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| 1 |
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# संयुक्त आवासको स्वामित्व सम्बन्धी ऐन, २०४४
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
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| 4 |
+
२०४४।९।७
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| 5 |
+
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| 6 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
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| 7 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
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| 8 |
+
१. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
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| 9 |
+
२०६६।१०।७
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| 10 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
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| 11 |
+
२०७२।११।१३
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| 12 |
+
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| 13 |
+
२०४४ सालको ऐन नं. १४
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| 14 |
+
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| 15 |
+
संयुक्त आवासको स्वामित्व सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
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| 16 |
+
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| 17 |
+
**प्रस्तावनाः**
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| 18 |
+
नेपालका शहरी क्षेत्रमा अत्याधिक जनसंख्याको चापको कारण जग्गाको मूल्यमा वृद्धि हुन गई शहरवासीहरु आवास सुविधावाट बञ्चित हुने अवस्था भएकोले संयुक्त आवासको विकास गरी सुपथ आवास इकाईहरू सुलभ ढङ्गबाट बिक्री वितरण गरी बिघमान आवास समस्यालाई निराकरण तथा व्यवस्थित बसोवासको व्यवस्था गर्न र त्यस्ता आवास इकाईका धनीहरुको अधिकार तथा दायित्व सम्बन्धी व्यवस्था गर्न बान्छुनीय भएकोले,
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| 19 |
+
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| 20 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरुन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको छब्वीसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएकोछ ।
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| 21 |
+
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| 22 |
+
---
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| 23 |
+
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| 24 |
+
## परिच्छेद - १
|
| 25 |
+
**प्रारम्भिक**
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| 26 |
+
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| 27 |
+
१. **संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
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| 28 |
+
(१) यस ऐनको नाम "संयुक्त आवासको स्वामित्व सम्बन्धी ऐन, २०४४" रहेको छ।
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| 29 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
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| 30 |
+
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| 31 |
+
२. **परिभाषाः**
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| 32 |
+
विषय बा प्रसंगले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 33 |
+
(क) "संयुक्त आवास भवन" भन्नाले कुनै जग्गामा दुई बा दुई भन्दा बढी आवास इकाई राखी बनाइएको दुई बा दुई भन्दा बढी तला भएको भवन सम्झनु पर्छ र सो शब्दले सोही जग्गामा ब्लक, पोकेट बा अन्य त्यस्तै नामबाट नामाकरण गरी निर्माण गरिएको त्यस्तै किसिमका दुई बा दुई भन्दा बढी भवनहरु र सो भवनहरुले चर्चेको जग्गा, कम्पाउण्ड, कमप्लेक्सलाई समेत जनाउँछ।
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| 34 |
+
(ख) "आवास इकाई (एर्पाटमेण्ट)" भन्नाले संयुक्त आवास भवनमा स्वतन्त्र रुपमा उपभोग गर्न सकिने सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधा सहित एक बा एक भन्दा बढी कोठाहरु भएको त्यस्तो भवनको कुनै इकाई सम्झनु पर्छ।
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| 35 |
+
(ग) "संस्थापक" भन्नाले संयुक्त आवास भवन निर्माण गरी सञ्चालन गर्न दफा ४ बमोजिम स्वीकृति प्राप्त प्रचलित कानून बमोजिम दर्ता भएको संगठित संस्था सम्झनु पर्छ।
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| 36 |
+
(घ) "आवास इकाई धनी" भन्नाले यस ऐन बमोजिमको सम्झौतामा उल्लिखित शर्तहरूका अधीनमा रही आवास इकाई खरिद गर्ने, भाडा (लिज) मा लिने बा अन्य कुनै पनि किसिमले भोग गर्ने व्यक्ति बा संगठित संस्था सम्झनु पर्छ।
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| 37 |
+
(ङ) "सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधा" भन्नाले दफा १६ मा उल्लिखित सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधा सम्झनु पर्छ।
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| 38 |
+
(च) "सीमित सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधा" भन्नाले केही आवास इकाई धनीहरुको लागि मात्र प्रयोगमा आउने गरी बनाइएको बा राखिएको क्षेत्र तथा सुविधा सम्झनु पर्छ।
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| 39 |
+
(छ) "सम्झौता" भन्नाले संस्थापक र आवास इकाई लिने व्यक्तिको बीचमा आवास इकाई खरिद गर्ने, भाडामा लिने बा अन्य कुनै किसिमले भोग गर्ने सम्बन्धमा गरिएको सम्झौता सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
(ज) "समिति" भन्नाले संयुक्त आवास भवनको रेखदेख, प्रबन्ध तथा सञ्चालन गर्नको लागि दफा २४ बमोजिम गठन भएको आवास व्यवस्थापन समिति सम्झनु पर्छ।
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| 41 |
+
(झ) "अधिकार प्राप्त अधिकारी" भन्नाले नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकिदिएको निकाय बा अधिकारी सम्झनु पर्छ।
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| 42 |
+
(ज) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
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| 43 |
+
|
| 44 |
+
---
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| 45 |
+
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| 46 |
+
## परिच्छेद - २
|
| 47 |
+
**संयुक्त आवास भवनको स्वीकृति सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 48 |
+
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| 49 |
+
३. **स्वीकृति नलिई संयुक्त आवास भवन निर्माण गर्न नपाउने:**
|
| 50 |
+
अन्य प्रचलित कानूनमा अन्यथा व्यवस्था भएकोमा बाहेक कसैले पनि अधिकार प्राप्त अधिकारीको स्वीकृति नलिई संयुक्त आवास भवनको निर्माण गर्न बा गर्न लगाउन हुँदैन।
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| 51 |
+
|
| 52 |
+
४. **स्वीकृतिको लागि निवेदन दिनु पर्ने:**
|
| 53 |
+
संयुक्त आवास भवन निर्माण गरी सञ्चालन गर्न चाहने संगठित संस्थाले संयुक्त आवास भवन निर्माण सम्बन्धी प्रस्तावित नक्सा, स्ट्रक्चरल डिजाइन, जग्गाको क्षेत्रफल तथा स्वामित्वको विवरण, आवास इकाई बिक्री वितरण प्रकृया, सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधा सम्बन्धी विवरण र संयुक्त आवास भवन सञ्चालन योजना समेत संलग्न गरी संयुक्त आवास भवन निर्माण गरी सञ्चालन गर्ने स्वीकृतिको लागि तोकिएको ढाँचामा अधिकार प्राप्त अधिकारी समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
५. **स्वीकृति दिनेः**
|
| 56 |
+
दफा ४ बमोजिम कुनै निवेदन पर्न आएमा अधिकार प्राप्त अधिकारीले सो सम्बन्धमा आवश्यक जाँचबुझ गर्दा तोकिए बमोजिमको प्रक्रिया पूरा भएको देखिएमा निवेदकलाई संयुक्त आवास भवन निर्माण गरी सञ्चालन गर्न स्वीकृति दिनेछ।
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
६. **थप विवरण वा कागजात माग्न सक्नेः**
|
| 59 |
+
दफा ४ बमोजिम जाँचबुझको सिलसिलामा संयुक्त आवास भवन सम्बन्धी कुनै थप विवरण वा कागजात आवश्यक देखिएमा अधिकार प्राप्त अधिकारीले सो विवरण वा कागजात निवेदकसंग माग गर्न सक्नेछ र त्यसरी माग गरिएको विवरण वा कागजात अविलम्ब पेश गर्नु सम्बन्धित निवेदकको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
७. **स्वीकृति बेगर नक्सा पास गर्न नहुने:**
|
| 62 |
+
प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि संयुक्त आवास भवन निर्माण गरी सञ्चालन गर्ने सम्बन्धमा यस ऐन बमोजिम अधिकार प्राप्त अधिकारीको स्वीकृति बेगर प्रचलित कानून बमोजिम नक्सा पास गर्ने अधिकार प्राप्त निकायले संयुक्त आवास भवन निर्माण गर्ने नक्सा पास गर्न हुँदैन।
|
| 63 |
+
|
| 64 |
+
---
|
| 65 |
+
|
| 66 |
+
## परिच्छेद - ३
|
| 67 |
+
**आवास इकाईको बिक्री स्वामित्व र हस्तान्तरण**
|
| 68 |
+
|
| 69 |
+
८. **आवास इकाईको बिकी तथा अन्य व्यवस्थाः**
|
| 70 |
+
(१) संस्थापकले आवास इकाईको पूरे रकम भुक्तानी लिई वा किस्ताबन्दीमा भुक्तानी लिने गरी आवास इकाई बिकी गर्न सक्नेछ।
|
| 71 |
+
(२) संस्थापकले कुनै व्यक्ति वा संस्थालाई आवास इकाई भाडा वा अन्य किसिमले भोग गर्न पाउने गरी दिन सक्नेछ।
|
| 72 |
+
(३) उपदफा (१) वा (२) बमोजिम आवास इकाई बिकी गर्दा वा भाडा वा अन्य तरीकाले भोग गर्न दिंदा दफा १४ मा उल्लेख भए बमोजिमको सम्झौता गर्नु पर्नेछ।
|
| 73 |
+
(४) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम आवास इकाई बिक्री गर्दा बा भाडा बा अन्य तरिकाले भोग गर्न दिंदा संस्थापकले आवास इकाई धनीलाई तोकिए बमोजिमको ढाँचामा प्रमाणपत्र समेत दिनु पर्नेछ।
|
| 74 |
+
|
| 75 |
+
९. **आवास इकाईको स्वामित्व र उपभोगः**
|
| 76 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम आवास इकाई धनीले सम्पूर्ण रकम संस्थापकलाई बुझाईसकेपछि त्यस्तो आवास इकाईमा निजको पूर्ण स्वामित्व कायम रहनेछ।
|
| 77 |
+
(२) आवास इकाई धनीले आफ्नो आवास इकाई सम्झौतामा उल्लिखित शर्तहरूका अधीनमा रही पूर्ण रुपमा उपभोग गर्न पाउनेछ।
|
| 78 |
+
|
| 79 |
+
१०. **आवास इकाई धनीले आवास इकाई बिक्री तथा भाडामा दिन सक्नेः**
|
| 80 |
+
दफा ११ र सम्झौतामा उल्लिखित शर्तहरूका अधीनमा रही आवास इकाई धनीले आफ्नो स्वामित्वमा रहेको आवास इकाई अरु कसैलाई बेचबिखन गर्न, भाडामा दिन बा अरु कुनै पनि किसिमबाट स्वामित्व हस्तान्तरण गर्न बा भोग गर्न दिन सक्नेछ।
|
| 81 |
+
|
| 82 |
+
११. **सम्झौता पालन गर्नु पर्नेः**
|
| 83 |
+
(१) आवास इकाई धनीले आफ्नो स्वामित्वमा रहेको आवास इकाई बेचबिखन गरेमा, भाडामा बा अन्य कुनै पनि किसिमबाट भोग गर्न दिएमा त्यसरी आवास इकाई खरिद गर्ने, भाडामा बा अन्य किसिमले भोग गर्ने व्यक्तिले सो आवास इकाईको सम्बन्धमा संस्थापकसंग भएको सम्झौता र यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम तथा कार्य ��ञ्चालन बिधिमा उल्लिखित कुराहरु पालन गर्नु पर्नेछ।
|
| 84 |
+
(२) संयुक्त आवास भवनमा काम गर्ने कर्मचारी तथा कामदारहरूले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम तथा कार्य सञ्चालन बिधि र सम्झौतामा उल्लिखित कुराहरु पालन गर्नु पर्नेछ।
|
| 85 |
+
|
| 86 |
+
१२. **आवास इकाईको स्वामित्व हस्तान्तरण हुन नसक्ने अवस्थाः**
|
| 87 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै व्यक्ति बा संस्थालाई बिक्री गरिएको आवास इकाईको सम्बन्धमा त्यस्तो व्यक्ति बा संस्थाले भुक्तान गर्नु पर्ने कुनै रकम बाँकी रहेको भए सम्झौतामा उल्लिखित शर्तहरूका अधीनमा रही निजले त्यस्तो आवास इकाईको उपभोग मात्र गर्न सक्नेछ।
|
| 88 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बाँकी रकम भुक्तान नगरेसम्म त्यस्तो व्यक्ति बा संस्थाले भोग गरिरहेको आवास इकाईको स्वामित्व अरु कसैलाई कुनै पनि किसिमबाट हस्तान्तरण गर्न सकिने छैन।
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
१३. **सहमति बेगर बेचबिखन गर्न नहुने:**
|
| 91 |
+
कुनै आवास इकाई धनीले आफ्नो आवास इकाई कसैलाई बेचबिखन गर्दा संस्थापक बा समितिले त्यस्तो आवास इकाई धनीले संस्थापक बा समितिलाई तिर्न बुझाउन पर्ने कुनै पनि किसिमको रकम, दस्तुर, शुल्क, फी आदि बाँकी नरहेको व्यहोरा उल्लेख गरी लिखित रुपमा सहमति नदिएसम्म प्रचलित कानून बमोजिम रजिष्टेशन गर्ने निकायले सो आवास इकाईको बेचबिखनको लिखत रजिष्टेशन पास गरी दिनु हुँदैन।
|
| 92 |
+
|
| 93 |
+
१४. **सहमति दिनु पर्ने:**
|
| 94 |
+
कुनै आवास इकाई धनीले आफ्नो आवास इकाई अरु कसैलाई बेचबिखन गर्नु परी दफा १३ बमोजिम सहमति माग गरेमा संस्थापक बा समितिले निजले तिर्न बुझाउन पर्ने रकम, दस्तुर, शुल्क, फी आदि बाँकी नरहेको भए सो आवास इकाई बेचबिखन गर्न लिखित सहमति दिनु पर्नेछ।
|
| 95 |
+
|
| 96 |
+
---
|
| 97 |
+
|
| 98 |
+
## परिच्छेद - ४
|
| 99 |
+
**सामूहिक हित र दायित्व**
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
१५. **सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधाः**
|
| 102 |
+
कुनै आवास इकाई धनीले अन्य आवास इकाई धनीको अधिकारमा प्रतिकूल असर नपर्ने गरी देहायका सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधाको उपभोग समानुपातिक ढङ्गबाट गर्न सक्नेछ:-
|
| 103 |
+
(क) संयुक्त आवास भवनको जग्गा।
|
| 104 |
+
(ख) संयुक्त आवास भवनको जग, लट्टा, गर्डर, बीम, सपोर्ट, गारो, पर्खाल, छाना, हल, कोरिडोर, लब्बी, भन्याङ्ग, फायर स्केप र भित्र बाहिर गर्ने बाटो।
|
| 105 |
+
(ग) बेसमेन्ट, सेलार, चोक, बगैचा, पार्किङ क्षेत्र र गोदाम।
|
| 106 |
+
(घ) जेनेरेटर राख्ने स्थान र सुरक्षा गार्ड बस्ने स्थान।
|
| 107 |
+
(ङ) बिघुत, ग्याँस, चिसो र तातो पानीको ब्यबस्था गर्ने भाग, हिटिङ बा एयर कण्���िशन जस्ता कार्यको लागि उपयोग भएको भवनको भाग।
|
| 108 |
+
(च) इलेभेटर, पम्प, टैंक, मोटर, पडा, फोहर राख्ने कन्टेनर जस्ता सामूहिक उपयोगका साधनहरु।
|
| 109 |
+
|
| 110 |
+
१६. **विभाजन गर्न नहुने:**
|
| 111 |
+
यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको कार्य सञ्चालन बिधिमा उल्लेख भए बमोजिम बाहेक सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधा र सीमित सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधाको विभाजन गर्न बा भाग लगाउन पाइने छैन।
|
| 112 |
+
|
| 113 |
+
१७. **सामूहिक खर्च ब्यहोर्ने:**
|
| 114 |
+
आवास इकाई धनीले आफूले उपभोग गरेको सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधाको सञ्चालन, स्याहार सम्भार, मर्मत, सरसफाई रेखदेख गर्न आफूले उपभोग गर्ने सुविधाको हिस्साको अनुपातमा सम्झौतामा उल्लेख भए बमोजिम लागने सामूहिक खर्च संस्थापक बा समितिलाई बुझाउनु पर्नेछ।
|
| 115 |
+
|
| 116 |
+
१८. **इन्कार गर्न नपाईने:**
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| 117 |
+
आवास इकाई धनीले सम्झौतामा उल्लेख भए बमोजिम आफूले ब्यहोर्नु पर्ने सामूहिक खर्च ब्यहोर्दिन भन्न पाउने छैन।
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| 118 |
+
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| 119 |
+
१९. **रोक लगाउन सक्नेः**
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| 120 |
+
आवास इकाई धनीले सामूहिक खर्च वापत संस्थापक वा समितिलाई तिर्न बुझाउन पर्ने रकम नतिरे नबुझाएसम्म संस्थापक वा समितिले आवास इकाई धनीले उपभोग गरिराखेको सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधा र सीमित सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधा मध्ये कुनै सेवा सुविधाहरु उपभोग गर्न नपाउने गरी रोका गर्न वा बाँकी रकम नबुझाएसम्म त्यस्तो आवास इकाई कुनै पनि किसिमले कसैलाई हस्तान्तरण गर्न नपाउने गरी रोक लगाउन सक्नेछ।
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| 121 |
+
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| 122 |
+
२०. **संयुक्त आवास भवनको बीमाः**
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| 123 |
+
संस्थापक वा समितिले संयुक्त आवास भवनको दैवी दुर्घटना सम्बन्धी बीमा गराउनु अनिवार्य हुनेछ। यसरी बीमा गराए वापत लाग्ने सम्पूर्ण खर्च आवास इकाई धनीहरुले सम्झौतामा उल्लेख भए अनुसार समानुपातिक तवरले व्यहोर्नु पर्नेछ।
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| 124 |
+
|
| 125 |
+
२१. **संयुक्त आवास भवन नष्ट वा क्षति भएमाः**
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| 126 |
+
(१) संयुक्त आवास भवन कुनै पनि किसिमबाट पूर्ण रुपमा क्षतिग्रस्त भएमा सो भवन रहेको जग्गामा सम्पूर्ण आवास इकाई धनीहरुको हक समानुपातिक ढङ्गबाट कायम हुनेछ।
|
| 127 |
+
(२) संयुक्त आवास भवन आंशिक रुपमा क्षतिग्रस्त भै मर्मत गर्न वा बनाउन मिल्ने भएमा त्यसरी क्षतिग्रस्त भएको मितिले तोकिएको अबधिभित्र संस्थापक वा समितिले त्यस्तो क्षतिग्रस्त भवन मर्मत गर्नु पर्नेछ।
|
| 128 |
+
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| 129 |
+
---
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| 130 |
+
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| 131 |
+
## परिच्छेद - ६
|
| 132 |
+
**संयुक्त आवास भवनको व्यवस्थापन**
|
| 133 |
+
|
| 134 |
+
२२. **संयुक्त आवास भवनको संरक्षण, रेखदेख, मर्मत तथा स्याहार सम्भार:**
|
| 135 |
+
संयुक्त आवास भवन र सामूहिक क्षेत्र तथ��� सुविधाहरुको संरक्षण, रेखदेख, मर्मत, स्याहार सम्भार तथा सरसफाई गर्ने दायित्व संस्थापकको हुनेछ।
|
| 136 |
+
|
| 137 |
+
२३. **आवास व्यवस्थापन समितिले संरक्षण, रेखदेख, मर्मत तथा स्याहार सम्भार गर्ने:**
|
| 138 |
+
(१) दफा २३ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि संस्थापकले आफनो स्वामित्वमा रहेका सबै आवास इकाईहरू बेचबिखन गरेमा वा कुनै संयुक्त आवास भवनका सम्पूर्ण आवास इकाई धनीहरुले संयुक्त आवास भवनको सञ्चालन आफैले गर्न लिखित सहमति जनाई संस्थापक समक्ष पेश गरेमा बा संस्थापक संगठित संस्था बिघटन भै बा संस्थापक व्यत्कि टाट पल्टी साहूको ऋण तिर्न नसक्ने भै संयुक्त आवास भवन र सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधाको संरक्षण, रेखदेख, मर्मत, स्याहार सम्भार तथा सरसफाई गर्न नसक्ने भएमा संयुक्त आवास भवन र सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधाको संरक्षण, रेखदेख, मर्मत, स्याहार सम्भार तथा सरसफाई गर्ने कार्य गर्नको निमित्त आवास इकाई धनीहरुले आफूहरूमध्येबाट आवास व्यवस्थापन समितिको गठन गर्नेछन् र त्यस्तो समितिको बैठक सम्बन्धी कार्यविधि समिति आफैले निर्धारण गर्नेछ।
|
| 139 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम समिति गठन भएकोमा यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम संस्थापकले गर्ने भनिएको सम्पूर्ण काम कारबाहीहरु सोही समितिले गर्नेछ।
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| 140 |
+
|
| 141 |
+
२४. **दस्तुर शुल्क र फी लिन सक्ने:**
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| 142 |
+
संयुक्त आवास भवन र सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधाको सञ्चालन, संरक्षण, रेखदेख, मर्मत, स्याहार सम्भार तथा सरसफाई गर्ने कार्य गर्नका लागि संस्थापक बा समितिले आवास इकाई धनीहरुसंग सम्झौतामा उल्लेख भए बमोजिमको दस्तुर, शुल्क र फी लिन सक्नेछ।
|
| 143 |
+
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| 144 |
+
---
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| 145 |
+
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| 146 |
+
## परिच्छेद - ७
|
| 147 |
+
**विविध**
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| 148 |
+
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| 149 |
+
२५. **निजी प्रयोगको लागि संयुक्त आवास भवन निर्माण गर्न सक्ने:**
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| 150 |
+
(१) कसैले निजी प्रयोगको लागि संयुक्त आवास भवन निर्माण गर्न चाहेमा सोही व्यहोरा खुलाई दफा ४ बमोजिम अधिकार प्राप्त अधिकारी समक्ष निवेदन दिई स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 151 |
+
(२) यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि उपदफा (१) बमोजिम निजी प्रयोगको लागि निर्माण गरिएको संयुक्त आवास भवनको सञ्चालन, व्यवस्थापन र अन्य कुराहरुका सम्बन्धमा यस ऐनको परिच्छेद-२ बाहेकका अन्य परिच्छेदका कुराहरु लागू हुने छैनन् र त्यस्तो संयुक्त आवास भवनको सञ्चालन सो भवन निर्माण गर्ने व्यक्तिहरु बीच भएको सम्झौता बमोजिम हुनेछ।
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| 152 |
+
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| 153 |
+
२६. **गर्न नहुने कार्य:**
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| 154 |
+
(१) संस्थापक वा समितिले देहायका कार्य गर्नु हुँदैन:-
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| 155 |
+
(क) अधिकार प्राप्त अधिकारीबाट स्वीकृत मापदण्ड तथा निजबाट तोकिएको स्तर विपरीत संयुक्त आवास भवन निर्माण गर्न।
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| 156 |
+
(ख) संयुक्त आवास भवन निर्माण गर्नको लागि स्वीकृत भएको नक्सा, स्ट्रकचरल डिजाईन तथा योजना विपरीत त्यस्तो भवनको निर्माण गर्न।
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| 157 |
+
(ग) आवास इकाई धनीहरुको हित विपरित हुने गरी कार्य गर्न।
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| 158 |
+
(२) आवास इकाई धनीले देहायका कार्य गर्नु हुँदैन।
|
| 159 |
+
(क) संयुक्त आवास भवन क्षेत्रको सुरक्षा र अन्य आवास इकाई धनीको सुरक्षा तथा स्वास्थ्यमा प्रतिकूल प्रभाव पार्न।
|
| 160 |
+
(ख) संयुक्त आवास भवनको मूल्य घट्न सक्ने कुनै कार्य गर्न।
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| 161 |
+
(ग) आफनो आवास इकाईमा थप निर्माण गर्न, भत्काउन वा उत्खनन् गर्न।
|
| 162 |
+
(घ) आवास इकाई खण्डीकरण वा टुक्याई बेचबिखन गर्न।
|
| 163 |
+
(ङ) सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधा र सीमित सामूहिक क्षेत्र तथा सुविधाको उपभोग अन्य आवास इकाई धनीहरुलाई गर्न दिनबाट बञ्चित गर्न।
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| 164 |
+
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| 165 |
+
२७. **दण्ड सजाय:**
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| 166 |
+
(१) कसैले दफा ४ बमोजिम स्वीकृति नलिई संयुक्त आवास भवन निर्माण गरेमा अधिकार प्राप्त अधिकारीले त्यस्तो व्यक्ति वा संस्थालाई एकलाख रुपैयाँ सम्म जरिबाना गरी त्यस्तो निर्माण गरिएको भवन भत्काउने आदेश समेत दिन सक्नेछ।
|
| 167 |
+
(२) कुनै संस्थापकले अधिकार प्राप्त अधिकारीबाट स्वीकृत, नक्सा, स्ट्रकचरल डिजाईन, योजना तथा निजबाट तोकिएको मापदण्ड तथा स्तर बमोजिम संयुक्त आवास भवन निर्माण नगरेको कारणबाट भवन क्षतिग्रस्त हुन गएमा त्यस्तो संस्थापकलाई एकलाख रुपैयाँदेखि पाँचलाख रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ र त्यस्तो संयुक्त आवास भवन प्राविधिक त्रुटिको कारणबाट भत्कन गई कसैलाई क्षति पुग्न गएको प्रमाणित भएमा पीडित व्यक्तिले संस्थापकसंग मनासिब माफिकको क्षतिपूर्ति समेत भराई लिन सक्नेछ।
|
| 168 |
+
(३) कसैले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम जारी गरिएको कुनै आदेश बा निर्देशनको जानी जानी उल्लघंन गरेमा बा आफूले गर्नु पर्ने कुनै काम कारबाही नगरेमा बा गर्न नहुने कुनै काम कारबाही गरेमा अधिकार प्राप्त अधिकारीले कसूरको मात्रा हेरी निजलाई पचासहजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ र त्यस्तो कसूर पटक पटक गरेमा पटक पिच्छे निजलाई पाँचहजार रुपैयाँका दरले थप जरिबाना समेत हुनेछ।
|
| 169 |
+
|
| 170 |
+
२८. **छुट दिन सक्ने:**
|
| 171 |
+
(१) नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी आवास इकाईको बेचबिखन गर्दा प्रचलित का���ून बमोजिम लागने रजिष्टेशन दस्तुर आंशिक बा पूर्ण रुपले छुट दिन सक्नेछ।
|
| 172 |
+
(२) नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी संयुक्त आवास भवन सञ्चालनको सिलसिलामा प्रचलित कानून बमोजिम लागने कर, महसूल तथा दस्तुर आंशिक तथा पूर्ण रुपले छुट दिन सक्नेछ।
|
| 173 |
+
|
| 174 |
+
२९. **प्रतिरक्षा सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 175 |
+
संयुक्त आवास भवनको तर्फबाट अन्य कुनै व्यक्तिसंग कुनै पनि किसिमको मुद्दा बा कानूनी कारबाही गर्नु पर्ने भएमा संस्थापक बा समितिले त्यस्तो मुद्दा मामिला बा कानूनी कारबाहीमा प्रतिरक्षा सम्बन्धी कारबाही चलाउनु पर्नेछ।
|
| 176 |
+
|
| 177 |
+
३०. **हदम्याद:**
|
| 178 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको कुनै पनि कसूरमा सो कसूर भए गरेको मितिले एक बर्षभित्र थाहा पाएको मितिले तीन महिनाभित्र उजूर गर्नु पर्नेछ।
|
| 179 |
+
|
| 180 |
+
३१. **पुनरावेदन:**
|
| 181 |
+
यस ऐन बमोजिम अधिकार प्राप्त अधिकारीले गरेको निर्णय उपर चित्त नबुढने व्यक्तिले सो निर्णय भएको मितिले पैतीस दिन भित्र सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा पुनरावेदन दिन सक्नेछ।
|
| 182 |
+
|
| 183 |
+
३२. **निर्देशन दिन सक्नेः**
|
| 184 |
+
संयुक्त आवास भवनको उपयुक्त सञ्चालनको निमित्त अधिकार प्राप्त अधिकारीले आवश्यक देखेमा संस्थापक बा समितिलाई निर्देशन दिन सक्नेछ र त्यस्तो निर्देशनको पालन गर्नु सम्बन्धित संस्थापक बा समितिको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 185 |
+
|
| 186 |
+
३३. **प्रचलित कानून बमोजिम हुने:**
|
| 187 |
+
यस ऐनमा लेखिए जतिमा यसै ऐन बमोजिम र अरूमा प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 188 |
+
|
| 189 |
+
३४. **नियम बनाउन सक्नेः**
|
| 190 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
|
| 191 |
+
|
| 192 |
+
३५. **कार्य सञ्चालन विधि बनाई लागू गर्न सक्नेः**
|
| 193 |
+
संयुक्त आवास भवनको सञ्चालन तथा व्यवस्थापनको लागि यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको प्रतिकूल नहुने गरी देहायका बिषयहरुमा संस्थापक बा समितिले कार्य सञ्चालन विधि बनाई लागू गर्न सक्नेछ:-
|
| 194 |
+
(क) संयुक्त आवास भवनको संरक्षण, मर्मत, स्याहार सम्भार गर्ने कुरा।
|
| 195 |
+
(ख) आवास इकाई प्रयोग गर्दा आवास इकाई धनीहरुले पालन गर्नु पर्ने कुरा।
|
| 196 |
+
(ग) संयुक्त आवास भवनमा काम गर्ने कर्मचारीहरुको सेबा, शर्त र सुविधा सम्बन्धमा।
|
| 197 |
+
(घ) संयुक्त आवास भवन सञ्चालन गर्न आवश्यक अन्य कुराहरु सम्बन्धमा।
|
| 198 |
+
|
| 199 |
+
---
|
| 200 |
+
|
| 201 |
+
**द्रष्टव्य:**
|
| 202 |
+
केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरू—
|
| 203 |
+
"श्री ५ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
section_11_pdf_12.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,156 @@
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| 1 |
+
# भवन ऐन, २०४४
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०४४।३।१६
|
| 5 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 6 |
+
9. भवन (पहिलो संशोधन) ऐन, २०६४
|
| 7 |
+
२०६४।४।१४
|
| 8 |
+
२. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 9 |
+
२०६६।१०।७
|
| 10 |
+
३. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 11 |
+
२०७२।११।१३
|
| 12 |
+
४. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 13 |
+
२०७४।११।१९
|
| 14 |
+
|
| 15 |
+
२०४४ सालको ऐन नं. २
|
| 16 |
+
भवन निर्माण कार्यलाई नियमित गर्ने सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 17 |
+
|
| 18 |
+
प्रस्तावनाः भूकम्प, आगलागी तथा अन्य दैवी प्रकोपहरुवाट भवनहरुलाई यथासम्भव सुरक्षित राख्नको लागि भवन निर्माण कार्यलाई नियमित गर्ने सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 19 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको सत्ताइसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएकोछ ।
|
| 20 |
+
|
| 21 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:
|
| 22 |
+
(१) यस ऐनको नाम "भवन ऐन, २०४४" रहेको छ ।
|
| 23 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकिदिएका क्षेत्रमा तोकिदिएको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ ।
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
२. परिभाषाः विषय बा प्रसंगले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 26 |
+
(क) "भवन" भन्नाले आवासीय, औद्योगिक, व्यापारिक, कार्यालय, सभागृह, अस्पताल, शीत भण्डार, गोदाम घर बा अन्य कुनै प्रयोगको लागि बनेको कुनै भौतिक संरचना सम्झनु पर्छ र सो शब्दले त्यस्तो संरचनाको कुनै भागलाई समेत जनाउँछ ।
|
| 27 |
+
(ख) "भवन संहिता" भन्नाले दफा ९, को उपदफा (२) बमोजिम नेपाल सरकारबाट स्वीकृत राष्ट्रिय भवन संहिता सम्झनु पर्छ ।
|
| 28 |
+
(ग) "भवन निर्माण" भन्नाले नयाँ भवन बनाउने, पुरानो भवन भत्काई पुनः निर्माण गर्ने, तला थप गर्ने, मोहोडा फेर्ने बा साबिकको भवनमा झ्याल, ढोका, बार्दली, कौशी, दलान आदि थपघट गरी बनाउने बा सोसंग सम्बन्धित अन्य कार्य सम्झनु पर्छ ।
|
| 29 |
+
(घ) "समिति" भन्नाले दफा ३ बमोजिम गटन भएको भवन निर्माण व्यवस्था सुदृढिकरण समिति सम्झनु पर्छ ।
|
| 30 |
+
(ङ) "नक्सा" भन्नाले भवन निर्माण सम्बन्धी सम्पूर्ण रेखाचित्र, विवरण र अन्य कागजपत्र सम्झनु पर्छ ।
|
| 31 |
+
(च) "नगरपालिका" भन्नाले प्रचलित कानून बमोजिम गटन भएको नगरपालिका सम्झनु पर्छ र सो शब्दले महानगरपालिका र उप-महानगरपालिका समेतलाई जनाउँछ ।
|
| 32 |
+
(छ) "सरकारी निकाय" भन्नाले नेपाल सरकारको मन्त्रालय, सचिवालय, विभाग तथा कार्यालय सम्झनु पर्छ र सो शब्दले प्रचलित कानून बमोजिम गटन भएको आयोग, परिषद् र समिति समेतलाई जनाउँछ ।
|
| 33 |
+
(ज) "शहरी विकास कार्याल��" भन्नाले शहरी विकास तथा भवन निर्माण डिभिजन कार्यालय सम्झनु पर्छ ।
|
| 34 |
+
|
| 35 |
+
३. भवन निर्माण व्यवस्था सुदृढिकरण समितिको गटन:
|
| 36 |
+
(१) भवन निर्माण सम्बन्धी व्यवस्थालाई सुदृढिकरण गर्नको लागि नेपाल सरकारले भवन निर्माण व्यवस्था सुदृढिकरण समिति गटन गर्नेछ ।
|
| 37 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको समितिमा देहायका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु रहनेछन्:-
|
| 38 |
+
(क) सचिव, सहरी विकास मन्त्रालय — अध्यक्ष
|
| 39 |
+
(ख) प्रतिनिधि, राष्ट्रिय योजना आयोग — सदस्य
|
| 40 |
+
(ग) प्रतिनिधि, कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालय - सदस्य
|
| 41 |
+
(घ) सदस्य-सचिव, नेपाल गुणस्तर परिषद् - सदस्य
|
| 42 |
+
(ङ) डीन, इन्जिनियरिङ अध्ययन संस्थान - सदस्य
|
| 43 |
+
(च) सहसचिव, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय (नगरपालिका महाशाखा हेर्ने) — सदस्य
|
| 44 |
+
(छ) प्रमुख, व्यावहारिक विज्ञान तथा प्रविधि अनुसन्धान केन्द्र - सदस्य
|
| 45 |
+
(ज) भवन निर्माण सम्बन्धमा विशेष ज्ञान भएका व्यक्तिहरुमध्ये सहरी विकास मन्त्रालयले मनोनीत गरेको बढीमा तीनजना व्यक्तिहरु — सदस्य
|
| 46 |
+
(झ) महानिर्देशक, शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभाग — सदस्य-सचिव
|
| 47 |
+
|
| 48 |
+
(३) समितिले आवश्यक देखेमा सम्बन्धित स्वदेशी वा विदेशी विशेषज्ञ वा अन्य कुनै व्यक्तिलाई समितिको बैठकमा पर्यवेक्षकको रुपमा भाग लिन आमन्त्रण गर्न सक्नेछ ।
|
| 49 |
+
(४) समितिको सचिवालयको रुपमा शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभागले काम गर्नेछ ।
|
| 50 |
+
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| 51 |
+
४. समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार:
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| 52 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएदेखि बाहेक समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
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| 53 |
+
(क) भूकम्प, आगलागी तथा अन्य दैवी प्रकोपबाट भवनहरुमा पर्न सक्ने क्षतिलाई यथासम्भव कम गर्न भवन निर्माण कार्यलाई नियमित गराउने,
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| 54 |
+
(ख) भवन निर्माण कार्यलाई नियमित गराउन भवन संहिता तर्जुमा गरी स्वीकृतिको लागि नेपाल सरकार समक्ष पेश गर्ने,
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| 55 |
+
(ग) भवन संहितामा समयानुकूल सुधार गर्न तथा भवन निर्माण सम्बन्धी प्रकृया बा प्रविधिको विकास गर्न आवश्यक अध्ययन तथा अनुसन्धान गर्ने गराउने,
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| 56 |
+
(घ) भवन संहितामा उल्लिखित मापदण्ड अनुरुप नक्सा स्वीकृत भए बा नभएको सम्बन्धमा जाँचबुझ गराउने,
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| 57 |
+
(ङ) भवन निर्माणसंग सम्बन्धित स्वदेशी बा विदेशी सामग्रीहरुको गुणस्तर निर्धारण गर्न नेपाल गुणस्तर परिषद्लाई सिफारिश गर्ने,
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| 58 |
+
(च) भवन संहिताको कार्यान्वयनमा देखापरेका समस्याहरुलाई समयानुकूल सुधार गर्नको लागि सम्बन्धित निकायका प्राविधिक विशेषज्ञ ���था कर्मचारीहरु समेत संलग्न गराई सभा बा गोष्ठी गर्ने, गराउने,
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| 59 |
+
(छ) भवन संहिताको उपयोगिता सम्बन्धमा सर्वसाधारणलाई विभिन्न माध्यमद्वारा जानकारी गराउने,
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| 60 |
+
(ज) यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न आवश्यक अन्य काम गर्ने, गराउने ।
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| 61 |
+
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| 62 |
+
५. समितिको बैठक र निर्णय:
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| 63 |
+
(१) समितिको बैठक समितिको अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा आवश्यकता अनुसार बस्नेछ् ।
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| 64 |
+
(२) समितिको बैठक बस्ने कम्तीमा तीन दिन अगाडि समितिको सदस्य-सचिबले बैठकमा छलफल हुने विषय सहितको सूचना सबै सदस्यहरुलाई दिनु पर्नेछ ।
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| 65 |
+
(३) समितिको कूल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशत सदस्यहरु उपस्थित भएमा समितिको बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ ।
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| 66 |
+
(४) समितिको बैठकको अध्यक्षता समितिको अध्यक्षले र निजको अनुपस्थितिमा समितिका सदस्यहरुले आफूमध्येबाट छानेको सदस्यले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ ।
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| 67 |
+
(५) समितिको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा अध्यक्षता गर्ने व्यत्क्तिले निर्णायक मत दिनेछ ।
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| 68 |
+
(६) समितिको प्रत्येक बैठकमा उपस्थित सदस्यहरुको नाम, छलफल भएको विषयवस्तु र बैठकमा भएका निर्णयहरु निर्णय पुस्तिकामा लेखी उपस्थित सदस्यहरुको सहीछाप गराई राख्नु पर्नेछ ।
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| 69 |
+
(७) समितिको निर्णय समितिको सदस्य-सचिबले प्रमाणित गर्नेछु ।
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| 70 |
+
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| 71 |
+
६. उपसमिति गठन गर्न सक्ने:
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| 72 |
+
(१) समितिले आफूले गर्नु पर्ने कुनै काम गर्न गराउन आबश्यकता अनुसार सम्बन्धित विशेषज्ञ व्यक्तिहरु समेत रहेका बिभिन्न उपसमितिहरु गठन गर्न सक्नेछ ।
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| 73 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठित उपसमितिहरुको काम, कर्तव्य र अधिकार समितिले तोकिदिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 74 |
+
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| 75 |
+
७. बैठक भत्ताः
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| 76 |
+
समिति तथा दफा ६ बमोजिम गठित उपसमितिका सदस्यहरु र आमन्त्रित व्यक्तिहरुले बैठकमा भाग लिए बापत नेपाल सरकारले तोकिदिए बमोजिमको बैठक भत्ता पाउने छन् ।
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| 77 |
+
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| 78 |
+
८. भवनको बर्गीकरण:
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| 79 |
+
भवन संहिताको तर्जुमा तथा कार्यान्वयन गर्ने प्रयोजनको लागि भवनलाई देहाय बमोजिम चार बर्गमा बर्गीकरण गरिनेछ:-
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| 80 |
+
(क) "क" बर्ग: बिकसित मुलुकमा अपनाइएका भवन संहिता समेतको अनुसरण गरी इण्टरनेशनल स्टेट अफ आर्टमा आधारित हुने गरी बनाइने अत्याधुनिक भवनहरू ।
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| 81 |
+
(ख) "ख" बर्ग: प्लीन्थ एरिया एक हजार बर्गफीटभन्दा बढी, भुइँतला सहित तीन तलाभन्दा बढी बा स्ट्रक्चरल स्पान चार दशमलब पाँच (४.४) मीटरभन्दा बढी भएका भवनहरू ।
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| 82 |
+
(ग) "ग" बर्ग: प्लीन्थ एरिया एक हजार बर्गफीटसम���म, भुइँतला सहित तीन तलासम्म बा स्ट्रक्चरल स्पान चार दशमलब पाँच (४.४) मीटरसम्म भएका भवनहरू ।
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| 83 |
+
(घ) "घ" बर्ग: खण्ड (क), (ख) र (ग) मा लेखिएदेखि बाहेकका काँचो बा पाको ईटा, ढुङ्गा, माटो, बाँस, खर आदि प्रयोग गरी दुई तलासम्म बनाइने साना घर, छाप्राहरु ।
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| 84 |
+
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| 85 |
+
९. भवन संहिता स्वीकृत गराउनु पर्नेः
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| 86 |
+
(१) समितिले दफा ८ मा उल्लिखित भवन वर्गीकरण समेतका आधारमा भवन संहिता तयार गरी स्वीकृतिको लागि नेपाल सरकार, सहरी विकास मन्त्रालय समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ ।
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| 87 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश भएको भवन संहिता नेपाल सरकार, सहरी विकास मन्त्रालयबाट स्वीकृत भएपछि लागू हुनेछ ।
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| 88 |
+
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| 89 |
+
१०. भवन संहिता अनुरुप भवन निर्माण गर्नु पर्नेः
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| 90 |
+
कुनै व्यक्ति, संस्था बा सरकारी निकायले भवन निर्माण गर्दा भवन संहितामा तोकिएको स्तर अनुरुप बनाउनु पर्नेछ । त्यसरी भवन निर्माण गर्दा सो भवनको नक्सा र डिजाइन जुन स्तरको डिजाइनकर्ता, इज्जिनियर बा आर्किटेक्टबाट प्रमाणित गराइएको हो कम्तीमा सोही स्तरको डिजाइनकर्ता बा निजको प्रतिनिधि, इज्जिनियर बा आर्किटेक्टको रेखदेखमा निर्माण गर्नु पर्नेछ ।
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| 91 |
+
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| 92 |
+
११. भवनको डिजायन तथा नक्सा स्वीकृति सम्बन्धी व्यवस्थाः
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| 93 |
+
(१) नगरपालिका क्षेत्रभित्र दफा ८ मा उल्लिखित "क", "ख" बा "ग" बर्गको भवन निर्माण गर्न चाहने व्यक्ति, संस्था बा सरकारी निकायले भवन निर्माण गर्न प्रचलित कानून बमोजिम स्वीकृतिको लागि नगरपालिका समक्ष दरखास्त दिंदा नक्सासाथ डिजायन समेत पेश गर्नु पर्नेछ ।
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| 94 |
+
(२) यो ऐन लागू भएको गाउँपालिका क्षेत्रभित्र दफा ८ मा उल्लिखित "क" बा "ख" बर्गको भवन निर्माण गर्न चाहने व्यक्ति, संस्था बा सरकारी निकायले भवनको नक्सा र डिजाइन तयार गरी शहरी विकास कार्यालयबाट स्वीकृत गराउनु पर्नेछ । तर "ग" बर्गको भवनको हकमा प्रचलित कानून बमोजिम नक्सा स्वीकृतिको लागि दरखास्त दिंदा भवन संहिता अनुरुपको नक्सा पेश गर्नु पर्नेछ ।
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| 95 |
+
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| 96 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम पेश गरिएका भवनको नक्सा र डिजाइन भवन संहिता अनुरुप भएको व्यहोरा देहायका व्यक्तिबाट प्रमाणित गराएको हुनु पर्नेछ:-
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| 97 |
+
(क) दफा ८ मा उल्लिखित "क" बर्गको भवनको हकमा सम्बन्धित डिजाइनकर्ताबाट,
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| 98 |
+
(ख) दफा ८ मा उल्लिखित "ख" बर्गको भवनको हकमा नेपाल इञ्जिनियरिङ्ग परिषद्मा दर्ता भएको सिभिल इञ्जिनियर बा आर्किटेक्टबाट,
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| 99 |
+
(ग) दफा ८ मा उल्लिखित "ग" बर्गको भवनको हकमा मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्थ���बाट सिभिल इञ्जिनियरिङ्ग बा आर्किटेक्ट बिषयमा कम्तीमा प्रमाणपत्र तह उत्तीर्ण गरेको व्यक्तिबाट ।
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| 100 |
+
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| 101 |
+
१२. मापदण्ड बिपरीत नक्सा स्वीकृत गर्न नहुने:
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| 102 |
+
(१) नगरपालिकाले भवन संहितामा उल्लिखित मापदण्ड बिपरीत हुने गरी नक्सा स्वीकृत गर्नु हुँदैन ।
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| 103 |
+
(२) नगरपालिकाले भवन संहिता बमोजिम नक्सा स्वीकृत गरे नगरेको सम्बन्धमा शहरी विकास कार्यालयले आवश्यक जाँचबुझ गर्न सक्नेछ ।
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| 104 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम जाँचबुझ गर्दा कुनै नगरपालिकाले भवन संहिता बिपरीत हुने गरी नक्सा स्वीकृत गरेको देखिएमा शहरी विकास कार्यालयले सोको प्रतिवेदन समिति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ ।
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| 105 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम प्राप्त भएको प्रतिवेदन छानबिन गर्दा मनासिब देखिएमा समितिले भवन संहिता बमोजिम नक्सा स्वीकृत गराउन सम्बन्धित नगरपालिकामा लेखी पटाउनु पर्नेछ ।
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| 106 |
+
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| 107 |
+
१३. भवन निर्माणको सुपरिवेक्षण गर्न सक्ने:
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| 108 |
+
(१) कुनै व्यक्ति, संस्था बा सरकारी निकायले भवन संहितामा तोकिएको स्तर अनुरुप भवन निर्माण गरे नगरेको सम्बन्धमा नगरपालिका क्षेत्रभित्रको हकमा नगरपालिकाले र गाउँपालिका क्षेत्रभित्रको हकमा शहरी विकास कार्यालयले सुपरिवेक्षण गर्न सक्नेछ ।
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| 109 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सुपरिवेक्षण गर्दा नगरपालिका बा शहरी विकास कार्यालयले कुनै भवनको निर्माण भवन संहितामा तोकिएको स्तर अनुरुप नभएको पाएमा भवन निर्माण गर्ने सम्बन्धित व्यक्ति, संस्था बा सरकारी निकायलाई आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ र त्यस्तो निर्देशन पालन गर्नु सम्बन्धित व्यक्ति, संस्था बा सरकारी निकायको कर्तव्य हुनेछ ।
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| 110 |
+
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| 111 |
+
१४. सजाय:
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| 112 |
+
(१) कसैले यस ऐन बमोजिम नक्सा स्वीकृत नगराई बा त्यस्तो स्वीकृत नक्सा बा भवन संहितामा उल्लिखित मापदण्ड बिपरीत हुने गरी भवन निर्माण गरेमा नगरपालिका क्षेत्रभित्रको हकमा नगरपालिकाले र गाउँपालिका क्षेत्रभित्रको हकमा शहरी विकास कार्यालयले त्यस्तो निर्माण कार्य तुरुन्त रोक्न आदेश दिनु पर्नेछ ।
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| 113 |
+
(२) कसैले यस ऐन बमोजिम नक्सा स्वीकृत नगराई बा त्यस्तो स्वीकृत नक्सा बा भवन संहितामा उल्लिखित मापदण्ड बिपरीत हुने गरी भवन निर्माण गरेमा नगरपालिका बा शहरी विकास कार्यालयले त्यस्तो भवन बा त्यसको कुनै भाग भत्काउन आदेश दिई त्यस्तो कार्य गर्ने व्यक्ति बा संस्थालाई पचास हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ ।
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| 114 |
+
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| 115 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम नगरपालिका बा शहर�� विकास कार्यालयले भवन निर्माणको कुनै भाग भत्काउने आदेश दिएकोमा सो भाग नभत्काएसम्म त्यस्तो सम्पत्ति कसैलाई पनि कुनै ब्यहोराले हक छाडी दिन बा धितो बन्धकी दिन नपाउने गरी रोक्रा राख्न, त्यस्तो निर्माण भएको भवनमा धारा, बिजुली, टेलिफोन आदि बितरण गर्न नलगाउन तथा बितरण गरिसकेको भए पनि त्यस्तो धारा, बिजुली, टेलिफोन आदिको लाइन काट्न समेत नगरपालिका बा शहरी विकास कार्यालयले सम्बन्धित कार्यालयहरुमा लेखी पठाउनु पर्नेछ र सम्बन्धित कार्यालयले पनि लेखी आए बमोजिम गरी दिनु पर्नेछ ।
|
| 116 |
+
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| 117 |
+
१५. पुनरावेदन:
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| 118 |
+
दफा १४ को उपदफा (२) बमोजिम नगरपालिका बा शहरी विकास कार्यालयले दिएको आदेशमा चित्त नबुझ्नेले त्यस्तो आदेश पाएको मितिले पैतीस दिनभित्र सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा पुनरावेदन दिन सक्नेछ ।
|
| 119 |
+
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| 120 |
+
१६. भवन भत्काउने र लागेको खर्च असुल गर्ने:
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| 121 |
+
(१) दफा १४ को उपदफा (२) बमोजिम कुनै भवन बा त्यसको कुनै भाग भत्काउने आदेश भएमा त्यस्तो आदेश उपर दफा १४ बमोजिम पुनरावेदन परेकोमा जिल्ला अदालतबाट त्यस्तो भवन बा त्यसको कुनै भाग भत्काउने गरी निर्णय भएको मितिले पैतीस दिनभित्र र पुनरावेदन नपरेकोमा पुनरावेदन गर्ने म्याद नाघेको मितिले पैतीस दिनभित्र सम्बन्धित व्यक्ति, संस्था बा सरकारी निकायले त्यस्तो भवन बा त्यसको कुनै भाग भत्काउनु पर्नेछ ।
|
| 122 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको म्यादभित्र सम्बन्धित व्यक्ति, संस्था बा सरकारी निकायले त्यस्तो भवन बा त्यसको कुनै भाग नभत्काएमा नगरपालिका बा शहरी विकास कार्यालयले नै त्यस्तो भवन बा त्यसको कुनै भाग भत्काउन सक्ने छु र त्यसरी भत्काउँदा लागेको खर्च सम्बन्धित व्यक्ति बा संस्थाबाट सरकारी बाँकी सरह असुल उपर गरिनेछ ।
|
| 123 |
+
|
| 124 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम नगरपालिका बा शहरी विकास कार्यालयले भवन बा त्यसको कुनै भाग भत्काउँदा भरमगदुर प्रयास गर्दागदै पनि भत्काउनु पर्ने भागभन्दा बढी भाग भत्किन गएमा नगरपालिका बा शहरी विकास कार्यालय जबाफदेही हुने छैन र त्यसरी भत्काउनु पर्नेभन्दा बढी भाग भत्किन गई क्षति पुरन गए बापत सम्बन्धित व्यत्किले क्षतिपूर्ति माग गर्न पाउने छैन ।
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम शहरी विकास कार्यालयले भवन बा त्यसको कुनै भाग भत्काउँदा सम्बन्धित गाउँपालिकाको अध्यक्ष, उपाध्यक्ष बा सम्बन्धित बडा अध्यक्षको रोहबरमा र निजहरू नभएमा बा उपस्थित नभएमा गाउँपालिकाको सचिव र निज पनि उपस्थित नभएमा स्थानियस्तरको कम्तीमा चारजना बासिन्दाको रोहबरमा भत्काउनु पर्नेछ ।
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| 127 |
+
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| 128 |
+
१७. सहयोग गर्नु पर्ने:
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| 129 |
+
दफा १६ को उपदफा (२) बमोजिम नगरपालिका बा शहरी विकास कार्यालयले भवन बा त्यसको कुनै भाग भत्काउँदा कसैले बाधा विरोध गरेमा नगरपालिकाले स्थानीय प्रशासनको र शहरी विकास कार्यालयले स्थानीय प्रशासन तथा सम्बन्धित गाउँपालिकाको सहयोग माग गर्न सक्नेछ र त्यसरी सहयोग माग भएमा नगरपालिका बा शहरी विकास कार्यालयलाई आवश्यक सहयोग गर्नु पर्नेछ ।
|
| 130 |
+
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| 131 |
+
१८. सूचना प्रकाशन गर्नु पर्नेः
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| 132 |
+
(१) नेपाल सरकारले भवन संहिता लागू गरिएको सूचना सर्वसाधारणको जानकारीको लागि नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गर्नेछ ।
|
| 133 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सूचना प्रकाशन भएपछि भवन संहिताको प्रतिलिपि लिन चाहने व्यत्तिले तोकिएको दस्तुर बुझाई शहरी विकास कार्यालयबाट भवन संहिताको प्रतिलिपि प्राप्त गर्न सक्नेछ ।
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| 134 |
+
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| 135 |
+
१९. अधिकार प्रत्यायोजन:
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| 136 |
+
समितिले यस ऐन बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकार मध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार समिति बा दफा ६ बमोजिम गठित उपसमितिका सदस्यहरु, सरकारी निकाय, नगरपालिका, शहरी विकास कार्यालय बा अन्य कुनै अधिकृत कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ ।
|
| 137 |
+
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| 138 |
+
२०. निर्देशन दिन सक्नेः
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| 139 |
+
(१) नेपाल सरकारले भवन संहिता तर्जुमा तथा कार्यान्वयन गर्ने सम्बन्धमा समितिलाई आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ ।
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| 140 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नेपाल सरकारले दिएको निर्देशन पालन गर्नु समितिको कर्तव्य हुनेछ ।
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| 141 |
+
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| 142 |
+
२१. यसै ऐन बमोजिम हुने:
|
| 143 |
+
यस ऐनमा लेखिए जति कुरामा यसै ऐन बमोजिम र अरुमा प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ ।
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| 144 |
+
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| 145 |
+
२२. नियम बनाउने अधिकार:
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| 146 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ ।
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| 147 |
+
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| 148 |
+
---
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| 149 |
+
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| 150 |
+
**द्वष्टव्य:**
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| 151 |
+
(१) केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरू:-
|
| 152 |
+
"श्री ४ को सरकार" को सझा "नेपाल सरकार" ।
|
| 153 |
+
(२) भवन (पहिलो संशोधन) ऐन, २०६४ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरू:-
|
| 154 |
+
"आबास तथा भौतिक योजना मन्त्रालय" को सझा "भौतिक योजना तथा निर्माण मन्त्रालय" ।
|
| 155 |
+
(३) केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरु:-
|
| 156 |
+
"कानून, न्याय तथा संसदीय व्यवस्था मन्त्रालय" को सझा "कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालय" ।
|
section_11_pdf_13.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,81 @@
|
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| 1 |
+
# विकास समिति ऐन, २०१३
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| 2 |
+
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| 3 |
+
## लालमोहर सदर मिति
|
| 4 |
+
प्रकाशित मिति
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
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| 8 |
+
१. विकास समिति (पहिलो संशोधन) ऐन, २०१३ २०१३।९।४ २०१३।९।१७
|
| 9 |
+
२. विकास समिति (दोस्रो संशोधन) ऐन, २०१४ २०१४।११।२ २०१४।११।९ लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 10 |
+
३. विकास समिति (तेस्रो संशोधन) ऐन, २०१६ २०१६।४।४
|
| 11 |
+
४. केही नेपाल कानून (संशोधन र पुन: व्यवस्थापन) ऐन, २०२० २०२०।११।१६
|
| 12 |
+
५. न्याय प्रशासन सुधार ऐन, २०३१ २०३१।४।१६
|
| 13 |
+
६. न्याय प्रशासन ऐन, २०४६
|
| 14 |
+
|
| 15 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 16 |
+
७. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन,२०६६(1) २०६६।१०।७
|
| 17 |
+
६. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ २०७२।११।१३
|
| 18 |
+
९. नेपालको संविधान अनुकुल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४ २०७४।११।१९
|
| 19 |
+
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| 20 |
+
२०१३ सालको ऐन नं. ३
|
| 21 |
+
$३<$
|
| 22 |
+
विकास योजना र विकास कार्यहरुलाई शीघ्र र सुचारुरुपले कार्यान्वित गर्न उचित व्यवस्था गर्नु पर्ने आवश्यक देखिएकोले श्री ५ महाराजाधिराजबाट मन्त्रिमण्डलको सल्लाह अनुसार यो ऐन बनाई जारी गरिबक्सेकोछ ।
|
| 23 |
+
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| 24 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः (१) यस ऐनको नाम "विकास समिति ऐन, २०१३" रहेको छ ।
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| 25 |
+
(२) यो ऐन नेपाल राज्यभर तुरुन्त लागू हुनेछ ।
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| 26 |
+
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| 27 |
+
२. परिभाषाः विषय बा प्रसङ्गले अर्कै अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,-
|
| 28 |
+
(१) यो ऐन २०६५ साल जेठ १५ गतेबाट लागू भएको ।
|
| 29 |
+
$३<$ गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा झिकिएको ।
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
(क) "समिति" भन्नाले द्रदफा ३ बा ३क अन्तर्गत गटन गरिएको समिति सम्झनु पर्छ ।
|
| 32 |
+
(ख) "विदेशी एजेन्सी" भन्नाले कुनै विदेशी राष्ट्र, अन्तर्राष्ट्रिय बा विदेशी संस्था समेत लिईनेछ ।
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| 33 |
+
(ग) "सूचित आदेश" भन्नाले नेपाल राजपत्रमा प्रकाशित आदेश सम्झनु पर्छ ।
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| 34 |
+
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| 35 |
+
३. समिति गटन गर्ने नेपाल सरकारको अधिकारः (१) नेपाल सरकारले उचित बा आवश्यक ठहराएमा सूचित आदेशद्वारा सोही आदेशमा तोकिए बमोजिमको कुनै विकास योजना बा विकास कार्यलाई कार्यान्वित गर्न समिति गटन गर्न सक्नेछ ।
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| 36 |
+
(२) उपदफा (१) अन्तर्गतको प्रत्येक सूचित आदेशद्वारा समितिका काम कर्तव्यहरु तोकिनेछन् र तत्सम्बन्धी अरु विषयहरुको पनि व्यवस्था हुन सक्दछ ।
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| 37 |
+
(३) समितिमा नेपाल सरकारले नियुक्त गरे बमोजिमको व्यक्तिहरु रहनेछन् +र सो समिति गटन गर्दाको आदेशमा तोके बमोजिमको नामले प्रचलित हुनेछ ।
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ऊ३क. समिति गटन गर्ने प्रदेश सरकारको अधिकारः (१) यस ऐन बमोजिम समिति गटन भई सञ्च���लनमा रही नेपाल सरकारबाट प्रदेश सरकारलाई हस्तान्तरण भएका योजना, परियोजना बा संस्थालाई प्रदेश सरकारले विकास समितिको रुपमा सञ्चालन गर्न आवश्यक देखेमा प्रदेश राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी समिति गटन गर्न सक्नेछ।
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(२) उपदफा (१) अन्तर्गतको आदेशद्वारा समितिका काम र कर्तव्य तोकिने छन् र समिति गटन गर्दाका बखत आदेशमा तोके बमोजिमको नामले प्रचलित हुनेछ ।
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(३) समितिमा सूचित आदेशमा तोकिएको मापदण्डका आधारमा प्रदेश सरकारले नियुक्ति गरेका तीन जना व्यक्तिहरु रहने छन् ।
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(४) उपदफा (१) बमोजिम गटित समिति बमोजिमको योजना, परियोजना कार्यान्वित भएपछि सो समिति स्वतः बिघटन हुनेछ र त्यसको सूचना प्रदेश राजपत्रमा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ ।
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४. समितिहरुलाई संस्था मान्नेः श्दफा ३ बा ३क अन्तर्गत गटन भएको प्रत्येक समिति अविछिन्न उत्तराधिकारबाला संस्था (कर्पोरेट बडी) हुनेछ र त्यस समिति जिम्माको सबै कामका निमित्त एउटै छाप हुनेछ र व्यक्ति सरह चल अचल सम्पत्ति लेनदेन गर्ने तथा राख्ने त्यस समितिलाई अधिकार हुनेछ । सो समितिले व्यक्ति सरह नालेस गर्न र निज उपर पनि व्यक्ति सरह नालेस उजुर लाग्न सक्तछ ।
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४. समितिको कोष: (१) ९दफा ३ बा ३क. अन्तर्गत गठन गरिएको समितिको कोषमा देहायका कुरा सम्मिलित हुनेछः-
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(क) नेपाल सरकार बा अरु कुनै गैर सरकारी व्यक्तिले प्रदान गरेको रुपैयाँ, र
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(ख) कुनै विदेशी एजेन्सीले नेपाल सरकारद्वारा दिएको कोष ।
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(२) समिति गठन गर्नको निमित्त निकालिएको आदेशमा तोकिएका काममा कार्यकमहरु कार्यान्वित गर्नको निमित्त समितिको रुपैयाँ र कोष उपयोग गरिनेछ ।
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(२) समितिले आफूले बनाएको नियममा तोकिएको कार्यकम र कार्यप्रणाली बमोजिम काम गर्नेछ र सोही बमोजिम हिसाब किताब पनि राख्नेछ ।
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प्तर दफा ३ अन्तर्गत निकालिएको आदेश बमोजिमका समितिले बनाएका नियमहरुमा नेपाल सरकारको सम्बन्धित मन्त्रालय र दफा ३क. अन्तर्गत निकालिएको आदेश बमोजिमका समितिले बनाएका नियमहरुमा प्रदेश सरकारको सम्बन्धित मन्त्रालयको स्वीकृति लिनु पर्नेछ ।
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(४) $x$ $\qquad$
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६. समितिका कर्मचारीहरु: (१) समितिको कामहरु सुचारु रुपले चलाउनको निमित्त आवश्यकतानुसार समितिले कर्मचारीहरु नियुक्त गर्न सक्नेछ ।
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तर मेलोक सेवा आयोगबाट स्वीकृत भएका सिद्धान्तहरु र तरीका अनुसार बाहेक अरु कुनै तरीकाबाट कुनै व्यक्तिलाई नियुक्त गर्नु हुँदैन ।
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(२) नेपाल सरकार बा अरु कुनै विदेशी एजेन्सीका स्थायी अधिकृतहरुको सेवा केही समयको लागि स्वीकार गर्नु समितिको निमित्त कानूनी हुनेछ र समितिको काम काज गर्दा त्यस्ता अधिकृतहरु समितिको प्रशासकीय नियन्त्रणमा रहनेछन् ।
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तर त्यसरी खटिएका कारणबाट तिनको साबिकको नोकरीको शर्तहरुमा कुनै असर पर्ने छैन ।
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७. आदेश नियम जारी गर्ने नेपाल सरकारको अधिकारः समितिको काम कारबाहीको विषयमा सरकारले समय समयमा नियम बा आदेश जारी गर्न सक्नेछ र त्यस्ता नियम बा आदेशहरु पालन गर्नु त्यस समितिको कर्तव्य हुनेछ ।
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५. समितिको बिघटनः (१) समितिले कार्यान्वित गर्न लागेको कुनै विकास योजना बा विकास कार्य नेपाल सरकारले नै बढी मावामा सुचारुरुपले कार्यान्वित गर्न सक्तछ भन्ने बा त्यसको काम पूरा भैसकेको छ भन्ने नेपाल सरकारलाई लागेमा नेपाल सरकारले सूचित आदेशद्वारा समितिलाई बिघटन गर्न सक्नेछ ।
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(२) समिति बिघटन भएको खण्डमा:-
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(क) समितिको सबै हक जायजात र ऋण नेपाल सरकारको हुनेछ ।
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(ख) समितिसंग लिएका सबै टेकाहरु नेपाल सरकारसंग लिइएका मानिनेछन् ।
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(ग) $\boldsymbol{*}$
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# *९. मध्यस्थद्वारा झगडाको निर्णय हुने: (१) समितिसंग भएको कुनै सम्झौता र त्यसलाई कार्यान्वित गर्ने कुराका सम्बन्धमा उट्ने झगडालाई निर्णयको लागि मध्यस्थ छेउ पटाउनु पर्ने गरी सो सम्झौतामा व्यवस्था भएकोमा सोही सम्झौता अनुसार नियुक्त भएको मध्यस्थले त्यस्तो झगडाको निर्णय गर्नेछ र त्यस्तो झगडालाई हेर्ने र छिन्ने अधिकार कुनै अदालतलाई हुने छैन ।
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+
(२) निर्णयको लागि उपदफा (१) अन्तर्गत मध्यस्थ छेउ पटाइएको झगडाको सम्बन्धमा साक्षी प्रमाण बुझ्ने, साक्षीहरुलाई उपस्थित गराउने र लिखतहर पेश गराउने अधिकार निजलाई हुनेछ ।
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+
(३) मध्यस्थको निर्णय अन्तिम हुनेछ र दुबै पक्षहरु उपर मान्य हुनेछ ।
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तर मर्का पर्ने पक्षको निबेदन परेमा उच्च अदालतले देहायका अवस्थामा सो निर्णयलाई रद् गर्न सक्नेछ:-
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+
(क) मध्यस्थले निर्णय गर्दा अनुचित आचरण देखाएको बा खास बदनियत देखिने गरी बेटीक निर्णय गरेको बा मनमानी गरेको भन्ने स्पष्ट देखिन आएमा, बा
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+
(ख) मध्यस्थको निर्णय सरासर कानून विरुद्ध भएमा ।
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+
(४) त्यस्ता निर्णयलाई उच्च अदालतबाट रद् गरिएको खण्डमा झगडालाई निर्णयका निमित्त >सो अदालतका मुख्य न्यायाधिशबाट नियुक्त अर्को मध्यस्थ छेउ पटाइनेछ ।
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+
(४) मध्यस्थद्वारा भएको निर्णयलाई नेपाल सरकारबाट तोकिएको तहसिल बा तहसिलको काम गर्ने अड्लाले तोकिए बमोजिम कार्यान्वित गर्नेछ ।
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+
(६) यस दफाको उद्देश्य कार्यान्वित गर्न नेपाल सरकारले नियम बनाउन सक्नेछ ।
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+
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+
^१०. लागू नहुने कानूनहरु: शङा निवारणको लागि स्पष्ट गरिन्छ कि मुलुकी सवाल बा मुलुकी ऐनको रकम बन्दोबस्त बा कागज जाँचको बा बही बुझ्नेको महलहरु समितिको काम काजमा लागू हुने छैन ।
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# खानेपानी व्यवस्थापन बोर्ड ऐन, २०६३
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| 2 |
+
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| 3 |
+
## प्रमाणिकरण र प्रकाशन मिति
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| 4 |
+
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| 5 |
+
२०६३।०६।०६
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| 6 |
+
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| 7 |
+
### संशोधन गर्ने ऐन
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| 8 |
+
१. केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०६४
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| 9 |
+
२०६४।०४।०९
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| 10 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 11 |
+
२०७२।११।१३
|
| 12 |
+
३. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 13 |
+
२०६३ सालको ऐन न. २१ भौतिक
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| 14 |
+
खानेपानी व्यवस्थापन बोर्डको सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 15 |
+
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| 16 |
+
### प्रस्तावनाः
|
| 17 |
+
नगरपालिका क्षेत्रमा खानेपानी तथा सरसफाई सेवालाई नियमित, व्यवस्थित, गुणस्तरयुक्त र सुलभ बनाई त्यस्तो क्षेत्रका बासिन्दालाई भरपर्दो सेवा प्रदान गर्ने गराउने उचित र प्रभावकारी व्यवस्था गर्ने सम्बन्धमा खानेपानी व्यवस्थापन बोर्डको स्थापना र सञ्चालन गर्न बाञ्छुनीय भएकोले, प्रतिनिधिसभाको घोषणा, २०६३ जारी भएको पहिलो वर्षमा प्रतिनिधिसभाले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 18 |
+
|
| 19 |
+
---
|
| 20 |
+
|
| 21 |
+
## परिच्छेद-१
|
| 22 |
+
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| 23 |
+
### प्रारम्भिक
|
| 24 |
+
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| 25 |
+
**१. संक्षित नाम र प्रारम्भः**
|
| 26 |
+
(१) यस ऐनको नाम "खानेपानी व्यवस्थापन बोर्ड ऐन, २०६३" रहेको छ।
|
| 27 |
+
(२) यो ऐन सम्वत् २०६३ साल असोज २७ गतेदेखि प्रारम्भ भएको मानिनेछ।
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
**२. परिभाषाः**
|
| 30 |
+
विषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 31 |
+
(क) "बोर्ड" भन्नाले दफा ३ बमोजिम गठन भएको खानेपानी व्यवस्थापन बोर्ड सम्झनु पर्छ र सो शब्दले दफा ७ बमोजिम गठन भएको काठमाडौं उपत्यका खानेपानी व्यवस्थापन बोर्डसमेतलाई जनाउँछ।
|
| 32 |
+
(ख) "समिति" भन्नाले दफा १० र ११ बमोजिम गठन भएको बोर्डको कार्यकारी समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 33 |
+
(ग) "अध्यक्ष" भन्नाले समितिको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अध्यक्षको अनुपस्थितिमा अध्यक्षको काम गर्ने अन्य कुनै ब्यक्तिसमेतलाई जनाउँछ।
|
| 34 |
+
(घ) "सदस्य" भन्नाले कार्यकारी समितिको सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अध्यक्षसमेतलाई जनाउँछ।
|
| 35 |
+
(ङ) "नगरपालिका" भन्नाले नेपालको संविधान बमोजिम स्थापना भएको नगरपालिका सम्झनु पर्छ र सो शब्दले महानगरपालिका तथा उपमहानगरपालिकालाई समेत जनाउँछ।
|
| 36 |
+
(च) "संस्थान" भन्नाले नेपाल खानेपानी संस्थान ऐन, २०४६ बमोजिम स्थापित नेपाल खानेपानी संस्थान सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
(छ) "भौगोलिक क्षेत्र" भन्नाले बोर्डले खानेपानी बा सरसफाई सेबा सञ्चालन तथा व्यवस्थापन गर्न गराउन दफा $x$ बमोजिम तोकेको क्षेत्र सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(ज) "प्राकृतिक पानी" भन्नाले सनातनदेखि डुङ्गधारा, कुबा, नदी, खोला, इनार, पोखरी, ताल बा सतही प्राकृतिक स्रोतबाट निःसृत भएको बा भ���मिगत स्रोतबाट निकालिएको पानी सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
(झ) "खानेपानी सेबा" भन्नाले प्राकृतिक पानीलाई प्रशोधन तथा शुद्धिकरण गरी उपभोक्तालाई पानी उपलव्ध गराउने काम सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
(ज) "सरसफाई सेबा" भन्नाले मानब मलमूवबाट बा घरेलु, व्यापारिक बा औद्योगिक उपयोग पथात् निष्काशन भएको फोहर पानी तथा त्यस्तो पानीमा मिश्रित सबै किसिमका फोहर पदार्थलाई नष्ट गर्ने, निष्काशन गर्ने, प्रशोधन गर्ने बा शुद्धिकरण गर्ने काम सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
(ट) "सेबा" भन्नाले खानेपानी बा सरसफाई सेबा सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(ट) "अनुमतिपत्र" भन्नाले सेबा सञ्चालन तथा व्यवस्थापन गर्न सेबाप्रदायकलाई दिइएको अनुमतिपत्र सम्झनु पर्छ।
|
| 43 |
+
(ड) "सेबाप्रदायक" भन्नाले महसुल लिई सेबा उपलव्ध गराउने कुनै ब्यक्ति, उपभोक्ता समूह बा संगठित संस्था सम्झनु पर्छ र सो शब्दले बोर्डसँग सम्झौता गरी सेबा प्रदान गर्ने अन्य कुनै ब्यक्तिसमेतलाई जनाउँछ।
|
| 44 |
+
(द) "सेवा प्रणाली" भन्नाले खानेपानी वा सरसफाई सेवा प्रदान गर्ने उद्देश्यले निर्माण वा जडान गरिएको पाइप, जलाशय वा खानेपानी, फोहर पानी वा ढल मिसिएको पानी प्रशोधन वा शुद्धिकरण गर्ने प्लाण्ट वा त्यस्तै किसिमका अन्य उपकरण वा संरचना सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
(ण) "महसुल" भन्नाले सेबाप्रदायकले सेवा प्रदान गरेवापत उपभोक्ताबाट लिन पाउने महसुल सम्झनु पर्छ।
|
| 46 |
+
(त) "कार्यकारी निर्देशक" भन्नाले दफा १७ बमोजिम नियुक्त बोर्डको कार्यकारी निर्देशक सम्झनु पर्छ।
|
| 47 |
+
(थ) "तोकिएको" वा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको वा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 48 |
+
|
| 49 |
+
---
|
| 50 |
+
|
| 51 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 52 |
+
|
| 53 |
+
### बोर्डको गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
**३. बोर्ड गठन गर्न सक्नेः**
|
| 56 |
+
(१) नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत "कुनै सरकारी निकाय वा संस्थानले सञ्चालन गरिरहेको एक वा एकभन्दा बढी नगरपालिका क्षेत्रको सेवा प्रणाली तथा सेवालाई प्रभावकारीरुपमा सञ्चालन तथा व्यवस्थापन गर्न गराउन सम्बन्धित नगरपालिकासँग परामर्श गरी आवश्यकता अनुसार खानेपानी व्यवस्थापन बोर्ड गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 57 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको सेवा प्रणाली तथा सेवा ५ गाउँपालिकाको केही वा पूरे भागमा समेत सञ्चालन भइरहेको रहेछ भने सो ५ गाउँपालिकाको त्यस्तो भागसमेतलाई उपदफा (१) बमोजिम गठन हुने बोर्डको भौगोलिक क्षेत्रभित्र समावेश गर्न सकिनेछ।
|
| 58 |
+
(���) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै नगरपालिकाले "सरकारी निकाय, नगरपालिका वा संस्थानबाट सञ्चालन भएको कुनै सेवा प्रणाली वा सेवा यस ऐनबमोजिम सञ्चालन तथा व्यवस्थापन गर्न गराउन चाहेमा देहायका बिबरणहरु खुलाई बोर्ड गठन गर्न नेपाल सरकारसमक्ष निवेदन दिन सक्नेछ:-
|
| 59 |
+
(क) सेवा सञ्चालन तथा व्यवस्थापन गरिने भौगोलिक क्षेत्र,
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| 60 |
+
(ख) नगरपालिकासँग जोडिएको कुनै ५ गाउँपालिकामा समेत सेवा बिस्तार भएको रहेछ भने सोको बिबरण,
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| 61 |
+
(ग) सेवा सञ्चालन तथा व्यवस्थापन गरिने क्षेत्रमित्र रहेको बा सोसँग सम्बन्धित पानीको स्रोतको स्थिति,
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| 62 |
+
(घ) उपभोक्ताको अनुमानित संख्या तथा सेवा मागको विवरण,
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| 63 |
+
(ङ) सेवा सञ्चालन गर्नको लागि लाग्ने अनुमानित लागत,
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| 64 |
+
(च) सेवा सञ्चालन, व्यवस्थापन, सोको मर्मत सम्भार तथा सुधार बा सेवा बिस्तारको लागि तयार गरिएको दीर्घकालीन योजना,
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| 65 |
+
(छ) सेबालाई प्रभावकारी र गुणस्तरयुक्त बनाउन तयार गरिएको कार्य योजना,
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| 66 |
+
(ज) बोर्ड आफैले सेवा सञ्चालन गर्ने बा अन्य व्यक्ति बा संस्थामार्फत सेवा सञ्चालन गराउने हो सो सम्बन्धी व्यहोरा,
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| 67 |
+
(झ) कुनै सरकारी निकायले सञ्चालन गरिरहेको सेवा प्रणालीलाई बोर्डमा हस्तान्तरण गरी सेवा सञ्चालन गर्ने भए त्यस्तो सेवा प्रणालीसँग आबद्ध सम्पत्ति तथा दायित्व र सोको हस्तान्तरण गर्ने तरीका तथा तत्सम्बन्धी अन्य व्यवस्था, र
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| 68 |
+
(ज) तोकिएबमोजिमका अन्य कुराहरू।
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| 69 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम परेका निवेदनउपर जाँचबुझ गर्दा त्यस्तो बोर्ड गठन गर्नु आवश्यक देखिएमा नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी निवेदकको मागबमोजिम बोर्ड गठन गर्न सक्नेछ।
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| 70 |
+
|
| 71 |
+
**४. बोर्ड स्वशासित संस्था हुने:**
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| 72 |
+
(१) बोर्ड अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला स्वशासित संगठित संस्था हुनेछ।
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| 73 |
+
(२) बोर्डको काम कारबाहीको निमित्त आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
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| 74 |
+
(३) बोर्डले व्यक्तिसरह चल, अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न बा अन्य कुनै किसिमले व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
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| 75 |
+
(४) बोर्डले व्यक्तिसरह आफ्नो नामबाट नालिस उजुर गर्न र बोर्डउपर पनि सोही नामबाट नालिस उजुर लारन सक्नेछ।
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| 76 |
+
|
| 77 |
+
**५. बोर्डको भौगोलिक क्षेत्र:**
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| 78 |
+
(१) दफा ३ बमोजिम गठन हुने बोर्डको भौगोलिक क्षेत्र त्यस्तो बोर्ड गठन गर्दाका बखत नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गरेको सूचनामा तोकिदिए बमोजिम हुनेछ।
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| 79 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको बोर्डको ��ौगोलिक क्षेत्र कुनै कारणले थपघट बा हेरफेर गर्नु परेमा सोको पर्याप्त कारणसहित बोर्डले नेपाल सरकारसमक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 80 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम निवेदन परेमा नेपाल सरकारले सो सम्बन्धमा आवश्यक जाँचबुझ गर्नेछ।
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| 81 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम जाँचबुझ गर्दा बोर्डको भौगोलिक क्षेत्र थपघट बा हेरफेर गर्न उपयुक्त देखेमा नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी बोर्डको भौगोलिक क्षेत्र थपघट बा हेरफेर गर्न सक्नेछ।
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| 82 |
+
|
| 83 |
+
**६. बोर्डको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
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| 84 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएका काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त बोर्डको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
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| 85 |
+
(क) सेवा प्रणाली प्राप्त, निर्माण, विस्तार, सुधार तथा पुनर्स्थापना गर्ने गराउने,
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| 86 |
+
(ख) सेबाको उपयोगसम्बन्धी नीति बनाई कार्यान्वयन गर्ने गराउने,
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| 87 |
+
(ग) खानेपानीको दुरुपयोग रोक्ने तथा खानेपानी प्रदूषित हुन नदिने,
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| 88 |
+
(घ) खानेपानीको स्रोत, वितरण तथा सरसफाई सम्बन्धमा अध्ययन, अनुसन्धान तथा सर्वेक्षण गर्ने गराउने,
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| 89 |
+
(ङ) सेवा प्रणालीसम्बन्धी अल्पकालीन तथा दीर्घकालीन योजना तयार गरी कार्यान्वयन गर्ने गराउने,
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| 90 |
+
(च) सेवा सञ्चालनको लागि आवश्यक पर्ने लगानी निश्चित गरी सोको योजना तयार गर्ने र आर्थिक स्रोतको व्यवस्था गर्ने गराउने,
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| 91 |
+
(छ) सेबाको विस्तार तथा विकासका लागि आवश्यक पर्ने रकमको स्रोत पहिचान गरी प्राप्त गर्ने,
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| 92 |
+
(ज) प्रचलित कानूनबमोजिम सेबाको महसुल दर निर्धारण गराउने,
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| 93 |
+
(झ) गुणस्तरयुक्त र प्रभावकारी सेवा प्रदान गर्न आवश्यक प्रबन्ध गर्ने,
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| 94 |
+
(ज) सेबाप्रदायकलाई सेवा प्रदान गर्न अनुमतिपत्र प्रदान गर्ने बा सेबाप्रदायकसँग सम्झौता गरी सेवा प्रदान गराउने,
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| 95 |
+
(ट) उपभोक्तालाई प्रदान गर्ने सेबाबापत निर्धारित महसुल असूल गर्ने गराउने,
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| 96 |
+
(ट) सेबाप्रदायकले सेवा प्रदान गर्दा कुनै उपभोक्तालाई पीरमर्का पर्न गएमा सोउपर सुनुवाई गरी उपयुक्त उपचार दिने,
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| 97 |
+
(ड) सेवा सञ्चालनका लागि आवश्यक पर्ने तोकिएबमोजिमका अन्य काम गर्ने।
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| 98 |
+
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| 99 |
+
**७. काठमाडौं उपत्यका खानेपानी व्यवस्थापन बोर्ड गठन गर्ने:**
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| 100 |
+
(१) दफा ३ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल सरकारले काठमाडौं उपत्यकाभित्रका नगरपालिका क्षेत्रको खानेपानी सेवा तथा सरसफाई सेवालाई नियमित, व्यवस्थित र प्रभावकारीरुपमा सञ्चालन गर्न गराउनको लागि छुट्टै काठमाडौं उपत्यका खानेपानी व्यवस्थापन बोर्ड गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 101 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बोर्ड गठन गर्दाका बखत काठमाडौं उपत्यकाका नगरपालिकाहरुको सेवा प्रणालीबाट कुनै ५ गाउँपालिका बा त्यसको कुनै भागमा समेत सेवा सञ्चालन भइरहेको रहेछ भने त्यस्तो ५ गाउँपालिका बा त्यसको कुनै भागसमेत बोर्डको भौगोलिक क्षेत्रभित्र समावेश गर्न सकिनेछ।
|
| 102 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम बोर्ड गठन भएपछि नेपाल सरकारले काठमाडौं उपत्यकाभित्र संस्थानद्वारा सञ्चालन तथा व्यवस्थापन भइरहेको सेवा र सोसँग सम्बन्धित सेवा प्रणाली, सम्पत्ति तथा दायित्व बोर्डलाई तोकिए बमोजिम हस्तान्तरण गर्न सक्नेछ।
|
| 103 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिम बोर्ड गठन गर्दाका बखत काठमाडौं उपत्यकाभित्रका नगरपालिका क्षेत्रमा कुनै सरकारी निकायले सेवा उपलब्ध गराइरहेको भए त्यसको सेवा प्रणालीसमेत नेपाल सरकारले यस दफाबमोजिम गठित बोर्डलाई हस्तान्तरण गर्न सक्नेछ।
|
| 104 |
+
(५) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत सिन्धुपाल्चोक जिल्लास्थित मेलम्ची खोलाको पानी काठमाडौं उपत्यकामा ल्याई उपत्यकाको सेवा प्रणालीभित्र समावेश गर्ने सम्बन्धमा सञ्चालनमा रहेको मेलम्ची आयोजना सम्पन्न भएको एक बर्षभित्र सो आयोजनाका सम्पूर्ण संरचना तथा त्यस्तो संरचनामा जडित उपकरणहरु र सोसँग सम्बद्ध दायित्व नेपाल सरकारले तोकिदिएबमोजिम उपदफा (१) बमोजिम गठित बोर्डमा हस्तान्तरण गर्नेछ।
|
| 105 |
+
(६) उपदफा (५) बमोजिम त्यस्तो आयोजनाका संरचना तथा उपकरणहरु हस्तान्तरण भएमा सो आयोजनाअन्तर्गत निर्मित संरचना, त्यसमा जडित उपकरण तथा सेवा प्रणाली यस दफाबमोजिम गठित बोर्डमा स्वतः संरेको मानिनेछ र त्यसको मर्मत, सम्भार तथा बिस्तार गर्ने दायित्व सोही बोर्डको हुनेछ।
|
| 106 |
+
(७) उपदफा (५) बमोजिम आयोजनाका संरचना तथा उपकरणहरु हस्तान्तरण गर्दा सो संरचना र उपकरण बा सेवा प्रणालीसँग सम्बद्ध कर्मचारीहरु आवश्यकता अनुसार यस दफाबमोजिमको बोर्डमा सार्न सकिनेछ।
|
| 107 |
+
(८) दफा ६ मा उल्लिखित काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त काठमाडौं उपत्यका खानेपानी व्यवस्थापन बोर्डको काम, कर्तव्य र अधिकार देहायबमोजिम हुनेछ:-
|
| 108 |
+
(क) आफ्नो भौगोलिक क्षेत्रभन्दा बाहिरबाट प्राकृतिक स्रोतको पानी पथान्तरण (डाइभर्सन) गरी आफ्नो भौगोलिक क्षेत्रभित्र सेवा उपलब्ध गराउन त्यस्तो पानी प्राप्त गर्ने तथा सो सम्बन्धमा अन्य व्यक्तिसँग प्रचलित कानूनबमोजिम सम्झौता गर्ने,
|
| 109 |
+
(ख) यो ऐन प��रारम्भ हुँदाका बखत कुनै नगरपालिका बा सेबाप्रदायकले सञ्चालन गरिरहेको सेवा प्रणाली हस्तान्तरण गरी लिन आवश्यक भएमा मनासिब क्षतिपूर्ति दिई त्यस्तो सेवा प्रणाली आफ्नो स्वामित्वमा लिई सञ्चालन तथा व्यवस्थापन गर्ने गराउने,
|
| 110 |
+
(ग) प्रचलित कानूनमा अन्यथा व्यवस्था भएकोमा बाहेक आफ्नो भौगोलिक क्षेत्रभित्र भूमिगत स्रोतबाट पानी निकाल्ने र उपयोग गर्ने कार्यलाई तोकिएबमोजिम नियमित, नियन्त्रण बा निषेध गर्ने तथा आवश्यकता अनुसार त्यस्तो पानी निकाल्न बा उपयोग गर्न तोकिएबमोजिम अनुमतिपत्र प्रदान गर्ने।
|
| 111 |
+
(घ) खण्ड (ग) बमोजिम अनुमतिपत्र लिई व्यावसायिक तथा औद्योगिक प्रयोजनको लागि भूमिगत स्रोतको पानी उपयोग गर्ने प्रयोगकर्ताबाट परिमाणको अनुपातमा तोकिए बमोजिम महसुल लिने।
|
| 112 |
+
|
| 113 |
+
---
|
| 114 |
+
|
| 115 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 116 |
+
|
| 117 |
+
### कार्यकारी समितिको गठनसम्बन्धी व्यवस्था
|
| 118 |
+
|
| 119 |
+
**१०. कार्यकारी समितिको गठन:**
|
| 120 |
+
(१) दफा ३ बमोजिम गठन भएको बोर्डको तर्फबाट सम्पादन गर्नु पर्ने सम्पूर्ण काम कारबाही सुचारुरुपले सम्पादन गर्न एक कार्यकारी समिति रहनेछ।
|
| 121 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको समितिमा देहायका सदस्यहरु रहनेछन्:-
|
| 122 |
+
(क) बोर्डको भौगोलिक क्षेत्रभित्रका नगरपालिकाको प्रमुख - सदस्य
|
| 123 |
+
(ख) प्रतिनिधि, खानेपानी मन्त्रालय - सदस्य
|
| 124 |
+
(ग) बोर्डको भौगोलिक क्षेत्रभित्रका गाउँपालिकाका अध्यक्षहरुले आफूहरुमध्येबाट छानेको गाउँपालिकाको एकजना अध्यक्ष - सदस्य
|
| 125 |
+
(घ) स्थानीय उद्योग बाणिज्य सङ्घको अध्यक्ष - सदस्य
|
| 126 |
+
(ङ) स्थानीय उपभोक्ता सङ्घको अध्यक्ष - सदस्य
|
| 127 |
+
(च) खानेपानी बा सरसफाई सेबा क्षेत्रमा कार्यरत स्थानीय गैर सरकारी संस्थाहरुमध्येबाट समितिले मनोनयन गरेको एकजना व्यक्ति - सदस्य
|
| 128 |
+
(छ) खानेपानी तथा सरसफाई सेबा क्षेत्रका बिजहरुमध्यबाट समितिले मनोनयन गरेको एकजना - सदस्य
|
| 129 |
+
(३) उपदफा (२) को खण्ड (ग), (घ) बा (ङ) बमोजिमको सदस्यले प्रतिनिधित्व गर्दा सम्बन्धित क्षेत्रमा एकभन्दा बढी संस्था भएमा त्यस्तो संस्थाले आलोपालो गरी प्रतिनिधित्व गर्नु पर्नेछ।
|
| 130 |
+
(४) उपदफा (२) को खण्ड (च) बमोजिम सदस्य मनोनयन गर्दा उपलव्ध भएसम्म महिलालाई प्राथमिकता दिनु पर्नेछ।
|
| 131 |
+
(५) उपदफा (२) बमोजिम मनोनीत सदस्यको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 132 |
+
(६) समितिका सदस्यहरुले आफूहरुमध्येबाट छानेको व्यक्ति समितिको अध्यक्ष हुनेछ।
|
| 133 |
+
(७) समितिका सदस्यले आफ्नो कार्य सम्हाल्नुअघि अनुसूचीमा उल्लेख भएबमोजिमको ढाँचामा शपथ लिनु पर्नेछ।
|
| 134 |
+
(८) कार्यकारी निर्देशकले समितिको सचिब भई काम गर्नेछ।
|
| 135 |
+
|
| 136 |
+
**११. काठमाडौं उपत्यका खानेपानी व्यवस्थापन बोर्डको कार्यकारी समितिको गठन:**
|
| 137 |
+
(१) दफा ७ बमोजिम गठन हुने काठमाडौं उपत्यका खानेपानी व्यवस्थापन बोर्डको तर्फबाट सम्पादन गर्नु पर्ने सम्पूर्ण काम कारबाही सुचारुरुपले सम्पादन गर्न एक कार्यकारी समिति रहनेछ।
|
| 138 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको समितिमा देहायका सदस्यहरु रहनेछन्:-
|
| 139 |
+
(क) प्रतिनिधि (राजपत्राहित प्रथम श्रेणी), खानेपानी मन्त्रालय - सदस्य
|
| 140 |
+
(ख) काठमाडौं उपत्यकाभित्रका नगरपालिकाका प्रमुखहरु - सदस्य
|
| 141 |
+
(ग) प्रतिनिधि, उद्योग बाणिज्य महासङ्घ - सदस्य
|
| 142 |
+
(घ) समितिले मनोनयन गरेको काठमाडौं उपत्यकामा कार्यरत उपभोक्ता सङ्घ संस्थाको प्रतिनिधि - सदस्य
|
| 143 |
+
(ङ) समितिले मनोनयन गरेको बोर्डको भौगोलिक क्षेत्रभित्र खानेपानी बा सरसफाई सेबासँग सम्बन्धित संस्थाको प्रतिनिधि - सदस्य
|
| 144 |
+
(च) खानेपानी तथा सरसफाई सेबा क्षेत्रका बिजहरुमध्येबाट समितिले मनोनयन गरेको एकजना - सदस्य
|
| 145 |
+
(३) समितिका सदस्यहरुको पदाबधि, अध्यक्षको चयन, समितिमा महिलाको प्रतिनिधित्व तथा समितिको सचिवसम्बन्धी व्यवस्था दफा १० मा लेखिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 146 |
+
|
| 147 |
+
**१२. सदस्यको पद रिक्त हुने अवस्थाः**
|
| 148 |
+
समितिमा मनोनीत सदस्यको पद देहायका अवस्थामा रिक्त भएको मानिनेछ:
|
| 149 |
+
(क) निजले मनोनयन गर्ने निकायसमक्ष आफ्नो पदबाट लिखित राजीनामा दिएमा,
|
| 150 |
+
(ख) निजको पदाबधि समाप्त भएमा,
|
| 151 |
+
(ग) निज साहूको दामासाहीमा परेमा,
|
| 152 |
+
(घ) निज कुनै फौजदारी अभियोगमा अदालतबाट कसूरदार टहरिएमा,
|
| 153 |
+
(ङ) निज बिना सूचना लगातार तीनपटकसम्म समितिको बैठकमा अनुपस्थित भएमा,
|
| 154 |
+
(च) निजको मृत्यु भएमा।
|
| 155 |
+
|
| 156 |
+
**१३. रिक्त स्थानको पूर्ति:**
|
| 157 |
+
समितिको मनोनीत सदस्यको पद कुनै कारणबाट रिक्त हुन आएमा बाँकी अबधिको लागि निज पहिले जुन तरिकाबाट मनोनयन भएको हो सोही तरिकाबाट मनोनयन गरी रिक्त पदको पूर्ति गरिनेछ।
|
| 158 |
+
|
| 159 |
+
**१४. समितिको बैठक र निर्णय:**
|
| 160 |
+
(१) समितिको बैठक बर्षको कम्तीमा छ पटक बस्नेछ र दुई बैठकबीचको फरक तीन महिनाभन्दा बढी हुने छैन।
|
| 161 |
+
(२) समितिको बैठक अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 162 |
+
(३) उपपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि समितिका कम्तीमा पच्चीस प्रतिशत सदस्यले समितिको बैठक बोलाउन लिखित अनुरोध गरेमा अध्यक्षले त्यस्तो लिखित अनुरोध प्राप्त भएको मितिले सात ��िनभित्र समितिको बैठक बोलाउनु पर्नेछ।
|
| 163 |
+
(४) समितिका कुल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्य उपस्थित भएमा समितिको बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 164 |
+
(५) समितिको बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ र निजको अनुपस्थितिमा उपस्थित सदस्यहरुले आफूमध्येबाट छानेको सदस्यले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 165 |
+
(६) समितिको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकको अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णायक मत दिनेछ।
|
| 166 |
+
(७) समितिको निर्णय कार्यकारी निर्देशकले प्रमाणित गर्नेछ।
|
| 167 |
+
(८) समितिको बैठकसम्बन्धी अन्य कार्यबिधि समिति आफैले निर्धारण गरेबमोजिम हुनेछ।
|
| 168 |
+
|
| 169 |
+
**१५. सदस्यको भत्ता तथा सुबिधा:**
|
| 170 |
+
(१) समितिको सदस्यले बैठकमा भाग लिए बापत तोकिए बमोजिम बैठक भत्ता पाउनेछ।
|
| 171 |
+
(२) समितिका सदस्यले बोर्डको काम गरेबापत पाउने अन्य सुबिधा तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 172 |
+
|
| 173 |
+
**१६. सर्वसाधारणको हित हेर्नु पर्ने:**
|
| 174 |
+
समितिले बोर्डको तर्फबाट काम कारबाही गर्दा सर्वसाधारणको बृहत्तर हित र व्यापक सुबिधालाई ध्यानमा राखी गर्नु पर्नेछ र त्यसरी काम गर्दा लागेको लागत खर्चसमेतलाई बिचार गर्नु पर्नेछ।
|
| 175 |
+
|
| 176 |
+
---
|
| 177 |
+
|
| 178 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 179 |
+
|
| 180 |
+
### कार्यकारी निर्देशक तथा कर्मचारीसम्बन्धी व्यवस्था
|
| 181 |
+
|
| 182 |
+
**१७. कार्यकारी निर्देशकको नियुक्ति:**
|
| 183 |
+
(१) बोर्डको प्रशासकीय प्रमुखको रुपमा काम गर्न समितिले तोकिएबमोजिमको योग्यता पुगेको व्यक्तिलाई कार्यकारी निर्देशकको पदमा नियुक्ति गर्नेछ।
|
| 184 |
+
(२) कार्यकारी निर्देशकको पदाबधि पाँच बर्षको हुनेछ।
|
| 185 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कार्यकारी निर्देशकले पदीय जिम्मेबारी पूरा नगरेमा, बोर्डको हित बिपरीत कुनै कामकारबाही गरेमा, निज कुनै खराब आचरणमा लागेमा बा समितिले दिएको निर्देशन अनुरुप निजले काम नगरेमा समितिले तोकिएको प्रक्रिया अपनाई निजलाई जुनसुकै बखत कार्यकारी निर्देशकको पदबाट हटाउन सक्नेछ।
