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41 वर्षीय जाफर ने टीम इंडिया के लिए कुल 31 टेस्ट मैच खेला है। इस दौरान उन्होंने 1944 रन बनाए जिनमें पांच शतक और 11 अर्धशतक शामिल हैं। जाफर ने दो वन-डे मुकाबले में भी टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किया है। आईपीएल में उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए 2008 में कुल आछ मैच खेले थे। इनमें 16. 25 की औसत और 107. 44 के स्ट्राइक रेट से महज 130 रन बनाए थे। अनिल कुंबले किंग्स इलेवन पंजाब के हेड कोच का दायित्व संभाल रहे हैं, वहीं जॉन्टी रोड्स को फील्डिंग कोच बनाया गया है। किंग्स इलेवन पंजाब ने एक बार भी आईपीएल का खिताब अभी तक नहीं जीता है। टीम इसबार नए कप्तान के साथ उतरेगी, क्योंकि 2019 के आईपीएल में टीम की कमान संभाल रहे आर अश्विन को फ्रेंचाइजी ने ट्रेड विंडों के तहत दिल्ली कैपिटल्स को बेच दिया है। रिटेन खिलाड़ीः केएल राहुल, करुण नायर, मोहम्मद शमी, निकोलस पूरन, मुजीब उर रहमान, क्रिस गेल, मनदीप सिंह, मयंक अग्रवाल, हार्डस विलोजेन, दर्शन लालचंद, सरफराज खान, अर्शदीप सिंह, हरप्रीत बराड़ और मुरुगन अश्विन। रिलीज खिलाड़ीः अग्निवेश अयाची, एंड्रयू टाई, डेविड मिलर, मोइसेस हेनरिक्स, प्रभसिमरन सिंह, सैम क्यूरन, वरुण चक्रवर्ती।
इकतालीस वर्षीय जाफर ने टीम इंडिया के लिए कुल इकतीस टेस्ट मैच खेला है। इस दौरान उन्होंने एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस रन बनाए जिनमें पांच शतक और ग्यारह अर्धशतक शामिल हैं। जाफर ने दो वन-डे मुकाबले में भी टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किया है। आईपीएल में उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए दो हज़ार आठ में कुल आछ मैच खेले थे। इनमें सोलह. पच्चीस की औसत और एक सौ सात. चौंतालीस के स्ट्राइक रेट से महज एक सौ तीस रन बनाए थे। अनिल कुंबले किंग्स इलेवन पंजाब के हेड कोच का दायित्व संभाल रहे हैं, वहीं जॉन्टी रोड्स को फील्डिंग कोच बनाया गया है। किंग्स इलेवन पंजाब ने एक बार भी आईपीएल का खिताब अभी तक नहीं जीता है। टीम इसबार नए कप्तान के साथ उतरेगी, क्योंकि दो हज़ार उन्नीस के आईपीएल में टीम की कमान संभाल रहे आर अश्विन को फ्रेंचाइजी ने ट्रेड विंडों के तहत दिल्ली कैपिटल्स को बेच दिया है। रिटेन खिलाड़ीः केएल राहुल, करुण नायर, मोहम्मद शमी, निकोलस पूरन, मुजीब उर रहमान, क्रिस गेल, मनदीप सिंह, मयंक अग्रवाल, हार्डस विलोजेन, दर्शन लालचंद, सरफराज खान, अर्शदीप सिंह, हरप्रीत बराड़ और मुरुगन अश्विन। रिलीज खिलाड़ीः अग्निवेश अयाची, एंड्रयू टाई, डेविड मिलर, मोइसेस हेनरिक्स, प्रभसिमरन सिंह, सैम क्यूरन, वरुण चक्रवर्ती।
यूपी के इटावा से रौंगटे खड़े करने वाली वारदात सामने आ रही है। घर में मां-बाप की डांट से खफा होकर युवती घर से भाग गई। वह इटावा स्टेशन पहुंची। उसे महोबा जाना था। इटावा स्टेशन पहुंचने के पश्चात युवती को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह डिब्बे में बैठी थी। इसी दौरान सफाई कर्मचारी पहुंचा। उसने पीड़िता को अकेला देखा तो जान-पहचान बढ़ाई। फिर विश्वास दिलाया और फिर उसे दबोच लिया। दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। 15 जनवरी की घटना के प्रकरण में 17 जनवरी को मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोपी सफाईकर्मी को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है। झांसी से भागी युवती के साथ इटावा स्टेशन की घटना को लेकर रेल विभाग ने सख्त रवैया अपनाया। मामले की सूचना मिलते ही आरोपी की जांच शुरू कर दी गई। पीड़िता के पास आरोपी का मोबाइल नंबर होने से उसे ट्रेस करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। झांसी की निवासी हाईस्कूल की छात्रा को परिजनों की बात इतनी बुरी लगी कि वह घर से फरार हो गई। उसे अपने दादा के घर महोबा जाना था। भूले भटके वो इटावा वाली ट्रेन झांसी-इटावा इंटरसिटी में बैठ गई। इटावा स्टेशन पहुंची तो काफी रात हो चुकी थी। रात्रि के 10:30 बज रहे थे। ऐसे में युवती को कुछ समझ नहीं आया। अंजान जगह। जाए तो कहां? बोगी में ही बैठी रही। सभी पैसेंजर उतर गए। फिर डिब्बे की सफाई के लिए सरकारी कर्मचारी वहां पहुंचा। उसने अकेली युवती को देखा तो उससे पूछताछ शुरू की। फिर कर्मचारी राजकपूर ने युवती को अकेली और परेशान देखा। आरोपी ने लड़की से सारी बात जानी। इसके बाद लड़की ने अपनी मां से बात कराने को कहा। आरोपी कर्मचारी ने उसे मां से बात करवाई। फिर खुद भी बात की। कहा कि सवेरे आकर नाबालिग को ले जाएं। यहां बच्ची सुरक्षित है। उसने मां को भरोसा दिलाया कि परेशानी की कोई बात नहीं है। कर्मचारी ने सबको विश्वास में लेने के बाद ट्रेन के डिब्बे को लॉक कर दिया। बच्ची के साथ बलात्कार की वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।
यूपी के इटावा से रौंगटे खड़े करने वाली वारदात सामने आ रही है। घर में मां-बाप की डांट से खफा होकर युवती घर से भाग गई। वह इटावा स्टेशन पहुंची। उसे महोबा जाना था। इटावा स्टेशन पहुंचने के पश्चात युवती को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह डिब्बे में बैठी थी। इसी दौरान सफाई कर्मचारी पहुंचा। उसने पीड़िता को अकेला देखा तो जान-पहचान बढ़ाई। फिर विश्वास दिलाया और फिर उसे दबोच लिया। दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। पंद्रह जनवरी की घटना के प्रकरण में सत्रह जनवरी को मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोपी सफाईकर्मी को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है। झांसी से भागी युवती के साथ इटावा स्टेशन की घटना को लेकर रेल विभाग ने सख्त रवैया अपनाया। मामले की सूचना मिलते ही आरोपी की जांच शुरू कर दी गई। पीड़िता के पास आरोपी का मोबाइल नंबर होने से उसे ट्रेस करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। झांसी की निवासी हाईस्कूल की छात्रा को परिजनों की बात इतनी बुरी लगी कि वह घर से फरार हो गई। उसे अपने दादा के घर महोबा जाना था। भूले भटके वो इटावा वाली ट्रेन झांसी-इटावा इंटरसिटी में बैठ गई। इटावा स्टेशन पहुंची तो काफी रात हो चुकी थी। रात्रि के दस:तीस बज रहे थे। ऐसे में युवती को कुछ समझ नहीं आया। अंजान जगह। जाए तो कहां? बोगी में ही बैठी रही। सभी पैसेंजर उतर गए। फिर डिब्बे की सफाई के लिए सरकारी कर्मचारी वहां पहुंचा। उसने अकेली युवती को देखा तो उससे पूछताछ शुरू की। फिर कर्मचारी राजकपूर ने युवती को अकेली और परेशान देखा। आरोपी ने लड़की से सारी बात जानी। इसके बाद लड़की ने अपनी मां से बात कराने को कहा। आरोपी कर्मचारी ने उसे मां से बात करवाई। फिर खुद भी बात की। कहा कि सवेरे आकर नाबालिग को ले जाएं। यहां बच्ची सुरक्षित है। उसने मां को भरोसा दिलाया कि परेशानी की कोई बात नहीं है। कर्मचारी ने सबको विश्वास में लेने के बाद ट्रेन के डिब्बे को लॉक कर दिया। बच्ची के साथ बलात्कार की वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) भारत के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने रविवार को कहा कि टीम 'बहुत भाग्यशाली' है कि विराट कोहली के स्तर के खिलाड़ी से कप्तानी का जिम्मा संभालने के लिए रोहित शर्मा जैसा क्षमतावान खिलाड़ी मौजूद है। कोहली ने जनवरी 2021 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला गंवाने के बाद कप्तान का पद छोड़ दिया था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रविवार को दूसरे टेस्ट में छह विकेट की जीत के साथ ही बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अपने बरकरार रखने के बाद द्रविड़ ने रोहित की कप्तानी की तारीफ करते हुए कहा कि मुंबई के इस खिलाड़ी का ड्रेसिंग रूम में सब सम्मान करते हैं। कप्तान रोहित ने मैच में भारत को जीत दिलाने के का श्रेय रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन की स्पिन गेंदबाजों की जोड़ी को दिया। जडेजा ने दूसरी पारी में 42 रन पर सात विकेट चटकाकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच में कुल 10 विकेट लिये जबकि अश्विन ने दोनों पारियों में तीन-तीन विकेट चटकाये। जडेजा और अश्विन की फिरकी के सामने ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी महज 113 रन पर सिमट गयी। रोहित ने कहा कि पहली पारी में जडेजा और कोहली के बाद अक्षर पटेल और अश्विन की साझेदारियों ने टीम की जीत की नींव रखी। मैन ऑफ द मैच जडेजा ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने उनके खिलाफ स्वीप शॉट खेलने का विकल्प चुना जो सही नहीं रहा। इस हार ने भारत में श्रृंखला जीतने के लिए ऑस्ट्रेलिया के 19 साल का इंतजार और बढ़ गया। (इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है। )
नयी दिल्ली, उन्नीस फरवरी भारत के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने रविवार को कहा कि टीम 'बहुत भाग्यशाली' है कि विराट कोहली के स्तर के खिलाड़ी से कप्तानी का जिम्मा संभालने के लिए रोहित शर्मा जैसा क्षमतावान खिलाड़ी मौजूद है। कोहली ने जनवरी दो हज़ार इक्कीस में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला गंवाने के बाद कप्तान का पद छोड़ दिया था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रविवार को दूसरे टेस्ट में छह विकेट की जीत के साथ ही बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अपने बरकरार रखने के बाद द्रविड़ ने रोहित की कप्तानी की तारीफ करते हुए कहा कि मुंबई के इस खिलाड़ी का ड्रेसिंग रूम में सब सम्मान करते हैं। कप्तान रोहित ने मैच में भारत को जीत दिलाने के का श्रेय रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन की स्पिन गेंदबाजों की जोड़ी को दिया। जडेजा ने दूसरी पारी में बयालीस रन पर सात विकेट चटकाकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच में कुल दस विकेट लिये जबकि अश्विन ने दोनों पारियों में तीन-तीन विकेट चटकाये। जडेजा और अश्विन की फिरकी के सामने ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी महज एक सौ तेरह रन पर सिमट गयी। रोहित ने कहा कि पहली पारी में जडेजा और कोहली के बाद अक्षर पटेल और अश्विन की साझेदारियों ने टीम की जीत की नींव रखी। मैन ऑफ द मैच जडेजा ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने उनके खिलाफ स्वीप शॉट खेलने का विकल्प चुना जो सही नहीं रहा। इस हार ने भारत में श्रृंखला जीतने के लिए ऑस्ट्रेलिया के उन्नीस साल का इंतजार और बढ़ गया।
- 6 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 6 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स के सारे शो सिनेमाघर में हाउसफुल चल रहे हैं। इसके साथ अनुपम खेर, पल्लवी जोशी और विवेक अग्निहोत्री की इस फिल्म को दर्शकों को लाजवाब प्रतिक्रिया मिल रही है। साल 1990 के दौरान कश्मीरी पंडितों के दर्द, हत्या और पलायन की घटना को द कश्मीर फाइल्स में दिखाया गया है। हाल ही में एक चैनल पर किए गए शो के दौरान दर्शकों में बैठी कश्मीरी महिला के दर्द को सुनकर अनुपम खेर, विवेक अग्निहोत्री और पल्लवी जोशी की आंख भर आयी। जहां पर कोई भी अपने आंसू को रोक नहीं पाया। आज तक चैनल पर हुए द कश्मीर फाइल्स विशेष प्रोग्राम के दौरान कश्मीरी पंडितों के परिवार के लोगों ने अनुपम खेर और विवेक अग्निहोत्री से बातचीत की। अपना किस्सा सुनाते हुए स्टूडियो में मौजूद एक महिला रोने लगीं। एक महिला ने विवेक अग्निहोत्री को धन्यवाद देते हुए रोकर कहा कि मेरे मामा घर सेस दो कदम की दूरी पर थे। तभी एक लड़का आया और उन्हें गोली मार दी। उन्होंने हमें खून भी साफ नहीं करने दिया। उनकी आत्मा पहले ही मर चुकी थी। बहुत मुश्किल से उनका अंतिम संस्कार हो पाया। महिला ने आगे कहा कि मस्जिद में घोषणा की जाती थी कि वो लड़की मेरी है। वो मकान मेरा है। औरत मेरी है। दूसरी कक्षा में मेरा भाई पढ़ता था मैं उसको ट्रक में लेकर आयी थी। एक अन्य महिला ने अपना दर्द जाहिर करते हुए कहा कि वो आज भी यही चाहते हैं कि हमें डरा कर रखें। एक और महिला ने रोते हुए कहा कि हम गुलमर्ग में पढ़ाई करते थे। ये पूरी बात सुनकर अनुपम खेर और विवेक अग्निहोत्री अपना रोना नहीं रोक पाए। पल्लवी जोशी उठ कर अपनी जगह से उस महिला के आंसू पोछने के लिए नीचे आती हैं। अनुपम खेर भी अपने आंसू पोछते हुए नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इससे पहले भी द कश्मीर फाइल्स के प्रीमियर के दौरान एक महिला ने विवेक अग्निहोत्री के पैर पकड़कर रोने लग पड़ीं थीं। आपको बता दें कि द कश्मीर फाइल्स 11 मार्च को रिलीज हुई है। इस फिल्म को पहले केवल 630 स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया था। बाद में शुक्रवार और शनिवार को फिल्म को मिलने वाले लाजवाब प्रतिक्रिया के बाद इसकी गिनती 2500 तक कर दी गई। फिल्म की कमाई का आंकड़ा बंपर होने की उम्मीद की जा रही है। यह फिल्म अभी तक 40 करोड़ से अधिक की कमाई कर चुकी है। 14 करोड़ के बजट में इसे तैयार किया गया था।
- छः hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - छः hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स के सारे शो सिनेमाघर में हाउसफुल चल रहे हैं। इसके साथ अनुपम खेर, पल्लवी जोशी और विवेक अग्निहोत्री की इस फिल्म को दर्शकों को लाजवाब प्रतिक्रिया मिल रही है। साल एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दौरान कश्मीरी पंडितों के दर्द, हत्या और पलायन की घटना को द कश्मीर फाइल्स में दिखाया गया है। हाल ही में एक चैनल पर किए गए शो के दौरान दर्शकों में बैठी कश्मीरी महिला के दर्द को सुनकर अनुपम खेर, विवेक अग्निहोत्री और पल्लवी जोशी की आंख भर आयी। जहां पर कोई भी अपने आंसू को रोक नहीं पाया। आज तक चैनल पर हुए द कश्मीर फाइल्स विशेष प्रोग्राम के दौरान कश्मीरी पंडितों के परिवार के लोगों ने अनुपम खेर और विवेक अग्निहोत्री से बातचीत की। अपना किस्सा सुनाते हुए स्टूडियो में मौजूद एक महिला रोने लगीं। एक महिला ने विवेक अग्निहोत्री को धन्यवाद देते हुए रोकर कहा कि मेरे मामा घर सेस दो कदम की दूरी पर थे। तभी एक लड़का आया और उन्हें गोली मार दी। उन्होंने हमें खून भी साफ नहीं करने दिया। उनकी आत्मा पहले ही मर चुकी थी। बहुत मुश्किल से उनका अंतिम संस्कार हो पाया। महिला ने आगे कहा कि मस्जिद में घोषणा की जाती थी कि वो लड़की मेरी है। वो मकान मेरा है। औरत मेरी है। दूसरी कक्षा में मेरा भाई पढ़ता था मैं उसको ट्रक में लेकर आयी थी। एक अन्य महिला ने अपना दर्द जाहिर करते हुए कहा कि वो आज भी यही चाहते हैं कि हमें डरा कर रखें। एक और महिला ने रोते हुए कहा कि हम गुलमर्ग में पढ़ाई करते थे। ये पूरी बात सुनकर अनुपम खेर और विवेक अग्निहोत्री अपना रोना नहीं रोक पाए। पल्लवी जोशी उठ कर अपनी जगह से उस महिला के आंसू पोछने के लिए नीचे आती हैं। अनुपम खेर भी अपने आंसू पोछते हुए नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इससे पहले भी द कश्मीर फाइल्स के प्रीमियर के दौरान एक महिला ने विवेक अग्निहोत्री के पैर पकड़कर रोने लग पड़ीं थीं। आपको बता दें कि द कश्मीर फाइल्स ग्यारह मार्च को रिलीज हुई है। इस फिल्म को पहले केवल छः सौ तीस स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया था। बाद में शुक्रवार और शनिवार को फिल्म को मिलने वाले लाजवाब प्रतिक्रिया के बाद इसकी गिनती दो हज़ार पाँच सौ तक कर दी गई। फिल्म की कमाई का आंकड़ा बंपर होने की उम्मीद की जा रही है। यह फिल्म अभी तक चालीस करोड़ से अधिक की कमाई कर चुकी है। चौदह करोड़ के बजट में इसे तैयार किया गया था।
BHAGALPUR : शहर के मोजाहिदपुर पुलिस के द्वारा एक ई रिक्शा चालक की लाठी से जमकर पिटाई कर दी गई। जिससे ई रिक्शा चालक गौतम का हाथ टूट गया। घायल ई रिक्शा चालक का कहना है कि वह सवारी बैठाकर जा रहा था। इसी क्रम में थाना के पास पुलिस के द्वारा सभी ई रिक्शा को घुमाया जा रहा था। जिसको लेकर वह साइड में गाड़ी खड़ा कर सवारी से पैसे मांग रहा था। इसी क्रम में एक पुलिसकर्मी आया और उसकी लाठी से जमकर पिटाई कर दी। जिससे वह घायल हो गया। वही घटना के बाद पुलिस वालों ने ही ई रिक्शा चालक को जीप में बैठाकर सदर अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने हाथ टूटने की बात कही है। बाद में इस घटना से आक्रोशित ई-रिक्शा चालकों ने सड़क जाम कर जमकर हंगामा किया। एक तरफ बिहार के डीजीपी पीपुल फ्रेंडली पुलिस होने का दावा करते हैं। वहीं दूसरी ओर मोजाहिदपुर पुलिस डीजीपी के आदेश के उलट लाठी चलाने में लगी हुई है। अब देखने वाली बात है कि इस कार्रवाई को लेकर पुलिस के वरीय अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।
BHAGALPUR : शहर के मोजाहिदपुर पुलिस के द्वारा एक ई रिक्शा चालक की लाठी से जमकर पिटाई कर दी गई। जिससे ई रिक्शा चालक गौतम का हाथ टूट गया। घायल ई रिक्शा चालक का कहना है कि वह सवारी बैठाकर जा रहा था। इसी क्रम में थाना के पास पुलिस के द्वारा सभी ई रिक्शा को घुमाया जा रहा था। जिसको लेकर वह साइड में गाड़ी खड़ा कर सवारी से पैसे मांग रहा था। इसी क्रम में एक पुलिसकर्मी आया और उसकी लाठी से जमकर पिटाई कर दी। जिससे वह घायल हो गया। वही घटना के बाद पुलिस वालों ने ही ई रिक्शा चालक को जीप में बैठाकर सदर अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने हाथ टूटने की बात कही है। बाद में इस घटना से आक्रोशित ई-रिक्शा चालकों ने सड़क जाम कर जमकर हंगामा किया। एक तरफ बिहार के डीजीपी पीपुल फ्रेंडली पुलिस होने का दावा करते हैं। वहीं दूसरी ओर मोजाहिदपुर पुलिस डीजीपी के आदेश के उलट लाठी चलाने में लगी हुई है। अब देखने वाली बात है कि इस कार्रवाई को लेकर पुलिस के वरीय अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लड़कियां लगातार हैवानियत का शिकार हो रही हैं। राजधानी के महरौली में श्रद्धा वालकर की उसके लिव इन पार्टनर आफताब आमीन पूनावाला ने निर्मम हत्या कर दी थी। ठीक वैसा ही एक और मामला दिल्ली से सामने आया है। दरअसल साहिल गहलोत नामक शख्स ने अपनी पार्टनर की 9 फरवरी को हत्या कर दी थी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से एक बाद एक महिलाओं की हत्या की खबर सामने आ रही है। बीते साल यहां के महरौली में श्रद्धा वालकर की हत्या की तरह एक और वारदात सामने आया है। दरअसल 9 फरवरी को साहिल गहलोत नामक शख्स ने अपनी पार्टनर की बेरहमी से हत्या कर दी। अब इस पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भड़की हुई हैं। उन्होंने ऐसा कहा कि आखिर दिल्ली में कब तक लड़कियां ऐसे मरती रहेंगी। बता दें कि 9 फरवरी को दिल्ली में श्रद्धा वालकर जैसी एक वारदात सामने आई है। राजधानी में साहिल गहलोत ने अपने लिव इन पार्टनर निक्की यादव की हत्या कर दी थी। इसके बाद मृतिका का शव कई दिनों बाद बंद पड़े ढाबे की एक फ्रिज में मिला। कुछ महीने पहले दिल दहलाने वाले श्रद्धा हत्याकांड ने इंसानियत को झकझोर दिया था। अब निक्की यादव नाम की लड़की को उसके बॉयफ्रेंड ने मार डाला, फ्रिज में लाश रखी और अगले दिन किसी और से शादी की। बेहद ख़ौफ़नाक, आख़िर कब तक लड़कियाँ ऐसे ही मरती रहेंगी।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लड़कियां लगातार हैवानियत का शिकार हो रही हैं। राजधानी के महरौली में श्रद्धा वालकर की उसके लिव इन पार्टनर आफताब आमीन पूनावाला ने निर्मम हत्या कर दी थी। ठीक वैसा ही एक और मामला दिल्ली से सामने आया है। दरअसल साहिल गहलोत नामक शख्स ने अपनी पार्टनर की नौ फरवरी को हत्या कर दी थी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से एक बाद एक महिलाओं की हत्या की खबर सामने आ रही है। बीते साल यहां के महरौली में श्रद्धा वालकर की हत्या की तरह एक और वारदात सामने आया है। दरअसल नौ फरवरी को साहिल गहलोत नामक शख्स ने अपनी पार्टनर की बेरहमी से हत्या कर दी। अब इस पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भड़की हुई हैं। उन्होंने ऐसा कहा कि आखिर दिल्ली में कब तक लड़कियां ऐसे मरती रहेंगी। बता दें कि नौ फरवरी को दिल्ली में श्रद्धा वालकर जैसी एक वारदात सामने आई है। राजधानी में साहिल गहलोत ने अपने लिव इन पार्टनर निक्की यादव की हत्या कर दी थी। इसके बाद मृतिका का शव कई दिनों बाद बंद पड़े ढाबे की एक फ्रिज में मिला। कुछ महीने पहले दिल दहलाने वाले श्रद्धा हत्याकांड ने इंसानियत को झकझोर दिया था। अब निक्की यादव नाम की लड़की को उसके बॉयफ्रेंड ने मार डाला, फ्रिज में लाश रखी और अगले दिन किसी और से शादी की। बेहद ख़ौफ़नाक, आख़िर कब तक लड़कियाँ ऐसे ही मरती रहेंगी।
कुछ दिन पहले Reliance Jio द्वारा महीने भर के प्लान की पेशकश की गई थी। इस होड़ में शामिल होते हुए Vodafone Idea ने भी महीने भर का प्लान पेश कर दिया है। मतलब अब जियो की तरह वोडाफोन आइडिया के रिचार्ज में भी 28 दिन नहीं पूरे 31 दिन की वैधता मिलेगी। जानकारी के लिए बता दें कि अगर महीने में 30 दिन होंगे, तो 30 दिन की वैधता मिलेगी और 31 दिन होंगे तो 31 दिन की वैधता मिलेगी। जिस तरह Jio ने अपने मंथली रिचार्ज प्लान को 259 रुपये में शुरू किया था। Vodafone Idea द्वारा यह प्लान 337 रुपये में दिया जा रहा है, कीमत को देखते हुए vodafone-idea का यह प्लान ग्राहकों को महंगा पड़ सकता है। जानें प्लान की पूरी जानकारी। पहले ग्राहकों को साल भर में 13 रिचार्ज करवाने पड़ते थे, लेकिन जियो और वोडाफोन आइडिया की इस नई पहल के बाद ग्राहकों को साल भर में केवल 12 बार रिचार्ज कराने की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा जियो के बाद Vodafone-idea पहली ऐसी टेलीकॉम कंपनी है, जिस ने महीने भर की वैधता वाले प्लान को बाजार में उतारा है। VI के इस नए प्लान को कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर देखा जा सकता है। जिसमें कंपनी ने इस प्लान को अनलिमिटेड नाम से लिस्ट किया है, प्लान के मुताबिक महीने भर में ग्राहकों को अनलिमिटेड कॉलिंग, 100 SMS के साथ 28GB डाटा प्रतिदिन मिलेगा। इसके साथ ही महीने भर के रिचार्ज प्लान में Vi Movies और TV Classic का उपयोग करने की सुविधा भी दी जा रही है। जिसकी मदद से ग्राहकों को मनोरंजन का लुफ्त उठाने का मौका भी मिलेगा। बताते चलें कि, टेलीकॉम कंपनी के इन नए प्लान्स के पीछे टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया TRAI का हाथ है। TRAI ने टेलिकॉम कंपनियों को निर्देश दिए थे की वे जल्द ही ऐसे रिचार्ज पेश करें, जिनमें ग्राहकों को 31 दिनों की वैधता का लाभ मिले। TRAI के आदेश का पालन कर कंपनियां अब नए प्लान पेश कर रही हैं। अब देखना यह है कि, जिस तरह जियो और Vodafone-idea के मंथली प्लान सामने आ चुके हैं, टेलीकॉम प्रमुख Airtel मंथली प्लान कब पेश करती है।
कुछ दिन पहले Reliance Jio द्वारा महीने भर के प्लान की पेशकश की गई थी। इस होड़ में शामिल होते हुए Vodafone Idea ने भी महीने भर का प्लान पेश कर दिया है। मतलब अब जियो की तरह वोडाफोन आइडिया के रिचार्ज में भी अट्ठाईस दिन नहीं पूरे इकतीस दिन की वैधता मिलेगी। जानकारी के लिए बता दें कि अगर महीने में तीस दिन होंगे, तो तीस दिन की वैधता मिलेगी और इकतीस दिन होंगे तो इकतीस दिन की वैधता मिलेगी। जिस तरह Jio ने अपने मंथली रिचार्ज प्लान को दो सौ उनसठ रुपयापये में शुरू किया था। Vodafone Idea द्वारा यह प्लान तीन सौ सैंतीस रुपयापये में दिया जा रहा है, कीमत को देखते हुए vodafone-idea का यह प्लान ग्राहकों को महंगा पड़ सकता है। जानें प्लान की पूरी जानकारी। पहले ग्राहकों को साल भर में तेरह रिचार्ज करवाने पड़ते थे, लेकिन जियो और वोडाफोन आइडिया की इस नई पहल के बाद ग्राहकों को साल भर में केवल बारह बार रिचार्ज कराने की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा जियो के बाद Vodafone-idea पहली ऐसी टेलीकॉम कंपनी है, जिस ने महीने भर की वैधता वाले प्लान को बाजार में उतारा है। VI के इस नए प्लान को कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर देखा जा सकता है। जिसमें कंपनी ने इस प्लान को अनलिमिटेड नाम से लिस्ट किया है, प्लान के मुताबिक महीने भर में ग्राहकों को अनलिमिटेड कॉलिंग, एक सौ SMS के साथ अट्ठाईसGB डाटा प्रतिदिन मिलेगा। इसके साथ ही महीने भर के रिचार्ज प्लान में Vi Movies और TV Classic का उपयोग करने की सुविधा भी दी जा रही है। जिसकी मदद से ग्राहकों को मनोरंजन का लुफ्त उठाने का मौका भी मिलेगा। बताते चलें कि, टेलीकॉम कंपनी के इन नए प्लान्स के पीछे टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया TRAI का हाथ है। TRAI ने टेलिकॉम कंपनियों को निर्देश दिए थे की वे जल्द ही ऐसे रिचार्ज पेश करें, जिनमें ग्राहकों को इकतीस दिनों की वैधता का लाभ मिले। TRAI के आदेश का पालन कर कंपनियां अब नए प्लान पेश कर रही हैं। अब देखना यह है कि, जिस तरह जियो और Vodafone-idea के मंथली प्लान सामने आ चुके हैं, टेलीकॉम प्रमुख Airtel मंथली प्लान कब पेश करती है।
देश को चरमपंथ की आग में झोंकने का मंसूबे रखने वाला पीएफआई अब जांच एजेंसियों की रडार पर आ गया हैं। बिहार के फुलवारी शरीफ में एनआईए ने पीएफआई कार्यकर्ताओं के यूएपीए के तहत केस दर्ज कर लिया हैं। अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय के काउंटर टेररिज्म एंड काउंटर रेडिकलाइजेशन डिवीजन की ओर से जारी आदेश के बाद भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है। बिहार के सीमाचंल में पीएफआई आतंकवाद का जाल बुन रहा था। जिसको सुरक्षा एजेंसियों व बिहार पुलिस की सतर्कता के चलते भंडाफोड़ किया गया। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनके PFI से संबंध थे। साथ ही भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की उनकी योजना थी। गत दिनों पहले बिहार पुलिस ने पीएफआई के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। जिनमें एक बिहार पुलिस का पूर्व अफसर भी था , जो चरमपंथ की आग को देश में फैलाने का प्रयास कर रहा था, इन लोगों के पास से एक खुफिया देश विरोधी दस्तावेज मिला था, जिसमें गजवा -ए- हिंद के नाम से हिंदुस्तान इस्लामिक राष्ट्र में बदलने को मंसूबों के लिखा गया था। पुलिस अधिकारी मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज को 13 जुलाई को पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से गिरफ्तार किया गया था, जबकि नूरुद्दीन जंगी को तीन दिन बाद उत्तर प्रदेश के आतंकवाद-रोधी दस्ते ने लखनऊ से अरेस्ट किया था। एनआईए ने बुधवार को बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित जामिया मारिया निस्वा मदरसा में तलाशी ली और असगर अली नाम के टीचर को गिरफ्तार किया। फुलवारी शरीफ मामले में बिहार पुलिस अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। बिहार पुलिस की ओर से फुलवारी शरीफ में की गई छापेमारी में कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं। आपको बता दे की पीएफआई देश के दंगों में शामिल रहा हैं। पिछले कुछ दिनों पहले पीएफआई राजस्थान व मध्यप्रदेश की हिंसा में पीएफआई कार्यकर्ताओं का नाम खुलकर सामने आया था। पीएफआई आतंकवादी प्रतिबंधित सिमी का ही दुसरा स्वरूप हैं। जो देश को इस्लामिक राष्ट्र में बदलने का मंसूबा अख्तियार किए हुए हैं। तेलंगाना के निजामाबाद व बिहार में पीएफआई ने चरमपंथी नौजवानों के ब्रेववॉश करके हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी दी थी।
देश को चरमपंथ की आग में झोंकने का मंसूबे रखने वाला पीएफआई अब जांच एजेंसियों की रडार पर आ गया हैं। बिहार के फुलवारी शरीफ में एनआईए ने पीएफआई कार्यकर्ताओं के यूएपीए के तहत केस दर्ज कर लिया हैं। अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय के काउंटर टेररिज्म एंड काउंटर रेडिकलाइजेशन डिवीजन की ओर से जारी आदेश के बाद भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है। बिहार के सीमाचंल में पीएफआई आतंकवाद का जाल बुन रहा था। जिसको सुरक्षा एजेंसियों व बिहार पुलिस की सतर्कता के चलते भंडाफोड़ किया गया। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनके PFI से संबंध थे। साथ ही भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की उनकी योजना थी। गत दिनों पहले बिहार पुलिस ने पीएफआई के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। जिनमें एक बिहार पुलिस का पूर्व अफसर भी था , जो चरमपंथ की आग को देश में फैलाने का प्रयास कर रहा था, इन लोगों के पास से एक खुफिया देश विरोधी दस्तावेज मिला था, जिसमें गजवा -ए- हिंद के नाम से हिंदुस्तान इस्लामिक राष्ट्र में बदलने को मंसूबों के लिखा गया था। पुलिस अधिकारी मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज को तेरह जुलाई को पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से गिरफ्तार किया गया था, जबकि नूरुद्दीन जंगी को तीन दिन बाद उत्तर प्रदेश के आतंकवाद-रोधी दस्ते ने लखनऊ से अरेस्ट किया था। एनआईए ने बुधवार को बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित जामिया मारिया निस्वा मदरसा में तलाशी ली और असगर अली नाम के टीचर को गिरफ्तार किया। फुलवारी शरीफ मामले में बिहार पुलिस अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। बिहार पुलिस की ओर से फुलवारी शरीफ में की गई छापेमारी में कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं। आपको बता दे की पीएफआई देश के दंगों में शामिल रहा हैं। पिछले कुछ दिनों पहले पीएफआई राजस्थान व मध्यप्रदेश की हिंसा में पीएफआई कार्यकर्ताओं का नाम खुलकर सामने आया था। पीएफआई आतंकवादी प्रतिबंधित सिमी का ही दुसरा स्वरूप हैं। जो देश को इस्लामिक राष्ट्र में बदलने का मंसूबा अख्तियार किए हुए हैं। तेलंगाना के निजामाबाद व बिहार में पीएफआई ने चरमपंथी नौजवानों के ब्रेववॉश करके हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी दी थी।
चेन्नई। चेन्नई में पानी को लेकर हो रही किल्लत को कम करने के लिए तमिलनाडु सरकार ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए हैं। तमिलनाडु के वेल्लोर जिले से शुक्रवार को पानी लेकर जा रही 50 बोगियों वाली विशेष ट्रेन के संबंध में दक्षिणी रेलवे अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक बोगी में 50,000 लीटर पानी ले जाने की क्षमता है। ट्रेन को सुबह जोलारपेट्टई स्टेशन से रवाना किया गया है। यह दोपहर तक चेन्नई पहुंचेगी। विल्लीवाक्कम स्टेशन पर पानी उतारने की शुुरुआत होने पर राज्य के मंत्री उपस्थित रह सकते हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने राज्य सरकार की योजनाओं की घोषणा की थी। इसमें चेन्नई की जरूरतों को पूरा करने के लिए जोलारपेट्टई से रेल द्वारा प्रतिदिन 10 मिलियन लीटर पानी पहुंचाने का लक्ष्य भी शामिल है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इसके लिए करीब 65 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। वर्तमान में चेन्नई महानगर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (चेन्नई मेट्रो जल) राज्य की राजधानी में लगभग 525 मिलियन लीटर प्रति दिन आपूर्ति कर रहा है। जोलारपेट्टाई से भेजा गया पानी मौजूदा आपूर्ति को बढ़ाएगा। बता दें कि इन दिनों चेन्नई में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे। चेन्नई में पानी की आपूर्ति करने वाले पूंदी, चेम्बरंबक्कम, चोलावरम और रेड हिल्स स्थित जलाशय सूखने से यहां पानी को लेकर हाहाकार मचा है।
चेन्नई। चेन्नई में पानी को लेकर हो रही किल्लत को कम करने के लिए तमिलनाडु सरकार ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए हैं। तमिलनाडु के वेल्लोर जिले से शुक्रवार को पानी लेकर जा रही पचास बोगियों वाली विशेष ट्रेन के संबंध में दक्षिणी रेलवे अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक बोगी में पचास,शून्य लीटरटर पानी ले जाने की क्षमता है। ट्रेन को सुबह जोलारपेट्टई स्टेशन से रवाना किया गया है। यह दोपहर तक चेन्नई पहुंचेगी। विल्लीवाक्कम स्टेशन पर पानी उतारने की शुुरुआत होने पर राज्य के मंत्री उपस्थित रह सकते हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने राज्य सरकार की योजनाओं की घोषणा की थी। इसमें चेन्नई की जरूरतों को पूरा करने के लिए जोलारपेट्टई से रेल द्वारा प्रतिदिन दस मिलियन लीटर पानी पहुंचाने का लक्ष्य भी शामिल है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इसके लिए करीब पैंसठ करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। वर्तमान में चेन्नई महानगर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड राज्य की राजधानी में लगभग पाँच सौ पच्चीस मिलियन लीटर प्रति दिन आपूर्ति कर रहा है। जोलारपेट्टाई से भेजा गया पानी मौजूदा आपूर्ति को बढ़ाएगा। बता दें कि इन दिनों चेन्नई में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे। चेन्नई में पानी की आपूर्ति करने वाले पूंदी, चेम्बरंबक्कम, चोलावरम और रेड हिल्स स्थित जलाशय सूखने से यहां पानी को लेकर हाहाकार मचा है।
लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई महासंग्राम में बदल चुकी है। नेताओं की रैलियों का दौर चरम पर पहुंच चुका है। लोकसभा चुनाव के पांच चरण आज खत्म हो गए। वहीं छठे चरण का मतदान 12 मई को 118 सीटों पर मतदान होना है। आपके लिए चुनाव की हर बड़ी खबर जानना बेहद जरूरी है। दिनभर की आपाधापी में चुनाव की बड़ी खबरें आपसे छूट रही हों तो चुनाव की हर बड़ी खबर आप एक ही जगह पढ़ सकते हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर-पूर्वी लोकसभा सीट पर पार्टी की उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के लिए रोड शो किया। शीला के खिलाफ भाजपा की ओर से मनोज तिवारी चुनाव लड़ रहे हैं। इस दौरान प्रियंका ने पीएम मोदी को तीखे तेवर और अंदाज में कई बातें भी कहीं। तस्वीरों में देखिए, रोड शो की झलकियां और 10 बड़ी बातें। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में बोले पीएम मोदी, "मुझे गाली देते हुए इन लोगों ने कितनी बार मर्यादा तार-तार की है। इनकी प्रेम वाली डिक्शनरी से पता चलता है। मुझे स्टुपिड पीएम कहा गया। जवानों के खून का दलाल कहा गया। इनके प्रेम की डिक्शनरी से मेरे लिए गद्दाफी, मुसोलिनी और हिटलर जैसे शब्द निकले। " मध्यप्रदेश में इन दिनों चुनावी घमासान इस कदर मचा है कि यहां की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। आज भोपाल में दिग्विजय सिंह के रोड शो में मोदी-मोदी के नारे लगाने वालों पर एफआईआर दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस की लड़ाई महासंग्राम में बदल चुकी है। नेताओं की रैलियों का दौर चरम पर पहुंच चुका है। लोकसभा चुनाव के पांच चरण आज खत्म हो गए। वहीं छठे चरण का मतदान बारह मई को एक सौ अट्ठारह सीटों पर मतदान होना है। आपके लिए चुनाव की हर बड़ी खबर जानना बेहद जरूरी है। दिनभर की आपाधापी में चुनाव की बड़ी खबरें आपसे छूट रही हों तो चुनाव की हर बड़ी खबर आप एक ही जगह पढ़ सकते हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर-पूर्वी लोकसभा सीट पर पार्टी की उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के लिए रोड शो किया। शीला के खिलाफ भाजपा की ओर से मनोज तिवारी चुनाव लड़ रहे हैं। इस दौरान प्रियंका ने पीएम मोदी को तीखे तेवर और अंदाज में कई बातें भी कहीं। तस्वीरों में देखिए, रोड शो की झलकियां और दस बड़ी बातें। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में बोले पीएम मोदी, "मुझे गाली देते हुए इन लोगों ने कितनी बार मर्यादा तार-तार की है। इनकी प्रेम वाली डिक्शनरी से पता चलता है। मुझे स्टुपिड पीएम कहा गया। जवानों के खून का दलाल कहा गया। इनके प्रेम की डिक्शनरी से मेरे लिए गद्दाफी, मुसोलिनी और हिटलर जैसे शब्द निकले। " मध्यप्रदेश में इन दिनों चुनावी घमासान इस कदर मचा है कि यहां की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। आज भोपाल में दिग्विजय सिंह के रोड शो में मोदी-मोदी के नारे लगाने वालों पर एफआईआर दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। रेलगाड़ी रेलगाड़ी शब्द दो शब्द रेल और गाड़ी से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है रेल (अब हिन्दी में इसे रेल की पटरी या सिर्फ पटरी कहते हैं) पर चलने वाली गाड़ी। दूसरे शब्दों में एक रेलगाड़ी या ट्रेन वाहनों (डिब्बों) की एक जुड़ी हुई श्रृंखला है जो एक निश्चित स्थायी पथ पर चलकर माल और सवारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाती है। यह पथ आमतौर पर दो पटरियों से बना होता है, लेकिन यह एक पटरीय या मेग्लेव गाइडवे भी हो सकता है। ट्रेन के लिए प्रणोदन एक अलग लोकोमोटिव या स्वयं-प्रणोदित एकाधिक ईकाइयों की विशिष्ट मोटरों के द्वारा प्रदान किया जाता है। अधिकतर आधुनिक गाड़ियों डीजल इंजन या बिजली के इंजन जिन्हें रेलगाड़ी के ऊपर से जा रहे बिजली के तारों से बिजली मिलती है, द्वारा चलाई जाती हैं पर 19 वीं सदी के मध्य से 20 वीं शताब्दी तक यह भाप के इंजनों से चलती थीं। ऊर्जा के अन्य स्रोत जैसे घोड़े, रस्सी या तार, गुरुत्वाकर्षण, न्युमेटिक और गैस टर्बाइन के द्वारा भी रेलगाड़ी चलाना संभव हैं। . एक जर्मन ट्रेन पर एक रेल इंजीनियर का कार्यस्थल एक रेलमार्ग इंजीनियर, लोकोमोटिव इंजीनियर, ट्रेन ऑपरेटर, ट्रेन ड्राइवर या इंजन ड्राइवर वह व्यक्ति है जो रेलमार्ग पर एक ट्रेन को चलाता है। इंजीनियर लोकोमोटिव के साथ ट्रेन के यांत्रिक आपरेशन, ट्रेन की गति और सभी ट्रेनों के प्रबंधन और प्रभार के लिए जिम्मेदार होते हैं। कई अमेरिकी रेलमार्गों पर, कॅरिअर की प्रगति एक सहायक (ब्रेकमैन), कंडक्टर और अंत में इंजीनियर के रूप में शुरू होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में इंजीनिय को हर 2-3 साल पर प्रमाणित और पुनःप्रमाणित किया जाना आवश्यक है। भारत में, एक इंजन ड्राइवर को एक डीजल सहायक या विद्युत सहायक (विद्युत लोकोमोटिव के मामले में) के रूप में शुरूआत करनी पड़ती है। उसके बाद उनकी पदोन्नतिः बी, ए और ए स्पेशल के स्तर पर होती है। 'ए स्पेशल' स्तर के ड्राइवर तेज और अधिक महत्वपूर्ण ट्रेन को चलाते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, और न्यूजीलैंड में ट्रेन ड्राइवर "लोकोमोटिव इंजीनियर" के रूप में जाने जाते हैं। ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, और ऑस्ट्रेलिया में, वे " ट्रेन ड्राइवर", " इंजन ड्राइवर", " लोकोमोटिव ड्राइवर" या "लोकोमोटिव ऑपरेटर" के रूप में जाने जाते हैं। . रेलगाड़ी और रेलमार्ग इंजीनियर आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। रेलगाड़ी 1 संबंध नहीं है और रेलमार्ग इंजीनियर 9 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (1 + 9)। यह लेख रेलगाड़ी और रेलमार्ग इंजीनियर के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। रेलगाड़ी रेलगाड़ी शब्द दो शब्द रेल और गाड़ी से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है रेल पर चलने वाली गाड़ी। दूसरे शब्दों में एक रेलगाड़ी या ट्रेन वाहनों की एक जुड़ी हुई श्रृंखला है जो एक निश्चित स्थायी पथ पर चलकर माल और सवारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाती है। यह पथ आमतौर पर दो पटरियों से बना होता है, लेकिन यह एक पटरीय या मेग्लेव गाइडवे भी हो सकता है। ट्रेन के लिए प्रणोदन एक अलग लोकोमोटिव या स्वयं-प्रणोदित एकाधिक ईकाइयों की विशिष्ट मोटरों के द्वारा प्रदान किया जाता है। अधिकतर आधुनिक गाड़ियों डीजल इंजन या बिजली के इंजन जिन्हें रेलगाड़ी के ऊपर से जा रहे बिजली के तारों से बिजली मिलती है, द्वारा चलाई जाती हैं पर उन्नीस वीं सदी के मध्य से बीस वीं शताब्दी तक यह भाप के इंजनों से चलती थीं। ऊर्जा के अन्य स्रोत जैसे घोड़े, रस्सी या तार, गुरुत्वाकर्षण, न्युमेटिक और गैस टर्बाइन के द्वारा भी रेलगाड़ी चलाना संभव हैं। . एक जर्मन ट्रेन पर एक रेल इंजीनियर का कार्यस्थल एक रेलमार्ग इंजीनियर, लोकोमोटिव इंजीनियर, ट्रेन ऑपरेटर, ट्रेन ड्राइवर या इंजन ड्राइवर वह व्यक्ति है जो रेलमार्ग पर एक ट्रेन को चलाता है। इंजीनियर लोकोमोटिव के साथ ट्रेन के यांत्रिक आपरेशन, ट्रेन की गति और सभी ट्रेनों के प्रबंधन और प्रभार के लिए जिम्मेदार होते हैं। कई अमेरिकी रेलमार्गों पर, कॅरिअर की प्रगति एक सहायक , कंडक्टर और अंत में इंजीनियर के रूप में शुरू होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में इंजीनिय को हर दो-तीन साल पर प्रमाणित और पुनःप्रमाणित किया जाना आवश्यक है। भारत में, एक इंजन ड्राइवर को एक डीजल सहायक या विद्युत सहायक के रूप में शुरूआत करनी पड़ती है। उसके बाद उनकी पदोन्नतिः बी, ए और ए स्पेशल के स्तर पर होती है। 'ए स्पेशल' स्तर के ड्राइवर तेज और अधिक महत्वपूर्ण ट्रेन को चलाते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, और न्यूजीलैंड में ट्रेन ड्राइवर "लोकोमोटिव इंजीनियर" के रूप में जाने जाते हैं। ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, और ऑस्ट्रेलिया में, वे " ट्रेन ड्राइवर", " इंजन ड्राइवर", " लोकोमोटिव ड्राइवर" या "लोकोमोटिव ऑपरेटर" के रूप में जाने जाते हैं। . रेलगाड़ी और रेलमार्ग इंजीनियर आम में शून्य बातें हैं । रेलगाड़ी एक संबंध नहीं है और रेलमार्ग इंजीनियर नौ है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख रेलगाड़ी और रेलमार्ग इंजीनियर के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
रिसोर्ट Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट कई कारणों से एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। प्रत्येक अच्छी तरह से ज्ञात है कि ग्रीस में उपलब्ध होटल की एक बड़ी संख्या। हालांकि, यह होटल मूल्य और गुणवत्ता के संयोजन के मामले में सर्वश्रेष्ठ में से एक माना जाता व्यर्थ में नहीं है। Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट केर्किरा के द्वीप पर स्थित है। वह बहुत लोकप्रिय है। दूसरे सभी Ionian द्वीप और उत्तरी के बीच सबसे बड़ा। और यह जहां निपटान Gouvia नाम पर है है। यह जगह मनोरंजन, मज़ा, क्लब और समुद्र तट दलों के साथ कई द्वारा जुड़ा हुआ है। लेकिन यह है कि यह कैसे है। क्योंकि Guviyu में ज्यादातर युवा कंपनियों, या सक्रिय मनोरंजन के लिए भूखे लोगों जाना। Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट समुद्र के तत्काल आसपास के क्षेत्र में स्थित है - आप कुछ ही मिनटों में समुद्र तट तक पहुँच सकते हैं। वैसे, अब तक नहीं होटल और हवाई अड्डे से स्थित है। यह "इओनिस कापोडिस्ट्रियस" कहा जाता है। दूर नहीं Gouvia (जो भी Gouves कहा जाता है) स्थित और हेराक्लिओन और Hersonissos से। सामान्य तौर पर, यहाँ आप जल्दी से ब्याज की सभी स्थानों तक पहुँच सकते हैं। होटल और उसके सभी 260 के करीब कमरे तथ्य यह है कि इमारत का निर्माण किया गया 2003 में किया गया था के बावजूद, आधुनिक लग रही है। पिछले बहाली 2007 में किया गया। Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट में रहते हुए, आप पूरी तरह से मजा कर सकते हैं। होटल के व्यापक रूप से तथ्य यह है कि यह अपने आप पानी पार्क है कि के लिए जाना जाता है। वहाँ निश्चित रूप से कम से कम एक बार जाना चाहिए। वाटरपार्क तैराकी निश्चित रूप से कई स्लाइड है और,,। इसके अलावा, जबकि वहाँ, आप पानी एरोबिक्स कर सकते हैं, जिम जाते, वॉलीबॉल या मिनी फुटबॉल खेलने, टेनिस कोर्ट के लिए या मिनी गोल्फ कोर्स पर चलते हैं। वहाँ मस्ती करने के लिए कई तरीके हैं। वहाँ डार्ट्स, टेबल टेनिस, रंगभूमि हैं, और शाम एनीमेशन स्टाफ विभिन्न दिलचस्प शो और डिस्को आयोजित करता है। यह भी बच्चों जिनके माता पिता छुट्टी पर उन लोगों के साथ लाया था के लिए सभी आवश्यक शर्तों है। दो अलग-अलग उथले पूल, खेल का मैदान, 2 मिनी क्लब और एनिमेटरों, उत्साही बच्चों को। वैसे, माता-पिता एक साथ रहना चाहते हैं, वे नर्स कॉल कर सकते हैं, लेकिन यह एक भुगतान सेवा है। अधिक होटल एक डाइविंग स्कूल, बिलियर्ड्स, साइकिल (भाड़े के लिए), एक मसाज पार्लर और सौंदर्य सैलून है। यह सच है, यह सब एक ही चार्ज है। Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट 4 में * सभी कि पर्यटकों के लिए आवश्यक हो सकता है। वहाँ निजी पार्किंग और किराये की कार, फैक्स और फोटोकॉपी सेवा, मुद्रा विनिमय के साथ छोटे से कार्यालय, एक विशाल सम्मेलन कक्ष और ड्राई क्लीनिंग साथ एक कपड़े धोने की है। खाद्य वितरण नहीं है, लेकिन अगर वे पूरे दिन के लिए कहीं और यात्रा करने के लिए योजना थी मेहमानों के स्वागत समारोह में एक पैक दोपहर का भोजन सेवा आदेश कर सकते हैं। और यहां तक कि Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट 4 के क्षेत्र * एक मिनी बाजार है। दुकानें भी पास में हैं, और होटल, लेकिन अगर आप कहीं भी जाने के लिए नहीं करना चाहते, तो आप सब कुछ आप यहाँ की जरूरत है खरीद सकते हैं। अंत में, सेवा के स्तर के बारे में बात, ध्यान कर्मियों को दी जानी चाहिए। यहाँ सच पेशेवरों की एक टीम। और होटल के कर्मचारियों के प्रशिक्षण के स्तर पर भाषा प्रवीणता के स्तर कहा। कौन सा, जिस तरह से, आठ से। होटल में वहाँ लोग हैं, जो रूसी, पोलिश, डच, जर्मन, फ्रेंच और इतालवी बोलने कर रहे हैं। यह ग्रीक और अंग्रेजी के अलावा है। सामान्य तौर पर, भाषा बाधा के साथ समस्याओं, कोई होगा एक। होटल Gouves पार्क Watersplash हॉलिडे रिज़ॉर्ट कई उत्कृष्ट प्रतिष्ठानों जहां आप खा सकते हैं है। वैसे, होटल सेवा पर "सभी समावेशी" मेहमानों को पूरा करता है। पर्यटकों को होटल के रेस्तरां, सराय और पिज़्ज़ेरिया यात्रा कर सकते हैं। इसके अलावा, क्षेत्र भी तीन बार और एक कैफे है। "सभी समावेशी" प्रणाली 23:00 बजे तक 7:30 से चल रही है। यह दोपहर का भोजन और रात का खाना (बुफे), नमकीन, आइसक्रीम, पेस्ट्री, कॉफी और चाय के साथ नाश्ते के साथ ही स्थानीय उत्पादन के शराबी और सॉफ्ट ड्रिंक्स शामिल हैं। ताज़ा रस और आयातित शराब एक अतिरिक्त कीमत पर की पेशकश की जा सकती है। Gouves पार्क Watersplash हॉलिडे रिज़ॉर्ट यह बजट वर्ग है। अपार्टमेंट 25 के एक क्षेत्र है "वर्ग। " कमरे दो सिंगल बेड कि एक दूसरे के करीब चले गए हैं। अंदर एक विशाल बाथरूम, एयर कंडीशनिंग, सेटेलाइट टीवी, और यहां तक कि एक छत (- अपनी पसंद या बालकनी) है। इस प्रकार के कमरों में भी अतिरिक्त बेड (या बच्चे पालने, लेकिन अनुरोध पर सभी) डाल सकता है। अधिक अपार्टमेंट में एक अलग बैठने की जगह, डेस्क, सुरक्षित, फोन, एक हेअर ड्रायर और एक लोहे के साथ एक रेफ्रिजरेटर है। यह ध्यान देने योग्य है कि कभी कभी Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट 4 * (क्रेते) अविश्वसनीय छूट प्रदान करता है लायक है (85% तक! )। आप उन्हें वहाँ पाने के है, तो कक्ष (पूर्ण बोर्ड) में एक सप्ताह के प्रवास के केवल 35 000 रूबल का भुगतान करना होगा। हालांकि, कीमतों में मौसम और टूर ऑपरेटर के आधार पर बदलती। अक्सर होटल Gouves जल पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट लोग बच्चों के साथ आते हैं। उनके लिए, यहाँ भी वहाँ नंबर दिए गए हैं। वे अधिक विशाल हैं, अपने क्षेत्र 35 है "वर्ग। " अंदर यह आम तौर पर एक 2-बिस्तर और दो सोफा बेड के लायक है। लेकिन वहाँ भी एक और विकल्प है। पारंपरिक दो बेड और सोफे की एक ही नंबर के साथ। इस श्रेणी के अपार्टमेंट विशेषता यह है कि वे दो अलग अलग कमरों में विभाजित कर रहे हैं। हर कमरे में एक टीवी और एयर कंडीशनिंग है। इसके अलावा कमरे में सब पहले उल्लेख सुविधाओं है। अंत में - इस कमरे पर में कुछ शब्द। बहुत से लोग उन्हें में बसने, Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट करने के लिए आ रहा है। अतिथि सुइट्स विशेष रूप से सकारात्मक रहे हैं। मेहमानों को आश्वासन दिया जाता है - यह सबसे अच्छा इन विशाल और स्टाइलिश कमरे में बुक करने के लिए है। ऊपर प्रस्तुत तस्वीरों को देखते हुए, हम देख सकते हैं कि यह वास्तव में एक बढ़िया विकल्प है। तीन वयस्कों के लिए मूल्य साप्ताहिक रिहाइश के 100 से थोड़ा कम से कम 000 रूबल्स (छूट) के बिना किया जाएगा। चार अपार्टमेंट के लिए 115 000 से भी कम कीमत हो जाएगा। हालांकि, के रूप में देखा जा सकता है, अपार्टमेंट की कीमतें इतनी सेवा के साथ यहाँ तक कि "पूर्ण बोर्ड" बल्कि मामूली। इसके अलावा, यहां मेहमानों का कहना है के रूप में बहुत विनम्र और विनम्र कर्मचारी है। हमेशा तैयार किसी भी मुद्दे के समाधान के लिए, और अगर मेहमान देर रात में होटल में पहुंचे, उन्हें खाने के लिए छोड़ने के लिए सुनिश्चित करें। अधिक यहाँ सेवा का एक सभ्य स्तर, और होटल अच्छा के स्थान। हालांकि, बढ़ाया ध्वनि इन्सुलेशन के साथ के साथ ही Gouves की गलियों में कमरे लेने के लिए कुछ सलाह शाम को काफी शोर है। हालांकि, पहले इस - यह आवश्यक नहीं है आश्चर्य हो रहा है। वैसे, पास के रूप में हवाई अड्डे स्थित है, तो आप कैसे चीजें टेकऑफ़ और लैंडिंग विमान में हैं सुन सकते हैं। कई लोगों के लिए यह हस्तक्षेप नहीं करता है, लेकिन विशेष रूप से लोगों की आवाज़ के प्रति संवेदनशील पसंद न करें। काफी अलग उम्र के शोर बच्चों के लिए आगंतुकों का एक बहुत की तरह। मेहमानों के अंतिम सिफारिश - यहाँ संख्या नियोजित यात्रा से पहले कुछ महीनों बुक करना चाहिए। सबसे पहले, वहाँ एक छूट पाने के लिए एक मौका है। दूसरे, होटल ताकि छुट्टियों के मौसम की शुरुआत से, कमरों की संख्या पर्याप्त नहीं है, बहुत लोकप्रिय है।
रिसोर्ट Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट कई कारणों से एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। प्रत्येक अच्छी तरह से ज्ञात है कि ग्रीस में उपलब्ध होटल की एक बड़ी संख्या। हालांकि, यह होटल मूल्य और गुणवत्ता के संयोजन के मामले में सर्वश्रेष्ठ में से एक माना जाता व्यर्थ में नहीं है। Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट केर्किरा के द्वीप पर स्थित है। वह बहुत लोकप्रिय है। दूसरे सभी Ionian द्वीप और उत्तरी के बीच सबसे बड़ा। और यह जहां निपटान Gouvia नाम पर है है। यह जगह मनोरंजन, मज़ा, क्लब और समुद्र तट दलों के साथ कई द्वारा जुड़ा हुआ है। लेकिन यह है कि यह कैसे है। क्योंकि Guviyu में ज्यादातर युवा कंपनियों, या सक्रिय मनोरंजन के लिए भूखे लोगों जाना। Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट समुद्र के तत्काल आसपास के क्षेत्र में स्थित है - आप कुछ ही मिनटों में समुद्र तट तक पहुँच सकते हैं। वैसे, अब तक नहीं होटल और हवाई अड्डे से स्थित है। यह "इओनिस कापोडिस्ट्रियस" कहा जाता है। दूर नहीं Gouvia स्थित और हेराक्लिओन और Hersonissos से। सामान्य तौर पर, यहाँ आप जल्दी से ब्याज की सभी स्थानों तक पहुँच सकते हैं। होटल और उसके सभी दो सौ साठ के करीब कमरे तथ्य यह है कि इमारत का निर्माण किया गया दो हज़ार तीन में किया गया था के बावजूद, आधुनिक लग रही है। पिछले बहाली दो हज़ार सात में किया गया। Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट में रहते हुए, आप पूरी तरह से मजा कर सकते हैं। होटल के व्यापक रूप से तथ्य यह है कि यह अपने आप पानी पार्क है कि के लिए जाना जाता है। वहाँ निश्चित रूप से कम से कम एक बार जाना चाहिए। वाटरपार्क तैराकी निश्चित रूप से कई स्लाइड है और,,। इसके अलावा, जबकि वहाँ, आप पानी एरोबिक्स कर सकते हैं, जिम जाते, वॉलीबॉल या मिनी फुटबॉल खेलने, टेनिस कोर्ट के लिए या मिनी गोल्फ कोर्स पर चलते हैं। वहाँ मस्ती करने के लिए कई तरीके हैं। वहाँ डार्ट्स, टेबल टेनिस, रंगभूमि हैं, और शाम एनीमेशन स्टाफ विभिन्न दिलचस्प शो और डिस्को आयोजित करता है। यह भी बच्चों जिनके माता पिता छुट्टी पर उन लोगों के साथ लाया था के लिए सभी आवश्यक शर्तों है। दो अलग-अलग उथले पूल, खेल का मैदान, दो मिनी क्लब और एनिमेटरों, उत्साही बच्चों को। वैसे, माता-पिता एक साथ रहना चाहते हैं, वे नर्स कॉल कर सकते हैं, लेकिन यह एक भुगतान सेवा है। अधिक होटल एक डाइविंग स्कूल, बिलियर्ड्स, साइकिल , एक मसाज पार्लर और सौंदर्य सैलून है। यह सच है, यह सब एक ही चार्ज है। Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट चार में * सभी कि पर्यटकों के लिए आवश्यक हो सकता है। वहाँ निजी पार्किंग और किराये की कार, फैक्स और फोटोकॉपी सेवा, मुद्रा विनिमय के साथ छोटे से कार्यालय, एक विशाल सम्मेलन कक्ष और ड्राई क्लीनिंग साथ एक कपड़े धोने की है। खाद्य वितरण नहीं है, लेकिन अगर वे पूरे दिन के लिए कहीं और यात्रा करने के लिए योजना थी मेहमानों के स्वागत समारोह में एक पैक दोपहर का भोजन सेवा आदेश कर सकते हैं। और यहां तक कि Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट चार के क्षेत्र * एक मिनी बाजार है। दुकानें भी पास में हैं, और होटल, लेकिन अगर आप कहीं भी जाने के लिए नहीं करना चाहते, तो आप सब कुछ आप यहाँ की जरूरत है खरीद सकते हैं। अंत में, सेवा के स्तर के बारे में बात, ध्यान कर्मियों को दी जानी चाहिए। यहाँ सच पेशेवरों की एक टीम। और होटल के कर्मचारियों के प्रशिक्षण के स्तर पर भाषा प्रवीणता के स्तर कहा। कौन सा, जिस तरह से, आठ से। होटल में वहाँ लोग हैं, जो रूसी, पोलिश, डच, जर्मन, फ्रेंच और इतालवी बोलने कर रहे हैं। यह ग्रीक और अंग्रेजी के अलावा है। सामान्य तौर पर, भाषा बाधा के साथ समस्याओं, कोई होगा एक। होटल Gouves पार्क Watersplash हॉलिडे रिज़ॉर्ट कई उत्कृष्ट प्रतिष्ठानों जहां आप खा सकते हैं है। वैसे, होटल सेवा पर "सभी समावेशी" मेहमानों को पूरा करता है। पर्यटकों को होटल के रेस्तरां, सराय और पिज़्ज़ेरिया यात्रा कर सकते हैं। इसके अलावा, क्षेत्र भी तीन बार और एक कैफे है। "सभी समावेशी" प्रणाली तेईस:शून्य बजे तक सात:तीस से चल रही है। यह दोपहर का भोजन और रात का खाना , नमकीन, आइसक्रीम, पेस्ट्री, कॉफी और चाय के साथ नाश्ते के साथ ही स्थानीय उत्पादन के शराबी और सॉफ्ट ड्रिंक्स शामिल हैं। ताज़ा रस और आयातित शराब एक अतिरिक्त कीमत पर की पेशकश की जा सकती है। Gouves पार्क Watersplash हॉलिडे रिज़ॉर्ट यह बजट वर्ग है। अपार्टमेंट पच्चीस के एक क्षेत्र है "वर्ग। " कमरे दो सिंगल बेड कि एक दूसरे के करीब चले गए हैं। अंदर एक विशाल बाथरूम, एयर कंडीशनिंग, सेटेलाइट टीवी, और यहां तक कि एक छत है। इस प्रकार के कमरों में भी अतिरिक्त बेड डाल सकता है। अधिक अपार्टमेंट में एक अलग बैठने की जगह, डेस्क, सुरक्षित, फोन, एक हेअर ड्रायर और एक लोहे के साथ एक रेफ्रिजरेटर है। यह ध्यान देने योग्य है कि कभी कभी Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट चार * अविश्वसनीय छूट प्रदान करता है लायक है । आप उन्हें वहाँ पाने के है, तो कक्ष में एक सप्ताह के प्रवास के केवल पैंतीस शून्य रूबल का भुगतान करना होगा। हालांकि, कीमतों में मौसम और टूर ऑपरेटर के आधार पर बदलती। अक्सर होटल Gouves जल पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट लोग बच्चों के साथ आते हैं। उनके लिए, यहाँ भी वहाँ नंबर दिए गए हैं। वे अधिक विशाल हैं, अपने क्षेत्र पैंतीस है "वर्ग। " अंदर यह आम तौर पर एक दो-बिस्तर और दो सोफा बेड के लायक है। लेकिन वहाँ भी एक और विकल्प है। पारंपरिक दो बेड और सोफे की एक ही नंबर के साथ। इस श्रेणी के अपार्टमेंट विशेषता यह है कि वे दो अलग अलग कमरों में विभाजित कर रहे हैं। हर कमरे में एक टीवी और एयर कंडीशनिंग है। इसके अलावा कमरे में सब पहले उल्लेख सुविधाओं है। अंत में - इस कमरे पर में कुछ शब्द। बहुत से लोग उन्हें में बसने, Gouves वाटर पार्क हॉलिडे रिज़ॉर्ट करने के लिए आ रहा है। अतिथि सुइट्स विशेष रूप से सकारात्मक रहे हैं। मेहमानों को आश्वासन दिया जाता है - यह सबसे अच्छा इन विशाल और स्टाइलिश कमरे में बुक करने के लिए है। ऊपर प्रस्तुत तस्वीरों को देखते हुए, हम देख सकते हैं कि यह वास्तव में एक बढ़िया विकल्प है। तीन वयस्कों के लिए मूल्य साप्ताहिक रिहाइश के एक सौ से थोड़ा कम से कम शून्य रूबल्स के बिना किया जाएगा। चार अपार्टमेंट के लिए एक सौ पंद्रह शून्य से भी कम कीमत हो जाएगा। हालांकि, के रूप में देखा जा सकता है, अपार्टमेंट की कीमतें इतनी सेवा के साथ यहाँ तक कि "पूर्ण बोर्ड" बल्कि मामूली। इसके अलावा, यहां मेहमानों का कहना है के रूप में बहुत विनम्र और विनम्र कर्मचारी है। हमेशा तैयार किसी भी मुद्दे के समाधान के लिए, और अगर मेहमान देर रात में होटल में पहुंचे, उन्हें खाने के लिए छोड़ने के लिए सुनिश्चित करें। अधिक यहाँ सेवा का एक सभ्य स्तर, और होटल अच्छा के स्थान। हालांकि, बढ़ाया ध्वनि इन्सुलेशन के साथ के साथ ही Gouves की गलियों में कमरे लेने के लिए कुछ सलाह शाम को काफी शोर है। हालांकि, पहले इस - यह आवश्यक नहीं है आश्चर्य हो रहा है। वैसे, पास के रूप में हवाई अड्डे स्थित है, तो आप कैसे चीजें टेकऑफ़ और लैंडिंग विमान में हैं सुन सकते हैं। कई लोगों के लिए यह हस्तक्षेप नहीं करता है, लेकिन विशेष रूप से लोगों की आवाज़ के प्रति संवेदनशील पसंद न करें। काफी अलग उम्र के शोर बच्चों के लिए आगंतुकों का एक बहुत की तरह। मेहमानों के अंतिम सिफारिश - यहाँ संख्या नियोजित यात्रा से पहले कुछ महीनों बुक करना चाहिए। सबसे पहले, वहाँ एक छूट पाने के लिए एक मौका है। दूसरे, होटल ताकि छुट्टियों के मौसम की शुरुआत से, कमरों की संख्या पर्याप्त नहीं है, बहुत लोकप्रिय है।
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में गुरुवार को हुए आत्मघाती आतंकवादी हमले में शहीद हुए 40 जवानों को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने श्रद्धांजलि दी. पुलवामा में हुए हमले का जायजा लेने पहुंचे राजनाथ सिंह ने पहले श्रीनगर में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक और सेना के नॉर्दर्न कमांड चीफ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह भी उनके साथ मौजूद रहे. कश्मीर के हालातों का जायजा लेने के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को दिल्ली लौटेंगे. कयास लगाए जा रहे हैं कि घाटी के हालातों को जायजा लेने के बाद राजनाथ सिंह, सभी राजनैतिक दलों के साथ मिलकर बैठक कर सकते हैं, ताकि इस पर कोई बड़ा एक्शन लिया जा सके. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकवादी हमले पर पड़ोसी देश पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आतंकी संगठन और उनके सरपरस्त बहुत बड़ी गलती कर गए हैं और इसके गुनाहगारों को उनके किये की सजा जरूर मिलेगी और उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. गौरतलब है कि पुलवामा में गुरुवार को जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे वाहन से सीआरपीएफ जवानों की बस को टक्कर मार दी, जिसमें कम से कम 40 जवान शहीद हो गए जबकि कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में गुरुवार को हुए आत्मघाती आतंकवादी हमले में शहीद हुए चालीस जवानों को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने श्रद्धांजलि दी. पुलवामा में हुए हमले का जायजा लेने पहुंचे राजनाथ सिंह ने पहले श्रीनगर में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक और सेना के नॉर्दर्न कमांड चीफ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह भी उनके साथ मौजूद रहे. कश्मीर के हालातों का जायजा लेने के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को दिल्ली लौटेंगे. कयास लगाए जा रहे हैं कि घाटी के हालातों को जायजा लेने के बाद राजनाथ सिंह, सभी राजनैतिक दलों के साथ मिलकर बैठक कर सकते हैं, ताकि इस पर कोई बड़ा एक्शन लिया जा सके. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकवादी हमले पर पड़ोसी देश पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आतंकी संगठन और उनके सरपरस्त बहुत बड़ी गलती कर गए हैं और इसके गुनाहगारों को उनके किये की सजा जरूर मिलेगी और उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. गौरतलब है कि पुलवामा में गुरुवार को जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे वाहन से सीआरपीएफ जवानों की बस को टक्कर मार दी, जिसमें कम से कम चालीस जवान शहीद हो गए जबकि कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
।एक प्रसिद्ध पत्रकार होने के अलावा जगजीत सिंह दर्दी पटियाला में श्री गुरु हर कृष्ण शैक्षिक संस्थानों के अध्यक्ष भी हैं। इन संस्थानों का उद्देश्य लोगों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों की भावना पैदा करना है। जगजीत सिंह दर्दी (अंग्रेज़ीः Jagjit Singh Dardi, जन्म- 19 जनवरी, 1949) दिग्गज पत्रकार, शिक्षाविद् और पंजाबी अखबार 'चढ़दीकला' के एडिटर-इन-चीफ हैं। उन्हें भारत सरकार ने साल 2022 में पद्म श्री से सम्मानित किया है। जगजीत सिंह दर्दी को यह सम्मान राष्ट्रीय एकीकरण, सांप्रदायिक सद्भावना बनाने, मीडिया एवं शिक्षा के क्षेत्र तथा पंजाबी भाषा और पंजाब की संस्कृति एवं विरासत के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में अहम योगदान देने के लिए दिया गया है। जगजीत सिंह दर्दी बताते हैं कि मैंने अपनी युवावस्था में एक पंजाबी भाषी राज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया। यह मोर्चा 100 दिन चला था। मोर्चे में भाग लेने के चलते 22 जून, 1960 को गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब, पटियाला से मुझे 12 साल की छोटी उम्र में गिरफ्तार किया गया था। तभी मैंने अखबारों के लिए जेल में बैठकर खबरें लिखनी शुरू कर दी थीं। नवजोत सिंह सिद्धू के पिता भगवंत सिंह ने जगजीत सिंह दर्दी की जमानत करवाई थी। वह उस समय एडवोकेट जनरल थे। वह एक महान और निडर व्यक्ति थे। सिद्धू की पत्नी निर्मल देवी मेरी माता की छात्रा थीं। उस समय नवजोत मात्र डेढ़ वर्ष की उम्र का था। नवजोत के पिता ने मुझे पटियाला में अपने घर कुछ महीने के लिए रखा ताकि पुलिस मुझे फिर तंग न करे। उसके पिता जिला कांग्रेस प्रधान भी रहे थे। उनके घर रहते हुए मैंने अखबारों के लिए लिखना शुरू कर दिया। उन्होंने ही मेरे माता-पिता को कहा कि लड़के में काबिलियत है। आप अखबार क्यों नहीं शुरू करते। इसके बाद से मेरी पत्रकारिता बड़ा रूप लेने लग गई। वहीं झूठे केसों में मैं बरी हो गया। जगजीत सिंह दर्दी ने अपने 62 वर्ष के अनुभव में मीडिया में अहम सेवाएं दी हैं। वर्ष 1997-1998 में वह लोक सभा की मीडिया एडवाइजरी कमेटी के मेंबर चुने गए थे। इसके बाद वह 2014 में राज्य सभा की मीडिया एडवाइजरी कमेटी के मेंबर चुने गए। वह दुनिया की सबसे बड़ी प्रिंट मीडिया इकाई 'द इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी' की एग्जीक्यूटिव कमेटी के वर्ष 1988 से मेंबर भी हैं। वर्ष 2001 में वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के मेंबर बने और तीन टर्म के लिए अपनी सेवाएं दी। वह वर्ष 1993 से प्रधानमंत्री के मीडिया प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे और कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। वर्ष 1970 से उनके मार्गदर्शन में चढ़दीकलां न्यूज पेपर चलता आ रहा है। 2007 में उन्होंने अपना टीवी चैनल शुरू किया। जगजीत सिंह दर्दी की उत्कृष्ट सेवाओं के कारण उन्हें वर्ष 1998 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने 'शिरोमणि पत्रकार अवार्ड' से सम्मानित किया था। वहीं इससे पूर्व 1992 में पंजाब सरकार ने उन्हें 'शिरोमणि साहित्यकार अवार्ड' से नवाजा था। कनाडा और अमेरिका में भी उन्हें वर्ष 1989 और 1997 में 'वर्ल्ड पंजाबी कान्फ्रेंस' सम्मानित कर चुकी है। तख्त श्री पटना साहिब ने उन्हें "भाई साहब" की उपाधि से सम्मानित किया है। - ↑ 1.0 1.1 1.2 12 साल की उम्र में लिखने लग गए थे 'दर्दी' (हिंदी) bhaskar.com। अभिगमन तिथिः 05 जून, 2022।
।एक प्रसिद्ध पत्रकार होने के अलावा जगजीत सिंह दर्दी पटियाला में श्री गुरु हर कृष्ण शैक्षिक संस्थानों के अध्यक्ष भी हैं। इन संस्थानों का उद्देश्य लोगों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों की भावना पैदा करना है। जगजीत सिंह दर्दी दिग्गज पत्रकार, शिक्षाविद् और पंजाबी अखबार 'चढ़दीकला' के एडिटर-इन-चीफ हैं। उन्हें भारत सरकार ने साल दो हज़ार बाईस में पद्म श्री से सम्मानित किया है। जगजीत सिंह दर्दी को यह सम्मान राष्ट्रीय एकीकरण, सांप्रदायिक सद्भावना बनाने, मीडिया एवं शिक्षा के क्षेत्र तथा पंजाबी भाषा और पंजाब की संस्कृति एवं विरासत के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में अहम योगदान देने के लिए दिया गया है। जगजीत सिंह दर्दी बताते हैं कि मैंने अपनी युवावस्था में एक पंजाबी भाषी राज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया। यह मोर्चा एक सौ दिन चला था। मोर्चे में भाग लेने के चलते बाईस जून, एक हज़ार नौ सौ साठ को गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब, पटियाला से मुझे बारह साल की छोटी उम्र में गिरफ्तार किया गया था। तभी मैंने अखबारों के लिए जेल में बैठकर खबरें लिखनी शुरू कर दी थीं। नवजोत सिंह सिद्धू के पिता भगवंत सिंह ने जगजीत सिंह दर्दी की जमानत करवाई थी। वह उस समय एडवोकेट जनरल थे। वह एक महान और निडर व्यक्ति थे। सिद्धू की पत्नी निर्मल देवी मेरी माता की छात्रा थीं। उस समय नवजोत मात्र डेढ़ वर्ष की उम्र का था। नवजोत के पिता ने मुझे पटियाला में अपने घर कुछ महीने के लिए रखा ताकि पुलिस मुझे फिर तंग न करे। उसके पिता जिला कांग्रेस प्रधान भी रहे थे। उनके घर रहते हुए मैंने अखबारों के लिए लिखना शुरू कर दिया। उन्होंने ही मेरे माता-पिता को कहा कि लड़के में काबिलियत है। आप अखबार क्यों नहीं शुरू करते। इसके बाद से मेरी पत्रकारिता बड़ा रूप लेने लग गई। वहीं झूठे केसों में मैं बरी हो गया। जगजीत सिंह दर्दी ने अपने बासठ वर्ष के अनुभव में मीडिया में अहम सेवाएं दी हैं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे-एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में वह लोक सभा की मीडिया एडवाइजरी कमेटी के मेंबर चुने गए थे। इसके बाद वह दो हज़ार चौदह में राज्य सभा की मीडिया एडवाइजरी कमेटी के मेंबर चुने गए। वह दुनिया की सबसे बड़ी प्रिंट मीडिया इकाई 'द इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी' की एग्जीक्यूटिव कमेटी के वर्ष एक हज़ार नौ सौ अठासी से मेंबर भी हैं। वर्ष दो हज़ार एक में वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के मेंबर बने और तीन टर्म के लिए अपनी सेवाएं दी। वह वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरानवे से प्रधानमंत्री के मीडिया प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे और कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्तर से उनके मार्गदर्शन में चढ़दीकलां न्यूज पेपर चलता आ रहा है। दो हज़ार सात में उन्होंने अपना टीवी चैनल शुरू किया। जगजीत सिंह दर्दी की उत्कृष्ट सेवाओं के कारण उन्हें वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने 'शिरोमणि पत्रकार अवार्ड' से सम्मानित किया था। वहीं इससे पूर्व एक हज़ार नौ सौ बानवे में पंजाब सरकार ने उन्हें 'शिरोमणि साहित्यकार अवार्ड' से नवाजा था। कनाडा और अमेरिका में भी उन्हें वर्ष एक हज़ार नौ सौ नवासी और एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में 'वर्ल्ड पंजाबी कान्फ्रेंस' सम्मानित कर चुकी है। तख्त श्री पटना साहिब ने उन्हें "भाई साहब" की उपाधि से सम्मानित किया है। - ↑ एक.शून्य एक.एक एक.दो बारह साल की उम्र में लिखने लग गए थे 'दर्दी' bhaskar.com। अभिगमन तिथिः पाँच जून, दो हज़ार बाईस।
वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ऑनलाइन फैशन रिटेलर मिंत्रा ने कहा है कि वह 3 से 10 अक्टूबर के बीच अपनी सेल 'बिग फैशन फेस्टिवल' का आयोजन करेगी। बिग फैशन फेस्टिवल का आगामी संस्करण 7,000 ब्रांडों से उत्पाद चयन की पेशकश करेगा और 10 लाख स्टाइल के कलेक्शन के साथ यह देश में इस त्योहारी सीजन के अवसर पर सबसे बड़ी फैशन सेल में से एक होगी। आठ दिन चलने वाली यह सेल खरीदारों को खासकर बीबा, डब्ल्यू, लिबास, एनॉक जैसे लोकप्रिय ब्रांडों से एथनिक वियर के नए डिजाइन और स्टाइल से चयन का अवसर प्रदान करेगी। मिंत्रा को इस सेल के दौरान करीब 11 लाख नए खरीदार जुडऩे की संभावना है। इस बार, पहले की तुलना में ज्यादा ब्रांड इसमें हिस्सा लेंगे, जिनमें मैंगो, एचऐंडएम, प्यूमा, माक्र्स ऐंड स्पेंसर मुख्य रूप से शामिल होंगे।
वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ऑनलाइन फैशन रिटेलर मिंत्रा ने कहा है कि वह तीन से दस अक्टूबर के बीच अपनी सेल 'बिग फैशन फेस्टिवल' का आयोजन करेगी। बिग फैशन फेस्टिवल का आगामी संस्करण सात,शून्य ब्रांडों से उत्पाद चयन की पेशकश करेगा और दस लाख स्टाइल के कलेक्शन के साथ यह देश में इस त्योहारी सीजन के अवसर पर सबसे बड़ी फैशन सेल में से एक होगी। आठ दिन चलने वाली यह सेल खरीदारों को खासकर बीबा, डब्ल्यू, लिबास, एनॉक जैसे लोकप्रिय ब्रांडों से एथनिक वियर के नए डिजाइन और स्टाइल से चयन का अवसर प्रदान करेगी। मिंत्रा को इस सेल के दौरान करीब ग्यारह लाख नए खरीदार जुडऩे की संभावना है। इस बार, पहले की तुलना में ज्यादा ब्रांड इसमें हिस्सा लेंगे, जिनमें मैंगो, एचऐंडएम, प्यूमा, माक्र्स ऐंड स्पेंसर मुख्य रूप से शामिल होंगे।
नालागढ़़ के रडियाली पंचायत के दतोवाल व पंजैहरा के साथ लगते अंबवाला गांव में बने तालाब में मछलियां मर गई है। उधर, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बादल वाले मौसम में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा कम होने से ऐसा हुआ है। विभाग कर्मचारियों ने इसमें आक्सीजन की गोलियां डाली है। जानकारी के अनुसार रडियाली पंचायत के दतोवाल में गांव में बीच स्थित तालाब की मछलियां अचानक मर गई है। जैसे ही सुबह लोग उठे तो मछलियां मरी हुई तालाब में तैरती नजर आई। लोगों ने इसकी सूचना पंचायत प्रधान छोटू राम को दी। पंचायत प्रधान छोटू राम ने बताया कि तालाब की अधिकांश बड़ी मछलियां मर गई है। उन्होंने इसकी सूचना मस्त्य विभाग को दी है। उधर, पंजैहरा के साथ अंबवाला गांव में तालाब में मछलियां अचानक मर गई। यहां के ग्रामीण राम प्रताप ने मछलियां मरने की सूचना दी। संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर इसकी जांच की है।
नालागढ़़ के रडियाली पंचायत के दतोवाल व पंजैहरा के साथ लगते अंबवाला गांव में बने तालाब में मछलियां मर गई है। उधर, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बादल वाले मौसम में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा कम होने से ऐसा हुआ है। विभाग कर्मचारियों ने इसमें आक्सीजन की गोलियां डाली है। जानकारी के अनुसार रडियाली पंचायत के दतोवाल में गांव में बीच स्थित तालाब की मछलियां अचानक मर गई है। जैसे ही सुबह लोग उठे तो मछलियां मरी हुई तालाब में तैरती नजर आई। लोगों ने इसकी सूचना पंचायत प्रधान छोटू राम को दी। पंचायत प्रधान छोटू राम ने बताया कि तालाब की अधिकांश बड़ी मछलियां मर गई है। उन्होंने इसकी सूचना मस्त्य विभाग को दी है। उधर, पंजैहरा के साथ अंबवाला गांव में तालाब में मछलियां अचानक मर गई। यहां के ग्रामीण राम प्रताप ने मछलियां मरने की सूचना दी। संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर इसकी जांच की है।
Hungary Snake Bite: जरा सोचिए आप किसी जानवर के सामने खड़े हो और वो जानवर आपको तिरछी निगाहों से देख रहा हो. इससे आपको यही लगने लगेगा की वो आपको अपना खाना बनाने के लिए तैयार है लेकिन असल अगर वो आपको अपना निवाला बनाने से पहले खुद को खाने लगे तो सोचने में थोड़ा अट-पटा सा लगता है. सांप बहुत खतरनाक होते हैं. आपने सांपों को शिकार करते हुए या काटते हुए देखा होगा, लेकिन क्या कभी आपने किसी सांप को खुद को काटते या निगलते हुए देखा है? एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें सांप खुद को ही निगलता हुआ दिखाई दे रहा है. वायरल हो रहे वीडियो में एक सांप नजर आ रहा है. एक बार तो आपको देखकर ऐसा लगेगा कि सांप बिल्कुल गोल होकर पड़ा है. मगर ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि सांप ने अपने मुंह से खुद को ही पकड़ा हुआ है. दरअसल, वह सांप खुद को ही निगल रहा था. वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि कैसे सांप (Snake) खुद को खाने की कोशिश कर रहा है जिसे छुड़ाने के लिए वीडियो में दिखाई दे रहा शख्स उसे अलग करने की कोशिश करता है. वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि एक काला सांप खुद को ही खा रहा है. सांप ने पूंछ की तरफ से खुद को ही निगलना शुरू कर दिया.इसके बाद एक शख्स भी वहां है. जो सांप को छुड़ाने की कोशिश करता नजर आ रहा है. वीडियो में साफ़ देखा जा रहा है कि सांप खुद को ही आधा निगल गया था. वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि शख्स उस सांप को छुड़ाने की कोशिश करता है. लेकिन सांप खुद को छोड़ने के लिए तैयार नहीं होता. इसके बाद वह शख्स अपने हाथ में हैंड सेनेटाइजर लेता है और सांप के मुंह पर लगा देता है. इसके बाद सांप खुद की पूंछ को छोड़ता है. तब समझ में आता है कि सांप ने खुद को आड़े से ज्यदा निगल लिया था.
Hungary Snake Bite: जरा सोचिए आप किसी जानवर के सामने खड़े हो और वो जानवर आपको तिरछी निगाहों से देख रहा हो. इससे आपको यही लगने लगेगा की वो आपको अपना खाना बनाने के लिए तैयार है लेकिन असल अगर वो आपको अपना निवाला बनाने से पहले खुद को खाने लगे तो सोचने में थोड़ा अट-पटा सा लगता है. सांप बहुत खतरनाक होते हैं. आपने सांपों को शिकार करते हुए या काटते हुए देखा होगा, लेकिन क्या कभी आपने किसी सांप को खुद को काटते या निगलते हुए देखा है? एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें सांप खुद को ही निगलता हुआ दिखाई दे रहा है. वायरल हो रहे वीडियो में एक सांप नजर आ रहा है. एक बार तो आपको देखकर ऐसा लगेगा कि सांप बिल्कुल गोल होकर पड़ा है. मगर ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि सांप ने अपने मुंह से खुद को ही पकड़ा हुआ है. दरअसल, वह सांप खुद को ही निगल रहा था. वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि कैसे सांप खुद को खाने की कोशिश कर रहा है जिसे छुड़ाने के लिए वीडियो में दिखाई दे रहा शख्स उसे अलग करने की कोशिश करता है. वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि एक काला सांप खुद को ही खा रहा है. सांप ने पूंछ की तरफ से खुद को ही निगलना शुरू कर दिया.इसके बाद एक शख्स भी वहां है. जो सांप को छुड़ाने की कोशिश करता नजर आ रहा है. वीडियो में साफ़ देखा जा रहा है कि सांप खुद को ही आधा निगल गया था. वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि शख्स उस सांप को छुड़ाने की कोशिश करता है. लेकिन सांप खुद को छोड़ने के लिए तैयार नहीं होता. इसके बाद वह शख्स अपने हाथ में हैंड सेनेटाइजर लेता है और सांप के मुंह पर लगा देता है. इसके बाद सांप खुद की पूंछ को छोड़ता है. तब समझ में आता है कि सांप ने खुद को आड़े से ज्यदा निगल लिया था.
