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वृषभ राशि में सूर्य व बुध के कारण बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है। दरअसल, जब किसी राशि में सूर्य व बुध एक ही स्थान में उच्च स्थिति में विराजमान होते हैं, तो बुधादित्य योग का निर्माण होता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, 15 मई को सूर्य का वृषभ राशि में गोचर होने वाला है। इस राशि में पहले से ही बुध ग्रह विराजमान हैं। ऐसे में सूर्य व बुध की युति से वृषभ राशि में बुधादित्य योग का निर्माण होगा। सूर्य को मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। वहीं बुध बुद्धि व व्यापार के कारक हैं। इन दोनों ग्रहों की युति का असर मानव जीवन में देखने को मिलेगा।
कर्क राशि- आपकी राशि के लिए बुधादित्य योग लाभकारी साबित होगा। क्योंकि आपकी कुंडली के 11वें स्थान में बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है। जिसे लाभ व इनकम का भाव कहा जाता है। इस दौरान आपकी आय में वृद्धि हो सकती है। इनकम के नए साधन बनेंगे। इस दौरान व्यापारियों को किसी डील में मुनाफा हो सकता है।
सिंह- सिंह राशि वालों के लिए बुधादित्य योग खुशियों की सौगात ला सकता है। बुधादित्य योग का निर्माण आपकी राशि के दशम भाव में हो रहा है। इसलिए इस दौरान आपको मान-सम्मान और प्रतिष्ठा हासिल हो सकती है। कारोबार में धन लाभ हो सकता है। आपकी कार्यशैली में निखार आएगा। नौकरी पेशा करने वाले जातकों को तरक्की मिल सकती है।
मिथुन- मिथुन राशि वालों के लिए बुधादित्य योग शुभ साबित हो सकता है। आपकी राशि से दूसरे भाव में बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है। जिसे धन व वाणी का भाव कहा जाता है। इसलिए इस दौरान आपको आकस्मिक धन लाभ हो सकता है। करियर के लिए यह समय शानदार साबित होगा। राजनीति के क्षेत्र से जुड़े लोगों को सफलता मिल सकती है।
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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वृषभ राशि में सूर्य व बुध के कारण बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है। दरअसल, जब किसी राशि में सूर्य व बुध एक ही स्थान में उच्च स्थिति में विराजमान होते हैं, तो बुधादित्य योग का निर्माण होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, पंद्रह मई को सूर्य का वृषभ राशि में गोचर होने वाला है। इस राशि में पहले से ही बुध ग्रह विराजमान हैं। ऐसे में सूर्य व बुध की युति से वृषभ राशि में बुधादित्य योग का निर्माण होगा। सूर्य को मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। वहीं बुध बुद्धि व व्यापार के कारक हैं। इन दोनों ग्रहों की युति का असर मानव जीवन में देखने को मिलेगा। कर्क राशि- आपकी राशि के लिए बुधादित्य योग लाभकारी साबित होगा। क्योंकि आपकी कुंडली के ग्यारहवें स्थान में बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है। जिसे लाभ व इनकम का भाव कहा जाता है। इस दौरान आपकी आय में वृद्धि हो सकती है। इनकम के नए साधन बनेंगे। इस दौरान व्यापारियों को किसी डील में मुनाफा हो सकता है। सिंह- सिंह राशि वालों के लिए बुधादित्य योग खुशियों की सौगात ला सकता है। बुधादित्य योग का निर्माण आपकी राशि के दशम भाव में हो रहा है। इसलिए इस दौरान आपको मान-सम्मान और प्रतिष्ठा हासिल हो सकती है। कारोबार में धन लाभ हो सकता है। आपकी कार्यशैली में निखार आएगा। नौकरी पेशा करने वाले जातकों को तरक्की मिल सकती है। मिथुन- मिथुन राशि वालों के लिए बुधादित्य योग शुभ साबित हो सकता है। आपकी राशि से दूसरे भाव में बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है। जिसे धन व वाणी का भाव कहा जाता है। इसलिए इस दौरान आपको आकस्मिक धन लाभ हो सकता है। करियर के लिए यह समय शानदार साबित होगा। राजनीति के क्षेत्र से जुड़े लोगों को सफलता मिल सकती है। इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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गुरु का नाम शान्ति हर्प और नैणसी के पुत्र जैतसी के लिये प्रस्तुत ग्रन्थ बनाया गया है । मिश्रबन्धुविनोद के पृ० १००४ में लाभवर्द्धन के रचित उपपदी मन्थ का उल्लेख है पर मुझे यह नाम अशुद्ध प्रतीत होता है ।
(७८) लालदास (३४) - इनके "विक्रमविलास " ग्रन्थ का विवरण इस ग्रन्थ में दिया गया है उसके प्रारंभ में कवि ने अपने दो अन्य मन्थों का उल्लेख किया है जिनमें से उषा नाटक ( कथा ) की प्रति सन् १९०९ से ११ की खोज रिपोर्ट में प्राप्त है । इनकी माधवानलकथा अभी तक कहीं जानने में नहीं आई अतः उसकी खोज होना आवश्यक है।
नागरी प्रचारिणी पत्रिका के वर्ष ५१ अंक ४ में सन् १९४१ से ४३ की खोज का विवरण प्राप्त हुआ है उसमें लिखा है कि विक्रमविलास की दो प्रतियां प्राप्त हुई हैं जिनके अनुसार कवि का नाम लाल या नेवजी लाल दीक्षित था। ये विक्रम शाहि राजा के आश्रित थे । जिनके बड़े भाई का नाम भूपतशादि पिता का नाम खेमकरण और पितामह का नाम मलकल्याण था । एक प्रति में इस ग्रन्थ का रचना काल १६४० लिखा है।
मिश्रबन्धु विनोद के पृ० १०७१ में लालदास के उषा कथा और वामन चरित्र का निर्देश है कविताकाल २० १८९६ के पूर्व और मनोहर दास के पुत्र लिखा है। है हमारे नम्रमतानुसार उषा कथा उपरोक्त लालदास रचित ही होगी और उसका रचना काल १७ वीं शताब्दी निश्चित ही है । वामनचरित्र के रचयिता लालदास प्रस्तुत कवि से भिन्न ही संभव हैं ।
१७ वीं शताब्दी के कवि लालदास की इतिहाससार (सं० १६४३) प्रसि है एवं अन्य कई ग्रन्थ भी इसी कवि के नाम से उपलब्ध हैं पर उन सभी का रचयिता एक ही कवि है या समनाम वाले भिन्न भिन्न कवि हैं प्रसारण भाव से नहीं कहा
जा सकता ।
(७९) वल्लभ (१३०) - आपने हृदयराम के समय में या उनके लिये स्वरोदय सम्बंधी छोटा सा ग्रन्थ बनाया ।
( ८० ) विजयराम (८७) - आशायत दुर्गेश के ग्राम समदरड़ी (लूणी के पास) में आपने शनिकथा बनाई । कवि ने रचनाकाल का भी निर्देश किया है पर उससे संवत् का अंक ठीक ज्ञात नहीं होता ।
( ८१ ) विनयसागर ( २ ) - इन्होंने अंचलगच्छीय कल्याणसागर सूरि के समय -- सं० १७०२ कार्तिक सुदी १५ को, अनेकार्थ नाममाला बनायी ।
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गुरु का नाम शान्ति हर्प और नैणसी के पुत्र जैतसी के लिये प्रस्तुत ग्रन्थ बनाया गया है । मिश्रबन्धुविनोद के पृशून्य एक हज़ार चार में लाभवर्द्धन के रचित उपपदी मन्थ का उल्लेख है पर मुझे यह नाम अशुद्ध प्रतीत होता है । लालदास - इनके "विक्रमविलास " ग्रन्थ का विवरण इस ग्रन्थ में दिया गया है उसके प्रारंभ में कवि ने अपने दो अन्य मन्थों का उल्लेख किया है जिनमें से उषा नाटक की प्रति सन् एक हज़ार नौ सौ नौ से ग्यारह की खोज रिपोर्ट में प्राप्त है । इनकी माधवानलकथा अभी तक कहीं जानने में नहीं आई अतः उसकी खोज होना आवश्यक है। नागरी प्रचारिणी पत्रिका के वर्ष इक्यावन अंक चार में सन् एक हज़ार नौ सौ इकतालीस से तैंतालीस की खोज का विवरण प्राप्त हुआ है उसमें लिखा है कि विक्रमविलास की दो प्रतियां प्राप्त हुई हैं जिनके अनुसार कवि का नाम लाल या नेवजी लाल दीक्षित था। ये विक्रम शाहि राजा के आश्रित थे । जिनके बड़े भाई का नाम भूपतशादि पिता का नाम खेमकरण और पितामह का नाम मलकल्याण था । एक प्रति में इस ग्रन्थ का रचना काल एक हज़ार छः सौ चालीस लिखा है। मिश्रबन्धु विनोद के पृशून्य एक हज़ार इकहत्तर में लालदास के उषा कथा और वामन चरित्र का निर्देश है कविताकाल बीस एक हज़ार आठ सौ छियानवे के पूर्व और मनोहर दास के पुत्र लिखा है। है हमारे नम्रमतानुसार उषा कथा उपरोक्त लालदास रचित ही होगी और उसका रचना काल सत्रह वीं शताब्दी निश्चित ही है । वामनचरित्र के रचयिता लालदास प्रस्तुत कवि से भिन्न ही संभव हैं । सत्रह वीं शताब्दी के कवि लालदास की इतिहाससार प्रसि है एवं अन्य कई ग्रन्थ भी इसी कवि के नाम से उपलब्ध हैं पर उन सभी का रचयिता एक ही कवि है या समनाम वाले भिन्न भिन्न कवि हैं प्रसारण भाव से नहीं कहा जा सकता । वल्लभ - आपने हृदयराम के समय में या उनके लिये स्वरोदय सम्बंधी छोटा सा ग्रन्थ बनाया । विजयराम - आशायत दुर्गेश के ग्राम समदरड़ी में आपने शनिकथा बनाई । कवि ने रचनाकाल का भी निर्देश किया है पर उससे संवत् का अंक ठीक ज्ञात नहीं होता । विनयसागर - इन्होंने अंचलगच्छीय कल्याणसागर सूरि के समय -- संशून्य एक हज़ार सात सौ दो कार्तिक सुदी पंद्रह को, अनेकार्थ नाममाला बनायी ।
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नामग्याल ने कहा कि; लद्दाख के लोगों ने शुरू से ही सरकार को बता दिया था कि, उन्हें कश्मीर के अलावा किसी भी और तरीके से देश में रहना मंजूर है भले ही वह केंद्र-शासित प्रदेश के रूप में हो !
लद्दाख के ३४ वर्षीय सांसद जाम्यांग त्सेरिंग नामग्याल ने अपने लोक सभा वक्तव्य में जम्मू-कश्मीर के विभाजन का विरोध करनेवालों की कलई खोल कर रख दी ! अपने भाषण में उन्होंने लद्दाख के प्रति फर्जी चिंता दिखाने की आड में ३७०/३५ए हटाने और लद्दाख को अलग केंद्र-शासित प्रदेश बनाने का विरोध कर रही घाटी की पार्टियों पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) की तो जमकर पोल खोली ही, कॉन्ग्रेस की २००८ की राज्य सरकार से लेकर के पूर्व-प्रधानमंत्री नेहरू तक को अपने लपेटे में लिया ! उनके भाषण की खुद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर तारीफ की !
अपने भाषण में नामग्याल ने कई महत्वपूर्ण बिंदु गिनाए ! उन्होंने शुरूआत पूर्व-प्रधानमंत्री नेहरू पर तंज कसते हुए की। उन्होंने कहा कि ७० साल से लद्दाख को कश्मीर के साथ रखनेवालों को वहाँ की स्थानीय संस्कृति, वहाँ की सभ्यता, वहाँ की आकांक्षाओं के बारे में ज्ञान नहीं था; उनके लिए तो यह बंजर भूमि थी जिस पर घास का तिनका भी नहीं उगता ! मालूम हो कि, अक्साई चिन पर चीन के कब्जे पर पंडित नेहरू ने संसद में कहा था कि, अरुणाचल और लद्दाख के पहाडों पर तो एक पत्ता घास का भी नहीं उगता, तो ऐसे में उनकी समझ में नहीं आ रहा कि, उसके पीछे संसद का कीमती समय बर्बाद करने का क्या मतलब है ?
नामग्याल ने कहा कि, लद्दाख के लोगों ने शुरू से ही सरकार को बता दिया था कि, उन्हें कश्मीर के अलावा किसी भी और तरीके से देश में रहना मंजूर है- भले ही वह केंद्र-शासित प्रदेश (UT) के रूप में हो ! हिंदी में बोल रहे नामग्याल ने कहा कि, हिंदुस्तान का हिस्सा बने रहने के लिए ही लद्दाख ने ७० साल युटी बनने की लडाई लडी, लेकिन पिछली सरकारों ने लद्दाख को 'फेंककर' रखा !
मोदी सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर लग रहे 'लोकतंत्र की हत्या' के आरोप के जवाब में नामग्याल ने पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेसद्वारा लद्दाख में बार-बार की गई लोकतंत्र की हत्याएँ गिनाईं ! उन्होंने बताया कि, समूचा लद्दाख अपने लिए युटी का दर्जा चाहता है ! उन्होंने बताया कि, कैसे तत्कालीन गृह-मंत्री (अब रक्षा-मंत्री) राजनाथ सिंह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ कश्मीर आने पर गृह सचिव को साथ लेकर लद्दाख गए और वहाँ हर आस्था और पंथ- हिन्दू महासभा, बौद्ध काउन्सिल, ईसाई और मुस्लिम संगठनों- ने युटी के दर्जे की ही माँग की !
नामग्याल ने याद दिलाया कि, कैसे घाटी की पार्टियों पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने तत्कालीन लेह जिलाध्यक्षों को केवल इसलिए पार्टी से बर्खास्त कर दिया कि उन दोनों ने अपने इलाके के लोगों की माँग का सम्मान करते हुए युटी की माँग के ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे ! उन्होंने कहा,
विपक्ष ने युटी बनने में करगिल की कथित असहमति का जिक्र किया था। इस पर नामग्याल ने उन्हें आडे हाथों लेते हुए कहा कि, वे सदन को भ्रमित कर रहे हैं ! बकौल नामग्याल, "मैं करगिल से चुन के आता हूँ ! मैं गर्व से कहता हूँ कि, करगिलवालों ने युटी के ही लिए वोट दिया था ! " उन्होंने बताया कि, करगिल के भाजपा घोषणापत्र में युटी बनाने का वादा २०१४ में सबसे ऊपर था। लेकिन जब वह २०१४ में हो नहीं पाया तो २०१४-१९ में भाजपा ने लद्दाख के युटी बनने के फायदे एक-एक घर जाकर समझाए। इसी के चलते लद्दाख संसदीय सीट पर भाजपा को आजादी के इतिहास की रिकॉर्ड-तोड जीत हासिल हुई !
उन्होंने विपक्ष पर करगिल से पूरी तरह अनभिज्ञ होने का भी आरोप लगाया ! "ये सिर्फ एक रोड और छोटा-से मार्केट को कारगिल समझ बैठे हैं ! " उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि, अगर असली करगिल देखना है तो जन्स्कार, वाखा, मुलबेक, शर्गोल, आर्यन घाटी आदि जगहों पर जाना चाहिए। ७०% भू-भाग के लोग निर्णय का स्वागत करते हैं !
कुछ छिटपुट विरोध कर रहीं आवाजों के बारे में भी उन्होंने पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा कि, जो लोग करगिल में अशांति की बात कर रहे हैं, असल में वही लोग फोन कर के अशांति पैदा करवा रहे हैं ! जो जमीन पर उनके हुक्म का पालन कर रहे हैं, वे नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं ! उन्हें इनकी (पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेस) बातों पर यकीन करने की बजाय खुद के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए !
'बराबरी' और सेक्युलरिज्म के मुद्दे पर भी पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेस को घेरते हुए नामग्याल ने कई खुलासे किए ! उन्होंने लद्दाख के साथ हुए सौतेले व्यवहार का विवरण पेश किया। उन्होंने बताया कि, लद्दाख के नाम पर केंद्र सरकार से लिया जा रहा पैसा कश्मीर में खर्च हो जाता है, लद्दाख नहीं पहुँचता ! कश्मीर की दो राजधानियों, दो सचिवालयों में कितने लद्दाखी हैं ? , उन्होंने पूछा। नामग्याल ने दावा किया कि, अगर पिछली सरकारें १,००० नौकरियों का निर्मांण करतीं थीं, तो उनमें से १० भी लद्दाख के हिस्से में नहीं आती थीं !
उन्होंने और भी उदाहरण दिए। २०११ में तत्कालीन कॉन्ग्रेस-यूपीए की केंद्र सरकार ने कश्मीर को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय दिया। बहुत लड-झगड कर जम्मू को भी एक मिल गया। लेकिन, बकौल तत्कालीन छात्रसंघ नेता नामग्याल, माथे पर काली पट्टियाँ बाँध कर प्रदर्शन करने के बाद भी लद्दाख को केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं मिला। वह अंत में जाकर मोदी सरकार ने दिया !
उन्होंने याद दिलाया कि, २००८ में सरकार बनाने पर कॉन्ग्रेस ने कश्मीर में ४ नए जिले बनाए। जम्मू को अपने लिए ४ नए जिले लड-झगडकर लेने पडे ! लेकिन लद्दाख को एक भी नहीं मिला !
भाषा के मुद्दे पर उन्होंने याद दिलाया कि, कोई तय, मानक लिपि न होने के बाद भी कश्मीरी भाषा को मान्यता मिल गई ! जम्मू के आंदोलन के बाद डोगरी को भी मान्यता दे दी गई ! नामग्याल ने पूछा कि, लद्दाख की भाषा 'बोटी' को भी मान्यता क्यों नहीं दी गई ?
उन्होंने विपक्ष को इस पर भी आडे हाथों लिया कि, विपक्ष 'गर्व से' दावा करता है कि ३७० के चलते कभी बौद्ध-बहुसंख्य लद्दाख आज मुस्लिम-बहुल इलाका बन गया है। नामग्याल ने आरोप लगाया कि, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेस ने ३७० का दुरुपयोग लद्दाख के बौद्धों को खत्म करने के लिए किया। विपक्ष के जनसांख्यिकीय बदलाव की 'आशंका' और सेक्युलरिज्म के मुद्दे पर उन्होंने लद्दाख के बौद्धों और घाटी के कश्मीरी पंडितों का जिक्र करते हुए पूछा कि, क्या यही विपक्ष का 'सेक्युलरिज्म' है ?
अपने पूरे भाषण में नामग्याल ने 'दो परिवारों'- पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अब्दुल्ला-मुफ्ती परिवारों की कई बार पोल-पट्टी खोली ! उन्होंने शुरू में ही नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद मसूदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, वे (मसूदी) कह रहे हैं कि, इसपर विचार होना चाहिए कि ३७० जाने से किस चीज का नुकसान होगा; केवल २ परिवारों की रोजी-रोटी का ! इसपर मसूदी को भी झेंप कर मुस्कुराना पडा। इसके अलावा गृह-मंत्री अमित शाह समेत सभी भाजपा सांसदों ने मेजें थपथपा कर इसका समर्थन किया !
फिर इसके कुछ देर बाद उन्होंने कश्मीर पर "शासन नहीं, राज करनेवाले" दो परिवारों को फिर आडे हाथों लेते हुए उनपर लद्दाख- और करगिल-रूपी दो भाइयों को आपस में लडवाने का भी आरोप लगाया ! बकौल नामग्याल, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने करगिल को बौद्ध-बहुल लद्दाख से काट कर जानबूझकर मुस्लिम-बहुल इलाकों से साथ एक जिले में जोड दिया !
उन्होंने कटाक्ष यह भी किया कि, ये दोनों परिवार कश्मीर को अपने बाप की जागीर समझ बैठे थे ! इस पर सभी भाजपा सदस्यों की मेजों के थपथपाने से सदन गूँज उठा ! उन्होंने कहा,
भाजपा के पितृ-पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नारे "एक देश में दो प्रधान, दो विधान, और दो निशान, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा" को याद करते हुए पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेस को याद दिलाया कि, लद्दाख स्वायत्तशासी पहाडी विकास काउन्सिल, जिसके अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है, २०११ में ही कश्मीर के दूसरे विधान-निशान-प्रधान को नकार कर हिंदुस्तान के झंडे और चिह्न को आत्मसात कर चुका है ! लद्दाख हिंदुस्तान का अभिन्न अंग बनना चाहता है !
अपने भाषण के अंत में मोदी-शाह और भाजपा सांसदों के अलावा बिल के समर्थन में वोट देने जा रहे गैर-भाजपाई दलों और सांसदों का भी धन्यवाद नामग्याल ने किया। साथ ही उन्होंने कहा कि,
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नामग्याल ने कहा कि; लद्दाख के लोगों ने शुरू से ही सरकार को बता दिया था कि, उन्हें कश्मीर के अलावा किसी भी और तरीके से देश में रहना मंजूर है भले ही वह केंद्र-शासित प्रदेश के रूप में हो ! लद्दाख के चौंतीस वर्षीय सांसद जाम्यांग त्सेरिंग नामग्याल ने अपने लोक सभा वक्तव्य में जम्मू-कश्मीर के विभाजन का विरोध करनेवालों की कलई खोल कर रख दी ! अपने भाषण में उन्होंने लद्दाख के प्रति फर्जी चिंता दिखाने की आड में तीन सौ सत्तर/पैंतीसए हटाने और लद्दाख को अलग केंद्र-शासित प्रदेश बनाने का विरोध कर रही घाटी की पार्टियों पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस की तो जमकर पोल खोली ही, कॉन्ग्रेस की दो हज़ार आठ की राज्य सरकार से लेकर के पूर्व-प्रधानमंत्री नेहरू तक को अपने लपेटे में लिया ! उनके भाषण की खुद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर तारीफ की ! अपने भाषण में नामग्याल ने कई महत्वपूर्ण बिंदु गिनाए ! उन्होंने शुरूआत पूर्व-प्रधानमंत्री नेहरू पर तंज कसते हुए की। उन्होंने कहा कि सत्तर साल से लद्दाख को कश्मीर के साथ रखनेवालों को वहाँ की स्थानीय संस्कृति, वहाँ की सभ्यता, वहाँ की आकांक्षाओं के बारे में ज्ञान नहीं था; उनके लिए तो यह बंजर भूमि थी जिस पर घास का तिनका भी नहीं उगता ! मालूम हो कि, अक्साई चिन पर चीन के कब्जे पर पंडित नेहरू ने संसद में कहा था कि, अरुणाचल और लद्दाख के पहाडों पर तो एक पत्ता घास का भी नहीं उगता, तो ऐसे में उनकी समझ में नहीं आ रहा कि, उसके पीछे संसद का कीमती समय बर्बाद करने का क्या मतलब है ? नामग्याल ने कहा कि, लद्दाख के लोगों ने शुरू से ही सरकार को बता दिया था कि, उन्हें कश्मीर के अलावा किसी भी और तरीके से देश में रहना मंजूर है- भले ही वह केंद्र-शासित प्रदेश के रूप में हो ! हिंदी में बोल रहे नामग्याल ने कहा कि, हिंदुस्तान का हिस्सा बने रहने के लिए ही लद्दाख ने सत्तर साल युटी बनने की लडाई लडी, लेकिन पिछली सरकारों ने लद्दाख को 'फेंककर' रखा ! मोदी सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर लग रहे 'लोकतंत्र की हत्या' के आरोप के जवाब में नामग्याल ने पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेसद्वारा लद्दाख में बार-बार की गई लोकतंत्र की हत्याएँ गिनाईं ! उन्होंने बताया कि, समूचा लद्दाख अपने लिए युटी का दर्जा चाहता है ! उन्होंने बताया कि, कैसे तत्कालीन गृह-मंत्री राजनाथ सिंह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ कश्मीर आने पर गृह सचिव को साथ लेकर लद्दाख गए और वहाँ हर आस्था और पंथ- हिन्दू महासभा, बौद्ध काउन्सिल, ईसाई और मुस्लिम संगठनों- ने युटी के दर्जे की ही माँग की ! नामग्याल ने याद दिलाया कि, कैसे घाटी की पार्टियों पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने तत्कालीन लेह जिलाध्यक्षों को केवल इसलिए पार्टी से बर्खास्त कर दिया कि उन दोनों ने अपने इलाके के लोगों की माँग का सम्मान करते हुए युटी की माँग के ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे ! उन्होंने कहा, विपक्ष ने युटी बनने में करगिल की कथित असहमति का जिक्र किया था। इस पर नामग्याल ने उन्हें आडे हाथों लेते हुए कहा कि, वे सदन को भ्रमित कर रहे हैं ! बकौल नामग्याल, "मैं करगिल से चुन के आता हूँ ! मैं गर्व से कहता हूँ कि, करगिलवालों ने युटी के ही लिए वोट दिया था ! " उन्होंने बताया कि, करगिल के भाजपा घोषणापत्र में युटी बनाने का वादा दो हज़ार चौदह में सबसे ऊपर था। लेकिन जब वह दो हज़ार चौदह में हो नहीं पाया तो दो हज़ार चौदह-उन्नीस में भाजपा ने लद्दाख के युटी बनने के फायदे एक-एक घर जाकर समझाए। इसी के चलते लद्दाख संसदीय सीट पर भाजपा को आजादी के इतिहास की रिकॉर्ड-तोड जीत हासिल हुई ! उन्होंने विपक्ष पर करगिल से पूरी तरह अनभिज्ञ होने का भी आरोप लगाया ! "ये सिर्फ एक रोड और छोटा-से मार्केट को कारगिल समझ बैठे हैं ! " उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि, अगर असली करगिल देखना है तो जन्स्कार, वाखा, मुलबेक, शर्गोल, आर्यन घाटी आदि जगहों पर जाना चाहिए। सत्तर% भू-भाग के लोग निर्णय का स्वागत करते हैं ! कुछ छिटपुट विरोध कर रहीं आवाजों के बारे में भी उन्होंने पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा कि, जो लोग करगिल में अशांति की बात कर रहे हैं, असल में वही लोग फोन कर के अशांति पैदा करवा रहे हैं ! जो जमीन पर उनके हुक्म का पालन कर रहे हैं, वे नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं ! उन्हें इनकी बातों पर यकीन करने की बजाय खुद के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए ! 'बराबरी' और सेक्युलरिज्म के मुद्दे पर भी पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेस को घेरते हुए नामग्याल ने कई खुलासे किए ! उन्होंने लद्दाख के साथ हुए सौतेले व्यवहार का विवरण पेश किया। उन्होंने बताया कि, लद्दाख के नाम पर केंद्र सरकार से लिया जा रहा पैसा कश्मीर में खर्च हो जाता है, लद्दाख नहीं पहुँचता ! कश्मीर की दो राजधानियों, दो सचिवालयों में कितने लद्दाखी हैं ? , उन्होंने पूछा। नामग्याल ने दावा किया कि, अगर पिछली सरकारें एक,शून्य नौकरियों का निर्मांण करतीं थीं, तो उनमें से दस भी लद्दाख के हिस्से में नहीं आती थीं ! उन्होंने और भी उदाहरण दिए। दो हज़ार ग्यारह में तत्कालीन कॉन्ग्रेस-यूपीए की केंद्र सरकार ने कश्मीर को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय दिया। बहुत लड-झगड कर जम्मू को भी एक मिल गया। लेकिन, बकौल तत्कालीन छात्रसंघ नेता नामग्याल, माथे पर काली पट्टियाँ बाँध कर प्रदर्शन करने के बाद भी लद्दाख को केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं मिला। वह अंत में जाकर मोदी सरकार ने दिया ! उन्होंने याद दिलाया कि, दो हज़ार आठ में सरकार बनाने पर कॉन्ग्रेस ने कश्मीर में चार नए जिले बनाए। जम्मू को अपने लिए चार नए जिले लड-झगडकर लेने पडे ! लेकिन लद्दाख को एक भी नहीं मिला ! भाषा के मुद्दे पर उन्होंने याद दिलाया कि, कोई तय, मानक लिपि न होने के बाद भी कश्मीरी भाषा को मान्यता मिल गई ! जम्मू के आंदोलन के बाद डोगरी को भी मान्यता दे दी गई ! नामग्याल ने पूछा कि, लद्दाख की भाषा 'बोटी' को भी मान्यता क्यों नहीं दी गई ? उन्होंने विपक्ष को इस पर भी आडे हाथों लिया कि, विपक्ष 'गर्व से' दावा करता है कि तीन सौ सत्तर के चलते कभी बौद्ध-बहुसंख्य लद्दाख आज मुस्लिम-बहुल इलाका बन गया है। नामग्याल ने आरोप लगाया कि, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेस ने तीन सौ सत्तर का दुरुपयोग लद्दाख के बौद्धों को खत्म करने के लिए किया। विपक्ष के जनसांख्यिकीय बदलाव की 'आशंका' और सेक्युलरिज्म के मुद्दे पर उन्होंने लद्दाख के बौद्धों और घाटी के कश्मीरी पंडितों का जिक्र करते हुए पूछा कि, क्या यही विपक्ष का 'सेक्युलरिज्म' है ? अपने पूरे भाषण में नामग्याल ने 'दो परिवारों'- पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अब्दुल्ला-मुफ्ती परिवारों की कई बार पोल-पट्टी खोली ! उन्होंने शुरू में ही नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद मसूदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, वे कह रहे हैं कि, इसपर विचार होना चाहिए कि तीन सौ सत्तर जाने से किस चीज का नुकसान होगा; केवल दो परिवारों की रोजी-रोटी का ! इसपर मसूदी को भी झेंप कर मुस्कुराना पडा। इसके अलावा गृह-मंत्री अमित शाह समेत सभी भाजपा सांसदों ने मेजें थपथपा कर इसका समर्थन किया ! फिर इसके कुछ देर बाद उन्होंने कश्मीर पर "शासन नहीं, राज करनेवाले" दो परिवारों को फिर आडे हाथों लेते हुए उनपर लद्दाख- और करगिल-रूपी दो भाइयों को आपस में लडवाने का भी आरोप लगाया ! बकौल नामग्याल, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने करगिल को बौद्ध-बहुल लद्दाख से काट कर जानबूझकर मुस्लिम-बहुल इलाकों से साथ एक जिले में जोड दिया ! उन्होंने कटाक्ष यह भी किया कि, ये दोनों परिवार कश्मीर को अपने बाप की जागीर समझ बैठे थे ! इस पर सभी भाजपा सदस्यों की मेजों के थपथपाने से सदन गूँज उठा ! उन्होंने कहा, भाजपा के पितृ-पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नारे "एक देश में दो प्रधान, दो विधान, और दो निशान, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा" को याद करते हुए पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कॉन्ग्रेस को याद दिलाया कि, लद्दाख स्वायत्तशासी पहाडी विकास काउन्सिल, जिसके अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है, दो हज़ार ग्यारह में ही कश्मीर के दूसरे विधान-निशान-प्रधान को नकार कर हिंदुस्तान के झंडे और चिह्न को आत्मसात कर चुका है ! लद्दाख हिंदुस्तान का अभिन्न अंग बनना चाहता है ! अपने भाषण के अंत में मोदी-शाह और भाजपा सांसदों के अलावा बिल के समर्थन में वोट देने जा रहे गैर-भाजपाई दलों और सांसदों का भी धन्यवाद नामग्याल ने किया। साथ ही उन्होंने कहा कि,
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सोलाना की मूल क्रिप्टोक्यूरेंसी SOL में अप्रत्याशित रूप से आया है मंदी का सप्ताह अब तक। अब तक इसे मिली काफी छूट से पता चलता है कि अब वापस आने का एक अच्छा समय हो सकता है। हालाँकि, यदि आप इसका इरादा रखते हैं डिस्काउंट सोलो खरीदें अपने वर्तमान स्तर पर, हो सकता है कि आप अभी के लिए पुनर्विचार करना चाहें और ऐसा क्यों है।
लैम्ब्डा मार्केट्स ने एक दिलचस्प अवलोकन की सूचना दी है, जो बताता है कि एसओएल अधिक दबाव का अनुभव करने वाला हो सकता है। निष्कर्षों के अनुसार, गुरुवार को लगभग 47.3 मिलियन SOL को बिना दांव के रखा जाएगा। प्रचलित धारणा यह है कि बिना दांव के एसओएल एक्सचेंजों पर अपना रास्ता खोज लेगा, जिससे बिक्री के दबाव की एक नई लहर शुरू हो जाएगी।
नया $सोल टेलीग्राम चैनल में पोस्ट किया गया अलर्ट।
~$845एमएम अमरीकी डालर मूल्य का सोलाना अब से 21 घंटे के समय में अचल होना है।
यदि बिना दांव वाली पूरी एसओएल बेची जाती है, तो हमें 890 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के बिकवाली दबाव की उम्मीद करनी चाहिए। दूसरों को हतोत्साहित करने के लिए यह काफी है एसओएल धारक कम कीमतों पर वापस खरीदने की उम्मीद में अपनी एसओएल होल्डिंग्स को ऑफलोड करने के लिए। दूसरे शब्दों में, हम एक्सचेंजों में $ 1 बिलियन से अधिक मूल्य के बिक्री दबाव को प्रवाहित होते हुए देख सकते हैं।
क्या SOL सांडों को दबाया जाएगा?
सोलाना की केवल 7 दिनों में मार्केट कैप 7.7 बिलियन डॉलर तक गिर गया। अगले 24 घंटों में एसओएल के बिना दांव पर लगाए जाने की उम्मीद है, जो इस सप्ताह हमारे द्वारा देखे गए बिकवाली के दबाव के एक छोटे से अंश का प्रतिनिधित्व करता है।
फिर भी, आने वाले बिकवाली के दबाव को अपने वर्तमान निम्न स्तर पर मांग से आगे निकलना होगा। दिलचस्प बात यह है कि एसओएल के मार्केट कैप से पता चला है कि प्रेस समय में पिछले कुछ घंटों में 1.2 बिलियन डॉलर से अधिक का खरीदारी दबाव था।
जैसा कि अपेक्षित था, बाजार पूंजीकरण में तेज गिरावट के परिणामस्वरूप एसओएल के मूल्य में समान रूप से तेज गिरावट आई।
प्रेस समय के अनुसार, यह $ 18.57 पर कारोबार कर रहा था - 2022 का एक नया निचला स्तर। तेजी से रिकवरी की उम्मीद इस तथ्य पर आधारित है कि यह अब ओवरसोल्ड क्षेत्र में है।
पिछले 24 घंटों में भी सोलाना का कारोबार अपने उच्चतम साप्ताहिक और मासिक स्तर पर पहुंच गया। हालाँकि, इसने अपने वर्तमान उच्च स्तर को प्राप्त करने से पहले थोड़ी गिरावट दर्ज की।
डिप बिकवाली के दबाव में कमी और डिप को खरीदने वाले बुलिश वॉल्यूम ट्रेडर्स की वापसी का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह समझा सकता है कि एसओएल की कीमत 18 डॉलर मूल्य सीमा के भीतर क्यों मँडराती है।
एसओएल के सामाजिक प्रभुत्व ने भी इसी समयावधि में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की। इसका मतलब है कि सोलाना अब बहुत अधिक ध्यान आकर्षित कर रहा है और निवेशक सकारात्मक या नकारात्मक समाचारों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
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सोलाना की मूल क्रिप्टोक्यूरेंसी SOL में अप्रत्याशित रूप से आया है मंदी का सप्ताह अब तक। अब तक इसे मिली काफी छूट से पता चलता है कि अब वापस आने का एक अच्छा समय हो सकता है। हालाँकि, यदि आप इसका इरादा रखते हैं डिस्काउंट सोलो खरीदें अपने वर्तमान स्तर पर, हो सकता है कि आप अभी के लिए पुनर्विचार करना चाहें और ऐसा क्यों है। लैम्ब्डा मार्केट्स ने एक दिलचस्प अवलोकन की सूचना दी है, जो बताता है कि एसओएल अधिक दबाव का अनुभव करने वाला हो सकता है। निष्कर्षों के अनुसार, गुरुवार को लगभग सैंतालीस.तीन मिलियन SOL को बिना दांव के रखा जाएगा। प्रचलित धारणा यह है कि बिना दांव के एसओएल एक्सचेंजों पर अपना रास्ता खोज लेगा, जिससे बिक्री के दबाव की एक नई लहर शुरू हो जाएगी। नया $सोल टेलीग्राम चैनल में पोस्ट किया गया अलर्ट। ~आठ सौ पैंतालीस डॉलरएमएम अमरीकी डालर मूल्य का सोलाना अब से इक्कीस घंटाटे के समय में अचल होना है। यदि बिना दांव वाली पूरी एसओएल बेची जाती है, तो हमें आठ सौ नब्बे मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के बिकवाली दबाव की उम्मीद करनी चाहिए। दूसरों को हतोत्साहित करने के लिए यह काफी है एसओएल धारक कम कीमतों पर वापस खरीदने की उम्मीद में अपनी एसओएल होल्डिंग्स को ऑफलोड करने के लिए। दूसरे शब्दों में, हम एक्सचेंजों में एक डॉलर बिलियन से अधिक मूल्य के बिक्री दबाव को प्रवाहित होते हुए देख सकते हैं। क्या SOL सांडों को दबाया जाएगा? सोलाना की केवल सात दिनों में मार्केट कैप सात.सात बिलियन डॉलर तक गिर गया। अगले चौबीस घंटाटों में एसओएल के बिना दांव पर लगाए जाने की उम्मीद है, जो इस सप्ताह हमारे द्वारा देखे गए बिकवाली के दबाव के एक छोटे से अंश का प्रतिनिधित्व करता है। फिर भी, आने वाले बिकवाली के दबाव को अपने वर्तमान निम्न स्तर पर मांग से आगे निकलना होगा। दिलचस्प बात यह है कि एसओएल के मार्केट कैप से पता चला है कि प्रेस समय में पिछले कुछ घंटों में एक.दो बिलियन डॉलर से अधिक का खरीदारी दबाव था। जैसा कि अपेक्षित था, बाजार पूंजीकरण में तेज गिरावट के परिणामस्वरूप एसओएल के मूल्य में समान रूप से तेज गिरावट आई। प्रेस समय के अनुसार, यह अट्ठारह दशमलव सत्तावन डॉलर पर कारोबार कर रहा था - दो हज़ार बाईस का एक नया निचला स्तर। तेजी से रिकवरी की उम्मीद इस तथ्य पर आधारित है कि यह अब ओवरसोल्ड क्षेत्र में है। पिछले चौबीस घंटाटों में भी सोलाना का कारोबार अपने उच्चतम साप्ताहिक और मासिक स्तर पर पहुंच गया। हालाँकि, इसने अपने वर्तमान उच्च स्तर को प्राप्त करने से पहले थोड़ी गिरावट दर्ज की। डिप बिकवाली के दबाव में कमी और डिप को खरीदने वाले बुलिश वॉल्यूम ट्रेडर्स की वापसी का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह समझा सकता है कि एसओएल की कीमत अट्ठारह डॉलर मूल्य सीमा के भीतर क्यों मँडराती है। एसओएल के सामाजिक प्रभुत्व ने भी इसी समयावधि में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की। इसका मतलब है कि सोलाना अब बहुत अधिक ध्यान आकर्षित कर रहा है और निवेशक सकारात्मक या नकारात्मक समाचारों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
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देवास/ मुरैना। मध्यप्रदेश में मासूमों से रेप के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। देवास में 10 साल की बच्ची से रेप और हत्या के आरोपी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। इधर मुरैना में एक सौतेले पिता ने हैवानियत की हद पार करते हुए 11 साल की बेटी को हवस का शिकार बनाया।
प्रदीप सिंह ठाकुर, देवास। 10 वर्ष की मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय खातेगांव ने मृत्युदंड की सजा सुनाई हैं। यह सनसनीखेज घटना 7 नवंबर 2021 की हैं। आरोपी गोलू उर्फ नरेंद्र बलाई ने 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद गमछे से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी थी और शव को एक बोरी में भरकर छिपा दिया था। पुलिस ने अगले दिन प्रकरण दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही इस मामले में आरोपी को फांसी की सजा तक पहुंचाने में पुलिस की अहम भूमिका रही है।
सहायक लोक अभियोजन अधिकारी संजय सुनहरे ने बताया कि आरोपी गोलू उर्फ नरेंद्र पर धारा 302, 201, 376, 376ए, बी, 376(3) भादवि 5एम/6 पॉक्सो एक्ट के मामले की न्यायालय में सुनवाई की गई। न्यायाधीश सरिता माधवानी ने आरोपी को मृत्यु दंड की सजा सुनाई है।
मनोज उपाध्याय, मुरैना। मध्यप्रदेश के मुरैना में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां एक बर्तन व्यवसायी ने अपनी 11 साल की सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म किया। मां ने जब इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे डंडों से बुरी तरह पीटा और दोनों को जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने मां के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है।
शहर के सदर बाजार इलाके के प्रतिष्ठित बर्तन दुकान संचालक मुरैना टाकीज के पास में रहता है। साथ में उसकी 30 साल की दूसरी पत्नी और उसकी 11 साल की बेटी भी रहती है। चार दिन पहले सौतेली पिता ने बेटी साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। इसी दौरान उसकी मां वहां आ गई और पति की गंदी हरकत पर हंगामा कर दिया। इसके बाद आरोपी ने डंडे से पत्नी को बुरी तरह पीटा और किसी को बताने पर मां-बेटी को खत्म करने की धमकी दी।
पति की धमकी से चार दिन तक पीड़िता और उसकी मां चुप रही, लेकिन गुरुवार की सुबह जब महिला के मायके वाले मिलने आए तो उसका धैर्य टूट गया और बेटी के साथ पति द्वारा की गई हरकत को बता दिया। इसके बाद थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने बताया कि बीते छह माह से आरोपी उसे अपनी हवस का शिकार बना रहा था। फिलहाल पुलिस ने आरोपी पर दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, मारपीट और धमकाने की धाराओं में केस दर्ज किया है।
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देवास/ मुरैना। मध्यप्रदेश में मासूमों से रेप के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। देवास में दस साल की बच्ची से रेप और हत्या के आरोपी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। इधर मुरैना में एक सौतेले पिता ने हैवानियत की हद पार करते हुए ग्यारह साल की बेटी को हवस का शिकार बनाया। प्रदीप सिंह ठाकुर, देवास। दस वर्ष की मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय खातेगांव ने मृत्युदंड की सजा सुनाई हैं। यह सनसनीखेज घटना सात नवंबर दो हज़ार इक्कीस की हैं। आरोपी गोलू उर्फ नरेंद्र बलाई ने दस वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद गमछे से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी थी और शव को एक बोरी में भरकर छिपा दिया था। पुलिस ने अगले दिन प्रकरण दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही इस मामले में आरोपी को फांसी की सजा तक पहुंचाने में पुलिस की अहम भूमिका रही है। सहायक लोक अभियोजन अधिकारी संजय सुनहरे ने बताया कि आरोपी गोलू उर्फ नरेंद्र पर धारा तीन सौ दो, दो सौ एक, तीन सौ छिहत्तर, तीन सौ छिहत्तरए, बी, तीन सौ छिहत्तर भादवि पाँचएम/छः पॉक्सो एक्ट के मामले की न्यायालय में सुनवाई की गई। न्यायाधीश सरिता माधवानी ने आरोपी को मृत्यु दंड की सजा सुनाई है। मनोज उपाध्याय, मुरैना। मध्यप्रदेश के मुरैना में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां एक बर्तन व्यवसायी ने अपनी ग्यारह साल की सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म किया। मां ने जब इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे डंडों से बुरी तरह पीटा और दोनों को जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने मां के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। शहर के सदर बाजार इलाके के प्रतिष्ठित बर्तन दुकान संचालक मुरैना टाकीज के पास में रहता है। साथ में उसकी तीस साल की दूसरी पत्नी और उसकी ग्यारह साल की बेटी भी रहती है। चार दिन पहले सौतेली पिता ने बेटी साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। इसी दौरान उसकी मां वहां आ गई और पति की गंदी हरकत पर हंगामा कर दिया। इसके बाद आरोपी ने डंडे से पत्नी को बुरी तरह पीटा और किसी को बताने पर मां-बेटी को खत्म करने की धमकी दी। पति की धमकी से चार दिन तक पीड़िता और उसकी मां चुप रही, लेकिन गुरुवार की सुबह जब महिला के मायके वाले मिलने आए तो उसका धैर्य टूट गया और बेटी के साथ पति द्वारा की गई हरकत को बता दिया। इसके बाद थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने बताया कि बीते छह माह से आरोपी उसे अपनी हवस का शिकार बना रहा था। फिलहाल पुलिस ने आरोपी पर दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, मारपीट और धमकाने की धाराओं में केस दर्ज किया है।
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विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही देहरादून की रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उत्तराखंड में विकास की गंगा बहती रहेगी यदि राज्य और केंद्र में डबल इंजन की सरकार होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस अंदाज में विकास की तस्वीर दिखाकर सियासी दांव चला, उसने साफ कर दिया कि प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा डबल इंजन के काम से ही चुनावी संग्राम लड़ेगी।
विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही इस रैली में पीएम मोदी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उत्तराखंड में विकास की गंगा बहती रहेगी यदि राज्य और केंद्र में डबल इंजन की सरकार होगी।
भाषण की शुरुआत गढ़वाली बोली से करके उन्होंने देवभूमि से अपनत्व को दर्शाने और उपस्थित लोगों के दिल में उतरने की कोशिश की। 18 हजार करोड़ की योजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यक्रम को उन्होंने डबल इंजन के महत्व से जोड़ा और पांच साल पहले चुनाव के समय में परेड ग्राउंड से कही गई उस पुरानी बात का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी पहाड़ के काम आने का वादा किया था। मोदी ने गढ़वाली में आश्वस्त किया, उत्तराखंड का पानी और जवानी उत्तराखंड के काम ही आली।
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विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही देहरादून की रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उत्तराखंड में विकास की गंगा बहती रहेगी यदि राज्य और केंद्र में डबल इंजन की सरकार होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस अंदाज में विकास की तस्वीर दिखाकर सियासी दांव चला, उसने साफ कर दिया कि प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा डबल इंजन के काम से ही चुनावी संग्राम लड़ेगी। विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही इस रैली में पीएम मोदी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उत्तराखंड में विकास की गंगा बहती रहेगी यदि राज्य और केंद्र में डबल इंजन की सरकार होगी। भाषण की शुरुआत गढ़वाली बोली से करके उन्होंने देवभूमि से अपनत्व को दर्शाने और उपस्थित लोगों के दिल में उतरने की कोशिश की। अट्ठारह हजार करोड़ की योजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यक्रम को उन्होंने डबल इंजन के महत्व से जोड़ा और पांच साल पहले चुनाव के समय में परेड ग्राउंड से कही गई उस पुरानी बात का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी पहाड़ के काम आने का वादा किया था। मोदी ने गढ़वाली में आश्वस्त किया, उत्तराखंड का पानी और जवानी उत्तराखंड के काम ही आली।
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उत्तर प्रदेश के रायबरेली में महिला ने पहले डंडे से पति को पीटा फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। जानकारी के मुताबिक महिला का पति शराब पीने का आदी था और उसके साथ मारपीट करता था। रोज-रोज की बेइज्जती से तंग आकर उसने अपने पति को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मृतक की पत्नी अन्नू ब्यूटी पार्लर चलाकर बच्चों का पालन पोषण करती थी।
यह घटना बछरावां थाना क्षेत्र के अंतर्गत सेहगों पश्चिम गांव की है। 15 दिसंबर को अतुल देर रात शराब पीकर आया और पत्नी को पीटने लगा। इसी बीच अन्नू ने मौका पाकर पलंग की पाया उठाया और उसके सिर पर मार दिया, जिससे वह बेहोश हो गया फिर गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया। बताया जा रहा है कि हत्या के बाद महिला पति के शव के साथ आराम से सो गई। सुबह उठकर बच्चों को हिदायत दी कि पापा को जगाना नहीं अगर वो उठ गए तो फिर मारेंगे और वह अपने ब्यूटी पार्लर चली गई। दिनभर ब्यूटी पार्लर पर काम किया। शाम को लौटी और खाना बनाया। बच्चों को खिलाकर उन्हें सुला दिया। रात में जब बच्चे सो गए और मोहल्ले में सन्नाटा हुआ तो उसने शव को अकेले ही खींचा और गेट पर फेंक कर सो गई। सुबह खुद ही हल्ला मचाया और कहा कि रात में शराब पीकर आए और गिर कर मर गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने आस पड़ोस और परिजनों के बयान दर्ज किए, लेकिन मृतक की पत्नी के बयानों में पुलिस को कई खामियां नजर आईं। शक के बिना पर उसे हिरासत में लिया और सख्ती से पूछताछ की गई। तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस ने पति की हत्या के आरोप में अन्नु को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वहीं इस मामले पर ज्यादा जानकारी देते हुए अपर पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक की डेड बॉडी उसके घर के बाहर पड़ी हुई है। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर बछरावां सीओ महाराजगंज और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। आस पड़ोस और मृतक के परिजनों के बयान लेकिन एफआईआर दर्ज की। इस मामले को सुलझाने के लिए मुखबिर और सर्विलांस की मदद ली गई और पता चला कि मृतक की हत्या उसकी पत्नी ने ही की है। आरोपी महिला अन्नु ने पुलिस को बताया कि वो गांव में ब्यूटी पॉर्लर चलाती है। उसका पति शराब पीने का आदी था और रोज उसके साथ मारपीट कर सबके सामने बेइज्जत करता था। साथ ही शराब पीने के लिए उससे बार-बार पैसे मांगा करता था। रोज-रोज की किचकिच से तंग आकर उसने पहले लकड़ी के डंडे से उसे पीटा फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को घर पर छोड़कर अपने ब्यूटी पार्लर चली गई. जब बच्चों ने पूछा कि पापा उठ क्यों नहीं रहे हैं इस पर वह बोली कि पापा को सोने दो नहीं तो वो उठकर फिर मारेंगे। 14 दिसंबर को दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। देर रात सभी के सोने के बाद अन्नु ने पति की डेड बॉडी को उठाया और किसी तहस घर के बाहर फेंक कर सोने चली गई। उसने यह सोचकर ऐसा किया कि उसका पति शराब पीकर अक्सर गिर जाता है। ऐसे में सभी को यह लगेगा कि उसे किसी बाहरी शख्स ने मारा है इससे वो बच जाएगी, लेकिन पुलिस ने गहराई से जांच की और असली कातिल तक पहुंच गई। पुलिस अधिक्षक द्वारा जांच टीम को 10 हजार रुपये इनाम की घोषणा की।
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उत्तर प्रदेश के रायबरेली में महिला ने पहले डंडे से पति को पीटा फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। जानकारी के मुताबिक महिला का पति शराब पीने का आदी था और उसके साथ मारपीट करता था। रोज-रोज की बेइज्जती से तंग आकर उसने अपने पति को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मृतक की पत्नी अन्नू ब्यूटी पार्लर चलाकर बच्चों का पालन पोषण करती थी। यह घटना बछरावां थाना क्षेत्र के अंतर्गत सेहगों पश्चिम गांव की है। पंद्रह दिसंबर को अतुल देर रात शराब पीकर आया और पत्नी को पीटने लगा। इसी बीच अन्नू ने मौका पाकर पलंग की पाया उठाया और उसके सिर पर मार दिया, जिससे वह बेहोश हो गया फिर गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया। बताया जा रहा है कि हत्या के बाद महिला पति के शव के साथ आराम से सो गई। सुबह उठकर बच्चों को हिदायत दी कि पापा को जगाना नहीं अगर वो उठ गए तो फिर मारेंगे और वह अपने ब्यूटी पार्लर चली गई। दिनभर ब्यूटी पार्लर पर काम किया। शाम को लौटी और खाना बनाया। बच्चों को खिलाकर उन्हें सुला दिया। रात में जब बच्चे सो गए और मोहल्ले में सन्नाटा हुआ तो उसने शव को अकेले ही खींचा और गेट पर फेंक कर सो गई। सुबह खुद ही हल्ला मचाया और कहा कि रात में शराब पीकर आए और गिर कर मर गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने आस पड़ोस और परिजनों के बयान दर्ज किए, लेकिन मृतक की पत्नी के बयानों में पुलिस को कई खामियां नजर आईं। शक के बिना पर उसे हिरासत में लिया और सख्ती से पूछताछ की गई। तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस ने पति की हत्या के आरोप में अन्नु को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं इस मामले पर ज्यादा जानकारी देते हुए अपर पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक की डेड बॉडी उसके घर के बाहर पड़ी हुई है। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर बछरावां सीओ महाराजगंज और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। आस पड़ोस और मृतक के परिजनों के बयान लेकिन एफआईआर दर्ज की। इस मामले को सुलझाने के लिए मुखबिर और सर्विलांस की मदद ली गई और पता चला कि मृतक की हत्या उसकी पत्नी ने ही की है। आरोपी महिला अन्नु ने पुलिस को बताया कि वो गांव में ब्यूटी पॉर्लर चलाती है। उसका पति शराब पीने का आदी था और रोज उसके साथ मारपीट कर सबके सामने बेइज्जत करता था। साथ ही शराब पीने के लिए उससे बार-बार पैसे मांगा करता था। रोज-रोज की किचकिच से तंग आकर उसने पहले लकड़ी के डंडे से उसे पीटा फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को घर पर छोड़कर अपने ब्यूटी पार्लर चली गई. जब बच्चों ने पूछा कि पापा उठ क्यों नहीं रहे हैं इस पर वह बोली कि पापा को सोने दो नहीं तो वो उठकर फिर मारेंगे। चौदह दिसंबर को दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। देर रात सभी के सोने के बाद अन्नु ने पति की डेड बॉडी को उठाया और किसी तहस घर के बाहर फेंक कर सोने चली गई। उसने यह सोचकर ऐसा किया कि उसका पति शराब पीकर अक्सर गिर जाता है। ऐसे में सभी को यह लगेगा कि उसे किसी बाहरी शख्स ने मारा है इससे वो बच जाएगी, लेकिन पुलिस ने गहराई से जांच की और असली कातिल तक पहुंच गई। पुलिस अधिक्षक द्वारा जांच टीम को दस हजार रुपये इनाम की घोषणा की।
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मध्य प्रदेश के सागर जिले का वीडियो सामने आया है जिसमें शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने वैलेंटाइन डे के खिलाफ विरोध जताते हुए अपनी लाठियों को तैयार करते हुए दिख रहे है साथ उन्होंने लाठियों पर तेल और केसरिया रंग लगाया है। इस वीडियो में शिव सैनिक लाठी की पूजा करने के साथ ही मंत्र का उच्चारण करते हुए और नारे लगाते हुए दिख रहे हैं। वे नारे लगा रहे हैं, जहां मिलेंगे बिट्टू-सोना, तोड़ देंगे कोना-कोना।
वहीं शिवसेना के उप प्रमुख पप्पू तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा,में वैलेंटाइन डे को हम भारत का पर्व नहीं मानते. विदेशी पर्व की भारत में कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए शिवसैनिक पहलवान बब्बा मंदिर में सरसों का तेल और चमेली का तेल डंडों में पिलाकर उन अश्लील हरकत करने वाले लव जिहादी तत्वों को चेतावनी देते हैं कि अगर वो अश्लील हरकत करते पाए गए. हमारी बहन बेटियों के साथ अनैतिक कृत्यों में पाए गए तो हम आवेदन भी कर चुके हैं, निवेदन भी कर चुके हैं। अब 14 तारीख को वैलेंटाइन डे के दिन डंडे का दनादन रहेगा. हमारे पूरे शिवसैनिक जिला प्रमुख दीपक लोदी के नेतृत्व में शहर के पब्लिक स्पॉट, प्रेमी स्पॉट, राजघाट, रेस्टोरेंट, पार्क जहां-जहां भी प्रेमी युगल अश्लील हरकत करते पाए जाते हैं। वहां पर शिवसैनिक डंडे के दम पर उस पाश्चात्य संस्कृति का विरोध करते आए हैं। उसी क्रम में इस साल भी शिवसैनिकों ने सरसों, चमेली का तेल डंडों में पिलाकर वैलेंटाइन डे का विरोध करने का निर्णय लिया है।
बता दें वैलेंटाइन को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन किये जा रहे कहीं कार्ड जलाये जा रहे तो पुलिस को इसके खिलाफ विज्ञापन भी सौपा गया है। इन सबके साथ ही बीतें दिनों केंद्र सरकार के ही एक मंत्रालय एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) ने एक पत्र जारी करके 14 फरवरी को काउ हग डे मनाने की अपील की थी। हालांकि अगले ही दिन उस अपील को वापस ले लिया गया था।
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मध्य प्रदेश के सागर जिले का वीडियो सामने आया है जिसमें शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने वैलेंटाइन डे के खिलाफ विरोध जताते हुए अपनी लाठियों को तैयार करते हुए दिख रहे है साथ उन्होंने लाठियों पर तेल और केसरिया रंग लगाया है। इस वीडियो में शिव सैनिक लाठी की पूजा करने के साथ ही मंत्र का उच्चारण करते हुए और नारे लगाते हुए दिख रहे हैं। वे नारे लगा रहे हैं, जहां मिलेंगे बिट्टू-सोना, तोड़ देंगे कोना-कोना। वहीं शिवसेना के उप प्रमुख पप्पू तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा,में वैलेंटाइन डे को हम भारत का पर्व नहीं मानते. विदेशी पर्व की भारत में कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए शिवसैनिक पहलवान बब्बा मंदिर में सरसों का तेल और चमेली का तेल डंडों में पिलाकर उन अश्लील हरकत करने वाले लव जिहादी तत्वों को चेतावनी देते हैं कि अगर वो अश्लील हरकत करते पाए गए. हमारी बहन बेटियों के साथ अनैतिक कृत्यों में पाए गए तो हम आवेदन भी कर चुके हैं, निवेदन भी कर चुके हैं। अब चौदह तारीख को वैलेंटाइन डे के दिन डंडे का दनादन रहेगा. हमारे पूरे शिवसैनिक जिला प्रमुख दीपक लोदी के नेतृत्व में शहर के पब्लिक स्पॉट, प्रेमी स्पॉट, राजघाट, रेस्टोरेंट, पार्क जहां-जहां भी प्रेमी युगल अश्लील हरकत करते पाए जाते हैं। वहां पर शिवसैनिक डंडे के दम पर उस पाश्चात्य संस्कृति का विरोध करते आए हैं। उसी क्रम में इस साल भी शिवसैनिकों ने सरसों, चमेली का तेल डंडों में पिलाकर वैलेंटाइन डे का विरोध करने का निर्णय लिया है। बता दें वैलेंटाइन को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन किये जा रहे कहीं कार्ड जलाये जा रहे तो पुलिस को इसके खिलाफ विज्ञापन भी सौपा गया है। इन सबके साथ ही बीतें दिनों केंद्र सरकार के ही एक मंत्रालय एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने एक पत्र जारी करके चौदह फरवरी को काउ हग डे मनाने की अपील की थी। हालांकि अगले ही दिन उस अपील को वापस ले लिया गया था।
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अगर आप ट्रेन में मोबाइल चार्जिंग पर लगातार सो गए हैं और ऐसी स्थिति में आपका मोबाइल चोरी हो जाए तो इसके लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं होगा। आपको अपने फोन की रक्षा खुद करनी होगी। यह फैसला हाल ही में भोपाल उपभोक्ता आयोग ने सुनाया। फैसले में आयोग ने कहा कि यदि परिवादी जाग रहा था, तो उसने चार्जिंग पर लगा मोबाइल किसी व्यक्ति के द्वारा ले जाते हुए क्यों नहीं देखा। मोबाइल ऐसी वस्तु है जो आसानी से पॉकेट में सुरक्षित रखी जा सकती है। चार्जिंग में लगाए जाने पर मोबाइल की सुरक्षा यात्री के द्वारा स्वयं की जानी चाहिए।
यह फैसला जिला आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल व सदस्य प्रतिभा पांडे की बेंच ने सुनाया।
भोपाल के शिवाजी नगर के रहने वाले लक्षित शर्मा (परिवर्तित नाम) ने साल 2015 में सीनियर डिवीजनल कामर्शियल मैनेजर वेस्ट सेंट्रल रेलवे रानी कमलापति, डिवीजनल मैनेजर रेलवे, डीआरएम नॉर्थन रेलवे के खिलाफ आयोग में शिकायत की। उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर 2014 को इंदौर - पटना एक्सप्रेस से पत्नी के साथ बनारस जाने के लिए एसी - 2ए कोच नंबर ए-1 में बर्थ नं. 47, 48 में बैठकर यात्रा कर रहे थे। इस दौरान एप्पल मोबाइल, जिसकी कीमत करीब 40 हजार रुपए थी, चार्जिंग में लगा दिया गया।
ट्रेन के लखनऊ छोड़ने के पश्चात एवं सुल्तानपुर पहुंचने के बाद उन्होंने देखा कि मोबाइल अपनी जगह पर नहीं था। उन्होंने तुरंत कोच में उपस्थित टीटीई को इसकी जानकारी दी। बताया कि उसके सामने की बर्थ पर एक अपरिचित व्यक्ति बैठा था। ऐसा प्रतीत होता है कि उसी व्यक्ति ने मोबाइल चुरा लिया।
टीटीई ने बताया कि उक्त बर्थ किसी को आवंटित ही नहीं की गई थी। इस प्रकार रेलवे के स्टाफ के द्वारा आरक्षित एसी कोच में अनाधिकृत व्यक्ति को यात्रा करने की अनुमति दी गई, जो लापरवाही को दर्शाता। यात्री ने इसके बाद फोन से जीआरपी भोपाल को सूचना दी। प्रथम सूचना रिपोर्ट भी लिखवाई ।
रेलवे ने इस मामले में कहा कि परिवादी 40 हजार रुपए के मूल्य का एप्पल कंपनी का मोबाइल लेकर यात्रा कर रहा था। परिवादी का सामान उसकी स्वयं की अभिरक्षा में था। जिसका रेलवे के पास कोई रिकार्ड नहीं था। परिवादी द्वारा रेलवे को मोबाइल सुरक्षा के लिए कोई भुगतान भी नहीं किया था। इस कारण परिवादी को क्षतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। रेलवे द्वारा सेवा में कोई कमी नहीं की गई है।
आयोग ने इस मामले में कहा कि परिवादी के द्वारा भोपाल से टिकिट लेकर यात्रा प्रारंभ की गई थी। परिवादी द्वारा भोपाल से बनारस के लिए इंदौर पटना एक्सप्रेस में ए-1 कोच के सीट नं. 47 व 48 पर यात्रा करते समय एप्पल कंपनी का मोबाइल चार्जिंग पर लगाने के दौरान अज्ञात व्यक्ति के द्वारा चोरी करने की सूचना फोन पर दिए जाने पर प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखाई गई थी। जिसमें यह बात नहीं लिखाई गई कि परिवादी की सामने की सीट में किसी अनाधिकृत यात्री को यात्रा करने के लिए अनुमति दी गई। प्रथम सूचना रिपोर्ट में घटना का समय नहीं बताया गया है, ना ही परिवादपत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि, परिवादी ने जब अपना मोबाइल चार्जिंग पर लगाया था तब वह जाग रहा था अथवा सो रहा था। चोरी की घटना दिन में हुई थी अथवा रात में। यह भी स्पष्ट नहीं होता है कि, यदि परिवादी जाग रहा था तो उसने चार्जिंग में लगा मोबाइल किसी व्यक्ति के द्वारा ले जाते हुए क्यों नहीं देखा । मोबाइल ऐसी वस्तु है कि, जो आसानी से अपने पॉकेट में सुरक्षित रखा जा सकता है एवं चार्जिंग में लगाये जाने पर उसकी सुरक्षा यात्री के द्वारा स्वयं की जानी चाहिए। यदि यात्री अपने मोबाइल की सुरक्षा के लए स्वयं उपेक्षावान रहा है तो उसे विपक्षी के द्वारा सेवा में कमी किया जाना नहीं माना जा सकता । अतः विपक्षी के द्वारा सेवा में कमी किया जाना प्रमाणित नहीं पाया जाता है।
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अगर आप ट्रेन में मोबाइल चार्जिंग पर लगातार सो गए हैं और ऐसी स्थिति में आपका मोबाइल चोरी हो जाए तो इसके लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं होगा। आपको अपने फोन की रक्षा खुद करनी होगी। यह फैसला हाल ही में भोपाल उपभोक्ता आयोग ने सुनाया। फैसले में आयोग ने कहा कि यदि परिवादी जाग रहा था, तो उसने चार्जिंग पर लगा मोबाइल किसी व्यक्ति के द्वारा ले जाते हुए क्यों नहीं देखा। मोबाइल ऐसी वस्तु है जो आसानी से पॉकेट में सुरक्षित रखी जा सकती है। चार्जिंग में लगाए जाने पर मोबाइल की सुरक्षा यात्री के द्वारा स्वयं की जानी चाहिए। यह फैसला जिला आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल व सदस्य प्रतिभा पांडे की बेंच ने सुनाया। भोपाल के शिवाजी नगर के रहने वाले लक्षित शर्मा ने साल दो हज़ार पंद्रह में सीनियर डिवीजनल कामर्शियल मैनेजर वेस्ट सेंट्रल रेलवे रानी कमलापति, डिवीजनल मैनेजर रेलवे, डीआरएम नॉर्थन रेलवे के खिलाफ आयोग में शिकायत की। उन्होंने बताया कि इकतीस दिसंबर दो हज़ार चौदह को इंदौर - पटना एक्सप्रेस से पत्नी के साथ बनारस जाने के लिए एसी - दोए कोच नंबर ए-एक में बर्थ नं. सैंतालीस, अड़तालीस में बैठकर यात्रा कर रहे थे। इस दौरान एप्पल मोबाइल, जिसकी कीमत करीब चालीस हजार रुपए थी, चार्जिंग में लगा दिया गया। ट्रेन के लखनऊ छोड़ने के पश्चात एवं सुल्तानपुर पहुंचने के बाद उन्होंने देखा कि मोबाइल अपनी जगह पर नहीं था। उन्होंने तुरंत कोच में उपस्थित टीटीई को इसकी जानकारी दी। बताया कि उसके सामने की बर्थ पर एक अपरिचित व्यक्ति बैठा था। ऐसा प्रतीत होता है कि उसी व्यक्ति ने मोबाइल चुरा लिया। टीटीई ने बताया कि उक्त बर्थ किसी को आवंटित ही नहीं की गई थी। इस प्रकार रेलवे के स्टाफ के द्वारा आरक्षित एसी कोच में अनाधिकृत व्यक्ति को यात्रा करने की अनुमति दी गई, जो लापरवाही को दर्शाता। यात्री ने इसके बाद फोन से जीआरपी भोपाल को सूचना दी। प्रथम सूचना रिपोर्ट भी लिखवाई । रेलवे ने इस मामले में कहा कि परिवादी चालीस हजार रुपए के मूल्य का एप्पल कंपनी का मोबाइल लेकर यात्रा कर रहा था। परिवादी का सामान उसकी स्वयं की अभिरक्षा में था। जिसका रेलवे के पास कोई रिकार्ड नहीं था। परिवादी द्वारा रेलवे को मोबाइल सुरक्षा के लिए कोई भुगतान भी नहीं किया था। इस कारण परिवादी को क्षतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। रेलवे द्वारा सेवा में कोई कमी नहीं की गई है। आयोग ने इस मामले में कहा कि परिवादी के द्वारा भोपाल से टिकिट लेकर यात्रा प्रारंभ की गई थी। परिवादी द्वारा भोपाल से बनारस के लिए इंदौर पटना एक्सप्रेस में ए-एक कोच के सीट नं. सैंतालीस व अड़तालीस पर यात्रा करते समय एप्पल कंपनी का मोबाइल चार्जिंग पर लगाने के दौरान अज्ञात व्यक्ति के द्वारा चोरी करने की सूचना फोन पर दिए जाने पर प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखाई गई थी। जिसमें यह बात नहीं लिखाई गई कि परिवादी की सामने की सीट में किसी अनाधिकृत यात्री को यात्रा करने के लिए अनुमति दी गई। प्रथम सूचना रिपोर्ट में घटना का समय नहीं बताया गया है, ना ही परिवादपत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि, परिवादी ने जब अपना मोबाइल चार्जिंग पर लगाया था तब वह जाग रहा था अथवा सो रहा था। चोरी की घटना दिन में हुई थी अथवा रात में। यह भी स्पष्ट नहीं होता है कि, यदि परिवादी जाग रहा था तो उसने चार्जिंग में लगा मोबाइल किसी व्यक्ति के द्वारा ले जाते हुए क्यों नहीं देखा । मोबाइल ऐसी वस्तु है कि, जो आसानी से अपने पॉकेट में सुरक्षित रखा जा सकता है एवं चार्जिंग में लगाये जाने पर उसकी सुरक्षा यात्री के द्वारा स्वयं की जानी चाहिए। यदि यात्री अपने मोबाइल की सुरक्षा के लए स्वयं उपेक्षावान रहा है तो उसे विपक्षी के द्वारा सेवा में कमी किया जाना नहीं माना जा सकता । अतः विपक्षी के द्वारा सेवा में कमी किया जाना प्रमाणित नहीं पाया जाता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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विराट् विश्व मे मानव ही सर्वाधिक विकसित प्राणी है। उसने समाज, संस्कृति और सभ्यता का विकास किया। आदिम युग का मानव जगलो मे रहता था, पर आधुनिक युग का मानव गगनचुम्बी उच्च अट्टालिकाओ मे रहने लगा है। विज्ञान जो नित नई प्रगति कर रहा है, वह उसके उर्वर मस्तिष्क का ही परिणाम है। जहाँ भौतिक दृष्टि से मानव ने विकास किया, वहाँ आध्यात्मिक दृष्टि से भी उसने अपूर्व प्रगति की। धर्म का जो विकसित रूप हमे दिखलाई देता है, वह मानव की देन है। तीर्थकर, अवतारी जितने भी महापुरुष हुए है, वे सभी मानव थे और मानव जीवन के आध्यात्मिक उत्कर्ष हेतु उन्होने उपदेश दिए। वही उपदेश वेद, उपनिषद्, त्रिपीटक और आगम के रूप में विश्रुत है।
जैन धर्म और संस्कृति के संस्थापक तीर्थंकर रहे है। भगवान ऋषभदेव, प्रागैतिहासिक काल मे हुए और २४वे तीर्थंकर महावीर ऐतिहासिक काल में हुए। आज से २५०० वर्ष पूर्व उस महागुरु ने तीर्थ की संस्थापना की और वह सस्थापना ही आज जैन धर्म के रूप मे जानी और पहजानी जाती है। महावीर के पश्चात् दुष्कालो के कारण जैन सघ विभिन्न रूप में विभक्त हुआ और कुछ ऐसे ज्योतिर्धर नक्षत्र आए, जिन्होने क्रियोद्धार कर जैन शासन की गरिमा में चार चाँद लगाए।
स्थानकवासी जैन धर्म एक विशुद्ध आध्यात्मिक और क्रांतिकारी धर्म रहा। किन्ही- किन्ही कारणों से जब यह धर्म अनेक सम्प्रदायो मे विभक्त हो गया, तब चिन्तको ने सोचा कि यदि हम अनेक भागो में विभक्त रहेगे तो हमारी शक्ति शनै शनै कम हो जाएगी। पर प्रश्न था कि सभी सम्प्रदायों को एक करने के लिए कौन पहले करे ? स्थानकवासी जैन कान्फेन्स के श्रद्धालु श्रावको ने यह भगीरथ कार्य करने का बीड़ा उठाया। पंजाब, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र - जहाँ पर सन्त भगवत विराज रहे थे, वहाँ पर वे अनेक बार पहुॅचे। अनेक कडुवे-मीठे अनुभव भी हुए, किन्तु वे हताश और निराश नही हुए, निरतर अपने लक्ष्य की ओर बढते रहे। परिणामस्वरूप स्थानकवासी समाज के सभी प्रमुख आचार्य, प्रवर्तक आदि महामुनिगण, अजरामरपुरि अजमेर मे स १९८९ मे एक्त्र सभी ने गहराई से चिन्तन किया और जो प्रमुख समस्याएँ थी, उन पर चिन्तन कर समाधान करने का प्रबल प्रयास किया। किन्ही कारणों से उस समय एक आचार्य और एक सघ की परिकल्पना मूर्त रूप न ले सकी। पर जो भी वहाँ कार्य हुआ, वह भी कम महत्वपूर्ण नही था। यदि कान्फ्रेन्स के कर्मठ कार्यकर्तागण उस समय प्रयास न करते तो अजमेर का
सम्मेलन सभव नहीं था। उन्होंने जो कार्य किया, वह आज भी मेरे स्मृत्याकाश मे चमक रहा है।
कान्फेन्स के मूर्धन्य मनीषीगण सदा आशावादी रहे। वे अजमेर सम्मेलन के पश्चात् भी निरन्तर प्रयत्न करते रहे। उनके प्रयत्न से सन्तो के मानस मे भी एकता की भव्य भावना मूर्त रूप ले रही थी। सर्वप्रथम पाँच सम्प्रदायो का एक सगठन हुआ और उस सगठन का मुझे आचार्य बनाया गया। मेरा अन्तर्मानस चाहता था कि सम्पूर्ण स्थानकवासी एक बने। कान्फेन्स के कार्यकर्ता भी इसी प्रयास में लगे हुए थे। सन् १९५२ मे सादडी मारवाड मे बृहद् साधु सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन मे कान्फेन्स के अध्यक्ष कुन्दनमलजी फिरोदिया ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। धीरजभाई तुरलिया ने नीव की ईंट के रूप में रहकर जो कार्य किया, वह भुलाया नहीं जा सकता। परिणामस्वरूप जितने भी सन्त, भगवत और आचार्य आदि वहाँ पर पधारे थे, वे सभी एक बन गए, एक आचार्य और एक समाचारी का निर्माण हुआ। आचार्य आत्मारामजी म श्रमण संघ के प्रथम आचार्य बने। श्री गणेशीलालजी म उपाचार्य बने और मुझे प्रधानमंत्री का कार्य सुपुर्द किया। इस सम्मेलन मे स्थानकवासी सम्प्रदायो की २२ सम्प्रदाएँ सम्मिलित हुई, जिसमे ३४१ मुनि और ७६८ साध्वियाँ थी। श्रमण सघ के निर्माण मे काफेस का जो योगदान रहा, वह बहुत ही अपूर्व है।
कान्फ्रेन्स स्थानकवासी समाज की एकमात्र मातृ संस्था है। आज भी इस संस्था के मूर्धन्य अधिकारीगण स्थानकवासी समाज की प्रगति हो, इसके लिए अहर्निश प्रयास कर रहे है। जब भी साधु-सम्मेलन हुए, उस समय कान्फ्रेन्स ने जो प्रयास किए है, वे किसी से छिपे हुए नही है। इन वर्षो मे कान्फ्रेन्स के सामने अनेक विकट समस्याएँ भी आई, किन्तु उन विकट समस्याओं को सहज रूप से सुलझाकर वह अपने लक्ष्य की ओर कदम बढा रही है। मुझे आशा है, वह कान्फेन्स के अमृत महोत्सव पर अपनी शक्ति को अधिक से अधिक अर्जित कर निरन्तर बढती रहेगी। यही मगलमय मनीषा।
राष्ट्र सत आचार्य सम्राट श्री आनन्द ऋषिजी म.
सत्यमेव जयते
राष्ट्रपति भारत गणतंत्र
REPUBLIC OF INDIA
नई दिल्ली,
मुझे यह जानकर प्रसन्न्ता है कि अखिल भारतवर्षीय श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कान्फ्रेंस का अमृत महोत्सव 23 अक्तूबर 1988 को इंदौर में सम्पन्न हो रहा है तथा इस शुभ अवसर पर अमृत महोत्सव ग्रन्थ" भी निकाला जा रहा है ।
मुझे आशा है कि ये आयोजन मानव जाति में जीव दया, अहिंसा, सत्य, परोपकार जैसे सद्गुणों की अभिवृद्धि करने में सहायक होंगे ।
में आयोजनों की सफलता की कामना करता हूँ ।
और वकेटरामन
आर वेंकटरामन
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विराट् विश्व मे मानव ही सर्वाधिक विकसित प्राणी है। उसने समाज, संस्कृति और सभ्यता का विकास किया। आदिम युग का मानव जगलो मे रहता था, पर आधुनिक युग का मानव गगनचुम्बी उच्च अट्टालिकाओ मे रहने लगा है। विज्ञान जो नित नई प्रगति कर रहा है, वह उसके उर्वर मस्तिष्क का ही परिणाम है। जहाँ भौतिक दृष्टि से मानव ने विकास किया, वहाँ आध्यात्मिक दृष्टि से भी उसने अपूर्व प्रगति की। धर्म का जो विकसित रूप हमे दिखलाई देता है, वह मानव की देन है। तीर्थकर, अवतारी जितने भी महापुरुष हुए है, वे सभी मानव थे और मानव जीवन के आध्यात्मिक उत्कर्ष हेतु उन्होने उपदेश दिए। वही उपदेश वेद, उपनिषद्, त्रिपीटक और आगम के रूप में विश्रुत है। जैन धर्म और संस्कृति के संस्थापक तीर्थंकर रहे है। भगवान ऋषभदेव, प्रागैतिहासिक काल मे हुए और चौबीसवे तीर्थंकर महावीर ऐतिहासिक काल में हुए। आज से दो हज़ार पाँच सौ वर्ष पूर्व उस महागुरु ने तीर्थ की संस्थापना की और वह सस्थापना ही आज जैन धर्म के रूप मे जानी और पहजानी जाती है। महावीर के पश्चात् दुष्कालो के कारण जैन सघ विभिन्न रूप में विभक्त हुआ और कुछ ऐसे ज्योतिर्धर नक्षत्र आए, जिन्होने क्रियोद्धार कर जैन शासन की गरिमा में चार चाँद लगाए। स्थानकवासी जैन धर्म एक विशुद्ध आध्यात्मिक और क्रांतिकारी धर्म रहा। किन्ही- किन्ही कारणों से जब यह धर्म अनेक सम्प्रदायो मे विभक्त हो गया, तब चिन्तको ने सोचा कि यदि हम अनेक भागो में विभक्त रहेगे तो हमारी शक्ति शनै शनै कम हो जाएगी। पर प्रश्न था कि सभी सम्प्रदायों को एक करने के लिए कौन पहले करे ? स्थानकवासी जैन कान्फेन्स के श्रद्धालु श्रावको ने यह भगीरथ कार्य करने का बीड़ा उठाया। पंजाब, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र - जहाँ पर सन्त भगवत विराज रहे थे, वहाँ पर वे अनेक बार पहुॅचे। अनेक कडुवे-मीठे अनुभव भी हुए, किन्तु वे हताश और निराश नही हुए, निरतर अपने लक्ष्य की ओर बढते रहे। परिणामस्वरूप स्थानकवासी समाज के सभी प्रमुख आचार्य, प्रवर्तक आदि महामुनिगण, अजरामरपुरि अजमेर मे स एक हज़ार नौ सौ नवासी मे एक्त्र सभी ने गहराई से चिन्तन किया और जो प्रमुख समस्याएँ थी, उन पर चिन्तन कर समाधान करने का प्रबल प्रयास किया। किन्ही कारणों से उस समय एक आचार्य और एक सघ की परिकल्पना मूर्त रूप न ले सकी। पर जो भी वहाँ कार्य हुआ, वह भी कम महत्वपूर्ण नही था। यदि कान्फ्रेन्स के कर्मठ कार्यकर्तागण उस समय प्रयास न करते तो अजमेर का सम्मेलन सभव नहीं था। उन्होंने जो कार्य किया, वह आज भी मेरे स्मृत्याकाश मे चमक रहा है। कान्फेन्स के मूर्धन्य मनीषीगण सदा आशावादी रहे। वे अजमेर सम्मेलन के पश्चात् भी निरन्तर प्रयत्न करते रहे। उनके प्रयत्न से सन्तो के मानस मे भी एकता की भव्य भावना मूर्त रूप ले रही थी। सर्वप्रथम पाँच सम्प्रदायो का एक सगठन हुआ और उस सगठन का मुझे आचार्य बनाया गया। मेरा अन्तर्मानस चाहता था कि सम्पूर्ण स्थानकवासी एक बने। कान्फेन्स के कार्यकर्ता भी इसी प्रयास में लगे हुए थे। सन् एक हज़ार नौ सौ बावन मे सादडी मारवाड मे बृहद् साधु सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन मे कान्फेन्स के अध्यक्ष कुन्दनमलजी फिरोदिया ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। धीरजभाई तुरलिया ने नीव की ईंट के रूप में रहकर जो कार्य किया, वह भुलाया नहीं जा सकता। परिणामस्वरूप जितने भी सन्त, भगवत और आचार्य आदि वहाँ पर पधारे थे, वे सभी एक बन गए, एक आचार्य और एक समाचारी का निर्माण हुआ। आचार्य आत्मारामजी म श्रमण संघ के प्रथम आचार्य बने। श्री गणेशीलालजी म उपाचार्य बने और मुझे प्रधानमंत्री का कार्य सुपुर्द किया। इस सम्मेलन मे स्थानकवासी सम्प्रदायो की बाईस सम्प्रदाएँ सम्मिलित हुई, जिसमे तीन सौ इकतालीस मुनि और सात सौ अड़सठ साध्वियाँ थी। श्रमण सघ के निर्माण मे काफेस का जो योगदान रहा, वह बहुत ही अपूर्व है। कान्फ्रेन्स स्थानकवासी समाज की एकमात्र मातृ संस्था है। आज भी इस संस्था के मूर्धन्य अधिकारीगण स्थानकवासी समाज की प्रगति हो, इसके लिए अहर्निश प्रयास कर रहे है। जब भी साधु-सम्मेलन हुए, उस समय कान्फ्रेन्स ने जो प्रयास किए है, वे किसी से छिपे हुए नही है। इन वर्षो मे कान्फ्रेन्स के सामने अनेक विकट समस्याएँ भी आई, किन्तु उन विकट समस्याओं को सहज रूप से सुलझाकर वह अपने लक्ष्य की ओर कदम बढा रही है। मुझे आशा है, वह कान्फेन्स के अमृत महोत्सव पर अपनी शक्ति को अधिक से अधिक अर्जित कर निरन्तर बढती रहेगी। यही मगलमय मनीषा। राष्ट्र सत आचार्य सम्राट श्री आनन्द ऋषिजी म. सत्यमेव जयते राष्ट्रपति भारत गणतंत्र REPUBLIC OF INDIA नई दिल्ली, मुझे यह जानकर प्रसन्न्ता है कि अखिल भारतवर्षीय श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कान्फ्रेंस का अमृत महोत्सव तेईस अक्तूबर एक हज़ार नौ सौ अठासी को इंदौर में सम्पन्न हो रहा है तथा इस शुभ अवसर पर अमृत महोत्सव ग्रन्थ" भी निकाला जा रहा है । मुझे आशा है कि ये आयोजन मानव जाति में जीव दया, अहिंसा, सत्य, परोपकार जैसे सद्गुणों की अभिवृद्धि करने में सहायक होंगे । में आयोजनों की सफलता की कामना करता हूँ । और वकेटरामन आर वेंकटरामन
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हिट फिल्में करने के बाद भी क्या वाकई एक हिट एक्ट्रेस हैं इलियाना ?
