियों से जोड़ सकते हैं? न केवल एक स्वस्थ लेकिन स्वादिष्ट पेय कैसे पकाते हैं? इन सवालों के जवाब देने के लिए, गाजर चाय बनाने के 4 स्रावों को जानना पर्याप्त है। गुप्त 1. आप सूखे गाजर को पत्तियों से काट सकते हैं और उबलते पानी डाल सकते हैं। नतीजतन, आपको एक पेय मिलता है, जिसका रंग सामान्य चाय से अलग नहीं किया जा सकता है। गुप्त 2. केतली में एक मुट्ठी भर सूखे गाजर रखो। उबलते पानी की थोड़ी मात्रा डालो और आधान के लिए आधे घंटे तक छोड़ दें। यह पेय अधिमानतः बिना स्वीटर्स के उपभोग किया जाता है। गुप्त 3। रूट सब्जियों के सूखे हिस्सों को रूसी ओवन में पकाया जाना चाहिए। ब्रू और कुछ मिनट के लिए जोर देते हैं। इस तकनीक के अनुसार तैयार गाजर चाय स्वाद और अविश्वसनीय रूप से सुगंधित सुखद होगा। गुप्त 4। इस पेय को पीसने के लिए आपको निम्नलिखित योजनाओं के अनुसार सामग्री लेने की जरूरत हैः 5 एच। सूखे चिड़ियाघर, गाजर, गुलाब कूल्हों और 1 चम्मच। शुष्क currant जामुन। अच्छी तरह से हिलाओ। एक चीनी मिट्टी के बरतन केतली में, सूखे अवयवों के परिणामी मिश्रण का एक बड़ा चमचा डालें और उबलते पानी के 200 मिलीलीटर डालें। 4 घंटे के लिए टिंचर के लिए छोड़ दें। फिल्टर के बाद और बिना किसी मीठे के अपने शुद्ध रूप में उपयोग करें। गाजर के फायदेमंद गुणों पर केवल पता नहीं हैआलसी, लेकिन शीर्ष हमेशा कचरे पर जाते हैं। और व्यर्थ में! कुछ लोगों को पता है कि गाजर चाय न केवल रूट फसलों से, बल्कि शीर्ष से भी तैयार की जाती है। गर्मियों में सर्दी में, सूखे में ताजा स्थिति में इसका उपयोग करना वांछनीय है। सूखे उपजी से चाय बनाने के लिए, आपको शीर्ष को पीसने और उबलते पानी का गिलास डालना होगा। एक घंटे की एक चौथाई तक खड़े रहें और खाएं। एक ताजा दौड़ के लिए, एक और नुस्खा है। 200 मिलीलीटर पानी के साथ कटा हुआ उपजी का एक चम्मच डालो और धीमी आग लगा दीजिये। 15 मिनट के बाद प्लेट से निकालें, चाय निकालें और पीएं। मिठाई, इस तरह से पकाया जाता है, ठंडा शीतकालीन दिन का एक उत्कृष्ट अंत होगा जब आप खुद को एक कंबल में लपेटना चाहते हैं और कुछ स्वादिष्ट, सुगंधित और स्वस्थ आनंद लेना चाहते हैं। सामग्री की सूचीः व्हीप्ड क्रीम के साथ मिठाई सजाने और इच्छा पर अदरक के साथ छिड़कना।
कहने के लिए कि गाजर चाय सबसे ज्यादा हैहमारे जीवन में आम पेय, हम नहीं कर सकते। हालांकि, कुछ प्रशंसकों ने सभी सर्दियों के लिए पूरे बगीचे इस रूट फसल संयंत्र, तो उसका स्वाद और सुगंध का आनंद लेने के लिए तैयार कर रहे हैं। और उनमें से कई का दावा है कि गर्म पेय लंबे अपने नियमित चाय की जगह है। आइए यह पता लगाने की कोशिश करें कि गाजर की चाय कैसा है, इसे कैसे पकाएं और इससे क्या फायदा होता है। सूखे जड़ सब्जियों से गर्म पेय लेंः लाभ गाजर , कैरोटीन, flavonoids, अमीनो एसिड और विटामिन से सूक्ष्म पोषक सामग्री के द्वारा प्राप्त किया। गाजर चाय के निरंतर उपयोग के साथ, हंसमुखता का एक फ्लश, प्रतिरक्षा में सुधार और मानव हड्डी प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए उल्लेख किया जाता है। एकमात्र कारक जो पेय के उपयोग को प्रभावित करता है -रूट फसल की गुणवत्ता। छोटे या मध्यम आकार के गाजर खरीदें, जितना बड़ा, सबसे अधिक संभावना है, रासायनिक उर्वरकों की भागीदारी के साथ उगाया गया था। गाजर चाय का उपयोग नहीं करना चाहिए? केवल विरोधाभास तीन: रूट के लिए एलर्जी, गर्भावस्था की अवधि और स्तनपान कराने की अवधि। और नुस्खा में संकेतित मानक में वृद्धि के साथ, एक व्यक्ति मतली, उल्टी और सिरदर्द का अनुभव कर सकता है। इसलिए, गाजर चाय का उपयोग भोजन के बीच सख्ती से दो सौ मिलीलीटर होना चाहिए। आवश्यक सामग्री की सूचीः एक grater के माध्यम से गाजर छील और रस बाहर निचोड़। कटा हुआ सब्जी को एक बेकिंग शीट पर रखें, इसे धूप के स्थान में तीन घंटाटे तक रखें, फिर इसे ओवन में सूखने के लिए भेजें। खिड़की सर्दियों और अवसरों के दौरान क्या करना हैक्या आप सूरज में जड़ सूखना चाहते हैं? आप एक और तरीके से सब्जी पकाने की तैयारी कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, गाजर को बारीक से काट लें और इसे दो सौ डिग्री के तापमान पर बीस मिनट के लिए तीन चरणों में ओवन में सूखा दें। प्रक्रिया का पालन करना न भूलें, अन्यथा कटा हुआ जड़ जला देगा। पके हुए चाय की पत्तियों को प्राकृतिक तरीके से ठंडा किया जाता है औरएक गिलास या टिन भंडारण कंटेनर में स्थानांतरित कर रहे हैं। इसे सामान्य तरीके से खींचाः दो-तीन छोटा चम्मच। उबलते पानी डालें और जलसेक के लिए दस मिनट के लिए छोड़ दें। तैयार पेय में एक सुखद फल छाया है, और इसे साधारण चाय से अलग करना असंभव है। बच्चे इसे दूध और शहद से पी सकते हैं। गाजर चाय को आप किस जड़ी बूटियों से जोड़ सकते हैं? न केवल एक स्वस्थ लेकिन स्वादिष्ट पेय कैसे पकाते हैं? इन सवालों के जवाब देने के लिए, गाजर चाय बनाने के चार स्रावों को जानना पर्याप्त है। गुप्त एक. आप सूखे गाजर को पत्तियों से काट सकते हैं और उबलते पानी डाल सकते हैं। नतीजतन, आपको एक पेय मिलता है, जिसका रंग सामान्य चाय से अलग नहीं किया जा सकता है। गुप्त दो. केतली में एक मुट्ठी भर सूखे गाजर रखो। उबलते पानी की थोड़ी मात्रा डालो और आधान के लिए आधे घंटे तक छोड़ दें। यह पेय अधिमानतः बिना स्वीटर्स के उपभोग किया जाता है। गुप्त तीन। रूट सब्जियों के सूखे हिस्सों को रूसी ओवन में पकाया जाना चाहिए। ब्रू और कुछ मिनट के लिए जोर देते हैं। इस तकनीक के अनुसार तैयार गाजर चाय स्वाद और अविश्वसनीय रूप से सुगंधित सुखद होगा। गुप्त चार। इस पेय को पीसने के लिए आपको निम्नलिखित योजनाओं के अनुसार सामग्री लेने की जरूरत हैः पाँच एच। सूखे चिड़ियाघर, गाजर, गुलाब कूल्हों और एक चम्मच। शुष्क currant जामुन। अच्छी तरह से हिलाओ। एक चीनी मिट्टी के बरतन केतली में, सूखे अवयवों के परिणामी मिश्रण का एक बड़ा चमचा डालें और उबलते पानी के दो सौ मिलीलीटर डालें। चार घंटाटे के लिए टिंचर के लिए छोड़ दें। फिल्टर के बाद और बिना किसी मीठे के अपने शुद्ध रूप में उपयोग करें। गाजर के फायदेमंद गुणों पर केवल पता नहीं हैआलसी, लेकिन शीर्ष हमेशा कचरे पर जाते हैं। और व्यर्थ में! कुछ लोगों को पता है कि गाजर चाय न केवल रूट फसलों से, बल्कि शीर्ष से भी तैयार की जाती है। गर्मियों में सर्दी में, सूखे में ताजा स्थिति में इसका उपयोग करना वांछनीय है। सूखे उपजी से चाय बनाने के लिए, आपको शीर्ष को पीसने और उबलते पानी का गिलास डालना होगा। एक घंटे की एक चौथाई तक खड़े रहें और खाएं। एक ताजा दौड़ के लिए, एक और नुस्खा है। दो सौ मिलीलीटर पानी के साथ कटा हुआ उपजी का एक चम्मच डालो और धीमी आग लगा दीजिये। पंद्रह मिनट के बाद प्लेट से निकालें, चाय निकालें और पीएं। मिठाई, इस तरह से पकाया जाता है, ठंडा शीतकालीन दिन का एक उत्कृष्ट अंत होगा जब आप खुद को एक कंबल में लपेटना चाहते हैं और कुछ स्वादिष्ट, सुगंधित और स्वस्थ आनंद लेना चाहते हैं। सामग्री की सूचीः व्हीप्ड क्रीम के साथ मिठाई सजाने और इच्छा पर अदरक के साथ छिड़कना।
Posted On: मेरे कैबिनेट के सदस्यगण - विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज, आज एक विशेष दिन है। आज भारत तथा बांग्लादेश के शहीदों के बलिदान को स्मरण करने का दिन है।बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए जिंदगी देने वाले योद्धाओं को याद करने का दिन है।बांग्लादेश के स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ने वाले भारतीय फौज के जांबाजों को याद करने का दिन है। लेकिन ये अवसर बांग्लादेश पर किए गए उस क्रूर प्रहार को भी याद करने का है जिसने लाखों इंसानों की जिंदगी छीन ली।किन्तु साथ ही साथ इतिहास की जो त्रासदी बांग्लादेश पर गुज़री, उस के पीछे की विकराल मानसिकता को नकारने का भी है। आज का ये अवसर भारत और बांग्लादेश के 140 करोड़ से ज्यादा नागरिकों के बीच अटूट विश्वास की strength को पहचानने का है। हम अपने समाजों को कैसा एक सशक्त तथा समृद्ध भविष्य दें इस पर चिंतन करने का भी यह उचित अवसर है। तथा साथियों कई कारणों से आज का दिन ऐतिहासिक है। बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए सभी भारतीय सैनिकों के परिवारों के लिए भी ये कभी न भूल पाने वाला क्षण है।आज बांग्लादेश उन 1661 भारतीय सैनिकों का सम्मान कर रहा है, जिन्होंने 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान की क़ुरबानी दी थी ।मैं भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की तरफ से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी का; वहां की सरकार और बांग्लादेश के लोगों का; इस भावनात्मक पहल के लिए आभार व्यक्त करता हूं। भारत के वीर सैनिक तथा हमारी गौरवशाली सेना केवल बांग्लादेश के साथ हो रहे अन्याय एवं नरसंहार के खिलाफ नहीं लड़े थे। यह वीर, भारतीय संस्कृति में निहित मानव मूल्यों के लिए भी लड़े थे। यह मेरा परम सौभाग्य है कि इस समय 7 भारतीय शहीदों के परिवार यहां उपस्थित हैं। पूरा भारत आपकी व्यथा, आपका दर्द और आपकी पीड़ा में सहभागी है। आपका त्याग और तपस्या अतुलनीय है।भारतीय सैनिको के बलिदानों के लिए मैं और पूरा देश सभी शहीदों को कोटि-कोटि नमन करते हैं। बांग्लादेश का जन्म जहां एक नयी आशा का उदय था । वहीं 1971 का इतिहास हमें कई अत्यंत दर्दनाक पलों की भी याद दिलाता है। 1971 में अप्रैल का यही वो महीना था जब बांग्लादेश में नरसंहार अपने चरम पर था। बांग्लादेश में पूरी एक पीढ़ी को खत्म करने के लिए संहार किया जा रहा था। हर वो व्यक्ति जो बांग्लादेश के गौरव से जुड़ा हुआ था, हर वो व्यक्ति जो भावी पीढ़ी को बांग्लादेश के अतीत से अवगत करा सकता था, उसे रास्ते से हटा दिया गया। इस नरसंहार का उद्देश्य केवल निर्दोषों की हत्या करना नहीं था, अपितु बांग्लादेश की पूरी सोच को जड़ से मिटा देना था। लेकिन अंतत अत्याचार विजयी नहीं हुआ । जीत मानव मूल्यों की हुई , करोड़ों बांग्लादेशियों की इच्छा शक्ति की हुई। बांग्लादेश की जन्म गाथा असीम बलिदानों की गाथा है। और इन सभी बलिदानों की कहानियो में एक सूत्र, एक विचार कॉमन है। और वह है राष्ट्र तथा मानवीय मूल्यों के प्रति अगाध प्रेम का।मुक्ति योद्धाओं का बलिदान राष्ट्र प्रेम से प्रेरित था। मुक्ति योद्धा मात्र एक मानव शरीर और आत्मा नहीं थे, बल्कि एक अदम्य तथा अविनाशी सोच थे। मुझे खुशी है कि मुक्ति योद्धाओं के लिए भारत की तरफ से भी कुछ प्रयास किए जाते रहे हैं।मुक्ति योद्धा स्कॉलरशिप स्कीम के तहत मुक्ति योद्धाओं के परिवार से 10 हजार से ज्यादा बच्चों को पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है। उन के परिवार कल्याण के लिए आज इस अवसर पर मैं तीन और घोषणाएं कर रहा हूं। अगले पाँच वर्षों में मुक्ति योद्धा स्कॉलरशिप स्कीम का फायदा दस हजार और बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।मुक्ति योद्धाओं को 5 वर्ष के लिए मल्टीप्ल एंट्री वीसा फैसिलिटी दी जाएगीऔर भारत में मुफ्त इलाज के लिए प्रतिवर्ष 100 मुक्ति योद्धाओं को एक स्पेशल मेडिकल स्कीम के तहत सहायता दी जाएगी।मुक्ति योद्धाओं के साथ साथ बांग्लादेश के लिए किये गए भारतीय फौज का संघर्ष और बलिदान को भी कोई नहीं भुला सकता।ऐसा करने में उनकी एक मात्र प्रेरणा थी, बांग्लादेश की जनता के प्रति उनका प्रेम, और बांग्लादेश के लोगों के सपनों के प्रति उनका सम्मान । और यह भी याद रखना चाहिये की युद्ध की बर्बरता में भी भारतीय सेना अपने कर्तव्य से नहीं मुड़ी और युद्ध के नियमों के पालन की पूरे विश्व के सामने एक मिसाल रखी।भारतीय फौज का यह चरित्र था कि 90 हजार उन कैदी सैनिकों को; (POWs ) को सुरक्षित जाने दिया। 1971 में भारत की दिखाई ये इंसानियत पिछली शताब्दी की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। दोस्तों, भारत और बांग्लादेश, न केवल क्रूरता को परास्त करने वाले देश हैं, बलिक क्रूरता की मूलभूत सोच को नकारने वाले देश हैं। बांग्लादेश पर चर्चा बिना बंगबन्धु के अधूरी है। दोनों का अस्तित्व एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।दोनों एक दूसरे की सोच के पूरक हैं। बंगबन्धु बांग्लादेश की स्वंत्रता के प्रमुख सूत्रधार थे। वह अपने समय से कहीं आगे की सोच रखते थे। उनकी हर एक पुकार जनता की ललकार थी। एक मॉडर्न, लिबरल तथा प्रोग्रेसिव बांग्लादेश का उन का विज़न आज भी बांग्लादेश की उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।1971 के बाद यह बंगबंधु शेख मुजिबुर्रहमान का ही नेतृत्व था जिसने बांग्लादेश को अशांति और अस्थिरता के दौर से बाहर निकाला था । समाज में मौजूद द्वेष तथा आक्रोश को मिटा कर, महान बंगबंधु ने बांग्लादेश को शांति तथा विकास का एक मार्ग दिखलाया।सोनार बांग्ला के सपने को सच करने की राह दिखाई। भारत की उस समय की युवा पीढ़ी तो उनसे विशेष रूप से प्रभावित थी।और यह मेरा सौभाग्य था कि मैं स्वयं उन के विचारो के ज्ञान से लाभ उठा सका।आज बंगबन्धु को न केवल दक्षिण एशिया में बल्कि पूरे विश्व में शांति और सहअस्त्तिव की स्थापना करने वाले नेता के तौर पर याद किया जाता है।उनकी बेटी, एक्सेलेंसी शेख़ हसीना आज बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के तौर पर यहां हैं। इस अवसर पर मैं उनके साहस की भी प्रशंसा करना चाहता हूं। जिस मुश्किल हालात से उन्होंने खुद को निकाला, अपने देश को निकाला, वो साहस हर किसी में नहीं होता। लेकिन वो चट्टान की तरह आज भी खड़ी हैं, और अपने देश को विकास पथ पर ले जाने के लिए काम कर रही हैं। आज हमारे क्षेत्र को, दुनिया के इस प्राचीन भूभाग को मुख्यतः तीन विचारधाराएं परिभाषित करती हैं। यह विचार धाराएं हमारे समाज तथा सरकारी व्यवस्थाओ की प्राथमिकताओं का आइना हैं। इस में एक सोच है जो आथिक विकास पर केन्द्रित है ; देश को समृद्ध तथा शक्तिशाली बनाने पर फोकस्ड है;समाज के सभी वर्गों को साथ ले कर चलने पर आधारित है।इस सोच का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है बांग्लादेश की प्रगति एव उन्नति। 1971 में बांग्लादेश के नागरिकों की औसत आयु (लाइफ एक्स्पेक्टेनसी) भारत से भी कम थी। आज बांग्लादेश के नागरिकों की औसत आयु भारत से भी ज्यादा है। पिछले 45 वर्ष में बांग्लादेश की GDP 31 गुना बढ़ी है।प्रति व्यक्ति आय में 13 गुना की बढोतरी हुई है। इन्फेंट मोर्टेलिटी 222 से घट कर अब 38 रह गई है।प्रति व्यक्ति डॉक्टरों की संख्या में तीन गुना बढोतरी हुई।स्वतंत्रता के बाद से अब तक बांग्लादेश का निर्यात 125 गुना बढ़ चुका है। परिवर्तन के यह चंद पैरामीटर्स अपने आप में काफी कुछ कह रहे है। प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के विज़न पर चलते हुए बांग्लादेश आर्थिक प्रगति की नयी सीमाए पार कर रहा है। लेकिन दुःख की बात है कि इन दो विचार धाराओं के विपरीत भी दक्षिण एशिया में एक मानसिकता है। ऐसी सोच जो कि आतंकवाद की प्रेरणा तथा उसकी पोषक है। ऐसी सोच जिस का वैल्यू सिस्टम मानवता पर नहीं अपितु हिंसा, आतिवाद तथा आतंक पर आधारित है । जिस का मूल उद्देश है टेर्रोरिस्ट्स द्वारा टेररिज्म फैलाना। एक ऐसी सोच जिस के नीति निर्माताओं कोः · मानववाद से बड़ा आतंकवाद लगता है। · विकास से बड़ा विनाश लगता है। · सृजन से बड़ा संहार लगता है। · विश्वास से बड़ा विश्वासघात लगता है। यह सोच हमारे समाज के शांति तथा संतुलन, और उस के मानसिक तथा आर्थिक विकास के लिए सब से बड़ा चैलेंज है। यह विचारधारा पूरे क्षेत्र तथा विश्व की शांति तथा विकास में अवरोधक है। जहां भारत और बांग्लादेश समाज के आर्थिक विकास की थॉट स्ट्रीम्स में सहभागी हैं, वहीं हम इस तीसरी, नकारात्मक विचारधारा के विक्टिम भी है। हमारी हार्दिक अभिलाषा है की इस क्षेत्र के सभी देशो के citizens सफलता और समृधि की ओर बढ़ें। और इस के लिए हमारे सहयोग के द्वार सदैव खुले हैं ।लेकिन इस के लिए आतंकवाद और आतंकवादी सोच का त्याग अनिवार्य है । भारत-बांग्लादेश संबंध ना सरकारों के मोहताज हैं और ना ही सत्ता के। भारत और बांग्लादेश इसलिए साथ हैं, क्योंकि दोनों देशों के 140 करोड़ लोग साथ हैं। हम दुःख-सुख के साथी है । मैंने हमेशा कहा है कि जो सपना मैं भारत के लिए देखता हूं, वही शुभकामना मेरी बांग्लादेश के लिए भी है।और भारत के हर पड़ोसी देश के लिए भी है। मैं बांग्लादेश के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं। एक दोस्त होने के नाते भारत जितनी मदद कर सकता है, वो करेगा।आखिर में, मैं एक बार फिर मुक्ति योद्धाओं को, भारत के वीर सैनिकों को नमन करता हूं। और इस कार्यक्रम के आयोजन तथा उपस्थिति के लिए प्रधानमत्री शेख़ हसीना जी का खास तौर पर अभिनन्दन करता हूँ।भारत सदैव एक घनिष्ठ तथा विश्वसनीय मित्र की तरह बांग्लादेश के साथ हर घड़ी हर सहायता के लिए तैयार है और रहेगा। जय हिंद- जॉय बांग्ला !!! 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Posted On: मेरे कैबिनेट के सदस्यगण - विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज, आज एक विशेष दिन है। आज भारत तथा बांग्लादेश के शहीदों के बलिदान को स्मरण करने का दिन है।बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए जिंदगी देने वाले योद्धाओं को याद करने का दिन है।बांग्लादेश के स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ने वाले भारतीय फौज के जांबाजों को याद करने का दिन है। लेकिन ये अवसर बांग्लादेश पर किए गए उस क्रूर प्रहार को भी याद करने का है जिसने लाखों इंसानों की जिंदगी छीन ली।