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दरअसल, देश भर में पेट्रोल डीजल की कीमतों की बात करते हुए पीएम मोदी अपने बयान में कह गए कि बीजेपी शासित राज्यों में पेट्रोल डीजल की कीमतें 100 रुपये से कम हैं। कहा जा रहा है कि पीएम मोदी को यही कीमत बताई होगी। जबकि हकीकत में तो कांग्रेस शासित राज्यों से भी ज्यादा कीमतें बीजेपी राज्यों में है।
कांग्रेस का आरोप- शिवराज सरकार ने पीएम को दी गलत जानकारीउमरिया से पूर्व विधायक और कांग्रेस जिला अध्यक्ष अजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि शिवराज सिंह कांग्रेस के बढ़ते जनाधार को देख कर बौखला गए हैं, जिसको देख कर लगता है कि सत्ता में वापसी के लिये कुछ भी करने को तैयार हैं। यही कारण है उन्होंने पीएम मोदी के जरिये पेट्रोल-डीजल की गलत कीमतों को जनता के सामने बोलने से रोका नहीं। जबकि चाहते तो शिवराज सिंह चौहान उसी समय मोदी को यह जानकारी देकर उन्हें अपना बयान सुधारने के लिये कह सकते थे, लेकिन जनता को लुभावने वायदे करने की इस लहर में शिवराज सिंह चौहान चुप्पी साधे बैठे रहे हैं और उन्होंने मोदी को एक के बाद एक झूठ बोलने पर मजबूर कर दिया।
कांग्रेस ने सीएम शिवराज पर साधा निशानाकांग्रेस जिला अध्यक्ष अजय सिंह कहा कि कुल मिलाकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सत्ता में वापसी को लेकर कुछ भी करने को तैयार हैं। वहीं प्रधानमंत्री ने भी मंच से साफ तौर पर कह दिया है कि जनता झूठ की गारंटी देने वालों से सावधान रहे, उनकी गारंटी में छिपे खोट को पहचाने। पूर्व विधायक ने कहा कि जनता से हमारी अपील है कि ऐसी पार्टी से सावधान रहें जो अपने प्रधानमंत्री तक को नही बख्शी, उनसे तक झूठ बुलवाने का काम की है, तो आपसे लोक लुभावने चुनावी वादे करने में कहां से पीछे रहेगी, इनके भ्रष्टाचार और घोटालों से अब हर कोई वाकिफ हो गया है।
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दरअसल, देश भर में पेट्रोल डीजल की कीमतों की बात करते हुए पीएम मोदी अपने बयान में कह गए कि बीजेपी शासित राज्यों में पेट्रोल डीजल की कीमतें एक सौ रुपयापये से कम हैं। कहा जा रहा है कि पीएम मोदी को यही कीमत बताई होगी। जबकि हकीकत में तो कांग्रेस शासित राज्यों से भी ज्यादा कीमतें बीजेपी राज्यों में है। कांग्रेस का आरोप- शिवराज सरकार ने पीएम को दी गलत जानकारीउमरिया से पूर्व विधायक और कांग्रेस जिला अध्यक्ष अजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि शिवराज सिंह कांग्रेस के बढ़ते जनाधार को देख कर बौखला गए हैं, जिसको देख कर लगता है कि सत्ता में वापसी के लिये कुछ भी करने को तैयार हैं। यही कारण है उन्होंने पीएम मोदी के जरिये पेट्रोल-डीजल की गलत कीमतों को जनता के सामने बोलने से रोका नहीं। जबकि चाहते तो शिवराज सिंह चौहान उसी समय मोदी को यह जानकारी देकर उन्हें अपना बयान सुधारने के लिये कह सकते थे, लेकिन जनता को लुभावने वायदे करने की इस लहर में शिवराज सिंह चौहान चुप्पी साधे बैठे रहे हैं और उन्होंने मोदी को एक के बाद एक झूठ बोलने पर मजबूर कर दिया। कांग्रेस ने सीएम शिवराज पर साधा निशानाकांग्रेस जिला अध्यक्ष अजय सिंह कहा कि कुल मिलाकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सत्ता में वापसी को लेकर कुछ भी करने को तैयार हैं। वहीं प्रधानमंत्री ने भी मंच से साफ तौर पर कह दिया है कि जनता झूठ की गारंटी देने वालों से सावधान रहे, उनकी गारंटी में छिपे खोट को पहचाने। पूर्व विधायक ने कहा कि जनता से हमारी अपील है कि ऐसी पार्टी से सावधान रहें जो अपने प्रधानमंत्री तक को नही बख्शी, उनसे तक झूठ बुलवाने का काम की है, तो आपसे लोक लुभावने चुनावी वादे करने में कहां से पीछे रहेगी, इनके भ्रष्टाचार और घोटालों से अब हर कोई वाकिफ हो गया है।
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- 1 hr ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल!
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- Lifestyle Sawan Month: सावन में किस वजह से है दाढ़ी-बाल कटवाने की मनाही?
जी सिनेमा ने बच्चों को आमिर खान से मिलाने के लिए एक चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया है जिसका नाम है 'मेरी दुनिया'. यह प्रतियोगिता अनाथ बच्चों के लिए रखी गई है. जिसमें जीतने वाले बच्चे को आमिर खान के साथ वक्त बिताने का मौका मिलेगा.
इतना ही नहीं आमिर से उस बच्चे का मिलन सभी लोग देख सकते हैं क्यूंकि उसे रेकॉर्ड करके प्रसारित भी किया जाएगा. प्रसारण आमिर खान की फ़िल्म 'इश्क' के ब्रेक के दौरान किया जाएगा जो20 दिसम्बर को8:00 बजे जी सिनेमा पर दिखाई जायेगी.
इस बारे में जी सिनेमा के बिस्नेज़ हेड मोहन गोपीनाथ ने हमे बताया कि आमिर खान बहुत लंबे अंतराल के बाद फ़िल्म बनाते हैं और हमे गर्व है की हम 'तारे ज़मीन पर' के साथ जुड़े हुए हैं.
है.
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Lavender Oil For Hair: हम सभी अपने बालों को स्वस्थ सुन्दर, और मजबूत रखना चाहते हैं। क्योंकि बाल हमारी सुन्दरता को बनाए रखने में हमारी सहायता करते हैं। बालों को मजबूत बनाने के लिए लोग बहुत सी चीजों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन लैवेंडर आयल आपके बालों को जड़ से मजबूत बना सकता है। आपके हेयर ग्रोथ को बढ़ता है और हेल्दी रखता है। लैवेंडर के आयल की खुशबू इतनी अच्छी होती है कि कभी आपको शर्मिंदगी भी नहीं महसूस होगी। लैवेंडर आयल हमारे बालों की हेल्थ के लिए काफी अच्छा होता है। इसके इस्तेमाल से हमारे बाल हेल्दी और मजबूत बनते हैं। लैवेंडर आयल की हेल्प से हम अपने बालों की हेल्थ को बनाए रख सकते हैं। यह हमारे बालों को नेचुरली हेल्दी बनाता है।
लैवेंडर का तेल बालों के की जड़ों में जाकर उन्हें मजबूत करता है और बालों के विकास को बढ़ावा देने का काम करता है। यह बालों के झड़ने से रोकता है और आपके बालों को मोटा करता है और बालों को घना बनाने में मदद करता है।
लैवेंडर आयल में शांत करने वाले और सूथिंग प्रोपर्टीज होते हैं जो सिर की खुजली या जलन को कम करने में मदद करते हैं। यह डैंड्रफ और रूखेपन को कम करने में भी मदद करते हैं, जिससे आपका सिर स्वस्थ रहता है और उसे आराम भी मिलता है।
लैवेंडर आयल एंटीऑक्सिडेंट और पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो आपके बालों को पोषण और कंडीशन कर सकता है। यह सूखे बालों को मॉइस्चराइज़ करने में मदद करता है, जिससे बाल सॉफ्ट और मैनेजबल हो जाते हैं। लैवेंडर आयल को डेली यूज करने से आपके बालों के ओवर आल हेल्थ ठीक रहती है।
यदि आपके सिर में आइल प्रोडक्शन ज्यादा मात्रा में होता है, तो लैवेंडर आयल इसके प्रोडक्शन को कम करने में मदद कर सकता है। आयल प्रोडक्शन को संतुलित करके, यह बालों को ज्यादा ऑयली होने से रोक सकता है और एक क्लियर, फ्रेश लुक बनाए रख सकता है।
लैवेंडर आयल मुख्य रूप से अपने रिलैक्सिंग और स्ट्रेस को रिमूव करने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। इसे अपने बालों में लगाने से एक अच्छी स्मेल आती है जो आपके माइंड को शांत करने, स्ट्रेस को कम करने और अच्छी नींद को बढ़ाने में मदद कर सकता है। लैवेंडर आयल की अच्छी स्मेल आपके माइंड पर पॉजिटिव इफ़ेक्ट डालती है।
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पटना। पूरा बिहार 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। शनिवार को सुबह से ही स्कूली बच्चों से लेकर सरकारी व गैरसरकारी संस्थानों में हर्षोल्लास का वातावरण है। स्कूल जाते बच्चों के हाथों में तिरंगा देखते ही बनता है। भारत माता की जय से शहर गूंज रहा है। पटना के गांधी मैदान में राज्यपाल लालजी टंडन ने झंडोत्तोलन किया। मौके पर 16 विभागों की झांकी भी निकल रही है। वहीं सीएम नीतीश कुमार ने पटना में एक अणे मार्ग स्थित आवास पर झंडोत्तोलन किया।
उधर बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन, सीएम नीतीश कुमार ने सूबे के लोगों को गणतंत्र दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल ने कहा कि हमारा देश एक गौरवशाली संप्रभुता संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में सतत विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और अमर शहीदों को भी स्मरण किया। वहीं सीएम नीतीश कुमार ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूतों को नमन किया और कहा कि उनकी कुर्बानियों को भुलाया नहीं जा सकता। मिलजुल कर आपसी भाईचारा, सद्भाव एवं शांति राज्य में बनाए रखना है। जबकि, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी हैं।
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पटना। पूरा बिहार सत्तरवां गणतंत्र दिवस मना रहा है। शनिवार को सुबह से ही स्कूली बच्चों से लेकर सरकारी व गैरसरकारी संस्थानों में हर्षोल्लास का वातावरण है। स्कूल जाते बच्चों के हाथों में तिरंगा देखते ही बनता है। भारत माता की जय से शहर गूंज रहा है। पटना के गांधी मैदान में राज्यपाल लालजी टंडन ने झंडोत्तोलन किया। मौके पर सोलह विभागों की झांकी भी निकल रही है। वहीं सीएम नीतीश कुमार ने पटना में एक अणे मार्ग स्थित आवास पर झंडोत्तोलन किया। उधर बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन, सीएम नीतीश कुमार ने सूबे के लोगों को गणतंत्र दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल ने कहा कि हमारा देश एक गौरवशाली संप्रभुता संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में सतत विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और अमर शहीदों को भी स्मरण किया। वहीं सीएम नीतीश कुमार ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूतों को नमन किया और कहा कि उनकी कुर्बानियों को भुलाया नहीं जा सकता। मिलजुल कर आपसी भाईचारा, सद्भाव एवं शांति राज्य में बनाए रखना है। जबकि, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी हैं।
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अशोक विश्वकर्मा, कौशांबीः माफिया भाई अतीक अहमद और अशरफ हत्याकांड के बाद 50 हजार की इनामी शाइस्ता परवीन की तलाश में कौशांबी पुलिस सक्रिय हो गई है। मूरतगंज ब्लॉक के पल्हाना गंगा कछार में बुधवार को अपर पुलिस अधीक्षक समर बहादुर की अगुवाई में कई थानों की फोर्स ने छापेमारी अभियान चलाया। पल्हाना गांव में अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता के छुपे होने की मिली खबर पर पुलिस ने लगातार कई घंटो तक खोजबीन करती रही। हालांकि सफलता नहीं मिल सकी। शाइस्ता का पता लगाने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया। प्रयागराज के माफिया अतीक अहमद के बेटे असद को झांसी एनकाउंटर में मार गिराया गया। कसारी मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक करने के दौरान शाइस्ता की मौजूदगी की चर्चाएं जोरशोर से उठी। तभी से कौशांबी और प्रयागराज पुलिस शाइस्ता की गिरफ्तारी को लेकर सक्रिय हो गई थी। इसके बाद पुलिस अभिरक्षा में मेडिकल के लिए काल्विन अस्पताल लाए गए माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और असरफ हत्या कर दी गई। दोनों को दफनाने के दौरान फिर शाइस्ता के मौजूद होने की चर्चा थी। हालांकि पुलिस को सफलता नहीं मिली। शाइस्ता का नहीं चला पताअतीक अहमद गैंग आईएस 227 की इनामी सदस्य शाइस्ता परवीन, गुड्डू मुस्लिम और साबिर अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। बुधवार को मूरतगंज के पल्हाना गांव में शाइस्ता परवीन के मौजूदगी की सूचना मिली। सक्रियता दिखाते हुए एएसपी समर बहादुर और 3 सीओ के साथ कई थानों की फोर्स पल्हाना गांव पहुंचे। शाम 5 बजे से शुरू हुई छापेमारी में पुलिस के जवानों ने घर-घर तलाशी ली। साथ ही गंगा के कछारी इलाकों और जंगलों में भी तलाश किया। ड्रोन का प्रयोग भी किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी है।
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अशोक विश्वकर्मा, कौशांबीः माफिया भाई अतीक अहमद और अशरफ हत्याकांड के बाद पचास हजार की इनामी शाइस्ता परवीन की तलाश में कौशांबी पुलिस सक्रिय हो गई है। मूरतगंज ब्लॉक के पल्हाना गंगा कछार में बुधवार को अपर पुलिस अधीक्षक समर बहादुर की अगुवाई में कई थानों की फोर्स ने छापेमारी अभियान चलाया। पल्हाना गांव में अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता के छुपे होने की मिली खबर पर पुलिस ने लगातार कई घंटो तक खोजबीन करती रही। हालांकि सफलता नहीं मिल सकी। शाइस्ता का पता लगाने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया। प्रयागराज के माफिया अतीक अहमद के बेटे असद को झांसी एनकाउंटर में मार गिराया गया। कसारी मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक करने के दौरान शाइस्ता की मौजूदगी की चर्चाएं जोरशोर से उठी। तभी से कौशांबी और प्रयागराज पुलिस शाइस्ता की गिरफ्तारी को लेकर सक्रिय हो गई थी। इसके बाद पुलिस अभिरक्षा में मेडिकल के लिए काल्विन अस्पताल लाए गए माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और असरफ हत्या कर दी गई। दोनों को दफनाने के दौरान फिर शाइस्ता के मौजूद होने की चर्चा थी। हालांकि पुलिस को सफलता नहीं मिली। शाइस्ता का नहीं चला पताअतीक अहमद गैंग आईएस दो सौ सत्ताईस की इनामी सदस्य शाइस्ता परवीन, गुड्डू मुस्लिम और साबिर अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। बुधवार को मूरतगंज के पल्हाना गांव में शाइस्ता परवीन के मौजूदगी की सूचना मिली। सक्रियता दिखाते हुए एएसपी समर बहादुर और तीन सीओ के साथ कई थानों की फोर्स पल्हाना गांव पहुंचे। शाम पाँच बजे से शुरू हुई छापेमारी में पुलिस के जवानों ने घर-घर तलाशी ली। साथ ही गंगा के कछारी इलाकों और जंगलों में भी तलाश किया। ड्रोन का प्रयोग भी किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी है।
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पद्यामि॑व॒ सूर्य॑नां॒ जन॑मागमम् । रात्री जगदिन्यसान् तेना॑ त वाग्ये वि॒षम् ॥ १ ॥
भा० - ( रात्री ) प्रलय-कालमय रात्रि जिस प्रकार ( जगत इब ) जगत् को कर लेती है परन्तु ( अन्यत् हसात् ) उससे भी परे विद्यमान हम पराम को वह व्यास नहीं करती, उसी प्रकार विप से उत्पन्न होने वाली रागि, तमोमय निद्रा या मूर्छा भी ( हंसात् अन्यत् ) कर लेती है । ( तेन ) उमी विष को ( वारये ) दूर करता आकाश को जिस प्रकार सूर्य
है और (हानाम् ) मेवा की (
जनम् ) उत्पत्ति करता है उसी
प्रकार में भी ( भीना गनिम् ) सपो की उत्पत्ति और उनके सम्वा ( भागसम् ) र अन्य प्रकार जानता है ।
वार्थषि॑भद्दे॒वत पुरा । भाग्यमासने नाम ॥ २ ॥
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पद्यामि॑व॒ सूर्य॑नां॒ जन॑मागमम् । रात्री जगदिन्यसान् तेना॑ त वाग्ये वि॒षम् ॥ एक ॥ भाशून्य - प्रलय-कालमय रात्रि जिस प्रकार जगत् को कर लेती है परन्तु उससे भी परे विद्यमान हम पराम को वह व्यास नहीं करती, उसी प्रकार विप से उत्पन्न होने वाली रागि, तमोमय निद्रा या मूर्छा भी कर लेती है । उमी विष को दूर करता आकाश को जिस प्रकार सूर्य है और मेवा की उत्पत्ति करता है उसी प्रकार में भी सपो की उत्पत्ति और उनके सम्वा र अन्य प्रकार जानता है । वार्थषि॑भद्दे॒वत पुरा । भाग्यमासने नाम ॥ दो ॥
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नई दिल्ली. निर्भया केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने सभी दोषियों को एक हफ्ते का वक्त दिया है, जिसमें वे अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकें। इसके बाद डेथ वांरट जारी करने की कार्रवाई शुरू होगी। साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि चारों दोषियों को एक साथ फांसी दी जाएगी। केंद्र सरकार ने पटियाला कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें फांसी पर रोक लगाई गई थी।
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नई दिल्ली. निर्भया केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने सभी दोषियों को एक हफ्ते का वक्त दिया है, जिसमें वे अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकें। इसके बाद डेथ वांरट जारी करने की कार्रवाई शुरू होगी। साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि चारों दोषियों को एक साथ फांसी दी जाएगी। केंद्र सरकार ने पटियाला कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें फांसी पर रोक लगाई गई थी।
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उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में कथित रूप से खनन माफिया के दबाव में उपजिलाधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल को निलंबित किये जाने को लेकर मचे बवाल के बीच उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिये एक विशेष बल बनाने की कवायद कर रही है.
प्रदेश के खनन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गायत्री प्रसाद प्रजापति ने बताया, 'सरकार प्रदेश में अवैध खनन को रोकने के लिये एक विशेष खनन बल गठित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. ' उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिये एक विशेष बल बनाने की जरूरत लम्बे वक्त से महसूस की जा रही थी, क्योंकि निचले स्तर के कर्मचारियों के लिये खनन माफिया की गतिविधियों को रोकना अक्सर मुश्किल होता है.
प्रजापति ने बताया कि बहुत बार तो ऐसा होता है कि खनन अधिकारी वाहन तथा स्टाफ जैसे संसाधनों की कमी की वजह से अवैध खनन के स्थान का पता लगाने की स्थिति में नहीं होते. राज्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने खनन अधिकारियों को अपने वाहनों पर नीली बत्ती लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव भी किया है.
खनन बल के बारे में प्रजापति ने बताया कि इसके लिये नयी भर्तियां की जाएंगी और उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा. साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें खनन माफिया से मुकाबले के लिये अत्याधुनिक हथियार भी उपलब्ध कराये जाएंगे.
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उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में कथित रूप से खनन माफिया के दबाव में उपजिलाधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल को निलंबित किये जाने को लेकर मचे बवाल के बीच उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिये एक विशेष बल बनाने की कवायद कर रही है. प्रदेश के खनन राज्यमंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने बताया, 'सरकार प्रदेश में अवैध खनन को रोकने के लिये एक विशेष खनन बल गठित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. ' उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिये एक विशेष बल बनाने की जरूरत लम्बे वक्त से महसूस की जा रही थी, क्योंकि निचले स्तर के कर्मचारियों के लिये खनन माफिया की गतिविधियों को रोकना अक्सर मुश्किल होता है. प्रजापति ने बताया कि बहुत बार तो ऐसा होता है कि खनन अधिकारी वाहन तथा स्टाफ जैसे संसाधनों की कमी की वजह से अवैध खनन के स्थान का पता लगाने की स्थिति में नहीं होते. राज्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने खनन अधिकारियों को अपने वाहनों पर नीली बत्ती लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव भी किया है. खनन बल के बारे में प्रजापति ने बताया कि इसके लिये नयी भर्तियां की जाएंगी और उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा. साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें खनन माफिया से मुकाबले के लिये अत्याधुनिक हथियार भी उपलब्ध कराये जाएंगे.
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उस दिन का आदेश तुम्हारा हाय राम, अभिशाप हुआ क्या
अपने मन को समझ तुम्हारा
ही तो मैंने दुलराया था, मेरे भाल कलंक तुम्हारे हाथ लगाया चंदन हो है । तुमको छोड़ कहीं जाने को आज हृदय स्वच्छंद नहीं है।
मेरी दुर्बलता के पल को याद तुम्हीं करुणाकर आते, अपनी करुणा के क्षरण में तुम मेरी दुर्बलता विसराते,
-अभिनव सोपान
बुद्धि विचारी गुमसुम, हारी, साफ़ बोलता, पर, चित मेरामेरे पाप तुम्हारी करुणा में कोई संबंध कहीं है । तुमको छोड़ कहीं जाने को आज हृदय स्वच्छंद नहीं है ।
पृथ्वी रक्तस्नान करेगी !
[ १ ] ईसा बड़े हृदय वाले थे,
कतु बड़े भोले - भाले थे, चार बूंद इनके लोहू की इसका ताप हरेगी ? पृथ्वी रक्तस्नान करेगी !
[ २ ] आग लगी धरती के तन में, मनुज नहीं बदला पाहन में, अभी श्यामला, सुजला, सुफला ऐसे नहीं मरेगी । पृथ्वी रक्तस्नान करेगी !
[ ३ ] संवेदना अश्रु ही केवल, जान पड़ेगा वर्षा का जल, जब मानवता निज लोहू का सागर दान करेगी। पृथ्वी रक्तस्नान करेगी !
व्याकुलता का केंद्र जग की व्याकुलता का केंद्र - [ १ ] जहाँ छिड़ा लोहित संग्राम, जहाँ मचा रौरव कुहराम,
पटा हताहत से जो ठाम ! वहाँ नहीं है, वहाँ नहीं है, वहां नहीं है, वहीं नहीं । जग की व्याकुलता का केंद्र ।
[ २ ] जहाँ वली का अत्याचार, जहाँ निवल की चीख-पुकार, रक्त, स्वेद, आँसू की धार ! वहाँ नहीं है, वहीं नहीं है, वहाँ नहीं है, वहां नहीं . जग की व्याकुलता का केंद्र !
[ ३ ] जहाँ घृणा करती है वास, जहाँ शक्ति की अनवुझ प्यास, जहाँ न मानव पर विश्वास, उसी हृदय में, उसी हृदय में, उसी हृदय में, वहीं, वहीं जग की व्याकुलता का केंद्र !
मनुष्य की मूर्ति
देवलोक से मिट्टी लाकर मैं मनुष्य की मूर्ति बनाता !
[ १ ] रचता मुख जिससे निकली हो वेद-उपनिषद की वर वाणी,
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उस दिन का आदेश तुम्हारा हाय राम, अभिशाप हुआ क्या अपने मन को समझ तुम्हारा ही तो मैंने दुलराया था, मेरे भाल कलंक तुम्हारे हाथ लगाया चंदन हो है । तुमको छोड़ कहीं जाने को आज हृदय स्वच्छंद नहीं है। मेरी दुर्बलता के पल को याद तुम्हीं करुणाकर आते, अपनी करुणा के क्षरण में तुम मेरी दुर्बलता विसराते, -अभिनव सोपान बुद्धि विचारी गुमसुम, हारी, साफ़ बोलता, पर, चित मेरामेरे पाप तुम्हारी करुणा में कोई संबंध कहीं है । तुमको छोड़ कहीं जाने को आज हृदय स्वच्छंद नहीं है । पृथ्वी रक्तस्नान करेगी ! [ एक ] ईसा बड़े हृदय वाले थे, कतु बड़े भोले - भाले थे, चार बूंद इनके लोहू की इसका ताप हरेगी ? पृथ्वी रक्तस्नान करेगी ! [ दो ] आग लगी धरती के तन में, मनुज नहीं बदला पाहन में, अभी श्यामला, सुजला, सुफला ऐसे नहीं मरेगी । पृथ्वी रक्तस्नान करेगी ! [ तीन ] संवेदना अश्रु ही केवल, जान पड़ेगा वर्षा का जल, जब मानवता निज लोहू का सागर दान करेगी। पृथ्वी रक्तस्नान करेगी ! व्याकुलता का केंद्र जग की व्याकुलता का केंद्र - [ एक ] जहाँ छिड़ा लोहित संग्राम, जहाँ मचा रौरव कुहराम, पटा हताहत से जो ठाम ! वहाँ नहीं है, वहाँ नहीं है, वहां नहीं है, वहीं नहीं । जग की व्याकुलता का केंद्र । [ दो ] जहाँ वली का अत्याचार, जहाँ निवल की चीख-पुकार, रक्त, स्वेद, आँसू की धार ! वहाँ नहीं है, वहीं नहीं है, वहाँ नहीं है, वहां नहीं . जग की व्याकुलता का केंद्र ! [ तीन ] जहाँ घृणा करती है वास, जहाँ शक्ति की अनवुझ प्यास, जहाँ न मानव पर विश्वास, उसी हृदय में, उसी हृदय में, उसी हृदय में, वहीं, वहीं जग की व्याकुलता का केंद्र ! मनुष्य की मूर्ति देवलोक से मिट्टी लाकर मैं मनुष्य की मूर्ति बनाता ! [ एक ] रचता मुख जिससे निकली हो वेद-उपनिषद की वर वाणी,
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Kalyan Singh Biography: कल्याण सिंह का जन्म 5 जनवरी 1932 को हुआ था उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh) में जन्म हुआ था उनके पिता का नाम श्री तेजपाल लोधी राजपूत (Tejpal Lodhi Rajput) और मां का नाम सीता देवी (Sita Devi) था कल्याण सिंह 2 बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें और 1967 में कल्याण सिंह (Kalyan Singh) ने पहला चुनाव जीता सिर्फ 35 की उम्र में MLA बने कल्याण सिंह और कई बार अतरौली के विधानसभा चुनाव के सदस्य के रुप में अपना योगदान दे चुके है 1980 तक लगातार चुनाव जीतते रहे कल्याण सिंह उन्होने अपने जीवन में कई सफलताएं हासिल की।
बाबरी मस्जिद पर कल्याण सिंह का विवादित बयान (Kalyan Singh Babri Marjid)
जानकारी के अनुसार, बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद उनका एक विवादित बयान सामने आया जिसमें वो एक सभा को संबोधित करते हुए कहे थे कि इस मामले में किसी की कोई गलती नहीं है। अधिकारियों ने मेरे आदेश का पालन किया था। सभा में खुलकर कहा था कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने की जो सजा देनी है मुझे दे दो। जांच बैठाना है मेरे ऊपर बैठाओ लेकिन इस मामले में अधिकारियों का कोई दोष नहीं। यहां तक कि उन्होंने कहा था कि उन्हें मस्जिद गिराए जाने का कोई अफसोस नहीं है।
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Kalyan Singh Biography: कल्याण सिंह का जन्म पाँच जनवरी एक हज़ार नौ सौ बत्तीस को हुआ था उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जन्म हुआ था उनके पिता का नाम श्री तेजपाल लोधी राजपूत और मां का नाम सीता देवी था कल्याण सिंह दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें और एक हज़ार नौ सौ सरसठ में कल्याण सिंह ने पहला चुनाव जीता सिर्फ पैंतीस की उम्र में MLA बने कल्याण सिंह और कई बार अतरौली के विधानसभा चुनाव के सदस्य के रुप में अपना योगदान दे चुके है एक हज़ार नौ सौ अस्सी तक लगातार चुनाव जीतते रहे कल्याण सिंह उन्होने अपने जीवन में कई सफलताएं हासिल की। बाबरी मस्जिद पर कल्याण सिंह का विवादित बयान जानकारी के अनुसार, बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद उनका एक विवादित बयान सामने आया जिसमें वो एक सभा को संबोधित करते हुए कहे थे कि इस मामले में किसी की कोई गलती नहीं है। अधिकारियों ने मेरे आदेश का पालन किया था। सभा में खुलकर कहा था कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने की जो सजा देनी है मुझे दे दो। जांच बैठाना है मेरे ऊपर बैठाओ लेकिन इस मामले में अधिकारियों का कोई दोष नहीं। यहां तक कि उन्होंने कहा था कि उन्हें मस्जिद गिराए जाने का कोई अफसोस नहीं है।
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विद्यमानता में ही बादशाह ने उसे दो हज़ार जात एवं डेढ़ हज़ार सवार का मनसव प्रदान कर बीकानेर का राज्याधिकार सौंप दिया था। वि० सं० १७९६ ( ई० स० १६६६ ) में फरीसिंह की मृत्यु हो जाने पर वद गद्दी पर बैठा और औरंगाबाद तथा बीजापुर का स्वामी बना रहा है। उसकी गद्दीनशीनी के समय यादशाह ने एक फ़रमान उसके पास भेजा, जिसमें भविष्य में योग्यतापूर्वक बीकानेर का राज्य कार्य चलाने के लिए उसे लिखा ।
छत्रपति शिवाजी के आतंक के कारण दक्षिण में बादशाह का
( १ ) चौरंगजेब का सन् जुलूस १० ता० १६ रबीउलुघण्वल ( हि० स० १०७८ - वि० सं० १७२४ अाश्विन यदि ४ = ई० स० १६६७ ता० २७ भगरत )
का फरमान ।
दयालदास की ख्यात में लिखा है कि मुहता दयालदास, कोठारी जीवनदास, पैद राजसी यादि के दिल्ली जाकर उद्योग करने से बादशाह ने बीकानेर का मनसब अनूपसिंह को दे दिया ( जि० २, पत्र ४७ ) । पाउलेट लिखता है कि कुछ ही दिनों पीछे बीकानेर का मनसब आादि बादशाह ने बनमालीदास के नाम कर दिया, जिसपर अनुपसिंह दिल्ली गया, जहां जाने से उसका पैतृक मनसब फिर उसे ही मिल गया ( गैजेटियर थॉवू दि बीकानेर स्टेट पृ०३८ ) । यह कथन कहां तक ठीक है, यह कहा "नहीं जा सकता, क्योंकि अन्य किसी तवरीख़ से इसकी पुष्टि नहीं होती। बनमालीदास का उल्लेख थौरंगज़ेब के एक फ़रमान में आया है, पर उससे तो यही ज्ञात होता है कि के शाही दरबार में उसका प्रवेश अनुपसिंह के ही कारण हुआ था । उक्र फ़रमान में स्पष्ट लिखा है कि उस कुरापात्र (अनूपसिंह ) की सिकारिश से ही उस ( भनमालीदास ) का प्रवेश शाही दरबार में हुआ है ( सन् जुलूस १० ता० १६ रमीउलधग्वल का 'फरमान ) ।
( २ ) ढा० जेम्स बर्जेस; दि क्रोनोलोजी ऑॉव् मॉडर्न इंडिया; पृ० ११८ ।
( ३ ) सन् जुलूस १२ ता० २२ सफर (६ि० स० १०८० ८ वि० सं० १७१६ श्रावण यदि १ = ई० स० १६६६ ता० ११ जुलाई ) का फरमान ।
४ ) इतिहास प्रसिद्ध मरहटा राज्य का संस्थापक - शाहगी का पुत्र । इसका ● जन्म वि० सं० १२८६ चैन पदि ३ ( ६० स० १६३० सा० १३ फ़रवरी ) शुक्रवार को
हुआ था ।
प्रभुत्व जमना कठिन हो रहा था। सूरत की लृट के बाद शिवाजी ने एक
बड़ी सेना एकत्र कर ली थी, जिससे बादशाह को अपनी नीति में परिवर्तन कर वि० सं० १७२७ पौष यदि ११ ( ई० स० १६७० सा० २८ नवम्बर ) को महायतसां को दक्षिण में भेजना पड़ा है। इस अवसर पर महाराजा अनुपसिंह, राजा अमरसिंह आदि कई अन्य मनसबदारों को भी खिलअत आदि देकर यादशाह ने उसके साथ भेजा। महायतखां की अध्यक्षता में मुग़लों ने नवीन उत्साह से मरद्दों पर आक्रमण किया । पहले उन्हें कुछ सफलता मिली और औंध तथा पट्टा पर अधिकार कर उन्होंने ई० स० १६७२ (वि० सं० १७२६ ) में साल्हेर को घेर लिया। इस समाचार के ज्ञात होते ही शिवाजी ने मोरोपन्त पिंगले तथा प्रतापराव गूजर को सैन्य एकत्र कर साल्हेर की रक्षार्थ जाने की आशा दो। इधर महावतखां ने भी इग्लासखां के साथ धकांश सेना को मरहरों का अवरोध करने के लिए भेजा । मरहटी सेना दो भागों में होकर आगे बढ़ रही थी; प्रतापराव गूजर पश्चिम की ओर से बढ़ रहा था तथा मोरोपन्त पिंगले साल्हेर के पूर्व से । इलासखों ने दोनों के बीच में पढ़कर उनका नाश करने की चेष्टा की, परन्तु उसका प्रयत्न निष्फल गया । प्रायः १२ घंटे की लड़ाई के याद ही इलाखां को भारी क्षति उठाकर रणक्षेत्र छोड़ना पड़ा । बची हुई थोड़ी सी फ़ौज के बल पर साल्हेर को घेरने से कुछ लाभ निकलता न देख महावतखां औरंगाबाद चला गया । साल्हेर को घेरने का नाशकारी परिणाम देखकर औरंगज़ेब विचलित हो गया, अव उसने तुरन्त
( १ ) सरकार; हिस्ट्री थॉवू औरंगज़ेब जि० ४ १० १६५ ।
( २ ) किंकेड एण्ड पार्सनीज़; ए हिस्ट्री ऑॉव् दि मराठा पीउल; जि० १, पु० २३४-५ । डा० जेम्स बजेंस; दि क्रोनोलॉजी ऑॉव् मॉडर्न इन्डिया; १० ११५ ।
( २ ) उमराए हन्द, प० ६३ । मुंशी देवीप्रसाद चौरंगज़ेबनामा; भाग २,
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विद्यमानता में ही बादशाह ने उसे दो हज़ार जात एवं डेढ़ हज़ार सवार का मनसव प्रदान कर बीकानेर का राज्याधिकार सौंप दिया था। विशून्य संशून्य एक हज़ार सात सौ छियानवे में फरीसिंह की मृत्यु हो जाने पर वद गद्दी पर बैठा और औरंगाबाद तथा बीजापुर का स्वामी बना रहा है। उसकी गद्दीनशीनी के समय यादशाह ने एक फ़रमान उसके पास भेजा, जिसमें भविष्य में योग्यतापूर्वक बीकानेर का राज्य कार्य चलाने के लिए उसे लिखा । छत्रपति शिवाजी के आतंक के कारण दक्षिण में बादशाह का चौरंगजेब का सन् जुलूस दस ताशून्य सोलह रबीउलुघण्वल का फरमान । दयालदास की ख्यात में लिखा है कि मुहता दयालदास, कोठारी जीवनदास, पैद राजसी यादि के दिल्ली जाकर उद्योग करने से बादशाह ने बीकानेर का मनसब अनूपसिंह को दे दिया । पाउलेट लिखता है कि कुछ ही दिनों पीछे बीकानेर का मनसब आादि बादशाह ने बनमालीदास के नाम कर दिया, जिसपर अनुपसिंह दिल्ली गया, जहां जाने से उसका पैतृक मनसब फिर उसे ही मिल गया । यह कथन कहां तक ठीक है, यह कहा "नहीं जा सकता, क्योंकि अन्य किसी तवरीख़ से इसकी पुष्टि नहीं होती। बनमालीदास का उल्लेख थौरंगज़ेब के एक फ़रमान में आया है, पर उससे तो यही ज्ञात होता है कि के शाही दरबार में उसका प्रवेश अनुपसिंह के ही कारण हुआ था । उक्र फ़रमान में स्पष्ट लिखा है कि उस कुरापात्र की सिकारिश से ही उस का प्रवेश शाही दरबार में हुआ है । ढाशून्य जेम्स बर्जेस; दि क्रोनोलोजी ऑॉव् मॉडर्न इंडिया; पृशून्य एक सौ अट्ठारह । सन् जुलूस बारह ताशून्य बाईस सफर का फरमान । चार ) इतिहास प्रसिद्ध मरहटा राज्य का संस्थापक - शाहगी का पुत्र । इसका ● जन्म विशून्य संशून्य एक हज़ार दो सौ छियासी चैन पदि तीन शुक्रवार को हुआ था । प्रभुत्व जमना कठिन हो रहा था। सूरत की लृट के बाद शिवाजी ने एक बड़ी सेना एकत्र कर ली थी, जिससे बादशाह को अपनी नीति में परिवर्तन कर विशून्य संशून्य एक हज़ार सात सौ सत्ताईस पौष यदि ग्यारह को महायतसां को दक्षिण में भेजना पड़ा है। इस अवसर पर महाराजा अनुपसिंह, राजा अमरसिंह आदि कई अन्य मनसबदारों को भी खिलअत आदि देकर यादशाह ने उसके साथ भेजा। महायतखां की अध्यक्षता में मुग़लों ने नवीन उत्साह से मरद्दों पर आक्रमण किया । पहले उन्हें कुछ सफलता मिली और औंध तथा पट्टा पर अधिकार कर उन्होंने ईशून्य सशून्य एक हज़ार छः सौ बहत्तर में साल्हेर को घेर लिया। इस समाचार के ज्ञात होते ही शिवाजी ने मोरोपन्त पिंगले तथा प्रतापराव गूजर को सैन्य एकत्र कर साल्हेर की रक्षार्थ जाने की आशा दो। इधर महावतखां ने भी इग्लासखां के साथ धकांश सेना को मरहरों का अवरोध करने के लिए भेजा । मरहटी सेना दो भागों में होकर आगे बढ़ रही थी; प्रतापराव गूजर पश्चिम की ओर से बढ़ रहा था तथा मोरोपन्त पिंगले साल्हेर के पूर्व से । इलासखों ने दोनों के बीच में पढ़कर उनका नाश करने की चेष्टा की, परन्तु उसका प्रयत्न निष्फल गया । प्रायः बारह घंटाटे की लड़ाई के याद ही इलाखां को भारी क्षति उठाकर रणक्षेत्र छोड़ना पड़ा । बची हुई थोड़ी सी फ़ौज के बल पर साल्हेर को घेरने से कुछ लाभ निकलता न देख महावतखां औरंगाबाद चला गया । साल्हेर को घेरने का नाशकारी परिणाम देखकर औरंगज़ेब विचलित हो गया, अव उसने तुरन्त सरकार; हिस्ट्री थॉवू औरंगज़ेब जिशून्य चार दस एक सौ पैंसठ । किंकेड एण्ड पार्सनीज़; ए हिस्ट्री ऑॉव् दि मराठा पीउल; जिशून्य एक, पुशून्य दो सौ चौंतीस-पाँच । डाशून्य जेम्स बजेंस; दि क्रोनोलॉजी ऑॉव् मॉडर्न इन्डिया; दस एक सौ पंद्रह । उमराए हन्द, पशून्य तिरेसठ । मुंशी देवीप्रसाद चौरंगज़ेबनामा; भाग दो,
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वर्ष 1 9 83 तक, कारखानों अधिनियम, 1 9 48 और द बॉयलर एक्ट, 1 9 23 के कार्यान्वयन और प्रवर्तन को आयुक्त, श्रम और रोजगार, गोवा सरकार, दमन और दीव के अधिकार के तहत कारखाने निरीक्षक कार्यकलाप द्वारा किया गया था।
भारत सरकार के निर्देशों के प्रकाश में और श्रम मंत्रियों के सम्मेलन के 24 वें सत्र की सिफारिशों में, गोवा सरकार, दमन और दीव ने आयुक्त, श्रम और रोजगार कार्यालय से कारखाने और बॉयलर निरीक्षक को विभाजित करने का फैसला किया और सरकार के एक नए कार्यालय को "कारखानों और बॉयलर के निरीक्षक" के रूप में नामित करने के लिए।
तब से, इसे कारखानों अधिनियम, 1 9 48, बॉयलर अधिनियम, 1 9 23 और औद्योगिक सुरक्षा प्रशिक्षण केंद्र और औद्योगिक स्वच्छता प्रयोगशाला के तहत नियमों के कार्यान्वयन के साथ सौंपा गया है। इसके बाद पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1 9 86 के अधिनियमन के साथ, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1 9 86 के तहत कुछ प्रावधानों को लागू करने की शक्तियां मुख्य निरीक्षक के पास निहित थीं।
विभाग का नेतृत्व कारखानों के मुख्य निरीक्षक और बॉयलर, जो सरकार के पूर्व अधिकारी संयुक्त सचिव के रूप में भी कार्य करता है।
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वर्ष एक नौ तिरासी तक, कारखानों अधिनियम, एक नौ अड़तालीस और द बॉयलर एक्ट, एक नौ तेईस के कार्यान्वयन और प्रवर्तन को आयुक्त, श्रम और रोजगार, गोवा सरकार, दमन और दीव के अधिकार के तहत कारखाने निरीक्षक कार्यकलाप द्वारा किया गया था। भारत सरकार के निर्देशों के प्रकाश में और श्रम मंत्रियों के सम्मेलन के चौबीस वें सत्र की सिफारिशों में, गोवा सरकार, दमन और दीव ने आयुक्त, श्रम और रोजगार कार्यालय से कारखाने और बॉयलर निरीक्षक को विभाजित करने का फैसला किया और सरकार के एक नए कार्यालय को "कारखानों और बॉयलर के निरीक्षक" के रूप में नामित करने के लिए। तब से, इसे कारखानों अधिनियम, एक नौ अड़तालीस, बॉयलर अधिनियम, एक नौ तेईस और औद्योगिक सुरक्षा प्रशिक्षण केंद्र और औद्योगिक स्वच्छता प्रयोगशाला के तहत नियमों के कार्यान्वयन के साथ सौंपा गया है। इसके बाद पर्यावरण अधिनियम, एक नौ छियासी के अधिनियमन के साथ, पर्यावरण अधिनियम, एक नौ छियासी के तहत कुछ प्रावधानों को लागू करने की शक्तियां मुख्य निरीक्षक के पास निहित थीं। विभाग का नेतृत्व कारखानों के मुख्य निरीक्षक और बॉयलर, जो सरकार के पूर्व अधिकारी संयुक्त सचिव के रूप में भी कार्य करता है।
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PNB MetLife: पीएनबी मेटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस (PNB MetLife India Insurance ) कंपनी ने 2020-21 में पॉलिसीधारकों के लिए 532 करोड़ रुपये के बोनस की घोषणा की है. ये बोनस पिछले साल की तुलना में 7% ज्यादा है.
पॉलिसीधारक का बोनस, दरअसल कंपनी के फंडों द्वारा कमाए गए मुनाफे का हिस्सा होता है, जो ग्राहकों को बहुत से अलग अलग मौकों पर दिया जाता है.
बीमा कंपनी ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि पीएनबी मेटलाइफ(PNB MetLife) की बेहतरीन फंड प्रबंधन क्षमताओं(fund management capabilities) और जोखिम उठाने की काबिलियत की वजह से आज कंपनी अपने पॉलिसीधारकों को हाई बोनस रिवॉर्ड देने में सक्षम है.
पीएनबी मेटलाइफ(PNB MetLife) के एमडी और सीईओ आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आज के माहौल को देखते हुए कंपनी ने पिछले कुछ सालों में पार्टिसिपेटिंग फंड्स लेकर लगातार विकास किया है.
उन्होंने कहा, "इस 532 करोड़ रुपये के बोनस की घोषणा हमारी उस प्रतिबद्धता को मजबूती देती है, जहां हम हमारे ग्राहकों को जिंदगी के हर चरण पर उनके वित्तीय लक्ष्य पूरे करने में उनकी मदद करेंगे".
पीएनबी मेटलाइफ (PNB MetLife) के शेयरधारकों में मेटलाइफ इंटरनेशनल होल्डिंग्स एलएलसी (MetLife International Holdings LLC. (MIHL), पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank), जम्मू एंड कश्मीर बैंक (Jammu & Kashmir Bank), एम पल्लोनजी एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (M Pallonji and Company Pvt Ltd) और दूसरे निजी निवेशक शामिल हैं. इसमें एमआईएचएल (MIHL) और पीएनबी (PNB) मेजोरिटी शेयरहोल्डर हैं.
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PNB MetLife: पीएनबी मेटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने दो हज़ार बीस-इक्कीस में पॉलिसीधारकों के लिए पाँच सौ बत्तीस करोड़ रुपये के बोनस की घोषणा की है. ये बोनस पिछले साल की तुलना में सात% ज्यादा है. पॉलिसीधारक का बोनस, दरअसल कंपनी के फंडों द्वारा कमाए गए मुनाफे का हिस्सा होता है, जो ग्राहकों को बहुत से अलग अलग मौकों पर दिया जाता है. बीमा कंपनी ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि पीएनबी मेटलाइफ की बेहतरीन फंड प्रबंधन क्षमताओं और जोखिम उठाने की काबिलियत की वजह से आज कंपनी अपने पॉलिसीधारकों को हाई बोनस रिवॉर्ड देने में सक्षम है. पीएनबी मेटलाइफ के एमडी और सीईओ आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आज के माहौल को देखते हुए कंपनी ने पिछले कुछ सालों में पार्टिसिपेटिंग फंड्स लेकर लगातार विकास किया है. उन्होंने कहा, "इस पाँच सौ बत्तीस करोड़ रुपये के बोनस की घोषणा हमारी उस प्रतिबद्धता को मजबूती देती है, जहां हम हमारे ग्राहकों को जिंदगी के हर चरण पर उनके वित्तीय लक्ष्य पूरे करने में उनकी मदद करेंगे". पीएनबी मेटलाइफ के शेयरधारकों में मेटलाइफ इंटरनेशनल होल्डिंग्स एलएलसी , पंजाब नेशनल बैंक , जम्मू एंड कश्मीर बैंक , एम पल्लोनजी एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और दूसरे निजी निवेशक शामिल हैं. इसमें एमआईएचएल और पीएनबी मेजोरिटी शेयरहोल्डर हैं.
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Shruti Haasan Breakup: अभिनेत्री श्रुति हसन इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। श्रुति को लेकर ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि उनका इटैलियन बॉयफ्रेंड माइकल कार्लोस संग रिश्ता टूट गया है। माइकल ने खुद इमोशनल पोस्ट लिख श्रुति के साथ ब्रेकअप होने की बात को स्वीकार किया है। जबकि माइकल और श्रुति को लेकर बीते दिनों खबरें आई थीं कि दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं।
माइकल कार्लोस ने एक ट्वीट में लिखा- 'भगवान को शायद स्वीकार नहीं है इसलिए हमें अलग होना पड़ रहा है। लेकिन यह यंग लेडी हमेशा मेरी अच्छी दोस्ती रहेगी। ' माइकल की इस पोस्ट से फैन्स अंदाजा लगा रहे हैं कि दोनों ने ब्रेकअप के बाद भी अच्छे दोस्त रहने का फैसला लिया है। हालांकि शादी की खबरों के बाद अचानक ब्रेकअप से फैन्स हैरान हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया है। हालांकि अभी तक दोनों के ब्रेकअप की वजह सामने नहीं आई है।
माइकल के पोस्ट पर श्रुति हासन की बेस्ट फ्रेंड सत्यालक्ष्मी ने भी कमेंट किया है। सत्यालक्ष्मी ने लिखा- 'तुम हमेशा मेरे अच्छे भाई रहोगे। ढेर सारा प्यार और भगवान तुम्हें हमेशा खुश रखें। मां की ओर से भी ढेर सारा प्यार। ' बता दें कि माइकल और श्रुति बीते 2 साल से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। कई मौकों पर दोनों को एक-दूसरे के साथ भी स्पॉट किया जाता रहा है। कहा जाता है कि श्रुति और माइकल की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए लंदन में हुई थी। करियर की बात करें तो माइकल एक ब्रिटिश थियेटर आर्टिस्ट हैं। वह लंदन बेस्ड थियेटर ग्रुप 'डीप डाइविंग मैन' से जुड़े हुए हैं।
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Shruti Haasan Breakup: अभिनेत्री श्रुति हसन इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। श्रुति को लेकर ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि उनका इटैलियन बॉयफ्रेंड माइकल कार्लोस संग रिश्ता टूट गया है। माइकल ने खुद इमोशनल पोस्ट लिख श्रुति के साथ ब्रेकअप होने की बात को स्वीकार किया है। जबकि माइकल और श्रुति को लेकर बीते दिनों खबरें आई थीं कि दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। माइकल कार्लोस ने एक ट्वीट में लिखा- 'भगवान को शायद स्वीकार नहीं है इसलिए हमें अलग होना पड़ रहा है। लेकिन यह यंग लेडी हमेशा मेरी अच्छी दोस्ती रहेगी। ' माइकल की इस पोस्ट से फैन्स अंदाजा लगा रहे हैं कि दोनों ने ब्रेकअप के बाद भी अच्छे दोस्त रहने का फैसला लिया है। हालांकि शादी की खबरों के बाद अचानक ब्रेकअप से फैन्स हैरान हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया है। हालांकि अभी तक दोनों के ब्रेकअप की वजह सामने नहीं आई है। माइकल के पोस्ट पर श्रुति हासन की बेस्ट फ्रेंड सत्यालक्ष्मी ने भी कमेंट किया है। सत्यालक्ष्मी ने लिखा- 'तुम हमेशा मेरे अच्छे भाई रहोगे। ढेर सारा प्यार और भगवान तुम्हें हमेशा खुश रखें। मां की ओर से भी ढेर सारा प्यार। ' बता दें कि माइकल और श्रुति बीते दो साल से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। कई मौकों पर दोनों को एक-दूसरे के साथ भी स्पॉट किया जाता रहा है। कहा जाता है कि श्रुति और माइकल की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए लंदन में हुई थी। करियर की बात करें तो माइकल एक ब्रिटिश थियेटर आर्टिस्ट हैं। वह लंदन बेस्ड थियेटर ग्रुप 'डीप डाइविंग मैन' से जुड़े हुए हैं।
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IPL 2021 Kolkata Knight Riders Full schedule: आईपीएल के 14वें संस्करण के लिए शेड्यूल का ऐलान कर दिया गया है और दो बार की चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स 11 अप्रैल को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ इस सीजन के अपने अभियान का आगाज करेगी. कोलकाता के लिए पिछला सीजन अच्छा नहीं गया था और टीम प्लेऑफ के लिए क्वाफिलाई नहीं कर पाई थी. ऐसे में इस साल टीम की कोशिश होगी कि वो आईपीएल का खिताब तीसरी बार अपने नाम करें.
इस साल आईपीएल की कोई फ्रेंचाइजी अपने घरेलू मैदान पर कोई मुकाबला नहीं खेलेगी. ऐसे में कोलकाता अपने शुरूआत के तीन मुकाबले चेन्नई में खेलेगी. उसके बाद टीम मुंबई जाएगी, जहां वो दो मुकाबले खेलेगी. मुंबई के बाद टीम अहमदाबाज जाएगी जहां उसके चार मुकाबले होंगे और आखिरी में टीम बैंगलोर का रूख करेगी, जहां उसे 5 मुकाबले खेलने होंगे.
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IPL दो हज़ार इक्कीस Kolkata Knight Riders Full schedule: आईपीएल के चौदहवें संस्करण के लिए शेड्यूल का ऐलान कर दिया गया है और दो बार की चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स ग्यारह अप्रैल को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ इस सीजन के अपने अभियान का आगाज करेगी. कोलकाता के लिए पिछला सीजन अच्छा नहीं गया था और टीम प्लेऑफ के लिए क्वाफिलाई नहीं कर पाई थी. ऐसे में इस साल टीम की कोशिश होगी कि वो आईपीएल का खिताब तीसरी बार अपने नाम करें. इस साल आईपीएल की कोई फ्रेंचाइजी अपने घरेलू मैदान पर कोई मुकाबला नहीं खेलेगी. ऐसे में कोलकाता अपने शुरूआत के तीन मुकाबले चेन्नई में खेलेगी. उसके बाद टीम मुंबई जाएगी, जहां वो दो मुकाबले खेलेगी. मुंबई के बाद टीम अहमदाबाज जाएगी जहां उसके चार मुकाबले होंगे और आखिरी में टीम बैंगलोर का रूख करेगी, जहां उसे पाँच मुकाबले खेलने होंगे.
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नीमच। नीमच शहर में बगैर अनुमति जुलूस निकालने, एसपी ऑफिस का घेराव करने और आपत्तिजनक नारे लगाने के मामले में मुस्लिम इंतेज़ामिया कमेटी के 11 नामजद पदाधिकारियों सहित 200 अन्य पर धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है, वहीं इनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। यह पैदल मार्च खरगोन और सेंधवा में रामनवमी के दिन हुई घटना के बाद हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में निकाला गया था।
शुक्रवार को खरगोन और सेंधवा में रामनवमी पर हुई घटना और उसके बाद हुयी पुलिस कार्रवाही को लेकर जिला मुस्लिम इंतेज़ामिया कमेटी के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समाजजन सड़कों पर उतरे और अपना विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद अब पुलिस ने 11 लोगो के खिलाफ नामजद और 200 अन्य के खिलाफ धारा 188 के तहत मामला कोतवाली थाने में दर्ज कर लिया।
इस मामले में जानकारी देते हुए कोतवाली थाना प्रभारी अजय सारवान ने बताया कि जिला मुस्लिम इंतेज़ामिया कमेटी के बैनर तले शहर में रामनवमी पर हुई घटना और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समाज ने जुलूस निकाला था, जिसकी अनुमति नहीं ली गई थी। कलेक्टर के आदेशों की अवहेलना की गई।
टीआई कोतवाली ने बताया की इस प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक नारे - शिवराज मुर्दाबाद, गृहमंत्री आतंकवादी है, भी लगाए गए। जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने कमेटी अध्यक्ष गुलाम रसूल पठान, सलीम उर्फ गुडलक, यासिन खान, जावेद दुर्रानी, सहिद, वसीम, छोटी उर्फ इमरान, राजा, इकबाल कुरैशी, असलम कोरियर, आसिफ मंसूरी जाट एंव अन्य 150 लोगों के खिलाफ धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है, वहीं प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है। बाकी लोगों की पहचान की जा रही है।
सारवान ने बताया की संबंधितों को नोटिस तामील करवा दिए गए हैं। जल्दी ही सभी को बाउंड ओवर किया जाएगा।
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नीमच। नीमच शहर में बगैर अनुमति जुलूस निकालने, एसपी ऑफिस का घेराव करने और आपत्तिजनक नारे लगाने के मामले में मुस्लिम इंतेज़ामिया कमेटी के ग्यारह नामजद पदाधिकारियों सहित दो सौ अन्य पर धारा एक सौ अठासी के तहत मामला दर्ज किया गया है, वहीं इनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। यह पैदल मार्च खरगोन और सेंधवा में रामनवमी के दिन हुई घटना के बाद हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में निकाला गया था। शुक्रवार को खरगोन और सेंधवा में रामनवमी पर हुई घटना और उसके बाद हुयी पुलिस कार्रवाही को लेकर जिला मुस्लिम इंतेज़ामिया कमेटी के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समाजजन सड़कों पर उतरे और अपना विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद अब पुलिस ने ग्यारह लोगो के खिलाफ नामजद और दो सौ अन्य के खिलाफ धारा एक सौ अठासी के तहत मामला कोतवाली थाने में दर्ज कर लिया। इस मामले में जानकारी देते हुए कोतवाली थाना प्रभारी अजय सारवान ने बताया कि जिला मुस्लिम इंतेज़ामिया कमेटी के बैनर तले शहर में रामनवमी पर हुई घटना और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समाज ने जुलूस निकाला था, जिसकी अनुमति नहीं ली गई थी। कलेक्टर के आदेशों की अवहेलना की गई। टीआई कोतवाली ने बताया की इस प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक नारे - शिवराज मुर्दाबाद, गृहमंत्री आतंकवादी है, भी लगाए गए। जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने कमेटी अध्यक्ष गुलाम रसूल पठान, सलीम उर्फ गुडलक, यासिन खान, जावेद दुर्रानी, सहिद, वसीम, छोटी उर्फ इमरान, राजा, इकबाल कुरैशी, असलम कोरियर, आसिफ मंसूरी जाट एंव अन्य एक सौ पचास लोगों के खिलाफ धारा एक सौ अठासी के तहत मामला दर्ज किया गया है, वहीं प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है। बाकी लोगों की पहचान की जा रही है। सारवान ने बताया की संबंधितों को नोटिस तामील करवा दिए गए हैं। जल्दी ही सभी को बाउंड ओवर किया जाएगा।
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नई दिल्लीः कई दिनों से इस बारे में चर्चा हो रही है कि सलमान खान के साथ फिल्म 'रेस 3' में और कौन से अभिनेता नजर आएंगे। सिद्धार्थ मल्होत्रा और सैफ अली खान का नाम सामने आया था मगर सैफ ने इस खबर को अफवाह बताया तो सिद्धार्थ ने यह कहकर फिल्म साइन करने से मना कर दिया था कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट अच्छी नहीं है। इसके बाद खबर आई कि इस रेस 3 में सलमान के साथ अभिनेता इमरान हाशमी दिख सकते हैं, लेकिन अब ये कन्फर्म हो गया है कि इस फिल्म में वाकई कौन सा अभिनेता नजर आने वाले हा। जी हां, रेस 3 में सलमान और जैकलीन के साथ अभिनेता बॉबी देओल का नाम तय हुआ है। रेमो डिसूजा इस फिल्म का निर्देशन करेंगे।
रेस 3 की शूटिंग आबू धाबी और दुबई में होगी। सलमान और बॉबी साल 2008 में आई फिल्म हीरोज में साथ काम कर चुके हैं।
रेस का पहला भाग साल 2008 में रिलीज हुआ था। इस फिल्म में सैफ अली खान, बिपाशा बसु, अक्षय खन्ना, कटरीना कैफ, अनिल कपूर और समीरा रेड्डी लीड रोल में थे। इस फिल्म का सीक्वल 5 साल बाद आया जिसमें अनिल और सैफ के साथ दीपिका पादुकोण, जॉन अब्राहम, जैकलीन फर्नांडिस और अमीषा पटेल लीड रोल में थे। दोनों ही फिल्में अब्बास मस्तान ने डायरेक्ट की थीं।
- जया ने ऐसा क्या किया कि अमिताभ से हमेशा के लिए दूर हो गईं रेखा !
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नई दिल्लीः कई दिनों से इस बारे में चर्चा हो रही है कि सलमान खान के साथ फिल्म 'रेस तीन' में और कौन से अभिनेता नजर आएंगे। सिद्धार्थ मल्होत्रा और सैफ अली खान का नाम सामने आया था मगर सैफ ने इस खबर को अफवाह बताया तो सिद्धार्थ ने यह कहकर फिल्म साइन करने से मना कर दिया था कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट अच्छी नहीं है। इसके बाद खबर आई कि इस रेस तीन में सलमान के साथ अभिनेता इमरान हाशमी दिख सकते हैं, लेकिन अब ये कन्फर्म हो गया है कि इस फिल्म में वाकई कौन सा अभिनेता नजर आने वाले हा। जी हां, रेस तीन में सलमान और जैकलीन के साथ अभिनेता बॉबी देओल का नाम तय हुआ है। रेमो डिसूजा इस फिल्म का निर्देशन करेंगे। रेस तीन की शूटिंग आबू धाबी और दुबई में होगी। सलमान और बॉबी साल दो हज़ार आठ में आई फिल्म हीरोज में साथ काम कर चुके हैं। रेस का पहला भाग साल दो हज़ार आठ में रिलीज हुआ था। इस फिल्म में सैफ अली खान, बिपाशा बसु, अक्षय खन्ना, कटरीना कैफ, अनिल कपूर और समीरा रेड्डी लीड रोल में थे। इस फिल्म का सीक्वल पाँच साल बाद आया जिसमें अनिल और सैफ के साथ दीपिका पादुकोण, जॉन अब्राहम, जैकलीन फर्नांडिस और अमीषा पटेल लीड रोल में थे। दोनों ही फिल्में अब्बास मस्तान ने डायरेक्ट की थीं। - जया ने ऐसा क्या किया कि अमिताभ से हमेशा के लिए दूर हो गईं रेखा !
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बॉलीवुड में कई स्टार्स दिल के साफ हैं और समाज के लिए काफी कुछ करते रहते हैं। कुछ स्टार्स के अपने सामाजिक संस्थान है तो कुछ इंटरनेशनल संस्थानों से जुड़े हुए हैं। इनमें से अमिताभ बच्चन, प्रियंका चोपड़ा, सलमान खान और नाना पाटेकर जैसे सितारों का नाम शीर्ष स्थान पर है। आज हम आपको कुछ ऐसे सेलिब्रिटीज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने दूसरों के बच्चों को गोद ले रखा है और उनका लालन-पालन से लेकर पढ़ाई लिखाई तक सब खर्चा खुद उठाते हैं।
रवीना टंडन - जब एक्ट्रेस रवीना टंडन सिर्फ 21 साल की थी, तब उन्होंने सिंगल मदर बनने का फैसला लिया था। इसके बाद सन 1995 में उन्होंने पूजा और छाया नाम की दो लड़कियों को गोद लिया था। उस समय पूजा 8 साल की और छाया 11 साल की थी। इसके बाद सन 2004 को उन्होंने बिजनेसमैन अनिल थडानी की से शादी किया था।
मिथुन चक्रवर्ती - मिथुन चक्रवर्ती अपने जमाने में हिंदी और बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की सबसे लोकप्रिय एक्टर थे। आज वह दिशानी, महाक्षय, नमाशी और उस्मय सहित 4 बच्चों के पिता है। इनमें से दिशानी को उन्होंने बचपन में गोद लिया था। कहा जाता है कि वह सड़क के किनारे एक कचरे के ढेर में मिली थी।
सुष्मिता सेन - मिस यूनिवर्स का खिताब जीत चुकी सुष्मिता सेन ने सन 2000 को 25 वर्ष की उम्र में रिनी नाम की एक लड़की को अपनाया था। इसके ठीक 10 साल बाद दूसरी बेटी अलीशा को भी गोद लिया था। इसके अलावा सुष्मिता सेन आजकल कई सारे सामाजिक कार्यक्रमों के साथ जुड़ी हुई है। वह गरीब और बेसहारा लोगों को आर्थिक सहायता भी प्रदान करती है।
सनी लियोन - एडल्ट फिल्म इंडस्ट्री से बॉलीवुड तक धूम मचाने वाली एक्ट्रेस सनी लियोन को तो आज हर कोई पहचानता है।उन्होंने पिछले साल अपने पति डेनियल वेबर के साथ मिलकर महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव लातूर से बेटी निशा को अडॉप्ट किया था। इसके बाद कुछ महीने पहले ही सेरोगेसी के जरिए 2 बच्ची को जन्म दिया था और अब वह तीनों बच्चों के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही है।
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था।
अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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बॉलीवुड में कई स्टार्स दिल के साफ हैं और समाज के लिए काफी कुछ करते रहते हैं। कुछ स्टार्स के अपने सामाजिक संस्थान है तो कुछ इंटरनेशनल संस्थानों से जुड़े हुए हैं। इनमें से अमिताभ बच्चन, प्रियंका चोपड़ा, सलमान खान और नाना पाटेकर जैसे सितारों का नाम शीर्ष स्थान पर है। आज हम आपको कुछ ऐसे सेलिब्रिटीज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने दूसरों के बच्चों को गोद ले रखा है और उनका लालन-पालन से लेकर पढ़ाई लिखाई तक सब खर्चा खुद उठाते हैं। रवीना टंडन - जब एक्ट्रेस रवीना टंडन सिर्फ इक्कीस साल की थी, तब उन्होंने सिंगल मदर बनने का फैसला लिया था। इसके बाद सन एक हज़ार नौ सौ पचानवे में उन्होंने पूजा और छाया नाम की दो लड़कियों को गोद लिया था। उस समय पूजा आठ साल की और छाया ग्यारह साल की थी। इसके बाद सन दो हज़ार चार को उन्होंने बिजनेसमैन अनिल थडानी की से शादी किया था। मिथुन चक्रवर्ती - मिथुन चक्रवर्ती अपने जमाने में हिंदी और बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की सबसे लोकप्रिय एक्टर थे। आज वह दिशानी, महाक्षय, नमाशी और उस्मय सहित चार बच्चों के पिता है। इनमें से दिशानी को उन्होंने बचपन में गोद लिया था। कहा जाता है कि वह सड़क के किनारे एक कचरे के ढेर में मिली थी। सुष्मिता सेन - मिस यूनिवर्स का खिताब जीत चुकी सुष्मिता सेन ने सन दो हज़ार को पच्चीस वर्ष की उम्र में रिनी नाम की एक लड़की को अपनाया था। इसके ठीक दस साल बाद दूसरी बेटी अलीशा को भी गोद लिया था। इसके अलावा सुष्मिता सेन आजकल कई सारे सामाजिक कार्यक्रमों के साथ जुड़ी हुई है। वह गरीब और बेसहारा लोगों को आर्थिक सहायता भी प्रदान करती है। सनी लियोन - एडल्ट फिल्म इंडस्ट्री से बॉलीवुड तक धूम मचाने वाली एक्ट्रेस सनी लियोन को तो आज हर कोई पहचानता है।उन्होंने पिछले साल अपने पति डेनियल वेबर के साथ मिलकर महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव लातूर से बेटी निशा को अडॉप्ट किया था। इसके बाद कुछ महीने पहले ही सेरोगेसी के जरिए दो बच्ची को जन्म दिया था और अब वह तीनों बच्चों के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही है। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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लखनऊ। वैश्विक महामारी कोविड-19 के कठिन दौर में विश्व आयुर्वेद परिषद के सदस्यों ने कोविड-19 के लिए बने मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख इक्यावन हजार रुपये का चेक भेंट किया है।
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा को यह चेक सौंपा गया। इस मौके पर परिषद के अवध प्रांत के महासचिव डॉ बीरेन्द्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ सदस्य डॉ मनोज मिश्रा तथा लखनऊ महानगर अध्यक्ष डॉ राम नरेश राठौर उपस्थित रहे। परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सुरेन्द्र चौधरी ने राहत कोष में दी जाने वाली राशि में योगदान देने वाले प्रत्येक सदस्य के प्रति अपना आभार प्रकट किया।
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लखनऊ। वैश्विक महामारी कोविड-उन्नीस के कठिन दौर में विश्व आयुर्वेद परिषद के सदस्यों ने कोविड-उन्नीस के लिए बने मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख इक्यावन हजार रुपये का चेक भेंट किया है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा को यह चेक सौंपा गया। इस मौके पर परिषद के अवध प्रांत के महासचिव डॉ बीरेन्द्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ सदस्य डॉ मनोज मिश्रा तथा लखनऊ महानगर अध्यक्ष डॉ राम नरेश राठौर उपस्थित रहे। परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सुरेन्द्र चौधरी ने राहत कोष में दी जाने वाली राशि में योगदान देने वाले प्रत्येक सदस्य के प्रति अपना आभार प्रकट किया।
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लखनऊः पिछले कई दिनों से देश के अलग अलग हिस्सों में CAA को लेकर चल रहे विरोध और समर्थन में बीजेपी की क्षेत्रीय रैलियां शनिवार 18 जनवरी को वाराणसी से शुरू की जाएगी वहीं इस रैली को केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह संबोधित करेंगे. जंहा शनिवार 18 जनवरी को गोरखपुर में हो रही रैली को मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष संबोधित करेंगे. अवध क्षेत्र की रैली 21 जनवरी को रामकथा पार्क सेक्टर जे रेलनगर बंगला बाजार लखनऊ में होगी. वहीं जिसे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेता संबोधित करेंगे.
राजनाथ 22 को मेरठ मेंः सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीएए पर जनजागरण अभियान के प्रभारी गोविंद शुक्ल ने बताया कि कानपुर क्षेत्र की रैली 22 जनवरी को कामर्शियल ग्राउंड मैदान कानपुर में होगी. वहीं रैली को केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सीएम योगी आदित्यनाथ तथा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित अन्य वरिष्ठ नेता संबोधित करेंगे. जंहा पश्चिम क्षेत्र की रैली 22 जनवरी को मेरठ में माधोकुंज शताब्दीनगर मेरठ में होगी. रैली को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह तथा उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेता संबोधित करेंगे.
वहीं यह भी कहा जा रहा है कि ब्रज ब्रज क्षेत्र की रैली 23 जनवरी को कोठी मीना बाजार मैदान आगरा में होगी. जिसे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जे. पी. नड्डा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह तथा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित अन्य वरिष्ठ नेता संबोधित करेंगे.
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लखनऊः पिछले कई दिनों से देश के अलग अलग हिस्सों में CAA को लेकर चल रहे विरोध और समर्थन में बीजेपी की क्षेत्रीय रैलियां शनिवार अट्ठारह जनवरी को वाराणसी से शुरू की जाएगी वहीं इस रैली को केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह संबोधित करेंगे. जंहा शनिवार अट्ठारह जनवरी को गोरखपुर में हो रही रैली को मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष संबोधित करेंगे. अवध क्षेत्र की रैली इक्कीस जनवरी को रामकथा पार्क सेक्टर जे रेलनगर बंगला बाजार लखनऊ में होगी. वहीं जिसे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेता संबोधित करेंगे. राजनाथ बाईस को मेरठ मेंः सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीएए पर जनजागरण अभियान के प्रभारी गोविंद शुक्ल ने बताया कि कानपुर क्षेत्र की रैली बाईस जनवरी को कामर्शियल ग्राउंड मैदान कानपुर में होगी. वहीं रैली को केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सीएम योगी आदित्यनाथ तथा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित अन्य वरिष्ठ नेता संबोधित करेंगे. जंहा पश्चिम क्षेत्र की रैली बाईस जनवरी को मेरठ में माधोकुंज शताब्दीनगर मेरठ में होगी. रैली को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह तथा उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेता संबोधित करेंगे. वहीं यह भी कहा जा रहा है कि ब्रज ब्रज क्षेत्र की रैली तेईस जनवरी को कोठी मीना बाजार मैदान आगरा में होगी. जिसे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जे. पी. नड्डा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह तथा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित अन्य वरिष्ठ नेता संबोधित करेंगे.