बॉलीवुड एक्ट्रेस इलियाना ड्रिकूज अब तक कई हिट फिल्मों में काम कर चुकी हैं। बड़े पर्दे पर उनकी फिल्म 'रेड' रिलीज हो चुकी है। ऐसा दूसरी बार हो रहा है कि वो किसी फिल्म में बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हैं। इससे पहले भी इलियाना और अजय देवगन की जोड़ी फिल्म 'बादशाहो' में नजर आई थी। फिल्म 'रेड' में इलियाना, अजय की पत्नी का किरदार निभा रही हैं।
साउथ इंडियन फिल्मों से फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री करने वाली एक्ट्रेस इलियाना ने बॉलीवुड में पहली बार रणबीर कपूर के साथ फिल्म 'बर्फी' से अपना डेब्यू किया था। फिल्म में उनके रोल को दर्शकों ने काफी पसंद किया और फिल्म भी लोगों को पसंद आई थी।
इसके बाद इलियाना ने बॉलीवुड की कई फिल्मों जैसे 'फटा पोस्टर निकला हीरो', 'मैं तेरा हीरो' और 'हैप्पी एंडिंग' जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म उनके करियर को अलग मुकाम पर पहुंचाने में सक्सेसफुल साबित नहीं हुई।
ऐसी कई फिल्मों में हाथ आजमाने के बाद इलियाना को अक्षय कुमार की फिल्म 'रुस्तम' जैसी बड़ी फिल्म का ऑफर मिला। ये फिल्म उनके करियर की बड़ी हिट फिल्म साबित हुई। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ से भी ज्यादा की कमाई की। इसके साथ ही फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों से काफी कारीफ भी मिली। लेकिन अगर हम फिल्म की बात करें तो फिल्म के हिट होने के पीछे कहीं न कहीं फिल्म में सुपरस्टार अक्षय कुमार का होना था।
इसके बाद इलियाना ने मल्टी स्टारर फिल्म 'मुबारकां' में काम किया। इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई तो कर ली, लेकिन इस फिल्म के लिए इलियाना को दर्शकों से कुछ खास तारीफ नहीं मिली। लेकिन इसके बाद इलियाना को बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिलने लगे। जैसे कुछ समय पहले ही वो अजय देवगन के साथ फिल्म 'बादशाहो' में नजर आईं।
अगर इलियाना की शुरुआती फिल्मों को देखा जाए तो पहली बार फिल्म 'बादशाहो' में वो एक दमदार किरदार में नजर आईं। लेकिन इसके बावजूद भी इलियाना की खूबसूरती के अलावा फिल्म में उनके किरदार कुछ खास सराहना नहीं मिली।
हमेशा से ही इलियाना अपनी एक्टिंग से ज्यादा अपनी खूबसूरती के लिए पसंद की जाती हैं। शायद इसी वजह से इलियाना को बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करने का मौका मिला और उनमें से कई फिल्में हिट भी हुईं। लेकिन फिल्मों के हिट होने के बावजूद भी अब तक इलियाना बॉलीवुड में अपनी खास जगह बनाने में कामयाब नहीं हो पाईं।
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हिट फिल्में करने के बाद भी क्या वाकई एक हिट एक्ट्रेस हैं इलियाना ? बॉलीवुड एक्ट्रेस इलियाना ड्रिकूज अब तक कई हिट फिल्मों में काम कर चुकी हैं। बड़े पर्दे पर उनकी फिल्म 'रेड' रिलीज हो चुकी है। ऐसा दूसरी बार हो रहा है कि वो किसी फिल्म में बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हैं। इससे पहले भी इलियाना और अजय देवगन की जोड़ी फिल्म 'बादशाहो' में नजर आई थी। फिल्म 'रेड' में इलियाना, अजय की पत्नी का किरदार निभा रही हैं। साउथ इंडियन फिल्मों से फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री करने वाली एक्ट्रेस इलियाना ने बॉलीवुड में पहली बार रणबीर कपूर के साथ फिल्म 'बर्फी' से अपना डेब्यू किया था। फिल्म में उनके रोल को दर्शकों ने काफी पसंद किया और फिल्म भी लोगों को पसंद आई थी। इसके बाद इलियाना ने बॉलीवुड की कई फिल्मों जैसे 'फटा पोस्टर निकला हीरो', 'मैं तेरा हीरो' और 'हैप्पी एंडिंग' जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म उनके करियर को अलग मुकाम पर पहुंचाने में सक्सेसफुल साबित नहीं हुई। ऐसी कई फिल्मों में हाथ आजमाने के बाद इलियाना को अक्षय कुमार की फिल्म 'रुस्तम' जैसी बड़ी फिल्म का ऑफर मिला। ये फिल्म उनके करियर की बड़ी हिट फिल्म साबित हुई। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर एक सौ करोड़ से भी ज्यादा की कमाई की। इसके साथ ही फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों से काफी कारीफ भी मिली। लेकिन अगर हम फिल्म की बात करें तो फिल्म के हिट होने के पीछे कहीं न कहीं फिल्म में सुपरस्टार अक्षय कुमार का होना था। इसके बाद इलियाना ने मल्टी स्टारर फिल्म 'मुबारकां' में काम किया। इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई तो कर ली, लेकिन इस फिल्म के लिए इलियाना को दर्शकों से कुछ खास तारीफ नहीं मिली। लेकिन इसके बाद इलियाना को बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिलने लगे। जैसे कुछ समय पहले ही वो अजय देवगन के साथ फिल्म 'बादशाहो' में नजर आईं। अगर इलियाना की शुरुआती फिल्मों को देखा जाए तो पहली बार फिल्म 'बादशाहो' में वो एक दमदार किरदार में नजर आईं। लेकिन इसके बावजूद भी इलियाना की खूबसूरती के अलावा फिल्म में उनके किरदार कुछ खास सराहना नहीं मिली। हमेशा से ही इलियाना अपनी एक्टिंग से ज्यादा अपनी खूबसूरती के लिए पसंद की जाती हैं। शायद इसी वजह से इलियाना को बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करने का मौका मिला और उनमें से कई फिल्में हिट भी हुईं। लेकिन फिल्मों के हिट होने के बावजूद भी अब तक इलियाना बॉलीवुड में अपनी खास जगह बनाने में कामयाब नहीं हो पाईं।
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ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में बुधवार को ब्लैक फंगस के 34 नए मरीज मिले हैं। इन मरीजों को पटना के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया हैं। जहां इनका इलाज किया जा रहा हैं। डॉक्टरों की टीम इन मरीजों का इलाज कर रही हैं।
वहीं बिहार में अबतक ब्लैक फंगस के सात मरीजों का ऑपरेशन भी किया गया हैं। बुधवार को पटना के एम्स में ब्लैक फंगस के लक्षण वाले 24 मरीज ओपीडी में पहुंचे जबकि नौ आईजीआईएमएस में और एक पीएमसीएच में पहुंचे। एम्स में सात मरीजों को भर्ती कराया गया।
जबकि आईजीआईएमएस में आए सभी नौ मरीजों को ब्लैक फंगस यूनिट में भर्ती किया गया हैं। बता दें की बिहार में ब्लैक फंगस के सात मरीजों का ऑपरेशन हुआ हैं जबकि तीन मरीजों का ऑपरेशन किया जायेगा। इसतरह से ब्लैक फंगस बिहार में कहर मचा रहा हैं।
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ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में बुधवार को ब्लैक फंगस के चौंतीस नए मरीज मिले हैं। इन मरीजों को पटना के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया हैं। जहां इनका इलाज किया जा रहा हैं। डॉक्टरों की टीम इन मरीजों का इलाज कर रही हैं। वहीं बिहार में अबतक ब्लैक फंगस के सात मरीजों का ऑपरेशन भी किया गया हैं। बुधवार को पटना के एम्स में ब्लैक फंगस के लक्षण वाले चौबीस मरीज ओपीडी में पहुंचे जबकि नौ आईजीआईएमएस में और एक पीएमसीएच में पहुंचे। एम्स में सात मरीजों को भर्ती कराया गया। जबकि आईजीआईएमएस में आए सभी नौ मरीजों को ब्लैक फंगस यूनिट में भर्ती किया गया हैं। बता दें की बिहार में ब्लैक फंगस के सात मरीजों का ऑपरेशन हुआ हैं जबकि तीन मरीजों का ऑपरेशन किया जायेगा। इसतरह से ब्लैक फंगस बिहार में कहर मचा रहा हैं।
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लज़ान्या और रैवियोली के लिए सॉस पाक कला।
सॉस - यह है कि क्या सामान्य पकवान मौलिकता, समृद्धि और उत्तम स्वाद और सुखद खुशबू देता है। यह विशेष sousnike में अलग से खिलाया जा सकता है, और किसी भी भोजन के लिए भरने, उदाहरण के लिए, सलाद, पास्ता के लिए और इतने पर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता। इसके अलावा सॉस मांस और सब्जियों के व्यंजन की एक किस्म पकाया जा सकता है। यह उत्साह पके हुए व्यंजन और रोचकता दे देंगे।
पारंपरिक इतालवी व्यंजनों का अभिन्न अंग "लज़ान्या" एक प्रकार का चटनी सॉस है। इस मलाईदार सॉस लज़ान्या के लिए, लेकिन यह भी किसी अन्य भोजन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता। लेकिन इसके अलावा में कई अन्य प्रकार का चटनी सॉस व्यंजनों कम नहीं स्वादिष्ट और रसदार कर रहे हैं।
यहाँ स्वादिष्ट भराई के लिए कुछ व्यंजनों हैं।
लज़ान्या के लिए सॉस एक प्रकार का चटनी। पकाने की विधि।
उत्पाद।
तैयार करना।
सबसे पहले, दूध उबालें। फिर प्याज छील और सूक्ष्मता काट। उबलते दूध प्याज डालें और थोड़ी देर के लिए डालने के लिए छोड़ दें।
पैन डाल मक्खन (चम्मच), यह पिघला और आटा जोड़ें। कुछ सेकंड (है कि वह थोड़ा जला नहीं) मक्खन में आटा भून। एक छलनी और दूध के माध्यम से तनाव धीरे-धीरे आटा के साथ पैन में डाल। जबकि लगातार मिश्रण हलचल, यह महत्वपूर्ण है कि सॉस गांठ फार्म नहीं किया। फिर नमक और काली मिर्च, एक छोटे से गर्मी मिश्रण के साथ स्वाद के लिए जोड़ है, लेकिन न दें फोड़ा। सॉस lasagne तैयार किया।
सॉस वांछित है, तो आप तला हुआ वील, जायफल और अजवायन के फूल के छोटे टुकड़े जोड़ सकते हैं।
उत्पाद।
- मक्खन (50gramm)
- कसा हुआ पनीर (150gramm)
तैयार करना।
में एक छोटा सा सॉस पैन उस में आग डाल दिया और पिघल मक्खन डाल दिया। उसके बाद, अच्छी तरह से गूंध (एक सजातीय मिश्रण प्राप्त करने के लिए) और गर्मी से पैन को दूर, आटा जोड़ें। नमक रखो और छोटे हिस्से में दूध में डाल, इस पर ध्यान से सरगर्मी। एक हो जाना चाहिए सजातीय मिश्रण गांठ के बिना। तब फिर एक छोटे से आग पर बर्तन रख दिया और लगातार सरगर्मी, जब तक जब तक यह गाढ़ा करने के लिए शुरू होता है लज़ान्या के लिए सॉस खाना बनाना। फिर पनीर, जोड़ने जायफल और मसालों। सॉस गर्म करने के लिए जारी रखें जब तक कटा पनीर पिघल रहा है। एक सजातीय बड़े पैमाने पर जब तक अच्छी तरह से मिलाएं।
अल्फ्रेडो सॉस।
उत्पाद।
- क्रीम के ग्लास (वसा)
एक सॉस पैन में क्रीम गरम करें उन्हें गर्म बनाने के लिए। पैन पिघल मक्खन (मक्खन)। घी क्रीम जोड़ें और कम आंच पर 6 मिनट के लिए सॉस अधिक खाना पकाने जारी रखने के लिए। फिर कुचल लहसुन, जोड़ने के एक प्रकार का पनीर पनीर, काली मिर्च और नमक। गर्मी से हटाने के बिना, जल्दी से ड्रेसिंग हलचल। यह एक प्रकार का पनीर जब तक कुछ समय कुक के लिए छोड़ दें।
सॉस लज़ान्या और मांस व्यंजन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
मशरूम के साथ रैवियोली के लिए सॉस। पकाने की विधि।
उत्पाद।
- लहसुन (3 लौंग)
- आटा (¼ कप)
मध्यम आंच पर एक सॉस पैन में, तेल गर्म करें। पिघला मक्खन बारीक कटा हुआ प्याज, लहसुन, chesnokodavku, बारीक कटा हुआ मशरूम, नमक और काली मिर्च के माध्यम से पारित जोड़ें। सामग्री, कभी कभी 10 मिनट के लिए मध्यम गर्मी के ऊपर उबाल सरगर्मी। उसके बाद,, एक पैन में आटा में छिड़क कुछ समय के लिए सॉस खाना बनाना। , पानी में अपने टमाटर को धोकर उन्हें एक ब्लेंडर और कोड़ा में डाल दिया। फिर, दूध और मसला हुआ टमाटर मिश्रण आग पर मिश्रण डाल दिया, फोड़ा इंतजार और एक अन्य 10 मिनट के लिए खाना बनाना। मशरूम के साथ पैन में मिश्रण डालो, सभी 15 मिनट बुझाने। अंत में, जड़ी बूटी (तुलसी और अजमोद) जोड़ें। हलचल।
सॉस गर्म रैवियोली के लिए आपूर्ति की है।
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लज़ान्या और रैवियोली के लिए सॉस पाक कला। सॉस - यह है कि क्या सामान्य पकवान मौलिकता, समृद्धि और उत्तम स्वाद और सुखद खुशबू देता है। यह विशेष sousnike में अलग से खिलाया जा सकता है, और किसी भी भोजन के लिए भरने, उदाहरण के लिए, सलाद, पास्ता के लिए और इतने पर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता। इसके अलावा सॉस मांस और सब्जियों के व्यंजन की एक किस्म पकाया जा सकता है। यह उत्साह पके हुए व्यंजन और रोचकता दे देंगे। पारंपरिक इतालवी व्यंजनों का अभिन्न अंग "लज़ान्या" एक प्रकार का चटनी सॉस है। इस मलाईदार सॉस लज़ान्या के लिए, लेकिन यह भी किसी अन्य भोजन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता। लेकिन इसके अलावा में कई अन्य प्रकार का चटनी सॉस व्यंजनों कम नहीं स्वादिष्ट और रसदार कर रहे हैं। यहाँ स्वादिष्ट भराई के लिए कुछ व्यंजनों हैं। लज़ान्या के लिए सॉस एक प्रकार का चटनी। पकाने की विधि। उत्पाद। तैयार करना। सबसे पहले, दूध उबालें। फिर प्याज छील और सूक्ष्मता काट। उबलते दूध प्याज डालें और थोड़ी देर के लिए डालने के लिए छोड़ दें। पैन डाल मक्खन , यह पिघला और आटा जोड़ें। कुछ सेकंड मक्खन में आटा भून। एक छलनी और दूध के माध्यम से तनाव धीरे-धीरे आटा के साथ पैन में डाल। जबकि लगातार मिश्रण हलचल, यह महत्वपूर्ण है कि सॉस गांठ फार्म नहीं किया। फिर नमक और काली मिर्च, एक छोटे से गर्मी मिश्रण के साथ स्वाद के लिए जोड़ है, लेकिन न दें फोड़ा। सॉस lasagne तैयार किया। सॉस वांछित है, तो आप तला हुआ वील, जायफल और अजवायन के फूल के छोटे टुकड़े जोड़ सकते हैं। उत्पाद। - मक्खन - कसा हुआ पनीर तैयार करना। में एक छोटा सा सॉस पैन उस में आग डाल दिया और पिघल मक्खन डाल दिया। उसके बाद, अच्छी तरह से गूंध और गर्मी से पैन को दूर, आटा जोड़ें। नमक रखो और छोटे हिस्से में दूध में डाल, इस पर ध्यान से सरगर्मी। एक हो जाना चाहिए सजातीय मिश्रण गांठ के बिना। तब फिर एक छोटे से आग पर बर्तन रख दिया और लगातार सरगर्मी, जब तक जब तक यह गाढ़ा करने के लिए शुरू होता है लज़ान्या के लिए सॉस खाना बनाना। फिर पनीर, जोड़ने जायफल और मसालों। सॉस गर्म करने के लिए जारी रखें जब तक कटा पनीर पिघल रहा है। एक सजातीय बड़े पैमाने पर जब तक अच्छी तरह से मिलाएं। अल्फ्रेडो सॉस। उत्पाद। - क्रीम के ग्लास एक सॉस पैन में क्रीम गरम करें उन्हें गर्म बनाने के लिए। पैन पिघल मक्खन । घी क्रीम जोड़ें और कम आंच पर छः मिनट के लिए सॉस अधिक खाना पकाने जारी रखने के लिए। फिर कुचल लहसुन, जोड़ने के एक प्रकार का पनीर पनीर, काली मिर्च और नमक। गर्मी से हटाने के बिना, जल्दी से ड्रेसिंग हलचल। यह एक प्रकार का पनीर जब तक कुछ समय कुक के लिए छोड़ दें। सॉस लज़ान्या और मांस व्यंजन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। मशरूम के साथ रैवियोली के लिए सॉस। पकाने की विधि। उत्पाद। - लहसुन - आटा मध्यम आंच पर एक सॉस पैन में, तेल गर्म करें। पिघला मक्खन बारीक कटा हुआ प्याज, लहसुन, chesnokodavku, बारीक कटा हुआ मशरूम, नमक और काली मिर्च के माध्यम से पारित जोड़ें। सामग्री, कभी कभी दस मिनट के लिए मध्यम गर्मी के ऊपर उबाल सरगर्मी। उसके बाद,, एक पैन में आटा में छिड़क कुछ समय के लिए सॉस खाना बनाना। , पानी में अपने टमाटर को धोकर उन्हें एक ब्लेंडर और कोड़ा में डाल दिया। फिर, दूध और मसला हुआ टमाटर मिश्रण आग पर मिश्रण डाल दिया, फोड़ा इंतजार और एक अन्य दस मिनट के लिए खाना बनाना। मशरूम के साथ पैन में मिश्रण डालो, सभी पंद्रह मिनट बुझाने। अंत में, जड़ी बूटी जोड़ें। हलचल। सॉस गर्म रैवियोली के लिए आपूर्ति की है।
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कार निर्माता कंपनी Volkswagen India बढ़ती इनपुट लागत का शिकार होने वाली लेटेस्ट कंपनी है। ऐसा इसलिए क्योंकि जर्मन कार निर्माता कंपनी ने भारतीय बाजार में मौजूद अपनी Volkswagen Taigun की कीमतों में बढ़ोत्तरी करने की घोषणा की है। पिछले साल सितंबर में कॉम्पैक्ट एसयूवी की बिक्री शुरू होने के बाद से यह दूसरी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
जानकारी के अनुसार नई कीमतों को बीती 2 मई 2022 से लागू कर दिया गया है। कीमतों में संशोधन के बाद अब Volkswagen Taigun को 11. 39 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर बेचा जा रहा है, वहीं इसके टॉप-स्पेक वेरिएंट की कीमत 18. 60 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) हो गई है।
कंपनी ने अपनी इस क्रॉसओवर की कीमतों में वेरिएंट के आधार पर 1. 5-4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसका टॉप-स्पेक GT Plus वेरिएंट अब पहले की तुलना में 60,000 रुपये ज्यादा महंगा है। कीमत में संशोधन के अलावा Volkswagen ने Taigun के उपकरणों में भी कुछ अपडेट किए हैं।
कंपनी ने Volkswagen Taigun में टायर प्रेशर डिफ्लेशन वार्निंग और इंजन आइडल स्टार्ट/स्टॉप जैसे फीचर्स को सभी वेरिएंट्स में स्टैंडर्ड कर दिया है। ये फीचर्स अब इस कार के Performance Line और Dynamic Line ट्रिम्स दोनों पर उपलब्ध हैं।
कंपनी का दावा है कि इंजन आइडल स्टार्ट/स्टॉप फीचर को जोड़ने से 1. 0-लीटर Dynamic Line वेरिएंट में 6 प्रतिशत तक ईंधन दक्षता में सुधार करने में मदद मिलेगी। जहां इसका मैनुअल वेरिएंट 19. 20 किमी/लीटर का माइलेज प्रदान करता है, वहीं इसका ऑटोमेटिक वेरिएंट 17. 23 किमी/लीटर का माइलेज देता है।
जानकारी अनुसार कंपनी ने न सिर्फ ईंधन दक्षता को बेहतर किया है, बल्कि Volkswagen Taigun लाइनअप में कुछ कॉस्मेटिक अपडेट भी किए हैं। एसयूवी के केबिन के अंदर, इसकी Performance Line ट्रिम अब केवल वाइल्ड चेरी रेड एक्सटीरियर कलर के साथ वाइल्ड चेरी रेड इन्सर्ट के साथ बेचा जाएगा।
अन्य सभी एक्सटीरियर रंग विकल्प आर्मर ग्रे ग्लॉसी इन्सर्ट के साथ उपलब्ध हैं। जैसा कि कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर दिख रहा है कि Volkswagen Taigun ताइगुन को नई और बेहतर रूफ लाइन्स भी दी गई हैं। इसके अलावा Volkswagen Taigun के बाकी लाइनअप को पहले के जैसा ही रखा गया है।
इसके इंजन की बात करें तो इसमें दो टर्बो पेट्रोल इंजन विकल्प हैं, जिसमें 1. 0-लीटर, 3-सिलेंडर TSI पेट्रोल इंजन और 1. 5-लीटर, 4-सिलेंडर TSI पेट्रोल इंजन शामिल है। जहां पहला इंजन 114 bhp की पावर और 178 Nm का टॉर्क देता है, वहीं दूसरा 148 bhp की पावर और 250 Nm का अधिकतम टॉर्क प्रदान करता है।
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Don't Miss! कार निर्माता कंपनी Volkswagen India बढ़ती इनपुट लागत का शिकार होने वाली लेटेस्ट कंपनी है। ऐसा इसलिए क्योंकि जर्मन कार निर्माता कंपनी ने भारतीय बाजार में मौजूद अपनी Volkswagen Taigun की कीमतों में बढ़ोत्तरी करने की घोषणा की है। पिछले साल सितंबर में कॉम्पैक्ट एसयूवी की बिक्री शुरू होने के बाद से यह दूसरी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। जानकारी के अनुसार नई कीमतों को बीती दो मई दो हज़ार बाईस से लागू कर दिया गया है। कीमतों में संशोधन के बाद अब Volkswagen Taigun को ग्यारह. उनतालीस लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर बेचा जा रहा है, वहीं इसके टॉप-स्पेक वेरिएंट की कीमत अट्ठारह. साठ लाख रुपये हो गई है। कंपनी ने अपनी इस क्रॉसओवर की कीमतों में वेरिएंट के आधार पर एक. पाँच-चार प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसका टॉप-स्पेक GT Plus वेरिएंट अब पहले की तुलना में साठ,शून्य रुपयापये ज्यादा महंगा है। कीमत में संशोधन के अलावा Volkswagen ने Taigun के उपकरणों में भी कुछ अपडेट किए हैं। कंपनी ने Volkswagen Taigun में टायर प्रेशर डिफ्लेशन वार्निंग और इंजन आइडल स्टार्ट/स्टॉप जैसे फीचर्स को सभी वेरिएंट्स में स्टैंडर्ड कर दिया है। ये फीचर्स अब इस कार के Performance Line और Dynamic Line ट्रिम्स दोनों पर उपलब्ध हैं। कंपनी का दावा है कि इंजन आइडल स्टार्ट/स्टॉप फीचर को जोड़ने से एक. शून्य-लीटर Dynamic Line वेरिएंट में छः प्रतिशत तक ईंधन दक्षता में सुधार करने में मदद मिलेगी। जहां इसका मैनुअल वेरिएंट उन्नीस. बीस किमी/लीटर का माइलेज प्रदान करता है, वहीं इसका ऑटोमेटिक वेरिएंट सत्रह. तेईस किमी/लीटर का माइलेज देता है। जानकारी अनुसार कंपनी ने न सिर्फ ईंधन दक्षता को बेहतर किया है, बल्कि Volkswagen Taigun लाइनअप में कुछ कॉस्मेटिक अपडेट भी किए हैं। एसयूवी के केबिन के अंदर, इसकी Performance Line ट्रिम अब केवल वाइल्ड चेरी रेड एक्सटीरियर कलर के साथ वाइल्ड चेरी रेड इन्सर्ट के साथ बेचा जाएगा। अन्य सभी एक्सटीरियर रंग विकल्प आर्मर ग्रे ग्लॉसी इन्सर्ट के साथ उपलब्ध हैं। जैसा कि कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर दिख रहा है कि Volkswagen Taigun ताइगुन को नई और बेहतर रूफ लाइन्स भी दी गई हैं। इसके अलावा Volkswagen Taigun के बाकी लाइनअप को पहले के जैसा ही रखा गया है। इसके इंजन की बात करें तो इसमें दो टर्बो पेट्रोल इंजन विकल्प हैं, जिसमें एक. शून्य-लीटर, तीन-सिलेंडर TSI पेट्रोल इंजन और एक. पाँच-लीटर, चार-सिलेंडर TSI पेट्रोल इंजन शामिल है। जहां पहला इंजन एक सौ चौदह bhp की पावर और एक सौ अठहत्तर Nm का टॉर्क देता है, वहीं दूसरा एक सौ अड़तालीस bhp की पावर और दो सौ पचास Nm का अधिकतम टॉर्क प्रदान करता है।
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भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा की 230 सीटों के लिए में बुधवार को मतदान शुरू हुआ. बूथों में मतदान शुरू होते ही इवीएम में खराबी की शिकायतें आने लगी हैं. इस पर जहां कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के पक्ष वाले बूथों में इवीएम खराब हो रही है. वहीं कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इवीएम की खराबी पर चुनाव आयोग से शिकायत की है.
मध्यप्रदेश में पहली बार वीवीपैट के साथ इवीएम पर हो बुधवार को 227 सीटों पर सुबह आठ बजे से तो नक्सल प्रभावित तीन क्षेत्रों में सुबह 7 बजे से शुरू हुआ. वास्तविक सुबह मॉकपोल के साथ शिकायतों का शुरू हुआ सिलसिला वास्तविक मतदान शुरू होने के बाद भी जारी रही. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उज्जैन में 2 खराब हुए, अलीराजपुर में 11 वीवीपैट, मंदसौर में 10 इवीएम, बुहरानपुर में 5 वीवीपैट और 2 इवीएम खराब हो गए. यहां तक भोपाल के वीआईपी बूथ में भी इवीएम खराब हो गया.
इवीएम के खराब होने की आ रही खबरों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि जिन बूथों में कांग्रेस की पकड़ है, वहां की इवीएम ही खराब हो रही है. वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिंया ने इवीएम की खराबी पर चुनाव आयोग में शिकायत किए जाने की बात कहते हुए कहा कि इवीएम की खराबी की वजह से बर्बाद हुए समय की भरपाई करते हुए वोटिंग के समय को बढ़ाया जाना चाहिए.
मतदान शुरू होने के साथ ही मध्यप्रदेश के दिग्गज नेताओं का वोट डालने का क्रम भी शुरू हो गया. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जहां बुधनी विधानसभा सीट के जैत बूथ में सपरिवार वोट दिया, वहीं कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार कमलनाथ ने अपने छिंदवाड़ा विधानसभा से वोट दिया. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में मतदान किया.
विधानसभा चुनाव में 5 करोड़ 4 लाख मतदाता 230 सीटों पर अपना भाग्य आजमा रहे 2899 प्रत्याशियों का फैसला करेंगे. मतदान के बाद स्ट्रांग रूम में 12 दिनों तक कैद रहने के बाद 11 दिसंबर को इवीएम खुलेगी, जिसके बाद मध्यप्रदेश में बनने वाली सरकार का निर्णय होगा.
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भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा की दो सौ तीस सीटों के लिए में बुधवार को मतदान शुरू हुआ. बूथों में मतदान शुरू होते ही इवीएम में खराबी की शिकायतें आने लगी हैं. इस पर जहां कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के पक्ष वाले बूथों में इवीएम खराब हो रही है. वहीं कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इवीएम की खराबी पर चुनाव आयोग से शिकायत की है. मध्यप्रदेश में पहली बार वीवीपैट के साथ इवीएम पर हो बुधवार को दो सौ सत्ताईस सीटों पर सुबह आठ बजे से तो नक्सल प्रभावित तीन क्षेत्रों में सुबह सात बजे से शुरू हुआ. वास्तविक सुबह मॉकपोल के साथ शिकायतों का शुरू हुआ सिलसिला वास्तविक मतदान शुरू होने के बाद भी जारी रही. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उज्जैन में दो खराब हुए, अलीराजपुर में ग्यारह वीवीपैट, मंदसौर में दस इवीएम, बुहरानपुर में पाँच वीवीपैट और दो इवीएम खराब हो गए. यहां तक भोपाल के वीआईपी बूथ में भी इवीएम खराब हो गया. इवीएम के खराब होने की आ रही खबरों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि जिन बूथों में कांग्रेस की पकड़ है, वहां की इवीएम ही खराब हो रही है. वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिंया ने इवीएम की खराबी पर चुनाव आयोग में शिकायत किए जाने की बात कहते हुए कहा कि इवीएम की खराबी की वजह से बर्बाद हुए समय की भरपाई करते हुए वोटिंग के समय को बढ़ाया जाना चाहिए. मतदान शुरू होने के साथ ही मध्यप्रदेश के दिग्गज नेताओं का वोट डालने का क्रम भी शुरू हो गया. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जहां बुधनी विधानसभा सीट के जैत बूथ में सपरिवार वोट दिया, वहीं कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार कमलनाथ ने अपने छिंदवाड़ा विधानसभा से वोट दिया. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में मतदान किया. विधानसभा चुनाव में पाँच करोड़ चार लाख मतदाता दो सौ तीस सीटों पर अपना भाग्य आजमा रहे दो हज़ार आठ सौ निन्यानवे प्रत्याशियों का फैसला करेंगे. मतदान के बाद स्ट्रांग रूम में बारह दिनों तक कैद रहने के बाद ग्यारह दिसंबर को इवीएम खुलेगी, जिसके बाद मध्यप्रदेश में बनने वाली सरकार का निर्णय होगा.
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ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। चाय पर चर्चा अब किसी बंद कमरे में नहीं हो रही है। इसके लिए शहरवासी ऐसे अड्डों पर पहुंच रहे हैं, जहां अलग-अलग फ्लेवर में महंगी से महंगी चाय के प्याले मिलते हैं। खासतौर पर युवा वर्ग के लिए तो अड्डे आइडिया दिमाग में लाने के नए ठिकाने बन चुके हैं। करियर संवारने पर चर्चा करते हुए वे अपनी जुबां पर लाते हैं-इस चाय वाले को ही देखो, थाड़ा सा दिमाग लगाया तो एक अच्छा स्टार्टअप ले लिया है। इस चर्चा से स्पष्ट होता है, ये चाय की चुस्कियां अब करियर ओरिएंटेंड बन चुकी हैं। युवा करियर को मजबूती देने के लिए कई आइडिया इन अड्डों से उठाकर अपने घर ले जा रहे हैं और उन पर काम भी कर रहे हैं। गौर किया जाए तो कई स्थानों पर तो ऐसे स्टाल खुल चुके हैं, जिनकी फ्रेंचाइजी किसी और दूसरी शहर से पैसा देकर यहां लाई गई हैं। इन स्टाल को कोई आैर नहीं शहर के पढ़े-लिखे युवा ही चला रहे हैं।
- शहर में एमबीए चाय वाले से लेकर मुंबई की राजवाड़ी की फ्रंचाइजी है। चाय सुट्टा, बीएड चाय वाला जैसे नामों से चाय की दुकानें संचालित हो रहीं हैं। फूलबाग क्षेत्र की चाय की गुमटियों पर सुबह से लेकर रात तक युवाओं की भीड़ नजर आती है। इन चाय के ठिकानों पर युवतियां भी भीड़ जुटाए खड़ी रहती हैं।
कैलाश नगर स्थित एमबीए चाय वाला की फ्रेंचाइजी कुछ दिन ही शुरू हुई थी। यहां पर चाय रेग्यूलर चाय, मसाला चाय, इलायची चाय, चाकलेट चाय, तुलसी चाय के साथ अन्य फ्लेवर में चाय उपलब्ध है। इनका स्वाद लेने के लिए सुबह से देर शाम तक यहां युवाओं की खासी भीड़ रहती है। अन्य जगहों पर भी युवाओं के चाय की कई वैरायटी देकर समय बिताने का मौका दिया दिया जाता है।
सुबह से शाम तक जितनी भीड़ चाय के अलग-अलग स्टाल पर रहती है, उतनी भीड़ पिज्जा-बर्गर वाले के यहां भी नहीं होती है। लगता है मानो पिज्जा-बर्गर से युवाओं का मन भर चुका है। सिटी सेंटर क्षेत्र में ही आधा दर्जन के लगभग चाय के स्टाल खुले हैं। इनमें अधिकतर फ्रेंचाइजी ही हैं, क्योंकि पब्लिक सक्सेस नाम को ही फालो करना चाहती है।
पहले चाय का मतलब दूध और चाय की पत्ती का मिश्रित रूप ही था। टेस्ट के लिए अदरक व इलायची का उपयोग होता था। अब फ्लेवर वाली चाय की जमाना है। गोविंदपुरी चौराहे के पास राजवाड़ी चाय का स्टाल चलाने वाले साफ्टवेयर इंजीनियार जितेंद्र परमार ने बताया कि उन्होंने मुंबई की रजवाड़ी चाय की फ्रेंचाइजी ली है। अब पढ़ा- लिखा नौजवान चाय के होटलों के बदले स्वरूप में चलाने में कोई गुरेज नहीं कर रहा है। सोच में पूरी तरह से परिवर्तन आ चुका है। उनके यहां रजवाड़ी चाय के अलावा, मसाला चाय, अदरक चाय, स्पेशल इलायची चाय, लांग वाली चाय. स्पायसी चाय, गुड़ वाली चाय, उकाला ( दूध में ड्राइ फ्रूट मसाला) ब्लैक टी, लेमन- जिंजर टी, ग्रीन टी, केशर उकाला मिलती है।
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ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। चाय पर चर्चा अब किसी बंद कमरे में नहीं हो रही है। इसके लिए शहरवासी ऐसे अड्डों पर पहुंच रहे हैं, जहां अलग-अलग फ्लेवर में महंगी से महंगी चाय के प्याले मिलते हैं। खासतौर पर युवा वर्ग के लिए तो अड्डे आइडिया दिमाग में लाने के नए ठिकाने बन चुके हैं। करियर संवारने पर चर्चा करते हुए वे अपनी जुबां पर लाते हैं-इस चाय वाले को ही देखो, थाड़ा सा दिमाग लगाया तो एक अच्छा स्टार्टअप ले लिया है। इस चर्चा से स्पष्ट होता है, ये चाय की चुस्कियां अब करियर ओरिएंटेंड बन चुकी हैं। युवा करियर को मजबूती देने के लिए कई आइडिया इन अड्डों से उठाकर अपने घर ले जा रहे हैं और उन पर काम भी कर रहे हैं। गौर किया जाए तो कई स्थानों पर तो ऐसे स्टाल खुल चुके हैं, जिनकी फ्रेंचाइजी किसी और दूसरी शहर से पैसा देकर यहां लाई गई हैं। इन स्टाल को कोई आैर नहीं शहर के पढ़े-लिखे युवा ही चला रहे हैं। - शहर में एमबीए चाय वाले से लेकर मुंबई की राजवाड़ी की फ्रंचाइजी है। चाय सुट्टा, बीएड चाय वाला जैसे नामों से चाय की दुकानें संचालित हो रहीं हैं। फूलबाग क्षेत्र की चाय की गुमटियों पर सुबह से लेकर रात तक युवाओं की भीड़ नजर आती है। इन चाय के ठिकानों पर युवतियां भी भीड़ जुटाए खड़ी रहती हैं। कैलाश नगर स्थित एमबीए चाय वाला की फ्रेंचाइजी कुछ दिन ही शुरू हुई थी। यहां पर चाय रेग्यूलर चाय, मसाला चाय, इलायची चाय, चाकलेट चाय, तुलसी चाय के साथ अन्य फ्लेवर में चाय उपलब्ध है। इनका स्वाद लेने के लिए सुबह से देर शाम तक यहां युवाओं की खासी भीड़ रहती है। अन्य जगहों पर भी युवाओं के चाय की कई वैरायटी देकर समय बिताने का मौका दिया दिया जाता है। सुबह से शाम तक जितनी भीड़ चाय के अलग-अलग स्टाल पर रहती है, उतनी भीड़ पिज्जा-बर्गर वाले के यहां भी नहीं होती है। लगता है मानो पिज्जा-बर्गर से युवाओं का मन भर चुका है। सिटी सेंटर क्षेत्र में ही आधा दर्जन के लगभग चाय के स्टाल खुले हैं। इनमें अधिकतर फ्रेंचाइजी ही हैं, क्योंकि पब्लिक सक्सेस नाम को ही फालो करना चाहती है। पहले चाय का मतलब दूध और चाय की पत्ती का मिश्रित रूप ही था। टेस्ट के लिए अदरक व इलायची का उपयोग होता था। अब फ्लेवर वाली चाय की जमाना है। गोविंदपुरी चौराहे के पास राजवाड़ी चाय का स्टाल चलाने वाले साफ्टवेयर इंजीनियार जितेंद्र परमार ने बताया कि उन्होंने मुंबई की रजवाड़ी चाय की फ्रेंचाइजी ली है। अब पढ़ा- लिखा नौजवान चाय के होटलों के बदले स्वरूप में चलाने में कोई गुरेज नहीं कर रहा है। सोच में पूरी तरह से परिवर्तन आ चुका है। उनके यहां रजवाड़ी चाय के अलावा, मसाला चाय, अदरक चाय, स्पेशल इलायची चाय, लांग वाली चाय. स्पायसी चाय, गुड़ वाली चाय, उकाला ब्लैक टी, लेमन- जिंजर टी, ग्रीन टी, केशर उकाला मिलती है।
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रामानंद सागर की पौत्री की ये बोल्ड फोटो, उडा रखी हैं रातों की नींद, अकेले में ही देखें ये फोटो!
जब से जोबन पे आयो उभार, नजरें चुभती हैं जैसे कटार.... देखें बेहद हॉट Song!
कृपा इस पोस्ट को ना देखे ! ! बॉस महिला कर्मचारी को बुलाकर....
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रामानंद सागर की पौत्री की ये बोल्ड फोटो, उडा रखी हैं रातों की नींद, अकेले में ही देखें ये फोटो! जब से जोबन पे आयो उभार, नजरें चुभती हैं जैसे कटार.... देखें बेहद हॉट Song! कृपा इस पोस्ट को ना देखे ! ! बॉस महिला कर्मचारी को बुलाकर....
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1- मिडिल क्लास फैमिली एक तीन से चार कमरों के अपार्टमेंट या 200 वर्गगज के मकान में 3 से 4 कमरों में अपनी जिंदगी बिताती है। पाकिस्तान की एक टिपिकल मिडिल क्लास फैमिली की इनकम 25 हजार से 1 लाख के बीच होती है।
2- बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते है। स्कूल की फीस 2 हजार से पांच हजार होती है।
3- बच्चे स्कूल वैन और बस से स्कूल आते जाते हैं। जिसमें प्रति बच्चा एक हजार से पन्द्रह सौ खर्चा आता है।
3- अक्सर मिडिल क्लास फैमिली में पिता किसी मल्टीनेशनल कंपनी मे होते हैं और मां हाउस वाइफ होती है। पापा सुबह नो बजे से दस बजे के बीच ऑफिस जाते है और रात को 8 बजे तक लौट के आते है। वो एक दिन 9 से 12 घंटे काम करते हैं। मां पापा के लिए लंच तैयार करती हैं।
4- घर के बड़े बुजुर्ग अक्सर अपना टाइम अखबार पढते हुए या फिर टीवी देखते हुए बिताते हैं। वो अक्सर अपने नाती पोतों के साथ भी अपना समय बिताते हैं। लेकिन बच्चे अपने स्कूल होम ट्यूशन मदरसे में बिजी रहते हैं।
5- बच्चों के पास घर के बड़े बुजुर्गो के साथ बिताने के लिए बहुत कम समय होता है। मिडिल क्लास फेमिली में सास और बहू के बीच लड़ाई होना आम बात है। एक महिने में पूरा परिवार 3 से 4 बार पिकनेक मनाने जाता है।
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एक- मिडिल क्लास फैमिली एक तीन से चार कमरों के अपार्टमेंट या दो सौ वर्गगज के मकान में तीन से चार कमरों में अपनी जिंदगी बिताती है। पाकिस्तान की एक टिपिकल मिडिल क्लास फैमिली की इनकम पच्चीस हजार से एक लाख के बीच होती है। दो- बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते है। स्कूल की फीस दो हजार से पांच हजार होती है। तीन- बच्चे स्कूल वैन और बस से स्कूल आते जाते हैं। जिसमें प्रति बच्चा एक हजार से पन्द्रह सौ खर्चा आता है। तीन- अक्सर मिडिल क्लास फैमिली में पिता किसी मल्टीनेशनल कंपनी मे होते हैं और मां हाउस वाइफ होती है। पापा सुबह नो बजे से दस बजे के बीच ऑफिस जाते है और रात को आठ बजे तक लौट के आते है। वो एक दिन नौ से बारह घंटाटे काम करते हैं। मां पापा के लिए लंच तैयार करती हैं। चार- घर के बड़े बुजुर्ग अक्सर अपना टाइम अखबार पढते हुए या फिर टीवी देखते हुए बिताते हैं। वो अक्सर अपने नाती पोतों के साथ भी अपना समय बिताते हैं। लेकिन बच्चे अपने स्कूल होम ट्यूशन मदरसे में बिजी रहते हैं। पाँच- बच्चों के पास घर के बड़े बुजुर्गो के साथ बिताने के लिए बहुत कम समय होता है। मिडिल क्लास फेमिली में सास और बहू के बीच लड़ाई होना आम बात है। एक महिने में पूरा परिवार तीन से चार बार पिकनेक मनाने जाता है।
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पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान सलमान के रूप में हुई है. आरोपी श्याम बनकर लड़की के संपर्क में आया था. उसने पहले दोस्ती की और इसी दौरान आरोपी लड़की को डरा धमका कर भगा ले गया.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लव जिहाद का मामला सामने आया है. एक युवक ने अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर एक नाबालिग से पहले दोस्ती की. फिर आरोपी ने चाकू की नोक पर उसका अपहरण कर धर्मांतरण कराया और फिर हरियाणा में ले जाकर उसके साथ निकाह करते हुए बार बार रेप किया. लड़की के मोबाइल फोन की लोकेशन को ट्रैस कर हरियाणा पहुंची लखनऊ पुलिस ने लड़की को बरामद करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धर्मांतरण, लव जिहाद, अपहरण और बाल यौन उत्पीड़न की धाराओं में केस दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है.
पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान सलमान के रूप में हुई है. आरोपी श्याम बनकर लड़की के संपर्क में आया था. उसने पहले दोस्ती की और इसी दौरान आरोपी लड़की को डरा धमका कर भगा ले गया. इस दौरान आरोपी ने लड़की का चाकू की नोक पर धर्मांतरण कराते हुए उसके साथ निकाह कर लिया और हरियाणा ले जाकर बार बार उसके साथ रेप किया. लखनऊ में पारा इंस्पेक्टर दधिबल तिवारी ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर पहले गुमशुदगी दर्ज की गई थी. इसके बाद पुलिस ने लड़की के मोबाइल नंबर को ट्रैस किया तो पता चला कि वह हरियाणा में है. फिर पुलिस की टीम हरियाणा भेजी गई. जहां से आरोपी को गिरफ्तार कर लड़की को बरामद किया गया है.
पुलिस ने बताया कि आरोपी ने 13 नवंबर को इस वारदात को अंजाम दिया था. आरोपी ने घर से भागने का विरोध किया था, लेकिन सलमान ने उसे परिवार के साथ जान से मारने की धमकी दी और उसे जबरन अपने साथ लेकर चला गया. इधर, अगली सुबह तक जब लड़की घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई. मोबाइल नंबर ट्रैस करने पर पता चला कि लड़की और आरोपी दोनों की लोकेशन हरियाणा में है. इसके बाद पुलिस ने लड़की को मुक्त कराते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बताया कि पीड़ित लड़की के बयान के आधार पर आरोपी सलमान के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन, निकाह करने और रेप की धाराओं में केस दर्ज किया गया है.
पुलिस ने बताया कि आरोपी पीड़ित लड़की के एक दोस्ते के संपर्क में था. इसी दोस्त ने पीड़िता को आरोपी से मिलवाया. इस दौरान आरोपी ने खुद का नाम श्याम बताया था. इसके बाद आरोपी ने मीठी मीठी बातें कर लड़कों को अपने जाल में फंसाया. वहीं जब लड़की उसके चंगुल में फंस गई तो आरोपी ने इस वारदात को अंजाम दिया है. लखनऊ के ADCP चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया है, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
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पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान सलमान के रूप में हुई है. आरोपी श्याम बनकर लड़की के संपर्क में आया था. उसने पहले दोस्ती की और इसी दौरान आरोपी लड़की को डरा धमका कर भगा ले गया. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लव जिहाद का मामला सामने आया है. एक युवक ने अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर एक नाबालिग से पहले दोस्ती की. फिर आरोपी ने चाकू की नोक पर उसका अपहरण कर धर्मांतरण कराया और फिर हरियाणा में ले जाकर उसके साथ निकाह करते हुए बार बार रेप किया. लड़की के मोबाइल फोन की लोकेशन को ट्रैस कर हरियाणा पहुंची लखनऊ पुलिस ने लड़की को बरामद करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धर्मांतरण, लव जिहाद, अपहरण और बाल यौन उत्पीड़न की धाराओं में केस दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान सलमान के रूप में हुई है. आरोपी श्याम बनकर लड़की के संपर्क में आया था. उसने पहले दोस्ती की और इसी दौरान आरोपी लड़की को डरा धमका कर भगा ले गया. इस दौरान आरोपी ने लड़की का चाकू की नोक पर धर्मांतरण कराते हुए उसके साथ निकाह कर लिया और हरियाणा ले जाकर बार बार उसके साथ रेप किया. लखनऊ में पारा इंस्पेक्टर दधिबल तिवारी ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर पहले गुमशुदगी दर्ज की गई थी. इसके बाद पुलिस ने लड़की के मोबाइल नंबर को ट्रैस किया तो पता चला कि वह हरियाणा में है. फिर पुलिस की टीम हरियाणा भेजी गई. जहां से आरोपी को गिरफ्तार कर लड़की को बरामद किया गया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी ने तेरह नवंबर को इस वारदात को अंजाम दिया था. आरोपी ने घर से भागने का विरोध किया था, लेकिन सलमान ने उसे परिवार के साथ जान से मारने की धमकी दी और उसे जबरन अपने साथ लेकर चला गया. इधर, अगली सुबह तक जब लड़की घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई. मोबाइल नंबर ट्रैस करने पर पता चला कि लड़की और आरोपी दोनों की लोकेशन हरियाणा में है. इसके बाद पुलिस ने लड़की को मुक्त कराते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बताया कि पीड़ित लड़की के बयान के आधार पर आरोपी सलमान के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन, निकाह करने और रेप की धाराओं में केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी पीड़ित लड़की के एक दोस्ते के संपर्क में था. इसी दोस्त ने पीड़िता को आरोपी से मिलवाया. इस दौरान आरोपी ने खुद का नाम श्याम बताया था. इसके बाद आरोपी ने मीठी मीठी बातें कर लड़कों को अपने जाल में फंसाया. वहीं जब लड़की उसके चंगुल में फंस गई तो आरोपी ने इस वारदात को अंजाम दिया है. लखनऊ के ADCP चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया है, जहां से उसे चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
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- व्यापक बैक अप समर्थन सहित सामान्य प्रबंधन और कल्याण गतिविधियों से संबंधित सभी मुद्दों पर डीआरडीओ मुख्यालय क्लस्टर्स / लैब्स को कॉर्पोरेट सहायता प्रदान करने के लिए जिम्मेदार।
- सरकारी वाहनों की दुर्घटनाओं से संबंधित अदालती मामलों के लिए डीआरडीओ के लैब्स / इस्टेट्स को आवश्यक और आवश्यक सभी सहायता प्रदान करें।
- धन के लिए डीआरडीओ सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रस्तावों की जांच और प्रक्रिया। स्कूलों से व्यय की स्थिति प्राप्त करें और उनके कथनों को सत्यापित करें।
- डीआरडीओ-अपोलो अस्पताल से संबंधित सभी मुद्दों के लिए समन्वय।
- संघों की सदस्यता का सत्यापन।
- सक्षम प्राधिकरण की स्वीकृति के लिए यूनियनों और संघों की मान्यता के लिए अनुरोधों को संसाधित करें।
- प्रयोगशालाओं में एमआई कक्ष स्थापित करना।
- निजी सुरक्षा प्रयोगशालाओं में शामिल हैं।
- डीआरडीओ मुख्यालय के लिए वार्षिक बजट अनुमान।
- विभिन्न प्रमुखों के तहत व्यय की स्थिति की समीक्षा।
- डीआरडीओ मुख्यालय के लिए स्टेशनरी, कार्यालय / आईटी / संचार उपकरणों की खरीद के लिए प्रक्रिया।
- डीआरडीओ मुख्यालय के सभी कार्यालय उपकरणों के लिए वार्षिक रखरखाव अनुबंधों को अंतिम रूप दें।
- डीआरडीओ मुख्यालय के लिए नकद पुरस्कार / विविध / व्यय के लिए वित्तीय स्वीकृति।
- स्टॉक लीडर बनाए रखें और वार्षिक स्टॉक सत्यापन करें।
- असंगत वस्तुओं / उपकरणों की निंदा।
- सभी डीआरडीओ लैब्स / एस्टी के 28 जून, 2018 के वित्तीय शक्तियों के प्रत्यायोजन के 5.2 (ii) के तहत सुरक्षा सेवा अनुबंध की प्रक्रिया करें, जो डीएमएस और की प्रत्यायोजित शक्तियों के अंतर्गत आता है; DG (R & M)।
- सरकारी पत्र के अनुसार डीएमएस को सौंपी गई वित्तीय शक्तियाँ; डीआरडीओ / डीएफएमएम / एफए / 83226 / एम / 01/1174 / डी (आर एंड डी) प्रयोगशाला निदेशकों की शक्तियों से परे प्रयोगशाला प्रस्तावों के संबंध में दिनांक 28 जून 2018।
- गैर अधिकारियों के कदम को मंजूरी देने के लिए प्रक्रिया प्रस्ताव। भुगतान के लिए सीडीए (आरएंडडी) के साथ उनके टीए / डीए दावों और प्रक्रिया को तैयार करें और जांच करें।
- सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के लिए लैब्स / क्लस्टर / कॉर्पोरेट निदेशालयों के निम्नलिखित, प्रक्रिया संबंधी प्रस्तावः
- कार्यकारी वर्ग में गैर-अधिकारियों की हवाई यात्रा।
- अन-अधिकृत एजेंटों के माध्यम से खरीदे गए हवाई टिकटों का नियमितीकरण।
- स्थायी स्थानांतरण पर परिवार और व्यक्तिगत के स्थानांतरण के लिए समय पट्टी की मंजूरी।
- टीए / डीए दावों को स्वीकार करने के लिए समय पट्टी की मंजूरी।
- जारी वारंट (स्वयं के लिए) के लिए आवश्यकताओं को संसाधित करें; डीआरडीओ मुख्यालय के बल पर सेवा कार्मिकों को उनके वारंट के अनुसार पारिवारिक वारंट / फॉर्म डी, आदि।
- प्रक्रिया के मामले।
- विदेशी प्रतिनियुक्तियों के प्रस्तावों की प्रक्रिया करें। एमईए से सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी और राजनीतिक मंजूरी प्राप्त करें। सरकारी पत्र जारी करने और यात्रा वाउचर जारी करने की व्यवस्था करें।
- आधिकारिक पासपोर्ट के लिए विदेशी प्रतिनियुक्ति पर आगे बढ़ने वाले अधिकारी को आवश्यक सहायता / सहायता प्रदान करना, वीजा पर मुहर लगाना, अवरुद्ध करना और अधिकृत एजेंटों द्वारा टिकट जारी करना आदि।
- सुनिश्चित करें कि परिवहन आवश्यकताओं की पूर्ति हो।
- सुनिश्चित करें कि वाहनों का डीआरडीओ मुख्यालय बेड़े का उपयोग किया गया है और ठीक से रखरखाव किया गया है।
- प्रयोगशालाओं / प्रतिष्ठानों की नियमित स्थापना (आरई) पर वाहनों की पूर्व-परिपक्व निंदा पर विचार करने के लिए समय-समय पर क्षेत्रीय स्टेशन बोर्ड (क्षेत्रवार) का गठन किया जाता है।
- प्राधिकरण के आधार पर, डाउनग्रेड किए गए वाहनों के नए / प्रतिस्थापन की खरीद के लिए लैब्स / इकाइयों को वित्तीय मंजूरी जारी करना।
- दैनिक आधार पर डीआरडीओ गेस्ट हाउस एट डेवलपमेंट एन्क्लेव में दिल्ली आने वाले अधिकारियों के लिए आवास की बुकिंग।
- आवासीय टेलीफोन।
- नया EPABX एक्सचेंज आदि।
- कार्यालय / आवासीय टेलीफोन पर आईएसडी सुविधा।
- अधिनियम।
- डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं / मुहल्लों को श्रम विधानों के तहत विभिन्न प्रावधानों के कार्यान्वयन और व्याख्या के लिए एक नोडल बिंदु के रूप में कार्य करें।
- समय-समय पर सभी प्रयोगशाला स्तर (जैसे डेथ रिलीफ फंड, रिलीफ फंड, रिटायरमेंट फंड, मेडिकल बेनिफिट फंड, लेबर वेलफेयर फंड, वेलफेयर कमेटी, आदि) को लागू करने वाली नीतियों और डीआरडीओ की श्रम और कल्याण नीतियों की समीक्षा करें। और कॉर्पोरेट स्तर पर (जैसे डीआरडीओ परोपकारी फंड ट्रस्ट डिफेंस सिविलियन मेडिकल एड (DCMA) फंड आदि)।
- श्रम अधिकारी / AL WC / DLWC पर नियंत्रण कार्य करें और सचिव, D (R D) के परामर्श से उनके बीच अतिरिक्त कर्तव्यों का पालन करें। उनके रिटर्न / रिपोर्ट की जांच करें और जब भी आवश्यकता हो उन्हें सलाह दें।
- लीज़।
- विभिन्न राष्ट्रीय आयोजनों / सम्मेलनों / पुरस्कार वितरण आदि के संचालन की व्यवस्था करने के लिए नोडल बिंदु की भूमिका निभाएं।
- CW के साथ संपर्क करें; डीआरडीओ भवन, तिमारपुर में डीआरडीओ कैंप, एनजीओ हॉस्टल इन डेवलपमेंट एन्क्लेव एंड डेवलपमेंट एन्क्लेव गेस्ट हाउस में सभागार और कॉन्फ्रेंस हॉल के रखरखाव के लिए ई।
- डीआरडीओ भवन परिसर की सुरक्षा सेवाओं और स्वच्छता नियंत्रण के लिए अनुबंध को अंतिम रूप दें।
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- व्यापक बैक अप समर्थन सहित सामान्य प्रबंधन और कल्याण गतिविधियों से संबंधित सभी मुद्दों पर डीआरडीओ मुख्यालय क्लस्टर्स / लैब्स को कॉर्पोरेट सहायता प्रदान करने के लिए जिम्मेदार। - सरकारी वाहनों की दुर्घटनाओं से संबंधित अदालती मामलों के लिए डीआरडीओ के लैब्स / इस्टेट्स को आवश्यक और आवश्यक सभी सहायता प्रदान करें। - धन के लिए डीआरडीओ सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रस्तावों की जांच और प्रक्रिया। स्कूलों से व्यय की स्थिति प्राप्त करें और उनके कथनों को सत्यापित करें। - डीआरडीओ-अपोलो अस्पताल से संबंधित सभी मुद्दों के लिए समन्वय। - संघों की सदस्यता का सत्यापन। - सक्षम प्राधिकरण की स्वीकृति के लिए यूनियनों और संघों की मान्यता के लिए अनुरोधों को संसाधित करें। - प्रयोगशालाओं में एमआई कक्ष स्थापित करना। - निजी सुरक्षा प्रयोगशालाओं में शामिल हैं। - डीआरडीओ मुख्यालय के लिए वार्षिक बजट अनुमान। - विभिन्न प्रमुखों के तहत व्यय की स्थिति की समीक्षा। - डीआरडीओ मुख्यालय के लिए स्टेशनरी, कार्यालय / आईटी / संचार उपकरणों की खरीद के लिए प्रक्रिया। - डीआरडीओ मुख्यालय के सभी कार्यालय उपकरणों के लिए वार्षिक रखरखाव अनुबंधों को अंतिम रूप दें। - डीआरडीओ मुख्यालय के लिए नकद पुरस्कार / विविध / व्यय के लिए वित्तीय स्वीकृति। - स्टॉक लीडर बनाए रखें और वार्षिक स्टॉक सत्यापन करें। - असंगत वस्तुओं / उपकरणों की निंदा। - सभी डीआरडीओ लैब्स / एस्टी के अट्ठाईस जून, दो हज़ार अट्ठारह के वित्तीय शक्तियों के प्रत्यायोजन के पाँच.दो के तहत सुरक्षा सेवा अनुबंध की प्रक्रिया करें, जो डीएमएस और की प्रत्यायोजित शक्तियों के अंतर्गत आता है; DG । - सरकारी पत्र के अनुसार डीएमएस को सौंपी गई वित्तीय शक्तियाँ; डीआरडीओ / डीएफएमएम / एफए / तिरासी हज़ार दो सौ छब्बीस / एम / एक/एक हज़ार एक सौ चौहत्तर / डी प्रयोगशाला निदेशकों की शक्तियों से परे प्रयोगशाला प्रस्तावों के संबंध में दिनांक अट्ठाईस जून दो हज़ार अट्ठारह। - गैर अधिकारियों के कदम को मंजूरी देने के लिए प्रक्रिया प्रस्ताव। भुगतान के लिए सीडीए के साथ उनके टीए / डीए दावों और प्रक्रिया को तैयार करें और जांच करें। - सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के लिए लैब्स / क्लस्टर / कॉर्पोरेट निदेशालयों के निम्नलिखित, प्रक्रिया संबंधी प्रस्तावः - कार्यकारी वर्ग में गैर-अधिकारियों की हवाई यात्रा। - अन-अधिकृत एजेंटों के माध्यम से खरीदे गए हवाई टिकटों का नियमितीकरण। - स्थायी स्थानांतरण पर परिवार और व्यक्तिगत के स्थानांतरण के लिए समय पट्टी की मंजूरी। - टीए / डीए दावों को स्वीकार करने के लिए समय पट्टी की मंजूरी। - जारी वारंट के लिए आवश्यकताओं को संसाधित करें; डीआरडीओ मुख्यालय के बल पर सेवा कार्मिकों को उनके वारंट के अनुसार पारिवारिक वारंट / फॉर्म डी, आदि। - प्रक्रिया के मामले। - विदेशी प्रतिनियुक्तियों के प्रस्तावों की प्रक्रिया करें। एमईए से सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी और राजनीतिक मंजूरी प्राप्त करें। सरकारी पत्र जारी करने और यात्रा वाउचर जारी करने की व्यवस्था करें। - आधिकारिक पासपोर्ट के लिए विदेशी प्रतिनियुक्ति पर आगे बढ़ने वाले अधिकारी को आवश्यक सहायता / सहायता प्रदान करना, वीजा पर मुहर लगाना, अवरुद्ध करना और अधिकृत एजेंटों द्वारा टिकट जारी करना आदि। - सुनिश्चित करें कि परिवहन आवश्यकताओं की पूर्ति हो। - सुनिश्चित करें कि वाहनों का डीआरडीओ मुख्यालय बेड़े का उपयोग किया गया है और ठीक से रखरखाव किया गया है। - प्रयोगशालाओं / प्रतिष्ठानों की नियमित स्थापना पर वाहनों की पूर्व-परिपक्व निंदा पर विचार करने के लिए समय-समय पर क्षेत्रीय स्टेशन बोर्ड का गठन किया जाता है। - प्राधिकरण के आधार पर, डाउनग्रेड किए गए वाहनों के नए / प्रतिस्थापन की खरीद के लिए लैब्स / इकाइयों को वित्तीय मंजूरी जारी करना। - दैनिक आधार पर डीआरडीओ गेस्ट हाउस एट डेवलपमेंट एन्क्लेव में दिल्ली आने वाले अधिकारियों के लिए आवास की बुकिंग। - आवासीय टेलीफोन। - नया EPABX एक्सचेंज आदि। - कार्यालय / आवासीय टेलीफोन पर आईएसडी सुविधा। - अधिनियम। - डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं / मुहल्लों को श्रम विधानों के तहत विभिन्न प्रावधानों के कार्यान्वयन और व्याख्या के लिए एक नोडल बिंदु के रूप में कार्य करें। - समय-समय पर सभी प्रयोगशाला स्तर को लागू करने वाली नीतियों और डीआरडीओ की श्रम और कल्याण नीतियों की समीक्षा करें। और कॉर्पोरेट स्तर पर फंड आदि)। - श्रम अधिकारी / AL WC / DLWC पर नियंत्रण कार्य करें और सचिव, D के परामर्श से उनके बीच अतिरिक्त कर्तव्यों का पालन करें। उनके रिटर्न / रिपोर्ट की जांच करें और जब भी आवश्यकता हो उन्हें सलाह दें। - लीज़। - विभिन्न राष्ट्रीय आयोजनों / सम्मेलनों / पुरस्कार वितरण आदि के संचालन की व्यवस्था करने के लिए नोडल बिंदु की भूमिका निभाएं। - CW के साथ संपर्क करें; डीआरडीओ भवन, तिमारपुर में डीआरडीओ कैंप, एनजीओ हॉस्टल इन डेवलपमेंट एन्क्लेव एंड डेवलपमेंट एन्क्लेव गेस्ट हाउस में सभागार और कॉन्फ्रेंस हॉल के रखरखाव के लिए ई। - डीआरडीओ भवन परिसर की सुरक्षा सेवाओं और स्वच्छता नियंत्रण के लिए अनुबंध को अंतिम रूप दें।
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'टाइम्स नाउ नवभारत' में टीम और मैनेजमेंट के बीच समन्वय स्थापित करने और चैनल को और अधिक मजबूती प्रदान करने के इरादे से एक बड़ा कदम उठाया गया है।
सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक बार फिर फर्जी न्यूज के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। दरअसल, इस कवायद के तहत सरकार ने 10 यू-ट्यूब चैनलों से 45 वीडियो को ब्लॉक कर दिया है।
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए सबसे बड़ा खतरा नए जमाने के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से नहीं, बल्कि खुद मुख्यधारा के मीडिया चैनलों से है।
एशिया कप के सुपर-4 के दूसरे मुकाबले के बाद 'विकिपीडिया' पर अर्शदीप की प्रोफाइल से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में प्रेस प्रभाग के अपर निदेशक अंशुमान राम त्रिपाठी की ओर से इस बारे में 26 अगस्त 2022 को अधीनस्थ अधिकारियों को एक लेटर भी जारी किया गया है।
'जागरण न्यू मीडिया' के सीईओ भरत गुप्ता ने कहा, 'हमने कंटेंट और तकनीक में निवेश कर एक सुरक्षित माहौल तैयार किया है जो बेहतर प्रगति के लिए जरूरी है। '
दूरदर्शन और आकाशवाणी के डायरेक्टर जनरल के पद उपयुक्त उम्मीदवारों की अनुपस्थिति में अभी तक नहीं भरे जा सके हैं, लिहाजा ये पद क्रमशः सितंबर और दिसंबर 2019 से खाली हैं।
सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को लोकसभा में इस बारे में जानकारी दी है।
ट्राई ने 'मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर्स' (एमएसओ) रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण को लेकर एक परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) जारी किया है।
लोकसभा में दिए गए सवालों के जवाब में अनुराग ठाकुर का कहना था कि मंत्रालय समय-समय पर कार्यक्रम संहिता का पालन करने के लिए निजी सैटेलाइट टीवी चैनल्स को एडवाइजरी भी जारी करता है।
सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर और भारत सरकार एक बार फिर आमने-सामने हैं।
इस साल 21 मार्च 2022 को 1763 के मुकाबले चार जुलाई तक रजिस्टर्ड मल्टीसिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) की संख्या घटकर 1753 रह गई है।
ASCI ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यक्तिगत देखभाल जैसे क्षेत्रों को डिजिटल श्रेणी में शीर्ष तीन उल्लंघनकारी श्रेणियों के रूप में पाया गया है।
कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने ईडी पर आरोप लगाया कि वह पार्टी नेताओं की छवि खराब करने के लिए कुछ मीडिया घरानों को चुनिंदा सूचनाएं लीक कर रहा है।
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'टाइम्स नाउ नवभारत' में टीम और मैनेजमेंट के बीच समन्वय स्थापित करने और चैनल को और अधिक मजबूती प्रदान करने के इरादे से एक बड़ा कदम उठाया गया है। सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक बार फिर फर्जी न्यूज के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। दरअसल, इस कवायद के तहत सरकार ने दस यू-ट्यूब चैनलों से पैंतालीस वीडियो को ब्लॉक कर दिया है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए सबसे बड़ा खतरा नए जमाने के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से नहीं, बल्कि खुद मुख्यधारा के मीडिया चैनलों से है। एशिया कप के सुपर-चार के दूसरे मुकाबले के बाद 'विकिपीडिया' पर अर्शदीप की प्रोफाइल से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में प्रेस प्रभाग के अपर निदेशक अंशुमान राम त्रिपाठी की ओर से इस बारे में छब्बीस अगस्त दो हज़ार बाईस को अधीनस्थ अधिकारियों को एक लेटर भी जारी किया गया है। 'जागरण न्यू मीडिया' के सीईओ भरत गुप्ता ने कहा, 'हमने कंटेंट और तकनीक में निवेश कर एक सुरक्षित माहौल तैयार किया है जो बेहतर प्रगति के लिए जरूरी है। ' दूरदर्शन और आकाशवाणी के डायरेक्टर जनरल के पद उपयुक्त उम्मीदवारों की अनुपस्थिति में अभी तक नहीं भरे जा सके हैं, लिहाजा ये पद क्रमशः सितंबर और दिसंबर दो हज़ार उन्नीस से खाली हैं। सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को लोकसभा में इस बारे में जानकारी दी है। ट्राई ने 'मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर्स' रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण को लेकर एक परामर्श पत्र जारी किया है। लोकसभा में दिए गए सवालों के जवाब में अनुराग ठाकुर का कहना था कि मंत्रालय समय-समय पर कार्यक्रम संहिता का पालन करने के लिए निजी सैटेलाइट टीवी चैनल्स को एडवाइजरी भी जारी करता है। सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर और भारत सरकार एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस साल इक्कीस मार्च दो हज़ार बाईस को एक हज़ार सात सौ तिरेसठ के मुकाबले चार जुलाई तक रजिस्टर्ड मल्टीसिस्टम ऑपरेटर्स की संख्या घटकर एक हज़ार सात सौ तिरेपन रह गई है। ASCI ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यक्तिगत देखभाल जैसे क्षेत्रों को डिजिटल श्रेणी में शीर्ष तीन उल्लंघनकारी श्रेणियों के रूप में पाया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने ईडी पर आरोप लगाया कि वह पार्टी नेताओं की छवि खराब करने के लिए कुछ मीडिया घरानों को चुनिंदा सूचनाएं लीक कर रहा है।
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आस्ट्रेलिया ने टीम में तीन बदलाव किये हैं । चोट के कारण नियमित कप्तान आरोन फिंच टीम से बाहर हैं जिनकी जगह मैथ्यू वेड कप्तानी करेंगे ।
टिम डेविड भी चोटिल हैं जबकि मिशेल स्टार्क को बाहर किया गया है । इनकी जगह कैमरन ग्रीन, स्टीव स्मिथ और केन रिचर्डसन खेलेंगे ।
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आस्ट्रेलिया ने टीम में तीन बदलाव किये हैं । चोट के कारण नियमित कप्तान आरोन फिंच टीम से बाहर हैं जिनकी जगह मैथ्यू वेड कप्तानी करेंगे । टिम डेविड भी चोटिल हैं जबकि मिशेल स्टार्क को बाहर किया गया है । इनकी जगह कैमरन ग्रीन, स्टीव स्मिथ और केन रिचर्डसन खेलेंगे ।
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मेष राशि- नया व्यवसाय शुरू करने या अपने मौजूदा व्यवसाय का विस्तार करने के इच्छुक लोगों के लिए यह बहुत बेहतर समय होगा। निजी क्षेत्र में करियर ग्रोथ की तलाश कर रहे लोगों को अपने सभी प्रयासों में सफलता मिलेगी क्योंकि शनि अपनी मूलत्रिकोण राशि में होगा। मेष राशि के जातकों को शनि की कृपा से आर्थिक लाभ होगा। हालांकि, आपको प्रेम संबंधी मामलों में सावधानी बरतने की ज़रूरत है क्योंकि 5 वें घर पर शनि की दृष्टि से आपको सावधान रहने की आवश्यकता होगी क्योंकि विवाद हो सकते हैं। अगर आप अपने पार्टनर को धोखा दे रहे हैं तो आप निश्चित रूप से रंगेहाथ पकड़े जाएंगे।
वृषभ राशि- वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि करियर के 10वें भाव में रहेगा। यह समय आपको व्यवसाय और नौकरी में नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करेगा। यह आपके सुविधा क्षेत्र से बाहर आने और पेशेवर के साथ-साथ व्यक्तिगत विकास की ओर बढ़ने का समय होगा। कार्यक्षेत्र में तबादला या बदलाव के योग हैं। छात्रों के लिए यह वांछित लाभ प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने का समय है।
मिथुन राशि- मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि 9वें भाव में होगा। किसी कोर्स में दाखिला लेने या किसी विदेशी विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन करने वालों के लिए शनि गोचर का चरण अनुकूल दिखाई देता है। पीआर आवेदन स्वीकार होने का इंतजार कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिलेगी।
कर्क राशि- शनि का नक्षत्र परिवर्तन कर्क राशि के जातकों के लिए थोड़ा मुश्किल होगा, खासकर आपके करियर के लिहाज से। जो लोग निजी क्षेत्र में काम कर रहे हैं उन्हें वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए अधिक प्रयास करने होंगे। इस बात की संभावना है कि कुछ लोग अपनी नौकरी खो सकते हैं या कार्यस्थल पर राजनीति का सामना कर सकते हैं। इसलिए काम सावधानी से और सावधानी से किया जाना चाहिए।
सिंह राशि- सिंह राशि के सप्तम भाव में शनि का वास रहेगा। इस दौरान जातकों को प्रमोशन मिल सकता है। जो लोग नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं, अगर वे चाहें तो उन्हें नौकरी मिल सकती है। आपके काम का शेड्यूल बदल सकता है, या आपको किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। जो लोग व्यवसाय में हैं, उनके लिए नए ऑर्डर कार्ड पर हैं।
कन्या राशि- कन्या राशि वालों के लिए शनि छठे भाव में रहेगा। कार्यक्षेत्र में इस दौरान परिवर्तन हो सकता है। आकर्षक नौकरी मिलने की संभावनाएं अधिक हैं। काम का बढ़ा हुआ बोझ कन्या राशि के जातकों को तनाव में डालेगा और कुछ अन्य कारणों से तनाव महसूस कर सकते हैं। छात्रों को अतिरिक्त प्रयास करने की सलाह दी जाती है।
तुला राशि- आपका प्रदर्शन शायद बेहतर होने जा रहा है, नई संभावनाएं खुल रही हैं या आपको उसी कंपनी के भीतर पदोन्नति मिल सकती है। जो लोग व्यापार में हैं उनके लिए नए अवसर सामने आएंगे। कंपनी को और आगे बढ़ाने के लिए यह समय सही प्रतीत होता है। शीघ्रता से या किसी शॉर्ट-कट तरीके से धन अर्जित करने के प्रलोभन का विरोध करना सबसे अच्छा है। छात्रों को सफलता प्राप्त करने की अधिक संभावना होती है।
वृश्चिक राशि- कार्य में ध्यान देने की आवश्यकता है अथवा उसमें हानि होने की संभावना है। यदि आप नौकरी बदलना चाहते हैं या शहर बदलना चाहते हैं तो किसी दूसरे शहर या स्थान से कोई अच्छी खबर सुनने की उम्मीद करें। व्यवसाय में लगे किसी को भी सतर्क रहना चाहिए। उन्हें इस दौरान कोई भी नया प्रोजेक्ट शुरू करने से बचना चाहिए। जो लोग विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं उनके लिए शनि का गोचर सबसे अधिक सफल रहने की संभावना है।
धनु राशि- अपनी वर्तमान नौकरी में, नौकरीपेशा व्यक्तियों को उन्नति प्राप्त होने की संभावना है। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को भी कोई नौकरी मिल सकती है। व्यवसाय से जुड़े जातक अपनी कंपनी के विकास की आशा कर सकते हैं। स्टार्ट-अप शुरू करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के लिए समय अवधि लाभप्रद प्रतीत होती है। जिन छात्रों को मनचाही उपलब्धि मिलने की संभावना है।
मकर राशि- शनि आपके दूसरे भाव में होने के कारण व्यवसायियों के लिए समय अनुकूल है। सबसे अधिक संभावना है कि वे अपने प्रयासों में सफल होंगे। जो लोग पदोन्नति की उम्मीद कर रहे हैं उनके लिए समय अनुकूल दिखाई दे रहा है। शनि के इस गोचर के दौरान छात्रों को अधिक प्रयास करने की सलाह दी जाती है। जो लोग विदेश यात्रा करना चाहते हैं उन्हें थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। अपने शब्दों के प्रति सावधान रहें।
कुंभ राशि- जिन जातकों के पास नौकरी है, वे शायद अधिक काम के दबाव का अनुभव करने वाले हैं क्योंकि साढ़े साती का दूसरा चरण एक कठिन समय है। सहकर्मियों से सहयोग की कमी रहेगी। यह सलाह दी जाती है कि आप कुछ समय के लिए अपनी वर्तमान स्थिति पर बने रहें। अगर आप अपना काम छोड़ना चाहते हैं तो भी गति स्थिर रखें। कंपनी में नया निवेश करते समय बुद्धिमान और सतर्क रहना चाहिए। जो लोग व्यापारिक साझेदारी में हैं, उनके लिए कुंभ राशि में शनि गोचर के दौरान तनाव उत्पन्न हो सकता है।
मीन राशि- नौकरी या व्यवसाय करने वाले जातकों के लिए यह अवधि असफलता का समय होने वाला है क्योंकि आपकी साढ़े साती शुरू हो चुकी है। आप कार्यस्थल पर दबाव महसूस करते हैं। आपके लिए नौकरी बदलना या किसी नए स्थान पर स्थानांतरित होना संभव है। नौकरी के लिए जातक को विदेश या देश के भीतर यात्रा करनी पड़ सकती है। नए व्यवसाय शुरू करने पर रोक लगाना सबसे अच्छा है।