खाना खाने के लिये हर एक का चम्मच और कटोरा अलग-अलग होता है, जिससे जल्दी खानेवाला जल्द खा लेता है और धीरे खानेवाला धीरे-धीरे । इस प्रकार एक दूसरे के खाने में बाधा नहीं पड़ती। सफर गुलाम ने कहा- हमें ऐसी श्रादत की जरूरत नहीं। आाश मिलनी चाहिये, न्चम्मच न भी हो तो कोई हर्ज नहीं, हाथ तो अपने पास है ही, और कठौत के किनारे मुँह लगाकर के भी सुरक लेंगे । तू लोगों के फायदे का ख्याल नहीं करता, सदा केवल अपना ख्याल करता है। यदि कोई बात अपने लिये श्रावश्यक है, तो आवश्यक समझता है और अनावश्यक है तो अवश्यक कहकर शाकिर ने सफर को जवाब दिया । -- क्यों न ऐसा हो -- सफर गुलाम ने कहा - "हर आदमी अपने मुर्दे के लिये रोता है। जदीदों की मांगों में सरसों भर की हमारा लाभ दिखला दो तो सबसे पहले हम जदीद बन जायेंगे । इसपर शाकिर ने कहा - नदीदों का घोषणा पत्र मेरी खुर्जी में है। खाने के बाद मैं उसे सुनाऊँगा । शायद उसमें तेरे लाभ की चीजें भी हैं । - क्षमा करना शाकिर का, तुम्हारी इस बात पर एक कहानी याद आ गयीकुलमुराद ने कहा - कहानी कह - -मैं भी सुनूँ - शाकिर ने कहा । कुलमुराद ने कहानी शुरू की - तूमान वाचकन्द में एक गाँव है, जिसे शीरीनों का गाँव कहते हैं । एक शीरनी के पास सफेद गदहा था, जिसके झाड़झाड़-जैसी पूँछ भूमि तक पहुँचती थी । शीरनी गदहे को बेचना चाहता था । बाबकन्द का बाजार लगने से एक दिन पहले उसने गदहे को साबुन से धोया, मालिश और खरहरा किया, पूँछ में कंघी की और उसे बाजार के लिये तैयार किया । दुर्भाग्य से रात को भारी वर्षा हो गयी और रास्ते में कीचड़ हो । शीरनी चिन्ता में पड़ गया, क्या करे । पैसे की बहुत जरूरत थी, इसलिये अगले बाजार तक के लिये. एक नहीं सकता था; लेकिन यदि बाजार ले जाता तो गदहे पर कीचड़ पड़ जाता; विशेषकर कंघी से सँवारी पूँछ, जो कि तरुगियों के सँवारे केशों की तरह खरीदारों, को अपनी ओर खींचने में समर्थ थी। बहुत सोचने पर भी उसे कोई उपाय न सूझ पड़ा। अन्त में उसने मुहम्मद दाना ( लाल बुझकड़ ) के पास जाने का निश्चय किया; क्योंकि वही ऐसी गुत्थियों को सुलझा सकता था। अभी मुहम्मद दाना बिस्तरे से उठा नहीं कि उसने तड़के ही जाकर दरवाजा खटखटाया और सारी बात 2
खाना खाने के लिये हर एक का चम्मच और कटोरा अलग-अलग होता है, जिससे जल्दी खानेवाला जल्द खा लेता है और धीरे खानेवाला धीरे-धीरे । इस प्रकार एक दूसरे के खाने में बाधा नहीं पड़ती। सफर गुलाम ने कहा- हमें ऐसी श्रादत की जरूरत नहीं। आाश मिलनी चाहिये, न्चम्मच न भी हो तो कोई हर्ज नहीं, हाथ तो अपने पास है ही, और कठौत के किनारे मुँह लगाकर के भी सुरक लेंगे । तू लोगों के फायदे का ख्याल नहीं करता, सदा केवल अपना ख्याल करता है। यदि कोई बात अपने लिये श्रावश्यक है, तो आवश्यक समझता है और अनावश्यक है तो अवश्यक कहकर शाकिर ने सफर को जवाब दिया । -- क्यों न ऐसा हो -- सफर गुलाम ने कहा - "हर आदमी अपने मुर्दे के लिये रोता है। जदीदों की मांगों में सरसों भर की हमारा लाभ दिखला दो तो सबसे पहले हम जदीद बन जायेंगे । इसपर शाकिर ने कहा - नदीदों का घोषणा पत्र मेरी खुर्जी में है। खाने के बाद मैं उसे सुनाऊँगा । शायद उसमें तेरे लाभ की चीजें भी हैं । - क्षमा करना शाकिर का, तुम्हारी इस बात पर एक कहानी याद आ गयीकुलमुराद ने कहा - कहानी कह - -मैं भी सुनूँ - शाकिर ने कहा । कुलमुराद ने कहानी शुरू की - तूमान वाचकन्द में एक गाँव है, जिसे शीरीनों का गाँव कहते हैं । एक शीरनी के पास सफेद गदहा था, जिसके झाड़झाड़-जैसी पूँछ भूमि तक पहुँचती थी । शीरनी गदहे को बेचना चाहता था । बाबकन्द का बाजार लगने से एक दिन पहले उसने गदहे को साबुन से धोया, मालिश और खरहरा किया, पूँछ में कंघी की और उसे बाजार के लिये तैयार किया । दुर्भाग्य से रात को भारी वर्षा हो गयी और रास्ते में कीचड़ हो । शीरनी चिन्ता में पड़ गया, क्या करे । पैसे की बहुत जरूरत थी, इसलिये अगले बाजार तक के लिये. एक नहीं सकता था; लेकिन यदि बाजार ले जाता तो गदहे पर कीचड़ पड़ जाता; विशेषकर कंघी से सँवारी पूँछ, जो कि तरुगियों के सँवारे केशों की तरह खरीदारों, को अपनी ओर खींचने में समर्थ थी। बहुत सोचने पर भी उसे कोई उपाय न सूझ पड़ा। अन्त में उसने मुहम्मद दाना के पास जाने का निश्चय किया; क्योंकि वही ऐसी गुत्थियों को सुलझा सकता था। अभी मुहम्मद दाना बिस्तरे से उठा नहीं कि उसने तड़के ही जाकर दरवाजा खटखटाया और सारी बात दो
स्वरूप धारण कर लिया। जब मेरठ के ग़दर करने वालो ने अपने आपको दिल्ली के बादशाह के अधीन रख दिया और भू-स्वामी रईसों तथा असैनिक श्राबादी के एक भाग मे उसके पक्ष मे घोषणा की । जिस आन्दोलन का प्रारम्भ धर्म के लिए लडाई के रूप मे हुआ था, उसी का अन्त स्वाधीनता के लिए युद्ध के रूप में हुआ और इसमे रच मात्र भी सन्देह नहीं है कि विद्रोही विदेशी शासन से मुक्ति प्राप्त करना चाहते थे और वे उस पुरानी व्यवस्था को पुन सस्थापित करना चाहते थे, जिसका दिल्ली का बादशाह न्यायपूर्ण प्रतिनिधि था । श्रवष मे विद्रोह ने राष्ट्रीय स्वरूप प्राप्त कर लिया, यद्यपि इस शब्द का प्रयोग एक सीमित अर्थ मे ही समझना चाहिए; क्योंकि भारतीय राष्ट्रीयता का विचार अभी अपनी प्रारम्भिक अवस्था में ही था। एक पजाबी के लिए एक हिन्दुस्तानी भी परिचित ही था और बहुत कम बगाली यह अनुभव करते थे कि वे उसी राष्ट्र के हैं जिसके महाराष्ट्रीय लोग । इसी प्रकार मध्यवर्ती भारत और राजपूताना के लोग दक्षिण भारत के लोगों के साथ किसी प्रकार की बन्धुता का सम्बन्ध नहीं मानते थे। हां, दासता की एकता ने विभिन्न प्रकार की अस्पष्ट एकता को एक अवश्य उत्पन्न किया था, परन्तु इस विचार ने अभी समान्यतः समाज मे जड़ें नहीं जमाई थीं। परन्तु फिर भी जातीय, धार्मिक और भाषात्मक भेदों के होते हुए भी भारतीय जनता यह अनुभव अवश्य करती थी कि अग्रेजो के विपरीत उसमे कुछ साम्य है । यही कारण है कि एक राजपूत चाररण को भरतपुर की जाट विजय मे अपनी कविता के अनुरूप एक विषय मिला और बुन्देले लोगों ने नेपाल मे अग्रेजों की विपत्ति पर प्रसन्नता मनाई । राज्यक्षेत्रीय देशभक्ति के प्रभाव मे धर्म एक महान वल है, यही कारण है कि सन् १८५७ मे सभी जीवन-क्षेत्र के लोगो ने धर्म की रक्षा मे सिपाहियों का साथ दिया। अवध के सामन्तों ने अपने काश्तकारों को न केवल धर्म के नाम पर बल्कि उनके राजा के नाम पर भी बुलाया। उनके राजा को गद्दी से अन्यायपूर्वक हटा दिया गया था और उनके देश को बलपूर्वक श्रग्रेजी राज्य में मिला लिया गया था। इस प्रकार उन्हें न केवल एक राजनीतिक शिकायत दूर करने का उपाय करना था बल्कि एक नैतिक अन्याय का भी प्रतिकार करना था । जैसा मुहम्मद हसन ने बताया, अवध के सरदारों को दृष्टि मे ग्रे मरणकारी थे और सामन्त लोग अनुभव करते थे कि वे अपने धर्म के साथ-साथ अपने राजा के लिए भी लड रहे हैं। सामन्ती भक्ति एक समय वेशभक्ति का काम करती थी और लोगों की एक प्रचुर बहुसस्या की भावनाए प्राय यही होती थीं जो उनके मुखिया लोगों की । यह सत्य है कि इसमे अपवाद भी थे । उदाहररगत वलरामपुर और शाहगज के राजाओ के ऐसे सरदार भी थे, जो या तो अपने नए स्वामियो के प्रति स्वामिभक्ति की भावना के कारण या इस विश्वास के कारण कि वे अन्त मे जीतेंगे, सरकार का साथ देना ही अपने लिए अनुकूल समझते थे । उन्हें उनके व्यवहारिक ज्ञान के लिए प्रभूत पुरस्कार भी दिए गए। वेरगी माधव, देवीबा जैसे देशभक्त नेता दृढ़तापूर्वक कर्तव्य मार्ग पर चले, भले ही उनका अन्त मृत्यु मे हुआ हो । इन नेताओं के प्रति जनता जो श्रादर-भाव रखती थी उसके प्रसन्दिग्ध साक्ष्य को रसेल ने शकरपुर के पतन के बाद "चारो ओर के ग्रामीणों के उदास चेहरों मे" देखा ।
स्वरूप धारण कर लिया। जब मेरठ के ग़दर करने वालो ने अपने आपको दिल्ली के बादशाह के अधीन रख दिया और भू-स्वामी रईसों तथा असैनिक श्राबादी के एक भाग मे उसके पक्ष मे घोषणा की । जिस आन्दोलन का प्रारम्भ धर्म के लिए लडाई के रूप मे हुआ था, उसी का अन्त स्वाधीनता के लिए युद्ध के रूप में हुआ और इसमे रच मात्र भी सन्देह नहीं है कि विद्रोही विदेशी शासन से मुक्ति प्राप्त करना चाहते थे और वे उस पुरानी व्यवस्था को पुन सस्थापित करना चाहते थे, जिसका दिल्ली का बादशाह न्यायपूर्ण प्रतिनिधि था । श्रवष मे विद्रोह ने राष्ट्रीय स्वरूप प्राप्त कर लिया, यद्यपि इस शब्द का प्रयोग एक सीमित अर्थ मे ही समझना चाहिए; क्योंकि भारतीय राष्ट्रीयता का विचार अभी अपनी प्रारम्भिक अवस्था में ही था। एक पजाबी के लिए एक हिन्दुस्तानी भी परिचित ही था और बहुत कम बगाली यह अनुभव करते थे कि वे उसी राष्ट्र के हैं जिसके महाराष्ट्रीय लोग । इसी प्रकार मध्यवर्ती भारत और राजपूताना के लोग दक्षिण भारत के लोगों के साथ किसी प्रकार की बन्धुता का सम्बन्ध नहीं मानते थे। हां, दासता की एकता ने विभिन्न प्रकार की अस्पष्ट एकता को एक अवश्य उत्पन्न किया था, परन्तु इस विचार ने अभी समान्यतः समाज मे जड़ें नहीं जमाई थीं। परन्तु फिर भी जातीय, धार्मिक और भाषात्मक भेदों के होते हुए भी भारतीय जनता यह अनुभव अवश्य करती थी कि अग्रेजो के विपरीत उसमे कुछ साम्य है । यही कारण है कि एक राजपूत चाररण को भरतपुर की जाट विजय मे अपनी कविता के अनुरूप एक विषय मिला और बुन्देले लोगों ने नेपाल मे अग्रेजों की विपत्ति पर प्रसन्नता मनाई । राज्यक्षेत्रीय देशभक्ति के प्रभाव मे धर्म एक महान वल है, यही कारण है कि सन् एक हज़ार आठ सौ सत्तावन मे सभी जीवन-क्षेत्र के लोगो ने धर्म की रक्षा मे सिपाहियों का साथ दिया। अवध के सामन्तों ने अपने काश्तकारों को न केवल धर्म के नाम पर बल्कि उनके राजा के नाम पर भी बुलाया। उनके राजा को गद्दी से अन्यायपूर्वक हटा दिया गया था और उनके देश को बलपूर्वक श्रग्रेजी राज्य में मिला लिया गया था। इस प्रकार उन्हें न केवल एक राजनीतिक शिकायत दूर करने का उपाय करना था बल्कि एक नैतिक अन्याय का भी प्रतिकार करना था । जैसा मुहम्मद हसन ने बताया, अवध के सरदारों को दृष्टि मे ग्रे मरणकारी थे और सामन्त लोग अनुभव करते थे कि वे अपने धर्म के साथ-साथ अपने राजा के लिए भी लड रहे हैं। सामन्ती भक्ति एक समय वेशभक्ति का काम करती थी और लोगों की एक प्रचुर बहुसस्या की भावनाए प्राय यही होती थीं जो उनके मुखिया लोगों की । यह सत्य है कि इसमे अपवाद भी थे । उदाहररगत वलरामपुर और शाहगज के राजाओ के ऐसे सरदार भी थे, जो या तो अपने नए स्वामियो के प्रति स्वामिभक्ति की भावना के कारण या इस विश्वास के कारण कि वे अन्त मे जीतेंगे, सरकार का साथ देना ही अपने लिए अनुकूल समझते थे । उन्हें उनके व्यवहारिक ज्ञान के लिए प्रभूत पुरस्कार भी दिए गए। वेरगी माधव, देवीबा जैसे देशभक्त नेता दृढ़तापूर्वक कर्तव्य मार्ग पर चले, भले ही उनका अन्त मृत्यु मे हुआ हो । इन नेताओं के प्रति जनता जो श्रादर-भाव रखती थी उसके प्रसन्दिग्ध साक्ष्य को रसेल ने शकरपुर के पतन के बाद "चारो ओर के ग्रामीणों के उदास चेहरों मे" देखा ।
पंजाब में जारी विधानसभा चुनाव के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ( Arvind Kejriwal ) ने कहा कि चन्नी साहब अपनी दोनों सीट हार रहें और भगवंत मान जी कम से कम 51 हज़ार सीट से जीत रहे हैं। हमारे केंद्र के साथ बहुत मतभेद है लेकिन कभी भी राष्ट्र के मुद्दों पर हमने केंद्र के साथ राजनीति नहीं की। पंजाब के लिए हम केंद्र के साथ बना के चलेंगे। AAP के राष्ट्रीय संयोजक ने आगे कहा कि धूरी आज पंजाब की सबसे वीआईपी और हॉट सीट है, क्योंकि धूरी से भगवंत मान जी चुनाव लड़ रहे हैं और AAP के CM कैंडिडेट हैं, लगभग सारे सर्वे दिखा रहें कि पंजाब में AAP की सरकार बनने जा रही है और भगवंत मान जी पंजाब के सीएम बनने जा रहें। .
पंजाब में जारी विधानसभा चुनाव के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चन्नी साहब अपनी दोनों सीट हार रहें और भगवंत मान जी कम से कम इक्यावन हज़ार सीट से जीत रहे हैं। हमारे केंद्र के साथ बहुत मतभेद है लेकिन कभी भी राष्ट्र के मुद्दों पर हमने केंद्र के साथ राजनीति नहीं की। पंजाब के लिए हम केंद्र के साथ बना के चलेंगे। AAP के राष्ट्रीय संयोजक ने आगे कहा कि धूरी आज पंजाब की सबसे वीआईपी और हॉट सीट है, क्योंकि धूरी से भगवंत मान जी चुनाव लड़ रहे हैं और AAP के CM कैंडिडेट हैं, लगभग सारे सर्वे दिखा रहें कि पंजाब में AAP की सरकार बनने जा रही है और भगवंत मान जी पंजाब के सीएम बनने जा रहें। .
IND vs BAN 1st ODI: बांग्लादेश के खिलाफ टीम इंडिया को पहले वनडे में एक विकेट से हार का सामना करना पड़ा। बांग्लादेश के बल्लेबाज़ों ने अंतिम विकेट के लिए 50 रनों ज्यादा की साझेदारी कर टीम को रोमांचक जीत दिलाई। इस मैच में कई बार उतार-चढ़ाव देखने को मिले। मेहदी हसन ने 38 रनों की नाबाद पारी खेलकर टीम को शानदार जीत दिलाई। इस जीत के साथ बांग्लादेश ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 से बढ़त बना ली। IND vs BAN 1st ODI: बांग्लादेश के खिलाफ टीम इंडिया को पहले वनडे में एक विकेट से हार का सामना करना पड़ा। बांग्लादेश के बल्लेबाज़ों ने अंतिम विकेट के लिए 50 रनों ज्यादा की साझेदारी कर टीम को रोमांचक जीत दिलाई। इस मैच में कई बार उतार-चढ़ाव देखने को मिले। मेहदी हसन ने 38 रनों की नाबाद पारी खेलकर टीम को शानदार जीत दिलाई। इस जीत के साथ बांग्लादेश ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 से बढ़त बना ली। मेहदी हसन ने खेली करिश्माई पारीः टीम इंडिया को इस मैच में बेहद शर्मनाक हार झेलनी पड़ी। एक समय टीम इंडिया इस मैच में बिल्कुल जीत के करीब नज़र आ रही थी। लेकिन उसके बाद बांग्लादेश के मेहदी हसन ने करिश्माई पारी से टीम को रोमांचक जीत दिलाई। मेहदी हसन मिराज और मुस्तफिजुर रहमान ने 10वें यानी आखिरी विकेट के लिए 54 रन की नाबाद साझेदारी कर डाली। मिराज बांग्लादेश की जीत के हीरो रहे। उन्होंने एकतरफा अंदाज में अपनी टीम को जीत दिलाई। वह 39 गेंदों पर 41 रन बनाकर नाबाद रहे। वहीं, मुस्तफिजुर नौ रन बनाकर नाबाद रहे। इस जीत के साथ बांग्लादेश ने सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। सीरीज का अगला मैच सात दिसंबर को ढाका के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में खेला जाएगा। कुछ ऐसी रही टीम इंडिया की पारीः बता दें इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। छठे ओवर में ही ओपनर शिखर धवन 17 गेंदों में 7 रन बनाकर मेहंदी हसन की बॉल पर क्लीन बोल्ड हो गए। उस समय टीम का कुल स्कोर महज 23 रन ही हुआ था। इसके बाद कप्तान रोहित 27 रन ने विराट कोहली के साथ स्कोर को आगे बढ़ाया, लेकिन 48 रन के कुल स्कोर पर रोहित भी शाकिब की गेंद पर बोल्ड हो गए। इसके बाद टीम इंडिया के विकेट लगातार अंतराल से गिरत रहे। लेकिन दूसरी तरफ केएल राहुल ने शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए 73 रनों की पारी खेली। टीम इंडिया के खिलाफ इस मैच में शाकिब अल हसन ने पांच विकेट चटकाए। भारतः रोहित शर्मा (कप्तान), शिखर धवन, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), वाशिंगटन सुंदर, शाहबाज अहमद, शार्दुल ठाकुर, दीपक चाहर, मोहम्मद सिराज और कुलदीप सेन। बांग्लादेशः लिटन दास (कप्तान), एनामुल हक, नजमुल हुसैन संतो, शाकिब अल हसन, मुश्फिकुर रहीम (विकेटकीपर), महमुदुल्लाह, अफीफ हुसैन, मेहदी हसन मिराज, हसन महमूद, मुस्तफिजुर रहमान और इबादत हुसैन।
IND vs BAN एकst ODI: बांग्लादेश के खिलाफ टीम इंडिया को पहले वनडे में एक विकेट से हार का सामना करना पड़ा। बांग्लादेश के बल्लेबाज़ों ने अंतिम विकेट के लिए पचास रनों ज्यादा की साझेदारी कर टीम को रोमांचक जीत दिलाई। इस मैच में कई बार उतार-चढ़ाव देखने को मिले। मेहदी हसन ने अड़तीस रनों की नाबाद पारी खेलकर टीम को शानदार जीत दिलाई। इस जीत के साथ बांग्लादेश ने तीन मैचों की सीरीज में एक-शून्य से बढ़त बना ली। IND vs BAN एकst ODI: बांग्लादेश के खिलाफ टीम इंडिया को पहले वनडे में एक विकेट से हार का सामना करना पड़ा। बांग्लादेश के बल्लेबाज़ों ने अंतिम विकेट के लिए पचास रनों ज्यादा की साझेदारी कर टीम को रोमांचक जीत दिलाई। इस मैच में कई बार उतार-चढ़ाव देखने को मिले। मेहदी हसन ने अड़तीस रनों की नाबाद पारी खेलकर टीम को शानदार जीत दिलाई। इस जीत के साथ बांग्लादेश ने तीन मैचों की सीरीज में एक-शून्य से बढ़त बना ली। मेहदी हसन ने खेली करिश्माई पारीः टीम इंडिया को इस मैच में बेहद शर्मनाक हार झेलनी पड़ी। एक समय टीम इंडिया इस मैच में बिल्कुल जीत के करीब नज़र आ रही थी। लेकिन उसके बाद बांग्लादेश के मेहदी हसन ने करिश्माई पारी से टीम को रोमांचक जीत दिलाई। मेहदी हसन मिराज और मुस्तफिजुर रहमान ने दसवें यानी आखिरी विकेट के लिए चौवन रन की नाबाद साझेदारी कर डाली। मिराज बांग्लादेश की जीत के हीरो रहे। उन्होंने एकतरफा अंदाज में अपनी टीम को जीत दिलाई। वह उनतालीस गेंदों पर इकतालीस रन बनाकर नाबाद रहे। वहीं, मुस्तफिजुर नौ रन बनाकर नाबाद रहे। इस जीत के साथ बांग्लादेश ने सीरीज में एक-शून्य की बढ़त बना ली है। सीरीज का अगला मैच सात दिसंबर को ढाका के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में खेला जाएगा। कुछ ऐसी रही टीम इंडिया की पारीः बता दें इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। छठे ओवर में ही ओपनर शिखर धवन सत्रह गेंदों में सात रन बनाकर मेहंदी हसन की बॉल पर क्लीन बोल्ड हो गए। उस समय टीम का कुल स्कोर महज तेईस रन ही हुआ था। इसके बाद कप्तान रोहित सत्ताईस रन ने विराट कोहली के साथ स्कोर को आगे बढ़ाया, लेकिन अड़तालीस रन के कुल स्कोर पर रोहित भी शाकिब की गेंद पर बोल्ड हो गए। इसके बाद टीम इंडिया के विकेट लगातार अंतराल से गिरत रहे। लेकिन दूसरी तरफ केएल राहुल ने शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए तिहत्तर रनों की पारी खेली। टीम इंडिया के खिलाफ इस मैच में शाकिब अल हसन ने पांच विकेट चटकाए। भारतः रोहित शर्मा , शिखर धवन, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल , वाशिंगटन सुंदर, शाहबाज अहमद, शार्दुल ठाकुर, दीपक चाहर, मोहम्मद सिराज और कुलदीप सेन। बांग्लादेशः लिटन दास , एनामुल हक, नजमुल हुसैन संतो, शाकिब अल हसन, मुश्फिकुर रहीम , महमुदुल्लाह, अफीफ हुसैन, मेहदी हसन मिराज, हसन महमूद, मुस्तफिजुर रहमान और इबादत हुसैन।
पितामहकी उक्त भविष्यवाणी आगे चलकर सोलहों ने सत्य सिद्ध हुई । जब कौरव-पक्षके समस्त महारथी काम श्री गये, केवल अश्वत्थामा पर विजयकी आशा केन्द्रित हो गई। और जब रण-कौशल दिखलाकर कीर्तिवरणका उपयुक्त अवसर आया, ठीक उसी अग्निपरीक्षाके समय श्रण क्षेत्र से भाग निकला। इसी एक भगोड़ेने कौरवोंकी ११ अक्षौहिणी सेनाके बलिदानको धूलमें मिला दिया। तब आया उपनिषद्की कथाका मर्म समझमें । जो निर्भय होकर जूभ मरता है, वह मरकर भी अमर रहता है और जो भयसे भाग खड़ा होता है, वह जीवित रहते हुए भी मर जाता है । हिन्दू धर्मानुसार अश्वत्थामा अमर था । फिर भी वह प्राणोंके मोहसे भाग निकला और कहते हैं आज भी वह अपना कलंकी जीवन लिये छद्म वेशमें जंगलों, पर्वतों और आबादियों घूमता फिरता है, किन्तु एक भी ऐसा मूर्ख आदमी नहीं जो अश्वत्थामा - जैसा प्रमरत्व एक रोजको भी चाहता हो । अपितु ऐसे जीवनसे वीर गतिको प्राप्त होनेवाला क्षणभरका जीवन कहीं अधिक श्रेष्ठ समझता है । भय कायरताका ही नहीं, अनेक पापोंका जनक है। पापी मनुष्य सर्वत्र भयभीत रहता है । भय मिथ्यात्व है, अभय सम्यक्त्व है । सम्यक्त्वी ही परतन्त्रताके बन्धन काटनेका अधिकारी है। मिथ्यात्वी सांसारिक प्रापदाओंको भुगतनेके लिए लाचार है। भयके कारण ही मनुष्य संसारमें मिथ्यात्व करता है, बड़े से बड़ा अनर्थ करता है। भयभीत मनुष्य संकटके समय स्वजनोंको छोड़कर भाग खड़ा होता है । बहन-बेटियोंकी लाज लुटती हुई निर्विकार नेत्रोंसे देख सकता है। देश और समाजको भट्टीमें झोंक सकता है, केवल अपने प्राण
पितामहकी उक्त भविष्यवाणी आगे चलकर सोलहों ने सत्य सिद्ध हुई । जब कौरव-पक्षके समस्त महारथी काम श्री गये, केवल अश्वत्थामा पर विजयकी आशा केन्द्रित हो गई। और जब रण-कौशल दिखलाकर कीर्तिवरणका उपयुक्त अवसर आया, ठीक उसी अग्निपरीक्षाके समय श्रण क्षेत्र से भाग निकला। इसी एक भगोड़ेने कौरवोंकी ग्यारह अक्षौहिणी सेनाके बलिदानको धूलमें मिला दिया। तब आया उपनिषद्की कथाका मर्म समझमें । जो निर्भय होकर जूभ मरता है, वह मरकर भी अमर रहता है और जो भयसे भाग खड़ा होता है, वह जीवित रहते हुए भी मर जाता है । हिन्दू धर्मानुसार अश्वत्थामा अमर था । फिर भी वह प्राणोंके मोहसे भाग निकला और कहते हैं आज भी वह अपना कलंकी जीवन लिये छद्म वेशमें जंगलों, पर्वतों और आबादियों घूमता फिरता है, किन्तु एक भी ऐसा मूर्ख आदमी नहीं जो अश्वत्थामा - जैसा प्रमरत्व एक रोजको भी चाहता हो । अपितु ऐसे जीवनसे वीर गतिको प्राप्त होनेवाला क्षणभरका जीवन कहीं अधिक श्रेष्ठ समझता है । भय कायरताका ही नहीं, अनेक पापोंका जनक है। पापी मनुष्य सर्वत्र भयभीत रहता है । भय मिथ्यात्व है, अभय सम्यक्त्व है । सम्यक्त्वी ही परतन्त्रताके बन्धन काटनेका अधिकारी है। मिथ्यात्वी सांसारिक प्रापदाओंको भुगतनेके लिए लाचार है। भयके कारण ही मनुष्य संसारमें मिथ्यात्व करता है, बड़े से बड़ा अनर्थ करता है। भयभीत मनुष्य संकटके समय स्वजनोंको छोड़कर भाग खड़ा होता है । बहन-बेटियोंकी लाज लुटती हुई निर्विकार नेत्रोंसे देख सकता है। देश और समाजको भट्टीमें झोंक सकता है, केवल अपने प्राण
मथुरा। जन-जन के राम-रामायण कॉन्क्लेव के तहत उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से डॉ. राजेंद्र कृष्ण संगीत महाविद्यालय के सहयोग से श्रीराम चरित मानस गान एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शुभारंभ अमरनाथ विद्या आश्रम के प्रधानाचार्य डॉ. अरुण कुमार वाजपेयी और संयोजक व वरिष्ठ संगीतज्ञ डॉ. राजेंद्र कृष्ण अग्रवाल ने किया। अमरनाथ विद्या आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में अतिथि कलाकार राधिका दासी ने भजन प्रस्तुत किए। दोनों प्रतियोगिताओं में 40 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। मानस गान में वैष्णवी गौड़ प्रथम, सुरभि शर्मा एवं वैभवी त्रिवेदी द्वितीय, कनक मिश्रा एवं कबीर शर्मा तृतीय स्थान पर रहे, जबकि अमित और यशस्वी राठौर को सांत्वना पुरस्कार घोषित हुए। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सुरभि शर्मा प्रथम, वैष्णवी गौड़ द्वितीय और वरुण बंसल तृतीय स्थान पर रहे।
मथुरा। जन-जन के राम-रामायण कॉन्क्लेव के तहत उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से डॉ. राजेंद्र कृष्ण संगीत महाविद्यालय के सहयोग से श्रीराम चरित मानस गान एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शुभारंभ अमरनाथ विद्या आश्रम के प्रधानाचार्य डॉ. अरुण कुमार वाजपेयी और संयोजक व वरिष्ठ संगीतज्ञ डॉ. राजेंद्र कृष्ण अग्रवाल ने किया। अमरनाथ विद्या आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में अतिथि कलाकार राधिका दासी ने भजन प्रस्तुत किए। दोनों प्रतियोगिताओं में चालीस से अधिक बच्चों ने भाग लिया। मानस गान में वैष्णवी गौड़ प्रथम, सुरभि शर्मा एवं वैभवी त्रिवेदी द्वितीय, कनक मिश्रा एवं कबीर शर्मा तृतीय स्थान पर रहे, जबकि अमित और यशस्वी राठौर को सांत्वना पुरस्कार घोषित हुए। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सुरभि शर्मा प्रथम, वैष्णवी गौड़ द्वितीय और वरुण बंसल तृतीय स्थान पर रहे।
अफगानिस्तान में आगामी सितंबर में होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के प्रत्याशी के काबुल स्थित दफ्तर पर हुए आत्मघाती हमले में 20 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है, जबकि 50 अन्य घायल हो गए हैं . अफगान प्रशासन ने सोमवार को इस बात की पुष्टि की है. यह कार धमाका रविवार की शाम को 4. 30 बजे के आसपास पूर्व खुफिया प्रमुख अमरुल्लाह सालेह के दफ्तर के निकट हुआ. सालेह 28 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में प्रत्याशी होने के साथ ही अशरफ गनी के सहयोगी भी हैं.
अफगानिस्तान में आगामी सितंबर में होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के प्रत्याशी के काबुल स्थित दफ्तर पर हुए आत्मघाती हमले में बीस लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है, जबकि पचास अन्य घायल हो गए हैं . अफगान प्रशासन ने सोमवार को इस बात की पुष्टि की है. यह कार धमाका रविवार की शाम को चार. तीस बजे के आसपास पूर्व खुफिया प्रमुख अमरुल्लाह सालेह के दफ्तर के निकट हुआ. सालेह अट्ठाईस सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में प्रत्याशी होने के साथ ही अशरफ गनी के सहयोगी भी हैं.
यह प्रोटोकॉल एक विकसित मिश्रित वास्तविकता अनुप्रयोग की तकनीकी सेटिंग को चित्रित करता है जिसका उपयोग इमर्सिव एनालिटिक्स के लिए किया जाता है। इसके आधार पर, उपाय प्रस्तुत किए जाते हैं, जिनका उपयोग विकसित तकनीकी समाधान के प्रयोज्य पहलुओं में अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए एक अध्ययन में किया गया था। चिकित्सा या उद्योग में, उच्च आयामी डेटा सेट का विश्लेषण तेजी से आवश्यक है। हालांकि, उपलब्ध तकनीकी समाधान अक्सर उपयोग करने के लिए जटिल होते हैं। इसलिए, इमर्सिव एनालिटिक्स जैसे नए दृष्टिकोणों का स्वागत है। इमर्सिव एनालिटिक्स विभिन्न उपयोगकर्ता समूहों और डेटा सेटों के लिए सुविधाजनक तरीके से उच्च आयामी डेटा सेट का अनुभव करने का वादा करता है। तकनीकी रूप से, वर्चुअल-रियलिटी उपकरणों का उपयोग इमर्सिव एनालिटिक्स को सक्षम करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, उद्योग 4.0 में, उच्च आयामी डेटा सेट में आउटलायर्स या विसंगतियों की पहचान जैसे परिदृश्यों को इमर्सिव एनालिटिक्स के लक्ष्यों का पीछा किया जाता है। इस संदर्भ में, इमर्सिव एनालिटिक्स पर किसी भी विकसित तकनीकी समाधान के लिए दो महत्वपूर्ण प्रश्नों को संबोधित किया जाना चाहिएः सबसे पहले, तकनीकी समाधान सहायक हो रहे हैं या नहीं? दूसरा, तकनीकी समाधान का शारीरिक अनुभव सकारात्मक या नकारात्मक है? पहला प्रश्न एक तकनीकी समाधान की सामान्य व्यवहार्यता पर लक्षित है, जबकि दूसरे का उद्देश्य पहनने के आराम को लक्षित करना है। मौजूदा अध्ययन और प्रोटोकॉल, जो व्यवस्थित रूप से इन सवालों को संबोधित करते हैं, अभी भी दुर्लभ हैं। इस काम में, एक अध्ययन प्रोटोकॉल प्रस्तुत किया गया है, जो मुख्य रूप से उद्योग 4.0 परिदृश्यों में इमर्सिव एनालिटिक्स के लिए प्रयोज्यता की जांच करता है। विशेष रूप से, प्रोटोकॉल चार स्तंभों पर आधारित है। सबसे पहले, यह पिछले अनुभवों के आधार पर उपयोगकर्ताओं को वर्गीकृत करता है। दूसरा, कार्य प्रस्तुत किए जाते हैं, जिनका उपयोग तकनीकी समाधान की व्यवहार्यता का मूल्यांकन करने के लिए किया जा सकता है। तीसरा, उपाय प्रस्तुत किए जाते हैं, जो उपयोगकर्ता के सीखने के प्रभाव को निर्धारित करते हैं। चौथा, एक प्रश्नावली कार्य करते समय तनाव के स्तर का मूल्यांकन करती है। इन स्तंभों के आधार पर, एक तकनीकी सेटिंग लागू की गई थी जो अध्ययन प्रोटोकॉल को लागू करने के लिए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग करती है। आयोजित अध्ययन के परिणाम एक तरफ प्रोटोकॉल की प्रयोज्यता और दूसरी ओर उद्योग 4.0 परिदृश्यों में इमर्सिव एनालिटिक्स की व्यवहार्यता दिखाते हैं। प्रस्तुत प्रोटोकॉल में खोजी गई सीमाओं की चर्चा शामिल है। वर्चुअल-रियलिटी समाधान (वीआर समाधान) विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से महत्वपूर्ण हैं। अक्सर, वीआर समाधान (आभासी वास्तविकता, मिश्रित वास्तविकता और संवर्धित वास्तविकता सहित) के साथ, कई दैनिक कार्यों और प्रक्रियाओं की उपलब्धि को आसान बनाया जाएगा। उदाहरण के लिए, मोटर वाहन डोमेन में, वर्चुअल रियलिटी1 (वीआर) के उपयोग से कार की कॉन्फ़िगरेशन प्रक्रिया का समर्थन किया जा सकता है। शोधकर्ताओं और चिकित्सकों ने इस संदर्भ में कई दृष्टिकोणों और समाधानों की जांच और विकास किया है। हालांकि, प्रयोज्य पहलुओं की जांच करने वाले अध्ययन अभी भी दुर्लभ हैं। सामान्य तौर पर, पहलुओं को दो प्रमुख प्रश्नों के प्रकाश में माना जाना चाहिए। सबसे पहले, यह मूल्यांकन किया जाना चाहिए कि क्या वीआर समाधान वास्तव में एक दृष्टिकोण से बेहतर है जो वीआर तकनीकों का उपयोग नहीं करता है। दूसरा, चूंकि वीआर समाधान मुख्य रूप से भारी और जटिल हार्डवेयर उपकरणों पर निर्भर हैं, पहनने के आराम और मानसिक प्रयास जैसे मापदंडों की अधिक गहराई से जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, उल्लिखित पहलुओं को हमेशा प्रश्न में आवेदन क्षेत्र के संबंध में जांच की जानी चाहिए। यद्यपि कई मौजूदा दृष्टिकोण इन प्रश्नों की जांच करने की आवश्यकता को देखते हैं2, कम अध्ययन मौजूद हैं जिन्होंने परिणाम प्रस्तुत किए हैं। वीआर के क्षेत्र में एक शोध विषय, जो वर्तमान में महत्वपूर्ण है, को इमर्सिव एनालिटिक्स के साथ निरूपित किया जाता है। यह दृश्य विश्लेषिकी के अनुसंधान क्षेत्र से लिया गया है, जो विश्लेषिकी कार्यों में मानव धारणा को शामिल करने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया को दृश्य डेटा खनन4 के रूप में भी जाना जाता है। इमर्सिव एनालिटिक्स में डेटा विज़ुअलाइज़ेशन, विज़ुअल एनालिटिक्स, वर्चुअल रियलिटी, कंप्यूटर ग्राफिक्स और मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन के क्षेत्र के विषय शामिलहैं। हेड-माउंटेड डिस्प्ले (एचएमडी) में हाल के फायदों ने एक इमर्सिव तरीके से डेटा की खोज के लिए बेहतर संभावनाओं को जन्म दिया। इन रुझानों के साथ, नई चुनौतियां और शोध प्रश्न उभरते हैं, जैसे कि नई इंटरैक्शन सिस्टम का विकास, उपयोगकर्ता थकान की जांच करने की आवश्यकता, या परिष्कृत 3 डी विज़ुअलाइज़ेशन6 का विकास। पिछले प्रकाशन6 में, इमर्सिव एनालिटिक्स के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर चर्चा की गई है। बड़े डेटा के प्रकाश में, जटिल डेटा पूल के बेहतर विश्लेषण को सक्षम करने के लिए इमर्सिव एनालिटिक्स जैसे तरीकों की अधिक से अधिक आवश्यकता होती है। केवल कुछ अध्ययन मौजूद हैं जो इमर्सिव एनालिटिक्स समाधानों के प्रयोज्य पहलुओं की जांच करते हैं। इसके अलावा, ऐसे अध्ययनों में प्रश्न में डोमेन या क्षेत्र पर भी विचार किया जाना चाहिए। इस काम में, एक इमर्सिव एनालिटिक्स प्रोटोटाइप विकसित किया गया था, और उसके आधार पर, एक प्रोटोकॉल, जो उद्योग 4.0 परिदृश्यों के लिए विकसित समाधान की जांच करता है। प्रोटोकॉल इस प्रकार अनुभव विधि2 का फायदा उठाता है, जो व्यक्तिपरक, प्रदर्शन और शारीरिक पहलुओं पर आधारित है। हाथ में प्रोटोकॉल में, व्यक्तिपरक पहलुओं को अध्ययन उपयोगकर्ताओं के कथित तनाव के माध्यम से मापा जाता है। प्रदर्शन, बदले में, आवश्यक समय और त्रुटियों के माध्यम से मापा जाता है जो विश्लेषण कार्यों को पूरा करने के लिए किए जाते हैं। अंत में, एक त्वचा चालकता सेंसर ने शारीरिक मापदंडों को मापा। इस काम में पहले दो उपाय प्रस्तुत किए जाएंगे, जबकि मापा त्वचा चालकता का मूल्यांकन करने के लिए आगे के प्रयासों की आवश्यकता होती है। प्रस्तुत अध्ययन में कई शोध क्षेत्र शामिल हैं, विशेष रूप से तंत्रिका विज्ञान पहलुओं और सूचना प्रणालियों सहित। दिलचस्प बात यह है कि सूचना प्रणालियों के तंत्रिका विज्ञान पहलुओं पर विचार ने हाल ही में कई शोध समूहों 7,8 का ध्यान आकर्षित किया है, जो संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से भी आईटी सिस्टम के उपयोग का पता लगाने की मांग दिखाता है। एक अन्य क्षेत्र जो इस काम के लिए प्रासंगिक है, वह सूचना प्रणाली 9,10,11 के मानव कारकों की जांच का गठन करता है। मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन के क्षेत्र में, एक समाधान की प्रयोज्यता की जांच करने के लिए उपकरण मौजूद हैं। ध्यान दें कि सिस्टम प्रयोज्य स्केल मुख्य रूप से इस संदर्भ12 में उपयोग किया जाता है। थिंकिंग अलाउड प्रोटोकॉल13 सूचना प्रणालियों के उपयोग के बारे में अधिक जानने के लिए एक और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली अध्ययन तकनीक है। यद्यपि सूचना प्रणालियों के प्रयोज्य पहलुओं को मापने के लिए कई दृष्टिकोण मौजूद हैं, और उनमें से कुछको बहुत पहले प्रस्तुत किया गया है, फिर भी ऐसे प्रश्न उभरते हैं जिन्हें नए उपायों या अध्ययन विधियों की जांच करने की आवश्यकता होती है। इसलिए, इस क्षेत्र में अनुसंधान बहुत सक्रियहै 12,15,16. निम्नलिखित में, उन कारणों पर चर्चा की जाएगी कि वर्तमान कार्य में दो प्रचलित रूप से उपयोग की जाने वाली विधियों पर विचार क्यों नहीं किया गया है। सबसे पहले, सिस्टम प्रयोज्य स्केल का उपयोग नहीं किया गया था। पैमाना दसप्रश्नों 17 पर आधारित है और इसका उपयोग कई अन्य वीआरअध्ययनों 18 में भी पाया जा सकता है। जैसा कि इस अध्ययन का उद्देश्य मुख्य रूप से तनाव19 का माप करना है, तनाव से संबंधित प्रश्नावली अधिक उपयुक्त थी। दूसरा, कोई थिंकिंग अलाउड प्रोटोकॉल20 का उपयोग नहीं किया गया था। यद्यपि इस प्रोटोकॉल प्रकार ने सामान्य13 में अपनी उपयोगिता दिखाई है, इसका उपयोग यहां नहीं किया गया था क्योंकि अध्ययन उपयोगकर्ताओं का तनाव स्तर केवल इस तथ्य के कारण बढ़ सकता है कि थिंक अलाउड सत्र को भारी और जटिल वीआर डिवाइस के उपयोग के समानांतर पूरा किया जाना चाहिए। हालांकि इन दो तकनीकों का उपयोग नहीं किया गया है, लेकिन अन्य हालिया अध्ययनों के परिणामों को अध्ययन में शामिल किया गया है। उदाहरण के लिए, पिछलेकार्यों 21,22 में, लेखक अपने अध्ययन में नौसिखियों और विशेषज्ञों के बीच अंतर करते हैं। इन अध्ययनों के सफल परिणाम के आधार पर, प्रोटोकॉल अध्ययन उपयोगकर्ताओं के इस प्रस्तुत पृथक्करण का उपयोग करता है। तनाव माप, बदले में, निम्नलिखित कार्यों15,19,21,22 के विचारों पर आधारित है। सबसे पहले, अध्ययन करने के लिए, विश्लेषणात्मक कार्यों को पूरा करने के लिए एक उपयुक्त उद्योग 4.0 परिदृश्य पाया जाना चाहिए। लेखकों के एक अन्य काम से प्रेरित होकर, दो परिदृश्यों (यानी, विश्लेषण कार्यों) की पहचान की गई है, (1) आउटलायर्स का पता लगाना, और (2) क्लस्टर की पहचान। दोनों परिदृश्य चुनौतीपूर्ण हैं, और उच्च-थ्रूपुट उत्पादन मशीनों के रखरखाव के संदर्भ में अत्यधिक प्रासंगिक हैं। इस निर्णय के आधार पर, छह प्रमुख विचारों ने इस काम में प्रस्तुत अध्ययन प्रोटोकॉल को प्रेरित किया हैः - अध्ययन के लिए विकसित समाधान तकनीकी रूप से मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास ( सामग्री की तालिका देखें) पर आधारित होगा और इसे मिश्रित वास्तविकता अनुप्रयोग के रूप में विकसित किया जाएगा। - एक उपयुक्त परीक्षण विकसित किया जाना चाहिए, जो नौसिखियों को उन्नत उपयोगकर्ताओं से अलग करने में सक्षम है। - प्रदर्शन उपायों को समय और त्रुटियों पर विचार करना चाहिए। - एक डेस्कटॉप एप्लिकेशन विकसित किया जाना चाहिए, जिसकी तुलना इमर्सिव एनालिटिक्स समाधान से की जा सकती है। - कथित तनाव स्तर का मूल्यांकन करने के लिए एक उपाय लागू किया जाना चाहिए। - बाद के बिंदु के अलावा, तनाव स्तर को कम करने के लिए सुविधाओं को विकसित किया जाएगा, जबकि एक उपयोगकर्ता दो उल्लिखित विश्लेषण कार्यों की प्रक्रिया को पूरा करता है (यानी, (1) आउटलायर्स का पता लगाना, और (2) क्लस्टर की मान्यता)। छह उल्लिखित बिंदुओं के आधार पर, अध्ययन प्रोटोकॉल में निम्नलिखित प्रक्रिया शामिल है। आउटलायर डिटेक्शन और क्लस्टर रिकग्निशन विश्लेषण कार्यों को मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग करके इमर्सिव तरीके से पूरा किया जाना है (सामग्री की तालिका देखें)। इसलिए, एक नया एप्लिकेशन विकसित किया गया था। स्थानिक ध्वनियां मानसिक प्रयास को बढ़ाए बिना विश्लेषण कार्यों के प्रदर्शन को आसान बना देंगी। एक आवाज सुविधा मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास के विकसित अनुप्रयोग के लिए उपयोग किए जाने वाले नेविगेशन को आसान बनाएगी (सामग्री की तालिका देखें)। एक मानसिक रोटेशन परीक्षण नौसिखियों को उन्नत उपयोगकर्ताओं से अलग करने का आधार होगा। तनाव का स्तर एक प्रश्नावली के आधार पर मापा जाता है। प्रदर्शन, बदले में, विश्लेषण कार्यों के लिए उपयोगकर्ता द्वारा आवश्यक (1) समय के आधार पर और विश्लेषण कार्यों के लिए उपयोगकर्ता द्वारा की गई (2) त्रुटियों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास में प्रदर्शन की तुलना एक नए विकसित और तुलनीय 2 डी डेस्कटॉप एप्लिकेशन में समान कार्यों की उपलब्धि के साथ की जाती है। इसके अलावा, तनाव के लिए एक संभावित संकेतक के रूप में त्वचा के चालकता स्तर को मापने के लिए एक त्वचा चालकता उपकरण का उपयोग किया जाता है। इस माप के परिणाम आगे के विश्लेषण के अधीन हैं और इस काम में चर्चा नहीं की जाएगी। लेखकों ने उसी उपकरण के साथ एक अन्य अध्ययन में खुलासा किया कि अतिरिक्त विचारों की आवश्यकता है। इस प्रोटोकॉल के आधार पर, निम्नलिखित पांच शोध प्रश्नों (आरक्यू) को संबोधित किया जाता हैः आरक्यू 1: क्या प्रतिभागियों की स्थानिक कल्पना क्षमताएं कार्यों के प्रदर्शन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं? आरक्यू 2: क्या समय के साथ कार्य प्रदर्शन में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है? आरक्यू 3: क्या इमर्सिव एनालिटिक्स समाधान में स्थानिक ध्वनियों का उपयोग करते समय कार्य प्रदर्शन में महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है? आरक्यू 4: क्या विकसित इमर्सिव एनालिटिक्स को उपयोगकर्ताओं द्वारा तनावपूर्ण माना जाता है? आरक्यू 5: क्या उपयोगकर्ता 2 डी दृष्टिकोण की तुलना में इमर्सिव एनालिटिक्स समाधान का उपयोग करते समय बेहतर प्रदर्शन करते हैं? चित्रा 1 दो पैमानों के संबंध में प्रस्तुत प्रोटोकॉल को सारांशित करता है। यह बातचीत के स्तर के संबंध में विकसित और उपयोग किए गए उपायों और उनकी नवीनता को दर्शाता है। चूंकि वीआर सेटिंग के लिए सुविधाओं को विकसित करते समय इंटरैक्शन स्तर एक महत्वपूर्ण पहलू का गठन करता है, इसलिए चित्रा 1 इस काम में विकसित पूरे प्रोटोकॉल की नवीनता को बेहतर ढंग से दिखाएगा। यद्यपि दो उपयोग किए गए पैमानों के भीतर पहलुओं का मूल्यांकन व्यक्तिपरक है, उनका समग्र मूल्यांकन वर्तमान संबंधित कार्य और निम्नलिखित प्रमुख विचारों पर आधारित हैः एक महत्वपूर्ण सिद्धांत प्राकृतिक बातचीत के लिए एक पर्यावरण की अमूर्तता के उपयोग का गठन करता है, जिसमें उपयोगकर्ता अभ्यस्त हो गया है। हाथ में प्रोटोकॉल के संबंध में, बिंदु बादलों का विज़ुअलाइज़ेशन उपयोगकर्ताओं के लिए सहज प्रतीत होता है और ऐसे बादलों में पैटर्न की पहचान को सामान्य रूप से एक प्रबंधनीय कार्य के रूप में मान्यता दी गई है। एक अन्य महत्वपूर्ण सिद्धांत उपभोग को ओवरले करना है। इसके द्वारा, हाथ में प्रोटोकॉल में उपयोग की जाने वाली स्थानिक ध्वनियों का उपयोग एक उदाहरण है, क्योंकि वे खोजी गई वस्तु की निकटता के साथ सहसंबंधित हैं। लेखक प्रतिनिधित्व को इस तरह से ट्यून करने की सलाह देते हैं कि अधिकांश जानकारी मध्यवर्ती क्षेत्र में स्थित है, जो मानव धारणा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। लेखकों ने इस सिद्धांत को शामिल नहीं करने का कारण उपयोगकर्ता को स्वयं द्वारा सबसे अच्छा स्थान खोजने के साथ-साथ डेटा विज़ुअलाइज़ेशन स्पेस में खुद को उन्मुख करने की कोशिश करने के लिए प्रोत्साहित करना था, जो एक बार में दिखाए जाने के लिए बहुत बड़ा है। प्रस्तुत दृष्टिकोण में, दिखाए जाने वाले 3 डी डेटा की विशेषताओं का कोई और विचार नहीं किया गया था। उदाहरण के लिए, यदि किसी आयाम को अस्थायी माना जाता है, तो स्कैटरप्लॉट दिखाए जा सकते थे। लेखक इस तरह के विज़ुअलाइज़ेशन को आम तौर पर उद्योग 4.0 के संदर्भ में दिलचस्प मानते हैं। हालांकि, इसे विज़ुअलाइज़ेशन के एक यथोचित छोटे सेट पर केंद्रित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, एक पिछला प्रकाशन पहले से ही डेटा के सहयोगी विश्लेषण पर केंद्रित था। इस काम में, इस अध्ययन में अन्य संबोधित मुद्दों की जटिलता के कारण इस शोध प्रश्न को बाहर रखा गया था। यहां प्रस्तुत सेटअप में, उपयोगकर्ता चारों ओर घूमकर इमर्सिव स्पेस का पता लगाने में सक्षम है। अन्य दृष्टिकोण नियंत्रकों को आभासी स्थान का पता लगाने की पेशकश करते हैं। इस अध्ययन में, सिस्टम प्रयोज्य पैमाने (एसयूएस) का उपयोग करके प्रयोज्यता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एक अन्य पिछले प्रकाशन ने आर्थिक विशेषज्ञों के लिए एक अध्ययन किया है, लेकिन वीआर हेडसेट के साथ। सामान्य तौर पर, और सबसे महत्वपूर्ण बात, यह अध्ययन इस काम में उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास जैसे अन्य उपकरणों के लिए सीमित क्षेत्र के बारे में शिकायत करता है (सामग्री की तालिका देखें)। उनके निष्कर्ष बताते हैं कि वीआर के क्षेत्र में शुरुआती विश्लेषणात्मक उपकरण का कुशलतापूर्वक उपयोग करने में सक्षम थे। यह इस अध्ययन के अनुभवों से मेल खाता है, हालांकि इस काम में शुरुआती लोगों को वीआर या गेमिंग अनुभवों के लिए वर्गीकृत नहीं किया गया था। अधिकांश वीआर समाधानों के विपरीत, मिश्रित वास्तविकता एक स्थिति के लिए तय नहीं है क्योंकि यह वास्तविक वातावरण को ट्रैक करने की अनुमति देता है। वीआर दृष्टिकोण जैसे उपयोगकर्ता को अपने डेस्कटॉप से मुक्त करने के लिए 360 ° अनुभव के लिए विशेष कुर्सियों के उपयोग का उल्लेख करना। लेखकों ने संकेत दिया कि धारणा के मुद्दे इमर्सिव एनालिटिक्स के प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं; उदाहरण के लिए, छाया का उपयोग करके। हाथ में अध्ययन के लिए, यह संभव नहीं है, क्योंकि उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास (सामग्री की तालिका देखें) छाया प्रदर्शित करने में सक्षम नहीं हैं। एक वर्कअराउंड एक आभासी मंजिल हो सकता है, लेकिन ऐसा सेटअप इस अध्ययन के दायरे से बाहर था। इमर्सिव एनालिटिक्स के क्षेत्र में एक सर्वेक्षण अध्ययन ने 3 डी स्कैटरप्लॉट्स को बहु-आयामी डेटा के सबसे आम प्रतिनिधित्वों में से एक के रूप में पहचाना। कुल मिलाकर, चित्रा 1 में दिखाए गए पहलुओं को वर्तमान में एक प्रोटोकॉल के लिए संकलित नहीं किया जा सकता है जो उद्योग 4.0 परिदृश्यों के लिए इमर्सिव एनालिटिक्स के प्रयोज्य पहलुओं की जांच करता है। Subscription Required. Please recommend JoVE to your librarian. सभी सामग्रियों और विधियों को उल्म विश्वविद्यालय की आचार समिति द्वारा अनुमोदित किया गया था, और अनुमोदित दिशानिर्देशों के अनुसार किया गया था। सभी प्रतिभागियों ने अपनी लिखित सूचित सहमति दी। नोटः अध्ययन जटिल हार्डवेयर सेटिंग से निपटने के लिए एक नियंत्रित वातावरण में आयोजित किया गया था। उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास ( सामग्री की तालिका देखें) और 2 डी एप्लिकेशन के लिए लैपटॉप अध्ययन प्रतिभागियों को समझाया गया था। - प्रत्येक प्रतिभागी से पहले तकनीकी समाधान की जांच करें; डिफ़ॉल्ट मोड में सेट करें. प्रश्नावली तैयार करें और एक प्रतिभागी के बगल में रखें। - प्रतिभागियों को एक सत्र में आउटलायर डिटेक्शन और क्लस्टर पहचान के उपयोग से कार्यों को हल करने दें (यानी, औसत समय 43 मिनट था)। - प्रतिभागियों का स्वागत करके और अध्ययन के लक्ष्य, साथ ही समग्र प्रक्रिया का परिचय देकर अध्ययन शुरू करें। - त्वचा चालकता माप उपकरण का उपयोग करने वाले प्रतिभागियों ( सामग्री की तालिका देखें) को बेसलाइन माप प्राप्त करने के लिए एक छोटे आराम चरण का पालन करना होगा। प्रतिभागियों में से केवल आधे ने इस डिवाइस का उपयोग किया। - प्रयोग की शुरुआत से पहले सभी प्रतिभागियों को स्टेट-ट्रेट एंग्जाइटी इन्वेंट्री (एसटीएआई) प्रश्नावली31 भरनी होगी। - इसके बाद, प्रतिभागियों को मानसिक रोटेशन परीक्षण करना होगा ( चित्रा 4 देखें, इस परीक्षण ने स्थानिक कल्पना क्षमताओं का मूल्यांकन किया), जो कम प्रदर्शन करने वालों से उच्च को अलग करने का आधार था (उच्च प्रदर्शन करने वाले उन्नत उपयोगकर्ता हैं, जबकि कम कलाकार नौसिखिए हैं), इसके बाद प्रतिभागी की स्थानिक श्रवण क्षमताओं को मापने के लिए स्थानिक ध्वनि परीक्षण किया गया। नोटः मानसिक रोटेशन टेस्ट32 में टेस्ट स्कोर का एक औसत विभाजन कम प्रदर्शन करने वालों से कम को अलग करने के लिए उपयोग किया गया था। - इसके बाद, प्रतिभागियों को मानसिक रोटेशन परीक्षण करना होगा ( चित्रा 4 देखें, इस परीक्षण ने स्थानिक कल्पना क्षमताओं का मूल्यांकन किया), जो कम प्रदर्शन करने वालों से उच्च को अलग करने का आधार था (उच्च प्रदर्शन करने वाले उन्नत उपयोगकर्ता हैं, जबकि कम कलाकार नौसिखिए हैं), इसके बाद प्रतिभागी की स्थानिक श्रवण क्षमताओं को मापने के लिए स्थानिक ध्वनि परीक्षण किया गया। - यादृच्छिक रूप से प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित करें; या तो आउटलायर डिटेक्शन या क्लस्टर पहचान पर कार्य से शुरू करें, जबकि बाद में अन्य उपयोग मामले के साथ जारी रखें। क्लस्टर पहचान कार्य के लिए, आधे प्रतिभागियों ने पहले उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास ( सामग्री की तालिका देखें) के साथ शुरुआत की, और फिर 2 डी एप्लिकेशन का उपयोग किया, जबकि दूसरे आधे ने पहले 2 डी एप्लिकेशन के साथ शुरुआत की, और फिर मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग किया ( सामग्री की तालिका देखें)। आउटलायर डिटेक्शन कार्य के लिए, यादृच्छिक रूप से एक समूह का चयन करें जो ध्वनि समर्थन प्राप्त करता है, जबकि समूह के दूसरे हिस्से को कोई ध्वनि समर्थन नहीं मिलता है। - सत्र का समापन करते हुए, प्रतिभागियों को राज्य-विशेषता चिंता सूची (एसटीएआई) प्रश्नावली31 का फिर से जवाब देना होगा, साथ ही साथ स्व-विकसित, और एक जनसांख्यिकीय प्रश्नावली भी। - सत्र पूरा होने के बाद लैपटॉप के भंडारण पर उत्पन्न डेटा स्टोर करें, जो प्रत्येक विकसित एप्लिकेशन द्वारा स्वचालित रूप से रिकॉर्ड किया गया था। - प्रत्येक प्रतिभागी के लिए प्रयोग तैयार करें (प्रयोग के कमरे के लिए चित्रा 2 देखें)। डेस्कटॉप पीसी, इस्तेमाल किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास प्रस्तुत करें, और प्रश्नावली सौंपें। - प्रतिभागियों को सूचित करें कि प्रयोग में 40 से 50 मिनट लगेंगे, और उनमें से आधे प्रीटेस्ट (अध्ययन प्रोटोकॉल के बिंदु 3-6 देखें) के बाद शुरू होते हैं, पहले आउटलायर डिटेक्शन टेस्ट (अध्ययन प्रोटोकॉल के बिंदु 7 देखें), इसके बाद क्लस्टर मान्यता परीक्षण (अध्ययन प्रोटोकॉल का बिंदु 8 देखें) के साथ शुरू होते हैं, जबकि अन्य इन दो परीक्षणों को पूरा करते हैं । बिंदु 7 से पहले अध्ययन प्रोटोकॉल का बिंदु 8)। - यादृच्छिक रूप से तय करें कि क्या त्वचा चालकता माप किया गया है। हां के मामले में, त्वचा चालकता माप उपकरण33 तैयार करें और प्रतिभागी को डिवाइस पर रखने के लिए सूचित करें। प्रतिभागियों से उनके तनाव स्तर के लिए आधारभूत माप प्राप्त करने के लिए एक छोटे आराम चरण का अनुरोध करें। - प्रतिभागियों से अनुरोध करें कि वे स्टेट-ट्रेट एंग्जाइटी इन्वेंट्री (एसटीएआई) प्रश्नावली31 भरें और उन्हें सूचित करें कि यह प्रयोग से पहले वर्तमान कथित तनाव को मापता है। - एक मानसिक रोटेशन परीक्षा आयोजित करें। - प्रतिभागियों को सूचित करें कि उनकी मानसिक रोटेशन क्षमताओं का मूल्यांकन किया जाता है और उन्हें डेस्कटॉप कंप्यूटर के सामने पेश किया जाता है। प्रतिभागियों को परीक्षण प्रक्रिया के बारे में सूचित करें। ध्यान दें कि उन्हें समान वस्तुओं की पहचान करनी थी जिनके पास सिम्युलेटेड 3 डी स्पेस में अलग-अलग स्थिति थी। - प्रतिभागियों को सूचित करें कि दिखाए गए पांच ऑब्जेक्ट्स में से केवल दो समान हैं और उनके पास पूरे परीक्षण के लिए 2 मिनट होंगे। प्रतिभागियों को सूचित करें कि दिए गए 2 मिनट के भीतर सात कार्य पूरे किए जा सकते हैं और उन्हें बताएं कि प्रत्येक पूर्ण कार्य के लिए प्रदर्शन उपाय दर्ज किए जाते हैं। - स्थानिक ध्वनि क्षमताओं का मूल्यांकन करें। - प्रतिभागियों को सूचित करें कि उनकी स्थानिक ध्वनि क्षमताओं का मूल्यांकन किया जाता है और उन्हें डेस्कटॉप कंप्यूटर के सामने पेश किया जाता है। प्रतिभागियों को परीक्षण प्रक्रिया के बारे में सूचित करें। प्रतिभागियों को समझाएं कि छह ध्वनि नमूनों का पता लगाया जाना चाहिए, जो प्रत्येक 13 सेकंड के लिए बजाया जाएगा। - प्रतिभागियों को सूचित करें कि उन्हें उस दिशा (चार कम्पास दिशाओं के अनुरूप) का पता लगाना होगा जिसमें से ध्वनि आ रही है। - आउटलायर डिटेक्शन कौशल का मूल्यांकन करें। - प्रतिभागियों से मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास पहनने का अनुरोध करें। उन्हें समझाएं कि मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास के लिए बनाई गई दुनिया के भीतर आउटलायर्स पाए जाने चाहिए। - आगे उन्हें सूचित करें कि एक आउटलायर एक लाल-चिह्नित बिंदु है, अन्य सभी बिंदु सफेद-चिह्नित हैं। फिर उन्हें समझाएं कि उन्हें इसका पता लगाने के लिए अपनी दृष्टि को लाल रंग के बिंदु पर निर्देशित करना होगा। - प्रतिभागियों को आगे बताएं कि न केवल दृश्य सहायता प्रदान की जाती है, बल्कि पर्यावरणीय ध्वनियां भी आउटलायर्स का पता लगाने में उनकी सहायता करती हैं। प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान करें कि उन्हें 8 आउटलायर कार्यों को पूरा करना है, जिसका अर्थ है कि आभासी दुनिया के भीतर 8 बार, लाल रंग का बिंदु खोजना होगा। प्रत्येक प्रतिभागी के लिए, 4 कार्य ध्वनि-समर्थित हैं, जबकि 4 कार्य ध्वनि-असमर्थित हैं। प्रत्येक प्रतिभागी के लिए, यह यादृच्छिक रूप से चुना जाता है कि वे कार्य ध्वनि-समर्थित शुरू करते हैं या नहीं। फिर, पहले कार्य से निर्भर, यह कार्य से कार्य में बदलता है चाहे ध्वनि समर्थन प्रदान किया गया हो या नहीं। - प्रतिभागियों को बताएं कि कौन सी जानकारी दर्ज की जाएगीः प्रत्येक कार्य के लिए आवश्यक समय, चलने की लंबाई, और उनकी अंतिम चलती स्थिति उनकी शुरुआती स्थिति से संबंधित कैसी दिख रही है। अंत में प्रतिभागियों को बताएं कि लाल-चिह्नित बिंदु हरे रंग में बदल जाता है यदि इसका पता लगाया गया था ( चित्रा 3 देखें)। - क्लस्टर मान्यता कौशल का मूल्यांकन करें। - प्रतिभागी के लिए यादृच्छिक रूप से निर्णय लें कि क्या पहले मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग करना है या प्रतिभागी को डेस्कटॉप कंप्यूटर पर ले जाना है। निम्नलिखित में, केवल मिश्रित वास्तविकता सेटिंग के लिए प्रक्रिया का वर्णन किया गया है। यदि कोई प्रतिभागी पहले डेस्कटॉप कंप्यूटर से शुरू होता है, तो प्रक्रिया बदले हुए क्रम में समान होती है और वॉयस कमांड को छोड़कर, वे केवल मिश्रित वास्तविकता समाधान का उपयोग करते समय प्रदान किए जाते हैं। - मिश्रित वास्तविकता का उपयोग करने वाले प्रतिभागियों के लिएः प्रतिभागियों से मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास लगाने का अनुरोध करें। प्रतिभागियों को सूचित करें कि उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास के साथ बनाई गई दुनिया के भीतर क्लस्टर कैसे खोजें। प्रतिभागियों को जोर दें कि उन्हें अपने चारों ओर घूमकर अतिव्यापी समूहों के बीच अंतर करना था। - मिश्रित वास्तविकता का उपयोग करने वाले प्रतिभागियों के लिएः प्रतिभागियों को समझाएं कि वे वॉयस कमांड का उपयोग करके आभासी दुनिया में और क्लस्टर के आसपास नेविगेट कर सकते हैं। अंत में प्रतिभागियों को बताएं कि उन्हें छह समूहों का पता लगाना था। - मिश्रित वास्तविकता का उपयोग करने वाले प्रतिभागियों के लिएः प्रतिभागियों से उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास को हटाने का अनुरोध करें। प्रतिभागियों को डेस्कटॉप कंप्यूटर पर ले जाएं और उन्हें डेस्कटॉप कंप्यूटर की स्क्रीन पर दिखाए गए सॉफ़्टवेयर का उपयोग करने के लिए कहें। उन्हें सूचित करें कि उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास में दिखाए गए समान प्रकार के क्लस्टर को डेस्कटॉप कंप्यूटर पर सॉफ्टवेयर का उपयोग करके पता लगाया जाना था ( चित्रा 7 और चित्रा 8 देखें)। - प्रतिभागियों से तीन प्रश्नावली भरने का अनुरोध करें, अर्थात् राज्य-विशेषता चिंता सूची (एसटीएआई) प्रश्नावली31, व्यक्तिपरक प्रतिक्रिया इकट्ठा करने के लिए एक स्व-विकसित प्रश्नावली, और उनके बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक जनसांख्यिकीय प्रश्नावली। - प्रतिभागियों से त्वचा चालकता माप उपकरण33 को हटाने का अनुरोध करें यदि उन्हें इसे लगाने के लिए शुरुआत में अनुरोध किया गया था। - भागीदारी के लिए धन्यवाद कहकर प्रतिभागियों को प्रयोग से राहत दें। Subscription Required. Please recommend JoVE to your librarian. आउटलायर डिटेक्शन कार्य के लिए, निम्न प्रदर्शन उपायों को परिभाषित किया गया थाः समय, पथ और कोण। माप के लिए चित्र 6 देखें। समय तब तक दर्ज किया गया था जब तक कि एक लाल-चिह्नित बिंदु (यानी, आउटलायर) नहीं मिला। यह प्रदर्शन माप इंगित करता है कि एक प्रतिभागी को लाल-चिह्नित बिंदु खोजने के लिए कितने समय की आवश्यकता है। परिणामों में समय को चर "समय" (मिलीसेकंड में) के रूप में निरूपित किया जाता है। जबकि प्रतिभागियों ने लाल-चिह्नित बिंदु को खोजने की कोशिश की, उनके चलने के रास्ते की लंबाई निर्धारित की गई थी। इस गणना का आधार यह था कि उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास ( सामग्री की तालिका देखें) 60 फ्रेम प्रति सेकंड की फ्रेम दर पर शुरुआती स्थिति के लिए अपेक्षाकृत 3 डी वेक्टर के रूप में वर्तमान स्थिति एकत्र करते हैं। इसके आधार पर, एक प्रतिभागी द्वारा चलने वाले पथ की लंबाई की गणना की जा सकती है। यह प्रदर्शन माप इंगित करता है कि प्रतिभागी बहुत चले या नहीं। पथ को परिणामों में पथ लंबाई के रूप में निरूपित किया जाता है। पथ लंबाई के आधार पर, तीन और प्रदर्शन उपाय प्राप्त किए गए थेः PathMean, PathVariance, और बाउंडिंगबॉक्स। PathMean मीटर प्रति फ्रेम में प्रतिभागियों की औसत गति को दर्शाता है, PathVariance एक आंदोलन की अनियमितता को दर्शाता है, और बाउंडिंगबॉक्स दर्शाता है कि प्रतिभागियों ने अपने बाउंडिंग बॉक्स का गहन उपयोग किया था या नहीं। उत्तरार्द्ध सभी आंदोलनों की अधिकतम और न्यूनतम स्थितियों के आधार पर निर्धारित किया जाता है (यानी, प्रतिभागी जो अक्सर अपनी चलने की स्थिति बदलते हैं, वे उच्च बाउंडिंगबॉक्स मूल्यों का खुलासा करते हैं)। मापा गया अंतिम मान एंगलमीन के साथ निरूपित किया जाता है और कोण के व्युत्पन्न मूल्य का गठन करता है, जिसे एंगलमीन के साथ निरूपित किया जाता है। उत्तरार्द्ध 60 प्रति सेकंड की फ्रेम दर पर वर्तमान स्थिति और एक प्रतिभागी की प्रारंभिक स्थिति के बीच रोटेशन को दर्शाता है। इसके आधार पर, डिग्री प्रति फ्रेम में औसत रोटेशन गति की गणना की गई थी। इस मान पर व्युत्पन्न, विचरण का उपयोग करके रोटेशन की अनियमितता की गणना की गई थी, जिसे एंगलवेरिएंस के रूप में निरूपित किया गया है। परिकलित पथ और कोण मानों के उद्देश्यों को संक्षेप में प्रस्तुत करने के लिए, पथ इंगित करता है कि उपयोगकर्ता बहुत चलते हैं या नहीं। यदि वे ज्यादा नहीं चल रहे हैं, तो यह उनके अभिविन्यास की कमी का संकेत दे सकता है। कोण, बदले में, यह इंगित करना चाहिए कि प्रतिभागी त्वरित या अचानक सिर आंदोलन करते हैं या नहीं। यदि वे कई बार अचानक सिर की गति कर रहे हैं, तो यह फिर से अभिविन्यास की कमी का संकेत दे सकता है। क्लस्टर डिटेक्शन कार्य के लिए, निम्न प्रदर्शन उपाय निर्धारित किए गए थेः समय और त्रुटियाँ। समय उस बिंदु तक दर्ज किया गया था जिस पर प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने कितने समूहों का पता लगाया है। यह प्रदर्शन उपाय इंगित करता है कि प्रतिभागियों को क्लस्टर खोजने के लिए कितने समय की आवश्यकता है। समय को समय (मिलीसेकंड में) के रूप में निरूपित किया जाता है। त्रुटियों को द्विआधारी निर्णय (सही / गलत) के अर्थ में पहचाना जाता है। या तो रिपोर्ट किए गए समूहों की संख्या सही (सही) थी या सही (गलत) नहीं थी। त्रुटियों को त्रुटियों के साथ निरूपित किया जाता है। स्टेट-ट्रेट एंग्जाइटी इन्वेंट्री (एसटीएआई) प्रश्नावली31 के राज्य संस्करण का उपयोग राज्य चिंता को मापने के लिए किया गया था, जो राज्य तनाव के समान एक निर्माण था। प्रश्नावली में 20 आइटम शामिल हैं और अध्ययन शुरू होने से पहले, साथ ही बाद में राज्य की चिंता में परिवर्तन का मूल्यांकन करने के लिए सौंप दिया गया था। इस प्रश्नावली के मूल्यांकन के लिए, सभी सकारात्मक विशेषताओं को फ़्लिप किया गया था (उदाहरण के लिए, एक उत्तर '4' '1' बन जाता है), और सभी उत्तरों को अंतिम एसटीएआई स्कोर तक अभिव्यक्त किया जाता है। त्वचा चालकता माप उपकरण ( सामग्री की तालिका देखें) 33 का उपयोग करके 30 यादृच्छिक रूप से चयनित प्रतिभागियों के लिए त्वचा चालकता को मापा गया था। दो कार्य प्रकारों को पूरा करने के बाद, प्रतिभागी की प्रतिक्रिया मांगने के लिए अध्ययन के अंत में एक स्व-विकसित प्रश्नावली सौंपी गई थी। प्रश्नावली तालिका 1 में दिखाया गया है। इसके अलावा, एक जनसांख्यिकीय प्रश्नावली ने सभी प्रतिभागियों के लिंग, आयु और शिक्षा के बारे में पूछा। समग्र आयोजित अध्ययन प्रक्रिया चित्रा 9 में चित्रित की गई है। अध्ययन में 60 प्रतिभागी शामिल हुए। प्रतिभागियों को ज्यादातर उल्म विश्वविद्यालय और उल्म से सॉफ्टवेयर कंपनियों में भर्ती किया गया था। भाग लेने वाले छात्र मुख्य रूप से कंप्यूटर विज्ञान, मनोविज्ञान और भौतिकी के क्षेत्र से थे। इनमें 10 महिलाएं और 50 पुरुष थे। मानसिक रोटेशन प्रीटेस्ट के आधार पर, 31 को कम प्रदर्शन करने वालों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जबकि 29 को उच्च प्रदर्शन करने वालों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। विशेष रूप से, 7 महिलाओं और 24 पुरुषों को कम प्रदर्शन करने वालों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जबकि 3 महिलाओं और 26 पुरुषों को उच्च प्रदर्शन करने वालों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। सांख्यिकीय मूल्यांकन के लिए, 3 सॉफ्टवेयर उपकरणों का उपयोग किया गया था ( सामग्री की तालिका देखें)। आवृत्तियों, प्रतिशत, साधन और मानक विचलन की गणना वर्णनात्मक आंकड़ों के रूप में की गई थी। फिशर के सटीक परीक्षणों और स्वतंत्र नमूनों के लिए टी-टेस्ट का उपयोग करके बेसलाइन जनसांख्यिकीय चर में कम और उच्च प्रदर्शन करने वालों की तुलना की गई थी। RQ1-RQ5 के लिए, पूर्ण अधिकतम संभावना अनुमान के साथ रैखिक बहुस्तरीय मॉडल किए गए थे। दो स्तरों को शामिल किया गया था, जहां स्तर एक बार-बार मूल्यांकन (या तो आउटलायर डिटेक्शन या क्लस्टर मान्यता में) का प्रतिनिधित्व करता है, और स्तर दो प्रतिभागियों का प्रतिनिधित्व करता है। प्रदर्शन उपाय (त्रुटियों को छोड़कर) इन मॉडलों में निर्भर चर थे। आरक्यू 1 में, त्रुटि संभावनाओं के लिए फिशर के सटीक परीक्षणों का भी उपयोग किया गया था। आरक्यू 3 में, स्थानिक ध्वनियों बनाम कोई ध्वनि नहीं में समय में प्रदर्शन की जांच की गई (मॉडल में भविष्यवक्ता के रूप में ध्वनि बनाम नो-साउंड को शामिल किया गया था)। एसटीएआई स्कोर का मूल्यांकन आरक्यू 4 के लिए निर्भर नमूनों के लिए टी-टेस्ट का उपयोग करके किया गया था। आरक्यू 5 में, त्रुटि संभावना के लिए मैकनेमर के परीक्षण का उपयोग करते हुए, 2 डी एप्लिकेशन बनाम उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास (सामग्री की तालिका देखें) के प्रभाव की जांच की गई थी। सभी सांख्यिकीय परीक्षण दो पूंछ वाले किए गए थे; महत्व मान P<.05 पर सेट किया गया था। त्वचा चालकता परिणामों का विश्लेषण नहीं किया गया है और भविष्य के काम के अधीन हैं। महत्वपूर्ण रूप से, लेखकों ने उसी उपकरण के साथ एक अन्य अध्ययन में खुलासा किया कि अतिरिक्त विचारोंकी आवश्यकता है। मानसिक रोटेशन परीक्षण के लिए, प्रतिभागियों के बीच मानसिक रोटेशन परीक्षण के परिणामों के अंतर का उपयोग उच्च प्रदर्शन करने वालों से कम को अलग करने के लिए किया गया था। स्थानिक क्षमता परीक्षण के लिए, सभी प्रतिभागियों ने अच्छे स्कोर दिखाए और इसलिए सभी को उनकी स्थानिक क्षमताओं के संबंध में उच्च प्रदर्शन करने वालों के लिए वर्गीकृत किया गया था। सबसे पहले, प्रतिभागियों के महत्वपूर्ण परिणामों को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया हैः मानसिक रोटेशन में कम और उच्च प्रदर्शन करने वालों ने अपने बेसलाइन चर (लिंग, आयु और शिक्षा) में कोई अंतर नहीं दिखाया। वर्णनात्मक रूप से, कम प्रदर्शन करने वालों में उच्च प्रदर्शन करने वालों की तुलना में महिला प्रतिभागियों का प्रतिशत अधिक था और उच्च कलाकार कम प्रदर्शन करने वालों की तुलना में छोटे थे। तालिका 2 प्रतिभागियों के बारे में विशेषताओं को सारांशित करती है। आरक्यू 1 के परिणामों के संबंध में, क्लस्टर मान्यता कार्य के लिए, 2 डी एप्लिकेशन (कम प्रदर्शन के लिए 4 त्रुटियां और उच्च प्रदर्शन करने वालों के लिए 2 त्रुटियां) और 3 डी दृष्टिकोण (कम के लिए 8 त्रुटियां और उच्च प्रदर्शन करने वालों के लिए 2 त्रुटियां) के लिए कम और उच्च प्रदर्शन करने वालों के लिए 2 त्रुटियां महत्वपूर्ण रूप से भिन्न नहीं थीं। आउटलायर डिटेक्शन टास्क के लिए, उच्च प्रदर्शन करने वाले कम प्रदर्शन करने वालों की तुलना में काफी तेज थे। इसके अलावा, उच्च प्रदर्शन करने वालों को कार्यों को हल करने के लिए कम पैदल दूरी की आवश्यकता होती है। आउटलायर के कार्य के लिए, तालिका 3 विस्तृत परिणामों को सारांशित करती है। आरक्यू 2 के परिणामों के बारे में, केवल आउटलायर के डिटेक्शन कार्य के लिए महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए। बाउंडिंगबॉक्स, पाथलेंथ, पाथवेरिएंस, पाथमीन, एंगल-वेरिएंस और एंगलमीन कार्य से कार्य तक काफी बढ़ गए ( तालिका 4 देखें)। रिकॉर्ड किए गए समय, बदले में, मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग करके कार्य से कार्य में महत्वपूर्ण रूप से नहीं बदला ( सामग्री की तालिका देखें)। स्थानिक ध्वनियों के आधार पर आरक्यू 3 के परिणामों के बारे में, प्रतिभागी स्थानिक ध्वनियों का उपयोग किए बिना आउटलायर डिटेक्शन केस में कार्यों को जल्दी से हल करने में सक्षम थे ( तालिका 5 देखें)। आरक्यू 4 के परिणामों के बारे में, पूर्व-मूल्यांकन में, एसटीएआई स्कोर पर औसत स्थिति एम = 44.58 (एसडी = 4.67) थी। मूल्यांकन के बाद, यह एम = 45.72 (एसडी = 4.43) था। इस परिवर्तन ने सांख्यिकीय महत्व प्राप्त नहीं किया (पी = .175)। स्व-विकसित प्रश्नावली में उत्तरों के वर्णनात्मक आंकड़े चित्रा 10 में प्रस्तुत किए गए हैं। RQ5 के परिणामों के बारे में, मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लासेस ( सामग्री की तालिका देखें) दृष्टिकोण डेस्कटॉप कंप्यूटर का उपयोग करने की तुलना में काफी तेज़ क्लस्टर पहचान समय को इंगित करता है (देखें Table 6)। हालांकि, मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग करते समय गति लाभ ( सामग्री की तालिका देखें) अपेक्षाकृत छोटा था (यानी, मिलीसेकंड रेंज में)। अंत में, ध्यान दें कि इस अध्ययन का डेटा36 पर पाया जा सकता है। चित्रा 1: पैमाने पर इंटरैक्शन बनाम नवीनता पर जांच किए गए पहलू। आंकड़ा बातचीत के स्तर के संबंध में उपयोग किए गए उपायों और उनकी नवीनता को दर्शाता है। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्र 2: अध्ययन कक्ष के चित्र। अध्ययन कक्ष के दो चित्र प्रस्तुत किए गए हैं। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्र 3: पता लगाया गया आउटलायर। स्क्रीनशॉट एक पता लगाया गया आउटलायर दिखाता है। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्रा 4: मानसिक रोटेशन परीक्षण का उदाहरण। स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि प्रतिभागियों को 3 डी-ऑब्जेक्ट्स का सामना करना पड़ा; यानी, एक ही ऑब्जेक्ट संरचना के साथ अलग-अलग स्थितियों में पांच में से दो वस्तुओं का पता लगाना पड़ा। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्रा 5: स्थानिक क्षमता परीक्षण के लिए सेटिंग। (ए) में, कार्य के लिए ऑडियो कॉन्फ़िगरेशन वापस दिखाया गया है, जबकि, (बी) में, परीक्षण का योजनाबद्ध उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस दिखाया गया है। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्रा 6: टास्क आउटलायर डिटेक्शन के लिए सेटिंग का चित्रण। तीन प्रमुख पहलुओं को दिखाया गया है। सबसे पहले, आउटलायर्स को चित्रित किया गया है। दूसरा, प्रदर्शन उपाय दिखाए गए हैं। तीसरा, जिस तरह से ध्वनि समर्थन की गणना की गई थी, उसे दिखाया गया है। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्रा 7: कार्य क्लस्टर पहचान के लिए सेटिंग का चित्रण। बेहतर प्रभाव के लिए परिदृश्य ए-सी पर विचार करें, प्रतिभागियों को समूहों को सही ढंग से पहचानने के लिए अपनी दृष्टि बदलनी पड़ी। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्रा 8: Matlab में कार्य क्लस्टर पहचान के लिए सेटिंग का चित्रण। आंकड़ा मैटलैब में प्रदान किए गए समूहों को दर्शाता है, जो 2 डी डेस्कटॉप एप्लिकेशन के लिए आधार था। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्र 9: एक नज़र में समग्र अध्ययन प्रक्रिया। यह आंकड़ा उन चरणों को प्रस्तुत करता है जिन्हें प्रतिभागियों को अपने कालानुक्रमिक क्रम में पूरा करना था। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्र 10: स्व-विकसित प्रश्नावली के परिणाम (तालिका 1 देखें)। परिणाम बॉक्स प्लॉट का उपयोग करके दिखाए जाते हैं। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। ।चश्मा पहनने से आपको कितना तनावपूर्ण अनुभव हुआ? ।आउटलायर का कार्य कितना तनावपूर्ण था? ।जैसा कि आपने स्थानिक ध्वनियों का अनुभव किया? ।मिश्रित वास्तविकता में समूहों को खोजने का कार्य कितना तनावपूर्ण था? ।डेस्कटॉप दृष्टिकोण में क्लस्टर खोजने का कार्य कितना तनावपूर्ण था? ।वॉयस कमांड का उपयोग कितना तनावपूर्ण था? ।क्या आप स्थानिक ध्वनियों द्वारा समर्थित महसूस करते हैं? तालिका 1: उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया के लिए स्व-विकसित प्रश्नावली। इसमें 7 प्रश्न शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्न के लिए, प्रतिभागियों को 1-10 से एक पैमाने के भीतर एक मूल्य निर्धारित करना था, जिससे 1 का अर्थ है कम मूल्य (यानी, खराब प्रतिक्रिया), और 10 एक उच्च मूल्य (यानी, एक बहुत अच्छी प्रतिक्रिया)। ।कम प्रदर्शन करने वाला (एन = 31) ।लिंग, एन (%) ।आयु श्रेणी, एन (%) ।उच्चतम शिक्षा, एन (%) ।मानसिक रोटेशन टेस्ट, मीन (एसडी) तालिका 2: प्रतिभागी नमूना विवरण और बेसलाइन चर में कम और उच्च प्रदर्शन करने वालों के बीच तुलना। तालिका लिंग, आयु और शिक्षा पर तीन जनसांख्यिकीय प्रश्नों के लिए डेटा दिखाती है। इसके अलावा, दो प्रीटेस्ट के परिणाम प्रस्तुत किए जाते हैं। ।एसई (ए) तालिका 3: आरक्यू 1 के लिए बहुस्तरीय मॉडल के परिणाम (स्मार्टग्लास का उपयोग करके आउटलायर डिटेक्शन)। तालिका आउटलायर के पहचान कार्य (सभी प्रदर्शन उपायों के लिए) के लिए आरक्यू 1 के सांख्यिकीय परिणाम दिखाती है। ।एसई (ए) तालिका 4: आरक्यू 2 के लिए बहुस्तरीय मॉडल के परिणाम (स्मार्टग्लास का उपयोग करके आउटलायर डिटेक्शन)। तालिका आउटलायर के पहचान कार्य (सभी प्रदर्शन उपायों के लिए) के लिए आरक्यू 2 के सांख्यिकीय परिणाम दिखाती है। ।एसई (ए) तालिका 5: आरक्यू 3 के लिए बहुस्तरीय मॉडल के परिणाम (स्मार्टग्लास का उपयोग करके आउटलायर डिटेक्शन)। तालिका आउटलायर के पहचान कार्य (सभी प्रदर्शन उपायों के लिए) के लिए आरक्यू 3 के सांख्यिकीय परिणाम दिखाती है। ।एसई (ए) तालिका 6: आरक्यू 5 के लिए बहुस्तरीय मॉडल के परिणाम (स्मार्टग्लासेस का उपयोग करके क्लस्टर मान्यता)। तालिका क्लस्टर पहचान कार्य (सभी प्रदर्शन उपायों के लिए) के लिए RQ5 के सांख्यिकीय परिणाम दिखाती है। Subscription Required. Please recommend JoVE to your librarian. विकसित मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास ( सामग्री की तालिका देखें) आवेदन के बारे में, दो पहलू विशेष रूप से फायदेमंद थे। आउटलायर के पहचान कार्य के लिए स्थानिक ध्वनियों का उपयोग सकारात्मक रूप से एक तरफ माना गया था (आरक्यू 3 के परिणाम देखें)। दूसरी ओर, वॉयस कमांड के उपयोग को भी सकारात्मक रूप से माना गया था ( चित्रा 10 देखें)। अध्ययन प्रतिभागियों के बारे में, हालांकि भर्ती किए गए प्रतिभागियों की संख्या एक अनुभवजन्य अध्ययन के लिए छोटी थी, लेकिन कई अन्य कार्यों की तुलना में संख्या प्रतिस्पर्धी है। फिर भी, दिखाए गए प्रोटोकॉल के आधार पर एक बड़े पैमाने पर अध्ययन की योजना बनाई गई है। हालांकि, जैसा कि इसने 60 प्रतिभागियों के लिए अपनी व्यवहार्यता दिखाई, अधिक प्रतिभागियों को आगे की चुनौतियों का खुलासा करने की उम्मीद है। यह चर्चा की गई कि प्रतिभागियों का चयन व्यापक हो सकता है (प्रतिभागियों के क्षेत्रों के अर्थ में) और यह कि उच्च और निम्न प्रदर्शन करने वालों के बीच अंतर करने के लिए बेसलाइन चर की संख्या अधिक हो सकती है। दूसरी ओर, यदि इन पहलुओं को उच्च संख्या में बदल दिया जाता है, तो प्रोटोकॉल को गहराई से नहीं बदला जाना चाहिए। सामान्य तौर पर, प्रकट सीमाएं इस काम में दिखाए गए प्रोटोकॉल के आधार पर एक अध्ययन के चालन को प्रभावित नहीं करती हैं, वे केवल भर्ती और जनसांख्यिकीय प्रश्नावली के लिए उपयोग किए गए प्रश्नों को प्रभावित करती हैं। हालांकि, इस अध्ययन की एक सीमा फिर भी महत्वपूर्ण हैः एक प्रतिभागी के लिए प्रयोग को पूरा करने के लिए समग्र आवश्यक समय अधिक है। दूसरी ओर, जैसा कि प्रतिभागियों ने पहनने के आराम के बारे में शिकायत नहीं की, या यह कि परीक्षण उपकरण उन पर बहुत अधिक बोझ डाल रहा है, एक प्रतिभागी के लिए समग्र प्रोटोकॉल आयोजित करने का समय स्वीकार्य माना जा सकता है। अंत में, भविष्य के प्रयोग में, प्रोटोकॉल में कई पहलुओं को जोड़ा जाना है। विशेष रूप से, आउटलायर डिटेक्शन कार्य का मूल्यांकन 2 डी डेस्कटॉप एप्लिकेशन में भी किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास ( सामग्री की तालिका देखें) जैसे अन्य हार्डवेयर उपकरणों का भी मूल्यांकन किया जाना चाहिए। हालांकि, प्रोटोकॉल व्यापक अर्थों में फायदेमंद प्रतीत होता है। प्रस्तुत प्रोटोकॉल के लिए निम्नलिखित प्रमुख अंतर्दृष्टि प्राप्त की गई थी। सबसे पहले, इसने मिश्रित-वास्तविकता समाधान के लिए इमर्सिव एनालिटिक्स का मूल्यांकन करने के लिए अपनी व्यवहार्यता दिखाई। विशेष रूप से, उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास ( सामग्री की तालिका देखें) ने उद्योग 4.0 परिदृश्यों के लिए मिश्रित-वास्तविकता अनुप्रयोग में इमर्सिव एनालिटिक्स का मूल्यांकन करने के लिए अपनी व्यवहार्यता का खुलासा किया। दूसरा, 2 डी डेस्कटॉप एप्लिकेशन के साथ विकसित मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास ( सामग्री की तालिका देखें) एप्लिकेशन की तुलना यह जांचने में सहायक थी कि क्या मिश्रित-वास्तविकता समाधान एक ऐसे एप्लिकेशन से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है जो वीआर तकनीकों का उपयोग नहीं करता है। तीसरा, ऐसे प्रयोगों में शारीरिक मापदंडों या महत्वपूर्ण संकेतों के माप पर हमेशा विचार किया जाना चाहिए। इस काम में, तनाव को एक प्रश्नावली और एक त्वचा चालकता उपकरण का उपयोग करके मापा गया था। यद्यपि उत्तरार्द्ध ने तकनीकी रूप से ठीक से काम किया, लेखकों ने उसी उपकरण के साथ एक अन्य अध्ययन में खुलासा किया कि अतिरिक्त विचारोंकी आवश्यकता है। चौथा, स्थानिक क्षमता परीक्षण और उच्च और निम्न प्रदर्शन करने वालों का पृथक्करण फायदेमंद था। सारांश में, हालांकि प्रस्तुत प्रोटोकॉल पहली नज़र में जटिल प्रतीत होता है ( चित्रा 9 देखें), इसने तकनीकी रूप से अपनी उपयोगिता दिखाई। परिणामों के बारे में, इसने इसकी उपयोगिता भी प्रकट की। चूंकि आउटलायर्स का पता लगाना और क्लस्टर की मान्यता उद्योग 4.0 परिदृश्यों में कई उच्च-आयामी डेटा सेटों के मूल्यांकन में विशिष्ट कार्य हैं, इसलिए एक अनुभवजन्य अध्ययन में उनका उपयोग अनुसंधान के इस क्षेत्र के लिए प्रतिनिधि है। प्रोटोकॉल से पता चला कि इन परिदृश्यों को इमर्सिव एनालिटिक्स पर एक प्रयोज्य अध्ययन में अच्छी तरह से एकीकृत किया जा सकता है। इसलिए, इस संदर्भ में अन्य अध्ययनों के लिए प्रयुक्त सेटिंग की सिफारिश की जा सकती है। जैसा कि दिखाए गए अध्ययन के परिणाम से पता चला है कि उपयोग किए गए स्मार्टग्लास ( सामग्री की तालिका देखें) के आधार पर मिश्रित-वास्तविकता समाधान का उपयोग उद्योग 4.0 परिदृश्यों के लिए इमर्सिव एनालिटिक्स की जांच करने के लिए उपयोगी है, प्रोटोकॉल का उपयोग दिए गए संदर्भ में अन्य प्रयोज्य अध्ययनों के लिए भी किया जा सकता है। Subscription Required. Please recommend JoVE to your librarian. लेखकों के पास खुलासा करने के लिए कुछ भी नहीं है। लेखकों के पास स्वीकार करने के लिए कुछ भी नहीं है। ।GNU General Public License v2 or later (GPLv2+) (GPLv2+) - Korinth, M., Sommer-Dittrich, T., Reichert, M., Pryss, R. Design and Evaluation of a Virtual Reality-Based Car Configuration Concept. Science and Information Conference. , Springer, Cham. 169-189 (2019). - Whalen, T. E., Noël, S., Stewart, J. Measuring the human side of virtual reality. IEEE International Symposium on Virtual Environments, Human-Computer Interfaces and Measurement Systems, 2003. , IEEE. 8-12 (2003). - Martens, M. A., et al. It feels real: physiological responses to a stressful virtual reality environment and its impact on working memory. Journal of Psychopharmacology. 