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MP Rewa News : सिविल लाइंस पुलिस ने नशीली टेबलेट और कफ सिरप (Cough Syrup) के साथ आरोपी को पकड़ा है। आरोपी युवक को पुलिस ने पकड़ कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश के बाद आरोपी युवक को जेल भेज दिया गया है। आरोपी युवक के खिलाफ थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध है।
पुलिस ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि कबाड़ी मोहल्ला में युवक कफ सिरप और नशीली टेबलेट बेचने का कार्य कर रहा है। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने घेराबंदी कर युवक को धर दबोंचा। पुलिस ने जब आरोपी की तलाशी ली तो पुलिस को उसके पास से 14 शीशी कफ सिरप और 2104 नशीली टैबलेट मिली। जब्त कफ सिरप की कीमत 1680 व टेबलेट की कीमत 7976 बताई गई है।
नशीली सामग्री के साथ पुलिस ने सुरेन्द्र सिंह पटेल पुत्र रामबहोर पटेल निवासी गल्ला मण्डी अमहिया को पकड़ा है। पुलिस की माने तो आरोपी शातिर बदमाश है उसके खिलाफ थाने में पूर्व से कई मामले थाने में पंजीबद्ध है।
जिले में अवैध कफ सिरप के मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि पुलिस द्वारा पिछले कुछ दिनों से नशे के खिलाफ जो कार्रवाई की जा रही है उसके तहत जब्त कफ सिरप या शराब की मात्रा काफी कम होती है। अगर यह कहा जाय कि पुलिस जिले में नशे के अवैध व्यापार पर अंकुश लगा पाने में कामयाब नहीं हो पा रही है तो अतिशयोक्ति न होगा। गौरतलब है कि गत दिवस गुढ़ पुलिस ने दो दिन की कार्रवाई में 35 व 27 शीशी कफ सिरप के साथ युवक को पकड़ा था। इसी प्रकार मनगवां पुलिस ने 1 किलो गांजा के साथ अधेड़ को गिरफ्तार किया था।
नशीली टेबलेट और कफ सिरप के साथ पुलिस ने आरोपी को पकड़ा है। आरोपी युवक को पुलिस ने पकड़ कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
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MP Rewa News : सिविल लाइंस पुलिस ने नशीली टेबलेट और कफ सिरप के साथ आरोपी को पकड़ा है। आरोपी युवक को पुलिस ने पकड़ कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश के बाद आरोपी युवक को जेल भेज दिया गया है। आरोपी युवक के खिलाफ थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध है। पुलिस ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि कबाड़ी मोहल्ला में युवक कफ सिरप और नशीली टेबलेट बेचने का कार्य कर रहा है। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने घेराबंदी कर युवक को धर दबोंचा। पुलिस ने जब आरोपी की तलाशी ली तो पुलिस को उसके पास से चौदह शीशी कफ सिरप और दो हज़ार एक सौ चार नशीली टैबलेट मिली। जब्त कफ सिरप की कीमत एक हज़ार छः सौ अस्सी व टेबलेट की कीमत सात हज़ार नौ सौ छिहत्तर बताई गई है। नशीली सामग्री के साथ पुलिस ने सुरेन्द्र सिंह पटेल पुत्र रामबहोर पटेल निवासी गल्ला मण्डी अमहिया को पकड़ा है। पुलिस की माने तो आरोपी शातिर बदमाश है उसके खिलाफ थाने में पूर्व से कई मामले थाने में पंजीबद्ध है। जिले में अवैध कफ सिरप के मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि पुलिस द्वारा पिछले कुछ दिनों से नशे के खिलाफ जो कार्रवाई की जा रही है उसके तहत जब्त कफ सिरप या शराब की मात्रा काफी कम होती है। अगर यह कहा जाय कि पुलिस जिले में नशे के अवैध व्यापार पर अंकुश लगा पाने में कामयाब नहीं हो पा रही है तो अतिशयोक्ति न होगा। गौरतलब है कि गत दिवस गुढ़ पुलिस ने दो दिन की कार्रवाई में पैंतीस व सत्ताईस शीशी कफ सिरप के साथ युवक को पकड़ा था। इसी प्रकार मनगवां पुलिस ने एक किलो गांजा के साथ अधेड़ को गिरफ्तार किया था। नशीली टेबलेट और कफ सिरप के साथ पुलिस ने आरोपी को पकड़ा है। आरोपी युवक को पुलिस ने पकड़ कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
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असम से चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पत्नी के सेक्स स्कैंडल के खुलासे के दो माह बाद पति ने आत्महत्या कर ली। 16 अक्टूबर 2017 को सेक्स स्कैंडल का खुलासा हुआ था। उस वक्त महिला की तीन पुलिस कर्मियों के साथ अश्लील तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।
सेक्स स्कैंडल के खुलासे के बाद तीनों पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था। जिन पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था उनमें करीमगंज पुलिस थाने के सेकैंड ऑफिसर इंचार्ज पवन कलिता भी शामिल थे। सेक्स स्कैंडल में जो दो अन्य पुलिस कर्मी शामिल थे, उनकी पहचान एसआई निपुल अहमद व कांस्टेबल अलोम चौधरी के रूप में हुई थी। तीनों पर महिला की आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर लीक करने का आरोप था।
महिला के पति प्रोत्याय दास ने विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ की मौजूदगी में पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। प्रोत्याय दास, जो पेशे से डीजे थे, ने करीमगंज कस्बे में स्थित अपने घर में फांसी का फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। सुसाइड से पहले दास ने खुद की एक तस्वीर ली जिसमें वह पंखे से गमोचा बांधते हुए नजर आ रहे हैं।
उसने इस तस्वीर को फेसबुक पर अपलोड किया। साथ ही बंगाली में एक मैसेज भी लिखा। पोस्ट में दास ने लिखा, मैं अपनी पत्नी श्रेया को बहुत प्यार करता है। वह करीमगंज के पुलिस अधिकारियों व सिलचर के रोशन हबीब के कारण सुसाइड कर रहा है क्योंकि उनके उसकी पत्नी श्रेया से अवैध संबंध थे। मेरी पत्नी बुरी औरत है। हालांकि मैं अभी तक उसे भूल नहीं पाया है। इसलिए यह कदम उठा रहा है। अंतिम लाइन में दास ने प्रशासन से उन सभी लोगों को दंडित करने की अपील की है जिनका उसने नाम लिया है। आखिर में प्रोत्याय दास ने लिखा, सभी को अलविदा।
फेसबुक पर दास की पोस्ट देखने के बाद किसी ने पुलिस को खबर की। पुलिस तुरंत दास के घर पहुंची। पुलिस वाले दरवाजा तोड़कर दास के घर में घुसे। उन्होंने दास का शव पंखे से लटका पाया। पुलिस ने बताया कि घटना बीती रात 11. 30 से 12 बजे की है। पुलिस को दास के घर से शराब की कई खाली बोतलें मिली। दास के शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया गया है। दास और उनकी पत्नी साथ नहीं रह रहे थे। अक्टूबर में सेक्स स्कैंडल का खुलासा होने के बाद दोनों अलग अलग रह रहे थे। श्रेया ने दास के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस भी दर्ज कराया था। वह सिलचर में अपने माता पिता के साथ रह रही है। दास और श्रेया की 2016 में शादी हुई थी। 16 अक्टूबर 2017 को सेक्स स्कैंडल का खुलासा हुआ था।
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असम से चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पत्नी के सेक्स स्कैंडल के खुलासे के दो माह बाद पति ने आत्महत्या कर ली। सोलह अक्टूबर दो हज़ार सत्रह को सेक्स स्कैंडल का खुलासा हुआ था। उस वक्त महिला की तीन पुलिस कर्मियों के साथ अश्लील तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। सेक्स स्कैंडल के खुलासे के बाद तीनों पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था। जिन पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था उनमें करीमगंज पुलिस थाने के सेकैंड ऑफिसर इंचार्ज पवन कलिता भी शामिल थे। सेक्स स्कैंडल में जो दो अन्य पुलिस कर्मी शामिल थे, उनकी पहचान एसआई निपुल अहमद व कांस्टेबल अलोम चौधरी के रूप में हुई थी। तीनों पर महिला की आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर लीक करने का आरोप था। महिला के पति प्रोत्याय दास ने विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ की मौजूदगी में पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। प्रोत्याय दास, जो पेशे से डीजे थे, ने करीमगंज कस्बे में स्थित अपने घर में फांसी का फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। सुसाइड से पहले दास ने खुद की एक तस्वीर ली जिसमें वह पंखे से गमोचा बांधते हुए नजर आ रहे हैं। उसने इस तस्वीर को फेसबुक पर अपलोड किया। साथ ही बंगाली में एक मैसेज भी लिखा। पोस्ट में दास ने लिखा, मैं अपनी पत्नी श्रेया को बहुत प्यार करता है। वह करीमगंज के पुलिस अधिकारियों व सिलचर के रोशन हबीब के कारण सुसाइड कर रहा है क्योंकि उनके उसकी पत्नी श्रेया से अवैध संबंध थे। मेरी पत्नी बुरी औरत है। हालांकि मैं अभी तक उसे भूल नहीं पाया है। इसलिए यह कदम उठा रहा है। अंतिम लाइन में दास ने प्रशासन से उन सभी लोगों को दंडित करने की अपील की है जिनका उसने नाम लिया है। आखिर में प्रोत्याय दास ने लिखा, सभी को अलविदा। फेसबुक पर दास की पोस्ट देखने के बाद किसी ने पुलिस को खबर की। पुलिस तुरंत दास के घर पहुंची। पुलिस वाले दरवाजा तोड़कर दास के घर में घुसे। उन्होंने दास का शव पंखे से लटका पाया। पुलिस ने बताया कि घटना बीती रात ग्यारह. तीस से बारह बजे की है। पुलिस को दास के घर से शराब की कई खाली बोतलें मिली। दास के शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया गया है। दास और उनकी पत्नी साथ नहीं रह रहे थे। अक्टूबर में सेक्स स्कैंडल का खुलासा होने के बाद दोनों अलग अलग रह रहे थे। श्रेया ने दास के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस भी दर्ज कराया था। वह सिलचर में अपने माता पिता के साथ रह रही है। दास और श्रेया की दो हज़ार सोलह में शादी हुई थी। सोलह अक्टूबर दो हज़ार सत्रह को सेक्स स्कैंडल का खुलासा हुआ था।
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स्मोक्ड स्तन के साथ सलाद, परतें परतें यामिश्रित, आप विभिन्न व्यंजनों के अनुसार कर सकते हैं। कोई उन्हें तेज कोरियाई गाजर जोड़ता है, कोई मसालेदार या तला हुआ मशरूम का उपयोग करता है, और कोई अंडे डालता है, गोभी, मक्का और अन्य अवयवों को देखता है। लेकिन जो भी खाद्य पदार्थ आप उपयोग करते हैं, किसी भी मामले में धूम्रपान किए गए स्तन के साथ मिश्रित या स्तरित सलाद बहुत सुगंधित, संतोषजनक और स्वादिष्ट होता है। इस कथन को सत्यापित करने के लिए, हम अनुशंसा करते हैं कि आप इसे घर पर स्वयं करें।
इस पकवान को न केवल सेवा दी जा सकती हैरोजाना रात का खाना, लेकिन उत्सव की मेज पर भी। आखिरकार, सुगंधित अवयवों को मिलाकर, यह बहुत मसालेदार हो जाता है, जो इसे शराब पीने के लिए एक उत्कृष्ट नाश्ता बनाता है।
तो, स्मोक्ड स्तन और कोरियाई गाजर के साथ सलाद तैयार करने के लिए, आपको अवयवों को पहले से तैयार करना होगाः
ऐसे स्नैक्स की तैयारी के लिएसभी घटकों को संसाधित करें। तो कटा हुआ चिकन स्तन कैसे कुचल दिया जाता है? इसके साथ सलाद के व्यंजनों को त्वचा, अतिरिक्त वसा और हड्डियों से उत्पाद को साफ करने की आवश्यकता होती है, और फिर शेष लुगदी को छोटे क्यूब्स में काट लें। ठीक वैसे ही, पिगटेल के रूप में पनीर पनीर, और ताजा मांसल टमाटर को धुंधला होना चाहिए। छीलने वाले नटों के संबंध में, उन्हें पूरी तरह धोया जाना चाहिए, और फिर माइक्रोवेव ओवन या फ्राइंग पैन में सूखना चाहिए।
डिब्बाबंद सेम खोलना और सभी ब्राइन को निकालना भी जरूरी है। कोरियाई गाजर का इस्तेमाल तेल और marinade के बिना किया जाना चाहिए।
स्मोक्ड स्तन और कोरियाई गाजर के साथ सलादयह काफी सरल गठन किया था। इस उद्देश्य के लिए एक कंटेनर में (लाल सेम, स्मोक्ड पनीर, स्तन, मसालेदार गाजर, पके टमाटर और भुना हुआ अखरोट) सब से ऊपर सामग्री मिश्रण के लिए आवश्यक है, और फिर उनके स्वाद बहुत वसा मेयोनेज़ नहीं है और मिश्रण अच्छी तरह से।
स्मोक्ड चिकन स्तनों के सलाद के बादकम वसा वाले मेयोनेज़ के साथ तैयार और अनुभवी हो जाएगा, इसे एक गहरे कटोरे में रखा जाना चाहिए और मेज को एक तीव्र स्नैक के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हर दिन इस तरह के एक पकवान खाने से बहुत निराश होता है। विशेष रूप से यह उन लोगों से संबंधित है जिनके पास आंत के साथ समस्याएं हैं।
स्मोक्ड स्तन और कोरियाई गाजर के साथ सलाद न केवल उपरोक्त नुस्खा के अनुसार पकाया जा सकता है। आखिरकार, इसे पूरी तरह से अलग सामग्री जोड़ने की अनुमति है।
इसलिए, हमें इसकी आवश्यकता हैः
स्मोक्ड चिकन स्तनों का सलाद बनाने के लिएगाजर, आपको सभी अवयवों का इलाज करना चाहिए। मांस उत्पाद त्वचा और हड्डियों से मुक्त किया जाना चाहिए, और फिर शेष fillets क्यूब्स में काट लें। इसके अलावा मीठे मांसपेशियों के मिर्च को धोना और साफ करना आवश्यक है। उन्हें छोटे आकार का भी होना चाहिए। तीव्र कोरियाई गाजर के लिए, बस पूरे ब्राइन को वंचित करना आवश्यक है।
सामग्री को संसाधित करने के बाद, उन्हें अंदर रखा जाना चाहिएसामान्य व्यंजन और कम वसा वाले मेयोनेज़ के साथ स्वाद। जब आप अवयवों को मिलाते हैं, तो आपको बहुत स्वादिष्ट और मसालेदार सलाद मिलना चाहिए। इसे एक कटोरे में रखा जाना चाहिए और सुगंधित स्नैक भोजन के रूप में कार्य किया जाना चाहिए।
यदि आप तालिका में मूल और उपस्थित होना चाहते हैंएक अच्छा पकवान, तो हम एक स्तरित सलाद बनाने का सुझाव देते हैं। स्मोक्ड स्तन, अंडे और पनीर इस स्नैक के मुख्य तत्व हैं। लेकिन, उनके अलावा, इस पकवान में अन्य घटक शामिल हैं।
इसलिए, हमें इसकी आवश्यकता हैः
इस तरह के सलाद की तैयारी के लिए,त्वचा से चिकन स्तन साफ करें, और फिर शेष fillets छोटे टुकड़ों में काट लें। इसके अलावा अंडे उबालने, उन्हें ठंडा करने और गिलहरी और योल को अलग करने की आवश्यकता नहीं है। दोनों घटकों को एक छोटे से grater पर अलग से रगड़ना चाहिए।
एक ताजा ककड़ी और क्रैबल धोना भी जरूरी हैयह एक पतली भूसे पर। ऐसा करने के लिए, आप कोरियाई ग्रेटर का उपयोग कर सकते हैं। बल्ब के लिए, इसे साफ करने की जरूरत है, बहुत पतले आधे छल्ले में कटौती और सिरका में मसालेदार। आधे घंटे के बाद, सब्जी को ठंडे पानी में धोया जाना चाहिए और दृढ़ता से बाहर निकलना चाहिए।
अन्य चीजों के अलावा, आपको एक छोटे से grater और हार्ड पनीर पर grate करने की जरूरत है।
इस तरह के सलाद बनाने के लिए, आपको लेने की जरूरत हैएक बड़ी और चौड़ी प्लेट, और उसके बाद स्मोक्ड स्तनों को इसके नीचे वितरित करें। फिर उन्हें ताजा ककड़ी से ढंकना चाहिए। इसके बाद निम्नलिखित परतों का उपयोग करना आवश्यक हैः मसालेदार लाल प्याज, जर्दी और प्रोटीन। वैसे, सभी सूचीबद्ध उत्पादों को बिना असफल के जैतून मेयोनेज़ के साथ greased किया जाना चाहिए।
अंत में, स्तरित सलाद grated पनीर के साथ कवर किया जाना चाहिए और इसे रेफ्रिजरेटर में डाल दिया जाना चाहिए।
स्नैक डिश की परतों के बाद मेयोनेज़ के साथ भिगो दी जाती है, इसे ठंड से बाहर निकाला जाना चाहिए और एक टेबल पर रखा जाना चाहिए। मुख्य गर्म रात के खाने से पहले इस सलाद का उपयोग करने की सिफारिश की जाती है।
क्या आपने कभी एक स्नैक डिश बनाया हैस्मोक्ड स्तन, चैंपियनों जैसे अवयवों का उपयोग करना? इन उत्पादों के उपयोग के साथ सलाद न केवल स्वादिष्ट और सुगंधित होना चाहिए, बल्कि यह भी काफी संतोषजनक होना चाहिए। उसके लिए हमें इसकी आवश्यकता होगीः
खुद को कैसे तैयार करेंसलाद? मशरूम, स्मोक्ड स्तन और पनीर इसके मुख्य घटक हैं। सबसे पहले आपको ताजा मशरूम को संसाधित करने की आवश्यकता है। उन्हें धोया जाना चाहिए और पतली प्लेटों में कटा हुआ होना चाहिए। इसके बाद, उत्पाद को एक पैन में तेल और बारीक कटा हुआ प्याज के साथ तला हुआ जाना चाहिए। सामग्री नरम और लाल हो जाने के बाद, उन्हें प्लेट से हटाकर ठंडा करके नमक के साथ छिड़का जाना चाहिए।
मशरूम फ्राइंग के बाद, आपको प्रसंस्करण शुरू करना चाहिएस्तनों का उन्हें हड्डियों और त्वचा से साफ करने की आवश्यकता होती है, और फिर बारीक कटा हुआ होता है। डच पनीर के लिए, यह एक बड़े grater पर grated होना चाहिए। एक ताजा ककड़ी के साथ किया जाना चाहिए।
घटकों को तैयार करने के बाद, आगे बढ़ना आवश्यक हैएक स्नैक सलाद का गठन। ऐसा करने के लिए, चिकन स्तनों के लिए थोड़ा मेयोनेज़ जोड़ें और अच्छी तरह मिलाएं। इसके बाद, मांस उत्पाद को एक विस्तृत प्लेट पर फैलाया जाना चाहिए और बिना ब्राइन के कोरियाई गाजर के साथ कवर किया जाना चाहिए। इसके बाद, प्याज के साथ कसा हुआ पनीर, ताजा खीरे और तला हुआ मशरूम रखना आवश्यक है। अंत में, सलाद की सतह को पतली मेयोनेज़ जाल से सजाया जाना चाहिए।
सलाद बनाने के बाद, इसे तुरंत टेबल पर परोसा जा सकता है। प्लेटों पर एक पकवान फैलाने के बाद, इसे ध्यान से मिश्रण करने की सिफारिश की जाती है, और केवल तब उपयोग करने के लिए शुरू किया जाता है।
यदि आप अधिक मसालेदार नाश्ता बनाना चाहते हैं, तो इसमें ताजा खीरे की बजाय, आपको मसालेदार सब्जियां डालना होगा। यह पकवान को एक विशेष पिक्चेंसी देगा, जिससे इसे अधिक स्वादिष्ट और सुगंधित बना दिया जाएगा।
यदि आप एक गंभीर पकवान नहीं बनाना चाहते हैं, औरएक हल्का नाश्ता खाना पसंद करते हैं, प्रस्तुत सलाद तैयार करने की सिफारिश की जाती है। गोभी पेकिंग, स्मोक्ड स्तन इसके मुख्य घटक हैं। लेकिन, उनके अलावा, इस पकवान में अन्य उत्पादों को शामिल किया गया है।
इसलिए, हमें इसकी आवश्यकता हैः
के लिए एक हल्का नाश्ता पकवान बनाने से पहलेएक उत्सव की मेज, चिकन स्तनों से छील को हटाने और हड्डियों और अतिरिक्त वसा से उन्हें मुक्त करने के लिए आवश्यक है। इसके बाद, शेष लुगदी बारीक कटा हुआ होना चाहिए और एक गहरे सलाद कटोरे में डाल दिया जाना चाहिए।
इस तरह के एक स्नैक्स के लिए पिटाई गोभी बेहतर हैशुष्क पत्तियों के बिना जितना संभव हो ताजा खरीद लें। इसे पूरी तरह से धोया जाना चाहिए, और फिर पतली स्ट्रॉ में कटौती और चिकन में जोड़ा जाना चाहिए। ताजा ककड़ी के लिए, इसे छीलना चाहिए (यदि यह कड़वा या सब्जी की दुकान है), और फिर 4 टुकड़ों में काटा और पतली स्लाइस में काट लें।
इसके अलावा हरी मटर से सभी ब्राइन को निकालने और ताजा हिरणों को कुल्ला करने की आवश्यकता होती है। अंतिम घटक बारीक कटा हुआ होना चाहिए।
पेकिंग गोभी के बाद और धूम्रपान कियास्तन एक गहरे सलाद कटोरे में होगा, उन्हें खीरे, हरी मटर और ताजा जड़ी बूटी के स्लाइस जोड़ने की जरूरत है। भविष्य में, सभी अवयवों को कम वसा वाले मेयोनेज़ के साथ स्वादित किया जाना चाहिए और बड़े चम्मच के साथ पूरी तरह मिलाया जाना चाहिए। अगर वांछित है, तो आप तैयार पकवान (स्वाद के लिए) थोड़ा सा नमक जोड़ सकते हैं।
अन्य सलादों के विपरीत, इस तरह का सामना करने के लिएरेफ्रिजरेटर में एक स्नैक पकवान आवश्यक नहीं है। इसे गठन के तुरंत बाद तालिका में परोसा जा सकता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ऐसा नाश्ता बहुत स्वादिष्ट और आसान है। यह न केवल सर्दियों के लिए तैयार किया जा सकता है, बल्कि गर्मी की छुट्टियों के लिए भी तैयार किया जा सकता है।
जैसा कि आप देख सकते हैं, स्मोक्ड चिकन स्तन के साथ एक सलादपूरी तरह से अलग हो सकता है। एक ही समय में मुख्य बात घटकों को सही तरीके से संसाधित करना और उन्हें सही ढंग से चुनना है। उदाहरण के लिए, चिकन मांस पूरी तरह से मशरूम, सब्जियां और हिरन के साथ संयुक्त है। इसके अलावा इसे अक्सर उबले अंडे, हार्ड पनीर और ऐसे डिब्बाबंद उत्पादों के साथ मटर, सेम, मक्का के रूप में मिश्रित किया जाता है।
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स्मोक्ड स्तन के साथ सलाद, परतें परतें यामिश्रित, आप विभिन्न व्यंजनों के अनुसार कर सकते हैं। कोई उन्हें तेज कोरियाई गाजर जोड़ता है, कोई मसालेदार या तला हुआ मशरूम का उपयोग करता है, और कोई अंडे डालता है, गोभी, मक्का और अन्य अवयवों को देखता है। लेकिन जो भी खाद्य पदार्थ आप उपयोग करते हैं, किसी भी मामले में धूम्रपान किए गए स्तन के साथ मिश्रित या स्तरित सलाद बहुत सुगंधित, संतोषजनक और स्वादिष्ट होता है। इस कथन को सत्यापित करने के लिए, हम अनुशंसा करते हैं कि आप इसे घर पर स्वयं करें। इस पकवान को न केवल सेवा दी जा सकती हैरोजाना रात का खाना, लेकिन उत्सव की मेज पर भी। आखिरकार, सुगंधित अवयवों को मिलाकर, यह बहुत मसालेदार हो जाता है, जो इसे शराब पीने के लिए एक उत्कृष्ट नाश्ता बनाता है। तो, स्मोक्ड स्तन और कोरियाई गाजर के साथ सलाद तैयार करने के लिए, आपको अवयवों को पहले से तैयार करना होगाः ऐसे स्नैक्स की तैयारी के लिएसभी घटकों को संसाधित करें। तो कटा हुआ चिकन स्तन कैसे कुचल दिया जाता है? इसके साथ सलाद के व्यंजनों को त्वचा, अतिरिक्त वसा और हड्डियों से उत्पाद को साफ करने की आवश्यकता होती है, और फिर शेष लुगदी को छोटे क्यूब्स में काट लें। ठीक वैसे ही, पिगटेल के रूप में पनीर पनीर, और ताजा मांसल टमाटर को धुंधला होना चाहिए। छीलने वाले नटों के संबंध में, उन्हें पूरी तरह धोया जाना चाहिए, और फिर माइक्रोवेव ओवन या फ्राइंग पैन में सूखना चाहिए। डिब्बाबंद सेम खोलना और सभी ब्राइन को निकालना भी जरूरी है। कोरियाई गाजर का इस्तेमाल तेल और marinade के बिना किया जाना चाहिए। स्मोक्ड स्तन और कोरियाई गाजर के साथ सलादयह काफी सरल गठन किया था। इस उद्देश्य के लिए एक कंटेनर में सब से ऊपर सामग्री मिश्रण के लिए आवश्यक है, और फिर उनके स्वाद बहुत वसा मेयोनेज़ नहीं है और मिश्रण अच्छी तरह से। स्मोक्ड चिकन स्तनों के सलाद के बादकम वसा वाले मेयोनेज़ के साथ तैयार और अनुभवी हो जाएगा, इसे एक गहरे कटोरे में रखा जाना चाहिए और मेज को एक तीव्र स्नैक के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हर दिन इस तरह के एक पकवान खाने से बहुत निराश होता है। विशेष रूप से यह उन लोगों से संबंधित है जिनके पास आंत के साथ समस्याएं हैं। स्मोक्ड स्तन और कोरियाई गाजर के साथ सलाद न केवल उपरोक्त नुस्खा के अनुसार पकाया जा सकता है। आखिरकार, इसे पूरी तरह से अलग सामग्री जोड़ने की अनुमति है। इसलिए, हमें इसकी आवश्यकता हैः स्मोक्ड चिकन स्तनों का सलाद बनाने के लिएगाजर, आपको सभी अवयवों का इलाज करना चाहिए। मांस उत्पाद त्वचा और हड्डियों से मुक्त किया जाना चाहिए, और फिर शेष fillets क्यूब्स में काट लें। इसके अलावा मीठे मांसपेशियों के मिर्च को धोना और साफ करना आवश्यक है। उन्हें छोटे आकार का भी होना चाहिए। तीव्र कोरियाई गाजर के लिए, बस पूरे ब्राइन को वंचित करना आवश्यक है। सामग्री को संसाधित करने के बाद, उन्हें अंदर रखा जाना चाहिएसामान्य व्यंजन और कम वसा वाले मेयोनेज़ के साथ स्वाद। जब आप अवयवों को मिलाते हैं, तो आपको बहुत स्वादिष्ट और मसालेदार सलाद मिलना चाहिए। इसे एक कटोरे में रखा जाना चाहिए और सुगंधित स्नैक भोजन के रूप में कार्य किया जाना चाहिए। यदि आप तालिका में मूल और उपस्थित होना चाहते हैंएक अच्छा पकवान, तो हम एक स्तरित सलाद बनाने का सुझाव देते हैं। स्मोक्ड स्तन, अंडे और पनीर इस स्नैक के मुख्य तत्व हैं। लेकिन, उनके अलावा, इस पकवान में अन्य घटक शामिल हैं। इसलिए, हमें इसकी आवश्यकता हैः इस तरह के सलाद की तैयारी के लिए,त्वचा से चिकन स्तन साफ करें, और फिर शेष fillets छोटे टुकड़ों में काट लें। इसके अलावा अंडे उबालने, उन्हें ठंडा करने और गिलहरी और योल को अलग करने की आवश्यकता नहीं है। दोनों घटकों को एक छोटे से grater पर अलग से रगड़ना चाहिए। एक ताजा ककड़ी और क्रैबल धोना भी जरूरी हैयह एक पतली भूसे पर। ऐसा करने के लिए, आप कोरियाई ग्रेटर का उपयोग कर सकते हैं। बल्ब के लिए, इसे साफ करने की जरूरत है, बहुत पतले आधे छल्ले में कटौती और सिरका में मसालेदार। आधे घंटे के बाद, सब्जी को ठंडे पानी में धोया जाना चाहिए और दृढ़ता से बाहर निकलना चाहिए। अन्य चीजों के अलावा, आपको एक छोटे से grater और हार्ड पनीर पर grate करने की जरूरत है। इस तरह के सलाद बनाने के लिए, आपको लेने की जरूरत हैएक बड़ी और चौड़ी प्लेट, और उसके बाद स्मोक्ड स्तनों को इसके नीचे वितरित करें। फिर उन्हें ताजा ककड़ी से ढंकना चाहिए। इसके बाद निम्नलिखित परतों का उपयोग करना आवश्यक हैः मसालेदार लाल प्याज, जर्दी और प्रोटीन। वैसे, सभी सूचीबद्ध उत्पादों को बिना असफल के जैतून मेयोनेज़ के साथ greased किया जाना चाहिए। अंत में, स्तरित सलाद grated पनीर के साथ कवर किया जाना चाहिए और इसे रेफ्रिजरेटर में डाल दिया जाना चाहिए। स्नैक डिश की परतों के बाद मेयोनेज़ के साथ भिगो दी जाती है, इसे ठंड से बाहर निकाला जाना चाहिए और एक टेबल पर रखा जाना चाहिए। मुख्य गर्म रात के खाने से पहले इस सलाद का उपयोग करने की सिफारिश की जाती है। क्या आपने कभी एक स्नैक डिश बनाया हैस्मोक्ड स्तन, चैंपियनों जैसे अवयवों का उपयोग करना? इन उत्पादों के उपयोग के साथ सलाद न केवल स्वादिष्ट और सुगंधित होना चाहिए, बल्कि यह भी काफी संतोषजनक होना चाहिए। उसके लिए हमें इसकी आवश्यकता होगीः खुद को कैसे तैयार करेंसलाद? मशरूम, स्मोक्ड स्तन और पनीर इसके मुख्य घटक हैं। सबसे पहले आपको ताजा मशरूम को संसाधित करने की आवश्यकता है। उन्हें धोया जाना चाहिए और पतली प्लेटों में कटा हुआ होना चाहिए। इसके बाद, उत्पाद को एक पैन में तेल और बारीक कटा हुआ प्याज के साथ तला हुआ जाना चाहिए। सामग्री नरम और लाल हो जाने के बाद, उन्हें प्लेट से हटाकर ठंडा करके नमक के साथ छिड़का जाना चाहिए। मशरूम फ्राइंग के बाद, आपको प्रसंस्करण शुरू करना चाहिएस्तनों का उन्हें हड्डियों और त्वचा से साफ करने की आवश्यकता होती है, और फिर बारीक कटा हुआ होता है। डच पनीर के लिए, यह एक बड़े grater पर grated होना चाहिए। एक ताजा ककड़ी के साथ किया जाना चाहिए। घटकों को तैयार करने के बाद, आगे बढ़ना आवश्यक हैएक स्नैक सलाद का गठन। ऐसा करने के लिए, चिकन स्तनों के लिए थोड़ा मेयोनेज़ जोड़ें और अच्छी तरह मिलाएं। इसके बाद, मांस उत्पाद को एक विस्तृत प्लेट पर फैलाया जाना चाहिए और बिना ब्राइन के कोरियाई गाजर के साथ कवर किया जाना चाहिए। इसके बाद, प्याज के साथ कसा हुआ पनीर, ताजा खीरे और तला हुआ मशरूम रखना आवश्यक है। अंत में, सलाद की सतह को पतली मेयोनेज़ जाल से सजाया जाना चाहिए। सलाद बनाने के बाद, इसे तुरंत टेबल पर परोसा जा सकता है। प्लेटों पर एक पकवान फैलाने के बाद, इसे ध्यान से मिश्रण करने की सिफारिश की जाती है, और केवल तब उपयोग करने के लिए शुरू किया जाता है। यदि आप अधिक मसालेदार नाश्ता बनाना चाहते हैं, तो इसमें ताजा खीरे की बजाय, आपको मसालेदार सब्जियां डालना होगा। यह पकवान को एक विशेष पिक्चेंसी देगा, जिससे इसे अधिक स्वादिष्ट और सुगंधित बना दिया जाएगा। यदि आप एक गंभीर पकवान नहीं बनाना चाहते हैं, औरएक हल्का नाश्ता खाना पसंद करते हैं, प्रस्तुत सलाद तैयार करने की सिफारिश की जाती है। गोभी पेकिंग, स्मोक्ड स्तन इसके मुख्य घटक हैं। लेकिन, उनके अलावा, इस पकवान में अन्य उत्पादों को शामिल किया गया है। इसलिए, हमें इसकी आवश्यकता हैः के लिए एक हल्का नाश्ता पकवान बनाने से पहलेएक उत्सव की मेज, चिकन स्तनों से छील को हटाने और हड्डियों और अतिरिक्त वसा से उन्हें मुक्त करने के लिए आवश्यक है। इसके बाद, शेष लुगदी बारीक कटा हुआ होना चाहिए और एक गहरे सलाद कटोरे में डाल दिया जाना चाहिए। इस तरह के एक स्नैक्स के लिए पिटाई गोभी बेहतर हैशुष्क पत्तियों के बिना जितना संभव हो ताजा खरीद लें। इसे पूरी तरह से धोया जाना चाहिए, और फिर पतली स्ट्रॉ में कटौती और चिकन में जोड़ा जाना चाहिए। ताजा ककड़ी के लिए, इसे छीलना चाहिए , और फिर चार टुकड़ों में काटा और पतली स्लाइस में काट लें। इसके अलावा हरी मटर से सभी ब्राइन को निकालने और ताजा हिरणों को कुल्ला करने की आवश्यकता होती है। अंतिम घटक बारीक कटा हुआ होना चाहिए। पेकिंग गोभी के बाद और धूम्रपान कियास्तन एक गहरे सलाद कटोरे में होगा, उन्हें खीरे, हरी मटर और ताजा जड़ी बूटी के स्लाइस जोड़ने की जरूरत है। भविष्य में, सभी अवयवों को कम वसा वाले मेयोनेज़ के साथ स्वादित किया जाना चाहिए और बड़े चम्मच के साथ पूरी तरह मिलाया जाना चाहिए। अगर वांछित है, तो आप तैयार पकवान थोड़ा सा नमक जोड़ सकते हैं। अन्य सलादों के विपरीत, इस तरह का सामना करने के लिएरेफ्रिजरेटर में एक स्नैक पकवान आवश्यक नहीं है। इसे गठन के तुरंत बाद तालिका में परोसा जा सकता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ऐसा नाश्ता बहुत स्वादिष्ट और आसान है। यह न केवल सर्दियों के लिए तैयार किया जा सकता है, बल्कि गर्मी की छुट्टियों के लिए भी तैयार किया जा सकता है। जैसा कि आप देख सकते हैं, स्मोक्ड चिकन स्तन के साथ एक सलादपूरी तरह से अलग हो सकता है। एक ही समय में मुख्य बात घटकों को सही तरीके से संसाधित करना और उन्हें सही ढंग से चुनना है। उदाहरण के लिए, चिकन मांस पूरी तरह से मशरूम, सब्जियां और हिरन के साथ संयुक्त है। इसके अलावा इसे अक्सर उबले अंडे, हार्ड पनीर और ऐसे डिब्बाबंद उत्पादों के साथ मटर, सेम, मक्का के रूप में मिश्रित किया जाता है।
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कोलकाता नगर निगम के पिछले चुनाव में पार्थ चटर्जी ने स्थानीय पार्टी नेतृत्व की इच्छा के खिलाफ जाकर भजा को 128 नंबर वार्ड से उम्मीदवार बनाया था। स्थानीय माकपा व भाजपा नेताओं ने भजा पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया है।
कोलकाता, राज्य ब्यूरो। शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ की नजर अब पार्थ सरकार उर्फ भजा पर है। भजा कोलकाता नगर निगम के 128 नंबर वार्ड के तृणमूल कांग्रेस पार्षद हैं और घोटाले में गिरफ्तार हो चुके बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के बेहद करीबी बताए जाते हैं। सीबीआइ ने गुरुवार को भजा के बेहला स्थित घर में छापामारी की।
भजा 2021 में पार्षद निर्वाचित हुए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेहला पश्चिम में पिछले दो दशक से उनका राज चल रहा है। 2001 में पार्थ चटर्जी के बेहला पश्चिम से पहली बार विधायक निर्वाचित होने के बाद उन्हीं का हाथ पकड़कर भजा ने इलाके में अपना वर्चस्व कायम करना शुरू किया था। मूल रूप से बेहला के वाशिंदा नहीं होने एवं प्रत्यक्ष रूप से तृणमूल के किसी पद पर नहीं होने के बावजूद परोक्ष तौर पर उनकी स्थानीय तृणमूल के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी से पहले तक भजा सार्वजनिक रूप से कहते थे कि वे पार्टी के लिए नहीं, बल्कि पार्थ चटर्जी के लिए काम करते हैं। सूत्रों ने बताया कि भजा पार्थ चटर्जी के सबसे भरोसेमंद लोगों में से एक थे। अपने विधानसभा क्षेत्र से संबंधित बहुत से महत्वपूर्ण फैसले पार्थ ने भजा के कहने पर ही लिए थे। कोलकाता नगर निगम के पिछले चुनाव में पार्थ चटर्जी ने स्थानीय पार्टी नेतृत्व की इच्छा के खिलाफ जाकर भजा को 128 नंबर वार्ड से उम्मीदवार बनाया था। स्थानीय माकपा व भाजपा नेताओं ने भजा पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया है।
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कोलकाता नगर निगम के पिछले चुनाव में पार्थ चटर्जी ने स्थानीय पार्टी नेतृत्व की इच्छा के खिलाफ जाकर भजा को एक सौ अट्ठाईस नंबर वार्ड से उम्मीदवार बनाया था। स्थानीय माकपा व भाजपा नेताओं ने भजा पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया है। कोलकाता, राज्य ब्यूरो। शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ की नजर अब पार्थ सरकार उर्फ भजा पर है। भजा कोलकाता नगर निगम के एक सौ अट्ठाईस नंबर वार्ड के तृणमूल कांग्रेस पार्षद हैं और घोटाले में गिरफ्तार हो चुके बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के बेहद करीबी बताए जाते हैं। सीबीआइ ने गुरुवार को भजा के बेहला स्थित घर में छापामारी की। भजा दो हज़ार इक्कीस में पार्षद निर्वाचित हुए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेहला पश्चिम में पिछले दो दशक से उनका राज चल रहा है। दो हज़ार एक में पार्थ चटर्जी के बेहला पश्चिम से पहली बार विधायक निर्वाचित होने के बाद उन्हीं का हाथ पकड़कर भजा ने इलाके में अपना वर्चस्व कायम करना शुरू किया था। मूल रूप से बेहला के वाशिंदा नहीं होने एवं प्रत्यक्ष रूप से तृणमूल के किसी पद पर नहीं होने के बावजूद परोक्ष तौर पर उनकी स्थानीय तृणमूल के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी से पहले तक भजा सार्वजनिक रूप से कहते थे कि वे पार्टी के लिए नहीं, बल्कि पार्थ चटर्जी के लिए काम करते हैं। सूत्रों ने बताया कि भजा पार्थ चटर्जी के सबसे भरोसेमंद लोगों में से एक थे। अपने विधानसभा क्षेत्र से संबंधित बहुत से महत्वपूर्ण फैसले पार्थ ने भजा के कहने पर ही लिए थे। कोलकाता नगर निगम के पिछले चुनाव में पार्थ चटर्जी ने स्थानीय पार्टी नेतृत्व की इच्छा के खिलाफ जाकर भजा को एक सौ अट्ठाईस नंबर वार्ड से उम्मीदवार बनाया था। स्थानीय माकपा व भाजपा नेताओं ने भजा पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया है।
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कुल्लू - प्रदेश के अग्रणी मीडिया गु्रप 'दिव्य हिमाचल' के डांस हिमाचल डांस के ऑडिशन के लिए देवभूमि कुल्लू पूरी तरह से तैयार है। 25 अगस्त शुक्रवार को ढालपुर स्थित होटल शोभला में 'डांस हिमाचल डांस' के ऑडिशन लिए जाएंगे। इसके लिए समस्त तैयारियों को भी पूरा कर लिया गया है। डांस हिमाचल डांस के सीजन पांच का शुभारंभ भी कुल्लू जिला से ही होगा। कुल्लू के युवा भी डांस हिमाचल डांस के इस पांचवें सीजन को लेकर काफी क्रेजी भी नजर आ रहे हैं। हर साल की भांति युवाओं ने डांस हिमाचल डांस के इस ऑडिशन में अपनी बैस्ट प्रस्तुति देने के लिए भी से ही तैयारियों को करना शुरू कर दिया है। बता दें कि प्रतिभागियों को डांस हिमाचल डांस में अपनी प्रस्तुति देने के लिए अपनी ही पैन ड्राइव या फिर सीडी में गाना लाना होगा। गाने की च्वाइस भी ऑडिशन के समय प्रतिभागी की अपनी ही होगी। मजेदार बात यह है कि अगर प्रतिभागी निर्णायक मंडल के सदस्यों को अपनी प्रस्तुति से इंप्रैस कर लेता है तो फिर आगे चलकर प्रतिभागियों के लिए विभिन्न वर्कशान का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागियों को अन्य कई तरह के टिप्स भी सिखाए जाएंगे।
'डांस हिमाचल डांस' कुल्लू के ऑडिशन में हिस्सा लेने के लिए कुल्लू के विभिन्न स्कूलों के युवा भी काफी उत्सुक नजर आ रहे है। स्कूलों से आने वाले विद्यार्थियों को ऑडिशन की फीस में विशेष छूट भी दी जाएगी। जूनियर वर्ग में 16 साल के प्रतिभागी हिस्सा ले सकते है। वहीं, सीनियर वर्ग में 35 साल के प्रतिभागी स्टेज पर प्रस्तुति देकर अपने कैरियर को बना सकते हैं।
जूनियर वर्ग में आठ से 16 साल तक के उम्मीदवार डांस में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। सीनियर केटागरी में आयु सीमा 17 से 35 साल निर्धारित है। स्कूलों व अकादमियों से प्रमाण पत्र लेकर आने वाले प्रतिभागियों को एंट्री फीस में विशेष छूट दी जाएगी।
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कुल्लू - प्रदेश के अग्रणी मीडिया गु्रप 'दिव्य हिमाचल' के डांस हिमाचल डांस के ऑडिशन के लिए देवभूमि कुल्लू पूरी तरह से तैयार है। पच्चीस अगस्त शुक्रवार को ढालपुर स्थित होटल शोभला में 'डांस हिमाचल डांस' के ऑडिशन लिए जाएंगे। इसके लिए समस्त तैयारियों को भी पूरा कर लिया गया है। डांस हिमाचल डांस के सीजन पांच का शुभारंभ भी कुल्लू जिला से ही होगा। कुल्लू के युवा भी डांस हिमाचल डांस के इस पांचवें सीजन को लेकर काफी क्रेजी भी नजर आ रहे हैं। हर साल की भांति युवाओं ने डांस हिमाचल डांस के इस ऑडिशन में अपनी बैस्ट प्रस्तुति देने के लिए भी से ही तैयारियों को करना शुरू कर दिया है। बता दें कि प्रतिभागियों को डांस हिमाचल डांस में अपनी प्रस्तुति देने के लिए अपनी ही पैन ड्राइव या फिर सीडी में गाना लाना होगा। गाने की च्वाइस भी ऑडिशन के समय प्रतिभागी की अपनी ही होगी। मजेदार बात यह है कि अगर प्रतिभागी निर्णायक मंडल के सदस्यों को अपनी प्रस्तुति से इंप्रैस कर लेता है तो फिर आगे चलकर प्रतिभागियों के लिए विभिन्न वर्कशान का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागियों को अन्य कई तरह के टिप्स भी सिखाए जाएंगे। 'डांस हिमाचल डांस' कुल्लू के ऑडिशन में हिस्सा लेने के लिए कुल्लू के विभिन्न स्कूलों के युवा भी काफी उत्सुक नजर आ रहे है। स्कूलों से आने वाले विद्यार्थियों को ऑडिशन की फीस में विशेष छूट भी दी जाएगी। जूनियर वर्ग में सोलह साल के प्रतिभागी हिस्सा ले सकते है। वहीं, सीनियर वर्ग में पैंतीस साल के प्रतिभागी स्टेज पर प्रस्तुति देकर अपने कैरियर को बना सकते हैं। जूनियर वर्ग में आठ से सोलह साल तक के उम्मीदवार डांस में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। सीनियर केटागरी में आयु सीमा सत्रह से पैंतीस साल निर्धारित है। स्कूलों व अकादमियों से प्रमाण पत्र लेकर आने वाले प्रतिभागियों को एंट्री फीस में विशेष छूट दी जाएगी। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
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दिलेर समाचार, हम सभी ये तो जानते ही हैं कि इस दुनिया में हर कोई चाहता है कि वो खुब पैसे कमाए और जितना हो सके अपने भविष्य के लिए भी उनका संचय कर सके लेकिन ये बात भी सच है कि पैसे कमाने की चाह में हर कोई इतना ज्यादा मेहनत करता है और परेशान रहता है कि हर कोई काफी मेहनत करता है लेकिन उतने पैसे नहीं कमा पाता है। जी हां लेकिन कई बार आपने ऐसा भी देखा होगा कि व्यक्ति पैसे व रुपए तो खूब जुटा लेता है लेकिन उसे ज्यादा समय तक नहीं रख पाता है।
1. सबसे पहले तो आपको बता दें कि घर के ईशान कोण को ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि ये ईश्वर का स्थान होता है और यहां पर गंदगी या डस्टबिन होने पर धन का नाश होता रहेगा। ऐसे में उत्तर-पूर्व में कभी भी भूलकर गंदगी न फैलाएं और इस स्थान पर भारी चीज न रखें।
2. इसके अलावा ये बात तो हम सभी जानते हैं कि हमारे यहां जल को लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। यानि की अगर आपके घरों में नलों से पानी टपकता है और पाईप लाइन से लीकेज है तो समझ जाए कि ये आपके आर्थिक नुकसान का संकेत देता है। इसलिए वास्तु में बताया गया है कि नल से पानी का टपकना आपके एकत्र किए गए धन को धीरे-धीरे खर्च होने का संकेत करता है।
3. इसके साथ ही साथ ये भी बताया गया है कि वास्तु में घर का मुख्य द्वार का धन से गहरा संबंध होता है इसलिए यहां से जुड़े वास्तुदोष धन हानि के कारक होते हैं। यदि किसी घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में हो तो हमेशा आर्थिक परेशानियां घेरे रहती हैं। इसी तरह यदि घर का मुख्य द्वार टूटा हुआ हो या फिर पूरी तरह से ना खुलता हो, तो इस वास्तुदोष से भी धनहानि होती है।
4. वास्तुशास्त्र के अनुसार बेडरूम में प्रवेश करने पर सामने वाली दीवार का बायां कोना भाग्य और संपत्ति का क्षेत्र होता है। धन एवं समृद्धि की कामना को पूरी करने के लिए इस कोने पर धातु की कोई चीज लटकाकर रखनी चाहिए। साथ ही इस कोने में यदि दरारें हो तो उसे शीघ्र ही मरम्मत करवा देना चाहिए। धन की दृष्टि से इस कोने का कटा होना अशुभ माना जाता है।
5. घर में टूटा हुआ बेड एक बड़ा वास्तुदोष माना जाता है। टूटे हुए बेड का वास्तुदोष न सिर्फ आपके खर्च को बढ़ाता है बल्कि इस दोष के कारण आर्थिक लाभ में भी कमी आती है। इसी तरह घर की छत पर या सीढ़ी के नीचे कबाड़ जमा कर रखने से भी आर्थिक नुकसान होता है।
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दिलेर समाचार, हम सभी ये तो जानते ही हैं कि इस दुनिया में हर कोई चाहता है कि वो खुब पैसे कमाए और जितना हो सके अपने भविष्य के लिए भी उनका संचय कर सके लेकिन ये बात भी सच है कि पैसे कमाने की चाह में हर कोई इतना ज्यादा मेहनत करता है और परेशान रहता है कि हर कोई काफी मेहनत करता है लेकिन उतने पैसे नहीं कमा पाता है। जी हां लेकिन कई बार आपने ऐसा भी देखा होगा कि व्यक्ति पैसे व रुपए तो खूब जुटा लेता है लेकिन उसे ज्यादा समय तक नहीं रख पाता है। एक. सबसे पहले तो आपको बता दें कि घर के ईशान कोण को ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि ये ईश्वर का स्थान होता है और यहां पर गंदगी या डस्टबिन होने पर धन का नाश होता रहेगा। ऐसे में उत्तर-पूर्व में कभी भी भूलकर गंदगी न फैलाएं और इस स्थान पर भारी चीज न रखें। दो. इसके अलावा ये बात तो हम सभी जानते हैं कि हमारे यहां जल को लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। यानि की अगर आपके घरों में नलों से पानी टपकता है और पाईप लाइन से लीकेज है तो समझ जाए कि ये आपके आर्थिक नुकसान का संकेत देता है। इसलिए वास्तु में बताया गया है कि नल से पानी का टपकना आपके एकत्र किए गए धन को धीरे-धीरे खर्च होने का संकेत करता है। तीन. इसके साथ ही साथ ये भी बताया गया है कि वास्तु में घर का मुख्य द्वार का धन से गहरा संबंध होता है इसलिए यहां से जुड़े वास्तुदोष धन हानि के कारक होते हैं। यदि किसी घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में हो तो हमेशा आर्थिक परेशानियां घेरे रहती हैं। इसी तरह यदि घर का मुख्य द्वार टूटा हुआ हो या फिर पूरी तरह से ना खुलता हो, तो इस वास्तुदोष से भी धनहानि होती है। चार. वास्तुशास्त्र के अनुसार बेडरूम में प्रवेश करने पर सामने वाली दीवार का बायां कोना भाग्य और संपत्ति का क्षेत्र होता है। धन एवं समृद्धि की कामना को पूरी करने के लिए इस कोने पर धातु की कोई चीज लटकाकर रखनी चाहिए। साथ ही इस कोने में यदि दरारें हो तो उसे शीघ्र ही मरम्मत करवा देना चाहिए। धन की दृष्टि से इस कोने का कटा होना अशुभ माना जाता है। पाँच. घर में टूटा हुआ बेड एक बड़ा वास्तुदोष माना जाता है। टूटे हुए बेड का वास्तुदोष न सिर्फ आपके खर्च को बढ़ाता है बल्कि इस दोष के कारण आर्थिक लाभ में भी कमी आती है। इसी तरह घर की छत पर या सीढ़ी के नीचे कबाड़ जमा कर रखने से भी आर्थिक नुकसान होता है।
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वित्तीय वर्ष 2020-21 में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत कार्यरत अधिकारियों / कर्मचारियों/ शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मार्च 2021 माह का वेतन भुगतान/ मानदेय होली के पूर्व कराये जाने के सम्बन्ध में।
शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड, प्रवक्ता संवर्ग के पदों पर लोक सेवा आयोग से चयनित एवं नवनियुक्त शिक्षकों का होली से पहले वेतन भुगतान का निर्देश दिया है। निदेशक माध्यमिक के निर्देश पर अपर शिक्षा निदेशक राजकीय डॉ. अंजना गोयल की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेेजे गए पत्र में कहा गया कि जिन शिक्षकों के सभी अंकपत्र, प्रमाणपत्र का सत्यापन संबंधित दस्तावेज बोर्ड से उनके कार्यालय को मिल गया है, उनका वेतन तत्काल कराएं। जिन शिक्षकों का सत्यापन अधूरा है, उसे पूरा करके नियमानुसार वेतन भुगतान कराएं।
अपर निदेशक राजकीय ने जिला विद्यालय निरीक्षकों से कहा कि नवनियुक्त शिक्षकों से निर्धारित प्रारूप पर शपथपत्र लेकर अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा के निर्देश पर होली से पहले वेतन भुगतान कराएं। जिला विद्यालय निरीक्षक 27 मार्च तक अपर निदेशक राजकीय के कार्यालय को रिपोर्ट दें कि किसी नवनियुक्त शिक्षक का वेतन भुगतान शेष नहीं रह गया है। शपथपत्र में शिक्षकों से कहा गया कि वह शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन में विसंगति पर भुगतान की गई राशि राजकोष में जमा कर देंगे। सत्यापन गलत पाए जाने पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी और अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जाएगा।
शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड पद पर अधीनस्थ चयन बोर्ड से चयनित 25 शिक्षकों को वेतन भुगतान का आदेश जारी किया है। अपर निदेशक राजकीय डॉ. अंजना गोयल की ओर से 25 मार्च को जारी आदेश में कहा गया है कि एलटी ग्रेड शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन के बाद उनके वेतन भुगतान किया जा रहा है।
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वित्तीय वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत कार्यरत अधिकारियों / कर्मचारियों/ शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मार्च दो हज़ार इक्कीस माह का वेतन भुगतान/ मानदेय होली के पूर्व कराये जाने के सम्बन्ध में। शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड, प्रवक्ता संवर्ग के पदों पर लोक सेवा आयोग से चयनित एवं नवनियुक्त शिक्षकों का होली से पहले वेतन भुगतान का निर्देश दिया है। निदेशक माध्यमिक के निर्देश पर अपर शिक्षा निदेशक राजकीय डॉ. अंजना गोयल की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेेजे गए पत्र में कहा गया कि जिन शिक्षकों के सभी अंकपत्र, प्रमाणपत्र का सत्यापन संबंधित दस्तावेज बोर्ड से उनके कार्यालय को मिल गया है, उनका वेतन तत्काल कराएं। जिन शिक्षकों का सत्यापन अधूरा है, उसे पूरा करके नियमानुसार वेतन भुगतान कराएं। अपर निदेशक राजकीय ने जिला विद्यालय निरीक्षकों से कहा कि नवनियुक्त शिक्षकों से निर्धारित प्रारूप पर शपथपत्र लेकर अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा के निर्देश पर होली से पहले वेतन भुगतान कराएं। जिला विद्यालय निरीक्षक सत्ताईस मार्च तक अपर निदेशक राजकीय के कार्यालय को रिपोर्ट दें कि किसी नवनियुक्त शिक्षक का वेतन भुगतान शेष नहीं रह गया है। शपथपत्र में शिक्षकों से कहा गया कि वह शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन में विसंगति पर भुगतान की गई राशि राजकोष में जमा कर देंगे। सत्यापन गलत पाए जाने पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी और अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जाएगा। शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड पद पर अधीनस्थ चयन बोर्ड से चयनित पच्चीस शिक्षकों को वेतन भुगतान का आदेश जारी किया है। अपर निदेशक राजकीय डॉ. अंजना गोयल की ओर से पच्चीस मार्च को जारी आदेश में कहा गया है कि एलटी ग्रेड शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन के बाद उनके वेतन भुगतान किया जा रहा है।
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इटावा : कांग्रेस नेता संतोष चौधरी के भाई समेत 7 शराब तस्करों के इटावा में गिरफ्तार होने का खामियाजा भुगतना पड़ा है। कांग्रेस ने संतोष चौधरी को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। भाई के शराब तस्कर बन कर सामने की गाज कांग्रेसी नेता संतोष चौधरी पर बुधवार को दोपहर बाद उस समय गिरी जब कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कीरत प्रसाद पाल और कांग्रेस के अनुशासन समिति के जिलाध्यक्ष प्रशांत राव चतुर्वेदी ने इटावा में एक प्रेसवार्ता के दौरान अवगत कराया कि शराब तस्करी के मामले में कांग्रेस नेता के भाई के पकडे़ जाने के दौरान बरामदगी के तौर एक ऐसी गाड़ी पकड़ी गई है, जिसका इस्तेमाल खुद संतोष चौधरी कांग्रेस पार्टी के प्रसार के लिये इटावा में करते रहे हैं। इससे कांग्रेस पार्टी की छवि को जहां बट्टा लगा है वहीं कांग्रेसियों की छवि भी धूमिल हुई है। ऐसे मे कांग्रेस की कोर कमेटी तात्कालिक तौर पर संतोष चौधरी को 6 साल के लिये कांग्रेस पार्टी से निष्कासित करती है।
सबसे हैरत की यह बात है कि संतोष चौधरी के इस्तेमाल की जाने वाली जो गाड़ी शराब तस्करी में पकड़ी गई है, उस में कांग्रेस पार्टी का झंडा और कांग्रेस के युवराज की तस्वीर वाला एक पोस्टर भी लगा हुआ रहा है। यही सब कुछ संतोष चौधरी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का आधार बना है। इस पूरी कार्रवाई के बाद संतोष चौधरी का पक्ष लेने की कोशिश कई स्तर पर की गई, लेकिन संतोष चौधरी से उनके निलंबन के संदर्भ में कोई पक्ष नहीं मिल पाया है। बताते चले कि इटावा में कल कांग्रेस नेता संतोष चौधरी के भाई विजय चौधरी समेत 7 शराब तस्करों को 4 करोड़ से अधिक की शराब के साथ एसओजी टीम ने पकड़ा था। इससे पहले कभी भी इटावा पुलिस शराब का इतना बड़ा जखीरा पकड़ने में कभी भी कामयाब नहीं हुई है। कांग्रेस नेता के भाई के शराब तस्कर के रूप में पकडे़ जाने से इटावा के कांग्रेसियों में दोहरी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
पुलिस ने संतोष चौधरी के भाई विजय चौधरी के होटल हर्षवर्धन पर छापे मारी करके कांग्रेस नेता के भाई समेत 7 शराब तस्करों को गिरफ्तार करने के बाद उनके कब्जे से करीब 4 करोड़ रुपये मूल्य की रामपुर डिसटलरी से मंगवाई गई एक टैंकर शराब के अलावा भारी तादात में निर्मित और अर्धनिर्मित शराब को बरामद किया गया है। दो टैंकर शराब को आंध्रप्रदेश के लिये भेजा गया था, लेकिन इस शराब भरे टैंकर को इटावा लाया गया है। सिर्फ इतना ही नहीं भारी तादात में होलग्राम, लेवल, ठक्कन और विभिन्न किस्म की शराब बनाने के एशेंस भी बरामद किये गये हैं। कांग्रेस पार्टी का झंडा लगी हुई टवेरा गाड़ी 5 अन्य गाडियों के साथ पकड़ी गई है।
शराब की तस्करी करने वाले गैंग का सरगना विजय चौधरी के अलावा नईम कुरैशी, मुन्ना कुरैशी, लाखन सिंह, इसरार, विमलेश गुप्ता, फयाज और अमित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। यह सभी एक अर्से से अवैध शराब का कारोबार करने मे लगे हुये थे। शराब तस्कर विजय चौधरी के होटल हर्षवर्धन में ही राज वियर शाप भी है, जिसके लाइसेंस को निरस्त किया जायेगा। कांग्रेस नेता संतोष चौधरी पूरे मामले के बाद मीडिया के सामने नहीं आये हैं। उनका कहना है कि वे इटावा से बाहर हैं इसलिये बात कर पाना संभव नहीं है। बताते चलें कि इटावा सदर विधानसभा के उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप मे संतोष चौधरी चुनाव लड़ चुके है। संतोष चौधरी को उपचुनाव में करीब 5 हजार ही वोट मिल पाये थे।
इटावा से दिनेश शाक्य की रिपोर्ट.
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इटावा : कांग्रेस नेता संतोष चौधरी के भाई समेत सात शराब तस्करों के इटावा में गिरफ्तार होने का खामियाजा भुगतना पड़ा है। कांग्रेस ने संतोष चौधरी को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। भाई के शराब तस्कर बन कर सामने की गाज कांग्रेसी नेता संतोष चौधरी पर बुधवार को दोपहर बाद उस समय गिरी जब कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कीरत प्रसाद पाल और कांग्रेस के अनुशासन समिति के जिलाध्यक्ष प्रशांत राव चतुर्वेदी ने इटावा में एक प्रेसवार्ता के दौरान अवगत कराया कि शराब तस्करी के मामले में कांग्रेस नेता के भाई के पकडे़ जाने के दौरान बरामदगी के तौर एक ऐसी गाड़ी पकड़ी गई है, जिसका इस्तेमाल खुद संतोष चौधरी कांग्रेस पार्टी के प्रसार के लिये इटावा में करते रहे हैं। इससे कांग्रेस पार्टी की छवि को जहां बट्टा लगा है वहीं कांग्रेसियों की छवि भी धूमिल हुई है। ऐसे मे कांग्रेस की कोर कमेटी तात्कालिक तौर पर संतोष चौधरी को छः साल के लिये कांग्रेस पार्टी से निष्कासित करती है। सबसे हैरत की यह बात है कि संतोष चौधरी के इस्तेमाल की जाने वाली जो गाड़ी शराब तस्करी में पकड़ी गई है, उस में कांग्रेस पार्टी का झंडा और कांग्रेस के युवराज की तस्वीर वाला एक पोस्टर भी लगा हुआ रहा है। यही सब कुछ संतोष चौधरी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का आधार बना है। इस पूरी कार्रवाई के बाद संतोष चौधरी का पक्ष लेने की कोशिश कई स्तर पर की गई, लेकिन संतोष चौधरी से उनके निलंबन के संदर्भ में कोई पक्ष नहीं मिल पाया है। बताते चले कि इटावा में कल कांग्रेस नेता संतोष चौधरी के भाई विजय चौधरी समेत सात शराब तस्करों को चार करोड़ से अधिक की शराब के साथ एसओजी टीम ने पकड़ा था। इससे पहले कभी भी इटावा पुलिस शराब का इतना बड़ा जखीरा पकड़ने में कभी भी कामयाब नहीं हुई है। कांग्रेस नेता के भाई के शराब तस्कर के रूप में पकडे़ जाने से इटावा के कांग्रेसियों में दोहरी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। पुलिस ने संतोष चौधरी के भाई विजय चौधरी के होटल हर्षवर्धन पर छापे मारी करके कांग्रेस नेता के भाई समेत सात शराब तस्करों को गिरफ्तार करने के बाद उनके कब्जे से करीब चार करोड़ रुपये मूल्य की रामपुर डिसटलरी से मंगवाई गई एक टैंकर शराब के अलावा भारी तादात में निर्मित और अर्धनिर्मित शराब को बरामद किया गया है। दो टैंकर शराब को आंध्रप्रदेश के लिये भेजा गया था, लेकिन इस शराब भरे टैंकर को इटावा लाया गया है। सिर्फ इतना ही नहीं भारी तादात में होलग्राम, लेवल, ठक्कन और विभिन्न किस्म की शराब बनाने के एशेंस भी बरामद किये गये हैं। कांग्रेस पार्टी का झंडा लगी हुई टवेरा गाड़ी पाँच अन्य गाडियों के साथ पकड़ी गई है। शराब की तस्करी करने वाले गैंग का सरगना विजय चौधरी के अलावा नईम कुरैशी, मुन्ना कुरैशी, लाखन सिंह, इसरार, विमलेश गुप्ता, फयाज और अमित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। यह सभी एक अर्से से अवैध शराब का कारोबार करने मे लगे हुये थे। शराब तस्कर विजय चौधरी के होटल हर्षवर्धन में ही राज वियर शाप भी है, जिसके लाइसेंस को निरस्त किया जायेगा। कांग्रेस नेता संतोष चौधरी पूरे मामले के बाद मीडिया के सामने नहीं आये हैं। उनका कहना है कि वे इटावा से बाहर हैं इसलिये बात कर पाना संभव नहीं है। बताते चलें कि इटावा सदर विधानसभा के उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप मे संतोष चौधरी चुनाव लड़ चुके है। संतोष चौधरी को उपचुनाव में करीब पाँच हजार ही वोट मिल पाये थे। इटावा से दिनेश शाक्य की रिपोर्ट.
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केजीएफ से देश भर में जाने पहचाने जाने वाले यश कर्नाटक के छोटे गांव के रहने वाले हैं. फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले यश रोडवेज में ड्राइवर के तौर पर काम किया करते थे.
कहते हैं ना जब कोई शख्स कामयाब होता है तो अपने साथ-साथ अपने शहर अपने देश का नाम भी रोशन करता है. कुछ ऐसा ही यश के साथ भी हुआ. लेकिन इस बीच यश के गांव वालों ने उनके बारे में कुछ ऐसी बातें फैलाई जिसको सुन एक्टर को भी हंसी आ जाया करती है.
जब लोग यश के बारे में पड़ताल करने के लिए उनके गांव पहुंचे तो गांव वाले उनके बारे में अजीबो गरीब किस्से सुनाए करते थे. कोई कहता था कि वह अपने स्ट्रगल के दिनों में 5 दिन नहीं नहाया करते थे तो कोई कुछ और कहानी बताया करता था.
यश ने बताया कि कैसे लोग खबरों में आने के चलते मेरे बारे में कहानियां बनाया करते थे. कोई कहता था वह कुछ दिनों तक खाना नहीं खाया था तो मैंने उसे खाना दिया, तो किसी ने कहा इसे मैंने थिएटर में इंट्रोड्यूस कराया था. कोई मुझे अपना क्लासमेट बताता था.
फिल्म कंपेनियन से हुई बातचीत में एक्टर ने बताया कि नहाने वाली बात मुझसे बर्दाश्त नहीं हुई तो मैंने उस व्यक्ति को कॉल लगाया और बोला- भाई मैं कब 5 दिन तक नहीं नहाया ? तुम्हें क्रेडिट लेना है तो ले लो, कोई बात नहीं. . लेकिन बकवास मत फैलाओ.
यश ने बताया कि बदलते दौर के साथ आपको अपने अंदर कुछ बदलाव लाने पड़ते हैं. आप जहां से निकलकर आते हैं वहां आपकी इज्जत नहीं करते लोग, वो आपके बारे में कुछ भी बातें फैलाते हैं.
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केजीएफ से देश भर में जाने पहचाने जाने वाले यश कर्नाटक के छोटे गांव के रहने वाले हैं. फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले यश रोडवेज में ड्राइवर के तौर पर काम किया करते थे. कहते हैं ना जब कोई शख्स कामयाब होता है तो अपने साथ-साथ अपने शहर अपने देश का नाम भी रोशन करता है. कुछ ऐसा ही यश के साथ भी हुआ. लेकिन इस बीच यश के गांव वालों ने उनके बारे में कुछ ऐसी बातें फैलाई जिसको सुन एक्टर को भी हंसी आ जाया करती है. जब लोग यश के बारे में पड़ताल करने के लिए उनके गांव पहुंचे तो गांव वाले उनके बारे में अजीबो गरीब किस्से सुनाए करते थे. कोई कहता था कि वह अपने स्ट्रगल के दिनों में पाँच दिन नहीं नहाया करते थे तो कोई कुछ और कहानी बताया करता था. यश ने बताया कि कैसे लोग खबरों में आने के चलते मेरे बारे में कहानियां बनाया करते थे. कोई कहता था वह कुछ दिनों तक खाना नहीं खाया था तो मैंने उसे खाना दिया, तो किसी ने कहा इसे मैंने थिएटर में इंट्रोड्यूस कराया था. कोई मुझे अपना क्लासमेट बताता था. फिल्म कंपेनियन से हुई बातचीत में एक्टर ने बताया कि नहाने वाली बात मुझसे बर्दाश्त नहीं हुई तो मैंने उस व्यक्ति को कॉल लगाया और बोला- भाई मैं कब पाँच दिन तक नहीं नहाया ? तुम्हें क्रेडिट लेना है तो ले लो, कोई बात नहीं. . लेकिन बकवास मत फैलाओ. यश ने बताया कि बदलते दौर के साथ आपको अपने अंदर कुछ बदलाव लाने पड़ते हैं. आप जहां से निकलकर आते हैं वहां आपकी इज्जत नहीं करते लोग, वो आपके बारे में कुछ भी बातें फैलाते हैं.
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पैराग्लाइडिंग की विख्यात घाटी बिलिंग में लंबे अंतराल के बाद हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन एवं हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष आर एस बाली द्वारा पांच से नौ अप्रैल तक आयोजित होने वाली एक्यूरेसी पैराग्लाइडिंग प्री-वल्र्ड कप 2023 का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्य संसदीय सचिव एवं बैजनाथ के विधायक किशोरी लाल विशेष रूप में उपस्थित रहे। हवन के साथ पांच दिन तक आयोजित होने बाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का शुभारंभ महाकाल मंदिर के मुख्य पुजारी राम जी द्वारा मंत्रोच्चारण द्वारा हवन के साथ किया। इस मौके पर स्वामी रामा नंद ट्रस्ट संसाल के प्रबंधक राजेश शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। प्रतियोगिता से पूर्व आर एस बाली ने प्रतियोगिता के सफलता पूर्वक आयोजन एवं पायलट्स की सुरक्षा के लिए रखे गए हवन में पूर्ण आहुति डाली।
उन्होंने हरी झंडी देकर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इस मौके पर आरएस बाली ने कहा कि बीड़-बिलिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन इलाके, प्रदेश और देश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि बिलिंग घाटी पैराग्लाइडिंग के लिए अपनी विशेषताओं के चलते दुनियांभर की सर्वक्षेष्ठ जगहों में आंकी जाती है। उन्होंने बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन को भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की बधाई दी और सफलता पूर्वक आयोजन के लिये सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन को बिलिंग में पैराग्लाइडिंग के वल्र्ड कप के आयोजन के लिए भी सभी मापदंड पूरे करने के प्रयास करने का सुझाव दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा की पैराग्लाइडिंग गतिविधियों को बढ़ाने पर हर संभव सहयोग प्रदेश की सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग ने बिलिंग में पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता के लिए 25 लाख रुपए दिए हैं और बीड़ में ऐरो स्पोट्र्स हॉस्टल का निर्माण भी पर्यटन विभाग द्वारा लगभग 12 करोड़ से किया गया था ताकि इस क्षेत्र में पैराग्लाइडिंग गतिविधियों को बढ़ावा मिले।
एक्यूरेसी पैराग्लाइडिंग प्री-वल्र्ड कप 2023 कैटेगिरी-दो में कुल 142 प्रतिभागियों ने अपना पंजीकरण करवाया है। बुधवार को प्रतियोगिता में 103 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में भारत सहित अमेरिका, नेपाल स्पेन और नीदरलैंड के प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता में 95 पुरुष जिसमें 74 भारतीय और 21 विदेशी प्रतिभागी शामिल हैं। जबकि महिलाओं में आठ प्रतिभागी हैं जिसमें पांच भारतीय और तीन प्रतिभागी विदेशी हैं। प्रतियोगिता में भारतीय सेना के दस नौसेना से एक, वायु सेना के एक तथा पैरामिलिट्री फोर्स के पांच प्रतिभागी भी भाग ले रहे हैं।
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पैराग्लाइडिंग की विख्यात घाटी बिलिंग में लंबे अंतराल के बाद हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन एवं हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष आर एस बाली द्वारा पांच से नौ अप्रैल तक आयोजित होने वाली एक्यूरेसी पैराग्लाइडिंग प्री-वल्र्ड कप दो हज़ार तेईस का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्य संसदीय सचिव एवं बैजनाथ के विधायक किशोरी लाल विशेष रूप में उपस्थित रहे। हवन के साथ पांच दिन तक आयोजित होने बाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का शुभारंभ महाकाल मंदिर के मुख्य पुजारी राम जी द्वारा मंत्रोच्चारण द्वारा हवन के साथ किया। इस मौके पर स्वामी रामा नंद ट्रस्ट संसाल के प्रबंधक राजेश शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। प्रतियोगिता से पूर्व आर एस बाली ने प्रतियोगिता के सफलता पूर्वक आयोजन एवं पायलट्स की सुरक्षा के लिए रखे गए हवन में पूर्ण आहुति डाली। उन्होंने हरी झंडी देकर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इस मौके पर आरएस बाली ने कहा कि बीड़-बिलिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन इलाके, प्रदेश और देश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि बिलिंग घाटी पैराग्लाइडिंग के लिए अपनी विशेषताओं के चलते दुनियांभर की सर्वक्षेष्ठ जगहों में आंकी जाती है। उन्होंने बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन को भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की बधाई दी और सफलता पूर्वक आयोजन के लिये सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन को बिलिंग में पैराग्लाइडिंग के वल्र्ड कप के आयोजन के लिए भी सभी मापदंड पूरे करने के प्रयास करने का सुझाव दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा की पैराग्लाइडिंग गतिविधियों को बढ़ाने पर हर संभव सहयोग प्रदेश की सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग ने बिलिंग में पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता के लिए पच्चीस लाख रुपए दिए हैं और बीड़ में ऐरो स्पोट्र्स हॉस्टल का निर्माण भी पर्यटन विभाग द्वारा लगभग बारह करोड़ से किया गया था ताकि इस क्षेत्र में पैराग्लाइडिंग गतिविधियों को बढ़ावा मिले। एक्यूरेसी पैराग्लाइडिंग प्री-वल्र्ड कप दो हज़ार तेईस कैटेगिरी-दो में कुल एक सौ बयालीस प्रतिभागियों ने अपना पंजीकरण करवाया है। बुधवार को प्रतियोगिता में एक सौ तीन प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में भारत सहित अमेरिका, नेपाल स्पेन और नीदरलैंड के प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता में पचानवे पुरुष जिसमें चौहत्तर भारतीय और इक्कीस विदेशी प्रतिभागी शामिल हैं। जबकि महिलाओं में आठ प्रतिभागी हैं जिसमें पांच भारतीय और तीन प्रतिभागी विदेशी हैं। प्रतियोगिता में भारतीय सेना के दस नौसेना से एक, वायु सेना के एक तथा पैरामिलिट्री फोर्स के पांच प्रतिभागी भी भाग ले रहे हैं।
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कुख्यात "अपतटीय अभिजात वर्ग" का उपयोग उच्च तेल की कीमतों को जादू के रूप में, उसकी इच्छा के अलावा, उसके सभी पापों के लिए भोग के रूप में किया जाता है, जो एकाधिकार की कुल मनमानी को शानदार आर्थिक विकास दर में बदल देता है, और स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और Rublevo-Courchevel संघीय जिले के जादू महल में भ्रष्टाचार।
हालांकि, झूठ और चोरी के आधार पर एक अक्षम अर्थव्यवस्था की मदद करने के लिए तेल बंद हो गया है। विश्व तेल की कीमतों में शानदार उछाल के बावजूद (वे लंबे समय से इतने उच्च स्तर पर कभी नहीं रहे हैं, और इस वर्ष का अपेक्षित औसत स्तर - एक्सएनयूएमएक्स डॉलर / बैरल - यहां तक कि वर्ष के एक्सएनयूएमएक्स के रिकॉर्ड से अधिक है), रूस के सामाजिक-आर्थिक विकास के संकेतक भी कुछ हद तक बिगड़ गए हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में। इस प्रकार, अधिक अनुकूल परिस्थितियों में, रूसी अर्थव्यवस्था बदतर विकसित हुई। इसका कारण दोनों "संरचनात्मक" समस्याओं (मुख्य रूप से भ्रष्टाचार और एकाधिकारवाद) का बहिष्कार है, और क्योंकि एक साल पहले, 105-2008 संकट (INNUMX की तिमाही के अंतिम वर्ष की पहली तिमाही की तुलना में) के बाद भी आर्थिक विकास आंशिक रूप से वसूली की प्रकृति में था। औपचारिक दृष्टि से सबसे खराब था)।
Q1 में, औद्योगिक विकास इस वर्ष 9,5 से 5,9% (9,8 से 5,3% तक मार्च सहित) में एक तिहाई से अधिक धीमा हो गया। कृषि उत्पादन सूखे से उबर नहीं पाया हैः पहली तिमाही में इसकी वृद्धि पिछले साल के 0,7% (मार्च - 3,6% के मुकाबले 0,7) की तुलना में प्रतीकात्मक 4,1% थी। मार्च में प्रतीकात्मक 3. 7% (मार्च में 1,4% सहित, वर्ष की पहली तिमाही में महत्वपूर्ण 11,6% की तुलना में), पहली तिमाही में केवल 2010% की वृद्धि हुई।
कार्गो परिवहन की वृद्धि में तेज मंदी निवेश मंदी की निरंतरता के रूप में खतरनाक है। यद्यपि यह धीमा हो जाता है (2011 की पहली तिमाही में, यह पिछले साल के 1,5% बनाम 4. 8% था, और मार्च में, 2011, प्रतीकात्मक 0,3% बनाम समान रूप से प्रतीकात्मक, लेकिन मार्च में 0,4% की वृद्धि, 2010) संयुग्मन रूस में वर्तमान सामाजिक-आर्थिक मॉडल में एक गंभीर दोष को इंगित करता है।
जनसंख्या की वास्तविक आय में भी कमी आ रही है, और पिछले वर्ष की तुलना में उनका पिछड़ापन बढ़ रहा हैः पहली तिमाही में यह 2,9% (7. 3% द्वारा पिछले वर्ष की वृद्धि के विरुद्ध) और मार्च में - 3,4% (4,4% द्वारा पिछले वर्ष की वृद्धि के विरुद्ध) की राशि थी।
देश में आबादी के जीवन स्तर में बढ़ती गिरावट, जिसकी नौकरशाही और कुलीनतंत्र वस्तुतः पेट्रोडॉलर पर घुट रहे हैं, एक गहरी छाप बनाता है। एक ही समय में, जहां तक कोई भी समझ सकता है, मुद्रास्फीति को पारंपरिक रूप से रोस्टैट द्वारा कम करके आंका जाता है, जो वास्तविक आय के overestimation में योगदान देता है, और सांख्यिकीय रूप से कम करके आंका गया कारक - मुद्रा खरीदने वाली जनसंख्या - I तिमाही में व्यावहारिक रूप से अनुपस्थित है। भुगतान संतुलन के अनुसार, 2011 की पहली तिमाही में, जनसंख्या और गैर-वित्तीय व्यवसाय ने 0,4 बिलियन डॉलर के लिए नकद बेचा। - 3,6 बिलियन डॉलर के साथ तुलना में। पिछले साल की पहली तिमाही में; मजबूत रूबल की स्थितियों में अर्थव्यवस्था के डी-डॉलरकरण का वास्तविक समापन भी एक चेतावनी संकेत है, जो रूसी अर्थव्यवस्था के लिए संभावनाओं के अविश्वास में वृद्धि का संकेत देता है।
जनसंख्या के वास्तविक आय में कमी के लिए एकमात्र कारक उनके कराधान में निषेधात्मक वृद्धि है (26 से 34% के लिए अनिवार्य सामाजिक योगदान में वृद्धि), हालांकि, यह बाजार की उचित परिस्थितियों से संबंधित नहीं है, इसका प्रभाव उद्देश्य है और यह दर्शाता है कि -सरकार की नीति में बदलाव से लोगों को वास्तव में कम पैसा मिलेगा। हालांकि, अगर यह जनसंख्या की वास्तविक आय में गिरावट का मुख्य कारण था, तो पिछले साल की तुलना में पिछड़ापन लगभग एक ही होगा - जबकि इसमें तेजी से उतार-चढ़ाव आया (यह जनवरी में एक्सएनयूएमएक्स%, फरवरी में प्रतीकात्मक एक्सएनयूएमएक्स% और मार्च में एक्सएनयूएमएक्स% था)।
इस प्रकार, जनसंख्या की वास्तविक आय में गिरावट सबसे अधिक संभावना है कि यह न केवल रूसी आबादी की भौतिक स्थिति के बिगड़ने को दर्शाता है, बल्कि समग्र रूप से आर्थिक स्थिति को भी - और इस संदर्भ में है, मुझे याद है, तेल की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि!
दिलचस्प बात यह है कि एक ही समय में, बेरोजगारी और आर्थिक सुधार में गिरावट के बावजूद, बेरोजगारी का विस्तार हुआ थाः मार्च में रोस्टैट मॉनिटरिंग के अनुसार, फरवरी की तुलना में बड़े और मध्यम आकार के उद्यमों में वृद्धि हुई, 5,0 से 5,3% कर्मचारियों तक।
इस प्रकार, आर्थिक मॉडल जो एक्सएनयूएमएक्स की शुरुआत में उभरा और बढ़ते पेट्रोडोलार के यांत्रिक पाचन के आधार पर हमारी आंखों से पहले सचमुच काम करना बंद कर देता है। भ्रष्ट अधिकारियों और एकाधिकारियों की मनमानी को सीमित करते हुए इसे बदलने की तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा कुछ वर्षों में यह पूरे देश को अपने साथ खींच लेगा।
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कुख्यात "अपतटीय अभिजात वर्ग" का उपयोग उच्च तेल की कीमतों को जादू के रूप में, उसकी इच्छा के अलावा, उसके सभी पापों के लिए भोग के रूप में किया जाता है, जो एकाधिकार की कुल मनमानी को शानदार आर्थिक विकास दर में बदल देता है, और स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और Rublevo-Courchevel संघीय जिले के जादू महल में भ्रष्टाचार। हालांकि, झूठ और चोरी के आधार पर एक अक्षम अर्थव्यवस्था की मदद करने के लिए तेल बंद हो गया है। विश्व तेल की कीमतों में शानदार उछाल के बावजूद , रूस के सामाजिक-आर्थिक विकास के संकेतक भी कुछ हद तक बिगड़ गए हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में। इस प्रकार, अधिक अनुकूल परिस्थितियों में, रूसी अर्थव्यवस्था बदतर विकसित हुई। इसका कारण दोनों "संरचनात्मक" समस्याओं का बहिष्कार है, और क्योंकि एक साल पहले, एक सौ पाँच-दो हज़ार आठ संकट के बाद भी आर्थिक विकास आंशिक रूप से वसूली की प्रकृति में था। औपचारिक दृष्टि से सबसे खराब था)। Qएक में, औद्योगिक विकास इस वर्ष नौ,पाँच से पाँच,नौ% में एक तिहाई से अधिक धीमा हो गया। कृषि उत्पादन सूखे से उबर नहीं पाया हैः पहली तिमाही में इसकी वृद्धि पिछले साल के शून्य,सात% की तुलना में प्रतीकात्मक चार,एक% थी। मार्च में प्रतीकात्मक तीन. सात% , पहली तिमाही में केवल दो हज़ार दस% की वृद्धि हुई। कार्गो परिवहन की वृद्धि में तेज मंदी निवेश मंदी की निरंतरता के रूप में खतरनाक है। यद्यपि यह धीमा हो जाता है संयुग्मन रूस में वर्तमान सामाजिक-आर्थिक मॉडल में एक गंभीर दोष को इंगित करता है। जनसंख्या की वास्तविक आय में भी कमी आ रही है, और पिछले वर्ष की तुलना में उनका पिछड़ापन बढ़ रहा हैः पहली तिमाही में यह दो,नौ% और मार्च में - तीन,चार% की राशि थी। देश में आबादी के जीवन स्तर में बढ़ती गिरावट, जिसकी नौकरशाही और कुलीनतंत्र वस्तुतः पेट्रोडॉलर पर घुट रहे हैं, एक गहरी छाप बनाता है। एक ही समय में, जहां तक कोई भी समझ सकता है, मुद्रास्फीति को पारंपरिक रूप से रोस्टैट द्वारा कम करके आंका जाता है, जो वास्तविक आय के overestimation में योगदान देता है, और सांख्यिकीय रूप से कम करके आंका गया कारक - मुद्रा खरीदने वाली जनसंख्या - I तिमाही में व्यावहारिक रूप से अनुपस्थित है। भुगतान संतुलन के अनुसार, दो हज़ार ग्यारह की पहली तिमाही में, जनसंख्या और गैर-वित्तीय व्यवसाय ने शून्य,चार बिलियन डॉलर के लिए नकद बेचा। - तीन,छः बिलियन डॉलर के साथ तुलना में। पिछले साल की पहली तिमाही में; मजबूत रूबल की स्थितियों में अर्थव्यवस्था के डी-डॉलरकरण का वास्तविक समापन भी एक चेतावनी संकेत है, जो रूसी अर्थव्यवस्था के लिए संभावनाओं के अविश्वास में वृद्धि का संकेत देता है। जनसंख्या के वास्तविक आय में कमी के लिए एकमात्र कारक उनके कराधान में निषेधात्मक वृद्धि है , हालांकि, यह बाजार की उचित परिस्थितियों से संबंधित नहीं है, इसका प्रभाव उद्देश्य है और यह दर्शाता है कि -सरकार की नीति में बदलाव से लोगों को वास्तव में कम पैसा मिलेगा। हालांकि, अगर यह जनसंख्या की वास्तविक आय में गिरावट का मुख्य कारण था, तो पिछले साल की तुलना में पिछड़ापन लगभग एक ही होगा - जबकि इसमें तेजी से उतार-चढ़ाव आया । इस प्रकार, जनसंख्या की वास्तविक आय में गिरावट सबसे अधिक संभावना है कि यह न केवल रूसी आबादी की भौतिक स्थिति के बिगड़ने को दर्शाता है, बल्कि समग्र रूप से आर्थिक स्थिति को भी - और इस संदर्भ में है, मुझे याद है, तेल की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि! दिलचस्प बात यह है कि एक ही समय में, बेरोजगारी और आर्थिक सुधार में गिरावट के बावजूद, बेरोजगारी का विस्तार हुआ थाः मार्च में रोस्टैट मॉनिटरिंग के अनुसार, फरवरी की तुलना में बड़े और मध्यम आकार के उद्यमों में वृद्धि हुई, पाँच,शून्य से पाँच,तीन% कर्मचारियों तक। इस प्रकार, आर्थिक मॉडल जो एक्सएनयूएमएक्स की शुरुआत में उभरा और बढ़ते पेट्रोडोलार के यांत्रिक पाचन के आधार पर हमारी आंखों से पहले सचमुच काम करना बंद कर देता है। भ्रष्ट अधिकारियों और एकाधिकारियों की मनमानी को सीमित करते हुए इसे बदलने की तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा कुछ वर्षों में यह पूरे देश को अपने साथ खींच लेगा।
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डेस्क । । ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, आज हम आपको बताने वाले हैं, उस एक भाग्यशाली राशि के बारे में जिनका भाग्य 777 साल बाद मां काली ने लिख दिया है। मां काली की कृपा से इस 1 राशि के जातकों की नए साल में सभी इच्छाएं पूरी होंगी। इन्हें ढेरों खुशियां मिलेंगी।
हम जिस भाग्यशाली राशि की बात कर रहे हैं, वो तुला राशि है। तुला राशि वाले लोगों पर लंबे समय बाद मां काली की कृपा होने जा रही है। मां काली की कृपा से तुला राशि वाले लोगों का भाग्य नए साल भी चमक सकता है। आप पर पूरे साल मां काली मेहरबान रहेंगी।
विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े अवसर प्राप्त होंगे। इस समय आपको पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में आपको लाभ होगा। व्यापार में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ की प्रबल संभावना है।
धन प्राप्ति का योग आपकी कुंडली में बन रहा है। आपके सभी बिगड़े हुए काम आसानी से बन सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी सभी शिकायतें दूर होंगी। व्यवसायिक कार्यों में आपको लाभ होगा। नए कार्य को शुरू करने का समय बहुत ही अच्छा है।
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डेस्क । । ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, आज हम आपको बताने वाले हैं, उस एक भाग्यशाली राशि के बारे में जिनका भाग्य सात सौ सतहत्तर साल बाद मां काली ने लिख दिया है। मां काली की कृपा से इस एक राशि के जातकों की नए साल में सभी इच्छाएं पूरी होंगी। इन्हें ढेरों खुशियां मिलेंगी। हम जिस भाग्यशाली राशि की बात कर रहे हैं, वो तुला राशि है। तुला राशि वाले लोगों पर लंबे समय बाद मां काली की कृपा होने जा रही है। मां काली की कृपा से तुला राशि वाले लोगों का भाग्य नए साल भी चमक सकता है। आप पर पूरे साल मां काली मेहरबान रहेंगी। विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े अवसर प्राप्त होंगे। इस समय आपको पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में आपको लाभ होगा। व्यापार में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ की प्रबल संभावना है। धन प्राप्ति का योग आपकी कुंडली में बन रहा है। आपके सभी बिगड़े हुए काम आसानी से बन सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी सभी शिकायतें दूर होंगी। व्यवसायिक कार्यों में आपको लाभ होगा। नए कार्य को शुरू करने का समय बहुत ही अच्छा है।
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नील एल्डन आर्मस्ट्रांग (५ अगस्त १९३० - २५ अगस्त २०१२) एक अमेरिकी खगोलयात्री और चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति थे। इसके अलावा वे एक एयरोस्पेस इंजीनियर, नौसेना अधिकारी, परीक्षण पायलट, और प्रोफ़ेसर भी थे। खगोलयात्री (ऍस्ट्रोनॉट) बनने से पूर्व वे नौसेना में थे। नौसेना में रहते हुए उन्होंने कोरिया युद्ध में भी हिस्सा लिया। नौसेना के बाद उन्होंने पुरुडु विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि ली और तत्पश्चात् एक ड्राइडेन फ्लाईट रिसर्च सेंटर से जुड़े और एक परीक्षण पायलट के रूप में ९०० से अधिक उड़ानें भरीं। यहाँ सेवायें देने के बाद उन्होंने दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से परास्नातक की उपाधि हासिल की। आर्मस्ट्रांग को मुख्यतः अपोलो अभियान के खगोलयात्री के रूप में चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। इससे पहले वे जेमिनी अभियान के दौरान भी अंतरिक्ष यात्रा कर चुके थे। अपोलो ११, वह अभियान था जिसमें जुलाई १९६९ में पहली बार चंद्रमा पर मानव सहित कोई यान उतरा और आर्मस्ट्रांग इसके कमांडर थे। उनके अलावा इसमें बज़ एल्ड्रिन, जो चाँद पर उतरने वाले दूसरे व्यक्ति बने, और माइकल कॉलिंस जो चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाते मुख्य यान में ही बैठे रहे, शामिल थे। अपने साथियों के साथ, इस उपलब्धि के लिये आर्मस्ट्रांग को राष्ट्रपति निक्सन के हाथों प्रेसिडेंसियल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने उन्हें १९७८ में कॉंग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर प्रदान किया और आर्मस्ट्रांग और उनके साथियों को वर्ष २००९ में कॉंग्रेसनल गोल्ड मेडल दिया गया। आर्मस्ट्रांग की मृत्यु, सिनसिनाती, ओहायो, में २५ अगस्त २०१२ को ८२ वर्ष की उम्र में बाईपास सर्जरी के पश्चात् हुई। .
17 संबंधोंः चन्द्रमा, एडगर मिशेल, एनडीटीवी खबर, बीबीसी, यूरी गगारिन, समन्वित सार्वत्रिक समय, स्कॉट केली, वॉयस ऑफ़ अमेरिका, खगोलयात्री, ओहायो, कल्पना चावला, क्वारंटीन, कैम्ब्रिज, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, अपोलो 8, अपोलो ११, अमेरिकी।
कोई विवरण नहीं।
एडगर मिशेल (अँग्रेजीः Edgar Dean Mitchell, 17 सितंबर 1930 - 4 फ़रवरी 2016) एक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री थे, जिनका 4 फरवरी, 2016 को वेस्ट पाम बीच, फ्लोरिडा में निधन हो गया। वे 1971 में चंद्रमा से जुड़े अपोलो-14 मिशन के सदस्य थे। उनके साथ अपोलो-14 मिशन में एलन बी.
एनडीटीवी खबर हिन्दी का एक ऑनलाइन समाचार पोर्टल है।। .
बीबीसी या ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोंरेशन (ब्रिटिश प्रसारण निगम) विश्व का सबसे बड़ा प्रसारण संघ है, दर्शकों की संख्या में, जिसके केवल ग्रेट ब्रिटेन में ही २६,००० कार्यकर्ता और बजट जीबी£ ४ अरब यूएस$ ७.८ अरब) से अधिक है। and the motto of the BBC is Nation Shall Speak Peace Unto Nation. The BBC is a quasi-autonomous Public Corporation operating as a public service broadcaster. The Corporation is run by the BBC Trust; however, the BBC is, per its charter, to be "free from both political and commercial influence and answers only to its viewers and listeners". Its domestic programming and broadcasts are primarily funded by levying television licence fees (under the Wireless Telegraphy Act 1949), although money is also raised through commercial activities such as sale of merchandise and programming. The BBC World Service, however, is funded by the Foreign and Commonwealth Office. In order to justify the licence fee the BBC is expected to produce a number of high-rating shows in addition to programmes that commercial broadcasters would not normally broadcast. Quite often domestic audiences affectionately refer to the BBC as the Beeb (coined by Kenny Everett). Auntie was a nickname used during the early years, said to originate in the somewhat old fashioned Auntie knows best attitude back when John Reith was in charge. The two terms have been used together as Auntie Beeb.--> .
यूरी गगारिन (Yuri Gagarin) (9 मार्च 1934 - 27 मार्च 1968), भूतपूर्व सोवियत संघ के हवाबाज़ और अंतरिक्ष यात्री थे। १२ अप्रैल, १९६१ को अंतरिक्ष में जाने वाले वे प्रथम मानव थे। अन्तरिक्ष की यात्रा करने के बाद गगारिन अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित व्यक्ति बन चुके थे और उन्हें कई तरह के पदक और खिताबों से सम्मानित किया गया था। उन खिताबों में से एक ख़िताब था हीरो ऑफ़ द सोवियत यूनियन (Hero of the Soviet Union) था। उन्होंने Vostok 1 नामक अन्तरिक्ष यान में अपनी यात्रा की थी। १९६८ जब वे मिग १५ (MiG-15) नामक प्रशिक्षण विमान का संचालक कर रहे थे तो, विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण उनकी मृत्यु हो गयी। यूरी गगारिन पदक उनके सम्मान में प्रदान किया जाता है। .
सार्वत्रिय समय समन्वित सार्वत्रिक समय (ससस) (Coordinated Universal Time) विश्व के समय का प्राथमिक मानक है जिसके द्वारा विश्वभर में घड़ियाँ एवं समय नियंत्रित किये जाते हैं। यह ग्रीनविच माध्य समय (GMT) के बहुत सारे अनुवतियों (successors) में से एक है। साधारण कार्यों की दृष्टि से समन्वित सार्वत्रिक समय और ग्रीनविच माध्य समय एक ही हैं, किन्तु ग्रीनविच माध्य समय अब वैज्ञानिक समुदाय द्वारा परिशुद्धता पूर्वक (precisely) परिभाषित नहीं किया जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय परमाण्विक समय(TAI) अनियमित अंतरालों पर जोड़े गये लोन सैकिण्ड सहित है। यह लोन सैकिण्ड पॄथ्वी की धीमी होती गति के कारण जोड़े जाते हैं। इनसे UTC की UT1 से समीपता बनी रहती है। UT1 औसत सौर समय है, जो कि ग्रीनविच की साही वेधशाला में देखा जाता है। UTC और UT1 के बीच का अन्तर 0.9 s से अधिक नहीं हो पाता, अतएव यदि उच्च परिशुद्धता आवश्यक ना हो, तो एक सामान्य टर्म विश्वव्यापी समय या युनिवर्सल टाइम, प्रयोग की जा सकती है। नैमित्तिक प्रयोगों हेतु, ग्रीनविच मानक समय (GMT) भी UTC और UT1 समान ही होता है। संशय मिटाने हेतु सामायतः सविस (UTC) ही प्रयोग होता है, GMT के प्रयोग से बचा जाता है। .
स्कॉट केली एक अमरीकी अंतरिक्ष यात्री हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में लगभग एक वर्ष रहने के लिए जाने जाते हैं। केली का पहला अंतरिक्ष यान स्पेस शटल डिस्कवरी के पायलट के रूप में था, दिसंबर 1 999 में एसटीएस -103 के दौरान। यह हबल स्पेस टेलीस्कॉप के लिए तीसरा सर्विसिंग मिशन था, और यह आठ दिनों के लिए चली थी। केली का दूसरा अंतरिक्ष यान एसटीएस -118 के मिशन कमांडर के रूप में था, जो अगस्त 2007 में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए 12-दिवसीय अंतरिक्ष शटल मिशन था। केली का तीसरा अंतरिक्ष यान आईएसएस पर एक्सपीडिशन 26 के कमांडर थे। वह 9 अक्टूबर 2010 को एक रूसी सोयुज अंतरिक्ष यान पर पहुंचा, एक्सपिडिशन 25 के दौरान, और यह समाप्त होने तक एक फ्लाइट इंजीनियर के रूप में काम किया। उन्होंने 25 नवंबर 2010 को स्टेशन की कमान संभाली, 26 अभियान की शुरुआत में आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ जब अंतरिक्ष यान सोयूज़ टीएमए -19 अंडकोल्ड, स्टेशन के पिछले कमांडर डगलस एच। व्हीलॉक को ले गए। 16 मार्च 2011 को सोयुज टीएमए 01 एम के प्रस्थान के साथ अभियान 26 का समापन हुआ। यह केली की पहली लंबी अवधि अंतरिक्ष उड़ान थी नवंबर 2012 में, केली को मिखाइल कोर्नियेंको के साथ, एक विशेष 340 दिन के लिए चुना गया, ताकि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए वर्षभर का मिशन किया जा सके। अंतरिक्ष में उनका वर्ष 27 मार्च 2015 को एक्स्पिशडन 43 की शुरुआत के साथ शुरू हुआ, जिसमें निरन्तर 44 अभियान और 45 के दौरान जारी रखा गया था, जो दोनों ने केली का आदेश दिया था। उन्होंने 29 फरवरी 2016 को टिमोथी कोपरा को आदेश पारित किया, जब आईएसएस 11 महीने का मिशन समाप्त हुआ। वह 1 मार्च 2016 को सोयुज टीएमए -18 एम पर धरती पर लौट आया। अक्टूबर 2015 में, उन्होंने अंतरिक्ष के खर्च में 520 अंकों की कुल संचित संख्या के लिए रिकॉर्ड बनाया। यह रिकॉर्ड 2016 में अंतरिक्ष यात्री जैफ विलियम्स द्वारा खोला गया था। तथाकथित आईएसएस साल के लंबे मिशन के लिए, केली ने अंतरिक्ष में लगातार 340 दिन (11 महीने, 3 दिन) खर्च किए। केली के समान जुड़वां भाई, मार्क केली, एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री है केली भाई अंतरिक्ष में यात्रा करने वाले एकमात्र भाई हैं। 12 मार्च 2016 को, कैली ने अप्रैल 2016 के लिए अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा की। .