किन्तु साथ ही साथ इतिहास की जो त्रासदी बांग्लादेश पर गुज़री, उस के पीछे की विकराल मानसिकता को नकारने का भी है। आज का ये अवसर भारत और बांग्लादेश के एक सौ चालीस करोड़ से ज्यादा नागरिकों के बीच अटूट विश्वास की strength को पहचानने का है। हम अपने समाजों को कैसा एक सशक्त तथा समृद्ध भविष्य दें इस पर चिंतन करने का भी यह उचित अवसर है। तथा साथियों कई कारणों से आज का दिन ऐतिहासिक है। बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए सभी भारतीय सैनिकों के परिवारों के लिए भी ये कभी न भूल पाने वाला क्षण है।आज बांग्लादेश उन एक हज़ार छः सौ इकसठ भारतीय सैनिकों का सम्मान कर रहा है, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान की क़ुरबानी दी थी ।मैं भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की तरफ से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी का; वहां की सरकार और बांग्लादेश के लोगों का; इस भावनात्मक पहल के लिए आभार व्यक्त करता हूं। भारत के वीर सैनिक तथा हमारी गौरवशाली सेना केवल बांग्लादेश के साथ हो रहे अन्याय एवं नरसंहार के खिलाफ नहीं लड़े थे। यह वीर, भारतीय संस्कृति में निहित मानव मूल्यों के लिए भी लड़े थे। यह मेरा परम सौभाग्य है कि इस समय सात भारतीय शहीदों के परिवार यहां उपस्थित हैं। पूरा भारत आपकी व्यथा, आपका दर्द और आपकी पीड़ा में सहभागी है। आपका त्याग और तपस्या अतुलनीय है।भारतीय सैनिको के बलिदानों के लिए मैं और पूरा देश सभी शहीदों को कोटि-कोटि नमन करते हैं। बांग्लादेश का जन्म जहां एक नयी आशा का उदय था । वहीं एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर का इतिहास हमें कई अत्यंत दर्दनाक पलों की भी याद दिलाता है। एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में अप्रैल का यही वो महीना था जब बांग्लादेश में नरसंहार अपने चरम पर था। बांग्लादेश में पूरी एक पीढ़ी को खत्म करने के लिए संहार किया जा रहा था। हर वो व्यक्ति जो बांग्लादेश के गौरव से जुड़ा हुआ था, हर वो व्यक्ति जो भावी पीढ़ी को बांग्लादेश के अतीत से अवगत करा सकता था, उसे रास्ते से हटा दिया गया। इस नरसंहार का उद्देश्य केवल निर्दोषों की हत्या करना नहीं था, अपितु बांग्लादेश की पूरी सोच को जड़ से मिटा देना था। लेकिन अंतत अत्याचार विजयी नहीं हुआ । जीत मानव मूल्यों की हुई , करोड़ों बांग्लादेशियों की इच्छा शक्ति की हुई। बांग्लादेश की जन्म गाथा असीम बलिदानों की गाथा है। और इन सभी बलिदानों की कहानियो में एक सूत्र, एक विचार कॉमन है। और वह है राष्ट्र तथा मानवीय मूल्यों के प्रति अगाध प्रेम का।मुक्ति योद्धाओं का बलिदान राष्ट्र प्रेम से प्रेरित था। मुक्ति योद्धा मात्र एक मानव शरीर और आत्मा नहीं थे, बल्कि एक अदम्य तथा अविनाशी सोच थे। मुझे खुशी है कि मुक्ति योद्धाओं के लिए भारत की तरफ से भी कुछ प्रयास किए जाते रहे हैं।मुक्ति योद्धा स्कॉलरशिप स्कीम के तहत मुक्ति योद्धाओं के परिवार से दस हजार से ज्यादा बच्चों को पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है। उन के परिवार कल्याण के लिए आज इस अवसर पर मैं तीन और घोषणाएं कर रहा हूं। अगले पाँच वर्षों में मुक्ति योद्धा स्कॉलरशिप स्कीम का फायदा दस हजार और बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।मुक्ति योद्धाओं को पाँच वर्ष के लिए मल्टीप्ल एंट्री वीसा फैसिलिटी दी जाएगीऔर भारत में मुफ्त इलाज के लिए प्रतिवर्ष एक सौ मुक्ति योद्धाओं को एक स्पेशल मेडिकल स्कीम के तहत सहायता दी जाएगी।मुक्ति योद्धाओं के साथ साथ बांग्लादेश के लिए किये गए भारतीय फौज का संघर्ष और बलिदान को भी कोई नहीं भुला सकता।ऐसा करने में उनकी एक मात्र प्रेरणा थी, बांग्लादेश की जनता के प्रति उनका प्रेम, और बांग्लादेश के लोगों के सपनों के प्रति उनका सम्मान । और यह भी याद रखना चाहिये की युद्ध की बर्बरता में भी भारतीय सेना अपने कर्तव्य से नहीं मुड़ी और युद्ध के नियमों के पालन की पूरे विश्व के सामने एक मिसाल रखी।भारतीय फौज का यह चरित्र था कि नब्बे हजार उन कैदी सैनिकों को; को सुरक्षित जाने दिया। एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत की दिखाई ये इंसानियत पिछली शताब्दी की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। दोस्तों, भारत और बांग्लादेश, न केवल क्रूरता को परास्त करने वाले देश हैं, बलिक क्रूरता की मूलभूत सोच को नकारने वाले देश हैं। बांग्लादेश पर चर्चा बिना बंगबन्धु के अधूरी है। दोनों का अस्तित्व एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।दोनों एक दूसरे की सोच के पूरक हैं। बंगबन्धु बांग्लादेश की स्वंत्रता के प्रमुख सूत्रधार थे। वह अपने समय से कहीं आगे की सोच रखते थे। उनकी हर एक पुकार जनता की ललकार थी। एक मॉडर्न, लिबरल तथा प्रोग्रेसिव बांग्लादेश का उन का विज़न आज भी बांग्लादेश की उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के बाद यह बंगबंधु शेख मुजिबुर्रहमान का ही नेतृत्व था जिसने बांग्लादेश को अशांति और अस्थिरता के दौर से बाहर निकाला था । समाज में मौजूद द्वेष तथा आक्रोश को मिटा कर, महान बंगबंधु ने बांग्लादेश को शांति तथा विकास का एक मार्ग दिखलाया।सोनार बांग्ला के सपने को सच करने की राह दिखाई। भारत की उस समय की युवा पीढ़ी तो उनसे विशेष रूप से प्रभावित थी।और यह मेरा सौभाग्य था कि मैं स्वयं उन के विचारो के ज्ञान से लाभ उठा सका।आज बंगबन्धु को न केवल दक्षिण एशिया में बल्कि पूरे विश्व में शांति और सहअस्त्तिव की स्थापना करने वाले नेता के तौर पर याद किया जाता है।उनकी बेटी, एक्सेलेंसी शेख़ हसीना आज बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के तौर पर यहां हैं। इस अवसर पर मैं उनके साहस की भी प्रशंसा करना चाहता हूं। जिस मुश्किल हालात से उन्होंने खुद को निकाला, अपने देश को निकाला, वो साहस हर किसी में नहीं होता। लेकिन वो चट्टान की तरह आज भी खड़ी हैं, और अपने देश को विकास पथ पर ले जाने के लिए काम कर रही हैं। आज हमारे क्षेत्र को, दुनिया के इस प्राचीन भूभाग को मुख्यतः तीन विचारधाराएं परिभाषित करती हैं। यह विचार धाराएं हमारे समाज तथा सरकारी व्यवस्थाओ की प्राथमिकताओं का आइना हैं। इस में एक सोच है जो आथिक विकास पर केन्द्रित है ; देश को समृद्ध तथा शक्तिशाली बनाने पर फोकस्ड है;समाज के सभी वर्गों को साथ ले कर चलने पर आधारित है।इस सोच का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है बांग्लादेश की प्रगति एव उन्नति। एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में बांग्लादेश के नागरिकों की औसत आयु भारत से भी कम थी। आज बांग्लादेश के नागरिकों की औसत आयु भारत से भी ज्यादा है। पिछले पैंतालीस वर्ष में बांग्लादेश की GDP इकतीस गुना बढ़ी है।प्रति व्यक्ति आय में तेरह गुना की बढोतरी हुई है। इन्फेंट मोर्टेलिटी दो सौ बाईस से घट कर अब अड़तीस रह गई है।प्रति व्यक्ति डॉक्टरों की संख्या में तीन गुना बढोतरी हुई।स्वतंत्रता के बाद से अब तक बांग्लादेश का निर्यात एक सौ पच्चीस गुना बढ़ चुका है। परिवर्तन के यह चंद पैरामीटर्स अपने आप में काफी कुछ कह रहे है। प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के विज़न पर चलते हुए बांग्लादेश आर्थिक प्रगति की नयी सीमाए पार कर रहा है। लेकिन दुःख की बात है कि इन दो विचार धाराओं के विपरीत भी दक्षिण एशिया में एक मानसिकता है। ऐसी सोच जो कि आतंकवाद की प्रेरणा तथा उसकी पोषक है। ऐसी सोच जिस का वैल्यू सिस्टम मानवता पर नहीं अपितु हिंसा, आतिवाद तथा आतंक पर आधारित है । जिस का मूल उद्देश है टेर्रोरिस्ट्स द्वारा टेररिज्म फैलाना। एक ऐसी सोच जिस के नीति निर्माताओं कोः · मानववाद से बड़ा आतंकवाद लगता है। · विकास से बड़ा विनाश लगता है। · सृजन से बड़ा संहार लगता है। · विश्वास से बड़ा विश्वासघात लगता है। यह सोच हमारे समाज के शांति तथा संतुलन, और उस के मानसिक तथा आर्थिक विकास के लिए सब से बड़ा चैलेंज है। यह विचारधारा पूरे क्षेत्र तथा विश्व की शांति तथा विकास में अवरोधक है। जहां भारत और बांग्लादेश समाज के आर्थिक विकास की थॉट स्ट्रीम्स में सहभागी हैं, वहीं हम इस तीसरी, नकारात्मक विचारधारा के विक्टिम भी है। हमारी हार्दिक अभिलाषा है की इस क्षेत्र के सभी देशो के citizens सफलता और समृधि की ओर बढ़ें। और इस के लिए हमारे सहयोग के द्वार सदैव खुले हैं ।लेकिन इस के लिए आतंकवाद और आतंकवादी सोच का त्याग अनिवार्य है । भारत-बांग्लादेश संबंध ना सरकारों के मोहताज हैं और ना ही सत्ता के। भारत और बांग्लादेश इसलिए साथ हैं, क्योंकि दोनों देशों के एक सौ चालीस करोड़ लोग साथ हैं। हम दुःख-सुख के साथी है । मैंने हमेशा कहा है कि जो सपना मैं भारत के लिए देखता हूं, वही शुभकामना मेरी बांग्लादेश के लिए भी है।और भारत के हर पड़ोसी देश के लिए भी है। मैं बांग्लादेश के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं। एक दोस्त होने के नाते भारत जितनी मदद कर सकता है, वो करेगा।आखिर में, मैं एक बार फिर मुक्ति योद्धाओं को, भारत के वीर सैनिकों को नमन करता हूं। और इस कार्यक्रम के आयोजन तथा उपस्थिति के लिए प्रधानमत्री शेख़ हसीना जी का खास तौर पर अभिनन्दन करता हूँ।भारत सदैव एक घनिष्ठ तथा विश्वसनीय मित्र की तरह बांग्लादेश के साथ हर घड़ी हर सहायता के लिए तैयार है और रहेगा। जय हिंद- जॉय बांग्ला !!! 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- महाघमनी को महराव ( Arch । - वृक्विका ६० (Renal A.) of aorta) २८५,३१२,३१४ -~-महाघमनी की महराव की परिखास्तीया धमनी व शिरा (Int. (Groove for the arch of -मूलांगुलीया पुरोगा (Common palmar digital A.) ३२२ मूल फुप्फुसीय ध. (Pulmonary trunk) ३१२ - मूल शिरोयोवर्तिनी घ. ( Common carotid A.) ३१२, ३१९ ---मूल थोषिगा प० (Common iliac A.) ११९, ३२५ - मौगिकी ध. (Facial A.) १००,३१२,३१८, ३१९ - याकृती घमनी (Hepatic A. ) - योनीघo (Vaginal A.) ३२६ - रासनिकी ध० ( Lingual A. ) --याजदरमध्यस्य पैशी की धमनी (Phrenic A.) ३१६ - विवर्तनो धु० (Peroneal A.) mammary vessels) ३४१ - स्तनीया घ० (Mammary A. ) स्वरयाभिको छ { Laryngeal ( A.) ३२६ -शकुलीया घ० (Auricular A.) ३२६ -शांत्रिकी घ० ( Temporal A.) ३१८,३२६ -खिकी उपरितन घमनी, (Superficial temporal A.) ३२९,३१३ शिरोघांतिनी घ० ( Commocarotid A.) ३१८ -- श्रीणिमूलिया घमनी ( Common iliac A. ) ३१६ हा० (Maxillary A. ) हार्दिक धर्मनियां (Coronary Aa.) ३१५ । नत्रजन (N) १६४, ३६१ नव्ज (Pulse) २९९ नरवस्ति गह्वर (Male pekis) ८१
- महाघमनी को महराव of aorta) दो सौ पचासी,तीन सौ बारह,तीन सौ चौदह -~-महाघमनी की महराव की परिखास्तीया धमनी व शिरा तीन सौ बाईस मूल फुप्फुसीय ध. तीन सौ बारह - मूल शिरोयोवर्तिनी घ. तीन सौ बारह, तीन सौ उन्नीस ---मूल थोषिगा पशून्य एक सौ उन्नीस, तीन सौ पच्चीस - मौगिकी ध. एक सौ,तीन सौ बारह,तीन सौ अट्ठारह, तीन सौ उन्नीस - याकृती घमनी - योनीघo तीन सौ छब्बीस - रासनिकी धशून्य --याजदरमध्यस्य पैशी की धमनी तीन सौ सोलह - विवर्तनो धुशून्य mammary vessels) तीन सौ इकतालीस - स्तनीया घशून्य स्वरयाभिको छ { Laryngeal तीन सौ छब्बीस -शकुलीया घशून्य तीन सौ छब्बीस -शांत्रिकी घशून्य तीन सौ अट्ठारह,तीन सौ छब्बीस -खिकी उपरितन घमनी, तीन सौ उनतीस,तीन सौ तेरह शिरोघांतिनी घशून्य तीन सौ अट्ठारह -- श्रीणिमूलिया घमनी तीन सौ सोलह हाशून्य हार्दिक धर्मनियां तीन सौ पंद्रह । नत्रजन एक सौ चौंसठ, तीन सौ इकसठ नव्ज दो सौ निन्यानवे नरवस्ति गह्वर इक्यासी
फल, पनीर फल, नींबू फल मोरिंडा घूमना - दक्षिण एशिया से एक अद्भुत पौधे का नाम। नोनी का रस विशेष रूप से सराहना की जाती है - इस उत्पाद के उपयोगी गुणों का अध्ययन कई सालों से किया गया है। अध्ययनों से पता चलता है कि यह मानव शरीर के समग्र सुधार और सेलुलर स्तर पर कायाकल्प में योगदान देता है। वर्तमान एजेंट में विटामिन (समूह बी, ए, सी, ई, बायोटिन, नियासिन) का एक जटिल, साथ ही अपरिवर्तनीय पदार्थ भी शामिल हैंः - मोलिब्डेनम; - सोडियम क्लोराइड; - कैल्शियम; - लोहा; - पोटेशियम; - फास्फोरस; - सोडियम; - मैग्नीशियम; - सेरीन; - ग्लाइसिन; - arginine; - cystine; - लाइसिन; - प्रोलाइन; - ल्यूसीन और इसके आइसोमर; - alanine; - मेथिओनिन; - threonine; - tryptophan; - फेनिलएलनिन; - वेलिन; - हिस्टडीन; - tyrosine; - एमिनो एसिड का एक परिसर (फोलिक, एस्पार्टिक, पेंटोथेनिक, ग्लूटामाइन); - कड़वा ग्लाइकोसाइड्स (इरिडोइड); - Proxeronine। कुल मिलाकर, फल में लगभग 150 विभिन्न अवयव होते हैं, जिनमें से विशिष्ट विशेषता उच्च पाचन और जैव उपलब्धता है। गैर फल के रस कितना उपयोगी है? समीक्षा के अनुसार, प्रश्न में उत्पाद की दैनिक खपत तेजी से immunomodulating प्रभाव पैदा करता है। इन्फ्लूएंजा और अन्य वायरल रोगों के महामारी के दौरान भी, मोरिंडा के फल से प्राकृतिक निकालने से संक्रमण से शरीर की भरोसेमंद सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा, गैर रस के उपयोगी गुणों में ऐसे प्रभाव शामिल हैंः - तंत्रिका तंत्र और यकृत parenchyma की कोशिकाओं की बहाली; - मुक्त कणों, विषाक्त यौगिकों, उनके उन्मूलन का तटस्थता; - उम्र बढ़ने धीमा; - कैंसर कोशिकाओं, ट्यूमर और मेटास्टेस के विकास को रोकें; - आंतरिक अंगों के चिकनी मांसपेशियों के कार्यों का समर्थन करें; - रक्त में ग्लूकोज एकाग्रता का सामान्यीकरण; - त्वचा में सुधार; - तंत्रिका, श्वसन, कार्डियोवैस्कुलर, प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार; - डीएनए के स्तर पर कोशिकाओं की सुरक्षा; - एलर्जी की रोकथाम। नॉन फलों के उपयोगी गुण एंटीप्रेट्रिक, एंटीट्यूसिव, एंटीसेप्टिक, एंटीपारासिटिक, एंटीबैक्टीरियल एक्शन भी प्रदान करते हैं। लगातार उपयोग के साथ उत्पाद पाचन में सुधार करने, सामान्य रूप से जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है, साहस और शारीरिक शक्ति देता है। आज तक, ऑटोम्यून्यून बीमारियों के उपचार के लिए वर्णित एजेंट की प्रभावशीलता पर परीक्षण अभी भी किए जा रहे हैं। यह अच्छी तरह से जाना जाता है कि नॉन जूस पूरी तरह से किसी भी बीमारी के साथ एक सूजन प्रक्रिया के साथ मदद करता है। यह निकालने के एनाल्जेसिक प्रभाव के कारण होता है, जो जल्दी से पैथोलॉजिकल तंत्र और एनेस्थेटिज़ को रोकता है। इसके अलावा, मोरिंडा के फल का रस पित्त, एंजाइमों के उत्पादन को उत्तेजित करता है और पूरे पाचन तंत्र की गतिविधि को पूरी तरह से उत्तेजित करता है। यह प्रभाव एंथ्राक्विनोन के उत्पाद में सामग्री के कारण हासिल किया जाता है, जो गुप्त प्रक्रियाओं को तेज करता है। प्रस्तुत आहार पूरक इस तरह की बीमारियों से मदद करता हैः - पुरानी थकान ; - विभिन्न प्रकार के दर्द सिंड्रोम; - gastritis; - helminths; - पेट और आंतों के अल्सरेटिव घाव; - अस्थिर रक्तचाप; - अवसादग्रस्त स्थितियां; - घोर वहम; - एक वायरल या संक्रामक प्रकृति की लगातार बीमारियां; - त्वचाविज्ञान सूजन रोग; - आंख की बीमारियां; - कार्डियोवैस्कुलर पैथोलॉजीज; - कैंसर, सौम्य neoplasms; - नशा; - सिरोसिस और यकृत के साथ अन्य समस्याओं, साथ ही साथ प्लीहा; - musculoskeletal प्रणाली, विशेष रूप से जोड़ों के विकार; - मूत्र-जननांग संक्रमण;
फल, पनीर फल, नींबू फल मोरिंडा घूमना - दक्षिण एशिया से एक अद्भुत पौधे का नाम। नोनी का रस विशेष रूप से सराहना की जाती है - इस उत्पाद के उपयोगी गुणों का अध्ययन कई सालों से किया गया है। अध्ययनों से पता चलता है कि यह मानव शरीर के समग्र सुधार और सेलुलर स्तर पर कायाकल्प में योगदान देता है। वर्तमान एजेंट में विटामिन का एक जटिल, साथ ही अपरिवर्तनीय पदार्थ भी शामिल हैंः - मोलिब्डेनम; - सोडियम क्लोराइड; - कैल्शियम; - लोहा; - पोटेशियम; - फास्फोरस; - सोडियम; - मैग्नीशियम; - सेरीन; - ग्लाइसिन; - arginine; - cystine; - लाइसिन; - प्रोलाइन; - ल्यूसीन और इसके आइसोमर; - alanine; - मेथिओनिन; - threonine; - tryptophan; - फेनिलएलनिन; - वेलिन; - हिस्टडीन; - tyrosine; - एमिनो एसिड का एक परिसर ; - कड़वा ग्लाइकोसाइड्स ; - Proxeronine। कुल मिलाकर, फल में लगभग एक सौ पचास विभिन्न अवयव होते हैं, जिनमें से विशिष्ट विशेषता उच्च पाचन और जैव उपलब्धता है। गैर फल के रस कितना उपयोगी है? समीक्षा के अनुसार, प्रश्न में उत्पाद की दैनिक खपत तेजी से immunomodulating प्रभाव पैदा करता है। इन्फ्लूएंजा और अन्य वायरल रोगों के महामारी के दौरान भी, मोरिंडा के फल से प्राकृतिक निकालने से संक्रमण से शरीर की भरोसेमंद सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा, गैर रस के उपयोगी गुणों में ऐसे प्रभाव शामिल हैंः - तंत्रिका तंत्र और यकृत parenchyma की कोशिकाओं की बहाली; - मुक्त कणों, विषाक्त यौगिकों, उनके उन्मूलन का तटस्थता; - उम्र बढ़ने धीमा; - कैंसर कोशिकाओं, ट्यूमर और मेटास्टेस के विकास को रोकें; - आंतरिक अंगों के चिकनी मांसपेशियों के कार्यों का समर्थन करें; - रक्त में ग्लूकोज एकाग्रता का सामान्यीकरण; - त्वचा में सुधार; - तंत्रिका, श्वसन, कार्डियोवैस्कुलर, प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार; - डीएनए के स्तर पर कोशिकाओं की सुरक्षा; - एलर्जी की रोकथाम। नॉन फलों के उपयोगी गुण एंटीप्रेट्रिक, एंटीट्यूसिव, एंटीसेप्टिक, एंटीपारासिटिक, एंटीबैक्टीरियल एक्शन भी प्रदान करते हैं। लगातार उपयोग के साथ उत्पाद पाचन में सुधार करने, सामान्य रूप से जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है, साहस और शारीरिक शक्ति देता है। आज तक, ऑटोम्यून्यून बीमारियों के उपचार के लिए वर्णित एजेंट की प्रभावशीलता पर परीक्षण अभी भी किए जा रहे हैं। यह अच्छी तरह से जाना जाता है कि नॉन जूस पूरी तरह से किसी भी बीमारी के साथ एक सूजन प्रक्रिया के साथ मदद करता है। यह निकालने के एनाल्जेसिक प्रभाव के कारण होता है, जो जल्दी से पैथोलॉजिकल तंत्र और एनेस्थेटिज़ को रोकता है। इसके अलावा, मोरिंडा के फल का रस पित्त, एंजाइमों के उत्पादन को उत्तेजित करता है और पूरे पाचन तंत्र की गतिविधि को पूरी तरह से उत्तेजित करता है। यह प्रभाव एंथ्राक्विनोन के उत्पाद में सामग्री के कारण हासिल किया जाता है, जो गुप्त प्रक्रियाओं को तेज करता है। प्रस्तुत आहार पूरक इस तरह की बीमारियों से मदद करता हैः - पुरानी थकान ; - विभिन्न प्रकार के दर्द सिंड्रोम; - gastritis; - helminths; - पेट और आंतों के अल्सरेटिव घाव; - अस्थिर रक्तचाप; - अवसादग्रस्त स्थितियां; - घोर वहम; - एक वायरल या संक्रामक प्रकृति की लगातार बीमारियां; - त्वचाविज्ञान सूजन रोग; - आंख की बीमारियां; - कार्डियोवैस्कुलर पैथोलॉजीज; - कैंसर, सौम्य neoplasms; - नशा; - सिरोसिस और यकृत के साथ अन्य समस्याओं, साथ ही साथ प्लीहा; - musculoskeletal प्रणाली, विशेष रूप से जोड़ों के विकार; - मूत्र-जननांग संक्रमण;