33 (10), 1264-1273 (2019). - Keim, D. A. Information visualization and visual data mining. IEEE transactions on Visualization and Computer Graphics. 8 (1), 1-8 (2002). - Dwyer, T., et al. 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यह प्रोटोकॉल एक विकसित मिश्रित वास्तविकता अनुप्रयोग की तकनीकी सेटिंग को चित्रित करता है जिसका उपयोग इमर्सिव एनालिटिक्स के लिए किया जाता है। इसके आधार पर, उपाय प्रस्तुत किए जाते हैं, जिनका उपयोग विकसित तकनीकी समाधान के प्रयोज्य पहलुओं में अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए एक अध्ययन में किया गया था। चिकित्सा या उद्योग में, उच्च आयामी डेटा सेट का विश्लेषण तेजी से आवश्यक है। हालांकि, उपलब्ध तकनीकी समाधान अक्सर उपयोग करने के लिए जटिल होते हैं। इसलिए, इमर्सिव एनालिटिक्स जैसे नए दृष्टिकोणों का स्वागत है। इमर्सिव एनालिटिक्स विभिन्न उपयोगकर्ता समूहों और डेटा सेटों के लिए सुविधाजनक तरीके से उच्च आयामी डेटा सेट का अनुभव करने का वादा करता है। तकनीकी रूप से, वर्चुअल-रियलिटी उपकरणों का उपयोग इमर्सिव एनालिटिक्स को सक्षम करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, उद्योग चार.शून्य में, उच्च आयामी डेटा सेट में आउटलायर्स या विसंगतियों की पहचान जैसे परिदृश्यों को इमर्सिव एनालिटिक्स के लक्ष्यों का पीछा किया जाता है। इस संदर्भ में, इमर्सिव एनालिटिक्स पर किसी भी विकसित तकनीकी समाधान के लिए दो महत्वपूर्ण प्रश्नों को संबोधित किया जाना चाहिएः सबसे पहले, तकनीकी समाधान सहायक हो रहे हैं या नहीं? दूसरा, तकनीकी समाधान का शारीरिक अनुभव सकारात्मक या नकारात्मक है? पहला प्रश्न एक तकनीकी समाधान की सामान्य व्यवहार्यता पर लक्षित है, जबकि दूसरे का उद्देश्य पहनने के आराम को लक्षित करना है। मौजूदा अध्ययन और प्रोटोकॉल, जो व्यवस्थित रूप से इन सवालों को संबोधित करते हैं, अभी भी दुर्लभ हैं। इस काम में, एक अध्ययन प्रोटोकॉल प्रस्तुत किया गया है, जो मुख्य रूप से उद्योग चार.शून्य परिदृश्यों में इमर्सिव एनालिटिक्स के लिए प्रयोज्यता की जांच करता है। विशेष रूप से, प्रोटोकॉल चार स्तंभों पर आधारित है। सबसे पहले, यह पिछले अनुभवों के आधार पर उपयोगकर्ताओं को वर्गीकृत करता है। दूसरा, कार्य प्रस्तुत किए जाते हैं, जिनका उपयोग तकनीकी समाधान की व्यवहार्यता का मूल्यांकन करने के लिए किया जा सकता है। तीसरा, उपाय प्रस्तुत किए जाते हैं, जो उपयोगकर्ता के सीखने के प्रभाव को निर्धारित करते हैं। चौथा, एक प्रश्नावली कार्य करते समय तनाव के स्तर का मूल्यांकन करती है। इन स्तंभों के आधार पर, एक तकनीकी सेटिंग लागू की गई थी जो अध्ययन प्रोटोकॉल को लागू करने के लिए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग करती है। आयोजित अध्ययन के परिणाम एक तरफ प्रोटोकॉल की प्रयोज्यता और दूसरी ओर उद्योग चार.शून्य परिदृश्यों में इमर्सिव एनालिटिक्स की व्यवहार्यता दिखाते हैं। प्रस्तुत प्रोटोकॉल में खोजी गई सीमाओं की चर्चा शामिल है। वर्चुअल-रियलिटी समाधान विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से महत्वपूर्ण हैं। अक्सर, वीआर समाधान के साथ, कई दैनिक कार्यों और प्रक्रियाओं की उपलब्धि को आसान बनाया जाएगा। उदाहरण के लिए, मोटर वाहन डोमेन में, वर्चुअल रियलिटीएक के उपयोग से कार की कॉन्फ़िगरेशन प्रक्रिया का समर्थन किया जा सकता है। शोधकर्ताओं और चिकित्सकों ने इस संदर्भ में कई दृष्टिकोणों और समाधानों की जांच और विकास किया है। हालांकि, प्रयोज्य पहलुओं की जांच करने वाले अध्ययन अभी भी दुर्लभ हैं। सामान्य तौर पर, पहलुओं को दो प्रमुख प्रश्नों के प्रकाश में माना जाना चाहिए। सबसे पहले, यह मूल्यांकन किया जाना चाहिए कि क्या वीआर समाधान वास्तव में एक दृष्टिकोण से बेहतर है जो वीआर तकनीकों का उपयोग नहीं करता है। दूसरा, चूंकि वीआर समाधान मुख्य रूप से भारी और जटिल हार्डवेयर उपकरणों पर निर्भर हैं, पहनने के आराम और मानसिक प्रयास जैसे मापदंडों की अधिक गहराई से जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, उल्लिखित पहलुओं को हमेशा प्रश्न में आवेदन क्षेत्र के संबंध में जांच की जानी चाहिए। यद्यपि कई मौजूदा दृष्टिकोण इन प्रश्नों की जांच करने की आवश्यकता को देखते हैंदो, कम अध्ययन मौजूद हैं जिन्होंने परिणाम प्रस्तुत किए हैं। वीआर के क्षेत्र में एक शोध विषय, जो वर्तमान में महत्वपूर्ण है, को इमर्सिव एनालिटिक्स के साथ निरूपित किया जाता है। यह दृश्य विश्लेषिकी के अनुसंधान क्षेत्र से लिया गया है, जो विश्लेषिकी कार्यों में मानव धारणा को शामिल करने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया को दृश्य डेटा खननचार के रूप में भी जाना जाता है। इमर्सिव एनालिटिक्स में डेटा विज़ुअलाइज़ेशन, विज़ुअल एनालिटिक्स, वर्चुअल रियलिटी, कंप्यूटर ग्राफिक्स और मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन के क्षेत्र के विषय शामिलहैं। हेड-माउंटेड डिस्प्ले में हाल के फायदों ने एक इमर्सिव तरीके से डेटा की खोज के लिए बेहतर संभावनाओं को जन्म दिया। इन रुझानों के साथ, नई चुनौतियां और शोध प्रश्न उभरते हैं, जैसे कि नई इंटरैक्शन सिस्टम का विकास, उपयोगकर्ता थकान की जांच करने की आवश्यकता, या परिष्कृत तीन डी विज़ुअलाइज़ेशनछः का विकास। पिछले प्रकाशनछः में, इमर्सिव एनालिटिक्स के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर चर्चा की गई है। बड़े डेटा के प्रकाश में, जटिल डेटा पूल के बेहतर विश्लेषण को सक्षम करने के लिए इमर्सिव एनालिटिक्स जैसे तरीकों की अधिक से अधिक आवश्यकता होती है। केवल कुछ अध्ययन मौजूद हैं जो इमर्सिव एनालिटिक्स समाधानों के प्रयोज्य पहलुओं की जांच करते हैं। इसके अलावा, ऐसे अध्ययनों में प्रश्न में डोमेन या क्षेत्र पर भी विचार किया जाना चाहिए। इस काम में, एक इमर्सिव एनालिटिक्स प्रोटोटाइप विकसित किया गया था, और उसके आधार पर, एक प्रोटोकॉल, जो उद्योग चार.शून्य परिदृश्यों के लिए विकसित समाधान की जांच करता है। प्रोटोकॉल इस प्रकार अनुभव विधिदो का फायदा उठाता है, जो व्यक्तिपरक, प्रदर्शन और शारीरिक पहलुओं पर आधारित है। हाथ में प्रोटोकॉल में, व्यक्तिपरक पहलुओं को अध्ययन उपयोगकर्ताओं के कथित तनाव के माध्यम से मापा जाता है। प्रदर्शन, बदले में, आवश्यक समय और त्रुटियों के माध्यम से मापा जाता है जो विश्लेषण कार्यों को पूरा करने के लिए किए जाते हैं। अंत में, एक त्वचा चालकता सेंसर ने शारीरिक मापदंडों को मापा। इस काम में पहले दो उपाय प्रस्तुत किए जाएंगे, जबकि मापा त्वचा चालकता का मूल्यांकन करने के लिए आगे के प्रयासों की आवश्यकता होती है। प्रस्तुत अध्ययन में कई शोध क्षेत्र शामिल हैं, विशेष रूप से तंत्रिका विज्ञान पहलुओं और सूचना प्रणालियों सहित। दिलचस्प बात यह है कि सूचना प्रणालियों के तंत्रिका विज्ञान पहलुओं पर विचार ने हाल ही में कई शोध समूहों सात,आठ का ध्यान आकर्षित किया है, जो संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से भी आईटी सिस्टम के उपयोग का पता लगाने की मांग दिखाता है। एक अन्य क्षेत्र जो इस काम के लिए प्रासंगिक है, वह सूचना प्रणाली नौ,दस,ग्यारह के मानव कारकों की जांच का गठन करता है। मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन के क्षेत्र में, एक समाधान की प्रयोज्यता की जांच करने के लिए उपकरण मौजूद हैं। ध्यान दें कि सिस्टम प्रयोज्य स्केल मुख्य रूप से इस संदर्भबारह में उपयोग किया जाता है। थिंकिंग अलाउड प्रोटोकॉलतेरह सूचना प्रणालियों के उपयोग के बारे में अधिक जानने के लिए एक और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली अध्ययन तकनीक है। यद्यपि सूचना प्रणालियों के प्रयोज्य पहलुओं को मापने के लिए कई दृष्टिकोण मौजूद हैं, और उनमें से कुछको बहुत पहले प्रस्तुत किया गया है, फिर भी ऐसे प्रश्न उभरते हैं जिन्हें नए उपायों या अध्ययन विधियों की जांच करने की आवश्यकता होती है। इसलिए, इस क्षेत्र में अनुसंधान बहुत सक्रियहै बारह,पंद्रह,सोलह. निम्नलिखित में, उन कारणों पर चर्चा की जाएगी कि वर्तमान कार्य में दो प्रचलित रूप से उपयोग की जाने वाली विधियों पर विचार क्यों नहीं किया गया है। सबसे पहले, सिस्टम प्रयोज्य स्केल का उपयोग नहीं किया गया था। पैमाना दसप्रश्नों सत्रह पर आधारित है और इसका उपयोग कई अन्य वीआरअध्ययनों अट्ठारह में भी पाया जा सकता है। जैसा कि इस अध्ययन का उद्देश्य मुख्य रूप से तनावउन्नीस का माप करना है, तनाव से संबंधित प्रश्नावली अधिक उपयुक्त थी। दूसरा, कोई थिंकिंग अलाउड प्रोटोकॉलबीस का उपयोग नहीं किया गया था। यद्यपि इस प्रोटोकॉल प्रकार ने सामान्यतेरह में अपनी उपयोगिता दिखाई है, इसका उपयोग यहां नहीं किया गया था क्योंकि अध्ययन उपयोगकर्ताओं का तनाव स्तर केवल इस तथ्य के कारण बढ़ सकता है कि थिंक अलाउड सत्र को भारी और जटिल वीआर डिवाइस के उपयोग के समानांतर पूरा किया जाना चाहिए। हालांकि इन दो तकनीकों का उपयोग नहीं किया गया है, लेकिन अन्य हालिया अध्ययनों के परिणामों को अध्ययन में शामिल किया गया है। उदाहरण के लिए, पिछलेकार्यों इक्कीस,बाईस में, लेखक अपने अध्ययन में नौसिखियों और विशेषज्ञों के बीच अंतर करते हैं। इन अध्ययनों के सफल परिणाम के आधार पर, प्रोटोकॉल अध्ययन उपयोगकर्ताओं के इस प्रस्तुत पृथक्करण का उपयोग करता है। तनाव माप, बदले में, निम्नलिखित कार्योंपंद्रह,उन्नीस,इक्कीस,बाईस के विचारों पर आधारित है। सबसे पहले, अध्ययन करने के लिए, विश्लेषणात्मक कार्यों को पूरा करने के लिए एक उपयुक्त उद्योग चार.शून्य परिदृश्य पाया जाना चाहिए। लेखकों के एक अन्य काम से प्रेरित होकर, दो परिदृश्यों की पहचान की गई है, आउटलायर्स का पता लगाना, और क्लस्टर की पहचान। दोनों परिदृश्य चुनौतीपूर्ण हैं, और उच्च-थ्रूपुट उत्पादन मशीनों के रखरखाव के संदर्भ में अत्यधिक प्रासंगिक हैं। इस निर्णय के आधार पर, छह प्रमुख विचारों ने इस काम में प्रस्तुत अध्ययन प्रोटोकॉल को प्रेरित किया हैः - अध्ययन के लिए विकसित समाधान तकनीकी रूप से मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास पर आधारित होगा और इसे मिश्रित वास्तविकता अनुप्रयोग के रूप में विकसित किया जाएगा। - एक उपयुक्त परीक्षण विकसित किया जाना चाहिए, जो नौसिखियों को उन्नत उपयोगकर्ताओं से अलग करने में सक्षम है। - प्रदर्शन उपायों को समय और त्रुटियों पर विचार करना चाहिए। - एक डेस्कटॉप एप्लिकेशन विकसित किया जाना चाहिए, जिसकी तुलना इमर्सिव एनालिटिक्स समाधान से की जा सकती है। - कथित तनाव स्तर का मूल्यांकन करने के लिए एक उपाय लागू किया जाना चाहिए। - बाद के बिंदु के अलावा, तनाव स्तर को कम करने के लिए सुविधाओं को विकसित किया जाएगा, जबकि एक उपयोगकर्ता दो उल्लिखित विश्लेषण कार्यों की प्रक्रिया को पूरा करता है आउटलायर्स का पता लगाना, और क्लस्टर की मान्यता)। छह उल्लिखित बिंदुओं के आधार पर, अध्ययन प्रोटोकॉल में निम्नलिखित प्रक्रिया शामिल है। आउटलायर डिटेक्शन और क्लस्टर रिकग्निशन विश्लेषण कार्यों को मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग करके इमर्सिव तरीके से पूरा किया जाना है । इसलिए, एक नया एप्लिकेशन विकसित किया गया था। स्थानिक ध्वनियां मानसिक प्रयास को बढ़ाए बिना विश्लेषण कार्यों के प्रदर्शन को आसान बना देंगी। एक आवाज सुविधा मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास के विकसित अनुप्रयोग के लिए उपयोग किए जाने वाले नेविगेशन को आसान बनाएगी । एक मानसिक रोटेशन परीक्षण नौसिखियों को उन्नत उपयोगकर्ताओं से अलग करने का आधार होगा। तनाव का स्तर एक प्रश्नावली के आधार पर मापा जाता है। प्रदर्शन, बदले में, विश्लेषण कार्यों के लिए उपयोगकर्ता द्वारा आवश्यक समय के आधार पर और विश्लेषण कार्यों के लिए उपयोगकर्ता द्वारा की गई त्रुटियों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास में प्रदर्शन की तुलना एक नए विकसित और तुलनीय दो डी डेस्कटॉप एप्लिकेशन में समान कार्यों की उपलब्धि के साथ की जाती है। इसके अलावा, तनाव के लिए एक संभावित संकेतक के रूप में त्वचा के चालकता स्तर को मापने के लिए एक त्वचा चालकता उपकरण का उपयोग किया जाता है। इस माप के परिणाम आगे के विश्लेषण के अधीन हैं और इस काम में चर्चा नहीं की जाएगी। लेखकों ने उसी उपकरण के साथ एक अन्य अध्ययन में खुलासा किया कि अतिरिक्त विचारों की आवश्यकता है। इस प्रोटोकॉल के आधार पर, निम्नलिखित पांच शोध प्रश्नों को संबोधित किया जाता हैः आरक्यू एक: क्या प्रतिभागियों की स्थानिक कल्पना क्षमताएं कार्यों के प्रदर्शन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं? आरक्यू दो: क्या समय के साथ कार्य प्रदर्शन में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है? आरक्यू तीन: क्या इमर्सिव एनालिटिक्स समाधान में स्थानिक ध्वनियों का उपयोग करते समय कार्य प्रदर्शन में महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है? आरक्यू चार: क्या विकसित इमर्सिव एनालिटिक्स को उपयोगकर्ताओं द्वारा तनावपूर्ण माना जाता है? आरक्यू पाँच: क्या उपयोगकर्ता दो डी दृष्टिकोण की तुलना में इमर्सिव एनालिटिक्स समाधान का उपयोग करते समय बेहतर प्रदर्शन करते हैं? चित्रा एक दो पैमानों के संबंध में प्रस्तुत प्रोटोकॉल को सारांशित करता है। यह बातचीत के स्तर के संबंध में विकसित और उपयोग किए गए उपायों और उनकी नवीनता को दर्शाता है। चूंकि वीआर सेटिंग के लिए सुविधाओं को विकसित करते समय इंटरैक्शन स्तर एक महत्वपूर्ण पहलू का गठन करता है, इसलिए चित्रा एक इस काम में विकसित पूरे प्रोटोकॉल की नवीनता को बेहतर ढंग से दिखाएगा। यद्यपि दो उपयोग किए गए पैमानों के भीतर पहलुओं का मूल्यांकन व्यक्तिपरक है, उनका समग्र मूल्यांकन वर्तमान संबंधित कार्य और निम्नलिखित प्रमुख विचारों पर आधारित हैः एक महत्वपूर्ण सिद्धांत प्राकृतिक बातचीत के लिए एक पर्यावरण की अमूर्तता के उपयोग का गठन करता है, जिसमें उपयोगकर्ता अभ्यस्त हो गया है। हाथ में प्रोटोकॉल के संबंध में, बिंदु बादलों का विज़ुअलाइज़ेशन उपयोगकर्ताओं के लिए सहज प्रतीत होता है और ऐसे बादलों में पैटर्न की पहचान को सामान्य रूप से एक प्रबंधनीय कार्य के रूप में मान्यता दी गई है। एक अन्य महत्वपूर्ण सिद्धांत उपभोग को ओवरले करना है। इसके द्वारा, हाथ में प्रोटोकॉल में उपयोग की जाने वाली स्थानिक ध्वनियों का उपयोग एक उदाहरण है, क्योंकि वे खोजी गई वस्तु की निकटता के साथ सहसंबंधित हैं। लेखक प्रतिनिधित्व को इस तरह से ट्यून करने की सलाह देते हैं कि अधिकांश जानकारी मध्यवर्ती क्षेत्र में स्थित है, जो मानव धारणा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। लेखकों ने इस सिद्धांत को शामिल नहीं करने का कारण उपयोगकर्ता को स्वयं द्वारा सबसे अच्छा स्थान खोजने के साथ-साथ डेटा विज़ुअलाइज़ेशन स्पेस में खुद को उन्मुख करने की कोशिश करने के लिए प्रोत्साहित करना था, जो एक बार में दिखाए जाने के लिए बहुत बड़ा है। प्रस्तुत दृष्टिकोण में, दिखाए जाने वाले तीन डी डेटा की विशेषताओं का कोई और विचार नहीं किया गया था। उदाहरण के लिए, यदि किसी आयाम को अस्थायी माना जाता है, तो स्कैटरप्लॉट दिखाए जा सकते थे। लेखक इस तरह के विज़ुअलाइज़ेशन को आम तौर पर उद्योग चार.शून्य के संदर्भ में दिलचस्प मानते हैं। हालांकि, इसे विज़ुअलाइज़ेशन के एक यथोचित छोटे सेट पर केंद्रित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, एक पिछला प्रकाशन पहले से ही डेटा के सहयोगी विश्लेषण पर केंद्रित था। इस काम में, इस अध्ययन में अन्य संबोधित मुद्दों की जटिलता के कारण इस शोध प्रश्न को बाहर रखा गया था। यहां प्रस्तुत सेटअप में, उपयोगकर्ता चारों ओर घूमकर इमर्सिव स्पेस का पता लगाने में सक्षम है। अन्य दृष्टिकोण नियंत्रकों को आभासी स्थान का पता लगाने की पेशकश करते हैं। इस अध्ययन में, सिस्टम प्रयोज्य पैमाने का उपयोग करके प्रयोज्यता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एक अन्य पिछले प्रकाशन ने आर्थिक विशेषज्ञों के लिए एक अध्ययन किया है, लेकिन वीआर हेडसेट के साथ। सामान्य तौर पर, और सबसे महत्वपूर्ण बात, यह अध्ययन इस काम में उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास जैसे अन्य उपकरणों के लिए सीमित क्षेत्र के बारे में शिकायत करता है । उनके निष्कर्ष बताते हैं कि वीआर के क्षेत्र में शुरुआती विश्लेषणात्मक उपकरण का कुशलतापूर्वक उपयोग करने में सक्षम थे। यह इस अध्ययन के अनुभवों से मेल खाता है, हालांकि इस काम में शुरुआती लोगों को वीआर या गेमिंग अनुभवों के लिए वर्गीकृत नहीं किया गया था। अधिकांश वीआर समाधानों के विपरीत, मिश्रित वास्तविकता एक स्थिति के लिए तय नहीं है क्योंकि यह वास्तविक वातावरण को ट्रैक करने की अनुमति देता है। वीआर दृष्टिकोण जैसे उपयोगकर्ता को अपने डेस्कटॉप से मुक्त करने के लिए तीन सौ साठ ° अनुभव के लिए विशेष कुर्सियों के उपयोग का उल्लेख करना। लेखकों ने संकेत दिया कि धारणा के मुद्दे इमर्सिव एनालिटिक्स के प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं; उदाहरण के लिए, छाया का उपयोग करके। हाथ में अध्ययन के लिए, यह संभव नहीं है, क्योंकि उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास छाया प्रदर्शित करने में सक्षम नहीं हैं। एक वर्कअराउंड एक आभासी मंजिल हो सकता है, लेकिन ऐसा सेटअप इस अध्ययन के दायरे से बाहर था। इमर्सिव एनालिटिक्स के क्षेत्र में एक सर्वेक्षण अध्ययन ने तीन डी स्कैटरप्लॉट्स को बहु-आयामी डेटा के सबसे आम प्रतिनिधित्वों में से एक के रूप में पहचाना। कुल मिलाकर, चित्रा एक में दिखाए गए पहलुओं को वर्तमान में एक प्रोटोकॉल के लिए संकलित नहीं किया जा सकता है जो उद्योग चार.शून्य परिदृश्यों के लिए इमर्सिव एनालिटिक्स के प्रयोज्य पहलुओं की जांच करता है। Subscription Required. Please recommend JoVE to your librarian. सभी सामग्रियों और विधियों को उल्म विश्वविद्यालय की आचार समिति द्वारा अनुमोदित किया गया था, और अनुमोदित दिशानिर्देशों के अनुसार किया गया था। सभी प्रतिभागियों ने अपनी लिखित सूचित सहमति दी। नोटः अध्ययन जटिल हार्डवेयर सेटिंग से निपटने के लिए एक नियंत्रित वातावरण में आयोजित किया गया था। उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास और दो डी एप्लिकेशन के लिए लैपटॉप अध्ययन प्रतिभागियों को समझाया गया था। - प्रत्येक प्रतिभागी से पहले तकनीकी समाधान की जांच करें; डिफ़ॉल्ट मोड में सेट करें. प्रश्नावली तैयार करें और एक प्रतिभागी के बगल में रखें। - प्रतिभागियों को एक सत्र में आउटलायर डिटेक्शन और क्लस्टर पहचान के उपयोग से कार्यों को हल करने दें । - प्रतिभागियों का स्वागत करके और अध्ययन के लक्ष्य, साथ ही समग्र प्रक्रिया का परिचय देकर अध्ययन शुरू करें। - त्वचा चालकता माप उपकरण का उपयोग करने वाले प्रतिभागियों को बेसलाइन माप प्राप्त करने के लिए एक छोटे आराम चरण का पालन करना होगा। प्रतिभागियों में से केवल आधे ने इस डिवाइस का उपयोग किया। - प्रयोग की शुरुआत से पहले सभी प्रतिभागियों को स्टेट-ट्रेट एंग्जाइटी इन्वेंट्री प्रश्नावलीइकतीस भरनी होगी। - इसके बाद, प्रतिभागियों को मानसिक रोटेशन परीक्षण करना होगा , जो कम प्रदर्शन करने वालों से उच्च को अलग करने का आधार था , इसके बाद प्रतिभागी की स्थानिक श्रवण क्षमताओं को मापने के लिए स्थानिक ध्वनि परीक्षण किया गया। नोटः मानसिक रोटेशन टेस्टबत्तीस में टेस्ट स्कोर का एक औसत विभाजन कम प्रदर्शन करने वालों से कम को अलग करने के लिए उपयोग किया गया था। - इसके बाद, प्रतिभागियों को मानसिक रोटेशन परीक्षण करना होगा , जो कम प्रदर्शन करने वालों से उच्च को अलग करने का आधार था , इसके बाद प्रतिभागी की स्थानिक श्रवण क्षमताओं को मापने के लिए स्थानिक ध्वनि परीक्षण किया गया। - यादृच्छिक रूप से प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित करें; या तो आउटलायर डिटेक्शन या क्लस्टर पहचान पर कार्य से शुरू करें, जबकि बाद में अन्य उपयोग मामले के साथ जारी रखें। क्लस्टर पहचान कार्य के लिए, आधे प्रतिभागियों ने पहले उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास के साथ शुरुआत की, और फिर दो डी एप्लिकेशन का उपयोग किया, जबकि दूसरे आधे ने पहले दो डी एप्लिकेशन के साथ शुरुआत की, और फिर मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग किया । आउटलायर डिटेक्शन कार्य के लिए, यादृच्छिक रूप से एक समूह का चयन करें जो ध्वनि समर्थन प्राप्त करता है, जबकि समूह के दूसरे हिस्से को कोई ध्वनि समर्थन नहीं मिलता है। - सत्र का समापन करते हुए, प्रतिभागियों को राज्य-विशेषता चिंता सूची प्रश्नावलीइकतीस का फिर से जवाब देना होगा, साथ ही साथ स्व-विकसित, और एक जनसांख्यिकीय प्रश्नावली भी। - सत्र पूरा होने के बाद लैपटॉप के भंडारण पर उत्पन्न डेटा स्टोर करें, जो प्रत्येक विकसित एप्लिकेशन द्वारा स्वचालित रूप से रिकॉर्ड किया गया था। - प्रत्येक प्रतिभागी के लिए प्रयोग तैयार करें । डेस्कटॉप पीसी, इस्तेमाल किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास प्रस्तुत करें, और प्रश्नावली सौंपें। - प्रतिभागियों को सूचित करें कि प्रयोग में चालीस से पचास मिनट लगेंगे, और उनमें से आधे प्रीटेस्ट के बाद शुरू होते हैं, पहले आउटलायर डिटेक्शन टेस्ट , इसके बाद क्लस्टर मान्यता परीक्षण के साथ शुरू होते हैं, जबकि अन्य इन दो परीक्षणों को पूरा करते हैं । बिंदु सात से पहले अध्ययन प्रोटोकॉल का बिंदु आठ)। - यादृच्छिक रूप से तय करें कि क्या त्वचा चालकता माप किया गया है। हां के मामले में, त्वचा चालकता माप उपकरणतैंतीस तैयार करें और प्रतिभागी को डिवाइस पर रखने के लिए सूचित करें। प्रतिभागियों से उनके तनाव स्तर के लिए आधारभूत माप प्राप्त करने के लिए एक छोटे आराम चरण का अनुरोध करें। - प्रतिभागियों से अनुरोध करें कि वे स्टेट-ट्रेट एंग्जाइटी इन्वेंट्री प्रश्नावलीइकतीस भरें और उन्हें सूचित करें कि यह प्रयोग से पहले वर्तमान कथित तनाव को मापता है। - एक मानसिक रोटेशन परीक्षा आयोजित करें। - प्रतिभागियों को सूचित करें कि उनकी मानसिक रोटेशन क्षमताओं का मूल्यांकन किया जाता है और उन्हें डेस्कटॉप कंप्यूटर के सामने पेश किया जाता है। प्रतिभागियों को परीक्षण प्रक्रिया के बारे में सूचित करें। ध्यान दें कि उन्हें समान वस्तुओं की पहचान करनी थी जिनके पास सिम्युलेटेड तीन डी स्पेस में अलग-अलग स्थिति थी। - प्रतिभागियों को सूचित करें कि दिखाए गए पांच ऑब्जेक्ट्स में से केवल दो समान हैं और उनके पास पूरे परीक्षण के लिए दो मिनट होंगे। प्रतिभागियों को सूचित करें कि दिए गए दो मिनट के भीतर सात कार्य पूरे किए जा सकते हैं और उन्हें बताएं कि प्रत्येक पूर्ण कार्य के लिए प्रदर्शन उपाय दर्ज किए जाते हैं। - स्थानिक ध्वनि क्षमताओं का मूल्यांकन करें। - प्रतिभागियों को सूचित करें कि उनकी स्थानिक ध्वनि क्षमताओं का मूल्यांकन किया जाता है और उन्हें डेस्कटॉप कंप्यूटर के सामने पेश किया जाता है। प्रतिभागियों को परीक्षण प्रक्रिया के बारे में सूचित करें। प्रतिभागियों को समझाएं कि छह ध्वनि नमूनों का पता लगाया जाना चाहिए, जो प्रत्येक तेरह सेकंड के लिए बजाया जाएगा। - प्रतिभागियों को सूचित करें कि उन्हें उस दिशा का पता लगाना होगा जिसमें से ध्वनि आ रही है। - आउटलायर डिटेक्शन कौशल का मूल्यांकन करें। - प्रतिभागियों से मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास पहनने का अनुरोध करें। उन्हें समझाएं कि मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास के लिए बनाई गई दुनिया के भीतर आउटलायर्स पाए जाने चाहिए। - आगे उन्हें सूचित करें कि एक आउटलायर एक लाल-चिह्नित बिंदु है, अन्य सभी बिंदु सफेद-चिह्नित हैं। फिर उन्हें समझाएं कि उन्हें इसका पता लगाने के लिए अपनी दृष्टि को लाल रंग के बिंदु पर निर्देशित करना होगा। - प्रतिभागियों को आगे बताएं कि न केवल दृश्य सहायता प्रदान की जाती है, बल्कि पर्यावरणीय ध्वनियां भी आउटलायर्स का पता लगाने में उनकी सहायता करती हैं। प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान करें कि उन्हें आठ आउटलायर कार्यों को पूरा करना है, जिसका अर्थ है कि आभासी दुनिया के भीतर आठ बार, लाल रंग का बिंदु खोजना होगा। प्रत्येक प्रतिभागी के लिए, चार कार्य ध्वनि-समर्थित हैं, जबकि चार कार्य ध्वनि-असमर्थित हैं। प्रत्येक प्रतिभागी के लिए, यह यादृच्छिक रूप से चुना जाता है कि वे कार्य ध्वनि-समर्थित शुरू करते हैं या नहीं। फिर, पहले कार्य से निर्भर, यह कार्य से कार्य में बदलता है चाहे ध्वनि समर्थन प्रदान किया गया हो या नहीं। - प्रतिभागियों को बताएं कि कौन सी जानकारी दर्ज की जाएगीः प्रत्येक कार्य के लिए आवश्यक समय, चलने की लंबाई, और उनकी अंतिम चलती स्थिति उनकी शुरुआती स्थिति से संबंधित कैसी दिख रही है। अंत में प्रतिभागियों को बताएं कि लाल-चिह्नित बिंदु हरे रंग में बदल जाता है यदि इसका पता लगाया गया था । - क्लस्टर मान्यता कौशल का मूल्यांकन करें। - प्रतिभागी के लिए यादृच्छिक रूप से निर्णय लें कि क्या पहले मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग करना है या प्रतिभागी को डेस्कटॉप कंप्यूटर पर ले जाना है। निम्नलिखित में, केवल मिश्रित वास्तविकता सेटिंग के लिए प्रक्रिया का वर्णन किया गया है। यदि कोई प्रतिभागी पहले डेस्कटॉप कंप्यूटर से शुरू होता है, तो प्रक्रिया बदले हुए क्रम में समान होती है और वॉयस कमांड को छोड़कर, वे केवल मिश्रित वास्तविकता समाधान का उपयोग करते समय प्रदान किए जाते हैं। - मिश्रित वास्तविकता का उपयोग करने वाले प्रतिभागियों के लिएः प्रतिभागियों से मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास लगाने का अनुरोध करें। प्रतिभागियों को सूचित करें कि उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास के साथ बनाई गई दुनिया के भीतर क्लस्टर कैसे खोजें। प्रतिभागियों को जोर दें कि उन्हें अपने चारों ओर घूमकर अतिव्यापी समूहों के बीच अंतर करना था। - मिश्रित वास्तविकता का उपयोग करने वाले प्रतिभागियों के लिएः प्रतिभागियों को समझाएं कि वे वॉयस कमांड का उपयोग करके आभासी दुनिया में और क्लस्टर के आसपास नेविगेट कर सकते हैं। अंत में प्रतिभागियों को बताएं कि उन्हें छह समूहों का पता लगाना था। - मिश्रित वास्तविकता का उपयोग करने वाले प्रतिभागियों के लिएः प्रतिभागियों से उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास को हटाने का अनुरोध करें। प्रतिभागियों को डेस्कटॉप कंप्यूटर पर ले जाएं और उन्हें डेस्कटॉप कंप्यूटर की स्क्रीन पर दिखाए गए सॉफ़्टवेयर का उपयोग करने के लिए कहें। उन्हें सूचित करें कि उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास में दिखाए गए समान प्रकार के क्लस्टर को डेस्कटॉप कंप्यूटर पर सॉफ्टवेयर का उपयोग करके पता लगाया जाना था । - प्रतिभागियों से तीन प्रश्नावली भरने का अनुरोध करें, अर्थात् राज्य-विशेषता चिंता सूची प्रश्नावलीइकतीस, व्यक्तिपरक प्रतिक्रिया इकट्ठा करने के लिए एक स्व-विकसित प्रश्नावली, और उनके बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक जनसांख्यिकीय प्रश्नावली। - प्रतिभागियों से त्वचा चालकता माप उपकरणतैंतीस को हटाने का अनुरोध करें यदि उन्हें इसे लगाने के लिए शुरुआत में अनुरोध किया गया था। - भागीदारी के लिए धन्यवाद कहकर प्रतिभागियों को प्रयोग से राहत दें। Subscription Required. Please recommend JoVE to your librarian. आउटलायर डिटेक्शन कार्य के लिए, निम्न प्रदर्शन उपायों को परिभाषित किया गया थाः समय, पथ और कोण। माप के लिए चित्र छः देखें। समय तब तक दर्ज किया गया था जब तक कि एक लाल-चिह्नित बिंदु नहीं मिला। यह प्रदर्शन माप इंगित करता है कि एक प्रतिभागी को लाल-चिह्नित बिंदु खोजने के लिए कितने समय की आवश्यकता है। परिणामों में समय को चर "समय" के रूप में निरूपित किया जाता है। जबकि प्रतिभागियों ने लाल-चिह्नित बिंदु को खोजने की कोशिश की, उनके चलने के रास्ते की लंबाई निर्धारित की गई थी। इस गणना का आधार यह था कि उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास साठ फ्रेम प्रति सेकंड की फ्रेम दर पर शुरुआती स्थिति के लिए अपेक्षाकृत तीन डी वेक्टर के रूप में वर्तमान स्थिति एकत्र करते हैं। इसके आधार पर, एक प्रतिभागी द्वारा चलने वाले पथ की लंबाई की गणना की जा सकती है। यह प्रदर्शन माप इंगित करता है कि प्रतिभागी बहुत चले या नहीं। पथ को परिणामों में पथ लंबाई के रूप में निरूपित किया जाता है। पथ लंबाई के आधार पर, तीन और प्रदर्शन उपाय प्राप्त किए गए थेः PathMean, PathVariance, और बाउंडिंगबॉक्स। PathMean मीटर प्रति फ्रेम में प्रतिभागियों की औसत गति को दर्शाता है, PathVariance एक आंदोलन की अनियमितता को दर्शाता है, और बाउंडिंगबॉक्स दर्शाता है कि प्रतिभागियों ने अपने बाउंडिंग बॉक्स का गहन उपयोग किया था या नहीं। उत्तरार्द्ध सभी आंदोलनों की अधिकतम और न्यूनतम स्थितियों के आधार पर निर्धारित किया जाता है । मापा गया अंतिम मान एंगलमीन के साथ निरूपित किया जाता है और कोण के व्युत्पन्न मूल्य का गठन करता है, जिसे एंगलमीन के साथ निरूपित किया जाता है। उत्तरार्द्ध साठ प्रति सेकंड की फ्रेम दर पर वर्तमान स्थिति और एक प्रतिभागी की प्रारंभिक स्थिति के बीच रोटेशन को दर्शाता है। इसके आधार पर, डिग्री प्रति फ्रेम में औसत रोटेशन गति की गणना की गई थी। इस मान पर व्युत्पन्न, विचरण का उपयोग करके रोटेशन की अनियमितता की गणना की गई थी, जिसे एंगलवेरिएंस के रूप में निरूपित किया गया है। परिकलित पथ और कोण मानों के उद्देश्यों को संक्षेप में प्रस्तुत करने के लिए, पथ इंगित करता है कि उपयोगकर्ता बहुत चलते हैं या नहीं। यदि वे ज्यादा नहीं चल रहे हैं, तो यह उनके अभिविन्यास की कमी का संकेत दे सकता है। कोण, बदले में, यह इंगित करना चाहिए कि प्रतिभागी त्वरित या अचानक सिर आंदोलन करते हैं या नहीं। यदि वे कई बार अचानक सिर की गति कर रहे हैं, तो यह फिर से अभिविन्यास की कमी का संकेत दे सकता है। क्लस्टर डिटेक्शन कार्य के लिए, निम्न प्रदर्शन उपाय निर्धारित किए गए थेः समय और त्रुटियाँ। समय उस बिंदु तक दर्ज किया गया था जिस पर प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने कितने समूहों का पता लगाया है। यह प्रदर्शन उपाय इंगित करता है कि प्रतिभागियों को क्लस्टर खोजने के लिए कितने समय की आवश्यकता है। समय को समय के रूप में निरूपित किया जाता है। त्रुटियों को द्विआधारी निर्णय के अर्थ में पहचाना जाता है। या तो रिपोर्ट किए गए समूहों की संख्या सही थी या सही नहीं थी। त्रुटियों को त्रुटियों के साथ निरूपित किया जाता है। स्टेट-ट्रेट एंग्जाइटी इन्वेंट्री प्रश्नावलीइकतीस के राज्य संस्करण का उपयोग राज्य चिंता को मापने के लिए किया गया था, जो राज्य तनाव के समान एक निर्माण था। प्रश्नावली में बीस आइटम शामिल हैं और अध्ययन शुरू होने से पहले, साथ ही बाद में राज्य की चिंता में परिवर्तन का मूल्यांकन करने के लिए सौंप दिया गया था। इस प्रश्नावली के मूल्यांकन के लिए, सभी सकारात्मक विशेषताओं को फ़्लिप किया गया था , और सभी उत्तरों को अंतिम एसटीएआई स्कोर तक अभिव्यक्त किया जाता है। त्वचा चालकता माप उपकरण तैंतीस का उपयोग करके तीस यादृच्छिक रूप से चयनित प्रतिभागियों के लिए त्वचा चालकता को मापा गया था। दो कार्य प्रकारों को पूरा करने के बाद, प्रतिभागी की प्रतिक्रिया मांगने के लिए अध्ययन के अंत में एक स्व-विकसित प्रश्नावली सौंपी गई थी। प्रश्नावली तालिका एक में दिखाया गया है। इसके अलावा, एक जनसांख्यिकीय प्रश्नावली ने सभी प्रतिभागियों के लिंग, आयु और शिक्षा के बारे में पूछा। समग्र आयोजित अध्ययन प्रक्रिया चित्रा नौ में चित्रित की गई है। अध्ययन में साठ प्रतिभागी शामिल हुए। प्रतिभागियों को ज्यादातर उल्म विश्वविद्यालय और उल्म से सॉफ्टवेयर कंपनियों में भर्ती किया गया था। भाग लेने वाले छात्र मुख्य रूप से कंप्यूटर विज्ञान, मनोविज्ञान और भौतिकी के क्षेत्र से थे। इनमें दस महिलाएं और पचास पुरुष थे। मानसिक रोटेशन प्रीटेस्ट के आधार पर, इकतीस को कम प्रदर्शन करने वालों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जबकि उनतीस को उच्च प्रदर्शन करने वालों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। विशेष रूप से, सात महिलाओं और चौबीस पुरुषों को कम प्रदर्शन करने वालों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जबकि तीन महिलाओं और छब्बीस पुरुषों को उच्च प्रदर्शन करने वालों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। सांख्यिकीय मूल्यांकन के लिए, तीन सॉफ्टवेयर उपकरणों का उपयोग किया गया था । आवृत्तियों, प्रतिशत, साधन और मानक विचलन की गणना वर्णनात्मक आंकड़ों के रूप में की गई थी। फिशर के सटीक परीक्षणों और स्वतंत्र नमूनों के लिए टी-टेस्ट का उपयोग करके बेसलाइन जनसांख्यिकीय चर में कम और उच्च प्रदर्शन करने वालों की तुलना की गई थी। RQएक-RQपाँच के लिए, पूर्ण अधिकतम संभावना अनुमान के साथ रैखिक बहुस्तरीय मॉडल किए गए थे। दो स्तरों को शामिल किया गया था, जहां स्तर एक बार-बार मूल्यांकन का प्रतिनिधित्व करता है, और स्तर दो प्रतिभागियों का प्रतिनिधित्व करता है। प्रदर्शन उपाय इन मॉडलों में निर्भर चर थे। आरक्यू एक में, त्रुटि संभावनाओं के लिए फिशर के सटीक परीक्षणों का भी उपयोग किया गया था। आरक्यू तीन में, स्थानिक ध्वनियों बनाम कोई ध्वनि नहीं में समय में प्रदर्शन की जांच की गई । एसटीएआई स्कोर का मूल्यांकन आरक्यू चार के लिए निर्भर नमूनों के लिए टी-टेस्ट का उपयोग करके किया गया था। आरक्यू पाँच में, त्रुटि संभावना के लिए मैकनेमर के परीक्षण का उपयोग करते हुए, दो डी एप्लिकेशन बनाम उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास के प्रभाव की जांच की गई थी। सभी सांख्यिकीय परीक्षण दो पूंछ वाले किए गए थे; महत्व मान P<.पाँच पर सेट किया गया था। त्वचा चालकता परिणामों का विश्लेषण नहीं किया गया है और भविष्य के काम के अधीन हैं। महत्वपूर्ण रूप से, लेखकों ने उसी उपकरण के साथ एक अन्य अध्ययन में खुलासा किया कि अतिरिक्त विचारोंकी आवश्यकता है। मानसिक रोटेशन परीक्षण के लिए, प्रतिभागियों के बीच मानसिक रोटेशन परीक्षण के परिणामों के अंतर का उपयोग उच्च प्रदर्शन करने वालों से कम को अलग करने के लिए किया गया था। स्थानिक क्षमता परीक्षण के लिए, सभी प्रतिभागियों ने अच्छे स्कोर दिखाए और इसलिए सभी को उनकी स्थानिक क्षमताओं के संबंध में उच्च प्रदर्शन करने वालों के लिए वर्गीकृत किया गया था। सबसे पहले, प्रतिभागियों के महत्वपूर्ण परिणामों को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया हैः मानसिक रोटेशन में कम और उच्च प्रदर्शन करने वालों ने अपने बेसलाइन चर में कोई अंतर नहीं दिखाया। वर्णनात्मक रूप से, कम प्रदर्शन करने वालों में उच्च प्रदर्शन करने वालों की तुलना में महिला प्रतिभागियों का प्रतिशत अधिक था और उच्च कलाकार कम प्रदर्शन करने वालों की तुलना में छोटे थे। तालिका दो प्रतिभागियों के बारे में विशेषताओं को सारांशित करती है। आरक्यू एक के परिणामों के संबंध में, क्लस्टर मान्यता कार्य के लिए, दो डी एप्लिकेशन और तीन डी दृष्टिकोण के लिए कम और उच्च प्रदर्शन करने वालों के लिए दो त्रुटियां महत्वपूर्ण रूप से भिन्न नहीं थीं। आउटलायर डिटेक्शन टास्क के लिए, उच्च प्रदर्शन करने वाले कम प्रदर्शन करने वालों की तुलना में काफी तेज थे। इसके अलावा, उच्च प्रदर्शन करने वालों को कार्यों को हल करने के लिए कम पैदल दूरी की आवश्यकता होती है। आउटलायर के कार्य के लिए, तालिका तीन विस्तृत परिणामों को सारांशित करती है। आरक्यू दो के परिणामों के बारे में, केवल आउटलायर के डिटेक्शन कार्य के लिए महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए। बाउंडिंगबॉक्स, पाथलेंथ, पाथवेरिएंस, पाथमीन, एंगल-वेरिएंस और एंगलमीन कार्य से कार्य तक काफी बढ़ गए । रिकॉर्ड किए गए समय, बदले में, मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग करके कार्य से कार्य में महत्वपूर्ण रूप से नहीं बदला । स्थानिक ध्वनियों के आधार पर आरक्यू तीन के परिणामों के बारे में, प्रतिभागी स्थानिक ध्वनियों का उपयोग किए बिना आउटलायर डिटेक्शन केस में कार्यों को जल्दी से हल करने में सक्षम थे । आरक्यू चार के परिणामों के बारे में, पूर्व-मूल्यांकन में, एसटीएआई स्कोर पर औसत स्थिति एम = चौंतालीस.अट्ठावन थी। मूल्यांकन के बाद, यह एम = पैंतालीस.बहत्तर था। इस परिवर्तन ने सांख्यिकीय महत्व प्राप्त नहीं किया । स्व-विकसित प्रश्नावली में उत्तरों के वर्णनात्मक आंकड़े चित्रा दस में प्रस्तुत किए गए हैं। RQपाँच के परिणामों के बारे में, मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लासेस दृष्टिकोण डेस्कटॉप कंप्यूटर का उपयोग करने की तुलना में काफी तेज़ क्लस्टर पहचान समय को इंगित करता है । हालांकि, मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास का उपयोग करते समय गति लाभ अपेक्षाकृत छोटा था । अंत में, ध्यान दें कि इस अध्ययन का डेटाछत्तीस पर पाया जा सकता है। चित्रा एक: पैमाने पर इंटरैक्शन बनाम नवीनता पर जांच किए गए पहलू। आंकड़ा बातचीत के स्तर के संबंध में उपयोग किए गए उपायों और उनकी नवीनता को दर्शाता है। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्र दो: अध्ययन कक्ष के चित्र। अध्ययन कक्ष के दो चित्र प्रस्तुत किए गए हैं। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्र तीन: पता लगाया गया आउटलायर। स्क्रीनशॉट एक पता लगाया गया आउटलायर दिखाता है। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्रा चार: मानसिक रोटेशन परीक्षण का उदाहरण। स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि प्रतिभागियों को तीन डी-ऑब्जेक्ट्स का सामना करना पड़ा; यानी, एक ही ऑब्जेक्ट संरचना के साथ अलग-अलग स्थितियों में पांच में से दो वस्तुओं का पता लगाना पड़ा। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्रा पाँच: स्थानिक क्षमता परीक्षण के लिए सेटिंग। में, कार्य के लिए ऑडियो कॉन्फ़िगरेशन वापस दिखाया गया है, जबकि, में, परीक्षण का योजनाबद्ध उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस दिखाया गया है। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्रा छः: टास्क आउटलायर डिटेक्शन के लिए सेटिंग का चित्रण। तीन प्रमुख पहलुओं को दिखाया गया है। सबसे पहले, आउटलायर्स को चित्रित किया गया है। दूसरा, प्रदर्शन उपाय दिखाए गए हैं। तीसरा, जिस तरह से ध्वनि समर्थन की गणना की गई थी, उसे दिखाया गया है। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्रा सात: कार्य क्लस्टर पहचान के लिए सेटिंग का चित्रण। बेहतर प्रभाव के लिए परिदृश्य ए-सी पर विचार करें, प्रतिभागियों को समूहों को सही ढंग से पहचानने के लिए अपनी दृष्टि बदलनी पड़ी। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्रा आठ: Matlab में कार्य क्लस्टर पहचान के लिए सेटिंग का चित्रण। आंकड़ा मैटलैब में प्रदान किए गए समूहों को दर्शाता है, जो दो डी डेस्कटॉप एप्लिकेशन के लिए आधार था। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्र नौ: एक नज़र में समग्र अध्ययन प्रक्रिया। यह आंकड़ा उन चरणों को प्रस्तुत करता है जिन्हें प्रतिभागियों को अपने कालानुक्रमिक क्रम में पूरा करना था। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। चित्र दस: स्व-विकसित प्रश्नावली के परिणाम । परिणाम बॉक्स प्लॉट का उपयोग करके दिखाए जाते हैं। इस कार्य के आधार पर इस आंकड़े को संशोधित किया गयाहै। कृपया इस आंकड़े का एक बड़ा संस्करण देखने के लिए यहां क्लिक करें। ।चश्मा पहनने से आपको कितना तनावपूर्ण अनुभव हुआ? ।आउटलायर का कार्य कितना तनावपूर्ण था? ।जैसा कि आपने स्थानिक ध्वनियों का अनुभव किया? ।मिश्रित वास्तविकता में समूहों को खोजने का कार्य कितना तनावपूर्ण था? ।डेस्कटॉप दृष्टिकोण में क्लस्टर खोजने का कार्य कितना तनावपूर्ण था? ।वॉयस कमांड का उपयोग कितना तनावपूर्ण था? ।क्या आप स्थानिक ध्वनियों द्वारा समर्थित महसूस करते हैं? तालिका एक: उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया के लिए स्व-विकसित प्रश्नावली। इसमें सात प्रश्न शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्न के लिए, प्रतिभागियों को एक-दस से एक पैमाने के भीतर एक मूल्य निर्धारित करना था, जिससे एक का अर्थ है कम मूल्य , और दस एक उच्च मूल्य । ।कम प्रदर्शन करने वाला ।लिंग, एन ।आयु श्रेणी, एन ।उच्चतम शिक्षा, एन ।मानसिक रोटेशन टेस्ट, मीन तालिका दो: प्रतिभागी नमूना विवरण और बेसलाइन चर में कम और उच्च प्रदर्शन करने वालों के बीच तुलना। तालिका लिंग, आयु और शिक्षा पर तीन जनसांख्यिकीय प्रश्नों के लिए डेटा दिखाती है। इसके अलावा, दो प्रीटेस्ट के परिणाम प्रस्तुत किए जाते हैं। ।एसई तालिका तीन: आरक्यू एक के लिए बहुस्तरीय मॉडल के परिणाम । तालिका आउटलायर के पहचान कार्य के लिए आरक्यू एक के सांख्यिकीय परिणाम दिखाती है। ।एसई तालिका चार: आरक्यू दो के लिए बहुस्तरीय मॉडल के परिणाम । तालिका आउटलायर के पहचान कार्य के लिए आरक्यू दो के सांख्यिकीय परिणाम दिखाती है। ।एसई तालिका पाँच: आरक्यू तीन के लिए बहुस्तरीय मॉडल के परिणाम । तालिका आउटलायर के पहचान कार्य के लिए आरक्यू तीन के सांख्यिकीय परिणाम दिखाती है। ।एसई तालिका छः: आरक्यू पाँच के लिए बहुस्तरीय मॉडल के परिणाम । तालिका क्लस्टर पहचान कार्य के लिए RQपाँच के सांख्यिकीय परिणाम दिखाती है। Subscription Required. Please recommend JoVE to your librarian. विकसित मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास आवेदन के बारे में, दो पहलू विशेष रूप से फायदेमंद थे। आउटलायर के पहचान कार्य के लिए स्थानिक ध्वनियों का उपयोग सकारात्मक रूप से एक तरफ माना गया था । दूसरी ओर, वॉयस कमांड के उपयोग को भी सकारात्मक रूप से माना गया था । अध्ययन प्रतिभागियों के बारे में, हालांकि भर्ती किए गए प्रतिभागियों की संख्या एक अनुभवजन्य अध्ययन के लिए छोटी थी, लेकिन कई अन्य कार्यों की तुलना में संख्या प्रतिस्पर्धी है। फिर भी, दिखाए गए प्रोटोकॉल के आधार पर एक बड़े पैमाने पर अध्ययन की योजना बनाई गई है। हालांकि, जैसा कि इसने साठ प्रतिभागियों के लिए अपनी व्यवहार्यता दिखाई, अधिक प्रतिभागियों को आगे की चुनौतियों का खुलासा करने की उम्मीद है। यह चर्चा की गई कि प्रतिभागियों का चयन व्यापक हो सकता है और यह कि उच्च और निम्न प्रदर्शन करने वालों के बीच अंतर करने के लिए बेसलाइन चर की संख्या अधिक हो सकती है। दूसरी ओर, यदि इन पहलुओं को उच्च संख्या में बदल दिया जाता है, तो प्रोटोकॉल को गहराई से नहीं बदला जाना चाहिए। सामान्य तौर पर, प्रकट सीमाएं इस काम में दिखाए गए प्रोटोकॉल के आधार पर एक अध्ययन के चालन को प्रभावित नहीं करती हैं, वे केवल भर्ती और जनसांख्यिकीय प्रश्नावली के लिए उपयोग किए गए प्रश्नों को प्रभावित करती हैं। हालांकि, इस अध्ययन की एक सीमा फिर भी महत्वपूर्ण हैः एक प्रतिभागी के लिए प्रयोग को पूरा करने के लिए समग्र आवश्यक समय अधिक है। दूसरी ओर, जैसा कि प्रतिभागियों ने पहनने के आराम के बारे में शिकायत नहीं की, या यह कि परीक्षण उपकरण उन पर बहुत अधिक बोझ डाल रहा है, एक प्रतिभागी के लिए समग्र प्रोटोकॉल आयोजित करने का समय स्वीकार्य माना जा सकता है। अंत में, भविष्य के प्रयोग में, प्रोटोकॉल में कई पहलुओं को जोड़ा जाना है। विशेष रूप से, आउटलायर डिटेक्शन कार्य का मूल्यांकन दो डी डेस्कटॉप एप्लिकेशन में भी किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास जैसे अन्य हार्डवेयर उपकरणों का भी मूल्यांकन किया जाना चाहिए। हालांकि, प्रोटोकॉल व्यापक अर्थों में फायदेमंद प्रतीत होता है। प्रस्तुत प्रोटोकॉल के लिए निम्नलिखित प्रमुख अंतर्दृष्टि प्राप्त की गई थी। सबसे पहले, इसने मिश्रित-वास्तविकता समाधान के लिए इमर्सिव एनालिटिक्स का मूल्यांकन करने के लिए अपनी व्यवहार्यता दिखाई। विशेष रूप से, उपयोग किए गए मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास ने उद्योग चार.शून्य परिदृश्यों के लिए मिश्रित-वास्तविकता अनुप्रयोग में इमर्सिव एनालिटिक्स का मूल्यांकन करने के लिए अपनी व्यवहार्यता का खुलासा किया। दूसरा, दो डी डेस्कटॉप एप्लिकेशन के साथ विकसित मिश्रित वास्तविकता स्मार्टग्लास एप्लिकेशन की तुलना यह जांचने में सहायक थी कि क्या मिश्रित-वास्तविकता समाधान एक ऐसे एप्लिकेशन से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है जो वीआर तकनीकों का उपयोग नहीं करता है। तीसरा, ऐसे प्रयोगों में शारीरिक मापदंडों या महत्वपूर्ण संकेतों के माप पर हमेशा विचार किया जाना चाहिए। इस काम में, तनाव को एक प्रश्नावली और एक त्वचा चालकता उपकरण का उपयोग करके मापा गया था। यद्यपि उत्तरार्द्ध ने तकनीकी रूप से ठीक से काम किया, लेखकों ने उसी उपकरण के साथ एक अन्य अध्ययन में खुलासा किया कि अतिरिक्त विचारोंकी आवश्यकता है। चौथा, स्थानिक क्षमता परीक्षण और उच्च और निम्न प्रदर्शन करने वालों का पृथक्करण फायदेमंद था। सारांश में, हालांकि प्रस्तुत प्रोटोकॉल पहली नज़र में जटिल प्रतीत होता है , इसने तकनीकी रूप से अपनी उपयोगिता दिखाई। परिणामों के बारे में, इसने इसकी उपयोगिता भी प्रकट की। चूंकि आउटलायर्स का पता लगाना और क्लस्टर की मान्यता उद्योग चार.शून्य परिदृश्यों में कई उच्च-आयामी डेटा सेटों के मूल्यांकन में विशिष्ट कार्य हैं, इसलिए एक अनुभवजन्य अध्ययन में उनका उपयोग अनुसंधान के इस क्षेत्र के लिए प्रतिनिधि है। प्रोटोकॉल से पता चला कि इन परिदृश्यों को इमर्सिव एनालिटिक्स पर एक प्रयोज्य अध्ययन में अच्छी तरह से एकीकृत किया जा सकता है। इसलिए, इस संदर्भ में अन्य अध्ययनों के लिए प्रयुक्त सेटिंग की सिफारिश की जा सकती है। जैसा कि दिखाए गए अध्ययन के परिणाम से पता चला है कि उपयोग किए गए स्मार्टग्लास के आधार पर मिश्रित-वास्तविकता समाधान का उपयोग उद्योग चार.शून्य परिदृश्यों के लिए इमर्सिव एनालिटिक्स की जांच करने के लिए उपयोगी है, प्रोटोकॉल का उपयोग दिए गए संदर्भ में अन्य प्रयोज्य अध्ययनों के लिए भी किया जा सकता है। Subscription Required. Please recommend JoVE to your librarian. लेखकों के पास खुलासा करने के लिए कुछ भी नहीं है। लेखकों के पास स्वीकार करने के लिए कुछ भी नहीं है। ।GNU General Public License vदो or later - Korinth, M., Sommer-Dittrich, T., Reichert, M., Pryss, R. Design and Evaluation of a Virtual Reality-Based Car Configuration Concept. Science and Information Conference. , Springer, Cham. एक सौ उनहत्तर-एक सौ नवासी . - Whalen, T. E., Noël, S., Stewart, J. Measuring the human side of virtual reality. IEEE International Symposium on Virtual Environments, Human-Computer Interfaces and Measurement Systems, दो हज़ार तीन. , IEEE. आठ-बारह . - Martens, M. A., et al. It feels real: physiological responses to a stressful virtual reality environment and its impact on working memory. Journal of Psychopharmacology. तैंतीस , एक हज़ार दो सौ चौंसठ-एक हज़ार दो सौ तिहत्तर . - Keim, D. A. Information visualization and visual data mining. 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Applicability of Immersive Analytics in Mixed Reality: Usability Study. IEEE Dataport. , .
Dhanbad : जिले के तेतुलमारी थाना क्षेत्र के शक्ति चौक पर कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा बसों को देर रात तकरीबन 12:30 बजे जबरन रोकने का प्रयास किया गया. इसके साथ ही बस पर पत्थरबाजी भी की गयी. घटना से आक्रोशित धनबाद जिला बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित कुमार सिंह के नेतृत्व में बस मालिकों ने धनबाद एसएसपी से बसों की सुरक्षा की गुहार लगायी. अध्यक्ष सुमित कुमार सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बीती रात तकरीबन 12:30 बजे धनबाद के तेतुलमारी थाना क्षेत्र के शक्ति चौक पर कुछ असामाजिक तत्व के द्वारा लंबी दूरी की बसों पर जबरन रोकने की कोशिश की गयी, लेकिन मामले को भांपते हुए जब बस ड्राइवर ने बस को नहीं रोका तो बसों पर पत्थरबाजी की गयी.
Dhanbad : जिले के तेतुलमारी थाना क्षेत्र के शक्ति चौक पर कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा बसों को देर रात तकरीबन बारह:तीस बजे जबरन रोकने का प्रयास किया गया. इसके साथ ही बस पर पत्थरबाजी भी की गयी. घटना से आक्रोशित धनबाद जिला बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित कुमार सिंह के नेतृत्व में बस मालिकों ने धनबाद एसएसपी से बसों की सुरक्षा की गुहार लगायी. अध्यक्ष सुमित कुमार सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बीती रात तकरीबन बारह:तीस बजे धनबाद के तेतुलमारी थाना क्षेत्र के शक्ति चौक पर कुछ असामाजिक तत्व के द्वारा लंबी दूरी की बसों पर जबरन रोकने की कोशिश की गयी, लेकिन मामले को भांपते हुए जब बस ड्राइवर ने बस को नहीं रोका तो बसों पर पत्थरबाजी की गयी.
एक बार फिर मौसम के करवट बदलते ही समूची घाटी में ठंड शुरू हो गई है। लगातार दो दिन से हो रही बारिश के चलते समूची घाटी में मानो सर्दियों का मौसम शुरू हो गया हो। दो दिन से ठंड के चलते जहां उघी घाटी के लोग घरों में दुबके है। वहीं, सोमवार को सुबह से जारी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के चलते दिन भर लोग घरों में ही ठंड के चलते दुबके रहे। वहीं, बर्फबारी के चलते अटल टनल के दोनों छोर पर एक फीट से अधिक बर्फबारी दर्ज की गई है, जबकि बर्फ के फाहे गिरने का दौर लगातार यहां जारी है। गर्मियों में सैलानियों की पहली पसंद रहने रहने वाले 13050 फीट ऊंचे रोहतांग दर्रे पर भी करीब डेढ़ फीट से अधिक ताजा बर्फबारी पड़ चुकी है। कोकसर में भी सवा फीट तक बर्फबारी हुई है। बर्फबारी व खराब मौसम के चलते अटल टनल सैलानियों के लिए बंद कर दिया गया है, ताकि बर्फबारी के कारण से किसी तरह की घटना न हो सके। वहीं, बर्फबारी के चलते केलंग कुल्लू बस सेवा भी बंद कर हो गई है। स्थानीय लोगों को भी परिस्तिथियां देखकर वाहनों को चलाने की सलाह फिल्हाल दी गई है। साथ ही अधिक बर्फबारी सफर न करने की भी अपील की गई है। मनाली के पर्यटन स्थलों रोहतांग, राहनीनाला, मढ़, ब्यासनाला, राहलाफल, गुलाबा, सोलंगनाला, धुंधी, फातरु, कोठी व अंजनी महादेव में भारी बर्फबारी का दौर जारी है। वहीं, दूसरी और लाहुल-स्पीति प्रशासन ने स्थानीय वाहन चालकों को भी सफर न करने की सलाह दी है। रोहतांग दर्रे सहित धुंधी, मकरवेद शिकरवेद, हामटा जोतए भृगु व दशोहर झील, इंद्र किला, चंद्रखनी, हनुमान टिब्बा सहित दर्रे के उस पार बारालाचा, कुंजम व शिंकुला, लेडी ऑफ केलंग सहित शिंकुला दर्रे, घेपन पीक, कोकसर , जोत, बारालाचा, कुंजम, छोटा व बड़ा शीघ्री ग्लेशियर, दारचा की पहाडिय़ों, नीलकंड जोत सहित समस्त ऊंची चोटियों में बर्फ के फाहे गिर रहे है। एसडीएम मनाली रमन घरसंगी ने बताया कि बर्फबारी को ध्यान में रखते हुए सैलानियों के लिए अटल टनल बंद कर दी गई है।
एक बार फिर मौसम के करवट बदलते ही समूची घाटी में ठंड शुरू हो गई है। लगातार दो दिन से हो रही बारिश के चलते समूची घाटी में मानो सर्दियों का मौसम शुरू हो गया हो। दो दिन से ठंड के चलते जहां उघी घाटी के लोग घरों में दुबके है। वहीं, सोमवार को सुबह से जारी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के चलते दिन भर लोग घरों में ही ठंड के चलते दुबके रहे। वहीं, बर्फबारी के चलते अटल टनल के दोनों छोर पर एक फीट से अधिक बर्फबारी दर्ज की गई है, जबकि बर्फ के फाहे गिरने का दौर लगातार यहां जारी है। गर्मियों में सैलानियों की पहली पसंद रहने रहने वाले तेरह हज़ार पचास फीट ऊंचे रोहतांग दर्रे पर भी करीब डेढ़ फीट से अधिक ताजा बर्फबारी पड़ चुकी है। कोकसर में भी सवा फीट तक बर्फबारी हुई है। बर्फबारी व खराब मौसम के चलते अटल टनल सैलानियों के लिए बंद कर दिया गया है, ताकि बर्फबारी के कारण से किसी तरह की घटना न हो सके। वहीं, बर्फबारी के चलते केलंग कुल्लू बस सेवा भी बंद कर हो गई है। स्थानीय लोगों को भी परिस्तिथियां देखकर वाहनों को चलाने की सलाह फिल्हाल दी गई है। साथ ही अधिक बर्फबारी सफर न करने की भी अपील की गई है। मनाली के पर्यटन स्थलों रोहतांग, राहनीनाला, मढ़, ब्यासनाला, राहलाफल, गुलाबा, सोलंगनाला, धुंधी, फातरु, कोठी व अंजनी महादेव में भारी बर्फबारी का दौर जारी है। वहीं, दूसरी और लाहुल-स्पीति प्रशासन ने स्थानीय वाहन चालकों को भी सफर न करने की सलाह दी है। रोहतांग दर्रे सहित धुंधी, मकरवेद शिकरवेद, हामटा जोतए भृगु व दशोहर झील, इंद्र किला, चंद्रखनी, हनुमान टिब्बा सहित दर्रे के उस पार बारालाचा, कुंजम व शिंकुला, लेडी ऑफ केलंग सहित शिंकुला दर्रे, घेपन पीक, कोकसर , जोत, बारालाचा, कुंजम, छोटा व बड़ा शीघ्री ग्लेशियर, दारचा की पहाडिय़ों, नीलकंड जोत सहित समस्त ऊंची चोटियों में बर्फ के फाहे गिर रहे है। एसडीएम मनाली रमन घरसंगी ने बताया कि बर्फबारी को ध्यान में रखते हुए सैलानियों के लिए अटल टनल बंद कर दी गई है।
अस्तानाः रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने (Russian President Putin) शुक्रवार को कजाखिस्तान की राजधानी अस्ताना में कहा कि उन्हें यूक्रेन युद्ध का कोई पछतावा नहीं है क्योंकि उनका देश जो कर रहा है वो सही है। ज्ञात रहे कि यूक्रेन युद्ध में (Ukraine war) हजारों लोग मारे गए हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं लेकिन पुतिन को का कहना है कि उसे इस पर कोई पछतावा नहीं है। इस दौरान उन्होंने भारत का भी जिक्र किया है। गौरतलब है कि यूक्रेन युद्ध के (Ukraine war) शुरू होने से पहले ही भारत कहता आ रहा है कि इस मसले का हल शांतिपूर्ण बातचीत से होना चाहिए। हालांकि भारत के (India) प्रस्ताव पर रूस टालमटोल करता रहा लेकिन शुक्रवार को पहली बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने (Russian President Putin) कबूल किया कि भारत शुरुआत से ही शांतिपूर्ण बातचीत के पक्ष में है। पुतिन ने भारत के साथ चीन का (China) भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश शांतिपूर्ण बातचीत के पक्ष में हैं। अस्ताना में संवाददाता सम्मेलन में पुतिन ने कहा कि "भारत और चीन ने यूक्रेन में ("India and China's Ukraine) शांतिपूर्ण बातचीत का समर्थन किया है। " हालांकि इस दौरान उन्होंने कहा कि यूक्रेन वार्ता के लिए तैयार नहीं था। उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर में पिछले महीने हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक से इतर PM मोदी ने पुतिन के साथ सीधी वार्ता की थी। पुतिन ने कहा (Russian President Putin) कि उन्हें यूक्रेन पर आठ महीने लंबे युद्ध (War) को लेकर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि रूस का उद्देश्य अपने पड़ोसी को "नष्ट" करना नहीं है। पुतिन ने यह भी कहा कि नाटो सैनिकों के (Nato Soldiers) साथ सीधा संघर्ष विनाशकारी होगा। पुतिन ने कहा कि अभी के लिए, यूक्रेन पर किसी और बड़े हमले की योजना नहीं है। पुतिन से (President Putin) जब पूछा गया कि क्या उन्हें यूक्रेन में संघर्ष को लेकर खेद है या रूस जो कर रहा है वो सही है, इस पर उन्होंने कहा कि नहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें यूक्रेन में संघर्ष के (Ukraine war) बारे में कोई पछतावा नहीं है जिसमें हजारों लोग मारे गए, कई शहर नष्ट हुए और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। लेकिन इसके साथ पुतिन ने कहा (President Putin) कि आज जो हो रहा है वह सुखद नहीं है। लेकिन फिर भी, (अगर रूस ने फरवरी में हमला नहीं किया होता) तो हम एक ही स्थिति में होते, जिससे केवल हमारे लिए ही हालात बदतर होते। इसलिए हम सब कुछ ठीक कर रहे हैं। व्लादिमीर पुतिन ने (President Putin) आगे की योजना की ओर इशारा करते हुए यह भी कहा है कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त नागरिकों की सेना में तैनाती संबंधी उनके फैसले पर दो सप्ताह में पूरी तरह अमल किया जाएगा। पुतिन की टिप्पणी से पहले जर्मन रक्षा मंत्री क्रिस्टीन लैंब्रेच ने (German Defense Minister Christine Lambrecht) कहा था कि नाटो के सहयोगियों को यूक्रेन के समर्थन के साथ आगे बढ़ना चाहिए और परमाणु हथियारों के (Nuclear Weapons) इस्तेमाल की रूस की धमकियों को गंभीरता से लेना चाहिए।
अस्तानाः रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने शुक्रवार को कजाखिस्तान की राजधानी अस्ताना में कहा कि उन्हें यूक्रेन युद्ध का कोई पछतावा नहीं है क्योंकि उनका देश जो कर रहा है वो सही है। ज्ञात रहे कि यूक्रेन युद्ध में हजारों लोग मारे गए हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं लेकिन पुतिन को का कहना है कि उसे इस पर कोई पछतावा नहीं है। इस दौरान उन्होंने भारत का भी जिक्र किया है। गौरतलब है कि यूक्रेन युद्ध के शुरू होने से पहले ही भारत कहता आ रहा है कि इस मसले का हल शांतिपूर्ण बातचीत से होना चाहिए। हालांकि भारत के प्रस्ताव पर रूस टालमटोल करता रहा लेकिन शुक्रवार को पहली बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कबूल किया कि भारत शुरुआत से ही शांतिपूर्ण बातचीत के पक्ष में है। पुतिन ने भारत के साथ चीन का भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश शांतिपूर्ण बातचीत के पक्ष में हैं। अस्ताना में संवाददाता सम्मेलन में पुतिन ने कहा कि "भारत और चीन ने यूक्रेन में शांतिपूर्ण बातचीत का समर्थन किया है। " हालांकि इस दौरान उन्होंने कहा कि यूक्रेन वार्ता के लिए तैयार नहीं था। उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर में पिछले महीने हुई शंघाई सहयोग संगठन की बैठक से इतर PM मोदी ने पुतिन के साथ सीधी वार्ता की थी। पुतिन ने कहा कि उन्हें यूक्रेन पर आठ महीने लंबे युद्ध को लेकर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि रूस का उद्देश्य अपने पड़ोसी को "नष्ट" करना नहीं है। पुतिन ने यह भी कहा कि नाटो सैनिकों के साथ सीधा संघर्ष विनाशकारी होगा। पुतिन ने कहा कि अभी के लिए, यूक्रेन पर किसी और बड़े हमले की योजना नहीं है। पुतिन से जब पूछा गया कि क्या उन्हें यूक्रेन में संघर्ष को लेकर खेद है या रूस जो कर रहा है वो सही है, इस पर उन्होंने कहा कि नहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें यूक्रेन में संघर्ष के बारे में कोई पछतावा नहीं है जिसमें हजारों लोग मारे गए, कई शहर नष्ट हुए और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। लेकिन इसके साथ पुतिन ने कहा कि आज जो हो रहा है वह सुखद नहीं है। लेकिन फिर भी, तो हम एक ही स्थिति में होते, जिससे केवल हमारे लिए ही हालात बदतर होते। इसलिए हम सब कुछ ठीक कर रहे हैं। व्लादिमीर पुतिन ने आगे की योजना की ओर इशारा करते हुए यह भी कहा है कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त नागरिकों की सेना में तैनाती संबंधी उनके फैसले पर दो सप्ताह में पूरी तरह अमल किया जाएगा। पुतिन की टिप्पणी से पहले जर्मन रक्षा मंत्री क्रिस्टीन लैंब्रेच ने कहा था कि नाटो के सहयोगियों को यूक्रेन के समर्थन के साथ आगे बढ़ना चाहिए और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की रूस की धमकियों को गंभीरता से लेना चाहिए।
बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन इन दिनों इंडस्ट्री में धमाल मचा रही हैं। वह काफी समय से इंडस्ट्री में काम कर रही हैं और अब उन्होंने अपना स्तर ऊंचा कर लिया है. कृति अब एक्ट्रेस के साथ-साथ प्रोड्यूसर भी बन गई हैं। उन्होंने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस लॉन्च किया है। कृति ने बहन नुपुर के साथ मिलकर एक प्रोडक्शन हाउस शुरू किया है। उनके प्रोडक्शन हाउस का नाम ब्लू बटरफ्लाई फिल्म्स है। कृति के प्रोडक्शन हाउस का कनेक्शन सुशांत सिंह राजपूत से है. फैंस को ये कनेक्शन मिल गया है. ये कनेक्शन प्रोडक्शन हाउस के नाम पर है. कृति सेनन इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म आदिपुरुष को लेकर सुर्खियों में हैं। ओम राउत द्वारा निर्देशित आदिपुरुष में प्रभास अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं. यह फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आई। इस बीच कृति ने एक प्रोडक्शन हाउस लॉन्च किया है। अपने प्रोडक्शन हाउस के लॉन्च के साथ ही कृति ने इसके तहत एक फिल्म की भी घोषणा की है। वह 9 साल बाद काजोल के साथ काम करने जा रही हैं। इस फिल्म का नाम है दो पत्ती. जिसमें काजोल और कृति एक साथ नजर आएंगी. फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी. फैंस को कृति सेनन का नाम ब्लू बटरफ्लाई और उनका नाम सुशांत सिंह राजपूत के साथ जुड़ना काफी पसंद आया है। कृति और सुशांत बहुत अच्छे दोस्त हैं. दोनों ने फिल्म राब्ता में साथ काम किया था. कृति अक्सर सुशांत की मौत के बाद उन्हें याद करती हैं। सुशांत अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के कैप्शन में नीली तितली का इस्तेमाल करते थे। एक प्रशंसक ने तो उनसे एक बार पूछा भी था कि वह नीली तितली का इस्तेमाल क्यों करते हैं। जिसके बाद सुशांत ने इसका मतलब समझाया. प्रोडक्शन हाउस की घोषणा के बाद कृति की पोस्ट पर फैन्स ने कमेंट किए. एक फैन ने लिखा- सुशांत सिंह राजपूत ने अपने पोस्ट में ब्लू बटरफ्लाई इमोजी का इस्तेमाल किया है. वहीं एक अन्य फैन ने लिखा- नीली तितली सुशांत का प्रतीक है. वर्कफ्रंट की बात करें तो कृति सेनन जल्द ही करीना कपूर और तब्बू के साथ एक फिल्म में नजर आएंगी। इसके अलावा वह टाइगर श्रॉफ के साथ गणपत में नजर आएंगी। शाहिद कपूर के साथ भी उनकी एक फिल्म पाइपलाइन में है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन इन दिनों इंडस्ट्री में धमाल मचा रही हैं। वह काफी समय से इंडस्ट्री में काम कर रही हैं और अब उन्होंने अपना स्तर ऊंचा कर लिया है. कृति अब एक्ट्रेस के साथ-साथ प्रोड्यूसर भी बन गई हैं। उन्होंने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस लॉन्च किया है। कृति ने बहन नुपुर के साथ मिलकर एक प्रोडक्शन हाउस शुरू किया है। उनके प्रोडक्शन हाउस का नाम ब्लू बटरफ्लाई फिल्म्स है। कृति के प्रोडक्शन हाउस का कनेक्शन सुशांत सिंह राजपूत से है. फैंस को ये कनेक्शन मिल गया है. ये कनेक्शन प्रोडक्शन हाउस के नाम पर है. कृति सेनन इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म आदिपुरुष को लेकर सुर्खियों में हैं। ओम राउत द्वारा निर्देशित आदिपुरुष में प्रभास अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं. यह फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आई। इस बीच कृति ने एक प्रोडक्शन हाउस लॉन्च किया है। अपने प्रोडक्शन हाउस के लॉन्च के साथ ही कृति ने इसके तहत एक फिल्म की भी घोषणा की है। वह नौ साल बाद काजोल के साथ काम करने जा रही हैं। इस फिल्म का नाम है दो पत्ती. जिसमें काजोल और कृति एक साथ नजर आएंगी. फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी. फैंस को कृति सेनन का नाम ब्लू बटरफ्लाई और उनका नाम सुशांत सिंह राजपूत के साथ जुड़ना काफी पसंद आया है। कृति और सुशांत बहुत अच्छे दोस्त हैं. दोनों ने फिल्म राब्ता में साथ काम किया था. कृति अक्सर सुशांत की मौत के बाद उन्हें याद करती हैं। सुशांत अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के कैप्शन में नीली तितली का इस्तेमाल करते थे। एक प्रशंसक ने तो उनसे एक बार पूछा भी था कि वह नीली तितली का इस्तेमाल क्यों करते हैं। जिसके बाद सुशांत ने इसका मतलब समझाया. प्रोडक्शन हाउस की घोषणा के बाद कृति की पोस्ट पर फैन्स ने कमेंट किए. एक फैन ने लिखा- सुशांत सिंह राजपूत ने अपने पोस्ट में ब्लू बटरफ्लाई इमोजी का इस्तेमाल किया है. वहीं एक अन्य फैन ने लिखा- नीली तितली सुशांत का प्रतीक है. वर्कफ्रंट की बात करें तो कृति सेनन जल्द ही करीना कपूर और तब्बू के साथ एक फिल्म में नजर आएंगी। इसके अलावा वह टाइगर श्रॉफ के साथ गणपत में नजर आएंगी। शाहिद कपूर के साथ भी उनकी एक फिल्म पाइपलाइन में है।
बहुरि जगत जो लोक, तार्क निग्रॅथलिंग प्रतीतिका कारण है। जातं बेहाविकमें ममत्वका त्यागी होयगा सोही यह सर्व परीवह सहनेकू समर्थ हुआ निर्ग्रन्थलग धारेगा, तातें निर्ग्रन्थलग वीतरागी मोक्षका मार्ग है. यह प्रतीति करे है । बहुरि यह निर्ग्रन्थलिंग प्रापका प्रात्माको स्थितीकरणका कारण है। जातं मोक्षके श्रथि सर्वपरिग्रहको त्यागि बिगम्बर जो मैं तार्क रागकरि कहा प्रयोजन है ? तथा द्वेषकरि वा मानकरि तथा मायाकरि वा लोभकरि मोहकरि शरीर का संस्कारकरणकरि परीषहउपसर्गर्ते कायर होनेकरि कहा प्रयोजन है ? मै तो सर्वका त्यागी निर्ग्रन्थ हूँ ऐसे आत्माकू रत्नत्रय में स्थिर करना है । बहुरि गृहस्थभावतं जुदापरणाहू निर्ग्रन्थलिंग होतं होत है। जाते निप्रंन्यलिंग घारं तार्क यह भावना होय, ओ, मै त्यागी होय दुर्गतिका कारण जो क्रोध मान माया लोभ इनिमैं कंसं प्रवत् ? गृहस्थकीसी क्रिया करू तो लोकनिधभी हूँ अर दुर्गतिभी जाऊ ? तातं संयमरूप प्रवर्तनाही श्रेष्ठ है। या प्रकार निमंन्थलिंगतं गुरण प्रकट होय हैं। भागे और निन्थलिंग के गुरण कहे हैं। गाया - गंथच्चाम्रो लाघवमप्पडिलिहरगं च गदभयत्तं च । संसज्जरगपरिहारो परिकम्मविवज्जरगा चेंब ॥८५॥ प्रर्थ-निप्रंन्थ होय तार्क परिग्रह में मूर्च्छा ही उठि जाय है, स्वप्नामैं भी चाह नहीं उपजं, तातं परिग्रहयाग गुर निर्ग्रन्थलगतेंही होय, वस्त्रादिसहितकं परिग्रहमें ममता रहेही । बहुरि परिग्रहत्यागीकै भ्रात्माके उपरिसू सर्व भार उतार गया यातै हलकापरणा होय है। बहुरि प्रतिलेखन कहिये बहोत सोधना नहीं होय है, जातें वस्त्रसहित जो ग्यारह प्रतिमाधारक तार्क वस्त्राविकनिका बहोत सोधन होय है पर निर्ग्रन्थनिकै मयूरपिच्छिकाका शरीरपरि फेरना यहही ग्रल्प प्रतिलेखन है । बहुरि निर्ग्रन्थलिंगीकै चिसको व्याकुलता का कारण जो भय ताकरि रहितपरगा होय है, जातं परिग्रहर हितकं भय काहेका ? वस्त्रादिक राखं तार्क भय होय है । बहुरि वस्त्रसहितके वस्त्र में जू वा लोखां वा सन्मूर्च्छन जीवका त्याग नहीं हो सके है, आापकं वा प्रन्यजीवकं बड़ी बाधा उपजे है, घर निर्ग्रन्थलिगमें जीवांकी उत्पत्तिही नहीं होय है, बहुरि निर्ग्रन्थलिंगमें याचना सींवना प्रक्षालना सुकावना इत्यादि स्वाध्याय ध्यान में विघ्न करने वाले दोष नहीं होत है। बहुरि निग्रंथलगोके शीत उष्णता वंशमशकादि सर्व परीषहनिका जीतना होय है, तारों पूर्वोपार्जितक मंनिकी बडी निर्जरा होय घर रत्नत्रयमार्ग में दृढता होय है, तात निग्रंथलगही श्रेष्ठ है। भागे धौरहू निर्धध्वलिगके गुरण कहे हैं।
बहुरि जगत जो लोक, तार्क निग्रॅथलिंग प्रतीतिका कारण है। जातं बेहाविकमें ममत्वका त्यागी होयगा सोही यह सर्व परीवह सहनेकू समर्थ हुआ निर्ग्रन्थलग धारेगा, तातें निर्ग्रन्थलग वीतरागी मोक्षका मार्ग है. यह प्रतीति करे है । बहुरि यह निर्ग्रन्थलिंग प्रापका प्रात्माको स्थितीकरणका कारण है। जातं मोक्षके श्रथि सर्वपरिग्रहको त्यागि बिगम्बर जो मैं तार्क रागकरि कहा प्रयोजन है ? तथा द्वेषकरि वा मानकरि तथा मायाकरि वा लोभकरि मोहकरि शरीर का संस्कारकरणकरि परीषहउपसर्गर्ते कायर होनेकरि कहा प्रयोजन है ? मै तो सर्वका त्यागी निर्ग्रन्थ हूँ ऐसे आत्माकू रत्नत्रय में स्थिर करना है । बहुरि गृहस्थभावतं जुदापरणाहू निर्ग्रन्थलिंग होतं होत है। जाते निप्रंन्यलिंग घारं तार्क यह भावना होय, ओ, मै त्यागी होय दुर्गतिका कारण जो क्रोध मान माया लोभ इनिमैं कंसं प्रवत् ? गृहस्थकीसी क्रिया करू तो लोकनिधभी हूँ अर दुर्गतिभी जाऊ ? तातं संयमरूप प्रवर्तनाही श्रेष्ठ है। या प्रकार निमंन्थलिंगतं गुरण प्रकट होय हैं। भागे और निन्थलिंग के गुरण कहे हैं। गाया - गंथच्चाम्रो लाघवमप्पडिलिहरगं च गदभयत्तं च । संसज्जरगपरिहारो परिकम्मविवज्जरगा चेंब ॥पचासी॥ प्रर्थ-निप्रंन्थ होय तार्क परिग्रह में मूर्च्छा ही उठि जाय है, स्वप्नामैं भी चाह नहीं उपजं, तातं परिग्रहयाग गुर निर्ग्रन्थलगतेंही होय, वस्त्रादिसहितकं परिग्रहमें ममता रहेही । बहुरि परिग्रहत्यागीकै भ्रात्माके उपरिसू सर्व भार उतार गया यातै हलकापरणा होय है। बहुरि प्रतिलेखन कहिये बहोत सोधना नहीं होय है, जातें वस्त्रसहित जो ग्यारह प्रतिमाधारक तार्क वस्त्राविकनिका बहोत सोधन होय है पर निर्ग्रन्थनिकै मयूरपिच्छिकाका शरीरपरि फेरना यहही ग्रल्प प्रतिलेखन है । बहुरि निर्ग्रन्थलिंगीकै चिसको व्याकुलता का कारण जो भय ताकरि रहितपरगा होय है, जातं परिग्रहर हितकं भय काहेका ? वस्त्रादिक राखं तार्क भय होय है । बहुरि वस्त्रसहितके वस्त्र में जू वा लोखां वा सन्मूर्च्छन जीवका त्याग नहीं हो सके है, आापकं वा प्रन्यजीवकं बड़ी बाधा उपजे है, घर निर्ग्रन्थलिगमें जीवांकी उत्पत्तिही नहीं होय है, बहुरि निर्ग्रन्थलिंगमें याचना सींवना प्रक्षालना सुकावना इत्यादि स्वाध्याय ध्यान में विघ्न करने वाले दोष नहीं होत है। बहुरि निग्रंथलगोके शीत उष्णता वंशमशकादि सर्व परीषहनिका जीतना होय है, तारों पूर्वोपार्जितक मंनिकी बडी निर्जरा होय घर रत्नत्रयमार्ग में दृढता होय है, तात निग्रंथलगही श्रेष्ठ है। भागे धौरहू निर्धध्वलिगके गुरण कहे हैं।
उन्नाव में शहर कोतवाली क्षेत्र के सिकंदरपुर सरोसी स्थित अगेहरा गांव के पास वाहन के बाहर खड़े युवकों को कार ने टक्कर मार दी। हादसे में एक छात्र की मौत हो गई। वहीं दो साथी जख्मी हो गए। हादसा उस समय हुआ जब छात्र और उसके साथी अपने दोस्त की बहन का तिलक चढ़ाने के लिए गांव आए हुए थे। जानकारी पर पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। छात्र की मौत पर परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। सफीपुर कस्बा का रहने वाले अजय बहन का तिलक चढ़ाने के लिए परिजनों के साथ बीती रात अगेहरा गांव आया हुआ था। अजय के दोस्त निखिल, शुभम और राज भी कार से अगेहरा गांव आए हुए थे। गांव में तिलक समारोह चल रहा था। इसी बीच निखिल, शुभम और राज एक वाहन के पास खड़े थे। तभी सामने से आई तेज रफ्तार कार ने तीनों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में तीनों दोस्त जख्मी हो गए। जानकारी होने पर लोगों ने घायलों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचाया। जहां डॉक्टर ने निखिल को मृत घोषित कर दिया। हादसे में घायल शुभम और राज का इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि तीनों दोस्त बीएससी दूसरे साल के छात्र हैं। पुलिस ने परिजनों को सूचना देने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत की खबर मिलने पर तिलक समारोह में मातम पसर गया। निखिल की मौत की खबर मिलने पर इमरजेंसी पहुंचे परिजनों में कोहराम मचा रहा। पुलिस ने छात्र के शव का पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस कार का पता लगा रही है। प्रभारी निरीक्षक सदर कोतवाली अखिलेश पांडे ने बताया कि घटना की जानकारी पर कार्रवाई की गई है। तहरीर मिलने पर मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उन्नाव में शहर कोतवाली क्षेत्र के सिकंदरपुर सरोसी स्थित अगेहरा गांव के पास वाहन के बाहर खड़े युवकों को कार ने टक्कर मार दी। हादसे में एक छात्र की मौत हो गई। वहीं दो साथी जख्मी हो गए। हादसा उस समय हुआ जब छात्र और उसके साथी अपने दोस्त की बहन का तिलक चढ़ाने के लिए गांव आए हुए थे। जानकारी पर पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। छात्र की मौत पर परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। सफीपुर कस्बा का रहने वाले अजय बहन का तिलक चढ़ाने के लिए परिजनों के साथ बीती रात अगेहरा गांव आया हुआ था। अजय के दोस्त निखिल, शुभम और राज भी कार से अगेहरा गांव आए हुए थे। गांव में तिलक समारोह चल रहा था। इसी बीच निखिल, शुभम और राज एक वाहन के पास खड़े थे। तभी सामने से आई तेज रफ्तार कार ने तीनों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में तीनों दोस्त जख्मी हो गए। जानकारी होने पर लोगों ने घायलों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचाया। जहां डॉक्टर ने निखिल को मृत घोषित कर दिया। हादसे में घायल शुभम और राज का इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि तीनों दोस्त बीएससी दूसरे साल के छात्र हैं। पुलिस ने परिजनों को सूचना देने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत की खबर मिलने पर तिलक समारोह में मातम पसर गया। निखिल की मौत की खबर मिलने पर इमरजेंसी पहुंचे परिजनों में कोहराम मचा रहा। पुलिस ने छात्र के शव का पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस कार का पता लगा रही है। प्रभारी निरीक्षक सदर कोतवाली अखिलेश पांडे ने बताया कि घटना की जानकारी पर कार्रवाई की गई है। तहरीर मिलने पर मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
डैनी ने सिक्किम की राजकुमारी 'गावा' से शादी की थी. डैनी बहुत सी नेपाली, तेलुगू और तमिल फिल्मों में काम करने के अलावा गायकी में भी हाथ आजमा चुके है. गुलशन ग्रोवर ने साल 2001 में कशिश से शादी की थी. लेकिन ये शादी ज्यादा नहीं चल पायी और दोनों ने 2002 में एक दुसरे से तलाक ले लिया था. आशुतोष राणा इंडस्ट्री का बहुत बड़ा नाम हैं और काफी सफल एक्टर भी रहे हैं. आशुतोष राणा ने साल 2001 में रेणुका शहाणे से शादी की थी. रेणुका कई मराठी फिल्मों के अलावा 1991 के लोकप्रिय धारावाहिक सुरभि में भी काम कर चुकी है. 1966-1967 में आयी फिल्म 'सावन भादो' से भारतीय फिल्मों में एंट्री करने वाले रंजीत ने 1986 में अलोका बेदी से शादी की थी. शक्ति कपूर ने बॉलीवुड एक्ट्रेस पद्मिनी कोल्हापुरी की बहन शिवांगी कोल्हापुरी से शादी की थी. फिल्म किस्मत के दौरान शक्ति को शिवांगी से प्यार हो गया था और दोनों ने शादी कर ली थी.