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मेष राशि- नया व्यवसाय शुरू करने या अपने मौजूदा व्यवसाय का विस्तार करने के इच्छुक लोगों के लिए यह बहुत बेहतर समय होगा। निजी क्षेत्र में करियर ग्रोथ की तलाश कर रहे लोगों को अपने सभी प्रयासों में सफलता मिलेगी क्योंकि शनि अपनी मूलत्रिकोण राशि में होगा। मेष राशि के जातकों को शनि की कृपा से आर्थिक लाभ होगा। हालांकि, आपको प्रेम संबंधी मामलों में सावधानी बरतने की ज़रूरत है क्योंकि पाँच वें घर पर शनि की दृष्टि से आपको सावधान रहने की आवश्यकता होगी क्योंकि विवाद हो सकते हैं। अगर आप अपने पार्टनर को धोखा दे रहे हैं तो आप निश्चित रूप से रंगेहाथ पकड़े जाएंगे। वृषभ राशि- वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि करियर के दसवें भाव में रहेगा। यह समय आपको व्यवसाय और नौकरी में नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करेगा। यह आपके सुविधा क्षेत्र से बाहर आने और पेशेवर के साथ-साथ व्यक्तिगत विकास की ओर बढ़ने का समय होगा। कार्यक्षेत्र में तबादला या बदलाव के योग हैं। छात्रों के लिए यह वांछित लाभ प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने का समय है। मिथुन राशि- मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि नौवें भाव में होगा। किसी कोर्स में दाखिला लेने या किसी विदेशी विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन करने वालों के लिए शनि गोचर का चरण अनुकूल दिखाई देता है। पीआर आवेदन स्वीकार होने का इंतजार कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिलेगी। कर्क राशि- शनि का नक्षत्र परिवर्तन कर्क राशि के जातकों के लिए थोड़ा मुश्किल होगा, खासकर आपके करियर के लिहाज से। जो लोग निजी क्षेत्र में काम कर रहे हैं उन्हें वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए अधिक प्रयास करने होंगे। इस बात की संभावना है कि कुछ लोग अपनी नौकरी खो सकते हैं या कार्यस्थल पर राजनीति का सामना कर सकते हैं। इसलिए काम सावधानी से और सावधानी से किया जाना चाहिए। सिंह राशि- सिंह राशि के सप्तम भाव में शनि का वास रहेगा। इस दौरान जातकों को प्रमोशन मिल सकता है। जो लोग नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं, अगर वे चाहें तो उन्हें नौकरी मिल सकती है। आपके काम का शेड्यूल बदल सकता है, या आपको किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। जो लोग व्यवसाय में हैं, उनके लिए नए ऑर्डर कार्ड पर हैं। कन्या राशि- कन्या राशि वालों के लिए शनि छठे भाव में रहेगा। कार्यक्षेत्र में इस दौरान परिवर्तन हो सकता है। आकर्षक नौकरी मिलने की संभावनाएं अधिक हैं। काम का बढ़ा हुआ बोझ कन्या राशि के जातकों को तनाव में डालेगा और कुछ अन्य कारणों से तनाव महसूस कर सकते हैं। छात्रों को अतिरिक्त प्रयास करने की सलाह दी जाती है। तुला राशि- आपका प्रदर्शन शायद बेहतर होने जा रहा है, नई संभावनाएं खुल रही हैं या आपको उसी कंपनी के भीतर पदोन्नति मिल सकती है। जो लोग व्यापार में हैं उनके लिए नए अवसर सामने आएंगे। कंपनी को और आगे बढ़ाने के लिए यह समय सही प्रतीत होता है। शीघ्रता से या किसी शॉर्ट-कट तरीके से धन अर्जित करने के प्रलोभन का विरोध करना सबसे अच्छा है। छात्रों को सफलता प्राप्त करने की अधिक संभावना होती है। वृश्चिक राशि- कार्य में ध्यान देने की आवश्यकता है अथवा उसमें हानि होने की संभावना है। यदि आप नौकरी बदलना चाहते हैं या शहर बदलना चाहते हैं तो किसी दूसरे शहर या स्थान से कोई अच्छी खबर सुनने की उम्मीद करें। व्यवसाय में लगे किसी को भी सतर्क रहना चाहिए। उन्हें इस दौरान कोई भी नया प्रोजेक्ट शुरू करने से बचना चाहिए। जो लोग विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं उनके लिए शनि का गोचर सबसे अधिक सफल रहने की संभावना है। धनु राशि- अपनी वर्तमान नौकरी में, नौकरीपेशा व्यक्तियों को उन्नति प्राप्त होने की संभावना है। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को भी कोई नौकरी मिल सकती है। व्यवसाय से जुड़े जातक अपनी कंपनी के विकास की आशा कर सकते हैं। स्टार्ट-अप शुरू करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के लिए समय अवधि लाभप्रद प्रतीत होती है। जिन छात्रों को मनचाही उपलब्धि मिलने की संभावना है। मकर राशि- शनि आपके दूसरे भाव में होने के कारण व्यवसायियों के लिए समय अनुकूल है। सबसे अधिक संभावना है कि वे अपने प्रयासों में सफल होंगे। जो लोग पदोन्नति की उम्मीद कर रहे हैं उनके लिए समय अनुकूल दिखाई दे रहा है। शनि के इस गोचर के दौरान छात्रों को अधिक प्रयास करने की सलाह दी जाती है। जो लोग विदेश यात्रा करना चाहते हैं उन्हें थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। अपने शब्दों के प्रति सावधान रहें। कुंभ राशि- जिन जातकों के पास नौकरी है, वे शायद अधिक काम के दबाव का अनुभव करने वाले हैं क्योंकि साढ़े साती का दूसरा चरण एक कठिन समय है। सहकर्मियों से सहयोग की कमी रहेगी। यह सलाह दी जाती है कि आप कुछ समय के लिए अपनी वर्तमान स्थिति पर बने रहें। अगर आप अपना काम छोड़ना चाहते हैं तो भी गति स्थिर रखें। कंपनी में नया निवेश करते समय बुद्धिमान और सतर्क रहना चाहिए। जो लोग व्यापारिक साझेदारी में हैं, उनके लिए कुंभ राशि में शनि गोचर के दौरान तनाव उत्पन्न हो सकता है। मीन राशि- नौकरी या व्यवसाय करने वाले जातकों के लिए यह अवधि असफलता का समय होने वाला है क्योंकि आपकी साढ़े साती शुरू हो चुकी है। आप कार्यस्थल पर दबाव महसूस करते हैं। आपके लिए नौकरी बदलना या किसी नए स्थान पर स्थानांतरित होना संभव है। नौकरी के लिए जातक को विदेश या देश के भीतर यात्रा करनी पड़ सकती है। नए व्यवसाय शुरू करने पर रोक लगाना सबसे अच्छा है।
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कल्याण सिंह पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले राजस्थान के चौथे राज्यपाल बन गए हैं। वह राज्य में 1967 के बाद कार्यकाल पूरा करने वाले पहले राज्यपाल हैं।
बता दें कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सिर्फ तीन अन्य राज्यपालों ने राज्य में अपना कार्यकाल पूरा किया है। सवाई मानसिंह ने राज्यपाल के रूप में 30 मार्च 1949 से 31 अक्टूबर 1956 तक सेवाएं दीं। गुरुमुख निहाल सिंह ने एक नवंबर 1956 से 15 अप्रैल 1962 तक और संपूर्णानंद ने 16 अप्रैल 1962 से 15 अप्रैल 1967 तक सेवाएं दीं। संपूर्णानंद इस विशिष्टता को हासिल करने वाले राज्य के अंतिम राज्यपाल थे।
इसके बाद से राज्य में करीब 40 राज्यपाल नियुक्त किए गए, लेकिन किसी ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया। सत्रह को विभिन्न राज्यों से लाया गया और संक्षिप्त कार्यकाल के लिए प्रभार दिया गया। कुछ स्थानांतरित कर दिए गए, जबकि कुछ अन्य ने केंद्र में सरकार बदलने के कारण इस्तीफा दे दिया। चार राज्यपालों की पद पर रहने के दौरान मौत हो गई।
इस तरह से राजस्थान के राज्यपाल का कार्यकाल पूरा नहीं करने को 'बदकिस्मती' से जोड़ा जाने लगा था। 52 साल बाद कल्याण सिंह इस 'बदकिस्मती' को तोड़ने में सफल हुए हैं।
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कल्याण सिंह पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले राजस्थान के चौथे राज्यपाल बन गए हैं। वह राज्य में एक हज़ार नौ सौ सरसठ के बाद कार्यकाल पूरा करने वाले पहले राज्यपाल हैं। बता दें कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सिर्फ तीन अन्य राज्यपालों ने राज्य में अपना कार्यकाल पूरा किया है। सवाई मानसिंह ने राज्यपाल के रूप में तीस मार्च एक हज़ार नौ सौ उनचास से इकतीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ छप्पन तक सेवाएं दीं। गुरुमुख निहाल सिंह ने एक नवंबर एक हज़ार नौ सौ छप्पन से पंद्रह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ बासठ तक और संपूर्णानंद ने सोलह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ बासठ से पंद्रह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ सरसठ तक सेवाएं दीं। संपूर्णानंद इस विशिष्टता को हासिल करने वाले राज्य के अंतिम राज्यपाल थे। इसके बाद से राज्य में करीब चालीस राज्यपाल नियुक्त किए गए, लेकिन किसी ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया। सत्रह को विभिन्न राज्यों से लाया गया और संक्षिप्त कार्यकाल के लिए प्रभार दिया गया। कुछ स्थानांतरित कर दिए गए, जबकि कुछ अन्य ने केंद्र में सरकार बदलने के कारण इस्तीफा दे दिया। चार राज्यपालों की पद पर रहने के दौरान मौत हो गई। इस तरह से राजस्थान के राज्यपाल का कार्यकाल पूरा नहीं करने को 'बदकिस्मती' से जोड़ा जाने लगा था। बावन साल बाद कल्याण सिंह इस 'बदकिस्मती' को तोड़ने में सफल हुए हैं।
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Bihar News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बड़ा हादसा हो गया। यहां के रामदयालू रेलवे स्टेशन के पास एक झुग्गी में आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य घायल हो गए। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर राहत कार्य में जुटी हुई है।
मुजफ्फरपुर के सीओ मुशहरी सुधांशु शेखर ने बताया कि बीती रात करीब 12 बजे रामदयालु रेलवे स्टेशन के पास एक झुग्गी में आग लग गई। इस घटना में 4 लोगों की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को हरसंभव तत्काल राहत दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि घटना के तत्काल बाद दमकल विभाग को सूचित किया गया था। उन्होंने कुछ ही देर में मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पा लिया गया। उन्होंने कहा कि आग में झुलसे सात लोगों का श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में में भर्ती कराया गया है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि झुग्गी में आग लगने के सही कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। साथ ही कहा गया है कि कुछ लोगों की हालत गंभीर है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति चिंताजनक बताई है।
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Bihar News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बड़ा हादसा हो गया। यहां के रामदयालू रेलवे स्टेशन के पास एक झुग्गी में आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य घायल हो गए। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर राहत कार्य में जुटी हुई है। मुजफ्फरपुर के सीओ मुशहरी सुधांशु शेखर ने बताया कि बीती रात करीब बारह बजे रामदयालु रेलवे स्टेशन के पास एक झुग्गी में आग लग गई। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को हरसंभव तत्काल राहत दी जाएगी। उन्होंने बताया कि घटना के तत्काल बाद दमकल विभाग को सूचित किया गया था। उन्होंने कुछ ही देर में मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पा लिया गया। उन्होंने कहा कि आग में झुलसे सात लोगों का श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में में भर्ती कराया गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि झुग्गी में आग लगने के सही कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। साथ ही कहा गया है कि कुछ लोगों की हालत गंभीर है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति चिंताजनक बताई है।
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ऑल क्वाइट ऑन द वेस्टर्न फ्रंट ने इस साल के बाफ्टा (ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स) फिल्म अवार्ड्स में सबसे बड़ा पुरस्कार जीता, जो सोमवार को लंदन में आयोजित किया गया, जिसमें सर्वश्रेष्ठ फिल्म और छह अन्य पुरस्कार जीते गए। सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और दूसरों के बीच सर्वश्रेष्ठ रूपांतरित पटकथा के लिए पुरस्कार सुरक्षित करते हुए, जर्मन युद्ध-विरोधी फिल्म ने समारोह में एक नया रिकॉर्ड बनाया, सात ट्राफियां हासिल करने वाली पहली गैर-अंग्रेजी भाषा की फिल्म बन गई। 1988 के Cinema Paradiso ने पहले पांच बाफ्टा के साथ वह रिकॉर्ड बनाया था। मार्टिन मैकडॉनघ की नवीनतम आयरिश ब्लैक कॉमेडी द बंशीज़ ऑफ इनिशरिन चार पुरस्कारों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जिसमें सर्वश्रेष्ठ मूल पटकथा और बैरी केओघन और केरी कोंडोन के लिए सहायक प्रदर्शन शामिल हैं।
हाल के पुरस्कार रुझानों को ध्यान में रखते हुए, केट ब्लेन्चेट में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अग्रणी अभिनेत्री का ताज पहनाया गया टार. इस बीच, ऑस्टिन बटलर, जिन्होंने महान गायक एल्विस प्रेस्ली को चित्रित किया था एल्विस, सर्वश्रेष्ठ अग्रणी अभिनेता के लिए बाफ्टा जीता। एक महत्वपूर्ण प्रिय और 2023 का पुरस्कार सीजन पसंदीदा हर जगह सब कुछ एक साथ सर्वश्रेष्ठ फिल्म सहित 10 श्रेणियों में नामांकित होने के बावजूद केवल एक पुरस्कार प्राप्त किया - सर्वश्रेष्ठ संपादन। जेम्स कैमरन का अवतारः पानी का रास्ता अपने अविश्वसनीय दृश्य प्रभावों के लिए सही तरीके से एक पुरस्कार अर्जित किया, जबकि नवलनी ने भारतीय फिल्म ऑल दैट ब्रीथ्स से प्रतिस्पर्धा को पछाड़ते हुए सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र का पुरस्कार जीता।
इस दौरान, गुइलेर्मो डेल टोरो का पिनोचियोद ट्विस्टेड, स्टॉप-मोशन फेयरी टेल ने जोएल क्रॉफर्ड की तेजतर्रार-किटी फिल्म को पीछे छोड़ते हुए सर्वश्रेष्ठ एनिमेटेड फिल्म का पुरस्कार जीता जूते में खरहाः द लास्ट विश. बाद वाला हाल ही में 400 मिलियन डॉलर को पार कर गया (लगभग 3,306 करोड़ रुपये) दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर। दोपहर के बाद लेखक-निर्देशक शार्लोट वेल्स सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता के रूप में उभरे, जबकि डेमियन चेज़ेल का स्वर्णिम युग हॉलीवुड महाकाव्य बेबीलोन प्रोडक्शन डिजाइन कैटेगरी में एक हासिल किया।
इसके साथ, यहां इस वर्ष के बाफ्टा अवार्ड्स में विजेताओं की पूरी सूची हैः
बेस्ट राइजिंग स्टार के लिए 2023 बाफ्टा अवार्ड (जनता द्वारा वोट दिया गया)
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ऑल क्वाइट ऑन द वेस्टर्न फ्रंट ने इस साल के बाफ्टा फिल्म अवार्ड्स में सबसे बड़ा पुरस्कार जीता, जो सोमवार को लंदन में आयोजित किया गया, जिसमें सर्वश्रेष्ठ फिल्म और छह अन्य पुरस्कार जीते गए। सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और दूसरों के बीच सर्वश्रेष्ठ रूपांतरित पटकथा के लिए पुरस्कार सुरक्षित करते हुए, जर्मन युद्ध-विरोधी फिल्म ने समारोह में एक नया रिकॉर्ड बनाया, सात ट्राफियां हासिल करने वाली पहली गैर-अंग्रेजी भाषा की फिल्म बन गई। एक हज़ार नौ सौ अठासी के Cinema Paradiso ने पहले पांच बाफ्टा के साथ वह रिकॉर्ड बनाया था। मार्टिन मैकडॉनघ की नवीनतम आयरिश ब्लैक कॉमेडी द बंशीज़ ऑफ इनिशरिन चार पुरस्कारों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जिसमें सर्वश्रेष्ठ मूल पटकथा और बैरी केओघन और केरी कोंडोन के लिए सहायक प्रदर्शन शामिल हैं। हाल के पुरस्कार रुझानों को ध्यान में रखते हुए, केट ब्लेन्चेट में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अग्रणी अभिनेत्री का ताज पहनाया गया टार. इस बीच, ऑस्टिन बटलर, जिन्होंने महान गायक एल्विस प्रेस्ली को चित्रित किया था एल्विस, सर्वश्रेष्ठ अग्रणी अभिनेता के लिए बाफ्टा जीता। एक महत्वपूर्ण प्रिय और दो हज़ार तेईस का पुरस्कार सीजन पसंदीदा हर जगह सब कुछ एक साथ सर्वश्रेष्ठ फिल्म सहित दस श्रेणियों में नामांकित होने के बावजूद केवल एक पुरस्कार प्राप्त किया - सर्वश्रेष्ठ संपादन। जेम्स कैमरन का अवतारः पानी का रास्ता अपने अविश्वसनीय दृश्य प्रभावों के लिए सही तरीके से एक पुरस्कार अर्जित किया, जबकि नवलनी ने भारतीय फिल्म ऑल दैट ब्रीथ्स से प्रतिस्पर्धा को पछाड़ते हुए सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र का पुरस्कार जीता। इस दौरान, गुइलेर्मो डेल टोरो का पिनोचियोद ट्विस्टेड, स्टॉप-मोशन फेयरी टेल ने जोएल क्रॉफर्ड की तेजतर्रार-किटी फिल्म को पीछे छोड़ते हुए सर्वश्रेष्ठ एनिमेटेड फिल्म का पुरस्कार जीता जूते में खरहाः द लास्ट विश. बाद वाला हाल ही में चार सौ मिलियन डॉलर को पार कर गया दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर। दोपहर के बाद लेखक-निर्देशक शार्लोट वेल्स सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता के रूप में उभरे, जबकि डेमियन चेज़ेल का स्वर्णिम युग हॉलीवुड महाकाव्य बेबीलोन प्रोडक्शन डिजाइन कैटेगरी में एक हासिल किया। इसके साथ, यहां इस वर्ष के बाफ्टा अवार्ड्स में विजेताओं की पूरी सूची हैः बेस्ट राइजिंग स्टार के लिए दो हज़ार तेईस बाफ्टा अवार्ड
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मेष- आज आपका दिन अच्छा रहेगा। घर में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। जीवनसाथी के साथ कहीं बाहर घूमने का प्लान बना सकते हैं। ऑफिस में आपके काम को लेकर बॉस तारीफ कर सकते हैं। इस राशि के स्टूडेंट्स के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा।
वृष- आज आपको नए अवसर मिल सकते हैं जिससे आपको भविष्य में लाभ हो सकता है। परिवार का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। बच्चों के साथ किसी पार्क में घूमने जाएंगे। आज पुराने दोस्तों से मिलने का मौका मिलेगा और उनके साथ घूमने भी जा सकते हैं।
मिथुन- आज आपका दिन बहुत शानदार रहेगा। दोस्तों के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। माता-पिता का भी पूरा सहयोग आपको मिलेगा, जिससे आप जीवन में आगे बढ़ने में सक्षम होंगे। घर का माहौल खुशनुमा बना रहेगा।
कर्क- आज आपके घर मेहमानों का आगमान हो सकता है। बच्चों की प्रगति से आप खुश होंगे। पैसे ज्यादा खर्च होंगे जिस वजह से आप तनाव में रहेंगे। रिश्तों में आपको थोड़ा ध्यान देने की जरूरत महसूस होगी।
सिंह- आज आपका दिन सामान्य रहेगा। धन लाभ हो सकता है। कोट कचहरी के क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। आपका पारिवारिक जीवन अच्छा होगा। शारीरिक स्थिति थोड़ी कमजोर रहेगी, भाइयों से मतभेद हो सकता है।
कन्या- आज आपको धन लाभ हो सकता है। कुछ लोगों के जीवन में प्रेम का प्रवेश हो सकता है। बहुत सारा दबाव आपको परेशान कर रहा है। कुछ यात्राएं हो सकती हैं, जो सकारात्मक परिणाम लाएंगी।
तुला- आज भाग्य आपके साथ है। पुराने कुछ मामले में आपको आज परिणाम दे सकते हैं। कानूनी मामलों में आपको कुछ सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद रहेगी। आज आपका ध्यान धार्मिक कार्यों में लगा रहेगा।
वृश्चिक- आज आपका दिन अच्छा बीतने वाला है। बच्चों के साथ कहीं घूमने जा सकते हैं। आज आपकी आर्थिक स्थिति भी ठीक-ठाक रहेगी। ऑफिस में आपको जिम्मेदारी वाला काम मिल सकता है, जिसे पूरा करने पर फायदा होगा।
धनु- ऑफिस में बढ़ते काम की वजह से तनाव रह सकता है। बड़े अफसरों से बातचीत में थोड़ी सावधानी बरतें। आज आपको उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। आप बहुत कुछ करना चाहते हैं लेकिन जल्दबाजी में निर्णय लेना आपके लिए गलत साबित हो सकता है।
मकर- आज आपका दिन अच्छा रहेगा। लंबे समय से रुके हुए कार्य जल्द पूरे हो सकते हैं। आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। वाहन चलाते समय थोड़ी सावधानी बरतें। व्यापार में आय अधिक होगी।
कुंभ- परिवार और संतान की तरफ से खुशियां मिल सकती है। महत्व के कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है। धन की हानि होने से व्यर्थ भागदौड़ व झगड़ा हो सकता है। किसी भी काम की शुरुआत से पहले माता-पिता का आशीर्वाद जरूर लें।
मीन- आज के दिन अधिक पैसे खर्च करने से बचें, विदेश यात्रा के लिए यह समय ठीक नहीं है। आप अपने संतान से मानसिक तौर पर परेशान रहेंगे। अपने आसपास के कुछ लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है। आपके साथ कोई धोखा हो सकता है।
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मेष- आज आपका दिन अच्छा रहेगा। घर में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। जीवनसाथी के साथ कहीं बाहर घूमने का प्लान बना सकते हैं। ऑफिस में आपके काम को लेकर बॉस तारीफ कर सकते हैं। इस राशि के स्टूडेंट्स के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। वृष- आज आपको नए अवसर मिल सकते हैं जिससे आपको भविष्य में लाभ हो सकता है। परिवार का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। बच्चों के साथ किसी पार्क में घूमने जाएंगे। आज पुराने दोस्तों से मिलने का मौका मिलेगा और उनके साथ घूमने भी जा सकते हैं। मिथुन- आज आपका दिन बहुत शानदार रहेगा। दोस्तों के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। माता-पिता का भी पूरा सहयोग आपको मिलेगा, जिससे आप जीवन में आगे बढ़ने में सक्षम होंगे। घर का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। कर्क- आज आपके घर मेहमानों का आगमान हो सकता है। बच्चों की प्रगति से आप खुश होंगे। पैसे ज्यादा खर्च होंगे जिस वजह से आप तनाव में रहेंगे। रिश्तों में आपको थोड़ा ध्यान देने की जरूरत महसूस होगी। सिंह- आज आपका दिन सामान्य रहेगा। धन लाभ हो सकता है। कोट कचहरी के क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। आपका पारिवारिक जीवन अच्छा होगा। शारीरिक स्थिति थोड़ी कमजोर रहेगी, भाइयों से मतभेद हो सकता है। कन्या- आज आपको धन लाभ हो सकता है। कुछ लोगों के जीवन में प्रेम का प्रवेश हो सकता है। बहुत सारा दबाव आपको परेशान कर रहा है। कुछ यात्राएं हो सकती हैं, जो सकारात्मक परिणाम लाएंगी। तुला- आज भाग्य आपके साथ है। पुराने कुछ मामले में आपको आज परिणाम दे सकते हैं। कानूनी मामलों में आपको कुछ सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद रहेगी। आज आपका ध्यान धार्मिक कार्यों में लगा रहेगा। वृश्चिक- आज आपका दिन अच्छा बीतने वाला है। बच्चों के साथ कहीं घूमने जा सकते हैं। आज आपकी आर्थिक स्थिति भी ठीक-ठाक रहेगी। ऑफिस में आपको जिम्मेदारी वाला काम मिल सकता है, जिसे पूरा करने पर फायदा होगा। धनु- ऑफिस में बढ़ते काम की वजह से तनाव रह सकता है। बड़े अफसरों से बातचीत में थोड़ी सावधानी बरतें। आज आपको उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। आप बहुत कुछ करना चाहते हैं लेकिन जल्दबाजी में निर्णय लेना आपके लिए गलत साबित हो सकता है। मकर- आज आपका दिन अच्छा रहेगा। लंबे समय से रुके हुए कार्य जल्द पूरे हो सकते हैं। आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। वाहन चलाते समय थोड़ी सावधानी बरतें। व्यापार में आय अधिक होगी। कुंभ- परिवार और संतान की तरफ से खुशियां मिल सकती है। महत्व के कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है। धन की हानि होने से व्यर्थ भागदौड़ व झगड़ा हो सकता है। किसी भी काम की शुरुआत से पहले माता-पिता का आशीर्वाद जरूर लें। मीन- आज के दिन अधिक पैसे खर्च करने से बचें, विदेश यात्रा के लिए यह समय ठीक नहीं है। आप अपने संतान से मानसिक तौर पर परेशान रहेंगे। अपने आसपास के कुछ लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है। आपके साथ कोई धोखा हो सकता है।
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नव वृदावन नव नव तरुगन नव नव विकसित फूल नवल वसत नवल मलयानिल मातल नब श्रलिकूल ।
दो, जब कवि पर उसका बहिरग हावी होता है जब उस बहिरग को सह और साध कर वह अपनी स्थिति को अभिव्यक्त करता जैसे फिराकइक रात भारी है शमा पै जिस तरह हमने तमाम उम्र गुज़ारों है इस तरह ? तीन, जब कवि प्रकृति के साथ सर्वथा एकाकार हो जाता है जब उसके पानी का जीवन प्रकृति के अवयवो को अनुभूति बन जाता है और कवि द्वारा अभिसृष्ट मानव और प्रकृति एक दूसरे के प्रति सहज एकाग्रह प्रक्ट करत हैं, जैसे कालिदास के शाकुन्तल मे -- चूताना चिरनिगतापि कलिका बध्नाति न स्व रज
सनद्ध पदपि स्थित कुरबक तत्कोरकावस्थया । कण्ठेषु स्खलित गतेऽपि शिशिरे पुस्कोक्लिाना रुत
शके सहरति स्मरोऽपि चकितस्तूशाघकृष्ट शरम् ॥ दुष्यन्त प्रिया से विरहित बैठा है काम अपने वसन्तादि सैनिका द्वारा उस पर श्राक्रमण करना चाहता है, पर उस अनुशय दुस से आविर्भूत मानव पर वे मरण नहीं कर पाते, विरत हो जाते है, सहानुभूति की श्राद्रता उन्हें उसके प्रति अनुरक्त कर देती है - ग्राम बोरा चुके हैं पर मजरिया अपने को म मकरन्द बाँध नही पाती, पराग वरसा नही पाती, उसका संचार वरवस रोक लेती हैं क्योंकि सामने मानव विमन व्याकुल बैठा है व अपनो कनिया का सभार लिये क्व से खडा है, उसकी कलियाँ चिटव पड़ने के लिए खिन जान व निए वचन है, पर तर उन्ह सहसा रोक लेता है और अपनी उसी कारवावस्था में रु जाती है क्याकि सहृदय मानव दादुन्तला वा सोकर बेहाल पड़ा है, शिशिर व जात हा नरवाक्लि गावर बसत व ग्रागमन या
कालिदास का मानवेतर विलास
सूचना दे देता है पर आज उसको कूक नीरव है, शिशिर सिधारा और वण्ठ मे फूटने के लिए उसका रव श्राया भी पर उसने उस उचरती कूक को गले में ही घोट दिया क्योकि हिया का मारा मानव व्यथित है, फिर वसन्त कैसे आए, काम कैसे दुष्यन्त पर आक्रमण करे ? सो मदन भो भयातुर हो आक्रमरण के लिए तरकश से आधा खीचा हुआ तीर तरकश को वापस लौटा देता है 1
पशु, पक्षियों के प्रति मानव की ममता ही उन्हें उसके प्रति प्रकरण की डोर मे वाँघ लाती है । मृग के लिए कुश का ग्रास स्वाभाविक है, पर जिसने उसे पुत्र बना कर पाला है, चुन कर कोमल कुशो का गस्सा हथेली स उसे दिया है अनवधानता स अनतिक्रम्य लोभ स जो उसने कुशो की नोक से तालु छील लिया है उस घाव का जब शकुन्तला इगुदी के तेल से भरती है तब पतिगृह जानेवाली उस जननीरूपिणी ऋषिकन्या की राह वह कैसे छोड दे, पग पगलग उसे क्यो न विरमा ले ?
यस्य त्वया व्रणविरोपणमगुदीना
तैल न्यपिच्यत मुखे कुशसूचिविद्ध । श्यामाकमुष्टिपरिर्वाधितको जहाति
सोग्य न पुत्रकृतक पदवीं मृगस्ते ।।
( शाकुतल ४ १३ ) अरे जगल के बीज और दाने खिला-खिला कर, अजलि भर-भर नोवार के दानो से पार्वती न हरिणियों को इस तरह भरमा परचा लिया था कि वे उस पास जाते हिचकती नही थी और तब पर्वत की जाई वह उमा उनकी आँख पर अपनी आँखें रख उनको छुटाई- बडाई नाप लेती, सखियो का कुतूहल आसमान चूमने लगता । भोली मुग्धा और भरमी हिरनी का यह कौतुक देख सखिया ठग जातीप्ररण्यबीजाञ्जलिदानलालितास्तथा च तस्या हरिणा विश्वसु । यथा तदीपनयन कुतूहलापुर सखीनाममिमोत लोचने ।
( कुमारसभव ५ १५)
कालिदाम नमामि
कुछ जव नहीं कि नयनो की यह अभिराम प्रतियोगिता उमा और मृगियो मे कटुता उत्पन्न कर दे, इससे उसके सद्भाव के प्रति आश्वस्त होकर भी कवि उनके प्रति उसकी कृपा का आग्रह वरना हैअपि प्रसन्न हरिगेषु ते मन वरस्थदर्भप्ररणयापहारिषु । य उत्पलाक्षि प्रचलं विलोचनै स्तवाक्षिसादृश्यमिव प्रयुञ्जते ।।
(वही, ५, ३५ ) पद्मनयने, तुम्हारे नयनो के समान हो इन हरिगो के नयन भी चचल हैं, उन्हीं की चपल चारुता का वे भी अभिनय करते है तुम्हारे अपने ग्राप खिलाते हाथ से कुशा छीन कर खा जाते है, से इनसे खीझनी तो नहीं ? तुम्हारे मंदिर चचल नयनो की चारुता से इनके नयन जो होड करें, प्रतियोगिता भरी ढिठाई कर और ऊपर से तुम्हारे हाथ से कुशों छीन कर खा जायँ तो तुम्हारा खोझ जाना संभव है, पर उनकी अधीरता से तुम कही भन्ला तो नही उठती ? स्वय तुम सया तो रहती हो, उनसे स्निग्ध व्यवहार तो वरती हो
मानव वा मानवेतर प्राणी के प्रति यही प्यार उसको अनुकूल प्रतिक्रिया वा मानव को धनी बनाता है । वह श्रव वभो सवेला नहीं रह पाता । राम को विरहावस्था मे, सोता की सोज में भरमते उनके दुख से पातर हार से उदासीन हो दूर्वाकुरो वा आहार वन्द वर लोचनो की पतकें दक्षिण दिशा की ओर चुपचाप उठा पर हरिणियाँ मार्ग का मर्म बताती थी, लवा की दिशा की ओर संकेत करती थी-मुग्यश्च दर्भाङ्कुर निष्पपेक्षास्तयागतिज्ञ समबोधय माम् । व्यापारयन्त्यो दिनि दक्षिणस्यामुत्पश्मराजोनि विलोचनानि ।। (रघुवश, १३, २५)
सोता वा परित्याग जितना उनके लिए दुमद है उतना ही वनवासो पशु-पक्षियो के लिए भी प्रसह्य हो उठता है । महायान्तार मे जानवी का विलाप जीवधारियो वे हृदय घो मथ देता है.
कालिदास का मानवतर विलास
मोर नाचना विसार देते हैं, तरु फूलो के ग्रांसू डालने लगते हैं, हरिणियाँ मुंह की प्रथकुचली दूव नीचे डाल देती हैं -
नृत्य मयूरा कुठुमानि वृक्षा दर्भानुपातान्विजहरिण्य । तस्या प्रपन्ने रामदु खभावमत्यन्तमासोद्बुदित बनेऽपि ॥
मानव और मानवेतर जीवो का परस्पर अन्योन्याश्रित सबंध होने से ही यह प्रतीति उत्पन्न होती है जिससे दोनो के बीच सद्भावना का उदय होता है । कालिदास न केवल दोनो के इस पारस्परिक सम्बन्ध को आचरण मे अनिवार्य मानते है वल्कि अनेक बार तो पशु-पक्षियों के प्राचरण को मनुष्य के मनुष्य के प्रति आचरण का आदर्श घोषित करते है। यह स्थिति वार-वार उनके वाव्यो मे चिनित हुई है ।
शकुन्तला के चले जाने के बाद अपने उजडे मन को बसाने के लिए जो दुष्यन्त अनेक उपक्रम करता है उनमे एक चिनाकन है । चित्र बनाते हुए उसे एक असाधारण अभिप्राय (मोटिफ ) की सज्ञा होती हैकार्या संकतलीन हसमिथुना स्रोतोवहा मालिनी
पादास्तामभितो निषण्णहरिगा गौरीगुरो पावना । शाखालम्बितवल्क्लस्य च तरोनिर्मातुमिच्छाम्यय
भृगे कृष्णमृगस्य वामनमन कण्डूयमाना मुगीम । (शाकु०, ६ १७)
ऐसा चित्र वनाऊँ, दुष्यन्त सोचता है, जिसकी अग्रभूमि म मालिनी की वह धारा हो जिसके तीर उसका प्यार पला था, जिसकी रेत के अचल म हसो के जोडे कलोल कर रहे हो, उसके दानो र पार्वती के पिता हिमालय की पर्वतमालाएँ दौडती चली गयी हो, हिरन जिस पर विराज रहे हो । फिर अपनी शाखाओ से तापसो मे वसन लटकाए तरु के नीचे कुछ ऐसा रचना चाहता हूँ जिसमे अपने प्यारे वाले मृग को छाँह वैठो मृगी उसकी सीग से अपना वार्यां नयन खुजा रही हो ।
कितनो मानस को विभोर कर दनेवाली कल्पना है दुष्यन्त की मनोवृत्ति के प्रतिकूल । मृग का कठोरतम अग उसको सीग होती है मृगी की मृदुतम उसकी ग्राख । अपने मर्मतम को अन्य के कठोरतम की नोक पर न केवल रखना वल्कि उससे सुखमय व्यापार करना नि शेष विश्वास का परिचायक है । मृगी जानती है कि उसका प्रिय उसका अनन्य गोप्ता है, जिससे उसका कथमपि भव नही । इससे वह अपनी आँख उसकी सौग
पर रखकर खुजाती है। उसके विपरीत मानव दुष्यन्त का आचरण है - जहाँ रक्षा की आशा की थी वहा निष्कासन मिला । मनुष्य राज को पशु से दाम्पत्य स्नेह प्रतोति सीखनी है ।
दशरथ की आखेट चेप्टा मृगो को उत्सर्ग भावना ने कुठित कर दी -
लक्ष्योकृतस्य हरिणस्य हरिप्रभाव
प्रक्ष्य स्थितां सहचरों व्यवधाय देहम । श्रावणकृष्टमपि कामितया स धवो
बारण कृपामृदुमना प्रतिसजहार ।।
(रघु० ६ ५७) विष्णु के से ग्रमाघ धन्वी राजा ने कृष्णसार मृग को मारने के लिए जैसे ही वारग सधाना वैसे ही उसकी सहचरी मृगी प्रिय को रक्षा के हेतु प्रारणोत्सर्ग करने वारण की राह में आ खड़ी हुई और प्रणय की पोडा जाननेवाले उस भावुक राजा को अपनी प्रिया की सहसा याद आ गयी और उस मृदुमना अहेरी ने वान तक खिचे धनुष की प्रत्यचा से वारण उतार लिया ।
राजा ने फिर फिर हिरनो को अपने तीरो का शिकार बनाना चाहा, फिर-फिर उसे अपना आवेग रोव ग्रामट से विरत हो जाना पड़ा। वारण कि उनकी ह्रिनिया के रिस भरे श्राकुल नयनो म उसे अपनी तरणी प्रिया क चटुल नयन सहसा भलक पड, उनके नयनविभ्रम दृष्टिविनाम उनको गहराइयों मे भा चमके, वानो तक गिचा वामुक् कार्य से विरत हा गया
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नव वृदावन नव नव तरुगन नव नव विकसित फूल नवल वसत नवल मलयानिल मातल नब श्रलिकूल । दो, जब कवि पर उसका बहिरग हावी होता है जब उस बहिरग को सह और साध कर वह अपनी स्थिति को अभिव्यक्त करता जैसे फिराकइक रात भारी है शमा पै जिस तरह हमने तमाम उम्र गुज़ारों है इस तरह ? तीन, जब कवि प्रकृति के साथ सर्वथा एकाकार हो जाता है जब उसके पानी का जीवन प्रकृति के अवयवो को अनुभूति बन जाता है और कवि द्वारा अभिसृष्ट मानव और प्रकृति एक दूसरे के प्रति सहज एकाग्रह प्रक्ट करत हैं, जैसे कालिदास के शाकुन्तल मे -- चूताना चिरनिगतापि कलिका बध्नाति न स्व रज सनद्ध पदपि स्थित कुरबक तत्कोरकावस्थया । कण्ठेषु स्खलित गतेऽपि शिशिरे पुस्कोक्लिाना रुत शके सहरति स्मरोऽपि चकितस्तूशाघकृष्ट शरम् ॥ दुष्यन्त प्रिया से विरहित बैठा है काम अपने वसन्तादि सैनिका द्वारा उस पर श्राक्रमण करना चाहता है, पर उस अनुशय दुस से आविर्भूत मानव पर वे मरण नहीं कर पाते, विरत हो जाते है, सहानुभूति की श्राद्रता उन्हें उसके प्रति अनुरक्त कर देती है - ग्राम बोरा चुके हैं पर मजरिया अपने को म मकरन्द बाँध नही पाती, पराग वरसा नही पाती, उसका संचार वरवस रोक लेती हैं क्योंकि सामने मानव विमन व्याकुल बैठा है व अपनो कनिया का सभार लिये क्व से खडा है, उसकी कलियाँ चिटव पड़ने के लिए खिन जान व निए वचन है, पर तर उन्ह सहसा रोक लेता है और अपनी उसी कारवावस्था में रु जाती है क्याकि सहृदय मानव दादुन्तला वा सोकर बेहाल पड़ा है, शिशिर व जात हा नरवाक्लि गावर बसत व ग्रागमन या कालिदास का मानवेतर विलास सूचना दे देता है पर आज उसको कूक नीरव है, शिशिर सिधारा और वण्ठ मे फूटने के लिए उसका रव श्राया भी पर उसने उस उचरती कूक को गले में ही घोट दिया क्योकि हिया का मारा मानव व्यथित है, फिर वसन्त कैसे आए, काम कैसे दुष्यन्त पर आक्रमण करे ? सो मदन भो भयातुर हो आक्रमरण के लिए तरकश से आधा खीचा हुआ तीर तरकश को वापस लौटा देता है एक पशु, पक्षियों के प्रति मानव की ममता ही उन्हें उसके प्रति प्रकरण की डोर मे वाँघ लाती है । मृग के लिए कुश का ग्रास स्वाभाविक है, पर जिसने उसे पुत्र बना कर पाला है, चुन कर कोमल कुशो का गस्सा हथेली स उसे दिया है अनवधानता स अनतिक्रम्य लोभ स जो उसने कुशो की नोक से तालु छील लिया है उस घाव का जब शकुन्तला इगुदी के तेल से भरती है तब पतिगृह जानेवाली उस जननीरूपिणी ऋषिकन्या की राह वह कैसे छोड दे, पग पगलग उसे क्यो न विरमा ले ? यस्य त्वया व्रणविरोपणमगुदीना तैल न्यपिच्यत मुखे कुशसूचिविद्ध । श्यामाकमुष्टिपरिर्वाधितको जहाति सोग्य न पुत्रकृतक पदवीं मृगस्ते ।। अरे जगल के बीज और दाने खिला-खिला कर, अजलि भर-भर नोवार के दानो से पार्वती न हरिणियों को इस तरह भरमा परचा लिया था कि वे उस पास जाते हिचकती नही थी और तब पर्वत की जाई वह उमा उनकी आँख पर अपनी आँखें रख उनको छुटाई- बडाई नाप लेती, सखियो का कुतूहल आसमान चूमने लगता । भोली मुग्धा और भरमी हिरनी का यह कौतुक देख सखिया ठग जातीप्ररण्यबीजाञ्जलिदानलालितास्तथा च तस्या हरिणा विश्वसु । यथा तदीपनयन कुतूहलापुर सखीनाममिमोत लोचने । कालिदाम नमामि कुछ जव नहीं कि नयनो की यह अभिराम प्रतियोगिता उमा और मृगियो मे कटुता उत्पन्न कर दे, इससे उसके सद्भाव के प्रति आश्वस्त होकर भी कवि उनके प्रति उसकी कृपा का आग्रह वरना हैअपि प्रसन्न हरिगेषु ते मन वरस्थदर्भप्ररणयापहारिषु । य उत्पलाक्षि प्रचलं विलोचनै स्तवाक्षिसादृश्यमिव प्रयुञ्जते ।। पद्मनयने, तुम्हारे नयनो के समान हो इन हरिगो के नयन भी चचल हैं, उन्हीं की चपल चारुता का वे भी अभिनय करते है तुम्हारे अपने ग्राप खिलाते हाथ से कुशा छीन कर खा जाते है, से इनसे खीझनी तो नहीं ? तुम्हारे मंदिर चचल नयनो की चारुता से इनके नयन जो होड करें, प्रतियोगिता भरी ढिठाई कर और ऊपर से तुम्हारे हाथ से कुशों छीन कर खा जायँ तो तुम्हारा खोझ जाना संभव है, पर उनकी अधीरता से तुम कही भन्ला तो नही उठती ? स्वय तुम सया तो रहती हो, उनसे स्निग्ध व्यवहार तो वरती हो मानव वा मानवेतर प्राणी के प्रति यही प्यार उसको अनुकूल प्रतिक्रिया वा मानव को धनी बनाता है । वह श्रव वभो सवेला नहीं रह पाता । राम को विरहावस्था मे, सोता की सोज में भरमते उनके दुख से पातर हार से उदासीन हो दूर्वाकुरो वा आहार वन्द वर लोचनो की पतकें दक्षिण दिशा की ओर चुपचाप उठा पर हरिणियाँ मार्ग का मर्म बताती थी, लवा की दिशा की ओर संकेत करती थी-मुग्यश्च दर्भाङ्कुर निष्पपेक्षास्तयागतिज्ञ समबोधय माम् । व्यापारयन्त्यो दिनि दक्षिणस्यामुत्पश्मराजोनि विलोचनानि ।। सोता वा परित्याग जितना उनके लिए दुमद है उतना ही वनवासो पशु-पक्षियो के लिए भी प्रसह्य हो उठता है । महायान्तार मे जानवी का विलाप जीवधारियो वे हृदय घो मथ देता है. कालिदास का मानवतर विलास मोर नाचना विसार देते हैं, तरु फूलो के ग्रांसू डालने लगते हैं, हरिणियाँ मुंह की प्रथकुचली दूव नीचे डाल देती हैं - नृत्य मयूरा कुठुमानि वृक्षा दर्भानुपातान्विजहरिण्य । तस्या प्रपन्ने रामदु खभावमत्यन्तमासोद्बुदित बनेऽपि ॥ मानव और मानवेतर जीवो का परस्पर अन्योन्याश्रित सबंध होने से ही यह प्रतीति उत्पन्न होती है जिससे दोनो के बीच सद्भावना का उदय होता है । कालिदास न केवल दोनो के इस पारस्परिक सम्बन्ध को आचरण मे अनिवार्य मानते है वल्कि अनेक बार तो पशु-पक्षियों के प्राचरण को मनुष्य के मनुष्य के प्रति आचरण का आदर्श घोषित करते है। यह स्थिति वार-वार उनके वाव्यो मे चिनित हुई है । शकुन्तला के चले जाने के बाद अपने उजडे मन को बसाने के लिए जो दुष्यन्त अनेक उपक्रम करता है उनमे एक चिनाकन है । चित्र बनाते हुए उसे एक असाधारण अभिप्राय की सज्ञा होती हैकार्या संकतलीन हसमिथुना स्रोतोवहा मालिनी पादास्तामभितो निषण्णहरिगा गौरीगुरो पावना । शाखालम्बितवल्क्लस्य च तरोनिर्मातुमिच्छाम्यय भृगे कृष्णमृगस्य वामनमन कण्डूयमाना मुगीम । ऐसा चित्र वनाऊँ, दुष्यन्त सोचता है, जिसकी अग्रभूमि म मालिनी की वह धारा हो जिसके तीर उसका प्यार पला था, जिसकी रेत के अचल म हसो के जोडे कलोल कर रहे हो, उसके दानो र पार्वती के पिता हिमालय की पर्वतमालाएँ दौडती चली गयी हो, हिरन जिस पर विराज रहे हो । फिर अपनी शाखाओ से तापसो मे वसन लटकाए तरु के नीचे कुछ ऐसा रचना चाहता हूँ जिसमे अपने प्यारे वाले मृग को छाँह वैठो मृगी उसकी सीग से अपना वार्यां नयन खुजा रही हो । कितनो मानस को विभोर कर दनेवाली कल्पना है दुष्यन्त की मनोवृत्ति के प्रतिकूल । मृग का कठोरतम अग उसको सीग होती है मृगी की मृदुतम उसकी ग्राख । अपने मर्मतम को अन्य के कठोरतम की नोक पर न केवल रखना वल्कि उससे सुखमय व्यापार करना नि शेष विश्वास का परिचायक है । मृगी जानती है कि उसका प्रिय उसका अनन्य गोप्ता है, जिससे उसका कथमपि भव नही । इससे वह अपनी आँख उसकी सौग पर रखकर खुजाती है। उसके विपरीत मानव दुष्यन्त का आचरण है - जहाँ रक्षा की आशा की थी वहा निष्कासन मिला । मनुष्य राज को पशु से दाम्पत्य स्नेह प्रतोति सीखनी है । दशरथ की आखेट चेप्टा मृगो को उत्सर्ग भावना ने कुठित कर दी - लक्ष्योकृतस्य हरिणस्य हरिप्रभाव प्रक्ष्य स्थितां सहचरों व्यवधाय देहम । श्रावणकृष्टमपि कामितया स धवो बारण कृपामृदुमना प्रतिसजहार ।। विष्णु के से ग्रमाघ धन्वी राजा ने कृष्णसार मृग को मारने के लिए जैसे ही वारग सधाना वैसे ही उसकी सहचरी मृगी प्रिय को रक्षा के हेतु प्रारणोत्सर्ग करने वारण की राह में आ खड़ी हुई और प्रणय की पोडा जाननेवाले उस भावुक राजा को अपनी प्रिया की सहसा याद आ गयी और उस मृदुमना अहेरी ने वान तक खिचे धनुष की प्रत्यचा से वारण उतार लिया । राजा ने फिर फिर हिरनो को अपने तीरो का शिकार बनाना चाहा, फिर-फिर उसे अपना आवेग रोव ग्रामट से विरत हो जाना पड़ा। वारण कि उनकी ह्रिनिया के रिस भरे श्राकुल नयनो म उसे अपनी तरणी प्रिया क चटुल नयन सहसा भलक पड, उनके नयनविभ्रम दृष्टिविनाम उनको गहराइयों मे भा चमके, वानो तक गिचा वामुक् कार्य से विरत हा गया
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- Movies Anupamaa Written Update: बेटी का हाल देखकर बदहवास होगा अनुज, अनुपमा भी ऐन मौके पर रोकेगी अपनी उड़ान!
- Travel भक्ति की अनुठी कहानी सुनाता है कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कहां से आते हैं मंदिर में इतने शिवलिंग?
जियो फोन की बुकिंग बंद हो गई है, लेकिन क्या आपने जियोफोन अपने लिए बुक कर दिया है ? अगर नहीं तो परेशान न हों, क्योंकि जल्द ही इसकी अगली बुकिंग के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होने वाला है। वहीं अगर आप इस फोन को अपने लिए बुक कर चुके हैं, तो अब आपको इस फोन की डिलिवरी का बेसब्री से इंतजार होगा। यहां आप जान सकते हैं कि सबसे पहले किन-किन शहरों में जियो फोन की डिलीवरी होने वाली है।
फायनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस जियो की प्लानिंग रोज 1 लाख जियोफोन डिलीवर करने की है, ताकि बुकिंग के लोड को कम किया सके। जियोफोन को लाखों की संख्या में बुक किया गया है और दूसरे फेज के रजिस्ट्रेशन में काफी जियोफोन फिर से बुक होने वाले हैं।
जियो फोन के निर्माण का काम एक ताइवान की कंपनी को दिया गया था। ये फोन डिलिवरी के लिए ताइवान से आएंगे और फिर देश के अलग-अलग शहरों में पहुंचेंगे। बता दें कि फोन की लॉन्चिंग के समय मुकेश अंबानी ने कहा था कि हर सप्ताह 50 लाख फोन की डिलीवरी होगी।
बता दें कि सबसे पहले जियो फोन की डिलीवरी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और अहमदाबाद में होगी। इन 5 शहरों में फोन पहुंचने के बाद जियो सेंटर और रिलायंस जियो स्टोर पर फोन की डिलीवरी होगी। इसके बाद इन दोनों स्टोर से रिटेल स्टोर और डीलर्स के पास फोन भेजे जाएंगे।
बता दें कि जियोफोन इन बिल्ट सिम के साथ आएगा। इसमें 2. 4 इंच की क्यूडब्ल्यूवीजीए डिस्प्ले, 1. 2 गीगाहर्ट्ज का स्प्रिडट्रम SPRD 9820A/QC8905 डुअल कोर प्रोसेसर, ग्राफिक्स के लिए माली-400 जीपीयू, 512 एमबी रैम और 4 जीबी स्टोरेज है जिसे 128 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है। फोन में 2 मेगापिक्सल का रियर कैमरा, 0. 3 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है यानी आप वीडियो कॉलिंग कर सकते हैं। फोन में 2000 एमएएच बैटरी, 4जी वीओएलटीई, ब्लूटूथ वी4. 1, वाई-फाई, एनएफसी, एफएम रेडियो, जीपीएस और यूएसबी 2. 0 सपोर्ट है।
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- Movies Anupamaa Written Update: बेटी का हाल देखकर बदहवास होगा अनुज, अनुपमा भी ऐन मौके पर रोकेगी अपनी उड़ान! - Travel भक्ति की अनुठी कहानी सुनाता है कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कहां से आते हैं मंदिर में इतने शिवलिंग? जियो फोन की बुकिंग बंद हो गई है, लेकिन क्या आपने जियोफोन अपने लिए बुक कर दिया है ? अगर नहीं तो परेशान न हों, क्योंकि जल्द ही इसकी अगली बुकिंग के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होने वाला है। वहीं अगर आप इस फोन को अपने लिए बुक कर चुके हैं, तो अब आपको इस फोन की डिलिवरी का बेसब्री से इंतजार होगा। यहां आप जान सकते हैं कि सबसे पहले किन-किन शहरों में जियो फोन की डिलीवरी होने वाली है। फायनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस जियो की प्लानिंग रोज एक लाख जियोफोन डिलीवर करने की है, ताकि बुकिंग के लोड को कम किया सके। जियोफोन को लाखों की संख्या में बुक किया गया है और दूसरे फेज के रजिस्ट्रेशन में काफी जियोफोन फिर से बुक होने वाले हैं। जियो फोन के निर्माण का काम एक ताइवान की कंपनी को दिया गया था। ये फोन डिलिवरी के लिए ताइवान से आएंगे और फिर देश के अलग-अलग शहरों में पहुंचेंगे। बता दें कि फोन की लॉन्चिंग के समय मुकेश अंबानी ने कहा था कि हर सप्ताह पचास लाख फोन की डिलीवरी होगी। बता दें कि सबसे पहले जियो फोन की डिलीवरी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और अहमदाबाद में होगी। इन पाँच शहरों में फोन पहुंचने के बाद जियो सेंटर और रिलायंस जियो स्टोर पर फोन की डिलीवरी होगी। इसके बाद इन दोनों स्टोर से रिटेल स्टोर और डीलर्स के पास फोन भेजे जाएंगे। बता दें कि जियोफोन इन बिल्ट सिम के साथ आएगा। इसमें दो. चार इंच की क्यूडब्ल्यूवीजीए डिस्प्ले, एक. दो गीगाहर्ट्ज का स्प्रिडट्रम SPRD नौ हज़ार आठ सौ बीस एम्पीयर/QCआठ हज़ार नौ सौ पाँच डुअल कोर प्रोसेसर, ग्राफिक्स के लिए माली-चार सौ जीपीयू, पाँच सौ बारह एमबी रैम और चार जीबी स्टोरेज है जिसे एक सौ अट्ठाईस जीबी तक बढ़ाया जा सकता है। फोन में दो मेगापिक्सल का रियर कैमरा, शून्य. तीन मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है यानी आप वीडियो कॉलिंग कर सकते हैं। फोन में दो हज़ार एमएएच बैटरी, चारजी वीओएलटीई, ब्लूटूथ वीचार. एक, वाई-फाई, एनएफसी, एफएम रेडियो, जीपीएस और यूएसबी दो. शून्य सपोर्ट है।
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पिहोवा, 11 अक्तूबर (मुकेश डोलिया)
झोंपडी पर बरपा कुदरत का कहर, सफेदे का पेड़ ने लील ली तीन जिंदगियां। प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा गरीब परिवार को भुगतना पड़ा। गांव अरुणाय जाने वाले रास्ते पर सुबह के समय दर्दनाक हादसा हुआ, जब अचानक भारी भरकम सफेदे का पेड़ अचानक झुग्गी-झोंपडी पर गिरा, जिसके नीचे दबने से पांच दिन का मासूम बच्चा और दो महिलाओं की मौत हो गई। हादसा स्थल पर खड़े लोगों ने बताया कि वे अलवर राजस्थान के रहने वाले हैं। कई वर्षों से ढोलक बजाकर पिहोवा शहर व आसपास के गांवों में विवाह शादी के प्रोग्रामों में या फिर घरों में मांग कर अपना पेट भरते हैं। आर्थिक तंगी के चलते झोंपडिय़ों में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन्ही झोंपडिय़ों में चांद नामक व्यक्ति अपनी पत्नी करिश्मा व माता हेमा तथा 12 वर्षीय भाई के साथ रह रहा था। चांद की पत्नी करिश्मा ने अभी पांच दिन पहले ही बिटिया को जन्म दिया था। परिवार वाले खुश थे।
बीती सोमवार की रात्रि करिश्मा व उसकी सास हेमा अपनी पांच दिन की बच्ची के साथ अलग झोंपडी में सोए थे और चांद व उसका 12 वर्षीय भाई अलग सोये हुए थे। मंगलवार सुबह लगभग छह बजे सडक़ पर खड़ा सफेदे का पेड़ अचानक जड़ से उखडक़र झोंपडी पर आ गिरा और पेड़ के नीचे करिश्मा उम्र लगभग 30 वर्ष व उसकी सास हेमा तथा पांच दिन की बच्ची नीचे दब गए। आसपास के लोगों ने तुरंत पेड़ को काटकर तीनों को बाहर निकाला और गंभीर अवस्था में एंबुलेंस द्वारा सिविल अस्पताल में पहुंचायाएजहां पर चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए भरसक प्रयास कियेएबाद में तीनों को मृतक घोषित कर दिया। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंचा। समाचार लिखे जाने तक तीनों मृतकों को पोस्टमार्टम के लिए एलएनजेपी अस्पताल कुरुक्षेत्र भेज दिया गया था। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की पीडि़त परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए।
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पिहोवा, ग्यारह अक्तूबर झोंपडी पर बरपा कुदरत का कहर, सफेदे का पेड़ ने लील ली तीन जिंदगियां। प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा गरीब परिवार को भुगतना पड़ा। गांव अरुणाय जाने वाले रास्ते पर सुबह के समय दर्दनाक हादसा हुआ, जब अचानक भारी भरकम सफेदे का पेड़ अचानक झुग्गी-झोंपडी पर गिरा, जिसके नीचे दबने से पांच दिन का मासूम बच्चा और दो महिलाओं की मौत हो गई। हादसा स्थल पर खड़े लोगों ने बताया कि वे अलवर राजस्थान के रहने वाले हैं। कई वर्षों से ढोलक बजाकर पिहोवा शहर व आसपास के गांवों में विवाह शादी के प्रोग्रामों में या फिर घरों में मांग कर अपना पेट भरते हैं। आर्थिक तंगी के चलते झोंपडिय़ों में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन्ही झोंपडिय़ों में चांद नामक व्यक्ति अपनी पत्नी करिश्मा व माता हेमा तथा बारह वर्षीय भाई के साथ रह रहा था। चांद की पत्नी करिश्मा ने अभी पांच दिन पहले ही बिटिया को जन्म दिया था। परिवार वाले खुश थे। बीती सोमवार की रात्रि करिश्मा व उसकी सास हेमा अपनी पांच दिन की बच्ची के साथ अलग झोंपडी में सोए थे और चांद व उसका बारह वर्षीय भाई अलग सोये हुए थे। मंगलवार सुबह लगभग छह बजे सडक़ पर खड़ा सफेदे का पेड़ अचानक जड़ से उखडक़र झोंपडी पर आ गिरा और पेड़ के नीचे करिश्मा उम्र लगभग तीस वर्ष व उसकी सास हेमा तथा पांच दिन की बच्ची नीचे दब गए। आसपास के लोगों ने तुरंत पेड़ को काटकर तीनों को बाहर निकाला और गंभीर अवस्था में एंबुलेंस द्वारा सिविल अस्पताल में पहुंचायाएजहां पर चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए भरसक प्रयास कियेएबाद में तीनों को मृतक घोषित कर दिया। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंचा। समाचार लिखे जाने तक तीनों मृतकों को पोस्टमार्टम के लिए एलएनजेपी अस्पताल कुरुक्षेत्र भेज दिया गया था। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की पीडि़त परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए।
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अमरावती- दि. 2 संत आसाराम बापू को बेवजह फंसाया गया है, लंबे समय से जेल की सलाखों के पीछे है, ऐसे ब्रह्मज्ञानी संत जात-पात से हटकर दुनिया का उध्दार करने के लिए आते है, इस बात का ध्यान रखते हुए संत आसाराम बापू को तत्काल रहा किया जाए, ऐसी मांग को लेकर श्री योग वेदांत सेवा समिति के सदस्यों ने जिलाधीश के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भिजवाया.
ज्ञापन में उन्हाेंंने कहा है कि, आसाराम बापू ने लोग व ब्रह्मविद्या का प्रशिक्षण दिया. ईश्वरी शांति व निर्विकारी सुख की गंगा बहाई, हजारों बाल संस्कार केंद्रों और युवा सेवा संघों के माध्यम से बाल और युवा पीढी में सच्चरित्रता व नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना कर राष्ट्र की रिढ मजबूत की. उन्होंने यह भी बताया कि, महिला उत्थान मंडल की स्थापना की और महिलाओं के सर्वांगिन विकास के लिए विभिन्न प्रोजेक्ट चलाए, अनगिनत लोगों को ईश्वर-भक्ति व जनसेवा के रास्ते लगाकर अध्यात्मिक क्रांति का उद्घोष किया, ऐसे संत के लिए आपातकालीन परिस्थिति में संविधान प्रदत अपने विशेषाधिकारों को सद्उपयोग कर राष्ट्रहित में संत आसाराम बापू को शिघ्र रिहा करवाने के लिए उचित कार्रवाई करे, ऐसी मांग को लेकर ज्ञापन सौंपते समय श्री योग वेदांत सेवा समिति के अध्यक्ष नंदलाल तरडेजा, उपाध्यक्ष सुदर्शन मतानी, सचिव मानव बुध्ददेव, पूर्व अध्यक्ष दयाराम राठोड, साहेबराव घाडकी, शलाका गोवारे समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे.
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अमरावती- दि. दो संत आसाराम बापू को बेवजह फंसाया गया है, लंबे समय से जेल की सलाखों के पीछे है, ऐसे ब्रह्मज्ञानी संत जात-पात से हटकर दुनिया का उध्दार करने के लिए आते है, इस बात का ध्यान रखते हुए संत आसाराम बापू को तत्काल रहा किया जाए, ऐसी मांग को लेकर श्री योग वेदांत सेवा समिति के सदस्यों ने जिलाधीश के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भिजवाया. ज्ञापन में उन्हाेंंने कहा है कि, आसाराम बापू ने लोग व ब्रह्मविद्या का प्रशिक्षण दिया. ईश्वरी शांति व निर्विकारी सुख की गंगा बहाई, हजारों बाल संस्कार केंद्रों और युवा सेवा संघों के माध्यम से बाल और युवा पीढी में सच्चरित्रता व नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना कर राष्ट्र की रिढ मजबूत की. उन्होंने यह भी बताया कि, महिला उत्थान मंडल की स्थापना की और महिलाओं के सर्वांगिन विकास के लिए विभिन्न प्रोजेक्ट चलाए, अनगिनत लोगों को ईश्वर-भक्ति व जनसेवा के रास्ते लगाकर अध्यात्मिक क्रांति का उद्घोष किया, ऐसे संत के लिए आपातकालीन परिस्थिति में संविधान प्रदत अपने विशेषाधिकारों को सद्उपयोग कर राष्ट्रहित में संत आसाराम बापू को शिघ्र रिहा करवाने के लिए उचित कार्रवाई करे, ऐसी मांग को लेकर ज्ञापन सौंपते समय श्री योग वेदांत सेवा समिति के अध्यक्ष नंदलाल तरडेजा, उपाध्यक्ष सुदर्शन मतानी, सचिव मानव बुध्ददेव, पूर्व अध्यक्ष दयाराम राठोड, साहेबराव घाडकी, शलाका गोवारे समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे.
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अमृत की वृष्टि करने वाली आपकी बातचीत की प्रणाली को तथा श्रेष्ठ कुशल पुरुषों द्वारा अभिनन्दन करने योग्य उस ( अनुपम ) प्राकृति को एवं करुणारस से भीगी हुई अलौकिक कृति को जानने के लिए किसी के मन का प्रसार नहीं होता ।
यहाँ किए जानेवाले 'मन के प्रसार का निषेध' वर्णनीय वस्तु की अनिर्वचनीयता समझाने के लिये है ।
श्वासोऽनुमानवेद्यः शीतान्यङ्गानि निचला दृष्टिः । तस्याः सुभग ! कथेयं तिष्ठतु तावत्कथान्तरं कथय ।
सखी नायक से कहती है - हे सुभग, उसका श्वास अनुमान से ज्ञात होने योग्य है, अंग शीतल हो गए हैं और दृष्टि निश्चल है - यह है उसकी कथा । इसलिए इसे तो रहने दीजिए । आप तो कुछ दूसरी ही बात करिए । ( यहाँ उक्तविषय है । )
स्वकारादिक तो कहते हैं कि -
"आक्षेप दो प्रकार का है - एक वह जिसमें प्राकरणिक का निषेध प्रतिष्ठित न होने के कारण केवल आभासरूप रहता है और इस तरह किसी विशेष के विधान को अभिव्यक्त करता है; और दूसरा वह जिसमें प्राकारणिक अर्थ की विधि केवल रूप होकर निषेध में पर्यवसित हो जाती है ।
प्रथमतः दो प्रकार का है- उक्तविषय और वक्ष्यमाणविषय । इन दोनों में से उक्तविषय के भी दो भेद हैं - कहीं केवल वस्तु का निषेध होने से और कहीं वस्तु के कथन
का निषेध होने से और वज्रयमाण विषय तो वस्तु-कथन का निषेधरूप
ही हो सकता है । वह शब्दतः सामान्य धर्म सेकेनिषेधरूप में उपस्थित किए जाने पर भी वस्तुतः विशेषरूप इष्ट वस्तु के निषेधरूप में उपस्थित होने के कारण जिस वस्तु का निषेध किया जाता है उसमें रहने वाले किसी अन्य विशेष को उत्पन्न कर देता है। यह भी दो प्रकार का है - एक वह जिसमें सामान्याश्रित किसी विशेष का निरूपण किया जाता है, दूसरा वह जिसमें केवल सामान्य का ही वर्ण होता हैतदाश्रित विशेष का निरूपण नहीं होता। उनमें से कुछ विशेषों के निरूपण कर दिए जाने पर प्रयोजन के प्रभाव से निषेध की प्रवृत्ति नहीं होती । वह निषेध वक्ष्यमाण इष्ट वस्तु के विषय में ही सम्पन्न हो जाता है और जहाँ विशेषो का निरूपण ही नहीं होता वहाँ तो सुतरां उसे वक्ष्यमाण भीष्ट वस्तु के विषय में सम्पन्न होना ही पड़ता है ।
इन चारों प्रकार के प्राक्षेप में इन चार बातों का उपयोग होता है - अभीष्ट वस्तु उसका निषेध, निषेध की भी
वस्तु में रहनेवाली विशेषता का प्रतिपादन । इसलिए यहाँ पर निषेव की विधिवत का निषेध नहीं कहा जा सकता, किंतु असत्य निषेध के द्वारा विधि का प्रक्षेत्र होने के कारण इसका 'योग-शक्ति' के द्वारा अर्थात् (व्युत्पत्ति के अनुसार ) श्राक्षेप नाम सार्थक है और वह पूर्वोक्त रीति से चार प्रकार का है ।
दूसरा श्राप सत्य विधि के द्वारा निषेध का क्षेप होने पर होता है। इसमें भी उसकी विधि, उस विधि का भी श्राभासरूप होना और में रहनेवाली विशेषता का प्रतिपादन इन चारों बातों का उपयोग होता है ।
इनके मत में इस तरह उदाहरण बनाना चाहिए
न वयं कवयस्तव स्तवं नृप कुर्वीमहि यन्मृषाक्षरम् । रणसीम्नि तवावलोकने तरुणाक दिनकौशिकायते ॥
हे राजन्, हम कवि नहीं हैं कि झूठे अक्षरों में तुम्हारी स्तुति करें । सचमुच युद्ध भूमि में तुम्हारे देखने पर तरुण सूर्य दिन के उल्लू की तरह प्रतीत होता है ।
( २ ) ( उक्तविषय वस्तुकथन निषेधात्मक; जैसे - )
मां पाहीति विधिविधेयविषयो वाच्यः स्वतंत्र कथं नोपेचयो भवतास्मि दीन इति गीः श्लाघ्या न संख्यावताम् । एवं दोषविचारणाकुलतया देव ! त्वयि प्रोन्मुखे वक्तव्यप्रतिभादरिद्रमतयः ब्रूमहे ॥
हे देव, 'मेरी रक्षा करिए' इस तरह 'विधि' ( का प्रयोग ) विधेय ज्ञाकारी भृत्य ) के विषय में होता है, इस वाक्य को (जैसे ) तंत्र के लिए कैसे कहा जाय । रहा यह कहना कि
। उपेक्षा नहीं करनी चाहिए' सो यह विद्वानों के लिए प्रशंसनीय हीं । इस तरह के सन्मुख आने पर दोष की विचारणा में व्याकुल ने के कारण हमारी बुद्धि वक्तव्य की सूझ से रहित हो जाती है और म कुछ नहीं बोलने पाते ।
( ३ ) ( सामान्याश्रय यत्किञ्चिद्विशेषनिरूपणात्मक; जैसे - ) खल ! तव खलु चरितं विदुषामग्रे विविष्य वदयामि । लमथवा पापात्मन्कृतया कथयापि ते हतया ॥
हे दुष्ट, ( देख तो सही ) तेरे चरित्र को विद्वानों के आगे विवेचन
ही हो सकता है । वह शब्दत : सामान्य धर्म सेवन के निषेधरूप में उपस्थित किए जाने पर भी वस्तुतः विशेषरूप इष्ट वस्तु के निषेधरूप में उपस्थित होने के कारण जिस वस्तु का निषेध किया जाता है उसमें रहने वाले किसी अन्य विशेष को उत्पन्न कर देता है। यह भी दो प्रकार का है - एक वह जिसमें सामान्याश्रित किसी विशेष का निरूपण किया जाता है, दूसरा वह जिसमें केवल सामान्य का ही वर्ण होता हैतदाश्रित विशेष का निरूपण नहीं होता। उनमें से कुछ विशेषों के निरूपण कर दिए जाने पर प्रयोजन के प्रभाव से निषेध की प्रवृत्ति नहीं होती। वह निषेध वक्ष्यमाण इष्ट वस्तु के विषय में ही सम्पन्न हो जाता है और जहाँ विशेषों का निरूपण ही नहीं होता वहाँ तो सुतरां उसे वक्ष्यमाण अभीष्ट वस्तु के विषय में सम्पन्न होना ही पड़ता है ।
इन चारों प्रकार के प्रक्षेप में इन चार बातों का उपयोग होता है - अभीष्ट वस्तु, उसका निषेध, निषेध की भी
विशेषता का प्रतिपादन । इसलिए यहाँ पर निषेध विहित का निषेध नहीं कहा जा सकता, किंतु सत्य निषेध के द्वारा विधि का आक्षेप होने के कारण इसका 'योग-शक्ति' के द्वारा अर्थात् ( व्युत्पत्ति के अनुसार ) श्राक्षेप नाम सार्थक है और वह श्राक्षेप पूर्वोक्त रीति से चार प्रकार का है ।
दूसरा श्राक्षेप असत्य विधि के द्वारा निषेध का प्रक्षेप होने पर होता है। इसमें भी अभीष्ट उसकी विधि, उस विधि का भी भासरूप होना और अर्थ में रहनेवाली विशेषता का प्रतिपादन इन चारों बातों का उपयोग होता है ।
इनके मत में इस तरह उदाहरण बनाना चाहिए ।
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अमृत की वृष्टि करने वाली आपकी बातचीत की प्रणाली को तथा श्रेष्ठ कुशल पुरुषों द्वारा अभिनन्दन करने योग्य उस प्राकृति को एवं करुणारस से भीगी हुई अलौकिक कृति को जानने के लिए किसी के मन का प्रसार नहीं होता । यहाँ किए जानेवाले 'मन के प्रसार का निषेध' वर्णनीय वस्तु की अनिर्वचनीयता समझाने के लिये है । श्वासोऽनुमानवेद्यः शीतान्यङ्गानि निचला दृष्टिः । तस्याः सुभग ! कथेयं तिष्ठतु तावत्कथान्तरं कथय । सखी नायक से कहती है - हे सुभग, उसका श्वास अनुमान से ज्ञात होने योग्य है, अंग शीतल हो गए हैं और दृष्टि निश्चल है - यह है उसकी कथा । इसलिए इसे तो रहने दीजिए । आप तो कुछ दूसरी ही बात करिए । स्वकारादिक तो कहते हैं कि - "आक्षेप दो प्रकार का है - एक वह जिसमें प्राकरणिक का निषेध प्रतिष्ठित न होने के कारण केवल आभासरूप रहता है और इस तरह किसी विशेष के विधान को अभिव्यक्त करता है; और दूसरा वह जिसमें प्राकारणिक अर्थ की विधि केवल रूप होकर निषेध में पर्यवसित हो जाती है । प्रथमतः दो प्रकार का है- उक्तविषय और वक्ष्यमाणविषय । इन दोनों में से उक्तविषय के भी दो भेद हैं - कहीं केवल वस्तु का निषेध होने से और कहीं वस्तु के कथन का निषेध होने से और वज्रयमाण विषय तो वस्तु-कथन का निषेधरूप ही हो सकता है । वह शब्दतः सामान्य धर्म सेकेनिषेधरूप में उपस्थित किए जाने पर भी वस्तुतः विशेषरूप इष्ट वस्तु के निषेधरूप में उपस्थित होने के कारण जिस वस्तु का निषेध किया जाता है उसमें रहने वाले किसी अन्य विशेष को उत्पन्न कर देता है। यह भी दो प्रकार का है - एक वह जिसमें सामान्याश्रित किसी विशेष का निरूपण किया जाता है, दूसरा वह जिसमें केवल सामान्य का ही वर्ण होता हैतदाश्रित विशेष का निरूपण नहीं होता। उनमें से कुछ विशेषों के निरूपण कर दिए जाने पर प्रयोजन के प्रभाव से निषेध की प्रवृत्ति नहीं होती । वह निषेध वक्ष्यमाण इष्ट वस्तु के विषय में ही सम्पन्न हो जाता है और जहाँ विशेषो का निरूपण ही नहीं होता वहाँ तो सुतरां उसे वक्ष्यमाण भीष्ट वस्तु के विषय में सम्पन्न होना ही पड़ता है । इन चारों प्रकार के प्राक्षेप में इन चार बातों का उपयोग होता है - अभीष्ट वस्तु उसका निषेध, निषेध की भी वस्तु में रहनेवाली विशेषता का प्रतिपादन । इसलिए यहाँ पर निषेव की विधिवत का निषेध नहीं कहा जा सकता, किंतु असत्य निषेध के द्वारा विधि का प्रक्षेत्र होने के कारण इसका 'योग-शक्ति' के द्वारा अर्थात् श्राक्षेप नाम सार्थक है और वह पूर्वोक्त रीति से चार प्रकार का है । दूसरा श्राप सत्य विधि के द्वारा निषेध का क्षेप होने पर होता है। इसमें भी उसकी विधि, उस विधि का भी श्राभासरूप होना और में रहनेवाली विशेषता का प्रतिपादन इन चारों बातों का उपयोग होता है । इनके मत में इस तरह उदाहरण बनाना चाहिए न वयं कवयस्तव स्तवं नृप कुर्वीमहि यन्मृषाक्षरम् । रणसीम्नि तवावलोकने तरुणाक दिनकौशिकायते ॥ हे राजन्, हम कवि नहीं हैं कि झूठे अक्षरों में तुम्हारी स्तुति करें । सचमुच युद्ध भूमि में तुम्हारे देखने पर तरुण सूर्य दिन के उल्लू की तरह प्रतीत होता है । मां पाहीति विधिविधेयविषयो वाच्यः स्वतंत्र कथं नोपेचयो भवतास्मि दीन इति गीः श्लाघ्या न संख्यावताम् । एवं दोषविचारणाकुलतया देव ! त्वयि प्रोन्मुखे वक्तव्यप्रतिभादरिद्रमतयः ब्रूमहे ॥ हे देव, 'मेरी रक्षा करिए' इस तरह 'विधि' विधेय ज्ञाकारी भृत्य ) के विषय में होता है, इस वाक्य को तंत्र के लिए कैसे कहा जाय । रहा यह कहना कि । उपेक्षा नहीं करनी चाहिए' सो यह विद्वानों के लिए प्रशंसनीय हीं । इस तरह के सन्मुख आने पर दोष की विचारणा में व्याकुल ने के कारण हमारी बुद्धि वक्तव्य की सूझ से रहित हो जाती है और म कुछ नहीं बोलने पाते । खल ! तव खलु चरितं विदुषामग्रे विविष्य वदयामि । लमथवा पापात्मन्कृतया कथयापि ते हतया ॥ हे दुष्ट, तेरे चरित्र को विद्वानों के आगे विवेचन ही हो सकता है । वह शब्दत : सामान्य धर्म सेवन के निषेधरूप में उपस्थित किए जाने पर भी वस्तुतः विशेषरूप इष्ट वस्तु के निषेधरूप में उपस्थित होने के कारण जिस वस्तु का निषेध किया जाता है उसमें रहने वाले किसी अन्य विशेष को उत्पन्न कर देता है। यह भी दो प्रकार का है - एक वह जिसमें सामान्याश्रित किसी विशेष का निरूपण किया जाता है, दूसरा वह जिसमें केवल सामान्य का ही वर्ण होता हैतदाश्रित विशेष का निरूपण नहीं होता। उनमें से कुछ विशेषों के निरूपण कर दिए जाने पर प्रयोजन के प्रभाव से निषेध की प्रवृत्ति नहीं होती। वह निषेध वक्ष्यमाण इष्ट वस्तु के विषय में ही सम्पन्न हो जाता है और जहाँ विशेषों का निरूपण ही नहीं होता वहाँ तो सुतरां उसे वक्ष्यमाण अभीष्ट वस्तु के विषय में सम्पन्न होना ही पड़ता है । इन चारों प्रकार के प्रक्षेप में इन चार बातों का उपयोग होता है - अभीष्ट वस्तु, उसका निषेध, निषेध की भी विशेषता का प्रतिपादन । इसलिए यहाँ पर निषेध विहित का निषेध नहीं कहा जा सकता, किंतु सत्य निषेध के द्वारा विधि का आक्षेप होने के कारण इसका 'योग-शक्ति' के द्वारा अर्थात् श्राक्षेप नाम सार्थक है और वह श्राक्षेप पूर्वोक्त रीति से चार प्रकार का है । दूसरा श्राक्षेप असत्य विधि के द्वारा निषेध का प्रक्षेप होने पर होता है। इसमें भी अभीष्ट उसकी विधि, उस विधि का भी भासरूप होना और अर्थ में रहनेवाली विशेषता का प्रतिपादन इन चारों बातों का उपयोग होता है । इनके मत में इस तरह उदाहरण बनाना चाहिए ।
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काशी विश्वनाथ (विश्वेश्वर महादेव) दर्शन कर मेरे बेटी-दामाद और मेरी सलहज गेट नम्बर चार के आसपास एक गोलगप्पे वाले के पास रुके।
विश्वनाथ मंदिर दर्शन के बाद कुछ जलपान को तलाश रहे थे वे लोग कि ये गोल गप्पे वाले का ठेला दिख गया। वाणी ने मुझे बाद में बताया कि बहुत स्पेशल था गोल गप्पे वाला। आठ-नौ प्रकार के गोलगप्पे के पानी बना रखे थे उसने। इसके अलावा बहुत ही साफ सुथरा। जबरदस्त हाईजीन। इन लोगों ने जम कर अलग अलग प्रकार के गोलगप्पे के पानी के साथ गोलगप्पे चखे और फिर भांति भांति के पानी का अलग से स्वाद लिया। उसके बाद सर्वसम्मति से तय किया कि छब्बीस जनवरी को विवस्वान पाण्डेय (विवेक वाणी के पुत्र और मेरे नत्तू पांड़े) के यज्ञोपवीत संस्कार में ऐसा ही गोलगप्पे का स्टॉल होना चाहिये।
गोलगप्पे वाले अभिषेक कुमार मिश्र को प्रस्ताव दिया तो वे कूद कर तैयार हो गये। उन्होने बताया कि हाल ही में वे बिहार में इसी तरह की स्टॉल एक समारोह में लगा चुके हैं। इस तरह के समारोहों में उत्कृष्ट सेवा देने में वे माहिर हैं।
सो तय हुआ है कि बनारस से बोकारो जायेंगे अभिषेक मिश्र, गोलगप्पे वाले। यहां से उनके गोलगप्पे के पानी का 8-10 तरह का मसाला और तैयार गोलगप्पे भी ले जाये जायेंगे। उनके अपने वाले स्वाद के लिये वे लोकल झारखण्डी गोलगपा नहीं, अपना वाला ही इस्तेमाल करेंगे। हजारों मेहमानों की भीड़ के लिये गोलगप्पे कैसे ले जाये जायेंगे, यह भी देखने की बात होगी।
विकास (मेरे छोटे साले साहब) ने बताया कि अभिषेक मिसिर के लिये एक सेट कुरता-धोती का इंतजाम भी बोकारो में किया जा रहा है। जिसे पहल कर वे खांटी बनारसी लुक देते हुये गोलगप्पा सर्व करेंगे!