मेरे जीवन में किस्से बहुत नहीं हैं, संघर्ष तो बिल्कुल नहीं। मेरे पास यात्राएं हैं, कर्म हैं और उससे उपजी सफलताएं हैं। बहुत संघर्ष की कहानियां नहीं हैं, जिन्हें सुना सकूं। नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर 'प्रसार भारती' ने 'दूरदर्शन' के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्लेटफॉर्म 'फ्रीडिश' पर दो नए चैनल्स द्वारा स्लॉट हासिल किए जाने की घोषणा की है। मूलतः पिथौरागढ़ के रहने वाले गोविंद सिंह पहले भी इस यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इजरायल के चैनल 'N12 News' ने रविवार की सुबह अपनी एंकर रीना मैत्ज़ालियाच (Rina Matzliach) को एक सप्ताह के लिए सस्पेंड करने की घोषणा की है। कोरोनावायरस (कोविड-19) के दौरान अपने बड़े दर्शक वर्ग की एंटरटेनमेंट की जरूरतों को पूरा करने के लिए कलर्स रिश्ते 'डीडी फ्रीडिश' प्लेटफॉर्म पर प्रीमियम कंटेंट का प्रसारण करेगा। फेसबुक लाइव के दौरान 'बदलती दुनिया में रेडियो' विषय पर शेफाली चतुर्वेदी ने कहा कि जब हम बदलते युग में रेडियो की बात करते हैं तो हमें रेडियो से बदलाव की बात भी करनी चाहिए। प्रसार भारती के 'डायरेक्ट टू होम' (DTH) प्लेटफॉर्म 'डीडी फ्रीडिश' (DD Free Dish) से फरवरी में हटने के बाद लगभग सभी बड़े ब्रॉडकास्टर्स फिर इस पर वापस आ गए हैं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारत में ऐसे भी पत्रकार हुए हैं, जिन्होंने सामाजिक सौहार्द के लिए अपने प्राणों की आहूति दे दी। ये लोग आज भी पत्रकारिता व पत्रकारों को प्रेरणा देते हैं।
मेरे जीवन में किस्से बहुत नहीं हैं, संघर्ष तो बिल्कुल नहीं। मेरे पास यात्राएं हैं, कर्म हैं और उससे उपजी सफलताएं हैं। बहुत संघर्ष की कहानियां नहीं हैं, जिन्हें सुना सकूं। नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर 'प्रसार भारती' ने 'दूरदर्शन' के डायरेक्ट टू होम प्लेटफॉर्म 'फ्रीडिश' पर दो नए चैनल्स द्वारा स्लॉट हासिल किए जाने की घोषणा की है। मूलतः पिथौरागढ़ के रहने वाले गोविंद सिंह पहले भी इस यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इजरायल के चैनल 'Nबारह News' ने रविवार की सुबह अपनी एंकर रीना मैत्ज़ालियाच को एक सप्ताह के लिए सस्पेंड करने की घोषणा की है। कोरोनावायरस के दौरान अपने बड़े दर्शक वर्ग की एंटरटेनमेंट की जरूरतों को पूरा करने के लिए कलर्स रिश्ते 'डीडी फ्रीडिश' प्लेटफॉर्म पर प्रीमियम कंटेंट का प्रसारण करेगा। फेसबुक लाइव के दौरान 'बदलती दुनिया में रेडियो' विषय पर शेफाली चतुर्वेदी ने कहा कि जब हम बदलते युग में रेडियो की बात करते हैं तो हमें रेडियो से बदलाव की बात भी करनी चाहिए। प्रसार भारती के 'डायरेक्ट टू होम' प्लेटफॉर्म 'डीडी फ्रीडिश' से फरवरी में हटने के बाद लगभग सभी बड़े ब्रॉडकास्टर्स फिर इस पर वापस आ गए हैं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारत में ऐसे भी पत्रकार हुए हैं, जिन्होंने सामाजिक सौहार्द के लिए अपने प्राणों की आहूति दे दी। ये लोग आज भी पत्रकारिता व पत्रकारों को प्रेरणा देते हैं।
कई घरों में बच्चे अक्सर यूट्यूब पर वीडियो देखते हैं। लेकिन जरूरी है कि माता-पिता या उसके अन्य परिजन इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि बच्चे किस तरह के वीडियो देख रहे हैं। दरअसल आज हम जिस खबर की चर्चा कर रहे हैं वो एक ऐसे शख्स की कहानी है जिसने यूट्यूब से वीडियो देख अपराध के तरीखे सीखे और कम उम्र में ही वो जुर्म के रास्ते पर चल पड़ा। मुंबई पुलिस ने कुछ ही दिनों पहले 27 साल के सोनू बानिया कुमार नाम के एक युवक को पकड़ा है। सोनू पर अलग-अलग थानों में 50 से अधिक मामले दर्ज है। दरअसल सोनू एक पेशेवर चोर और लुटेरा है। सोनू को पुलिस ने गुजरात जिले के वापी से गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक सोनू यहां ज्वैलरी की तीन दुकानों को लूटने की साजिश रच रहा था। उसने अपने एक साथी के साथ इन दुकानों की रेकी भी कर ली थी। लेकिन इससे पहले कि वो अपने मकसद में कामयाब होता पुलिस ने उसे दबोच लिया। सोनू के पास से कुछ चोरी के लैपटॉप, आईपैड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं। सोनू सिवरी में डेढ़ लाख रुपए के लैपटॉप चोरी का मुख्य आरोपी है। शातिर सोनू को पकड़ने के बाद जब पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू कि तो कई सारे चौंकाने वाले खुलासे हुए। शुरुआती जांच में पता चला है कि सोनू के माता-पिता नहीं हैं। अनाथ होने की वजह से वो बचपन में अनाथ आश्रम में रहता था। लेकिन 15 साल की उम्र में वो अनाथआलय से फरार हो गया। अनाथआलय से फरार होने के बाद वो छोटी-मोटे अपराधों में शामिल हो गया। सोनू ने यूट्यूब पर वीडियो देख कर अपराध करने की ट्रेनिंग ली। सोनू पहले भी जेल जा चुका है और जेल में रहने के दौरान उसने अपराध कर बचने के तरीके भी सीखे थे। जेल से बाहर आने के बाद वो लगातार अपराध करता और बड़ी ही साफगोई से बच निकलता। वो अपराध करने से पहले अच्छी तरह से रेकी करता था और बच निकलने के सारे रास्तों को अच्छी तरह से देखता और समझता था। धीरे-धीरे उसे विश्वास होने लगा कि वो अब पुलिस को चकमा देने में माहिर बन चुका है। यहीं विश्वास उसका अति आत्मविश्वास हो गया। खुद को जरुरत से ज्यादा होशियार समझने वाले सोनू ने पुलिस को फोन पर खुलेआम चुनौती दी कि 'पकड़ सको तो मुझे पकड़ कर दिखाओ। 'दरअसल सोनू अलग-अलग सिम का इस्तेमाल करता था और लगातार अपना लोकेशन बदलता रहता था। इसलिए कानून के हाथ उस तक नहीं पहुंच पा रहे थे। लेकिन एक दिन उसका यह ओवर कॉनफिडेंस उसपर भारी पड़ गया और वो चढ़ गया पुलिस के हत्थे। बताया जा रहा है कि इस बार सोनू का जेल से छूटना मुश्किल है क्योंकि उसपर 50 से अधिक मामले दर्ज हैं। (और...CRIME NEWS)
कई घरों में बच्चे अक्सर यूट्यूब पर वीडियो देखते हैं। लेकिन जरूरी है कि माता-पिता या उसके अन्य परिजन इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि बच्चे किस तरह के वीडियो देख रहे हैं। दरअसल आज हम जिस खबर की चर्चा कर रहे हैं वो एक ऐसे शख्स की कहानी है जिसने यूट्यूब से वीडियो देख अपराध के तरीखे सीखे और कम उम्र में ही वो जुर्म के रास्ते पर चल पड़ा। मुंबई पुलिस ने कुछ ही दिनों पहले सत्ताईस साल के सोनू बानिया कुमार नाम के एक युवक को पकड़ा है। सोनू पर अलग-अलग थानों में पचास से अधिक मामले दर्ज है। दरअसल सोनू एक पेशेवर चोर और लुटेरा है। सोनू को पुलिस ने गुजरात जिले के वापी से गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक सोनू यहां ज्वैलरी की तीन दुकानों को लूटने की साजिश रच रहा था। उसने अपने एक साथी के साथ इन दुकानों की रेकी भी कर ली थी। लेकिन इससे पहले कि वो अपने मकसद में कामयाब होता पुलिस ने उसे दबोच लिया। सोनू के पास से कुछ चोरी के लैपटॉप, आईपैड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं। सोनू सिवरी में डेढ़ लाख रुपए के लैपटॉप चोरी का मुख्य आरोपी है। शातिर सोनू को पकड़ने के बाद जब पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू कि तो कई सारे चौंकाने वाले खुलासे हुए। शुरुआती जांच में पता चला है कि सोनू के माता-पिता नहीं हैं। अनाथ होने की वजह से वो बचपन में अनाथ आश्रम में रहता था। लेकिन पंद्रह साल की उम्र में वो अनाथआलय से फरार हो गया। अनाथआलय से फरार होने के बाद वो छोटी-मोटे अपराधों में शामिल हो गया। सोनू ने यूट्यूब पर वीडियो देख कर अपराध करने की ट्रेनिंग ली। सोनू पहले भी जेल जा चुका है और जेल में रहने के दौरान उसने अपराध कर बचने के तरीके भी सीखे थे। जेल से बाहर आने के बाद वो लगातार अपराध करता और बड़ी ही साफगोई से बच निकलता। वो अपराध करने से पहले अच्छी तरह से रेकी करता था और बच निकलने के सारे रास्तों को अच्छी तरह से देखता और समझता था। धीरे-धीरे उसे विश्वास होने लगा कि वो अब पुलिस को चकमा देने में माहिर बन चुका है। यहीं विश्वास उसका अति आत्मविश्वास हो गया। खुद को जरुरत से ज्यादा होशियार समझने वाले सोनू ने पुलिस को फोन पर खुलेआम चुनौती दी कि 'पकड़ सको तो मुझे पकड़ कर दिखाओ। 'दरअसल सोनू अलग-अलग सिम का इस्तेमाल करता था और लगातार अपना लोकेशन बदलता रहता था। इसलिए कानून के हाथ उस तक नहीं पहुंच पा रहे थे। लेकिन एक दिन उसका यह ओवर कॉनफिडेंस उसपर भारी पड़ गया और वो चढ़ गया पुलिस के हत्थे। बताया जा रहा है कि इस बार सोनू का जेल से छूटना मुश्किल है क्योंकि उसपर पचास से अधिक मामले दर्ज हैं।
- 4 hrs ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! Ranveer Singh in IPL 2023: चैनल स्टार स्पोर्ट्स ने बॉलीवुड स्टार औऱ खेल प्रेमी रणवीर सिंह को अपना ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है। रणवीर की स्टार स्पोर्ट्स के साथ ये पहल खेल की दुनिया में सबसे अनूठी मानी जा रही है। इसकी धमाकेदार शुरुआत टाटा आईपीएल 2033 से होगी जिसमें वो बतौर सूत्रधार की भूमिका में नजर आएंगे। तय है कि लीग के दौरान कहानियों को पेश करने और जानने का अंदाज अब और भी मनोरंजक, रोचक और तूफानी होगा। स्टार स्पोर्ट्स और पॉप कल्चर आइकन अभिनेता के बीच बना ये एसोसिएशन खेल और मनोरंजन की दुनिया को नये क्षितिज पर स्थापित करेगा। "इनक्रेडिबल लीग" के इस सीज़न में 'सूत्रधार' की भूमिका निभाते हुए रणवीर सिंह अपने अंदाज से ना केवल लोगों को जोड़ेंगे बल्कि खेल और एंटरटेनमेंट की नई लहर की शुरुआत भी करेंगे। बतौर सूत्रधार रणवीर का ये धमाकेदार सफर शुरूआती हफ्ते (शुक्रवार 31 मार्च से रविवार 2 अप्रैल ) से शुरु होगा। रणवीर का खेलों के लिए प्यार जगजाहिर है उनकी इस विशाल छवि के जरिए चैनल की कोशिश उन दर्शकों को खुद से जोड़ने की है जो खेलों के साथ अभी तक गहरा नाता नहीं बना सके हैं। वैसे भी स्टार स्पोर्ट्स का ये एक घोषित मिशन भी है कि खेलों को प्रति लोगों की दीवानगी और उनके जुनून को बढ़ावा देकर भारत की छवि को एक स्पोर्ट्स नेशन के तौर पर और भी ज्यादा मजबूत किया जाये। दूसरी ओर, रणवीर सिंह के पास मौका है फैन्स के साथ अपने जुनून को व्यक्त करने का। स्टार स्पोर्ट्स के साथ अपने एसोसिएशन को लेकर रणवीर सिंह का कहना है, "स्टार स्पोर्ट्स एक ऐसा ब्रांड है जो भारत में खेलों का पर्याय है। एक खेल प्रेमी के रूप में, एक ऐसे ब्रांड के साथ जुड़ना जिसने भारत में खेलों को लेकर एक नये नजरिए को पेश किया जो कि मेरे लिए ये बहुत खास है। वर्ल्ड स्पोर्ट्स के ढेरों यादगार लम्हों को स्टार स्पोर्ट्स पर देखकर मैं बड़ा हुआ हूं और अब इस शानदार सफर का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व की बात है। " पार्टनर के रूप में स्टार स्पोर्ट्स और रणवीर सिंह के इस सफर की शुरुआत टाटा आईपीएल 2023 (31 मार्च - 2 अप्रैल) के ओपनिंग वीकेंड से आपको देखने को मिलेगी और फिर पूरे टूर्नामेंट के दौरान नये-नये सितारों के उभरने की कहानी और हर दिन बनते रोमांच को रोचक तरीके से जानने को भी मिलेगी। इस खूबसूरत सफर में वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल, प्रीमियर लीग, प्रो कबड्डी, एशिया कप और आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप सहित नेटवर्क पर आने वाले प्रमुख खेल आयोजन भी शामिल हैं। बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
- चार hrs ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! Ranveer Singh in IPL दो हज़ार तेईस: चैनल स्टार स्पोर्ट्स ने बॉलीवुड स्टार औऱ खेल प्रेमी रणवीर सिंह को अपना ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है। रणवीर की स्टार स्पोर्ट्स के साथ ये पहल खेल की दुनिया में सबसे अनूठी मानी जा रही है। इसकी धमाकेदार शुरुआत टाटा आईपीएल दो हज़ार तैंतीस से होगी जिसमें वो बतौर सूत्रधार की भूमिका में नजर आएंगे। तय है कि लीग के दौरान कहानियों को पेश करने और जानने का अंदाज अब और भी मनोरंजक, रोचक और तूफानी होगा। स्टार स्पोर्ट्स और पॉप कल्चर आइकन अभिनेता के बीच बना ये एसोसिएशन खेल और मनोरंजन की दुनिया को नये क्षितिज पर स्थापित करेगा। "इनक्रेडिबल लीग" के इस सीज़न में 'सूत्रधार' की भूमिका निभाते हुए रणवीर सिंह अपने अंदाज से ना केवल लोगों को जोड़ेंगे बल्कि खेल और एंटरटेनमेंट की नई लहर की शुरुआत भी करेंगे। बतौर सूत्रधार रणवीर का ये धमाकेदार सफर शुरूआती हफ्ते से शुरु होगा। रणवीर का खेलों के लिए प्यार जगजाहिर है उनकी इस विशाल छवि के जरिए चैनल की कोशिश उन दर्शकों को खुद से जोड़ने की है जो खेलों के साथ अभी तक गहरा नाता नहीं बना सके हैं। वैसे भी स्टार स्पोर्ट्स का ये एक घोषित मिशन भी है कि खेलों को प्रति लोगों की दीवानगी और उनके जुनून को बढ़ावा देकर भारत की छवि को एक स्पोर्ट्स नेशन के तौर पर और भी ज्यादा मजबूत किया जाये। दूसरी ओर, रणवीर सिंह के पास मौका है फैन्स के साथ अपने जुनून को व्यक्त करने का। स्टार स्पोर्ट्स के साथ अपने एसोसिएशन को लेकर रणवीर सिंह का कहना है, "स्टार स्पोर्ट्स एक ऐसा ब्रांड है जो भारत में खेलों का पर्याय है। एक खेल प्रेमी के रूप में, एक ऐसे ब्रांड के साथ जुड़ना जिसने भारत में खेलों को लेकर एक नये नजरिए को पेश किया जो कि मेरे लिए ये बहुत खास है। वर्ल्ड स्पोर्ट्स के ढेरों यादगार लम्हों को स्टार स्पोर्ट्स पर देखकर मैं बड़ा हुआ हूं और अब इस शानदार सफर का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व की बात है। " पार्टनर के रूप में स्टार स्पोर्ट्स और रणवीर सिंह के इस सफर की शुरुआत टाटा आईपीएल दो हज़ार तेईस के ओपनिंग वीकेंड से आपको देखने को मिलेगी और फिर पूरे टूर्नामेंट के दौरान नये-नये सितारों के उभरने की कहानी और हर दिन बनते रोमांच को रोचक तरीके से जानने को भी मिलेगी। इस खूबसूरत सफर में वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल, प्रीमियर लीग, प्रो कबड्डी, एशिया कप और आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप सहित नेटवर्क पर आने वाले प्रमुख खेल आयोजन भी शामिल हैं। बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह चढियार पूर्व विधायक किशोरी लाल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में विधायक बैजनाथ में अपने चहेते कार्यकर्ताओं और ठेकेदारों को ही कार्य आबंटित किए जा रहे हैं। पूर्व विधायक किशोरी लाल ने कहा हिमाचल पथ परिवहन निगम के बस डिपो बैजनाथ के अधिकतर कर्मचारियों तथा बसों को जोगिंद्रनगर स्थानांतरित कर दिया गया है जिस पर बैजनाथ के विधायक मुलख राज प्रेमी चुप्पी साधे हुए हैं जिसके चलते क्षेत्र के कई बस रूट प्रभावित होंगे पूर्व विधायक किशोरी लाल ने कहा कि जो कार्य कांग्रेस सरकार के समय में मंजूर हुए हैं उन कार्यों का उद्घाटन व शिलान्यास बैजनाथ के वर्तमान विधायक मुलख राज प्रेमी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों में कोई भी नई डीपीआर तैयार नहीं की गई है। 2022 चुनावों के मद्देनजर पूर्व विधायक किशोरी लाल ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है कांग्रेस एकजुट है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश में केवल सिराज तथा धर्मपुर विधानसभा क्षेत्रों में ही विकास कार्य हो रहे हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि अगर कांग्रेस सरकार बनती है तो जो भी विकास कार्य रह गए हैं उन्हें पूरा किया जाएगा तथा चढियार क्षेत्र में विकास कार्यों में कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने विधायक पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र में किसी भी स्कूल को अपग्रेड नहीं करवा पाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में चढियार अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं न के बराबर हैं चढियार अस्पताल में कैंटीन पिछले चार सालों से बंद पड़ी हुई है तथा लगभग 70 प्रतिशत स्टाफ के पद रिक्त चल रहे हैं। इस अवसर पर चढियार क्षेत्र के कुछ व्यक्तियों ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता भी ग्रहण की। इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बैजनाथ के अध्यक्ष वीरेंद्र जम्वाल, संसार चंद, मिलकीत सिंह, गुलाब राज ठाकुर, कमलेश शर्मा, ठाकुर महेंद्र सिंह व कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।
लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह चढियार पूर्व विधायक किशोरी लाल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में विधायक बैजनाथ में अपने चहेते कार्यकर्ताओं और ठेकेदारों को ही कार्य आबंटित किए जा रहे हैं। पूर्व विधायक किशोरी लाल ने कहा हिमाचल पथ परिवहन निगम के बस डिपो बैजनाथ के अधिकतर कर्मचारियों तथा बसों को जोगिंद्रनगर स्थानांतरित कर दिया गया है जिस पर बैजनाथ के विधायक मुलख राज प्रेमी चुप्पी साधे हुए हैं जिसके चलते क्षेत्र के कई बस रूट प्रभावित होंगे पूर्व विधायक किशोरी लाल ने कहा कि जो कार्य कांग्रेस सरकार के समय में मंजूर हुए हैं उन कार्यों का उद्घाटन व शिलान्यास बैजनाथ के वर्तमान विधायक मुलख राज प्रेमी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों में कोई भी नई डीपीआर तैयार नहीं की गई है। दो हज़ार बाईस चुनावों के मद्देनजर पूर्व विधायक किशोरी लाल ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है कांग्रेस एकजुट है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश में केवल सिराज तथा धर्मपुर विधानसभा क्षेत्रों में ही विकास कार्य हो रहे हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि अगर कांग्रेस सरकार बनती है तो जो भी विकास कार्य रह गए हैं उन्हें पूरा किया जाएगा तथा चढियार क्षेत्र में विकास कार्यों में कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने विधायक पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र में किसी भी स्कूल को अपग्रेड नहीं करवा पाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में चढियार अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं न के बराबर हैं चढियार अस्पताल में कैंटीन पिछले चार सालों से बंद पड़ी हुई है तथा लगभग सत्तर प्रतिशत स्टाफ के पद रिक्त चल रहे हैं। इस अवसर पर चढियार क्षेत्र के कुछ व्यक्तियों ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता भी ग्रहण की। इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बैजनाथ के अध्यक्ष वीरेंद्र जम्वाल, संसार चंद, मिलकीत सिंह, गुलाब राज ठाकुर, कमलेश शर्मा, ठाकुर महेंद्र सिंह व कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।
विद्वत्व और काव्यत्वं । शीर्षक लेख में यह बातें प्रामाणित हुई हैंः (१) " कविका प्रधान गुण सहृदयता है । हृदय की शृंगार घोर करुणादि जो वृत्तियाँ हैं वे उसे अत्यन्त सूक्ष्म एवं स्पष्ट रूप से अनुभूत होनी चाहिये । उक्त भिन्न वृत्तियों का विषय इन्द्रिय गोचर होते ही कवि का मन दुब्ध हो जाता और उस क्षुब्धता के आवेग में उनके मुख से जो बातें विनिसृत होती हैं वही यथार्थ कविता है... हमारे भाषा काव्य के भण्डार में ऐसी सर्वाङ्ग सुन्दर कविता गोस्वामी तुलसीदास जी को हो पायी जाती है" ( २ ) "यदि हम सम्प्रति काव्य का लक्षण इतना ही समझलें कि रमणीय अर्थ प्रकट करनेवाला शब्द काव्य कहाता है तो बस उक्त लक्षण को समझने से समस्त भ्रम दूर हो सकते हैं अर्थात् तत्क्षण ज्ञात हो जाता है कि काव्य के लिये पद्यरचना, यमक, प्रास, श्लेष सुतरां वर्ण माधुर्य्यादिकों की विशेष रूप से कोई आवश्यकता नहीं है (३) " कवित्व ईश्वर प्रदत्तगुण है । यदि कोई चाहे कि परिश्रम कर उसे प्राप्त कर ले तो नहीं हो सकता साधारण मनुष्य कवि हो सकता है केवल विद्वान ही नहीं। विद्या से सुधार होता है वह कल्पना का बाधक है और कल्पना ही से कविता की सृष्टि है अतएव बड़े २ विद्वान कवि नहीं होते अथवा उनकी कविता अच्छी नही होती । स्वाभाविक कवि कभी २ विद्वान भी हो जाते हैं जैसे कालि दास प्रभृति ", " (४) काव्य के प्रधान गुण सहृदयता और तज्जन्यवस्तु के प्रकृति सुलभ गुण वर्णन करने की शक्ति ईश्वर प्रदत्त गुण है । साधार्ण चौपाई में तुलसीदास ने क्या ही अपनी अपूर्व प्रतिभा दिखाई है ? जैसेः चौपाई । बन घमंड नभ गरजत घोरा । प्रिय हीन डरपंत मन, मोरा ॥ दामिन दमकि रही घनसाहीं । खेलको प्रौति यथा थिर नाहीं ॥ घरषहिं जलद भूमिनियराये । यथा नवहिं बुध विद्यापाये ॥ बूंद अघात सहें गिरि कैसे। खल के बचन सन्त कहें जैसे ॥ इत्यादि बड़ेश् कवि यथार्थ अभिमान करते थे जैसे पं० जगन्नाथ उनको अभिमानोक्ति से ग्रन्थ की शोभा बढ़ती है । आज कल के नये समालोचक हर्ष कवि की दपक्ति पर झुलस से गये हैं । शीर्षक द्वितीय निबन्ध में वे बातें कही गयी हैं जिनकी इस समय बड़ी आवश्यकता है । इसके शीर्षस्थान में एक लोक भामिनी विलास का लिखा हुआ है जो योग्य समा लोचकों को समझा रहा है ऐसा जान पड़ता है, वह लोक, अर्थ सहित यहाँ पर उद्धृत किया जाता है । लोक । नौर क्षौर विवेके हंसालस्थं त्वमेव तनुषे चेत् । विश्वस्मिन्नतुनान्यः कुलव्रतंपालयिष्यति कः । 2 भावार्थ । हे हंस जल और दूध को पृथक करने के लिये यदि तूही आलस्य करेगा तो ससार में तेरे उक्त कुलव्रत कर पालन और कौन करेगा। सच है समालोचक यदि पुस्तकों के दोष गुण विचार करने में आलस करे तो दूसरा इस काम को कौन करेगा। जो जिस काम के करने में समर्थ होता है वही उसे करता है अथवा उसी के ऊपर उस काम के करने का मार है। इस निवन्ध में बहुत सी ममालोचना सम्बन्धी अच्छी बातें बर्णित हैं उन में मे कई एक का उल्लेख किया जाता है । जिस से पाठक निवन्ध की उत्तमता समझ जायें । (१) हिन्दी भाषा में पुस्तकों की संख्या बढ़ती जाती हैं क्योंकि उपयोगी पुस्तकें बहुत ही कम प्रकाशित होती हैं । इसके प्रकाशक दोही प्रकार के मनुष्य हैं एक व्यापारी और दूसरा नाम चाहने वाले । व्यापारी जिम पुस्तक की fat अधिक देखता है उसी को छपवाता है उसके प्रयत्न से अच्छी पुस्तकों का प्रकाशित होना असम्भव अथवा दुर्घट है क्योंकि अच्छी पुस्तकों को चाहने वाले कम हैं । दैवात् किसी व्या पारी ने किसी अच्छी पुस्तक को प्रकाशित किया है तो उसने हानिही उठायी है अतएव अच्छी पुस्तकों का दूसरा संस्करण होता ही नही । ( यही कारण है कि इस निवन्धमालादर्श का भी दूसरा संस्करण अभी तक नहीं हुआ ) ) नाम चाहनेवाले बिना कुछ बिचार किये टूटे फूटे अशुद्ध शब्दों (जैसे पठित समाज, मनोकामना, स्यात् और अतिउत्मव आदि ) की दाक्यावली से दो चार पन्ने काले कर पुस्तक प्रकाशित करता है फिर ऐसी पुस्तक कैसे अच्छी हो
विद्वत्व और काव्यत्वं । शीर्षक लेख में यह बातें प्रामाणित हुई हैंः " कविका प्रधान गुण सहृदयता है । हृदय की शृंगार घोर करुणादि जो वृत्तियाँ हैं वे उसे अत्यन्त सूक्ष्म एवं स्पष्ट रूप से अनुभूत होनी चाहिये । उक्त भिन्न वृत्तियों का विषय इन्द्रिय गोचर होते ही कवि का मन दुब्ध हो जाता और उस क्षुब्धता के आवेग में उनके मुख से जो बातें विनिसृत होती हैं वही यथार्थ कविता है... हमारे भाषा काव्य के भण्डार में ऐसी सर्वाङ्ग सुन्दर कविता गोस्वामी तुलसीदास जी को हो पायी जाती है" "यदि हम सम्प्रति काव्य का लक्षण इतना ही समझलें कि रमणीय अर्थ प्रकट करनेवाला शब्द काव्य कहाता है तो बस उक्त लक्षण को समझने से समस्त भ्रम दूर हो सकते हैं अर्थात् तत्क्षण ज्ञात हो जाता है कि काव्य के लिये पद्यरचना, यमक, प्रास, श्लेष सुतरां वर्ण माधुर्य्यादिकों की विशेष रूप से कोई आवश्यकता नहीं है " कवित्व ईश्वर प्रदत्तगुण है । यदि कोई चाहे कि परिश्रम कर उसे प्राप्त कर ले तो नहीं हो सकता साधारण मनुष्य कवि हो सकता है केवल विद्वान ही नहीं। विद्या से सुधार होता है वह कल्पना का बाधक है और कल्पना ही से कविता की सृष्टि है अतएव बड़े दो विद्वान कवि नहीं होते अथवा उनकी कविता अच्छी नही होती । स्वाभाविक कवि कभी दो विद्वान भी हो जाते हैं जैसे कालि दास प्रभृति ", " काव्य के प्रधान गुण सहृदयता और तज्जन्यवस्तु के प्रकृति सुलभ गुण वर्णन करने की शक्ति ईश्वर प्रदत्त गुण है । साधार्ण चौपाई में तुलसीदास ने क्या ही अपनी अपूर्व प्रतिभा दिखाई है ? जैसेः चौपाई । बन घमंड नभ गरजत घोरा । प्रिय हीन डरपंत मन, मोरा ॥ दामिन दमकि रही घनसाहीं । खेलको प्रौति यथा थिर नाहीं ॥ घरषहिं जलद भूमिनियराये । यथा नवहिं बुध विद्यापाये ॥ बूंद अघात सहें गिरि कैसे। खल के बचन सन्त कहें जैसे ॥ इत्यादि बड़ेश् कवि यथार्थ अभिमान करते थे जैसे पंशून्य जगन्नाथ उनको अभिमानोक्ति से ग्रन्थ की शोभा बढ़ती है । आज कल के नये समालोचक हर्ष कवि की दपक्ति पर झुलस से गये हैं । शीर्षक द्वितीय निबन्ध में वे बातें कही गयी हैं जिनकी इस समय बड़ी आवश्यकता है । इसके शीर्षस्थान में एक लोक भामिनी विलास का लिखा हुआ है जो योग्य समा लोचकों को समझा रहा है ऐसा जान पड़ता है, वह लोक, अर्थ सहित यहाँ पर उद्धृत किया जाता है । लोक । नौर क्षौर विवेके हंसालस्थं त्वमेव तनुषे चेत् । विश्वस्मिन्नतुनान्यः कुलव्रतंपालयिष्यति कः । दो भावार्थ । हे हंस जल और दूध को पृथक करने के लिये यदि तूही आलस्य करेगा तो ससार में तेरे उक्त कुलव्रत कर पालन और कौन करेगा। सच है समालोचक यदि पुस्तकों के दोष गुण विचार करने में आलस करे तो दूसरा इस काम को कौन करेगा। जो जिस काम के करने में समर्थ होता है वही उसे करता है अथवा उसी के ऊपर उस काम के करने का मार है। इस निवन्ध में बहुत सी ममालोचना सम्बन्धी अच्छी बातें बर्णित हैं उन में मे कई एक का उल्लेख किया जाता है । जिस से पाठक निवन्ध की उत्तमता समझ जायें । हिन्दी भाषा में पुस्तकों की संख्या बढ़ती जाती हैं क्योंकि उपयोगी पुस्तकें बहुत ही कम प्रकाशित होती हैं । इसके प्रकाशक दोही प्रकार के मनुष्य हैं एक व्यापारी और दूसरा नाम चाहने वाले । व्यापारी जिम पुस्तक की fat अधिक देखता है उसी को छपवाता है उसके प्रयत्न से अच्छी पुस्तकों का प्रकाशित होना असम्भव अथवा दुर्घट है क्योंकि अच्छी पुस्तकों को चाहने वाले कम हैं । दैवात् किसी व्या पारी ने किसी अच्छी पुस्तक को प्रकाशित किया है तो उसने हानिही उठायी है अतएव अच्छी पुस्तकों का दूसरा संस्करण होता ही नही । ) नाम चाहनेवाले बिना कुछ बिचार किये टूटे फूटे अशुद्ध शब्दों की दाक्यावली से दो चार पन्ने काले कर पुस्तक प्रकाशित करता है फिर ऐसी पुस्तक कैसे अच्छी हो
Friday July 10, 2020, भारत में फिल्में अब तक एक आकर्षक उद्यम रही हैं। यद्यपि यह निकट भविष्य में ओटीटी प्लेटफार्मों के साथ अधिक फिल्मों पर हस्ताक्षर करने वाली फिल्मों के साथ बदल सकता है, हम अभी तक यह नहीं सीख पाए हैं कि यह प्रणाली कैसे काम करती है। इस बीच, फिल्मों के लिए बहुत सारे बजट अक्सर निवेश पर भारी रिटर्न के साथ पूरे उद्यम को बेहद लाभदायक बनाते हुए मिले हैं। आज हम यहाँ आपको बताने जा रहे बॉलीवुड की अब तक की सबसे महंगी फिल्मों के बारे में। 2.0, को 2018 में सबसे बड़े प्रोडक्शन बजट (450 करोड़ रुपये) के साथ बनने वाली भारतीय फिल्म का खिताब मिला। एस-शंकर द्वारा लिखित और निर्देशित और लीसा प्रोडक्शंस के संस्थापक सुबास्करन अलिराजाह द्वारा निर्मित एक साई-फाई फिल्म 3 डी दर्शकों के लिये भी शूट की गई थी। 2.0, 2010 की तमिल फिल्म एंथीरन का सीक्वल थी, जिसमें अक्षय कुमार और एमी जैक्सन के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन और रजनीकांत दोनों ने अभिनय किया था। इस फिल्म को तमिल और हिंदी दोनों में एक साथ शूट किया गया था। 215 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म को संजय लीला भंसाली, सुधांशु वत्स, और अजीत अंधारे ने प्रोड्यूस किया था। यह फिल्म मलिक मुहम्मद जायसी की कविता पद्मावत पर आधारित थी। रानी पद्मावती की कहानी में, अपने जीवन का बलिदान महसूस करना दुश्मन के सामने समर्पण करने से बेहतर था। एक पीरियड ड्रामा के लिए, फिल्म सांस लेने वाले दृश्यों, और वेशभूषा और युग की याद ताजा करती है। फिल्म में गहराई देने के लिए और इसकी भव्यता में इजाफा करने के लिए आईमैक्स तकनीक और 3 डी का भी उपयोग किया है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के झंडे गाड़े और दुनिया भर में 565 करोड़ रुपये की कमाई की। इस एक्शन ड्रामा फिल्म को अली अब्बास ज़फर ने लिखा और निर्देशित किया था। फिल्म का निर्माण यशराज फिल्म्स के बैनर तले किया गया था और इसमें सलमान खान, कैटरीना कैफ, सज्जाद डेल्फरोज ने अभिनय किया था। फिल्म 2012 की फिल्म एक था टाइगर की सीक्वल थी। इस फिल्म की प्रोडक्शन कॉस्ट 210 करोड़ रुपये थी और इसने उम्मीद के मुताबिक बॉक्स-ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया। 210 करोड़ रुपये के बजट में बनी एक्शन ड्रामा फिल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान में आमिर खान, कैटरीना कैफ, अमिताभ बच्चन और फातिमा सना शेख जैसे कलाकार थे। फिल्म के निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य (विक्टर) थे और इस फिल्म को यशराज फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म की कहानी फिलिप मीडोज टेलर के 1839 के उपन्यास, कन्फेशंस ऑफ ए ठग पर आधारित थी। यह फिल्म 1790 और 1805 के बीच का एक पीरियड ड्रामा थी। दुर्भाग्य से, यह बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। बाहुबली 2: द कन्क्लूजन, बाहुबलीः द बिगनिंग की अगली कड़ी थी। इस फिल्म का बजट 210 करोड़ रुपये था। पहले भाग में सबसे ज्यादा चलने वाली फिल्म अच्छा प्रदर्शन करने के लिए बाध्य थी। एस. एस. राजामौली द्वारा निर्देशित और उनके पिता के. वी. विजयेंद्र प्रसाद द्वारा लिखित फैंटेसी-एक्शन फिल्म में प्रभास, राणा दग्गुबाती, और अनुष्का शेट्टी ने अभिनय किया है। एक और अवधि का नाटक, फिल्म मध्ययुगीन भारत में स्थापित की गई थी और बड़े-बजट का उपयोग विश्वसनीय शाही महलों, कोर्ट रूम और यहां तक कि हाथियों को बनाने के लिए किया गया था। प्रेम रतन धन पायो को सुरज बड़जात्या द्वारा निर्देशित किया गया था और राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले 180 करोड़ रुपये के बजट में इसे प्रोड्यूस किया गया था। सलमान खान और सोनम कपूर द्वारा अभिनीत यह फिल्म बॉलीवुड की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक है, दुनिया भर में 400 करोड़ रुपये। यह फिल्म स्पष्ट रूप से दक्षिण कोरियाई फिल्म, मस्काराडे से 'प्रेरित' थी, जो एंथनी होप द्वारा लिखित द प्रिजनर ऑफ ज़ेंडा के उपन्यास पर आधारित थी। विजय कृष्ण आचार्य द्वारा लिखित और निर्देशित और यशराज फिल्म्स द्वारा निर्मित, धूम 3, धूम फ्रैंचाइजी की तीसरी फिल्म थी। आमिर खान, कैटरीना कैफ, अभिषेक बच्चन और उदय चोपड़ा अभिनीत इस फिल्म का बजट 175 करोड़ रुपये था। फिल्म व्यावसायिक रूप से बेहद सफल साबित हुई और 540 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई करने में सफल रही। 161 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म दिलवाले 2015 में बड़े पर्दे पर आई थी, इसे रोहित शेट्टी ने निर्देशित किया था और रेड चिलीज़ प्रोडक्शंस और रोहित शेट्टी प्रोडक्शंस द्वारा सह-निर्मित किया गया था। फिल्म में शाहरुख खान, काजोल, वरुण धवन और कृति सनोन ने अभिनय किया। फिल्म ने 214.15 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी और 194 करोड़ रुपये से अधिक सकल विदेशी कारोबार था, जो कि शाहरुख खान की फिल्म के लिए अब तक का सबसे ज्यादा कारोबार था।
Friday July दस, दो हज़ार बीस, भारत में फिल्में अब तक एक आकर्षक उद्यम रही हैं। यद्यपि यह निकट भविष्य में ओटीटी प्लेटफार्मों के साथ अधिक फिल्मों पर हस्ताक्षर करने वाली फिल्मों के साथ बदल सकता है, हम अभी तक यह नहीं सीख पाए हैं कि यह प्रणाली कैसे काम करती है। इस बीच, फिल्मों के लिए बहुत सारे बजट अक्सर निवेश पर भारी रिटर्न के साथ पूरे उद्यम को बेहद लाभदायक बनाते हुए मिले हैं। आज हम यहाँ आपको बताने जा रहे बॉलीवुड की अब तक की सबसे महंगी फिल्मों के बारे में। दो.शून्य, को दो हज़ार अट्ठारह में सबसे बड़े प्रोडक्शन बजट के साथ बनने वाली भारतीय फिल्म का खिताब मिला। एस-शंकर द्वारा लिखित और निर्देशित और लीसा प्रोडक्शंस के संस्थापक सुबास्करन अलिराजाह द्वारा निर्मित एक साई-फाई फिल्म तीन डी दर्शकों के लिये भी शूट की गई थी। दो.शून्य, दो हज़ार दस की तमिल फिल्म एंथीरन का सीक्वल थी, जिसमें अक्षय कुमार और एमी जैक्सन के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन और रजनीकांत दोनों ने अभिनय किया था। इस फिल्म को तमिल और हिंदी दोनों में एक साथ शूट किया गया था। दो सौ पंद्रह करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म को संजय लीला भंसाली, सुधांशु वत्स, और अजीत अंधारे ने प्रोड्यूस किया था। यह फिल्म मलिक मुहम्मद जायसी की कविता पद्मावत पर आधारित थी। रानी पद्मावती की कहानी में, अपने जीवन का बलिदान महसूस करना दुश्मन के सामने समर्पण करने से बेहतर था। एक पीरियड ड्रामा के लिए, फिल्म सांस लेने वाले दृश्यों, और वेशभूषा और युग की याद ताजा करती है। फिल्म में गहराई देने के लिए और इसकी भव्यता में इजाफा करने के लिए आईमैक्स तकनीक और तीन डी का भी उपयोग किया है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के झंडे गाड़े और दुनिया भर में पाँच सौ पैंसठ करोड़ रुपये की कमाई की। इस एक्शन ड्रामा फिल्म को अली अब्बास ज़फर ने लिखा और निर्देशित किया था। फिल्म का निर्माण यशराज फिल्म्स के बैनर तले किया गया था और इसमें सलमान खान, कैटरीना कैफ, सज्जाद डेल्फरोज ने अभिनय किया था। फिल्म दो हज़ार बारह की फिल्म एक था टाइगर की सीक्वल थी। इस फिल्म की प्रोडक्शन कॉस्ट दो सौ दस करोड़ रुपये थी और इसने उम्मीद के मुताबिक बॉक्स-ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया। दो सौ दस करोड़ रुपये के बजट में बनी एक्शन ड्रामा फिल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान में आमिर खान, कैटरीना कैफ, अमिताभ बच्चन और फातिमा सना शेख जैसे कलाकार थे। फिल्म के निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य थे और इस फिल्म को यशराज फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म की कहानी फिलिप मीडोज टेलर के एक हज़ार आठ सौ उनतालीस के उपन्यास, कन्फेशंस ऑफ ए ठग पर आधारित थी। यह फिल्म एक हज़ार सात सौ नब्बे और एक हज़ार आठ सौ पाँच के बीच का एक पीरियड ड्रामा थी। दुर्भाग्य से, यह बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। बाहुबली दो: द कन्क्लूजन, बाहुबलीः द बिगनिंग की अगली कड़ी थी। इस फिल्म का बजट दो सौ दस करोड़ रुपये था। पहले भाग में सबसे ज्यादा चलने वाली फिल्म अच्छा प्रदर्शन करने के लिए बाध्य थी। एस. एस. राजामौली द्वारा निर्देशित और उनके पिता के. वी. विजयेंद्र प्रसाद द्वारा लिखित फैंटेसी-एक्शन फिल्म में प्रभास, राणा दग्गुबाती, और अनुष्का शेट्टी ने अभिनय किया है। एक और अवधि का नाटक, फिल्म मध्ययुगीन भारत में स्थापित की गई थी और बड़े-बजट का उपयोग विश्वसनीय शाही महलों, कोर्ट रूम और यहां तक कि हाथियों को बनाने के लिए किया गया था। प्रेम रतन धन पायो को सुरज बड़जात्या द्वारा निर्देशित किया गया था और राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले एक सौ अस्सी करोड़ रुपये के बजट में इसे प्रोड्यूस किया गया था। सलमान खान और सोनम कपूर द्वारा अभिनीत यह फिल्म बॉलीवुड की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक है, दुनिया भर में चार सौ करोड़ रुपये। यह फिल्म स्पष्ट रूप से दक्षिण कोरियाई फिल्म, मस्काराडे से 'प्रेरित' थी, जो एंथनी होप द्वारा लिखित द प्रिजनर ऑफ ज़ेंडा के उपन्यास पर आधारित थी। विजय कृष्ण आचार्य द्वारा लिखित और निर्देशित और यशराज फिल्म्स द्वारा निर्मित, धूम तीन, धूम फ्रैंचाइजी की तीसरी फिल्म थी। आमिर खान, कैटरीना कैफ, अभिषेक बच्चन और उदय चोपड़ा अभिनीत इस फिल्म का बजट एक सौ पचहत्तर करोड़ रुपये था। फिल्म व्यावसायिक रूप से बेहद सफल साबित हुई और पाँच सौ चालीस करोड़ रुपये से अधिक की कमाई करने में सफल रही। एक सौ इकसठ करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म दिलवाले दो हज़ार पंद्रह में बड़े पर्दे पर आई थी, इसे रोहित शेट्टी ने निर्देशित किया था और रेड चिलीज़ प्रोडक्शंस और रोहित शेट्टी प्रोडक्शंस द्वारा सह-निर्मित किया गया था। फिल्म में शाहरुख खान, काजोल, वरुण धवन और कृति सनोन ने अभिनय किया। फिल्म ने दो सौ चौदह.