|
| 186 |
+
(४) कार्यकारी निर्देशकको पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेबाका अन्य शर्त तोकिएबमोजिम हुनेछन्।
|
| 187 |
+
|
| 188 |
+
**१८. कार्यकारी निर्देशकको काम कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 189 |
+
कार्यकारी निर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार देहायबमोजिम हुनेछः-
|
| 190 |
+
(क) समितिको निर्णय तथा निर्देशन कार्यान्वयन गर्ने गराउने,
|
| 191 |
+
(ख) बोर्डको अल्पकालीन तथा दीर्घकालीन योजना, बार्षिक कार्यकम र बजेट तयार गर्ने गराउने,
|
| 192 |
+
(ग) समितिबाट स्वीकृत कार्यकम कार्यान्वयन गर्ने गराउने,
|
| 193 |
+
(घ) बोर्डको लागि आवश्यक कर्मचारी नियुक्तिको लागि समितिसमक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 194 |
+
(ङ) समितिबाट स्वीकृत हुनु पर्ने प्रस्ताबहरु समितिसमक्ष पेश गर्ने,
|
| 195 |
+
(च) तोकिएबमोजिमका अन्य काम गर्ने।
|
| 196 |
+
|
| 197 |
+
**१९. कर्मचारीसम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 198 |
+
(१) बोर्डमा आवश्यक संख्यामा कर्मचारीहरु रहनेछन्।
|
| 199 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका कर्मचारीको नियुक्ति, पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेबाका अन्य शर्तहरु तोकिएबमोजिम हुनेछन्।
|
| 200 |
+
|
| 201 |
+
---
|
| 202 |
+
|
| 203 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 204 |
+
|
| 205 |
+
### बोर्डको विशेषाधिकार
|
| 206 |
+
|
| 207 |
+
**२०. ऋण तथा सहयोग लिन सक्ने:**
|
| 208 |
+
बोर्डले आवश्यकता अनुसार नेपालभित्रको कुनै बैङ् बा बित्तीय संस्था बा बिदेशी सरकार, अन्तर्राष्ट्रिय सङ्घ बा संस्थाबाट ऋण बा सहयोग प्राप्त गर्न सक्नेछ।
|
| 209 |
+
तर बिदेशी सरकार, अन्तर्राष्ट्रिय सङ्घ बा संस्थाबाट ऋण बा सहयोग प्राप्त गर्नु अघि बोर्डले नेपाल सरकारको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 210 |
+
|
| 211 |
+
**२१. लगानी गर्न सक्ने:**
|
| 212 |
+
(१) बोर्डले दफा २६ बमोजिमको कोषमा रहेको रकम उपभोक्ताको हितलाई ध्यानमा राखी लगानी गर्न सक्नेछ।
|
| 213 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गरिने लगानीको क्षेत्र तथा शर्त तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 214 |
+
|
| 215 |
+
**२२. घर जग्गामा प्रवेश गर्न सक्ने:**
|
| 216 |
+
(१) बोर्डको कुनै कर्मचारीले आफ्नो कर्तव्य पालनको सिलसिलामा कुनै उपभोक्ताको घर जग्गामा प्रवेश गर्नु पर्ने भएमा सोको कारणसहितको जानकारी सम्बन्धित व्यक्तिलाई दिई त्यस्तो घर जग्गामा प्रवेश गर्न सक्नेछ।
|
| 217 |
+
तर कुनै व्यक्तिले सेबाको दुरुपयोग बा सेबाको अनाधिकार उपयोग गरिरहेको छ भन्ने शङ्गा गर्नु पर्ने मनासिब आधार र कारण भएमा त्यस्तो घर जग्गामा प्रवेश गर्न जानकारी दिइरहनु पर्ने छैन।
|
| 218 |
+
(२) बोर्डको अनुमतिपत्र लिई बा बोर्डसँग सम्झौता गरी सेबा सञ्चालन गर्ने सेबा प्रदायकलाई समेत उपदफा (१) बमोजिमको अधिकार प्राप्त हुनेछ।
|
| 219 |
+
|
| 220 |
+
**२३. निजी बा सार्वजनिक घर जग्गामा पाइप बिच्छ्याउन सक्ने:**
|
| 221 |
+
(१) बोर्डले उपभोक्तालाई खानेपानी बा सरसफाई सेबा उपलव्ध गराउने प्रयोजनको लागि निजी बा सार्वजनिक घर जग्गामा पाइप बिच्छ्याउन बा अन्य संरचना बनाउन सक्नेछ।
|
| 222 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पाइप बिछ्याउँदा बा सोसँग सम्बन्धित अन्य संचरना बनाउँदा कुनै व्यक्तिको निजी घर जग्गामा कुनै किसिमले हानि नोक्सानी पर्न गएमा बोर्डले सोबापत सम्बन्धित घर जग्गाधनीलाई मनासिब क्षतिपूर्ति दिनु पर्नेछ।
|
| 223 |
+
|
| 224 |
+
**२४. सेबा प्रदायकसँग शुल्क ��िन सक्ने:**
|
| 225 |
+
(१) बोर्डले आफ्नो भौगोलिक क्षेत्रभित्र सेबा सञ्चालन गर्ने सेबा प्रदायकसँग तोकिएबमोजिम शुल्क लिन सक्नेछ।
|
| 226 |
+
(२) बोर्डले कुनै सेबा प्रदायकलाई आफ्नो सेबा प्रणाली सञ्चालन गर्न अनुमतिपत्र दिएकोमा अनुमतिपत्रमा उल्लेख भए बमोजिमको रकम त्यस्तो सेबा प्रदायकबाट असूलउपर गर्नेछ।
|
| 227 |
+
|
| 228 |
+
**२५. अतिरिक्त दस्तुर लगाउने:**
|
| 229 |
+
(१) उपभोक्ताले सेवा उपयोग गरेवापत तिर्नु पर्ने महसुल निर्धारित समयभित्र नतिरेमा बा उपभोक्तालाई नियमित सेबाभन्दा थप सेवा उपलब्ध गराइएकोमा त्यस्तो उपभोक्ताबाट बोर्डले तोकिएबमोजिम अतिरिक्त दस्तुर असूलउपर गर्न सक्नेछ।
|
| 230 |
+
(२) बोर्डसँग सम्झौता गरी बा बोर्डको अनुमतिपत्र प्राप्त गरी सेवा सञ्चालन गर्ने सेवा प्रदायकले समेत उपदफा (१) बमोजिमको अतिरिक्त दस्तुर लगाउन र उठाउन पाउनेछ।
|
| 231 |
+
|
| 232 |
+
**२६. सेवा निलम्बन बा अन्त्य गर्न सक्नेः**
|
| 233 |
+
(१) यस ऐन बा प्रचलित कानूनबमोजिम निर्धारित महसुल नबुझाउने बा तोकिएको समयमा महसुल नबुझाउने उपभोक्ताको सेवा बोर्ड बा सेवा प्रदायकले निलम्बन बा अन्त्य गर्न सक्नेछ।
|
| 234 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सेवा अन्त्य भएकोमा उपभोक्ताले बोर्ड बा सेवा प्रदायकलाई बुझाउनु पर्ने महसुल तथा अन्य दस्तुर बुझाएमा निजलाई पुनः सेवा प्रदान गरिनेछ।
|
| 235 |
+
|
| 236 |
+
---
|
| 237 |
+
|
| 238 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 239 |
+
|
| 240 |
+
### कसूर तथा सजाय
|
| 241 |
+
|
| 242 |
+
**२७. कसूर तथा सजाय:**
|
| 243 |
+
(१) कसैले यो ऐन बा यसअन्तर्गत बनेको नियम प्रतिकूल कुनै काम गरी देहायको कसूर गरेमा बोर्डले त्यस्तो व्यक्तिलाई देहायबमोजिम सजाय गर्न सक्नेछ:-
|
| 244 |
+
(क) सेबासँग सम्बन्धित कुनै संरचना, जडान बा पूर्वाधार भत्काए बा बिगारेमा बा अन्य कुनै प्रकारले क्षति पन्याएमा क्षति भएको हानि नोक्सानी भराई कसूरको मात्रा हेरी पचास हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 245 |
+
(ख) खानेपानीलाई प्रदूषित गराई सार्वजनिक स्वास्थ्यमा प्रतिकूल असर पुथ्याएकोमा कसूरको मात्रा हेरी पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 246 |
+
(ग) सेबाको अनाधिकार प्रयोग बा दुरुपयोग गरेमा पन्ध्र हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गरी सेवा बन्द गर्न,
|
| 247 |
+
(घ) सेवा मापकयन्त्र बा अन्य त्यस्तै उपकरण बिगारे बा सेवा प्रदान गर्ने कार्यमा बाधा अवरोध पन्याएमा दश हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 248 |
+
(ङ) सेवा प्रणालीमा जडित पाइप लाइन चोरी गरेमा, बिगारेमा, भत्काएमा बा नष्ट गरेमा सो कामबाट पुग्न गएको क्षतिको बिगो भराई बिगोबमोजिम जरिबाना गर्न तथा त्यस्तो कार्��� गर्ने व्यत्कि उपभोक्ता भए त्यस्ता उपभोक्ताको सेवा छ महिनासम्म बन्द बा निलम्बन गर्न।
|
| 249 |
+
(२) सेवा प्रदायकद्वारा सेवा प्रदान भएको अवस्थामा उपदफा (१) बमोजिमको कसूरका सम्बन्धमा सजाय गर्न बा क्षतिपूर्ति भराई माग्न सेवा प्रदायकले बोर्डमा निबेदन दिन सक्नेछ।
|
| 250 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम सेवा प्रदायकले बोर्डसमक्ष दिएको निबेदनउपर छानबिन गर्दा कुनै व्यत्किले कसूर गरेको टहरेमा बोर्डले उपदफा (१) बमोजिम उपयुक्त सजाय गर्ने आदेश दिन सक्नेछ।
|
| 251 |
+
(४) यस दफाबमोजिम कसूरको छानबिन गरी सजाय गर्न बोर्डले तोकिएबमोजिम न्यायिक समिति गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 252 |
+
(५) न्यायिक समितिले उपदफा (४) बमोजिम गरेको सजायउपर सम्बन्धित उच्च अदालतमा पुनराबेदन गर्न सकिनेछ।
|
| 253 |
+
(६) उपदफा (४) बमोजिम गठित न्यायिक समितिको कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 254 |
+
|
| 255 |
+
---
|
| 256 |
+
|
| 257 |
+
## परिच्छेद-७
|
| 258 |
+
|
| 259 |
+
### बोर्डको कोष र लेखापरीक्षण
|
| 260 |
+
|
| 261 |
+
**२८. बोर्डको कोष:**
|
| 262 |
+
(१) बोर्डको आफ्नो एउटा छुट्टै कोष हुनेछ।
|
| 263 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा देहायका रकम रहनेछन्:-
|
| 264 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम,
|
| 265 |
+
(ख) बिदेशी सरकार, अन्तर्राष्ट्रिय सङ्घ बा संस्थाबाट ऋण, अनुदान बा सहयोगबापत प्राप्त रकम,
|
| 266 |
+
(ग) सेवा प्रदायकलाई सेवा प्रणाली उपयोग गर्न दिएबापत प्राप्त रकम,
|
| 267 |
+
(घ) सेवा प्रदायकबाट अनुमतिपत्र दस्तुरबापत प्राप्त रकम,
|
| 268 |
+
(ङ) उपभोक्ताले महसुलबापत बुझाएको रकम,
|
| 269 |
+
(च) अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त रकम।
|
| 270 |
+
(३) बोर्डको सम्पूर्ण खर्च उपदफा (१) बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ।
|
| 271 |
+
(४) बोर्डको कोषमा रहने रकम नेपालभित्रको कुनै बैङ्ग वा बित्तीय संस्थामा खाता खोली जम्मा गरिनेछ र त्यस्तो खाताको सञ्चालन तोकिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 272 |
+
|
| 273 |
+
**२९. उपभोक्ता संरक्षण कोष:**
|
| 274 |
+
(१) दफा २७ बमोजिम जरिबानाबापत प्राप्त गरेको रकम जम्मा गर्न बोर्डले एउटा उपभोक्ता संरक्षण कोष खडा गर्नेछ।
|
| 275 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा जम्मा भएको रकम सेबालाई नियमित गराउन, सेबा प्रणालीको आवश्यकता अनुसार मर्मत सम्भार गर्न वा पुनर्निर्माण गर्न तथा तोकिए बमोजिम उपभोक्तालाई अनुदान दिने काममा प्रयोग गरिनेछ।
|
| 276 |
+
(३) कोषको सञ्चालन, व्यवस्थापन र उपयोगसम्बन्धी कार्यबिधि तोकिएबमोजिम हुनेछन्।
|
| 277 |
+
|
| 278 |
+
**३०. लेखा र लेखापरीक्षण:**
|
| 279 |
+
(१) बोर्डको आय-व्ययको लेखा प्रचलित कानून बमोजिम राखिनेछ।
|
| 280 |
+
(२) बोर्डले तोकिएबमोजिम आन्तरिक लेखापरीक्षण तथा आन्तरिक नियन्त्रण गर्नु गराउनु पर्नेछ।
|
| 281 |
+
(३) बोर्डको आय-व्ययको लेखापरीक्षण समितिले नियुक्त गरेको ईजाजतपत्र प्राप्त लेखापरीक्षकबाट हुनेछ।
|
| 282 |
+
(४) नेपाल सरकारले चाहेमा जुनसुकै बखत बोर्डको लेखा तथा सोसैंग सम्बन्धित कागजात जाँच्न वा जँचाउन सक्नेछ।
|
| 283 |
+
|
| 284 |
+
---
|
| 285 |
+
|
| 286 |
+
## परिच्छेद-८
|
| 287 |
+
|
| 288 |
+
### विविध
|
| 289 |
+
|
| 290 |
+
**३१. निर्देशन दिन सक्ने:**
|
| 291 |
+
सेबाको गुणस्तर कायम गर्ने, बाताबरण संरक्षण गर्ने तथा खानेपानी तथा सरसफाईको गुणस्तर कायम राख्ने सम्बन्धमा नेपाल सरकारले बोर्डलाई आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ र त्यस्तो निर्देशनको पालन गर्नु बोर्डको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 292 |
+
|
| 293 |
+
**३२. बार्षिक प्रतिबदेन पेश गर्नु पर्ने:**
|
| 294 |
+
(१) बोर्डले प्रत्येक आर्थिक बर्ष समाप्त भएको मितिले तीन महिनाभित्र देहायका कुराहरुसमेत समाबेश गरी नेपाल सरकारसमक्ष बार्षिक प्रतिबेदन पेश गर्नु पर्नेछ:-
|
| 295 |
+
(क) बोर्डको आम्दानी र खर्चको बिबरण,
|
| 296 |
+
(ख) आफूले बर्षभरी सम्पादन गरेको कामको बिबरण र सोको लागि लागेको प्रशासकीय खर्च,
|
| 297 |
+
(ग) आगामी बर्षको कार्ययोजना र त्यसको लागि आवश्यक पर्ने अनुमानित बजेट तथा सोको स्रोत,
|
| 298 |
+
(घ) तोकिए बमोजिमका अन्य विवरण।
|
| 299 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको प्रतिवेदन नेपाल सरकारले प्रत्येक बर्ष बोर्डलाई सार्वजनिक गर्न लगाउनेछ।
|
| 300 |
+
|
| 301 |
+
**३३. उपसमिति गठन गर्न सक्नेः**
|
| 302 |
+
(१) बोर्डले आफूले गर्नुपर्ने काम कारबाही सुचारुरुपले गर्नको लागि विभिन्न विषयसँग सम्बन्धित विशेषज्ञ, सेवा प्रदायक तथा उपभोक्ताको समेत संलग्नता रहने गरी आवश्यकता अनुसार उपसमिति गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 303 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठित उपसमितिको काम, कर्तव्य, अधिकार तथा उपसमितिका सदस्यले पाउने सुविधा तोकिएबमोजिम हुनेछन्।
|
| 304 |
+
|
| 305 |
+
**३४. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 306 |
+
बोर्डले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा खानेपानी मन्त्रालयमार्फत राख्नु पर्नेछ।
|
| 307 |
+
|
| 308 |
+
**३५. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 309 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न बोर्डले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ र त्यस्तो नियम नेपाल सरकारबाट स्वीकृत भएपछि लागू हुनेछ।
|
| 310 |
+
|
| 311 |
+
**३६. निर्देशिका बनाई लागू गर्न सक्नेः**
|
| 312 |
+
बोर्डले यो ऐन बा यसअन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही आवश्यक निर्देशिका बनाई लागू गर्न सक्नेछ।
|
| 313 |
+
|
| 314 |
+
**३७. खानेपानी व्यवस्थापन बोर्ड अध्यादेश २०६२ निष्क्रिय भएपछि त्यसको परिणाम:**
|
| 315 |
+
खानेपानी व्यवस्थापन बोर्ड अध्यादेश, २०६२ निष्क्रिय भएपछि अर्को अभिप्राय नदेखिएमा सो निष्क्रियताले,
|
| 316 |
+
(क) सो अध्यादेश निष्क्रिय हुँदाका बखत चल्ती नभएको बा कायम नरहेको कुनै कुरा पनि जगाउने छैन,
|
| 317 |
+
(ख) सो अध्यादेश बमोजिम चालू भएको कुरा बा सोबमोजिम रीत पुन्याई अघि नै गरिएको कुनै काम बा भोगिसकेको कुनै कुरालाई असर पार्ने छैन,
|
| 318 |
+
(ग) सो अध्यादेशबमोजिम पाएको, हासिल गरेको बा भोगेको कुनै हक, सुविधा, कर्तव्य बा दायित्वमा असर पार्ने छैन,
|
| 319 |
+
(घ) सो अध्यादेश बमोजिम गरिएको कुनै दण्ड सजाय बा जफतलाई असर पार्ने छैन,
|
| 320 |
+
(ङ) माथि लेखिएको कुनै त्यस्तो हक, सुविधा, कर्तव्य, दायित्व, दण्ड सजायका सम्बन्धमा गरिएको कुनै काम कारबाही बा उपायलाई असर पार्ने छैन र सो अध्यादेश कायम रहेसरह त्यस्तो कुनै कानूनी कारवाही बा उपायलाई पनि शुरु गर्न, चालू राख्न बा लागू गर्न सकिनेछ।
|
| 321 |
+
|
| 322 |
+
---
|
| 323 |
+
|
| 324 |
+
### अनुसूची
|
| 325 |
+
(दफा ९० को उपदफा (७) सँग सम्बन्धित)
|
| 326 |
+
|
| 327 |
+
### शपथ
|
| 328 |
+
|
| 329 |
+
म... ... ... ... ... ... ... ईश्वरलाई साक्षी राखी/सत्य निष्ठापूर्वक शपथ लिन्छु कि समितिको अध्यक्ष/सदस्यको हैसियतले मलाई सुम्पिएको जिम्मेबारी र कर्तव्य पालन कसैको डर, त्रास, मोलाहिजा, पक्षपात, द्वेष बा लोभमा नपरी निष्पक्ष तथा इमान्दारीपूर्वक गर्नेछु र आफ्नो कर्तव्य पालनाको सिलसिलामा जानकारी हुन आएको गोप्य कुरा प्रचलित कानूनको पालनाको सिलसिलामा बाहेक कुनै अबस्थामा कसैलाई कुनै पनि माध्यमबाट आफू-पद्मा बहाल रहे बा नरहेको जुनसुकै अबस्थामा प्रकट गर्ने छैन।
|
| 330 |
+
|
| 331 |
+
मितिः-
|
| 332 |
+
दस्तखतः
|
section_11_pdf_7.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,234 @@
|
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| 1 |
+
# नेपाल खानेपानी संस्थान ऐन, २०४६
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०४६।०७।११
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
१. न्याय प्रशासन ऐन, २०४६
|
| 8 |
+
२०४६।०२।१६
|
| 9 |
+
२ नेपाल खानेपानी संस्थान (पहिलो संशोधन) ऐन, २०४९
|
| 10 |
+
२०४९।०६।१४
|
| 11 |
+
३. नेपाल खानेपानी संस्थान (दोस्रो संशोधन) ऐन, २०४७
|
| 12 |
+
२०४७।०६।२१
|
| 13 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 14 |
+
४. नेपाल खानेपानी संस्थान (तेस्रो संशोधन) ऐन, २०६३
|
| 15 |
+
२०६३।०९।३०
|
| 16 |
+
५. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६० २०६६।१०।०७
|
| 17 |
+
६. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 18 |
+
२०७२।११।१३
|
| 19 |
+
७. केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४P
|
| 20 |
+
२०७४।०६।३०
|
| 21 |
+
६. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 22 |
+
२०६२।०४।१४
|
| 23 |
+
२०४६ सालको ऐन नं. २३
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
नेपाल खानेपानी संस्थानको स्थापना र व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
प्रस्तावनाः सर्वसाधारण जनताको स्वास्थ्य र सुविधा कायम राख्न नेपालका बिभिन्न क्षेत्रमा नियमित रूपले स्वच्छ् खानेपानी उपलव्ध गराउन र ढल निकास प्रणालीलाई समुचित व्यवस्था गर्न नेपाल खानेपानी संस्थानको स्थापना र सञ्चालन गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,-
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
श्री ५ महाराजाधिराज बीरेन्द्र बीर बिक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्मतिले यो ऐन बनाइबक्सेको छ।
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
(1) यो ऐन संबत् २०६५ साल जेट १५ गतेदेखि लागू भएको।
|
| 32 |
+
" यो ऐन संबत् २०७५ साल भाद्र १ गतेदेखि लागू भएको।
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× गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा ज्ञिकिएको।
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१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:
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१. १ यस ऐनको नाम "नेपाल खानेपानी संस्थान ऐन, २०४६" रहेको छ।
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१. २. यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकिदिएको मितिदेख प्रारम्भ हुनेछ।
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२. परिभाषा:
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२.१ विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,-
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२.१.१. "संस्थान" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको नेपाल खानेपानी संस्थान सम्झनु पर्छ।
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२.१.२ "समिति" भन्नाले दफा द बमोजिम गठित सञ्चालक समिति सम्झनु पर्छ।
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२.१.३ "अध्यक्ष" भन्नाले दफा ११ बमोजिम तोकिएको बा नियुक्त भएको संस्थानको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
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२.१.३क "संस्था" भन्नाले प्रचलित कानून बमोजिम स्थापना भएको संगठित संस्था सम्झनु पर्छ।
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२.१.३ख "सेवा प्रणाली" भन्नाले खानेपानी सेवा उपलब्ध गराउनको लागि निर्माण गरिएको जलाशय, त्यस्तो जलाशयमा जडान भएको पानी प्रशोधन बा शुद्धिकरण प्लाण्ट, पानी आपू��्ति गर्न जडान भएको पादप बा फोहर पानी शुद्धिकरण गर्ने प्लाण्ट, ढल निकासको व्यवस्था गर्नको लागि निर्माण गरिएको ढल निकास प्रणाली, उपकरण बा यस्तै प्रकृतिका अन्य संरचना सम्झनु पर्छ र सो शब्दले खानेपानी सेवा बा ढल निकास सेबासँग आवद्ध भएको घर बा जग्गा समेतलाई जनाउँछ।
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२.९.३ग "बोर्ड" भन्नाले खानेपानी व्यवस्थापन बोर्ड ऐन, २०६३ बमोजिम स्थापना भएको बोर्ड सम्झनु पर्छ।
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२.९.४ "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यो ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा बिनियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
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३. संस्थानको स्थापना:
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३.१ नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकिदिएको क्षेत्रमा नियमित रूपले स्वच्छ् खानेपानी उपलव्ध गराउन तथा ढल निकास प्रणालीको समुचित व्यवस्था गर्नको लागि नेपाल खानेपानी संस्थाको स्थापना गरेको छ।
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३.२ संस्थानको प्रधान कार्यालय काठमाडौं उपत्यकामा रहनेछ।
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३.३ संस्थानका अन्य कार्यालयहरू आवश्यकता अनुसार नेपालको जुनसुकै ठाउँमा रहन सक्नेछ।
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४. संस्थान संगठित संस्था हुने:
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४.१ संस्थान अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र संगठित संस्था हुनेछ ।
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४.२ संस्थानको आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
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४.३. संस्थानले व्यक्ति सरह चल अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न बा अन्य किसिमले बन्दोबस्त गर्न सक्नेछ।
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४.४ संस्थानले व्यक्ति सरह आफ्नो नामबाट नालिस उजुर गर्न र सो उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजुर लाग्न सक्नेछ।
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५. संस्थानको काम कर्तव्य र अधिकार:
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५.१ संस्थानको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
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| ४.१.१ | खानेपानी तथा ढल निकास सम्बन्धी योजना तर्जुमा गर्ने र योजना कार्यान्वयन गर्ने गराउने, |
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| ४.१.२ | खानेपानीको स्रोत तथा बितरण र ढल निकास सम्बन्धी अध्ययन, अनुसन्धान तथा सर्वेक्षण गर्ने, |
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| ४.१.३ | खानेपानीको स्रोतदेखि बितरण स्थलसम्मको बाटो निर्धारण गर्ने र सोको रेखाइन गर्ने, |
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| ४.१.४ | खानेपानी तथा ढल निकास सम्बन्धी कामको लागि आवश्यक हुने निर्माण कार्य गर्ने गराउने, |
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| ४.१.४ | खानेपानी तथा ढल निकास सम्बन्धमा नेपाल सरकार र विदेशी सरकार बा अन्तराष्ट्रिय बा विदेशी संस्था बीच भएका सम्झौता बमोजिम सम्पन्न गर्नु पर्ने कार्यहरू गर्ने, |
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| ४.१.६ | नेपाल सरकारले तोकिदिएका खानेपानी तथा ढल निकास सम्बन्धी विकास परियोजना सञ्चालन गर्ने, |
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| ४.१.७ | महसुल तथा शुल्क आदि लिई खानेपानी बा ढल निकासको सुविधा उपलब्ध गराई सेवा प्रदान गर्ने, |
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| ४.१.५ | खानेपानीको उपयोग तथा ढल निकासको प्रयोग सम्बन्धमा आवश्यक शर्तहरू तोक्ने, |
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| ४.१.९ | खानेपानीको दुरूपयोग हुन नदिने, |
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| ४.१.१० | खानेपानीको प्रदूषण नियन्त्रण गर्ने, |
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| ४.१.११ | खानेपानी तथा ढल निकासको पाइप लाइनहरूको आवश्यक मर्मत तथा सम्भार गर्ने गराउने, |
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| ४.१.१२ | कुनै कारणले धारामा पानी नआएको सूचना संस्थानलाई प्राप्त भएमा आवश्यक मर्मत गरी यथाशीघ्र सेवा उपलब्ध गराउने, |
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| ४.१.१३ | संस्थानले आफ्नो सञ्चालन खर्च आफै उठाउने, |
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| ४.१.१४ | संस्थानको उद्देश्य पूर्तिको लागि आवश्यक अन्य कार्यहरू गर्ने, गराउने। |
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४क. संस्थानले गरेको वा गर्नु पर्ने कुनै काम करारमा दिन सकिनेः
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४क.१ यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि संस्थानले यस ऐन बमोजिम सञ्चालन र व्यवस्थापन गरिरहेको सेवा प्रणाली नेपाल सरकार र स्थानीय निकायको कम्तीमा असी प्रतिशत शेयर भएको कुनै संस्था वा नाफा कमाउने उद्देश्य नभएको संस्था वा उपभोक्ता संस्थालाई करारमा दिई सञ्चालन गर्न गराउन चाहेमा संस्थानले नेपाल सरकारको पूर्व स्वीकृति लिई संस्थानको स्वामित्व रहेको सेवा प्रणाली तथा सोसँग सम्बन्धित संरचना, उपकरण तथा सोसँग सम्बन्धित अन्य सम्पत्ति त्यस्तो संस्थालाई करारमा दिन सक्नेछ।
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४क.२. उपदफा ४क१ बमोजिम करार गर्ने संस्थाले प्रयोग गर्न पाउने संस्थानको स्वामित्वमा रहेको वा जिम्मामा रहेको संरचना, उपकरण तथा सम्पत्ति, करार कायम रहने अवधि, करार गर्ने पक्षहरूले करार बापत पाउने प्रतिफल र तत्सम्बन्धी अन्य कुराहरू करारमा उल्लेख भए बमोजिम हुनेछ।
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४क.३. उपदफा ४क१ बमोजिम करार गर्ने संस्थाले प्रयोग गरेको संस्थानको स्वामित्वमा रहेको वा जिम्मामा रहेको कुनै संरचना, उपकरण तथा सम्पत्ति करारको अवधि समाप्त भएपछि करारमा तोकिएको शर्त बमोजिम संस्थानलाई फिर्ता गर्नु पर्नेछ।
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४क.४. उपदफा ४क१ बमोजिम करारद्वारा काम गर्न दिइएको व्यवस्थालाई निजीकरण ऐन, २०४० बमोजिम निजीकरण गरिएको मानिने छैन।
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४ख. सेवा प्रणालीको स्वामित्व हस्तान्तरण गर्न सकिनेः
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४ख. १ यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल सरकारले यस ऐन बमोजिम संस्थानले सञ्चालन तथा व्यवस्थापन गरिरहेको कुनै क्षेत्रको सेवा प्रणाली बोर्डमा हस���तान्तरण गराई खानेपानी तथा ढल निकासको समुचित व्यवस्था गर्न उचित र आवश्यक देखेमा त्यस्तो क्षेत्रको सेवा प्रणालीको स्वामित्व सो बोर्डमा हस्तान्तरण गर्न गराउन सक्नेछ।
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| 87 |
+
४ख.२ उपदफा ४ख.१ बमोजिम सेवा प्रणालीको स्वामित्व हस्तान्तरण गर्दा गराउँदा नेपाल सरकारले त्यसरी स्वामित्व हस्तान्तरण गरिएको सेवा प्रणाली र सोसँग सम्बन्धित सम्पत्ति तोकिए बमोजिम मूल्याङ्कन गरी त्यस्तो सेवा प्रणालीको मूल्य बराबरको दायित्व समेत त्यस्तो बोर्डमा सारी दिन सक्नेछ।
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| 88 |
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४ख.३ उपदफा ४ख.१ बमोजिम सेवा प्रणालीको स्वामित्व हस्तान्तरण भएमा सम्बन्धित क्षेत्रमा खानेपानी उपलब्ध गराउने तथा दल निकास सम्बन्धी काम, सेवा प्रणालीको मर्मत सम्भार, संरक्षण, सञ्चालन तथा व्यवस्थापन गर्ने जिम्मेबारी त्यसरी स्वामित्व हस्तान्तरण गरिलिने बोर्डको हुनेछ।
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४.ग. कर तथा दस्तुर छुट र सटही सुविधा दिन सकिने:
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नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी दफा ४क. बमोजिम करार गर्ने संस्थालाई करारमा उल्लिखित कामको लागि आयकर, भन्सार बा अन्य कुनै दस्तुर छुट दिन र विदेशी मुद्रा सटही सुविधा प्रदान गर्न सक्नेछ।
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+
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+
४.घ. कर्मचारी सम्बन्धी विशेष व्यवस्था:
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४घ. १ दफा ४क. बमोजिम करार भएकोमा त्यसरी करार हुँदाका बखत संस्थानमा कार्यरत कर्मचारीलाई करारमा उल्लिखित अबधिभरका लागि करारमा सेवा प्रणाली लिने संस्थाबाट पारिश्रमिक तथा सुविधा उपलब्ध गराउने गरी संस्थानले त्यस्तो संस्थामा काजमा खटाउन सक्नेछ।
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+
४घ. २ दफा ४ख. बमोजिम संस्थानको कुनै सेवा प्रणालीको स्वामित्व कुनै बोर्डलाई हस्तान्तरण भएकोमा त्यस्तो सेवा प्रणालीसँग सम्बद्ध संस्थानका कर्मचारीलाई त्यसरी सेवा प्रणाली हस्तान्तरण गरिलिने बोर्डमा रहने गरी आवश्यक ब्यबस्था गर्न सकिनेछ।
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४घ. ३ उपदफा ४घ. २ बमोजिम खटिएका कर्मचारीको सेबाका शर्त तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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+
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+
६. महसुल तथा सेवा शुल्क असूल गर्ने अधिकार:
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६.१ संस्थानले खानेपानी उपलब्ध गराए बापत लाग्ने महसुल तथा ढल निकास र धारा जडान आदिको सेवा शुल्क सम्बन्धित ब्यक्तिबाट असुल गर्न सक्नेछ ।
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| 100 |
+
६.२ खानेपानीको महसुल तथा ढल निकासको लागि सेवा शुल्क बुझाउने म्याद संस्थानले तोके बमोजिम हुनेछ।
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| 101 |
+
६.३ उपदफा ६.२ बमोजिम महसुल तथा सेवा शुल्क बुझाउने म्याद भित्र त्यस्तो महसुल तथा सेवा शुल्क नबुझाएमा संस्थानले त्यस्तो समयभित्र रकम नबुझाउने ब्यक्तिबाट पच्चीसदेखि पचास प्रतिशतसम्म अतिरिक्त शुल्क लिन सक्नेछ।
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| 102 |
+
६.४ कुनै ग्राहकले संस्थानलाई बुझाउनु पर्ने महसुल, सेवा शुल्क, अतिरिक्त शुल्क वा तिर्नु बुझाउनु पर्ने अन्य रकम संस्थानले तोकेको समयभित्र नबुझाएमा संस्थानले त्यस्तो ग्राहकलाई दिइराखेको खानेपानी तथा ढल निकासको सुविधा रोक्न सक्नेछ।
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| 103 |
+
६.४ उपदफा ६.४ बमोजिम सुविधा रोकिएको व्यक्तिले नयाँ ग्राहक शुल्क र उपदफा ६.३ बमोजिमको बाँकी रकम समेत बुझाएमा संस्थानले पुनः त्यस्तो सुविधा उपलव्ध गराउन सक्नेछ।
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| 104 |
+
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७. अरूको घर जग्गामा प्रवेश गर्ने अधिकार:
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| 106 |
+
संस्थानले अधिकृत गरेको व्यक्तिले संस्थानको कामको सिलसिलामा अरूको घर जग्गामा प्रवेश गर्न आवश्यक परेमा तत्काल त्यस्तो घर वा जग्गा प्रयोग गरिरहेका व्यक्तिलाई पूर्व सूचना दिएर प्रवेश गर्न सक्नेछ।
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| 107 |
+
तर खानेपानीको दुरूपयोग वा चोरी भइरहेको शङा गर्नु पर्ने मनासिब कारण भएमा छानबिनको सिलसिलामा सूर्यास्त भएपछि सूर्योदय नभएसम्मको रातिको समय बाहेक अन्य समयमा अध्यक्षले वा निजले तोकेको संस्थानको अधिकृतले प्रवेश गर्दा पूर्व सूचना दिनु पर्ने छैन।
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| 108 |
+
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| 109 |
+
८. सञ्चालक समितिको गठन:
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| 110 |
+
६.१ संस्थानको काम कारवाही सञ्चालन, रेखदेख र व्यवस्थापनको लागि देहायका सदस्यहरू भएको सञ्चालक समिति गठन गरिएको छ:-
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| 111 |
+
६.१.१ खानेपानीको व्यवस्थापन सम्बन्धमा अनुभव प्राप्त व्यक्तिहरूमध्येबाट नेपाल सरकारले तोकेको वा नियुक्ति गरेको व्यक्ति
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| 112 |
+
६.१.२ प्रतिनिधि (राजपत्राहित प्रथम श्रेणी), ख्वानेपानी मन्त्रालय
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| 113 |
+
६.१.३ प्रतिनिधि (राजपत्राहित प्रथम श्रेणी), स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय, (जनस्वास्थ्य हेर्ने) — सदस्य
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| 114 |
+
६.१.४ संस्थानले सेवा पुर्याएका नगरपालिकाहरूमध्येवाट नेपाल सरकारले तोकेको एउटा नगरपालिकाको प्रमुख - सदस्य
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| 115 |
+
६.१.४ उपभोक्ताको हितको संरक्षणमा संलग्न उपभोक्ताहरूको संस्थाहरूमध्येवाट नेपाल सरकारले तोकेको संस्थाका दुईजना महिला प्रतिनिधि - सदस्य
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| 116 |
+
६.१.६ खानेपानी गुणस्तर सम्बन्धी विशेषज्ञहरूमध्येवाट नेपाल सरकारले तोकेको एकजना - सदस्य
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| 117 |
+
६.१.७ पर्यावरण बा बातावरण संरक्षणमा संलग्न संस्थाहरूमध्येवाट नेपाल सरकारले तोकेको एकजना - सदस्य
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| 118 |
+
६.१.६ महाप्रबन्धक, नेपाल खानेपानी संस्थान — सदस्य-सचिव
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+
६.२
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| 120 |
+
६.३ नेपाल सरकारले आवश्यक देखेमा नेपाल ���ाजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी सञ्चालक समितिका सदस्यहरूमा आवश्यक थपघट बा हेरफेर गर्न सक्नेछ।
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| 121 |
+
६.४ समितिले आवश्यक देखेमा कुनै विदेशी बा स्वदेशी विशेषज्ञ बा सल्लाहकारलाई सञ्चालक समितिको बैठकमा पर्यवेक्षकको रूपमा भाग लिन आमन्त्रण गर्न सक्नेछ।
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| 122 |
+
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| 123 |
+
९. समितिको बैठक सम्बन्धी कार्यबिधिः
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| 124 |
+
९.१ समितिको बैठक आवश्यकता अनुसार अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
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| 125 |
+
९.२ समितिको कूल सदस्य सङ्ख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्य उपस्थित भएमा समितिको बैठकको लागि गणपूरक सङ्ख्या पुगेको मानिनेछ।
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| 126 |
+
९.३ समितिको बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ र निजको अनुपस्थितिमा सदस्यहरूले आफूमध्येवाट छानेको सदस्यले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ।
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| 127 |
+
९.४ समितिको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा अध्यक्षले निर्णयात्मक मत दिन सक्नेछ।
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| 128 |
+
९.४ समितिको निर्णय समितिको सदस्य-सचिवले प्रमाणित गर्नेछ।
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| 129 |
+
९.६ समितिको बैठकसम्बन्धी अन्य कार्यबिधि समिति आफैले निर्धारण गर्नेछ।
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| 130 |
+
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| 131 |
+
१९.क. कामकारबाही अमान्य नहुने:
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| 132 |
+
सञ्चालक समितिको कुनै सदस्यको पद रिक्त रहेको कारणले मात्र सञ्चालक समितिको कुनै कारबाही अमान्य हुने छैन।
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| 133 |
+
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| 134 |
+
१०. उपसमिति गटन गर्न सक्ने:
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| 135 |
+
१०.१ समितिले आफ्नो काम कारबाही सुचारूरूपले सञ्चालन गर्नको लागि आवश्यकता अनुसार बिभिन्न उपसमितिहरू गटन गर्न सक्नेछ।
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| 136 |
+
१०.२ समितिले आवश्यक टानेमा काठमाडौं उपत्यका बाहिर उपदफा १०.१ बमोजिम गठित उपसमितिहरूलाई बित्तीय तथा प्रबन्ध स्वायत्तताको आधारमा खानेपानी योजनाहरू सञ्चालन गर्न दिन सक्नेछ।
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| 137 |
+
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| 138 |
+
११. अध्यक्ष र महाप्रबन्धकको व्यवस्था:
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| 139 |
+
१११.१ संस्थानको अध्यक्ष नेपाल सरकारले तोक्न बा नियुक्त गर्न सक्नेछ।
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| 140 |
+
१११.२ नेपाल सरकारले संस्थानको महाप्रबन्धक नियुक्त गर्नेछ।
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| 141 |
+
११.३ अध्यक्ष र महा प्रबन्धकको पदार्थध नेपाल सरकारले तोके बमोजिम हुनेछ।
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| 142 |
+
११.४ अध्यक्ष र महाप्रबन्धकको पारिश्रमिक, सेबाको शर्त तथा सुविधा सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 143 |
+
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| 144 |
+
१२. कर्मचारी सम्बन्धी व्यवस्था:
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| 145 |
+
१२.१ संस्थानले आवश्यकता अनुसार कर्मचारीहरू नियुक्त गर्न सक्नेछ।
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| 146 |
+
१२.२ संस्थानका कर्मचारीहरूको पारिश्रमिक, सेबाको शर्त तथा सुविधा सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 147 |
+
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| 148 |
+
१३. समितिको सदस्य र संस्थानका कर्मचारी उपर प्रतिबन्ध:
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| 149 |
+
समितिको सदस्य, संस्थानका कर्मचा���ी र सल्लाहकारले संस्थानसँगको टेका पट्टामा प्रत्यक्ष बा अप्रत्यक्ष रूपले हिस्सेदार हुन पाउने छैनन्।
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| 150 |
+
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| 151 |
+
१४. संस्थानको कोष:
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| 152 |
+
१४.१ संस्थानको एउटा छुट्टै कोष हुनेछ। सो कोषमा देहायका रकमहरू रहनेछन्:-
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| 153 |
+
१४.१.१ नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम,
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| 154 |
+
१४.१.२ नेपाल सरकार मार्फत कुनै बिदेशी सरकार बा अन्तर्रष्ट्रिय बा बिदेशी संस्थाबाट प्राप्त रकम,
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| 155 |
+
१४.१.३ संस्थानको चल अचल सम्पत्तिबाट आर्जन हुने रकम,
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| 156 |
+
१४.१.४ खानेपानी बा ढल निकासको सुबिधा पुऱ्याए बापत प्राप्त महसुल तथा सेबा शुल्क र अतिरिक्त शुल्क तथा जरिबानाको रकम,
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| 157 |
+
१४.१.४ संस्थानलाई अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त रकम।
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| 158 |
+
१४.२ संस्थानको सबै रकम संस्थानको नाममा नेपाल राष्ट्र बैंक बा कुनै बाणिज्य बैंकमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
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| 159 |
+
१४.३ संस्थानको तर्फबाट व्यहोर्नु पर्ने सम्पूर्ण खर्च उपदफा १४.१ बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ।
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| 160 |
+
१४.४ संस्थानको खाता सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 161 |
+
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| 162 |
+
१५. जग्गा प्राप्त गर्ने:
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| 163 |
+
१६.१ संस्थानलाई देहायको प्रयोजनको लागि नेपाल सरकारले प्रचलित कानून बमोजिम आवश्यक जग्गा प्राप्त गरी दिन सक्नेछ:-
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| 164 |
+
१६.१.१ जल भण्डार (रिजरम्बायर) निर्माण गर्न,
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| 165 |
+
१६.१.२ खानेपानी तथा ढल निकास सम्बन्धी कुनै संरचनाको निर्माण गर्न,
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| 166 |
+
१६.१.३ संस्थानको उद्देश्य पूर्तिको लागि आवश्यक अन्य काम गर्न।
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| 167 |
+
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| 168 |
+
१७. सार्वजनिक वा निजी घर जग्गाबाट पाइप लाइन लैजान सक्ने:
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| 169 |
+
१७.१ खानेपानी तथा ढल निकास सम्बन्धी योजना कार्यान्वयन गर्दा सार्वजनिक वा कसैको निजी घर जग्गाबाट खानेपानी वा ढल निकासको पाइप लाइन बिछ्याई एक टाउँबाट अर्को टाउँमा लैजान आवश्यक भएमा संस्थानले सोही योजना अनुसार पाइप लाइन बिछ्याउन सक्नेछ।
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| 170 |
+
१७.२ संस्थानले उपदफा १७.१ बमोजिम खानेपानी वा ढल निकासको पाइप लाइन बिछ्याउँदा सार्वजनिक वा कसैको निजी घर जग्गामा सकेसम्म कम नोक्सान हुने गरी पाइप लाइन बिछ्याउनु पर्नेछ।
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| 171 |
+
१७.३ संस्थानले उपदफा १७.१ ब्मोजिम खानेपानी वा ढल निकासको पाइप लाइन बिछ्याउँदा हुन गएको नोक्सानी वापत घर जग्गा धनीलाई प्रचलित भाउ अनुसार क्षतिपूर्ति दिनु पर्नेछ वा नोक्सान हुन गएको घर जग्गाको मर्मत गरी यथास्थितिमा ल्याई दिनु पर्नेछ।
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| 172 |
+
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| 173 |
+
१६. काम कारबाही गर्न मनाही:
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| 174 |
+
१६.१ कसैले पनि देहायमा लेखिएको कुनै काम कारबाही गर्न वा गर्न लगाउन हुँदैन:१६.१.१ खानेपानीको मुहान, जलभण्डार (रिजरम्बा��र) वा खानेपानी तथा ढल निकास सम्बन्धी अन्य कुनै संरचना बिगार्न, तोडफोड गर्न वा त्यसमा कुनै किसिमले क्षति पुए्याउन,
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| 175 |
+
५.१.९.९ खानेपानी वा खानेपानीको मुहानलाई दुषित गर्न,
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| 176 |
+
१६.१.३ संस्थानको अनुमति नलिई खानेपानीको पाइप लाइनबाट धारा जडान गर्न,
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| 177 |
+
१६.१.४ संस्थानलाई सूचना नदिई खानेपानीको मिटर झिकी पानी उपभोग गर्न,
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| 178 |
+
१६.१.४ खानेपानीको पाइप लाइनबाट कुनै यन्त्र जडान गरी पानी तान्न,
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| 179 |
+
१६.१.६ खानेपानीको मिटर तोडफोड गर्न वा बिगार्न,
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| 180 |
+
१६.१.७ संस्थानको स्वीकृति नलिई संस्थानको ढल लाइनमा ढलको निकास जोड्न वा ढल थुनिने गरी कुनै ठोस पदार्थ ढलमा फाँक्न वा राख्न,
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| 181 |
+
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| 182 |
+
१६.१.६ संस्थानद्वारा व्यवस्थित खानेपानी बा ढलको पाइप लाइन चोर्न, बिगार्न, नास्न बा त्यसमा क्षति पुन्याउन,
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| 183 |
+
१६.१.९ ढल निकास बा मंगाललाई भत्काउन, बिगार्न बा त्यसमा कुनै किसिमले क्षति पुन्याउन,
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| 184 |
+
१६.१.१० खानेपानी तथा ढल निकास सम्बन्धी संस्थानले गर्ने काम कारबाहीमा बाधा बिरोध गर्न।
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| 185 |
+
१११६.१.११.पानी बितरण गर्न बा ढल निकासको लागि बिछुएकुको पाइप लाइनमा क्षति पुग्ने गरी कुनै निर्माण कार्य गर्न।
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| 186 |
+
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| 187 |
+
१९. सजाय:
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| 188 |
+
१९.१ उपदफा १६.१.१ बिपरीत काम कारबाही गर्ने गराउनेलाई बिगो असुल गरी दश हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना बा पाँच बर्षसम्म कैद बा दुवै सजाय हुनेछ।
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| 189 |
+
१९.१क उपदफा १६.१.२ बिपरित काम कारबाही गर्ने गराउनेलाई तीन बर्षसम्म कैद बा तीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा दुवै सजाय हुनेछ।
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| 190 |
+
१९.२ देहायको काम कारबाही गर्ने गराउनेलाई संस्थानले बा संस्थानले तोकेको दफा १० बमोजिमको कुनै उपसमितिले देहाय बमोजिम जरिबाना गर्न सक्नेछ:-
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| 191 |
+
१९.२.१ उपदफा १६.१.३ बिपरीत काम, कारबाही गर्ने गराउनेलाई पाँच हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना,
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| 192 |
+
१९.२.३ उपदफा १६.१.४ बा १६.१.६ बिपरीत काम कारबाही गर्ने गराउनेलाई तीन हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना,
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| 193 |
+
१९.२.४ उपदफा १६.१.७ बिपरीत काम कारबाही गर्ने गराउनेलाई दुई हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना,
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| 194 |
+
१९.२.४ उपदफा १६.१.६ बा १६.१.९ बिपरीत काम कारबाही गर्ने गराउनेलाई त्यस्तो चोरिएको, बिग्रिएको बा नाशिएको सामानको बिगो बमोजिम जरीबाना गरी थप दुई हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना,
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| 195 |
+
१९.२.६ उपदफा १६.१.४ बा १६.१.१० बिपरीत काम कारबाही गर्ने गराउनेलाई एक हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना,
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| 196 |
+
१९.२.७ माथि लेखिएदेखि बाहेक कसैले यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको बिनियम बिपरीत हुने गरी कुनै काम का���बाही गर्ने गराउनेलाई कसूरको प्रकृति हेरी एक हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना।
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| 197 |
+
१९९.३ उपदफा १६.१.११ बिपरीतको कार्य गर्ने गराउनेलाई संस्थानले पाँच हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना गरी त्यस्तो निर्माण कार्य संस्थानले आफै भत्काउन बा सो बनाउने व्यक्तिलाई नै भत्काउन लगाउन सक्नेछ। संस्थानले नै भत्काउनु परेमा सो भत्काउँदा लागेको खर्च संस्थानले सम्बन्धित व्यक्तिसँग असूल उपर गर्नेछ।
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| 198 |
+
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+
२०. पुनरावेदन:
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| 200 |
+
उपदफा १९.२ बमोजिम दिएको सजायको आदेश उपर चित्त नबुझ्ने व्यक्तिले त्यस्तो सजायको आदेश पाएको मितिले पैतीस दिनभित्र सम्बन्धित उच्च अदालतमा पुनरावेदन दिन सक्नेछ र उच्च अदालतको निर्णय अन्तिम हुनेछ।
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| 201 |
+
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| 202 |
+
२१. सरकारी बाँकी सरह असूल उपर गर्ने:
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| 203 |
+
यस ऐन बमोजिम लगाइएको महसुल, सेबा, शुल्क, अतिरिक्त शुल्क तथा दफा १९. बमोजिम संस्थान बा उपसमितिले गरेको जरिबानाको रकम नबुझाउने व्यक्तिबाट संस्थानले त्यस्तो महसुल, सेबा, शुल्क, अतिरिक्त शुल्क तथा जरीबानाको रकम सरकारी बाँकी सरह असुल उपर गर्न सक्नेछ।
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| 204 |
+
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+
२२. अधिकार प्रत्यायोजन:
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+
२२.१ समितिले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा बिनियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकार आबश्यकता अनुसार अध्यक्ष, समितिका कुनै सदस्य बा उपसमितिलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
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| 207 |
+
२२.२ अध्यक्ष बा महाप्रबन्धकले आफूलाई प्राप्त अधिकार आवश्यकता अनुसार संस्थानको कुनै अधिकृत कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
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+
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+
२३. नेपाल सरकारले निर्देशन दिन सक्ने:
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| 210 |
+
नेपाल सरकारले संस्थानलाई समय समयमा निर्देशन दिन सक्नेछ। त्यस्तो निर्देशनको पालना गर्नु संस्थानको कर्तव्य हुनेछ।
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| 211 |
+
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+
२४. नेपाल सरकारको अधिकार:
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| 213 |
+
२४.१ संस्थानले यस ऐन बिपरीत कुनै काम गरेमा बा गर्न लागेमा नेपाल सरकारले त्यस्तो काम रोक्ने आदेश दिन सक्नेछ।
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| 214 |
+
२४.२ संस्थानले गर्नुपर्ने काम पूरा गरिसकेको छ बा संस्थानले आफूले गर्नु पर्ने काम, कर्तव्य बा आदेश बा निर्देशनको पालना गरेको छैन बा संस्थान कायम राख्न आवश्यक छैन भन्ने नेपाल सरकारले टहन्याएमा संस्थानलाई जुनसुकै बखत बिघटन गर्न सक्नेछ।
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| 215 |
+
२४.३ उपदफा २४.२ बमोजिम संस्थान बिघटन भएमा सो संस्थानको हक तथा दायित्व नेपाल सरकारमा सर्नेछ।
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| 216 |
+
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+
२४. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:
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| 218 |
+
संस्थानले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा खानेपानी मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
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+
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+
१२४क. नियम बनाउने अ��िकार:
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| 221 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वित गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरू बनाउन सक्नेछ।
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| 222 |
+
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+
२६. बिनियम बनाउने अधिकार:
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| 224 |
+
संस्थानले यो ऐनको अधीनमा रही आफ्नो आन्तरिक काम कारबाही सुव्यबस्थित गर्नको लागि नेपाल सरकारको स्वीकृति लिई आवश्यक बिनियमहरू बनाउन सक्नेछ।
|
| 225 |
+
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+
२७. विघटन:
|
| 227 |
+
२७.१ यो ऐन प्रारम्भ भएपछि नेपाल राजपत्र भाग ३, खण्ड ३४, सङ्ख्या १४ मिति २०४१ साल साउन १ गते प्रकाशित नेपाल सरकार, जलस्रोत मन्त्रालयको सूचनाद्वारा गठन गरिएको खानेपानी तथा ढल निकास संस्थान विघटन हुनेछ।
|
| 228 |
+
२७.२ उपदफा २७.१ बमोजिम विघटित संस्थानले गरिआएको काम कारबाही तथा सो संस्थानको हक र दायित्व यस ऐन बमोजिम स्थापित संस्थानमा सर्नेछ।
|
| 229 |
+
२७.३ उपदफा २७.१ बमोजिम विघटित संस्थानमा कार्यरत कर्मचारीहरू यस ऐन बमोजिम स्थापित संस्थानमा सर्नेछन्।
|
| 230 |
+
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| 231 |
+
दहव्य: १. केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर गरिएका शब्दहरू:-
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| 232 |
+
"श्री ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
| 233 |
+
२. न्याय प्रशासन ऐन, २०७३ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरु:-
|
| 234 |
+
"पुनराबेदन अदालत" को सट्टा "उच्च अदालत"।
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section_11_pdf_8.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,272 @@
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| 1 |
+
# नगर विकास कोष ऐन, २०४३
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०४३।१०।२३
|
| 5 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 6 |
+
१. आयकर ऐन, २०४६
|
| 7 |
+
२०४६।१२।१९
|
| 8 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 9 |
+
२. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन,२०६६
|
| 10 |
+
२०६६।१०।०७
|
| 11 |
+
३. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 12 |
+
२०७४।११।१९
|
| 13 |
+
४. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 14 |
+
२०६३ सालको ऐन नं. २६
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
नगर विकास कोषको स्थापना र व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 17 |
+
|
| 18 |
+
प्रस्तावनाः नेपालमा नगरहरूको निर्माण, विकास र विस्तार एवं नगरहरूमा आधारभूत सामाजिक सेवा र आयमूलक आयोजना सञ्चालन गर्न गराउन तथा त्यस्ता सेवा तथा आयोजना सञ्चालन गर्ने नगर विकाससँग सम्बन्धित निकायलाई आवश्यक आर्थिक तथा प्राविधिक सहयोग पुन्याई व्यवस्थित ढङ्गले नगरको विकास गर्न, गराउनको लागि नगर विकास कोषको स्थापना र कार्य सञ्चालनको सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 19 |
+
|
| 20 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज बीरन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको पच्चीसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
(1) यो ऐन २०६४ साल जेठ १४ गतेदेखि लागू भएको।
|
| 23 |
+
गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा झिकिएको।
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
---
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
## परिच्छेद-१
|
| 28 |
+
### प्रारम्भिक
|
| 29 |
+
|
| 30 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः
|
| 31 |
+
(१) यस ऐनको नाम "नगर विकास कोष ऐन, २०४३" रहेको छ।
|
| 32 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 33 |
+
|
| 34 |
+
२. परिभाषाः
|
| 35 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 36 |
+
(क) "कोष" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको नगर विकास कोष सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
(ख) "आधारभूत सामाजिक सेवा" भन्नाले बाटो, सडक, बत्ती, पुल, खानेपानी, ढल निकास, फोहरमैला संकलन, सार्वजनिक शौचालय, सार्वजनिक पुस्तकालय, बिघालय तथा त्यस्तै सार्वजनिक उपयोगका लागि बनाइने बिभिन्न संरचना लगायत नगरबासीको हितको निमित्त पुन्याउने बिभिन्न सेबाहरु सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(ग) "आयमूलक आयोजना" भन्नाले सार्वजनिक बजार, व्यापार केन्द्र, बस पार्क, पशु बधशाला, गोदाम घर तथा त्यस्तै अन्य आयमूलक आयोजना सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
(घ) "नगर विकाससँग सम्बन्धित निकाय" भन्नाले नगरको निर्माण तथा विकास गर्नको निमित्त जग्गा विकास तथा बितरण र आधारभूत सामाजिक सेवा तथा आयमूलक आयोजना सम्बन्धी कार्य गर्ने देहायका संस्था सम्झनु पर्छ।-
|
| 40 |
+
(१) प्रचलित कानून बमोजिम स्थापना भएका सरकारी बा गैरसरकारी संस्था,
|
| 41 |
+
(२) प्रचलित कानून बमोजिम गठन भएका नगर विकास सम���ति, महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका बा नगरपालिका,
|
| 42 |
+
(३) प्रचलित कानून बमोजिम नगरोन्मुख गाउँ भनी तोकिएका गाउँहरुमध्ये जनसंख्या र विकासको आधारमा कोषले तोकेको कुनै गाउँ।
|
| 43 |
+
|
| 44 |
+
(ङ) "नगर" भन्नाले महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका, नगरपालिका र नगरोन्मुख गाउँ सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
(च) "ऋण" भन्नाले कुनै चल, अचल सम्पत्ति धितो, बन्धक बा अन्य आवश्यक सुरक्षण बा जमानत लिई बा नलिई कोषले निर्धारण गरेको शर्तमा दिने कर्जा सम्झनु पर्छ।
|
| 46 |
+
(छ) "ऋणी" भन्नाले कोषबाट ऋण लिने नगर बिकाससँग सम्बन्धित निकाय सम्झनु पर्छ।
|
| 47 |
+
(ज) "डिबेन्चर" भन्नाले कोषले आफ्नो जायजेथा धितो राखी बा नराखी जारी गरेको ऋणपत्र सम्झनु पर्छ।
|
| 48 |
+
(झ) "समिति" भन्नाले दफा १४ बमोजिम गठन भएको कोषको संचालक समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 49 |
+
(ज) "अध्यक्ष" भन्नाले समितिको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
|
| 50 |
+
(ट) "सदस्य" भन्नाले समितिको सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले समितिको अध्यक्ष तथा सदस्य-सचिबलाई समेत जनाउँछ।
|
| 51 |
+
(ट) "कार्यकारी निर्देशक" भन्नाले दफा १६ बमोजिम नियुक्त कोषको कार्यकारी निर्देशक सम्झनु पर्छ।
|
| 52 |
+
(ड) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा बिनियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 53 |
+
|
| 54 |
+
---
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 57 |
+
### कोषको स्थापना, उद्देश्य तथा काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 58 |
+
|
| 59 |
+
३. कोषको स्थापनाः
|
| 60 |
+
(१) नगरको निर्माण, बिकास तथा बिस्तार गर्न तथा सो सम्बन्धी कार्य गर्ने नगर बिकाससँग सम्बन्धित निकायहरुलाई आवश्यक आर्थिक तथा प्राविधिक सहयोग प्रदान गर्नको लागि नगर बिकास कोषको नामबाट एउटा कोषको स्थापना गरिएको छ।
|
| 61 |
+
(२) कोषको केन्द्रीय कार्यालय काठमाडौं उपत्यकामा रहनेछ र कोषले आवश्यकतानुसार नेपालभित्र जुनसुकै स्थानमा आफ्नो शाखा कार्यालयहरु खोल्न सक्नेछ।
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
४. कोष स्वशासित संस्था हुने:
|
| 64 |
+
(१) कोष अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र सँगटित संस्था हुनेछ।
|
| 65 |
+
(२) कोषको काम कारबाहीको लागि आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 66 |
+
(३) कोषले यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम तथा विनियमका व्यवस्थाका अधीनमा रही व्यक्ति सरह चल, अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न बा अन्य कुनै किसिमले व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 67 |
+
(४) कोषले व्यक्ति सरह आफनो नामबाट नालिस उजुर गर्न र कोष उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजुर लाग्न सक्नेछ।
|
| 68 |
+
|
| 69 |
+
५. कोषको उद्देश्य:
|
| 70 |
+
कोषको उद्देश्य देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 71 |
+
(क) नगर विकाससँग सम्बन्धित निकायलाई आवश्यक आर्थिक तथा प्राविधिक सहयोग प्रदान गर्ने।
|
| 72 |
+
(ख) नगरलाई स्वच्छ् तथा सफा राख्न आवश्यक काम गर्ने, गराउने।
|
| 73 |
+
(ग) बिभिन्न किसिमका आधारभूत सामाजिक सेबा तथा आयमूलक आयोजना सञ्चालन गर्ने, गराउने।
|
| 74 |
+
(घ) नगर विकास र यसको लागि गरिनु पर्ने सम्भाव्य सुधारहरूको सम्बन्धमा देखा परेका समस्याहरुको निराकरणका उपायहरु पत्ता लगाउन आवश्यकता अनुसार कार्यमूलक अनुसन्धान गर्ने, गराउने।
|
| 75 |
+
|
| 76 |
+
६. कोषको काम, कर्तव्य र अधिकार:
|
| 77 |
+
यस ऐनको अन्य दफाहरुमा लेखिएको काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त कोषको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 78 |
+
(क) कोषको सञ्चालन र व्यवस्थापन सम्बन्धी नीति निर्धारण गरी कार्यान्वयन गर्ने, गराउने।
|
| 79 |
+
(ख) कोषको बार्षिक तथा आबधिक कार्यकम र बजेट स्वीकृत गर्ने र सोको निमित्त आवश्यक रकमको व्यवस्था गर्ने, गराउने।
|
| 80 |
+
(ग) नगरको निर्माण, विकास तथा बिस्तार तथा नगरमा आधारभूत सामाजिक सेबा तथा आयमूलक आयोजना सञ्चालन गर्न, नगर विकाससँग सम्बन्धित निकायहरुलाई आर्थिक तथा प्राविधिक सहयोग प्रदान गर्ने।
|
| 81 |
+
(घ) नगरको निर्माण, विकास, विस्तार र विविधिकरणको लागि आवश्यक पर्ने आर्थिक तथा प्राविधिक आधारहरू तयार पारी नगर विकाससँग सम्बन्धित कार्यकमहरू कार्यान्वयन गर्ने, गराउने तथा त्यस्तो कार्यकममा नगर विकाससँग सम्बन्धित निकायहरूको सहभागितालाई अधिकतम् मात्रामा प्रोत्साहित गर्ने।
|
| 82 |
+
(ङ) नगर विकाससँग सम्बन्धित निकायमा कार्यरत कर्मचारीहरुलाई दिइने तालिम तथा प्रशिक्षणको लागि आवश्यक सहयोग पुर्याउने।
|
| 83 |
+
(च) नगर विकाससँग सम्बन्धित निकायहरुलाई नगर विकास सम्बन्धी विषयहरूमा आवश्यक परामर्श सेवा प्रदान गर्ने।
|
| 84 |
+
(छ) कोषसँग ऋण लिई सञ्चालन भएका आयोजना तथा कार्यकमहरूको अनुगमन तथा सुपरिवेक्षण गर्ने, गराउने।
|
| 85 |
+
(ज) नेपाल सरकारले कुनै विदेशी सरकार वा संस्था वा अन्तर्रष्ट्रिय संस्थासँग कोषका सम्बन्धमा गरेको सम्झौता बमोजिम कार्य गर्ने, गराउने।
|
| 86 |
+
(झ) कोषको हित विपरीत नहुने गरी कोषको रकम प्रचलित कानून बमोजिम स्थापित अन्य कुनै संस्थाको शेयर, डिवेज्चर वा अन्य कुनै किसिमको ऋणपत्र खरिद गर्ने कार्यमा लगानी गर्ने।
|
| 87 |
+
(ट) कोष समक्ष पेश भएका योजना तथा कार्यकमहरू स्वीकृत गर्ने।
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| 88 |
+
(ट) कोषको वार्षिक लेखा परीक्षण गराउने।
|
| 89 |
+
(ङ) कोषले बर्षभरी गरेको काम कारवाहीको वार्षिक प्रतिवेदन र प्रत्येक बर्षको लेखा परीक्षणको प्रतिवेदन नेपाल सरकार समक्ष पेश गर्ने।
|
| 90 |
+
(ङ) कोषको सङ्गटानात्मक स्वरुप स्वीकृत गर्ने र सो बमोजिम आवश्यक दरबन्दी श्रृजना गर्ने।
|
| 91 |
+
(ड) कोषको उद्देश्य प्राप्त गर्न अन्य आवश्यक कार्यहरू गर्ने।
|
| 92 |
+
|
| 93 |
+
७. कोषले आवश्यक सेवा शुल्क लिन सक्ने:
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| 94 |
+
कोषले नगर विकाससँग सम्बन्धित निकायहरुलाई नगर विकास सम्बन्धी परामर्श सेवा प्रदान गरे बापत तोकिए बमोजिम सेवा शुल्क लिन सक्नेछ।
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| 95 |
+
|
| 96 |
+
८. कोषले आर्थिक स्रोत जुटाउन सक्ने:
|
| 97 |
+
कोषले आफनो उद्देश्य अनुरुपको कार्यकम सञ्चालन गर्नको लागि नेपाल सरकार, सरकारी तथा गैर सरकारी संस्था, विदेशी सरकार बा संस्था, अन्तर्राष्ट्रिय संस्था बा निकायहरुसित ऋण, अनुदान, दान दातव्य बा उपहार लगायत आबश्यक आर्थिक स्रोत जुटाउन सक्नेछ।
|
| 98 |
+
तर विदेशी सरकार बा संस्था, अन्तर्राष्ट्रिय संस्था बा निकायहरुसित आर्थिक स्रोत लिनु अगावै कोषले नेपाल सरकारको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
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| 99 |
+
|
| 100 |
+
९. ऋणपत्र जारी तथा खरिद गर्न सक्ने:
|
| 101 |
+
(१) कोषले प्रचलित कानून बमोजिमको रीत पन्याई डिबेन्चर तथा अन्य कुनै किसिमको ऋणपत्रहरु जारी गर्न तथा खरिद गर्न सक्नेछ।
|
| 102 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम कोषले डिबेन्चर तथा अन्य कुनै किसिमको ऋणपत्र जारी तथा खरिद गर्दा तोकिएको प्रक्रिया अपनाउनु पर्नेछ।
|
| 103 |
+
|
| 104 |
+
१०. शर्तहरू राख्ने अधिकार:
|
| 105 |
+
(१) कोषले नगर विकाससँग सम्बन्धित निकायलाई ऋण बा अनुदान दिंदा आफनो हितको संरक्षण र आफूले प्रदान गरेको ऋण बा अनुदानको उचित प्रयोगका लागि आवश्यकता अनुसार शर्तहरू राखी लिखित रूपमा सम्झौता गर्नु पर्नेछ।
|
| 106 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सम्झौता गर्दा कोषले जतिसुकै अबधिको भाखा राख्न, कोषले तोकेको शर्त भंग गरेमा ऋणीले लिएको ऋणको साँबा ब्याज फिर्ता बुझाउन लगाउन बा ऋणीले लिखत गराई दिएको धितो, बन्धक बा अन्य सम्पत्ति र जमानतबाट असुल गर्न सक्ने गरी शर्त तोक्न सक्नेछ।
|
| 107 |
+
(३) कोषले ऋणीलाई दिने कूल ऋण रकमको किस्ता प्राप्त गरेको मितिदेखि त्यसको ब्याज हिसाब गर्ने गरी तोकिए बमोजिम किस्ताबन्दीमा नगद, चेक, प्रतिज्ञापत्र बा त्यस्तै अन्य किसिमबाट ऋण प्रदान गर्ने शर्तहरू राख्न सक्नेछ।
|
| 108 |
+
|
| 109 |
+
११. शर्त उल्लंघन गरेमा कोषको अधिकार:
|
| 110 |
+
(१) दफा १० बमोजिम गरेको सम्झौता अनुसार कुनै ऋणीले कोषलाई बुझाउनु पर्ने ऋण, त्यसको ब्याज र पेश्की बापतको बाँकी रकम नबुझाई कोपसँग गरेको सम्झौतामा उ���्लिखित शर्त उल्लंघन गरेमा बा त्यस्तो ऋणको रकम ऋणीसँग चुक्ता हुन नसक्ने पर्याप्त आधारहरू देखिएमा भाखाको अबधि नपुगेको भए तापनि कोषले ऋणीसँग लिनु पर्ने रकम फिर्ता माग गर्न बा ऋण दिंदा धितो बापत राखेको सम्पत्ति बा त्यस्तो ऋणीको अन्य सम्पत्तिहरु प्रचलित कानून बमोजिम कब्जा गरी चलन गर्न, बहाल बा ठेका पट्टामा दिन बा लिलाम बढाबढ, बोलपत्र बा आपसी छलफलद्वारा बिक्री गरी आफूले लिनु पर्ने रकम असूल उपर गर्न सक्नेछ।
|
| 111 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम कोषले ऋणीको सम्पत्ति कब्जा गरी लिलाम बढाबढ, बोलपत्र बा आपसी छलफलद्वारा बिक्री गरेकोमा कोषले लिनु पर्ने रकम लिई बढी भएको रकम जति सम्बन्धित ऋणीलाई फिर्ता दिनु पर्नेछ।
|
| 112 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम लिलाम बढाबढ, बोलपत्र बा आपसी छलफलद्वारा पटक पटक प्रयास गर्दा पनि ऋणीको सम्पत्ति लिलाम बिक्री हुन नसकेमा बा प्राप्त मूल्यमा बिक्री गर्दा कोषको हितमा हुने नदेखिएमा तोकिए बमोजिम ऋणीको सम्पत्तिको मोल कायम गरी सो सम्पत्तिको स्वामित्व कोषले आफै लिन सक्नेछ।
|
| 113 |
+
|
| 114 |
+
१२. कोषको अधिकार समाप्त नहुने:
|
| 115 |
+
(१) कोषले लिखत गराई कुनै सम्पत्ति धितो लिएको लिखतमा उल्लेख भएको शर्त बमोजिमको म्याद भित्र धितो कब्जा गर्न बा ऋण असुल गर्न कारबाही नगरेको कारणले मात्र धितो माथिको कोषको अधिकार समाप्त हुने छैन।
|
| 116 |
+
(२) सम्झौतामा उल्लिखित शर्त बमोजिम धितो कब्जा गरेको, भोग चलन गरेको, भाडा बा ठेका पट्टामा दिएको बा मुनाफा बाँड्ने गरी अरुलाई सञ्चालन गर्न दिएकोमा त्यस्तो कारणले मात्र कोषले असुल गरी लिन पाउने ऋण रकमको किस्ता नबुझाए बापतको ब्याज तथा थप दस्तुर बा धितो बिक्री गर्न पाउने कोषको अधिकारमा असर पर्ने छैन।
|
| 117 |
+
|
| 118 |
+
१३. कोषको ऋण लगानीको सुरक्षाः
|
| 119 |
+
कोषले ऋण लगानी गरेको नगर विकाससँग सम्बन्धित निकाय बा कुनै संस्था बिघटन भएमा बा नरहेमा त्यस्तो निकाय बा संस्थाको जायजेथामा सबभन्दा पहिलो हक् दाबी कोषको हुनेछ।
|
| 120 |
+
|
| 121 |
+
---
|
| 122 |
+
|
| 123 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 124 |
+
### समितिको गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
१४. समितिको गठन:
|
| 127 |
+
(१) कोषको उद्देश्य प्राप्तिको लागि सुव्यबस्थित रुपले आवश्यक कार्यकमहरु सञ्चालन गर्न, गराउन र कोषको सम्पूर्ण काम कारबाहीहरुको रेखदेख तथा प्रबन्ध गर्नको लागि एक सञ्चालक समितिको गठन हुनेछ।
|
| 128 |
+
(२) समितिमा देहायका सदस्यहरु रहनेछन्:-
|
| 129 |
+
(क) सचिव, सहरी विकास मन्त्रालय - अध्यक्ष
|
| 130 |
+
(ख) प्रतिनिधि, अर्थ मन्त्रालय (राजपत्रांकित प्रथम श्रेणी) - सदस्य
|
| 131 |
+
(ग) प्रतिनिधि, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय (राजपत्रांकित प्रथम श्रेणी) - सदस्य
|
| 132 |
+
(घ) नगरपालिकाका प्रमुख बा उपप्रमुखहरूमध्येबाट प्रत्येक प्रदेशबाट प्रतिनिधित्व हुने गरी नेपाल सरकारले मनोनयन गरेका कम्तीमा तीन जना महिला सहित सातजना - सदस्य
|
| 133 |
+
(ङ) बित्तीय संस्था सञ्चालन क्षेत्रमा विशेषज्ञता हासिल गरेको अर्थ बिज्ञ बा इजिनियरिङ बिषयमा स्नातकोपाधि हासिल गरी नगर विकास क्षेत्रमा कार्यरत प्राविधिक व्यक्ति बा नगर विकाससँग सम्बन्धित निकायहरु मध्येबाट प्रतिनिधित्व हुने गरी समितिले मनोनीत गरेका दुई जना - सदस्य
|
| 134 |
+
(ङ१) समावशिताको आधारमा नगर विकास सम्बन्धी विज्ञता भएका व्यत्तिहरुमध्येबाट मन्त्रालयले तोकेको कम्तीमा एक जना महिला सहित तीन जना - सदस्य
|
| 135 |
+
(च) कार्यकारी निर्देशक - सदस्य-सचिव
|
| 136 |
+
(२क) कार्यकारी निर्देशकलाई कारबाही गर्ने सम्बन्धी बिषयमा छलफल गर्नु पर्ने भएमा समितिको बैठकमा कोषको बरिष्ठतम् अधिकृतले सदस्य-सचिवको रूपमा काम गर्नेछ।
|
| 137 |
+
(३) उपदफा (२) को खण्ड (घ) र (ङ) बमोजिम मनोनीत सदस्यहरुको पदाबधि दुई बर्षको हुनेछ। पदाबधि पूरा नहुँदै कुनै मनोनीत सदस्यको पद रिक्त हुन आएमा बाँकी अबधिको लागि सो पद जुन प्रक्रियाबाट पूर्ति गरिएको हो सोही प्रक्रियाबाट पूर्ति गरिनेछ।
|
| 138 |
+
(४) समितिले आवश्यक देखेमा कुनै स्वदेशी बा विदेशी विशेषज्ञ, सल्लाहकार बा नगर विकास कार्यसँग सम्बन्धित लब्ध प्रतिष्ठित व्यक्तिलाई समितिको बैठकमा पर्यवेक्षकको रुपमा भाग लिन आमन्त्रण गर्न सक्नेछ।
|
| 139 |
+
|
| 140 |
+
१५. समितिको बैठक र निर्णय:
|
| 141 |
+
(१) समितिको बैठक अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 142 |
+
तर एक बर्ष कम्तीमा ६ पटक समितिको बैठक बस्नु पर्नेछ।
|
| 143 |
+
(२) एक तिहाई सदस्यहरुले समितिको बैठक बोलाउनको लागि लिखित रुपमा माग गरेमा समितिको सदस्य-सचिबले अध्यक्षको स्वीकृति लिई समितिको बैठक बोलाउनु पर्नेछ।
|
| 144 |
+
(३) समितिको सदस्य-सचिबले समितिको बैठक बस्ने सूचनाको साथमा बैठकमा छलफल हुने बिषयहरुको सूची सदस्यहरुलाई उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 145 |
+
(४) समितिको बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ र निजको अनुपस्थितिमा सदस्यहरुले आफू मध्येबाट छानेको सदस्यले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 146 |
+
(५) कूल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशत भन्दा बढी सदस्यहरु उपस्थित भएमा समितिको बैठकको लागि गण��ूरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 147 |
+
(६) समितिको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकको अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णायक मत दिनेछ।
|
| 148 |
+
(७) समितिको प्रत्येक बैठकमा उपस्थित सदस्यहरुको नाम, छलफल भएका बिषयबस्तु तथा बैठकमा भएका निर्णयहरु एउटा छुई निर्णय पुस्तिकामा लेखी उपस्थित सदस्यहरुको दस्तखत गराई राख्नु पर्नेछ।
|
| 149 |
+
(८) समितिले गरेका निर्णय समितिको सदस्य-सचिबद्वारा प्रमाणित गरिनेछ।
|
| 150 |
+
(९) समितिको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि समिति आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 151 |
+
|
| 152 |
+
१६. समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार:
|
| 153 |
+
(१) यो ऐन र यस ऐन अन्तरगत बनेका नियम तथा बिनियमहरुका अधीनमा रही कोषले गर्नु पर्ने सम्पूर्ण काम कारबाहीहरु गर्नु तथा कोषलाई प्राप्त सम्पूर्ण अधिकारहरूको प्रयोग तथा कर्तव्यको पालना गर्नु समितिको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 154 |
+
(२) उपदफा (१) मा उल्लेखित काम, कर्तव्यहरुका अतिरिक्त कोषको उद्देश्य प्राप्तिको लागि आवश्यक पर्ने अन्य कार्यहरू गर्नु समितिको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 155 |
+
|
| 156 |
+
१७. उपसमिति गठन गर्न सक्ने:
|
| 157 |
+
(१) समितिले आफ्नो कार्य सञ्चालन गर्नको लागि आवश्यकता अनुसार उपसमितिहरु गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 158 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठन भएका उपसमितिहरुको काम, कर्तव्य, अधिकार, कार्यक्षेत्र तथा कार्याबधि समितिले तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 159 |
+
|
| 160 |
+
---
|
| 161 |
+
|
| 162 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 163 |
+
### कार्यकारी निर्देशक र कर्मचारी सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 164 |
+
|
| 165 |
+
१६. कार्यकारी निर्देशक:
|
| 166 |
+
(१) कोषको प्रशासकीय प्रमुखको रुपमा दैनिक कार्य सञ्चालन गर्नको लागि तोकिएको योग्यता पुगेका व्यक्तिहरु मध्येबाट खुल्ला प्रतिस्पर्धाको आधारमा समितिले एकजना कार्यकारी निर्देशक नियुक्त गर्नेछ।
|
| 167 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कार्यकारी निर्देशकको पद पूर्ति नभएसम्मको लागि नेपाल सरकारले समितिसँग परामर्श गरी समितिको बरिष्ठ कर्मचारीलाई बढीमा तीन महिनाको लागि कार्यकारी निर्देशकको रुपमा काम गर्ने गरी तोक्न सक्नेछ।
|
| 168 |
+
(३) कार्यकारी निर्देशकको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 169 |
+
(४) कार्यकारी निर्देशकको पारिश्रमिक, सेबाको शर्त र सुबिधा सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 170 |
+
(५) उपदफा (३) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कार्यकारी निर्देशकले कोषलाई हानी नोक्सानी हुने कुनै काम कारबाही गरेमा बा समितिको नीति निर्देशन बिपरीत काम गरेमा समितिले तोकिएको प्रक्रिया अपनाई निजलाई कार्यकारी निर्देशकको पदबाट हटाउन सक्नेछ।
|
| 171 |
+
|
| 172 |
+
१९. कार्यकारी निर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार:
|
| 173 |
+
(१) कार्यकारी निर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 174 |
+
(क) समितिको निर्णयहरु कार्यान्वयन गर्ने, गराउने।
|
| 175 |
+
(ख) कोषको दीर्घकालीन तथा अल्पकालीन योजना, वार्षिक कार्यकम तथा बजेट तयार गरी स्वीकृतिको लागि समिति समक्ष पेश गर्ने।
|
| 176 |
+
(ग) समितिबाट स्वीकृत योजना तथा कार्यकमहरु कार्यान्वयन गर्ने, गराउने।
|
| 177 |
+
(घ) कोषको दैनिक कार्यको सुपरिवेक्षण तथा निरीक्षण गरी कोषको उद्देश्य अनुसार आवश्यक कार्यहरू गर्ने।
|
| 178 |
+
(ङ) कोषको लगानीमा कार्यान्वयन गरिएका योजना तथा कार्यकमहरुको निरीक्षण गरी त्यसको प्रगति बिबरण समिति समक्ष पेश गर्ने।
|
| 179 |
+
(च) कोषले सञ्चालन गरेका कार्यकमको बार्षिक तथा आबधिक प्रतिवेदन तयार गरी समिति समक्ष पेश गर्ने।
|
| 180 |
+
(२) उपदफा (१) मा लेखिएदेखि बाहेक कार्यकारी निर्देशकको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 181 |
+
|
| 182 |
+
२०. कर्मचारी सम्बन्धी व्यवस्थाः
|
| 183 |
+
(१) कोषको काम सुचारु रुपले सञ्चालन गर्नको लागि कोषमा आवश्यक संख्यामा कर्मचारीहरु रहनेछन्।
|
| 184 |
+
(२) कोषका कर्मचारीहरुको नियुक्ति, पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेबाका शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 185 |
+
|
| 186 |
+
---
|
| 187 |
+
|
| 188 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 189 |
+
### कोष र लेखापरीक्षण
|
| 190 |
+
|
| 191 |
+
२१. कोष:
|
| 192 |
+
(१) कोषको आफनो एउटा छुट्टै कोष हुनेछ र सो कोषमा देहायका रकमहरु रहनेछन्:-
|
| 193 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम।
|
| 194 |
+
(ख) विदेशी सरकार, राष्ट्रिय बा अन्तर्राष्ट्रिय संघ, संस्थाबाट प्राप्त सहयोग, अनुदान बा ऋण।
|
| 195 |
+
(ग) स्वदेशी बा विदेशी संघ, संस्था बा व्यक्तिबाट प्राप्त दान दातव्य बा उपहार।
|
| 196 |
+
(घ) नगर बिकाससँग सम्बन्धित निकायलाई प्रदान गरेको सेबा तथा परामर्श बापत प्राप्त गरेको शुल्क।
|
| 197 |
+
(ङ) कोषले गरेको लगानीबाट उठेको रकम।
|
| 198 |
+
(च) डिबेञ्चर तथा अन्य कुनै किसिमको ऋणपत्र जारी गरी प्राप्त गरेका रकम।
|
| 199 |
+
(छ) कोषको चल तथा अचल सम्पत्तिबाट आर्जन भएको रकम।
|
| 200 |
+
(ज) कोषलाई अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त रकम।
|
| 201 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम कोषलाई प्राप्त हुने सम्पूर्ण रकमहरु नेपालस्थित कुनै बाणिज्य बैकमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
|
| 202 |
+
(३) कोषको तर्फबाट गरिने सम्पूर्ण खर्च उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा जम्मा भएको रकमबाट व्यहोरिनेछ।
|
| 203 |
+
(४) कोषको सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 204 |
+
|
| 205 |
+
२२. लेखा र लेखापरीक्षण:
|
| 206 |
+
(१) कोषको आय व्ययको लेखा तोकिए बमोजिम ���ाखिनेछ।
|
| 207 |
+
(२) कोषको आय व्ययको बार्षिक लेखापरीक्षण महालेखा परीक्षकबाट मान्यता प्राप्त लेखापरीक्षकहरु मध्येबाट महालेखा परीक्षकको परामर्श लिई समितिले नियुक्त गरेको लेखापरीक्षकबाट हुनेछ।
|
| 208 |
+
(३) कोषले आवश्यक देखेमा कुनै लेखापरीक्षकद्वारा कोषको आन्तरिक लेखापरीक्षण गराउन सक्नेछ।
|
| 209 |
+
(४) नेपाल सरकारले चाहेमा जुनसुकै बखत कोषको बार्षिक हिसाब किताब जाँच्न बा जँचाउन सक्नेछ।
|
| 210 |
+
|
| 211 |
+
---
|
| 212 |
+
|
| 213 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 214 |
+
### विविध
|
| 215 |
+
|
| 216 |
+
२३. कोषले पाउने छुट:
|
| 217 |
+
कोषले ऋणी बा जमानीबाट लिखत गराई धितो लिंदा बा धितो लिएको सम्पत्ति कोषको नाममा पारित गराई लिंदा बा कोषले अचल सम्पत्ति खरिद बिक्री गर्दा त्यस्तो कारोबारमा आय टिकट बा रजिष्टेशन दस्तुर लाग्ने छैन।
|
| 218 |
+
|
| 219 |
+
२४. निर्णय प्रक्रियामा सहभागी हुन नपाउने:
|
| 220 |
+
कोषका सदस्य तथा कुनै कर्मचारीहरुले आफनो स्वार्थ भएको कुनै बिषयबस्तुसँग सम्बन्धित कोषको कुनै निर्णय प्रक्रियामा सहभागी हुन पाउने छैनन्।
|
| 221 |
+
|
| 222 |
+
२६. काम कारबाही बदर नहुने:
|
| 223 |
+
समितिको कुनै सदस्यको मनोनयन नभएको कारणले मात्र समितिको काम कारबाही बदर हुने छैन।
|
| 224 |
+
|
| 225 |
+
२७. गोपनीयता तथा इमान्दारीको शपथ ग्रहण गराउने:
|
| 226 |
+
सदस्य तथा कर्मचारीले आफ्नो पदीय दायित्व सम्हाल्नु अगावै तोकिए बमोजिम गोपनीयता र इमान्दारीको शपथ ग्रहण गर्नु पर्नेछ।
|
| 227 |
+
|
| 228 |
+
२८. बार्षिक प्रतिबेदन:
|
| 229 |
+
(१) कार्यकारी निर्देशकले कोषको काम कारबाहीको बार्षिक प्रतिबेदन प्रत्येक आर्थिक बर्ष समाप्त भएको मितिले ६ महिनाभित्र समिति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ र समितिबाट पारित प्रतिबेदनको एक प्रति कार्यकारी निर्देशकले नेपाल सरकार समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 230 |
+
(२) कार्यकारी निर्देशकले समितिको स्वीकृति लिई उपदफा (१) मा उल्लेख भए बमोजिमको कोषको बार्षिक प्रतिबेदन प्रत्येक बर्ष सार्वजनिक रुपमा प्रकाशन गर्नेछ।
|
| 231 |
+
|
| 232 |
+
२९. यसै ऐन बमोजिम हुने:
|
| 233 |
+
प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यस ऐनमा लेखिए जति कुरा यसै ऐन बमोजिम हुनेछ।
|
| 234 |
+
|
| 235 |
+
३०. बैठक भत्ताः
|
| 236 |
+
सदस्यहरुले समितिको बैठकमा भाग लिए बापत तोकिए बमोजिमको बैठक भत्ता पाउनेछन्।
|
| 237 |
+
|
| 238 |
+
३१. नेपाल सरकारले आदेश बा निर्देशन दिन सक्नेः
|
| 239 |
+
नेपाल सरकारले कोषले गरेको काम कारबाहीहरुको आवश्यक जाँचबुझ गरी कोषको उद्देश्य अनुरुप काम कारबाही गर्न कोषलाई आवश्यक आदेश बा निर्देशन दिन सक्नेछ। त्यसरी नेपाल सरकारले दिएको आदेश बा निर्देशनको पालना गर्नु कोषको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 240 |
+
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| 241 |
+
३२. अधिकार प्रत्यायोजन:
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| 242 |
+
(१) समितिले आफूलाई प्राप्त अधिकारहरू मध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार कुनै सदस्य, दफा १७ बमोजिम गठित उपसमिति बा कार्यकारी निर्देशकलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
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| 243 |
+
(२) कार्यकारी निर्देशकले आफूलाई प्राप्त अधिकारहरू मध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार कोषको कुनै अधिकृत कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
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| 244 |
+
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+
३३. नेपाल सरकारले कोषलाई बिघटन गर्न सक्ने:
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+
देहायको अबस्थामा नेपाल सरकारले कोषलाई बिघटन गर्न सक्नेछ:-
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| 247 |
+
(क) कोषले नेपाल सरकार, कुनै बिदेशी सरकार, राष्ट्रिय बा अन्तर्राष्ट्रिय संघ संस्थाबाट प्राप्त ऋण रकम नेपाल सरकार, बिदेशी सरकार बा अन्य त्यस्तो संस्थालाई तिर्न कोष असमर्थ छ भन्ने नेपाल सरकारलाई लागेमा।
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| 248 |
+
(ख) यो ऐनको उद्देश्य अनुरुप कोषले काम गर्न नसकेमा।
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| 249 |
+
(ग) दफा ३१ बमोजिम नेपाल सरकारले दिएको आदेश बा निर्देशन कोषले उल्लंघन गरेबाट कोषलाई बिघटन गर्न बाञ्छुनीय छ भन्ने नेपाल सरकारलाई लागेमा।
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+
(घ) कोष कायम राख्न आबश्यक छैन भन्ने नेपाल सरकारले टहन्याएमा।
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३४. सम्पत्ति तथा दायित्व सर्ने:
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दफा ३३ बमोजिम कोष बिघटन भएमा कोषको जिम्मामा रहेको सम्पूर्ण सम्पत्ति तथा दायित्वहरु नेपाल सरकारमा सर्नेछ।
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३५. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:
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कोषले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा नेपाल सरकार, सहरी विकास मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
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+
तर कोषसँग सम्बन्धित दैनिक प्रशासकीय कामका लागि सम्बन्धित निकायसँग कोषले सिधै सम्पर्क राख्न सक्नेछ।
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+
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३६. नियम तथा बिनियम बनाउन सक्ने:
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| 260 |
+
(१) यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्नको लागि नेपाल सरकारले आबश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
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| 261 |
+
(२) कोषले आफ्नो कार्य सञ्चालन गर्नका लागि यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमहरुका अधीनमा रही आबश्यक बिनियमहरु बनाउन सक्नेछ।
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+
३७. खारेजी र बचाउ:
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| 264 |
+
(१) नगर विकास कोष समिति (गटन) आदेश, २०४५ खारेज गरिएको छ।
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| 265 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको गटन आदेश अतर्गत गटित समितिको सम्पूर्ण चल, अचल सम्पत्ति तथा हक र दायित्वहरु यस ऐन बमोजिम स्थापित कोषमा सर्नेछ।
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| 266 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको गठन आदेश अन्तर्गत गठित समितिले गरेको सम्पूर्ण काम कारबाहीहरु यसै ऐन बमोजिम स्थापित कोषले गरे सरह मानिनेछ।
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| 267 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिमको गठन आदेश अन्तर्गत गठित समितिमा कार्यरत कार्यकारी निर्देशक तथा कर्मचारीहरु ��सै ऐन बमोजिम नियुक्ति भएका मानी कोषमा बहाल रहनेछ।
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| 268 |
+
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| 269 |
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| 270 |
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+
**द्रष्ट्रव्य:** केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रुपान्तरण भएका शब्दहरु:-
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| 272 |
+
"श्री ४ को सरकार" को सझ "नेपाल सरकार"।
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section_11_pdf_9.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,468 @@
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| 1 |
+
# नेपाल इन्जिनियरिङ परिषद् ऐन, २०४४
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| 2 |
+
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| 3 |
+
## लालमोहर र प्रकाशन मिति
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| 4 |
+
२०४४।११।२७
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| 5 |
+
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| 6 |
+
### संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 8 |
+
१. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 9 |
+
२०६६।१०।७
|
| 10 |
+
२. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 11 |
+
२०७४।११।१९
|
| 12 |
+
३. नेपाल इन्जिनियरिङ परिषद् (पहिलो संशोधन) ऐन, २०७९, २०७९।४।४
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
२०४४ सालको ऐन नं. २३
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
---
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| 17 |
+
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| 18 |
+
### प्रस्तावनाः
|
| 19 |
+
नेपाल इन्जिनियरिङ व्यवसायलाई प्रभावकारी बनाई व्यवस्थित तथा बैज्ञानिक ढङ्गले परिचालन गर्न तथा इन्जिनियरहरूको योग्यता अनुसार नाम दर्ता गर्ने समेतको व्यवस्था गर्नको लागि नेपाल इन्जिनियरिङ परिषद्को व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 20 |
+
|
| 21 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको सत्ताइसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएकोछ।
|
| 22 |
+
|
| 23 |
+
---
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
## परिच्छेद - १
|
| 26 |
+
### प्रारम्भिक
|
| 27 |
+
|
| 28 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
|
| 29 |
+
(१) यस ऐनको नाम "नेपाल इन्जिनियरिङ परिषद् ऐन, २०४४" रहेको छ।
|
| 30 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 31 |
+
|
| 32 |
+
**२. परिभाषाः**
|
| 33 |
+
विषय बा प्रसँगले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 34 |
+
(क) "परिषद्" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको नेपाल इन्जिनियरिङ परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 35 |
+
(ख) "अध्यक्ष" भन्नाले परिषद्को अध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(ख१) "उपाध्यक्ष" भन्नाले परिषद्को उपाध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
(ग) "सदस्य" भन्नाले परिषद्को सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले परिषद्को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष र सदस्य-सचिब समेतलाई जनाउँछ।
|
| 38 |
+
(घ) "इन्जिनियर" भन्नाले परिषद्वाट मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट इन्जिनियरिङ विषयमा कम्तीमा स्नातकोपाधि प्राप्त गरेको व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
(ङ) "इन्जिनियरिङ व्यवसाय" भन्नाले अनुसूचीमा उल्लिखित विषयमा प्राविधिक ज्ञान तथा दक्षता हासिल गरेका इन्जिनियरहरूले अपनाउने व्यवसाय सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
(च) "दर्ता किताब" भन्नाले दफा १४ बमोजिम तयार गरिएको दर्ता किताब सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
(छ) "दर्ताबाला इन्जिनियर" भन्नाले दर्ता किताबमा नाम दर्ता भएको इन्जिनियर सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(ज) "रजिष्ट्रा" भन्नाले दफा २७ बमोजिम नियुक्त गरिएको व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 43 |
+
(झ) "समिति" भन्नाले दफा १४ बमोजिम गठित परीक्षा समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 44 |
+
(ज) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
|
| 46 |
+
---
|
| 47 |
+
|
| 48 |
+
## परिच्छेद - २
|
| 49 |
+
### परिषद्को स्थापना गठन, काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 50 |
+
|
| 51 |
+
**३. परिषद्को स्थापना:**
|
| 52 |
+
(१) इन्जिनियरिङ व्यवसायलाई प्रभावकारी बनाई व्यवस्थित तथा बैज्ञानिक ढङ्गले परिचालन गर्न तथा इन्जिनियरको योग्यता अनुसार नाम दर्ता गर्ने समेतको काम गर्नको लागि नेपाल इन्जिनियरिङ परिषद्को स्थापना गरिएको छ।
|
| 53 |
+
(२) परिषद्को कार्यालय काठमाडौँ उपत्यकामा रहनेछ।
|
| 54 |
+
(३) परिषद्ले आवश्यकता अनुसार प्रदेशस्तरमा शाखा कार्यालय बा सम्पर्क कार्यालय स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
**४. परिषद् स्वशासित संस्था हुने:**
|
| 57 |
+
(१) परिषद् अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र सँगठित संस्था हुनेछ।
|
| 58 |
+
(२) परिषद्को सबै काम कारबाहीको लागि आफ्नो छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 59 |
+
(३) परिषद्ले व्यक्ति सरह चल अचल सम्पति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न बा अन्य कुनै किसिमले व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 60 |
+
(४) परिषद्ले व्यक्ति सरह आफनो नामबाट नालिस उजुर गर्न र परिषद् उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजुर लाग्न सक्नेछ।
|
| 61 |
+
|
| 62 |
+
**५. परिषद्को गठन:**
|
| 63 |
+
(१) दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको परिषद् देहाय बमोजिमका सदस्यहरू रहने छन्:
|
| 64 |
+