वॉयस ऑफ़ अमेरिका (अंग्रेज़ीः Voice of America (VOA)) अमेरिकी सरकार की आधिकारिक मल्टीमीडिया प्रसारण सेवा है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण सेवाओं में वॉयस आफ़ अमेरिका एक जाना-माना नाम है। अंग्रेज़ी के अतिरिक्त वीओए अन्य ४४ भाषाओं में भी प्रसारण करता है। इनमें से २५ भाषाओं पर दूरदर्शन पर भी प्रसारण होता है। आधिकारिक जालस्थल इस सेवा का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर के लोगों को विश्व के बारे में अमेरिकी दृष्टिकोण से अवगत कराना है। इस सेवा के वांछित श्रोता मात्र अमेरिका में या अमेरिकी नागरिक ही नहीं है, वरन् पूरे विश्व में इस पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों को सुना जाता है। विश्व में इस सेवा के १२.५ करोड़ श्रोता/उपयोक्ता है। वीओए से प्रतिसप्ताह लगभग १५०० घंटे के समाचार, ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। इस सेवा को उत्कृष्ट बनाने में १३०० कर्मचारियों का सहयोग होता है। वीओए का गठन १९४२ में युद्ध सूचना कार्यालय के अधीन किया गया था जिसका उद्देश्य उस समय यूरोप में चल रहे द्वितीय विश्व युद्ध के समाचारों का प्रसारण करना था। वीओए ने २१ फरवरी, १९४२ को प्रसारण आरम्भ किया। वीओए द्वारा लघुतरंग ट्रान्समीटर ट्रान्समीटरों से प्रसारण किया जाता है और वे कोलम्बिया बॉडकास्टिंग सिस्टम (सीबीएस) द्वारा उपयोग किये जाते हैं। वीओए ने १७ फरवरी, १९४७ को भूतपूर्व सोवियत संघ में भी रेडियो प्रसारण आरम्भ किया।शीत युद्ध के दौरान, वीओए को संयुक्त राज्य सूचना संस्था के अधीन रखा गया। १९८० के दशक में वीओए ने दूरदर्शन सेवा भी आरम्भ की और क्यूबा के लिए विशेष कार्यक्रमों का प्रसारण भी आरम्भ किया। वर्तमान में वीओए के २७ रेडियो प्रसारण स्टूडियो, ३३ प्रोडक्शन एवं रिकॉर्डिंग स्टूडियो, ३० व्यावसायिक मिक्सिंग एवं डबिंग स्टेशन, ४ दूरदर्शन स्टूडियो, २१ वीडियो संपादन सूट्स एवं मास्टर नियंत्रण, रिकॉर्डिंग, रीशिड्यूलिंग एवं फ़ीड इन्टेक की विभिन्न सुविधाएं हैं। इनका ३०,०००व र्ग फ़ीट का समाचार केन्द्र है जिसमें २४ घंटे, ३६५ दिन १५० से २०० समाचार रिपोर्टें प्रतिदिन सभी भाशाओं की सेवाओं एवं कार्यक्रमों के लिये कार्यरत हैं। यहां २२ अंतर्देशीय एवं १६ सूदूर संवाददातागण हैं, जिनके संग ९० अंशकालिक संवाददाता भी कार्यरत हैं, जिन्हें स्ट्रिंजर्स कहते हैं। वॉयस ऑफ अमेरिका की हिंदी सेवा को ५३ वर्षों की सेवा उपरांत ३० सितंबर २००८ को बंद कर दिया गया है। .
खगोलयात्री या अंतरिक्षयात्री या खगोलबाज़ ऐसे व्यक्ति को कहते हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल से ऊपर जाकर अंतरिक्ष में प्रवेश करे। वर्तमान काल में यह अधिकतर विश्व की कुछ सरकारों द्वारा चलाए जा रहे अंतरिक्ष शोध कार्यक्रमों के अंतर्गत अंतरिक्ष-यानों में सवार यात्रियों को कहा जाता है, हालाँकि हाल में कुछ निजी कम्पनियाँ भी अंतरिक्ष-यान में पर्यटकों को वायुमंडल से ऊपर ले जाने वाले यानों के विकास में जुटी हुई हैं। .
ओहायो (Ohio) संयुक्त राज्य अमेरिका के विशाल झीलों के क्षेत्र में एक मध्य-पश्चिमी राज्य है। राज्य का नाम ओहायो नदी से लिया गया है। 1 मार्च, 1803 को इस इलाके को 17वें राज्य के रूप में संघ में भर्ती किया गया था। कोलंबस राज्य की राजधानी है। राज्य की सीमा पूर्व में पेंसिल्वेनिया से, उत्तर पश्चिम में मिशिगन से, उत्तर में ओन्टारियो, कनाडा से, पश्चिम में इंडियाना से, दक्षिण में केंटकी से, और दक्षिण-पूर्व में वेस्ट वर्जिनिया से लगती है। ओहायो 34वां सबसे बड़ा अमेरिकी राज्य है। 2016 के अनुमान के अनुसार राज्य की आबादी 1,16,14,373 हैं जिससे उसका इस मामले में 7वां स्थान हुआ। श्रेणीःसंयुक्त राज्य अमेरिका के राज्य.
कल्पना चावला (17 मार्च 1962 - 1 फ़रवरी 2003), एक भारतीय अमरीकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थी और अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी। वे कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं। .
'येलो जैक' नामक यह ध्वज जिस जहाज पर लगा होता है उसके क्वारंटीन होने की सूचना देता है। क्वारंटीन (Quarantine) यह लैटिन मूल का शब्द है। इसका मूल अर्थ चालीस है। पुराने समय में में जिन जहाजों में किसी यात्री के रोगी होने अथवा जहाज पर लदे माल में रोग प्रसारक कीटाणु होने का संदेह होता तो उस जहाज को बंदरगाह से दूर चालीस दिन ठहरना पड़ता था। ग्रेट ब्रिटेन में प्लेग को रोकने के प्रयास के रूप में इस व्यवस्था का आरंभ हुआ। उसी व्यवस्था के अनुसार इस शब्द का प्रयोग पीछे ऐसे मनुष्यों, पशुओं और स्थानों को दूसरों से अलग रखने के सभी उपायों के लिये होने लगा जिनसे किसी प्रकार के रोग के संक्रमण की आशंका हो। क्वारंटीन का यह काल अब रोग विशेष के रोकने के लिये आवश्यक समय के अनुसार निर्धारित किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय क्वारंटीन की जाँच बंदरगाहों, हवाई अड्डों और दो देशों के बीच सीमास्थ स्थानों पर होता है। विदेश से आनेवाले सभी जहाजों की क्वारंटीन संबंधी जाँच होती है। जाँच करनेवाले अधिकारी के सम्मुख जहाज का कप्तान अपने कर्मचारियों और यात्रियों का स्वास्थ्य विवरण प्रस्तुत करता है। जहाज के रोगमुक्त घोषित किए जाने पर ही उसे बंदरगाह में प्रदेश करने की अनुमति दी जाती है। यदि जहाज में किसी प्रकार का कोई संक्रामक रोगी अथवा रोग फैलानेवाली वस्तु मौजूद हो तो जहाज को बंदरगाह से दूर ही रोक दिया जाता है और उस पर क्वारंटीन काल के समाप्त होने तक पीला झंडा फहराता रहता है। रोग संबंधी गलत सूचना देने अथवा सत्य बात छिपाने के अपराध में कप्तान का कड़ा दंड मिल सकता है। क्वारंटीन व्यवस्था के अंतर्गत आनेवाले रोगों में हैजा, ज्वर, चेचक टायफायड, कुष्ट, प्लेग प्रमुख हैं। वायुयान से यात्रा करनेवाले यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान जाने तो दिया जाता है पर रोगग्रस्त व्यक्ति पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी रहती है ताकि रोग का संक्रमण न हो सके। अनेक देशों में कतिपय रोगों का टीका लगा लेने का प्रमाण प्रस्तुत करने पर ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है। इस प्रकार के प्रवेश पत्र की जाँच वायुयान से उतरकर बाहर जाने के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी करते हैं। रोग के संक्रमण को रोकने के निमित्त नगरों, स्थानों, मकानों अथवा व्यक्ति विशेष का भी अनेक देशों में क्वारंटीन होता है। इसके लिए प्रत्येक देश के अपने अपने नियम और कानून हैं। यूरोप और अमेरिका में जिस घर में किसी संक्रामक रोग का रोगी होता है उसके द्वार पर इस आशय की नोटिस लगा दी जाती है। कहीं कहीं रोगी के साथ डाक्टर और नर्स भी अलग रखे जाते हैं। जहाँ डाक्टर या नर्स अलग नहीं रखे जाते उन्हें विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। वृक्ष और पशुओं का भी क्वारंटीन होता है। अमेरिका, कनाडा और आस्ट्रेलिया में इसका पालन बड़ी कठोरता के साथ होता है। यहाँ तक कि यदि किसी यात्री के पास ऐसा कोई फल है जिसके माध्यम से वृक्षों का रोग फैलानेवाले कीड़े आ सकते हों, तो वह फल कितना भी अच्छा क्यों न हो तत्काल नष्ट कर दिया जाता है। इसी प्रकार कुछ निर्धारित के निर्दोष लकड़ी के बक्सों में पैक किया माल ही इन देशों में प्रवेश कर सकता है। पैकिंग के बक्से के रोगी किस्म की लकड़ी से बना होने का संदेह होने पर माल सहित बक्से को नष्ट कर दिया जाता है। .
कैम्ब्रिज केमब्रिजशायर में मौजूद एक शहर है जो कि लंदन से 80 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के लिये मशहूर इस शहर में 1,23,867 जनसंख्या में से 24,488 विद्यार्थी है। श्रेणीःइंग्लैंड के शहर.
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस (CUP) कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का प्रकाशन व्यवसाय है। 1534 में हेनरी अष्ठम द्वारा इसे लेटर्स पेटेंट दिया गया था। यह दुनिया का सबसे पुराना पब्लिशिंग हाउस और दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी प्रेस (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के बाद) है। .
श्रेणीःअमेरिका के चन्द्र अभियानों की सूची.
अपोलो ११ का कर्मीदल्, बायीं ओर से, नील आर्मस्ट्रांग, कॉलिन्स और ऐल्ड्रिन अपोलो ११ (Apollo 11) वह अंतरिक्ष उड़ान थी जिसने चंद्रमा पर पहले इंसान, नील आर्मस्ट्रांग और ऐडविन "बज़" ऐल्ड्रिन.
कोई भी व्यक्ति, समूह, कंपनी या अन्य जो अमेरिका में स्थित हो। श्रेणीःअमेरिका श्रेणीःचित्र जोड़ें.
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नील एल्डन आर्मस्ट्रांग एक अमेरिकी खगोलयात्री और चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति थे। इसके अलावा वे एक एयरोस्पेस इंजीनियर, नौसेना अधिकारी, परीक्षण पायलट, और प्रोफ़ेसर भी थे। खगोलयात्री बनने से पूर्व वे नौसेना में थे। नौसेना में रहते हुए उन्होंने कोरिया युद्ध में भी हिस्सा लिया। नौसेना के बाद उन्होंने पुरुडु विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि ली और तत्पश्चात् एक ड्राइडेन फ्लाईट रिसर्च सेंटर से जुड़े और एक परीक्षण पायलट के रूप में नौ सौ से अधिक उड़ानें भरीं। यहाँ सेवायें देने के बाद उन्होंने दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से परास्नातक की उपाधि हासिल की। आर्मस्ट्रांग को मुख्यतः अपोलो अभियान के खगोलयात्री के रूप में चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। इससे पहले वे जेमिनी अभियान के दौरान भी अंतरिक्ष यात्रा कर चुके थे। अपोलो ग्यारह, वह अभियान था जिसमें जुलाई एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में पहली बार चंद्रमा पर मानव सहित कोई यान उतरा और आर्मस्ट्रांग इसके कमांडर थे। उनके अलावा इसमें बज़ एल्ड्रिन, जो चाँद पर उतरने वाले दूसरे व्यक्ति बने, और माइकल कॉलिंस जो चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाते मुख्य यान में ही बैठे रहे, शामिल थे। अपने साथियों के साथ, इस उपलब्धि के लिये आर्मस्ट्रांग को राष्ट्रपति निक्सन के हाथों प्रेसिडेंसियल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने उन्हें एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में कॉंग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर प्रदान किया और आर्मस्ट्रांग और उनके साथियों को वर्ष दो हज़ार नौ में कॉंग्रेसनल गोल्ड मेडल दिया गया। आर्मस्ट्रांग की मृत्यु, सिनसिनाती, ओहायो, में पच्चीस अगस्त दो हज़ार बारह को बयासी वर्ष की उम्र में बाईपास सर्जरी के पश्चात् हुई। . सत्रह संबंधोंः चन्द्रमा, एडगर मिशेल, एनडीटीवी खबर, बीबीसी, यूरी गगारिन, समन्वित सार्वत्रिक समय, स्कॉट केली, वॉयस ऑफ़ अमेरिका, खगोलयात्री, ओहायो, कल्पना चावला, क्वारंटीन, कैम्ब्रिज, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, अपोलो आठ, अपोलो ग्यारह, अमेरिकी। कोई विवरण नहीं। एडगर मिशेल एक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री थे, जिनका चार फरवरी, दो हज़ार सोलह को वेस्ट पाम बीच, फ्लोरिडा में निधन हो गया। वे एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में चंद्रमा से जुड़े अपोलो-चौदह मिशन के सदस्य थे। उनके साथ अपोलो-चौदह मिशन में एलन बी. एनडीटीवी खबर हिन्दी का एक ऑनलाइन समाचार पोर्टल है।। . बीबीसी या ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोंरेशन विश्व का सबसे बड़ा प्रसारण संघ है, दर्शकों की संख्या में, जिसके केवल ग्रेट ब्रिटेन में ही छब्बीस,शून्य कार्यकर्ता और बजट जीबीचार पाउंड अरब यूएससात दशमलव आठ डॉलर अरब) से अधिक है। and the motto of the BBC is Nation Shall Speak Peace Unto Nation. The BBC is a quasi-autonomous Public Corporation operating as a public service broadcaster. The Corporation is run by the BBC Trust; however, the BBC is, per its charter, to be "free from both political and commercial influence and answers only to its viewers and listeners". Its domestic programming and broadcasts are primarily funded by levying television licence fees , although money is also raised through commercial activities such as sale of merchandise and programming. The BBC World Service, however, is funded by the Foreign and Commonwealth Office. In order to justify the licence fee the BBC is expected to produce a number of high-rating shows in addition to programmes that commercial broadcasters would not normally broadcast. Quite often domestic audiences affectionately refer to the BBC as the Beeb . Auntie was a nickname used during the early years, said to originate in the somewhat old fashioned Auntie knows best attitude back when John Reith was in charge. The two terms have been used together as Auntie Beeb.--> . यूरी गगारिन , भूतपूर्व सोवियत संघ के हवाबाज़ और अंतरिक्ष यात्री थे। बारह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ इकसठ को अंतरिक्ष में जाने वाले वे प्रथम मानव थे। अन्तरिक्ष की यात्रा करने के बाद गगारिन अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित व्यक्ति बन चुके थे और उन्हें कई तरह के पदक और खिताबों से सम्मानित किया गया था। उन खिताबों में से एक ख़िताब था हीरो ऑफ़ द सोवियत यूनियन था। उन्होंने Vostok एक नामक अन्तरिक्ष यान में अपनी यात्रा की थी। एक हज़ार नौ सौ अड़सठ जब वे मिग पंद्रह नामक प्रशिक्षण विमान का संचालक कर रहे थे तो, विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण उनकी मृत्यु हो गयी। यूरी गगारिन पदक उनके सम्मान में प्रदान किया जाता है। . सार्वत्रिय समय समन्वित सार्वत्रिक समय विश्व के समय का प्राथमिक मानक है जिसके द्वारा विश्वभर में घड़ियाँ एवं समय नियंत्रित किये जाते हैं। यह ग्रीनविच माध्य समय के बहुत सारे अनुवतियों में से एक है। साधारण कार्यों की दृष्टि से समन्वित सार्वत्रिक समय और ग्रीनविच माध्य समय एक ही हैं, किन्तु ग्रीनविच माध्य समय अब वैज्ञानिक समुदाय द्वारा परिशुद्धता पूर्वक परिभाषित नहीं किया जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय परमाण्विक समय अनियमित अंतरालों पर जोड़े गये लोन सैकिण्ड सहित है। यह लोन सैकिण्ड पॄथ्वी की धीमी होती गति के कारण जोड़े जाते हैं। इनसे UTC की UTएक से समीपता बनी रहती है। UTएक औसत सौर समय है, जो कि ग्रीनविच की साही वेधशाला में देखा जाता है। UTC और UTएक के बीच का अन्तर शून्य दशमलव नौ सेकंड से अधिक नहीं हो पाता, अतएव यदि उच्च परिशुद्धता आवश्यक ना हो, तो एक सामान्य टर्म विश्वव्यापी समय या युनिवर्सल टाइम, प्रयोग की जा सकती है। नैमित्तिक प्रयोगों हेतु, ग्रीनविच मानक समय भी UTC और UTएक समान ही होता है। संशय मिटाने हेतु सामायतः सविस ही प्रयोग होता है, GMT के प्रयोग से बचा जाता है। . स्कॉट केली एक अमरीकी अंतरिक्ष यात्री हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में लगभग एक वर्ष रहने के लिए जाने जाते हैं। केली का पहला अंतरिक्ष यान स्पेस शटल डिस्कवरी के पायलट के रूप में था, दिसंबर एक नौ सौ निन्यानवे में एसटीएस -एक सौ तीन के दौरान। यह हबल स्पेस टेलीस्कॉप के लिए तीसरा सर्विसिंग मिशन था, और यह आठ दिनों के लिए चली थी। केली का दूसरा अंतरिक्ष यान एसटीएस -एक सौ अट्ठारह के मिशन कमांडर के रूप में था, जो अगस्त दो हज़ार सात में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए बारह-दिवसीय अंतरिक्ष शटल मिशन था। केली का तीसरा अंतरिक्ष यान आईएसएस पर एक्सपीडिशन छब्बीस के कमांडर थे। वह नौ अक्टूबर दो हज़ार दस को एक रूसी सोयुज अंतरिक्ष यान पर पहुंचा, एक्सपिडिशन पच्चीस के दौरान, और यह समाप्त होने तक एक फ्लाइट इंजीनियर के रूप में काम किया। उन्होंने पच्चीस नवंबर दो हज़ार दस को स्टेशन की कमान संभाली, छब्बीस अभियान की शुरुआत में आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ जब अंतरिक्ष यान सोयूज़ टीएमए -उन्नीस अंडकोल्ड, स्टेशन के पिछले कमांडर डगलस एच। व्हीलॉक को ले गए। सोलह मार्च दो हज़ार ग्यारह को सोयुज टीएमए एक एम के प्रस्थान के साथ अभियान छब्बीस का समापन हुआ। यह केली की पहली लंबी अवधि अंतरिक्ष उड़ान थी नवंबर दो हज़ार बारह में, केली को मिखाइल कोर्नियेंको के साथ, एक विशेष तीन सौ चालीस दिन के लिए चुना गया, ताकि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए वर्षभर का मिशन किया जा सके। अंतरिक्ष में उनका वर्ष सत्ताईस मार्च दो हज़ार पंद्रह को एक्स्पिशडन तैंतालीस की शुरुआत के साथ शुरू हुआ, जिसमें निरन्तर चौंतालीस अभियान और पैंतालीस के दौरान जारी रखा गया था, जो दोनों ने केली का आदेश दिया था। उन्होंने उनतीस फरवरी दो हज़ार सोलह को टिमोथी कोपरा को आदेश पारित किया, जब आईएसएस ग्यारह महीने का मिशन समाप्त हुआ। वह एक मार्च दो हज़ार सोलह को सोयुज टीएमए -अट्ठारह एम पर धरती पर लौट आया। अक्टूबर दो हज़ार पंद्रह में, उन्होंने अंतरिक्ष के खर्च में पाँच सौ बीस अंकों की कुल संचित संख्या के लिए रिकॉर्ड बनाया। यह रिकॉर्ड दो हज़ार सोलह में अंतरिक्ष यात्री जैफ विलियम्स द्वारा खोला गया था। तथाकथित आईएसएस साल के लंबे मिशन के लिए, केली ने अंतरिक्ष में लगातार तीन सौ चालीस दिन खर्च किए। केली के समान जुड़वां भाई, मार्क केली, एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री है केली भाई अंतरिक्ष में यात्रा करने वाले एकमात्र भाई हैं। बारह मार्च दो हज़ार सोलह को, कैली ने अप्रैल दो हज़ार सोलह के लिए अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा की। . वॉयस ऑफ़ अमेरिका ) अमेरिकी सरकार की आधिकारिक मल्टीमीडिया प्रसारण सेवा है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण सेवाओं में वॉयस आफ़ अमेरिका एक जाना-माना नाम है। अंग्रेज़ी के अतिरिक्त वीओए अन्य चौंतालीस भाषाओं में भी प्रसारण करता है। इनमें से पच्चीस भाषाओं पर दूरदर्शन पर भी प्रसारण होता है। आधिकारिक जालस्थल इस सेवा का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर के लोगों को विश्व के बारे में अमेरिकी दृष्टिकोण से अवगत कराना है। इस सेवा के वांछित श्रोता मात्र अमेरिका में या अमेरिकी नागरिक ही नहीं है, वरन् पूरे विश्व में इस पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों को सुना जाता है। विश्व में इस सेवा के बारह.पाँच करोड़ श्रोता/उपयोक्ता है। वीओए से प्रतिसप्ताह लगभग एक हज़ार पाँच सौ घंटाटे के समाचार, ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। इस सेवा को उत्कृष्ट बनाने में एक हज़ार तीन सौ कर्मचारियों का सहयोग होता है। वीओए का गठन एक हज़ार नौ सौ बयालीस में युद्ध सूचना कार्यालय के अधीन किया गया था जिसका उद्देश्य उस समय यूरोप में चल रहे द्वितीय विश्व युद्ध के समाचारों का प्रसारण करना था। वीओए ने इक्कीस फरवरी, एक हज़ार नौ सौ बयालीस को प्रसारण आरम्भ किया। वीओए द्वारा लघुतरंग ट्रान्समीटर ट्रान्समीटरों से प्रसारण किया जाता है और वे कोलम्बिया बॉडकास्टिंग सिस्टम द्वारा उपयोग किये जाते हैं। वीओए ने सत्रह फरवरी, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को भूतपूर्व सोवियत संघ में भी रेडियो प्रसारण आरम्भ किया।शीत युद्ध के दौरान, वीओए को संयुक्त राज्य सूचना संस्था के अधीन रखा गया। एक हज़ार नौ सौ अस्सी के दशक में वीओए ने दूरदर्शन सेवा भी आरम्भ की और क्यूबा के लिए विशेष कार्यक्रमों का प्रसारण भी आरम्भ किया। वर्तमान में वीओए के सत्ताईस रेडियो प्रसारण स्टूडियो, तैंतीस प्रोडक्शन एवं रिकॉर्डिंग स्टूडियो, तीस व्यावसायिक मिक्सिंग एवं डबिंग स्टेशन, चार दूरदर्शन स्टूडियो, इक्कीस वीडियो संपादन सूट्स एवं मास्टर नियंत्रण, रिकॉर्डिंग, रीशिड्यूलिंग एवं फ़ीड इन्टेक की विभिन्न सुविधाएं हैं। इनका तीस,शून्यव र्ग फ़ीट का समाचार केन्द्र है जिसमें चौबीस घंटाटे, तीन सौ पैंसठ दिन एक सौ पचास से दो सौ समाचार रिपोर्टें प्रतिदिन सभी भाशाओं की सेवाओं एवं कार्यक्रमों के लिये कार्यरत हैं। यहां बाईस अंतर्देशीय एवं सोलह सूदूर संवाददातागण हैं, जिनके संग नब्बे अंशकालिक संवाददाता भी कार्यरत हैं, जिन्हें स्ट्रिंजर्स कहते हैं। वॉयस ऑफ अमेरिका की हिंदी सेवा को तिरेपन वर्षों की सेवा उपरांत तीस सितंबर दो हज़ार आठ को बंद कर दिया गया है। . खगोलयात्री या अंतरिक्षयात्री या खगोलबाज़ ऐसे व्यक्ति को कहते हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल से ऊपर जाकर अंतरिक्ष में प्रवेश करे। वर्तमान काल में यह अधिकतर विश्व की कुछ सरकारों द्वारा चलाए जा रहे अंतरिक्ष शोध कार्यक्रमों के अंतर्गत अंतरिक्ष-यानों में सवार यात्रियों को कहा जाता है, हालाँकि हाल में कुछ निजी कम्पनियाँ भी अंतरिक्ष-यान में पर्यटकों को वायुमंडल से ऊपर ले जाने वाले यानों के विकास में जुटी हुई हैं। . ओहायो संयुक्त राज्य अमेरिका के विशाल झीलों के क्षेत्र में एक मध्य-पश्चिमी राज्य है। राज्य का नाम ओहायो नदी से लिया गया है। एक मार्च, एक हज़ार आठ सौ तीन को इस इलाके को सत्रहवें राज्य के रूप में संघ में भर्ती किया गया था। कोलंबस राज्य की राजधानी है। राज्य की सीमा पूर्व में पेंसिल्वेनिया से, उत्तर पश्चिम में मिशिगन से, उत्तर में ओन्टारियो, कनाडा से, पश्चिम में इंडियाना से, दक्षिण में केंटकी से, और दक्षिण-पूर्व में वेस्ट वर्जिनिया से लगती है। ओहायो चौंतीसवां सबसे बड़ा अमेरिकी राज्य है। दो हज़ार सोलह के अनुमान के अनुसार राज्य की आबादी एक,सोलह,चौदह,तीन सौ तिहत्तर हैं जिससे उसका इस मामले में सातवां स्थान हुआ। श्रेणीःसंयुक्त राज्य अमेरिका के राज्य. कल्पना चावला , एक भारतीय अमरीकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थी और अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी। वे कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं। . 'येलो जैक' नामक यह ध्वज जिस जहाज पर लगा होता है उसके क्वारंटीन होने की सूचना देता है। क्वारंटीन यह लैटिन मूल का शब्द है। इसका मूल अर्थ चालीस है। पुराने समय में में जिन जहाजों में किसी यात्री के रोगी होने अथवा जहाज पर लदे माल में रोग प्रसारक कीटाणु होने का संदेह होता तो उस जहाज को बंदरगाह से दूर चालीस दिन ठहरना पड़ता था। ग्रेट ब्रिटेन में प्लेग को रोकने के प्रयास के रूप में इस व्यवस्था का आरंभ हुआ। उसी व्यवस्था के अनुसार इस शब्द का प्रयोग पीछे ऐसे मनुष्यों, पशुओं और स्थानों को दूसरों से अलग रखने के सभी उपायों के लिये होने लगा जिनसे किसी प्रकार के रोग के संक्रमण की आशंका हो। क्वारंटीन का यह काल अब रोग विशेष के रोकने के लिये आवश्यक समय के अनुसार निर्धारित किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय क्वारंटीन की जाँच बंदरगाहों, हवाई अड्डों और दो देशों के बीच सीमास्थ स्थानों पर होता है। विदेश से आनेवाले सभी जहाजों की क्वारंटीन संबंधी जाँच होती है। जाँच करनेवाले अधिकारी के सम्मुख जहाज का कप्तान अपने कर्मचारियों और यात्रियों का स्वास्थ्य विवरण प्रस्तुत करता है। जहाज के रोगमुक्त घोषित किए जाने पर ही उसे बंदरगाह में प्रदेश करने की अनुमति दी जाती है। यदि जहाज में किसी प्रकार का कोई संक्रामक रोगी अथवा रोग फैलानेवाली वस्तु मौजूद हो तो जहाज को बंदरगाह से दूर ही रोक दिया जाता है और उस पर क्वारंटीन काल के समाप्त होने तक पीला झंडा फहराता रहता है। रोग संबंधी गलत सूचना देने अथवा सत्य बात छिपाने के अपराध में कप्तान का कड़ा दंड मिल सकता है। क्वारंटीन व्यवस्था के अंतर्गत आनेवाले रोगों में हैजा, ज्वर, चेचक टायफायड, कुष्ट, प्लेग प्रमुख हैं। वायुयान से यात्रा करनेवाले यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान जाने तो दिया जाता है पर रोगग्रस्त व्यक्ति पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी रहती है ताकि रोग का संक्रमण न हो सके। अनेक देशों में कतिपय रोगों का टीका लगा लेने का प्रमाण प्रस्तुत करने पर ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है। इस प्रकार के प्रवेश पत्र की जाँच वायुयान से उतरकर बाहर जाने के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी करते हैं। रोग के संक्रमण को रोकने के निमित्त नगरों, स्थानों, मकानों अथवा व्यक्ति विशेष का भी अनेक देशों में क्वारंटीन होता है। इसके लिए प्रत्येक देश के अपने अपने नियम और कानून हैं। यूरोप और अमेरिका में जिस घर में किसी संक्रामक रोग का रोगी होता है उसके द्वार पर इस आशय की नोटिस लगा दी जाती है। कहीं कहीं रोगी के साथ डाक्टर और नर्स भी अलग रखे जाते हैं। जहाँ डाक्टर या नर्स अलग नहीं रखे जाते उन्हें विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। वृक्ष और पशुओं का भी क्वारंटीन होता है। अमेरिका, कनाडा और आस्ट्रेलिया में इसका पालन बड़ी कठोरता के साथ होता है। यहाँ तक कि यदि किसी यात्री के पास ऐसा कोई फल है जिसके माध्यम से वृक्षों का रोग फैलानेवाले कीड़े आ सकते हों, तो वह फल कितना भी अच्छा क्यों न हो तत्काल नष्ट कर दिया जाता है। इसी प्रकार कुछ निर्धारित के निर्दोष लकड़ी के बक्सों में पैक किया माल ही इन देशों में प्रवेश कर सकता है। पैकिंग के बक्से के रोगी किस्म की लकड़ी से बना होने का संदेह होने पर माल सहित बक्से को नष्ट कर दिया जाता है। . कैम्ब्रिज केमब्रिजशायर में मौजूद एक शहर है जो कि लंदन से अस्सी किलोग्राममीटर उत्तर में स्थित है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के लिये मशहूर इस शहर में एक,तेईस,आठ सौ सरसठ जनसंख्या में से चौबीस,चार सौ अठासी विद्यार्थी है। श्रेणीःइंग्लैंड के शहर. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का प्रकाशन व्यवसाय है। एक हज़ार पाँच सौ चौंतीस में हेनरी अष्ठम द्वारा इसे लेटर्स पेटेंट दिया गया था। यह दुनिया का सबसे पुराना पब्लिशिंग हाउस और दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी प्रेस है। . श्रेणीःअमेरिका के चन्द्र अभियानों की सूची. अपोलो ग्यारह का कर्मीदल्, बायीं ओर से, नील आर्मस्ट्रांग, कॉलिन्स और ऐल्ड्रिन अपोलो ग्यारह वह अंतरिक्ष उड़ान थी जिसने चंद्रमा पर पहले इंसान, नील आर्मस्ट्रांग और ऐडविन "बज़" ऐल्ड्रिन. कोई भी व्यक्ति, समूह, कंपनी या अन्य जो अमेरिका में स्थित हो। श्रेणीःअमेरिका श्रेणीःचित्र जोड़ें.
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पर्यटन मंत्रालय ने आज राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली में स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मनाया और स्मारक में पर्यटन क्षेत्र से संबंधित हितधारकों के दौरे का आयोजन किया। पर्यटन मंत्रालय ने शहीदों के 7 परिजनों को सम्मानित किया। मेहमान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के दौरे पर भी गए और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में हर दिन मनाये जाने वाले 'पुष्पांजलि समारोह' में भी शामिल हुए। एक शहीद सैनिक के परिजनों को स्मारक पर माल्यार्पण कर सैनिकों को सम्मान देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। शाम का समापन सूर्यास्त से पहले बीटिंग द रिट्रीट ड्रिल के साथ हुआ। श्री अरविंद सिंह, सचिव, पर्यटन मंत्रालय ने इस दौरे में ट्रैवल, कारोबार, छात्रों, अतुल्य भारत टूरिस्ट गाइड, ट्रैवल ब्लॉगर्स/इन्फ्लुएंसर्स और हितधारकों की करीब 150 लोगों की सभा का नेतृत्व किया। कार्यक्रम के आयोजन में कर्नल आकाश खज़ांची और उनकी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक टीम ने सहयोग किया।
श्री अरविंद सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर रिट्रीट समारोह में भाग लिया और उन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने युद्ध के दौरान वीरता के विशिष्ट कार्य प्रदर्शित किए और राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी । इस अवसर पर श्री अरविंद सिंह ने कहा कि हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और हम अमृत काल (भारत की आजादी के 75 वें वर्ष) में प्रवेश करने जा रहे हैं, मैं सभी से अपील करता हूं कि अमृत काल के दौरान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आकर देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करें।
राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में 40 एकड़ में फैला, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक उन सभी सैनिकों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने निडर होकर भारत के लिए लड़ाई लड़ी और अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। 25 फरवरी 2019 को उद्घाटन किया गया स्मारक राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में अमर जवान ज्योति की शाश्वत लौ के साथ एक राष्ट्रीय गौरव के रूप में खड़ा है जो अपने सैनिकों के प्रति ऋणी राष्ट्र को दर्शाता है।
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण पुलवामा हमले के 40 शहीदों के गृहनगर की मिट्टी सहित पूरे भारत के 144 सेना के शहीदों के गृहनगर की मिट्टी से युक्त 144 मिट्टी के बर्तनों को श्रद्धांजलि देना था। बैंगलोर के श्री उमेश गोपीनाथ जादव ने सड़क मार्ग से 1.15 लाख किलोमीटर से अधिक की यात्रा की और पूरे भारत में 144 शहीदों के परिवारों से मुलाकात की और "भारत की मिट्टी का सम्मान" यात्रा के रूप में उनके घर के बाहर से मिट्टी एकत्र की। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के अंदर राष्ट्र की ओर से सम्मान के प्रतीक के रूप में इन मिट्टी के पात्रों को प्रदर्शित किया गया था।
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Posted On: पर्यटन मंत्रालय ने आज राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली में स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मनाया और स्मारक में पर्यटन क्षेत्र से संबंधित हितधारकों के दौरे का आयोजन किया। पर्यटन मंत्रालय ने शहीदों के सात परिजनों को सम्मानित किया। मेहमान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के दौरे पर भी गए और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में हर दिन मनाये जाने वाले 'पुष्पांजलि समारोह' में भी शामिल हुए। एक शहीद सैनिक के परिजनों को स्मारक पर माल्यार्पण कर सैनिकों को सम्मान देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। शाम का समापन सूर्यास्त से पहले बीटिंग द रिट्रीट ड्रिल के साथ हुआ। श्री अरविंद सिंह, सचिव, पर्यटन मंत्रालय ने इस दौरे में ट्रैवल, कारोबार, छात्रों, अतुल्य भारत टूरिस्ट गाइड, ट्रैवल ब्लॉगर्स/इन्फ्लुएंसर्स और हितधारकों की करीब एक सौ पचास लोगों की सभा का नेतृत्व किया। कार्यक्रम के आयोजन में कर्नल आकाश खज़ांची और उनकी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक टीम ने सहयोग किया। श्री अरविंद सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर रिट्रीट समारोह में भाग लिया और उन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने युद्ध के दौरान वीरता के विशिष्ट कार्य प्रदर्शित किए और राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी । इस अवसर पर श्री अरविंद सिंह ने कहा कि हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और हम अमृत काल में प्रवेश करने जा रहे हैं, मैं सभी से अपील करता हूं कि अमृत काल के दौरान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आकर देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करें। राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में चालीस एकड़ में फैला, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक उन सभी सैनिकों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने निडर होकर भारत के लिए लड़ाई लड़ी और अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। पच्चीस फरवरी दो हज़ार उन्नीस को उद्घाटन किया गया स्मारक राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में अमर जवान ज्योति की शाश्वत लौ के साथ एक राष्ट्रीय गौरव के रूप में खड़ा है जो अपने सैनिकों के प्रति ऋणी राष्ट्र को दर्शाता है। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण पुलवामा हमले के चालीस शहीदों के गृहनगर की मिट्टी सहित पूरे भारत के एक सौ चौंतालीस सेना के शहीदों के गृहनगर की मिट्टी से युक्त एक सौ चौंतालीस मिट्टी के बर्तनों को श्रद्धांजलि देना था। बैंगलोर के श्री उमेश गोपीनाथ जादव ने सड़क मार्ग से एक.पंद्रह लाख किलोमीटर से अधिक की यात्रा की और पूरे भारत में एक सौ चौंतालीस शहीदों के परिवारों से मुलाकात की और "भारत की मिट्टी का सम्मान" यात्रा के रूप में उनके घर के बाहर से मिट्टी एकत्र की। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के अंदर राष्ट्र की ओर से सम्मान के प्रतीक के रूप में इन मिट्टी के पात्रों को प्रदर्शित किया गया था।
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पदों का विवरण : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने 26 प्रशिक्षण अधिकारी पदों पर भर्ती को लेकर ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं।
योग्यता : भर्ती नोटिफिकेशन के अनुसार इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएट्स होनी चाहिए।
आयु सीमा : आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष, जबकि अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित किया गया हैं।
आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर नोटिश को पढ़ें और आवेदन करें।
आवेदन की तिथि : 19 अप्रैल से 19 मई तक।
वेतनमान : 35400-112400 रुपया प्रतिमाह।
नौकरी करने का स्थान : झारखण्ड।
आवेदन शुल्क : GEN/ OBC के लिए 100/-रुपया और SC/ ST के लिए 50/- रुपया।
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पदों का विवरण : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने छब्बीस प्रशिक्षण अधिकारी पदों पर भर्ती को लेकर ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। योग्यता : भर्ती नोटिफिकेशन के अनुसार इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएट्स होनी चाहिए। आयु सीमा : आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु सीमा इक्कीस वर्ष, जबकि अधिकतम आयु सीमा पैंतीस वर्ष निर्धारित किया गया हैं। आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर नोटिश को पढ़ें और आवेदन करें। आवेदन की तिथि : उन्नीस अप्रैल से उन्नीस मई तक। वेतनमान : पैंतीस हज़ार चार सौ-एक लाख बारह हज़ार चार सौ रुपयापया प्रतिमाह। नौकरी करने का स्थान : झारखण्ड। आवेदन शुल्क : GEN/ OBC के लिए एक सौ/-रुपया और SC/ ST के लिए पचास/- रुपया।
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यूरोपीय संघ के संगठन को गु्रप ऑफ 20 कहा जाता है। अर्जेंटीना,
ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनिशया, इटली,
जापान, मैक्सिको, रूस, सउदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की,
ब्रिटेन और अमेरिका इस समूह के सदस्य हैं। यह भी पढ़े : एनडीए के राष्ट्रपति कैंडिडेट रामनाथ कोविंद का कानपुर से क्या है नाता, जानें यहां ?
हैम्बर्ग सम्मेलन की मेजबान और जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की जन्मभूमि होने के साथ-साथ वामपंथी कट्टरपंथियों का सरकार विरोधी गढ़ भी है। इस सम्मेलन से पहले कम-से-कम 30 प्रदर्शन होने की उम्मीद है। जिसमें पूंजीवाद विरोधी समूहों के सदस्यों समेत हजारों लोगों के हिस्सा लेने की संभावना है।
यह भी पढ़े : एनडीए के राष्ट्रपति कैंडिडेट रामनाथ कोविंद का कानपुर से क्या है नाता, जानें यहां ?
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यूरोपीय संघ के संगठन को गु्रप ऑफ बीस कहा जाता है। अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनिशया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सउदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका इस समूह के सदस्य हैं। यह भी पढ़े : एनडीए के राष्ट्रपति कैंडिडेट रामनाथ कोविंद का कानपुर से क्या है नाता, जानें यहां ? हैम्बर्ग सम्मेलन की मेजबान और जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की जन्मभूमि होने के साथ-साथ वामपंथी कट्टरपंथियों का सरकार विरोधी गढ़ भी है। इस सम्मेलन से पहले कम-से-कम तीस प्रदर्शन होने की उम्मीद है। जिसमें पूंजीवाद विरोधी समूहों के सदस्यों समेत हजारों लोगों के हिस्सा लेने की संभावना है। यह भी पढ़े : एनडीए के राष्ट्रपति कैंडिडेट रामनाथ कोविंद का कानपुर से क्या है नाता, जानें यहां ?
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नई दिल्ली, 30 जुलाई, दस्तक (ब्यूरो) : कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सोनिया गांधी को गुरुवार की शाम को करीब सात बजे अस्पताल लाया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। अस्पताल बोर्ड के चेयरमैन डॉ डीएस राणा ने बताया कि सोनिया गांधी को नियमित चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती हुईं हैं। उनकी हालत बिल्कुल सामान्य है।
इधर, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी को पेट में संक्रमण के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष राणा ने बताया है कि उनकी हालत अभी ठीक है। नियमित जांच व कुछ टेस्ट किए जाएंगे।
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नई दिल्ली, तीस जुलाई, दस्तक : कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सोनिया गांधी को गुरुवार की शाम को करीब सात बजे अस्पताल लाया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। अस्पताल बोर्ड के चेयरमैन डॉ डीएस राणा ने बताया कि सोनिया गांधी को नियमित चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती हुईं हैं। उनकी हालत बिल्कुल सामान्य है। इधर, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी को पेट में संक्रमण के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष राणा ने बताया है कि उनकी हालत अभी ठीक है। नियमित जांच व कुछ टेस्ट किए जाएंगे।
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यशकी उत्पत्ति और तिथिक्रम
वशावली सम्बन्धी इन ताम्रपनका विश्लेषण करनेपर यह स्पष्ट है कि थोडे बहुत अन्तरके अतिरिक्त समीम साम्य है। इसप्रकार दानपत्र ४ तथा ३ में जो अत्यल्प अन्तर है, वह नगण्य है । ५वे दानपत्रका प्रथम पत्र उन्ही राजाओवा उल्लेख करता है जिनका विवरण दानपत्रकी ४ क्रमसंख्याके सातव पत्रमं मिलता है। इन दोनोम ही जयसिंहका नामोल्लेख नहीं हुआ है। छठवें दानपत्रके प्रथम पत्रवी वशावली तया विक्रम संवत् १२८३के पूर्व दानपत्रमं उल्लिखित वशवृक्षमं जयसिंह के विवरण के अतिरिक्त कोई अन्तर नही । दानपत्र ७१ तथा वि० स० १२८३के ५वे दानपत्रमे वि० स० १२६३के ३रे दानपत्रके अनुसार जयसिंह तथा भूलराज द्वितीयका विवरण है। दानपत्र = १को वशावली तथा वि० स० १२८८ के ७ने दानपत्रमे भी साम्य है। कुछ अन्तर है तो इतना ही वि एकमें मूलराज द्वितीयकी तुलना म्लेच्छोके अन्धवारसे व्याप्त ससारमे प्रकाश फैलानेवाले प्रात रविले की गयी है । दानपत्र १ १वी वशावलीका क्रम वि० स० १२६५ के ८वें दानपत्रसे प्राय. मिलता जुलता है। अन्तर एक्मे केवल यह है कि चौलुक्य वशके नवम राजा अजयपालको महामाहेश्वरकी उपाधि दी गयी है । इसीप्रकार दानपत्र संख्या १००१यो वशावली तथा वि० स० १९६६ के दानलेखमें वशके ग्यारह राजाओको नामावलीमै साम्य हूँ। प्रथममें त्रिभुवनपालदेववा नाम नही है ।
बुमारपालके समयको वडनगर प्रदशस्ति तथा प्राची शिलालेखोमे घौलुक्य राजाओकी वशावली कुमारपाल तक दी हुई है । वडनगर प्रशस्तिमे गुजरातने चौलुक्य राजाओवाश्रम इस प्रकार है- १. मूलराज, २ उसका पुत्र चामुडराज, ३ उसका पुत्र वल्लभराज, ४. उसका भाई दुर्लभराज, ५ भीमदेव, ६ उसका पुत्र वर्ण, ७ उसका पुत्र जयसिंह सिद्धराज और ८. कुमारपाल । प्राची शिलालेसमें चौलुक्य राजाओंकी यही वशावली कुमारपाल तक अपित हूँ । अन्तर घेवल इतना है कि इसमें वल्लभराजवा नामोल्लेस नहीं हुआ है।
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यशकी उत्पत्ति और तिथिक्रम वशावली सम्बन्धी इन ताम्रपनका विश्लेषण करनेपर यह स्पष्ट है कि थोडे बहुत अन्तरके अतिरिक्त समीम साम्य है। इसप्रकार दानपत्र चार तथा तीन में जो अत्यल्प अन्तर है, वह नगण्य है । पाँचवे दानपत्रका प्रथम पत्र उन्ही राजाओवा उल्लेख करता है जिनका विवरण दानपत्रकी चार क्रमसंख्याके सातव पत्रमं मिलता है। इन दोनोम ही जयसिंहका नामोल्लेख नहीं हुआ है। छठवें दानपत्रके प्रथम पत्रवी वशावली तया विक्रम संवत् एक हज़ार दो सौ तिरासीके पूर्व दानपत्रमं उल्लिखित वशवृक्षमं जयसिंह के विवरण के अतिरिक्त कोई अन्तर नही । दानपत्र इकहत्तर तथा विशून्य सशून्य एक हज़ार दो सौ तिरासीके पाँचवे दानपत्रमे विशून्य सशून्य एक हज़ार दो सौ तिरेसठके तीनरे दानपत्रके अनुसार जयसिंह तथा भूलराज द्वितीयका विवरण है। दानपत्र = एकको वशावली तथा विशून्य सशून्य एक हज़ार दो सौ अठासी के सातने दानपत्रमे भी साम्य है। कुछ अन्तर है तो इतना ही वि एकमें मूलराज द्वितीयकी तुलना म्लेच्छोके अन्धवारसे व्याप्त ससारमे प्रकाश फैलानेवाले प्रात रविले की गयी है । दानपत्र एक एकवी वशावलीका क्रम विशून्य सशून्य एक हज़ार दो सौ पैंसठ के आठवें दानपत्रसे प्राय. मिलता जुलता है। अन्तर एक्मे केवल यह है कि चौलुक्य वशके नवम राजा अजयपालको महामाहेश्वरकी उपाधि दी गयी है । इसीप्रकार दानपत्र संख्या एक हज़ार एकयो वशावली तथा विशून्य सशून्य एक हज़ार नौ सौ छयासठ के दानलेखमें वशके ग्यारह राजाओको नामावलीमै साम्य हूँ। प्रथममें त्रिभुवनपालदेववा नाम नही है । बुमारपालके समयको वडनगर प्रदशस्ति तथा प्राची शिलालेखोमे घौलुक्य राजाओकी वशावली कुमारपाल तक दी हुई है । वडनगर प्रशस्तिमे गुजरातने चौलुक्य राजाओवाश्रम इस प्रकार है- एक. मूलराज, दो उसका पुत्र चामुडराज, तीन उसका पुत्र वल्लभराज, चार. उसका भाई दुर्लभराज, पाँच भीमदेव, छः उसका पुत्र वर्ण, सात उसका पुत्र जयसिंह सिद्धराज और आठ. कुमारपाल । प्राची शिलालेसमें चौलुक्य राजाओंकी यही वशावली कुमारपाल तक अपित हूँ । अन्तर घेवल इतना है कि इसमें वल्लभराजवा नामोल्लेस नहीं हुआ है।
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सन्न लोग १" प्रतिमा ने संशयात्मक स्वर में पूछा ?
'सभी तो' नवीन पत्नों का संशय निवारण करते हुए कहने लगा, "उड़ाकू युवक मुख्य कारक है और शेष सत्र लोग जो उसे प्रोत्साहन दे रहे हैं, गौण कारक हैं।"
" ये तो हुए दो पूरे बने हुए चित्र, बाकी रहे धूरे । उनके पूरा होने पर मैं पुनः आपको कष्ट दूंगा। अब चलिये चाय पीजिये ।" गगन ने कहा ।
चित्रों की चर्चा करते हुए सब लोग अपने अपने स्थानों पर बैठे और गगन ने नौकर को चाय ले आने की आज्ञा दी। कुछ ही क्षणों में सब के सम्मुख छोटी तिपाइयाँ रख दी गई और देखते ही देखते चाय का सन्त्र सामान सजा दिया गया। चाय ढालने का काम प्रतिमा और तारा ने सँभाल लिया !
जब सब के प्याले बन गये तो तारा ने पूछा, "क्या यह विनाशकारक लीला हमें अवश्य देखनी होगी ? क्या इससे बचने का कोई साधन नहीं हो सकता ?"
'साधन" गगन ने जवाब दिया हो सकता था, यदि हम सिता की बेड़ियों में बँधे न होते । यदि हम स्वतंत्र होते तो हमें क्या पड़ी थी इस साम्राज्यवादी युद्ध में उलझने की ।
• यह तो ठीक है पर अब तो हमें यह अग्नि-परीक्षा देनी ही होगी। हमारे ऊपर किसी भी क्षण बम-वृष्टि हो सकती है ।" रमेश यह कह कर चुप हो गया ।
किंतु अभी तक शत्रु चुप क्यों है ?" तारा ने पूछा ।
क्या इन अफवाहों में कुछ सचाई नहीं है कि मुभाष बोस उनके
साथ है और इसी कारण हम बचे हुए हैं। प्रतिमा बोली ।" "हो सकता है सुभाष बोस उनके साथ हो, पर वर्मा हन बच न सकेंगे ।" रमेश ने कहा ।
"क्यों नहीं ?" नवीन के स्वर में थोड़ी उत्तेजना थी ।
"इसलिए" श्रम के गनन कहने लगा कि हमारी संगति ऐसी के साथ है जिन पर शत्रु दया नहीं दिखला सकता।"
इसके अनंतर बातचीत का तार विवियदि पर बने यम और कुछ देर के लिए उसमें की कता जाती थी। फिर सवीन एकाएक बोल उठा, मानो कोई भूली हुई बात याद आई हो। रमेश, भला शैला का कुछ पता चला ? क्या वह यहां है ?"
रमेश को यह प्रसंग अच्छा न लगा. पर जवान तो उसे देना ही था, "हाँ तुम ठीक कह रहे थे । वह आज कल यहीं है।" "क्या तुम ने भी उसे देखा है ?"
"देखा तो नहीं, पर टेलीफोन पर बातचीत हुई है।" "ऋच्छा ?:
"और भैया " इस चार तारा ने कहा, "कल वह हमारे यहाँ चा
रही है ।
"तुम्हारे यहाँ !" प्रतिमा ने विस्मित त्वर से कदा । 'हाँ !"
' रमेश, क्या तुम उसको घर ला रहे हो ?" नवीन की चारणी में थोड़ा क्रोध था ।
इससे पहले कि रमेश कुछ कहे तारा ने कहना आरंभ कर दिया, " ये नहीं ला रहे । वह स्वयं आना चाहती है और मैं भी अपनी
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सन्न लोग एक" प्रतिमा ने संशयात्मक स्वर में पूछा ? 'सभी तो' नवीन पत्नों का संशय निवारण करते हुए कहने लगा, "उड़ाकू युवक मुख्य कारक है और शेष सत्र लोग जो उसे प्रोत्साहन दे रहे हैं, गौण कारक हैं।" " ये तो हुए दो पूरे बने हुए चित्र, बाकी रहे धूरे । उनके पूरा होने पर मैं पुनः आपको कष्ट दूंगा। अब चलिये चाय पीजिये ।" गगन ने कहा । चित्रों की चर्चा करते हुए सब लोग अपने अपने स्थानों पर बैठे और गगन ने नौकर को चाय ले आने की आज्ञा दी। कुछ ही क्षणों में सब के सम्मुख छोटी तिपाइयाँ रख दी गई और देखते ही देखते चाय का सन्त्र सामान सजा दिया गया। चाय ढालने का काम प्रतिमा और तारा ने सँभाल लिया ! जब सब के प्याले बन गये तो तारा ने पूछा, "क्या यह विनाशकारक लीला हमें अवश्य देखनी होगी ? क्या इससे बचने का कोई साधन नहीं हो सकता ?" 'साधन" गगन ने जवाब दिया हो सकता था, यदि हम सिता की बेड़ियों में बँधे न होते । यदि हम स्वतंत्र होते तो हमें क्या पड़ी थी इस साम्राज्यवादी युद्ध में उलझने की । • यह तो ठीक है पर अब तो हमें यह अग्नि-परीक्षा देनी ही होगी। हमारे ऊपर किसी भी क्षण बम-वृष्टि हो सकती है ।" रमेश यह कह कर चुप हो गया । किंतु अभी तक शत्रु चुप क्यों है ?" तारा ने पूछा । क्या इन अफवाहों में कुछ सचाई नहीं है कि मुभाष बोस उनके साथ है और इसी कारण हम बचे हुए हैं। प्रतिमा बोली ।" "हो सकता है सुभाष बोस उनके साथ हो, पर वर्मा हन बच न सकेंगे ।" रमेश ने कहा । "क्यों नहीं ?" नवीन के स्वर में थोड़ी उत्तेजना थी । "इसलिए" श्रम के गनन कहने लगा कि हमारी संगति ऐसी के साथ है जिन पर शत्रु दया नहीं दिखला सकता।" इसके अनंतर बातचीत का तार विवियदि पर बने यम और कुछ देर के लिए उसमें की कता जाती थी। फिर सवीन एकाएक बोल उठा, मानो कोई भूली हुई बात याद आई हो। रमेश, भला शैला का कुछ पता चला ? क्या वह यहां है ?" रमेश को यह प्रसंग अच्छा न लगा. पर जवान तो उसे देना ही था, "हाँ तुम ठीक कह रहे थे । वह आज कल यहीं है।" "क्या तुम ने भी उसे देखा है ?" "देखा तो नहीं, पर टेलीफोन पर बातचीत हुई है।" "ऋच्छा ?: "और भैया " इस चार तारा ने कहा, "कल वह हमारे यहाँ चा रही है । "तुम्हारे यहाँ !" प्रतिमा ने विस्मित त्वर से कदा । 'हाँ !" ' रमेश, क्या तुम उसको घर ला रहे हो ?" नवीन की चारणी में थोड़ा क्रोध था । इससे पहले कि रमेश कुछ कहे तारा ने कहना आरंभ कर दिया, " ये नहीं ला रहे । वह स्वयं आना चाहती है और मैं भी अपनी
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नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। IMD Alert. चक्रवात तूफान 'आसनी' के चलते देशभर में मौसम (Weather Update Today) में बदलाव देखने को मिल रहा है। कहीं तेज बारिश तो कहीं लू का कहर जारी है। मौसम विभाग (IMD Alert Today 21 March 2022) की मानें तो आज सोमवार 21 मार्च 2022 को चक्रवात 'आसनी' के अंडमान द्वीप समूह से म्यांमा और दक्षिणी बांग्लादेश तट की ओर बढ़ने का अनुमान है, ऐसे में शाम को यह चक्रवात का रूप ले सकता है, इसके चलते अंडमान निकोबार समेत कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है, वही जम्मू में कहीं कहीं बर्फबारी के भी संकेत है।
यह भी पढे. . कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, शिक्षा विभाग ने मांगा डाटा, अप्रैल से मिलेगा लाभ!
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD Weather Report) के मुताबिक, आज सोमवार 21 मार्च को राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और विदर्भ में तापमान में गिरावट आ सकती है। विदर्भ और आस-पास के इलाकों में चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बनने के कारण तेलंगाना, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश होने के आसार है। वही जम्मू कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भी हल्की बारिश हो सकती है। इसके असर से जम्मू कश्मीर के ऊपरी इलाकों में हल्की बर्फबारी का भी अनुमान है।
मौसम विभाग (IMD) की ताजा जानकारी के अनुसार,रास्ता बदलने के चलते आज चक्रवात आसनी के अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के तट से टकराने की संभावना कम हो गई है, लेकिन इसके असर से सोमवार को अंडमान एवं निकोबार के द्वीपों में भारी बारिश होने एवं तेज हवाएं चलने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना दबाव अब उत्तर की तरफ बढ़ रहा है, अगर ये सोमवार सुबह गहरे दबाव क्षेत्र में तब्दील होता है तो शाम तक यह चक्रवाती तूफान बन जाएगा, जिसे 'आसनी' नाम से जाना जाएगा।
देश की राजधानी दिल्ली में आज सोमवार को मौसम साफ रहेगा और तापमान 37 डिग्री सेल्सियस एवं नयूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। झारखंड की राजधानी रांची सहित कई जिलों में बादल छाए हुए है,लेकिन पलामू और गोड्डा में मार्च में ही 40 डिग्री अधिकतम तापमान पहुंच गया है। आज सोमवार को गढ़वा, पलामू, चतरा और लातेहार जिले में लू चलने की चेतावनी दी गई है। बिहार के कई जिलों में पारा 40 डिग्री के पास पहुंच गया है, ऐसे में मार्च के सप्ताह के अंत और अप्रैल में भीषण गर्मी पड़ने के आसार है। वही उत्तर प्रदेश में भी मौसम बदलने वाला है और इस सप्ताह गर्मी में और तेजी आएगी। यूपी में अगले 10 दिन तक मौसम साफ रहने के पूरे आसार हैं।
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नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। IMD Alert. चक्रवात तूफान 'आसनी' के चलते देशभर में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। कहीं तेज बारिश तो कहीं लू का कहर जारी है। मौसम विभाग की मानें तो आज सोमवार इक्कीस मार्च दो हज़ार बाईस को चक्रवात 'आसनी' के अंडमान द्वीप समूह से म्यांमा और दक्षिणी बांग्लादेश तट की ओर बढ़ने का अनुमान है, ऐसे में शाम को यह चक्रवात का रूप ले सकता है, इसके चलते अंडमान निकोबार समेत कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है, वही जम्मू में कहीं कहीं बर्फबारी के भी संकेत है। यह भी पढे. . कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, शिक्षा विभाग ने मांगा डाटा, अप्रैल से मिलेगा लाभ! भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, आज सोमवार इक्कीस मार्च को राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और विदर्भ में तापमान में गिरावट आ सकती है। विदर्भ और आस-पास के इलाकों में चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बनने के कारण तेलंगाना, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश होने के आसार है। वही जम्मू कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भी हल्की बारिश हो सकती है। इसके असर से जम्मू कश्मीर के ऊपरी इलाकों में हल्की बर्फबारी का भी अनुमान है। मौसम विभाग की ताजा जानकारी के अनुसार,रास्ता बदलने के चलते आज चक्रवात आसनी के अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के तट से टकराने की संभावना कम हो गई है, लेकिन इसके असर से सोमवार को अंडमान एवं निकोबार के द्वीपों में भारी बारिश होने एवं तेज हवाएं चलने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना दबाव अब उत्तर की तरफ बढ़ रहा है, अगर ये सोमवार सुबह गहरे दबाव क्षेत्र में तब्दील होता है तो शाम तक यह चक्रवाती तूफान बन जाएगा, जिसे 'आसनी' नाम से जाना जाएगा। देश की राजधानी दिल्ली में आज सोमवार को मौसम साफ रहेगा और तापमान सैंतीस डिग्री सेल्सियस एवं नयूनतम तापमान इक्कीस डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। झारखंड की राजधानी रांची सहित कई जिलों में बादल छाए हुए है,लेकिन पलामू और गोड्डा में मार्च में ही चालीस डिग्री अधिकतम तापमान पहुंच गया है। आज सोमवार को गढ़वा, पलामू, चतरा और लातेहार जिले में लू चलने की चेतावनी दी गई है। बिहार के कई जिलों में पारा चालीस डिग्री के पास पहुंच गया है, ऐसे में मार्च के सप्ताह के अंत और अप्रैल में भीषण गर्मी पड़ने के आसार है। वही उत्तर प्रदेश में भी मौसम बदलने वाला है और इस सप्ताह गर्मी में और तेजी आएगी। यूपी में अगले दस दिन तक मौसम साफ रहने के पूरे आसार हैं।
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चीन के वुहान शहर से दुनिया के अन्य देशों में फैला कोरोना वायरस लगातार और भी घातक होता जा रहा है। 12 लाख से ज्यादा मामले सामने आने के बाद भी यह संक्रमण कई देशों में तेजी से फैल रहा है।
न्यूज़ ट्ररैक पर छपी खबर के अनुसार, अमेरिका में कोरोना के चलते कोहराम मचा हुआ है। पिछले 12 घंटों में अमेरिका में वायरस की वजह से 1200 लोगों की जान जा चुकी है।
अमेरिका में कोरोना वायरस के तीन लाख से अधिक केस दर्ज किए जा चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में 3,37,274 लोग कोरोना से संक्रमित हैं।
इसके अलावा 9,633 लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से सहायता भी मांगी है। ट्रंप ने पीएम मोदी से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा भिजवाने के लिए कहा था।
इसके जवाब में भारत ने कहा कि एक जिम्मेदार देश होने के नाते हमसे जितना हो सकेगा, हम सहायता करेंगे।
वहीं, कोरोना से बचाव के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशवासियों को जन स्वास्थ्य उपाय के रूप में स्कार्फ या घर पर बने मास्क से चेहरा ढकने का सुझाव दिया है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि वह स्वयं मास्क नहीं पहनेंगे। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) का हवाला देते हुए ट्रंप ने लोगों से स्कार्फ या घर पर बने कपड़े के मास्क से चेहरा ढकने, किन्तु चिकित्सा वाले मास्क स्वास्थ्यकर्मियों के लिए छोड़ने का आग्रह किया है।
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चीन के वुहान शहर से दुनिया के अन्य देशों में फैला कोरोना वायरस लगातार और भी घातक होता जा रहा है। बारह लाख से ज्यादा मामले सामने आने के बाद भी यह संक्रमण कई देशों में तेजी से फैल रहा है। न्यूज़ ट्ररैक पर छपी खबर के अनुसार, अमेरिका में कोरोना के चलते कोहराम मचा हुआ है। पिछले बारह घंटाटों में अमेरिका में वायरस की वजह से एक हज़ार दो सौ लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका में कोरोना वायरस के तीन लाख से अधिक केस दर्ज किए जा चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में तीन,सैंतीस,दो सौ चौहत्तर लोग कोरोना से संक्रमित हैं। इसके अलावा नौ,छः सौ तैंतीस लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से सहायता भी मांगी है। ट्रंप ने पीएम मोदी से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा भिजवाने के लिए कहा था। इसके जवाब में भारत ने कहा कि एक जिम्मेदार देश होने के नाते हमसे जितना हो सकेगा, हम सहायता करेंगे। वहीं, कोरोना से बचाव के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशवासियों को जन स्वास्थ्य उपाय के रूप में स्कार्फ या घर पर बने मास्क से चेहरा ढकने का सुझाव दिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह स्वयं मास्क नहीं पहनेंगे। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र का हवाला देते हुए ट्रंप ने लोगों से स्कार्फ या घर पर बने कपड़े के मास्क से चेहरा ढकने, किन्तु चिकित्सा वाले मास्क स्वास्थ्यकर्मियों के लिए छोड़ने का आग्रह किया है।
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- भारत-पाक सीमा तनाव पर फ्लैग बैठक!
जम्मू में भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीक पिछले एक पखवाड़े के दौरान भारी गोलीबारी के बाद भारत और पाकिस्तान के सुरक्षा बल तनाव को कम करने के लिए सोमवार को फ्लैग बैठक कर सकते हैं. बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक संघर्षविराम उल्लंघन को खत्म करने के लिए फ्लैग बैठक सोमवार को होने की संभावना है (पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ). " उन्होंने कहा, "तनाव कम करने के लिए फ्लैग बैठक आयोजित करने की खातिर हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं और दूसरे तरफ से भी इस बारे जवाब मिल गया है. " जम्मू अग्रिम मोर्चे के जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में करीब 200 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास 14 अक्टूबर से मोर्टार और रॉकेट से रोजाना भारी गोलाबारी हो रही थी. गोलीबारी में न केवल सीमा की चौकियों को निशाना बनाया जा रहा था बल्कि कई सीमावर्ती गांव भी इसकी चपेट में थे.
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- भारत-पाक सीमा तनाव पर फ्लैग बैठक! जम्मू में भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीक पिछले एक पखवाड़े के दौरान भारी गोलीबारी के बाद भारत और पाकिस्तान के सुरक्षा बल तनाव को कम करने के लिए सोमवार को फ्लैग बैठक कर सकते हैं. बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक संघर्षविराम उल्लंघन को खत्म करने के लिए फ्लैग बैठक सोमवार को होने की संभावना है . " उन्होंने कहा, "तनाव कम करने के लिए फ्लैग बैठक आयोजित करने की खातिर हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं और दूसरे तरफ से भी इस बारे जवाब मिल गया है. " जम्मू अग्रिम मोर्चे के जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में करीब दो सौ किलोग्राममीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास चौदह अक्टूबर से मोर्टार और रॉकेट से रोजाना भारी गोलाबारी हो रही थी. गोलीबारी में न केवल सीमा की चौकियों को निशाना बनाया जा रहा था बल्कि कई सीमावर्ती गांव भी इसकी चपेट में थे.
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स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने बुधवार को घोषणा की कि पुरुषों की आईपीएल टीमों मुंबई इंडियंस, दिल्ली कैपिटल्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के साथ-साथ अडानी ग्रुप और कैपरी ग्लोबल ने महिला आईपीएल की पांच टीमों के लिए बोली जीत ली है। महिला प्रीमियर लीग का उद्घाटन संस्करण इस साल मार्च में खेले जाने की उम्मीद है। पांच विजेता फ्रेंचाइजी की घरेलू टीमें क्रमशः मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर, अहमदाबाद और लखनऊ होंगी।
नीलामी पहले मुंबई में आयोजित की गई थी। बोलियां खोलने के बाद 5 विजेताओं का खुलासा हुआ। अदानी ग्रुप, अदानी स्पोर्ट्सलाइन प्राइवेट लिमिटेड ने 1289 करोड़ की उच्चतम बोली के साथ अहमदाबाद फ्रैंचाइजी खरीदी। वहीं इंडियाविन स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने 912. 99 करोड़ रुपये की बोली के साथ मुंबई फ्रेंचाइजी का अधिग्रहण किया। रॉयल चैलेंजर्स स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू जीएमआर क्रिकेट प्राइवेट लिमिटेड और कैपरी ग्लोबल होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने शेष तीन टीमों के लिए क्रमशः 901 करोड़ रुपए, 810 करोड़ रुपए और 757 करोड़ रुपए की विजयी बोलियां लगाई।
सचिव जय शाह ने पहले कहा था कि आगामी महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) में टीमों के स्वामित्व के लिए कुल 4669. 99 करोड़ रुपए की बोली आई जिसमें उन्होंने 2008 में पुरुषों के आईपीएल के उद्घाटन का रिकॉर्ड तोड़ दिया। उन्होंने कहा, 'क्रिकेट में आज एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि उद्घाटन महिला आईपीएल की टीमों के लिए बोली ने 2008 में पुरुषों के आईपीएल के उद्घाटन के रिकॉर्ड को तोड़ दिया! विजेताओं को बधाई क्योंकि हमने कुल बोली में 4669. 99 करोड़ रुपए जुटाए। '
जय शाह ने आगे कहा, 'यह महिला क्रिकेट में एक क्रांति की शुरुआत का प्रतीक है और न केवल हमारी महिला क्रिकेटरों के लिए बल्कि पूरे खेल बिरादरी के लिए एक परिवर्तनकारी यात्रा का मार्ग प्रशस्त करता है। ' शाह ने ट्वीट्स की एक श्रृंखला में लिखा, 'महिला आईपीएल महिला क्रिकेट में आवश्यक सुधार लाएगा और एक सर्वव्यापी पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करेगा जो प्रत्येक हितधारक को लाभान्वित करे। बीसीसीआई ने लीग का नाम महिला प्रीमियर लीग रखा है। यात्रा शुरू करें। '
2009, 2011 और 2016 के आईपीएल के उपविजेता बैंगलोर ने महिला प्रीमियर लीग टीम के मालिक होने के अपने उत्साह को ट्वीट किया। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, बेंगलुरु महिला प्रीमियर लीग टीम की गौरवान्वित मालिक है। 'बाधाओं को तोड़ना, इतिहास बनाना और साहसिक खेलना! ' जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स के निदेशक पार्थ जिंदल जो जीएमआर ग्रुप के साथ संयुक्त रूप से आईपीएल में दिल्ली की टीम के मालिक हैं, महिला प्रीमियर लीग में एक फ्रेंचाइजी खरीदने के बारे में उत्साहित थे। उन्होंने कहा, 'यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि जेएसडब्ल्यू ग्रुप जीएमआर ग्रुप और दिल्ली कैपिटल्स दिल्ली महिला आईपीएल टीम की गौरवशाली मालिक हैं। यह भारतीय क्रिकेट और महिलाओं के खेल के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है और हम दिल्ली कैपिटल्स WIPL फ्रेंचाइजी के मालिक होने पर गर्व करते हैं।
इससे पहले 16 जनवरी को वायाकॉम18 मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2023-2027 की अवधि के लिए महिला आईपीएल के मीडिया अधिकारों (यानी, वैश्विक टेलीविजन अधिकार और वैश्विक डिजिटल अधिकार) के लिए बोली जीती थी। वायकॉम18 ने 951 करोड़ रुपए की बोली के साथ अधिकार हासिल किए जिसका मतलब प्रति मैच 7. 09 करोड़ रुपए है। ऐसा माना जाता है कि 2026 के बाद से मैचों को 33 या 34 तक बढ़ाने की संभावना के साथ पहले तीन सत्रों के लिए 22 मैचों का आयोजन किया जा सकता है।
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स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बुधवार को घोषणा की कि पुरुषों की आईपीएल टीमों मुंबई इंडियंस, दिल्ली कैपिटल्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के साथ-साथ अडानी ग्रुप और कैपरी ग्लोबल ने महिला आईपीएल की पांच टीमों के लिए बोली जीत ली है। महिला प्रीमियर लीग का उद्घाटन संस्करण इस साल मार्च में खेले जाने की उम्मीद है। पांच विजेता फ्रेंचाइजी की घरेलू टीमें क्रमशः मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर, अहमदाबाद और लखनऊ होंगी। नीलामी पहले मुंबई में आयोजित की गई थी। बोलियां खोलने के बाद पाँच विजेताओं का खुलासा हुआ। अदानी ग्रुप, अदानी स्पोर्ट्सलाइन प्राइवेट लिमिटेड ने एक हज़ार दो सौ नवासी करोड़ की उच्चतम बोली के साथ अहमदाबाद फ्रैंचाइजी खरीदी। वहीं इंडियाविन स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने नौ सौ बारह. निन्यानवे करोड़ रुपये की बोली के साथ मुंबई फ्रेंचाइजी का अधिग्रहण किया। रॉयल चैलेंजर्स स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू जीएमआर क्रिकेट प्राइवेट लिमिटेड और कैपरी ग्लोबल होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने शेष तीन टीमों के लिए क्रमशः नौ सौ एक करोड़ रुपए, आठ सौ दस करोड़ रुपए और सात सौ सत्तावन करोड़ रुपए की विजयी बोलियां लगाई। सचिव जय शाह ने पहले कहा था कि आगामी महिला प्रीमियर लीग में टीमों के स्वामित्व के लिए कुल चार हज़ार छः सौ उनहत्तर. निन्यानवे करोड़ रुपए की बोली आई जिसमें उन्होंने दो हज़ार आठ में पुरुषों के आईपीएल के उद्घाटन का रिकॉर्ड तोड़ दिया। उन्होंने कहा, 'क्रिकेट में आज एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि उद्घाटन महिला आईपीएल की टीमों के लिए बोली ने दो हज़ार आठ में पुरुषों के आईपीएल के उद्घाटन के रिकॉर्ड को तोड़ दिया! विजेताओं को बधाई क्योंकि हमने कुल बोली में चार हज़ार छः सौ उनहत्तर. निन्यानवे करोड़ रुपए जुटाए। ' जय शाह ने आगे कहा, 'यह महिला क्रिकेट में एक क्रांति की शुरुआत का प्रतीक है और न केवल हमारी महिला क्रिकेटरों के लिए बल्कि पूरे खेल बिरादरी के लिए एक परिवर्तनकारी यात्रा का मार्ग प्रशस्त करता है। ' शाह ने ट्वीट्स की एक श्रृंखला में लिखा, 'महिला आईपीएल महिला क्रिकेट में आवश्यक सुधार लाएगा और एक सर्वव्यापी पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करेगा जो प्रत्येक हितधारक को लाभान्वित करे। बीसीसीआई ने लीग का नाम महिला प्रीमियर लीग रखा है। यात्रा शुरू करें। ' दो हज़ार नौ, दो हज़ार ग्यारह और दो हज़ार सोलह के आईपीएल के उपविजेता बैंगलोर ने महिला प्रीमियर लीग टीम के मालिक होने के अपने उत्साह को ट्वीट किया। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, बेंगलुरु महिला प्रीमियर लीग टीम की गौरवान्वित मालिक है। 'बाधाओं को तोड़ना, इतिहास बनाना और साहसिक खेलना! ' जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स के निदेशक पार्थ जिंदल जो जीएमआर ग्रुप के साथ संयुक्त रूप से आईपीएल में दिल्ली की टीम के मालिक हैं, महिला प्रीमियर लीग में एक फ्रेंचाइजी खरीदने के बारे में उत्साहित थे। उन्होंने कहा, 'यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि जेएसडब्ल्यू ग्रुप जीएमआर ग्रुप और दिल्ली कैपिटल्स दिल्ली महिला आईपीएल टीम की गौरवशाली मालिक हैं। यह भारतीय क्रिकेट और महिलाओं के खेल के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है और हम दिल्ली कैपिटल्स WIPL फ्रेंचाइजी के मालिक होने पर गर्व करते हैं। इससे पहले सोलह जनवरी को वायाकॉमअट्ठारह मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने दो हज़ार तेईस-दो हज़ार सत्ताईस की अवधि के लिए महिला आईपीएल के मीडिया अधिकारों के लिए बोली जीती थी। वायकॉमअट्ठारह ने नौ सौ इक्यावन करोड़ रुपए की बोली के साथ अधिकार हासिल किए जिसका मतलब प्रति मैच सात. नौ करोड़ रुपए है। ऐसा माना जाता है कि दो हज़ार छब्बीस के बाद से मैचों को तैंतीस या चौंतीस तक बढ़ाने की संभावना के साथ पहले तीन सत्रों के लिए बाईस मैचों का आयोजन किया जा सकता है।
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मलमास या खरमास (Kharmas) के बाद 17 जनवरी 2023 से 14 मार्च 2023 तक विवाह के कुल 28 शुभ मुहूर्त रहेंगे. जिसके बाद अब 15 मार्च 2023 को सूर्य मीन राशि में चले जाएंगे तो फिर से खरमास लग जाएगा. इसलिए बेहतर होगा कि आप जनवरी से मार्च के बीच निश्चित तिथियों के मुताबिक, शादी-ब्याह से जुड़े काम पुरे कर ले। ग्रहों के राजा सूर्य देव16 दिसंबर 2022 को धनु राशि में गोचर कर चुके हैं. सूर्य के धनु राशि में जाते ही खरमास लग गया है. खरमास में शुभ और मांगलिक कार्य निषेध माने होते हैं. इसमें शादी-ब्याह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश या गृह निर्माण जैसे शुभ कामों से बचना चाहिए. ज्योतिषियों कि ऐसी राय है कि 14 जनवरी 2023 को जब सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे तो शादी-ब्याह जैसे मंगल कार्यों की शुरुआत हो जाएगी.
17 जनवरी (मंगलवार)
18 जनवरी (बुधवार)
19 जनवरी (गुरुवार)
25 जनवरी (बुधवार)
26 जनवरी (गुरुवार)
27 जनवरी (शुक्रवार)
30 जनवरी (सोमवार)
31 जनवरी (मंगलवार)
1 फरवरी (बुधवार)
6 फरवरी (सोमवार)
7 फरवरी (मंगलवार)
8 फरवरी (बुधवार)
9 फरवरी (गुरुवार)
10 फरवरी (शुक्रवार)
13 फरवरी (सोमवार)
15 फरवरी (बुधवार)
22 फरवरी (बुधवार)
23 फरवरी (गुरुवार)
27 फरवरी (सोमवार)
28 फरवरी (मंगलावर)
1 मार्च (बुधवार)
5 मार्च (रविवार)
6 मार्च (सोमवार)
7 मार्च (मंगलवार)
8 मार्च (बुधवार)
9 मार्च (गुरुवार)
11 मार्च (शुक्रवार)
14 मार्च (मंगलवार)
खरमास या मलमास में शादी-ब्याह जैसे शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, खरमास में विवाह करने से पति-पत्नी का वैवाहिक जीवन में उथल पुथल मच जाती हैं. इसलिए इसमें शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य न करने की सलाह दी जाती है. इस साल खरमास 16 दिसंबर से लगने वाला है और 14 जनवरी 2023 को जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तब शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त खुल जाएंगे और फिर आप मंगल कार्य कर सकते हैं.
खरमास के महीने में कोई नई वस्तु या चीज घर नहीं लाना चाहिए, जमीन या वाहन आदि की खरीदीं नहीं करनी चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य इन वस्तुओं का सुख नहीं भोग पाता है. इस महीने मांस-मदिरा, गेहूं, चावल, सफेद धान, मूंग, जौ, तिल, कटहल, जीरा, आंवला, सुपारी सेंधा नमक भी नहीं खाना चाहिए.
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मलमास या खरमास के बाद सत्रह जनवरी दो हज़ार तेईस से चौदह मार्च दो हज़ार तेईस तक विवाह के कुल अट्ठाईस शुभ मुहूर्त रहेंगे. जिसके बाद अब पंद्रह मार्च दो हज़ार तेईस को सूर्य मीन राशि में चले जाएंगे तो फिर से खरमास लग जाएगा. इसलिए बेहतर होगा कि आप जनवरी से मार्च के बीच निश्चित तिथियों के मुताबिक, शादी-ब्याह से जुड़े काम पुरे कर ले। ग्रहों के राजा सूर्य देवसोलह दिसंबर दो हज़ार बाईस को धनु राशि में गोचर कर चुके हैं. सूर्य के धनु राशि में जाते ही खरमास लग गया है. खरमास में शुभ और मांगलिक कार्य निषेध माने होते हैं. इसमें शादी-ब्याह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश या गृह निर्माण जैसे शुभ कामों से बचना चाहिए. ज्योतिषियों कि ऐसी राय है कि चौदह जनवरी दो हज़ार तेईस को जब सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे तो शादी-ब्याह जैसे मंगल कार्यों की शुरुआत हो जाएगी. सत्रह जनवरी अट्ठारह जनवरी उन्नीस जनवरी पच्चीस जनवरी छब्बीस जनवरी सत्ताईस जनवरी तीस जनवरी इकतीस जनवरी एक फरवरी छः फरवरी सात फरवरी आठ फरवरी नौ फरवरी दस फरवरी तेरह फरवरी पंद्रह फरवरी बाईस फरवरी तेईस फरवरी सत्ताईस फरवरी अट्ठाईस फरवरी एक मार्च पाँच मार्च छः मार्च सात मार्च आठ मार्च नौ मार्च ग्यारह मार्च चौदह मार्च खरमास या मलमास में शादी-ब्याह जैसे शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, खरमास में विवाह करने से पति-पत्नी का वैवाहिक जीवन में उथल पुथल मच जाती हैं. इसलिए इसमें शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य न करने की सलाह दी जाती है. इस साल खरमास सोलह दिसंबर से लगने वाला है और चौदह जनवरी दो हज़ार तेईस को जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तब शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त खुल जाएंगे और फिर आप मंगल कार्य कर सकते हैं. खरमास के महीने में कोई नई वस्तु या चीज घर नहीं लाना चाहिए, जमीन या वाहन आदि की खरीदीं नहीं करनी चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य इन वस्तुओं का सुख नहीं भोग पाता है. इस महीने मांस-मदिरा, गेहूं, चावल, सफेद धान, मूंग, जौ, तिल, कटहल, जीरा, आंवला, सुपारी सेंधा नमक भी नहीं खाना चाहिए.
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महराजगंज के ठूठीबारी थाना के पास एक गांव में दो लोग डूब गए हैं। इससे गांव में सनसनी मच गई है। पढ़ें पूरी खबर. .
कोरोना महामारी से बचाव के लिये राजधानी लखनऊ के सभी थानों को सेनेटाइज किया जा रहा है। पूरी खबर. .
उत्तर प्रदेश के एक गांव में कुछ अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से एक ऑटो चालक की हत्या कर दी। पुलिस मामले की जांच में चुट गयी है। पूरी खबर. .
यूपी में जिला स्तर पर गैंगस्टर, माफियाओं की सूची तैयार की जा रही है। गैंगस्टर के तहत आरोपितों की सम्पत्तियां कुर्क की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर. .
उत्तर प्रदेश में सभी विश्वविद्यालयों के लिए सरकार द्वारा नई गाइडलाइन जारी कर दी गया है। जानिये, कबसे होगा नया सत्र और कक्षाएं शुरू. .
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महराजगंज के ठूठीबारी थाना के पास एक गांव में दो लोग डूब गए हैं। इससे गांव में सनसनी मच गई है। पढ़ें पूरी खबर. . कोरोना महामारी से बचाव के लिये राजधानी लखनऊ के सभी थानों को सेनेटाइज किया जा रहा है। पूरी खबर. . उत्तर प्रदेश के एक गांव में कुछ अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से एक ऑटो चालक की हत्या कर दी। पुलिस मामले की जांच में चुट गयी है। पूरी खबर. . यूपी में जिला स्तर पर गैंगस्टर, माफियाओं की सूची तैयार की जा रही है। गैंगस्टर के तहत आरोपितों की सम्पत्तियां कुर्क की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर. . उत्तर प्रदेश में सभी विश्वविद्यालयों के लिए सरकार द्वारा नई गाइडलाइन जारी कर दी गया है। जानिये, कबसे होगा नया सत्र और कक्षाएं शुरू. .