पंद्रह करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी और एक सौ चौरानवे करोड़ रुपये से अधिक सकल विदेशी कारोबार था, जो कि शाहरुख खान की फिल्म के लिए अब तक का सबसे ज्यादा कारोबार था।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ : शनिवार रात को हमला किए गए एक तृणमूल (TMC) नेता के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए रविवार सुबह कूच बिहार के एक निजी नर्सिंग होम पहुंचे राज्यपाल (Governor) सी. वी. आनंद बोस (CV Anand Bose)। परिवार के सदस्यों से बात की और उन्हें हर मदद का आश्वासन दिया। शनिवार की रात, गीतलदाहा-I पंचायत में भाजपा(BJP) समर्थित एक निर्दलीय के सहयोगियों ने ग्रामीण चुनाव लड़ रहे तृणमूल उम्मीदवार खलील हक के बेटे राजू हक का कथित तौर पर अपहरण (kidnap) कर लिया। पंचायत के तृणमूल अध्यक्ष मफुजर रहमान ने पांच अन्य लोगों के साथ राजू की तलाश शुरू की। अपहरणकर्ताओं ने खोज दल पर हमला किया और माफुजर पर धारदार हथियार से वार किया । शनिवार रात को हमला किए गए एक तृणमूल (TMC) नेता के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए रविवार सुबह कूच बिहार के एक निजी नर्सिंग होम पहुंचे राज्यपाल (Governor) सी. वी. आनंद बोस (CV Anand Bose)।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ : शनिवार रात को हमला किए गए एक तृणमूल नेता के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए रविवार सुबह कूच बिहार के एक निजी नर्सिंग होम पहुंचे राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस । परिवार के सदस्यों से बात की और उन्हें हर मदद का आश्वासन दिया। शनिवार की रात, गीतलदाहा-I पंचायत में भाजपा समर्थित एक निर्दलीय के सहयोगियों ने ग्रामीण चुनाव लड़ रहे तृणमूल उम्मीदवार खलील हक के बेटे राजू हक का कथित तौर पर अपहरण कर लिया। पंचायत के तृणमूल अध्यक्ष मफुजर रहमान ने पांच अन्य लोगों के साथ राजू की तलाश शुरू की। अपहरणकर्ताओं ने खोज दल पर हमला किया और माफुजर पर धारदार हथियार से वार किया । शनिवार रात को हमला किए गए एक तृणमूल नेता के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए रविवार सुबह कूच बिहार के एक निजी नर्सिंग होम पहुंचे राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ।
M. F. hussain Birth Anniversary: भारत के पिकासो कहे जाने वाले मकबूल फ़िदा हुसैन की आज बर्थ एनिवर्सिरी है. उनके कई ऐसे किस्से हैं जो उनकी फक्कड़ी पर खूब रोशनी डालते हैं. पढ़ें उनकी लाइफ से जुड़े 6 दिलचस्प किस्से. एमएफ हुसैन और विवाद. एक सिक्के के दो पहलू रहे हैं. फक्कड़, बेपरवाह, बाल सुलभ, कुछ ऐसा ही था उनका जीवन. लगभग खुली किताब की तरह. जो मन में है वही जुबां पर और कई बार वही कूची, कलर के जरिए उनकी पेंटिंग में भी दिख जाता. देश का सबसे महंगा पेंटर, देश के तीनों पद्म सम्मान, राज्यसभा सदस्य समेत अनेक प्रतिष्ठित मान-सम्मान पाने के बावजूद आजीवन बेहद सरल, सहज बने रहे हुसैन. अगर हिन्दू-मुस्लिम भाव और उनसे जुड़े विवादों को अलग रख दें तो उनके जीवन के ऐसे बहुतेरे पहलू हैं, जो प्रेरित करते हैं. मकबूल फ़िदा हुसैन उर्फ एमएफ हुसैन की आज जन्म जयंती है. उनके बारे में पढ़ते हुए अनेक रोचक किस्से पता चले, जो उनकी फक्कड़ी पर खूब रोशनी डालते हैं. वह विदेशी धरती पर आधी उम्र की लड़की से प्रेम कर बैठते हैं और कुछ दिन साथ गुजारने के बाद वही शादी से इनकार करते हुए किसी और से शादी करती है तो वहां उसे बधाई देने भी पहुंचते हैं. हिन्दू देवियों की नग्न पेंटिंग समेत किसी नग्न महिला की पेंटिंग बना उसके शरीर पर जगह-जगह राज्यों का नाम लिखने के विवाद आम हैं. उन पर मुकदमे लिखे गए. घर पर हमला हुआ. पेंटिंग्स तोड़ दे गईं. पर, वे बेपरवाह अपने काम में जुटे रहे. पूरी दुनिया में कला के पारखी उनकी तुलना पिकासो से भी करते रहे. जिंदगी के अंतिम साल में वे जरूर दुखी हुए और देश छोड़ लगभग निर्वासित जीवन गुजारा. कतर ने उन्हें नागरिकता भी दी. हालांकि, उन्होंने 95 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस लंदन में ली. पहला किस्साः क्यों नंगे पैर चलने का फैसला लिया? बात साल 1963 की है, जब हुसैन ने नंगे पैर चलने का फैसला किया. मशहूर कवि मुक्तिबोध से उनकी दोस्ती थी. निधन के बाद उनकी अन्त्येष्टि में जाना हुआ तो चप्पल उतार दी क्योंकि वे जमीन की तपन महसूस करना चाहते थे. उसी समय उन्हें मां की याद आई. जब उनका इंतकाल हुआ तो हुसैन महज बहुत छोटे थे. उनके पिता कहते थे कि तुम्हारे पैर तुम्हारी मां की तरह दिखते हैं. तब हुसैन ने खुद से ही सवाल किया कि फिर मैं चप्पल क्यों पहनूं? और फिर जीवन पर्यंत नंगे पांव ही चले. साल 1956 की बात है. हुसैन 41 के थे. शादी हो चुकी थी. बच्चे थे. चेकोस्लोवाकिया के प्राग में उनकी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगी थी. शाम का समय था. गैलरी लगभग खाली हो चुकी थी या यूं कहें कि बंद होने वाली थी. तभी वहां एक युवती आई और पेंटिंग्स को एक-एक कर निहारने लगी. हुसैन उसके पास पहुंच गए. पूछा कि अच्छी लगीं तो सामने से हां में जवाब आया. उसने कहा कि ये वाकई गजब की हैं. हुसैन ने तुरंत अपनी पेंटिंग उसे उपहार में दे दीं. अगले दिन फिर मिलने के वायदे के साथ वह चली गई. जब वह युवती आई तो दाढ़ी वाला पेंटर क्लीनसेव था. सूट-टाई भी पहने था. आकर उसने बांहों में भरा और गालों को चूम लिया. करीब आठ सालों तक रही यह दोस्ती. शादी की बात चली. हुसैन लंदन गए, शादी का जोड़ा खरीदने. एक महंगी कार भी बुक कर दी. फिर उसने शादी से मना कर दिया और किसी और से शादी कर ली. हुसैन उस समारोह में भी शामिल हुए. बधाई भी दी. फिल्मों के प्रति भी उनकी दीवानगी खास थी. माधुरी दीक्षित के तो वे इतने बड़े फैन थे कि उनकी कई फिल्में कई-कई बार देख डाली. उन पर केंद्रित गजगामिनी नाम से फिल्म भी बना डाली. हालांकि, दर्शकों ने उनकी फिल्म को बिल्कुल भी नहीं पसंद किया. माधुरी के साथ वे एक अन्य फिल्म मोहब्बतें में भी नजर आए. तब्बू के साथ एक फिल्म में वे नजर आए. नाम था-मीनाक्षीः ए टेल ऑफ थ्री सिटीज. इसमें फिल्माए गए एक गाने पर मुस्लिम संगठन भड़क गए. ईश निंदा माना. गाने के बोल थे-नूर-उन-अला-नूर. भारतीय उलमा काउंसिल समेत अनेक संगठन सामने आ गए. हुसैन ने फिल्म से गाना नहीं हटाया बल्कि सिनेमा हालों से फिल्म ही हटा ली. यह फैसला आसान नहीं होता है. फिल्मों में काफी पैसा लगता है, ऐसे में कोई नुकसान उठाकर भी अपने जमीर से समझौता न करे तो वह खुद में फक्कड़ ही होगा. जिसे पैसों से कोई लालच न होगा. ऐसे थे हुसैन. मदर टेरेसा की प्रवक्ता रहीं चित्रकार सुनीता कुमार की एक कहानी भी सामने आती है. दिल्ली में उनकी मुलाकात हुई तो अगले दिन टेनिस चैम्पियनशिप देखने को आमंत्रित कर लिया. वे मान गए और हार-जीत पर शर्त भी लग गई. हारने वाले को अपने हाथ की पेंटिंग दूसरे को देनी थी. हुसैन हार गए. सुनीता की मुश्किल कि इतने बड़े चित्रकार से वे शर्त की याद कैसे दिलाएं? पर, यह क्या हुआ? अगली सुबह होटल से बाहर निकलते हुए सुनीता को रिसेप्शन पर एक पैकेट मिला. उसमें घोड़े की एक ताजी और शानदार पेंटिग थी, जिसके रंग भी पूरी तरह सूखे नहीं थे. वह हुसैन छोड़ गए थे सुनीता के लिए. सुनीता का आंकलन था कि पेंटिंग रात में जागकर बनाई गई है. ऐसा था हुसैन का कमिटमेंट. वचन दिया तो पूरा कर दिखाया. ऐसा नहीं है कि वे केवल लड़कियों पर ही फ़िदा होते थे. वे स्तंभकार, फिल्मकार विक्रम सिंह पर भी फ़िदा हो गए थे. विक्रम ने हुसैन पर केंद्रित एक किताब लिखी. अपनी किताब के जरिए विक्रम ने माना कि उनकी कलाकृतियां किसी भी सूरत में अश्लील नहीं थीं. हुसैन भी इसे एक प्रामाणिक किताब मानते थे. एक दिन अचानक पता चलता है कि प्रतियां बड़ी संख्या में उन्होंने प्रकाशक से सीधे खरीद लिया. किताब की कीमत उस जमाने में थी लगभग 10 हजार रुपए. वे मिलने वालों को वह किताब जरूर देते थे, जिसमें उनकी दिलेरी दिखती है. तर्पण एवं अंधी गली समेत अनेक फिल्में बनाने वाले विक्रम सिंह सामान्य व्यक्ति नहीं थे. उन्होंने 73 साल की उम्र में साल 2013 में दुनिया को अलविदा कहा था. वे उसूलों के पक्के थे बिल्कुल हुसैन की तरह. कभी समझौता नहीं किया. नतीजे में उन्हें न तो प्रोड्यूसर मिलते थे और न ही वितरक. लेकिन वे आजीवन बेपरवाह रहे. बीबीसी की एक रिपोर्ट में प्रख्यात साहित्यकार प्रयाग शुक्ल का एक किस्सा मिला. जब भोपाल में भारत भवन बना तब तय हुआ कि यहां हुसैन की पेंटिंग लगेगी. कुछ लोगों से बातचीत के बाद हुसैन पेंटिंग देने को राजी हो गए. प्रयाग शुक्ल को जिम्मेदारी मिली कि वे पेंटिंग लेकर भारत भवन पहुंचाएंगे. उन्होंने हुसैन के बेटे शमशाद को कहा कि जब भी हुसैन साहब आएं तो वह खबर कर दें. सूचना मिलने पर जब शुक्ल पहुंचे तो हुसैन ने आने का प्रयोजन पूछा. जब वे पेंटिंग ले जाने का प्रयोजन बताए तो वे भड़क गए. बोले-जब मैंने कह दिया था तो ले क्यों नहीं गए. प्रयाग शुक्ल ने कहा कि वे पेंटिंग्स आप की मौजूदगी में ले जाना चाहते थे और लिखकर भी देना चाहते थे कि पेंटिंग उन्हें मिल गईं. तो हुसैन बोले-लिखकर देने की कोई जरूरत नहीं है. मेरे लिए इतना बहुत है कि यह पेंटिंग्स भारत भवन जा रही है.
M. F. hussain Birth Anniversary: भारत के पिकासो कहे जाने वाले मकबूल फ़िदा हुसैन की आज बर्थ एनिवर्सिरी है. उनके कई ऐसे किस्से हैं जो उनकी फक्कड़ी पर खूब रोशनी डालते हैं. पढ़ें उनकी लाइफ से जुड़े छः दिलचस्प किस्से. एमएफ हुसैन और विवाद. एक सिक्के के दो पहलू रहे हैं. फक्कड़, बेपरवाह, बाल सुलभ, कुछ ऐसा ही था उनका जीवन. लगभग खुली किताब की तरह. जो मन में है वही जुबां पर और कई बार वही कूची, कलर के जरिए उनकी पेंटिंग में भी दिख जाता. देश का सबसे महंगा पेंटर, देश के तीनों पद्म सम्मान, राज्यसभा सदस्य समेत अनेक प्रतिष्ठित मान-सम्मान पाने के बावजूद आजीवन बेहद सरल, सहज बने रहे हुसैन. अगर हिन्दू-मुस्लिम भाव और उनसे जुड़े विवादों को अलग रख दें तो उनके जीवन के ऐसे बहुतेरे पहलू हैं, जो प्रेरित करते हैं. मकबूल फ़िदा हुसैन उर्फ एमएफ हुसैन की आज जन्म जयंती है. उनके बारे में पढ़ते हुए अनेक रोचक किस्से पता चले, जो उनकी फक्कड़ी पर खूब रोशनी डालते हैं. वह विदेशी धरती पर आधी उम्र की लड़की से प्रेम कर बैठते हैं और कुछ दिन साथ गुजारने के बाद वही शादी से इनकार करते हुए किसी और से शादी करती है तो वहां उसे बधाई देने भी पहुंचते हैं. हिन्दू देवियों की नग्न पेंटिंग समेत किसी नग्न महिला की पेंटिंग बना उसके शरीर पर जगह-जगह राज्यों का नाम लिखने के विवाद आम हैं. उन पर मुकदमे लिखे गए. घर पर हमला हुआ. पेंटिंग्स तोड़ दे गईं. पर, वे बेपरवाह अपने काम में जुटे रहे. पूरी दुनिया में कला के पारखी उनकी तुलना पिकासो से भी करते रहे. जिंदगी के अंतिम साल में वे जरूर दुखी हुए और देश छोड़ लगभग निर्वासित जीवन गुजारा. कतर ने उन्हें नागरिकता भी दी. हालांकि, उन्होंने पचानवे वर्ष की उम्र में अंतिम सांस लंदन में ली. पहला किस्साः क्यों नंगे पैर चलने का फैसला लिया? बात साल एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ की है, जब हुसैन ने नंगे पैर चलने का फैसला किया. मशहूर कवि मुक्तिबोध से उनकी दोस्ती थी. निधन के बाद उनकी अन्त्येष्टि में जाना हुआ तो चप्पल उतार दी क्योंकि वे जमीन की तपन महसूस करना चाहते थे. उसी समय उन्हें मां की याद आई. जब उनका इंतकाल हुआ तो हुसैन महज बहुत छोटे थे. उनके पिता कहते थे कि तुम्हारे पैर तुम्हारी मां की तरह दिखते हैं. तब हुसैन ने खुद से ही सवाल किया कि फिर मैं चप्पल क्यों पहनूं? और फिर जीवन पर्यंत नंगे पांव ही चले. साल एक हज़ार नौ सौ छप्पन की बात है. हुसैन इकतालीस के थे. शादी हो चुकी थी. बच्चे थे. चेकोस्लोवाकिया के प्राग में उनकी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगी थी. शाम का समय था. गैलरी लगभग खाली हो चुकी थी या यूं कहें कि बंद होने वाली थी. तभी वहां एक युवती आई और पेंटिंग्स को एक-एक कर निहारने लगी. हुसैन उसके पास पहुंच गए. पूछा कि अच्छी लगीं तो सामने से हां में जवाब आया. उसने कहा कि ये वाकई गजब की हैं. हुसैन ने तुरंत अपनी पेंटिंग उसे उपहार में दे दीं. अगले दिन फिर मिलने के वायदे के साथ वह चली गई. जब वह युवती आई तो दाढ़ी वाला पेंटर क्लीनसेव था. सूट-टाई भी पहने था. आकर उसने बांहों में भरा और गालों को चूम लिया. करीब आठ सालों तक रही यह दोस्ती. शादी की बात चली. हुसैन लंदन गए, शादी का जोड़ा खरीदने. एक महंगी कार भी बुक कर दी. फिर उसने शादी से मना कर दिया और किसी और से शादी कर ली. हुसैन उस समारोह में भी शामिल हुए. बधाई भी दी. फिल्मों के प्रति भी उनकी दीवानगी खास थी. माधुरी दीक्षित के तो वे इतने बड़े फैन थे कि उनकी कई फिल्में कई-कई बार देख डाली. उन पर केंद्रित गजगामिनी नाम से फिल्म भी बना डाली. हालांकि, दर्शकों ने उनकी फिल्म को बिल्कुल भी नहीं पसंद किया. माधुरी के साथ वे एक अन्य फिल्म मोहब्बतें में भी नजर आए. तब्बू के साथ एक फिल्म में वे नजर आए. नाम था-मीनाक्षीः ए टेल ऑफ थ्री सिटीज. इसमें फिल्माए गए एक गाने पर मुस्लिम संगठन भड़क गए. ईश निंदा माना. गाने के बोल थे-नूर-उन-अला-नूर. भारतीय उलमा काउंसिल समेत अनेक संगठन सामने आ गए. हुसैन ने फिल्म से गाना नहीं हटाया बल्कि सिनेमा हालों से फिल्म ही हटा ली. यह फैसला आसान नहीं होता है. फिल्मों में काफी पैसा लगता है, ऐसे में कोई नुकसान उठाकर भी अपने जमीर से समझौता न करे तो वह खुद में फक्कड़ ही होगा. जिसे पैसों से कोई लालच न होगा. ऐसे थे हुसैन. मदर टेरेसा की प्रवक्ता रहीं चित्रकार सुनीता कुमार की एक कहानी भी सामने आती है. दिल्ली में उनकी मुलाकात हुई तो अगले दिन टेनिस चैम्पियनशिप देखने को आमंत्रित कर लिया. वे मान गए और हार-जीत पर शर्त भी लग गई. हारने वाले को अपने हाथ की पेंटिंग दूसरे को देनी थी. हुसैन हार गए. सुनीता की मुश्किल कि इतने बड़े चित्रकार से वे शर्त की याद कैसे दिलाएं? पर, यह क्या हुआ? अगली सुबह होटल से बाहर निकलते हुए सुनीता को रिसेप्शन पर एक पैकेट मिला. उसमें घोड़े की एक ताजी और शानदार पेंटिग थी, जिसके रंग भी पूरी तरह सूखे नहीं थे. वह हुसैन छोड़ गए थे सुनीता के लिए. सुनीता का आंकलन था कि पेंटिंग रात में जागकर बनाई गई है. ऐसा था हुसैन का कमिटमेंट. वचन दिया तो पूरा कर दिखाया. ऐसा नहीं है कि वे केवल लड़कियों पर ही फ़िदा होते थे. वे स्तंभकार, फिल्मकार विक्रम सिंह पर भी फ़िदा हो गए थे. विक्रम ने हुसैन पर केंद्रित एक किताब लिखी. अपनी किताब के जरिए विक्रम ने माना कि उनकी कलाकृतियां किसी भी सूरत में अश्लील नहीं थीं. हुसैन भी इसे एक प्रामाणिक किताब मानते थे. एक दिन अचानक पता चलता है कि प्रतियां बड़ी संख्या में उन्होंने प्रकाशक से सीधे खरीद लिया. किताब की कीमत उस जमाने में थी लगभग दस हजार रुपए. वे मिलने वालों को वह किताब जरूर देते थे, जिसमें उनकी दिलेरी दिखती है. तर्पण एवं अंधी गली समेत अनेक फिल्में बनाने वाले विक्रम सिंह सामान्य व्यक्ति नहीं थे. उन्होंने तिहत्तर साल की उम्र में साल दो हज़ार तेरह में दुनिया को अलविदा कहा था. वे उसूलों के पक्के थे बिल्कुल हुसैन की तरह. कभी समझौता नहीं किया. नतीजे में उन्हें न तो प्रोड्यूसर मिलते थे और न ही वितरक. लेकिन वे आजीवन बेपरवाह रहे. बीबीसी की एक रिपोर्ट में प्रख्यात साहित्यकार प्रयाग शुक्ल का एक किस्सा मिला. जब भोपाल में भारत भवन बना तब तय हुआ कि यहां हुसैन की पेंटिंग लगेगी. कुछ लोगों से बातचीत के बाद हुसैन पेंटिंग देने को राजी हो गए. प्रयाग शुक्ल को जिम्मेदारी मिली कि वे पेंटिंग लेकर भारत भवन पहुंचाएंगे. उन्होंने हुसैन के बेटे शमशाद को कहा कि जब भी हुसैन साहब आएं तो वह खबर कर दें. सूचना मिलने पर जब शुक्ल पहुंचे तो हुसैन ने आने का प्रयोजन पूछा. जब वे पेंटिंग ले जाने का प्रयोजन बताए तो वे भड़क गए. बोले-जब मैंने कह दिया था तो ले क्यों नहीं गए. प्रयाग शुक्ल ने कहा कि वे पेंटिंग्स आप की मौजूदगी में ले जाना चाहते थे और लिखकर भी देना चाहते थे कि पेंटिंग उन्हें मिल गईं. तो हुसैन बोले-लिखकर देने की कोई जरूरत नहीं है. मेरे लिए इतना बहुत है कि यह पेंटिंग्स भारत भवन जा रही है.