काशीनाथ सिंह ने बनारस के पप्पू चाय वाले को फेमस कर दिया। अब विवेक वाणी अभिषेक मिसिर को बनारस से बोकारो घुमा कर फेमस कर देंगे। या अभिषेक पहले से ही फेमस हैं? पता नहीं। चित्र में अभिषेक जो कागज दिखा रहे हैं उसमें उनका मोबाइल नम्बर, बैंक अकाउण्ट नम्बर आदि सब कुछ है। उनके बारे में ज्यादा डीटेल्स मुझे नहीं मिली हैं। क्या सुझाव है - मोबाइल नम्बर डायल कर अभिषेक से ही पूछा जाये?
पता नहीं बनारस में अभिषेक जैसे कितने तराशे और/या अनगढ़ हीरे होंगे!
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काशी विश्वनाथ दर्शन कर मेरे बेटी-दामाद और मेरी सलहज गेट नम्बर चार के आसपास एक गोलगप्पे वाले के पास रुके। विश्वनाथ मंदिर दर्शन के बाद कुछ जलपान को तलाश रहे थे वे लोग कि ये गोल गप्पे वाले का ठेला दिख गया। वाणी ने मुझे बाद में बताया कि बहुत स्पेशल था गोल गप्पे वाला। आठ-नौ प्रकार के गोलगप्पे के पानी बना रखे थे उसने। इसके अलावा बहुत ही साफ सुथरा। जबरदस्त हाईजीन। इन लोगों ने जम कर अलग अलग प्रकार के गोलगप्पे के पानी के साथ गोलगप्पे चखे और फिर भांति भांति के पानी का अलग से स्वाद लिया। उसके बाद सर्वसम्मति से तय किया कि छब्बीस जनवरी को विवस्वान पाण्डेय के यज्ञोपवीत संस्कार में ऐसा ही गोलगप्पे का स्टॉल होना चाहिये। गोलगप्पे वाले अभिषेक कुमार मिश्र को प्रस्ताव दिया तो वे कूद कर तैयार हो गये। उन्होने बताया कि हाल ही में वे बिहार में इसी तरह की स्टॉल एक समारोह में लगा चुके हैं। इस तरह के समारोहों में उत्कृष्ट सेवा देने में वे माहिर हैं। सो तय हुआ है कि बनारस से बोकारो जायेंगे अभिषेक मिश्र, गोलगप्पे वाले। यहां से उनके गोलगप्पे के पानी का आठ-दस तरह का मसाला और तैयार गोलगप्पे भी ले जाये जायेंगे। उनके अपने वाले स्वाद के लिये वे लोकल झारखण्डी गोलगपा नहीं, अपना वाला ही इस्तेमाल करेंगे। हजारों मेहमानों की भीड़ के लिये गोलगप्पे कैसे ले जाये जायेंगे, यह भी देखने की बात होगी। विकास ने बताया कि अभिषेक मिसिर के लिये एक सेट कुरता-धोती का इंतजाम भी बोकारो में किया जा रहा है। जिसे पहल कर वे खांटी बनारसी लुक देते हुये गोलगप्पा सर्व करेंगे! काशीनाथ सिंह ने बनारस के पप्पू चाय वाले को फेमस कर दिया। अब विवेक वाणी अभिषेक मिसिर को बनारस से बोकारो घुमा कर फेमस कर देंगे। या अभिषेक पहले से ही फेमस हैं? पता नहीं। चित्र में अभिषेक जो कागज दिखा रहे हैं उसमें उनका मोबाइल नम्बर, बैंक अकाउण्ट नम्बर आदि सब कुछ है। उनके बारे में ज्यादा डीटेल्स मुझे नहीं मिली हैं। क्या सुझाव है - मोबाइल नम्बर डायल कर अभिषेक से ही पूछा जाये? पता नहीं बनारस में अभिषेक जैसे कितने तराशे और/या अनगढ़ हीरे होंगे!
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देश आजादी का 76 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। पूरे देश में धूमधाम से तिरंगा फहराया जा रहा है। योगगुरु बाबा रामदेव भी तिरंगा यात्रा में शामिल हुए और कहा कि ये राष्ट्रीय एकता, सम्प्रभुता और अखंडता का संगम है। भारत माता की जय और हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे गूंज रहे हैं और वतन के लिए अपना सबकुछ न्योछावर करने का जज्बा जाग रहा है।
आजादी के अमृत महोत्सव पर क्या बोले बाबा रामदेव?
आजादी के पर्व पर तिरंगा यात्रा निकालने पर बाबा रामदेव ने कहा कि हमने कोई नई परंपरा नहीं शुरू की है। यही हमारी सनातन परंपरा है कि हम सभी मिलकर राष्ट्र की एकता, अखंडता, सम्प्रभुता, राष्ट्र के गौरव और वैभव को बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम सब मिलकर आजादी के अमृत महोत्सव से लेकर, आजादी के शताब्दी वर्ष तक इस भारत को इतनी उंचाई पर ले जायेंगे कि सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा बनेगा।
बाबा रामदेव ने कहा, 'हम भारत को दुनिया की महाशक्ति, परम वैभवशाली, जगतगुरु, विश्वगुरु और सुपर पॉवर बनाएंगे। ' बाबा रामदेव के इस बयान पर लोग उनके पुराने बयान को याद दिला रहे हैं। नीरज कुमार नाम के ट्विटर यूजर ने बाबा रामदेव के इस बयान पर लिखा, 'जैसे पेट्रोल डीजल और गैस के दाम कम करवाए हैं? ' जय नाम के यूजर ने लिखा कि इनको पता ही नहीं है कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बन चुका है।
खान नाम के यूजर ने लिखा, 'बिल्कुल वैसे ही जैसे काला धन आ गया और पेट्रोल 30 रुपए लीटर हो गया। विकास चौहान नाम के यूजर ने लिखा, 'बाद में बोल देंगे कि हां बोला तो था कि अगले 25 वर्षो में भारत को सुपर पॉवर बनेगा, नहीं बना तो सवाल पूछने पर बोलेंगे कि मैंने कहा तो था, अब पूछ पाड़ेगा मेरी! ' एक यूजर ने लिखा कि सीधे 25 वर्ष का टारगेट दिया है, ताकि हर 5 साल में जवाब ना देना पड़े।
संतोष नाम के यूजर ने लिखा कि आम जनता जब भी पेट्रोल पम्प जाती है तो आप की 35 रूपए लीटर वाली बात याद आ जाती है। शरद श्रीवास्तव नाम के यूजर ने लिखा कि इन्हें फिर धोती उठाकर भगना न पड़ जाए कहीं, कुछ भी बोल रहे हैं बाबा। ये सबसे बड़े पलटू हैं। जयेश पटेल नाम के यूजर ने लिखा कि मुझे आजतक ये समझ नहीं आया कि न्यूज चैनल वाले बाबा का इंटरव्यू लेते ही क्यों है?
बता दें कि बाबा रामदेव का एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसमें उनसे एक पत्रकार ने जब उनके पुराने बयान 'पेट्रोल-डीजल' के दाम कम होने वाले बयान पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा था कि हां मैंने कहा था, अब क्या पूंछ पाडेगा मेरी? बाबा रामदेव के इस जवाब में उन्हें खूब ट्रोल किया गया था।
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देश आजादी का छिहत्तर वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। पूरे देश में धूमधाम से तिरंगा फहराया जा रहा है। योगगुरु बाबा रामदेव भी तिरंगा यात्रा में शामिल हुए और कहा कि ये राष्ट्रीय एकता, सम्प्रभुता और अखंडता का संगम है। भारत माता की जय और हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे गूंज रहे हैं और वतन के लिए अपना सबकुछ न्योछावर करने का जज्बा जाग रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव पर क्या बोले बाबा रामदेव? आजादी के पर्व पर तिरंगा यात्रा निकालने पर बाबा रामदेव ने कहा कि हमने कोई नई परंपरा नहीं शुरू की है। यही हमारी सनातन परंपरा है कि हम सभी मिलकर राष्ट्र की एकता, अखंडता, सम्प्रभुता, राष्ट्र के गौरव और वैभव को बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम सब मिलकर आजादी के अमृत महोत्सव से लेकर, आजादी के शताब्दी वर्ष तक इस भारत को इतनी उंचाई पर ले जायेंगे कि सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा बनेगा। बाबा रामदेव ने कहा, 'हम भारत को दुनिया की महाशक्ति, परम वैभवशाली, जगतगुरु, विश्वगुरु और सुपर पॉवर बनाएंगे। ' बाबा रामदेव के इस बयान पर लोग उनके पुराने बयान को याद दिला रहे हैं। नीरज कुमार नाम के ट्विटर यूजर ने बाबा रामदेव के इस बयान पर लिखा, 'जैसे पेट्रोल डीजल और गैस के दाम कम करवाए हैं? ' जय नाम के यूजर ने लिखा कि इनको पता ही नहीं है कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बन चुका है। खान नाम के यूजर ने लिखा, 'बिल्कुल वैसे ही जैसे काला धन आ गया और पेट्रोल तीस रुपयापए लीटर हो गया। विकास चौहान नाम के यूजर ने लिखा, 'बाद में बोल देंगे कि हां बोला तो था कि अगले पच्चीस वर्षो में भारत को सुपर पॉवर बनेगा, नहीं बना तो सवाल पूछने पर बोलेंगे कि मैंने कहा तो था, अब पूछ पाड़ेगा मेरी! ' एक यूजर ने लिखा कि सीधे पच्चीस वर्ष का टारगेट दिया है, ताकि हर पाँच साल में जवाब ना देना पड़े। संतोष नाम के यूजर ने लिखा कि आम जनता जब भी पेट्रोल पम्प जाती है तो आप की पैंतीस रूपए लीटर वाली बात याद आ जाती है। शरद श्रीवास्तव नाम के यूजर ने लिखा कि इन्हें फिर धोती उठाकर भगना न पड़ जाए कहीं, कुछ भी बोल रहे हैं बाबा। ये सबसे बड़े पलटू हैं। जयेश पटेल नाम के यूजर ने लिखा कि मुझे आजतक ये समझ नहीं आया कि न्यूज चैनल वाले बाबा का इंटरव्यू लेते ही क्यों है? बता दें कि बाबा रामदेव का एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसमें उनसे एक पत्रकार ने जब उनके पुराने बयान 'पेट्रोल-डीजल' के दाम कम होने वाले बयान पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा था कि हां मैंने कहा था, अब क्या पूंछ पाडेगा मेरी? बाबा रामदेव के इस जवाब में उन्हें खूब ट्रोल किया गया था।
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करनाल जिले के नेशनल हाईवे पर बड़ा हादसा होने से टल गया। यहां हाईवे पर अचानक गाड़ी की ब्रेक लगने के कारण कई गाड़ियां और कैंटर की भिड़त हो गई।
जींद जिले पुलिस ने अलेवा में हुए सुखबीर मर्डर मामले में कार्यवाही करते हुए चार आरोपियों को काबू करने में सफलता हासिल की है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर कहा कि असम चाय के द्विशताब्दी वर्ष को भव्य तरीके से मनाया जाएगा।
अंबाला छावनी की ग्वाल मंडी में बिजली का काम कर रहे एक युवक की काम करते वक़्त करंट लगने से मौत हो गई। युवक रविंद्र की आयु 29 साल थी।
हरियाणा के हिसार जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है यहां गैस चढ़ने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि चौथे व्यक्ति को लोगों ने समय रहते बचा लिया।
कर्क राशि वालों आज घर की सुख-सुविधा संबंधी चीजों पर खर्च हो सकता है। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।
कन्या राशि वालों आय के स्त्रोत बढ़ने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी। युवा वर्ग भविष्य को लेकर ज्यादा फोकस रहेंगे।
तुला राशि वालों आज का दिन शानदार रहेगा। बिजनेस संबंधित निवेश करना आपके लिए उत्तम रहेगा।
धनु राशि वालों व्यापार में लाभ के संकेत हैं। उच्च अधिकारी आपके विचारों से प्रसन्न हो सकते हैं।
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करनाल जिले के नेशनल हाईवे पर बड़ा हादसा होने से टल गया। यहां हाईवे पर अचानक गाड़ी की ब्रेक लगने के कारण कई गाड़ियां और कैंटर की भिड़त हो गई। जींद जिले पुलिस ने अलेवा में हुए सुखबीर मर्डर मामले में कार्यवाही करते हुए चार आरोपियों को काबू करने में सफलता हासिल की है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर कहा कि असम चाय के द्विशताब्दी वर्ष को भव्य तरीके से मनाया जाएगा। अंबाला छावनी की ग्वाल मंडी में बिजली का काम कर रहे एक युवक की काम करते वक़्त करंट लगने से मौत हो गई। युवक रविंद्र की आयु उनतीस साल थी। हरियाणा के हिसार जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है यहां गैस चढ़ने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि चौथे व्यक्ति को लोगों ने समय रहते बचा लिया। कर्क राशि वालों आज घर की सुख-सुविधा संबंधी चीजों पर खर्च हो सकता है। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। कन्या राशि वालों आय के स्त्रोत बढ़ने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी। युवा वर्ग भविष्य को लेकर ज्यादा फोकस रहेंगे। तुला राशि वालों आज का दिन शानदार रहेगा। बिजनेस संबंधित निवेश करना आपके लिए उत्तम रहेगा। धनु राशि वालों व्यापार में लाभ के संकेत हैं। उच्च अधिकारी आपके विचारों से प्रसन्न हो सकते हैं। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
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भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और सलामी बल्लेबाज शिखर धवन अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। उनका मस्ती भर मिजाज फैंस को काफी पसंद आता हैं।
हालांकि, इन दिनों शिखर धवन टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं, लेकिन इस सीजन वह पंजाब किंग्स की कप्तानी करेंगे। आईपीएल 2023 से पहले शिखर ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल को लेकर खुलकर बात की, जिन्होंने वनडे में धवन की जगह ली है।
वनडे टीम से बाहर होने के बाद Shikhar Dhawan ने Shubman Gill को लेकर क्या कहा?
दरअसल, आईपीएल 2023 से पहले शिखर धवन ने एक इंटरव्यू में शुभमन गिल की जमकर तारीफ करते हुए एक सवाल का जवाब खास अंदाज में दिया। बता दें कि धवन की जगह वनडे में शुभमन गिल ने ली, लेकिन इसके बावजूद भी शिखर इस बात से नाखुश नहीं है। उनसे जब गिल को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, शुभमन ने जिस तरह का खेल दिखाया है उसके कारण ही उनकी भारत की वनडे में एंट्री हुई।
इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि अगर आप सेलेक्टर होते तो आप शिखर धवन को इतना लंबा मौका देते? तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि शुभमन ने इंटरनेशनल में जितना अच्छा प्रदर्शन किया, तो मैं शिखर के ऊपर शुभमन को चुनता।
इसके बाद ही उन्होंने कहा कि शुभमन काफी अच्छा कर रहा है, तो हमें इसे स्वीकार करना चाहिए। हालांकि मैं मौकों के लिए हमेशा तैयार हूं। कब मैजिक हो जाए, इसका नहीं पता, लेकिन मैं अपनी तरफ से पूरी मेहनत कर रहा हूं।
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भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और सलामी बल्लेबाज शिखर धवन अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। उनका मस्ती भर मिजाज फैंस को काफी पसंद आता हैं। हालांकि, इन दिनों शिखर धवन टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं, लेकिन इस सीजन वह पंजाब किंग्स की कप्तानी करेंगे। आईपीएल दो हज़ार तेईस से पहले शिखर ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल को लेकर खुलकर बात की, जिन्होंने वनडे में धवन की जगह ली है। वनडे टीम से बाहर होने के बाद Shikhar Dhawan ने Shubman Gill को लेकर क्या कहा? दरअसल, आईपीएल दो हज़ार तेईस से पहले शिखर धवन ने एक इंटरव्यू में शुभमन गिल की जमकर तारीफ करते हुए एक सवाल का जवाब खास अंदाज में दिया। बता दें कि धवन की जगह वनडे में शुभमन गिल ने ली, लेकिन इसके बावजूद भी शिखर इस बात से नाखुश नहीं है। उनसे जब गिल को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, शुभमन ने जिस तरह का खेल दिखाया है उसके कारण ही उनकी भारत की वनडे में एंट्री हुई। इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि अगर आप सेलेक्टर होते तो आप शिखर धवन को इतना लंबा मौका देते? तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि शुभमन ने इंटरनेशनल में जितना अच्छा प्रदर्शन किया, तो मैं शिखर के ऊपर शुभमन को चुनता। इसके बाद ही उन्होंने कहा कि शुभमन काफी अच्छा कर रहा है, तो हमें इसे स्वीकार करना चाहिए। हालांकि मैं मौकों के लिए हमेशा तैयार हूं। कब मैजिक हो जाए, इसका नहीं पता, लेकिन मैं अपनी तरफ से पूरी मेहनत कर रहा हूं।
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लाखों रुपए खर्च कर के बनने वाले देश के 95 प्रतिशत इंजीनियर और सौफ्टवेयर डैवलपमैंट से जुड़ी नौकरियों के काबिल ही नहीं हैं. यह आकलन है रोजगार से जुड़ी कंपनी एस्पायरिंग माइंड्स का. इस के एक अध्ययन में सामने आया है कि लगभग 4.77 प्रतिशत उम्मीदवार ही प्रोग्राम के लिए सही लौजिक लिख पाते हैं जोकि प्रोग्रामिंग की नौकरी के लिए न्यूनतम आवश्यकता है. छात्रों की इस भयानक खामी का तब पता चला जब आईटी संबंधित कालेजों की 500 ब्रांचों के 36 हजार से ज्यादा छात्रों ने औटोमेटा नाम के एक टैस्ट में हिस्सा लिया. इन में से दोतिहाई छात्र सहीसही कोड भी नहीं डाल सके. इस स्टडी में सामने आया कि जहां 60 प्रतिशत उम्मीदवार सही से कोड नहीं डाल पाए वहीं सिर्फ 1.4 प्रतिशत छात्र ही ऐसे निकले जिन्होंने सही कोड डालने में सफलता प्राप्त की.
क्या हमारे इंजीनियरिंग के छात्रों की यही खामी उन के बड़ेबड़े सपनों के लिए सब से बड़ी बाधा बन गई है? जी, हां, पूरी दुनिया में भारतीय इंजीनियरों की बौद्धिक क्षमताओं और तकनीकी कुशलता को ले कर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. 6 साल पहले तब के मानव संसाधन विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा था कि हमारे आईआईटी से निकलने वाले तमाम छात्रों में से महज 15 फीसदी छात्र ही रोजगार के काबिल हैं. उन के इस हंगामा खड़ा करने वाले बयान के कुछ ही दिनों बाद सौफ्टवेयर कंपनी इन्फोसिस के तत्कालीन अध्यक्ष एन नारायण मूर्ति ने भी यही कहा था.
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लाखों रुपए खर्च कर के बनने वाले देश के पचानवे प्रतिशत इंजीनियर और सौफ्टवेयर डैवलपमैंट से जुड़ी नौकरियों के काबिल ही नहीं हैं. यह आकलन है रोजगार से जुड़ी कंपनी एस्पायरिंग माइंड्स का. इस के एक अध्ययन में सामने आया है कि लगभग चार.सतहत्तर प्रतिशत उम्मीदवार ही प्रोग्राम के लिए सही लौजिक लिख पाते हैं जोकि प्रोग्रामिंग की नौकरी के लिए न्यूनतम आवश्यकता है. छात्रों की इस भयानक खामी का तब पता चला जब आईटी संबंधित कालेजों की पाँच सौ ब्रांचों के छत्तीस हजार से ज्यादा छात्रों ने औटोमेटा नाम के एक टैस्ट में हिस्सा लिया. इन में से दोतिहाई छात्र सहीसही कोड भी नहीं डाल सके. इस स्टडी में सामने आया कि जहां साठ प्रतिशत उम्मीदवार सही से कोड नहीं डाल पाए वहीं सिर्फ एक.चार प्रतिशत छात्र ही ऐसे निकले जिन्होंने सही कोड डालने में सफलता प्राप्त की. क्या हमारे इंजीनियरिंग के छात्रों की यही खामी उन के बड़ेबड़े सपनों के लिए सब से बड़ी बाधा बन गई है? जी, हां, पूरी दुनिया में भारतीय इंजीनियरों की बौद्धिक क्षमताओं और तकनीकी कुशलता को ले कर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. छः साल पहले तब के मानव संसाधन विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा था कि हमारे आईआईटी से निकलने वाले तमाम छात्रों में से महज पंद्रह फीसदी छात्र ही रोजगार के काबिल हैं. उन के इस हंगामा खड़ा करने वाले बयान के कुछ ही दिनों बाद सौफ्टवेयर कंपनी इन्फोसिस के तत्कालीन अध्यक्ष एन नारायण मूर्ति ने भी यही कहा था.
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में हाग्छु गाव नाहर ठहरा हुआ था कि रात्रिके पहिले पदर में वहा एक सार्थ आकर ठहरगया, पिछले पहर उड अ पड़ने से जुन लोगाने ज ह जगह आग जलाई । और सूर्योदय के पाहिले ही आग को जोड़कर चल दिये। मैदान में घाम सरनगर था और वह सूत्र गया था इसnिये उसके सहारे आग फैलने लगी। जगह जगह भाग जलाई गई थी इस लिय फलते फटने वह मेरे चारों तरफ फैल गई। गोशाल चिल्लाया और भाग जाने की प्ररणा की. पर एक तो ऐसे साधा. गण से सकट से डर कर भागना ठीक नहीं मालूम हुआ, दूसरे माग्ने का रास्ता चन्द्र ही होगया था क्योंकि मेरे चारों तरफ आग फैल गई थी, तीसरे जहा मैं खड़ा था उसके चारों तरफ हाथ हाथ तक घास नहीं था और फिर मैं नग्न था, कपड़ा होता तो आग कपड़े को पकड़कर मुझे सिर तक जला सकती थी, ध्न सय याताँ से म स्थिर रहा। यो भी मृत्युजय बनने के लिये मेरा दृढ रहना ही ठाक था। आग मेरे पास तक आई, ज्वालानों की उष्णता मे मेरे पैरों में वेदना हुई पर मैंने उपेक्षा ही की। थोड़ी देर में आशा होगई। पर मैं इस बात का विचार करने लगा कि मनुष्य अपनी लापर्वाही से दूसरों का कितना मुक्रमान कर जाता है। प्रत्येक पथिक का यह उत्तरदायित्व है कि जहां से आय वहां कोई ऐसा कार्य न कर जाय जिससे पीछे रहनेषागे या पीछे आनेवालों का कछु हो । देखकर उठाना देखकर रवा देखकर मल सूत्र निक्षेपण करना आदि प्रत्येक पथिक या प्रक व्यक्ति का आवश्यक और प्रथम कर्तव्य होना चाहिये। मैं अपनी भाधु, संस्था में इस विषय के नियम अनिवार्य कर दूंगा ।
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में हाग्छु गाव नाहर ठहरा हुआ था कि रात्रिके पहिले पदर में वहा एक सार्थ आकर ठहरगया, पिछले पहर उड अ पड़ने से जुन लोगाने ज ह जगह आग जलाई । और सूर्योदय के पाहिले ही आग को जोड़कर चल दिये। मैदान में घाम सरनगर था और वह सूत्र गया था इसnिये उसके सहारे आग फैलने लगी। जगह जगह भाग जलाई गई थी इस लिय फलते फटने वह मेरे चारों तरफ फैल गई। गोशाल चिल्लाया और भाग जाने की प्ररणा की. पर एक तो ऐसे साधा. गण से सकट से डर कर भागना ठीक नहीं मालूम हुआ, दूसरे माग्ने का रास्ता चन्द्र ही होगया था क्योंकि मेरे चारों तरफ आग फैल गई थी, तीसरे जहा मैं खड़ा था उसके चारों तरफ हाथ हाथ तक घास नहीं था और फिर मैं नग्न था, कपड़ा होता तो आग कपड़े को पकड़कर मुझे सिर तक जला सकती थी, ध्न सय याताँ से म स्थिर रहा। यो भी मृत्युजय बनने के लिये मेरा दृढ रहना ही ठाक था। आग मेरे पास तक आई, ज्वालानों की उष्णता मे मेरे पैरों में वेदना हुई पर मैंने उपेक्षा ही की। थोड़ी देर में आशा होगई। पर मैं इस बात का विचार करने लगा कि मनुष्य अपनी लापर्वाही से दूसरों का कितना मुक्रमान कर जाता है। प्रत्येक पथिक का यह उत्तरदायित्व है कि जहां से आय वहां कोई ऐसा कार्य न कर जाय जिससे पीछे रहनेषागे या पीछे आनेवालों का कछु हो । देखकर उठाना देखकर रवा देखकर मल सूत्र निक्षेपण करना आदि प्रत्येक पथिक या प्रक व्यक्ति का आवश्यक और प्रथम कर्तव्य होना चाहिये। मैं अपनी भाधु, संस्था में इस विषय के नियम अनिवार्य कर दूंगा ।
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।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद )
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ ।
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद )
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ( नदारद )
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ( नदारद )
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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Jharkhand News, रांची न्यूज : राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (प्रथम चरण) की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने आवेदन जमा करने की तिथि घोषित कर दी है. आवेदन आठ से 28 नवंबर तक ऑनलाइन जमा होगा. परीक्षा 16 जनवरी को होगी. प्रवेश पत्र नौ नवंबर से डाउनलोड होगा. 10वीं कक्षा में पढ़ रहे विद्यार्थी इसके लिए आवेदन कर सकेंगे.
आप 10वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं, तो आपके लिए अच्छा अवसर है. आप राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा के जरिए छात्रवृत्ति प्राप्त कर सकते हैं. इसके लिए 8 नवंबर से आवेदन कर सकेंगे. प्रारंभिक चरण की परीक्षा झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा ली जायेगी, जबकि मुख्य परीक्षा एनसीईआरटी द्वारा ली जायेगी. झारखंड के सभी कोटि के मान्यता प्राप्त विद्यालय के कक्षा 10 में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसके लिए आवेदन जमा कर सकते हैं. परीक्षा में सफल विद्यार्थी को कक्षा 11वीं से पीजी तक की पढ़ाई के लिए प्रतिमाह दो हजार रुपये छात्रवृत्ति दी जायेगी.
झारखंड एकेडमिक काउंसिल की आधिकारिक वेबसाइट www. jac. jharkhand. gov. in से परीक्षा के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है. इसके अलावा राष्ट्रीय साधन सह मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा के लिए भी आवेदन जमा करने की प्रक्रिया आठ नवंबर से शुरू होगी. आवेदन 28 नवंबर तक जमा होगा. परीक्षा 23 जनवरी को ली जायेगी.
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Jharkhand News, रांची न्यूज : राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने आवेदन जमा करने की तिथि घोषित कर दी है. आवेदन आठ से अट्ठाईस नवंबर तक ऑनलाइन जमा होगा. परीक्षा सोलह जनवरी को होगी. प्रवेश पत्र नौ नवंबर से डाउनलोड होगा. दसवीं कक्षा में पढ़ रहे विद्यार्थी इसके लिए आवेदन कर सकेंगे. आप दसवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं, तो आपके लिए अच्छा अवसर है. आप राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा के जरिए छात्रवृत्ति प्राप्त कर सकते हैं. इसके लिए आठ नवंबर से आवेदन कर सकेंगे. प्रारंभिक चरण की परीक्षा झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा ली जायेगी, जबकि मुख्य परीक्षा एनसीईआरटी द्वारा ली जायेगी. झारखंड के सभी कोटि के मान्यता प्राप्त विद्यालय के कक्षा दस में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसके लिए आवेदन जमा कर सकते हैं. परीक्षा में सफल विद्यार्थी को कक्षा ग्यारहवीं से पीजी तक की पढ़ाई के लिए प्रतिमाह दो हजार रुपये छात्रवृत्ति दी जायेगी. झारखंड एकेडमिक काउंसिल की आधिकारिक वेबसाइट www. jac. jharkhand. gov. in से परीक्षा के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है. इसके अलावा राष्ट्रीय साधन सह मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा के लिए भी आवेदन जमा करने की प्रक्रिया आठ नवंबर से शुरू होगी. आवेदन अट्ठाईस नवंबर तक जमा होगा. परीक्षा तेईस जनवरी को ली जायेगी.
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लखनऊ, 19 अक्टूबर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने का ऐलान करने वाली कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मंगलवार को कहा कि इस पार्टी की सरकार ने आधी आबादी के कल्याण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
मायावती ने सिलसिलेवार ट्वीट में यह भी कहा कि कांग्रेस अगर महिलाओं को वाजिब भागीदारी देना चाहती थी तो उसने अपने शासनकाल में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून क्यों नहीं बनाया।
गौरतलब है कि कांग्रेस महासचिव और पार्टी की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाद्रा ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में ऐलान किया कि उनकी पार्टी प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में 40 फीसद सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारेगी।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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लखनऊ, उन्नीस अक्टूबर बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में चालीस प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने का ऐलान करने वाली कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मंगलवार को कहा कि इस पार्टी की सरकार ने आधी आबादी के कल्याण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। मायावती ने सिलसिलेवार ट्वीट में यह भी कहा कि कांग्रेस अगर महिलाओं को वाजिब भागीदारी देना चाहती थी तो उसने अपने शासनकाल में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने का कानून क्यों नहीं बनाया। गौरतलब है कि कांग्रेस महासचिव और पार्टी की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाद्रा ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में ऐलान किया कि उनकी पार्टी प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में चालीस फीसद सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारेगी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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पंजाब राज्य औद्योगिक विकास कॉर्पोरेशन (पी. एस. आई. डी. सी. ) के चेयरमैन कृष्ण कुमार बावा ने कहा कि पी. एस. आई. डी. सी. राज्य के उद्यमियों को सुविधाएं देने के लिए वचनवद्ध है। उन्होंने कहा कि पी. एस. आई. डी. सी. राज्य के उद्योग को प्रफुल्लित करने के लिए सेतु के तौर पर काम करती आ रही है। उन्होंने एक मुश्त निपटारा नीति (ओ. टी. एस. पॉलिसी) के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह का विशेष तौर पर धन्यवाद करते हुए कहा कि इससे राज्य के उद्योगों को लाभ होगा। आज यहाँ उद्योग भवन में हुई पी. एस. आई. डी. सी. के बोर्ड ऑफ डायरैकटरज़ की मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए श्री बावा ने कहा कि इस समय एक मुश्त निपटारा नीति (ओ. टी. एस. पॉलिसी) जो 31 दिसंबर, 2020 तक करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह का विशेष तौर पर धन्यवाद किया। उन्होंने पी. एस. आई. डी. सी. से कजऱ् प्राप्त करने वाले समूह उद्यमियों को जल्द कजऱ् वापस करने की अपील भी की। इस मौके पर बोर्ड ऑफ डायरैकटरज़ ने पिछली मीटिंग के दौरान पास किए गए कदमों को स्वीकृत करते हुए पी. एस. आई. डी. सी. के नव-नियुक्त वाइस चेयरमैन श्री ब्रह्म शंकर शर्मा और मैनेजिंग डायरैक्टर सिबिन सी. की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार का धन्यवाद भी किया। इस मीटिंग में वाइस चेयरमैन श्री ब्रह्म शंकर शर्मा, मैनेजिंग डायरैक्टर श्री सिबिन सी, श्री शविन्दर उप्पल, श्री बलविन्दर सिंह जंडू, श्री राजेश घारू, सीनियर जनरल मैनेजर श्री एस. के. अहुजा, श्रीमती गुरलीन कपूर, जनरल मैनेजर श्री सोहन लाल आदि उपस्थित थे।
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पंजाब राज्य औद्योगिक विकास कॉर्पोरेशन के चेयरमैन कृष्ण कुमार बावा ने कहा कि पी. एस. आई. डी. सी. राज्य के उद्यमियों को सुविधाएं देने के लिए वचनवद्ध है। उन्होंने कहा कि पी. एस. आई. डी. सी. राज्य के उद्योग को प्रफुल्लित करने के लिए सेतु के तौर पर काम करती आ रही है। उन्होंने एक मुश्त निपटारा नीति के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह का विशेष तौर पर धन्यवाद करते हुए कहा कि इससे राज्य के उद्योगों को लाभ होगा। आज यहाँ उद्योग भवन में हुई पी. एस. आई. डी. सी. के बोर्ड ऑफ डायरैकटरज़ की मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए श्री बावा ने कहा कि इस समय एक मुश्त निपटारा नीति जो इकतीस दिसंबर, दो हज़ार बीस तक करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह का विशेष तौर पर धन्यवाद किया। उन्होंने पी. एस. आई. डी. सी. से कजऱ् प्राप्त करने वाले समूह उद्यमियों को जल्द कजऱ् वापस करने की अपील भी की। इस मौके पर बोर्ड ऑफ डायरैकटरज़ ने पिछली मीटिंग के दौरान पास किए गए कदमों को स्वीकृत करते हुए पी. एस. आई. डी. सी. के नव-नियुक्त वाइस चेयरमैन श्री ब्रह्म शंकर शर्मा और मैनेजिंग डायरैक्टर सिबिन सी. की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार का धन्यवाद भी किया। इस मीटिंग में वाइस चेयरमैन श्री ब्रह्म शंकर शर्मा, मैनेजिंग डायरैक्टर श्री सिबिन सी, श्री शविन्दर उप्पल, श्री बलविन्दर सिंह जंडू, श्री राजेश घारू, सीनियर जनरल मैनेजर श्री एस. के. अहुजा, श्रीमती गुरलीन कपूर, जनरल मैनेजर श्री सोहन लाल आदि उपस्थित थे।
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प्रिलिम्स के लियेः
नासा, इसरो, एस बैंड रडार, GPS, सिंथेटिक एपर्चर रडार।
मेन्स के लियेः
NISAR मिशन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियाँ।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) ने NISAR (NASA-ISRO सिंथेटिक एपर्चर रडार) को रवाना किये जाने के संबंध में एक कार्यक्रम आयोजित किया।
- दो अलग-अलग रडार फ्रीक्वेंसी (L-बैंड और S-बैंड) का उपयोग करते हुए NISAR अंतरिक्ष में पृथ्वी को व्यवस्थित रूप से स्कैन करने वाला अपनी तरह का पहला रडार होगा। यह हमारे ग्रह की सतह पर होने वाले एक सेंटीमीटर से कम तक के परिवर्तनों को भी मापेगा।
NISAR मिशनः
- परिचयः
- NISAR को वर्ष 2014 में हस्ताक्षरित एक साझेदारी समझौते के तहत अमेरिका और भारत की अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा तैयार किया गया है।
- उम्मीद है कि इसे जनवरी 2024 में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से निकट-ध्रुवीय कक्षा में लॉन्च किया जाएगा।
- यह उपग्रह कम-से-कम तीन वर्ष तक काम करेगा।
- यह एक निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit -LEO) वेधशाला है।
- यह 12 दिन में पूरे विश्व का मानचित्रण कर लेगा।
- विशेषताः
- यह 2,800 किलोग्राम का उपग्रह है जिसमें L-बैंड और S-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) उपकरण शामिल हैं, जिस कारण इसे दोहरी आवृत्ति इमेजिंग रडार उपग्रह कहा जाता है।
- नासा द्वारा डेटा स्टोर करने के लिये L-बैंड रडार, GPS, एक उच्च क्षमता वाला सॉलिड-स्टेट रिकॉर्डर और एक पेलोड डेटा सब-सिस्टम प्रदान किया गया है, जबकि ISRO ने S-बैंड रडार, जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) प्रक्षेपण प्रणाली तथा अंतरिक्ष यान प्रदान किया है।
- S-बैंड रडार 8-15 सेंटीमीटर की तरंगदैर्ध्य (Wavelength) और 2-4 गीगाहर्ट्ज़ की आवृत्ति (frequency) पर काम करते हैं। इस तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति के कारण वे आसानी से क्षीण नहीं होते हैं। यह उन्हें निकट एवं दूर के मौसम अवलोकन के लिये उपयोगी बनाता है।
- इसमें 39 फुट का स्थिर एंटीना रिफ्लेक्टर लगा हुआ है, जो सोने की परत वाले तार की जाली से बना है; रिफ्लेक्टर का उपयोग "उपकरण संरचना पर ऊपर की ओर फीड द्वारा उत्सर्जित और प्राप्त रडार सिग्नल" पर केंद्रित करने के लिये किया जाएगा।
- SAR का उपयोग करके NISAR उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली छवियाँ प्रस्तुत करेगा। बादलों का SAR पर कुछ विशेष प्रभाव नहीं पड़ता, ये मौसम की स्थिति की परवाह किये बिना दिन और रात डेटा एकत्र कर सकते हैं।
- नासा को अपने विज्ञान संबंधी वैश्विक संचालन के लिये कम-से-कम तीन वर्षों के लिये L-बैंड रडार की आवश्यकता है। इस बीच इसरो कम-से-कम पाँच वर्षों के लिये S-बैंड रडार का उपयोग करेगा।
NISAR के अपेक्षित लाभः
- पृथ्वी विज्ञानः NISAR पृथ्वी की सतह में परिवर्तन, प्राकृतिक खतरों और पारिस्थितिकी तंत्र की विकृति के बारे में डेटा एवं जानकारी प्रदान करेगा, जिससे पृथ्वी प्रणाली प्रक्रियाओं तथा जलवायु परिवर्तन की हमारी समझ को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- आपदा प्रबंधनः मिशन तेज़ी से प्रतिक्रिया समय और बेहतर जोखिम आकलन कर भूकंप, सूनामी एवं ज्वालामुखी विस्फोट जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में मदद के लिये महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा।
- कृषिः NISAR डेटा का उपयोग फसल वृद्धि, मृदा की नमी और भूमि उपयोग में बदलाव के बारे में जानकारी प्रदान करके कृषि प्रबंधन एवं खाद्य सुरक्षा में सुधार हेतु किया जाएगा।
- इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंगः मिशन इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और प्रबंधन हेतु डेटा मुहैया कराएगा, जैसे- तेल रिसाव, शहरीकरण एवं वनों की कटाई की निगरानी।
- जलवायु परिवर्तनः NISAR पिघलते ग्लेशियरों, समुद्र के स्तर में वृद्धि और कार्बन भंडारण में परिवर्तन सहित पृथ्वी की सतह पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की निगरानी एवं समझने में मदद करेगा।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्नः
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः (2016)
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तरः (c)
प्रश्न. भारत की अपना स्वयं का अंतरिक्ष केंद्र प्राप्त करने की क्या योजना है और यह हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम को किस तरह लाभ पहुँचाएगी? (मुख्य परीक्षा, 2019)
प्रश्नः अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों की चर्चा कीजिये। इस प्रौद्योगिकी का प्रयोग भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में किस प्रकार सहायक हुआ है? (मुख्य परीक्षा, 2016)
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प्रिलिम्स के लियेः नासा, इसरो, एस बैंड रडार, GPS, सिंथेटिक एपर्चर रडार। मेन्स के लियेः NISAR मिशन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियाँ। चर्चा में क्यों? हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी ने NISAR को रवाना किये जाने के संबंध में एक कार्यक्रम आयोजित किया। - दो अलग-अलग रडार फ्रीक्वेंसी का उपयोग करते हुए NISAR अंतरिक्ष में पृथ्वी को व्यवस्थित रूप से स्कैन करने वाला अपनी तरह का पहला रडार होगा। यह हमारे ग्रह की सतह पर होने वाले एक सेंटीमीटर से कम तक के परिवर्तनों को भी मापेगा। NISAR मिशनः - परिचयः - NISAR को वर्ष दो हज़ार चौदह में हस्ताक्षरित एक साझेदारी समझौते के तहत अमेरिका और भारत की अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा तैयार किया गया है। - उम्मीद है कि इसे जनवरी दो हज़ार चौबीस में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से निकट-ध्रुवीय कक्षा में लॉन्च किया जाएगा। - यह उपग्रह कम-से-कम तीन वर्ष तक काम करेगा। - यह एक निम्न पृथ्वी कक्षा वेधशाला है। - यह बारह दिन में पूरे विश्व का मानचित्रण कर लेगा। - विशेषताः - यह दो,आठ सौ किलोग्रामग्राम का उपग्रह है जिसमें L-बैंड और S-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार उपकरण शामिल हैं, जिस कारण इसे दोहरी आवृत्ति इमेजिंग रडार उपग्रह कहा जाता है। - नासा द्वारा डेटा स्टोर करने के लिये L-बैंड रडार, GPS, एक उच्च क्षमता वाला सॉलिड-स्टेट रिकॉर्डर और एक पेलोड डेटा सब-सिस्टम प्रदान किया गया है, जबकि ISRO ने S-बैंड रडार, जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल प्रक्षेपण प्रणाली तथा अंतरिक्ष यान प्रदान किया है। - S-बैंड रडार आठ-पंद्रह सेंटीमीटर की तरंगदैर्ध्य और दो-चार गीगाहर्ट्ज़ की आवृत्ति पर काम करते हैं। इस तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति के कारण वे आसानी से क्षीण नहीं होते हैं। यह उन्हें निकट एवं दूर के मौसम अवलोकन के लिये उपयोगी बनाता है। - इसमें उनतालीस फुट का स्थिर एंटीना रिफ्लेक्टर लगा हुआ है, जो सोने की परत वाले तार की जाली से बना है; रिफ्लेक्टर का उपयोग "उपकरण संरचना पर ऊपर की ओर फीड द्वारा उत्सर्जित और प्राप्त रडार सिग्नल" पर केंद्रित करने के लिये किया जाएगा। - SAR का उपयोग करके NISAR उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली छवियाँ प्रस्तुत करेगा। बादलों का SAR पर कुछ विशेष प्रभाव नहीं पड़ता, ये मौसम की स्थिति की परवाह किये बिना दिन और रात डेटा एकत्र कर सकते हैं। - नासा को अपने विज्ञान संबंधी वैश्विक संचालन के लिये कम-से-कम तीन वर्षों के लिये L-बैंड रडार की आवश्यकता है। इस बीच इसरो कम-से-कम पाँच वर्षों के लिये S-बैंड रडार का उपयोग करेगा। NISAR के अपेक्षित लाभः - पृथ्वी विज्ञानः NISAR पृथ्वी की सतह में परिवर्तन, प्राकृतिक खतरों और पारिस्थितिकी तंत्र की विकृति के बारे में डेटा एवं जानकारी प्रदान करेगा, जिससे पृथ्वी प्रणाली प्रक्रियाओं तथा जलवायु परिवर्तन की हमारी समझ को बढ़ाने में मदद मिलेगी। - आपदा प्रबंधनः मिशन तेज़ी से प्रतिक्रिया समय और बेहतर जोखिम आकलन कर भूकंप, सूनामी एवं ज्वालामुखी विस्फोट जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में मदद के लिये महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा। - कृषिः NISAR डेटा का उपयोग फसल वृद्धि, मृदा की नमी और भूमि उपयोग में बदलाव के बारे में जानकारी प्रदान करके कृषि प्रबंधन एवं खाद्य सुरक्षा में सुधार हेतु किया जाएगा। - इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंगः मिशन इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और प्रबंधन हेतु डेटा मुहैया कराएगा, जैसे- तेल रिसाव, शहरीकरण एवं वनों की कटाई की निगरानी। - जलवायु परिवर्तनः NISAR पिघलते ग्लेशियरों, समुद्र के स्तर में वृद्धि और कार्बन भंडारण में परिवर्तन सहित पृथ्वी की सतह पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की निगरानी एवं समझने में मदद करेगा। UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्नः प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? उत्तरः प्रश्न. भारत की अपना स्वयं का अंतरिक्ष केंद्र प्राप्त करने की क्या योजना है और यह हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम को किस तरह लाभ पहुँचाएगी? प्रश्नः अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों की चर्चा कीजिये। इस प्रौद्योगिकी का प्रयोग भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में किस प्रकार सहायक हुआ है?
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'कोविड-19 वैक्सीन दोनों के लिए सुरक्षित है'
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टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के कोविड-19 वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. एन. के. अरोड़ा ने आज स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गर्भवती महिलाओं के लिए जारी टीकाकरण दिशानिर्देशों पर डीडी न्यूज से बात की।
डॉ. एन. के. अरोड़ा ने बताया कि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान गर्भवती महिलाओं की मृत्युदर में वृद्धि के कारण यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा, 'दूसरी लहर के दौरान यह देखा गया कि कोविड-19 से संक्रमित गर्भवती महिलाओं की मृत्युदर में पहली लहर की तुलना में दो से तीन गुना वृद्धि हुई है। ऐसी स्थिति में, यह महसूस किया गया कि गर्भवती महिलाओं को भी कोविड-19 वैक्सीन का टीका लगना चाहिए। गर्भवती महिलाओं के मामले में, दो जिंदगियों की सुरक्षा शामिल है- मां और उसके गर्भ में पल रह शिशु। इसीलिए, देश ने गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करने का फैसला किया है।'
उन्होंने कहा कि इस टीके से माताओं को अधिक लाभ होगा। वे कोरोनावायरस संबंधी चिंता और डर से मुक्त रहेंगी। उन्होंने कहा, 'गर्भवती मां के टीकाकरण से मां के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी बचाया जा सकता है। अगर मां के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है तो यह बच्चे में भी चली जाएगी। वैक्सीन और मां के शरीर में विकसित रोग प्रतिरोधक क्षमता का असर बच्चे में कम से कम जन्म के समय तक बना रहेगा।'
गर्भवती महिलाओं के लिए टीके कितने सुरक्षित होंगे?इस पर एक सवाल के जवाब में डॉ. अरोड़ा ने कहा कि पूरी दुनिया अब सोच रही है कि माताओं को भी टीका लगाया जाना चाहिए क्योंकि इससे न केवल मां के शरीर में बल्कि बच्चे के लिए भी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी।' उन्होंने कहा, 'कुल मिलाकर, हमारे टीके सुरक्षित पाए गए हैं। यहां तक कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों में जहां एमआरएनए टीके दिए जा रहे हैं, गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जा रहा है। इन तथ्यों और आंकड़ों को देखते हुए, हमारे देश में गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करने का निर्णय लिया गया है।'
कुछ लोग पहले तीन महीनों में गर्भवती मां को टीका लगाने पर संदेह और भय व्यक्त कर रहे हैं क्योंकि इस अवधि में बच्चे के अंग विकसित होने शुरू होते हैं। इन शंकाओं को दूर करते हुए, डॉ. अरोड़ा ने मां के साथ-साथ बच्चे के लिए भी वैक्सीन की सुरक्षा का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, 'मैं इन आशंकाओं को दूर करना चाहता हूं और लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारे टीकों में कोई जीवित वायरस नहीं है जो संक्रमण का कारण बन सकता है। इस प्रकार से, ऐसा नहीं लगता है कि मां के गर्भ में पल रहे शिशु पर टीके का कोई बुरा प्रभाव पड़ेगा।'
उन्होंने आगे कहा कि टीके लगवाने वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानीकी जाएगी जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा, 'सभी गर्भवती महिलाओं को जिन्हें देशभर में टीका लगाया जाएगा, किसी भी तरह की असुविधा के लक्षणों की निगरानी के लिए एक नेटवर्क के माध्यम से देखरेख की जाएगी। मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर भी नजर रखी जाएगी। यह हमें आश्वस्त करेगा कि टीकाकरण के बाद हमारी माताएं, बहनें और बेटियां पूरी तरह सुरक्षित रहें।'
टीकाकरण के बाद गर्भवती महिलाओं को होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में बात करते हुए डॉ. अरोड़ा ने कहा, '10 लाख में से एक महिला में रक्तस्राव और थक्के बनने का मामला सामने आया है। जो लक्षण प्रकट होते हैं उनमें गंभीर सिरदर्द, सिरदर्द के साथ उल्टी, उल्टी के साथ पेट में दर्द या सांस लेने में भी समस्या हो सकती है। कुल मिलाकर, इस तरह के तीन या चार लक्षण हो सकते हैं और सामान्य तौर पर यह टीकाकरण के बाद तीन से चार सप्ताह की अवधि के भीतर होता है। ऐसे मामलों में, परिवार के सदस्यों को गर्भवती महिला को जल्दी से अस्पताल ले जाना चाहिए जहां टीकाकरण किया गया है। अस्पताल में बीमारी के कारणों की जांच की जा सकती है और उसे आवश्यक उपचार मुहैया कराया जा सकता है।'
गर्भवती महिलाएं वैक्सीन की खुराक कब ले सकती हैं?
चेयरपर्सन ने कहा, 'गर्भवती महिलाएं किसी भी समय टीका ले सकती हैं। लिए गए फैसले के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था का पता लगने के बाद कोविड-19 वैक्सीन किसी भी समय दी जा सकती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वैक्सीन पहली, दूसरी या तीसरी तिमाही में दी जा रही है।'
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'कोविड-उन्नीस वैक्सीन दोनों के लिए सुरक्षित है' Posted On: टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के कोविड-उन्नीस वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. एन. के. अरोड़ा ने आज स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गर्भवती महिलाओं के लिए जारी टीकाकरण दिशानिर्देशों पर डीडी न्यूज से बात की। डॉ. एन. के. अरोड़ा ने बताया कि कोविड-उन्नीस की दूसरी लहर के दौरान गर्भवती महिलाओं की मृत्युदर में वृद्धि के कारण यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा, 'दूसरी लहर के दौरान यह देखा गया कि कोविड-उन्नीस से संक्रमित गर्भवती महिलाओं की मृत्युदर में पहली लहर की तुलना में दो से तीन गुना वृद्धि हुई है। ऐसी स्थिति में, यह महसूस किया गया कि गर्भवती महिलाओं को भी कोविड-उन्नीस वैक्सीन का टीका लगना चाहिए। गर्भवती महिलाओं के मामले में, दो जिंदगियों की सुरक्षा शामिल है- मां और उसके गर्भ में पल रह शिशु। इसीलिए, देश ने गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करने का फैसला किया है।' उन्होंने कहा कि इस टीके से माताओं को अधिक लाभ होगा। वे कोरोनावायरस संबंधी चिंता और डर से मुक्त रहेंगी। उन्होंने कहा, 'गर्भवती मां के टीकाकरण से मां के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी बचाया जा सकता है। अगर मां के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है तो यह बच्चे में भी चली जाएगी। वैक्सीन और मां के शरीर में विकसित रोग प्रतिरोधक क्षमता का असर बच्चे में कम से कम जन्म के समय तक बना रहेगा।' गर्भवती महिलाओं के लिए टीके कितने सुरक्षित होंगे?इस पर एक सवाल के जवाब में डॉ. अरोड़ा ने कहा कि पूरी दुनिया अब सोच रही है कि माताओं को भी टीका लगाया जाना चाहिए क्योंकि इससे न केवल मां के शरीर में बल्कि बच्चे के लिए भी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी।' उन्होंने कहा, 'कुल मिलाकर, हमारे टीके सुरक्षित पाए गए हैं। यहां तक कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों में जहां एमआरएनए टीके दिए जा रहे हैं, गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जा रहा है। इन तथ्यों और आंकड़ों को देखते हुए, हमारे देश में गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करने का निर्णय लिया गया है।' कुछ लोग पहले तीन महीनों में गर्भवती मां को टीका लगाने पर संदेह और भय व्यक्त कर रहे हैं क्योंकि इस अवधि में बच्चे के अंग विकसित होने शुरू होते हैं। इन शंकाओं को दूर करते हुए, डॉ. अरोड़ा ने मां के साथ-साथ बच्चे के लिए भी वैक्सीन की सुरक्षा का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, 'मैं इन आशंकाओं को दूर करना चाहता हूं और लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारे टीकों में कोई जीवित वायरस नहीं है जो संक्रमण का कारण बन सकता है। इस प्रकार से, ऐसा नहीं लगता है कि मां के गर्भ में पल रहे शिशु पर टीके का कोई बुरा प्रभाव पड़ेगा।' उन्होंने आगे कहा कि टीके लगवाने वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानीकी जाएगी जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा, 'सभी गर्भवती महिलाओं को जिन्हें देशभर में टीका लगाया जाएगा, किसी भी तरह की असुविधा के लक्षणों की निगरानी के लिए एक नेटवर्क के माध्यम से देखरेख की जाएगी। मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर भी नजर रखी जाएगी। यह हमें आश्वस्त करेगा कि टीकाकरण के बाद हमारी माताएं, बहनें और बेटियां पूरी तरह सुरक्षित रहें।' टीकाकरण के बाद गर्भवती महिलाओं को होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में बात करते हुए डॉ. अरोड़ा ने कहा, 'दस लाख में से एक महिला में रक्तस्राव और थक्के बनने का मामला सामने आया है। जो लक्षण प्रकट होते हैं उनमें गंभीर सिरदर्द, सिरदर्द के साथ उल्टी, उल्टी के साथ पेट में दर्द या सांस लेने में भी समस्या हो सकती है। कुल मिलाकर, इस तरह के तीन या चार लक्षण हो सकते हैं और सामान्य तौर पर यह टीकाकरण के बाद तीन से चार सप्ताह की अवधि के भीतर होता है। ऐसे मामलों में, परिवार के सदस्यों को गर्भवती महिला को जल्दी से अस्पताल ले जाना चाहिए जहां टीकाकरण किया गया है। अस्पताल में बीमारी के कारणों की जांच की जा सकती है और उसे आवश्यक उपचार मुहैया कराया जा सकता है।' गर्भवती महिलाएं वैक्सीन की खुराक कब ले सकती हैं? चेयरपर्सन ने कहा, 'गर्भवती महिलाएं किसी भी समय टीका ले सकती हैं। लिए गए फैसले के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था का पता लगने के बाद कोविड-उन्नीस वैक्सीन किसी भी समय दी जा सकती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वैक्सीन पहली, दूसरी या तीसरी तिमाही में दी जा रही है।'
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नोएडा में लॉकडाउन के दौरान सेक्टर-16 में छत पर नमाज अदा कर रहे करीब 10 से 12 लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है।
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि पुलिस को बुधवार देर शाम को सूचना मिली कि सेक्टर-16 में एक घर के छत पर करीब 10 से 12 लोग सामाजिक दूरी बनाए बिना नमाज अदा कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
गिरफ्तार और नमाज पढ़ने वाले सभी पर आईपीसी की धारा 188, 269, 270 और महामारी अधिनियम 1897 की धाराओं और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51(b) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कोरोना महामारी के फैलने के खतरे के बीच नोएडा सेक्टर-16 के जेजे कॉलनी में 15 से 20 की संख्या में इकट्ठा होकर इन लोगों ने घर की छत पर नमाज पढ़ी थी।
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नोएडा में लॉकडाउन के दौरान सेक्टर-सोलह में छत पर नमाज अदा कर रहे करीब दस से बारह लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है। एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि पुलिस को बुधवार देर शाम को सूचना मिली कि सेक्टर-सोलह में एक घर के छत पर करीब दस से बारह लोग सामाजिक दूरी बनाए बिना नमाज अदा कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। गिरफ्तार और नमाज पढ़ने वाले सभी पर आईपीसी की धारा एक सौ अठासी, दो सौ उनहत्तर, दो सौ सत्तर और महामारी अधिनियम एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे की धाराओं और आपदा प्रबंधन अधिनियम दो हज़ार पाँच की धारा इक्यावन के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कोरोना महामारी के फैलने के खतरे के बीच नोएडा सेक्टर-सोलह के जेजे कॉलनी में पंद्रह से बीस की संख्या में इकट्ठा होकर इन लोगों ने घर की छत पर नमाज पढ़ी थी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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बेगूसराय से सूचना मिली है कि आज सुबह राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार व ब्लागर मनीष राज के पिता रविंद्र प्रसाद सिंह का शव कुरहा बाजार में पड़ा मिला. इलाकाई साहबपुर कमाल थाने के थानाध्यक्ष ने जब आसपास के लोगों से शव की पहचान कराई तो पता चला कि ये मनीष राज के पिताजी हैं. आनन फानन में घरवालों को सूचना दी गई. 45 वर्षीय रविंद्र प्रताप सिंह मानसिक रूप से इन दिनों अस्वस्थ चल रहे थे.
कई बार वे बिना बताए घर से निकल जाते थे. परिवार के लोग उन्हें खोजकर ले आते थे. इसी क्रम में मृत्यु होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. उन्हें मानसिक दिक्कत के अलावा अन्य कोई बीमारी नहीं थी. 45 वर्ष के कम उम्र में निधन से घर वालों पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा है. आज शाम परिजनों व परिचितों ने अंत्येष्टि कर दी. परिवार में दो बेटे और एक बहन हैं. मनीष राज सबसे बड़े हैं. वे भड़ास ब्लाग के शुरुआती सदस्यों में से रहे हैं. बाद में वे कोचिंग पढ़ाने फिर अखबार में पत्रकार के रूप में काम करने में जुट गए.
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बेगूसराय से सूचना मिली है कि आज सुबह राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार व ब्लागर मनीष राज के पिता रविंद्र प्रसाद सिंह का शव कुरहा बाजार में पड़ा मिला. इलाकाई साहबपुर कमाल थाने के थानाध्यक्ष ने जब आसपास के लोगों से शव की पहचान कराई तो पता चला कि ये मनीष राज के पिताजी हैं. आनन फानन में घरवालों को सूचना दी गई. पैंतालीस वर्षीय रविंद्र प्रताप सिंह मानसिक रूप से इन दिनों अस्वस्थ चल रहे थे. कई बार वे बिना बताए घर से निकल जाते थे. परिवार के लोग उन्हें खोजकर ले आते थे. इसी क्रम में मृत्यु होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. उन्हें मानसिक दिक्कत के अलावा अन्य कोई बीमारी नहीं थी. पैंतालीस वर्ष के कम उम्र में निधन से घर वालों पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा है. आज शाम परिजनों व परिचितों ने अंत्येष्टि कर दी. परिवार में दो बेटे और एक बहन हैं. मनीष राज सबसे बड़े हैं. वे भड़ास ब्लाग के शुरुआती सदस्यों में से रहे हैं. बाद में वे कोचिंग पढ़ाने फिर अखबार में पत्रकार के रूप में काम करने में जुट गए.