डैनी ने सिक्किम की राजकुमारी 'गावा' से शादी की थी. डैनी बहुत सी नेपाली, तेलुगू और तमिल फिल्मों में काम करने के अलावा गायकी में भी हाथ आजमा चुके है. गुलशन ग्रोवर ने साल दो हज़ार एक में कशिश से शादी की थी. लेकिन ये शादी ज्यादा नहीं चल पायी और दोनों ने दो हज़ार दो में एक दुसरे से तलाक ले लिया था. आशुतोष राणा इंडस्ट्री का बहुत बड़ा नाम हैं और काफी सफल एक्टर भी रहे हैं. आशुतोष राणा ने साल दो हज़ार एक में रेणुका शहाणे से शादी की थी. रेणुका कई मराठी फिल्मों के अलावा एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के लोकप्रिय धारावाहिक सुरभि में भी काम कर चुकी है. एक हज़ार नौ सौ छयासठ-एक हज़ार नौ सौ सरसठ में आयी फिल्म 'सावन भादो' से भारतीय फिल्मों में एंट्री करने वाले रंजीत ने एक हज़ार नौ सौ छियासी में अलोका बेदी से शादी की थी. शक्ति कपूर ने बॉलीवुड एक्ट्रेस पद्मिनी कोल्हापुरी की बहन शिवांगी कोल्हापुरी से शादी की थी. फिल्म किस्मत के दौरान शक्ति को शिवांगी से प्यार हो गया था और दोनों ने शादी कर ली थी.
प्रफुलित कमल निमिप + नहिंससि डर गुंजत निगम सुवास ।।२ जहिं सर सुभग मुक्ति मुक्ताफल सुकृत विमल जल पीजे ॥ सोरस छांडि कुबुद्धि विहंगम ! इहां कहा रहि कीजें ? ॥३॥ तहां श्री सहस्र सहित नित क्रीडत सोमित 'सूरजंदास' ।। अवन, सुहाय विषय रस छालर वा समुद्र की आस ॥४॥ यह दसमस्कंध की कारिका में कह्यो हे :"लक्ष्मी-सहस्र लीलाभिः सेव्यमानं कलानिधिम्" तेसे सूरदासजी नें या पद में कह्यो हेः-"तहां श्री सहस्र सहित नित क्रीडत सोभित सूरजदास" । या भांति सों पद किए । तातें जानि परी जो- संपूर्ण सुबोधिनी सूरदास कों फुरी । सो यह पद पहलो करिके ताही समें श्री आचार्यजी महाप्रभुंन को सुनायो । सो सुनिके श्री आचार्यजी महाप्रभु बोहोत प्रसन्न (भए । ओर जानें जो अब) लीला को अभ्यास +सूर-सुधा २७ का पाठ ? सुकृत अमृत रस० (सूरसुधां २७) सुकृति विमल o (श्र और वल्लभ० २०७) S लछमी सहित होत नित क्रीडा सोभित० ( सूरसुधा २७ ) भयो ( सो तब प्राचार्यजी आपु श्रीमुख तें सूरदास सों आज्ञा किये जो- सूर ! कछु नंदालय की लीला गावो ) पाछे सूरदासजी नें नंद-महोच्छव वर्णन कियो । ( सो पद ) * राग देवगंधार : व्रज भयो महरि के पूत जब यह बात सुनी । सुन आनंदे सब लोक गोकुल गनक गुनी ॥ ग्रह- लगन नखत पल सोधि कीन्ही वेद-धुनी । व्रज पूरव पूरे पुन्य रूपी कुल सुथर थुनी # ॥ सुनि धाईं सब ब्रज-नारि सहज सिंगार किए। तन पहिरे नौतन चीर, काजर न दिए ।। कसि कंचुकी, तिलक लिलार, सोभित हार हिए । कर कंकन, कंचन थार मंगल साज लिए ।। सुभ स्रवननि तरल तरोन, वेनी सिथिल गुही। सिर वरषत सुमन सुरेस मानों मेघ फुही ॥ उर अंचल उडत न जान्यो सारी सुरंग, सुही । मुख मंडितरोरी रंग सेंदूर मांग छुही ।। ते अपने अपने मेल निकसीं भांति भली । * बृज पूरव पूरे० यह तुक, सूरसागर (नागरी प्र०) पत्र ४२२ में नहीं है । मानों लाल मुनैयनि पांति पिंजरन चूरि चली ।। वे गावें मंगल गीत मिलि दस पांच अली । मानो भोर भए रवि देखि फूली कमल कली ॥ पिय पहिले पहुंचीं जाइ अति आनंद भरी । लई भीतर भवन बुलाइ, सव सिसु पांइ परी ।। एक वदन उघारि निहारि, देत असीस खरी । चिरजीवो जसोदा नंद ! पूरन काम करी ।। धनि दिन, धनि यह राति, धनि यह पहर, घरी । धनि धनि महरि की कूखि भाग सुहाग भरी ।। जिन जायो एसो पूत सत्र सुख फरनि फरी । थिर थाप्यो सव परिवार मन की सूल हरी ॥ सुनि ग्वालनि गांइ वहोरि वालक बोलि लिए । गुहि गुन्जा, घसि धनसार B अंग अंग चित्र ठए । सिर दघि साखन के साट, गावत गीत नए । डफ, झांझ, मृदंग बजावत सव नंद भवन गए ॥ मिलि नाचत, करत किलोल, छिरकत हरद दही । मानो वरपत भादों मास नदी दधि S दूध वही ॥ जाको जहीं जहीं चित जात, कोतिक तहीं नहीं । रस आनंद मगन गुवाल काहू चदत नहीं ।। B वन-धातु अंग चित्र टए (सूरसागर नागरी प्र० S घृत दूध वही ( ) एक धाड़ नंद जू पें जाइ पुनि पुनि पांड़ परें । एक ही मांझ हंमि हंसि अंक P भरें । एक अभरन लेहिं उतारि देत न संक करें । एक दधि रोचन दूध सवनि के सीस धरें । तब नंद न्हाय भए ठाढे अरु कुश हाथ धरे । नांदी-मुख पितर पुजाय अंतर सोच हरे ॥ घसि चंदन चारु मगाय, विप्रनि तिलक करे । द्विज गुरुजन कों पहराय सवनि के पांड़ परे ॥ गन गैयां गनिय न जाय, तरुनी बच्छ वढीं । ते चरहिं जमुना के s काछ, दूने दूध चढीं ॥ खुर रूपे, तामे पीठि, सोने सींग मढीं । ते दीनीं जिनपढ़ी ॥ सव अपने मित्र, सुबंधु हंसि हंसि बोलि लिए । मथि मृगमद मलय कपूर माथे तिलक किए ॥ उर मनिमाला पहिराय, वसन विचित्र दिए । मानों वरपत मास असाढ दादुर मोर जिए ।। वर बंदी, मागध, सूत आंगन भवन भरे । ते बोलें ले ले नाम हित कोऊ ना विसरे ॥ जिन जो जांच्यो सो दीनो, नंदराय ढरे । P मोद भरे । ( सूरसागर नांगरी प्र० ४२३ ) 8 जमुन के तीर (सूरसागर नागरी प्र० ४२४ )
प्रफुलित कमल निमिप + नहिंससि डर गुंजत निगम सुवास ।।दो जहिं सर सुभग मुक्ति मुक्ताफल सुकृत विमल जल पीजे ॥ सोरस छांडि कुबुद्धि विहंगम ! इहां कहा रहि कीजें ? ॥तीन॥ तहां श्री सहस्र सहित नित क्रीडत सोमित 'सूरजंदास' ।। अवन, सुहाय विषय रस छालर वा समुद्र की आस ॥चार॥ यह दसमस्कंध की कारिका में कह्यो हे :"लक्ष्मी-सहस्र लीलाभिः सेव्यमानं कलानिधिम्" तेसे सूरदासजी नें या पद में कह्यो हेः-"तहां श्री सहस्र सहित नित क्रीडत सोभित सूरजदास" । या भांति सों पद किए । तातें जानि परी जो- संपूर्ण सुबोधिनी सूरदास कों फुरी । सो यह पद पहलो करिके ताही समें श्री आचार्यजी महाप्रभुंन को सुनायो । सो सुनिके श्री आचार्यजी महाप्रभु बोहोत प्रसन्न लीला को अभ्यास +सूर-सुधा सत्ताईस का पाठ ? सुकृत अमृत रसशून्य सुकृति विमल o S लछमी सहित होत नित क्रीडा सोभितशून्य भयो पाछे सूरदासजी नें नंद-महोच्छव वर्णन कियो । * राग देवगंधार : व्रज भयो महरि के पूत जब यह बात सुनी । सुन आनंदे सब लोक गोकुल गनक गुनी ॥ ग्रह- लगन नखत पल सोधि कीन्ही वेद-धुनी । व्रज पूरव पूरे पुन्य रूपी कुल सुथर थुनी # ॥ सुनि धाईं सब ब्रज-नारि सहज सिंगार किए। तन पहिरे नौतन चीर, काजर न दिए ।। कसि कंचुकी, तिलक लिलार, सोभित हार हिए । कर कंकन, कंचन थार मंगल साज लिए ।। सुभ स्रवननि तरल तरोन, वेनी सिथिल गुही। सिर वरषत सुमन सुरेस मानों मेघ फुही ॥ उर अंचल उडत न जान्यो सारी सुरंग, सुही । मुख मंडितरोरी रंग सेंदूर मांग छुही ।। ते अपने अपने मेल निकसीं भांति भली । * बृज पूरव पूरेशून्य यह तुक, सूरसागर पत्र चार सौ बाईस में नहीं है । मानों लाल मुनैयनि पांति पिंजरन चूरि चली ।। वे गावें मंगल गीत मिलि दस पांच अली । मानो भोर भए रवि देखि फूली कमल कली ॥ पिय पहिले पहुंचीं जाइ अति आनंद भरी । लई भीतर भवन बुलाइ, सव सिसु पांइ परी ।। एक वदन उघारि निहारि, देत असीस खरी । चिरजीवो जसोदा नंद ! पूरन काम करी ।। धनि दिन, धनि यह राति, धनि यह पहर, घरी । धनि धनि महरि की कूखि भाग सुहाग भरी ।। जिन जायो एसो पूत सत्र सुख फरनि फरी । थिर थाप्यो सव परिवार मन की सूल हरी ॥ सुनि ग्वालनि गांइ वहोरि वालक बोलि लिए । गुहि गुन्जा, घसि धनसार B अंग अंग चित्र ठए । सिर दघि साखन के साट, गावत गीत नए । डफ, झांझ, मृदंग बजावत सव नंद भवन गए ॥ मिलि नाचत, करत किलोल, छिरकत हरद दही । मानो वरपत भादों मास नदी दधि S दूध वही ॥ जाको जहीं जहीं चित जात, कोतिक तहीं नहीं । रस आनंद मगन गुवाल काहू चदत नहीं ।। B वन-धातु अंग चित्र टए एक धाड़ नंद जू पें जाइ पुनि पुनि पांड़ परें । एक ही मांझ हंमि हंसि अंक P भरें । एक अभरन लेहिं उतारि देत न संक करें । एक दधि रोचन दूध सवनि के सीस धरें । तब नंद न्हाय भए ठाढे अरु कुश हाथ धरे । नांदी-मुख पितर पुजाय अंतर सोच हरे ॥ घसि चंदन चारु मगाय, विप्रनि तिलक करे । द्विज गुरुजन कों पहराय सवनि के पांड़ परे ॥ गन गैयां गनिय न जाय, तरुनी बच्छ वढीं । ते चरहिं जमुना के s काछ, दूने दूध चढीं ॥ खुर रूपे, तामे पीठि, सोने सींग मढीं । ते दीनीं जिनपढ़ी ॥ सव अपने मित्र, सुबंधु हंसि हंसि बोलि लिए । मथि मृगमद मलय कपूर माथे तिलक किए ॥ उर मनिमाला पहिराय, वसन विचित्र दिए । मानों वरपत मास असाढ दादुर मोर जिए ।। वर बंदी, मागध, सूत आंगन भवन भरे । ते बोलें ले ले नाम हित कोऊ ना विसरे ॥ जिन जो जांच्यो सो दीनो, नंदराय ढरे । P मोद भरे । आठ जमुन के तीर
माप से मी. मे. राजस्थानी - हिन्दी हस्तलिखित ग्रन्थ- सूची, भाग 4 ( ऐतिहासिक काव्य ) [ 57 54 वां पूर्ण/ अपूर्ण (वि सवत्) पत्राङ्क 6 पर जेठमल कृत "चुगली" का कवित्त है । पत्राक 44-46 पर स्फुट प्रास्ताविक छन्द हैं । अन्त मे एक कवित्त है ।
माप से मी. मे. राजस्थानी - हिन्दी हस्तलिखित ग्रन्थ- सूची, भाग चार [ सत्तावन चौवन वां पूर्ण/ अपूर्ण पत्राङ्क छः पर जेठमल कृत "चुगली" का कवित्त है । पत्राक चौंतालीस-छियालीस पर स्फुट प्रास्ताविक छन्द हैं । अन्त मे एक कवित्त है ।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लिखे एक आलेख में कहा कि विभाजनकारी राजनीति तात्कालिक फ़ायदा भले पहुंचाए लेकिन यह देश की प्रगति में बाधा खड़ी करती है. जग्गी वासुदेव की ईशा फाउंडेशन द्वारा ढाई करोड़ रुपये से अधिक के टेलीफोन बिल का भुगतान नहीं किया गया है. फाउंडेशन का कहना है कि आश्रम से इतनी बड़ी संख्या में कॉल्स नहीं हुई है और वहां स्थित निजी एक्सचेंज को नींव से हैक करने से इतना बिल आया है. बीएसएनएल इसके ख़िलाफ़ मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा है. 5 अक्टूबर 2020 को केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और तीन अन्य को हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय गिरफ़्तार किया गया था. पुलिस का आरोप है कि आरोपी क़ानून-व्यवस्था ख़राब करने के लिए हाथरस जा रहा था. कप्पन पर पीएफआई से जुड़े होने का भी आरोप है. 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' के तहत संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से कॉमिक बुक 'अमर चित्र कथा' ने 'स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी नेता' नामक एक संग्रह प्रकाशित किया था, जिसमें ब्रिटिशराज के मणिपुरी सेनानायक पाउना ब्रजवासी की कहानी को भी शामिल किया था. मणिपुर के छात्र संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि ब्रजवासी न तो आदिवासी थे और न ही उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया था. आज़ादी के 75 सालः हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी क़ैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है. नोएडा की ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी में एक महिला से अभद्रता के आरोपी नेता श्रीकांत त्यागी की पत्नी अनु त्यागी ने कहा है कि उन्होंने अपनी पति को भाजपा के कई कार्यक्रमों और रैली में शामिल होते देखा है. उन्हें इस बात पर आश्चर्य है कि अब पार्टी ने उनसे किनारा कर लिया गया है. भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 4,42,06,996 बढ़कर हो गई है और इस महामारी से जान गंवाने वालों का आंकड़ा 5,26,879 है. विश्व में संक्रमण के 58. 74 करोड़ से ज़्यादा मामले सामने आए हैं और अब तक 64. 27 लाख से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने एक समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता तब तक सुरक्षित रहेगी, जब तक पत्रकार प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से डरे बिना सत्ता से सच कह सकते हैं. भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में आरोपी 83 वर्षीय वरवरा राव ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें स्थायी चिकित्सा ज़मानत के उनके आवेदन को ख़ारिज कर दिया गया था. राव अभी चिकित्सकीय आधार पर अंतरिम ज़मानत पर हैं. 2019 में लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्र की सत्ता में भाजपा के आने के 18 महीनों के भीतर उसके दो पुराने सहयोगियों- शिवसेना और अकाली दल ने उससे नाता तोड़ लिया था. अब जद (यू) ऐसा करने वाला उसका तीसरा प्रमुख राजनीतिक सहयोगी है. नीतीश कुमार ने मंगलवार को एनडीए के मुख्यमंत्री के तौर पर अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को सौंपने के बाद सर्वसम्मति से 'महागठबंधन' का नेता चुने जाने पर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया. उन्होंने बताया कि महागठबंधन में निर्दलीय विधायकों समेत सात दलों के 164 विधायक शामिल हैं. बीना नगर पालिका ने हिंदी और बुंदेली के जाने-माने कवि महेश कटारे 'सुगम' को नोटिस भेजते हुए दावा किया है कि उनका घर अवैध निर्माण है. वहीं, कटारे का कहना है कि उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज़ और अनुमतियां हैं और वे नियमित रूप से गृह कर भी जमा करवाते रहे हैं. पिछले 18 महीनों में गुजरात सूचना आयोग ने दस लोगों को जीवनभर आरटीआई आवेदन दायर करने से बैन करते हुए कहा कि वे 'सरकारी अधिकारियों को परेशान करने के लिए आरटीआई अधिनियम का इस्तेमाल' करते हैं. आयोग ने एक शख़्स पर आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर पांच हज़ार रुपये जुर्माना भी लगाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने लोगों को वोट के लिए मुफ़्त उपहार देने को 'रेवड़ी संस्कृति' क़रार देते हुए कहा था कि यह देश के विकास के लिए बहुत ख़तरनाक है. अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा है कि आम नागरिकों को मुफ़्त शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली देने में ग़लत क्या है?
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लिखे एक आलेख में कहा कि विभाजनकारी राजनीति तात्कालिक फ़ायदा भले पहुंचाए लेकिन यह देश की प्रगति में बाधा खड़ी करती है. जग्गी वासुदेव की ईशा फाउंडेशन द्वारा ढाई करोड़ रुपये से अधिक के टेलीफोन बिल का भुगतान नहीं किया गया है. फाउंडेशन का कहना है कि आश्रम से इतनी बड़ी संख्या में कॉल्स नहीं हुई है और वहां स्थित निजी एक्सचेंज को नींव से हैक करने से इतना बिल आया है. बीएसएनएल इसके ख़िलाफ़ मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा है. पाँच अक्टूबर दो हज़ार बीस को केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और तीन अन्य को हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय गिरफ़्तार किया गया था. पुलिस का आरोप है कि आरोपी क़ानून-व्यवस्था ख़राब करने के लिए हाथरस जा रहा था. कप्पन पर पीएफआई से जुड़े होने का भी आरोप है. 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' के तहत संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से कॉमिक बुक 'अमर चित्र कथा' ने 'स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी नेता' नामक एक संग्रह प्रकाशित किया था, जिसमें ब्रिटिशराज के मणिपुरी सेनानायक पाउना ब्रजवासी की कहानी को भी शामिल किया था. मणिपुर के छात्र संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि ब्रजवासी न तो आदिवासी थे और न ही उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया था. आज़ादी के पचहत्तर सालः हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी क़ैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है. नोएडा की ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी में एक महिला से अभद्रता के आरोपी नेता श्रीकांत त्यागी की पत्नी अनु त्यागी ने कहा है कि उन्होंने अपनी पति को भाजपा के कई कार्यक्रमों और रैली में शामिल होते देखा है. उन्हें इस बात पर आश्चर्य है कि अब पार्टी ने उनसे किनारा कर लिया गया है. भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों की संख्या चार,बयालीस,छः,नौ सौ छियानवे बढ़कर हो गई है और इस महामारी से जान गंवाने वालों का आंकड़ा पाँच,छब्बीस,आठ सौ उन्यासी है. विश्व में संक्रमण के अट्ठावन. चौहत्तर करोड़ से ज़्यादा मामले सामने आए हैं और अब तक चौंसठ. सत्ताईस लाख से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने एक समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता तब तक सुरक्षित रहेगी, जब तक पत्रकार प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से डरे बिना सत्ता से सच कह सकते हैं. भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में आरोपी तिरासी वर्षीय वरवरा राव ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें स्थायी चिकित्सा ज़मानत के उनके आवेदन को ख़ारिज कर दिया गया था. राव अभी चिकित्सकीय आधार पर अंतरिम ज़मानत पर हैं. दो हज़ार उन्नीस में लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्र की सत्ता में भाजपा के आने के अट्ठारह महीनों के भीतर उसके दो पुराने सहयोगियों- शिवसेना और अकाली दल ने उससे नाता तोड़ लिया था. अब जद ऐसा करने वाला उसका तीसरा प्रमुख राजनीतिक सहयोगी है. नीतीश कुमार ने मंगलवार को एनडीए के मुख्यमंत्री के तौर पर अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को सौंपने के बाद सर्वसम्मति से 'महागठबंधन' का नेता चुने जाने पर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया. उन्होंने बताया कि महागठबंधन में निर्दलीय विधायकों समेत सात दलों के एक सौ चौंसठ विधायक शामिल हैं. बीना नगर पालिका ने हिंदी और बुंदेली के जाने-माने कवि महेश कटारे 'सुगम' को नोटिस भेजते हुए दावा किया है कि उनका घर अवैध निर्माण है. वहीं, कटारे का कहना है कि उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज़ और अनुमतियां हैं और वे नियमित रूप से गृह कर भी जमा करवाते रहे हैं. पिछले अट्ठारह महीनों में गुजरात सूचना आयोग ने दस लोगों को जीवनभर आरटीआई आवेदन दायर करने से बैन करते हुए कहा कि वे 'सरकारी अधिकारियों को परेशान करने के लिए आरटीआई अधिनियम का इस्तेमाल' करते हैं. आयोग ने एक शख़्स पर आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर पांच हज़ार रुपये जुर्माना भी लगाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने लोगों को वोट के लिए मुफ़्त उपहार देने को 'रेवड़ी संस्कृति' क़रार देते हुए कहा था कि यह देश के विकास के लिए बहुत ख़तरनाक है. अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा है कि आम नागरिकों को मुफ़्त शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली देने में ग़लत क्या है?
है वह जैसा चाहता है, वैसा हो जाता है । कालवादी कहते हैं कि कर्त्ता-हर्त्ता काल ही हैं। वे लोग अपने कथन की पुष्टि में कहते हैं, कि, 'काल होने पर ही, जी काल होने पर ही, बुढ़ापा आता है । काल होने पर ही, स्त्रियाँ बालक प्रसव करती हैं और वृक्ष फूल फलते हैं । 'काल होने पर ही गर्मी सर्दी और वर्षा भी होती है। इस प्रकार प्रत्येक कार्य, काल से ही होता है, बिना काल, कुछ नहीं होता। इसी के अनुसार, काल होने पर, आत्मा को स्वर्ग जाना पड़ता है और काले होनेपर नरक जाना पड़ता है। काल होने पर, सुख मिलता है, और काल होने पर दुःख मिलता है । तात्पर्य यह कि सब कुछ काल ही करता है और काल ही से सब कुछ होता भी है ।' स्वभाववादी कहता है, कि 'काल कर्त्ता नहीं है, किन्तु स्वभाव कर्त्ता है। जो कुछ होता है, स्वभाव से ही होता है, काल आदि किसी के किये कुछ भी नहीं होता । यदि काल ही कर्ता है, काल से ही सब कुछ होता है, तो काल तो सब पर वर्तता है ! फिर एक का काम होता है, और दूसरे का काम क्यों नहीं होता ? काल होने पर भी एक स्त्री के तो बालक होता है और दूसरी स्त्री के क्यों नहीं होता ? एक ही बाग के कुछ वृक्ष तो फलते हैं और कुछ वृक्ष काल होने पर भी क्यों नहीं फलते ? एक बूक्ष में आम लगते हैं, दूसरे में नीबू क्यों लगते हैं ? सब में श्रम क्यों नहीं लगते ? काल तो सब पर समानता से वर्तता है, फिर इस प्रकार की विषमता क्यों ? इन बातों पर दृष्टि देने से काल, कर्त्ता नहीं ठहरता, किन्तु स्वभाव कर्त्ता ठहरता है। जो कुछ होता है, स्वभाव से ही होता है । स्वभाव होने पर ही स्त्री के वालक होते हैं और वृक्ष में फल लगते हैं। इसी प्रकार जिस वृक्ष में, आम का फल लगने का स्वभाव होता है, उसमें, श्रम का फल लगता है और जिसमें नींबू का फल लगने का स्वभाव होता है उसमें, नींबू का फल लगता है ! जिसमें नरक का स्वभाव होता है, वह नरक जाता है और जिसमें स्वर्ग का स्वभाव होता है, वह स्वर्ग जाता है। जिसमें सुख का स्वभाव होता है, वह सुख पाता है, और जिसमें दुःख का स्वभाव होता है, वह दुःख पाता है। इस प्रकार, सब कुछ स्वभाव से ही होता है। स्वभाव ही, प्रत्येक बात का कर्त्ता है, काल आदि कोई भी कर्त्ता नहीं है।' होनहारवादी, काल तथा स्वभाव आदि को न कुछ बताकर कहता है, कि 'जो कुछ होता है, होनहार से ही होता है। होनहार ही कर्त्ता है, दूसरा कोई भी कर्त्ता नहीं है। स्वभाववादी ने, कालवादी को झूठा ठहरा कर, स्वभाव को कत्र्ता बताया है, लेकिन स्वभाव भी कर्त्ता नहीं है, कर्त्ता तो होनहार ही है। यदि स्वभाव ही कर्त्ता हो, तो दो स्त्रियों में से एक के तो पहले बालक हुआ और दूसरी के बहुत समय पश्चात् बालक क्यों हुआ ? बालक उत्पन्न करने का स्वभाव तो इस दूसरी में भी था, फिर इतने बिलम्ब का क्या कारण ? स्वभाव होने पर भी पहले बालक नहीं हुआ और फिर बालक हुआ, इससे सिद्ध है, कि जो कुछ होता है, होनहार से ही होता है ।' ईश्वर को कर्त्ता मानने वाले लोग कहते हैं, कि 'जो कुछ होता है, वह सब ईश्वर के करने से ही होता है । काल, स्वभाव या होनहार कर्त्ता नहीं है, किन्तु ईश्वर ही कर्त्ता है। प्रत्येक बात, ईश्वर के करने से ही होती है। वह चाहता है, तो स्वर्ग भेज देता है और वह चाहता है, तो नरक भेज देना है । वह चाहता है, तो दुःख देता है और वह चाहता है तो सुख देता है । वह चाहता है तो स्त्री बालक प्रसव करती है, और वह नहीं चाहता है, तो प्रसव नहीं करती है। इस प्रकार सब कुछ ईश्वर के ही करने से होता है, किसी और के किये कुछ भी नहीं होता ।' इस प्रकार भिन्न-भिन्न मत के लोगों ने, संसार को चक्कर में डाल रखा है, लेकिन सनाथी मुनि कहते हैं, कि आत्मा ही कर्त्ता इर्ता और भोक्ता है! दूसरा कोई न तो कर्त्ता है, न दर्ता है, न करानेवाला या भोगनेवाला ही है । यद्यपि जैन-शास्त्र आत्मा को ही कर्ता बताते हैं, लेकिन ऊपर कहे हुए मतवादियों की युक्ति का, युक्तियुक्त उत्तर दिये बिना, साधारण लोगों की समझ में यह बात नहीं सकती किम कर्त्ता-हर्त्ता कैसे है । इसलिए युक्ति द्वारा मतवादियों की युक्तियों का खण्डन किया जाता है 1 सबसे पहले, हम, कालवादी से पूछते हैं, कि काल जड़ हैं, या चैतन्य ? काल, चैतन्य तो हो नहीं सकता क्योंकि, समय का नाम 'काल' है - इसलिए काल, जड़ ही ठहरता है । काल, जड़ है और चैतन्य है । जड़ काल, जब अपने आप को ही नहीं समझता है, तब वह, चैतन्य आत्मा के विषय में कुछ करने के लिए समर्थ कैसे हो सकता है ? चैतन्य आत्मा को, जड़-काल के अधीन समझना; चेतन्य आत्मा के लिए, जड़ कॉल को कर्त्ता मानना कौनसी बुद्धिमानी है ? जड़ काल के अधीन चैतन्य आत्मा को मानना, चैतन्य को जड़ बनाना है। इस कारण, काल, कदापि कर्त्ता नहीं माना जा सकता । काल की ही तरह; स्वभाव के लिए भी यही प्रश्न होता है, कि 'स्वभाव' जड़ है, या चैतन्य ? यदि कहें कि जड़ है, तो फिर काल की ही तरह स्वभाव भी, चैतन्य कैसे हो सकता है और चैतन्य आत्मा को, जड़ स्वभाव के अधीन कैसे माना जा सकता है ? यदि कहो, कि स्वभाव चैतन्य है, तो से मित्र है, या अभिन्न ? यदि फिर महक ठहरता है, स्वभाव, कर्त्ता स्वभाव अपनी इच्छानुसार बना सकता है । क्षमावान् से से क्षमावान्द, चोर से साहूकार और साहूकार से चोर होते देखे से जाते हैं। इस प्रकार, स्वभाव में परिवर्तन होता है, जो सर्वथा के अधीन है। इसलिए, स्वभाव कर्त्ता नहीं हो सकता । यह बात दूसरी है, कि आत्मा के अधीन रहकर, स्वभाव, कर्तृत्व में भी भाग लेता हो, लेकिन इस कारण, स्वभाव कर्त्ता नहीं कहा जा सकता । कर्त्ता तो वही कहा जावेगा, जिसकी कर्तृत्व में प्रधानता है । रही होनहार की बात; लेकिन होनहार तो कुछ है ही नहीं होनहार को कर्त्ता मानना, असत् को सत् मानना है । हम होनहारवादी से पूछते हैं कि एक रसोई बनानेवाला, रसोई बनाने की सब, सामग्री लेकर बैठा रहे, रसोई न बनावे, किन्तु यह मानता रहे या कहा करे, कि 'रसौई बननी होगी, तो बन जावेगी !" तो क्या इस प्रकार बैठे रहने पर, रसोई बन सकती है ? यदि बिना बनाये रसोई नहीं बन सकती, तो फिर होनहार को कर्त्ता मानना तथा उसके भरोसे बैठे रहना, कैसे उचित है ? यदि होनेवाले कार्य को ही होनहार कहा जावे, तो उस होनेवाले कार्य का कर्त्ता तो आत्मा ही रहा न ? जब आत्मा ही कर्ता है, तब फिर होनहार को कर्त्ता कैसे माना जा सकता है ? अब ईश्वर को कर्त्ता माननेवाले लोगों से हम पूछते हैं, कि ईश्वर का अस्तित्व आत्मा के अन्तर्गत ही है, या आत्मा से भिन्न यदि के अन्तर्गत ही ईश्वर का अस्वित्व है, तब तो चाहे ईश्वर को कर्त्ता कहो, या आत्मा को कर्त्ता कहो, एक ही बात है। फिर तो कोई मतभेद ही नहीं है। लेकिन यदि यह कहो, कि ईश्वर का अस्तित्व आत्मा से भिन्न है, ईश्वर एक व्यक्ति विशेष सनाथ-अनाथ निरगय है और जो कुछ करता है, वही करता है, आत्मा के किये कुछ नहीं होता; तो इसका अर्थ तो यह हुआ कि आत्मा एक मशीन है और ईश्वर उसका संचालक है ! दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि आत्मा एक मिट्टों का ढेला है और मिट्टी के ढेले के बर्तन बनानेवाला कुम्हार है ! या यों कहा जा सकता है कि आत्मा बन्दर है, और ईश्वर मदारी ! ईश्वर-रूपी मदारी, आत्मा-रूपी चन्दर को जैसा सिखलाता और नचाता है, उसे उसी प्रकार नाचना होता है ! ईश्वर को, इस प्रकार का कर्ता मानने पर तो बड़ी गड़बड़ होती है । संसार अनावस्था दोष से परिपूर्ण हो जाता है ! फिर तो धर्म करने की भी आवश्यकता नहीं रहती। क्योंकि, चाहे धर्म करो या पाप, होगा वही, जो ईश्वर चाहेगा ! धर्म करने से कोई लाभ न होगा ! इसी प्रकार, यह भी मानना होगा, कि यदि म करता है, तो ईश्वर की प्रेरणा से और पाप करता है, तो ईश्वर की प्रेरणा से ! अच्छा बुरा, ईश्वर की प्रेरणा से ही करता है । सब ईश्वर ही करता कराता है । लेकिन यदि ऐसा है, तो यह प्रश्न होता है, कि फिर आत्मा को नरकादि के कष्ट क्यों भोगने पड़ते हैं ? आत्मा ने, स्वयं तो कुछ किया नहीं, जो कुछ किया, वह ईश्वर के कराने से किया, फिर बिना किये का फल, आत्मा को क्यों भोगना पड़े ? ईश्वर के सम्मुख, आत्मा तो एक मिट्टी के ढेले के समान, या एक मदारी के बन्दर के समान निरधिकारी है ! स्वयं कुछ करने की शक्ति नहीं रखता है ! फिर भी यदि सनाथ- श्रनाथ निर्णय ईश्वर उसे नरक भेजता है, तब तो ईश्वर अन्यायी ठहरा ! उसने स्वयं ही, आत्मा से बुरा काम कराया और फिर भी उसे नरक में भेज दिया, इससे अधिक और क्या होगा ? ऐसा अन्याय तो मनुष्य भी नहीं करता ! मनुष्य भी अपने सेवक द्वारा कराये हुए अच्छे बुरे कार्य के परिणाम को, स्वयं भोगता है, नौकर पर नहीं डालता । एक व्यापारी का मुनीम, यदि नुकसान का सौदा कर बैठता है, तो उस नुकसान को भी व्यापारी ही उठाता है, मुनीम को नहीं उठाना पड़ता । फिर जो ईश्वर स्वयं ही आत्मा से पाप करावे, वही उस आत्मा को नरक भेज दे, यह न्यायोचित कैसे है ? उचित तो यह है, कि ईश्वर, प्रत्येक आत्मा को कुछ न कुछ इनाम ही दें, फिर चाहे द्वारा बुरा ही काम सम्पादन क्यों न हुआ हो ! क्योंकि बुरा काम करके भी, आत्मा ने, ईश्वर की आज्ञा का पालन ही किया हैं, और आज्ञा का पालन करने के कारण, आत्मा तो पुरस्कार का ही अधिकारी है आत्मा से, ईश्वर ही सब कुछ कराता हो, अधिकार न रखता हो, तब तो फिर, संसार में, किसी प्रकार का सदुपदेश देने, या धर्म का प्रचार करने आदि की भी आवश्यकता नहीं रहती ! क्योंकि आत्मा तो दूसरे के अधीन है, इसलिए उस पर उपदेश का कोई असर नहीं हो सकता और ईश्वर को उपदेश की आवश्यकता ही क्या है ? यदि यह कहा जावे, कि ईश्वर की प्रेरणा से ही, एक आत्मा, दूसरे आत्मा को उपदेश देता है, तो यह बात ठीक नहीं जँचती। क्योंकि वही ईश्वर, चोरी त्यागने का उपदेश दिलावे और वही ईश्वर चोरी करने की प्रेरणा करे, यह कैसे सम्भव है ! ईश्वर को कर्त्ता मानने पर, इसी प्रकार के बहुत से ऐसे प्रश्न उत्पन्न होते हैं, जिनका समाधान होना कठिन है ईश्वर को कर्त्ता मानने वाले लोग ईश्वर-कर्तृत्व के विषय में, एक यह दलील देते हैं, कि 'ईश्वर को कर्त्ता न मानने से, संसार अन्य फैल जावेगा ! लोगों को, पुण्य-पांप का फल देनेवाला कोई न रहेगा। कोई भी अपराधी, स्वयं दण्ड नहीं भुगतना चाहता । स्वयं जेल जाना, किसी को भी पसन्द नहीं है । स्वेच्छापूर्वक, कोई भी दुःख नहीं सहना चाहता, सब सुन ही चाहते हैं। इसलिए, जिस प्रकार राजा के न होने पर अन्याय अपराध बढ़ जायेंगे, अपराधियों को दण्ड और अच्छे काम करनेवालों को पुरस्कार देनेवाला कोई न रहेगा, जिससे व्यवस्था में गड़बड़ होगी और अशान्ति बढ़ जावेगी; इसी प्रकार, यदि ईश्वर न हो, तो पाप-पुण्य का फल कौन दे ? ईश्वर कर्त्ता है, तभी तो पापियों को दण्ड और पुण्यात्माओं को सुख मिलता है ! यदि ईश्वर कर्त्ता न हो, तो यह व्यवस्था न रहे !" इस प्रकार, राजा का उदाहरण देकर, ईश्वर-कर्तृत्व सिद्ध करते हैं, लेकिन इस दलील पर भी कई प्रश्न होते हैं। सब से पहला प्रश्न तो यही होता है कि जब ईश्वर ही मा से पुण्य पाप करता है, तब उसका फल क्यों भोगे ? दूसरा प्रश्न यह होता है कि बहुत स्थानों पर, राजा नहीं होता है, बिना राजा के ही काम चलता है, तो क्या इसी प्रकार, कहीं-कहीं बिना ईवर के भी काम चलता है ? तीसरा प्रश्न यह है कि कहीं-कहीं राजा का अस्तित्व ही उठ गया है और सम्भव है कि सभी जगह से उठ जावे, तो क्या ऐसा ईश्वर के लिए भी हो सकता है ? चौथा प्रश्न यह है कि राजा का परिवर्तन भी होता रहता है और उसके नियम भी बदलते रहते हैं, तो क्या ऐसे ही ईश्वर और उसके नियम परिवर्तनशील हैं ? सबसे बड़ा प्रश्न यह होता है कि एक आदमी, चोरी कर रहा है। यह चोरी का पाप, वह आदमा, पूर्व- पाप के दण्ड स्वरूप कर रहा है। या नया पाप, कर है ? यदि यह कहो, कि पूर्व- पाप के दण्ड स्वरूप कर रहा तब तो यह हुआ कि ईश्वर पाप का दण्ड देने के लिए, पाप कराता है । फिर तो किसी की 'चोरी मत करो !' उपदेश, ईश्वरीय व्यवस्था में हस्तक्षेप करना - अपराध होगा ! यदि यह कहा जावे, कि वह चोरी करनेवाला, नया पाप कर रही है, तो ईश्वर की प्रेरणा से कर रहा है, या स्वेच्छा से ? यदि ईश्वर की प्रेरणा से कर रहा है, तब तो यह हुआ कि ईश्वरं पाप कराता है और स्वयं पाप करा कर भी, पाप का दण्ड देता है। यदि यह कहा जावे, कि पाप करने के लिए, आत्मा स्वतन्त्र है, इसीलिए वह स्वेच्छा स्खे पाप कर रहा है, तब भी यह प्रश्न होता है, कि पाप हो जाने पर उसका दण्ड देने के बदले, ईश्वर, पाप करने वाले को, पाप करने के समय ही क्यों नहीं रोक देता ? पाप करने देकर फिर दण्ड देने से, इश्वर को क्या लाभ ? वह दयालु कहाता है, फिर किसी को दुःख में पड़ने या किसी के पास दुःख रहने ही क्यों देता है ? ईवर को कर्त्ता सिद्ध करने के लिए दी जाने वाली समस्त दलीलें, इसी प्रकार लचर ठहरती हैं। हाँ, ईश्वर को निमित्त रूप कर्ता तो जैन-शास्त्र भी मानते हैं, लेकिन ईश्वर को उपदान कर्त्ता मानने, एवं आत्मा को-जो प्रत्यक्ष ही कर्त्ता भोक्ता है-अकर्त्ता मानने का कोई कारण नहीं है। यदि आत्मा को ही शुद्ध प्ररुपणा के अनुसार ईश्वर माना जावे, तव तो ईश्वर को कर्त्ता मानने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ईश्वर को व्यक्ति विशेष और मा से भिन्न मान कर कर्त्ता मानना, ठीक नहीं है। गीता में भी कहा हैन कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः ॥ अध्याय ५ वां । अर्थात् - ईश्वर न तो संसार के कर्तृत्व में है, न कर्मों की सृष्टि करने में ही है । इस प्रकार गीता के अनुसार भी, ईश्वर कर्त्ता नहीं है । के कर्म करने में स्वतंत्र है, लेकिन कर्मबन्ध हो जाने परम कर्म के आधीन हो जाता है। फिर को, कर्मों का अच्छा बुरा फल - विपाक या प्रदेश से भोगना ही पड़ता है। कर्म का फल भुगताने वाला कोई दूसरा नहीं है, किन्तु कर्म स्वयं ही अपना फल उसी प्रकार भुगताते हैं, जिस प्रकार मिश्री और मिर्ची, अपना मीठापन और कडुन देती है। मिश्री को मुँह में रखने पर मीठापन और मिर्च को मुँह में रखने पर कडुआपन, आप ही मालूम होता है । इस मीठेपन या कडुएपन के देने में, किसी और की सहयता- प्रेरणा या शक्ति नहीं होती । यदि किसी दूसरे की प्रेरणा या शक्ति से मिर्च और मिश्री, कडुआपन या मीठापन दे, तो इसका अर्थ यह होगा कि मिर्च और मिश्री में, स्वभावतः कडुआपन या मीठापन नहीं है। लेकिन वास्तव में, मिर्च और मिश्री, किसी की प्रेरणा से कडुआपन या मीठापन नहीं देती है, किन्तु उनमें, मुँह में रखने पर कडुआपन और मीठापन देने का स्वभाव ही है । ठीक इसी प्रकार, कर्म में फल भुगताने की शक्ति स्वभावतः है । शुभ कर्म का शुभ फल और और अशुभ कर्म का अशुभ फल, कर्म अपने स्वभाव से ही भुगताते हैं । इसमें किसी तीसरे की आवश्यकता नहीं है । यदि कर्म का फल कोई तीसरा भुगताता हो, तो इसका अर्थ यह होगा कि कर्म फल भुगताने की शक्ति नहीं रखते। लेकिन यह बात नहीं है। मिर्च और मिश्री की तरह, कर्म में भी अच्छा-बुरा फल भुगताने की शक्ति है, इसलिए कर्म-फल भुगताने के लिए, ईश्वर की आवश्यकता नहीं होती । रही यह बात, कि फिर आत्मा, स्वर्ग या मोक्ष क्यों नहीं चला जाता ? इसका उत्तर यह है, कि जैन शास्त्रों के समीप स्वर्ग कोई महत्वपूर्ण स्थान नहीं है। जैन-शास्त्र, स्वर्ग को भी कर्म-फल भोगने का वैसा ही एक स्थान मानते हैं, जैसा कि नरक को । हाँ, यह अन्तर अवश्य मानते हैं, कि स्वर्ग में शुभ कर्मों का फल भुगता जाता है और नरक में अशुभ कर्मों का फल भुगता जाता है। शुभ कर्म भोगने के लिए, आत्मा को स्वर्ग जाना पड़ता है, इसलिए यदि आत्मा स्वर्ग चला भी गया, तब भी कोई विशेपता की बात नहीं हुई । अब केवल मोक्ष जाने की बात रही, लेकिन जब तक आत्मा के साथ कर्म हैं, आत्मा, मोक्ष जा ही कैसे सकता है और कर्म रहित होने पर आत्मा को मोक्ष से रोक ही कौन सकता है ? कर्म-रहित आत्मा का नाम ही 'मुक्तात्मा' है। आत्मा साथ कर्म न होने को ही मोक्ष कहते हैं । यदि कर्मो को नष्ट कर दे, तो वह मुक्त ही है । सारांश यह, कि काल, स्वभाव, होनहार, या ईश्वर को कर्त्ता मानना, भयंकर भूल है । इस भूल से, आत्मा, अनाथता में पड़ता है। कर्त्ता, कोई दूसरा नहीं है, किन्तु आत्मा ही है। इसीप्रकार, फल देने वाला भी कोई दूसरा नहीं है, किन्तु कर्म, अपना फल आप ही भुगता देते हैं । इसलिए आत्मा ही कर्त्ता, र्हात्त और भोक्ता है !
है वह जैसा चाहता है, वैसा हो जाता है । कालवादी कहते हैं कि कर्त्ता-हर्त्ता काल ही हैं। वे लोग अपने कथन की पुष्टि में कहते हैं, कि, 'काल होने पर ही, जी काल होने पर ही, बुढ़ापा आता है । काल होने पर ही, स्त्रियाँ बालक प्रसव करती हैं और वृक्ष फूल फलते हैं । 'काल होने पर ही गर्मी सर्दी और वर्षा भी होती है। इस प्रकार प्रत्येक कार्य, काल से ही होता है, बिना काल, कुछ नहीं होता। इसी के अनुसार, काल होने पर, आत्मा को स्वर्ग जाना पड़ता है और काले होनेपर नरक जाना पड़ता है। काल होने पर, सुख मिलता है, और काल होने पर दुःख मिलता है । तात्पर्य यह कि सब कुछ काल ही करता है और काल ही से सब कुछ होता भी है ।' स्वभाववादी कहता है, कि 'काल कर्त्ता नहीं है, किन्तु स्वभाव कर्त्ता है। जो कुछ होता है, स्वभाव से ही होता है, काल आदि किसी के किये कुछ भी नहीं होता । यदि काल ही कर्ता है, काल से ही सब कुछ होता है, तो काल तो सब पर वर्तता है ! फिर एक का काम होता है, और दूसरे का काम क्यों नहीं होता ? काल होने पर भी एक स्त्री के तो बालक होता है और दूसरी स्त्री के क्यों नहीं होता ? एक ही बाग के कुछ वृक्ष तो फलते हैं और कुछ वृक्ष काल होने पर भी क्यों नहीं फलते ? एक बूक्ष में आम लगते हैं, दूसरे में नीबू क्यों लगते हैं ? सब में श्रम क्यों नहीं लगते ? काल तो सब पर समानता से वर्तता है, फिर इस प्रकार की विषमता क्यों ? इन बातों पर दृष्टि देने से काल, कर्त्ता नहीं ठहरता, किन्तु स्वभाव कर्त्ता ठहरता है। जो कुछ होता है, स्वभाव से ही होता है । स्वभाव होने पर ही स्त्री के वालक होते हैं और वृक्ष में फल लगते हैं। इसी प्रकार जिस वृक्ष में, आम का फल लगने का स्वभाव होता है, उसमें, श्रम का फल लगता है और जिसमें नींबू का फल लगने का स्वभाव होता है उसमें, नींबू का फल लगता है ! जिसमें नरक का स्वभाव होता है, वह नरक जाता है और जिसमें स्वर्ग का स्वभाव होता है, वह स्वर्ग जाता है। जिसमें सुख का स्वभाव होता है, वह सुख पाता है, और जिसमें दुःख का स्वभाव होता है, वह दुःख पाता है। इस प्रकार, सब कुछ स्वभाव से ही होता है। स्वभाव ही, प्रत्येक बात का कर्त्ता है, काल आदि कोई भी कर्त्ता नहीं है।' होनहारवादी, काल तथा स्वभाव आदि को न कुछ बताकर कहता है, कि 'जो कुछ होता है, होनहार से ही होता है। होनहार ही कर्त्ता है, दूसरा कोई भी कर्त्ता नहीं है। स्वभाववादी ने, कालवादी को झूठा ठहरा कर, स्वभाव को कत्र्ता बताया है, लेकिन स्वभाव भी कर्त्ता नहीं है, कर्त्ता तो होनहार ही है। यदि स्वभाव ही कर्त्ता हो, तो दो स्त्रियों में से एक के तो पहले बालक हुआ और दूसरी के बहुत समय पश्चात् बालक क्यों हुआ ? बालक उत्पन्न करने का स्वभाव तो इस दूसरी में भी था, फिर इतने बिलम्ब का क्या कारण ? स्वभाव होने पर भी पहले बालक नहीं हुआ और फिर बालक हुआ, इससे सिद्ध है, कि जो कुछ होता है, होनहार से ही होता है ।' ईश्वर को कर्त्ता मानने वाले लोग कहते हैं, कि 'जो कुछ होता है, वह सब ईश्वर के करने से ही होता है । काल, स्वभाव या होनहार कर्त्ता नहीं है, किन्तु ईश्वर ही कर्त्ता है। प्रत्येक बात, ईश्वर के करने से ही होती है। वह चाहता है, तो स्वर्ग भेज देता है और वह चाहता है, तो नरक भेज देना है । वह चाहता है, तो दुःख देता है और वह चाहता है तो सुख देता है । वह चाहता है तो स्त्री बालक प्रसव करती है, और वह नहीं चाहता है, तो प्रसव नहीं करती है। इस प्रकार सब कुछ ईश्वर के ही करने से होता है, किसी और के किये कुछ भी नहीं होता ।' इस प्रकार भिन्न-भिन्न मत के लोगों ने, संसार को चक्कर में डाल रखा है, लेकिन सनाथी मुनि कहते हैं, कि आत्मा ही कर्त्ता इर्ता और भोक्ता है! दूसरा कोई न तो कर्त्ता है, न दर्ता है, न करानेवाला या भोगनेवाला ही है । यद्यपि जैन-शास्त्र आत्मा को ही कर्ता बताते हैं, लेकिन ऊपर कहे हुए मतवादियों की युक्ति का, युक्तियुक्त उत्तर दिये बिना, साधारण लोगों की समझ में यह बात नहीं सकती किम कर्त्ता-हर्त्ता कैसे है । इसलिए युक्ति द्वारा मतवादियों की युक्तियों का खण्डन किया जाता है एक सबसे पहले, हम, कालवादी से पूछते हैं, कि काल जड़ हैं, या चैतन्य ? काल, चैतन्य तो हो नहीं सकता क्योंकि, समय का नाम 'काल' है - इसलिए काल, जड़ ही ठहरता है । काल, जड़ है और चैतन्य है । जड़ काल, जब अपने आप को ही नहीं समझता है, तब वह, चैतन्य आत्मा के विषय में कुछ करने के लिए समर्थ कैसे हो सकता है ? चैतन्य आत्मा को, जड़-काल के अधीन समझना; चेतन्य आत्मा के लिए, जड़ कॉल को कर्त्ता मानना कौनसी बुद्धिमानी है ? जड़ काल के अधीन चैतन्य आत्मा को मानना, चैतन्य को जड़ बनाना है। इस कारण, काल, कदापि कर्त्ता नहीं माना जा सकता । काल की ही तरह; स्वभाव के लिए भी यही प्रश्न होता है, कि 'स्वभाव' जड़ है, या चैतन्य ? यदि कहें कि जड़ है, तो फिर काल की ही तरह स्वभाव भी, चैतन्य कैसे हो सकता है और चैतन्य आत्मा को, जड़ स्वभाव के अधीन कैसे माना जा सकता है ? यदि कहो, कि स्वभाव चैतन्य है, तो से मित्र है, या अभिन्न ? यदि फिर महक ठहरता है, स्वभाव, कर्त्ता स्वभाव अपनी इच्छानुसार बना सकता है । क्षमावान् से से क्षमावान्द, चोर से साहूकार और साहूकार से चोर होते देखे से जाते हैं। इस प्रकार, स्वभाव में परिवर्तन होता है, जो सर्वथा के अधीन है। इसलिए, स्वभाव कर्त्ता नहीं हो सकता । यह बात दूसरी है, कि आत्मा के अधीन रहकर, स्वभाव, कर्तृत्व में भी भाग लेता हो, लेकिन इस कारण, स्वभाव कर्त्ता नहीं कहा जा सकता । कर्त्ता तो वही कहा जावेगा, जिसकी कर्तृत्व में प्रधानता है । रही होनहार की बात; लेकिन होनहार तो कुछ है ही नहीं होनहार को कर्त्ता मानना, असत् को सत् मानना है । हम होनहारवादी से पूछते हैं कि एक रसोई बनानेवाला, रसोई बनाने की सब, सामग्री लेकर बैठा रहे, रसोई न बनावे, किन्तु यह मानता रहे या कहा करे, कि 'रसौई बननी होगी, तो बन जावेगी !" तो क्या इस प्रकार बैठे रहने पर, रसोई बन सकती है ? यदि बिना बनाये रसोई नहीं बन सकती, तो फिर होनहार को कर्त्ता मानना तथा उसके भरोसे बैठे रहना, कैसे उचित है ? यदि होनेवाले कार्य को ही होनहार कहा जावे, तो उस होनेवाले कार्य का कर्त्ता तो आत्मा ही रहा न ? जब आत्मा ही कर्ता है, तब फिर होनहार को कर्त्ता कैसे माना जा सकता है ? अब ईश्वर को कर्त्ता माननेवाले लोगों से हम पूछते हैं, कि ईश्वर का अस्तित्व आत्मा के अन्तर्गत ही है, या आत्मा से भिन्न यदि के अन्तर्गत ही ईश्वर का अस्वित्व है, तब तो चाहे ईश्वर को कर्त्ता कहो, या आत्मा को कर्त्ता कहो, एक ही बात है। फिर तो कोई मतभेद ही नहीं है। लेकिन यदि यह कहो, कि ईश्वर का अस्तित्व आत्मा से भिन्न है, ईश्वर एक व्यक्ति विशेष सनाथ-अनाथ निरगय है और जो कुछ करता है, वही करता है, आत्मा के किये कुछ नहीं होता; तो इसका अर्थ तो यह हुआ कि आत्मा एक मशीन है और ईश्वर उसका संचालक है ! दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि आत्मा एक मिट्टों का ढेला है और मिट्टी के ढेले के बर्तन बनानेवाला कुम्हार है ! या यों कहा जा सकता है कि आत्मा बन्दर है, और ईश्वर मदारी ! ईश्वर-रूपी मदारी, आत्मा-रूपी चन्दर को जैसा सिखलाता और नचाता है, उसे उसी प्रकार नाचना होता है ! ईश्वर को, इस प्रकार का कर्ता मानने पर तो बड़ी गड़बड़ होती है । संसार अनावस्था दोष से परिपूर्ण हो जाता है ! फिर तो धर्म करने की भी आवश्यकता नहीं रहती। क्योंकि, चाहे धर्म करो या पाप, होगा वही, जो ईश्वर चाहेगा ! धर्म करने से कोई लाभ न होगा ! इसी प्रकार, यह भी मानना होगा, कि यदि म करता है, तो ईश्वर की प्रेरणा से और पाप करता है, तो ईश्वर की प्रेरणा से ! अच्छा बुरा, ईश्वर की प्रेरणा से ही करता है । सब ईश्वर ही करता कराता है । लेकिन यदि ऐसा है, तो यह प्रश्न होता है, कि फिर आत्मा को नरकादि के कष्ट क्यों भोगने पड़ते हैं ? आत्मा ने, स्वयं तो कुछ किया नहीं, जो कुछ किया, वह ईश्वर के कराने से किया, फिर बिना किये का फल, आत्मा को क्यों भोगना पड़े ? ईश्वर के सम्मुख, आत्मा तो एक मिट्टी के ढेले के समान, या एक मदारी के बन्दर के समान निरधिकारी है ! स्वयं कुछ करने की शक्ति नहीं रखता है ! फिर भी यदि सनाथ- श्रनाथ निर्णय ईश्वर उसे नरक भेजता है, तब तो ईश्वर अन्यायी ठहरा ! उसने स्वयं ही, आत्मा से बुरा काम कराया और फिर भी उसे नरक में भेज दिया, इससे अधिक और क्या होगा ? ऐसा अन्याय तो मनुष्य भी नहीं करता ! मनुष्य भी अपने सेवक द्वारा कराये हुए अच्छे बुरे कार्य के परिणाम को, स्वयं भोगता है, नौकर पर नहीं डालता । एक व्यापारी का मुनीम, यदि नुकसान का सौदा कर बैठता है, तो उस नुकसान को भी व्यापारी ही उठाता है, मुनीम को नहीं उठाना पड़ता । फिर जो ईश्वर स्वयं ही आत्मा से पाप करावे, वही उस आत्मा को नरक भेज दे, यह न्यायोचित कैसे है ? उचित तो यह है, कि ईश्वर, प्रत्येक आत्मा को कुछ न कुछ इनाम ही दें, फिर चाहे द्वारा बुरा ही काम सम्पादन क्यों न हुआ हो ! क्योंकि बुरा काम करके भी, आत्मा ने, ईश्वर की आज्ञा का पालन ही किया हैं, और आज्ञा का पालन करने के कारण, आत्मा तो पुरस्कार का ही अधिकारी है आत्मा से, ईश्वर ही सब कुछ कराता हो, अधिकार न रखता हो, तब तो फिर, संसार में, किसी प्रकार का सदुपदेश देने, या धर्म का प्रचार करने आदि की भी आवश्यकता नहीं रहती ! क्योंकि आत्मा तो दूसरे के अधीन है, इसलिए उस पर उपदेश का कोई असर नहीं हो सकता और ईश्वर को उपदेश की आवश्यकता ही क्या है ? यदि यह कहा जावे, कि ईश्वर की प्रेरणा से ही, एक आत्मा, दूसरे आत्मा को उपदेश देता है, तो यह बात ठीक नहीं जँचती। क्योंकि वही ईश्वर, चोरी त्यागने का उपदेश दिलावे और वही ईश्वर चोरी करने की प्रेरणा करे, यह कैसे सम्भव है ! ईश्वर को कर्त्ता मानने पर, इसी प्रकार के बहुत से ऐसे प्रश्न उत्पन्न होते हैं, जिनका समाधान होना कठिन है ईश्वर को कर्त्ता मानने वाले लोग ईश्वर-कर्तृत्व के विषय में, एक यह दलील देते हैं, कि 'ईश्वर को कर्त्ता न मानने से, संसार अन्य फैल जावेगा ! लोगों को, पुण्य-पांप का फल देनेवाला कोई न रहेगा। कोई भी अपराधी, स्वयं दण्ड नहीं भुगतना चाहता । स्वयं जेल जाना, किसी को भी पसन्द नहीं है । स्वेच्छापूर्वक, कोई भी दुःख नहीं सहना चाहता, सब सुन ही चाहते हैं। इसलिए, जिस प्रकार राजा के न होने पर अन्याय अपराध बढ़ जायेंगे, अपराधियों को दण्ड और अच्छे काम करनेवालों को पुरस्कार देनेवाला कोई न रहेगा, जिससे व्यवस्था में गड़बड़ होगी और अशान्ति बढ़ जावेगी; इसी प्रकार, यदि ईश्वर न हो, तो पाप-पुण्य का फल कौन दे ? ईश्वर कर्त्ता है, तभी तो पापियों को दण्ड और पुण्यात्माओं को सुख मिलता है ! यदि ईश्वर कर्त्ता न हो, तो यह व्यवस्था न रहे !" इस प्रकार, राजा का उदाहरण देकर, ईश्वर-कर्तृत्व सिद्ध करते हैं, लेकिन इस दलील पर भी कई प्रश्न होते हैं। सब से पहला प्रश्न तो यही होता है कि जब ईश्वर ही मा से पुण्य पाप करता है, तब उसका फल क्यों भोगे ? दूसरा प्रश्न यह होता है कि बहुत स्थानों पर, राजा नहीं होता है, बिना राजा के ही काम चलता है, तो क्या इसी प्रकार, कहीं-कहीं बिना ईवर के भी काम चलता है ? तीसरा प्रश्न यह है कि कहीं-कहीं राजा का अस्तित्व ही उठ गया है और सम्भव है कि सभी जगह से उठ जावे, तो क्या ऐसा ईश्वर के लिए भी हो सकता है ? चौथा प्रश्न यह है कि राजा का परिवर्तन भी होता रहता है और उसके नियम भी बदलते रहते हैं, तो क्या ऐसे ही ईश्वर और उसके नियम परिवर्तनशील हैं ? सबसे बड़ा प्रश्न यह होता है कि एक आदमी, चोरी कर रहा है। यह चोरी का पाप, वह आदमा, पूर्व- पाप के दण्ड स्वरूप कर रहा है। या नया पाप, कर है ? यदि यह कहो, कि पूर्व- पाप के दण्ड स्वरूप कर रहा तब तो यह हुआ कि ईश्वर पाप का दण्ड देने के लिए, पाप कराता है । फिर तो किसी की 'चोरी मत करो !' उपदेश, ईश्वरीय व्यवस्था में हस्तक्षेप करना - अपराध होगा ! यदि यह कहा जावे, कि वह चोरी करनेवाला, नया पाप कर रही है, तो ईश्वर की प्रेरणा से कर रहा है, या स्वेच्छा से ? यदि ईश्वर की प्रेरणा से कर रहा है, तब तो यह हुआ कि ईश्वरं पाप कराता है और स्वयं पाप करा कर भी, पाप का दण्ड देता है। यदि यह कहा जावे, कि पाप करने के लिए, आत्मा स्वतन्त्र है, इसीलिए वह स्वेच्छा स्खे पाप कर रहा है, तब भी यह प्रश्न होता है, कि पाप हो जाने पर उसका दण्ड देने के बदले, ईश्वर, पाप करने वाले को, पाप करने के समय ही क्यों नहीं रोक देता ? पाप करने देकर फिर दण्ड देने से, इश्वर को क्या लाभ ? वह दयालु कहाता है, फिर किसी को दुःख में पड़ने या किसी के पास दुःख रहने ही क्यों देता है ? ईवर को कर्त्ता सिद्ध करने के लिए दी जाने वाली समस्त दलीलें, इसी प्रकार लचर ठहरती हैं। हाँ, ईश्वर को निमित्त रूप कर्ता तो जैन-शास्त्र भी मानते हैं, लेकिन ईश्वर को उपदान कर्त्ता मानने, एवं आत्मा को-जो प्रत्यक्ष ही कर्त्ता भोक्ता है-अकर्त्ता मानने का कोई कारण नहीं है। यदि आत्मा को ही शुद्ध प्ररुपणा के अनुसार ईश्वर माना जावे, तव तो ईश्वर को कर्त्ता मानने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ईश्वर को व्यक्ति विशेष और मा से भिन्न मान कर कर्त्ता मानना, ठीक नहीं है। गीता में भी कहा हैन कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः ॥ अध्याय पाँच वां । अर्थात् - ईश्वर न तो संसार के कर्तृत्व में है, न कर्मों की सृष्टि करने में ही है । इस प्रकार गीता के अनुसार भी, ईश्वर कर्त्ता नहीं है । के कर्म करने में स्वतंत्र है, लेकिन कर्मबन्ध हो जाने परम कर्म के आधीन हो जाता है। फिर को, कर्मों का अच्छा बुरा फल - विपाक या प्रदेश से भोगना ही पड़ता है। कर्म का फल भुगताने वाला कोई दूसरा नहीं है, किन्तु कर्म स्वयं ही अपना फल उसी प्रकार भुगताते हैं, जिस प्रकार मिश्री और मिर्ची, अपना मीठापन और कडुन देती है। मिश्री को मुँह में रखने पर मीठापन और मिर्च को मुँह में रखने पर कडुआपन, आप ही मालूम होता है । इस मीठेपन या कडुएपन के देने में, किसी और की सहयता- प्रेरणा या शक्ति नहीं होती । यदि किसी दूसरे की प्रेरणा या शक्ति से मिर्च और मिश्री, कडुआपन या मीठापन दे, तो इसका अर्थ यह होगा कि मिर्च और मिश्री में, स्वभावतः कडुआपन या मीठापन नहीं है। लेकिन वास्तव में, मिर्च और मिश्री, किसी की प्रेरणा से कडुआपन या मीठापन नहीं देती है, किन्तु उनमें, मुँह में रखने पर कडुआपन और मीठापन देने का स्वभाव ही है । ठीक इसी प्रकार, कर्म में फल भुगताने की शक्ति स्वभावतः है । शुभ कर्म का शुभ फल और और अशुभ कर्म का अशुभ फल, कर्म अपने स्वभाव से ही भुगताते हैं । इसमें किसी तीसरे की आवश्यकता नहीं है । यदि कर्म का फल कोई तीसरा भुगताता हो, तो इसका अर्थ यह होगा कि कर्म फल भुगताने की शक्ति नहीं रखते। लेकिन यह बात नहीं है। मिर्च और मिश्री की तरह, कर्म में भी अच्छा-बुरा फल भुगताने की शक्ति है, इसलिए कर्म-फल भुगताने के लिए, ईश्वर की आवश्यकता नहीं होती । रही यह बात, कि फिर आत्मा, स्वर्ग या मोक्ष क्यों नहीं चला जाता ? इसका उत्तर यह है, कि जैन शास्त्रों के समीप स्वर्ग कोई महत्वपूर्ण स्थान नहीं है। जैन-शास्त्र, स्वर्ग को भी कर्म-फल भोगने का वैसा ही एक स्थान मानते हैं, जैसा कि नरक को । हाँ, यह अन्तर अवश्य मानते हैं, कि स्वर्ग में शुभ कर्मों का फल भुगता जाता है और नरक में अशुभ कर्मों का फल भुगता जाता है। शुभ कर्म भोगने के लिए, आत्मा को स्वर्ग जाना पड़ता है, इसलिए यदि आत्मा स्वर्ग चला भी गया, तब भी कोई विशेपता की बात नहीं हुई । अब केवल मोक्ष जाने की बात रही, लेकिन जब तक आत्मा के साथ कर्म हैं, आत्मा, मोक्ष जा ही कैसे सकता है और कर्म रहित होने पर आत्मा को मोक्ष से रोक ही कौन सकता है ? कर्म-रहित आत्मा का नाम ही 'मुक्तात्मा' है। आत्मा साथ कर्म न होने को ही मोक्ष कहते हैं । यदि कर्मो को नष्ट कर दे, तो वह मुक्त ही है । सारांश यह, कि काल, स्वभाव, होनहार, या ईश्वर को कर्त्ता मानना, भयंकर भूल है । इस भूल से, आत्मा, अनाथता में पड़ता है। कर्त्ता, कोई दूसरा नहीं है, किन्तु आत्मा ही है। इसीप्रकार, फल देने वाला भी कोई दूसरा नहीं है, किन्तु कर्म, अपना फल आप ही भुगता देते हैं । इसलिए आत्मा ही कर्त्ता, र्हात्त और भोक्ता है !