अश्वनीनगर में घनी आबादी के बीच संत कर्मा स्कूल। स्कूल के ठीक बाजू छोटा सा सामुदायिक भवन। भवन के छोटे से हॉल के एक हिस्से में कुर्सी टेबल पर बुजुर्ग डाक्टर बैठे हैं। उनके सामने रजिस्टर और दवा लिखने का लेटर पेड रखा है। वहीं दीवार से सटे टेबल पर कुछ टेबलेट, सर्दी की सिरप और कैप्सूल के बंडल पड़े हैं। सफेद एप्रेन पहने एक एएनएम दवाओं को चेक कर रही है। हॉल में व्यवस्था के नाम पर तीन-चार लोगों के बैठने के लिए कुर्सी बस। कमरे की न तो रंगाई-पोताई हुई है और न ही रिनोवेशन हुआ है। बाथरुम तो दूर मरीज को लिटाकर जांच करने जैसा बड़ा टेबल भी नहीं है। ये है राजधानी का हमर क्लीनिक। डाक्टर एसके गुप्ता ने जैसे ही टीम को देखा वे मरीज समझकर हालचाल पूछने लगे। बाद में कहा- अभी सब शुरुआती दौर में है। सुबह से 3 मरीज आ चुके हैं। लोगों को जानकारी भी नहीं कि यहां सरकारी क्लीनिक खुल गया है। अभी प्रचार-प्रसार होगा तब सब जान जाएंगे। उसके बाद सुविधाएं भी बढ़ेंगी। यही हाल छत्तीसगढ़ नगर टिकरापारा के क्लीनिक का है। नेशनल हेल्थ मिशन के माध्यम से 40 डाक्टरों का चयन किया जा चुका है। 12 डाक्टरों ने ज्वाइनिंग भी दे दी है। हमर क्लीनिक खोलने की घोषणा काफी पहले की जा चुकी थी, लेकिन कहां खोले जाएंगे? इसकी जगह ही तय नहीं की गई। अब जब क्लीनिक खोलने का समय बिलकुल करीब आ गया, तो जहां जगह मिल रही है वहां खोला जा रहा है। कहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो नगर निगम के पुराने बंद पड़े अस्पताल को ही हमर क्लीनिक के लिए चुना गया है। मोहल्ला क्लीनिक शहर में हर 15 से 20 हजार की आबादी के बीच खोला जा रहा है। इसी हिसाब से शहर का सर्वे कर जगह का चयन किया गया है। इसके लिए नगर निगम की भी मदद ली गई। निगम ने भी अपने सालाना बजट में मोहल्ला क्लीनिक को शामिल कर अप्रैल-मई में क्लीनिक खोलने की घोषणा कर दी है। मोहल्ला क्लीनिक में सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक ओपीडी चलेगी। उसके बाद शाम 5 से 7 बजे तक दूसरी पाली में भी डाक्टर उपलब्ध रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार मोहल्ला क्लीनिक में सामान्य सर्दी जुकाम और बुखार की दवाएं भी कराईं जाएंगी। यहां मरीजों का ब्लड प्रेशर भी चेक किया जाएगा। रायपुर जिले की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मीरा बघेल का कहना है इसी महीने बाकी मोहल्ला क्लीनिक खोल दिए जाएंगे। उद्घाटन नहीं हुआ है इसलिए अभी महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता और हेल्थ वर्कर के माध्यम से प्रचार किया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अश्वनीनगर में घनी आबादी के बीच संत कर्मा स्कूल। स्कूल के ठीक बाजू छोटा सा सामुदायिक भवन। भवन के छोटे से हॉल के एक हिस्से में कुर्सी टेबल पर बुजुर्ग डाक्टर बैठे हैं। उनके सामने रजिस्टर और दवा लिखने का लेटर पेड रखा है। वहीं दीवार से सटे टेबल पर कुछ टेबलेट, सर्दी की सिरप और कैप्सूल के बंडल पड़े हैं। सफेद एप्रेन पहने एक एएनएम दवाओं को चेक कर रही है। हॉल में व्यवस्था के नाम पर तीन-चार लोगों के बैठने के लिए कुर्सी बस। कमरे की न तो रंगाई-पोताई हुई है और न ही रिनोवेशन हुआ है। बाथरुम तो दूर मरीज को लिटाकर जांच करने जैसा बड़ा टेबल भी नहीं है। ये है राजधानी का हमर क्लीनिक। डाक्टर एसके गुप्ता ने जैसे ही टीम को देखा वे मरीज समझकर हालचाल पूछने लगे। बाद में कहा- अभी सब शुरुआती दौर में है। सुबह से तीन मरीज आ चुके हैं। लोगों को जानकारी भी नहीं कि यहां सरकारी क्लीनिक खुल गया है। अभी प्रचार-प्रसार होगा तब सब जान जाएंगे। उसके बाद सुविधाएं भी बढ़ेंगी। यही हाल छत्तीसगढ़ नगर टिकरापारा के क्लीनिक का है। नेशनल हेल्थ मिशन के माध्यम से चालीस डाक्टरों का चयन किया जा चुका है। बारह डाक्टरों ने ज्वाइनिंग भी दे दी है। हमर क्लीनिक खोलने की घोषणा काफी पहले की जा चुकी थी, लेकिन कहां खोले जाएंगे? इसकी जगह ही तय नहीं की गई। अब जब क्लीनिक खोलने का समय बिलकुल करीब आ गया, तो जहां जगह मिल रही है वहां खोला जा रहा है। कहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो नगर निगम के पुराने बंद पड़े अस्पताल को ही हमर क्लीनिक के लिए चुना गया है। मोहल्ला क्लीनिक शहर में हर पंद्रह से बीस हजार की आबादी के बीच खोला जा रहा है। इसी हिसाब से शहर का सर्वे कर जगह का चयन किया गया है। इसके लिए नगर निगम की भी मदद ली गई। निगम ने भी अपने सालाना बजट में मोहल्ला क्लीनिक को शामिल कर अप्रैल-मई में क्लीनिक खोलने की घोषणा कर दी है। मोहल्ला क्लीनिक में सुबह दस से दोपहर एक बजे तक ओपीडी चलेगी। उसके बाद शाम पाँच से सात बजे तक दूसरी पाली में भी डाक्टर उपलब्ध रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार मोहल्ला क्लीनिक में सामान्य सर्दी जुकाम और बुखार की दवाएं भी कराईं जाएंगी। यहां मरीजों का ब्लड प्रेशर भी चेक किया जाएगा। रायपुर जिले की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मीरा बघेल का कहना है इसी महीने बाकी मोहल्ला क्लीनिक खोल दिए जाएंगे। उद्घाटन नहीं हुआ है इसलिए अभी महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता और हेल्थ वर्कर के माध्यम से प्रचार किया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जीवन की शुरुआत से अब तक स्कूल नहीं जाने वाले निरक्षरों को भले ही अक्षर ज्ञान नहीं हो लेकिन सरकार ने मोबाइल एप के जरिए पढ़ाने की तैयारी कर ली है। योजना कितनी सफल होगी यह अलग बात है लेकिन फिलहाल सरकार ने ऐसे निरक्षरों का सर्वे भी करवाना शुरू कर दिया है जो अब तक स्कूल नहीं गए हैं। ऐसे निरक्षरों को सरकार एप से जोड़ेगी और उसके माध्यम से नई जानकारी दी जाएगी। हालांकि सरकार के अधिकारियों के पास भी इस बात का जवाब नहीं है बिना एक भी दिन स्कूल गए कोई व्यक्ति एप पर दिए निर्देशों को कैसे समझ पाएगा। उनका केवल यही कहना है कि अभी एप आया नहीं है। हो सकता है उसमें जानकारी वॉइस मैसेजेज के जरिए दी जाए। जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी कार्यालय काे योजना काे इंप्लीमेंट करना है। ऐसे में उन्हें योजना में फ्री टीचर नियुक्त करने को कहा गया है। ये टीचर पांचवी से ऊपर की कक्षाओं तक पढ़े स्टू्डेंट, रिटायर्ड टीचर, आशा सहयोगिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सरकारी और प्राइवेट टीचर्स, नेहरू युवा केंद्र के मैंबर्स, एनएसएस, स्काउट, बीएड और एमएड के स्टूडेंट्स आदि चुने जाएंगे। इन्हें भी बिना वेतन के नियुक्त करना होगा। ऐसे में टीचर्स कितना सहयोग कर पाएंगे यह भी समझ से बाहर की बात है। हालांकि योजना अभी शुरुआती दौर में हैं। ऐसे में वॉलंटियर्स और निरक्षरों के लिए सर्वे तो शुरू कर दिया गया है। अभी ढूंढा जा रहा है कि गांव में कितने लोग इन लोगों पढ़ाने को तैयार हैं और कितने लोग ऐसे हैं जिन्हें साक्षर किया जाना है। फिलहाल इसके लिए सर्वे शुरू कर दिया गया है । हालांकि अभी जिले को 8400 को साक्षर करने का लक्ष्य दिया गया है। जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी विजय शर्मा बताते हैं कि योजना अभी शुरुआती दौर में है। ऐसे में इंप्लीमेंट करने के लिए तैयारी की गई है। अभी सर्वे करवाने के बाद जिले के 8400 निरक्षरों को साक्षरों करने का लक्ष्य रखा गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जीवन की शुरुआत से अब तक स्कूल नहीं जाने वाले निरक्षरों को भले ही अक्षर ज्ञान नहीं हो लेकिन सरकार ने मोबाइल एप के जरिए पढ़ाने की तैयारी कर ली है। योजना कितनी सफल होगी यह अलग बात है लेकिन फिलहाल सरकार ने ऐसे निरक्षरों का सर्वे भी करवाना शुरू कर दिया है जो अब तक स्कूल नहीं गए हैं। ऐसे निरक्षरों को सरकार एप से जोड़ेगी और उसके माध्यम से नई जानकारी दी जाएगी। हालांकि सरकार के अधिकारियों के पास भी इस बात का जवाब नहीं है बिना एक भी दिन स्कूल गए कोई व्यक्ति एप पर दिए निर्देशों को कैसे समझ पाएगा। उनका केवल यही कहना है कि अभी एप आया नहीं है। हो सकता है उसमें जानकारी वॉइस मैसेजेज के जरिए दी जाए। जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी कार्यालय काे योजना काे इंप्लीमेंट करना है। ऐसे में उन्हें योजना में फ्री टीचर नियुक्त करने को कहा गया है। ये टीचर पांचवी से ऊपर की कक्षाओं तक पढ़े स्टू्डेंट, रिटायर्ड टीचर, आशा सहयोगिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सरकारी और प्राइवेट टीचर्स, नेहरू युवा केंद्र के मैंबर्स, एनएसएस, स्काउट, बीएड और एमएड के स्टूडेंट्स आदि चुने जाएंगे। इन्हें भी बिना वेतन के नियुक्त करना होगा। ऐसे में टीचर्स कितना सहयोग कर पाएंगे यह भी समझ से बाहर की बात है। हालांकि योजना अभी शुरुआती दौर में हैं। ऐसे में वॉलंटियर्स और निरक्षरों के लिए सर्वे तो शुरू कर दिया गया है। अभी ढूंढा जा रहा है कि गांव में कितने लोग इन लोगों पढ़ाने को तैयार हैं और कितने लोग ऐसे हैं जिन्हें साक्षर किया जाना है। फिलहाल इसके लिए सर्वे शुरू कर दिया गया है । हालांकि अभी जिले को आठ हज़ार चार सौ को साक्षर करने का लक्ष्य दिया गया है। जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी विजय शर्मा बताते हैं कि योजना अभी शुरुआती दौर में है। ऐसे में इंप्लीमेंट करने के लिए तैयारी की गई है। अभी सर्वे करवाने के बाद जिले के आठ हज़ार चार सौ निरक्षरों को साक्षरों करने का लक्ष्य रखा गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। रूस में प्रिमोर्सकी क्राय का स्थान दुनिया के अधिकतर जंगली साइबेरियाई शेर प्रिमोर्सकी क्राय में रहते हैं प्रिमोर्स्की क्राय (रूसीः Примо́рский край), जिसे पहले प्रिमोर्ये (Примо́рье) भी कहा जाता था, रूस का एक संघीय खंड है जो क्राय का दर्जा रखता है। रूसी भाषा में 'प्रिमोर्सकी' का मतलब 'समुद्री' होता है इसलिए इस राज्य को कभी-कभी 'समुद्री प्रांत' या 'समुद्री क्षेत्र' भी कहा जाता है। इसका प्रशासनिक केंद्र और राजधानी व्लादिवोस्तोक का शहर है। प्रिमोर्सकी क्राय का क्षेत्रफल वर्ग १,६५,९०० किमी है और सन् २०१० की जनगणना में इस प्रांत की आबादी १९,५६,४२६ थी। . सूकरी और उसका एक बच्चा सूअर (Pig) आर्टियोडेक्टिला गण (Order Artiodactyla) के सुइडी कुल (family Suidae) के जीव, जिनमें संसार के सभी जंगली और पालतू सूअर सम्मिलित हैं, इसके अंतर्गत आते हैं। इन खुर वाले प्राणियों की खाल बहुत मोटी होती है और इनके शरीर जो थोड़े बहुत बाल रहते हैं वे बहुत कड़े होते हैं। इनका थूथन आगे की ओऱ चपटा रहता है जिसके भीतर मुलायम हड्डी का एक चक्र सा रहता है जो थूथन को कड़ा बनाए रखता है। इसी थूथन के सहारे ये जमीन खोद डालते हैं और भारी-भारी पत्थरों को आसानी से उलट देते हैं। . प्रिमोर्स्की क्राय और सूअर आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। प्रिमोर्स्की क्राय 13 संबंध है और सूअर 5 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (13 + 5)। यह लेख प्रिमोर्स्की क्राय और सूअर के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। रूस में प्रिमोर्सकी क्राय का स्थान दुनिया के अधिकतर जंगली साइबेरियाई शेर प्रिमोर्सकी क्राय में रहते हैं प्रिमोर्स्की क्राय , जिसे पहले प्रिमोर्ये भी कहा जाता था, रूस का एक संघीय खंड है जो क्राय का दर्जा रखता है। रूसी भाषा में 'प्रिमोर्सकी' का मतलब 'समुद्री' होता है इसलिए इस राज्य को कभी-कभी 'समुद्री प्रांत' या 'समुद्री क्षेत्र' भी कहा जाता है। इसका प्रशासनिक केंद्र और राजधानी व्लादिवोस्तोक का शहर है। प्रिमोर्सकी क्राय का क्षेत्रफल वर्ग एक,पैंसठ,नौ सौ किमी है और सन् दो हज़ार दस की जनगणना में इस प्रांत की आबादी उन्नीस,छप्पन,चार सौ छब्बीस थी। . सूकरी और उसका एक बच्चा सूअर आर्टियोडेक्टिला गण के सुइडी कुल के जीव, जिनमें संसार के सभी जंगली और पालतू सूअर सम्मिलित हैं, इसके अंतर्गत आते हैं। इन खुर वाले प्राणियों की खाल बहुत मोटी होती है और इनके शरीर जो थोड़े बहुत बाल रहते हैं वे बहुत कड़े होते हैं। इनका थूथन आगे की ओऱ चपटा रहता है जिसके भीतर मुलायम हड्डी का एक चक्र सा रहता है जो थूथन को कड़ा बनाए रखता है। इसी थूथन के सहारे ये जमीन खोद डालते हैं और भारी-भारी पत्थरों को आसानी से उलट देते हैं। . प्रिमोर्स्की क्राय और सूअर आम में शून्य बातें हैं । प्रिमोर्स्की क्राय तेरह संबंध है और सूअर पाँच है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख प्रिमोर्स्की क्राय और सूअर के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज : तमिलनाडु में कोयंबटूर के उक्कदम इलाके में रविवार सुबह कार में लगे सिलेंडर में भीषण विस्फोट की घटना सामने आई है। इस घटना में एक व्यक्ति की झुलसकर मौत हो गई। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सी. सिलेंद्र बाबू ने इस मामले की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कार के सिलेंडर में विस्फोट की हर पहलू से जांच की जा रही है। घटना के कुछ घंटों बाद उन्होंने बताया कि मृतक के घऱ से कम तीव्रता वाली विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। संभावना जताई जा रही है कि इसे उसने भविष्य में इस्तेमाल के लिए रखा होगा।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज : तमिलनाडु में कोयंबटूर के उक्कदम इलाके में रविवार सुबह कार में लगे सिलेंडर में भीषण विस्फोट की घटना सामने आई है। इस घटना में एक व्यक्ति की झुलसकर मौत हो गई। पुलिस महानिदेशक सी. सिलेंद्र बाबू ने इस मामले की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कार के सिलेंडर में विस्फोट की हर पहलू से जांच की जा रही है। घटना के कुछ घंटों बाद उन्होंने बताया कि मृतक के घऱ से कम तीव्रता वाली विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। संभावना जताई जा रही है कि इसे उसने भविष्य में इस्तेमाल के लिए रखा होगा।
Raipur से बड़ी खबर है. आज संविदा कर्मचारियों का जेल भरो आंदोलन है. हजारों संविदाकर्मी जेल भरो आंदोलन में पहुंचेंगे. नियमितीकरण की मांग को लेकर ये जेल भरो आंदोलन हो रहा है. अपोलो को सिर्फ 3 दिन तो चंद्रयान-3 को चांद तक पहुंचने में क्यों लगेंगे 40 दिन?
Raipur से बड़ी खबर है. आज संविदा कर्मचारियों का जेल भरो आंदोलन है. हजारों संविदाकर्मी जेल भरो आंदोलन में पहुंचेंगे. नियमितीकरण की मांग को लेकर ये जेल भरो आंदोलन हो रहा है. अपोलो को सिर्फ तीन दिन तो चंद्रयान-तीन को चांद तक पहुंचने में क्यों लगेंगे चालीस दिन?