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"इंडिया मेडटेक एक्सपो 2023 भारत में चिकित्सा उपकरणों के पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करेगा और भारतीय मेडटेक क्षेत्र की ब्रांड के रूप में पहचान बनाएगा"
Posted On:
भारत 2050 तक चिकित्सा प्रौद्योगिकी और उपकरणों के क्षेत्र में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने के अनुमान के साथ वैश्विक केंद्र बनने के लिए पूर्ण रूप तैयार है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 'इंडिया मेडटेक एक्सपो 2023' के पूर्वावलोकन कार्यक्रम को संबंधित करते हुए दी। यह कार्यक्रम 17 से 19 अगस्त, 2023 तक गुजरात के गांधीनगर में जी-20 स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के दौरान आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में उनके साथ केन्द्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री श्री भगवंत खुबा भी थे।
डॉ. मांडविया ने कहा कि चिकित्सा उपकरण क्षेत्र देश के उभरते क्षेत्रों में प्रमुख है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देख को चिकित्सा उपकरणों का विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा, '1.5 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ हमें अगले 25 साल में भारत की बाजार हिस्सेदारी 10-12 प्रतिशत तक पहुंचने की आशा है।' उन्होंने कहा कि 'हाल ही में शुरू की गई राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023 के प्रभावी कार्यान्वयन के साथ हम 2030 तक चिकित्सा उपकरणों के विकास को वर्तमान 11 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के प्रति आश्वस्त हैं।'
डॉ. मांडविया ने कहा कि "पहले, हमने फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरणों सहित स्वास्थ्य क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों को भंडार क्षेत्र में देखा था। मोदी सरकार ने भारत के स्वास्थ्य परिदृश्य को 2047 तक बदलने का समग्र दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शुरू की गई उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना जैसी कई नई पहलों से देश में 43 महत्वपूर्ण सक्रिय दवा घटक (एपीआई) का उत्पादन किया जा रहा है। पहले इसका विदेशों से आयात किया जाता था। सरकार इस क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश में थोक दवा पार्क और चिकित्सा उपकरण पार्क भी बना रही है।
डॉ. मांडविया ने कहा कि मेडटेक एक्सपो 2023 चिकित्सा और शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं, दवाओं, उपकरणों और सुविधाओं में भारत के नवाचारों और उपलब्धियों को प्रदर्शित करेगा। उन्होंने बताया कि इस आयोजन से भारत के चिकित्सा उपकरणों के पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में विश्व के अन्य देशों को भी जानकारी मिलेगी और यह एक ब्रांड पहचान कायम कर सकेगा।
केन्द्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री श्री भगवंत खुबा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार, स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उद्योगों और मीडिया कर्मियों सहित सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे एक्सपो का दौरा करें और इस क्षेत्र में आ रहे परिवर्तन के साक्षी बनें।
फार्मास्युटिकल्स विभाग की सचिव श्रीमती एस अपर्णा ने कहा, "चिकित्सा उपकरण क्षेत्र आज सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण के लिए उद्योग को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इससे 37 अद्वितीय उत्पाद अब देश में ही निर्मित किये जा रहे हैं, ये पहले आयात किये जाते थे।
श्रीमती एस अपर्णा ने यह भी कहा कि ये नीतिगत हस्तक्षेप चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण और मांग दोनों पक्ष को पूरा करने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि चिकित्सा उपकरणों के निर्माण के लिए देश भर में चार नए औद्योगिक पार्कों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा उपकरणों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण निर्यात संवर्धन परिषद की भी स्थापना की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि एक्सपो में भविष्य मंडप और एक अनुसंधान एवं विकास मंडप होगा और इसमें राज्यों, उद्योगों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, शिक्षाविदों और अन्वेषकों की भागीदारी होगी।
इस क्षेत्र की पर्याप्त क्षमता का उपयोग करने और भविष्य के मार्ग पर मंथन करने के लिए सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय का फार्मास्यूटिकल्स विभाग 'भारतः 'उपकरण, निदान और डिजिटल का अगला मेडटेक वैश्विक हब' विषय के साथ 'इंडिया मेडटेक एक्सपो' की मेजबानी कर रहा है।
एक्सपो में फ्यूचर पवेलियन, अनुसंधान और विकास पवेलियन, स्टार्ट-अप पवेलियन, राज्य पैवेलियन, नियामक पवेलियन और मेक इन इंडिया शोकेस सहित विभिन्न मंडप होंगे। इसमें 150 से अधिक लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम (एमएसएमई) उद्योग और अंतर्राष्ट्रीय विनिर्माताओं, स्टार्ट-अप, नियामक एजेंसियां, राज्य सरकारों और केंद्रीय विभागों सहित 400 से अधिक भागीदार हिस्सा ले रहे हैं।
एक्सपो के दौरान 7 राज्य - मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात मंडप स्थापित कर रहे हैं। इसमें एक्सपो में नवाचार और अनुसंधान और विकास का परिदृश्य दिखाने के लिए मंडप लगाए जायेंगे, इनमें 30 से अधिक कंपनियां नए अनुसंधान और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगी। स्टार्ट-अप के लिए एक अलग मंडप भी होगा और इसमें 75 स्टार्ट-अप भाग ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त फार्मास्यूटिकल्स विभाग, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी), केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ), राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) और राष्ट्रीय मानक संगठन (बीआईएस) सहित चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के लिए 7 नियामक एजेंसियां इसमें भाग ले रही हैं।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विषयगत सम्मेलन सत्र आयोजित किए जाएंगे, इनका उद्देश्य ज्ञान की असीम संभावनाओं का पता लगाना, नवाचारों को प्रेरित करना और विभिन्न देशों की प्रतिभाओं के बीच संबंध ज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में संबंध स्थापित करना है। ये सत्र वर्ष 2047 के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के उद्देश्य को देखते हुए बनाए गए हैं, एक ऐसा दृष्टिकोण है, जो मेडटेक क्षेत्र के लिए भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक है, जो न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करेगा।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य है :
चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में नवीनतम प्रगति, चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के व्यवसायियों, विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों को एक मंच पर लाना।
प्रसिद्ध उद्योगपति और विशेषज्ञ चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में वर्तमान रुझानों और संभावनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करते हुए अपनी अंतर्दृष्टि और अनुभव साझा करेंगे।
सफल उत्पाद विकास और बाजार पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नवीनतम नियामक दिशानिर्देशों और अनुपालन आवश्यकताओं पर उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं के बीच चर्चा की जाएगी।
चिकित्सा उपकरण विकास, विनियमन और कार्यान्वयन में चुनौतियों और अवसरों के बारे में उद्योग विशेषज्ञों, नियामकों और स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सकों के साथ चर्चा।
मुख्य रूप से 5 प्रमुख क्षेत्रों अफ्रीका, आसियान, कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (सीआईएस), मध्य पूर्व और ओशिनिया के 50 देशों के कुल 231 विदेशी खरीदार अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता बैठक में भाग लेंगे। प्रोफ़ाइल के आधार पर, इन खरीदारों को मुख्य रूप से चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता हैः
इस अवसर रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में संयुक्त सचिव (नीति) श्री रविन्द्र प्रताप सिंह, फिक्की के महासचिव श्री शैलेश के पाठक, उप महासचिव श्री मनाब मजूमदार सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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"इंडिया मेडटेक एक्सपो दो हज़ार तेईस भारत में चिकित्सा उपकरणों के पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करेगा और भारतीय मेडटेक क्षेत्र की ब्रांड के रूप में पहचान बनाएगा" Posted On: भारत दो हज़ार पचास तक चिकित्सा प्रौद्योगिकी और उपकरणों के क्षेत्र में पचास बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने के अनुमान के साथ वैश्विक केंद्र बनने के लिए पूर्ण रूप तैयार है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 'इंडिया मेडटेक एक्सपो दो हज़ार तेईस' के पूर्वावलोकन कार्यक्रम को संबंधित करते हुए दी। यह कार्यक्रम सत्रह से उन्नीस अगस्त, दो हज़ार तेईस तक गुजरात के गांधीनगर में जी-बीस स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के दौरान आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में उनके साथ केन्द्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री श्री भगवंत खुबा भी थे। डॉ. मांडविया ने कहा कि चिकित्सा उपकरण क्षेत्र देश के उभरते क्षेत्रों में प्रमुख है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देख को चिकित्सा उपकरणों का विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा, 'एक.पाँच प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ हमें अगले पच्चीस साल में भारत की बाजार हिस्सेदारी दस-बारह प्रतिशत तक पहुंचने की आशा है।' उन्होंने कहा कि 'हाल ही में शुरू की गई राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति दो हज़ार तेईस के प्रभावी कार्यान्वयन के साथ हम दो हज़ार तीस तक चिकित्सा उपकरणों के विकास को वर्तमान ग्यारह बिलियन डॉलर से बढ़ाकर पचास बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के प्रति आश्वस्त हैं।' डॉ. मांडविया ने कहा कि "पहले, हमने फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरणों सहित स्वास्थ्य क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों को भंडार क्षेत्र में देखा था। मोदी सरकार ने भारत के स्वास्थ्य परिदृश्य को दो हज़ार सैंतालीस तक बदलने का समग्र दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शुरू की गई उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना जैसी कई नई पहलों से देश में तैंतालीस महत्वपूर्ण सक्रिय दवा घटक का उत्पादन किया जा रहा है। पहले इसका विदेशों से आयात किया जाता था। सरकार इस क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश में थोक दवा पार्क और चिकित्सा उपकरण पार्क भी बना रही है। डॉ. मांडविया ने कहा कि मेडटेक एक्सपो दो हज़ार तेईस चिकित्सा और शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं, दवाओं, उपकरणों और सुविधाओं में भारत के नवाचारों और उपलब्धियों को प्रदर्शित करेगा। उन्होंने बताया कि इस आयोजन से भारत के चिकित्सा उपकरणों के पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में विश्व के अन्य देशों को भी जानकारी मिलेगी और यह एक ब्रांड पहचान कायम कर सकेगा। केन्द्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री श्री भगवंत खुबा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार, स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उद्योगों और मीडिया कर्मियों सहित सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे एक्सपो का दौरा करें और इस क्षेत्र में आ रहे परिवर्तन के साक्षी बनें। फार्मास्युटिकल्स विभाग की सचिव श्रीमती एस अपर्णा ने कहा, "चिकित्सा उपकरण क्षेत्र आज सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण के लिए उद्योग को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इससे सैंतीस अद्वितीय उत्पाद अब देश में ही निर्मित किये जा रहे हैं, ये पहले आयात किये जाते थे। श्रीमती एस अपर्णा ने यह भी कहा कि ये नीतिगत हस्तक्षेप चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण और मांग दोनों पक्ष को पूरा करने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि चिकित्सा उपकरणों के निर्माण के लिए देश भर में चार नए औद्योगिक पार्कों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा उपकरणों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण निर्यात संवर्धन परिषद की भी स्थापना की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि एक्सपो में भविष्य मंडप और एक अनुसंधान एवं विकास मंडप होगा और इसमें राज्यों, उद्योगों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, शिक्षाविदों और अन्वेषकों की भागीदारी होगी। इस क्षेत्र की पर्याप्त क्षमता का उपयोग करने और भविष्य के मार्ग पर मंथन करने के लिए सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय का फार्मास्यूटिकल्स विभाग 'भारतः 'उपकरण, निदान और डिजिटल का अगला मेडटेक वैश्विक हब' विषय के साथ 'इंडिया मेडटेक एक्सपो' की मेजबानी कर रहा है। एक्सपो में फ्यूचर पवेलियन, अनुसंधान और विकास पवेलियन, स्टार्ट-अप पवेलियन, राज्य पैवेलियन, नियामक पवेलियन और मेक इन इंडिया शोकेस सहित विभिन्न मंडप होंगे। इसमें एक सौ पचास से अधिक लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग और अंतर्राष्ट्रीय विनिर्माताओं, स्टार्ट-अप, नियामक एजेंसियां, राज्य सरकारों और केंद्रीय विभागों सहित चार सौ से अधिक भागीदार हिस्सा ले रहे हैं। एक्सपो के दौरान सात राज्य - मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात मंडप स्थापित कर रहे हैं। इसमें एक्सपो में नवाचार और अनुसंधान और विकास का परिदृश्य दिखाने के लिए मंडप लगाए जायेंगे, इनमें तीस से अधिक कंपनियां नए अनुसंधान और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगी। स्टार्ट-अप के लिए एक अलग मंडप भी होगा और इसमें पचहत्तर स्टार्ट-अप भाग ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त फार्मास्यूटिकल्स विभाग, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस , भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद , भारतीय फार्माकोपिया आयोग , केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन , राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण और राष्ट्रीय मानक संगठन सहित चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के लिए सात नियामक एजेंसियां इसमें भाग ले रही हैं। तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विषयगत सम्मेलन सत्र आयोजित किए जाएंगे, इनका उद्देश्य ज्ञान की असीम संभावनाओं का पता लगाना, नवाचारों को प्रेरित करना और विभिन्न देशों की प्रतिभाओं के बीच संबंध ज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में संबंध स्थापित करना है। ये सत्र वर्ष दो हज़ार सैंतालीस के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के उद्देश्य को देखते हुए बनाए गए हैं, एक ऐसा दृष्टिकोण है, जो मेडटेक क्षेत्र के लिए भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक है, जो न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य है : चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में नवीनतम प्रगति, चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के व्यवसायियों, विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों को एक मंच पर लाना। प्रसिद्ध उद्योगपति और विशेषज्ञ चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में वर्तमान रुझानों और संभावनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करते हुए अपनी अंतर्दृष्टि और अनुभव साझा करेंगे। सफल उत्पाद विकास और बाजार पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नवीनतम नियामक दिशानिर्देशों और अनुपालन आवश्यकताओं पर उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं के बीच चर्चा की जाएगी। चिकित्सा उपकरण विकास, विनियमन और कार्यान्वयन में चुनौतियों और अवसरों के बारे में उद्योग विशेषज्ञों, नियामकों और स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सकों के साथ चर्चा। मुख्य रूप से पाँच प्रमुख क्षेत्रों अफ्रीका, आसियान, कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स , मध्य पूर्व और ओशिनिया के पचास देशों के कुल दो सौ इकतीस विदेशी खरीदार अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता बैठक में भाग लेंगे। प्रोफ़ाइल के आधार पर, इन खरीदारों को मुख्य रूप से चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता हैः इस अवसर रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री रविन्द्र प्रताप सिंह, फिक्की के महासचिव श्री शैलेश के पाठक, उप महासचिव श्री मनाब मजूमदार सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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सूचित होता है जिसके आदि, मध्य, तथा अन्त में बुद्धि की आवश्यकता है। किसी वस्तु में ऐसा स्वभाव नहीं पाया जाता कि परिवर्तनों का अन्त ही न हो । प्रत्येक वस्तु में परिवर्त्तन उसकी बनावट के अनुसार होता है। डाक्टर हक्सले के कथनानुसार 'इल में ऐसा परिवर्त्तन कभी नहीं होता कि उसके पर निकल आवें और न चिड़ियों में ऐसा परिवर्त्तन होता है कि उनमें हल की हड्डी चन सकें' । नियत परिवर्त्तन से स्पष्टतया प्रयोजन सूचित होता है । यदि कोई मनुष्य ऐसी घूमती हुई नलिका बना सके जो आगे चल कर घड़ी के रूप में विकसित हो सके तो इन दोनों वस्तुओं को एक साथ बनाने के लिये उसकी बुद्धि की उतनी ही प्रशंसा करनी पड़ेगी जितनी अलग अलग नलिका और घड़ी बनाने के लिये । डार्विन के अनुयायियों के मतानुसार परिवर्तन एक निश्चित मार्ग में हुआ है इससे विरुद्ध नहीं। यह आगे को ही चलता है पीछे को नहीं। इससे उन्नति ही होती है अवनति नहीं। क्यों ? केवल इसीलिये कि चीज़ों की मिलावट इस बुद्धिमता के साथ की गई हैं कि उससे नियत परिणाम निकल सके ।"
उत्पत्ति के नियम को लीजिये जिसके कारण अस्तित्व के लिये युद्ध करना पड़ता है। क्या इस नियम से यह
‡"Again, there is a law of overproduction, we are told, which gives rise to a struggle for existence. Well, is this law not a means to an end worthy of Divine Wisdom ? In it we find the reason why the world is so wonderfully rich in the most varied forms of life. What is called overproduction. is a productivity which is in excess of the means of subsistence provided for the species itself; but no species exists merely for itself. The ratio of the production of life is probably none too high for
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सूचित होता है जिसके आदि, मध्य, तथा अन्त में बुद्धि की आवश्यकता है। किसी वस्तु में ऐसा स्वभाव नहीं पाया जाता कि परिवर्तनों का अन्त ही न हो । प्रत्येक वस्तु में परिवर्त्तन उसकी बनावट के अनुसार होता है। डाक्टर हक्सले के कथनानुसार 'इल में ऐसा परिवर्त्तन कभी नहीं होता कि उसके पर निकल आवें और न चिड़ियों में ऐसा परिवर्त्तन होता है कि उनमें हल की हड्डी चन सकें' । नियत परिवर्त्तन से स्पष्टतया प्रयोजन सूचित होता है । यदि कोई मनुष्य ऐसी घूमती हुई नलिका बना सके जो आगे चल कर घड़ी के रूप में विकसित हो सके तो इन दोनों वस्तुओं को एक साथ बनाने के लिये उसकी बुद्धि की उतनी ही प्रशंसा करनी पड़ेगी जितनी अलग अलग नलिका और घड़ी बनाने के लिये । डार्विन के अनुयायियों के मतानुसार परिवर्तन एक निश्चित मार्ग में हुआ है इससे विरुद्ध नहीं। यह आगे को ही चलता है पीछे को नहीं। इससे उन्नति ही होती है अवनति नहीं। क्यों ? केवल इसीलिये कि चीज़ों की मिलावट इस बुद्धिमता के साथ की गई हैं कि उससे नियत परिणाम निकल सके ।" उत्पत्ति के नियम को लीजिये जिसके कारण अस्तित्व के लिये युद्ध करना पड़ता है। क्या इस नियम से यह ‡"Again, there is a law of overproduction, we are told, which gives rise to a struggle for existence. Well, is this law not a means to an end worthy of Divine Wisdom ? In it we find the reason why the world is so wonderfully rich in the most varied forms of life. What is called overproduction. is a productivity which is in excess of the means of subsistence provided for the species itself; but no species exists merely for itself. The ratio of the production of life is probably none too high for
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जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने उसका ढोगल ख्पोता, हाथ में लपेट लिया।
"बहन जी छोड़ दीजिए." सज्जन ने आकर विनती की।
मैंने कहा छोडूँगी तब जब 5100सौ लूँगी। दीपिकामाई ने ताली बजाई। लग रहा था जैसे वह एक्ंिटग नहीं नेचुरल में बधाई ले रही हैं।
इसी बीच ज्ञानदीप का सेलफोन बजा। उसने उठकर हैलो कहा और सारी बात सुनने के बाद उसने आँधे घँटें में पहुँचने को कहा। सेलफोन रखते ही ज्ञानदीप ने डायरी के पन्ने निकालकर दीपिकामाई को दिए।
ज्ञानदीप चरण-स्पर्श करके चला आया था।
ज्ञानदीप उसी रात लिखने बैठ गया। लगभग छः महीने की कड़ी मेहनत के बाद उसने आधा आदमी उपन्यास मुकम्मल किया। और उसे प्रकाशिन होने के लिए प्रकाशक के पास भेज दिया।
एक महीने में दीपिकामाई की जैसे काया ही बदल गई थी। दिन पर दिन उनका स्वास्थ्य गिरता जा रहा था। डाॅक्टर के अनुसार उनका शुगर लेबल बढ़ा हुआ था। एक-एक करके सारे चेले उन्हें छोड़कर चली गई थी। ड्राइवर और इसराइल का भी कुछ अता-पता नहीं था। दीपिकामाई को उठने-बैठने में काफी दिक्कत हो रही थी।
कहते हैं वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता। कभी यहाँ महफिल सजती थी आज यहाँ वीरान हैं। जितने भी उनके संगी-साथी थे सभी ने, यहाँ तक आस-पड़ोस के लोगों ने भी उनसे मिलना-जुलना बंद कर दिया था।
समाज की इस बेरूखी ने उनके अंदर जीने की ललक ही खत्म कर दी थी। हद तो तब हो गई जब उनका एक-एक सामान उनके चेले और संगी-साथी उठा ले गई। यहाँ तक उनका सेलफोन तक नहीं बख़्शा। भगवान इतने बुरे दिन किसी को न दिखाये। दूसरों का पेट भरने वाली दीपिकामाई आज स्वयं एक-एक दाने को तरस रही थी।
ज्ञानदीप ट्यूशन पढ़ाकर जब रात को घर लौटा तभी उसे पड़ोसी से एक लिफाफा मिला। उसने खोलकर देखा तो उसमे एक किताब थी। आधा आदमी को देखकर वह खुशी से फूला नहीं समाया। पहले उसने किताब को माथे से लगाकर ईश्वर का शुक्रिया अदा किया। फिर उसने सेलफोन उठाकर दीपिकामाई को काँल किया। पर जवाब न मिलने के कारण उसने झल्लाकर सेलफोन रख दिया।
अब वह सुबह के इंतज़ार में था कि कितनी जल्दी सुबह हो और वह दीपिकामाई के घर जा पहुँचे। मगर उसका बावलापन यह जरा भी मनाने तैयार नहीं था। रह-रहकर उसका मन दीपिकामाई की तरफ उचट जाता।
अंतत थकहार वह लेट गया। रात काफी हो चुकी थी। मगर नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी। वह बार-बार किताब को देखे जा रहा था। उसे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।
दीपिकामाई के घर के अंदर और बाहर भीड़ लगी थी। भीड़ को चीरता हुआ ज्ञानदीप जब अंदर पहुँचा तो दीपिकामाई की लाश को देखकर वह हक्का-बक्का रह गया। उसके हाथ से किताब छुटकर नीचे गिर गई। उसे लगा जैसे वह अभी चक्कर खा के गिर पड़ेगा। मगर उसने किसी तरह अपने आप को संभाला और भारी कदमों से लाश की तरफ बढ़ गया। दीपिकामाई के मुँह और नाक में मक्खियाँ भरी थी। यह सब देखकर ज्ञानदीप की आँखें छलक आई। उसने पास पड़ी चादर से दीपिकामाई को ढक दिया और उनके पैर पकड़कर फफक पड़ा।
"का हुवा?" भीड़ में से एक ने पूछा।
"अरे उ हिजड़वा मर गवा." महिला ने ऐसे कहा जैसे कुछ हुआ ही न हो।
"सही कहत हव भइया." महिला के एक-एक लफ़्ज़ ज्ञानदीप के कान में भाले की भाँति जा चुभे।
ज्ञानदीप ने पलट कर देखा तो कोई और नहीं, वह वही महिला थी जो दीपिकामाई से अपने बच्चे की दवा के लिए पैंसे माँगने आई थी। आज उसका यह रूप देखकर ज्ञानदीप हतप्रभ था।
"चच्चा सही कहत हय." तहमत वाले लड़के ने मसाले की पुड़िया मुँह में फाकते हुए कहा।
"के हव तुम? नाटे कद वाले ने आँखे तरेर कर पूछा।
वक्त की नजाकत को देखते हुए ज्ञानदीप क्रोध के घूँट को पी गया था। यह वही लोग थे जो कभी दीपिकामाई के आप-पास मंडराते थे। जिनकी छत्र-छाया से इनके घर चलते थे। इनमें से कितने लोग तो ऐसे थे जिनके घर की बेटियों की दीपिकामाई ने शादी करवायी थी। किसी की मज़ाल थी जो बगैर इजाजत उनके कमरे में चला जाए।
ज्ञानदीप ने समझाया।
"अबे मादरचोद, तेरी हिम्मत कैसे हुई मौलवी साब से जवाब-तलब करने की." चपटी नाक वाले ने ज्ञानदीप का गिरहेबान पकड़ा।
अगर ज्ञानदीप चाहता तों वह भी गाली-गलोच कर सकता था मगर नहीं, क्योंकि इस वक्त गाली से कही ज्यादा जरूरी थी दीपिकामाई की लाश।
मौलवी के कहते ही चपटी नाक वाले ने ज्ञानदीप को वर्निग देकर छोड़ दिया।
"श्मशान घाट में तो है." ज्ञानदीप का इतना कहना क्या था कि चैधरी के तन-बदन में आग लग गई। उसने आँखें तरेर कर ज्ञानदीप को घूरा,
धीरे-धीरे भीड़ उग्र होती जा रही थी। भीड़ को संभालना ज्ञानदीप के बस में नहीं था। उसकी सारी कोशिशें नाकाम हो गई थी। मगर भीड़ थी जो लाश की तरफ बढ़ती जा रही थी।
"मैं। आप के आगे हाथ जोड़ता हूँ छोड़ दीजिए इन्हें........।" ज्ञानदीप गिड़गिड़ाया।
तभी टोपी वाले ने ज्ञानदीप को धकेल दिया। वह गिरते-गिरते बचा। भीड़ ने चारों तरफ से लाश को घेर लिया। जैसे ही लोग लाश को उठाने वाले थे वैसे ही आँधी का तेज झोंका आया। जो जहाँ था वही थम गया। न जाने कहाँ से उड़कर अनगिनत पत्ते आए और दीपिकामाई की छाती से लिपट गए।
तभी लाश के पास पड़ी किताब के पन्ने ऐसे फड़फड़ाने लगे जैसे दीपिकामाई पढ़ रही हो। वैसे ही टप से बूँदें किताब के अंतिम पेज पर गिरी। ऐसा लगा जैसे वह बूँदें नहीं, दीपिकामाई के आँसू हैं।
थोड़ी देर बाद आँधी थम गई।
वहाँ खड़े लोग लाश को उठाने लगे। कोई लाश के हाथ पकड़े था, कोई पैर। वे लोग लाश को झुलाते हुए ले जाने लगे। बच्चे इस तरह से हा-हू कर रहे थे जैसे कोई तमाशा हो रहा हो।
किसी ने पीछे से ज्ञानदीप को लात मारी वह मुँह के बल जा गिरा। उसका होंठ फट गया था। पर उसने अपने खून की प्रवाह न करके तेजी से लाश की तरफ भागा।
तमाशाई भीड़ अपने-अपने छतों, दरवाजों और खिड़कियों पर ऐसे जुटी थी जैसे कोई जुलूस निकल रहा हो।
कुत्ते भीड़ पर भौंक रहे थे। जैसे कह रहे हो छोड़ दो मेरी माई को.....।
गायें-बकरियाँ चिल्ला रही थी, वे सब रस्सीयों को तोड़ देना चाहती थी। अगर उनका बस चलता तो वे भीड़ को दिखा देती कि उनके होते हुए उनकी माई को कोई नहीं ले जा सकता। मगर वे सब बेबस-लाचार थी।
ज्ञानदीप एक-एक आदमी के आगे हाथ-पैर जोड़ रहा था। मगर लोग बजाय उसकी सुनने के, उल्टे उस पर ही टूट पड़े।
फिर क्या था। एक नहीं, दो नहीं, तीन नही अनगिनत हाथ-पैर ज्ञानदीप पर बरसने लगे। वह चीख़ता-चिल्लाता रहा। पर भीड़ के शोर-शराबे के आगे उसकी आवाज दब गई। ज्ञानदीप गली के बीचोबीच मूच्र्छित पड़ा था। पास खड़ा एक कुत्ता ज्ञानदीप को भौंक-भौंक कर जैसे उठा रहा हो।
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जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने उसका ढोगल ख्पोता, हाथ में लपेट लिया। "बहन जी छोड़ दीजिए." सज्जन ने आकर विनती की। मैंने कहा छोडूँगी तब जब पाँच हज़ार एक सौसौ लूँगी। दीपिकामाई ने ताली बजाई। लग रहा था जैसे वह एक्ंिटग नहीं नेचुरल में बधाई ले रही हैं। इसी बीच ज्ञानदीप का सेलफोन बजा। उसने उठकर हैलो कहा और सारी बात सुनने के बाद उसने आँधे घँटें में पहुँचने को कहा। सेलफोन रखते ही ज्ञानदीप ने डायरी के पन्ने निकालकर दीपिकामाई को दिए। ज्ञानदीप चरण-स्पर्श करके चला आया था। ज्ञानदीप उसी रात लिखने बैठ गया। लगभग छः महीने की कड़ी मेहनत के बाद उसने आधा आदमी उपन्यास मुकम्मल किया। और उसे प्रकाशिन होने के लिए प्रकाशक के पास भेज दिया। एक महीने में दीपिकामाई की जैसे काया ही बदल गई थी। दिन पर दिन उनका स्वास्थ्य गिरता जा रहा था। डाॅक्टर के अनुसार उनका शुगर लेबल बढ़ा हुआ था। एक-एक करके सारे चेले उन्हें छोड़कर चली गई थी। ड्राइवर और इसराइल का भी कुछ अता-पता नहीं था। दीपिकामाई को उठने-बैठने में काफी दिक्कत हो रही थी। कहते हैं वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता। कभी यहाँ महफिल सजती थी आज यहाँ वीरान हैं। जितने भी उनके संगी-साथी थे सभी ने, यहाँ तक आस-पड़ोस के लोगों ने भी उनसे मिलना-जुलना बंद कर दिया था। समाज की इस बेरूखी ने उनके अंदर जीने की ललक ही खत्म कर दी थी। हद तो तब हो गई जब उनका एक-एक सामान उनके चेले और संगी-साथी उठा ले गई। यहाँ तक उनका सेलफोन तक नहीं बख़्शा। भगवान इतने बुरे दिन किसी को न दिखाये। दूसरों का पेट भरने वाली दीपिकामाई आज स्वयं एक-एक दाने को तरस रही थी। ज्ञानदीप ट्यूशन पढ़ाकर जब रात को घर लौटा तभी उसे पड़ोसी से एक लिफाफा मिला। उसने खोलकर देखा तो उसमे एक किताब थी। आधा आदमी को देखकर वह खुशी से फूला नहीं समाया। पहले उसने किताब को माथे से लगाकर ईश्वर का शुक्रिया अदा किया। फिर उसने सेलफोन उठाकर दीपिकामाई को काँल किया। पर जवाब न मिलने के कारण उसने झल्लाकर सेलफोन रख दिया। अब वह सुबह के इंतज़ार में था कि कितनी जल्दी सुबह हो और वह दीपिकामाई के घर जा पहुँचे। मगर उसका बावलापन यह जरा भी मनाने तैयार नहीं था। रह-रहकर उसका मन दीपिकामाई की तरफ उचट जाता। अंतत थकहार वह लेट गया। रात काफी हो चुकी थी। मगर नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी। वह बार-बार किताब को देखे जा रहा था। उसे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला। दीपिकामाई के घर के अंदर और बाहर भीड़ लगी थी। भीड़ को चीरता हुआ ज्ञानदीप जब अंदर पहुँचा तो दीपिकामाई की लाश को देखकर वह हक्का-बक्का रह गया। उसके हाथ से किताब छुटकर नीचे गिर गई। उसे लगा जैसे वह अभी चक्कर खा के गिर पड़ेगा। मगर उसने किसी तरह अपने आप को संभाला और भारी कदमों से लाश की तरफ बढ़ गया। दीपिकामाई के मुँह और नाक में मक्खियाँ भरी थी। यह सब देखकर ज्ञानदीप की आँखें छलक आई। उसने पास पड़ी चादर से दीपिकामाई को ढक दिया और उनके पैर पकड़कर फफक पड़ा। "का हुवा?" भीड़ में से एक ने पूछा। "अरे उ हिजड़वा मर गवा." महिला ने ऐसे कहा जैसे कुछ हुआ ही न हो। "सही कहत हव भइया." महिला के एक-एक लफ़्ज़ ज्ञानदीप के कान में भाले की भाँति जा चुभे। ज्ञानदीप ने पलट कर देखा तो कोई और नहीं, वह वही महिला थी जो दीपिकामाई से अपने बच्चे की दवा के लिए पैंसे माँगने आई थी। आज उसका यह रूप देखकर ज्ञानदीप हतप्रभ था। "चच्चा सही कहत हय." तहमत वाले लड़के ने मसाले की पुड़िया मुँह में फाकते हुए कहा। "के हव तुम? नाटे कद वाले ने आँखे तरेर कर पूछा। वक्त की नजाकत को देखते हुए ज्ञानदीप क्रोध के घूँट को पी गया था। यह वही लोग थे जो कभी दीपिकामाई के आप-पास मंडराते थे। जिनकी छत्र-छाया से इनके घर चलते थे। इनमें से कितने लोग तो ऐसे थे जिनके घर की बेटियों की दीपिकामाई ने शादी करवायी थी। किसी की मज़ाल थी जो बगैर इजाजत उनके कमरे में चला जाए। ज्ञानदीप ने समझाया। "अबे मादरचोद, तेरी हिम्मत कैसे हुई मौलवी साब से जवाब-तलब करने की." चपटी नाक वाले ने ज्ञानदीप का गिरहेबान पकड़ा। अगर ज्ञानदीप चाहता तों वह भी गाली-गलोच कर सकता था मगर नहीं, क्योंकि इस वक्त गाली से कही ज्यादा जरूरी थी दीपिकामाई की लाश। मौलवी के कहते ही चपटी नाक वाले ने ज्ञानदीप को वर्निग देकर छोड़ दिया। "श्मशान घाट में तो है." ज्ञानदीप का इतना कहना क्या था कि चैधरी के तन-बदन में आग लग गई। उसने आँखें तरेर कर ज्ञानदीप को घूरा, धीरे-धीरे भीड़ उग्र होती जा रही थी। भीड़ को संभालना ज्ञानदीप के बस में नहीं था। उसकी सारी कोशिशें नाकाम हो गई थी। मगर भीड़ थी जो लाश की तरफ बढ़ती जा रही थी। "मैं। आप के आगे हाथ जोड़ता हूँ छोड़ दीजिए इन्हें........।" ज्ञानदीप गिड़गिड़ाया। तभी टोपी वाले ने ज्ञानदीप को धकेल दिया। वह गिरते-गिरते बचा। भीड़ ने चारों तरफ से लाश को घेर लिया। जैसे ही लोग लाश को उठाने वाले थे वैसे ही आँधी का तेज झोंका आया। जो जहाँ था वही थम गया। न जाने कहाँ से उड़कर अनगिनत पत्ते आए और दीपिकामाई की छाती से लिपट गए। तभी लाश के पास पड़ी किताब के पन्ने ऐसे फड़फड़ाने लगे जैसे दीपिकामाई पढ़ रही हो। वैसे ही टप से बूँदें किताब के अंतिम पेज पर गिरी। ऐसा लगा जैसे वह बूँदें नहीं, दीपिकामाई के आँसू हैं। थोड़ी देर बाद आँधी थम गई। वहाँ खड़े लोग लाश को उठाने लगे। कोई लाश के हाथ पकड़े था, कोई पैर। वे लोग लाश को झुलाते हुए ले जाने लगे। बच्चे इस तरह से हा-हू कर रहे थे जैसे कोई तमाशा हो रहा हो। किसी ने पीछे से ज्ञानदीप को लात मारी वह मुँह के बल जा गिरा। उसका होंठ फट गया था। पर उसने अपने खून की प्रवाह न करके तेजी से लाश की तरफ भागा। तमाशाई भीड़ अपने-अपने छतों, दरवाजों और खिड़कियों पर ऐसे जुटी थी जैसे कोई जुलूस निकल रहा हो। कुत्ते भीड़ पर भौंक रहे थे। जैसे कह रहे हो छोड़ दो मेरी माई को.....। गायें-बकरियाँ चिल्ला रही थी, वे सब रस्सीयों को तोड़ देना चाहती थी। अगर उनका बस चलता तो वे भीड़ को दिखा देती कि उनके होते हुए उनकी माई को कोई नहीं ले जा सकता। मगर वे सब बेबस-लाचार थी। ज्ञानदीप एक-एक आदमी के आगे हाथ-पैर जोड़ रहा था। मगर लोग बजाय उसकी सुनने के, उल्टे उस पर ही टूट पड़े। फिर क्या था। एक नहीं, दो नहीं, तीन नही अनगिनत हाथ-पैर ज्ञानदीप पर बरसने लगे। वह चीख़ता-चिल्लाता रहा। पर भीड़ के शोर-शराबे के आगे उसकी आवाज दब गई। ज्ञानदीप गली के बीचोबीच मूच्र्छित पड़ा था। पास खड़ा एक कुत्ता ज्ञानदीप को भौंक-भौंक कर जैसे उठा रहा हो।
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शान्ति संस्थापक के रूप में राष्ट्रसंघ
यह एक दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है कि महत्वपूर्ण कामों में और बडे-बडे राष्ट्रों के विवादों में राष्ट्रसंघ को कोई सफलता नहीं प्राप्त हो सकी । झगड़ा का शान्तिपूर्ण समाधान निकाल कर युद्ध को रोकना राष्ट्रसंघ का एक प्रमुख काम था; लेकिन इस काम में राष्ट्रसंघ असफल रहा। पर यदि राष्ट्रसंघ की महत्त्वपूर्ण विवादों में सफलता नहीं मिली तो इसका अर्थ यह नहीं कि वह पूर्णतया असफल रहा। छोटे-छोटे राज्यों के झगडों को सुलझाने में राष्ट्रसंघ काफी सफल रहा और अपनी बीस वर्ष की छोटी-सी बधि में इसमें चालिम छोटे-बड़े राजनीतिक झगडों की जाँच करके थपना निर्णय दिया। समझौता, मध्यस्थता तथा अनुरोध के रास्ते को अपनाकर राष्ट्रसंघ कुछ छोटे-छोटे झगड़ों को तय करने में सफलीभूत रहा। अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के क्षेत्र में यह एक उत्साहवर्द्धक लक्षण था।
आलैण्ड विवाद : - राष्ट्रसंघ के सामने सबसे पहले जो अन्तर्राष्ट्रीय विवाद आया वह यालैंड द्वीपों से सम्बन्धित था। लगभग ३०० द्वीपों का यह समूह, जिसकी आवादी १९३० में २७००० थी, स्वेडन थोर फिनलैंड के बीच में स्थित है। प्रारम्भ में यह स्वेडन के कब्जे में था। नेपोलियन के युद्धों के समय (१८८०८६) यह फिनलैंड के साथ-साथ रूसी साम्राज्य के अन्तर्गत चला गया। उस समय से रूसी क्रांति (१९१७) तक फिनलैंड द्वीप समूहों को एक इकाई मानकर रूस का शासन चलता रहा। १६१७ में फिनलैंड स्वतन्त्र हो गया। आलैंड भी उसी के अन्दर रह गया। पर यालैंड के निवासी स्वेडिश थे और राष्ट्रीयता का सिद्धान्त के आधार पर वे स्वायत शासन तथा स्वेडन के साथ मिलने की मांग करने लगे। इसके लिए उनलोगों ने जवरदस्त के आन्दोलन खड़ा किया। फिनलैंड ने आन्दोलन को दवाना शुरू किया। प्रतिक्रियास्वरूप स्वेडन में फिनलैंड के दमन के विरुद्ध घोर विरोध शुरू हुआ। स्वेडन युद्ध की तैयारी करने लगा। उस समय फिनलैंड राष्ट्रमंघ का सदस्य नहीं था । इस मौके पर ब्रिटेन ने राष्ट्र विधान की ११ वी धारा के अन्तर्गत राष्ट्रसंघ का ध्यान इस विवाद की थोर याकृष्ट किया। जुलाई १६२० में यह मामला राष्ट्रसंघ कौमिल के सामने आया। दोनों देशों के प्रतिनिधि कौंमिल के सामने उपस्थित हुए और अपने-अपने विचार प्रकट किये। कौंसिल ने क्षेत्राधिकार के सम्बन्ध में कानून-विशेषठों से परामर्श लिया और फिर एक समिति की नियुक्ति की जिसका काम विवादग्रस्त क्षेत्रों का भ्रमण करके तथ्यों का पता लगाना था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर कौंसिल ने २४ जून, १९२१ को निम्नलिखित फेसले दिये - (१) आलैंड द्वीप समूह पर फिनलैंड की प्रभुसवा कायम रहे, (२) आलेंडवासियों की स्वायचता तथा उसके राजनीतिक अधिकारों की रक्षा की गारन्टी दी जाय, (३) उन्हें निजी सम्पत्ति तथा स्वेडिश भाषा का प्रयोग करने का अधिकार मिले, तथा (४) थालैंड का तटस्थीकरण और व्यसैनिककरण हो जाय । ६ अप्रैल, १६२२ को यालैंड द्वीपसमूह को तटस्थीकरण कर दिया और इस तरह प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय विवाद, जो राष्ट्रसंघ के सामने आया, उसका फेमला सर्वमान्य ढंग से हो गया ।
विलना विवाद :- विलना लिथुएनिया की प्राचीन राजधानी और उसकी संस्कृति का केन्द्र था। वर्साय-सधि के द्वारा यह प्रदेश लिथुएनिया को सौंप दिया गया था। १९२० में वोत्शेविको ने विलना पर कब्जा कर लिया। १२ जुलाई, १६२० को सोवियत रूस और
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शान्ति संस्थापक के रूप में राष्ट्रसंघ यह एक दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है कि महत्वपूर्ण कामों में और बडे-बडे राष्ट्रों के विवादों में राष्ट्रसंघ को कोई सफलता नहीं प्राप्त हो सकी । झगड़ा का शान्तिपूर्ण समाधान निकाल कर युद्ध को रोकना राष्ट्रसंघ का एक प्रमुख काम था; लेकिन इस काम में राष्ट्रसंघ असफल रहा। पर यदि राष्ट्रसंघ की महत्त्वपूर्ण विवादों में सफलता नहीं मिली तो इसका अर्थ यह नहीं कि वह पूर्णतया असफल रहा। छोटे-छोटे राज्यों के झगडों को सुलझाने में राष्ट्रसंघ काफी सफल रहा और अपनी बीस वर्ष की छोटी-सी बधि में इसमें चालिम छोटे-बड़े राजनीतिक झगडों की जाँच करके थपना निर्णय दिया। समझौता, मध्यस्थता तथा अनुरोध के रास्ते को अपनाकर राष्ट्रसंघ कुछ छोटे-छोटे झगड़ों को तय करने में सफलीभूत रहा। अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के क्षेत्र में यह एक उत्साहवर्द्धक लक्षण था। आलैण्ड विवाद : - राष्ट्रसंघ के सामने सबसे पहले जो अन्तर्राष्ट्रीय विवाद आया वह यालैंड द्वीपों से सम्बन्धित था। लगभग तीन सौ द्वीपों का यह समूह, जिसकी आवादी एक हज़ार नौ सौ तीस में सत्ताईस हज़ार थी, स्वेडन थोर फिनलैंड के बीच में स्थित है। प्रारम्भ में यह स्वेडन के कब्जे में था। नेपोलियन के युद्धों के समय यह फिनलैंड के साथ-साथ रूसी साम्राज्य के अन्तर्गत चला गया। उस समय से रूसी क्रांति तक फिनलैंड द्वीप समूहों को एक इकाई मानकर रूस का शासन चलता रहा। एक हज़ार छः सौ सत्रह में फिनलैंड स्वतन्त्र हो गया। आलैंड भी उसी के अन्दर रह गया। पर यालैंड के निवासी स्वेडिश थे और राष्ट्रीयता का सिद्धान्त के आधार पर वे स्वायत शासन तथा स्वेडन के साथ मिलने की मांग करने लगे। इसके लिए उनलोगों ने जवरदस्त के आन्दोलन खड़ा किया। फिनलैंड ने आन्दोलन को दवाना शुरू किया। प्रतिक्रियास्वरूप स्वेडन में फिनलैंड के दमन के विरुद्ध घोर विरोध शुरू हुआ। स्वेडन युद्ध की तैयारी करने लगा। उस समय फिनलैंड राष्ट्रमंघ का सदस्य नहीं था । इस मौके पर ब्रिटेन ने राष्ट्र विधान की ग्यारह वी धारा के अन्तर्गत राष्ट्रसंघ का ध्यान इस विवाद की थोर याकृष्ट किया। जुलाई एक हज़ार छः सौ बीस में यह मामला राष्ट्रसंघ कौमिल के सामने आया। दोनों देशों के प्रतिनिधि कौंमिल के सामने उपस्थित हुए और अपने-अपने विचार प्रकट किये। कौंसिल ने क्षेत्राधिकार के सम्बन्ध में कानून-विशेषठों से परामर्श लिया और फिर एक समिति की नियुक्ति की जिसका काम विवादग्रस्त क्षेत्रों का भ्रमण करके तथ्यों का पता लगाना था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर कौंसिल ने चौबीस जून, एक हज़ार नौ सौ इक्कीस को निम्नलिखित फेसले दिये - आलैंड द्वीप समूह पर फिनलैंड की प्रभुसवा कायम रहे, आलेंडवासियों की स्वायचता तथा उसके राजनीतिक अधिकारों की रक्षा की गारन्टी दी जाय, उन्हें निजी सम्पत्ति तथा स्वेडिश भाषा का प्रयोग करने का अधिकार मिले, तथा थालैंड का तटस्थीकरण और व्यसैनिककरण हो जाय । छः अप्रैल, एक हज़ार छः सौ बाईस को यालैंड द्वीपसमूह को तटस्थीकरण कर दिया और इस तरह प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय विवाद, जो राष्ट्रसंघ के सामने आया, उसका फेमला सर्वमान्य ढंग से हो गया । विलना विवाद :- विलना लिथुएनिया की प्राचीन राजधानी और उसकी संस्कृति का केन्द्र था। वर्साय-सधि के द्वारा यह प्रदेश लिथुएनिया को सौंप दिया गया था। एक हज़ार नौ सौ बीस में वोत्शेविको ने विलना पर कब्जा कर लिया। बारह जुलाई, एक हज़ार छः सौ बीस को सोवियत रूस और
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एक तरह से उद्धव गुट ने कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी एकजुटता की जमीन तैयार करने की कोशिश की है। मुखपत्र 'सामना' में लिखा गया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव अपने-अपने राज्य में भाजपा से लड़ रहे हैं। आगे यह सवाल किया गया, 'कांग्रेस से नफरत करके आप (विपक्षी दल) भाजपा से कैसे लड़ेंगे। ' उद्धव गुट ने विपक्ष को संदेश दिया है कि मिशन 2024 के लिए सभी दलों को जल्द से जल्द एकजुट होकर रणनीति बनानी होगी। 'सामना' में कहा गया कि विपक्ष की तरफ से पीएम पद का उम्मीदवार कौन होगा, यह मुद्दा बाद में भी सुलझाया जा सकता है। बीजेपी विरोधी राजनीतिक ताकतों को जल्द से जल्द टेबल पर आना चाहिए। दरअसल, उद्धव गुट कांग्रेस का सहयोगी है। महाराष्ट्र में मिलकर सरकार भी बनाई गई थी। हाल में पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह खोने के बाद उद्धव गुट अब 2024 के लिए मोर्चेबंदी की कोशिशों में जुट गया है।
हालांकि मेघालय जाकर राहुल गांधी ने ममता बनर्जी पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि टीएमसी की परंपराओं, पश्चिम बंगाल में हिंसा और घोटाले से लोग वाकिफ हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि TMC ने गोवा चुनाव में काफी खर्च किया, वह मेघालय में भी भाजपा को जिताने के लिए यही कर रही है। TMC कहां चुप रहने वाली थी। तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने तस्वीरें साझा करते हुए राहुल पर निशाना साधा। वह बताना चाह रहे थे कि मेघालय में राहुल गांधी की चुनावी रैली में भीड़ नहीं जुटी जबकि ममता बनर्जी की सभा खचाखच भरी थी। आपको याद होगा जब ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव में भाजपा को शिकस्त दी थी, तो उन्हें 2024 के लिहाज से मुख्य दावेदार माना जाने लगा था लेकिन जल्द ही मामला ठंडा पड़ गया।
उधर, मल्लिकार्जुन खरगे का दावा है कि 2024 में कांग्रेस पार्टी सहयोगी दलों के साथ मिलकर 'सामूहिक रूप से' सरकार बनाएगी। हाल में वह कई बैठकों और रैली में यह दावा कर चुके हैं कि 2024 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनेगी। खरगे भी विपक्षी एकजुटता के पक्ष में हैं और अब सबकी नजरें रायपुर में होने वाले कांग्रेस के अधिवेशन पर हैं। वहां विपक्षी गठबंधन का फॉर्म्युला तय हो सकता है। दो दिन पहले उन्होंने नगालैंड में कहा था कि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में आएगा। हम दूसरी पार्टियों के साथ चर्चा कर रहे हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में कांग्रेस से विपक्षी गठबंधन पर जल्द फैसला लेने को कहा था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को 'भारत जोड़ो यात्रा' से बने माहौल का लाभ उठाते हुए भाजपा विरोधी दलों के साथ गठबंधन करना चाहिए। अगर ऐसा हो गया तो 300 से ज्यादा सीटें जीतने वाली भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में 100 से भी कम सीट पर समेटा जा सकता है। इसके बाद से विपक्षी एकजुटता की कवायद और नेतृत्व को लेकर चर्चा चल पड़ी।
मंच पर बैठे कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद से नीतीश कुमार ने कहा था कि यह संदेश कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दिया जाए। बाद में खुर्शीद ने वहीं कहा कि हम भी वही चाहते हैं जो आप चाहते हैं, मामला बस इतना है कि पहले आई लव यू कौन बोलेगा। वैसे, नीतीश कांग्रेस के साथ आने की बात तो करते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर राहुल गांधी के नाम पर मुहर नहीं लगाते। नीतीश और उद्धव गुट इस बात को जोरशोर से उठा रहे हैं कि कांग्रेस के बिना और कई क्षेत्रीय दलों के बगैर भाजपा के खिलाफ मेन फ्रंट नहीं बन सकता।
सियासी जानकार मान रहे हैं कि क्षेत्रीय नेताओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं। वे पीएम कैंडिडेट पर स्पष्ट स्थिति चाहते हैं। कांग्रेस के नेतृत्व में कुछ दल शायद इसलिए भी पत्ते न खोल रहे हों क्योंकि वे राहुल गांधी के नाम पर सहमत न हों। वैसे कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से पीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया है लेकिन कई बार कांग्रेसी नेता राहुल का नाम उछाल चुके हैं। विपक्षी दल भी जानते हैं कि कांग्रेस की सीटें भले न हों, पर उपस्थिति और जनाधार पूरे देश में है। विचारधारा का मसला है जिस पर विपक्ष बंट सकता है लेकिन उसे मालूम है कि भाजपा को चुनौती देने के लिए एकजुट होना होगा।
ममता बनर्जी के नेता उन्हें पीएम का दावेदार मानते हैं। ममता ने कई राज्यों में पार्टी का विस्तार करना शुरू किया है। उन्हें शायद लगता हो कि अगर ज्यादा राज्यों में टीएमसी का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो उनकी दावेदारी मजबूत दिख सकती है। शायद इसीलिए ममता कांग्रेस के साथ आने में देर कर रही हैं। शरद पवार को भी कुछ लोग पीएम कैंडिडेट मानते हैं लेकिन उनका झुकाव कांग्रेस के पक्ष में है। के. चंद्रशेखर राव की गहमागहमी ने भी उनकी महत्वाकांक्षा को लेकर कई सवाल पैदा किए थे। हालांकि उनकी राह आसान नहीं। अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ मिलकर यूपी चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन अभी उन्होंने चुप्पी साध रखी है। आम आदमी पार्टी का दिल्ली, पंजाब, गोवा में प्रभाव बढ़ने के बाद से अरविंद केजरीवाल को भी पीएम कैंडिडेट प्रोजेक्ट करने की कोशिशें हुई हैं।
शायद विरोधी दलों की इसी उलझन को भांपते हुए कांग्रेस पीएम कैंडिडेट पर फैसला चुनाव टालना चाहती है। तब सीटों की संख्या के हिसाब से बहुत चीजें अपने आप साफ हो जाएंगी।
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एक तरह से उद्धव गुट ने कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी एकजुटता की जमीन तैयार करने की कोशिश की है। मुखपत्र 'सामना' में लिखा गया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव अपने-अपने राज्य में भाजपा से लड़ रहे हैं। आगे यह सवाल किया गया, 'कांग्रेस से नफरत करके आप भाजपा से कैसे लड़ेंगे। ' उद्धव गुट ने विपक्ष को संदेश दिया है कि मिशन दो हज़ार चौबीस के लिए सभी दलों को जल्द से जल्द एकजुट होकर रणनीति बनानी होगी। 'सामना' में कहा गया कि विपक्ष की तरफ से पीएम पद का उम्मीदवार कौन होगा, यह मुद्दा बाद में भी सुलझाया जा सकता है। बीजेपी विरोधी राजनीतिक ताकतों को जल्द से जल्द टेबल पर आना चाहिए। दरअसल, उद्धव गुट कांग्रेस का सहयोगी है। महाराष्ट्र में मिलकर सरकार भी बनाई गई थी। हाल में पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह खोने के बाद उद्धव गुट अब दो हज़ार चौबीस के लिए मोर्चेबंदी की कोशिशों में जुट गया है। हालांकि मेघालय जाकर राहुल गांधी ने ममता बनर्जी पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि टीएमसी की परंपराओं, पश्चिम बंगाल में हिंसा और घोटाले से लोग वाकिफ हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि TMC ने गोवा चुनाव में काफी खर्च किया, वह मेघालय में भी भाजपा को जिताने के लिए यही कर रही है। TMC कहां चुप रहने वाली थी। तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने तस्वीरें साझा करते हुए राहुल पर निशाना साधा। वह बताना चाह रहे थे कि मेघालय में राहुल गांधी की चुनावी रैली में भीड़ नहीं जुटी जबकि ममता बनर्जी की सभा खचाखच भरी थी। आपको याद होगा जब ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव में भाजपा को शिकस्त दी थी, तो उन्हें दो हज़ार चौबीस के लिहाज से मुख्य दावेदार माना जाने लगा था लेकिन जल्द ही मामला ठंडा पड़ गया। उधर, मल्लिकार्जुन खरगे का दावा है कि दो हज़ार चौबीस में कांग्रेस पार्टी सहयोगी दलों के साथ मिलकर 'सामूहिक रूप से' सरकार बनाएगी। हाल में वह कई बैठकों और रैली में यह दावा कर चुके हैं कि दो हज़ार चौबीस में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनेगी। खरगे भी विपक्षी एकजुटता के पक्ष में हैं और अब सबकी नजरें रायपुर में होने वाले कांग्रेस के अधिवेशन पर हैं। वहां विपक्षी गठबंधन का फॉर्म्युला तय हो सकता है। दो दिन पहले उन्होंने नगालैंड में कहा था कि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में आएगा। हम दूसरी पार्टियों के साथ चर्चा कर रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में कांग्रेस से विपक्षी गठबंधन पर जल्द फैसला लेने को कहा था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को 'भारत जोड़ो यात्रा' से बने माहौल का लाभ उठाते हुए भाजपा विरोधी दलों के साथ गठबंधन करना चाहिए। अगर ऐसा हो गया तो तीन सौ से ज्यादा सीटें जीतने वाली भाजपा को दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में एक सौ से भी कम सीट पर समेटा जा सकता है। इसके बाद से विपक्षी एकजुटता की कवायद और नेतृत्व को लेकर चर्चा चल पड़ी। मंच पर बैठे कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद से नीतीश कुमार ने कहा था कि यह संदेश कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दिया जाए। बाद में खुर्शीद ने वहीं कहा कि हम भी वही चाहते हैं जो आप चाहते हैं, मामला बस इतना है कि पहले आई लव यू कौन बोलेगा। वैसे, नीतीश कांग्रेस के साथ आने की बात तो करते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर राहुल गांधी के नाम पर मुहर नहीं लगाते। नीतीश और उद्धव गुट इस बात को जोरशोर से उठा रहे हैं कि कांग्रेस के बिना और कई क्षेत्रीय दलों के बगैर भाजपा के खिलाफ मेन फ्रंट नहीं बन सकता। सियासी जानकार मान रहे हैं कि क्षेत्रीय नेताओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं। वे पीएम कैंडिडेट पर स्पष्ट स्थिति चाहते हैं। कांग्रेस के नेतृत्व में कुछ दल शायद इसलिए भी पत्ते न खोल रहे हों क्योंकि वे राहुल गांधी के नाम पर सहमत न हों। वैसे कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से पीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया है लेकिन कई बार कांग्रेसी नेता राहुल का नाम उछाल चुके हैं। विपक्षी दल भी जानते हैं कि कांग्रेस की सीटें भले न हों, पर उपस्थिति और जनाधार पूरे देश में है। विचारधारा का मसला है जिस पर विपक्ष बंट सकता है लेकिन उसे मालूम है कि भाजपा को चुनौती देने के लिए एकजुट होना होगा। ममता बनर्जी के नेता उन्हें पीएम का दावेदार मानते हैं। ममता ने कई राज्यों में पार्टी का विस्तार करना शुरू किया है। उन्हें शायद लगता हो कि अगर ज्यादा राज्यों में टीएमसी का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो उनकी दावेदारी मजबूत दिख सकती है। शायद इसीलिए ममता कांग्रेस के साथ आने में देर कर रही हैं। शरद पवार को भी कुछ लोग पीएम कैंडिडेट मानते हैं लेकिन उनका झुकाव कांग्रेस के पक्ष में है। के. चंद्रशेखर राव की गहमागहमी ने भी उनकी महत्वाकांक्षा को लेकर कई सवाल पैदा किए थे। हालांकि उनकी राह आसान नहीं। अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ मिलकर यूपी चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन अभी उन्होंने चुप्पी साध रखी है। आम आदमी पार्टी का दिल्ली, पंजाब, गोवा में प्रभाव बढ़ने के बाद से अरविंद केजरीवाल को भी पीएम कैंडिडेट प्रोजेक्ट करने की कोशिशें हुई हैं। शायद विरोधी दलों की इसी उलझन को भांपते हुए कांग्रेस पीएम कैंडिडेट पर फैसला चुनाव टालना चाहती है। तब सीटों की संख्या के हिसाब से बहुत चीजें अपने आप साफ हो जाएंगी।
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पालमपुर - प्रदेश के अग्रणी मीडिया ग्रुप 'दिव्य हिमाचल' के सौजन्य से आयोजित 'डांस हिमाचल डांस सीजन-5' की प्रतियोगिता ने डांसरों ने ऐसी धूम मचाई कि हर कोई झूमने पर मजबूर हो गया। धौलाधार पर्वत श्रृखलाओं के आगोश में बसी चाय नगरी पालमपुर में हुए ऑडिशन के दौरान केएलबी कालेज की छात्राएं तथा बच्चों के साथ आए अभिभावक भी इस महत्त्वपूर्ण इवेंट का गवाह बने। छोटे बच्चों के साथ युवा वर्ग ने भी डांसिंग कला का जादू बिखेरा। दमदार व मनमोहक प्रस्तुतियों पर प्रतिभागियों ने खूब तालियां बटोरीं। प्रतियोगिता के दूसरे राउंड यानी सेमीफाइनल में प्रवेश करने हेतु मानों होड़ मची हुई थी। एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों को देखकर ऐसा लग रहा था कि निर्णायक मंडल को भी कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ेगा। 'डांस हिमाचल डांस' के इस ऑडिशन में 105 प्रतिभागियों ने पालमपुर में पहली बार नया रिकार्ड कायम किया है। एंकर मनोज ठाकुर ने देर शाम तक चलने वाले इस समारोह में खूब समां बांधा तथा दर्शकों को खूब हंसाया। आईना शर्मा ने सबसे पहले स्टेज पर 'बाबू जी जरा धीरे चलना' पर अपने दमदार नृत्य पर खूब तालियां बटोरीं। काजल शर्मा की प्रस्तुति 'तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त' खूब सराही गई। माउंट कार्मल की खुशी अग्रवाल ने 'इक परदेशी मेरा दिल ले गया' पर मनमोहक डांस कर दर्शकों का दिल जीत लिया। उषा ने कत्थक नृत्य पेश करके जजेज को हैरान कर दिया। निर्णायक मंडल ने उषा की प्रस्तुति को खूब सराहा। पारस पब्लिक स्कूल के बच्चों ने भी ऑडिशन के दौरान खूब धमाल मचाया।
विजन पब्लिक स्कूल बैजनाथ के छात्रों ने कमाल का नृत्य प्रस्तुत करके सेमीफाइनल के लिए अपनी दावेदारी मजबूत की। सीनियर वर्ग में मदन की परफार्मेंस काफी सराही गई। जोगिंद्रनगर से ऑडिशन देने पहुंचे मदन ने 'तू चंडीगढ़ तो आई नीं' पर जमकर डांस किया। आयो रे म्हारो ढोलना, रंगीलो म्हारो डोलना पर नंदिनी का डांस देख दर्शक कुर्सियां छोड़कर नाचने को मजबूर हो गए।
केएलबी डीएवी कन्या महाविद्यालय का ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नंदिनी अनुराधा स्कूल में अध्यापक के तौर पर कार्यरत हैं। रितु को निर्णायक मंडल ने अपनी बेस्ट परफार्मेंस पर सेमीफाइनल के लिए मौके पर चुनकर घोषणा कर दी। रितु रानी ने हालीवुड सांग पर जबरदस्त प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही लूटी। यह होनहार छात्रा कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में बीएसई की पढ़ाई कर रही है। अंत में सोनाली के नृत्य ने भी जमकर तालियां बटोरीं।
पालमपुर - विख्यात कोरियोग्राफर नवीन पाल जानी ने पालमपुर में उभरती प्रतिभाओं के हुनर परख के दौरान अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि चाय नगरी के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन इन हीरों को दराशने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 'दिव्य हिमाचल' द्वारा आयोजित अंतिम ऑडिशन में दर्शकों की भारी भीड़ प्रतिभागियों के हौसले बुलंद कर गई। सीनियर वर्ग में सभी प्रतिभागियों ने दमदार प्रस्तुतियां देकर निर्णायक मंडल को भी प्रभावित किया। इस ऑडिशन के दूसरे प्रख्यात कोरियोग्राफर साहिल शर्मा ने प्रदेश के नंबर वन मीडिया ग्रुप 'दिव्य हिमाचल' के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि 'डांस हिमाचल डांस' के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को एक ऐसा मंच उपलब्ध हुआ है, जहां से बालीवुड का रास्ता खुलता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को आवश्यक टिप्स देते हुए अपने प्रदर्शन में और अधिक सुधार लाने पर बल दिया।
पालमपुर - चाय नगरी पालमपुर में प्रदेश के अग्रणी मीडिया ग्रुप 'दिव्य हिमाचल' के सौजन्य से आयोजित 'डांस हिमाचल डांस' का ऑडिशन सोमवार को केएलबी कालेज पालमपुर में संपन्न हुआ। इस मौके पर हमीरपुर के वीएलसीसी इंस्टीच्यूट द्वारा 'डांस हिमाचल डांस' के 50 प्रतिभागियों का मेकअप किया गया। 'दिव्य हिमाचल' द्वारा आयोजित 'डांस हिमाचल डांस' के सीजन-पांच के मुख्य ऑडिशन पाटर्नर वीएलसीसी द्वारा ऑडिशन के दौरान फैशन शो का भी आयोजन किया गया। इसमें वीएलसीसी की मॉडल्स ने खूब जलवे बिखेर कर दर्शकों का मनोरंजन किया। इंडियन ट्रेडिशनल व वेस्टर्न ड्रेस पहनकर मंच पर आई मॉडल्स को देख दंग रह गए। वीएलसीसी इंस्टीच्यूट के डायरेक्टर विवेक राणा ने बताया कि वीएलसीसी इंस्टीच्यूट जल्द ही कांगड़ा, पालमपुर और मंडी में अपने इंस्टीच्यूट खोल रहे हैं, जिसमें हिमाचल के बच्चों को ब्यूटी इंडस्ट्री में जाने का मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि अब बच्चों को दिल्ली, चंडीगढ़ व मुंबई के स्तर पर ब्यूटी कोर्सेज वाजिब दामों पर इन्हीं सेंटर में करवाए जाएंगे। इस ऑडिशन में वीएलसीसी की सेंटर हैड रितिका अत्री व इवेंट मैनेजर ज्योति ठाकुर, सहित मेकअप फैकल्टीज ने भाग लिया।
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पालमपुर - प्रदेश के अग्रणी मीडिया ग्रुप 'दिव्य हिमाचल' के सौजन्य से आयोजित 'डांस हिमाचल डांस सीजन-पाँच' की प्रतियोगिता ने डांसरों ने ऐसी धूम मचाई कि हर कोई झूमने पर मजबूर हो गया। धौलाधार पर्वत श्रृखलाओं के आगोश में बसी चाय नगरी पालमपुर में हुए ऑडिशन के दौरान केएलबी कालेज की छात्राएं तथा बच्चों के साथ आए अभिभावक भी इस महत्त्वपूर्ण इवेंट का गवाह बने। छोटे बच्चों के साथ युवा वर्ग ने भी डांसिंग कला का जादू बिखेरा। दमदार व मनमोहक प्रस्तुतियों पर प्रतिभागियों ने खूब तालियां बटोरीं। प्रतियोगिता के दूसरे राउंड यानी सेमीफाइनल में प्रवेश करने हेतु मानों होड़ मची हुई थी। एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों को देखकर ऐसा लग रहा था कि निर्णायक मंडल को भी कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ेगा। 'डांस हिमाचल डांस' के इस ऑडिशन में एक सौ पाँच प्रतिभागियों ने पालमपुर में पहली बार नया रिकार्ड कायम किया है। एंकर मनोज ठाकुर ने देर शाम तक चलने वाले इस समारोह में खूब समां बांधा तथा दर्शकों को खूब हंसाया। आईना शर्मा ने सबसे पहले स्टेज पर 'बाबू जी जरा धीरे चलना' पर अपने दमदार नृत्य पर खूब तालियां बटोरीं। काजल शर्मा की प्रस्तुति 'तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त' खूब सराही गई। माउंट कार्मल की खुशी अग्रवाल ने 'इक परदेशी मेरा दिल ले गया' पर मनमोहक डांस कर दर्शकों का दिल जीत लिया। उषा ने कत्थक नृत्य पेश करके जजेज को हैरान कर दिया। निर्णायक मंडल ने उषा की प्रस्तुति को खूब सराहा। पारस पब्लिक स्कूल के बच्चों ने भी ऑडिशन के दौरान खूब धमाल मचाया। विजन पब्लिक स्कूल बैजनाथ के छात्रों ने कमाल का नृत्य प्रस्तुत करके सेमीफाइनल के लिए अपनी दावेदारी मजबूत की। सीनियर वर्ग में मदन की परफार्मेंस काफी सराही गई। जोगिंद्रनगर से ऑडिशन देने पहुंचे मदन ने 'तू चंडीगढ़ तो आई नीं' पर जमकर डांस किया। आयो रे म्हारो ढोलना, रंगीलो म्हारो डोलना पर नंदिनी का डांस देख दर्शक कुर्सियां छोड़कर नाचने को मजबूर हो गए। केएलबी डीएवी कन्या महाविद्यालय का ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नंदिनी अनुराधा स्कूल में अध्यापक के तौर पर कार्यरत हैं। रितु को निर्णायक मंडल ने अपनी बेस्ट परफार्मेंस पर सेमीफाइनल के लिए मौके पर चुनकर घोषणा कर दी। रितु रानी ने हालीवुड सांग पर जबरदस्त प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही लूटी। यह होनहार छात्रा कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में बीएसई की पढ़ाई कर रही है। अंत में सोनाली के नृत्य ने भी जमकर तालियां बटोरीं। पालमपुर - विख्यात कोरियोग्राफर नवीन पाल जानी ने पालमपुर में उभरती प्रतिभाओं के हुनर परख के दौरान अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि चाय नगरी के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन इन हीरों को दराशने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 'दिव्य हिमाचल' द्वारा आयोजित अंतिम ऑडिशन में दर्शकों की भारी भीड़ प्रतिभागियों के हौसले बुलंद कर गई। सीनियर वर्ग में सभी प्रतिभागियों ने दमदार प्रस्तुतियां देकर निर्णायक मंडल को भी प्रभावित किया। इस ऑडिशन के दूसरे प्रख्यात कोरियोग्राफर साहिल शर्मा ने प्रदेश के नंबर वन मीडिया ग्रुप 'दिव्य हिमाचल' के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि 'डांस हिमाचल डांस' के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को एक ऐसा मंच उपलब्ध हुआ है, जहां से बालीवुड का रास्ता खुलता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को आवश्यक टिप्स देते हुए अपने प्रदर्शन में और अधिक सुधार लाने पर बल दिया। पालमपुर - चाय नगरी पालमपुर में प्रदेश के अग्रणी मीडिया ग्रुप 'दिव्य हिमाचल' के सौजन्य से आयोजित 'डांस हिमाचल डांस' का ऑडिशन सोमवार को केएलबी कालेज पालमपुर में संपन्न हुआ। इस मौके पर हमीरपुर के वीएलसीसी इंस्टीच्यूट द्वारा 'डांस हिमाचल डांस' के पचास प्रतिभागियों का मेकअप किया गया। 'दिव्य हिमाचल' द्वारा आयोजित 'डांस हिमाचल डांस' के सीजन-पांच के मुख्य ऑडिशन पाटर्नर वीएलसीसी द्वारा ऑडिशन के दौरान फैशन शो का भी आयोजन किया गया। इसमें वीएलसीसी की मॉडल्स ने खूब जलवे बिखेर कर दर्शकों का मनोरंजन किया। इंडियन ट्रेडिशनल व वेस्टर्न ड्रेस पहनकर मंच पर आई मॉडल्स को देख दंग रह गए। वीएलसीसी इंस्टीच्यूट के डायरेक्टर विवेक राणा ने बताया कि वीएलसीसी इंस्टीच्यूट जल्द ही कांगड़ा, पालमपुर और मंडी में अपने इंस्टीच्यूट खोल रहे हैं, जिसमें हिमाचल के बच्चों को ब्यूटी इंडस्ट्री में जाने का मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि अब बच्चों को दिल्ली, चंडीगढ़ व मुंबई के स्तर पर ब्यूटी कोर्सेज वाजिब दामों पर इन्हीं सेंटर में करवाए जाएंगे। इस ऑडिशन में वीएलसीसी की सेंटर हैड रितिका अत्री व इवेंट मैनेजर ज्योति ठाकुर, सहित मेकअप फैकल्टीज ने भाग लिया।
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बख्शी का तालाब (बीकेटी) से नीमसार के बीच जल्द प्राइवेट बसों की सुविधा मिलेगी। इसके लिए संभागीय परिवहन अधिकारी ने बुधवार को परमिट स्वीकृत कर दिए।
ये बसें चंद्रिका देवी व अटारी होकर चलेंगी। प्राइवेट ऑपरेटरों को दो महीने के भीतर इस रूट पर बसों का संचालन करना होगा।
लखनऊ जोन के ट्रांसपोर्ट डिप्टी कमिश्नर अनिल कुमार मिश्र के मुताबिक संभागीय परिवहन अधिकारी रामफेर द्विवेदी ने प्राइवेट रूट बीकेटी से नीमसार के लिए 35 बसों का संचालन करने को परमिट स्वीकृत किए हैं।
इस रूट की बसें बीकेटी से चलकर चंद्रिका देवी, माल, अटारी व जानकीखेड़ा, जहानी खेड़ा होते हुए नीमसार तक जाएंगी। बीकेटी से नीमसार की दूरी लगभग 45 किमी है।
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि निजी ऑपरेटर राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा तय किमी रेट से किराया निर्धारित करेंगे।
अभी तक बीकेटी से नीमसार जाने के लिए लोगों को वाया सिधौली जाना पड़ता है। इसकी दूरी लगभग 60 किमी है।
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बख्शी का तालाब से नीमसार के बीच जल्द प्राइवेट बसों की सुविधा मिलेगी। इसके लिए संभागीय परिवहन अधिकारी ने बुधवार को परमिट स्वीकृत कर दिए। ये बसें चंद्रिका देवी व अटारी होकर चलेंगी। प्राइवेट ऑपरेटरों को दो महीने के भीतर इस रूट पर बसों का संचालन करना होगा। लखनऊ जोन के ट्रांसपोर्ट डिप्टी कमिश्नर अनिल कुमार मिश्र के मुताबिक संभागीय परिवहन अधिकारी रामफेर द्विवेदी ने प्राइवेट रूट बीकेटी से नीमसार के लिए पैंतीस बसों का संचालन करने को परमिट स्वीकृत किए हैं। इस रूट की बसें बीकेटी से चलकर चंद्रिका देवी, माल, अटारी व जानकीखेड़ा, जहानी खेड़ा होते हुए नीमसार तक जाएंगी। बीकेटी से नीमसार की दूरी लगभग पैंतालीस किमी है। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि निजी ऑपरेटर राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा तय किमी रेट से किराया निर्धारित करेंगे। अभी तक बीकेटी से नीमसार जाने के लिए लोगों को वाया सिधौली जाना पड़ता है। इसकी दूरी लगभग साठ किमी है।
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रवि गोयल,जांजगीर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में रिश्तों को शर्मसार करने वाले आरोपी देवर को पुलिस ने जेल भेज दिया है. देवर राजेन्द्र बंजारे ने अपनी ही भाभी का नहाते हुए अश्लील वीडियो बना लिया, फिर उसे ब्लैकमेल कर 6 महीने से दुष्कर्म कर रहा था. देवर अपने भाभी को धमकी भी देता था कि अगर उसने किसी को बताया तो वो उसके पति यानी अपने बड़े भाई को जान से मार देगा. अब शिकायत के बाद पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है.
पूरा मामला पामगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम मुड़पार का है, जहां पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसका देवर उसका नहाते हुए वीडियो बना लिया था. उसी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ दिसंबर 2020 से मई 2021 तक करीब 6 महीने तक जबरन दुष्कर्म किया. 6 महीने बाद पीड़िता ने हिम्मत कर अपने पति को ये बात बताई. जिसके बाद पीड़िता और उसके पति थाने पहुंचे, जहां आरोपी देवर राजेंद्र बंजारे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 376, 376(ढ), 506 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है.
जांजगीर एसडीओपी दिनेश्वरी नंद ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले पीड़िता ने थाने में अपने देवर के खिलाफ छेड़खानी की शिकायत दर्ज कराई थी, उस समय आरोपी देवर राजेंद्र बंजारे के खिलाफ 354 के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा गया था. उस समय पीड़िता ने बदनामी के डर से पूरी सच्चाई नहीं बताई थी.
एक महीने बाद जेल से छूटने के बाद फिर से मोबाइल में अश्लील वीडियो भेज कर उसे परेशान करने लगा. जिसके बाद पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ फिर से पामगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई. साथ ही पूर्व में हुई घटना के बारे में भी शिकायत की है. पीड़िता की शिकायत पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है.
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रवि गोयल,जांजगीर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में रिश्तों को शर्मसार करने वाले आरोपी देवर को पुलिस ने जेल भेज दिया है. देवर राजेन्द्र बंजारे ने अपनी ही भाभी का नहाते हुए अश्लील वीडियो बना लिया, फिर उसे ब्लैकमेल कर छः महीने से दुष्कर्म कर रहा था. देवर अपने भाभी को धमकी भी देता था कि अगर उसने किसी को बताया तो वो उसके पति यानी अपने बड़े भाई को जान से मार देगा. अब शिकायत के बाद पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है. पूरा मामला पामगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम मुड़पार का है, जहां पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसका देवर उसका नहाते हुए वीडियो बना लिया था. उसी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ दिसंबर दो हज़ार बीस से मई दो हज़ार इक्कीस तक करीब छः महीने तक जबरन दुष्कर्म किया. छः महीने बाद पीड़िता ने हिम्मत कर अपने पति को ये बात बताई. जिसके बाद पीड़िता और उसके पति थाने पहुंचे, जहां आरोपी देवर राजेंद्र बंजारे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ तीन सौ छिहत्तर, तीन सौ छिहत्तर, पाँच सौ छः के तहत मामला पंजीबद्ध किया है. जांजगीर एसडीओपी दिनेश्वरी नंद ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले पीड़िता ने थाने में अपने देवर के खिलाफ छेड़खानी की शिकायत दर्ज कराई थी, उस समय आरोपी देवर राजेंद्र बंजारे के खिलाफ तीन सौ चौवन के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा गया था. उस समय पीड़िता ने बदनामी के डर से पूरी सच्चाई नहीं बताई थी. एक महीने बाद जेल से छूटने के बाद फिर से मोबाइल में अश्लील वीडियो भेज कर उसे परेशान करने लगा. जिसके बाद पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ फिर से पामगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई. साथ ही पूर्व में हुई घटना के बारे में भी शिकायत की है. पीड़िता की शिकायत पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है.
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KFC, पिज्जा हट, टैको बेल और द हैबिट बर्गर ग्रिल हाल ही में यूनाइटेड किंगडम (UK) में रैंसमवेयर हमले का शिकार हुए हैं। इन फूड चेन्स को संचालित करने वाली कंपनी यम ब्रांड्स ने कहा है कि हमले में पूरे UK में लगभग 300 रेस्टोरेंट्स प्रभावित हुए और हमलावरों ने डाटा चुरा लिया। हालांकि, कंपनी ने ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उनका पर्सनल डाटा भी लीक हुआ है।
रैंसमवेयर हमला क्या है और इससे कैसे बचें ?
रैंसमवेयर हमले में साइबर हमलावर पीड़ित के डाटाबेस को चोरी कर उसे एनक्रिप्टेड कर देते हैं और उसे डिक्रिप्ट करने के बदले फिरौती मांगते हैं। ये हमलावर फिशिंग, स्पैम मेल या किसी सॉफ्टवेयर के माध्यम से अपने लक्ष्य का शिकार करते हैं। रैंसमवेयर हमले से बचने के लिए अपने सिस्टम को समय-समय पर अपडेट करते रहें। किसी भी विश्वसनीय एंटीवायरस एप्लीकेशन का ही उपयोग करें और समय-समय पर अपनी महत्वपूर्ण फाइलों का बैकअप जरूर लेते रहें।
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KFC, पिज्जा हट, टैको बेल और द हैबिट बर्गर ग्रिल हाल ही में यूनाइटेड किंगडम में रैंसमवेयर हमले का शिकार हुए हैं। इन फूड चेन्स को संचालित करने वाली कंपनी यम ब्रांड्स ने कहा है कि हमले में पूरे UK में लगभग तीन सौ रेस्टोरेंट्स प्रभावित हुए और हमलावरों ने डाटा चुरा लिया। हालांकि, कंपनी ने ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उनका पर्सनल डाटा भी लीक हुआ है। रैंसमवेयर हमला क्या है और इससे कैसे बचें ? रैंसमवेयर हमले में साइबर हमलावर पीड़ित के डाटाबेस को चोरी कर उसे एनक्रिप्टेड कर देते हैं और उसे डिक्रिप्ट करने के बदले फिरौती मांगते हैं। ये हमलावर फिशिंग, स्पैम मेल या किसी सॉफ्टवेयर के माध्यम से अपने लक्ष्य का शिकार करते हैं। रैंसमवेयर हमले से बचने के लिए अपने सिस्टम को समय-समय पर अपडेट करते रहें। किसी भी विश्वसनीय एंटीवायरस एप्लीकेशन का ही उपयोग करें और समय-समय पर अपनी महत्वपूर्ण फाइलों का बैकअप जरूर लेते रहें।
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Raebareli News: मोदी सरकार के नौ साल पूरा होने पर चल रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर दो दिवसीय दौरे पर रायबरेली पहुंचे हैं। रायबरेली पहुंचने से पहले उन्होंने चूरूआ बॉर्डर पर हनुमान मंदिर में दर्शन किया।
Raebareli News: मोदी सरकार के नौ साल पूरा होने पर चल रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर दो दिवसीय दौरे पर रायबरेली पहुंचे हैं। रायबरेली पहुंचने से पहले उन्होंने चूरूआ बॉर्डर पर हनुमान मंदिर में दर्शन किया। उनके साथ रायबरेली लोकसभा प्रभारी वीरेंद्र तिवारी प्रतिभा शुक्ला और पूर्व विधायक रामलाल अकेला सहित स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी थे।
मंदिर में दर्शन के बाद नरेंद्र सिंह तोमर बछरावां पहुंचे। जहां उन्होंने दयानंद पीजी कॉलेज में लाभार्थी सम्मेलन को संबोधित किया। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डार्सी के आरोपों को मिथ्या बताया है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन एक साल तक चला और शांतिपूर्वक निस्तारित हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर आरोपों में सच्चाई होती तो आंदोलन जल्दी समाप्त हो जाता। नरेंद्र तोमर ने कहा जैक डार्सी के सभी आरोप मिथ्या हैं।
दरअसल, ट्विटर पूर्व सीइओ जैक डार्सी ने आरोप लगाया है कि किसान आंदोलन के दौरान ट्विटर को शट डाउन किये जाने की धमकी मिली थी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के अकाउंड भी सस्पेंड करने का दबाव था, जो आंदोलन के पक्षधर थे। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। वहीं बछरावां में लाभार्थियों के सम्मेलन को संबोधित करने के बाद नरेंद्र सिंह तोमर एक होटल में पत्रकारों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए मोदी सरकार की जमकर तारीफ की है।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कल जीआईसी मैदान में लाभार्थियों के साथ संवाद करेंगे। यहां उनकी जनसभा होगी, जिसमें भारी संख्या में लोगों के उपस्थित होने का दावा भाजपा के कार्यकर्ताओं की तरफ से किया जा रहा है। शहर में इसकी तैयारियां जोरशोर से चल रहीं हैं।
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Raebareli News: मोदी सरकार के नौ साल पूरा होने पर चल रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर दो दिवसीय दौरे पर रायबरेली पहुंचे हैं। रायबरेली पहुंचने से पहले उन्होंने चूरूआ बॉर्डर पर हनुमान मंदिर में दर्शन किया। Raebareli News: मोदी सरकार के नौ साल पूरा होने पर चल रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर दो दिवसीय दौरे पर रायबरेली पहुंचे हैं। रायबरेली पहुंचने से पहले उन्होंने चूरूआ बॉर्डर पर हनुमान मंदिर में दर्शन किया। उनके साथ रायबरेली लोकसभा प्रभारी वीरेंद्र तिवारी प्रतिभा शुक्ला और पूर्व विधायक रामलाल अकेला सहित स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी थे। मंदिर में दर्शन के बाद नरेंद्र सिंह तोमर बछरावां पहुंचे। जहां उन्होंने दयानंद पीजी कॉलेज में लाभार्थी सम्मेलन को संबोधित किया। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डार्सी के आरोपों को मिथ्या बताया है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन एक साल तक चला और शांतिपूर्वक निस्तारित हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर आरोपों में सच्चाई होती तो आंदोलन जल्दी समाप्त हो जाता। नरेंद्र तोमर ने कहा जैक डार्सी के सभी आरोप मिथ्या हैं। दरअसल, ट्विटर पूर्व सीइओ जैक डार्सी ने आरोप लगाया है कि किसान आंदोलन के दौरान ट्विटर को शट डाउन किये जाने की धमकी मिली थी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के अकाउंड भी सस्पेंड करने का दबाव था, जो आंदोलन के पक्षधर थे। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। वहीं बछरावां में लाभार्थियों के सम्मेलन को संबोधित करने के बाद नरेंद्र सिंह तोमर एक होटल में पत्रकारों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए मोदी सरकार की जमकर तारीफ की है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कल जीआईसी मैदान में लाभार्थियों के साथ संवाद करेंगे। यहां उनकी जनसभा होगी, जिसमें भारी संख्या में लोगों के उपस्थित होने का दावा भाजपा के कार्यकर्ताओं की तरफ से किया जा रहा है। शहर में इसकी तैयारियां जोरशोर से चल रहीं हैं।
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भाकपा माओवादी के सुबोध सिंह को लातेहार पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इस हार्डकोर माओवादी की गिरफ्तारी पटना के कंकड़बाग स्थित उसके भाई के घर से हुई है. जब वह अपनी रीढ़ की हड्डी का इलाज करवा रहा था, उसी दौरान उसकी गिरफ्तारी हुई.
प्रेससवार्ता कर एसपी प्रशांत आनंद ने बताया कि सूचना मिली थी कि सारंडा में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में पहाड़ो में भागने के दौरान सुबोध सिंह गिर गया था और उसके रीढ़ की हड्डी टूट गई थी. तब किसी तरह उसका इलाज जमशेदपुर में करवा कर उसे पटना ले जाया गया था.
माओवादी सुबोध अरविंद के दस्ते का ख़ास है. वह झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में सक्रिय था. इस उग्रवादी पर झारखंड के कई जिलों में दर्जनों केस दर्ज हैं. यह बूढ़ा पहाड़ और सारंडा के जंगलों में हुई पुलिस के साथ कई मुठभेड़ में शामिल रहा है. यह माओवादी बिहार के जहानाबाद का रहने वाला है. इसकी गिरफ्तारी से माओवादियों को भारी छति हुई है. पुलिस इसकी गिरफ्तारी को बड़ी उपलब्धि मान रही है. सुबोध की गिरफ्तारी से पुलिस को माओवादियों के खिलाफ कई महत्वपूर्ण सूचनाएं भी प्राप्त हुई है.
(विकास)
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भाकपा माओवादी के सुबोध सिंह को लातेहार पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इस हार्डकोर माओवादी की गिरफ्तारी पटना के कंकड़बाग स्थित उसके भाई के घर से हुई है. जब वह अपनी रीढ़ की हड्डी का इलाज करवा रहा था, उसी दौरान उसकी गिरफ्तारी हुई. प्रेससवार्ता कर एसपी प्रशांत आनंद ने बताया कि सूचना मिली थी कि सारंडा में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में पहाड़ो में भागने के दौरान सुबोध सिंह गिर गया था और उसके रीढ़ की हड्डी टूट गई थी. तब किसी तरह उसका इलाज जमशेदपुर में करवा कर उसे पटना ले जाया गया था. माओवादी सुबोध अरविंद के दस्ते का ख़ास है. वह झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में सक्रिय था. इस उग्रवादी पर झारखंड के कई जिलों में दर्जनों केस दर्ज हैं. यह बूढ़ा पहाड़ और सारंडा के जंगलों में हुई पुलिस के साथ कई मुठभेड़ में शामिल रहा है. यह माओवादी बिहार के जहानाबाद का रहने वाला है. इसकी गिरफ्तारी से माओवादियों को भारी छति हुई है. पुलिस इसकी गिरफ्तारी को बड़ी उपलब्धि मान रही है. सुबोध की गिरफ्तारी से पुलिस को माओवादियों के खिलाफ कई महत्वपूर्ण सूचनाएं भी प्राप्त हुई है. .
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भारतीय संस्कृति का विकास.