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साइंस की बात करें तो महिलाओं के शरीर को जानने और समझने के लिए इस दुनिया में कई तरह के शोध किये गए हैं ताकि महिलाओं को इसके बारे में सही जानकारी प्राप्त हो सके हैं और उनके शारीरिक को किसी बड़ी बीमारी के खतरे से बचाया जा सके। आज इसी संदर्भ में कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के अनुसार जानने की कोशिश करेंगे की आखिर क्या कारण हैं की महिलाओं को सोते हुए भी ओर्गेन की प्राप्ति होती हैं और इससे महिलाओं के शरीर में उदासी और थकान की समस्या भी जन्म ले लेती हैं। तो आइये जानते हैं विस्तार से की सोते हुए भी ओर्गेन पा सकती है महिलाएं।
शोध, कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हुए एक रिसर्च के अनुसार जब महिलाओं का मासिक धर्म समय पर नहीं होता हैं तो वो महिलाये कभी कभी सोते हुए भी ओर्गेन पा सकती हैं। क्यों की मासिक धर्म जब समय पर नहीं होता हैं तब महिलाओं के Urethral ओपनिंग ग्लैंड में अचानक से घर्षण होने लगते हैं। जिसके कारण महिलाओं को ओर्गेन की प्राप्ति होती हैं। ये प्रक्रिया ज्यादा तर उन महिलाओं में होता हैं जिनका मासिक चक्र एक से दो सप्ताह की देरी से होता हैं।
इस रिसर्च के बारे में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकन डॉक्टर माइकल जेम्स कहते हैं की महिलाओं के शरीर में घटने वाली ये घटना एक मेडिकल प्रोसेस हैं। जो उन महिलाओं के साथ घटित होती हैं जो मासिक धर्म की समस्या से ग्रसित हैं। महिलाओं को इसमें चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं हैं। क्यों की इस प्रक्रिया से उनके शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता हैं। लेकिन ज्यादा लेट से मासिक धर्म होना कभी कभी महिलाओं के शरीर के लिए खतरनाक होता हैं।
यह खबर कुछ दिन पहले डेली मेल पत्रिका में प्रकाशित हुयी थी। इस शोध को करने के लिए कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने 130 महिलाओं को शामिल किया और इन महिलाओं पर 72 दिनों तक कई तरह के मेडिकल टेस्ट और शोध किये। साथ हीं साथ उनके शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के बारे में भी अध्ययन किये । जिसके बात डॉक्टरों ने बताया की महिलाएं सोते हुए भी ओर्गेन पा सकती हैं।
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साइंस की बात करें तो महिलाओं के शरीर को जानने और समझने के लिए इस दुनिया में कई तरह के शोध किये गए हैं ताकि महिलाओं को इसके बारे में सही जानकारी प्राप्त हो सके हैं और उनके शारीरिक को किसी बड़ी बीमारी के खतरे से बचाया जा सके। आज इसी संदर्भ में कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के अनुसार जानने की कोशिश करेंगे की आखिर क्या कारण हैं की महिलाओं को सोते हुए भी ओर्गेन की प्राप्ति होती हैं और इससे महिलाओं के शरीर में उदासी और थकान की समस्या भी जन्म ले लेती हैं। तो आइये जानते हैं विस्तार से की सोते हुए भी ओर्गेन पा सकती है महिलाएं। शोध, कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हुए एक रिसर्च के अनुसार जब महिलाओं का मासिक धर्म समय पर नहीं होता हैं तो वो महिलाये कभी कभी सोते हुए भी ओर्गेन पा सकती हैं। क्यों की मासिक धर्म जब समय पर नहीं होता हैं तब महिलाओं के Urethral ओपनिंग ग्लैंड में अचानक से घर्षण होने लगते हैं। जिसके कारण महिलाओं को ओर्गेन की प्राप्ति होती हैं। ये प्रक्रिया ज्यादा तर उन महिलाओं में होता हैं जिनका मासिक चक्र एक से दो सप्ताह की देरी से होता हैं। इस रिसर्च के बारे में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकन डॉक्टर माइकल जेम्स कहते हैं की महिलाओं के शरीर में घटने वाली ये घटना एक मेडिकल प्रोसेस हैं। जो उन महिलाओं के साथ घटित होती हैं जो मासिक धर्म की समस्या से ग्रसित हैं। महिलाओं को इसमें चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं हैं। क्यों की इस प्रक्रिया से उनके शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता हैं। लेकिन ज्यादा लेट से मासिक धर्म होना कभी कभी महिलाओं के शरीर के लिए खतरनाक होता हैं। यह खबर कुछ दिन पहले डेली मेल पत्रिका में प्रकाशित हुयी थी। इस शोध को करने के लिए कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने एक सौ तीस महिलाओं को शामिल किया और इन महिलाओं पर बहत्तर दिनों तक कई तरह के मेडिकल टेस्ट और शोध किये। साथ हीं साथ उनके शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के बारे में भी अध्ययन किये । जिसके बात डॉक्टरों ने बताया की महिलाएं सोते हुए भी ओर्गेन पा सकती हैं।
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Gujarat Titans vs Rajasthan Royals Highlights: पूर्व चैंपियन राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल के 16वें सीजन में अपनी चौथी जीत दर्ज की और पॉइंट्स टेबल में शीर्ष पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। प्रतिष्ठित नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में गुजरात टाइटंस ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 177 रन बनाए। इसके बाद राजस्थान ने 19. 2 ओवर में 7 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। शिमरोन हेटमयार ने विजयी छक्का जड़ा। वह 26 गेंदों पर 56 रन बनाकर नाबाद लौटे।
राजस्थान रॉयल्स ने सीजन के 5 मैचों में अपनी चौथी जीत दर्ज की। संजू सैमसन की कप्तानी वाली इस टीम के अब 8 अंक हो गए हैं। धुरंधर ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की कप्तानी में खेल रही गुजरात टीम ने 5 मैचों में दूसरी हार झेली। टीम के 6 अंक हैं और वह तालिका में तीसरे जगह पर है। लखनऊ सुपर जायंट्स और पंजाब किंग्स के भी 6-6 अंक हैं।
राजस्थान की जीत में शिमरोन हेटमायर ने बड़ा सहयोग दिया। उन्होंने 26 गेंदों पर 2 चौके और 5 छक्के लगाते हुए 56 रन जोड़े। उन्होंने नूर अहमद के पारी के आखिरी ओवर की दूसरी गेंद पर विजयी छक्का जड़ा। टीम के लिए कप्तान संजू सैमसन ने 32 गेंदों पर 3 चौके और 6 छक्के लगाते हुए 60 रन बनाए। देवदत्त पडिक्कल ने 26 जबकि रविचंद्रन अश्विन ने महज 3 गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाकर 10 रन बनाए। गुजरात के लिए पेसर मोहम्मद शमी ने 3 विकेट लिए। स्पिनर राशिद खान को 2 विकेट मिले जबकि कप्तान हार्दिक पांड्या और नूर अहमद को 1-1 विकेट मिला।
178 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी राजस्थान टीम की आरंभ काफी खराब रही और उसने अपने 2 विकेट महज 4 रन तक गंवा दिए। यशस्वी जायसवाल (1) को हार्दिक पांड्या ने पारी के दूसरे ओवर में शुभमन गिल के हाथों कैच कराया। फिर अगले ओवर में पेसर मोहम्मद शमी ने जोस बटलर (0) को बोल्ड कर दिया। इसके बाद देवदत्त पडिक्कल (26) ने कप्तान संजू सैमसन के साथ 43 रन की साझेदारी की। राशिद खान ने पारी के 9वें ओवर में पडिक्कल को मोहित शर्मा के हाथों कैच कराकर इस पार्टनरशिप को तोड़ दिया। पडिक्कल ने 25 गेंदों पर 2 छक्के और इतने ही चौके जड़े।
कप्तान संजू सैमसन हालांकि एक छोर पर जमे रहे। उन्होंने शिमरोन हेटमायर के साथ 5वें विकेट के लिए 59 रन जोड़े। सैमसन ने 32 गेंदों पर 60 रन की अपनी बहुत बढ़िया पारी में 3 चौके और 6 छक्के जड़े। उन्हें नूर अहमद ने शिकार बनाया, जब मिलर ने बहुत बढ़िया कैच लपककर सैमसन की पारी का अंत किया। वह टीम के 114 के स्कोर पर 5वें विकेट के तौर पर पवेलियन लौटे।
इससे पहले धुरंधर बल्लेबाज डेविड मिलर और शुभमन गिल ने गुजरात टाइटंस के लिए रविवार को कुछ दम दिखाया लेकिन दोनों ही अर्धशतक से चूक गए। मिलर ने 46 जबकि गिल ने 45 रनों का सहयोग दिया। मिलर ने 6 रन पर मिले जीवनदान का लाभ उठाते हुए 30 गेंद की पारी में 3 चौके और 2 छक्के जड़े। गिल ने 34 गेंदों की अपनी पारी में 4 चौके और एक छक्का लगाने के अतिरिक्त तीसरे विकेट के लिए कप्तान हार्दिक पंड्या के साथ 33 गेंद में 59 रन की साझेदारी की।
कप्तान हार्दिक पांड्या ने 19 गेंदों पर 28 रन की पारी में 3 चौके और एक छक्का लगाया। अंतिम ओवरों में अभिनव मनोहर ने 13 गेंद में 3 छक्कों की सहायता से 27 रन की पारी खेल टीम में स्वयं के सेलेक्शन को ठीक साबित किया। उन्होंने मिलर के साथ 5वें विकेट के लिए 22 गेंद में 45 रन की साझेदारी की। गुजरात टीम ने अंतिम 4 ओवर में 52 रन जोड़े।
पिछले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स के विरूद्ध कद्दावर एमएस धोनी के सामने बहुत बढ़िया गेंदबाजी करने वाले पेसर संदीप शर्मा ने एक बार फिर प्रभावित किया और चार ओवर में 25 रन देकर 2 विकेट लिए। पेसर ट्रेंट बोल्ट, एडम जम्पा और युजवेंद्र चहल को 1-1 विकेट मिला। पिछले सीजन के फाइनल खेलने वाली टीमों के मुकाबले में टॉस जीतकर गेंदबाजी करने करने के बाद बोल्ट ने पहले ओवर में ही ऋद्धिमान साहा (4) को पवेलियन भेजा। साई सुदर्शन (20 रन) गिल के साथ गफलत का शिकार होकर रन आउट हो गए। फिर चहल ने पारी के 11वें ओवर में हार्दिक को अपनी फिरकी में फंसा लिया। फिर संदीप ने बटलर के हाथों कैच कराकर गिल की बहुत बढ़िया पारी को समाप्त किया। उन्होंने अंतिम ओवर में मिलर से 2 चौके खाने के बाद उन्हें पवेलियन की राह दिखाई। राशिद खान (1) अंतिम ओवर की 5वीं गेंद पर रन आउट हुए।
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Gujarat Titans vs Rajasthan Royals Highlights: पूर्व चैंपियन राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल के सोलहवें सीजन में अपनी चौथी जीत दर्ज की और पॉइंट्स टेबल में शीर्ष पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। प्रतिष्ठित नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में गुजरात टाइटंस ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर एक सौ सतहत्तर रन बनाए। इसके बाद राजस्थान ने उन्नीस. दो ओवर में सात विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। शिमरोन हेटमयार ने विजयी छक्का जड़ा। वह छब्बीस गेंदों पर छप्पन रन बनाकर नाबाद लौटे। राजस्थान रॉयल्स ने सीजन के पाँच मैचों में अपनी चौथी जीत दर्ज की। संजू सैमसन की कप्तानी वाली इस टीम के अब आठ अंक हो गए हैं। धुरंधर ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की कप्तानी में खेल रही गुजरात टीम ने पाँच मैचों में दूसरी हार झेली। टीम के छः अंक हैं और वह तालिका में तीसरे जगह पर है। लखनऊ सुपर जायंट्स और पंजाब किंग्स के भी छः-छः अंक हैं। राजस्थान की जीत में शिमरोन हेटमायर ने बड़ा सहयोग दिया। उन्होंने छब्बीस गेंदों पर दो चौके और पाँच छक्के लगाते हुए छप्पन रन जोड़े। उन्होंने नूर अहमद के पारी के आखिरी ओवर की दूसरी गेंद पर विजयी छक्का जड़ा। टीम के लिए कप्तान संजू सैमसन ने बत्तीस गेंदों पर तीन चौके और छः छक्के लगाते हुए साठ रन बनाए। देवदत्त पडिक्कल ने छब्बीस जबकि रविचंद्रन अश्विन ने महज तीन गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाकर दस रन बनाए। गुजरात के लिए पेसर मोहम्मद शमी ने तीन विकेट लिए। स्पिनर राशिद खान को दो विकेट मिले जबकि कप्तान हार्दिक पांड्या और नूर अहमद को एक-एक विकेट मिला। एक सौ अठहत्तर रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी राजस्थान टीम की आरंभ काफी खराब रही और उसने अपने दो विकेट महज चार रन तक गंवा दिए। यशस्वी जायसवाल को हार्दिक पांड्या ने पारी के दूसरे ओवर में शुभमन गिल के हाथों कैच कराया। फिर अगले ओवर में पेसर मोहम्मद शमी ने जोस बटलर को बोल्ड कर दिया। इसके बाद देवदत्त पडिक्कल ने कप्तान संजू सैमसन के साथ तैंतालीस रन की साझेदारी की। राशिद खान ने पारी के नौवें ओवर में पडिक्कल को मोहित शर्मा के हाथों कैच कराकर इस पार्टनरशिप को तोड़ दिया। पडिक्कल ने पच्चीस गेंदों पर दो छक्के और इतने ही चौके जड़े। कप्तान संजू सैमसन हालांकि एक छोर पर जमे रहे। उन्होंने शिमरोन हेटमायर के साथ पाँचवें विकेट के लिए उनसठ रन जोड़े। सैमसन ने बत्तीस गेंदों पर साठ रन की अपनी बहुत बढ़िया पारी में तीन चौके और छः छक्के जड़े। उन्हें नूर अहमद ने शिकार बनाया, जब मिलर ने बहुत बढ़िया कैच लपककर सैमसन की पारी का अंत किया। वह टीम के एक सौ चौदह के स्कोर पर पाँचवें विकेट के तौर पर पवेलियन लौटे। इससे पहले धुरंधर बल्लेबाज डेविड मिलर और शुभमन गिल ने गुजरात टाइटंस के लिए रविवार को कुछ दम दिखाया लेकिन दोनों ही अर्धशतक से चूक गए। मिलर ने छियालीस जबकि गिल ने पैंतालीस रनों का सहयोग दिया। मिलर ने छः रन पर मिले जीवनदान का लाभ उठाते हुए तीस गेंद की पारी में तीन चौके और दो छक्के जड़े। गिल ने चौंतीस गेंदों की अपनी पारी में चार चौके और एक छक्का लगाने के अतिरिक्त तीसरे विकेट के लिए कप्तान हार्दिक पंड्या के साथ तैंतीस गेंद में उनसठ रन की साझेदारी की। कप्तान हार्दिक पांड्या ने उन्नीस गेंदों पर अट्ठाईस रन की पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। अंतिम ओवरों में अभिनव मनोहर ने तेरह गेंद में तीन छक्कों की सहायता से सत्ताईस रन की पारी खेल टीम में स्वयं के सेलेक्शन को ठीक साबित किया। उन्होंने मिलर के साथ पाँचवें विकेट के लिए बाईस गेंद में पैंतालीस रन की साझेदारी की। गुजरात टीम ने अंतिम चार ओवर में बावन रन जोड़े। पिछले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स के विरूद्ध कद्दावर एमएस धोनी के सामने बहुत बढ़िया गेंदबाजी करने वाले पेसर संदीप शर्मा ने एक बार फिर प्रभावित किया और चार ओवर में पच्चीस रन देकर दो विकेट लिए। पेसर ट्रेंट बोल्ट, एडम जम्पा और युजवेंद्र चहल को एक-एक विकेट मिला। पिछले सीजन के फाइनल खेलने वाली टीमों के मुकाबले में टॉस जीतकर गेंदबाजी करने करने के बाद बोल्ट ने पहले ओवर में ही ऋद्धिमान साहा को पवेलियन भेजा। साई सुदर्शन गिल के साथ गफलत का शिकार होकर रन आउट हो गए। फिर चहल ने पारी के ग्यारहवें ओवर में हार्दिक को अपनी फिरकी में फंसा लिया। फिर संदीप ने बटलर के हाथों कैच कराकर गिल की बहुत बढ़िया पारी को समाप्त किया। उन्होंने अंतिम ओवर में मिलर से दो चौके खाने के बाद उन्हें पवेलियन की राह दिखाई। राशिद खान अंतिम ओवर की पाँचवीं गेंद पर रन आउट हुए।
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इलाके की तरह विभिन्न बोलियाँ नहीं हैं। फिर भी, यहाँ हिन्दी सम्पर्क भाषा रही है यह तब से रही है जब हिन्दी राष्ट्रभाषा नहीं थी । अब पाकिस्तान स्थित सिरायकी बोली के क्षेत्र को हिन्दी प्रदेश न माने, उर्दू प्रदेश का हिस्सा तो मान सकते हैं । हिन्दी प्रदेश की विशिष्टता एकल नहीं है । कई बोलियों का संसार है यहाँ । एक बोली के तन्त्र के आधार पर हिन्दी की रूप रेखा नहीं बन सकती है । एक प्रश्न है, कैसे खड़ी बोली, दिल्ली की खड़ी बोली इतने बड़े देश की भाषा बन गयी ? निश्चय ही इसमें बोलियों का योगदान है। इससे इनकार नहीं । हिन्दी में प्रयोग के
पहले कोई रूप चाहे वह क्रियापद का रूप हो, दूसरी बोलियों में मिलते-जुलते रूप में भी प्रचलित रहा है । अलीगढ़ की हाबूड़ा जाति की बोली में हुती ( थी) हुतौ ( था), गयौ (गया) रहूयौ (रहा) जैसे प्रयोग मिलते हैं । यह सौ साल पहले की बात है, भारतेन्दु की समस्या उसके कुछ बाद । तब खड़ी बोली में एकरूपता नहीं आयी थी । भारतेन्दु के समय ग़ालित की कविताओं में ता ते ती है आदि के प्रयोग प्रचलित थे, बल्कि उनके पहले मीर तक़ी मीर की शायरी में ये प्रयोग मिलते हैं । बोली से भाषा केवल इस कारण नहीं बनती कि उस बोली के बोलने वाले अलग-अलग इलाके में फैल जाएँ । सम्पर्क और साहचर्य कितना है? हाबूड़ा जाति के लोग दिल्ली में भी बसे, लेकिन वहाँ वे खड़ी बोली बोलने लगे ।
पंजाबी भाषी देश के हर कोने में मिलेंगे । वहाँ वे पंजाबी भाषी नहीं रह जाते हैं । कलकत्ता के मारवाड़ी भी बंगला बोलते हैं, परन्तु वे समझते हैं कि कलकत्ता की सामाजिक और आर्थिक संरचना में बंगालियों की तरह उनकी भी भूमिका है। अगर ऐसा न हो तो सब जगह लघु राष्ट्रीयता का सवाल खड़ा हो जाएगा । भाषा-परिवर्तन और विकास में एक प्रक्रिया अन्तर्मिलन (एसिमिलेशन ) की होती है । जातियों का अन्तर्मिलन हो या न हो, बोलियों का होता है। दरभंगा में कायस्थ कायस्थ ही बने रहे और ब्राह्मण ब्राह्मण ही । बोलते तो मैथिली ही हैं । वहाँ के पंजाबी भी मैथिली बोलते हैं। पंजाबी बोलकर उनका कारोबार नहीं चल सकता है। बोली भाषा तब बनती है, जब कारोबार बड़ा होता है । खेती पर आधारित समाज में बोली के अनेक रूप होते हैं। जैसे ही खेती के उत्पाद दूसरे कारोबार में बदलते हैं, बोली का रूप भी बदलता है। किसान को ट्रैक्टर चाहिए तो उसे उद्योग को समझना होगा । भले वह ट्रैक्टर बनाने का तरीका न समझे, लेकिन ट्रैक्टर उद्योग उसके मनोजगत का एक हिस्सा ज़रूर होता है ।
बोलियों और भाषाओं के मेले और युद्ध में अंग्रेजी का कहीं विरोध नहीं हो रहा है। मैथिली हो, राजस्थानी हो या बंगला, इन्हें हिन्दी से जितना विरोध है, अंग्रेजी से नहीं । जो अभिजात और शहरी मध्य वर्ग हिन्दी के विरोध में है, उन्हें पता है कि अंग्रेजी का विरोध करने से उनके बाल-बच्चों को नौकरी में परेशानी हो सकती है। आई. टी. सेक्टर, मैनेजमेंट सेक्टर और दूसरे कई क्षेत्र हैं, जहाँ अंग्रेजी का वर्चस्व है। विकासशील देशों में अंग्रेजी के प्रसार का एक चरण था, अहिन्दी भाषी क्षेत्रों
में हिन्दी के थोपने के आरोप का और अब दूसरा चरण आया है हिन्दी प्रदेश को तोड़ने का । इस काम में हिन्दी प्रदेश की बोलियाँ ढाल बनी हुई है । अचानक बोलियों का महत्त्व बढ़ गया, हिन्दी के विरोध में ।
अंग्रेजी के प्रसार के पहले चरण में मातृ भाषाओं से पल्ला झाड़ने और अंग्रेजी को अपनाने का जोर था । बहुत पहले की बात है। 1962 में मैकरेरे विश्वविद्यालय (कम्पाला/डिगांडा) में एक सम्मेलन हुआ, जिसका शीर्षक था, 'अंग्रेजी में लिखनेवाले लेखकों का सम्मेलन ।' जाहिर है कि इसमें अफ्रीकी भाषाओं में लिखने वाले लेखक अपने आप छँट गये। इस सम्मेलन में भाग लेने वाले लेखक कोई बड़े लेखक नहीं थे । एक लेखक थे, न्गुगी वा थ्योंगो, जिनकी उस समय (1962) के दो कहानियाँ छपी थीं और दोनों अंग्रेजी में थी। दो में से एक कहानी 'दि रिटर्न' स्कूल की पत्रिका में छपी थी आगे चलकर थ्योंगो अफ्रीका के बहुत बड़े लेखक बने । उन्होंने अंग्रेजी की धज्जी उड़ाई । थ्योंगी केन्या के निवासी थे । केन्या के स्कूलों में अंग्रेजी बोलने की बाध्यता थी । जो छात्र गिकुयू (केन्या की भाषा) में बात करता, उसे कठोर दण्ड मिलता था । दण्ड था नंगी पीठ पर तीन से पाँच कोड़े । अंग्रेजी लिखने और बोलने वालों को पुरस्कृत किया जाता था । थोड़ी अंग्रेजी जानिये और पुरस्कार पाइए । वह समय 1952 का था, जब केन्या में आपातकाल लगा था । यह तो अविकसित देशों की बात है। पिछले कई वर्षों से विकासशील देशों में अमेरिका की किसी संस्था में भारत के लिए बिबिलियोग्राफी बनाने का काम चल रहा है। मेरे एक वरिष्ठ परिचित, जो पेशे से एक कॉलेज के प्राचार्य हैं, को अमेरिका से एक पत्र आया । पत्र का आशय था कि वे रसायन विज्ञान में अपनी उपलब्धि यानी पी. एच. डी. का ब्यौरा तथा अन्य विवरण भेजें । अमेरिका की संस्था अपनी बिबिलियोग्राफी में उन्हें प्रमुखता से छापेगी। मैंने राँची के अपने विज्ञान मित्रों से पूछा कि रसायन विज्ञान में अमुक प्राचार्य की क्या उपलब्धि है। उन लोगों ने बताया कि वे प्राचार्य रसायन में एम. एस सी. और पी. एच. डी. है । बस, समझिए यही उपलब्धि है। ये है औसत दर्जे के बुद्धिजीवी का महिमा मंडन । थ्योंगो ने खुद ही लिखा है (भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय स्मिता) कि उन्हें इस सम्मेलन में बुलाये जाने पर हैरानी हुई, क्योंकि तब तक वे मुकम्मिल लेखक भी नहीं हुए थे । उपलब्धि केवल यही थी कि उनकी दो कहानियाँ अंग्रेजी में आयी थी ।
केन्या एक छोटा देश है । पचास के दशक में वहाँ की खदानों पर फ्रांस और ब्रिटेन का कब्जा था। उनके लिए अंग्रेजी को बढ़ावा देना औपनिवेशिक हित था । यह तभी सम्भव था जब वहाँ की मातृभाषा को कुचला जाता । केन्या में अंग्रेजी और फ्रेंच के माध्यम से यूरोप का बाजार समृद्ध हुआ । इसलिए जो संस्कृति विकसित हुई, गुलाम बनाने की संस्कृति, उसने केन्या को बहुत लूटा । 1962 में यूरोप को आवश्यकता पड़ी अंग्रेजी में अफ्रीका की पीड़ा लिखनेवालों को जमा करने की । मुल्कराज आनन्द अंग्रेजी के बड़े लेखक थे । उन्होंने अपना उपन्यास (अनटचेबल्स)
की पांडुलिपि महात्मा गाँधी को दी। गाँधीजी ने उन्हें हरिजन बस्ती में रहने को कहा । वे हरिजनों की बस्ती में रहे । 'अनटचेब्ल्स' दुबारा लिखा और वह अंग्रेजी का मानक उपन्यास बना । गाँधीजी स्वयं अंग्रेजी के बड़े लेखक थे । कहते हैं कि उनकी अंग्रेजी लन्दन की प्रकृति के बिल्कुल अनुकूल थी । गाँधीजी समझते थे कि जबतक हरिजनों की बस्ती में रहकर उनकी भाषा न जानी जाए, तब तक अछूतों पर कुछ भी लिखना बेईमानी है। अब केन्या के समाज की पीड़ा वहाँ की भाषा में प्रकट न होकर पहले अंग्रेजी में हो, यह कुछ ब्रिटिश भारत में अंग्रेजी में लिखे हिन्दी के शोध प्रबन्धों जैसा है। प्रसिद्ध इतिहासकार लाल बहादुर वर्मा का शोध प्रबन्ध फ्रेंच की राज्यक्रान्ति पर था। उन्होंने फ्रेंच भाषा सीखी थी । दूसरे प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. नुरुल हसन ने भारत में पुर्तगालियों के आक्रमण और उस समय के समाज पर शोधकार्य किया था । वे पुर्तगाली भाषा के जानकार थे ।
वर्तमान पूँजी तन्त्र में संस्कृति का चरित्र सार्वभौमिक नहीं है। ऐसा होने पर पूँजी पर वर्चस्व खत्म होगा । इसलिए यह तन्त्र कई स्तरों पर भाषा और संस्कृति को बाँटने का काम करता है। आज के समय में दानव की तरह शहरों का विकास हो रहा है। अब गाँव शहर पर निर्भर होते जा रहे हैं । यह इसी तरह है जैसे अविकसित देश विकसित देशों पर निर्भर हो रहे हैं । गाँव से आबादी शहर की ओर आ रही है । अविकसित देशों की प्रतिभा विकसित देशों की ओर जा रही है । जब शहरों की भाषा अंग्रेजी हो रही हो, तो गाँवों में भी 'स्पोकन इग्लिश' का कोर्स चलाना जरूरी हो गया है। पश्चिम से जो पूँजी-निवेश हो रहा है, उसे पश्चिम देश पश्चिमी सभ्यता मानते हैं। क्या समझा जाए कि पश्चिम में मजदूर नहीं हैं, किसान नहीं हैं, उनकी समस्याएँ नहीं हैं । अमेरिका ने इराक को तोड़ा है, तो किसानों को भी तोड़ा है, अमेरिका के किसानों को तोड़ा है। किसानों के पैसे से, मजदूरों के पेसे से वहाँ की सरकार हथियार बनाती है। पाकिस्तान और हिन्दुस्तान किसानों के पैसों से हथियार खरीदते है । इसलिए पश्चिम के पूँजी निवेश को केवल पश्चिम की संस्कृति नहीं समझें । पश्चिम भी यही चाहता है कि उसका पूँजी निवेश पश्चिमी संस्कृति के साँचे में ही आए । लोग बराक ओबामा के देश के किसानों को सम्पन्न समझें । कई लोग कहते भी हैं कि अमेरिका में सब कुछ ठीक-ठाक है। उन्हें क्या पता कि वहाँ अश्वेतों की भी घनी बस्ती है, सुख-सुविधाओं से दूर । पश्चिम से जो भाषा आ रही है अंग्रेजी, उसकी ज़रूरत शेक्सपियर ओर वर्ड्सवर्थ पढ़ने-पढ़ाने की नहीं है । वह 'बिजनेस अंग्रेजी'
है । ध्यान रहे कि राजस्थानी जाननेवाले इस भाषा के लिए रोजगार पैदा करने पर जोर नहीं दे रहे हैं। मिथिला के हर स्कूल में मैथिली की पढ़ाई हो, जोर इस पर होना चाहिए । बाहर से जो अंग्रेजी दाँ माल खरीदने दरभंगा आएँ तो या हिन्दी में बात करे या मैथिली में । तब मिथिला का किसान अपने उत्पाद का महत्त्व भी समझेगा । जिसे हम और आप जनता की संस्कृति कहते हैं, उसे एक ऐसी भाषा चाहिए जिसमें उसकी पीड़ा प्रकट हो ।
भाषाओं की अस्मिता से आशय आजादी के पहले हिन्दी के लेखकों को हिन्दी की अस्मिता की चिन्ता नहीं थी, जबकि हिन्दी साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ रही थी । यह चिन्ता गुजराती और बंगला को भी नहीं थी । गाँधी जी गुजराती थे । बिहार का चम्पारण उनके आन्दोलन का पहला प्रयोग-स्थल था । केशवचन्द्र सेन बंगाली थे । वे हिन्दी और दूसरे अहिन्दी प्रान्तों में अपने संगठन (ब्रह्म समाज ) का विस्तार करने में लगे थे। बाल गंगाधर तिलक मराठी थे । हिन्दी इलाके के मजदूर आन्दोलन में सक्रिय थे । इन सबकी अस्मिता साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ने में थी । भारतीय उपमहाद्वीप (काबुल लाहौर आदि) में भी हिन्दी का प्रसार नेपथ्य से पश्चिमी पूँजी निवेश के लिए चुनौती बना हुआ है । काबुल में हिन्दी का केन्द्र खुला है। इसे लेकर पश्चिमवालों को चिन्ता है । अस्मिता की रक्षा साम्राज्यवाद के खिलाफ हो और वह मैथिली, भोजपुरी और राजस्थानी से डील हो तो हिन्दी की ज़रूरत कहाँ है? बेशक वह स्वागत योग्य है ।
उर्मिला जैन
ज़ेबरा की धारियां - सफेद पर काली या काले पर सफेद
'र की पिछली सीट पर बैठी, मैंने जैसे ही खिड़की खोली, एक मोटा-ताजा बबून खिड़की में झपटा और सीट पर रखा ताजे सेब का बैग उठा कर भाग गया। मैं जोरों से चीखी। कुछ समझ पाती कि पल भर में यह सब हो गया । देखा, आसपास के पर्यटक इस दृश्य को कैमरे में कैद कर रहे थे । मैं तो अधमरी हो रही थी, जबकि उनके लिए यह एक मनोरंजक और अजीब घटना थी । दो-तीन कारें हमारी गाड़ी के पास आयीं और लोगों ने पूछा, 'आर यू आल राइट ?' मेरे 'हां' कहने पर उन्होंने सन्तोष जाहिर किया । मैंने भी चैन की सांस ली कि मुझे कोई चोट या खरोंच नहीं आयी थी। बबून के झपटने का एकमात्र उद्देश्य था, सेब का बैग ले जाना, पर उसे पता कैसे चला कि कार में मेरे पास सेब का बैग रखा है, क्योंकि आसपास तो कोई बबून दिखा नहीं था । तब क्या बबून की घ्राण शक्ति इतनी तेज होती है कि 15-20 फुट दूर से उसे फलों की गन्ध मिल जाती है । यह मेरे लिए अब भी रहस्य ही बना हुआ है
बेटे और पति ने बरजा कि इस घनघोर जंगल में कार की खिड़की नहीं खोलनी चाहिए थी। मैंने कहा कि जंगल का दृश्य थोड़ी और अच्छी तरह दिखे और कुछ स्नैप ले लूं, इसलिए ही पलभर को खिड़की खोली थी । यह सब घटित हो रहा था, दक्षिण अफ्रीका के विश्वविख्यात 'क्रूगर राष्ट्रीय उद्यान में ।
क्रूगर राष्ट्रीय उद्यान, दक्षिण अफ्रीका के पर्यटन का एक विवादास्पद संप्रतीक
। ज्यादातर पर्यटक अफ्रीका में ढेरों हाथी, शेर और हजारों की संख्या में अन्य पशुओं को घूमते-फिरते और चरते देखने आते हैं। ये सब यहां हैं । धरती का एक लम्बा हिस्सा, जो मोजाम्बिक की सीमा से प्रारम्भ होकर लिम्पु प्रान्त और पुमालांगा तक जाता है, 414 किलीमीटर लम्बा है यानी पूर्व में मोजाम्बिक की सीमा, उत्तर में जिम्बाब्वे की सीमा और क्रोकोडाइल रिवर इसकी दक्षिण सीमा पर है । इस उद्यान की स्थापना 1926 में हुई और क्षेत्रफल है 20 हजार वर्ग किलोमीटर । इसे 14 इको ज़ोन में बांटा गया है। हर क्षेत्र अलग प्रजाति के वन-जन्तुओं को आश्रय देता है । उद्यान की देख-रेख का जिम्मा 'साउथ अफ्रीकन नेशनल पार्क आर्गनाइज़ेशन' के जिम्मे है ।
क्रूगर राष्ट्रीय उद्यान इस प्रकार बनाया गया है कि जहां चाहें तो खुद ड्राइव किया जा सकता है और खुद पकाया- खाया जा सकता है । हम लोग दोपहर के भोजन के समय क्रूगर पहुंचे और जौक सफारी लॉज में ठहरे । देखने में भले ही यह एक छोटा कॉटेज था, पर बहुत ही खूबसूरती के साथ और चार सितारा होटल की सुख-सुविधाओं से युक्त था । क्रूगर में नौ अलग-अलग दरवाजे हैं- नाम्बि, मैडलीन, फाबेनि, क्रोकोडाइल ब्रिज, क्रूगर ऑरपेन, फालाबोरबा, पुंडा मारिआ और पारफुरी । हम दक्षिण पश्चिम में स्थित नाम्बि दरवाजे से अन्दर पहुंचे थे ।
इस उद्यान को नूतन माना जाए या आदिम, यह विवादास्पद है । कारण, इसमें या इसके आसपास लोग हजारों वर्षों से रहते आये हैं । 'सन हंटर-गैदरर्स' अपने निशान पेंटिंग और नक्काशी के रूप में छोड़ गये हैं। अब तक करीब 150 ऐसे स्थान मिल चुके हैं, साथ ही उद्यान में कई स्थानों पर कृषि संस्कृति के निशान भी मिले हैं। यहां पत्थर के महलों वाले राज्य भी थे, जहां चीनी मिट्टी, आभूषण और कपड़ों का व्यापार भी होता था ।
वैसे सच्चाई और कल्पनाएं दोनों ही, आधुनिक वैज्ञानिक ढंग से देख-रेख किए जाने वाले इस उद्यान के बारे में मिली जुली हैं । जो भी हो, उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में हाथीदांत, चमड़ा तथा सोना होने की अफवाहों के कारण गोरों का आगमन इस क्षेत्र में हुआ । वे इस क्षेत्र में जोखिम उठाकर घूमते रहे और उनका यहां सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा। परिणामस्वरूप तेजी से जानवरों का घटना शुरू हुआ । भविष्य में जानवरों का शिकार न हो सके, इसके लिए तत्कालीन दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति पॉल क्रूगर ने ट्रांसवाल पार्लियामेंट पर दबाव डाला कि वन-जन्तुओं लिए सुरक्षित क्षेत्र स्थापित किए जाएं । ये सुरक्षित क्षेत्र क्रूगर राष्ट्रीय उद्यान के रूप में विकसित हुए । बोअर युद्ध के फलस्वरूप बहुत तहस-नहस हुआ और उसके बाद अंग्रेजों ने 1902 में मेजर जेम्स स्टिवेन्सन हैमिल्टन को गेम-वार्डेन बनाया । स्टिवेन्सन हैमिल्टन ने चार दशकों तक उद्यान की सुविधाओं को उन्नत करने का प्रयास किया । फलस्वरूप इसमें जगह-जगह बेहद सुसज्जित, तरतीब से बने हुए कैम्प भी हैं । 'स्कुकुज़ा रेस्ट कैम्प' उद्यान के केन्द्र में स्थित है। इस मुख्य कैम्प में चित्रों तथा नक्शों द्वारा
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इलाके की तरह विभिन्न बोलियाँ नहीं हैं। फिर भी, यहाँ हिन्दी सम्पर्क भाषा रही है यह तब से रही है जब हिन्दी राष्ट्रभाषा नहीं थी । अब पाकिस्तान स्थित सिरायकी बोली के क्षेत्र को हिन्दी प्रदेश न माने, उर्दू प्रदेश का हिस्सा तो मान सकते हैं । हिन्दी प्रदेश की विशिष्टता एकल नहीं है । कई बोलियों का संसार है यहाँ । एक बोली के तन्त्र के आधार पर हिन्दी की रूप रेखा नहीं बन सकती है । एक प्रश्न है, कैसे खड़ी बोली, दिल्ली की खड़ी बोली इतने बड़े देश की भाषा बन गयी ? निश्चय ही इसमें बोलियों का योगदान है। इससे इनकार नहीं । हिन्दी में प्रयोग के पहले कोई रूप चाहे वह क्रियापद का रूप हो, दूसरी बोलियों में मिलते-जुलते रूप में भी प्रचलित रहा है । अलीगढ़ की हाबूड़ा जाति की बोली में हुती हुतौ , गयौ रहूयौ जैसे प्रयोग मिलते हैं । यह सौ साल पहले की बात है, भारतेन्दु की समस्या उसके कुछ बाद । तब खड़ी बोली में एकरूपता नहीं आयी थी । भारतेन्दु के समय ग़ालित की कविताओं में ता ते ती है आदि के प्रयोग प्रचलित थे, बल्कि उनके पहले मीर तक़ी मीर की शायरी में ये प्रयोग मिलते हैं । बोली से भाषा केवल इस कारण नहीं बनती कि उस बोली के बोलने वाले अलग-अलग इलाके में फैल जाएँ । सम्पर्क और साहचर्य कितना है? हाबूड़ा जाति के लोग दिल्ली में भी बसे, लेकिन वहाँ वे खड़ी बोली बोलने लगे । पंजाबी भाषी देश के हर कोने में मिलेंगे । वहाँ वे पंजाबी भाषी नहीं रह जाते हैं । कलकत्ता के मारवाड़ी भी बंगला बोलते हैं, परन्तु वे समझते हैं कि कलकत्ता की सामाजिक और आर्थिक संरचना में बंगालियों की तरह उनकी भी भूमिका है। अगर ऐसा न हो तो सब जगह लघु राष्ट्रीयता का सवाल खड़ा हो जाएगा । भाषा-परिवर्तन और विकास में एक प्रक्रिया अन्तर्मिलन की होती है । जातियों का अन्तर्मिलन हो या न हो, बोलियों का होता है। दरभंगा में कायस्थ कायस्थ ही बने रहे और ब्राह्मण ब्राह्मण ही । बोलते तो मैथिली ही हैं । वहाँ के पंजाबी भी मैथिली बोलते हैं। पंजाबी बोलकर उनका कारोबार नहीं चल सकता है। बोली भाषा तब बनती है, जब कारोबार बड़ा होता है । खेती पर आधारित समाज में बोली के अनेक रूप होते हैं। जैसे ही खेती के उत्पाद दूसरे कारोबार में बदलते हैं, बोली का रूप भी बदलता है। किसान को ट्रैक्टर चाहिए तो उसे उद्योग को समझना होगा । भले वह ट्रैक्टर बनाने का तरीका न समझे, लेकिन ट्रैक्टर उद्योग उसके मनोजगत का एक हिस्सा ज़रूर होता है । बोलियों और भाषाओं के मेले और युद्ध में अंग्रेजी का कहीं विरोध नहीं हो रहा है। मैथिली हो, राजस्थानी हो या बंगला, इन्हें हिन्दी से जितना विरोध है, अंग्रेजी से नहीं । जो अभिजात और शहरी मध्य वर्ग हिन्दी के विरोध में है, उन्हें पता है कि अंग्रेजी का विरोध करने से उनके बाल-बच्चों को नौकरी में परेशानी हो सकती है। आई. टी. सेक्टर, मैनेजमेंट सेक्टर और दूसरे कई क्षेत्र हैं, जहाँ अंग्रेजी का वर्चस्व है। विकासशील देशों में अंग्रेजी के प्रसार का एक चरण था, अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में हिन्दी के थोपने के आरोप का और अब दूसरा चरण आया है हिन्दी प्रदेश को तोड़ने का । इस काम में हिन्दी प्रदेश की बोलियाँ ढाल बनी हुई है । अचानक बोलियों का महत्त्व बढ़ गया, हिन्दी के विरोध में । अंग्रेजी के प्रसार के पहले चरण में मातृ भाषाओं से पल्ला झाड़ने और अंग्रेजी को अपनाने का जोर था । बहुत पहले की बात है। एक हज़ार नौ सौ बासठ में मैकरेरे विश्वविद्यालय में एक सम्मेलन हुआ, जिसका शीर्षक था, 'अंग्रेजी में लिखनेवाले लेखकों का सम्मेलन ।' जाहिर है कि इसमें अफ्रीकी भाषाओं में लिखने वाले लेखक अपने आप छँट गये। इस सम्मेलन में भाग लेने वाले लेखक कोई बड़े लेखक नहीं थे । एक लेखक थे, न्गुगी वा थ्योंगो, जिनकी उस समय के दो कहानियाँ छपी थीं और दोनों अंग्रेजी में थी। दो में से एक कहानी 'दि रिटर्न' स्कूल की पत्रिका में छपी थी आगे चलकर थ्योंगो अफ्रीका के बहुत बड़े लेखक बने । उन्होंने अंग्रेजी की धज्जी उड़ाई । थ्योंगी केन्या के निवासी थे । केन्या के स्कूलों में अंग्रेजी बोलने की बाध्यता थी । जो छात्र गिकुयू में बात करता, उसे कठोर दण्ड मिलता था । दण्ड था नंगी पीठ पर तीन से पाँच कोड़े । अंग्रेजी लिखने और बोलने वालों को पुरस्कृत किया जाता था । थोड़ी अंग्रेजी जानिये और पुरस्कार पाइए । वह समय एक हज़ार नौ सौ बावन का था, जब केन्या में आपातकाल लगा था । यह तो अविकसित देशों की बात है। पिछले कई वर्षों से विकासशील देशों में अमेरिका की किसी संस्था में भारत के लिए बिबिलियोग्राफी बनाने का काम चल रहा है। मेरे एक वरिष्ठ परिचित, जो पेशे से एक कॉलेज के प्राचार्य हैं, को अमेरिका से एक पत्र आया । पत्र का आशय था कि वे रसायन विज्ञान में अपनी उपलब्धि यानी पी. एच. डी. का ब्यौरा तथा अन्य विवरण भेजें । अमेरिका की संस्था अपनी बिबिलियोग्राफी में उन्हें प्रमुखता से छापेगी। मैंने राँची के अपने विज्ञान मित्रों से पूछा कि रसायन विज्ञान में अमुक प्राचार्य की क्या उपलब्धि है। उन लोगों ने बताया कि वे प्राचार्य रसायन में एम. एस सी. और पी. एच. डी. है । बस, समझिए यही उपलब्धि है। ये है औसत दर्जे के बुद्धिजीवी का महिमा मंडन । थ्योंगो ने खुद ही लिखा है कि उन्हें इस सम्मेलन में बुलाये जाने पर हैरानी हुई, क्योंकि तब तक वे मुकम्मिल लेखक भी नहीं हुए थे । उपलब्धि केवल यही थी कि उनकी दो कहानियाँ अंग्रेजी में आयी थी । केन्या एक छोटा देश है । पचास के दशक में वहाँ की खदानों पर फ्रांस और ब्रिटेन का कब्जा था। उनके लिए अंग्रेजी को बढ़ावा देना औपनिवेशिक हित था । यह तभी सम्भव था जब वहाँ की मातृभाषा को कुचला जाता । केन्या में अंग्रेजी और फ्रेंच के माध्यम से यूरोप का बाजार समृद्ध हुआ । इसलिए जो संस्कृति विकसित हुई, गुलाम बनाने की संस्कृति, उसने केन्या को बहुत लूटा । एक हज़ार नौ सौ बासठ में यूरोप को आवश्यकता पड़ी अंग्रेजी में अफ्रीका की पीड़ा लिखनेवालों को जमा करने की । मुल्कराज आनन्द अंग्रेजी के बड़े लेखक थे । उन्होंने अपना उपन्यास की पांडुलिपि महात्मा गाँधी को दी। गाँधीजी ने उन्हें हरिजन बस्ती में रहने को कहा । वे हरिजनों की बस्ती में रहे । 'अनटचेब्ल्स' दुबारा लिखा और वह अंग्रेजी का मानक उपन्यास बना । गाँधीजी स्वयं अंग्रेजी के बड़े लेखक थे । कहते हैं कि उनकी अंग्रेजी लन्दन की प्रकृति के बिल्कुल अनुकूल थी । गाँधीजी समझते थे कि जबतक हरिजनों की बस्ती में रहकर उनकी भाषा न जानी जाए, तब तक अछूतों पर कुछ भी लिखना बेईमानी है। अब केन्या के समाज की पीड़ा वहाँ की भाषा में प्रकट न होकर पहले अंग्रेजी में हो, यह कुछ ब्रिटिश भारत में अंग्रेजी में लिखे हिन्दी के शोध प्रबन्धों जैसा है। प्रसिद्ध इतिहासकार लाल बहादुर वर्मा का शोध प्रबन्ध फ्रेंच की राज्यक्रान्ति पर था। उन्होंने फ्रेंच भाषा सीखी थी । दूसरे प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. नुरुल हसन ने भारत में पुर्तगालियों के आक्रमण और उस समय के समाज पर शोधकार्य किया था । वे पुर्तगाली भाषा के जानकार थे । वर्तमान पूँजी तन्त्र में संस्कृति का चरित्र सार्वभौमिक नहीं है। ऐसा होने पर पूँजी पर वर्चस्व खत्म होगा । इसलिए यह तन्त्र कई स्तरों पर भाषा और संस्कृति को बाँटने का काम करता है। आज के समय में दानव की तरह शहरों का विकास हो रहा है। अब गाँव शहर पर निर्भर होते जा रहे हैं । यह इसी तरह है जैसे अविकसित देश विकसित देशों पर निर्भर हो रहे हैं । गाँव से आबादी शहर की ओर आ रही है । अविकसित देशों की प्रतिभा विकसित देशों की ओर जा रही है । जब शहरों की भाषा अंग्रेजी हो रही हो, तो गाँवों में भी 'स्पोकन इग्लिश' का कोर्स चलाना जरूरी हो गया है। पश्चिम से जो पूँजी-निवेश हो रहा है, उसे पश्चिम देश पश्चिमी सभ्यता मानते हैं। क्या समझा जाए कि पश्चिम में मजदूर नहीं हैं, किसान नहीं हैं, उनकी समस्याएँ नहीं हैं । अमेरिका ने इराक को तोड़ा है, तो किसानों को भी तोड़ा है, अमेरिका के किसानों को तोड़ा है। किसानों के पैसे से, मजदूरों के पेसे से वहाँ की सरकार हथियार बनाती है। पाकिस्तान और हिन्दुस्तान किसानों के पैसों से हथियार खरीदते है । इसलिए पश्चिम के पूँजी निवेश को केवल पश्चिम की संस्कृति नहीं समझें । पश्चिम भी यही चाहता है कि उसका पूँजी निवेश पश्चिमी संस्कृति के साँचे में ही आए । लोग बराक ओबामा के देश के किसानों को सम्पन्न समझें । कई लोग कहते भी हैं कि अमेरिका में सब कुछ ठीक-ठाक है। उन्हें क्या पता कि वहाँ अश्वेतों की भी घनी बस्ती है, सुख-सुविधाओं से दूर । पश्चिम से जो भाषा आ रही है अंग्रेजी, उसकी ज़रूरत शेक्सपियर ओर वर्ड्सवर्थ पढ़ने-पढ़ाने की नहीं है । वह 'बिजनेस अंग्रेजी' है । ध्यान रहे कि राजस्थानी जाननेवाले इस भाषा के लिए रोजगार पैदा करने पर जोर नहीं दे रहे हैं। मिथिला के हर स्कूल में मैथिली की पढ़ाई हो, जोर इस पर होना चाहिए । बाहर से जो अंग्रेजी दाँ माल खरीदने दरभंगा आएँ तो या हिन्दी में बात करे या मैथिली में । तब मिथिला का किसान अपने उत्पाद का महत्त्व भी समझेगा । जिसे हम और आप जनता की संस्कृति कहते हैं, उसे एक ऐसी भाषा चाहिए जिसमें उसकी पीड़ा प्रकट हो । भाषाओं की अस्मिता से आशय आजादी के पहले हिन्दी के लेखकों को हिन्दी की अस्मिता की चिन्ता नहीं थी, जबकि हिन्दी साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ रही थी । यह चिन्ता गुजराती और बंगला को भी नहीं थी । गाँधी जी गुजराती थे । बिहार का चम्पारण उनके आन्दोलन का पहला प्रयोग-स्थल था । केशवचन्द्र सेन बंगाली थे । वे हिन्दी और दूसरे अहिन्दी प्रान्तों में अपने संगठन का विस्तार करने में लगे थे। बाल गंगाधर तिलक मराठी थे । हिन्दी इलाके के मजदूर आन्दोलन में सक्रिय थे । इन सबकी अस्मिता साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ने में थी । भारतीय उपमहाद्वीप में भी हिन्दी का प्रसार नेपथ्य से पश्चिमी पूँजी निवेश के लिए चुनौती बना हुआ है । काबुल में हिन्दी का केन्द्र खुला है। इसे लेकर पश्चिमवालों को चिन्ता है । अस्मिता की रक्षा साम्राज्यवाद के खिलाफ हो और वह मैथिली, भोजपुरी और राजस्थानी से डील हो तो हिन्दी की ज़रूरत कहाँ है? बेशक वह स्वागत योग्य है । उर्मिला जैन ज़ेबरा की धारियां - सफेद पर काली या काले पर सफेद 'र की पिछली सीट पर बैठी, मैंने जैसे ही खिड़की खोली, एक मोटा-ताजा बबून खिड़की में झपटा और सीट पर रखा ताजे सेब का बैग उठा कर भाग गया। मैं जोरों से चीखी। कुछ समझ पाती कि पल भर में यह सब हो गया । देखा, आसपास के पर्यटक इस दृश्य को कैमरे में कैद कर रहे थे । मैं तो अधमरी हो रही थी, जबकि उनके लिए यह एक मनोरंजक और अजीब घटना थी । दो-तीन कारें हमारी गाड़ी के पास आयीं और लोगों ने पूछा, 'आर यू आल राइट ?' मेरे 'हां' कहने पर उन्होंने सन्तोष जाहिर किया । मैंने भी चैन की सांस ली कि मुझे कोई चोट या खरोंच नहीं आयी थी। बबून के झपटने का एकमात्र उद्देश्य था, सेब का बैग ले जाना, पर उसे पता कैसे चला कि कार में मेरे पास सेब का बैग रखा है, क्योंकि आसपास तो कोई बबून दिखा नहीं था । तब क्या बबून की घ्राण शक्ति इतनी तेज होती है कि पंद्रह-बीस फुट दूर से उसे फलों की गन्ध मिल जाती है । यह मेरे लिए अब भी रहस्य ही बना हुआ है बेटे और पति ने बरजा कि इस घनघोर जंगल में कार की खिड़की नहीं खोलनी चाहिए थी। मैंने कहा कि जंगल का दृश्य थोड़ी और अच्छी तरह दिखे और कुछ स्नैप ले लूं, इसलिए ही पलभर को खिड़की खोली थी । यह सब घटित हो रहा था, दक्षिण अफ्रीका के विश्वविख्यात 'क्रूगर राष्ट्रीय उद्यान में । क्रूगर राष्ट्रीय उद्यान, दक्षिण अफ्रीका के पर्यटन का एक विवादास्पद संप्रतीक । ज्यादातर पर्यटक अफ्रीका में ढेरों हाथी, शेर और हजारों की संख्या में अन्य पशुओं को घूमते-फिरते और चरते देखने आते हैं। ये सब यहां हैं । धरती का एक लम्बा हिस्सा, जो मोजाम्बिक की सीमा से प्रारम्भ होकर लिम्पु प्रान्त और पुमालांगा तक जाता है, चार सौ चौदह किलीमीटर लम्बा है यानी पूर्व में मोजाम्बिक की सीमा, उत्तर में जिम्बाब्वे की सीमा और क्रोकोडाइल रिवर इसकी दक्षिण सीमा पर है । इस उद्यान की स्थापना एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में हुई और क्षेत्रफल है बीस हजार वर्ग किलोमीटर । इसे चौदह इको ज़ोन में बांटा गया है। हर क्षेत्र अलग प्रजाति के वन-जन्तुओं को आश्रय देता है । उद्यान की देख-रेख का जिम्मा 'साउथ अफ्रीकन नेशनल पार्क आर्गनाइज़ेशन' के जिम्मे है । क्रूगर राष्ट्रीय उद्यान इस प्रकार बनाया गया है कि जहां चाहें तो खुद ड्राइव किया जा सकता है और खुद पकाया- खाया जा सकता है । हम लोग दोपहर के भोजन के समय क्रूगर पहुंचे और जौक सफारी लॉज में ठहरे । देखने में भले ही यह एक छोटा कॉटेज था, पर बहुत ही खूबसूरती के साथ और चार सितारा होटल की सुख-सुविधाओं से युक्त था । क्रूगर में नौ अलग-अलग दरवाजे हैं- नाम्बि, मैडलीन, फाबेनि, क्रोकोडाइल ब्रिज, क्रूगर ऑरपेन, फालाबोरबा, पुंडा मारिआ और पारफुरी । हम दक्षिण पश्चिम में स्थित नाम्बि दरवाजे से अन्दर पहुंचे थे । इस उद्यान को नूतन माना जाए या आदिम, यह विवादास्पद है । कारण, इसमें या इसके आसपास लोग हजारों वर्षों से रहते आये हैं । 'सन हंटर-गैदरर्स' अपने निशान पेंटिंग और नक्काशी के रूप में छोड़ गये हैं। अब तक करीब एक सौ पचास ऐसे स्थान मिल चुके हैं, साथ ही उद्यान में कई स्थानों पर कृषि संस्कृति के निशान भी मिले हैं। यहां पत्थर के महलों वाले राज्य भी थे, जहां चीनी मिट्टी, आभूषण और कपड़ों का व्यापार भी होता था । वैसे सच्चाई और कल्पनाएं दोनों ही, आधुनिक वैज्ञानिक ढंग से देख-रेख किए जाने वाले इस उद्यान के बारे में मिली जुली हैं । जो भी हो, उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में हाथीदांत, चमड़ा तथा सोना होने की अफवाहों के कारण गोरों का आगमन इस क्षेत्र में हुआ । वे इस क्षेत्र में जोखिम उठाकर घूमते रहे और उनका यहां सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा। परिणामस्वरूप तेजी से जानवरों का घटना शुरू हुआ । भविष्य में जानवरों का शिकार न हो सके, इसके लिए तत्कालीन दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति पॉल क्रूगर ने ट्रांसवाल पार्लियामेंट पर दबाव डाला कि वन-जन्तुओं लिए सुरक्षित क्षेत्र स्थापित किए जाएं । ये सुरक्षित क्षेत्र क्रूगर राष्ट्रीय उद्यान के रूप में विकसित हुए । बोअर युद्ध के फलस्वरूप बहुत तहस-नहस हुआ और उसके बाद अंग्रेजों ने एक हज़ार नौ सौ दो में मेजर जेम्स स्टिवेन्सन हैमिल्टन को गेम-वार्डेन बनाया । स्टिवेन्सन हैमिल्टन ने चार दशकों तक उद्यान की सुविधाओं को उन्नत करने का प्रयास किया । फलस्वरूप इसमें जगह-जगह बेहद सुसज्जित, तरतीब से बने हुए कैम्प भी हैं । 'स्कुकुज़ा रेस्ट कैम्प' उद्यान के केन्द्र में स्थित है। इस मुख्य कैम्प में चित्रों तथा नक्शों द्वारा
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सोलन-पिछले दो दिन से लगातार मौसम तेवर बदल रहा है। हालांकि सुबह के समय तो अच्छी धूप खिली होती है, लेकिन दोपहर बाद अचानक बदल रहे मौसम के रंग ने भी लोगों को डराना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि पहले तो कोरोना की वजह से लॉकडाउन था और लोग घरों में दुबके हुए थे, पर अब बारिश ने भी लॉकडाउन लगा दिया है। इस कारण बारिश के बाद पूरा बाजार खाली हो जाता है, जिसके चलते सबसे अधिक परेशानियों का सामना व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। बुधवार दोपहर बाद सोलन जिला मुख्यालय सहित पूरे जिला में जोरदार बारिश हुई। बारिश की ऐसी बौछारें पड़ी जो जहां था वहीं का वहीं खड़ा रह गया। यह सिलसिला लगातार कई घंटों तक जारी रहा। दूसरी तरफ लगातार बिगड़ रहे मौसम के मिजाज के कारण इस बार ठंड नाम की कोई चीज ही नहीं है। यद्यपि बीते सप्ताह गर्मी पूरे यौवन पर थी और दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद बारिश के कारण अब मौसम में ठंडक आरंभ हो गई है। लोग अपने घरों में अभी भी रजाई या फिर कंबल में सो रहे हैं और कई बार तो नौबत यहां तक पहुंच जाती है कि लोगों को गर्म कपड़े पहनने की जरूरत पड़ जाती है। बुद्धिजीवियों की मानें तो सोलन में जून माह में ऐसा मौसम इससे पहले कभी नहीं देखा था। यही नहीं बारिश का खासकर किसानों को फायदा भी पहुंच रहा है। सोलन जिला के अधिकतर क्षेत्रों में टमाटर, शिमला मिर्च और अन्य बेलदार सब्जियों की रोपाई का कार्य चरम पर है। ऐसे में रोजाना हो रही बारिश संजीवनी साबित हो रही है। किसानों को सिंचाई की जरूरत ही नहीं पड़ रही। इससे उम्मीद जताई जा सकती है कि फसलों के लिहाज से समय पर हो रही बारिश का किसानों को फायदा पहुंच सकता है।
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सोलन-पिछले दो दिन से लगातार मौसम तेवर बदल रहा है। हालांकि सुबह के समय तो अच्छी धूप खिली होती है, लेकिन दोपहर बाद अचानक बदल रहे मौसम के रंग ने भी लोगों को डराना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि पहले तो कोरोना की वजह से लॉकडाउन था और लोग घरों में दुबके हुए थे, पर अब बारिश ने भी लॉकडाउन लगा दिया है। इस कारण बारिश के बाद पूरा बाजार खाली हो जाता है, जिसके चलते सबसे अधिक परेशानियों का सामना व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। बुधवार दोपहर बाद सोलन जिला मुख्यालय सहित पूरे जिला में जोरदार बारिश हुई। बारिश की ऐसी बौछारें पड़ी जो जहां था वहीं का वहीं खड़ा रह गया। यह सिलसिला लगातार कई घंटों तक जारी रहा। दूसरी तरफ लगातार बिगड़ रहे मौसम के मिजाज के कारण इस बार ठंड नाम की कोई चीज ही नहीं है। यद्यपि बीते सप्ताह गर्मी पूरे यौवन पर थी और दिन का अधिकतम तापमान पैंतीस डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद बारिश के कारण अब मौसम में ठंडक आरंभ हो गई है। लोग अपने घरों में अभी भी रजाई या फिर कंबल में सो रहे हैं और कई बार तो नौबत यहां तक पहुंच जाती है कि लोगों को गर्म कपड़े पहनने की जरूरत पड़ जाती है। बुद्धिजीवियों की मानें तो सोलन में जून माह में ऐसा मौसम इससे पहले कभी नहीं देखा था। यही नहीं बारिश का खासकर किसानों को फायदा भी पहुंच रहा है। सोलन जिला के अधिकतर क्षेत्रों में टमाटर, शिमला मिर्च और अन्य बेलदार सब्जियों की रोपाई का कार्य चरम पर है। ऐसे में रोजाना हो रही बारिश संजीवनी साबित हो रही है। किसानों को सिंचाई की जरूरत ही नहीं पड़ रही। इससे उम्मीद जताई जा सकती है कि फसलों के लिहाज से समय पर हो रही बारिश का किसानों को फायदा पहुंच सकता है।
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21 जुलाई 2020, भोपाल। प्रत्येक किसान के खेत तक पानी पहुंचाने का प्रयास करेंगे - मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विजनरी लीडर और मैन ऑफ आइडिया है। उन्होंने कोविड की चुनौती को अवसर में बदला है तथा नए आत्मनिर्भर भारत का मंत्र एवं संकल्प लिया है। हम उसे पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाएंगे। इसके लिए खेती, किसान एवं गाँवों के अधिकाधिक विकास की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश में सिंचाई क्षमताएं बढ़ाने के लिए विशेष कार्य हुए हैं। गत वर्षों में हमने प्रदेश में सिंचाई क्षमता को 7. 5 लाख हेक्टेयर से 42 लाख हैक्टेयर तक पहुंचाया है, इसमें नाबार्ड का महत्वपूर्ण योगदान है। आगामी समय में हम प्रदेश में किसानों की एक-एक इंच भूमि तक पानी पहुंचाने के प्रभावी प्रयास करेंगे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि नाबार्ड द्वारा आज मध्यप्रदेश के लिए 1425 करोड़ रूपये की लिफ्ट इरीगेशन को स्वीकृति दी गई है। साथ ही अन्य परियोजनाओं के लिए 4 हजार करोड़ का ऋण भी स्वीकृत किया है। इसके लिए मैं नाबार्ड की पूरी टीम का पूरे हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
मुख्यमंत्री श्री चौहान मंत्रालय में नाबार्ड के 39वें स्थापना दिवस के अवसर पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों के महिला स्व-सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संघों के प्रतिनिधियों, प्रगतिशील किसानों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल, सहकारिता, लोक सेवा प्रबंधन मंत्री श्री अरविंद सिंह भदौरिया, महाप्रबंधक नाबार्ड डॉ. डी. एस. चौहान , मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज गोविल आदि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा नाबार्ड की 2381. 69 लाख रूपये की अनुदान सहायता परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। इनसे प्रदेश के 10. 82 लाख परिवार लाभान्वित होंगे।
नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती टी. एस. राजी गैन ने वी. सी. के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में नाबार्ड कृषि रोजगार, कृषि अधोसंरचना विकास आदि के क्षेत्र में कार्य कर रही है। गत 10 वर्षों में लगभग एक लाख करोड़ के कार्य किए गए हैं।
नाबार्ड के अध्यक्ष श्री जी. आर. चिंताला मुंबई से वी सी में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि गत 15 वर्षों में मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर 10 प्रतिशत से भी काफी अधिक रही हैै।
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इक्कीस जुलाई दो हज़ार बीस, भोपाल। प्रत्येक किसान के खेत तक पानी पहुंचाने का प्रयास करेंगे - मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विजनरी लीडर और मैन ऑफ आइडिया है। उन्होंने कोविड की चुनौती को अवसर में बदला है तथा नए आत्मनिर्भर भारत का मंत्र एवं संकल्प लिया है। हम उसे पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाएंगे। इसके लिए खेती, किसान एवं गाँवों के अधिकाधिक विकास की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश में सिंचाई क्षमताएं बढ़ाने के लिए विशेष कार्य हुए हैं। गत वर्षों में हमने प्रदेश में सिंचाई क्षमता को सात. पाँच लाख हेक्टेयर से बयालीस लाख हैक्टेयर तक पहुंचाया है, इसमें नाबार्ड का महत्वपूर्ण योगदान है। आगामी समय में हम प्रदेश में किसानों की एक-एक इंच भूमि तक पानी पहुंचाने के प्रभावी प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि नाबार्ड द्वारा आज मध्यप्रदेश के लिए एक हज़ार चार सौ पच्चीस करोड़ रूपये की लिफ्ट इरीगेशन को स्वीकृति दी गई है। साथ ही अन्य परियोजनाओं के लिए चार हजार करोड़ का ऋण भी स्वीकृत किया है। इसके लिए मैं नाबार्ड की पूरी टीम का पूरे हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मुख्यमंत्री श्री चौहान मंत्रालय में नाबार्ड के उनतालीसवें स्थापना दिवस के अवसर पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों के महिला स्व-सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संघों के प्रतिनिधियों, प्रगतिशील किसानों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल, सहकारिता, लोक सेवा प्रबंधन मंत्री श्री अरविंद सिंह भदौरिया, महाप्रबंधक नाबार्ड डॉ. डी. एस. चौहान , मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज गोविल आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा नाबार्ड की दो हज़ार तीन सौ इक्यासी. उनहत्तर लाख रूपये की अनुदान सहायता परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। इनसे प्रदेश के दस. बयासी लाख परिवार लाभान्वित होंगे। नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती टी. एस. राजी गैन ने वी. सी. के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में नाबार्ड कृषि रोजगार, कृषि अधोसंरचना विकास आदि के क्षेत्र में कार्य कर रही है। गत दस वर्षों में लगभग एक लाख करोड़ के कार्य किए गए हैं। नाबार्ड के अध्यक्ष श्री जी. आर. चिंताला मुंबई से वी सी में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि गत पंद्रह वर्षों में मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर दस प्रतिशत से भी काफी अधिक रही हैै।
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अफगानिस्तान में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और ऐसे में अंतरराष्ट्रीय क्रिकट परिषद (ICC) वहां क्रिकेट डेवलप्मेंट को लेकर अपनी नजर रखे हुए है। क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, दुबई में स्थित आईसीसी दफ्तर काबुल में अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) के सदस्यों के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है।
एसीबी के लिए सबसे बड़ी चुनौती देश में महिला क्रिकेट को बचाए रखना है। 2020 में 25 महिला खिलाड़ियों को पहली बार सालाना कॉन्ट्रेक्ट में शामिल किया गया था। आईसीसी महिला क्रिकेट की एक सूत्र ने कहा कि वहां बड़ा बदलाव हुआ है और हमें नहीं पता कि क्या होगा।
एसीबी को पता है कि आईसीसी का पूर्ण सदस्य होने के लिए राष्ट्रीय महिला टीम का होना जरूरी है लेकिन हाल की स्थिति को देखते हुए काफी अनिश्चितिता है।
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अफगानिस्तान में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और ऐसे में अंतरराष्ट्रीय क्रिकट परिषद वहां क्रिकेट डेवलप्मेंट को लेकर अपनी नजर रखे हुए है। क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, दुबई में स्थित आईसीसी दफ्तर काबुल में अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सदस्यों के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है। एसीबी के लिए सबसे बड़ी चुनौती देश में महिला क्रिकेट को बचाए रखना है। दो हज़ार बीस में पच्चीस महिला खिलाड़ियों को पहली बार सालाना कॉन्ट्रेक्ट में शामिल किया गया था। आईसीसी महिला क्रिकेट की एक सूत्र ने कहा कि वहां बड़ा बदलाव हुआ है और हमें नहीं पता कि क्या होगा। एसीबी को पता है कि आईसीसी का पूर्ण सदस्य होने के लिए राष्ट्रीय महिला टीम का होना जरूरी है लेकिन हाल की स्थिति को देखते हुए काफी अनिश्चितिता है।
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श्री अजीत शर्मा : अध्यक्ष महोदय, मूव करेंगे। अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि
खंड-11 में 1 संशोधन है ।
"खंड - 10 इस विधेयक का अंग बने ।"
खंड - 10 इस विधेयक का अंग बना ।
श्री अजीत शर्मा : महोदय, मैंने यह प्रस्ताव इसलिये दिया है क्योंकि जब तक शराब का व्यापार
होता हुआ नहीं पाया जाय, तब तक अधिग्रहण अन्यायपूर्ण होगा इसलिये अधिहरण करना ही हो तो यह प्रमाणित होना चाहिये कि वहां शराब का व्यापार हो रहा है । प्रश्न यह है कि
"विधेयक के खंड-11 में प्रस्तावित संशोधन की छठी पंक्ति के शब्द "तथा" एवं शब्द "उसके" के बीच शब्द समूह "शराब का व्यापार होता हुआ पाये जाने पर " अंतःस्थापित किया जाय ।"
"विधेयक के खंड - 11 में प्रस्तावित संशोधन की छठी पंक्ति के शब्द 'तथा" एवं शब्द "उसके" के बीच शब्द समूह "शराब का व्यापार होता हुआ पाये जाने पर" अंतःस्थापित किया जाय ।"
"खंड - 11 इस विधेयक का अंग बने ।"
खंड-11 इस विधेयक का अंग बना ।
खंड - 12 एवं 13 में कोई संशोधन नहीं है । प्रश्न यह है कि
"खंड - 12 एवं 13 इस विधेयक का अंग बने ।" प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
खंड-12 एवं 13 इस विधेयक का अंग बने ।
खंड-14 में 2 संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री अजीत शर्मा अपना संशोधन मूव करेंगे ?
( 2 ) की दूसरी पंक्ति के शब्द "नहीं" को विलोपित किया जाय । "
"विधेयक के खंड -14 में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड
महोदय, मैंने यह संशोधन इसलिये दिया है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के
तौर पर कहीं भी तस्वीर चिपकाई जा सकती है ।
" विधेयक के खंड - 14 में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड (2) की दूसरी पंक्ति के शब्द "नहीं" को विलोपित किया जाय ।" यह संशोधन अस्वीकृत हुआ ।
क्या माननीय सदस्य श्री समीर कुमार महासेठ अपना संशोधन मूव करेंगे ? श्री समीर कुमार महासेठ : जी, मूव करेंगे ।
"विधेयक के खंड-14 में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड (2) की दूसरी एवं तीसरी पंक्ति के शब्द समूह " संबंद्ध उत्पाद पदाधिकारी या पुलिस पदाधिकारी ऐसी बरामदगी का इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत कर सकेगा ।" को विलोपित किया जाय ।"
महोदय, आये दिन हमलोग देखते हैं कि टेम्पर्ड वीडियो चला दिया जाता है सोशल मीडिया पर । इसी से पता चलता है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य में हेर-फेर होना कितना आसान है इसलिये मैंने यह संशोधन दिया है ।
"विधेयक के खंड-14 में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड (2) की दूसरी एवं तीसरी पंक्ति के शब्द समूह " संबंद्ध उत्पाद पदाधिकारी या पुलिस पदाधिकारी ऐसी बरामदगी का इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत कर सकेगा ।" को विलोपित किया जाय ।"
"खंड - 14 इस विधेयक का अंग बने ।"
खंड-14 इस विधेयक का अंग बना ।
खंड-15 में 1 संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री समीर कुमार महासेठ अपना संशोधन मूव करेंगे ?
श्री समीर कुमार महासेठ : जी, मूव करेंगे । अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि
"विधेयक के खंड-15 में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड ( 2 ) की दूसरी पंक्ति के शब्द "पदाधिकारी " एवं शब्द "एक" के बीच शब्द समूह "एक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में अंतःस्थापित किया जाय । "
महोदय, कई पुलिसकर्मियों के बहुत सारे कारनामे हमलोगों के सामने है इसलिये जब्ती सूची मजिस्ट्रेट के सामने बने इसलिये मैंने यह प्रस्ताव दिया है ।
"विधेयक के खंड - 15 में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड ( 2 ) की दूसरी पंक्ति के शब्द "पदाधिकारी " एवं शब्द "एक" के बीच शब्द समूह "एक ' मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में" अंतःस्थापित किया जाय । "
"खंड - 15 इस विधेयक का अंग बने ।"
खंड-15 इस विधेयक का अंग बना ।
खंड-16 में एक संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री समीर कुमार महासेठ अपना संशोधन मूव करेंगे ?
श्री समीर कुमार महासेठ : जी, मूव करेंगे ।
"विधेयक के खंड-16 में प्रस्तावित संशोधन की पांचवी पंक्ति के शब्द "बिना" एवं शब्द "एक" के बीच शब्द समूह "एक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में" अंतःस्थापित किया जाय ।"
महोदय, यहां टनों शराब चूहे भी पी जाते हैं ऐसा समाचार सुर्खियों में था इसलिये जो नष्ट किया जाय, वह मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हो इसलिये मैंने यह संशोधन दिया है ।
"विधेयक के खंड-16 में प्रस्तावित संशोधन की पांचवी पंक्ति के शब्द "बिना" एवं शब्द "एक" के बीच शब्द समूह "एक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में " अंतःस्थापित किया जाय । "
"खंड - 16 इस विधेयक का अंग बने ।"
खंड-16 इस विधेयक का अंग बना ।
खंड-17 में एक संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री अजीत शर्मा अपना संशोधन मूव करेंगे ?
"विधेयक के खंड - 17 को विलोपित किया जाय ।" महोदय, मैंने यह प्रस्ताव इसलिये दिया है क्योंकि देश के निर्धनतम राज्यों
में बिहार है । यहां केवल शराब के मामले की सुनवाई के लिये विशेष न्यायालयों की स्थापना या उसकी शक्ति प्रदान करना न्यायसंगत नहीं है ।
"विधेयक के खंड - 17 को विलोपित किया जाय ।" यह संशोधन अस्वीकृत हुआ ।
"खंड - 17 इस विधेयक का अंग बने ।"
खंड-17 इस विधेयक का अंग बना ।
खंड-18 में तीन संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री अजीत शर्मा अपना संशोधन मूव करेंगे ?
"विधेयक के खंड - 18 को विलोपित किया जाय ।"
महोदय, मैंने यह प्रस्ताव इसलिये दिया क्योंकि गरीब राज्य बिहार पर एक और अनावश्यक भार पड़ेगा ।
"विधेयक के खंड - 18 को विलोपित किया जाय । " यह संशोधन अस्वीकृत हुआ ।
क्या माननीय सदस्य श्री समीर कुमार महासेठ अपना संशोधन मूव करेंगे ?
श्री समीर कुमार महासेठ जी, मूव करेंगे । :
दिया है ।
"विधेयक के खंड-18 में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड (4) की पहली पंक्ति के शब्द समूह "एक वर्ष" के स्थान पर शब्द समूह "तीन माह " प्रतिःस्थापित किया जाय । "
महोदय, मामले का निपटारा जल्द से जल्द हो इसलिये मैंने यह संशोधन
"विधेयक के खंड - 18 में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड (4) की पहली पंक्ति के शब्द समूह "एक वर्ष" के स्थान पर शब्द समूह "तीन माह " प्रतिःस्थापित किया जाय ।"
"विधेयक के खंड-18 में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड (4) की पहली पंक्ति के शब्द " वर्ष" के स्थान पर शब्द "माह" प्रतिःस्थापित किया जाय । "
महोदय, मैंने यह संशोधन इसलिये दिया ताकि विचारण एक माह के
अंदर पूरा किया जा सके ।
"विधेयक के खंड - 18 में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड (4) की पहली पंक्ति के शब्द समूह "एक वर्ष" के स्थान पर शब्द समूह "तीन माह " प्रतिः स्थापित किया जाय ।"
"खंड - 18 इस विधेयक का अंग बने ।"
खंड-18 इस विधेयक का अंग बना ।
खंड-19 में कोई संशोधन नहीं है ।
"खंड - 19 इस विधेयक का अंग बने ।"
खंड-19 इस विधेयक का अंग बना ।
खंड-1 में एक संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री अजीत शर्मा अपना संशोधन मूव करेंगे ?