Flying Rock: सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो वायरल होते रहते है, जिसे देखने के बाद विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। कई बार चीजे गलत निकलती है तो वहीं कई बार चीजे हमारी समझ के बाहर चली जाती है। दरअसल, हाल ही में एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसे देखने के बाद हर किसी का दिमाग चकरा जा रहा है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें हवा में चट्टान उड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। तस्वीर के ट्विटर पर वायरल होने के बाद लोग समझ नहीं पा रहे कि आखिर यह ऐसा क्यों है? लोग जानने चाहते कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है। यूजर्स इसके पीछे की असल कहानी जानने को बेताब है। ट्विटर पर तस्वीर के साथ लिखा हुआ है- यह तस्वीर इस बात का उदाहरण है कि ऑप्टिकल इल्यूजन आपके दिमाग के साथ कैसे खिलवाड़ करता है। सबसे पहले, आप एक चट्टान को हवा में तैरते हुए देखते हैं और फिर। This photo is an example of how optical illusions mess with your mind. जब कोई भी इंसान इस तस्वीर को देखता हो तो वह इसकी सच्चाई को लेकर धोखा जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि चट्टान पानी में है जो चट्टान के आधे हिस्से को प्रतिबिंब के जरिए दिखला रहा है। पानी में तैरती हुई चट्टान की असलियत जानकर सभी हैरान रह गए।
Flying Rock: सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो वायरल होते रहते है, जिसे देखने के बाद विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। कई बार चीजे गलत निकलती है तो वहीं कई बार चीजे हमारी समझ के बाहर चली जाती है। दरअसल, हाल ही में एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसे देखने के बाद हर किसी का दिमाग चकरा जा रहा है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें हवा में चट्टान उड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। तस्वीर के ट्विटर पर वायरल होने के बाद लोग समझ नहीं पा रहे कि आखिर यह ऐसा क्यों है? लोग जानने चाहते कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है। यूजर्स इसके पीछे की असल कहानी जानने को बेताब है। ट्विटर पर तस्वीर के साथ लिखा हुआ है- यह तस्वीर इस बात का उदाहरण है कि ऑप्टिकल इल्यूजन आपके दिमाग के साथ कैसे खिलवाड़ करता है। सबसे पहले, आप एक चट्टान को हवा में तैरते हुए देखते हैं और फिर। This photo is an example of how optical illusions mess with your mind. जब कोई भी इंसान इस तस्वीर को देखता हो तो वह इसकी सच्चाई को लेकर धोखा जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि चट्टान पानी में है जो चट्टान के आधे हिस्से को प्रतिबिंब के जरिए दिखला रहा है। पानी में तैरती हुई चट्टान की असलियत जानकर सभी हैरान रह गए।
दिवाली का त्योहार पूरे देश में काफी धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे में बॉलीवुड सेलेब्स भी इसमें पीछे नहीं रहते हैं और पूरे धूमधाम से इस त्योहार को मनाते हैं। इस साल की दिवाली कुछ सितारों के लिए बेहद खास रही, क्योंकि इस बार शादी के बाद उनकी पहली दिवाली थी। आइए आगे की स्लाइड में आपको बताते हैं किन-किन कपल्स के लिए ये दिवाली पहली है। 1 दिसंबर 2018 को प्रियंका चोपड़ा की शादी निक जोनस से बड़ी धूमधाम से हुई। दोनों ने हिंदू रीति रिवाजों के साथ ही साथ कैथोलिक रीति रिवाज से भी शादी की। शादी के बाद सोशल मीडिया पर दोनों के कई फोटोज और वीडियोज तेजी से वायरल हुए थे। प्रियंका की शादी के बाद ये पहली दिवाली है जोकि उनके लिए बेहद खास है। 14 नवंबर 2018 को बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने रणवीर सिंह को अपना जीवनसाथी चुना। दोनों की शादी काफी धूमधाम से हुई थी। इस साल बॉलीवुड के इस पॉपुलर कपल की पहली दिवाली है। वहीं बात वर्कफ्रंट की करें तो दीपिका और रणवीर एक बार फिर जल्दी ही बड़े पर्दे पर फिल्म 83 में साथ नजर आएंगे। इसके अलावा दीपिका की फिल्म छपाक भी 2020 में रिलीज होगी। सांसद और बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री नुसरत जहां ने इस साल 19 जून को निखिल जैन से शादी की थी। दोनों की शादी काफी सुर्खियों में रही थीं। वहीं दूसरे धर्म में शादी करने और बाद में सिंदूर लगाने को लेकर नुसरत को काफी विवादों का भी सामना करना पड़ा था। ऐसे में नुसरत की यह पहली दिवाली थी। 4 जुलाई 2019 को पूजा बत्रा ने नवाब शाह से शादी की। पूजा- नवाब की शादी के बारे में सभी को तब जानकारी मिली जो उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने शादी के फोटोज शेयर करना शुरू किए। इस कपल के लिए भी यह दिवाली रही सबसे खास।
दिवाली का त्योहार पूरे देश में काफी धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे में बॉलीवुड सेलेब्स भी इसमें पीछे नहीं रहते हैं और पूरे धूमधाम से इस त्योहार को मनाते हैं। इस साल की दिवाली कुछ सितारों के लिए बेहद खास रही, क्योंकि इस बार शादी के बाद उनकी पहली दिवाली थी। आइए आगे की स्लाइड में आपको बताते हैं किन-किन कपल्स के लिए ये दिवाली पहली है। एक दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह को प्रियंका चोपड़ा की शादी निक जोनस से बड़ी धूमधाम से हुई। दोनों ने हिंदू रीति रिवाजों के साथ ही साथ कैथोलिक रीति रिवाज से भी शादी की। शादी के बाद सोशल मीडिया पर दोनों के कई फोटोज और वीडियोज तेजी से वायरल हुए थे। प्रियंका की शादी के बाद ये पहली दिवाली है जोकि उनके लिए बेहद खास है। चौदह नवंबर दो हज़ार अट्ठारह को बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने रणवीर सिंह को अपना जीवनसाथी चुना। दोनों की शादी काफी धूमधाम से हुई थी। इस साल बॉलीवुड के इस पॉपुलर कपल की पहली दिवाली है। वहीं बात वर्कफ्रंट की करें तो दीपिका और रणवीर एक बार फिर जल्दी ही बड़े पर्दे पर फिल्म तिरासी में साथ नजर आएंगे। इसके अलावा दीपिका की फिल्म छपाक भी दो हज़ार बीस में रिलीज होगी। सांसद और बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री नुसरत जहां ने इस साल उन्नीस जून को निखिल जैन से शादी की थी। दोनों की शादी काफी सुर्खियों में रही थीं। वहीं दूसरे धर्म में शादी करने और बाद में सिंदूर लगाने को लेकर नुसरत को काफी विवादों का भी सामना करना पड़ा था। ऐसे में नुसरत की यह पहली दिवाली थी। चार जुलाई दो हज़ार उन्नीस को पूजा बत्रा ने नवाब शाह से शादी की। पूजा- नवाब की शादी के बारे में सभी को तब जानकारी मिली जो उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने शादी के फोटोज शेयर करना शुरू किए। इस कपल के लिए भी यह दिवाली रही सबसे खास।
भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र इकाई ने शनिवार को घोषणा की कि वह अधिक वर्षा के कारण नुकसान का सामना करने वाले किसानों की समस्याओं को दूर करने में राज्य सरकार की विफलता के विरोध में सोमवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन करेगी । प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने यहां संवाददाताओं से कहा कि पार्टी नेताओं ने सार्वजनिक स्थानों पर बांहों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है । उपाध्याय ने कहा, "पार्टी ने सार्वजनिक स्थानों पर काली पट्टी बांधकर सोमवार को विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। स्थानीय नेता संबंधित सरकारी कार्यालयों में मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपेंगे।" उन्होंने कहा कि राज्य भाजपा एमवीए सरकार की संवेदनहीनता से स्तब्ध है, क्योंकि अधिक वर्षा के कारण लाखों किसानों की फसल, मिट्टी और आजीविका चली गई है। भाजपा नेता ने कहा, "कई गांवों और जिलों में नुकसान का आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है। किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। ऐसा लगता है कि यह सरकार किसानों की दुर्दशा से ज्यादा एक हिंदी फिल्म अभिनेता के बेटे में दिलचस्पी रखती है ।" प्रवक्ता ने कहा कि राज्य चीनी आयुक्तालय का निर्णय भी किसानों के खिलाफ है, क्योंकि चीनी मिलों द्वारा किसानों को भुगतान की गई खरीद राशि से बिजली खर्च काट लिया जाएगा, जिससे उनकी कमाई में और कमी आएगी।
भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र इकाई ने शनिवार को घोषणा की कि वह अधिक वर्षा के कारण नुकसान का सामना करने वाले किसानों की समस्याओं को दूर करने में राज्य सरकार की विफलता के विरोध में सोमवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन करेगी । प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने यहां संवाददाताओं से कहा कि पार्टी नेताओं ने सार्वजनिक स्थानों पर बांहों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है । उपाध्याय ने कहा, "पार्टी ने सार्वजनिक स्थानों पर काली पट्टी बांधकर सोमवार को विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। स्थानीय नेता संबंधित सरकारी कार्यालयों में मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपेंगे।" उन्होंने कहा कि राज्य भाजपा एमवीए सरकार की संवेदनहीनता से स्तब्ध है, क्योंकि अधिक वर्षा के कारण लाखों किसानों की फसल, मिट्टी और आजीविका चली गई है। भाजपा नेता ने कहा, "कई गांवों और जिलों में नुकसान का आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है। किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। ऐसा लगता है कि यह सरकार किसानों की दुर्दशा से ज्यादा एक हिंदी फिल्म अभिनेता के बेटे में दिलचस्पी रखती है ।" प्रवक्ता ने कहा कि राज्य चीनी आयुक्तालय का निर्णय भी किसानों के खिलाफ है, क्योंकि चीनी मिलों द्वारा किसानों को भुगतान की गई खरीद राशि से बिजली खर्च काट लिया जाएगा, जिससे उनकी कमाई में और कमी आएगी।
Supertech Emerald Court के ट्विन टावरों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। टावर को ढहाने के लिए 200 मजदूरों के साथ इंजीनियरों की टीम मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी को दोनों टावरों को गिराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने नोएडा (Noida) के सीईओ (CEO) को 72 घंटे के भीतर टावरों को गिराने में शामिल सभी संबंधित एजेंसियों की बैठक बुलाकर टावरों को गिराने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने को कहा था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि मामले को गंभीरता से लेते हुए टावरों को हफ्ते भर के भीतर गिराया जाए। सुपरटेक के ट्विन टावर (Supertech Twin Tower) को ढहाने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका 29 सितंबर 2021 को दाखिल की थी। सुपरेटक एमेरॉल्ड कोर्ट ट्विन टावर मामले में कंपनी ने कोर्ट से 40 मंजिला ट्विन टॉवर-16 (एपेक्स) और 17(स्यान) को ढहाने के आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका दाखिल की थी। साथ ही कोर्ट दोनों टावर को गिराए जाने की बजाय एक टावर को गिराने का आदेश जारी करने का आग्रह किया था। बता दें कि 31 अगस्त को सुपरटेक एमराल्ड केस में Supreme Court ने बड़ा आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि Supertech के ट्विन टॉर्वस को गिराया जाएंगे। गिराए जाने वाले दोनों ही टावर 40-40 मंजिला हैं। कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा था कि, यह टॉवर नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) और सुपरटेक की मिलीभगत से बने थे। रियल स्टेट (Real Estate) कंपनी सुपरटेक को बड़ा झटका देते हुए कोर्ट ने कहा था कि तीन माह के भीतर कंपनी खुद के पैसों से दोनों ही टॉवर को तोड़े। Supertech Emerald Court केस पर Allahabad High Court ने क्या कहा था? वहीं साल 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इन टॉवर्स को गिराने का निर्देश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह ने मामले की सुवाई करते हुए कहा कि था, जिन लोगों ने भी सुपरटेक ट्विन टॉवर में फ्लैट्स लिए हैं। उन्हें 12 फीसदी ब्याज के साथ रकम वापस की जाएगी। कोर्ट में कहा गया था कि टॉवर्स को तोड़ते वक्त अन्य बिल्डिंग्स को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। संबंधित खबरेंः
Supertech Emerald Court के ट्विन टावरों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। टावर को ढहाने के लिए दो सौ मजदूरों के साथ इंजीनियरों की टीम मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट ने सात फरवरी को दोनों टावरों को गिराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने नोएडा के सीईओ को बहत्तर घंटाटे के भीतर टावरों को गिराने में शामिल सभी संबंधित एजेंसियों की बैठक बुलाकर टावरों को गिराने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने को कहा था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि मामले को गंभीरता से लेते हुए टावरों को हफ्ते भर के भीतर गिराया जाए। सुपरटेक के ट्विन टावर को ढहाने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका उनतीस सितंबर दो हज़ार इक्कीस को दाखिल की थी। सुपरेटक एमेरॉल्ड कोर्ट ट्विन टावर मामले में कंपनी ने कोर्ट से चालीस मंजिला ट्विन टॉवर-सोलह और सत्रह को ढहाने के आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका दाखिल की थी। साथ ही कोर्ट दोनों टावर को गिराए जाने की बजाय एक टावर को गिराने का आदेश जारी करने का आग्रह किया था। बता दें कि इकतीस अगस्त को सुपरटेक एमराल्ड केस में Supreme Court ने बड़ा आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि Supertech के ट्विन टॉर्वस को गिराया जाएंगे। गिराए जाने वाले दोनों ही टावर चालीस-चालीस मंजिला हैं। कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा था कि, यह टॉवर नोएडा अथॉरिटी और सुपरटेक की मिलीभगत से बने थे। रियल स्टेट कंपनी सुपरटेक को बड़ा झटका देते हुए कोर्ट ने कहा था कि तीन माह के भीतर कंपनी खुद के पैसों से दोनों ही टॉवर को तोड़े। Supertech Emerald Court केस पर Allahabad High Court ने क्या कहा था? वहीं साल दो हज़ार चौदह में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इन टॉवर्स को गिराने का निर्देश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह ने मामले की सुवाई करते हुए कहा कि था, जिन लोगों ने भी सुपरटेक ट्विन टॉवर में फ्लैट्स लिए हैं। उन्हें बारह फीसदी ब्याज के साथ रकम वापस की जाएगी। कोर्ट में कहा गया था कि टॉवर्स को तोड़ते वक्त अन्य बिल्डिंग्स को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। संबंधित खबरेंः
खोद कर बहुत सी गुफाएँ प्राचीनकाल में बनाई गई थी, जो दूर से देखने पर मधुमक्षिकाओं के छत्ते-सी मालूम देती हैं। इन गुहाओं या गुहाविहारों का निर्माण चौथी सदी के मध्य भाग में शुरू हो गया था। पर पांचवीं सदी में चीन के वेई वंश के राजाओं ने बौद्ध धर्म तथा कला का विकास करने में विशेष उत्साह प्रदर्शित किया, और उनके द्वारा तुह्वांग मे भी बहुत से गुहाविहार तैयार कराए गए। ताग वंश के शक्तिशाली सम्राटो के शासन काल में भी अनेक नये गुहा-विहार बनवाए गए, और यह प्रक्रिया दशवी सदी तक जारी रही। चीनी भाषा मे लिखे हुए कितने ही अभिलेख तुङ्हांग् मे मिले हैं, जिनसे इन गुहाविहारो के निर्माण के इतिहास पर अच्छा प्रकाश पड़ता है । इनमे सबसे पुराना अभिलेख ६९८ ईस्वी का है, जिससे यह ज्ञात होता है कि लोचन नाम का भिक्षु कितने ही जगलों तथा मैदानो को पारकर ३६६ ईस्वी में इस स्थान पर आया था। यहाँ पहाड़ी पर उसे एक प्रकाश दृष्टिगोचर हुभा जिसमे हजारों बुद्ध दिखायी दे रहे थे । लो-चुन ने यहाँ एक गुहा-विहार का निर्माण कराया। बाद में फा-लियान नाम का एक अन्य बौद्ध आचार्य पूर्व की ओर से इस स्थान पर आया, और इसने लो-चुन की गुहा के समीप एक अन्य गुहा - विहार का निर्माण कराया। इस प्रकार गुहा- बिहारो की उस शृंखला का निर्माण प्रारम्भ हो गया, जो सहस्र-बुद्ध-गुहा - विहार के नाम से प्रसिद्ध हैं । लो-चुन और फालियान के अनुकरण में तुड़वा के स्थानीय शासको, प्रान्तीय शासको और उस नगरी के समृद्ध नागरिको ने भी बहुत सी गुहाओ का निर्माण कराया और यह सिलसिला छ. सदियों तक चलता रहा । ७७५ ईस्वी से चौदहवी सदी के मध्य तक के अन्य भी अनेक अभिलेख मिले हैं जिनमे इस सहस्र - बुद्ध - गुहा - विहार के निमित्त किए गए दान, गुहा-विहार की मरम्मत व पुननिर्माण प्रादि का उल्लेख है । ये पुण्य कार्य जिन व्यक्तियों द्वारा किए गए, उनके नाम भी इन अभिलेखो में दिए गए हैं। इनमे मगोलो का एक राजकुमार भी है । तुड्ग के दक्षिण-पश्चिम मे पहाडी को काट-काट कर या खोद-खोद कर जिन गुहा- विहारो का निर्माण किया गया है, उनके दो समुदाय हैं। इनमें दक्षिण वाला गुहा समुदाय मुख्य है। ये गुहा-बिहार पहाडी की ढलान पर एक हजार गज के लगभग तक फैले हुए हैं। पहाडी की लम्बाई पर लगातार गुहाएँ खुदी हुई है, जिनमे से कुछ ऊँचाई पर हैं और कुछ निचली ओोर हैं। ये गुहाएँ एक के बाद एक करके खोदी गई हैं, जिससे ये एक के ऊपर एक लटकी-सी दिखाई देती हैं। गुहा -विहारों के ऊपरी खण्ड पर पहुंचने के लिए लकडी की सीढ़ियाँ बनाई गई थी, जो अब टूट चुकी हैं । गुहा- विहार छोटे-बडे सब भाकारो के हैं। एक गुहा- बिहार की भीतरी गुहा मे ४५ फीट लम्बी चौकोर शाला है, जिसे ठोस चट्टान को काटकर बनाया गया है। इस शाला के बीच में बुद्ध की एक विशाल मूर्ति है, जिसके दोनो पार्श्वों मे विविध देवताओ तथा बोधिसत्त्वों की मूर्तियाँ हैं। मूर्तियों के पीछे की ओर कुछ जगह प्रदक्षिणा के लिए छोड दी गई है। शाला की दीवारों पर बहुत से भित्तिचित्र बने हुए है। चित्र बहुत सुन्दर हैं, और सुरक्षित दशा में हैं । प्राय सभी गुहा- बिहार इसी ढंग के हैं। उनमें बोधिसत्त्वों तथा देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं, और उनकी दीवारो पर सुन्दर भित्तिचित्र बने हैं । तुझ्ह्वांगू की जलवायु प्रत्यन्त शुष्क है। अतः नमी (आर्द्रता) का इन गुहाविहरों के भित्तिचित्रों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा । ये गुहा-विहार तथा उनके भित्तिचित्र प्रायः उसी काल के हैं, जबकि अजन्ता के गुहामन्दिरों का निर्माण हुमा था। पर तुङ्वांग की ये कलाकृतियां अधिक सुरक्षित दशा में हैं। इसीलिए इनके द्वारा यह भलीभांति अध्ययन किया जा सकता है, कि चीन के इस पश्चिमी प्रदेश में कला का विकास किस प्रकार हुआ था । तुङ्-ह्वांग की कला-कृतियो (मूर्तियों तथा भित्तिचित्रो) को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है - (१) जिसका सम्बन्ध बुद्ध, बोधिसत्वों, प्रहंतो और देवताओं के साथ है, और (२) जिनमें सांसारिक जीवन का चित्रण किया गया है। यहाँ की सबसे पुरानी कलाकृतियो पर ग्रीस से प्रभावित गान्धार कला का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है । पर बाद में जब भारत और चीन का सम्बन्ध बहुत बढ़ गया और चीनी यात्री बडी संख्या में भारत आने लगे, तो उनका गुप्त युग की भारतीय कला से भी परिचय हुआ । सातवी सदी से दसवी सदी तक जो बहुत-से चीनी यात्री भारत आये, वे केवल बौद्ध ग्रन्थो को ही अपने साथ चीन नही ले गए, अपितु बहुत-सी मूर्तियाँ तथा चित्रों की अनुकृतियाँ भी वे अपने साथ ले गए। यह स्वाभाविक था कि भारत की इन कलाकृतियों की शैली का चीन की बौद्ध कला पर प्रभाव पडे । तुङ्-ह्वांग के गुहाविहारो की मूर्तियो तथा भित्तिचित्रो पर यह प्रभाव स्पष्ट रूप से विद्यमान है। वहाँ बुद्ध, बोधिसत्त्वो तथा देवताओं की जो मूर्तियाँ व भित्तिचित्र हैं, वे प्रायः भारतीय शैली मे ही हैं । पर जिन चित्रो मे सांसारिक जीवन चित्रित किया गया है, वे चीनी शैली के हैं। तुङ्-ह्वाग् की कलाकृतियों मे केवल चीनी और भारतीय शैलियाँ हो नहीं हैं, उन पर अन्य देशो का प्रभाव भी विद्यमान है। इस स्थान की भौगोलिक स्थिति ऐसी थी, कि वहाँ पश्चिम की ओर से चीन जाने वाले विविध मार्ग परस्पर मिल जाते थे । प्रतः स्वाभाविक रूप से ईरान, बल्ख, सुग्ध, खोतन, कुची, मंगोलिया प्रादि के विविध व्यापारी व यात्री वहाँ आते जाते थे और उन्हें वहां परस्पर मिलने तथा एक-दूसरे को प्रभावित करने का अवसर मिला करता था। इसी कारण तुङ्-ह्वाग् की कला-कृतियो पर ईरान आादि का प्रभाव भी दिखाई देता है। तुङ्-ह्लागू के गुहाविहारों में विद्यमान मूर्तियों का सम्बन्ध प्राय. बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय के साथ है । यहाँ की बहुसंख्यक मूर्तियाँ आकार में सामान्य पुरुषो के बराबर हैं, पर दो मूर्तियाँ अत्यन्त विशाल भी है। एक की ऊंचाई तो १० फीट है। बहुत-सी मूर्तियाँ पहले सुवर्ण के रंग में रँगी हुई थी, पर यह रंग अब बहुत कम स्थानों पर ही शेष बचा है। समय के साथ-साथ बहुत-सी मूर्तियाँ खराब भी हो गई हैं, और कुछ तो मनुष्यों की पशुता की भी शिकार हुई हैं। गुहाविहारों की दीवारों पर जो भित्तिचित्र बनाए गए थे, वे अभी पर्याप्त रूप से सुरक्षित दशा में हैं, और उनके रंग भी अधिक खराब नहीं हुए हैं। इन भित्तिचित्रों में जहाँ बुद्ध, बोधिसत्त्व, अर्हत तथा देवता बनाए गए हैं, वहीं साथ ही सज्जा के लिए बीच-बीच में पत्र पुष्प भी चित्रित किए गए हैं, जो अत्यन्त सुन्दर तथा कलात्मक हैं । अनेक जातक कथाओं को भी
खोद कर बहुत सी गुफाएँ प्राचीनकाल में बनाई गई थी, जो दूर से देखने पर मधुमक्षिकाओं के छत्ते-सी मालूम देती हैं। इन गुहाओं या गुहाविहारों का निर्माण चौथी सदी के मध्य भाग में शुरू हो गया था। पर पांचवीं सदी में चीन के वेई वंश के राजाओं ने बौद्ध धर्म तथा कला का विकास करने में विशेष उत्साह प्रदर्शित किया, और उनके द्वारा तुह्वांग मे भी बहुत से गुहाविहार तैयार कराए गए। ताग वंश के शक्तिशाली सम्राटो के शासन काल में भी अनेक नये गुहा-विहार बनवाए गए, और यह प्रक्रिया दशवी सदी तक जारी रही। चीनी भाषा मे लिखे हुए कितने ही अभिलेख तुङ्हांग् मे मिले हैं, जिनसे इन गुहाविहारो के निर्माण के इतिहास पर अच्छा प्रकाश पड़ता है । इनमे सबसे पुराना अभिलेख छः सौ अट्ठानवे ईस्वी का है, जिससे यह ज्ञात होता है कि लोचन नाम का भिक्षु कितने ही जगलों तथा मैदानो को पारकर तीन सौ छयासठ ईस्वी में इस स्थान पर आया था। यहाँ पहाड़ी पर उसे एक प्रकाश दृष्टिगोचर हुभा जिसमे हजारों बुद्ध दिखायी दे रहे थे । लो-चुन ने यहाँ एक गुहा-विहार का निर्माण कराया। बाद में फा-लियान नाम का एक अन्य बौद्ध आचार्य पूर्व की ओर से इस स्थान पर आया, और इसने लो-चुन की गुहा के समीप एक अन्य गुहा - विहार का निर्माण कराया। इस प्रकार गुहा- बिहारो की उस शृंखला का निर्माण प्रारम्भ हो गया, जो सहस्र-बुद्ध-गुहा - विहार के नाम से प्रसिद्ध हैं । लो-चुन और फालियान के अनुकरण में तुड़वा के स्थानीय शासको, प्रान्तीय शासको और उस नगरी के समृद्ध नागरिको ने भी बहुत सी गुहाओ का निर्माण कराया और यह सिलसिला छ. सदियों तक चलता रहा । सात सौ पचहत्तर ईस्वी से चौदहवी सदी के मध्य तक के अन्य भी अनेक अभिलेख मिले हैं जिनमे इस सहस्र - बुद्ध - गुहा - विहार के निमित्त किए गए दान, गुहा-विहार की मरम्मत व पुननिर्माण प्रादि का उल्लेख है । ये पुण्य कार्य जिन व्यक्तियों द्वारा किए गए, उनके नाम भी इन अभिलेखो में दिए गए हैं। इनमे मगोलो का एक राजकुमार भी है । तुड्ग के दक्षिण-पश्चिम मे पहाडी को काट-काट कर या खोद-खोद कर जिन गुहा- विहारो का निर्माण किया गया है, उनके दो समुदाय हैं। इनमें दक्षिण वाला गुहा समुदाय मुख्य है। ये गुहा-बिहार पहाडी की ढलान पर एक हजार गज के लगभग तक फैले हुए हैं। पहाडी की लम्बाई पर लगातार गुहाएँ खुदी हुई है, जिनमे से कुछ ऊँचाई पर हैं और कुछ निचली ओोर हैं। ये गुहाएँ एक के बाद एक करके खोदी गई हैं, जिससे ये एक के ऊपर एक लटकी-सी दिखाई देती हैं। गुहा -विहारों के ऊपरी खण्ड पर पहुंचने के लिए लकडी की सीढ़ियाँ बनाई गई थी, जो अब टूट चुकी हैं । गुहा- विहार छोटे-बडे सब भाकारो के हैं। एक गुहा- बिहार की भीतरी गुहा मे पैंतालीस फीट लम्बी चौकोर शाला है, जिसे ठोस चट्टान को काटकर बनाया गया है। इस शाला के बीच में बुद्ध की एक विशाल मूर्ति है, जिसके दोनो पार्श्वों मे विविध देवताओ तथा बोधिसत्त्वों की मूर्तियाँ हैं। मूर्तियों के पीछे की ओर कुछ जगह प्रदक्षिणा के लिए छोड दी गई है। शाला की दीवारों पर बहुत से भित्तिचित्र बने हुए है। चित्र बहुत सुन्दर हैं, और सुरक्षित दशा में हैं । प्राय सभी गुहा- बिहार इसी ढंग के हैं। उनमें बोधिसत्त्वों तथा देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं, और उनकी दीवारो पर सुन्दर भित्तिचित्र बने हैं । तुझ्ह्वांगू की जलवायु प्रत्यन्त शुष्क है। अतः नमी का इन गुहाविहरों के भित्तिचित्रों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा । ये गुहा-विहार तथा उनके भित्तिचित्र प्रायः उसी काल के हैं, जबकि अजन्ता के गुहामन्दिरों का निर्माण हुमा था। पर तुङ्वांग की ये कलाकृतियां अधिक सुरक्षित दशा में हैं। इसीलिए इनके द्वारा यह भलीभांति अध्ययन किया जा सकता है, कि चीन के इस पश्चिमी प्रदेश में कला का विकास किस प्रकार हुआ था । तुङ्-ह्वांग की कला-कृतियो को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है - जिसका सम्बन्ध बुद्ध, बोधिसत्वों, प्रहंतो और देवताओं के साथ है, और जिनमें सांसारिक जीवन का चित्रण किया गया है। यहाँ की सबसे पुरानी कलाकृतियो पर ग्रीस से प्रभावित गान्धार कला का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है । पर बाद में जब भारत और चीन का सम्बन्ध बहुत बढ़ गया और चीनी यात्री बडी संख्या में भारत आने लगे, तो उनका गुप्त युग की भारतीय कला से भी परिचय हुआ । सातवी सदी से दसवी सदी तक जो बहुत-से चीनी यात्री भारत आये, वे केवल बौद्ध ग्रन्थो को ही अपने साथ चीन नही ले गए, अपितु बहुत-सी मूर्तियाँ तथा चित्रों की अनुकृतियाँ भी वे अपने साथ ले गए। यह स्वाभाविक था कि भारत की इन कलाकृतियों की शैली का चीन की बौद्ध कला पर प्रभाव पडे । तुङ्-ह्वांग के गुहाविहारो की मूर्तियो तथा भित्तिचित्रो पर यह प्रभाव स्पष्ट रूप से विद्यमान है। वहाँ बुद्ध, बोधिसत्त्वो तथा देवताओं की जो मूर्तियाँ व भित्तिचित्र हैं, वे प्रायः भारतीय शैली मे ही हैं । पर जिन चित्रो मे सांसारिक जीवन चित्रित किया गया है, वे चीनी शैली के हैं। तुङ्-ह्वाग् की कलाकृतियों मे केवल चीनी और भारतीय शैलियाँ हो नहीं हैं, उन पर अन्य देशो का प्रभाव भी विद्यमान है। इस स्थान की भौगोलिक स्थिति ऐसी थी, कि वहाँ पश्चिम की ओर से चीन जाने वाले विविध मार्ग परस्पर मिल जाते थे । प्रतः स्वाभाविक रूप से ईरान, बल्ख, सुग्ध, खोतन, कुची, मंगोलिया प्रादि के विविध व्यापारी व यात्री वहाँ आते जाते थे और उन्हें वहां परस्पर मिलने तथा एक-दूसरे को प्रभावित करने का अवसर मिला करता था। इसी कारण तुङ्-ह्वाग् की कला-कृतियो पर ईरान आादि का प्रभाव भी दिखाई देता है। तुङ्-ह्लागू के गुहाविहारों में विद्यमान मूर्तियों का सम्बन्ध प्राय. बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय के साथ है । यहाँ की बहुसंख्यक मूर्तियाँ आकार में सामान्य पुरुषो के बराबर हैं, पर दो मूर्तियाँ अत्यन्त विशाल भी है। एक की ऊंचाई तो दस फीट है। बहुत-सी मूर्तियाँ पहले सुवर्ण के रंग में रँगी हुई थी, पर यह रंग अब बहुत कम स्थानों पर ही शेष बचा है। समय के साथ-साथ बहुत-सी मूर्तियाँ खराब भी हो गई हैं, और कुछ तो मनुष्यों की पशुता की भी शिकार हुई हैं। गुहाविहारों की दीवारों पर जो भित्तिचित्र बनाए गए थे, वे अभी पर्याप्त रूप से सुरक्षित दशा में हैं, और उनके रंग भी अधिक खराब नहीं हुए हैं। इन भित्तिचित्रों में जहाँ बुद्ध, बोधिसत्त्व, अर्हत तथा देवता बनाए गए हैं, वहीं साथ ही सज्जा के लिए बीच-बीच में पत्र पुष्प भी चित्रित किए गए हैं, जो अत्यन्त सुन्दर तथा कलात्मक हैं । अनेक जातक कथाओं को भी
आईपीएल फ्रेंचाइजी किंग्स इलेवन पंजाब ने कहा है कि ऑस्ट्रेलियाई आलराउंडर ग्लैन मैक्सवेल लीग के 13वें सीजन के शुरुआती मैचों के लिए किंग्स इलेवन पंजाब टीम में चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे। किंग्स इलेवन पंजाब ने शनिवार को अपने आधिकारिक ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ऑस्ट्रेलिया का इंग्लैंड दौरा समाप्त होने के बाद मैक्सवेल 17 सितंबर को ही यूएई पहुंच गए थे। टीम ने एक बयान में कहा, " अब उन्हें पांच दिन के बजाय तीन दिन ही टीम होटल में क्वारंटीन में रहने की जरूरत होगी क्योंकि नियमों में मुताबिक वह पहले ही इंग्लैंड में बायो सिक्योर बबल में रह चुके हैं।" टीम ने आगे कहा, " उनका यह क्वारंटीन पीरियड शनिवार को पूरा होगा। इसके बाद मैक्सवेल 20 सितंबर को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ होने वाले पंजाब के सीजन के पहले मैच के लिए टीम चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे।" मैक्सवेल के यूएई पहुंचने के बाद किंग्स इलेवन पंजाब की 25 सदस्यीय टीम आईपीएल 13 के लिए अब पूरी हो गई है। मैक्सवेल के अलावा मुजीब उर रहमान, निकोलस पूरन और शेल्डन कॉटरेल इस सप्ताह टीम से जुड़ेंगे।
आईपीएल फ्रेंचाइजी किंग्स इलेवन पंजाब ने कहा है कि ऑस्ट्रेलियाई आलराउंडर ग्लैन मैक्सवेल लीग के तेरहवें सीजन के शुरुआती मैचों के लिए किंग्स इलेवन पंजाब टीम में चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे। किंग्स इलेवन पंजाब ने शनिवार को अपने आधिकारिक ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ऑस्ट्रेलिया का इंग्लैंड दौरा समाप्त होने के बाद मैक्सवेल सत्रह सितंबर को ही यूएई पहुंच गए थे। टीम ने एक बयान में कहा, " अब उन्हें पांच दिन के बजाय तीन दिन ही टीम होटल में क्वारंटीन में रहने की जरूरत होगी क्योंकि नियमों में मुताबिक वह पहले ही इंग्लैंड में बायो सिक्योर बबल में रह चुके हैं।" टीम ने आगे कहा, " उनका यह क्वारंटीन पीरियड शनिवार को पूरा होगा। इसके बाद मैक्सवेल बीस सितंबर को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ होने वाले पंजाब के सीजन के पहले मैच के लिए टीम चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे।" मैक्सवेल के यूएई पहुंचने के बाद किंग्स इलेवन पंजाब की पच्चीस सदस्यीय टीम आईपीएल तेरह के लिए अब पूरी हो गई है। मैक्सवेल के अलावा मुजीब उर रहमान, निकोलस पूरन और शेल्डन कॉटरेल इस सप्ताह टीम से जुड़ेंगे।
लहसुन में विटामिन बी12 होता है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा लहसुन में सल्फर होता है, जिससे नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) और हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) गैसें बनती हैं। ये यौगिक हमारे रक्त वाहिकाओं को आराम देते हैं और उन्हें फैलाने में मदद करते हैं। इस तरह रक्त वाहिकाओं में पर्याप्त जगह होने पर हृदय को रक्त पंप करने में अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ती और हाई बीपी की समस्या कंट्रोल में रहती है. हाई बीपी के मरीज लहसुन की 2 कली खा सकते हैं। इसे आप सुबह या दिन में कभी भी ले सकते हैं। इससे सुबह से ही शरीर में ब्लड प्रेशर सही रहेगा, इससे रक्त वाहिकाओं पर जोर नहीं पड़ेगा और हृदय स्वस्थ रहेगा। भुना हुआ लहसुन खाना हाई बीपी को कंट्रोल करने का एक अच्छा तरीका हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले एक पैन में लहसुन को भून लें और रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करें। ऐसे में लहसुन का सेवन हाई बीपी में फायदेमंद हो सकता है। बस इस बात का ध्यान रखें कि एक दिन में बहुत ज्यादा न खाएं।
लहसुन में विटामिन बीबारह होता है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा लहसुन में सल्फर होता है, जिससे नाइट्रिक ऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड गैसें बनती हैं। ये यौगिक हमारे रक्त वाहिकाओं को आराम देते हैं और उन्हें फैलाने में मदद करते हैं। इस तरह रक्त वाहिकाओं में पर्याप्त जगह होने पर हृदय को रक्त पंप करने में अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ती और हाई बीपी की समस्या कंट्रोल में रहती है. हाई बीपी के मरीज लहसुन की दो कली खा सकते हैं। इसे आप सुबह या दिन में कभी भी ले सकते हैं। इससे सुबह से ही शरीर में ब्लड प्रेशर सही रहेगा, इससे रक्त वाहिकाओं पर जोर नहीं पड़ेगा और हृदय स्वस्थ रहेगा। भुना हुआ लहसुन खाना हाई बीपी को कंट्रोल करने का एक अच्छा तरीका हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले एक पैन में लहसुन को भून लें और रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करें। ऐसे में लहसुन का सेवन हाई बीपी में फायदेमंद हो सकता है। बस इस बात का ध्यान रखें कि एक दिन में बहुत ज्यादा न खाएं।
Hazaribagh: संत कोलंबस कॉलेज तथा विनोबा भावे विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्राध्यापक (सेवानिवृत्त) डॉ उदय शंकर सिन्हा का निधन प्रातः 31 अक्टूबर को बेंगलुरु स्थित उनके छोटे बेटे के आवास में हृदय गति रुक जाने से हुआ. वे 84 वर्ष के थे. डॉ सिन्हा 1960 से 1998 तक रांची विश्वविद्यालय तथा विनोबा भावे विश्वविद्यालय में अपना योगदान दिया. स्वभाव से मृदुभाषी तथा सरल व्यक्तित्व के वे काफी धनी थे. उनका अंतिम संस्कार बेंगलुरु से ही किया जाएगा. वे अपने पीछे 2 पुत्र तथा दो पुत्रियों से भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं.
Hazaribagh: संत कोलंबस कॉलेज तथा विनोबा भावे विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ उदय शंकर सिन्हा का निधन प्रातः इकतीस अक्टूबर को बेंगलुरु स्थित उनके छोटे बेटे के आवास में हृदय गति रुक जाने से हुआ. वे चौरासी वर्ष के थे. डॉ सिन्हा एक हज़ार नौ सौ साठ से एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे तक रांची विश्वविद्यालय तथा विनोबा भावे विश्वविद्यालय में अपना योगदान दिया. स्वभाव से मृदुभाषी तथा सरल व्यक्तित्व के वे काफी धनी थे. उनका अंतिम संस्कार बेंगलुरु से ही किया जाएगा. वे अपने पीछे दो पुत्र तथा दो पुत्रियों से भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं.
चंडीगढ़. पंजाब में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां अचानक से रद्द कर दी गई है. इस संबंध में डीजीपी दफ्तर से आदेश जारी किया गया है. डीजीपी दफ्तर से राज्य से सभी पुलिस दफ्तरों को भेजे गए संदेश में सभी राजपत्रित और गैर राजपत्रित पदाधिकारियों की छुट्टिया 14 अप्रैल तक रद्द कर दी गई हैं. पंजाब पुलिस की छुट्टियां रद्द होने के फैसले को सीधा अमृतपाल से जोड़ कर देखा जा रहा है. लगता है पुलिस अमृतपाल को लेकर किसी बड़ी कार्रवाई में है. गौरतलब है कि भगौड़े अमृतपाल ने 14 अप्रैल को वैसाखी पर सिख संगतों को तलवंडी साबो पहुंचने के लिए कहा है. आपको यह भी बता दें सरबत खालसा की कॉल को अकाल तख्त द्वारा मंजूरी नहीं मिली है. फिर पंजाब पुलिस अलर्ट पर है और तलवंडी साबो में सुरक्षा बढ़ाई गई है. पंजाब पुलिस के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स भी तैनात की गई है. पंजाब पुलिस द्वारा गत दिन वीरवार को पूरे राज्य में चैकिंग अभियान भी चलाया गया है. पुलिस के सभी विभाग प्रमुखों को यह आदेश दिया गया है कि 14 अप्रैल, 2023 तक किसी भी तरह की छुट्टी को मंजूरी नहीं दी जाए. इसके साथ ही पहले से स्वीकृत सभी तरह की छुट्टियां भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई हैं. हाल के दिनों में खासतौर से अमृतपाल सिंह का मामला सामने आने के बाद पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आशंकाएं गहराने लगी है. राज्य के एक बार फिर से आतंक और उग्रवाद की चपेट में आने का खतरा बढ़ सकता है. इसके मद्देनजर प्रशासन हर स्तर पर अपनी तैयारियों को पुख्ता कर रहा है.
चंडीगढ़. पंजाब में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां अचानक से रद्द कर दी गई है. इस संबंध में डीजीपी दफ्तर से आदेश जारी किया गया है. डीजीपी दफ्तर से राज्य से सभी पुलिस दफ्तरों को भेजे गए संदेश में सभी राजपत्रित और गैर राजपत्रित पदाधिकारियों की छुट्टिया चौदह अप्रैल तक रद्द कर दी गई हैं. पंजाब पुलिस की छुट्टियां रद्द होने के फैसले को सीधा अमृतपाल से जोड़ कर देखा जा रहा है. लगता है पुलिस अमृतपाल को लेकर किसी बड़ी कार्रवाई में है. गौरतलब है कि भगौड़े अमृतपाल ने चौदह अप्रैल को वैसाखी पर सिख संगतों को तलवंडी साबो पहुंचने के लिए कहा है. आपको यह भी बता दें सरबत खालसा की कॉल को अकाल तख्त द्वारा मंजूरी नहीं मिली है. फिर पंजाब पुलिस अलर्ट पर है और तलवंडी साबो में सुरक्षा बढ़ाई गई है. पंजाब पुलिस के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स भी तैनात की गई है. पंजाब पुलिस द्वारा गत दिन वीरवार को पूरे राज्य में चैकिंग अभियान भी चलाया गया है. पुलिस के सभी विभाग प्रमुखों को यह आदेश दिया गया है कि चौदह अप्रैल, दो हज़ार तेईस तक किसी भी तरह की छुट्टी को मंजूरी नहीं दी जाए. इसके साथ ही पहले से स्वीकृत सभी तरह की छुट्टियां भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई हैं. हाल के दिनों में खासतौर से अमृतपाल सिंह का मामला सामने आने के बाद पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आशंकाएं गहराने लगी है. राज्य के एक बार फिर से आतंक और उग्रवाद की चपेट में आने का खतरा बढ़ सकता है. इसके मद्देनजर प्रशासन हर स्तर पर अपनी तैयारियों को पुख्ता कर रहा है.
Indian Army Religious Teacher Recruitment 2022: भारतीय सेना ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट यानी joinindianarmy. nic. in पर RRT 91 और 92 कोर्सेज के लिए जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) के पद के लिए धार्मिक शिक्षकों (Religious Teachers) के पंजीकरण शुरू कर दिए हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारतीय सेना JCO भर्ती 2022 के लिए केवल पुरुष उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते हैं। पंडित, पंडित (गोरखा), ग्रंथी, मौलवी (शिया), पदरी, बोध भिक्षु और मौलवी (सुन्नी) श्रेणियों के लिए कुल 128 रिक्तियां हैं। उनकी जिम्मेदारी सैनिकों को धार्मिक ग्रंथों का प्रचार करना और रेजिमेंटल / यूनिट धार्मिक संस्थानों में विभिन्न अनुष्ठानों का संचालन करना है। इसके अलावा, उन्हें अंत्येष्टि में शामिल होना, अस्पतालों में बीमारों के लिए मंत्री, दीक्षांत समारोह के साथ प्रार्थना पढ़ना, सजा काट रहे सैनिकों से मिलने, बच्चों और सूचीबद्ध लड़कों और अधिकारी, सैनिक और उनके परिवारों को विशेष धार्मिक निर्देश देने के अलावा धार्मिक संस्थानों में भाग लेना होगा। सभी पदों पर शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है, योग्यता संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन देखें। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा में पेपर- I और पेपर- II शामिल होंगे। स्टेप 1- सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy. nic. in. पर जाएं। स्टेप 2- होम पेज पर दिखाई गए "JCO / OR Apply / Login" लिंक पर क्लिक करें। स्टेप 3- ऑनलाइन पंजीकरण फॉर्म भरें। प्रत्येक फ़ील्ड को हाइलाइट करते समय फ़ील्ड भरने में सहायता के लिए टिप्स प्रदान किए गए हैं। स्टेप 4- डिटेल्स भरने के बाद आपकी प्रोफाइल खुल जाएगी। स्टेप 5- ऑनलाइन अप्लाई पर क्लिक करें। स्टेप 6- फॉर्म भरने के बाद, प्रिव्यू पर क्लिक करें और जांचें कि क्या आपके द्वारा दर्ज की गई सभी जानकारी सही है या नहीं। एक बार फॉर्म सबमिट होने के बाद कोई सुधार नहीं कर पाएंगे। स्टेप 7- ई-मेल आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके लॉग इन करें और किसी भी समय आवेदन फॉर्म का प्रिंट आउट लें।
Indian Army Religious Teacher Recruitment दो हज़ार बाईस: भारतीय सेना ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट यानी joinindianarmy. nic. in पर RRT इक्यानवे और बानवे कोर्सेज के लिए जूनियर कमीशंड ऑफिसर के पद के लिए धार्मिक शिक्षकों के पंजीकरण शुरू कर दिए हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारतीय सेना JCO भर्ती दो हज़ार बाईस के लिए केवल पुरुष उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते हैं। पंडित, पंडित , ग्रंथी, मौलवी , पदरी, बोध भिक्षु और मौलवी श्रेणियों के लिए कुल एक सौ अट्ठाईस रिक्तियां हैं। उनकी जिम्मेदारी सैनिकों को धार्मिक ग्रंथों का प्रचार करना और रेजिमेंटल / यूनिट धार्मिक संस्थानों में विभिन्न अनुष्ठानों का संचालन करना है। इसके अलावा, उन्हें अंत्येष्टि में शामिल होना, अस्पतालों में बीमारों के लिए मंत्री, दीक्षांत समारोह के साथ प्रार्थना पढ़ना, सजा काट रहे सैनिकों से मिलने, बच्चों और सूचीबद्ध लड़कों और अधिकारी, सैनिक और उनके परिवारों को विशेष धार्मिक निर्देश देने के अलावा धार्मिक संस्थानों में भाग लेना होगा। सभी पदों पर शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है, योग्यता संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन देखें। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा में पेपर- I और पेपर- II शामिल होंगे। स्टेप एक- सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy. nic. in. पर जाएं। स्टेप दो- होम पेज पर दिखाई गए "JCO / OR Apply / Login" लिंक पर क्लिक करें। स्टेप तीन- ऑनलाइन पंजीकरण फॉर्म भरें। प्रत्येक फ़ील्ड को हाइलाइट करते समय फ़ील्ड भरने में सहायता के लिए टिप्स प्रदान किए गए हैं। स्टेप चार- डिटेल्स भरने के बाद आपकी प्रोफाइल खुल जाएगी। स्टेप पाँच- ऑनलाइन अप्लाई पर क्लिक करें। स्टेप छः- फॉर्म भरने के बाद, प्रिव्यू पर क्लिक करें और जांचें कि क्या आपके द्वारा दर्ज की गई सभी जानकारी सही है या नहीं। एक बार फॉर्म सबमिट होने के बाद कोई सुधार नहीं कर पाएंगे। स्टेप सात- ई-मेल आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके लॉग इन करें और किसी भी समय आवेदन फॉर्म का प्रिंट आउट लें।
वाराणसी में क्रिसमस की तैयारियां जोरदार ढंग से की जा रही है। आयोजन के मद्देनजर छावनी क्षेत्र के सेंट मैरी गिराजघर कैंपस के विशेष समारोह में प्रभु यीशु के आगमन की सूचना मिस्सा बलिदान की गिरजा घंटी बजाकर दी जाएगी। क्रिसमस के लिए बाजार उपहारों से सजे हैं तो प्रमुख लाल चर्च से लेकर दर्जनों गिरजाघरों को लाइट्स से सजाया गया है। सेंटा कैप और जर्सी के ढेरों विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। वाराणसी के होटेल-रेस्ट्रॉन्ट भी क्रिसमस की तैयारियां लगभग पूरी कर चुके हैं। जगह-जगह पर सेंटा गिफ्ट बांटते हुए नजर आ रहे हैं। वाराणसी धर्मप्रांत के बिशप डॉ. यूजीन जोसेफ ने बताया कि इस बार क्रिसमस के मौके पर गिरजाघरों में विश्व में शांति के लिए विशेष प्रार्थना होगी। धर्मप्रांत की ओर से महागिरजाघर में क्रिसमस की खुशियां बांटने और खीस्त के प्रेम-भाईचारे का संदेश देने के लिए 25 से 27 जनवरी तक मेले का आयोजन किया गया है। मेले में आने वालों के मद्देनजर दुकानें सज गई हैं। वाराणसी धर्मप्रांत की ओर से लगने वाली बाइबल प्रदर्शनी में सचल मूर्तियों के जरिए खीस्त का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। पारंपरिक कठपुतली नृत्य द्वारा भी प्रभु यीशु के गीत व संदेश प्रदर्शित किए जाएंगे। समारोह का समापन 2 जनवरी को दिव्यांगों संग खुशी बांटने के साथ होगा।
वाराणसी में क्रिसमस की तैयारियां जोरदार ढंग से की जा रही है। आयोजन के मद्देनजर छावनी क्षेत्र के सेंट मैरी गिराजघर कैंपस के विशेष समारोह में प्रभु यीशु के आगमन की सूचना मिस्सा बलिदान की गिरजा घंटी बजाकर दी जाएगी। क्रिसमस के लिए बाजार उपहारों से सजे हैं तो प्रमुख लाल चर्च से लेकर दर्जनों गिरजाघरों को लाइट्स से सजाया गया है। सेंटा कैप और जर्सी के ढेरों विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। वाराणसी के होटेल-रेस्ट्रॉन्ट भी क्रिसमस की तैयारियां लगभग पूरी कर चुके हैं। जगह-जगह पर सेंटा गिफ्ट बांटते हुए नजर आ रहे हैं। वाराणसी धर्मप्रांत के बिशप डॉ. यूजीन जोसेफ ने बताया कि इस बार क्रिसमस के मौके पर गिरजाघरों में विश्व में शांति के लिए विशेष प्रार्थना होगी। धर्मप्रांत की ओर से महागिरजाघर में क्रिसमस की खुशियां बांटने और खीस्त के प्रेम-भाईचारे का संदेश देने के लिए पच्चीस से सत्ताईस जनवरी तक मेले का आयोजन किया गया है। मेले में आने वालों के मद्देनजर दुकानें सज गई हैं। वाराणसी धर्मप्रांत की ओर से लगने वाली बाइबल प्रदर्शनी में सचल मूर्तियों के जरिए खीस्त का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। पारंपरिक कठपुतली नृत्य द्वारा भी प्रभु यीशु के गीत व संदेश प्रदर्शित किए जाएंगे। समारोह का समापन दो जनवरी को दिव्यांगों संग खुशी बांटने के साथ होगा।
अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस के मौके पर एक सात साल की बच्ची संसद के बाहर खड़ी होकर प्रदर्शन कर रही थी। दरअसल मणिपुर की बच्ची लिसिप्रिया कनगुजम जलवायु परिवर्तन मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान आकृष्ट करना चाहती थी। जब मीडिया ने सात वर्षीय लिसिप्रिया ने उसके मोटिव के बारे में पूछा तो उसने बताया, मैं देश के प्रधानमंत्री और सभी सांसदों से अपील करना चाहती हूं कि वो जलवायु परिवर्तन पर गंभीरता से विचार करे और हमारे भविष्य को बचाए। समुद्र का लेवल बढ़ रहा है और धरती पहले के मुकाबले और भी ज्यादा गर्म होती जा रही है। सरकार को जल्द ही इसपर ध्यान देते हुए कार्रवाई करने की जरूरत है। महज सात साल की लिसिप्रिया को संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच के छठे सत्र में संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करने के लिए बुलाया गया था। संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की थीम 'रेजिलिएंट डिविडेंडः टुवर्ड्स सस्टेनेबल एंड इनक्लूसिव सोसाइटीज' थी। लिसिप्रिया संयुक्त राष्ट्र ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (UNISDR) और स्विटजरलैंड सरकार की ओर से आमंत्रण प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की पहली प्रतिभागी है। आपदा प्रबंधन पर बातचीत के दौरान लिसिप्रिया ने कहा कि जब मैं भूकंप, बाढ़ और सुनामी के कारण टीवी पर लोगों को पीड़ित और मरते हुए देखती हूं तो मैं डर जाती हूं। मैं रोती हूं जब मैं देखती हूं कि बच्चों को अपने माता-पिता को खोते हुए या आपदाओं के कारण लोग बेघर हो रहे हैं। मैं सभी से इस काम में दिमाग और जुनून से जुड़ने का आग्रह करती हूं, ताकि हम सभी के लिए एक बेहतर दुनिया का निर्माण हो सके। वह वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय युवा समिति (IYC) में बाल आपदा जोखिम न्यूनीकरण अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। लिसिप्रिया मूल रूप से भारत के मणिपुर राज्य की रहने वाली है और कक्षा 2 में पढ़ाई करती है।
अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस के मौके पर एक सात साल की बच्ची संसद के बाहर खड़ी होकर प्रदर्शन कर रही थी। दरअसल मणिपुर की बच्ची लिसिप्रिया कनगुजम जलवायु परिवर्तन मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान आकृष्ट करना चाहती थी। जब मीडिया ने सात वर्षीय लिसिप्रिया ने उसके मोटिव के बारे में पूछा तो उसने बताया, मैं देश के प्रधानमंत्री और सभी सांसदों से अपील करना चाहती हूं कि वो जलवायु परिवर्तन पर गंभीरता से विचार करे और हमारे भविष्य को बचाए। समुद्र का लेवल बढ़ रहा है और धरती पहले के मुकाबले और भी ज्यादा गर्म होती जा रही है। सरकार को जल्द ही इसपर ध्यान देते हुए कार्रवाई करने की जरूरत है। महज सात साल की लिसिप्रिया को संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच के छठे सत्र में संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करने के लिए बुलाया गया था। संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की थीम 'रेजिलिएंट डिविडेंडः टुवर्ड्स सस्टेनेबल एंड इनक्लूसिव सोसाइटीज' थी। लिसिप्रिया संयुक्त राष्ट्र ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन और स्विटजरलैंड सरकार की ओर से आमंत्रण प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की पहली प्रतिभागी है। आपदा प्रबंधन पर बातचीत के दौरान लिसिप्रिया ने कहा कि जब मैं भूकंप, बाढ़ और सुनामी के कारण टीवी पर लोगों को पीड़ित और मरते हुए देखती हूं तो मैं डर जाती हूं। मैं रोती हूं जब मैं देखती हूं कि बच्चों को अपने माता-पिता को खोते हुए या आपदाओं के कारण लोग बेघर हो रहे हैं। मैं सभी से इस काम में दिमाग और जुनून से जुड़ने का आग्रह करती हूं, ताकि हम सभी के लिए एक बेहतर दुनिया का निर्माण हो सके। वह वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय युवा समिति में बाल आपदा जोखिम न्यूनीकरण अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। लिसिप्रिया मूल रूप से भारत के मणिपुर राज्य की रहने वाली है और कक्षा दो में पढ़ाई करती है।
नमक स्वाद के लिए जरूरी है लेकिन अगर ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो यह हाई ब्लड प्रेशर से लेकर दिल की बीमारी तक कई घातक रोगों को निमंत्रण दे सकता है। हालांकि यह भी सच है कि स्वस्थ रक्तचाप के लिए सोडियम की मात्रा जरूरी है। ऐसे में आपको सेहतमंद रहने के लिए रोज तय मात्रा में ही नमक का सेवन करना चाहिए। अमेरीकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) का कहना है कि हर व्यक्ति को दिनभर में 2,300 मिलीग्राम ही नमक का सेवन करना चाहिए। यह मात्रा ज्यादा नमक खाने वालों के लिए है जबकि रोज नमक की आदर्श मात्रा 1,500 मिलीग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लेकिन हम इस बात पर गौर नहीं करते हैं और हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हो जाते हैं। नमक का ज्यादा सेवन दिल की बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है। इसके अलावा, ज्यादा नमक खाने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी होने लगती है। अगर आप तय मात्रा से ज्यादा नमक खाते हैं तो आपको डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है। शरीर में नमक की मात्रा ज्यादा होने पर पानी जरूरत से ज्यादा जमा हो जाता है। यह स्थिति वाटर रिटेंशन या फ्लूड रिटेंशन कहलाती है। ऐसी स्थिति में हाथ, पैर और चेहरे में सूजन हो सकती है। हालांकि यहां एक बात भी ध्यान रखना जरूरी है कि अगर आप तय मात्रा से कम नमक लेते हैं तो भी आप बीमार पड़ सकते हैं। दरअसल, नमक एक प्राकृतिक तत्व है जिसमें सोडियम और क्लोरीन तत्व होते हैं। जब आप नमक का सेवन करते हैं तो यह शरीर में इन ही दो घटकों में टूट जाता है। अगर आपके शरीर में नमक की कमी होती है तो आपको सुस्ती के लक्षण दिख सकते हैं। मासपेशियों की कमजोरी और सिर के दर्द की समस्या से भी आप परेशान हो सकते हैं। अगर शरीर में नमक की कमी हो जाए तो मस्तिष्क को क्षति पहुंच सकती है। जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में करीब 20 करोड़ लोगों में आयोडीन की कमी से होने वाले विकार का खतरा है। आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियां का अगर सही वक्त पर इलाज नहीं किया गया तो यह गंभीर खतरा बन सकती है। शरीर में नमक की कमी से हार्ट का आकार बढ़ने और हार्ट के फेल होने की संभावना रहती है।
नमक स्वाद के लिए जरूरी है लेकिन अगर ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो यह हाई ब्लड प्रेशर से लेकर दिल की बीमारी तक कई घातक रोगों को निमंत्रण दे सकता है। हालांकि यह भी सच है कि स्वस्थ रक्तचाप के लिए सोडियम की मात्रा जरूरी है। ऐसे में आपको सेहतमंद रहने के लिए रोज तय मात्रा में ही नमक का सेवन करना चाहिए। अमेरीकन हार्ट एसोसिएशन का कहना है कि हर व्यक्ति को दिनभर में दो,तीन सौ मिलीग्राम ही नमक का सेवन करना चाहिए। यह मात्रा ज्यादा नमक खाने वालों के लिए है जबकि रोज नमक की आदर्श मात्रा एक,पाँच सौ मिलीग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लेकिन हम इस बात पर गौर नहीं करते हैं और हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हो जाते हैं। नमक का ज्यादा सेवन दिल की बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है। इसके अलावा, ज्यादा नमक खाने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी होने लगती है। अगर आप तय मात्रा से ज्यादा नमक खाते हैं तो आपको डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है। शरीर में नमक की मात्रा ज्यादा होने पर पानी जरूरत से ज्यादा जमा हो जाता है। यह स्थिति वाटर रिटेंशन या फ्लूड रिटेंशन कहलाती है। ऐसी स्थिति में हाथ, पैर और चेहरे में सूजन हो सकती है। हालांकि यहां एक बात भी ध्यान रखना जरूरी है कि अगर आप तय मात्रा से कम नमक लेते हैं तो भी आप बीमार पड़ सकते हैं। दरअसल, नमक एक प्राकृतिक तत्व है जिसमें सोडियम और क्लोरीन तत्व होते हैं। जब आप नमक का सेवन करते हैं तो यह शरीर में इन ही दो घटकों में टूट जाता है। अगर आपके शरीर में नमक की कमी होती है तो आपको सुस्ती के लक्षण दिख सकते हैं। मासपेशियों की कमजोरी और सिर के दर्द की समस्या से भी आप परेशान हो सकते हैं। अगर शरीर में नमक की कमी हो जाए तो मस्तिष्क को क्षति पहुंच सकती है। जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में करीब बीस करोड़ लोगों में आयोडीन की कमी से होने वाले विकार का खतरा है। आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियां का अगर सही वक्त पर इलाज नहीं किया गया तो यह गंभीर खतरा बन सकती है। शरीर में नमक की कमी से हार्ट का आकार बढ़ने और हार्ट के फेल होने की संभावना रहती है।
महेंद्र नाथ पांडेय यही नहीं रुके, उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि इस तरह के बयान से न सिर्फ राहुल गांधी बल्कि कांग्रेस पार्टी गर्त में जाएगी। भारतीय जनता पार्टी वीर सावरकर के परिवार के साथ पहले भी खड़ी थी और आगे भी खड़ी रहेगी। वाराणसीः वीर सावरकर को लेकर दिए गए ताजा बयान के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी बीजेपी के निशाने पर आ गए हैं। वाराणसी पहुंचे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का वीर सावरकर पर इस तरह का बयान देना बेहद अफसोसजनक है। राहुल गांधी ने उस शख्स के खिलाफ बयान दिया है, जिसने आज़ादी की लड़ाई में सबसे ज्यादा कष्ट उठाया है। राहुल गांधी को बयान के लिए राहुल गांधी को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। महेंद्र नाथ पांडेय यही नहीं रुके, उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि इस तरह के बयान से न सिर्फ राहुल गांधी बल्कि कांग्रेस पार्टी गर्त में जाएगी। भारतीय जनता पार्टी वीर सावरकर के परिवार के साथ पहले भी खड़ी थी और आगे भी खड़ी रहेगी। दरअसल, झारखंड की एक रैली में राहुल गांधी ने रेप के ऊपर दिए गए बयान पर माफी नहीं मांगते हुए कहा था कि मेरे नाम के साथ सावरकर नहीं बल्कि गांधी जुड़ा है। भारतीय राजनीति में वैसे भी सावरकर को लेकर दो गुट रहे हैं। बीजेपी जहां उन्हें आज़ादी का हीरो बताती रही है, वहीं काँग्रेस सावरकर को अंग्रेजों का जासूस कहती है। इसे लेकर दोनों ही पार्टियों में विचारधारा का द्वंद चलता रहा है। महेंद्र नाथ पांडेय ने राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि देश में इमरजेंसी लगाने वाले हमे शासन चलाना ना सिखाये। महंगाई के मुद्दे पर उन्होंने अपनी सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि महंगाई पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है। खराब मौसम के चलते प्याज सहित कुछ सामानों के दाम बढ़े हैं। जल्द ही इसे कंट्रोल में कर लिया जाएगा। आपको बता दें कि खुदरा बाज़ार में प्याज 150 रुपये किलो बिक रहा है। प्याज को लेकर देश में लोगों का गुस्सा दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।
महेंद्र नाथ पांडेय यही नहीं रुके, उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि इस तरह के बयान से न सिर्फ राहुल गांधी बल्कि कांग्रेस पार्टी गर्त में जाएगी। भारतीय जनता पार्टी वीर सावरकर के परिवार के साथ पहले भी खड़ी थी और आगे भी खड़ी रहेगी। वाराणसीः वीर सावरकर को लेकर दिए गए ताजा बयान के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी बीजेपी के निशाने पर आ गए हैं। वाराणसी पहुंचे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का वीर सावरकर पर इस तरह का बयान देना बेहद अफसोसजनक है। राहुल गांधी ने उस शख्स के खिलाफ बयान दिया है, जिसने आज़ादी की लड़ाई में सबसे ज्यादा कष्ट उठाया है। राहुल गांधी को बयान के लिए राहुल गांधी को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। महेंद्र नाथ पांडेय यही नहीं रुके, उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि इस तरह के बयान से न सिर्फ राहुल गांधी बल्कि कांग्रेस पार्टी गर्त में जाएगी। भारतीय जनता पार्टी वीर सावरकर के परिवार के साथ पहले भी खड़ी थी और आगे भी खड़ी रहेगी। दरअसल, झारखंड की एक रैली में राहुल गांधी ने रेप के ऊपर दिए गए बयान पर माफी नहीं मांगते हुए कहा था कि मेरे नाम के साथ सावरकर नहीं बल्कि गांधी जुड़ा है। भारतीय राजनीति में वैसे भी सावरकर को लेकर दो गुट रहे हैं। बीजेपी जहां उन्हें आज़ादी का हीरो बताती रही है, वहीं काँग्रेस सावरकर को अंग्रेजों का जासूस कहती है। इसे लेकर दोनों ही पार्टियों में विचारधारा का द्वंद चलता रहा है। महेंद्र नाथ पांडेय ने राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि देश में इमरजेंसी लगाने वाले हमे शासन चलाना ना सिखाये। महंगाई के मुद्दे पर उन्होंने अपनी सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि महंगाई पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है। खराब मौसम के चलते प्याज सहित कुछ सामानों के दाम बढ़े हैं। जल्द ही इसे कंट्रोल में कर लिया जाएगा। आपको बता दें कि खुदरा बाज़ार में प्याज एक सौ पचास रुपयापये किलो बिक रहा है। प्याज को लेकर देश में लोगों का गुस्सा दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अतीक अहमद की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत के दौरान सुरक्षा की मांग की थी। माफिया डॉन अतीक अहमद को एक साथ एक दिन में दो झटके लगे हैं। अतीक को पहला झटका उमेश पाल अपहरण मामले में लगा है। इस मामले में प्रयागराज एमपी-एमएलए कोर्ट ने माफिया से नेता बने अतीक अहमद को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही उस पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने इस मामले में अतीक अहमद, दिनेश पासी और खान सौलत हनीफ को दोषी करार दिया था। अतीक अहमद के भाई अशरफ सहित अन्य सभी 7 अभियुक्तों को बरी कर दिया गया। कोर्ट के फैसले पर उमेश पाल की पत्नी जया देवी ने कहा कि जब तक अतीक, उसके भाई, बेटे को खत्म नहीं किया जाएगा तब तक यह आतंक चलता रहेगा। मैं न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करती हूं। मैं मुख्यमंत्री जी से चाहूंगी की अतीक अहमद को खत्म किया जाए जिससे उसके आतंक पर भी अंकुश लगे। कोर्ट के फैसले पर उमेश पाल की मां ने कहा कि मेरा बेटा शेर की तरह लड़ाई लड़ता चला आया। जब उसे (अतीक अहमद) लगा कि वह नहीं बच पाएगा तब उसने 17-18 साल बाद मेरे बेटे की हत्या कराई। कोर्ट मेरे बेटे की हत्या पर उसे (अतीक अहमद) फांसी की सज़ा सुनाए। वह नोट के बल पर आगे कुछ भी कर सकता है। अतीक अहमद को दूसरा झटका सुप्रीम कोर्ट से लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अतीक अहमद की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत के दौरान सुरक्षा की मांग की थी। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने अहमद के वकील से उचित आवेदन के साथ उच्च न्यायालय जाने को कहा। वकील ने जोर देकर कहा कि उनके मुवक्किल की सुरक्षा दांव पर है, यूपी पुलिस हिरासत में रहते हुए उसके जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इस पर बेंच ने जवाब दिया, राज्य मशीनरी आपका ख्याल रखेगी। याचिकाकर्ता ने अपने जीवन की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश मांगा कि पुलिस हिरासत/रिमांड/पूछताछ के दौरान किसी भी तरह से उसे कोई शारीरिक चोट या नुकसान न पहुंचे।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अतीक अहमद की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत के दौरान सुरक्षा की मांग की थी। माफिया डॉन अतीक अहमद को एक साथ एक दिन में दो झटके लगे हैं। अतीक को पहला झटका उमेश पाल अपहरण मामले में लगा है। इस मामले में प्रयागराज एमपी-एमएलए कोर्ट ने माफिया से नेता बने अतीक अहमद को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही उस पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने इस मामले में अतीक अहमद, दिनेश पासी और खान सौलत हनीफ को दोषी करार दिया था। अतीक अहमद के भाई अशरफ सहित अन्य सभी सात अभियुक्तों को बरी कर दिया गया। कोर्ट के फैसले पर उमेश पाल की पत्नी जया देवी ने कहा कि जब तक अतीक, उसके भाई, बेटे को खत्म नहीं किया जाएगा तब तक यह आतंक चलता रहेगा। मैं न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करती हूं। मैं मुख्यमंत्री जी से चाहूंगी की अतीक अहमद को खत्म किया जाए जिससे उसके आतंक पर भी अंकुश लगे। कोर्ट के फैसले पर उमेश पाल की मां ने कहा कि मेरा बेटा शेर की तरह लड़ाई लड़ता चला आया। जब उसे लगा कि वह नहीं बच पाएगा तब उसने सत्रह-अट्ठारह साल बाद मेरे बेटे की हत्या कराई। कोर्ट मेरे बेटे की हत्या पर उसे फांसी की सज़ा सुनाए। वह नोट के बल पर आगे कुछ भी कर सकता है। अतीक अहमद को दूसरा झटका सुप्रीम कोर्ट से लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अतीक अहमद की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत के दौरान सुरक्षा की मांग की थी। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने अहमद के वकील से उचित आवेदन के साथ उच्च न्यायालय जाने को कहा। वकील ने जोर देकर कहा कि उनके मुवक्किल की सुरक्षा दांव पर है, यूपी पुलिस हिरासत में रहते हुए उसके जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इस पर बेंच ने जवाब दिया, राज्य मशीनरी आपका ख्याल रखेगी। याचिकाकर्ता ने अपने जीवन की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश मांगा कि पुलिस हिरासत/रिमांड/पूछताछ के दौरान किसी भी तरह से उसे कोई शारीरिक चोट या नुकसान न पहुंचे।
20 साल बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान को पूरी तरह से छोड़ दिया है। वहीं अमरीकी जवानों के जाने के बाद तालिबान सरकार गठन की तैयारियों में जुट गया है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अल कायदा ने 2 पन्नों का मुबारकबाद का पैगाम तालिबान के नाम लिखा है। इसमें कश्मीर का भी जिक्र किया गया है। पत्र में फिलिस्तीन, सीरिया, लेबनॉन, जोर्डन, इजरायल, तुर्की, सोमालिया, यमन और कश्मीर जैसे तमाम जगहों को कब्जा करने की बात कही है। इस मुद्दे पर टीवी न्यूज़ चैनल 'आज तक' के शो 'हल्ला बोल' पर चर्चा हो रही थी। इस दौरान पाकिस्तानी पत्रकार हामिद खान और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता संबित पात्रा के बीच बहस देखने को मिली। संबित पात्रा ने कहा, "मुझे दया आती है इन पाकिस्तानियों पर। इनके पास खाने के पैसे नहीं हैं, पर ये पूरे विश्व पर कब्जा करने चले हैं। ये बड़ी शर्म की बात है। " इसपर एंकर अंजना ओम कश्यप ने कहा, " अपने कहा दया आ रही है इनपर और उन्होंने सर झुका लिया।
बीस साल बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान को पूरी तरह से छोड़ दिया है। वहीं अमरीकी जवानों के जाने के बाद तालिबान सरकार गठन की तैयारियों में जुट गया है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अल कायदा ने दो पन्नों का मुबारकबाद का पैगाम तालिबान के नाम लिखा है। इसमें कश्मीर का भी जिक्र किया गया है। पत्र में फिलिस्तीन, सीरिया, लेबनॉन, जोर्डन, इजरायल, तुर्की, सोमालिया, यमन और कश्मीर जैसे तमाम जगहों को कब्जा करने की बात कही है। इस मुद्दे पर टीवी न्यूज़ चैनल 'आज तक' के शो 'हल्ला बोल' पर चर्चा हो रही थी। इस दौरान पाकिस्तानी पत्रकार हामिद खान और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा के बीच बहस देखने को मिली। संबित पात्रा ने कहा, "मुझे दया आती है इन पाकिस्तानियों पर। इनके पास खाने के पैसे नहीं हैं, पर ये पूरे विश्व पर कब्जा करने चले हैं। ये बड़ी शर्म की बात है। " इसपर एंकर अंजना ओम कश्यप ने कहा, " अपने कहा दया आ रही है इनपर और उन्होंने सर झुका लिया।
दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी राफेल नडाल के शानदार प्रदर्शन के दम पर स्पेन ने घरेलू दर्शकों के सामने डेविस कप मुकाबले में रूस को 2-1 से पराजित किया। नडाल ने कारेन खाचानोव को 6-3, 7-6 से हराकर स्पेन को बराबरी दिलाई। इसके बाद मार्शेल ग्रानोलेर्स और फेलिसियानो लोपेज ने निर्णायक युगल मुकाबले में खाचानोव और आंद्रेई रूबलेव को 6-4,7-6 से मात दी। Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.
दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी राफेल नडाल के शानदार प्रदर्शन के दम पर स्पेन ने घरेलू दर्शकों के सामने डेविस कप मुकाबले में रूस को दो-एक से पराजित किया। नडाल ने कारेन खाचानोव को छः-तीन, सात-छः से हराकर स्पेन को बराबरी दिलाई। इसके बाद मार्शेल ग्रानोलेर्स और फेलिसियानो लोपेज ने निर्णायक युगल मुकाबले में खाचानोव और आंद्रेई रूबलेव को छः-चार,सात-छः से मात दी। Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.
पंचकूला, 8 मार्च (ट्रिन्यू) अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आज यहां कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें अतिरिक्त उपायुक्त मोहम्मद इमरान रज़ा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में एसडीएम रिचा राठी और नगराधीश सिमरनजीत कौर भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली विभिन्न स्कूलों की 16 छात्राओं को एक लाख 52 हजार 400 रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी को संबोधित किया। उन्होंने आह्वान किया कि जिस प्रकार से घरों में माताएं एवं बहनों का सम्मान करते हैं उसी भावना से दूसरों की बहन व बेटियों का भी सम्मान करें। एसडीएम रिचा राठी ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस साल का थीम है 'चूज़ टू चैलें'। 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ व पोषण अभियान' की ब्रांड एम्बेसडर प्रियंका शर्मा ने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में उपलब्धि हासिल कर प्रदेश व देश का नाम रोशन कर रही हैं। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए दून पब्लिक स्कूल की मनजोत कौर, मेधावी, अनिका गगनेजा, स्नेहा धीमान, भाव्या टुटेजा, तनिशा, नाव्या शर्मा, गुरूप्रीत कश्यप, कीर्ति भट्ट और कृष्टि अग्रवाल, डीएवी पब्लिक स्कूल की सीया चानना और भवन विद्यालय स्कूल की अनवी सोनी को 11-11 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई। इसी प्रकार स्पाॅट पेंटिंग के क्षेत्र में चाइल्ड केयर संस्थान की शगुन, कोमल और अंजलि तथा संगीत के क्षेत्र में दीपिका को 5100-5100 रूपए की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। अम्बाला (नस) : कल्पना चावला राजकीय महिला बहुतकनीकी अम्बाला शहर में आज अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस सप्ताह के तहत एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जन औषधि केंद्र के प्रधान नरेश कुमार अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि शिक्षक एमपी गुप्ता रहे। मुख्य वक्ता नरेश कुमार ने वक्तव्य में भारतीय जन औषधि परियोजना दिवस 2021 की उपलब्धियों के बारे में बताया। कल्पना चावला गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक फॉर वुमेन में चार विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें एसे राइटिंग में मनीषा व आंचल गुप्ता, पोस्टर मेकिंग में मनीषा, कोमल, पलक, सिमरन, भाषण प्रतियोगिता मे मनजीत कौर, कोमल, पल्लवी, रिदम, शिवानी, रंगोली प्रतियोगिता में शिवानी, पल्लवी ने प्रथम स्थान ग्रहण किया। संस्था की डाक्टर विंदु आनंद ने अतिथियों का स्वागत किया व महिला सशक्तिकरण के लिए छात्राओं को जागरूक किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉक्टर अश्वनी भारद्वाज रहे व इस अवसर पर सरला, कृष्णा, डॉ़ संतोष व सविता आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे। अम्बाला शहर (हप्र) : विश्व महिला दिवस के अवसर पर अम्बाला नगर निगम की मेयर शक्तिरानी शर्मा की ओर से महिलाओं के लिए निशुल्क मेडिकल चेकअप कैंप का आयोजन किया गया। इसमें करीब 200 महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की गई और उन्हें परामर्श देकर मुफ्त दवाइयां भी दी गईं। शहर के नाहन हाउस स्थित भगवान वाल्मीकि सत्संग हाल में आयोजित कैंप के दौरान मिशन अस्पताल के डायरेक्टर सुनील सादिक की देखरेख में डॉक्टरों ने मरीजों की जांच की। कैंप के दौरान फिजियोथेरेपिस्ट, सामान्य चिकित्सा, स्त्री रोग विशेषज्ञ, आंखों की जांच, दवा विशेषज्ञ ने मरीजों की जांच की। अम्बाला (नस) : जीएमएन कॉलेज, अंबाला छावनी के एनएसएस यूनिट के सौजन्य वूमेन सेल द्वारा कॉलेज प्राचार्य डॉ राजपाल सिंह की अध्यक्षता में महिला दिवस के उपलक्ष्य में 'आओ स्त्री के लिए लिखें' अभियान चलाया गया जिसमें महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों ने स्त्री संबंधी अपने भावों को लिखा। कॉलेज प्राचार्य डॉ राजपाल सिंह ने कहा कि पुरुषों की प्रेरक के साथ-साथ स्त्री मार्गदर्शक भी है । यहां एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ धर्मवीर सैनी, व डॉ अनीश ने भी विचार रखे। पंचकूला (ट्रिन्यू) : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सोमवार को युवा व्यापार मंडल द्वारा सेक्टर 5 महिला थाना प्रभारी वहिता हामिद व उनकी सहयोगी टीम, सेक्टर-20 के सरकारी अस्पताल में मुख्य डॉक्टर अंजू शर्मा व सहयोगी टीम, कर्मचारी वंदना रानी, उद्यमी पूजा गुप्ता, मनीषा सिंगला व विभिन्न क्षेत्र से जुड़ी 36 महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस मौके पर युवा व्यापार मंडल के प्रदेश प्रभारी राहुल गर्ग, प्रदेश सचिव कृष्ण कुमार, विशेष आमंत्रित सदस्य आशु सिंगला, सुबोध अटल, विजय बंसल आदि मौजूद थे। सुपर 100 के साथ काटा केक : प्रिंसिपल डाइट सुनीता नैन के अनुसार आज विश्व महिला दिवस पर डाइट सदस्यों ने अपनी सुपर 100 की लड़कियों के साथ केक काटा। इसमें कविताएं, गीत और नृत्य के साथ-साथ लड़कियों को संदेश दिया कि कभी खुद को कमज़ोर मत समझें। दूसरी ओर सेक्टर 6 के नागरिक अस्पताल में ठेका कर्मचारी यूनियन की प्रधान रमा देवी ने महिला कर्मचारियों को शुभकामनायें दीं। बीबीएन (निस) : अटल शिक्षा नगर, कालूझंडा स्थित आईईसी यूनिवर्सिटी में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के सभागार में महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उनके सराहनीय प्रदर्शन और कोरोना काल में कार्य करते रहने के लिए सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में दून निर्वाचन क्षेत्र की पूर्व विधायक विनोद चंदेल और आईटी विभाग, शिमला की वर्तमान संयुक्त निदेशक, नीरज चांदला मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। कुलपति डॉ़ अंजु सक्सेना ने जिला परिषद सदस्य रीना देवी चौहान और बीडीसी सदस्य नीलम कुमारी को सम्मानित भी किया। पंचकूला (ट्रिन्यू) : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आज यहां सेक्टर 15 स्थित पोस्ट ऑफिस में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। हरियाणा महिला आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष प्रीति भारद्वाज ने मुख्यातिथि व उपमंडल अधिकारी ( नागरिक) डॉ़ ऋचा राठी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। पोस्टमास्टर जनरल हरियाणा रंजू प्रसाद ने इस अवसर पर डाक महिला कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं हेतु पुरस्कृत किया। इसके अतिरिक्त सोनिया सूद, नगर पार्षद , कुमारी रीजुल सैनी बैडमिंटन खिलाड़ी, नीलम कोशिक सामाजिक कार्यकर्ता, प्रियंका शर्मा, कोरोना वारियर को सम्मानित किया गया। पिंजौर (निस) : एनआरएमयू रेलवे वर्कशॉप ब्रांच कालका ने सोमवार को महिला दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया जिसकी अध्यक्षता प्रधान प्रदीप कुमार ने की। इस मौके पर सचिव पुष्पिंदर शर्मा, संजीव कोहली, जगपाल सिंह, गगनदीप शर्मा, कमल कुमार, चौधरी प्रकाश चंद, किरण रेखा, अनिता शर्मा अन्य महिला कर्मी मौजूद थी। सचिव पुष्पिंदर शर्मा ने संगठन में महिलाओं के योगदान की सराहना की। संजीव कोहली ने रेलवे में महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने और उनके कार्यों की सराहना की। पिंजौर (निस) : कालका रेलवे वर्कशॉप ब्रांच यूआरएमयू ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय महीला दिवस के उपलक्ष्य में महिला विंग रेल कर्मियों को उपहार देकर सम्मानित किया। यूनियन सचिव विकास तलवार ने महिला कर्मियों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया। इस अवसर पर गुरमीत कौर, मंजु शर्मा, पुष्पा, चित्र रेखा, प्रेम लता, मनजीत कौर, मीना देवी, वीना वधवा, रीतिका, हिना शर्मा आदि महिला कर्मी मौजूद थी। अम्बाला (नस) : क्राइम कंट्रोल एवं ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन सोनीपत द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अम्बाला छावनी के राजकीय स्कूल की हिंदी प्राध्यापिका डॉ सोनिका को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि हरियाणा की बेटी बचाओ बेटी बचाओ अभियान की ब्रांड एम्बेसडर डॉ. वीना अरोड़ा, महिला आयोग की सदस्य सोनिया अग्रवाल, सोनीपत की समाज सेवी ऊषा भंडारी एवं पूर्व केबिनेट मंत्री कविता जैन भी उपस्थित रहे। आर्गेनाइजेशन द्वारा देश भर से 61 महिलाओं को उनके द्वारा किए गए समाज हित में कार्य करने पर सम्मानित किया है। अंबाला कैंट के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मेन ब्रांच, अंबाला छावनी की हिंदी प्राध्यापिका डॉ. सोनिका को उनके लॉकडाउन के दौरान शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रयासों के लिए सम्मानित किया।
पंचकूला, आठ मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आज यहां कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें अतिरिक्त उपायुक्त मोहम्मद इमरान रज़ा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में एसडीएम रिचा राठी और नगराधीश सिमरनजीत कौर भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली विभिन्न स्कूलों की सोलह छात्राओं को एक लाख बावन हजार चार सौ रुपयापए की राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी को संबोधित किया। उन्होंने आह्वान किया कि जिस प्रकार से घरों में माताएं एवं बहनों का सम्मान करते हैं उसी भावना से दूसरों की बहन व बेटियों का भी सम्मान करें। एसडीएम रिचा राठी ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस साल का थीम है 'चूज़ टू चैलें'। 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ व पोषण अभियान' की ब्रांड एम्बेसडर प्रियंका शर्मा ने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में उपलब्धि हासिल कर प्रदेश व देश का नाम रोशन कर रही हैं। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए दून पब्लिक स्कूल की मनजोत कौर, मेधावी, अनिका गगनेजा, स्नेहा धीमान, भाव्या टुटेजा, तनिशा, नाव्या शर्मा, गुरूप्रीत कश्यप, कीर्ति भट्ट और कृष्टि अग्रवाल, डीएवी पब्लिक स्कूल की सीया चानना और भवन विद्यालय स्कूल की अनवी सोनी को ग्यारह-ग्यारह हजार रुपए की राशि प्रदान की गई। इसी प्रकार स्पाॅट पेंटिंग के क्षेत्र में चाइल्ड केयर संस्थान की शगुन, कोमल और अंजलि तथा संगीत के क्षेत्र में दीपिका को पाँच हज़ार एक सौ-पाँच हज़ार एक सौ रूपए की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। अम्बाला : कल्पना चावला राजकीय महिला बहुतकनीकी अम्बाला शहर में आज अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस सप्ताह के तहत एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जन औषधि केंद्र के प्रधान नरेश कुमार अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि शिक्षक एमपी गुप्ता रहे। मुख्य वक्ता नरेश कुमार ने वक्तव्य में भारतीय जन औषधि परियोजना दिवस दो हज़ार इक्कीस की उपलब्धियों के बारे में बताया। कल्पना चावला गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक फॉर वुमेन में चार विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें एसे राइटिंग में मनीषा व आंचल गुप्ता, पोस्टर मेकिंग में मनीषा, कोमल, पलक, सिमरन, भाषण प्रतियोगिता मे मनजीत कौर, कोमल, पल्लवी, रिदम, शिवानी, रंगोली प्रतियोगिता में शिवानी, पल्लवी ने प्रथम स्थान ग्रहण किया। संस्था की डाक्टर विंदु आनंद ने अतिथियों का स्वागत किया व महिला सशक्तिकरण के लिए छात्राओं को जागरूक किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉक्टर अश्वनी भारद्वाज रहे व इस अवसर पर सरला, कृष्णा, डॉ़ संतोष व सविता आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे। अम्बाला शहर : विश्व महिला दिवस के अवसर पर अम्बाला नगर निगम की मेयर शक्तिरानी शर्मा की ओर से महिलाओं के लिए निशुल्क मेडिकल चेकअप कैंप का आयोजन किया गया। इसमें करीब दो सौ महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की गई और उन्हें परामर्श देकर मुफ्त दवाइयां भी दी गईं। शहर के नाहन हाउस स्थित भगवान वाल्मीकि सत्संग हाल में आयोजित कैंप के दौरान मिशन अस्पताल के डायरेक्टर सुनील सादिक की देखरेख में डॉक्टरों ने मरीजों की जांच की। कैंप के दौरान फिजियोथेरेपिस्ट, सामान्य चिकित्सा, स्त्री रोग विशेषज्ञ, आंखों की जांच, दवा विशेषज्ञ ने मरीजों की जांच की। अम्बाला : जीएमएन कॉलेज, अंबाला छावनी के एनएसएस यूनिट के सौजन्य वूमेन सेल द्वारा कॉलेज प्राचार्य डॉ राजपाल सिंह की अध्यक्षता में महिला दिवस के उपलक्ष्य में 'आओ स्त्री के लिए लिखें' अभियान चलाया गया जिसमें महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों ने स्त्री संबंधी अपने भावों को लिखा। कॉलेज प्राचार्य डॉ राजपाल सिंह ने कहा कि पुरुषों की प्रेरक के साथ-साथ स्त्री मार्गदर्शक भी है । यहां एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ धर्मवीर सैनी, व डॉ अनीश ने भी विचार रखे। पंचकूला : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सोमवार को युवा व्यापार मंडल द्वारा सेक्टर पाँच महिला थाना प्रभारी वहिता हामिद व उनकी सहयोगी टीम, सेक्टर-बीस के सरकारी अस्पताल में मुख्य डॉक्टर अंजू शर्मा व सहयोगी टीम, कर्मचारी वंदना रानी, उद्यमी पूजा गुप्ता, मनीषा सिंगला व विभिन्न क्षेत्र से जुड़ी छत्तीस महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस मौके पर युवा व्यापार मंडल के प्रदेश प्रभारी राहुल गर्ग, प्रदेश सचिव कृष्ण कुमार, विशेष आमंत्रित सदस्य आशु सिंगला, सुबोध अटल, विजय बंसल आदि मौजूद थे। सुपर एक सौ के साथ काटा केक : प्रिंसिपल डाइट सुनीता नैन के अनुसार आज विश्व महिला दिवस पर डाइट सदस्यों ने अपनी सुपर एक सौ की लड़कियों के साथ केक काटा। इसमें कविताएं, गीत और नृत्य के साथ-साथ लड़कियों को संदेश दिया कि कभी खुद को कमज़ोर मत समझें। दूसरी ओर सेक्टर छः के नागरिक अस्पताल में ठेका कर्मचारी यूनियन की प्रधान रमा देवी ने महिला कर्मचारियों को शुभकामनायें दीं। बीबीएन : अटल शिक्षा नगर, कालूझंडा स्थित आईईसी यूनिवर्सिटी में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के सभागार में महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उनके सराहनीय प्रदर्शन और कोरोना काल में कार्य करते रहने के लिए सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में दून निर्वाचन क्षेत्र की पूर्व विधायक विनोद चंदेल और आईटी विभाग, शिमला की वर्तमान संयुक्त निदेशक, नीरज चांदला मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। कुलपति डॉ़ अंजु सक्सेना ने जिला परिषद सदस्य रीना देवी चौहान और बीडीसी सदस्य नीलम कुमारी को सम्मानित भी किया। पंचकूला : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आज यहां सेक्टर पंद्रह स्थित पोस्ट ऑफिस में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। हरियाणा महिला आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष प्रीति भारद्वाज ने मुख्यातिथि व उपमंडल अधिकारी डॉ़ ऋचा राठी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। पोस्टमास्टर जनरल हरियाणा रंजू प्रसाद ने इस अवसर पर डाक महिला कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं हेतु पुरस्कृत किया। इसके अतिरिक्त सोनिया सूद, नगर पार्षद , कुमारी रीजुल सैनी बैडमिंटन खिलाड़ी, नीलम कोशिक सामाजिक कार्यकर्ता, प्रियंका शर्मा, कोरोना वारियर को सम्मानित किया गया। पिंजौर : एनआरएमयू रेलवे वर्कशॉप ब्रांच कालका ने सोमवार को महिला दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया जिसकी अध्यक्षता प्रधान प्रदीप कुमार ने की। इस मौके पर सचिव पुष्पिंदर शर्मा, संजीव कोहली, जगपाल सिंह, गगनदीप शर्मा, कमल कुमार, चौधरी प्रकाश चंद, किरण रेखा, अनिता शर्मा अन्य महिला कर्मी मौजूद थी। सचिव पुष्पिंदर शर्मा ने संगठन में महिलाओं के योगदान की सराहना की। संजीव कोहली ने रेलवे में महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने और उनके कार्यों की सराहना की। पिंजौर : कालका रेलवे वर्कशॉप ब्रांच यूआरएमयू ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय महीला दिवस के उपलक्ष्य में महिला विंग रेल कर्मियों को उपहार देकर सम्मानित किया। यूनियन सचिव विकास तलवार ने महिला कर्मियों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया। इस अवसर पर गुरमीत कौर, मंजु शर्मा, पुष्पा, चित्र रेखा, प्रेम लता, मनजीत कौर, मीना देवी, वीना वधवा, रीतिका, हिना शर्मा आदि महिला कर्मी मौजूद थी। अम्बाला : क्राइम कंट्रोल एवं ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन सोनीपत द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अम्बाला छावनी के राजकीय स्कूल की हिंदी प्राध्यापिका डॉ सोनिका को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि हरियाणा की बेटी बचाओ बेटी बचाओ अभियान की ब्रांड एम्बेसडर डॉ. वीना अरोड़ा, महिला आयोग की सदस्य सोनिया अग्रवाल, सोनीपत की समाज सेवी ऊषा भंडारी एवं पूर्व केबिनेट मंत्री कविता जैन भी उपस्थित रहे। आर्गेनाइजेशन द्वारा देश भर से इकसठ महिलाओं को उनके द्वारा किए गए समाज हित में कार्य करने पर सम्मानित किया है। अंबाला कैंट के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मेन ब्रांच, अंबाला छावनी की हिंदी प्राध्यापिका डॉ. सोनिका को उनके लॉकडाउन के दौरान शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रयासों के लिए सम्मानित किया।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः सांप का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन आज हम जिस वीडियो की बात करने जा रहे हैं उसे देख कर आपकी आंखें फटी रही जाएगी। एक छोटी बच्ची का वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है। इस वीडियो में आप देख सकते है की बिस्तर पर बच्ची लेटी है। और वो यहां अकेले नहीं है बल्कि उसके हाथों में खतरनाक सांप है। इस बच्ची को डर नहीं है। वो हंस रही है। आराम से तकिए पर लेटी है। ऐसा लग रहा है मानो ये सांप बच्ची का दोस्त ह। इस वीडियो के एक-एक फ्रेम को देख कर आप डर जाएंगे।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः सांप का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन आज हम जिस वीडियो की बात करने जा रहे हैं उसे देख कर आपकी आंखें फटी रही जाएगी। एक छोटी बच्ची का वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है। इस वीडियो में आप देख सकते है की बिस्तर पर बच्ची लेटी है। और वो यहां अकेले नहीं है बल्कि उसके हाथों में खतरनाक सांप है। इस बच्ची को डर नहीं है। वो हंस रही है। आराम से तकिए पर लेटी है। ऐसा लग रहा है मानो ये सांप बच्ची का दोस्त ह। इस वीडियो के एक-एक फ्रेम को देख कर आप डर जाएंगे।
दमोह, (एजेंसी/वार्ता):मध्यप्रदेश के दमोह जिले के पथरिया थाना क्षेत्र के ग्राम उमरा में बिजली गिरने से पिता-पुत्र की मौत हो गई। वहीं दो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार दमोह जिले के पथरिया थाना अंतर्गत ग्राम उमरा में कल रात्रि अचानक मौसम परिवर्तन एवं तेज बारिश के चलते बिजली गिरने से अपने घर के एक हिस्से में गाय बांधने गए पुत्र अन्नू आदिवासी (36) एवं पिता राधे आदिवासी (55) के ऊपर बिजली गिरने से उनकी घटना स्थल पर ही मौत हो गयी। इसी बीच पास में ही खड़े उनके दोनों बच्चे लखन दो वर्ष एवं हरि बाई 4 वर्ष भी बिजली की धमक एवं चिनगारियों से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। -(एजेंसी/वार्ता) यह भी पढ़ेः- पाचन सिस्टम को मजबूत करने में मदद करता है कच्चा केला, ये कई पोषक तत्वों से भरपूर!
दमोह, :मध्यप्रदेश के दमोह जिले के पथरिया थाना क्षेत्र के ग्राम उमरा में बिजली गिरने से पिता-पुत्र की मौत हो गई। वहीं दो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार दमोह जिले के पथरिया थाना अंतर्गत ग्राम उमरा में कल रात्रि अचानक मौसम परिवर्तन एवं तेज बारिश के चलते बिजली गिरने से अपने घर के एक हिस्से में गाय बांधने गए पुत्र अन्नू आदिवासी एवं पिता राधे आदिवासी के ऊपर बिजली गिरने से उनकी घटना स्थल पर ही मौत हो गयी। इसी बीच पास में ही खड़े उनके दोनों बच्चे लखन दो वर्ष एवं हरि बाई चार वर्ष भी बिजली की धमक एवं चिनगारियों से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। - यह भी पढ़ेः- पाचन सिस्टम को मजबूत करने में मदद करता है कच्चा केला, ये कई पोषक तत्वों से भरपूर!