ऐसी स्थिति में पहुँचने के बाद कबीर साहिब किसी धर्म या सम्प्रदाय से क्या समझौता करते, उसके नेताओं से या महात्माओं से क्या धुन मिलाते। वे अपने मतभेद को संयत भाषा में प्रकट नहीं करते थे। जो कुछ कहना चाहते थे साफ शब्दों में और प्रायः अपशब्दों में कह डालते थे। इसलाम के नबी और हबीब के विषय में उन्होंने इसी प्रकार अपने विचार प्रकट किये हैं। वे कहते हैं कि :इबीबी और नबी कै कामा, जितने अमल सो सबै हरामा ।
कबीर साहिब की इस मस्ती और विचार स्वतन्त्रता पर मुग्ध हो कर एक मुसलमान लेखक ने लिखा है कि 'उनको खुदा का फरजन्द कहना बजा है। वह एक कौम या मजहब न रखते थे। उनका घर दुनिया, उनके भाई बन्द बनी नवा इन्सान और उनका बाप खालिके अर्ज वो समां था।'
कबीर साहिब और इसलाम का प्रभाव : कबीर साहिब ने हिन्दुओं के वेद शास्त्र, पुराण, देव, देवियों, पंडितों और तीर्थ तथा जप, माला, तिलक, व्रत, उपवास आदि सब को निरर्थक बतलाया है परन्तु उनकी भाषा, भावना, दर्शन और दृष्टिकोण सब उपनिषदों से मिलता है और उनके धर्म या सिद्धान्त के लिये यदि किसी नाम की आवश्यकता है तो वह नाम वेदान्त ही हो सकता है। परन्तु उनका वेदान्त पन्द्रहवीं शताब्दी का वेदान्त है। मुसलमानों के हमलों के धक्कों को तथा उनके ऐकेश्वरबाद और रहस्यवाद के सबल सम्पर्क को सहने के बाद शंकर के वेदान्त ने यह स्वरूप धारण किया था जो कबीर जी के वचनों से प्रकट होता है। यह वेदान्त हिन्दू और मुसलिम विचारों का मिश्रण था परन्तु हिन्दू वेदान्त मुसलिम तत्वों को निगल कर आत्मसात् कर गया था । हिन्दू लोग मुसलमानों को तो अपने में नहीं मिला सकते थे परन्तु उनके दार्शनिक विचारों को उन्होंने अपने दर्शन में घुला मिला लिया । तो भी कबीर जी की वर्णन शैली में, उनकी उड़ान में, आध्यात्मिक मस्ती में और विचार चैचित्र्य में इसलाम का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
कबीरजी पर सूफीमत का प्रभाव : कबीरजी ने हिन्दू धर्म का सार या तत्व ग्रहण किया था। वह तत्व था वेदान्त । इसी प्रकार उन्होंने इसलाम में से सूफीमत का तत्व ग्रहण किया। वे अनुयायी किसी के नहीं हैं। जैसी उनको तरंग या मस्ती आती थी वैसी ही वाणी बोल दिया करते थे, परन्तु संस्कार उन पर वेदान्त और सूफीमत के थे। ये संस्कार उनको भाषा और विचारों में स्पष्ट हैं। वेदान्त के संस्कारों का उल्लेख करना तो अनावश्यक है, क्योंकि कबीर साहिब के वचनों में अधिकांश वेदान्त ही वेदान्त है। लेकिन सूफीमत का जो उन पर सुन्दर प्रभाव पड़ा है उसके स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। कबीर साहिब ने सूफीमत की वर्णन शैली को बड़ी खूबी और सफलता से अपनाया है। इस विषय के ग्रन्थों का अध्ययन तो कबीर साहिब ने नहीं किया था परन्तु उनकी कितने ही सूफी सन्तों से भेंट अवश्य
हुई होगी और कितने ही उनसे मिलने आया करते होंगे । इनके सम्पर्क से वे सूफीमत के तत्वों से परिचित हो गये थे और इनकी वर्णन शैली उन्होंने अपना ली थी, परन्तु उसको ऐसा अपनाया कि प्रत्यक्ष में वह भारतीय प्रतीत होने लगी। उन्होंने सूफी शरीर को भारतीय भेष में खड़ा कर दिया ।
सूफीमत की रूप रेखाः आठवीं शताब्दी में ईरान में एक नवीन विचार धारा चली । तत्व और सार से प्रेम करने वालों को तत्कालीन इसलाम और उसकी मारकाट या विजय बाढ़ से सन्तोष नहीं होता था। उनके विचार से यह धर्म नहीं, आडम्बर था और कुछ विजेताओं के स्वार्थ का साधन था। इन तत्वाभिलाषी लोगों ने अपना एक मण्डल बनाया और धर्म के असली सार पर विचार करने लगे। इन लोगों का खान-पीन और रहन-सहन अत्यन्त सादा था । वास्तव में ये साधुओं को भांति रहा करते थे। इनकी वेष-भूषा भी फकीरों की सी था । ये लोग सफेद ऊन के वस्त्र पहिनते थे, जिसको फारसी में सूफ कहते हैं । इसलिये लोग इनको सूफी कहने लगे और इनके मंडल में जो विचार निश्चित हुए या विकसित अथवा पुनर्जागृत हुए उसका नाम सूफीमत हो गया। इस मल में बंदे और खुदा का एकरस होना माना जाता है। आत्मा परमात्मा से मिलने के लिये उत्कंठित हो कर प्रस्थान करती है, मार्ग में अनेक विघ्न आते हैं परन्तु वह अनेक स्थितियों को पार करती हुई ईश्वर के सानिध्य में पहुँच कर उसमें फना हो जाती है, अर्थात् घुल मिल जाती है। तब उसको आनन्द ही आनन्द का अनुभव होने लगता है। इस अवस्था को बना कहते हैं। यह अवस्था परम साधना से जीवितावस्था में भी प्राप्त हो सकती है, परन्तु ऐसा माना है कि यावत् जीवन अथक साधना के द्वारा यह स्थिति मरणोपरान्त प्राप्त हुआ करती है। ईरान के कितने ही रहस्यवादी कवियों ने सूफी सिद्धान्तों का अपनी कविता द्वारा सरस और मधुर वर्णन किया है। इनमें अत्तार, सादी, दलालुद्दीन सूफी और हाफिज विशेष उल्लेख के योग्य हैं। यह मत विकसित, प्रौढ़ और प्रचलित हो कर ईरान से पश्चिम की ओर गया और पूर्व की ओर भी । पश्चिम की ओर बढ़ता बढ़ता यह यूनानियों के ब्रह्मवाद से जा मिला और इस सम्पर्क से जो इसका रूपान्तर हुआ वह पश्चिमीय सूफीमत कहलाया । पूर्व में इसको वेदान्त से मुलाकात करनी पड़ी । भारतीय वेदान्त लगभग ढाई हजार वर्ष पुराना था। इसका मूल वेद था । उपनिषद् काल में इसने सुन्दर पल्लवित वृक्ष का रूप धारण कर लिया था। स्वामी शंकराचार्य ने इस वृक्ष को सुडौल और व्यवस्थित करके मनोहर बना दिया था । कबीर साहिब के समय में भारतवर्ष में शांकर दर्शन के लाखों अनुयायी थे और इस विषय पर बीसियों पांडित्यपूर्ण ग्रन्थ लिखे जा चुके थे । अतः जब सूफी दर्शन भारत में आया तो यहाँ के विद्वानों को उससे चकाचौंध नहीं हुई। उन्होंने उसको उलटफेर कर देखा और डाल दिया। परन्तु सन्त लोगों पर जादू चल गया । कबीर, नानक,
रैदास, मीरा आदि भक्त कवियों ने उसके बहुत से अंश अपना लिये और उसकी वर्णन शैली का अपने काव्यों में प्रयोग किया ।
सूफीमत के सिद्धान्त और साधन - ईश्वर के दो रूप हैं- जात और सिफत । जात निर्गुण हैं और सिफत सगुण जात से सिफत उत्पन्न हो कर पुनः जात में लीन हो जाता है। मनुष्य अपने अज्ञान के कारण जात और सिफत को भिमानता है। जात की शक्ति नजूल कहलाती है और सिफत की उरूज । ये दोनों एक दूसरे में लीन हो जाती हैं। सत्य का नाम है हक्क यह एक ही है परन्तु उसका विवेचन विविध प्रकार से किया गया है। इसीलिये संसार में अनेक धर्म और -सम्प्रदाय चल पड़े हैं। 'अहद' (शब्द) ईश्वर के लिये प्रयुक्त होता है और 'बहदत ' अर्थात् एकत्व उसका मुख्य गुण माना जाता है। श्रहद बहदत से सन्तुष्ट नहीं होता । यही भारतीय सिद्धान्त है। ब्रह्म ने कहा कि 'मैं एक हूँ परन्तु अनेक होना चाहता हूँ।' एवं श्रद अपना दूसरा रूप उत्पन्न करके उससे इश्क करने लगता है। परन्तु अल्लाह का नया रूप प्रेम पथ से बहुत आगे बढ़ जाता है जिससे वह स्वयं प्रशिक हो जाता है और अल्लाह माशूक (प्रेमिका) बन जाता है। 'माशूक' अल्लाह के लिये आशिक सफी की यह तड़फन ही सूफी दर्शन का सार है। इस इश्क का पर्यचसान है सूफी का अल्लाह में फना हो जाना । यही वफा अर्थात् अनन्त और पार आनन्द की अवस्था है। इसको पार करने के लिये आशिक (सूफी) को चार मुख्य अवस्थाओं या सीढ़ियों को पार करना पड़ता है। इनको भारतीय दर्शन के शब्दों में साधनायें भी कह सकते हैं। इनके नाम हैं शरीयत, तरीकत, हकीकत और मारफत । ये स्थितियां क्रमशः एक दूसरी से कठिन होती जाती हैं परन्तु ज्यों ज्यों मनुष्य इनको पार करता है त्यों त्यों वह अपने माशूक (ईश्वर) के निकट होता जाता है। जो मनुष्य प्रथम अवस्था में है वह आदम है, अर्थात् वह साधारण मनुष्य है, जो दूसरी स्थिति में पहुँच गया वह इंसान अर्थात् ज्ञानी है। इसी प्रकार आध्यात्मिक उन्नति करता करता मनुष्य कुतुब (महात्मा) और नबी के पद पर पहुँच जाता है। फिर उसको चक्रा हासिल हो जाती है ।
कबीर साहिब के सूफी विचारः मुसलमानों का खयाल है कि अल्लाह आसमान में रहता है, अपनी बातचीत में जब ये लोग अल्लाह की ओर संकेत करते हैं तो आसमान की ओर उंगली उठाते हैं और अपना चेहरा भी ऊपर की ओर कर लेते हैं। ईसाइयों में भी ऐसा ही विश्वास है। बाइबिल में ईश्वर को आसमानी बाप कहा है। इस विश्वास का हिन्दुओं में भी बहुत प्रचार है और यह विश्वास कबीर -साहिब से पहिले ही भारत में प्रचलित हो गया था। कबीरजी को यह सीधा सादा विश्वास अच्छा लगा। शिव कैलाश में निवास करते हैं और विष्णु क्षीर सागर में, यह परम्परागत भगवद्धाम कबीर साहिब को पसन्द नहीं आाये और वे विश्वास करने लगे कि ईश्वर घासमान में निवास करता है। यदि ईश्वर सर्वव्यापी है और घट घट
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भारतीय संस्कृति का विकास. ऐसी स्थिति में पहुँचने के बाद कबीर साहिब किसी धर्म या सम्प्रदाय से क्या समझौता करते, उसके नेताओं से या महात्माओं से क्या धुन मिलाते। वे अपने मतभेद को संयत भाषा में प्रकट नहीं करते थे। जो कुछ कहना चाहते थे साफ शब्दों में और प्रायः अपशब्दों में कह डालते थे। इसलाम के नबी और हबीब के विषय में उन्होंने इसी प्रकार अपने विचार प्रकट किये हैं। वे कहते हैं कि :इबीबी और नबी कै कामा, जितने अमल सो सबै हरामा । कबीर साहिब की इस मस्ती और विचार स्वतन्त्रता पर मुग्ध हो कर एक मुसलमान लेखक ने लिखा है कि 'उनको खुदा का फरजन्द कहना बजा है। वह एक कौम या मजहब न रखते थे। उनका घर दुनिया, उनके भाई बन्द बनी नवा इन्सान और उनका बाप खालिके अर्ज वो समां था।' कबीर साहिब और इसलाम का प्रभाव : कबीर साहिब ने हिन्दुओं के वेद शास्त्र, पुराण, देव, देवियों, पंडितों और तीर्थ तथा जप, माला, तिलक, व्रत, उपवास आदि सब को निरर्थक बतलाया है परन्तु उनकी भाषा, भावना, दर्शन और दृष्टिकोण सब उपनिषदों से मिलता है और उनके धर्म या सिद्धान्त के लिये यदि किसी नाम की आवश्यकता है तो वह नाम वेदान्त ही हो सकता है। परन्तु उनका वेदान्त पन्द्रहवीं शताब्दी का वेदान्त है। मुसलमानों के हमलों के धक्कों को तथा उनके ऐकेश्वरबाद और रहस्यवाद के सबल सम्पर्क को सहने के बाद शंकर के वेदान्त ने यह स्वरूप धारण किया था जो कबीर जी के वचनों से प्रकट होता है। यह वेदान्त हिन्दू और मुसलिम विचारों का मिश्रण था परन्तु हिन्दू वेदान्त मुसलिम तत्वों को निगल कर आत्मसात् कर गया था । हिन्दू लोग मुसलमानों को तो अपने में नहीं मिला सकते थे परन्तु उनके दार्शनिक विचारों को उन्होंने अपने दर्शन में घुला मिला लिया । तो भी कबीर जी की वर्णन शैली में, उनकी उड़ान में, आध्यात्मिक मस्ती में और विचार चैचित्र्य में इसलाम का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। कबीरजी पर सूफीमत का प्रभाव : कबीरजी ने हिन्दू धर्म का सार या तत्व ग्रहण किया था। वह तत्व था वेदान्त । इसी प्रकार उन्होंने इसलाम में से सूफीमत का तत्व ग्रहण किया। वे अनुयायी किसी के नहीं हैं। जैसी उनको तरंग या मस्ती आती थी वैसी ही वाणी बोल दिया करते थे, परन्तु संस्कार उन पर वेदान्त और सूफीमत के थे। ये संस्कार उनको भाषा और विचारों में स्पष्ट हैं। वेदान्त के संस्कारों का उल्लेख करना तो अनावश्यक है, क्योंकि कबीर साहिब के वचनों में अधिकांश वेदान्त ही वेदान्त है। लेकिन सूफीमत का जो उन पर सुन्दर प्रभाव पड़ा है उसके स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। कबीर साहिब ने सूफीमत की वर्णन शैली को बड़ी खूबी और सफलता से अपनाया है। इस विषय के ग्रन्थों का अध्ययन तो कबीर साहिब ने नहीं किया था परन्तु उनकी कितने ही सूफी सन्तों से भेंट अवश्य हुई होगी और कितने ही उनसे मिलने आया करते होंगे । इनके सम्पर्क से वे सूफीमत के तत्वों से परिचित हो गये थे और इनकी वर्णन शैली उन्होंने अपना ली थी, परन्तु उसको ऐसा अपनाया कि प्रत्यक्ष में वह भारतीय प्रतीत होने लगी। उन्होंने सूफी शरीर को भारतीय भेष में खड़ा कर दिया । सूफीमत की रूप रेखाः आठवीं शताब्दी में ईरान में एक नवीन विचार धारा चली । तत्व और सार से प्रेम करने वालों को तत्कालीन इसलाम और उसकी मारकाट या विजय बाढ़ से सन्तोष नहीं होता था। उनके विचार से यह धर्म नहीं, आडम्बर था और कुछ विजेताओं के स्वार्थ का साधन था। इन तत्वाभिलाषी लोगों ने अपना एक मण्डल बनाया और धर्म के असली सार पर विचार करने लगे। इन लोगों का खान-पीन और रहन-सहन अत्यन्त सादा था । वास्तव में ये साधुओं को भांति रहा करते थे। इनकी वेष-भूषा भी फकीरों की सी था । ये लोग सफेद ऊन के वस्त्र पहिनते थे, जिसको फारसी में सूफ कहते हैं । इसलिये लोग इनको सूफी कहने लगे और इनके मंडल में जो विचार निश्चित हुए या विकसित अथवा पुनर्जागृत हुए उसका नाम सूफीमत हो गया। इस मल में बंदे और खुदा का एकरस होना माना जाता है। आत्मा परमात्मा से मिलने के लिये उत्कंठित हो कर प्रस्थान करती है, मार्ग में अनेक विघ्न आते हैं परन्तु वह अनेक स्थितियों को पार करती हुई ईश्वर के सानिध्य में पहुँच कर उसमें फना हो जाती है, अर्थात् घुल मिल जाती है। तब उसको आनन्द ही आनन्द का अनुभव होने लगता है। इस अवस्था को बना कहते हैं। यह अवस्था परम साधना से जीवितावस्था में भी प्राप्त हो सकती है, परन्तु ऐसा माना है कि यावत् जीवन अथक साधना के द्वारा यह स्थिति मरणोपरान्त प्राप्त हुआ करती है। ईरान के कितने ही रहस्यवादी कवियों ने सूफी सिद्धान्तों का अपनी कविता द्वारा सरस और मधुर वर्णन किया है। इनमें अत्तार, सादी, दलालुद्दीन सूफी और हाफिज विशेष उल्लेख के योग्य हैं। यह मत विकसित, प्रौढ़ और प्रचलित हो कर ईरान से पश्चिम की ओर गया और पूर्व की ओर भी । पश्चिम की ओर बढ़ता बढ़ता यह यूनानियों के ब्रह्मवाद से जा मिला और इस सम्पर्क से जो इसका रूपान्तर हुआ वह पश्चिमीय सूफीमत कहलाया । पूर्व में इसको वेदान्त से मुलाकात करनी पड़ी । भारतीय वेदान्त लगभग ढाई हजार वर्ष पुराना था। इसका मूल वेद था । उपनिषद् काल में इसने सुन्दर पल्लवित वृक्ष का रूप धारण कर लिया था। स्वामी शंकराचार्य ने इस वृक्ष को सुडौल और व्यवस्थित करके मनोहर बना दिया था । कबीर साहिब के समय में भारतवर्ष में शांकर दर्शन के लाखों अनुयायी थे और इस विषय पर बीसियों पांडित्यपूर्ण ग्रन्थ लिखे जा चुके थे । अतः जब सूफी दर्शन भारत में आया तो यहाँ के विद्वानों को उससे चकाचौंध नहीं हुई। उन्होंने उसको उलटफेर कर देखा और डाल दिया। परन्तु सन्त लोगों पर जादू चल गया । कबीर, नानक, रैदास, मीरा आदि भक्त कवियों ने उसके बहुत से अंश अपना लिये और उसकी वर्णन शैली का अपने काव्यों में प्रयोग किया । सूफीमत के सिद्धान्त और साधन - ईश्वर के दो रूप हैं- जात और सिफत । जात निर्गुण हैं और सिफत सगुण जात से सिफत उत्पन्न हो कर पुनः जात में लीन हो जाता है। मनुष्य अपने अज्ञान के कारण जात और सिफत को भिमानता है। जात की शक्ति नजूल कहलाती है और सिफत की उरूज । ये दोनों एक दूसरे में लीन हो जाती हैं। सत्य का नाम है हक्क यह एक ही है परन्तु उसका विवेचन विविध प्रकार से किया गया है। इसीलिये संसार में अनेक धर्म और -सम्प्रदाय चल पड़े हैं। 'अहद' ईश्वर के लिये प्रयुक्त होता है और 'बहदत ' अर्थात् एकत्व उसका मुख्य गुण माना जाता है। श्रहद बहदत से सन्तुष्ट नहीं होता । यही भारतीय सिद्धान्त है। ब्रह्म ने कहा कि 'मैं एक हूँ परन्तु अनेक होना चाहता हूँ।' एवं श्रद अपना दूसरा रूप उत्पन्न करके उससे इश्क करने लगता है। परन्तु अल्लाह का नया रूप प्रेम पथ से बहुत आगे बढ़ जाता है जिससे वह स्वयं प्रशिक हो जाता है और अल्लाह माशूक बन जाता है। 'माशूक' अल्लाह के लिये आशिक सफी की यह तड़फन ही सूफी दर्शन का सार है। इस इश्क का पर्यचसान है सूफी का अल्लाह में फना हो जाना । यही वफा अर्थात् अनन्त और पार आनन्द की अवस्था है। इसको पार करने के लिये आशिक को चार मुख्य अवस्थाओं या सीढ़ियों को पार करना पड़ता है। इनको भारतीय दर्शन के शब्दों में साधनायें भी कह सकते हैं। इनके नाम हैं शरीयत, तरीकत, हकीकत और मारफत । ये स्थितियां क्रमशः एक दूसरी से कठिन होती जाती हैं परन्तु ज्यों ज्यों मनुष्य इनको पार करता है त्यों त्यों वह अपने माशूक के निकट होता जाता है। जो मनुष्य प्रथम अवस्था में है वह आदम है, अर्थात् वह साधारण मनुष्य है, जो दूसरी स्थिति में पहुँच गया वह इंसान अर्थात् ज्ञानी है। इसी प्रकार आध्यात्मिक उन्नति करता करता मनुष्य कुतुब और नबी के पद पर पहुँच जाता है। फिर उसको चक्रा हासिल हो जाती है । कबीर साहिब के सूफी विचारः मुसलमानों का खयाल है कि अल्लाह आसमान में रहता है, अपनी बातचीत में जब ये लोग अल्लाह की ओर संकेत करते हैं तो आसमान की ओर उंगली उठाते हैं और अपना चेहरा भी ऊपर की ओर कर लेते हैं। ईसाइयों में भी ऐसा ही विश्वास है। बाइबिल में ईश्वर को आसमानी बाप कहा है। इस विश्वास का हिन्दुओं में भी बहुत प्रचार है और यह विश्वास कबीर -साहिब से पहिले ही भारत में प्रचलित हो गया था। कबीरजी को यह सीधा सादा विश्वास अच्छा लगा। शिव कैलाश में निवास करते हैं और विष्णु क्षीर सागर में, यह परम्परागत भगवद्धाम कबीर साहिब को पसन्द नहीं आाये और वे विश्वास करने लगे कि ईश्वर घासमान में निवास करता है। यदि ईश्वर सर्वव्यापी है और घट घट
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कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गांधी रविवार को पटना के गांधी मैदान में जन आकांक्षा रैली को संबोधित करेंगे। लंबे समय बार बिहार में कांग्रेस अपने बल पर बड़ी रैली कर रही है। इसके माध्यम से कांग्रेस के साथ विपक्षी महागठबंधन का शक्ति प्रदर्शन हो रहा है। रैली को लेकर गांधी मैदान में समर्थकों की भारी भीड़ जुट गई है। राहुल गांधी इस रैली में तेजस्वी यादव के साथ पहुंच चुके हैं। रैली के मंच पर कांग्रेस शासित तीन राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं।
रैली को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने राहुल को पीएम मैटेरियल तथा नरेंद्र मोदी को झूठ की फैक्ट्री बताया।
रैली को एक-एक कर विभिन्न नेता संबोधित कर रहे हैं।
रैली को संबोधित करते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तथा बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके विशेष पैकेज की बाबत पूछा। उन्होंने केंद्र व राज्य की नीतीश सरकार से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने को लेकर भी सवाल किए। कहा कि मोदी ने बिहार को ठगने का काम किया है, लेकिन बिहार के लोग उड़ती चिडि़या को हल्दी लगाने का काम भी जानते हैं। उन्होंने पीएम मोदी को झूठ की फैक्ट्री और आरएसएस उनका रिटेलर बताया।
तेजस्वी ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार विरोधियों के पीछे सीबीआइ लगाती है। उन्होंने कहा कि मोदी भले ही लालू प्रसाद यादव के पीछे सीबीआइ, आयकर व इडी को लगा दें( लेकिन लालू को लोगों को दिलों से नहीं निकाल पाएंगे।
तेजस्वी ने राहुल गांधी को पीएम मैटेरियल भी बताया। कहा कि उनमें प्रधानमंत्री बनने की योग्यता है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वह सहयोगियों को साथ लेकर चले।
उन्होंने राहुल के प्रधानमंत्री बनने पर बिहार को उसका अधिकार दिलाने का आग्रह भी किया।
कांग्रेस करीब 30 साल बाद पटना के गांधी मैदान में अपने बल पर बड़ी रैली कर रही है। इससे पहले 1989 में गांधी मैदान में उनके पिता राजीव गांधी ने भी ने बतौर कांग्रेस अध्यक्ष रैली की थी।
कांग्रेस की जन आकांक्षा रैली में बिहार का विपक्ष एकजुट दिख रहा है। रैली के मंच पर बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्तिसिंह गोहिल व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा व सभी प्रभारी अध्यक्ष पहुंच चुके हैं। मंच पर रंजीता रंजन, तारिक अनवर, सदानंद सिंह, मीरा कुमार, शकील अहमद आदि पचुंच चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री व हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) सुप्रीमो जीतनराम मांझी, लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) प्रमुख शरद यादव तथा विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) प्रमुख मुकेश साहनी भी हैं। पूर्व मंत्री व रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा बीते दिन पुलिस लाठीचार्ज में घायल होने के कारण नहीं आ पाए हैं।
वाम दलों में भाकपा के सत्यनारायण सिंह, माकपा के अवधेश कुमार और भाकपा-माले के कुणाल भी रैली में शिरकत कर रहे हैं। रैली में मोकामा के निर्दलीय विधायक अनंत सिंह भी समथकों के साथ मौजूद हैं।
राहुल की इस रैली में कांग्रेस ने पूरी ताकत झाेंक दी है। रैली में तीन राज्यों के मुख्यमंत्री भी शिरकत कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी रैली में शामिल होने राहुल गांधी के साथ ही पहुंचे। तीनों मुख्यमंत्री मंच पर पहुंच चुके हैं।
इस बीच रैली को लेकर प्रशासन ने एहतियाती उपाय किए हैं। रविवार की सुबह छह बजे से रैली के समाप्त होने तक पटना के डाक बंगला चौराहा से गांधी मैदान तक सामान्य वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। रामगुलाम चौक से जेपी गोलंबर तक भी वाहन परिचालन पर रोक लगी हुई है। पटना में वेटनरी कॉलेज से जीरो माइल तक बनाए गए 17 पार्किंग स्थलों पर 3300 से अधिक वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है। रैली में आने वालों की व्यवस्था निर्दलीय विधायक अनंत सिंह देख रहे हैं। वे कांग्रेस के टिकट पर मुंगेर से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।
रैली को लेकर पटना की सड़कों को बैनरों-पोस्टरों से पाट दिया गया है। समर्थकों के विविध रूप देखने को मिल रहे हैं। कोई हाथी पर अा रहा हैतो कोई राम-लक्ष्मण व हनुमान का रूप धर केंद्र सरकार पर तंज कसते बैनर-पोस्टर धारण किए है।
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कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गांधी रविवार को पटना के गांधी मैदान में जन आकांक्षा रैली को संबोधित करेंगे। लंबे समय बार बिहार में कांग्रेस अपने बल पर बड़ी रैली कर रही है। इसके माध्यम से कांग्रेस के साथ विपक्षी महागठबंधन का शक्ति प्रदर्शन हो रहा है। रैली को लेकर गांधी मैदान में समर्थकों की भारी भीड़ जुट गई है। राहुल गांधी इस रैली में तेजस्वी यादव के साथ पहुंच चुके हैं। रैली के मंच पर कांग्रेस शासित तीन राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। रैली को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने राहुल को पीएम मैटेरियल तथा नरेंद्र मोदी को झूठ की फैक्ट्री बताया। रैली को एक-एक कर विभिन्न नेता संबोधित कर रहे हैं। रैली को संबोधित करते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तथा बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके विशेष पैकेज की बाबत पूछा। उन्होंने केंद्र व राज्य की नीतीश सरकार से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने को लेकर भी सवाल किए। कहा कि मोदी ने बिहार को ठगने का काम किया है, लेकिन बिहार के लोग उड़ती चिडि़या को हल्दी लगाने का काम भी जानते हैं। उन्होंने पीएम मोदी को झूठ की फैक्ट्री और आरएसएस उनका रिटेलर बताया। तेजस्वी ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार विरोधियों के पीछे सीबीआइ लगाती है। उन्होंने कहा कि मोदी भले ही लालू प्रसाद यादव के पीछे सीबीआइ, आयकर व इडी को लगा दें सुप्रीमो जीतनराम मांझी, लोकतांत्रिक जनता दल प्रमुख शरद यादव तथा विकासशील इंसान पार्टी प्रमुख मुकेश साहनी भी हैं। पूर्व मंत्री व रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा बीते दिन पुलिस लाठीचार्ज में घायल होने के कारण नहीं आ पाए हैं। वाम दलों में भाकपा के सत्यनारायण सिंह, माकपा के अवधेश कुमार और भाकपा-माले के कुणाल भी रैली में शिरकत कर रहे हैं। रैली में मोकामा के निर्दलीय विधायक अनंत सिंह भी समथकों के साथ मौजूद हैं। राहुल की इस रैली में कांग्रेस ने पूरी ताकत झाेंक दी है। रैली में तीन राज्यों के मुख्यमंत्री भी शिरकत कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी रैली में शामिल होने राहुल गांधी के साथ ही पहुंचे। तीनों मुख्यमंत्री मंच पर पहुंच चुके हैं। इस बीच रैली को लेकर प्रशासन ने एहतियाती उपाय किए हैं। रविवार की सुबह छह बजे से रैली के समाप्त होने तक पटना के डाक बंगला चौराहा से गांधी मैदान तक सामान्य वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। रामगुलाम चौक से जेपी गोलंबर तक भी वाहन परिचालन पर रोक लगी हुई है। पटना में वेटनरी कॉलेज से जीरो माइल तक बनाए गए सत्रह पार्किंग स्थलों पर तीन हज़ार तीन सौ से अधिक वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है। रैली में आने वालों की व्यवस्था निर्दलीय विधायक अनंत सिंह देख रहे हैं। वे कांग्रेस के टिकट पर मुंगेर से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। रैली को लेकर पटना की सड़कों को बैनरों-पोस्टरों से पाट दिया गया है। समर्थकों के विविध रूप देखने को मिल रहे हैं। कोई हाथी पर अा रहा हैतो कोई राम-लक्ष्मण व हनुमान का रूप धर केंद्र सरकार पर तंज कसते बैनर-पोस्टर धारण किए है।
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इसके फलस्वरूप अलग-अलग व्यक्तियों के बीच सामाजिक सम्बन्धों की प्रकृति हो समाज को पनपाती और उसे एक विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती है। व्यक्तियों का स्वमाय जिस प्रकार का होगा, उसी के अनुरूप उनमें अन्त क्रियाएँ होंगी, और अन् क्रियाएँ ही सामाजिक सम्बन्ध के एक विशिष्ट स्वरूप को रूप देंगी। समाज को प्रकृति इन्हीं सामाजिक सम्बन्धों को प्रकृति के आधार पर विकसित होगी । अतः समाज के स्वभाव की व्याख्या व्यक्ति के स्वभाव के अनुसार ही की जानी चाहिये । व्यक्ति मुख्य है, समाज गौण
(2) द्वितीय मत : समूहवादी दृष्टिकोण (Second View : Group Approach)-दूसरी ओर, जैसा कि थी किसवर्ग ने लिखा है, अन्य विचारकों का एक दल है जो यह सोचता है कि बजाय इसके कि किसी समूह की प्रकृति को उसके निर्माण करने वाले व्यक्तियों के सन्दर्भ मे समझा जाय, व्यक्तियों को ही उनके सामाजिक समूह के सन्दर्भ मे समझा जा सकता है। इस मत के प्रवर्तक अपना त देते हैं कि व्यक्ति अपने स्वभाव के लिये उस सामाजिक या सामूहिक पर्यावरण का ऋणी है, जिसमें वह जन्म लेकर बड़ा होता है। यह समाज या समूह जन्म से मृत्यु तक निरन्तर व्यक्ति को प्रभावित करता रहता है। समाज का अपना एक इतिहास होता है। उसको अपनी कुछ प्रयाएँ, परम्पराएँ, आदर्श, मूल्य आदि भी होते हैं । ये सभी मिलकर उस सामाजिक पर्यावरण को सृष्टि करते हैं, जो व्यक्ति के व्यक्तित्क की रूपरेखा बनाता है। अतः समाज से पृथक्करके व्यक्ति के स्वभाव को समझा नहीं जा सकता । समूह-मस्तिष्क की धारणा इसी दृष्टिकोण की उपज है ।
समालोचना : दोनों ही दृष्टिकोण दोषपूर्ण हैं (Criticism: Both the Views are Defective) श्री गिनायर्ग (Ginsberg) के अनुसार, उपर्युक्त दोनों ही दृष्टिकोणों के विरुद्ध गम्भीर आक्षेप किये जा खरते हैं । "पहला मत व्यक्ति को अनुचित रूप से पृथक् करके देखता है, और इस अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथ्य को महत्व नहीं देता कि ज्यो ही कोई समूह थोड़ा स्थायी होता है, और उसके अन्दर नियमित और मान्यता प्राप्त संस्थाओं तथा परम्परा का विकास होता है, त्यों हो उसको कुछ अपनी विशेषताएँ उमर बाती है। ये विशेषतायें व्यक्तियों की अनुभूतियों और विचारों पर असर डालने और उनकी क्रियायों को ढालने लगती है। अतः मह कहा जा सकता है कि व्यक्तियों की तुलना में, किसी सीमा तक, समूह का अपना एक अलग जीवन और अपना एक अलग बरित्र होना है।"s
दूसरे भत में, यो गिन्सबर्त ने लिखा है, "यद्यपि सच्चाई का एक यश अंश मौजूद है. फिर भी इसको जिस तरीके से पेश किया गया है, उससे व्यक्ति 'तुन्छ' पडता दोखता है। इसके अतिरिक्त इस मत के विरुद्ध यह आपति भी की जा सकती है कि सामाजिक समूहों की एकता को किस रूप में समझा जाय, इस बारे में कोई वैज्ञानिक इस मत के प्रवर्तकों ने प्रस्तुत नहीं की है !"
उपर्युक्त दो विरोधी मतों के आधार पर एक निश्चित निष्पर्ष निकालते हुए भी गिन्सबने बागे लिखा है-"सच बात तो यह है कि जिस विरोध की रूपरेखा हुमने ऊपर प्रस्तुत की है, वह मुठा विरोध है, और व्यक्ति व समाज की प्रकृति को एक-दूसरे से पक करके देखने का फल है। किसी सामाजिक समूह की जो एकता होती है, उसका स्पष्टीकरण उसकी इकाइयों को प्रकृति से नहीं हो सकता, क्योंकि अपने सामाजिक समूह से अलग कर दिये जाने पर उन इकाइयों का कोई अस्तित्व ही नहीं रह जाता। जैसे पहले और बाद में उनका देर बनवा
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इसके फलस्वरूप अलग-अलग व्यक्तियों के बीच सामाजिक सम्बन्धों की प्रकृति हो समाज को पनपाती और उसे एक विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती है। व्यक्तियों का स्वमाय जिस प्रकार का होगा, उसी के अनुरूप उनमें अन्त क्रियाएँ होंगी, और अन् क्रियाएँ ही सामाजिक सम्बन्ध के एक विशिष्ट स्वरूप को रूप देंगी। समाज को प्रकृति इन्हीं सामाजिक सम्बन्धों को प्रकृति के आधार पर विकसित होगी । अतः समाज के स्वभाव की व्याख्या व्यक्ति के स्वभाव के अनुसार ही की जानी चाहिये । व्यक्ति मुख्य है, समाज गौण द्वितीय मत : समूहवादी दृष्टिकोण -दूसरी ओर, जैसा कि थी किसवर्ग ने लिखा है, अन्य विचारकों का एक दल है जो यह सोचता है कि बजाय इसके कि किसी समूह की प्रकृति को उसके निर्माण करने वाले व्यक्तियों के सन्दर्भ मे समझा जाय, व्यक्तियों को ही उनके सामाजिक समूह के सन्दर्भ मे समझा जा सकता है। इस मत के प्रवर्तक अपना त देते हैं कि व्यक्ति अपने स्वभाव के लिये उस सामाजिक या सामूहिक पर्यावरण का ऋणी है, जिसमें वह जन्म लेकर बड़ा होता है। यह समाज या समूह जन्म से मृत्यु तक निरन्तर व्यक्ति को प्रभावित करता रहता है। समाज का अपना एक इतिहास होता है। उसको अपनी कुछ प्रयाएँ, परम्पराएँ, आदर्श, मूल्य आदि भी होते हैं । ये सभी मिलकर उस सामाजिक पर्यावरण को सृष्टि करते हैं, जो व्यक्ति के व्यक्तित्क की रूपरेखा बनाता है। अतः समाज से पृथक्करके व्यक्ति के स्वभाव को समझा नहीं जा सकता । समूह-मस्तिष्क की धारणा इसी दृष्टिकोण की उपज है । समालोचना : दोनों ही दृष्टिकोण दोषपूर्ण हैं श्री गिनायर्ग के अनुसार, उपर्युक्त दोनों ही दृष्टिकोणों के विरुद्ध गम्भीर आक्षेप किये जा खरते हैं । "पहला मत व्यक्ति को अनुचित रूप से पृथक् करके देखता है, और इस अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथ्य को महत्व नहीं देता कि ज्यो ही कोई समूह थोड़ा स्थायी होता है, और उसके अन्दर नियमित और मान्यता प्राप्त संस्थाओं तथा परम्परा का विकास होता है, त्यों हो उसको कुछ अपनी विशेषताएँ उमर बाती है। ये विशेषतायें व्यक्तियों की अनुभूतियों और विचारों पर असर डालने और उनकी क्रियायों को ढालने लगती है। अतः मह कहा जा सकता है कि व्यक्तियों की तुलना में, किसी सीमा तक, समूह का अपना एक अलग जीवन और अपना एक अलग बरित्र होना है।"s दूसरे भत में, यो गिन्सबर्त ने लिखा है, "यद्यपि सच्चाई का एक यश अंश मौजूद है. फिर भी इसको जिस तरीके से पेश किया गया है, उससे व्यक्ति 'तुन्छ' पडता दोखता है। इसके अतिरिक्त इस मत के विरुद्ध यह आपति भी की जा सकती है कि सामाजिक समूहों की एकता को किस रूप में समझा जाय, इस बारे में कोई वैज्ञानिक इस मत के प्रवर्तकों ने प्रस्तुत नहीं की है !" उपर्युक्त दो विरोधी मतों के आधार पर एक निश्चित निष्पर्ष निकालते हुए भी गिन्सबने बागे लिखा है-"सच बात तो यह है कि जिस विरोध की रूपरेखा हुमने ऊपर प्रस्तुत की है, वह मुठा विरोध है, और व्यक्ति व समाज की प्रकृति को एक-दूसरे से पक करके देखने का फल है। किसी सामाजिक समूह की जो एकता होती है, उसका स्पष्टीकरण उसकी इकाइयों को प्रकृति से नहीं हो सकता, क्योंकि अपने सामाजिक समूह से अलग कर दिये जाने पर उन इकाइयों का कोई अस्तित्व ही नहीं रह जाता। जैसे पहले और बाद में उनका देर बनवा
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विपक्षी पार्टियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था. केंद्र सरकार पर हमला था और सुप्रीम कोर्ट से कोई एक्शन लेने की मांग हुई थी. लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कोई सुनवाई नहीं करने वाला है. विपक्षी पार्टियों को अपनी याचिका वापस लेनी पड़ गई है.
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विपक्षी पार्टियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था. केंद्र सरकार पर हमला था और सुप्रीम कोर्ट से कोई एक्शन लेने की मांग हुई थी. लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कोई सुनवाई नहीं करने वाला है. विपक्षी पार्टियों को अपनी याचिका वापस लेनी पड़ गई है.
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चरम अर्थ उपलब्ध करना चाहते हैं। रति > शृंगार के प्रति दिनकर की अभिव्यक्ति किस रूप में अभिव्यक्त हुई है ? Classical काव्य-धारणा शृंगार की अभिव्यक्ति तृप्ति के धरातल पर करती है। जो तृप्त होता है वह संतुलित होता है। वह सदैव काम भाव से पीड़ित होकर अन्य कार्यो को बाधित नहीं करता । Romantic धारणा काम, शृंगार की उढाम अभिव्यक्ति तो करती है पर अतृप्त रहती है। Romantic काव्य में अतृप्ति की व्यंजना होती है । दिनकर के अनुसार काम की अतृप्ति की व्यंजना स्वाभाविक है और दिनकर उसके विरुद्ध थे । " यौन भावनाओं के सम्बन्ध में भी मनोवैज्ञानिको का कहना है कि उनमें से अधिकांश कवि अतृप्त वासना से पीड़ित थे" (चक्रवाल : भूमिका, पृ० १३ ) ।
उर्वशी जितनी बार संवाद बोलती है उतनी काम की तीव्रता, सघनता बड़ी हे । उसके संवादों से ऐसा लगता है कि वह अतृप्त है और अपनी काम-भावना को तृप्त करना चाहती है --
"अतिक्रमण सुख की तरंग, तन के उद्वेलित मधु का ? तो जगा रहे मुझमें फिर उसी शीत महिमा को, जिसे टॉगकर पारिजात द्रुम की अकम्प टहनी में मैं चपलोष्ण मानवी-सी भू पर जीने आयी हूँ ।
पर, मैं बाधक नहीं, जहाँ भी रहो, भूमि या नभ में वक्षस्थल पर, इसी भाँति, मेरा कपोल रहने दो कसे रहो, बस, इसी भाँति उर-पीड़क आलिंगन में और जलाते रहो अधर-पुट को कठोर चुम्बन से । " इस पूरे संबाद में आवेग के साथ सम्पृक्ति को व्यंजित किया गया है । यह सम्पृक्ति सघन है और इसमें पर्याप्त मांसलता है। इसमें वासना की उद्दाम और सघन अनुभूति का चित्रण है । उपरोक्त पंक्तियों को पढ़कर 'कामायनी' के वासना-सगँ की स्मृति सहज ही मानस पटल पर उभर आती है। उर्वशी के पाठ से हमारे सामने क्या बात आती है ?
जहाँ"रक्त बुद्धि से अधिक बली है और अधिक ज्ञानी भी, क्योंकि बुद्धि सोचती और शोणित अनुभव करता है।
या वासक-सज्जा कोई फूलों के कुंज भवन में
पथ जोहती हुई, संकेत स्थल सूचित करने को खड़ी समुत्सुक पद्मरागमणि-नूपुर बजा रही है।"
उर्वशी-पुरुरवा काम भाव को तृप्त अथवा अतृप्ति की उद्दाम अभिव्यक्ति कर रहे है । यह शृंगार की अतृप्ति की कविता है । कविता में शृंगार की एक झनझनाहट हो रही है
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चरम अर्थ उपलब्ध करना चाहते हैं। रति > शृंगार के प्रति दिनकर की अभिव्यक्ति किस रूप में अभिव्यक्त हुई है ? Classical काव्य-धारणा शृंगार की अभिव्यक्ति तृप्ति के धरातल पर करती है। जो तृप्त होता है वह संतुलित होता है। वह सदैव काम भाव से पीड़ित होकर अन्य कार्यो को बाधित नहीं करता । Romantic धारणा काम, शृंगार की उढाम अभिव्यक्ति तो करती है पर अतृप्त रहती है। Romantic काव्य में अतृप्ति की व्यंजना होती है । दिनकर के अनुसार काम की अतृप्ति की व्यंजना स्वाभाविक है और दिनकर उसके विरुद्ध थे । " यौन भावनाओं के सम्बन्ध में भी मनोवैज्ञानिको का कहना है कि उनमें से अधिकांश कवि अतृप्त वासना से पीड़ित थे" । उर्वशी जितनी बार संवाद बोलती है उतनी काम की तीव्रता, सघनता बड़ी हे । उसके संवादों से ऐसा लगता है कि वह अतृप्त है और अपनी काम-भावना को तृप्त करना चाहती है -- "अतिक्रमण सुख की तरंग, तन के उद्वेलित मधु का ? तो जगा रहे मुझमें फिर उसी शीत महिमा को, जिसे टॉगकर पारिजात द्रुम की अकम्प टहनी में मैं चपलोष्ण मानवी-सी भू पर जीने आयी हूँ । पर, मैं बाधक नहीं, जहाँ भी रहो, भूमि या नभ में वक्षस्थल पर, इसी भाँति, मेरा कपोल रहने दो कसे रहो, बस, इसी भाँति उर-पीड़क आलिंगन में और जलाते रहो अधर-पुट को कठोर चुम्बन से । " इस पूरे संबाद में आवेग के साथ सम्पृक्ति को व्यंजित किया गया है । यह सम्पृक्ति सघन है और इसमें पर्याप्त मांसलता है। इसमें वासना की उद्दाम और सघन अनुभूति का चित्रण है । उपरोक्त पंक्तियों को पढ़कर 'कामायनी' के वासना-सगँ की स्मृति सहज ही मानस पटल पर उभर आती है। उर्वशी के पाठ से हमारे सामने क्या बात आती है ? जहाँ"रक्त बुद्धि से अधिक बली है और अधिक ज्ञानी भी, क्योंकि बुद्धि सोचती और शोणित अनुभव करता है। या वासक-सज्जा कोई फूलों के कुंज भवन में पथ जोहती हुई, संकेत स्थल सूचित करने को खड़ी समुत्सुक पद्मरागमणि-नूपुर बजा रही है।" उर्वशी-पुरुरवा काम भाव को तृप्त अथवा अतृप्ति की उद्दाम अभिव्यक्ति कर रहे है । यह शृंगार की अतृप्ति की कविता है । कविता में शृंगार की एक झनझनाहट हो रही है
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गुड़गांव, (ब्यूरो): सोमवार को जिला नगर योजनाकार विभाग द्वारा पटौछी क्षेत्र में विशाल विध्वंस अभियान चलाया गया। जिसमें सुबह से दोपहर तक चलाए गए अभियान के दौरान 8 एकड में बने निर्माण को ध्वसत करा कर जमीन मुक्त करा ली गई। तोडफोड अभियान में ड्यूटी मजिस्ट्रेट जीमएमडीए के एफटी ओपी मलिक द्वारा किया गया।
गुड़गांव की खबरों के लिए इस लिंक https://www. facebook. com/KesariGurugram पर क्लिक करें।
ज्ञात हो कि पटौदी थाना क्षेत्र अर्न्तगत भारी पुलिस बल के सहयोग से यह कार्रवाई की गई। पटौदी शहरी क्षेत्र के राजस्व सम्पदा के तहत आने वाले ग्राम पटौदी, नरहेरा व उछा माजरा में यह अभियान चलाया गया। जिसमें सबसे पहले 5 एकड क्षेत्र में बने नवनिर्मित अनाधिकृत कालोनी को घ्वस्त किया गया। जिसमें 16 डीपीसी, सीमेंट की बाउंड्री, व कच्ची सडक का बनाया गया पूरा नेटवर्क उखाड दिया गया। इसके बाद गांव नरहेरा के 2 एकड़ बने 4 डीपीसी, 3 सीमांकन पत्थर व कच्ची सडक को ध्वस्त कर दिया गया। तीसरी कार्रवाई बिलासपुर-पटौदी रोड स्थित ग्राम उंचा माजरा के राजस्व सम्पदा के तहत बने नवनिर्मित अनाधिकृत ढांचों/दुकानों को तोड़ा गया।
देर तक चली इस कार्रवाई को देखने के लिए बडी संख्या में स्थानीय व दूर दराज से आए लोगों की भीड लग गई। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए बडी संख्या में स्थानीय पुलिस बल तैनात रहा। विभाग की ओर से इस कार्रवाई के दौरान डीटीपीई मनीष यादव, जेई आनंद, एफटी प्रशांत सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कार्रवाई पूरी होने के बाद लोगों को अपने घरों के दरवाजें, खिडकियां व अन्य सामानों को एकित्रत करते देखा गया। डीटीपीई मनीष यादव ने एक बार फिर से लोगों को हिदायत देते हुए कहा कि वे अपने मेहनत की कमाई का अवैध कालोनियों में निवेश ना करें। क्योकि सरकार के निर्देशानुसार जिले में किसी भी तरह के अवैध कालोनी काटने व उसे विकसित नही होने दिया जाएगा।
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गुड़गांव, : सोमवार को जिला नगर योजनाकार विभाग द्वारा पटौछी क्षेत्र में विशाल विध्वंस अभियान चलाया गया। जिसमें सुबह से दोपहर तक चलाए गए अभियान के दौरान आठ एकड में बने निर्माण को ध्वसत करा कर जमीन मुक्त करा ली गई। तोडफोड अभियान में ड्यूटी मजिस्ट्रेट जीमएमडीए के एफटी ओपी मलिक द्वारा किया गया। गुड़गांव की खबरों के लिए इस लिंक https://www. facebook. com/KesariGurugram पर क्लिक करें। ज्ञात हो कि पटौदी थाना क्षेत्र अर्न्तगत भारी पुलिस बल के सहयोग से यह कार्रवाई की गई। पटौदी शहरी क्षेत्र के राजस्व सम्पदा के तहत आने वाले ग्राम पटौदी, नरहेरा व उछा माजरा में यह अभियान चलाया गया। जिसमें सबसे पहले पाँच एकड क्षेत्र में बने नवनिर्मित अनाधिकृत कालोनी को घ्वस्त किया गया। जिसमें सोलह डीपीसी, सीमेंट की बाउंड्री, व कच्ची सडक का बनाया गया पूरा नेटवर्क उखाड दिया गया। इसके बाद गांव नरहेरा के दो एकड़ बने चार डीपीसी, तीन सीमांकन पत्थर व कच्ची सडक को ध्वस्त कर दिया गया। तीसरी कार्रवाई बिलासपुर-पटौदी रोड स्थित ग्राम उंचा माजरा के राजस्व सम्पदा के तहत बने नवनिर्मित अनाधिकृत ढांचों/दुकानों को तोड़ा गया। देर तक चली इस कार्रवाई को देखने के लिए बडी संख्या में स्थानीय व दूर दराज से आए लोगों की भीड लग गई। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए बडी संख्या में स्थानीय पुलिस बल तैनात रहा। विभाग की ओर से इस कार्रवाई के दौरान डीटीपीई मनीष यादव, जेई आनंद, एफटी प्रशांत सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कार्रवाई पूरी होने के बाद लोगों को अपने घरों के दरवाजें, खिडकियां व अन्य सामानों को एकित्रत करते देखा गया। डीटीपीई मनीष यादव ने एक बार फिर से लोगों को हिदायत देते हुए कहा कि वे अपने मेहनत की कमाई का अवैध कालोनियों में निवेश ना करें। क्योकि सरकार के निर्देशानुसार जिले में किसी भी तरह के अवैध कालोनी काटने व उसे विकसित नही होने दिया जाएगा।
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रविवार को इनायत नगर थाना की पुलिस ने 1 हजार100 ग्राम अवैध गांजे के साथ एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दियाl इससे पहले चार जनवरी को खंडासा थाना की पुलिस ने एक और गांजा तस्कर को माल सहित पकड़ जेल की राह दिखाई थीlएसएसपी अयोध्या शैलेश पांडे के दिशा निर्देशन में मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत कोतवाली पुलिस को यह सफलता हाथ लग रही है।
कोतवाली इनायत नगर पुलिस को मुखबिर ने रविवार को सूचना दिया कि एक संदिग्ध व्यक्ति थाना क्षेत्र के जमुआ गांव के पास खड़ा होकर किसी का इंतजार कर रहा है। प्रभारी निरीक्षक इनायत नगर अमर जीत सिंह ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर इनायत नगर थाने के उपनिरीक्षक अक्षय कुमार पटेल, कांस्टेबल वीरेंद्र तिवारी ने मौके पर पहुंचकर संदिग्ध खड़े व्यक्ति को पकड़कर पूछताछ करते हुए तलाशी ली तो आरोपी के पास से 1 हजार100 ग्राम अवैध गांजा बरामद कियाl इसके बाद पुलिस आरोपी व्यक्ति को पकड़ कर थाने ले आई जहां पर आरोपी अमित कुमार पुत्र शिव कुमार निवासी ग्राम देवन पारा कोठिला ताली थाना कोतवाली इनायत नगर के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 012/022 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे पुलिस ने जेल भेज दिया।
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रविवार को इनायत नगर थाना की पुलिस ने एक हजारएक सौ ग्राम अवैध गांजे के साथ एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दियाl इससे पहले चार जनवरी को खंडासा थाना की पुलिस ने एक और गांजा तस्कर को माल सहित पकड़ जेल की राह दिखाई थीlएसएसपी अयोध्या शैलेश पांडे के दिशा निर्देशन में मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत कोतवाली पुलिस को यह सफलता हाथ लग रही है। कोतवाली इनायत नगर पुलिस को मुखबिर ने रविवार को सूचना दिया कि एक संदिग्ध व्यक्ति थाना क्षेत्र के जमुआ गांव के पास खड़ा होकर किसी का इंतजार कर रहा है। प्रभारी निरीक्षक इनायत नगर अमर जीत सिंह ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर इनायत नगर थाने के उपनिरीक्षक अक्षय कुमार पटेल, कांस्टेबल वीरेंद्र तिवारी ने मौके पर पहुंचकर संदिग्ध खड़े व्यक्ति को पकड़कर पूछताछ करते हुए तलाशी ली तो आरोपी के पास से एक हजारएक सौ ग्राम अवैध गांजा बरामद कियाl इसके बाद पुलिस आरोपी व्यक्ति को पकड़ कर थाने ले आई जहां पर आरोपी अमित कुमार पुत्र शिव कुमार निवासी ग्राम देवन पारा कोठिला ताली थाना कोतवाली इनायत नगर के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या बारह/बाईस धारा आठ/बीस एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे पुलिस ने जेल भेज दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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विधायक रामदास सोरेन ने शुक्रवार को मुसाबनी में कल्याण विभाग से तीन योजनाओं का शिलान्यास किया। जिसमें पारुलिया के रोहनीगोड़ा टोला में लगभग 25 लाख रुपए की लागत से आदिवासी कला संस्कृति भवन, लटिया में 15 लाख रुपए की लागत से जाहेरगाढ़ बाउंड्री का मरम्मत करण एवं सौंदर्यीकरण एंव भंडारबोरो गांव में कब्रिस्तान की बाउंड्री शामिल हैं।
इस अवसर पर विधायक ने कहा कि 5 वीं अनुसूची क्षेत्र में बन रहे आदिवासी कला संस्कृति भवन में आदिवासी समुदाय की संस्कृति के संरक्षण हेतु धमसा, मादल, जैसे वाद्य यंत्र हेमंत सरकार देगी । इसके लिए बजट में 12 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। ग्राम प्रधानों को उनके क्षेत्र में घूमने और बैठक करने हेतु एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए दो पहिया वाहन भी हएंमत सरकार देगी। ग्राम प्रधानों को मिलने वाले 1 हजार रुपए मानदेय को बढ़ाकर 5 हजार रुपए करने का भी प्रस्ताव जल्द ही सरकार लाएगी। उन्होंने कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में 10 जाहेर गाढ़ बाउंड्री और एक दर्जन आदिवासी कला संस्कृति भवन के निर्माण के लिए स्वीकृत दे चुके हैं।
जिसमें सुरदा जाहेर गाढ़ में 5 करोड़ की लागत से निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। शिलान्यास के अवसर पर जिप सदस्य लक्ष्मी मुर्मू, कुईलीसूता मुखिया शांखो मार्डी, झामुमो जिला कोषाध्यक्ष कालीपदो गोराई, प्रखंड अध्यक्ष प्रधान सोरेन, उपाध्यक्ष सोमाय सोरेन, कोषाध्यक्ष साधु हेम्ब्रम, साधुचरण मुर्मू, प्रियनाथ बास्के, संजीवन पातर विक्रम मुर्मू, पारुलिया ग्राम प्रधान अशोक सोरेन , चंदन महाली आदि उपस्थित थे।
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विधायक रामदास सोरेन ने शुक्रवार को मुसाबनी में कल्याण विभाग से तीन योजनाओं का शिलान्यास किया। जिसमें पारुलिया के रोहनीगोड़ा टोला में लगभग पच्चीस लाख रुपए की लागत से आदिवासी कला संस्कृति भवन, लटिया में पंद्रह लाख रुपए की लागत से जाहेरगाढ़ बाउंड्री का मरम्मत करण एवं सौंदर्यीकरण एंव भंडारबोरो गांव में कब्रिस्तान की बाउंड्री शामिल हैं। इस अवसर पर विधायक ने कहा कि पाँच वीं अनुसूची क्षेत्र में बन रहे आदिवासी कला संस्कृति भवन में आदिवासी समुदाय की संस्कृति के संरक्षण हेतु धमसा, मादल, जैसे वाद्य यंत्र हेमंत सरकार देगी । इसके लिए बजट में बारह करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। ग्राम प्रधानों को उनके क्षेत्र में घूमने और बैठक करने हेतु एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए दो पहिया वाहन भी हएंमत सरकार देगी। ग्राम प्रधानों को मिलने वाले एक हजार रुपए मानदेय को बढ़ाकर पाँच हजार रुपए करने का भी प्रस्ताव जल्द ही सरकार लाएगी। उन्होंने कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में दस जाहेर गाढ़ बाउंड्री और एक दर्जन आदिवासी कला संस्कृति भवन के निर्माण के लिए स्वीकृत दे चुके हैं। जिसमें सुरदा जाहेर गाढ़ में पाँच करोड़ की लागत से निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। शिलान्यास के अवसर पर जिप सदस्य लक्ष्मी मुर्मू, कुईलीसूता मुखिया शांखो मार्डी, झामुमो जिला कोषाध्यक्ष कालीपदो गोराई, प्रखंड अध्यक्ष प्रधान सोरेन, उपाध्यक्ष सोमाय सोरेन, कोषाध्यक्ष साधु हेम्ब्रम, साधुचरण मुर्मू, प्रियनाथ बास्के, संजीवन पातर विक्रम मुर्मू, पारुलिया ग्राम प्रधान अशोक सोरेन , चंदन महाली आदि उपस्थित थे।
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मरकच्चो। कोडरमा डीडीसी ऋतुराज ने बुधवार को मरकच्चो प्रखंड परिसर में झारखंड अनावद्ध योजना अंतर्गत करोड़ो के लागत से बने बीडीओ, सीओ व तृतीये, चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के आवास का निरीक्षण किया।
इस दौरान कुछ त्रुटियों को सुधार करने का दिशा निर्देश दिया साथ ही साथ प्रखंड कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कैशबुक उपस्थिति पंजी व मनरेगा योजना से संबंधित कई अभिलेखों की जांच की व कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कार्यालय निरीक्षण के बाद डीडीसी मरकच्चो ब्लॉक व बाजार पर जिला परिषद मद से बने दुकान को देखा व बेहतर ढंग से रख रखाव व बकाया किराया को अविलंब देने की बात कही तथा दूकान के समाने से अतिक्रमण हटाने की बात की।
उसके बाद जिला बोर्ड के डाकबंगला पहुंचे व बीडीओ से उसके रख रखाव की जानकारी लेते हुए उन्होंने डाकबंगला को उपयोग में लाने के लिए जनता की सुविधा को देखते हुवे एक मैरेज हॉल व सामने दुकान बनाने की बात कही। वही डीडीसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरकच्चो का भी औचक निरीक्षण किया व कई दिशा निर्देश दिए एवं 100 बेड के बनने वाले स्वास्थ्य भवन का 16 फरवरी को कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी के द्वारा होने वाले शिलान्यास का भी जायजा लिया।
आदर्श ग्राम पंचायत चोपनाडीह में मनरेगा के तहत बने बागवानी एवं डोभा का निरक्षण किये, उत्क्रमित उच्च विद्यालय जगदीशपुर में विद्यार्थियों से अपडेट हुवे जहाँ साइंस टीचर की कमी विद्यार्थियों ने बताया,मध्याहन भोजन के स्टॉक का भी जायजा लिए।
जामु में प्रधानमंत्री आवास का निरक्षण किये,मूर्कमनाय पंचायत भवन,परियोजना उच्च विद्यालय देवीपुर पहुचे व कई आवश्यक दिशा निर्देश दिए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर धरना प्रदर्शन कर रहे एनएचएम,एएनएम,जीएनएम एवं अनुबंधित पारा चिकित्सक कर्मी ने अपनी मांगों को लेकर एक हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन डीडीसी को सौंपा।
निरीक्षण के दौरान बीडीओ पप्पू रजक,अंचलाधिकारी रामसुमन प्रसाद,सीडीपीओ गिरेन्द्र टूडी,मुखिया रंजीत सिंह, बीपीओ राकेश रंजन,जेई जागेश्वर उरांव आदि उपस्थित थे।
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मरकच्चो। कोडरमा डीडीसी ऋतुराज ने बुधवार को मरकच्चो प्रखंड परिसर में झारखंड अनावद्ध योजना अंतर्गत करोड़ो के लागत से बने बीडीओ, सीओ व तृतीये, चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के आवास का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ त्रुटियों को सुधार करने का दिशा निर्देश दिया साथ ही साथ प्रखंड कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कैशबुक उपस्थिति पंजी व मनरेगा योजना से संबंधित कई अभिलेखों की जांच की व कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कार्यालय निरीक्षण के बाद डीडीसी मरकच्चो ब्लॉक व बाजार पर जिला परिषद मद से बने दुकान को देखा व बेहतर ढंग से रख रखाव व बकाया किराया को अविलंब देने की बात कही तथा दूकान के समाने से अतिक्रमण हटाने की बात की। उसके बाद जिला बोर्ड के डाकबंगला पहुंचे व बीडीओ से उसके रख रखाव की जानकारी लेते हुए उन्होंने डाकबंगला को उपयोग में लाने के लिए जनता की सुविधा को देखते हुवे एक मैरेज हॉल व सामने दुकान बनाने की बात कही। वही डीडीसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरकच्चो का भी औचक निरीक्षण किया व कई दिशा निर्देश दिए एवं एक सौ बेड के बनने वाले स्वास्थ्य भवन का सोलह फरवरी को कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी के द्वारा होने वाले शिलान्यास का भी जायजा लिया। आदर्श ग्राम पंचायत चोपनाडीह में मनरेगा के तहत बने बागवानी एवं डोभा का निरक्षण किये, उत्क्रमित उच्च विद्यालय जगदीशपुर में विद्यार्थियों से अपडेट हुवे जहाँ साइंस टीचर की कमी विद्यार्थियों ने बताया,मध्याहन भोजन के स्टॉक का भी जायजा लिए। जामु में प्रधानमंत्री आवास का निरक्षण किये,मूर्कमनाय पंचायत भवन,परियोजना उच्च विद्यालय देवीपुर पहुचे व कई आवश्यक दिशा निर्देश दिए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर धरना प्रदर्शन कर रहे एनएचएम,एएनएम,जीएनएम एवं अनुबंधित पारा चिकित्सक कर्मी ने अपनी मांगों को लेकर एक हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन डीडीसी को सौंपा। निरीक्षण के दौरान बीडीओ पप्पू रजक,अंचलाधिकारी रामसुमन प्रसाद,सीडीपीओ गिरेन्द्र टूडी,मुखिया रंजीत सिंह, बीपीओ राकेश रंजन,जेई जागेश्वर उरांव आदि उपस्थित थे।
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जलभराव के बाद अवैध निर्माण पर बेंगलुरू में चला बुलडोजर.
बेंगलुरु. कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर जलभराव के बाद शहर के नगर निकाय बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका 'बीबीएमपी' ने बड़ा एक्शन लेते हुए बुलडोजर से अवैध निर्माणों को ढहाना शुरू कर दिया है. यह अवैध निर्माण नालों और जल निकासी क्षेत्रों में बने थे, जिससे बेंगलुरु में जलभराव की समस्या खड़ी हो गई. बीबीएमपी की टीमें महादेवपुरा जोनों में चिन्नपन्हाल्ली से मुन्नेनकोला झील तक दो स्थानों पर पहुंचीं और नगरपालिका अधिकारियों ने जल निकासी पर किए गए अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया.
इस कार्रवाई के दौरान निर्माण ढहाने पहुंची टीम ने लेआउट पर काम शुरू किया है, जिसमें पानी के नाले पर बने रागम मेगा स्टोर के कुछ हिस्सों को साफ किया गया. बीबीएमपी के मुख्य अभियंता बसवराज कबाडे ने कहा कि बीस इमारतों ने मसाला उद्यान के पास अतिक्रमण किया है और पांच इमारतें चिन्नपन्हाल्ली में तूफान के पानी के नाले पर हैं. इस पर राजस्व विभाग नोटिस जारी करेगा और उन्हें इमारतों को खाली करने का समय दिया जाएगा. इसके साथ ही सात दिन बाद हम उन इमारतों को भी ध्वस्त कर देंगे और जल निकासी का निर्माण करेंगे.
इस कार्रवाई को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं. यहां तक कि जब बीबीएमपी ने विध्वंस अभियान शुरू किया, तब भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह शक्तिशाली लोगों के स्वामित्व वाले बड़े तकनीकी पार्कों को बख्शते हुए आम आदमी के निर्माण को निशाने पर ले रहा है?
एक बीबीएमपी विध्वंस दस्ता सुबह बागमने टेक पार्क पहुंचा और यहां तक कि आईटी पार्क द्वारा 2. 4 मीटर तूफानी जल निकासी अतिक्रमण की पहचान की और चिह्नित किया. पुलिस के साथ अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन रहस्यमय तरीके से वे कुछ घंटे बाद बिना किसी ढांचे को गिराए टेक पार्क से निकल गए.
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जलभराव के बाद अवैध निर्माण पर बेंगलुरू में चला बुलडोजर. बेंगलुरु. कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर जलभराव के बाद शहर के नगर निकाय बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका 'बीबीएमपी' ने बड़ा एक्शन लेते हुए बुलडोजर से अवैध निर्माणों को ढहाना शुरू कर दिया है. यह अवैध निर्माण नालों और जल निकासी क्षेत्रों में बने थे, जिससे बेंगलुरु में जलभराव की समस्या खड़ी हो गई. बीबीएमपी की टीमें महादेवपुरा जोनों में चिन्नपन्हाल्ली से मुन्नेनकोला झील तक दो स्थानों पर पहुंचीं और नगरपालिका अधिकारियों ने जल निकासी पर किए गए अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई के दौरान निर्माण ढहाने पहुंची टीम ने लेआउट पर काम शुरू किया है, जिसमें पानी के नाले पर बने रागम मेगा स्टोर के कुछ हिस्सों को साफ किया गया. बीबीएमपी के मुख्य अभियंता बसवराज कबाडे ने कहा कि बीस इमारतों ने मसाला उद्यान के पास अतिक्रमण किया है और पांच इमारतें चिन्नपन्हाल्ली में तूफान के पानी के नाले पर हैं. इस पर राजस्व विभाग नोटिस जारी करेगा और उन्हें इमारतों को खाली करने का समय दिया जाएगा. इसके साथ ही सात दिन बाद हम उन इमारतों को भी ध्वस्त कर देंगे और जल निकासी का निर्माण करेंगे. इस कार्रवाई को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं. यहां तक कि जब बीबीएमपी ने विध्वंस अभियान शुरू किया, तब भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह शक्तिशाली लोगों के स्वामित्व वाले बड़े तकनीकी पार्कों को बख्शते हुए आम आदमी के निर्माण को निशाने पर ले रहा है? एक बीबीएमपी विध्वंस दस्ता सुबह बागमने टेक पार्क पहुंचा और यहां तक कि आईटी पार्क द्वारा दो. चार मीटर तूफानी जल निकासी अतिक्रमण की पहचान की और चिह्नित किया. पुलिस के साथ अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन रहस्यमय तरीके से वे कुछ घंटे बाद बिना किसी ढांचे को गिराए टेक पार्क से निकल गए. .
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लिए भी भारतीय सामाजिक संस्थाओं का अध्ययन करना होगा। ऐसे अध्ययन के पश्चात् ही हम कह सकते हैं कि वर्तमान समय मे प्रमुक सस्थाए उपयोगी हैं और प्रमुक अनुपयोगी । भूतकालीन भारतीय सामाजिक संस्थाओं के अध्ययन द्वारा हम समझ सकेंगे कि हमारे पूर्वजो ने अपने समय को समस्या को हल करने के लिए विन पद्धतियों को अपनाया। इस अध्ययन से पूर्वजो द्वारा भूतकाल में की गई त्रुटियो से बचा जा सकेगा, उनके सफल अनुभवो का लाभ उठाया जा सकेगा और भावी सामाजिक व्यवस्था के पुननिर्माण मे सहायता मिलेगी । भूतवालीन सामाजिक संस्थाओं के अध्ययन द्वारा हम वर्तमान परिस्थितिथो और घटनाओं को भली प्रकार समझ सकेंगे और अपने भविष्य का नियोजन कर सकेंगे ।
समय एव परिस्थितियों के बदलने के साथ सामाजिक संस्थाओं के स्वरूप एव कार्यों मे भी परिवर्तन होता रहता है। वर्तमान में प्राचीन संस्थाओं के बार में यह कहा जाता है कि आज इनकी कोई उपयोगिता नहीं है, इसलिए इन्हें समाप्त कर देना चाहिए । यद्यपि इस बात को स्वीकार किया जा सकता कि समय एव परिस्थितियों के बदल जाने के कारण संस्थाओं की उपयोगिताओ मे कई बार कमी आ सकती है तथापि किसी भी भूतकालीन संस्था के सम्बन्ध में यह कहना कि चूकि यह प्राचीन है, इस कारण इसे समाप्त कर देना चाहिए, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित प्रतीत नही होता। यदि कोई प्राचीन संस्था परिवर्तित परिस्थितियों में उपयोगी नहीं हैं तो हमे यह सिद्ध एव स्पष्ट करना होगा कि वास्तव मे बदली हुई परिस्थितियों में उस संस्था की कोई उपयोगिता नही है । वेवल मात्र यह वह देने से कि भूतकालीन संस्थामा की वर्तमान समय में कोई उपयोगिता नही है, काम नहीं चल सकता, वास्तव में वैज्ञानिक आधार पर इसे प्रमाणित करना होगा । यह सम्भव है कि परिस्थितियों के बदलने से किसी सस्था वा महत्त्व कम अथवा अधिक हो जाय, किन्ही परिस्थितियों में किसी संस्था का महत्त्व अधिक हो सकता है और किन्ही मे कम । परन्तु इस सम्बन्ध मे वास्तविकता का पता लगाना होगा । यदि इस बात को स्वीकार कर लिया जाय कि परिवर्तित परिस्थितियो मे भूतकालीन संस्था की कोई उपयोगिता नही है, तो भी इस सत्य से इन्कार नही किया जा सकता कि इन संस्थाओं के पोछे लाखो-करोडो व्यक्तियों का सैकडो हजारो वर्षों का अनुभव छिपा रहता है । यह मनुष्या के मन एव मस्तिष्क में अपना स्थान बनाये रहती हैं। इस कारण इन संस्थाओं के प्रभाव को मनुष्य के मस्तिष्क से आसानी से दूर नही किया जा सकता ।
आज बहुत से उत्साही सामाजिक कायकर्ता प्राचीन विचारों, भादर्शी तथा सामाजिक सस्थाओं को जड़ से समाप्त करने के पक्ष में हैं। वे यह भूल जाते हैं कि जो विचार, आदर्श एवं सामाजिक सस्थाए अपनी उपयोगिता के कारण सैकडा वर्षों से लोगो के दिल और दिमाग पर गहरा प्रभाव जमाये हुए है, उन्हें अनेक प्रयत्नो के बावजूद भी शीघ्र ही समाप्त नही किया जा सकता। व्यक्ति नवीन परम्पराओ एव संस्थाओं को तुरन्त स्वीकार नहीं करता, चाहे उनसे कितना ही लाभ क्या न हो । देश मे शिक्षा की कमी के कारण भी भूतकालीन संस्थाओं के प्रभाव को शीघ्र ही समाप्त कर नवीन संस्थाओं का विकास नही किया जा सकता । यदि कोई प्राचीन विचार, आदर्श अथवा सामाजिक संस्था वास्तव मे हानिकारक है, तो उसे समाप्त करने के लिए लोगो को धीरे-धीरे तैयार करना होगा, नवीन विचारों को ग्रहण करने के लिए उन्हें प्रेरित करना होगा ।
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लिए भी भारतीय सामाजिक संस्थाओं का अध्ययन करना होगा। ऐसे अध्ययन के पश्चात् ही हम कह सकते हैं कि वर्तमान समय मे प्रमुक सस्थाए उपयोगी हैं और प्रमुक अनुपयोगी । भूतकालीन भारतीय सामाजिक संस्थाओं के अध्ययन द्वारा हम समझ सकेंगे कि हमारे पूर्वजो ने अपने समय को समस्या को हल करने के लिए विन पद्धतियों को अपनाया। इस अध्ययन से पूर्वजो द्वारा भूतकाल में की गई त्रुटियो से बचा जा सकेगा, उनके सफल अनुभवो का लाभ उठाया जा सकेगा और भावी सामाजिक व्यवस्था के पुननिर्माण मे सहायता मिलेगी । भूतवालीन सामाजिक संस्थाओं के अध्ययन द्वारा हम वर्तमान परिस्थितिथो और घटनाओं को भली प्रकार समझ सकेंगे और अपने भविष्य का नियोजन कर सकेंगे । समय एव परिस्थितियों के बदलने के साथ सामाजिक संस्थाओं के स्वरूप एव कार्यों मे भी परिवर्तन होता रहता है। वर्तमान में प्राचीन संस्थाओं के बार में यह कहा जाता है कि आज इनकी कोई उपयोगिता नहीं है, इसलिए इन्हें समाप्त कर देना चाहिए । यद्यपि इस बात को स्वीकार किया जा सकता कि समय एव परिस्थितियों के बदल जाने के कारण संस्थाओं की उपयोगिताओ मे कई बार कमी आ सकती है तथापि किसी भी भूतकालीन संस्था के सम्बन्ध में यह कहना कि चूकि यह प्राचीन है, इस कारण इसे समाप्त कर देना चाहिए, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित प्रतीत नही होता। यदि कोई प्राचीन संस्था परिवर्तित परिस्थितियों में उपयोगी नहीं हैं तो हमे यह सिद्ध एव स्पष्ट करना होगा कि वास्तव मे बदली हुई परिस्थितियों में उस संस्था की कोई उपयोगिता नही है । वेवल मात्र यह वह देने से कि भूतकालीन संस्थामा की वर्तमान समय में कोई उपयोगिता नही है, काम नहीं चल सकता, वास्तव में वैज्ञानिक आधार पर इसे प्रमाणित करना होगा । यह सम्भव है कि परिस्थितियों के बदलने से किसी सस्था वा महत्त्व कम अथवा अधिक हो जाय, किन्ही परिस्थितियों में किसी संस्था का महत्त्व अधिक हो सकता है और किन्ही मे कम । परन्तु इस सम्बन्ध मे वास्तविकता का पता लगाना होगा । यदि इस बात को स्वीकार कर लिया जाय कि परिवर्तित परिस्थितियो मे भूतकालीन संस्था की कोई उपयोगिता नही है, तो भी इस सत्य से इन्कार नही किया जा सकता कि इन संस्थाओं के पोछे लाखो-करोडो व्यक्तियों का सैकडो हजारो वर्षों का अनुभव छिपा रहता है । यह मनुष्या के मन एव मस्तिष्क में अपना स्थान बनाये रहती हैं। इस कारण इन संस्थाओं के प्रभाव को मनुष्य के मस्तिष्क से आसानी से दूर नही किया जा सकता । आज बहुत से उत्साही सामाजिक कायकर्ता प्राचीन विचारों, भादर्शी तथा सामाजिक सस्थाओं को जड़ से समाप्त करने के पक्ष में हैं। वे यह भूल जाते हैं कि जो विचार, आदर्श एवं सामाजिक सस्थाए अपनी उपयोगिता के कारण सैकडा वर्षों से लोगो के दिल और दिमाग पर गहरा प्रभाव जमाये हुए है, उन्हें अनेक प्रयत्नो के बावजूद भी शीघ्र ही समाप्त नही किया जा सकता। व्यक्ति नवीन परम्पराओ एव संस्थाओं को तुरन्त स्वीकार नहीं करता, चाहे उनसे कितना ही लाभ क्या न हो । देश मे शिक्षा की कमी के कारण भी भूतकालीन संस्थाओं के प्रभाव को शीघ्र ही समाप्त कर नवीन संस्थाओं का विकास नही किया जा सकता । यदि कोई प्राचीन विचार, आदर्श अथवा सामाजिक संस्था वास्तव मे हानिकारक है, तो उसे समाप्त करने के लिए लोगो को धीरे-धीरे तैयार करना होगा, नवीन विचारों को ग्रहण करने के लिए उन्हें प्रेरित करना होगा ।
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लखनऊ। भारतीय महिला पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविनाबेन पटेल को टोक्यो पैरालम्पिक खेलों में महिला एकल वर्ग के क्लास 4 इवेंट के फाइनल में रजत पदक जीतकर देश का नाम ऊंचा कर दिया। हालांकि वह फाइनल में चीन की खिलाड़ी के हाथों हार गईं, लेकिन सेमीफाइनल में जीत के साथ ही उन्होंने रजत पदक पक्का कर लिया था।
उधर, सीएम योगी ने भी भाविनाबेन पटेल को इस जीत पर बधाई दी है। सीएम योगी ने ट्वीट कर कहा, राष्ट्रीय खेल दिवस पर #Paralympics की टेबल टेनिस स्पर्धा में भारत की बेटी भाविना पटेल जी ने रजत पदक प्राप्त कर वैश्विक पटल पर समूचे देश का मान बढ़ाया है। आपकी इस अविस्मरणीय उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व है। आपके स्वर्णिम भविष्य हेतु मंगलकामनाएं! जय हिंद!
पहली बार पैरालम्पिक में शामिल हुईं भाविना के रजत पदक जीतने से भारत ने टोक्यो पैरालम्पिक में अपना पहला पदक हासिल किया। भाविना ने शुक्रवार को सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही देश के लिए पदक पक्का कर लिया था। उनकी कोशिश स्वर्ण जीतने की थी, हालांकि ऐसा हो नहीं सका।
लेकिन भाविना ने रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। वह पहली भारतीय महिला पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्होंने पैरालम्पिक में इस इवेंट में कोई पदक जीता है।
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लखनऊ। भारतीय महिला पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविनाबेन पटेल को टोक्यो पैरालम्पिक खेलों में महिला एकल वर्ग के क्लास चार इवेंट के फाइनल में रजत पदक जीतकर देश का नाम ऊंचा कर दिया। हालांकि वह फाइनल में चीन की खिलाड़ी के हाथों हार गईं, लेकिन सेमीफाइनल में जीत के साथ ही उन्होंने रजत पदक पक्का कर लिया था। उधर, सीएम योगी ने भी भाविनाबेन पटेल को इस जीत पर बधाई दी है। सीएम योगी ने ट्वीट कर कहा, राष्ट्रीय खेल दिवस पर #Paralympics की टेबल टेनिस स्पर्धा में भारत की बेटी भाविना पटेल जी ने रजत पदक प्राप्त कर वैश्विक पटल पर समूचे देश का मान बढ़ाया है। आपकी इस अविस्मरणीय उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व है। आपके स्वर्णिम भविष्य हेतु मंगलकामनाएं! जय हिंद! पहली बार पैरालम्पिक में शामिल हुईं भाविना के रजत पदक जीतने से भारत ने टोक्यो पैरालम्पिक में अपना पहला पदक हासिल किया। भाविना ने शुक्रवार को सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही देश के लिए पदक पक्का कर लिया था। उनकी कोशिश स्वर्ण जीतने की थी, हालांकि ऐसा हो नहीं सका। लेकिन भाविना ने रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। वह पहली भारतीय महिला पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्होंने पैरालम्पिक में इस इवेंट में कोई पदक जीता है।
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नए नियम के मुताबिक हर टीचर और स्टूडेंट की एक्टिविटी पर नजर रखने के लिए कॉलेज और यूनिवर्सिटी में वायस रिकॉर्डिंग से लैस CCTV कैमरा लगाए जाएंगे.
उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटीज और डिग्री कॉलेजों में मोबाइल फोन के को बैन किया गया है. उच्च शिक्षा निदेशालय की तरफ से मोबाइल फोन को लेकर कुछ नियम कायदे जारी किए हैं. जिसके मुताबिक स्टूडेंट्स अब कैंपस के अंदर मोबाइल फोन में बिजी नजर नहीं आएंगे.
ये नया नियम सिर्फ स्टूडेंट्स ही नहीं बल्कि टीचर्स पर भी लागू होगा. कैंपस में एंटर होने के बाद स्टूडेंट और टीचर दोनों हो फोन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. उच्च शिक्षा निदेशालय ने ये नियम पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए लागू किया है.
अगर कोई इन नए नियमों को तोड़ता है तो पकड़े जाने पर उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया जाएगा. इसके बाद स्टूडेंट्स के पेरेंट्स को बुलाया जाएगा और वॉर्निंग देने के बाद ही मोबाइल फोन वापस लौटाया जाएगा.
नए नियम के हिसाब से स्टूडेंट और टीचर कैंपस के अंदर साइलेंट मोड पर फोन रख तो सकेंगे लेकिन इसे इस्तेमाल करने के लिए उन्हें कैंपस के बाहर जाना होगा.
उच्च शिक्षा निदेशालय की तरफ से निर्देश दिया गया है कि सभी यूनिवर्सिटीज और डिग्री कॉलेजों में वायस रिकॉर्डिंग से लैस CCTV कैमरा लगाए जाएं. ताकि हर टीचर और स्टूडेंट की एक्टिविटी पर नजर रखी जा सके.
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नए नियम के मुताबिक हर टीचर और स्टूडेंट की एक्टिविटी पर नजर रखने के लिए कॉलेज और यूनिवर्सिटी में वायस रिकॉर्डिंग से लैस CCTV कैमरा लगाए जाएंगे. उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटीज और डिग्री कॉलेजों में मोबाइल फोन के को बैन किया गया है. उच्च शिक्षा निदेशालय की तरफ से मोबाइल फोन को लेकर कुछ नियम कायदे जारी किए हैं. जिसके मुताबिक स्टूडेंट्स अब कैंपस के अंदर मोबाइल फोन में बिजी नजर नहीं आएंगे. ये नया नियम सिर्फ स्टूडेंट्स ही नहीं बल्कि टीचर्स पर भी लागू होगा. कैंपस में एंटर होने के बाद स्टूडेंट और टीचर दोनों हो फोन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. उच्च शिक्षा निदेशालय ने ये नियम पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए लागू किया है. अगर कोई इन नए नियमों को तोड़ता है तो पकड़े जाने पर उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया जाएगा. इसके बाद स्टूडेंट्स के पेरेंट्स को बुलाया जाएगा और वॉर्निंग देने के बाद ही मोबाइल फोन वापस लौटाया जाएगा. नए नियम के हिसाब से स्टूडेंट और टीचर कैंपस के अंदर साइलेंट मोड पर फोन रख तो सकेंगे लेकिन इसे इस्तेमाल करने के लिए उन्हें कैंपस के बाहर जाना होगा. उच्च शिक्षा निदेशालय की तरफ से निर्देश दिया गया है कि सभी यूनिवर्सिटीज और डिग्री कॉलेजों में वायस रिकॉर्डिंग से लैस CCTV कैमरा लगाए जाएं. ताकि हर टीचर और स्टूडेंट की एक्टिविटी पर नजर रखी जा सके.
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कंधे पर अनावश्यक दबाव, गलत मुद्रा में बैठना या लेटना, भारी बोझ कंधे में दर्द का कारण बन सकता है। आजकल लोगों में इसकी समस्या आम हो गई है। यह उन्हें भी परेशान कर रहा है जो एक ही कंधे पर भारी पर्स या बैग टांगकर ऑफिस जाते हैं। इससे बचने के लिए जरूरत है अपनी आदत में कुछ बदलाव करने की। साथ ही ये उपाय जो आपको कंधे के दर्द से छुटकारा दिलवाएंगे।
दर्द शरीर के किसी भी हिस्से में हो, वह आपकी दिनचर्या प्रभावित करता है। अगर लंबे समय तक इसे नजरंदाज किया जाए तो यह मांसपेशियों में खिंचाव और ऊत्तकों में गड़बड़ी का कारण भी बन सकता है। ऐसा ही है कंधे का दर्द। कभी अत्यधिक काम तो कभी अनावश्यक का तनाव, इसकी वजह बनता है। हम में से अधिकांश लोग दाएं कंधे पर पर्स या बैग टांगकर ऑफिस जाते हैं। जिसकी वजह से इस तरफ के कंधे में लगातार दर्द रहने लगता है।
कंधे में दर्द न हो इसके लिए आपको अपनी आदत बदलनी होगी। एक ही कंधे पर पर्स या बैग टांगने की बजाए कोशिश करें कि बैग दोनों कंधों पर टांगा जाए। इसके लिए पिट्ठू बैग या बैग पैक बेहतर रहते हैं। इससे वजन दोनों कंधों पर शेयर हो जाता है और एक ही साइड पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। इसके साथ ही यह भी कोशिश करें कि हर रोज लाने-ले जाने वाले पर्स अथवा बैग में कम से कम सामान रखें। टिफिन के लिए एक अलग कैरी बैग रखना भी बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे एक ही हाथ पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता।
अगर सोने के दौरान आपको यह दर्द महसूस हुआ है तो इसका यह अर्थ है कि आपका पॉश्चर ठीक नहीं है। संभवतः तकिया भी आपके आराम के अनुकूल न हो। इसलिए तकिए को सही तरह से गर्दन के नीचे रखें। इसके अतिरिक्त तकिए के चुनाव में भी सावधानी बरतें। तकिया बहुत अधिक ऊंचा या सख्त नहीं होना चाहिए। इससे गर्दन व कंधे में दर्द की शिकायत होती है।
इसके लिए मालिश करना एक अच्छा विचार है। इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है। मालिश करने से शरीर में रक्त प्रवाह भी बेहतर होता है। कंधे के दर्द से आराम दिलाने के लिए लैवेंडर के तेल की मालिश करना एक बेहतरीन ऑप्शन है।
एक ही कंधे पर ज्यादा भार होने के कारण दर्द हो रहा हो, तो कुछ दिन इस कंधे को आराम दें। कई बार काम की अधिकता या मानसिक टेंशन से भी कंधे में दर्द हो सकता है। इसलिए अगर बहुत देर तक काम करने के कारण आपको कंधे में दर्द का अहसास हो रहा है, तो काम छोड़कर कुछ देर आराम करें।
दर्द से निजात पाने के लिए आप बर्फ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे दर्द वाली जगह पर रखें, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी इसे सीधे ही कंधे पर न रखें। आईस पैक बनाने के लिए पहले किसी प्लास्टिक की थैली में बर्फ के टुकड़ों को डाल लें और फिर किसी पतले कपड़े से लपेट लें। अंत में इसे कंधे पर रखें।
जिन लोगों को लगातार कंधे में दर्द की शिकायत रहती है, उन्हें पानी को हल्का गर्म करके उसमें दो चम्मच सेंधा नमक डालकर उससे नहाना चाहिए। इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है।
Total Wellness is now just a click away.
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कंधे पर अनावश्यक दबाव, गलत मुद्रा में बैठना या लेटना, भारी बोझ कंधे में दर्द का कारण बन सकता है। आजकल लोगों में इसकी समस्या आम हो गई है। यह उन्हें भी परेशान कर रहा है जो एक ही कंधे पर भारी पर्स या बैग टांगकर ऑफिस जाते हैं। इससे बचने के लिए जरूरत है अपनी आदत में कुछ बदलाव करने की। साथ ही ये उपाय जो आपको कंधे के दर्द से छुटकारा दिलवाएंगे। दर्द शरीर के किसी भी हिस्से में हो, वह आपकी दिनचर्या प्रभावित करता है। अगर लंबे समय तक इसे नजरंदाज किया जाए तो यह मांसपेशियों में खिंचाव और ऊत्तकों में गड़बड़ी का कारण भी बन सकता है। ऐसा ही है कंधे का दर्द। कभी अत्यधिक काम तो कभी अनावश्यक का तनाव, इसकी वजह बनता है। हम में से अधिकांश लोग दाएं कंधे पर पर्स या बैग टांगकर ऑफिस जाते हैं। जिसकी वजह से इस तरफ के कंधे में लगातार दर्द रहने लगता है। कंधे में दर्द न हो इसके लिए आपको अपनी आदत बदलनी होगी। एक ही कंधे पर पर्स या बैग टांगने की बजाए कोशिश करें कि बैग दोनों कंधों पर टांगा जाए। इसके लिए पिट्ठू बैग या बैग पैक बेहतर रहते हैं। इससे वजन दोनों कंधों पर शेयर हो जाता है और एक ही साइड पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। इसके साथ ही यह भी कोशिश करें कि हर रोज लाने-ले जाने वाले पर्स अथवा बैग में कम से कम सामान रखें। टिफिन के लिए एक अलग कैरी बैग रखना भी बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे एक ही हाथ पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। अगर सोने के दौरान आपको यह दर्द महसूस हुआ है तो इसका यह अर्थ है कि आपका पॉश्चर ठीक नहीं है। संभवतः तकिया भी आपके आराम के अनुकूल न हो। इसलिए तकिए को सही तरह से गर्दन के नीचे रखें। इसके अतिरिक्त तकिए के चुनाव में भी सावधानी बरतें। तकिया बहुत अधिक ऊंचा या सख्त नहीं होना चाहिए। इससे गर्दन व कंधे में दर्द की शिकायत होती है। इसके लिए मालिश करना एक अच्छा विचार है। इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है। मालिश करने से शरीर में रक्त प्रवाह भी बेहतर होता है। कंधे के दर्द से आराम दिलाने के लिए लैवेंडर के तेल की मालिश करना एक बेहतरीन ऑप्शन है। एक ही कंधे पर ज्यादा भार होने के कारण दर्द हो रहा हो, तो कुछ दिन इस कंधे को आराम दें। कई बार काम की अधिकता या मानसिक टेंशन से भी कंधे में दर्द हो सकता है। इसलिए अगर बहुत देर तक काम करने के कारण आपको कंधे में दर्द का अहसास हो रहा है, तो काम छोड़कर कुछ देर आराम करें। दर्द से निजात पाने के लिए आप बर्फ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे दर्द वाली जगह पर रखें, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी इसे सीधे ही कंधे पर न रखें। आईस पैक बनाने के लिए पहले किसी प्लास्टिक की थैली में बर्फ के टुकड़ों को डाल लें और फिर किसी पतले कपड़े से लपेट लें। अंत में इसे कंधे पर रखें। जिन लोगों को लगातार कंधे में दर्द की शिकायत रहती है, उन्हें पानी को हल्का गर्म करके उसमें दो चम्मच सेंधा नमक डालकर उससे नहाना चाहिए। इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। Total Wellness is now just a click away.
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नई दिल्ली। यदि आप रेडमी के ग्राहक हैं और आप खुद के लिए कोई नया और सस्ता फोन खरीदने के बारे में सोच रहे हैं और आपका बजट 8 हजार से कम है, तो आज हम आपको एक ऐसे हैंडसेट के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे आप अपने बजट में ही खरीद सकते हैं। इस फोन में आपको 6.52-इंच HD + LCD डिस्प्ले, मीडियाटेक हीलियो G36 5G चिपसेट के तगड़ी बैटरी भी देखने को मिलेगी। हम जिस हैंडसेट के बारे में बात कर रहे हैं, उसका नाम है Redmi A2, जिसे पिछले महीने भारत में लॉन्च किया गया था।
Redmi A2 के 2GB + 64GB रैम और स्टोरेज को आप कल यानी 20 जून से Amazon, Mi.com और Mi होम स्टोर्स के माध्यम से खरीद सकते हैं। हैंडसेट तीन कलर ऑप्शन के साथ खरीदने के लिए उपलब्ध होगा, काला, हल्का हरा और हल्का नीला। कंपनी ने ट्वीट किया है कि Redmi A2 के 2GB+64GB मॉडल की कीमत 6,799 रखी गई है। आप इस फोन को आराम से खरीद सकते हैं।
Redmi A2 में 6.52-इंच HD+ (1600 x 720 पिक्सल) LCD स्क्रीन है। हैंडसेट में प्रोसेसर के तौर पर MediaTek Helio G36 SoC चिप का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का ये फोन 4GB तक रैम के साथ है। हैंडसेट डुअल सिम सपोर्ट करता है और Android 13 पर चलता है। रेड्मी ए 2 स्मार्टफोन में फोटोग्राफी के लिए दो कैमरे दिए गए हैं, जिसमें 8 मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर दिया गया है। जबकि, सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन 64GB स्टोरेज के साथ आता है, जिसे एक माइक्रोएसडी कार्ड की मदद से 512GB तक स्टोरेज को बढ़ाया जा सकता है। Redmi A2 में पावर बैकअप के लिए 5,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 10W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है।
कंपनी का ये फोन उन लोगों के लिए अच्छा साबित हो सकता है, जिन्हें केवल बातचीत करने के लिए फोन चाहिए।
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नई दिल्ली। यदि आप रेडमी के ग्राहक हैं और आप खुद के लिए कोई नया और सस्ता फोन खरीदने के बारे में सोच रहे हैं और आपका बजट आठ हजार से कम है, तो आज हम आपको एक ऐसे हैंडसेट के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे आप अपने बजट में ही खरीद सकते हैं। इस फोन में आपको छः.बावन-इंच HD + LCD डिस्प्ले, मीडियाटेक हीलियो Gछत्तीस पाँचG चिपसेट के तगड़ी बैटरी भी देखने को मिलेगी। हम जिस हैंडसेट के बारे में बात कर रहे हैं, उसका नाम है Redmi Aदो, जिसे पिछले महीने भारत में लॉन्च किया गया था। Redmi Aदो के दोGB + चौंसठGB रैम और स्टोरेज को आप कल यानी बीस जून से Amazon, Mi.com और Mi होम स्टोर्स के माध्यम से खरीद सकते हैं। हैंडसेट तीन कलर ऑप्शन के साथ खरीदने के लिए उपलब्ध होगा, काला, हल्का हरा और हल्का नीला। कंपनी ने ट्वीट किया है कि Redmi Aदो के दोGB+चौंसठGB मॉडल की कीमत छः,सात सौ निन्यानवे रखी गई है। आप इस फोन को आराम से खरीद सकते हैं। Redmi Aदो में छः.बावन-इंच HD+ LCD स्क्रीन है। हैंडसेट में प्रोसेसर के तौर पर MediaTek Helio Gछत्तीस SoC चिप का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का ये फोन चारGB तक रैम के साथ है। हैंडसेट डुअल सिम सपोर्ट करता है और Android तेरह पर चलता है। रेड्मी ए दो स्मार्टफोन में फोटोग्राफी के लिए दो कैमरे दिए गए हैं, जिसमें आठ मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर दिया गया है। जबकि, सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में पाँच मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन चौंसठGB स्टोरेज के साथ आता है, जिसे एक माइक्रोएसडी कार्ड की मदद से पाँच सौ बारहGB तक स्टोरेज को बढ़ाया जा सकता है। Redmi Aदो में पावर बैकअप के लिए पाँच,शून्यmAh की बैटरी दी गई है, जो दस वाट फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है। कंपनी का ये फोन उन लोगों के लिए अच्छा साबित हो सकता है, जिन्हें केवल बातचीत करने के लिए फोन चाहिए।
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लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में यूपी बोर्ड परीक्षा के मेधावियों और उनके माता-पिता को सम्मानित किया. इस मौके पर उन्हें एक-एक लाख रुपए का पुरस्कार भी दिया. मुख्यमंत्री योगी ने राज्य स्तर पर शीर्ष पांच स्थान पाने वाले यूपी बोर्ड, संस्कृत शिक्षा परिषद, सीबीएसई व आईसीएसई के सर्वोच्च 10-10 मेधावियों को मिलाकर 141 मेधावियों व उनके माता-पिता को सम्मानित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि नकल माफिया समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं. सरकार ने उन पर लगाम लगाई है, इनका सामाजिक बहिष्कार भी करें.