निर्णय । (२) भारतीय छह दर्शनों में दो जो 'पूर्व' और 'उत्तर' मोनांसा कहलाते हैं । मीर-मंज्ञा पुं. [फा.] (१) प्रधान नेता । (२) धर्माचार्य । मीरग, मोरगा - पंज्ञा पु. [स. मृग] हिरन । मीलन - संज्ञा पु [स.] (१) बंद करना, (२) सकुचित करना । मीलित - वि. [ स ] (१) यंद किया हुआ । (२) सिकोड़ा या संकुचित किया हुआ । सज्ञा पु. - एक अलकार । मुँ गरा--पज्ञापु [हि मोगग] नमकीन बूंदी । मुँगैछी, मुँ गौछो, मुँगौरी - सज्ञा स्त्री [हिं. मूंग + वरी] मूंग की यरी । मुचना, मुचनो - क्रि. अ. [स. मोचन] मुक्त होना । क्रि. स. - मुक्त करना । मुंज - संज्ञा पु [म ] नूंज । मुंड-सज्ञापु [न.] (१) सिर । (२) फटा हुआ सिर । (३) शुभ वैत्य का सेनापति । मुँडाइ, मुँड़ाई - सज्ञा स्त्री. [ हि. मुँड़ना] भूँड़ने की शिया, भाव या मजदूरी मुॅड़ानो - क्र. ) मुँडाना, मुँड़ानो - क्र. स. [सं. मुंडन] मुंडन कराना, कि अ. - (१) मूंड़ा जाना [. (२) प्रोखे में भ गंवाना, ठगा जाना मुँडासा - सज्ञा पृ. [हिं. मूंड ] सोफा, मुडित - वि. [ स.] मुड़ा हुआ मुड़िया - सज्ञा स्त्री [ हि मूडे ] तिर मूँड । संज्ञा पुं. [ हि मूंडना,] वह फिसो जोगी का चेला बन गया हो। उ.- जिन के जोग जोग यह ऊत्री ते मुंडिया यस कासी । मुं॰डी - संज्ञा स्त्री. [ हि मुँडी] (१) स्त्री जिसका सर मुड़ा हो । (२) विधवा सज्ञा पुः - साधु जिसका सर मुंडा हो । मुँ ढेरि, मुँढेरी-सज्ञा स्त्री. [ हि-मुंडेंरा ] दीवार का ऊपरी भाग जो छत से कुछ उठा रहता है। मुँडेरा - संज्ञा पु. [-हिं. मूंड ] दीवार का वह ऊपरी भाग जो छत से कुछ उठा रहता है। मुडो - सज्ञा स्त्री. [ हिमुडी ] ( १ ) स्त्री जिसका सर मुंडा हो । (२) विधवा, रौड़ । मुँदना, मुँदनो - क्रि. अ. [ स मुद्रण ] (१) बंद होना । (२) छिपना, लुप्त होना । (३) (छेद आदि) भर जाना । मुदरा - संज्ञा पुं. [ स. मुद्रा ] (१) कुंडल जो जोगी कान में पहनते है । (२) कान का एक आभूषण । मुँ दरिया, मुँ दरी - सज्ञा स्त्री. [ सं. मुद्रा ] (१) उंगली । में पहनने का छल्ला । (२) अंगूठी । उ - (क) माशा होइ देउ कर मुदरी, कहीं संदेसी पति को -९-८४॥ (ख) लाख मुंदरिया जाइगी कान्ह तुम्हारो मोल११२७ । (ग) हाथ पहुँची बोर कानन जरित मुंदरी भ्राजई - १० उ०-२४ । मुँदाई - कि, स. [ हि मुंदाना ] बंद करवायो । उ हरि तब भरनी अखि मुंदाई-१०-२४० । मुँदाए - कि स. [ हि. मुंदाना ] बंद कराये । उ. - कु भीरज घरी, जियह कोउ जिनि डड़ौ, कहा इहि सु लोचन मंदाए - ५९६१ - मुंशी-सज्ञा पुं. [म. ] (१) लेखक । (२) मुदिर । वि. - ( १ ) मुंडे हुए सिर वाला । ( २ ) नीव । मुंडन - सज्ञा पु [ स ] (१) सिर को मूंढ़ने को किया । ( २ ) द्विजातियों में बालक का एक संस्कार जो सामान्यतया पांचवें वर्ष किया जाता है। मुँहना, मुँडनो - कि अ [स मुडन] (१) सिर के वालों का मूंडा जाना । (२) लूटा या ठगा जाना । (३) हानि उठाना । मुंडमाल, मुडमाला - संज्ञा स्थी. [ सं मुंडमाला ] . कटे हुए सिरों को माला जो शिव या काली के गले में रहती है। उ मुडमाल सिव-ग्रीवा कैसी " । मुडमान कैमो तव ग्रो-१-२२६ । मुडमालिनि, मुडमालिनी- सज्ञा स्त्री. [स] देवी काली । मुढमाली - सज्ञा पु. [स. मुडमालिन् ] शिव जी । मुडली-सजा स्त्री. [हि. मुडा] जिसका सिर मुंडा हो । उ.- मुडली पाटो पारन चहूँ । मुंडा - वि. [ सं गुड़ ] (१) जिसका सिर मुंडा हो । - (२) जिस (पशु) के सींग न हों। सा स्पी.- एक निपि जिसमें मात्राएँ आदि मही होती । [ मुँह - संज्ञा पुं॰ [ सं. मुख ] (१) मुख का विवर । मुंह आना - मुंह में छाले पड़ना । (१) मुँह का कच्चा - जिसकी बात का विश्वास न हो । (२) जो किसी बात को गुप्त न रखकर सबसे कह देता हो । मुँह का कड़ा उद्दडता पूर्वक बातें करनेवाला । मुँह किलना - मुंह से बात या बोल न निकलना । मुँह कोलन से बात न निकालने देना । मुँह की ~ बात छिमता- जो बात स्वयं कहने जा रहे हों, वही दूसरे के द्वारा कही जाना । मुँह की बात छोनना जो दूसरी कहने को हो, वहीं स्वयं कह देना । मुह को मंत्रखी 'न' उड़ा सकना-बहुत ही दुर्बल या अपाहिज होना। मुँह की मिलानामुँह देखी या चापलूसो को बातें करना । मुंह मिलवत (हो): ॠह देखी. या चापलूसो की बातें करते हो । उ.- (रु) मोखो तुम मुँह की मिलबत ही भावति है वह प्यारी - १८६४.। (ख) मुँह ही की हमसौँ मिलवत, जिय बसतं ही मन मोहनि - २०१४ मुंह खराब करना - (१) स्वाद बिगाड़ना । (२) गंदी - बात कहना । मुँह खराब होना - (१) स्वाद बिगइना । (२) गंदी बातें कही जाना । मुँह खुलना - (१) • बोलना । (२) उद्दंडता की बात कहने का नादी होना । मुँह खुलवाना - (१) बोलने को प्रवृत्त करमा (२) कड़ी या उद्दंडता की बातें कहने को वाध्य करना । मुंह खोलकर रह जाना - कुछ कहने को होना, पर लज्जा, संकोच या भय से न कह पाना । मुंह खोलना - (१) बोलना । (२) बुरो या उद्दंडताभरी बातें कहना । किसी के मुंह चढ़ना - (१) कोई बात हर समय याद आ जाना । (२) किसी के प्यार-दुलार के फलस्वरूप उद्दंड हो जाना । (किसो को) मुँह चढ़ाना - (१) अत्यधिक प्यार दुलार से किसी को उद्देउ या घुष्ट करना । (२) बहुत प्रिय बनाना । मुँह चलना(१) खाया जाना । (२) व्यर्थ की बातें या दुर्धचन कहा जाना ।' मुँह चलाना - (१) भोजन करना । (२) बोलना । (३) गाली देना । (४) काट लेना । मुंह चिढ़ानाकिसी की आकृति या उसके हाव-भाव को मकल' बनाकर हंसी उड़ाना या उसको खिझाना । मुँह चूम कर छोड देना- लज्जित करके छोड़ देना । मुँह छूना - ( १ ) ऊपरी मन से या नाम मात्र को करना । (२) दिखावटी बात करना । मुंह (कडआ) जहर होना - मुँह में कडुआहट होना । मुँह जुठारना (झूठा करना) बहुत ही कम खाना । मुंह जोडना ( जोरना) - कानाफूसी करना । मुँह डालना- (किसी पशु आदि फा) खाने के पदार्थ को एक-दो कौर खाकर जूठा कर देना मुंह तक बना कहने को होना । मुँह थकना - बहुत बोलने से यक जाना। मुंह थकाना - बहुत बोलकर ज़बान थका देना मुँह देना- - (१) (किसी पशु आदि का) प्याद्य पदार्थ को एक-दो कौर खाकर जूठा कर देना । (२) बहुत लाड़ प्यार करना । मुँह न दोजिए- बहुत लाईप्यार न कीजिए। उ. - कबहूँ बालक मुंह न दीजिए मुँह न दीजिए नारि - १०९९ । मुँह पकड़ना ~~ कुछ बोलने न देना। मुँह पर न रखना - जरा भी न खाना । मुँह पर बात आना - (१) कुछ कहने की इच्छा होना । (२) सामने हो या उपस्थिति में कोई प्रसंग उठना या चर्चा चलना । (३) कुछ फहना मुँह पर मोहर करना - बोलने न वेना । मुँह पर लाना - (१) वर्णन करना । (२) कहने को होना । मुँह पर हाथ रखना - बोलने न वेना । मुंह पमारकर दौड़ना - कुछ पाने के लालच में आगे बढ़ना । मुँह पसारकर रह जाना - (१) बहुत चकित या हक्काबक्का रह जाना । (२) लज्जित होकर रह जाना । मुंह पाना- लाड़ प्यार पाना, पार्श्ववर्ती और प्रिय बनना । मुँह-पेट चलना - कै वस्त होना । मुँह फटना - (१) मुँह का बहुत ज्यादा खुलना । (२) चुने आादि से मुंह कट जाना। मुँह फाड़कर कहनाबेहया बनकर कहना । मुँह फैलाना - (१) मुँह को बहुत खोलना । (२) जॅम्हाई लेना । (३) अपनी हो भूल-चूक के होने पर भी निर्लज्जता से हँस देना । (४) भद्दे ढंग से हँमना । (५) अधिक प्राप्ति की इच्छा या हठ करना । मुंह फोड़कर कहना - निर्लज्ज बना'कर कहना । मुँह बद करना - बोलने में देना । मूंह बंद कर लेना--कुछ न बोलना । मुँह बंद होनाचुप हो जाना। मुँह बाँधकर बैठना कुछ न बोलना। देना) - वोलने न देना । मुंह वाना - (१) मुंह को बहुत सोलना या फैलाना । (२) जम्हाई लेना । (३) अपनो भूल-चूक होने पर भी निर्लज्जता से हँस देना । (४) भद्दे ढंग से हँसना । (५) अधिक प्राप्ति के लिए इच्छा या हठ करना। फिरत रहत मुँह कए- अधिकाधिक ( धन को) प्राप्ति के चक्कर में फिरता रहता है । उ निसि दिन फिरत रहन मुंह बाए अहमिति जनम बिगोइसि - १.३३३ । मुँह बिगड़ना - मुँह का स्वाद खराव होना । मुँह विगाडना मुंह का स्वाद खराव करना । मुंह भर बाना - (१) किसी चीज को देखकर ललचा जाना । (२) जो मिचलाना । मुंह तक (भरकर ) - (१) ऊपर तक, लवालव । (२) जितना जो चाहे । (३) भली भांति । मुंह भर बालना- -प्यार- सम्मान से बात करना । मुंह भरना - (१) खिलाना । (२) रिश्वत चेना । (३) बोलने से रोकना । मुँह मारना - (१) साने की चीज में मुंह लगाकर जूठा फर देना । (२) दाँत से काट लेना । (विसो फा) मुँह मारता - (१) घोलने न देना । (२) रिश्वत देना । (३) बढ़कर होना। मुँह मीठा करना - (१) मिठाई खिलाना । (२) कुछ वेकर प्रसन्न होना । मुंह मोठा होना - (१) खाने को मिठाई मिलना । (२) लाभ या प्राप्ति होना । (३) मंगनी होना । ( बात ) मुंह मे लाना -- फहने की इच्छा होना । मुँह मे खून या लहू लगना-घाट या चस्का पडना । मुँह मे जवान होना - कहने में समर्थ होना, कहने का साहस होना । मुंह मे तिनका दबाना ( लेना) • बहुत दीनता से बोलना । मुंह मे पडना - खाने को मिलना । (बात का ) मुंह मे पड़ना--मुँह से कुछ कहा जाना । मुंह मे पाना भर आना- (१) कोई आफपंक, स्वादिष्ट या अच्छी चोज देखकर उसको पाने के लिए बहुत ललचाना । (२) ईर्ष्या होना । मुँह में बात करना ( कहना या बोलना - इतना घोरे बोलना कि किसी को सुनायी न देना। मुंह में लगाम देना--समझ बूझहर चोलना । मुंह मे लगाम न होना-बिना सोचे-समझे जो मुँह में लाये कह डालना । मुंह लगाना -झामा, चलना । मुँह सँभालना - (१) सोच] समझकर मुंह से बात निकालना । (२) गाली-गलौच न करना । मुँह सीना- बिलकुल चुप रहना। मुँह, मूखना-~बहुत प्यास लगना । मुँह से दूध को व आना ( टपकना ) - वयस्क का बालक जैसा -अनजान : बनना । मुंह से निकलना - फहना । मुँह से फूटनाःकहना (ध्यग्य या सिझलाहट) से फूलझड़ना(१) सुंदर और प्रिय-वाले करना । (२) असूवर और अप्रिय नात कहना ( व्यंग्य या सिझलाहट ) । मुँह से बात छीनना - जो दूसरा कहने जा रहा हो, वह स्वयं कह देना । मुँह से बात न. निनाल, कोष या भय से कुछ बोल न सफना। मुँह से भाप ( तक) न निकलना - भय के मारे - चूं तक न कर सकना । मुँह से लार गिरना ( चूना, पत्नी, बहना - - कोई सुदर, स्वादिष्ट या आकर्षक वस्तु देखकर उसे पाने को बहुत लालांचिंत होना । मुँह से लाल, उगलना--- (१) त्रिय और रुचिकर बात कहना । (२) अप्रिय और अरुचिकर बात कहना (व्यंग्ये या खिलाहट) । (.) चेहरा, मुखभडल । मुहा० - अपना सा मुँह लेकर रह जाना - लज्जित होकर चुन या निश्चेष्ट हो जाना। इतना सा मुँह निकल आना - (१) बहुत सुस्त होना । (२) हानि, हुस, लज्जा आदि के कारण बहुत उदास होना मुँह अँधेरे- बहुत सबेरे । (किसी के) मुंह आना- किसी से तर्क कुतर्क या गाली-गलौज करना । मुँह उजला होना - वात या इज्जत बनी रह जाना । मुंह उजाले ( उठे ) - बहुत सबेरे । मुंह उठना - किसी ओर चलने की इच्छा होना । मुंह उठाये चले जाना - -वेधड़क चले जाना । मुँह उठाकर कहना - बिना सोचे-समझे बक वेना । मुँह उतरना ~ (१) दुर्बलता या रोग से चेहरा सुस्त होना । (२) हानि या दुख से उदास हो जाना। (अपना) मुँह काला करना - अपनी बदनामी करना । ( दूसरे का ) मुँह काला करना -उपवेश दे कर त्यागना । मुंहकी खाना- (१) दुवंशा या वेइज्जती कराना । (२) मुंहतोड़ उत्तर सुनना । (३) लज्जित या शर्मिंदा होना । (४) धोखा खाना । (५) बुरी तरह पराजित होना । मुंह के बल गिरना - ठोकर खाना, 'बाघात सहना । मुँह खोलना-घूंघट या परदा हटाना। मुँह चढ़ाना--आकृति से अप्रसन्नता या बसंतोष प्रकट करना । मुँह चाटना - खुज्ञानव या छापलूसी करना । मुंह छिपाना - लज्जा के कारण किसी के "सामने न आना + मुँह झटकं जाना - रोग या दुर्बलता से चेहरा सुस्त होना । मुंह झुलसना - लपट या लू आदि से चेहरा बहुत मलिन् हो जाना। मुँह झुलसाना - (१) लपट या आग से चेहरा फूंकना (गाली) । (२) शव का दाह-कर्म करना । (३) कुछ ले देकर झगड़ालू व्यक्ति से पीछा छुड़ाना । (अपना ) मुँह टेढा करना-अप्रसन्नता या असतोष का भाव चेहरे पर लाना । (-दूसरे का ) मुँह टेढा करना - (१) बहुत मोरना-पोटना । (२) कर्टु बात कहना या उत्तर देना । मुंड ढाँकनी - किसी सवधी के मरने पर शोक करना । ( किसी का ) मुंह ताकना - (१) एकटक देखना । (२) कुछ पाने की आशा से देखना, आश्रित या सहारे होना । (३) विवशता से देखना । (४) चकित होकर देखना । मुँह ताकना-काम-काज छोड़ । कर चुपचाप बैठ रहना मुँह तोडकर जवाब देनाफटु या चुभती हुई बात कहना । मुँह नोडना - (१) बहुत मारना-पीटना । (२) कटु या चुभती हुई बात कहना । मुँह थ्र्याना - अप्रसन्न या असतुष्ट होकर किसी से न बोलना । मुँह दिखाना-सासने आना। मुँह देखकर उठना-सोकर उठते ही किसी का दर्शन पाना । मुँह देखकर बात कहना - खुशामद करना । (किसो का) मुँह देखना - (१) किसी के सामने जाना । (२) चकित होकर देखना । (किसी का ) मुँह देखकर - (१) किसी के सहारे या बल यूते पर । (२) किसी को प्रसन्न या संतुष्ट करने के उद्देश्य से । मुँह धो रखना - प्राप्ति के संबंध में कोई आशा न रखना व्यंग्य ) । मुँह न देखना - घृणा या फोध के कारण कभी न मिलना-जुलना । मुँह न फेरना ( माडना) - (१) दृढ़ता के सामने डटे रहना । (२) अस्वीकार न करना । ( इतना सा ) मुँह निकल आना - (१) रोग या दुर्बलता सें चेहरा सुस्त हो जाना । (२) हानि, दुख या अपमान से उदास हो जाना । मुँह पर -सामने ही । मुँह पर चढ़ना-सामना या मुकाबला करना । मुँह पर थूकना - बहुत अपमानित और लज्जित करना मुँह पर नाक न होना बहुत निर्लज्ज होना । मुँह पर पानी फिर जाना - (१) चेहरे पर रौनक या तेज था जाना । (२) प्रसन्नता या संतोष का भाव प्रकट होना। मुँह पर फेंकना ( फेंक मारता ) - बहुत अप्रसन्न या असतुष्ट होफर कोई चीज देना। मुँह पर से बरसना - आकृति से जान पड़ना या प्रकट होना । मुँह पर बसंत खिलना ( फूनना ) - (१) चेहरा पीला पड़ जाना । (२) भयभीत या उदास हो जाना । मुँह पर मारना ( मार देना)-बहुत असंतुष्ट या अप्रसन्न होकर कोई चीज देना । मुँह दर मुँहु - आमने-सामने । मुंह • पर मुरदनी छाना (फिरना) - (१) चेहरा पीला पड़ जाना । (२) भयभीत, लज्जित या उदास होना । (३) अत समय निकट होना मुँह पर हवाई उडना ( छूटना) - भय, लज्जा या अपमान से चेहरा बहुत उदास हो जाना। ( किसी का ) मुँह पाना- किसी को अपने अनुकूल समझना, सम्मान और प्रेम का व्यवहार पाना । मुँह पाइ- लाड़ प्यार और सम्मान पाकर, अनुकूल समझकर उ - नेक ही मुंह पाइ फूला अनि गई इतराइ - २६८० । मुंह पावतिसम्मान और प्रेम का व्यवहार पाती है, अनुकूल सम झती है । उ. - मुँह पावति तब ही लो आवति और लावति मोहि - ७२३ । मुँह पीट लेना - बहुत अधिक क्रोध, दुख, पराजय या असफलता की स्थिति में होना । मुँह फक होना - भय या आशंका से चेहरा बहुत उदास हो जाना । मुँह फिरना (फिर जाना) - सामने से हट या भाग जाना । मुंह फुलाकर बैठना ( फुलाना ) - असंतोष या अप्रसन्न होकर चुप बैठना। मुँह फूंकना - (१) मुंह में आग लगाना (गाली) । (२) शव का दाह कर्म करना । (३) किसी झगड़ालू को कुछ ले देकर हटाना । मुँह फूलना असन्नता या असतोष होना । (किसी का) मुँह फेरना- पराजित कर देना । ( अपना) मुँह फेरना -- (१) उपेक्षा करना । (२) किसी की ओर से ध्यान हटा लेना । मुंह वन जाना ( बनना ) - चेहरे से असंतोष या अप्रसन्नता -
निर्णय । भारतीय छह दर्शनों में दो जो 'पूर्व' और 'उत्तर' मोनांसा कहलाते हैं । मीर-मंज्ञा पुं. [फा.] प्रधान नेता । धर्माचार्य । मीरग, मोरगा - पंज्ञा पु. [स. मृग] हिरन । मीलन - संज्ञा पु [स.] बंद करना, सकुचित करना । मीलित - वि. [ स ] यंद किया हुआ । सिकोड़ा या संकुचित किया हुआ । सज्ञा पु. - एक अलकार । मुँ गरा--पज्ञापु [हि मोगग] नमकीन बूंदी । मुँगैछी, मुँ गौछो, मुँगौरी - सज्ञा स्त्री [हिं. मूंग + वरी] मूंग की यरी । मुचना, मुचनो - क्रि. अ. [स. मोचन] मुक्त होना । क्रि. स. - मुक्त करना । मुंज - संज्ञा पु [म ] नूंज । मुंड-सज्ञापु [न.] सिर । फटा हुआ सिर । शुभ वैत्य का सेनापति । मुँडाइ, मुँड़ाई - सज्ञा स्त्री. [ हि. मुँड़ना] भूँड़ने की शिया, भाव या मजदूरी मुॅड़ानो - क्र. ) मुँडाना, मुँड़ानो - क्र. स. [सं. मुंडन] मुंडन कराना, कि अ. - मूंड़ा जाना [. प्रोखे में भ गंवाना, ठगा जाना मुँडासा - सज्ञा पृ. [हिं. मूंड ] सोफा, मुडित - वि. [ स.] मुड़ा हुआ मुड़िया - सज्ञा स्त्री [ हि मूडे ] तिर मूँड । संज्ञा पुं. [ हि मूंडना,] वह फिसो जोगी का चेला बन गया हो। उ.- जिन के जोग जोग यह ऊत्री ते मुंडिया यस कासी । मुं॰डी - संज्ञा स्त्री. [ हि मुँडी] स्त्री जिसका सर मुड़ा हो । विधवा सज्ञा पुः - साधु जिसका सर मुंडा हो । मुँ ढेरि, मुँढेरी-सज्ञा स्त्री. [ हि-मुंडेंरा ] दीवार का ऊपरी भाग जो छत से कुछ उठा रहता है। मुँडेरा - संज्ञा पु. [-हिं. मूंड ] दीवार का वह ऊपरी भाग जो छत से कुछ उठा रहता है। मुडो - सज्ञा स्त्री. [ हिमुडी ] स्त्री जिसका सर मुंडा हो । विधवा, रौड़ । मुँदना, मुँदनो - क्रि. अ. [ स मुद्रण ] बंद होना । छिपना, लुप्त होना । भर जाना । मुदरा - संज्ञा पुं. [ स. मुद्रा ] कुंडल जो जोगी कान में पहनते है । कान का एक आभूषण । मुँ दरिया, मुँ दरी - सज्ञा स्त्री. [ सं. मुद्रा ] उंगली । में पहनने का छल्ला । अंगूठी । उ - माशा होइ देउ कर मुदरी, कहीं संदेसी पति को -नौ-चौरासी॥ लाख मुंदरिया जाइगी कान्ह तुम्हारो मोलएक हज़ार एक सौ सत्ताईस । हाथ पहुँची बोर कानन जरित मुंदरी भ्राजई - दस उशून्य-चौबीस । मुँदाई - कि, स. [ हि मुंदाना ] बंद करवायो । उ हरि तब भरनी अखि मुंदाई-दस-दो सौ चालीस । मुँदाए - कि स. [ हि. मुंदाना ] बंद कराये । उ. - कु भीरज घरी, जियह कोउ जिनि डड़ौ, कहा इहि सु लोचन मंदाए - पाँच हज़ार नौ सौ इकसठ - मुंशी-सज्ञा पुं. [म. ] लेखक । मुदिर । वि. - मुंडे हुए सिर वाला । नीव । मुंडन - सज्ञा पु [ स ] सिर को मूंढ़ने को किया । द्विजातियों में बालक का एक संस्कार जो सामान्यतया पांचवें वर्ष किया जाता है। मुँहना, मुँडनो - कि अ [स मुडन] सिर के वालों का मूंडा जाना । लूटा या ठगा जाना । हानि उठाना । मुंडमाल, मुडमाला - संज्ञा स्थी. [ सं मुंडमाला ] . कटे हुए सिरों को माला जो शिव या काली के गले में रहती है। उ मुडमाल सिव-ग्रीवा कैसी " । मुडमान कैमो तव ग्रो-एक-दो सौ छब्बीस । मुडमालिनि, मुडमालिनी- सज्ञा स्त्री. [स] देवी काली । मुढमाली - सज्ञा पु. [स. मुडमालिन् ] शिव जी । मुडली-सजा स्त्री. [हि. मुडा] जिसका सिर मुंडा हो । उ.- मुडली पाटो पारन चहूँ । मुंडा - वि. [ सं गुड़ ] जिसका सिर मुंडा हो । - जिस के सींग न हों। सा स्पी.- एक निपि जिसमें मात्राएँ आदि मही होती । [ मुँह - संज्ञा पुं॰ [ सं. मुख ] मुख का विवर । मुंह आना - मुंह में छाले पड़ना । मुँह का कच्चा - जिसकी बात का विश्वास न हो । जो किसी बात को गुप्त न रखकर सबसे कह देता हो । मुँह का कड़ा उद्दडता पूर्वक बातें करनेवाला । मुँह किलना - मुंह से बात या बोल न निकलना । मुँह कोलन से बात न निकालने देना । मुँह की ~ बात छिमता- जो बात स्वयं कहने जा रहे हों, वही दूसरे के द्वारा कही जाना । मुँह की बात छोनना जो दूसरी कहने को हो, वहीं स्वयं कह देना । मुह को मंत्रखी 'न' उड़ा सकना-बहुत ही दुर्बल या अपाहिज होना। मुँह की मिलानामुँह देखी या चापलूसो को बातें करना । मुंह मिलवत : ॠह देखी. या चापलूसो की बातें करते हो । उ.