Highlights'पहले आओ , पहले पाओ' के आधार पर बेचे जाएंगे। 4000 से अधिक अनारक्षित टिकट 30 आस्ट्रेलियाई डॉलर में उपलब्ध हैं। आईसीसी हास्पिटेलिटी और आईसीसी टैवल एंड टूर्स कार्यक्रम के जरिये सीमित संख्या में पैकेज भी उपलब्ध हैं। T20 World Cup 2022: आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2022 ऑस्ट्रेलिया में होने वाला है। 23 अक्टूबर को भारत और पाकिस्तान की टीम आमने-सामने होंगी। इस मैच के आम टिकट फरवरी में पांच मिनट के भीतर ही बिक गए थे। आईसीसी ने स्टैंडिंग रूम के टिकट जारी किए। आयोजक 16 अक्टूबर को पहले मैच से पूर्व पुनः बिक्री का प्लेटफॉर्म भी शुरू करेंगे। आईसीसी ने कहा कि जो प्रशंसक पहले टिकट बुक करने से चूक गए हैं, वे अभी भी टिकट ले सकते हैं। बच्चों की टिकट पांच डॉलर से और बड़ों की 20 डॉलर से उपलब्ध है। टिकट अभी भी ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप फाइनल के लिए उपलब्ध हैं, जो 13 नवंबर को MCG में भी खेला जा रहा है।
Highlights'पहले आओ , पहले पाओ' के आधार पर बेचे जाएंगे। चार हज़ार से अधिक अनारक्षित टिकट तीस आस्ट्रेलियाई डॉलर में उपलब्ध हैं। आईसीसी हास्पिटेलिटी और आईसीसी टैवल एंड टूर्स कार्यक्रम के जरिये सीमित संख्या में पैकेज भी उपलब्ध हैं। Tबीस World Cup दो हज़ार बाईस: आईसीसी पुरुष टीबीस विश्व कप दो हज़ार बाईस ऑस्ट्रेलिया में होने वाला है। तेईस अक्टूबर को भारत और पाकिस्तान की टीम आमने-सामने होंगी। इस मैच के आम टिकट फरवरी में पांच मिनट के भीतर ही बिक गए थे। आईसीसी ने स्टैंडिंग रूम के टिकट जारी किए। आयोजक सोलह अक्टूबर को पहले मैच से पूर्व पुनः बिक्री का प्लेटफॉर्म भी शुरू करेंगे। आईसीसी ने कहा कि जो प्रशंसक पहले टिकट बुक करने से चूक गए हैं, वे अभी भी टिकट ले सकते हैं। बच्चों की टिकट पांच डॉलर से और बड़ों की बीस डॉलर से उपलब्ध है। टिकट अभी भी ICC मेन्स Tबीस वर्ल्ड कप फाइनल के लिए उपलब्ध हैं, जो तेरह नवंबर को MCG में भी खेला जा रहा है।
वीके शशिकला को 31 जनवरी को बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल में कोरोना के इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई थी। इसके बाद से वह क्वारंटाइन में थीं। आज वह अपना क्वारंटाइन पीरियड पूरा कर तमिलनाडु पहुंची और यहां मंदिर के दर्शन किए। बेंगलुरू, एएनआइ। तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले आज राज्य में सियासी पारा बढ़ गय है। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) से निष्कासित और पूर्व सीएम जयललिता की करीबी नेता वीके शशिकला(VK Sasikala) आज तमिलनाडु पहुंची हैं। तमिलनाडु में AIADMK की नेता वीके शशिकला होसुर ने मां प्रतिज्ञा कालिका मंदिर में पूजा-अर्चना कर दर्शन किए। इससे पहले वह आज सुबह कर्नाटक के बेंगलुरू से तमिलनाडु के लिए रवाना हुईं। शशिकला बेंगलुरु में अपना क्वारंटाइन पीरियड पूरा करने के बाद तमिलनाडु पहुंची हैं। वह आज सुबह बेंगलुरु के प्रेस्टीज गोल्फशायर क्लब(Prestige Golfshire Club) से तमिलनाडु के लिए रवाना हुईं, जहां वह अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अपना क्वारंटाइन पीरियड बिता रही थीं। बताते चलें कि वीके शशिकला को 31 जनवरी को बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल में कोरोना के इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई थी। इसके बाद से वह क्वारंटाइन में थीं। निष्कासित अन्नाद्रमुक नेता वीके शशिकला का समर्थन करने के लिए बड़ी संख्या में तमिलनाडु में लोग उनके आगमन का जश्न मनाने के लिए जुटे । वह बेंगलुरू में अस्पताल से छुट्टी पाकर आज तमिलनाडु पहुंची हैं। बता दें, इस साल तमिलनाडु में 234 सीटों के लिए विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में वीके शशिकला की राज्य में रही वापसी के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। साल 2019 में आयकर विभाग ने बेनामी लेनदेन अधिनियम के प्रावधानों के तहत पूर्व AIADMK नेता से संबंधित 1,600 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी। इस दौरान शशिकला को आधिकारिक रूप से 27 जनवरी को भ्रष्टाचार के मामले में चार साल की जेल की सजा पूरी करने के बाद रिहा किया गया था। उनको जेल अस्पताल से 20 जनवरी को सरकार द्वारा संचालित बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल ले जाया गया था। वहां तबियत और खराब होने के बाद उन्हें अगले दिन उन्हें विक्टोरिया अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां वो कोरोना से संक्रमित पाई गईं।
वीके शशिकला को इकतीस जनवरी को बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल में कोरोना के इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई थी। इसके बाद से वह क्वारंटाइन में थीं। आज वह अपना क्वारंटाइन पीरियड पूरा कर तमिलनाडु पहुंची और यहां मंदिर के दर्शन किए। बेंगलुरू, एएनआइ। तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले आज राज्य में सियासी पारा बढ़ गय है। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से निष्कासित और पूर्व सीएम जयललिता की करीबी नेता वीके शशिकला आज तमिलनाडु पहुंची हैं। तमिलनाडु में AIADMK की नेता वीके शशिकला होसुर ने मां प्रतिज्ञा कालिका मंदिर में पूजा-अर्चना कर दर्शन किए। इससे पहले वह आज सुबह कर्नाटक के बेंगलुरू से तमिलनाडु के लिए रवाना हुईं। शशिकला बेंगलुरु में अपना क्वारंटाइन पीरियड पूरा करने के बाद तमिलनाडु पहुंची हैं। वह आज सुबह बेंगलुरु के प्रेस्टीज गोल्फशायर क्लब से तमिलनाडु के लिए रवाना हुईं, जहां वह अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अपना क्वारंटाइन पीरियड बिता रही थीं। बताते चलें कि वीके शशिकला को इकतीस जनवरी को बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल में कोरोना के इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई थी। इसके बाद से वह क्वारंटाइन में थीं। निष्कासित अन्नाद्रमुक नेता वीके शशिकला का समर्थन करने के लिए बड़ी संख्या में तमिलनाडु में लोग उनके आगमन का जश्न मनाने के लिए जुटे । वह बेंगलुरू में अस्पताल से छुट्टी पाकर आज तमिलनाडु पहुंची हैं। बता दें, इस साल तमिलनाडु में दो सौ चौंतीस सीटों के लिए विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में वीके शशिकला की राज्य में रही वापसी के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। साल दो हज़ार उन्नीस में आयकर विभाग ने बेनामी लेनदेन अधिनियम के प्रावधानों के तहत पूर्व AIADMK नेता से संबंधित एक,छः सौ करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी। इस दौरान शशिकला को आधिकारिक रूप से सत्ताईस जनवरी को भ्रष्टाचार के मामले में चार साल की जेल की सजा पूरी करने के बाद रिहा किया गया था। उनको जेल अस्पताल से बीस जनवरी को सरकार द्वारा संचालित बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल ले जाया गया था। वहां तबियत और खराब होने के बाद उन्हें अगले दिन उन्हें विक्टोरिया अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां वो कोरोना से संक्रमित पाई गईं।
रवफाकों को आवश्यकताओं के प्रति पार्टी और सरकार थक रूप से चिन्ताशील रही । १९३० में उन स्कूलों की प्रणाली में बहुत बड़ा परिवर्तन किया गया । रवफ़ाकों के विशेषीकरण का निश्चय किया गया । उसके बाद ये स्कूल बड़े बड़े उद्यमों और राजकीय तथा सामूहिक फ़ामों में खोले गये। छात्र समुदाय में युवा अग्रणी कामगार, विशाल प्रौद्योगिक उद्यमों तथा समाजवादी फार्मों के उत्साही कामगार शामिल करते थे । अव प्रत्येक प्रौद्योगिक क्षेत्र का अपना आधार अपना उच्च शिक्षा. संस्थापन था, और इस प्रकार के प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थापन का अपना एक बड़ा केन्द्र - रवफाक - था जो उसका पोषण करता था। साल दर साल इन नये, सोवियत बुद्धिजीवी वर्ग के वर्कशापों की संख्या बढ़ने लगो और वे अधिकाधिक मजबूत होने लगे । उच्च शिक्षा संस्थापनों के सर्वहारीकरण और नये बुद्धिजीवी वर्ग को तैयार करने में रवफाकों ने विशेषरूप से महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। - साल दर साल विश्वविद्यालयों और कालिजी के माध्यम से उन्होंने उद्योग को ऐसे युवा विशेषज्ञ देकर मजबूत बनाया जिनका जन्म और पालनपोषण श्रमिक वर्ग में हुआ था । लाखों की संख्या में मज़दूरों, खेत-मज़दूरों तथा घरीव किसानों ने शिक्षा ग्रहण की, साक्षरता स्कूल से शुरू होकर, रवफाक के रास्ते, विश्वविद्यालय तक पहुंचे । अन्य लोगों के साथ रवफ़ाक के रास्ते औद्योगिक अकादमी तक का मार्ग, सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिष्ठित नेता तथा राजनयिक, नि० से० नुश्चेव ने भी तय किया । वह पहले एक फिटर थे और अव सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी को केन्द्रीय समिति के प्रथम सेक्रेटरी और सोवियत संघ की मन्त्रिपरिषद् के श्रव्यक्ष है । भारी संख्या में पाये जानेवाले वयस्क स्कूलो के अलावा पाठ्येतर शिक्षा का भी सुव्यवस्थित जाल विछा था । लाखों लोगो के बीच संस्कृति के प्रोत्साहन के लिए श्रखवारें, पुस्तकें, रेडियो तथा सिनेमा, सोवियत संघ के दूरवर्ती इलाक़ों तक में पहुंचते थे। दयस्को में निरक्षरता को खत्म करना, बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा लागू करना, सांस्कृतिक तथा शिक्षा संवन्धी संस्थापनो में वृद्धि, और व्यावसायिक प्रशिक्षण स्कूलो ( फैक्टरी प्रशिक्षण स्कूल में लेकर उच्च शिक्षा संस्थापनो तक ) का निर्माण - समाजवादी संस्कृति फो प्रोत्साहित करने की दिशा में ये सभी सोवियत जनता की प्रमुख उपलव्विया थीं । १६३६ को जन-गणना के अनुसार, ६ से ४६ साल तक की उम्र के लोगो में ८६.१ प्रतिशत साक्षरता पायी जाती थी ( शहरी इलाको में १४.२ प्रतिशत और देहात में ८६.३ प्रतिशत ) । पुरपो में १५ १ प्रतिशत और स्त्रियो में ८३.४ प्रतिशत साक्षरता पायी जाती थी। इस तरह रेकार्ड समय में - २० सालो से भी कम समय में - सास्कृति क्रान्ति के अत्यधिक कठिन कामो में से एक काम पूरा किया गया । इतिहास में इसका जोड़ नहीं मिलता। क्रान्ति से पहले रस में साक्षरता के स्तर में प्रति वर्ष केवल ०.५ प्रतिशत के हिसाब से वृद्धि होती थी । हिन्देशिया पर हालंड के ३०० साल के लम्बे शासन के बाद श्रमजीवी जनता में से केवल ५ प्रतिशत निरक्षरता को दूर किया गया था । ऐसी है पूंजीवाद को दुनिया । संस्कृति और साक्षरता को इतनी जल्दी केवल उस समाजवादी समाज में ही प्रोत्साहित किया जा सकता था जिसने जनता में नया उत्साह फूल दिया था और जन-निर्माण के अक्षय सोते खोल दिये थे । भारी संख्या में लोगो ने साक्षरता स्कूलो मे लेकर समाजवादी निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने तक का रास्ता तय किया । वर्णमाला की पुस्तक से लेकर अन्तरिक्ष विजय तक ४० साल से अधिक समय बीत चुका है जब लेनिन ने निरक्षरता उन्मूलन संबन्धी ऐतिहासिक श्राज्ञप्ति पर हस्ताक्षर किये थे। पहले साक्षरता पाठ्यक्रम गृह युद्ध के मोर्चों पर, युद्ध विरामों के समय संगठित किये जाते थे। वह सव कितना निकट, पर फिर भी कितना दूर जान पड़ता है ! उस समय से लेकर अब तक देश ने कितना शानदार ऐतिहासिक मार्ग तय कर लिया है ! सोवियत शासन काल में सोवियत संघ में वास्तव में सांस्कृतिक_ क्रान्ति सम्पन्न को गयी है : राष्ट्रव्यापी स्तर पर मुफ्त और अनिवार्य आठसाला तालीम लागू की जा रही है और माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा को विस्तृत स्तर पर विकसित किया गया है। इस समय लगभग ५ करोड़ ६० लाख लोग सोवियत संघ में शिक्षा प्राप्त कर रहे है । प्रत्येक सोवियत नागरिक को - भले हो वह काम भी करता हो - मुफ्त माध्यमिक श्रथवा उच्च शिक्षा ग्रहण करने का अवसर प्राप्त है । इस प्रकार की कोई चीज्र पूंजीवादी देशो में नहीं है और न ही हो सकती है। इस समय देश में ६८.५ प्रतिशत लोग साक्षर है, और इसमें स्त्रियो और पुरुषों, तथा शहरी और देहात के इलाको में नाम मात्र का अन्तर हो तो हो । माध्यमिक शिक्षा, यहां तक कि उच्च शिक्षा प्राप्त लोगो की संख्या में, शहरों और देहात के बीच पाया जानेवाला अन्तर वस्तुतः कम हो गया है । निरक्षरता पर काबू पाने के बाद अव सोवियत जनता सांस्कृतिक जीवन के सभी पहलुओ में उच्च स्तर प्राप्त करने की दिशा में प्रयत्नशील है। जनता की पहलकदमी के फलस्वरूप संस्कृति विश्वविद्यालय बनाये गये है जो सामान्य तथा ललित कला से संबन्धित नये प्रकार की शिक्षा का प्रतिनिधित्व करते है। १६५६ के अन्त तक देश में इस प्रकार के लगभग एक हजार विश्वविद्यालय थे । हर साल सोवियत संघ में १०० करोड़ से अधिक पुस्तके छपनी है। पुस्तक लाखो-करोड़ो सोवियत लोगो को चिर-सगिनी वन गयी है । किसी भी वैज्ञानिक अथवा इंजीनियर, मजदूर या किसान के घर जाइये, सभी के घरो में उनके बड़े या छोड़े निजी पुस्तकालय श्रापको मिलेंगे। कान्ति पूर्व के रूप में, १९१३ में, लगभग २ लाख १० हजार लोग उच्च, अधूरी उच्च तथा माध्यमिक विशिष्ट शिक्षा प्राप्त थे । प्राज उनकी कुल संख्या १ करोड़ ३४ लाख है। १९६०-६१ के स्कूली वर्ष में सोवियत उच्च शिक्षा संस्थापनो में कुल २३ लाख ९६ हजार व्यक्ति दाखिल हुए - यह सरया क्रान्ति पूर्व के रूस की संख्या से लगभग १८ गुना और ब्रिटेन, फ़ास, जर्मन सघात्मर जनतन्त्र और इटली ( इन देशो की कुल आवादी २० करोड़ या लगभग सोवियत संघ की आवादी जितनी है ) की संख्या से चार गुना अधिक है । विशेषज्ञों के प्रशिक्षण के स्तर में सोवियत संघ दुनिया के सभी देशो से आगे निकल गया है, और ध्रुव संयुक्त राज्य अमेरिका सोरियन -संघ के स्तर तक पहुंचने की बात करता है । १९६० में, सोवियत संघ में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में लगे हुए में, डिप्लोमा प्राप्त इंजीनियरो की संख्या १० लाख ८० हजार थी । संयुनन राज्य अमेरिका में ऐसे लोगो की संख्या ५ लाख २५ हजार थी। जारशाही के अधीन स्त्री - विशेषरूप से देहात में - निक्ष, जाहिल तथा उत्पीड़ित थी । श्राज उच्च शिक्षा प्राप्त ३८ लास लोगो में ने १८ ला (४ प्रतिशत ) स्त्रियां है। माध्यमिक तथा अपूर्ण माध्यमिक शिक्षा की दृष्टि
रवफाकों को आवश्यकताओं के प्रति पार्टी और सरकार थक रूप से चिन्ताशील रही । एक हज़ार नौ सौ तीस में उन स्कूलों की प्रणाली में बहुत बड़ा परिवर्तन किया गया । रवफ़ाकों के विशेषीकरण का निश्चय किया गया । उसके बाद ये स्कूल बड़े बड़े उद्यमों और राजकीय तथा सामूहिक फ़ामों में खोले गये। छात्र समुदाय में युवा अग्रणी कामगार, विशाल प्रौद्योगिक उद्यमों तथा समाजवादी फार्मों के उत्साही कामगार शामिल करते थे । अव प्रत्येक प्रौद्योगिक क्षेत्र का अपना आधार अपना उच्च शिक्षा. संस्थापन था, और इस प्रकार के प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थापन का अपना एक बड़ा केन्द्र - रवफाक - था जो उसका पोषण करता था। साल दर साल इन नये, सोवियत बुद्धिजीवी वर्ग के वर्कशापों की संख्या बढ़ने लगो और वे अधिकाधिक मजबूत होने लगे । उच्च शिक्षा संस्थापनों के सर्वहारीकरण और नये बुद्धिजीवी वर्ग को तैयार करने में रवफाकों ने विशेषरूप से महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। - साल दर साल विश्वविद्यालयों और कालिजी के माध्यम से उन्होंने उद्योग को ऐसे युवा विशेषज्ञ देकर मजबूत बनाया जिनका जन्म और पालनपोषण श्रमिक वर्ग में हुआ था । लाखों की संख्या में मज़दूरों, खेत-मज़दूरों तथा घरीव किसानों ने शिक्षा ग्रहण की, साक्षरता स्कूल से शुरू होकर, रवफाक के रास्ते, विश्वविद्यालय तक पहुंचे । अन्य लोगों के साथ रवफ़ाक के रास्ते औद्योगिक अकादमी तक का मार्ग, सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिष्ठित नेता तथा राजनयिक, निशून्य सेशून्य नुश्चेव ने भी तय किया । वह पहले एक फिटर थे और अव सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी को केन्द्रीय समिति के प्रथम सेक्रेटरी और सोवियत संघ की मन्त्रिपरिषद् के श्रव्यक्ष है । भारी संख्या में पाये जानेवाले वयस्क स्कूलो के अलावा पाठ्येतर शिक्षा का भी सुव्यवस्थित जाल विछा था । लाखों लोगो के बीच संस्कृति के प्रोत्साहन के लिए श्रखवारें, पुस्तकें, रेडियो तथा सिनेमा, सोवियत संघ के दूरवर्ती इलाक़ों तक में पहुंचते थे। दयस्को में निरक्षरता को खत्म करना, बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा लागू करना, सांस्कृतिक तथा शिक्षा संवन्धी संस्थापनो में वृद्धि, और व्यावसायिक प्रशिक्षण स्कूलो का निर्माण - समाजवादी संस्कृति फो प्रोत्साहित करने की दिशा में ये सभी सोवियत जनता की प्रमुख उपलव्विया थीं । एक हज़ार छः सौ छत्तीस को जन-गणना के अनुसार, छः से छियालीस साल तक की उम्र के लोगो में छियासी.एक प्रतिशत साक्षरता पायी जाती थी । पुरपो में पंद्रह एक प्रतिशत और स्त्रियो में तिरासी.चार प्रतिशत साक्षरता पायी जाती थी। इस तरह रेकार्ड समय में - बीस सालो से भी कम समय में - सास्कृति क्रान्ति के अत्यधिक कठिन कामो में से एक काम पूरा किया गया । इतिहास में इसका जोड़ नहीं मिलता। क्रान्ति से पहले रस में साक्षरता के स्तर में प्रति वर्ष केवल शून्य.पाँच प्रतिशत के हिसाब से वृद्धि होती थी । हिन्देशिया पर हालंड के तीन सौ साल के लम्बे शासन के बाद श्रमजीवी जनता में से केवल पाँच प्रतिशत निरक्षरता को दूर किया गया था । ऐसी है पूंजीवाद को दुनिया । संस्कृति और साक्षरता को इतनी जल्दी केवल उस समाजवादी समाज में ही प्रोत्साहित किया जा सकता था जिसने जनता में नया उत्साह फूल दिया था और जन-निर्माण के अक्षय सोते खोल दिये थे । भारी संख्या में लोगो ने साक्षरता स्कूलो मे लेकर समाजवादी निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने तक का रास्ता तय किया । वर्णमाला की पुस्तक से लेकर अन्तरिक्ष विजय तक चालीस साल से अधिक समय बीत चुका है जब लेनिन ने निरक्षरता उन्मूलन संबन्धी ऐतिहासिक श्राज्ञप्ति पर हस्ताक्षर किये थे। पहले साक्षरता पाठ्यक्रम गृह युद्ध के मोर्चों पर, युद्ध विरामों के समय संगठित किये जाते थे। वह सव कितना निकट, पर फिर भी कितना दूर जान पड़ता है ! उस समय से लेकर अब तक देश ने कितना शानदार ऐतिहासिक मार्ग तय कर लिया है ! सोवियत शासन काल में सोवियत संघ में वास्तव में सांस्कृतिक_ क्रान्ति सम्पन्न को गयी है : राष्ट्रव्यापी स्तर पर मुफ्त और अनिवार्य आठसाला तालीम लागू की जा रही है और माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा को विस्तृत स्तर पर विकसित किया गया है। इस समय लगभग पाँच करोड़ साठ लाख लोग सोवियत संघ में शिक्षा प्राप्त कर रहे है । प्रत्येक सोवियत नागरिक को - भले हो वह काम भी करता हो - मुफ्त माध्यमिक श्रथवा उच्च शिक्षा ग्रहण करने का अवसर प्राप्त है । इस प्रकार की कोई चीज्र पूंजीवादी देशो में नहीं है और न ही हो सकती है। इस समय देश में अड़सठ.पाँच प्रतिशत लोग साक्षर है, और इसमें स्त्रियो और पुरुषों, तथा शहरी और देहात के इलाको में नाम मात्र का अन्तर हो तो हो । माध्यमिक शिक्षा, यहां तक कि उच्च शिक्षा प्राप्त लोगो की संख्या में, शहरों और देहात के बीच पाया जानेवाला अन्तर वस्तुतः कम हो गया है । निरक्षरता पर काबू पाने के बाद अव सोवियत जनता सांस्कृतिक जीवन के सभी पहलुओ में उच्च स्तर प्राप्त करने की दिशा में प्रयत्नशील है। जनता की पहलकदमी के फलस्वरूप संस्कृति विश्वविद्यालय बनाये गये है जो सामान्य तथा ललित कला से संबन्धित नये प्रकार की शिक्षा का प्रतिनिधित्व करते है। एक हज़ार छः सौ छप्पन के अन्त तक देश में इस प्रकार के लगभग एक हजार विश्वविद्यालय थे । हर साल सोवियत संघ में एक सौ करोड़ से अधिक पुस्तके छपनी है। पुस्तक लाखो-करोड़ो सोवियत लोगो को चिर-सगिनी वन गयी है । किसी भी वैज्ञानिक अथवा इंजीनियर, मजदूर या किसान के घर जाइये, सभी के घरो में उनके बड़े या छोड़े निजी पुस्तकालय श्रापको मिलेंगे। कान्ति पूर्व के रूप में, एक हज़ार नौ सौ तेरह में, लगभग दो लाख दस हजार लोग उच्च, अधूरी उच्च तथा माध्यमिक विशिष्ट शिक्षा प्राप्त थे । प्राज उनकी कुल संख्या एक करोड़ चौंतीस लाख है। एक हज़ार नौ सौ साठ-इकसठ के स्कूली वर्ष में सोवियत उच्च शिक्षा संस्थापनो में कुल तेईस लाख छियानवे हजार व्यक्ति दाखिल हुए - यह सरया क्रान्ति पूर्व के रूस की संख्या से लगभग अट्ठारह गुना और ब्रिटेन, फ़ास, जर्मन सघात्मर जनतन्त्र और इटली की संख्या से चार गुना अधिक है । विशेषज्ञों के प्रशिक्षण के स्तर में सोवियत संघ दुनिया के सभी देशो से आगे निकल गया है, और ध्रुव संयुक्त राज्य अमेरिका सोरियन -संघ के स्तर तक पहुंचने की बात करता है । एक हज़ार नौ सौ साठ में, सोवियत संघ में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में लगे हुए में, डिप्लोमा प्राप्त इंजीनियरो की संख्या दस लाख अस्सी हजार थी । संयुनन राज्य अमेरिका में ऐसे लोगो की संख्या पाँच लाख पच्चीस हजार थी। जारशाही के अधीन स्त्री - विशेषरूप से देहात में - निक्ष, जाहिल तथा उत्पीड़ित थी । श्राज उच्च शिक्षा प्राप्त अड़तीस लास लोगो में ने अट्ठारह ला स्त्रियां है। माध्यमिक तथा अपूर्ण माध्यमिक शिक्षा की दृष्टि
इसी प्रकार भारतीय सनातन मार्ग की धार्मिक परंपरानुसार गति विधि का आचरण यहां पूर्ण श्रद्धा से होता है । और सत्पंथ अनुयायी के लिये पूजा-अर्चना के लिये संपूर्ण सुविधा है । और यहां आनेवाले अनुयायीओं के लिये भोजन और ठहरने की स्वच्छ और सुंदर सुविधा युक्त विशाल अद्यतन अतिथि गृह है । विशेषतः इसी संप्रदाय के अन्य धर्मस्थान, गुजरात में खेडा जिले में स्थित दो गांव जिसमें देवा में भाभाराम, रुण में कीकीबाई का सुप्रसिध्ध यात्राधाम है और बडौदा जिल्ले के कुकस गांव में नायाकाका का भव्य मंदिर विद्यमान है । और कच्छ जिल्लेमे नखत्राणामे भव्य यात्राधाम श्री निष्कलंकी नारायणधाम प्रसिद्ध है । अन्यथा नखत्राणासे पंदरह की.मी. पर मोटा कादिया गाँवमे अथर्ववेदी सत्पंथ आश्रम और दरशडी गाँवमे रांत मातृश्री कुंवरमा रात्पंथ आश्रम नामक स्थान भी है । और साबरकांठा जिल्ले मे वडालीके पास संत नथ्थुरामबापा आश्रम है और बायड के पास वजेपुराकंपामें संत मातृश्री कुंवरमा आश्रम विद्यमान है । यह सभी तीर्थ स्थानोमे प्रतिदिन सेवा-पूजा होती है और यहाँ अन्नक्षेत्र भी चलते रहते है । इसी प्रकार महाराष्ट्र के खानदेश विभाग के फैजपुर गांव में भी करीब ३०० वर्ष पुराना सत्पंथ मंदिर विद्यमान है । जो इसी सत्पंथ का, खानदेश विभाग का पवित्र धर्मस्थान ना जाता है । यहां भी परंपरागत आचार्य पीठाधिकारी होते हैं । जो धार्मिक रीति से सबके वंदनीय होते हैं । आज वर्तमान परिस्थितियों में संसार का मानवी धार्मिक रीति से सक्रात्मक मानसिक चिंताओं का सामना कर रहा है । तब सत्पंथ जैसा पवित्र धर्म, एकता-प्रेम और सनातन हिन्दु धर्म की तत्त्वशील प्रणालिकाओं से परिपूर्ण सत्पंथ धर्म के युग पुरुष महात्मा सद्गुरु श्री इमामशाह महाराज का जीवन भी इतना ही शुध्ध और कल्याणकारी है । जो सनातन भक्ति मार्ग को हमेशा झिलमिलाता रखेगा । Page 18 of 40
इसी प्रकार भारतीय सनातन मार्ग की धार्मिक परंपरानुसार गति विधि का आचरण यहां पूर्ण श्रद्धा से होता है । और सत्पंथ अनुयायी के लिये पूजा-अर्चना के लिये संपूर्ण सुविधा है । और यहां आनेवाले अनुयायीओं के लिये भोजन और ठहरने की स्वच्छ और सुंदर सुविधा युक्त विशाल अद्यतन अतिथि गृह है । विशेषतः इसी संप्रदाय के अन्य धर्मस्थान, गुजरात में खेडा जिले में स्थित दो गांव जिसमें देवा में भाभाराम, रुण में कीकीबाई का सुप्रसिध्ध यात्राधाम है और बडौदा जिल्ले के कुकस गांव में नायाकाका का भव्य मंदिर विद्यमान है । और कच्छ जिल्लेमे नखत्राणामे भव्य यात्राधाम श्री निष्कलंकी नारायणधाम प्रसिद्ध है । अन्यथा नखत्राणासे पंदरह की.मी. पर मोटा कादिया गाँवमे अथर्ववेदी सत्पंथ आश्रम और दरशडी गाँवमे रांत मातृश्री कुंवरमा रात्पंथ आश्रम नामक स्थान भी है । और साबरकांठा जिल्ले मे वडालीके पास संत नथ्थुरामबापा आश्रम है और बायड के पास वजेपुराकंपामें संत मातृश्री कुंवरमा आश्रम विद्यमान है । यह सभी तीर्थ स्थानोमे प्रतिदिन सेवा-पूजा होती है और यहाँ अन्नक्षेत्र भी चलते रहते है । इसी प्रकार महाराष्ट्र के खानदेश विभाग के फैजपुर गांव में भी करीब तीन सौ वर्ष पुराना सत्पंथ मंदिर विद्यमान है । जो इसी सत्पंथ का, खानदेश विभाग का पवित्र धर्मस्थान ना जाता है । यहां भी परंपरागत आचार्य पीठाधिकारी होते हैं । जो धार्मिक रीति से सबके वंदनीय होते हैं । आज वर्तमान परिस्थितियों में संसार का मानवी धार्मिक रीति से सक्रात्मक मानसिक चिंताओं का सामना कर रहा है । तब सत्पंथ जैसा पवित्र धर्म, एकता-प्रेम और सनातन हिन्दु धर्म की तत्त्वशील प्रणालिकाओं से परिपूर्ण सत्पंथ धर्म के युग पुरुष महात्मा सद्गुरु श्री इमामशाह महाराज का जीवन भी इतना ही शुध्ध और कल्याणकारी है । जो सनातन भक्ति मार्ग को हमेशा झिलमिलाता रखेगा । Page अट्ठारह of चालीस
पुलिस (Police) की पिटाई के बाद नाराज डॉक्टर (Doctor) ने अपनी पहचान बताई और रोने लगा. हंगामा बढ़ता देख मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टर को समझा कर शांत किया. अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों ने इसकी लिखित में शिकायत भी की है. राजस्थान (Rajasthan) के भरतपुर (Bharat) में 9 लोगों के पॉजिटिव पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने कई जगहों पर कर्फ्यू और धारा 144 लागू कर दी है. इस बीच प्रशासन की सख्ती के दौरान आम लोगों की बीच एक डॉक्टर भी पुलिस की लाठियों का शिकार हो गए. दरअसल जिला आरबीएम अस्पताल से अपनी ड्यूटी कर लौट रहा एक चिकित्सक उस समय गलती से पुलिस के हत्थे चढ़ गया जब वह अपनी बाइक से बिजलीघर चौराहे से होकर गुजर रहा था. इस दौरान वहां से निकलने वाले लोगों पर पुलिस डंडे भांज रही थी. ऐसे में वो डॉक्टर भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया और उसकी भी पिटाई हो गई. शहर का बिजलीघर चौराहा जहां से मुख्य बाजार, जिला कलेक्टर कार्यालय सहित सभी अधिकारीयों के कार्यालयों का रास्ता वहीं से गुजरता है. जिस समय यह घटना हुई उस वक्त एडीएम सिटी राजेश गोयल और अन्य पुलिस अधिकारी भी वहां मौजूद थे. पुलिस की पिटाई के बाद नाराज डॉक्टर ने अपनी पहचान बताई और रोने लगा. हंगामा बढ़ता देख मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टर को समझा कर शांत किया. अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों ने इसकी लिखित में शिकायत भी की है. वहीं एडीएम सिटी राजेश गोयल ने कहा की लॉकडाउन (Lockdown) के चलते सख्ती की जा रही है और लोग लापरवाही कर रहे हैं, जिसके खिलाफ सख्ती के साथ कार्रवाई की जा रही है. हालांकि इस दौरान जरूरत की दुकानों को खुलने का समय भी निश्चित किया गया है, फिर भी लोग लापरवाही कर रहे हैं.
पुलिस की पिटाई के बाद नाराज डॉक्टर ने अपनी पहचान बताई और रोने लगा. हंगामा बढ़ता देख मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टर को समझा कर शांत किया. अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों ने इसकी लिखित में शिकायत भी की है. राजस्थान के भरतपुर में नौ लोगों के पॉजिटिव पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने कई जगहों पर कर्फ्यू और धारा एक सौ चौंतालीस लागू कर दी है. इस बीच प्रशासन की सख्ती के दौरान आम लोगों की बीच एक डॉक्टर भी पुलिस की लाठियों का शिकार हो गए. दरअसल जिला आरबीएम अस्पताल से अपनी ड्यूटी कर लौट रहा एक चिकित्सक उस समय गलती से पुलिस के हत्थे चढ़ गया जब वह अपनी बाइक से बिजलीघर चौराहे से होकर गुजर रहा था. इस दौरान वहां से निकलने वाले लोगों पर पुलिस डंडे भांज रही थी. ऐसे में वो डॉक्टर भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया और उसकी भी पिटाई हो गई. शहर का बिजलीघर चौराहा जहां से मुख्य बाजार, जिला कलेक्टर कार्यालय सहित सभी अधिकारीयों के कार्यालयों का रास्ता वहीं से गुजरता है. जिस समय यह घटना हुई उस वक्त एडीएम सिटी राजेश गोयल और अन्य पुलिस अधिकारी भी वहां मौजूद थे. पुलिस की पिटाई के बाद नाराज डॉक्टर ने अपनी पहचान बताई और रोने लगा. हंगामा बढ़ता देख मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टर को समझा कर शांत किया. अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों ने इसकी लिखित में शिकायत भी की है. वहीं एडीएम सिटी राजेश गोयल ने कहा की लॉकडाउन के चलते सख्ती की जा रही है और लोग लापरवाही कर रहे हैं, जिसके खिलाफ सख्ती के साथ कार्रवाई की जा रही है. हालांकि इस दौरान जरूरत की दुकानों को खुलने का समय भी निश्चित किया गया है, फिर भी लोग लापरवाही कर रहे हैं.
पोर्ट ऑफ स्पेन, कप्तान विराट कोहली के नाबाद 114 रन की शतकीय पारी तथा श्रेयय अय्यर के 65 रनों की अर्धशतकीय पारी की बदौलत भारत ने बुधवार को वर्षा बाधित तीसरे और अंतिम वनडे मुकाबले में मेजबान वेस्टइंडीज को डकवर्थ लुइस नियम के तहत छह विकेट से हराकर 2-0 से सीरीज अपने नाम कर देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस पर जीत का तोहफा दिया है। विराट ने 99 गेंदों में 14 चौकों के सहारे 144 रन बनाए और अपने एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय करियर का 43वां शतक जड़ दिया। विराट का इस सीरीज में यह लगातार दूसरा शतक है। अय्यर ने 41 गेंदों में 65 रन की पारी में तीन चौके और पांच छक्के लगाए। विराट को उनकी शतकीय पारी के लिए मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार दिया गया। विराट ने इस वनडे सीरीज के दो मैचों में 234 रन बनाए हैं। इससे पहले टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी विंडीज की पारी के बीच वर्षा आ गयी जिसके बाद अंपायरों ने मैच को 35-35 ओवर का कराने का फैसला लिया। वेस्टइंडीज ने सलामी बल्लेबाज क्रिस गेल की 41 गेंदों में आठ चौकों और पांच छक्कों की विस्फोटक पारी और उनकी एविन लुइस के साथ पहले विकेट के लिए 115 रनों की शतकीय साझेदारी की बदौलत 35 ओवर में सात विकेट पर 240 रन बनाए। बारिश के कारण भारत को 255 रनों का संशोधित स्कोर का लक्ष्य दिया गया। लुइस ने 29 गेंदों में पांच चौके और तीन छक्के की मदद से 43 रन बनाए। भारत की ओर से मध्य तेज गेंदबाज खलील अहमद ने 68 रन पर तीन विकेट लिए जबकि तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने 50 रन पर दो विकेट लिए। स्पिनर युजवेंद्र चहल और रवींद्र जडेजा को एक-एक विकेट मिला। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने कप्तान विराट के नाबाद शतक और मध्यक्रम के बल्लेबाज अय्यर के 65 रनों की शानदार अर्धशतकीय पारी की मदद से 32. 3 ओवर में चार विकेट खोकर 256 रन बना लिए और मैच तथा सीरीज जीत ली। विंडीज की ओर से फेबियन एलेन ने 40 रन पर दो विकेट और केमार रोच ने 53 रन देकर एक विकेट लिया। इससे पहले वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज क्रिस गेल और एविन लुइस ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई और दोनों बल्लेबाजों ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए पहले 10 ओवर में ही 100 का आंकड़ा पार कर दिया। दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 115 रनों की बड़ी साझेदारी हुई। दोनों के बीच इस साझेदारी को देखते हुए एक समय ऐसा लगा रहा था कि स्कोर 300 के पार जाएगा। गेल और लुइस भारतीय तेज गेंदबाजों पर लगातार भारी पड़ रहे थे। वेस्टइंडीज का स्कोर पहले 10 ओवर में बिना विकेट खोए 114 रन था। भुवनेश्वर ने मैच के पहले ओवर में हालांकि कोई रन नहीं दिया लेकिन गेल ने शमी की ओवर में 12 रन मार दिए। इसके बाद दोनों ही बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों पर भारी पड़े और अपनी रन गति को तेज कर दिया। गेल ने अपने अर्धशतक को मात्र 30 गेंदों में छह चौकों और चार छक्कों की मदद से पूरा किया। पहले 10 ओवर में ज्यादा रन लुटते देख कप्तान ने गेंद स्पिनर युजवेंद्र चहल को दी। चहल ने उम्मीद के अनुरुप ही प्रदर्शन करते हुए लुइस को शिखर धवन के हाथों कैच कराकर उनकी पारी का अंत कर दिया और इस साझेदारी को तोड़ दिया। लुइस के आउट होने के बाद गेल भी ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और खलील की गेंद पर कप्तान विराट कोहली को कैच दे बैठे। विंडीज की पारी के 22वें ओवर में बारिश आ गयी और मैच को वहीं रोक देना पड़ा। जिस वक्त बारिश के कारण मैच रोका गया उस समय मेजबान टीम का स्कोर 22 ओवर में दो विकेट पर 158 रन था। बारिश के बाद अंपायरों ने मैच के ओवरों में कटौती करना का निर्णय लेते हुए 35-35 ओवर कराने का फैसला किया। सलामी बल्लेबाजों के आउट होने के बाद मध्यक्रम में शिमरॉन हेत्मायेर और शाई होप ने विंडीज की पारी को आगे बढाया। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 50 रन की साझेदारी हुई। दोनों के बीच साझेदारी और बड़ी होती कि उससे पहले ही शमी ने हेत्मायेर को बोल्ड कर पवेलियन भेज दिया। हेत्मायेर के आउट होते ही होप भी जल्द ही आउट हो गए। उन्हें रवींद्र जडेजा ने आउट किया। हेत्मायेर ने 25 रन और होप ने 24 रन की अपनी पारी में एक-एक चौका लगाया। विंडीज की पारी में निकोलस पूरन ने 30, कप्तान जैसन होल्डर ने 14 और कार्लोस ब्रैथवेट ने 16 रन बनाए। फेबियन एलेन छह रन बनाकर नाबाद रहे। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज शिखर धवन और रोहित शर्मा ने टीम को धुआंधार शुराआत दिलाई और 2. 4 ओवर में 25 रन बना डाले। लेकिन रन चुराने की कोशिश में रोहित रन आउट हो गए और एक बार फिर भारतीय सलामी जोड़ी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाने में नाकाम रही। रोहित ने छह गेंदों में दो चौके की मदद से 10 रन बनाए। पहला झटका लगने के बाद भारतीय पारी को कप्तान विराट और धवन ने आगे बढ़ाया। दोनों ने सधी हुई पारी खेलते हुए दूसरे विकेट के लिए 66 रनों की साझेदारी कर ली। लेकिन धवन फेबियन एलेन की गेंद पर कीमो पॉल को कैच दे बैठे। धवन का विकेट 91 के स्कोर पर गिरा। धवन ने 36 रनों की अपनी पारी में पांच चौके लगाए। धवन के बाद युवा विकेटकीपर बल्लेबाज रिषभ पंत उतरे लेकिन वह एक बार फिर नाकाम साबित हुए और एलेन की पहली ही गेंद पर पॉल को कैच दे बैठे और बिना खाता खोले पवेलियन चल दिए। पंत के आउट होने तक भारत का स्कोर तीन विकेट पर 92 रन था और भारतीय पारी लड़खड़ा गयी थी। इसके बाद विराट ने एक बार फिर जिम्मेदारी से बल्लेबाजी करते हुए श्रेयस अय्यर के साथ टीम की पारी को आगे बढ़ाया। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 120 रनों की मजबूत साझेदारी कर टीम का स्कोर 212 तक पहुंचा दिया। हालांकि अय्यर मैच खत्म करने से पहले ही केमार रोच का शिकार हो गए। अय्यर ने 65 रन बनाए। अय्यर के आउट होने के बावजूद विराट अपनी पारी को आगे बढ़ाते रहे और लगातार दूसरे मैच में शतक ठोक दिया। विराट ने नाबाद रहते हुए 32. 3 ओवर में ही टीम को जीत दिला दी। विराट 114 और केदार जाधव 19 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत और विंडीज के बीच पहला वनडे मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया था जबकि भारत ने मेजबान टीम को दूसरे वनडे में डकवर्थ लुइस नियम के तहत 59 रनों से पराजित किया था। भारत और वेस्टइंडीज के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज 22 अगस्त से शुरु होगी।
पोर्ट ऑफ स्पेन, कप्तान विराट कोहली के नाबाद एक सौ चौदह रन की शतकीय पारी तथा श्रेयय अय्यर के पैंसठ रनों की अर्धशतकीय पारी की बदौलत भारत ने बुधवार को वर्षा बाधित तीसरे और अंतिम वनडे मुकाबले में मेजबान वेस्टइंडीज को डकवर्थ लुइस नियम के तहत छह विकेट से हराकर दो-शून्य से सीरीज अपने नाम कर देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस पर जीत का तोहफा दिया है। विराट ने निन्यानवे गेंदों में चौदह चौकों के सहारे एक सौ चौंतालीस रन बनाए और अपने एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय करियर का तैंतालीसवां शतक जड़ दिया। विराट का इस सीरीज में यह लगातार दूसरा शतक है। अय्यर ने इकतालीस गेंदों में पैंसठ रन की पारी में तीन चौके और पांच छक्के लगाए। विराट को उनकी शतकीय पारी के लिए मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार दिया गया। विराट ने इस वनडे सीरीज के दो मैचों में दो सौ चौंतीस रन बनाए हैं। इससे पहले टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी विंडीज की पारी के बीच वर्षा आ गयी जिसके बाद अंपायरों ने मैच को पैंतीस-पैंतीस ओवर का कराने का फैसला लिया। वेस्टइंडीज ने सलामी बल्लेबाज क्रिस गेल की इकतालीस गेंदों में आठ चौकों और पांच छक्कों की विस्फोटक पारी और उनकी एविन लुइस के साथ पहले विकेट के लिए एक सौ पंद्रह रनों की शतकीय साझेदारी की बदौलत पैंतीस ओवर में सात विकेट पर दो सौ चालीस रन बनाए। बारिश के कारण भारत को दो सौ पचपन रनों का संशोधित स्कोर का लक्ष्य दिया गया। लुइस ने उनतीस गेंदों में पांच चौके और तीन छक्के की मदद से तैंतालीस रन बनाए। भारत की ओर से मध्य तेज गेंदबाज खलील अहमद ने अड़सठ रन पर तीन विकेट लिए जबकि तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने पचास रन पर दो विकेट लिए। स्पिनर युजवेंद्र चहल और रवींद्र जडेजा को एक-एक विकेट मिला। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने कप्तान विराट के नाबाद शतक और मध्यक्रम के बल्लेबाज अय्यर के पैंसठ रनों की शानदार अर्धशतकीय पारी की मदद से बत्तीस. तीन ओवर में चार विकेट खोकर दो सौ छप्पन रन बना लिए और मैच तथा सीरीज जीत ली। विंडीज की ओर से फेबियन एलेन ने चालीस रन पर दो विकेट और केमार रोच ने तिरेपन रन देकर एक विकेट लिया। इससे पहले वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज क्रिस गेल और एविन लुइस ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई और दोनों बल्लेबाजों ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए पहले दस ओवर में ही एक सौ का आंकड़ा पार कर दिया। दोनों के बीच पहले विकेट के लिए एक सौ पंद्रह रनों की बड़ी साझेदारी हुई। दोनों के बीच इस साझेदारी को देखते हुए एक समय ऐसा लगा रहा था कि स्कोर तीन सौ के पार जाएगा। गेल और लुइस भारतीय तेज गेंदबाजों पर लगातार भारी पड़ रहे थे। वेस्टइंडीज का स्कोर पहले दस ओवर में बिना विकेट खोए एक सौ चौदह रन था। भुवनेश्वर ने मैच के पहले ओवर में हालांकि कोई रन नहीं दिया लेकिन गेल ने शमी की ओवर में बारह रन मार दिए। इसके बाद दोनों ही बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों पर भारी पड़े और अपनी रन गति को तेज कर दिया। गेल ने अपने अर्धशतक को मात्र तीस गेंदों में छह चौकों और चार छक्कों की मदद से पूरा किया। पहले दस ओवर में ज्यादा रन लुटते देख कप्तान ने गेंद स्पिनर युजवेंद्र चहल को दी। चहल ने उम्मीद के अनुरुप ही प्रदर्शन करते हुए लुइस को शिखर धवन के हाथों कैच कराकर उनकी पारी का अंत कर दिया और इस साझेदारी को तोड़ दिया। लुइस के आउट होने के बाद गेल भी ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और खलील की गेंद पर कप्तान विराट कोहली को कैच दे बैठे। विंडीज की पारी के बाईसवें ओवर में बारिश आ गयी और मैच को वहीं रोक देना पड़ा। जिस वक्त बारिश के कारण मैच रोका गया उस समय मेजबान टीम का स्कोर बाईस ओवर में दो विकेट पर एक सौ अट्ठावन रन था। बारिश के बाद अंपायरों ने मैच के ओवरों में कटौती करना का निर्णय लेते हुए पैंतीस-पैंतीस ओवर कराने का फैसला किया। सलामी बल्लेबाजों के आउट होने के बाद मध्यक्रम में शिमरॉन हेत्मायेर और शाई होप ने विंडीज की पारी को आगे बढाया। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए पचास रन की साझेदारी हुई। दोनों के बीच साझेदारी और बड़ी होती कि उससे पहले ही शमी ने हेत्मायेर को बोल्ड कर पवेलियन भेज दिया। हेत्मायेर के आउट होते ही होप भी जल्द ही आउट हो गए। उन्हें रवींद्र जडेजा ने आउट किया। हेत्मायेर ने पच्चीस रन और होप ने चौबीस रन की अपनी पारी में एक-एक चौका लगाया। विंडीज की पारी में निकोलस पूरन ने तीस, कप्तान जैसन होल्डर ने चौदह और कार्लोस ब्रैथवेट ने सोलह रन बनाए। फेबियन एलेन छह रन बनाकर नाबाद रहे। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज शिखर धवन और रोहित शर्मा ने टीम को धुआंधार शुराआत दिलाई और दो. चार ओवर में पच्चीस रन बना डाले। लेकिन रन चुराने की कोशिश में रोहित रन आउट हो गए और एक बार फिर भारतीय सलामी जोड़ी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाने में नाकाम रही। रोहित ने छह गेंदों में दो चौके की मदद से दस रन बनाए। पहला झटका लगने के बाद भारतीय पारी को कप्तान विराट और धवन ने आगे बढ़ाया। दोनों ने सधी हुई पारी खेलते हुए दूसरे विकेट के लिए छयासठ रनों की साझेदारी कर ली। लेकिन धवन फेबियन एलेन की गेंद पर कीमो पॉल को कैच दे बैठे। धवन का विकेट इक्यानवे के स्कोर पर गिरा। धवन ने छत्तीस रनों की अपनी पारी में पांच चौके लगाए। धवन के बाद युवा विकेटकीपर बल्लेबाज रिषभ पंत उतरे लेकिन वह एक बार फिर नाकाम साबित हुए और एलेन की पहली ही गेंद पर पॉल को कैच दे बैठे और बिना खाता खोले पवेलियन चल दिए। पंत के आउट होने तक भारत का स्कोर तीन विकेट पर बानवे रन था और भारतीय पारी लड़खड़ा गयी थी। इसके बाद विराट ने एक बार फिर जिम्मेदारी से बल्लेबाजी करते हुए श्रेयस अय्यर के साथ टीम की पारी को आगे बढ़ाया। दोनों ने चौथे विकेट के लिए एक सौ बीस रनों की मजबूत साझेदारी कर टीम का स्कोर दो सौ बारह तक पहुंचा दिया। हालांकि अय्यर मैच खत्म करने से पहले ही केमार रोच का शिकार हो गए। अय्यर ने पैंसठ रन बनाए। अय्यर के आउट होने के बावजूद विराट अपनी पारी को आगे बढ़ाते रहे और लगातार दूसरे मैच में शतक ठोक दिया। विराट ने नाबाद रहते हुए बत्तीस. तीन ओवर में ही टीम को जीत दिला दी। विराट एक सौ चौदह और केदार जाधव उन्नीस रन बनाकर नाबाद रहे। भारत और विंडीज के बीच पहला वनडे मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया था जबकि भारत ने मेजबान टीम को दूसरे वनडे में डकवर्थ लुइस नियम के तहत उनसठ रनों से पराजित किया था। भारत और वेस्टइंडीज के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज बाईस अगस्त से शुरु होगी।
बेंगलुरू , कर्नाटक में तीन दिन पुरानी एच डी कुमारस्वामी सरकार ने भाजपा विधायकों के बहिर्गमन के बीच आज राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। जद (से)- कांग्रेस गठबंधन के विधायकों और अन्य विधायकों की उपस्थिति में कुमारस्वामी सरकार के प्रति विश्वास प्रस्ताव को ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया गया। भाजपा विधायकों ने विश्वास मत से ठीक पहले सदन से बहिर्गमन किया। विपक्ष के नेता बी एस येदियुरप्पा ने कुमारस्वामी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन " अपवित्र " है। कुमारस्वामी ने अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर चलेगी और विपक्ष के सुझावों को ध्यान में रखा जायेगा।
बेंगलुरू , कर्नाटक में तीन दिन पुरानी एच डी कुमारस्वामी सरकार ने भाजपा विधायकों के बहिर्गमन के बीच आज राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। जद - कांग्रेस गठबंधन के विधायकों और अन्य विधायकों की उपस्थिति में कुमारस्वामी सरकार के प्रति विश्वास प्रस्ताव को ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया गया। भाजपा विधायकों ने विश्वास मत से ठीक पहले सदन से बहिर्गमन किया। विपक्ष के नेता बी एस येदियुरप्पा ने कुमारस्वामी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन " अपवित्र " है। कुमारस्वामी ने अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर चलेगी और विपक्ष के सुझावों को ध्यान में रखा जायेगा।
जन्म-दर इंगलैंड में जहां १३.३धिक थी जर्मनी में उस समय १०.८ थी और फ्रांस में यह संख्या १.४ थी । सन् १८७० के बाद श्रमिक वर्ग के परिवारों के माता-पिताओं को सभी जगह प्राथमिक शिक्षा की सुविधाएं प्राप्त थीं, लेकिन स्कूल के समय के अतिरिक्त गरीबों के वच्चे अव भी सड़कों पर आवारा घूमते रहते थे । मध्यवर्गीय परिवारों के लिये यह् युग काठ के घोड़ों पर चढ़ने तथा कागज की नौकाएं बहाने का युग था : शिशु शालाएं तथा स्कूलों के कमरे सजीवता तथा ऐसी चहल-पहल का अहसास कराते थे जहां वच्चों में चरित्र अंकुरित होता है और यह तब तक चलता रहता था जब तक कि सभी भाई वोडिंग स्कूल में नहीं चले जाते और अपनी वहिनों के लिये छुट्टी के दिनों को छोड़ कर प्रसन्नता अथवा क्षोभ का और अधिक कारण नहीं बनते थे । अध्यापिकाएं, प्रयाएं, परिचारिकाएं तथा रसोइये अव भी काफी संख्या में नियुक्त थे और वेतन आदि विषयक उनकी मांगें भी अधिक नहीं थीं। उनमें से कई तो घर के सदस्यों की ही भांति ही रहते थे, अन्य आते-जाते रहते थे और उन्हें याद भी यदा-कदा ही किया जाता था । इनकी सेवाएं काफी श्रमसाध्य तथा अपरिहार्य होती थीं, क्योंकि ऊंचे तथा सकड़े मध्यवर्गीय मकानों में श्रमं की कुछ बचत की जा सके ऐसी किसी वस्तु का वहां प्रबन्ध नहीं था, अनेकों परिचारिकाएं टवों में भरने के लिये गर्म पानी के वर्तन लिये सीढ़ियों पर लड़खड़ाती हुई नजर आती थीं, और प्रत्येक कमरे में कोयला पहुँचाने का काम करती थीं जिसका धुआं लन्डन के कुहासे को और अधिक घना बनाता रहता था । सन् नव्वे के दशक में ही यह स्पष्ट हो पाया था कि परिवारों के आकार छोटे होने लगे हैं, सर्वप्रथम यह परिवर्तन उन व्यावसायिक वर्गों तथा मध्यवर्ग में घटित हुआ था जिन्हें 'पब्लिक स्कूलों में एक भारी शुल्क प्रदा करना पड़ता था और उन सम्पन्न शिल्पियों के वर्ग में भी घटित हो रहा था जिन्हें अपने जीवन स्तर को उच्चस्तरीय बनाये रखने के लिये संघर्ष करना पड़ रहा था । सन् १८७७ में ब्रॉडलॉफ़ तथा श्रीमती वेसेन्ट ने नव्य-माल्थसंवादी परिपत्र के प्रकाशन के बाद सर्वप्रथम राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन की विधियों का विज्ञापन किया गया था । लेकिन जो गन्दी वस्तियों में रहने वाले लोग इन सुधारकों का लक्ष्य थे उन्होंने उनके सुझाव पर सबसे कम ध्यान दिया था । जो परिवार वच्चों का वांछित प्रकार से लालन-पालन कर सकने में सर्वाधिक समर्थ थे, दुर्भाग्य से वे, वे परिवार थे जो आगामी शताब्दी में प्रजातीय-आत्महत्या' में रत हो गये थे । सन् सत्तर तथा अस्सी की दशान्दियां केवल बड़े परिवारों का ही युग नहीं थीं वल्कि नैतिक तथा यौन सम्बन्धी विचारों के क्षेत्र में विशुद्धतावादी दशाब्दियां थीं जिनमें मानवीय प्रकृति की दुर्बलताएं नित्य प्रति व्यवहृत होती रहती थीं । महारानी विक्टोरिया का न्यायालय कठोर नियमों का ही पक्षपाती था । अधिकांश ब्रिटिश व्यापारियों का वास्तव में ईमानदार होना हमारी व्यापारिक समृद्धि का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कारण था । इस युग के लोकप्रिय नायक, जिनमें नायकत्व के निस्सन्देह सभी विद्यमान थे - सर्वप्रथम तथा सर्वाधिक धार्मिक व्यक्ति थे : अफ्रीका की खोज गुरण करने वाले तथा धर्मावलम्बी लिविंगस्टन, सेवाधर्मी-सैनिक जनरल गॉर्डन, लॉर्ड शैफ्ट्सबरी तथा ग्लैडस्टन - इन सभी व्यक्तियों के लिये, जो परस्पर काफी भिन्न थे, जीवन का अर्थ केवल ईश्वरीय सेवा में निरत होता था । लेकिन इन पुराने तथा रूढ़ धार्मिक विश्वासों पर, जो इन लोगों की दृष्टि में इतने अर्थपूर्ण थे, उस काल के 'नास्तिवादी' सफलतापूर्वक आक्रमण कर रहे थे । लेकिन दृष्टिकोण तथा भावनाओं की दृष्टि से ये 'नास्तिवादी' भी 'विशुद्धतावादी' ( प्यूरिटन) ही थे । 'संस्कृति' के भविष्यद्रष्टा मैथ्यू ऑरनोल्ड ने 'चरित्र' को 'जीवन के तीन भागों की दृष्टि से देखा था लेकिन 'चरित्र' की अवधारणा उनके निकट संकीरता अथवा विशुद्ध नकारात्मकता की अवधारणा नहीं थी । जार्ज इलियट के उपन्यासों को जो ख्याति प्राप्त हुई थी उसका श्रेय अधिकांश इसी तथ्य को है कि अनेकों लोगों ने उन्हें 'बुद्धिवादी नास्तिक चेतना को स्वीकार्य, आत्मोन्नति की प्रक्रिया तथा नैतिक मूल्यों की पुर्नव्याख्या के कारण ही मान्यता प्रदान की थी । 'सार्टर' में कार्लाइल के मंत्र - वाक्यों ने अनेकों लोगों को एक अस्पष्ट किन्तु प्रभावशाली चिन्तन प्रदान किया था, जिनमें डार्विनवाद के प्रवल समर्थक वे हक्सले भी सम्मिलित थे जिन्होंने कि 'ल्यूथर एट वर्क्स' की भांति आक्सफोर्ड में ब्रिटिश एसोसिएशन की प्रसिद्ध बैठक में पादरी- विचारों का स्पष्ट उल्लंघन कर दिया था । लेस्ली स्टीफेन तथा जॉनमॉरले द्वारा असत्य अन्धविश्वासों से समझौता कर लिये जाने से इनकार कर देना भी सत्रहवीं शताब्दी के विशुद्धतावाद की कट्टरता से युंक्त था । लेस्ली स्टीफेन एक समय से पादरी रह चुके थे और इसी प्रकार लोकप्रिय उदारतावादी इतिहासकार जे. आर. ग्रीन भी पादरी थे । साहित्य तथा चिन्तन के क्षेत्र में यह युग धर्म से पृथक् एक अर्द्धथे धार्मिक आन्दोलन का युग था । • इसकी बहुपक्षी जिज्ञासा तथा सामर्थ्य, इसके आत्मविश्वास तथा तत्परता - इन सभी दृष्टियों से उत्तर मध्य विक्टोरिया कालीन संस्कृति यूनानी ( ग्रीक) थी । बौद्धिक अभियानों तथा नैतिक अनुदारतावाद की ओर इसके रुझान इसे वास्तव में एथेनियन प्रकृति के निकट ले आता है । समकालीन लोगों द्वारा टेनीसन की निम्त पंक्तियों के अतिरिक्त कोई और पंक्ति भी इतनी अधिक उद्धृत हुई है इसमें मुझे सन्देह है : ज्ञान निरन्तर अधिक से अधिकतर होता जाय, किन्तु उससे भी अधिक रहे हममें ईश्वराराधन और मन और आत्मा रहें समस्वर तथा सदा की भांति एक ही तान दोनों से निकले, किन्तु यह अधिक से अधिक व्यापकतर हो ।
जन्म-दर इंगलैंड में जहां तेरह.तीनधिक थी जर्मनी में उस समय दस.आठ थी और फ्रांस में यह संख्या एक.चार थी । सन् एक हज़ार आठ सौ सत्तर के बाद श्रमिक वर्ग के परिवारों के माता-पिताओं को सभी जगह प्राथमिक शिक्षा की सुविधाएं प्राप्त थीं, लेकिन स्कूल के समय के अतिरिक्त गरीबों के वच्चे अव भी सड़कों पर आवारा घूमते रहते थे । मध्यवर्गीय परिवारों के लिये यह् युग काठ के घोड़ों पर चढ़ने तथा कागज की नौकाएं बहाने का युग था : शिशु शालाएं तथा स्कूलों के कमरे सजीवता तथा ऐसी चहल-पहल का अहसास कराते थे जहां वच्चों में चरित्र अंकुरित होता है और यह तब तक चलता रहता था जब तक कि सभी भाई वोडिंग स्कूल में नहीं चले जाते और अपनी वहिनों के लिये छुट्टी के दिनों को छोड़ कर प्रसन्नता अथवा क्षोभ का और अधिक कारण नहीं बनते थे । अध्यापिकाएं, प्रयाएं, परिचारिकाएं तथा रसोइये अव भी काफी संख्या में नियुक्त थे और वेतन आदि विषयक उनकी मांगें भी अधिक नहीं थीं। उनमें से कई तो घर के सदस्यों की ही भांति ही रहते थे, अन्य आते-जाते रहते थे और उन्हें याद भी यदा-कदा ही किया जाता था । इनकी सेवाएं काफी श्रमसाध्य तथा अपरिहार्य होती थीं, क्योंकि ऊंचे तथा सकड़े मध्यवर्गीय मकानों में श्रमं की कुछ बचत की जा सके ऐसी किसी वस्तु का वहां प्रबन्ध नहीं था, अनेकों परिचारिकाएं टवों में भरने के लिये गर्म पानी के वर्तन लिये सीढ़ियों पर लड़खड़ाती हुई नजर आती थीं, और प्रत्येक कमरे में कोयला पहुँचाने का काम करती थीं जिसका धुआं लन्डन के कुहासे को और अधिक घना बनाता रहता था । सन् नव्वे के दशक में ही यह स्पष्ट हो पाया था कि परिवारों के आकार छोटे होने लगे हैं, सर्वप्रथम यह परिवर्तन उन व्यावसायिक वर्गों तथा मध्यवर्ग में घटित हुआ था जिन्हें 'पब्लिक स्कूलों में एक भारी शुल्क प्रदा करना पड़ता था और उन सम्पन्न शिल्पियों के वर्ग में भी घटित हो रहा था जिन्हें अपने जीवन स्तर को उच्चस्तरीय बनाये रखने के लिये संघर्ष करना पड़ रहा था । सन् एक हज़ार आठ सौ सतहत्तर में ब्रॉडलॉफ़ तथा श्रीमती वेसेन्ट ने नव्य-माल्थसंवादी परिपत्र के प्रकाशन के बाद सर्वप्रथम राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन की विधियों का विज्ञापन किया गया था । लेकिन जो गन्दी वस्तियों में रहने वाले लोग इन सुधारकों का लक्ष्य थे उन्होंने उनके सुझाव पर सबसे कम ध्यान दिया था । जो परिवार वच्चों का वांछित प्रकार से लालन-पालन कर सकने में सर्वाधिक समर्थ थे, दुर्भाग्य से वे, वे परिवार थे जो आगामी शताब्दी में प्रजातीय-आत्महत्या' में रत हो गये थे । सन् सत्तर तथा अस्सी की दशान्दियां केवल बड़े परिवारों का ही युग नहीं थीं वल्कि नैतिक तथा यौन सम्बन्धी विचारों के क्षेत्र में विशुद्धतावादी दशाब्दियां थीं जिनमें मानवीय प्रकृति की दुर्बलताएं नित्य प्रति व्यवहृत होती रहती थीं । महारानी विक्टोरिया का न्यायालय कठोर नियमों का ही पक्षपाती था । अधिकांश ब्रिटिश व्यापारियों का वास्तव में ईमानदार होना हमारी व्यापारिक समृद्धि का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कारण था । इस युग के लोकप्रिय नायक, जिनमें नायकत्व के निस्सन्देह सभी विद्यमान थे - सर्वप्रथम तथा सर्वाधिक धार्मिक व्यक्ति थे : अफ्रीका की खोज गुरण करने वाले तथा धर्मावलम्बी लिविंगस्टन, सेवाधर्मी-सैनिक जनरल गॉर्डन, लॉर्ड शैफ्ट्सबरी तथा ग्लैडस्टन - इन सभी व्यक्तियों के लिये, जो परस्पर काफी भिन्न थे, जीवन का अर्थ केवल ईश्वरीय सेवा में निरत होता था । लेकिन इन पुराने तथा रूढ़ धार्मिक विश्वासों पर, जो इन लोगों की दृष्टि में इतने अर्थपूर्ण थे, उस काल के 'नास्तिवादी' सफलतापूर्वक आक्रमण कर रहे थे । लेकिन दृष्टिकोण तथा भावनाओं की दृष्टि से ये 'नास्तिवादी' भी 'विशुद्धतावादी' ही थे । 'संस्कृति' के भविष्यद्रष्टा मैथ्यू ऑरनोल्ड ने 'चरित्र' को 'जीवन के तीन भागों की दृष्टि से देखा था लेकिन 'चरित्र' की अवधारणा उनके निकट संकीरता अथवा विशुद्ध नकारात्मकता की अवधारणा नहीं थी । जार्ज इलियट के उपन्यासों को जो ख्याति प्राप्त हुई थी उसका श्रेय अधिकांश इसी तथ्य को है कि अनेकों लोगों ने उन्हें 'बुद्धिवादी नास्तिक चेतना को स्वीकार्य, आत्मोन्नति की प्रक्रिया तथा नैतिक मूल्यों की पुर्नव्याख्या के कारण ही मान्यता प्रदान की थी । 'सार्टर' में कार्लाइल के मंत्र - वाक्यों ने अनेकों लोगों को एक अस्पष्ट किन्तु प्रभावशाली चिन्तन प्रदान किया था, जिनमें डार्विनवाद के प्रवल समर्थक वे हक्सले भी सम्मिलित थे जिन्होंने कि 'ल्यूथर एट वर्क्स' की भांति आक्सफोर्ड में ब्रिटिश एसोसिएशन की प्रसिद्ध बैठक में पादरी- विचारों का स्पष्ट उल्लंघन कर दिया था । लेस्ली स्टीफेन तथा जॉनमॉरले द्वारा असत्य अन्धविश्वासों से समझौता कर लिये जाने से इनकार कर देना भी सत्रहवीं शताब्दी के विशुद्धतावाद की कट्टरता से युंक्त था । लेस्ली स्टीफेन एक समय से पादरी रह चुके थे और इसी प्रकार लोकप्रिय उदारतावादी इतिहासकार जे. आर. ग्रीन भी पादरी थे । साहित्य तथा चिन्तन के क्षेत्र में यह युग धर्म से पृथक् एक अर्द्धथे धार्मिक आन्दोलन का युग था । • इसकी बहुपक्षी जिज्ञासा तथा सामर्थ्य, इसके आत्मविश्वास तथा तत्परता - इन सभी दृष्टियों से उत्तर मध्य विक्टोरिया कालीन संस्कृति यूनानी थी । बौद्धिक अभियानों तथा नैतिक अनुदारतावाद की ओर इसके रुझान इसे वास्तव में एथेनियन प्रकृति के निकट ले आता है । समकालीन लोगों द्वारा टेनीसन की निम्त पंक्तियों के अतिरिक्त कोई और पंक्ति भी इतनी अधिक उद्धृत हुई है इसमें मुझे सन्देह है : ज्ञान निरन्तर अधिक से अधिकतर होता जाय, किन्तु उससे भी अधिक रहे हममें ईश्वराराधन और मन और आत्मा रहें समस्वर तथा सदा की भांति एक ही तान दोनों से निकले, किन्तु यह अधिक से अधिक व्यापकतर हो ।
कोलार। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जिस जगह से दिए भाषण के चलते सदस्यता रद्द की गई, उसी जगह से हुंकार भरी. उन्होंने जनसभा सम्बोधन के दौरान भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर निशाना साधा है. वहीँ अडानी मामलें को लेकर भी हमलावर रहे. राहुल ने कहा कि मैंने संसद में कहा था कि अडानी की एक शेल कंपनी है. मैंने सवाल किया कि 20,000 करोड़ रुपये का मालिक कौन है? इतिहास में पहली बार भाजपा सरकार ने संसद नहीं चलने दी. आमतौर पर विपक्ष संसद को चलने से रोकता है. राहुल गांधी ने कहा कि मैं कर्नाटक के लोगों से सीधे बात करना चाहूंगा. उन्होंने कहा कि हमने कर्नाटक की जनता से चार वादे किए हैं. पहला यह कि हर घर के परिवार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी. दूसरा हर महीने हर महिला को 2000 रुपए दिए जाएंगे. तीसरा वादा है कि हर महीने हर परिवार को 10 किलो चावल मुफ्त दिया जाएगा. चौथी योजना है कि हर महीने 2 साल के लिए कर्नाटक के हर ग्रेजुएट को 3000 रुपए और डिप्लोमा होल्डर को 1500 रुपए दिए जाएंगे. कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में कांग्रेस जल्द ही सत्ता में आएगी. कांग्रेस यह सुनिश्चित करेगी कि सत्ता में आते ही युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम हों. हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं ने मुझसे पूछा कि क्या किया जा सकता है. मैंने उनसे सत्ता में आने के बाद वादा किए गए कार्यक्रमों को तुरंत लागू करने को कहा है. मैंने उनसे कहा कि इसे लागू करने में एक साथ महीनों का समय न लें. मैं यहां कर्नाटक में कांग्रेस के नेताओं से भी यही कहता हूं.
कोलार। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जिस जगह से दिए भाषण के चलते सदस्यता रद्द की गई, उसी जगह से हुंकार भरी. उन्होंने जनसभा सम्बोधन के दौरान भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर निशाना साधा है. वहीँ अडानी मामलें को लेकर भी हमलावर रहे. राहुल ने कहा कि मैंने संसद में कहा था कि अडानी की एक शेल कंपनी है. मैंने सवाल किया कि बीस,शून्य करोड़ रुपये का मालिक कौन है? इतिहास में पहली बार भाजपा सरकार ने संसद नहीं चलने दी. आमतौर पर विपक्ष संसद को चलने से रोकता है. राहुल गांधी ने कहा कि मैं कर्नाटक के लोगों से सीधे बात करना चाहूंगा. उन्होंने कहा कि हमने कर्नाटक की जनता से चार वादे किए हैं. पहला यह कि हर घर के परिवार को दो सौ यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी. दूसरा हर महीने हर महिला को दो हज़ार रुपयापए दिए जाएंगे. तीसरा वादा है कि हर महीने हर परिवार को दस किलो चावल मुफ्त दिया जाएगा. चौथी योजना है कि हर महीने दो साल के लिए कर्नाटक के हर ग्रेजुएट को तीन हज़ार रुपयापए और डिप्लोमा होल्डर को एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए दिए जाएंगे. कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में कांग्रेस जल्द ही सत्ता में आएगी. कांग्रेस यह सुनिश्चित करेगी कि सत्ता में आते ही युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम हों. हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं ने मुझसे पूछा कि क्या किया जा सकता है. मैंने उनसे सत्ता में आने के बाद वादा किए गए कार्यक्रमों को तुरंत लागू करने को कहा है. मैंने उनसे कहा कि इसे लागू करने में एक साथ महीनों का समय न लें. मैं यहां कर्नाटक में कांग्रेस के नेताओं से भी यही कहता हूं.
पहिला पाठ भोजन लड़कियो ! तुम जानती हो कि रेलगाड़ी में एक इञ्जिन होता है । यही इञ्जिन उसे खींचता है। क्या तुम यह भी जानती हो कि यह इञ्जिन किस चीज़ से चलता है ? इञ्जिन भाफ़ से है चलता है। यह भाफ़ कोयले और पानी से तैयार की जाती है । इसी से इञ्जिन को कोयला और पानी दिया जाता है । यदि उसे कोयला और पानी न मिले तो वह न चल सके । हम क्यों खाते हैं ? हमारा शरीर भी एक प्रकार का इञ्जिन है । इञ्जिन की तरह इसे भी खाना चाहिए । खाना खाने से हमारे शरीर में शक्ति आती है, जिससे हम काम करते और चलते फिरते हैं । काम करने, चलने फिरने अथवा बोलने से शक्ति खर्च होती है । यह शक्ति खाना खाने से फिर पैदा हो जाती है। बात यह है कि खाने में शरीर के लिए पोषण तत्व होता है । इसी पोषण तत्व से हमारे शरीर का पोषण होता है और उसमें बल आता है । इसलिए सदा ऐसा खाना खाना चाहिए जिसमें शरीर का पोषण करने वाला तत्व अधिक हो और जिसके खाने से शरीर को बल मिले । खाना कैसा होना चाहिए - शरीर का पोषरण स्वास्थ्यकर और अच्छा खाना खाने से होता है तुम पूछागी कि अच्छा खाना कौन सा है ? क्या मिठाई, हलवा, पूड़ी, रबड़ी वगैरह अच्छा खाना है ? नहीं, कभी नहीं । मिठाई, रबड़ी या पूड़ी वग़ैरह स्वादिष्ट भोजन भले ही हों, लेकिन इनसे लाभ कम होता है । हाँ, इनके खाने से हानि ज़रूर होती है। ये सब देर में हजम होने वाले और कब्ज़ करने वाले पदार्थ हैं। अच्छा और स्वास्थ्यकर खाना वह है जो जल्द हज़म होने वाला हो और जिसके खाने से शरीर में बल बढ़े। तुम्हें यह याद रखना चाहिए कि खाना स्वाद के लिए नहीं खाया जाता वह स्वास्थ्य के लिए खाया जाता है। इसलिए अगर कोई खाना ऐसा हो जो खाने में तो स्वादिष्ट हो लेकिन शरीर को हानि पहुँचाता हो तो तुम उसे कभी न खाओ । ऐसा खाना खाने से जीभ के जायके के सिवा लाभ कुछ नहीं होगा। हाँ, जाओगी । बीमारी से बचने के लिए तुम्हें सदा सादा और बलकारक भोजन करना चाहिए । ऐसा भोजन करने से थकान दूर होती है और शरीर में बल बढ़ता है। शरीर में बल होने से बीमारियाँ भी पास नहीं फटकतीं । कमजोरी ही बीमारियों का घर है और वही उनकी जननी है। इसलिए यदि तुम नीरोग रहना चाहती हो तो बलवान बनो और बलवान बनने के लिए अच्छा और जल्द हज़म होने वाला खाना खाओ । तुम पूछोगी कि यदि मिठाई और पकवान भी अच्छा खाना नहीं है तो अच्छा खाना फिर क्या है ? हम तुम्हें बता चुके हैं कि बल देने वाला और जल्द हज़म होने वाला खाना स्वास्थ्य के लिये लाभकर है । यही अच्छा खाना है । रोटी, दाल, भात, तरकारी, फल, दूध वगैरह सच भोजन के अच्छे पदार्थ हैं । ये सब जल्द हजम होते हैं और शरीर को ताक़त देते हैं । दूध पीना - स्वास्थ्य के लिए दूध सब से अच्छी चीज़ है । यह हमारे लिए अमृत के समान है। दूध में शरीर के लिए पोषण तत्व अधिक होता है। इसलिए इसके खाने से शरीर में बल बढ़ता है और मस्तिष्क भी ताक़तवर होता है; जिससे बुद्धि बढ़ती है। लड़कियों को बचपन ही से दूध पीने की आदत डालनी चाहिए और यदि मिल सके तो खूब दूध पीना चाहिए । पीने के लिए गाय ओर बकरी का दूध अच्छा होता है। इनका दूध हल्का और नीरोग होता है। भैंस का दूध ताक़तवर किन्तु भारी होता है। कमजोर और रोगी आदमियों का भैंस का दूध नहीं पीना चाहिए। दूध किसी का हो सदा उबाल कर पोना चाहिए । फल खाना-- फल खाना भी स्वास्थ्य के लिए हितकर है। फल खाने से शरीर में नया खून पैदा होता है, जिससे बल और बुद्धि बढ़ती है। फल खाने से सौन्दर्य की भी वृद्धि होती है । जिनको क़ब्ज की शिकायत रहती हो उन्हें सदा फलों का प्रयोग करना चाहिए । फल खाने से शरीर पर ही अच्छा प्रभाव
पहिला पाठ भोजन लड़कियो ! तुम जानती हो कि रेलगाड़ी में एक इञ्जिन होता है । यही इञ्जिन उसे खींचता है। क्या तुम यह भी जानती हो कि यह इञ्जिन किस चीज़ से चलता है ? इञ्जिन भाफ़ से है चलता है। यह भाफ़ कोयले और पानी से तैयार की जाती है । इसी से इञ्जिन को कोयला और पानी दिया जाता है । यदि उसे कोयला और पानी न मिले तो वह न चल सके । हम क्यों खाते हैं ? हमारा शरीर भी एक प्रकार का इञ्जिन है । इञ्जिन की तरह इसे भी खाना चाहिए । खाना खाने से हमारे शरीर में शक्ति आती है, जिससे हम काम करते और चलते फिरते हैं । काम करने, चलने फिरने अथवा बोलने से शक्ति खर्च होती है । यह शक्ति खाना खाने से फिर पैदा हो जाती है। बात यह है कि खाने में शरीर के लिए पोषण तत्व होता है । इसी पोषण तत्व से हमारे शरीर का पोषण होता है और उसमें बल आता है । इसलिए सदा ऐसा खाना खाना चाहिए जिसमें शरीर का पोषण करने वाला तत्व अधिक हो और जिसके खाने से शरीर को बल मिले । खाना कैसा होना चाहिए - शरीर का पोषरण स्वास्थ्यकर और अच्छा खाना खाने से होता है तुम पूछागी कि अच्छा खाना कौन सा है ? क्या मिठाई, हलवा, पूड़ी, रबड़ी वगैरह अच्छा खाना है ? नहीं, कभी नहीं । मिठाई, रबड़ी या पूड़ी वग़ैरह स्वादिष्ट भोजन भले ही हों, लेकिन इनसे लाभ कम होता है । हाँ, इनके खाने से हानि ज़रूर होती है। ये सब देर में हजम होने वाले और कब्ज़ करने वाले पदार्थ हैं। अच्छा और स्वास्थ्यकर खाना वह है जो जल्द हज़म होने वाला हो और जिसके खाने से शरीर में बल बढ़े। तुम्हें यह याद रखना चाहिए कि खाना स्वाद के लिए नहीं खाया जाता वह स्वास्थ्य के लिए खाया जाता है। इसलिए अगर कोई खाना ऐसा हो जो खाने में तो स्वादिष्ट हो लेकिन शरीर को हानि पहुँचाता हो तो तुम उसे कभी न खाओ । ऐसा खाना खाने से जीभ के जायके के सिवा लाभ कुछ नहीं होगा। हाँ, जाओगी । बीमारी से बचने के लिए तुम्हें सदा सादा और बलकारक भोजन करना चाहिए । ऐसा भोजन करने से थकान दूर होती है और शरीर में बल बढ़ता है। शरीर में बल होने से बीमारियाँ भी पास नहीं फटकतीं । कमजोरी ही बीमारियों का घर है और वही उनकी जननी है। इसलिए यदि तुम नीरोग रहना चाहती हो तो बलवान बनो और बलवान बनने के लिए अच्छा और जल्द हज़म होने वाला खाना खाओ । तुम पूछोगी कि यदि मिठाई और पकवान भी अच्छा खाना नहीं है तो अच्छा खाना फिर क्या है ? हम तुम्हें बता चुके हैं कि बल देने वाला और जल्द हज़म होने वाला खाना स्वास्थ्य के लिये लाभकर है । यही अच्छा खाना है । रोटी, दाल, भात, तरकारी, फल, दूध वगैरह सच भोजन के अच्छे पदार्थ हैं । ये सब जल्द हजम होते हैं और शरीर को ताक़त देते हैं । दूध पीना - स्वास्थ्य के लिए दूध सब से अच्छी चीज़ है । यह हमारे लिए अमृत के समान है। दूध में शरीर के लिए पोषण तत्व अधिक होता है। इसलिए इसके खाने से शरीर में बल बढ़ता है और मस्तिष्क भी ताक़तवर होता है; जिससे बुद्धि बढ़ती है। लड़कियों को बचपन ही से दूध पीने की आदत डालनी चाहिए और यदि मिल सके तो खूब दूध पीना चाहिए । पीने के लिए गाय ओर बकरी का दूध अच्छा होता है। इनका दूध हल्का और नीरोग होता है। भैंस का दूध ताक़तवर किन्तु भारी होता है। कमजोर और रोगी आदमियों का भैंस का दूध नहीं पीना चाहिए। दूध किसी का हो सदा उबाल कर पोना चाहिए । फल खाना-- फल खाना भी स्वास्थ्य के लिए हितकर है। फल खाने से शरीर में नया खून पैदा होता है, जिससे बल और बुद्धि बढ़ती है। फल खाने से सौन्दर्य की भी वृद्धि होती है । जिनको क़ब्ज की शिकायत रहती हो उन्हें सदा फलों का प्रयोग करना चाहिए । फल खाने से शरीर पर ही अच्छा प्रभाव
भारतीय क्रिकेट टीम ने अपने टी 20 विश्वकप से पहले ही पीछले वर्ष की टी 20 विश्वकप विजेता टीम रही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए अभ्यास मुकाबले में एक अंतिम ओवर तक चले रोमांचक मुकाबले में हराकर सबको हैरान कर दिया है। यह मुकाबला भारत के हाथ से जाता हुआ नजर आ रहा था लेकिन विराट कोहली ने मैच का रुख बदल के रख दिया। विराट कोहली ने मैच की नाजुक स्थिति में दो महत्वपूर्ण विकेट अपनी शानदार फील्डिंग के दम पर भारत को दिलाए। विराट कोहली ने पहले जब ऑस्ट्रेलिया को जीतने के लिए 11 गेंदों में सिर्फ 16 रनो की जरूरत थी तो उस समय युवा आक्रामक बल्लेबाज टीम डेविड को एक बाज की रफ्तार से दौड़ते हुए थ्रो के जरिए आउट किया। इसके बाद कोहली ने अंतिम ओवर में जब ऑस्ट्रेलिया को 4 गेंदों पर 7 रनो की जरूरत थी उस समय पेट कमिंस का बाउंड्री के ऊपर एक हाथ से जैसे कोई बाज पक्षी ने अपने शिकार को लपका हो वैसे कैच लपका। अगर विराट यह कैच नही करते तो भारत यह मुकाबला हार चुकी होती। इसके बाद फैंस विराट कोहली के इस प्रदर्शन को देख दीवाने हो गए। भले ही वह बल्ले से ज्यादा रन नहीं बना पाए लेकिन अपनी फील्डिंग से मैच भारत को जीता दिया। वही हर्षल पटेल और मोहम्मद शमी ने भी अंत में आकर शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन दिया।
भारतीय क्रिकेट टीम ने अपने टी बीस विश्वकप से पहले ही पीछले वर्ष की टी बीस विश्वकप विजेता टीम रही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए अभ्यास मुकाबले में एक अंतिम ओवर तक चले रोमांचक मुकाबले में हराकर सबको हैरान कर दिया है। यह मुकाबला भारत के हाथ से जाता हुआ नजर आ रहा था लेकिन विराट कोहली ने मैच का रुख बदल के रख दिया। विराट कोहली ने मैच की नाजुक स्थिति में दो महत्वपूर्ण विकेट अपनी शानदार फील्डिंग के दम पर भारत को दिलाए। विराट कोहली ने पहले जब ऑस्ट्रेलिया को जीतने के लिए ग्यारह गेंदों में सिर्फ सोलह रनो की जरूरत थी तो उस समय युवा आक्रामक बल्लेबाज टीम डेविड को एक बाज की रफ्तार से दौड़ते हुए थ्रो के जरिए आउट किया। इसके बाद कोहली ने अंतिम ओवर में जब ऑस्ट्रेलिया को चार गेंदों पर सात रनो की जरूरत थी उस समय पेट कमिंस का बाउंड्री के ऊपर एक हाथ से जैसे कोई बाज पक्षी ने अपने शिकार को लपका हो वैसे कैच लपका। अगर विराट यह कैच नही करते तो भारत यह मुकाबला हार चुकी होती। इसके बाद फैंस विराट कोहली के इस प्रदर्शन को देख दीवाने हो गए। भले ही वह बल्ले से ज्यादा रन नहीं बना पाए लेकिन अपनी फील्डिंग से मैच भारत को जीता दिया। वही हर्षल पटेल और मोहम्मद शमी ने भी अंत में आकर शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन दिया।
पेरिस, (आईएएनएस)। फांस में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में रविवार को लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। दोपहर तक करीब 31 पतिशत मतदान होने की सूचना है। इस चुनाव में 1988 के बाद पहली बार किसी सोशलिस्ट उम्मीदवार की जीत की सम्भावना बनी है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक फांस के आंतरिक मत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति पद के लिए रविवार को दूसरे चरण के मतदान में दोपहर तक करीब 30 पतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। फांस के मुख्यभाग में मतदान पेंदों को रविवार सुबह आठ बजे खोल दिया गया। देश के 4. 6 करोड़ पंजीकृत मतदाता मौजूदा राष्ट्रपति व युनियन फॉर अ पॉपुलर मूवमेंट के नेता निकोलस सरकोजी और पेंच सोशलिस्ट पार्टी के नेता फांसुआ होलांद के बीच से अगले राष्ट्रपति का चुनाव करेंगे। राष्ट्रपति सरकोजी अपनी पत्नी कार्ला ब्रूनी-सरकोजी के साथ पेरिस के 16वें पशासनिक जिले में दोपहर के समय अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। अपना मत डालने आए सरकोजी काफी थके दिख रहे थे, लेकिन उन्होंने अपने समर्थकों का मुस्कुराते हुए अभिवादन किया। होलांद ने अपना मत सुबह 10. 30 बजे मध्य फांस के तुले में डाला। होलांद 2001 से 2008 तक तुले के मेयर रह चुके हैं। अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से पहले होलांद ने कुछ समय समर्थकों एवं पत्रकारों के साथ बिताया। समय में अंतराल होने की वजह से प ांस के नियंत्रण वाले पवासी क्षेत्रों कनाडा के पूर्वी तट स्थित सैंट पियरे एवं मिक्केलन द्वीप में शनिवार को सबसे पहले मतदान शुरू हुआ।
पेरिस, । फांस में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में रविवार को लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। दोपहर तक करीब इकतीस पतिशत मतदान होने की सूचना है। इस चुनाव में एक हज़ार नौ सौ अठासी के बाद पहली बार किसी सोशलिस्ट उम्मीदवार की जीत की सम्भावना बनी है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक फांस के आंतरिक मत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति पद के लिए रविवार को दूसरे चरण के मतदान में दोपहर तक करीब तीस पतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। फांस के मुख्यभाग में मतदान पेंदों को रविवार सुबह आठ बजे खोल दिया गया। देश के चार. छः करोड़ पंजीकृत मतदाता मौजूदा राष्ट्रपति व युनियन फॉर अ पॉपुलर मूवमेंट के नेता निकोलस सरकोजी और पेंच सोशलिस्ट पार्टी के नेता फांसुआ होलांद के बीच से अगले राष्ट्रपति का चुनाव करेंगे। राष्ट्रपति सरकोजी अपनी पत्नी कार्ला ब्रूनी-सरकोजी के साथ पेरिस के सोलहवें पशासनिक जिले में दोपहर के समय अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। अपना मत डालने आए सरकोजी काफी थके दिख रहे थे, लेकिन उन्होंने अपने समर्थकों का मुस्कुराते हुए अभिवादन किया। होलांद ने अपना मत सुबह दस. तीस बजे मध्य फांस के तुले में डाला। होलांद दो हज़ार एक से दो हज़ार आठ तक तुले के मेयर रह चुके हैं। अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से पहले होलांद ने कुछ समय समर्थकों एवं पत्रकारों के साथ बिताया। समय में अंतराल होने की वजह से प ांस के नियंत्रण वाले पवासी क्षेत्रों कनाडा के पूर्वी तट स्थित सैंट पियरे एवं मिक्केलन द्वीप में शनिवार को सबसे पहले मतदान शुरू हुआ।
न्यूजीलैंड दिग्गज स्कॉट स्टाइरिस ने केएल राहुल की फॉर्म को लेकर खड़े किए सवाल- क्या वास्तव में केएल राहुल की जरूरत है, वह अच्छी लय में होंगे? पिछले कुछ महीने से भारतीय टीम से बाहर चल रहे केएल राहुल के एशिया कप टीम में जगह मिलने की उम्मीद है। लेकिन स्कॉट स्टाइरिस ने राहुल के लंबे ब्रेक के कारण उनके फॉर्म को लेकर सवाल उठाए हैं। टीम इंडिया के सीनियर बल्लेबाज केएल राहुल कोविड-19 पॉजिटिव होने के चलते वेस्टइंडीज के खिलाफ जारी टी20 सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। फिटनेस और हेल्थ के चलते आगामी जिम्बाब्वे दौरे के लिए भी उन्हें टीम में जगह नहीं मिली है। आईपीएल 2022 के बाद से ही केएल राहुल मैदान पर वापसी करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। आगामी टी20 वर्ल्ड कप को देखते हुए केएल राहुल की जगह टीम मैनेजमेंट ने कई युवा खिलाड़ियों को मौका दिया है और उन्होंने चयनकर्ताओं को निराश नहीं किया, लेकिन दमदार प्रदर्शन से उनकी टेंशन जरूर बढ़ा दी है। वर्ल्ड कप की तैयारियों के लिए भारत के पास वेस्टइंडीज के खिलाफ बचे दो मैचों के अलावा 11 और मुकाबले होंगे। इस सीरीज के बाद भारत को एशिया कप खेलना है, जहां टीम कम से कम 5 मैच खेलेगी, अगर भारत फाइनल में पहुंचती है, तो मैचों की संख्य 6 हो जाएगी। इसके बाद भारत ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सरजमीं पर 3-3 मैच की टी20 सीरीज खेलेगी। हालांकि भारतीय टीम अभी भी रोहित शर्मा के ओपनिंग जोड़ीदारी को फाइनल नहीं कर सकी है। क्योंकि केएल राहुल चोटिल चल रहे हैं और पूर्व कप्तान विराट कोहली नियमित अंतराल पर आराम ले रहे हैं, जिसके कारण भारत का शीर्ष क्रम अभी भी कंफर्म नहीं है। हालांकि केएल राहुल एशिया कप से एक्शन में नजर आने वाले हैं और वह रोहित के साथ ओपनिंग कर सकते हैं। लेकिन राहुल के लिए इतना आसान नहीं होने वाला है, क्योंकि न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर स्कॉट स्टाइरिस का मानना है कि वापसी के बाद क्या केएल राहुल अपनी पुरानी फॉर्म को बरकरार रख सकेंगे और दूसरी बात ये है कि उनकी गैरमौजूदगी में दूसरे खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। स्पोर्ट्स 18 के शो 'स्पोर्ट्स ओवर द टॉप' पर स्कॉट स्टाइरिस ने कहा, "खिलाड़ियों के लिए यह एक अलग मानसिकता है, क्योंकि वे बाहर नहीं होना चाहते हैं और वे अन्य खिलाड़ियों को मौका नहीं देना चाहते हैं। मुझे पता है कि भारत के ग्रुप के भीतर बहुत अच्छी संस्कृति है, इसलिए उसे हर समय अन्य खिलाड़ियों को अवसर देने में कोई दिक्कत नहीं है। मैं खुद एक खिलाड़ी के रूप में जानता हूं, आप कभी भी किसी और को अपनी जगह लेने का मौका नहीं देना चाहते थे। " उन्होंने आगे कहा, "इस समय वह चोटिल है और वह इस समय टीम से दूर है, इसका सीधा सा मतलब है कि अन्य खिलाड़ी वह करने में सक्षम हैं जो सूर्यकुमार कर रहे हैं, जो ऋषभ पंत कर रहे हैं, वो वहां है और रन बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं और वास्तव में चयनकर्ताओं के मन में सवाल भी खड़े कर दिए हैं, क्या हमें वास्तव में केएल राहुल की जरूरत है? जब वह वापस आएंगे तो क्या वह अच्छी फॉर्म में होंगे? उन्होंने बहुत सारा क्रिकेट मिस कर दिया है, बहुत सारे सवालिया निशान अब सिर्फ इसलिए मौजूद हैं क्योंकि वह अन्य खिलाड़ियों को वह मौका देने में सक्षम हैं। "
न्यूजीलैंड दिग्गज स्कॉट स्टाइरिस ने केएल राहुल की फॉर्म को लेकर खड़े किए सवाल- क्या वास्तव में केएल राहुल की जरूरत है, वह अच्छी लय में होंगे? पिछले कुछ महीने से भारतीय टीम से बाहर चल रहे केएल राहुल के एशिया कप टीम में जगह मिलने की उम्मीद है। लेकिन स्कॉट स्टाइरिस ने राहुल के लंबे ब्रेक के कारण उनके फॉर्म को लेकर सवाल उठाए हैं। टीम इंडिया के सीनियर बल्लेबाज केएल राहुल कोविड-उन्नीस पॉजिटिव होने के चलते वेस्टइंडीज के खिलाफ जारी टीबीस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। फिटनेस और हेल्थ के चलते आगामी जिम्बाब्वे दौरे के लिए भी उन्हें टीम में जगह नहीं मिली है। आईपीएल दो हज़ार बाईस के बाद से ही केएल राहुल मैदान पर वापसी करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। आगामी टीबीस वर्ल्ड कप को देखते हुए केएल राहुल की जगह टीम मैनेजमेंट ने कई युवा खिलाड़ियों को मौका दिया है और उन्होंने चयनकर्ताओं को निराश नहीं किया, लेकिन दमदार प्रदर्शन से उनकी टेंशन जरूर बढ़ा दी है। वर्ल्ड कप की तैयारियों के लिए भारत के पास वेस्टइंडीज के खिलाफ बचे दो मैचों के अलावा ग्यारह और मुकाबले होंगे। इस सीरीज के बाद भारत को एशिया कप खेलना है, जहां टीम कम से कम पाँच मैच खेलेगी, अगर भारत फाइनल में पहुंचती है, तो मैचों की संख्य छः हो जाएगी। इसके बाद भारत ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सरजमीं पर तीन-तीन मैच की टीबीस सीरीज खेलेगी। हालांकि भारतीय टीम अभी भी रोहित शर्मा के ओपनिंग जोड़ीदारी को फाइनल नहीं कर सकी है। क्योंकि केएल राहुल चोटिल चल रहे हैं और पूर्व कप्तान विराट कोहली नियमित अंतराल पर आराम ले रहे हैं, जिसके कारण भारत का शीर्ष क्रम अभी भी कंफर्म नहीं है। हालांकि केएल राहुल एशिया कप से एक्शन में नजर आने वाले हैं और वह रोहित के साथ ओपनिंग कर सकते हैं। लेकिन राहुल के लिए इतना आसान नहीं होने वाला है, क्योंकि न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर स्कॉट स्टाइरिस का मानना है कि वापसी के बाद क्या केएल राहुल अपनी पुरानी फॉर्म को बरकरार रख सकेंगे और दूसरी बात ये है कि उनकी गैरमौजूदगी में दूसरे खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। स्पोर्ट्स अट्ठारह के शो 'स्पोर्ट्स ओवर द टॉप' पर स्कॉट स्टाइरिस ने कहा, "खिलाड़ियों के लिए यह एक अलग मानसिकता है, क्योंकि वे बाहर नहीं होना चाहते हैं और वे अन्य खिलाड़ियों को मौका नहीं देना चाहते हैं। मुझे पता है कि भारत के ग्रुप के भीतर बहुत अच्छी संस्कृति है, इसलिए उसे हर समय अन्य खिलाड़ियों को अवसर देने में कोई दिक्कत नहीं है। मैं खुद एक खिलाड़ी के रूप में जानता हूं, आप कभी भी किसी और को अपनी जगह लेने का मौका नहीं देना चाहते थे। " उन्होंने आगे कहा, "इस समय वह चोटिल है और वह इस समय टीम से दूर है, इसका सीधा सा मतलब है कि अन्य खिलाड़ी वह करने में सक्षम हैं जो सूर्यकुमार कर रहे हैं, जो ऋषभ पंत कर रहे हैं, वो वहां है और रन बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं और वास्तव में चयनकर्ताओं के मन में सवाल भी खड़े कर दिए हैं, क्या हमें वास्तव में केएल राहुल की जरूरत है? जब वह वापस आएंगे तो क्या वह अच्छी फॉर्म में होंगे? उन्होंने बहुत सारा क्रिकेट मिस कर दिया है, बहुत सारे सवालिया निशान अब सिर्फ इसलिए मौजूद हैं क्योंकि वह अन्य खिलाड़ियों को वह मौका देने में सक्षम हैं। "
बेगम जान 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद के बंगाल के एक कोठे में रहने वाली 11 महिलाओं की कहानी है। श्रीजीत मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म 14 अप्रैल को रिलीज होगी। फिल्म निर्माता महेश भट्ट की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। कई दिनों की कोशिश बेकार हो गई है। बेगम जान 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद के बंगाल के एक कोठे में रहने वाली 11 महिलाओं की कहानी है। श्रीजीत मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म 14 अप्रैल को रिलीज होगी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
बेगम जान एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में हुए भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद के बंगाल के एक कोठे में रहने वाली ग्यारह महिलाओं की कहानी है। श्रीजीत मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म चौदह अप्रैल को रिलीज होगी। फिल्म निर्माता महेश भट्ट की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। कई दिनों की कोशिश बेकार हो गई है। बेगम जान एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में हुए भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद के बंगाल के एक कोठे में रहने वाली ग्यारह महिलाओं की कहानी है। श्रीजीत मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म चौदह अप्रैल को रिलीज होगी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
खंडवा रेलवे जंक्शन के बाहरी परिसर में दो पहिया वाहन की पार्किंग है। रेल कर्मचारियों के लिए यह पार्किंग निः शुल्क थी। लेकिन जब से रेलवे ने ठेके पर पार्किंग दे दी। तब से पार्किंग शुल्क को लेकर आये दिन रेलवे कर्मचारियों और ठेकेदार के बीच विवाद होने लगा। मामला डीआरएम तक पहुंचा तो भुसावल डीआरएम ने रेलवे कर्मचारियों के वाहन पार्किंग हेतु पार्सल आफिस के पीछे की जमीन की स्वीकृति दे दी। इस पार्किंग के बनने से रेलवे कर्मचारियों के वाहन पार्किंग की समस्या तो हल हो गई। लेकिन इस पार्किंग का उपयोग रेलवे कर्मियों के अलावा बाहरी लोग भी करने लगे वाहन चोरी होने लगे। यूपी के एक हनुमान मंदिर में भक्तों के लिए 'ड्रेस कोड'
खंडवा रेलवे जंक्शन के बाहरी परिसर में दो पहिया वाहन की पार्किंग है। रेल कर्मचारियों के लिए यह पार्किंग निः शुल्क थी। लेकिन जब से रेलवे ने ठेके पर पार्किंग दे दी। तब से पार्किंग शुल्क को लेकर आये दिन रेलवे कर्मचारियों और ठेकेदार के बीच विवाद होने लगा। मामला डीआरएम तक पहुंचा तो भुसावल डीआरएम ने रेलवे कर्मचारियों के वाहन पार्किंग हेतु पार्सल आफिस के पीछे की जमीन की स्वीकृति दे दी। इस पार्किंग के बनने से रेलवे कर्मचारियों के वाहन पार्किंग की समस्या तो हल हो गई। लेकिन इस पार्किंग का उपयोग रेलवे कर्मियों के अलावा बाहरी लोग भी करने लगे वाहन चोरी होने लगे। यूपी के एक हनुमान मंदिर में भक्तों के लिए 'ड्रेस कोड'