(क) इन्जिनियरिङ विषयमा स्नातकोपाधि प्राप्त गरी कम्तीमा पन्ध्र बर्ष इन्जिनियरिङ व्यवसायमा अनुभव प्राप्त इन्जिनियरहरू मध्येबाट नेपाल सरकारबाट मनोनीत इन्जिनियर - अध्यक्ष
|
| 65 |
+
(ख) इन्जिनियरिङ विषयमा स्नातकोपाधि प्राप्त गरी कम्तीमा दश बर्ष इन्जिनियरिङ् व्यवसायमा अनुभव प्राप्त इन्जिनियरहरू मध्येबाट नेपाल सरकारबाट मनोनीत इन्जिनियर - उपाध्यक्ष
|
| 66 |
+
(ग) इन्जिनियरिङ विषयमा स्नातकोपाधि प्राप्त गरी कम्तीमा सात बर्ष इन्जिनियरिङ् व्यवसायमा अनुभवप्राप्त इन्जिनियरहरू मध्येबाट प्रत्येक प्रदेशबाट प्रतिनिधित्व हुने गरी समावेशी सिद्धान्तको आधारमा नेपाल सरकारबाट मनोनीत कम्तीमा तीनजना महिला सहित सातजना - सदस्य
|
| 67 |
+
(घ) अध्यक्ष, नेपाल इन्जिनियर्स एशोसिएसन - सदस्य
|
| 68 |
+
(ङ) नेपाल इन्जिनियर्स एशोसिएसनले निर्वाचन गरी पठाएका पाँचजना इन्जिनियरहरू - सदस्य
|
| 69 |
+
(च) इन्जिनियरिङ क्याम्पसका क्याम्पस प्रमुखहरू मध्ये नेपाल सरकारबाट मनोनीत क्याम्पस प्रमुख एकजना - सदस्य
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| 70 |
+
(छ) प्रतिनिधि, इन्जिनियरिङ, अध्ययन संस्थान, त्रिभुवन विश्वविद्यालय - सदस्य
|
| 71 |
+
(छ१) इन्जिनियरिङ विषय अध्ययन, अध्यापन गराउने विश्वविद्यालय���रू मध्येबाट नेपाल सरकारबाट मनोनीत एकजना - सदस्य
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| 72 |
+
(ज) इन्जिनियरिङ विषयमा स्नातकोपाधि प्राप्त गरी कम्तीमा सात बर्ष इन्जिनियरिङ व्यवसायमा अनुभवप्राप्त इन्जिनियरहरू मध्येबाट परिषद्बाट मनोनीत कम्तीमा एकजना महिला सहित दुईजना - सदस्य
|
| 73 |
+
(झ) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिब
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| 74 |
+
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| 75 |
+
**६. सदस्यको पदावधिः**
|
| 76 |
+
(१) परिषद्मा मनोनीत बा निर्वाचित सदस्यको पदावधि चार वर्षको हुनेछ। पदावधि समाप्त भएका सदस्यहरू यस ऐनमा लेखिएका अन्य व्यवस्थाहरूको अधीनमा रही पुनः मनोनयन हुन बा निर्वाचित हुन सक्ने छन्।
|
| 77 |
+
(२) पदावधि समाप्त नहुँदै कुनै सदस्यको पद रिक्त हुन आएमा त्यस्तो रिक्त हुन आएको सदस्यको पद बाँकी अवधिको लागि अर्को सदस्यको मनोनयन बा निर्वाचनद्वारा पूर्ति गर्न सकिनेछ।
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| 78 |
+
|
| 79 |
+
**७. सदस्यको निमित्त अयोग्यताः**
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| 80 |
+
देहायका कुनै व्यक्ति परिषद्को सदस्य पदमा मनोनीत बा निर्वाचित हुन सक्ने छैन:
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| 81 |
+
(क) गैर नेपाल नागरिक,
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| 82 |
+
(ख) दर्ता किताबबाट नाम हटाइएको,
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| 83 |
+
(ग) साहूको ऋण तिर्न नसकी दामासाहीमा परेको,
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| 84 |
+
(घ) भ्रष्टाचार, जवरजस्ती करणी, मानब बेचबिखन तथा ओसारपसार, लागू औषध बिकी बितरण तथा निकासी बा पैटारी, सम्पत्ति शुद्धीकरण, साइबर अपराध, बन्यजन्तु ओसारपसार, राहदानी दुरुपयोग, अपहरण सम्बन्धी कसुर बा नैतिक पतन देखिने अन्य फौजदारी कसूरमा सजाय पाएको बा अन्य कुनै फौजदारी कसूरमा तीन बर्ष बा सोभन्दा बढी कैदको सजाय पाई त्यस्तो फैसला अन्तिम भएको,
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| 85 |
+
(ड) मानसिक सन्तुलन ठीक नभएको,
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| 86 |
+
(च) कुनै बिदेशी मुलुकको स्थायी आबासीय अनुमति प्राप्त गरेको।
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| 87 |
+
|
| 88 |
+
**८. सदस्यता समाप्त हुने अवस्थाः**
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| 89 |
+
देहायको अवस्थामा परिषद्को सदस्यता समाप्त भएको मानिनेछ:
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| 90 |
+
(क) दफा ७ बमोजिम अयोग्य भएमा,
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| 91 |
+
(ख) सदस्यको पदबाट दिएको राजीनामा स्वीकृत भएमा,
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| 92 |
+
(ग) परिषद्लाई कारण सहितको पूर्व सूचना नदिई लगातार तीन पटकसम्म परिषद्को बैठकमा अनुपस्थित भएमा,
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| 93 |
+
(घ) मृत्यु भएमा।
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| 94 |
+
|
| 95 |
+
**९. परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार:**
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| 96 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएको काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
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| 97 |
+
(क) इन्जिनियरिङ व्यवसाय सूचारु रूपबाट संचालन गर्नको लागि आवश्यक नीति, योजना तथा कार्यक्रमहरू तयार गरी त्यसको कार्यान्वयन गर्ने,
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| 98 |
+
(ख) इन्जिनियरिङ शिक्षा दिने शिक्षण संस्था र त्यस्ता संस्थाहरूले प्रदान गरेका प्रमाणपत्र तथा उपाधिहरूलाई तोकिए बमोजिम मान्यता दिने,
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| 99 |
+
(ग) इन्जिनियरिङ व्यवसाय गर्नको लागि आवश्यक योग्यता निर्धारण गर्ने र योग्यता पुगेका इन्जिनियरको नाम दर्ता गर्ने प्रयोजनका लागि लिइने परीक्षाको पाठ्यक्रम तयार गर्ने, परीक्षा लिने र उत्तीर्ण भएका व्यक्तिलाई नाम दर्ता प्रमाणपत्र प्रदान गर्ने,
|
| 100 |
+
(घ) दर्ताबाला इन्जिनियरले तोकिए बमोजिमको व्यवसायिक आचार संहिताको उल्लंघन गरेमा बा पालना नगरेमा तोकिए बमोजिमको कार्यविधि पूरा गरी त्यस्तो इन्जिनियरको नाम परिषद्वाट हटाउने।
|
| 101 |
+
(ङ) इन्जिनियरिङ विषय अध्ययन, अध्यापन गराइने शिक्षण संस्थाहरूको पाठ्यक्रम, शैक्षिक मापदण्ड तथा परीक्षा प्रणाली सम्बन्धी नीतिको पुनरावलोकन र मूल्याङ्कन गरी सम्बन्धित विश्वविद्यालय र नेपाल सरकार बा सम्बन्धित प्रदेश सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 102 |
+
(च) इन्जिनियरिङ विषय अध्ययन, अध्यापन गराइने शिक्षण संस्थाको विद्यार्थी भर्नाका आधार र शर्तहरू तथा शिक्षण संस्थाको भौतिक पूर्वाधार तोक्ने र अनुगमन तथा मूल्याङ्कन गरी सोको उल्लङ्घन गरेको पाइएमा त्यस्ता शिक्षण संस्थालाई प्रदान गरिएको स्वीकृति रद्द गर्न सम्बन्धित विश्वविद्यालयलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 103 |
+
(छ) इन्जिनियरिङ व्यवसायीको हक, हित अभिवृद्धि गर्न अध्ययन, अनुसन्धान, गोष्ठी तथा अन्य आवश्यक कार्यक्रम गर्ने, र
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| 104 |
+
(ज) इन्जिनियरलाई व्यावहारिक अनुभव दिलाउन तालिम तथा प्रशिक्षण सञ्चालन गर्ने।
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| 105 |
+
|
| 106 |
+
**१०. परिषद्को बैठक र निर्णय:**
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| 107 |
+
(१) परिषद्को बैठक साधारणतया वर्षमा चार पटक बस्नेछ। तर अध्यक्षले चाहेमा सो भन्दा बढी पटक पनि बैठक बोलाउन सक्नेछ।
|
| 108 |
+
(२) परिषद्को बैठक अध्यक्षले तोकेको समय र स्थानमा बस्नेछ।
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| 109 |
+
(३) परिषद्को कुल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशत भन्दा बढी सदस्यहरू उपस्थित भएमा परिषद्को बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 110 |
+
(४) परिषद्को बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ र निजको अनुपस्थितिमा उपाध्यक्षले गर्नेछ। अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष दुवैको अनुपस्थितिमा बैठकमा उपस्थित सदस्यहरूले आफू मध्येबाट छानेको व्यक्तिले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 111 |
+
(५) परिषद्को बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकको अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णयात्मक मत दिन सक्नेछ।
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| 112 |
+
(६) परिषद्को निर्णय सदस्य-सचिबद्वारा प्रमाणित गरिनेछ।
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| 113 |
+
(७) परिषद्को बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यविधि परिषद् आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
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| 114 |
+
|
| 115 |
+
---
|
| 116 |
+
|
| 117 |
+
## परिच्छेद - ३
|
| 118 |
+
### नाम दर्ता सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 119 |
+
|
| 120 |
+
**११. नाम दर्ता नगराई इन्जिनियरिङ व्यवसाय गर्न नहुने:**
|
| 121 |
+
(१) परिषद्मा नाम दर्ता नगराई कुनै पनि व्यक्तिले इन्जिनियरिङ व्यवसाय गर्न हुँदैन।
|
| 122 |
+
(२) यस ऐन बमोजिम परिषद्मा इन्जिनियरको नाम दर्ता गर्दा इन्जिनियरलाई तोकिए बमोजिम वर्गीकरण गर्न सकिनेछ।
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| 123 |
+
|
| 124 |
+
**१२. नाम दर्ताको लागि दरखास्त दिनेः**
|
| 125 |
+
(१) परिषद्मा नाम दर्ता गराउन चाहने व्यक्तिले तोकिए बमोजिमको ढाँचामा परिषद् समक्ष दरखास्त दिनु पर्नेछ।
|
| 126 |
+
(२) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत इन्जिनियरिङ व्यवसाय गरिरहेको व्यक्तिले यो ऐन प्रारम्भ भएको मितिले छ महिना भित्र परिषद्मा नाम दर्ता गराउनको लागि उपदफा (१) बमोजिम दरखास्त दिनु पर्नेछ।
|
| 127 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम नाम दर्ता गराउन दरखास्त दिने व्यक्तिले दरखास्त साथ शिक्षण संस्थाबाट प्राप्त गरेको प्रमाणपत्र, उपाधि तथा तत्सम्बन्धी अन्य कागजात तथा तोकिए बमोजिमको दस्तुर संलग्न गर्नु पर्नेछ।
|
| 128 |
+
|
| 129 |
+
**१३. दरखास्त उपर छानबिन:**
|
| 130 |
+
(१) दफा १२ बमोजिम दर्ता हुन आएका दरखास्तमा रजिष्ट्रारले आवश्यक छानबिन गरी यस ऐन बमोजिमको मापदण्ड पूरा गरेको देखिएमा सम्बन्धित दरखास्तबालाको नाम इन्जिनियरिङ व्यवसायी दर्ता परीक्षा सञ्चालन गर्ने प्रयोजनको लागि समिति समक्ष पठाउनु पर्नेछ।
|
| 131 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम छानबिन गर्दा कुनै कुरा अस्पष्ट भएमा रजिष्ट्रारले सो विषयमा सम्बन्धित दरखास्तबालासँग आवश्यक प्रमाण बा कागजात माग गर्न सक्नेछ।
|
| 132 |
+
|
| 133 |
+
**१४. परीक्षा समिति गठन:**
|
| 134 |
+
(१) परिषद्मा इन्जिनियरिङ व्यवसायीको रूपमा नाम दर्ता गर्ने प्रयोजनका लागि परीक्षा सञ्चालन गर्न देहाय बमोजिमको परीक्षा समिति रहनेछ:
|
| 135 |
+
(क) परिषद्ले तोकेको सदस्य - संयोजक
|
| 136 |
+
(ख) परिषद्ले तोकेको परिषद्का एकजना महिला सहित तीनजना सदस्य - सदस्य
|
| 137 |
+
(ग) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिव
|
| 138 |
+
(२) परिषद्मा इन्जिनियरिङ व्यवसायीको रूपमा नाम दर्ता गर्नको लागि समितिले कम्तीमा वर्षको दुई पटक तोकिए बमोजिम परीक्षा सञ्चालन गर्नेछ।
|
| 139 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको परीक्षाको पाठ्यक्रम र परीक्षा सञ्चालन प्रणाली परिषद्ले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 140 |
+
(४) समितिले आवश्यक ठानेमा विषयसँग सम्बन्धित विशेषज्ञलाई समितिको बैठकमा आमन्त्रण गर्न सक्नेछ।
|
| 141 |
+
|
| 142 |
+
**१५. नाम दर्ता गर्ने:**
|
| 143 |
+
(१) दफा १४ बमोजिम लिइएको इन्जिनियरिङ व्यवसायी दर्ता परीक्षा उत्तीर��ण भएका दरखास्तबालाको नाम दर्ता गर्नको लागि समितिले परिषद्मा सिफारिस गर्नु पर्नेछ।
|
| 144 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नाम दर्ताको लागि सिफारिस प्राप्त भएपछि परिषद्ले सो नामाबली बमोजिम परिषद्मा नाम दर्ता गर्नु पर्नेछ।
|
| 145 |
+
|
| 146 |
+
**१६. नाम दर्ता प्रमाणपत्र दिनेः**
|
| 147 |
+
दफा १४ बमोजिम नाम दर्ता गरेका व्यक्तिलाई रजिष्ट्रारले तोकिए बमोजिमको ढाँचामा नाम दर्ता प्रमाणपत्र दिनु पर्नेछ।
|
| 148 |
+
|
| 149 |
+
**१७. दर्ता किताबबाट नाम हटाउने:**
|
| 150 |
+
(१) देहाय बमोजिमको अवस्थामा बाहेक दर्ताबाला इन्जिनियरको नाम दर्ता किताबबाट हटाइने छैन:
|
| 151 |
+
(क) दफा ७ बमोजिम अयोग्य भएमा,
|
| 152 |
+
(ख) व्यवसायिक आचार संहिताको उल्लङ्घन गरेको अभियोगमा दर्ता किताबबाट नाम हटाउने भनी परिषद्को बैठकमा पेश भएको प्रस्ताव दुई तिहाइ बहुमतबाट पारित भएमा, बा
|
| 153 |
+
(ग) धोखा बा गल्तीले योग्यता नपुगेको कुनै व्यक्तिको नाम दर्ता हुन गएमा।
|
| 154 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ख) र (ग) बमोजिमको आरोपमा कुनै दर्ताबाला इन्जिनियरको नाम दर्ता किताबबाट हटाउने प्रस्ताव परिषद्को बैठकमा पेश गर्नु अघि त्यस्तो व्यक्तिलाई लागेको अभियोगको सम्बन्धमा जाँचबुझ गरी प्रतिवेदन पेश गर्न परिषद्ले एक जाँचबुझ समिति गठन गर्नेछ।
|
| 155 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम गठन भएको जाँचबुझ समितिले जाँचबुझ गर्दा अपनाउनु पर्ने कार्यविधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 156 |
+
|
| 157 |
+
**१८. प्रमाणपत्र रद्द गर्नेः**
|
| 158 |
+
(१) दफा १६ बमोजिम परिषद्ले दर्ता किताबबाट नाम हटाउने निर्णय गरेकोमा रजिष्ट्रारले त्यस्तो व्यक्तिको नाम दर्ता किताबबाट हटाई दफा १६ बमोजिम दिइएको नाम दर्ता प्रमाणपत्र रद्द गरी सम्बन्धित व्यक्तिलाई सो कुराको जानकारी दिनु पर्नेछ।
|
| 159 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नाम दर्ता प्रमाणपत्र रद्द गर्नु अघि सम्बन्धित व्यक्तिलाई आफ्नो सफाइ पेश गर्ने मौका दिनु पर्नेछ।
|
| 160 |
+
|
| 161 |
+
**१९. पुनः नाम दर्ता गर्ने:**
|
| 162 |
+
(१) दफा १६ को उपदफा (१) को खण्ड (क), (ख) र (ग) बमोजिमको अवस्थामा दर्ता किताबबाट नाम हटाउने निर्णय गरेकोमा त्यस्तो निर्णय भएको मितिले कम्तीमा एक बर्ष पछि सम्बन्धित व्यक्तिले मनासिब माफिकको कारण खोली पुनः नाम दर्ताको लागि दफा १२ बमोजिम परिषद्मा दरखास्त दिन सक्नेछ।
|
| 163 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पुनः नाम दर्ताको लागि दरखास्त दिएमा परिषद्ले त्यस्तो दरखास्तबालाको नाम पुनः दर्ता गर्न मनासिब देखेमा पुनः नाम दर्ता गर्ने निर्णय गर्न सक्नेछ।
|
| 164 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम परिषद्ले दरखास्तबाल���को नाम पुनः दर्ता गर्ने निर्णय गरेकोमा रजिष्ट्रारले त्यस्तो दरखास्तबालाको नाम दर्ता किताबमा पुनः दर्ता गरी दरखास्तबालालाई तोकिए बमोजिमको ढाँचामा पुनः नाम दर्ता भएको प्रमाणपत्र दिनु पर्नेछ।
|
| 165 |
+
|
| 166 |
+
---
|
| 167 |
+
|
| 168 |
+
## परिच्छेद - ४
|
| 169 |
+
### शैक्षिक संस्था र शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधिको मान्यता
|
| 170 |
+
|
| 171 |
+
**२१. शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधिको मान्यताः**
|
| 172 |
+
(१) कुनै शिक्षण संस्थाले प्रदान गरेको इन्जिनियरिङ विषयको शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधिलाई परिषद्ले मान्यता दिनेछ।
|
| 173 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परिषद्ले मान्यता दिएको शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधि र त्यस्तो प्रमाणपत्र बा उपाधि प्रदान गर्ने शिक्षण संस्थाको नाम नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गरिनेछ।
|
| 174 |
+
|
| 175 |
+
**२१क. शिक्षण संस्थालाई मान्यता प्रदान गर्नेः**
|
| 176 |
+
(१) प्रचलित कानून बमोजिम स्थापना भएका शिक्षण संस्थाले इन्जिनियरिङ विषयको अध्ययन, अध्यापन गर्नु, गराउनु अघि परिषद्बाट समेत मान्यता प्राप्त गर्नु पर्नेछ।
|
| 177 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम मान्यता प्राप्त गर्नको लागि परिषद्ले तोके बमोजिमको विवरण र दस्तुर संलग्न गरी परिषद्मा निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 178 |
+
(३) परिषद्ले उपदफा (२) बमोजिमको निवेदन उपर तोकिए बमोजिमको मापदण्डको आधारमा जाँचबुझ गरी तोकिए बमोजिमको मापदण्ड पूरा गर्ने शिक्षण संस्थालाई परिषद्ले तोके बमोजिमको शुल्क लिई स्थायी बा अस्थायी मान्यता प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 179 |
+
|
| 180 |
+
**२१ख. मान्यता रद्द गर्न सिफारिस गर्नेः**
|
| 181 |
+
परिषद्ले दफा २१क. बमोजिम मान्यता दिएको शिक्षण संस्थाको अनुगमन गर्दा त्यस्ता संस्थाले पाठ्यक्रम, विद्यार्थीको भर्नाका आधार भौतिक पूर्वाधार तथा शैक्षिक मापदण्ड पालना गरेको नदेखिएमा परिषद्ले त्यस्ता शिक्षण संस्थाको मान्यता रद्द गर्न नेपाल सरकार बा सम्बन्धित प्रदेश सरकारलाई सिफारिस गर्न सक्नेछ।
|
| 182 |
+
|
| 183 |
+
**२२. विवरण माग गर्न सक्नेः**
|
| 184 |
+
(१) दफा २१ बमोजिम कुनै शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधिको मान्यता दिने क्रममा परिषद्ले सम्बन्धित शिक्षण संस्थासँग त्यस्तो शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधिको लागि निर्धारित पाठ्यक्रम तथा भर्नाको लागि निर्धारित शर्त तथा तत्सम्बन्धी अन्य विवरणहरू माग गर्न सक्नेछ।
|
| 185 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परिषद्बाट माग भए बमोजिमको आवश्यक विवरण उपलब्ध गराउनु सम्बन्धित शिक्षण संस्थाको कर्���व्य हुनेछ।
|
| 186 |
+
|
| 187 |
+
**२३. परीक्षाको निरीक्षण:**
|
| 188 |
+
(१) दफा २१ बमोजिम कुनै शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधीको मान्यता दिने क्रममा बा मान्यता दिई सकेपछि उक्त शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधी प्रदान गर्ने सम्बन्धित शिक्षण संस्थाबाट लिईने परीक्षा प्रणालीको बारेमा निरीक्षण गर्न परिषद्ले निरीक्षक नियुक्त गरी पठाउन सक्नेछ।
|
| 189 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पठाइएको निरीक्षकले निरीक्षण गर्ने क्रममा परीक्षामा कुनै किसिमको हस्तक्षेप गर्न पाउने छैन।
|
| 190 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम परीक्षाको निरीक्षण गर्ने निरीक्षकले परीक्षा निरीक्षणको क्रममा देखेका कुराहरूको बारेमा प्रतिवेदन तयार गरी परिषद्मा पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 191 |
+
|
| 192 |
+
**२४. मान्यता हटाउने:**
|
| 193 |
+
(१) दफा २१ बमोजिम मान्यता प्रदान गरिएको कुनै शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधिको सम्बन्धमा सम्बन्धित शिक्षण संस्थाबाट दफा २२ बमोजिम प्राप्त विवरण बा दफा २३ को उपदफा (३) बमोजिम प्राप्त प्रतिवेदन उपर विचार गर्दा त्यस्तो शिक्षण संस्थाले निर्धारण गरेको पाठ्यक्रम, भर्नाका शर्त तथा परीक्षा प्रणाली उपयुक्त तथा पर्याप्त छैन भन्ने लागेमा परिषद्ले सो सम्बन्धमा आफनो प्रतिवेदन नेपाल सरकार समक्ष पेश गर्नेछ।
|
| 194 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परिषद्को प्रतिवेदन प्राप्त भएपछि सो सम्बन्धमा नेपाल सरकारले सम्बन्धित संस्थासँग स्पष्टीकरण माग गर्न सक्नेछ।
|
| 195 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम सम्बन्धित शिक्षण संस्थासँग माग गरिए बमोजिम प्राप्त हुन आएको स्पष्टीकरणको सम्बन्धमा नेपाल सरकारले विचार गरी सो सम्बन्धमा अन्य कुनै कुरा जाँचबुझ गर्नु पर्ने भए आवश्यक जाँचबुझ गरी सो समेतको आधारमा नेपाल सरकारले त्यस्तो शिक्षण संस्थाले कुनै खास मितिपछि प्रदान गरेको कुनै शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधिको मान्यता हटाउन सक्नेछ।
|
| 196 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम कुनै शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र बा उपाधिको मान्यता हटाइएको सूचना नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गरिनेछ।
|
| 197 |
+
|
| 198 |
+
---
|
| 199 |
+
|
| 200 |
+
## परिच्छेद - ५
|
| 201 |
+
### अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा रजिष्ट्रारको काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 202 |
+
|
| 203 |
+
**२५. अध्यक्षको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 204 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएका काम, कर्तव्य तथा अधिकारको अतिरिक्त अध्यक्षको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
|
| 205 |
+
(क) परिषद्को बैठकमा छलफल गरिने विषयहरूको प्राथमिकता निर्धारण गर्ने,
|
| 206 |
+
(ख) परिषद्द्वारा संचा��ित योजना तथा कार्यक्रमहरूको अनुगमन तथा मूल्यांकन गर्ने, गराउने र तत्सम्बन्धमा आवश्यक निर्देशन दिने,
|
| 207 |
+
(ग) परिषद्को काम कारबाही व्यवस्थित, प्रभावकारी र सूचारु रूपबाट संचालन गर्ने, गराउने।
|
| 208 |
+
(घ) तोकिए बमोजिमको अन्य कार्य गर्ने।
|
| 209 |
+
|
| 210 |
+
**२६. उपाध्यक्षको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 211 |
+
अध्यक्षको अनुपस्थितिमा यस ऐन बमोजिम अध्यक्षले गर्नु पर्ने काम, कर्तव्य र अधिकारको प्रयोग गर्नु उपाध्यक्षको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 212 |
+
|
| 213 |
+
**२७. रजिष्ट्रारको नियुक्ति तथा काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 214 |
+
(१) परिषद्को काम गर्न इन्जिनियरिङ विषयमा स्नातकोपाधि प्राप्त गरी कम्तीमा दश बर्ष इन्जिनियरिङ व्यवसायमा अनुभवप्राप्त इन्जिनियरहरू मध्येबाट खुला प्रतिस्पर्धाको आधारमा नेपाल सरकारले एकजना रजिष्ट्रार नियुक्त गर्नेछ।
|
| 215 |
+
(१क) उपदफा (१) बमोजिम नियुक्त रजिष्ट्रारको पदावधि चार वर्षको हुनेछ।
|
| 216 |
+
(१ख) उपदफा (१क) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि रजिष्ट्रारको कार्य क्षमताको अभाव भएमा, खराब आचरण भएमा, इमान्दारीपूर्वक पदीय आचरण नगरेमा नेपाल सरकारले निजलाई जुनसुकै बखत पदबाट हटाउन सक्नेछ। तर त्यसरी हटाउनु अघि निजलाई सफाइ पेश गर्ने मौका दिनु पर्नेछ।
|
| 217 |
+
(२) यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएको काम, कर्तव्य तथा अधिकारको अतिरिक्त रजिष्ट्रारको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
|
| 218 |
+
(क) परिषद्को सामान्य प्रशासन र व्यवस्थापनको कार्य गर्ने,
|
| 219 |
+
(ख) परिषद्को कोषको रखदेख नियन्त्रण, सम्पत्तिको व्यवस्था र स्याहार संभारको व्यवस्था गर्ने, गराउने,
|
| 220 |
+
(ग) परिषद्को वार्षिक कार्यक्रम तथा योजना तर्जुमा गरी परिषद्मा पेश गर्ने,
|
| 221 |
+
(घ) परिषद्को वार्षिक आय व्यय तथा पुरक आय व्यय विवरण तयार गर्ने,
|
| 222 |
+
(ङ) परिषद्वाट स्वीकृत बजेट, योजना तथा कार्यक्रम कार्यान्वयन गर्ने,
|
| 223 |
+
(च) परिषद्को आन्तरिक र अन्तिम लेखा परीक्षण गर्ने व्यवस्था गराउने,
|
| 224 |
+
(छ) परिषद् र इन्जिनियरहरू बीच सम्पर्क अधिकारीको रूपमा काम गर्ने,
|
| 225 |
+
(ज) परिषद्वाट निर्देशन दिए बमोजिमको अन्य कार्यहरू गर्ने, गराउने,
|
| 226 |
+
(झ) तोकिए बमोजिमको अन्य कार्य गर्ने।
|
| 227 |
+
|
| 228 |
+
---
|
| 229 |
+
|
| 230 |
+
## परिच्छेद - ६
|
| 231 |
+
### परिषद्को कोष
|
| 232 |
+
|
| 233 |
+
**२८. परिषद्को कोष:**
|
| 234 |
+
(१) परिषद्को आफ्नो एउटा छुट्टै कोष हुनेछ।
|
| 235 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा देहाय बमोजिमका रकम रहने छन्:
|
| 236 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम,
|
| 237 |
+
(ख) स्वदेशी बा विदेशी व्यक्ति, संस्था, सरकार बा अन्तर्राष्ट्रिय संघ, संस्थाबाट ऋण, चन्दा, सहायता, अनुदान बा दान दातव्यको रूपमा प्राप्त रकम,
|
| 238 |
+
(ग) परिषद्को तर्फबाट उपलब्ध गराइएको सेवा बापत प्राप्त रकम,
|
| 239 |
+
(घ) अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त रकम।
|
| 240 |
+
(३) उपदफा (२) को खण्ड (ख) बमोजिम कुनै विदेशी व्यक्ति, संस्था, सरकार बा अन्तर्राष्ट्रिय संघ, संस्थाबाट ऋण, चन्दा सहायता, अनुदान बा दान दातव्य प्राप्त गर्नु अघि परिषद्ले नेपाल सरकारको पूर्व स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 241 |
+
(४) परिषद्को कोषमा प्राप्त हुन आएको रकम कुनै बाणिज्य बैंकमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
|
| 242 |
+
(५) परिषद्को कोष र खाताको संचालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 243 |
+
|
| 244 |
+
**२९. लेखा तथा लेखा परीक्षण:**
|
| 245 |
+
(१) परिषद्को आय व्ययको लेखा तोकिए बमोजिम राखिनेछ।
|
| 246 |
+
(२) परिषद्को लेखा परीक्षण तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 247 |
+
(३) नेपाल सरकारले चाहेमा परिषद्को हिसाब किताब जुनसुकै बखत जाँच्न बा जाँचाउन सक्नेछ।
|
| 248 |
+
|
| 249 |
+
---
|
| 250 |
+
|
| 251 |
+
## परिच्छेद - ७
|
| 252 |
+
### विविध
|
| 253 |
+
|
| 254 |
+
**२९क. व्यावसायिक आचार संहिता पालना गर्नु पर्नेः**
|
| 255 |
+
इन्जिनियरिङ व्यवसायीले देहाय बमोजिमका व्यावसायिक आचार संहिता पालना गर्नु पर्नेछ:
|
| 256 |
+
(क) बदनियत चिताई कुनै पनि काम गर्न, गराउन हुँदैन,
|
| 257 |
+
(ख) कुनै काम गर्दा लापरबाही बा हेलचेक्याइँ गर्न, गराउन हुँदैन,
|
| 258 |
+
(ग) कुनै परीक्षण गर्दा झूठा बा गलत प्रतिवेदन बा तथ्यभन्दा फरक पर्ने गरी प्रतिवेदन तयार गर्न बा सिफारिस गर्न, गराउन हुँदैन,
|
| 259 |
+
(घ) तोकिए बमोजिमका अन्य कुराहरू।
|
| 260 |
+
|
| 261 |
+
**३०. कसूर तथा दण्ड सजाय:**
|
| 262 |
+
(१) दफा ११ बमोजिम परिषद्मा नाम दर्ता नगराई इन्जिनियरिङ व्यवसाय गरेमा यस ऐन बमोजिमको कसूर गरेको मानिनेछ।
|
| 263 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कसूर गर्ने व्यक्तिलाई दशहजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा तीन महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ।
|
| 264 |
+
(२क) दफा २१क. बमोजिम परिषद्बाट मान्यता प्राप्त नगरी शिक्षण संस्था सञ्चालन गरेमा परिषद्ले तोकिए बमोजिम कारबाही गर्न सक्नेछ।
|
| 265 |
+
(३) उपदफा (२) र (२क) मा उल्लेख भएदेखि बाहेक यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको प्रतिकूल हुने गरी कुनै काम गरेमा त्यस्तो व्यक्तिलाई पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ।
|
| 266 |
+
(४) व्यावसायिक आचार संहिताको उल्लङ्घन गर्ने बा पालना नगर्ने दर्ताबाला इन्जिनियरलाई परिषद्ले देहाय बमोजिमको सजाय गर्न सक्नेछ:
|
| 267 |
+
(क) सचेत गराउने,
|
| 268 |
+
(ख) कुनै खास अवधिको लागि इन्जिनियरिङ व्यवसाय गर्न नपाउने गरी नाम दर्ता प्रमाण पत्र निलम्बन गर्ने,
|
| 269 |
+
(ग) दर्ता किताबबाट नाम हटाउने।
|
| 270 |
+
तर त्यसरी ��जाय गर्नु अघि निजलाई सफाइ पेश गर्ने मौका दिनु पर्नेछ।
|
| 271 |
+
|
| 272 |
+
**३०क. पुनरावेदन:**
|
| 273 |
+
यस ऐन बमोजिम परिषद्ले गरेको निर्णय उपर चित्त नबुझ्ने पक्षले निर्णयको जानकारी पाएको मितिले पैतीस दिनभित्र सम्बन्धित उच्च अदालतमा पुनरावेदन दिन सक्नेछ।
|
| 274 |
+
|
| 275 |
+
**३१. परिषद्को बिघटन:**
|
| 276 |
+
(१) परिषद्ले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारको प्रयोग गर्न नसकेको बा अधिकारको दुरुपयोग गरेको बा प्राप्त अधिकार भन्दा बढी अधिकार प्रयोग गरेको बा यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम परिषद्ले पालन गर्नु पर्ने कर्तव्य पालन गर्न नसकेको भन्ने नेपाल सरकारलाई लागेमा नेपाल सरकारले परिषद् बिघटन गर्न सक्नेछ।
|
| 277 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परिषद्को बिघटन भएपछि परिषद्को कोष तथा सम्पत्ति नेपाल सरकारले आफनो जिम्मामा राखी अर्को परिषद् गठन नभएसम्म यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम परिषद्ले गर्नु पर्ने सबै काम कारबाही आफैले गर्न बा एक समिति गठन गरी सो समितिबाट गराउन सक्नेछ।
|
| 278 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम परिषद् बिघटन भएको साधारणतया तीन महिनाभित्र नेपाल सरकारले दफा ४ बमोजिम अर्को परिषद् गठन गर्नेछ।
|
| 279 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम अर्को परिषद् गठन भएपछि उपदफा (२) बमोजिम नेपाल सरकारले आफनो जिम्मामा राखेको कोष तथा सम्पत्ति उक्त परिषद्लाई हस्तान्तरण गर्नेछ।
|
| 280 |
+
|
| 281 |
+
**३२. विषय समिति तथा अन्य समिति गठन गर्न सक्नेः**
|
| 282 |
+
(१) परिषद्ले आवश्यकता अनुसार विषय समिति तथा अन्य समिति गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 283 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठन भएका विषय समिति तथा समितिको काम, कर्तव्य तथा अधिकार परिषद्ले तोकिदिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 284 |
+
|
| 285 |
+
**३३. सदस्यको बैठक भत्ता तथा अन्य सुविधा:**
|
| 286 |
+
सदस्य तथा दफा ३२ बमोजिम गठन भएका विषय समिति तथा अन्य समितिका सदस्यको बैठक भत्ता तथा अन्य सुविधा तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 287 |
+
|
| 288 |
+
**३४. परिषद्को कर्मचारी:**
|
| 289 |
+
(१) परिषद्ले आवश्यकता अनुसार कर्मचारीको नियुक्ति गर्न सक्नेछ।
|
| 290 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नियुक्त कर्मचारीको सेवा, शर्त तथा सुविधा विनियममा तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 291 |
+
|
| 292 |
+
**३५. अनुसन्धान तहकिकात तथा मुद्दा चलाउने अधिकारी:**
|
| 293 |
+
दफा ३० बमोजिमको कसूरको अनुसन्धान तहकिकात गर्ने, मुद्दा चलाउने अधिकारी बा निकाय र तत्सम्बन्धी कार्यविधि नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकिदिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 294 |
+
|
| 295 |
+
**३६. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 296 |
+
परिषद्ले नेपा�� सरकारसँग सम्पर्क राख्दा "नेपाल सरकारको भौतिक पूर्वाधार सम्बन्धी विषय हेर्ने मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
|
| 297 |
+
|
| 298 |
+
**३७. नियम विनियम निर्देशिका कार्यविधि र मापदण्ड बनाउन सक्नेः**
|
| 299 |
+
(१) यो ऐन कार्यान्वयन गर्न परिषद्ले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 300 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बनाएको नियम नेपाल सरकारबाट स्वीकृत भएपछि लागू हुनेछ।
|
| 301 |
+
(३) यो ऐन र उपदफा (१) बमोजिम बनेको नियम बिपरीत नहुने गरी परिषद्ले आवश्यक विनियम, निर्देशिका, कार्यविधि र मापदण्ड बनाउन सक्नेछ।
|
| 302 |
+
(४) यस ऐन बमोजिम परिषद्ले बनाएको नियम, विनियम, निर्देशिका, कार्यविधि र मापदण्ड सर्वसाधारणको जानकारीको लागि सार्वजनिक गर्नु पर्नेछ।
|
| 303 |
+
|
| 304 |
+
**३७क. वार्षिक प्रतिवेदन पेश गर्नु पर्नेः**
|
| 305 |
+
(१) परिषद्ले आफूले वर्षभरि सम्पादन गरेको कामको संक्षिप्त विवरण, प्रशासकीय खर्च, आय-व्ययको विवरण तथा भविष्यमा सञ्चालन गर्ने कार्यक्रम समेत समावेश गरी प्रत्येक वर्षको असोज महिनाभित्र नेपाल सरकार समक्ष प्रतिवेदन पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 306 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको प्रतिवेदन परिषद्ले सार्वजनिक समेत गर्नु पर्नेछ।
|
| 307 |
+
|
| 308 |
+
**३७ख. नेपाल सरकारले परिषद्लाई आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेः**
|
| 309 |
+
(१) नेपाल सरकारले परिषद्को काम कारबाहीलाई प्रभावकारी बनाउन आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 310 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नेपाल सरकारले दिएको निर्देशनको पालन गर्न परिषद्को कर्तव्य हुनेछ।
|
| 311 |
+
|
| 312 |
+
**३८. अनुसूचीमा थप गर्न सक्नेः**
|
| 313 |
+
नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी अनुसूचीमा आवश्यकता अनुसार इन्जिनियरिङ विषय थप गर्न सक्नेछ।
|
| 314 |
+
|
| 315 |
+
---
|
| 316 |
+
|
| 317 |
+
## अनुसूची
|
| 318 |
+
(दफा २ को खण्ड (ङ) सँग सम्बन्धित)
|
| 319 |
+
|
| 320 |
+
### इन्जिनियरिङ व्यवसाय
|
| 321 |
+
|
| 322 |
+
१. सिभिल इन्जिनियरिङ
|
| 323 |
+
(क) जनरल
|
| 324 |
+
(ख) हाईवे
|
| 325 |
+
(ग) स्यानीटरी
|
| 326 |
+
(घ) बिल्डिङ एण्ड आर्किटेक्ट
|
| 327 |
+
(ङ) इरिगेशन
|
| 328 |
+
(च) हाइड्रोलोजी
|
| 329 |
+
(छ) हाइड्रोपावर
|
| 330 |
+
(ज) एअरपोर्ट
|
| 331 |
+
|
| 332 |
+
२. इलेक्ट्रिकल
|
| 333 |
+
(क) जनरल इलेक्ट्रिकल
|
| 334 |
+
(ख) एभिएशन इलेक्ट्रिकल
|
| 335 |
+
(ग) इलेक्ट्रिकल एण्ड कम्प्युटर इन्जिनियरिङ
|
| 336 |
+
|
| 337 |
+
३. इलेक्ट्रोनिक एण्ड कम्युनिकेशन
|
| 338 |
+
|
| 339 |
+
४. मेकानिकल
|
| 340 |
+
(क) जनरल मेकानिकल
|
| 341 |
+
(ख) एभिएसन मेकानिकल
|
| 342 |
+
(ग) निर्माण उपकरण संभार
|
| 343 |
+
(घ) प्रोडक्सन इन्जिनियरिङ
|
| 344 |
+
|
| 345 |
+
५. एरोनटिकल
|
| 346 |
+
|
| 347 |
+
६. माइनिङ
|
| 348 |
+
|
| 349 |
+
७. केमिकल
|
| 350 |
+
(क) केमिकल इन्जिनियरिङ
|
| 351 |
+
(ख) केमिकल इन्जिनियरिङ एण्ड पोलिमर साइन्स
|
| 352 |
+
|
| 353 |
+
८. मेटालर्जिकल
|
| 354 |
+
|
| 355 |
+
९. मेट्रोलोजी
|
| 356 |
+
|
| 357 |
+
१०. मेटिरियोलोजी
|
| 358 |
+
|
| 359 |
+
११. जियोलोजी
|
| 360 |
+
(क) जनरल
|
| 361 |
+
(ख) हाइड्रोजियोलोजी
|
| 362 |
+
(ग) इन्जिनियरिङ जियोलोजी
|
| 363 |
+
|
| 364 |
+
१२. सिभिल एभिएसन अपरेशन एण्ड इन्जिनियरिङ
|
| 365 |
+
(क) सिभिल एभिएसन अपरेशन
|
| 366 |
+
(ख) फ्लाइट अपरेशन
|
| 367 |
+
(ग) एभिएसन फायर सर्भिसेज
|
| 368 |
+
|
| 369 |
+
१३. सर्भे
|
| 370 |
+
|
| 371 |
+
१४. केमेट्री
|
| 372 |
+
|
| 373 |
+
१५. एग्री इरिगेशन इन्जिनियरिङ
|
| 374 |
+
|
| 375 |
+
१६. टेक्सटाईल इन्जिनियरिङ
|
| 376 |
+
|
| 377 |
+
१७. इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड कम्प्यूटर साइन्स
|
| 378 |
+
|
| 379 |
+
१८. कम्प्यूटर इन्जिनियरिङ
|
| 380 |
+
(क) कम्प्यूटर इन्जिनियरिङ
|
| 381 |
+
(ख) इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड कम्प्यूटर साइन्स
|
| 382 |
+
(ग) कम्प्यूटर एण्ड कम्यूनिकेशन इन्जिनियरिङ
|
| 383 |
+
|
| 384 |
+
१९. इन्भाइरोमेन्टल इन्जिनियरिङ
|
| 385 |
+
|
| 386 |
+
२०. अटोमोबाइल इन्जिनियरिङ
|
| 387 |
+
|
| 388 |
+
२१. ईण्डह्रियल इन्जिनियरिङ
|
| 389 |
+
|
| 390 |
+
२२. रेडियो इन्जिनियरिङ
|
| 391 |
+
|
| 392 |
+
२३. सिस्टम इन्जिनियरिङ
|
| 393 |
+
|
| 394 |
+
२४. अटोमेशन इन्जिनियरिङ
|
| 395 |
+
|
| 396 |
+
२५. बेचलर अफ अर्वान एण्ड फिजिकल प्लानिङ
|
| 397 |
+
|
| 398 |
+
२६. जियोटेक्निकल इन्जिनियरिङ
|
| 399 |
+
|
| 400 |
+
२७. फरेष्ट्री इन्जिनियरिङ
|
| 401 |
+
|
| 402 |
+
२८. एग्रिकल्चर इन्जिनियरिङ
|
| 403 |
+
|
| 404 |
+
२९. इनर्जी इन्जिनियरिङ
|
| 405 |
+
|
| 406 |
+
३०. इन्फरमेशन टेक्लोलोजी एण्ड टेलिकम्युनिकेशन इन्जिनियरिङ
|
| 407 |
+
|
| 408 |
+
३१. अर्थक्वेक इन्जिनियरिङ
|
| 409 |
+
|
| 410 |
+
३२. आर्किटेक्ट इन्जिनियरिङ
|
| 411 |
+
|
| 412 |
+
३३. इलेक्ट्रिकल एण्ड इलेक्ट्रोनिक्स इन्जिनियरिङ
|
| 413 |
+
|
| 414 |
+
३४. इलेक्ट्रोनिक्स
|
| 415 |
+
(क) इलेक्ट्रोनिक्स इन्जिनियरिङ
|
| 416 |
+
(ख) इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड इन्स्टुमेन्टेशन
|
| 417 |
+
|
| 418 |
+
३५. एभियोनिक्स इन्जिनियरिङ
|
| 419 |
+
|
| 420 |
+
३६. म्यानुफ्याक्चरिङ साइन्स एण्ड इन्जिनियरिङ
|
| 421 |
+
|
| 422 |
+
३७. इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड टेलिकम्यूनिकेशन इन्जिनियरिङ
|
| 423 |
+
|
| 424 |
+
३८. साउण्ड एण्ड भिडियो इन्जिनियरिङ
|
| 425 |
+
|
| 426 |
+
३९. इण्डष्ट्रियल इलेक्ट्रोनिक्स इन्जिनियरिङ
|
| 427 |
+
|
| 428 |
+
४०. सफ्टबेर इन्जिनियरिङ
|
| 429 |
+
|
| 430 |
+
४१. इन्स्टुमेन्टेशन इन्जिनियरिङ
|
| 431 |
+
|
| 432 |
+
४२. इन्फरमेसन टेक्नोलोजी
|
| 433 |
+
|
| 434 |
+
४३. बायोमेडिकल इन्जिनियरिङ
|
| 435 |
+
(क) बायोमेडिकल इन्जिनियरिङ
|
| 436 |
+
(ख) मेडिकल इलेक्ट्रोनिक्स
|
| 437 |
+
|
| 438 |
+
४४. जियोम्याटिक्स इन्जिनियरिङ
|
| 439 |
+
|
| 440 |
+
४५. फूड इन्जिनियरिङ
|
| 441 |
+
|
| 442 |
+
४६. सिभिल एण्ड रुरल इन्जिनियरिङ
|
| 443 |
+
|
| 444 |
+
४७. बायोटेक्नोलोजी
|
| 445 |
+
|
| 446 |
+
४८. इलेक्ट्रोमेकानिकल
|
| 447 |
+
|
| 448 |
+
४९. पेट्रोलियम इन्जिनियरिङ
|
| 449 |
+
|
| 450 |
+
५०. मेकाट्रोनिक्स इन्जिनियरिङ
|
| 451 |
+
|
| 452 |
+
५१. हाइटेकप्लासमा एण्ड प्लान्ट्स इन्जिनियरिङ
|
| 453 |
+
|
| 454 |
+
५२. ब्याचलर अफ इन्जिनियरिङ साइन्स एण्ड टेक्नोलोजी अफ बिपेनरी
|
| 455 |
+
|
| 456 |
+
५३. Genetic Engineering
|
| 457 |
+
|
| 458 |
+
५४. Logistic Engineering
|
| 459 |
+
|
| 460 |
+
५५. ब्याचलर अफ हाइड्रोपावर इन्जिनियरिङ
|
| 461 |
+
|
| 462 |
+
५६. मेटेरियल साइन्स एण्ड इन्जिनियरिङ
|
| 463 |
+
|
| 464 |
+
५७. एयरस्पेस इन्जिनियरिङ
|
| 465 |
+
|
| 466 |
+
५८. इलेक्ट्रोनिक्स, कम्युनिकेशन एण्ड इनफरमेशन इन्जिनियरिङ
|
| 467 |
+
|
| 468 |
+
५९. इलेक्ट्रोनिक्स, कम्युनिकेशन एण्ड अटोमेशन इन्जिनियरिङ
|
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ADDED
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| 1 |
+
# नेपाल पशु चिकित्सा परिषद् ऐन, २०४४
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| 2 |
+
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| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
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| 4 |
+
२०४४।११।२७
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| 5 |
+
9. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून
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| 6 |
+
संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
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| 7 |
+
२०६६।१०। ७
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| 8 |
+
२. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई
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| 9 |
+
संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
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| 10 |
+
२०७४।११।१९
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| 11 |
+
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| 12 |
+
२०४४ सालको ऐन नं. २४
|
| 13 |
+
$\times$ $\qquad$
|
| 14 |
+
नेपाल पशु चिकित्सा परिषद् सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 15 |
+
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| 16 |
+
प्रस्तावना : नेपाल $\times$ $\qquad$ मा पशु चिकित्सा व्यवसायलाई प्रभावकारी बनाई व्यवस्थित गराउन तथा पशु चिकित्सकहरुको योग्यता अनुसार नाम दर्ता समेतको व्यवस्था गर्नको लागि नेपाल पशु चिकित्सा परिषद्को स्थापना गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 17 |
+
|
| 18 |
+
थी ४ महाराजाधिराज वीरुन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको सत्ताइसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएकोछ ।
|
| 19 |
+
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| 20 |
+
## परिच्छेद - १
|
| 21 |
+
प्रारम्भिक
|
| 22 |
+
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| 23 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ : (१) यस ऐनको नाम "नेपाल पशु चिकित्सा परिषद् ऐन, २०४४" रहेकोछ ।
|
| 24 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ ।
|
| 25 |
+
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| 26 |
+
२. परिभाषा : बिषय बा प्रसँगले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,-
|
| 27 |
+
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| 28 |
+
[^0]
|
| 29 |
+
[^0]: - यो ऐन संबत् २०६४ साल जेठ १४ गतेदेखि लागू भएको ।
|
| 30 |
+
$\times$ गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा झिकिएको ।
|
| 31 |
+
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| 32 |
+
(क) "परिषद्" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको नेपाल पशु चिकित्सा परिषद् सम्झनु पर्छ ।
|
| 33 |
+
(ख) "अध्यक्ष" भन्नाले परिषद्को अध्यक्ष सम्झनु पर्छ ।
|
| 34 |
+
(ग) "सदस्य" भन्नाले परिषद्को सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले परिषद्को अध्यक्ष र उपाध्यक्ष समेतलाई जनाउँछ ।
|
| 35 |
+
(घ) "दर्ता किताब" भन्नाले यस ऐन बमोजिम पशु चिकित्सकहरुको नाम दर्ता गर्ने किताब सम्झनु पर्छ ।
|
| 36 |
+
(ङ) "दर्ताबाल पशु चिकित्सक" भन्नाले दर्ता किताबमा नाम दर्ता भएको पशु चिकित्सक सम्झनु पर्छ ।
|
| 37 |
+
(च) "पशु चिकित्सक" भन्नाले परिषद्वाट मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु चिकित्सा विषयमा कम्तीमा स्नातकोपाधि प्राप्त गरेको व्यक्ति सम्झनु पर्छ ।
|
| 38 |
+
(छ) "रजिष्ट्रार" भन्नाले दफा १९, बमोजिम नियुक्त रजिष्ट्रार सम्झनु पर्छ ।
|
| 39 |
+
(ज) "पशु औषधि" भन्नाले पशुको रोगको निदान, उपचार बा नियन्त्रण गर्ने काममा प्रयोग हुने जुनसुकै पदार्थ, हार्मोन बा जैविक पदार्थ सम्झनु पर्छ र सो शब्दले पशु दानामा प्रयोग गरिने प्रोटिन, लबण बा भिटामिन समेतलाई जनाउँछ ।
|
| 40 |
+
(झ) "पशु" भन्नाले जनाबर, पंक्षी र माझा समेत सम्झनु पर्छ ।
|
| 41 |
+
(ज) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ��न अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ ।
|
| 42 |
+
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| 43 |
+
# परिच्छेद - २
|
| 44 |
+
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| 45 |
+
## परिषद्को स्थापना, गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 46 |
+
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| 47 |
+
३. परिषद्को स्थापना : पशु चिकित्सा व्यवसायलाई प्रभावकारी बनाई व्यवस्थित गराउन, वैज्ञानिक ढङ्गले परिचालन गर्न तथा पशु चिकित्सकहरुको योग्यता अनुसार नाम दर्ता गर्ने समेतको व्यवस्था गर्न नेपाल पशु चिकित्सा परिषद्को स्थापना गरिएकोछ ।
|
| 48 |
+
|
| 49 |
+
४. परिषद् स्वशासित संस्था हुने : (१) परिषद् अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र सँगटित संस्था हुनेछ ।
|
| 50 |
+
(२) परिषद्को सम्पूर्ण काम कारबाहीको लागि आफनो छुट्टै छाप हुनेछ ।
|
| 51 |
+
|
| 52 |
+
(३) परिषद्ले व्यक्ति सरह चल अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेच बिखन गर्न बा अन्य किसिमले व्यवस्था गर्न सक्नेछ ।
|
| 53 |
+
(४) परिषद्ले व्यक्ति सरह आफनो नामबाट नालेस उजूर गर्न र परिषद् उपर पनि सोही नामबाट नालेस उजूर लाग्न सक्नेछ ।
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
५. परिषद्को गठन : (१) दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको परिषद्मा देहाय बमोजिमका सदस्यहरु रहने छन् :-
|
| 56 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट मनोनीत "क" श्रेणीको दर्ताबाल पशु चिकित्सक
|
| 57 |
+
(ख) दर्ताबाल पशु चिकित्सकहरु मध्येबाट निर्बाचित दुर्द्रजना पशु चिकित्सक
|
| 58 |
+
(ग) नेपाल सरकारबाट मनोनीत कम्तीमा "ख" श्रेणीको दर्ताबाल पशु चिकित्सक दुर्द्रजना
|
| 59 |
+
(घ) दर्ताबाल पशु चिकित्सकहरु मध्येबाट निर्बाचित पाँचजना पशु चिकित्सक
|
| 60 |
+
(ङ) अध्यक्ष, नेपाल भेटेनरी एसोसिएशन - सदस्य
|
| 61 |
+
|
| 62 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परिषद्को गठन नभएसम्मको लागि परिषद्ले गर्नु पर्ने काम गर्ने गरी नेपाल सरकारले समिति गठन गर्न सक्नेछ । त्यसरी गठन भएको समिति एक वर्षभन्दा बढी अबधिको लागि कायम हुने छैन ।
|
| 63 |
+
|
| 64 |
+
६. सदस्यको पदाबधि : (१) दफा ५ को उपदफा (१) को खण्ड (क), (ख), (ग) र (घ) बमोजिमको सदस्यहरुको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ । पदाबधि समाप्त भएका सदस्यहरु यस एनमा लेखिएका अन्य कुराहरुको अधीनमा रही पुनः मनोनीत बा निर्बाचित हुन सक्ने छन् ।
|
| 65 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको पदाबधि समाप्त नहुँदै कुनै सदस्यको पद रिक्त हुन आएमा त्यस्तो रिक्त हुन आएको सदस्यको पद बाँकी अबधिको लागि मनोनयन बा निर्बाचनद्वारा पूर्ति गर्न सकिनेछ । तर छ महिनाभन्दा कम अबधिको लागि निर्बाचन बा मनोनयन गरिने छैन ।
|
| 66 |
+
|
| 67 |
+
७. सदस्यको निमित्त अयोग्यता : देहायको कुनै व्यक्ति परिषद्को सदस्य पदमा मनोनीत बा निर्बाचित हुन सक्ने छैन :-
|
| 68 |
+
(क) गैर नेपाली नागरिक,
|
| 69 |
+
(ख) दर्ता किताबबाट नाम हटाइएको,
|
| 70 |
+
(ग) साहुको ऋण तिर्न नसकी दामासाहीमा परेको,
|
| 71 |
+
(घ) नैतिक पतन देखिने फौजदारी अभियोगमा अदालतबाट कसरदार ठहरी सजाय पाएको, र
|
| 72 |
+
(ङ) मगज बिग्रेको ।
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
८. परिषद्को सदस्यता कायम नरहने : देहायको अबस्थामा परिषद्को सदस्यता कायम रहने छैन :-
|
| 75 |
+
(क) दफा ७ बमोजिम अयोग्य भएमा,
|
| 76 |
+
(ख) सदस्यको पदबाट दिएको राजीनामा स्वीकृत भएमा,
|
| 77 |
+
(ग) परिषद्लाई कारण सहितको पूर्व सूचना नदिई लगातार तीन पटकसम्म परिषद्को बैटकमा अनुपस्थित भएमा,
|
| 78 |
+
(घ) मृत्यु भएमा ।
|
| 79 |
+
|
| 80 |
+
९. परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार : परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ :-
|
| 81 |
+
(क) पशु चिकित्सा व्यवसाय सुचारु रुपबाट सञ्चालन गर्नको लागि आवश्यक नीति, योजना तथा कार्यकमहरु तयार गरी त्यसको कार्यान्वयन गर्ने ।
|
| 82 |
+
(ख) पशु स्वास्थ्य सेवा र तत्सम्बन्धी प्रणालीलाई सुव्यवस्थित, स्तरीय, मर्यादापूर्ण र प्रभावकारी बनाउन आवश्यक नीति, कार्ययोजना तथा कार्यकमहरु तर्जुमा गरी कार्यान्वयनको लागि नेपाल सरकार समक्ष पेश गर्ने ।
|
| 83 |
+
(ग) पशु औषधि, जैविक पदार्थ, पशुको दाना, चल्ला तथा पशु उत्पादन सामग्रीलाई गुणस्तरयुक्त बनाउन आवश्यक पर्ने मापदण्ड तयार गर्न नेपाल सरकारलाई बुझाव दिने ।
|
| 84 |
+
|
| 85 |
+
(घ) पशु चिकित्सकहरुको योग्यता निर्धारण गर्ने र त्यसरी निर्धारित योग्यता पूरा गरेका पशु चिकित्सकहरुको नाम दर्ता गरी अघाबधिक अभिलेख राख्ने ।
|
| 86 |
+
(ङ) दर्ताबाल पशु चिकित्सकहरुले पालन गर्नु पर्ने आचार संहिता तयार गरी लागू गर्ने ।
|
| 87 |
+
(च) पशु चिकित्सा शिक्षा दिने शिक्षण संस्था र त्यस्ता संस्थाहरुले प्रदान गरेका प्रमाणपत्र तथा उपाधिहरुलाई तोकिए बमोजिम मान्यता दिने ।
|
| 88 |
+
(छ) पशु चिकित्सा र पशु स्वास्थ्यसँग सम्बन्धित विषयमा नेपाल सरकारलाई आवश्यक परामर्श दिने ।
|
| 89 |
+
(ज) पशु औषधिको खोज बा आविष्कार गर्ने कार्यमा प्रयत्नशील रहने ।
|
| 90 |
+
(झ) अन्तर्राष्ट्रिय क्षेत्रमा हासिल गरिएका पशु चिकित्सासँग सम्बन्धित अनुसन्धान बा अनुभवहरुको आदान प्रदान गरी नेपालको लागि उपयुक्त हुने कुराहरु लागू गर्न नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने ।
|
| 91 |
+
(ज) दर्ताबाल पशु चिकित्सकले आचार संहिताको पालन नगरेमा तोकिए बमोजिमको कार्यबिधि पूरा गरी त्यस्तो पशु चिकित्सकको नाम परिषद्द्वारा हटाउने ।
|
| 92 |
+
(ट) परिषद्को उद्देश्य प्राम्रिको लागि आवश्यक पर्ने अन्य कार्यहरु गर्ने ।
|
| 93 |
+
|
| 94 |
+
१०. परिषद्को बैठक र निर्णय : (१) परिषद्को बैठक साधारणतया बर्षमा चारपटक बस्नेछ ।
|
| 95 |
+
(२) परिषद्को बैठक अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ ।
|
| 96 |
+
(३) परिषद्को कूल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्यहरु उपस्थित भएमा परिषद्को बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ ।
|
| 97 |
+
(४) परिषद्को बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले र निजको अनुपस्थितिमा उपाध्यक्षले गर्नेछ। अध्यक्ष र उपाध्यक्ष दुबैको अनुपस्थितिमा बैठकमा उपस्थित सदस्यहरुले आफूमध्येबाट छानेको व्यक्तिले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ ।
|
| 98 |
+
(५) परिषद्को बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ । मत बराबर भएमा बैठकको अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णायक मत दिन सक्नेछ ।
|
| 99 |
+
(६) परिषद्को निर्णय रजिष्ट्रारद्वारा प्रमाणित गरिनेछ ।
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
(७) परिषद्को बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि परिषद् आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ ।
|
| 102 |
+
|
| 103 |
+
# परिच्छेद - ३
|
| 104 |
+
नाम दर्ता सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
११. नाम दर्ता नगराई व्यवसाय गर्न नहुने : यो ऐन प्रारम्भ भएको मितिले एक वर्षपछि परिषद्मा नाम दर्ता नगराएको कुनै पनि व्यक्तिले पशु चिकित्सा व्यवसाय गर्न हुँदैन ।
|
| 107 |
+
|
| 108 |
+
१२. नाम दर्ताको लागि दरखास्त दिने : (१) परिषद्मा नाम दर्ता गराउन चाहने व्यक्तिले तोकिए बमोजिमको ढाँचामा परिषद् समक्ष दरखास्त दिनु पर्नेछ ।
|
| 109 |
+
(२) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत पशु चिकित्सा व्यवसाय गरिरहेका व्यक्तिले यो ऐन प्रारम्भ भएको मितिले छ महिनाभित्र परिषद् समक्ष नाम दर्ता गराउनका लागि उपदफा (१) बमोजिम दरखास्त दिनु पर्नेछ ।
|
| 110 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम नाम दर्ता गराउन दरखास्त दिने व्यक्तिले दरखास्त साथ आफूले प्राप्त गरेका प्रमाणपत्र, उपाधि तथा तत्सम्बन्धी अन्य कागजात र तोकिए बमोजिमको दस्तुर संलग्न गर्नु पर्नेछ ।
|
| 111 |
+
|
| 112 |
+
१३. दरखास्त उपर कारबाही र दर्ताको प्रमाणपत्र : (१) दफा १२ बमोजिम पर्न आएको दरखास्त उपर रजिष्ट्रारले आवश्यक जाँचबुझ गरी दर्ता किताबमा नाम दर्ता गर्न सम्बन्धित समितिमा पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 113 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश हुन आएको दरखास्त उपर सम्बन्धित समितिले योग्यता सम्बन्धी उपाधि मान्यता प्राप्त हो होइन र दरखास्त रीतपूर्वकको छ छैन भन्ने कुराको समेत जाँचबुझ गरी पन्ध्र दिनभित्र परिषद् समक्ष प्रतिबेदन पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 114 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम समितिले पेश गरेको प्रतिबेदनको आधारमा परिषद्ले दरखास्तबालाको नाम दर्ता किताबमा दर्���ा गर्ने नगर्ने कुराको निर्णय गर्नेछ ।
|
| 115 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम परिषद्ले दरखास्तबालाको नाम दर्ता हुने निर्णय गरेकोमा रजिष्ट्रारले त्यस्तो दरखास्तबालाको नाम दर्ता किताबमा दर्ता गरी निजलाई तोकिएको ढाँचामा दर्ताको प्रमाणपत्र दिनु पर्नेछ । परिषद्ले दरखास्तवालाको नाम दर्ता नगर्ने निर्णय गरेकोमा रजिष्ट्रारले त्यसको जानकारी दरखास्तवालालाई दिनु पर्नेछ ।
|
| 116 |
+
|
| 117 |
+
# १४. दर्ता किताबबाट नाम हटाउने र पुनः दर्ता गर्ने : (१) देहायको अवस्थामा बाहेक दर्ताबाल पशु चिकित्सकको नाम दर्ता किताबबाट हटाइने छैन :-
|
| 118 |
+
(क) मगज बिग्रेको,
|
| 119 |
+
(ख) नैतिक पतन देखिने फाँज्दारी अभियोगमा अदालतबाट सजाय पाएको,
|
| 120 |
+
(ग) साहुको ऋण तिर्न नसकी दामासाहीमा परेको,
|
| 121 |
+
(घ) आचार संहिता पालन नगरेको भनी परिषद्को दुई तिहाई बहुमतले प्रस्ताव पारित गरेको ।
|
| 122 |
+
|
| 123 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (क), (ग) र (घ) बमोजिमको अवस्था परी दर्ता किताबबाट नाम हटाइएको पशु चिकित्सकले मनासिब माफिकको कारण देखाई पुनः नाम दर्ता गराउन दरखास्त दिएमा र परिषद्ले निजको नाम पुनः दर्ता गर्न मनासिब देखेमा परिषद्को दुई तिहाई बहुमतको निर्णयबाट नाम दर्ता गर्ने आदेश दिन सक्नेछ ।
|
| 124 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम आदेश भएमा रजिष्ट्रारले तोकिए बमोजिमको दस्तुर लिई त्यस्तो पशु चिकित्सकको नाम दर्ता किताबमा पुनः दर्ता गरी प्रमाणपत्र दिनु पर्नेछ ।
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
## १४. प्रमाणपत्र रद्द गर्ने : धोखा वा गन्तीले कुनै व्यत्तिको नाम दर्ता किताबमा दर्ता हुन गएको रहेछ भन्ने कुराको जानकारी हुन आई सो कुरा जाँचबुझ गर्दा साँचो टहरिन आएमा परिषद्ले त्यस्तो व्यत्तिको दर्ताको प्रमाणपत्र रद्द गर्न सक्नेछ ।
|
| 127 |
+
|
| 128 |
+
## १६. पशु चिकित्सकहरुको श्रेणी : यस ऐन बमोजिम पशु चिकित्सकहरुको नाम दर्ता गर्ने प्रयोजनको लागि देहाय बमोजिमको योग्यता भएका पशु चिकित्सकहरुलाई देहाय बमोजिमको श्रेणीमा राखिएकोछ :-
|
| 129 |
+
(क) "क श्रेणी" : मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु चिकित्सा विज्ञानमा बिघाबारिधि उपाधि हासिल गरी सम्बन्धित क्षेत्रमा कम्तीमा सात बर्षको अनुभव भएको वा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु चिकित्सा विज्ञानमा स्नातकोत्तर उपाधि हासिल गरी सम्बन्धित क्षेत्रमा कम्तीमा दश बर्षको अनुभव भएको बा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु चिकित्सा विज्ञानमा स्नातक उपाधि हासिल गरी सम्बन्धित क्षेत्रमा कम्तीमा पन्ध्र बर्षको अनुभव भएको बा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु चिकित्सा विज्ञानमा स्नातक उपाधि हासिल गरी नेपाल सरकारको सेबामा कम्तीमा राजपत्रांकित प्रथम श्रेणी बा सो सरहको पदमा बा विश्वविद्यालयमा कम्तीमा सहप्राध्यापकको पदमा कार्यरत पशु चिकित्सक ।
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
(ख) "ख श्रेणी" : मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु चिकित्सा विज्ञानमा बिघाबारिधि उपाधि हासिल गरी सम्बन्धित क्षेत्रमा कम्तीमा पाँच बर्षको अनुभव भएको बा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट स्नातकोत्तर उपाधि हासिल गरी सम्बन्धित क्षेत्रमा कम्तीमा सात बर्षको अनुभव भएको बा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु चिकित्सा विज्ञानमा स्नातक उपाधि हासिल गरी सम्बन्धित क्षेत्रमा कम्तीमा दश बर्षको अनुभव भएको बा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु चिकित्सा विज्ञानमा स्नातक उपाधि हासिल गरी नेपाल सरकारको सेबामा कम्तीमा राजपत्रांकित द्वितीय श्रेणीको पदमा बा बिश्विद्यालयमा कम्तीमा उपप्राध्यापकको पदमा कार्यरत पशु चिकित्सक ।
|
| 132 |
+
|
| 133 |
+
(ग) "ग श्रेणी": मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु चिकित्सा विज्ञानमा कम्तीमा स्नातक उपाधि हासिल गरेको पशु चिकित्सक ।
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| 134 |
+
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| 135 |
+
१७. मान्यताको लागि दरखास्त दिने : (१) कुनै शिक्षण संस्थाबाट पशु चिकित्सा सम्बन्धी बिषयमा डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाणपत्र बा यस्तै अन्य उपाधि प्राप्त गर्ने व्यक्तिले सोको मान्यताको लागि परिषद् समक्ष तोकिए बमोजिम दरखास्त दिनु पर्नेछ ।
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| 136 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको दरखास्त उपर ज्ञानबिन गरी परिषद्ले मान्यता दिएको डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाणपत्र बा अन्य उपाधि प्रदान गर्ने शिक्षण संस्थाको नाम नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गरिनेछ ।
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| 137 |
+
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| 138 |
+
१६. व्यवसाय छाडेमा बा ठेगाना बदलेमा सूचना गर्नु पर्ने : कुनै दर्ताबाल पशु चिकित्सकले आफनो व्यवसाय छाडेमा बा ठेगाना परिवर्तन गरेमा एक महिनाभित्र रजिष्ट्रारलाई सूचना गर्नु पर्नेछ ।
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| 139 |
+
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| 140 |
+
# परिच्छेद - ४
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| 141 |
+
कर्मचारी सम्बन्धी व्यवस्था
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| 142 |
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१९. रजिष्ट्रारको नियुक्ति तथा काम, कर्तव्य र अधिकार : (१) परिषद्मा नाम दर्ता भै तोकिएको योग्यता पुगेका व्यक्तिहरु मध्येबाट नेपाल सरकारले परिषद्को रजिष्ट्रार नियुक्त गर्न सक्नेछ ।
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| 144 |
+
(२) रजिष्ट्रार परिषद्को प्रमुख प्रशासकीय अधिकृतको रुपमा रहनेछ ।
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| 145 |
+
(३) रजिष्ट्रारको पारिश्रमिक, सेबाको शर्त तथा सुविधाहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 146 |
+
(४) यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएका कुराको अतिरिक्त रजिष्ट्रारको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
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| 147 |
+
(क) पशु चिकित्सकद्वारा नाम दर्ताको लागि पेश गरिएका दरखास्तहरु सम्बन्धित समितिमा पेश गर्ने ।
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| 148 |
+
(ख) परिषदद्वारा गरिएका निर्णयहरु कार्यान्वयन गर्ने गराउने ।
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| 149 |
+
(ग) परिषदद्वारा पशु चिकित्सकको रुपमा नाम दर्ता गर्ने निर्णय गरे बमोजिम पशु चिकित्सकहरुको नाम दर्ता किताबमा चढाउने ।
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| 150 |
+
(घ) कुनै दर्ताबाल पशु चिकित्सकको मृत्यु भएमा निजको नाम दर्ता किताबबाट हटाउने ।
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| 151 |
+
(ङ) दर्ताबाल पशु चिकित्सकले व्यवसाय छाडेको बा टेगाना बदलेको सूचना प्राप्त भएमा दर्ता किताबमा जनाउने ।
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| 152 |
+
(च) परिषद्को निर्णय प्रमाणित गर्ने ।
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| 153 |
+
(४) रजिष्ट्रारको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार परिषद्ले तोके बमोजिम हुनेछ ।
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| 154 |
+
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+
२०. परिषद्का कर्मचारी : (१) परिषद्ले आफनो आर्थिक स्रोतबाट तलब, भत्ता तथा अन्य सुविधाहरु उपलब्ध गराउने गरी परिषद्को कार्य सञ्चालनको लागि आवश्यक संख्यामा कर्मचारीहरु नियुक्त गर्न सक्नेछ ।
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| 156 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नियुक्त कर्मचारीहरु रजिष्ट्रारको रेखदेख र नियन्त्रणमा रहने छन् ।
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| 157 |
+
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+
(३) उपदफा (१) बमोजिम नियुक्त कर्मचारीहरुको सेबाको शर्त र सुबिधाहरु बिनियममा तोकिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 159 |
+
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| 160 |
+
# परिच्छेद - ५
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| 161 |
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कोष र लेखापरीक्षण
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| 162 |
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| 163 |
+
२१. परिषद्को कोष : (१) परिषद्को एउटा छुट्टै कोष हुनेछ ।
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| 164 |
+
(२) परिषद्को सम्पूर्ण खर्च उपदफा (१) बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ ।
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| 165 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा देहायका रकमहरु रहने छुन्-
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| 166 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम,
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| 167 |
+
(ख) स्वदेशी बा विदेशी व्यक्ति, संस्था, सरकार बा अन्तर्राष्ट्रिय संघ, संस्थाबाट प्राप्त ऋण, चन्दा, अनुदान बा दान दातव्यको रुपमा प्राप्त रकम,
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| 168 |
+
(ग) परिषद्ले लगाएको विभिन्न दस्तुरबाट उठेको रकम,
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| 169 |
+
(घ) अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त रकम ।
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| 170 |
+
(४) उपदफा (३) को खण्ड (ख) बमोजिमको रकम प्राप्त गर्दा नेपाल सरकारको पूर्व स्वीकृति लिनु पर्नेछ ।
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| 171 |
+
(४) परिषद्को कोषमा प्राप्त हुन आएको रकम नेपाल $x$............ को कुनै बाणिज्य बैकमा खाता खोली जम्मा गर्नु पर्नेछ ।
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| 172 |
+
(६) परिषद्को कोष र खाताको सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 173 |
+
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| 174 |
+
२२. परिषद्को लेखा र लेखा परीक्षण : (१) परिषद्को आय व्ययको लेखा तोकिए बमोजिम राखिनेछ ।
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| 175 |
+
(२) परिषद्को लेखा परीक्षण महालेखा परीक्षकले तोकेको लेखा परीक्षकबाट हुनेछ ।
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| 176 |
+
(३) नेपाल सरकारले चाहेमा परिषद्को कोषको हिसाब किताब जुनसुकै बखत जाँच्न बा जँचाउन सक्नेछ ।
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| 177 |
+
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| 178 |
+
# परिच्छेद - ६
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| 179 |
+
विविध
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| 180 |
+
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| 181 |
+
२३. परिषद्को विघटन : (१) परिषद्ले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमावली बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारको प्रयोग गर्न नसकेको बा बराबर अधिकारको दुरुपयोग गरेको बा त्यस्तो अधिकारभन्दा बढी अधिकारको प्रयोग गर्ने गरेको बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमावली बमोजिम आफनो कर्तव्य पालन गर्न नसकेको भन्ने नेपाल सरकारलाई लागेमा सो कुरा सुधार गर्न बा सच्याउन नेपाल सरकारले परिषद्लाई निर्देशन दिनेछ ।
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| 182 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दिइएको निर्देशन बमोजिम परिषद्ले आफनो काम कारबाही सुधार गर्न बा सच्याउन नसकेमा नेपाल सरकारले परिषद्लाई विघटन गर्न सक्नेछ।
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| 183 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम परिषद् विघटन भएपछि अर्को परिषद् गठन नभएम्म परिषद्को कोष तथा सम्पत्ति नेपाल सरकारले आफनो जिम्मामा राखी यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमावली बमोजिम परिषद्ले प्रयोग गर्ने सबै अधिकार नेपाल सरकार आफैले प्रयोग गर्न बा समिति गठन गरी सो समितिबाट गराउन सक्नेछ ।
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| 184 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम परिषद् विघटन भएको तीन महिनाभित्र नेपाल सरकारले दफा ४ बमोजिम नयाँ परिषद् गठन गर्नेछ ।
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| 185 |
+
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| 186 |
+
२४. समिति गठन गर्न सक्ने : (१) परिषद्ले आवश्यकतानुसार विभिन्न विषय समिति तथा अन्य समिति गठन गर्न सक्नेछ ।
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| 187 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठित विषय समिति तथा अन्य समितिहरुको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा कार्याबधि परिषद्ले तोकिदिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 188 |
+
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| 189 |
+
२४. सदस्यको बैठक भत्ता तथा अन्य सुविधा : सदस्य तथा दफा २४ बमोजिम गठन भएको विषय समिति तथा अन्य समितिका सदस्यहरुको बैठक भत्ता तथा अन्य सुविधा तोकिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 190 |
+
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| 191 |
+
२६. अनुसन्धान तहकिकात तथा मुद्दा चलाउने अधिकारी : दफा २७ बमोजिमको कसूरको अनुसन्धान तहकिकात गर्ने तथा मुद्दा चलाउने अधिकारी बा निकाय र तत्सम्बन्धी कार्यबिधि नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकिदिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 192 |
+
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| 193 |
+
२७. कसूर तथा दण्ड सजाय : (१) दफा ११ बमोजिम परिषद्मा नाम दर्ता नगराई पशु चिकित्सा व्यवसाय गरेमा यस ऐन बमोजिम कसूर गरेको मानिनेछ ।
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| 194 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम कसूर गर्ने व्यक्तिलाई तीन हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा तीन महिनासम्म कैद बा दुवै सजाय हुनेछ ।
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| 195 |
+
(३) उपदफा (२) मा लेखिएदेखि बाहेक यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमावलीको विपरीत हुने गरी कुनै काम गर्ने व्यक्तिलाई दुई हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ ।
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| 196 |
+
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| 197 |
+
२६. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क : परिषद्ले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा $\Rightarrow$ कृषि तथा पशुपंक्षी विकास मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ ।
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| 198 |
+
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| 199 |
+
२९. नियम तथा विनियम बनाउने अधिकार : (१) यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न परिषद्ले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ र त्यसरी बनाएको नियम नेपाल सरकारबाट स्वीकृत भएपछि मात्र लागू हुनेछ ।
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| 200 |
+
(२) यस ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही परिषद्ले आवश्यक विनियमहरु बनाउन सक्नेछ ।
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section_12_pdf_11.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,119 @@
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| 1 |
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# पशु बधशाला र मासु जाँच ऐन, २०४४
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| 2 |
+
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| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
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| 4 |
+
२०४४।१२।१
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| 5 |
+
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| 6 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
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| 7 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 8 |
+
(१) गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
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| 9 |
+
२०६६।१०।७
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| 10 |
+
(२) केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन २०७२
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| 11 |
+
२०७२।११।१३
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| 12 |
+
(३) नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 13 |
+
२०७४।११।१९
|
| 14 |
+
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| 15 |
+
२०४४ सालको ऐन नं. २६
|
| 16 |
+
|
| 17 |
+
पशु बधशाला र मासु जाँच गर्ने सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 18 |
+
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| 19 |
+
प्रस्तावना: सर्वसाधारण जनताको स्वास्थ्य र हित कायम राख्न मासु तथा मासुवाट बन्ने खाघ पदार्थमा मिसावट रोक्न र मासुमा हुने स्वस्थता तथा मासुको स्वाभाविक गुण बिग्रन नदिई उपयुक्त स्तर कायम राख्नको लागि पशु बधशाला स्थापना गर्ने र मासु जाँच गर्ने सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 20 |
+
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| 21 |
+
दफा ४ महाराजाधिराज बीरेन्द्र वीर बिक्रम शाहदेवको शासनकालको सत्ताइसौं बर्षमा संसदले यो ऐन बनाएकोछ।
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| 22 |
+
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| 23 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:
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| 24 |
+
(१) यस ऐनको नाम "पशु बधशाला र मासु जाँच ऐन, २०४४" रहेको छ।
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| 25 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको क्षेत्रमा तोकेको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
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| 26 |
+
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| 27 |
+
(१) यो ऐन संवत् २०६४ साल जेठ १४ गतेदेखि लागू भएको।
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| 28 |
+
गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा झिकिएको।
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| 29 |
+
(२) ऐन लागू भएका मिति र स्थान द्रष्टव्यमा उल्लेख गरिएको छ।
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| 30 |
+
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| 31 |
+
२. परिभाषा: विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 32 |
+
(क) "पशु" भन्नाले गाई, गोरु, साँढे बाहेक भाले जातको खसी तुल्याइएको बा नतुल्याइएको बोका, भेडा, च्याङ्मा, सुंगुर, बंगुर, बँदेल, राँगो, खरायो बा मासुको लागि योग्य देखिएको भैंसी, बाख्रा, पोथी जातको भेंडा, च्याङ्मा, सुंगुर, बंगुर, बँदेल बा खरायो सम्झनु पर्छ र सो शब्दले भाले बा पोथी जातको कुखुरा, हाँस, परेबा बा मासुको प्रयोजनको लागि पालिएको अन्य पशुपक्षी समेत सम्झनु पर्छ।
|
| 33 |
+
(ख) "मासु" भन्नाले मानिसले खान योग्य पशुको मासु सम्झनु पर्छ।
|
| 34 |
+
(ग) "मासु निरीक्षक" भन्नाले दफा ६ बमोजिम नियुक्ति गरिएको बा तोकिएको मासु निरीक्षक सम्झनु पर्छ।
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| 35 |
+
(घ) "मासु सुपरीवेक्षक" भन्नाले दफा ७ बमोजिम तोकिएको मासु सुपरीवेक्षक सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(ङ) "पशु बधशाला" भन्नाले मासुको निमित्त पशु बध गर्न बनाइएको घर बा टाउँ सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
(च) "मासु विक्रता" भन्नाले व्यवसा��िक रूपमा मासु बिकी गर्ने व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(छ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
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| 39 |
+
|
| 40 |
+
३. इजाजतपत्र नलिई पशु बधशाला स्थापना गर्न बा मासु बिकी गर्न नपाइने: यस ऐन बमोजिम इजाजतपत्र नलिई कसैले पनि पशु बधशाला स्थापना गर्न बा मासु विक्रताको काम गर्न पाउने छैन।
|
| 41 |
+
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| 42 |
+
४. पशु बधशालाको स्थापना:
|
| 43 |
+
(१) नेपाल सरकार पा प्रदेश सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी नेपालको कुनै पनि क्षेत्रमा पशु बधशाला स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 44 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि गैर सरकारी क्षेत्रमा समेत पशु बधशाला स्थापना गर्न नेपाल सरकार पा प्रदेश सरकारले तोकिए बमोजिम इजाजत दिन सक्नेछ।
|
| 45 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम पशु बधशाला स्थापना र सञ्चालन गर्दा पालन गर्नु पर्ने शर्त तथा अपनाउनु पर्ने मापदण्ड तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 46 |
+
|
| 47 |
+
५. इजाजतपत्र:
|
| 48 |
+
(१) पशु बधशाला स्थापना गर्न बा मासु बिक्रताको काम गर्न चाहने व्यक्ति बा संस्थाले तोकिए बमोजिमको ढाँचामा तोकिएको अधिकारी समक्ष दरखास्त दिनु पर्नेछ।
|
| 49 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दरखास्त पर्न आएमा तोकिएको अधिकारीले त्यस्तो दरखास्तको सम्बन्धमा आवश्यक जाँचबुझ गरी तोकिए बमोजिम दस्तुर लिई दरखास्तबालालाई पशु बधशाला स्थापना गर्न बा मासु विक्रताको काम गर्न तोकिए बमोजिमको ढाँचामा इजाजतपत्र दिनेछ।
|
| 50 |
+
(३) मासु विक्रताले पालन गर्नु पर्ने शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 51 |
+
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| 52 |
+
६. मासु निरीक्षकको नियुक्ति:
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| 53 |
+
(१) नेपाल सरकार बा प्रदेश सरकारले पशु र मासु जाँच गर्नको लागि पशु चिकित्सा विषयमा कम्तीमा स्नातकोपाधि हासिल गरेको व्यक्तिलाई मासु निरीक्षकको पदमा नियुक्ति गर्न बा तोक्न सक्नेछ।
|
| 54 |
+
(२) यस ऐनमा लेखिएका काम, कर्तव्य तथा अधिकारको अतिरिक्त मासु निरीक्षकको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
७. मासु सुपरीवेक्षक तोक्न सक्ने:
|
| 57 |
+
(१) पशु बधशाला व्यवस्थापन र मासु निरीक्षकको काममा सुपरीवेक्षण गर्नको लागि पशु चिकित्सा विषयमा कम्तीमा स्नातकोपाधि हासिल गरेको कुनै कर्मचारीलाई प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले मासु सुपरीवेक्षक तोक्न सक्नेछ।
|
| 58 |
+
(२) मासु सुपरीवेक्षकको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 59 |
+
|
| 60 |
+
८. पशु बध गर्नु अघि जाँचाउनु पर्ने:
|
| 61 |
+
(१) कुनै पशु बध गर्नुभन्दा अघि पशु बधशाला स्थापना भएको क्षेत्रमा पशु बधशालामा र पशु बधशाला स्थापना नभएको क्षेत्रमा मासु सुपरीवेक्षकले तोकेको स्थानमा त्यस्तो पशु जाँचाउनु पर्नेछ। पशु जाँच गर्ने कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 62 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम जाँच गरिएको पशु बध गर्न उपयुक्त देखिएमा मासु निरीक्षकले चिन्ह समेत अंकित गरी त्यस्तो पशु बध गर्ने अनुमति दिनेछ।
|
| 63 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम जाँच गरिएको पशु रोगी देखिएमा त्यस्तो पशु बध गर्न मासु निरीक्षकले रोक लगाउन सक्नेछ।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
९. पशु बधशालामा पशु बध गर्नु पर्ने:
|
| 66 |
+
(१) दफा ६ बमोजिम बध गर्न उपयुक्त देखिएको पशुलाई पशु बधशालामा बध गर्नु पर्नेछ। तर प्रचलित कानून बमोजिम निषेध गरिएका दिनमा पशु बध गर्न पाइने छैन।
|
| 67 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि पशु बधशाला स्थापना नभएको क्षेत्रमा मासु सुपरीवेक्षकले तोकेको समय र स्थानमा त्यस्तो पशु बध गर्नु पर्नेछ।
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| 68 |
+
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| 69 |
+
१०. बध गरिएको पशुको मासु जाँच गर्नु पर्ने:
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| 70 |
+
(१) दफा ९ बमोजिम बध गरिएको पशुको मासु मासु निरीक्षकले तोकिए बमोजिम जाँच गर्नु पर्नेछ।
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| 71 |
+
(२) मासु निरीक्षकले उपदफा (१) बमोजिम बध गरिएको पशुको मासु जाँच गर्दा त्यस्तो मासुमा केही खराबी बा रोग भएको पाइएमा त्यस्तो मासु आंशिक बा पूर्णरुपमा बिक्री बितरणको लागि निषेध गर्न सक्नेछ।
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| 72 |
+
(३) यस दफाको प्रयोजनको लागि नेपाल सरकारले मासु जाँच गर्ने प्रयोगशाला तोक्न सक्नेछ।
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| 73 |
+
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| 74 |
+
११. मासु बिकी गर्ने नपाइने:
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| 75 |
+
(१) दफा २ को खण्ड (क) मा उल्लिखित पशु बाहेक अन्य पशुको मासु बिकी गर्न पाइने छैन।
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| 76 |
+
(२) रोग लागि बा नलागी कालगतिले मरेको पशुको मासु बिकी गर्न पाइने छैन।
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| 77 |
+
(३) छाला सहितको मासु बिकी गर्न पाइने छैन। तर पक्षी, सुंगुर, बंगुर वा बँदलको मासु र पशुको जात चिनाउन आवश्यक पर्ने जति हिस्साको मासु वा पशुको टाउको वा खुट्टा छाला सहित बिकी गर्न यस दफाले बाधा पुए्याएको मानिने छैन।
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| 78 |
+
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| 79 |
+
१२. मासुमा छाप वा चिह्न लगाउनु पर्ने:
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+
(१) मासु निरीक्षकले पशुको मासु जाँच गरी मासु बिकी गर्न अनुमति दिंदा त्यस्तो मासुमा तोकिए बमोजिमको छाप वा चिह्न स्पष्ट देखिने गरी लगाउनु पर्नेछ।
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| 81 |
+
(२) मासु विक्रेताले उपदफा (१) बमोजिम छाप वा चिह्न नलगाएको मासु बिकी गर्न पाउने छैन।
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१३. मिसावट गरी मासु बिकी गर्न नहुने:
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+
(१) एक जातको पशुको मासुलाई अर्को जातको पशुको मासु हो भनी वा एक जातको पशुको मासु र अर्को जातको पशुको मासु मिसावट गरी बिकी गर्न पाइ���े छैन।
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(२) मासुको स्वाभाविक गुण वा स्वाद परिवर्तन गर्ने वा तौल बढाउने गरी कुनै पदार्थ मासुमा मिसाई बिकी गर्न पाइने छैन।
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१४. दस्तुर लाग्ने: यस ऐन बमोजिम पशु वा मासु जाँच गराउँदा लाग्ने दस्तुर तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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१५. प्रवेश गर्न सक्ने: मासु निरीक्षक वा मासु सुपरीवेक्षकले जुनसुकै बेला पशु बधशाला वा मासु बिकी गरिने स्थानमा प्रवेश गरी पशु वा मासु जाँच गर्न वा मासुको नमूना लिन सक्नेछ। सो कार्यमा सहयोग पुए्याउनु सम्बन्धित सबैको कर्तव्य हुनेछ।
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१६. बाधा नहुने: यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि परम्परादेखि चलिआएको चाडपर्व, धार्मिक पूजाआजा, कुनै भोज भतेर वा धार्मिक उत्सव जस्ता कार्यको सिलसिलामा पशु बधशाला बाहेकका स्थानमा पशु बध गर्न र छाला सहितको मासु उपभोग गर्न बाधा पुए्याएको मानिने छैन।
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१७. दण्ड सजाय:
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(१) दफा ३ को उपदफा (१) बा (३), दफा ९, दफा १० को उपदफा (२), दफा ११ को उपदफा (३) बा दफा १२ को उपदफा (२) उल्लंघन गर्ने व्यक्तिलाई पहिलो पटक भए पौंचहजार रुपैयाँसम्म र दोस्रो पटकदेखि पटकै पिच्छे दशहजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा एक महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ।
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| 95 |
+
(२) दफा ३, दफा ११ को उपदफा (१) बा (२) बा दफा १३ उल्लंघन गर्ने व्यक्तिलाई पहिलो पटक भए दशहजार रुपैयाँसम्म र दोश्रो पटकदेखि पटकै पिच्छे बीसहजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा तीन महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ।
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१८. अधिकार प्रत्यायोजन: यस ऐन बमोजिम नेपाल सरकार बा प्रदेश सरकारलाई प्राप्त अधिकार मध्ये केही अधिकार आवश्यकता अनुसार कुनै निकायलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
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१९. नेपाल सरकार बादी हुने: यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दा नेपाल सरकार बादी हुनेछ।
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२०. मुद्दाको तहकिकात र दायरी:
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(१) यस ऐन अन्तर्गतको कसूरको तहकिकात नेपाल सरकारले नियुक्त गरेको मास निरीक्षकले गर्नेछ र तहकिकातको काम पूरा भएपछि मुद्दा हेर्ने अधिकारी समक्ष मुद्दा दायर गर्नेछ।
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+
(२) उपदफा (१) बमोजिम मुद्दा हेर्ने अधिकारी समक्ष मुद्दा दायर गर्दा मुद्दाको तहकिकात गर्ने कर्मचारीले सरकारी बकिलसित राय सल्लाह लिन सक्नेछ।
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+
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२१. मुद्दा हेर्ने अधिकारी: यस ऐन अन्तर्गतको कसूर सम्बन्धी मुद्दा प्रमुख जिल्ला अधिकारीले हेनेछ र प्रमुख जिल्ला अधिकारीको निर्णय उपर चित्त नबुझ्ने व्यक्तिले जिल्ला अदालतमा पुनराबेदन गर्न सक्नेछ।
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+
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+
२२. प्रचलित कान��न बमोजिम हुने: यस ऐनमा लेखिएजति कुरामा यसै ऐन बमोजिम र अरुमा प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
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+
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२३. नियम बनाउने अधिकार: यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
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२४. खारेजी: मुलुकी ऐन, चौपायाको महलको ३ नम्बर र १६ नम्बर खारेज गरिएको छ।
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इष्टव्य:
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(क) ऐन लागू भएको मिति र स्थान:
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मिति २०६०।१।द को नेपाल राजपत्रमा प्रकाशित सूचना अनुसार हेर्टोडा नगरपालिकाको पूर्वमा चौधडा बजार, पश्चिममा बडा नं. ११ को सरस्वती खोल्सी, उत्तरमा चौकीटोल बन तगारो र दक्षिणमा स्यासेंकालिका पम्पभित्रको क्षेत्रमा २०६० साल बैशाख १ गतेदेखि प्रारम्भ हुने गरी तोकिएको।
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+
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+
(ख) रूपान्तर:
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+
केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर गरिएका शब्दहरू:
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"थी ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
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section_12_pdf_12.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,334 @@
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| 1 |
+
# पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा ऐन, २०४४
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| 2 |
+
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| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
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| 4 |
+
२०४४।०४।०६
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| 5 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
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| 6 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 7 |
+
१. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
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| 8 |
+
२०६६।१०।०७
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| 9 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन २०७२
|
| 10 |
+
२०७२।११।१३
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| 11 |
+
३. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 12 |
+
२०७४।११।१९
|
| 13 |
+
४. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 14 |
+
२०६२।०४।१४
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
२०४४ सालको ऐन नं. ७
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| 17 |
+
पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 18 |
+
प्रस्तावना : मुलुकको अर्थतन्त्रको महत्त्वपूर्ण स्थान ओगटेको पशुपालन व्यवसायलाई व्यवस्थित र विकासित तुल्याउन र मानव समुदायको पौष्टिक भोजन तथा स्वास्थ्यका दृष्टिकोणबाट समेत पशु, पशुजन्य पदार्थ वा पशु उत्पादन सामग्रीको स्वस्थ रूपमा उत्पादन, बिक्री वितरण, निकासी तथा पैठारी गर्ने सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बाज्छुनीय भएकोले,
|
| 19 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज बीरेन्द्र बीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको सत्ताइसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएको छ।
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| 20 |
+
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| 21 |
+
## परिच्छेद-१
|
| 22 |
+
प्रारम्भिक
|
| 23 |
+
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| 24 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ : (१) यस ऐनको नाम "पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा ऐन, २०४४" रहेको छ।
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| 25 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको क्षेत्रमा तोकेको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 26 |
+
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| 27 |
+
२. परिभाषा : विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 28 |
+
(क) "पशु" भन्नाले जुनसुकै प्रकारका पाल्तु बा जङ्गली जनावर सम्झनु पर्छ र सो शब्दले पक्षी र माछालाई समेत जनाउँछ।
|
| 29 |
+
(ख) "पशुजन्य पदार्थ" भन्नाले पशुको मासु, रगत, बोसो, पित्त, दूध, फुल, हाड, छाला, सिङ, खुर, प्वाँख, ऊन, भुत्ला, रौं, भुण, वीर्य, ग्रन्थी, मल, मुत्र बा सोबाट बनाइएको अप्रशोधित वस्तु सम्झनु पर्छ।
|
| 30 |
+
(ग) "पशु उत्पादन सामग्री" भन्नाले पशु स्वास्थ्यमा, कृत्रिम गर्भाधानमा बा जैविक पदार्थ उत्पादनमा उपयोग हुने प्रशोधित बा अप्रशोधित सामग्री सम्झनु पर्छ।
|
| 31 |
+
(घ) "जैविक पदार्थ (बायोलोजिकल्स)" भन्नाले पशु विकास बा पशु स्वास्थ्यको लागि प्रयोग गरिने जीवाणु बा विषाणुयुक्त औषधी, खोप बा जैविक रसायन सम्झनु पर्छ।
|
| 32 |
+
(ङ) "क्वारेन्टाइन चेकपोप्ट" भन्नाले नेपाल सरकारले दफा ३ बमोजिम स्थापना गरेको पशु क्वारेन्टाइन चेकपोप्ट सम्झनु पर्छ।
|
| 33 |
+
(च) "क्वारेन्टाइन" भन्नाले कुनै पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग��रीमा कुनै रोग लागेको छ छैन भन्ने कुरा यकिन गर्न पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीलाई कुनै खास ठाउँमा तोकिएको अबधिभर परीक्षणको लागि एकैसाथ बा छुट्टा छुट्टै राख्ने काम सम्झनु पर्छ।
|
| 34 |
+
(छ) "क्वारेन्टाइन अधिकृत" भन्नाले दफा ४ बमोजिम नियुक्ति गरिएको क्वारेन्टाइन अधिकृत सम्झनु पर्छ।
|
| 35 |
+
(ज) "क्वारेन्टाइन स्थल" भन्नाले पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीलाई परीक्षणको लागि क्वारेन्टाइनमा राखिने ठाउँ सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(झ) "संक्रामक रोग" भन्नाले अनुसूचीमा उल्लिखित रोगहरु र नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेका अन्य रोगहरुलाई समेत जनाउँछ।
|
| 37 |
+
(ज) "बिभाग" भन्नाले नेपाल सरकार, पशु सेबा बिभाग सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(ट) "कार्यालय प्रमुख" भन्नाले पशु सेबा कार्यालय बा तोकिएको अन्य कार्यालयको प्रमुख भई काम गर्ने व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