श्री अजीत शर्मा : मूव करेंगे अध्यक्ष महोदय ।
"विधेयक के खंड-1 के उपखंड (3) की पहली एवं दूसरी पंक्ति के शब्द समूह "यह तुरंत प्रवृत होगा और इस संशोधन अधिनियम के उपबंध सभी लंबित मामलों पर लागू होंगे" के स्थान पर शब्द समूह "यह 02 अक्टूबर, 2016 से प्रवृत होगा " प्रतिः स्थापित किया जाय । "
महोदय, मैंने यह संशोधन इसलिए दिया है ताकि यह दिनांक - 02 अक्टूबर, 2016, जब से उत्पाद अधिनियम प्रभावी है तब से प्रभावी हो सके ।
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श्री अजीत शर्मा : अध्यक्ष महोदय, मूव करेंगे। अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि खंड-ग्यारह में एक संशोधन है । "खंड - दस इस विधेयक का अंग बने ।" खंड - दस इस विधेयक का अंग बना । श्री अजीत शर्मा : महोदय, मैंने यह प्रस्ताव इसलिये दिया है क्योंकि जब तक शराब का व्यापार होता हुआ नहीं पाया जाय, तब तक अधिग्रहण अन्यायपूर्ण होगा इसलिये अधिहरण करना ही हो तो यह प्रमाणित होना चाहिये कि वहां शराब का व्यापार हो रहा है । प्रश्न यह है कि "विधेयक के खंड-ग्यारह में प्रस्तावित संशोधन की छठी पंक्ति के शब्द "तथा" एवं शब्द "उसके" के बीच शब्द समूह "शराब का व्यापार होता हुआ पाये जाने पर " अंतःस्थापित किया जाय ।" "विधेयक के खंड - ग्यारह में प्रस्तावित संशोधन की छठी पंक्ति के शब्द 'तथा" एवं शब्द "उसके" के बीच शब्द समूह "शराब का व्यापार होता हुआ पाये जाने पर" अंतःस्थापित किया जाय ।" "खंड - ग्यारह इस विधेयक का अंग बने ।" खंड-ग्यारह इस विधेयक का अंग बना । खंड - बारह एवं तेरह में कोई संशोधन नहीं है । प्रश्न यह है कि "खंड - बारह एवं तेरह इस विधेयक का अंग बने ।" प्रस्ताव स्वीकृत हुआ । खंड-बारह एवं तेरह इस विधेयक का अंग बने । खंड-चौदह में दो संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री अजीत शर्मा अपना संशोधन मूव करेंगे ? की दूसरी पंक्ति के शब्द "नहीं" को विलोपित किया जाय । " "विधेयक के खंड -चौदह में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड महोदय, मैंने यह संशोधन इसलिये दिया है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के तौर पर कहीं भी तस्वीर चिपकाई जा सकती है । " विधेयक के खंड - चौदह में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड की दूसरी पंक्ति के शब्द "नहीं" को विलोपित किया जाय ।" यह संशोधन अस्वीकृत हुआ । क्या माननीय सदस्य श्री समीर कुमार महासेठ अपना संशोधन मूव करेंगे ? श्री समीर कुमार महासेठ : जी, मूव करेंगे । "विधेयक के खंड-चौदह में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड की दूसरी एवं तीसरी पंक्ति के शब्द समूह " संबंद्ध उत्पाद पदाधिकारी या पुलिस पदाधिकारी ऐसी बरामदगी का इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत कर सकेगा ।" को विलोपित किया जाय ।" महोदय, आये दिन हमलोग देखते हैं कि टेम्पर्ड वीडियो चला दिया जाता है सोशल मीडिया पर । इसी से पता चलता है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य में हेर-फेर होना कितना आसान है इसलिये मैंने यह संशोधन दिया है । "विधेयक के खंड-चौदह में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड की दूसरी एवं तीसरी पंक्ति के शब्द समूह " संबंद्ध उत्पाद पदाधिकारी या पुलिस पदाधिकारी ऐसी बरामदगी का इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत कर सकेगा ।" को विलोपित किया जाय ।" "खंड - चौदह इस विधेयक का अंग बने ।" खंड-चौदह इस विधेयक का अंग बना । खंड-पंद्रह में एक संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री समीर कुमार महासेठ अपना संशोधन मूव करेंगे ? श्री समीर कुमार महासेठ : जी, मूव करेंगे । अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि "विधेयक के खंड-पंद्रह में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड की दूसरी पंक्ति के शब्द "पदाधिकारी " एवं शब्द "एक" के बीच शब्द समूह "एक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में अंतःस्थापित किया जाय । " महोदय, कई पुलिसकर्मियों के बहुत सारे कारनामे हमलोगों के सामने है इसलिये जब्ती सूची मजिस्ट्रेट के सामने बने इसलिये मैंने यह प्रस्ताव दिया है । "विधेयक के खंड - पंद्रह में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड की दूसरी पंक्ति के शब्द "पदाधिकारी " एवं शब्द "एक" के बीच शब्द समूह "एक ' मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में" अंतःस्थापित किया जाय । " "खंड - पंद्रह इस विधेयक का अंग बने ।" खंड-पंद्रह इस विधेयक का अंग बना । खंड-सोलह में एक संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री समीर कुमार महासेठ अपना संशोधन मूव करेंगे ? श्री समीर कुमार महासेठ : जी, मूव करेंगे । "विधेयक के खंड-सोलह में प्रस्तावित संशोधन की पांचवी पंक्ति के शब्द "बिना" एवं शब्द "एक" के बीच शब्द समूह "एक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में" अंतःस्थापित किया जाय ।" महोदय, यहां टनों शराब चूहे भी पी जाते हैं ऐसा समाचार सुर्खियों में था इसलिये जो नष्ट किया जाय, वह मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हो इसलिये मैंने यह संशोधन दिया है । "विधेयक के खंड-सोलह में प्रस्तावित संशोधन की पांचवी पंक्ति के शब्द "बिना" एवं शब्द "एक" के बीच शब्द समूह "एक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में " अंतःस्थापित किया जाय । " "खंड - सोलह इस विधेयक का अंग बने ।" खंड-सोलह इस विधेयक का अंग बना । खंड-सत्रह में एक संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री अजीत शर्मा अपना संशोधन मूव करेंगे ? "विधेयक के खंड - सत्रह को विलोपित किया जाय ।" महोदय, मैंने यह प्रस्ताव इसलिये दिया है क्योंकि देश के निर्धनतम राज्यों में बिहार है । यहां केवल शराब के मामले की सुनवाई के लिये विशेष न्यायालयों की स्थापना या उसकी शक्ति प्रदान करना न्यायसंगत नहीं है । "विधेयक के खंड - सत्रह को विलोपित किया जाय ।" यह संशोधन अस्वीकृत हुआ । "खंड - सत्रह इस विधेयक का अंग बने ।" खंड-सत्रह इस विधेयक का अंग बना । खंड-अट्ठारह में तीन संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री अजीत शर्मा अपना संशोधन मूव करेंगे ? "विधेयक के खंड - अट्ठारह को विलोपित किया जाय ।" महोदय, मैंने यह प्रस्ताव इसलिये दिया क्योंकि गरीब राज्य बिहार पर एक और अनावश्यक भार पड़ेगा । "विधेयक के खंड - अट्ठारह को विलोपित किया जाय । " यह संशोधन अस्वीकृत हुआ । क्या माननीय सदस्य श्री समीर कुमार महासेठ अपना संशोधन मूव करेंगे ? श्री समीर कुमार महासेठ जी, मूव करेंगे । : दिया है । "विधेयक के खंड-अट्ठारह में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड की पहली पंक्ति के शब्द समूह "एक वर्ष" के स्थान पर शब्द समूह "तीन माह " प्रतिःस्थापित किया जाय । " महोदय, मामले का निपटारा जल्द से जल्द हो इसलिये मैंने यह संशोधन "विधेयक के खंड - अट्ठारह में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड की पहली पंक्ति के शब्द समूह "एक वर्ष" के स्थान पर शब्द समूह "तीन माह " प्रतिःस्थापित किया जाय ।" "विधेयक के खंड-अट्ठारह में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड की पहली पंक्ति के शब्द " वर्ष" के स्थान पर शब्द "माह" प्रतिःस्थापित किया जाय । " महोदय, मैंने यह संशोधन इसलिये दिया ताकि विचारण एक माह के अंदर पूरा किया जा सके । "विधेयक के खंड - अट्ठारह में प्रस्तावित संशोधन के उपखंड की पहली पंक्ति के शब्द समूह "एक वर्ष" के स्थान पर शब्द समूह "तीन माह " प्रतिः स्थापित किया जाय ।" "खंड - अट्ठारह इस विधेयक का अंग बने ।" खंड-अट्ठारह इस विधेयक का अंग बना । खंड-उन्नीस में कोई संशोधन नहीं है । "खंड - उन्नीस इस विधेयक का अंग बने ।" खंड-उन्नीस इस विधेयक का अंग बना । खंड-एक में एक संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री अजीत शर्मा अपना संशोधन मूव करेंगे ? श्री अजीत शर्मा : मूव करेंगे अध्यक्ष महोदय । "विधेयक के खंड-एक के उपखंड की पहली एवं दूसरी पंक्ति के शब्द समूह "यह तुरंत प्रवृत होगा और इस संशोधन अधिनियम के उपबंध सभी लंबित मामलों पर लागू होंगे" के स्थान पर शब्द समूह "यह दो अक्टूबर, दो हज़ार सोलह से प्रवृत होगा " प्रतिः स्थापित किया जाय । " महोदय, मैंने यह संशोधन इसलिए दिया है ताकि यह दिनांक - दो अक्टूबर, दो हज़ार सोलह, जब से उत्पाद अधिनियम प्रभावी है तब से प्रभावी हो सके ।
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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का उत्तराखंड में ब्रांच सम्मेलन का सिलसिला जारी है। इसके तहत देहरादून में चंद्रशेखर आजादनगर द्रोणपुरी वार्ड में आयोजित सम्मेलन में आंगनवाड़ी, आशा वर्कर्स, भोजन माताओं के साथ ही किसान आंदोलन को समर्थन दिया गया।
बृन्दा मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में पहले दिवगंत कार्यकर्ताओं के निधन पर दो मिनट का मौन रखा गया। सम्मेलन में पिछले कार्यों की समीक्षा तथा भविष्य के लिए। साथ ही पार्टी को मजबूत कर जनता की समस्याओं को लेकर संघर्ष का फैसला लिया गया। यह भी फैसला लिया गया कि बस्तियों के नियमतिकरण तथा आपदा से प्रभावित लोगों की सहायता के लिये शीध्र ही जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा।
साथ ही वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार के जनविरोधी कदमों, साम्प्रदायिक परस्त नीतियों के खिलाफ एकजुटता के साथ संघर्ष करने का निर्णय किया गया। सम्मेलन में किसान आन्दोलन, आशा, आंगनबाड़ी, भोजनमाताओं तथा बेरोजगारों के आन्दोलन को समर्थन दिया गया। साथ ही नगर निगम प्रशासन से मांग की गई कि क्षेत्र में स्वास्थ्य, सफाई, डेंगू से बचने के लिये फागिंग तथा दवाइयों का छिड़काव किया जाए। सड़कों, नालियों का निर्माण तथा बाढ़ से सुरक्षा के इन्तजाम करने की भी मांग की गई। इस अवसर पर सचिव मंडल की सदस्य इन्दु नौडियाल, अनन्त आकाश, नुरैशा अंसारी, चन्दा ममगाई आदि ने विचार व्यक्त किए।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी का उत्तराखंड में ब्रांच सम्मेलन का सिलसिला जारी है। इसके तहत देहरादून में चंद्रशेखर आजादनगर द्रोणपुरी वार्ड में आयोजित सम्मेलन में आंगनवाड़ी, आशा वर्कर्स, भोजन माताओं के साथ ही किसान आंदोलन को समर्थन दिया गया। बृन्दा मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में पहले दिवगंत कार्यकर्ताओं के निधन पर दो मिनट का मौन रखा गया। सम्मेलन में पिछले कार्यों की समीक्षा तथा भविष्य के लिए। साथ ही पार्टी को मजबूत कर जनता की समस्याओं को लेकर संघर्ष का फैसला लिया गया। यह भी फैसला लिया गया कि बस्तियों के नियमतिकरण तथा आपदा से प्रभावित लोगों की सहायता के लिये शीध्र ही जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार के जनविरोधी कदमों, साम्प्रदायिक परस्त नीतियों के खिलाफ एकजुटता के साथ संघर्ष करने का निर्णय किया गया। सम्मेलन में किसान आन्दोलन, आशा, आंगनबाड़ी, भोजनमाताओं तथा बेरोजगारों के आन्दोलन को समर्थन दिया गया। साथ ही नगर निगम प्रशासन से मांग की गई कि क्षेत्र में स्वास्थ्य, सफाई, डेंगू से बचने के लिये फागिंग तथा दवाइयों का छिड़काव किया जाए। सड़कों, नालियों का निर्माण तथा बाढ़ से सुरक्षा के इन्तजाम करने की भी मांग की गई। इस अवसर पर सचिव मंडल की सदस्य इन्दु नौडियाल, अनन्त आकाश, नुरैशा अंसारी, चन्दा ममगाई आदि ने विचार व्यक्त किए। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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[caption id="attachment_17747" align="alignleft" width="99"]अभिनय[/caption]वेबदुनिया के वरिष्ठ उपसंपादक रहे अभिनय कुलकर्णी (32) का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। वे महाराष्ट्र में अपनी नई जिम्मेदारी ग्रहण करने जा रहे थे। रात पौने दो बजे दुर्घटना हुई। धुलिया-इंदौर महामार्ग पर पारोली चौफाली पर ट्रेक-बस में भिड़ंत हो गई। बताया जाता है कि मालेगांव से तेज रफ्तार से ट्रक आ रहा था और इसने इंदौर से मुंबई जा रही लक्जरी बस में टक्कर मार दी।
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[caption id="attachment_सत्रह हज़ार सात सौ सैंतालीस" align="alignleft" width="निन्यानवे"]अभिनय[/caption]वेबदुनिया के वरिष्ठ उपसंपादक रहे अभिनय कुलकर्णी का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। वे महाराष्ट्र में अपनी नई जिम्मेदारी ग्रहण करने जा रहे थे। रात पौने दो बजे दुर्घटना हुई। धुलिया-इंदौर महामार्ग पर पारोली चौफाली पर ट्रेक-बस में भिड़ंत हो गई। बताया जाता है कि मालेगांव से तेज रफ्तार से ट्रक आ रहा था और इसने इंदौर से मुंबई जा रही लक्जरी बस में टक्कर मार दी।
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तुनिषा शर्मा आत्महत्या कांड में अब मुंबई पुलिस शिजान खान के मिस्ट्री गर्लफ्रेंड तक पहुंच गई है। पुलिस शीजान के व्हाट्सएप चैट को खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस को शीजान खान के कई लड़कियों से चैट का खुलासा हुआ है। शीजान ने चैट को भी डिलीट किया है। जिसकी रिकवरी के लिए पुलिस ने प्रयास तेज कर दिया है। देखना होगा कि इस डिलीट से पुलिस को क्या मिलता है। बताया जा रहा है कि पुलिस इन चैट्स को खंगालने के लिए एक तेज तर्राक महिला पुलिस को इस काम में लगाया है। पुलिस स चैट के जरिये यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि शीजान तुनिशा के अलावा भी क्या अन्य लड़की के साथ रिलेशनशिप में था या नहीं।
गौरतलब है कि तुनिषा के घरवालों ने आरोप लगाया था कि शीजान के कई लड़कियों से संबंध थे। जिसके बाद पुलिस ने ओर अपना जांच का दायरा बढ़ाते हुए शीजान के मिस्ट्री गर्लफ्रेंड के पास पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस उस लड़की के संपर्क में भी है। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि शीजान के कितने लड़कियों से संबंध थे और फिलहाल कितने उसके संपर्क में हैं। इस मामले में पुलिस ने अपनी जांच भी तेज कर दी है।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने शीजान और तुनिषा के बीच के चैट को खंगाल रही है और इसकी जांच कर रही है। पुलिस इसी चैट के आधार पर अपनी जांच को आगे बड़ाएगी। शीजान और तुनिषा के बीच के चैट लगभग 300 पन्नों के हैं ,जो जून से लेकर अभी तक के बातये जा रहे हैं। वहीं, जिस लड़की का शीजान ने चैट डिलीट किया है उस लड़की का भी पुलिस बयान जल्द ही दर्ज करने वाली है।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शीजान और तुनिषा के बीच एक माह पहले ही ब्रेकअप हो गया था ,लेकिन दोनों सेट पर नार्मल रहते थे। ये बात भी पुलिस को कई तरह की शंका पैदा कर रही है। वहीं, शीजान ने जिस लड़की का चैट डिलीट किया है, उसके चैट को प्राप्त करने के लिए पुलिस व्हाट्सअप को पत्र लिखेगी। गौरतलब है कि,शीजान की आज यानी बुधवार को पुलिस हिरासत ख़त्म होने के बाद लड़की की चैट डिलीट करने को लेकर एक बार फिर पुलिस कस्टडी की मांग करेगी। बताया जा रहा है कि पुलिस कोर्ट में यह सवाल उठाएगी कि इतने लड़कियों में एक ही लड़की की चैट को शीजान ने क्यों डिलीट किया।
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तुनिषा शर्मा आत्महत्या कांड में अब मुंबई पुलिस शिजान खान के मिस्ट्री गर्लफ्रेंड तक पहुंच गई है। पुलिस शीजान के व्हाट्सएप चैट को खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस को शीजान खान के कई लड़कियों से चैट का खुलासा हुआ है। शीजान ने चैट को भी डिलीट किया है। जिसकी रिकवरी के लिए पुलिस ने प्रयास तेज कर दिया है। देखना होगा कि इस डिलीट से पुलिस को क्या मिलता है। बताया जा रहा है कि पुलिस इन चैट्स को खंगालने के लिए एक तेज तर्राक महिला पुलिस को इस काम में लगाया है। पुलिस स चैट के जरिये यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि शीजान तुनिशा के अलावा भी क्या अन्य लड़की के साथ रिलेशनशिप में था या नहीं। गौरतलब है कि तुनिषा के घरवालों ने आरोप लगाया था कि शीजान के कई लड़कियों से संबंध थे। जिसके बाद पुलिस ने ओर अपना जांच का दायरा बढ़ाते हुए शीजान के मिस्ट्री गर्लफ्रेंड के पास पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस उस लड़की के संपर्क में भी है। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि शीजान के कितने लड़कियों से संबंध थे और फिलहाल कितने उसके संपर्क में हैं। इस मामले में पुलिस ने अपनी जांच भी तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने शीजान और तुनिषा के बीच के चैट को खंगाल रही है और इसकी जांच कर रही है। पुलिस इसी चैट के आधार पर अपनी जांच को आगे बड़ाएगी। शीजान और तुनिषा के बीच के चैट लगभग तीन सौ पन्नों के हैं ,जो जून से लेकर अभी तक के बातये जा रहे हैं। वहीं, जिस लड़की का शीजान ने चैट डिलीट किया है उस लड़की का भी पुलिस बयान जल्द ही दर्ज करने वाली है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शीजान और तुनिषा के बीच एक माह पहले ही ब्रेकअप हो गया था ,लेकिन दोनों सेट पर नार्मल रहते थे। ये बात भी पुलिस को कई तरह की शंका पैदा कर रही है। वहीं, शीजान ने जिस लड़की का चैट डिलीट किया है, उसके चैट को प्राप्त करने के लिए पुलिस व्हाट्सअप को पत्र लिखेगी। गौरतलब है कि,शीजान की आज यानी बुधवार को पुलिस हिरासत ख़त्म होने के बाद लड़की की चैट डिलीट करने को लेकर एक बार फिर पुलिस कस्टडी की मांग करेगी। बताया जा रहा है कि पुलिस कोर्ट में यह सवाल उठाएगी कि इतने लड़कियों में एक ही लड़की की चैट को शीजान ने क्यों डिलीट किया।
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आपको ये बात शायद थोड़ी अजीब लगे लेकिन यही हकीकत है। इंग्लैंड की नॉरफोल्क काउंटी से हर साल हजारों टन रद्दी कागज का कचरा 13,000 मील दूर चीन भेजा जाता है। ऐसा इसलिए ताकी उसे वहां रीसाइकिल किया जा सके।
इंग्लैंड में नागरिकों के पास से रद्दी कागज को इकठ्ठा किया जाता है। जिसे नॉरफोल्क काउंटी ले जाकर उसमें से गीला व सूखा कचरा अलग-अलग किया जाता है।
edp24. co. uk की रिपोर्ट के मुताबिक 38,000 टन कचरा हर साल इंग्लैंड से 13,000 मील दूर चीन भेजा जा रहा है। हर कोई इस बात को जान कर हैरान तो है पर ये नहीं समझ पाता कि ऐसा क्यों है।
दरअसल, चीन में रीसाइकलिंग करने वाली कंपनी सस्ते में ये काम करती है। इसलिए ये कचरा यहां भेजा जा रहा है। हालांकि ये बात सच है कि इस कचरे को चीन भेजने वाली कंपनी न्यूज यानि नॉर्स इन्वारोमेंटल वेस्ट सर्विस के अधिकारी इस बात को वजह नहीं मानते।
ये फैसला क्यों लिया गया. . ?
दरअसल, पर्यावरण की सुरक्षा के मद्दे नजर और अपने नागरिकों को चिंता मुक्त रखने के लिए इंग्लैंड कि ओर से ऐसा किया जा रहा है। नॉरफोल्क के नगर अधिकारियों का कहना है कि उनकी काउंटी में रहने वाले लोग इस बात से डरते हैं कि आखिर इतने कचरे को कैसी रिसाइकिल किया जायेगा। वे अपना कचरा इतनी दूर भेज देते हैं और वातावरण को भी प्रदूषित नहीं होने देते।
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आपको ये बात शायद थोड़ी अजीब लगे लेकिन यही हकीकत है। इंग्लैंड की नॉरफोल्क काउंटी से हर साल हजारों टन रद्दी कागज का कचरा तेरह,शून्य मील दूर चीन भेजा जाता है। ऐसा इसलिए ताकी उसे वहां रीसाइकिल किया जा सके। इंग्लैंड में नागरिकों के पास से रद्दी कागज को इकठ्ठा किया जाता है। जिसे नॉरफोल्क काउंटी ले जाकर उसमें से गीला व सूखा कचरा अलग-अलग किया जाता है। edpचौबीस. co. uk की रिपोर्ट के मुताबिक अड़तीस,शून्य टन कचरा हर साल इंग्लैंड से तेरह,शून्य मील दूर चीन भेजा जा रहा है। हर कोई इस बात को जान कर हैरान तो है पर ये नहीं समझ पाता कि ऐसा क्यों है। दरअसल, चीन में रीसाइकलिंग करने वाली कंपनी सस्ते में ये काम करती है। इसलिए ये कचरा यहां भेजा जा रहा है। हालांकि ये बात सच है कि इस कचरे को चीन भेजने वाली कंपनी न्यूज यानि नॉर्स इन्वारोमेंटल वेस्ट सर्विस के अधिकारी इस बात को वजह नहीं मानते। ये फैसला क्यों लिया गया. . ? दरअसल, पर्यावरण की सुरक्षा के मद्दे नजर और अपने नागरिकों को चिंता मुक्त रखने के लिए इंग्लैंड कि ओर से ऐसा किया जा रहा है। नॉरफोल्क के नगर अधिकारियों का कहना है कि उनकी काउंटी में रहने वाले लोग इस बात से डरते हैं कि आखिर इतने कचरे को कैसी रिसाइकिल किया जायेगा। वे अपना कचरा इतनी दूर भेज देते हैं और वातावरण को भी प्रदूषित नहीं होने देते।
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भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका की अर्थव्यवस्था दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा की गई है। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार आधी रात से देश में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है।
पिछले कुछ महीनों में देश के लोगों को भोजन, आवश्यक वस्तुओं, गैस और ईंधन की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिजली बचाने के लिए सरकार ने स्ट्रीट लाइट बंद कर दी थी। कुछ दिन पहले दवाई के अभाव में ऑपरेशन रोक दिया गया था। इससे पहले, राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार की रात, 1 अप्रैल को आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी थी, क्योंकि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही थी।
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भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका की अर्थव्यवस्था दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा की गई है। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार आधी रात से देश में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है। पिछले कुछ महीनों में देश के लोगों को भोजन, आवश्यक वस्तुओं, गैस और ईंधन की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिजली बचाने के लिए सरकार ने स्ट्रीट लाइट बंद कर दी थी। कुछ दिन पहले दवाई के अभाव में ऑपरेशन रोक दिया गया था। इससे पहले, राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार की रात, एक अप्रैल को आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी थी, क्योंकि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही थी।
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भूटान पर्यटन परिषद (टीसीबी) ने हाल ही में देश के विभिन्न स्मारकों में प्रवेश शुल्क को जनवरी 2020 से बढ़ाने का फैसला लिया है। हालांकि छात्रों को इस फी में 50 प्रतिशत की छूट दी गई है।
शांतिपूर्ण माहौल, पहाड़ और बढ़िया हॉस्पिटैलिटी के चक्कर में भूटान लंबे वक्त से टूरिस्ट्स की पसंदीदा जगह बना हुआ है। इतना ही नहीं इन सबकी कीमत भी काफी कम चुकानी पड़ती है। लेकिन अब सैलानियों को थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। भूटान पर्यटन परिषद (टीसीबी) ने हाल ही में देश के विभिन्न स्मारकों में प्रवेश शुल्क को जनवरी 2020 से बढ़ाने का फैसला लिया है।
हालिया रिपोर्ट्स की मानें तो, पारो जिले स्थित 'टाइगर नेस्ट' के विजिटिंग फी को 7. 14 डॉलर से बढ़ाकर 14. 25 डॉलर कर दिया गया है। जबकि ताशिचो-द्ज़ोंग, मेमोरियल चोर्टेन और सहित अन्य स्मारकों में यह फी 4. 28 डॉलर से 7. 14 डॉलर तक बढ़ा दिया गया है। जानकारी के अनुसार, छात्रों को इस फी में 50 प्रतिशत की छूट दी गई है।
टीसीबी के एक अधिकारी के अनुसार, इस वृद्धि से देश में पर्यटन बेहतर बनाने के लिए उपयोग किया जाएगा। इस फी बढ़ोतरी को देश लगातार बढ़ रही सौलानियों की भीड़ की समस्या से निपटने के उपाय के तौर पर भी देख जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से स्मारकों से पास पर्यटकों के लिए शेड, टॉयलेट और कैंटीन जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
वहीं एक टूर गाइड का कहना है कि रीजनल पर्यटकों के लिए सही दिशानिर्देश और नियम उनकी परेशानियों को कम करने में मदद करेंगे। पिछले दिनों आई रिपोर्ट्स की मानें तो भूटान में बढ़ते हुए टूरिस्ट्स की संख्या को देखते हुए कई फॉरन ट्रैवल फर्म्स ने अपने प्रॉडक्ट की लिस्ट से भूटान को हटा दिया है। इसकी वजह यह है कि यह भीड़भाड़ वाली जगह बन चुका है।
साथ ही जो लोग ज्यादा पैसा खर्च करके आते हैं उन्हें भी शिकायत रहती है कि ज्यादा पैसे देने के बाद भी उन्हें होटल वगैरह मिलने में दिक्कत होती है। वहीं भारत, मालदीव और बांग्लादेश के टूरिस्ट्स को होटल सस्ते दामों में मिल जाते हैं। इसके अलावा जिस शांति और सुकून की तलाश में पर्यटक वहां जाते ते वह भी भीड़-भाड़ के चलते खोती जा रही है। खबरों के मुताबिक यह सब देखते हुए भूटान सरकार हर साल आने वाले टूरिस्ट्स के लिए कुछ शर्तें लागू करने जा रही है साथ ही भारत, बांग्लादेश औऱ मालदीव से आने वाले पर्यटकों पर पे कमिशन की तरह से तय किया गया कुछ टैक्स भी लगेगा।
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भूटान पर्यटन परिषद ने हाल ही में देश के विभिन्न स्मारकों में प्रवेश शुल्क को जनवरी दो हज़ार बीस से बढ़ाने का फैसला लिया है। हालांकि छात्रों को इस फी में पचास प्रतिशत की छूट दी गई है। शांतिपूर्ण माहौल, पहाड़ और बढ़िया हॉस्पिटैलिटी के चक्कर में भूटान लंबे वक्त से टूरिस्ट्स की पसंदीदा जगह बना हुआ है। इतना ही नहीं इन सबकी कीमत भी काफी कम चुकानी पड़ती है। लेकिन अब सैलानियों को थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। भूटान पर्यटन परिषद ने हाल ही में देश के विभिन्न स्मारकों में प्रवेश शुल्क को जनवरी दो हज़ार बीस से बढ़ाने का फैसला लिया है। हालिया रिपोर्ट्स की मानें तो, पारो जिले स्थित 'टाइगर नेस्ट' के विजिटिंग फी को सात. चौदह डॉलर से बढ़ाकर चौदह. पच्चीस डॉलर कर दिया गया है। जबकि ताशिचो-द्ज़ोंग, मेमोरियल चोर्टेन और सहित अन्य स्मारकों में यह फी चार. अट्ठाईस डॉलर से सात. चौदह डॉलर तक बढ़ा दिया गया है। जानकारी के अनुसार, छात्रों को इस फी में पचास प्रतिशत की छूट दी गई है। टीसीबी के एक अधिकारी के अनुसार, इस वृद्धि से देश में पर्यटन बेहतर बनाने के लिए उपयोग किया जाएगा। इस फी बढ़ोतरी को देश लगातार बढ़ रही सौलानियों की भीड़ की समस्या से निपटने के उपाय के तौर पर भी देख जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से स्मारकों से पास पर्यटकों के लिए शेड, टॉयलेट और कैंटीन जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वहीं एक टूर गाइड का कहना है कि रीजनल पर्यटकों के लिए सही दिशानिर्देश और नियम उनकी परेशानियों को कम करने में मदद करेंगे। पिछले दिनों आई रिपोर्ट्स की मानें तो भूटान में बढ़ते हुए टूरिस्ट्स की संख्या को देखते हुए कई फॉरन ट्रैवल फर्म्स ने अपने प्रॉडक्ट की लिस्ट से भूटान को हटा दिया है। इसकी वजह यह है कि यह भीड़भाड़ वाली जगह बन चुका है। साथ ही जो लोग ज्यादा पैसा खर्च करके आते हैं उन्हें भी शिकायत रहती है कि ज्यादा पैसे देने के बाद भी उन्हें होटल वगैरह मिलने में दिक्कत होती है। वहीं भारत, मालदीव और बांग्लादेश के टूरिस्ट्स को होटल सस्ते दामों में मिल जाते हैं। इसके अलावा जिस शांति और सुकून की तलाश में पर्यटक वहां जाते ते वह भी भीड़-भाड़ के चलते खोती जा रही है। खबरों के मुताबिक यह सब देखते हुए भूटान सरकार हर साल आने वाले टूरिस्ट्स के लिए कुछ शर्तें लागू करने जा रही है साथ ही भारत, बांग्लादेश औऱ मालदीव से आने वाले पर्यटकों पर पे कमिशन की तरह से तय किया गया कुछ टैक्स भी लगेगा।
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Patna Traffic Route Change: पटना के गांधी मैदान से लोकनायक गंगा पथ पर अशोक राजपथ होकर अब वाहन चलेंगे। ऐसे में गाड़ियों की संख्या अधिक होगी और ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ जाएगा, जिससे निजात दिलाने के लिए गांधी मैदान से गोलघर के पश्चिमी कॉर्नर तक डिवाइडर के कट को बंद करने का निर्णय लिया गया है। प्रमंडलीय आयुक्त कुमार रवि का कहना है कि, वाहन गोलघर के पश्विमी कॉर्नर पर बनने वाले यू-टर्न से घूमकर जाएंगी।
जबकि गंगा पथ से गांधी मैदान की ओर आने वाले वाहन सीधे कारगिल चौक चले जाएंगे। चिल्ड्रन पार्क गोलंबर के पास से घूमने के दौरान जाम होने की आशंका है। वैसे इस पर मंथन चल रहा है।
गंगा पथ और अटल पथ से आने वाले वाहन जेपी सेतु के नीचे से होकर दीघा रोटरी पर पहुंचेंगे। यहां आने वाली ओवरलोड गाड़ियां जेपी सेतु से टकरा सकती है, जिन्हें रोकने के लिए हाईगेज लगवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सुबह टहलने वालों के लिए अटल पथ गोलंबर से एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के बीच गंगा की ओर 5 मीटर चौड़ा और 5. 4 किलोमीटर लंबा वॉक-वे बनाया जा रहा है। यहां टहलने के लिए आने वाले लोगों के लिए पार्किंग, टी-स्टॉल कॉर्नर आदि बनाने के लिए तीन जगहों पर 500 वर्ग मीटर का री-क्रिएशन एरिया छोड़ दिया गया है।
प्रमंडलीय आयुक्त के मुताबिक, दीघा से पीएमसीएच के बीच 7. 6 किलोमीटर में 750 स्ट्रीट लाइट लगवाई जा रही है। इसमें मिडियन के अलावा एक्सप्रेस-वे की दोनों ओर लाइट की व्यवस्था की गई है। शहर की ओर गंगा पथ के वॉक-वे पर टहलने के लिए आने वाले लोगों के लिए चार जगहों पर फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। इसमें जेपी सेतु गोलंबर, कुर्जी, राजापुर पुल, बांस घाट शामिल हैं। दूसरा टोल दीदारगंज के पास बनवाया जाएगा।
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Patna Traffic Route Change: पटना के गांधी मैदान से लोकनायक गंगा पथ पर अशोक राजपथ होकर अब वाहन चलेंगे। ऐसे में गाड़ियों की संख्या अधिक होगी और ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ जाएगा, जिससे निजात दिलाने के लिए गांधी मैदान से गोलघर के पश्चिमी कॉर्नर तक डिवाइडर के कट को बंद करने का निर्णय लिया गया है। प्रमंडलीय आयुक्त कुमार रवि का कहना है कि, वाहन गोलघर के पश्विमी कॉर्नर पर बनने वाले यू-टर्न से घूमकर जाएंगी। जबकि गंगा पथ से गांधी मैदान की ओर आने वाले वाहन सीधे कारगिल चौक चले जाएंगे। चिल्ड्रन पार्क गोलंबर के पास से घूमने के दौरान जाम होने की आशंका है। वैसे इस पर मंथन चल रहा है। गंगा पथ और अटल पथ से आने वाले वाहन जेपी सेतु के नीचे से होकर दीघा रोटरी पर पहुंचेंगे। यहां आने वाली ओवरलोड गाड़ियां जेपी सेतु से टकरा सकती है, जिन्हें रोकने के लिए हाईगेज लगवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सुबह टहलने वालों के लिए अटल पथ गोलंबर से एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के बीच गंगा की ओर पाँच मीटर चौड़ा और पाँच. चार किलोग्राममीटर लंबा वॉक-वे बनाया जा रहा है। यहां टहलने के लिए आने वाले लोगों के लिए पार्किंग, टी-स्टॉल कॉर्नर आदि बनाने के लिए तीन जगहों पर पाँच सौ वर्ग मीटर का री-क्रिएशन एरिया छोड़ दिया गया है। प्रमंडलीय आयुक्त के मुताबिक, दीघा से पीएमसीएच के बीच सात. छः किलोग्राममीटर में सात सौ पचास स्ट्रीट लाइट लगवाई जा रही है। इसमें मिडियन के अलावा एक्सप्रेस-वे की दोनों ओर लाइट की व्यवस्था की गई है। शहर की ओर गंगा पथ के वॉक-वे पर टहलने के लिए आने वाले लोगों के लिए चार जगहों पर फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। इसमें जेपी सेतु गोलंबर, कुर्जी, राजापुर पुल, बांस घाट शामिल हैं। दूसरा टोल दीदारगंज के पास बनवाया जाएगा।
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एनटीपीसी समूह की कंपनियों ने अप्रैल से सितम्बर 2022 तक 203.5 बीयू का उत्पादन दर्ज किया, जो अप्रैल से सितम्बर 2021 में उत्पन्न 176.8 बीयू से 15.1 प्रतिशत की वृद्धि प्रदर्शित करती है। उच्च उत्पादन वृद्धि बेहतर निष्पादन और चालू वर्ष में बिजली की मांग में बढ़ोतरी का संकेत देती है।
उत्तर प्रदेश में एनटीपीसी रिहंद (3000 मेगावाट) अप्रैल से सितम्बर 2022 के बीच 90.22 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वाला थर्मल पावर प्लांट रहा। एनटीपीसी कोयला स्टेशनों का कुल प्लांट लोड फैक्टर अप्रैल से सितम्बर 2022 तक 76.3 प्रतिशत था, जो परिचालन उत्कृष्टता के उच्च स्तरों तथा बिजली संयंत्रों के संचालन और रखरखाव में एनटीपीसी की विशेषज्ञता का एक प्रमाण है।
एनटीपीसी की कुल संस्थापित क्षमता 70234 मेगावाट है। एनटीपीसी हरित हाइड्रोजन, अपशिष्ट से ऊर्जा और ई-गतिशीलता जैसे नए व्यावसायिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी का लक्ष्य 2032 तक शुद्ध ऊर्जा तीव्रता में 10 प्रतिशत की कमी करना है। एनटीपीसी ऊर्जा पर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय वार्ता (एचएलडीई) के हिस्से के रूप में अपने ऊर्जा कॉम्पैक्ट लक्ष्यों को घोषित करने वाली पहली ऊर्जा कंपनी है।
बिजली उत्पादन के अतिरिक्त, एनटीपीसी ने जलीय, पवन और सौर जैसे स्वच्छ और हरित स्रोतों और हरित हाइड्रोजन समाधानों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन को विविधीकृत किया है। बिजली क्षेत्र की इस बड़ी कंपनी ने ईंधन सेल, ई-मोबिलिटी और वेस्ट-टू-एनर्जी सहित कई तरह के व्यावसायिक क्षेत्रों में भी कदम रखा है।
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Posted On: एनटीपीसी समूह की कंपनियों ने अप्रैल से सितम्बर दो हज़ार बाईस तक दो सौ तीन.पाँच बीयू का उत्पादन दर्ज किया, जो अप्रैल से सितम्बर दो हज़ार इक्कीस में उत्पन्न एक सौ छिहत्तर.आठ बीयू से पंद्रह.एक प्रतिशत की वृद्धि प्रदर्शित करती है। उच्च उत्पादन वृद्धि बेहतर निष्पादन और चालू वर्ष में बिजली की मांग में बढ़ोतरी का संकेत देती है। उत्तर प्रदेश में एनटीपीसी रिहंद अप्रैल से सितम्बर दो हज़ार बाईस के बीच नब्बे.बाईस प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वाला थर्मल पावर प्लांट रहा। एनटीपीसी कोयला स्टेशनों का कुल प्लांट लोड फैक्टर अप्रैल से सितम्बर दो हज़ार बाईस तक छिहत्तर.तीन प्रतिशत था, जो परिचालन उत्कृष्टता के उच्च स्तरों तथा बिजली संयंत्रों के संचालन और रखरखाव में एनटीपीसी की विशेषज्ञता का एक प्रमाण है। एनटीपीसी की कुल संस्थापित क्षमता सत्तर हज़ार दो सौ चौंतीस मेगावाट है। एनटीपीसी हरित हाइड्रोजन, अपशिष्ट से ऊर्जा और ई-गतिशीलता जैसे नए व्यावसायिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी का लक्ष्य दो हज़ार बत्तीस तक शुद्ध ऊर्जा तीव्रता में दस प्रतिशत की कमी करना है। एनटीपीसी ऊर्जा पर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय वार्ता के हिस्से के रूप में अपने ऊर्जा कॉम्पैक्ट लक्ष्यों को घोषित करने वाली पहली ऊर्जा कंपनी है। बिजली उत्पादन के अतिरिक्त, एनटीपीसी ने जलीय, पवन और सौर जैसे स्वच्छ और हरित स्रोतों और हरित हाइड्रोजन समाधानों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन को विविधीकृत किया है। बिजली क्षेत्र की इस बड़ी कंपनी ने ईंधन सेल, ई-मोबिलिटी और वेस्ट-टू-एनर्जी सहित कई तरह के व्यावसायिक क्षेत्रों में भी कदम रखा है।
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Easy Chicken Recipes: नॉनवेज लवर्स को चिकन बहुत पसंद होता है। चिकन के साथ एक अच्छी बात है कि यह बनाने में बहुत आसान है और इसका टेस्ट भी बहुत अच्छा होता है। अगर आप खाना बनाने में नए हैं तो चिकन के साथ पूरा एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं। एक आसानी से बनने वाली डिश है। लेकिन चिकन में लोग अक्सर बहुत ज्यादा तेल-घी का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी वजह से वो लोग इसे खाने से परहेज करते हैं जो हेल्थ के प्रति जागरूक होते हैं। अगर आप भी इन्हीं लोगों में से हैं तो आज हम आपको तीन ऐसी चिकन रेसिपीज के बारे में बताएंगे जिन्हें आप एक चम्मच तेज या घी में बना सकते हैं। यह नॉनवेज खाने का एक हेल्दी तरीका है। इसके अलावा आपके टेस्ट बड भी सैटिसफाई हो जाएंगे। तो चलिए इस आर्टीकल में हम कुछ नए अंदाज में चिकन को बनाएंगे।
सबसे पहले आप चिकन को अच्छे से धो लें। इसे छलनी में धोएं ताकि पानी ठीक से निकल जाए। धोने के बाद थोड़ी देर रखें। इसके बाद चाकू या कांटे की सहायता से चिकन के पीसेज में कट लगा लें- इसके बाद सबसे पहले नींबू का रस और नमक और जीरा डालें। इसके बाद बाकी बची हुई चीजों को दही के साथ मिलाकर 6 से 8 घंटे तक मैरिनेट करें। 8 घंटे मैरिनेट करने के बाद एक कड़ाही लें उसमें एक चम्मच सरसों का तेल डालें। तेल के गर्म होने के बाद मैरिनेट किया हुआ चिकन इसमें डालें दें। इसकी आंच पहले तेज करें और बीच में आंच हल्की कर दें। यह बीस से तीस मिनट में पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। अगर आपको स्मोकी सा फ्लेवर चाहिए तो आप इसमें दुघार दें। यह शाम के स्नैक का एक बढ़िया आइटम है। हरे धनिए की चटनी के साथ इसका मजा दोगुना होता है।
सबसे पहले चिकन को अच्छे से धोकर उसका पानी निथार लें। इसे चिकन को दही और नमक, अदरक, लहसुन में पांच से छह घंटे के लिए मैरिनेट करें। पांच से छह घंटे के बाद एक कूकर लें इसमें एक चम्मच सरसों का तेल डालें। इसके बाद इसमें सभी गरम मसालें डालकर, प्याज डालें। इसके साथ इसमें साबुत धनिया डालें। इन्हें भूनें। आपको अलग से पानी डालने की जरुरत नहीं है क्योंकि प्याज अपना पानी छोड़ेगी। अगर आपको लग रहा है कि आपके पास भूनने का इतना यमय नहीं है तो आप कूकर में दो सीटें दे दें। प्याज गल जाएगी। इन मसालों को अच्छे से भूनने के बाद आप इसमें मसालों और दही में मैरिनेट किए हुए चिकन को डाल दें। दही होने की वजह से इसमें पानी आएगा और चिकन इस पानी में ही गल जाएगा। जब चिकन गलने को लगे तो आप इसमें साबुत मिर्च डालें। ऊपर से बारीक कटा हुआ अदरक और हरा धनिया डालकर इसे ढक दें। पांच से दस मिनट बाद यह तैयार हो जाएगा। चिकन स्टू बनाने में आपको सीटी नहीं लगानी। आप जितना इसे हल्की आंच पर पकाएंगे उतना ही टेस्ट इसका बढ़ता जाएगा। वैसे तो स्टू की पहचान उसके साबुत मसालों से ही होती है लेकिन अगर आपको साबुत मसाले पसंद नहीं है तो आप इसमें पिसे हुए मसाले डाल सकते हैं। जब आप चिकन को दही के मसाले में भूनेंगे तो चिकन अपना पूरा फैट कुकर में छोड़ देगा। आपको लगेगा ही नहीं कि यह केवल एक चम्मच तेल से बना है। रूमाली रोटी के साथ इसका कॉम्बिनेशन परफैक्ट होता है। आप इस पर नींबू डालकर खाएं आपको और भी मजा आएगा।
एक चम्मच तेल लें। इसमें बारीक कटी हुई लहसुन की कलियों को डालें। इसमें बॉयल्ड और शे्डेड किए हुए चिकन को सोटे करें। इसमें यह सब्जियां डाल दें। सब्जियों को भी दो मिनट पकाएं। हमने यहां शिमला मिर्च, प्याज और पत्ता गोभी डाली है। आप इसमें इसके अलावा भी अपनी पसंद की सब्जी डाल सकते हैं। स्वीट कॉन, गाजर और पनीर भी अच्छा लगेगा। सब्जी और चिकन को पकाने के बाद इसमें सारे मसालें और नमक डालें। दो मिनट चलाते हुए पकाएं। आपका सैंडविच बैटर तैयार है। आप चाहें तो सैंडविच मेकर में सेंक लें। वैसे यह कच्ची ब्रेड के साथ भी अच्छा लगता है। इस बैटर को आप एक हफ्ते तक फ्रिज में एयरटाइट डिब्बे में आराम से रख सकते हैं। यह बनने में आसान है और टेस्ट में भी इसका कोई जवाब नहीं है।
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Easy Chicken Recipes: नॉनवेज लवर्स को चिकन बहुत पसंद होता है। चिकन के साथ एक अच्छी बात है कि यह बनाने में बहुत आसान है और इसका टेस्ट भी बहुत अच्छा होता है। अगर आप खाना बनाने में नए हैं तो चिकन के साथ पूरा एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं। एक आसानी से बनने वाली डिश है। लेकिन चिकन में लोग अक्सर बहुत ज्यादा तेल-घी का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी वजह से वो लोग इसे खाने से परहेज करते हैं जो हेल्थ के प्रति जागरूक होते हैं। अगर आप भी इन्हीं लोगों में से हैं तो आज हम आपको तीन ऐसी चिकन रेसिपीज के बारे में बताएंगे जिन्हें आप एक चम्मच तेज या घी में बना सकते हैं। यह नॉनवेज खाने का एक हेल्दी तरीका है। इसके अलावा आपके टेस्ट बड भी सैटिसफाई हो जाएंगे। तो चलिए इस आर्टीकल में हम कुछ नए अंदाज में चिकन को बनाएंगे। सबसे पहले आप चिकन को अच्छे से धो लें। इसे छलनी में धोएं ताकि पानी ठीक से निकल जाए। धोने के बाद थोड़ी देर रखें। इसके बाद चाकू या कांटे की सहायता से चिकन के पीसेज में कट लगा लें- इसके बाद सबसे पहले नींबू का रस और नमक और जीरा डालें। इसके बाद बाकी बची हुई चीजों को दही के साथ मिलाकर छः से आठ घंटाटे तक मैरिनेट करें। आठ घंटाटे मैरिनेट करने के बाद एक कड़ाही लें उसमें एक चम्मच सरसों का तेल डालें। तेल के गर्म होने के बाद मैरिनेट किया हुआ चिकन इसमें डालें दें। इसकी आंच पहले तेज करें और बीच में आंच हल्की कर दें। यह बीस से तीस मिनट में पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। अगर आपको स्मोकी सा फ्लेवर चाहिए तो आप इसमें दुघार दें। यह शाम के स्नैक का एक बढ़िया आइटम है। हरे धनिए की चटनी के साथ इसका मजा दोगुना होता है। सबसे पहले चिकन को अच्छे से धोकर उसका पानी निथार लें। इसे चिकन को दही और नमक, अदरक, लहसुन में पांच से छह घंटे के लिए मैरिनेट करें। पांच से छह घंटे के बाद एक कूकर लें इसमें एक चम्मच सरसों का तेल डालें। इसके बाद इसमें सभी गरम मसालें डालकर, प्याज डालें। इसके साथ इसमें साबुत धनिया डालें। इन्हें भूनें। आपको अलग से पानी डालने की जरुरत नहीं है क्योंकि प्याज अपना पानी छोड़ेगी। अगर आपको लग रहा है कि आपके पास भूनने का इतना यमय नहीं है तो आप कूकर में दो सीटें दे दें। प्याज गल जाएगी। इन मसालों को अच्छे से भूनने के बाद आप इसमें मसालों और दही में मैरिनेट किए हुए चिकन को डाल दें। दही होने की वजह से इसमें पानी आएगा और चिकन इस पानी में ही गल जाएगा। जब चिकन गलने को लगे तो आप इसमें साबुत मिर्च डालें। ऊपर से बारीक कटा हुआ अदरक और हरा धनिया डालकर इसे ढक दें। पांच से दस मिनट बाद यह तैयार हो जाएगा। चिकन स्टू बनाने में आपको सीटी नहीं लगानी। आप जितना इसे हल्की आंच पर पकाएंगे उतना ही टेस्ट इसका बढ़ता जाएगा। वैसे तो स्टू की पहचान उसके साबुत मसालों से ही होती है लेकिन अगर आपको साबुत मसाले पसंद नहीं है तो आप इसमें पिसे हुए मसाले डाल सकते हैं। जब आप चिकन को दही के मसाले में भूनेंगे तो चिकन अपना पूरा फैट कुकर में छोड़ देगा। आपको लगेगा ही नहीं कि यह केवल एक चम्मच तेल से बना है। रूमाली रोटी के साथ इसका कॉम्बिनेशन परफैक्ट होता है। आप इस पर नींबू डालकर खाएं आपको और भी मजा आएगा। एक चम्मच तेल लें। इसमें बारीक कटी हुई लहसुन की कलियों को डालें। इसमें बॉयल्ड और शे्डेड किए हुए चिकन को सोटे करें। इसमें यह सब्जियां डाल दें। सब्जियों को भी दो मिनट पकाएं। हमने यहां शिमला मिर्च, प्याज और पत्ता गोभी डाली है। आप इसमें इसके अलावा भी अपनी पसंद की सब्जी डाल सकते हैं। स्वीट कॉन, गाजर और पनीर भी अच्छा लगेगा। सब्जी और चिकन को पकाने के बाद इसमें सारे मसालें और नमक डालें। दो मिनट चलाते हुए पकाएं। आपका सैंडविच बैटर तैयार है। आप चाहें तो सैंडविच मेकर में सेंक लें। वैसे यह कच्ची ब्रेड के साथ भी अच्छा लगता है। इस बैटर को आप एक हफ्ते तक फ्रिज में एयरटाइट डिब्बे में आराम से रख सकते हैं। यह बनने में आसान है और टेस्ट में भी इसका कोई जवाब नहीं है।
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शाजापुर से 16 सितम्बर को एक मुस्लिम युवक अपनी प्रेमिका के साथ भागा था। जिसे पुलिस ने सायबर सैल की मदद से दोनों की लोकेशन को ट्रेस कर हैदराबाद से पकड़ा लिया है। युवक ने प्रेमिका को भगाकर ले जाने के लिए एक मोबाइल दुकान से पर्स चोरी किया, जिसमें 15 हजार रुपए थे। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। युवक को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया है। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। युवक प्रेमिका को लेकर हैदराबाद के अफजल नगर में किराए के मकान में रह रहा था, जब पुलिस इन्हें वहां पकड़ने गई तो एआईएमआईएम के कार्यकताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। लेकिन पुलिस दोनों को वहां से सुरक्षित वापस ले आई।
युवक समीर (24) शाजापुर का निवासी है, जिसकी 2016 में मक्सी निवासी एक लड़की से कोचिंग क्लास में साथ पढ़ने के दौरान दोस्ती हो गई। फिर दोस्ती प्यार में बदल गई। जब दोनों 11वीं कक्षा में थे। युवक 12 वीं के बाद आगे नहीं पढ़ा और लड़की ने बीएससी तक पढ़ाई की। दोनों का मिलना जुलना होता रहा और पांच साल बाद युवक प्रेमिका को भगाकर ले गया।
प्रेमिका को भगाकर हैदराबाद ले जाने के लिए समीर ने शाजापुर की एक मोबाइल दुकान से पर्स चोरी किया। जिसमें 15 हजार रुपए नगद थे। पुलिस ने युवक पर चोरी का मामला भी दर्ज किया है।
युवक प्रेमिका को लेकर हैदराबाद के अफजल नगर में मकान किराए से लेकर रह रहा था। पुलिस जब दोनों को वापस शाजापुर ला रही थी तो एआईएमआईएम के कार्यकताओं ने पुलिस का विरोध किया। लेकिन स्थानीय पुलिस की मदद से शाजापुर पुलिस दोनों को लेकर वापस शाजापुर आ गई।
युवक को गिरफ्तार करने के लिए शाजापुर कोतवाली पुलिस और मक्सी पुलिस की संयुक्त टीम को हैदराबाद भेजा गया था। जहां से पुलिस दोनों को साथ लेकर आई। पुलिस ने प्रेमिका को परिजनों को सौंप दिया है और प्रेमी समीर को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
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शाजापुर से सोलह सितम्बर को एक मुस्लिम युवक अपनी प्रेमिका के साथ भागा था। जिसे पुलिस ने सायबर सैल की मदद से दोनों की लोकेशन को ट्रेस कर हैदराबाद से पकड़ा लिया है। युवक ने प्रेमिका को भगाकर ले जाने के लिए एक मोबाइल दुकान से पर्स चोरी किया, जिसमें पंद्रह हजार रुपए थे। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। युवक को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया है। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। युवक प्रेमिका को लेकर हैदराबाद के अफजल नगर में किराए के मकान में रह रहा था, जब पुलिस इन्हें वहां पकड़ने गई तो एआईएमआईएम के कार्यकताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। लेकिन पुलिस दोनों को वहां से सुरक्षित वापस ले आई। युवक समीर शाजापुर का निवासी है, जिसकी दो हज़ार सोलह में मक्सी निवासी एक लड़की से कोचिंग क्लास में साथ पढ़ने के दौरान दोस्ती हो गई। फिर दोस्ती प्यार में बदल गई। जब दोनों ग्यारहवीं कक्षा में थे। युवक बारह वीं के बाद आगे नहीं पढ़ा और लड़की ने बीएससी तक पढ़ाई की। दोनों का मिलना जुलना होता रहा और पांच साल बाद युवक प्रेमिका को भगाकर ले गया। प्रेमिका को भगाकर हैदराबाद ले जाने के लिए समीर ने शाजापुर की एक मोबाइल दुकान से पर्स चोरी किया। जिसमें पंद्रह हजार रुपए नगद थे। पुलिस ने युवक पर चोरी का मामला भी दर्ज किया है। युवक प्रेमिका को लेकर हैदराबाद के अफजल नगर में मकान किराए से लेकर रह रहा था। पुलिस जब दोनों को वापस शाजापुर ला रही थी तो एआईएमआईएम के कार्यकताओं ने पुलिस का विरोध किया। लेकिन स्थानीय पुलिस की मदद से शाजापुर पुलिस दोनों को लेकर वापस शाजापुर आ गई। युवक को गिरफ्तार करने के लिए शाजापुर कोतवाली पुलिस और मक्सी पुलिस की संयुक्त टीम को हैदराबाद भेजा गया था। जहां से पुलिस दोनों को साथ लेकर आई। पुलिस ने प्रेमिका को परिजनों को सौंप दिया है और प्रेमी समीर को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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अपने इस गीत से मैं बेरोजगार युवाओं को रोजगार की मांग करने के लिए उकसा रही हूं.
इससे समाज की शांति भंग हो सकती है, युवा उपद्रव कर सकते हैं.
सरकार अगर जरूरी समझे तो इस गीत के लिए भी मुझे नोटिस भेज दे.
वहीं तीसरे यूजर ने लिखा, "इससे दंगा भड़क सकता है, जल्द ही आपको नोटिस मिल सकती है। " वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, "वाह क्या बात है नेहा जी, कला किसी से दबती नहीं है। देश के युवा जब बेरोजगार होंगे तो सरकार जिसको चुना है रोजगार देने के लिए उसी को ही सवाल करेंगे। " बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंगलवार को नेहा सिंह राठौर को उनके गाने 'यूपी में का बा' सीजन 2 के वीडियो के संबंध में नोटिस पकड़ाया था। नेहा को उनके वीडियो के जरिए जनता के बीच नफरत फैलाने के आरोप में नोटिस मिली थी।
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अपने इस गीत से मैं बेरोजगार युवाओं को रोजगार की मांग करने के लिए उकसा रही हूं. इससे समाज की शांति भंग हो सकती है, युवा उपद्रव कर सकते हैं. सरकार अगर जरूरी समझे तो इस गीत के लिए भी मुझे नोटिस भेज दे. वहीं तीसरे यूजर ने लिखा, "इससे दंगा भड़क सकता है, जल्द ही आपको नोटिस मिल सकती है। " वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, "वाह क्या बात है नेहा जी, कला किसी से दबती नहीं है। देश के युवा जब बेरोजगार होंगे तो सरकार जिसको चुना है रोजगार देने के लिए उसी को ही सवाल करेंगे। " बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंगलवार को नेहा सिंह राठौर को उनके गाने 'यूपी में का बा' सीजन दो के वीडियो के संबंध में नोटिस पकड़ाया था। नेहा को उनके वीडियो के जरिए जनता के बीच नफरत फैलाने के आरोप में नोटिस मिली थी।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने आईसीसी के कार्यक्रम में आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर, कहा- 'हर मुसीबत की एक ही दवा मजबूती है'
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के 95वें एनुअल डे के मौके पर संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की ओर कदम बढ़ाने पर जोर दिया।
कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक बार फिर आपदा को अवसर में बदलने की कोशिश पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया कोरोना वायरस से लग रही है और भारत भी इस जंग में शामिल है लेकिन हमें कई और मोर्चों पर भी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
पीएम ने कहा, 'बाढ़, टिड्डी, तेल कुएं में आग, छोटे-मोट भूकंप, चक्रवात इन सबसे हम एक साथ लड़ रहे हैं। ' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इच्छाशक्ति ही नए अवसर के लिए रास्ता तैयार करती हैं। जो जीत के लिए प्रयास करते हैं, आग बढ़ते हैं, उनके सामने ही नये अवसर सामने आते हैं। हमारी एकजुटता बड़ी से बड़ी आपदा को पीछे छोड़ सकती है। '
पीएम ने कहा, 'हमारे यहां कहते हैं कि मन के हारे हार, मन के जीते जीत, यानि हमारी संकल्पशक्ति, हमारी इच्छाशक्ति ही हमारा आगे का मार्ग तय करती है। जो पहले ही हार मान लेता है उसके सामने नए अवसर कम ही आते हैं। '
भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हुए पीएम ने कहा कि इसके लिए सभी को प्रयास करना है। पीएम मोदी ने कहा,, 'देश के हर नागरिक को इस संकट के समय को मौके में बदलना है। हमें देश के लिए इसे एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट बनाना है। टर्निंग प्वाइंट क्या है- ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। '
पीएम ने साथ ही कहा कि हर वो चीज जिसे आयात करने के लिए देश मजबूर है, वो भारत में ही कैसे बने, भविष्य में उन्हीं उत्पादों का भारत निर्यातक कैसे बने, इस दिशा में हमें और तेजी से काम करना है।
पीएम मोदी ने कहा कि लोगों पर केंद्रित, लोगों द्वारा जलाई जाने वाली और धरती के अनुकूल विकास उनकी सरकार का हिस्सा है। पीएम मोदी ने कि भारत में एक और अभियान अभी चल रहा है- देश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करने का। इसमें पीपुल, प्लैनेट और प्रोफिट तीनों ही विषय एड्रेस होते हैं।
पीएम ने ये भी बताया कि देश में एलईडी बल्ब के इस्तेमाल के कारण कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन 4 करोड़ टन तक घटा है। साथ ही इससे 19000 करोड़ बिजली बिल की भी बचत हुई है।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने आईसीसी के कार्यक्रम में आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर, कहा- 'हर मुसीबत की एक ही दवा मजबूती है' इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के पचानवेवें एनुअल डे के मौके पर संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की ओर कदम बढ़ाने पर जोर दिया। कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक बार फिर आपदा को अवसर में बदलने की कोशिश पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया कोरोना वायरस से लग रही है और भारत भी इस जंग में शामिल है लेकिन हमें कई और मोर्चों पर भी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। पीएम ने कहा, 'बाढ़, टिड्डी, तेल कुएं में आग, छोटे-मोट भूकंप, चक्रवात इन सबसे हम एक साथ लड़ रहे हैं। ' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इच्छाशक्ति ही नए अवसर के लिए रास्ता तैयार करती हैं। जो जीत के लिए प्रयास करते हैं, आग बढ़ते हैं, उनके सामने ही नये अवसर सामने आते हैं। हमारी एकजुटता बड़ी से बड़ी आपदा को पीछे छोड़ सकती है। ' पीएम ने कहा, 'हमारे यहां कहते हैं कि मन के हारे हार, मन के जीते जीत, यानि हमारी संकल्पशक्ति, हमारी इच्छाशक्ति ही हमारा आगे का मार्ग तय करती है। जो पहले ही हार मान लेता है उसके सामने नए अवसर कम ही आते हैं। ' भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हुए पीएम ने कहा कि इसके लिए सभी को प्रयास करना है। पीएम मोदी ने कहा,, 'देश के हर नागरिक को इस संकट के समय को मौके में बदलना है। हमें देश के लिए इसे एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट बनाना है। टर्निंग प्वाइंट क्या है- ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। ' पीएम ने साथ ही कहा कि हर वो चीज जिसे आयात करने के लिए देश मजबूर है, वो भारत में ही कैसे बने, भविष्य में उन्हीं उत्पादों का भारत निर्यातक कैसे बने, इस दिशा में हमें और तेजी से काम करना है। पीएम मोदी ने कहा कि लोगों पर केंद्रित, लोगों द्वारा जलाई जाने वाली और धरती के अनुकूल विकास उनकी सरकार का हिस्सा है। पीएम मोदी ने कि भारत में एक और अभियान अभी चल रहा है- देश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करने का। इसमें पीपुल, प्लैनेट और प्रोफिट तीनों ही विषय एड्रेस होते हैं। पीएम ने ये भी बताया कि देश में एलईडी बल्ब के इस्तेमाल के कारण कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन चार करोड़ टन तक घटा है। साथ ही इससे उन्नीस हज़ार करोड़ बिजली बिल की भी बचत हुई है।
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अधर्म स्वरूप अदृष्ट को तो सारे प्रास्तिकजन जगत् की उत्पत्ति में कारण मानते ही हैं - प्रतः कोई खास विरोध नहीं प्राता । इस ग्रन्थ की प्रक्रिया में प्रलयकाल में श्रदृष्ट को हेतु मानना चाहिये यह भी संकेत यहां कर दिया गया है। वेग आदि संस्कारों से अणुओं में प्रवृत्त होती ही है।
आकाश, काल, दिशा तथा पदार्थों से ग्रसम्बद्ध गुण-कर्म ये सब क्रिया शून्य होते हैं । मन की क्रिया हाथ को क्रिया के समान ही होती है अर्थात् जैसे हाथ की क्रिया आत्मा के प्रयत्न से होती है वैसे हो मन की भी होती है। मन की सर्वप्रथम क्रिया में कारण अदृष्ट ही होता है ॥२०७।।
वैशेषिकदर्शन में माने जाने वाले नो द्रव्यों में मूर्त अवस्था में आगे हुए पृथिवी, जल, तेज, वायु तथा मन में ही कर्म की प्रवृत्ति होती है । प्रकाश, काल, दिशा, ग्रात्मा जो विभु (व्यापक) हैं उनमें क्रिया नहीं होती । द्रव्य के अतिरिक्त स्वतन्त्र गुण-कर्मों में भी क्रिया नहीं होती यह सूत्रों में संकेत है तदनुसार ही यहां भी कहा गया है। श्लोक के उत्तरार्ध में मन की क्रिया का विवरण है -- मन की क्रिया हस्त सम्बन्धी क्रिया के समान होती है। जैसे आत्मा के प्रयत्न से हाथ में कर्म प्रवृत्ति कही गई है वैसे ही आत्मा के प्रयत्न से मन में भी क्रिया संचार होता है। यहां प्रश्न होता है कि वह प्रयत्न भी तो मन के संयोग से ही होता है । और आत्मा का संयोग मन की क्रिया से ही मानना होगा, क्योंकि व्यापक आत्मा में तो कोई क्रिया होती नहीं। ऐसी स्थिति में जब मन में स्वतन्त्रतया क्रिया संचार नहीं होगा तो आत्मा और मन का संयोग ही नहीं होगा, तो फिर प्रयत्न की उत्पत्ति भी कैसे हो सकेगी? इसका समाधान किया कि उस मन की पहली क्रिया में कारण अदृष्ट है। उदाहरणतः तत्काल उत्पन्न हुए बालक के मन में, निद्रा से जागकर उठे हुए पुरुष के मन में, अथवा मूर्च्छा हट जाने पर होश में आये हुए पुरुष के मन में जो पहली क्रिया होती है - वह अदृष्ट जनित ही होती है। स्पष्ट यह हुआ कि आत्मा के संयोग से प्रयत्न आदि की उत्पत्ति में इच्छा शक्ति की प्रेरणा से आत्मा मन को प्रेरित करता है। श्रीमान् करणाद ने (सू० २१ २ । १३ तथा १४) में कहा है- "हस्त कर्मरणा मनः कर्म व्याख्यातम्" "अणनांमनसञ्चाद्यं कर्मादृष्टकारितप्" इति ।
'श्रात्मेन्द्रियाणां मनसोऽर्थयोगात् सुखं च दुःखं च कृतिश्च बुद्धिः । तेषामनारम्भ इहात्मसंस्थे मनस्यलं दैहिक दुःखनाशः ॥ २०८ ॥
" सहात्मनो यन्मनसोऽपसर्पणं देहाच्च देहे च तथोपसर्पणम् ।
तत् स्यादृष्टादशितप्रपीतयोः कार्यान्तराणामपि तत्र संगमः ।। २०६॥
3 अदृष्टनाशादुपसर्परगा दिसंयोगनाशोऽनुदयश्च मोक्षः ।
इत्थं परीक्ष्याणि समस्तकर्मस्थानानि सर्वत्र भवेत् प्रणोदः ।।२१०॥
बलं न सुप्तं प्रतिबुध्यते क्वचिद् बलान्तरक्षोदविशेषकं विना । कुर्ववलं विक्रियते च न क्वचिद् बलान्तरक्षोदविशेषकं विना ।।२११॥
स्थानच्युतिः कम्पनमेव सा गतिः संपद्यते नोदनया ऽथवा क्वचित् । यत्कम्पते तेन गातर्भवेत् तथा स्यान्नोदनाऽन्यत्र यदाहितं बलम् ॥ २१२॥
गतिस्तु देशान्तरयोगलक्षणा द्विधांशतो वा समुदायगाऽपि वा । रथस्य चक्रं शिरसा धृतं यदि प्रणीयते सा समुदायगा गतिः ।। २१३।।
संसार स्थिति में आत्मचेतन्य, मन तथा इन्द्रियों का जब भोग्य पदार्थों से संयोग होता है, तब ही सुख, दुःख, प्रयत्न, ज्ञान ग्रादि का अनुभव होता है, किन्तु सुषुप्ति अवस्था में अथवा समाधि अवस्था में जब मन एकमात्र आत्मा में स्थिति पाजाता है तब देह से सम्बन्धित इन्द्रिय जन्य सुख, दुःख आदि का अनुभव नहीं होता - वहां दुःख का नाश होजाता है, केवल एक अद्भुत सुख का ही संचार रहता है। पदार्थ संयोग से होने वाले सुख, दुःखों की वहां उत्पत्ति ही नहीं होती ॥२०८॥
आत्मा के गुण जो वैशेषिक दर्शन में कहे गये हैं, ग्रन्थकार के अपने मत में भी व्यावहारिकम्तात्मा के वे धर्म है, उनकी उत्पत्ति का प्रकार इस ही प्रकरण में वैशेषिक सूत्र में कहा है - यह ही बता रहे हैं कि आत्मा का, मम का, इन्द्रियों का और बाहर के पदार्थों का संयोग होने पर मन में सुख, दुःख, ज्ञान, प्रयत्न, इच्छा द्वोष आदि होते हैं। किन्तु जब मन सुषप्ति, अथवा योग समाधि अवस्था में आत्मा में ही स्थिर हो जाता है, अर्थात् निष्क्रिय हो जाता है, तब सुख दुःख आदि पैदा नहीं होते। निरन्तर अभ्यास से इस समाधि अवस्था की स्थिरता पा जाने पर देहजन्य दुःख का सर्वथा नाश ही हो जाता है।
मरणकाल में प्रात्मचैतन्य सहित मन देह को छोड़कर निकल जाता है तथा अन्य शरीर में प्रविष्ट हो जाता है, वह सब अदृष्ट के कारण होता है और वहां मन्न जल की प्राप्ति तथा अन्य करणीय भी अदृष्टवश ही होते हैं ॥२०६॥
मरण में और जन्मान्तर प्राप्त करने में भी मन ही एक शरीर को छोड़कर अन्य शरीर में जाता है । मन के गमन से ही मन के द्वारा आवृत व्यापक श्रात्मा में भी गमन का श्रौपचारिक व्यवहार कर लिया जाता है। जैसे घट को स्थानान्तरित करने पर घट के भीतर के प्रकाश में भी गति मान ली जाती है - जबकि आकाश स्वयं गति रहित है। यह जो मन का एक शरीर से अपसरण और अन्य शरीर में प्रवेश होता है, वह प्रदृष्ट हेतुक ही होता है। इस ही प्रकार तत्तत् स्थानों में स्व रक्षार्थ अन्न-पान आदि का लाभ भी अदृष्ट द्वारा ही होता है।
दृष्ट जिसे प्रारब्ध अथवा भाग्य कहते हैं, इसकी समाप्ति भोगपूर्ण हो जाने पर ही होती है। भोगानन्तर अदृष्ट के नष्ट हो जाने पर भिन्न शरीरों में प्रवेश रूप मन के संयोग का भी नाश हो जाता है। अन्य अदृष्ट का उदय होता नहीं है, यह ही मोक्ष की परिभाषा है। सांसारिक अवस्था में रहते हुए समस्त कर्मविषयों को इस प्रकार परीक्षा करनी चाहिये, परीक्षा में नोदना को ही सर्वत्र कर्म का कारण पावेंगे ॥२१०॥
प्रदृष्ट का सर्वथा नाश और फिर अन्य अदृष्ट का उदित न होना सम्पूर्ण पाप-पुण्यों के फल भोग के पूरे हो जाने पर होता है, अथवा आत्मा के तत्व ज्ञान से प्रदृष्ट नष्ट होता है, तब मन
का यह निर्गम और प्रवेश रुक जाता है - फलतः मोक्ष हो जाता है। यह भी उस प्रकरण के वैशेषिक सूत्रों का अनुवाद है। इस प्रकार वैशेषिक दर्शन के पांचवें अध्याय का पूरा अनुवाद यहां कर दिया गया है। आगे के श्लोकों में अवयवों में होने वाली और समूह में होने वाली द्विविध गति का विवरण है।
प्रसुप्तावस्था में अवस्थित बल किसी अन्य बल की विशेष उत्तेजना के बिना कहीं भी प्रबुद्ध नहीं होता और जो बल कार्यरत है अर्थात् क्रिया रूप में परिणत होकर क्रियान्वित होरहा है- उसकी सहन क्रिया में विकार भी बलान्तर की विशेष उत्तेजना के बिना नहीं होता, अर्थात् प्रसुप्त अवस्था में या जागते हुए कार्यरत अवस्था में दोनों में अन्य बल जनित उत्तेजना श्रावश्यक है ॥ २११ ॥
स्थान से च्युत हो जाना वा कम्पित हो जाना एक ही बात है, इसका नाम ही. गति है, यह गति नोदना से उत्पन्न होती है, अथवा कम्पन से कहीं गति उत्पन्न होकर अन्यत्र स्थिति पाये हुए बल में नोदना होती है ।।२१२।। में
पदार्थ का एक स्थान को छोड़कर अन्य स्थान से संयोग होना ही गति का लक्षण है, ये गति कहीं अवयवों में होती है और कहीं समुदाय में इस प्रकार गति के दो प्रकार हो जाते हैं। उदाहरणतः-- रथचक्र (पहिया) को यदि मनुष्य अपने शिर पर रखकर कहीं ले जाता है तो उस रथचक्र की जो स्थानान्तरण रूप गति होती है वह समुदायगत गति है ॥ २१३ ॥
रथस्य चक्रं धुरि चेत् स्थिरायामावर्त्यते सा गतिरांशिकी स्यात् । रथस्य चक्रं रथसन्नियुक्तं संचाल्यतेऽश्वेन तदोभयी सा ।। २१४ ।। 'प्रसारणाऽऽकुञ्चनयोर्द्वयं तथापक्षेपणोत्क्षेपणयोर्द्वयं पुनः । इत्थं चतुर्धा गतिरांशिकी मता नाना विधाऽन्या समुदायगागतिः ॥२१५ ।।
2 प्रसारणाकुञ्चन के तु वाससोऽवक्षेपणं चक्रगतं परं तरौ । यत्कम्पनं यश्च नतोन्नतकम उत्क्षेपणं त्वेव तथोमंयोऽपि च ।। २१६ ।।
अथान्यथा स्यादिह सामुदायिकी सा स्यन्दनस्पन्दन रेचनभ्रमैः ।
ऋज्वी च वक्रान्यविधा च लक्ष्यते योगाद्बलानामिह जायते गतिः ॥२१७ ।।
लोहे की धुरी में रथचक्र को डालकर यदि हाथ से घुमाया जाय तो वह चक्रगति रथ के अंशभूत चक्र में होने से अवयव की गति मानी जायगो और रथ में संयुक्त रथचक्र को जब अश्व खींच रहा हो तो वो गति समुदाय और अवयव दोनों में होती है ॥२१३॥
प्रसारण फैलाना, प्राकुञ्चन गति को संकुचित करना, अपक्षेपण - गति की वंचना, उत्क्षेपण - पैर को ऊपर उठाकर अश्व का गति आरम्भ, इस प्रकार अंशगतागति चार प्रकार की होती है और समुदाय में होने वाली गति तो नाना प्रकार की होती है ।। २१५ ।।
वैशेषिक मतानुयायी उत्क्षेपण, प्रपक्षेपण, आकुञ्चन, प्रसारण और गमन इस प्रकार गतिकर्म के पांच भेद मानते हैं, उनमें आदि के चार भेद अवयव में गति के रूप हैं, पांचवा सामान्य गतिरूप भेद समुदाय गति का होता है, यह तात्पर्य है ।
गीले वस्त्र को सुखाने के लिये फैलाना, सूखे को समेटना, रथचक्र को अंगुली के सहारे घुमाना, वायु की गति से वृक्ष के पत्तों में कम्पन होना अथवा पत्तों का नीचे ऊपर जाना, जल की तरंगों में जल के अवयवों का ऊपर नीचे होना ये सब अवयव सम्बन्धिनी गति होती है ॥२१६॥
२. वैशेषिक सूत्रों में उत्क्षेपण (ऊपर उछालना), प्रक्षेपण ( नीचे गिराना), आकुञ्चन ( संकोचन), प्रसारण और गमन ये पांच गति कर्म कहे गये हैं। वहां व्याख्याकारों ने और निबन्धकारों ने शंका उठाई है कि भ्रमण, रेचन, स्यन्दन (भरना), ऊर्ध्वज्वलन तथा तिर्यक (तिरछा) गमन ये पांच गतिभेद क्यों नहीं गिनाये गये ? इसका समाधान उनने इनका गमन में ही अन्तर्भाव करके किया है, वहां ही यह भी कहा गया कि उत्क्षेपण आदि का भी अन्तर्भाव गमन में ही क्यों नहीं किया गया ? इसका समाधान कुछ विद्वानों ने क्लिष्ट कल्पना से किया है और कुछ विद्वानों ने मुनि की स्वतन्त्र इच्छा को कारण माना है। इस विषय में ग्रन्थकर्ता ने करणाद का अभिप्राय विलक्षण रीति से प्रकट किया है। उनका कथन है कि गति दो प्रकार की होती है, एक समुदाय में गति और दूसरी अवयवों में गति । का अथवा समुदाय के केन्द्र बिन्दु का स्थानत्याग नहीं होता, वहां केवल अवयवों की गति ही मानी जाती है, और जहां केन्द्र बिन्दु तथा समुदाय का भी स्थान त्याग होता है वहां समुदाय की गति समझनी चाहिये । उनमें केवल अवयवों की गति के उत्क्षेपण आदि चार भेद कहे गये हैं । समुदाय की गति सामान्य गमन शब्द से ही कही जाती है, यह पूर्व पद्य में कहा है। अवयव गति के चार भेदों की संगति अब बता रहे हैं । वस्त्र आदि के फैलाने और सिकोड़ने में केवल अवयवों में गति होती है यह स्पष्ट देखा जाता है वहां समुदाय का अथवा समुदाय के केन्द्र बिन्दु का देश त्याग नहीं होता। रथचक्र को अथवा अन्य किसी सामान्य चक्र को अपने हाथ में लेकर एक स्थान पर खड़ा हुआ मनुष्य अंगुली द्वारा उसे ऊपर नीचे घुमाता है वहां उत्क्षेपण और प्रक्षेपण होता है। वहां भी समुदाय में अथवा केन्द्र में गति न होने से मनुष्य का देशत्याग रूपगमन नहीं होता केवल अवयव रूप चक्र में ही गति होती है। वृक्ष के शाखा पत्र आदि में वायु के संयोग से जो नीचे झुकना, ऊपर उठना रूप संचलन होता है वह भी अवयव गति रूप ही कहा जा सकता है। जल की तरंगों में जल के अवयवों की जो ऊपर नीचे गति होती हैवहां भी सारे समुदाय में गति न होने से अवयव गति ही कही जायगी ।)
समुदाय में होने वाली गति के प्रकार विभिन्न होते हैं, उसमें भरना, कम्पन होना, बाहर निकालना, चारों ओर घूमना, सीधो गति, वक्र गति आदि अनेक प्रक्रिया होती हैं । अनेक प्रकार के बलों के संयोग से समुदाय गति होती है ।।२१७।।
समुदाय सम्बन्धी गति को सामान्यतया गमन शब्द से ही कहा जाता है, उसमें केवल भ्रमण आदि भेद ही नहीं होते और भी अनेक भेद होते हैं, जैसे जल आदि का 'स्यन्दन' -भरना,
स्पन्दन भूकम्प आदि में शय्या आसन आदि का कम्पन, 'रेचन' मल आदि का अधः-पतन, 'भ्रमण' - नृत्य आदि क्रिया में एक ही जगह खड़े हुए चहुं ओर घूमजाना - उस क्रिया में भी केन्द्र में गति होने से गमन में ही गणना माननी चाहिये । 'ऋजु' सरल गति हंस आदि की, वक्रगति सर्प आदि की और भी पशु पक्षी आादि की तिरछी गति इस प्रकार समुदाय गति के अनेक भेद होते हैं। उन सबकी गणना नहीं की जा सकती। अतः सूत्रकार ने सामान्य रूप से गमन शब्द से ही समुदाय गति बताई है। ये सारे भेद अनेक बलों के परस्पर संयोग से होते हैं ।
'प्राकर्षणं सिध्यति चाशनायया विक्षेपतः स्यात्तु विकर्षणं पृथक् । तयोस्तु योगादिह जायते गतिः स्तम्भस्तथा चक्रगतिश्च वक्रता ॥२१८॥ 'बलं हि मात्राकृतरूपमिष्यते तदुद्भवेत् खण्डसमुच्चयात्मना । कम्पे प्रसारेऽथ गती तथा पृथग् भूत्वा तदैकैकमिवाथ लुप्यते ।।२१६॥ कम्पो गतिस्तेन कृतस्वरूपं बलं रसे भूम्नि कृतावतारम् । विकासयोगात् पृथगेकमेकमात्राणु मूत्वंव लयं प्रयाति ॥२२०॥ कम्पस्य धारा यदि नाभिमेकं संश्रित्य तस्माच्च बहिर्मुखी स्यात् । सा मण्डलीभूय बहिश्चरन्ती काष्ठासु गत्वा विलयं प्रयाति ॥२२१॥ कम्पस्य धारा यदि नाभिमेकं संश्रित्य चान्तर्मु खतामुपेयात् । सा मण्डलीभूय तदन्तरन्तर्गत्वैव नाभौ विलयं प्रयाति ॥२२२॥
कम्पस्य घारा बलवत्प्रबुद्धा परस्परेण प्रतिहन्यते चेत् । नोच्छिद्यते चेदितरेतरेण भुक्तं भवेदावरणं तदिष्टम् ॥ २२३ ।।
पदार्थ को अपने में लेना-भाकर्षण और पृथक् कर देना विकषर्ण ये दोनों अशनाया बल के आधार पर होते हैं, ग्रहण में आकर्षण विक्षेप से विकर्षण। इन दोनों के संयोग से कहीं गतिस्तम्भ ( रुकावट), कहीं चक्राकार गति, कहीं वक्र गति होती रहती है ॥ २१८ ॥
जिसकी व्याख्या पूर्व की जा चुकी है उस अशनाया बल से आकर्षण होता है, अर्थात् पूर्ण प्रशनाय बल जिसका जागृत हो उसकी ओर पदार्थान्तर का आगमन होता है। अशेनाया की ही विपरीत विक्षेप बल शक्ति से विकर्षरण होता है, अर्थात् उस विपरीत भाव में वस्तु पराङ मुख हो जाती है। इन प्राकर्षण और विकर्षण के विपरीत अथवा अनुकूल संयोग होने पर गतिस्तम्भ, चक्रगति, वक्रगति आदि विशेषतायें उत्पन्न होती हैं। विद्वद्गण सावधानी से इसका परीक्षण करें। ग्रन्थ विस्तृत न हो जाय इस भय से सबके उदाहरण यहां नहीं दिये गये हैं।
बल स्वभावतः अल्पमात्रा में अणुरूप माना जाता है। प्रवाह रूप में अनेक बलों का समुदाय होने पर उसकी प्रतीति कहीं खण्ड रूप में तथा कहीं समुदाय रूप में होती है । वह बलों का समुदाय कहीं कम्पन भाव से, कहीं प्रसारण भाव से तथा कहीं गति भाव से पृथक्-पृथक् कर, एक-एक खण्ड में आता हुआ नष्ट हो जाता है ।।२१६॥
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अधर्म स्वरूप अदृष्ट को तो सारे प्रास्तिकजन जगत् की उत्पत्ति में कारण मानते ही हैं - प्रतः कोई खास विरोध नहीं प्राता । इस ग्रन्थ की प्रक्रिया में प्रलयकाल में श्रदृष्ट को हेतु मानना चाहिये यह भी संकेत यहां कर दिया गया है। वेग आदि संस्कारों से अणुओं में प्रवृत्त होती ही है। आकाश, काल, दिशा तथा पदार्थों से ग्रसम्बद्ध गुण-कर्म ये सब क्रिया शून्य होते हैं । मन की क्रिया हाथ को क्रिया के समान ही होती है अर्थात् जैसे हाथ की क्रिया आत्मा के प्रयत्न से होती है वैसे हो मन की भी होती है। मन की सर्वप्रथम क्रिया में कारण अदृष्ट ही होता है ॥दो सौ सात।। वैशेषिकदर्शन में माने जाने वाले नो द्रव्यों में मूर्त अवस्था में आगे हुए पृथिवी, जल, तेज, वायु तथा मन में ही कर्म की प्रवृत्ति होती है । प्रकाश, काल, दिशा, ग्रात्मा जो विभु हैं उनमें क्रिया नहीं होती । द्रव्य के अतिरिक्त स्वतन्त्र गुण-कर्मों में भी क्रिया नहीं होती यह सूत्रों में संकेत है तदनुसार ही यहां भी कहा गया है। श्लोक के उत्तरार्ध में मन की क्रिया का विवरण है -- मन की क्रिया हस्त सम्बन्धी क्रिया के समान होती है। जैसे आत्मा के प्रयत्न से हाथ में कर्म प्रवृत्ति कही गई है वैसे ही आत्मा के प्रयत्न से मन में भी क्रिया संचार होता है। यहां प्रश्न होता है कि वह प्रयत्न भी तो मन के संयोग से ही होता है । और आत्मा का संयोग मन की क्रिया से ही मानना होगा, क्योंकि व्यापक आत्मा में तो कोई क्रिया होती नहीं। ऐसी स्थिति में जब मन में स्वतन्त्रतया क्रिया संचार नहीं होगा तो आत्मा और मन का संयोग ही नहीं होगा, तो फिर प्रयत्न की उत्पत्ति भी कैसे हो सकेगी? इसका समाधान किया कि उस मन की पहली क्रिया में कारण अदृष्ट है। उदाहरणतः तत्काल उत्पन्न हुए बालक के मन में, निद्रा से जागकर उठे हुए पुरुष के मन में, अथवा मूर्च्छा हट जाने पर होश में आये हुए पुरुष के मन में जो पहली क्रिया होती है - वह अदृष्ट जनित ही होती है। स्पष्ट यह हुआ कि आत्मा के संयोग से प्रयत्न आदि की उत्पत्ति में इच्छा शक्ति की प्रेरणा से आत्मा मन को प्रेरित करता है। श्रीमान् करणाद ने में कहा है- "हस्त कर्मरणा मनः कर्म व्याख्यातम्" "अणनांमनसञ्चाद्यं कर्मादृष्टकारितप्" इति । 'श्रात्मेन्द्रियाणां मनसोऽर्थयोगात् सुखं च दुःखं च कृतिश्च बुद्धिः । तेषामनारम्भ इहात्मसंस्थे मनस्यलं दैहिक दुःखनाशः ॥ दो सौ आठ ॥ " सहात्मनो यन्मनसोऽपसर्पणं देहाच्च देहे च तथोपसर्पणम् । तत् स्यादृष्टादशितप्रपीतयोः कार्यान्तराणामपि तत्र संगमः ।। दो सौ छः॥ तीन अदृष्टनाशादुपसर्परगा दिसंयोगनाशोऽनुदयश्च मोक्षः । इत्थं परीक्ष्याणि समस्तकर्मस्थानानि सर्वत्र भवेत् प्रणोदः ।।दो सौ दस॥ बलं न सुप्तं प्रतिबुध्यते क्वचिद् बलान्तरक्षोदविशेषकं विना । कुर्ववलं विक्रियते च न क्वचिद् बलान्तरक्षोदविशेषकं विना ।।दो सौ ग्यारह॥ स्थानच्युतिः कम्पनमेव सा गतिः संपद्यते नोदनया ऽथवा क्वचित् । यत्कम्पते तेन गातर्भवेत् तथा स्यान्नोदनाऽन्यत्र यदाहितं बलम् ॥ दो सौ बारह॥ गतिस्तु देशान्तरयोगलक्षणा द्विधांशतो वा समुदायगाऽपि वा । रथस्य चक्रं शिरसा धृतं यदि प्रणीयते सा समुदायगा गतिः ।। दो सौ तेरह।। संसार स्थिति में आत्मचेतन्य, मन तथा इन्द्रियों का जब भोग्य पदार्थों से संयोग होता है, तब ही सुख, दुःख, प्रयत्न, ज्ञान ग्रादि का अनुभव होता है, किन्तु सुषुप्ति अवस्था में अथवा समाधि अवस्था में जब मन एकमात्र आत्मा में स्थिति पाजाता है तब देह से सम्बन्धित इन्द्रिय जन्य सुख, दुःख आदि का अनुभव नहीं होता - वहां दुःख का नाश होजाता है, केवल एक अद्भुत सुख का ही संचार रहता है। पदार्थ संयोग से होने वाले सुख, दुःखों की वहां उत्पत्ति ही नहीं होती ॥दो सौ आठ॥ आत्मा के गुण जो वैशेषिक दर्शन में कहे गये हैं, ग्रन्थकार के अपने मत में भी व्यावहारिकम्तात्मा के वे धर्म है, उनकी उत्पत्ति का प्रकार इस ही प्रकरण में वैशेषिक सूत्र में कहा है - यह ही बता रहे हैं कि आत्मा का, मम का, इन्द्रियों का और बाहर के पदार्थों का संयोग होने पर मन में सुख, दुःख, ज्ञान, प्रयत्न, इच्छा द्वोष आदि होते हैं। किन्तु जब मन सुषप्ति, अथवा योग समाधि अवस्था में आत्मा में ही स्थिर हो जाता है, अर्थात् निष्क्रिय हो जाता है, तब सुख दुःख आदि पैदा नहीं होते। निरन्तर अभ्यास से इस समाधि अवस्था की स्थिरता पा जाने पर देहजन्य दुःख का सर्वथा नाश ही हो जाता है। मरणकाल में प्रात्मचैतन्य सहित मन देह को छोड़कर निकल जाता है तथा अन्य शरीर में प्रविष्ट हो जाता है, वह सब अदृष्ट के कारण होता है और वहां मन्न जल की प्राप्ति तथा अन्य करणीय भी अदृष्टवश ही होते हैं ॥दो सौ छः॥ मरण में और जन्मान्तर प्राप्त करने में भी मन ही एक शरीर को छोड़कर अन्य शरीर में जाता है । मन के गमन से ही मन के द्वारा आवृत व्यापक श्रात्मा में भी गमन का श्रौपचारिक व्यवहार कर लिया जाता है। जैसे घट को स्थानान्तरित करने पर घट के भीतर के प्रकाश में भी गति मान ली जाती है - जबकि आकाश स्वयं गति रहित है। यह जो मन का एक शरीर से अपसरण और अन्य शरीर में प्रवेश होता है, वह प्रदृष्ट हेतुक ही होता है। इस ही प्रकार तत्तत् स्थानों में स्व रक्षार्थ अन्न-पान आदि का लाभ भी अदृष्ट द्वारा ही होता है। दृष्ट जिसे प्रारब्ध अथवा भाग्य कहते हैं, इसकी समाप्ति भोगपूर्ण हो जाने पर ही होती है। भोगानन्तर अदृष्ट के नष्ट हो जाने पर भिन्न शरीरों में प्रवेश रूप मन के संयोग का भी नाश हो जाता है। अन्य अदृष्ट का उदय होता नहीं है, यह ही मोक्ष की परिभाषा है। सांसारिक अवस्था में रहते हुए समस्त कर्मविषयों को इस प्रकार परीक्षा करनी चाहिये, परीक्षा में नोदना को ही सर्वत्र कर्म का कारण पावेंगे ॥दो सौ दस॥ प्रदृष्ट का सर्वथा नाश और फिर अन्य अदृष्ट का उदित न होना सम्पूर्ण पाप-पुण्यों के फल भोग के पूरे हो जाने पर होता है, अथवा आत्मा के तत्व ज्ञान से प्रदृष्ट नष्ट होता है, तब मन का यह निर्गम और प्रवेश रुक जाता है - फलतः मोक्ष हो जाता है। यह भी उस प्रकरण के वैशेषिक सूत्रों का अनुवाद है। इस प्रकार वैशेषिक दर्शन के पांचवें अध्याय का पूरा अनुवाद यहां कर दिया गया है। आगे के श्लोकों में अवयवों में होने वाली और समूह में होने वाली द्विविध गति का विवरण है। प्रसुप्तावस्था में अवस्थित बल किसी अन्य बल की विशेष उत्तेजना के बिना कहीं भी प्रबुद्ध नहीं होता और जो बल कार्यरत है अर्थात् क्रिया रूप में परिणत होकर क्रियान्वित होरहा है- उसकी सहन क्रिया में विकार भी बलान्तर की विशेष उत्तेजना के बिना नहीं होता, अर्थात् प्रसुप्त अवस्था में या जागते हुए कार्यरत अवस्था में दोनों में अन्य बल जनित उत्तेजना श्रावश्यक है ॥ दो सौ ग्यारह ॥ स्थान से च्युत हो जाना वा कम्पित हो जाना एक ही बात है, इसका नाम ही. गति है, यह गति नोदना से उत्पन्न होती है, अथवा कम्पन से कहीं गति उत्पन्न होकर अन्यत्र स्थिति पाये हुए बल में नोदना होती है ।।दो सौ बारह।। में पदार्थ का एक स्थान को छोड़कर अन्य स्थान से संयोग होना ही गति का लक्षण है, ये गति कहीं अवयवों में होती है और कहीं समुदाय में इस प्रकार गति के दो प्रकार हो जाते हैं। उदाहरणतः-- रथचक्र को यदि मनुष्य अपने शिर पर रखकर कहीं ले जाता है तो उस रथचक्र की जो स्थानान्तरण रूप गति होती है वह समुदायगत गति है ॥ दो सौ तेरह ॥ रथस्य चक्रं धुरि चेत् स्थिरायामावर्त्यते सा गतिरांशिकी स्यात् । रथस्य चक्रं रथसन्नियुक्तं संचाल्यतेऽश्वेन तदोभयी सा ।। दो सौ चौदह ।। 'प्रसारणाऽऽकुञ्चनयोर्द्वयं तथापक्षेपणोत्क्षेपणयोर्द्वयं पुनः । इत्थं चतुर्धा गतिरांशिकी मता नाना विधाऽन्या समुदायगागतिः ॥दो सौ पंद्रह ।। दो प्रसारणाकुञ्चन के तु वाससोऽवक्षेपणं चक्रगतं परं तरौ । यत्कम्पनं यश्च नतोन्नतकम उत्क्षेपणं त्वेव तथोमंयोऽपि च ।। दो सौ सोलह ।। अथान्यथा स्यादिह सामुदायिकी सा स्यन्दनस्पन्दन रेचनभ्रमैः । ऋज्वी च वक्रान्यविधा च लक्ष्यते योगाद्बलानामिह जायते गतिः ॥दो सौ सत्रह ।। लोहे की धुरी में रथचक्र को डालकर यदि हाथ से घुमाया जाय तो वह चक्रगति रथ के अंशभूत चक्र में होने से अवयव की गति मानी जायगो और रथ में संयुक्त रथचक्र को जब अश्व खींच रहा हो तो वो गति समुदाय और अवयव दोनों में होती है ॥दो सौ तेरह॥ प्रसारण फैलाना, प्राकुञ्चन गति को संकुचित करना, अपक्षेपण - गति की वंचना, उत्क्षेपण - पैर को ऊपर उठाकर अश्व का गति आरम्भ, इस प्रकार अंशगतागति चार प्रकार की होती है और समुदाय में होने वाली गति तो नाना प्रकार की होती है ।। दो सौ पंद्रह ।। वैशेषिक मतानुयायी उत्क्षेपण, प्रपक्षेपण, आकुञ्चन, प्रसारण और गमन इस प्रकार गतिकर्म के पांच भेद मानते हैं, उनमें आदि के चार भेद अवयव में गति के रूप हैं, पांचवा सामान्य गतिरूप भेद समुदाय गति का होता है, यह तात्पर्य है । गीले वस्त्र को सुखाने के लिये फैलाना, सूखे को समेटना, रथचक्र को अंगुली के सहारे घुमाना, वायु की गति से वृक्ष के पत्तों में कम्पन होना अथवा पत्तों का नीचे ऊपर जाना, जल की तरंगों में जल के अवयवों का ऊपर नीचे होना ये सब अवयव सम्बन्धिनी गति होती है ॥दो सौ सोलह॥ दो. वैशेषिक सूत्रों में उत्क्षेपण , प्रक्षेपण , आकुञ्चन , प्रसारण और गमन ये पांच गति कर्म कहे गये हैं। वहां व्याख्याकारों ने और निबन्धकारों ने शंका उठाई है कि भ्रमण, रेचन, स्यन्दन , ऊर्ध्वज्वलन तथा तिर्यक गमन ये पांच गतिभेद क्यों नहीं गिनाये गये ? इसका समाधान उनने इनका गमन में ही अन्तर्भाव करके किया है, वहां ही यह भी कहा गया कि उत्क्षेपण आदि का भी अन्तर्भाव गमन में ही क्यों नहीं किया गया ? इसका समाधान कुछ विद्वानों ने क्लिष्ट कल्पना से किया है और कुछ विद्वानों ने मुनि की स्वतन्त्र इच्छा को कारण माना है। इस विषय में ग्रन्थकर्ता ने करणाद का अभिप्राय विलक्षण रीति से प्रकट किया है। उनका कथन है कि गति दो प्रकार की होती है, एक समुदाय में गति और दूसरी अवयवों में गति । का अथवा समुदाय के केन्द्र बिन्दु का स्थानत्याग नहीं होता, वहां केवल अवयवों की गति ही मानी जाती है, और जहां केन्द्र बिन्दु तथा समुदाय का भी स्थान त्याग होता है वहां समुदाय की गति समझनी चाहिये । उनमें केवल अवयवों की गति के उत्क्षेपण आदि चार भेद कहे गये हैं । समुदाय की गति सामान्य गमन शब्द से ही कही जाती है, यह पूर्व पद्य में कहा है। अवयव गति के चार भेदों की संगति अब बता रहे हैं । वस्त्र आदि के फैलाने और सिकोड़ने में केवल अवयवों में गति होती है यह स्पष्ट देखा जाता है वहां समुदाय का अथवा समुदाय के केन्द्र बिन्दु का देश त्याग नहीं होता। रथचक्र को अथवा अन्य किसी सामान्य चक्र को अपने हाथ में लेकर एक स्थान पर खड़ा हुआ मनुष्य अंगुली द्वारा उसे ऊपर नीचे घुमाता है वहां उत्क्षेपण और प्रक्षेपण होता है। वहां भी समुदाय में अथवा केन्द्र में गति न होने से मनुष्य का देशत्याग रूपगमन नहीं होता केवल अवयव रूप चक्र में ही गति होती है। वृक्ष के शाखा पत्र आदि में वायु के संयोग से जो नीचे झुकना, ऊपर उठना रूप संचलन होता है वह भी अवयव गति रूप ही कहा जा सकता है। जल की तरंगों में जल के अवयवों की जो ऊपर नीचे गति होती हैवहां भी सारे समुदाय में गति न होने से अवयव गति ही कही जायगी ।) समुदाय में होने वाली गति के प्रकार विभिन्न होते हैं, उसमें भरना, कम्पन होना, बाहर निकालना, चारों ओर घूमना, सीधो गति, वक्र गति आदि अनेक प्रक्रिया होती हैं । अनेक प्रकार के बलों के संयोग से समुदाय गति होती है ।।दो सौ सत्रह।। समुदाय सम्बन्धी गति को सामान्यतया गमन शब्द से ही कहा जाता है, उसमें केवल भ्रमण आदि भेद ही नहीं होते और भी अनेक भेद होते हैं, जैसे जल आदि का 'स्यन्दन' -भरना, स्पन्दन भूकम्प आदि में शय्या आसन आदि का कम्पन, 'रेचन' मल आदि का अधः-पतन, 'भ्रमण' - नृत्य आदि क्रिया में एक ही जगह खड़े हुए चहुं ओर घूमजाना - उस क्रिया में भी केन्द्र में गति होने से गमन में ही गणना माननी चाहिये । 'ऋजु' सरल गति हंस आदि की, वक्रगति सर्प आदि की और भी पशु पक्षी आादि की तिरछी गति इस प्रकार समुदाय गति के अनेक भेद होते हैं। उन सबकी गणना नहीं की जा सकती। अतः सूत्रकार ने सामान्य रूप से गमन शब्द से ही समुदाय गति बताई है। ये सारे भेद अनेक बलों के परस्पर संयोग से होते हैं । 'प्राकर्षणं सिध्यति चाशनायया विक्षेपतः स्यात्तु विकर्षणं पृथक् । तयोस्तु योगादिह जायते गतिः स्तम्भस्तथा चक्रगतिश्च वक्रता ॥दो सौ अट्ठारह॥ 'बलं हि मात्राकृतरूपमिष्यते तदुद्भवेत् खण्डसमुच्चयात्मना । कम्पे प्रसारेऽथ गती तथा पृथग् भूत्वा तदैकैकमिवाथ लुप्यते ।।दो सौ सोलह॥ कम्पो गतिस्तेन कृतस्वरूपं बलं रसे भूम्नि कृतावतारम् । विकासयोगात् पृथगेकमेकमात्राणु मूत्वंव लयं प्रयाति ॥दो सौ बीस॥ कम्पस्य धारा यदि नाभिमेकं संश्रित्य तस्माच्च बहिर्मुखी स्यात् । सा मण्डलीभूय बहिश्चरन्ती काष्ठासु गत्वा विलयं प्रयाति ॥दो सौ इक्कीस॥ कम्पस्य धारा यदि नाभिमेकं संश्रित्य चान्तर्मु खतामुपेयात् । सा मण्डलीभूय तदन्तरन्तर्गत्वैव नाभौ विलयं प्रयाति ॥दो सौ बाईस॥ कम्पस्य घारा बलवत्प्रबुद्धा परस्परेण प्रतिहन्यते चेत् । नोच्छिद्यते चेदितरेतरेण भुक्तं भवेदावरणं तदिष्टम् ॥ दो सौ तेईस ।। पदार्थ को अपने में लेना-भाकर्षण और पृथक् कर देना विकषर्ण ये दोनों अशनाया बल के आधार पर होते हैं, ग्रहण में आकर्षण विक्षेप से विकर्षण। इन दोनों के संयोग से कहीं गतिस्तम्भ , कहीं चक्राकार गति, कहीं वक्र गति होती रहती है ॥ दो सौ अट्ठारह ॥ जिसकी व्याख्या पूर्व की जा चुकी है उस अशनाया बल से आकर्षण होता है, अर्थात् पूर्ण प्रशनाय बल जिसका जागृत हो उसकी ओर पदार्थान्तर का आगमन होता है। अशेनाया की ही विपरीत विक्षेप बल शक्ति से विकर्षरण होता है, अर्थात् उस विपरीत भाव में वस्तु पराङ मुख हो जाती है। इन प्राकर्षण और विकर्षण के विपरीत अथवा अनुकूल संयोग होने पर गतिस्तम्भ, चक्रगति, वक्रगति आदि विशेषतायें उत्पन्न होती हैं। विद्वद्गण सावधानी से इसका परीक्षण करें। ग्रन्थ विस्तृत न हो जाय इस भय से सबके उदाहरण यहां नहीं दिये गये हैं। बल स्वभावतः अल्पमात्रा में अणुरूप माना जाता है। प्रवाह रूप में अनेक बलों का समुदाय होने पर उसकी प्रतीति कहीं खण्ड रूप में तथा कहीं समुदाय रूप में होती है । वह बलों का समुदाय कहीं कम्पन भाव से, कहीं प्रसारण भाव से तथा कहीं गति भाव से पृथक्-पृथक् कर, एक-एक खण्ड में आता हुआ नष्ट हो जाता है ।।दो सौ सोलह॥
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आमिर खान (Aamir Khan) ने 16 दिसंबर को चीन के सान्या में Hainan International Film Festival के समापन समारोह का हिस्सा बने। वह भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस फेस्टिवल में 'पाइरेट्स ऑफ कैरैबियन' फेम जॉनी डेप और इंटरनेशनल स्टार जैकी चैन भी नजर आए। इस फेस्टिवल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। फैंस आमिर, जॉनी और जैकी को एक फ्रेम में देखकर बहुत उत्साहित हैं।
यह फेस्टिवल 9 दिसंबर को शुरू हुआ था। इसमें कई टैलेंटेड फिल्ममेकर्स के काम को सम्मानित किया गया। एक तस्वीर में आमिर, जैकी के साथ स्टेज पर अनाउंसमेंट करते नजर आ रहे हैं। दूसरी तस्वीर में आमिर स्टेज पर जॉनी और फ्रेंच एक्टर जूलियट बिनोशे के साथ हैं। जूलियट The Unbearable Lightness of Being (1988), The English Patient (1996) and Chocolat (2000) जैसी फिल्मों के लिए प्रसिद्ध हैं। एक और तस्वीर में तुर्की के एक्टर-डायरेक्टर नूरी ब्लिज भी नडर आ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैसी इस फेस्टिवल के प्रमोशनल अंबैसडर भी हैं।
इस बात को कोई खारिज नहीं कर सकता कि चीन में आमिर बहुत पॉपुलर हैं। उनकी 'दंगल' और 'पीके' ने वहां शानदार बिजनेस किया है। 'दंगल' 70 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी, लेकिन इल फिल्म ने 2,112 करोड़ रूपये की कमाई की थी। आमिर के 'सीक्रेट सुपरस्टार' को भी चीन में बहुत प्रशंसा मिली थी और इस फिल्म ने 977 करोड़ रूपये का कलेक्शन किया था।
आमिर का मानना है कि '3 इडियट्स' की वजह से चीन के लोगों ने उन्हें पसंद करना शुरू किया था। हिंदुस्तान टाइम्स से इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- "चीन में मेरी पॉपुलैरिटी अचानक बढ़ी। ज्यादा लोगों को नहीं पता कि इसकी शुरुआत 3 इडियट्स (2009) से हुई थी। यह फिल्म पाइरेसी के द्वारा चीन के घरों में पहुंची थी। मुझे लगता है कि उन्हें एजुकेशन सिस्टम का विषय बहुत अच्छा लगा था। इसके बाद उन्होंने मेरा काम फॉलो करना शुरू किया, जिसमें पीके और टीवी शो सत्यमेव जयते शामिल है। "
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आमिर खान ने सोलह दिसंबर को चीन के सान्या में Hainan International Film Festival के समापन समारोह का हिस्सा बने। वह भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस फेस्टिवल में 'पाइरेट्स ऑफ कैरैबियन' फेम जॉनी डेप और इंटरनेशनल स्टार जैकी चैन भी नजर आए। इस फेस्टिवल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। फैंस आमिर, जॉनी और जैकी को एक फ्रेम में देखकर बहुत उत्साहित हैं। यह फेस्टिवल नौ दिसंबर को शुरू हुआ था। इसमें कई टैलेंटेड फिल्ममेकर्स के काम को सम्मानित किया गया। एक तस्वीर में आमिर, जैकी के साथ स्टेज पर अनाउंसमेंट करते नजर आ रहे हैं। दूसरी तस्वीर में आमिर स्टेज पर जॉनी और फ्रेंच एक्टर जूलियट बिनोशे के साथ हैं। जूलियट The Unbearable Lightness of Being , The English Patient and Chocolat जैसी फिल्मों के लिए प्रसिद्ध हैं। एक और तस्वीर में तुर्की के एक्टर-डायरेक्टर नूरी ब्लिज भी नडर आ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैसी इस फेस्टिवल के प्रमोशनल अंबैसडर भी हैं। इस बात को कोई खारिज नहीं कर सकता कि चीन में आमिर बहुत पॉपुलर हैं। उनकी 'दंगल' और 'पीके' ने वहां शानदार बिजनेस किया है। 'दंगल' सत्तर करोड़ रुपये के बजट में बनी थी, लेकिन इल फिल्म ने दो,एक सौ बारह करोड़ रूपये की कमाई की थी। आमिर के 'सीक्रेट सुपरस्टार' को भी चीन में बहुत प्रशंसा मिली थी और इस फिल्म ने नौ सौ सतहत्तर करोड़ रूपये का कलेक्शन किया था। आमिर का मानना है कि 'तीन इडियट्स' की वजह से चीन के लोगों ने उन्हें पसंद करना शुरू किया था। हिंदुस्तान टाइम्स से इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- "चीन में मेरी पॉपुलैरिटी अचानक बढ़ी। ज्यादा लोगों को नहीं पता कि इसकी शुरुआत तीन इडियट्स से हुई थी। यह फिल्म पाइरेसी के द्वारा चीन के घरों में पहुंची थी। मुझे लगता है कि उन्हें एजुकेशन सिस्टम का विषय बहुत अच्छा लगा था। इसके बाद उन्होंने मेरा काम फॉलो करना शुरू किया, जिसमें पीके और टीवी शो सत्यमेव जयते शामिल है। " Also Read:
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मैं अपनी बेटी के पास अहमदाबाद गई थी. सुबह की सैर के बाद जब हम सब चाय पी रहे थे तो देखा मेरे बाएं हाथ में सोने का कड़ा नहीं था. कहां गिरा, कब गिरा, याद ही नहीं.