अब तक हम दोनों खाना खत्म कर चुके थे। बिल्लो अंदर के कमरों के दरवाजे बंद कर अंदर आते हुए पूछ रही थी। तभी मैं गौर से उसे देखता हुआ उठा,निसंकोच उसकी हथेलियों को पकड़ कर ऊपर उठाया, फिर जेब से उसका खास गिफ़्ट निकाल कर उसकी हथेली पर रखा और मुठ्ठी बंद कर दी। फिर उसकी आँखों की गहराई में झांकते हुए कहा 'मेरे बचपन की अल्हड़, चंचल ,तीखी बिल्लो के लिए वही बचपन वाला मीठा सा गिफ़्ट।' बिल्लो एकदम शांत रही। बिल्लो की आंखें भर आई थीं। मैंने उसके हाथों से चॉकलेट लेकर अपने हाथों से उसे खिलाई। फिर उसे उसके तखत पर बैठा दिया। तभी एक टुकड़ा उसने मेरे मुंह में भी डाल दिया। हम दोनों तब तक बिल्कुल अपने बचपन को ही जी रहे थे। इसमें चॉकलेट ने भी बड़ा रोल प्ले किया। हुआ यह कि हड़बड़ी में दिमाग में यह बात आई ही नहीं कि जौनपुर से बिल्लो के पास पहुंचने तक इतनी तेज़ गर्मी में चॉकलेट बहुत ज़्यादा सॉफ्ट ,गीली सी हो जाएगी। जब खोली तब समझ में आया। अपनी मूर्खता पर हंसी आई। गीली चॉकलेट हम दोनों के होंठो और हाथों में लग रही थी। तभी चॉकलेट का एक विज्ञापन आंखों के सामने कौंध गया। जिसमें सीढ़ियों पर बैठे किशोर-किशोरी एक नई तरह की गीली सी आई चॉकलेट एक दूसरे को खिला रहे हैं। और वह उनके मुंह-हाथों में फैली हुई है। लेकिन मैं भीतर ही भीतर यह सोच कर परेशान हो रहा था कि यह मेरी बचपन को फिर से जीने की कोशिश कहीं बचकानी हरकत वाला तुफान ना खड़ा कर दे। बिल्लो कहीं नाराज ना हो जाए। कोई आफत ना खड़ी हो जाए। तभी बिल्लो बोली 'अरे हमें तो आज पता चल रहा ई सब। फिर खाली आंखें ही बनाते रहे या..? ' बिल्लो भी यह कहते-कहते गंभीर हुई थी। बिल्लो यह कहते-कहते बड़ी भावुक हो गई। और कुछ देर चुप रह कर बोली 'जब तुम इतना निष्कपट होकर, इतना सच बोल दिए हो तो हम भी सच कह रहे हैं। अब तो सब कहने भर का ही रह गया है। जैसे तुम मुझ से बातें करते रहना चाहते थे। देखते रहना और छूना चाहते थे। वैसे ही मैं भी चाहती थी। मैं भी तुमसे ही शादी करना चाहती थी। जैसे तुम यहां से जाने के बाद उदास रहते थे। रोते थे। वैसे ही मैं भी जब भी अकेले बैठती, रहती तो तुम्हारे ही बारे में सोचती। कई बार तो तुम्हें सपनों में भी देखती। मगर किसी से मन की बात कह ना पाती। तुम तो जानते ही हो कि हमारा स्वभाव ऐसा था कि किसी को अपनी अंतरंग सहेली भी नहीं बना पाई। जब शादी की बात आई तो बार-बार मन में आया कि अम्मा-बाबू से कहूं मन की बात लेकिन तुम लोग पढ़ाई-लिखाई, रहन-सहन में इतना आगे थे कि हिम्मत ही ना पड़ी। इसी से सब अपने मन की करते रहे और मैं विवश हो देखती रही। किससे क्या कहती? मेरी सुनने वाला कोई था ही नहीं। फिर अचानक ही शादी कर दी गई। शादी कितने दिन चली सब जानते ही हो। और उस दिन जब शादी के नाम पर अपने साथ हुए अन्याय का जवाब दे रही थी तो तुम्हें देख कर लगा कि भगवान मैंने क्या पाप किया था जो मुझे यह सजा दी। कुछ सालों बाद जब तुम आते तो मन में आता कि सब बात तुम से कहूं। मगर हिम्मत ना जुटा पाई। फिर तुम्हारे चच्चा ने घर में जो आफत मचाई उससे तुम लोगों ने आना ही छोड़ दिया। जल्दी ही मैं निराश हो गई। और फिर परिस्थितियों ने मुझे यहां पहुंचा दिया। और अब इस दुनिया से निकलना जीते जी संभव ही नही है। कल अचानक ही तुम ऐसे सामने आ गए.. कुछ देर तो हम समझ ही नहीं पाए कि क्या बोलें? क्या कहें? अब बात तो यह भी है कि कुछ सुनने-कहने के लिए बचा ही क्या है? तुम खेत बेचने आए हो। बेच कर जाने के बाद फिर यहां कहां आओगे? मतलब की हम लोगों का यह आखिरी मिलना बतियाना है, तो मन कर रहा है कि जितना बोल-बतिया सकें, बतिया लें।' यह कह कर बिल्लो प्रश्नानुकूल सी एकटक मुझे देखने लगी। मुझे लगा कि यह बात तो सही कह रही है। खेत बेचने के बाद यहां आने का कोई कारण ही कहां बचता है। बिल्लो ने कहा 'इतनी रात बाहर टहलना ठीक नहीं। सिगरेट जितनी पीनी है यहीं पियो ना।' मैं जब एक दिन पहले बिल्लो से मिला था तभी से देख रहा था कि वह बराबर पान-मसाला मुंह में दबाए हुए थी। मुझसे भी कई बार पूछा था लेकिन मैंने मना कर दिया था कि मैं नहीं खाता। उसने मुझे सिगरेट के लिए कहकर फिर एक पुड़िया किनारे से फाड़कर मुंह में भर ली। फिर एक छोटी पुड़िया निकाली जिसमें सिर्फ़ तंबाकू थी उसे भी मुंह में डाल लिया। पुड़िया खोलने और उसे मुंह में डालने की स्टाइल से लग रहा था कि वह बरसों-बरस से खाती आ रही है। और अन्य करोड़ों देशवासियों की तरह वह भी अपने देश के कानून की, न्यायालय की खिल्ली उड़ाती आ रही है। न्यायालय ने तंबाकू गुटखा बंद किया तो कंपनियों ने तुरंत रास्ता निकाल लिया कि ठीक है तंबाकू गुटखा बंद। दोनों को अलग-अलग पैक कर दिया। अब खाने वाले अलग-अलग खरीद कर मुंह में एक साथ भर लेते हैं। मैंने पूछा 'बिल्लो कब से खा रही हो यह सब?' तो उसने मुस्कुराते हुए कहा 'अरे, अब याद नहीं। पहले अम्मा पान खाती रहीं, उन्हीं के पनडब्बा से कभी-कभी खाना खाने के बाद पान निकाल कर खा लिया करती थी। बस ऐसे ही पड़ गई़ पान- तंबाकू की आदत।' 'हूं... अम्मा पान खाती थीं तो पान की आदत पड़ गई। और तुम्हारे बाबू जी को मैंने हुक्का और सिगरेट पीते भी देखता था। तो कभी वहां भी तो हाथ साफ नहीं किया।' बिल्लो फिर हंस पड़ी। बोली 'अब क्या बताएं। कोई मुझसे बात तो करता नहीं था। ऊपर से सुना-सुना कर ताने अलग मारे जाते थे। ऐसे में खीझती। काम धंधा भी कुछ था नहीं तो मन एकदम बौराया रहता था। एकदम बौराई औरत सी हरकत करती। जानबूझ कर ऐसी हरकतें करती कि कोई तो मुझसे कुछ बोले। भले ही गाली दे। सबसे ज़्यादा मुझे खलता अम्मा का ना बोलना। मैं दिखा-दिखा कर अंड-बंड हरकत करती। ऐसे ही एक दिन बाबू जी ने हुक्का भरा। जलाया। कि तभी प्रधान आ गया। बाहर से आवाज़ आई तो बाबू जी बाहर गए। फिर पता नहीं क्या बात हुई कि उसी की मोटर साइकिल पर उसी के साथ कहीं चले गए। अम्मा उस समय चौका लीप रही थीं। उनकी चुप्पी ने मुझे और खिझाया। मैंने फिर अपनी खीझ उतारने, वो कुछ बोलें इसके लिए उन्हें दिखाकर हुक्के का लंबा पाइप जो बाबू जी खटिया में फंसा कर गए थे उसे निकाला और मुंह में लगाकर जोर से खींचा। पूरा मुंह तीखे कसैले धुएं से भर गया। और फिर ज़ोर से खांसी आने लगी। मुंह, नाक से धुंआ निकल रहा था। खांसते-खांसते उबकाई सी आने लगी। ऐसा लगा कि उल्टी हो जाएगी। मैं इस हालत में भी अम्मा पर नजर लगाए हुए थी कि वो कुछ बोल रही हैं कि नहीं। उन्होंने हुक्का पीते देखा कि नहीं। तब मैंने अंदर-अंदर बड़ी राहत महसूस की जब मुझे हुक्का पीते देख कर आग बाबूला होते हुए कहा "अरे हरामजादी औऊर कुछ बचा होए वहू कयि ले। अरे अब औऊर केतना नाक बोरबे। जीते जी खून पियत हऊ। देखाए-देखाए के खून जलावत हऊ" तभी मैंने फिर एक लंबा कश खींचा। फिर खांसी का दौरा। अब अम्मा आपा खो बैठीं, उनके पास ही लोटा पड़ा था वही फेंक कर मारा। वह मुझे नहीं लगा तो उनका गुस्सा और बढ़ गया। उन्हीं के पास एक मौनी (मूँज की बनी कटोरी नुमा डलिया) पड़ी थी उसे फेंक कर मारा। इस बार भी मेरा बचना था कि अम्मा लीपना-पोतना छोड़कर उठ खड़ी हुईं। सामने उनके झाड़ू पड़ी थी वही उठाकर जमकर झड़ुवा दिया। मन भर के गाली दी, कोसा। झाड़ूओं की चोट से मुझे दर्द हो रहा था। फिर भी मैं अजीब सी राहत महसूस कर रही थी। कि अम्मा बोलीं तो। मैं तब इतना जिद में आ गई थी कि इतनी मार खा कर भी वहां से हटी नहीं। अम्मा कोसतीं हुई जा के दलान में बैठ गईं। और मैं वहीं आंसू बहाती, बैठी, खींच-खींच हुक्का पीती रही। पान-तंबाकू खाती ही थी तो हुक्का ज़्यादा चढ़ा नहीं। अब जिद और चिढ़ाने के लिए की गई यह शुरुआत आगे चल कर आदत बन गई। 'बदला-वदला तो नहीं। हमें खाली गुस्सा ये आती थी घर वालों पर कि चलो शादी जैसी भी हुई। जहां भाग्य था सब हो गया। हमें कोई शौक तो लगा नहीं था कि अपना वैवाहिक जीवन खुद अपने हाथों खत्म करती। लेकिन बात तो ये है ना कि दूध में मक्खी देखकर तो नहीं निगली जा सकती ना। हमने सोचा चलो जैसे चलेगी वैसे चला लेंगे। घर वाले तो हैं ही। मगर यहां घर पर मेरे साथ जो हुआ हुआ। जिस तरह सब का व्यवहार बदला उससे मैं खुद गुस्से से भर उठी। बल्कि कहें कि नफरत से। मैंने तो सोचा ही नहीं था कि मां-बाप ऐसा बदलेंगे। मुझे बहुत बड़ा धक्का लगा था इन लोगों के व्यवहार से। सोचा कि जिस मायके के दम पर मैंने इतना बड़ा कदम उठाया, वो लोग तो देखना ही नहीं चाह रहे। हर तरफ से दुत्कारी हुई महसूस करने लगी। मुझे लगा कि मैं पेड़ से टूट कर गिरी पत्ती की तरह बेसहारा हो गई हूं। जो राह चलते लोगों के क़दमों तले कुचल-कुचल कर खत्म हो जाएगी। जिस दिन मैंने तय किया कि मैं जमीन पर बेसहारा होकर गिरी पत्ती नहीं हूं। मां-बाप परिवार सहारा नहीं देना चाहते हैं तो ना दें। मुझे नहीं जरूरत किसी के सहारे की। मैं अपना सहारा खुद बनूंगी। जब मैं मन में यह तय कर रही थी तब मैं कई दिनों से भूखी थी। ना मैं खाना मांगती थी। ना कोई मुझसे पूछता था। भूख के मारे पानी भी नहीं पिया जाता था, उबकायी सी आने लगती। मगर खुद अपना सहारा बनने का फैसला करते ही मैं सीधे रसोई में गई। पूरा परिवार खाना खा चुका था। एक भगोने में थोड़ी सी सांवा की खिचड़ी थी वही निकाली। मटके में गुड़ था वो निकाला, खाया तब कहीं जाकर जी में जी आया। यह कहते समय बिल्लो के चेहरे पर मुझे घमंड तो वाकई नहीं दिखा। हां गर्व की चमक साफ दिख रही थी। एल. ई. डी. बल्ब की उस सफेद रोशनी में भी। बिल्लो ने एक पुराना वाला पीला बल्ब भी लगा रख था। उसका कहना था कि इसकी पीली रोशनी की आदत एकदम से छूट नहीं पा रही है। इन्हीं पीली और सफेद रोशनी में उसके गर्व को देखते हुए मैं उठा और बिल्लो के तखत के पास पहुंच कर सिगरेट की डिब्बी खोलकर उसकी ओर बढ़ा दी। ऐसा करते समय मेरे मन में एक ही भावना थी कि यह भी इन चीजों की शौकीन रही है। ऐसे लोग अकेले में भले ही इसकी तलब ना महसूस करें लेकिन सामने किसी को खाता-पीता देखकर मन उनका भी मचल उठता है। मैंने कहा 'हां इस रेंज में गांव में मुश्किल ही है। यह जौनपुर में मिली। हालांकि मैं जो पीता हूं वह वहां भी नहीं मिली।' मैंने बिल्लो की इस बात का कोई जवाब नहीं दिया कि सिगरेट पिला कर क्या जी रहा हूं। मैं पूरी तरह से उसके हाव-भाव, काम बात को गहराई तक समझने का प्रयास का रहा था कि यह मेरी वही भोली-भाली चंचल बिल्लो है या एक दबंग गंवई महिला। या इसमें वह गुण भी हैं जिनके आधार पर मैं इसे लेडी डॉन कह सकता हूं। बिल्लो की इस बात ने मुझे निश्चित कर दिया तो मैंने सीधे से कहा बिल्लो मैं यहां यह समझ के रुका कि तुम्हारा भतीजा, परिवार यहां होंगे। मगर परिस्थितिवश वो सब नहीं हैं। तुम यहां अकेले हो। ऐसे में मेरा यहां रुकना कहीं गांव में लोगों को ऊटपटांग बोलने का मौका ना दे दे। मैं यही सोच-सोच कर परेशान हूं। तुम्हें अगर कहने में हिचक हो रही हो तो बताओ। ऐसी कोई बात नहीं है। मैं चाचा के यहां चला जाऊंगा। वैसे भी वो लोग यही चाहते हैं।' मेरे इतना कहते ही बिल्लो ने दाहिने हाथ की हथेली अपने माथे पर चट से मारी और बोली। मेरी ये बात सुनते ही बिल्लो हंस पड़ी। बोली 'तुमहूं का बात करत हो। देखो पहिला जो अनुभव रहा, उससे शादी, पति नाम से ही नफरत हो गई। दूसरे घर में सबका व्यवहार ऐसा रहा कि मन में हमेशा गुस्सा भरा रहता। कभी-कभी तो मन करता कि बांका उठाऊं औऊर जो मिल जाए सब को बाल (काट) डालूं। बाद में जब काम-धाम में मन लगने लगा तो गुस्सा कम हुआ। फिर जब हाथ में पैसा आने लगा तो मन पैसा कमाने में रमता गया। इतना कि नई-नई चीज करने लगी। कोहड़ौरी से शुरू करके आचार और फिर आगे बढ़ते गए। पैसों का हिसाब, काम-धाम देख के सब कहने लगे कि ये तो एकदम बनिया हो गई है। पैसा आने लगा तो घर की सूरत बदलने लगी। तब एक बार अम्मा ने बात उठाई। वो चाहती थीं कि उसी कलमुंहे से बातचीत करके हम उसी के साथ हो लें। वो हमसे बात करने से पहले बाबू को वहां भेजने के लिए तैयार कर चुकी थीं। जाने के एक दिन पहले मुझसे ना जाने क्या सोच कर पूछ लिया। इतना सुनते ही मेरे तन-बदन में आग लग गई। कि मैं इतना बड़ा बोझ हूं कि एक बार किसी तरह उस नर्क, उस मौत के मुंह से निकल कर आई। ई मां-बाप होके फिर वहीं भेज रहे हैं। अब तो हम इतना कमा रहे हैं। घर भर की रंगत बदल दी है फिर भी हम इन सबके लिए भारू(बोझ) बने हैं। हमने अम्मा-बाबू दोनों को खूब खरी-खोटी सुनाई। अम्मा बोलीं 'तू जब तक रहबे तब तक घरै का नकिया झुकी रहे। अरे ज़िंदगी भर के राखै तोके। ई जऊन काम धंधा फाने हऊ ओसे अऊर सब बोलत हैयन कि सब बिटिया के कमाई खात हयेन। कब तक काने में अंगुरि डारे बैइठी रही।' उस दिन घर में फिर बवाल हुआ। हमने कहा ठीक है अब हम इस घर में रहेंगे ही नहीं। उस दिन हम कुंआ के पास खटिया डाल के सोए। सब बहुत कोशिश किए कि अंदर चल कर सोऊं। रात-विरात कुछ हो ना जाए। गांव वाले जानेंगे तो क्या कहेंगे? लेकिन हम नहीं माने, अगले दिन उसी कुंआ के पास पहला काम किए खटिया डाले भर एक मड़ई तैयार कराए। घर खाना-पानी सब बंद कर दिया। भुजवा के हिआं से लइया, चना, मकई का दाना, गुड़ बजारे से लाय के कई दिन गुजारे। फिर आनन-फानन में दिवार खड़़ी करा कर टिन शेड डलवाया। इस बीच पूरे घर ने जोर लगा लिया कि हम घर वापस चलें। लेकिन मैं शुरू से अपने जिद की पक्की ठहरी। तो टस से मस नहीं हुई।
अब तक हम दोनों खाना खत्म कर चुके थे। बिल्लो अंदर के कमरों के दरवाजे बंद कर अंदर आते हुए पूछ रही थी। तभी मैं गौर से उसे देखता हुआ उठा,निसंकोच उसकी हथेलियों को पकड़ कर ऊपर उठाया, फिर जेब से उसका खास गिफ़्ट निकाल कर उसकी हथेली पर रखा और मुठ्ठी बंद कर दी। फिर उसकी आँखों की गहराई में झांकते हुए कहा 'मेरे बचपन की अल्हड़, चंचल ,तीखी बिल्लो के लिए वही बचपन वाला मीठा सा गिफ़्ट।' बिल्लो एकदम शांत रही। बिल्लो की आंखें भर आई थीं। मैंने उसके हाथों से चॉकलेट लेकर अपने हाथों से उसे खिलाई। फिर उसे उसके तखत पर बैठा दिया। तभी एक टुकड़ा उसने मेरे मुंह में भी डाल दिया। हम दोनों तब तक बिल्कुल अपने बचपन को ही जी रहे थे। इसमें चॉकलेट ने भी बड़ा रोल प्ले किया। हुआ यह कि हड़बड़ी में दिमाग में यह बात आई ही नहीं कि जौनपुर से बिल्लो के पास पहुंचने तक इतनी तेज़ गर्मी में चॉकलेट बहुत ज़्यादा सॉफ्ट ,गीली सी हो जाएगी। जब खोली तब समझ में आया। अपनी मूर्खता पर हंसी आई। गीली चॉकलेट हम दोनों के होंठो और हाथों में लग रही थी। तभी चॉकलेट का एक विज्ञापन आंखों के सामने कौंध गया। जिसमें सीढ़ियों पर बैठे किशोर-किशोरी एक नई तरह की गीली सी आई चॉकलेट एक दूसरे को खिला रहे हैं। और वह उनके मुंह-हाथों में फैली हुई है। लेकिन मैं भीतर ही भीतर यह सोच कर परेशान हो रहा था कि यह मेरी बचपन को फिर से जीने की कोशिश कहीं बचकानी हरकत वाला तुफान ना खड़ा कर दे। बिल्लो कहीं नाराज ना हो जाए। कोई आफत ना खड़ी हो जाए। तभी बिल्लो बोली 'अरे हमें तो आज पता चल रहा ई सब। फिर खाली आंखें ही बनाते रहे या..? ' बिल्लो भी यह कहते-कहते गंभीर हुई थी। बिल्लो यह कहते-कहते बड़ी भावुक हो गई। और कुछ देर चुप रह कर बोली 'जब तुम इतना निष्कपट होकर, इतना सच बोल दिए हो तो हम भी सच कह रहे हैं। अब तो सब कहने भर का ही रह गया है। जैसे तुम मुझ से बातें करते रहना चाहते थे। देखते रहना और छूना चाहते थे। वैसे ही मैं भी चाहती थी। मैं भी तुमसे ही शादी करना चाहती थी। जैसे तुम यहां से जाने के बाद उदास रहते थे। रोते थे। वैसे ही मैं भी जब भी अकेले बैठती, रहती तो तुम्हारे ही बारे में सोचती। कई बार तो तुम्हें सपनों में भी देखती। मगर किसी से मन की बात कह ना पाती। तुम तो जानते ही हो कि हमारा स्वभाव ऐसा था कि किसी को अपनी अंतरंग सहेली भी नहीं बना पाई। जब शादी की बात आई तो बार-बार मन में आया कि अम्मा-बाबू से कहूं मन की बात लेकिन तुम लोग पढ़ाई-लिखाई, रहन-सहन में इतना आगे थे कि हिम्मत ही ना पड़ी। इसी से सब अपने मन की करते रहे और मैं विवश हो देखती रही। किससे क्या कहती? मेरी सुनने वाला कोई था ही नहीं। फिर अचानक ही शादी कर दी गई। शादी कितने दिन चली सब जानते ही हो। और उस दिन जब शादी के नाम पर अपने साथ हुए अन्याय का जवाब दे रही थी तो तुम्हें देख कर लगा कि भगवान मैंने क्या पाप किया था जो मुझे यह सजा दी। कुछ सालों बाद जब तुम आते तो मन में आता कि सब बात तुम से कहूं। मगर हिम्मत ना जुटा पाई। फिर तुम्हारे चच्चा ने घर में जो आफत मचाई उससे तुम लोगों ने आना ही छोड़ दिया। जल्दी ही मैं निराश हो गई। और फिर परिस्थितियों ने मुझे यहां पहुंचा दिया। और अब इस दुनिया से निकलना जीते जी संभव ही नही है। कल अचानक ही तुम ऐसे सामने आ गए.. कुछ देर तो हम समझ ही नहीं पाए कि क्या बोलें? क्या कहें? अब बात तो यह भी है कि कुछ सुनने-कहने के लिए बचा ही क्या है? तुम खेत बेचने आए हो। बेच कर जाने के बाद फिर यहां कहां आओगे? मतलब की हम लोगों का यह आखिरी मिलना बतियाना है, तो मन कर रहा है कि जितना बोल-बतिया सकें, बतिया लें।' यह कह कर बिल्लो प्रश्नानुकूल सी एकटक मुझे देखने लगी। मुझे लगा कि यह बात तो सही कह रही है। खेत बेचने के बाद यहां आने का कोई कारण ही कहां बचता है। बिल्लो ने कहा 'इतनी रात बाहर टहलना ठीक नहीं। सिगरेट जितनी पीनी है यहीं पियो ना।' मैं जब एक दिन पहले बिल्लो से मिला था तभी से देख रहा था कि वह बराबर पान-मसाला मुंह में दबाए हुए थी। मुझसे भी कई बार पूछा था लेकिन मैंने मना कर दिया था कि मैं नहीं खाता। उसने मुझे सिगरेट के लिए कहकर फिर एक पुड़िया किनारे से फाड़कर मुंह में भर ली। फिर एक छोटी पुड़िया निकाली जिसमें सिर्फ़ तंबाकू थी उसे भी मुंह में डाल लिया। पुड़िया खोलने और उसे मुंह में डालने की स्टाइल से लग रहा था कि वह बरसों-बरस से खाती आ रही है। और अन्य करोड़ों देशवासियों की तरह वह भी अपने देश के कानून की, न्यायालय की खिल्ली उड़ाती आ रही है। न्यायालय ने तंबाकू गुटखा बंद किया तो कंपनियों ने तुरंत रास्ता निकाल लिया कि ठीक है तंबाकू गुटखा बंद। दोनों को अलग-अलग पैक कर दिया। अब खाने वाले अलग-अलग खरीद कर मुंह में एक साथ भर लेते हैं। मैंने पूछा 'बिल्लो कब से खा रही हो यह सब?' तो उसने मुस्कुराते हुए कहा 'अरे, अब याद नहीं। पहले अम्मा पान खाती रहीं, उन्हीं के पनडब्बा से कभी-कभी खाना खाने के बाद पान निकाल कर खा लिया करती थी। बस ऐसे ही पड़ गई़ पान- तंबाकू की आदत।' 'हूं... अम्मा पान खाती थीं तो पान की आदत पड़ गई। और तुम्हारे बाबू जी को मैंने हुक्का और सिगरेट पीते भी देखता था। तो कभी वहां भी तो हाथ साफ नहीं किया।' बिल्लो फिर हंस पड़ी। बोली 'अब क्या बताएं। कोई मुझसे बात तो करता नहीं था। ऊपर से सुना-सुना कर ताने अलग मारे जाते थे। ऐसे में खीझती। काम धंधा भी कुछ था नहीं तो मन एकदम बौराया रहता था। एकदम बौराई औरत सी हरकत करती। जानबूझ कर ऐसी हरकतें करती कि कोई तो मुझसे कुछ बोले। भले ही गाली दे। सबसे ज़्यादा मुझे खलता अम्मा का ना बोलना। मैं दिखा-दिखा कर अंड-बंड हरकत करती। ऐसे ही एक दिन बाबू जी ने हुक्का भरा। जलाया। कि तभी प्रधान आ गया। बाहर से आवाज़ आई तो बाबू जी बाहर गए। फिर पता नहीं क्या बात हुई कि उसी की मोटर साइकिल पर उसी के साथ कहीं चले गए। अम्मा उस समय चौका लीप रही थीं। उनकी चुप्पी ने मुझे और खिझाया। मैंने फिर अपनी खीझ उतारने, वो कुछ बोलें इसके लिए उन्हें दिखाकर हुक्के का लंबा पाइप जो बाबू जी खटिया में फंसा कर गए थे उसे निकाला और मुंह में लगाकर जोर से खींचा। पूरा मुंह तीखे कसैले धुएं से भर गया। और फिर ज़ोर से खांसी आने लगी। मुंह, नाक से धुंआ निकल रहा था। खांसते-खांसते उबकाई सी आने लगी। ऐसा लगा कि उल्टी हो जाएगी। मैं इस हालत में भी अम्मा पर नजर लगाए हुए थी कि वो कुछ बोल रही हैं कि नहीं। उन्होंने हुक्का पीते देखा कि नहीं। तब मैंने अंदर-अंदर बड़ी राहत महसूस की जब मुझे हुक्का पीते देख कर आग बाबूला होते हुए कहा "अरे हरामजादी औऊर कुछ बचा होए वहू कयि ले। अरे अब औऊर केतना नाक बोरबे। जीते जी खून पियत हऊ। देखाए-देखाए के खून जलावत हऊ" तभी मैंने फिर एक लंबा कश खींचा। फिर खांसी का दौरा। अब अम्मा आपा खो बैठीं, उनके पास ही लोटा पड़ा था वही फेंक कर मारा। वह मुझे नहीं लगा तो उनका गुस्सा और बढ़ गया। उन्हीं के पास एक मौनी पड़ी थी उसे फेंक कर मारा। इस बार भी मेरा बचना था कि अम्मा लीपना-पोतना छोड़कर उठ खड़ी हुईं। सामने उनके झाड़ू पड़ी थी वही उठाकर जमकर झड़ुवा दिया। मन भर के गाली दी, कोसा। झाड़ूओं की चोट से मुझे दर्द हो रहा था। फिर भी मैं अजीब सी राहत महसूस कर रही थी। कि अम्मा बोलीं तो। मैं तब इतना जिद में आ गई थी कि इतनी मार खा कर भी वहां से हटी नहीं। अम्मा कोसतीं हुई जा के दलान में बैठ गईं। और मैं वहीं आंसू बहाती, बैठी, खींच-खींच हुक्का पीती रही। पान-तंबाकू खाती ही थी तो हुक्का ज़्यादा चढ़ा नहीं। अब जिद और चिढ़ाने के लिए की गई यह शुरुआत आगे चल कर आदत बन गई। 'बदला-वदला तो नहीं। हमें खाली गुस्सा ये आती थी घर वालों पर कि चलो शादी जैसी भी हुई। जहां भाग्य था सब हो गया। हमें कोई शौक तो लगा नहीं था कि अपना वैवाहिक जीवन खुद अपने हाथों खत्म करती। लेकिन बात तो ये है ना कि दूध में मक्खी देखकर तो नहीं निगली जा सकती ना। हमने सोचा चलो जैसे चलेगी वैसे चला लेंगे। घर वाले तो हैं ही। मगर यहां घर पर मेरे साथ जो हुआ हुआ। जिस तरह सब का व्यवहार बदला उससे मैं खुद गुस्से से भर उठी। बल्कि कहें कि नफरत से। मैंने तो सोचा ही नहीं था कि मां-बाप ऐसा बदलेंगे। मुझे बहुत बड़ा धक्का लगा था इन लोगों के व्यवहार से। सोचा कि जिस मायके के दम पर मैंने इतना बड़ा कदम उठाया, वो लोग तो देखना ही नहीं चाह रहे। हर तरफ से दुत्कारी हुई महसूस करने लगी। मुझे लगा कि मैं पेड़ से टूट कर गिरी पत्ती की तरह बेसहारा हो गई हूं। जो राह चलते लोगों के क़दमों तले कुचल-कुचल कर खत्म हो जाएगी। जिस दिन मैंने तय किया कि मैं जमीन पर बेसहारा होकर गिरी पत्ती नहीं हूं। मां-बाप परिवार सहारा नहीं देना चाहते हैं तो ना दें। मुझे नहीं जरूरत किसी के सहारे की। मैं अपना सहारा खुद बनूंगी। जब मैं मन में यह तय कर रही थी तब मैं कई दिनों से भूखी थी। ना मैं खाना मांगती थी। ना कोई मुझसे पूछता था। भूख के मारे पानी भी नहीं पिया जाता था, उबकायी सी आने लगती। मगर खुद अपना सहारा बनने का फैसला करते ही मैं सीधे रसोई में गई। पूरा परिवार खाना खा चुका था। एक भगोने में थोड़ी सी सांवा की खिचड़ी थी वही निकाली। मटके में गुड़ था वो निकाला, खाया तब कहीं जाकर जी में जी आया। यह कहते समय बिल्लो के चेहरे पर मुझे घमंड तो वाकई नहीं दिखा। हां गर्व की चमक साफ दिख रही थी। एल. ई. डी. बल्ब की उस सफेद रोशनी में भी। बिल्लो ने एक पुराना वाला पीला बल्ब भी लगा रख था। उसका कहना था कि इसकी पीली रोशनी की आदत एकदम से छूट नहीं पा रही है। इन्हीं पीली और सफेद रोशनी में उसके गर्व को देखते हुए मैं उठा और बिल्लो के तखत के पास पहुंच कर सिगरेट की डिब्बी खोलकर उसकी ओर बढ़ा दी। ऐसा करते समय मेरे मन में एक ही भावना थी कि यह भी इन चीजों की शौकीन रही है। ऐसे लोग अकेले में भले ही इसकी तलब ना महसूस करें लेकिन सामने किसी को खाता-पीता देखकर मन उनका भी मचल उठता है। मैंने कहा 'हां इस रेंज में गांव में मुश्किल ही है। यह जौनपुर में मिली। हालांकि मैं जो पीता हूं वह वहां भी नहीं मिली।' मैंने बिल्लो की इस बात का कोई जवाब नहीं दिया कि सिगरेट पिला कर क्या जी रहा हूं। मैं पूरी तरह से उसके हाव-भाव, काम बात को गहराई तक समझने का प्रयास का रहा था कि यह मेरी वही भोली-भाली चंचल बिल्लो है या एक दबंग गंवई महिला। या इसमें वह गुण भी हैं जिनके आधार पर मैं इसे लेडी डॉन कह सकता हूं। बिल्लो की इस बात ने मुझे निश्चित कर दिया तो मैंने सीधे से कहा बिल्लो मैं यहां यह समझ के रुका कि तुम्हारा भतीजा, परिवार यहां होंगे। मगर परिस्थितिवश वो सब नहीं हैं। तुम यहां अकेले हो। ऐसे में मेरा यहां रुकना कहीं गांव में लोगों को ऊटपटांग बोलने का मौका ना दे दे। मैं यही सोच-सोच कर परेशान हूं। तुम्हें अगर कहने में हिचक हो रही हो तो बताओ। ऐसी कोई बात नहीं है। मैं चाचा के यहां चला जाऊंगा। वैसे भी वो लोग यही चाहते हैं।' मेरे इतना कहते ही बिल्लो ने दाहिने हाथ की हथेली अपने माथे पर चट से मारी और बोली। मेरी ये बात सुनते ही बिल्लो हंस पड़ी। बोली 'तुमहूं का बात करत हो। देखो पहिला जो अनुभव रहा, उससे शादी, पति नाम से ही नफरत हो गई। दूसरे घर में सबका व्यवहार ऐसा रहा कि मन में हमेशा गुस्सा भरा रहता। कभी-कभी तो मन करता कि बांका उठाऊं औऊर जो मिल जाए सब को बाल डालूं। बाद में जब काम-धाम में मन लगने लगा तो गुस्सा कम हुआ। फिर जब हाथ में पैसा आने लगा तो मन पैसा कमाने में रमता गया। इतना कि नई-नई चीज करने लगी। कोहड़ौरी से शुरू करके आचार और फिर आगे बढ़ते गए। पैसों का हिसाब, काम-धाम देख के सब कहने लगे कि ये तो एकदम बनिया हो गई है। पैसा आने लगा तो घर की सूरत बदलने लगी। तब एक बार अम्मा ने बात उठाई। वो चाहती थीं कि उसी कलमुंहे से बातचीत करके हम उसी के साथ हो लें। वो हमसे बात करने से पहले बाबू को वहां भेजने के लिए तैयार कर चुकी थीं। जाने के एक दिन पहले मुझसे ना जाने क्या सोच कर पूछ लिया। इतना सुनते ही मेरे तन-बदन में आग लग गई। कि मैं इतना बड़ा बोझ हूं कि एक बार किसी तरह उस नर्क, उस मौत के मुंह से निकल कर आई। ई मां-बाप होके फिर वहीं भेज रहे हैं। अब तो हम इतना कमा रहे हैं। घर भर की रंगत बदल दी है फिर भी हम इन सबके लिए भारू बने हैं। हमने अम्मा-बाबू दोनों को खूब खरी-खोटी सुनाई। अम्मा बोलीं 'तू जब तक रहबे तब तक घरै का नकिया झुकी रहे। अरे ज़िंदगी भर के राखै तोके। ई जऊन काम धंधा फाने हऊ ओसे अऊर सब बोलत हैयन कि सब बिटिया के कमाई खात हयेन। कब तक काने में अंगुरि डारे बैइठी रही।' उस दिन घर में फिर बवाल हुआ। हमने कहा ठीक है अब हम इस घर में रहेंगे ही नहीं। उस दिन हम कुंआ के पास खटिया डाल के सोए। सब बहुत कोशिश किए कि अंदर चल कर सोऊं। रात-विरात कुछ हो ना जाए। गांव वाले जानेंगे तो क्या कहेंगे? लेकिन हम नहीं माने, अगले दिन उसी कुंआ के पास पहला काम किए खटिया डाले भर एक मड़ई तैयार कराए। घर खाना-पानी सब बंद कर दिया। भुजवा के हिआं से लइया, चना, मकई का दाना, गुड़ बजारे से लाय के कई दिन गुजारे। फिर आनन-फानन में दिवार खड़़ी करा कर टिन शेड डलवाया। इस बीच पूरे घर ने जोर लगा लिया कि हम घर वापस चलें। लेकिन मैं शुरू से अपने जिद की पक्की ठहरी। तो टस से मस नहीं हुई।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के 15 नगरीय निकायों के लिए मतगणना शुरू हो गई है. इस बीच कई निकायों के रुझान सामने आने लगे है. भैरमगढ़ नगर पंचायत में कांग्रेस का दबदबा देखने को मिल रहा है. यहाँ कांग्रेस ने 15 वार्डो में से 12 वार्डों में कब्जा जमाया। वहीँ भाजपा सिर्फ 3 वार्डों में अपना परचम लहरा सकी. जानकारी के मुताबिक, बेमेतरा के मारो में कांग्रेस प्रत्यासी सुधा तिवारी की जीत हुई है। 53 वोटों से जीत बताई जा रही है। इधर बिरगांव में 11 नंबर वार्ड की मत पेटी खुलने से बीजेपी कार्यकर्ताओं के द्वारा हल्ला करने की भी जानकारी सामने आ रही है. वार्ड नंबर 22 में भी जोगी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मत पेटी पहले से खुलने का आरोप लगाया है. बता दें, बिरगांव में 40 वार्डो के लिए 186 प्रत्याशी मैदान में है। कुछ घंटों बाद 1393 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला भी सामने आ जायेगा। प्रदेश के बिरगांव, भिलाई, रिसाली, भिलाई चारौदा नगर निगम, खैरागढ़, बैकुंठपुर, शिवपुर चर्चा, सारंगढ़ और जामुल नगर पालिका परिषद, भैरमगढ़, भोपालपट्टनम बीजापुर, नरहरपुर कांकेर, मारो बेमेतरा, कोंटा नगर पंचायत और प्रेम नगर सूरजपुर के लिए मतगणना की जा रही है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पंद्रह नगरीय निकायों के लिए मतगणना शुरू हो गई है. इस बीच कई निकायों के रुझान सामने आने लगे है. भैरमगढ़ नगर पंचायत में कांग्रेस का दबदबा देखने को मिल रहा है. यहाँ कांग्रेस ने पंद्रह वार्डो में से बारह वार्डों में कब्जा जमाया। वहीँ भाजपा सिर्फ तीन वार्डों में अपना परचम लहरा सकी. जानकारी के मुताबिक, बेमेतरा के मारो में कांग्रेस प्रत्यासी सुधा तिवारी की जीत हुई है। तिरेपन वोटों से जीत बताई जा रही है। इधर बिरगांव में ग्यारह नंबर वार्ड की मत पेटी खुलने से बीजेपी कार्यकर्ताओं के द्वारा हल्ला करने की भी जानकारी सामने आ रही है. वार्ड नंबर बाईस में भी जोगी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मत पेटी पहले से खुलने का आरोप लगाया है. बता दें, बिरगांव में चालीस वार्डो के लिए एक सौ छियासी प्रत्याशी मैदान में है। कुछ घंटों बाद एक हज़ार तीन सौ तिरानवे उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला भी सामने आ जायेगा। प्रदेश के बिरगांव, भिलाई, रिसाली, भिलाई चारौदा नगर निगम, खैरागढ़, बैकुंठपुर, शिवपुर चर्चा, सारंगढ़ और जामुल नगर पालिका परिषद, भैरमगढ़, भोपालपट्टनम बीजापुर, नरहरपुर कांकेर, मारो बेमेतरा, कोंटा नगर पंचायत और प्रेम नगर सूरजपुर के लिए मतगणना की जा रही है।
मोबाइल और कंप्यूटर यूजर्स इन गलतियों को करने से बचेंः - कई लोग नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय ब्राउजर पर अपनी बैंकिंग जानकारी जैसे- आईडी और पासवर्ड सेव कर देते हैं। ऐसी गलती कभी न करें, क्योंकि मोबाइल या लैपटॉप हैक होने पर आप दिक्कत में पड़ सकते हैं। इसलिए हमेशा मैन्युअली ही आईडी पासवर्ड दर्ज करें, इन्हें कभी सेव न करें। - हम एक दिन में कई वेबसाइट पर अलग-अलग कामों के लिए जाते हैं, लेकिन इस दौरान कई वेबसाइट ऐसी भी होती हैं जहां लोग उसे परमिशन दे देते हैं। हो सकता है कि आपने जिस वेबसाइट को परमिशन दी है, वो कोई फेक वेबसाइट हो। ऐसे में ये वेबसाइट आपके लिए खतरा पैदा कर सकती है। इसलिए परमिशन देने से पहले ये सब बातें जान लें। - आपको इस बात का ध्यान रखना है कि मोबाइल या लैपटॉप पर व्हाट्सएप या कहीं अन्य जगहों से मिले अनजाने लिंक पर कभी क्लिक न करें। अगर आप ऐसा करते हैं तो जालसाजों द्वारा आपका डाटा चुराने के अलावा आपका बैंक खाता भी खाली किया जा सकता है। - कई लोग अपना इंटरनेट बचाने के चक्कर में पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि पब्लिक वाई-फाई के जरिए हैकर्स सबसे ज्यादा लोगों को टारगेट करते हैं। इसलिए ध्यान रखें और अपने हिसाब से ही पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करें या न करें।
मोबाइल और कंप्यूटर यूजर्स इन गलतियों को करने से बचेंः - कई लोग नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय ब्राउजर पर अपनी बैंकिंग जानकारी जैसे- आईडी और पासवर्ड सेव कर देते हैं। ऐसी गलती कभी न करें, क्योंकि मोबाइल या लैपटॉप हैक होने पर आप दिक्कत में पड़ सकते हैं। इसलिए हमेशा मैन्युअली ही आईडी पासवर्ड दर्ज करें, इन्हें कभी सेव न करें। - हम एक दिन में कई वेबसाइट पर अलग-अलग कामों के लिए जाते हैं, लेकिन इस दौरान कई वेबसाइट ऐसी भी होती हैं जहां लोग उसे परमिशन दे देते हैं। हो सकता है कि आपने जिस वेबसाइट को परमिशन दी है, वो कोई फेक वेबसाइट हो। ऐसे में ये वेबसाइट आपके लिए खतरा पैदा कर सकती है। इसलिए परमिशन देने से पहले ये सब बातें जान लें। - आपको इस बात का ध्यान रखना है कि मोबाइल या लैपटॉप पर व्हाट्सएप या कहीं अन्य जगहों से मिले अनजाने लिंक पर कभी क्लिक न करें। अगर आप ऐसा करते हैं तो जालसाजों द्वारा आपका डाटा चुराने के अलावा आपका बैंक खाता भी खाली किया जा सकता है। - कई लोग अपना इंटरनेट बचाने के चक्कर में पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि पब्लिक वाई-फाई के जरिए हैकर्स सबसे ज्यादा लोगों को टारगेट करते हैं। इसलिए ध्यान रखें और अपने हिसाब से ही पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करें या न करें।
अमरीकी अमेरिकियों के साथ हर साल अमेरिकी कैलेंडर पर अधिक छुट्टियां दिखाई देती हैं, जिनमें अफ्रीकी अमेरिकियों के लिए विशेष रुचि भी शामिल है। लेकिन आम जनता यह समझ नहीं सकती कि ऐसी छुट्टियां क्या याद करती हैं। उदाहरण के लिए, क्वानजा ले लो। अधिकांश लोगों ने कम से कम छुट्टी के बारे में सुना है लेकिन इसके उद्देश्य को समझाने के लिए कठिन दबाव डाला जाएगा। अफ्रीकी अमेरिकियों, जैसे लविंग डे और जूनटेन्थ के लिए ब्याज की अन्य छुट्टियां, बस कई अमेरिकियों के रडार पर नहीं हैं। इस सिंहावलोकन के साथ, यह छुट्टियां कैसे शुरू हुईं, साथ ही ब्लैक हिस्ट्री महीने और मार्टिन लूथर किंग डे जैसे अनुष्ठानों की उत्पत्ति भी शुरू हुईं जो आपके लिए अधिक परिचित हैं। जूनटेन्थ क्या है? संयुक्त राज्य अमेरिका में दासता कब समाप्त हुई? ऐसा लगता है कि उस सवाल का जवाब उतना स्पष्ट नहीं है जितना लगता है। राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने मुक्ति उद्घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद ज्यादातर दासों को अपनी आजादी मिली, टेक्सास के दासों को साढ़े सालों बाद अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़ा। यही वह समय था जब यूनियन सेना 1 9 जून, 1865 को गैल्वेस्टोन पहुंची और लोन स्टार स्टेट एंड में दासता का आदेश दिया। तब से, अफ्रीकी अमेरिकियों ने उस तारीख को जूनटेन्थ स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया है। जूनटेन्थ टेक्सास में आधिकारिक अवकाश अवकाश है। यह 40 राज्यों और कोलंबिया जिला द्वारा भी मान्यता प्राप्त है। जूनियरवीं वकालत करने वालों ने संघीय सरकार के लिए मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दिवस स्थापित करने के लिए वर्षों से काम किया है। अधिक " काले और गोरे के बीच अमेरिका में आज अंतरजातीय विवाह रिकॉर्ड-ब्रेकिंग गति से बढ़ रहा है। लेकिन सालों से, विभिन्न राज्यों ने ऐसे यूनियनों को अफ्रीकी अमेरिकियों और काकेशियनों के बीच होने से रोक दिया। रिचर्ड और मिल्ड्रेड लविंग नामक एक वर्जीनिया जोड़े ने अपने घर के राज्यों में किताबों पर भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों को चुनौती दी। गिरफ्तार होने के बाद और कहा कि वे वर्जीनिया में नहीं रह सकते थे क्योंकि उनके अंतरजातीय संघ-मिल्ड्रेड काले और मूल अमेरिकी थे, रिचर्ड सफेद थे-लविंग्स ने कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया। उनका मामला यूएस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने 12 जून, 1 9 67 को देश में भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों पर हमला करने का फैसला किया। आज, काले, सफेद, और अन्य 12 जून को पूरे देश में प्रेम दिवस के रूप में मनाते हैं। अधिक " कई अमेरिकियों ने कम से कम क्वानजा के बारे में सुना है। उन्होंने रात के समाचारों पर क्वानजा समारोहों को देखा होगा या दुकानों के छुट्टियों के वर्गों में क्वानजा ग्रीटिंग कार्ड्स देखा होगा। फिर भी, वे यह महसूस नहीं कर सकते कि यह सात दिवसीय लंबी छुट्टियों का जश्न मनाता है। तो, क्वानजा क्या है? यह अफ्रीकी अमेरिकियों के लिए उनकी विरासत, उनके समुदाय और अफ्रीका से उनके संबंध पर प्रतिबिंबित करने का समय दर्शाता है। तर्कसंगत रूप से, क्वानजा के बारे में सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि इस कार्यक्रम में केवल अफ्रीकी अमेरिकी भाग ले सकते हैं। लेकिन आधिकारिक क्वानजा वेबसाइट के अनुसार, सभी नस्लीय पृष्ठभूमि के व्यक्ति भाग ले सकते हैं। अधिक " ब्लैक हिस्ट्री महीना एक सांस्कृतिक अनुष्ठान है जिसके साथ लगभग सभी अमेरिकी परिचित हैं। फिर भी, कई अमेरिकियों को इस महीने के बिंदु को समझ में नहीं आता है। वास्तव में, कुछ गोरे ने दावा किया है कि ब्लैक हिस्ट्री महीना किसी भी तरह से भेदभावपूर्ण है क्योंकि यह अफ्रीकी अमेरिकियों की उपलब्धियों को याद रखने के लिए एक समय निकाल देता है। लेकिन इतिहासकार कार्टर जी। वुडसन ने छुट्टी शुरू की, जिसे पहले नेग्रो हिस्ट्री वीक के नाम से जाना जाता था क्योंकि 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में अफ्रीकी अमेरिकियों ने अमेरिकी संस्कृति और समाज को किए गए योगदानों को इतिहास पुस्तकों में अनदेखा कर दिया था। इस प्रकार, नेग्रो हिस्ट्री वीक ने राष्ट्र के लिए विषाक्त नस्लवाद के चलते देश में काले रंगों को हासिल करने के लिए एक समय चिह्नित किया। अधिक "
अमरीकी अमेरिकियों के साथ हर साल अमेरिकी कैलेंडर पर अधिक छुट्टियां दिखाई देती हैं, जिनमें अफ्रीकी अमेरिकियों के लिए विशेष रुचि भी शामिल है। लेकिन आम जनता यह समझ नहीं सकती कि ऐसी छुट्टियां क्या याद करती हैं। उदाहरण के लिए, क्वानजा ले लो। अधिकांश लोगों ने कम से कम छुट्टी के बारे में सुना है लेकिन इसके उद्देश्य को समझाने के लिए कठिन दबाव डाला जाएगा। अफ्रीकी अमेरिकियों, जैसे लविंग डे और जूनटेन्थ के लिए ब्याज की अन्य छुट्टियां, बस कई अमेरिकियों के रडार पर नहीं हैं। इस सिंहावलोकन के साथ, यह छुट्टियां कैसे शुरू हुईं, साथ ही ब्लैक हिस्ट्री महीने और मार्टिन लूथर किंग डे जैसे अनुष्ठानों की उत्पत्ति भी शुरू हुईं जो आपके लिए अधिक परिचित हैं। जूनटेन्थ क्या है? संयुक्त राज्य अमेरिका में दासता कब समाप्त हुई? ऐसा लगता है कि उस सवाल का जवाब उतना स्पष्ट नहीं है जितना लगता है। राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने मुक्ति उद्घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद ज्यादातर दासों को अपनी आजादी मिली, टेक्सास के दासों को साढ़े सालों बाद अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़ा। यही वह समय था जब यूनियन सेना एक नौ जून, एक हज़ार आठ सौ पैंसठ को गैल्वेस्टोन पहुंची और लोन स्टार स्टेट एंड में दासता का आदेश दिया। तब से, अफ्रीकी अमेरिकियों ने उस तारीख को जूनटेन्थ स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया है। जूनटेन्थ टेक्सास में आधिकारिक अवकाश अवकाश है। यह चालीस राज्यों और कोलंबिया जिला द्वारा भी मान्यता प्राप्त है। जूनियरवीं वकालत करने वालों ने संघीय सरकार के लिए मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दिवस स्थापित करने के लिए वर्षों से काम किया है। अधिक " काले और गोरे के बीच अमेरिका में आज अंतरजातीय विवाह रिकॉर्ड-ब्रेकिंग गति से बढ़ रहा है। लेकिन सालों से, विभिन्न राज्यों ने ऐसे यूनियनों को अफ्रीकी अमेरिकियों और काकेशियनों के बीच होने से रोक दिया। रिचर्ड और मिल्ड्रेड लविंग नामक एक वर्जीनिया जोड़े ने अपने घर के राज्यों में किताबों पर भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों को चुनौती दी। गिरफ्तार होने के बाद और कहा कि वे वर्जीनिया में नहीं रह सकते थे क्योंकि उनके अंतरजातीय संघ-मिल्ड्रेड काले और मूल अमेरिकी थे, रिचर्ड सफेद थे-लविंग्स ने कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया। उनका मामला यूएस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने बारह जून, एक नौ सरसठ को देश में भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों पर हमला करने का फैसला किया। आज, काले, सफेद, और अन्य बारह जून को पूरे देश में प्रेम दिवस के रूप में मनाते हैं। अधिक " कई अमेरिकियों ने कम से कम क्वानजा के बारे में सुना है। उन्होंने रात के समाचारों पर क्वानजा समारोहों को देखा होगा या दुकानों के छुट्टियों के वर्गों में क्वानजा ग्रीटिंग कार्ड्स देखा होगा। फिर भी, वे यह महसूस नहीं कर सकते कि यह सात दिवसीय लंबी छुट्टियों का जश्न मनाता है। तो, क्वानजा क्या है? यह अफ्रीकी अमेरिकियों के लिए उनकी विरासत, उनके समुदाय और अफ्रीका से उनके संबंध पर प्रतिबिंबित करने का समय दर्शाता है। तर्कसंगत रूप से, क्वानजा के बारे में सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि इस कार्यक्रम में केवल अफ्रीकी अमेरिकी भाग ले सकते हैं। लेकिन आधिकारिक क्वानजा वेबसाइट के अनुसार, सभी नस्लीय पृष्ठभूमि के व्यक्ति भाग ले सकते हैं। अधिक " ब्लैक हिस्ट्री महीना एक सांस्कृतिक अनुष्ठान है जिसके साथ लगभग सभी अमेरिकी परिचित हैं। फिर भी, कई अमेरिकियों को इस महीने के बिंदु को समझ में नहीं आता है। वास्तव में, कुछ गोरे ने दावा किया है कि ब्लैक हिस्ट्री महीना किसी भी तरह से भेदभावपूर्ण है क्योंकि यह अफ्रीकी अमेरिकियों की उपलब्धियों को याद रखने के लिए एक समय निकाल देता है। लेकिन इतिहासकार कार्टर जी। वुडसन ने छुट्टी शुरू की, जिसे पहले नेग्रो हिस्ट्री वीक के नाम से जाना जाता था क्योंकि बीस वीं शताब्दी की शुरुआत में अफ्रीकी अमेरिकियों ने अमेरिकी संस्कृति और समाज को किए गए योगदानों को इतिहास पुस्तकों में अनदेखा कर दिया था। इस प्रकार, नेग्रो हिस्ट्री वीक ने राष्ट्र के लिए विषाक्त नस्लवाद के चलते देश में काले रंगों को हासिल करने के लिए एक समय चिह्नित किया। अधिक "
Ranchi : संत थॉमस स्कूल धुर्वा में शनिवार को वार्षिक खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कंट्री क्रिकेट क्लब के सचिव अजय नाथ शाहदेव उपस्थित रहे. कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों ने कई खेलो में हिस्सा लिया. वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित किया. इस अवसर पर स्कूल के बच्चों ने खेल के महत्व को जाना. मुख्य अतिथि अजय नाथ शाहदेव ने कहां कि जीवन में खेल का महत्व बहुत है. पढ़ाई के साथ ही खेल पर भी ध्यान देना चाहिए. खेलने से शरीर और दिमाग दोनों स्वस्थ रहता है. सभी बच्चों को आगे बढ़ने की शुभकामना दी. कार्यक्रम में स्कूल के प्राचार्य वूमेन युवाचार्य सूजन ओमेन व स्कूल के विद्यार्थी व शिक्षक मुख्य रूप से उपस्थित रहे.
Ranchi : संत थॉमस स्कूल धुर्वा में शनिवार को वार्षिक खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कंट्री क्रिकेट क्लब के सचिव अजय नाथ शाहदेव उपस्थित रहे. कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों ने कई खेलो में हिस्सा लिया. वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित किया. इस अवसर पर स्कूल के बच्चों ने खेल के महत्व को जाना. मुख्य अतिथि अजय नाथ शाहदेव ने कहां कि जीवन में खेल का महत्व बहुत है. पढ़ाई के साथ ही खेल पर भी ध्यान देना चाहिए. खेलने से शरीर और दिमाग दोनों स्वस्थ रहता है. सभी बच्चों को आगे बढ़ने की शुभकामना दी. कार्यक्रम में स्कूल के प्राचार्य वूमेन युवाचार्य सूजन ओमेन व स्कूल के विद्यार्थी व शिक्षक मुख्य रूप से उपस्थित रहे.
अमरीकी सैनिक अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने बीती रात इराक़ के दो शहर फ़लूजा और रमादी में हमला करके 60 विद्रोहियों को मार डाला है. सैनिक अधिकारियों के बयान में कहा गया है कि फ़लूजा और इसके निकट एक शहर में हमला चरमपंथी अबू मुसाब ज़रक़ावी समर्थकों के ठिकाने पर ही किए गए. बयान में कहा गया है कि फ़लूजा के साथ-साथ रमादी में अमरीकी सैनिकों ने ज़रक़ावी समर्थकों के अड्डे को निशाना बनाया. फ़लूजा के मुख्य अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि वे 14 घायलों का इलाज कर रहे हैं. जिनमें ज़्यादातर बच्चे और महिलाएँ हैं. उधर देश के पश्चिमी अंबर प्रांत में हुई अलग-अलग घटनाओं में उसके तीन सैनिक मारे गए हैं. पिछले साल मार्च से इराक़ में अभी तक एक हज़ार से ज़्यादा अमरीकी सैनिक मारे गए हैं. दूसरी ओर राजधानी बग़दाद के पास से मिले एक शव के बारे में ऑस्ट्रेलिया अधिकारी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. इस व्यक्ति का शव दज़ला नदी से निकाला गया. ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं यह व्यक्ति ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा गार्ड तो नहीं था जिसे चमपंथियों ने बंधक बनाने का दावा किया था. फ़लूजा और रमादी में अपनी कार्रवाई के बारे में अमरीकी अधिकारियों ने कहा कि सेना ने उन इमारतों को निशाना बनाया जहाँ भारी मात्रा में हथियार रखे गए थे. बयान में कहा गया है कि मिसाइल के हमले में फ़लूजा के पास स्थित क़रयात शहर में तीन इमारतें नष्ट हो गईं. अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि यहाँ ज़रक़ावी समर्थक बैठकें करते थे. उधर अमरीकी और ब्रितानी दूतावास के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि कर दी है कि बग़दाद में तीन कर्मचारियों का अपहरण कर लिया गया है. अमरीकी दूतावास ने दो अमरीकी व्यक्तियों के नाम जैक हेन्सले और ईयूजिन ऑर्मस्ट्राँग बताए हैं. लेकिन अभी ब्रितानी दूतावास ने अपने नागरिक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. इराक़ में विद्रोहियों ने अभी तक 100 से ज़्यादा विदेशी नागरिकों को बंधक बनाया. इनमें से कई मार दिए गए.
अमरीकी सैनिक अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने बीती रात इराक़ के दो शहर फ़लूजा और रमादी में हमला करके साठ विद्रोहियों को मार डाला है. सैनिक अधिकारियों के बयान में कहा गया है कि फ़लूजा और इसके निकट एक शहर में हमला चरमपंथी अबू मुसाब ज़रक़ावी समर्थकों के ठिकाने पर ही किए गए. बयान में कहा गया है कि फ़लूजा के साथ-साथ रमादी में अमरीकी सैनिकों ने ज़रक़ावी समर्थकों के अड्डे को निशाना बनाया. फ़लूजा के मुख्य अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि वे चौदह घायलों का इलाज कर रहे हैं. जिनमें ज़्यादातर बच्चे और महिलाएँ हैं. उधर देश के पश्चिमी अंबर प्रांत में हुई अलग-अलग घटनाओं में उसके तीन सैनिक मारे गए हैं. पिछले साल मार्च से इराक़ में अभी तक एक हज़ार से ज़्यादा अमरीकी सैनिक मारे गए हैं. दूसरी ओर राजधानी बग़दाद के पास से मिले एक शव के बारे में ऑस्ट्रेलिया अधिकारी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. इस व्यक्ति का शव दज़ला नदी से निकाला गया. ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं यह व्यक्ति ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा गार्ड तो नहीं था जिसे चमपंथियों ने बंधक बनाने का दावा किया था. फ़लूजा और रमादी में अपनी कार्रवाई के बारे में अमरीकी अधिकारियों ने कहा कि सेना ने उन इमारतों को निशाना बनाया जहाँ भारी मात्रा में हथियार रखे गए थे. बयान में कहा गया है कि मिसाइल के हमले में फ़लूजा के पास स्थित क़रयात शहर में तीन इमारतें नष्ट हो गईं. अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि यहाँ ज़रक़ावी समर्थक बैठकें करते थे. उधर अमरीकी और ब्रितानी दूतावास के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि कर दी है कि बग़दाद में तीन कर्मचारियों का अपहरण कर लिया गया है. अमरीकी दूतावास ने दो अमरीकी व्यक्तियों के नाम जैक हेन्सले और ईयूजिन ऑर्मस्ट्राँग बताए हैं. लेकिन अभी ब्रितानी दूतावास ने अपने नागरिक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. इराक़ में विद्रोहियों ने अभी तक एक सौ से ज़्यादा विदेशी नागरिकों को बंधक बनाया. इनमें से कई मार दिए गए.
बॉल टैंपरिंग मामले में लगे एक साल के बैन के बाद वापसी करते हुए पूर्व ऑस्ट्रेलियाई उप कप्तान डेविड वार्नर ने पहले इंडियन प्रीमियर लीग और फिर विश्व कप में रनों का अंबार लगाया। हालांकि ये दिग्गज इंग्लैंड में खेली जा रही एशेज सीरीज में अब कुछ कमाल नहीं दिखा पाया है। लेकिन कोच जस्टिन लैंगर को यकीन है कि वार्नर बड़ी पारी के बेहद करीब हैं और ये पारी लॉर्ड्स टेस्ट में ही देखने को मिल सकती है। वार्नर ने पहले एशेज टेस्ट की दो पारियों में मात्र 10 रन बनाए। कहा जा सकता है कि विश्व कप और आईपीएल में लगातार बड़ी पारियां खेलने के बाद वार्नर का बल्ला थक गया लेकिन लैंगर का मानना है कि स्टार खिलाड़ी इस तरह के फेज से नहीं गुजरते हैं। वो अगर कुछ पारियों चूक जाते हैं तो इसका मतलब है कि एक बड़ी पारी आने को है। ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीमः टिम पेन (कप्तान), कैमरन बैनक्रॉफ्ट, पैट कमिंस, मार्कस हैरिस, जॉश हेजलवुड, ट्रेविस हेड, उस्मान ख्वाजा, मार्नस लाबुशाने, नाथन लियोन, मिशेल मार्श, माइकल नेसर, जेम्स पैटिनसन, पीटर सिडल, स्टीव स्मिथ, मिशेल स्टार्क, मैथ्यू वेड, डेविड वार्नर।
बॉल टैंपरिंग मामले में लगे एक साल के बैन के बाद वापसी करते हुए पूर्व ऑस्ट्रेलियाई उप कप्तान डेविड वार्नर ने पहले इंडियन प्रीमियर लीग और फिर विश्व कप में रनों का अंबार लगाया। हालांकि ये दिग्गज इंग्लैंड में खेली जा रही एशेज सीरीज में अब कुछ कमाल नहीं दिखा पाया है। लेकिन कोच जस्टिन लैंगर को यकीन है कि वार्नर बड़ी पारी के बेहद करीब हैं और ये पारी लॉर्ड्स टेस्ट में ही देखने को मिल सकती है। वार्नर ने पहले एशेज टेस्ट की दो पारियों में मात्र दस रन बनाए। कहा जा सकता है कि विश्व कप और आईपीएल में लगातार बड़ी पारियां खेलने के बाद वार्नर का बल्ला थक गया लेकिन लैंगर का मानना है कि स्टार खिलाड़ी इस तरह के फेज से नहीं गुजरते हैं। वो अगर कुछ पारियों चूक जाते हैं तो इसका मतलब है कि एक बड़ी पारी आने को है। ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीमः टिम पेन , कैमरन बैनक्रॉफ्ट, पैट कमिंस, मार्कस हैरिस, जॉश हेजलवुड, ट्रेविस हेड, उस्मान ख्वाजा, मार्नस लाबुशाने, नाथन लियोन, मिशेल मार्श, माइकल नेसर, जेम्स पैटिनसन, पीटर सिडल, स्टीव स्मिथ, मिशेल स्टार्क, मैथ्यू वेड, डेविड वार्नर।
अतुल कुमार गुप्ता, मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, समस्त प्रमुख सचिव/सचिव, उ0प्र0 शासन। समस्त मंडलायुक्त/जिलाधिकारी, उ0प्र0। आयुक्त एवं निदेशक उद्योग, उ0प्र0। औद्योगिक विकास विभाग के समस्त निगमों के प्रबंध निदेशक। सुनिश्चित कराया जाए ताकि नवीन उद्योगों की सािपना का मार्ग प्रशस्त कराया जा सके। अनुरोध है कि कृपया उपरोक्त शासनादेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। (अतुल कुमार गुप्ता) मुख्य सचिव।
अतुल कुमार गुप्ता, मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, समस्त प्रमुख सचिव/सचिव, उशून्यप्रशून्य शासन। समस्त मंडलायुक्त/जिलाधिकारी, उशून्यप्रशून्य। आयुक्त एवं निदेशक उद्योग, उशून्यप्रशून्य। औद्योगिक विकास विभाग के समस्त निगमों के प्रबंध निदेशक। सुनिश्चित कराया जाए ताकि नवीन उद्योगों की सािपना का मार्ग प्रशस्त कराया जा सके। अनुरोध है कि कृपया उपरोक्त शासनादेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव।
Akasa Air Unveils Brand logo: दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala) के समर्थन वाली एयरलाइन कंपनी अकासा एयर (Akasa Air) ने बुधवार को 'द राइजिंग ए' (The Rising A) की थीम पर अपने ब्रांड लोगो और पहचान का अनावरण किया। अकासा एयर ने एक बयान में कहा कि, 'द राइजिंग ए आकाश के तत्वों से प्रेरित है। यह उगते सूरज की गर्मी, पक्षी की सहज उड़ान और एक विमान के विंग की निर्भरता का प्रतीक है। इट्स योर स्काई (It's Your Sky) सभी भारतीयों के लिए उनकी सामाजिक-आर्थिक या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना एक समावेशी वातावरण बनाने का ब्रांड का वादा है। यह स्वामित्व और संभावनाओं की एक शक्तिशाली प्रतिज्ञा है, जो प्रत्येक यात्री के साथ उनकी यात्रा पर जाती है। ' एयरलाइन ने ब्रांड रंग, 'सनराइज ऑरेंज' और 'पैशनेट पर्पल' को चुना है, जो एयरलाइन के गर्म, युवा और सम्मानजनक स्वभाव को दर्शाता है। मालूम हो कि अकासा एयर ने हाल ही में 72 बोइंग 737 मैक्स जेट का ऑर्डर दिया है, जिसमें 737 मैक्स परिवार के दो वेरिएंट, 737-8 और उच्च क्षमता वाले 737-8-200 शामिल हैं। अगस्त में भारत के वायु सुरक्षा नियामक ने देश की एयरलाइनों को MAX जेट उड़ाने की अनुमति दी थी, ताकि उसके लगभग ढाई साल के नियामक ग्राउंडिंग को समाप्त किया जा सके। अकासा एयर के मालिक, एसएनवी एविएशन (SNV Aviation) ने पहले कहा था कि देश के नवीनतम अल्ट्रा-लो-कॉस्ट कैरियर को लॉन्च करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय से प्रारंभिक मंजूरी मिलने के बाद उसे अगले साल उड़ान शुरू होने की उम्मीद है। बोइंग एयरलाइंस ने ट्वीट कर अकासा एयर को बधाई दी है। कंपनी ने ट्वीट में लिखा कि, 'हम भारत की नवीनतम एयरलाइन के साथ अपने भविष्य को लेकर उत्साहित हैं और अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। बोइंग परिवार में आपका स्वागत है। ' Times Now Navbharat पर पढ़ें Business News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
Akasa Air Unveils Brand logo: दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला के समर्थन वाली एयरलाइन कंपनी अकासा एयर ने बुधवार को 'द राइजिंग ए' की थीम पर अपने ब्रांड लोगो और पहचान का अनावरण किया। अकासा एयर ने एक बयान में कहा कि, 'द राइजिंग ए आकाश के तत्वों से प्रेरित है। यह उगते सूरज की गर्मी, पक्षी की सहज उड़ान और एक विमान के विंग की निर्भरता का प्रतीक है। इट्स योर स्काई सभी भारतीयों के लिए उनकी सामाजिक-आर्थिक या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना एक समावेशी वातावरण बनाने का ब्रांड का वादा है। यह स्वामित्व और संभावनाओं की एक शक्तिशाली प्रतिज्ञा है, जो प्रत्येक यात्री के साथ उनकी यात्रा पर जाती है। ' एयरलाइन ने ब्रांड रंग, 'सनराइज ऑरेंज' और 'पैशनेट पर्पल' को चुना है, जो एयरलाइन के गर्म, युवा और सम्मानजनक स्वभाव को दर्शाता है। मालूम हो कि अकासा एयर ने हाल ही में बहत्तर बोइंग सात सौ सैंतीस मैक्स जेट का ऑर्डर दिया है, जिसमें सात सौ सैंतीस मैक्स परिवार के दो वेरिएंट, सात सौ सैंतीस-आठ और उच्च क्षमता वाले सातसैंतीस अगस्त दो सौ शामिल हैं। अगस्त में भारत के वायु सुरक्षा नियामक ने देश की एयरलाइनों को MAX जेट उड़ाने की अनुमति दी थी, ताकि उसके लगभग ढाई साल के नियामक ग्राउंडिंग को समाप्त किया जा सके। अकासा एयर के मालिक, एसएनवी एविएशन ने पहले कहा था कि देश के नवीनतम अल्ट्रा-लो-कॉस्ट कैरियर को लॉन्च करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय से प्रारंभिक मंजूरी मिलने के बाद उसे अगले साल उड़ान शुरू होने की उम्मीद है। बोइंग एयरलाइंस ने ट्वीट कर अकासा एयर को बधाई दी है। कंपनी ने ट्वीट में लिखा कि, 'हम भारत की नवीनतम एयरलाइन के साथ अपने भविष्य को लेकर उत्साहित हैं और अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। बोइंग परिवार में आपका स्वागत है। ' Times Now Navbharat पर पढ़ें Business News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
ALLAHABAD: बुधवार को इलाहाबाद पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी माफियाओं को धमकी भी दे गए। कहा कि दिसंबर बाद भू माफियाओं की शामत आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज हर हाल में होगा। कानून के अनुसार प्रदेश में 22 करोड़ नागरिकों को सुरक्षा की गारंटी सरकार देगी, जिसका परिणाम दिखने लगा है। पूरे प्रदेश में अपराधियों में भय व्याप्त है। इलाहाबाद के बारे में जब देखता था, सोचता था। इलाहाबाद में तमाम ऐसे माफिया उभर गए थे, जो किसी भी गरीब की जमीन को, सार्वजनिक संपत्ति को कब्जा कर लेते थे। जमीन कब्जा करने की होड़ होती थी। उन्हें पहले ही चेतावनी दे दी गई है। प्रदेश में एंटी भू माफिया टास्क फोर्स का गठन कर लिया गया है। एंटी-भू माफिया टास्क फोर्स दिसंबर से एक्टिव हो जाएगी। टास्क फोर्स का काम शुरू होगा तो 43 हजार हेक्टेयर भूमि भू माफियाओं और पेशेवर अपराधियों के कब्जे से मुक्त होगी। भू-माफियाओं और पेशेवर माफियाओं द्वारा सत्ता के संरक्षण में जितनी जमीनें कब्जा की गई है, प्रदेश सरकार दिसंबर से इन्हें अपने हाथ में लेने जा रही है।
ALLAHABAD: बुधवार को इलाहाबाद पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी माफियाओं को धमकी भी दे गए। कहा कि दिसंबर बाद भू माफियाओं की शामत आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज हर हाल में होगा। कानून के अनुसार प्रदेश में बाईस करोड़ नागरिकों को सुरक्षा की गारंटी सरकार देगी, जिसका परिणाम दिखने लगा है। पूरे प्रदेश में अपराधियों में भय व्याप्त है। इलाहाबाद के बारे में जब देखता था, सोचता था। इलाहाबाद में तमाम ऐसे माफिया उभर गए थे, जो किसी भी गरीब की जमीन को, सार्वजनिक संपत्ति को कब्जा कर लेते थे। जमीन कब्जा करने की होड़ होती थी। उन्हें पहले ही चेतावनी दे दी गई है। प्रदेश में एंटी भू माफिया टास्क फोर्स का गठन कर लिया गया है। एंटी-भू माफिया टास्क फोर्स दिसंबर से एक्टिव हो जाएगी। टास्क फोर्स का काम शुरू होगा तो तैंतालीस हजार हेक्टेयर भूमि भू माफियाओं और पेशेवर अपराधियों के कब्जे से मुक्त होगी। भू-माफियाओं और पेशेवर माफियाओं द्वारा सत्ता के संरक्षण में जितनी जमीनें कब्जा की गई है, प्रदेश सरकार दिसंबर से इन्हें अपने हाथ में लेने जा रही है।
मुंबईः गत सप्ताह आरम्भ में बीएसई व एनएसई की गति में धीमापन बना हुआ है। मुख्य कारण वर्तमान में महंगाई को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मोनिटरी पॉलिसी दरों का मूल्यांकन होना था, जिससे घरेलू व विदेशी निवेशकों की लिवाली शांत चल रही थी, लेकिन बुधवार आरबीआई की ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने के बाद अंतिम दो सत्रों में उक्त निवेेशकों की करीब 95 प्रतिशत शेयरों में भारी लिवाली को देखते हुए बीएसई व एनएसई तेजी में दहाड़ने लगे। बीएसई गत सप्ताह 32832. 94 से बढ़त लेकर अंतिम सत्र में 33250. 30 की ऊंचाई नाप गया। एनएसई भी 10121. 80 से उछलकर इसी अवधि में 10265. 65 अंक पर जा पहुंचा। इस दौरान अधिकतर विदेशी शेयर बाजार भी तेजी में देखे गये। तीन सप्ताह पूर्व से चली आ रही देश-विदेश के शेयर बाजारों की मंदी गत सप्ताह अंतिम दो सत्रों में थम गयी, जिससेे बीएसई व एनएसई में अच्छी बढ़त के साथ बाजार बंद हुए। गत सप्ताह के दूसरे व तीसरे कार्यसत्र मंगल व बुधवार को आरबीआई की दरों पर निवेशकों का फोकस बना हुआ था, जिससे इन दोनों सत्रों में शेयर बाजार टूट गये थे। वहीं विदेेशी शेयर बाजारों में भी निवेशकों की लिवाली ठण्डी होने से बाजार लुढ़के हुए थे। घरेेलू शेयर बाजारों में 90 प्रतिशत से अधिक शेयर फिसल गये थे, जो केन्द्रीय बैंक की ब्याज दरों की समीक्षा का थोक व खुदरा महंगाई के आंकड़ों में वृद्धि संकेतों के चलते आंकलन होना था, वह बुधवार को मोनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) 6 शीर्ष अधिकारियों की बैठक में आरबीआई गवर्नर द्वारा ब्याज दरें पूर्वस्तर पर ही रखने का निर्णय लिये जाने के बाद अंतिम दो सत्रों में भारतीय शेेयर बाजारों में चमक दिखाई दी। अधिक लेटेस्ट खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
मुंबईः गत सप्ताह आरम्भ में बीएसई व एनएसई की गति में धीमापन बना हुआ है। मुख्य कारण वर्तमान में महंगाई को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मोनिटरी पॉलिसी दरों का मूल्यांकन होना था, जिससे घरेलू व विदेशी निवेशकों की लिवाली शांत चल रही थी, लेकिन बुधवार आरबीआई की ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने के बाद अंतिम दो सत्रों में उक्त निवेेशकों की करीब पचानवे प्रतिशत शेयरों में भारी लिवाली को देखते हुए बीएसई व एनएसई तेजी में दहाड़ने लगे। बीएसई गत सप्ताह बत्तीस हज़ार आठ सौ बत्तीस. चौरानवे से बढ़त लेकर अंतिम सत्र में तैंतीस हज़ार दो सौ पचास. तीस की ऊंचाई नाप गया। एनएसई भी दस हज़ार एक सौ इक्कीस. अस्सी से उछलकर इसी अवधि में दस हज़ार दो सौ पैंसठ. पैंसठ अंक पर जा पहुंचा। इस दौरान अधिकतर विदेशी शेयर बाजार भी तेजी में देखे गये। तीन सप्ताह पूर्व से चली आ रही देश-विदेश के शेयर बाजारों की मंदी गत सप्ताह अंतिम दो सत्रों में थम गयी, जिससेे बीएसई व एनएसई में अच्छी बढ़त के साथ बाजार बंद हुए। गत सप्ताह के दूसरे व तीसरे कार्यसत्र मंगल व बुधवार को आरबीआई की दरों पर निवेशकों का फोकस बना हुआ था, जिससे इन दोनों सत्रों में शेयर बाजार टूट गये थे। वहीं विदेेशी शेयर बाजारों में भी निवेशकों की लिवाली ठण्डी होने से बाजार लुढ़के हुए थे। घरेेलू शेयर बाजारों में नब्बे प्रतिशत से अधिक शेयर फिसल गये थे, जो केन्द्रीय बैंक की ब्याज दरों की समीक्षा का थोक व खुदरा महंगाई के आंकड़ों में वृद्धि संकेतों के चलते आंकलन होना था, वह बुधवार को मोनिटरी पॉलिसी कमिटी छः शीर्ष अधिकारियों की बैठक में आरबीआई गवर्नर द्वारा ब्याज दरें पूर्वस्तर पर ही रखने का निर्णय लिये जाने के बाद अंतिम दो सत्रों में भारतीय शेेयर बाजारों में चमक दिखाई दी। अधिक लेटेस्ट खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
देश में लंबे चले किसान आंदोलन के बाद तीन विवादास्पद कृषि कानूनों की वापसी हुई थी। तब माना जा रहा था कि आंदोलन का पटाक्षेप हो गया है। रविवार को फिर पंजाब व हरियाणा में किसान रेल की पटरियों व टोल प्लाजों पर डटे। आरोप था कि केंद्र सरकार ने वायदा खिलाफी की है। एमएसपी को कानूनी दर्जा देने के बाबत केंद्र सरकार ने जो कमेटी बनायी है उसमें किसानों काे न्यायसंगत प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। किसान हरियाणा व पंजाब में कई रेल ट्रैकों पर धरने पर बैठे जिसके चलते बड़ी संख्या में ट्रेनें रद्द की गईं और उनके रूट बदले गये। निस्संदेह, किसानों को अपनी जायज मांगों के लिये आंदोलन करने का अधिकार है। लेकिन सवाल उठता है कि इसके लिये हजारों यात्रियों को क्यों परेशान किया जाये? लोग तमाम जरूरी कार्यों के लिये घर से निकलते हैं। कई नौकरी, उपचार व अन्य जरूरी कार्यों के लिये रेल से सफर करते हैं। लेकिन ऐसे आंदोलन से उनकी मुसीबतों में भारी इजाफा हो जाता है। ऐसे ही जम्मू जाने वाले देश के विभिन्न राज्यों के तीर्थयात्रियों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्हें मनमाना किराया वसूलने वाली निजी बसों व टैक्सी संचालकों के लालच का शिकार होना पड़ता है। इसका शिकार गंभीर रोगों का उपचार कराने जाने वाले यात्री भी होते हैं। निस्संदेह, किसी भी आंदोलनकारी को देश के व्यापक हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। पहले ही महंगाई व बेरोजगारी से जूझते लाखों लोगों की जीविका ऐसे आंदोलनों से प्रभावित होती है। वहीं आम नागरिकों को सबसे सस्ती यात्रा उपलब्ध कराने वाली भारतीय रेल की आर्थिकी पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। काश, हम जापान आदि राष्ट्रवादी देशों से सबक लेते जो देश में अपना विरोध दर्ज कराने के लिये उत्पादन बढ़ाकर अपनी सरकार को मुश्किल में डाल देते हैं। निस्संदेह, अपनी जायज मांगों को लेकर विरोध करने के अधिकार हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था देती है, लेकिन उसकी सार्थकता बनाये रखना हमारा दायित्व है। इसमें दो राय नहीं कि ऐसे मामलों में सत्ताधीशों की उदासीनता की भी बड़ी भूमिका रहती है। क्यों सरकारें समय रहते संवेदनशील ढंग से किसी वर्ग या संगठन की मांगों पर विचार नहीं करतीं? किसानों का आरोप है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाला कानून बनाने को लेकर सरकार ढुलमुल रवैया अपना रही है। उनका आरोप है कि इस बाबत केंद्र सरकार ने जो कमेटी बनायी है उसमें सरकार द्वारा अपनी मनपसंद के लोगों को स्थान दिया गया है। किसान लंबे समय से स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की मांग करते रहे हैं, लेकिन देश में किसी भी सरकार ने इसे लागू करने की दिशा में ईमानदार पहल नहीं की। मौजूदा समय में कोरोना संकट और यूक्रेन युद्ध के चलते देश में जो महंगाई बढ़ी है उसने किसान की लागत को भी बढ़ाया है। यह एक हकीकत है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान लगे सख्त लॉकडाउन के बाद जब भारतीय अर्थव्यवस्था ढलान पर थी तो केवल कृषि क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को संबल दिया। इतना ही नहीं, कोरोना संकट के दौरान जिन अस्सी करोड़ लोगों को सरकार मुफ्त अनाज देने का ढोल पीटती रही है वह भारतीय किसान की मेहनत का ही फल है। ऐसे में केंद्र सरकार को किसानों की वास्तविक समस्याओं पर उपलब्ध संसाधनों के दायरे में संवेदनशील ढंग से विचार करना चाहिए। ऐसी नौबत क्यों आती है जब अपनी मांगों को लेकर कोई संगठन या वर्ग सड़कों पर उतर आता है तब सरकारों की नींद खुलती है। इसके चलते आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही देश की अर्थव्यवस्था पर भी इन आंदोलनों का प्रतिकूल असर पड़ता है। निस्संदेह, आंदोलनकारियों को भी आंदोलन के वैकल्पिक रास्ते पर विचार करना चाहिए जिसमें वे सरकारों पर तो दबाव बनायें मगर सार्वजनिक जन-जीवन बाधित न हो। ऐसी बाधाओं का देश की अर्थव्यवस्था व नागरिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विषम वैश्विक परिस्थितियों में ऐसा करना और जरूरी हो जाता है।
देश में लंबे चले किसान आंदोलन के बाद तीन विवादास्पद कृषि कानूनों की वापसी हुई थी। तब माना जा रहा था कि आंदोलन का पटाक्षेप हो गया है। रविवार को फिर पंजाब व हरियाणा में किसान रेल की पटरियों व टोल प्लाजों पर डटे। आरोप था कि केंद्र सरकार ने वायदा खिलाफी की है। एमएसपी को कानूनी दर्जा देने के बाबत केंद्र सरकार ने जो कमेटी बनायी है उसमें किसानों काे न्यायसंगत प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। किसान हरियाणा व पंजाब में कई रेल ट्रैकों पर धरने पर बैठे जिसके चलते बड़ी संख्या में ट्रेनें रद्द की गईं और उनके रूट बदले गये। निस्संदेह, किसानों को अपनी जायज मांगों के लिये आंदोलन करने का अधिकार है। लेकिन सवाल उठता है कि इसके लिये हजारों यात्रियों को क्यों परेशान किया जाये? लोग तमाम जरूरी कार्यों के लिये घर से निकलते हैं। कई नौकरी, उपचार व अन्य जरूरी कार्यों के लिये रेल से सफर करते हैं। लेकिन ऐसे आंदोलन से उनकी मुसीबतों में भारी इजाफा हो जाता है। ऐसे ही जम्मू जाने वाले देश के विभिन्न राज्यों के तीर्थयात्रियों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्हें मनमाना किराया वसूलने वाली निजी बसों व टैक्सी संचालकों के लालच का शिकार होना पड़ता है। इसका शिकार गंभीर रोगों का उपचार कराने जाने वाले यात्री भी होते हैं। निस्संदेह, किसी भी आंदोलनकारी को देश के व्यापक हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। पहले ही महंगाई व बेरोजगारी से जूझते लाखों लोगों की जीविका ऐसे आंदोलनों से प्रभावित होती है। वहीं आम नागरिकों को सबसे सस्ती यात्रा उपलब्ध कराने वाली भारतीय रेल की आर्थिकी पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। काश, हम जापान आदि राष्ट्रवादी देशों से सबक लेते जो देश में अपना विरोध दर्ज कराने के लिये उत्पादन बढ़ाकर अपनी सरकार को मुश्किल में डाल देते हैं। निस्संदेह, अपनी जायज मांगों को लेकर विरोध करने के अधिकार हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था देती है, लेकिन उसकी सार्थकता बनाये रखना हमारा दायित्व है। इसमें दो राय नहीं कि ऐसे मामलों में सत्ताधीशों की उदासीनता की भी बड़ी भूमिका रहती है। क्यों सरकारें समय रहते संवेदनशील ढंग से किसी वर्ग या संगठन की मांगों पर विचार नहीं करतीं? किसानों का आरोप है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाला कानून बनाने को लेकर सरकार ढुलमुल रवैया अपना रही है। उनका आरोप है कि इस बाबत केंद्र सरकार ने जो कमेटी बनायी है उसमें सरकार द्वारा अपनी मनपसंद के लोगों को स्थान दिया गया है। किसान लंबे समय से स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की मांग करते रहे हैं, लेकिन देश में किसी भी सरकार ने इसे लागू करने की दिशा में ईमानदार पहल नहीं की। मौजूदा समय में कोरोना संकट और यूक्रेन युद्ध के चलते देश में जो महंगाई बढ़ी है उसने किसान की लागत को भी बढ़ाया है। यह एक हकीकत है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान लगे सख्त लॉकडाउन के बाद जब भारतीय अर्थव्यवस्था ढलान पर थी तो केवल कृषि क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को संबल दिया। इतना ही नहीं, कोरोना संकट के दौरान जिन अस्सी करोड़ लोगों को सरकार मुफ्त अनाज देने का ढोल पीटती रही है वह भारतीय किसान की मेहनत का ही फल है। ऐसे में केंद्र सरकार को किसानों की वास्तविक समस्याओं पर उपलब्ध संसाधनों के दायरे में संवेदनशील ढंग से विचार करना चाहिए। ऐसी नौबत क्यों आती है जब अपनी मांगों को लेकर कोई संगठन या वर्ग सड़कों पर उतर आता है तब सरकारों की नींद खुलती है। इसके चलते आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही देश की अर्थव्यवस्था पर भी इन आंदोलनों का प्रतिकूल असर पड़ता है। निस्संदेह, आंदोलनकारियों को भी आंदोलन के वैकल्पिक रास्ते पर विचार करना चाहिए जिसमें वे सरकारों पर तो दबाव बनायें मगर सार्वजनिक जन-जीवन बाधित न हो। ऐसी बाधाओं का देश की अर्थव्यवस्था व नागरिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विषम वैश्विक परिस्थितियों में ऐसा करना और जरूरी हो जाता है।
पर खूब ध्यान रखना चाहिये क्योंकि उसका घाव टेढा होता है और छाती की बरावर में दिल यानी हृदय उपस्थित है उसका ध्यान भी अवश्य रखना चाहिये और बाजी गोली कपडे से लिपटी हुई होती हैं तो वह गोली निकल जाती है और कपडा रहजाता है और जिस ओर को गोली निकल जाती है उस ओर का घाव चौडा हो जाता है उचित है कि धावको चोरकर वा पकाकर पहिले कपडे को निकाल लेवे और कपडे रहजाने की यह पहिचान है कि घावमे से पतली और स्याह पीव निकला करती है पहिले घावको शुद्ध करले क्योकि जब घाव शुद्ध हो जायगा और जला हुआ मांस निकल जाता है तो घाव शीघ्र अच्छा हो जाता है और धीरज से उसकी चिकित्सा कर घबराहट को काममें न लावै ॥ - किसीकी छाती से पेहूतक गोली लगी हो तो उसकी भी चिकित्सा इसी प्रकार से करनी चाहिये जैसी कि ऊपर वर्णन कीगई है । किसीके अंडकोषो में वा जंघासे पिंडली तक कहीं गोली लगी हो तो चिकित्सा के समय देखे कि गोली निकल गई वा नहीं, निकलगई होतो उत्तम है और जो रहगई होती गोली को निकालकर घावको देखे कि हड्डी तो नही टूटी यदि हड्डी टूटगई हो तो छोटे टुकडोंको जमाढे और उसपर विलायती रसौत मलदे और स्टिकिन एक अंग्रेजी दवा है उसका फाया लगादेवे और खूध कसकर बांधे और तीनदिन के पीछे खोककर देखे कि हड्डी जमी वा नही जो जमगई होती उस्को भी निकालडाले अथवा समय पर जैसी स मति हो बैसा करै और देखता रहे कि घावमें सफेदी और उसके आसपास स्याही तो नहीं हुई और घावमें से दुर्गंधि तौ नहीं आती और पीवतो नहीं निकलता क्योंकि यह लक्षण बहुत बुरे होते हैं । और गोली के हरएक घाव वह दवाई लगाबे जो सिरके घाबमे वर्णन की है अथवा उस दवाईको लगावे जिस्में अंडेकी स फेदी है उस दवाईमें रुईको भिगोकर घावपर रखना चाहिये और सब शरीरमें किसी मुकामपर गोली लगीहो उन सब गहरे घावोंका इलाज इन्हीं औषधियों से होता है ।। कितीके बिषकी बुझी तलचार, तीर, वरछा, कटार, फरसा, चक्र. आदिशख लगेहों तो उस्की यह परीक्षा है किघाव तो ऊपर दुक्ता जाता है और मांस गलता जाता है और दुर्गंध आती है और प्रतिदिन घावका रंग बुरा होता जाता है और वहांका मांस तथा रुधिर स्याह पडजाता है वस उचित है कि पहिले सघ स्याह मांसको काट डाले जो रुधिर जारी होजाय तो रुधिर बंद करनेवाली दवाई करे और दूसरे दिन गेरू नमक फिटकरी गुनगुनी करके बांधे और यह मरहम लगावे । मरहमकी विधि । पहिले गौका घी आधपाव लेकर गरम करे फिर उस्में एक तोला मौम डालकर पिघलावै पीछे क्वेला १ तोले रालसफेद १ तोले रतनजोत १ तोले इन तीनोंको भी पीसकर उसमें मिलादे फिर थोडासा औटाचे फिर ठंडा करके एक फाया घाव के अनुसार बनाकर उसपर इस मरहमको लगाकर घावपर रक्खे और जो कोई है कि यह जहरवाद है तो उत्तर देवेकि यह सत्य है परंतु उस्मे मैला मैरा पानी निकलता है जो लाली लिये हुए है जिस्को कचलोहू कहते हैं और जहरबादका घाव, शीघ्र बढ़ना है और यह घाव देरमे बढता है और जहरवाद शीघ्र गलता है और यह देरमें जहरबाद के घावमे मनुष्य शीघ्र मरजाता है और इस्में देरमे मरता है और जहरवाद के रोगी को किसी समय कल नहीं पडती और ऐसे घायलको जितनी पीडा होती है उससे न्यूनाधिक नहीं हो सक्ती ॥ उचितहै कि चिकित्सा बुद्धिमानीसे करे और जो सूखजाने के पीछे कोई किर्च हड्डीकी फिर दीखपडे तो फिर तेजाव लगाबै कि घाव चौडा होजाबै तब हड्डीको निकाल डाले ॥ तेजाब की विधि । लहसन का रस. कागजी नीबूका रस चार चार तोले सुहागा चौकिया एक तोला इन दोनोंको महीन पीसकर प हले दोनों अकौंमे मिलाकर चारदिवस पर्यंत धूपमे रक्खे और एक बूंद घाव पर लगाने । फिर किसी मरहम का फाया रक्खै । अथ डाढ टूटने का यत्न । जानना चाहिये कि टूटी हड्डियों के बारह भेदहें सो यथा क्रम लिखते हैं तो ग्रंथ बहुत वढजाता है और कुछ मतलब हासिल नहीं होता है इस वास्ते बहुतसा बखेडा नहीं लिखा केवल जो जो मतलन की बात है सोई लिखते हैं । अथडाढ टूटने की पहिचान । अंगशिथिल होजाय और उसजगह हाथलगानान सहाय और वहां शरीर फडके और शरीरमे पीडा और शूल होय गत दिन कभीभी चैन नही पढे ये लक्षण हॉय तब जानिये कि इस मनुष्य की किसी प्रकारसे डाढटी है ।। जिस मनुष्य की अग्नि मंद होजाय औरकुपथ्य किया करै वायुका शरीर होय और जिस्मे ज्वर अतीसार दिकभी होय ऐसे लक्षणों बाला रोगी कट से बचता है । और जिस मनुष्य का मस्तक फटगया हो कमर टूटगई होय और संधि खुलजाय और जांच पिसजाय ललाटका चूर्णहोजाय हृदय. गुदा कनपटी मा था फटजाय जिसरोगीके ये लक्षण होय वह असाध्य है, और डाढको अच्छे प्रकार वाधे. पीछे कडाबांधे और वह बुरी तरह बंधजाय और उस्मे चोट आजाय मैथुनादिक करतारहे तो उस रोगीका टूटाहाडमी असाध्य होजाताहै ॥ अवशरीर के स्थान २ के हाडों में चोट लगीहो उनके लक्षण कंठ ताळू, कनपटी, कंधा सिरपैर कपाल, नाक, आंख, इन स्थानोमें किसी तरह की चोट लगजायेतो. उस जगहके हाडनवजायऔर पहुंचा, पीठ आदि के सीधे हाड़ हैं सोटेढे होजांय, कपालको आदिले जो गोलहाड है सो फटिजाय और दांत वगैरह जो छोटे हाड़, हे सो टूटजाय इन सब हाडो का यत्न लिखताहूं जो किसी मनुष्यके चोट आदिकिसी तरहसे हाड और संघ टूट जायेतौ चतुर जर्राह को चाहिये कि उसी समय उस जगह चोटपर शीतल पानीडालै पीछे उसके औपधियों का सेककरे ।। अथवा पट्टी बाधे और उस जगह जो लेप करे सो शीतल इलाज करे और बुद्धिमान जर्राहको चाहिये कि उस मुकाम पर जो पट्टी बांधे तो ढीली न बाघे और बहुत कडीभी न बाघे अच्छी तरह साधारण बांधे क्योंकि जो पहो टोली रंधेगी तो हाड जमेगा नहीं और बहुत कडा बांधने से शरीरकी खाळ मे सूजन होजावेगी और पीडा होगी और चमड़ी प्रकजायगी इसी कारण पट्टी स धारण बाधनी अच्छी होती है बस जिस म नुष्यके चोट लगी हो उसके यह लेप लगावै ॥ ( ७२ ) लेप की विधि । मेदा लकड़ी. आंवले आंवाहलदी. पंवार के बीज साबुन, पुरानी ईंट ये सब बरावर लेके महीन पीसकर और इसमें थोड़ा काले तिलोका तेल मिलाकर आगपर रखकर गरम गरम लेप करे अथवा - मुगास गेरु. खतमी के बीज उरद एलुआ. ये सब दवा एक एक तोले लेकर और हल्दी छः माशे सोया छः माशे. लोवान छः माशे. इन सबको पीसकर लेप करे ॥ २ ॥ अथवा - गेरू. ६ माशे झाऊ के पत्ता नौ माशे. गुलाब के पत्ता नौ माशे बेरके पत्तौ माशे इनको महीन पीसकर लेप करने से लाठी आदि की चोट गिरपढने की चोट और पत्थर आदि से कुचल जाने की चोट को आराम करता है ॥ ३ ॥ अथवा - हल्दी. हरीमकोय के पत्ते. गेरू. ये तीनों दवा एक २ तोले. खिली सरसों दो तोले इनको महीन पीसकर लेप करने स सब प्रकार की सूजन को दूर करता है ॥ ४ ॥ अथवा - गेरु. कालेतिल आंवाहल्दी हालों के बीज ये सब बरावर लेकर थोडी अलसी का तेल मिलाके लेप करने से सब प्रकार की चोट अच्छी होती है । अथवा - मटर का चुन चना का चून छे डाली. अलसी के बीज ये सब द्वा नौ नौ माशे ले. लालबूग छै माशे कालीमिरच तीन माशे इन सबको पीसकर थोडे सिरके में मिलाकर लेपकरै ।। अथवा - गेरू एक तोले सुपारी एक तोले, सफेद चन्दन एक तोले, रसोत छ माशे. मुर्दासंग छ माशे. पलुआ छः माशे. इन सबको हरीमकोय के रसमें पीसकर लगावें तो सब प्रकार की घोट जाय ।। अथवा - एलआ तीन माशे खतमी के चीज छ' मारों. वनप्सा के पत्ते छः माशे. दोनों चन्दन वारह माशे. भठवास छ मागे
पर खूब ध्यान रखना चाहिये क्योंकि उसका घाव टेढा होता है और छाती की बरावर में दिल यानी हृदय उपस्थित है उसका ध्यान भी अवश्य रखना चाहिये और बाजी गोली कपडे से लिपटी हुई होती हैं तो वह गोली निकल जाती है और कपडा रहजाता है और जिस ओर को गोली निकल जाती है उस ओर का घाव चौडा हो जाता है उचित है कि धावको चोरकर वा पकाकर पहिले कपडे को निकाल लेवे और कपडे रहजाने की यह पहिचान है कि घावमे से पतली और स्याह पीव निकला करती है पहिले घावको शुद्ध करले क्योकि जब घाव शुद्ध हो जायगा और जला हुआ मांस निकल जाता है तो घाव शीघ्र अच्छा हो जाता है और धीरज से उसकी चिकित्सा कर घबराहट को काममें न लावै ॥ - किसीकी छाती से पेहूतक गोली लगी हो तो उसकी भी चिकित्सा इसी प्रकार से करनी चाहिये जैसी कि ऊपर वर्णन कीगई है । किसीके अंडकोषो में वा जंघासे पिंडली तक कहीं गोली लगी हो तो चिकित्सा के समय देखे कि गोली निकल गई वा नहीं, निकलगई होतो उत्तम है और जो रहगई होती गोली को निकालकर घावको देखे कि हड्डी तो नही टूटी यदि हड्डी टूटगई हो तो छोटे टुकडोंको जमाढे और उसपर विलायती रसौत मलदे और स्टिकिन एक अंग्रेजी दवा है उसका फाया लगादेवे और खूध कसकर बांधे और तीनदिन के पीछे खोककर देखे कि हड्डी जमी वा नही जो जमगई होती उस्को भी निकालडाले अथवा समय पर जैसी स मति हो बैसा करै और देखता रहे कि घावमें सफेदी और उसके आसपास स्याही तो नहीं हुई और घावमें से दुर्गंधि तौ नहीं आती और पीवतो नहीं निकलता क्योंकि यह लक्षण बहुत बुरे होते हैं । और गोली के हरएक घाव वह दवाई लगाबे जो सिरके घाबमे वर्णन की है अथवा उस दवाईको लगावे जिस्में अंडेकी स फेदी है उस दवाईमें रुईको भिगोकर घावपर रखना चाहिये और सब शरीरमें किसी मुकामपर गोली लगीहो उन सब गहरे घावोंका इलाज इन्हीं औषधियों से होता है ।। कितीके बिषकी बुझी तलचार, तीर, वरछा, कटार, फरसा, चक्र. आदिशख लगेहों तो उस्की यह परीक्षा है किघाव तो ऊपर दुक्ता जाता है और मांस गलता जाता है और दुर्गंध आती है और प्रतिदिन घावका रंग बुरा होता जाता है और वहांका मांस तथा रुधिर स्याह पडजाता है वस उचित है कि पहिले सघ स्याह मांसको काट डाले जो रुधिर जारी होजाय तो रुधिर बंद करनेवाली दवाई करे और दूसरे दिन गेरू नमक फिटकरी गुनगुनी करके बांधे और यह मरहम लगावे । मरहमकी विधि । पहिले गौका घी आधपाव लेकर गरम करे फिर उस्में एक तोला मौम डालकर पिघलावै पीछे क्वेला एक तोले रालसफेद एक तोले रतनजोत एक तोले इन तीनोंको भी पीसकर उसमें मिलादे फिर थोडासा औटाचे फिर ठंडा करके एक फाया घाव के अनुसार बनाकर उसपर इस मरहमको लगाकर घावपर रक्खे और जो कोई है कि यह जहरवाद है तो उत्तर देवेकि यह सत्य है परंतु उस्मे मैला मैरा पानी निकलता है जो लाली लिये हुए है जिस्को कचलोहू कहते हैं और जहरबादका घाव, शीघ्र बढ़ना है और यह घाव देरमे बढता है और जहरवाद शीघ्र गलता है और यह देरमें जहरबाद के घावमे मनुष्य शीघ्र मरजाता है और इस्में देरमे मरता है और जहरवाद के रोगी को किसी समय कल नहीं पडती और ऐसे घायलको जितनी पीडा होती है उससे न्यूनाधिक नहीं हो सक्ती ॥ उचितहै कि चिकित्सा बुद्धिमानीसे करे और जो सूखजाने के पीछे कोई किर्च हड्डीकी फिर दीखपडे तो फिर तेजाव लगाबै कि घाव चौडा होजाबै तब हड्डीको निकाल डाले ॥ तेजाब की विधि । लहसन का रस. कागजी नीबूका रस चार चार तोले सुहागा चौकिया एक तोला इन दोनोंको महीन पीसकर प हले दोनों अकौंमे मिलाकर चारदिवस पर्यंत धूपमे रक्खे और एक बूंद घाव पर लगाने । फिर किसी मरहम का फाया रक्खै । अथ डाढ टूटने का यत्न । जानना चाहिये कि टूटी हड्डियों के बारह भेदहें सो यथा क्रम लिखते हैं तो ग्रंथ बहुत वढजाता है और कुछ मतलब हासिल नहीं होता है इस वास्ते बहुतसा बखेडा नहीं लिखा केवल जो जो मतलन की बात है सोई लिखते हैं । अथडाढ टूटने की पहिचान । अंगशिथिल होजाय और उसजगह हाथलगानान सहाय और वहां शरीर फडके और शरीरमे पीडा और शूल होय गत दिन कभीभी चैन नही पढे ये लक्षण हॉय तब जानिये कि इस मनुष्य की किसी प्रकारसे डाढटी है ।। जिस मनुष्य की अग्नि मंद होजाय औरकुपथ्य किया करै वायुका शरीर होय और जिस्मे ज्वर अतीसार दिकभी होय ऐसे लक्षणों बाला रोगी कट से बचता है । और जिस मनुष्य का मस्तक फटगया हो कमर टूटगई होय और संधि खुलजाय और जांच पिसजाय ललाटका चूर्णहोजाय हृदय. गुदा कनपटी मा था फटजाय जिसरोगीके ये लक्षण होय वह असाध्य है, और डाढको अच्छे प्रकार वाधे. पीछे कडाबांधे और वह बुरी तरह बंधजाय और उस्मे चोट आजाय मैथुनादिक करतारहे तो उस रोगीका टूटाहाडमी असाध्य होजाताहै ॥ अवशरीर के स्थान दो के हाडों में चोट लगीहो उनके लक्षण कंठ ताळू, कनपटी, कंधा सिरपैर कपाल, नाक, आंख, इन स्थानोमें किसी तरह की चोट लगजायेतो. उस जगहके हाडनवजायऔर पहुंचा, पीठ आदि के सीधे हाड़ हैं सोटेढे होजांय, कपालको आदिले जो गोलहाड है सो फटिजाय और दांत वगैरह जो छोटे हाड़, हे सो टूटजाय इन सब हाडो का यत्न लिखताहूं जो किसी मनुष्यके चोट आदिकिसी तरहसे हाड और संघ टूट जायेतौ चतुर जर्राह को चाहिये कि उसी समय उस जगह चोटपर शीतल पानीडालै पीछे उसके औपधियों का सेककरे ।। अथवा पट्टी बाधे और उस जगह जो लेप करे सो शीतल इलाज करे और बुद्धिमान जर्राहको चाहिये कि उस मुकाम पर जो पट्टी बांधे तो ढीली न बाघे और बहुत कडीभी न बाघे अच्छी तरह साधारण बांधे क्योंकि जो पहो टोली रंधेगी तो हाड जमेगा नहीं और बहुत कडा बांधने से शरीरकी खाळ मे सूजन होजावेगी और पीडा होगी और चमड़ी प्रकजायगी इसी कारण पट्टी स धारण बाधनी अच्छी होती है बस जिस म नुष्यके चोट लगी हो उसके यह लेप लगावै ॥ लेप की विधि । मेदा लकड़ी. आंवले आंवाहलदी. पंवार के बीज साबुन, पुरानी ईंट ये सब बरावर लेके महीन पीसकर और इसमें थोड़ा काले तिलोका तेल मिलाकर आगपर रखकर गरम गरम लेप करे अथवा - मुगास गेरु. खतमी के बीज उरद एलुआ. ये सब दवा एक एक तोले लेकर और हल्दी छः माशे सोया छः माशे. लोवान छः माशे. इन सबको पीसकर लेप करे ॥ दो ॥ अथवा - गेरू. छः माशे झाऊ के पत्ता नौ माशे. गुलाब के पत्ता नौ माशे बेरके पत्तौ माशे इनको महीन पीसकर लेप करने से लाठी आदि की चोट गिरपढने की चोट और पत्थर आदि से कुचल जाने की चोट को आराम करता है ॥ तीन ॥ अथवा - हल्दी. हरीमकोय के पत्ते. गेरू. ये तीनों दवा एक दो तोले. खिली सरसों दो तोले इनको महीन पीसकर लेप करने स सब प्रकार की सूजन को दूर करता है ॥ चार ॥ अथवा - गेरु. कालेतिल आंवाहल्दी हालों के बीज ये सब बरावर लेकर थोडी अलसी का तेल मिलाके लेप करने से सब प्रकार की चोट अच्छी होती है । अथवा - मटर का चुन चना का चून छे डाली. अलसी के बीज ये सब द्वा नौ नौ माशे ले. लालबूग छै माशे कालीमिरच तीन माशे इन सबको पीसकर थोडे सिरके में मिलाकर लेपकरै ।। अथवा - गेरू एक तोले सुपारी एक तोले, सफेद चन्दन एक तोले, रसोत छ माशे. मुर्दासंग छ माशे. पलुआ छः माशे. इन सबको हरीमकोय के रसमें पीसकर लगावें तो सब प्रकार की घोट जाय ।। अथवा - एलआ तीन माशे खतमी के चीज छ' मारों. वनप्सा के पत्ते छः माशे. दोनों चन्दन वारह माशे. भठवास छ मागे
नई दिल्लीः आईपीएल ऑक्शन में मुकेश कुमार पर पैसे की बरसात हुई है. 20 लाख के बेस प्राइस में नीलामी में शामिल मुकेश कुमार को उनकी बेस प्राइस से 27.5 टाइम्स ज्यादा की राशि मिली. मुकेश कुमार को दिल्ली कैपिटल्स ने 5.50 करोड़ रुपए में खरीदा. मुकेश कुमार ने काफी संघर्ष के बाद आज यह मुकाम हासिल किया था. मुकेश कुमार को खरीदने के लिए चेन्नई सुपरकिंग्स, दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला, मगर आखिरकार बाजी दिल्ली कैपिटल्स के हाथ लगी. दिल्ली ने 5.50 करोड़ खर्च कर इस खिलाड़ी को अपने नाम किया. मुकेश कुमार मूल रुप से बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं. क्रिकेट के लिए उन्हें अपने घर को छोड़कर कोलकाता जाना पड़ा. उनके पिता कोलकाता में ही ऑटो चलाते थे. हालांकि विपरित परिस्थितियों के बावजूद भी इस खिलाड़ी ने क्रिकेट को लेकर अपना सपना नहीं छोड़ा और उन्हें 20 साल की उम्र में कामयाबी मिली, जब वह केट को प्रोफेशनल तरीके से खेलने गए. इससे पहले वह रोजाना की आमदनी के लिए क्लब क्रिकेट खेलते थे. 2014 में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB)के ट्रायल में पहली बार उन्हें पहली बार नोटिस किया गया और फिर यह क्रिकेटर छा गया. बंगाल के लिए रणजी खेलने वाले इस खिलाड़ी को हाल ही में बांग्लादेश में भारत ए के साथ भेजा गया था, जहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने एक पारी में छह विकेट हासिल किए. इनके पिता की साल 2019 में ब्रेन स्टोक्स से मौत हो गई थी. मुकेश कुमार ने अब तक 33 फर्स्ट क्लास, 24 लिस्ट ए और 23 टी-20 मैच खेले हैं. उनके नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 123, लिस्ट ए में 26 और टी-20 में 25 विकेट लिए हैं.