- मोखो तुम मुँह की मिलबत ही भावति है वह प्यारी - एक हज़ार आठ सौ चौंसठ.। मुँह ही की हमसौँ मिलवत, जिय बसतं ही मन मोहनि - दो हज़ार चौदह मुंह खराब करना - स्वाद बिगाड़ना । गंदी - बात कहना । मुँह खराब होना - स्वाद बिगइना । गंदी बातें कही जाना । मुँह खुलना - • बोलना । उद्दंडता की बात कहने का नादी होना । मुँह खुलवाना - बोलने को प्रवृत्त करमा कड़ी या उद्दंडता की बातें कहने को वाध्य करना । मुंह खोलकर रह जाना - कुछ कहने को होना, पर लज्जा, संकोच या भय से न कह पाना । मुंह खोलना - बोलना । बुरो या उद्दंडताभरी बातें कहना । किसी के मुंह चढ़ना - कोई बात हर समय याद आ जाना । किसी के प्यार-दुलार के फलस्वरूप उद्दंड हो जाना । मुँह चढ़ाना - अत्यधिक प्यार दुलार से किसी को उद्देउ या घुष्ट करना । बहुत प्रिय बनाना । मुँह चलना खाया जाना । व्यर्थ की बातें या दुर्धचन कहा जाना ।' मुँह चलाना - भोजन करना । बोलना । गाली देना । काट लेना । मुंह चिढ़ानाकिसी की आकृति या उसके हाव-भाव को मकल' बनाकर हंसी उड़ाना या उसको खिझाना । मुँह चूम कर छोड देना- लज्जित करके छोड़ देना । मुँह छूना - ऊपरी मन से या नाम मात्र को करना । दिखावटी बात करना । मुंह जहर होना - मुँह में कडुआहट होना । मुँह जुठारना बहुत ही कम खाना । मुंह जोडना - कानाफूसी करना । मुँह डालना- खाने के पदार्थ को एक-दो कौर खाकर जूठा कर देना मुंह तक बना कहने को होना । मुँह थकना - बहुत बोलने से यक जाना। मुंह थकाना - बहुत बोलकर ज़बान थका देना मुँह देना- - प्याद्य पदार्थ को एक-दो कौर खाकर जूठा कर देना । बहुत लाड़ प्यार करना । मुँह न दोजिए- बहुत लाईप्यार न कीजिए। उ. - कबहूँ बालक मुंह न दीजिए मुँह न दीजिए नारि - एक हज़ार निन्यानवे । मुँह पकड़ना ~~ कुछ बोलने न देना। मुँह पर न रखना - जरा भी न खाना । मुँह पर बात आना - कुछ कहने की इच्छा होना । सामने हो या उपस्थिति में कोई प्रसंग उठना या चर्चा चलना । कुछ फहना मुँह पर मोहर करना - बोलने न वेना । मुँह पर लाना - वर्णन करना । कहने को होना । मुँह पर हाथ रखना - बोलने न वेना । मुंह पमारकर दौड़ना - कुछ पाने के लालच में आगे बढ़ना । मुँह पसारकर रह जाना - बहुत चकित या हक्काबक्का रह जाना । लज्जित होकर रह जाना । मुंह पाना- लाड़ प्यार पाना, पार्श्ववर्ती और प्रिय बनना । मुँह-पेट चलना - कै वस्त होना । मुँह फटना - मुँह का बहुत ज्यादा खुलना । चुने आादि से मुंह कट जाना। मुँह फाड़कर कहनाबेहया बनकर कहना । मुँह फैलाना - मुँह को बहुत खोलना । जॅम्हाई लेना । अपनी हो भूल-चूक के होने पर भी निर्लज्जता से हँस देना । भद्दे ढंग से हँमना । अधिक प्राप्ति की इच्छा या हठ करना । मुंह फोड़कर कहना - निर्लज्ज बना'कर कहना । मुँह बद करना - बोलने में देना । मूंह बंद कर लेना--कुछ न बोलना । मुँह बंद होनाचुप हो जाना। मुँह बाँधकर बैठना कुछ न बोलना। देना) - वोलने न देना । मुंह वाना - मुंह को बहुत सोलना या फैलाना । जम्हाई लेना । अपनो भूल-चूक होने पर भी निर्लज्जता से हँस देना । भद्दे ढंग से हँसना । अधिक प्राप्ति के लिए इच्छा या हठ करना। फिरत रहत मुँह कए- अधिकाधिक प्राप्ति के चक्कर में फिरता रहता है । उ निसि दिन फिरत रहन मुंह बाए अहमिति जनम बिगोइसि - एक.तीन सौ तैंतीस । मुँह बिगड़ना - मुँह का स्वाद खराव होना । मुँह विगाडना मुंह का स्वाद खराव करना । मुंह भर बाना - किसी चीज को देखकर ललचा जाना । जो मिचलाना । मुंह तक - ऊपर तक, लवालव । जितना जो चाहे । भली भांति । मुंह भर बालना- -प्यार- सम्मान से बात करना । मुंह भरना - खिलाना । रिश्वत चेना । बोलने से रोकना । मुँह मारना - साने की चीज में मुंह लगाकर जूठा फर देना । दाँत से काट लेना । मुँह मारता - घोलने न देना । रिश्वत देना । बढ़कर होना। मुँह मीठा करना - मिठाई खिलाना । कुछ वेकर प्रसन्न होना । मुंह मोठा होना - खाने को मिठाई मिलना । लाभ या प्राप्ति होना । मंगनी होना । मुंह मे लाना -- फहने की इच्छा होना । मुँह मे खून या लहू लगना-घाट या चस्का पडना । मुँह मे जवान होना - कहने में समर्थ होना, कहने का साहस होना । मुंह मे तिनका दबाना • बहुत दीनता से बोलना । मुंह मे पडना - खाने को मिलना । मुंह मे पड़ना--मुँह से कुछ कहा जाना । मुंह मे पाना भर आना- कोई आफपंक, स्वादिष्ट या अच्छी चोज देखकर उसको पाने के लिए बहुत ललचाना । ईर्ष्या होना । मुँह में बात करना सोच] समझकर मुंह से बात निकालना । गाली-गलौच न करना । मुँह सीना- बिलकुल चुप रहना। मुँह, मूखना-~बहुत प्यास लगना । मुँह से दूध को व आना - वयस्क का बालक जैसा -अनजान : बनना । मुंह से निकलना - फहना । मुँह से फूटनाःकहना से फूलझड़ना सुंदर और प्रिय-वाले करना । असूवर और अप्रिय नात कहना । मुँह से बात छीनना - जो दूसरा कहने जा रहा हो, वह स्वयं कह देना । मुँह से बात न. निनाल, कोष या भय से कुछ बोल न सफना। मुँह से भाप न निकलना - भय के मारे - चूं तक न कर सकना । मुँह से लार गिरना त्रिय और रुचिकर बात कहना । अप्रिय और अरुचिकर बात कहना । चेहरा, मुखभडल । मुहाशून्य - अपना सा मुँह लेकर रह जाना - लज्जित होकर चुन या निश्चेष्ट हो जाना। इतना सा मुँह निकल आना - बहुत सुस्त होना । हानि, हुस, लज्जा आदि के कारण बहुत उदास होना मुँह अँधेरे- बहुत सबेरे । मुंह आना- किसी से तर्क कुतर्क या गाली-गलौज करना । मुँह उजला होना - वात या इज्जत बनी रह जाना । मुंह उजाले - बहुत सबेरे । मुंह उठना - किसी ओर चलने की इच्छा होना । मुंह उठाये चले जाना - -वेधड़क चले जाना । मुँह उठाकर कहना - बिना सोचे-समझे बक वेना । मुँह उतरना ~ दुर्बलता या रोग से चेहरा सुस्त होना । हानि या दुख से उदास हो जाना। मुँह काला करना - अपनी बदनामी करना । मुँह काला करना -उपवेश दे कर त्यागना । मुंहकी खाना- दुवंशा या वेइज्जती कराना । मुंहतोड़ उत्तर सुनना । लज्जित या शर्मिंदा होना । धोखा खाना । बुरी तरह पराजित होना । मुंह के बल गिरना - ठोकर खाना, 'बाघात सहना । मुँह खोलना-घूंघट या परदा हटाना। मुँह चढ़ाना--आकृति से अप्रसन्नता या बसंतोष प्रकट करना । मुँह चाटना - खुज्ञानव या छापलूसी करना । मुंह छिपाना - लज्जा के कारण किसी के "सामने न आना + मुँह झटकं जाना - रोग या दुर्बलता से चेहरा सुस्त होना । मुंह झुलसना - लपट या लू आदि से चेहरा बहुत मलिन् हो जाना। मुँह झुलसाना - लपट या आग से चेहरा फूंकना । शव का दाह-कर्म करना । कुछ ले देकर झगड़ालू व्यक्ति से पीछा छुड़ाना । मुँह टेढा करना-अप्रसन्नता या असतोष का भाव चेहरे पर लाना । मुँह टेढा करना - बहुत मोरना-पोटना । कर्टु बात कहना या उत्तर देना । मुंड ढाँकनी - किसी सवधी के मरने पर शोक करना । मुंह ताकना - एकटक देखना । कुछ पाने की आशा से देखना, आश्रित या सहारे होना । विवशता से देखना । चकित होकर देखना । मुँह ताकना-काम-काज छोड़ । कर चुपचाप बैठ रहना मुँह तोडकर जवाब देनाफटु या चुभती हुई बात कहना । मुँह नोडना - बहुत मारना-पीटना । कटु या चुभती हुई बात कहना । मुँह थ्र्याना - अप्रसन्न या असतुष्ट होकर किसी से न बोलना । मुँह दिखाना-सासने आना। मुँह देखकर उठना-सोकर उठते ही किसी का दर्शन पाना । मुँह देखकर बात कहना - खुशामद करना । मुँह देखना - किसी के सामने जाना । चकित होकर देखना । मुँह देखकर - किसी के सहारे या बल यूते पर । किसी को प्रसन्न या संतुष्ट करने के उद्देश्य से । मुँह धो रखना - प्राप्ति के संबंध में कोई आशा न रखना व्यंग्य ) । मुँह न देखना - घृणा या फोध के कारण कभी न मिलना-जुलना । मुँह न फेरना - दृढ़ता के सामने डटे रहना । अस्वीकार न करना । मुँह निकल आना - रोग या दुर्बलता सें चेहरा सुस्त हो जाना । हानि, दुख या अपमान से उदास हो जाना । मुँह पर -सामने ही । मुँह पर चढ़ना-सामना या मुकाबला करना । मुँह पर थूकना - बहुत अपमानित और लज्जित करना मुँह पर नाक न होना बहुत निर्लज्ज होना । मुँह पर पानी फिर जाना - चेहरे पर रौनक या तेज था जाना । प्रसन्नता या संतोष का भाव प्रकट होना। मुँह पर फेंकना - बहुत अप्रसन्न या असतुष्ट होफर कोई चीज देना। मुँह पर से बरसना - आकृति से जान पड़ना या प्रकट होना । मुँह पर बसंत खिलना - चेहरा पीला पड़ जाना । भयभीत या उदास हो जाना । मुँह पर मारना -बहुत असंतुष्ट या अप्रसन्न होकर कोई चीज देना । मुँह दर मुँहु - आमने-सामने । मुंह • पर मुरदनी छाना - चेहरा पीला पड़ जाना । भयभीत, लज्जित या उदास होना । अत समय निकट होना मुँह पर हवाई उडना - भय, लज्जा या अपमान से चेहरा बहुत उदास हो जाना। मुँह पाना- किसी को अपने अनुकूल समझना, सम्मान और प्रेम का व्यवहार पाना । मुँह पाइ- लाड़ प्यार और सम्मान पाकर, अनुकूल समझकर उ - नेक ही मुंह पाइ फूला अनि गई इतराइ - दो हज़ार छः सौ अस्सी । मुंह पावतिसम्मान और प्रेम का व्यवहार पाती है, अनुकूल सम झती है । उ. - मुँह पावति तब ही लो आवति और लावति मोहि - सात सौ तेईस । मुँह पीट लेना - बहुत अधिक क्रोध, दुख, पराजय या असफलता की स्थिति में होना । मुँह फक होना - भय या आशंका से चेहरा बहुत उदास हो जाना । मुँह फिरना - सामने से हट या भाग जाना । मुंह फुलाकर बैठना - असंतोष या अप्रसन्न होकर चुप बैठना। मुँह फूंकना - मुंह में आग लगाना । शव का दाह कर्म करना । किसी झगड़ालू को कुछ ले देकर हटाना । मुँह फूलना असन्नता या असतोष होना । मुँह फेरना- पराजित कर देना । मुँह फेरना -- उपेक्षा करना । किसी की ओर से ध्यान हटा लेना । मुंह वन जाना - चेहरे से असंतोष या अप्रसन्नता -
महाराणा प्रताप आजादी के प्रतीक है। उन्होंने आजीवन यवनों मुगल आक्रांता से आपनी मिट्टी की रक्षा करने के लिए जीवने न्योछावर कर दिया। ये बातें उनकी जयंती पर समाजवादी विचार मंच के अध्यक्ष रीतेश कुमार गुड्डू ने कही। कहा कि मुगल आक्रांता के समक्ष कभी घुटने नहीं टेके। जंगल में रहकर व घास की रोटी खाकर भी मेवाड़ की आजादी को बरकरार रखा। भाजपा नेता राजीव कुमार सिंह राजू ने कहा कि महाराणा प्रताप के जीवन से आज भी स्वतंत्रता की हमें प्रेरणा मिलती है। इस दौरान जयंती के अवसर पर बबलू सिंह, सुधीर कुमार द्विवेदी, दिनेश प्रसाद, राजेश कुमार झा ने भी महाराणा प्रताप को याद किया।
महाराणा प्रताप आजादी के प्रतीक है। उन्होंने आजीवन यवनों मुगल आक्रांता से आपनी मिट्टी की रक्षा करने के लिए जीवने न्योछावर कर दिया। ये बातें उनकी जयंती पर समाजवादी विचार मंच के अध्यक्ष रीतेश कुमार गुड्डू ने कही। कहा कि मुगल आक्रांता के समक्ष कभी घुटने नहीं टेके। जंगल में रहकर व घास की रोटी खाकर भी मेवाड़ की आजादी को बरकरार रखा। भाजपा नेता राजीव कुमार सिंह राजू ने कहा कि महाराणा प्रताप के जीवन से आज भी स्वतंत्रता की हमें प्रेरणा मिलती है। इस दौरान जयंती के अवसर पर बबलू सिंह, सुधीर कुमार द्विवेदी, दिनेश प्रसाद, राजेश कुमार झा ने भी महाराणा प्रताप को याद किया।
नई दिल्लीः भारतीय रेलवे (Indian Railway) द्वारा आज एक सबसे बड़ा और सबसे अहम प्रयोग किया गया है। जी दरअसल, रेलवे ने अपनी सेवाओं और तकनीकी को और ज्यादा बढ़ाने के लिए दो ट्रेनों की फुल स्पीड में टक्कर करवाने का निर्णय लिया और इस निर्णय को करने के बाद जो निष्कर्ष निकला वह बेहतरीन रहा। आप सभी को बता दें कि इस प्रयोग द्वारा भारतीय रेलवे सुरक्षा टेक्नोलॉजी 'कवच' (Kavach Technique Testing) का परिक्षण करना चाहता था और भारतीय रेलवे का यह प्रयोग सफल रहा। Rear-end collision Testing is successful. Successful Trial of KAVACH! आप देख सकते हैं एक अन्य वीडियो को शेयर करते हुए भारतीय रेलवे ने लिखा है, "रियर-एंड टक्कर परीक्षण सफल रहा है। कवच ने अन्य लोको से 380 मीटर पहले लोको को स्वचालित रूप से रोक दिया। " अब इस सफल परीक्षण के बाद लोगों में ख़ुशी की लहर है। भारतीय रेलवे का बड़ा ऐलान, इन राज्यों के लिए चलाएगी 'होली स्पेशल ट्रेनें'
नई दिल्लीः भारतीय रेलवे द्वारा आज एक सबसे बड़ा और सबसे अहम प्रयोग किया गया है। जी दरअसल, रेलवे ने अपनी सेवाओं और तकनीकी को और ज्यादा बढ़ाने के लिए दो ट्रेनों की फुल स्पीड में टक्कर करवाने का निर्णय लिया और इस निर्णय को करने के बाद जो निष्कर्ष निकला वह बेहतरीन रहा। आप सभी को बता दें कि इस प्रयोग द्वारा भारतीय रेलवे सुरक्षा टेक्नोलॉजी 'कवच' का परिक्षण करना चाहता था और भारतीय रेलवे का यह प्रयोग सफल रहा। Rear-end collision Testing is successful. Successful Trial of KAVACH! आप देख सकते हैं एक अन्य वीडियो को शेयर करते हुए भारतीय रेलवे ने लिखा है, "रियर-एंड टक्कर परीक्षण सफल रहा है। कवच ने अन्य लोको से तीन सौ अस्सी मीटर पहले लोको को स्वचालित रूप से रोक दिया। " अब इस सफल परीक्षण के बाद लोगों में ख़ुशी की लहर है। भारतीय रेलवे का बड़ा ऐलान, इन राज्यों के लिए चलाएगी 'होली स्पेशल ट्रेनें'
रतलाम - इमालवा । आगामी 3 से 8 मई तक जिले के युवाओं के लिए सेना में भर्ती का सुनहरा अवसर आया है । भर्ती के लिये रतलाम के युवा झाबुआ में आयोजित रैली में भाग ले सकते है । इसी के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों में 3 मई से 18 जून तक रैली की जायेगी। रैली में सेना के विभिन्न पद के लिये भर्ती की जायेगी। झाबुआ में 3 से 8 मई तक होने वाली रैली में जिला इंदौर, देवास, मंदसौर, धार, अलीराजपुर, उज्जैन, रतलाम, बड़वानी, बुरहानपुर, झाबुआ, नीमच, खरगोन और खण्डवा के अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं। गुना में 13 से 19 मई तक रैली होगी। रैली में जिला ग्वालियर, दतिया, भिण्ड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, टीकमगढ़, छतरपुर, श्योपुर और अशोकनगर के अभ्यर्थी शामिल होंगे। इसी तरह राजगढ़ जिला में 29 मई को होने वाली रैली में सभी जिलों के अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे। इस दिन धर्म शिक्षक और हवलदार शिक्षा के लिये भर्ती होगी। राजगढ़ में 30 मई से 4 जून तक होने वाली रैली में अन्य पदों के लिये भर्ती होगी। इसमें जिला भोपाल, सीहोर, रायसेन, छिन्दवाड़ा, बैतूल, होशंगाबाद, विदिशा, सागर, राजगढ़, हरदा और शाजापुर के अभ्यर्थी शामिल होंगे। रीवा में 12 से 18 जून तक रैली होगी। रैली में जिला रीवा, सतना, पन्ना, दमोह, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मण्डला, नरसिंहपुर, कटनी, डिण्डोरी और अनूपपुर के अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे।
रतलाम - इमालवा । आगामी तीन से आठ मई तक जिले के युवाओं के लिए सेना में भर्ती का सुनहरा अवसर आया है । भर्ती के लिये रतलाम के युवा झाबुआ में आयोजित रैली में भाग ले सकते है । इसी के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों में तीन मई से अट्ठारह जून तक रैली की जायेगी। रैली में सेना के विभिन्न पद के लिये भर्ती की जायेगी। झाबुआ में तीन से आठ मई तक होने वाली रैली में जिला इंदौर, देवास, मंदसौर, धार, अलीराजपुर, उज्जैन, रतलाम, बड़वानी, बुरहानपुर, झाबुआ, नीमच, खरगोन और खण्डवा के अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं। गुना में तेरह से उन्नीस मई तक रैली होगी। रैली में जिला ग्वालियर, दतिया, भिण्ड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, टीकमगढ़, छतरपुर, श्योपुर और अशोकनगर के अभ्यर्थी शामिल होंगे। इसी तरह राजगढ़ जिला में उनतीस मई को होने वाली रैली में सभी जिलों के अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे। इस दिन धर्म शिक्षक और हवलदार शिक्षा के लिये भर्ती होगी। राजगढ़ में तीस मई से चार जून तक होने वाली रैली में अन्य पदों के लिये भर्ती होगी। इसमें जिला भोपाल, सीहोर, रायसेन, छिन्दवाड़ा, बैतूल, होशंगाबाद, विदिशा, सागर, राजगढ़, हरदा और शाजापुर के अभ्यर्थी शामिल होंगे। रीवा में बारह से अट्ठारह जून तक रैली होगी। रैली में जिला रीवा, सतना, पन्ना, दमोह, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मण्डला, नरसिंहपुर, कटनी, डिण्डोरी और अनूपपुर के अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे।
कावेरी जल विवाद को लेकर चेन्नई सुपरकिंग्स द्वारा अपने होम ग्राउंड पर खेले जाने वाले मैचों को बाहर शिफ्ट करना पड़ा। चेन्नई में चल रहे लगातार विरोध प्रदर्शन के बावजूद सीएसके की टीम अपना एक मैच घरेलू मैदान चेपक स्टेडियम में खेल चुकी थी। हालांकि अब सीएसके बाकी के शेष मैचों को मुंबई के क्रिकेट स्टेडियम में खेलना चाहती है। चेन्ऩई सुपरकिंग्स द्वारा अपने बाकी के शेष छह मैचों को मुंबई के ब्राबोर्न क्रिकेट स्टेडियम में खेलने की इच्छा भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड को रास नहीं आ रही है। इसका कारण इस ग्राउंड पर पहले ही मुंबई इण्डियंस की टीम अपने 7 मैचों को खेलते हुए नजर आएगी। इसके बाद दो नाॅकआउट मैच भी इसी ग्राउंड पर खेला जाना तय है। ऐसे में अगर चेन्नई सुपरकिंग्स की बात मानकर उनके सभी 6 मैचों को मुंबई के क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किए जाए तो कुल 15 आईपीएल मैचों का आयोजन एक ही ग्राउंड पर हो जाएगा। जो कि बीसीसीआई के समझ से परे लग रहा है। अगर टाइम्स आॅफ रिपोर्ट की माने तो बीसीसीआई ने चेन्ऩई सुपरकिंग्स की टीम को चार च्वाइस दिया है,जहां पर वे अपने बाकी के मैचों को खेल सकते हैं। इसमें उन्हें विशाखापट्टनम, तिरुवन्तपुरम,पुणे और राजकोट मेंं मैच को आयोजित करने का आप्शन दिया है। साथ ही बोर्ड ने चेन्ऩई सुपरकिंग्स के मैचों को मुंबई में कराने को लेकर किए गए अनुरोध को मानने से इनकार कर दिया है। सोर्स के मुताबिक पहले से ही सीएसके की टीम को पुणे के क्रिकेट स्टेडियम में बाकी के छह मैचो को आयोजित कराने का विकल्प दिया थीा। हालांकि अब तक इसमें कोई भी अन्तिम फैसला नहीं हो सका है। ऐसे में अब यह देखना बेहद दिलचस्प रहेगा कि आने वाले समय में इसको लेकर क्या फैसला आता है.
कावेरी जल विवाद को लेकर चेन्नई सुपरकिंग्स द्वारा अपने होम ग्राउंड पर खेले जाने वाले मैचों को बाहर शिफ्ट करना पड़ा। चेन्नई में चल रहे लगातार विरोध प्रदर्शन के बावजूद सीएसके की टीम अपना एक मैच घरेलू मैदान चेपक स्टेडियम में खेल चुकी थी। हालांकि अब सीएसके बाकी के शेष मैचों को मुंबई के क्रिकेट स्टेडियम में खेलना चाहती है। चेन्ऩई सुपरकिंग्स द्वारा अपने बाकी के शेष छह मैचों को मुंबई के ब्राबोर्न क्रिकेट स्टेडियम में खेलने की इच्छा भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड को रास नहीं आ रही है। इसका कारण इस ग्राउंड पर पहले ही मुंबई इण्डियंस की टीम अपने सात मैचों को खेलते हुए नजर आएगी। इसके बाद दो नाॅकआउट मैच भी इसी ग्राउंड पर खेला जाना तय है। ऐसे में अगर चेन्नई सुपरकिंग्स की बात मानकर उनके सभी छः मैचों को मुंबई के क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किए जाए तो कुल पंद्रह आईपीएल मैचों का आयोजन एक ही ग्राउंड पर हो जाएगा। जो कि बीसीसीआई के समझ से परे लग रहा है। अगर टाइम्स आॅफ रिपोर्ट की माने तो बीसीसीआई ने चेन्ऩई सुपरकिंग्स की टीम को चार च्वाइस दिया है,जहां पर वे अपने बाकी के मैचों को खेल सकते हैं। इसमें उन्हें विशाखापट्टनम, तिरुवन्तपुरम,पुणे और राजकोट मेंं मैच को आयोजित करने का आप्शन दिया है। साथ ही बोर्ड ने चेन्ऩई सुपरकिंग्स के मैचों को मुंबई में कराने को लेकर किए गए अनुरोध को मानने से इनकार कर दिया है। सोर्स के मुताबिक पहले से ही सीएसके की टीम को पुणे के क्रिकेट स्टेडियम में बाकी के छह मैचो को आयोजित कराने का विकल्प दिया थीा। हालांकि अब तक इसमें कोई भी अन्तिम फैसला नहीं हो सका है। ऐसे में अब यह देखना बेहद दिलचस्प रहेगा कि आने वाले समय में इसको लेकर क्या फैसला आता है.