(ट) "भेटेनरी निरीक्षक" भन्नाले दफा २४ बमोजिम नियुक्ति गरिएको बा तोकिएको अधिकृत सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
(ड) "पैठारीकर्ता" भन्नाले नेपाल बाहिरबाट पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री पैठारी गर्ने व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
(ढ) "निकासीकर्ता" भन्नाले नेपाल अधिराज्यबाट पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री निकासी गर्ने व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(ण) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 43 |
+
|
| 44 |
+
---
|
| 45 |
+
|
| 46 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 47 |
+
पशु क्वारेन्टाइन सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 48 |
+
|
| 49 |
+
३. क्वारेन्टाइन चेकपोष्टको स्थापना : नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी नेपाल को कुनै पनि क्षेत्रमा स्थायी बा अस्थायी प्रकृतिको क्वारेन्टाइन चेकपोष्ट स्थापना गर्नेछ।
|
| 50 |
+
|
| 51 |
+
४. क्वारेन्टाइन स्थल निर्माण गर्न सक्ने : (१) नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी दफा ३ बमोजिम क्वारेन्टाइन चेकपोष्ट स्थापना भएको क्षेत्रमा क्वारेन्टाइन स्थल निर्माण गर्न सक्नेछ।
|
| 52 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि निजी क्षेत्रलाई समेत क्वारेन्टाइन स्थल निर्माण गर्न नेपाल सरकारले अनुमति दिन सक्नेछ।
|
| 53 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम गैर सरकारी क्षेत्रमा क्वारेन्टाइन स्थल निर्माण गर्न चाहनेले बिभागबाट सिफारिश पत्र लिनु पर्नेछ।
|
| 54 |
+
(४) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम क्वारेन्टाइन स्थल निर्माण गर्दा पालन गर्नु पर्ने शर्त तथा अपनाउनु पर्न��� मापदण्ड तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
५. क्वारेन्टाइन अधिकृतको नियुक्ति : नेपाल सरकारले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको क्वारेन्टाइन चेकपोष्टको प्रमुखको रुपमा काम गर्ने गरी पशु चिकित्सा बिषयमा कम्तीमा स्नातकोपाधि हासिल गरेको व्यक्तिलाई क्वारेन्टाइन अधिकृतको पदमा नियुक्ति गर्नेछ।
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
६. क्वारेन्टाइनमा राख्नु पर्ने : (१) पैठारीकर्ताले पैठारी गरेका पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीलाई परीक्षणको लागि तोकिएको अबधिसम्म क्वारेन्टाइनमा राख्नु पर्नेछ।
|
| 59 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम क्वारेन्टाइनमा राखिएका पशुको लागि आवश्यक पर्ने दाना, पानी र सुरक्षाको व्यवस्था सम्बन्धित पैठारीकर्ताले गर्नु पर्नेछ।
|
| 60 |
+
(३) क्वारेन्टाइनमा राखिएको पशु परीक्षण अबधिभित्रै मरेमा क्वारेन्टाइन अधिकृतले त्यस्तो मरेको पशु परीक्षण गरी नष्ट गर्न पैठारीकर्तालाई आदेश दिनेछ।
|
| 61 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिम क्वारेन्टाइनमा राखिएको पशु मरेमा पैठारीकर्ताले कुनै प्रकारको क्षतिपूर्ति दाबी गर्न पाउने छैन।
|
| 62 |
+
(५) क्वारेन्टाइनमा राखिएको पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री परीक्षण गर्ने कार्यविधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 63 |
+
|
| 64 |
+
७. प्रमाणपत्र दिनु पर्ने : क्वारेन्टाइन अधिकृतले पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीलाई क्वारेन्टाइनमा राखी जाँच गरेपछि तोकिए बमोजिमको ढाँचामा क्वारेन्टाइन प्रमाणपत्र उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
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८. निकासी बा पैठारी गर्दा पालन गर्नु पर्ने शर्त : निकासीकर्ता बा पैठारीकर्ताले पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री निकासी बा पैठारी गर्दा पालन गर्नु पर्ने शर्त तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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९. क्वारेन्टाइन चेकपोष्टको बाटो भएर मात्र पैठारी गर्नु पर्ने : पैठारीकर्ताले पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री पैठारी गर्दा क्वारेन्टाइन चेकपोष्टको बाटो भएर गर्नु पर्नेछ।
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१०. पैटारी गर्न प्रतिबन्ध लगाउन सक्ने : नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको रोगहरु भएको पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री पैटारी गर्न प्रतिबन्ध लगाउन सक्नेछ।
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११. प्रवेश गर्न रोक लगाउन सक्ने : देहायका अवस्थामा क्वारेन्टाइन अधिकृतले पैटारी गरिएका पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीको प्रवेशमा रोक लगाउन सक्नेछ :-
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(क) पैटारी गरिएका पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री जुन टाउँबाट ल्याएको हो सो टाउँमा संकामक रोगको प्रकोप भएको सूचना प्राप्त भएमा,
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+
(ख) पैटारीकर्ताले पैटारी गर्ने पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीमा तोकिए बमोजिम संकामक रोग नभएको प्रमाणपत्र र स्वस्थता सम्बन्धी प्रमाणपत्र उपलब्ध नगराएमा,
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+
(ग) खण्ड (ख) बमोजिमको प्रमाणपत्र उपलब्ध गराएको भए तापनि केही पशुहरु संकामक रोग लागि मरेको पाइएमा,
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+
(घ) पैटारी गरिएको पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री ल्याउनको निमित्त प्रयोग गरिएको सबारी साधनमा संकामक रोगको लसपस भएको पाइएमा।
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+
१२. आदेश दिन सक्ने : (१) क्वारेन्टाइन अधिकृतले दफा ११ बमोजिम प्रवेश गर्न रोक लगाइएको पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री जुन मुलुकबाट ल्याइएको हो सो मुलुकमा फिर्ता लैजान आदेश दिन सक्नेछ।
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+
(२) पैटारी गरिएका पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री त्यसै राखी छोड्दा बा सम्बन्धित मुलुकमा फिर्ता पटाउँदा संकामक रोग फैलन सक्ने संभावना देखिएमा क्वारेन्टाइन अधिकृतले पैटारीकर्तालाई त्यस्तो पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीलाई हटाउने बा नष्ट गर्ने आदेश दिन सक्नेछ।
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१३. लिलाम गर्न सकिने : (१) क्वारेन्टाइन स्थलमा राखिएको पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री तोकिएको अबधि भित्र सम्बन्धित पैटारीकर्ताले फिर्ता नलगेमा क्वारेन्टाइन अधिकृतले त्यस्तो पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामाग्री जफत गरी लिलाम गर्न सक्नेछ। लिलाम गर्ने अवस्था र कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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+
(२) उपदफा (१) बमोजिम जफत गरिएको पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री लिलाम गर्न उपयुक्त नदेखिएमा बा लिलाम गर्दा कसैले नसकारेमा क्वारेन्टाइन अधिकृतले त्यस्तो पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री हटाउन बा नष्ट गर्न आदेश दिन सक्नेछ।
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१४. हटाउने बा नष्ट गर्ने : (१) दफा ६, १२ बा १३ बमोजिम हटाउने बा नष्ट गर्ने आदेश पाएपछि सम्बन्धित पैठारीकर्ताले त्यस्तो पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री हटाउन बा नष्ट गर्नु पर्नेछ।
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+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सम्बन्धित पैठारीकर्ताले पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री नहटाएमा बा नष्ट नगरेमा क्वारेन्टाइन अधिकृत आफैले त्यस्तो पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री हटाउन बा नष्ट गर्न सक्नेछ।
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(३) उपदफा (२) बमोजिम पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री हटाउँदा बा नष्ट गर्दा लाग्ने सम्पूर्ण खर्च पैठारीकर्ताबाट सरकारी बाँकी सरह असूल उपर गरिनेछ।
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+
१५. पशुहरुको बसार पसार सम्बन्धी व्यवस्था : नेपाल को कुनै एक ठाउँको पशुहरुमा संकामक रोग लागेको कुरा पत्ता लागेमा कार्यालय प्रमुख बा क्वारेन्टाइन अधिकृतले त्यस्ता पशुहरु नेपाल को कुनै अर्को ठाउँमा बसार पसार गर्न प्रतिबन्ध लगाउन सक्नेछ।
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+
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## परिच्छेद-३
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पशु नसल सुधार सम्बन्धी व्यवस्था
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१६. सूचना जारी गर्न सक्ने : (१) नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी नेपालमा रहेका कुनै जातका पशुको बंश लोप हुनबाट बचाउन बा तिनीहरुको नसल सुधार गर्ने दृष्टिले नेपाल को कुनै क्षेत्रमा सोही सूचनामा तोकेको जातको भाले जातको पशु बाहेक अन्य भाले जातको पशु खसी पारी राख्नु पर्ने गरी सूचना जारी गर्न सक्नेछ।
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| 96 |
+
तर परम्परादेखि चलिआएको पूजा आजा बा धार्मिक अनुष्ठानका लागि नभई नहुने खसी नपारेको भाले पशु पाल्नु पर्ने भएमा त्यस्तो पशुलाई गर्भाधान गराउन नसक्ने गरी अलग्गै राख्न उपदफा (१) मा लेखिएको कुनै कुराले बाधा पुए्याएको मानिने छैन।
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| 97 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम तोकिएको जात बाहेक अन्य भाले जातको पशु पालेको पाइएमा कार्यालय प्रमुखले सम्बन्धित व्यक्तिलाई त्यस्तो भाले पशुलाई तत्कालै खसी पार्ने आदेश दिन सक्नेछ।
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## परिच्छेद-४
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उद्योग स्थापना तथा निकासी पैठारी सम्बन्धी व्यवस्था
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+
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+
१७. उद्योग स्थापना गर्न सिफारिश पत्र लिनु पर्ने : जैविक पदार्थ, चल्ला, माछाका भूरा उत्पादन गर्ने (ह्याचरी) बा पशु दाना बा मासु प्रशोधन सम्बन्धी उद्योग स्थापना गर्न चाहने व्यक्तिले तोकिएको निकायबाट सिफारिश पत्र लिनु पर्नेछ।
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+
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+
१८. निकासी बा पैठारी गर्न सिफारिश लिनु पर्ने : जैविक पदार्थ, चल्ला बा माछाका भूरा बा पशु दाना निकासी बा पैठारी गर्न चाहने व्यक्तिले तोकिएको दस्तुर तिरी तोकिएको निकायबाट सिफारिश पत्र लिनु पर्नेछ।
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+
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+
१९. अनुमतिपत्र लिनु पर्ने : (१) जैविक पदार्थ, चल्ला, माछाका भूरा बिक्री बितरण बा मासु प्रशोधन गर्न चाहने व्यक्तिले तोकिएको निकायबाट तोकिएको दस्तुर तिरी अनुमतिपत्र लिनु पर्नेछ।
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| 109 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बिक्री बितरण गरिने जैविक पदार्थ, चल्ला, माछाका भूरा बा मासु प्रशोधनको गुणस्तर तथा मापदण्ड तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 110 |
+
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+
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+
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+
## परिच्छेद-५
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+
दण्��� सजाय र पुनरावेदन
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+
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+
२०. दण्ड सजाय : (१) दफा ९ को उल्लहन गरी पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री पैठारी गर्ने व्यक्तिलाई पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ र त्यसरी पैठारी गरिएका पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीमा संकामक रोग भएको पाइएमा दोब्बर जरिबाना हुनेछ।
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| 117 |
+
(२) दफा १० को उल्लहन गर्ने व्यक्तिलाई दश हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ।
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| 118 |
+
(३) दफा १२ को उपदफा (१) बमोजिम दिइएको आदेश पालन नगर्ने व्यक्तिलाई पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ।
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+
(४) उपदफा (१), (२) र (३) मा लेखिएदेखि बाहेक यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमाबलीको उल्लङ्गन गर्ने व्यक्तिलाई कसूरको मात्रा हेरी पाँच हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ।
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+
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+
२१. मुद्दाको तहकिकात र दायरी : (१) यस ऐन अन्तर्गतको कसूरको तहकिकात क्वारेन्टाइन चेकपोष्टको कम्तीमा राजपत्र अनंकित प्रथम श्रेणीको प्राविधिक सहायकले गर्नेछ र त्यस्तो तहकिकातको काम पूरा भएपछि मुद्दा हेर्ने अधिकारी समक्ष मुद्दा दायर गर्नेछ।
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| 122 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम मुद्दा हेर्ने अधिकारी समक्ष मुद्दा दायर गर्दा मुद्दाको तहकिकात गर्ने कर्मचारीले सरकारी बकीलसित राय सल्लाह लिन सक्नेछ।
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| 123 |
+
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| 124 |
+
२२. मुद्दा हेर्ने अधिकारी : (१) दफा ९ अन्तर्गतको मुद्दा हेर्ने अधिकार सम्बन्धित प्रमुख जिल्ला अधिकारीलाई हुनेछ।
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| 125 |
+
(२) उपदफा (१) मा लेखिएदेखि बाहेक यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दा हेर्ने अधिकार कार्यालय प्रमुखलाई हुनेछ।
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+
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+
२३. नेपाल सरकार बादी हुने : यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दा नेपाल सरकार बादी हुनेछ।
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| 128 |
+
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| 129 |
+
२४. पुनराबेदन : दफा २२ बमोजिमको अधिकारीले गरेको निर्णय उपर चित्त नबुझने व्यक्तिले पेंतीस दिनभित्र जिल्ला अदालत समक्ष पुनराबेदन गर्न सक्नेछ।
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| 130 |
+
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| 131 |
+
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| 132 |
+
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+
## परिच्छेद-६
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| 134 |
+
विविध
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| 135 |
+
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+
२४. भेटेनरी निरीक्षकको नियुक्ति : (१) नेपाल सरकारले पशु औषधी बा जैविक पदार्थको गुणस्तर निर्धारित मापदण्ड अनुसार भए नभएको जाँच गर्न आवश्यक स्थान र संस्थामा भेटेनरी निरीक्षकहरु नियुक्ति गर्न बा तोक्न सक्नेछ।
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| 137 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नियुक्ति हुने भेटेनरी निरीक्षकहरुको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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+
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+
२५. प्रदेश तथा स्थानीय तहले पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा सम्बन्धी कार्य गर्न सक्ने : देश तथा स्थानीय तहले पशुपालन व्यवसायलाई व्यवस्थित र बिकसित गर्न किसानलाई पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा उपलब्��� गराउन सक्नेछ।
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| 140 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्रदेश र स्थानीय तहले पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेबा उपलब्ध गराउँदा यस ऐन बमोजिमको मापदण्डको अधीनमा रही उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
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| 141 |
+
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+
२६. अधिकार प्रत्यायोजन : यस ऐन बमोजिम, कार्यालय प्रमुख, पशु चिकित्सक, क्वारेन्टाइन अधिकृत बा भेटेनरी निरीक्षकलाई प्राप्त अधिकार मध्ये मुद्दा हेर्ने अधिकार बाहेक अन्य अधिकार आवश्यकता अनुसार निजले आफू मातहतका कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
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| 143 |
+
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| 144 |
+
२७. पशु प्रति निर्दयी व्यवहार गर्न रोक लगाउन सक्ने : नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी पशु प्रति हुने निर्दयी व्यवहार रोक्नको लागि एउटा समिति गठन गर्न सक्नेछ र त्यस्तो समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार सोही सूचनामा तोकिदिए बमोजिम हुनेछ।
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| 145 |
+
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| 146 |
+
२८. सङ्कामक रोगको निगरानी, जाँचबुझ र नियन्त्रण : (१) कार्यालय प्रमुखले सङ्कामक रोग लाग्न नदिन बा कुनै स्थानमा देखिएको सङ्कामक रोग अन्यत्र फैलन नदिनको लागि पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीको विभागले निर्धारण गरे बमोजिम नियमित रूपमा बा आवश्यकता अनुसार जुनसुकै बखत जुनसुकै स्थानमा निगरानी, जाँच परीक्षण तथा अनुगमन गर्नु, गराउनु पर्नेछ।
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| 147 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निगरानी, जाँच परीक्षण तथा अनुगमनको क्रममा कार्यालय प्रमुख बा कार्यालयबाट खटिएको कर्मचारीले सङ्कामक रोग लागेको बा रोगको जोखिम रहेको क्षेत्रको पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री रहेको स्थानमा प्रवेश गर्न, नमूना सङ्कलन गर्न तथा सङ्कलित नमूनाको प्रयोगशाला परीक्षण गर्न बा गराउन सक्नेछ।
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| 148 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम निगरानी, जाँच परीक्षण बा अनुगमन गर्दा सङ्कामक रोग लागेको शङ्का भएमा त्यसको प्रयोगशाला परीक्षण प्रतिबेदन प्राप्त नभएसम्मको लागि सङ्कामक रोग महामारीको रूपमा फैलन सक्ने अबस्थालाई समेत विचार गरी कार्यालय प्रमुखले त्यस्तो शङ्का लागेको क्षेत्रबाट बा त्यस्तो क्षेत्र भएर कुनै पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री बा सोसँग सम्बन्धित अन्य कुराको उपभोग, बिक्री बितरण, प्रयोग बा ओसारपसारमा रोक लगाउन सक्नेछ।
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| 149 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम परीक्षण गर्दा सङ्कामक रोग लागेको पुष्टि भएमा कार्यालय प्रमुखले नमूना सङ्कलन गरिएको स्थानलाई केन्द्रबिन्दु मानी तोकिए बमोजिमको क्षेत्रलाई तोकिए बमोजिम सङ्कामक रोग प्रभावित क्षेत्र घोषणा गर्न, त्यस्तो क्षेत्रभन्दा बाहिरको तोकिए बमोजिमको क्षेत्रलाई सघन निगरानी क्षेत्रको रूपमा घोषणा गरी सङ्कामक रोग नियन्त्रण सम्बन्धी कार्य गर्नु पर्नेछ।
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| 150 |
+
(५) उपदफा (४) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सङ्कामक रोग एकभन्दा बढी प्रदेशमा फैलिई काबु बाहिरको परिस्थिति सिर्जना भएको भनी प्राविधिक प्रतिबेदन प्राप्त भएमा नेपाल सरकारको पशुपन्छी विकास हेर्ने मन्त्रालयले सङ्कामक रोग प्रभावित क्षेत्र घोषणा गरी सम्बन्धित प्रदेश र स्थानीय तहको समन्त्रय र सहकार्यमा रोग नियन्त्रण सम्बन्धी कार्य गर्नेछ।
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| 151 |
+
(६) उपदफा (३), (४) बा (५) बमोजिम सङ्कामक रोग प्रभावित क्षेत्र घोषणा गरिएकोमा त्यस्तो घोषणा कायम रहेसम्म सङ्कामक रोग लाग्ने बा फैलाउने गरी पशुपालन गर्न, पशुजन्य पदार्थ, पशु उत्पादन सामग्री तथा सङ्कामक रोग सार्न सक्ने अन्य वस्तुको उत्पादन, प्रशोधन, उपभोग, बिकी वितरण, प्रयोग तथा ओसारपसारमा प्रतिबन्ध लगाउन, नियन्त्रण गर्न बा निःसङ्कमण गरेर मात्र कारोबार बा ओसारपसार गर्न दिने गरी प्रतिबन्ध लगाउने निकायले आदेश जारी गर्न सक्नेछ।
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| 152 |
+
(७) उपदफा (१) र (२) बमोजिम पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीको जाँचबुझ बा प्रयोगशाला परीक्षण गर्दा सङ्कामक रोग लागेको पाइएमा कार्यालय प्रमुख बा तोकिएको अधिकारीले त्यस्तो पशु, पशुजन्य पदार्थ, पशु उत्पादन सामग्री बा सङ्कामक रोग सार्न सक्ने अन्य वस्तु निःसङ्कमण गर्न र निःसङ्कमण पथ्रात पुनः प्रयोग गर्न नसकिने अवस्था भएमा सम्बन्धित पशुधनीलाई सो कुराको जानकारी गराई तोकिए बमोजिम नष्ट गर्न बा आवश्यक व्यवस्थापन गर्न, गराउन सक्नेछ।
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| 153 |
+
(८) उपदफा (७) बमोजिम पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री नष्ट गर्दा बा व्यवस्थापन गर्दा क्षति भएकोमा त्यस्तो क्षतिको सम्बन्धित धनीलाई नेपाल सरकार बा प्रदेश सरकारले मापदण्ड निर्धारण गरी राहत दिन सक्नेछ।
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| 154 |
+
तर उपदफा (४) बा (५) बमोजिम लगाइएको रोक बा प्रतिबन्ध उल्लहन गरी उत्पादन, प्रशोधन, बिकी वितरण बा ओसारपसार गरिएका पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री बा सोसँग सम्बन्धित अन्य कुरा उपदफा (७) बमोजिम नष्ट गर्दा, तह लगाउँदा बा व्यवस्थापन गर्दा भएको क्षतिको राहत दिइने छैन।
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| 155 |
+
(९) उपदफा (१) बमोजिम पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीको जाँचबुझ गर्दा दफा १० बमोजिम नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेका रोगहरू लागेको पाइएमा कार्यालय प्रमुखले त्यस्तो पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्रीलाई हटाउन बा नष्ट गर्न आदेश दिनेछ।
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| 156 |
+
(१०) उपदफा (९) बमोजिम सम्बन्धित धनीले पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री नहटाएमा बा नष्ट नगरेमा कार्यालय प्रमुख आफैले त्यस्तो पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री हटाउन बा नष्ट गर्न सक्नेछ।
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| 157 |
+
(११) उपदफा (१०) बमोजिम पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री हटाउँदा बा नष्ट गर्दा लाग्ने सम्पूर्ण खर्च सम्बन्धित धनीबाट सरकारी बाँकी सरह असुल उपर गरिनेछ।
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| 158 |
+
(१२) सङ्कामक रोग नियन्त्रण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 159 |
+
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| 160 |
+
२९. नष्ट गर्ने कार्यविधि : यस ऐन बमोजिम मृत पशु, पशुजन्य पदार्थ बा पशु उत्पादन सामग्री नष्ट गर्ने कार्यविधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 161 |
+
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| 162 |
+
३०. बाधा नहुने : यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै प्रशोधित पशुजन्य पदार्थमा संक्रामक रोग लागेको आशंका भएमा त्यस्तो प्रशोधित पशुजन्य पदार्थलाई क्वारेन्टाइनमा राखी परीक्षण गर्न बाधा पुन्याएको मानिने छैन।
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| 163 |
+
|
| 164 |
+
३१. अनुसूचीमा हेरफेर तथा थपघट गर्ने अधिकार : नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी अनुसूचीमा आवश्यकतानुसार हेरफेर तथा थपघट गर्न सक्नेछ।
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| 165 |
+
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| 166 |
+
३२. प्रचलित कानून बमोजिम हुने : यस ऐनमा लेखिएजति कुरामा यसै ऐन बमोजिम र अरुमा प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
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| 167 |
+
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| 168 |
+
३३. नियम बनाउने अधिकार : यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्नको लागि नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
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| 169 |
+
|
| 170 |
+
३४. संशोधन : संक्रामक रोग ऐन, २०२० मा टाउँ टाउँमा प्रयोग भएका "पशु, पक्षी बा" भन्ने शब्दहरु झिकिएका छन्।
|
| 171 |
+
|
| 172 |
+
---
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| 173 |
+
|
| 174 |
+
## अनुसूची
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| 175 |
+
(दफा २ को खण्ड (झ) सँग सम्बन्धित)
|
| 176 |
+
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| 177 |
+
१. ए ०१० फूट एण्ड माउथ् डिजिज् (एफ.एम.डी.)
|
| 178 |
+
२. ए ०११ एफ.एम.डी. भाईरस ओ.
|
| 179 |
+
३. ए ०१२ एफ.एम.डी. भाईरस ए.
|
| 180 |
+
४. ए ०१३ एफ.एम.डी. भाईरस सी.
|
| 181 |
+
५. ए ०१४ एफ.एम.डी. भाईरस एस. ए. टी. १
|
| 182 |
+
६. ए ०१४ एफ.एम.डी. भाईरस एस. ए. टी. २
|
| 183 |
+
७. ए ०१६ एफ.एम.डी. भाईरस एस. ए. टी. ३
|
| 184 |
+
८. ए ०१७ एफ.एम.डी. भाईरस एसिया १
|
| 185 |
+
९. ए. ०१५ एफ.एम.डी. भाईरस प्रकार नदिएको
|
| 186 |
+
१०. ए. ०२० भेसिकुलर स्टोमेटाइटिस (भी.एस.)
|
| 187 |
+
११. ए. ०२१ भी. एस. भाईरस डण्डियाना
|
| 188 |
+
१२. ए ०२२ भी. एस. भाईरस न्युजर्सी
|
| 189 |
+
१३. ए ०२३ भी. एस. भाईरस प्रकार नदिएको
|
| 190 |
+
१४. ए ०३० स्वाईन भेसिकुलर डिजिज्
|
| 191 |
+
१५. ए ०४० रिण्डरपेष्���
|
| 192 |
+
१६. ए ०५० पेप्टिस डेस पेटिटिस रुमिनान्ट्स
|
| 193 |
+
१७. ए ०६० कन्टाजियस बोभाईन फ्युरोन्यूमोनिया
|
| 194 |
+
१८. ए ०७० लम्पी स्कीन डिजिज्
|
| 195 |
+
१९. ए ०६० रिफट भ्याली फिभर
|
| 196 |
+
२०. ए ०९० ब्ल्यू टङ
|
| 197 |
+
२१. ए १०० सीप पक्स एण्ड गोट पक्स
|
| 198 |
+
२२. ए ११० अफ्रिकन हर्स सिक्नेस
|
| 199 |
+
२३. ए १२० अफ्रिकन स्वाईन फिभर
|
| 200 |
+
२४. ए १३० हग क्लेरा
|
| 201 |
+
२५. ए १४० फाउल प्लेग
|
| 202 |
+
२६. ए १६० न्यू क्यासल डिजिज्
|
| 203 |
+
|
| 204 |
+
### मल्टिपल स्पेसिज डिजिज
|
| 205 |
+
२७. ची ०४१ एन्थ्राक्स्
|
| 206 |
+
२८. ची ०४२ एजोकाईज डिजिज्
|
| 207 |
+
२९. ची ०४२ इकाइनोकोकोसिस्/हाइड्रेटिडोसिस्
|
| 208 |
+
३०. ची ०४४ हर्टबाटर
|
| 209 |
+
३१. ची ०४६ लेप्टोस्पाइरोसिस्
|
| 210 |
+
३२. ची ०४७ क्यू फिबर
|
| 211 |
+
३३. ची ०४६ रेबिज
|
| 212 |
+
३४. ची ०४९ प्याराट्यूबरक्लोसिस्
|
| 213 |
+
३५. ची ०६० स्कीउ बर्म (कोक्लियोमिया होमिनोभोरस)
|
| 214 |
+
|
| 215 |
+
### क्याटल डिजिज
|
| 216 |
+
३६. ची १०१ एनाप्लाज्मोसिस्
|
| 217 |
+
३७. ची १०२ बबेसियोसिस्
|
| 218 |
+
३८. ची १०३ बोभाईन बुरसेल्लोसिस् (बी. एबोर्ट्स)
|
| 219 |
+
३९. ची १०४ बोभाईन जेनाइटल क्याम्पाइलो व्याक्टेरियोसिस्
|
| 220 |
+
४०. ची १०४ बोभाईन ट्यूबरक्लोसिस् (माइको व्याक्टेरियम बोभिस)
|
| 221 |
+
४१. ची १०६ सिस्टीसकोसिस् (सि. बोभिस)
|
| 222 |
+
४२. ची १०७ डर्म्याटोफिलोसिस्
|
| 223 |
+
४३. ची १०६ इन्जुटिक बोभाइन ल्यूकोसिस्
|
| 224 |
+
४४. ची १०९, ह्यामोरहेजिक सेप्टीसेमिया
|
| 225 |
+
४५. ची ११० इन्फेक्सियस् बोभाइन राइनोट्रेकाइटिस्
|
| 226 |
+
४६. ची १११ थेलेरियोसिस्
|
| 227 |
+
४७. ची ११२ टाइको मोनियसिस्
|
| 228 |
+
४८. ची ११३ टाइपानोसोमियासिस्
|
| 229 |
+
४९. बी ११४ बोभाइन म्यालिग्न्यान्ट क्याटरहल
|
| 230 |
+
५०. बी ११४ बोभाइन स्पोन्जिफर्मिइन्सेफालोप्याथी
|
| 231 |
+
|
| 232 |
+
### सीप एण्ड गोट डिजिज
|
| 233 |
+
५१. बी १४१ ब्रुसेल्लोसिस् ओभिस इन्फेक्सन
|
| 234 |
+
५२. बी १४२ क्याप्पाइन एण्ड ओभाइन ब्रुसेल्लोसिस् (बी. मेलीटेन्सिस्)
|
| 235 |
+
५३. बी १४३ क्याप्पाइन अर्घ्राराइट/इन्सेफलाइटिस
|
| 236 |
+
५४. बी १४४ कन्टाजियस एगालेक्सिया
|
| 237 |
+
५५. बी १४४ कन्टाजियस क्याप्पाइन प्लुरोन्यूमोनिया
|
| 238 |
+
५६. बी १४६ इन्जटिक एर्वोसन अफ इयुज
|
| 239 |
+
५७. बी १४७ पल्मोनरी एडिनोमेटोसिस
|
| 240 |
+
५८. बी १४६ नैरोवी सीप डिजिज्
|
| 241 |
+
५९. बी १४९ साल्मोनेल्लोसिस् (एस. एबोर्टस ओभिस)
|
| 242 |
+
६०. बी १६० स्केपी
|
| 243 |
+
६१. बी १६१ माएदी भिस्ना
|
| 244 |
+
|
| 245 |
+
### हर्स डिजिज
|
| 246 |
+
६२. बी २०१ कन्टाजियस् इक्वाइन मेट्राइटिस्
|
| 247 |
+
६३. बी २०२ डुराइन
|
| 248 |
+
६४. बी २०३ इपिजुटिक लिम्फेन्जाइटिस्
|
| 249 |
+
६५. बी २०४ इक्वाइन इन्सेफालोमाईलाईट्सि
|
| 250 |
+
६६. बी २०४ इक्वाइन इन्फेक्सिएस एनिमिया
|
| 251 |
+
६७. बी २०६ इक्वाइन इन्फ्लूएन्जा (भाइरस टाइप ए)
|
| 252 |
+
६८. बी २०७ इक्वाइन पाइरोप्लाज्मोसिस् (बबेसियोसिस्)
|
| 253 |
+
६९. बी २०६ इक्वाइन राइनोन्यूमोनाइटिस्
|
| 254 |
+
७०. बी २०९ ग्ल्यान्डर्स्
|
| 255 |
+
७१. बी २१० हर्स पक्स्
|
| 256 |
+
७२. बी २११ इन्फेक्सिएस् आर्थराइटिस् अफ हर्स
|
| 257 |
+
|
| 258 |
+
७३. ची २१२ जापनिज इन्सेफलाइटिस्
|
| 259 |
+
७४. ची २१३ हर्स मेन्ज
|
| 260 |
+
७५. ची २१५ सर्रा
|
| 261 |
+
७६. ची २१६ भेनेजुएलान इक्वाइन इन्सेफालोमाइलिटिस्
|
| 262 |
+
|
| 263 |
+
### पीग डिजिज
|
| 264 |
+
७७. ची २४१ एट्रोफिक राइनाइटिस्
|
| 265 |
+
७८. ची २४२ सिस्टीसर्कोसिस् (सी. सेलूलोसा)
|
| 266 |
+
७९. ची २४३ पोर्साइन बुरसेल्लोसीस् (बी. सूइस्)
|
| 267 |
+
८०. ची २४४ ट्रान्समिसिबल ग्यास्ट्रोइन्टेराइटिस् अफ पीग
|
| 268 |
+
८१. ची २४४ ट्राइकिनेलोसिस्
|
| 269 |
+
८२. ची २४६ इन्टेरोभाइरस इन्सेफालोमाइलाइटिस्
|
| 270 |
+
८३. ची २४७ पोर्साइन रिप्रोडक्टिभ एण्ड रेस्पिन्याटोरी सिन्ड्रोम
|
| 271 |
+
|
| 272 |
+
### पोल्ट्री डिजिज
|
| 273 |
+
८४. ची ३०१ एभिएन इन्फेक्सिएस् ब्रोन्काइटिस्
|
| 274 |
+
८५. ची ३०२ एभिएन इन्फेक्सिएस् ल्यारिन्जोट्रेकाइटिस्
|
| 275 |
+
८६. ची ३०३ इभिएन टपुवरक्लोसिस
|
| 276 |
+
८७. ची ३०४ डक् भाइरस हेपाटाइटिस्
|
| 277 |
+
८८. ची ३०४ डक भाइरस इज्टेराइटिस् (डक् प्लेग)
|
| 278 |
+
८९. ची ३०६ फाउल क्लेरा
|
| 279 |
+
९०. ची ३०७ फाउल पक्स
|
| 280 |
+
९१. ची ३०८ फाउल टाइफाइड (एस. ग्यालीनेरम)
|
| 281 |
+
९२. ची ३०९ इन्फेक्सिएस् ब्रर्सल डिजिज् (गमबोरो डिजिज्)
|
| 282 |
+
९३. ची ३१० मेरेक्स डिजिज्
|
| 283 |
+
९४. ची ३११ माइकोप्लाज्मोसिस् (एम. ग्यालिसेप्टिकम)
|
| 284 |
+
९५. ची ३१२ सिटाकोसिस् एण्ड ओर्निथोसिस् डिजिज्
|
| 285 |
+
९६. ची ३१३ पूल्लोराम डिजिज् (एस. पूल्लोरम)
|
| 286 |
+
|
| 287 |
+
### डिजिज अफ अदर एनिमल
|
| 288 |
+
९७. बी ५०१ लेस्मानीएसिस्
|
| 289 |
+
|
| 290 |
+
### मल्टिपल स्पेसीज डिजिज
|
| 291 |
+
९८. सी ६११ लिस्टेरियोसिस्
|
| 292 |
+
९९. सी ६१२ टक्सोप्लाज्मोसिस्
|
| 293 |
+
१००. सी ६१३ मेलिओडोसिस्
|
| 294 |
+
१०१. सी ६१४ ब्लाक्लेग
|
| 295 |
+
१०२. सी ६१४ बाटूलिज्म
|
| 296 |
+
१०३. सी ६१६ अदर क्लोस्ट्रेडियल इन्फेक्सन्स्
|
| 297 |
+
१०४. सी ६१७ अदर पास्चुरेल्लोसिस्
|
| 298 |
+
१०५. सी ६१६ एक्टिनोमाइकोसिस्
|
| 299 |
+
१०६. सी ६१९ इन्टेस्टिनल साल्मोनेल्ला इन्फेक्सन्स्
|
| 300 |
+
१०७. सी ६२० कक्सिडियोसिस्
|
| 301 |
+
१०८. सी ६२१ डिस्टोम्याटोसिस (लिभर फलुक)
|
| 302 |
+
१०९. सी ६२२ फिलारियासिस्
|
| 303 |
+
|
| 304 |
+
### क्याटल डिजिज
|
| 305 |
+
११०. सी ६४२ म्यूकोसल डिजिज/बोभाइन भाइरस डाईरिया
|
| 306 |
+
१११. सी ६४३ भिब्रियोनिक डिसेन्ट्री
|
| 307 |
+
११२. सी ६४४ बार्बल इन्फेस्टेसन्
|
| 308 |
+
|
| 309 |
+
### सीप एण्ड गोट डिजिज
|
| 310 |
+
११३. सी ७०१ कन्टाजियसे पोस्चुलर डर्माटाइटिस्
|
| 311 |
+
११४. सी ७०२ फूट रट
|
| 312 |
+
११५. सी ७०३ कन्टाजियस् ओप्थालमिया
|
| 313 |
+
११६. सी ७०४ इन्टेरोटक्सिमिया
|
| 314 |
+
११७. सी ७०४ केजियस लिम्फेन्डिनाइटिस्
|
| 315 |
+
११८. सी ७०६ सीप मेन्ज
|
| 316 |
+
|
| 317 |
+
### डिजिज अफ अदर एनिमल्स
|
| 318 |
+
११९. सी ७४१ इक्वाइन क्याइटल एक्जेन्चेमा
|
| 319 |
+
१२०. सी ७४२ अल्स��ेटिफ लेम्फेन्जाइटिस्
|
| 320 |
+
१२१. सी ७४३ स्ट्रेन्गल्स्
|
| 321 |
+
१२२. सी ७४४ साल्मोनेल्लोसिस् (एस. एबोर्टस् इक्वाई)
|
| 322 |
+
|
| 323 |
+
### पीग डिजिज
|
| 324 |
+
१२३. सी ६०१ स्वाइन इरिसेपलस्
|
| 325 |
+
|
| 326 |
+
### पोल्ट्रि डिजिज
|
| 327 |
+
१२४. सी ६४१ इन्फेक्सियस् कोराइजा
|
| 328 |
+
१२५. सी ६४३ एभिएन इन्सेफालोमाइलाइटिस्
|
| 329 |
+
१२६. सी ६४४ एभिएन स्पाइरोकिटोसिस्
|
| 330 |
+
१२७. सी ६४४ एभिएन साल्मोनेल्लोसिस्
|
| 331 |
+
१२८. सी ६४६ एभिएन ल्यूकोसिस्
|
| 332 |
+
|
| 333 |
+
### डग एण्ड क्याट डिजिज
|
| 334 |
+
१२९. सी ९२१ क्यानाइन डिस्टेम्पर
|
section_12_pdf_13.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,290 @@
|
|
|
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|
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|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
# बीउ बिजन ऐन, २०४४
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०४४। ७। १०
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
१. बीउ बिजन (पहिलो संशोधन) ऐन, २०६४
|
| 8 |
+
२०६४। १०। १०
|
| 9 |
+
|
| 10 |
+
२. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 11 |
+
२०६६। १०। ७
|
| 12 |
+
|
| 13 |
+
३. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 14 |
+
२०७४। ११। १९
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
४. बीउ बिजन (दोस्रो संशोधन) ऐन, २०७९
|
| 17 |
+
२०७९। ११। १९
|
| 18 |
+
|
| 19 |
+
२०४४ सालको ऐन नं. १४
|
| 20 |
+
बीउ बिजन सम्बन्धी व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
प्रस्तावना: विभिन्न बालीको उत्पादनमा बुद्धि गराउन उच्च गुणस्तरको बीउ बिजन उत्पादन, प्रशोधन तथा परीक्षण गरी गुणस्तरयुक्त बीउ बिजन सुव्यबस्थित रूपले उपलब्ध गराई सर्वसाधारण जनताको सुबिधा तथा आर्थिक हित कायम राख्न बाच्छुनीय भएकोले,
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
थी ४ महाराजाधिराज वीरन्द्व वीर विक्रम शाददेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्भतिले यो ऐन बनाइबक्सेको छ।
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
## १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ :
|
| 27 |
+
|
| 28 |
+
१.१ यस ऐनको नाम "बीउ बिजन ऐन, २०४४" रहेको छ।
|
| 29 |
+
१.२ यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकिदिएको क्षेत्रमा तोकिदिएको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
२. परिभाषा :
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
२.१ विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा-
|
| 34 |
+
२.१.१ "बीउ बिजन" भन्नाले भौण बिरूवा (इम्ब्रोयनिक प्लान्ट) खाद्य पदार्थ र सुरक्षात्मक आवरण भएको परिपक्व ओभ्यूल (म्याचोर्ड ओभ्यूल) बा यौनिक बा बानस्पतिक तरीकाले पुनरोत्पादन (रिप्रोडक्सन) गरी बाली उत्पादन गर्नका लागि छुर्ने बा रोष्ने काममा प्रयोग गर्न सकिने बीउ बिजन बा बीज सम्झनु पर्छ।
|
| 35 |
+
२.१.२ "बाली" भन्नाले खाद्यान्न, तरकारी, फलफूल, दलहन, तेलहन, नगदेबाली बा घाँसबाली सम्झनु पर्छ र सो शब्दले फूल फूल्ने बा नफूल्ने आलझारिक बालीलाई समेत जनाउँछ।
|
| 36 |
+
२.१.३ "कृषिकार्य" भन्नाले बाली उत्पादन, सड्कलन, भण्डारण र प्रशोधन गर्ने कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
२.१.४ "समिति" भन्नाले दफा ३ बमोजिम गठित राष्ट्रिय बीउ बिजन समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
२.१.५ "प्रयोगशाला" भन्नाले दफा ९ बमोजिम स्थापना भएको बीउ बिजन परीक्षण प्रयोगशाला सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
२.१.६ "सूचित बीउ बिजन" भन्नाले दफा ११ बमोजिम सूचित बा पञ्जीकृत गरिएको बीउ बिजन सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
२.१.७ "भाडो (कन्टेनर)" भन्नाले बाकस, टिनको बड़ा, शीशी, थैली, बोरा, भकारी, व्यारेल बा अन्य यस्तै बीउ बिजन राख्न प्रयोग गरिने भाँडो सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
२.१.८ "प्रजनक (ब्रीडर)" भन्नाले बालीको कुनै जातलाई पहिलो पटक प्रजनन बा छनीट गरी प्रयोगमा ल्याउने व्यक्ति, संस्था बा निकाय सम्झनु पर्छ।
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| 42 |
+
२.१.९ "किसिम" भन्नाले एकै नामद्वारा चिनिएका बा चिनिन सक्ने कुनै बनस्पतिको सबै जातमूल (स्पेसिज्) तथा उपजातमूल (सब्स्पेसिज्) सम्झनु पर्छ।
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| 43 |
+
२.१.१० "जात (भेराईटी)" भन्नाले बनस्पति शास्त्रीय बर्गीकरणमा सबैभन्दा तल्लो श्रेणीभित्र पर्ने समान आनुबंशिक लक्षणहरू देखिने, अन्य समूहसँग कम्तीमा एउटा लक्षणद्वारा भिन्नता छुट्टिने र पुनरूत्पादन (प्रोपागेसन) हुँदा लक्षणहरू परिबर्तन नहुने लक्षण भएका कुनै बनस्पतिको समूह सम्झनु पर्छ।
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| 44 |
+
२.१.११ "सङ्गेतपत्र" भन्नाले भाँडोमा देखिने गरी राखिएको डबा लेखिएका बीउ विजन सम्बन्धी बिबरण *(लेबल) सम्झनु पर्छ।
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+
२.१.१२ "तोकिएको" बा तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
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| 46 |
+
२.१.१३ "मन्त्रालय" भन्नाले कृषि सम्बन्धी बिषय हेर्ने मन्त्रालय सम्झनु पर्छ।
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+
२.१.१४ "प्रदेश मन्त्रालय" भन्नाले प्रदेश सरकारको कृषि सम्बन्धी बिषय हेर्ने मन्त्रालय सम्झनु पर्छ।
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| 48 |
+
२.१.१५ "केन्द्र" भन्नाले बीउ विजन गुणस्तर नियन्त्रण केन्द्र सम्झनु पर्छ।
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+
२.१.१६ "प्रदेश समिति" भन्नाले दफा ६क. बमोजिमको प्रदेश बीउ विजन व्यवस्थापन समिति सम्झनु पर्छ।
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+
२.१.१७ "स्थानीय तह" भन्नाले नगरपालिका बा गाउँपालिका सम्झनु पर्छ।
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+
२.१.१८ "संस्था" भन्नाले बीउ विजन सम्बन्धी काम गर्न प्रचलित कानून बमोजिम स्थापना भएको संस्था सम्झनु पर्छ र सो शब्दले कृषि सम्बन्धी सहकारी संस्था समेतलाई जनाउँछ।
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+
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+
## ३. राष्ट्रिय बीउ बिजन समितिको गठन :
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+
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+
३.१ बीउ बिजन सम्बन्धी नीति निर्धारण गरी कार्यान्वयन गर्न र बीउ बिजन सम्बन्धी बिषयमा नेपाल सरकारलाई आवश्यक परामर्श दिन एक राष्ट्रिय बीउ बिजन समितिको गठन हुन्छ।
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+
३.२ समितिमा देहायका अध्यक्ष तथा सदस्य रहनेछन् :-
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+
३.२.१ सचिव, "मन्त्रालय -अध्यक्ष
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+
३.२.२ महानिदेशक, कृषि विभाग - सदस्य
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+
३.२.२क. प्रदेश मन्त्रालयका सचिवहरु मध्यवाट समितिको बैठकमा छलफल हुने विषयसँग सम्बन्धित प्रदेश मन्त्रालयका सचिव - सदस्य
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+
३.२.३ कार्यकारी निर्देशक, नेपाल कृषि अनुसन्धान परिषद् - सदस्य
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| 61 |
+
३.२.४ प्रबन्ध सज्चालक, कृषि सामग्री कम्पनी लिमिटेड - सदस्य
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| 62 |
+
३.२.५ महाप्रबन्धक, कृषि विकास वैड - सदस्य
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+
३.२.६ बागबानी, खाद्यान्न, घाँसेवाली विज्ञानसँग सम्���न्धित विषयविज्ञ मध्येवाट कम्तीमा एकजना महिला सहित मन्त्रालयद्वारा मनोनीत तीनजना - सदस्य
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| 64 |
+
३.२.७ कृषि तथा पशु विज्ञान विषयमा अध्ययन अध्यापन गराउने बिश्वविद्यालयमध्येवाट मन्त्रालयले तोकेको बिश्वविद्यालयको कम्तीमा सहप्राध्यापकस्तरको बीज विशेषज्ञ एकजना - सदस्य
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| 65 |
+
३.२.८ नेपाल सरकारद्वारा मनोनीत बीउ बिजन उद्यमीहरूमध्येवाट एकजना महिला सहित दुईजना - सदस्य
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| 66 |
+
३.२.९ नेपाल सरकारद्वारा मनोनीत बीउ बिजन उत्पादक र कृषकमध्ये कम्तीमा एकजना महिला सहित दुईजना - सदस्य
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| 67 |
+
३.२.१० प्रमुख, बीउ बिजन गुणस्तर नियन्त्रण केन्द्र - सदस्य-सचिव
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| 68 |
+
३.३ उपदफा ३.२.७, ३.२.८ र ३.२.९ बमोजिम मनोनीत सदस्यको पदाबधि दुई वर्षको हुनेछ।
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| 69 |
+
३.४ उपदफा ३.३ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि उपदफा ३.२.७, ३.२.८ र ३.२.९ बमोजिम मनोनीत सदस्यलाई निजको पदाबधि पूरा नहुँदै नेपाल सरकारले हटाउन सक्नेछ।
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| 70 |
+
३.५ खण्ड ३.२.७, ३.२.८ र ३.२.९ बमोजिमका सदस्य मनोनयन गर्दा समावेशी सिद्धान्तको आधारमा गर्नु पर्नेछ।
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| 71 |
+
३.६ समितिले आवश्यक देखेमा कुनै स्वदेशी बा विदेशी विशेषज्ञ बा सल्लाहकारलाई समितिको बैठकमा पर्यवेक्षकको रूपमा भाग लिन आमन्क्रण गर्न सक्नेछ।
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+
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+
## ४. समितिको बैठक र निर्णय :
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+
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| 75 |
+
४.१ समितिको बैठक अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
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| 76 |
+
४.२ समितिको कूल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशत सदस्यहरू उपस्थित भएमा बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
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| 77 |
+
४.३ समितिको बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ र निजको अनुपस्थितिमा बैठकमा उपस्थित सदस्यहरूले आफूमध्येबाट छानेको सदस्यले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ।
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| 78 |
+
४.४ समितिको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा अध्यक्षले निर्णयात्मक मत दिनेछ।
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| 79 |
+
४.५ समितिको निर्णय सदस्य-सचिबद्वारा प्रमाणित गरिनेछ।
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| 80 |
+
४.६ समितिको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि समिति आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
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| 81 |
+
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+
## ५. समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार :
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+
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+
५.१ बीउ बिजन सम्बन्धी राष्ट्रिय नीति तर्जुमा गर्न नेपाल सरकारलाई परामर्श दिने।
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| 85 |
+
५.२ बीउ बिजन उत्पादन, प्रशोधन, भण्डारण, प्याकेजिङ्ग तथा बितरण कार्यमा प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तह र निजी क्षेत्रबीच समन्वय कायम गरी बीउ बिजनको गुणस्तर नियन्त्रण तथा मापदण्ड निर्धारणमा एकरुपता ल्याउने।
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| 86 |
+
५.३ बीउ बिजन उद्योगमा लगानी गर्न निजी क्षेत्रलाई प्रोत्साहन गर्ने।
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+
५.४ नेपालभित्र उत्पादन बा बाहिरबाट आयात भई बिक्री बितरण हुने बीउ बिजनको गुणस्तर नियमित तथा नियन्त्रण गर्ने गराउने।
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| 88 |
+
५.५ नयाँ जातको बीउ बिजनहरू तोकिएबमोजिम अनुमोदन, उन्मोचन (रिलीज) र दर्ता गर्ने।
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| 89 |
+
५.६ नयाँ जातको बीउ बिजनको विशिष्टता, एकरूपता र स्थायित्व परीक्षण गरी तोकिएबमोजिम प्रजनकलाई स्वामित्वको अधिकार प्रदान गर्ने।
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| 90 |
+
५.७ बीउ बिजनको गुणस्तर निर्धारण गर्ने।
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| 91 |
+
५.८ स्वदेशी बा बिदेशी निकायहरूद्वारा निर्धारित बीउ बिजनको गुणस्तरलाई आवश्यकता अनुसार अनुमोदन गर्ने।
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| 92 |
+
५.९क बीउ बिजन सम्बन्धी सेबा शुल्कको सम्बन्धमा नेपाल सरकारलाई परामर्श दिने,
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| 93 |
+
५.९ख बालीको किसिम र "जात सचित बा पञ्जीकरण गर्ने सम्बन्धमा नेपाल सरकार बा प्रदेश सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
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| 94 |
+
५.९ग कसैले अनुमतिपत्र नबीकरण नगराई प्रयोगशाला सञ्चालन गरेको पाइएमा सोको अनुमतिपत्र खारेज गर्ने,
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| 95 |
+
५.९घ बाली निरीक्षक, बीउ बिजन नमूना सङ्लक तथा बीउ बिजन बिश्लेषकको रूपमा काम गर्न अनुमति दिनको लागि परीक्षा लिने।
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| 96 |
+
५.१० समितिको निर्णयहरु प्रदेश मन्त्रालय, प्रदेश बीउ बिजन समिति र बीउ बिजन परीक्षण प्रयोगशाला लगायत अन्य सम्बन्धित निकायमा लेखी पटाउने,
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| 97 |
+
५.११ प्रदेश बीउ बिजन समिति बा स्थानीय बीउ बिजन व्यवस्थापन समितिले बीउ बिजन सम्बन्धमा परामर्श माग गरेमा आवश्यक परामर्श दिने,
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| 98 |
+
५.१२ राह्रिय र प्रदेशस्तरमा परम्परागत रुपमा प्रयोग भइरहेका र लोपोन्मुख जातका बीउ बिजनको पहिचान गरी तिनको संरक्षणको लागि राह्रियस्तरमा जीन बैङ र प्रदेशस्तरमा सामुदायिक बीउ बिजन बैङ स्थापना गर्न आवश्यक प्राविधिक र नीतिगत काम गर्ने,
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| 99 |
+
५.१३ बीउ बिजनसम्बन्धी अन्य आवश्यक काम कारबाही गर्ने।
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| 100 |
+
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| 101 |
+
## ६. उपसमितिहरू गठन गर्न सक्ने :
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| 102 |
+
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| 103 |
+
६.१ बीउ बिजनको उत्पादन, प्रशोधन, भण्डारण तथा बिक्री बितरण गर्ने कार्यलाई सुचारू रूपले संचालन गरी गुणस्तरयुक्त बीउ बिजन उपलब्ध गराउने प्रयोजनको लागि समितिले आवश्यकता अनुसार बिभिन्न उपसमितिहरू गठन गर्न सक्नेछ।
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| 104 |
+
६.२ उप-समितिहरूको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 105 |
+
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| 106 |
+
## ६६क. प्रदेश बीउ बिजन समितिको गटनः
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| 107 |
+
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| 108 |
+
६क.१ प्रदेशमा बीउ बिजन सम्बन्धी नीति निर्धारण गरी कार्यान्वयन गर्न र बीउ बिजन सम्बन्धी आवश्यक परामर्श दिन प्रदेश सरकारले प्रदेश बीउ बिजन समितिको गटन गर्न सक्नेछ।
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| 109 |
+
६क.२ उपदफ��� ६क.१ बमोजिम गठित समितिको गटन, काम, कर्तव्य र अधिकार प्रदेश कानून बमोजिम हुनेछ।
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| 110 |
+
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| 111 |
+
## ६६ख. स्थानीय बीउ बिजन व्यवस्थापन समिति गटन गर्न सकिनेः
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| 112 |
+
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| 113 |
+
आफ्नो क्षेत्रभित्र उत्पादन हुने बीउ बिजनको स्थानीय तहमा उत्पादन, संरक्षण र सम्बर्पन गर्न तथा तत्सम्बन्धमा कृषकलाई परामर्श दिन स्थानीय कानूनमा व्यवस्था भए बमोजिम स्थानीय बीउ बिजन व्यवस्थापन समिति गटन गर्न सकिनेछ।
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| 114 |
+
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| 115 |
+
## ७. बीउ बिजन गुणस्तर नियन्त्रण केन्द्रको स्थापना :
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| 116 |
+
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| 117 |
+
बीउ बिजनको गुणस्तर नियन्त्रण सम्बन्धी कार्य गर्न तथा समितिको सचिवालयको रूपमा काम गर्न नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी बीउ बिजन गुणस्तर नियन्त्रण केन्द्रको स्थापना गर्न सक्नेछ।
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| 118 |
+
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| 119 |
+
## ८. बीउ बिजन गुणस्तर नियन्त्रण केन्द्रको काम, कर्तव्य र अधिकार :
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| 120 |
+
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| 121 |
+
८.१ बीउ बिजन गुणस्तर नियन्त्रण केन्द्रको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ :-
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| 122 |
+
८.१.१ बीउ बिजन गुणस्तर नियन्त्रण तथा प्रमाणीकरण सम्बन्धी आवश्यक पूर्वाधारहरू तयार गरी समितिमा पेश गर्ने।
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| 123 |
+
८.१.२ समितिद्वारा स्वीकृत तरीका, स्तर तथा मापदण्ड अनुसार बीउ बिजन प्रमाणित गरी आवश्यकता अनुसार प्रमाणपत्र दिने।
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| 124 |
+
८.१.३ उपदफा ९.४ बमोजिम अनुमतिपत्रप्राप्त व्यक्ति वा संस्थाले शर्त बमोजिम काम गरे नगरेको अनुगमन गर्ने।
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| 125 |
+
८.२ बीउ बिजन गुणस्तर नियन्त्रण केन्द्रको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तथा त्यस्तो केन्द्रले बीउ बिजन गुणस्तर नियन्त्रण तथा प्रमाणीकरण गर्दा अपनाउनु पर्ने कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 126 |
+
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| 127 |
+
## ९. बीउ बिजन परीक्षण प्रयोगशालाको स्थापना :
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| 128 |
+
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| 129 |
+
९.१ बीउ बिजनको परीक्षण र तत्सम्बन्धी अन्य कार्य गर्नको लागि नेपाल सरकारले बीउ बिजन परीक्षण प्रयोगशालाको स्थापना गर्नेछ।
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| 130 |
+
९.२ बीउ बिजनको परीक्षण र तत्सम्बन्धी अन्य कार्य गर्नको लागि मन्त्रालयले तोकेको मापदण्ड बमोजिम हुने गरी सम्बन्धित प्रदेश कानून बमोजिम प्रदेश मन्त्रालय वा स्थानीय तह वा कुनै व्यक्ति वा निजी सङ् संस्थाले बीउ बिजन परीक्षण प्रयोगशालाको स्थापना गर्न सक्नेछन्।
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| 131 |
+
९.३ उपदफा ९.१ र ९.२ बमोजिम स्थापना भएका प्रयोगशालाको प्राविधिक रेखदेख र नियन्त्रण समितिबाट हुनेछ।
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| 132 |
+
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| 133 |
+
## १०. प्रयोगशालाको काम, कर्तव्य र अधिकारः
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| 134 |
+
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| 135 |
+
प्रयोगशालाको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 136 |
+
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| 137 |
+
## १०क. नवीकरण:
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| 138 |
+
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| 139 |
+
१०क.१ दफा ९ बमोजिम स्थापना भएका प्रयोगशाल���ले प्रत्येक बर्ष समितिबाट प्राविधिक परीक्षण (टेक्निकल अडिट) गराई अनुमतिपत्र नवीकरण गराउनु पर्नेछ।
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| 140 |
+
१०क.२ उपदफा १०क.१ बमोजिम प्रत्येक बर्ष अनुमतिपत्र नवीकरण नगराएमा वा प्राविधिक परीक्षणबाट तोकेको मापदण्ड पूरा भएको नपाइएमा त्यस्तो प्रयोगशालाको अनुमतिपत्र स्वतः खारज हुनेछ।
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| 141 |
+
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| 142 |
+
## ११. बीउ बिजनको किसिम वा जात सूचित वा पञ्जीकृत गर्ने अधिकार:
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| 143 |
+
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| 144 |
+
११.१ मन्त्रालयले कृषि कार्यको निमित्त प्रयोग गरिने बीउ बिजनको कुनै किसिम वा जातको गुणस्तर नियमित तथा नियन्त्रण गर्न आवश्यक देखेमा समितिको परामर्श लिई नेपालमा उन्मोचित किसिम वा जातका बीउ बिजनहरुलाई नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी सूचित बीउ बिजनको रुपमा तोक्न सक्नेछ।
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| 145 |
+
११.२ मन्त्रालयले कृषि कार्यको निमित्त प्रयोग गरिने आयातित बा स्थानीय जातका बीउ बिजनको कुनै किसिम बा जातको गुणस्तर नियमित तथा नियन्त्रण गर्न आबश्यक देखेमा समितिको निर्णय बमोजिम पञ्जीकरण गरी त्यस्ता किसिम बा जातका बीउ बिजनहरुलाई पञ्जीकृत बीउ बिजनको रुपमा तोक्न सक्नेछ। त्यसरी बीउ बिजनहरुलाई पञ्जीकृत गरेको सूचना मन्त्रालय तथा समितिको बेभसाइट र अन्य उपयुक्त माध्यमबाट प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 146 |
+
११.३ प्रदेश मन्त्रालयले आफ्नो क्षेत्रभित्र उपयुक्त हुने नेपालमा उन्मोचित किसिम बा जातका बीउ बिजन सूचित गर्न बा आयातित बाहेकको स्थानीय जातका बीउ बिजनको पञ्जीकृत गर्न चाहेमा तोकिएको मापदण्ड र प्रक्रिया पूरा गरी प्रदेश समितिको सिफारिसमा त्यस्तो बीउ बिजन प्रदेश राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी सूचित गर्न बा पञ्जीकृत गर्न सक्नेछ। त्यसरी बीउ बिजन सूचित बा पञ्जीकृत गर्दा प्रदेश मन्त्रालयले समितिसँग परामर्श लिनु पर्नेछ।
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| 147 |
+
११.४ मन्त्रालय बा प्रदेश मन्त्रालयले उपदफा ११.१, ११.२ बा ११.३ बमोजिम सूचित बीउ बिजन बा पञ्जीकृत बीउ बिजन तोक्दा विभिन्न क्षेत्रको लागि उपयुक्त हुने बीउ बिजनको किसिम बा जात समेत तोक्नु पर्नेछ।
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| 148 |
+
११.५ यस दफा बमोजिम पञ्जीकृत बीउ बिजन खेतिका लागि उपयुक्त नदेखिएमा त्यसरी पञ्जीकरण गर्ने निकायले सार्वजनिक रुपमा सूचना प्रकाशन गरी पञ्जीकृत बीउ बिजनको सूचीबाट हटाउनेछ। प्रदेश मन्त्रालयले उपदफा ११.३ बमोजिम पञ्जीकृत गरेको बीउ बिजन सो सूचीबाट हटाएमा त्यसको जानकारी समितिलाई दिनु पर्नेछ।
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| 149 |
+
११.६ बीउ बिजनको जात सूचित गर्ने ���ा पञ्जीकरण गर्ने प्रक्रिया तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी प्रक्रिया तोक्दा बालीहरुका प्रकृति अनुसार बीउ बिजनको जात सूचित गर्ने तथा आयातित बा स्थानीय जातका बीउ बिजनको पञ्जीकरण गर्ने प्रक्रिया फरक-फरक हुने गरी तोक्न सकिनेछ।
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| 150 |
+
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| 151 |
+
## ११क. अनुमतिपत्र लिनु पर्ने:
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| 152 |
+
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| 153 |
+
११क.१ कुनै व्यक्ति बा संस्थाले बीउ बिजनको बिक्री बितरण सम्बन्धी कारोबार गर्न चाहेमा तोकिए बमोजिमको दस्तुर सहित तोकिएको अधिकारी समक्ष निबेदन दिई तोकिए बमोजिमको ढाँचामा अनुमतिपत्र लिनु पर्नेछ।
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| 154 |
+
११क.२ कसैले उपदफा ११क.१ बमोजिम अनुमति नलिई बीउ बिजन बिकी बितरण गरेको पाइएमा त्यस्तो बीउ बिजन बाली निरीक्षकले जफत गर्नेछ।
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| 155 |
+
११क.३ उपदफा ११क.१ बमोजिम प्राप्त अनुमतिपत्र प्रत्येक बर्ष तोकिएको अधिकारी समक्ष निवेदन दिई तोकिए बमोजिमको दस्तुर लिई नवीकरण गराउनु पर्नेछ। अनुमतिपत्रको नवीकरण तथा खारेजी सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 156 |
+
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| 157 |
+
## ११ख. बिकी वितरण गर्न नपाइने:
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| 158 |
+
|
| 159 |
+
११ख.१ कसैले यस ऐन बमोजिम सूचित बा पञ्जीकरण नभएका वीउ विजन बिकी गर्न गराउन हुँदैन।
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| 160 |
+
११ख.२ उपदफा ११ख.१ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कृषि अनुसन्धान प्रयोजनको लागि यस ऐन बमोजिम सूचित बा पञ्जीकरण नभएका वीउ विजन बिकी वितरण गर्न बाधा पर्ने छैन।
|
| 161 |
+
|
| 162 |
+
## ११ग. जफत हुने:
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| 163 |
+
|
| 164 |
+
११ग.१ कसैले यस ऐनको बर्खिलाप हुने गरी कुनै वीउ विजनको जातीय परीक्षण, गुणस्तर परीक्षण, आयात, निर्यात, उत्पादन, प्रशोधन, ओसारपसार, भण्डारण र बिकी वितरण गरेमा त्यस्ता वीउ विजनहरु वीउ विजन निरीक्षकले जफत गर्न सक्नेछ।
|
| 165 |
+
११ग.२ वीउ विजनको जफत सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 166 |
+
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| 167 |
+
## ११घ. क्षतिपूर्ति सम्बन्धी व्यवस्था:
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| 168 |
+
|
| 169 |
+
११घ.१ कसैले बिकी वितरण गरेको वीउ विजनको गुणस्तर बा गलत सूचनाको कारणले कृषकलाई आर्थिक हानि नोक्सानी पुग्न गएमा मूल्याङ्गन समितिले गरेको मूल्याङ्गन र सिफारिसको आधारमा सम्बन्धित पक्षले कृषकलाई वास्तविक हानि नोक्सानीको क्षतिपूर्ति दिनु पर्नेछ।
|
| 170 |
+
११घ.२ उपदफा ११ घ.१ बमोजिमको हानि नोक्सानीको मूल्याङ्गन गर्न प्रत्येक जिल्लामा देहाय बमोजिमको मूल्याङ्गन समिति रहनेछः
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| 171 |
+
(क) केन्द्रको प्रमुखले तोकेको अधिकृत - संयोजक
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| 172 |
+
(ख) कृषि सम्बन्धी विषय हेर्ने जिल्लास्तरको कार्यालयको प्रमुख - सदस्य
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| 173 |
+
(ग) मूल्याङ्गन समितिले तोकेको कृषि बिज्ञ - सदस्य
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| 174 |
+
(घ) नेपाल कृषि अनुसन्धा�� परिषद्को बैज्ञानिक - सदस्य
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| 175 |
+
(ङ) सम्बन्धित गाउँपालिका/ नगरपालिकाको प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत - सदस्य
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| 176 |
+
११घ.३ उपदफा११घ.२ बमोजिमको मूल्याङ्कन समितिले आर्थिक हानि नोक्सानीको मूल्याङ्कन गर्दा जग्गाको उत्पादकत्व, बीउ बिजनको सिफारिस गुणस्तर, कृषि कार्यको लागि भएको खर्च, उत्पादनमा आएको कमी तथा सो समितिले आबश्यक ठानेको अन्य आधारमा समेत मूल्याङ्कन गरी उपदफा ११घ.१ बमोजिम क्षतिपूर्तिको रकम सिफारिस गर्नु पर्नेछ।
|
| 177 |
+
|
| 178 |
+
## १२. बीउ बिजनको न्यूनतम गुणस्तरको हद तोक्ने :
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| 179 |
+
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| 180 |
+
१२.१ मन्त्रालयले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी सूचित बीउ बिजनमध्ये समितिको परामर्श लिई कुनै बीउ बिजनको हकमा न्यूनतम गुणस्तरको हद तोक्न सक्नेछ।
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| 181 |
+
१२.२ मन्त्रालयले आफ्नो बेभसाइटमा र अन्य उपयुक्त माध्यमबाट सूचना प्रकाशन गरी दफा ११ को उपदफा ११.२ बमोजिम पञ्जीकृत बीउ बिजनमध्ये समितिको परामर्श लिई कुनै बीउ बिजनको हकमा न्यूनतम गुणस्तरको हद तोक्न सक्नेछ।
|
| 182 |
+
१२.३ प्रदेश मन्त्रालयले प्रदेश राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी दफा ११ को उपदफा ११.३ बमोजिम सूचित बा पञ्जीकृत बीउ बिजनमध्ये प्रदेश बीउ बिजन समितिको परामर्श लिई कुनै बीउ बिजनको हकमा न्यूनतम गुणस्तरको हद तोक्न सक्नेछ।
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| 183 |
+
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| 184 |
+
## १३. सूचित बीउ बिजनको बिक्री वितरण :
|
| 185 |
+
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| 186 |
+
१३.१ सूचित बीउ बिजनको बिक्री वितरण गर्ने व्यक्ति बा संस्थाले आफूले बिक्री वितरण गर्ने बीउको भाँडोमा देहायको बिबरण उल्लेख गर्नु पर्नेछ :-
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| 187 |
+
१३.१.१ बीउ बिजनको किसिम र जात,
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| 188 |
+
१३.१.२ दफा १२ बमोजिम तोकिएको न्यूनतम गुणस्तरको हद,
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| 189 |
+
१३.१.३ रासायनिक पदार्थ प्रयोग गरी उपचार गरिएको भए सोको बिबरण,
|
| 190 |
+
१३.१.४ तोकिए बमोजिमका अन्य कुराहरू।
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| 191 |
+
१३.२ उपदफा १३.१ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै खास क्षेत्रको लागि मात्र उपयुक्त हुने भनी प्रजनकले निर्धारण गरेको किसिम र जातको सूचित बीउ बिजन त्यसरी निर्धारण गरिएको क्षेत्र बाहेक अन्य क्षेत्रमा बिक्री वितरण गर्न बा गराउन पाइने छैन।
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| 192 |
+
|
| 193 |
+
## १४. सूचित बीउ बिजन निकासी बा पैटारी गर्न स्वीकृति लिनु पर्ने :
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| 194 |
+
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| 195 |
+
१४.१ कुनै किसिम बा जातको सूचित बीउ बिजन निकासी बा पैटारी गर्न चाहने "व्यक्ति बा संस्थाले तोकिएको अधिकारी समक्ष तोकिए बमोजिमको *दस्तुर र विवरण सहित निकासी बा पैटारी गर्न स्वीकृतिको निमित्त निवेदन दिनु पर्नेछ।
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| 196 |
+
१४.२ उपदफा १४.१ बमोजिमको निवेदन प्राप्त भएपछि तोकिएको अधि���ारीले स्वीकृति दिन सक्नेछ।
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| 197 |
+
१४.३ उपदफा १४.२ बमोजिम स्वीकृति प्राप्त भएपछि सम्बन्धित व्यक्ति बा संस्थाले सूचीत बीउ बिजनको निकासी बा पैटारी गर्न सक्नेछ।
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| 198 |
+
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| 199 |
+
## १४क. निकासी बा पैटारीमा रोक लगाउन सक्ने :
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| 200 |
+
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| 201 |
+
१४क.१ कसैले मानव, पशुपन्छी, बिरुवा, वातावरण, संस्कृति र जनजीवनमा प्रतिकूल प्रभाव पुए्याउन सक्ने कुनै खास जातको बीउ बिजन बा अनुबश परिवर्तित जीव (जेनेटिकल्ली मोडिफाइड अर्गानिज्म) बा जीवित रूपमा रूपान्तरित जीव (लिभिङ्म मोडिफाइड अर्गानिज्म) बा बंश नपुंसक बीउ (टर्मिनेटर सीड) को निकासी बा पैटारी गर्नु अघि तोकिए बमोजिम जोखिम विश्लेषण गर्नु पर्नेछ।
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| 202 |
+
१४क.२ उपदफा १४क.१ बमोजिम गरिएको जोखिम विश्लेषणको आधारमा निकासी बा पैटारी गर्न उपयुक्त नदेखिएको बीउ बिजन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी निकासी बा पैटारी गर्न रोक लगाउन सक्नेछ।
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| 203 |
+
१४.क.३ यस दफामा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि मन्त्रालयको अनुमति लिई दफा १४क.१ मा उल्लिखित प्रकृतिका बीउ बिजनको अध्ययन अनुसन्धान गर्न यस ऐनले बाधा पुए्याएको मानिने छैन।
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| 204 |
+
१४.क.४ उपदफा १४क.३ बमोजिम अनुमति माग गर्दा त्यस्तो बीउ बिजनको संक्षिम्र परिचयात्मक विवरण समावेश गर्नु पर्नेछ।
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| 205 |
+
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| 206 |
+
## १४ख. मूल बा स्रोत बीउ उत्पादनको अनुमति लिनु पर्ने:
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| 207 |
+
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| 208 |
+
१४ख.१ कुनै व्यक्ति बा संस्थाले मूल बा स्रोत बीउ उत्पादन गर्न चाहेमा अनुमतिको लागि तोकिए बमोजिमको दस्तुर सहित समिति बा प्रदेश समिति समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ।
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| 209 |
+
१४ख.२ उपदफा १४ख.१ बमोजिम निवेदन परेमा समितिले आवश्यक जाँचबुझ गरी अनुमति दिन सक्नेछ।
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| 210 |
+
१४ख.३ मूल बा स्रोत बीउ उत्पादन गर्न अनुमति दिने सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 211 |
+
१४ख.४ यस दफामा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि घरायसी प्रयोजनका लागि मूल बा स्रोत बीउ उत्पादन गर्न अनुमति लिनु पर्ने छैन।
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| 212 |
+
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| 213 |
+
## १४ग. बर्णशङर बीउ उत्पादनको अनुमति लिनु पर्ने:
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| 214 |
+
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| 215 |
+
१४ग.१ कुनै व्यक्ति बा संस्थाले बर्णशङर बीउ उत्पादन गर्न चाहेमा अनुमतिको लागि तोकिए बमोजिमको दस्तुर सहित समिति बा प्रदेश समिति समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ।
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| 216 |
+
१४ग.२ उपदफा १४ग.१ बमोजिमको निवेदन प्राप्त भएपछि समितिले आवश्यक जाँचबुझ गरी त्यस्तो बीउ उत्पादन गर्न अनुमति दिन सक्नेछ।
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| 217 |
+
१४ग.३ बर्णशङर बीउ उत्पादन गर्न अनुमति दिने सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ��
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| 218 |
+
१४ग.४ यस दफामा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि घरायसी प्रयोजनको लागि बर्णशङर बीउ उत्पादन गर्न अनुमति लिनु पर्ने छैन।
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| 219 |
+
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| 220 |
+
## १४घ. जातीय विकास तथा सम्बर्ढन गर्न अनुमति लिनु पर्ने:
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| 221 |
+
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| 222 |
+
१४.घ.१ कुनै व्यक्ति बा संस्थाले कुनै बीउको जातीय विकास तथा सम्बर्ढन गर्न चाहेमा अनुमतिको लागि तोकिए बमोजिमको दस्तुर सहित समिति समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ।
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| 223 |
+
१४.घ.२ उपदफा १४घ.१ बमोजिमको निवेदन प्राप्त भएपछि समितिले आवश्यक जाँचबुझ गरी कुनै बीउको जातीय विकास तथा सम्बर्ढन गर्न अनुमति दिन सक्नेछ।
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| 224 |
+
१४.घ.३ बीउको जातीय विकास तथा सम्बर्ढन गर्ने सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 225 |
+
१४घ.४ यस दफामा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि घरायसी प्रयोजनको लागि जातीय विकास तथा सम्बर्ढन गर्न अनुमति लिनु पर्ने छैन।
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| 226 |
+
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| 227 |
+
## १४ङ. प्रदेश कानून बमोजिम हुने:
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| 228 |
+
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| 229 |
+
दफा १४ख., १४ग. र १४घ. बमोजिम मूल बा स्रोत बीउ उत्पादन, बर्णशइर बीउ उत्पादन र जातीय विकास सम्बर्द्धनका सम्बन्धमा समितिले तोकेको गुणस्तर र मापदण्ड अनुरुप हुने गरी प्रदेशले कानून बनाई व्यत्कि बा संस्थालाई अनुमति दिन सक्नेछ।
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| 230 |
+
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| 231 |
+
## १६. बाली निरीक्षक, बीउ बिजन नमुना सइलक तथा बीउ बिजन बिश्लेषक सम्बन्धी व्यवस्था :
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| 232 |
+
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| 233 |
+
१६.१ नेपाल सरकार बा प्रदेश सरकारले देहायको योग्यता पुगेका नेपाली नागरिकलाई बीउ बिजन निरीक्षक तथा बीउ बिजन बिश्लेषक नियुक्त गर्न बा तोक्न सक्नेछः
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| 234 |
+
(क) मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्थाबाट कम्तीमा कृषिमा स्नातक तह उत्तीर्ण गरेको बा कृषिमा प्रमाणपत्र तह उत्तीर्ण गरी बीउ बिजन उत्पादनमा कम्तीमा दश बर्षको अनुभब भएको,
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| 235 |
+
(ख) समितिबाट लिइने परीक्षा उत्तीर्ण भएको,
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| 236 |
+
(ग) खण्ड (क) बमोजिम योग्यता पुगेको निजामती कर्मचारी भए निज सेवारत कार्यालयको स्वीकृति प्राप्त भएको।
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| 237 |
+
१६.२ उपदफा १६.१ बमोजिम बाली निरीक्षक, बीउ बिजन नमुना सइलक तथा बीउ बिजन बिश्लेषक नियुक्त नभएसम्मको लागि नेपाल सरकार बा प्रदेश सरकारले सो सम्बन्धमा योग्यता पुगेका "आफ मातहतका बा स्थानीय तहका अधिकृत स्तरका कर्मचारीलाई बाली निरीक्षक, बीउ बिजन नमुना सइलक बा बीउ बिजन बिश्लेषकको रूपमा काम गर्न तोक्न सक्नेछ।
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| 238 |
+
१६.३ उपदफा १६.१ र १६.२ मा उल्लिखित अबस्थामा बाहेक कसैले पनि यस ऐन बमोजिम अनुमतिपत्र नलिई बाली निरीक्षण गर्न, बीउ बिजनको नमूना सइलन गर्न तथा बीउ बिजन बिश्लेषण गर्न हुँदैन।
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| 239 |
+
१६.४ उप��फा १६.३ बमोजिमको अनुमतिपत्र लिन चाहने तोकिए बमोजिमको योग्यता पुगेको व्यत्तिले समितिबाट लिइने परीक्षा उत्तीर्ण गर्नु पर्नेछ।
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| 240 |
+
१६.५ उपदफा १६.४ बमोजिमको परीक्षा उत्तीर्ण भएको व्यक्तिले बाली निरीक्षक, बीउ बिजन नमुना सङ्लक बा बीउ बिजन बिश्लेषकको रूपमा व्यवसाय सञ्चालन गर्ने अनुमतिपत्र प्राप्त गर्न समिति समक्ष तोकिएको दस्तुर सहित तोकिएको ढाँचामा निवेदन दिनु पर्नेछ।
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| 241 |
+
१६.६ उपदफा १६.५ बमोजिम निवेदन पर्न आएमा तोकिए बमोजिमको दस्तुर लिई तोकिएको शर्त र ढाँचामा समितिले अनुमतिपत्र दिनेछ। यसरी दिइएको अनुमतिपत्र दुई बर्षसम्म बहाल रहनेछ।
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| 242 |
+
१६.७ उपदफा १६.६ बमोजिम दिइएको अनुमतिपत्र तोकिए बमोजिम नवीकरण गराउनु पर्नेछ।
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| 243 |
+
१६.८ उपदफा १६.७ बमोजिम अनुमतिपत्र नवीकरण नगराएमा त्यस्तो अनुमतिपत्र स्वतः रद्द हुनेछ।
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| 244 |
+
१६.९ उपदफा १६.४ बमोजिमको परीक्षा सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 245 |
+
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| 246 |
+
## १७. बाली निरीक्षक, बीउ बिजन नमुना सङ्लक तथा बीउ बिजन बिश्लेषकको काम, कर्तव्य र अधिकार:
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| 247 |
+
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| 248 |
+
बाली निरीक्षक, बीउ बिजन नमूना सङ्लक तथा बीउ बिजन बिश्लेषकको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 249 |
+
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| 250 |
+
## १७क. सेवा शुल्क लिन सक्ने :
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| 251 |
+
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| 252 |
+
१७क.१ नेपाल सरकार बा प्रदेश सरकारले यस ऐन बमोजिम उपलव्ध गराउने कुनै सेवा बापत नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको सेवा शुल्क लिन सक्नेछ।
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| 253 |
+
१७क.२ कुनै व्यक्ति बा संस्थाले यस ऐन बमोजिम कुनै सेवा प्रदान गर्दा समितिबाट स्वीकृत गरे बमोजिमको सेवा शुल्क लिन सक्नेछ।
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| 254 |
+
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| 255 |
+
## १८. नेपाल सरकारले मान्यता दिने :
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| 256 |
+
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| 257 |
+
नेपाल सरकारले समितिको परामर्श लिई नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी बीउ बिजन परिक्षण बा प्रमाणीकरण गर्ने बा जात परीक्षण गर्ने कुनै स्वदेशी बा विदेशी बा अन्तर्राह्रिय संस्थालाई यस ऐनको प्रयोजनका लागि मान्यता प्रदान गर्न सक्नेछ।
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| 258 |
+
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| 259 |
+
## १९. कृषकको अधिकार रहने:
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| 260 |
+
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| 261 |
+
(१) नेपालमा परम्परादेखि प्रयोग र अबलम्बन गरिदैं आएको स्थानीय बीउ बिजन बा जात बा कृषि प्रजातिको बालीको बीउ बिजनमा कृषकको स्वामित्व, जात छुर्नोट, संरक्षण र बितरणको अधिकार रहनेछ।
|
| 262 |
+
(२) नेपालमा कुनै कृषक समूहले परम्परादेखि सामूहिक रुपमा प्रयोग र अबलम्बन गरिदैं आएको स्थानीय बीउ बिजन बा जात बा कृषि प्रजातिको बालीको बीउ बिजन त्यस्तो कृषक समूहको नाममा सामूहिक स्वामित्व हुने गरी प्रचलित कानून बमोज���म दर्ता गर्न सक्नेछन्।
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| 263 |
+
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| 264 |
+
## २०. दण्ड सजाय :
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| 265 |
+
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| 266 |
+
२०.१ कसैले दफा ९. बमोजिम अनुमतिपत्र नलिई प्रयोगशाला सञ्चालन गरेमा गपचास हजारदेखि एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना बा एक महिनादेखि तीन महिनासम्म कैद बा दुवै सजाय हुनेछ।
|
| 267 |
+
२०.२ कसैले दफा ११क. र ११ख. बिपरीत बीउ बिजन बिकी बितरण गरे बा गराएमा "पचास हजारदेखि एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना बा एक महिनादेखि तीन महिना कैद बा दुवै सजाय हुनेछ।
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| 268 |
+
२०.३ कसैले दफा १३ बमोजिमको बिबरण नखुलाई बीउ बिजन बिकी बितरण गरे बा गराएमा "दश हजारदेखि पचास हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा एक महिनादेखि तीन महिना कैद बा दुवै सजाय हुनेछ।
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| 269 |
+
२०.४ कसैले उपदफा १६.३ बिपरीत कुनै कार्य गरेमा "पच्चीस हजार रुपैयाँ जरिबाना बा एक महिनादेखि तीन महिना कैद बा दुवै सजाय हुनेछ।
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| 270 |
+
२०.५ उपदफा २०.१, २०.२, २०.३ र २०.४ मा लेखिएदेखि बाहेक यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत कुनै काम गर्ने गराउने व्यक्ति बा संस्थालाई "पन्च हजारदेखि पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा एक महिनादेखि दुई महिना कैद बा दुवै सजाय हुनेछ।
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| 271 |
+
२०.६ कसैले बीउ बिजन निरीक्षक तथा बीउ बिजन बिश्लेषकलाई यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेका नियम कार्यान्वयन गर्दाका बखत कुनै बाधा अबरोध खडा गरेमा बा धम्की दिएमा दफा १६ को उपदफा १६.१ बमोजिम नियुक्त बा उपदफा १६.२ बमोजिम तोकिएको बीउ बिजन निरीक्षक तथा बीउ बिजन बिश्लेषकले पटकैपिच्छे पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्नेछ।
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| 272 |
+
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| 273 |
+
## २१. मुद्दाको तहकिकात र दायरी :
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| 274 |
+
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| 275 |
+
२१.१ यस ऐन बमोजिम सजाय हुने कसूर सम्बन्धी मुद्दाको तहकिकात "दफा १६ को उपदफा १६.१ बमोजिम नियुक्त बा उपदफा १६.२ बमोजिम तोकिएको बीउ बिजन निरीक्षक तथा बीउ बिजन बिश्लेषकले गर्नेछ र त्यस्तो तहकिकातको काम पूरा भएपछि मुद्दा हेर्ने अधिकारी समक्ष मुद्दा दायर गर्नेछ।
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| 276 |
+
२१.२ उपदफा २१.१ बमोजिम मुद्दा तहकिकात र दायर गर्दा बीउ बिजन निरीक्षकले सरकारी बकीलको राय लिन सक्नेछ। "सरकारी बकिलको राय लिई त्यस्तो राय बमोजिम मुद्दा चलाउनु पर्नेछ।
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| 277 |
+
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| 278 |
+
## २२. मुद्दा हेर्ने अधिकार :
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| 279 |
+
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| 280 |
+
२२.१ यो ऐन अन्तर्गतको मुद्दा हेर्ने अधिकार तोकिए बमोजिमको अधिकारीलाई हुनेछ।
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| 281 |
+
२२.२ उपदफा २२.१ बमोजिम मुद्दाको कारबाही र किनारा गर्दा तोकिएको अधिकारीले विशेष अदालत ऐन, २०४९, बमोजिमको कार्यबिधि अपनाउनेछ।
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| 282 |
+
२२.३ उपदफा २२.१ बमोजिम मुद्दा हेर्ने अधिकारीले गरेको निर्णय��ा चित्त नबुझ्ने पक्षले निर्णय भएको मितिले पैतीस दिनभित्र सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा पुनराबेदन गर्न सक्नेछ।
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| 283 |
+
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| 284 |
+
## २३. असल नियतले गरेको कामको बचाउ :
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| 285 |
+
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| 286 |
+
बीउ बिजन निरीक्षक बा बीउ बिजन बिश्लेषक बा यस ऐन अन्तर्गत काम गर्ने अधिकार प्राप्त कुनै कर्मचारीले यस ऐन बमोजिम आफ्नो कर्तव्यको पालन गर्दा असल नियतले गरेको काम कारबाहीमा निज व्यक्तिगत रूपमा जबाफदेही हुनेछैन। तर कसैलाई अनावश्यक दुःख, हैरानी बा झण्झट दिने नियतले काम गरेमा सम्बन्धित व्यक्ति त्यसको लागि जबाफदेही हुनेछ।
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| 287 |
+
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| 288 |
+
## २४. नियम बनाउने अधिकार:
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| 289 |
+
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| 290 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्नका लागि नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरू बनाउन सक्नेछ।
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section_12_pdf_2.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,315 @@
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| 1 |
+
**खाघ अधिकार तथा खाघ सम्प्रभुता सम्बन्धी ऐन, २०७४**
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**प्रमाणीकरण मिति**
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| 4 |
+
२०७४।६।२
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| 5 |
+
संबत् २०७४ सालको ऐन नम्र्वर १३
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| 6 |
+
खाघ तथा खाघ सम्प्रभुताको अधिकारको सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
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| 7 |
+
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| 8 |
+
**प्रस्तावनाः**
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| 9 |
+
नेपालको संविधान बमोजिम प्रदत्त नागरिकको खाघ, खाघ सुरक्षा तथा खाघ सम्प्रभुता सम्बन्धी मौलिक हकलाई कार्यान्वयन गर्ने र त्यसको लागि उपयुक्त संयन्त्र निर्माण गर्न तथा खाघमा नागरिकको पहुँच सुनिश्चित गर्ने सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाङ्छुनीय भएकोले, सङ्घीय संसदले यो ऐन बनाएको छ।
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| 10 |
+
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| 11 |
+
---
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| 12 |
+
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| 13 |
+
### **परिच्छेद-१**
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| 14 |
+
**प्रारम्भिक**
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| 15 |
+
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| 16 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
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| 17 |
+
(१) यस ऐनको नाम "खाघ अधिकार तथा खाघ सम्प्रभुता सम्बन्धी ऐन, २०७४" रहेको छ।
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| 18 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
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| 19 |
+
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| 20 |
+
**२. परिभाषाः**
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| 21 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 22 |
+
(क) "आधारभूत खाघ" भन्नाले नेपाल सरकारले समय समयमा नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको खाघ पदार्थ सम्झनु पर्छ।
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| 23 |
+
(ख) "किसान" भन्नाले कृषिलाई मुख्य पेशा बा व्यवसाय बनाई त्यसबाट नै आफ्नो जीविकोपार्जन गर्ने नागरिक सम्झनु पर्छ र सो शब्दले त्यस्तो नागरिकमा आखित परिवारका सदस्य बा बर्षको छ महिना बा सोभन्दा बढी अवधि कृषि कार्यमा श्रम गर्ने बा परम्परागत कृषि औजार निर्माण गर्ने नागरिक बा त्यस्तो नागरिकमा आखित परिवारका सदस्यलाई समेत जनाउँछ।
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| 24 |
+
(ग) "कृषि योग्य भूमि" भन्नाले कृषिको लागि प्रयोग हुने, कृषिजन्य उत्पादन गर्ने बा प्रचलित कानून बमोजिम कृषि कार्यमा उपयोगको लागि निर्धारण गरिएको भूमिलाई सम्झनु पर्छ।
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| 25 |
+
(घ) "खाद्य" भन्नाले जैविक स्रोतबाट प्राप्त सांस्कृतिक रूपमा स्वीकार्य प्रशोधित, अर्धप्रशोधित बा अप्रशोधित मानब उपभोग्य पदार्थ सम्झनु पर्छ र सो शब्दले त्यस्तो पदार्थको तयारी, प्रशोधन बा उत्पादनमा प्रयोग हुने कच्चा पदार्थलाई समेत जनाउँछ।
|
| 26 |
+
(ङ) "खाद्य सम्प्रभुता" भन्नाले खाद्य उत्पादन तथा बितरण प्रणालीमा किसानले उपभोग बा अभ्यास गर्ने देहायको अधिकार सम्झनु पर्छः-
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| 27 |
+
(१) खाद्य सम्बन्धी नीति निर्माण प्रक्रियामा सहभागी हुने,
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| 28 |
+
(२) खाद्य उत्पादन बा बितरण प्रणालीसँग सम्बन्धित कुनै पनि व्यवसाय रोज्ने,
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| 29 |
+
(३) कृषि योग्य भूमि, श्रम, बीउ बिजन, प्रविधि, औजारको छनौट गर्ने,
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| 30 |
+
(४) कृषि व्यवसायको बिश्रव्यापीकरण बा व्यापारीकरणको प्रतिकूल प्रभावबा�� मुक्त रहने।
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| 31 |
+
(च) "खाद्य सुरक्षा" भन्नाले सक्रिय र स्वस्थ मानब जीवनयापन गर्न आवश्यक हुने खाद्यमा प्रत्येक व्यक्तिको भौतिक तथा आर्थिक पहुँच सम्झनु पर्छ।
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| 32 |
+
(छ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
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| 33 |
+
(ज) "परिषद्" भन्नाले दफा ३२ बमोजिमको राष्ट्रिय खाद्य परिषद् सम्झनु पर्छ।
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| 34 |
+
(झ) "मन्त्रालय" भन्नाले कृषि सम्बन्धी बिषय हेर्ने नेपाल सरकारको मन्त्रालय सम्झनु पर्छ।
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| 35 |
+
(ज) "लक्षित घर परिवार" भन्नाले दफा ४ बमोजिम पहिचान भएका घर परिवार सम्झनु पर्छ।
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| 36 |
+
(ट) "स्थानीय तह" भन्नाले गाउँपालिका बा नगरपालिका सम्झनु पर्छ।
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| 37 |
+
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| 38 |
+
---
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| 39 |
+
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| 40 |
+
### **परिच्छेद-२**
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| 41 |
+
**खाद्य अधिकार तथा खाद्य असुरक्षाबाट संरक्षण**
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| 42 |
+
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| 43 |
+
**३. खाद्य सम्बन्धी अधिकारको सम्मान, संरक्षण र परिपूर्तिः**
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| 44 |
+
(१) प्रत्येक नागरिकलाई खाद्य सम्बन्धी अधिकार तथा खाद्य सुरक्षाको अधिकार हुनेछ।
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| 45 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अधिकारको सम्मान, संरक्षण र परिपूर्तिको लागि नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तहले पारस्परिक समन्वयमा आवश्यक व्यवस्था मिलाउने छ।
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| 46 |
+
(३) उपदफा (१) को सर्वसामान्यतामा प्रतिकूल प्रभाव नपर्ने गरी प्रत्येक नागरिकलाई देहायको खाद्य सम्बन्धी अधिकार तथा खाद्य सुरक्षाको अधिकार हुनेछ:-
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| 47 |
+
(क) बिना भेदभाव पर्याप्त, पोषणयुक्त तथा गुणस्तरीय खाद्यमा नियमित पहुँच हुने,
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| 48 |
+
(ख) भोकबाट मुक्त हुने,
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| 49 |
+
(ग) खाद्यको अभावमा जीवन जोखिममा पर्ने अवस्थाबाट सुरक्षित रहने,