सोचा, जहां घूम रहे थे वहीं देखूं. शायद गिरा हो तो मिल जाए. सो, मैं और बेटी दोनों देखने निकले. इतनी देर में सड़क में झाड़ू भी लग चुकी थी. खैर, कचरे वाली से पूछा. उस ने कहा कि एक लड़की, जो औफिस जा रही थी, को मिला तो था लेकिन वह तो औफिस गई.
अब क्या करें. खैर, उस के घर गए. उस की मम्मी से बात की. फिर उस लड़की से मोबाइल से बात की और बताया जो कड़ा उसे मिला था वह मेरा है. उस ने बोला कि लंचटाइम में वह घर आएगी तब मिल कर दे देगी. उस समय 10 बजे थे. 1 बजे अपनी मम्मी को ले कर हमारे घर आई व मेरा दूसरा कड़ा देख कर (जो मेरे हाथ में था) मेरा कड़ा मुझे लौटा दिया. कड़ा लेते ही मेरे होंठों पर मुसकान आ गई.
मुझे पति के साथ हरिद्वार जाना था. अंबाला से हरिद्वार का 170 किलोमीटर का सफर हम ने स्कूटर पर तय करने का निर्णय लिया. हम 3 बजे अंबाला से चले और साढ़े 5 बजे सहारनपुर, पहुंचे. वर्षा होने लगी. जैसेतैसे हम छुटमलपुर पहुंचे ही थे कि हमारा स्कूटर खराब हो गया. हरिद्वार अभी 60 किलोमीटर दूर था. तभी दूध का एक टैंकर आया और उस ने हमें लिफ्ट दे दी.
हम जैसेतैसे रुड़की पहुंचे. हरिद्वार अभी 32 किलोमीटर दूर था और रात के 9 बज गए थे. तभी पास में ही चुंगी के निकट हमें एक सज्जन मिले. हम ने उन्हें अपनी समस्या से अवगत करा कर रात को ठहरने के लिए किसी होटल का पता पूछा. आसपास कोई होटल न था.
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बॉलीवुड सुपरस्टार अजय देवगन और तब्बू स्टारर फिल्म 'दृश्यम' को जबरदस्त सफलता मिली है। जल्द ही फिल्म विदेशों में धूम मचाने वाली है. भारतीय प्रोडक्शन हाउस पैनोरमा स्टूडियोज और दक्षिण कोरिया के एंथोलॉजी स्टूडियोज ने हाल ही में कान्स फिल्म फेस्टिवल 2023 के दौरान इंडियन पवेलियन में साझेदारी की घोषणा की। घोषणा के समय निर्माता कुमार मंगत पाठक और जय चोई मौजूद थे। जिसके बाद ध्यम को कोरियन रीमेक में बनाने का फैसला किया गया है।
अजय देवगन की फिल्म दशमन का चीनी रीमेक भी बनाया गया था, जिसका शीर्षक शीप विदाउट ए फियर था। अब इस बेहतरीन मूवी सीरीज का साउथ कोरिया में रीमेक बनाया जाएगा. यह भारतीय फिल्म के लिए सम्मान की बात है।
ध्यम के कोरिया रीमेक और एंथोलॉजी स्टूडियोज के साथ साझेदारी के बारे में बात करते हुए कुमार मंगत ने कहा, मैं उत्साहित हूं कि श्याम फ्रेंचाइजी कोरिया में बनाई जा रही है। इससे न केवल भारत के बाहर इसकी पहुंच बढ़ेगी बल्कि हिंदी सिनेमा को वैश्विक उपस्थिति भी मिलेगी। इन सभी वर्षों में हम कोरियाई शैली से प्रेरित रहे हैं। अब उन्हें हमारी एक फिल्म में प्रेरणा मिली है। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है।
इस मौके पर जे चोई ने भी उत्साहित होकर कहा कि हम कोरियाई सिनेमा की मौलिकता को बनाए रखते हुए एक व्यापक रूप से सफल हिंदी फिल्म का रीमेक बनाने को लेकर बहुत उत्साहित हैं। रीमेक का कोरिया और भारत के बीच पहले प्रमुख सह-निर्माण के रूप में अधिक महत्व है। हमारी साझेदारी के माध्यम से, हम भारतीय और कोरियाई दोनों सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ को पर्दे पर लाने और एक सार्थक रीमेक बनाने की कोशिश करेंगे जो मूल के समान ही महान हो।
गौरतलब है कि अजय देवगन की फिल्म 'दृश्यम' के पहले पार्ट को निशिकांत कामत ने डायरेक्ट किया था। फिल्म में तब्बू ने भी अहम भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी विजय सलगांवकर उर्फ अजय देवगन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी बेटी एक अपराध करती है। अपनी बेटी को पुलिस से बचाने के लिए वह कुछ ऐसा करता है जिससे उसकी पूरी जिंदगी बदल जाती है, वह अपने परिवार को बचाने की पूरी कोशिश करता है।
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बॉलीवुड सुपरस्टार अजय देवगन और तब्बू स्टारर फिल्म 'दृश्यम' को जबरदस्त सफलता मिली है। जल्द ही फिल्म विदेशों में धूम मचाने वाली है. भारतीय प्रोडक्शन हाउस पैनोरमा स्टूडियोज और दक्षिण कोरिया के एंथोलॉजी स्टूडियोज ने हाल ही में कान्स फिल्म फेस्टिवल दो हज़ार तेईस के दौरान इंडियन पवेलियन में साझेदारी की घोषणा की। घोषणा के समय निर्माता कुमार मंगत पाठक और जय चोई मौजूद थे। जिसके बाद ध्यम को कोरियन रीमेक में बनाने का फैसला किया गया है। अजय देवगन की फिल्म दशमन का चीनी रीमेक भी बनाया गया था, जिसका शीर्षक शीप विदाउट ए फियर था। अब इस बेहतरीन मूवी सीरीज का साउथ कोरिया में रीमेक बनाया जाएगा. यह भारतीय फिल्म के लिए सम्मान की बात है। ध्यम के कोरिया रीमेक और एंथोलॉजी स्टूडियोज के साथ साझेदारी के बारे में बात करते हुए कुमार मंगत ने कहा, मैं उत्साहित हूं कि श्याम फ्रेंचाइजी कोरिया में बनाई जा रही है। इससे न केवल भारत के बाहर इसकी पहुंच बढ़ेगी बल्कि हिंदी सिनेमा को वैश्विक उपस्थिति भी मिलेगी। इन सभी वर्षों में हम कोरियाई शैली से प्रेरित रहे हैं। अब उन्हें हमारी एक फिल्म में प्रेरणा मिली है। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है। इस मौके पर जे चोई ने भी उत्साहित होकर कहा कि हम कोरियाई सिनेमा की मौलिकता को बनाए रखते हुए एक व्यापक रूप से सफल हिंदी फिल्म का रीमेक बनाने को लेकर बहुत उत्साहित हैं। रीमेक का कोरिया और भारत के बीच पहले प्रमुख सह-निर्माण के रूप में अधिक महत्व है। हमारी साझेदारी के माध्यम से, हम भारतीय और कोरियाई दोनों सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ को पर्दे पर लाने और एक सार्थक रीमेक बनाने की कोशिश करेंगे जो मूल के समान ही महान हो। गौरतलब है कि अजय देवगन की फिल्म 'दृश्यम' के पहले पार्ट को निशिकांत कामत ने डायरेक्ट किया था। फिल्म में तब्बू ने भी अहम भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी विजय सलगांवकर उर्फ अजय देवगन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी बेटी एक अपराध करती है। अपनी बेटी को पुलिस से बचाने के लिए वह कुछ ऐसा करता है जिससे उसकी पूरी जिंदगी बदल जाती है, वह अपने परिवार को बचाने की पूरी कोशिश करता है।
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महिला का पति अनिल (34) एक मजदूर था। उन्होंने बताया कि "अनिल और मंजू (30) शराब का सेवन करते थे और आपस में झगड़ते थे।
जयपुरः राजस्थान के बाड़मेर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम को एक महिला ने पति की हत्या कर दी। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। कोतवाली थानाधिकारी उगमराज सोनी ने बताया कि प्राथमिक जांच से पता चला है कि मंजू अपने पति की आय कम होने के कारण उससे नाखुश थी।
उन्होंने बताया कि महिला का पति अनिल (34) एक मजदूर था। उन्होंने बताया कि "अनिल और मंजू (30) शराब का सेवन करते थे और आपस में झगड़ते थे। मंजू अपने पति से नाखुश थी क्योंकि वह कम कमाई करता था। मंगलवार शाम को मंजू ने अनिल का गला दबा दिया जिससे उसकी मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि अनिल की मां की ओर से बहू मंजू के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करवाया गया है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
राजस्थान के पाली जिले के सोजत रोड थाना क्षेत्र में एक बुजुर्ग महिला की गला रेत कर हत्या करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी । थानाधिकारी उर्जाराम ने बताया कि सिनला गांव में अकेली रह रही कुनकी (70) का शव मंगलवार की सुबह झाड़ियों में पड़ा मिला।
उन्होंने बताया कि मृतक की किसी धारदार हथियार से गला रेत कर हत्या की गई है । उन्होंने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिये स्थानीय अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने बताया कि मृतका झोपड़ी में अकेली रहती थी और उसके दो बेटे आसपास में अलग रहते थे। उन्होंने बताया कि अज्ञात आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।
हैदराबाद में मंगलवार को अज्ञात हमलावरों ने दो रियल एस्टेट कारोबारियों की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों कारोबारी साझेदार थे, जिनमें से एक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरे ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
उन्होंने बताया कि वारदात के पीछे के कारणों और आरोपियों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई है। अधिकारी ने बताया कि जान गंवाने वाला एक कारोबारी कथित तौर पर हत्या के एक मामले में संलिप्त था जबकि दूसरा कारोबारी प्रॉपर्टी संबंधी विवाद में आरोपों का सामना कर रहा था।
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महिला का पति अनिल एक मजदूर था। उन्होंने बताया कि "अनिल और मंजू शराब का सेवन करते थे और आपस में झगड़ते थे। जयपुरः राजस्थान के बाड़मेर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम को एक महिला ने पति की हत्या कर दी। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। कोतवाली थानाधिकारी उगमराज सोनी ने बताया कि प्राथमिक जांच से पता चला है कि मंजू अपने पति की आय कम होने के कारण उससे नाखुश थी। उन्होंने बताया कि महिला का पति अनिल एक मजदूर था। उन्होंने बताया कि "अनिल और मंजू शराब का सेवन करते थे और आपस में झगड़ते थे। मंजू अपने पति से नाखुश थी क्योंकि वह कम कमाई करता था। मंगलवार शाम को मंजू ने अनिल का गला दबा दिया जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि अनिल की मां की ओर से बहू मंजू के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करवाया गया है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। राजस्थान के पाली जिले के सोजत रोड थाना क्षेत्र में एक बुजुर्ग महिला की गला रेत कर हत्या करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी । थानाधिकारी उर्जाराम ने बताया कि सिनला गांव में अकेली रह रही कुनकी का शव मंगलवार की सुबह झाड़ियों में पड़ा मिला। उन्होंने बताया कि मृतक की किसी धारदार हथियार से गला रेत कर हत्या की गई है । उन्होंने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिये स्थानीय अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने बताया कि मृतका झोपड़ी में अकेली रहती थी और उसके दो बेटे आसपास में अलग रहते थे। उन्होंने बताया कि अज्ञात आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। हैदराबाद में मंगलवार को अज्ञात हमलावरों ने दो रियल एस्टेट कारोबारियों की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों कारोबारी साझेदार थे, जिनमें से एक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरे ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि वारदात के पीछे के कारणों और आरोपियों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई है। अधिकारी ने बताया कि जान गंवाने वाला एक कारोबारी कथित तौर पर हत्या के एक मामले में संलिप्त था जबकि दूसरा कारोबारी प्रॉपर्टी संबंधी विवाद में आरोपों का सामना कर रहा था।
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हमारे संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा द्वारा एफडीआई के विरोध में 26 अक्तूबर से दिल्लीव्यापी 10 दिवसीय आंदोलन की श्रं=ंखला में आज रोहिणी सेक्टर 9 तथा राजधानी के अनेक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और जनसभाओं का आयोजन किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने घोषणा की कि 4 नवम्बर को एफडीआई के विरोध में सम्पूर्ण दिल्ली में काला दिवस मनाया जाएगा। रोहिणी सेक्टर 9 की जनसभा में हजारों की तादाद में भाजपा कार्यकर्ताओं, स्थानीय व्यापारियों तथा प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लेकर एफडीआई के विरोध में नारे लगाए। जनसभा को प्रदेश सहप्रभारी श्री रामेश्वर चौरसिया, प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, स्थानीय पार्षद डॉ. शोभा विजेंद्र, श्री प्रवेश वाही, श्री ताराचंद बंसल और डॉ. नीलम गोयल आदि नेताओं ने संबोधित किया। श्री रामेश्वर चौरसिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार देश की जनता क विश्वास खो चुकी है। यह सरकार राज करने के काबिल नहीं है। सरकार के सभी लोग खजाने को लूटने में व्यस्त हैं। ऐसी भ्रष्टाचारी और जनविरोधी सरकार आजाद भारत के इतिहास में पहले कभी देखने को हीं मिली। यह सरकार जितनी जल्दी सत्ता से बाहर हो जाए उतना ही अच्छा होगा। प्रदेश अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार हर दिन कोई न कोई जनविरोधी और देशविरोधी निर्णय अवश्य करती है। इस बार उसने देश की गरिमा को ताक पर रखखर खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की इजाजत दी है। यह फैसला इतनी हड़बड़ी और बगैर सोचे समझे किया गया है कि इसके दुष्परिणामों के बारे में सरकार ने सोचा तक नहीं है। दिल्ली तथा देश में यदि एफडीआई आया तो यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो जाएगी। भारी संख्या में लोग बेरोजगार होंगे। देश की दौलत और सम्पदा लूटकर विदेशी कंपनियां भारत से बाहर ले जाएंगी। यहां का परंपरागत व्यवसाय पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। उन्होंने उपस्थित जनता का आह्वान किया कि वे दिल्ली में एफडीआई की अनुमति देने के शीला सरकार के निर्णय का पूरी ताकत से विरोध करें। स्थानीय पार्षद डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि एफडीआई देश के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र है। सरकार के लोग इससे भले ही मालामाल हो जाएं लेकिन देश के व्यापारी, युवा पीढ़ी और उपभोक्ताओं पर इसके दूरगामी विपरीत परिणाम होंगे जिसका खामियाजा अंतत जनता को भी भुगतना पड़ेगा। आज के कार्यक्रमों में सुश्री आरती मेहरा, श्री रमेश बिधूड़ी, श्री विक्रम बिधूड़ी, डॉ. हर्ष वर्धन, श्री सतीश उपाध्याय, श्री कैलाश जैन एवं बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने हिस्सा लिया। उन्होंने इस अवसर पर संकल्प किया कि वे कांग्रेस सरकार के हर जनविरोधी निर्णय का विरोध करेंगे और आगामी चुनावों में कांग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल कर देंगे।
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हमारे संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा द्वारा एफडीआई के विरोध में छब्बीस अक्तूबर से दिल्लीव्यापी दस दिवसीय आंदोलन की श्रं=ंखला में आज रोहिणी सेक्टर नौ तथा राजधानी के अनेक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और जनसभाओं का आयोजन किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने घोषणा की कि चार नवम्बर को एफडीआई के विरोध में सम्पूर्ण दिल्ली में काला दिवस मनाया जाएगा। रोहिणी सेक्टर नौ की जनसभा में हजारों की तादाद में भाजपा कार्यकर्ताओं, स्थानीय व्यापारियों तथा प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लेकर एफडीआई के विरोध में नारे लगाए। जनसभा को प्रदेश सहप्रभारी श्री रामेश्वर चौरसिया, प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, स्थानीय पार्षद डॉ. शोभा विजेंद्र, श्री प्रवेश वाही, श्री ताराचंद बंसल और डॉ. नीलम गोयल आदि नेताओं ने संबोधित किया। श्री रामेश्वर चौरसिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार देश की जनता क विश्वास खो चुकी है। यह सरकार राज करने के काबिल नहीं है। सरकार के सभी लोग खजाने को लूटने में व्यस्त हैं। ऐसी भ्रष्टाचारी और जनविरोधी सरकार आजाद भारत के इतिहास में पहले कभी देखने को हीं मिली। यह सरकार जितनी जल्दी सत्ता से बाहर हो जाए उतना ही अच्छा होगा। प्रदेश अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार हर दिन कोई न कोई जनविरोधी और देशविरोधी निर्णय अवश्य करती है। इस बार उसने देश की गरिमा को ताक पर रखखर खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की इजाजत दी है। यह फैसला इतनी हड़बड़ी और बगैर सोचे समझे किया गया है कि इसके दुष्परिणामों के बारे में सरकार ने सोचा तक नहीं है। दिल्ली तथा देश में यदि एफडीआई आया तो यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो जाएगी। भारी संख्या में लोग बेरोजगार होंगे। देश की दौलत और सम्पदा लूटकर विदेशी कंपनियां भारत से बाहर ले जाएंगी। यहां का परंपरागत व्यवसाय पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। उन्होंने उपस्थित जनता का आह्वान किया कि वे दिल्ली में एफडीआई की अनुमति देने के शीला सरकार के निर्णय का पूरी ताकत से विरोध करें। स्थानीय पार्षद डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि एफडीआई देश के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र है। सरकार के लोग इससे भले ही मालामाल हो जाएं लेकिन देश के व्यापारी, युवा पीढ़ी और उपभोक्ताओं पर इसके दूरगामी विपरीत परिणाम होंगे जिसका खामियाजा अंतत जनता को भी भुगतना पड़ेगा। आज के कार्यक्रमों में सुश्री आरती मेहरा, श्री रमेश बिधूड़ी, श्री विक्रम बिधूड़ी, डॉ. हर्ष वर्धन, श्री सतीश उपाध्याय, श्री कैलाश जैन एवं बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने हिस्सा लिया। उन्होंने इस अवसर पर संकल्प किया कि वे कांग्रेस सरकार के हर जनविरोधी निर्णय का विरोध करेंगे और आगामी चुनावों में कांग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल कर देंगे।
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'मैसूर का शेर' कहे जाने वाले टीपू सुल्तान की जयंती पर कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा समारोह आयोजित करने का फ़ैसला किया है.
18वीं सदी में मैसूर के शासक रहे टीपू सुल्तान का जन्म 10 नवंबर 1750 को हुआ था.
कर्नाटक सरकार टीपू सुल्तान की जयंती पर लंबे अरसे से क्षेत्रीय कार्यक्रम आयोजित करती आई है.
वहीं टीपू सुल्तान को 'बर्बर', 'सनकी हत्यारा' और 'बलात्कारी' समझने वाली भारतीय जनता पार्टी इन आयोजनों का विरोध करती रही है और इस साल भी ये विरोध जारी है.
कर्नाटक में बीते कुछ दिनों से भाजपा और आनुषांगिग दल टीपू सुल्तान की जयंती का विरोध कर रहे हैं. इसे ध्यान में रखते हुए कर्नाटक में सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत कर दी गई है.
टीपू की जयंती को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच शुक्रवार शाम को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वो जयंती समारोह में हिस्सा नहीं लेंगे.
कुछ राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आगामी चुनावों के मद्देनज़र तैयार हो रहे राजनीति ग्राउंड पर किसी भी तरह की ग़लती से बचने के लिए कुमारस्वामी ने ये फ़ैसला किया है.
लेकिन हर बार की तरह इस बार भी भाजपा टीपू सुल्तान पर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है.
बीते सालों में टीपू सुल्तान की जयंती मनाए जाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं.
साल 2015 में कर्नाटक के कोडागु ज़िले में टीपू सुल्तान की जयंती के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई थी. इसके साथ ही कई लोग घायल हुए थे.
भाजपा के विचार में कर्नाटक सरकार मुसलमानों को ख़ुश करने के लिए टीपू सुल्तान के जन्म का जश्न मनाती है.
लेकिन भाजपा और आरएसएस को टीपू सुल्तान से इतना परहेज़ क्यों है? ये समझने के लिए बीबीसी संवाददाता अनंत प्रकाश ने संघ के विचारक और राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा से बात की.
टीपू सुल्तान को एक ऐसा शासक समझा जाता है जिसने अपने शासन काल में कृषि-व्यवस्था में बड़े सुधार किये.
कर्नाटक में भाजपा के लिए टीपू सुल्तान बीते काफ़ी समय से एक अहम मुद्दा बने हुए हैं.
भाजपा की राजनीति पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा ने बीबीसी से बात करते हुए बीजेपी द्वारा पहले कर्नाटक और टीपू सुल्तान की जयंती के विरोध में दिल्ली में हो चुके विरोध प्रदर्शनों की वजह बताई.
भाजपा-अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा था कि उन्होंने सुझाव दिया है कि दिल्ली विधानसभा में टीपू सुल्तान की जगह सिख नेता जस्सा सिंह अहलूवालिया की तस्वीर लगानी चाहिए.
बीजेपी बीते कई सालों से कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती मनाए जाने का विरोध कर रही है.
हालांकि विपक्षी पार्टियाँ इस मामले में बीजेपी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाती हैं.
क्या कहता है इतिहास?
मैसूर के पूर्व शासक टीपू सुल्तान को एक बहादुर और देशभक्त शासक के रूप में ही नहीं धार्मिक सहिष्णुता के दूत के रूप में भी याद किया जाता है.
लेकिन इतिहास की मानें तो टीपू सुल्तान को सांप्रदायिक शासक सिद्ध करने की कहानी गढ़ी हुई है.
कुछ समय से भाजपा नेता और दक्षिणपंथी इतिहासकार टीपू को 'हिंदुओं के दुश्मन' मुस्लिम सुल्तान के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. टीपू को हिंदुओं का सफ़ाया करने वाला शासक बताया जा रहा है.
टीपू ऐसे भारतीय शासक थे जिनकी मौत मैदाने-जंग में अंग्रेज़ो के ख़िलाफ़ लड़ते-लड़ते हुई थी. साल 2014 की गणतंत्र दिवस परेड में टीपू सुल्तान को एक अदम्य साहस वाला महान योद्धा बताया गया था.
वहीं, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर नरेंद्र पानी टीपू पर एक अलग ही नज़रिया रखते हैं.
टीपू सुल्तान मैसूर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर श्रीरंगपट्टनम में एक सुंदर मकबरे में अपने पिता हैदर अली और माँ फ़ातिमा फ़ख़रुन्निसा के बाज़ू में दफन हैं.
श्रीरंगपट्टनम टीपू की राजधानी थी और यहां जगह-जगह टीपू के युग के महल, इमारतें और खंडहर हैं.
टीपू के मक़बरे और महलों को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग श्रीरंगपट्टनम जाते हैं.
टीपू के साम्राज्य में हिंदू बहुमत में थे. टीपू सुल्तान धार्मिक सहिष्णुता और आज़ाद ख़्याल के लिए जाना जाते हैं जिन्होंने श्रीरंगपट्टनम, मैसूर और अपने राज्य के कई अन्य स्थानों में कई बड़े मंदिर बनाए, और मंदिरों के लिए ज़मीन दी.
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'मैसूर का शेर' कहे जाने वाले टीपू सुल्तान की जयंती पर कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा समारोह आयोजित करने का फ़ैसला किया है. अट्ठारहवीं सदी में मैसूर के शासक रहे टीपू सुल्तान का जन्म दस नवंबर एक हज़ार सात सौ पचास को हुआ था. कर्नाटक सरकार टीपू सुल्तान की जयंती पर लंबे अरसे से क्षेत्रीय कार्यक्रम आयोजित करती आई है. वहीं टीपू सुल्तान को 'बर्बर', 'सनकी हत्यारा' और 'बलात्कारी' समझने वाली भारतीय जनता पार्टी इन आयोजनों का विरोध करती रही है और इस साल भी ये विरोध जारी है. कर्नाटक में बीते कुछ दिनों से भाजपा और आनुषांगिग दल टीपू सुल्तान की जयंती का विरोध कर रहे हैं. इसे ध्यान में रखते हुए कर्नाटक में सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत कर दी गई है. टीपू की जयंती को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच शुक्रवार शाम को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वो जयंती समारोह में हिस्सा नहीं लेंगे. कुछ राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आगामी चुनावों के मद्देनज़र तैयार हो रहे राजनीति ग्राउंड पर किसी भी तरह की ग़लती से बचने के लिए कुमारस्वामी ने ये फ़ैसला किया है. लेकिन हर बार की तरह इस बार भी भाजपा टीपू सुल्तान पर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है. बीते सालों में टीपू सुल्तान की जयंती मनाए जाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं. साल दो हज़ार पंद्रह में कर्नाटक के कोडागु ज़िले में टीपू सुल्तान की जयंती के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई थी. इसके साथ ही कई लोग घायल हुए थे. भाजपा के विचार में कर्नाटक सरकार मुसलमानों को ख़ुश करने के लिए टीपू सुल्तान के जन्म का जश्न मनाती है. लेकिन भाजपा और आरएसएस को टीपू सुल्तान से इतना परहेज़ क्यों है? ये समझने के लिए बीबीसी संवाददाता अनंत प्रकाश ने संघ के विचारक और राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा से बात की. टीपू सुल्तान को एक ऐसा शासक समझा जाता है जिसने अपने शासन काल में कृषि-व्यवस्था में बड़े सुधार किये. कर्नाटक में भाजपा के लिए टीपू सुल्तान बीते काफ़ी समय से एक अहम मुद्दा बने हुए हैं. भाजपा की राजनीति पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा ने बीबीसी से बात करते हुए बीजेपी द्वारा पहले कर्नाटक और टीपू सुल्तान की जयंती के विरोध में दिल्ली में हो चुके विरोध प्रदर्शनों की वजह बताई. भाजपा-अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा था कि उन्होंने सुझाव दिया है कि दिल्ली विधानसभा में टीपू सुल्तान की जगह सिख नेता जस्सा सिंह अहलूवालिया की तस्वीर लगानी चाहिए. बीजेपी बीते कई सालों से कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती मनाए जाने का विरोध कर रही है. हालांकि विपक्षी पार्टियाँ इस मामले में बीजेपी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाती हैं. क्या कहता है इतिहास? मैसूर के पूर्व शासक टीपू सुल्तान को एक बहादुर और देशभक्त शासक के रूप में ही नहीं धार्मिक सहिष्णुता के दूत के रूप में भी याद किया जाता है. लेकिन इतिहास की मानें तो टीपू सुल्तान को सांप्रदायिक शासक सिद्ध करने की कहानी गढ़ी हुई है. कुछ समय से भाजपा नेता और दक्षिणपंथी इतिहासकार टीपू को 'हिंदुओं के दुश्मन' मुस्लिम सुल्तान के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. टीपू को हिंदुओं का सफ़ाया करने वाला शासक बताया जा रहा है. टीपू ऐसे भारतीय शासक थे जिनकी मौत मैदाने-जंग में अंग्रेज़ो के ख़िलाफ़ लड़ते-लड़ते हुई थी. साल दो हज़ार चौदह की गणतंत्र दिवस परेड में टीपू सुल्तान को एक अदम्य साहस वाला महान योद्धा बताया गया था. वहीं, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर नरेंद्र पानी टीपू पर एक अलग ही नज़रिया रखते हैं. टीपू सुल्तान मैसूर से लगभग पंद्रह किलोग्राममीटर की दूरी पर श्रीरंगपट्टनम में एक सुंदर मकबरे में अपने पिता हैदर अली और माँ फ़ातिमा फ़ख़रुन्निसा के बाज़ू में दफन हैं. श्रीरंगपट्टनम टीपू की राजधानी थी और यहां जगह-जगह टीपू के युग के महल, इमारतें और खंडहर हैं. टीपू के मक़बरे और महलों को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग श्रीरंगपट्टनम जाते हैं. टीपू के साम्राज्य में हिंदू बहुमत में थे. टीपू सुल्तान धार्मिक सहिष्णुता और आज़ाद ख़्याल के लिए जाना जाते हैं जिन्होंने श्रीरंगपट्टनम, मैसूर और अपने राज्य के कई अन्य स्थानों में कई बड़े मंदिर बनाए, और मंदिरों के लिए ज़मीन दी.
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१२ । नयी गुजराती रंगभूमि : धनसुखलाल मेहता
प्रभाव है । ये हों भोर इन सब को निभा लें, ऐसे उत्तम थियेटर हों, तो नयी गुजराती रंगभूमि देखते ही देखते उच्च शिखर पर पहुँच सकती है ।
रंगभूमि रसिकों के लाभार्थ कुछ दिग्दर्शकों की नामावलि देने का दुःसाहस उचित तो नहीं, फिर भी कुछ नामों को देने का लोभ मैं संवरण नहीं कर पा रहा हूँः
दिग्दर्शक : प्रदा मर्मबान, फिरोज़ भाँटिया, चन्द्रवदन भट्ट, विष्णुप्रसाद व्यास, प्रताप श्रोझा, कान्ति मडिया । #
मौलिक नाटकों के लेखकों में शिवकुमार जोशी और प्रागजी डोसा के नाम अग्रणी हैं । मुजराती हिन्दू तथा पारसी अभिनेताओं की नामावलि तो इतनी बड़ी हो जाने का भय है कि मैं देने का साहस नहीं कर सकता ।
लेखक अधिक श्रमपूर्वक अधिक अच्छे और विविध रसों के नाटक लिखें और सरकार किसी अधिक उपयोगी एवं सक्रिय रूप से सहयोग दे, तो नयी गुजराती रंगभूमि देखते ही देखते उच्चतम विकास प्राप्त कर सकती है, ऐसा मेरा विश्वास है ।
गुजराती साहित्य में ऐतिहासिक नाटक
नटवरलाल अम्बालाल व्यास
मध्यकालीन गुजराती साहित्य में नाटक की रचना नहीं होती थी। समर्थ महाकवि प्रेमानन्द के नाम पर तीन नाटक मिलते हैं, पर अब सभी ने स्वीकार कर ही लिया है कि इन नाटकों के लेखक महाकवि प्रेमानन्द नहीं थे। सर्वप्रथम गुजराती नाटक 'लक्ष्मी' ( ई० स० १८५१ में ) कविवर लखा गया । तदनन्तर रणछोड़भाई उदयराम ने कई सामजिक नाटक लिखे। गुजराती में नाट्यसाहित्य का निर्माण करने का श्रेय उन्हें ही मिलता है । फिर भी गुजराती साहित्य में ऐतिहासिक नाटकों की कमी
१४ । गुजराता साहित्य में ऐतिहासिक नाटक : न० अ० व्यास
थी। गुजराती साहित्य के प्रसिद्ध विद्वान एवं 'Further milestones in Gujarati Jiterature' के रचयिता श्री कृष्णलाल भवेरी ने ठीक ही कहा हैः - Of historical plays there is a paucity in Gujarati literature.'
सर्वप्रथम कवि गणपतराम ने 'प्रताप' नामक ऐतिहासिक नाटक लिखा। कला की दृष्टि से कई त्रुटियाँ होने पर भी यह एक अत्यन्त लोकप्रिय नाटक रहा । इस नाटक में हमें 'प्रताप' का अत्यन्त उच्च पात्रालेखन मिलता है। गुजरात के आदि-विवेचक नवलराम पण्ड्या ने 'वीरमती' नामक ऐतिहासिक नाटक में मालवा के परमार वंश के जगदेव प्रौर वीरमती के उच्च चारित्र्य, धैर्य एवं शौर्य को खुलकर बताया है। यह नाटक अत्यन्त सुन्दर सम्भाषण एवं गीतों से भरपूर है। श्री झवेरी के अभिमतानुसार यह नवलराम की सर्वोत्तम साहित्य कृति नहीं है; फिर भी गुजरात के ऐतिहासिक नाटकों में 'वीरमती' का कम महत्त्व नहीं है । 'वीरमती' नाटक गम्भीर है । फार्बस रचित 'रासमाला' में जगदेव परमार के श्रद्ध ऐतिहासिक वृत्तान्त से इस नाटक की 'वस्तु' ली गयी है। इस नाटक की रचना निर्बल होने पर भी कविना तथा तरह-तरह की प्रकृति वाले पात्रों के प्रालेखन में लेखक को अच्छी सफलता मिली है ।
दौलतराम कृपाराम पण्ड्या ने 'अमरसत्र' (प्रकाशन १९०२) नामक एक अद्ध ऐतिहासिक नाटक लिखा है । 'अमरसत्र' की ऐतिहासिक कथावस्तु के साथ कई सामाजिक कथाएं भी साथ-साथ चलती रहती हैं। इस नाटक में कथा प्रवाह मन्द होने पर भी कई जगह रसयुक्त एवं आनन्द देने वाले प्रसंगों का चित्ररण मिलता है ।
तदनन्तर बहुत समय तक सामाजिक उपदेश प्रधान नाटकों की गुजराती साहित्य में धूम रही । इसी समय में संस्कृत के महाकवि कालिदास और भवभूति के शाकुन्तल, उत्तर रामचरित तथा प्रन्यान्य नाटकों का कई व्यक्तियों द्वारा अनुवाद किया गया। नरभेराम प्रारणजीवन ने शेक्सपियर के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक 'जूलियस सीज़र' का रूपान्तर किया और नारायण हेमचन्द्र ने ज्योतीन्द्र ठाकुर कृत बंगाली ऐतिहासिक करुणरस - प्रधान 'अश्रुमती' नाटक का गुजराती में अनुवाद किया। इस नाटक में कविता का अनुवाद सुप्रसिद्ध कवि श्री नरसिंहराव दीवेटिया ने किया था। नाटक के अनुवाद की सफलता का श्रेय श्री दीवेटिया को ही है। श्राज भी 'अश्र मती' गुजराती साहित्य का एक सर्वोत्तम नाटक माना जाता है। इस नाटक के फरीद और शाहज़ादा सलीम शेक्सपियर के प्रसिद्ध पात्र Iago एवं Othello की याद दिलाते है। 'अश्रु मती' की तरह ही 'पुरुविक्रम' भी बंगाली से अनुवादित ऐतिहासिक नाटक है।
१ गुजराती साहित्यनी विकास रेखा पृष्ठ ५० डॉ० धीरूभाई ठाकर
गुजराती साहित्यनी विकास रेखा खण्ड २ पृष्ठ १४१, डॉ० धीरूभाई ठाकर
गुजराती साहित्य में ऐतिहासिक नाटक : न० अ० व्यास । १५
अहमदाबाद के भीमराव भोलानाथ दीवेटिया ने 'देवल देवी' ( प्रकाशन ई० स० १८७५) नाम का मौलिक ऐतिहासिक नाटक लिखा। मराठी भाषा से गुजराती में अनुदीत होने वाले ऐतिहासिक नाटकों में 'माधवराव पेशवा मुख्य है। इसी समय कवि सम्राट न्हानालाल दलपतराम कवि ने 'जया-जयन्त और रमणभाई नीलकंठ ने 'राई नो पर्वत' नामक सुप्रसिद्ध नाटक लिखे । निर्व्याज मनोहर सामाजिक नाटकों के अतिरिक्त कवि न्हानालाल ने 'हर्षदेव' 'संघमित्रा' 'शाहानशाह अकबर शाह', 'जहाँगीर-नूरजहाँ, जैसे ऐतिहासिक नाटक लिखे है। कवि न्हानालाल के नाटक 'अपद्यागद्य' शैली में थे। उनके सभी नाटकों में अभिनय क्षमता का प्रमाण बहुत कम है। 'संघमित्रा' नाटक में सम्राट अशोक की अहिंसा का आवेश व्यक्त करने वाली 'विश्व कथा' है । शाहानशाह एवं 'जहाँगीर-नूरजहाँ इस्लाम को समझने-समझाने को एक हिन्दू की सच्चे दिल की चेष्टा है। 'हर्षदेव' में कवि हमें भारतवर्ष के अतीत गौरव एवं 'हर्ष देव' की महत्ता का दिग्दर्शन कराता है। उनका प्रत्येक नाटक गौरवशाली है और यदि अभिनय क्षमता के अतिरिक्त अन्य कसौटियों पर नाटकों को कसा जाय, तो निःसंदेह वे प्रथम पंक्ति में आसन प्राप्त करने के योग्य ठहरते हैं । न्हानालाल कवि के नाटकों को भावप्रधान नाटक - Lyrical Dramas - कहना ही उचित होगा ।
श्री कन्हैयालाल मुन्शी ने भी 'ध्रुवस्वामिनी' ( प्रकट ई० स० १६२६ ) नामक प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक लिखा । समुद्रगुप्त प्रौर चन्द्रगुप्त भारत के प्रसिद्ध सम्राट थे। पर इन दोनों के बीच के समय में समुद्रगुप्त के ज्येष्ठ पुत्र रामगुप्त ने गुप्तों का राज्यदंड थोड़े समय के लिए अपने हाथों में ले लिया था, ऐसा नया धनुसंधान डॉ० सिल्वियन लेवी ने किया है । 'मुद्राराक्षस' के जगत्प्रसिद्ध लेखक विशाखदत्त ने रामगुप्त के प्रथम एवं निन्द्य कृत्यों के विषय में एक 'देवी चन्द्रगुप्तम्' नाटक संस्कृत में लिखा था । यह संस्कृत नाटक तो नहीं मिल सका, किन्तु इसी कथा वस्तु के प्राधार पर श्री मुन्शीजी इस नाटक की भूमिका में लिखते हैं : 'इस ( 'देवी चन्द्रगुप्तम् ) नष्टप्रायः नाटक की वस्तु में, अन्य ऐतिहासिक एवं काल्पनिक घटनाएँ मिलकर नये स्वरूप में यह नाटक लिखने की मैंने चेष्टा की है ।' रचना एवं अभिनय क्षमता, दोनों दृष्टिकोरणों से - यह नाटक मुन्शीजी की नाट्य सर्जन शक्ति को प्रकट करता है। चन्द्रगुप्त, रामगुप्त एवं ध्रुव देवी आदि पात्रों का प्राकर्षक झालेखन, चन्द्रगुप्त एवं ध्रुवस्वामिनी के तीव्र मनोमंथनों का हृदयंगम निरूपरण, चन्द्रगुप्त के पागलपन का अद्भुत प्रसंग और सारे नाटक के दृढ़ निबन्धन से हमें प्रतीत होता है कि मुन्शीजी नाट्यकार के स्वरूप में कितने कल्पना-विहारी बन सकते है । " मुन्शीजी के नाटक साहित्य तत्व एवं अभिनय - दोनों दृष्टियों से उच्च सिद्ध हुए हैं ।
गुजरात के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार श्री रमरणलाल वसंतलाल देसाई ने भी 'संयुक्ता' १ गुजराती साहित्यनी विकास रेखा खंड - २, पृष्ठ २१२, डॉ० धीरूभाई ठाकर
१६ । गुजराती साहित्य में ऐतिहासिक नाटक : न० अ० व्यास
नामक ऐतिहासिक नाटक लिखा है। 'संयुक्ता' अभिनय और कला की दृष्टि से एक उत्तम एवं सफल नाटक सिद्ध हो चुका है । इसमें 'संयुक्ता' और पृथ्वीराज चौहान के स्नेह का चित्ररण अत्यन्त आकर्षक रीति से हुआ है। पात्रों के चरित्र चित्रण में लेखक को पर्याप्त सफलता मिली है । श्री देसाई ने एक ही ऐतिहासिक नाटक लिखा, परन्तु उसमें हमें कला के उच्च स्तर तथा सरल, मधुर एवं भावमयी शैली के दर्शन होते हैं । श्री भवेरचंद मेघाणी ने बंगला के प्रसिद्ध नाट्यकार श्री द्विजेन्द्रलाल रॉय के 'शाहजहाँ' तथा 'राणा प्रताप' ऐतिहासिक नाटकों का अनुवाद किया । तदनन्तर प्रसिद्ध अभिनेता एवं नाट्यकार चन्द्रवदन मेहता ने 'सोना ने वाटकड़ी' नामक ऐतिहासिक एव 'धरागुजंरी' नामक अर्द्ध-ऐतिहासिक नाटक लिखे। दोनों अभिनय नाटक की दृष्टि से सर्वांग सम्पूर्ण है; क्योंकि लेखक स्वयं एक अभिनेता होने से अभिनय के तत्त्वों से सुपरिचित है। अपने प्रत्येक नाटक में अभिनय के तत्त्व पर वे अधिक बल देते रहते हैं। श्री रसिकलाल परीख ने भी 'मेना गूर्जरी' नामक एक ऐतिहासिक नाटक लिखा है। इस नाटक का प्रधान विषय गूर्जरी नारी की वीरता, देहाती जीवन के आनन्द और दिल्ली के सुल्तान की अधमता है । ऐतिहासिक तथ्यों के साथ साथ ही लेखक ने लोक-साहित्य का भी पर्याप्त उपयोग किया है। श्री 'दर्शक' ने '१८५७' और 'जलियांवाला' नामक दो ऐतिहासिक नाटक लिखे हैं । '१८५७' में उस समय के ऐतिहासिक एवं सामाजिक जीवन से लेखक हमें परिचित कराता है। 'जलियांवाला' नाटक में अंग्रेजों की क्रूरता के साथ साथ उदयोन्मुख भारतीय संस्कृति का लेखक ने वर्णन किया है। श्री जशवन्त ठाकर के नाट्यसंग्रह 'रजिया बेगम' में कई ऐतिहासिक एकांकी है। उपन्यास, नवलिका, इत्यादि अन्य साहित्य प्रकारों की तरह ऐतिहासिक नाटक में विशेष देन लेखकों द्वारा नहीं हुई है । आशा है, इस विषय की ओर गुजरात के समर्थ साहित्यिकों का ध्यान जाएगा और वे अत्यन्त उच्च एवं कलामय, रसपूर्ण ऐतिहासिक नाटकों से गुर्जरी गिरा को विभूषित करेंगे ।
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बारह । नयी गुजराती रंगभूमि : धनसुखलाल मेहता प्रभाव है । ये हों भोर इन सब को निभा लें, ऐसे उत्तम थियेटर हों, तो नयी गुजराती रंगभूमि देखते ही देखते उच्च शिखर पर पहुँच सकती है । रंगभूमि रसिकों के लाभार्थ कुछ दिग्दर्शकों की नामावलि देने का दुःसाहस उचित तो नहीं, फिर भी कुछ नामों को देने का लोभ मैं संवरण नहीं कर पा रहा हूँः दिग्दर्शक : प्रदा मर्मबान, फिरोज़ भाँटिया, चन्द्रवदन भट्ट, विष्णुप्रसाद व्यास, प्रताप श्रोझा, कान्ति मडिया । # मौलिक नाटकों के लेखकों में शिवकुमार जोशी और प्रागजी डोसा के नाम अग्रणी हैं । मुजराती हिन्दू तथा पारसी अभिनेताओं की नामावलि तो इतनी बड़ी हो जाने का भय है कि मैं देने का साहस नहीं कर सकता । लेखक अधिक श्रमपूर्वक अधिक अच्छे और विविध रसों के नाटक लिखें और सरकार किसी अधिक उपयोगी एवं सक्रिय रूप से सहयोग दे, तो नयी गुजराती रंगभूमि देखते ही देखते उच्चतम विकास प्राप्त कर सकती है, ऐसा मेरा विश्वास है । गुजराती साहित्य में ऐतिहासिक नाटक नटवरलाल अम्बालाल व्यास मध्यकालीन गुजराती साहित्य में नाटक की रचना नहीं होती थी। समर्थ महाकवि प्रेमानन्द के नाम पर तीन नाटक मिलते हैं, पर अब सभी ने स्वीकार कर ही लिया है कि इन नाटकों के लेखक महाकवि प्रेमानन्द नहीं थे। सर्वप्रथम गुजराती नाटक 'लक्ष्मी' कविवर लखा गया । तदनन्तर रणछोड़भाई उदयराम ने कई सामजिक नाटक लिखे। गुजराती में नाट्यसाहित्य का निर्माण करने का श्रेय उन्हें ही मिलता है । फिर भी गुजराती साहित्य में ऐतिहासिक नाटकों की कमी चौदह । गुजराता साहित्य में ऐतिहासिक नाटक : नशून्य अशून्य व्यास थी। गुजराती साहित्य के प्रसिद्ध विद्वान एवं 'Further milestones in Gujarati Jiterature' के रचयिता श्री कृष्णलाल भवेरी ने ठीक ही कहा हैः - Of historical plays there is a paucity in Gujarati literature.' सर्वप्रथम कवि गणपतराम ने 'प्रताप' नामक ऐतिहासिक नाटक लिखा। कला की दृष्टि से कई त्रुटियाँ होने पर भी यह एक अत्यन्त लोकप्रिय नाटक रहा । इस नाटक में हमें 'प्रताप' का अत्यन्त उच्च पात्रालेखन मिलता है। गुजरात के आदि-विवेचक नवलराम पण्ड्या ने 'वीरमती' नामक ऐतिहासिक नाटक में मालवा के परमार वंश के जगदेव प्रौर वीरमती के उच्च चारित्र्य, धैर्य एवं शौर्य को खुलकर बताया है। यह नाटक अत्यन्त सुन्दर सम्भाषण एवं गीतों से भरपूर है। श्री झवेरी के अभिमतानुसार यह नवलराम की सर्वोत्तम साहित्य कृति नहीं है; फिर भी गुजरात के ऐतिहासिक नाटकों में 'वीरमती' का कम महत्त्व नहीं है । 'वीरमती' नाटक गम्भीर है । फार्बस रचित 'रासमाला' में जगदेव परमार के श्रद्ध ऐतिहासिक वृत्तान्त से इस नाटक की 'वस्तु' ली गयी है। इस नाटक की रचना निर्बल होने पर भी कविना तथा तरह-तरह की प्रकृति वाले पात्रों के प्रालेखन में लेखक को अच्छी सफलता मिली है । दौलतराम कृपाराम पण्ड्या ने 'अमरसत्र' नामक एक अद्ध ऐतिहासिक नाटक लिखा है । 'अमरसत्र' की ऐतिहासिक कथावस्तु के साथ कई सामाजिक कथाएं भी साथ-साथ चलती रहती हैं। इस नाटक में कथा प्रवाह मन्द होने पर भी कई जगह रसयुक्त एवं आनन्द देने वाले प्रसंगों का चित्ररण मिलता है । तदनन्तर बहुत समय तक सामाजिक उपदेश प्रधान नाटकों की गुजराती साहित्य में धूम रही । इसी समय में संस्कृत के महाकवि कालिदास और भवभूति के शाकुन्तल, उत्तर रामचरित तथा प्रन्यान्य नाटकों का कई व्यक्तियों द्वारा अनुवाद किया गया। नरभेराम प्रारणजीवन ने शेक्सपियर के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक 'जूलियस सीज़र' का रूपान्तर किया और नारायण हेमचन्द्र ने ज्योतीन्द्र ठाकुर कृत बंगाली ऐतिहासिक करुणरस - प्रधान 'अश्रुमती' नाटक का गुजराती में अनुवाद किया। इस नाटक में कविता का अनुवाद सुप्रसिद्ध कवि श्री नरसिंहराव दीवेटिया ने किया था। नाटक के अनुवाद की सफलता का श्रेय श्री दीवेटिया को ही है। श्राज भी 'अश्र मती' गुजराती साहित्य का एक सर्वोत्तम नाटक माना जाता है। इस नाटक के फरीद और शाहज़ादा सलीम शेक्सपियर के प्रसिद्ध पात्र Iago एवं Othello की याद दिलाते है। 'अश्रु मती' की तरह ही 'पुरुविक्रम' भी बंगाली से अनुवादित ऐतिहासिक नाटक है। एक गुजराती साहित्यनी विकास रेखा पृष्ठ पचास डॉशून्य धीरूभाई ठाकर गुजराती साहित्यनी विकास रेखा खण्ड दो पृष्ठ एक सौ इकतालीस, डॉशून्य धीरूभाई ठाकर गुजराती साहित्य में ऐतिहासिक नाटक : नशून्य अशून्य व्यास । पंद्रह अहमदाबाद के भीमराव भोलानाथ दीवेटिया ने 'देवल देवी' नाम का मौलिक ऐतिहासिक नाटक लिखा। मराठी भाषा से गुजराती में अनुदीत होने वाले ऐतिहासिक नाटकों में 'माधवराव पेशवा मुख्य है। इसी समय कवि सम्राट न्हानालाल दलपतराम कवि ने 'जया-जयन्त और रमणभाई नीलकंठ ने 'राई नो पर्वत' नामक सुप्रसिद्ध नाटक लिखे । निर्व्याज मनोहर सामाजिक नाटकों के अतिरिक्त कवि न्हानालाल ने 'हर्षदेव' 'संघमित्रा' 'शाहानशाह अकबर शाह', 'जहाँगीर-नूरजहाँ, जैसे ऐतिहासिक नाटक लिखे है। कवि न्हानालाल के नाटक 'अपद्यागद्य' शैली में थे। उनके सभी नाटकों में अभिनय क्षमता का प्रमाण बहुत कम है। 'संघमित्रा' नाटक में सम्राट अशोक की अहिंसा का आवेश व्यक्त करने वाली 'विश्व कथा' है । शाहानशाह एवं 'जहाँगीर-नूरजहाँ इस्लाम को समझने-समझाने को एक हिन्दू की सच्चे दिल की चेष्टा है। 'हर्षदेव' में कवि हमें भारतवर्ष के अतीत गौरव एवं 'हर्ष देव' की महत्ता का दिग्दर्शन कराता है। उनका प्रत्येक नाटक गौरवशाली है और यदि अभिनय क्षमता के अतिरिक्त अन्य कसौटियों पर नाटकों को कसा जाय, तो निःसंदेह वे प्रथम पंक्ति में आसन प्राप्त करने के योग्य ठहरते हैं । न्हानालाल कवि के नाटकों को भावप्रधान नाटक - Lyrical Dramas - कहना ही उचित होगा । श्री कन्हैयालाल मुन्शी ने भी 'ध्रुवस्वामिनी' नामक प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक लिखा । समुद्रगुप्त प्रौर चन्द्रगुप्त भारत के प्रसिद्ध सम्राट थे। पर इन दोनों के बीच के समय में समुद्रगुप्त के ज्येष्ठ पुत्र रामगुप्त ने गुप्तों का राज्यदंड थोड़े समय के लिए अपने हाथों में ले लिया था, ऐसा नया धनुसंधान डॉशून्य सिल्वियन लेवी ने किया है । 'मुद्राराक्षस' के जगत्प्रसिद्ध लेखक विशाखदत्त ने रामगुप्त के प्रथम एवं निन्द्य कृत्यों के विषय में एक 'देवी चन्द्रगुप्तम्' नाटक संस्कृत में लिखा था । यह संस्कृत नाटक तो नहीं मिल सका, किन्तु इसी कथा वस्तु के प्राधार पर श्री मुन्शीजी इस नाटक की भूमिका में लिखते हैं : 'इस नष्टप्रायः नाटक की वस्तु में, अन्य ऐतिहासिक एवं काल्पनिक घटनाएँ मिलकर नये स्वरूप में यह नाटक लिखने की मैंने चेष्टा की है ।' रचना एवं अभिनय क्षमता, दोनों दृष्टिकोरणों से - यह नाटक मुन्शीजी की नाट्य सर्जन शक्ति को प्रकट करता है। चन्द्रगुप्त, रामगुप्त एवं ध्रुव देवी आदि पात्रों का प्राकर्षक झालेखन, चन्द्रगुप्त एवं ध्रुवस्वामिनी के तीव्र मनोमंथनों का हृदयंगम निरूपरण, चन्द्रगुप्त के पागलपन का अद्भुत प्रसंग और सारे नाटक के दृढ़ निबन्धन से हमें प्रतीत होता है कि मुन्शीजी नाट्यकार के स्वरूप में कितने कल्पना-विहारी बन सकते है । " मुन्शीजी के नाटक साहित्य तत्व एवं अभिनय - दोनों दृष्टियों से उच्च सिद्ध हुए हैं । गुजरात के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार श्री रमरणलाल वसंतलाल देसाई ने भी 'संयुक्ता' एक गुजराती साहित्यनी विकास रेखा खंड - दो, पृष्ठ दो सौ बारह, डॉशून्य धीरूभाई ठाकर सोलह । गुजराती साहित्य में ऐतिहासिक नाटक : नशून्य अशून्य व्यास नामक ऐतिहासिक नाटक लिखा है। 'संयुक्ता' अभिनय और कला की दृष्टि से एक उत्तम एवं सफल नाटक सिद्ध हो चुका है । इसमें 'संयुक्ता' और पृथ्वीराज चौहान के स्नेह का चित्ररण अत्यन्त आकर्षक रीति से हुआ है। पात्रों के चरित्र चित्रण में लेखक को पर्याप्त सफलता मिली है । श्री देसाई ने एक ही ऐतिहासिक नाटक लिखा, परन्तु उसमें हमें कला के उच्च स्तर तथा सरल, मधुर एवं भावमयी शैली के दर्शन होते हैं । श्री भवेरचंद मेघाणी ने बंगला के प्रसिद्ध नाट्यकार श्री द्विजेन्द्रलाल रॉय के 'शाहजहाँ' तथा 'राणा प्रताप' ऐतिहासिक नाटकों का अनुवाद किया । तदनन्तर प्रसिद्ध अभिनेता एवं नाट्यकार चन्द्रवदन मेहता ने 'सोना ने वाटकड़ी' नामक ऐतिहासिक एव 'धरागुजंरी' नामक अर्द्ध-ऐतिहासिक नाटक लिखे। दोनों अभिनय नाटक की दृष्टि से सर्वांग सम्पूर्ण है; क्योंकि लेखक स्वयं एक अभिनेता होने से अभिनय के तत्त्वों से सुपरिचित है। अपने प्रत्येक नाटक में अभिनय के तत्त्व पर वे अधिक बल देते रहते हैं। श्री रसिकलाल परीख ने भी 'मेना गूर्जरी' नामक एक ऐतिहासिक नाटक लिखा है। इस नाटक का प्रधान विषय गूर्जरी नारी की वीरता, देहाती जीवन के आनन्द और दिल्ली के सुल्तान की अधमता है । ऐतिहासिक तथ्यों के साथ साथ ही लेखक ने लोक-साहित्य का भी पर्याप्त उपयोग किया है। श्री 'दर्शक' ने 'एक हज़ार आठ सौ सत्तावन' और 'जलियांवाला' नामक दो ऐतिहासिक नाटक लिखे हैं । 'एक हज़ार आठ सौ सत्तावन' में उस समय के ऐतिहासिक एवं सामाजिक जीवन से लेखक हमें परिचित कराता है। 'जलियांवाला' नाटक में अंग्रेजों की क्रूरता के साथ साथ उदयोन्मुख भारतीय संस्कृति का लेखक ने वर्णन किया है। श्री जशवन्त ठाकर के नाट्यसंग्रह 'रजिया बेगम' में कई ऐतिहासिक एकांकी है। उपन्यास, नवलिका, इत्यादि अन्य साहित्य प्रकारों की तरह ऐतिहासिक नाटक में विशेष देन लेखकों द्वारा नहीं हुई है । आशा है, इस विषय की ओर गुजरात के समर्थ साहित्यिकों का ध्यान जाएगा और वे अत्यन्त उच्च एवं कलामय, रसपूर्ण ऐतिहासिक नाटकों से गुर्जरी गिरा को विभूषित करेंगे ।
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भरतपुर के नगर थाना इलाके के गांव सुंदरावली के शहीद जीतराम गुर्जर की पत्नी वीरांगना सुंदरी देवी, भाई विक्रम और बेटी सुमन को पुलिस ने सुबह 5 बजे जबरन नगर अस्पताल में भर्ती कराया था। इसके बाद शाम 6 बजे तक स्वस्थ होने के बावजूद न तो उन्हें छुट्टी दी गई और न ही किसी से मिलने दिया गया। वार्ड के अंदर और बाहर पुलिस मौजूद रही। 13 घंटे से भी ज्यादा वक्त से शहीद का परिवार हॉस्पिटल में कैद है।
सुंदरी देवी जयपुर में धरना देने वाली 3 वीरांगनाओं में शामिल हैं। उनके पति जीतराम गुर्जर पुलवामा अटैक में शहीद हो गए थे। सुंदरी देवी अपने देवर विक्रम के लिए अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रही हैं। इसी को लेकर 5 दिन से जयपुर में धरना दे रही थीं।
उन्हें गुरुवार देर रात जयपुर पुलिस ने धरनास्थल से उठाया और एंबुलेंस से भरतपुर ले गई। यहां नगर पुलिस ने सुंदरी देवी को जबरन नगर हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया और बाहर पुलिस का पहरा बैठा दिया।
अस्पताल के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों या मीडियाकर्मियों को वार्ड में घुसने नहीं दिया गया। न ही शहीद के परिवार से बात करने दी गई। शहीद के परिवार से मिलने की किसी को इजाजत नहीं है। सुबह करीब 5 बजे शहीद की पत्नी सुंदरी देवी, देवर विक्रम और बड़ी बेटी सुमन को पुलिस जयपुर से भरतपुर ले आई। इसके बाद से शाम तक तीनों पुलिस की निगरानी में ही हैं।
उधर, सुंदरावली गांव में शहीद के घर के बाहर बुजुर्ग माता पिता चिंता में बैठे रहे। सुंदरी की सास गोपा देवी ने कहा- पुलिस कह रही है कि सुंदरी को घर पहुंचा दिया है। लेकिन सुंदरी अभी तक घर नहीं पहुंची है। 11 दिन से वह धरना प्रदर्शन कर रही है। एक बच्चा घर में है और बेटी सुमन सुंदरी के साथ है। वह जो मांग कर रही है, सरकार ने उसे पूरा नहीं किया है, इसलिए धरना दे रही थी। सरकार उसकी मांग पूरी करे।
सुंदरी के ससुर राधेश्याम ने कहा- बहू सुंदरी अभी तक लापता है। पता नहीं वह कहां है। पुलिस ने हमें कोई सूचना नहीं दी है। बहू जयपुर में धरना दे रही थी।
उधर, नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर जयसिंह ने कहा कि सुंदरी देवी को सीओ ऑफिस लाए तो उनका बीपी लो हो गया था, सुबह थोड़ी बीपी शुगर बढ़ी हुई थी। यहां लाए तो बीपी शुगर अब कंट्रोल में है, कोई गंभीर स्थिति नहीं है, वे सामान्य हैं।
नगर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुलिस छावनी बना हुआ है। जिस वार्ड में सुंदरी देवी को रखा है उसमें किसी की भी एंट्री नहीं है। उन्हें किसी से मिलने बात करने नहीं दिया जा रहा। न ही विक्रम और सुमन से किसी को मिलने दिया जा रहा है।
वीरांगना सुंदरी देवी उन तीन वीरांगनाओं में शामिल हैं जो पिछले 5 दिन में मुख्यमंत्री आवास और सचिन पायलट के बंगले पर धरना दे चुकी हैं। गुरुवार रात पुलिस ने जबरन धरना खत्म करवा दिया और वीरांगनाओं को उनके गांव पहुंचा दिया।
वीरांगनाओं का साथ दे रहे राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा को भी आज जयपुर में हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी के विरोध में दौसा, सवाई माधोपुर में समर्थकों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया।
विक्रम से मिली जानकारी के अनुसार उनके भाई जीतराम गुर्जर के शहीद होने के बाद परिवार को 50 लाख की आर्थिक सहायता मिली। नगर के सरकारी कॉलेज का नाम शहीद भाई के नाम पर रखने की फाइल प्रोसेस में है। विक्रम के लिए भाभी सुंदरी देवी सरकारी नौकरी की मांग कर रही हैं। सरकार यह मांग पूरी नहीं कर रही है।
पुलवामा शहीदों की तीन वीरांगनाओं के धरने को जबरन खत्म करने के बाद अब पुलिस ने भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं है। इधर, पुलिस पर मीणा ने हाथापाई का आरोप लगाया है।
उधर, बताया जा रहा है कि हिरासत के दौरान किरोड़ी लाल मीणा की तबीयत खराब हो गई। उनके शरीर पर चोट लगी है, इसलिए उन्हें उपचार के लिए गोविंदगढ़ सीएचसी ले जाया गया। फिर वहां से एसएमएस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया है। वहीं, गिरफ्तारी की खबर फैलते ही सांसद के समर्थक सड़कों पर उतरने लगे। विरोध में जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे तथा लालसोट-दौसा हाईवे पर जाम लगाया। (पूरी खबर पढ़ें)
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भरतपुर के नगर थाना इलाके के गांव सुंदरावली के शहीद जीतराम गुर्जर की पत्नी वीरांगना सुंदरी देवी, भाई विक्रम और बेटी सुमन को पुलिस ने सुबह पाँच बजे जबरन नगर अस्पताल में भर्ती कराया था। इसके बाद शाम छः बजे तक स्वस्थ होने के बावजूद न तो उन्हें छुट्टी दी गई और न ही किसी से मिलने दिया गया। वार्ड के अंदर और बाहर पुलिस मौजूद रही। तेरह घंटाटे से भी ज्यादा वक्त से शहीद का परिवार हॉस्पिटल में कैद है। सुंदरी देवी जयपुर में धरना देने वाली तीन वीरांगनाओं में शामिल हैं। उनके पति जीतराम गुर्जर पुलवामा अटैक में शहीद हो गए थे। सुंदरी देवी अपने देवर विक्रम के लिए अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रही हैं। इसी को लेकर पाँच दिन से जयपुर में धरना दे रही थीं। उन्हें गुरुवार देर रात जयपुर पुलिस ने धरनास्थल से उठाया और एंबुलेंस से भरतपुर ले गई। यहां नगर पुलिस ने सुंदरी देवी को जबरन नगर हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया और बाहर पुलिस का पहरा बैठा दिया। अस्पताल के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों या मीडियाकर्मियों को वार्ड में घुसने नहीं दिया गया। न ही शहीद के परिवार से बात करने दी गई। शहीद के परिवार से मिलने की किसी को इजाजत नहीं है। सुबह करीब पाँच बजे शहीद की पत्नी सुंदरी देवी, देवर विक्रम और बड़ी बेटी सुमन को पुलिस जयपुर से भरतपुर ले आई। इसके बाद से शाम तक तीनों पुलिस की निगरानी में ही हैं। उधर, सुंदरावली गांव में शहीद के घर के बाहर बुजुर्ग माता पिता चिंता में बैठे रहे। सुंदरी की सास गोपा देवी ने कहा- पुलिस कह रही है कि सुंदरी को घर पहुंचा दिया है। लेकिन सुंदरी अभी तक घर नहीं पहुंची है। ग्यारह दिन से वह धरना प्रदर्शन कर रही है। एक बच्चा घर में है और बेटी सुमन सुंदरी के साथ है। वह जो मांग कर रही है, सरकार ने उसे पूरा नहीं किया है, इसलिए धरना दे रही थी। सरकार उसकी मांग पूरी करे। सुंदरी के ससुर राधेश्याम ने कहा- बहू सुंदरी अभी तक लापता है। पता नहीं वह कहां है। पुलिस ने हमें कोई सूचना नहीं दी है। बहू जयपुर में धरना दे रही थी। उधर, नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर जयसिंह ने कहा कि सुंदरी देवी को सीओ ऑफिस लाए तो उनका बीपी लो हो गया था, सुबह थोड़ी बीपी शुगर बढ़ी हुई थी। यहां लाए तो बीपी शुगर अब कंट्रोल में है, कोई गंभीर स्थिति नहीं है, वे सामान्य हैं। नगर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुलिस छावनी बना हुआ है। जिस वार्ड में सुंदरी देवी को रखा है उसमें किसी की भी एंट्री नहीं है। उन्हें किसी से मिलने बात करने नहीं दिया जा रहा। न ही विक्रम और सुमन से किसी को मिलने दिया जा रहा है। वीरांगना सुंदरी देवी उन तीन वीरांगनाओं में शामिल हैं जो पिछले पाँच दिन में मुख्यमंत्री आवास और सचिन पायलट के बंगले पर धरना दे चुकी हैं। गुरुवार रात पुलिस ने जबरन धरना खत्म करवा दिया और वीरांगनाओं को उनके गांव पहुंचा दिया। वीरांगनाओं का साथ दे रहे राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा को भी आज जयपुर में हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी के विरोध में दौसा, सवाई माधोपुर में समर्थकों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। विक्रम से मिली जानकारी के अनुसार उनके भाई जीतराम गुर्जर के शहीद होने के बाद परिवार को पचास लाख की आर्थिक सहायता मिली। नगर के सरकारी कॉलेज का नाम शहीद भाई के नाम पर रखने की फाइल प्रोसेस में है। विक्रम के लिए भाभी सुंदरी देवी सरकारी नौकरी की मांग कर रही हैं। सरकार यह मांग पूरी नहीं कर रही है। पुलवामा शहीदों की तीन वीरांगनाओं के धरने को जबरन खत्म करने के बाद अब पुलिस ने भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं है। इधर, पुलिस पर मीणा ने हाथापाई का आरोप लगाया है। उधर, बताया जा रहा है कि हिरासत के दौरान किरोड़ी लाल मीणा की तबीयत खराब हो गई। उनके शरीर पर चोट लगी है, इसलिए उन्हें उपचार के लिए गोविंदगढ़ सीएचसी ले जाया गया। फिर वहां से एसएमएस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया है। वहीं, गिरफ्तारी की खबर फैलते ही सांसद के समर्थक सड़कों पर उतरने लगे। विरोध में जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे तथा लालसोट-दौसा हाईवे पर जाम लगाया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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राहुल गांधी पर मुख्तार अब्बास नक़वी ने कसा तंज- जब नानी याद आती है तो वो....
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की विदेश यात्रा को लेकर बीजेपी लगातार हमलावर है. पार्टी प्रवक्ताओं से लेकर केंद्रीय मंत्री तक सभी राहुल पर निशाना साध रहे हैं. अब केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नक़वी ने बिना नाम लिए कहा है कि जब नानी याद आती है तो वो कहां पहुंच जाते हैं इसका पता सिर्फ उनको ही होता है.
बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी रविवार को अपनी संक्षिप्त निजी यात्रा पर विदेश रवाना हुए. पार्टी ने यह जानकारी दी. कांग्रेस ने हालांकि यह नहीं बताया कि राहुल गांधी कहां गए हैं. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पुष्टि की कि वह कुछ दिनों तक बाहर रहेंगे.
सुरजेवाला ने कहा, "कांग्रेस नेता राहुल गांधी संक्षिप्त व्यक्तिगत यात्रा के लिए विदेश रवाना हुए हैं और वह कुछ दिनों तक बाहर रहेंगे. " यह पूछे जाने पर कि पूर्व कांग्रेस प्रमुख कहां गए हैं, सुरजेवाला ने कोई खुलासा नहीं किया. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी कतर एयरवेज की उड़ान से इटली में मिलान रवाना हुए. राहुल गांधी की नानी इटली में रहती हैं और वह पहले भी उनसे मिलने गए थे.
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राहुल गांधी पर मुख्तार अब्बास नक़वी ने कसा तंज- जब नानी याद आती है तो वो.... कांग्रेस नेता राहुल गांधी की विदेश यात्रा को लेकर बीजेपी लगातार हमलावर है. पार्टी प्रवक्ताओं से लेकर केंद्रीय मंत्री तक सभी राहुल पर निशाना साध रहे हैं. अब केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नक़वी ने बिना नाम लिए कहा है कि जब नानी याद आती है तो वो कहां पहुंच जाते हैं इसका पता सिर्फ उनको ही होता है. बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी रविवार को अपनी संक्षिप्त निजी यात्रा पर विदेश रवाना हुए. पार्टी ने यह जानकारी दी. कांग्रेस ने हालांकि यह नहीं बताया कि राहुल गांधी कहां गए हैं. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पुष्टि की कि वह कुछ दिनों तक बाहर रहेंगे. सुरजेवाला ने कहा, "कांग्रेस नेता राहुल गांधी संक्षिप्त व्यक्तिगत यात्रा के लिए विदेश रवाना हुए हैं और वह कुछ दिनों तक बाहर रहेंगे. " यह पूछे जाने पर कि पूर्व कांग्रेस प्रमुख कहां गए हैं, सुरजेवाला ने कोई खुलासा नहीं किया. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी कतर एयरवेज की उड़ान से इटली में मिलान रवाना हुए. राहुल गांधी की नानी इटली में रहती हैं और वह पहले भी उनसे मिलने गए थे.