नई दिल्लीः आईपीएल ऑक्शन में मुकेश कुमार पर पैसे की बरसात हुई है. बीस लाख के बेस प्राइस में नीलामी में शामिल मुकेश कुमार को उनकी बेस प्राइस से सत्ताईस.पाँच टाइम्स ज्यादा की राशि मिली. मुकेश कुमार को दिल्ली कैपिटल्स ने पाँच.पचास करोड़ रुपए में खरीदा. मुकेश कुमार ने काफी संघर्ष के बाद आज यह मुकाम हासिल किया था. मुकेश कुमार को खरीदने के लिए चेन्नई सुपरकिंग्स, दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला, मगर आखिरकार बाजी दिल्ली कैपिटल्स के हाथ लगी. दिल्ली ने पाँच.पचास करोड़ खर्च कर इस खिलाड़ी को अपने नाम किया. मुकेश कुमार मूल रुप से बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं. क्रिकेट के लिए उन्हें अपने घर को छोड़कर कोलकाता जाना पड़ा. उनके पिता कोलकाता में ही ऑटो चलाते थे. हालांकि विपरित परिस्थितियों के बावजूद भी इस खिलाड़ी ने क्रिकेट को लेकर अपना सपना नहीं छोड़ा और उन्हें बीस साल की उम्र में कामयाबी मिली, जब वह केट को प्रोफेशनल तरीके से खेलने गए. इससे पहले वह रोजाना की आमदनी के लिए क्लब क्रिकेट खेलते थे. दो हज़ार चौदह में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के ट्रायल में पहली बार उन्हें पहली बार नोटिस किया गया और फिर यह क्रिकेटर छा गया. बंगाल के लिए रणजी खेलने वाले इस खिलाड़ी को हाल ही में बांग्लादेश में भारत ए के साथ भेजा गया था, जहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने एक पारी में छह विकेट हासिल किए. इनके पिता की साल दो हज़ार उन्नीस में ब्रेन स्टोक्स से मौत हो गई थी. मुकेश कुमार ने अब तक तैंतीस फर्स्ट क्लास, चौबीस लिस्ट ए और तेईस टी-बीस मैच खेले हैं. उनके नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एक सौ तेईस, लिस्ट ए में छब्बीस और टी-बीस में पच्चीस विकेट लिए हैं.
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच 3 मैचों की रोमांचक T20I श्रृंखला का आखिरी और निर्णायक मुकाबला 1 फरवरी बुधवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया. जिसमें टीम इंडिया ने 168 रनों की बड़ी जीत दर्ज की है. इस जीत के साथ भारत 2-1 से यह श्रृंखला भी अपने नाम करने में सफल रहा. वहीं इस जीत में पहले तो शुभमन गिल के शतक के बदौलत स्कोरबोर्ड पर 235 रनों का विशाल लक्ष्य लगाने में सक्षम रही. उसके बाद दूसरी पारी में भारतीय गेंदबाज़ी का दबदबा रहा. जिसमें सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने अविश्वसनीय फील्डिंग कर अहम भूमिका निभाई. ऐसे में अब इस शानदार जीत के बाद फैंस सोशल मीडिया पर हार्दिक की गेंदबाज़ी और कप्तानी के साथ-साथ सूर्य की फील्डिंग की भी प्रशंसा कर रहे हैं. भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक मध्य क्रम के बल्लेबाज़ सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) इस समय अपनी तूफानी बल्लेबाज़ी के चलते नहीं बल्कि अपनी गज़ब की फील्डिंग के चलते चर्चा में बने हुए हैं. सूर्य ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ तीसरे T20I में अविश्वसनीय फील्डिंग की है. उन्होंने एक नहीं दो नहीं बल्कि 3 ऐसे कैच लपके हैं. जिसको देख कर हर कोई दंग रह गया. सूर्य (Suryakumar Yadav) ने पहले दो कैच स्लिप्स में पकड़े और फिर 1 कैच बाउंड्री पर पकड़ा. जिसकी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है. ऐसे में फैंस उनकी फील्डिंग की जमकर सरहाना कर रहे हैं. इसके अलावा दूसरी पारी में भारत के कप्तान हार्दिक पंड्या का प्रदर्शन भी सांतवे आसमान पर रहा. उन्होंने 4 बल्लेबाजों को आउट किया जिसके चलते कीवी टीम को महज़ 66 रनों पर ही समेट दिया और 168 रनों से कीवी टीम को करारी शिकस्त दी. जिसके बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने हार्दिक को नियमित कप्तान बनाने की मांग शुरू कर दी है. यहां देखें फैंस की प्रतिक्रियाः Quote of the day: Subah surya namaskar ka asan! by HUGE 168 RUNS! Bravoooo! 🔥🙌🙏 ENTIRE BOWLING DEPT! India win by 168 runs and clinch the series 2-1! IND 234/4 (20) India bowling line up dominated the kiwis batting today spectacular win from the world's no. 1 team....... What a catch by Surya!
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच तीन मैचों की रोमांचक TबीसI श्रृंखला का आखिरी और निर्णायक मुकाबला एक फरवरी बुधवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया. जिसमें टीम इंडिया ने एक सौ अड़सठ रनों की बड़ी जीत दर्ज की है. इस जीत के साथ भारत दो-एक से यह श्रृंखला भी अपने नाम करने में सफल रहा. वहीं इस जीत में पहले तो शुभमन गिल के शतक के बदौलत स्कोरबोर्ड पर दो सौ पैंतीस रनों का विशाल लक्ष्य लगाने में सक्षम रही. उसके बाद दूसरी पारी में भारतीय गेंदबाज़ी का दबदबा रहा. जिसमें सूर्यकुमार यादव ने अविश्वसनीय फील्डिंग कर अहम भूमिका निभाई. ऐसे में अब इस शानदार जीत के बाद फैंस सोशल मीडिया पर हार्दिक की गेंदबाज़ी और कप्तानी के साथ-साथ सूर्य की फील्डिंग की भी प्रशंसा कर रहे हैं. भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक मध्य क्रम के बल्लेबाज़ सूर्यकुमार यादव इस समय अपनी तूफानी बल्लेबाज़ी के चलते नहीं बल्कि अपनी गज़ब की फील्डिंग के चलते चर्चा में बने हुए हैं. सूर्य ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ तीसरे TबीसI में अविश्वसनीय फील्डिंग की है. उन्होंने एक नहीं दो नहीं बल्कि तीन ऐसे कैच लपके हैं. जिसको देख कर हर कोई दंग रह गया. सूर्य ने पहले दो कैच स्लिप्स में पकड़े और फिर एक कैच बाउंड्री पर पकड़ा. जिसकी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है. ऐसे में फैंस उनकी फील्डिंग की जमकर सरहाना कर रहे हैं. इसके अलावा दूसरी पारी में भारत के कप्तान हार्दिक पंड्या का प्रदर्शन भी सांतवे आसमान पर रहा. उन्होंने चार बल्लेबाजों को आउट किया जिसके चलते कीवी टीम को महज़ छयासठ रनों पर ही समेट दिया और एक सौ अड़सठ रनों से कीवी टीम को करारी शिकस्त दी. जिसके बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने हार्दिक को नियमित कप्तान बनाने की मांग शुरू कर दी है. यहां देखें फैंस की प्रतिक्रियाः Quote of the day: Subah surya namaskar ka asan! by HUGE एक सौ अड़सठ RUNS! Bravoooo! 🔥🙌🙏 ENTIRE BOWLING DEPT! India win by एक सौ अड़सठ runs and clinch the series दो-एक! IND दो सौ चौंतीस/चार India bowling line up dominated the kiwis batting today spectacular win from the world's no. एक team....... What a catch by Surya!
नामफालोंग के अधिकारियों ने बताया कि अभी तक आग में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। हालांकि, आग से ३० से अधिक दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान जलकर खाक हो गए हैं। इन दुकानों में चीन, जापान और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों से लाया गया विदेशी सामान भरा पड़ा था। आग से भारी नुकसान होने की आशंका है। हालांकि, अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
नामफालोंग के अधिकारियों ने बताया कि अभी तक आग में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। हालांकि, आग से तीस से अधिक दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान जलकर खाक हो गए हैं। इन दुकानों में चीन, जापान और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों से लाया गया विदेशी सामान भरा पड़ा था। आग से भारी नुकसान होने की आशंका है। हालांकि, अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
सम्यग्दृष्टी । इनमें उपशम क्षायककी ३३ सागरसे अधिक ६६ सागरकी है। सम्यग्दृष्टोकी मर्यादा अन्तर्मुहूर्त की है तथा अधिक है, परन्तु क्षयोपशमकी सर्वसे इस पञ्चमकाल में यहां क्षायक- सम्यक्त तो होता नहीं, केवल उपशम और क्षयोपशम सम्यक्त होता है सो जब उपशमकी मर्यादा केवल ४८ मिनटके भीतरकी है तो अधिक फालतक ठहरनेवाला केवल क्षयोपशम सम्यक्त ही है। इस सम्यक्त के होते हुए चल, मल, अगाढ़ ऐसे तीन प्रकारके दोप लगते हैं। मलके भीतर वे ही १५ मलदोष अथवा ५ अतीचार गर्भित हैं । परन्तु चरणानुयोगकी अपेक्षासे इस श्रेणिका श्रावक इस बातका पूरा२ यत्न करता है कि कोई दोष न लग जावे । यदि चारित्रमें कोई दोप लग जावे तो उस दोषको दूर करनेके लिये प्रायश्चित्त याने दण्ड लेता रहता है तथा चारित्रको उज्वलता के लिये श्रावक सात व्यसन, पांच उदम्बर तथा मधु आदि दोपको अवश्य बचाता है ।
सम्यग्दृष्टी । इनमें उपशम क्षायककी तैंतीस सागरसे अधिक छयासठ सागरकी है। सम्यग्दृष्टोकी मर्यादा अन्तर्मुहूर्त की है तथा अधिक है, परन्तु क्षयोपशमकी सर्वसे इस पञ्चमकाल में यहां क्षायक- सम्यक्त तो होता नहीं, केवल उपशम और क्षयोपशम सम्यक्त होता है सो जब उपशमकी मर्यादा केवल अड़तालीस मिनटके भीतरकी है तो अधिक फालतक ठहरनेवाला केवल क्षयोपशम सम्यक्त ही है। इस सम्यक्त के होते हुए चल, मल, अगाढ़ ऐसे तीन प्रकारके दोप लगते हैं। मलके भीतर वे ही पंद्रह मलदोष अथवा पाँच अतीचार गर्भित हैं । परन्तु चरणानुयोगकी अपेक्षासे इस श्रेणिका श्रावक इस बातका पूरादो यत्न करता है कि कोई दोष न लग जावे । यदि चारित्रमें कोई दोप लग जावे तो उस दोषको दूर करनेके लिये प्रायश्चित्त याने दण्ड लेता रहता है तथा चारित्रको उज्वलता के लिये श्रावक सात व्यसन, पांच उदम्बर तथा मधु आदि दोपको अवश्य बचाता है ।
वाशिंगटनः अमेरिकी रक्षा सचिव जेम्स मैटिस और नौसेना संचालन प्रमुख एडमिरल जॉन रिचर्डसन को भेजे गए दो मेल्स में रिसन (जहर) के अंश पाए गए हैं. डिफेंस न्यूज ने यह जानकारी दी. मामले की जांच कर रहे संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) द्वारा मंगलवार को प्रारंभिक जांच में पाए गए जहर (रिसन) के अंश की पुष्टि के लिए दूसरी जांच किए जाने की उम्मीद है. एरंड के बीजों में पाया जाने वाला रिसन पाउडर, गोली, झाग या एसिड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसको निगल लेने से मतली, उल्टी, पेट में आतंरिक रक्तस्त्राव जैसी समस्या हो सकती है और जान भी जा सकती है. पेंटागन के प्रवक्ता कर्नल रॉबर्ट मैनिंग ने एक बयान में कहा, "सोमवार को पेंटागन फोर्स प्रोटेक्शन एजेंसी को मेल स्क्रीनिंग के दौरान एक संदिग्ध पदार्थ का पता लगा. " उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग फैसिलिटी पर पाए सभ सभी यूएसपीएस मेल वर्तमान में अलग हैं और पेंटागन के कर्मचारियों को कोई खतरा नहीं है. पेंटागन के प्रवक्ता क्रिस शेरवुड ने कहा, "संदिग्ध पदार्थ के रिसिन होने का संदेह है. "
वाशिंगटनः अमेरिकी रक्षा सचिव जेम्स मैटिस और नौसेना संचालन प्रमुख एडमिरल जॉन रिचर्डसन को भेजे गए दो मेल्स में रिसन के अंश पाए गए हैं. डिफेंस न्यूज ने यह जानकारी दी. मामले की जांच कर रहे संघीय जांच ब्यूरो द्वारा मंगलवार को प्रारंभिक जांच में पाए गए जहर के अंश की पुष्टि के लिए दूसरी जांच किए जाने की उम्मीद है. एरंड के बीजों में पाया जाने वाला रिसन पाउडर, गोली, झाग या एसिड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसको निगल लेने से मतली, उल्टी, पेट में आतंरिक रक्तस्त्राव जैसी समस्या हो सकती है और जान भी जा सकती है. पेंटागन के प्रवक्ता कर्नल रॉबर्ट मैनिंग ने एक बयान में कहा, "सोमवार को पेंटागन फोर्स प्रोटेक्शन एजेंसी को मेल स्क्रीनिंग के दौरान एक संदिग्ध पदार्थ का पता लगा. " उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग फैसिलिटी पर पाए सभ सभी यूएसपीएस मेल वर्तमान में अलग हैं और पेंटागन के कर्मचारियों को कोई खतरा नहीं है. पेंटागन के प्रवक्ता क्रिस शेरवुड ने कहा, "संदिग्ध पदार्थ के रिसिन होने का संदेह है. "
मुंबई - आज की पीढ़ी को सेल्फी लेने का बड़ा शौक है। किसी भी महोत्सव या सेलेब्रेशन में लोग सेल्फी निकालते ही है। लेकिन अगर आप बार बार सेल्फी लेते है तो सावधान हो जाईये। मनौचिकित्सकों के अनुसार ये एक तरह की बीमारी है। सेल्फी आपको सिर्फ मानसिक विकृति बनाती है। आप एक ऐसी दुनियां में जाते है जहां अपनेआप को ही सब कुछ मानने लगते है। जो आपके काम, करिअर के लिए बेहतर खतरनाक साबित हो सकता है। मनौचिकित्सक डॉ. आरती आनंद के अनुसार अगर सेल्फी को सामाजिक तौर पर स्वीकार किया जाए तो भी आप कम ही सेल्फी ले।
मुंबई - आज की पीढ़ी को सेल्फी लेने का बड़ा शौक है। किसी भी महोत्सव या सेलेब्रेशन में लोग सेल्फी निकालते ही है। लेकिन अगर आप बार बार सेल्फी लेते है तो सावधान हो जाईये। मनौचिकित्सकों के अनुसार ये एक तरह की बीमारी है। सेल्फी आपको सिर्फ मानसिक विकृति बनाती है। आप एक ऐसी दुनियां में जाते है जहां अपनेआप को ही सब कुछ मानने लगते है। जो आपके काम, करिअर के लिए बेहतर खतरनाक साबित हो सकता है। मनौचिकित्सक डॉ. आरती आनंद के अनुसार अगर सेल्फी को सामाजिक तौर पर स्वीकार किया जाए तो भी आप कम ही सेल्फी ले।
टेस्ट क्रिकेट के सुपरस्टार और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ (Steve Smith) ने बिग बैश लीग (Big Bash League) में अपना पहला शतक बनाया. बिग बैश लीग का 45वां मैच सिडनी सिक्सर्स (Sydney Sixers) और एडिलेड स्ट्राइकर्स (Adelaide Strikers) के बीच खेला गया. इस मैच में स्टीव स्मिथ की शानदार बल्लेबाजी देखने को मिली. स्मिथ ने अपने शानदार शतक में सात बड़े छक्के और पांच चौके लगाए, जिसमें कर्टिस पैटरसन ने प्रभावशाली सहायक भूमिका निभाई. स्मिथ के जाने के बाद, सिक्सर्स ने तेजी से तीन विकेट खो दिए लेकिन जॉर्डन सिल्क और डैन क्रिस्टियन ने स्कोर को 5/203 तक पंहुचा दिया. छक्का शामिल था. यह भी पढ़ेंः India vs New Zealand ODI records: भारत के खिलाफ न्यूजीलैंड के आंकड़े देखकर आपको कीवी टीम पर आएगा तरस! हम सभी जानते हैं स्टीव स्मिथ किस स्तर के खिलाड़ी हैं. आइए एक नजर डालते हैं उनके अब तक के क्रिकेट करियर पर. स्टीव स्मिथ ने अब तक कुल 92 टेस्ट मैच खेले हैं और करी 61 की औसत से 8647 रन बनाए हैं, जिसमें उनका 239 का सर्वोच्च स्कोर भी शामिल है. वनडे की बात करें तो स्मिथ ने अब तक कुल 139 वनडे खेले हैं, जिसमें उन्होंने 45. 11 की औसत से कुल 4917 रन बनाए हैं. स्मिथ ने वनडे में सर्वाधिक 164 रन बनाए हैं. टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट की बात करें तो स्मिथ ने अब तक 63 मुकाबले खेले हैं. इस दौरान उन्होंने 25. 20 की औसत और 125 के स्ट्राइक रेट से 1008 रन बनाए हैं.
टेस्ट क्रिकेट के सुपरस्टार और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ ने बिग बैश लीग में अपना पहला शतक बनाया. बिग बैश लीग का पैंतालीसवां मैच सिडनी सिक्सर्स और एडिलेड स्ट्राइकर्स के बीच खेला गया. इस मैच में स्टीव स्मिथ की शानदार बल्लेबाजी देखने को मिली. स्मिथ ने अपने शानदार शतक में सात बड़े छक्के और पांच चौके लगाए, जिसमें कर्टिस पैटरसन ने प्रभावशाली सहायक भूमिका निभाई. स्मिथ के जाने के बाद, सिक्सर्स ने तेजी से तीन विकेट खो दिए लेकिन जॉर्डन सिल्क और डैन क्रिस्टियन ने स्कोर को पाँच/दो सौ तीन तक पंहुचा दिया. छक्का शामिल था. यह भी पढ़ेंः India vs New Zealand ODI records: भारत के खिलाफ न्यूजीलैंड के आंकड़े देखकर आपको कीवी टीम पर आएगा तरस! हम सभी जानते हैं स्टीव स्मिथ किस स्तर के खिलाड़ी हैं. आइए एक नजर डालते हैं उनके अब तक के क्रिकेट करियर पर. स्टीव स्मिथ ने अब तक कुल बानवे टेस्ट मैच खेले हैं और करी इकसठ की औसत से आठ हज़ार छः सौ सैंतालीस रन बनाए हैं, जिसमें उनका दो सौ उनतालीस का सर्वोच्च स्कोर भी शामिल है. वनडे की बात करें तो स्मिथ ने अब तक कुल एक सौ उनतालीस वनडे खेले हैं, जिसमें उन्होंने पैंतालीस. ग्यारह की औसत से कुल चार हज़ार नौ सौ सत्रह रन बनाए हैं. स्मिथ ने वनडे में सर्वाधिक एक सौ चौंसठ रन बनाए हैं. टीबीस इंटरनेशनल क्रिकेट की बात करें तो स्मिथ ने अब तक तिरेसठ मुकाबले खेले हैं. इस दौरान उन्होंने पच्चीस. बीस की औसत और एक सौ पच्चीस के स्ट्राइक रेट से एक हज़ार आठ रन बनाए हैं.
Deepesh Bhan: सोमवार को दीपेश भान की प्रेयर मीट रखी गई, जहां उनके साथ काम करने वाले उनके को स्टार्स ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। टीवी का सबसे पसंदीदा शो 'भाबीजी घर पर हैं' की शूटिंग तीन महीने के लंबे लॉकडाउन के बाद शुरू हो गई है। शो के पहले दिन की शूटिंग की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसमें शुभांगी अत्रे, रोहिताशव गौर, आसिफ शेख और योगेश त्रिपाठी नजर आ रहे हैं। आप भी देखें ये तस्वीरें।
Deepesh Bhan: सोमवार को दीपेश भान की प्रेयर मीट रखी गई, जहां उनके साथ काम करने वाले उनके को स्टार्स ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। टीवी का सबसे पसंदीदा शो 'भाबीजी घर पर हैं' की शूटिंग तीन महीने के लंबे लॉकडाउन के बाद शुरू हो गई है। शो के पहले दिन की शूटिंग की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसमें शुभांगी अत्रे, रोहिताशव गौर, आसिफ शेख और योगेश त्रिपाठी नजर आ रहे हैं। आप भी देखें ये तस्वीरें।
लखनऊ : यूपी के कौशल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि राज्य के कौशल विकास केंद्रों पर इस बार साढ़े आठ लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। (This time eight and a half lakh youths will be trained at the skill development centers of the state. ) रिकग्नाइजेशन आफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) योजना से छह लाख, शार्ट टर्म ट्रेनिंग प्रोग्राम से एक लाख और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के जरिये करीब डेढ़ लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह बीते वर्षों के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा है। सोमवार को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये प्रशिक्षण प्रदाताओं को इसके निर्देश देते हुए कौशल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में वापस आए हैं, जिन्हें आरपीएल योजना के तहत पारंपरिक हुनर का प्रमाणीकरण और प्रशिक्षण देकर सार्टिफिकेट दिया जाए। उन्होंने कहा कि अनलाक-फोर के तहत कौशल विकास केंद्र 21 सितंबर से खुलेंगे। केंद्र सरकार द्वारा तय गाइड लाइन के अनुसार ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। (Training will be given as per the guide line fixed by the central government) कौशल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने 25 सितंबर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय के 104वें जन्मदिवस के मौके पर प्रशिक्षण केंद्रों में कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश दिए। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक कुणाल सिल्कू (Kunal Silku, Director, Skill Development Mission, Uttar Pradesh) ने कोविड-19 के संक्रमण के बचाव के साथ ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाने की जानकारी दी और पोषण माह के तहत प्रशिक्षण केंद्रों पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
लखनऊ : यूपी के कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि राज्य के कौशल विकास केंद्रों पर इस बार साढ़े आठ लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। रिकग्नाइजेशन आफ प्रायर लर्निंग योजना से छह लाख, शार्ट टर्म ट्रेनिंग प्रोग्राम से एक लाख और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के जरिये करीब डेढ़ लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह बीते वर्षों के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा है। सोमवार को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये प्रशिक्षण प्रदाताओं को इसके निर्देश देते हुए कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में वापस आए हैं, जिन्हें आरपीएल योजना के तहत पारंपरिक हुनर का प्रमाणीकरण और प्रशिक्षण देकर सार्टिफिकेट दिया जाए। उन्होंने कहा कि अनलाक-फोर के तहत कौशल विकास केंद्र इक्कीस सितंबर से खुलेंगे। केंद्र सरकार द्वारा तय गाइड लाइन के अनुसार ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने पच्चीस सितंबर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय के एक सौ चारवें जन्मदिवस के मौके पर प्रशिक्षण केंद्रों में कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश दिए। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक कुणाल सिल्कू ने कोविड-उन्नीस के संक्रमण के बचाव के साथ ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाने की जानकारी दी और पोषण माह के तहत प्रशिक्षण केंद्रों पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
महान स्वतंत्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले की बनाई गई सर्वेंट ऑफ इंडिया सोयायटी की प्रयागराज शाखा में विवाद सामने आया है। संस्था के एक सदस्य ने दो लोगों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइंस थाने में ठगी, धोखधाड़ी और साजिश रचने की एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस इस मामले की छानबीन कर रही है। इस प्रकरण में खुफिया एजेंसियों की भी नजर टिकी है। पीडी टंडन रोड, सिविल लाइंस निवासी अमरेश चंद्र त्रिपाठी सर्वेंट ऑफ इंडिया सोसायटी के प्रभारी सदस्य हैं। उन्होंने मेजा के गिरीश द्विवेदी और उनके बेटे अवेधश के खिलाफ विभिन्न धाराओं में सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। एफआईआर के मुताबिक संस्था का मुख्यालय पुणे में है। इस संस्था के तहत कामकाजी महिलाओं को आवासीय सुविधा दी जाती है। प्रयागराज स्थित इमारत में 64 लड़कियों के रहने का इंतजाम हैं। आरोप लगाया है कि संस्था के एकाउंटेंट रहे गिरिश द्विवेदी ने तैनाती के दौरान अनियमितता की। उन पर लड़कियों ने भी संगीन आरोप लगाया था। जांच में आरोप सही आने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। इसके बाद दिसंबर 2019 में उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया। आरोप यह भी है कि फर्जीवाड़ा करके पिता-पुत्र ने प्रॉपर्टी की कीमत करोड़ रुपये दिखाते हुए एक इकरारनामा तैयार कर लिया। पूरी प्रॉपर्टी हड़पने की साजिश रची गई थी। यह मामला कोर्ट में लंबित है। इस तरह से फर्जीवाड़ा का आरोप लगाते हुए मुकदमा कराया गया है।
महान स्वतंत्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले की बनाई गई सर्वेंट ऑफ इंडिया सोयायटी की प्रयागराज शाखा में विवाद सामने आया है। संस्था के एक सदस्य ने दो लोगों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइंस थाने में ठगी, धोखधाड़ी और साजिश रचने की एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस इस मामले की छानबीन कर रही है। इस प्रकरण में खुफिया एजेंसियों की भी नजर टिकी है। पीडी टंडन रोड, सिविल लाइंस निवासी अमरेश चंद्र त्रिपाठी सर्वेंट ऑफ इंडिया सोसायटी के प्रभारी सदस्य हैं। उन्होंने मेजा के गिरीश द्विवेदी और उनके बेटे अवेधश के खिलाफ विभिन्न धाराओं में सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। एफआईआर के मुताबिक संस्था का मुख्यालय पुणे में है। इस संस्था के तहत कामकाजी महिलाओं को आवासीय सुविधा दी जाती है। प्रयागराज स्थित इमारत में चौंसठ लड़कियों के रहने का इंतजाम हैं। आरोप लगाया है कि संस्था के एकाउंटेंट रहे गिरिश द्विवेदी ने तैनाती के दौरान अनियमितता की। उन पर लड़कियों ने भी संगीन आरोप लगाया था। जांच में आरोप सही आने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। इसके बाद दिसंबर दो हज़ार उन्नीस में उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया। आरोप यह भी है कि फर्जीवाड़ा करके पिता-पुत्र ने प्रॉपर्टी की कीमत करोड़ रुपये दिखाते हुए एक इकरारनामा तैयार कर लिया। पूरी प्रॉपर्टी हड़पने की साजिश रची गई थी। यह मामला कोर्ट में लंबित है। इस तरह से फर्जीवाड़ा का आरोप लगाते हुए मुकदमा कराया गया है।
चिंटू- लड़कियों के साथ कितना अच्छा है यार शादी से पहले पापा की परी होती हैं और शादी के बाद घर की लक्ष्मी हो जाती हैं। पिंटू- और लड़के? चिंटू- लड़कों का क्या, शादी से पहले पापा से मार खाते हैं और शादी के बाद बीवी से। पत्नी- तुम इतनी शराब क्यों पीते हो? पति- डार्लिंग नशे में तुम कितनी सुंदर लगती हो, मैं तुम्हारी तारीफ करने के लिए ही तो पीता हूं। पत्नी- तुम भी ना, लाओ एक और पेग बनाती हूं। क्लास में मास्टर जी ने बच्चों से पूछा- बताओ, कांटों भरे रास्ते पर आपका साथ कौन देगा? पति, पत्नी, भाई, बहन, मां-बाप, प्रेमी, प्रेमिका या दोस्त? मिंटू खड़े होकर बोला - सर, चप्पल। फिर मास्टर जी ने भी चप्पल से की शौंटी की पिटाई। पति- आज सब्जी बिल्कुल भी ठीक नहीं बनी है। पति बेहोश! एक बुजुर्ग व्यक्ति हर साल अपनी पत्नी से शादी करता था। पंडित जी बोले- ऐसा क्यों करते हैं? बुजुर्ग बोला- बस एक ही शब्द सुनने की खातिर। पंडित जी- कौन सा शब्द? बुजुर्ग- वही, जब आप कहते हैं कि लड़के को बुलाओ। पंडित जी बेहोश।
चिंटू- लड़कियों के साथ कितना अच्छा है यार शादी से पहले पापा की परी होती हैं और शादी के बाद घर की लक्ष्मी हो जाती हैं। पिंटू- और लड़के? चिंटू- लड़कों का क्या, शादी से पहले पापा से मार खाते हैं और शादी के बाद बीवी से। पत्नी- तुम इतनी शराब क्यों पीते हो? पति- डार्लिंग नशे में तुम कितनी सुंदर लगती हो, मैं तुम्हारी तारीफ करने के लिए ही तो पीता हूं। पत्नी- तुम भी ना, लाओ एक और पेग बनाती हूं। क्लास में मास्टर जी ने बच्चों से पूछा- बताओ, कांटों भरे रास्ते पर आपका साथ कौन देगा? पति, पत्नी, भाई, बहन, मां-बाप, प्रेमी, प्रेमिका या दोस्त? मिंटू खड़े होकर बोला - सर, चप्पल। फिर मास्टर जी ने भी चप्पल से की शौंटी की पिटाई। पति- आज सब्जी बिल्कुल भी ठीक नहीं बनी है। पति बेहोश! एक बुजुर्ग व्यक्ति हर साल अपनी पत्नी से शादी करता था। पंडित जी बोले- ऐसा क्यों करते हैं? बुजुर्ग बोला- बस एक ही शब्द सुनने की खातिर। पंडित जी- कौन सा शब्द? बुजुर्ग- वही, जब आप कहते हैं कि लड़के को बुलाओ। पंडित जी बेहोश।
अथर्ववेदी संहिताएं तात्पर्य यह है कि 'असत्, अभाव, शून्यमे - निरस्त समस्तोपाधिक नाम-रूप-रहित अप्रत्यक्ष ब्रह्ममे - ही सत्, भाव या प्रत्यक्ष मायाका प्रपंच प्रतिष्ठित वा अध्यस्त है । इसी सत् अर्थात् प्रत्यक्ष मायाके प्रपचमे सारी सृष्टि ( भव्य ) के उपादानभूत पृथिव्यादि पच महाभूत निहित है; इसीसे उत्पन्न होते है । वे ही पांचो महाभूत समस्त कार्यो मे विद्यमान रहते है । समस्त सृष्टि ( कार्यजात) उन्ही महाभूतोमे-पीपलके वीजमे पीपलके वृक्षकी तरह वर्त्तमान रहती है। यही, आत्माके प्रपच रूपकी महिमा, हे विष्णो, आपका अनन्त बल-वीर्य है । आप हम लोगोको इस लोकमे सब तरहके पशुओसे भरा-पूरा रखिये और ( शरीर-पात होनेपर ) परम कल्याण-धाम पहुँचाकर हमे अमृतमे सुरक्षित कर दीजिये ।' क्या ही उदात्त उपदेश है। सैकडो ग्रन्थोका सार एक ही मन्त्रमे रख दिया गया है -गागरमे सागर भर दिया गया है । वेदोके ऐसे ही एक-एक मन्त्रको लेकर उत्तर कालमे अनेकानेक ग्रन्थ रचे गये है । इस शौनक - शाखापर भी आचार्य सायणका भाष्य है । विभिन्न वेदोकी स्वर-लहरी विभिन्न होती है । कही हस्तचालन करना पडता है और कही शिर - सचालन । वसन्त पूजा और यज्ञ - विशेषके अवसरोपर जो विविध स्वर-निर्घोष और मेघ-मन्द्र-निनाद सुनाई देता है, वह बडा ही दिव्य और भव्य, मृदुल और मजुल तथा महनीय और स्तवनीय जान पडता है । मन प्राण परिप्लुत हो जाते है और हृदय चाहता है कि यह पावन निनाद वह सदा सुना करे । *"अहिर्बुध्न्य-संहिता" (१२ और २०) में अथर्ववेदकी पांच शाखाप्रो की ही बात लिखी हुई है। अधिकांश ग्रन्थोके मतसे अथर्ववेदकी नौ शाखाएँ है; परन्तु आज कल इतने नाम पाये जाते है -१ पैप्पलाद, २ शौनक, ३ तोद, ४ मोद, ५ जाजल, ६ जलद, ७ ब्रह्मवेद, ८ देवदर्श, ६ चारणवैद्य, १० दामोंद, ११ तोत्तायन, १२ जाबाल, १३ कुनखी, १४ ब्रह्मनलाश, १५ त्रिखर्च, १६ ततिल, १७ शैखण्ड, १८ सौकरसद्म, १६ शांगरव, २० अश्वमेय श्रादि श्रादि । पाणिनीय व्याकरणके गण-पाठ भी ऐसे कितने ही नाम आये है । इस दशाम यह निश्चय करना विकट कार्य है कि प्रथवेदकी वस्तुत कितनी शाखाएँ है । नाम तो और भी भुष्ट हो गये है। कहीं तोद है, कहीं दामोद है, कहीं दान्त है, कहीं योद है ! कहीं पिप्पल है, कहीं पिप्पलाद है, कहीं पैप्पल है, कहीं पप्पलाद है । कहीं देवदर्श है, कहीं वेददर्श है, कहीं देवर्षि है ! इस तरह प्रायः सभी नामो के प्रक्षर - विन्यासमें गोलमाल है। पता नहीं, इन नामोमें कितने शाखानाम है और कितने अन्य है । ऐसी परिस्थितिम लेखकने उन्हीं नौ नामोको लिखा है, जो विशेष विख्यात है। षष्ठ अध्याय वेदभाष्य आपस्तम्ब ऋषिका एक वचन उद्धृत किया गया है"सन्न - ब्राह्मणयोर्वेदनामधेयम् ।" अर्थात् वेदके दो विभाग है - मन्त्र और ब्राह्मण । दोनोमे ही मुख्यतया यज्ञोका प्रतिपादन किया गया है । दोनोसे ही दोनो सम्बद्ध हैं। ब्रह्म शब्दका एक अर्थ यज्ञ है। यज्ञका प्रतिपादन करने के कारण इन ग्रन्थोका नाम "ब्राह्मण" पडा । कुछ लोगोका मत है कि 'याजिक कृत्योके प्रधान संचालक ब्राह्मण पुरोहित थे, इसलिये इनका नाम ब्राह्मण पडा ।' इसमे सन्देह नहीं कि यज्ञो और समूचे कर्मकाण्डके आधार ये ब्राह्मण-ग्रन्थ ही है । कर्मकाण्ड ही, क्रियात्मक रूप ही, किसी भी धर्मकी विशेषता है । किसी भी धर्मसे उसका क्रियात्मक रूप निकाल दीजिये, वह नि.सत्त्व और जड़ हो जायगा । इसलिये हिन्दूधर्मका जीवित रूप ब्राह्मण-ग्रन्थ है । मन्त्रभाग वा सहिताभागका यथार्थ रहस्य ब्राह्मणभागके विना समझमे ही नहीं आ सकता । इसीसे मन्त्र ओर ब्राह्मणदोनोको वेद कहा गया है - "सन्त्रब्राह्मणात्मको वेद" (आपस्तम्वपरिभाषा ३१ ) । इन दोनोका सम्वन्ध इतना विजडित है कि कहीं-कही दोनोको अलग-अलग करना भी कठिन हो जाता है । कृष्ण यजुर्वेदकी जो तैत्तिरीय, मैत्रायणी और काठक सहिताएँ उपलब्ध है, उनको ही उदाहरणके रूप ले लीजिय । अन्तकी दोनो सहिताओमे मन्त्र और ब्राह्मण सम्मिलित है, पृथक्-पृथक् नही । सहितामे कुछ मन्त्र कहकर उसी प्रपाठक में ब्राह्मण भी कहा गया है । किसी-किसी प्रपाठकमे दोनों भाग एक साथ ही वर्णित है और कहीं-कही भिन्न रूपमे । तैत्तिरीयमे मन्त्र और ब्राह्मण अलग-अलग कहे गये है, परन्तु अनेक मन्त्र ब्राह्मण-भागमं और अनेक ब्राह्मण मन्त्र - भागमं पाये जाते है । माध्यन्दिनशाखाके शतपथ ब्राह्मण मे नी काण्डोतक सहिता के अनुसार ही ब्राह्मणका भी क्रम है - पितृ-पिण्डयज्ञको छोडकर । सहितामे इस यज्ञके मन्त्र दर्ग- पौर्णमासके अनन्तर कहूँ गये है और ब्राह्मण मे आधानके अनन्तर । वस, इतना ही भेद है। शुक्ल यजुबदकी दूसरी शाखा काण्वमहिनामं पहले दर्शपूर्णमास सम्बन्धी मन्त्र पढ गये है और ब्राह्मणका प्रारम्भ आधानसे होता है। सच वात तो यह है कि उपनिपर्दे तक सहिता-भागमे सवद्ध है । माध्यन्दिन सहिताका अन्तिम अध्याय ही "ईशावास्योपनिषद्" है । श्वेताश्वतरोपनिषद् भी श्वेताश्वतरसहिताका ही भाग है । इसलिये यह प्रश्न उठाना ही व्यर्थ है कि मन्त्र-भाग ही वेद है, ब्राह्मण और उपनिषद् नही । वस्तुत सभी एकमे मिले हुए है - सभी वेद है । ये वाते पहले भी लिखी ही गयी है । यह दूसरी बात है कि कोई नकली उपनिषद् और ब्राह्मण गढनेकी निरर्थक चेप्टा करे । कहते है, "अल्लोपनिषद् " की तरह कुछ नकली उपनिषदे गढी भी गयी है । ब्राह्मण-भागमें विधि, अर्थवाद और उपनिषद् नामके तीन भाग है। विधि शब्दसे कर्म-विधायक, अर्थवादसे प्ररोचनात्मक और उपनिषद् शब्दसे तत्त्वविचारात्मक प्रकरण विवक्षित है। कुछ ब्राह्मणोमे "कृत्तिका" से नक्षत्र गणना की गयी है और कुछ सहिताओमे "मृगशिरा" से। आजकल "अश्विनी" से नक्षत्र गणना की जाती है । ब्राह्मण-ग्रन्थो मन्त्रोकी अर्थ -मीमासा, यज्ञानुष्ठानके सम्बन्धमे विस्तृत विवरण तथा आलोचना, नाना विषयोके उपारयान, शब्दोकी व्युत्पत्ति एवम् प्राचीन राजाओ और ऋषियोकी कथाएँ है । इस प्रकार वेदागो और सम्पूर्ण सस्कृत साहित्यका वीज ब्राह्मण-ग्रन्थोमे निहित है। जैसे ११३० सहिताओमे ११ सहिताएं ही उपलब्ध है, वैसे ही ११३० ब्राह्मण-ग्रन्थोम १८ ही मिलते है - शेष कालके गालमे समा गये । उपलब्ध ब्राह्मण प्राय गद्यमे है । ऋग्वेदके दो ब्राह्मण छपे है - ऐतरेय और कौषीतकि (शाङखायन ) । ऐतरेय अत्यन्त प्रसिद्ध है । इसे १८६३ ई० मे, अंग्रेजी अनुवादके साथ, मार्टिन हागने, १८७६ मे थ्यूडोर आउफरेस्टने, १८९६ मे काशीनाथ शास्त्री ने और १९२० मे ए० वी० कीथने प्रकाशित किया । इसपर सायण-भाष्य है, जिसे उक्त शास्त्रीजीने भी अपने सस्करणमे छापा है । ऐतरेय ब्राह्मण ४० अध्याय है । यह सोमयज्ञके विवरणसे परिपूर्ण है । इसके एकसे लेकर सोलह अध्यायोमे एक ही दिनमे होनेवाले "अग्निष्टोम" नामक सोमयागका, अनन्तर दो अध्यायोमे ३६० दिनोमे पूर्ण होनेवाले "गवामयन" का और वादके ६ अध्यायोमे " द्वादशाह" का प्रतिपादन किया गया है । आगेके अध्यायोमे अग्निहोत्रादिका वर्णन है । अन्तके आठ अध्यायोम राज्याभिषेक-महोत्सवोमे राजपुरुहितोके अधिकारका वर्णन है । अन्तिम दस अध्यायोम उपाख्यान और इतिहास विशेष है । ५ अध्यायोकी एक "पचिका" कहाती है । सब आठ "पचिकाएँ" है । इसकी सप्तम "पचिक" (३ अध्याय) राजा हरिश्चन्द्रके उपाख्यानके लिये प्रसिद्ध है । इक्ष्वाकु वशीय राजा हरिश्चन्द्रके कोई सन्तान नही थी, इसलिये उन्होने वरुणदेवकी उपासना की । वरुणने प्रसन्न होकर वर दिया - "संन्तान तो होगी, परन्तु बलि देनी होगी।" कदाचित् वरुण परीक्षा ले रहे थे । राजाको रोहित नामका लडका तो हुआ, परन्तु लडके की बलि देनेकी बात राजा टालने लगे । अन्तको राजाको रोगने पकड लिया । तब राजाने अजीगत ऋषिके पुत्र शुन शेपको खरीदकर उसकी वलि देना तै किया । यज्ञ-समारम्भ हुआ । उस यज्ञमे चार पुरोहित थेहोता विश्वामित्र, अध्वर्यु जमदग्नि, उद्गाता अयस्य और ब्रह्मा वसिष्ठ । वरुणकी स्तुति कर शुन शेपने मुक्ति पा ली । हरिश्चन्द्र भी नीरोग हो गये । शुन नेपने लोभी पिताका त्याग कर दिया और विश्वामित्रने उसे पुत्र मानकर रख लिया । ऐतरेयके अन्तिम तीन अध्यायोमे जो ऐतिहासिक विवरण हैं, उनसे विदित होता है कि भारतवर्षको पूर्वी सीमामै विदेह आदि जातियोका राज्य था । दक्षिणमें भोज-राज्य, पश्चिममे 'नीच' और 'अपाच्य' लोगोका राज्य, उत्तरमे उत्तर-कुरुओं और उत्तर - मद्र लोगोधा राज्य तथा मध्य देशमें कुरु, पात्रान लोगोका राज्य था। इस ब्राह्मणमे परीक्षित-पुत्र जनमेजय, मनुपुत्र शार्यात, उग्रसेन पुत्र युधाश्रीप्ठि, पिजवन - पुन सुदाम, दुप्यन्त - पुन भरत आदि तथा काशी, मत्स्य, कुरुक्षेत्र, साण्डव आदिका भी उल्लेख है। ऐय-ब्राह्मण (१२७ ) में सोमाहरणको कथा भी है। गायत्रीने पक्षीका रूप धारण किया और श्येन रूपमे पैरोते पकडकर सोमको देवोके पाससे ले आयी । यही यह भी कहा गया है कि "एक बार यज्ञमे सोम-पान के लिये देवाने झगडा हो गया । जो चलनेमें वाजी मारे, वही सोम-पान करे, यह निश्चित हुआ । अन्तको वायु और इन्द्र पहले आये, मित्रावरुण पीछे आये । सोमाहरण के लिये ईशान्य दिशा उत्तम है; कारण इसी दिशामे असुरोने देवोपर विजय पायी थी ।" सोमाहरण- प्रतिपादक सूक्तोको इसी स्थलपर "सौपर्ण" सजा दी गयी है । ऐतरेय (२.२८) ने मुख्य देवता ३३ ही माने है । इसके ३.४४ में मात्माकी उपमा सूर्यसे दी गयी है। आत्माको अमर माना गया है और पुनर्जन्मका भी उल्लेख है । स्पष्ट ही कहा गया है - "आत्मा एक शरीरसे अस्त होकर दूसरे गरीरमे उदित होती है।" यह प्रसग भी कण्ठस्थ करने योग्य है । इससे थोडा आगे चलकर (३२३) कहा गया है - "सन्तानोत्पत्ति कर देव- ॠण, पितृ ऋण आदिके परिशोधके लिये पुरुप अनेक विवाह कर सकता है । " एक स्थान (४२७ ५-६ ) पर यह भी लिखा है- "न्यायतः विवाह वही है, जो उचित प्रेमपूर्वक किया जाता है।" ५.३३ से ज्ञात
अथर्ववेदी संहिताएं तात्पर्य यह है कि 'असत्, अभाव, शून्यमे - निरस्त समस्तोपाधिक नाम-रूप-रहित अप्रत्यक्ष ब्रह्ममे - ही सत्, भाव या प्रत्यक्ष मायाका प्रपंच प्रतिष्ठित वा अध्यस्त है । इसी सत् अर्थात् प्रत्यक्ष मायाके प्रपचमे सारी सृष्टि के उपादानभूत पृथिव्यादि पच महाभूत निहित है; इसीसे उत्पन्न होते है । वे ही पांचो महाभूत समस्त कार्यो मे विद्यमान रहते है । समस्त सृष्टि उन्ही महाभूतोमे-पीपलके वीजमे पीपलके वृक्षकी तरह वर्त्तमान रहती है। यही, आत्माके प्रपच रूपकी महिमा, हे विष्णो, आपका अनन्त बल-वीर्य है । आप हम लोगोको इस लोकमे सब तरहके पशुओसे भरा-पूरा रखिये और परम कल्याण-धाम पहुँचाकर हमे अमृतमे सुरक्षित कर दीजिये ।' क्या ही उदात्त उपदेश है। सैकडो ग्रन्थोका सार एक ही मन्त्रमे रख दिया गया है -गागरमे सागर भर दिया गया है । वेदोके ऐसे ही एक-एक मन्त्रको लेकर उत्तर कालमे अनेकानेक ग्रन्थ रचे गये है । इस शौनक - शाखापर भी आचार्य सायणका भाष्य है । विभिन्न वेदोकी स्वर-लहरी विभिन्न होती है । कही हस्तचालन करना पडता है और कही शिर - सचालन । वसन्त पूजा और यज्ञ - विशेषके अवसरोपर जो विविध स्वर-निर्घोष और मेघ-मन्द्र-निनाद सुनाई देता है, वह बडा ही दिव्य और भव्य, मृदुल और मजुल तथा महनीय और स्तवनीय जान पडता है । मन प्राण परिप्लुत हो जाते है और हृदय चाहता है कि यह पावन निनाद वह सदा सुना करे । *"अहिर्बुध्न्य-संहिता" में अथर्ववेदकी पांच शाखाप्रो की ही बात लिखी हुई है। अधिकांश ग्रन्थोके मतसे अथर्ववेदकी नौ शाखाएँ है; परन्तु आज कल इतने नाम पाये जाते है -एक पैप्पलाद, दो शौनक, तीन तोद, चार मोद, पाँच जाजल, छः जलद, सात ब्रह्मवेद, आठ देवदर्श, छः चारणवैद्य, दस दामोंद, ग्यारह तोत्तायन, बारह जाबाल, तेरह कुनखी, चौदह ब्रह्मनलाश, पंद्रह त्रिखर्च, सोलह ततिल, सत्रह शैखण्ड, अट्ठारह सौकरसद्म, सोलह शांगरव, बीस अश्वमेय श्रादि श्रादि । पाणिनीय व्याकरणके गण-पाठ भी ऐसे कितने ही नाम आये है । इस दशाम यह निश्चय करना विकट कार्य है कि प्रथवेदकी वस्तुत कितनी शाखाएँ है । नाम तो और भी भुष्ट हो गये है। कहीं तोद है, कहीं दामोद है, कहीं दान्त है, कहीं योद है ! कहीं पिप्पल है, कहीं पिप्पलाद है, कहीं पैप्पल है, कहीं पप्पलाद है । कहीं देवदर्श है, कहीं वेददर्श है, कहीं देवर्षि है ! इस तरह प्रायः सभी नामो के प्रक्षर - विन्यासमें गोलमाल है। पता नहीं, इन नामोमें कितने शाखानाम है और कितने अन्य है । ऐसी परिस्थितिम लेखकने उन्हीं नौ नामोको लिखा है, जो विशेष विख्यात है। षष्ठ अध्याय वेदभाष्य आपस्तम्ब ऋषिका एक वचन उद्धृत किया गया है"सन्न - ब्राह्मणयोर्वेदनामधेयम् ।" अर्थात् वेदके दो विभाग है - मन्त्र और ब्राह्मण । दोनोमे ही मुख्यतया यज्ञोका प्रतिपादन किया गया है । दोनोसे ही दोनो सम्बद्ध हैं। ब्रह्म शब्दका एक अर्थ यज्ञ है। यज्ञका प्रतिपादन करने के कारण इन ग्रन्थोका नाम "ब्राह्मण" पडा । कुछ लोगोका मत है कि 'याजिक कृत्योके प्रधान संचालक ब्राह्मण पुरोहित थे, इसलिये इनका नाम ब्राह्मण पडा ।' इसमे सन्देह नहीं कि यज्ञो और समूचे कर्मकाण्डके आधार ये ब्राह्मण-ग्रन्थ ही है । कर्मकाण्ड ही, क्रियात्मक रूप ही, किसी भी धर्मकी विशेषता है । किसी भी धर्मसे उसका क्रियात्मक रूप निकाल दीजिये, वह नि.सत्त्व और जड़ हो जायगा । इसलिये हिन्दूधर्मका जीवित रूप ब्राह्मण-ग्रन्थ है । मन्त्रभाग वा सहिताभागका यथार्थ रहस्य ब्राह्मणभागके विना समझमे ही नहीं आ सकता । इसीसे मन्त्र ओर ब्राह्मणदोनोको वेद कहा गया है - "सन्त्रब्राह्मणात्मको वेद" । इन दोनोका सम्वन्ध इतना विजडित है कि कहीं-कही दोनोको अलग-अलग करना भी कठिन हो जाता है । कृष्ण यजुर्वेदकी जो तैत्तिरीय, मैत्रायणी और काठक सहिताएँ उपलब्ध है, उनको ही उदाहरणके रूप ले लीजिय । अन्तकी दोनो सहिताओमे मन्त्र और ब्राह्मण सम्मिलित है, पृथक्-पृथक् नही । सहितामे कुछ मन्त्र कहकर उसी प्रपाठक में ब्राह्मण भी कहा गया है । किसी-किसी प्रपाठकमे दोनों भाग एक साथ ही वर्णित है और कहीं-कही भिन्न रूपमे । तैत्तिरीयमे मन्त्र और ब्राह्मण अलग-अलग कहे गये है, परन्तु अनेक मन्त्र ब्राह्मण-भागमं और अनेक ब्राह्मण मन्त्र - भागमं पाये जाते है । माध्यन्दिनशाखाके शतपथ ब्राह्मण मे नी काण्डोतक सहिता के अनुसार ही ब्राह्मणका भी क्रम है - पितृ-पिण्डयज्ञको छोडकर । सहितामे इस यज्ञके मन्त्र दर्ग- पौर्णमासके अनन्तर कहूँ गये है और ब्राह्मण मे आधानके अनन्तर । वस, इतना ही भेद है। शुक्ल यजुबदकी दूसरी शाखा काण्वमहिनामं पहले दर्शपूर्णमास सम्बन्धी मन्त्र पढ गये है और ब्राह्मणका प्रारम्भ आधानसे होता है। सच वात तो यह है कि उपनिपर्दे तक सहिता-भागमे सवद्ध है । माध्यन्दिन सहिताका अन्तिम अध्याय ही "ईशावास्योपनिषद्" है । श्वेताश्वतरोपनिषद् भी श्वेताश्वतरसहिताका ही भाग है । इसलिये यह प्रश्न उठाना ही व्यर्थ है कि मन्त्र-भाग ही वेद है, ब्राह्मण और उपनिषद् नही । वस्तुत सभी एकमे मिले हुए है - सभी वेद है । ये वाते पहले भी लिखी ही गयी है । यह दूसरी बात है कि कोई नकली उपनिषद् और ब्राह्मण गढनेकी निरर्थक चेप्टा करे । कहते है, "अल्लोपनिषद् " की तरह कुछ नकली उपनिषदे गढी भी गयी है । ब्राह्मण-भागमें विधि, अर्थवाद और उपनिषद् नामके तीन भाग है। विधि शब्दसे कर्म-विधायक, अर्थवादसे प्ररोचनात्मक और उपनिषद् शब्दसे तत्त्वविचारात्मक प्रकरण विवक्षित है। कुछ ब्राह्मणोमे "कृत्तिका" से नक्षत्र गणना की गयी है और कुछ सहिताओमे "मृगशिरा" से। आजकल "अश्विनी" से नक्षत्र गणना की जाती है । ब्राह्मण-ग्रन्थो मन्त्रोकी अर्थ -मीमासा, यज्ञानुष्ठानके सम्बन्धमे विस्तृत विवरण तथा आलोचना, नाना विषयोके उपारयान, शब्दोकी व्युत्पत्ति एवम् प्राचीन राजाओ और ऋषियोकी कथाएँ है । इस प्रकार वेदागो और सम्पूर्ण सस्कृत साहित्यका वीज ब्राह्मण-ग्रन्थोमे निहित है। जैसे एक हज़ार एक सौ तीस सहिताओमे ग्यारह सहिताएं ही उपलब्ध है, वैसे ही एक हज़ार एक सौ तीस ब्राह्मण-ग्रन्थोम अट्ठारह ही मिलते है - शेष कालके गालमे समा गये । उपलब्ध ब्राह्मण प्राय गद्यमे है । ऋग्वेदके दो ब्राह्मण छपे है - ऐतरेय और कौषीतकि । ऐतरेय अत्यन्त प्रसिद्ध है । इसे एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ ईशून्य मे, अंग्रेजी अनुवादके साथ, मार्टिन हागने, एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर मे थ्यूडोर आउफरेस्टने, एक हज़ार आठ सौ छियानवे मे काशीनाथ शास्त्री ने और एक हज़ार नौ सौ बीस मे एशून्य वीशून्य कीथने प्रकाशित किया । इसपर सायण-भाष्य है, जिसे उक्त शास्त्रीजीने भी अपने सस्करणमे छापा है । ऐतरेय ब्राह्मण चालीस अध्याय है । यह सोमयज्ञके विवरणसे परिपूर्ण है । इसके एकसे लेकर सोलह अध्यायोमे एक ही दिनमे होनेवाले "अग्निष्टोम" नामक सोमयागका, अनन्तर दो अध्यायोमे तीन सौ साठ दिनोमे पूर्ण होनेवाले "गवामयन" का और वादके छः अध्यायोमे " द्वादशाह" का प्रतिपादन किया गया है । आगेके अध्यायोमे अग्निहोत्रादिका वर्णन है । अन्तके आठ अध्यायोम राज्याभिषेक-महोत्सवोमे राजपुरुहितोके अधिकारका वर्णन है । अन्तिम दस अध्यायोम उपाख्यान और इतिहास विशेष है । पाँच अध्यायोकी एक "पचिका" कहाती है । सब आठ "पचिकाएँ" है । इसकी सप्तम "पचिक" राजा हरिश्चन्द्रके उपाख्यानके लिये प्रसिद्ध है । इक्ष्वाकु वशीय राजा हरिश्चन्द्रके कोई सन्तान नही थी, इसलिये उन्होने वरुणदेवकी उपासना की । वरुणने प्रसन्न होकर वर दिया - "संन्तान तो होगी, परन्तु बलि देनी होगी।" कदाचित् वरुण परीक्षा ले रहे थे । राजाको रोहित नामका लडका तो हुआ, परन्तु लडके की बलि देनेकी बात राजा टालने लगे । अन्तको राजाको रोगने पकड लिया । तब राजाने अजीगत ऋषिके पुत्र शुन शेपको खरीदकर उसकी वलि देना तै किया । यज्ञ-समारम्भ हुआ । उस यज्ञमे चार पुरोहित थेहोता विश्वामित्र, अध्वर्यु जमदग्नि, उद्गाता अयस्य और ब्रह्मा वसिष्ठ । वरुणकी स्तुति कर शुन शेपने मुक्ति पा ली । हरिश्चन्द्र भी नीरोग हो गये । शुन नेपने लोभी पिताका त्याग कर दिया और विश्वामित्रने उसे पुत्र मानकर रख लिया । ऐतरेयके अन्तिम तीन अध्यायोमे जो ऐतिहासिक विवरण हैं, उनसे विदित होता है कि भारतवर्षको पूर्वी सीमामै विदेह आदि जातियोका राज्य था । दक्षिणमें भोज-राज्य, पश्चिममे 'नीच' और 'अपाच्य' लोगोका राज्य, उत्तरमे उत्तर-कुरुओं और उत्तर - मद्र लोगोधा राज्य तथा मध्य देशमें कुरु, पात्रान लोगोका राज्य था। इस ब्राह्मणमे परीक्षित-पुत्र जनमेजय, मनुपुत्र शार्यात, उग्रसेन पुत्र युधाश्रीप्ठि, पिजवन - पुन सुदाम, दुप्यन्त - पुन भरत आदि तथा काशी, मत्स्य, कुरुक्षेत्र, साण्डव आदिका भी उल्लेख है। ऐय-ब्राह्मण में सोमाहरणको कथा भी है। गायत्रीने पक्षीका रूप धारण किया और श्येन रूपमे पैरोते पकडकर सोमको देवोके पाससे ले आयी । यही यह भी कहा गया है कि "एक बार यज्ञमे सोम-पान के लिये देवाने झगडा हो गया । जो चलनेमें वाजी मारे, वही सोम-पान करे, यह निश्चित हुआ । अन्तको वायु और इन्द्र पहले आये, मित्रावरुण पीछे आये । सोमाहरण के लिये ईशान्य दिशा उत्तम है; कारण इसी दिशामे असुरोने देवोपर विजय पायी थी ।" सोमाहरण- प्रतिपादक सूक्तोको इसी स्थलपर "सौपर्ण" सजा दी गयी है । ऐतरेय ने मुख्य देवता तैंतीस ही माने है । इसके तीन.चौंतालीस में मात्माकी उपमा सूर्यसे दी गयी है। आत्माको अमर माना गया है और पुनर्जन्मका भी उल्लेख है । स्पष्ट ही कहा गया है - "आत्मा एक शरीरसे अस्त होकर दूसरे गरीरमे उदित होती है।" यह प्रसग भी कण्ठस्थ करने योग्य है । इससे थोडा आगे चलकर कहा गया है - "सन्तानोत्पत्ति कर देव- ॠण, पितृ ऋण आदिके परिशोधके लिये पुरुप अनेक विवाह कर सकता है । " एक स्थान पर यह भी लिखा है- "न्यायतः विवाह वही है, जो उचित प्रेमपूर्वक किया जाता है।" पाँच.तैंतीस से ज्ञात
निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही नहीं है? भारत की कृषि भूमि का कितना प्रतिशत भाग सिंचित है? कितने सिंचाई कमान क्षेत्र वाली परियोजनाओं को 'वृहत सिंचाई परियोजना' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है? भारत के किस राज्य में कॉफ़ी का सर्वाधिक उत्पादन होता है?
निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही नहीं है? भारत की कृषि भूमि का कितना प्रतिशत भाग सिंचित है? कितने सिंचाई कमान क्षेत्र वाली परियोजनाओं को 'वृहत सिंचाई परियोजना' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है? भारत के किस राज्य में कॉफ़ी का सर्वाधिक उत्पादन होता है?
नवीन के उस संधिकाल में जैसी शीतल कला का सन्चार अपेक्षित था वैसी ही शीतल कला के साथ भारते दु का उदय हुआ, इसमें सदेह नहीं । हरिश्चद्र के जीवन काल में ही लेखकों और कवियों का एक ख़ासा मडल चारों ओर तैयार हो गया था । उपाध्याय पढित बदरीनारायण चौधरी, पडित प्रतापनारायण मिश्र, बाबू तोताराम, ठाकुर जगमोहन सिंह, लाला श्रीनिवासदास, पडित वालकृष्ण भट्ट, पडित केशवराम भट्ट, पति श्रमिकादत्त व्यास, पडित राधाचरण गोस्वामी इत्यादि कई प्रौढ और प्रतिभाशाली लेखकों ने हिंदी साहित्य के इस नूतन विकास में योग दिया था। भारते दु का अस्त तो सवत् १९४९ में ही हो गया पर उनका यह मडल बहुत दिनों तक साहित्य निर्माण करता रहा । अनेक प्रकार के गद्य-प्रब घ, नाटक, उपन्यास आदि इन लेखकों की लेखनी से निकलते रहे। जो मौलिकता इन लेखकों में थी वह द्वितीय उत्थान के लेखकों में न दिखाई पड़ी। भारते दुजी में हम दो प्रकार की शैलियों का व्यवहार पाते हैं। उनकी भावावेश की शैली दूसरी है और तथ्य निरूपण की शैली दूसरी । भावावेश की भाषा में प्राय वाक्य बहुत छोटे छोटे होते हैं और पदावली सरल बोल-चाल की होती है जिसमें बहुत प्रचलित साधारण फ़ारसी- अरबी के शब्द भी कभी कभी, पर बहुत कम, श्रा जाते है । 'चद्रावली नाटिका' से उद्धृत यह श देखिए --- "झूठे, झूठे झूठे ! झूठे ही नहीं विश्वासघातक । ठॉक और हाथ उठाउठाकर लोगों को विश्वास दिया ? चाहे जहन्नुम में पड़ते। भला क्या काम था कि इतना पचा किया ? किसने इस उपद्रव और जाल करने को कहा था ? कुछ न होता, तुम्हीं तुम रहते, बस चैन था, केवल आनद था। फिर क्यों यह विषमय ससार किया ? बहिए ! और इतने बड़े कारखाने पर वेहयाई परले सिरे की । नाम विके, लोग झूठा कहें, अपने मारे फिरें पर वाह रे शुद्ध वेहयाई पूरी निर्लजता । लाज को जूतो मार के, पीट पीट के निकाल दिया है। जिस मुहल्ले में आप रहते हैं लान
नवीन के उस संधिकाल में जैसी शीतल कला का सन्चार अपेक्षित था वैसी ही शीतल कला के साथ भारते दु का उदय हुआ, इसमें सदेह नहीं । हरिश्चद्र के जीवन काल में ही लेखकों और कवियों का एक ख़ासा मडल चारों ओर तैयार हो गया था । उपाध्याय पढित बदरीनारायण चौधरी, पडित प्रतापनारायण मिश्र, बाबू तोताराम, ठाकुर जगमोहन सिंह, लाला श्रीनिवासदास, पडित वालकृष्ण भट्ट, पडित केशवराम भट्ट, पति श्रमिकादत्त व्यास, पडित राधाचरण गोस्वामी इत्यादि कई प्रौढ और प्रतिभाशाली लेखकों ने हिंदी साहित्य के इस नूतन विकास में योग दिया था। भारते दु का अस्त तो सवत् एक हज़ार नौ सौ उनचास में ही हो गया पर उनका यह मडल बहुत दिनों तक साहित्य निर्माण करता रहा । अनेक प्रकार के गद्य-प्रब घ, नाटक, उपन्यास आदि इन लेखकों की लेखनी से निकलते रहे। जो मौलिकता इन लेखकों में थी वह द्वितीय उत्थान के लेखकों में न दिखाई पड़ी। भारते दुजी में हम दो प्रकार की शैलियों का व्यवहार पाते हैं। उनकी भावावेश की शैली दूसरी है और तथ्य निरूपण की शैली दूसरी । भावावेश की भाषा में प्राय वाक्य बहुत छोटे छोटे होते हैं और पदावली सरल बोल-चाल की होती है जिसमें बहुत प्रचलित साधारण फ़ारसी- अरबी के शब्द भी कभी कभी, पर बहुत कम, श्रा जाते है । 'चद्रावली नाटिका' से उद्धृत यह श देखिए --- "झूठे, झूठे झूठे ! झूठे ही नहीं विश्वासघातक । ठॉक और हाथ उठाउठाकर लोगों को विश्वास दिया ? चाहे जहन्नुम में पड़ते। भला क्या काम था कि इतना पचा किया ? किसने इस उपद्रव और जाल करने को कहा था ? कुछ न होता, तुम्हीं तुम रहते, बस चैन था, केवल आनद था। फिर क्यों यह विषमय ससार किया ? बहिए ! और इतने बड़े कारखाने पर वेहयाई परले सिरे की । नाम विके, लोग झूठा कहें, अपने मारे फिरें पर वाह रे शुद्ध वेहयाई पूरी निर्लजता । लाज को जूतो मार के, पीट पीट के निकाल दिया है। जिस मुहल्ले में आप रहते हैं लान
बैंक अधिकारी मान-2 एस. एसटी. बीएन. डब्ल्यू. एच. आर डब्ल्यू. एसई.सी ओए ओएल.ओएएल.बी.एल.वी अथवा संगठन के आधार पर यथापेक्षित यह देखा गया कि कार्यालयों स्थापनाओं और संस्थानों द्वारा निर्धारित अनुपालन किया गया है और लेखा पुस्तकें उचित रुप मे रखी गई है। सुनिश्चित करता है कि दिये गए अनुदेश अथवा उठाई गई आपत्तियां पूरी कर दी गई है। अथवा सुधार ली गई हैं। लेखाओ की आवधिक और औचक जांच करना। राजस्व और व्यय सहित वित्तिय मुद्दों पर उपयुक्त प्राधिकारी को सलाह देना जैसे कच्चा माल, मशीनरी व अन्य खरीदों के बारे में प्रक्रिया और परिसम्पत्तियों के निपटान, बट्टे खाते डालना, ह्रास और संविदा प्रदान करने संबंधी सलाह देना । बहुविध सुविस्तृत क्षेत्रों में से किसी एक के आंकड़ों को एकत्र, सारणीबद्ध और व्याख्या करने के लिए अत्यधिक प्रभावी विधियों का विकास करना और लागू करना । किसी समस्या के हल के लिए आवश्यक सूचना स्वरूप और परिणाम का निर्धारण करना व आवश्यक सूचना एकत्र करने के लिए विधि प्राप्त और सोच निकालना । अध्यनाधीन समस्या की किस्म और उपलब्ध सूचना की प्राकृति के अनुसार अपेक्षित आंकड़े प्रस्तुत करने के लिए अत्यधिक प्रभावी तकनीक का निर्धारण करना । अपेक्षित रूप में आंकड़ों की व्याख्या को प्रभावित करने वाली परिवर्तनीय स्थितियों के आधार पर निष्कर्षो का विश्लेषण जाता है। कार्यस्थल अच्छा प्रकाशमय और सुविधाजनक होता है। कार्मिक सामन्यतः अकेले काम करते है। यद्यपि जनता से भी कार्य करना पड़ता है। अधिकारी को फील्ड मे भी कार्य करना पड़ता है। कार्यस्थल उष्ण, आर्द्र व धूल धूसित होता है। उपयुक्त कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर व भाग I-खण्ड ]
बैंक अधिकारी मान-दो एस. एसटी. बीएन. डब्ल्यू. एच. आर डब्ल्यू. एसई.सी ओए ओएल.ओएएल.बी.एल.वी अथवा संगठन के आधार पर यथापेक्षित यह देखा गया कि कार्यालयों स्थापनाओं और संस्थानों द्वारा निर्धारित अनुपालन किया गया है और लेखा पुस्तकें उचित रुप मे रखी गई है। सुनिश्चित करता है कि दिये गए अनुदेश अथवा उठाई गई आपत्तियां पूरी कर दी गई है। अथवा सुधार ली गई हैं। लेखाओ की आवधिक और औचक जांच करना। राजस्व और व्यय सहित वित्तिय मुद्दों पर उपयुक्त प्राधिकारी को सलाह देना जैसे कच्चा माल, मशीनरी व अन्य खरीदों के बारे में प्रक्रिया और परिसम्पत्तियों के निपटान, बट्टे खाते डालना, ह्रास और संविदा प्रदान करने संबंधी सलाह देना । बहुविध सुविस्तृत क्षेत्रों में से किसी एक के आंकड़ों को एकत्र, सारणीबद्ध और व्याख्या करने के लिए अत्यधिक प्रभावी विधियों का विकास करना और लागू करना । किसी समस्या के हल के लिए आवश्यक सूचना स्वरूप और परिणाम का निर्धारण करना व आवश्यक सूचना एकत्र करने के लिए विधि प्राप्त और सोच निकालना । अध्यनाधीन समस्या की किस्म और उपलब्ध सूचना की प्राकृति के अनुसार अपेक्षित आंकड़े प्रस्तुत करने के लिए अत्यधिक प्रभावी तकनीक का निर्धारण करना । अपेक्षित रूप में आंकड़ों की व्याख्या को प्रभावित करने वाली परिवर्तनीय स्थितियों के आधार पर निष्कर्षो का विश्लेषण जाता है। कार्यस्थल अच्छा प्रकाशमय और सुविधाजनक होता है। कार्मिक सामन्यतः अकेले काम करते है। यद्यपि जनता से भी कार्य करना पड़ता है। अधिकारी को फील्ड मे भी कार्य करना पड़ता है। कार्यस्थल उष्ण, आर्द्र व धूल धूसित होता है। उपयुक्त कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर व भाग I-खण्ड ]
Jamshedpur : एमजीएम अस्पताल की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है. शुक्रवार को चाकू लगने से घायल एक ट्रक खलासी बी स्वामी को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती किया गया था. वह शनिवार को अस्पताल से फरार पाया गया. यहां तक कि उसकी देखरेख के लिए होमगार्ड के जवान भी तैनात थे. बावजूद इसके सुरक्षाकर्मियों को उसके फरार होने की भनक तक नहीं. बी स्वामी आंध्र प्रदेश केला नगर ट्रक के साथ जमशेदपुर आया था. साकची मंडी मे गाड़ी अनलोड करने के बाद पेमेंट को लेकर उसका ट्रक के ड्राइवर के साथ विवाद हो गया था. उसी बीच ड्राइवर ने उसके गले पर चाकू से वार कर घायल कर दिया और मौके से फरार हो गया. उसके बाद घायल स्वामी किसी तरह एमजीएम अस्पताल पहुंचा, लेकिन हिंदी भाषा का ज्ञान नहीं होने के कारण उसे अस्पताल में एडमिट नहीं लिया जा रहा था. इसकी जानकारी साकची थाना को मिलने पर पुलिस के प्रयास से उसे सर्जिकल वार्ड में दूसरे मरीजों से अलग 91 नंबर बेड पर भर्ती किया गया था. साथ ही होमगार्ड के जवान को भी उसकी निगरानी के लिए तैनात किया गया और ड्यूटी में मौजूद नर्सों से भी उसके बेहतर इलाज की बात कही गई थी. पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, जब शनिवार को उस मरीज की जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो जिस बेड में उसे एडमिट किया गया था वहां रूम बंद था. पूछने पर ड्यूटी पर मौजूद नर्स और होमगार्ड जवानों ने कहा कि वह कहीं चला गया है. उन्होंने इस संबंध में किसी तरह के जनकारी होने से इंकार किया. इस मामले में होमगार्ड जवान के रात्रि पाली के इंचार्ज जसबीर सिंह ने बताया कि रात्रि में दो जवान सतीश चंद्र महतो और संदीप उसकी निगरानी में सुबह छह बजे तक थे. उनके ड्यूटी में रहना तक मरीज बेड पर मौजूद था. उसके बाद वह कैसे गायब हुआ इसकी जानकारी लेने का प्रयास किया जा रहा है.
Jamshedpur : एमजीएम अस्पताल की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है. शुक्रवार को चाकू लगने से घायल एक ट्रक खलासी बी स्वामी को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती किया गया था. वह शनिवार को अस्पताल से फरार पाया गया. यहां तक कि उसकी देखरेख के लिए होमगार्ड के जवान भी तैनात थे. बावजूद इसके सुरक्षाकर्मियों को उसके फरार होने की भनक तक नहीं. बी स्वामी आंध्र प्रदेश केला नगर ट्रक के साथ जमशेदपुर आया था. साकची मंडी मे गाड़ी अनलोड करने के बाद पेमेंट को लेकर उसका ट्रक के ड्राइवर के साथ विवाद हो गया था. उसी बीच ड्राइवर ने उसके गले पर चाकू से वार कर घायल कर दिया और मौके से फरार हो गया. उसके बाद घायल स्वामी किसी तरह एमजीएम अस्पताल पहुंचा, लेकिन हिंदी भाषा का ज्ञान नहीं होने के कारण उसे अस्पताल में एडमिट नहीं लिया जा रहा था. इसकी जानकारी साकची थाना को मिलने पर पुलिस के प्रयास से उसे सर्जिकल वार्ड में दूसरे मरीजों से अलग इक्यानवे नंबर बेड पर भर्ती किया गया था. साथ ही होमगार्ड के जवान को भी उसकी निगरानी के लिए तैनात किया गया और ड्यूटी में मौजूद नर्सों से भी उसके बेहतर इलाज की बात कही गई थी. पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, जब शनिवार को उस मरीज की जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो जिस बेड में उसे एडमिट किया गया था वहां रूम बंद था. पूछने पर ड्यूटी पर मौजूद नर्स और होमगार्ड जवानों ने कहा कि वह कहीं चला गया है. उन्होंने इस संबंध में किसी तरह के जनकारी होने से इंकार किया. इस मामले में होमगार्ड जवान के रात्रि पाली के इंचार्ज जसबीर सिंह ने बताया कि रात्रि में दो जवान सतीश चंद्र महतो और संदीप उसकी निगरानी में सुबह छह बजे तक थे. उनके ड्यूटी में रहना तक मरीज बेड पर मौजूद था. उसके बाद वह कैसे गायब हुआ इसकी जानकारी लेने का प्रयास किया जा रहा है.