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| 50 |
+
(घ) भोकमरी बा खाद्य असुरक्षाको जोखिममा रहेका व्यक्ति बा परिवारले खाद्यमा दीगो पहुँच र पोषण सहायता प्राप्त गर्ने,
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| 51 |
+
(ङ) सांस्कृतिक रूपमा स्वीकार्य खाद्य उपयोग गर्ने।
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| 52 |
+
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| 53 |
+
**४. भोकमरीको रोकथाम र नियन्त्रण:**
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| 54 |
+
नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार र स्थानीय तहले भोकमरीको रोकथाम र त्यसको नियन्त्रणको लागि पारस्परिक समन्वयमा प्राथमिकीकरणको आधारमा देहायका काम गर्नेछ:-
|
| 55 |
+
(क) भोकमरी बा भोकमरीको जोखिममा रहेका व्यक्ति, परिवार, समुदाय र क्षेत्रको नियमित रूपमा पहिचान गर्ने र त्यसको अभिलेख राख्ने,
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| 56 |
+
(ख) भोकमरी बा भोकमरीको जोखिम नियन्त्रणका लागि आवश्यक पर्ने खाद्यको सज्चितिको व्यवस्था गर्ने,
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| 57 |
+
(ग) भोकमरी बा भोकमरीको जोखिम नियन्त्रणको लागि खाद्य बितरणको व्यवस्था गर्ने,
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| 58 |
+
(घ) भोकमरी रोकथाम तथा नियन्त्रणको लागि तत्कालीन, अल्पकालीन तथा दीर्घकालीन उपायहरूको अवल���्बन गर्ने।
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| 59 |
+
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| 60 |
+
**५. लक्षित घर परिवारको पहिचान:**
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| 61 |
+
(१) स्थानीय तहले आफ्नो क्षेत्रभित्र रहेको गरिबी, भौगोलिक बिकटता, बिपद् बा त्यस्तै अन्य कुनै कारणले खाद्य असुरक्षाको जोखिममा रहेका लक्षित घर परिवारको तोकिए बमोजिम पहिचान गरी त्यसको अभिलेख तोकिएको ढाँचामा राख्नु पर्नेछ।
|
| 62 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अभिलेखको विवरण दफा ३४ बमोजिमको प्रदेश खाद्य परिषद् र मन्त्रालयमा समेत अभिलेखको लागि पटाउनु पर्नेछ।
|
| 63 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको अभिलेखमा खाद्य असुरक्षाको जोखिममा नरहेका घर परिवारको विवरण समेत समावेश भएको पाइएमा बा अभिलेखमा परेको घर परिवार कुनै कारणबाट लक्षित घर परिवारमा नपर्ने भएमा जुनसुकै अवस्थामा स्थानीय तहले त्यस्तो परिवारको विवरण अभिलेखबाट हटाउन सक्नेछ।
|
| 64 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम प्राप्त अभिलेखको आधारमा प्रत्येक प्रदेशले आफ्नो प्रदेशभित्रका र मन्त्रालयले नेपालभरका खाद्य असुरक्षाको जोखिममा रहेका लक्षित घर परिवारको एकीकृत र अद्यावधिक अभिलेख राख्नु पर्नेछ।
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| 65 |
+
(५) यस दफा बमोजिमको अभिलेख स्थानीय तहले समय समयमा अद्यावधिक गर्नु पर्नेछ र त्यसको जानकारी प्रदेश खाद्य परिषद् र नेपाल सरकारलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 66 |
+
(६) यस दफा बमोजिमको अभिलेख विद्युतीय माध्यमबाट समेत राख्ने गरी नेपाल सरकारले आवश्यक प्रणालीको विकास गर्न सक्नेछ।
|
| 67 |
+
(७) लक्षित घर परिवारको पहिचानका अन्य आधार तथा प्रकृया तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 68 |
+
|
| 69 |
+
**६. खाद्य सहायता परिचयपत्र:**
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| 70 |
+
(१) स्थानीय तहले लक्षित घर परिवारको अद्यावधिक विवरणको आधारमा तोकिएको दाँचामा खाद्य सहायता परिचयपत्र जारी गर्नु पर्नेछ।
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| 71 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परिचयपत्र जारी गर्दा लक्षित घर परिवारमा अटार बर्ष उमेर पूरा भएको महिला सदस्य भएमा त्यस्ता सदस्यमध्ये ज्येष्ठ सदस्यको नाममा र अटार बर्ष उमेर पूरा भएको महिला सदस्य नभएमा परिवारको अन्य सदस्यमध्ये जेष्ठ सदस्यको नाममा तोकिए बमोजिम खाद्य सहायता परिचयपत्र जारी गर्नु पर्नेछ।
|
| 72 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम अन्य सदस्यको नाममा परिचयपत्र जारी गरिएको रहेछ भने महिला सदस्यको उमेर अटार बर्ष पुगेपछि त्यस्तो सदस्यको नाममा जारी गरिएको परिचयपत्र खारेज गरी महिला सदस्यको नाममा परिचयपत्र जारी गर्नु पर्नेछ।
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
**७. निःशुल्क बा सहुलियत मूल्यमा खाद्य सहायता उपलब्ध गराउने:**
|
| 75 |
+
(१) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले लक्षि��� घर परिबारलाई सहुलियत मूल्यमा र खास प्रकृतिका लक्षित घर परिबारलाई तोकिए बमोजिम निःशुल्क खाद्य सहायता उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 76 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै क्षेत्रमा बा कुनै स्थानीय तहमा कुनै किसिमको बिपद् उत्पन्न भई नेपाल सरकारले बिपद्मस्त क्षेत्र घोषणा गरेको अबस्थामा त्यस्तो अबस्था कायम रहेको अबधिभर र खाद्य सइट्यस्त क्षेत्र घोषणा गरेको अबस्थामा त्यस्तो सइट कायम रहेको अबधिभर त्यस्तो क्षेत्रमा रहेका व्यक्ति तथा परिबारलाई तोकिए बमोजिम निःशुल्क बा सहुलियत मूल्यमा खाद्य सहायता उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 77 |
+
(३) नेपाल सरकार बा प्रदेश सरकारले उपदफा (१) बा (२) बमोजिम निःशुल्क बा सहुलियत मूल्यमा खाद्य सहायता उपलब्ध गराउँदा स्थानीय तह मार्फत् बितरण गर्ने व्यवस्था मिलाउनु पर्नेछ।
|
| 78 |
+
(४) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले यस दफा बमोजिम प्रदान गर्ने निःशुल्क बा सहुलियत खाद्य सहायता तोकिएको क्षेत्रका व्यक्ति बा परिबारको तत्कालको आवश्यकता, भौगोलिक अबस्था, खाद्यको उपलब्धता तथा परम्परागत बा सांस्कृतिक रूपमा स्वीकार्यता समेतको आधारमा त्यस्तो खाद्य सहायताको स्वरूप तथा परिमाणलाई समय समयमा पुनरावलोकन गर्न सक्नेछ।
|
| 79 |
+
|
| 80 |
+
**८. खाद्यको पोषण तत्त्वको मापदण्ड तोक्नेः**
|
| 81 |
+
दफा ७ बमोजिम खाद्य सहायता प्रदान गर्ने प्रयोजनका लागि आवश्यक पर्ने खाद्यको पोषण तत्त्वको मापदण्ड तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 82 |
+
|
| 83 |
+
**९. आपतकालीन खाद्य तथा पोषण सुरक्षाः**
|
| 84 |
+
(१) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार र स्थानीय तहले पारस्परिक समन्वयमा खाद्य तथा पोषण सुरक्षामा कुनै कारणले पर्न सक्ने प्रतिकूल प्रभावलाई न्यूनीकरण गर्न तथा आपतकालीन अबस्थामा यथाशीघ्र खाद्य उपलब्ध गराउन आवश्यक उपाय अबलम्बन गर्नेछ।
|
| 85 |
+
(२) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार र स्थानीय तहले पारस्परिक समन्वयमा आफ्नो खाद्य भण्डारण सुविधाको बिस्तार तथा आधुनिकीकरण गरी जुनसुकै परिस्थितिमा पोषणको आवश्यकता पूरा गर्न चाहिने खाद्य सज्चित गर्नु पर्नेछ।
|
| 86 |
+
(३) यस दफा बमोजिम आपत्कालीन खाद्य तथा पोषण सहायता उपलब्ध गराउने कार्यको संयोजन तोकिएको निकायले गर्नेछ।
|
| 87 |
+
(४) नेपाल सरकारले आपतकालीन अवस्थामा खाद्य तथा पोषण सुरक्षाको स्थितिलाई सुदृढ गर्न आवश्यकता अनुसार राष्ट्रिय तथा अन्तर्रष्ट्रिय सहयोग परिचालन गर्न सक्नेछ।
|
| 88 |
+
|
| 89 |
+
**१०. खा��्य सङटग्रस्त क्षेत्र घोषणा गर्न सक्नेः**
|
| 90 |
+
(१) नेपाल सरकारले भूकम्प, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, बाढी, पहिरो, आगलागी, महामारी, भोकमरी जस्ता कारणले कुनै क्षेत्रमा खाद्य सङट उत्पन्न भएमा त्यस्तो क्षेत्रलाई निश्चित अबधिका लागि खाद्य सङटग्रस्त क्षेत्र घोषणा गर्न सक्नेछ।
|
| 91 |
+
(२) खाद्य सङटग्रस्त क्षेत्रमा आवश्यक पर्ने खाद्य तथा पोषण सुरक्षाको प्रबन्ध सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 92 |
+
|
| 93 |
+
**११. स्थानीय खाद्यलाई प्राथमिकता दिनेः**
|
| 94 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम खाद्य तथा पोषणको प्रबन्ध गर्दा स्थानीयस्तरमा उत्पादन भएको परम्परागत खाद्यलाई प्राथमिकता दिई बितरण गर्नु पर्नेछ।
|
| 95 |
+
(२) स्थानीयस्तरमा उत्पादित परम्परागत खाद्य तथा पोषणको प्रबन्ध गर्ने सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 96 |
+
|
| 97 |
+
---
|
| 98 |
+
|
| 99 |
+
### **परिच्छेद-३**
|
| 100 |
+
**खाद्य सम्प्रभुताको अधिकारको संरक्षण र प्रवर्द्धन**
|
| 101 |
+
|
| 102 |
+
**१२. खाद्य सम्प्रभुताको अधिकारको सम्मान, संरक्षण र परिपूर्तिः**
|
| 103 |
+
(१) प्रत्येक किसानलाई खाद्य सम्प्रभुताको अधिकार हुनेछ।
|
| 104 |
+
(२) उपदफा (१) को सर्वमान्यतामा प्रतिकुल प्रभाव नपर्नेगरी प्रत्येक किसानलाई देहायको खाद्य सम्प्रभुताको अधिकार हुनेछः-
|
| 105 |
+
(क) प्रत्येक किसान बा खाद्य उत्पादकले पहिचान र सम्मान पाउने,
|
| 106 |
+
(ख) खाद्य तथा कृषि उत्पादन प्रणालीमा सहभागी हुने,
|
| 107 |
+
(ग) कृषि कार्यका लागि आवश्यक पर्ने साधन र श्रोतमा पहुँच हुने,
|
| 108 |
+
(घ) स्थानीय बीउ बिजन, प्रविधि, औजार र कृषि प्रजातिको छूनीट तथा त्यसको बौद्धिक सम्पत्तिको संरक्षण प्राप्त गर्ने,
|
| 109 |
+
(ङ) परम्परागत तथा रैथाने खाद्यको संरक्षण गर्ने,
|
| 110 |
+
(च) कृषि पेशाबाट स्वेच्छाचारी रूपले बञ्चित गर्ने कार्य बिरुद्ध संरक्षण प्राप्त गर्ने।
|
| 111 |
+
|
| 112 |
+
**१३. कृषि पेशाको संरक्षण र किसानको जीवनस्तरको प्रबर्द्धन:**
|
| 113 |
+
नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार र स्थानीय तहले पारस्परिक समन्वयमा कृषि पेशाको संरक्षण गरी किसानको जीवनस्तरको प्रबर्द्धन गर्न उपलब्ध स्रोत साधनको आधारमा देहाय बमोजिमको व्यवस्था मिलाउनेछः-
|
| 114 |
+
(क) कृषि तथा खाद्य उत्पादनको क्षेत्रमा लगानी अभिबुद्धि गर्ने,
|
| 115 |
+
(ख) खाद्य उत्पादनमा उन्नत प्रविधि, बाताबरण मैबी मल, बीउका विभिन्न प्रकार, जीवनाशक बिपादि बा कृषि सामग्रीको दिगो प्रयोग तथा पहुँचलाई विस्तार गर्ने,
|
| 116 |
+
(ग) नगदे बाली बा निकासी योग्य बालीलाई विशेष ग्राह्यता दिने,
|
| 117 |
+
(घ) बीउ, बाली बा पशुपंक्षी बीमामा किसानको ��रल तथा सहज पहुँचलाई विस्तार गर्ने,
|
| 118 |
+
(ङ) कृषि बजारमा किसानको पहुँचलाई अभिबुद्धि गर्ने,
|
| 119 |
+
(च) जैविक खेतीका लागि आवश्यक पर्ने पूर्वाधारमा किसानको पहुँचलाई विस्तार गर्ने,
|
| 120 |
+
(छ) रासायनिक, बिपादीयुक्त बा आनुबांपिक अभियान्विक (जेनेटिकल्ली मोडिफाइड अर्गानिज्म) खेतीबाट हुने हानिबाट संरक्षण प्रदान गर्ने,
|
| 121 |
+
(ज) लामो समयसम्म सञ्चय गर्न सकिने तोकिएका बालीको न्यूनतम समर्थन मूल्य तोक्ने,
|
| 122 |
+
(झ) अतिबृष्टि, अनाबृष्टि बा खडेरी लगायत मौसमको बारेमा पूर्व सूचना दिने प्रणालीको विकास गर्ने,
|
| 123 |
+
(ज) जैविक विविधतामा आधारित दीगो कृषि प्रणाली प्रबर्द्धन गर्ने,
|
| 124 |
+
(ट) कृषि पेशाको संरक्षण गर्न कृषिको व्यवसायीकरण, औद्योगिकीकरण, आधुनिकीकरण र प्रविधीकरण गर्ने,
|
| 125 |
+
(ठ) महिला किसान तथा कृषिमा आधारित भूमिहीन परिबारलाई प्राथमिकताको आधारमा कृषि योग्य भूमि तथा कृषि सामग्रीमा पहुँच विस्तार गर्ने,
|
| 126 |
+
(ड) कृषि वाली, फलफूल तथा पशुपक्षी उत्पादनमा प्रयोग भएको जलस्रोतको त्यस्तो उत्पादनलाई प्रतिकूल हुने गरी अन्यथा उपयोग गर्न नदिने,
|
| 127 |
+
(ड) कृषि उत्पादन बा कृषिवालीको हानि, नोक्सानी विरुद्ध किसानलाई तोकिएको अबस्थामा तोकिए बमोजिमको क्षतिपूर्ति प्रदान गर्ने व्यवस्था मिलाउने,
|
| 128 |
+
(ण) लागत मूल्यमा आधारित भई कृषि उत्पादनको समर्थन मूल्य तोक्ने।
|
| 129 |
+
|
| 130 |
+
**१४. किसानको पहिचान र सम्मान:**
|
| 131 |
+
(१) नेपाल सरकारले किसानको तोकिए बमोजिम पहिचान गरी बर्गीकरण गर्नेछ।
|
| 132 |
+
(२) स्थानीय तहले उपदफा (१) बमोजिमको बर्गीकरणको आधारमा परिचयपत्र जारी गर्नेछ।
|
| 133 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको बर्गीकरणको आधारमा किसानलाई राज्यबाट प्राप्त हुने सहुलियत, छुट, सुविधा तथा प्रचलित कानून बमोजिम योगदानमा आधारित निवृत्तभरण उपलब्ध गराइनेछ।
|
| 134 |
+
(४) परिचयपत्रको मान्य अबधि नबीकरण तथा तत् सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 135 |
+
|
| 136 |
+
**१५. कृषि योग्य भूमिको दिगो उपयोग:**
|
| 137 |
+
कृषि योग्य भूमिको संरक्षण तथा दिगो उपयोगको लागि नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार र स्थानीय तहले पारस्परिक समन्वयमा देहाय बमोजिमका कार्य गर्नेछन्ः-
|
| 138 |
+
(क) प्रचलित कानून बमोजिम पहिचान गरिएका कृषि योग्य भूमिमा बाली लगाउन प्रोत्साहन बा प्रबर्द्धन गर्ने,
|
| 139 |
+
(ख) कृषि योग्य भूमिको वैज्ञानिक पहिचान गरी छुट्याउने बा बर्गीकरण गर्ने,
|
| 140 |
+
(ग) कृषि योग्य भूमिलाई बाँझो राख्न तथा भूमिको उपयोगको सम्बन्धमा प्रचलित कानून बमोजिम ���ोकिएको प्रयोजन बाहेक अन्य प्रयोजनको लागि उपयोग गर्न बा गराउन नदिने,
|
| 141 |
+
(घ) कृषि योग्य भूमिको खण्डीकरण गर्न नदिने,
|
| 142 |
+
(ङ) विकास निर्माणका कार्य गर्दा दफा २१ बमोजिमको राष्ट्रिय खाद्य योजना प्रतिकूल नहुने गरी सञ्चालन गर्ने,
|
| 143 |
+
(च) कृषि योग्य भूमिको उपयोगको बारेमा सचेतना अभिबुद्धि गर्ने,
|
| 144 |
+
(छ) कृषि प्रयोजनको लागि बर्गीकरणमा परेको भूमिमा मनासिब कारणबिना खेती नलगाउने जग्गाधनीलाई सरकारले दिने अनुदान, सुविधा र सहयोग कटौती गर्ने,
|
| 145 |
+
(ज) सहकारी खेती, कचुलियती खेती, करार खेती बा सामूहिक खेतीलाई प्रबर्द्धन गरी बाँझो रहेको उत्पादनशील भूमिको अधिकतम उपयोगको व्यवस्था गर्ने।
|
| 146 |
+
|
| 147 |
+
**१६. स्थानीय कृषि बाली तथा पशुजन्य उत्पादनको प्रबर्द्धन:**
|
| 148 |
+
स्थानीय कृषि बाली तथा पशुजन्य उत्पादनको प्रबर्द्धन गर्न नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार र स्थानीय तहले देहाय बमोजिमका उपाय अबलम्बन गर्नेछन्:-
|
| 149 |
+
(क) स्थानीय कृषि तथा पशुजन्य उत्पादन तथा बजारीकरणलाई प्रबर्द्धन गर्ने,
|
| 150 |
+
(ख) स्थानीय कृषि तथा पशुजन्य उत्पादनमा उपभोक्ताको सहज पहुँच सुनिश्चित गर्ने,
|
| 151 |
+
(ग) कृषि बजार, कृषि फर्म बा खेतबारीबाट नै किसानले उपभोक्तालाई आफ्नो उत्पादन बिक्री गर्न सक्ने बाताबरणको सृजना गर्ने,
|
| 152 |
+
(घ) परम्परागत कृषि बजार तथा हाटबजारको प्रबर्द्धन गर्ने,
|
| 153 |
+
(ङ) कृषि उत्पादनसँग सम्बन्धित स्थानीय ज्ञान तथा परम्परागत खाद्य संस्कृतिको संरक्षण गर्ने,
|
| 154 |
+
(च) स्थानीयस्तरमा उत्पादित खाद्यको उपयोग गरी कृषि पर्यटन प्रबर्द्धन गर्ने।
|
| 155 |
+
|
| 156 |
+
**१७. कृषि योग्य भूमिको दिगो व्यवस्थापनको जिम्मेबारी:**
|
| 157 |
+
(१) सङ्गीय र प्रदेश कानूनको अधीनमा रही कृषि योग्य भूमिको दिगो व्यवस्थापन गर्ने जिम्मेबारी स्थानीय तहको हुनेछ।
|
| 158 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको जिम्मेबारी पूरा गर्न स्थानीय तहले देहाय बमोजिमको कार्य गर्नेछ:-
|
| 159 |
+
(क) कृषि योग्य भूमिको लगत तयार गर्ने,
|
| 160 |
+
(ख) स्थानीयस्तरमा रहेका बाँझो जग्गा तथा अन्य जग्गाको पहिचान गर्ने,
|
| 161 |
+
(ग) खण्ड (क) र (ख) बमोजिम पहिचान गरिएका भूमिको अभिलेख राख्ने,
|
| 162 |
+
(घ) भूमि सम्बन्धी अभिलेख अद्यावधिक गर्ने,
|
| 163 |
+
(ङ) बाँझो भूमिको प्रभावकारी व्यवस्थापन गर्न अन्य आवश्यक काम गर्ने बा गराउने।
|
| 164 |
+
|
| 165 |
+
**१८. लक्षित कृषि विकास कार्यकम सञ्चालन:**
|
| 166 |
+
(१) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तहले दलित, लोपोन्मुख, आदिवासी किसान बा भूमिहीन किसानको हकहितको संरक्षणका लागि लक्षित कृषि ��िकास कार्यकम बनाई लागू गर्नेछ।
|
| 167 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कार्यकम सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 168 |
+
|
| 169 |
+
**१९. जलबायु परिवर्तनबाट हुन सक्ने असरको न्यूनीकरण:**
|
| 170 |
+
नेपाल सरकारले जलबायु परिवर्तनबाट खाद्य उत्पादनमा पर्न सक्ने प्रतिकूल प्रभाव बा त्यसबाट हुने जोखिम न्यूनीकरणका लागि निवारणात्मक उपायहरू अपनाउन आवश्यक व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 171 |
+
|
| 172 |
+
**२०. क्षतिपूर्ति दिनु पर्नेः**
|
| 173 |
+
(१) कुनै सरकारी संस्था, निकाय, कम्पनी बा फर्मले सिफारिस गरेको बीउ, बिजन सिफारिस गरेको क्षेत्र र समयमा सिफारिस गरेको बिधि, प्रक्रिया बा तरिका बमोजिम गरेको खेती बा त्यस्तो संस्था, निकाय, कम्पनी बा फर्मबाट सिफारिस गरिएको बीउ, बिजन, बिधि, प्रकृया बा मल सिफारिस गरिएको तरिका बमोजिम प्रयोग गरेको अवस्थामा कसैको बाली उत्पादन हुन नसकेमा बा सारभूत रुपमा बाली उत्पादनमा कमी आएमा त्यस्तो बीउ, बिजन, बिधि, प्रकृया बा मल सिफारिस गर्ने संस्था, निकाय, कम्पनी बा फर्मले क्षतिपूर्ति दिनु पर्नेछ।
|
| 174 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दिढने क्षतिपूर्ति सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 175 |
+
|
| 176 |
+
---
|
| 177 |
+
|
| 178 |
+
### **परिच्छेद-४**
|
| 179 |
+
**खाद्य अधिकारको कार्यान्वयन**
|
| 180 |
+
|
| 181 |
+
**२१. राष्ट्रिय खाद्य योजनाः**
|
| 182 |
+
(१) नेपाल सरकारले खाद्यसँग सम्बन्धित सङ्घ, प्रदेश र स्थानीय तहका निकायसँग समन्वय गरी राष्ट्रिय खाद्य योजना तर्जुमा गर्नेछ।
|
| 183 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम समन्वय गर्दा आवश्यकता अनुसार अन्य सरकारी, गैरसरकारी बा निजीस्तरका निकाय बा संस्थासँग परामर्श गर्नु पर्नेछ।
|
| 184 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम राष्ट्रिय खाद्य योजनामा समावेश गर्नु पर्ने बिषय तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 185 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिम राष्ट्रिय खाद्य योजना तर्जुमा गर्दा खाद्य अधिकारको कार्यान्वयनमा भएको प्रगति मापन तथा अनुगमनका सूचकाङ्लाई आधार मान्नु पर्नेछ।
|
| 186 |
+
(५) नेपाल सरकारले खाद्य अधिकार, खाद्य तथा पोषण सुरक्षा तथा खाद्य सम्प्रभुता अधिकारको प्रवर्द्धनका बिषयलाई आवधिक विकास योजनामा समावेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 187 |
+
|
| 188 |
+
**२२. खाद्य तथा पोषण सुरक्षा कार्यकम सञ्चालन:**
|
| 189 |
+
स्थानीय तहले प्रत्येक बर्ष खाद्य तथा पोषण सुरक्षाका लागि तोकिए बमोजिमका आवश्यक कार्यकम सञ्चालन गर्नेछ।
|
| 190 |
+
|
| 191 |
+
**२३. खाद्य अधिकार अनुगमनका सूचकाइ:**
|
| 192 |
+
(१) नेपाल सरकारले यस ऐनको कार्यान्वयनलाई अनुगमन गर्न परिषद् तथा अन्य सम्बद्ध निकायसँग परामर्श गरी खाद्य अधिकार तथा खाद��य सम्प्रभुताको अधिकारको अनुगमन सूचकाइ तयार गर्नु पर्नेछ।
|
| 193 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अधिकारको अनुगमन सूचकाइ सर्वसाधारणको जानकारीको लागि सार्वजनिक गर्नु पर्नेछ।
|
| 194 |
+
|
| 195 |
+
**२४. खाद्य तथा पोषण शिक्षा र सूचनाः**
|
| 196 |
+
नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार र स्थानीय तहले समय समयमा खाद्य अधिकारसँग सम्बन्धित सूचना तथा शिक्षामूलक जानकारी प्रवाह गर्नु पर्नेछ।
|
| 197 |
+
|
| 198 |
+
**२५. अनुसन्धान तथा वैज्ञानिक प्रविधिको विकास:**
|
| 199 |
+
नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार र स्थानीय तहले कृषिको दिगो विकास, खाद्य उत्पादनको अभिबुद्धि बा खाद्य तथा पोषण सुरक्षाको प्रवर्द्धन गर्न आवश्यक अध्ययन, अनुसन्धान तथा वैज्ञानिक प्रविधिको विकासको लागि आवश्यक व्यवस्था मिलाउनेछ।
|
| 200 |
+
|
| 201 |
+
---
|
| 202 |
+
|
| 203 |
+
### **परिच्छेद-५**
|
| 204 |
+
**खाद्यको उपलब्धता, आपूर्ति तथा वितरण प्रणाली**
|
| 205 |
+
|
| 206 |
+
**२६. खाद्यको भण्डारण तथा सच्चिति व्यवस्थाः**
|
| 207 |
+
नेपाल सरकार तथा प्रदेश सरकारले दफा ७, ९ बा १० को प्रयोजनका लागि खाद्य उपलब्ध गराउन तथा सइटको समयमा खाद्यको आवश्यकता पूरा गर्न तोकिए बमोजिम खाद्य सच्चितिको व्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
|
| 208 |
+
|
| 209 |
+
**२७. खाद्य खरिद:**
|
| 210 |
+
(१) दफा २६ बमोजिम भण्डारण तथा सच्चित गर्नको लागि आवश्यक हुने खाद्य आन्तरिक रूपमा खरिद गर्नु पर्नेछ।
|
| 211 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि आन्तरिक खरिदबाट पर्याप्त खाद्य उपलब्ध हुन नसक्ने अवस्था भएमा पैठारी गर्न सकिनेछ।
|
| 212 |
+
|
| 213 |
+
**२८. खाद्यको ढुवानी तथा वितरण:**
|
| 214 |
+
नेपाल सरकार तथा प्रदेश सरकारले दफा २६ बमोजिम सच्चित तथा भण्डारण गरेको खाद्य वितरण प्रकृया तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 215 |
+
|
| 216 |
+
**२९. आधारभूत खाद्यको मूल्य स्थिरताः**
|
| 217 |
+
आधारभूत खाद्यको मूल्यमा स्थिरता कायम गर्ने जिम्मेबारी नेपाल सरकारको हुनेछ।
|
| 218 |
+
|
| 219 |
+
**३०. खाद्य वितरणको व्यवस्थाः**
|
| 220 |
+
(१) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तहले तोकिए बमोजिम सुपथ मूल्यको पसल बा सार्वजनिक खाद्य वितरण केन्द्र मार्फत खाद्य वितरणको व्यवस्था मिलाउने छ।
|
| 221 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सुपथ मूल्यका पसल बा सार्वजनिक खाद्य वितरण केन्द्र सञ्चालन गर्दा महिला समूह बा कृषि सहकारीलाई विशेष प्राथमिकता दिन सकिनेछ।
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
**३१. विवरण सार्वजनिक गर्नेः**
|
| 224 |
+
(१) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले यस परिच्छेद बमोजिम वितरण हुने खाद्यको सम्बन्धमा देहायका विवरणहरू तयार गरी अद्यावधिक गर्नु पर्नेछ:-
|
| 225 |
+
(क) खाद्य सञ्चित्त अवस्था,
|
| 226 |
+
(ख) सञ्चित्त खाद्यको परिमाण,
|
| 227 |
+
(��) खाद्यको मूल्य,
|
| 228 |
+
(घ) खाद्यको वितरण प्रणाली र
|
| 229 |
+
(ङ) खाद्यको किसिम।
|
| 230 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको विवरण सर्वसाधारणको जानकारीको लागि सार्वजनिक गर्नु पर्नेछ।
|
| 231 |
+
|
| 232 |
+
---
|
| 233 |
+
|
| 234 |
+
### **परिच्छेद-६**
|
| 235 |
+
**राष्ट्रिय खाद्य परिषद्, प्रदेश खाद्य परिषद् तथा स्थानीय खाद्य समन्वय समिति**
|
| 236 |
+
|
| 237 |
+
**३२. राष्ट्रिय खाद्य परिषद्को गठन:**
|
| 238 |
+
(१) खाद्य अधिकार, खाद्य सुरक्षा तथा खाद्य सम्प्रभुता सम्बन्धी अधिकारको संरक्षण, प्रबर्ढन तथा परिपूर्ति गर्ने कार्यलाई व्यवस्थित गर्न कृषि सम्बन्धी विषय हेर्ने नेपाल सरकारको मन्त्रीको अध्यक्षतामा तोकिए बमोजिम एक राष्ट्रिय खाद्य परिषद् गठन हुनेछ।
|
| 239 |
+
(२) परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 240 |
+
|
| 241 |
+
**३३. अनुगमन तथा सुप्रीवेक्षण:**
|
| 242 |
+
(१) खाद्यको उपलव्धता, सञ्चिति, आपूर्ति तथा वितरण प्रणालीको सञ्चालनको नियमित रूपमा अनुगमन र सुप्रीवेक्षण गर्नका लागि परिषद्ले तोकिए बमोजिम उपसमिति गठन गर्न बा निरीक्षण अधिकृतलाई तोक्न सक्नेछ।
|
| 243 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम अनुगमन बा निरीक्षण गर्ने उपसमिति बा अधिकृतले अनुगमन बा निरीक्षण गरी त्यसको प्रतिवेदन परिषद् समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 244 |
+
|
| 245 |
+
**३४. प्रदेश खाद्य परिषद् सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 246 |
+
(१) यस ऐन बमोजिमको अधिकार प्रदेशस्तरमा संरक्षण, प्रबर्ढन तथा परिपूर्ति गर्न प्रत्येक प्रदेशमा कृषि विषय हेर्ने मन्त्रीको अध्यक्षतामा एक प्रदेश खाद्य परिषद् गठन हुनेछ।
|
| 247 |
+
(२) प्रदेश खाद्य परिषद् सम्बन्धी अन्य व्यवस्था प्रदेश सरकारले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 248 |
+
|
| 249 |
+
**३५. प्रदेश खाद्य परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 250 |
+
प्रदेश खाद्य परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार प्रदेश सरकारले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 251 |
+
|
| 252 |
+
**३६. स्थानीय खाद्य समन्वय समितिः**
|
| 253 |
+
(१) स्थानीय तहमा खाद्य अधिकार, खाद्य सुरक्षा तथा खाद्य सम्प्रभुताको अधिकारको संरक्षण एवं सम्बद्धंन गर्ने काम समेतको लागि तथा स्थानीयस्तरमा खाद्य आपूर्ति तथा वितरण प्रणालीलाई सहज बनाउन नगरपालिकाको प्रमुख बा गाउँपालिका अध्यक्षको अध्यक्षतामा स्थानीय तहमा एक खाद्य समन्वय समिति गठन हुनेछ।
|
| 254 |
+
(२) स्थानीय खाद्य समन्वय समितिको सचिवालय सम्बन्धित नगरपालिका बा गाउँपालिकामा रहनेछ।
|
| 255 |
+
(३) स्थानीय खाद्य समन्वय समितिको गठन, काम, कर्तव्य र अधिकार सम्बन्धी व्यवस्था सम्बन्धित स्थानीय तहले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 256 |
+
|
| 257 |
+
**३७. उपसमिति बा कार्यदल बा विज्ञ समूह गठन गर्न सक्नेः**
|
| 258 |
+
(१) परिषद् बा प्रदेश खाद्य परिषद्ले आफ्नो कार्य सञ्चालन गर्नका लागि आवश्यकता अनुसार उपसमिति बा कार्यदल बा विज्ञ समूह गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 259 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठन भएका उपसमिति, कार्यदल बा विज्ञ समूहको कार्य क्षेत्रगत शर्त (टमर्स अफ रिफरेन्स) तथा कार्याबधि गठन गर्दाका बखत परिषद्ले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 260 |
+
|
| 261 |
+
**३८. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 262 |
+
परिषद्ले आफूलाई प्राप्त अधिकारमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार उपसमिति बा परिषद्को अन्य कुनै अधिकृतस्तरको कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 263 |
+
|
| 264 |
+
**३९. कर्मचारी सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 265 |
+
परिषद्को काम सुचारु रूपले सञ्चालन गर्नका लागि आवश्यक पर्ने कर्मचारी नेपाल सरकारले उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 266 |
+
|
| 267 |
+
---
|
| 268 |
+
|
| 269 |
+
### **परिच्छेद-७**
|
| 270 |
+
**कसूर तथा सजाय**
|
| 271 |
+
|
| 272 |
+
**४०. कसूरजन्य कार्य:**
|
| 273 |
+
कसैले देहाय बमोजिमको काम गरेमा यस ऐन अन्तर्गत कसूर गरेको मानिनेछ:-
|
| 274 |
+
(क) कसैलाई अत्यावश्यक खाद्यको पहुँचबाट बञ्चित गरी गम्भीर हानि पुन्याउने बा भोकमरीको स्थिति सिर्जना गर्ने कुनै काम गरेमा,
|
| 275 |
+
(ख) आपत्कालीन सहायताको प्रयोजनका लागि सञ्चित तथा सङलित खाद्य वस्तुलाई कब्जा गर्ने बा नष्ट गर्ने बा दुरूपयोग गर्ने कार्य गरेमा,
|
| 276 |
+
(ग) आपत्कालीन खाद्य सहायता वितरणमा अबरोध सिर्जना गरेमा,
|
| 277 |
+
(घ) आधारभूत खाद्यवस्तुको डुबानी, आपूर्ति, वितरण तथा बजारीकरणमा सङ्गठित बा असङ्गठित रूपले बाधा सिर्जना गरेमा,
|
| 278 |
+
(ङ) जीविकोपार्जनको आधारबाट बिमुख पार्ने गरी बासस्थान बिहीन बनाएमा,
|
| 279 |
+
(च) दफा ७ बमोजिम वितरण गर्नु पर्ने खाद्य लक्षित बर्ग बा पिछडिएको बर्गलाई वितरण नगरेमा,
|
| 280 |
+
(छ) यस ऐन बा यस ऐन बमोजिम बनेको नियम विपरीतका अन्य कुनै कार्य गरेमा।
|
| 281 |
+
|
| 282 |
+
**४१. मुद्दाको अनुसन्धान र दायरी:**
|
| 283 |
+
(१) यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दाको अनुसन्धान दफा ४४ बमोजिमको निरीक्षण अधिकृतले गर्नेछ।
|
| 284 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निरीक्षण अधिकृतले मुद्दाको अनुसन्धान गर्दा उजूरी प्राप्त भएको मितिले पैतीस दिनभित्र सम्बन्धित जिल्ला अदालत समक्ष मुद्दा दायर गर्नु पर्नेछ।
|
| 285 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम मुद्दा दायर गर्दा निरीक्षण अधिकृतले सरकारी बकीलको राय लिनु पर्नेछ।
|
| 286 |
+
|
| 287 |
+
**४२. सजाय:**
|
| 288 |
+
कसैले दफा ४० बमोजिमको कसूर गरेमा कसूरको गम्भीरताको आधारमा देहाय बमोजिमको सजाय हुनेछ:-
|
| 289 |
+
(क) खण्ड (क) बमोजिमको कसूर गरेमा बा गराएमा दश बर्षसम्म कैद र दश लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 290 |
+
(ख) खण्ड (ख), (ग) बा (घ) बमोजिमको कसूर गरेमा बा गराएमा तीन बर्षसम्म कैद र तीन लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 291 |
+
(ग) खण्ड (ङ) बमोजिमको कसूर गरेमा पाँच बर्षसम्म कैद र पाँच लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 292 |
+
(घ) खण्ड (च) र (छ) बमोजिमको कसूर गरेमा एक बर्षसम्म कैद र एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना।
|
| 293 |
+
|
| 294 |
+
**४३. क्षतिपूर्तिः**
|
| 295 |
+
(१) यस ऐन अन्तर्गतको कुनै कसूर गरेको कारणबाट कसैलाई कुनै प्रकारको हानि, नोक्सानी हुन गएमा त्यस्तो हानि, नोक्सानीको क्षतिपूर्ति भराई पाउन मुद्दा हेर्ने अधिकारी समक्ष निवेदन दिन सक्नेछ।
|
| 296 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दिइने क्षतिपूर्ति सम्बन्धी मापदण्ड तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 297 |
+
|
| 298 |
+
---
|
| 299 |
+
|
| 300 |
+
### **परिच्छेद-८**
|
| 301 |
+
**विविध**
|
| 302 |
+
|
| 303 |
+
**४४. निरीक्षण अधिकृत नियुक्त गर्न बा तोक्न सक्नेः**
|
| 304 |
+
(१) यस ऐनको प्रभावकारी कार्यान्वयन गर्न तथा खाद्य सम्बन्धी बिषयको अनुगमन गर्न मन्त्रालयले आवश्यकता अनुसार तोकिए बमोजिम योग्यता पुगेको कर्मचारीलाई निरीक्षण अधिकृत नियुक्त गर्न बा तोक्न सक्नेछ।
|
| 305 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निरीक्षण अधिकृत सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 306 |
+
|
| 307 |
+
**४५. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 308 |
+
परिषद्ले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
|
| 309 |
+
|
| 310 |
+
**४६. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 311 |
+
यो ऐन कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 312 |
+
|
| 313 |
+
**४७. कार्यबिधि तथा निर्देशिका बनाउन सक्नेः**
|
| 314 |
+
(१) मन्त्रालयले यस ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही आवश्यक कार्यबिधि बा निर्देशिका बनाउन सक्नेछ।
|
| 315 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बनाएको कार्यबिधि बा निर्देशिका सार्वजनिक गर्नु पर्नेछ।
|
section_12_pdf_20.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,147 @@
|
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| 1 |
+
# उखडा सम्बन्धी ऐन, २०२१
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०२१।६।१७
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
१. उखडा सम्बन्धी (प्रथम संशोधन) ऐन, २०२२
|
| 8 |
+
२०२२।३।३०
|
| 9 |
+
२. उखडा सम्बन्धी (दोस्रो संशोधन) ऐन, २०२४
|
| 10 |
+
२०२४।७।६
|
| 11 |
+
३. विशेष अदालत ऐन, २०३१
|
| 12 |
+
२०३१।६।२०
|
| 13 |
+
४. न्याय प्रशासन सुधार ऐन, २०३१
|
| 14 |
+
२०३१।४।१६
|
| 15 |
+
५. न्याय प्रशासन सुधार (पहिलो संशोधन) ऐन, २०३३
|
| 16 |
+
२०३३।४।१०
|
| 17 |
+
६. उखडा सम्बन्धी (तेस्रो संशोधन) ऐन, २०४२
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| 18 |
+
२०४२।६।९
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| 19 |
+
७. उखडा सम्बन्धी (चौथो संशोधन) ऐन, २०४४
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| 20 |
+
२०४४।५।१४
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| 21 |
+
८. न्याय प्रशासन ऐन, २०४६
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| 22 |
+
२०४६।२।१६
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| 23 |
+
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| 24 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
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| 25 |
+
९. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
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| 26 |
+
२०६६।१०।७
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| 27 |
+
१०. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
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| 28 |
+
२०७२।११।१३
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| 29 |
+
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| 30 |
+
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| 31 |
+
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+
२०२१ सालको ऐन नं. १६
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| 33 |
+
उखडा सम्बन्धी व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
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| 34 |
+
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| 35 |
+
**प्रस्तावना:**
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| 36 |
+
उखडा सम्बन्धी केही कानुनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले, श्री ५ महाराजाधिराज महेन्द्र बीर विक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्मतिले यो ऐन बनाइवक्सेको छ ।
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| 37 |
+
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| 38 |
+
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| 39 |
+
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| 40 |
+
१. संक्षिप्त नाम, विस्तार र प्रारम्भ:
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| 41 |
+
(१) यस ऐनको नाम "उखडा सम्बन्धी ऐन, २०२१" रहेकोछ।
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| 42 |
+
(२) यो ऐन नवलपरासी, रुपन्देही र कपिलबस्तु (पाल्ही माझखण्ड, शिवराज र तौलीहबा) जिल्लामा लागू हुनेछ।
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| 43 |
+
(३) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
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| 44 |
+
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| 45 |
+
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| 46 |
+
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| 47 |
+
२. परिभाषा:
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| 48 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 49 |
+
(क) "जग्गा धनी" भन्नाले आफ्नो नाममा जग्गा दर्ता भएका नाताले बा सो जग्गामा आफ्नो हक पुग्ने नाताले नेपाल सरकारलाई मालपोत बुझाउनु पर्ने व्यक्तिलाई सम्झनु पर्छ।
|
| 50 |
+
(ख) "किसान" भन्नाले उखडा जग्गा जोत्ने किसानको रूपमा सरकारी श्रेस्तामा दर्ता भएको बा जग्गा धनीसँग भएको बोल कबोल बमोजिम उखडा जग्गा जोती आएको किसानलाई सम्झनु पर्छ। तर यस शब्दले हुण्डा, मनखप, अधियाँ, बाटैयामा कमाउन पाएको जग्गा जोत्ने व्यक्तिलाई जनाउने छैन।
|
| 51 |
+
(ग) "पोत" भन्नाले उखडा जग्गा कमाउन दिए बापत किसानले जग्गाधनीलाई बुझाउनु पर्ने रूपैयाँ सम्झनु पर्छ।
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| 52 |
+
(घ) "उखडा जग्गा" भन्नाले जग्गा धनीसँग भएको बोल कबोल बमोजिम किसानले जग्गाधनीलाई नगदी पोत बुझाउने गरी कमाईआएको जग्गा सम्झनु पर्छ।
|
| 53 |
+
(ङ) "तोकिएको" बा "तोकिएबमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गतको नियममा तोकिए बा तोकिएबमोजिम सम्झनु पर्छ।
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| 54 |
+
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| 55 |
+
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| 56 |
+
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| 57 |
+
३. जग्गा किसानको नाममा दर्ता हुने:
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| 58 |
+
यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत किसानले जग्गाधनीलाई पोत बुझाउने गरी कमाई रहेको उखडा जग्गामा जग्गा धनीको हक समाप्त भै किसानको नाममा तोकिएबमोजिम नम्बरीमा दर्ता हुनेछ।
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| 59 |
+
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| 60 |
+
**तर:**
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| 61 |
+
(१) सो किसान विदेशी नागरिक रहेछ बा पछि विदेशी नागरिक ठहरिन आयो भने निजले जोतेको उखडा जग्गा नेपाल सरकारको नाममा दर्ता हुनेछ र सो जग्गा सुकुम्बासी नेपाली नागरिकलाई कुनै शर्तमा नेपाल सरकारले बिकी बितरण गर्न सक्नेछ। त्यस्तो जग्गाको सम्बन्धमा जग्गा धनीले यस ऐन बमोजिम पाउनु पर्ने क्षतिपूर्ति मध्ये केही पनि नपाएको भए सबै र किसानबाट केही पाइसकेको भए सो कट्टा गरी बाँकी रकम नेपाल सरकारले पाँच बर्ष भित्र एकमुष्ट बा पाँच बराबर किस्तामा जग्गाधनीलाई दिनेछ।
|
| 62 |
+
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| 63 |
+
(२) सो किसानले दफा ४ को उपदफा (१) को प्रतिबन्धात्मक बाक्याँश (ख) अनुसार एकमुष्ट बा पहिलो किस्ता बापत बुझाउनु पर्ने क्षतिपूर्तिको रकम सो बमोजिम नबुझाएमा सो जग्गा निजको नाममा दर्ता हुने छैन।
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| 64 |
+
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| 65 |
+
---
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| 66 |
+
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| 67 |
+
४. क्षतिपूर्ति:
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| 68 |
+
(१) दफा ३ बमोजिम किसानको नाममा दर्ता हुने जग्गाका सम्बन्धमा सो जग्गाको मालपोतको दश दोब्बरको हिसाबले हुन आउने रकम सम्बन्धित किसानले सम्बन्धित जग्गा धनीलाई एकमुष्ट बा जग्गा दर्ता भएको मितिले पाँच बर्षभित्र पाँच बराबर किस्तासम्मको किस्ताबन्दी गरी क्षतिपूर्तिको रूपमा बुझाउनुपर्छ।
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| 69 |
+
|
| 70 |
+
**तर,**
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| 71 |
+
(क) किसानले क्षतिपूर्तिको रकम एकमुष्ट बुझाउन कबुल गरेकोमा सो एकमुष्ट रकम र किस्ताबन्दीमा बुझाउन कबूल गरेकोमा पहिलो किस्ताको रकम निजको नाममा जग्गा दर्ता हुने बखत सम्ममा र त्यसपछिको प्रत्येक किस्ता अघिल्लो किस्ता बुझाएको मितिले १ बर्ष भित्र बुझाउँदै जानुपर्छ।
|
| 72 |
+
(ख) किसानले कुनै किस्ता सो किस्ता बुझाउनु पर्ने म्याद अगाबै जुनसुकै बखत बुझाउन सक्नेछ।
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| 73 |
+
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| 74 |
+
(२) किसानले क्षतिपूर्तिको रकम बुझाउन जाँदा जग्गाधनीले बुझी नलिएमा सो बुझाउनु पर्ने म्याद गुज्रेको मितिले पन्ध्र दिन भित्र किसानले सो रकम इलाकाको माल अड्डामा धरौट राख्न सक्नेछ र सो बमोजिम किसानले धरौट राख्न ल्याएमा सो माल अड्डाले पनि बुझिलिई निजलाई रसीद दिनुपर्छ।
|
| 75 |
+
|
| 76 |
+
(३) उपदफा (२) अन्तर्गत किसानले धरौट राखेमा निजले जग्गाधनीलाई सो क्षतिपूर्तिको रकम बुझाए सरह मानिनेछ।
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| 77 |
+
|
| 78 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम किसानले क्षतिपूर्तिको रकम धरौट राखेमा सो कुराको सूचना सो माल अड्डाले जग्गाधनीलाई दिनुपर्छ। सो सूचना पाएको मितिले पैतिस दिन भित्र सो रकम ���िन आएमा माल अड्डाले जग्गाधनीलाई बुझाईदिनुपर्छ। सो म्याद भित्र जग्गाधनीले लिन नआएमा सो रकम नेपाल सरकारमा लाग्नेछ।
|
| 79 |
+
|
| 80 |
+
(५) पहिलो किस्ता बाहेक उपदफा (१) बमोजिम बुझाउनु पर्ने अन्य किस्ता म्याद भित्र नबुझाएमा सो किसानको नाउँमा दफा ३ बमोजिम दर्ता भएको जग्गा प्रचलित नेपाल कानुनबमोजिम सम्बन्धित माल अड्डाले लिलाम बढाबढ गराउनुपर्छ र सो बमोजिम लिलाम बढाबढ हुँदा उठेको रुपैयाँ जग्गा धनीले पाउनेछ।
|
| 81 |
+
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| 82 |
+
---
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| 83 |
+
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| 84 |
+
५. जग्गा दर्ता सम्बन्धी कार्यबिधि:
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| 85 |
+
(१) यो ऐन लागू भएपछि तोकिएको अधिकारीले तोकिदिएको म्याद भित्र जग्गाधनीले आफूले कमाउन दिएको र किसानले आफूले कमाई राखेको जग्गाको देहाय बमोजिमको बिबरण खुलाई आफूसँग जो भएको सबूद प्रमाणको सञ्जल बा रीतपूर्वकको नञ्जल समेत सामेल राखी सो अधिकारीका समक्ष बिबरण पेश गर्नुपर्छ र किसानले रसीद बा अरू लिखतको प्रमाण नपाएको भए त्यसको कारण समेत बिबरणमा खुलाउनुपर्छ:
|
| 86 |
+
(क) जग्गाधनी र किसानको नाउँ, घर, बतन र नागरिकता,
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| 87 |
+
(ख) जग्गा भएको जिल्ला, तप्पा बा प्रगन्ना, मौजा र
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| 88 |
+
(ग) जग्गाको चारकिल्ला र बिगाहा, कट्टा र धूर समेतको क्षेत्रफल।
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| 89 |
+
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| 90 |
+
(२) जग्गाधनी र किसान मध्ये कुनै एक पक्षले मात्र उपदफा (१) बमोजिमको बिबरण पेश गरेमा सो उपदफाको म्याद नाघेको मितिले सात दिन भित्र तोकिएको अधिकारीले सो बिबरणको सबै ब्यहोरा खुलाई तोकिए बमोजिम सूचना प्रकाशित गर्नुपर्छ।
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| 91 |
+
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| 92 |
+
(३) जग्गाधनी र किसान मध्ये कुनै पक्षले उपदफा (१) बमोजिम पेश गर्नु पर्ने बिबरण सो उपदफा (२) बमोजिम सूचना प्रकाशित भएको मितिले पन्ध्र दिन भित्र पनि पेश नगरेमा अर्को पक्षले पेश गरेको बिबरण नै बिबरण पेश नगर्ने पक्षको विरुद्धमा अकाट्य प्रमाण मानिनेछ र सो पेश भएको बिबरण झूझ हो बा सो सम्बन्धित कुनै सबूद प्रमाण जालसाजी बा कीर्ते गरी बनाएको हो भन्ने कुराको आधारमा पछि बिबरण पेश नगर्ने पक्षको कुनै उजूर बा दाबी लाग्ने छैन।
|
| 93 |
+
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| 94 |
+
**तर** जग्गाधनीले किसानलाई डर त्रास देखाई बा कुनै किसिमको जबरजस्ती गरी बिबरण पत्र पेश गर्न दिएको थिएन भन्ने कुराको उजूर परी सो कुरा प्रमाणित भएमा यस उपदफाको कुनै कुरा लागू हुने छैन।
|
| 95 |
+
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| 96 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम प्रकाशित भएको सूचनाको कुनै ब्यहोरामा चित्त नबुझ्ने ब्यक्तिले सो सूचना प्रकाशित भएको मितिले एक्काइस दिन भित्र आफूसँग जो भएको सबूद प्रमाण समेत सामेल राखी तोकिएको अधिकारीका समक्ष उजूर गर्न सक्नेछ र कुनै जग्गाको सम्बन्धमा हक बेहक सम्बन्धी खिचौला उटेमा सो अधिकारीले यस उपदफा र उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त भएको प्रमाणको साथै सो सम्बन्धी मिसिल कागजात इन्साफका निमित्त दफा ७ बमोजिम नेपाल सरकारद्वारा तोकिएको अदालतमा पटाईदिनु पर्छ।
|
| 97 |
+
|
| 98 |
+
**तर** उपदफा (१) बमोजिम बिबरण पेश गर्नु पर्ने ब्यक्तिले सो उपदफा बा उपदफा (३) मा तोकिएको म्याद भित्र पेश नगरेमा निजले यस उपदफा बमोजिम उजूर गर्न पाउने छैन।
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| 99 |
+
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| 100 |
+
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| 101 |
+
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| 102 |
+
६. दण्ड सजाय:
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| 103 |
+
(१) दफा ४ बमोजिम बिबरण पत्र पेश गर्दा कुनै पक्षले अर्को पक्षको हकमा मर्का पर्ने गरी जानी जानी झुटो बिबरण बा जाली सबूद प्रमाण पेश गरेमा निजलाई रु. १०००।-एक हजारसम्म जरिबाना बा तीन महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय हुन सक्नेछ।
|
| 104 |
+
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| 105 |
+
(२) यस ऐन बमोजिमको कुनै काम कारबाई गर्न लागेको कुनै अधिकार प्राप्त अधिकारीलाई कसैले सो काम गर्न नदिन कुनै बाधा विरोध गरेमा बा सो गर्न कसैलाई दुरुत्साहन दिएमा सो बाधा विरोध गर्ने बा दुरुत्साहन दिने ब्यक्तिलाई तोकिएको अधिकारीको आदेशले रु. ४००।-पाँचसयसम्म जरिबाना बा एक महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय हुन सक्नेछ।
|
| 106 |
+
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| 107 |
+
(३) कुनै जग्गाका सम्बन्धमा दफा ४ बमोजिम पेश गर्नु पर्ने बिबरण सो दफा बमोजिमको म्यादभित्र कुनै पनि पक्षले पेश नगरेमा सो जग्गाको सम्बन्धमा जग्गाधनी र किसान दुबैको हक समाप्त भै नेपाल सरकार लाग्नेछ र सो जग्गा नेपाल सरकारले कुनै प्रकारले फेरी बन्दोबस्त गर्न सक्नेछ।
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| 108 |
+
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| 109 |
+
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| 110 |
+
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| 111 |
+
७. मुद्दा मामिलाको कारबाई:
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| 112 |
+
दफा ५ को उपदफा (४) र दफा ९ बमोजिमको मुद्दा मामिलाको कारबाई गरी किनारा तोकिएको अदालतले गर्नेछ।
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| 113 |
+
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| 114 |
+
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| 115 |
+
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| 116 |
+
८. कारबाई र पुनरावेदन:
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| 117 |
+
(१) दफा ७ बमोजिम तोकिएको अदालत र दफा ६ को उपदफा (२) बमोजिम तोकिएको अधिकारीले विशेष अदालत ऐन, २०५९ अन्तर्गतको कार्यबिधि अपनाई कारबाई गर्न र मुद्दा मामिलामा आवश्यकता अनुसार दौडाहा इजलास कायम गर्न तथा स्गाउँपालिका बा नगरपालिकाको सदस्यलाई रोहबरमा राखी प्रचलित कानुनबमोजिम सरजमीन गर्न गराउन सक्नेछ।
|
| 118 |
+
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| 119 |
+
**तर** पूर्णक्षको सिलसिलामा अभियुक्तलाई थुनामा राख्ने अधिकार तोकिएको अधिकारीलाई हुनेछैन।
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| 120 |
+
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| 121 |
+
(२) दफा ६ को उपदफा (२) अन्तर्गत तोकिएको अधिकारीले दिएको आदेश उपर तोकिएको अदालतमा पुनरावेदन लाग्नेछ।
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| 122 |
+
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| 123 |
+
(३) उपदफा (२) अन्तर्गत दफा ६ को उपदफा (१) अन्तर्गत तोकिएको अदालतले गरेको सजाय उपर उच्च अदालतमा पुनरावेदन लाग्नेछ���
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| 124 |
+
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+
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| 126 |
+
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| 127 |
+
९. विशेष व्यवस्था:
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| 128 |
+
(१) यो दफा प्रारम्भ हुनु भन्दा अगावै उखडा जग्गा दर्ता गर्ने सम्बन्धमा तोकिएको अदालतमा सम्बन्धित पक्षले म्याद तारेख गुजारी डिसमिस भएको बा नागरिकताको प्रमाणपत्र पेश गर्न नसकेकोले खारेज भएको बा तामेलीमा रहेको बा एक पक्षले म्याद तारेख गुजारी अर्को पक्षको हकमा समेत खारेज भएको बा तामेलीमा रहेको मुद्दा पुनः जगाई कारबाई गराउन चाहने व्यत्तिले नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकिदिएको म्याद भित्र तोकिएको अदालतमा निवेदन दिएमा, तोकिएको अदालतले त्यसरी डिसमिस बा खारेज भएको बा तामेलीमा रहेको मुद्दा पुनः जगाई कारबाही र किनारा गर्न सक्नेछ।
|
| 129 |
+
|
| 130 |
+
(२) कुनै जग्गाधनी बा किसानले दफा ४ को उपदफा (१) बमोजिमको बिबरण म्यादभित्र पेश नगरेको कारणबाट उखडा जग्गा दर्ता हुन नसकेकोमा तोकिएको अदालतले म्याद तोकी सो म्यादभित्र दफा ४ को उपदफा (१) बमोजिमको बिबरण प्राप्त हुन आएमा सो बिबरणको आधारमा समेत तोकिएको अदालतले उखडा जग्गा दर्ता गर्ने सम्बन्धी कारबाही गर्न सक्नेछ।
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| 131 |
+
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| 132 |
+
(३) यो दफा प्रारम्भ हुनु भन्दा अगावै तोकिएको अदालतले उखडा जग्गा दर्ता गर्ने सम्बन्धमा गरेको फैसला उपर नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकिदिएको म्याद भित्र तोकिएको अदालतमा पुनराबेदन लाग्नेछ।
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| 133 |
+
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| 134 |
+
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+
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+
१०. छिन्न बाँकी मुद्दा मामिला सर्ने:
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+
यो ऐन प्रारम्भ हुनुभन्दा अघि सर्वोच्च अदालतमा बाहेक अन्य कुनै अड्डा अदालत बा अधिकारीका समक्ष दायर भै छिन्न बाँकी रहेको उखडा जग्गाका किसान र जग्गाधनीको हक बहक सम्बन्धी मुद्दा मामिला यो ऐन प्रारम्भ भएपछि दफा ७ अन्तर्गत गठित तोकिएको अदालतमा सर्नेछ र सो तोकिएको अदालतबाट कारबाही र किनारा गरिनेछ।
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| 138 |
+
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+
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+
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| 141 |
+
११. नियम बनाउने अधिकार:
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| 142 |
+
यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वित गर्न नेपाल सरकारले नियम बनाउन सक्नेछ।
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| 143 |
+
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| 144 |
+
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+
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| 146 |
+
९९. बचाउ:
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+
यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेका नियममा लेखिएका कुराहरूमा सोही बमोजिम र अरूमा प्रचलित नेपाल कानुनबमोजिम गर्नुपर्छ।
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section_12_pdf_21.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,150 @@
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| 1 |
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**जलचर संरक्षण ऐन, २०१७**
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| 2 |
+
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| 3 |
+
लालमोहर सदर मिति
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| 4 |
+
२०१७।ऒ।२९
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| 5 |
+
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| 6 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
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| 7 |
+
१. केही नेपाल कानून (संशोधन र पुनः व्यवस्थापन) ऐन, २०२०
|
| 8 |
+
२. न्याय प्रशासन ऐन, २०४६
|
| 9 |
+
३. जलचर संरक्षण (पहिलो संशोधन) ऐन, २०४४
|
| 10 |
+
४. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 11 |
+
५. केही नेपाल कानून संशोधन तथा खारेज गर्ने ऐन, २०७२
|
| 12 |
+
६. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन २०७२
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| 13 |
+
७. केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४
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| 14 |
+
६. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७५
|
| 15 |
+
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| 16 |
+
२०१७ सालको ऐन नं. १६
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| 17 |
+
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| 18 |
+
जलचरहरुको संरक्षण र तत्सम्बन्धी अरु कुराहरुको व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 19 |
+
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| 20 |
+
"शान्ति र व्यवस्था एवं सर्वसाधारण जनताको सुविधा र आर्थिक हित कायम राख्न जलचरहरुको संरक्षण र तत्सम्बन्धी अरु कुराहरुको व्यवस्था गर्नु बाञ्छुनीय भएकोले,
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| 21 |
+
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| 22 |
+
- यो ऐन संबत् २०६५ साल जेठ १४ गतेदेखि लागू भएको ।
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| 23 |
+
- यो ऐन संबत् २०७५ साल भाद्र १ गतेदेखि लागू भएको ।
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| 24 |
+
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| 25 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज महेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको छैटाँ वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएको छ ।
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| 26 |
+
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| 27 |
+
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| 28 |
+
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| 29 |
+
**१. संक्षिप्त नाम, विस्तार र प्रारम्भ :**
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| 30 |
+
(१) यस ऐनको नाम "जलचर संरक्षण ऐन, २०१७" रहेको छ ।
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| 31 |
+
(२) यो ऐन नेपाल...भर लागू हुनेछ ।
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| 32 |
+
(३) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ ।
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| 33 |
+
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| 34 |
+
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+
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+
**२. परिभाषा :**
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| 37 |
+
बिषय बा प्रसंगले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा-
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| 38 |
+
(क) "जल" भन्नाले ताल, दह, खहरे, खोला, नदी, नाला, पोखरी, नहर, कुलो, तलाउ, जलाशय, कृत्रिम जलाशय, (रिजरम्बायर), सिमसार, मत्स्य पालनका लागि जडान भएको पिंजडा (क्रेज) तथा माझा पालन गरेको धान खेतको पानी र तिनीहरुको स्रोत समेत सम्झनु पर्छ ।
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| 39 |
+
(ख) "जलचर" भन्नाले जलभित्र बस्ने जुनसुकै जीव सम्झनुपर्छ ।
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| 40 |
+
(ग) "स्थानीय अधिकारी" भन्नाले सम्बन्धित जिल्लाको प्रमुख जिल्ला अधिकारी सम्झनु पर्छ ।
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| 41 |
+
(ग१) "प्राविधिक अधिकारी" भन्नाले मत्स्य विकास बा मत्स्य अनुसन्धान बा मत्स्य प्रसार कार्य गर्नको लागि नेपाल सरकारले तोकेको कर्मचारी सम्झनुपर्छ ।
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| 42 |
+
(ग२) "फीस ल्याडर" भन्नाले जलमा जलचरको आवागमनको लागि राखिएको बैकल्पिक बाटो सम्झनु पर्छ ।
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| 43 |
+
(घ) "निजी जल" भन्नाले व्यक्ति विशेषले बस्थानीय तहलाई मालपोत बा भूमिकर तिरीराखेको जमीनमा भएको निजको हक र उपभोगको ताल, दह, पोखरी, तलाउ बा जलाशय सम्झनुपर्छ ।
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| 44 |
+
(ङ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिमको" भन्नाले यो ऐन अन्तर्गत बनेको न���यममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिमको सम्झनुपर्छ ।
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| 45 |
+
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| 46 |
+
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| 47 |
+
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| 48 |
+
**३. जलचर समात्ने तथा मानें तरिकाहरुमा प्रतिबन्ध :**
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| 49 |
+
कुनै व्यत्किले पनि कुनै जलमा रहेको कुनै जलचरलाई समात्ने तथा मानें अभिप्रायले जानी जानी त्यस्तो जलमा बा त्यसको आसपासमा कुनै किसिमको "बिघुतीय धार (करेण्ट) बिष्फोट पदार्थ बा बिषालु पदार्थको प्रयोग गर्न हुँदैन ।
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| 50 |
+
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| 51 |
+
तर कुनै निजी जलका धनीले अरु कुनै जलका जलचरहरुलाई क्षति नहुने गरी आफ्नो निजी जलमा जलचर समात्न तथा मार्नको निमित्त बिषालु पदार्थ छाड्न चाहेक जुनसुकै तरीकाको प्रयोग गर्नमा यो दफा र यस अन्तर्गतका कुनै कुराले बाधा पुऱ्याउने छैन ।
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| 52 |
+
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| 53 |
+
---
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| 54 |
+
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| 55 |
+
**३३क. फीस ल्याडर तथा संरचनाका ढोका थुन्न बा भत्काउन नहुने :**
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| 56 |
+
अधिकार प्राप्त व्यत्कि बाहेक अरु कसैले पनि जलचरको संरक्षणको लागि जलमा रहेको फीस ल्याडर, बाँध तथा अन्य कुनै किसिमको संरचनाको ढोकाहरुलाई थुन्न बा भत्काउन हुँदैन ।
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| 57 |
+
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| 58 |
+
---
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| 59 |
+
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| 60 |
+
**४. केही खास प्रकारका जलचरहरुलाई समात्न, मार्न तथा चोट पुन्याउन मनाही गर्ने नेपाल सरकारको अधिकार :**
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| 61 |
+
नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा प्रकाशित आदेशद्वारा सोही आदेशमा-
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| 62 |
+
(क) तोकिएका जातिका जलचरहरुलाई नेपाल सरकार बा स्थानीय अधिकारीको इजाजत बेगर कुनै पनि व्यत्तिले जानी जानी समात्न, मार्न तथा चोट पुन्याउन नपाउने गरी, र
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| 63 |
+
(ख) तोकिएको ऋतुमा र तोकिएका अबस्थाका कुनै पनि जलचरहरुलाई कुनै पनि व्यत्तिले जानी जानी समात्न, मार्न तथा चोट पुन्याउन नपाउने गरी मनाही गर्न सक्नेछ ।
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| 64 |
+
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| 65 |
+
तर कुनै व्यत्कि विशेषको निजी जलमा रहेका जलचरहरुको सम्बन्धमा यो दफा र यस दफा अन्तर्गतका कुनै कुरा लागू हुने छैन ।
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| 66 |
+
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| 67 |
+
---
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| 68 |
+
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| 69 |
+
**४. केही खास जलमा जलचरहरुलाई समात्न, मार्न तथा चोट पुन्याउन मनाही गर्न नेपाल सरकारको अधिकार :**
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| 70 |
+
नेपाल सरकारले नेपालको राजपत्रमा प्रकाशित आदेशद्वारा सोही आदेशमा तोकिएका टाउँको जलमा नेपाल सरकार बा स्थानीय अधिकारीको इजाजत बेगर कुनै पनि व्यत्किले जानी जानी जलचरहरु समात्न, मार्न तथा चोट पुन्याउन नपाउने गरी मनाही गर्न सक्नेछ र त्यस्ता टाउँका जलको सम्पूर्ण जलचरमा नेपाल सरकारको मात्र अधिकार हुनेछ ।
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| 71 |
+
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| 72 |
+
तर कुनै व्यत्कि विशेषले निजी जलको सम्बन्धमा नेपाल सरकारले त्यस्तो आदेश निकाल्ने छैन ।
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| 73 |
+
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| 74 |
+
---
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| 75 |
+
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| 76 |
+
**४क. सुरक्षित विष बाहेक अन्य विष प्रयोग गर्न नहुने :**
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| 77 |
+
जलचर समात्ने बा मानें प्रयोजनको लागि कुनै बिषालु पदार्थ प��रयोग गर्नु पर्ने भएमा त्यसको प्रयोजनको लागि सुरक्षित विष बाहेक अरु कुनै प्रकारको बिष प्रयोग गर्नु हुँदैन ।
|
| 78 |
+
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| 79 |
+
स्पष्टीकरण : यस दफाको प्रयोजनको लागि "सुरक्षित बिष" भन्नाले प्राविधिक अधिकारीले सिफारिश गरेको रसायन बा जडिबुटी सम्झनुपर्छ ।
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| 80 |
+
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| 81 |
+
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| 82 |
+
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| 83 |
+
**४ख. जलचर सम्बन्धी अन्य व्यवस्था :**
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| 84 |
+
(१) बिद्युत् खाने पानी, सिंचाई बा अन्य कुनै प्रयोजनको लागि बाँध निर्माण गर्ने निकायले जलचरको आवागमनमा बाधा पर्न नदिनको लागि सम्भव भएसम्म फीस ल्याडर निर्माण गर्नु पर्नेछ । फीस ल्याडर निर्माण गर्न सम्भव नहुने भएमा त्यस्तो टाउँमा बा आस पासको क्षेत्रमा जलचरको कृत्रिम प्रजनन गराउनको निमित्त जलचर ह्याचरी तथा जलचर नर्सरीको व्यवस्था गर्नु पर्नेछ ।
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| 85 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निर्माण कार्य गर्दा प्राविधिक अधिकारीलाई पूर्व जानकारी दिनु पर्नेछ ।
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| 86 |
+
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| 87 |
+
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| 88 |
+
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| 89 |
+
**६४ग. प्रदेश तथा स्थानीय तहबाट जलचरको संरक्षण :**
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| 90 |
+
प्रदेश र स्थानीय तहले आफ्नो क्षेत्रभित्र जलचरको संरक्षण गर्नु पर्नेछ ।
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| 91 |
+
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| 92 |
+
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| 93 |
+
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| 94 |
+
**६. नागरिकको अधिकार :**
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| 95 |
+
दफा ४ तथा दफा ४ बमोजिम निकालिएका आदेशले मनाही गरेको ऋतु अबस्था तथा टाउँमा बाहेक दफा ३ को अधिनमा रही अन्य जलमा जलचर मार्न बा समात्न यस ऐनको कुनै कुराले कुनै नागरिकलाई मनाही गरेको मानिने छैन ।
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| 96 |
+
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| 97 |
+
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| 98 |
+
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| 99 |
+
**७. टेक्का सम्बन्धी व्यवस्था :**
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| 100 |
+
(१) नेपाल सरकारले आफ्नो नियन्त्रणमा रहेको जुनसुकै जलमा कुनै एक बा एक भन्दा बढी प्रकारका जलचरहरु समात्ने तथा मानें कामको टेक्का बन्दोबस्त गर्न सक्नेछ ।
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| 101 |
+
(२) दफा ४ बमोजिम मनाही गरिएका जलचर बा दफा ४ बमोजिमका खास जलमा रहेका जलचर बाहेक अन्य जलचर समात्ने तथा मानें कामको लागि नेपाल सरकारले उपदफा (३) बमोजिम जारी गरेको मापदण्डको अधीनमा रही स्थानीय तहले कानून बमोजिम टेक्का गर्न सक्नेछ ।
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| 102 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिमको टेक्का दिंदा जलचर समात्न बा पकन प्रयोग गरिने साधनको मापदण्ड तोकिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 103 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिमको टेक्का दिंदाको कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 104 |
+
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| 105 |
+
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| 106 |
+
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| 107 |
+
**८. दण्ड सजाय :**
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| 108 |
+
(१) दफा ३ बा ३क. उल्लङ्गन गर्ने बा गर्न दुरुत्साहन गर्ने व्यक्तिलाई स्थानीय अधिकारीको आदेशले कसूरको मात्रा हेरी हानी नोक्सानी भएकोमा बिगो बराबरको क्षतिपूर्ति भराई ६ महिनासम्म कैद बा पाँच हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा दुबै सजाय हुनेछ । होनी नोक्सानीको मूल्याकंन गर्दा प्राविधिक अधिकारीलाई संलग्न गराउनु पर्नेछ ।
|
| 109 |
+
(२) दफा ४ बा दफा ४ अन्तर्गत निकालिएको आदेशका कुनै कुरा उल्लङ्गन गर्ने बा गर्न दुरुत्साहन गर्ने व्यक्तिलाई स्थानीय अधिकारीका आदेशले दुई हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ ।
|
| 110 |
+
(३) उपदफा (१) र (२) मा लेखिएको दण्ड सजायमा कुनै प्रतिकूल प्रभाव नपारी यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेका नियम बा निकालिएका आदेशका कुनै कुरा उल्लङ्गन गर्ने बा गर्न दुरुत्साहन गर्ने व्यत्किलाई स्थानीय अधिकारीका आदेशले ३ एक हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ ।
|
| 111 |
+
(४) यो ऐन अन्तर्गत कसूरदार साबित भएको व्यत्किको साथमा रहेको सो कसूरसँग सम्बन्धित सबै हतियार, सामान र चीज वस्तुहरु समेत स्थानीय अधिकारीका आदेशले जफत हुनेछ ।
|
| 112 |
+
|
| 113 |
+
---
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| 114 |
+
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| 115 |
+
**९. पुनरावेदन :**
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| 116 |
+
दफा ८ अन्तर्गत स्थानीय अधिकारीले दिएको दण्ड सजायका आदेश उपर चित्त नबुझ्ने व्यत्किले सो आदेशको सूचना पाएका मितिले ३५ दिनभित्र जिल्ला अदालतमा पुनरावेदन गर्न सक्नेछ ।
|
| 117 |
+
|
| 118 |
+
तर आफूलाई लाग्ने टहरिएको जरिबाना बापतको रुपैयाँ धरौटी बा त्यति अंकको धन जमानी नराखे निजको त्यस्तो कुनै पुनरावेदन लारने छैन ।
|
| 119 |
+
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| 120 |
+
---
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| 121 |
+
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| 122 |
+
**१०. जरिबाना बापत असूल भएको रुपैयाँ र जफत भएको हतियार, सामान र चीज वस्तुहरु सरकारी कोषमा दाखिल हुने :**
|
| 123 |
+
यो ऐन अन्तर्गत जरिबाना बापत असूल भएको रुपैयाँ र जफत भएको हतियार, सामान र चीज वस्तु मध्ये हतियार र बिस्फोटक तथा बिषालु पदार्थ बाहेक अरु जिन्सी जति लिलाम बिकी गरी नगदीमा परिणत गरी स्थानीय माल अडा बा नेपाल राष्ट्र बैंकमा दाखिल गर्नु हतियार र बिस्फोटक बिषालु पदार्थ जति प्रचलित नेपाल कानून बमोजिम गर्नु स्थानीय अधिकारीको कर्तव्य हुनेछ ।
|
| 124 |
+
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| 125 |
+
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| 126 |
+
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| 127 |
+
**११. स्थानीय अधिकारीको अधिकार :**
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| 128 |
+
यो ऐन अन्तर्गतको मुदाको कारबाही गर्दा बयान बकपत्र गराउने, साक्षी प्रमाण बुझ्ने लिखतहरु दाखिल गराउने समेत शुरु अदालतलाई भए सरहका सबै अधिकार स्थानीय अधिकारीलाई हुनेछ ।
|
| 129 |
+
|
| 130 |
+
---
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| 131 |
+
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| 132 |
+
**१२. गिरफ्तार गर्ने र कब्जा गर्ने अधिकार :**
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| 133 |
+
(१) यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा निकालिएको आदेश बर्खिलाप कसैले कुनै काम गरे गराएको देखेमा बा सोको प्रमाण पाएमा स्थानीय अधिकारीले जारी गरेको पक्राउ पूर्जी बमोजिम गिरफ्तार गर्न तथा कसूर गर्ने व्यक्ति तत्काल पक्राउ नगरेमा बा त्यस्तो व्यक्ति भाग्ने, उम्कने बा निजले प्रमाण, दसी बा सबुत नष्ट गर्ने मनासिब कारण भएमा बा कसूरसँग सम्बन्धित फरार ��हेको व्यक्ति फेला परेमा बा कसूर गरिरहेको अबस्थामा बा स्थानीय अधिकारीको सामुन्नेमा भए त्यस्तो व्यक्तिलाई स्थानीय अधिकारीले तत्कालै जरुरी पक्राउ पूर्जी जारी गरी गिरफ्तार गरी कसूरमा प्रयोग भएका हतियार, सामान र चीज बस्तुहरू समेत कब्जा गर्न सक्नेछ । स्थानीय अधिकारीबाट खटिएका कर्मचारी बा कुनै प्रहरी कर्मचारीले गिरफ्तार गरेको व्यक्ति र कब्जा गरेको हतियार, सामान र चीज बस्तुलाई बाटोको म्याद बाहेक चौबीस घण्टाभिब स्थानीय अधिकारी समक्ष बुझाई दिनु पर्छ ।
|
| 134 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दाखिल हुन आएपछि स्थानीय अधिकारीले २४ घण्टाभिबै जो गर्नु पर्ने कारबाई गर्नु पर्छ र कब्जा भइआएको चीज सड्ने गल्ने रहेछ भने गिरफ्तार भइआएका मानिसकै रोहबरमा लिलाम गरी आएको मोल धरौटीमा राख्नु पर्छ ।
|
| 135 |
+
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| 136 |
+
---
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| 137 |
+
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| 138 |
+
**१३. प्रचलित कानून बमोजिम हुने :**
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| 139 |
+
यस ऐनले गर्न मनाही भएको काम कुरा गर्दा र यस ऐनको कुनै दफा लागू नभएका कुनै व्यक्तिले सो बमोजिम गर्दा कसैको केही हानी नोक्सानी भएकोमा प्रचलित नेपाल कानून बमोजिम हुन बा गर्नमा यस ऐनको कुनै कुराले बाधा पुर्याएको मानिने छैन ।
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
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| 142 |
+
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| 143 |
+
**१४. नियम बनाउने अधिकार :**
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| 144 |
+
यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वित गर्न नेपाल सरकारले नियमहरु बनाउन सक्नेछ ।
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| 145 |
+
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| 146 |
+
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| 147 |
+
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| 148 |
+
**१५. खारेजी :**
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| 149 |
+
(१) मुलुकी ऐन (अदल) को २४ नं. खारेज गरिएकोछ ।
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| 150 |
+
(२) यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा निकालिएका आदेशसँग बाझिने जति नेपाल कानून खारेज भएको बा अबस्थानुसार सोसँग मिल्ने गरी संशोधन गरिएको मानिनेछ ।
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section_12_pdf_22.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,74 @@
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| 1 |
+
**छोरा क्षेत्रको जग्मा सम्बन्धी ऐन, २०२६**
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०२६।६।६
|
| 5 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
|
| 6 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 7 |
+
गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून
|
| 8 |
+
संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 9 |
+
२०६६। १०। ७
|
| 10 |
+
|
| 11 |
+
२०२६ सालको ऐन नं. १३
|
| 12 |
+
|
| 13 |
+
**छोरा क्षेत्रको जग्मा सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन**
|
| 14 |
+
|
| 15 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 16 |
+
शान्ति र व्यवस्था कायम राख्न तथा सर्वसाधारण जनताको आर्थिक हितको लागि मोरङ्ग, सुनसरी र झापा जिल्लाहरुको जङ्गल फडानी भएको छोरा क्षेत्रको जग्माको समयोचित व्यवस्था गर्न बाज्छुनीय भएकोले,
|
| 17 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज महेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्भतिले यो ऐन बनाइबक्सेको छ ।
|
| 18 |
+
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| 19 |
+
**१. संक्षिप्त नाम, विस्तार र प्रारम्भ:**
|
| 20 |
+
(१) यस ऐनको नाम "छोरा क्षेत्रको जग्मा सम्बन्धी ऐन, २०२६" रहेको छु ।
|
| 21 |
+
(२) यो ऐन मोरङ्ग, सुनसरी र झापा जिल्लाको छोरा क्षेत्रहरुमा लागू हुनेछ ।
|
| 22 |
+
(३) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकिदिएको मिति देखि तोकिदिएको छोरा क्षेत्रमा प्रारम्भ हुनेछ ।
|
| 23 |
+
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| 24 |
+
**२. परिभाषा:**
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| 25 |
+
विषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा-
|
| 26 |
+
(क) "झोरा क्षेत्र" भन्नाले कानूनी रुपबाट अधिकार पाई जङ्गल फडानी गरी बसोबास आबाद गरेको क्षेत्रलाई सम्झनुपर्छ ।
|
| 27 |
+
(ख) "जग्गाबाला" भन्नाले प्रचलित नेपाल कानून बमोजिम आफ्नो नाममा जग्गा दर्ता भएको बा त्यस्तो दर्ता गर्ने अधिकार भएको व्यक्ति सम्झनुपर्छ ।
|
| 28 |
+
(ग) "रैती" भन्नाले झोरा क्षेत्रको जग्गा आबाद गरी आफ्नो बा आफ्नो परिवारको श्रमले खेती गरी कमाई सोही ठाउँमा बसोबास गरी आएको व्यक्तिलाई सम्झनुपर्छ ।
|
| 29 |
+
(घ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनुपर्छ ।
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
**३. जग्गाबालाको हक समाप्त हुने:**
|
| 32 |
+
(१) यो ऐन प्रारम्भ भएको झोरा क्षेत्रको जग्गामा जग्गाबालाको आफै खेती गरी आएको नभई रैतीले कमाई आएको जग्गाको सम्बन्धमा त्यस्तो जग्गाबालाको सबै किसिमको हक र अधिकार समाप्त हुनेछ ।
|
| 33 |
+
(२) यस ऐनमा स्पष्ट व्यवस्था भएकोमा बाहेक यो ऐन प्रारम्भ हुँदाको बखतसम्म जुनसुकै व्यक्तिले जुनसुकै किसिमले झोरा क्षेत्रको जग्गा पाउने भईसकेको भए पनि सो व्यक्तिले यो ऐन प्रारम्भ भएपछि सो बमोजिम झोरा क्षेत्रमा जग्गा पाउने बा निजको नाउँमा दर्ता हुनेछैन ।
|
| 34 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम जग्गामा हक समाप्त ���ुने जग्गाबालालाई सो जग्गाको सम्बन्धमा नेपाल सरकारले सो जग्गामा लागेको मालपोतको रकमको पाँच दोब्बरमा नबढाई तोकिए बमोजिमको क्षतिपूर्ति दिनेछ ।
|
| 35 |
+
तर प्रचलित नेपाल कानून बमोजिम दर्ता भई नसकेको कुनै जग्गाको क्षतिपूर्ति दिइनेछैन ।
|
| 36 |
+
(४) जग्गाबालाले उपदफा (३) बमोजिम पाउने क्षतिपूर्तिको रकम तोकिएको कार्यालय बा संस्थाबाट तोकिए बमोजिम पाउनेछ ।
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| 37 |
+
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| 38 |
+
**४. जग्गाको बिकी बितरण:**
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| 39 |
+
(१) यो ऐन प्रारम्भ भएको झोरा क्षेत्रको जग्गा सोही क्षेत्रमा बसोबास गरी घटीमा एक बर्षदेखि खेती गरी कमाई आएको रैतिलाई निजको परिवार संख्याको विचार गरी बढीमा चार बिगाहासम्मको दरले तोकिएको अधिकारीले तोकिएको मोलमा तोकिए बमोजिम बिक्री बितरण गर्नेछ ।
|
| 40 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बिक्री बितरण गरी बाँकी रहन आएको जग्गा तोकिएको अधिकारीले तोकिएबमोजिमका व्यक्तिहरुलाई तोकिएको मोलमा तोकिएबमोजिम बिक्री बितरण गर्नेछ ।
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**५. जग्गा दर्ता गर्ने:**
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(१) दफा ४ बमोजिम बिक्री बितरण भएको जग्गा तोकिएको अधिकारीले बिक्री बितरणमा पाउने व्यक्तिको नाममा तोकिए बमोजिम दर्ता किताबमा दर्ता गरी त्यसको प्रमाणिक प्रतिलिपि सम्बन्धित माल अड्रामा बा माल अड्रा नभएको जिल्लामा भूमि प्रशासन कार्यालयमा पठाउनुपर्छ ।
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+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दर्ता किताबको प्रमाणिक प्रतिलिपि प्राप्त भएपछि सम्बन्धित माल अड्रा बा भूमि प्रशासन कार्यालयले सो जग्गा पाउने व्यक्तिको नाउँमा जग्गाबालाको हैसियतले दर्ता गर्नुपर्छ ।
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**६. जग्गा प्राप्त गर्नेले पालन गर्नुपर्ने शर्तहरु:**
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दफा ४ बमोजिम जग्गा प्राप्त गर्ने व्यक्तिले देहायको शर्तहरु पालन गर्नुपर्छ:-
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(क) सो जग्गाको तोकिएको मोल तोकिए बमोजिम एकैमुष्ट बा किस्ताबन्दीमा तोकिएको समयमा तोकिएको कार्यालयमा नगदीमा बुझाउनु पर्छ ।
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तर कसैले बुझाउनु पर्ने पुरै रकम बा किस्ताबन्दीमा तिर्नुपर्ने रकम एक बा सो भन्दा बढी किस्ताबन्दी रकम तोकिएको समय अगाबै बुझाउन यस दफाले बाधा पुए्याएको मानिनेछैन ।
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+
(ख) सो जग्गाको बुझाउनु पर्ने पूरा रकम भुक्तान नभएसम्म दफा ४ बमोजिम प्राप्त गरेको जग्गा बेचबिखन, दान दातव्य आदि कुनै किसिमले हक छाडी दिन र कृषि विकास बैंक बा किसानलाई ऋण दिने कानूनद्वारा स्थापित संस्था बा तोकिएको प्रशासनलाई बाहेक अरु व्यक्तिलाई धितो बन्धक राख्न हुँदैन।
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(ग) सो जग्गामा प्रचलित नेपाल का��ून बमोजिम लाग्ने मालपोत सो जग्गा दर्ता गरेको सालदेखि नै तिर्नुपर्छ ।
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**७. विशेष अदालतको कार्यबिधि अपनाउन र अधिकार प्रयोग गर्न पाउने:**
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यस ऐन अन्तर्गतका काम कारबाई गर्दा उटेको मुद्दा मामिलाको सम्बन्धमा तोकिएको अधिकारीले विशेष अदालत ऐन, २०४९, को कार्यबिधि अपनाउने र अधिकार प्रयोग गर्नेछ ।
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**८. दण्ड सजाय:**
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(१) कसैले झुहा व्यहोरा देखाई जग्गा प्राप्त गरेमा बा दफा ६ को कुनै कुरा उल्लघंन गरेमा तोकिएको अधिकारीले निजले प्राप्त गरेको जग्गा र सो जग्गा प्राप्त गर्दा बुझाएको रकम जफत गर्न सक्नेछ ।
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+
(२) यस ऐन अन्तर्गत काम कारबाई गर्दा कसैले बाधा विरोध गरेमा तोकिएको अधिकारीले निजलाई एक हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा एक बर्ष सम्म कैद बा दुबै सजाय गर्न सक्नेछ ।
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**९. उजूर बा पुनराबेदन नलाग्ने:**
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यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम तोकिएको अधिकारीले गरेको कुनै काम कारबाई बा निर्णय उपर कुनै अदालतमा नालेस, उजूर बा पुनराबेदन लाग्ने छैन ।
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तर तोकिएको अधिकारीको त्यस्तो निर्णय उपर उजूर परेमा नेपाल सरकारले दोहोन्याई हेर्न सक्नेछ ।
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**१०. नियम बनाउने अधिकार:**
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यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वित गर्न नेपाल सरकारले नियम बनाउन सक्नेछ ।
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**११. बचाउ:**
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यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा लेखिएकोमा सोही बमोजिम र अरुमा प्रबलित नेपाल कानून बमोजिम हुनेछ ।
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**द्रष्टव्य:**
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१. विशेष अदालत ऐन, २०४९, द्वारा रूपान्तर गरिएका शब्दहरु:-
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"बिशेष अदालत ऐन, २०३१" को सट्टा "बिशेष अदालत ऐन, २०४९"।
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२. केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरू:-
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| 74 |
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"श्री ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
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section_12_pdf_3.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,343 @@
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Here is the exact text extracted from the provided PDF document:
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# पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी परिषद् ऐन, २०७९
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**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
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२०७९।०६।२३
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| 10 |
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## सङ्घीय-संसदले बनाएको २०७९ सालको ऐन नं .२९
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+
## पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी परिषद् सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 18 |
+
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| 19 |
+
**प्रस्तावनाः**
|
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+
प्रचलित कानून बमोजिम स्थापित नेपाल पशु चिकित्सा परिषद्मा नाम दर्ता भएका र दर्ता हुन योग्य पशु चिकित्सक बाहेकका पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीहरुको सेवा र व्यवसायलाई व्यवस्थित, गुणस्तरीय एवं मर्यादित ढङ्गले परिचालन गरी प्रभावकारी पशु स्वास्थ्य र पशु सेवा व्यवसायको विकास गर्न पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा परिषद्को स्थापना गर्न बाञ्छुनीय भएकोले, सङ्घीय संसदले यो ऐन बनाएको छ ।
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
---
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| 23 |
+
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| 24 |
+
## परिच्छेद -१
|
| 25 |
+
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| 26 |
+
### प्रारम्भिक
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| 27 |
+
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| 28 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
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| 29 |
+
(१) यस ऐनको नाम "पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी परिषद् ऐन, २०७९" रहेको छ।
|
| 30 |
+
(२) यो ऐन प्रमाणीकरण भएको मितिले एकतीसौं दिनदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 31 |
+
|
| 32 |
+
**२. परिभाषाः**
|
| 33 |
+
विषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 34 |
+
(क) "अध्यक्ष" भन्नाले परिषद्को अध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
|
| 35 |
+
(ख) "उपाध्यक्ष" भन्नाले परिषद्को उपाध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(ग) "तोकिएको" वा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यो ऐन वा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम वा विनियममा तोकिएको वा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
(घ) "दर्ता किताब" भन्नाले यो ऐन अन्तर्गत पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको नाम दर्ता गर्न तयार गरिएको किताब सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(ङ) "पशु" भन्नाले जुनसुकै प्रकारको घरपालुवा वा जङ्गली जनावर, पन्छी वा माछा सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अन्य जलचर र उभयचरलाई समेत जनाउँछ।
|
| 39 |
+
(च) "पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय" भन्नाले बिरामी पशुको रोगको उपचार, निदान, रोकथाम वा पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय सम्बन्धी कुनै कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
(छ) "पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी" भन्नाले यस ऐन बमोजिम दर्ता भएका पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
(ज) "परिषद्" भन्नाले दफा ४ बमोजिम गठन भएको पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(झ) "मन्त्रालय" भन्नाले पशु विकास सम्बन्धी विषय हेर्ने नेपाल सरकारको मन्त्रालय सम्झनु पर्छ।
|
| 43 |
+
(ज) "रजिष्ट्रार" भन्नाले दफा २४ बमोजिम नियुक्त गरेको वा तोकेको व्यक्ति सम���झनु पर्छ।
|
| 44 |
+
(ट) "सदस्य" भन्नाले परिषद्को सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अध्यक्ष र उपाध्यक्ष समेतलाई जनाउँछ।
|
| 45 |
+
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| 46 |
+
---
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| 47 |
+
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| 48 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 49 |
+
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| 50 |
+
### परिषद्को स्थापना, गठन, काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 51 |
+
|
| 52 |
+
**३. परिषद्को स्थापना:**
|
| 53 |
+
(१) प्रचलित कानून बमोजिमको नेपाल पशु चिकित्सा परिषद्मा नाम दर्ता भएका र दर्ता हुन योग्य पशु चिकित्सक बाहेकका पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीहरुको सेवा र व्यवसायलाई व्यवस्थित, गुणस्तरीय एवं मर्यादित बनाउन पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी परिषद्को स्थापना हुनेछ।
|
| 54 |
+
(२) परिषद्को कार्यालय काठमाडौं उपत्यकामा रहनेछ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
**४. परिषद् स्वशासित र सङ्गठित संस्था हुने:**
|
| 57 |
+
(१) परिषद् अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित सङ्गठित संस्था हुनेछ र कानूनी व्यक्तित्व प्राप्त गर्नेछ।
|
| 58 |
+
(२) परिषद्ले कानूनी व्यक्तिको हैसियतले प्रचलित कानून बमोजिम अधिकारको प्रयोग, कर्तव्यको पालना र दायित्व निर्वाह गर्नेछ।
|
| 59 |
+
|
| 60 |
+
**५. परिषद्को गठन:**
|
| 61 |
+
(१) परिषद्मा देहाय बमोजिमका सदस्य रहनेछन्:
|
| 62 |
+
(क) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको रूपमा कम्तीमा "ख श्रेणी" मा दर्ता भएको र पाँच वर्ष अनुभव प्राप्त गरेका पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीमध्येबाट नेपाल सरकारबाट मनोनित एकजना
|
| 63 |
+
(ख) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको रूपमा कम्तीमा "ख श्रेणी" मा दर्ता भएका पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीमध्येबाट निर्बाचित एकजना
|
| 64 |
+
(ग) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी मध्येबाट मन्त्रालयबाट मनोनित कम्तिमा एकजना महिला सहित दुईजना
|
| 65 |
+
(घ) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीमध्येबाट प्रत्येक प्रदेशबाट एक/एक जना निर्बाचित हुने गरी सातजना
|
| 66 |
+
(ङ) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीमध्येबाट कम्तीमा दुईजना महिला सहित निर्बाचित चारजना
|
| 67 |
+
(च) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय सम्बन्धी विषय अध्यापन गर्ने विश्वविद्यालय वा अध्ययन संस्थान मध्येबाट र प्राविधिक शिक्षा तथा व्यावसायिक तालिम परिषद्वाट परिषद्ले मनोनित गरेको कम्तीमा एकजना महिला सहित दुईजना
|
| 68 |
+
(छ) नेपाल पशु चिकित्सा परिषद्का पदाधिकारी प्रतिनिधि एकजना
|
| 69 |
+
(ज) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिब
|
| 70 |
+
|