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CHAURICHAURA: चौरीचौरा क्षेत्र के नगर पंचायत मुंडेरा बाजार के वार्डो में विकास के नाम पर खूब मजाक हुआ है। घरों में पाइप से पानी की सप्लाई तो छोडि़ए, इंडिया मार्क के हैंडपंप तक नहीं लगवाए गए हैं। पीने के शुद्ध पानी के लिए यहां के लोग तरस रहे हैं। वार्ड 8 में तो स्थिति और भी खराब है। यहां विकास के रास्ते पर नगर पंचायत प्रशासन एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है।
वार्ड 8 में स्थित साई मंदिर और दुर्गा मंदिर के सामने इंडिया मार्क हैंडपंप लगवाया गया था। निजी जमीन में होने के कारण बाद में इसको बंद करा दिया गया लेकिन फिर कहीं और हैंडपंप नहीं लगाया गया। मोहल्ले के रमेश, कैलाश, सोनू, मुन्हे आदि ने बताया कि मंदिर यहां भूमिगत जल काफी खराब है। इसके बावजूद नगर पंचायत की ओर से एक हैंडपंप तक नहीं लगवाया जा रहा।
क्षेत्र में स्थित रेलवे क्रासिंग से यहां के व्यवसायियों को काफी क्षति है। लगातार मांग के बावजूद यहां ओवरब्रिज नहीं बनाया गया। इससे अक्सर ओवरब्रिज बंद रहता है और इस पार के व्यवसायियों का रोजगार प्रभावित होता है। यह क्रासिंग ही भोपा चौक से मुंडेरा बाज़ार होते सोनबरसा जाने का मेन रोड है। मुंडेरा बाजार के आधा दर्जन स्कूल के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भी क्रासिंग पार कर ही जाना होता है। इमरजेंसी में जहां मरीजों को दिक्कत होती है वहीं बच्चों को स्कूल पहुंचने में देर हो जाती है।
भोपा के गेट संख्या 147 बी के कारण कई व्यापारियों ने अपना व्यापार दूसरी जगह शिफ्ट कर लिया। इतना ही नहीं बैंकों ने भी अपनी शाखाएं मुंडेरा बाजार से भोपा ग्राम सभा में स्थानांतरित कर लिया। रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज की मांग रेलमंत्री, जीएम तक से की गई लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो सकी।
यहां की सबसे बड़ी समस्या भोपा बाजार की रेलवे क्रासिंग है। जब तक यहां ओवरब्रिज नहंी बनेगा, क्षेत्र का विकास नहीं हो सकेगा।
वार्ड में साफ-सफाई की व्यवस्था बहुत खराब है। यहां तक कि यूरिनल और सामुदायिक शौचालय तक नहीं हैं।
जल्द ही इंडिया मार्क हैंडपंप लगवा दिया जाएगा। यूरिनल के लिए जगह देखा गया था लेकिन विवाद के कारण नहीं बन सका।
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CHAURICHAURA: चौरीचौरा क्षेत्र के नगर पंचायत मुंडेरा बाजार के वार्डो में विकास के नाम पर खूब मजाक हुआ है। घरों में पाइप से पानी की सप्लाई तो छोडि़ए, इंडिया मार्क के हैंडपंप तक नहीं लगवाए गए हैं। पीने के शुद्ध पानी के लिए यहां के लोग तरस रहे हैं। वार्ड आठ में तो स्थिति और भी खराब है। यहां विकास के रास्ते पर नगर पंचायत प्रशासन एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है। वार्ड आठ में स्थित साई मंदिर और दुर्गा मंदिर के सामने इंडिया मार्क हैंडपंप लगवाया गया था। निजी जमीन में होने के कारण बाद में इसको बंद करा दिया गया लेकिन फिर कहीं और हैंडपंप नहीं लगाया गया। मोहल्ले के रमेश, कैलाश, सोनू, मुन्हे आदि ने बताया कि मंदिर यहां भूमिगत जल काफी खराब है। इसके बावजूद नगर पंचायत की ओर से एक हैंडपंप तक नहीं लगवाया जा रहा। क्षेत्र में स्थित रेलवे क्रासिंग से यहां के व्यवसायियों को काफी क्षति है। लगातार मांग के बावजूद यहां ओवरब्रिज नहीं बनाया गया। इससे अक्सर ओवरब्रिज बंद रहता है और इस पार के व्यवसायियों का रोजगार प्रभावित होता है। यह क्रासिंग ही भोपा चौक से मुंडेरा बाज़ार होते सोनबरसा जाने का मेन रोड है। मुंडेरा बाजार के आधा दर्जन स्कूल के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भी क्रासिंग पार कर ही जाना होता है। इमरजेंसी में जहां मरीजों को दिक्कत होती है वहीं बच्चों को स्कूल पहुंचने में देर हो जाती है। भोपा के गेट संख्या एक सौ सैंतालीस बी के कारण कई व्यापारियों ने अपना व्यापार दूसरी जगह शिफ्ट कर लिया। इतना ही नहीं बैंकों ने भी अपनी शाखाएं मुंडेरा बाजार से भोपा ग्राम सभा में स्थानांतरित कर लिया। रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज की मांग रेलमंत्री, जीएम तक से की गई लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो सकी। यहां की सबसे बड़ी समस्या भोपा बाजार की रेलवे क्रासिंग है। जब तक यहां ओवरब्रिज नहंी बनेगा, क्षेत्र का विकास नहीं हो सकेगा। वार्ड में साफ-सफाई की व्यवस्था बहुत खराब है। यहां तक कि यूरिनल और सामुदायिक शौचालय तक नहीं हैं। जल्द ही इंडिया मार्क हैंडपंप लगवा दिया जाएगा। यूरिनल के लिए जगह देखा गया था लेकिन विवाद के कारण नहीं बन सका।
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औरैया। पेट के कीड़े बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित करते हैं। समय से उपचार नहीं होने पर कीड़ों के कारण बच्चे कुपोषण का भी शिकार हो जाते हैं। इसी समस्या के निदान को लेकर कृमि मुक्ति अभियान चलाया जाता है। यह बातें जिलाधिकारी प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ने औरैया शहर के प्राथमिक विद्यालय एवं आँगनवाड़ी केंद्र तुर्कीपुर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के शुभारम्भ पर कहीं।
उन्होंने वहां बच्चों को दवा खिलाकर अभियान की शुरूआत कराई। साथ ही सैम/मैम बच्चों को फल, पोषण पोटली और गर्भवती व धात्री माताओं को ड्राई राशन भी वितरित किया।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि पेट में कीड़े होने से कुपोषण व खून की कमी होती है। इस कारण हमेशा थकावट रहती है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास नहीं होता इसलिए हर छह महीने में एक साल से 19 साल तक के सभी बच्चों को कृमि की गोली खानी चाहिए।
आमतौर पर 1 से 6 वर्ष के बच्चों को एल्बेंडाजोल की टेबलेट आंगनबाड़ी केंद्र और 6 से 19 वर्ष के बच्चों को विद्यालयों के माध्यम से एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाती है।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ शिशिर पुरी ने कहा कि बीमार बच्चे को कृमि मुक्ति की दवा नहीं खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया की कृमि (पेट में कीड़े) के संक्रमण से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है।
इससे बचने के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने बताया की शुक्रवार को जनपद के कुल 1265 स्कूल, 289 कॉलेज और 1789 आंगनबाड़ी केंद्रों में कृमि से मुक्ति (पेट के कीड़े निकालने) के लिए एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गयी। इसके बाद 13 से 15 फरवरी तक मॉप अप राउंड स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों में आयोजित होंगे।
इस दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी, सीडीपीओ, डीपीएम, डीसीपीएम, स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी, शहरी स्वास्थ्य समन्वयक , फार्मेसिस्ट, यूनिसेफ प्रतिनधि सहित एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।
जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक अजय पांडेय ने बताया कि कृमि नियंत्रण किए जाने से बच्चों में खून की कमी में सुधार होगा, पोषण स्तर बेहतर होगा। इसके अलावा स्कूल आंगनबाड़ी केंद्र में उपस्थिति तथा सीखने की क्षमता में सुधार होगा। वहीं बच्चे की भविष्य में कार्य क्षमता और औसत आय में बढ़ोतरी होगी। वातावरण में कृमि की संख्या कम होने पर समुदाय को लाभ मिलता है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि बच्चों को खुले में शौच जाने से अस्वच्छता के कारण बच्चों के आंतों में कीड़े उत्पन्न हो जाते हैं जिसके कारण बच्चे जल्दी-जल्दी बीमार पड़ते हैं।
इस कारण बच्चों में खून की कमी (एनिमीया) कुपोषण से ग्रस्त हो जाते हैं। कृमि मुक्ति दवा खिलाने से बच्चों के पेट में कृमि नहीं होते हैं। बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास पूर्ण रूप से होता है। कृमि नाशक गोली बच्चों को खिलाई जानी चाहिए, जिसमें निजी विद्यालयों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
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औरैया। पेट के कीड़े बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित करते हैं। समय से उपचार नहीं होने पर कीड़ों के कारण बच्चे कुपोषण का भी शिकार हो जाते हैं। इसी समस्या के निदान को लेकर कृमि मुक्ति अभियान चलाया जाता है। यह बातें जिलाधिकारी प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ने औरैया शहर के प्राथमिक विद्यालय एवं आँगनवाड़ी केंद्र तुर्कीपुर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के शुभारम्भ पर कहीं। उन्होंने वहां बच्चों को दवा खिलाकर अभियान की शुरूआत कराई। साथ ही सैम/मैम बच्चों को फल, पोषण पोटली और गर्भवती व धात्री माताओं को ड्राई राशन भी वितरित किया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि पेट में कीड़े होने से कुपोषण व खून की कमी होती है। इस कारण हमेशा थकावट रहती है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास नहीं होता इसलिए हर छह महीने में एक साल से उन्नीस साल तक के सभी बच्चों को कृमि की गोली खानी चाहिए। आमतौर पर एक से छः वर्ष के बच्चों को एल्बेंडाजोल की टेबलेट आंगनबाड़ी केंद्र और छः से उन्नीस वर्ष के बच्चों को विद्यालयों के माध्यम से एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाती है। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ शिशिर पुरी ने कहा कि बीमार बच्चे को कृमि मुक्ति की दवा नहीं खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया की कृमि के संक्रमण से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। इससे बचने के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने बताया की शुक्रवार को जनपद के कुल एक हज़ार दो सौ पैंसठ स्कूल, दो सौ नवासी कॉलेज और एक हज़ार सात सौ नवासी आंगनबाड़ी केंद्रों में कृमि से मुक्ति के लिए एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गयी। इसके बाद तेरह से पंद्रह फरवरी तक मॉप अप राउंड स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों में आयोजित होंगे। इस दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी, सीडीपीओ, डीपीएम, डीसीपीएम, स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी, शहरी स्वास्थ्य समन्वयक , फार्मेसिस्ट, यूनिसेफ प्रतिनधि सहित एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहीं। जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक अजय पांडेय ने बताया कि कृमि नियंत्रण किए जाने से बच्चों में खून की कमी में सुधार होगा, पोषण स्तर बेहतर होगा। इसके अलावा स्कूल आंगनबाड़ी केंद्र में उपस्थिति तथा सीखने की क्षमता में सुधार होगा। वहीं बच्चे की भविष्य में कार्य क्षमता और औसत आय में बढ़ोतरी होगी। वातावरण में कृमि की संख्या कम होने पर समुदाय को लाभ मिलता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि बच्चों को खुले में शौच जाने से अस्वच्छता के कारण बच्चों के आंतों में कीड़े उत्पन्न हो जाते हैं जिसके कारण बच्चे जल्दी-जल्दी बीमार पड़ते हैं। इस कारण बच्चों में खून की कमी कुपोषण से ग्रस्त हो जाते हैं। कृमि मुक्ति दवा खिलाने से बच्चों के पेट में कृमि नहीं होते हैं। बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास पूर्ण रूप से होता है। कृमि नाशक गोली बच्चों को खिलाई जानी चाहिए, जिसमें निजी विद्यालयों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
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आप सभी को बहुत ही अच्छे से याद होगा साल 2017 में हॉलीवुड की बहुत ही मशहूर सिंगर सेलेना गोमेज को किडनी से जुडी बिमारी हो गई थी, जिससे उन्हें कई दिनों तक जूझना पड़ा था. इस बिमारी के वक्त उन्हें ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी थी जिसके लिए उनके बॉयफ्रेंड द वीकेंड उन्हें किडनी डोनेट करने के लिए तैयार हो गए थे.
जी हाँ, हाल ही में मिली खबर के अनुसार सेलेना को जिस वक्त इस बात का पता चला था कि उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट करवाना पड़ेगा उस वक्त सेलेना बहुत बुरी तरह डर गई थी साथ ही वे काफी भावुक भी हो गई थी. उस वक्त उनके बॉयफ्रेंड द वीकेंड ने उन्हें सहारा दिया और उन्होंने उनसे कहा कि अगर उनकी किडनी मैच हो जाएगी तो वे उन्हें अपनी किडनी दे देंगे. सेलेना से एबेल मैकॉनेन टेसफाये वाकई में बहुत प्यार करते थे, और उनका प्रोजेक्ट 'माई डियर मैलेनकॉली' भी उनकी पूर्व प्रेमिका सेलेना गोमेज से प्रेरित है.
सेलेना से एबेल बहुत प्यार करते थे और उनके लिए वे कुछ भी करने के लिए तैयार रहते थे. एबेल की किडनी सेलेना से मैच ना होने की वजह से वे सेलेना को किडनी नहीं दे पाए और उसके बाद सेलेना को उनकी बेस्ट फ्रेंड फ्रैंसिया रेइसा ने किडनी दी क्योंकि उनकी किडनी सेलेना से मैच कर गई थी.
वाकई में यह बहुत ही दुखद वक्त था सेलेना के लिए जो उन्होंने फेस किया. सेलेना अक्सर ही अपनी तस्वीरों की वजह से सुर्ख़ियों में रहती हैं. कई समय बाद वे बिकिनी में अपनी दोस्तों के साथ मस्त अंदाज में नजर आ चुकी हैं.
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आप सभी को बहुत ही अच्छे से याद होगा साल दो हज़ार सत्रह में हॉलीवुड की बहुत ही मशहूर सिंगर सेलेना गोमेज को किडनी से जुडी बिमारी हो गई थी, जिससे उन्हें कई दिनों तक जूझना पड़ा था. इस बिमारी के वक्त उन्हें ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी थी जिसके लिए उनके बॉयफ्रेंड द वीकेंड उन्हें किडनी डोनेट करने के लिए तैयार हो गए थे. जी हाँ, हाल ही में मिली खबर के अनुसार सेलेना को जिस वक्त इस बात का पता चला था कि उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट करवाना पड़ेगा उस वक्त सेलेना बहुत बुरी तरह डर गई थी साथ ही वे काफी भावुक भी हो गई थी. उस वक्त उनके बॉयफ्रेंड द वीकेंड ने उन्हें सहारा दिया और उन्होंने उनसे कहा कि अगर उनकी किडनी मैच हो जाएगी तो वे उन्हें अपनी किडनी दे देंगे. सेलेना से एबेल मैकॉनेन टेसफाये वाकई में बहुत प्यार करते थे, और उनका प्रोजेक्ट 'माई डियर मैलेनकॉली' भी उनकी पूर्व प्रेमिका सेलेना गोमेज से प्रेरित है. सेलेना से एबेल बहुत प्यार करते थे और उनके लिए वे कुछ भी करने के लिए तैयार रहते थे. एबेल की किडनी सेलेना से मैच ना होने की वजह से वे सेलेना को किडनी नहीं दे पाए और उसके बाद सेलेना को उनकी बेस्ट फ्रेंड फ्रैंसिया रेइसा ने किडनी दी क्योंकि उनकी किडनी सेलेना से मैच कर गई थी. वाकई में यह बहुत ही दुखद वक्त था सेलेना के लिए जो उन्होंने फेस किया. सेलेना अक्सर ही अपनी तस्वीरों की वजह से सुर्ख़ियों में रहती हैं. कई समय बाद वे बिकिनी में अपनी दोस्तों के साथ मस्त अंदाज में नजर आ चुकी हैं.
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जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार आतंकियों ने गुरुवार रात बिहार के एक मज़दूर की गोली मारकर हत्या कर दी.
कश्मीर ज़ोन की पुलिस ने एक ट्वीट कर बताया है कि आतंकियों ने गुरुवार की मध्य रात्रि बांदिपोरा के सदुनारा संबल में एक प्रवासी मज़दूर पर गोलियाँ चलाईं जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई.
हमले के व़क्त मौके पर मौजूद अमरेज़ के भाई ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "गुरुवार को साढ़े 12 बजे रात के करीब फायरिंग शुरू हुई. अमरेज़ हमारे आसपास नहीं था, हमें लगा शौचालय गया है. हम देखने गए तो वो खून से लथपथ गिरा हुआ था. हमने सुरक्षा कर्मियों से संपर्क किया. उन्हें हाजिन लाया गया और बाद में रेफर कर दिया गया लेकिन उनकी मृत्यु हो गई. "
पुलिस के मुताबिक़ मज़दूर का नाम मोहम्मद अमरेज़ था जो बिहार के मधेपुरा ज़िले के बेसाढ़ का रहने वाला था.
जम्मू कश्मीर में पिछले सप्ताह भी चरमपंथियों ने बिहार के एक मज़दूर की हत्या कर दी थी.
4 अगस्त को कश्मीर के पुलवामा ज़िले के गदूरा गाँव में चरमपंथियों ने एक शिविर में रह रहे बिहारी मज़दूरों पर ग्रेनेड हमला किया था जिससे एक मज़दूर की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए थे. उस हमले में बिहार के सकवा परसा के निवासी मोहम्मद मुमताज़ की मौत हो गई थी.
जम्मू-कश्मीर में इस वर्ष बाहर से आए लोगों पर चरमपंथी हमलों की घटनाओं में तेज़ी आई है. दो महीने पहले ये हमले रुक गए थे. मगर इस महीने एक बार फिर ऐसे हमले होने लगे हैं.
वैसे जम्मू-कश्मीर में अगस्त 2019 में विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म किए जाने के बाद से ऐसी हत्याओं में इज़ाफ़ा देखा गया है.
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जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार आतंकियों ने गुरुवार रात बिहार के एक मज़दूर की गोली मारकर हत्या कर दी. कश्मीर ज़ोन की पुलिस ने एक ट्वीट कर बताया है कि आतंकियों ने गुरुवार की मध्य रात्रि बांदिपोरा के सदुनारा संबल में एक प्रवासी मज़दूर पर गोलियाँ चलाईं जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई. हमले के व़क्त मौके पर मौजूद अमरेज़ के भाई ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "गुरुवार को साढ़े बारह बजे रात के करीब फायरिंग शुरू हुई. अमरेज़ हमारे आसपास नहीं था, हमें लगा शौचालय गया है. हम देखने गए तो वो खून से लथपथ गिरा हुआ था. हमने सुरक्षा कर्मियों से संपर्क किया. उन्हें हाजिन लाया गया और बाद में रेफर कर दिया गया लेकिन उनकी मृत्यु हो गई. " पुलिस के मुताबिक़ मज़दूर का नाम मोहम्मद अमरेज़ था जो बिहार के मधेपुरा ज़िले के बेसाढ़ का रहने वाला था. जम्मू कश्मीर में पिछले सप्ताह भी चरमपंथियों ने बिहार के एक मज़दूर की हत्या कर दी थी. चार अगस्त को कश्मीर के पुलवामा ज़िले के गदूरा गाँव में चरमपंथियों ने एक शिविर में रह रहे बिहारी मज़दूरों पर ग्रेनेड हमला किया था जिससे एक मज़दूर की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए थे. उस हमले में बिहार के सकवा परसा के निवासी मोहम्मद मुमताज़ की मौत हो गई थी. जम्मू-कश्मीर में इस वर्ष बाहर से आए लोगों पर चरमपंथी हमलों की घटनाओं में तेज़ी आई है. दो महीने पहले ये हमले रुक गए थे. मगर इस महीने एक बार फिर ऐसे हमले होने लगे हैं. वैसे जम्मू-कश्मीर में अगस्त दो हज़ार उन्नीस में विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म किए जाने के बाद से ऐसी हत्याओं में इज़ाफ़ा देखा गया है.
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उज्जैन के पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि नव संवत्सर में नवग्रहों के बीच मंत्रिमंडल में इस बार राजा बुध और मंत्री चंद्रमा रहेंगे। पूरे वर्ष बुद्धदेव का आधिपत्य रहेगा। बुद्ध कन्या राशि का स्वामी है। अंग्रेजी नववर्ष की शुरुआत कन्या लग्न में ही होगी।
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उज्जैन के पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि नव संवत्सर में नवग्रहों के बीच मंत्रिमंडल में इस बार राजा बुध और मंत्री चंद्रमा रहेंगे। पूरे वर्ष बुद्धदेव का आधिपत्य रहेगा। बुद्ध कन्या राशि का स्वामी है। अंग्रेजी नववर्ष की शुरुआत कन्या लग्न में ही होगी।
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पुलवामा में हुए आतंकी हमले का बदला भारत ने ले लिया है। भारतीय वायुसेना के लड़ाकू जहाज़ मिराज 2000 की एक टुकड़ी ने 1,000 किलोग्राम बम गिराए और सभी आतंकी कैंप को तहस नहस कर दिया। इस जवाबी कार्रवाई की हर कोई सराहना कर रहा है। यह कदम भारतवासियों के लिए गर्व का पल है। तो ऐसे मौके पर आपको हम उन फिल्मों के बारे में बता रहे हैं, जिनमें भारतीय सेनाओं के गर्व को सेलिब्रेट किया गया है।
भारत-पाक के बीच 1971 में हुए युद्ध पर आधारित थी 'बॉर्डर'
साल 1997 में आई फिल्म 'बॉर्डर', भारत-पाक के बीच 1971 में हुए युद्ध पर आधारित थी। इस फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे भारतीय सेना की एक बटालियन पाकिस्तान के दो हजार सैनिकों को लोहे के चने चबवा देती है। इस मल्टी स्टारर फिल्म में सनी देओल, सुनील शेट्टी, जैकी श्रॉफ व अक्षय खन्ना ने अहम रोल निभाया था। फिल्म को दर्शकों ने काफी सराहा था। इस फिल्म के डॉयलाग और गाने बहुत पॉपुलर हुए थे।
कारगिल की जंग पर आधारित थी 'LoC कारगिल'
1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल की जंग हुई थी। मई से लेकर जुलाई तक चले युद्ध काे 'ऑपरेशन विजय' नाम दिया गया था। भारतीय सेना की जीत के बाद इस पर फिल्म बनाई गई। फिल्म का नाम था 'LoC कारगिल' रखा गया। इस फिल्म को जेपी दत्ता ने डायरेक्ट किया था। यह एक मल्टीस्टारर फिल्म थी। संजय दत्त, सुनील शेट्टी, अभिषेक बच्चन, सैफ अली खान, अजय देवगन के अलावा साउथ के स्टार नागार्जुन भी फिल्म में थे।
साल 2004 में आई थी 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों'
'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों' फिल्म साल 2004 में बनी थी। फिल्म में अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, नगमा, आरती छाबड़िया, और बॉबी देओल थे। यह एक मल्टी स्टारर फिल्म थी। इसमें भारतीय आर्मी ने अमरनाथ यात्रा पर पाकिस्तान के आतंकी साजिश रचने वाले अफसरों का पर्दाफाश कर सभी नापाक कोशिशों को नाकम कर दिया था। फिल्म को अनिल शर्मा ने डायरेक्ट किया था।
1965 में भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट ने सिक्किम के नाथुला दर्रे में चीनी सेना के दांत खट्टे कर दिये थे। 2018 में आई फिल्म 'पलटन' की कहानी इस असल घटना पर आधारित है। फिल्म में अर्जुन रामपाल, हर्षवर्धन राणे, गुरमीत चौधरी, लव सिन्हा, जैकी श्रॉफ, सोनल चौहान व सोनू सूद अहम किरदारों में थे। इस फिल्म का डायरेक्शन जेपी दत्ता ने किया था। इस फिल्म के गानों को भी काफी पसंद किया गया था।
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पुलवामा में हुए आतंकी हमले का बदला भारत ने ले लिया है। भारतीय वायुसेना के लड़ाकू जहाज़ मिराज दो हज़ार की एक टुकड़ी ने एक,शून्य किलोग्रामग्राम बम गिराए और सभी आतंकी कैंप को तहस नहस कर दिया। इस जवाबी कार्रवाई की हर कोई सराहना कर रहा है। यह कदम भारतवासियों के लिए गर्व का पल है। तो ऐसे मौके पर आपको हम उन फिल्मों के बारे में बता रहे हैं, जिनमें भारतीय सेनाओं के गर्व को सेलिब्रेट किया गया है। भारत-पाक के बीच एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में हुए युद्ध पर आधारित थी 'बॉर्डर' साल एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में आई फिल्म 'बॉर्डर', भारत-पाक के बीच एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में हुए युद्ध पर आधारित थी। इस फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे भारतीय सेना की एक बटालियन पाकिस्तान के दो हजार सैनिकों को लोहे के चने चबवा देती है। इस मल्टी स्टारर फिल्म में सनी देओल, सुनील शेट्टी, जैकी श्रॉफ व अक्षय खन्ना ने अहम रोल निभाया था। फिल्म को दर्शकों ने काफी सराहा था। इस फिल्म के डॉयलाग और गाने बहुत पॉपुलर हुए थे। कारगिल की जंग पर आधारित थी 'LoC कारगिल' एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल की जंग हुई थी। मई से लेकर जुलाई तक चले युद्ध काे 'ऑपरेशन विजय' नाम दिया गया था। भारतीय सेना की जीत के बाद इस पर फिल्म बनाई गई। फिल्म का नाम था 'LoC कारगिल' रखा गया। इस फिल्म को जेपी दत्ता ने डायरेक्ट किया था। यह एक मल्टीस्टारर फिल्म थी। संजय दत्त, सुनील शेट्टी, अभिषेक बच्चन, सैफ अली खान, अजय देवगन के अलावा साउथ के स्टार नागार्जुन भी फिल्म में थे। साल दो हज़ार चार में आई थी 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों' 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों' फिल्म साल दो हज़ार चार में बनी थी। फिल्म में अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, नगमा, आरती छाबड़िया, और बॉबी देओल थे। यह एक मल्टी स्टारर फिल्म थी। इसमें भारतीय आर्मी ने अमरनाथ यात्रा पर पाकिस्तान के आतंकी साजिश रचने वाले अफसरों का पर्दाफाश कर सभी नापाक कोशिशों को नाकम कर दिया था। फिल्म को अनिल शर्मा ने डायरेक्ट किया था। एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट ने सिक्किम के नाथुला दर्रे में चीनी सेना के दांत खट्टे कर दिये थे। दो हज़ार अट्ठारह में आई फिल्म 'पलटन' की कहानी इस असल घटना पर आधारित है। फिल्म में अर्जुन रामपाल, हर्षवर्धन राणे, गुरमीत चौधरी, लव सिन्हा, जैकी श्रॉफ, सोनल चौहान व सोनू सूद अहम किरदारों में थे। इस फिल्म का डायरेक्शन जेपी दत्ता ने किया था। इस फिल्म के गानों को भी काफी पसंद किया गया था।
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Text of Vice-President's Address at Mody university of Science and Technology, Laxmangarh (Excerpts)
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आप सबको देख कर आपका लगातार अभिनंदन करने का मन करता है!
You represent the power, the might, and the future of our country Bharat, home to 1/6th of the humanity. i am greatly impressed by the motto of this Institute and that is 'Nurturing excellence of Women in education'.
यह संभव होता है तो सृष्टि का कल्याण होता है. कहा गया है एक लड़के को पढ़ाओ तो लड़के को पढ़ाते हैं, जब लड़की को पढ़ाते हैं तो पूरे समाज की पढ़ाई हो जाती है.
किसी भी समाज को बदलने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान एजुकेशन का है. Education is the most effective impactful transformational mechanism और आप उसके सारथी है.
वैसे तो मोदी नाम में ही दम है, नाम से ही सब कुछ मुमकिन हो जाता है.
गणेश चतुर्थी इस बार अलग थी. इतिहास रचित हो गया. 20 सितंबर को दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पेश हुआ और उस समय लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला जो की राजस्थान के है, उनके नाम की जैसे प्रकाशता है, जो काम कई प्रयासों के बाद नहीं हो पाया वह 20 सितंबर को लोकसभा ने कर दिखाया और गेंद आ गई मेरे पाले में. मैं राज्यसभा का सभापति हूं, उपराष्ट्रपति होने की वजह से.
हमने कहा लोकसभा में तो दो मत खिलाफ पड़े, हमारे यहां एक भी नहीं पढ़ना चाहिए. इस पूरे काम का जो सारथी है भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री, किसी को पता नहीं था गणेश चतुर्थी के दिन शुरुआत हुई और 21 सितंबर को जैसे ही एक मत से स्वीकृत हुई मैंने कहा माननीय प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी आपको जन्मदिन की बधाई.
हिंदू रीति नीति के हिसाब से वह उनका जन्मदिन था. सब आश्चर्य चकित भी थे और प्रफुल्लित भी थे.
लोकसभा हो या राज्यसभा हो सभी में राजस्थान की भूमि का योगदान रहा है. लोकसभा में ओमजी बिरला और राज्यसभा में मैं.
हमारे पास करने से कानून नहीं बनता है, हम तो पास करते हैं it will takes the shape of law only when it is signed by the president of India under article 111 of the constitution और यह परम सौभाग्य महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी को मिला, आपके वर्ग को मिला. उन्होंने दस्तख्त किये और इतिहास रचित हो गया.
Now one third member in Lok Sabha and one third members in all the legislatures will be women. और यह रिजर्वेशन होरिजेंटल भी है और वर्टिकल भी है. इस वन थर्ड में शेड्यूल कास्ट शेड्यूल ट्राइब का रिजर्वेशन भी है. कहने का अर्थ है की nothing could be more shining and इक्विटेबल.
मैं एक छोटा किस्सा बताता हूं. एक महिला थी विधवा थी क्योंकि पति का ध्यान्त हो गया. एक लौता बेटा था जो की कमाता नहीं था. वह अंधी थी बेटे की शादी नहीं हुई बेरोजगार था और वह बीमार भी थी. ईश्वर प्रकट हुए और कहा एक वचन मांग लो. महिला क्या वचन मांगती खुद की हाथ खुद का स्वास्थ्य है बेटे की शादी या बेटे की नौकरी.
उनको मोदी साहब जैसे किसी व्यक्ति ने जरूर राय दी होगी और महिला ने कहा मैं सोने की थाली में पोते को हंसता खेलता देखना चाहती हूं. सब कुछ आ गया. तो जहां तक हमारी महिला शक्ति का मामला है भारत के प्रधानमंत्री ने जो अब तक के असफल प्रयास होते रहे दशकों से होते रहे मुझे जानकारी इसलिए है की मैं 1989 में सांसद बना था केंद्रीय मंत्री भी था मुझे पता है कब-कब प्रयास हुए कब-कब असफल रहे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने यह करिश्मा करके दिखाया. It is an epocal डेवलपमेंट, it is a historic development and I can tell you girls it is a game changer. क्योंकि नारी शक्ति के हाथ में जब कमान होती है तो बहुत कुछ हासिल होता है, इसका मैं प्रमाण हूं क्योंकि ताकत मेरी धर्मपत्नी के हाथ में है.
मैंने ऐसी संस्था नहीं देखी. आपके यहां कदम रखते ही मुझे भारत की संस्कृति दिखने लगी संस्कार दिखने लगे मजबूती दिखने लगी और तब मुझे याद आया कि जी-20 में दुनिया के बड़े-बड़े नेता आए. हम दोनों भी शरीक हुए. सबसे चर्चा हुई सब एक बात से अभिभूत थे that Indian culture is unrivalled, unparalleled.
कौन सा देश है जो 5000 साल से ज्यादा सिविलाइजेशन एठोस की बात कर सकता है. वह G20 का नजारा देखिए, देश का कोई प्रांत नहीं छूता है कोई यूनियन टेरिटरी नहीं छुट्टी है 200 बैठकें हुई, राजस्थान में भी हुई, जयपुर उदयपुर में भी हुई. देश के हर प्रांत में हुई. 58 लोकेशंस पर हुई. जो आए वहां पर वह कभी नहीं बोलने वाली यादें लेकर गए हैं कि हमने कभी नहीं सोचा था कि यह हो पाएगा.
आप ऐसे कालखंड में रह रहे हो जब भारत उन्नति की ओर है और यह उन्नति विश्व में प्रमाणित है the world is stunned.
23 अगस्त 2023 को करिश्मा हुआ जब इसरो ने विकल को चांद के उसे हिस्से पर सफलतापूर्वक उतार दिया जहाँ दुनिया का कोई देश नहीं पहुंच पाया है और उसमें भी आपका वंदन हुआ शिव शक्ति पॉइंट दिखाया गया.
चंद्रयान तीन वहा लैंड हुआ यह बहुत बड़ा डेवलपमेंट है और इसमें जो प्रमुख भूमिका निभाई वह एक महिला है, प्रोजेक्ट डायरेक्टर.
कहने का मतलब है भारत की विकास में आज के दिन नारी और पुरुष दोनों का योगदान है और मैं तो कहूंगा नारी का ज्यादा है. कहते हैं सबसे बड़ी ताकत फाइनेंस में होती है और मोदी जी से ज्यादा कौन जानता है. कर्म है धर्म है पर अर्थ भी आवश्यकता है ताकि ऐसी संस्था बन सके.
हमारी अर्थव्यवस्था का संचालन कौन ना रहा है श्रीमती निर्मला सीतारमण, a tough lady a great economist और दुनिया में उनका बहुत बड़ा रुतबा है क्योंकि she is an expert in economics. हमारी अर्थव्यवस्था को देखिये हम कहां थे कहां आ गए. फ्रजाइल 5 छू दोगे तो बिखर जाएंगे उनमे हमारा नाम था. ब्राज़ील साउथ अफ्रीका तुर्की इंडोनेशिया और भारत. 13 साल पहले दुनिया पर बोझ थे. दुनिया सोचती थी कि इनकी अर्थव्यवस्था ठीक होनी चाहिए वरना दुनिया को झटका लगेगा और हम कहां से कहां आ गए हैं फ्रेजिले 5 से हम पावरफुल 5 में आ गए हैं.
हमने 2 सितंबर 2022 में दुनिया के पांचवें आर्थिक महाशक्ति का दर्जा हासिल किया, फिफ्थ लार्जेस्ट इकोनामी और हमने यूके और फ्रांस को पीछे छोड़ा. अब बारी है जापान और जर्मनी की और आने वाले चार-पांच साल में India will be the third largest global economy और इसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम का बहुत बड़ा रोल रहेगा.
जो मेरे सामने बैठे हैं, इन 2047 when India will be celebrating centenary of its इंडिपेंडेंस, तब आप सब लोग निर्णायक भूमिका में रहेंगे महत्वपूर्ण भूमिका में रहेंगे और आपकी वजह से भारत प्रकाष्ठा पर होगा इसमें कोई दोराहे नहीं है.
जब मैं आ रहा था जानकारी ली तो मुझे आश्चर्य हुआ और संतोष भी हुआ आपके यहां तपोवन है, योगशाला है, आपके प्रांगण में आकर जो चित्र दिखा, भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांत उजागर करते हुए ।
Our culture is our strength, our culture is a repository of wisdom of several ages. कल्चर के मामले में एक घटना में आपको बताता हूं, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में लिखी गई है.. यह सेकंड वर्ल्ड वॉर का जमाना था.. कैंब्रिज का एक प्रोफेसर, अपने एयर कंडीशन चैंबर मैं बैठा था, एक सैनिक आया उसको गुस्सा आया जो की स्वाभाविक था कि हम तो मर मिटने को तैयार हैं, और आप यहां आराम से बैठे हैं। प्रोफेसर ने पूछा आप किस चीज के लिए मर मिटने को तैयार हैं? सैनिक को इस पर और ज्यादा गुस्सा आया.. हम देश की अस्मिता के लिए लड़ रहे हैं, देश की आजादी के लिए लड़ रहे हैं, देश की सीमाओं के लिए लड़ रहे हैं।
प्रोफेसर ने कहा आपका क्या मतलब है? आप देश के कल्चर की रक्षा कर रहे हैं, और मैं भी बैठा यही काम कर रहा हूं, that was a glorious moment for the Professor.
हर भारतीय का धर्म है कि वह कर्म से हमारी संस्कृति का सर्जन करें, संरक्षण करें जो दुनिया में बेमिसाल है।
स्वामी विवेकानंद ने बहुत छोटी उम्र में दुनिया में बहुत बड़ा नाम कमाया। और आप लोगों के लिए कहा,"Awake, Arise and do not stop until the goal is achieved." उन्होंने एक बात और कहीं, "There is no chance for the welfare of the world, unless the condition of human is improved. It is not possible for a bird to fly on only one wing."
Now, You are nuclear power. यह छोटा कदम नहीं है, इससे पहले भी कदम उठाए जा चुके हैं, पंचायत, गांव की सरपंच, प्रधान पंचायत समिति के, जिला प्रमुख, जब यह महिला होती थी पहले तो कुर्सी पर उसका पति जाकर बैठता था। और वह खुद को सरपंच पति हूं, प्रधान पति हूं, जिला प्रमुख पति हूं ऐसा बताता था.. अपने धीरे-धीरे वह ताकत ले ली है। इस ताकत का नतीजा यह है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पहली बार भारतीय संसद में बिना रिजर्वेशन के सबसे ज्यादा महिलाएं पहुंची- 78.
आप लोगों ने अगर 21 सितंबर को राज्यसभा की कार्यवाही देखी होगी जब इस अधिनियम पर चर्चा हो रही थी मैंने एक निर्णय लिया, कि मेरे अलावा और लोकसभा पति के अलावा, कुर्सी पर सिर्फ महिलाएं बैठेंगी।
Only women will sit on the chair during the precedings.
यह मौका उसे दिन मैंने 17 महिला सांसदों को दिया। पीटी उषा जी, जया बच्चन जी, कोयनाक, सुजाता जी.. सबको दिया। और सब अभीभूत थी।
टेबल ऑफिस के ऊपर मैंने पूरा महिलाओं का वर्चस्व रखा।
मैंने शुरुआत कि विदेश यात्राओं में उनकी भागीदारी 50% से कम नहीं होगी।
यह करके मुझे सुकून मिला यह तो अलग बात है, मुझे बहुत आशीर्वाद भी मिला, उन सब ने मुझे आशीर्वाद दिया, यह एक बड़ा बदलाव है। लगता था कि वह कुर्सी पर क्या करेंगे, पर बैठते ही पता लगा जो उन्होंने किया वह जबरदस्त साबित हुआ, वह कमजोर नहीं पड़ी।
हमारे यहां एक परंपरा है कि हम बहुत जल्दी लोगों को बहुत बड़ा मान लेते हैं। इसमें परिवर्तन आया है, आप उदाहरण के तौर पर देखिए padma awards, पदमश्री,पदमभूषण, पदमविभूषण.. पहले किन को मिलते थे? जिनका नाम पहले होता था। अब उनको मिलते हैं जिनका नाम सुना नहीं, पर मिलने के बाद एक बात होती है, की सही को मिला, इसी को मिलना चाहिए था।
यही योग्यता का पात्र है।
जब ऐसे ऑब्जेक्टिव काम होते हैं, तो देश की विकास यात्रा में चार चांद लग जाते हैं।
राज्यसभा में आपने देखा होगा शेरो शायरी भी होती है, हंसी के पल भी होते हैं, टेंशन भी होती है, इससे वातावरण ठीक रहता है, प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। जब मैं आ रहा था तो मैंने देखा कि मैं बच्चों को गिफ्ट क्या दूं? तो मैंने सोचा कि I will invite in a batch of 50, all of you, for a visit to the Indian Parliament.
उस विजिट का मैंने एक प्रोग्राम भी निश्चित किया है, पहले तो आप संसद की नई बिल्डिंग को देखेंगे, ढाई साल में सिर्फ बिल्डिंग नहीं बनी, कोविड की चुनौती के बावजूद अपितु उसके अंदर देख कर आप लोग दंग रह जाएंगे। दूसरा भारत मंडपम जहां g20 हुई है, दुनिया के 10 कन्वेंशन सेंटर में से एक है ,उसकी यात्रा कराई जाएगी, करिश्मा देखिए देश कितना बदल चुका है कि भारत मंडपम में g20 का कार्यक्रम संपन्न हुआ, उसके दो-तीन सप्ताह में ही उससे बड़ा कन्वेंशन सेंटर यशोभूमि जहां p20 का सम्मेलन होगा, दुनिया भर के पार्लियामेंट से लोग आएंगे, वह भारत मंडपम से भी बड़ा है वहां भी आपका आगमन होगा।
प्रधानमंत्री संग्रहालय एक पल भी आप आंख नहीं जाता पाएंगे। it has been changed it reflects everything, justice done to every PM of the country.. ओर वॉर मेमोरियल जो इंडिया गेट पर है, नेताजी बोस का स्टेचू भी है। यह कार्यक्रम मैंने बनाया है, we will facilitate it, we will do everything to make it possible.
थोड़ा यदि आगे चले तो आज के दिन आप लोगो को जो वातावरण मिल रहा है, हमने उसकी कल्पना नहीं की थी। पहला वातावरण, सत्ता के गलियारों से दलालों की छुट्टी हो गई। पहले सत्ता के गलियारों में दलाल रहते थे। पावर कॉरिडोर्स वर इनफेक्टेड विद पावर ब्रोकर, उनको सेनीटाइज कर दिया गया है, न्यूट्रलाइज कर दिया है।
दूसरा आपके लिए भी चुनौती है कि जब बहुत बड़ी प्रगति कोई परिवार या समाज करता है, कोई देश करता है तो कहीं ना कहीं थोड़ी बहुत जलन आ जाती है, जिसकी वजह से वह प्रक्रिया लोग अपनाते हैं जो देश हित में नहीं है।
मेरा आपको अग्वाहन है कि हर परिस्थिति में भारतीयता और भारत सर्वोपरि है, Non-negotiable है।
अपने को मानना पड़ेगा क्योंकि यह हकीकत है, we are proud Indians, दुनिया में बाहर कदम रखते ही यह आपको पता लग जाएगा कि भारतीय होने का क्या अर्थ है। we must also take legitimate pride in our phenomenal historic unprecedented growth scenario.
आप टेंशन मत रखिए यह मेरी आपसे राय है, आप स्ट्रेस मत रखिए, जो करना है अपने मन के कीजिए। इंक्लिनेशन का एप्टीट्यूड के हिसाब से कीजिए। मैं यहां से आपके माता-पिता को भी संदेश दूंगा, allow your children to grow where there is to grow. don't tinker with their inclination, don't tweak it, let it be natural.
क्योंकि आजकल इतनी ऑपच्यरुनिटीज आ रही है जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते।
वह ऑपच्यरुनिटीज हर किसी को उपलब्ध है। धन आज के दिन बाधक नहीं है। चुनौतियां तो आती रहेगी, चुनौतियों से कोई बच नहीं सकता।
मैं यहां आया हूं, ठीक काम कर रहा हूं, पहले भी कहीं जगह गया, पर कुछ लोगों ने कहा कि आप क्यों आते हो बार-बार? पता क्यों कह रहे हो कि बार-बार, कि थोड़ा अचंभित हो गया क्योंकि कहने वाले ने ना तो संविधान को पड़ा, ना कानून को पड़ा, ना अपने पद की मर्यादा राखी, यदि अगर थोड़ा सोच लेते, कानून में झांक लेते तो उनको पता लग जाता कि भारत के उपराष्ट्रपति की कोई भी यात्रा अचानक नहीं होती है, बड़ी सोच विचार मंथन चिंतन के बाद होती है। पर कह दिया कि आपका आना ठीक नहीं है, किस कानून के तहत पता नहीं। तो क्योंकि राज्य सभा में शेरो शायरी होती है, रास्ते में मैंने भी एक छोटी सी कविता लिख दी, और मैंने कहा कि सबसे पहले आपसे साझा करूं, इस कविता को लिखने से पहले मुझे गजल याद आ गई, उस गजल में था,
इसी के तर्ज पर दुखी होकर, पीड़ित महसूस कर कर, कि मुझे इस मामले में क्यों घसीटा,मेरा काम तो संविधान संबंधित था, जनता के भले के लिए था, कृषक पुत्र होने के नाते, जैसे मेरी उन्नति हुई है तो मैं हर संस्था में भी गया और बाकी मेरी यात्रा विधानसभा के अध्यक्ष के निमंत्रण पर हुई, केंद्र सरकार के कार्यक्रमों में हुई, राज्य सरकार ने कोई कार्यक्रम नहीं बनाया, नहीं बुलाया मुझे तो कोई परेशानी नहीं है, उनका विवेक है वह जाने।
मैंने जो कविता बनाई,
'खता क्या कि हमने, पता ही नहीं, आपत्ति क्यों है उन्हें हमारे घर आने की पता ही नहीं। यह कैसा मंजर है समझ से परे है, सवाल या निशान क्यों है? अपने घर आने में। क्या जुर्म है, पता ही नहीं। यही छोड़ता हूं इस बात को.
From this platform I would like to declare that I do not expect, people in authority to make light of constitutional positions. This is not good for democracy. There must be respect for constitutional positions and all of us togetherness, hand in hand collaboration and coordination with consensual approach have to serve the people at large.
मन दुखी होता है कि किन-किन शब्दों का उपयोग कर लिया, उभरना बड़ा मुश्किल है , I appeal to everyone it is our country we all are servants of this country whatever be our position, right from president down the line up to the chief minister. We must be very sensitive, we should not generates such a public perception, की बेवजह संवैधानिक पद पर बैठे हुए व्यक्ति को राजनीति में घसीटा जाए, यह ठीक नहीं है।
Girls I am delighted to share with you a platform are the future, आज का दिन सौभाग्यशाली इसलिए भी है, की 80% अधिकारियों से मैंने हाथ में लाया, उनके भी बेटे और बेटियां ही है, और बेटियों की ताकत, और माता-पिता के लिए उनका प्रेम, एक अजीब तरीके का होता है।
God bless you! You are in one of the best institutes at a global level. Utilize the opportunity.
Alumni of any institution are it's spinal strength, alumni are reservoir of talent, मैं आशा करता हूं इस संस्था जितने भी Alumni हैं, इस संस्था को योग्यता अनुसार आर्थिक सहयोग देंगे, सुझाव देंगे, this will shape into an institute that will reach pinnacle at a global level. All the very best. Thank you so much!
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Text of Vice-President's Address at Mody university of Science and Technology, Laxmangarh Posted On: आप सबको देख कर आपका लगातार अभिनंदन करने का मन करता है! You represent the power, the might, and the future of our country Bharat, home to एक/छःth of the humanity. i am greatly impressed by the motto of this Institute and that is 'Nurturing excellence of Women in education'. यह संभव होता है तो सृष्टि का कल्याण होता है. कहा गया है एक लड़के को पढ़ाओ तो लड़के को पढ़ाते हैं, जब लड़की को पढ़ाते हैं तो पूरे समाज की पढ़ाई हो जाती है. किसी भी समाज को बदलने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान एजुकेशन का है. Education is the most effective impactful transformational mechanism और आप उसके सारथी है. वैसे तो मोदी नाम में ही दम है, नाम से ही सब कुछ मुमकिन हो जाता है. गणेश चतुर्थी इस बार अलग थी. इतिहास रचित हो गया. बीस सितंबर को दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पेश हुआ और उस समय लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला जो की राजस्थान के है, उनके नाम की जैसे प्रकाशता है, जो काम कई प्रयासों के बाद नहीं हो पाया वह बीस सितंबर को लोकसभा ने कर दिखाया और गेंद आ गई मेरे पाले में. मैं राज्यसभा का सभापति हूं, उपराष्ट्रपति होने की वजह से. हमने कहा लोकसभा में तो दो मत खिलाफ पड़े, हमारे यहां एक भी नहीं पढ़ना चाहिए. इस पूरे काम का जो सारथी है भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री, किसी को पता नहीं था गणेश चतुर्थी के दिन शुरुआत हुई और इक्कीस सितंबर को जैसे ही एक मत से स्वीकृत हुई मैंने कहा माननीय प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी आपको जन्मदिन की बधाई. हिंदू रीति नीति के हिसाब से वह उनका जन्मदिन था. सब आश्चर्य चकित भी थे और प्रफुल्लित भी थे. लोकसभा हो या राज्यसभा हो सभी में राजस्थान की भूमि का योगदान रहा है. लोकसभा में ओमजी बिरला और राज्यसभा में मैं. हमारे पास करने से कानून नहीं बनता है, हम तो पास करते हैं it will takes the shape of law only when it is signed by the president of India under article एक सौ ग्यारह of the constitution और यह परम सौभाग्य महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी को मिला, आपके वर्ग को मिला. उन्होंने दस्तख्त किये और इतिहास रचित हो गया. Now one third member in Lok Sabha and one third members in all the legislatures will be women. और यह रिजर्वेशन होरिजेंटल भी है और वर्टिकल भी है. इस वन थर्ड में शेड्यूल कास्ट शेड्यूल ट्राइब का रिजर्वेशन भी है. कहने का अर्थ है की nothing could be more shining and इक्विटेबल. मैं एक छोटा किस्सा बताता हूं. एक महिला थी विधवा थी क्योंकि पति का ध्यान्त हो गया. एक लौता बेटा था जो की कमाता नहीं था. वह अंधी थी बेटे की शादी नहीं हुई बेरोजगार था और वह बीमार भी थी. ईश्वर प्रकट हुए और कहा एक वचन मांग लो. महिला क्या वचन मांगती खुद की हाथ खुद का स्वास्थ्य है बेटे की शादी या बेटे की नौकरी. उनको मोदी साहब जैसे किसी व्यक्ति ने जरूर राय दी होगी और महिला ने कहा मैं सोने की थाली में पोते को हंसता खेलता देखना चाहती हूं. सब कुछ आ गया. तो जहां तक हमारी महिला शक्ति का मामला है भारत के प्रधानमंत्री ने जो अब तक के असफल प्रयास होते रहे दशकों से होते रहे मुझे जानकारी इसलिए है की मैं एक हज़ार नौ सौ नवासी में सांसद बना था केंद्रीय मंत्री भी था मुझे पता है कब-कब प्रयास हुए कब-कब असफल रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने यह करिश्मा करके दिखाया. It is an epocal डेवलपमेंट, it is a historic development and I can tell you girls it is a game changer. क्योंकि नारी शक्ति के हाथ में जब कमान होती है तो बहुत कुछ हासिल होता है, इसका मैं प्रमाण हूं क्योंकि ताकत मेरी धर्मपत्नी के हाथ में है. मैंने ऐसी संस्था नहीं देखी. आपके यहां कदम रखते ही मुझे भारत की संस्कृति दिखने लगी संस्कार दिखने लगे मजबूती दिखने लगी और तब मुझे याद आया कि जी-बीस में दुनिया के बड़े-बड़े नेता आए. हम दोनों भी शरीक हुए. सबसे चर्चा हुई सब एक बात से अभिभूत थे that Indian culture is unrivalled, unparalleled. कौन सा देश है जो पाँच हज़ार साल से ज्यादा सिविलाइजेशन एठोस की बात कर सकता है. वह Gबीस का नजारा देखिए, देश का कोई प्रांत नहीं छूता है कोई यूनियन टेरिटरी नहीं छुट्टी है दो सौ बैठकें हुई, राजस्थान में भी हुई, जयपुर उदयपुर में भी हुई. देश के हर प्रांत में हुई. अट्ठावन लोकेशंस पर हुई. जो आए वहां पर वह कभी नहीं बोलने वाली यादें लेकर गए हैं कि हमने कभी नहीं सोचा था कि यह हो पाएगा. आप ऐसे कालखंड में रह रहे हो जब भारत उन्नति की ओर है और यह उन्नति विश्व में प्रमाणित है the world is stunned. तेईस अगस्त दो हज़ार तेईस को करिश्मा हुआ जब इसरो ने विकल को चांद के उसे हिस्से पर सफलतापूर्वक उतार दिया जहाँ दुनिया का कोई देश नहीं पहुंच पाया है और उसमें भी आपका वंदन हुआ शिव शक्ति पॉइंट दिखाया गया. चंद्रयान तीन वहा लैंड हुआ यह बहुत बड़ा डेवलपमेंट है और इसमें जो प्रमुख भूमिका निभाई वह एक महिला है, प्रोजेक्ट डायरेक्टर. कहने का मतलब है भारत की विकास में आज के दिन नारी और पुरुष दोनों का योगदान है और मैं तो कहूंगा नारी का ज्यादा है. कहते हैं सबसे बड़ी ताकत फाइनेंस में होती है और मोदी जी से ज्यादा कौन जानता है. कर्म है धर्म है पर अर्थ भी आवश्यकता है ताकि ऐसी संस्था बन सके. हमारी अर्थव्यवस्था का संचालन कौन ना रहा है श्रीमती निर्मला सीतारमण, a tough lady a great economist और दुनिया में उनका बहुत बड़ा रुतबा है क्योंकि she is an expert in economics. हमारी अर्थव्यवस्था को देखिये हम कहां थे कहां आ गए. फ्रजाइल पाँच छू दोगे तो बिखर जाएंगे उनमे हमारा नाम था. ब्राज़ील साउथ अफ्रीका तुर्की इंडोनेशिया और भारत. तेरह साल पहले दुनिया पर बोझ थे. दुनिया सोचती थी कि इनकी अर्थव्यवस्था ठीक होनी चाहिए वरना दुनिया को झटका लगेगा और हम कहां से कहां आ गए हैं फ्रेजिले पाँच से हम पावरफुल पाँच में आ गए हैं. हमने दो सितंबर दो हज़ार बाईस में दुनिया के पांचवें आर्थिक महाशक्ति का दर्जा हासिल किया, फिफ्थ लार्जेस्ट इकोनामी और हमने यूके और फ्रांस को पीछे छोड़ा. अब बारी है जापान और जर्मनी की और आने वाले चार-पांच साल में India will be the third largest global economy और इसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम का बहुत बड़ा रोल रहेगा. जो मेरे सामने बैठे हैं, इन दो हज़ार सैंतालीस when India will be celebrating centenary of its इंडिपेंडेंस, तब आप सब लोग निर्णायक भूमिका में रहेंगे महत्वपूर्ण भूमिका में रहेंगे और आपकी वजह से भारत प्रकाष्ठा पर होगा इसमें कोई दोराहे नहीं है. जब मैं आ रहा था जानकारी ली तो मुझे आश्चर्य हुआ और संतोष भी हुआ आपके यहां तपोवन है, योगशाला है, आपके प्रांगण में आकर जो चित्र दिखा, भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांत उजागर करते हुए । Our culture is our strength, our culture is a repository of wisdom of several ages. कल्चर के मामले में एक घटना में आपको बताता हूं, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में लिखी गई है.. यह सेकंड वर्ल्ड वॉर का जमाना था.. कैंब्रिज का एक प्रोफेसर, अपने एयर कंडीशन चैंबर मैं बैठा था, एक सैनिक आया उसको गुस्सा आया जो की स्वाभाविक था कि हम तो मर मिटने को तैयार हैं, और आप यहां आराम से बैठे हैं। प्रोफेसर ने पूछा आप किस चीज के लिए मर मिटने को तैयार हैं? सैनिक को इस पर और ज्यादा गुस्सा आया.. हम देश की अस्मिता के लिए लड़ रहे हैं, देश की आजादी के लिए लड़ रहे हैं, देश की सीमाओं के लिए लड़ रहे हैं। प्रोफेसर ने कहा आपका क्या मतलब है? आप देश के कल्चर की रक्षा कर रहे हैं, और मैं भी बैठा यही काम कर रहा हूं, that was a glorious moment for the Professor. हर भारतीय का धर्म है कि वह कर्म से हमारी संस्कृति का सर्जन करें, संरक्षण करें जो दुनिया में बेमिसाल है। स्वामी विवेकानंद ने बहुत छोटी उम्र में दुनिया में बहुत बड़ा नाम कमाया। और आप लोगों के लिए कहा,"Awake, Arise and do not stop until the goal is achieved." उन्होंने एक बात और कहीं, "There is no chance for the welfare of the world, unless the condition of human is improved. It is not possible for a bird to fly on only one wing." Now, You are nuclear power. यह छोटा कदम नहीं है, इससे पहले भी कदम उठाए जा चुके हैं, पंचायत, गांव की सरपंच, प्रधान पंचायत समिति के, जिला प्रमुख, जब यह महिला होती थी पहले तो कुर्सी पर उसका पति जाकर बैठता था। और वह खुद को सरपंच पति हूं, प्रधान पति हूं, जिला प्रमुख पति हूं ऐसा बताता था.. अपने धीरे-धीरे वह ताकत ले ली है। इस ताकत का नतीजा यह है कि दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में पहली बार भारतीय संसद में बिना रिजर्वेशन के सबसे ज्यादा महिलाएं पहुंची- अठहत्तर. आप लोगों ने अगर इक्कीस सितंबर को राज्यसभा की कार्यवाही देखी होगी जब इस अधिनियम पर चर्चा हो रही थी मैंने एक निर्णय लिया, कि मेरे अलावा और लोकसभा पति के अलावा, कुर्सी पर सिर्फ महिलाएं बैठेंगी। Only women will sit on the chair during the precedings. यह मौका उसे दिन मैंने सत्रह महिला सांसदों को दिया। पीटी उषा जी, जया बच्चन जी, कोयनाक, सुजाता जी.. सबको दिया। और सब अभीभूत थी। टेबल ऑफिस के ऊपर मैंने पूरा महिलाओं का वर्चस्व रखा। मैंने शुरुआत कि विदेश यात्राओं में उनकी भागीदारी पचास% से कम नहीं होगी। यह करके मुझे सुकून मिला यह तो अलग बात है, मुझे बहुत आशीर्वाद भी मिला, उन सब ने मुझे आशीर्वाद दिया, यह एक बड़ा बदलाव है। लगता था कि वह कुर्सी पर क्या करेंगे, पर बैठते ही पता लगा जो उन्होंने किया वह जबरदस्त साबित हुआ, वह कमजोर नहीं पड़ी। हमारे यहां एक परंपरा है कि हम बहुत जल्दी लोगों को बहुत बड़ा मान लेते हैं। इसमें परिवर्तन आया है, आप उदाहरण के तौर पर देखिए padma awards, पदमश्री,पदमभूषण, पदमविभूषण.. पहले किन को मिलते थे? जिनका नाम पहले होता था। अब उनको मिलते हैं जिनका नाम सुना नहीं, पर मिलने के बाद एक बात होती है, की सही को मिला, इसी को मिलना चाहिए था। यही योग्यता का पात्र है। जब ऐसे ऑब्जेक्टिव काम होते हैं, तो देश की विकास यात्रा में चार चांद लग जाते हैं। राज्यसभा में आपने देखा होगा शेरो शायरी भी होती है, हंसी के पल भी होते हैं, टेंशन भी होती है, इससे वातावरण ठीक रहता है, प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। जब मैं आ रहा था तो मैंने देखा कि मैं बच्चों को गिफ्ट क्या दूं? तो मैंने सोचा कि I will invite in a batch of पचास, all of you, for a visit to the Indian Parliament. उस विजिट का मैंने एक प्रोग्राम भी निश्चित किया है, पहले तो आप संसद की नई बिल्डिंग को देखेंगे, ढाई साल में सिर्फ बिल्डिंग नहीं बनी, कोविड की चुनौती के बावजूद अपितु उसके अंदर देख कर आप लोग दंग रह जाएंगे। दूसरा भारत मंडपम जहां gबीस हुई है, दुनिया के दस कन्वेंशन सेंटर में से एक है ,उसकी यात्रा कराई जाएगी, करिश्मा देखिए देश कितना बदल चुका है कि भारत मंडपम में gबीस का कार्यक्रम संपन्न हुआ, उसके दो-तीन सप्ताह में ही उससे बड़ा कन्वेंशन सेंटर यशोभूमि जहां pबीस का सम्मेलन होगा, दुनिया भर के पार्लियामेंट से लोग आएंगे, वह भारत मंडपम से भी बड़ा है वहां भी आपका आगमन होगा। प्रधानमंत्री संग्रहालय एक पल भी आप आंख नहीं जाता पाएंगे। it has been changed it reflects everything, justice done to every PM of the country.. ओर वॉर मेमोरियल जो इंडिया गेट पर है, नेताजी बोस का स्टेचू भी है। यह कार्यक्रम मैंने बनाया है, we will facilitate it, we will do everything to make it possible. थोड़ा यदि आगे चले तो आज के दिन आप लोगो को जो वातावरण मिल रहा है, हमने उसकी कल्पना नहीं की थी। पहला वातावरण, सत्ता के गलियारों से दलालों की छुट्टी हो गई। पहले सत्ता के गलियारों में दलाल रहते थे। पावर कॉरिडोर्स वर इनफेक्टेड विद पावर ब्रोकर, उनको सेनीटाइज कर दिया गया है, न्यूट्रलाइज कर दिया है। दूसरा आपके लिए भी चुनौती है कि जब बहुत बड़ी प्रगति कोई परिवार या समाज करता है, कोई देश करता है तो कहीं ना कहीं थोड़ी बहुत जलन आ जाती है, जिसकी वजह से वह प्रक्रिया लोग अपनाते हैं जो देश हित में नहीं है। मेरा आपको अग्वाहन है कि हर परिस्थिति में भारतीयता और भारत सर्वोपरि है, Non-negotiable है। अपने को मानना पड़ेगा क्योंकि यह हकीकत है, we are proud Indians, दुनिया में बाहर कदम रखते ही यह आपको पता लग जाएगा कि भारतीय होने का क्या अर्थ है। we must also take legitimate pride in our phenomenal historic unprecedented growth scenario. आप टेंशन मत रखिए यह मेरी आपसे राय है, आप स्ट्रेस मत रखिए, जो करना है अपने मन के कीजिए। इंक्लिनेशन का एप्टीट्यूड के हिसाब से कीजिए। मैं यहां से आपके माता-पिता को भी संदेश दूंगा, allow your children to grow where there is to grow. don't tinker with their inclination, don't tweak it, let it be natural. क्योंकि आजकल इतनी ऑपच्यरुनिटीज आ रही है जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते। वह ऑपच्यरुनिटीज हर किसी को उपलब्ध है। धन आज के दिन बाधक नहीं है। चुनौतियां तो आती रहेगी, चुनौतियों से कोई बच नहीं सकता। मैं यहां आया हूं, ठीक काम कर रहा हूं, पहले भी कहीं जगह गया, पर कुछ लोगों ने कहा कि आप क्यों आते हो बार-बार? पता क्यों कह रहे हो कि बार-बार, कि थोड़ा अचंभित हो गया क्योंकि कहने वाले ने ना तो संविधान को पड़ा, ना कानून को पड़ा, ना अपने पद की मर्यादा राखी, यदि अगर थोड़ा सोच लेते, कानून में झांक लेते तो उनको पता लग जाता कि भारत के उपराष्ट्रपति की कोई भी यात्रा अचानक नहीं होती है, बड़ी सोच विचार मंथन चिंतन के बाद होती है। पर कह दिया कि आपका आना ठीक नहीं है, किस कानून के तहत पता नहीं। तो क्योंकि राज्य सभा में शेरो शायरी होती है, रास्ते में मैंने भी एक छोटी सी कविता लिख दी, और मैंने कहा कि सबसे पहले आपसे साझा करूं, इस कविता को लिखने से पहले मुझे गजल याद आ गई, उस गजल में था, इसी के तर्ज पर दुखी होकर, पीड़ित महसूस कर कर, कि मुझे इस मामले में क्यों घसीटा,मेरा काम तो संविधान संबंधित था, जनता के भले के लिए था, कृषक पुत्र होने के नाते, जैसे मेरी उन्नति हुई है तो मैं हर संस्था में भी गया और बाकी मेरी यात्रा विधानसभा के अध्यक्ष के निमंत्रण पर हुई, केंद्र सरकार के कार्यक्रमों में हुई, राज्य सरकार ने कोई कार्यक्रम नहीं बनाया, नहीं बुलाया मुझे तो कोई परेशानी नहीं है, उनका विवेक है वह जाने। मैंने जो कविता बनाई, 'खता क्या कि हमने, पता ही नहीं, आपत्ति क्यों है उन्हें हमारे घर आने की पता ही नहीं। यह कैसा मंजर है समझ से परे है, सवाल या निशान क्यों है? अपने घर आने में। क्या जुर्म है, पता ही नहीं। यही छोड़ता हूं इस बात को. From this platform I would like to declare that I do not expect, people in authority to make light of constitutional positions. This is not good for democracy. There must be respect for constitutional positions and all of us togetherness, hand in hand collaboration and coordination with consensual approach have to serve the people at large. मन दुखी होता है कि किन-किन शब्दों का उपयोग कर लिया, उभरना बड़ा मुश्किल है , I appeal to everyone it is our country we all are servants of this country whatever be our position, right from president down the line up to the chief minister. We must be very sensitive, we should not generates such a public perception, की बेवजह संवैधानिक पद पर बैठे हुए व्यक्ति को राजनीति में घसीटा जाए, यह ठीक नहीं है। Girls I am delighted to share with you a platform are the future, आज का दिन सौभाग्यशाली इसलिए भी है, की अस्सी% अधिकारियों से मैंने हाथ में लाया, उनके भी बेटे और बेटियां ही है, और बेटियों की ताकत, और माता-पिता के लिए उनका प्रेम, एक अजीब तरीके का होता है। God bless you! You are in one of the best institutes at a global level. Utilize the opportunity. Alumni of any institution are it's spinal strength, alumni are reservoir of talent, मैं आशा करता हूं इस संस्था जितने भी Alumni हैं, इस संस्था को योग्यता अनुसार आर्थिक सहयोग देंगे, सुझाव देंगे, this will shape into an institute that will reach pinnacle at a global level. All the very best. Thank you so much!
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पंजाब में जीत के बाद से आम आदमी पार्टी अपने विस्तार की कोशिशों में जुटी है। यही कारण है कि आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान लगातार राज्यों के दौरे कर रहे हैं। इसी क्रम में केजरीवाल केरल पहुंचे और वहां CPI (M) की विजयन सरकार को चुनौती लगाते हुए कहा कि दिल्ली की तरह वो केरल को भी बदल देंगे। हालांकि सच्चाई ये है कि केरल कई मामलों में दिल्ली से काफी आगे है। चाहे बात शिक्षा की हो या फिर रोजगार की। दिल्ली केरल के मुकाबले पीछे ही है।
केजरीवाल ने क्या कहा- केरल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने लोगों से पूछा कि क्या वो केरल में बदलाव देखना चाहते हैं? उन्होंने कहा- "क्या आप केरल में बदलाव चाहते हैं या नहीं? अन्य पार्टियों के लोग इस राज्य के बच्चों को नौकरी नहीं देंगे, वे शिक्षा नहीं देंगे। क्योंकि उन्हें ऐसे लोग चाहिए जो दंगा कर सकें, जो गुंडागर्दी फैला सकें"।
बेरोजगारी- सीएमआई के जनवरी से अप्रैल 2022 तक की रिपोर्ट के अनुसार, केरल की तुलना में दिल्ली में बेरोजगारी की दर अधिक है। देश की राजधानी में बेरोजगारी दर 11. 04 प्रतिशत है, जबकि केरल में यह 6. 30 प्रतिशत है।
अपराध- एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार केरल में हत्या की दर 0. 9 प्रतिशत है। वहीं, दिल्ली में यह 2. 3 प्रतिशत है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों को देखें तो यौन उत्पीड़न के मामलों में केरल की दर 5. 9 तो दिल्ली में यह दर 3. 4 प्रतिशत है। वहीं दिल्ली में पुलिस लाठीचार्ज से घायल हुए नागरिकों की संख्या 65 है, इसमें चार लोग मारे भी गए हैं। वहीं, केरल में दोनों के आंकड़े जीरो है।
सतत विकास लक्ष्य- वर्ष 2020-21 के लिए नीति आयोग की रैंकिंग के अनुसार, केरल ने 2030 के लिए निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने में देश में शीर्ष स्थान हासिल किया। केरल ने विभिन्न लक्ष्यों पर अपने प्रदर्शन के आधार पर संभावित 100 में से 75 रैंक हासिल की। दिल्ली ने 68वें स्थान पर जगह बनाई, जो केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरे स्थान पर है।
स्कूली शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक- साक्षरता दर की अगर हम बात करें तो 2011 की गणना के अनुसार केरल में यह 94 प्रतिशत है, जोकि देशभर के राज्यों में सबसे ज्यादा है। वहीं, दिल्ली में यह 86. 21 प्रतिशत है। यानि यहां भी दिल्ली पिछड़ी हुई है।
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पंजाब में जीत के बाद से आम आदमी पार्टी अपने विस्तार की कोशिशों में जुटी है। यही कारण है कि आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान लगातार राज्यों के दौरे कर रहे हैं। इसी क्रम में केजरीवाल केरल पहुंचे और वहां CPI की विजयन सरकार को चुनौती लगाते हुए कहा कि दिल्ली की तरह वो केरल को भी बदल देंगे। हालांकि सच्चाई ये है कि केरल कई मामलों में दिल्ली से काफी आगे है। चाहे बात शिक्षा की हो या फिर रोजगार की। दिल्ली केरल के मुकाबले पीछे ही है। केजरीवाल ने क्या कहा- केरल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने लोगों से पूछा कि क्या वो केरल में बदलाव देखना चाहते हैं? उन्होंने कहा- "क्या आप केरल में बदलाव चाहते हैं या नहीं? अन्य पार्टियों के लोग इस राज्य के बच्चों को नौकरी नहीं देंगे, वे शिक्षा नहीं देंगे। क्योंकि उन्हें ऐसे लोग चाहिए जो दंगा कर सकें, जो गुंडागर्दी फैला सकें"। बेरोजगारी- सीएमआई के जनवरी से अप्रैल दो हज़ार बाईस तक की रिपोर्ट के अनुसार, केरल की तुलना में दिल्ली में बेरोजगारी की दर अधिक है। देश की राजधानी में बेरोजगारी दर ग्यारह. चार प्रतिशत है, जबकि केरल में यह छः. तीस प्रतिशत है। अपराध- एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार केरल में हत्या की दर शून्य. नौ प्रतिशत है। वहीं, दिल्ली में यह दो. तीन प्रतिशत है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों को देखें तो यौन उत्पीड़न के मामलों में केरल की दर पाँच. नौ तो दिल्ली में यह दर तीन. चार प्रतिशत है। वहीं दिल्ली में पुलिस लाठीचार्ज से घायल हुए नागरिकों की संख्या पैंसठ है, इसमें चार लोग मारे भी गए हैं। वहीं, केरल में दोनों के आंकड़े जीरो है। सतत विकास लक्ष्य- वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए नीति आयोग की रैंकिंग के अनुसार, केरल ने दो हज़ार तीस के लिए निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में देश में शीर्ष स्थान हासिल किया। केरल ने विभिन्न लक्ष्यों पर अपने प्रदर्शन के आधार पर संभावित एक सौ में से पचहत्तर रैंक हासिल की। दिल्ली ने अड़सठवें स्थान पर जगह बनाई, जो केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरे स्थान पर है। स्कूली शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक- साक्षरता दर की अगर हम बात करें तो दो हज़ार ग्यारह की गणना के अनुसार केरल में यह चौरानवे प्रतिशत है, जोकि देशभर के राज्यों में सबसे ज्यादा है। वहीं, दिल्ली में यह छियासी. इक्कीस प्रतिशत है। यानि यहां भी दिल्ली पिछड़ी हुई है।
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।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद )
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो ।
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद )
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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उत्तराखंड में छठी से 11वीं की कक्षाओं की पढ़ाई आनलाइन यथावत जारी रहेगी। जिन विद्यार्थियों के पास आनलाइन पठन-पाठन की सुविधा नहीं है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्कूल बुलाया जाएगा। अधिक छात्रसंख्या की स्थिति में जरूरत पड़ने पर स्कूलों को दो पालियों में संचालित करने की अनुमति दी गई।
राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में छठी से 11वीं की कक्षाओं की पढ़ाई आनलाइन यथावत जारी रहेगी। जिन विद्यार्थियों के पास आनलाइन पठन-पाठन की सुविधा नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्कूल बुलाया जाएगा। मुख्य सचिव की ओर से जारी एसओपी (मानक संचालन कार्यविधि) में अधिक छात्रसंख्या की स्थिति में शारीरिक दूरी बनाने के लिए जरूरत पड़ने पर स्कूलों को दो पालियों में संचालित करने की अनुमति दी गई है। विद्यार्थियों को लाने-ले जाने वाले स्कूल बसों या स्कूल से संबद्ध सार्वजनिक सेवा वाहनों को प्रतिदिन सैनिटाइज कराया जाएगा। बस में छात्रों के प्रवेश के समय थर्मल स्कैनिंग और हैंड सैनिटाइजेशन कराया जाएगा। स्कूल प्रबंधन को अतिरिक्त मात्रा में सैनिटाइजर व मास्क की उपलब्धता रखनी होगी। प्रदेश में वे ही डे और आवासीय स्कूल खुलेंगे, जो कंटेनमेंट जोन के बाहर होंगे।
स्कूलों को एसओपी का पालन कराने के लिए एक नोडल अधिकारी नामित करना होगा। यह अधिकारी सुरक्षित शारीरिक दूरी और कोविड प्रोटोकाल संबंधी निर्देशों के अनुपालन के लिए जिम्मेदार होगा। स्कूल में छात्रों, शिक्षकों या अन्य स्टाफ में कोरोना संक्रमण होने की स्थिति में जिला प्रशासन को समय पर सूचित करने की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी की होगी। प्रत्येक जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी को स्कूलों में दिन-प्रतिदिन कोरोना संक्रमण की सूचना प्राप्त करने और जिला प्रशासन व उच्चाधिकारियों को सूचित करने के लिए व्यक्तिगत तौर पर जवाबदेह बनाया गया है।
आवासीय स्कूलों के लिए अलग से एसओपी जारी की गई है। इसमें बीती 24 अक्टूबर को शासन की ओर से स्कूलों को खोलने के लिए दिए गए निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। राज्य के सरकारी आवासीय विद्यालय अलग-अलग विभागों से संचालित हो रहे हैं। मुख्य सचिव के मुताबिक शिक्षा विभाग के आवासीय विद्यालयों के लिए शिक्षा महानिदेशक एसओपी जारी करेंगे। समाज कल्याण विभाग या अन्य विभाग अपने आवासीय विद्यालयों के लिए अलग से एसओपी जारी करेंगे।
प्रदेश में 10वीं व 12वीं की कक्षाओं के लिए स्कूलों को बीती नवंबर माह में ही खोला जा चुका है। सरकार ने कक्षा एक से पांचवीं यानी प्राथमिक कक्षाओं के लिए स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया है।
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उत्तराखंड में छठी से ग्यारहवीं की कक्षाओं की पढ़ाई आनलाइन यथावत जारी रहेगी। जिन विद्यार्थियों के पास आनलाइन पठन-पाठन की सुविधा नहीं है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्कूल बुलाया जाएगा। अधिक छात्रसंख्या की स्थिति में जरूरत पड़ने पर स्कूलों को दो पालियों में संचालित करने की अनुमति दी गई। राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में छठी से ग्यारहवीं की कक्षाओं की पढ़ाई आनलाइन यथावत जारी रहेगी। जिन विद्यार्थियों के पास आनलाइन पठन-पाठन की सुविधा नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्कूल बुलाया जाएगा। मुख्य सचिव की ओर से जारी एसओपी में अधिक छात्रसंख्या की स्थिति में शारीरिक दूरी बनाने के लिए जरूरत पड़ने पर स्कूलों को दो पालियों में संचालित करने की अनुमति दी गई है। विद्यार्थियों को लाने-ले जाने वाले स्कूल बसों या स्कूल से संबद्ध सार्वजनिक सेवा वाहनों को प्रतिदिन सैनिटाइज कराया जाएगा। बस में छात्रों के प्रवेश के समय थर्मल स्कैनिंग और हैंड सैनिटाइजेशन कराया जाएगा। स्कूल प्रबंधन को अतिरिक्त मात्रा में सैनिटाइजर व मास्क की उपलब्धता रखनी होगी। प्रदेश में वे ही डे और आवासीय स्कूल खुलेंगे, जो कंटेनमेंट जोन के बाहर होंगे। स्कूलों को एसओपी का पालन कराने के लिए एक नोडल अधिकारी नामित करना होगा। यह अधिकारी सुरक्षित शारीरिक दूरी और कोविड प्रोटोकाल संबंधी निर्देशों के अनुपालन के लिए जिम्मेदार होगा। स्कूल में छात्रों, शिक्षकों या अन्य स्टाफ में कोरोना संक्रमण होने की स्थिति में जिला प्रशासन को समय पर सूचित करने की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी की होगी। प्रत्येक जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी को स्कूलों में दिन-प्रतिदिन कोरोना संक्रमण की सूचना प्राप्त करने और जिला प्रशासन व उच्चाधिकारियों को सूचित करने के लिए व्यक्तिगत तौर पर जवाबदेह बनाया गया है। आवासीय स्कूलों के लिए अलग से एसओपी जारी की गई है। इसमें बीती चौबीस अक्टूबर को शासन की ओर से स्कूलों को खोलने के लिए दिए गए निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। राज्य के सरकारी आवासीय विद्यालय अलग-अलग विभागों से संचालित हो रहे हैं। मुख्य सचिव के मुताबिक शिक्षा विभाग के आवासीय विद्यालयों के लिए शिक्षा महानिदेशक एसओपी जारी करेंगे। समाज कल्याण विभाग या अन्य विभाग अपने आवासीय विद्यालयों के लिए अलग से एसओपी जारी करेंगे। प्रदेश में दसवीं व बारहवीं की कक्षाओं के लिए स्कूलों को बीती नवंबर माह में ही खोला जा चुका है। सरकार ने कक्षा एक से पांचवीं यानी प्राथमिक कक्षाओं के लिए स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया है।
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।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद )
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम)
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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सिमडेगाः ठेठईटांगर प्रखंड के दुमकी में ग्राम सभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कोलेबिरा विधायक बिक्सल कोंगड़ी उपस्थित थे. इस दौरान वन अधिकार कानून 2006 के तहत सामुदायिक दावा प्रक्रिया के लिए स्थल निरीक्षण करते हुए जंगल पर अपना अधिकार के लिए वन अधिकार कानून का बोर्ड लगाया गया. इस मौके पर विधायक श्री कोगाड़ी ने कहा कि वन अधिकार किसानों के लिए प्रधानमंत्री सम्मान योजना मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना आदि योजना सरकार के द्वारा एवं किसानों का आर्थिक सहयोग देना है. लेकिन यह सरकार न सम्मान दे रही है ना ही किसानों का आशीर्वाद योजना का लाभ, सरकार सिर्फ घोषणाएं करती हैं जंगल के संरक्षण एवं विकास के मुद्दे पर विधायक श्री कोगाड़ी ने कहा कि सरकार को भारतीय कानून 1927 एवं अधिकार कानून में समन्वय बनाकर काम करना है. तभी जंगल का संरक्षण एवं विकास हो पाएगा. इस मौके पर रावेल लकड़ा ने भी अपने वक्तव्य में कहा कि झारखंड सरकार जमीन को भूमि बैंक में रखकर भूमिहीनों को देने की बात कह रही है किंतु यह एक साजिश है. साजिश के तहत जमीनों को पूंजीपतियों को देने की तैयारी है. जमीन को पंचायत में शिविर लगाकर भारतीय संविधान के तहत ग्राम सभा के माध्यम से लोगों को देने का काम किया जाना चाहिए. मौके पर कांग्रेस पार्टी के जिला महासचिव खुशी कुमार, कुरडेग प्रखंड अध्यक्ष देवनिश खलखो, झारखंडगल बचाओ आंदोलन के सिप्रियन समद,राजेश डुगंडुगं, बजरंग प्रसाद, नीलकंठ खड़िया ,ग्लोरिया सोरेग,अजीत के अलावा सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे.
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सिमडेगाः ठेठईटांगर प्रखंड के दुमकी में ग्राम सभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कोलेबिरा विधायक बिक्सल कोंगड़ी उपस्थित थे. इस दौरान वन अधिकार कानून दो हज़ार छः के तहत सामुदायिक दावा प्रक्रिया के लिए स्थल निरीक्षण करते हुए जंगल पर अपना अधिकार के लिए वन अधिकार कानून का बोर्ड लगाया गया. इस मौके पर विधायक श्री कोगाड़ी ने कहा कि वन अधिकार किसानों के लिए प्रधानमंत्री सम्मान योजना मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना आदि योजना सरकार के द्वारा एवं किसानों का आर्थिक सहयोग देना है. लेकिन यह सरकार न सम्मान दे रही है ना ही किसानों का आशीर्वाद योजना का लाभ, सरकार सिर्फ घोषणाएं करती हैं जंगल के संरक्षण एवं विकास के मुद्दे पर विधायक श्री कोगाड़ी ने कहा कि सरकार को भारतीय कानून एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस एवं अधिकार कानून में समन्वय बनाकर काम करना है. तभी जंगल का संरक्षण एवं विकास हो पाएगा. इस मौके पर रावेल लकड़ा ने भी अपने वक्तव्य में कहा कि झारखंड सरकार जमीन को भूमि बैंक में रखकर भूमिहीनों को देने की बात कह रही है किंतु यह एक साजिश है. साजिश के तहत जमीनों को पूंजीपतियों को देने की तैयारी है. जमीन को पंचायत में शिविर लगाकर भारतीय संविधान के तहत ग्राम सभा के माध्यम से लोगों को देने का काम किया जाना चाहिए. मौके पर कांग्रेस पार्टी के जिला महासचिव खुशी कुमार, कुरडेग प्रखंड अध्यक्ष देवनिश खलखो, झारखंडगल बचाओ आंदोलन के सिप्रियन समद,राजेश डुगंडुगं, बजरंग प्रसाद, नीलकंठ खड़िया ,ग्लोरिया सोरेग,अजीत के अलावा सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे.
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Ranchi: चतरा जिले के सदर थाना क्षेत्र में प्रेमी युगल की खंभे में बांधकर पिटाई में प्रेमिका की मौत मामले में पुलिस ने आधा दर्जन आरोपी को हिरासत में लिया है. वही मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है. पुलिस के अनुसार आपसी विवाद से जुड़ा मामला है, जिसमें प्रेमिका की पीट पीटकर हत्या कर दी गई. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस आधा दर्जन लोगों को हिरासत में लिया है. वही घटना में संलिप्त अन्य आरोपी की तलाश में पुलिस संभावित ठिकाने पर छापेमारी में जुटी है.
चतरा जिले के सदर थाना क्षेत्र स्थित रैनी पंचायत के मसूरियातरी गांव निवासी प्रेमी घोपिन गंझू अपनी विवाहिता प्रेमिका सुगिया देवी से मिलने 30 जून की रातत उसके घर पहुंचा था. इसी क्रम में गांव के कमल गंझू, अनिल गंझू और बोधा गंझू समेत अन्य ग्रामीण रंगे हाथ पकड़ लिया. इसके बाद दोनो की मौके पर ही खंभे में बांधकर बेरहमी से पिटाई कर दी. प्रेमिका सुगिया देवी की मौत हो गई. जबकि प्रेमी घोपिन गंझू गंभीर रुप से घायल हो गया.
इस घटना का विडियो किसी ने सोशल मिडिया पर डाल दिया. रात के अंधेरे में घटना को अंजाम दिया गया. प्रेमिका की मौत हो जाने के बाद ग्रामीणों ने आनन फानन में पंचायत बुलाकर महज तीन लाख रुपये में महिला की मौत का सौदा कर दिया और महिला का शव जला डाला. घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे महिला के परिजनों पर भी ग्रामीणों ने दबाव बनाते हुए धमकाया कि मामले की जानकारी पुलिस को दी, तो अंजाम बुरा होगा. वही वायरल वीडियो पर एसपी राकेश रंजन ने सदर थाना प्रभारी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया. जिसके बाद पुलिस मामले की जांच और कार्रवाई में जुट गई.
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Ranchi: चतरा जिले के सदर थाना क्षेत्र में प्रेमी युगल की खंभे में बांधकर पिटाई में प्रेमिका की मौत मामले में पुलिस ने आधा दर्जन आरोपी को हिरासत में लिया है. वही मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है. पुलिस के अनुसार आपसी विवाद से जुड़ा मामला है, जिसमें प्रेमिका की पीट पीटकर हत्या कर दी गई. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस आधा दर्जन लोगों को हिरासत में लिया है. वही घटना में संलिप्त अन्य आरोपी की तलाश में पुलिस संभावित ठिकाने पर छापेमारी में जुटी है. चतरा जिले के सदर थाना क्षेत्र स्थित रैनी पंचायत के मसूरियातरी गांव निवासी प्रेमी घोपिन गंझू अपनी विवाहिता प्रेमिका सुगिया देवी से मिलने तीस जून की रातत उसके घर पहुंचा था. इसी क्रम में गांव के कमल गंझू, अनिल गंझू और बोधा गंझू समेत अन्य ग्रामीण रंगे हाथ पकड़ लिया. इसके बाद दोनो की मौके पर ही खंभे में बांधकर बेरहमी से पिटाई कर दी. प्रेमिका सुगिया देवी की मौत हो गई. जबकि प्रेमी घोपिन गंझू गंभीर रुप से घायल हो गया. इस घटना का विडियो किसी ने सोशल मिडिया पर डाल दिया. रात के अंधेरे में घटना को अंजाम दिया गया. प्रेमिका की मौत हो जाने के बाद ग्रामीणों ने आनन फानन में पंचायत बुलाकर महज तीन लाख रुपये में महिला की मौत का सौदा कर दिया और महिला का शव जला डाला. घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे महिला के परिजनों पर भी ग्रामीणों ने दबाव बनाते हुए धमकाया कि मामले की जानकारी पुलिस को दी, तो अंजाम बुरा होगा. वही वायरल वीडियो पर एसपी राकेश रंजन ने सदर थाना प्रभारी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया. जिसके बाद पुलिस मामले की जांच और कार्रवाई में जुट गई.