उन्होंने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री लेना नहीं बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व के निर्माण का माध्यम बनना भी है. उन्होंने टॉपर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 6 वर्ष पहले प्रदेश बोर्ड परीक्षाओं में नकल के कारण बदनाम था. पूरा साल परीक्षा में ही निकलता था. सरकार बनते ही मैंने लक्ष्य दिया कि 1 माह में परीक्षा और परिणाम दोनों आए. 15 दिन के भीतर परीक्षा हुई और 14 दिन के भीतर परिणाम घोषित किया गया. पारदर्शिता से परीक्षा कराई गई सामान्य प्रश्न पत्र बनाया गया और सामुदायिक नकल पर छात्रों की बजाय प्रबंधकों अधिकारियों पर कार्रवाई की गई. एक डीआईओएस को जेल में डालना पड़ा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि नकल माफिया वास्तव में शिक्षकों की मेहनत पर डकैती है. यह पूरी तरह रुकनी ही चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रदेश में 1,62,000 शिक्षकों की नियुक्ति हुई. 1,33,000 विद्यालय कायाकल्प में विकसित किए गए. यही जन सहभागिता माध्यमिक शिक्षा विभाग भी चाहेगा तो जरूर होगा. पुरातन छात्रों के सम्मेलन के माध्यम से जन सहभागिता की जाए. कोई लाइब्रेरी बनवा सकता है तो कोई स्मार्ट क्लास. हम दो करोड़ युवाओं को टेबलेट दे रहे हैं ताकि ये तकनीक से जुड़ सकें.
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इस बार अभ्युदय कोचिंग से 23 बच्चे आईएएस में 98 बच्चे पीसीएस में चुने गए. भेदभाव नहीं किया गया. हमने यूपी बोर्ड के साथ-साथ सभी बोर्ड के बच्चों को पुरस्कृत किया है, क्योंकि यूपी में पढ़ने वाला हर बोर्ड का बच्चा प्रदेश का है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पुस्तक एग्जाम वॉरियर को भी बच्चों को दिया जाए. नई शिक्षानीति एक नया अवसर है उसका लाभ सभी को उठाना चाहिए.
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लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में यूपी बोर्ड परीक्षा के मेधावियों और उनके माता-पिता को सम्मानित किया. इस मौके पर उन्हें एक-एक लाख रुपए का पुरस्कार भी दिया. मुख्यमंत्री योगी ने राज्य स्तर पर शीर्ष पांच स्थान पाने वाले यूपी बोर्ड, संस्कृत शिक्षा परिषद, सीबीएसई व आईसीएसई के सर्वोच्च दस-दस मेधावियों को मिलाकर एक सौ इकतालीस मेधावियों व उनके माता-पिता को सम्मानित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि नकल माफिया समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं. सरकार ने उन पर लगाम लगाई है, इनका सामाजिक बहिष्कार भी करें. उन्होंने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री लेना नहीं बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व के निर्माण का माध्यम बनना भी है. उन्होंने टॉपर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि छः वर्ष पहले प्रदेश बोर्ड परीक्षाओं में नकल के कारण बदनाम था. पूरा साल परीक्षा में ही निकलता था. सरकार बनते ही मैंने लक्ष्य दिया कि एक माह में परीक्षा और परिणाम दोनों आए. पंद्रह दिन के भीतर परीक्षा हुई और चौदह दिन के भीतर परिणाम घोषित किया गया. पारदर्शिता से परीक्षा कराई गई सामान्य प्रश्न पत्र बनाया गया और सामुदायिक नकल पर छात्रों की बजाय प्रबंधकों अधिकारियों पर कार्रवाई की गई. एक डीआईओएस को जेल में डालना पड़ा. मुख्यमंत्री ने कहा कि नकल माफिया वास्तव में शिक्षकों की मेहनत पर डकैती है. यह पूरी तरह रुकनी ही चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक,बासठ,शून्य शिक्षकों की नियुक्ति हुई. एक,तैंतीस,शून्य विद्यालय कायाकल्प में विकसित किए गए. यही जन सहभागिता माध्यमिक शिक्षा विभाग भी चाहेगा तो जरूर होगा. पुरातन छात्रों के सम्मेलन के माध्यम से जन सहभागिता की जाए. कोई लाइब्रेरी बनवा सकता है तो कोई स्मार्ट क्लास. हम दो करोड़ युवाओं को टेबलेट दे रहे हैं ताकि ये तकनीक से जुड़ सकें. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इस बार अभ्युदय कोचिंग से तेईस बच्चे आईएएस में अट्ठानवे बच्चे पीसीएस में चुने गए. भेदभाव नहीं किया गया. हमने यूपी बोर्ड के साथ-साथ सभी बोर्ड के बच्चों को पुरस्कृत किया है, क्योंकि यूपी में पढ़ने वाला हर बोर्ड का बच्चा प्रदेश का है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पुस्तक एग्जाम वॉरियर को भी बच्चों को दिया जाए. नई शिक्षानीति एक नया अवसर है उसका लाभ सभी को उठाना चाहिए.
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PRAYAGRAJ: PRAYAGRAJ: चुनावी माहौल में राजनीतिक दलों के बीच की रस्साकशी आम आदमी के जीवन का हिस्सा बनती जा रही है. लोग खुद को आम मतदाता की जगह नरेंद्र मोदी, अखिलेश यादव, मायावती, राहुल गांधी समझ बैठे हैं. यही कारण है कि सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक चुनावी छीटाकशी और गंदे कमेंट्स के चलते लोगों के बीच खाई बढ़ती जा रही है. मनोचिकित्सक की माने तो यह माहौल मास हिस्टीरिया <चुनावी माहौल में राजनीतिक दलों के बीच की रस्साकशी आम आदमी के जीवन का हिस्सा बनती जा रही है. लोग खुद को आम मतदाता की जगह नरेंद्र मोदी, अखिलेश यादव, मायावती, राहुल गांधी समझ बैठे हैं. यही कारण है कि सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक चुनावी छीटाकशी और गंदे कमेंट्स के चलते लोगों के बीच खाई बढ़ती जा रही है. मनोचिकित्सक की माने तो यह माहौल मास हिस्टीरिया ((एक प्रकार का मानसिक विकार<एक प्रकार का मानसिक विकार) ) का एग्जाम्पल है.
मऊआइमा के रहने वाले प्रदीप के परिजन उन्हे लेकर पिछले दिनों मानसिक स्वास्थ्य केद्र पहुंचे थे. बताया कि किसी दल विशेष और नेता को लेकर अन्य व्यक्ति से उनका झगड़ा हुआ और जमकर मारपीट भी हुई. लगातार ऐसी घटनाओं से तंग परिजनो ने हॉस्पिटल का दरवाजा खटखटाया. डॉक्टर्स ने प्रदीप की काउंसिलिंग की. उन्हे मानसिक विकार से बचने की सलाह दी गई.
राजापुर के रहने वाले राशिद का अपने कई साल पुराने दोस्त से जमकर विवाद हुआ. रीजन था दोनों सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों के समर्थन में भिड़ जाना. मामला इतना बढ़ा कि दोनों के बीच सड़क पर जमकर गाली गलौज हुई. राशिद के साथ ऐसे तीन घटनाएं होने पर परिजनों ने उन्हें हॉस्पिटल में दिखाया. उनका इलाज चल रहा है.
मानसिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में एक अन्य रोचक मामले भी पहुंचे हैं. जानकारी के मुताबिक कुछ मरीज खुद को नरेंद्र मोदी तो कुछ को खुद में राहुल गांधी की छवि नजर आती है. उनकी हरकतें भी ऐसी हैं. यह लोग जब तब चुनाव को लेकर दूसरों से बहस और विवाद कर रहे थे. परिजनों द्वारा शिकायत करने पर उनकी काउंसिलिंग की जा रही है.
एक समुदाय या वर्ग विशेष के लोगाें को केंद्रित कर कुंठित और विकृत मानसिकता के मैसेज बल्क में भेजे जाते हैं.
'मास हिस्टीरिया' का मतलब एक विशेष प्रकार के माहौल के हिसाब से व्यवहार होना. जैसे चुनावी माहौल में लोगों का अपने-अपने नेताओं और दलों की तरह व्यवहार और सोच का पालन करना.
किसी खास दल या व्यक्ति विशेष से अत्यधिक जुड़ाव महसूस करने को मनोविज्ञान की भाषा में 'आइडेंटिफिकेशन' कहते हैं.
अलग-अलग दलों से प्रभावित लोग 'करिश्माई लीडरशिप' के विचार को आत्मसात कर चुके हैं जो विवाद का मुख्य कारण है.
करिश्माई लीडरशिप के अत्यधिक प्रभाव में आने से व्यक्ति समाज से खुद को अलग महसूस करने लगता है.
ऐसे लोग सोसायटी में मजाक का पात्र बन जाते हैं और लोग उनका उपहास उड़ाते हैं.
बार-बार विवाद होने से शारीरिक क्षमता और कार्यशैली भी प्रभावित होती है.
देशप्रेम, आतंकवाद, गरीबी, बेरोजगारी आदि मामलों को लेकर मन में डर पैदा होने लगे तो तत्काल होशियार हो जाना चाहिए.
किसी राजनीतिक छवि के प्रति खुद का जुड़ाव महसूस होने लगे तो इसे इग्नोर करना ही बेहतर.
अब चुनाव सड़कों पर नही बल्कि मनौवैज्ञानिक तरीके से लड़ा जाता है. राजनीतिक दल कई तकनीकी प्रयोग और रिसर्च के बाद मुद्दों के आधार पर जनता का ब्रेन वाश करने की कोशिश की जाती है. डर का माहौल पैदा किया जाता है. ऐसे में जनता करिश्माई लीडरशिप की चपेट में आकर चुनावी विवाद में पड़ने लगती है. मेरी राय में लोगों को अपने निजी जीवन जैसे पढ़ाई, नौकरी आदि पर ध्यान देना चाहिए. इससे वह बेहतर नागरिक होने का परिचय दे सकेंगे.
डॉ. राकेश पासवान,
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PRAYAGRAJ: PRAYAGRAJ: चुनावी माहौल में राजनीतिक दलों के बीच की रस्साकशी आम आदमी के जीवन का हिस्सा बनती जा रही है. लोग खुद को आम मतदाता की जगह नरेंद्र मोदी, अखिलेश यादव, मायावती, राहुल गांधी समझ बैठे हैं. यही कारण है कि सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक चुनावी छीटाकशी और गंदे कमेंट्स के चलते लोगों के बीच खाई बढ़ती जा रही है. मनोचिकित्सक की माने तो यह माहौल मास हिस्टीरिया <चुनावी माहौल में राजनीतिक दलों के बीच की रस्साकशी आम आदमी के जीवन का हिस्सा बनती जा रही है. लोग खुद को आम मतदाता की जगह नरेंद्र मोदी, अखिलेश यादव, मायावती, राहुल गांधी समझ बैठे हैं. यही कारण है कि सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक चुनावी छीटाकशी और गंदे कमेंट्स के चलते लोगों के बीच खाई बढ़ती जा रही है. मनोचिकित्सक की माने तो यह माहौल मास हिस्टीरिया ) का एग्जाम्पल है. मऊआइमा के रहने वाले प्रदीप के परिजन उन्हे लेकर पिछले दिनों मानसिक स्वास्थ्य केद्र पहुंचे थे. बताया कि किसी दल विशेष और नेता को लेकर अन्य व्यक्ति से उनका झगड़ा हुआ और जमकर मारपीट भी हुई. लगातार ऐसी घटनाओं से तंग परिजनो ने हॉस्पिटल का दरवाजा खटखटाया. डॉक्टर्स ने प्रदीप की काउंसिलिंग की. उन्हे मानसिक विकार से बचने की सलाह दी गई. राजापुर के रहने वाले राशिद का अपने कई साल पुराने दोस्त से जमकर विवाद हुआ. रीजन था दोनों सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों के समर्थन में भिड़ जाना. मामला इतना बढ़ा कि दोनों के बीच सड़क पर जमकर गाली गलौज हुई. राशिद के साथ ऐसे तीन घटनाएं होने पर परिजनों ने उन्हें हॉस्पिटल में दिखाया. उनका इलाज चल रहा है. मानसिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में एक अन्य रोचक मामले भी पहुंचे हैं. जानकारी के मुताबिक कुछ मरीज खुद को नरेंद्र मोदी तो कुछ को खुद में राहुल गांधी की छवि नजर आती है. उनकी हरकतें भी ऐसी हैं. यह लोग जब तब चुनाव को लेकर दूसरों से बहस और विवाद कर रहे थे. परिजनों द्वारा शिकायत करने पर उनकी काउंसिलिंग की जा रही है. एक समुदाय या वर्ग विशेष के लोगाें को केंद्रित कर कुंठित और विकृत मानसिकता के मैसेज बल्क में भेजे जाते हैं. 'मास हिस्टीरिया' का मतलब एक विशेष प्रकार के माहौल के हिसाब से व्यवहार होना. जैसे चुनावी माहौल में लोगों का अपने-अपने नेताओं और दलों की तरह व्यवहार और सोच का पालन करना. किसी खास दल या व्यक्ति विशेष से अत्यधिक जुड़ाव महसूस करने को मनोविज्ञान की भाषा में 'आइडेंटिफिकेशन' कहते हैं. अलग-अलग दलों से प्रभावित लोग 'करिश्माई लीडरशिप' के विचार को आत्मसात कर चुके हैं जो विवाद का मुख्य कारण है. करिश्माई लीडरशिप के अत्यधिक प्रभाव में आने से व्यक्ति समाज से खुद को अलग महसूस करने लगता है. ऐसे लोग सोसायटी में मजाक का पात्र बन जाते हैं और लोग उनका उपहास उड़ाते हैं. बार-बार विवाद होने से शारीरिक क्षमता और कार्यशैली भी प्रभावित होती है. देशप्रेम, आतंकवाद, गरीबी, बेरोजगारी आदि मामलों को लेकर मन में डर पैदा होने लगे तो तत्काल होशियार हो जाना चाहिए. किसी राजनीतिक छवि के प्रति खुद का जुड़ाव महसूस होने लगे तो इसे इग्नोर करना ही बेहतर. अब चुनाव सड़कों पर नही बल्कि मनौवैज्ञानिक तरीके से लड़ा जाता है. राजनीतिक दल कई तकनीकी प्रयोग और रिसर्च के बाद मुद्दों के आधार पर जनता का ब्रेन वाश करने की कोशिश की जाती है. डर का माहौल पैदा किया जाता है. ऐसे में जनता करिश्माई लीडरशिप की चपेट में आकर चुनावी विवाद में पड़ने लगती है. मेरी राय में लोगों को अपने निजी जीवन जैसे पढ़ाई, नौकरी आदि पर ध्यान देना चाहिए. इससे वह बेहतर नागरिक होने का परिचय दे सकेंगे. डॉ. राकेश पासवान,
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प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती है। इसका उदाहरण पेश किया है, नारायणपुर तहसील के गांव गढी मामोड निवासी रविना गुर्जर ने, घर में बिजली कनेक्शन नहीं था। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया था। ऐसी विकट परिस्थितियों के बाद भी रविना ने अपने मेहनत और लगन से पढ़ाई कर 12वीं कक्षा में 93 प्रतिशत अंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली 17 साल की रविना गुर्जर के पिता रमेश की 12 साल पहले सांप के काटने से मौत हो गई थी। वहीं रविना की माता विद्या देवी के हार्ट के दोनों वॉल्व खराब है। जिनका जयपुर के एस एम एस में ऑपरेशन करवाया है। माता जी के बीमार होने के कारण घर का सारा काम रविना गुर्जर ही संभालती है और इसलिए परिवार चलाने के लिए बकरियां भी चराती थी।
घर संभालने के सात ही रविना पढ़ाई को भी उतना ही महत्व देती थी। जिसके चलते ़रविना नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी द्वारा संचालित ट्रस्ट से मिले मोबाइल की टॉर्च से रात में पढ़ाई करती थी। इसी मेहनत व लगन के बलबूते रविना गुर्जर ने राजकीय विद्यालय में पढ़कर 12वीं कला वर्ग में 93% अंक लाकर तहसील टॉप किया है।
रविना गुर्जर की इस सफलता पर गुर्जर नेता विजय बैंसला ने फोन कर रविना गुर्जर को बधाई दी है। वहीं पूर्व मंत्री डॉ. रोहिताश शर्मा ने छात्रा को पढाई के लिए हर माह 5 हजार रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। साथ ही बानसुर के सरकारी अस्पताल में डॉ. महिपाल चंदेला ने भी पढाई के लिए आर्थिक मदद की बात कही है।
इसके अलावा रवीना गुर्जर को गुर्जर अधिकारी कर्मचारी परिषद बानसूर व रामशरण सरपंच के नेतृत्व में ग्राम भग्गूकाबास के लोगों ने छात्रा को बधाई दी और प्रोत्साहन राशि भेंट की। गुर्जर अधिकारी कर्मचारी परिषद बानसूर के अध्यक्ष शीशराम पोसवाल ने कहा कि छात्रा ने विकट परिस्थितियों में अध्ययन कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वहीं आश्वासन दिया कि छात्रा के अध्ययन में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आने दी जाएगी।
इस मौके पर सीबीइओ इन्द्राज गुर्जर, वरिष्ठ अध्यापक रोहिताश्व गुर्जर, यादराम गुर्जर, पूर्ण गुर्जर, मुकेश कुमार, देशराज रैया, लक्ष्मण गुरुजी, पूर्व प्रधान मातादीन, पूर्व पंचायत समिति सदस्य झाबर सहित ग्रामीण मौजूद रहे।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती है। इसका उदाहरण पेश किया है, नारायणपुर तहसील के गांव गढी मामोड निवासी रविना गुर्जर ने, घर में बिजली कनेक्शन नहीं था। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया था। ऐसी विकट परिस्थितियों के बाद भी रविना ने अपने मेहनत और लगन से पढ़ाई कर बारहवीं कक्षा में तिरानवे प्रतिशत अंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली सत्रह साल की रविना गुर्जर के पिता रमेश की बारह साल पहले सांप के काटने से मौत हो गई थी। वहीं रविना की माता विद्या देवी के हार्ट के दोनों वॉल्व खराब है। जिनका जयपुर के एस एम एस में ऑपरेशन करवाया है। माता जी के बीमार होने के कारण घर का सारा काम रविना गुर्जर ही संभालती है और इसलिए परिवार चलाने के लिए बकरियां भी चराती थी। घर संभालने के सात ही रविना पढ़ाई को भी उतना ही महत्व देती थी। जिसके चलते ़रविना नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी द्वारा संचालित ट्रस्ट से मिले मोबाइल की टॉर्च से रात में पढ़ाई करती थी। इसी मेहनत व लगन के बलबूते रविना गुर्जर ने राजकीय विद्यालय में पढ़कर बारहवीं कला वर्ग में तिरानवे% अंक लाकर तहसील टॉप किया है। रविना गुर्जर की इस सफलता पर गुर्जर नेता विजय बैंसला ने फोन कर रविना गुर्जर को बधाई दी है। वहीं पूर्व मंत्री डॉ. रोहिताश शर्मा ने छात्रा को पढाई के लिए हर माह पाँच हजार रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। साथ ही बानसुर के सरकारी अस्पताल में डॉ. महिपाल चंदेला ने भी पढाई के लिए आर्थिक मदद की बात कही है। इसके अलावा रवीना गुर्जर को गुर्जर अधिकारी कर्मचारी परिषद बानसूर व रामशरण सरपंच के नेतृत्व में ग्राम भग्गूकाबास के लोगों ने छात्रा को बधाई दी और प्रोत्साहन राशि भेंट की। गुर्जर अधिकारी कर्मचारी परिषद बानसूर के अध्यक्ष शीशराम पोसवाल ने कहा कि छात्रा ने विकट परिस्थितियों में अध्ययन कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वहीं आश्वासन दिया कि छात्रा के अध्ययन में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आने दी जाएगी। इस मौके पर सीबीइओ इन्द्राज गुर्जर, वरिष्ठ अध्यापक रोहिताश्व गुर्जर, यादराम गुर्जर, पूर्ण गुर्जर, मुकेश कुमार, देशराज रैया, लक्ष्मण गुरुजी, पूर्व प्रधान मातादीन, पूर्व पंचायत समिति सदस्य झाबर सहित ग्रामीण मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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कनिका कपूर, करीम मोरानी के बाद जाने माने अभिनेता किरण कुमार भी कोरोनो वायरस की चपेट में आ चुके हैं। बता दें कि फिल्म और टीवी जगत के अभिनेता किरण कुमार को जैसे ही 14 मई को पता चला कि वह कोरोनो से संक्रमित हैं वैसे ही उन्होंने खुद को अपने घर पर क्वारेंटाइन कर लिया है।
किरण ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उनमें कोरोनो वायरस के एक भी लक्षण नहीं थे जैसे खांसी, बुखार, सांस लेने में दिक्कत लेकिन फिर भी वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। साथ ही उन्होंने बताया है कि वह अपने परिवार वालों से अलग तीसरी मंजिल पर रह रहे हैं। उनका परिवार दूसरी मंजिल पर रहता है। 74 साल के किरण ने यह भी बताया है कि वह 27 मई को अपना दूसरा परीक्षण करवाने वाले हैं। फिलहाल वह ठीक हैं।
बता दें कि अभिनेता किरण कुमार के साथ उनकी पत्नी सुषमा वर्मा और दो बच्चे रहते हैं। बेटे का नाम शौर्य है जो अभिनेता के रूप में लॉन्च होने की तैयारी में है, वह सहायक निर्देशक के रूप में भी काम कर चुका है वहीं उनकी एक बेटी है जो स्टाइलिस्ट है।
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कनिका कपूर, करीम मोरानी के बाद जाने माने अभिनेता किरण कुमार भी कोरोनो वायरस की चपेट में आ चुके हैं। बता दें कि फिल्म और टीवी जगत के अभिनेता किरण कुमार को जैसे ही चौदह मई को पता चला कि वह कोरोनो से संक्रमित हैं वैसे ही उन्होंने खुद को अपने घर पर क्वारेंटाइन कर लिया है। किरण ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उनमें कोरोनो वायरस के एक भी लक्षण नहीं थे जैसे खांसी, बुखार, सांस लेने में दिक्कत लेकिन फिर भी वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। साथ ही उन्होंने बताया है कि वह अपने परिवार वालों से अलग तीसरी मंजिल पर रह रहे हैं। उनका परिवार दूसरी मंजिल पर रहता है। चौहत्तर साल के किरण ने यह भी बताया है कि वह सत्ताईस मई को अपना दूसरा परीक्षण करवाने वाले हैं। फिलहाल वह ठीक हैं। बता दें कि अभिनेता किरण कुमार के साथ उनकी पत्नी सुषमा वर्मा और दो बच्चे रहते हैं। बेटे का नाम शौर्य है जो अभिनेता के रूप में लॉन्च होने की तैयारी में है, वह सहायक निर्देशक के रूप में भी काम कर चुका है वहीं उनकी एक बेटी है जो स्टाइलिस्ट है।
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ऐसी कौन सी असाधारण हड़बड़ी थी कि राज्य सरकार पदोन्नति की अधिसूचना जारी करने के लिए दस दिन इंतजार नहीं कर सकी? क्या आपका सचिव कानून से ऊपर है? यह और कुछ नहीं बल्कि इस अदालत और वर्तमान कार्यवाही को खत्म करने का प्रयास है। हम इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। हम किसी का भी करियर खत्म कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया को कभी भी ओवररीच करने की कोशिश न करें।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से गुजरात हाई कोर्ट और राज्य सरकार को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस सीटी रवि कुमार ने अपने फैसले में कहा है कि राज्य सरकार ने याचिका के लंबित रहने दौरान जजों के ट्रांसफर को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया। इसके बाद अदालत ने नोटिस जारी की। हम हाई कोर्ट की प्रमोशन की सिफारिश और सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है जजाें का पदोन्नति मेरिट और सीनियोरिटी के सिद्वांत के साथ परीक्षा को पास करने पर होनी चाहिए। जस्टिस शाह ने कहा कि गुजरात हाई कोर्ट और सरकार नोटिफिकेशन गलत हैं। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कहा यह अंतरिम आदेश है। जस्टिस शाह 15 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश की तरफ से जो जज नामित होंगे वे आगे इस मामले की सुनवाई करेंगे।
68 जजों के प्रमोशन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद अब नए सिरे जजों का चयन किया जाएगा। ऐसे में जजों के प्रमोशन और नियुक्ति अब आमान्य मानी जाएगी। अब देखना होगा कि हाई कोर्ट जब फिर जजों की सूची बनाएगा तो किस नियम से सूची तैयार होती है। जानकार बता रहे हैं कि अगर अगर नई सूची में मेरिट और सीनियोरिटी पर बनी तो इस सूची से कम से कम 40 जजों के नाम बाहर हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जिन जजों की प्रमोशन सूची पर रोक लगाई हैं उनमें मानहानि के केस में अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह को समन करने वाले जज जयेश एल चोवटिया का भी नाम शामिल है।
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ऐसी कौन सी असाधारण हड़बड़ी थी कि राज्य सरकार पदोन्नति की अधिसूचना जारी करने के लिए दस दिन इंतजार नहीं कर सकी? क्या आपका सचिव कानून से ऊपर है? यह और कुछ नहीं बल्कि इस अदालत और वर्तमान कार्यवाही को खत्म करने का प्रयास है। हम इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। हम किसी का भी करियर खत्म कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया को कभी भी ओवररीच करने की कोशिश न करें। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से गुजरात हाई कोर्ट और राज्य सरकार को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस सीटी रवि कुमार ने अपने फैसले में कहा है कि राज्य सरकार ने याचिका के लंबित रहने दौरान जजों के ट्रांसफर को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया। इसके बाद अदालत ने नोटिस जारी की। हम हाई कोर्ट की प्रमोशन की सिफारिश और सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है जजाें का पदोन्नति मेरिट और सीनियोरिटी के सिद्वांत के साथ परीक्षा को पास करने पर होनी चाहिए। जस्टिस शाह ने कहा कि गुजरात हाई कोर्ट और सरकार नोटिफिकेशन गलत हैं। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कहा यह अंतरिम आदेश है। जस्टिस शाह पंद्रह मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश की तरफ से जो जज नामित होंगे वे आगे इस मामले की सुनवाई करेंगे। अड़सठ जजों के प्रमोशन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद अब नए सिरे जजों का चयन किया जाएगा। ऐसे में जजों के प्रमोशन और नियुक्ति अब आमान्य मानी जाएगी। अब देखना होगा कि हाई कोर्ट जब फिर जजों की सूची बनाएगा तो किस नियम से सूची तैयार होती है। जानकार बता रहे हैं कि अगर अगर नई सूची में मेरिट और सीनियोरिटी पर बनी तो इस सूची से कम से कम चालीस जजों के नाम बाहर हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जिन जजों की प्रमोशन सूची पर रोक लगाई हैं उनमें मानहानि के केस में अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह को समन करने वाले जज जयेश एल चोवटिया का भी नाम शामिल है।
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जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (Intergovernmental Panel on Climate Change - IPCC) सिंथेसिस रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए स्विट्जरलैंड में बैठक आयोजित करने जा रहा है, जो IPCC की पिछली पांच रिपोर्टों के निष्कर्षों को सारांशित करेगी और जलवायु परिवर्तन से संबंधित नीति-प्रासंगिक वैज्ञानिक प्रश्नों को संबोधित करेगी। यह रिपोर्ट मुख्य वैश्विक लक्ष्य के रूप में 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को पूरा करने पर जोर देगी। सिंथेसिस रिपोर्ट से पिछली रिपोर्टों का गैर-तकनीकी सारांश प्रदान करने की उम्मीद है, जो 2018 से छठे मूल्यांकन चक्र के दौरान जारी की गई थीं।
सिंथेसिस रिपोर्ट (Synthesis Report) दुनिया भर के नीति निर्माताओं के उद्देश्य से है, और इस साल 20 मार्च को जारी होने के बाद शर्म अल-शेख में पिछले साल की जलवायु बैठक में लिए गए निर्णयों को लागू करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए कोपेनहेगन में एक मंत्री स्तरीय बैठक होगी। रिपोर्ट पर संयुक्त राष्ट्र 2023 जल सम्मेलन में भी चर्चा की जाएगी, जिसमें जलवायु परिवर्तन सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा में से एक है। इसका उद्देश्य दुबई में इस वर्ष के जलवायु सम्मेलन में अधिक महत्वाकांक्षी समझौतों के लिए माहौल बनाना है, जो वर्ष के अंत में निर्धारित है।
आसन्न विनाश की बार-बार की गई भविष्यवाणी के बावजूद, देशों ने जलवायु संकट का मुकाबला करने के लिए बहुत कम या कोई कदम नहीं उठाया है। कार्रवाई का मौजूदा स्तर 2 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक प्रयास के अनुरूप भी नहीं है। ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य योगदानकर्ताओं में से एक, जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की प्रतिबद्धता के रूप में बुनियादी बातों पर भी असहमति है।
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जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल सिंथेसिस रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए स्विट्जरलैंड में बैठक आयोजित करने जा रहा है, जो IPCC की पिछली पांच रिपोर्टों के निष्कर्षों को सारांशित करेगी और जलवायु परिवर्तन से संबंधित नीति-प्रासंगिक वैज्ञानिक प्रश्नों को संबोधित करेगी। यह रिपोर्ट मुख्य वैश्विक लक्ष्य के रूप में एक दशमलव पाँच डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को पूरा करने पर जोर देगी। सिंथेसिस रिपोर्ट से पिछली रिपोर्टों का गैर-तकनीकी सारांश प्रदान करने की उम्मीद है, जो दो हज़ार अट्ठारह से छठे मूल्यांकन चक्र के दौरान जारी की गई थीं। सिंथेसिस रिपोर्ट दुनिया भर के नीति निर्माताओं के उद्देश्य से है, और इस साल बीस मार्च को जारी होने के बाद शर्म अल-शेख में पिछले साल की जलवायु बैठक में लिए गए निर्णयों को लागू करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए कोपेनहेगन में एक मंत्री स्तरीय बैठक होगी। रिपोर्ट पर संयुक्त राष्ट्र दो हज़ार तेईस जल सम्मेलन में भी चर्चा की जाएगी, जिसमें जलवायु परिवर्तन सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा में से एक है। इसका उद्देश्य दुबई में इस वर्ष के जलवायु सम्मेलन में अधिक महत्वाकांक्षी समझौतों के लिए माहौल बनाना है, जो वर्ष के अंत में निर्धारित है। आसन्न विनाश की बार-बार की गई भविष्यवाणी के बावजूद, देशों ने जलवायु संकट का मुकाबला करने के लिए बहुत कम या कोई कदम नहीं उठाया है। कार्रवाई का मौजूदा स्तर दो डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक प्रयास के अनुरूप भी नहीं है। ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य योगदानकर्ताओं में से एक, जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की प्रतिबद्धता के रूप में बुनियादी बातों पर भी असहमति है।
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बॉलीवुड में बहुत से परिवार ऐसे हैं जहां सितारे अपनी मां के साथ साथ अपनी सौतेली मां से भी लगाव रखते हैं। इसमें शाहिद कपूर का परिवार भी शामिल हैं, जहां परिवार के सदस्यों के बीच जबरदस्त बॉन्डिंग हैं। शाहिद कपूर के पिता और एक्टर-फिल्ममेकर पंकज कपूर ने सुप्रिया पाठक से दूसरी शादी की थी। अब हाल ही में सुप्रिया पाठक ने शाहिद कपूर और उनके पत्नी-बच्चों से अपने संबंध पर बात की है।
शाहिद कपूर के बारे में बात करते हुए सुप्रिया पाठक ने कहा कि वो शाहिद से पहली बार तब मिली थी जब वो छह साल के थे। उन्होंने बताया कि उनका आपस में रिश्ता एक मां बेटे से कहीं बढ़कर है। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी उस पहली मुलाकात की यादें साझा कीं।
सुप्रिया पाठक ने कहा, 'हम एक दूसरे से दोस्त की तरह मिले थे। मैं उनके पापा की दोस्त थी और फिर ये हमेशा ऐसा ही रहा. . . . क्योंकि हम कभी साथ नहीं रहे। वो एक ऐसा व्यक्ति है जिस पर मैं हमेशा निर्भर रहती थी। मैं उसे वाकई प्यार करती हूं'।
आगे सुप्रिया पाठक ने कहा कि, 'मैं इस रिश्ते को परिभाषित नहीं कर सकती हूं, लेकिन ये कुछ ऐसा था कि मैं उस पर विश्वास करती हूं'। अपने पोते जैन और पोती मिशा के बारे में बात करते हुए सुप्रिया ने कहा कि वो उन्हें काफी पसंद करती हैं और वो काफी प्यारे बच्चे हैं।
सिर्फ शाहिद और उनके बच्चों की ही नहीं बल्कि सुप्रिया पाठक ने मीरा की भी काफी तारीफ की। सुप्रिया ने कहा कि वो ये नहीं सोचती है कि वो मीरा की सास है। उन्होंने कहा, ' मीरा मेरी बेटी की तरह है। मैं व्यक्तिगत तौर पर महसूस करती हूं कि मैं उसकी अच्छी दोस्त हूं। हम शॉपिंग, लंच, डिनर साथ करना पसंद करते हैं'। बता दें कि पंकज कपूर ने नीलिमा से शादी की थी लेकिन उनकी शादी सफल नहीं हो पाई। इसके बाद उन्होंने सुप्रिया पाठक से शादी कर ली थी वहीं नीलिमा ने राजेश खट्टर से शादी की और वो भी सफल नहीं हुई।
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बॉलीवुड में बहुत से परिवार ऐसे हैं जहां सितारे अपनी मां के साथ साथ अपनी सौतेली मां से भी लगाव रखते हैं। इसमें शाहिद कपूर का परिवार भी शामिल हैं, जहां परिवार के सदस्यों के बीच जबरदस्त बॉन्डिंग हैं। शाहिद कपूर के पिता और एक्टर-फिल्ममेकर पंकज कपूर ने सुप्रिया पाठक से दूसरी शादी की थी। अब हाल ही में सुप्रिया पाठक ने शाहिद कपूर और उनके पत्नी-बच्चों से अपने संबंध पर बात की है। शाहिद कपूर के बारे में बात करते हुए सुप्रिया पाठक ने कहा कि वो शाहिद से पहली बार तब मिली थी जब वो छह साल के थे। उन्होंने बताया कि उनका आपस में रिश्ता एक मां बेटे से कहीं बढ़कर है। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी उस पहली मुलाकात की यादें साझा कीं। सुप्रिया पाठक ने कहा, 'हम एक दूसरे से दोस्त की तरह मिले थे। मैं उनके पापा की दोस्त थी और फिर ये हमेशा ऐसा ही रहा. . . . क्योंकि हम कभी साथ नहीं रहे। वो एक ऐसा व्यक्ति है जिस पर मैं हमेशा निर्भर रहती थी। मैं उसे वाकई प्यार करती हूं'। आगे सुप्रिया पाठक ने कहा कि, 'मैं इस रिश्ते को परिभाषित नहीं कर सकती हूं, लेकिन ये कुछ ऐसा था कि मैं उस पर विश्वास करती हूं'। अपने पोते जैन और पोती मिशा के बारे में बात करते हुए सुप्रिया ने कहा कि वो उन्हें काफी पसंद करती हैं और वो काफी प्यारे बच्चे हैं। सिर्फ शाहिद और उनके बच्चों की ही नहीं बल्कि सुप्रिया पाठक ने मीरा की भी काफी तारीफ की। सुप्रिया ने कहा कि वो ये नहीं सोचती है कि वो मीरा की सास है। उन्होंने कहा, ' मीरा मेरी बेटी की तरह है। मैं व्यक्तिगत तौर पर महसूस करती हूं कि मैं उसकी अच्छी दोस्त हूं। हम शॉपिंग, लंच, डिनर साथ करना पसंद करते हैं'। बता दें कि पंकज कपूर ने नीलिमा से शादी की थी लेकिन उनकी शादी सफल नहीं हो पाई। इसके बाद उन्होंने सुप्रिया पाठक से शादी कर ली थी वहीं नीलिमा ने राजेश खट्टर से शादी की और वो भी सफल नहीं हुई।
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कैंसर क्या है, यह कैसे होता है, इसके लक्षण क्या हैं और इसे कैसे टाला जा सकता है. ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो स्तन कैंसर से संबंधित महिलाओं के मन में रहते हैं. भारत में हर 10 महिलाओं में एक स्तन कैंसर से पीड़ित है और विशेषज्ञों का कहना है कि स्तन कैंसर के इस रोग से पीड़ित महिलाओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ गई है.
स्तन कैंसर की घटना लंबे समय से बढ़ रही है. भारत की प्रत्येक आठ महिलाओं में से एक स्तन कैंसर से पीड़ित है. हालांकि यह पुरुषों में भी होता है, बहुत कम ही. घरेलू कोर और फिर बच्चों के साथ कार्यालय! आज की महिलाओं का जीवन इतना जटिल है कि उन्हें अपने लिए समय नहीं मिलता है. इस सबके बीच, वह अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पा रही है. महिलाओं में कई सामान्य रोग हैं, जिनसे उन्हें रोजमर्रा की जीवनशैली में निपटना होता है. उनमें से एक स्तन कैंसर है.
स्तन कैंसर की घटना को कम करने के लिए स्तन कैंसर के लक्षणों और उपचारों के बारे में जागरूकता आकर्षित करने के लिए चिकित्सा सर्कल में हमारा उद्देश्य है.
डॉ. आशुतोष चौहान ने मुंबई के एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में सामान्य सर्जरी में अपना पोस्टग्रेजुएशन पूरा किया और इसके लिए राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड का एक डिप्लोमेट भी है. उन्होंने मुंबई से सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप किया है और राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, दिल्ली से सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में DNB भी प्राप्त किया है. उन्हें रेन्स इंस्टीट्यूट, किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल, लंदन में अनुवाद अनुसंधान में भी प्रशिक्षित किया गया है.
डॉ. चौहान की विशेषज्ञता का प्रमुख क्षेत्र स्तन ऑन्कोलॉजी (स्तन संरक्षण सर्जरी, ऑनकोप्लास्टिक स्तन की सर्जरी, और स्तन पुनर्निर्माण, एब्लेटिव सर्जरी का पालन) और सिर और गर्दन सर्जरी (मौखिक कैंसर में अनिवार्य संरक्षण और फॉर्म संरक्षण सर्जरी) है.
क्या ब्रेस्ट कैंसर जेनेटिक है?
सर्जरी - स्तन कन्ज़र्वेटिव सर्जरी कैंसर को सर्जरी के माध्यम से प्रभावित करने और ब्रेस्ट के शेष भाग को कॉस्मेटिक रूप से पुनर्निर्मित करने के लिए.
लंबे समय के लिए एस्ट्रोजन-रिस्पॉन्सिव ट्यूमर के लिए इम्यूनोथेरेपी और हार्मोनल थेरेपी.
(डॉ. रति परवानी द्वारा संपादित)
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कैंसर क्या है, यह कैसे होता है, इसके लक्षण क्या हैं और इसे कैसे टाला जा सकता है. ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो स्तन कैंसर से संबंधित महिलाओं के मन में रहते हैं. भारत में हर दस महिलाओं में एक स्तन कैंसर से पीड़ित है और विशेषज्ञों का कहना है कि स्तन कैंसर के इस रोग से पीड़ित महिलाओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ गई है. स्तन कैंसर की घटना लंबे समय से बढ़ रही है. भारत की प्रत्येक आठ महिलाओं में से एक स्तन कैंसर से पीड़ित है. हालांकि यह पुरुषों में भी होता है, बहुत कम ही. घरेलू कोर और फिर बच्चों के साथ कार्यालय! आज की महिलाओं का जीवन इतना जटिल है कि उन्हें अपने लिए समय नहीं मिलता है. इस सबके बीच, वह अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पा रही है. महिलाओं में कई सामान्य रोग हैं, जिनसे उन्हें रोजमर्रा की जीवनशैली में निपटना होता है. उनमें से एक स्तन कैंसर है. स्तन कैंसर की घटना को कम करने के लिए स्तन कैंसर के लक्षणों और उपचारों के बारे में जागरूकता आकर्षित करने के लिए चिकित्सा सर्कल में हमारा उद्देश्य है. डॉ. आशुतोष चौहान ने मुंबई के एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में सामान्य सर्जरी में अपना पोस्टग्रेजुएशन पूरा किया और इसके लिए राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड का एक डिप्लोमेट भी है. उन्होंने मुंबई से सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप किया है और राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, दिल्ली से सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में DNB भी प्राप्त किया है. उन्हें रेन्स इंस्टीट्यूट, किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल, लंदन में अनुवाद अनुसंधान में भी प्रशिक्षित किया गया है. डॉ. चौहान की विशेषज्ञता का प्रमुख क्षेत्र स्तन ऑन्कोलॉजी और सिर और गर्दन सर्जरी है. क्या ब्रेस्ट कैंसर जेनेटिक है? सर्जरी - स्तन कन्ज़र्वेटिव सर्जरी कैंसर को सर्जरी के माध्यम से प्रभावित करने और ब्रेस्ट के शेष भाग को कॉस्मेटिक रूप से पुनर्निर्मित करने के लिए. लंबे समय के लिए एस्ट्रोजन-रिस्पॉन्सिव ट्यूमर के लिए इम्यूनोथेरेपी और हार्मोनल थेरेपी.
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OMG! मां अपने जिंदा बेटे की अंतिम संस्कार की कर रही तैयारी, आखिर क्या है वजह?
एक महिला का बेटा जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है. डॉक्टरों ने साफ कह दिया है कि उसे बचाने के लिए एक ही ऑप्शन बचा है. यह सुनकर महिला बुरी तरह से टूट गई है.
एक मां के लिए उसका बच्चा ही पूरी दुनिया होती है. जरा सोचिए कि उस महिला पर क्या बीत रही होगी, जिसे पता चले कि उसका नवजात बेटा तिल-तिल कर मर रहा है. ब्रिटेन की एक महिला के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. बच्चे के जन्म के आठ हफ्ते बाद ही उसकी खुशियों को मानो ग्रहण लग गया. आज उसका बेटा अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है. यह महिला अंदर से इतनी टूट गई है कि बेटे के जिंदा होने के बावजूद अब उसके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही है.
मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, यूके की 28 वर्षीय जेड जॉन्स का बेटा जन्म के आठ हफ्ते बाद ही बीमार पड़ गया. बाद में पता चला कि उसके दिल में छेद हो गया है. अगर समय पर हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हुआ, तो वह नहीं बचेगा.अपने बच्चे को तिल-तिल कर मरता देख जेड बुरी तरह टूट गई हैं. जेड को लगता है कि वह अपनी पूरी दुनिया खोने जा रही है. उसे अपने बच्चे के लिए ऑर्गन डोनर का बेसब्री से इंतजार है, लेकिन मिल नहीं रहा.
जेड ने बताया कि फिलहाल उनके बेटे की हालत स्थिर है. उसे एलवीएडी (एक मैकेनिकल दिल) सपोर्ट पर रखा गया है, लेकिन यह अस्थाई है. उन्होंने भारी मन से कहा, लुई जिंदा है फिर भी मैं दिल पर पत्थर रखकर उसके फ्यूनरल की तैयारी कर रही हूं.
महिला ने बताया कि लुई जब तीन हफ्ते का था, तब उसे सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल ले जाना पड़ा.जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसे ब्रोंकाइटिस और नेजल ड्रॉप के साथ उन्हें घर भेज दिया. चार दिन बाद ही लुई की तबीयत बिगड़ी और उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. जांच में पता चला कि लुई एंटरोवायरस से जूझ रहा था. इससे उसके दिल को गंभीर नुकसान पहुंचा.
इसके बाद लुई की हालत बिगड़ती चली गई. उसे कई बार कार्डियक अरेस्ट आया. डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट ट्रांसप्लांटेशन के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं है. महिला ने बताया कि उसने अपने बेटे की कहानी इसलिए लोगों के साथ शेयर की, ताकि उन्हें कोई डोनर मिल सके.
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OMG! मां अपने जिंदा बेटे की अंतिम संस्कार की कर रही तैयारी, आखिर क्या है वजह? एक महिला का बेटा जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है. डॉक्टरों ने साफ कह दिया है कि उसे बचाने के लिए एक ही ऑप्शन बचा है. यह सुनकर महिला बुरी तरह से टूट गई है. एक मां के लिए उसका बच्चा ही पूरी दुनिया होती है. जरा सोचिए कि उस महिला पर क्या बीत रही होगी, जिसे पता चले कि उसका नवजात बेटा तिल-तिल कर मर रहा है. ब्रिटेन की एक महिला के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. बच्चे के जन्म के आठ हफ्ते बाद ही उसकी खुशियों को मानो ग्रहण लग गया. आज उसका बेटा अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है. यह महिला अंदर से इतनी टूट गई है कि बेटे के जिंदा होने के बावजूद अब उसके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही है. मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, यूके की अट्ठाईस वर्षीय जेड जॉन्स का बेटा जन्म के आठ हफ्ते बाद ही बीमार पड़ गया. बाद में पता चला कि उसके दिल में छेद हो गया है. अगर समय पर हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हुआ, तो वह नहीं बचेगा.अपने बच्चे को तिल-तिल कर मरता देख जेड बुरी तरह टूट गई हैं. जेड को लगता है कि वह अपनी पूरी दुनिया खोने जा रही है. उसे अपने बच्चे के लिए ऑर्गन डोनर का बेसब्री से इंतजार है, लेकिन मिल नहीं रहा. जेड ने बताया कि फिलहाल उनके बेटे की हालत स्थिर है. उसे एलवीएडी सपोर्ट पर रखा गया है, लेकिन यह अस्थाई है. उन्होंने भारी मन से कहा, लुई जिंदा है फिर भी मैं दिल पर पत्थर रखकर उसके फ्यूनरल की तैयारी कर रही हूं. महिला ने बताया कि लुई जब तीन हफ्ते का था, तब उसे सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल ले जाना पड़ा.जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसे ब्रोंकाइटिस और नेजल ड्रॉप के साथ उन्हें घर भेज दिया. चार दिन बाद ही लुई की तबीयत बिगड़ी और उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. जांच में पता चला कि लुई एंटरोवायरस से जूझ रहा था. इससे उसके दिल को गंभीर नुकसान पहुंचा. इसके बाद लुई की हालत बिगड़ती चली गई. उसे कई बार कार्डियक अरेस्ट आया. डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट ट्रांसप्लांटेशन के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं है. महिला ने बताया कि उसने अपने बेटे की कहानी इसलिए लोगों के साथ शेयर की, ताकि उन्हें कोई डोनर मिल सके.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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IPL 2023: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2023 में लगातार इंजरी की समस्या से टीमें परेशान हैं। सीजन का 17वां मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेला जा रहा है। इस मैच से पहले दोनों टीमें इंजरी की समस्या से जूझती नजर आई हैं। संजू सैमसन की अगुआई वाली राजस्थान रॉयल्स को एक बड़े खिलाड़ी की इंजरी के कारण मजबूरी में उनके बिना उतरना पड़ा है। वहीं सीएसके भी दो बड़े खिलाड़ियों की इंजरी से परेशान है। कप्तान एमएस धोनी ने भी टॉस के समय इस बात को स्वीकारा कि उनकी टीम इंजरी की समस्या से जूझ रही है।
आईपीएल 2023 के 17वें मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स की टीम स्टार पेसर ट्रेंट बोल्ट के बिना मैदान पर उतरी है। वहीं सीएसके की टीम बेन स्टोक्स और दीपक चाहर की इंजरी से परेशान है। इसके अलावा टीम ने इस मैच में मिचेल सैंटनर और ड्वेन प्रेटोरियन को भी बाहर कर दिया है। राजस्थान की टीम इससे पहले भी कुलदीप सेन जैसे प्रमुख गेंदबाज के बिना उतरने को मजबूर थी, हालांकि इस मैच में उनकी वापसी हुई है। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा पहले ही पूरे सीजन से बाहर हो चुके थे। कप्तान संजू सैमसन ने टॉस के समय जानकारी दी कि बोल्ट को निगल है जिस कारण वह यह मुकाबला नहीं खेल पा रहे हैं।
इस मैच की बात करें तो सीएसके के कप्तान एमएस धोनी का यह चेन्नई के कप्तान के तौर पर 200वां मैच है। वह इस सीजन में दूसरी बार चेपॉक के मैदान पर उतरे और उन्होंने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। राजस्थान रॉयल्स की टीम इस मैच में पहले बल्लेबाजी करेगी। दोनों टीमों ने इससे पहले तीन में से 2-2 मैच जीते हैं।
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IPL दो हज़ार तेईस: इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार तेईस में लगातार इंजरी की समस्या से टीमें परेशान हैं। सीजन का सत्रहवां मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेला जा रहा है। इस मैच से पहले दोनों टीमें इंजरी की समस्या से जूझती नजर आई हैं। संजू सैमसन की अगुआई वाली राजस्थान रॉयल्स को एक बड़े खिलाड़ी की इंजरी के कारण मजबूरी में उनके बिना उतरना पड़ा है। वहीं सीएसके भी दो बड़े खिलाड़ियों की इंजरी से परेशान है। कप्तान एमएस धोनी ने भी टॉस के समय इस बात को स्वीकारा कि उनकी टीम इंजरी की समस्या से जूझ रही है। आईपीएल दो हज़ार तेईस के सत्रहवें मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स की टीम स्टार पेसर ट्रेंट बोल्ट के बिना मैदान पर उतरी है। वहीं सीएसके की टीम बेन स्टोक्स और दीपक चाहर की इंजरी से परेशान है। इसके अलावा टीम ने इस मैच में मिचेल सैंटनर और ड्वेन प्रेटोरियन को भी बाहर कर दिया है। राजस्थान की टीम इससे पहले भी कुलदीप सेन जैसे प्रमुख गेंदबाज के बिना उतरने को मजबूर थी, हालांकि इस मैच में उनकी वापसी हुई है। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा पहले ही पूरे सीजन से बाहर हो चुके थे। कप्तान संजू सैमसन ने टॉस के समय जानकारी दी कि बोल्ट को निगल है जिस कारण वह यह मुकाबला नहीं खेल पा रहे हैं। इस मैच की बात करें तो सीएसके के कप्तान एमएस धोनी का यह चेन्नई के कप्तान के तौर पर दो सौवां मैच है। वह इस सीजन में दूसरी बार चेपॉक के मैदान पर उतरे और उन्होंने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। राजस्थान रॉयल्स की टीम इस मैच में पहले बल्लेबाजी करेगी। दोनों टीमों ने इससे पहले तीन में से दो-दो मैच जीते हैं।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण मणिपुर का अपना एक प्राचीन एवं समृद्ध इतिहास है। इसका इतिहास पुरातात्विक अनुसंधानों, मिथकों तथा कलिखित इतिहास से प्राप्त होता है। इसका प्राचीन नाम कंलैपाक् है। मणिपुर के नामकरण के संदर्भ में जहाँ पौराणिक कथाओं से उसका संबंध जोड़ा जाता है, वहीं प्राप्त तथ्यों से यह प्रमाणित होता है कि प्राचीन काल में पड़ोसी राज्यों द्वारा मणिपुर को विभिन्न नामों से पुकारा जाता था, जैसे बर्मियों द्वारा कथे, असमियों द्वारा मोगली, मिक्ली आदि। इतिहास से यह भी पता चलता है कि मणिपुर को मैत्रबाक, कंलैपुं या पोंथोक्लम आदि नामों से भी जाना जाता था। ईसवी युग के प्रारंभ होने से पहले से ही मणिपुर का लंबा और शानदार इतिहास है। यहां के राजवंशों का लिखित इतिहास सन 33 ई. में पाखंगबा के राज्याभिषेक के साथ शुरू होता है। उसने इस भूमि पर प्रथम शासक के रूप में १२० वर्षों (33-154 ई) तक शासन किया। उसके बाद अनेक राजाओं ने मणिपुर पर शासन किया। आगे जाकर मणिपुर के महाराज कियाम्बा ने 1467, खागेम्बा ने 1597, चराइरोंबा ने 1698, गरीबनिवाज ने 1714, भाग्यचन्द्र (जयसिंह) ने 1763, गम्भीर सिंह ने 1825 को शासन किया। इन जैसे महावीर महाराजाओं ने शासन कर मणिपुर की सीमाओं की रक्षा की। मणिपुर की स्वतंत्रता और संप्रभुता 19वीं सदी के आरंभ तक बनी रही। उसके बाद सात वर्ष (1819 से 1825 तक) बर्मी लोगों ने यहां पर कब्जा करके शासन किया। 24 अप्रैल, 1891 के खोंगजोम युद्ध (अंग्रेज-मणिपुरी युद्ध) हुआ जिसमें मणिपुर के वीर सेनानी पाओना ब्रजवासी ने अंग्रेजों के हाथों से अपने मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की। इस प्रकार 1891 में मणिपुर ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया और 1947 में शेष देश के साथ स्वतंत्र हुआ। 1947 में जब अंग्रेजों ने मणिपुर छोड़ा तब से मणिपुर का शासन महाराज बोधचन्द्र के कन्धों पर पड़ा। 21 सितम्बर1949 को हुई विलय संधि के बाद 15 अक्टूबर 1949 से मणिपुर भारत का अंग बना। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने पर यह एक मुख्य आयुक्त के अधीन भारतीय संघ में भाग 'सी' के राज्य के रूप में शामिल हुआ। बाद में इसके स्थान पर एक प्रादेशिक परिषद गठित की गई जिसमें 30 चयनित तथा दो मनोनीत सदस्य थे। इसके बाद 1962 में केंद्रशासित प्रदेश अधिनियम के अंतर्गत 30 चयनित तथा तीन मनोनीत सदस्यों की एक विधानसभा स्थापित की गई। 19 दिसंबर, 1969 से प्रशासक का दर्जा मुख्य आयुक्त से बढ़ाकर उपराज्यपाल कर दिया गया। 21 जनवरी, 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और 60 निर्वाचित सदस्यों वाली विधानसभा गठित की गई। इसमें 19 अनुसूचित जनजाति और 1 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। राज्य में लोकसभा में दो और राज्यसभा में एक प्रतिनिधि है। . तीर्थयात्रा करने के बाद रामानन्द जब घर आए और गुरुमठ पहुँचे तो उनके गुरुभाइयों ने उनके साथ भोजन करने में आपत्ति की। उनका अनुमान था कि रामानन्द ने तीर्थाटन में अवश्य ही खानपान संबंधी छुआछूत का कोई विचार नहीं किया होगा। राघवानन्द ने अपने शिष्यों का यह आग्रह देखकर एक नया संप्रदाय चलाने की सलाह दे दी। यहीं से रामानन्द संप्रदाय का जन्म हुआ। इन दृष्टियों से रामानंद संप्रदाय एवं रामानुज संप्रदाय में भेद है किंतु दार्शनिक सिद्धांत से दोनों ही संप्रदाय विशिष्टाद्वैत मत के पोषक हैं। दोनों ही ब्रह्म को चिदचिद्विशिष्ट मानते हैं और दोनों ही के मत के पोषक हैं। दोनों ही ब्रह्म को चिदचिद्विशिष्ट मानते हैं और दोनों ही के मत से मोक्ष का उपाय परमोपास्य की 'प्रपत्ति' है। रामानंद संप्रदाय में निम्नलिखित बातें प्रधान हैं -.
मणिपुर का इतिहास और रामानन्दी सम्प्रदाय आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
मणिपुर का इतिहास 10 संबंध है और रामानन्दी सम्प्रदाय 13 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (10 + 13)।
यह लेख मणिपुर का इतिहास और रामानन्दी सम्प्रदाय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण मणिपुर का अपना एक प्राचीन एवं समृद्ध इतिहास है। इसका इतिहास पुरातात्विक अनुसंधानों, मिथकों तथा कलिखित इतिहास से प्राप्त होता है। इसका प्राचीन नाम कंलैपाक् है। मणिपुर के नामकरण के संदर्भ में जहाँ पौराणिक कथाओं से उसका संबंध जोड़ा जाता है, वहीं प्राप्त तथ्यों से यह प्रमाणित होता है कि प्राचीन काल में पड़ोसी राज्यों द्वारा मणिपुर को विभिन्न नामों से पुकारा जाता था, जैसे बर्मियों द्वारा कथे, असमियों द्वारा मोगली, मिक्ली आदि। इतिहास से यह भी पता चलता है कि मणिपुर को मैत्रबाक, कंलैपुं या पोंथोक्लम आदि नामों से भी जाना जाता था। ईसवी युग के प्रारंभ होने से पहले से ही मणिपुर का लंबा और शानदार इतिहास है। यहां के राजवंशों का लिखित इतिहास सन तैंतीस ई. में पाखंगबा के राज्याभिषेक के साथ शुरू होता है। उसने इस भूमि पर प्रथम शासक के रूप में एक सौ बीस वर्षों तक शासन किया। उसके बाद अनेक राजाओं ने मणिपुर पर शासन किया। आगे जाकर मणिपुर के महाराज कियाम्बा ने एक हज़ार चार सौ सरसठ, खागेम्बा ने एक हज़ार पाँच सौ सत्तानवे, चराइरोंबा ने एक हज़ार छः सौ अट्ठानवे, गरीबनिवाज ने एक हज़ार सात सौ चौदह, भाग्यचन्द्र ने एक हज़ार सात सौ तिरेसठ, गम्भीर सिंह ने एक हज़ार आठ सौ पच्चीस को शासन किया। इन जैसे महावीर महाराजाओं ने शासन कर मणिपुर की सीमाओं की रक्षा की। मणिपुर की स्वतंत्रता और संप्रभुता उन्नीसवीं सदी के आरंभ तक बनी रही। उसके बाद सात वर्ष बर्मी लोगों ने यहां पर कब्जा करके शासन किया। चौबीस अप्रैल, एक हज़ार आठ सौ इक्यानवे के खोंगजोम युद्ध हुआ जिसमें मणिपुर के वीर सेनानी पाओना ब्रजवासी ने अंग्रेजों के हाथों से अपने मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की। इस प्रकार एक हज़ार आठ सौ इक्यानवे में मणिपुर ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया और एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में शेष देश के साथ स्वतंत्र हुआ। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में जब अंग्रेजों ने मणिपुर छोड़ा तब से मणिपुर का शासन महाराज बोधचन्द्र के कन्धों पर पड़ा। इक्कीस सितम्बरएक हज़ार नौ सौ उनचास को हुई विलय संधि के बाद पंद्रह अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ उनचास से मणिपुर भारत का अंग बना। छब्बीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ पचास को भारतीय संविधान लागू होने पर यह एक मुख्य आयुक्त के अधीन भारतीय संघ में भाग 'सी' के राज्य के रूप में शामिल हुआ। बाद में इसके स्थान पर एक प्रादेशिक परिषद गठित की गई जिसमें तीस चयनित तथा दो मनोनीत सदस्य थे। इसके बाद एक हज़ार नौ सौ बासठ में केंद्रशासित प्रदेश अधिनियम के अंतर्गत तीस चयनित तथा तीन मनोनीत सदस्यों की एक विधानसभा स्थापित की गई। उन्नीस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर से प्रशासक का दर्जा मुख्य आयुक्त से बढ़ाकर उपराज्यपाल कर दिया गया। इक्कीस जनवरी, एक हज़ार नौ सौ बहत्तर को मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और साठ निर्वाचित सदस्यों वाली विधानसभा गठित की गई। इसमें उन्नीस अनुसूचित जनजाति और एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। राज्य में लोकसभा में दो और राज्यसभा में एक प्रतिनिधि है। . तीर्थयात्रा करने के बाद रामानन्द जब घर आए और गुरुमठ पहुँचे तो उनके गुरुभाइयों ने उनके साथ भोजन करने में आपत्ति की। उनका अनुमान था कि रामानन्द ने तीर्थाटन में अवश्य ही खानपान संबंधी छुआछूत का कोई विचार नहीं किया होगा। राघवानन्द ने अपने शिष्यों का यह आग्रह देखकर एक नया संप्रदाय चलाने की सलाह दे दी। यहीं से रामानन्द संप्रदाय का जन्म हुआ। इन दृष्टियों से रामानंद संप्रदाय एवं रामानुज संप्रदाय में भेद है किंतु दार्शनिक सिद्धांत से दोनों ही संप्रदाय विशिष्टाद्वैत मत के पोषक हैं। दोनों ही ब्रह्म को चिदचिद्विशिष्ट मानते हैं और दोनों ही के मत के पोषक हैं। दोनों ही ब्रह्म को चिदचिद्विशिष्ट मानते हैं और दोनों ही के मत से मोक्ष का उपाय परमोपास्य की 'प्रपत्ति' है। रामानंद संप्रदाय में निम्नलिखित बातें प्रधान हैं -. मणिपुर का इतिहास और रामानन्दी सम्प्रदाय आम में शून्य बातें हैं । मणिपुर का इतिहास दस संबंध है और रामानन्दी सम्प्रदाय तेरह है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख मणिपुर का इतिहास और रामानन्दी सम्प्रदाय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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China: बता दें कि चीन में इस हिट गाने को मंडारीन (Mandarin) लैंग्वेज 'जिम्मी जिम्मी आजा आजा' में बनाया गया है। जिसका अर्थ होता है कि 'मुझे चावल दो, मुझे चावल दो'। वीडियो में देखा जा सकता है कि जिनपिंग के खिलाफ देश की जनता भड़की हुई है और खाली बर्तन को बजाकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे है।
नई दिल्ली। चीन में एक बार फिर से कोरोना महामारी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। पड़ोसी मुल्क में कोरोना का कहर इस कदर है कि सख्त लॉकडाउन लगाना पड़ रहा है लोगों को जबरन घरों में कैद होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा लगाए जीरो कोविड पॉलिसी को लेकर लोग अपना रोष भी प्रकट कर रहे है। लेकिन चीनी लोगों का विरोध करने का अंदाज इस बार बिल्कुल ही अलग देखने को मिला हैं। कोरोना महामारी के बीच चीन में हिंदुस्तान के दिवंगत संगीतकार बप्पी लाहिड़ी के मशहूर सॉन्ग की धूम देखने को मिल रही है। दरअसल चीन की जनता शी जिनपिंग के खिलाफ गुस्सा जाहिर करने के लिए दिवंगत संगीतकार बप्पी लाहिड़ी का गाने का प्रयोग कर रही हैं। आपको बता दें कि 1982 में आई अभिनेता मिथुन की सुपरहिट फिल्म डिस्को का गाना 'जिम्मी जिम्मी आजा आजा' के जरिए वहां के लोग अनोखे अंदाज में विरोध जता रहे है।
इसके अलावा खास बात ये है कि चीनी सरकार के विरोध में अक्सर वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हटा दिया जाता है। लेकिन इस बार अभी तक इस वीडियो डिलीट नहीं करवाया गया है। बता दें कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बप्पी लाहिड़ी का गाना 'जिम्मी जिम्मी आजा आजा' वीडियो तेजी से वायरल हो रहा हैं, जिसमें चीन के लोग लॉकडाउन पर अपना गुस्सा दिखा रहे है और उनके सॉन्ग के जरिए नाराजगी भी जता रहे है।
बता दें कि चीन में इस हिट गाने को मंडारीन (Mandarin) लैंग्वेज 'जिम्मी जिम्मी आजा आजा' में बनाया गया है। जिसका अर्थ होता है कि 'मुझे चावल दो, मुझे चावल दो'। वीडियो में देखा जा सकता है कि जिनपिंग के खिलाफ देश की जनता भड़की हुई है और खाली बर्तन को बजाकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे है। एक के नहीं बल्कि कई लोग वीडियो के जरिए चीनी सरकार के सख्त लॉकडाउन को लेकर गुस्सा दिखा रहे है। खाली बर्तन के माध्यम से वहां के लोग जिनपिंग सरकार को ये भी संदेश देने की कोशिश कर रहे है कि उन्हें खाने-पीने जैसी चीजों से दो चार होना पड़ रहा है यानि की उनके पास खाने की भारी किल्लत भी हो रही है।
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China: बता दें कि चीन में इस हिट गाने को मंडारीन लैंग्वेज 'जिम्मी जिम्मी आजा आजा' में बनाया गया है। जिसका अर्थ होता है कि 'मुझे चावल दो, मुझे चावल दो'। वीडियो में देखा जा सकता है कि जिनपिंग के खिलाफ देश की जनता भड़की हुई है और खाली बर्तन को बजाकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे है। नई दिल्ली। चीन में एक बार फिर से कोरोना महामारी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। पड़ोसी मुल्क में कोरोना का कहर इस कदर है कि सख्त लॉकडाउन लगाना पड़ रहा है लोगों को जबरन घरों में कैद होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा लगाए जीरो कोविड पॉलिसी को लेकर लोग अपना रोष भी प्रकट कर रहे है। लेकिन चीनी लोगों का विरोध करने का अंदाज इस बार बिल्कुल ही अलग देखने को मिला हैं। कोरोना महामारी के बीच चीन में हिंदुस्तान के दिवंगत संगीतकार बप्पी लाहिड़ी के मशहूर सॉन्ग की धूम देखने को मिल रही है। दरअसल चीन की जनता शी जिनपिंग के खिलाफ गुस्सा जाहिर करने के लिए दिवंगत संगीतकार बप्पी लाहिड़ी का गाने का प्रयोग कर रही हैं। आपको बता दें कि एक हज़ार नौ सौ बयासी में आई अभिनेता मिथुन की सुपरहिट फिल्म डिस्को का गाना 'जिम्मी जिम्मी आजा आजा' के जरिए वहां के लोग अनोखे अंदाज में विरोध जता रहे है। इसके अलावा खास बात ये है कि चीनी सरकार के विरोध में अक्सर वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हटा दिया जाता है। लेकिन इस बार अभी तक इस वीडियो डिलीट नहीं करवाया गया है। बता दें कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बप्पी लाहिड़ी का गाना 'जिम्मी जिम्मी आजा आजा' वीडियो तेजी से वायरल हो रहा हैं, जिसमें चीन के लोग लॉकडाउन पर अपना गुस्सा दिखा रहे है और उनके सॉन्ग के जरिए नाराजगी भी जता रहे है। बता दें कि चीन में इस हिट गाने को मंडारीन लैंग्वेज 'जिम्मी जिम्मी आजा आजा' में बनाया गया है। जिसका अर्थ होता है कि 'मुझे चावल दो, मुझे चावल दो'। वीडियो में देखा जा सकता है कि जिनपिंग के खिलाफ देश की जनता भड़की हुई है और खाली बर्तन को बजाकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे है। एक के नहीं बल्कि कई लोग वीडियो के जरिए चीनी सरकार के सख्त लॉकडाउन को लेकर गुस्सा दिखा रहे है। खाली बर्तन के माध्यम से वहां के लोग जिनपिंग सरकार को ये भी संदेश देने की कोशिश कर रहे है कि उन्हें खाने-पीने जैसी चीजों से दो चार होना पड़ रहा है यानि की उनके पास खाने की भारी किल्लत भी हो रही है।
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[ करु मतसई काहू समृति लखाय, दीपशलाका लाय ? ॥६६॥
सम शिक्षा, समभाव, त्यों
चैनन व्यौहार,
असन, बसन, बर बासही है हरिजन उद्वार । ॥१००।
परत न नेकु अछूतपन यदि है ? जारत वाहि किन
चाहिये, किन्तु यदि इसके द्वारा हरिजनोद्वार अभिप्रेत हो. तो यह उनकी लो भावना मात्र है । इरिजनों का उदार उनको आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों को दूर करने से हो सम्भव है, न कि उनके यहाँ अववार लेने- उन्हों जैसा दोन-हीन घन जाने से।
(1) सच तो यह है कि स्मृति प्रन्यों में कहीं भी अछूतपन का वह स्वरूप नहीं है, जो श्राज हमारे देश में बरखा जा रहा है। किन्तु यदि पैसी कोई भप्रयोजनीय चातें उन मन्यों में किसी विकृत मस्तिष्क पाले ने लिन मारो हों, वो युग धर्म के सर्वथा विरुद्ध ज्ञान कर क्या टनका विनष्ट कर देना ही श्रेयस्कर न होगा ?
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[ करु मतसई काहू समृति लखाय, दीपशलाका लाय ? ॥छयासठ॥ सम शिक्षा, समभाव, त्यों चैनन व्यौहार, असन, बसन, बर बासही है हरिजन उद्वार । ॥एक सौ। परत न नेकु अछूतपन यदि है ? जारत वाहि किन चाहिये, किन्तु यदि इसके द्वारा हरिजनोद्वार अभिप्रेत हो. तो यह उनकी लो भावना मात्र है । इरिजनों का उदार उनको आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों को दूर करने से हो सम्भव है, न कि उनके यहाँ अववार लेने- उन्हों जैसा दोन-हीन घन जाने से। सच तो यह है कि स्मृति प्रन्यों में कहीं भी अछूतपन का वह स्वरूप नहीं है, जो श्राज हमारे देश में बरखा जा रहा है। किन्तु यदि पैसी कोई भप्रयोजनीय चातें उन मन्यों में किसी विकृत मस्तिष्क पाले ने लिन मारो हों, वो युग धर्म के सर्वथा विरुद्ध ज्ञान कर क्या टनका विनष्ट कर देना ही श्रेयस्कर न होगा ?