| 71 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ख), (घ) र (ङ) बमोजिमका सदस्यको निर्बाचन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 72 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम मनोनित तथा निर्बाचित सदस्यहरुको पदावधि चार वर्षको हुनेछ। पदावधि समाप्त भ��पछि निजहरु पुन: एक पटकका लागि मनोनित वा निर्बाचित हुन सक्नेछन्।
|
| 73 |
+
(४) उपदफा (३) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार बिपरीत हुने गरी काम गरेमा नेपाल सरकारले त्यस्तो सदस्यलाई जुनसुकै बखत पदबाट हटाउन सक्नेछ। तर, त्यसरी निजलाई पदबाट हटाउनु अघि सफाइ पेश गर्ने मौका दिनु पर्नेछ।
|
| 74 |
+
(५) उपदफा (३) बमोजिमको पदावधि समाप्त नहुँदै कुनै सदस्यको पद रिक्त हुन आएमा बाँकी अवधिको लागि परिषद्ले अर्को सदस्य मनोनित वा निर्बाचित गर्न सक्नेछ। तर, एक वर्षभन्दा कम अवधिको लागि रिक्त पदमा मनोनयन वा निर्बाचन गरिने छैन।
|
| 75 |
+
(६) उपदफा (१) बमोजिमको परिषद् गठन नभएसम्मको लागि परिषद्ले गर्नु पर्ने काम गर्न नेपाल सरकारले उपदफा (१) मा उल्लेख भए बमोजिमका क्षेत्रको प्रतिनिधित्व हुने गरी समिति गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 76 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजिमको समिति गठन गर्दा दफा १७ बमोजिम सम्बन्धित पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको लागि आवश्यक योग्यता हासिल गरेका व्यक्तिहरुमध्येबाट गठन गरिनेछ।
|
| 77 |
+
(८) उपदफा (६) बमोजिम गठन भएको समितिको अवधि बढीमा एक वर्षको हुनेछ।
|
| 78 |
+
(९) उपदफा (१) बमोजिमका सदस्य मनोनीत वा निर्वाचित गर्दा समावेशी सिद्धान्तका आधारमा गर्नु पर्नेछ।
|
| 79 |
+
(१०) उपदफा (१) बमोजिम परिषद्मा सदस्य निर्वाचन वा मनोनयन गर्दा पशु सेवा तथा पशु स्वास्थ्यसँग सम्बन्धित सबै क्षेत्रको प्रतिनिधित्व सुनिश्चित गराउनको लागि आलो-पालो गरी गर्नु पर्नेछ।
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| 80 |
+
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| 81 |
+
**६. अयोग्य मानिनेः**
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| 82 |
+
देहायको अवस्थामा कुनै व्यक्ति परिषद्को सदस्यमा मनोनित वा निर्वाचित हुन अयोग्य मानिनेछ:
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| 83 |
+
(क) गैर नेपाली नागरिक,
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| 84 |
+
(ख) दर्ता किताबबाट नाम हटाइएको,
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| 85 |
+
(ग) भ्रष्टाचार, जबरजस्ती करणी, मानव बेचविखन तथा ओसारपसार, लागू औषध बिक्री वितरण वा ओसार पसार, सम्पत्ति शुद्धीकरण, राहदानी दुरुपयोग, अपहरण सम्बन्धी कसूर वा नैतिक पतन देखिने अन्य फौजदारी कसूरमा अदालतबाट कसूरदार ठहरिएको,
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| 86 |
+
(घ) प्रचलित कानून बमोजिम कालो सूचीमा रहेको,
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| 87 |
+
(ङ) शारीरिक तथा मानसिक अस्वस्थताको कारणले परिषद्मा रही सेवा गर्न असमर्थ भएको,
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| 88 |
+
(च) प्रचलित कानून बमोजिम दामासाहीमा परेको।
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| 89 |
+
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| 90 |
+
**७. सदस्यता समाप्त हुने अवस्थाः**
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| 91 |
+
(१) देहायको अवस्थामा परिषद्को सदस्यता समाप्त भएको मानिनेः
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| 92 |
+
(क) दफा ६ बमोजिम सदस्य रहन अयोग्य भएमा,
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| 93 |
+
(ख) सदस्यको पदबाट राजिनामा दिएमा,
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| 94 |
+
(ग) परिषद्लाई कारण सहितको सूचना नदिई ��गातार तीन पटकभन्दा बढी परिषद्को बैठकमा अनुपस्थित भएमा,
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| 95 |
+
(घ) मृत्यु भएमा।
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| 96 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ख) बमोजिम राजिनामा दिँदा अध्यक्षले मन्त्रालय मार्फत नेपाल सरकार समक्ष र अन्य सदस्यले अध्यक्ष समक्ष दिनु पर्नेछ।
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| 97 |
+
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| 98 |
+
**८. परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार:**
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| 99 |
+
परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
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| 100 |
+
(क) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायलाई सुव्यवस्थित, स्तरीय, मर्यादित र प्रभावकारी बनाउन आवश्यक नीति, योजना तथा कार्यक्रम तर्जुमा गरी स्वीकृतीका लागि मन्त्रालय समक्ष पेश गर्ने,
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| 101 |
+
(ख) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय सुचारु रूपबाट सञ्चालन गर्न नेपाल सरकारबाट स्वीकृत नीति, योजना तथा कार्यक्रमहरू कार्यान्वयन गर्ने, गराउने,
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| 102 |
+
(ग) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको राष्ट्रिय मापदण्ड तयार गरी मन्त्रालयबाट स्वीकृत गराई लागू गर्ने,
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| 103 |
+
(घ) पशु तथा पशुजन्य पदार्थ उत्पादन, पशु प्रजनन् सम्बन्धी सामग्रीको उत्पादन, प्रशोधन, वितरण तथा पशुपालन प्रणालीलाई गुणस्तरयुक्त बनाउन मन्त्रालयलाई सुझाव दिने,
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| 104 |
+
(ङ) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीहरुको योग्यता निर्धारण गर्ने,
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| 105 |
+
(च) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीका सम्बन्धमा प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तहसँग समन्वय गर्ने,
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| 106 |
+
(छ) प्रदेश कानूनले तोकेको निकायबाट पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय सम्बन्धी एकीकृत अभिलेख संकलन तथा अद्यावधिक गर्ने,
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| 107 |
+
(ज) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको राष्ट्रिय स्तरको आचार संहिता तयार गरी लागू गर्ने, गराउने,
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| 108 |
+
(झ) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवासँग सम्बन्धित विषयमा मन्त्रालयलाई आवश्यक परामर्श दिने,
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| 109 |
+
(ट) अन्तर्राष्ट्रिय अभ्यास बमोजिम पशु स्वास्थ्य सेवासँग सम्बन्धित अनुसन्धान वा अनुभवहरुको आदान प्रदान गरी नेपालका लागि उपयुक्त हुने विषयहरू लागू गर्न मन्त्रालय समक्ष सुझाव पेश गर्ने,
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| 110 |
+
(ठ) परिषद्ले निर्धारण गरेको आचार संहिताको पालना गरे नगरेको सम्बन्धमा निरीक्षण, सुपरिवेक्षण र अनुगमन गर्ने र आचार संहिताको पालना नगरेको पाइएमा व्यस्ता पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको नाम परिषद्मा दर्ता भएकोमा दर्ता किताबबाट हटाउने र प्रदेशको निकायमा दर्ता भएकोमा दर्ता किताबबाट नाम हटाउन लेखी पठाउने,
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| 111 |
+
(ड) परिषद्को उद्देश्य प्रामिका लागि आवश्यक पर्ने अन्य कार्य गर्ने।
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| 112 |
+
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| 113 |
+
**९. परिषद्को बैठक:**
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| 114 |
+
(१) परिषद्को बैठक अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
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| 115 |
+
(२) परिषद्को बैठक साधारणतया वर्षको चार पटक बस्नेछ।
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| 116 |
+
(३) परिषद्को बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले र निजको अनुपस्थितिमा उपाध्यक्षले गर्नेछ र निजहरु दुवै जना उपस्थित नभएमा उपस्थित सदस्यहरुमध्येबाट जेष्ठ सदस्यले गर्नेछ।
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| 117 |
+
(४) परिषद्को कुल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्यहरू उपस्थित भएमा परिषद्को बैठकको लागि गणपुरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
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| 118 |
+
(५) परिषद्को बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकको अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णायक मत दिनेछ।
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| 119 |
+
(६) परिषद्को निर्णय अध्यक्ष र रजिष्ट्रारद्वारा प्रमाणित गरिनेछ।
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| 120 |
+
(७) सदस्यहरूले बैठकमा भाग लिँदा पाउने भत्ता तथा अन्य सुविधा तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 121 |
+
(८) परिषद्को बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यविधि परिषद् आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
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| 122 |
+
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| 123 |
+
**१०. अध्यक्षको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
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| 124 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएका काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त अध्यक्षको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
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| 125 |
+
(क) परिषद्को बैठकमा छलफल गरिने विषयहरूको प्राथमिकता निर्धारण गर्ने।
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| 126 |
+
(ख) परिषद्द्वारा सञ्चालित कार्यक्रमहरूको अनुगमन तथा मूल्याङ्कन गर्ने, गराउने र तत्सम्बन्धमा आवश्यक निर्देशन दिने।
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| 127 |
+
(ग) परिषद्को काम कारबाही व्यवस्थित, प्रभावकारी र सुचारु रूपमा सञ्चालन गर्ने, गराउने।
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| 128 |
+
(घ) परिषद्को उद्देश्य प्रामिका लागि आवश्यक अन्य काम गर्ने।
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| 129 |
+
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| 130 |
+
**११. उपाध्यक्षले कार्य गर्ने:**
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| 131 |
+
अध्यक्षको अनुपस्थितिमा अध्यक्षबाट गरिने कार्यहरू उपाध्यक्षबाट सम्पादन गरिनेछ।
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| 132 |
+
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| 133 |
+
---
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| 134 |
+
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| 135 |
+
## परिच्छेद-३
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| 136 |
+
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| 137 |
+
### नाम दर्ता सम्बन्धी व्यवस्था
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| 138 |
+
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| 139 |
+
**१२. नाम दर्ता नगराई पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय गर्न नपाउने:**
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| 140 |
+
(१) यो ऐन बमोजिम नाम दर्ता नगराई कसैले पनि पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय गर्नु हुँदैन। तर प्रचलित कानून बमोजिम नेपाल पशु चिकित्सा परिषद्मा नाम दर्ता भएका पशु चिकित्सकका हकमा यस ऐन बमोजिम नाम दर्ता गराउनु पर्ने छैन।
|
| 141 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा १३ को उपदफा (२) बमोजिम नाम दर्ताको लागि दरखास्त दिने व्यक्तिले उक्त दरखास्तको सम्बन्धमा अन्तिम निर्णय नभएसम्मको लागि पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय गर्न बाधा पर्ने छैन।
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| 142 |
+
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| 143 |
+
**१३. नाम दर्ता गराउन दरखास्त दिनेः**
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| 144 |
+
(१) मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय, शिक्षण संस्था, शैक्षिक परिषद्, शैक्षिक प्रतिष्ठानबाट अनुसूचीमा उल्लेख भए बमोजिमको योग्यता पूरा गरेका पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीले दर्ता किताबमा नाम दर्ता गराउन तोकिए बमोजिम दरखास्त दिनु पर्नेछ।
|
| 145 |
+
(२) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय गरिरहेका अनुसूचीमा उल्लेख भए बमोजिमको योग्यता पूरा गरेका पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीले दर्ता किताबमा नाम दर्ता गराउन यो ऐन प्रारम्भ भएको मितिले एक वर्षभित्र उपदफा (१) बमोजिम दरखास्त दिनु पर्नेछ।
|
| 146 |
+
(३) उपदफा (१) वा (२) बमोजिम नाम दर्ता गराउन दरखास्त दिने पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीले दरखास्तसाथ आफ्नो योग्यता सम्बन्धी तोकिए बमोजिम कागजात र दस्तुर संलग्न गर्नु पर्नेछ।
|
| 147 |
+
(४) उपदफा (१) वा (३) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दरखास्त पेश गर्ने प्रक्रिया, दरखास्त साथ पेश गर्नु पर्ने कागजात र दस्तुरका सम्बन्धमा प्रदेश कानूनमा छुट्टै व्यवस्था भएमा सोही बमोजिम हुनेछ।
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| 148 |
+
|
| 149 |
+
**१४. दरखास्त उपर कारबाही:**
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| 150 |
+
(१) दफा १२ बमोजिम पर्न आएको दरखास्त उपर प्रदेश कानून बमोजिम तोकिएको निकायले त्यसरी पेश भएको योग्यता सम्बन्धी प्रमाणपत्र र उपाधि मान्यता प्राप्त हो होइन र दरखास्त रीतपूर्वक छ छैन भन्ने कुरा समेत जाँचबुझ गरी प्रदेश कानूनले तोकेको अवधिभित्र दरखास्तबालाको नाम दर्ता किताबमा दर्ता गर्ने नगर्ने कुराको निर्णय गर्नु पर्नेछ।
|
| 151 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्रदेश सरकारको सम्बन्धित निकायले दरखास्तबालाको नाम दर्ता हुने निर्णय गरेकोमा त्यस्तो दरखास्तबालाको नाम दर्ता किताबमा दर्ता गरी तोकिए बमोजिमको ढाँचामा दर्ताको प्रमाणपत्र दिनु पर्नेछ।
|
| 152 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम दरखास्तबालाको नाम दर्ता नगर्ने निर्णय गरेकोमा प्रदेश कानूनले तोकेको कुनै निकायले त्यसको जानकारी दरखास्ताबालालाई दिनु पर्नेछ।
|
| 153 |
+
|
| 154 |
+
**१५. नाम हटाउने र पुनः नाम दर्ता गर्नेः**
|
| 155 |
+
(१) देहायका कुनै अवस्थामा प्रदेश कानूनले तोकेको निकायले कुनै पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको नाम दर्ता किताबबाट हटाउन आदेश दिन सक्नेछ:
|
| 156 |
+
(क) भ्रष्टाचार, जबरजस्ती करणी, मानव बेचविखन तथा ओसारपसार, लागू औषध बिक्री वितरण वा ओसार पसार, सम्पत्ति शुद्धीकरण, राहदानी दुरुपयोग, अपहरण सम्बन्धी कसूर वा नैतिक पतन देखिने अन्य फौजदारी ��सूरमा अदालतबाट सजाय पाएको,
|
| 157 |
+
(ख) पेशा सम्बन्धी तोकिएको आचरण पालन नगरेको भनी परिषद्को दुई तिहाई बहुमतले ठहर गरेमा,
|
| 158 |
+
(ग) प्रचलित कानून बमोजिम कालो सूचीमा रहेको,
|
| 159 |
+
(घ) शारीरिक तथा मानसिक अस्वस्थताको कारणले पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको रूपमा काम गर्न असमर्थ भएको।
|
| 160 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दर्ता किताबबाट नाम हटाइएको पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीले मनासिव माफिकको कारण देखाई पुनः नाम दर्ता गराउन दरखास्त दिन सक्नेछ। त्यसरी दरखास्त दिएकोमा कारण मनासिव देखिएमा प्रदेश कानूनले तोकेको निकायले त्यस्तो पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको नाम दर्ता किताबमा पुनः दर्ता गरी प्रमाणपत्र दिनुपर्नेछ।
|
| 161 |
+
|
| 162 |
+
**१६. प्रमाणपत्र रद्द गर्ने:**
|
| 163 |
+
यस ऐन बमोजिम योग्यता नपुगेको कुनै व्यक्तिको नाम भूलबस दर्ता किताबमा दर्ता हुन गएको रहेछ भन्ने कुराको जानकारी हुन आई सो कुरा जाँचबुझ गर्दा साँचे ठहरिन आएमा प्रदेश कानूनले तोकेको निकायले त्यस्तो व्यक्तिको दर्ताको प्रमाणपत्र फिर्ता लिई दर्ता रद्द गर्न सक्नेछ।
|
| 164 |
+
|
| 165 |
+
**१७. पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको श्रेणी:**
|
| 166 |
+
यस ऐन बमोजिम पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको नाम दर्ता गर्ने प्रयोजनको लागि देहाय बमोजिमको योग्यता पूरा भएका पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीलाई देहाय बमोजिमको श्रेणीमा नाम दर्ता गरिनेछ:
|
| 167 |
+
(क) "क श्रेणी": मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय वा शिक्षण संस्थाबाट सम्बन्धित विषयमा स्नातकोत्तर वा विद्वाबारिधी उत्तीर्ण गरेको पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी।
|
| 168 |
+
(ख) "ख श्रेणी": मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय वा शिक्षण संस्थाबाट पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायसँग सम्बन्धित विषयमा कम्तीमा स्नातक तह वा सो सरहको उपाधि हासिल गरेका वा "ग श्रेणीमा" कम्तीमा दश वर्षको अनुभव हासिल गरेका र परिषद्ले तोके बमोजिमको निरन्तर शिक्षाको मापदण्ड पूरा गरेको पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी।
|
| 169 |
+
(ग) "ग श्रेणी": मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायसँग सम्बन्धित विषयमा कम्तीमा प्रविणता प्रमाणपत्र तह वा सो सरहको उपाधि हासिल गरेका वा "घ श्रेणी" मा कम्तीमा पाँच वर्षको अनुभव हासिल गरी परिषद्ले तोके बमोजिमको निरन्तर शिक्षाको मापदण्ड पूरा गरेको पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी।
|
| 170 |
+
(घ) "घ ���्रेणी": मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्थाबाट पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायसँग सम्बन्धित विषयमा कम्तीमा प्राविधिक एस.एल.सी. वा सो सरहको उपाधि हासिल गरेका पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी।
|
| 171 |
+
|
| 172 |
+
**१८. पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय गर्न पाउने:**
|
| 173 |
+
पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीले दफा १७ बमोजिम शैक्षिक योग्यता र तालिमको आधारमा पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायमध्येका तोकिए बमोजिमको पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय सम्बन्धी कार्य गर्न पाउनेछन्।
|
| 174 |
+
|
| 175 |
+
**१९. परीक्षा लिन सक्ने:**
|
| 176 |
+
(१) पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायमा आवश्यक गुणस्तर कायम राख्नको लागि यो ऐन बमोजिम नाम दर्ता गराउन चाहने पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीहरूलाई नाम दर्ता गराउनुअघि नाम दर्ता गराउने निकायले तोकिए बमोजिम परीक्षा लिन सकिनेछ।
|
| 177 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परीक्षा लिने व्यवस्था गरिएकोमा त्यस्तो परीक्षामा सफल हुन नसक्ने व्यक्तिको नाम दर्ता किताबमा दर्ता गरिने छैन।
|
| 178 |
+
|
| 179 |
+
**२०. ग्रामिण पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ता:**
|
| 180 |
+
(१) यो ऐन प्रारम्भ हुनुअघि नेपाल सरकारबाट तोकिएको अवधिको तालिम प्राप्त गरी पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय सञ्चालन गर्दै आएका ग्रामिण पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ता अनुसूचीमा उल्लेख भए बमोजिमको योग्यता पूरा नभएसम्म प्रदेश कानूनले तोकेको निकायले छुट्टै दर्ता किताब खडा गरी नाम दर्ता गर्ने व्यवस्था मिलाउन सक्नेछ।
|
| 181 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दर्ता भएका ग्रामिण पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ताले तोकिए बमोजिमको पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय गर्न सक्नेछन्।
|
| 182 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम दर्ता भएका ग्रामिण पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ताबाट तोकिए बमोजिमका कार्य भए नभएको सम्बन्धमा प्रदेश कानूनले तोकेको निकायले आवश्यक नियमन गर्न सक्नेछ।
|
| 183 |
+
(४) यस दफा बमोजिम दर्ता भएका ग्रामिण पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ताले सोको प्रमाणपत्र प्राप्त गरी निरन्तर दश वर्ष पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय सञ्चालन गरी रहेको भएमा त्यस्ता व्यवसायीलाई सीप परीक्षण गराई सफल भएमा दफा १७ को खण्ड (घ) बमोजिमको श्रेणीमा दर्ता गर्न सकिनेछ।
|
| 184 |
+
(५) ग्रामिण पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ताको दर्ता, नियमन र क्षमता अभिवृद्धि सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 185 |
+
|
| 186 |
+
**२१. परिषद्ले गर्नेः**
|
| 187 |
+
(१) यस परिच्छेदमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा ���ेखिएको भए तापनि प्रदेश कानून नवनेसम्मका लागि प्रदेश कानूनले तोकेको निकायबाट हुने कार्य परिषद्ले गर्नेछ।
|
| 188 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परिषद्ले कार्य गर्दा यस परिच्छेद बमोजिमको अवधि र दस्तुर तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 189 |
+
|
| 190 |
+
---
|
| 191 |
+
|
| 192 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 193 |
+
|
| 194 |
+
### शैक्षिक उपाधि तथा प्रमाणपत्रको मान्यता
|
| 195 |
+
|
| 196 |
+
**२२. शैक्षिक योग्यताको मान्यताः**
|
| 197 |
+
(१) परिषद्को सिफारिसमा मन्त्रालयले पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय सम्बन्धी शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र वा अन्य उपाधिहरूलाई मान्यता प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 198 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम मान्यता प्रदान गरेको विषय र त्यस्तो शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र वा अन्य उपाधी प्रदान गर्ने शिक्षण संस्थाको नाम नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गरिनेछ।
|
| 199 |
+
(३) शैक्षिक योग्यतालाई मान्यता दिने सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 200 |
+
|
| 201 |
+
**२३. मापदण्ड तोक्न सक्नेः**
|
| 202 |
+
(१) परिषद्ले पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय सम्बन्धी शिक्षण संस्थाले शैक्षिक कार्यक्रम सञ्चालन गर्दा पूरा गर्नु पर्ने शर्त तथा मापदण्ड तोक्न सक्नेछ।
|
| 203 |
+
(२) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत सञ्चालनमा रहेका पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायी सम्बन्धी शिक्षण संस्थाले उपदफा (१) बमोजिम शर्त तथा मापदण्ड तोकिएको छ महिनाभित्र त्यस्तो शर्त तथा मापदण्ड पूरा गरिसक्नु पर्नेछ।
|
| 204 |
+
(३) यस परिच्छेदमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि प्रचलित कानून बमोजिम नेपाल पशु चिकित्सा परिषद्मा दर्ता हुने शैक्षिक योग्यता प्रदान गर्ने शिक्षण संस्थाहरूको पाठ्यक्रम, भर्नाका शर्तहरू तथा परीक्षा प्रणाली सम्बन्धी नीति तथा मापदण्ड निर्धारण गरी त्यस्ता संस्थाहरूले प्रदान गर्ने उपाधि तथा प्रमाणपत्र सम्बन्धी विषय सोही कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 205 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम तोकिएको समयभित्र मापदण्ड पूरा नगरेमा वा मापदण्डको बर्खिलाप गरेको पाइएमा त्यस्तो शिक्षण संस्थाको स्वीकृति रद्दको लागि परिषद्ले सम्बन्धित निकाय समक्ष सिफारिस गर्न सक्नेछ।
|
| 206 |
+
|
| 207 |
+
**२४. मूल्याङ्कन गर्न सक्नेः**
|
| 208 |
+
(१) परिषद्ले दफा २२ बमोजिम मान्यता प्रदान गरिएको शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र वा अन्य उपाधि प्रदान गर्ने शिक्षण संस्थाले त्यस्तो प्रमाणपत्र वा अन्य उपाधिको लागि निर्धारण गरेको पाठ्यक्रम तथा भर्नाको लागि निर्धारण गरेका शर्तहरूको मूल्याङ्कन गर्न सक्नेछ।
|
| 209 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि परिषद्ले आवश्यकता अनुसार त्यस्तो शिक्षण संस्थासँग कागजात तथा विवरण माग गर्न सक्नेछ।
|
| 210 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम परिषद्वाट माग भए बमोजिमको कागजात तथा विवरण उपलब्ध गराउनु सम्बन्धित संस्थाको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 211 |
+
|
| 212 |
+
**२५. मान्यता रद्द गर्न सक्नेः**
|
| 213 |
+
(१) दफा २४ बमोजिम प्राप्त कागजात तथा विवरण समेतका आधारमा परिषद्वाट मान्यता प्रदान गरिएको कुनै शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र वा उपाधिहरूको लागि सम्बन्धित शिक्षण संस्थाले निर्धारण गरेको पाठ्यक्रम, भर्नाका शर्तहरू, अध्ययन अध्यापन विधि, परीक्षा संचालन विधि उपयुक्त एवं पर्याप्त छैन भन्ने लागेमा परिषद्ले आफ्नो राय सुझाव सहितको प्रतिवेदन मन्त्रालय समक्ष पेश गर्नेछ।
|
| 214 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परिषद्को प्रतिवेदन प्राप्त भएपछि मन्त्रालयले आवश्यक देखेमा सम्बन्धित शिक्षण संस्थासँग थप विवरण वा स्पष्टीकरण माग गर्न सक्नेछ। त्यसरी परिषद्वाट माग भए बमोजिमको थप विवरण वा स्पष्टीकरण तोकिए बमोजिमको समयमा उपलब्ध गराउनु सम्बन्धित शिक्षण संस्थाको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 215 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम परिषद्वाट प्राप्त प्रतिवेदन वा उपदफा (२) बमोजिम प्राप्त विवरण वा स्पष्टीकरण अध्ययन गर्दा थप जाँचबुझ गराउन आवश्यक देखेमा मन्त्रालयले कुनै विशेषज्ञ सम्मिलित समिति वा कार्यदल मार्फत थप जाँचबुझ गराउन सक्नेछ।
|
| 216 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिमको प्रतिवेदन तथा उपदफा (२) बमोजिम प्राप्त स्पष्टीकरण र जाँचबुझ प्रतिवेदन समेतको आधारमा मन्त्रालयले त्यस्तो शिक्षण संस्थाबाट कुनै खास मितिपछि प्रदान गरिएको पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय सम्बन्धी शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र वा अन्य उपाधिलाई दफा २२ बमोजिम प्रदान गरिएको मान्यतालाई रद्द गर्न सक्नेछ। त्यसरी मान्यता रद्द गरिएको सूचना नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 217 |
+
|
| 218 |
+
**२६. परीक्षाको पर्यवेक्षण:**
|
| 219 |
+
(१) परिषद्ले दफा २२ बमोजिम मान्यता प्रदान गरिएको शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्र वा अन्य उपाधिको लागि सम्बन्धित शिक्षण संस्थाबाट लिइने परीक्षाको पर्यवेक्षण गर्न सक्नेछ।
|
| 220 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको परीक्षा पर्यवेक्षण गर्नको लागि आवश्यकता अनुसार परिषद्ले पर्यवेक्षक नियुक्त गरी पठाउन सक्नेछ।
|
| 221 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम नियुक्त गरिएका पर्यवेक्षकले आफूले निरीक्षण गरेका परीक्षाको सम्बन्धमा परिषद्ले त���के बमोजिमको विवरण खुलाई परिषद् समक्ष प्रतिवेदन पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 222 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम नियुक्त गरिएका पर्यवेक्षकले परीक्षामा कुनै किसिमको हस्तक्षेप गर्न पाउने छैन।
|
| 223 |
+
|
| 224 |
+
---
|
| 225 |
+
|
| 226 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 227 |
+
|
| 228 |
+
### कर्मचारी सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 229 |
+
|
| 230 |
+
**२७. रजिष्ट्रार:**
|
| 231 |
+
(१) मन्त्रालयले परिषद्को प्रशासकीय प्रमुखको रूपमा काम गर्न मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालयबाट स्नातक उपाधि प्राप्त गरी कम्तीमा "ख" श्रेणीमा नाम दर्ता भएको पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीलाई तोकिए बमोजिम खुल्ला प्रतिस्पर्धाको माध्यमबाट परिषद्को रजिष्ट्रारमा नियुक्त गर्न सक्नेछ।
|
| 232 |
+
(२) रजिष्ट्रारको सेवा, शर्त र सुविधा तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 233 |
+
(३) रजिष्ट्रारको अनुपस्थितिमा वा उपदफा (१) बमोजिम रजिष्ट्रार नियुक्त नभएसम्मको लागि मन्त्रालयले रजिष्ट्रार हुन् योग्यता पुगेका नेपाल सरकार वा परिषद्को कुनै कर्मचारीलाई रजिष्ट्रारको रूपमा कामकाज गर्न तोक्न सक्नेछ।
|
| 234 |
+
|
| 235 |
+
**२८. रजिष्ट्रारको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 236 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएका काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त रजिष्ट्रारको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
|
| 237 |
+
(क) परिषद्को बैठकमा पेश गर्नु पर्ने छलफलको विषयसूची अध्यक्षको परामर्शमा तयार गर्ने।
|
| 238 |
+
(ख) परिषद्को निर्णय कार्यान्वयन गर्ने, गराउने।
|
| 239 |
+
(ग) तोकिए बमोजिमको अन्य काम गर्ने।
|
| 240 |
+
|
| 241 |
+
**२९. परिषद्का कर्मचारी:**
|
| 242 |
+
(१) परिषद्को कार्यभार, स्रोत, साधन र आर्थिक क्षमता समेतको आधारमा परिषद्को सङ्गठनात्मक संरचना मन्त्रालयले स्वीकृत गरेबमोजिम हुनेछ।
|
| 243 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सङ्गठनात्मक संरचना स्वीकृत गर्नुपूर्व नेपाल सरकार, अर्थ मन्त्रालयको सहमति लिनु पर्नेछ।
|
| 244 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम स्वीकृत सङ्गठनात्मक संरचना अनुसारको दरबन्दीमा परिषद्ले तोकिए बमोजिमका कर्मचारीहरू नियुक्त गर्न सक्नेछ।
|
| 245 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम नियुक्त कर्मचारीहरू रजिष्ट्रारको प्रत्यक्ष रेखदेख र नियन्त्रणमा रहनेछन्।
|
| 246 |
+
|
| 247 |
+
---
|
| 248 |
+
|
| 249 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 250 |
+
|
| 251 |
+
### परिषद्को कोष
|
| 252 |
+
|
| 253 |
+
**३०. परिषद्को कोष:**
|
| 254 |
+
(१) परिषद्को एउटा छुट्टै कोष रहनेछ।
|
| 255 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा देहाय बमोजिमका रकमहरू रहनेछन्:
|
| 256 |
+
(क) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहबाट प्राप्त रकम,
|
| 257 |
+
(ख) स्वदेशी संघ संस्थाबाट सहयोग स्वरूप प्राप्त रकम,
|
| 258 |
+
(ग) विदेशी सरकार वा अन्तर्राष्ट्रिय संघ संस्थाबाट सहयोग स्वरूप प्राप्त रकम,
|
| 259 |
+
(घ) परिषद्ले आर्जन गरेको अन्य रकम।
|
| 260 |
+
(३) उपदफा (२) को खण्ड (ग) बमोजिमको रकम प्राप्त गर्नु अगाडि नेपाल सरकार अर्थ मन्त्रालयको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 261 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिमको कोषको रकम परिषद्ले तोकेको कुनै बाणिज्य बैङ्क परिषद्को नाममा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
|
| 262 |
+
(५) परिषद्को नामबाट गरिने सबै खर्च उपदफा (१) बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ।
|
| 263 |
+
(६) उपदफा (१) बमोजिमको कोषको संचालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 264 |
+
|
| 265 |
+
**३१. लेखा र लेखापरीक्षण:**
|
| 266 |
+
(१) परिषद्को आय-व्ययको लेखा नेपाल सरकारले अपनाएको ढाँचामा राख्नु पर्नेछ।
|
| 267 |
+
(२) परिषद्को आय-व्ययको आन्तरिक लेखा परीक्षण दर्ताबाला लेखा परीक्षकहरुमध्येबाट परिषद्ले तोकेको लेखा परीक्षकबाट र अन्तिम लेखा परीक्षण महालेखा परीक्षकले तोकेको लेखा परीक्षकबाट हुनेछ।
|
| 268 |
+
(३) नेपाल सरकारले चाहेमा परिषद्को कोषको लेखा सम्बन्धी कागजात जुनसुकै बखत जाँच्न वा जाँचाउन सक्नेछ।
|
| 269 |
+
|
| 270 |
+
---
|
| 271 |
+
|
| 272 |
+
## परिच्छेद-७
|
| 273 |
+
|
| 274 |
+
### कसूर र सजाय
|
| 275 |
+
|
| 276 |
+
**३२. कसूर गरेको मानिने:**
|
| 277 |
+
दफा १२ बमोजिम नाम दर्ता नगराई पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसाय गरेमा यस ऐन अन्तर्गतको कसूर गरेको मानिनेछ।
|
| 278 |
+
|
| 279 |
+
**३३. सजाय:**
|
| 280 |
+
(१) दफा ३२ बमोजिम कसूर गर्ने व्यक्तिलाई कसूरको मात्रा हेरी पचास हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना वा छ महिनासम्म कैद वा दुबै सजाय हुनेछ।
|
| 281 |
+
(२) उपदफा (१) मा उल्लेख भएकोमा बाहेक यो ऐन वा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम विपरीत हुने गरी कसैले कुनै काम गरेमा त्यस्तो व्यक्तिलाई तीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ।
|
| 282 |
+
|
| 283 |
+
---
|
| 284 |
+
|
| 285 |
+
## परिच्छेद-८
|
| 286 |
+
|
| 287 |
+
### विविध
|
| 288 |
+
|
| 289 |
+
**३४. मुद्दाको अनुसन्धान र दायरी:**
|
| 290 |
+
दफा ३३ बमोजिम सजाय हुने मुद्दाको अनुसन्धान परिषद्ले तोकेको परिषद्को अधिकृतले गर्नेछ र त्यस्तो अनुसन्धानको काम पूरा भएपछि सरकारी वकिलको राय लिई सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा मुद्दा दायर गर्नेछ।
|
| 291 |
+
|
| 292 |
+
**३५. नेपाल सरकार बादी हुने:**
|
| 293 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दामा नेपाल सरकार बादी हुनेछ।
|
| 294 |
+
|
| 295 |
+
**३६. परिषद्को विघटन:**
|
| 296 |
+
(१) परिषद्ले यो ऐन वा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकार प्रयोग गर्न नसकेमा, अधिकारको दुरुपयोग गरेमा, प्राप्त अधिकारभन्दा बढी अधिकार प्रयोग गरेमा वा यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम परिषद्ले पालना गर्नु पर्ने कर्तव्य पालना नगरेमा नेपाल सरकारले परिषद् विघटन गर्न सक्नेछ। तर परिषद् विघटन गर्नु अघि परिषद्लाई आफ्नो काम, कारबाही सुधार गर्न वा सव्याउने म��का दिनु पर्नेछ।
|
| 297 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परिषद् विघटन भएपछि परिषद्को कोष र अन्य सम्पत्ति नेपाल सरकारले आफ्नै जिम्मामा राखी अर्को परिषद् गठन नभएसम्म यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम परिषद्ले गर्नु पर्ने सबै काम कारबाही आफैले गर्न वा कुनै समिति गठन गरी सोही समितिबाट गराउन सक्नेछ।
|
| 298 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम परिषद् विघटन भएको छ महिनाभित्र नेपाल सरकारले दफा ४ को उपदफा (१) बमोजिम अर्को परिषद् गठन गर्नु पर्नेछ।
|
| 299 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम अर्को परिषद् गठन भएपछि उपदफा (२) बमोजिम नेपाल सरकारले आफ्नो जिम्मामा राखेको कोष र सम्पत्ति सो परिषद्लाई हस्तान्तरण गर्नेछ।
|
| 300 |
+
|
| 301 |
+
**३७. समितिः**
|
| 302 |
+
(१) परिषद्को निर्णय कार्यान्वयन गर्न परिषद्ले तोकिए बमोजिम विभिन्न विषयगत समितिको गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 303 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठन हुने विषयगत समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 304 |
+
|
| 305 |
+
**३८. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 306 |
+
परिषद्ले यस ऐन बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारमध्ये केही अधिकार आवश्यकता अनुसार अध्यक्ष, उपाध्यक्ष वा सदस्यलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 307 |
+
|
| 308 |
+
**३९. यसै ऐन बमोजिम हुने:**
|
| 309 |
+
यस ऐनमा लेखिए जति कुरामा यसै ऐन बमोजिम र अरुमा प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 310 |
+
|
| 311 |
+
**४०. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 312 |
+
परिषद्ले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
|
| 313 |
+
|
| 314 |
+
**४१. ऐन कार्यान्वयन मापन:**
|
| 315 |
+
यो ऐन प्रारम्भ भएको पाँच वर्ष पूरा भएको एक वर्षभित्र र त्यसपछि प्रत्येक पाँच वर्षपछिको एक वर्षभित्र मन्त्रालयले ऐन कार्यान्वयनको मापन गर्नेछ र सोको प्रतिवेदन सङ्घीय संसदको दुबै सदनको सम्बन्धित समितिमा पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 316 |
+
|
| 317 |
+
**४२. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 318 |
+
यो ऐनको कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 319 |
+
|
| 320 |
+
**४३. विनियम बनाउने अधिकार:**
|
| 321 |
+
(१) परिषद्ले कर्मचारीको भर्ना, सेवा तथा सुविधा सम्बन्धी विषय र परिषद्को कार्य सञ्चालन सम्बन्धी विषयमा आवश्यक विनियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 322 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बनाएको विनियम मन्त्रालयबाट स्वीकृत भएपछि लागू हुनेछ।
|
| 323 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम मन्त्रालयले स्वीकृति दिनुअघि आर्थिक दायित्व पर्ने विषयमा अर्थ मन्त्रालयको सहमति लिनु पर्नेछ।
|
| 324 |
+
|
| 325 |
+
**४४. निर्देशिका तथा कार्यविधि बनाउन सक्ने:**
|
| 326 |
+
यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधिनमा रही परिषद्ले मन्त्रालयको स्वीकृति लिई आवश्यक निर्दे��िका तथा कार्यविधि बनाउन सक्नेछ।
|
| 327 |
+
|
| 328 |
+
**४५. अनुसूचीमा हेरफेर:**
|
| 329 |
+
नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी आवश्यकता अनुसार अनुसूचीमा हेरफेर गर्न सक्नेछ।
|
| 330 |
+
|
| 331 |
+
---
|
| 332 |
+
|
| 333 |
+
### अनुसूची
|
| 334 |
+
(दफा १३ सँग सम्बन्धित)
|
| 335 |
+
|
| 336 |
+
**पशु स्वास्थ्य तथा पशु सेवा व्यवसायीको योग्यता**
|
| 337 |
+
|
| 338 |
+
(क) एस.इ.ई. वा सो सरह उत्तीर्ण गरी एक वर्षे स्टक सुपरभाइजर तालिम प्राप्त गरेको,
|
| 339 |
+
(ख) पशु स्वास्थ्य तथा पशुपालन विषयमा प्राविधिक एस.ई.ई. वा सो सरह उत्तीर्ण गरेको,
|
| 340 |
+
(ग) एस.ई.ई. वा सो सरह उत्तर गरी जे.टी.ए. कोर्ष (पशु विज्ञान) उत्तर गरेको,
|
| 341 |
+
(घ) एस.ई.ई. वा सो सरह उत्तर गरी प्रविधिक शिक्षा तथा व्यावसायिक तालिम परिषद्बाट तह-२ को पशुविज्ञान विषयमा सीप परीक्षण उत्तर गरेको,
|
| 342 |
+
(ड) पशुविज्ञान विषयमा प्रमाणपत्र तह वा पशु स्वास्थ्य तहा पशु सेवासंग सम्बन्धित विषयमा बाह्य कक्षा उत्तर वा प्रविधिक प्रमाणपत्र तह, डिप्लोमा (३ वर्षको) कोर्ष उत्तर गरेको, वा
|
| 343 |
+
(च) पशुविज्ञान वा मत्स्य विज्ञान विषयमा स्नातक वा सो सरह वा सम्बन्धित विषयमा स्नातकोत्तर तह वा विद्यावारिधि उत्तर गरेको।
|
section_14_pdf_15.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,303 @@
|
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| 1 |
+
# पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय ऐन, २०४०
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०४०।०९।१९
|
| 5 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 6 |
+
१. केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३
|
| 7 |
+
२०६३।०६।२६
|
| 8 |
+
२०६४।०४।०९
|
| 9 |
+
|
| 10 |
+
*३. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 11 |
+
२०६६।१०।०७
|
| 12 |
+
४. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 13 |
+
२०७२।११।१३
|
| 14 |
+
४. शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७
|
| 15 |
+
२०७७।०३।११
|
| 16 |
+
६. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
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| 17 |
+
२०६२।०४।१४
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| 18 |
+
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| 19 |
+
२०४० सालको ऐन नं. ३२
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| 20 |
+
पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
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| 21 |
+
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| 22 |
+
प्रस्तावना: प्रतिस्पर्धात्मक आधारमा शिक्षाको गुणस्तरमा अभिबुद्धि गर्न तथा स्वस्थ शैक्षिक संरचनाको विकास गर्न कला, विज्ञान, कानून, व्यवस्थापन, शिक्षा, प्रविधि लगायत अन्य विषयहरूको अध्ययन, अध्यापन र अनुसन्धानको लागि मुख्यरूपमा जनस्तरबाट उच्च तहको शिक्षण संस्थाहरुको सञ्चालन गर्न पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालयको स्थापना गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
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| 23 |
+
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| 24 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको बाइसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएको छ।
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| 25 |
+
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| 26 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ: (१) यस ऐनको नाम "पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय ऐन, २०४०" रहेको छ।
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| 27 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
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| 28 |
+
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| 29 |
+
२. परिभाषा: विषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा, -
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| 30 |
+
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| 31 |
+
(क) "विश्वविद्यालय" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापित पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय सम्झनु पर्छ।
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| 32 |
+
(ख) "सभा" भन्नाले दफा ७ बमोजिमको विश्वविद्यालय सभा सम्झनु पर्छ।
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| 33 |
+
(ग) "प्राज्ञिक परिषद्" भन्नाले दफा १० बमोजिमको प्राज्ञिक परिषद् सम्झनु पर्छ।
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| 34 |
+
(घ) "कार्यकारी परिषद्" भन्नाले दफा १२ बमोजिमको कार्यकारी परिषद् सम्झनु पर्छ।
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| 35 |
+
(ङ) "साधन-श्रीत परिषद्" भन्नाले दफा १४ बमोजिमको साधन-श्रीत परिषद् सम्झनु पर्छ।
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| 36 |
+
(च) "डीन" भन्नाले विश्वविद्यालय अन्तर्गत स्थापित विभिन्न सङ्कायका प्रमुख सम्झनु पर्छ।
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| 37 |
+
(छ) "क्याम्पस" भन्नाले विश्वविद्यालयको आहिक क्याम्पस सम्झनु पर्छ र सो शब्दले विश्वविद्यालयबाट सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसलाई समेत जनाउनेछ।
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| 38 |
+
(ज) "शिक्षक" भन्नाले विश्वविद्यालयमा शिक्षा प्रदान गर्ने बा अनुसन्धान गर्ने गराउने प्राध्यापक, सहप्राध्यापक, उपप्राध्यापक तथा सहायक प्राध्यापक सम्झनु पर्छ र सो ��ब्दले विश्वविद्यालयका विभिन्न तहका प्रशिक्षक तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा शिक्षक भनी तोकिएको व्यक्तिलाई समेत जनाउनेछ।
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| 39 |
+
(झ) "सेवा आयोग" भन्नाले दफा १९, बमोजिमको सेवा आयोग सम्झनु पर्छ।
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| 40 |
+
(ज) "विद्या परिषद्" भन्नाले दफा २९, बमोजिमको विद्या परिषद् सम्झनु पर्छ।
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| 41 |
+
(ट) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
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| 42 |
+
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| 43 |
+
३. विश्वविद्यालयको स्थापनाः (१) कला, विज्ञान, कानून, व्यवस्थापन, शिक्षा, प्राविधिक र तोकिएका अन्य विषयको उच्च तहका शिक्षण संस्थाहरुको सञ्चालनको लागि पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालयको स्थापना गरिएको छ।
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| 44 |
+
*(२) विश्वविद्यालयको केन्द्रीय कार्यालय मोरङ जिल्ला, सुन्दर हरैचा नगरपालिकाको गोटगाउँमा रहनेछ।
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| 45 |
+
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| 46 |
+
४. विश्वविद्यालय स्वशासित सङ्गठित संस्था हुनेः (१) विश्वविद्यालय अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र सङ्गठित संस्था हुनेछ।
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| 47 |
+
(२) विश्वविद्यालयको सबै काम कारबाहीको निमित्त आफ्नो छुट्टै छाप हुनेछ।
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| 48 |
+
(३) विश्वविद्यालयले व्यक्ति सरह चल अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न, बा अन्य किसिमले व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
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| 49 |
+
(४) विश्वविद्यालयले व्यक्ति सरह नालिस उजुर गर्न र विश्वविद्यालय उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजुर लाग्न सक्नेछ।
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| 50 |
+
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| 51 |
+
५. विश्वविद्यालयको संगठनः विश्वविद्यालयको सङ्गठन देहाय बमोजिम हुनेछ र यिनीहरुको सामुहिक रुप नै विश्वविद्यालयको स्वरुप हुनेछः-
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| 52 |
+
(क) सभा,
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| 53 |
+
(ख) प्राज्ञिक परिषद्,
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| 54 |
+
(ग) कार्यकारी परिषद्,
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| 55 |
+
(घ) साधन-स्रोत परिषद्,
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| 56 |
+
(ङ) क्याम्पस,
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| 57 |
+
(च) सङ्काय,
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| 58 |
+
(छ) सेवा आयोग,
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| 59 |
+
(ज) तोकिएका अन्य निकायहरु,
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| 60 |
+
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| 61 |
+
६. विश्वविद्यालयका पदाधिकारीहरु: विश्वविद्यालयमा देहाय बमोजिमका पदाधिकारीहरु रहनेछन्:-
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| 62 |
+
(क) कुलपति,
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| 63 |
+
(ख) सहकुलपति,
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| 64 |
+
(ग) उपकुलपति,
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| 65 |
+
(घ) रजिष्ट्रार,
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| 66 |
+
(ङ) डीन,
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| 67 |
+
(च) सेवा आयोगको अध्यक्ष
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| 68 |
+
(छ) तोकिएका बा अन्य पदाधिकारीहरु
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| 69 |
+
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| 70 |
+
७. सभाको गठनः- (१) विश्वविद्यालयमा सर्वोच्च निकायको रुपमा एक सभा रहनेछ।
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| 71 |
+
(२) सभाको गठन देहाय बमोजिम हुनेछः-
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| 72 |
+
(क) कुलपति - अध्यक्ष
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| 73 |
+
(ख) सहकुलपति - उपाध्यक्ष
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| 74 |
+
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| 75 |
+
| (ग) | उपकुलपति | - सदस्य |
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| 76 |
+
|-----|------------|---------|
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| 77 |
+
| * (घ) | विश्वविद्यालयको केन्द्रीय कार्यालय रहेको निर्वाचन क्षेत्रका पहिलो हुने निर्वाचित हुने निर्वाचन प्रणाली अन्तर्गत निर्वाचित प्रतिनिधि सभा र प्रदेश सभाका सदस्य | - सदस्य |
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| 78 |
+
| (ङ) | अन्य विश्वविद्यालयक��� उपकुलपतिहरु सदस्य | - सदस्य |
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| 79 |
+
| (च) | सदस्य, राष्ट्रिय योजना आयोग (शिक्षा हेर्ने) | - सदस्य |
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| 80 |
+
| (छ) | सचिव, "शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय | - सदस्य |
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| 81 |
+
| (ज) | सचिव, अर्थ मन्त्रालय | - सदस्य |
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| 82 |
+
| *(झ) | लब्धप्रतिष्ठित विद्वानहरुमध्येबाट समावेशी आधारमा कम्तीमा दुईजना महिला सहित पाँचजना | - सदस्य |
|
| 83 |
+
| (ज) | डीनहरु | - सदस्य |
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| 84 |
+
| *(ट) | विश्वविद्यालयको केन्द्रीय कार्यालय रहेको नगर कार्यपालिकाको प्रमुख र उपप्रमुख | - सदस्य |
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| 85 |
+
| (ट) | क्याम्पस प्रमुखहरुमध्येबाट छ जना | - सदस्य |
|
| 86 |
+
| (ड) | विश्वविद्यालयको विषय समितिका अध्यक्षहरु मध्येबाट तीन जना | - सदस्य |
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| 87 |
+
| *(ड) | विश्वविद्यालयका नेपाल प्राध्यापक सङ्घ, क्याम्पस इकाईका अध्यक्ष र सचिवको निर्वाचक मण्डलले समानुपातिक एकल सङ्कमणीय मतका आधारमा समावेशी सिद्धान्त बमोजिम निर्वाचित कम्तीमा दुईजना महिला सहित पाँच जना शिक्षकहरु | - सदस्य |
|
| 88 |
+
| * (ढ९) | नेपाल प्राध्यापक सङ्घको प्रतिनिधि एकजना | - सदस्य |
|
| 89 |
+
| *(ढ२) | पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय प्राध्यापक सङ्घको प्रतिनिधि एकजना | - सदस्य |
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| 90 |
+
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| 91 |
+
(त) प्रतिनिधि, प्राज्ञिक परिषद् - सदस्य
|
| 92 |
+
(थ) प्रतिनिधि, साधन-श्रोत परिषद् - सदस्य
|
| 93 |
+
*(द) शिक्षा प्रेमी तथा समाजसेवीमध्येबाट समावेशी आधारमा कम्तीमा दुईजना महिला सहित चारजना - सदस्य
|
| 94 |
+
*(ध) उद्योगपति, व्यापारी तथा कृषकहरुमध्येबाट समावेशी आधारमा कम्तीमा दुईजना महिला सहित छजना - सदस्य
|
| 95 |
+
*(न) चन्दादाताहरु मध्येबाट समावेशी आधारमा कम्तीमा एकजना महिला सहित तीनजना - सदस्य
|
| 96 |
+
(प) क्याम्पसका स्वतन्त्र विद्यार्थी युनियनका सभापतिहरु मध्येबाट दुईजना - सदस्य
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| 97 |
+
(फ) अनुसन्धान केन्द्रका प्रमुखहरु - सदस्य
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| 98 |
+
(ब) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिब
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| 99 |
+
|
| 100 |
+
(३) पदेन सदस्यहरु बाहेक सभाका अन्य सदस्यहरुको मनोनयन कार्यकारी परिषद्को सिफारिसमा कुलपतिबाट हुनेछ।
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| 101 |
+
(४) मनोनीत सदस्यहरुको पदावधि तीन बर्षको हुनेछ।
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| 102 |
+
|
| 103 |
+
८. सभाको बैठक: (१) सभाको बैठक बर्षको कम्तीमा एक पटक बस्नेछ।
|
| 104 |
+
(२) सभाको बैठकको अध्यक्षता सभाको अध्यक्षले गर्नेछ। अध्यक्षको अनुपस्थितिमा बैठकको अध्यक्षता सभाका उपाध्यक्षले गर्नेछ र अध्यक्ष तथा उपाध्यक्षको अनुपस्थितिमा सभाको बैठकको अध्यक्षता उपकुलपतिले गर्नेछ।
|
| 105 |
+
+(२क) सभाको अध्यक्षता गर्ने व्यत्तिले सभाको बैठकको निर्णय प्रमाणित गर्नेछ।
|
| 106 |
+
(३) सभाको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्म बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि सभा आफैले निर्धारण गर्नेछ।
|
| 107 |
+
|
| 108 |
+
९. सभाको काम, कर्तव्य र अधिकारः सभाको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 109 |
+
(क) विश्वविद्यालयको नीति निर्धारण गर्ने।
|
| 110 |
+
(ख) विश्वविद्यालयलाई मार्गदर्शन गर्ने।
|
| 111 |
+
(ग) विश्वविद्यालयको शैक्षिक कार्यक्रमहरुको सञ्चालन र प्रबन्ध गर्ने, गराउने।
|
| 112 |
+
(घ) क्याम्पसहरुको संस्थापन एबम् सम्बन्धन बारे आवश्यक प्रबन्ध गर्ने, गराउने।
|
| 113 |
+
(ङ) विश्वविद्यालयबाट प्रदान गरिने उपाधिहरु निर्धारण गर्ने र प्रदान गर्ने।
|
| 114 |
+
(च) विश्वविद्यालयको बार्षिक बजेट र कार्यक्रम स्वीकृत गर्ने।
|
| 115 |
+
(छ) विश्वविद्यालय सम्बन्धी नियमहरु पारित गर्ने।
|
| 116 |
+
(ज) विश्वविद्यालयका आङ्गिक एबम् विश्वविद्यालयबाट सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसहरुलाई निर्देशन दिने र मार्ग दर्शन गर्ने।
|
| 117 |
+
(झ) विश्वविद्यालय अन्तर्गतका निकायहरुको बार्षिक प्रतिवेदन माथि छलफल गर्ने र कार्यकमको मूल्याङ्कन गर्ने।
|
| 118 |
+
(ज) विश्वविद्यालयको लेखापरीक्षण प्रतिवेदन माथि छलफल गर्ने र स्वीकृति दिने।
|
| 119 |
+
(ट) विश्वविद्यालय अन्तर्गतका विभिन्न निकायहरुको शैक्षिक तथा प्रशासनिक नीति निर्धारण गर्ने, गराउने।
|
| 120 |
+
(ट) विश्वविद्यालयको कुनै नयाँ कार्यकम सञ्चालन गर्ने अनुमति प्रदान गर्ने।
|
| 121 |
+
(ड) विश्वविद्यालयको आवश्यकता अनुसार विभिन्न समिति, उपसमिति बा कार्य टोलीहरुको गटन गर्ने।
|
| 122 |
+
(ड) विश्वविद्यालयको पदाधिकारी, शिक्षक तथा कर्मचारीको सेवा तथा शर्त निर्धारण गर्ने।
|
| 123 |
+
(ण) तोकिए बमोजिम अन्य काम गर्ने।
|
| 124 |
+
|
| 125 |
+
१०. प्राज्ञिक परिषद्को गटनः (१) विश्वविद्यालयको शैक्षिक तथा प्राज्ञिक निकायको रुपमा काम गर्ने देहायका सदस्यहरु भएको एक प्राज्ञिक परिषद् हुनेछः-
|
| 126 |
+
(क) उपकुलपति
|
| 127 |
+
(ख) रजिष्ट्रार
|
| 128 |
+
(ग) डीनहरु
|
| 129 |
+
(घ) विश्वविद्यालयका विभिन्न विषय समितिका अध्यक्षहरु मध्येबाट पाँच जना
|
| 130 |
+
(ङ) प्रमुख, पाठ्यकम अनुसन्धान तथा विकास केन्द्र - सदस्य
|
| 131 |
+
(च) विश्वविद्यालय अनुसन्धान महाशाखा, योजना महाशाखा र समन्वय महाशाखाका प्रमुखहरु - सदस्य
|
| 132 |
+
(छ) बरिष्ठ प्राध्यापकहरु मध्येबाट दुई जना - सदस्य
|
| 133 |
+
(ज) क्याम्पस प्रमुखहरुमध्येबाट चार जना - सदस्य
|
| 134 |
+
(झ) लव्ध प्रतिष्ठित विद्वानहरु मध्येबाट दुई जना - सदस्य
|
| 135 |
+
(ज) डीनहरु मध्येबाट उपकुलपतिले तोकेको व्यक्ति - सदस्य-सचिव
|
| 136 |
+
|
| 137 |
+
(२) पदेन सदस्यहरु बाहेक अन्य सदस्यहरुको मनोनयन कार्यकारी परिषद्को सिफारिसमा कुलपतिबाट हुनेछ।
|
| 138 |
+
(३) मनो��ीत सदस्यहरुको पदावधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 139 |
+
(४) प्राज्ञिक परिषद्को बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्म बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि प्राज्ञिक परिषद् आफैले निर्धारण गर्नेछ।
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
११. प्राज्ञिक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकारः प्राज्ञिक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 142 |
+
(क) विश्वविद्यालयको पाठ्यक्रम निर्धारण तथा स्वीकृत गर्ने।
|
| 143 |
+
(ख) परीक्षाको किसिम तोक्ने।
|
| 144 |
+
(ग) विद्यार्थी भर्ना सम्बन्धी योग्यता र सङ्ख्या निर्धारण गर्ने।
|
| 145 |
+
(घ) अनुसन्धान सम्बन्धी नीति तर्जुमा गर्ने र अनुसन्धान कार्यकमहरुलाई स्वीकृत प्रदान गर्ने।
|
| 146 |
+
(ङ) विद्यार्थीहरुको शैक्षिक कार्यकमको मूल्याङ्कन गर्ने।
|
| 147 |
+
(च) शिक्षण र अनुसन्धानको स्तर निर्धारण गर्ने।
|
| 148 |
+
(छ) मानार्थ उपाधिहरुको व्यवस्था गर्ने।
|
| 149 |
+
(ज) तोकिए बमोजिमका अन्य कामहरु गर्ने।
|
| 150 |
+
|
| 151 |
+
१२. कार्यकारी परिषद्को गठनः (१) विश्वविद्यालयको कार्यकारी निकायको रुपमा काम गर्न देहायका सदस्यहरु भएको एक कार्यकारी परिषद् हुनेछः-
|
| 152 |
+
(क) उपकुलपति - अध्यक्ष
|
| 153 |
+
(ख) डीनहरु मध्येबाट दुई जना - सदस्य
|
| 154 |
+
(ग) शिक्षकहरु मध्येबाट एक जना - सदस्य
|
| 155 |
+
(घ) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिव
|
| 156 |
+
|
| 157 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ख) र (ग) बमोजिमका सदस्यहरूको मनोनयन उपकुलपतिको सिफारिसमा सभाले गर्नेछ।
|
| 158 |
+
(३) मनोनीत सदस्यहरूको पदाबधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 159 |
+
(४) कार्यकारी परिषद्को बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्म बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि कार्यकारी परिषद् आफैले निर्धारण गर्नेछ।
|
| 160 |
+
|
| 161 |
+
१३. कार्यकारी परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकारः कार्यकारी परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ।
|
| 162 |
+
(क) सभाको निर्णय एबम् निर्देशनहरु कार्यान्वयन गर्ने, गराउने।
|
| 163 |
+
(ख) राष्ट्रिय शिक्षा नीतिको परिधिभित्र रही आफ्नो कार्य सञ्चालन गर्ने, गराउने।
|
| 164 |
+
(ग) सभामा पेश हुने बार्षिक कार्यकम, बजेट, प्रगति बिबरण, लेखापरीक्षण प्रतिबेदन र अन्य प्रस्ताबहरु तयार गर्ने।
|
| 165 |
+
(घ) तोकिए बमोजिम अन्य कामहरु गर्ने, गराउने।
|
| 166 |
+
|
| 167 |
+
१४. साधन-श्रोत परिषद्को गठनः (१) बिश्बबिघालयको भौतिक साधन र आर्थिक श्रोतको सङ्लन तथा परिचालन गर्ने कामको लागि देहाय बमोजिमका सदस्यहरु भएको एक साधन-श्रोत परिषद् हुनेछः-
|
| 168 |
+
(क) कार्यकारी परिषद्वाट मनोनीत व्यक्ति
|
| 169 |
+
(ख) डीनहरु मध्येबाट तीन जना
|
| 170 |
+
(ग) क्याम्पस प्रमुखहरुमध्येबाट तीन जना
|
| 171 |
+
(घ) उद्योगपति, व्यापारी तथा कृषक तथा चन्द्रदाताहरु मध्येबाट आठ जना
|
| 172 |
+
*(ङ) बिश्बबिघालयको केन्द्रीय कार्यालय रहेको नगर कार्यपालिकाको प्रमुख समेत रहने गरी बिश्बबिघालयको केन्द्रीय कार्यालय रहेको प्रदेश अन्तर्गतका नगर कार्यपालिकाका प्रमुखहरुमध्येबाट चार जना
|
| 173 |
+
(च) लब्ध प्रतिष्ठित व्यत्तिहरु मध्येवाट तीन जना - सदस्य
|
| 174 |
+
(ज) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिव
|
| 175 |
+
|
| 176 |
+
(२) पदेन सदस्यहरु बाहेक अन्य सदस्यहरुको मनोनयन कार्यकारी परिषद्ले गर्नेछ।
|
| 177 |
+
(३) अध्यक्ष र मनोनीत सदस्यहरुको पदावधि चार वर्षको हुनेछ र पदावधि समाघ्र भएपछि निजहरुको पुनः मनोनयन हुन सक्नेछ।
|
| 178 |
+
(४) साधन-श्रोत परिषद्को बैटक सम्बन्धी कार्यविधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्म बैटक सम्बन्धी कार्यविधि साधन-श्रोत परिषद् आफैले निर्धारण गर्नेछ।
|
| 179 |
+
|
| 180 |
+
१४. साधन-श्रोत परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकारः साधन-श्रोत परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 181 |
+
|
| 182 |
+
१६. क्याम्पसहरुको सज्चालनः (१) विश्वविद्यालयले उच्च शिक्षा प्रदान गर्न राष्ट्रिय शिक्षा नीति अनुरुप विभिन्न विषयका क्याम्पसहरुको स्थापना तथा सज्चालन गर्न सक्नेछ।
|
| 183 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम विश्वविद्यालयबाट स्थापना तथा सज्चालन गरिने क्याम्पस सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 184 |
+
|
| 185 |
+
१७. क्याम्पसहरुको हस्तान्तरण सम्बन्धी व्यवस्था: (१) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत त्रिभुवन विश्वविद्यालयको आङ्किक क्याम्पसको रुपमा सज्चालन भएका नेपाल " ...........भित्रका कुनै क्याम्पसहरु विश्वविद्यालयको आङ्किक क्याम्पसको रुपमा रहन चाहेमा त्रिभुवन विश्वविद्यालयको स्वीकृति लिई तोकिएका आधारमा त्यस्ता क्याम्पसहरु विश्वविद्यालयमा हस्तान्तरण हुन सक्नेछन्।
|
| 186 |
+
(२) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँग सम्बन्धन प्राप्त नेपाल " $\qquad$ भित्रका कुनै क्याम्पसहरु सो क्याम्पसको सहमतिको आधारमा विश्वविद्यालयले सम्बन्धन प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 187 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम कुनै क्याम्पसले विश्वविद्यालयसँग सम्बन्धन प्राप्त गर्न चाहेमा त्यसको अग्रिम जानकारी त्रिभुवन विश्वविद्यालयलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 188 |
+
(४) क्याम्पसहरुको हस्तान्तरण तथा सम्बन्धन प्रदान गर्ने सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 189 |
+
|
| 190 |
+
१६. संकायः (१) विश्वविद्यालयबाट सञ्चालन गरिने उच्च शिक्षाको लागि तोकिएका विषयहरुमा तोकिए बमोजिमका सङ्कायहरु रहनेछन्।
|
| 191 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम रहने सङ्कायहरुको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 192 |
+
|
| 193 |
+
१९. सेवा आयोगको गठनः (१) विश्वविद्यालयको शिक्षक तथा कर्मचारीहरुको नियुक्ति तथा बडुवाको लागि सिफारिस गर्न देहाय बमोजिमको एक सेवा आयोग हुनेछः-
|
| 194 |
+
(क) कुलपतिबाट नियुक्त व्यक्ति - अध्यक्ष
|
| 195 |
+
(ख) सदस्य, लोकसेवा आयोग - सदस्य
|
| 196 |
+
(ग) प्राध्यापकहरु मध्येबाट एक जना - सदस्य
|
| 197 |
+
|
| 198 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (क) र (ग) बमोजिमका अध्यक्ष र सदस्यको नियुक्तिको लागि सिफारिस पेश गर्न कुलपतिबाट सहकुलपतिको अध्यक्षतामा सभाका दुई जना सदस्यहरु रहेको एक समिति गठन हुनेछ र सो समितिको सिफारिसमा कुलपतिबाट अध्यक्ष र सदस्यको नियुक्ति हुनेछ।
|
| 199 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम नियुक्त हुने अध्यक्ष तथा सदस्यको पदावधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 200 |
+
(४) सेवा आयोगको बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्म बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि सेवा आयोग आफैले निर्धारण गर्नेछ।
|
| 201 |
+
|
| 202 |
+
२०. सेवा आयोगको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार: सेवा आयोगको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 203 |
+
|
| 204 |
+
२१. सेवा आयोगको अध्यक्ष तथा सदस्यको पारिश्रमिक र सुविधा: सेवा आयोगको अध्यक्ष तथा सदस्यको पारिश्रमिक, सुविधा र सेबाका शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 205 |
+
|
| 206 |
+
२२. कुलपतिः (१) प्रधानमन्त्री विश्वविद्यालयको कुलपति हुनेछ।
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| 207 |
+
(२) कुलपति विश्वविद्यालयको प्रमुख र सभाको अध्यक्ष हुनेछ।
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| 208 |
+
(३) कुलपतिले विश्वविद्यालय बा विश्वविद्यालयसँग सम्बन्धित जुनसुकै बिषय बा वस्तुको निरीक्षण गर्न र आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ।
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| 209 |
+
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| 210 |
+
२३. सह-कुलपतिः (१) *शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्री बा राज्यमन्त्री विश्वविद्यालयको सहकुलपति हुनेछ।
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| 211 |
+
(२) सहकुलपतिले आवश्यकता अनुसार विश्वविद्यालयको निरीक्षण गर्न र निर्देशन दिन सक्नेछ।
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| 212 |
+
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| 213 |
+
२४. उप-कुलपतिः (१) उपकुलपति विश्वविद्यालयमा पूरा समय काम गर्ने प्रमुख पदाधिकारी हुनेछ।
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| 214 |
+
(२) उपकुलपति पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस पेश गर्न कुलपतिबाट सहकुलपतिको अध्यक्षतामा सभाका दुई जना सदस्यहरु रहेको एक समिति गठन हुनेछ र सो समितिको सिफारिसमा कुलपतिबाट उपकुलपतिको नियुक्ति हुनेछ।
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| 215 |
+
(३) उपकुलपतिको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 216 |
+
(४) उपकुलपतिको पारिश्रमिक, सुबिधा र सेबाका शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 217 |
+
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| 218 |
+
२४. उपकुलपतिको काम, कर्तव्य �� अधिकारः (१) उपकुलपतिको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 219 |
+
(क) विश्वविद्यालयको सबै काम कारबाही उपर उपकुलपतिको सामान्य नियन्त्रण रहनेछ र निजले विश्वविद्यालयको काम कारबाहीमा निर्देशन दिन र रेखदेख गर्न सक्नेछ।
|
| 220 |
+
(ख) उपकुलपतिले सभाको निर्णय र निर्देशनहरु कार्यान्वयन गर्नु, गराउनु पर्नेछ।
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| 221 |
+
(ग) यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेका नियममा कुनै निकाय बा पदाधिकारीले गर्ने भनी उल्लेख भएका कामहरु बाहेक अन्य कामहरु उपकुलपतिले गर्नेछ। त्यस बमोजिम गरेको कामको जानकारी उपकुलपतिले तुरुन्त कुलपतिलाई गराउनु पर्नेछ र लगत्तै यसपछि बस्ने सभाको बैठकबाट अनुमोदन गराउनु पर्नेछ।
|
| 222 |
+
(घ) सभामा पेश हुने बिषयहरु उपकुलपति मार्फत पेश हुनेछन्।
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| 223 |
+
(ङ) उपकुलपतिको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 224 |
+
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| 225 |
+
२६. रजिष्ट्रार: (१) विश्वविद्यालयको रजिष्ट्रारको नियुक्ति उपकुलपतिको सिफारिसमा कुलपतिबाट हुनेछ।
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| 226 |
+
(२) रजिष्ट्रार विश्वविद्यालयमा पूरा समय काम गर्ने पदाधिकारी हुनेछ।
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| 227 |
+
(३) रजिष्ट्रारको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
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| 228 |
+
(४) रजिष्ट्रारको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा पारिश्रमिक, सुविधा र सेबाका शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 229 |
+
(४) रजिष्ट्रारले सभाको निर्णय बा आदेशको अभिलेख गरी राख्नु पर्नेछ। सो निर्णय बा आदेशको एक प्रति कुलपति समक्ष पटाउनु पर्नेछ।
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| 230 |
+
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| 231 |
+
२७. डीनः *(१) डीनको नियुक्ति कार्यकारी परिषद्वाट हुनेछ।
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| 232 |
+
(२) डीनको पदावधि चार बर्षको हुनेछ।
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| 233 |
+
(३) डीनको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा पारिश्रमिक, सुविधा र सेबाका शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 234 |
+
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| 235 |
+
२६. अन्य पदाधिकारी: (१) विश्वविद्यालयमा तोकिए बमोजिमका अन्य पदाधिकारीहरु रहनेछन्।
|
| 236 |
+
(२) अन्य पदाधिकारीहरुको नियुक्ति, काम, कर्तव्य र अधिकार तथा पारिश्रमिक, सुविधा र सेबाका शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 237 |
+
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| 238 |
+
+२६क. नियुक्ति गर्नु पर्ने अवधि: यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि विश्वविद्यालयको कुनै पदाधिकारीको पद रिक्त भएमा सम्बन्धित अधिकारीले रिक्त भएको तीन महिनाभित्र त्यस्तो पदमा नियुक्ति गरी पूर्ति गर्नु पर्नेछ।
|
| 239 |
+
|
| 240 |
+
+२६ख. जिम्मेबारी तोक्न सक्ने: यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि विश्वविद्यालयको कुनै पद रिक्त भएमा सो पदपूर्ति नभएसम्म दैनिक कार्य सञ्चालन गर्न बढीमा तीन महिनाको लागि उपकुलपतिको जिम्मेबारी सहकुलपतिको परामर्शमा कुलपतिले र अन्य पदाधिकारीको जिम्मेबारी उपकुलपतिले विश्वविद्यालयको कुनै बरिष्ठतम प्राध्यापकलाई तोक्नेछ।
|
| 241 |
+
|
| 242 |
+
+२६ग. पदबाट हटाउन सकिने: (१) उपकुलपति, शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार बा सेबा आयोगको अध्यक्षले आफ्नो पद अनुरुपको जिम्मेबारी पूरा नगरेको, इमान्दारीपूर्वक काम नगरेको बा निजले पद अनुकूलको आचरण नगरेको भनी सभामा तत्काल रहेका एक तिहाइ सदस्यले निजलाई पदबाट हटाउन कुलपति समक्ष लिखित निवेदन दिएमा कुलपतिले सभाको कुनै सदस्यको अध्यक्षतामा विश्वविद्यालय अनुदान आयोगको सदस्य र शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालयको सचिव रहेको तीन सदस्यीय छानबिन समिति गठन गर्नेछ।
|
| 243 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठित छानबिन समितिले सो सम्बन्धमा आवश्यक छानबिन गरी तीस दिनभित्र आफ्नो प्रतिवेदन कुलपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 244 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको प्रतिबेदन प्राप्त भएपछि कुलपतिले सो प्रतिबेदन सभा समक्ष पेश गर्नेछ।
|
| 245 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम पेश भएको प्रतिबेदन उपर छलफल हुँदा सभाका कुल सदस्य सङ्ब्याको कम्तीमा एकाउन्न प्रतिशत सदस्यले उपकुलपति, शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार बा सेबा आयोगको अध्यक्षलाई पदबाट हटाउन निर्णय गरेमा कुलपतिले उपकुलपति, शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार बा सेबा आयोगको अध्यक्षलाई पदबाट हटाउनेछ।
|
| 246 |
+
तर त्यसरी हटाउनु अघि निजलाई सफाई पेश गर्ने मौकाबाट बञ्चित गरिने छैन।
|
| 247 |
+
(५) उपकुलपति, शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार र सेबा आयोगको अध्यक्ष बाहेक विश्वविद्यालयका अन्य पदाधिकारीलाई उपदफा (१) बमोजिमको आरोप छानबिन गर्दा बा पदबाट हटाउँदा अपनाउनु पर्ने प्रक्रिया तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 248 |
+
(६) यस दफा बमोजिम कुनै पदाधिकारी उपर छानबिन शुरु भएमा छ महिनाभित्र अन्तिम निर्णय गरिसक्नु पर्नेछ। त्यस्तो अन्तिम निर्णय नभएसम्म निजले आफू बहाल रहेको पदमा काम गर्न पाउने छैन।
|
| 249 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजिमको पदाधिकारीले गर्ने दैनिक काम सम्पादन गर्नका लागि कुलपतिले विश्वविद्यालयको बरिष्ठतम् पदाधिकारीलाई जिम्मेबारी तोक्न सक्नेछ।
|
| 250 |
+
|
| 251 |
+
२९. विद्या परिषद्को गठनः (१) प्रत्येक सङ्कायमा शैक्षिक तथा प्राज्ञिक कार्यक्रमहरुको सञ्चालनका लागि तोकिए बमोजिमको एक विद्या परिषद् रहनेछ।
|
| 252 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको विद्या परिषद् अन्तर्गत तोकिए बमोजिमका बिषय समितिहरु रहनेछन्।
|
| 253 |
+
(३) विद्या परिषद् र सो अन्तर्गतमा रहने बिषय समितिक��� काम, कर्तव्य र अधिकार तथा बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 254 |
+
|
| 255 |
+
३०. अनुसन्धान केन्द्रहरुको स्थापना र सञ्चालनः (१) विश्वविद्यालयले शैक्षिक, प्राज्ञिक तथा अनुसन्धान सम्बन्धी कार्य गर्नको लागि बिभिन्न अनुसन्धान केन्द्रहरु स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 256 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम स्थापना हुने अनुसन्धान केन्द्रहरुको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा सञ्चालन बिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 257 |
+
|
| 258 |
+
३१. विश्वविद्यालयको कोष: (१) विश्वविद्यालयको आफ्नो एउटा छुट्टै कोष हुनेछ र सो कोषमा देहायका रकमहरु रहनेछन्ः-
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| 259 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त सहयोग बा अनुदान रकम,
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| 260 |
+
(ख) कुनै व्यक्ति बा संस्थाले चन्दा, दान, दातव्य र आर्थिक सहायता स्वरूप प्रदान गरेको रकम,
|
| 261 |
+
(ग) उद्योग, व्यापार व्यवसायसँग सम्बद्ध व्यक्ति बा संस्थाबाट प्राप्त सहयोग एबम् अनुदानको रकम,
|
| 262 |
+
*(घ) गाउँपालिका बा नगरपालिकाबाट प्राप्त सहयोग एबम् अनुदानको रकम,
|
| 263 |
+
(ङ) अन्तर्राष्ट्रिय सङ्घ, संस्था, विदेशी सरकार बा एजेन्सी बा वित्तीय सस्थाहरूबाट प्राप्त सहयोग एबम् ऋणको रकम,
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| 264 |
+
(च) शुल्क बा अन्य कुनै श्रोतबाट प्राप्त रकम।
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| 265 |
+
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| 266 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ङ) बमोजिम विश्वविद्यालयले कुनै रकम प्राप्त गर्दा नेपाल सरकारको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
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| 267 |
+
(३) विश्वविद्यालयको कोषको रकम तोकिएको बैङ्कमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ र विश्वविद्यालयको कोष र खाताको सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 268 |
+
(४) विश्वविद्यालयको सबै खर्चहरु उपदफा (१) बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ।
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| 269 |
+
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| 270 |
+
३२. लेखा र लेखा परीक्षण: (१) विश्वविद्यालयको आय व्ययको लेखा प्रचलित कानून बमोजिम राखिनेछ।
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| 271 |
+
*(२) विश्वविद्यालयको लेखापरीक्षण महालेखा परीक्षकबाट हुनेछ।
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| 272 |
+
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| 273 |
+
३३. उपाधि र प्रमाणपत्र तथा मान्यता दिने: (१) तोकिएको उच्च शिक्षा हासिल गर्ने विद्यार्थी, प्रशिक्षार्थी बा अनुसन्धानकर्तालाई विश्वविद्यालयले तोकिए बमोजिमको प्रमाणपत्र दिन र अनुसन्धानात्मक कार्य गर्ने एबम् प्राज्ञिक क्षेत्रमा प्रशंसनीय कार्य गर्ने व्यक्तिलाई मानार्थ उपाधि प्रदान गर्न सक्नेछ।
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| 274 |
+
(२) विश्वविद्यालयले अन्य विश्वविद्यालय बा शैक्षिक संस्थाको शैक्षिक उपाधिलाई मान्यता दिन सक्नेछ।
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| 275 |
+
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| 276 |
+
३४. विश्वविद्यालयमा भर्ना हुन चाहिने योग्यताः विश्वविद्यालयमा भर्ना हुन चाहिने योग्यता तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 277 |
+
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| 278 |
+
+३४क. निःशुल्क उच्च शिक्षा तथा ह्याबबृत्ति: (१) विश्वविद्यालयले तोकेको मापदण्ड पूरा गरी विश्वविद्यालय बा मातहतका आङ्गिक तथा सामुदायिक शैक्षिक संस्थामा भर्ना भएका दलित, सिमान्तीकृत, अपाङ्ग र आर्थिक रूपले बिपन्न विद्यार्थीको लागि उच्च शिक्षा निःशुल्क हुनेछ।
|
| 279 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि आधार, मापदण्ड, बर्गीकरण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोके बमोजिम हुनेछ।
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| 280 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको सुविधा एक विद्यार्थीले प्रत्येक तहमा एकपटक मात्र उपभोग गर्न पाउनेछ।
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| 281 |
+
(४) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दलित विद्यार्थीको लागि प्राविधिक तथा व्यावसायिक उच्च शिक्षामा भर्नाका लागि तोकिए बमोजिमको सिट सुरक्षित गरिनेछ।
|
| 282 |
+
(४) विश्वविद्यालयले शहिद, बेपत्ता पारिएका र अपाइता भएका व्यक्तिका छोरा, छोरीको लागि प्रचलित कानूनमा व्यवस्था भए बमोजिम उच्च शिक्षाको व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 283 |
+
(६) कक्षा छ देखि कक्षा दशसम्म सामुदायिक विद्यालयमा अध्ययन गरेको विद्यार्थीले उच्च शिक्षामा प्रचलित कानून बमोजिम ह्याबबृत्ति पाउनेछ।
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| 284 |
+
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| 285 |
+
३४. राष्ट्रिय शिक्षा नीति अनुरुप कार्य गर्ने: नेपाल सरकारको राष्ट्रिय शिक्षा नीति अनुरुप कार्य सञ्चालन गर्नु विश्वविद्यालयको कर्तव्य हुनेछ।
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| 286 |
+
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| 287 |
+
३६. अधिकार प्रत्यायोजनः (१) सभाले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त भएको अधिकार मध्ये सबै बा केही अधिकार प्राज्ञिक परिषद्, कार्यकारी परिषद्, साधन-श्वेत परिषद्, क्याम्पस, सङ्काय, सेवा आयोग, कुनै पदाधिकारी, विद्या परिषद् बा यस ऐन बमोजिम गठन हुने कुनै समिति, उप-समिति बा कार्यटोलीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 288 |
+
(२) प्राज्ञिक परिषद्, कार्यकारी परिषद्, साधन-श्वेत परिषद्, क्याम्पस, सङ्काय, सेवा आयोग, कुनै पदाधिकारी बा विद्या परिषद्ले यो ऐन बा ऐन अन्तर्गत बनेका नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त भएको सबै बा केही अधिकार तोकिएको निकाय बा पदाधिकारीलाई सुम्पन सक्नेछ।
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| 289 |
+
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| 290 |
+
३७. नेपाल सरकारसँग सम्पर्कः विश्वविद्यालयले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा *शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय मार्फत राख्नेछ।
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| 291 |
+
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| 292 |
+
३६. विघटन हुँदाको परिणामः विश्वविद्यालय विघटन भएमा यसको चल अचल जायजेथा नेपाल सरकारको हुनेछ।
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| 293 |
+
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| 294 |
+
*३६क. स्वीकृति लिनु पर्ने: यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल सरकारलाई थप आर्थिक व्य��भार पर्ने विषयमा नियम बनाउँदा बा कार्य गर्दा नेपाल सरकारको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
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| 295 |
+
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| 296 |
+
३९. नियम बनाउने अधिकारः यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न विश्वविद्यालयले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
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| 297 |
+
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| 298 |
+
इष्टव्य : (१) केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरु :-
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| 299 |
+
"थी ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
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| 300 |
+
(२) केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा रुपान्तरितः
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| 301 |
+
"नगरपालिकाको प्रमुख" को सट्टा "नगर कार्यपालिकाको प्रमुख"।
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| 302 |
+
(३) शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरु:-
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| 303 |
+
"शिक्षा तथा खेलकुद मन्त्रालय" को सट्टा "शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय"।
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section_14_pdf_16.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,366 @@
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| 1 |
+
**पोखरा विश्वविद्यालय ऐन, २०४३**
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०४३।११।१४
|
| 5 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 6 |
+
१. आयकर ऐन, २०४६
|
| 7 |
+
२०४६।१२।१९
|
| 8 |
+
|
| 9 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 10 |
+
२०६३।०६।२६
|
| 11 |
+
३. केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०६४
|
| 12 |
+
२०६४।०४।०९
|
| 13 |
+
*४. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 14 |
+
२०६६।१०।०७
|
| 15 |
+
४. केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 16 |
+
२०७२।११।१३
|
| 17 |
+
६. शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७
|
| 18 |
+
२०७७।०३।११
|
| 19 |
+
७. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 20 |
+
२०६२।०४।१४
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
२०४३ सालको ऐन नं. ३३
|
| 23 |
+
$\times$
|
| 24 |
+
पोखरा विश्वविद्यालय सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 25 |
+
प्रस्तावनाः उच्च शिक्षामा निजी क्षेत्रको सहभागितामा अधिकाधिक बुद्धि गरी कला, विज्ञान, व्यवस्थापन, कानुन, शिक्षा, प्राविधिक तथा अन्य व्यावसायिक विषयमा गुणात्मक एवं स्तरयुक्त उच्च शिक्षाको अवसर सबै क्षेत्रका सर्वसाधारणलाई सर्वसुलभ रूपमा उपलब्ध गराई राष्ट्रिय विकासमा दक्ष जनशक्तिको आपूर्तिलाई सुनिश्चित तुल्याउन र प्रतिस्पर्धाको आधारमा उच्च शिक्षाको गुणस्तरमा अभिबुद्धि गर्दै देशको शैक्षिक एवं प्राज्ञिक बातावरणलाई बढी स्वच्छ, मर्यादित र उपलब्धिमूलक तुल्याउन पोखरा विश्वविद्यालयको स्थापना र सञ्चालन गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
थ्री ४ महाराजाधिराज वीरेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको पच्चीसौं बर्षमा संसदले यो ऐन बनाएकोछ।
|
| 28 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः (१) यस ऐनको नाम "पोखरा विश्वविद्यालय ऐन, २०४३" रहेकोछ।
|
| 29 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकिदिएको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।*
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
[^0]
|
| 32 |
+
[^0]: * यो ऐन संवत् २०६४ साल जेट १४ गतेदेखि लागू भएको।
|
| 33 |
+
$\times$ गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा झिकिएको।
|
| 34 |
+
+ यो ऐन मिति २०४४।४।१ गते देखि प्रारम्भ हुने गरी तोकिएको। (ने.रा.प. २०४४।४।१)।
|
| 35 |
+
|
| 36 |
+
२. परिभाषाः विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,-
|
| 37 |
+
(क) "विश्वविद्यालय" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना पोखरा विश्वविद्यालय सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(ख) "सभा" भन्नाले दफा ७ बमोजिमको विश्वविद्यालय सभा सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
(ग) "प्राज्ञिक परिषद्" भन्नाले दफा १० बमोजिमको प्राज्ञिक परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
(घ) "कार्यकारी परिषद्" भन्नाले दफा १२ बमोजिमको कार्यकारी परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
(ङ) "सेवा आयोग" भन��नाले दफा १४ बमोजिमको सेवा आयोग सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(च) "संकाय" भन्नाले दफा १४ बमोजिमको संकाय सम्झनु पर्छ।
|
| 43 |
+
(छ) "अनुसन्धान केन्द्र" भन्नाले दफा १६ बमोजिमको अनुसन्धान केन्द्र सम्झनु पर्छ।
|
| 44 |
+
(ज) "विद्या परिषद्" भन्नाले दफा १७ बमोजिमको विद्या परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
(झ) "डीन" भन्नाले संकायको प्रमुखलाई सम्झनु पर्छ।
|
| 46 |
+
(ज) "क्याम्पस" भन्नाले विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पस सम्झनु पर्छ र सो शब्दले विश्वविद्यालयबाट सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसलाई समेत जनाउँनेछ।
|
| 47 |
+
(ट) "शिक्षक" भन्नाले विश्वविद्यालयमा शिक्षा प्रदान गर्ने बा अनुसन्धान कार्यमा संलग्न प्राध्यापक, सह—प्राध्यापक, उप—प्राध्यापक तथा सहायक प्राध्यापक सम्झनु पर्छ र सो शब्दले विश्वविद्यालयका विभिन्न तहका प्रशिक्षक तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा शिक्षक भनी तोकिएको व्यक्तिलाई समेत जनाउँछ।
|
| 48 |
+
(ट) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 49 |
+
|
| 50 |
+
३. विश्वविद्यालयको स्थापना: (१) कला, विज्ञान, कानून, व्यवस्थापन, शिक्षा, प्राविधिक र तोकिएका अन्य बिषयको उच्च तहका शिक्षण संस्थाहरूको सञ्चालनको लागि पोखरा विश्वविद्यालयको स्थापना गरिएको छ।
|
| 51 |
+
(२) विश्वविद्यालयको केन्द्रीय कार्यालय कास्की जिल्लामा रहनेछ।
|
| 52 |
+
|
| 53 |
+
४. विश्वविद्यालय स्वशासित संगठित संस्था हुने: (१) विश्वविद्यालय अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र संगठित संस्था हुनेछ।
|
| 54 |
+
(२) विश्वविद्यालयको सबै काम कारबाहीको निमित्त आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 55 |
+
(३) विश्वविद्यालयले व्यक्ति सरह चल अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न, बा अन्य किसिमले व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 56 |
+
(४) विश्वविद्यालयले व्यक्ति सरह नालिस उजुर गर्न र विश्वविद्यालय उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजुर लाग्न सक्नेछ।
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
५. विश्वविद्यालयको संगटनः विश्वविद्यालयको संगटन देहाय बमोजिम हुनेछ र यिनीहरूको सामुहिक रूप नै विश्वविद्यालयको स्वरूप हुनेछः-
|
| 59 |
+
(क) सभा,
|
| 60 |
+
(ख) प्राज्ञिक परिषद्,
|
| 61 |
+
(ग) कार्यकारी परिषद्,
|
| 62 |
+
(घ) सेवा आयोग,
|
| 63 |
+
(ङ) संकाय,
|
| 64 |
+
(च) विद्या परिषद्,
|
| 65 |
+
(छ) अनुसन्धान केन्द्र,
|
| 66 |
+
(ज) क्याम्पस,
|
| 67 |
+
(झ) पाठ्यक्रम विकास केन्द्र
|
| 68 |
+
(ज) तोकिएका अन्य निकायहरू,
|
| 69 |
+
|
| 70 |
+
६. विश्वविद्यालयका पदाधिकारीहरूः विश्वविद्यालयमा देहाय बमोजिमका पदाधिकारीहरू रहनेछन्:-
|
| 71 |
+
(क) कुलपति,
|
| 72 |
+
(ख) सह-कुलपति,
|
| 73 |
+
(ग) उप-कुलपति,
|
| 74 |
+
(घ) सेवा आयोगको अध्यक्ष
|
| 75 |
+
(ङ) रजिष्ट्रार,
|
| 76 |
+
(च) डीन,
|
| 77 |
+
(छ) अनुसन्धान केन्द्रका प्रमुख
|
| 78 |
+
(ज) क्याम्पस प्रमुखहरू
|
| 79 |
+
(झ) पाठ्यक्रम विकास केन्द्रका प्रमुख
|
| 80 |
+
(ज) तोकिएका वा अन्य पदाधिकारीहरू
|
| 81 |
+
|
| 82 |
+
७. सभाको गठनः (१) विश्वविद्यालयमा सर्वोच्च निकायको रूपमा एक सभा रहनेछ।
|
| 83 |
+
(२) सभाको गठन देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 84 |
+
(क) कुलपति - अध्यक्ष
|
| 85 |
+
(ख) सह-कुलपति - उपाध्यक्ष
|
| 86 |
+
(ग) उप-कुलपति - सदस्य
|
| 87 |
+
(घ) $\mathcal{H}$
|
| 88 |
+
(ङ) अन्य विश्वविद्यालयहरूका उप-कुलपतिहरू
|
| 89 |
+
$\times$ गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा झिकिएको।
|
| 90 |
+
|
| 91 |
+
| मध्येबाट दुई जना | - सदस्य |
|
| 92 |
+
| :--: | :--: |
|
| 93 |
+
| (च) सचिब, *शिक्षा, विज्ञान तथा प्रबिधि मन्त्रालय | - सदस्य |
|
| 94 |
+
| (छ) शिक्षाबिद्हरूमध्येबाट तीन जना | - सदस्य |
|
| 95 |
+
| (ज) डीनहरू | - सदस्य |
|
| 96 |
+
| *(झ) विश्वविद्यालयको केन्द्रिय कार्यालय रहेको नगर कार्यपालिकाको प्रमुख र उपप्रमुख | - सदस्य |
|
| 97 |
+
| (ज) क्याम्पस प्रमुखहरू मध्येबाट चार जना | - सदस्य |
|
| 98 |
+
| (ट) विश्वविद्यालयको बिषय समितिका अध्यक्षहरूमध्येबाट तीन जना | - सदस्य |
|
| 99 |
+
| $\cdot$ (ट१) नेपाल प्राध्यापक संघको प्रतिनिधि एकजना | - सदस्य |
|
| 100 |
+
| (ट) प्रतिनिधि, पोखरा विश्वविद्यालय प्राध्यापक संघ | - सदस्य |
|
| 101 |
+
| (ड) शिक्षकहरूमध्येबाट तीन जना | - सदस्य |
|
| 102 |
+
| * (ड) | |
|
| 103 |
+
| (ण) | विश्वविद्यालय अनुदान आयोगको अध्यक्ष बा निजले तोकेको सो आयोगको सदस्य | - सदस्य |
|
| 104 |
+