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वनडे विश्व कप 2023 का आगाज 5 अक्टूबर से हो गया है. इस बार यह क्रिकेट महाकुम्भ भारत की मेजबानी में आयोजित किया जा रहा है. इस वर्ल्ड कप में भारत समेत दुनिया की 10 टीमें भाग ले रही है. ऐसे में चलिये देखते है भारत का विश्व कप में कैसा है जीत का रिकॉर्ड. पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व कप में भारत का जीत का रिकॉर्ड चौंकाने वाला है.
ODI World Cup 2023: वनडे विश्व कप 2023 का आगाज 5 अक्टूबर से हो गया है. इस बार यह क्रिकेट महाकुम्भ भारत की मेजबानी में आयोजित किया जा रहा है. इस वर्ल्ड कप में भारत समेत दुनिया की 10 टीमें भाग ले रही है.
इससे पहले वर्ष 2011 में वनडे विश्व कप का आयोजन भारत में किया गया था. जिसमें भारत ने श्रीलंका को हराकर चैम्पियन बना था. इस बार भी भारत के लिये यह विश्व कप जीतने का सुनहरा मौका है.
ऐसे में चलिये देखते है भारत का विश्व कप में कैसा है जीत का रिकॉर्ड. पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व कप में भारत का जीत का रिकॉर्ड चौंकाने वाला है. भारत अभी तक विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 13 मैच खेले है जिसमें से सिर्फ 5 मैच में भारत को जीत मिली है और आठ मैचों में भारत को हार का सामना करना पड़ा है.
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पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक रिकॉर्डः
वनडे विश्व कप में भारत का रिकॉर्ड पाकिस्तान के खिलाफ 100 प्रतिशत जीत का है. भारत अभी तक विश्व कप के इतिहास में पाकिस्तान के खिलाफ एक भी मैच नहीं हारा है. पाकिस्तान के खिलाफ अभी तक खेले गये आठ मैचों में भारत ने जीत दर्ज की है. पाकिस्तान को अभी भी अपनी पहली जीत का इंतजार है.
अन्य टीमों के खिलाफ कैसा है रिकॉर्डः
वहीं वनडे विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के प्रदर्शन की बात करें तो भारत ने अब तक 9 मैच खेले है जिसमें से 4 में भारत को जीत और चार में हार का सामना करना पड़ा है वहीं एक मैच टाई रहा है.
श्रीलंका में खिलाफ भारत अभी तक 10 मैच खेला है जिसमें से 5 में जीत और चार में हार मिली है जबकि एक मैच बेनतीजा रहा है. वहीं दक्षिण अफ्रीका की बात करे तो भारत में पांच मैच खेले है जिसमें से 2 में जीत और 3 में हार का सामना करना पड़ा है.
विश्व कप में अब तक किन टीमों ने लिया है भागः
ODI World Cup 2023 की 9 टीमों में खिलाफ भारत का प्रदर्शनः
वनडे विश्व कप 2023 के लिए भारतीय टीमः
रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर, शुभमन गिल, सूर्यकुमार यादव, विराट कोहली, हार्दिक पंड्या, रविचंद्रन अश्विन, रवीन्द्र जड़ेजा, शार्दुल ठाकुर, ईशान किशन, केएल राहुल, जसप्रित बुमरा, कुलदीप यादव, मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज.
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ODI World Cup के इतिहास में कैसा है भारत का रिकॉर्ड?
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वनडे विश्व कप दो हज़ार तेईस का आगाज पाँच अक्टूबर से हो गया है. इस बार यह क्रिकेट महाकुम्भ भारत की मेजबानी में आयोजित किया जा रहा है. इस वर्ल्ड कप में भारत समेत दुनिया की दस टीमें भाग ले रही है. ऐसे में चलिये देखते है भारत का विश्व कप में कैसा है जीत का रिकॉर्ड. पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व कप में भारत का जीत का रिकॉर्ड चौंकाने वाला है. ODI World Cup दो हज़ार तेईस: वनडे विश्व कप दो हज़ार तेईस का आगाज पाँच अक्टूबर से हो गया है. इस बार यह क्रिकेट महाकुम्भ भारत की मेजबानी में आयोजित किया जा रहा है. इस वर्ल्ड कप में भारत समेत दुनिया की दस टीमें भाग ले रही है. इससे पहले वर्ष दो हज़ार ग्यारह में वनडे विश्व कप का आयोजन भारत में किया गया था. जिसमें भारत ने श्रीलंका को हराकर चैम्पियन बना था. इस बार भी भारत के लिये यह विश्व कप जीतने का सुनहरा मौका है. ऐसे में चलिये देखते है भारत का विश्व कप में कैसा है जीत का रिकॉर्ड. पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व कप में भारत का जीत का रिकॉर्ड चौंकाने वाला है. भारत अभी तक विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तेरह मैच खेले है जिसमें से सिर्फ पाँच मैच में भारत को जीत मिली है और आठ मैचों में भारत को हार का सामना करना पड़ा है. यह भी देखेंः पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक रिकॉर्डः वनडे विश्व कप में भारत का रिकॉर्ड पाकिस्तान के खिलाफ एक सौ प्रतिशत जीत का है. भारत अभी तक विश्व कप के इतिहास में पाकिस्तान के खिलाफ एक भी मैच नहीं हारा है. पाकिस्तान के खिलाफ अभी तक खेले गये आठ मैचों में भारत ने जीत दर्ज की है. पाकिस्तान को अभी भी अपनी पहली जीत का इंतजार है. अन्य टीमों के खिलाफ कैसा है रिकॉर्डः वहीं वनडे विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के प्रदर्शन की बात करें तो भारत ने अब तक नौ मैच खेले है जिसमें से चार में भारत को जीत और चार में हार का सामना करना पड़ा है वहीं एक मैच टाई रहा है. श्रीलंका में खिलाफ भारत अभी तक दस मैच खेला है जिसमें से पाँच में जीत और चार में हार मिली है जबकि एक मैच बेनतीजा रहा है. वहीं दक्षिण अफ्रीका की बात करे तो भारत में पांच मैच खेले है जिसमें से दो में जीत और तीन में हार का सामना करना पड़ा है. विश्व कप में अब तक किन टीमों ने लिया है भागः ODI World Cup दो हज़ार तेईस की नौ टीमों में खिलाफ भारत का प्रदर्शनः वनडे विश्व कप दो हज़ार तेईस के लिए भारतीय टीमः रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर, शुभमन गिल, सूर्यकुमार यादव, विराट कोहली, हार्दिक पंड्या, रविचंद्रन अश्विन, रवीन्द्र जड़ेजा, शार्दुल ठाकुर, ईशान किशन, केएल राहुल, जसप्रित बुमरा, कुलदीप यादव, मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज. यह भी पढ़ेंः ODI World Cup के इतिहास में कैसा है भारत का रिकॉर्ड?
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लंदन,10 दिसम्बर (आईएएनएस)। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने शनिवार को अपने इराकी समकक्ष हैदर अबादी को आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) पर जीत की बधाई दी। लेकिन उन्होंने साथ ही चेताया कि आईएस 'अभी तक हारा नहीं' है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार थेरेसा ने एक बयान में कहा कि आतंकवादी सीरिया की सीमा के पार से अभी भी इराक के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। उन्होंने इराकी प्रधानमंत्री द्वारा शुक्रवार को आतंकवादी समूह के खिलाफ लड़ाई की समाप्ति की घोषणा के बाद जारी एक बयान में यह बात कही।
अबादी ने घोषणा की कि इस्लामिक स्टेट का अब इराक के महत्वपूर्ण क्षेत्र में नियंत्रण नहीं रहा और आईएस के खिलाफ लड़ाई तीन साल से अधिक समय तक चले अभियानों के बाद खत्म हो गई।
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मे ने कहा, मैं प्रधानमंत्री अबादी और सभी इराकियों को इस ऐतिहासिक क्षण के लिए बधाई देती हूं। यह एक अधिक शांतिपूर्ण व समृद्ध देश के निर्माण की ओर एक नए अध्याय का संकेत है।
थेरेसा ने आगे कहा, हमें हालांकि इस बात पर स्पष्ट होना चाहिए कि दाएश अभी कमजोर हुआ है, लेकिन पूरी तरह हारा नहीं है। वह अभी भी सीरियाई सीमा के पार से इराक के लिए खतरा बना हुआ है।
इराकी सेना ने शनिवार को इराक के पश्चिमी रेगिस्तान से आईएस लड़ाकों को उनके नियंत्रण वाले आखिरी इलाकों से खदेड़ दिया।
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लंदन,दस दिसम्बर । ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने शनिवार को अपने इराकी समकक्ष हैदर अबादी को आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट पर जीत की बधाई दी। लेकिन उन्होंने साथ ही चेताया कि आईएस 'अभी तक हारा नहीं' है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार थेरेसा ने एक बयान में कहा कि आतंकवादी सीरिया की सीमा के पार से अभी भी इराक के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। उन्होंने इराकी प्रधानमंत्री द्वारा शुक्रवार को आतंकवादी समूह के खिलाफ लड़ाई की समाप्ति की घोषणा के बाद जारी एक बयान में यह बात कही। अबादी ने घोषणा की कि इस्लामिक स्टेट का अब इराक के महत्वपूर्ण क्षेत्र में नियंत्रण नहीं रहा और आईएस के खिलाफ लड़ाई तीन साल से अधिक समय तक चले अभियानों के बाद खत्म हो गई। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मे ने कहा, मैं प्रधानमंत्री अबादी और सभी इराकियों को इस ऐतिहासिक क्षण के लिए बधाई देती हूं। यह एक अधिक शांतिपूर्ण व समृद्ध देश के निर्माण की ओर एक नए अध्याय का संकेत है। थेरेसा ने आगे कहा, हमें हालांकि इस बात पर स्पष्ट होना चाहिए कि दाएश अभी कमजोर हुआ है, लेकिन पूरी तरह हारा नहीं है। वह अभी भी सीरियाई सीमा के पार से इराक के लिए खतरा बना हुआ है। इराकी सेना ने शनिवार को इराक के पश्चिमी रेगिस्तान से आईएस लड़ाकों को उनके नियंत्रण वाले आखिरी इलाकों से खदेड़ दिया।
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कहते हैं मौत कभी भी किसी भी रूप में आकर हमारे प्राणों की बलि ले सकती है और इस कथन को हकीकत में बदला 02 दिसंबर, 1984 की उस घटना ने जिसने दुनिया को हिलाकर रख दिया. देश के इतिहास की सबसे दर्दनाक और भयानक घटना जिसने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया वह घटी थी भोपाल में.
02 दिसंबर, 1984 को घटित भोपाल गैस त्रासदी भारत के इतिहास में वह काला अध्याय है जिसे शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा. भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड प्लांट में 2 दिसंबर को आधी रात में मिथाइल आइसोनेट (एमआईसी) के रिसाव के कारण हजारों की तादाद में लोगों की मृत्यु हो गई. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दुर्घटना के कुछ ही घंटों के भीतर तीन हज़ार लोग मारे गए थे. लेकिन हमेशा की तरह यह सिर्फ सरकारी आंकड़ा था और मरने वाली की संख्या और भी ज्यादा थी.
घोर लापरवाही के कारण गैस कार्बाइड कारखाने से मिथाइल आइसोसायनाइड गैस का रिसाव हुआ था. मिथाइल आइसोसायनाइड के रिसाव ने न सिर्फ फैक्टरी के आसपास की आबादी को अपने चपेट मे लिया था, बल्कि हवा के झोकों के साथ दूर-दूर तक निवास करने वाली आबादी तक अपना कहर फैलाया था. गैस रिसाव से सुरक्षा का इंतजाम तक नहीं था. दो दिन तक फैक्टरी से जहरीली गैसों का रिसाव होता रहा. फैक्टरी के अधिकारी गैस रिसाव को रोकने के इंतजाम करने की जगह खुद भाग खड़े हुए थे. गैस का रिसाव तो कई दिन पहले से ही हो रहा था. फैक्टरी के आसपास रहने वाली आबादी कई दिनों से बैचेनी महसूस कर रही थी. इतना ही नहीं, बल्कि उल्टी और जलन जैसी बीमारी भी घातक तौर पर फैल चुकी थी. उदासीन और लापरवाह कंपनी प्रबंधन ने इस तरह मिथाइल गैस आधारित बीमारी पर गौर ही नहीं किया था.
मिथाइल आइसोसायनाइड गैस की चपेट में आने से करीब 15 हजार लोगों की मौत हुई थी. पांच लाख से अधिक लोग घायल हुए थे. जहरीली गैस के चपेट में आने से सैकड़ों लोगों की बाद में मौत हो गई. यही नहीं, आज भी हजारों पीड़ित ऐसे हैं, जो जहरीली गैस के प्रभाव से मुक्त नहीं हैं. भोपाल गैस कार्बाइड के आसपास की भूमि जहरीली हो गई है.
सबसे बड़ी बात यह है कि भोपाल गैस कांड के बाद में जन्म लेने वाली पीढ़ी भी मिथाइल गैस के प्रभाव से पीड़ित है और उसे कई खतरनाक बीमारियां विरासत में मिली हैं. इस हादसे ने देश को झकझोर कर रख दिया. लेकिन इससे भी दर्दनाक था इस मामले में सरकार का रवैया. यूनियन कार्बाइड के मालिक वारेन एंडरसन को बचाने की सरकार ने पुरजोर कोशिश की. किसी भी अनहोनी से बचने के लिए उसे देश से बाहर जाने का रास्ता दिया गया जिसके बाद से वह कभी भारत के हाथ नहीं लगा.
और तो और न्यायालय ने भी अपने फैसले से उन तमाम लोगों की मौत का मजाक बनाया जिसमें उसने सात दोषियों को दो साल की सजा और एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया लेकिन सजा सुनाने के कुछ ही देर बाद सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया.
मुआवजे के नाम पर धोखाधड़ी हुई है. इस धोखाधड़ी में भारत सरकार और मध्य प्रदेश की तत्कालीन सरकार के हाथ काले हैं. यूनियन कार्बाइड कंपनी के साथ सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता में मुआवजे के लिए एक समझौता हुआ था. समझौते में एक तरह से भोपाल गैस कांड के पीड़ितों के साथ अन्याय ही नहीं हुआ था, बल्कि उनके संघर्ष और भविष्य पर भी नकेल डाली गई थी. जबकि यूनियन कार्बाइड को कानूनी उलझन से मुक्त कराने जैसी शर्त को माना गया था.
दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी और 15 हजार से ज्यादा जानें छीनने वाली व पांच लाख से ज्यादा लोगों को अपने घातक जद में लेने वाली इस नरसंहारक घटना की मुआवजा राशि मात्र 713 करोड़ रुपये. भारत सरकार की अति रुचि और यूनियन गैस कार्बाइड कारपोरेशन के प्रति अतिरिक्त मोह ने गैस पीड़ितों की संभावनाओं का गला घोंट दिया.
सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस नरसंहारक घटना में सैकड़ों लोग ऐसे मारे गए थे, जिनके पास न तो कोई रिहायशी प्रमाण थे और न ही नियमित पते का पंजीकरण था. ऐसे गरीब हताहतों के साथ न्याय नहीं हुआ. उन्हें मुआवजा भी नहीं मिला. सरकारी कामकाज के झंझटों के कारण भी मुआवजे की राशि दुर्बल और असहाय लोगों तक नहीं पहुंची.
देश में ऐसी घटनाओं के प्रति जितनी मानवीय संवेदनाएं होती हैं उतनी सरकारी राहत नहीं मिल पाती. इस घटना ने कई की आंखों को तो गीला किया पर सरकार ने उन आंसुओं को और भी बढ़ा दिया. यह इस देश की हकीकत है कि यहां मौत जिंदगी से सस्ती है. किसी आपदा या घटना में मरने वाले को सरकार चार-पांच लाख देकर अपना दायित्व निभा देती है और यह भूल जाती है कि उस इंसान की जिंदगी उसके घरवालों के लिए कितनी महत्वपूर्ण थी.
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कहते हैं मौत कभी भी किसी भी रूप में आकर हमारे प्राणों की बलि ले सकती है और इस कथन को हकीकत में बदला दो दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ चौरासी की उस घटना ने जिसने दुनिया को हिलाकर रख दिया. देश के इतिहास की सबसे दर्दनाक और भयानक घटना जिसने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया वह घटी थी भोपाल में. दो दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ चौरासी को घटित भोपाल गैस त्रासदी भारत के इतिहास में वह काला अध्याय है जिसे शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा. भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड प्लांट में दो दिसंबर को आधी रात में मिथाइल आइसोनेट के रिसाव के कारण हजारों की तादाद में लोगों की मृत्यु हो गई. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दुर्घटना के कुछ ही घंटों के भीतर तीन हज़ार लोग मारे गए थे. लेकिन हमेशा की तरह यह सिर्फ सरकारी आंकड़ा था और मरने वाली की संख्या और भी ज्यादा थी. घोर लापरवाही के कारण गैस कार्बाइड कारखाने से मिथाइल आइसोसायनाइड गैस का रिसाव हुआ था. मिथाइल आइसोसायनाइड के रिसाव ने न सिर्फ फैक्टरी के आसपास की आबादी को अपने चपेट मे लिया था, बल्कि हवा के झोकों के साथ दूर-दूर तक निवास करने वाली आबादी तक अपना कहर फैलाया था. गैस रिसाव से सुरक्षा का इंतजाम तक नहीं था. दो दिन तक फैक्टरी से जहरीली गैसों का रिसाव होता रहा. फैक्टरी के अधिकारी गैस रिसाव को रोकने के इंतजाम करने की जगह खुद भाग खड़े हुए थे. गैस का रिसाव तो कई दिन पहले से ही हो रहा था. फैक्टरी के आसपास रहने वाली आबादी कई दिनों से बैचेनी महसूस कर रही थी. इतना ही नहीं, बल्कि उल्टी और जलन जैसी बीमारी भी घातक तौर पर फैल चुकी थी. उदासीन और लापरवाह कंपनी प्रबंधन ने इस तरह मिथाइल गैस आधारित बीमारी पर गौर ही नहीं किया था. मिथाइल आइसोसायनाइड गैस की चपेट में आने से करीब पंद्रह हजार लोगों की मौत हुई थी. पांच लाख से अधिक लोग घायल हुए थे. जहरीली गैस के चपेट में आने से सैकड़ों लोगों की बाद में मौत हो गई. यही नहीं, आज भी हजारों पीड़ित ऐसे हैं, जो जहरीली गैस के प्रभाव से मुक्त नहीं हैं. भोपाल गैस कार्बाइड के आसपास की भूमि जहरीली हो गई है. सबसे बड़ी बात यह है कि भोपाल गैस कांड के बाद में जन्म लेने वाली पीढ़ी भी मिथाइल गैस के प्रभाव से पीड़ित है और उसे कई खतरनाक बीमारियां विरासत में मिली हैं. इस हादसे ने देश को झकझोर कर रख दिया. लेकिन इससे भी दर्दनाक था इस मामले में सरकार का रवैया. यूनियन कार्बाइड के मालिक वारेन एंडरसन को बचाने की सरकार ने पुरजोर कोशिश की. किसी भी अनहोनी से बचने के लिए उसे देश से बाहर जाने का रास्ता दिया गया जिसके बाद से वह कभी भारत के हाथ नहीं लगा. और तो और न्यायालय ने भी अपने फैसले से उन तमाम लोगों की मौत का मजाक बनाया जिसमें उसने सात दोषियों को दो साल की सजा और एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया लेकिन सजा सुनाने के कुछ ही देर बाद सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया. मुआवजे के नाम पर धोखाधड़ी हुई है. इस धोखाधड़ी में भारत सरकार और मध्य प्रदेश की तत्कालीन सरकार के हाथ काले हैं. यूनियन कार्बाइड कंपनी के साथ सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता में मुआवजे के लिए एक समझौता हुआ था. समझौते में एक तरह से भोपाल गैस कांड के पीड़ितों के साथ अन्याय ही नहीं हुआ था, बल्कि उनके संघर्ष और भविष्य पर भी नकेल डाली गई थी. जबकि यूनियन कार्बाइड को कानूनी उलझन से मुक्त कराने जैसी शर्त को माना गया था. दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी और पंद्रह हजार से ज्यादा जानें छीनने वाली व पांच लाख से ज्यादा लोगों को अपने घातक जद में लेने वाली इस नरसंहारक घटना की मुआवजा राशि मात्र सात सौ तेरह करोड़ रुपये. भारत सरकार की अति रुचि और यूनियन गैस कार्बाइड कारपोरेशन के प्रति अतिरिक्त मोह ने गैस पीड़ितों की संभावनाओं का गला घोंट दिया. सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस नरसंहारक घटना में सैकड़ों लोग ऐसे मारे गए थे, जिनके पास न तो कोई रिहायशी प्रमाण थे और न ही नियमित पते का पंजीकरण था. ऐसे गरीब हताहतों के साथ न्याय नहीं हुआ. उन्हें मुआवजा भी नहीं मिला. सरकारी कामकाज के झंझटों के कारण भी मुआवजे की राशि दुर्बल और असहाय लोगों तक नहीं पहुंची. देश में ऐसी घटनाओं के प्रति जितनी मानवीय संवेदनाएं होती हैं उतनी सरकारी राहत नहीं मिल पाती. इस घटना ने कई की आंखों को तो गीला किया पर सरकार ने उन आंसुओं को और भी बढ़ा दिया. यह इस देश की हकीकत है कि यहां मौत जिंदगी से सस्ती है. किसी आपदा या घटना में मरने वाले को सरकार चार-पांच लाख देकर अपना दायित्व निभा देती है और यह भूल जाती है कि उस इंसान की जिंदगी उसके घरवालों के लिए कितनी महत्वपूर्ण थी.
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अमरावती प्रतिनिधि/दि. २३ - अमरावती जिला स्वाराज्य ट्रस्ट संगठना की ओर से २० सितंबर को विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था. संगठना के जिलाध्यक्ष आकाश कविठकर व उपाध्यक्ष धीरज मांडवकर के मार्गदर्शन में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए थे. जिसमें प्रमुख रुप से भव्य जांच शिबिर का आयोजन कल्याणनगर में हनुमान मंदिर के पास किया गया था. रक्तजांच शिबिर में प्रमुख्य वक्ता के रुप में डॉ. प्रजापति ऑनलाइन उपस्थित थे. उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के काल में रक्त का अधिक महत्व है और उन्होंने रक्तपेशी किस तरह बढायी जाए इस पर अपना मार्गदर्शन किया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष आकाश कविठकर ने की थी. तथा प्रमुख अतिथि के रुप में धीरज मांडवकर उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन अभिजीत कावलकर ने किया. इस समय शाला, विद्यालय व महाविद्यालय के विद्यार्थी तथा कल्याण नगर के रहवासी उपस्थित थे. रक्त जांच शिबिर के दौरान १०० लोगों ने अपने ब्लड ग्रुप की जांच की और ऑनलाइन रिपोर्ट ट्रस्ट को भिजवायी. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सिद्धार्थ ठाकरे, आदर्श गंजीवाले, राहुल कडूकार, जयेश वाढाई, तुषार वाढाई, सूरज इंदूरकर, स्वप्रील अंबाडकर, विशाल वानखडे, अभिजीतराव,शेखर सयाम ने अथक प्रयास किए.
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अमरावती प्रतिनिधि/दि. तेईस - अमरावती जिला स्वाराज्य ट्रस्ट संगठना की ओर से बीस सितंबर को विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था. संगठना के जिलाध्यक्ष आकाश कविठकर व उपाध्यक्ष धीरज मांडवकर के मार्गदर्शन में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए थे. जिसमें प्रमुख रुप से भव्य जांच शिबिर का आयोजन कल्याणनगर में हनुमान मंदिर के पास किया गया था. रक्तजांच शिबिर में प्रमुख्य वक्ता के रुप में डॉ. प्रजापति ऑनलाइन उपस्थित थे. उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के काल में रक्त का अधिक महत्व है और उन्होंने रक्तपेशी किस तरह बढायी जाए इस पर अपना मार्गदर्शन किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष आकाश कविठकर ने की थी. तथा प्रमुख अतिथि के रुप में धीरज मांडवकर उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन अभिजीत कावलकर ने किया. इस समय शाला, विद्यालय व महाविद्यालय के विद्यार्थी तथा कल्याण नगर के रहवासी उपस्थित थे. रक्त जांच शिबिर के दौरान एक सौ लोगों ने अपने ब्लड ग्रुप की जांच की और ऑनलाइन रिपोर्ट ट्रस्ट को भिजवायी. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सिद्धार्थ ठाकरे, आदर्श गंजीवाले, राहुल कडूकार, जयेश वाढाई, तुषार वाढाई, सूरज इंदूरकर, स्वप्रील अंबाडकर, विशाल वानखडे, अभिजीतराव,शेखर सयाम ने अथक प्रयास किए.
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सशस्त्र बलों के बीच मोटे अनाज के उपयोग और स्वस्थ भोजन परम्पराओं को बढ़ावा देने और सुरक्षित व पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की उपस्थिति में रक्षा मंत्रालय (एमओडी) और खाद्य सुरक्षा तथा भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने आज यहां एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। दोनों मंत्रियों ने श्री अन्न (मोटे अनाज) की खपत और इसके स्वास्थ्य लाभों को बढ़ावा देने के लिए 'हेल्दी रेसिपीज़ फॉर डिफेंस' नामक पुस्तक का भी विमोचन किया।
एमओयू पर रक्षा मंत्रालय की ओर से महानिदेशक (आपूर्ति और परिवहन) लेफ्टिनेंट जनरल प्रीत मोहिंदरा सिंह और सीईओ, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) श्री जी कमला वर्धन राव ने हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य कर्मियों के बीच आहार विविधता और मोटे अनाज-आधारित खाद्य उत्पादों के पोषण संबंधी लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करना है। एमओयू रक्षा मंत्रालय के तहत मेस, कैंटीन और अन्य खाद्य दुकानों में मोटे अनाज आधारित व्यंजन सूची की शुरुआत का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
यह सहयोग खाद्य संरक्षा और मानक कानून 2006 के अनुसार खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता पर मेस, सशस्त्र बलों की कैंटीन और अन्य खाद्य दुकानों के खाद्य संचालकों और रसोइयों का प्रशिक्षण भी सुनिश्चित करेगा। यह सशस्त्र बलों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक साझी प्रतिबद्धता का प्रतीक है ताकि वे राष्ट्र के प्रति अपनी सेवा में दृढ़ता और लचीलापन बनाये रखने में सक्षम बने रहें। समझौता ज्ञापन सशस्त्र बलों के परिवारों और बड़े पैमाने पर समुदाय को पौष्टिक आहार अपनाने, स्वस्थ भोजन विकल्प चुनने और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
एफएसएसएआई द्वारा तैयार पुस्तक 'हेल्दी रेसिपीज फॉर डिफेंस' में मोटे अनाज आधारित व्यंजनों की एक श्रृंखला शामिल है। यह रक्षा मंत्रालय के तहत विभिन्न कैंटीनों और खाद्य दुकानों के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम करेगा। रक्षाकर्मियों के सामने कठिन इलाकों में आने वाली चुनौतियों और विविध जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए, आहार में विविधता का बेहद महत्व है। मोटे अनाज अपने पोषण मूल्य के लिए जाने जाते हैं और एक संतुलित और विविध आहार में योगदान दे सकते हैं।
इस अवसर पर थल सेना अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव श्री गिरिधर अरमने, केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव श्री राजेश भूषण, एफएसएसएआई के सीईओ श्री जी कमला वर्धन राव और रक्षा मत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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Posted On: सशस्त्र बलों के बीच मोटे अनाज के उपयोग और स्वस्थ भोजन परम्पराओं को बढ़ावा देने और सुरक्षित व पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की उपस्थिति में रक्षा मंत्रालय और खाद्य सुरक्षा तथा भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने आज यहां एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। दोनों मंत्रियों ने श्री अन्न की खपत और इसके स्वास्थ्य लाभों को बढ़ावा देने के लिए 'हेल्दी रेसिपीज़ फॉर डिफेंस' नामक पुस्तक का भी विमोचन किया। एमओयू पर रक्षा मंत्रालय की ओर से महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल प्रीत मोहिंदरा सिंह और सीईओ, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण श्री जी कमला वर्धन राव ने हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य कर्मियों के बीच आहार विविधता और मोटे अनाज-आधारित खाद्य उत्पादों के पोषण संबंधी लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करना है। एमओयू रक्षा मंत्रालय के तहत मेस, कैंटीन और अन्य खाद्य दुकानों में मोटे अनाज आधारित व्यंजन सूची की शुरुआत का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। यह सहयोग खाद्य संरक्षा और मानक कानून दो हज़ार छः के अनुसार खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता पर मेस, सशस्त्र बलों की कैंटीन और अन्य खाद्य दुकानों के खाद्य संचालकों और रसोइयों का प्रशिक्षण भी सुनिश्चित करेगा। यह सशस्त्र बलों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक साझी प्रतिबद्धता का प्रतीक है ताकि वे राष्ट्र के प्रति अपनी सेवा में दृढ़ता और लचीलापन बनाये रखने में सक्षम बने रहें। समझौता ज्ञापन सशस्त्र बलों के परिवारों और बड़े पैमाने पर समुदाय को पौष्टिक आहार अपनाने, स्वस्थ भोजन विकल्प चुनने और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा। एफएसएसएआई द्वारा तैयार पुस्तक 'हेल्दी रेसिपीज फॉर डिफेंस' में मोटे अनाज आधारित व्यंजनों की एक श्रृंखला शामिल है। यह रक्षा मंत्रालय के तहत विभिन्न कैंटीनों और खाद्य दुकानों के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम करेगा। रक्षाकर्मियों के सामने कठिन इलाकों में आने वाली चुनौतियों और विविध जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए, आहार में विविधता का बेहद महत्व है। मोटे अनाज अपने पोषण मूल्य के लिए जाने जाते हैं और एक संतुलित और विविध आहार में योगदान दे सकते हैं। इस अवसर पर थल सेना अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव श्री गिरिधर अरमने, केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव श्री राजेश भूषण, एफएसएसएआई के सीईओ श्री जी कमला वर्धन राव और रक्षा मत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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नहीं किया था बल्कि वह एक शहर से दूसरे शहर की तरफ आए थे । यद्यपि यह दूसरा शहर पहले शहर की अपेक्षा जिंदगी के अनेक मैदानों में भिन्न था और अपेक्षाकृत मक्का से कुछ छोटा भी था, लेकिन वहां का जनजीवन मक्का की अपेक्षा अधिक पेचीदा था और अल्लाह के रसूल सल्ल० को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ा वह नाना प्रकार की थीं। क्योंकि वहां अनेक धर्म, जाति और संस्कृति के लोग रहते थे जिन पर क़ाबू पाना और मदीना वासियों को एक आस्था और एक दीन के रंग में रंगने का कठिन काम अल्लाह का कोई ऐसा रसूल ही कर सकता था जिसे अल्लाह का समर्थन हासिल हो और जिसे अल्लाह ने सूझ-बूझ दूरदृष्टि, निर्णय शक्ति और इंसानियत के बिखरे हुए ढेर को जमा करने तथा परस्पर विरोधी शक्तियों व विचारधाराओं को सिसकती मानवता को फिर से पुख्ता करने के काम में एक दूसरे का पूरक और मददगार बनाने की अपार क्षमता प्रदान की थी, और जो एक मनमोहक व्यक्तित्व का मालिक था। कुर्बान पाक में आता है।
अनुवादः- "वही है जिसने अपनी मदद और मुसलमानों के ज़रिए आपकी पुश्तपनाही (रक्षा) कर और उनके दिल मिला दिए कि अगर आप दुनिया की सारी दौलत भी खर्च कर देते तब भी उनके दिलों को नहीं जोड सकते थे, लेकिन अल्लाह ही ने उनमें और सहमति पैदा कर दी । वह ग़ालिब ( सर्व शक्तिमान ) और हिकमत वाला है। ( सूरः अन्फाल - 62-63)
अध्याय दस
मदीना में
मदीना में अन्सार को यह सूचमा हो गई कि अल्लाह के रसूल सल्ल0 मक्का से प्रस्थान कर चुके हैं इसलिए वह रोज़ाना फज्र की नमाज़ के बाद शहर के आखिरी किनारे पर पहुंच जाते और अल्लाह के रसूल सल्ल0 की राह देखते रहते और तब तक वहां से न हटते जब तक धूप बहुत तेज़ व बर्दाश्त के बाहर न हो जाती और वह छाया में जाने के लिए मजबूर न होते । यह बहुत गर्मी का दौर था ।
अल्लाह के रसूल सल्ल० जिस समय मदीना पहुंचे उस समय अन्सार इन्तेज़ार के बाद अपने घरों में जा चुके थे। सबसे पहले आप पर एक यहूदी की नज़र पड़ी। आपको देखकर उसने ज़ोर से आवाज़ लगाई और अन्सार को आपके आगमन की सूचना दी। अन्सार यह सूचना सुनते ही दौड़ पड़े। उन्होंने देखा कि आप एक खजूर के पेड़ के नीचे विराजमान हैं। आपके साथ हज़रत अबुबक्र रज़ी० थे जो आप ही की अवस्था के मालूम हो रहे थे। इनमें से अधिकांश ने आपको इससे पहले नहीं देखा था। इस लिए इन लोगों ने आप दोनों को घेर लिया और भीड बढ़ने लगी। हज़रत अबुबक्र रज़ी० ने महसूस किया कि लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इनमें मालिक कौन है और सेवक कौन ? इस लिए उन्होंने एक चादर लेकर आप सल्ल० के सर पर छाया कर दी। इस तरह यह शंका ख़त्म हो गई ।
लगभग पांच सौ अन्सार ने आपका स्वागत किया और निवेदन किया हुजूर! तशरीफ ले चलें । आप हर तरह से सुरक्षित हैं। हम आपकी हर बात का पालन करेंगे। अल्लाह के रसूल सल्ल0 और हज़रत अबुबक्र रज़ी० इस काफिले के झुरमुट में चले। इधर पूरा मदीना आपके स्वागत के लिए निकल खड़ा हुआ। औरतें मकान की छतों से नए काफिले को देख रही थीं और एक दूसरे से कहती थीं कि देखो इनमें अल्लाह के रसूल सल्ल० कौन हैं? हज़रत अनस रज़ी० कहते हैं कि हमने फिर कभी
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नहीं किया था बल्कि वह एक शहर से दूसरे शहर की तरफ आए थे । यद्यपि यह दूसरा शहर पहले शहर की अपेक्षा जिंदगी के अनेक मैदानों में भिन्न था और अपेक्षाकृत मक्का से कुछ छोटा भी था, लेकिन वहां का जनजीवन मक्का की अपेक्षा अधिक पेचीदा था और अल्लाह के रसूल सल्लशून्य को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ा वह नाना प्रकार की थीं। क्योंकि वहां अनेक धर्म, जाति और संस्कृति के लोग रहते थे जिन पर क़ाबू पाना और मदीना वासियों को एक आस्था और एक दीन के रंग में रंगने का कठिन काम अल्लाह का कोई ऐसा रसूल ही कर सकता था जिसे अल्लाह का समर्थन हासिल हो और जिसे अल्लाह ने सूझ-बूझ दूरदृष्टि, निर्णय शक्ति और इंसानियत के बिखरे हुए ढेर को जमा करने तथा परस्पर विरोधी शक्तियों व विचारधाराओं को सिसकती मानवता को फिर से पुख्ता करने के काम में एक दूसरे का पूरक और मददगार बनाने की अपार क्षमता प्रदान की थी, और जो एक मनमोहक व्यक्तित्व का मालिक था। कुर्बान पाक में आता है। अनुवादः- "वही है जिसने अपनी मदद और मुसलमानों के ज़रिए आपकी पुश्तपनाही कर और उनके दिल मिला दिए कि अगर आप दुनिया की सारी दौलत भी खर्च कर देते तब भी उनके दिलों को नहीं जोड सकते थे, लेकिन अल्लाह ही ने उनमें और सहमति पैदा कर दी । वह ग़ालिब और हिकमत वाला है। अध्याय दस मदीना में मदीना में अन्सार को यह सूचमा हो गई कि अल्लाह के रसूल सल्लशून्य मक्का से प्रस्थान कर चुके हैं इसलिए वह रोज़ाना फज्र की नमाज़ के बाद शहर के आखिरी किनारे पर पहुंच जाते और अल्लाह के रसूल सल्लशून्य की राह देखते रहते और तब तक वहां से न हटते जब तक धूप बहुत तेज़ व बर्दाश्त के बाहर न हो जाती और वह छाया में जाने के लिए मजबूर न होते । यह बहुत गर्मी का दौर था । अल्लाह के रसूल सल्लशून्य जिस समय मदीना पहुंचे उस समय अन्सार इन्तेज़ार के बाद अपने घरों में जा चुके थे। सबसे पहले आप पर एक यहूदी की नज़र पड़ी। आपको देखकर उसने ज़ोर से आवाज़ लगाई और अन्सार को आपके आगमन की सूचना दी। अन्सार यह सूचना सुनते ही दौड़ पड़े। उन्होंने देखा कि आप एक खजूर के पेड़ के नीचे विराजमान हैं। आपके साथ हज़रत अबुबक्र रज़ीशून्य थे जो आप ही की अवस्था के मालूम हो रहे थे। इनमें से अधिकांश ने आपको इससे पहले नहीं देखा था। इस लिए इन लोगों ने आप दोनों को घेर लिया और भीड बढ़ने लगी। हज़रत अबुबक्र रज़ीशून्य ने महसूस किया कि लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इनमें मालिक कौन है और सेवक कौन ? इस लिए उन्होंने एक चादर लेकर आप सल्लशून्य के सर पर छाया कर दी। इस तरह यह शंका ख़त्म हो गई । लगभग पांच सौ अन्सार ने आपका स्वागत किया और निवेदन किया हुजूर! तशरीफ ले चलें । आप हर तरह से सुरक्षित हैं। हम आपकी हर बात का पालन करेंगे। अल्लाह के रसूल सल्लशून्य और हज़रत अबुबक्र रज़ीशून्य इस काफिले के झुरमुट में चले। इधर पूरा मदीना आपके स्वागत के लिए निकल खड़ा हुआ। औरतें मकान की छतों से नए काफिले को देख रही थीं और एक दूसरे से कहती थीं कि देखो इनमें अल्लाह के रसूल सल्लशून्य कौन हैं? हज़रत अनस रज़ीशून्य कहते हैं कि हमने फिर कभी
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Philips TV ने नए MiniLED TV और OLED TV को पेश किया है। इस साल के मध्य तक ये टीवी उपलब्ध हो जाएंगा। यहां ये 4-साइडिड एम्बिलाइट के साथ काफी दमदार फीचर्स से लैस होंगे।
दुनिया की जानी-मानी इलेक्ट्रोनिक कंपनी Philips TV ने MiniLED TV और OLED TV टेक्नोलॉजी को पेश किया है। कंपनी ने इस साल दो मिनी एलईडी टीवी को लॉन्च करने की घोषणा की है। इन मिनी एलईडी टीवी 9636 का साइज 65 इंच और 9506 का साइज 75 इंच होगा। यह कंपनी द्वारा पेश किए जाने वाला पहले मिनी एलईडी होगा। यहां हम आपको बता रहे हैं कि इन नए टीवी के फीचर्स और स्पेशिफिकेशन कैसे हैं।
MiniLED एक बैकलाइट टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है जो कि पुराने LCD-LED टीवी के मुकाबले ज्यादा ब्राइटनेस कंट्रोल और दमदार कंट्रास्ट के लिए हजारों छोटे LED का इस्तेमाल करती है। इस टेक्नोलॉजी में OLED या MicroLED पैनल्स के पिक्सल नहीं मिलते हैं। यूजर्स के लिए LG की नई QNED रेंज और बेहतरीन Samsung टीवी दोनों में MiniLED टेक्नोलॉजी इस साल में मिलेगी।
टेक्नोलॉजी की बात करें तो Philips के इन दोनों टीवी 9636 और 9506 में Philips की 5वीं जेनरेशन का P5 पिक्चर प्रोसेसर यूजर होगा। इनका इस्तेमाल टीवी निर्माता OLED मॉडल में भी कर सकते हैं। लेटेस्ट P5 चिप को एंटी-बर्न-इन टेक्नोलॉजी के लिए एक नई फिल्म डिटेक्शन कैटेगरी के तहत पिक्चर सेटिंग की जांच करने के लिए अपग्रेड किया गया है।
पिछले साल पेश किए गए 805/855 मॉडल को लोगों द्वारा काफी पसंद किए जाने के बाद Philips ने 2 नए OLED टीवी 806 और 856 को पेश किया है। अगर आकार की बात करें तो 806 टीवी 48-इंच, 55-इंच, 65-इंच और 77-इंच में आएगा, वहीं 856 की आकार की बात करें तो यह सिर्फ 55-इंच और 65-इंच के साइज में ही उपलब्ध होगा।
इन सभी MiniLED और OLEDटीवी में 4-साइडिड एम्बिलाइट दी जाएंगी। इसके जरिए यूजर्स Philips की यूनिक कलर प्रोजेक्शन सिस्टम का बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा 55-इंच और 65-इंच आकार वाले 9206 टीवी और 43 से 75 इंच साइज वाले 8506 टीवी में कई अन्य स्टेंडर्ड एम्बिलाइट टीवी मिल सकते हैं।
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Philips TV ने नए MiniLED TV और OLED TV को पेश किया है। इस साल के मध्य तक ये टीवी उपलब्ध हो जाएंगा। यहां ये चार-साइडिड एम्बिलाइट के साथ काफी दमदार फीचर्स से लैस होंगे। दुनिया की जानी-मानी इलेक्ट्रोनिक कंपनी Philips TV ने MiniLED TV और OLED TV टेक्नोलॉजी को पेश किया है। कंपनी ने इस साल दो मिनी एलईडी टीवी को लॉन्च करने की घोषणा की है। इन मिनी एलईडी टीवी नौ हज़ार छः सौ छत्तीस का साइज पैंसठ इंच और नौ हज़ार पाँच सौ छः का साइज पचहत्तर इंच होगा। यह कंपनी द्वारा पेश किए जाने वाला पहले मिनी एलईडी होगा। यहां हम आपको बता रहे हैं कि इन नए टीवी के फीचर्स और स्पेशिफिकेशन कैसे हैं। MiniLED एक बैकलाइट टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है जो कि पुराने LCD-LED टीवी के मुकाबले ज्यादा ब्राइटनेस कंट्रोल और दमदार कंट्रास्ट के लिए हजारों छोटे LED का इस्तेमाल करती है। इस टेक्नोलॉजी में OLED या MicroLED पैनल्स के पिक्सल नहीं मिलते हैं। यूजर्स के लिए LG की नई QNED रेंज और बेहतरीन Samsung टीवी दोनों में MiniLED टेक्नोलॉजी इस साल में मिलेगी। टेक्नोलॉजी की बात करें तो Philips के इन दोनों टीवी नौ हज़ार छः सौ छत्तीस और नौ हज़ार पाँच सौ छः में Philips की पाँचवीं जेनरेशन का Pपाँच पिक्चर प्रोसेसर यूजर होगा। इनका इस्तेमाल टीवी निर्माता OLED मॉडल में भी कर सकते हैं। लेटेस्ट Pपाँच चिप को एंटी-बर्न-इन टेक्नोलॉजी के लिए एक नई फिल्म डिटेक्शन कैटेगरी के तहत पिक्चर सेटिंग की जांच करने के लिए अपग्रेड किया गया है। पिछले साल पेश किए गए आठ सौ पाँच/आठ सौ पचपन मॉडल को लोगों द्वारा काफी पसंद किए जाने के बाद Philips ने दो नए OLED टीवी आठ सौ छः और आठ सौ छप्पन को पेश किया है। अगर आकार की बात करें तो आठ सौ छः टीवी अड़तालीस-इंच, पचपन-इंच, पैंसठ-इंच और सतहत्तर-इंच में आएगा, वहीं आठ सौ छप्पन की आकार की बात करें तो यह सिर्फ पचपन-इंच और पैंसठ-इंच के साइज में ही उपलब्ध होगा। इन सभी MiniLED और OLEDटीवी में चार-साइडिड एम्बिलाइट दी जाएंगी। इसके जरिए यूजर्स Philips की यूनिक कलर प्रोजेक्शन सिस्टम का बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा पचपन-इंच और पैंसठ-इंच आकार वाले नौ हज़ार दो सौ छः टीवी और तैंतालीस से पचहत्तर इंच साइज वाले आठ हज़ार पाँच सौ छः टीवी में कई अन्य स्टेंडर्ड एम्बिलाइट टीवी मिल सकते हैं।
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बोकारोः बोकारो जिला के पेटरवार प्रखंड अंतर्गत खेतको पंचायत गुड़ी बकरी टोला के लालदेव यादव लगभग 44 वर्ष सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई है।
जानकी नामक बस रांची से चलकर दातू होते हुए खेतको पंचायत से गुजरते हुए बोकारो थर्मल जाती है।
रोज की तरह आज भी यह बस अपने समय से ही जा रही थी, तभी खेतको दामोदर पुल मैं खेतको निवासी लालदेव यादव अपने मोटरसाइकिल से घर की ओर आ रहे थे इसी दरमियान जानकी बस और मोटरसाइकिल में जोरदार टक्कर हो गई। जिसमे बाइक सवार लालदेव यादव बुरी तरह घायल हो गए सिर पर लगी गम्भीर चोट की बजह से मौके पर ही उसकी मौत है गई।
दुर्घटना के बस चालक बाद लेकर भागने का प्रयास भी किया लेकिन स्थानीय लोगो द्वारा उसे पीछा कर पकड़ लिया। बस चालक मौके पर बस छोड़ भागने में सफल रहा। इस दुर्घटना के बाद जमा भीड़ ने बस को ज़रूर कब्जे में लिया लेकिन बस में सवार किसी भी पैसेंजर को या बस कोई नुकसान नही पहुँचाया है।
वही घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुँची पेटरवार पुलिस शव कब्जे में ले मामले की कर्यवाई में जुटी है।
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बोकारोः बोकारो जिला के पेटरवार प्रखंड अंतर्गत खेतको पंचायत गुड़ी बकरी टोला के लालदेव यादव लगभग चौंतालीस वर्ष सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई है। जानकी नामक बस रांची से चलकर दातू होते हुए खेतको पंचायत से गुजरते हुए बोकारो थर्मल जाती है। रोज की तरह आज भी यह बस अपने समय से ही जा रही थी, तभी खेतको दामोदर पुल मैं खेतको निवासी लालदेव यादव अपने मोटरसाइकिल से घर की ओर आ रहे थे इसी दरमियान जानकी बस और मोटरसाइकिल में जोरदार टक्कर हो गई। जिसमे बाइक सवार लालदेव यादव बुरी तरह घायल हो गए सिर पर लगी गम्भीर चोट की बजह से मौके पर ही उसकी मौत है गई। दुर्घटना के बस चालक बाद लेकर भागने का प्रयास भी किया लेकिन स्थानीय लोगो द्वारा उसे पीछा कर पकड़ लिया। बस चालक मौके पर बस छोड़ भागने में सफल रहा। इस दुर्घटना के बाद जमा भीड़ ने बस को ज़रूर कब्जे में लिया लेकिन बस में सवार किसी भी पैसेंजर को या बस कोई नुकसान नही पहुँचाया है। वही घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुँची पेटरवार पुलिस शव कब्जे में ले मामले की कर्यवाई में जुटी है।
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दुनिया तेजी से चूहे की दौड़ में शामिल होने की होड़ में लगी है। इस दौड़ के साथ तेजी से हमारे अंदर की नैतिकताएं और मूल्य भी हर दिन पीछे छूटती जा रही हैं। लगातार स्टूडेंट्स खुद को साबित करने की होड़ में लगे हैं। यूथ तेजी से भागती कॉर्पोरेट दुनिया में अपनी काबिलियत साबित करने की लगातार कोशिश में लगे हैं। इनका मकसद है तो बस रेस में आगे बने रहना। लेकिन इस सब में ह्यूमैनिटी कहीं पीछे छूट गईहैं। हमारे आपके दिलों में ह्यूमैनिटी बची रहे, इस मोटिव से पावर कपल, फिलांथ्रॉफिस्ट्स व टेक्नोलॉजी पायनियर्स 'विमल डागा और प्रीती डागा' ने 2 और 3 जुलाई को 'अचीविंग माइलस्टोन विद ह्यूमैनिटी'सब्जेक्ट पर प्रोग्राम होस्ट किया।
प्रोग्राम में लेट्स डिजाइन लाइफ के संस्थापक संजीव सचदेवा,टेक्नोलॉजी लीडरशिप एंड एम्पावरमेंट कोच के उज्जवल छबलानी, हर्षित भाटिया, पूजा, निदेशक संचालन पार्थ बिसानी, आबिद मट्टू, सीनियर पार्टनर मैनेजर, रेड हैट इंडिया, उमेश मूलराजनी, माइंड एंड बॉडी उपस्थित रहे। एनर्जी हीलर, डॉ. विक्रम यादव, फिजियोथेरेपिस्ट, अंशुल सक्सेना, प्रोफेशनल फिटनेस कोच, मेधा चतुर्वेदी मौजूद रहे। यहां मौजूद स्पीकर्स ने युवाओं को पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ मैनेज करने की सलाद हेते हुए कहा, आगे भागने की रेस में अपने स्वास्थ्य के साथ बिल्कुल भी कॉम्प्रोमाइज न करें। जिंदगी में आगे बढ़ने के क्रम में एक्सर्पट्स ने फिटनेस और हैल्दी लाइफ का महत्व समझाया।
वर्ल्ड रिकॉर्ड होलडर, आईआईईसी एंड जज़्बा, यूथ फेस्टिवल के संस्थापक विमल डागा के अनुसार, "यह प्रोग्राम एजुकेशन के पर्सपैक्टिव बदलने की कोशिश थी। इस मौके पर उन्होंने डेली रूटीन में मानवता का अभ्यास करने के महत्व पर खासतौर से जोर दिया। जो हमारी रोज़मर्रा के जीवन में अहम भूमिका निभाती है।
इस मौके पर मौजूद प्रीति डागा ने कहा, 'इस वर्कशॉप का मोटिव है कि समाज के हर पहलु का बराबर रूप से उत्थान हो। मार्क्स के पीछे व नौकरी की भागदौड़ के बीच मन की शांति कायम रह सके। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों के यंग अचीवर्स और प्रोफेशनल्स को उनकी उपलब्धियों और समाज में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। 'कार्यक्रम के दौरान मौजूदा शिक्षा प्रणाली और कॉर्पोरेट में ह्यूमैनिटी और ह्यूमन वैल्यूज बनी रहे, इन्हीं विषयों पर जोर दिया गया। असल एम्पलॉय व एम्पलायर का सम्बंध कैसा दिखता है जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
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दुनिया तेजी से चूहे की दौड़ में शामिल होने की होड़ में लगी है। इस दौड़ के साथ तेजी से हमारे अंदर की नैतिकताएं और मूल्य भी हर दिन पीछे छूटती जा रही हैं। लगातार स्टूडेंट्स खुद को साबित करने की होड़ में लगे हैं। यूथ तेजी से भागती कॉर्पोरेट दुनिया में अपनी काबिलियत साबित करने की लगातार कोशिश में लगे हैं। इनका मकसद है तो बस रेस में आगे बने रहना। लेकिन इस सब में ह्यूमैनिटी कहीं पीछे छूट गईहैं। हमारे आपके दिलों में ह्यूमैनिटी बची रहे, इस मोटिव से पावर कपल, फिलांथ्रॉफिस्ट्स व टेक्नोलॉजी पायनियर्स 'विमल डागा और प्रीती डागा' ने दो और तीन जुलाई को 'अचीविंग माइलस्टोन विद ह्यूमैनिटी'सब्जेक्ट पर प्रोग्राम होस्ट किया। प्रोग्राम में लेट्स डिजाइन लाइफ के संस्थापक संजीव सचदेवा,टेक्नोलॉजी लीडरशिप एंड एम्पावरमेंट कोच के उज्जवल छबलानी, हर्षित भाटिया, पूजा, निदेशक संचालन पार्थ बिसानी, आबिद मट्टू, सीनियर पार्टनर मैनेजर, रेड हैट इंडिया, उमेश मूलराजनी, माइंड एंड बॉडी उपस्थित रहे। एनर्जी हीलर, डॉ. विक्रम यादव, फिजियोथेरेपिस्ट, अंशुल सक्सेना, प्रोफेशनल फिटनेस कोच, मेधा चतुर्वेदी मौजूद रहे। यहां मौजूद स्पीकर्स ने युवाओं को पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ मैनेज करने की सलाद हेते हुए कहा, आगे भागने की रेस में अपने स्वास्थ्य के साथ बिल्कुल भी कॉम्प्रोमाइज न करें। जिंदगी में आगे बढ़ने के क्रम में एक्सर्पट्स ने फिटनेस और हैल्दी लाइफ का महत्व समझाया। वर्ल्ड रिकॉर्ड होलडर, आईआईईसी एंड जज़्बा, यूथ फेस्टिवल के संस्थापक विमल डागा के अनुसार, "यह प्रोग्राम एजुकेशन के पर्सपैक्टिव बदलने की कोशिश थी। इस मौके पर उन्होंने डेली रूटीन में मानवता का अभ्यास करने के महत्व पर खासतौर से जोर दिया। जो हमारी रोज़मर्रा के जीवन में अहम भूमिका निभाती है। इस मौके पर मौजूद प्रीति डागा ने कहा, 'इस वर्कशॉप का मोटिव है कि समाज के हर पहलु का बराबर रूप से उत्थान हो। मार्क्स के पीछे व नौकरी की भागदौड़ के बीच मन की शांति कायम रह सके। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों के यंग अचीवर्स और प्रोफेशनल्स को उनकी उपलब्धियों और समाज में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। 'कार्यक्रम के दौरान मौजूदा शिक्षा प्रणाली और कॉर्पोरेट में ह्यूमैनिटी और ह्यूमन वैल्यूज बनी रहे, इन्हीं विषयों पर जोर दिया गया। असल एम्पलॉय व एम्पलायर का सम्बंध कैसा दिखता है जैसे विषयों पर चर्चा हुई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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आरक्षित मुद्रा, विनिमय के माध्यम या खाते की संचानल की इकाई के रूप में प्रचलित अमेरिकी डॉलर के दशकों से चले आ रहे प्रभुत्व को एक बड़ी चुनौती मिल रही है। इसके पीछे का कारण विकासशील देश में ज्यादा से ज्यादा डॉलर के प्रभाव को कम करने की मांग कर रहे हैं। यह उनकी अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करने का प्रयास है। दुनिया भर में डॉलर के प्रभाव को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित ब्रेटन वुड्स द्वारा स्थापित किया गया था।
पिछले महीने में ही चीन और ब्राजील ने आपसी मुद्रा में ही व्यापार का समझौता किया है। बीते बुधवार को ही अर्जेंटीना ने घोषणा की कि वह घटते विदेशी भंडार को बचाए रखने के लिए चीन से व्यापार करते हुए वह चीन की मुद्रा (युआन) में भुगतान करेगा, इसका कारण वह अमेरिकी डॉलर को बचाकर रखना चाहता है। दुनिया भर में उठ रहे ये सभी कदम डी-डॉलराइजेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।
डी-डॉलरीकरण एक शब्द के रूप में भले ही नया हो, लेकिन दुनिया के कई देश दशकों से अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने का आह्वान कर रहे हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा जैसे कई राष्ट्र प्रमुखों ने विश्व व्यापार में अमेरिकी आधिपत्य की आलोचना की है।
चीन और रूस भी उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने डी-डॉलराइजेशन का समर्थन किया है। इस साल जनवरी में, यह बताया गया था कि ईरान और रूस संयुक्त रूप से सोने(गोल्ड) द्वारा समर्थित एक नई क्रिप्टोकरेंसी जारी करेंगे, जो विदेशी व्यापार में भुगतान विधि के रूप में काम करेगा। यह राजनीतिक रूप से तटस्थ आरक्षित मुद्रा बनाने की दिशा में एक नवीनतम कदम है।
डॉलर की प्रतिष्ठा को समय-समय पर सवालों के घेरे में लिया जाता रहा है। उसके बाद भी व्यापार के लिए सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत मुद्रा का उपयोग करने के भारी फायदे के कारण यह जारी रहा है। अमेरिकी डॉलर की प्रभुता 1920 के दशक में अंतरराष्ट्रीय आरक्षित मुद्रा के रूप में स्थापित होनी शुरू हुई, जब इसने पाउंड स्टर्लिंग की जगह लेनी शुरू कर दी।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रेटन वुड्स प्रणाली ने डॉलर की स्थिति को और मजबूत बनाया। चूंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूती उभरा। साल 1944 के समझौते ने युद्ध के बाद की अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली की स्थापना की जिसने अमेरिकी डॉलर को विश्व स्तर पर दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा बनने की अनुमति दी।
अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च के अनुसार, ईरान और हाल ही में रूस (यूक्रेन पर आक्रमण करने के लिए) द्वारा शुरू किए गए आर्थिक व्यवधानों ने स्विफ्ट जैसी अंतरराष्ट्रीय डॉलर-व्यापार प्रणालियों से डिस्कनेक्ट होने के बाद छोटे देशों को विकल्पों की तलाश करने के लिए प्रेरित किया।
इस सिलसिले में भारत और मलेशिया ने हाल ही में घोषणा की कि उन्होंने कुछ ट्रेडों को निपटाने के लिए भारतीय रुपये का उपयोग करना शुरू कर दिया है। इसी तरह, सऊदी अरब के वित्त मंत्री ने जनवरी में ब्लूमबर्ग को बताया कि सऊदी अरब अमेरिकी डॉलर के अलावा अन्य मुद्राओं में भी व्यापार के बारे में चर्चा के लिए तैयार है। पिछले ही महीने चीन ने फ्रांस के साथ प्राकृतिक गैस के भुगतान के लिए युआन का प्रयोग किया।
इस मसले पर भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के उपायुक्त कुमार विवेक के अनुसार, यह केंद्रीय बैंकों (भारत के मामले में, आरबीआई) द्वारा अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को सुविधाजनक बनाने, विनिमय दरों को स्थिर करने और वित्तीय विश्वास को बढ़ाने के लिए रखी गई विदेशी मुद्रा है।
पिछले साल सितंबर में जारी अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरो, येन, पाउंड, रेनमिनबी (आरएमबी), कनाडाई डॉलर, स्विस फ्रैंक और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर सहित अन्य सहित अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्राएं हैं।
अमेरिकी कांग्रेस की इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 60 प्रतिशत डॉलर में रखते हैं। इसके बावजूदू भी लगभग आधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार का भुगतान डॉलर में किया जाता है।
अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च के अनुसार अमेरिकी डॉलर अमेरिका के अलावा पूर्वी तिमोर, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया, मार्शल आइलैंड्स, पलाऊ, पनामा और जिम्बाब्वे की वास्तविक मुद्रा है। 22 विदेशी केंद्रीय बैंकों और मुद्रा बोर्डों ने अपनी मुद्रा को इसके लिए आंका है।
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आरक्षित मुद्रा, विनिमय के माध्यम या खाते की संचानल की इकाई के रूप में प्रचलित अमेरिकी डॉलर के दशकों से चले आ रहे प्रभुत्व को एक बड़ी चुनौती मिल रही है। इसके पीछे का कारण विकासशील देश में ज्यादा से ज्यादा डॉलर के प्रभाव को कम करने की मांग कर रहे हैं। यह उनकी अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करने का प्रयास है। दुनिया भर में डॉलर के प्रभाव को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित ब्रेटन वुड्स द्वारा स्थापित किया गया था। पिछले महीने में ही चीन और ब्राजील ने आपसी मुद्रा में ही व्यापार का समझौता किया है। बीते बुधवार को ही अर्जेंटीना ने घोषणा की कि वह घटते विदेशी भंडार को बचाए रखने के लिए चीन से व्यापार करते हुए वह चीन की मुद्रा में भुगतान करेगा, इसका कारण वह अमेरिकी डॉलर को बचाकर रखना चाहता है। दुनिया भर में उठ रहे ये सभी कदम डी-डॉलराइजेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। डी-डॉलरीकरण एक शब्द के रूप में भले ही नया हो, लेकिन दुनिया के कई देश दशकों से अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने का आह्वान कर रहे हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा जैसे कई राष्ट्र प्रमुखों ने विश्व व्यापार में अमेरिकी आधिपत्य की आलोचना की है। चीन और रूस भी उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने डी-डॉलराइजेशन का समर्थन किया है। इस साल जनवरी में, यह बताया गया था कि ईरान और रूस संयुक्त रूप से सोने द्वारा समर्थित एक नई क्रिप्टोकरेंसी जारी करेंगे, जो विदेशी व्यापार में भुगतान विधि के रूप में काम करेगा। यह राजनीतिक रूप से तटस्थ आरक्षित मुद्रा बनाने की दिशा में एक नवीनतम कदम है। डॉलर की प्रतिष्ठा को समय-समय पर सवालों के घेरे में लिया जाता रहा है। उसके बाद भी व्यापार के लिए सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत मुद्रा का उपयोग करने के भारी फायदे के कारण यह जारी रहा है। अमेरिकी डॉलर की प्रभुता एक हज़ार नौ सौ बीस के दशक में अंतरराष्ट्रीय आरक्षित मुद्रा के रूप में स्थापित होनी शुरू हुई, जब इसने पाउंड स्टर्लिंग की जगह लेनी शुरू कर दी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रेटन वुड्स प्रणाली ने डॉलर की स्थिति को और मजबूत बनाया। चूंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूती उभरा। साल एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस के समझौते ने युद्ध के बाद की अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली की स्थापना की जिसने अमेरिकी डॉलर को विश्व स्तर पर दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा बनने की अनुमति दी। अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च के अनुसार, ईरान और हाल ही में रूस द्वारा शुरू किए गए आर्थिक व्यवधानों ने स्विफ्ट जैसी अंतरराष्ट्रीय डॉलर-व्यापार प्रणालियों से डिस्कनेक्ट होने के बाद छोटे देशों को विकल्पों की तलाश करने के लिए प्रेरित किया। इस सिलसिले में भारत और मलेशिया ने हाल ही में घोषणा की कि उन्होंने कुछ ट्रेडों को निपटाने के लिए भारतीय रुपये का उपयोग करना शुरू कर दिया है। इसी तरह, सऊदी अरब के वित्त मंत्री ने जनवरी में ब्लूमबर्ग को बताया कि सऊदी अरब अमेरिकी डॉलर के अलावा अन्य मुद्राओं में भी व्यापार के बारे में चर्चा के लिए तैयार है। पिछले ही महीने चीन ने फ्रांस के साथ प्राकृतिक गैस के भुगतान के लिए युआन का प्रयोग किया। इस मसले पर भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के उपायुक्त कुमार विवेक के अनुसार, यह केंद्रीय बैंकों द्वारा अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को सुविधाजनक बनाने, विनिमय दरों को स्थिर करने और वित्तीय विश्वास को बढ़ाने के लिए रखी गई विदेशी मुद्रा है। पिछले साल सितंबर में जारी अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरो, येन, पाउंड, रेनमिनबी , कनाडाई डॉलर, स्विस फ्रैंक और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर सहित अन्य सहित अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्राएं हैं। अमेरिकी कांग्रेस की इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग साठ प्रतिशत डॉलर में रखते हैं। इसके बावजूदू भी लगभग आधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार का भुगतान डॉलर में किया जाता है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च के अनुसार अमेरिकी डॉलर अमेरिका के अलावा पूर्वी तिमोर, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया, मार्शल आइलैंड्स, पलाऊ, पनामा और जिम्बाब्वे की वास्तविक मुद्रा है। बाईस विदेशी केंद्रीय बैंकों और मुद्रा बोर्डों ने अपनी मुद्रा को इसके लिए आंका है।
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बॉलीवुड के अभिनेता सलमान खान की बहन अर्पिता खान और आयुष शर्मा के यहां 22 अप्रैल की रात को ईद पार्टी का जश्न देखने को मिला। पार्टी में बॉलीवुड इंडस्ट्री से जुड़े तमाम सेलेब्स शामिल हुए थे जिनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। बता दे पार्टी में पॉपुलर एक्ट्रेस कैटरीना कैफ ने भी शिरकत की थी।
इस दौरान कैटरीना कैफ जैसे ही कैमरे के सामने आई तो यूजर्स कयास लगा रहे कि कैटरीना कैफ प्रेग्नेंट है। जी हां. . इससे जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें कैटरीना कैफ अपने हाथों से बेबी बंप छुपाने की कोशिश कर रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैटरीना कैफ अनारकली सूट पहने हुए नजर आ रही है। इस दौरान वह बेहद खूबसूरत लग रही थी। उन्होंने अपने लुक को कंप्लीट करने के लिए बालों को खुला रखा हुआ था जबकि कानों में बड़े-बड़े झुमके पहने हुए थे।
इसके अलावा हर बार की तरह कैटरीना मिनिमम मेकअप करते हुए नजर आई थी जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही है। जैसे ही पैपराजी ने कैटरीना कैफ को देखा तो वे लगातार उनकी तस्वीरें लेने लगे। इसके अलावा उनका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वह दुपट्टे और हाथों से अपने बेबी बंप को कवर करती हुई नजर आ रही है।
कैटरीना कैफ का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो यूजर्स भी तरह तरह के कमेंट करने लगे। यूजर्स अंदाजा लगाने लगे कि कैटरीना कैफ प्रेग्नेंट है जिसकी वजह से उन्होंने ढीला ढाला अनारकली सूट पहना हुआ है। इसके अलावा जब कैटरीना बार-बार अपने दुपट्टे के सहारे पेट को ढकने की कोशिश कर रही थी तब भी उन्हें देखकर यही लग रहा था कि वह प्रेग्नेंट है। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि, "क्या कटरीना प्रेग्नेंट हैं।
अब वह जिम में भी नहीं दिखतीं और ऐसा लग रहा है कि थोड़ा वेट भी बढ़ गया है और तो और वह इन दिनों कोई शूटिंग भी नहीं कर रहीं। " एक अन्य ने कहा कि, "ऐसा लग रहा है कि कटरीना जल्द कोई गुड न्यूज देने वाली हैं। " इसके अलावा कई लोगों ने तो कैटरीना और विक्की को बधाई तक दे डाली।
हालाँकि असल सच्चाई क्या है यह तो कैटरीना कैफ ही जानती है। लेकिन उनका यह वीडियो वायरल होने के बाद उनकी प्रेगनेंसी की खबरें एक बार फिर से चर्चा में आ गई। बता दें, इससे पहले भी कैटरीना कैफ कई बार प्रेगनेंसी को लेकर सुर्खियों में आ चुकी है।
बता दें, कैटरीना कैफ ने साल 2021 में मशहूर अभिनेता विक्की कौशल के साथ शादी रचाई थी। इन दोनों की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। बता दे कैटरीना और विक्की ने शादी से पहले 1 साल तक सिक्रेटली डेट किया था, इसके बाद ही शादी के बंधन में बंध गए।
बात करें कैटरीना कैफ के काम के बारे में तो आखरी बार उन्हें फिल्म 'फोनभूत' में देखा गया था जिसे मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी। इस फिल्म में वह इशान खट्टर और अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ नजर आई थी। अब कैटरीना को जल्दी सलमान खान के साथ फिल्म 'टाइगर-3' में देखा जाएगा। फिल्म में उनके साथ अभिनेता इमरान हाशमी भी मुख्य किरदार में होंगे। इसके अलावा कैटरीना के पास 'मैरी क्रिसमस' और 'जी ले जरा' नाम की 2 फ़िल्में है।
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बॉलीवुड के अभिनेता सलमान खान की बहन अर्पिता खान और आयुष शर्मा के यहां बाईस अप्रैल की रात को ईद पार्टी का जश्न देखने को मिला। पार्टी में बॉलीवुड इंडस्ट्री से जुड़े तमाम सेलेब्स शामिल हुए थे जिनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। बता दे पार्टी में पॉपुलर एक्ट्रेस कैटरीना कैफ ने भी शिरकत की थी। इस दौरान कैटरीना कैफ जैसे ही कैमरे के सामने आई तो यूजर्स कयास लगा रहे कि कैटरीना कैफ प्रेग्नेंट है। जी हां. . इससे जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें कैटरीना कैफ अपने हाथों से बेबी बंप छुपाने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैटरीना कैफ अनारकली सूट पहने हुए नजर आ रही है। इस दौरान वह बेहद खूबसूरत लग रही थी। उन्होंने अपने लुक को कंप्लीट करने के लिए बालों को खुला रखा हुआ था जबकि कानों में बड़े-बड़े झुमके पहने हुए थे। इसके अलावा हर बार की तरह कैटरीना मिनिमम मेकअप करते हुए नजर आई थी जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही है। जैसे ही पैपराजी ने कैटरीना कैफ को देखा तो वे लगातार उनकी तस्वीरें लेने लगे। इसके अलावा उनका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वह दुपट्टे और हाथों से अपने बेबी बंप को कवर करती हुई नजर आ रही है। कैटरीना कैफ का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो यूजर्स भी तरह तरह के कमेंट करने लगे। यूजर्स अंदाजा लगाने लगे कि कैटरीना कैफ प्रेग्नेंट है जिसकी वजह से उन्होंने ढीला ढाला अनारकली सूट पहना हुआ है। इसके अलावा जब कैटरीना बार-बार अपने दुपट्टे के सहारे पेट को ढकने की कोशिश कर रही थी तब भी उन्हें देखकर यही लग रहा था कि वह प्रेग्नेंट है। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि, "क्या कटरीना प्रेग्नेंट हैं। अब वह जिम में भी नहीं दिखतीं और ऐसा लग रहा है कि थोड़ा वेट भी बढ़ गया है और तो और वह इन दिनों कोई शूटिंग भी नहीं कर रहीं। " एक अन्य ने कहा कि, "ऐसा लग रहा है कि कटरीना जल्द कोई गुड न्यूज देने वाली हैं। " इसके अलावा कई लोगों ने तो कैटरीना और विक्की को बधाई तक दे डाली। हालाँकि असल सच्चाई क्या है यह तो कैटरीना कैफ ही जानती है। लेकिन उनका यह वीडियो वायरल होने के बाद उनकी प्रेगनेंसी की खबरें एक बार फिर से चर्चा में आ गई। बता दें, इससे पहले भी कैटरीना कैफ कई बार प्रेगनेंसी को लेकर सुर्खियों में आ चुकी है। बता दें, कैटरीना कैफ ने साल दो हज़ार इक्कीस में मशहूर अभिनेता विक्की कौशल के साथ शादी रचाई थी। इन दोनों की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। बता दे कैटरीना और विक्की ने शादी से पहले एक साल तक सिक्रेटली डेट किया था, इसके बाद ही शादी के बंधन में बंध गए। बात करें कैटरीना कैफ के काम के बारे में तो आखरी बार उन्हें फिल्म 'फोनभूत' में देखा गया था जिसे मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी। इस फिल्म में वह इशान खट्टर और अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ नजर आई थी। अब कैटरीना को जल्दी सलमान खान के साथ फिल्म 'टाइगर-तीन' में देखा जाएगा। फिल्म में उनके साथ अभिनेता इमरान हाशमी भी मुख्य किरदार में होंगे। इसके अलावा कैटरीना के पास 'मैरी क्रिसमस' और 'जी ले जरा' नाम की दो फ़िल्में है।
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Global Investors Summit 2023: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर में दो दिनी ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट का समापन हुआ। समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि निवेश के माध्यम से मध्य प्रदेश के विकास को निर्णायक गति प्रदान की जाएगी। प्रदेश में निवेश करने वाले उद्योगपतियों की एक पाई भी व्यर्थ नहीं जाने देंगे। संवाद, सहयोग, सुविधा, स्वीकृति, सेतु, सरलता और समन्वय के सात सूत्रों से उद्योगों को पूर्ण सहयोग की रणनीति अपनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समिट के माध्यम से उद्योगपतियों और निवेशकों द्वारा 15 लाख 42 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के उद्योग लगाने के प्रस्ताव मिले हैं। इनसे 29 लाख लोगों को रोजगार देने की संभावनाओं को साकार किया जा सकेगा। इंटेनशन टू इंवेस्ट के फलस्वरूप क्रियान्वयन से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 6 लाख 9 हजार 478 करोड़, नगरीय अधोसंरचना में 2 लाख 80 हजार 753 करोड़, खाद्य प्रसंस्करण और एग्री क्षेत्र में 1 लाख 6 हजार 149 करोड़, माइनिंग और उससे जुड़े उद्योगों में 98 हजार 305, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 78 हजार 778 करोड़, केमिकल एवं पेट्रोलियम इंडस्ट्री में 76 हजार 769 करोड़, विभिन्न सेवाओं के क्षेत्र में 71 हजार 351 करोड़, आटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल के क्षेत्र में 42 हजार 254 करोड़, फार्मास्युटिकल और हेल्थ सेक्टर में 17 हजार 991 करोड़, लाजिस्टिक एवं वेयर हाउसिंग क्षेत्र में 17 हजार 916 करोड़, टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र में 16 हजार 914 करोड़ तथा अन्य क्षेत्रों में 1 लाख 25 हजार 853 करोड़ का निवेश किए जाने के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन सभी से 29 लाख लोगों को रोजगार मिलने की आशा है।
मुख्यमंत्री कहा कि ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट की सफलता के लिए सभी का आभार माना। समिट के प्रति सभी में काफी उत्साह था। इंदौर के लोगों ने आतिथ्य परम्परा से अभिभूत कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा, इस तरह के कार्यक्रमों की भावी आवश्यकता को देखते हुए इंदौर में 10 हजार लोगों की क्षमता वाला नया कंवेंशन सेंटर बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर अद्भुत है, यहां से निवेश का नया दौर आरंभ हो रहा है। विश्वास का वातावरण है। मध्य प्रदेश देश में निवेश की राजधानी बन रहा है। बीमारू से विकसित हुए मध्य प्रदेश की विकास दर अन्य राज्यों से अलग है। 18 वर्ष में हम गड्ढों से उबरकर अच्छी सड़कों तक और गंदगी के ढेर से निकलकर स्वच्छता के शिखर तक पहुंचे हैं। प्रदेश की क्षमताओं को पहचानकर उसे अपनी शक्ति बनाया गया है।
चौहान ने कहा कि उद्योगपतियों को अपनी कठिनाइयां दूर करने के लिए राजधानी भोपाल नहीं आना पड़ेगा। शिकायतों के निराकरण के लिए invest. mp. gov. in पोर्टल पर "हाउ केन आय हेल्प यू" की पृथक विंडो शुरू होगी, जो उद्योगपति की समस्या से अवगत करवाएगी। एक टीम द्वारा उद्योगपति से संपर्क भी किया जाएगा। इसका फालो मुख्यमंत्री स्तर पर होगा। उद्योगपतियों को अटकने, भटकने की जरूरत नहीं होगी। द्योगपतियों को राज्य के अधिसूचित क्षेत्रों में उद्योग लगाने के लिए तीन वर्ष तक किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इस अवधि में औद्योगिक इकाई का कोई निरीक्षण भी नहीं होगा। प्लग एंड प्ले की सुविधा, जो अभी तक सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में है वह गारमेंट और अन्य उद्योग क्षेत्रों में भी प्रदान की जाएगी। इज आ डूइंग बिजनेस और सुशासन के द्वारा समस्याओं को हल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भारत प्रगति और प्रतिष्ठा बढ़ाने में सफल हुआ है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विश्व के देशों को भारत ही दिग्दर्शन कराएगा। मध्य देश में औद्योगिक विकास के लिए अनेक क्षेत्रों में उनकी आशाएं और अपेक्षाएं हैं, जिन्हें गंभीरता से पूरा किया जाएगा। मध्यप्रदेश औद्योगिक प्रगति के रनवे पर रफ्तार बढ़ा चुका है, हम अब टेक आफ कर रहे हैं।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि देवी अहिल्या की नगरी इंदौर का उज्जवल इतिहास और गौरवशाली विरासत है। आज इंदौर ने जिस तरह पूरी दुनिया से आए मेहमानों का पूरी सेवा,उदारता और समर्पण के साथ स्वागत किया है, उसके लिए पूरी दुनिया में इंदौर को याद किया जाएगा। तोमर ने कहा कि वर्ष 2003 से पहले मध्य देश के उद्योगपति दूसरे राज्यों में जाने का सोच रहे थे, परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य देश में निवेश के अनुरूप जो वातावरण बना है, उसके चलते आज दुनियाभर के निवेशक गौरव के साथ मध्य प्रदेश में निवेश के लिए आए हुए हैं।
नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मध्य प्रदेश न केवल अतुल्य भारत का हृदय है, बल्कि भारत के विकास का भी दिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को पांच ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो संकल्प लिया है, उसमें मध्य प्रदेश का प्रदेश को साढ़े पांच सौ बिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प शामिल है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उद्योग पुरुष हैं। वे प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ ही प्रदेश के सीईओ भी है। उनके नेतृत्व में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन और मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश औद्योगिक प्रगति के क्षेत्र में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। मध्य देश में निवेश की बहुत संभावनाएं है। आज इस सम्मेलन में विश्व भर से निवेशक आए हैं, उन्होंने नए आइडियाज, अपने अनुभव बताए हैं और प्रदेश में निवेश करने की अच्छा व्यक्ति की है। सरकार की ओर से उन्हें हर संभव सहायता एवं सहयोग मिलेगा।
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Global Investors Summit दो हज़ार तेईस: इंदौर । इंदौर में दो दिनी ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट का समापन हुआ। समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि निवेश के माध्यम से मध्य प्रदेश के विकास को निर्णायक गति प्रदान की जाएगी। प्रदेश में निवेश करने वाले उद्योगपतियों की एक पाई भी व्यर्थ नहीं जाने देंगे। संवाद, सहयोग, सुविधा, स्वीकृति, सेतु, सरलता और समन्वय के सात सूत्रों से उद्योगों को पूर्ण सहयोग की रणनीति अपनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समिट के माध्यम से उद्योगपतियों और निवेशकों द्वारा पंद्रह लाख बयालीस हजार पाँच सौ करोड़ रुपये से अधिक की लागत के उद्योग लगाने के प्रस्ताव मिले हैं। इनसे उनतीस लाख लोगों को रोजगार देने की संभावनाओं को साकार किया जा सकेगा। इंटेनशन टू इंवेस्ट के फलस्वरूप क्रियान्वयन से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में छः लाख नौ हजार चार सौ अठहत्तर करोड़, नगरीय अधोसंरचना में दो लाख अस्सी हजार सात सौ तिरेपन करोड़, खाद्य प्रसंस्करण और एग्री क्षेत्र में एक लाख छः हजार एक सौ उनचास करोड़, माइनिंग और उससे जुड़े उद्योगों में अट्ठानवे हजार तीन सौ पाँच, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अठहत्तर हजार सात सौ अठहत्तर करोड़, केमिकल एवं पेट्रोलियम इंडस्ट्री में छिहत्तर हजार सात सौ उनहत्तर करोड़, विभिन्न सेवाओं के क्षेत्र में इकहत्तर हजार तीन सौ इक्यावन करोड़, आटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल के क्षेत्र में बयालीस हजार दो सौ चौवन करोड़, फार्मास्युटिकल और हेल्थ सेक्टर में सत्रह हजार नौ सौ इक्यानवे करोड़, लाजिस्टिक एवं वेयर हाउसिंग क्षेत्र में सत्रह हजार नौ सौ सोलह करोड़, टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र में सोलह हजार नौ सौ चौदह करोड़ तथा अन्य क्षेत्रों में एक लाख पच्चीस हजार आठ सौ तिरेपन करोड़ का निवेश किए जाने के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन सभी से उनतीस लाख लोगों को रोजगार मिलने की आशा है। मुख्यमंत्री कहा कि ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट की सफलता के लिए सभी का आभार माना। समिट के प्रति सभी में काफी उत्साह था। इंदौर के लोगों ने आतिथ्य परम्परा से अभिभूत कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा, इस तरह के कार्यक्रमों की भावी आवश्यकता को देखते हुए इंदौर में दस हजार लोगों की क्षमता वाला नया कंवेंशन सेंटर बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर अद्भुत है, यहां से निवेश का नया दौर आरंभ हो रहा है। विश्वास का वातावरण है। मध्य प्रदेश देश में निवेश की राजधानी बन रहा है। बीमारू से विकसित हुए मध्य प्रदेश की विकास दर अन्य राज्यों से अलग है। अट्ठारह वर्ष में हम गड्ढों से उबरकर अच्छी सड़कों तक और गंदगी के ढेर से निकलकर स्वच्छता के शिखर तक पहुंचे हैं। प्रदेश की क्षमताओं को पहचानकर उसे अपनी शक्ति बनाया गया है। चौहान ने कहा कि उद्योगपतियों को अपनी कठिनाइयां दूर करने के लिए राजधानी भोपाल नहीं आना पड़ेगा। शिकायतों के निराकरण के लिए invest. mp. gov. in पोर्टल पर "हाउ केन आय हेल्प यू" की पृथक विंडो शुरू होगी, जो उद्योगपति की समस्या से अवगत करवाएगी। एक टीम द्वारा उद्योगपति से संपर्क भी किया जाएगा। इसका फालो मुख्यमंत्री स्तर पर होगा। उद्योगपतियों को अटकने, भटकने की जरूरत नहीं होगी। द्योगपतियों को राज्य के अधिसूचित क्षेत्रों में उद्योग लगाने के लिए तीन वर्ष तक किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इस अवधि में औद्योगिक इकाई का कोई निरीक्षण भी नहीं होगा। प्लग एंड प्ले की सुविधा, जो अभी तक सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में है वह गारमेंट और अन्य उद्योग क्षेत्रों में भी प्रदान की जाएगी। इज आ डूइंग बिजनेस और सुशासन के द्वारा समस्याओं को हल किया जाएगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भारत प्रगति और प्रतिष्ठा बढ़ाने में सफल हुआ है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विश्व के देशों को भारत ही दिग्दर्शन कराएगा। मध्य देश में औद्योगिक विकास के लिए अनेक क्षेत्रों में उनकी आशाएं और अपेक्षाएं हैं, जिन्हें गंभीरता से पूरा किया जाएगा। मध्यप्रदेश औद्योगिक प्रगति के रनवे पर रफ्तार बढ़ा चुका है, हम अब टेक आफ कर रहे हैं। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि देवी अहिल्या की नगरी इंदौर का उज्जवल इतिहास और गौरवशाली विरासत है। आज इंदौर ने जिस तरह पूरी दुनिया से आए मेहमानों का पूरी सेवा,उदारता और समर्पण के साथ स्वागत किया है, उसके लिए पूरी दुनिया में इंदौर को याद किया जाएगा। तोमर ने कहा कि वर्ष दो हज़ार तीन से पहले मध्य देश के उद्योगपति दूसरे राज्यों में जाने का सोच रहे थे, परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य देश में निवेश के अनुरूप जो वातावरण बना है, उसके चलते आज दुनियाभर के निवेशक गौरव के साथ मध्य प्रदेश में निवेश के लिए आए हुए हैं। नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मध्य प्रदेश न केवल अतुल्य भारत का हृदय है, बल्कि भारत के विकास का भी दिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को पांच ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो संकल्प लिया है, उसमें मध्य प्रदेश का प्रदेश को साढ़े पांच सौ बिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प शामिल है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उद्योग पुरुष हैं। वे प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ ही प्रदेश के सीईओ भी है। उनके नेतृत्व में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन और मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश औद्योगिक प्रगति के क्षेत्र में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। मध्य देश में निवेश की बहुत संभावनाएं है। आज इस सम्मेलन में विश्व भर से निवेशक आए हैं, उन्होंने नए आइडियाज, अपने अनुभव बताए हैं और प्रदेश में निवेश करने की अच्छा व्यक्ति की है। सरकार की ओर से उन्हें हर संभव सहायता एवं सहयोग मिलेगा।
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एसआईटी की जांच के बाद विभागीय कार्रवाई में फंसे वर्ष 2005 की बीएड की डिग्री वाले 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के खिलाफ बीएसए ने सेवा समाप्ति की कार्रवाई की है। इन शिक्षकों में फर्जी और टेंपर्ड डिग्री वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हैं।
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एसआईटी की जांच के बाद विभागीय कार्रवाई में फंसे वर्ष दो हज़ार पाँच की बीएड की डिग्री वाले चौंसठ शिक्षक-शिक्षिकाओं के खिलाफ बीएसए ने सेवा समाप्ति की कार्रवाई की है। इन शिक्षकों में फर्जी और टेंपर्ड डिग्री वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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