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बागवानी फसलें खाद्य एवं पौष्टिकता सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार पारिस्थितिकीय संतुलन तथा विधायन उद्योग को कच्चा माल प्रदान करने में अहम भूमिका निभाती है। वर्ष 2005-06 के आंकड़ों के अनुसार भारतवर्ष में लगभग 5,510,000 हेक्टेयर भूमि पर फलों की काश्त की गई जिससे 5,874,0000 टन का उत्पादन हुआ। चीन के बाद फल उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है तथा विश्व के कुल उत्पादन में भारत की लगभग 10 प्रतिशत भागीदारी है। हमारा देश आम, केला, चीकू तथा नीम्बू प्रजाति के फलों के उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है।
विविध वातावरण एवं भूमि की बनावट हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक देन है। आज हमारा प्रदेश देश में सेब राज्य के नाम से जाना जाता है। प्रदेश में वर्ष 1950 में फलों के अंतर्गत 793 हेक्टेयर भूमि थी जो वर्ष 2005-06 में बढ़कर 182000 हेक्टेयर हो गई तथा फल उत्पादन 1200 मिट्रिक टन से बढ़कर 692000 मिट्रिक टन तक पहुंच गया। प्रदेश में लगभग 4.64 लाख किसान फल उत्पादन से जुड़े हैं तथा फल उद्योग से 900 लाख श्रम-दिवस रोजगार का सृजन होता है। फलों के अंतर्गत कुल भूमि तथा उत्पादन में अकेले सेब की क्रमशः 45 प्रतिशत तथा 85 प्रतिशत भागीदारी है।
विश्व के अन्य भागों की तरह प्रदेश में भी जलवायु तथा पर्यावरण में परिवर्तन आया है। इसका एक मुख्य कारण विकास की अंधाधुंध दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों का अवैज्ञानिक दोहन भी माना जा रहा है। इस परिवर्तन के कारण बागवानों को कई प्राकृतिक विपदाओं का सामना करना पड़ा है। एक क्षेत्र में बार-बार एक ही फसल उगाने के दुष्परिणाम भी हमारे सामने आने लगे है तथा समय की पुकार है कि बागवानी के क्षेत्र में विविधता लाई जाये। भविष्य की बागवानी इसी पर निर्भर होगी।
इन समस्त समस्याओं के निवारण के लिए अति अनिवार्य है कि नवीनतम तकनीकी का विकास किया जाए तथा इस जानकारी का बागवानों के खेतों तक स्थानांतरण किया जाए। इस दिशा में विभिन्न प्रसार माध्यमों का प्रयोग कारगर ढंग से करना होगा ताकि बागवान नई तकनीकों को अपनाकर अपने चहुंमुखी विकास की ओर अग्रसर हो सकें और प्रदेश की आर्थिक समृद्धि में भागीदारी निभा सकें। इस दिशा में प्रस्तुत पुस्तिका 'फल उत्पादन एवं संरक्षण' में नवीनतम तकनीकी जानकारी उपलब्ध करवाई गई है जो बागवानों, प्रसार अधिकारियों तथा उद्यमियों के लिए मार्गदर्शिका का कार्य करेगी।
भारत का चीन के बाद फल उत्पादन में दूसरा स्थान है। हमारा देश फलों के अंतर्गत 5.55 मिलियन हेक्टेयर भूमि से लगभग 59.0 मिलियन टन फल पैदा करता है, जबकि चीन 10.50 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र से लगभग 89 मिलियन टन फलों का उत्पादन करता है। चीन और भारत की विश्व फल उत्पादन में क्रमशः 16.7 तथा 11 प्रतिशत की भागीदारी है। आज अकेला चीन विश्व का लगभग 40 प्रतिशत सेब उत्पन्न कर रहा है जबकि भारतवर्ष आम तथा केले के उत्पादन में अग्रणी है। अगर हम मुख्य फलों की उत्पादकता में सार्थक वृद्धि करें तो हम फलोत्पादन में प्रथम स्थान प्राप्त कर सकते हैं। यह तभी सम्भव होगा यदि हमारे बागवान उन्नत किस्मों व नवीनतम हाईटेक तकनीकी का उपयोग करें।
प्राकृतिक प्रकोपों, अनेक बीमारियों तथा कीटों की समस्याओं के कारण अत्याधिक फसलों में काफी क्षति उठानी पड़ती है। आर्थिक लाभ अर्जित करने व वैज्ञानिक ढंग से बागवानी करने हेतु उन्नत तकनीक अपनाना आवश्यक है। प्रचार माध्यम तथा संचार साधन अनुसंधान की उपलब्धियों को किसानों तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह निदेशालय उपयुक्त तकनीक जन-जन तक पहुँचाने का लगातार प्रयास कर रहा है तथा हमारा यह प्रत्यन्त रहा है कि हम विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित बागवानी में नई प्राद्योगिकी को सरल और सहज भाषा के माध्यम से फल उत्पादकों तक पहुँचा सकें। इस प्रकाशन में अभी तक की फल उत्पादन एवं संरक्षण की सभी अनुमोदित अनुसंधान सिफारिशें सम्मिलित की गई है।
हमारे प्रदेश में उगाये जाने वाले लगभग सभी फलों, खुम्ब उत्पादन, मौन पालन तथा इनके संरक्षण की तकनीक का इस पुस्तिका में समावेश किया गया हैं। सभी वैज्ञानिकों, विस्तार शिक्षा विशेषज्ञों, बागवानी विभाग के अधिकारियों व उन्नत बागवानों के सामूहिक प्रयास किया गया है।
आम को 1200 मीटर की ऊँचाई तक उगाया जा सकता है परन्तु 600 मी. से अधिक ऊँचाई पर फलन और फलों की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आम ठंड और अधिक पाले को सहन नहीं कर पाता है। सामान्य रूप में आम उन्ही शुष्क क्षेत्रों का सफल फल है जहां पर जून से सितम्बर तक गर्मियों में अच्छी वर्षा होती हो और बाकी समय कम सूखा पड़े।
वैसे तो विभिन्न प्रकार की मिट्टी में इसे उगाया जा सकता है, परन्तु इसके लिए सबसे उपयुक्त गहरी, दोमट, अच्छे जल निकास वाली और 5.5-7.5 पी.एच.मान की मिट्टी होती है।
दशहरीः फल छोटे से मध्यम आकार के और लम्बे, छिलका दरम्याना मोटा, समतल और पीले रंग का, फल मीठे तथा स्वादिष्ट, जुलाई-अगस्त में पककर तैयार, नियमित रूप से फलन, भंडारण क्षमता उत्तम।
बॉमबे ग्रीन (माल्दा): जल्दी पकने वाली किस्म, फल मध्यम आकार के, छिलका पतला, समतल और हरे रंग का, जुलाई में पककर तैयार, भंडारण क्षमता मध्यम।
फाजलीः बड़े आकार वाले फल, छिलका मध्यम मोटा, हरे रंग का, सिंचित क्षेत्रों में बागवानी के लिए अनुमोदित किस्म, कोहरे को सहने वाली किस्म, अगस्त में पक कर तैयार।
आम्रपाली किस्म में यह दूरी 3 x 3 मीटर (सघन खेती)
पौधे तैयार करना (प्रवर्धन)
व्यावसायिक स्तर पर आम के पौधे विनीयर ग्राफ्टिंग द्वारा तैयार किये जाते है। ग्राफ्टिंग मार्च या जून के दूसरे पखवाड़े से बीच गमलों में या सीधे गड्ढों में तैयार किये गए मूलवृन्तों पर की जाती है। बीजू पौधों के लिए जंगली फल की गुठली उपयुक्त समझी जाती है। पके हुए फल से गुठली लेने के एक सप्ताह के बीच ही इसे बो देना चाहिए। 'इन सीटू' (सीधे गड्ढों में बीज लगाना) पौध रोपण की स्थिति में एक गड्ढे में 3 बीज बोने चाहिए।
अप्रैल के पहले सप्ताह में जी.ए.एम. (30 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी) तथा उसके 15 दिनों बाद यूरिया 2 प्रतिशत का छिड़काव करने से नर्सरी पौधों की अधिक वृद्धि होगी तथा कलम करने योग्य आम के पौधों का अनुपात अधिक होगा। आम की नर्सरी को प्लास्टिक की थैलियों (15 x 30 सेमी.) में लगाने से मृत्यु दर कम हो जाती है।
गड्ढा भरने की विधिः आम के प्रतिरोपित पौधों में मृत्यु दर कम करने के लिए गड्ढे के तल पर गोबर की खाद की 10सेमी. मोटी तह बिछाएं और उसके ऊपर 10 सेमी. व्यास के दो बांस खड़े करके गड्ढे को मिट्टी से भर दें। फिर बांस निकाल कर छेदों को गोबर की खाद से भर दें।
छोटे पौधों को लू और पाले से बचा कर रखें। इसके लिए घास, सरकंडों या सूखी मक्की के डंठल का पौधों के ऊपर छप्पर बनाएं। ध्यान रखें कि दक्षिण-पूर्व दिशा को खुला रखें ताकि पौधों को धूप मिलती रहे। सामान्यतः आम की नर्सरी सर्दियों में कोहरे से बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। इससे बचाव के लिए पौधशाला को नाईलोन की छायादार जाली (50 प्रतिशत छाया) से 15 अक्टूबर से 15 फरवरी तक ढक देना चाहिए।
नाइट्रोजन (ग्राम)
अधिक फल उत्पादन वाले फलन वर्ष में नाईट्रोजन की मात्रा को दुगुना कर देना चाहिए। गोबर की खाद और सुपर फ़ॉस्फेट को दिसम्बर में तथा एक किलोग्राम कैन और म्यूरेट ऑफ़ पोटाश फरवरी में और एक किलो कैन फलन वर्ष में जून महीने में प्रति पौधा प्रयोग करें।
अधिकतर फल जब छोटे होते हैं, तभी से गिरने लगते हैं। कीट और रोगों के प्रकोप से गिरने वाले फलों को कीटनाशी या फफूंदनाशी छिड़काव से रोका जा सकता है। दूसरे कारणों से फलों को गिरने से बचाने हेतु 20 पी.पी. एम 2,4-डी (2 ग्राम/100 लीटर) पानी में घोलकर अप्रैल के आखिरी सप्ताह में या मई के प्रथम सप्ताह में लंगड़ा और दशहरी किस्मों में छिड़काव करना लाभप्रद है।
फल तभी तोड़ें जब उनका पूर्ण विकास हो जाए और अभी पके न हों। फलों को फल लगने के 15-16 सप्ताह बाद तोड़ें। तुड़ाई के पश्चात फल पकने की प्रक्रिया शीघ्रता से होती है। फलों को तोड़ने के पश्चात उन्हें एक दिन के लिए कमरे में रखना चाहिए, उसके बाद इन्हें तुड़ी, भूसे, घास, आदि के बीच रखें। ये फल सामान्य रूप से सात दिन में पक कर तैयार हो जाते हैं।
(दवाई की मात्रा 200 लीटर पानी में घोल बनाने के लिए)
1. मैंगो हॉपरः यह एक छोटा भूरे सलेटी रंग का कीट है। बसंत ऋतु में बौर पर कीट के शिशुओं के झुण्ड नजर आने लगते हैं जो बौर का रस चूसकर नुकसान पहुँचाते हैं। ऐसे बौर मुरझाने लगते है और भूरे रंग के हो जाते है और असमय ही पेड़ से झड़ जाते है। व्यस्क कीड़े पत्तों का रस भी चूसते हैं जिससे पत्तियाँ चिपचिपी तथा फफूंद से काली हो जाती है, फल कम लगते हैं और छोटे फल गर्मी में हवा से गिरने लगते हैं।
2. मैंगो सिल्लाः यह बहुत ही छोटा नाशी जीव है जो टहनियों पर गांठे बनाता है। शिशु (निम्फ) फूले हुए बीमों में प्रवेश कर उन्हें भी सख्त शंकुनुमा गांठों में बदल देते हैं जिससे नई शाखाएं नहीं फूटती और न ही फूल आते हैं।
3. मिली बगः ये फरवरी मई तक बढ़ती शाखाओं तथा फूलों के गुच्छों से रस चूस कर उन्हें क्षति पहुंचाते हैं। प्रकोपित शाखाएँ मुरझा जाती हैं और फूलों से फल नही बन पाते या फिर असमय ही गिर जाते हैं। यह कीड़ा बाकि के समय अण्डों के रूप में तौलिये में तने के आस पास 5-12 सेंमी. गहरी मिट्टी में बिताता है। इन अण्डों में से जनवरी-फरवरी में छोटे भूरे कीट पौधे पर ऊपर की ओर चढ़ने लगते है।
शिशुओं का ऊपर को रेंगना रोकने के लिए दिसम्बर महीने में जमीन से करीब आधा मीटर ऊपर तने पर फिसलने वाला बंध (स्लीपरी/स्टीकी बैंड) लगाएं।
स्टीकी बैंडः (1) तने के खरदरे भाग को खरोंच कर औसटिको या एसो फ्रूट ट्री ग्रीस की 5 सेंमी. चौड़ी पट्टी तने पर लगायें। स्लीपरी बैंड लगाने कल लिए 15-20 सेंमी. चौड़ी एलकाथीन की पट्टी तने पर लपेटें। इसे ऊपर और नीचे किनारों से अच्छी तरह बांधे। एलकाथीन पट्टी के नीचे खरदरे तने को चिकनी मिट्टी के लेप से समतल बनाया जाता है जिससे शिशु (निम्फ) स्लीपरी बैंड के नीचे न घुसने पाएं।
सावधानीः पेड़ के पत्ते जमीन को नही छूने चाहिए।
(2) मैंगों हॉपर से बचाव हेतु सुझाई गई कीट नाशी दवाएं मिली बग को भी नियंत्रित करती है।
4. स्टैम बोरर/तना छेदक कीटः तने और शाखाओं में छेद करके यह कीट सुरंगे बनाता है। बाहर से इस कीट के प्रकोप का आसानी से पता नहीं चलता, यद्यपि कई जगह छेदों से रस और बुरादा सा निकलने लगता है।
बुरादे को हटा कर रूई के फाये को पेट्रोल या मिट्टी के तेल या मिथाइल पैराथियान 0.2 प्रतिशत (4 मिली. मैटासिड 50 ई.सी. 1 ली. पानी) से भिगोकर छिद्र में डाल कर गीली चिकनी मिट्टी से बंद कर दें।
सुझावः व्यस्क कीट रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं, उन्हें एकत्र करके मार डालना चाहिए।
5. शूट बोरर (टहनी छेदक): यह सिरे की नई टहनियों को नुकसान पहुंचाता है जिससे वे सूखने लगती हैं।
(1) नई निकलने वाली टहनियों पर एंडोसल्फान 0.05 प्रतिशत (300 मिली. थायोडान/एंडोसिल/हिलडान/ एंडोमास 35 ई.सी.) या मोनोक्रोटोफ़ॉस 0.036 प्रतिशत (200 मिली. मासक्रांन/मैक्रोफ़ॉस/ न्युवाक्रांन/ मोनोसिल 36 डब्ल्यू.एस.सी.) या डाइमैथोएट 0.03 प्रतिशत (200 मिली. रोगर 30 ई.सी.) या साइपरमैथरिन 0.01 प्रतिशत (200 मिली. रिपकार्ड 10 ई.सी.) का छिड़काव करें। छिड़काव अगस्त माह में करें तथा यदि आवश्यकता हो तो 20 दिन बाद पुनः छिड़काव करें।
सावधानीः मुरझाई हुई टहनियों को निकाल कर नष्ट कर दें।
6. बार्क ईटिंग कैटरपिलर (छाल भक्षी सुंडियां): रिबन के भीतर ये सुंडियां तने और तने की छाल को नुकसान पहुंचाती हैं।
सुंडियों के रिबन को साफ़ करें और शाखाओं तथा तने को 0.1 प्रतिशत मिथाइल पैराथियान से (2 मिली. मैटासिड 50 ई.सी. प्रति लीटर पानी) फरवरी-मार्च और फिर सितम्बर-अक्टूबर में उपचारित करें।
7. फूट फ्लाई (फल मक्खी)
गुठलीदार फलों पर लगने वाली फल मक्खी के लिए दिए गए उपायों का प्रयोग करें।
8. जाला बनाने वाला कीटः इस कीट की सुंडियां पत्तों पर आक्रमण करती हैं। ये पत्तों को आपस में जोड़ कर जाला बना देती हैं तथा इन्हें खाती हैं। परिणामस्वरूप पत्ते सूख जाते हैं तथा वृक्ष कमजोर पड़ जाते हैं। आक्रमण जून माह में आरम्भ हो जाता है परन्तु मानसून के बाद इसका अधिक आक्रमण नजर आता है।
एक लम्बे डंडे पर बोरी का टुकड़ा बाँध कर जालों को नष्ट कर दें। सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में कार्बेरिल 0.1 प्रतिशत (400 ग्राम सेविन 50 डब्ल्यू पी.) या साइपरमैथरिन 0.01 प्रतिशत (200 मिली. रिपकार्ड 10 ई.सी.) या मिथाईल पैराथियाँन 0.05 प्रतिशत (200 मिली. मैटासिड 50 ई.सी.) का छिड़काव करें।
नोटः नया बागीचा लगाते समय पौधों के बीच उचित दूरी रखें।
नर्सरी क्षेत्र को गोबर की खाद मिलाने व सिंचाई करने के पश्चात मई से जुलाई के दौरान 45 दिनों के लिए पारदर्शी पोलीथीन से ढक दें (25 माइक्रांन या 100 गेज मोटा) जिसे पौध लगाने से पहले हटा दें।
2. एंथ्रेक्नोज (कोलैटोट्राइकम गलोइओसपोरियोडस): पौधे के सभी भागों में जैसे कि पत्तियों, टहनियों और फलों पर इस रोग के लक्षण दिखाई पड़ते है, गहरे भूरे रंग के अंदर क तरफ दबे हुए धब्बे पड़ जाते हैं। नई टहनियां ऊपरी भाग से मुरझाने लगती हैं। बौर भी मुरझाने लगते हैं और फल टूट कर गिरने लगते हैं।
3. चूर्णी फफूंद (ओडियम मेंजीफेरी): आम के फूलों या बौर, कलियों और फल डंडियों पर सफेद से राख के रंग के चूर्णिल धब्बे पड़ते हैं। यह फफूंद नई पत्तियों पर मार्च-अप्रैल के महीनों में फैलता है।
2. बचाव के लिए फरवरी-अप्रैल और सितम्बर में बोर्डो मिक्सचर (1600 ग्राम कॉपर सल्फेट + 1600 ग्राम चूना या कैप्टान (600 ग्राम) का घोल बनाकर दो से तीन छिड़काव 15-20 दिनों के अंतराल पर करें।
घुलनशील सल्फर (1000 ग्राम) या कैराथेन (100 मिली.) या कार्बेन्डाजिम (100 मिली.) या ट्राईडिमोरफ (200 मिली.) या बीटरटानोल (100 ग्राम) या हैग जाकोनाजोल (100मिली.) या माइक्लोबयूटानिल (100 ग्राम) पानी में घोल बनाकर फूल खिलने से पहले तथा दूसरी बार फल स्थापित होने तथा फल मटर के दाने का हो जाने पर तीन छिड़काव करें।
4. आम के फूल व पत्तों का गुच्छा रोग (फ्यूजोरियम मोनिलेफोरमी): प्रभावित पौधों में फूल या कुर मोटा हो जाता है, उसका गुच्छा बन जाता है जो बहुत समय तक पेड़ पर ऐसे ही लटके रहते हैं और उनमें फल नहीं लगते। इसी तरह नर्सरी के पौधों में व बड़े पौधों में एक ही स्थान से कई छोटे-छोटे लम्बे पत्ते निकलते हैं जो गुच्छे का रूप ले लेते हैं व पौधों की बढौतरी को प्रभावित करते हैं।
2. पेड़ पर पोटाशियम मैटाबाईसल्फाईट (के एम.एस. 120 ग्राम/200 ली. पानी) अक्टूबर में छिड़काव करें। जनवरी में इस छिड़काव को दोहरायें या नैपथालिन एसिटिक एसिड (40 ग्राम/200 लीटर पानी) सितम्बर या अक्टूबर में छिडकें।
5. आम का डाईबैंक (वाटरियोडिपलोडिया थियोब्रोमे): यह रोग नये तथा पुराने दोनों ही तरह के पौधों को नुकसान पहुंचाता है। प्रारम्भ में टहनियों के पत्ते चमक खो देते हैं। प्रभावित टहनियों से पत्ते गिर जाते हैं, टहनियां ऊपर से सूख कर पूरी सूख जाती हैं कलम किया हुआ ऊपर का भाग मुर्झा जाता है या फिर सूख जाता है। टहनियों में जगह-जगह गोंद भी निकलता है।
2. बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सी-क्लोराईड (600 ग्राम) का छिड़काव सर्दी के आरम्भ में करें ताकि तने व टहनियों की छाल फफूंदनाशी के घोल से अच्छी तरह भींग जाये। मार्च तथा सितम्बर महीनों में दो छिड़काव पुनः करें।
6. पत्तों का चितकबरा होनाः (जिंक की कमी के कारण) - अधिक प्रभावित पौधे पर पत्ते कम चौड़े और नोकदार बन जाते हैं। फल भी छोटे, सख्त तथा सूखे रह जाते हैं। कली का विकास भी देरी से होता है।
पौधों पर जिंक सल्फेट (100 ग्राम/200 लीटर पानी) का छिड़काव करें।
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विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। बागवानी फसलें खाद्य एवं पौष्टिकता सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार पारिस्थितिकीय संतुलन तथा विधायन उद्योग को कच्चा माल प्रदान करने में अहम भूमिका निभाती है। वर्ष दो हज़ार पाँच-छः के आंकड़ों के अनुसार भारतवर्ष में लगभग पाँच,पाँच सौ दस,शून्य हेक्टेयर भूमि पर फलों की काश्त की गई जिससे पाँच,आठ सौ चौहत्तर,शून्य टन का उत्पादन हुआ। चीन के बाद फल उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है तथा विश्व के कुल उत्पादन में भारत की लगभग दस प्रतिशत भागीदारी है। हमारा देश आम, केला, चीकू तथा नीम्बू प्रजाति के फलों के उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है। विविध वातावरण एवं भूमि की बनावट हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक देन है। आज हमारा प्रदेश देश में सेब राज्य के नाम से जाना जाता है। प्रदेश में वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचास में फलों के अंतर्गत सात सौ तिरानवे हेक्टेयर भूमि थी जो वर्ष दो हज़ार पाँच-छः में बढ़कर एक लाख बयासी हज़ार हेक्टेयर हो गई तथा फल उत्पादन एक हज़ार दो सौ मिट्रिक टन से बढ़कर छः लाख बानवे हज़ार मिट्रिक टन तक पहुंच गया। प्रदेश में लगभग चार.चौंसठ लाख किसान फल उत्पादन से जुड़े हैं तथा फल उद्योग से नौ सौ लाख श्रम-दिवस रोजगार का सृजन होता है। फलों के अंतर्गत कुल भूमि तथा उत्पादन में अकेले सेब की क्रमशः पैंतालीस प्रतिशत तथा पचासी प्रतिशत भागीदारी है। विश्व के अन्य भागों की तरह प्रदेश में भी जलवायु तथा पर्यावरण में परिवर्तन आया है। इसका एक मुख्य कारण विकास की अंधाधुंध दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों का अवैज्ञानिक दोहन भी माना जा रहा है। इस परिवर्तन के कारण बागवानों को कई प्राकृतिक विपदाओं का सामना करना पड़ा है। एक क्षेत्र में बार-बार एक ही फसल उगाने के दुष्परिणाम भी हमारे सामने आने लगे है तथा समय की पुकार है कि बागवानी के क्षेत्र में विविधता लाई जाये। भविष्य की बागवानी इसी पर निर्भर होगी। इन समस्त समस्याओं के निवारण के लिए अति अनिवार्य है कि नवीनतम तकनीकी का विकास किया जाए तथा इस जानकारी का बागवानों के खेतों तक स्थानांतरण किया जाए। इस दिशा में विभिन्न प्रसार माध्यमों का प्रयोग कारगर ढंग से करना होगा ताकि बागवान नई तकनीकों को अपनाकर अपने चहुंमुखी विकास की ओर अग्रसर हो सकें और प्रदेश की आर्थिक समृद्धि में भागीदारी निभा सकें। इस दिशा में प्रस्तुत पुस्तिका 'फल उत्पादन एवं संरक्षण' में नवीनतम तकनीकी जानकारी उपलब्ध करवाई गई है जो बागवानों, प्रसार अधिकारियों तथा उद्यमियों के लिए मार्गदर्शिका का कार्य करेगी। भारत का चीन के बाद फल उत्पादन में दूसरा स्थान है। हमारा देश फलों के अंतर्गत पाँच.पचपन मिलियन हेक्टेयर भूमि से लगभग उनसठ.शून्य मिलियन टन फल पैदा करता है, जबकि चीन दस.पचास मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र से लगभग नवासी मिलियन टन फलों का उत्पादन करता है। चीन और भारत की विश्व फल उत्पादन में क्रमशः सोलह.सात तथा ग्यारह प्रतिशत की भागीदारी है। आज अकेला चीन विश्व का लगभग चालीस प्रतिशत सेब उत्पन्न कर रहा है जबकि भारतवर्ष आम तथा केले के उत्पादन में अग्रणी है। अगर हम मुख्य फलों की उत्पादकता में सार्थक वृद्धि करें तो हम फलोत्पादन में प्रथम स्थान प्राप्त कर सकते हैं। यह तभी सम्भव होगा यदि हमारे बागवान उन्नत किस्मों व नवीनतम हाईटेक तकनीकी का उपयोग करें। प्राकृतिक प्रकोपों, अनेक बीमारियों तथा कीटों की समस्याओं के कारण अत्याधिक फसलों में काफी क्षति उठानी पड़ती है। आर्थिक लाभ अर्जित करने व वैज्ञानिक ढंग से बागवानी करने हेतु उन्नत तकनीक अपनाना आवश्यक है। प्रचार माध्यम तथा संचार साधन अनुसंधान की उपलब्धियों को किसानों तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह निदेशालय उपयुक्त तकनीक जन-जन तक पहुँचाने का लगातार प्रयास कर रहा है तथा हमारा यह प्रत्यन्त रहा है कि हम विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित बागवानी में नई प्राद्योगिकी को सरल और सहज भाषा के माध्यम से फल उत्पादकों तक पहुँचा सकें। इस प्रकाशन में अभी तक की फल उत्पादन एवं संरक्षण की सभी अनुमोदित अनुसंधान सिफारिशें सम्मिलित की गई है। हमारे प्रदेश में उगाये जाने वाले लगभग सभी फलों, खुम्ब उत्पादन, मौन पालन तथा इनके संरक्षण की तकनीक का इस पुस्तिका में समावेश किया गया हैं। सभी वैज्ञानिकों, विस्तार शिक्षा विशेषज्ञों, बागवानी विभाग के अधिकारियों व उन्नत बागवानों के सामूहिक प्रयास किया गया है। आम को एक हज़ार दो सौ मीटर की ऊँचाई तक उगाया जा सकता है परन्तु छः सौ मी. से अधिक ऊँचाई पर फलन और फलों की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आम ठंड और अधिक पाले को सहन नहीं कर पाता है। सामान्य रूप में आम उन्ही शुष्क क्षेत्रों का सफल फल है जहां पर जून से सितम्बर तक गर्मियों में अच्छी वर्षा होती हो और बाकी समय कम सूखा पड़े। वैसे तो विभिन्न प्रकार की मिट्टी में इसे उगाया जा सकता है, परन्तु इसके लिए सबसे उपयुक्त गहरी, दोमट, अच्छे जल निकास वाली और पाँच.पाँच-सात.पाँच पी.एच.मान की मिट्टी होती है। दशहरीः फल छोटे से मध्यम आकार के और लम्बे, छिलका दरम्याना मोटा, समतल और पीले रंग का, फल मीठे तथा स्वादिष्ट, जुलाई-अगस्त में पककर तैयार, नियमित रूप से फलन, भंडारण क्षमता उत्तम। बॉमबे ग्रीन : जल्दी पकने वाली किस्म, फल मध्यम आकार के, छिलका पतला, समतल और हरे रंग का, जुलाई में पककर तैयार, भंडारण क्षमता मध्यम। फाजलीः बड़े आकार वाले फल, छिलका मध्यम मोटा, हरे रंग का, सिंचित क्षेत्रों में बागवानी के लिए अनुमोदित किस्म, कोहरे को सहने वाली किस्म, अगस्त में पक कर तैयार। आम्रपाली किस्म में यह दूरी तीन x तीन मीटर पौधे तैयार करना व्यावसायिक स्तर पर आम के पौधे विनीयर ग्राफ्टिंग द्वारा तैयार किये जाते है। ग्राफ्टिंग मार्च या जून के दूसरे पखवाड़े से बीच गमलों में या सीधे गड्ढों में तैयार किये गए मूलवृन्तों पर की जाती है। बीजू पौधों के लिए जंगली फल की गुठली उपयुक्त समझी जाती है। पके हुए फल से गुठली लेने के एक सप्ताह के बीच ही इसे बो देना चाहिए। 'इन सीटू' पौध रोपण की स्थिति में एक गड्ढे में तीन बीज बोने चाहिए। अप्रैल के पहले सप्ताह में जी.ए.एम. तथा उसके पंद्रह दिनों बाद यूरिया दो प्रतिशत का छिड़काव करने से नर्सरी पौधों की अधिक वृद्धि होगी तथा कलम करने योग्य आम के पौधों का अनुपात अधिक होगा। आम की नर्सरी को प्लास्टिक की थैलियों में लगाने से मृत्यु दर कम हो जाती है। गड्ढा भरने की विधिः आम के प्रतिरोपित पौधों में मृत्यु दर कम करने के लिए गड्ढे के तल पर गोबर की खाद की दससेमी. मोटी तह बिछाएं और उसके ऊपर दस सेमी. व्यास के दो बांस खड़े करके गड्ढे को मिट्टी से भर दें। फिर बांस निकाल कर छेदों को गोबर की खाद से भर दें। छोटे पौधों को लू और पाले से बचा कर रखें। इसके लिए घास, सरकंडों या सूखी मक्की के डंठल का पौधों के ऊपर छप्पर बनाएं। ध्यान रखें कि दक्षिण-पूर्व दिशा को खुला रखें ताकि पौधों को धूप मिलती रहे। सामान्यतः आम की नर्सरी सर्दियों में कोहरे से बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। इससे बचाव के लिए पौधशाला को नाईलोन की छायादार जाली से पंद्रह अक्टूबर से पंद्रह फरवरी तक ढक देना चाहिए। नाइट्रोजन अधिक फल उत्पादन वाले फलन वर्ष में नाईट्रोजन की मात्रा को दुगुना कर देना चाहिए। गोबर की खाद और सुपर फ़ॉस्फेट को दिसम्बर में तथा एक किलोग्राम कैन और म्यूरेट ऑफ़ पोटाश फरवरी में और एक किलो कैन फलन वर्ष में जून महीने में प्रति पौधा प्रयोग करें। अधिकतर फल जब छोटे होते हैं, तभी से गिरने लगते हैं। कीट और रोगों के प्रकोप से गिरने वाले फलों को कीटनाशी या फफूंदनाशी छिड़काव से रोका जा सकता है। दूसरे कारणों से फलों को गिरने से बचाने हेतु बीस पी.पी. एम दो,चार-डी पानी में घोलकर अप्रैल के आखिरी सप्ताह में या मई के प्रथम सप्ताह में लंगड़ा और दशहरी किस्मों में छिड़काव करना लाभप्रद है। फल तभी तोड़ें जब उनका पूर्ण विकास हो जाए और अभी पके न हों। फलों को फल लगने के पंद्रह-सोलह सप्ताह बाद तोड़ें। तुड़ाई के पश्चात फल पकने की प्रक्रिया शीघ्रता से होती है। फलों को तोड़ने के पश्चात उन्हें एक दिन के लिए कमरे में रखना चाहिए, उसके बाद इन्हें तुड़ी, भूसे, घास, आदि के बीच रखें। ये फल सामान्य रूप से सात दिन में पक कर तैयार हो जाते हैं। एक. मैंगो हॉपरः यह एक छोटा भूरे सलेटी रंग का कीट है। बसंत ऋतु में बौर पर कीट के शिशुओं के झुण्ड नजर आने लगते हैं जो बौर का रस चूसकर नुकसान पहुँचाते हैं। ऐसे बौर मुरझाने लगते है और भूरे रंग के हो जाते है और असमय ही पेड़ से झड़ जाते है। व्यस्क कीड़े पत्तों का रस भी चूसते हैं जिससे पत्तियाँ चिपचिपी तथा फफूंद से काली हो जाती है, फल कम लगते हैं और छोटे फल गर्मी में हवा से गिरने लगते हैं। दो. मैंगो सिल्लाः यह बहुत ही छोटा नाशी जीव है जो टहनियों पर गांठे बनाता है। शिशु फूले हुए बीमों में प्रवेश कर उन्हें भी सख्त शंकुनुमा गांठों में बदल देते हैं जिससे नई शाखाएं नहीं फूटती और न ही फूल आते हैं। तीन. मिली बगः ये फरवरी मई तक बढ़ती शाखाओं तथा फूलों के गुच्छों से रस चूस कर उन्हें क्षति पहुंचाते हैं। प्रकोपित शाखाएँ मुरझा जाती हैं और फूलों से फल नही बन पाते या फिर असमय ही गिर जाते हैं। यह कीड़ा बाकि के समय अण्डों के रूप में तौलिये में तने के आस पास पाँच-बारह सेंमी. गहरी मिट्टी में बिताता है। इन अण्डों में से जनवरी-फरवरी में छोटे भूरे कीट पौधे पर ऊपर की ओर चढ़ने लगते है। शिशुओं का ऊपर को रेंगना रोकने के लिए दिसम्बर महीने में जमीन से करीब आधा मीटर ऊपर तने पर फिसलने वाला बंध लगाएं। स्टीकी बैंडः तने के खरदरे भाग को खरोंच कर औसटिको या एसो फ्रूट ट्री ग्रीस की पाँच सेंमी. चौड़ी पट्टी तने पर लगायें। स्लीपरी बैंड लगाने कल लिए पंद्रह-बीस सेंमी. चौड़ी एलकाथीन की पट्टी तने पर लपेटें। इसे ऊपर और नीचे किनारों से अच्छी तरह बांधे। एलकाथीन पट्टी के नीचे खरदरे तने को चिकनी मिट्टी के लेप से समतल बनाया जाता है जिससे शिशु स्लीपरी बैंड के नीचे न घुसने पाएं। सावधानीः पेड़ के पत्ते जमीन को नही छूने चाहिए। मैंगों हॉपर से बचाव हेतु सुझाई गई कीट नाशी दवाएं मिली बग को भी नियंत्रित करती है। चार. स्टैम बोरर/तना छेदक कीटः तने और शाखाओं में छेद करके यह कीट सुरंगे बनाता है। बाहर से इस कीट के प्रकोप का आसानी से पता नहीं चलता, यद्यपि कई जगह छेदों से रस और बुरादा सा निकलने लगता है। बुरादे को हटा कर रूई के फाये को पेट्रोल या मिट्टी के तेल या मिथाइल पैराथियान शून्य.दो प्रतिशत से भिगोकर छिद्र में डाल कर गीली चिकनी मिट्टी से बंद कर दें। सुझावः व्यस्क कीट रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं, उन्हें एकत्र करके मार डालना चाहिए। पाँच. शूट बोरर : यह सिरे की नई टहनियों को नुकसान पहुंचाता है जिससे वे सूखने लगती हैं। नई निकलने वाली टहनियों पर एंडोसल्फान शून्य.पाँच प्रतिशत या मोनोक्रोटोफ़ॉस शून्य.छत्तीस प्रतिशत या डाइमैथोएट शून्य.तीन प्रतिशत या साइपरमैथरिन शून्य.एक प्रतिशत का छिड़काव करें। छिड़काव अगस्त माह में करें तथा यदि आवश्यकता हो तो बीस दिन बाद पुनः छिड़काव करें। सावधानीः मुरझाई हुई टहनियों को निकाल कर नष्ट कर दें। छः. बार्क ईटिंग कैटरपिलर : रिबन के भीतर ये सुंडियां तने और तने की छाल को नुकसान पहुंचाती हैं। सुंडियों के रिबन को साफ़ करें और शाखाओं तथा तने को शून्य.एक प्रतिशत मिथाइल पैराथियान से फरवरी-मार्च और फिर सितम्बर-अक्टूबर में उपचारित करें। सात. फूट फ्लाई गुठलीदार फलों पर लगने वाली फल मक्खी के लिए दिए गए उपायों का प्रयोग करें। आठ. जाला बनाने वाला कीटः इस कीट की सुंडियां पत्तों पर आक्रमण करती हैं। ये पत्तों को आपस में जोड़ कर जाला बना देती हैं तथा इन्हें खाती हैं। परिणामस्वरूप पत्ते सूख जाते हैं तथा वृक्ष कमजोर पड़ जाते हैं। आक्रमण जून माह में आरम्भ हो जाता है परन्तु मानसून के बाद इसका अधिक आक्रमण नजर आता है। एक लम्बे डंडे पर बोरी का टुकड़ा बाँध कर जालों को नष्ट कर दें। सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में कार्बेरिल शून्य.एक प्रतिशत या साइपरमैथरिन शून्य.एक प्रतिशत या मिथाईल पैराथियाँन शून्य.पाँच प्रतिशत का छिड़काव करें। नोटः नया बागीचा लगाते समय पौधों के बीच उचित दूरी रखें। नर्सरी क्षेत्र को गोबर की खाद मिलाने व सिंचाई करने के पश्चात मई से जुलाई के दौरान पैंतालीस दिनों के लिए पारदर्शी पोलीथीन से ढक दें जिसे पौध लगाने से पहले हटा दें। दो. एंथ्रेक्नोज : पौधे के सभी भागों में जैसे कि पत्तियों, टहनियों और फलों पर इस रोग के लक्षण दिखाई पड़ते है, गहरे भूरे रंग के अंदर क तरफ दबे हुए धब्बे पड़ जाते हैं। नई टहनियां ऊपरी भाग से मुरझाने लगती हैं। बौर भी मुरझाने लगते हैं और फल टूट कर गिरने लगते हैं। तीन. चूर्णी फफूंद : आम के फूलों या बौर, कलियों और फल डंडियों पर सफेद से राख के रंग के चूर्णिल धब्बे पड़ते हैं। यह फफूंद नई पत्तियों पर मार्च-अप्रैल के महीनों में फैलता है। दो. बचाव के लिए फरवरी-अप्रैल और सितम्बर में बोर्डो मिक्सचर का घोल बनाकर दो से तीन छिड़काव पंद्रह-बीस दिनों के अंतराल पर करें। घुलनशील सल्फर या कैराथेन या कार्बेन्डाजिम या ट्राईडिमोरफ या बीटरटानोल या हैग जाकोनाजोल या माइक्लोबयूटानिल पानी में घोल बनाकर फूल खिलने से पहले तथा दूसरी बार फल स्थापित होने तथा फल मटर के दाने का हो जाने पर तीन छिड़काव करें। चार. आम के फूल व पत्तों का गुच्छा रोग : प्रभावित पौधों में फूल या कुर मोटा हो जाता है, उसका गुच्छा बन जाता है जो बहुत समय तक पेड़ पर ऐसे ही लटके रहते हैं और उनमें फल नहीं लगते। इसी तरह नर्सरी के पौधों में व बड़े पौधों में एक ही स्थान से कई छोटे-छोटे लम्बे पत्ते निकलते हैं जो गुच्छे का रूप ले लेते हैं व पौधों की बढौतरी को प्रभावित करते हैं। दो. पेड़ पर पोटाशियम मैटाबाईसल्फाईट अक्टूबर में छिड़काव करें। जनवरी में इस छिड़काव को दोहरायें या नैपथालिन एसिटिक एसिड सितम्बर या अक्टूबर में छिडकें। पाँच. आम का डाईबैंक : यह रोग नये तथा पुराने दोनों ही तरह के पौधों को नुकसान पहुंचाता है। प्रारम्भ में टहनियों के पत्ते चमक खो देते हैं। प्रभावित टहनियों से पत्ते गिर जाते हैं, टहनियां ऊपर से सूख कर पूरी सूख जाती हैं कलम किया हुआ ऊपर का भाग मुर्झा जाता है या फिर सूख जाता है। टहनियों में जगह-जगह गोंद भी निकलता है। दो. बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सी-क्लोराईड का छिड़काव सर्दी के आरम्भ में करें ताकि तने व टहनियों की छाल फफूंदनाशी के घोल से अच्छी तरह भींग जाये। मार्च तथा सितम्बर महीनों में दो छिड़काव पुनः करें। छः. पत्तों का चितकबरा होनाः - अधिक प्रभावित पौधे पर पत्ते कम चौड़े और नोकदार बन जाते हैं। फल भी छोटे, सख्त तथा सूखे रह जाते हैं। कली का विकास भी देरी से होता है। पौधों पर जिंक सल्फेट का छिड़काव करें।
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अब चाहे सभी देश आपस में कितने भी अलग हो लेकिन उन्हें आगे बढ़ने के लिए कई मामलों में एक साथ आना ही पड़ता है और बिना आपसी सहयोग के आगे बढ़ पाना बहुत मुश्किल होता है।
ऐसे में एक दूसरे का समय समय पर सहयोग किया जाना बहुत आवश्यक हो जाता है जो हर देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत सहायक रहता है।
इसी क्रम में एक दूसरे का निरंतर सहयोग करने या कुछ मामलों में आपसी सहयोग चलता रहे इस के लिए तथा उसमे दो से अधिक देशों का गठबंधन बनाने के लिए एक समूह बनाया जाता है जिसे एक नाम दिया जाता है।
विश्व में इसी तरह के कई संगठन या संस्थाएं बनी हुई है जिसमें दो से अधिक देशों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। इसी क्रम में एक गठबंधन है SCO का जिसे एशिया महाद्वीप का गठबंधन कहा जा सकता है।
क्योंकि दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था तथा जनसंख्या के हिसाब से यह बहुत बड़ा है और इसमें शक्तिशाली देश भी सम्मिलित है।
वर्तमान समय में इसमें भारत, रूस व चीन सहित एशिया महाद्वीप के कुल 8 देश सम्मिलित है जो विभिन्न मुद्दों पर एक दूसरे का सहयोग करते हैं।
SCO क्या है? । SCO का मुख्यालय, स्थापना व फुल फॉर्म अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर यहां क्लिक करे?
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अब चाहे सभी देश आपस में कितने भी अलग हो लेकिन उन्हें आगे बढ़ने के लिए कई मामलों में एक साथ आना ही पड़ता है और बिना आपसी सहयोग के आगे बढ़ पाना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में एक दूसरे का समय समय पर सहयोग किया जाना बहुत आवश्यक हो जाता है जो हर देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत सहायक रहता है। इसी क्रम में एक दूसरे का निरंतर सहयोग करने या कुछ मामलों में आपसी सहयोग चलता रहे इस के लिए तथा उसमे दो से अधिक देशों का गठबंधन बनाने के लिए एक समूह बनाया जाता है जिसे एक नाम दिया जाता है। विश्व में इसी तरह के कई संगठन या संस्थाएं बनी हुई है जिसमें दो से अधिक देशों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। इसी क्रम में एक गठबंधन है SCO का जिसे एशिया महाद्वीप का गठबंधन कहा जा सकता है। क्योंकि दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था तथा जनसंख्या के हिसाब से यह बहुत बड़ा है और इसमें शक्तिशाली देश भी सम्मिलित है। वर्तमान समय में इसमें भारत, रूस व चीन सहित एशिया महाद्वीप के कुल आठ देश सम्मिलित है जो विभिन्न मुद्दों पर एक दूसरे का सहयोग करते हैं। SCO क्या है? । SCO का मुख्यालय, स्थापना व फुल फॉर्म अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर यहां क्लिक करे?
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मुंबई, 12 अगस्त । बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान दूसरी बार प्रेग्नेंट हुई हैं। इस मौके पर उनकी ननद सोहा अली खान ने उन्हें बधाई दी।
करीना कपूर खान ने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी बुधवार दोपहर को साझा की।
सोहा अली खान ने अपने इंस्टाग्राम पर भाई सैफ अली खान की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने अपने भाई को द क्वाडफादर कहा, जिसका मतलब है कि चार बच्चों के पिता।
उन्होंने इसे कैप्शन देते हुए लिखा, जल्द आ रहा है। रेसिस्ट नहीं हो सकती। करीना कपूर खान को बधाई, सुरक्षित और स्वस्थ रहो।
इससे पहले बुधवार को करीना और उनके पति सैफ ने ऐलान किया कि वह अपने परिवार में एक अन्य सदस्य की उम्मीद कर रहे हैं।
दोनों ने बुधवार दोपहर को जारी अपने बयान में कहा, हमें यह ऐलान करते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि हम अपने परिवार में एक नए सदस्य के जुड़ने की उम्मीद कर रहे हैं! ! हमारे सभी शुभचिंतकों को उनके प्यार व समर्थन के लिए उनका धन्यवाद।
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मुंबई, बारह अगस्त । बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान दूसरी बार प्रेग्नेंट हुई हैं। इस मौके पर उनकी ननद सोहा अली खान ने उन्हें बधाई दी। करीना कपूर खान ने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी बुधवार दोपहर को साझा की। सोहा अली खान ने अपने इंस्टाग्राम पर भाई सैफ अली खान की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने अपने भाई को द क्वाडफादर कहा, जिसका मतलब है कि चार बच्चों के पिता। उन्होंने इसे कैप्शन देते हुए लिखा, जल्द आ रहा है। रेसिस्ट नहीं हो सकती। करीना कपूर खान को बधाई, सुरक्षित और स्वस्थ रहो। इससे पहले बुधवार को करीना और उनके पति सैफ ने ऐलान किया कि वह अपने परिवार में एक अन्य सदस्य की उम्मीद कर रहे हैं। दोनों ने बुधवार दोपहर को जारी अपने बयान में कहा, हमें यह ऐलान करते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि हम अपने परिवार में एक नए सदस्य के जुड़ने की उम्मीद कर रहे हैं! ! हमारे सभी शुभचिंतकों को उनके प्यार व समर्थन के लिए उनका धन्यवाद।
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Facebook डेवलपर कॉन्फ्रेंस F8 में फेसबुक सीईओ मार्कजकबर्ग ने अपने सीक्रेट प्रोजेक्ट के बारे में बताया! जिससे building 8 नाम दिया गया है. building 8 एक प्रकार का तकनिकी प्रोजेक्ट है. जिसके माध्यम से यूजर बिना कुछ बोले संवाद स्थापित कर सकता है.
आपने प्राचीन काल ऋषि मुनि बिना किसी माध्यम से अपने दिमाग की शक्ति से लोगो से बात कर लेते थे. ये कुछ इसी तरह की टेक्नोलॉजी है जैसे आप अपनी पलकों के इशारो से टाइप करके मैसेज कर पायेगे अपने दोस्तों को.
इसमें आपके सामने वर्चुअल रियलिटी कीबोर्ड आपकी आँखों के पलकों के इशारो के हिसाब से कीबोर्ड पर टाइप करके संवाद स्थापित कर सकते है. फेसबुक के F8 कॉन्फ्रेंस में काफी सारी तकनीक के बारे में बताया गया जो भविष्य में आने वाली है, फेसबुक के डेवलपर इस प्रोग्राम पर काफी लम्बे समय से गुप्त रूप से कार्य कर रहे थे जिसके कारण इसे स्क्रेट प्रोजेक्ट कहा जाता है.
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Facebook के निर्माता बनना चाहते थे, एक . .
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Facebook डेवलपर कॉन्फ्रेंस Fआठ में फेसबुक सीईओ मार्कजकबर्ग ने अपने सीक्रेट प्रोजेक्ट के बारे में बताया! जिससे building आठ नाम दिया गया है. building आठ एक प्रकार का तकनिकी प्रोजेक्ट है. जिसके माध्यम से यूजर बिना कुछ बोले संवाद स्थापित कर सकता है. आपने प्राचीन काल ऋषि मुनि बिना किसी माध्यम से अपने दिमाग की शक्ति से लोगो से बात कर लेते थे. ये कुछ इसी तरह की टेक्नोलॉजी है जैसे आप अपनी पलकों के इशारो से टाइप करके मैसेज कर पायेगे अपने दोस्तों को. इसमें आपके सामने वर्चुअल रियलिटी कीबोर्ड आपकी आँखों के पलकों के इशारो के हिसाब से कीबोर्ड पर टाइप करके संवाद स्थापित कर सकते है. फेसबुक के Fआठ कॉन्फ्रेंस में काफी सारी तकनीक के बारे में बताया गया जो भविष्य में आने वाली है, फेसबुक के डेवलपर इस प्रोग्राम पर काफी लम्बे समय से गुप्त रूप से कार्य कर रहे थे जिसके कारण इसे स्क्रेट प्रोजेक्ट कहा जाता है. निचे दी हुई स्टोरी जरूर पढ़े और कमेंट बॉक्स में कमेंट कर प्रोत्साहित करे आगे बेहतर सूचनाओ के किये बने रहे व स्टोरी शेयर करे. ऐसे होगा आपके ऑनलाइन बैंक अकाउंट का पासवर्ड चेंज ! Facebook के द्वारा ऑनलाइन अकाउंट के पास वर्ड चेंज ! Facebook के निर्माता बनना चाहते थे, एक . .
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अमरीका में ऑस्कर समारोह शुरु हो चुका है. संकट से घिरे अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में बाल सैनिकों पर बनी एक फिल्म भी ऑस्कर में पहुंची है.
'वॉर विच' नाम की इस फिल्म में काम करने वाली रशेल म्वांजा बर्लिन और त्रिबेका फिल्म महोत्सवों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुने जाने के बाद अब स्टार हो गई हैं और ऑस्कर के लिए लॉस एंजेलिस में रेड कारपेट पर नजर आईं.
लेकि इस 16 वर्षीय लड़की की जिंदगी खासी चुनौतीपूर्ण रही है. वॉर विच के निर्देशक किम एंगुएन कहते हैं कि म्वांजा की कहानी किसी परी कथा से कम नहीं है.
वॉर विच को रिबेले के नाम से फ्रेंच भाषा में भी रिलीज किया गया.
लॉस एंजलिस टाइम्स ने लिखा है कि वॉच विच के निर्माता इस बात के लिए कोशिश कर रहे हैं म्वांजा को उनकी पसंदीदा स्टार बेयोंस से मिलवाया जाएगा.
वॉर विच को कनाडा की तरफ से विदेशी भाषा की श्रेणी में भेजी गई है.
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अमरीका में ऑस्कर समारोह शुरु हो चुका है. संकट से घिरे अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में बाल सैनिकों पर बनी एक फिल्म भी ऑस्कर में पहुंची है. 'वॉर विच' नाम की इस फिल्म में काम करने वाली रशेल म्वांजा बर्लिन और त्रिबेका फिल्म महोत्सवों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुने जाने के बाद अब स्टार हो गई हैं और ऑस्कर के लिए लॉस एंजेलिस में रेड कारपेट पर नजर आईं. लेकि इस सोलह वर्षीय लड़की की जिंदगी खासी चुनौतीपूर्ण रही है. वॉर विच के निर्देशक किम एंगुएन कहते हैं कि म्वांजा की कहानी किसी परी कथा से कम नहीं है. वॉर विच को रिबेले के नाम से फ्रेंच भाषा में भी रिलीज किया गया. लॉस एंजलिस टाइम्स ने लिखा है कि वॉच विच के निर्माता इस बात के लिए कोशिश कर रहे हैं म्वांजा को उनकी पसंदीदा स्टार बेयोंस से मिलवाया जाएगा. वॉर विच को कनाडा की तरफ से विदेशी भाषा की श्रेणी में भेजी गई है.
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सवाई माधोपुर। राजस्थान राज्य परिवहन निगम बस डिपो में बुधवार को जल मंदिर और बस सर्विस सेंटर का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होना था, लेकिन अतिथियों में संसदीय सचिव जितेंद्र गोठवाल और क्षेत्रीय विधायक दीया कुमारी का घंटों तक इंतजार चलता रहा और दोपहर लगभग 2 बजे संसदीय सचिव जितेंद्र गोठवाल के पहुंचने के बाद कार्यक्रम शुरू किया गया। कार्यक्रम में पार्टी के अन्य लोगों के उद्बोधन के बाद जितेंद्र गोठवाल ने अपना भाषण देकर तत्काल जल मंदिर का उद्घाटन किया और आयोजन कर्ताओं से अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने की बात कहते हुए जाने की बात कही। खास बात यह रही कि कार्यक्रम देरी से शुरू होने पर वहां मौजूद लोगों में नाराजगी दिखाई दी।
संसदीय सचिव जैसे ही जल मंदिर का उद्घाटन कर लौट रहे थे तो एकाएक विधायक दिया कुमारी भी बस डिपो पर पहुंच गईं। बाद में दोनों ने एक साथ बस डिपो पर लगाए गए बस सर्विस सेंटर का फीता काटकर उद्घाटन किया। इस दौरान विधायक दिया कुमारी ने विधायक कोटे से 5 लाख रुपए की राशि यात्रियों की सुख-सुविधाओं के लिए देने की घोषणा की।
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सवाई माधोपुर। राजस्थान राज्य परिवहन निगम बस डिपो में बुधवार को जल मंदिर और बस सर्विस सेंटर का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम दोपहर बारह बजे शुरू होना था, लेकिन अतिथियों में संसदीय सचिव जितेंद्र गोठवाल और क्षेत्रीय विधायक दीया कुमारी का घंटों तक इंतजार चलता रहा और दोपहर लगभग दो बजे संसदीय सचिव जितेंद्र गोठवाल के पहुंचने के बाद कार्यक्रम शुरू किया गया। कार्यक्रम में पार्टी के अन्य लोगों के उद्बोधन के बाद जितेंद्र गोठवाल ने अपना भाषण देकर तत्काल जल मंदिर का उद्घाटन किया और आयोजन कर्ताओं से अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने की बात कहते हुए जाने की बात कही। खास बात यह रही कि कार्यक्रम देरी से शुरू होने पर वहां मौजूद लोगों में नाराजगी दिखाई दी। संसदीय सचिव जैसे ही जल मंदिर का उद्घाटन कर लौट रहे थे तो एकाएक विधायक दिया कुमारी भी बस डिपो पर पहुंच गईं। बाद में दोनों ने एक साथ बस डिपो पर लगाए गए बस सर्विस सेंटर का फीता काटकर उद्घाटन किया। इस दौरान विधायक दिया कुमारी ने विधायक कोटे से पाँच लाख रुपए की राशि यात्रियों की सुख-सुविधाओं के लिए देने की घोषणा की।
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उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) अब महिला सुरक्षा को लेकर और सख्त कदम उठाने को तैयार है. दरअसल, पुलिस विभाग को अब 149 नयी महिला सिपाही मिल गयीं हैं. प्रयागराज पुलिस लाइन (Prayagraj Police Line) में इन महिला सिपाहियों का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया था, जहां 149 महिला सिपाहियों ने शानदार परेड की और इसकी सलामी एडीजी जोन प्रेम प्रकाश और डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने ली. वहीँ दूसरी तरफ 2013 भर्ती पर लगे स्टे पर सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद उनकी ट्रेनिंग पूरी कराई गई और आखिर में 8 साल के लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को उन्होंने वर्दी पहनने का गौरव मिला.
जानकारी के मुताबिक, इन सिपाहियों की अलग जिलों में ट्रेनिंग हो रही थी. प्रयागराज की पुलिस लाइन में 164 महिला सिपाही भेजी गई थीं, जिनमें 149 ने फाइनल एग्जाम में हिस्सा लिया और ट्रेनिंग पूरी की. पुलिस लाइन में चल रहे प्रशिक्षण के बाद गुरुवार सुबह पासिंग आउट परेड में महिला रंगरूटों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. परेड की सलामी एडीजी जोन प्रेम प्रकाश और डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने ली.
वहीँ बता दें कि 206 रंगरूट, जो पूर्वांचल से आए थे, उनका आवंटन चतुर्थ वाहिनी पीएसी धूमनगंज में हुआ था. इनमें से 192 सिपाहियों ने ट्रेनिंग पूरी की और पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया. रंगरूट द्वारा प्रदर्शित की गई इस परेड की सलामी आईजी पीएसी बीआर मीणा ने ली. इसके बाद ट्रेनिंग में टॉप करने वाले कैंडिडेट को सम्मानित किया गया.
गौरतलब है कि साल 2013 में सिपाही की भर्ती करने के लिए आवेदन मांगे थे. लेकिन उस समय एग्जाम में गड़बड़ी होने की वजह से शासन ने रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा दी थी. उस दौरान कैंडिडेट्स ने रोक के खिलाफ आवाज उठाई थी और कोर्ट से मदद मांगी थी. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा. जिसके बाद क्लीन चिट मिलने पर भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए इन सभी की ट्रेनिंग कराई गयी.
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उत्तर प्रदेश पुलिस अब महिला सुरक्षा को लेकर और सख्त कदम उठाने को तैयार है. दरअसल, पुलिस विभाग को अब एक सौ उनचास नयी महिला सिपाही मिल गयीं हैं. प्रयागराज पुलिस लाइन में इन महिला सिपाहियों का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया था, जहां एक सौ उनचास महिला सिपाहियों ने शानदार परेड की और इसकी सलामी एडीजी जोन प्रेम प्रकाश और डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने ली. वहीँ दूसरी तरफ दो हज़ार तेरह भर्ती पर लगे स्टे पर सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद उनकी ट्रेनिंग पूरी कराई गई और आखिर में आठ साल के लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को उन्होंने वर्दी पहनने का गौरव मिला. जानकारी के मुताबिक, इन सिपाहियों की अलग जिलों में ट्रेनिंग हो रही थी. प्रयागराज की पुलिस लाइन में एक सौ चौंसठ महिला सिपाही भेजी गई थीं, जिनमें एक सौ उनचास ने फाइनल एग्जाम में हिस्सा लिया और ट्रेनिंग पूरी की. पुलिस लाइन में चल रहे प्रशिक्षण के बाद गुरुवार सुबह पासिंग आउट परेड में महिला रंगरूटों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. परेड की सलामी एडीजी जोन प्रेम प्रकाश और डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने ली. वहीँ बता दें कि दो सौ छः रंगरूट, जो पूर्वांचल से आए थे, उनका आवंटन चतुर्थ वाहिनी पीएसी धूमनगंज में हुआ था. इनमें से एक सौ बानवे सिपाहियों ने ट्रेनिंग पूरी की और पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया. रंगरूट द्वारा प्रदर्शित की गई इस परेड की सलामी आईजी पीएसी बीआर मीणा ने ली. इसके बाद ट्रेनिंग में टॉप करने वाले कैंडिडेट को सम्मानित किया गया. गौरतलब है कि साल दो हज़ार तेरह में सिपाही की भर्ती करने के लिए आवेदन मांगे थे. लेकिन उस समय एग्जाम में गड़बड़ी होने की वजह से शासन ने रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा दी थी. उस दौरान कैंडिडेट्स ने रोक के खिलाफ आवाज उठाई थी और कोर्ट से मदद मांगी थी. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा. जिसके बाद क्लीन चिट मिलने पर भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए इन सभी की ट्रेनिंग कराई गयी.
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रींगस के कैरपुरा गांव के शिव शक्ति नगर में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा आज से शुरू हुई। आज गांव में कलश यात्रा निकाली गई।
कलश यात्रा बुगंले वाले बालाजी मंदिर आभावास से शुरू हुई। कलश यात्रा गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई भागवत कथा स्थल नीलकंठ महादेव मंदिर कैरपुरा पहुंची। इस दौरान अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा कर लोगों ने स्वागत किया।
कलश यात्रा से पहले कलश पूजन किया गया। कथावाचक छैल बिहारी महाराज मथुरावाले कथा सुनाएंगे। श्री हनुमान मित्र मंडल गौशाला आभावास अध्यक्ष बाबूलाल महाराज ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के लोग सेवाएं दे रहे है। कथा का समापन हवन में पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा।
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रींगस के कैरपुरा गांव के शिव शक्ति नगर में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा आज से शुरू हुई। आज गांव में कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा बुगंले वाले बालाजी मंदिर आभावास से शुरू हुई। कलश यात्रा गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई भागवत कथा स्थल नीलकंठ महादेव मंदिर कैरपुरा पहुंची। इस दौरान अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा कर लोगों ने स्वागत किया। कलश यात्रा से पहले कलश पूजन किया गया। कथावाचक छैल बिहारी महाराज मथुरावाले कथा सुनाएंगे। श्री हनुमान मित्र मंडल गौशाला आभावास अध्यक्ष बाबूलाल महाराज ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के लोग सेवाएं दे रहे है। कथा का समापन हवन में पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Patna Police: पटना में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। आए दिन दिनदहाड़े हत्या को अंजाम दिया जा रहा है। अब शहर के दानापुर इलाके में बारात के बीच गोली मारकर एक युवक की हत्या कर दी गई। युवक जहानाबाद का रहने वाला था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और लोगों से पूछताछ की। फिलहाल मामले में पुलिस को किसी अपराधी का सुराग नहीं मिला है।
पटना में बारात के दौरान गोली मारकर युवक की हत्या (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Patna News : राजधानी के दानापुर क्षेत्र अंतर्गत गाभतल के चौधराना रोड में बारात में शामिल एक युवक को गोली मार दी गई। बैंड-बाजा के शोर के बीच अपराधियों ने उसे गोली मारी और वहां से फरार हो गए। शव की शिनाख्त जहानाबाद के उत्तर सेथू इलाके में रहने वाले गणेश दत्त के बेटे अमित कुमार के रूप में हुई है। बारात में शामिल लोगों ने कॉल करके पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम करने के लिए भेज दिया। शव का पोस्टमार्टम होने के बाद परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया है।
वहीं, वारदात को लेकर थाना अध्यक्ष कमलेश्वर प्रसाद सिंह का कहना है कि, पुलिस ने सूचना मिलते ही घटनास्थल का मुआयना किया। वहां खून से लथपथ एक युवक का शव पड़ा था। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया है कि, 28 साल के युवक को गोली मारने के बाद अपराधी वहां से फरार हो गए।
पुलिस का कहना है कि, अपराधियों ने अमित को दो गोलियां मारी हैं। एक गोली अमित की आंख के ऊपर और दूसरी गोली सीने में लगी है, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। मृत युवक के भाई अभिषेक कुमार का कहना है कि, अमित के दोस्त ने कॉल करके उन्हें घटना की सूचना दी। बता दें, अमित अपराधी था। उसके ऊपर फिरौती के लिए अगवा करने, रंगदारी के लिए शाहपुर एवं जहानाबाद थाने में केस दर्ज था। वह जमीन की खरीद-बिक्री में दलाली का काम किया करता था। वह पटना के राजाबाजार निवासी अपने दोस्त की बारात में शामिल होने जहानाबााद से पटना आया था।
भाई के मुताबिक, अमित अपने घर में बेहद कम रहा करता था। अक्सर वह दूसरे-दूसरे शहरों या अपने शहर में किसी और के साथ रहा करता था। कई बार परिवार वालों ने उसे डांटा-फटकारा भी था, लेकिन वह नहीं समझा। वहीं, पुलिस का कहना है कि, मामले की छानबीन शुरू कर दी गई है। अपराधियों की पहचान करने के लिए पुलिस की टीम घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरे को तलाश रही है। सीसीटीवी कैमरे के फुटेज की मदद से अपराधियों की पहचान होगी। आगे कहा कि, बहुत जल्द अपराधियों को पुलिस पकड़ लेगी। हत्या जैसे संगीन अपराध करके अपराधी नहीं बच सकते हैं।
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Patna Police: पटना में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। आए दिन दिनदहाड़े हत्या को अंजाम दिया जा रहा है। अब शहर के दानापुर इलाके में बारात के बीच गोली मारकर एक युवक की हत्या कर दी गई। युवक जहानाबाद का रहने वाला था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और लोगों से पूछताछ की। फिलहाल मामले में पुलिस को किसी अपराधी का सुराग नहीं मिला है। पटना में बारात के दौरान गोली मारकर युवक की हत्या Patna News : राजधानी के दानापुर क्षेत्र अंतर्गत गाभतल के चौधराना रोड में बारात में शामिल एक युवक को गोली मार दी गई। बैंड-बाजा के शोर के बीच अपराधियों ने उसे गोली मारी और वहां से फरार हो गए। शव की शिनाख्त जहानाबाद के उत्तर सेथू इलाके में रहने वाले गणेश दत्त के बेटे अमित कुमार के रूप में हुई है। बारात में शामिल लोगों ने कॉल करके पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम करने के लिए भेज दिया। शव का पोस्टमार्टम होने के बाद परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया है। वहीं, वारदात को लेकर थाना अध्यक्ष कमलेश्वर प्रसाद सिंह का कहना है कि, पुलिस ने सूचना मिलते ही घटनास्थल का मुआयना किया। वहां खून से लथपथ एक युवक का शव पड़ा था। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया है कि, अट्ठाईस साल के युवक को गोली मारने के बाद अपराधी वहां से फरार हो गए। पुलिस का कहना है कि, अपराधियों ने अमित को दो गोलियां मारी हैं। एक गोली अमित की आंख के ऊपर और दूसरी गोली सीने में लगी है, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। मृत युवक के भाई अभिषेक कुमार का कहना है कि, अमित के दोस्त ने कॉल करके उन्हें घटना की सूचना दी। बता दें, अमित अपराधी था। उसके ऊपर फिरौती के लिए अगवा करने, रंगदारी के लिए शाहपुर एवं जहानाबाद थाने में केस दर्ज था। वह जमीन की खरीद-बिक्री में दलाली का काम किया करता था। वह पटना के राजाबाजार निवासी अपने दोस्त की बारात में शामिल होने जहानाबााद से पटना आया था। भाई के मुताबिक, अमित अपने घर में बेहद कम रहा करता था। अक्सर वह दूसरे-दूसरे शहरों या अपने शहर में किसी और के साथ रहा करता था। कई बार परिवार वालों ने उसे डांटा-फटकारा भी था, लेकिन वह नहीं समझा। वहीं, पुलिस का कहना है कि, मामले की छानबीन शुरू कर दी गई है। अपराधियों की पहचान करने के लिए पुलिस की टीम घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरे को तलाश रही है। सीसीटीवी कैमरे के फुटेज की मदद से अपराधियों की पहचान होगी। आगे कहा कि, बहुत जल्द अपराधियों को पुलिस पकड़ लेगी। हत्या जैसे संगीन अपराध करके अपराधी नहीं बच सकते हैं। ट्रेंडिंगः
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कानन पेंडारी जू में शनिवार को एक युवक शेर के पिंजरे में कूद गया। उस वक्त आसपास पर्यटकों की भीड़ थी। पर्यटकों के शोर मचाने पर चिड़ियाघर के गार्ड मौके पर पहुंचे। एक महिला रेंजर सुखबाई कंवर की बहादुरी से बड़ा हादसा टल गया।
बिलासपुर। कानन पेंडारी जू में शनिवार को एक युवक शेर के पिंजरे में कूद गया। उस वक्त आसपास पर्यटकों की भीड़ थी। पर्यटकों के शोर मचाने पर चिड़ियाघर के गार्ड मौके पर पहुंचे। एक महिला रेंजर सुखबाई कंवर की बहादुरी से बड़ा हादसा टल गया। युवक को छह मिनट के अंदर ही शेर के बाड़े से बाहर निकाल लिया गया। उसके पिता को फोन कर बुलाया गया। इस कारनामे के एवज में युवक को बड़ा जुर्माना भरना पड़ा।
कानन पेंडारी जू में शनिवार का दिन होने की वजह से पर्यटकों की भीड़ थी। दोपहर लगभग 12:45 बजे एक युवक शेर के पिंजरे के जाल को लांघते हुए बाड़े में घुस गया। यह देखकर मौजूद पर्यटक घबरा गए और शोर मचाने लगे। युवक पर शोर का असर नहीं पड़ रहा था। वह धीरे धीरे शेर की तरफ बढ रहा था।
पर्यटकों ने जू के सुरक्षा गार्ड को यह जानकारी दी तो चिड़ियाघर प्रबंधन में हड़कम्प मच गया। वह लोग भागकर पिंजरे के पास पहुंचे। मौजूद पर्यटकों का कहना है कि युवक जिस ओर से शेर की तरफ जा रहा था। शेर का चेहरे उसके विपरीत दिशा में था। इसीलिए शेर युवक को नहीं देख सका। बहरहाल, एक महिला डिप्टी रेंजर सुखबाई कवंर की सूझबूझ मौके पर काम आयी। वह काफी समय से चिड़ियाघर में ही तैनात हैं। इसीलिए जानवर उन्हें पहचानते हैं। उन्होंने शेर को आवाज दी और पिंजरे में जाने के लिए कहा। उसके बाद शेर पिंजरे में चला गया। फिर युवक को बाहर निकाला गया।
युवक की पहचान मगरपारा, आंबेडरकर नगर निवासी कुंतल भिमटे (36) के रूप में हुई है। उसके पिता को फोन करके बुलाया गया। पूरा मामला जानने के बाद युवक के पिता घबरा गए। उनके मुताबिक युवक की तबियत ठीक नहीं है। पर जू प्रबंधन ने इस अपराध के लिए युवक पर दस हजार का जुर्माना लगाया। उसके भुगतान के बाद ही युवक को छोड़ा गया।
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कानन पेंडारी जू में शनिवार को एक युवक शेर के पिंजरे में कूद गया। उस वक्त आसपास पर्यटकों की भीड़ थी। पर्यटकों के शोर मचाने पर चिड़ियाघर के गार्ड मौके पर पहुंचे। एक महिला रेंजर सुखबाई कंवर की बहादुरी से बड़ा हादसा टल गया। बिलासपुर। कानन पेंडारी जू में शनिवार को एक युवक शेर के पिंजरे में कूद गया। उस वक्त आसपास पर्यटकों की भीड़ थी। पर्यटकों के शोर मचाने पर चिड़ियाघर के गार्ड मौके पर पहुंचे। एक महिला रेंजर सुखबाई कंवर की बहादुरी से बड़ा हादसा टल गया। युवक को छह मिनट के अंदर ही शेर के बाड़े से बाहर निकाल लिया गया। उसके पिता को फोन कर बुलाया गया। इस कारनामे के एवज में युवक को बड़ा जुर्माना भरना पड़ा। कानन पेंडारी जू में शनिवार का दिन होने की वजह से पर्यटकों की भीड़ थी। दोपहर लगभग बारह:पैंतालीस बजे एक युवक शेर के पिंजरे के जाल को लांघते हुए बाड़े में घुस गया। यह देखकर मौजूद पर्यटक घबरा गए और शोर मचाने लगे। युवक पर शोर का असर नहीं पड़ रहा था। वह धीरे धीरे शेर की तरफ बढ रहा था। पर्यटकों ने जू के सुरक्षा गार्ड को यह जानकारी दी तो चिड़ियाघर प्रबंधन में हड़कम्प मच गया। वह लोग भागकर पिंजरे के पास पहुंचे। मौजूद पर्यटकों का कहना है कि युवक जिस ओर से शेर की तरफ जा रहा था। शेर का चेहरे उसके विपरीत दिशा में था। इसीलिए शेर युवक को नहीं देख सका। बहरहाल, एक महिला डिप्टी रेंजर सुखबाई कवंर की सूझबूझ मौके पर काम आयी। वह काफी समय से चिड़ियाघर में ही तैनात हैं। इसीलिए जानवर उन्हें पहचानते हैं। उन्होंने शेर को आवाज दी और पिंजरे में जाने के लिए कहा। उसके बाद शेर पिंजरे में चला गया। फिर युवक को बाहर निकाला गया। युवक की पहचान मगरपारा, आंबेडरकर नगर निवासी कुंतल भिमटे के रूप में हुई है। उसके पिता को फोन करके बुलाया गया। पूरा मामला जानने के बाद युवक के पिता घबरा गए। उनके मुताबिक युवक की तबियत ठीक नहीं है। पर जू प्रबंधन ने इस अपराध के लिए युवक पर दस हजार का जुर्माना लगाया। उसके भुगतान के बाद ही युवक को छोड़ा गया।
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प्रश्न :
उत्तर :
"अनेकता में एकता" भारतीय समाज की महत्त्वपूर्ण विशेषता है। यह वाक्यांश इस बात का भी सूचक है कि भारत किस प्रकार से विविधतापूर्ण संस्कृति, सामाजिक और जातीय तत्त्वों को अपनाते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है। यहाँ अपनी पहचान को अक्षुण्ण रखकर विविधता को अंगीकार करने की आज़ादी है।
कुछ विभाजनकारी ताकतों की नाकाम कोशिशों, सामुदायिक झड़प और नफरत फैलाने जैसी गिनी-चुनी घटनाओं को छोड़ दें तो ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं जिसके परिणामस्वरूप भारत की विविधता पर आँच आई हो। उल्लेखनीय है कि जब ऐसी शक्तियों ने करवट लेने की कोशिश की है जिससे कि भारत की एकता और अखंडता पर संकट आए तो इसका मुखर प्रतिरोध समाज, सरकार, न्यायपालिका, सिविल सोसाइटी आदि के द्वारा किया गया।
इस तरह विविधता भारत की एक अमूल्य संपदा है जो भारत को निम्नलिखित रूप से सशक्त बनाती हैः
- यह किसी एक भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज आदि को प्रभावशाली होने से रोकती है और गंगा-जमुनी तहज़ीब को जीवंत बनाए रखती है।
- यह समाज में सकारात्मक स्पर्द्धा को जन्म देती है, जो समाज को सतत् रूप से विकास करने की प्रेरणा प्रदान करती है।
- इससे विभिन्न संस्कृतियों का समावेश होता है जिससे बंधुता की भावना को बल मिलता है।
- निजता या व्यक्तिगत स्वंत्रता का अधिकार से सृजनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
यद्यपि भारत मामूली स्तर पर बड़े और छोटे धार्मिक समुदायों के बीच अंतर का सामना कर रहा है। फिर भी भारत की अधिकांश आबादी यहाँ की विविधता का मज़ा लेते हुए खुशीपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं।
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- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : "अनेकता में एकता" भारतीय समाज की महत्त्वपूर्ण विशेषता है। यह वाक्यांश इस बात का भी सूचक है कि भारत किस प्रकार से विविधतापूर्ण संस्कृति, सामाजिक और जातीय तत्त्वों को अपनाते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है। यहाँ अपनी पहचान को अक्षुण्ण रखकर विविधता को अंगीकार करने की आज़ादी है। कुछ विभाजनकारी ताकतों की नाकाम कोशिशों, सामुदायिक झड़प और नफरत फैलाने जैसी गिनी-चुनी घटनाओं को छोड़ दें तो ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं जिसके परिणामस्वरूप भारत की विविधता पर आँच आई हो। उल्लेखनीय है कि जब ऐसी शक्तियों ने करवट लेने की कोशिश की है जिससे कि भारत की एकता और अखंडता पर संकट आए तो इसका मुखर प्रतिरोध समाज, सरकार, न्यायपालिका, सिविल सोसाइटी आदि के द्वारा किया गया। इस तरह विविधता भारत की एक अमूल्य संपदा है जो भारत को निम्नलिखित रूप से सशक्त बनाती हैः - यह किसी एक भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज आदि को प्रभावशाली होने से रोकती है और गंगा-जमुनी तहज़ीब को जीवंत बनाए रखती है। - यह समाज में सकारात्मक स्पर्द्धा को जन्म देती है, जो समाज को सतत् रूप से विकास करने की प्रेरणा प्रदान करती है। - इससे विभिन्न संस्कृतियों का समावेश होता है जिससे बंधुता की भावना को बल मिलता है। - निजता या व्यक्तिगत स्वंत्रता का अधिकार से सृजनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। यद्यपि भारत मामूली स्तर पर बड़े और छोटे धार्मिक समुदायों के बीच अंतर का सामना कर रहा है। फिर भी भारत की अधिकांश आबादी यहाँ की विविधता का मज़ा लेते हुए खुशीपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं।
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RCB vs MI Live Score: मुंबई इंडियंस को बड़ा झटका रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के गेंदबाज आकाश दीप ने दिया। उन्होंने छठे ओवर की दूसरी गेंद पर मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा को आउट कर दिया। रोहित 10 गेंद पर एक रन ही बना सके। उन्होंने विकेटकीपर दिनेश कार्तिक को कैच थमा दिया। रोहित के आउट होने के बाद तिलक वर्मा क्रीज पर आए हैं। मुंबई का पावरप्ले समाप्त हो चुका है। उसने छह ओवर में तीन विकेट पर 29 रन बनाए हैं। तिलक वर्मा सात और सूर्यकुमार यादव पांच रन बनाकर मैदान पर डटे हुए हैं।
IPL 2022: यह मैच तय करेगा कि दिल्ली की टीम प्लेऑफ में पहुंचेगी या नहीं। एक हिसाब से इस मैच में दिल्ली कैपिटल्स (DC) के लिए करो या मरो वाली स्थिति होने वाली है।
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RCB vs MI Live Score: मुंबई इंडियंस को बड़ा झटका रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के गेंदबाज आकाश दीप ने दिया। उन्होंने छठे ओवर की दूसरी गेंद पर मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा को आउट कर दिया। रोहित दस गेंद पर एक रन ही बना सके। उन्होंने विकेटकीपर दिनेश कार्तिक को कैच थमा दिया। रोहित के आउट होने के बाद तिलक वर्मा क्रीज पर आए हैं। मुंबई का पावरप्ले समाप्त हो चुका है। उसने छह ओवर में तीन विकेट पर उनतीस रन बनाए हैं। तिलक वर्मा सात और सूर्यकुमार यादव पांच रन बनाकर मैदान पर डटे हुए हैं। IPL दो हज़ार बाईस: यह मैच तय करेगा कि दिल्ली की टीम प्लेऑफ में पहुंचेगी या नहीं। एक हिसाब से इस मैच में दिल्ली कैपिटल्स के लिए करो या मरो वाली स्थिति होने वाली है।
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पीलीभीत में सपा के पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है। छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए समस्या का समाधान करने व परीक्षा फलों में सुधार करने को कहा है। दरअसल, कोरोना संक्रमण की वजह से छात्रों को बिना परीक्षा के अगली कक्षा में प्रमोट किया गया है, लेकिन उनको नंबर नहीं दिए गए हैं। जिससे उन्हें एडमिशन लेने में दिक्कत हो रही है।
ऐसे में बड़ी संख्या में एकत्र हुए छात्रों के साथ समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। उन्होंने एसडीएम को जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर छात्र हितों की बात रखी।
बीसलपुर के रामलीला रोड स्थित खेदन लाल इंटर कॉलेज के छात्रों का बोर्ड परीक्षा का परिणाम छात्रों के पिछले वर्षों में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार किया गया है। ऐसे में विद्यालय के सभी छात्रों को बोर्ड कार्यालय से प्राप्त अंकों में प्राप्त अंकों के स्थान पर प्रमोटेड लिखकर रिजल्ट दे दिए गए हैं। परिणाम में प्राप्त अंकों के स्थान पर प्रमोटेड लिखे जाने को अन्यायपूर्ण व गलती बताते हुए समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।
पूर्व राज्य मंत्री हेमराज वर्मा ने कहा कि परीक्षा में पास होने के बाद भी अंक पत्र का उपयोग आगामी प्रवेश परीक्षाओं में नहीं किया जा सकता है। हालांकि बोर्ड द्वारा परीक्षा पर सुधार के लिए परीक्षा का आयोजन कराने का आदेश तो प्राप्त हुआ है, लेकिन यह न्याय उचित नहीं है क्योंकि छात्र इतने कम समय में तैयारी कर परीक्षा कैसे देंगे।
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पीलीभीत में सपा के पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है। छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए समस्या का समाधान करने व परीक्षा फलों में सुधार करने को कहा है। दरअसल, कोरोना संक्रमण की वजह से छात्रों को बिना परीक्षा के अगली कक्षा में प्रमोट किया गया है, लेकिन उनको नंबर नहीं दिए गए हैं। जिससे उन्हें एडमिशन लेने में दिक्कत हो रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में एकत्र हुए छात्रों के साथ समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। उन्होंने एसडीएम को जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर छात्र हितों की बात रखी। बीसलपुर के रामलीला रोड स्थित खेदन लाल इंटर कॉलेज के छात्रों का बोर्ड परीक्षा का परिणाम छात्रों के पिछले वर्षों में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार किया गया है। ऐसे में विद्यालय के सभी छात्रों को बोर्ड कार्यालय से प्राप्त अंकों में प्राप्त अंकों के स्थान पर प्रमोटेड लिखकर रिजल्ट दे दिए गए हैं। परिणाम में प्राप्त अंकों के स्थान पर प्रमोटेड लिखे जाने को अन्यायपूर्ण व गलती बताते हुए समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। पूर्व राज्य मंत्री हेमराज वर्मा ने कहा कि परीक्षा में पास होने के बाद भी अंक पत्र का उपयोग आगामी प्रवेश परीक्षाओं में नहीं किया जा सकता है। हालांकि बोर्ड द्वारा परीक्षा पर सुधार के लिए परीक्षा का आयोजन कराने का आदेश तो प्राप्त हुआ है, लेकिन यह न्याय उचित नहीं है क्योंकि छात्र इतने कम समय में तैयारी कर परीक्षा कैसे देंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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भावार्थः- इन्द्रियसंन्निकर्ष थचा इन्द्रियव्यापार ही को वे प्रमाकरण- बतलाते है, यह सन्निकर्ष और व्यापार स्थूल मूर्त पदार्थोके साथ हीन्हो सकता है, सूक्ष्म परमाणु तथा अमूर्त धर्माधर्मं, और दूरवर्ती पदार्थोका वह नही हो सकता है, इसलिये सन्निकर्ष अथवा इन्द्रियव्यापार प्रमाकरणको प्रमाण माननेसे योगीजन सूक्ष्मादि पदार्थो का प्रत्यक्ष नही कर सकते परन्तु वे करते हैं ऐसा वे मानते है इसलिये योगीजनोमें उनके मत से ही प्रमाकरण लक्षण नही जाता है यदि वे योगियोको प्रमाका करण स्वयं नही मानते है तो उनके मतसे ही प्रमाणका लक्षण अव्याप्ति दोषसे दूषित हो गया। क्योंकि उन्होने योगियोके ज्ञानको प्रमाण माना है ।
वेद भी प्रमाण नहीं है
वेदाः प्रमाणमत्र तु हेतुः केवलमपौरुषेयत्वम् ।
आगमगोचरताया हेतोरन्याश्रितादहेतुत्वम् ।।७३६।।
अर्थः- वेदको प्रमाण माननेवाले वेदान्ती तो केवल अपौरुषेय हेतु द्वारा उसमें प्रमाणता लाते है । दूसरा उनका हेतु आगम है, आगम प्रमाणरूप हेतु अन्योन्याश्रय दोष आनेसे आहेतु हो जाता है ।
भावार्थः - वेदको अपौरुषेय माननेवाले उसकी अनादिता में प्रवाह नित्यताका हेतु देते है, वह प्रवाह नित्यता क्या शब्दमात्रमे है या विशेष अनुपूर्वीरूप जो शब्द बेदमें उल्लिखित है उन्हीमे है ? यदि पूर्व पक्ष स्वीकार किया जाय तब तो जितने भी शब्द है सभी वैदिक हो जाँयगे, फिर वेद ही क्यो अपौरुपेर्य ( पुरुषकों नहीं बनाया हुआ) कहा जाता है ? यदि उत्तर पक्ष स्वीकार किया जाय तो प्रश्न होता है कि उन विशेष आनुपूर्वीरूप शब्दोंका अर्थ किसीका समझा हुआ है या नही ? यदि नही, तब तो विना ज्ञानके उन वेद वाक्योमे प्रमाणता नहीं आ सकती है, यदि किसीका समझा हुआ है तो उन वेद वाक्योके अर्थको समझानेवाला व्याख्याता सर्वज्ञ है या अल्पज्ञ ? यदि सर्वज्ञ है तो वेदके समान अतीन्द्रिय पदार्थोके जाननेवले सर्वज्ञके वचन भी प्रमाणुरूप क्यो न माने जायँ, ऐसी अवस्थामे वेदमे सर्वज्ञ पुरुष कृत ही प्रमागता आती है इसलिये उसका अपौरुषेयत्व प्रमाण सूचक नही सिद्ध होता । यदि वेदका व्याख्याता अल्पज्ञ है तो उस वेदके कठिन २ वाक्योका उलटा भी अर्थ कर सकता है, क्योकि वाक्य स्वयं तो यह कहते नही है कि हमारा अमुक अर्थ है, अमुक नहीं है, किन्तु पुरुषो द्वारा उनके अर्थोंका वोध किया जाता है । यदि । यदि वे पुरुष और रागादि दोपोने विशिष्ट है तो वे अवश्य कुछका कुछ निरूपण कर सकते है । कदाचित् यह कहा जाय कि उसके व्याख्याता
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भावार्थः- इन्द्रियसंन्निकर्ष थचा इन्द्रियव्यापार ही को वे प्रमाकरण- बतलाते है, यह सन्निकर्ष और व्यापार स्थूल मूर्त पदार्थोके साथ हीन्हो सकता है, सूक्ष्म परमाणु तथा अमूर्त धर्माधर्मं, और दूरवर्ती पदार्थोका वह नही हो सकता है, इसलिये सन्निकर्ष अथवा इन्द्रियव्यापार प्रमाकरणको प्रमाण माननेसे योगीजन सूक्ष्मादि पदार्थो का प्रत्यक्ष नही कर सकते परन्तु वे करते हैं ऐसा वे मानते है इसलिये योगीजनोमें उनके मत से ही प्रमाकरण लक्षण नही जाता है यदि वे योगियोको प्रमाका करण स्वयं नही मानते है तो उनके मतसे ही प्रमाणका लक्षण अव्याप्ति दोषसे दूषित हो गया। क्योंकि उन्होने योगियोके ज्ञानको प्रमाण माना है । वेद भी प्रमाण नहीं है वेदाः प्रमाणमत्र तु हेतुः केवलमपौरुषेयत्वम् । आगमगोचरताया हेतोरन्याश्रितादहेतुत्वम् ।।सात सौ छत्तीस।। अर्थः- वेदको प्रमाण माननेवाले वेदान्ती तो केवल अपौरुषेय हेतु द्वारा उसमें प्रमाणता लाते है । दूसरा उनका हेतु आगम है, आगम प्रमाणरूप हेतु अन्योन्याश्रय दोष आनेसे आहेतु हो जाता है । भावार्थः - वेदको अपौरुषेय माननेवाले उसकी अनादिता में प्रवाह नित्यताका हेतु देते है, वह प्रवाह नित्यता क्या शब्दमात्रमे है या विशेष अनुपूर्वीरूप जो शब्द बेदमें उल्लिखित है उन्हीमे है ? यदि पूर्व पक्ष स्वीकार किया जाय तब तो जितने भी शब्द है सभी वैदिक हो जाँयगे, फिर वेद ही क्यो अपौरुपेर्य कहा जाता है ? यदि उत्तर पक्ष स्वीकार किया जाय तो प्रश्न होता है कि उन विशेष आनुपूर्वीरूप शब्दोंका अर्थ किसीका समझा हुआ है या नही ? यदि नही, तब तो विना ज्ञानके उन वेद वाक्योमे प्रमाणता नहीं आ सकती है, यदि किसीका समझा हुआ है तो उन वेद वाक्योके अर्थको समझानेवाला व्याख्याता सर्वज्ञ है या अल्पज्ञ ? यदि सर्वज्ञ है तो वेदके समान अतीन्द्रिय पदार्थोके जाननेवले सर्वज्ञके वचन भी प्रमाणुरूप क्यो न माने जायँ, ऐसी अवस्थामे वेदमे सर्वज्ञ पुरुष कृत ही प्रमागता आती है इसलिये उसका अपौरुषेयत्व प्रमाण सूचक नही सिद्ध होता । यदि वेदका व्याख्याता अल्पज्ञ है तो उस वेदके कठिन दो वाक्योका उलटा भी अर्थ कर सकता है, क्योकि वाक्य स्वयं तो यह कहते नही है कि हमारा अमुक अर्थ है, अमुक नहीं है, किन्तु पुरुषो द्वारा उनके अर्थोंका वोध किया जाता है । यदि । यदि वे पुरुष और रागादि दोपोने विशिष्ट है तो वे अवश्य कुछका कुछ निरूपण कर सकते है । कदाचित् यह कहा जाय कि उसके व्याख्याता
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