| *(त) | शिक्षाप्रेमी तथा समाजसेवीमध्येबाट समावेशी आधारमा कम्तीमा एकजना महिला सहित तीनजना | - सदस्य |
|
| 105 |
+
| @(थ) | उद्योगपति, व्यापारी र कृषकहरूमध्येबाट समावेशी आधारमा कम्तीमा दुई जना महिला सहित चारजना | - सदस्य |
|
| 106 |
+
| * (द) | चन्दादाताहरूमध्येबाट समावेशी आधारमा दुईजना | - सदस्य |
|
| 107 |
+
| $<$ (ध) | | |
|
| 108 |
+
| (न) | क्याम्पसका स्वतन्त्र विद्यार्थी युनियनका | |
|
| 109 |
+
| | सभापतिहरूमध्येबाट दुईजना | - सदस्य |
|
| 110 |
+
| (प) | रजिष्ट्रार | - सदस्य-सचिब |
|
| 111 |
+
|
| 112 |
+
(३) पदेन सदस्यहरू बाहेक सभाका अन्य सदस्यहरूको मनोनयन कार्यकारी परिषद्को सिफारिशमा कुलपतिबाट हुनेछ।
|
| 113 |
+
(४) मनोनीत सदस्यहरूको पदाबधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 114 |
+
(४) कुनै कारणले मनोनीत सदस्यहरूको पद रिक्त हुन गएमा बाँकी अबधिको लागि उपदफा (३) बमोजिमको प्रकृया पूरा गरी अर्को व्यक्तिलाई मनोनयन गरिनेछ।
|
| 115 |
+
|
| 116 |
+
[^0]
|
| 117 |
+
[^0]: - शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७ द्वारा संशोधित।
|
| 118 |
+
+ केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा थप।
|
| 119 |
+
๑ केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वार��� झिकिएको।
|
| 120 |
+
$<$ शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७ द्वारा झिकिएको।
|
| 121 |
+
|
| 122 |
+
८. सभाको बैठक: (१) सभाको बैठक बर्षको कम्तीमा एक पटक बस्नेछ।
|
| 123 |
+
(२) सभाको बैठक सभाको अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 124 |
+
(३) सभाको बैठक हुनु भन्दा कम्तीमा पन्ध्र दिन अगावै बैठकमा छलफल हुने बिषयको कार्यसूची सहितको सूचना सभाको सदस्य-सचिवले सबै सदस्यहरूलाई दिनेछ।
|
| 125 |
+
(४) सभामा कायम रहेका कुल सदस्य संख्याको कम्तीमा पचास प्रतिशत सदस्यहरू उपस्थित भएमा बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 126 |
+
(४) सभाको बैठकको अध्यक्षता सभाको अध्यक्षले र निजको अनुपस्थितिमा सभाको उपाध्यक्षले गर्नेछ। अध्यक्ष र उपाध्यक्ष दुबैको अनुपस्थितिमा सभाको बैठकको अध्यक्षता उप-कुलपतिले गर्नेछ।
|
| 127 |
+
(६) सभाको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकमा अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णायक मत दिनेछ।
|
| 128 |
+
*(७) सभाको अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले सभाको बैठकको निर्णय प्रमाणित गर्नेछ।
|
| 129 |
+
(८) सभाको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि सभा आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
९. सभाको काम, कर्तव्य र अधिकार: सभाको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 132 |
+
(क) विश्वविद्यालयको नीति निर्धारण गर्ने,
|
| 133 |
+
(ख) विश्वविद्यालयको विकासको लागि दीर्घकालीन कार्यक्रमहरू तर्जुमा गर्ने तथा त्यस्ता कार्यक्रमहरू कार्यान्वयन गर्ने, गराउने,
|
| 134 |
+
(ग) विश्वविद्यालयलाई मार्ग दर्शन गर्ने,
|
| 135 |
+
(घ) विश्वविद्यालयको शैक्षिक कार्यक्रमहरूको सञ्चालन र प्रबन्ध गर्ने, गराउने,
|
| 136 |
+
(ङ) क्याम्पसहरूको संस्थापन एवं सम्बन्धन बारे आवश्यक प्रबन्ध गर्ने, गराउने,
|
| 137 |
+
(च) विश्वविद्यालयबाट प्रदान गरिने बिभिन्न उपाधिहरू निर्धारण गर्ने,
|
| 138 |
+
(छ) विश्वविद्यालयका आङ्गिक क्याम्पसहरू तथा विश्वविद्यालयबाट सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसहरूलाई निर्देशन दिने र मार्ग दर्शन गर्ने,
|
| 139 |
+
(ज) विश्वविद्यालयलाई कुनै नयाँ कार्यक्रम सञ्चालन गर्न अनुमति दिने,
|
| 140 |
+
(झ) विश्वविद्यालय अन्तर्गतका निकायहरूको शैक्षिक, प्राज्ञिक तथा प्रशासनिक नीति निर्धारण गर्ने, गराउने,
|
| 141 |
+
(ज) विश्वविद्यालयको बार्षिक बजेट र कार्यक्रम स्वीकृत गर्ने,
|
| 142 |
+
(ट) विश्वविद्यालय अन्तर्गतका निकायहरूको बार्षिक प्रतिबेदन माथि छलफल गर्ने र कार्यक्रमको मूल्याङ्कन गर्ने,
|
| 143 |
+
|
| 144 |
+
[^0]
|
| 145 |
+
[^0]: - शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन ग��्न बनेको ऐन, २०७७ द्वारा संशोधित।
|
| 146 |
+
|
| 147 |
+
(ट) लेखा परीक्षक नियुक्ति गर्ने, लेखा परीक्षण प्रतिवेदन माथि छलफल गर्ने र स्वीकृति दिने,
|
| 148 |
+
(ड) विश्वविद्यालय सम्बन्धी नियमहरू पारित गर्ने,
|
| 149 |
+
(ड) शैक्षिक तथा प्रशासनिक कामका लागि आवश्यक शिक्षक तथा कर्मचारीको दरबन्दी स्वीकृत गर्ने,
|
| 150 |
+
(ण) विश्वविद्यालयको आवश्यकता अनुसार विभिन्न समिति, उप-समिति बा कार्य टोलीहरूको गठन गर्ने,
|
| 151 |
+
(त) तोकिए बमोजिमका अन्य काम गर्ने।
|
| 152 |
+
|
| 153 |
+
१०. प्राज्ञिक परिषद्को गठनः (१) विश्वविद्यालयको शैक्षिक, प्राज्ञिक तथा अनुसन्धानात्मक कार्यहरूलाई व्यवस्थित गर्ने निकायको रूपमा काम गर्न देहाय बमोजिमको एक प्राज्ञिक परिषद्को गठन हुनेछः-
|
| 154 |
+
(क) उप-कुलपति
|
| 155 |
+
(ख) रजिष्ट्रार
|
| 156 |
+
(ग) डीनहरू
|
| 157 |
+
(घ) विश्वविद्यालयका विभिन्न विषय समितिका अध्यक्षहरूमध्येवाट पाँच जना
|
| 158 |
+
(ङ) अनुसन्धान केन्द्रका प्रमुख
|
| 159 |
+
(च) विश्वविद्यालयका पाठ्यक्रम तथा परीक्षा सम्बन्धी निकायका प्रमुखहरू
|
| 160 |
+
(छ) क्याम्पस प्रमुखहरूमध्येवाट चारजना
|
| 161 |
+
(ज) शिक्षकहरू मध्येवाट दुई जना
|
| 162 |
+
(झ) शैक्षिक क्षेत्रमा विशिष्ट योगदान पुन्याएका शिक्षाविद्हरू मध्येवाट दुई जना
|
| 163 |
+
(ज) डीनहरू मध्येवाट उप-कुलपतिले तोकेको डीन - सदस्य-सचिब
|
| 164 |
+
(२) पदेन सदस्य बाहेक अन्य सदस्यहरूको मनोनयन उप-कुलपतिको सिफारिशमा कुलपतिबाट हुनेछ।
|
| 165 |
+
(३) मनोनीत सदस्यहरूको पदाबधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 166 |
+
(४) कुनै कारणले मनोनीत सदस्यहरूको पद रिक्त हुन गएमा बाँकी अबधिको लागि उपदफा (२) बमोजिमको प्रक्रिया पूरा गरी अर्को व्यक्तिलाई मनोनयन गरिनेछ।
|
| 167 |
+
(४) प्राज्ञिक परिषद्को बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि प्राज्ञिक परिषद् आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 168 |
+
|
| 169 |
+
११. प्राज्ञिक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकारः प्राज्ञिक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ :-
|
| 170 |
+
(क) विश्वविद्यालय अन्तर्गत अध्ययन, अनुसन्धान र प्रशिक्षण हुने विषयहरूको पाठ्यक्रम निर्धारण गर्ने तथा सबै तहका शैक्षिक, प्राज्ञिक तथा अनुसन्धान कार्यहरूको समीक्षा गर्ने,
|
| 171 |
+
(ख) परीक्षाको किसिम तोक्ने,
|
| 172 |
+
(ग) विद्यार्थीहरूको भर्ना सम्बन्धी योग्यता र संख्या निर्धारण गर्ने,
|
| 173 |
+
(घ) अनुसन्धान सम्बन्धी नीति तर्जुमा गर्ने र अनुसन्धान कार्यक्रमलाई स्वीकृत प्रदान गर्ने,
|
| 174 |
+
(ङ) शैक्षिक कार्यक्रमको मूल्याङ्कन गर्ने,
|
| 175 |
+
(च) शिक्षण र अनुसन्धानको स्तर निर्धारण गर्ने,
|
| 176 |
+
(छ) प्राज्ञिक विषयमा कार्यकारी परिषद्लाई राय सल्लाह दिने,
|
| 177 |
+
(ज) तोकिए बमोजिमका अन्य कार्यहरू गर्ने।
|
| 178 |
+
|
| 179 |
+
१२. कार्यकारी परिषद्को गठनः (१) विश्वविद्यालयको कार्यकारी निकायको रूपमा काम गर्न देहायका सदस्यहरू भएको कार्यकारी परिषद् हुनेछः-
|
| 180 |
+
(क) उप-कुलपति - अध्यक्ष
|
| 181 |
+
(ख) डीनहरू मध्येबाट एक जना - सदस्य
|
| 182 |
+
(ग) सभाका सदस्य रहेका क्याम्पस प्रमुखहरू मध्येबाट एकजना - सदस्य
|
| 183 |
+
(घ) सभाका सदस्यहरू मध्येबाट एकजना शिक्षक समेत रहने गरी तीन जना - सदस्य
|
| 184 |
+
(ङ) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिब
|
| 185 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ख), (ग) र (घ) बमोजिमका सदस्यहरूको मनोनयन उपकुलपतिको सिफारिशमा कुलपतिबाट हुनेछ।
|
| 186 |
+
(३) मनोनीत सदस्यहरूको पदाबधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 187 |
+
(४) कुनै कारणले मनोनीत सदस्यहरूको पद रिक्त भएमा बाँकी अबधिको लागि उपदफा (२) बमोजिमको प्रकृया पूरा गरी अर्को व्यक्तिलाई मनोनयन गरिनेछ।
|
| 188 |
+
(४) कार्यकारी परिषद्को बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि कार्यकारी परिषद् आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 189 |
+
|
| 190 |
+
१३. कार्यकारी परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकारः कार्यकारी परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ।
|
| 191 |
+
(क) सभाको निर्णय र निर्देशनहरू कार्यान्वयन गर्ने, गराउने।
|
| 192 |
+
(ख) विश्वविद्यालयको वार्षिक कार्यक्रम, बजेट, प्रगति विवरण, लेखा परीक्षण प्रतिवेदन र अन्य प्रस्तावहरू तयार गरी स्वीकृतिको लागि सभा समक्ष पेश गर्ने,
|
| 193 |
+
(ग) विश्वविद्यालयको कोष तथा चल अचल सम्पत्तिको सञ्चालन, रेखदेख र संरक्षण गर्ने,
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| 194 |
+
(घ) सभाको नीति निर्देशनको अधीनमा रही विश्वविद्यालयको चल अचल सम्पत्ति बेचविखन गर्ने, टेक्का पट्टामा दिने आदि काम गर्ने,
|
| 195 |
+
(ङ) विश्वविद्यालयद्वारा सञ्चालित कार्यक्रमहरूको समन्वय, रेखदेख, निरीक्षण गर्ने र सोको प्रतिवेदन सभामा पेश गर्ने,
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| 196 |
+
(च) विश्वविद्यालय सम्बन्धी नियमहरूको मसौदा तयार गरी स्वीकृतिको लागि सभामा पेश गर्ने,
|
| 197 |
+
(छ) सेवा आयोगको सिफारिशमा विश्वविद्यालयको लागि आवश्यक शिक्षक तथा कर्मचारीहरू नियुक्ति र बढुवा गर्ने,
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| 198 |
+
(ज) विश्वविद्यालयलाई प्राप्त दान, दातव्य, आर्थिक तथा अन्य सहयोग ग्रहण गर्ने,
|
| 199 |
+
(झ) विद्यार्थी शुल्क निर्धारण गर्ने,
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| 200 |
+
(ज) तोकिए बमोजिमको अन्य कार्यहरू गर्ने।
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| 201 |
+
|
| 202 |
+
१४. सेवा आयोग: (१) विश्वविद्यालयका शिक्षक तथा कर्मचारीहरूको नियुक्ति तथा बढुवाको सिफारिश गर्न देहाय बमोजिमको एक सेवा आयोग हुनेछः-
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| 203 |
+
(क) कुलपतिबाट नियुक्त व्यक्ति - अध्यक्ष
|
| 204 |
+
(ख) सदस्य, लोकसेवा आयोग - सदस्य
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| 205 |
+
(ग) प्राध्यापकहरू मध्येबाट एकजना - सदस्य
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| 206 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (क) र (ग) बमोजिमका अध्यक्ष र सदस्यको नियुक्ति कार्यकारी परिषद्को सिफारिशमा कुलपतिबाट हुनेछ।
|
| 207 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम नियुक्त अध्यक्ष र सदस्यको पदावधि चार वर्षको हुनेछ।
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| 208 |
+
(४) सेवा आयोगको बैटक सम्बन्धी कार्यबिधि सेवा आयोग आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
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| 209 |
+
(४) सेवा आयोगले शिक्षकको नियुक्ति तथा बढुवाको लागि सिफारिश गर्दा प्राज्ञिक क्षमता र अनुभवलाई र कर्मचारीको नियुक्ति तथा बढुवाको लागि सिफारिश गर्दा प्रशासनिक दक्षता र अनुभवलाई मुख्य आधार बनाउनेछ।
|
| 210 |
+
(६) सेवा आयोगको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 211 |
+
(७) सेवा आयोगको अध्यक्ष तथा सदस्यहरूको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 212 |
+
(६) सेवा आयोगको अध्यक्षको पारिश्रमिक र सुविधा तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 213 |
+
|
| 214 |
+
१५. संकायः (१) विश्वविद्यालयबाट सञ्चालन गरिने उच्च शिक्षाको लागि तोकिएका विषयमा तोकिए बमोजिमका संकायहरू रहनेछन्।
|
| 215 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम रहने संकायको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 216 |
+
|
| 217 |
+
१६. अनुसन्धान केन्द्रको स्थापनाः (१) विश्वविद्यालयले शैक्षिक, प्राज्ञिक तथा अनुसन्धान सम्बन्धी कार्य गर्नको लागि विभिन्न अनुसन्धान केन्द्रहरू स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 218 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम स्थापना हुने अनुसन्धान केन्द्रहरूको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा सञ्चालन सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 219 |
+
|
| 220 |
+
१७. विद्या परिषद्को गठनः (१) प्रत्येक संकायमा शैक्षिक तथा प्राज्ञिक कार्यक्रमहरूको सञ्चालनका लागि तोकिए बमोजिमको एक विद्या परिषद् रहनेछ।
|
| 221 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको विद्या परिषद् अन्तर्गत तोकिए बमोजिमका विषय समितिहरू रहनेछन्।
|
| 222 |
+
(३) विद्या परिषद् र सो अन्तर्गतमा रहने समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 223 |
+
|
| 224 |
+
१८. क्याम्पसहरूको स्थापना र संचालनः (१) विश्वविद्यालयले नेपाल सरकारको राष्ट्रिय शिक्षा नीतिको परिधिभित्र रही विभिन्न विषयमा उच्च शिक्षा प्रदान गर्नको लागि क्याम्पसहरूको स्थापना तथा सञ्चालन गर्न सक्नेछ।
|
| 225 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम स्थापित क्याम्पसहरूको सञ्चालन सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 226 |
+
|
| 227 |
+
१९. पाठ्यक्रम विकास केन्द्रको स्थापनाः (१) पाठ्यक्रमको निर्धारण तथा विकासको लागि तोकिए बमोजिम पाठ्यक्रम विकास केन्द्रको स्थापना हुनेछ।
|
| 228 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम स्थापना हुने पाठ्यक्रम विकास केन्द्रको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 229 |
+
|
| 230 |
+
२०. विश्वविद्यालयसँग सम्बन्धन गर्न सक्नेः (१) निजी क्षेत्रका कुनै क्याम्पसले विश्वविद्यालयसँग सम्बन्धन प्राप्त गरी सञ्चालन हुन चाहेमा विश्वविद्यालयले त्यस्ता क्याम्पसलाई सम्बन्धन प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 231 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसले विश्वविद्यालयले तोकेको शर्तहरूको पालना गर्नु पर्नेछ।
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| 232 |
+
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| 233 |
+
२१. अन्य विश्वविद्यालयको आंगिक क्याम्पस सञ्चालन गर्ने सम्बन्धी विशेष व्यवस्थाः (१) अन्य विश्वविद्यालयको कुनै आंगिक क्याम्पसलाई विश्वविद्यालयको आंगिक क्याम्पसको रूपमा सञ्चालन गर्न आवश्यक भएमा नेपाल सरकारले सम्बन्धित विश्वविद्यालयका उप-कुलपतिहरू र सो क्याम्पसको क्याम्पस प्रमुख रहेको एक समिति गठन गर्नेछु र सो समितिले त्यस्तो क्याम्पसलाई विश्वविद्यालयको आंगिक क्याम्पसको रूपमा सञ्चालन गर्ने निर्णय गरेमा विश्वविद्यालयले सो क्याम्पसलाई आंगिक क्याम्पसको रूपमा सञ्चालन गर्नेछ।
|
| 234 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम कुनै क्याम्पस विश्वविद्यालयको आंगिक क्याम्पसको रूपमा सञ्चालन हुने भएमा सो क्याम्पसको हकभोगमा रहेको चल अचल सम्पत्ति तथा दायित्व समेत विश्वविद्यालय अन्तर्गतको सोही क्याम्पसमा सर्नेछ।
|
| 235 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम कुनै क्याम्पस विश्वविद्यालयको आंगिक क्याम्पसको रूपमा सञ्चालन हुने भएमा सो क्याम्पसमा कार्यरत शिक्षक तथा कर्मचारीहरूले चाहेमा निजहरू समेत विश्वविद्यालयको आंगिक क्याम्पसको शिक्षक तथा कर्मचारीको रूपमा बहाल रहन सक्नेछन्।
|
| 236 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम कुनै शिक्षक तथा कर्मचारी विश्वविद्यालयको आंगिक क्याम्पसमा बहाल रहेमा निजहरूलाई मर्का पर्ने गरी साबिकको तलब, सुविधा तथा सेवा शर्तमा कुनै परिवर्तन गरिने छैन।
|
| 237 |
+
|
| 238 |
+
२२. कुलपतिः (१) प्रधानमन्त्री विश्वविद्यालयको कुलपति हुनेछ।
|
| 239 |
+
(२) कुलपति विश्वविद्यालयको प्रमुख हुनेछ र निज उपस्थित रहेको अबस्थामा निजले विश्वविद्यालयको दीक्षान्त समारोहमा अध्यक्षको आसन ग्रहण गर्नेछ।
|
| 240 |
+
(३) कुलपतिलाई विश्वविद्यालय बा विश्वविद्यालयसँग सम्बन्धित जुनसुकै बिषय बा वस्तुको निरीक्षण गर्न बा जाँचबुझ गर्ने गराउने अधिकार हुनेछ।
|
| 241 |
+
|
| 242 |
+
२३. सह-कुलपतिः (१) *शिक्षा, विज्ञान तथा प्रबिधि मन्त्री बा राज्यमन्त्री विश्वविद्यालयको सहकुलपति हुनेछ।
|
| 243 |
+
(२) कुलपतिको अनुपस्थितिमा सह-कुलपतिले विश्वविद्यालयको दीक्षान्त समारोहमा अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 244 |
+
(३) सहकुलपतिले आवश्यकता अनुसार विश्वविद्यालयको निरीक्षण गर्न र निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 245 |
+
|
| 246 |
+
२४. उप-कुलपतिः (१) उप-कुलपति विश्वविद्यालयमा पूरा समय काम गर्ने प्रमुख पदाधिकारी हुनेछ।
|
| 247 |
+
(२) उप-कुलपति पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिश पेश गर्न कुलपतिबाट सहकुलपतिको अध्यक्षतामा सभाका अन्य दुई जना सदस्यहरू रहेको एक समिति गठन हुनेछ र सो समितिको सिफारिशमा कुलपतिबाट उप-कुलपतिको नियुक्ति हुनेछ।
|
| 248 |
+
(३) उप-कुलपतिको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 249 |
+
(४) उप-कुलपतिको अनुपस्थितिमा निजको काम कुलपतिबाट व्यवस्था भए बमोजिम हुनेछ।
|
| 250 |
+
(४) उप-कुलपतिको पारिश्रमिक र सुबिधा तथा सेबाका अन्य शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 251 |
+
|
| 252 |
+
२५. उप-कुलपतिको काम, कर्तव्य र अधिकारः (१) उप-कुलपतिको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 253 |
+
(क) विश्वविद्यालयको सबै काम कारबाही उपर आवश्यक निर्देशन दिने र रेखदेख गर्ने।
|
| 254 |
+
(ख) सभामा पेश हुने सबै बिषय सम्बन्धी प्रस्तावहरू पेश गर्ने तथा पेश गर्न लगाउने ।
|
| 255 |
+
(ग) कुलपति र सहकुलपति दुबैको अनुपस्थितिमा विश्वविद्यालयको दीक्षान्त समारोहमा अध्यक्षता गर्ने।
|
| 256 |
+
(घ) विश्वविद्यालयको विकासको लागि अल्पकालीन र दीर्घकालीन कार्यक्रमहरू तय गर्ने, गराउने ।
|
| 257 |
+
(ङ) विश्वविद्यालयको तर्फबाट बिभिन्न निकायहरूसंग छलफल, बार्ता आदि गर्ने।
|
| 258 |
+
(च) विश्वविद्यालयको स्वीकृत नीति भित्र रही बिभिन्न योजना तथा कार्यक्रम तर्जुमा गरी सभा समक्ष पेश गर्ने।
|
| 259 |
+
(२) उपदफा (१) मा लेखिएदेखि बाहेक यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा कुनै निकाय बा पदाधिकारीले गर्ने भनी उल्लेख भएका कामहरू बाहेक अन्य कामहरू उपकुलपतिले गर्नेछ। त्यस्तो कामको जानकारी उप-कुलपतिले तुरुन्त कुलपतिलाई गराउनु पर्नेछ र लगत्तै बस्ने सभाको बैठकबाट अनुमोदन गराउनु पर्नेछ।
|
| 260 |
+
(३) उपदफा (१) र (२) मा लेखिएदेखि बाहेक उप-कुलपतिको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 261 |
+
|
| 262 |
+
२६. रजिष्ट्रार: (१) रजिष्ट्रार विश्वविद्यालयमा पूरा समय काम गर्ने पदाधिकारी हुनेछ।
|
| 263 |
+
(२) रजिष्ट्रारको नियुक्ति उप-कुलपतिको सिफारिशमा कुलपतिबाट हुनेछ।
|
| 264 |
+
(३) रजिष्ट्रारको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 265 |
+
(४) विश्वविद��यालयको शैक्षिक, आर्थिक र कर्मचारी प्रशासन रजिष्ट्रारको सामान्य रेखदेखमा रहनेछ।
|
| 266 |
+
(५) रजिष्ट्रारको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 267 |
+
(६) रजिष्ट्रारको पारिश्रमिक, सुविधा र सेबाका अन्य शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 268 |
+
*(७) रजिष्ट्रारले सभाको निर्णय बा आदेशको अभिलेख गरी राख्नु पर्नेछ। सो निर्णय बा आदेशको एक प्रति कुलपति समक्ष पठाउनु पर्नेछ।
|
| 269 |
+
|
| 270 |
+
२७. डीनः (१) डीन संकायमा पूरा समय काम गर्ने प्रमुख पदाधिकारी हुनेछ।
|
| 271 |
+
(२) डीनको नियुक्ति कार्यकारी परिषद्बाट हुनेछ।
|
| 272 |
+
(३) डीनको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 273 |
+
(४) डीनको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 274 |
+
(५) डीनको पारिश्रमिक, सुविधा र सेबाका अन्य शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 275 |
+
|
| 276 |
+
२८. विश्वविद्यालयका अन्य पदाधिकारी: (१) विश्वविद्यालयमा क्याम्पस प्रमुख तथा पाठ्यक्रम विकास केन्द्रका प्रमुख लगायत तोकिए बमोजिमका अन्य पदाधिकारीहरू रहनेछन्।
|
| 277 |
+
(२) क्याम्पस प्रमुख तथा पाठ्यक्रम विकास केन्द्रका प्रमुख लगायत अन्य पदाधिकारीहरूको नियुक्ति, पारिश्रमिक, सुविधा, सेबाका अन्य शर्त तथा काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 278 |
+
|
| 279 |
+
२८क. नियुक्ति गर्नु पर्ने अवधि: यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भएतापनि विश्वविद्यालयको कुनै पदाधिकारीको पद रिक्त भएमा सम्बन्धित अधिकारीले रिक्त भएको तीन महिनाभित्र त्यस्तो पदमा नियुक्ति गरी पूर्ति गर्नु पर्नेछ।
|
| 280 |
+
|
| 281 |
+
२८ख. जिम्मेबारी तोक्न सक्ने: यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि विश्वविद्यालयको कुनै पद रिक्त भएमा सो पदपूर्ति नभएसम्म दैनिक कार्य सञ्चालन गर्न बढीमा तीन महिनाको लागि उप-कुलपतिको जिम्मेबारी सहकुलपतिको परामर्शमा कुलपतिले र अन्य पदाधिकारीको जिम्मेबारी उप-कुलपतिले विश्वविद्यालयको कुनै बरिष्ठतम प्राध्यापकलाई तोक्नेछ।
|
| 282 |
+
|
| 283 |
+
२८ग. पदबाट हटाउन सकिने: (१) उप-कुलपति, शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार बा सेवा आयोगको अध्यक्षले आफ्नो पद अनुरुपको जिम्मेबारी पूरा नगरेको, इमान्दारीपूर्वक काम नगरेको बा निजले पद अनुकूलको आचरण नगरेको भनी सभामा तत्काल रहेका एकतिहाइ सदस्यले निजलाई पदबाट हटाउन कुलपति समक्ष लिखित निबेदन दिएमा कुलपतिले सभाको कुनै सदस्यको अध्यक्षतामा
|
| 284 |
+
|
| 285 |
+
[^0]
|
| 286 |
+
[^0]: 1 शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७ द्वारा थप।
|
| 287 |
+
केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०६४ द्वारा थप।
|
| 288 |
+
|
| 289 |
+
विश्वविद्यालय अनुदान आयोगको सदस्य र शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालयको सचिव रहेको तीन सदस्यीय छानबिन समिति गठन गर्नेछ।
|
| 290 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठित छानबिन समितिले सो सम्बन्धमा आवश्यक छानबिन गरी तीस दिनभित्र आफ्नो प्रतिवेदन कुलपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 291 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको प्रतिवेदन प्राप्त भएपछि कुलपतिले सो प्रतिवेदन सभामा पेश गर्नेछ।
|
| 292 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम पेश भएको प्रतिवेदन उपर छलफल हुँदा सभाका कुल सदस्य संख्याको कम्तीमा एकाउन्न प्रतिशत सदस्यले उप-कुलपति, शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार बा सेवा आयोगको अध्यक्षलाई पदबाट हटाउन निर्णय गरेमा कुलपतिले उप-कुलपति, शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार बा सेवा आयोगको अध्यक्षलाई पदबाट हटाउनेछ।
|
| 293 |
+
तर त्यसरी हटाउनु अघि निजलाई सफाई पेश गर्ने मौकाबाट बञ्चित गरिने छैन।
|
| 294 |
+
(४) उप-कुलपति, शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार र सेवा आयोगको अध्यक्ष बाहेक विश्वविद्यालयका अन्य पदाधिकारीलाई उपदफा (१) बमोजिमको आरोप छानबिन गर्दा बा पदबाट हटाउँदा अपनाउनु पर्ने प्रक्रिया तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 295 |
+
(६) यस दफा बमोजिम कुनै पदाधिकारी उपर छानबिन शुरु भएमा छ महिनाभित्र अन्तिम निर्णय गरिसक्नु पर्नेछ। त्यस्तो अन्तिम निर्णय नभएसम्म निजले आफू बहाल रहेको पदमा काम गर्न पाउने छैन।
|
| 296 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजिमको पदाधिकारीले गर्ने दैनिक काम सम्पादन गर्नका लागि कुलपतिले विश्वविद्यालयको बरिष्ठतम् पदाधिकारीलाई जिम्मेबारी तोक्न सक्नेछ।
|
| 297 |
+
|
| 298 |
+
२९. विश्वविद्यालयको कोष: (१) विश्वविद्यालयको आफ्नो एउटा छुट्टै कोष हुनेछ र सो कोषमा देहायका रकमहरू रहनेछन् :-
|
| 299 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त अनुदान रकम,
|
| 300 |
+
(ख) कुनै व्यक्ति बा संस्थाले चन्दा, दान, दातव्य बा आर्थिक सहायता स्वरूप प्रदान गरेको रकम,
|
| 301 |
+
(ग) विदेशी सरकार, अन्तरराष्ट्रिय संघ, संस्था, वित्तीय संस्था बा व्यक्तिबाट ऋण एवं सहयोग स्वरूप प्राप्त रकम,
|
| 302 |
+
(घ) शुल्क तथा अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त रकम ।
|
| 303 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ग) बमोजिमको कुनै रकम प्राप्त गर्नु अघि विश्वविद्यालयले नेपाल सरकारको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 304 |
+
(३) विश्वविद्यालयको कोषको रकम तोकिएको बैकमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
|
| 305 |
+
(४) विश्वविद्यालयको खाताको सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 306 |
+
|
| 307 |
+
३०. लेखा र लेखापरीक्षणः (१) विश्वविद्यालयको आय व्ययको लेखा प��रचलित कानुन बमोजिम राखिनेछ।
|
| 308 |
+
*(२) विश्वविद्यालयको लेखा परीक्षण महालेखा परीक्षकबाट हुनेछ।
|
| 309 |
+
|
| 310 |
+
३१. प्रमाणपत्र र उपाधि तथा मान्यता दिनेः (१) तोकिएको उच्च शिक्षा हासिल गर्ने विद्यार्थी, प्रशिक्षार्थी वा अनुसन्धानकर्तालाई विश्वविद्यालयले तोकिए बमोजिमको प्रमाणपत्र दिनेछ।
|
| 311 |
+
(२) शैक्षिक तथा प्राज्ञिक क्षेत्रमा उल्लेखनीय योगदान पु¥याएका स्वदेशी तथा विदेशी विद्वानहरूलाई विश्वविद्यालयले मानार्थ उपाधि प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 312 |
+
(३) स्वदेशी तथा विदेशी विशिष्ट नागरिकलाई विश्वविद्यालयले मानार्थ उपाधि प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 313 |
+
(४) विश्वविद्यालयले अन्य विश्वविद्यालय वा शैक्षिक संस्थाको शैक्षिक उपाधिलाई मान्यता दिन सक्नेछ।
|
| 314 |
+
(५) उपदफा (२) र (३) अनुसारका उपाधिहरू सभाको स्वीकृतिबाट प्रदान गरिनेछ।
|
| 315 |
+
|
| 316 |
+
३२. विश्वविद्यालयमा भर्ना हुन चाहिने योग्यताः विश्वविद्यालयमा भर्ना हुन चाहिने योग्यता तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 317 |
+
|
| 318 |
+
३२क. निःशुल्क उच्च शिक्षा तथा छात्रवृत्तिः (१) विश्वविद्यालयले तोकेको मापदण्ड पूरा गरी विश्वविद्यालय वा मातहतका आडिक तथा सामुदायिक शैक्षिक संस्थामा भर्ना भएका दलित, सिमान्तीकृत, अपाङ्ग र आर्थिक रूपले विपन्न विद्यार्थीको लागि उच्च शिक्षा निःशुल्क हुनेछ।
|
| 319 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि आधार, मापदण्ड, वर्गीकरण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 320 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको सुविधा एक विद्यार्थीले प्रत्येक तहमा एकपटक मात्र उपभोग गर्न पाउनेछ।
|
| 321 |
+
(४) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दलित विद्यार्थीको लागि प्राविधिक तथा व्यावसायिक उच्च शिक्षामा भर्नाका लागि तोकिए बमोजिमको सिट सुरक्षित गरिनेछ।
|
| 322 |
+
(५) विश्वविद्यालयले शहिद, बेपत्ता पारिएका र अपाङ्गता भएका व्यक्तिका छोरा, छोरीको लागि प्रचलित कानूनमा व्यवस्था भए बमोजिम उच्च शिक्षाको व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 323 |
+
(६) कक्षा छदेखि कक्षा दशसम्म सामुदायिक विद्यालयमा अध्ययन गरेको विद्यार्थीले उच्च शिक्षामा प्रचलित कानून बमोजिम छात्रवृत्ति पाउनेछ।
|
| 324 |
+
|
| 325 |
+
[^0]
|
| 326 |
+
[^0]: * शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७ द्वारा संशोधित।
|
| 327 |
+
2 केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२ द्वारा संशोधित।
|
| 328 |
+
१ शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७ द्वारा थप।
|
| 329 |
+
|
| 330 |
+
३३. राष्ट्रिय शिक्षा नीति अनुरूप कार्य गर्नु पर्ने: नेपाल सरकारको स्वीकृत राष्ट्रिय शिक्षा नीति अनुरूप कार्य गर्नु विश्वविद्यालयको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 331 |
+
|
| 332 |
+
३४. काम कारबाही बदर नहुने: विश्वविद्यालयको कुनै पदाधिकारी बा सदस्यको स्थान रिक्त भै बा कुनै पदाधिकारी बा सदस्यको नियुक्ति बा मनोनयन गर्न बुटि भएको कारणले मात्र त्यस्तो काम कारबाही बदर हुने छैन।
|
| 333 |
+
|
| 334 |
+
३५. असल नियतले काम गरेकोमा बचाउ: यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमबमोजिम असल नियत लिई गरेको बा गर्न खोजेको कुनै कामको सम्बन्धमा विश्वविद्यालय बा विश्वविद्यालयको कुनै पदाधिकारी उपर मुद्दा चलाउने बा अन्य कुनै कारबाही गरिने छैन।
|
| 335 |
+
|
| 336 |
+
३६. विश्वविद्यालयलाई छुट र सुविधा: (१) प्रचलित कानुनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भएतापनि विश्वविद्यालयको रजिष्टेशन गर्नु पर्ने जुनसुकै लिखत रजिष्टेशन गर्नु परेमा रजिष्टेशन दस्तुर लाग्ने छैन।
|
| 337 |
+
(२)
|
| 338 |
+
|
| 339 |
+
३७. बार्षिक प्रतिवेदन: विश्वविद्यालयको बार्षिक प्रतिवेदन तोकिएको अबधिभित्र सभामा पेश गरिनेछ।
|
| 340 |
+
|
| 341 |
+
३८. अधिकार प्रत्यायोजन: (१) सभाले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमबमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरूमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार कार्यकारी परिषद् बा उपकुलपतिलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 342 |
+
(२) कार्यकारी परिषद्ले यो ऐन बा ऐन अन्तर्गत बनेका नियमबमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरूमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार विश्वविद्यालयका कुनै पदाधिकारी बा विश्वविद्यालयको कुनै समितिलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 343 |
+
(३) प्राज्ञिक परिषद्ले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेका नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरूमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार विद्या परिषद्लाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 344 |
+
(४) सेवा आयोगले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमबमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरूमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार विश्वविद्यालयको कुनै समितिलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 345 |
+
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| 346 |
+
३९. नेपाल सरकारसँग सम्पर्कः विश्वविद्यालयले नेपाल सरकारसंग सम्पर्क राख्दा नेपाल सरकार, शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
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| 347 |
+
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| 348 |
+
४०. विघटन हुँदाको परिणामः विश्वविद्यालय विघटन भएमा यसको चल अचल जायजेथा नेपाल सरकारको हुनेछ।
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| 349 |
+
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| 350 |
+
[^0]
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| 351 |
+
[^0]: - आयकर ऐन, २०५६ द्वारा झिकिएको।
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| 352 |
+
* शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशो��न गर्न बनेको ऐन, २०७७ द्वारा संशोधित।
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| 353 |
+
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| 354 |
+
*४०क. स्वीकृति लिनु पर्ने: यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भएतापनि नेपाल सरकारलाई थप आर्थिक व्ययभार पर्ने बिषयमा नियम बनाउँदा बा कार्य गर्दा नेपाल सरकारको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 355 |
+
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| 356 |
+
४१. नियम बनाउने अधिकार: यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न सभाले आवश्यक नियमहरू बनाई लागू गर्न सक्नेछ।
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| 357 |
+
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| 358 |
+
---
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| 359 |
+
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| 360 |
+
**द्रष्टव्य:**
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| 361 |
+
१. केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तरण भएका शब्दहरु:-
|
| 362 |
+
"थी ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
| 363 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरु:-
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| 364 |
+
"नगरपालिकाको प्रमुख" को सट्टा "नगर कार्यपालिकाको प्रमुख"।
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| 365 |
+
३. शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरु:-
|
| 366 |
+
"शिक्षा तथा खेलकुद मन्त्रालय" को सट्टा "शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय"।
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section_14_pdf_17.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,97 @@
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| 1 |
+
**गैर आवासीय नेपाली सम्बन्धी ऐन, २०६४**
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
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| 4 |
+
२०६४।४।१०
|
| 5 |
+
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| 6 |
+
**१. सुशासन प्रबर्धन तथा सार्वजनिक सेवा प्रवाह सम्बन्धी केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०६१**
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| 7 |
+
२०६१।१२।१६
|
| 8 |
+
व्यवस्थापिका-संसदले बनाएको २०६४ सालको ऐन न, १४
|
| 9 |
+
गैर आवासीय नेपालीका सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 10 |
+
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| 11 |
+
**प्रस्तावना:**
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| 12 |
+
गैर आवासीय नेपालीहरुमा नेपालप्रतिको सामिप्यता अभिबुद्धि गरी त्यस्ता व्यक्तिलाई नेपालको सर्वाहिण विकासमा सहभागी गराउन उत्प्रेरित गर्ने सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाज्छुनीय भएकोले, व्यवस्थापिका-संसदले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
|
| 15 |
+
(१) यस ऐनको नाम "गैर आवासीय नेपाली सम्बन्धी ऐन, २०६४" रहेको छ।
|
| 16 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 17 |
+
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| 18 |
+
**२. परिभाषा:**
|
| 19 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 20 |
+
(क) "गैरआवासीय नेपाली" भन्नाले देहायको व्यक्ति सम्झनु पर्छ:-
|
| 21 |
+
(१) गैरआवासीय नेपाली नागरिकता प्राप्त व्यक्ति,
|
| 22 |
+
(२) नेपाली मूलको विदेशी नागरिक,
|
| 23 |
+
(३) विदेशमा बस्ने नेपाली नागरिक।
|
| 24 |
+
(क१) "गैरआवासीय नेपाली नागरिकता प्राप्त व्यक्ति" भन्नाले कानून बमोजिम गैरआवासीय नेपाली नागरिकताको प्रमाणपत्र प्राप्त गरेको व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 25 |
+
(ख) "नेपाली मूलको विदेशी नागरिक" भन्नाले कुनै व्यक्ति साबिकमा स्वयम् बा निजको बाबु, आमा, बाजे बा बज्यै नेपालको नागरिक रही पछि दक्षिण एशियाली क्षेत्रीय सहयोग संगटन (सार्क) को सदस्य मुलुक बाहेक अन्य मुलुकको नागरिकता लिएको व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 26 |
+
(ग) "विदेशमा बस्ने नेपाली नागरिक" भन्नाले सार्कको सदस्य मुलुकमा बसोबास गरेको, नेपाल सरकारबाट खटीई विदेशस्थित कुटनैतिक नियोग बा महाबाणिज्य दुताबासमा बहाल रहेको र विदेशस्थित शिक्षण संस्थामा अध्ययन गरिरहेको नेपाली नागरिक बाहेक कुनै पेशा, व्यवसाय र रोजगारी गरी विदेशी मुलुकमा कम्तीमा दुई बर्ष बसोबास गरेको नेपाली नागरिक सम्झनु पर्छ।
|
| 27 |
+
(घ) "परिचयपत्र" भन्नाले दफा ४ बमोजिम दिइएको गैर आवासीय नेपालीको परिचयपत्र सम्झनु पर्छ।
|
| 28 |
+
(ड) "लगानी" भन्नाले मुनाफा आर्जन गर्ने उद्देश्यले नेपालको कुनै उद्योग बा व्यवसायमा गरेको लगानी सम्झनु पर्छ र सो शब्दले उद्योग बा व्यवसाय र गैर आवासीय नेपालीका बीच सम्झौता गरी कुनै विदेशी उत्पत्तिको प्रविधि सम्बन्धी अधिकार, बिशिष्टता, फर्मुला, प्र���्रिया, पेटेण्ट, टेडमार्क बा प्राविधिक सीप बा ज्ञानको हस्तान्तरण गर्न बा प्राविधिक सल्लाहकार बा व्यवस्थापन सेवा उपलव्ध गराउने कार्य समेतलाई जनाउँछ।
|
| 29 |
+
(च) "परिवार" भन्नाले पति, पत्नी, बाबु, आमा, छोराछोरी, बाजे बज्यै र सासू बा ससुरा सम्झनु पर्छ।
|
| 30 |
+
(छ) "नजिकका नातेदार" भन्नाले आयकर ऐन, २०४६ को दफा २ को खण्ड (ब) मा उल्लिखित नातेदार सम्झनु पर्छ।
|
| 31 |
+
(ज) "परिबर्त्य विदेशी मुद्रा" भन्नाले नेपाल राष्ट्र बैड ऐन, २०४६ को दफा २ को खण्ड (ठ) बमोजिमको परिबर्त्य विदेशी मुद्रा सम्झनु पर्छ।
|
| 32 |
+
(झ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 33 |
+
|
| 34 |
+
**३. गैर आवासीय नेपालीको अभिलेख खडा गर्ने:**
|
| 35 |
+
(१) कुनै गैर आवासीय नेपाली बा निजको परिवारले गैर आवासीय नेपालीको सो हैसियतमा आफ्नो नाम दर्ता गराउन चाहेमा तोकिए बमोजिमको दस्तुर सहित तोकिएको अधिकारी समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 36 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निवेदन परेमा तोकिएको अधिकारीले आवश्यक छानबिन गरी तोकिए बमोजिम गैर आवासीय नेपालीको अभिलेख खडा गर्नेछ।
|
| 37 |
+
|
| 38 |
+
**४. परिचयपत्र दिने:**
|
| 39 |
+
(१) दफा ३ बमोजिम अभिलेखमा नाम समावेश भएको गैर आवासीय नेपालीले परिचयपत्र लिन चाहेमा तोकिएको अधिकारी समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 40 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निवेदन परेमा तोकिएको अधिकारीले आवश्यक छानबिन गरी तोकिए बमोजिमको दस्तुर लिई निवेदकलाई गैर आवासीय नेपालीको परिचयपत्र दिन सक्नेछ।
|
| 41 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम दिइएको परिचयपत्रको अबधि नेपाली मूलको विदेशी नागरिक भए निजले प्राप्त गरेको भिसाको अधीनमा रही बढिमा दश बर्ष र विदेशमा बस्ने नेपाली नागरिक भए दुई बर्षसम्म बहाल रहने छ। तर दुई बर्षभन्दा बढी विदेशमा बसोबास गर्न पाउने अनुमतिपत्र प्राप्त विदेशमा बस्ने नेपाली नागरिकलाई सो अबधिभरको लागि परिचयपत्र दिन सकिनेछ।
|
| 42 |
+
(४) परिचयपत्र नवीकरण गराउन चाहने गैर आवासीय नेपालीले परिचयपत्रको अबधि समाप्त हुनु अगावै तोकिएको अधिकारी समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 43 |
+
(४) उपदफा (४) बमोजिम परिचयपत्र नवीकरणको लागि निवेदन परेमा तोकिएको अधिकारीले उपदफा (३) को अधीनमा रही तोकिए बमोजिमको दस्तुर लिई परिचयपत्र नवीकरण गरिदिनु पर्नेछ।
|
| 44 |
+
|
| 45 |
+
**५. गैर आवासीय नेपालीको हैसियत कायमै रहने:**
|
| 46 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यस ऐन बमोजिम लगानी गरेको विदेशमा बस��ने नेपाली नागरिक कुनै उद्योग बा व्यवसाय सञ्चालनको सिलसिलामा व्यस्तो उद्योग बा व्यवसायको सञ्चालक बा उच्च व्यवस्थापकीय पदाधिकारीको हैसियतले नेपालमा बसोबास गरेमा पनि निजको गैर आवासीय नेपालीको हैसियत कायमै रहनेछ।
|
| 47 |
+
|
| 48 |
+
**६. परिवर्त्य विदेशी मुद्रामा खाता खोल्न पाउने:**
|
| 49 |
+
परिचयपत्रप्राप्त गैर आवासीय नेपालीले परिवर्त्य विदेशी मुद्रामा आर्जन गरेको रकम नेपाल राष्ट्र बैङ्गबाट वित्तीय कारोबार गर्ने इजाजतपत्र प्राप्त कुनै बाणिज्य बैङ् बा वित्तीय संस्थामा परिवर्त्य विदेशी मुद्रामा खाता खोली सञ्चालन गर्न सक्नेछ।
|
| 50 |
+
|
| 51 |
+
**७. परिवर्त्य विदेशी मुद्रामा लगानी गर्न सक्ने:**
|
| 52 |
+
(१) गैर आवासीय नेपालीले बा गैर आवासीय नेपालीको पचास प्रतिशतभन्दा बढी शेयर लगानी भएको कुनै विदेशी कम्पनीले प्रचलित कानून बमोजिम विदेशी लगानीको लागि खुला गरिएको उद्योग बा व्यवसाय बा नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी गैर आवासीय नेपालीको लागि लगानी गर्न खुला गरेको अन्य कुनै उद्योग बा व्यवसायमा विदेशमा विदेशी मुद्रामा आर्जन गरेको रकम नेपालमा परिवर्त्य विदेशी मुद्रामा लगानी गर्न सक्नेछ।
|
| 53 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको गैर आवासीय नेपाली बा कम्पनीले नेपालमा लगानी गर्ने रकम प्रचलित कानून बमोजिम नेपाल राष्ट्र बैङ्गबाट वित्तीय कारोबार गर्न इजाजतपत्र प्राप्त कुनै बाणिज्य बैङ् बा वित्तिय संस्था मार्फत प्राप्त गर्नु पर्नेछ।
|
| 54 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम प्राप्त गरेको रकमको कानून बमोजिम स्रोत खुलाउनु पर्ने अबस्थामा सोको स्रोत खुलाउनु पर्नेछ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
**८. जानकारी दिनु पर्ने:**
|
| 57 |
+
कुनै गैर आबासीय नेपालीले नेपालमा लगानी गरेमा तोकिएको बिबरण खुलाई तोकिएको अधिकारी समक्ष सोको जानकारी दिनु पर्नेछ।
|
| 58 |
+
|
| 59 |
+
**९. रकम फिर्ता लैजान सक्ने:**
|
| 60 |
+
प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि गैर आबासीय नेपालीले दफा ७ बमोजिम गरेको लगानी र त्यसबाट प्राप्त भएको लाभ बराबरको रकम निजले परिवर्त्य विदेशी मुद्रामा तोकिए बमोजिम फिर्ता लैजान सक्नेछ।
|
| 61 |
+
|
| 62 |
+
**१०. नेपाली मूलका विदेशी नागरिकलाई सुविधा तथा सहुलियत:**
|
| 63 |
+
(१) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाली मूलका विदेशी नागरिकले नेपालभित्र बसोबास गर्नको लागि आफ्नो बा आफ्नो परिवारको निमित्त तोकिएको शर्तको अधीनमा रही तोकिएको क्षेत्रफलको जागा बा अन्य सम्पत्ति खरिद गर्न सक्नेछ।
|
| 64 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नेपाली मूलको विदेशी नागरिकले खरिद गरेको सम्पत्ति प्रचलित कानूनको अधीनमा रही बिकी गर्न सक्नेछ।
|
| 65 |
+
(३) नेपाली मूलको विदेशी नागरिकको मृत्यु भई अपुताली परेमा र निजको नेपालमा सम्पत्ति भएमा त्यस्तो सम्पत्ति निजको हकबाला परिचयपत्र प्राप्त नेपाली मूलको विदेशी नागरिक भए निजले पाउनेछु र त्यस्तो हकबाला नभए प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 66 |
+
|
| 67 |
+
**११. भिसा सम्बन्धी सुविधा:**
|
| 68 |
+
(१) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपालमा बसोबास गर्ने गैरआबासीय नेपाली नागरिकता प्राप्त व्यक्ति बा परिचयपत्र प्राप्त नेपाली मूलको विदेशी नागरिक बा निजको परिवारलाई दश बर्षसम्मको गैरआबासीय नेपाली भिसा निशुल्क उपलब्ध गराइनेछ।
|
| 69 |
+
(१क) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि गैरआबासीय नेपाली नागरिकता प्राप्त व्यक्तिलाई एकपटकमा दुई बर्ष अबधिको बहुप्रबेश सुविधा सहितको आबासीय भिसा निशुल्क उपलब्ध गराइनेछ।
|
| 70 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दिइएको भिसाको अबधि आवश्यकता अनुसार थप गर्न सकिनेछ।
|
| 71 |
+
|
| 72 |
+
**१२. कर नलाग्ने:**
|
| 73 |
+
प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायको विषयमा देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 74 |
+
(क) गैर आवासीय नेपालीले लगानी गर्दाको पूँजी रकममा कुनै कर लाग्ने छैन,
|
| 75 |
+
(ख) गैर आवासीय नेपालीले निजको नजिकको नातेदार नेपाली नागरिकलाई निजी प्रयोगको लागि एक आर्थिक वर्षमा पन्ध्र लाख रुपैयाँमा नवढ्ने गरी नेपाल राष्ट्र बैङ्गबाट वित्तीय कारोबार गर्न इजाजतपत्रप्राप्त कुनै बाणिज्य बैङ्ग बा वित्तीय संस्था मार्फत पटाएको रकममा त्यस्तो रकम प्राप्त गर्दाको बखत कुनै कर लाग्ने छैन,
|
| 76 |
+
(ग) गैर आवासीय नेपालीले नाफा आर्जन नगर्ने गरी खडा भएको कुनै सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक, साँस्कृतिक, परोपकारी, खेलकूद बा दैबी प्रकोपको उद्धार कार्यसँग सम्बन्धित संस्थालाई नेपाल राष्ट्र बैङ्गबाट इजाजतपत्र प्राप्त कुनै बाणिज्य बैङ्ग बा वित्तीय संस्था मार्फत पटाएको रकममा त्यस्तो रकम प्राप्त गर्दाको बखत कुनै कर लाग्ने छैन।
|
| 77 |
+
|
| 78 |
+
**१३. उद्योग बा व्यवसाय सञ्चालन गर्न पाउने:**
|
| 79 |
+
यस ऐन बमोजिम लगानी गर्ने नेपाली मूलको विदेशी नागरिकले नेपाली नागरिक सरह नेपालमा उद्योग बा व्यवसाय सञ्चालन गर्न पाउनेछ।
|
| 80 |
+
|
| 81 |
+
**१४. प्रचलित कानून बमोजिमको सुविधा पाउने:**
|
| 82 |
+
प्रचलित कानून बमोजिम कुनै विदेशी नागरिकले पर���वर्त्य विदेशी मुद्रामा नेपालमा लगानी गरे बापत पाउने सुविधा यस ऐन बमोजिम लगानी गर्ने नेपाली मूलका विदेशी नागरिकले पनि पाउनेछ।
|
| 83 |
+
|
| 84 |
+
**१५. सल्लाहकार बोर्ड गटन गर्न सक्ने:**
|
| 85 |
+
(१) विदेशी लगानी सम्बन्धी नीति बा कानूनलाई समयानुकूल बनाउन, गैर आवासीय नेपालीलाई नेपालमा लगानी गर्न उत्प्रेरित गर्ने सम्बन्धमा नेपाल सरकारलाई सुझाव दिन तथा गैर आवासीय नेपालीहरुबीच सुमधुर सम्बन्ध कायम गर्नको लागि नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी गैर आवासीय नेपाली संस्थाको समेत प्रतिनिधित्व हुने गरी बढीमा सातजना रहेको एक सल्लाहकार बोर्डको गटन गर्न सक्नेछ।
|
| 86 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको सल्लाहकार बोर्डको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तथा कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 87 |
+
|
| 88 |
+
**१६. गैर आवासीय नेपाली संघ सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 89 |
+
(१) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि गैर आवासीय नेपालीहरुबीच पारस्परिक सहयोग तथा सद्भाव अभिबुद्धि गर्ने उद्देश्यले गैर आवासीय नेपालीहरुले नेपालभित्र गैर आवासीय नेपाली संघ खोल्न पाउने छन्।
|
| 90 |
+
(२) गैर आवासीय नेपाली संघको दर्ता तथा अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 91 |
+
|
| 92 |
+
**१७. परिचयपत्र रद् हुने:**
|
| 93 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि बिदेशमा बस्ने नेपाली नागरिकले बिदेशी मुलुकको नागरिकता लिएमा निजले यस ऐन बमोजिम प्राप्त गरेको परिचयपत्र स्वतः रद् हुने छ।
|
| 94 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परिचय पत्र रद् भएमा बिदेशमा बस्ने नेपाली नागरिकले सो हैसियतमा यस ऐन बमोजिमको कुनै सुबिधा तथा सहुलियत पाउने छैन।
|
| 95 |
+
|
| 96 |
+
**१८. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 97 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
|
section_14_pdf_18.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,417 @@
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|
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| 1 |
+
# कृषि तथा वन विज्ञान विश्वविद्यालय ऐन, २०६७
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 5 |
+
२०६७।३।३
|
| 6 |
+
१. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 7 |
+
२०७२।११।१३
|
| 8 |
+
२. शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७
|
| 9 |
+
२०७७।०३।११
|
| 10 |
+
३. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 11 |
+
२०६२।०४।१४
|
| 12 |
+
|
| 13 |
+
---
|
| 14 |
+
|
| 15 |
+
## सम्बत् २०६७ सालको ऐन नं. ३
|
| 16 |
+
|
| 17 |
+
## कृषि तथा वन विज्ञान विश्वविद्यालयको सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 18 |
+
|
| 19 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 20 |
+
देशको मेरुदण्डको रूपमा रहेको कृषि क्षेत्रको सर्वाहोण विकास गर्न र कृषिको आधुनिकीकरण गर्दै ग्रामीण जनसमुदायको सामाजिक तथा आर्थिक स्तर उठाउन कृषि, वन, पशु विज्ञान जस्ता क्षेत्रसँग सम्बन्धित विषयको एकीकृत रूपले अध्ययन, अध्यापन र अनुसन्धान गराई मुलुकभित्रै उच्चस्तरको प्राज्ञिक तथा सीपयुक्त दक्ष जनशक्ति उत्पादन गर्न नेपाल सरकारको लगानीमा कृषि तथा वन विज्ञान विश्वविद्यालयको स्थापना र सञ्चालन गर्ने सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
नेपालको अन्तरिम संविधान, २०६३ को धारा ६३ को उपधारा (१) बमोजिम संविधान सभाले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
---
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
## परिच्छेद-१
|
| 27 |
+
**प्रारम्भिक**
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
१. **संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
|
| 30 |
+
(१) यस ऐनको नाम "कृषि तथा वन विज्ञान विश्वविद्यालय ऐन, २०६७" रहेको छ।
|
| 31 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
२. **परिभाषा:**
|
| 34 |
+
विषय वा प्रसहले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 35 |
+
(क) "विश्वविद्यालय" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको कृषि तथा वन विज्ञान विश्वविद्यालय सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(ख) "सभा" भन्नाले दफा ७ बमोजिमको विश्वविद्यालय सभा सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
(ग) "प्राज्ञिक परिषद्" भन्नाले दफा १० बमोजिमको प्राज्ञिक परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(घ) "कार्यकारी परिषद्" भन्नाले दफा १२ बमोजिमको कार्यकारी परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
(ङ) "सेवा आयोग" भन्नाले दफा २१ बमोजिमको सेवा आयोग सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
(च) "संकाय" भन्नाले दफा १४ बमोजिमको संकाय सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
(छ) "अनुसन्धान केन्द्र" भन्नाले दफा १४ बमोजिमको अनुसन्धान केन्द्र सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(ज) "विद्यापरिषद्" भन्नाले दफा १६ बमोजिमको विद्यापरिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 43 |
+
(झ) "क्याम्पस" भन्नाले विश्वविद्यालयको आहिक क्याम्पस सम्झनु पर्छ र सो शब्दले विश्वविद्यालयबाट सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसलाई समेत जनाउँछ।
|
| 44 |
+
(ज) "पाठ्यक्रम विकास केन्द्र" भन्नाले दफा १६ बमोजिमको पाठ्यक्रम विकास केन्द्र सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
(ट) "कुलपति" भन्नाले दफा २२ बमोजिमको कुलपति सम्झनु पर्छ।
|
| 46 |
+
(ट) "सह-कुलपति" भन्नाले दफा २३ बमोजिमको सह-कुलपति सम्झनु पर्छ।
|
| 47 |
+
(ड) "उप-कुलपति" भन्नाले दफा २४ बमोजिमको उप-कुलपति सम्झनु पर्छ।
|
| 48 |
+
(ड) "रजिष्ट्रार" भन्नाले दफा २४ बमोजिमको रजिष्ट्रार सम्झनु पर्छ।
|
| 49 |
+
(ण) "डीन" भन्नाले संकायका प्रमुख सम्झनु पर्छ।
|
| 50 |
+
(त) "निर्देशक" भन्नाले दफा २७ बमोजिमको निर्देशक सम्झनु पर्छ।
|
| 51 |
+
(थ) "शिक्षक" भन्नाले विश्वविद्यालयमा शिक्षा प्रदान गर्ने वा अनुसन्धान गर्ने गराउने प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, उप-प्राध्यापक तथा सहायक प्राध्यापक सम्झनु पर्छ र सो शब्दले विश्वविद्यालयका विभिन्न तहका प्रशिक्षक तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा शिक्षक भनी तोकिएका व्यक्तिलाई समेत जनाउँछ।
|
| 52 |
+
(द) "कर्मचारी" भन्नाले विश्वविद्यालय सञ्चालन सम्बन्धमा व्यवस्थापकीय एवं सहयोगीको कार्य गर्ने गराउने शिक्षक बाहेकका व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 53 |
+
(ध) "विद्यार्थी" भन्नाले क्याम्पसमा भर्ना भई अध्ययन वा अनुसन्धान गर्ने छात्रा तथा छात्र सम्झनु पर्छ।
|
| 54 |
+
(न) "तोकिएको" वा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको वा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
---
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 59 |
+
**विश्वविद्यालयको स्थापना**
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
३. **विश्वविद्यालयको स्थापना र सञ्चालन:**
|
| 62 |
+
(१) कृषि तथा वन विज्ञानसँग सम्बन्धित विषयको एकीकृत रूपले अध्ययन, अध्यापन र अनुसन्धान गर्ने काम समेतको लागि कृषि तथा वन विज्ञान विश्वविद्यालयको स्थापना गरिएको छ।
|
| 63 |
+
(२) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत नेपाल सरकारबाट अनुदान प्राप्त गरी त्रिभुवन विश्वविद्यालयको आङ्किक क्याम्पसको रूपमा रहेको चितवन जिल्लास्थित कृषि तथा पशु विज्ञान अध्ययन संस्थान, रामपुर कृषि क्याम्पस र मकबानपुर जिल्लामा सञ्चालित हेटौंडा वन क्याम्पस, हेटौंडालाई संयुक्त रूपमा समावेश गरी कृषि तथा पशु विज्ञान अध्ययन संस्थान र रामपुर कृषि क्याम्पस परिसरमा यो विश्वविद्यालयको स्थापना गरिनेछ।
|
| 64 |
+
(३) विश्वविद्यालयको केन्द्रीय कार्यालय चितवन जिल्लामा रहनेछ।
|
| 65 |
+
|
| 66 |
+
४. **विश्वविद्यालय स्वशासित र सङ्गठित संस्था हुने:**
|
| 67 |
+
(१) विश्वविद्यालय अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र सङ्गठित संस्था हुनेछ।
|
| 68 |
+
(२) विश्वविद्यालयको सबै काम कारबाहीको निमित्त आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 69 |
+
(३) विश्वविद्यालयले व्यक्ति स��ह चल, अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न बा अन्य किसिमको ब्यबस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 70 |
+
(४) विश्वविद्यालयले व्यक्ति सरह नालिस उजूर गर्न र विश्वविद्यालय उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजूर लाग्न सक्नेछ।
|
| 71 |
+
(४) विश्वविद्यालयले व्यक्ति सरह करार गर्न, करार बमोजिमको अधिकार प्रयोग गर्न तथा दायित्व निर्वाह गर्न सक्नेछ।
|
| 72 |
+
|
| 73 |
+
---
|
| 74 |
+
|
| 75 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 76 |
+
**विश्वविद्यालयका सङ्गठन तथा पदाधिकारी**
|
| 77 |
+
|
| 78 |
+
४. **विश्वविद्यालयको सङ्गठन:**
|
| 79 |
+
विश्वविद्यालयको सङ्गठन देहाय बमोजिम हुनेछ र यिनीहरूको सामूहिक रूप नै विश्वविद्यालयको स्वरूप हुनेछ:-
|
| 80 |
+
(क) सभा
|
| 81 |
+
(ख) प्राज्ञिक परिषद्
|
| 82 |
+
(ग) कार्यकारी परिषद्
|
| 83 |
+
(घ) सेवा आयोग
|
| 84 |
+
(ङ) संकाय
|
| 85 |
+
(च) अनुसन्धान केन्द्र
|
| 86 |
+
(छ) विद्यापरिषद्
|
| 87 |
+
(ज) क्याम्पस
|
| 88 |
+
(झ) पाठ्यक्रम विकास केन्द्र
|
| 89 |
+
(ज) तोकिएका अन्य निकायहरू।
|
| 90 |
+
|
| 91 |
+
६. **विश्वविद्यालयका पदाधिकारीहरू:**
|
| 92 |
+
विश्वविद्यालयमा देहाय बमोजिमका पदाधिकारीहरू रहनेछन्:-
|
| 93 |
+
(क) कुलपति
|
| 94 |
+
(ख) सह-कुलपति
|
| 95 |
+
(ग) उप-कुलपति
|
| 96 |
+
(घ) सेवा आयोगको अध्यक्ष
|
| 97 |
+
(ङ) रजिष्ट्रार
|
| 98 |
+
(च) डीन
|
| 99 |
+
(छ) निर्देशक
|
| 100 |
+
(ज) तोकिएका अन्य पदाधिकारीहरू।
|
| 101 |
+
|
| 102 |
+
---
|
| 103 |
+
|
| 104 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 105 |
+
**सभाको गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 106 |
+
|
| 107 |
+
९. **सभाको गठन:**
|
| 108 |
+
(१) विश्वविद्यालयमा सर्वोच्च निकायको रूपमा एक सभा रहनेछ।
|
| 109 |
+
(२) सभाको गठन देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 110 |
+
(क) कुलपति - अध्यक्ष
|
| 111 |
+
(ख) सह-कुलपति - उपाध्यक्ष
|
| 112 |
+
(ग) उप-कुलपति - सदस्य
|
| 113 |
+
(घ) सदस्य, राष्ट्रिय योजना आयोग (शिक्षा, कृषि र बन हेर्ने) - सदस्य
|
| 114 |
+
(ङ) अध्यक्ष, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग - सदस्य
|
| 115 |
+
(च) उप-कुलपति, नेपाल विज्ञान तथा प्रविधि प्रज्ञा प्रतिष्ठान - सदस्य
|
| 116 |
+
(छ) अन्य विश्वविद्यालयका उप-कुलपतिहरू मध्येबाट एकजना - सदस्य
|
| 117 |
+
(ज) सचिव, शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय - सदस्य
|
| 118 |
+
(झ) सचिव, कृषि तथा पशुपन्छी विकास मन्त्रालय - सदस्य
|
| 119 |
+
(ज) सचिव, बन तथा वातावरण मन्त्रालय - सदस्य
|
| 120 |
+
(ट) सचिव, अर्थ मन्त्रालय - सदस्य
|
| 121 |
+
(ड) डीन - सदस्य
|
| 122 |
+
(ढ) निर्देशक - सदस्य
|
| 123 |
+
(ण) कार्यकारी निर्देशक, नेपाल कृषि अनुसन्धान परिषद् - सदस्य
|
| 124 |
+
(त) नेपाल प्राध्यापक संघको केन्द्रीय अध्यक्ष - सदस्य
|
| 125 |
+
(थ) विश्वविद्यालको केन्द्रीय कार्यालय रहेको नगर कार्यपालिकाको प्रमुख र उपप्रमुख - सदस्य
|
| 126 |
+
(ध) निर्देशक, पाठ्यक्रम विकास केन्द्र - सदस्य
|
| 127 |
+
(न) कृषि, बन तथा पशु विज्ञानको क्षेत्रमा विशिष्ट योगदान पुन्याएका व्यत्क्रिहरूमध्येवाट कम्तीमा एकजना महिला सहित तीनजना - सदस्य
|
| 128 |
+
(प) प्रत्येक संकायवाट एक/एकजनाको प्रतिनिधित्व हुने गरी शिक्षक प्रतिनिधिहरू - सदस्य
|
| 129 |
+
(फ) विश्वविद्यालय स्वतन्त्र विद्यार्थी युनियनको सभापति - सदस्य
|
| 130 |
+
(ब) शिक्षाप्रेमी, उद्योगपति तथा चन्दादाताहरू मध्येवाट तीनजना - सदस्य
|
| 131 |
+
(भ) कर्मचारी प्रतिनिधिमध्येवाट एकजना - सदस्य
|
| 132 |
+
(म) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिव
|
| 133 |
+
|
| 134 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमका पदेन सदस्यहरू बाहेक अन्य सदस्यहरूको मनोनयन कार्यकारी परिषद्को सिफारिसमा कुलपतिबाट हुनेछ।
|
| 135 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिमका मनोनीत सदस्यहरूको पदाबधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 136 |
+
(४) कुनै कारणले मनोनीत सदस्यहरूको पद रिक्त हुन गएमा बाँकी अबधिको लागि उपदफा (३) बमोजिमको प्रक्रिया पूरा गरी अर्को व्यक्तिलाई मनोनयन गरिनेछ।
|
| 137 |
+
|
| 138 |
+
५. **सभाको बैठक:**
|
| 139 |
+
(१) सभाको बैठक बर्षको कम्तीमा दुई पटक अनिबार्य रूपमा बस्नेछ।
|
| 140 |
+
(२) सभाको बैठक सभाको अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 141 |
+
(३) सभाको बैठक हुनुभन्दा कम्तीमा पन्ध्र दिन अगावै बैठकमा छलफल हुने विषयको कार्यसूची सहितको सूचना सभाको सदस्य-सचिबले सभाका सबै सदस्यहरूलाई दिनेछ।
|
| 142 |
+
(४) सभामा तत्काल कायम रहेका कूल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्यहरू उपस्थित भएमा बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 143 |
+
(४) सभाको बैठकको अध्यक्षता सभाको अध्यक्षले, निजको अनुपस्थितिमा सभाको उपाध्यक्षले र अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष दुबैको अनुपस्थितिमा उप-कुलपतिले गर्नेछ।
|
| 144 |
+
(६) सभाको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकमा अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णायक मत दिनेछ।
|
| 145 |
+
(७) सभाको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि सभा आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 146 |
+
|
| 147 |
+
९. **सभाको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 148 |
+
सभाको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 149 |
+
(क) विश्वविद्यालयको नीति निर्धारण गर्ने,
|
| 150 |
+
(ख) विश्वविद्यालय र सो अन्तर्गतका निकायलाई मार्गदर्शन गर्ने,
|
| 151 |
+
(ग) विश्वविद्यालयबाट प्रदान गरिने उपाधि निर्धारण गर्ने र त्यस्तो उपाधि प्रदान गर्ने,
|
| 152 |
+
(घ) विश्वविद्यालयको दीर्घकालीन योजना, वार्षिक बजेट र कार्यक्रम स्वीकृत गर्ने,
|
| 153 |
+
(ङ) विश्वविद्यालय सम्बन्धी नियम पारित गर्ने,
|
| 154 |
+
(च) विश्वविद्यालय अन्तर्गतका निकायको बार्षिक प्रतिवेदनमाथि छलफल गर्ने र त्यस्ता निकायको कार्यकमको मूल्याङ्गन गर्ने,
|
| 155 |
+
(छ) विश्वविद्यालयको लेखापरीक्षण प्रतिवेदनमाथि छलफल गर्ने र स्वीकृति दिने,
|
| 156 |
+
(ज) आवश्यकतानुसार विभिन्न समिति, उप-समिति बा कार्य टोलीको गठन गर्ने,
|
| 157 |
+
(झ) तोकिए बमोजिम अन्य कामहरू गर्ने।
|
| 158 |
+
|
| 159 |
+
---
|
| 160 |
+
|
| 161 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 162 |
+
**प्राज्ञिक परिषद्को गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 163 |
+
|
| 164 |
+
१०. **प्राज्ञिक परिषद्को गठन:**
|
| 165 |
+
(१) विश्वविद्यालयको शैक्षिक तथा प्राज्ञिक कार्यलाई व्यवस्थित गर्ने निकायको रूपमा काम गर्न एक प्राज्ञिक परिषद् रहनेछ।
|
| 166 |
+
(२) प्राज्ञिक परिषद्को गठन देहाय बमोजिम हुनेछ।-
|
| 167 |
+
(क) उप-कुलपति - अध्यक्ष
|
| 168 |
+
(ख) रजिष्ट्रार - सदस्य
|
| 169 |
+
(ग) डीन - सदस्य
|
| 170 |
+
(घ) विभिन्न संकायका विभागीय प्रमुखहरूमध्येवाट तीनजना - सदस्य
|
| 171 |
+
(ङ) कृषि तथा वन विज्ञान क्षेत्रमा विशिष्ट योगदान पुन्याएका व्यक्तिहरूमध्येवाट कम्तीमा एकजना महिला सहित दुईजना - सदस्य
|
| 172 |
+
(च) परीक्षा नियन्त्रक - सदस्य
|
| 173 |
+
(छ) निर्देशक - सदस्य
|
| 174 |
+
(ज) डीनहरूमध्येवाट उप-कुलपतिले तोकेको डीन - सदस्य-सचिव
|
| 175 |
+
|
| 176 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमका पदेन सदस्य बाहेक अन्य सदस्यको मनोनयन उप-कुलपतिवाट हुनेछ।
|
| 177 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिमका मनोनीत सदस्यको पदावधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 178 |
+
(४) कुनै कारणले प्राज्ञिक परिषद्का मनोनीत सदस्यको पद रिक्त हुन गएमा बाँकी अबधिको लागि उपदफा (३) बमोजिमको प्रक्रिया पूरा गरी अर्को व्यक्तिलाई मनोनयन गरिनेछ।
|
| 179 |
+
(६) प्राज्ञिक परिषद्को बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्मको लागि बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि प्राज्ञिक परिषद् आफैले निर्धारण गर्न सक्नेछ।
|
| 180 |
+
|
| 181 |
+
११. **प्राज्ञिक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 182 |
+
प्राज्ञिक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 183 |
+
(क) विश्वविद्यालयको पाठ्यक्रम निर्धारण तथा स्वीकृत गर्ने,
|
| 184 |
+
(ख) विश्वविद्यालय अन्तर्गत सञ्चालन हुने परीक्षाको किसिम तोक्ने,
|
| 185 |
+
(ग) विश्वविद्यालयको शैक्षिक गुणस्तर निर्धारण तथा कायम गर्ने,
|
| 186 |
+
(घ) अनुसन्धान सम्बन्धी नीति तर्जुमा गर्ने र अनुसन्धान कार्यकमलाई स्वीकृति प्रदान गर्ने,
|
| 187 |
+
(ङ) विश्वविद्यालयमा अध्ययन तथा अध्यापन गरिने बिषयहरूमा भर्ना हुन चाहिने योग्यता, बिघार्थी भर्ना संस्था र भर्ना हुन चाहिने आधार तोक्ने,
|
| 188 |
+
(च) प्राज्ञिक बिषयमा कार्यकारी परिषद्लाई राय सल्लाह दिने,
|
| 189 |
+
(छ) विश्वविद्यालयबाट दिइने मानार्थ उपाधिहरूको लागि सभामा सिफारिस गर्ने,
|
| 190 |
+
(ज) तोकिए बमोजिम अन्य कामहरू गर्ने।
|
| 191 |
+
|
| 192 |
+
---
|
| 193 |
+
|
| 194 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 195 |
+
**कार्यकारी परिषद्को गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 196 |
+
|
| 197 |
+
१२. **कार्यकारी परिषद्को गठ���:**
|
| 198 |
+
(१) विश्वविद्यालयको कार्यकारी निकायको रूपमा काम गर्न एक कार्यकारी परिषद् रहनेछ।
|
| 199 |
+
(२) कार्यकारी परिषद्को गठन देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 200 |
+
(क) उप-कुलपति - अध्यक्ष
|
| 201 |
+
(ख) डीनहरूमध्येबाट तीनजना - सदस्य
|
| 202 |
+
(ग) शिक्षकहरूमध्येबाट दुईजना - सदस्य
|
| 203 |
+
(घ) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिब
|
| 204 |
+
|
| 205 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमका पदेन सदस्य बाहेक अन्य सदस्यको मनोनयन उप-कुलपतिको सिफारिसमा सभाबाट हुनेछ।
|
| 206 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिमका मनोनीत सदस्यको पदाबधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 207 |
+
(४) कुनै कारणले मनोनीत सदस्यको पद रिक्त भएमा बाँकी अबधिका लागि उपदफा (३) बमोजिमको प्रक्रिया पूरा गरी अर्को व्यक्तिलाई मनोनयन गरिनेछ।
|
| 208 |
+
(६) कार्यकारी परिषद्को बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्मको लागि बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि कार्यकारी परिषद् आफैले निर्धारण गर्न सक्नेछ।
|
| 209 |
+
|
| 210 |
+
१३. **कार्यकारी परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 211 |
+
कार्यकारी परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 212 |
+
(क) सभाको निर्णय र निर्देशनहरू कार्यान्वयन गर्ने, गराउने,
|
| 213 |
+
(ख) विश्वविद्यालयको बार्षिक कार्यकम, बजेट, प्रगति बिबरण, लेखापरीक्षण प्रतिवेदन र अन्य प्रस्तावहरू तयार गरी स्वीकृतिको लागि सभामा पेश गर्ने,
|
| 214 |
+
(ग) विश्वविद्यालयको कोष तथा चल, अचल सम्पत्तिको सञ्चालन, रेखदेख र संरक्षण गर्ने,
|
| 215 |
+
(घ) सभाको नीति निर्देशनको अधीनमा रही विश्वविद्यालयको चल, अचल सम्पत्ति बेचबिखन गर्ने, ठेक्कापट्टामा दिने, लिने काम गर्ने,
|
| 216 |
+
(ङ) विश्वविद्यालयद्वारा सञ्चालित कार्यकमहरूको समन्वय, रेखदेख तथा निरीक्षण गर्ने र सोको प्रतिवेदन सभामा पेश गर्ने,
|
| 217 |
+
(च) विश्वविद्यालय सम्बन्धी नियमहरूको मस्यौदा तयार गरी स्वीकृतिको लागि सभामा पेश गर्ने,
|
| 218 |
+
(छ) सेवा आयोगको सिफारिसमा विश्वविद्यालयको लागि आवश्यक शिक्षक तथा कर्मचारीहरूको नियुक्ति र बढुवा गर्ने,
|
| 219 |
+
(ज) बिघार्थी शुल्क निर्धारण गर्ने,
|
| 220 |
+
(झ) विश्वविद्यालयको लागि प्रदान गरिएका आर्थिक तथा अन्य सहयोग ग्रहण गर्ने,
|
| 221 |
+
(ज) तोकिए बमोजिम अन्य कामहरू गर्ने।
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
---
|
| 224 |
+
|
| 225 |
+
## परिच्छेद-७
|
| 226 |
+
**संकाय, अनुसन्धान केन्द्र तथा अन्य निकाय**
|
| 227 |
+
|
| 228 |
+
१४. **संकाय:**
|
| 229 |
+
(१) विश्वविद्यालयबाट सञ्चालन गरिने उच्च शिक्षाको लागि कृषि तथा बन बिज्ञानसँग सम्बधित बिषयमा तोकिए बमोजिमका संकायहरू रहनेछन्।
|
| 230 |
+
(२) संकायको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 231 |
+
|
| 232 |
+
१४. **अनुसन्धान केन्द्र:**
|
| 233 |
+
(१) ��िश्वविद्यालयले कृषि तथा वन विज्ञानसँग सम्बन्धित विषयमा अनुसन्धान गर्नको लागि आवश्यकतानुसार अनुसन्धान केन्द्रको स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 234 |
+
(२) अनुसन्धान केन्द्रको स्थापना, काम, कर्तव्य र अधिकार तथा सञ्चालन सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 235 |
+
|
| 236 |
+
१६. **विद्यापरिषद्:**
|
| 237 |
+
(१) प्रत्येक संकायमा शैक्षिक तथा प्राज्ञिक कार्यकमहरूको सञ्चालनको लागि तोकिए बमोजिम एक विद्यापरिषद् रहनेछ।
|
| 238 |
+
(२) विद्यापरिषद् अन्तर्गत तोकिए बमोजिमका विषय समितिहरू रहनेछन्।
|
| 239 |
+
(३) विद्यापरिषद् र सो अन्तर्गत रहने समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 240 |
+
|
| 241 |
+
१७. **क्याम्पस:**
|
| 242 |
+
(१) विश्वविद्यालयले विभिन्न विषयमा उच्च शिक्षा प्रदान गर्नको लागि आवश्यकता अनुसार क्याम्पसको स्थापना तथा सञ्चालन गर्न सक्नेछ।
|
| 243 |
+
(२) क्याम्पसको स्थापना र सञ्चालन सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 244 |
+
|
| 245 |
+
१६. **पाठ्यक्रम विकास केन्द्र:**
|
| 246 |
+
(१) विश्वविद्यालयमा अध्ययन र अध्यापन गरिने विभिन्न विषयहरूको पाठ्यक्रमको निर्धारण तथा विकासको लागि एक पाठ्यक्रम विकास केन्द्र रहनेछ।
|
| 247 |
+
(२) पाठ्यक्रम विकास केन्द्रको स्थापना र काम, कर्तव्य तथा अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 248 |
+
|
| 249 |
+
१९. **विश्वविद्यालयसँग सम्बन्धन गर्न सक्ने:**
|
| 250 |
+
(१) निजी क्षेत्रका कुनै क्याम्पसले विश्वविद्यालयसँग सम्बन्धन प्राप्त गरी सञ्चालन हुन चाहेमा विश्वविद्यालयले तोकिए बमोजिम त्यस्ता क्याम्पसलाई सम्बन्धन प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 251 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसले विश्वविद्यालयद्वारा तोकिएको शर्तहरूको पालना गर्नु पर्नेछ।
|
| 252 |
+
|
| 253 |
+
२०. **अन्य विश्वविद्यालयको क्याम्पस सञ्चालन गर्ने सम्बन्धी विशेष व्यवस्था:**
|
| 254 |
+
(१) कुनै विश्वविद्यालयका आङ्गिक तथा सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसले विश्वविद्यालयसँग आबद्ध भई आङ्गिक तथा सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसको रूपमा रहन सञ्चालक समितिको सिफारिस सहित निवेदन गरेमा सो क्याम्पसलाई विश्वविद्यालयको आङ्गिक तथा सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसको रूपमा मान्यता दिन प्रक्रिया अगाडि बढाइनेछ।
|
| 255 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको प्रक्रिया विश्वविद्यालयले तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 256 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम कुनै क्याम्पस विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको रूपमा सञ्चालन भएपछि त्यस्तो क्याम्पसको नाममा रहेको सम्पत्ति समेत वि��्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसमा सर्नेछ।
|
| 257 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिम कुनै क्याम्पस विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको रूपमा सञ्चालन भएपछि सो क्याम्पसमा कार्यरत शिक्षक तथा कर्मचारीहरू विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको शिक्षक तथा कर्मचारीको रूपमा रहनेछन्।
|
| 258 |
+
(४) उपदफा (४) बमोजिम कुनै शिक्षक तथा कर्मचारी विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको शिक्षक तथा कर्मचारीको रूपमा रहन नचाहेमा सभाले निर्धारण गरेको बा सम्बन्धित विश्वविद्यालयको स्वीकृति लिएको एक बर्षभित्र सो कुराको जानकारी सम्बन्धित विश्वविद्यालयलाई गराउनु पर्नेछ र त्यस्तो अबस्थामा विश्वविद्यालयले सम्बन्धित विश्वविद्यालयसँग परामर्श गरी त्यस्ता शिक्षक तथा कर्मचारीलाई विश्वविद्यालयको शिक्षक तथा कर्मचारीको रूपमा काममा लगाउन सक्नेछ।
|
| 259 |
+
(६) उपदफा (४) बमोजिम विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको शिक्षक तथा कर्मचारीको रूपमा रहने शिक्षक तथा कर्मचारीले सम्बन्धित क्याम्पसमा गरेको स्थायी सेवा विश्वविद्यालय अन्तर्गतको आङ्गिक क्याम्पसमा गरेको मानिनेछ र सोही बमोजिम निजहरूको सेवा अबधि गणना हुनेछ।
|
| 260 |
+
(७) उपदफा (४) बा (४) बमोजिम कुनै शिक्षक तथा कर्मचारी विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसमा बहाल रहेमा निजहरूलाई मर्का पर्ने गरी साविकको पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेवा शर्तमा कुनै परिवर्तन गरिने छैन।
|
| 261 |
+
|
| 262 |
+
---
|
| 263 |
+
|
| 264 |
+
## परिच्छेद-८
|
| 265 |
+
**सेवा आयोग**
|
| 266 |
+
|
| 267 |
+
२१. **सेवा आयोग:**
|
| 268 |
+
(१) विश्वविद्यालयको शिक्षक तथा कर्मचारीहरूको नियुक्ति तथा बढुवाका लागि सिफारिस गर्न एक सेवा आयोग रहनेछ।
|
| 269 |
+
(२) सेवा आयोगको गठन देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 270 |
+
(क) कुलपतिबाट नियुक्त व्यक्ति - अध्यक्ष
|
| 271 |
+
(ख) लोक सेवा आयोगको सदस्य - सदस्य
|
| 272 |
+
(ग) शिक्षकहरूमध्येबाट एकजना - सदस्य
|
| 273 |
+
|
| 274 |
+
(३) उपदफा (१) को खण्ड (क) र (ग) बमोजिमका अध्यक्ष र सदस्यको नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्न कुलपतिबाट सह-कुलपतिको अध्यक्षतामा सभाका दुईजना सदस्यहरू रहेको एक समिति गठन हुनेछ र सो समितिको सिफारिसमा कुलपतिबाट अध्यक्ष र सदस्यको नियुक्ति हुनेछ।
|
| 275 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम नियुक्त हुने अध्यक्ष तथा सदस्यको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 276 |
+
(४) सेवा आयोगको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 277 |
+
(६) सेवा आयोगका अध्यक्ष र सदस्यको पारिश्रमिक, सुविधा र सेबाका अन्य शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 278 |
+
(७) सेवा आयोगको बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्मका लागि बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि सेवा आयोग आफैले निर्धारण गर्नेछ।
|
| 279 |
+
|
| 280 |
+
---
|
| 281 |
+
|
| 282 |
+
## परिच्छेद-९
|
| 283 |
+
**विश्वविद्यालयका पदाधिकारी शिक्षक तथा कर्मचारी**
|
| 284 |
+
|
| 285 |
+
२२. **कुलपति:**
|
| 286 |
+
(१) प्रधानमन्त्री विश्वविद्यालयको कुलपति हुनेछ।
|
| 287 |
+
(२) कुलपति विश्वविद्यालयको प्रमुख हुनेछ। निज उपस्थित रहेको अवस्थामा निजले विश्वविद्यालयको दीक्षान्त समारोहमा अध्यक्षको आसन ग्रहण गर्नेछ।
|
| 288 |
+
(३) कुलपतिले आवश्यकता अनुसार विश्वविद्यालय निरीक्षण गर्न र निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 289 |
+
|
| 290 |
+
२३. **सह-कुलपति:**
|
| 291 |
+
(१) शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्री बा राज्यमन्त्री विश्वविद्यालयको सह-कुलपति हुनेछ।
|
| 292 |
+
(२) कुलपतिको अनुपस्थितिमा सह-कुलपतिले विश्वविद्यालयको दीक्षान्त समारोहमा अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 293 |
+
(३) सह-कुलपतिले आवश्यकता अनुसार विश्वविद्यालयको निरीक्षण गरी विश्वविद्यालयलाई निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 294 |
+
|
| 295 |
+
२४. **उप-कुलपति:**
|
| 296 |
+
(१) उप-कुलपति विश्वविद्यालयमा पूरा समय काम गर्ने प्रमुख पदाधिकारी हुनेछ।
|
| 297 |
+
(२) उप-कुलपतिको पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्न कुलपतिले सभाका सदस्यहरूमध्येबाट शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालयको सचिव समेत रहने गरी तीन सदस्यीय एक समिति गठन गर्नेछ।
|
| 298 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको समितिले कृषि तथा बन विज्ञानको क्षेत्रमा विशेष अनुभव भएका व्यक्तिहरूमध्येवाट प्रत्येक क्षेत्रबाट एकजना पर्ने गरी तीनजना व्यक्तिको नाम सिफारिस गर्नु पर्नेछ र यसरी सिफारिस भएका व्यक्तिहरूमध्येवाट कुलपतिले उप-कुलपतिको नियुक्ति गर्नेछ।
|
| 299 |
+
(४) विश्वविद्यालयको सबै काम कारबाही उपर उप-कुलपतिको सामान्य नियन्त्रण रहनेछ र निजले विश्वविद्यालयको काम कारबाहीमा निर्देशन दिन र रेखदेख गर्न सक्नेछ।
|
| 300 |
+
(४) उप-कुलपतिको पदावधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 301 |
+
(६) कुलपति र सह-कुलपतिको अनुपस्थितिमा विश्वविद्यालयको दीक्षान्त समारोहमा उप-कुलपतिले अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 302 |
+
(७) उप-कुलपतिले सभाको निर्णय र निर्देशनहरू कार्यान्वयन गर्नु गराउनु पर्नेछ।
|
| 303 |
+
(८) यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा कुनै निकाय बा अधिकारीले गर्ने भनी उल्लेख भएका कामहरू बाहेक अन्य कामहरू उप-कुलपतिले गर्नेछ। त्यस्तो कामको जानकारी उप-कुलपतिले तुरुन्त कुलपतिलाई गराउनु पर्नेछ र लगत्तै बस्ने सभाको बैठकमा अनुमोदन गराउनु पर्नेछ।
|
| 304 |
+
(९) उप-कुलपतिको अनुपस्थ���तिमा निजको काम कुलपतिबाट व्यवस्था भए बमोजिम हुनेछ।
|
| 305 |
+
(१०) उप-कुलपतिको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तथा पारिश्रमिक, सुविधा र सेबाका अन्य शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 306 |
+
|
| 307 |
+
२४. **रजिष्ट्रार:**
|
| 308 |
+
रजिष्ट्रारको नियुक्ति उप-कुलपतिको सिफारिसमा कुलपतिबाट हुनेछ।
|
| 309 |
+
|
| 310 |
+
२६. **डीन:**
|
| 311 |
+
डीनको नियुक्ति कार्यकारी परिषद्बाट हुनेछ।
|
| 312 |
+
|
| 313 |
+
२७. **निर्देशक:**
|
| 314 |
+
(१) अनुसन्धान केन्द्र तथा पाठ्यक्रम विकास केन्द्रको प्रमुखको रूपमा काम गर्न छुट्टाछुट्टै निर्देशकहरू रहनेछन्।
|
| 315 |
+
(२) निर्देशकको नियुक्ति कार्यकारी परिषद्ले गर्नेछ।
|
| 316 |
+
|
| 317 |
+
२६. **रजिष्ट्रार, डीन र निर्देशकको सेवा, शर्त, काम, कर्तव्य र अधिकार तथा पारिश्रमिक, सुविधा र सेबाका शर्तहरू:**
|
| 318 |
+
(१) रजिष्ट्रार, डीन र निर्देशक विश्वविद्यालयको पूरा समय काम गर्ने पदाधिकारी हुनेछन्।
|
| 319 |
+
(२) रजिष्ट्रार, डीन र निर्देशकको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 320 |
+
(३) रजिष्ट्रार, डीन र निर्देशकको काम, कर्तव्य, अधिकार तथा पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेबाका अन्य शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 321 |
+
|
| 322 |
+
२९. **अन्य पदाधिकारीहरू:**
|
| 323 |
+
(१) विश्वविद्यालयमा तोकिए बमोजिमका अन्य पदाधिकारीहरू रहनेछन्।
|
| 324 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पदाधिकारीको नियुक्ति, काम, कर्तव्य र अधिकार, पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेबाका अन्य शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 325 |
+
|
| 326 |
+
३०. **पदबाट हटाउन सकिने:**
|
| 327 |
+
(१) उप-कुलपति, सेवा आयोगको अध्यक्ष बा रजिष्ट्रारले आफ्नो पद अनुरुपको जिम्मेबारी पूरा नगरेको, इमान्दारीपूर्वक काम नगरेको बा निजले पद अनुकूलको आचरण नगरेको भनी सभामा तत्काल रहेका एक चौथाई सदस्यहरूले निजलाई पदबाट हटाउन कुलपति समक्ष लिखित निवेदन दिएमा कुलपतिले सभाको कुनै सदस्यको अध्यक्षतामा विश्वविद्यालय अनुदान आयोगको सदस्य र शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालयको सचिव रहेको तीन सदस्यीय एक छानबिन समिति गठन गर्नेछ।
|
| 328 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठित छानबिन समितिले सो सम्बन्धमा आवश्यक छानबिन गरी तीस दिनभित्र आफ्नो प्रतिवेदन कुलपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 329 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको प्रतिवेदन प्राप्त भएपछि कुलपतिले सो प्रतिवेदन सभा समक्ष पेश गर्नेछ।
|
| 330 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम पेश भएको प्रतिवेदन उपर छलफल हुँदा सभाको बैठकमा उपस्थित सदस्यमध्ये सभामा तत्काल कायम रहेका पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्यले उप-कुलपति, सेवा आयोगको अध्यक्ष बा रजिष्ट्रारलाई पदबाट हटाउन निर्णय गरेमा कुलपतिले उप-कुलपति, सेवा आयोगको अध्यक्ष बा रजिष्ट्रारलाई पदबाट हटाउनेछ।
|
| 331 |
+
(५) तरे त्यसरी हटाउनु अघि निजलाई सफाई पेश गर्ने मौकाबाट बधित गरिने छैन।
|
| 332 |
+
(६) उप-कुलपति, सेवा आयोगको अध्यक्ष बा रजिष्ट्रार बाहेक विश्वविद्यालयका अन्य पदाधिकारीलाई उपदफा (१) बमोजिमको आरोपमा छानबिन गर्दा बा पदबाट हटाउँदा अपनाउनु पर्ने प्रक्रिया तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 333 |
+
(७) यस दफा बमोजिम कुनै पदाधिकारी उपर छानबिन शुरु भएमा त्यसको अन्तिम निर्णय नभएसम्मको लागि निजले आफू बहाल रहेको पदको काम गर्न पाउने छैन।
|
| 334 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजिमको पदाधिकारीले गर्ने दैनिक काम सम्पादन गर्नका लागि कुलपतिले विश्वविद्यालयको बरिष्ठतम् पदाधिकारीलाई जिम्मेबारी तोक्न सक्नेछ।
|
| 335 |
+
|
| 336 |
+
३१. **शिक्षक तथा कर्मचारी सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 337 |
+
(१) विश्वविद्यालयमा तोकिए बमोजिम शिक्षक तथा कर्मचारी रहनेछन्।
|
| 338 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका कर्मचारीको नियुक्ति, काम, कर्तव्य र अधिकार पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेबाका शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 339 |
+
|
| 340 |
+
---
|
| 341 |
+
|
| 342 |
+
## परिच्छेद-१०
|
| 343 |
+
**विश्वविद्यालयको कोष, लेखा तथा लेखापरीक्षण**
|
| 344 |
+
|
| 345 |
+
३२. **विश्वविद्यालयको कोष:**
|
| 346 |
+
(१) विश्वविद्यालयको आफ्नो एउटा छुट्टै कोष हुनेछ र सो कोषमा देहायका रकमहरू रहनेछन्:-
|
| 347 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम,
|
| 348 |
+
(ख) विश्वविद्यालय अनुदान आयोगबाट प्राप्त रकम,
|
| 349 |
+
(ग) स्थानीय तहबाट प्राप्त रकम,
|
| 350 |
+
(घ) कुनै व्यक्ति बा संस्थाले चन्दा, दान, दातव्य र आर्थिक सहायता स्वरूप प्रदान गरेको रकम,
|
| 351 |
+
(ड) उद्योग, व्यापार व्यवसायसँग सम्बद्ध व्यक्ति बा संस्थाबाट प्राप्त सहयोग र अनुदान रकम,
|
| 352 |
+
(च) अन्तरराष्ट्रिय संघ, संस्था, विदेशी सरकार बा एजेन्सी बा वित्तीय संस्थाहरूबाट प्राप्त सहयोग एवं ऋणको रकम,
|
| 353 |
+
(छ) शुल्क तथा अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त रकम।
|
| 354 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (च) बमोजिम विश्वविद्यालयले कुनै रकम प्राप्त गर्दा नेपाल सरकारको पूर्वस्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 355 |
+
(३) विश्वविद्यालयको कोषको रकम कार्यकारी परिषद्ले तोकेको कुनै बाणिज्य बैङ्कमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
|
| 356 |
+
(४) विश्वविद्यालयको कोष र खाताको सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 357 |
+
(४) विश्वविद्यालयको सबै खर्चहरू सभाबाट स्वीकृत भए अनुसार उपदफा (१) बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ।
|
| 358 |
+
|
| 359 |
+
३३. **लेखा र लेखापरीक्षण:**
|
| 360 |
+
(१) विश्वविद्यालयले आफ्नो आय-व्ययको लेखा नेपाल सरकारले अपनाएको लेखाप्रणाली अनुसार राख्नु पर्नेछ।
|
| 361 |
+
(२) विश्वविद्यालयले लेखाको तोकिए बमोजिम आन्तरिक नियन्त्रण प्रणालीको व्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
|
| 362 |
+
(३) विश्वविद्यालयको लेखापरीक्षण महालेखा परीक्षकबाट हुनेछ।
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| 363 |
+
|
| 364 |
+
---
|
| 365 |
+
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| 366 |
+
## परिच्छेद-११
|
| 367 |
+
**विविध**
|
| 368 |
+
|
| 369 |
+
३४. **प्रमाणपत्र र उपाधि तथा मान्यता दिने:**
|
| 370 |
+
(१) तोकिएको विषयमा उच्च शिक्षा हासिल गर्ने विद्यार्थी, प्रशिक्षार्थी बा अनुसन्धानकर्तालाई विश्वविद्यालयले तोकिए बमोजिमको प्रमाणपत्र र उपाधि दिन र अनुसन्धानात्मक कार्य गर्ने तथा प्राज्ञिक क्षेत्रमा प्रशंसनीय कार्य गर्ने व्यक्तिलाई मानार्थ उपाधि प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 371 |
+
(२) विश्वविद्यालयले अन्य विश्वविद्यालय बा शैक्षिक संस्थाको शैक्षिक उपाधिलाई मान्यता दिन सक्नेछ।
|
| 372 |
+
|
| 373 |
+
३५. **विश्वविद्यालयमा भर्ना हुन चाहिने योग्यता:**
|
| 374 |
+
(१) विश्वविद्यालयमा भर्ना हुन चाहिने विद्यार्थी बा अनुसन्धानकर्ताको योग्यता तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 375 |
+
(२) विश्वविद्यालयले विद्यार्थी भर्ना गर्दा नेपाल सरकारको नीति अनुरूप महिला, आदिबासी/जनजाति, मधेशी, दलित, अपाङ्ग, पिछडिएको बर्ग बा समुदायका विद्यार्थीलाई तोकिएको प्रतिशतको आधारमा भर्नाको लागि स्थान सुरक्षित गर्नु पर्नेछ।
|
| 376 |
+
|
| 377 |
+
३४क. **निःशुल्क उच्च शिक्षा तथा छात्रवृत्ति:**
|
| 378 |
+
(१) विश्वविद्यालयले तोकेको मापदण्ड पूरा गरी विश्वविद्यालय बा मातहतका आङ्गिक तथा सामुदायिक शैक्षिक संस्थामा भर्ना भएका दलित, सिमान्तीकृत, अपाङ्ग र आर्थिक रूपले बिपन्न विद्यार्थीको लागि उच्च शिक्षा निःशुल्क हुनेछ।
|
| 379 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि आधार, मापदण्ड, बर्गीकरण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 380 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको सुविधा एक विद्यार्थीले प्रत्येक तहमा एकपटक मात्र उपभोग गर्न पाउनेछ।
|
| 381 |
+
(४) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दलित विद्यार्थीको लागि प्राविधिक तथा व्यावसायिक उच्च शिक्षामा भर्नाका लागि तोकिए बमोजिमको सिट सुरक्षित गरिनेछ।
|
| 382 |
+
(४) विश्वविद्यालयले शहिद, बेपत्ता पारिएका र अपाइता भएका व्यक्तिका छोरा, छोरीको लागि प्रचलित कानूनमा व्यवस्था भए बमोजिम उच्च शिक्षाको व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 383 |
+
(६) कक्षा छदेखि कक्षा दशसम्म सामुदायिक विद्यालयमा अध्ययन गरेको विद्यार्थीले उच्च शिक्षामा प्रचलित कानून बमोजिम छात्रवृत्ति पाउनेछ।
|
| 384 |
+
|
| 385 |
+
३६. **राष्ट्रिय शिक्षा नीति अनुरूप कार्य गर्ने:**
|
| 386 |
+
नेपाल सरकारको राष्ट्रिय शिक्षा नीति अनुरूप कार्य सञ्चालन गर्नु विश्वविद्यालयको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 387 |
+
|
| 388 |
+
३७. **काम कारबाही बदर नहुने:**
|
| 389 |
+
विश्वविद्यालयको कुनै पदाधिकारी बा सदस्यको स्थान रिक्त भई बा कुनै पदाधिकारी बा सदस्यको नियुक्ति बा मनोनयनमा त्रुटि भएको कारणले मात्र त्यस्तो काम कारबाही बदर हुने छैन।
|
| 390 |
+
|
| 391 |
+
३८. **असल नियतले गरेको काममा बचाउ:**
|
| 392 |
+
यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम असल नियत लिई गरेको बा गर्न खोजेको कुनै कामको सम्बन्धमा विश्वविद्यालय बा विश्वविद्यालयको कुनै पदाधिकारी उपर मुद्दा चलाउने बा अन्य कारबाही गरिने छैन।
|
| 393 |
+
|
| 394 |
+
३९. **नेपाल सरकारको पूर्वस्वीकृति लिनु पर्ने:**
|
| 395 |
+
विश्वविद्यालयले नेपाल सरकारलाई आर्थिक दायित्व पर्ने गरी कुनै पदाधिकारी, शिक्षक तथा कर्मचारीको दरबन्दी स्वीकृत गर्दा बा त्यस्ता पदाधिकारी, शिक्षक तथा कर्मचारीको पारिश्रमिक तथा सेवा सुविधा थप गर्नु अघि नेपाल सरकार, अर्थ मन्त्रालयको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 396 |
+
|
| 397 |
+
४०. **अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 398 |
+
(१) सभाले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त भएको अधिकारहरूमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार प्राज्ञिक परिषद्, कार्यकारी परिषद् बा उप-कुलपतिलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 399 |
+
(२) प्राज्ञिक परिषद्ले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरूमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार विद्यापरिषद्लाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 400 |
+
(३) कार्यकारी परिषद्ले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरूमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार विश्वविद्यालयका कुनै पदाधिकारी बा समितिलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 401 |
+
(४) सेवा आयोगले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरूमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार विश्वविद्यालयको कुनै समितिलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 402 |
+
|
| 403 |
+
४१. **नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 404 |
+
विश्वविद्यालयले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय मार्फत् राख्नेछ।
|
| 405 |
+
|
| 406 |
+
४२. **विश्वविद्यालय विघटन सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 407 |
+
(१) कुनै कारणले विश्वविद्यालय सञ्चालन हुन नसक्ने भएमा नेपाल सरकारले सभाको सिफारिसमा विश्वविद्यालय विघटन गर्न सक्नेछ।
|
| 408 |
+
(२) उपदफा (१) ��मोजिम विश्वविद्यालय विघटन भएमा विश्वविद्यालयको चल, अचल जायजेथा नेपाल सरकारको हुनेछ।
|
| 409 |
+
|
| 410 |
+
४३. **नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 411 |
+
यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न विश्वविद्यालयले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 412 |
+
|
| 413 |
+
---
|
| 414 |
+
|
| 415 |
+
**द्रष्टव्य:**
|
| 416 |
+
(१) केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा रुपान्तरित भएका शब्दहरू:-
|
| 417 |
+
"नगरपालिका प्रमुख" को सट्टा "नगर कार्यपालिकाको प्रमुख"।
|
section_14_pdf_19.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,107 @@
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| 1 |
+
**नेपाल सन्धि ऐन, २०४७**
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०४७।०६।०१
|
| 5 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
|
| 6 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 7 |
+
११. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 8 |
+
२०६६। १०।०७
|
| 9 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 10 |
+
२०७२। ११।१३
|
| 11 |
+
३. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 12 |
+
२०६२।०४।१४
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
---
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
**२०४७ सालको ऐन नं. १६**
|
| 17 |
+
|
| 18 |
+
"........."
|
| 19 |
+
सन्धि सम्बन्धी कार्यबिधिको व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 20 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 21 |
+
नेपाल "..........." बा नेपाल सरकार पक्ष हुने सन्धि बा सम्झौताको हस्ताक्षर, अनुमोदन, सम्मिलन, स्वीकृति बा समर्थन सम्बन्धी कार्यबिधि तथा त्यस्तो सन्धि बा सम्झौताको कार्यान्वयनको सम्बन्धमा कानुनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 22 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरैन्द्र वीर विक्रम शाहदेवबाट संबिधानको धारा १२९ बमोजिम मन्त्रिपरिषद्को सल्लाह र सम्मतिले बनाईवक्सेको छ।
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
---
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
**१. संक्षिप्त नाम विस्तार र प्रारम्भ:**
|
| 27 |
+
(१) यस ऐनको नाम "नेपाल सन्धि ऐन, २०४७" रहेको छ।
|
| 28 |
+
(२) यो ऐन २०४७ साल कार्तिक २३ गतेदेखि प्रारम्भ भएको मानिनेछ।
|
| 29 |
+
(३) यो ऐन "संबत् २०४७ साल कात्तिक २३ गतेपछि नेपाल बा नेपाल सरकार पक्ष हुने सन्धिको सम्बन्धमा लागू हुनेछ।
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
---
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
**२. परिभाषा:**
|
| 34 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 35 |
+
(क) "सन्धि" भन्नाले दुई बा दुई भन्दा बढी राज्यहरू बा कुनै राज्य र अन्तर सरकारी सङ्गठन बीच लिखित रूपमा सम्पन्न भएको सम्झौता सम्झनु पर्छ र सो शब्दले यसै प्रकृतिको जुनसुकै नामाकरण गरिएको लिखत समेतलाई जनाउनेछ।
|
| 36 |
+
(ख) "पूर्णाधिकार" भन्नाले सन्धि वार्ता गर्न बा सन्धिको अन्तिम मर्स्योदा बा प्रामाणिक प्रति स्वीकार गर्न बा सन्धिमा हस्ताक्षर गर्न अद्लियारी दिई नेपाल सरकारले जारी गरेको अधिकार पत्र सम्झनु पर्छ र सो शब्दले त्यस्तो सन्धि वार्ता गर्दा बा सन्धि हस्ताक्षर गर्दा आरक्षण राख्न बा त्यस्तो सन्धि सम्बन्धमा अन्य कुनै काम गर्न प्रदान गरेको अद्लियारी समेतलाई जनाउनेछ।
|
| 37 |
+
(ग) "आरक्षण" भन्नाले बहुपक्षीय सन्धिलाई हस्ताक्षर गर्दा बा त्यस्तो सन्धिको अनुमोदन, सम्मिलन, स्वीकृति बा समर्थन गर्दा कुनै पक्षले सो सन्धिको कुनै प्राबधान आफूलाई लागू नहुने भनी गरेको घोषणा सम्झनु पर्छ र सो शब्दले त्यस्तो प्राबधानको व्याख्या कुनै पक्षले आफ्नो हकमा स्पष्ट गरी गरेको घोषणा समेतलाई जनाउनेछ।
|
| 38 |
+
(घ) "सन्धि परित्याग" भन्���ाले सन्धिमा उल्लेख भएको रीत पुन्याई सन्धि समाप्त गर्ने गरेको घोषणा सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
(ङ) "संबिधान" भन्नाले नेपालको संबिधान सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
|
| 41 |
+
---
|
| 42 |
+
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| 43 |
+
**३. सन्धि सम्पन्न गर्ने अधिकार:**
|
| 44 |
+
(१) राष्ट्रपति, प्रधान मन्त्री बा परराष्ट्र मन्त्री बाहेक अरु कसैले पूर्णाधिकार बिना नेपाल बा नेपाल सरकारको तर्फबाट कुनै पनि सन्धिको सम्बन्धमा वार्ता गर्न, सन्धिको अन्तिम मर्स्योदा बा प्रामाणिक प्रति स्वीकार गर्न, त्यस्तो सन्धिमा हस्ताक्षर गर्न बा आरक्षण राख्न बा तत्सम्बन्धी अन्य कुनै काम गर्न हुँदैन।
|
| 45 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भएतापनि कुनै विदेशी राज्य बा अन्तरसरकारी सङ्गठनमा नेपालको प्रतिनिधित्व गर्ने नेपाली राजदूत बा नियोग प्रमुखले त्यस्तो राज्य बा अन्तरसरकारी सङ्गठनसँग गर्ने जुनसुकै बिषयको सन्धि सम्बन्धमा र कुनै अन्तर्राष्ट्रिय सम्मेलनमा भाग लिने प्रतिनिधिमण्डलका नेताबाट सो सम्मेलनमा गरिने सन्धिको सम्बन्धमा वार्ता गर्न बा सन्धिको अन्तिम मर्स्योदा बा प्रामाणिक प्रति स्वीकार गर्न सक्नेछ।
|
| 46 |
+
|
| 47 |
+
---
|
| 48 |
+
|
| 49 |
+
**४. सन्धिको अनुमोदन तथा सम्मिलनको कार्यविधि:**
|
| 50 |
+
(१) *संबिधानको धारा २७९ को उपधारा (२) मा उल्लेख भएका विषयका सन्धि बाहेक अन्य विषयका सन्धिहरू मध्ये अनुमोदन, सम्मिलन, स्वीकृति बा समर्थन गर्नु पर्ने भनी व्यवस्था भएको सन्धिलाई अनुमोदन, स्वीकृति बा समर्थन गर्नु परेमा बा कुनै सन्धिमा सम्मिलित हुन चाहेमा सो सम्बन्धी प्रस्ताव नेपाल सरकारले *प्रतिनिधि सभामा पेश गर्नु पर्दछ।
|
| 51 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश भएको सन्धिको अनुमोदन, स्वीकृति, समर्थन बा सम्मिलन सम्बन्धी प्रस्ताव *प्रतिनिधि सभामा उपस्थित सदस्य संख्याको बहुमतबाट पारित हुनु पर्नेछ।
|
| 52 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम *प्रतिनिधि सभाबाट प्रस्ताव पारित भएपछि नेपाल सरकारले सो सन्धिमा भएको व्यवस्था बमोजिम अनुमोदन, स्वीकृति, समर्थन बा सम्मिलनको सूचना सम्बन्धित पक्ष बा अधिकारीलाई दिनेछ।
|
| 53 |
+
(४) कुनै अन्तर सरकारी संगठनको स्थापना गर्ने बा त्यस्तो कुनै सङ्गठनको सदस्यता प्राप्त गर्ने सन्धि बा प्रचलित कानुनको प्रतिकूल हुने सन्धिको हकमा त्यस्तो सन्धिमा अनुमोदन, सम्मिलन, स्वीकृति बा समर्थनको व्यवस्था नगरिएको भए तापनि *प्रतिनिधि सभाबाट प्रस्ताव पारित नभएसम्म नेपाल "........ बा नेपाल सरकार त्यस्तो सन्धिको पक्ष हुन सक्ने छैन।
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
---
|
| 56 |
+
|
| 57 |
+
**५. केही खास सन्धिको अनुमोदन, सम्मिलन, स्वीकृति बा समर्थन:**
|
| 58 |
+
(१) *संबिधानको धारा २७९ को उपधारा (२) मा उल्लेख भएका विषयका सन्धिको अनुमोदन, स्वीकृति बा समर्थन गराउनु पर्दा बा त्यस्तो सन्धिमा सम्मिलित हुने अनुमति प्राप्त गर्नु पर्दा नेपाल सरकारले यस सम्बन्धमा *सङ्खीय संसद्मा प्रस्ताव पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 59 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश भएको सन्धिको सम्बन्धमा *संबिधानको धारा २७९ को उपधारा (२) बमोजिम *सङ्खीय संसद्वाट प्रस्ताव पारित भएपछि त्यस्तो सन्धिको अनुमोदन, सम्मिलन, स्वीकृति बा समर्थनको सूचना नेपाल सरकारले सो सन्धिमा उल्लेख भएको व्यवस्था अनुसार सम्बन्धित पक्ष बा अधिकारीलाई दिनेछ।
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| 60 |
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**६. नेपाल सरकारले हस्ताक्षर गरी सन्धि लागू गर्न सक्ने:**
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दफा ४ बा *संबिधानको धारा २७९ को उपधारा (२) मा उल्लेख भएका विषयका सन्धिहरू बाहेक अन्य जुनसुकै विषयका सन्धिमा नेपाल सरकारको निर्णयबाट हस्ताक्षर गरिसकेपछि त्यस्तो सन्धिमा नेपाल "........ बा नेपाल सरकार पक्ष भएको र त्यस्तो सन्धि स्वीकृत भएको मानिनेछ।
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**७. सन्धिको परित्याग बा निलम्बन गर्न सकिने:**
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नेपाल "........ बा नेपाल सरकार पक्ष भएको सन्धिमा अन्यथा व्यवस्था भएकोमा बाहेक त्यस्तो सन्धिलाई परित्याग गर्ने बा आंशिक बा पूरे निलम्बन गर्ने बा निलम्बन फुकुबा गर्ने अधिकार नेपाल सरकारलाई हुनेछ र त्यस्तो सन्धि *संबिधानको धारा २७९ को उपधारा (२) मा उल्लेख भएका विषयसँग सम्बन्धित भए सो सम्बन्धी जानकारी सङ्घीय संसद्लाई र दफा ४ बमोजिमको भए सो सम्बन्धी जानकारी प्रतिनिधि सभालाई दिनु पर्नेछ।
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**८. सन्धि पश्चातदर्शी नहुने:**
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सन्धिमा अन्यथा व्यवस्था भएकोमा बाहेक सन्धिलाई पश्चातदर्शी प्रभाव दिने गरी लागू गरिने छैन।
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**९. सन्धि व्यवस्था कानुन सरह लागू हुने:**
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(१) *प्रतिनिधि सभा बा सङ्घीय संसद्वाट अनुमोदन, सम्मिलन, स्वीकृति बा समर्थन भई नेपाल "........ बा नेपाल सरकार पक्ष भएको कुनै सन्धिको कुरा प्रचलित कानुनसँग बाझिएमा सो सन्धिको प्रयोजनको लागि बाझिएको हदसम्म प्रचलित कानुन अमान्य हुनेछ र तत्सम्बन्धमा सन्धिको व्यवस्था नेपाल कानुन सरह लागू हुनेछ।
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| 80 |
+
(२) *प्रतिनिधि सभा बा सङ्घीय संसद्वाट अनुमोदन, स्वीकृति बा समर्थन नभएको बा सम्मिलनको स्वीकृति नपाएको तर नेपाल "........ बा नेपाल सरकार पक्ष भएको कुनै सन्धिबाट नेपाल "........ बा नेपाल सरकार उपर ��ुनै थप दायित्व बा भार पर्न जाने र त्यसको कार्यान्वयनको लागि कानूनी व्यवस्था गर्नु पर्ने रहेछ भने त्यस्तो सन्धि कार्यान्वयनको लागि नेपाल सरकारले यथासम्भब चाँडो कानुन बनाउने कारबाही चलाउनु पर्दछ।
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**१०. व्यवस्थापिका-संसद् समक्ष पेश गर्नुपर्ने:**
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दफा ६ बमोजिम नेपाल सरकारले स्वीकार गरेका सन्धिहरूको सूचना *प्रतिनिधि सभाको बैठक बसेको एक महीना भित्र जानकारीको लागि *प्रतिनिधि सभामा पेश गर्नु पर्नेछ।
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**११. सन्धि दर्ता गर्ने:**
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नेपाल "........ बा नेपाल सरकार पक्ष भएका सन्धिहरू मध्ये नेपाल सरकारले उपयुक्त ठहराएका सन्धिहरू सम्बन्धित अन्तर्राष्ट्रिय संगठन बा संयुक्त राष्ट्र संघको सचिवालयमा दर्ता गराउन सक्नेछ।
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**१२. सन्धि प्रकाशन गर्नु पर्ने:**
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| 95 |
+
नेपाल "........ बा नेपाल सरकार पक्ष भएका सन्धिहरू मध्ये नेपाल सरकारले उचित ठहराएका सन्धिहरूको प्रामाणिक प्रति नेपाल राजपत्रमा प्रकाशित गरिनेछ।
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| 96 |
+
तर *प्रतिनिधि सभा बा सङ्घीय संसद्वाट अनुमोदन, स्वीकृति बा समर्थन भएका सन्धिहरू र *प्रतिनिधि सभा बा सङ्घीय संसद्को निर्णयबमोजिम नेपाल "........ बा नेपाल सरकार सम्मिलित भएका सन्धिहरू त्यसरी अनुमोदन, सम्मिलन, स्वीकृति बा समर्थन भएको मितिले साठी दिन भित्र अनिबार्य रूपले नेपाल राजपत्रमा प्रकाशित गर्नु पर्नेछ।
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| 97 |
+
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+
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+
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| 100 |
+
**१३. नियम बनाउने अधिकार:**
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| 101 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्नको लागि नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरू बनाउन सक्नेछ।
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| 102 |
+
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+
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+
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| 105 |
+
**द्रष्टव्य:**
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+
(१) केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरु :- "थी ४ सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
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| 107 |
+
(२) व्यवस्थापिका-संसदको सट्टा हाल संघीय संसद भएको।
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section_14_pdf_24.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,207 @@
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| 1 |
+
# काठमाडौं विश्वविद्यालय ऐन, २०४६
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| 2 |
+
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| 3 |
+
लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०४६।०६।०४
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
संशोधन गर्ने ऐनः
|
| 7 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 8 |
+
११. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 9 |
+
२०६६।१०।०७
|
| 10 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 11 |
+
२०७२।११।१३
|
| 12 |
+
३. शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७
|
| 13 |
+
२०७७।०३।११
|
| 14 |
+
४. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 15 |
+
२०६२।०४।१४
|
| 16 |
+
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| 17 |
+
## २०४६ सालको ऐन नं. ३४
|
| 18 |
+
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| 19 |
+
".............
|
| 20 |
+
काठमाडौं विश्वविद्यालयको स्थापना गर्न बनेको ऐन
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
प्रस्तावना: कला, विज्ञान, व्यवस्थापन, प्रविधि जस्ता विविध क्षेत्रमा अध्ययन, अध्यापन तथा अनुसन्धानको लागि उच्च तहका शिक्षण संस्थाहरु सञ्चालन गर्न गैरसरकारी क्षेत्रमा एक विश्वविद्यालयको स्थापना र व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको बीसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएकोछ।
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ: (१) यस ऐनको नाम "काठमाडौं विश्वविद्यालय ऐन, २०४६" रहेको छ।
|
| 27 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकेको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
२. परिभाषा: विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 30 |
+
(क) "विश्वविद्यालय" भन्नाले यस ऐन बमोजिम स्थापना भएको काठमाडौं विश्वविद्यालय सम्झनु पर्छ।
|
| 31 |
+
(ख) "सभा" भन्नाले दफा ४ बमोजिमको विश्वविद्यालय सभा सम्झनु पर्छ।
|
| 32 |
+
(ग) "कार्यकारी परिषद्" भन्नाले दफा ६ बमोजिमको कार्यकारी परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 33 |
+
(घ) "प्राज्ञिक परिषद्" भन्नाले दफा द बमोजिमको प्राज्ञिक परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 34 |
+
(ङ) "डीन" भन्नाले विश्वविद्यालय अन्तर्गत स्थापित विभिन्न सङ्कायका प्रमुख सम्झनु पर्छ।
|
| 35 |
+
(च) "स्कूल" भन्नाले विश्वविद्यालयका प्रत्येक सङ्कायका कार्यकमहरू सञ्चालित हुने निकाय सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(छ) "कलेज" भन्नाले विश्वविद्यालयसित सम्बन्धन प्राप्त शिक्षण संस्था सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
(ज) "प्राचार्य" भन्नाले कलेजको प्राचार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(झ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
|
| 40 |
+
३. विश्वविद्यालयको स्थापना: (१) कला, विज्ञान, व्यवस्थापन र प्राविधिक विषयको उच्च तहका शिक्षण संस्थाहरूको सञ्चालनको लागि काठमाडौं विश्वविद्यालयको स्थापना हुनेछ।
|
| 41 |
+
(२) विश्वविद्यालय अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र सङ्गठित संस्था हुनेछ।
|
| 42 |
+
(३) विश्वविद्यालयको आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 43 |
+
(४) विश्वविद्यालयले व्यक्ति सरह चल अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न, धितो बन्धक राख्न बा अन्य किसिमले बन्दोबस्त गर्न सक्नेछ।
|
| 44 |
+
(५) विश्वविद्यालयले व्यक्ति सरह नालिस उजुर गर्न र विश्वविद्यालय उपर पनि नालिस उजुर लाग्न सक्नेछ।
|
| 45 |
+
(६) विश्वविद्यालयको केन्द्रीय कार्यालय धुलिखेलमा रहनेछ।
|
| 46 |
+
|
| 47 |
+
४. विश्वविद्यालय सभाको गठन: (१) देहायका सदस्यहरू भएको विश्वविद्यालय सभा हुनेछ:-
|
| 48 |
+
(क) कुलपति -अध्यक्ष
|
| 49 |
+
(ख) दुई जना -सदस्य
|
| 50 |
+
(ग) उप-कुलपति -सदस्य
|
| 51 |
+
(घ) रजिष्ट्रार -सदस्य-सचिब
|
| 52 |
+
(ङ) राष्ट्रिय योजना आयोगको सदस्य (शिक्षा हेर्ने) -सदस्य
|
| 53 |
+
(च) सचिव, शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय -सदस्य
|
| 54 |
+
(छ) सचिव, अर्थ मन्त्रालय -सदस्य
|
| 55 |
+
(ज) डीनहरू -सदस्य
|
| 56 |
+
(झ) प्राचार्यहरूमध्येवाट एक जना -सदस्य
|
| 57 |
+
(ज) बनेपा नगर कार्यपालिकाको प्रमुख -सदस्य
|
| 58 |
+
(ट) धुलिखेल नगर कार्यपालिकाको प्रमुख -सदस्य
|
| 59 |
+
(ठ) चन्दादाताहरुमध्येवाट समावेशी आधारमा दुई जना -सदस्य
|
| 60 |
+
(ड) लब्धप्रतिष्ठित विद्वानहरुमध्येवाट समावेशी आधारमा कम्तीमा दुई जना महिला सहित पाँचजना -सदस्य
|
| 61 |
+
(ण) उद्योगपतिहरूमध्येवाट एक जना -सदस्य
|
| 62 |
+
(त) शिक्षकहरुमध्येवाट कम्तीमा एकजना महिला सहित दुई जना -सदस्य
|
| 63 |
+
(थ) विद्यार्थीहरूमध्येवाट एक जना -सदस्य
|
| 64 |
+
(द) पुस्तकालयाध्यक्ष विश्वविद्यालय -सदस्य
|
| 65 |
+
|
| 66 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (झ), (ड), (ड), (ण) (त), (थ) बमोजिमका सदस्यहरू कार्यकारी परिषद्को सिफारिसमा सभाले र खण्ड (ठ) बमोजिमका सदस्यहरू दुई जनाको सिफारिसमा कुलपतिले मनोनीत गर्नेछ।
|
| 67 |
+
(३) मनोनीत सदस्यहरूको पदावधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 68 |
+
(४) सभा विश्वविद्यालयको सर्वोच्च र अधिकार सम्पन्न निकाय हुनेछ।
|
| 69 |
+
(५) सभाको अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले सभाको बैठकको निर्णय प्रमाणित गर्नेछ।
|
| 70 |
+
|
| 71 |
+
४. सभाको काम, कर्तव्य र अधिकार: सभाको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 72 |
+
(क) सम्बन्धित विषयका कार्यकमहरूको सञ्चालन र प्रबन्ध गर्ने।
|
| 73 |
+
(ख) कलेजको शैक्षिक सम्बन्धन बारे आवश्यक प्रबन्ध गर्ने।
|
| 74 |
+
(ग) उपाधिहरू निर्धारण गर्ने र प्रदान गर्ने।
|
| 75 |
+
(घ) विश्वविद्यालयको बार्षिक कार्यकमलाई स्वीकृत गर्ने र बार्षिक बजेट पारित गर्ने।
|
| 76 |
+
(ङ) विश्वविद्यालयका नियमहरू पारित गर्ने।
|
| 77 |
+
(च) विश्वविद्यालयका स्कूलहरू र सम्बन्धन प्राप्त कलेजलाई निर्देशन ���िने र मार्गदर्शन गर्ने।
|
| 78 |
+
(छ) विश्वविद्यालय र मातहतका निकायको बार्षिक प्रतिवेदनमाथि छलफल गर्ने र कार्यकमको मूल्याङन गर्ने।
|
| 79 |
+
(ज) लेखा परीक्षण प्रतिवेदनमाथि छलफल गर्ने र स्वीकृति दिने।
|
| 80 |
+
(झ) विश्वविद्यालयका बिभिन्न निकायको शैक्षिक तथा प्रशासनिक कामको लागि आवश्यक शिक्षक तथा कर्मचारीको दरबन्दी स्वीकृत गर्ने।
|
| 81 |
+
(ज) कुनै नयाँ कार्यकम सञ्चालन गर्नु परेमा त्यसको अनुमति प्रदान गर्ने।
|
| 82 |
+
(ट) उप-कुलपतिको नियुक्तिको लागि कुलपति समक्ष सिफारिस पेश गर्न समिति गठन गर्ने।
|
| 83 |
+
(ट) आवश्यकतानुसार बिभिन्न समितिहरू गठन गर्ने।
|
| 84 |
+
(ड) पदाधिकारी, शिक्षक तथा कर्मचारीको सेवा, शर्त निर्धारण गर्ने।
|
| 85 |
+
|
| 86 |
+
६. कार्यकारी परिषद्को गठन: (१) विश्वविद्यालयको देहायका सदस्यहरू भएको एक कार्यकारी परिषद् हुनेछ:-
|
| 87 |
+
(क) उप-कुलपति अध्यक्ष
|
| 88 |
+
(ख) रजिष्ट्रार सदस्य
|
| 89 |
+
(ग) डीनहरू मध्येबाट दुई जना सदस्य
|
| 90 |
+
(घ) सभाबाट मनोनीत शिक्षक प्रतिनिधि एक जना सदस्य
|
| 91 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ग) बमोजिमका सदस्यहरू बिषयगत सङ्कायको वर्णानुक्रम अनुसार पालै पालोसित सदस्य हुनेछन्।
|
| 92 |
+
(३) मनोनीत सदस्यहरूको पदाबधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 93 |
+
|
| 94 |
+
७. कार्यकारी परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार: कार्यकारी परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 95 |
+
(क) सभाको निर्णय र निर्देशनहरू कार्यान्वयन गर्ने गराउने।
|
| 96 |
+
(ख) नेपाल सरकारले निर्धारण गरेको नीति, निर्देशनको पालना गर्ने।
|
| 97 |
+
(ग) सभामा प्रस्तुत हुने बार्षिक कार्यकम, बजेट, प्रगति बिबरण, लेखा परीक्षण प्रतिवेदन र अन्य प्रस्तावहरू तयार गर्ने।
|
| 98 |
+
(घ) विश्वविद्यालयलाई प्राप्त दान, दातव्य ग्रहण गर्ने।
|
| 99 |
+
(ङ) विश्वविद्यालयको कोष र चल अचल सम्पत्तिको संरक्षण गर्ने सभाको नीति तथा निर्देशन भित्र रही आवश्यकतानुसार बेचबिखन गर्ने।
|
| 100 |
+
(च) विश्वविद्यालयले सञ्चालन गरेको कार्यहरूको रेखदेख गर्ने, निरीक्षण गर्ने र सो को प्रतिवेदन सभामा पेश गर्ने।
|
| 101 |
+
(छ) विश्वविद्यालय सम्बन्धी नियमहरूको मर्स्यादा तयार गरी स्वीकृतिको लागि सभामा पेश गर्ने।
|
| 102 |
+
(ज) विश्वविद्यालयलाई आवश्यक पर्ने कर्मचारीको नियुक्ति गर्ने।
|
| 103 |
+
(झ) कर्मचारीको सेवा, शर्त निर्धारण गरी सभा समक्ष पेश गर्ने।
|
| 104 |
+
|
| 105 |
+
८. प्राज्ञिक परिषद्को गठन: (१) विश्वविद्यालयको शैक्षिक तथा प्राज्ञिक क्षेत्रमा प्रमुख निकायको रूपमा देहायका सदस्यहरू भएको एक प्राज्ञिक परिषद् हुनेछ:-
|
| 106 |
+
(क) उप-कुलप���ि अध्यक्ष
|
| 107 |
+
(ख) रजिष्ट्रार सदस्य
|
| 108 |
+
(ग) डीनहरू सदस्य
|
| 109 |
+
(घ) विषय समितिका अध्यक्षहरू मध्येबाट पाँच जना सदस्य
|
| 110 |
+
(ङ) सम्बन्धन प्राप्त कलेजबाट दुई जना सदस्य
|
| 111 |
+
(२) पदेन सदस्यहरू बाहेक अन्य सदस्यहरूको मनोनयन सभाबाट हुनेछ।
|
| 112 |
+
(३) मनोनीत सदस्यहरूको पदाबधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 113 |
+
|
| 114 |
+
९. प्राज्ञिक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार: प्राज्ञिक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 115 |
+
(क) विश्वविद्यालयको शैक्षिक तथा प्राज्ञिक कुरामा मुख्य निकायको रूपमा रही कार्य गर्ने।
|
| 116 |
+
(ख) विश्वविद्यालयमा हुने अध्ययन तथा अध्यापनको गुणस्तर, पाठ्यक्रम, परीक्षाको स्तर र किसिम, मूल्याङ्गन बिधिहरू, शिक्षण सामाग्रीहरू, विद्यार्थी भर्ना सम्बन्धी सङ्ख्या र योग्यता निर्धारण गर्ने।
|
| 117 |
+
(ग) अनुसन्धान सम्बन्धी नीति तर्जुमा गर्ने र अनुसन्धान कार्यकमहरूलाई स्वीकृति प्रदान गर्ने।
|
| 118 |
+
(घ) विद्यार्थीहरूको शैक्षिक कार्यकमहरूको मूल्याङ्गन गर्ने।
|
| 119 |
+
(ङ) शिक्षण र अनुसन्धानको स्तर निर्धारण गर्ने।
|
| 120 |
+
(च) मानार्थ उपाधिहरूको व्यवस्था गर्ने।
|
| 121 |
+
(छ) बिभिन्न तहका निमित्त शिक्षकको न्यूनतम योग्यता तोक्ने।
|
| 122 |
+
|
| 123 |
+
१०. विश्वविद्यालयको सङ्गठन: (१) कुलपति, उप-कुलपति, रजिष्ट्रार, डीनहरू र सम्बन्धन प्राप्त कलेजहरूको सामुहिक रूप नै विश्वविद्यालयको स्वरूप हुनेछ।
|
| 124 |
+
(२) उच्च शिक्षाको लागि तोकिएको बिषयहरूमा तोकिएका स्कूलहरू रहनेछन्।
|
| 125 |
+
(३) स्कूलहरूको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 126 |
+
(४) कलेजहरू सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 127 |
+
|
| 128 |
+
११. जिम्मेबारी र अधिकार प्रत्यायोजन: (१) यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही विश्वविद्यालयको सबै अधिकार सभामा निहित रहनेछ।
|
| 129 |
+
(२) सभाले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा उल्लेख भएका आफ्ना अधिकारहरूमध्ये आवश्यकता अनुसार सबै बा केही अधिकार कार्यकारी परिषद्, प्राज्ञिक परिषद् तथा अन्य पदाधिकारीहरूलाई बा तोकिए बमोजिम स्थापना गरिएका समितिलाई सुम्पन सक्नेछ।
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
१२. पदाधिकारीहरू: विश्वविद्यालयमा देहाय बमोजिमका पदाधिकारीहरू रहने छन्:-
|
| 132 |
+
(क) कुलपति
|
| 133 |
+
(ख) सहकुलपति
|
| 134 |
+
(ग) उपकुलपति
|
| 135 |
+
(घ) रजिष्ट्रार
|
| 136 |
+
(ङ) डीनहरू
|
| 137 |
+
(च) अन्य पदाधिकारीहरू।
|
| 138 |
+
|
| 139 |
+
१३. कुलपति: (१) प्रधानमन्त्री विश्वविद्यालयको कुलपति हुनेछ।
|
| 140 |
+
(२) कुलपति विश्वविद्यालयको प्रमुख र सभाको अध्यक्ष हुनेछ।
|
| 141 |
+
(३) कुलपतिलाई विश्वविद्यालय बा विश्वविद्या���यसंग सम्बन्धित जुनसुकै बिषय बा बस्तुको निरीक्षण बा जाँचबुझ गर्ने गराउने र निर्देशन दिने अधिकार हुनेछ।
|
| 142 |
+
(४) यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत भएका कार्यलाई कुलपति रद्द गर्न सक्नेछ।
|
| 143 |
+
(६) कुलपतिको अन्य अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 144 |
+
|
| 145 |
+
१३क. दुई जना: (१) शिक्षा, विज्ञान तथा प्रबिधि मन्त्री बा राज्यमन्त्री विश्वविद्यालयको दुई जना हुनेछ।
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| 146 |
+
(२) कुलपतिको अनुपस्थितिमा दुई जनाले दीक्षान्त समारोहको अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 147 |
+
(३) दुई जनाले आवश्यकता अनुसार विश्वविद्यालयको निरीक्षण गर्न, गराउन र कानूनसम्मत निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 148 |
+
|
| 149 |
+
१४. उप-कुलपति: (१) विश्वविद्यालयको उप-कुलपति पदमा सभाद्वारा गठित तीन सदस्यीय समितिले सिफारिस गरेको व्यक्तिलाई कुलपतिबाट चार बर्षको लागि नियुक्ति गरिनेछ।
|
| 150 |
+
(२) उप-कुलपति विश्वविद्यालयको प्रमुख प्रशासकीय पदाधिकारी हुनेछ।
|
| 151 |
+
(३) रजिष्ट्रारले सभाको निर्णय बा आदेशलाई अभिलेख गरी राख्नु पर्नेछ। सो निर्णय बा आदेशको एक प्रति कुलपति समक्ष पटाउनु पर्नेछ।
|
| 152 |
+
(४) कुलपति तथा दुई जनाको अनुपस्थितिमा विश्वविद्यालय सभामा उपकुलपतिले अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 153 |
+
(५) यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको पालना गर्नु गराउनु उपकुलपतिको कर्तव्य हुनेछ र यसको प्रयोजनको निमित्त उप-कुलपतिको विचारमा तत्काल कुनै काम कारबाही नगरी नहुने आकस्मिक अवस्था आइपरेको छ भन्ने लागेमा निजले उचित र आवश्यक देखेको काम कारबाही गर्न सक्नेछ र त्यसको सूचना सकभर चाँडो सम्बन्धित पदाधिकारी बा निकायलाई दिनेछ।
|
| 154 |
+
(६) उप-कुलपतिले सभाको निर्णय बा आदेशलाई कार्यान्वयन गर्नेछ।
|
| 155 |
+
(७) विश्वविद्यालयको सबै शैक्षिक र प्राज्ञिक काम कारबाही उपर उपकुलपतिको सामान्य नियन्त्रण रहनेछ।
|
| 156 |
+
(८) सभामा पेश हुने सबै बिषयहरू उप-कुलपति मार्फत पेश हुनेछन्।
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| 157 |
+
(९) विश्वविद्यालयका सबै कार्यहरू सभाको निर्देशनमा उप-कुलपतिले कार्यान्वयन गर्नेछ।
|
| 158 |
+
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| 159 |
+
१५. रजिष्ट्रार: (१) विश्वविद्यालयको रजिष्ट्रारको नियुक्ती उप-कुलपतिको सिफारिसमा कुलपतिबाट चार बर्षको लागि हुनेछ।
|
| 160 |
+
(२) रजिष्ट्रार विश्वविद्यालयको पूरा समय काम गर्ने बैतनिक पदाधिकारी हुनेछ।
|
| 161 |
+
(३) रजिष्ट्रारले सभाको निर्णय बा आदेशलाई अभिलेख गरी राख्नु पर्नेछ। सो निर्णय बा आदेशको एक प्रति कुलपति समक्ष पटाउनु पर्नेछ।
|
| 162 |
+
(४) रजिष्ट्रारलाई विश्वविद्यालयको सबै प्रकारको प्रशासनिक तथा प्राज्ञिक कार्यको जिम्मेबारीपूर्वक कार्य सम्पन्न गर्ने, गराउने अधिकार हुनेछ।
|
| 163 |
+
(५) विश्वविद्यालयको सामान्य प्रशासन, आर्थिक प्रशासन तथा प्राज्ञिक कार्यहरू रजिष्ट्रार अन्तर्गत सम्पन्न हुनेछन्।
|
| 164 |
+
(६) रजिष्ट्रारको अन्य काम, कर्तव्य अधिकार र पारिश्रमिक सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 165 |
+
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| 166 |
+
१६. डीन र अन्य पदाधिकारीहरू: (१) डीनको नियुक्ति तीन बर्षको लागि हुनेछ।
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| 167 |
+
(२) डीन सङ्कायको प्रमुख हुनेछ र निज पूरा समय काम गर्ने पदाधिकारी हुनेछ।
|
| 168 |
+
(३) डीनको नियुक्ति कार्यकारी परिषद्बाट हुनेछ।
|
| 169 |
+
(४) डीन र अन्य पदाधिकारीहरूको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 170 |
+
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| 171 |
+
१९६क. पदबाट हटाउन सकिने: (१) उप-कुलपति बा रजिष्ट्रारले आफ्नो पद अनुरुपको जिम्मेबारी पूरा नगरेको, इमान्दारीपूर्वक काम नगरेको बा निजले पद अनुकूलको आचरण नगरेको भनी सभामा तत्काल रहेका एकतिहाइ सदस्यले निजलाई पदबाट हटाउन कुलपति समक्ष लिखित निवेदन दिएमा कुलपतिले सभाको कुनै सदस्यको अध्यक्षतामा विश्वविद्यालय अनुदान आयोगको सदस्य र शिक्षा, विज्ञान तथा प्रबिधि मन्त्रालयको सचिव रहेको तीन सदस्यीय छानबिन समिति गटन गर्नेछ।
|
| 172 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठित छानबिन समितिले सो सम्बन्धमा आवश्यक छानबिन गरी तीस दिनभित्र आफ्नो प्रतिवेदन कुलपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 173 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको प्रतिवेदन प्राप्त भएपछि कुलपतिले सो प्रतिवेदन सभा समक्ष पेश गर्नेछ।
|
| 174 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम पेश भएको प्रतिवेदन उपर छलफल हुँदा सभाका कुल सदस्य सङ्ख्याको कम्तीमा एकाउन्न प्रतिशत सदस्यले उप-कुलपति बा रजिष्ट्रारलाई पदबाट हटाउन निर्णय गरेमा कुलपतिले उप-कुलपति बा रजिष्ट्रारलाई पदबाट हटाउनेछ।
|
| 175 |
+
(५) तर त्यसरी हटाउनु अघि निजलाई सफाई पेश गर्ने मौकाबाट बञ्चित गरिने छैन।
|
| 176 |
+
(६) उप-कुलपति र रजिष्ट्रार बाहेक विश्वविद्यालयका अन्य पदाधिकारीलाई उपदफा (१) बमोजिमको आरोप छानबिन गर्दा बा पदबाट हटाउँदा अपनाउनु पर्ने प्रक्रिया तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 177 |
+
(७) यस दफा बमोजिम कुनै पदाधिकारी उपर छानबिन शुरु भएमा छ महिनाभित्र अन्तिम निर्णय गरिसक्नु पर्नेछ। त्यस्तो अन्तिम निर्णय नभएसम्म निजले आफू बहाल रहेको पदमा काम गर्न पाउने छैन।
|
| 178 |
+
(८) उपदफा (७) बमोजिमको पदाधिकारीले गर्ने दैनिक काम सम्पादन गर्नका लागि कुलपतिले विश्वविद्यालयको बरिष्ठतम् पदाधिक���रीलाई जिम्मेबारी तोक्न सक्नेछ।
|
| 179 |
+
|
| 180 |
+
१७. स्कूल: विश्वविद्यालय अन्तर्गतका प्रमुख शैक्षिक कार्यकमहरू स्कूलहरूमा सञ्चालित हुनेछन्। कला, विज्ञान, व्यवस्थापन, प्रविधि आदि सङ्कायका लागि स्कूलहरू स्थापित हुनेछन्।
|
| 181 |
+
|
| 182 |
+
१८. विद्यापरिषद् र बिषय समिति: (१) प्रत्येक स्कूलमा शैक्षिक तथा प्राज्ञिक कार्यकमहरूको सञ्चालनको लागि एक विद्यापरिषद् रहनेछ।
|
| 183 |
+
(२) प्रत्येक स्कूलमा सञ्चालन हुने बिभिन्न शैक्षिक तथा प्राज्ञिक बिषयको पाठ्यक्रम निर्धारण गर्नको लागि स्कूलको विद्यापरिषद् अन्तर्गत बिभिन्न बिषय समितिहरू रहनेछन्।
|
| 184 |
+
(३) विद्यापरिषद् र बिषय समितिको गठन, अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 185 |
+
|
| 186 |
+
१९. लेखापरीक्षण: विश्वविद्यालयको लेखापरीक्षण सभाद्वारा नियुक्त लेखा परीक्षकबाट हुनेछ।
|
| 187 |
+
|
| 188 |
+
२०. विश्वविद्यालयमा भर्ना हुन चाहिने योग्यताः विश्वविद्यालयमा भर्ना हुन तोकिए बमोजिमको परीक्षा उत्तीर्ण भएको हुनु पर्नेछ।
|
| 189 |
+
|
| 190 |
+
२०क. निःशुल्क उच्च शिक्षा तथा छात्रवृत्ति: (१) विश्वविद्यालयले तोकेको मापदण्ड पूरा गरी विश्वविद्यालय बा मातहतका आङ्कि तथा सामुदायिक शैक्षिक संस्थामा भर्ना भएका दलित, सिमान्तीकृत, अपाङ्ग र आर्थिक रूपले विपन्न विद्यार्थीको लागि उच्च शिक्षा नि:शुल्क हुनेछ।
|
| 191 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि आधार, मापदण्ड, वर्गीकरण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 192 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको सुविधा एक विद्यार्थीले प्रत्येक तहमा एकपटक मात्र उपभोग गर्न पाउनेछ।
|
| 193 |
+
(४) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दलित विद्यार्थीको लागि प्राविधिक तथा व्यावसायिक उच्च शिक्षामा भर्नाका लागि तोकिए बमोजिमको सिट सुरक्षित गरिनेछ।
|
| 194 |
+
(५) विश्वविद्यालयले शहिद, बेपत्ता पारिएका र अपाइता भएका व्यक्तिका छोरा, छोरीको लागि प्रचलित कानूनमा व्यवस्था भए बमोजिम उच्च शिक्षाको व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 195 |
+
(६) कक्षा छदेखि कक्षा दशसम्म सामुदायिक विद्यालयमा अध्ययन गरेको विद्यार्थीले उच्च शिक्षामा प्रचलित कानून बमोजिम छात्रवृत्ति पाउनेछ।
|
| 196 |
+
|
| 197 |
+
२१. विघटन हुँदाको परिणाम: विश्वविद्यालय विघटन भएका अवस्थामा यसको सम्पूर्ण सम्पत्ति नेपाल सरकारको हुनेछ।
|
| 198 |
+
|
| 199 |
+
२२. नियम बनाउने अधिकार: यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वित गर्न विश्वविद्यालयले आवश्यक नियमहरू बनाउन सक्नेछ।
|
| 200 |
+
|
| 201 |
+
---
|
| 202 |
+
|
| 203 |
+
**द्रष्टव्य:**
|
| 204 |
+
१. केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरू:
|
| 205 |
+
"श्री ४ सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
| 206 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरू:
|
| 207 |
+
"नगरपालिकाको प्रमुख" को सट्टा "नगर कार्यपालिकाको प्रमुख"।
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| 1 |
+
**अन्तर्राहिय एकीकृत पर्वतीय विकास केन्द्र ऐन, २०४०**
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०४०।६।२४
|
| 5 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन:**
|
| 6 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 7 |
+
|
| 8 |
+
- गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 9 |
+
२०६६।१०।७
|
| 10 |
+
|
| 11 |
+
---
|
| 12 |
+
|
| 13 |
+
### २०४० सालको ऐन नं. ९
|
| 14 |
+
|
| 15 |
+
### अन्तर्राहिय एकीकृत पर्वतीय विकास केन्द्र सम्बन्धी कानुनी व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 16 |
+
|
| 17 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 18 |
+
नेपाल सरकार र संयुक्त राष्ट्र संघीय शैक्षिक वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठनबीच भएको सम्झौता अनुसार हिन्दुकुश हिमाली क्षेत्रको पर्वतीय भेगको एकीकृत रूपले विकास गर्नको लागि अध्ययन, अनुसन्धान तथा अन्य आवश्यक काम गर्न नेपालमा एक अन्तर्राहिय केन्द्रको स्थापना भएकोले सो केन्द्रलाई अन्तर्राहिय स्तरमा सञ्चालन हुनको लागि पूर्ण स्वशासित रूपमा काम गर्न सक्ने तुल्याउन कानुनी व्यवस्था गर्न बाञ्छनीय भएको, र सो अन्तर्राहिय केन्द्र तथा त्यसको कर्मचारी प्रतिनिधि तथा विशेषज्ञलाई अन्तर्राहिय कानुनद्वारा प्रदान गरिने सुविधा तथा उन्मुक्ति उपलब्ध गराउने गरी सम्झौता भए अनुसार त्यस्तो उन्मुक्ति तथा सुविधाको सम्बन्धमा समेत कानुनी व्यवस्था गर्न बाञ्छनीय भएकोले,
|
| 19 |
+
|
| 20 |
+
थी ४ महाराजाधिराज चैरिन् द्धोर विक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्भत्तिले यो ऐन बनाइबक्सेको छ ।
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
---
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
### १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:
|
| 25 |
+
(१) यस ऐनको नाम "अन्तर्राहिय एकीकृत पर्वतीय विकास केन्द्र ऐन, २०४०" रहेको छ।
|
| 26 |
+
(२) यो ऐन तुरून्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 27 |
+
|
| 28 |
+
---
|
| 29 |
+
|
| 30 |
+
### २. परिभाषा:
|
| 31 |
+
बिषय बा प्रसँगले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 32 |
+
(क) "केन्द्र" भन्नाले नेपाल सरकार र संयुक्त राष्ट्र संघको शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा साँस्कृतिक संगठन (यूनेस्को)का बीच भएको सम्झौता अनुसार नेपालमा स्थापना भएको अन्तर्राह्टिय एकीकृत पर्वतीय विकास केन्द्र (इन्टरनेशनल सेण्टर फर इन्टेग्रेटेड माउन्टेन डेभलपमेण्ट) सम्झनुपर्छ।
|
| 33 |
+
(ख) "सम्झौता" भन्नाले नेपाल सरकार र यूनेस्कोको बीच सन् १९६१ सेण्टेम्बर ३० मा पेरिसमा भएको सम्झौता सम्झनुपर्छ।
|
| 34 |
+
(ग) "समिति" भन्नाले केन्द्रको सञ्चालनको लागि गठन भएको सञ्चालक समिति (गभर्नरहरूको बोर्ड) सम्झनुपर्छ।
|
| 35 |
+
(घ) "निर्देशक" भन्नाले केन्द्रको निर्देशक (डाइरेक्टर) सम्झनुपर्छ।
|
| 36 |
+
(ङ) "कर्मचारी" भन्नाले केन्द्रको निर्देशक, उपनिर्देशक, कर्मचारी, विशेषज्ञ, सल्लाहकार तथा परामर्शदाता (कन्सलट्याण्ट)लाई समेत सम्झनुपर्छ।
|
| 37 |
+
|
| 38 |
+
---
|
| 39 |
+
|
| 40 |
+
### ३. केन्द्र स्वशासित संस्था मानिने:
|
| 41 |
+
(१) केन्द्र अन्तर्राह्टिय व्यक्तित्व भएको अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला संगृहित तथा पूर्ण स्वशासित संस्था हुनेछ। केन्द्रले समिति बाहेक कुनै सरकार वा संस्थाबाट निर्देशन प्राप्त गर्नेछन्।
|
| 42 |
+
(२) केन्द्रको आषषा छापे हुनेछ र यसले करार गर्न तथा आफ्नो नामबाट नालिश उजुर गर्न र यस उभर पनि सोही नामबाट नालिस उजुर लाग्न सक्नेछ।
|
| 43 |
+
(३) केन्द्रले नेपाल सरकार बा कुनै विदेशी सरकार बा सरकारी संस्थाबाट वा स्वदेशी, विदेशी बा अन्तर्राह्टिय संस्था, कम्पनी, कर्पोरेशन बा व्यक्तिबाट चल अचल सम्पत्ति, हक, अनुमति, सुविधा बा सहायतालाई दानदातव्य, अनुदान, बक्स, सट्टापट्टा, खरीद-बिकी, बन्धकी, भाडा बा कुनै पनि तरीकाबाट प्राप्त गर्न, भोग गर्न, चलन चल्ती गर्न बा त्यस्तो चल अचल सम्पत्ति धितो बन्धकी राख्न, भाडामा दिन बा बेच-बिखन गर्न र दान-दातव्य गर्न सक्नेछ।
|
| 44 |
+
(४) केन्द्र मुनाफा नकमाउने गरी सञ्चालित हुनेछ र व्यवस्थापन, कर्मचारी भर्ना, कार्य सञ्चालन समेतको सम्बन्धमा राजनीतिबाट मुक्त रहनेछ।
|
| 45 |
+
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| 46 |
+
---
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| 47 |
+
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| 48 |
+
### ४. केन्द्रको काम कर्तव्य र अधिकार:
|
| 49 |
+
प्रचलित कानुनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि केन्द्रको काम, कर्तव्य, अधिकार तथा दायित्वहरूको सम्बन्धमा सम्झौता र सोसैंग संलग्न रहेको बिधान (स्टाच्यूट) बमोजिम हुनेछ।
|
| 50 |
+
|
| 51 |
+
---
|
| 52 |
+
|
| 53 |
+
### ५. कार्यालय रहने ठाउँको व्यवस्था:
|
| 54 |
+
(१) केन्द्रको कार्यालय काठमाडौं बा केन्द्रको निर्णय अनुसार नेपालको अन्य कुनै स्थानमा रहनेछ।
|
| 55 |
+
(२) केन्द्रको कार्यालय स्थापना गर्नको लागि केन्द्रले नै खर्च व्यहोनें गरी नेपाल सरकारले उपयुक्त भवन उपलब्ध गराई दिनेछ।
|
| 56 |
+
(३) केन्द्रले आफ्नै भवन निर्माण गर्ने निर्णय गरेमा नेपाल सरकारले त्यस्तो भवन निर्माण गर्न उपयुक्त हुने स्थानमा डेढ हेक्टर जमीन निःशुल्क उपलब्ध गराई दिनेछ।
|
| 57 |
+
(४) नेपाल सरकारले उपदफा (२) वा (३) बमोजिम उपलब्ध गराइएको भवन बा जमीनमा आवश्यक पर्ने बिबुली, पानी, टेलिफोन, टेलिग्राम, सडक, ढल निकास इत्यादि आधारभूत सुविधा समेतको व्यवस्था गरिदिनेछ।
|
| 58 |
+
(५) केन्द्रको कार्यालय भवन तथा जग्गा जमीनलाई केन्द्रको उद्देश्य प्राप्तिको लागि मात्र प्रयोग गरिनेछ।
|
| 59 |
+
(६) केन्द्रको कार्यालय भवनको मर्मत तथा संरक्षण र त्यसमा जडान भएको सुविधा तथा उपकरणको स���याहार संभारको सम्पूर्ण दायित्व केन्द्रमा नै रहनेछ।
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| 60 |
+
|
| 61 |
+
---
|
| 62 |
+
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| 63 |
+
### ६. केन्द्रको कार्यालय भवन र हाता तथा सम्पत्तिको अनतिक्रम्यता:
|
| 64 |
+
(१) केन्द्रको कार्यालय भवन र हाता तथा सम्पत्ति अनतिक्रम्य हुनेछ।
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| 65 |
+
(२) केन्द्रको कार्यालय भवन र हाता तथा सम्पत्तिको अतिक्रमण बा क्षति हुन नदिनु र त्यसको शान्ति बा व्यवस्थामा खलल हुन नदिने दायित्व नेपाल सरकारको हुनेछ।
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| 66 |
+
|
| 67 |
+
---
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| 68 |
+
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| 69 |
+
### ७. केन्द्रको सम्पत्तिको संरक्षण:
|
| 70 |
+
केन्द्रको सम्पत्ति नेपालभित्र जहाँ जुनसुकै व्यक्तिसैंग रहेको भए तापनि कसैले पनि कुनै पनि प्रकारबाट खानतलासी, अपहरण, अधिग्रहण गर्न बा त्यस्तो सम्पत्तिमा हस्तक्षेप तथा हानी नोक्सानी गर्न नपाउने गरी नेपाल सरकारले संरक्षण प्रदान गर्नेछ।
|
| 71 |
+
|
| 72 |
+
---
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| 73 |
+
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| 74 |
+
### ८. अभिलेख तथा कागजातको अनतिक्रम्यता:
|
| 75 |
+
(१) केन्द्रका अभिलेखहरू तथा सबै प्रकारका लिखतहरू नेपालभित्र जहाँसुकै रहेको भए तापनि अनतिक्रम्य हुनेछ।
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| 76 |
+
(२) केन्द्रको औपचारिक पत्र व्यवहार, लिखत तथा प्रकाशनमा कुनै पनि प्रकारले सेन्सर गरिनेछैन र त्यस्तो कागजात तथा अन्य कुनै पनि हुलाक वस्तुको पुलिन्दा बा अन्य बन्दी खाम, बट्टा, बाकस, अदत समेत खोलिने तथा रोकिनेर्छैन। तर त्यस्तो बन्दी पुलिन्दा बा अदतभित्र केन्द्रको कागजात बाहेक अन्य कुनै चीज राखिएमा प्रचलित नेपाल कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 77 |
+
|
| 78 |
+
---
|
| 79 |
+
|
| 80 |
+
### ९. कर सम्बन्धी उन्मुक्ति:
|
| 81 |
+
केन्द्रको पूँजी, आम्दानी तथा सम्पत्तिमा कुनै किसिमको आयकर, घर जग्गा कर, मालपोत, सवारी साचत कर, व्याज कर, विकास कर, रजिष्टेशन दस्तुर लगायत सरकारी स्थानीय तहबाट लगाइएको कुनै पनि प्रकारको प्रत्यक्ष बा अप्रत्यक्ष कर, दस्तुर बा महसूल लगाइने छैन। तर केन्द्रलाई बिजुली, पानी, देख्न निकास, टेलिफोन, टेलिग्राम, यातायात, हुलाक इत्यादि कुनै सेवा वापर लोरने दस्तुर भने छुट हुनेछैन।
|
| 82 |
+
|
| 83 |
+
---
|
| 84 |
+
|
| 85 |
+
### १०. निकासी पैठारी सम्बन्धी सुविधा:
|
| 86 |
+
केन्द्रले आफ्नो प्रयोगको लागि निकासी बा पैठारी गर्ने मालसामानमा भन्सार महसूल, बिक्रीकर बा कुनै दस्तुर र निकासी पैठारी सम्बन्धी प्रतिबन्ध लगाइने बा नियन्त्रण गरिनेछैन। तर केन्द्रले निकासी बा पैठारी गरेको मालसामानको बिबरण भन्सार कार्यालयलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 87 |
+
|
| 88 |
+
---
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
### ११. कर फिर्ता:
|
| 91 |
+
केन्द्रले खरीद गरेको मालसामानको मोलमा अप्रत्यक्ष रूपमा समावेश भएको अन्तःशुल्क बा पैठारीमा लागेको भन्सार महसूल तथा बिक्रीकरको रकम फ��र्ताको लागि केन्द्रले कुनै दावी गर्ने छैन।
|
| 92 |
+
|
| 93 |
+
---
|
| 94 |
+
|
| 95 |
+
### १२. विदेशी मुद्रा सम्बन्धी सुविधा:
|
| 96 |
+
(१) प्रचलित कानुनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि केन्द्रले नेपालभित्र बा अन्य कुनै पनि विदेशी मुलुकमा विदेशी मुद्राको कोष तथा खाता राख्न र सञ्चालन गर्न तथा त्यस्तो कोष नेपालभित्र बा बाहिर बा एक मुलुकबाट अर्को मुलुकमा सार्न बा आदान प्रदान गर्न र एक प्रकारको विदेशी मुद्राबाट अर्को प्रकारको मुद्रामा परिणत गर्न सक्नेछ।
|
| 97 |
+
(२) केन्द्रले उपदफा (१) अनुसार प्राप्त सुविधा उपभोग गर्दा अपनाउनु पर्ने कार्यविधि नेपाल सरकार र केन्द्रले आपसी छलफलद्वारा निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
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| 98 |
+
|
| 99 |
+
---
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| 100 |
+
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| 101 |
+
### १३. विदेशी प्रतिनिधि बा विशेषज्ञलाई उन्मुक्ति:
|
| 102 |
+
(१) केन्द्रको सम्मेलन बा बैठकमा भाग लिन आउने बा केन्द्रको काम कारबाइको लागि खटी आउने देहायका प्रतिनिधि बा व्यक्तिलाई नेपालभित्र आउँदा, रहँदा तथा प्रस्थान गर्दा सन् १९६५ सेप्टेम्बर २६ देखि नेपाल पनि पक्ष भएको सन् १९४७ नोभेम्बर २१ मा पारित संयुक्त राष्ट्र संघीय विशेष संस्थाहरूको सुविधा तथा उन्मुक्ति सम्बन्धी सन्धिपत्र अनुसारको सुविधा तथा उन्मुक्ति प्रदान गरिनेछ:
|
| 103 |
+
(क) यूनेस्कोको प्रतिनिधि बा कर्मचारी बा विशेषज्ञ, र
|
| 104 |
+
(ख) समितिको सदस्य बा केन्द्रद्वारा निम्त्याइएका विदेशी सरकार बा विदेशी संस्थाका प्रतिनिधि।
|
| 105 |
+
(२) उपदफा (१) मा उल्लिखित प्रतिनिधि बा व्यक्तिलाई नेपालमा आउन निःशुल्क भिन्ना प्रदान गरिनेछ।
|
| 106 |
+
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| 107 |
+
---
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| 108 |
+
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| 109 |
+
### १४. केन्द्रका पदाधिकारी तथा कर्मचारीलाई सुविधा तथा उन्मुक्ति:
|
| 110 |
+
(१) केन्द्रसँग सम्बन्धित काम कारबाइको सिलसिलामा नेपालभित्र रहँदा समितिको सदस्य, केन्द्रको निर्देशक तथा उप-निर्देशकलाई नेपाल सरकारले सम्बन्धित कुटनैतिक वर्गमा समावेश गरी प्रचलित कानून बमोजिम कूटनैतिक व्यक्तिलाई दिए सरहको सुविधा तथा उन्मुक्ति प्रदान गर्नेछ।
|
| 111 |
+
(२) कर्मचारीलाई केन्द्रसँग सम्बन्धित आफ्नो कर्तव्य पालनको सिलसिलामा नेपालभित्र रहँदा सन् १९६५ सेप्टेम्बर २६ देखि नेपाल पनि पक्ष भएको सन् १९४७ नोभेम्बर २१ मा पारित संयुक्त राष्ट्र संघीय विशेष संस्थाहरूको सुविधा तथा उन्मुक्ति सम्बन्धी सन्धिपत्र अनुसारको सुविधा तथा उन्मुक्ति प्रदान गरिनेछ।
|
| 112 |
+
(३) यस दफा बमोजिमको सुविधा तथा उन्मुक्ति केन्द्रको अनुरोधमा नेपाल सरकारद्वारा प्रदान गरिनेछ।
|
| 113 |
+
(४) केन��द्रले यस दफा बमोजिम सुविधा तथा उन्मुक्ति पाउन सक्ने व्यत्तिको नाम, पद, राष्ट्रियता तथा कामको प्रकृति समेतको बिबरण र त्यसमा भएको हेरफेर समेत नेपाल सरकार, पराराष्ट्र मन्त्रालयलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 114 |
+
(५) यस दफा बमोजिमको सुविधा तथा उन्मुक्ति प्राप्त गर्नको लागि सम्बन्धित व्यत्तिले केन्द्रद्वारा दिइएको आफ्नो परिचयपत्र आवश्यकता अनुसार देखाउनुपर्नेछ।
|
| 115 |
+
(६) यस दफा बमोजिम प्रदान गरिने सुविधा तथा उन्मुक्तिको अतिरिक्त नेपाल सरकारले आवश्यक देखेका अन्य सुविधा तथा उन्मुक्ति प्रदान गर्न यस दफाको कुनै कुराले बाधा पुन्याएको मानिने छैन।
|
| 116 |
+
(७) यस दफामा अन्य जुनसुकै कुरा लेखिएको भएतापनि नेपाली नागरिकलाई यस दफा बमोजिमको सुविधा दिइनु छैन।
|
| 117 |
+
|
| 118 |
+
---
|
| 119 |
+
|
| 120 |
+
### १५. केन्द्रको मालसामानको बेचबिखन:
|
| 121 |
+
(१) दफा १० बा ११ बमोजिम भन्सार महसूल, बिकीकर, दस्तुर बा अन्तःशुल्क छुट पाएको बा फिर्ता पाएको मालसामान केन्द्रले बेच-बिखन गरेमा बा बिना मूल्य हस्तान्तरण गरेमा त्यस्ता मालसामानको तत्काल कायम हुन आउने मोलमा प्रचलित दर अनुसार हुन आउने भन्सार महसूल करदस्तुर बा अन्तःशुल्क नेपाल सरकारलाई बुझाउनु पर्नेछ।
|
| 122 |
+
(२) दफा (१०) बेमोजिम केन्द्रले पैठारी गरेको मालसामानमध्ये प्रतिबन्धित बा नियन्त्रित मालसामान केन्द्रको निमित्त आवश्यक नभई बेचबिखन गरिने भएमा त्यस्तो मालसामान नेपाल सरकारलाई बा नेपाल सरकारबाट स्वीकृति प्रदान गरिएको व्यत्तिलाई मात्र बेचबिखन बा हस्तान्तरण गर्न सकिनेछ।
|
| 123 |
+
|
| 124 |
+
---
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
### १६. क्षति सम्बन्धी दायित्व:
|
| 127 |
+
(१) केन्द्रले बा कर्मचारीले आफ्नो काम, कर्तव्यको सिलसिलामा गरेको कुनै पनि काम कारबाइको सम्बन्धमा केन्द्र बा कर्मचारीको बिरुद्ध कुनै क्षति सम्बन्धी दाबी लाग्ने छैन। तर कर्मचारीले लापरबाही गरेको कारणबाट बा जानी जानी गरेको काम कारबाइबाट कसैलाई क्षति बा नोक्सानी हुन गएमा सम्बन्धित व्यत्तिले नेपाल सरकारमार्फत केन्द्रमा दाबी गर्न सक्नेछ।
|
| 128 |
+
(२) केन्द्रले आफ्नो काम, कर्तव्यको सिलसिलामा गरेका कुनै काम कारबाइबाट कुनै व्यक्तिलाई भएको खास प्रकारको क्षति बा नोक्सानी बापत उचित हर्जाना उपलब्ध गराउन केन्द्रले आवश्यक व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 129 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम दिइने हर्जाना केन्द्रले नेपाल सरकारसँग परामर्श गरी बीमा कम्पनीमार्फत बा अन्य तरिकाले दिने व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
---
|
| 132 |
+
|
| 133 |
+
### १७. शरण द���न नपाउने:
|
| 134 |
+
यस ऐनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि केन्द्रले आफ्नो कार्यालय भवन र हाताभित्र नेपालको कानुनद्वारा पक्राउ गरिने व्यक्ति बा अन्य देशमा सुपुर्दगी गरिनु पर्ने व्यक्ति बा कानुनी तथा न्यायिक कारबाइबाट उम्कन खोज्ने व्यक्तिलाई शरण प्रदान गर्न पाउने छैन।
|
| 135 |
+
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| 136 |
+
---
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| 137 |
+
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| 138 |
+
### १८. सुविधा तथा उन्मुक्ति दुरुपयोग हुन नदिने:
|
| 139 |
+
(१) यस ऐनद्वारा प्रदान गरिएको सुविधा तथा उन्मुक्ति केन्द्रको हितको दृष्टिबाट मोब प्रदान गरिएको मानिनेछ। यस्तो सुविधा तथा उन्मुक्ति दुरुपयोग हुन नदिने कर्तव्य निर्देशकको हुनेछ।
|
| 140 |
+
(२) यस ऐन बमोजिमको कुनै सुविधा बो उन्मुक्ति दुरुपयोग भएकोछ भन्ने नेपाल सरकारलाई लागेमा नेपाल सरकारले केन्द्रलाई तत्सम्बन्धमा लिखित सूचना दिनेछ।
|
| 141 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको सूचना प्राप्त हुनासाथ निर्देशकले नेपाल सरकारको सम्बन्धित पदाधिकारीसँग छलफल गरी तत्सम्बन्धमा आवश्यक कारबाइ गरेको लिखित जानकारी नेपाल सरकारलाई दिनुपर्नेछ।
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| 142 |
+
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| 143 |
+
---
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| 144 |
+
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| 145 |
+
### १९. बिघटन:
|
| 146 |
+
केन्द्रको बिघटन हुँदा त्यसको सम्पूर्ण जायजेथा र दायित्वको व्यवस्था तत्सम्बन्धमा नेपाल सरकार र केन्द्रको बीचमा भएको सम्झौतामा उल्लेख भए बमोजिम हुनेछ।
|
| 147 |
+
|
| 148 |
+
---
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| 149 |
+
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| 150 |
+
### २०. नेपाल सरकारसित सम्पर्क:
|
| 151 |
+
केन्द्रले नेपाल सरकारसित सम्पर्क राख्दा शिक्षा तथा संस्कृति मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
|
| 152 |
+
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| 153 |
+
---
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| 154 |
+
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| 155 |
+
**द्रष्टव्य:**
|
| 156 |
+
(१) केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरू:
|
| 157 |
+
"श्री ४ को सरकार" भन्ने शब्दको सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
| 158 |
+
(२) शिक्षा तथा खेलकुद मन्त्रालयको नाम हाल "शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय" रहेको।
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section_14_pdf_5.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,297 @@
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| 1 |
+
# अनिबार्य तथा नि:शुल्क शिक्षाको सम्बन्धी ऐन, २०७४
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**प्रमाणीकरण तथा प्रकाशन मिति**
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| 4 |
+
२०७४।६।२
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| 5 |
+
संबत् २०७४ सालको ऐन नम्बर १६
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| 6 |
+
अनिबार्य तथा नि:शुल्क शिक्षाको सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
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| 7 |
+
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| 8 |
+
**प्रस्ताबनाः**
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| 9 |
+
शिक्षा प्राप्त गर्ने प्रत्येक व्यक्तिको आधारभूत मानव अधिकार एवं संविधान प्रदत्त मौलिक हकलाई व्यवहारमा कार्यान्वयन गरी शिक्षालाई लोकतान्त्रिक मूल्य र मान्यतामा आधारित समाजवाद उन्मुख राष्ट्र निर्माणमा केन्द्रित गर्दै शिक्षामा सबैको सहज एवं समतामूलक पहुँच र निरन्तरता सुनिश्चित गर्न तथा शिक्षालाई सर्वव्यापी, जीवनोपयोगी, प्रतिस्पर्धी एवं गुणस्तरयुक्त बनाउनका लागि अनिबार्य तथा नि:शुल्क शिक्षा सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाञ्छनीय भएकोले, सङ्घीय संसदले यो ऐन बनाएको छ।
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| 10 |
+
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| 11 |
+
---
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| 12 |
+
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| 13 |
+
## परिच्छेद-१
|
| 14 |
+
**प्रारम्भिक**
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| 15 |
+
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| 16 |
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**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
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| 17 |
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(१) यस ऐनको नाम "अनिबार्य तथा नि:शुल्क शिक्षा सम्बन्धी ऐन, २०७४" रहेको छ।
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| 18 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
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| 19 |
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| 20 |
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**२. परिभाषाः**
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बिषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 22 |
+
(क) "अनिबार्य शिक्षा" भन्नाले नेपाल सरकारद्वारा तोकिएको उमेर समूहका बालबालिकाहरूलाई विद्यालय वा अन्य वैकल्पिक शैक्षिक संस्थामा भर्ना भई नियमित अध्ययन गर्ने र आधारभूत तहको अध्ययन पूरा गर्ने बाध्यकारी व्यवस्थालाई सम्झनु पर्छ।
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| 23 |
+
(ख) "अभिभावक" भन्नाले बालबालिकाको बाबु, आमा वा विद्यालयमा अभिभावकको रूपमा नाम दर्ता भएको व्यक्तिलाई सम्झनु पर्छ र सो शब्दले निजको संरक्षक वा माथबरलाई समेत जनाउँछ।
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| 24 |
+
(ग) "आर्थिक रूपले बिपन्न" भन्नाले तोकिएको सीमाभन्दा कम वार्षिक आय भएको अवस्था सम्झनु पर्छ।
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| 25 |
+
(घ) "आधारभूत शिक्षा" भन्नाले कक्षा एकदेखि कक्षा आठसम्मको विद्यालय शिक्षा सम्झनु पर्छ।
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+
(ङ) "तोकिएको" वा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको वा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
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| 27 |
+
(च) "निजी लगानीका विद्यालय" भन्नाले निजी लगानीमा स्थापना वा सञ्चालन भएको विद्यालय सम्झनु पर्छ र सो शब्दले यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत कायम रहेको संस्थागत विद्यालयलाई समेत जनाउँछ।
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| 28 |
+
(छ) "निःशुल्क शिक्षा" भन्नाले विद्यालय वा शैक्षिक संस्थाले विद्यार्थी वा अभिभावकबाट कुनै पनि शीर्षकमा कुनै पनि शुल्क असुल नगरी दिइने शिक्षालाई सम्झनु पर्छ।
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| 29 |
+
(ज) "प्रधानाध्यापक" भन���नाले विद्यालयको नेतृत्व बहन गरी व्यवस्थापकीय तथा प्रशासनिक जिम्मेवारी निर्वाह गर्ने विद्यालयको प्रमुख कार्यकारी पदाधिकारीलाई सम्झनु पर्छ र सो शब्दले विद्यालय वा शिक्षण संस्थाको व्यवस्थापनको प्रमुख जिम्मेवारी भएको प्रधानाचार्य वा कार्यकारी अधिकार प्रयोग गर्ने अन्य व्यक्तिलाई समेत जनाउँछ।
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| 30 |
+
(झ) "प्रारम्भिक बालविकास तथा शिक्षा" भन्नाले चार वर्ष उमेर पूरा भएका बालबालिकालाई कक्षा एकमा प्रवेश गर्नु भन्दा अगाडि दिइने एक वर्ष अवधिको बालबालिकाको सर्वाङ्गीण विकासमा केन्द्रित बाल विकास तथा शिक्षा सम्झनु पर्छ।
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| 31 |
+
(ज) "माध्यमिक शिक्षा" भन्नाले कक्षा नौदेखि कक्षा बाह्रसम्म वा सो सरहको शिक्षा सम्झनु पर्छ।
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| 32 |
+
(ट) "मातृभाषी शिक्षा" भन्नाले नेपालमा बोलिने नेपाली समुदायको कुनै मातृभाषाका माध्यमबाट दिइने शिक्षा सम्झनु पर्छ र सो शब्दले मातृभाषामा आधारित बहुभाषिक शिक्षालाई समेत जनाउँछ।
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| 33 |
+
(ड) "विद्यालय" भन्नाले प्रचलित कानून बमोजिम स्थापनाभई सञ्चालन भएको सार्वजनिक वा निजी लगानीका विद्यालय सम्झनु पर्छ र सो शब्दले यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत प्रचलित कानून बमोजिम कायम रहेका सामुदायिक वा संस्थागत विद्यालयलाई समेत जनाउँछ।
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| 34 |
+
(द) "विद्यार्थी" भन्नाले विद्यालयमा भर्ना भई अध्ययन गरिरहेका व्यक्तिलाई सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अनौपचारिक, खुला, वैकल्पिक लगायतका कार्यक्रममा शिक्षा हासिल गरिरहेका व्यक्तिलाई समेत जनाउँछ।
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| 35 |
+
(ण) "विशेष शिक्षा" भन्नाले दृष्टिविहीन, बहिरा, अटिजम, बौद्धिक अपाङ्गता, सुस्त श्रवण, वा अति अशक्त शारीरिक अपाङ्गता भएका वा यस्तै प्रकृतिका अवस्थाका बालबालिकालाई छुट्टै समूहमा राखी विशेष प्रकार र निश्चित माध्यमबाट दिइने शिक्षा सम्झनु पर्छ।
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| 36 |
+
(त) "शिक्षक" भन्नाले विद्यालयको अध्यापक सम्झनु पर्छ र सो शब्दले प्रधानाध्यापकलाई समेत जनाउँछ।
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| 37 |
+
(थ) "शिक्षण संस्था" भन्नाले विद्यालय वा उच्च शिक्षा प्रदायक संस्थालाई सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अनौपचारिक, वैकल्पिक वा खुला शिक्षा प्रदान गर्ने संस्थालाई समेत जनाउँछ।
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| 38 |
+
(द) "सार्वजनिक विद्यालय" भन्नाले नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहको लगानी वा अनुदानमा सञ्चालित विद्यालय सम्झनु पर्छ र सो शब्दले प्रचलित कानून बमोजिम सामुदायिक विद्यालयको रूपमा सञ्चालित विद्यालय समेत जनाउँछ।
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| 39 |
+
(ध) "सार्वजनिक शै��्षिक गुठी विद्यालय" भन्नाले मुनाफा नकमाउने उद्देश्यले सार्वजनिक शैक्षिक गुठी अन्तर्गत स्थापना वा सञ्चालन भएका कल्याणकारी विद्यालयलाई सम्झनु पर्छ।
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| 40 |
+
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| 41 |
+
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| 42 |
+
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| 43 |
+
## परिच्छेद-२
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| 44 |
+
**शिक्षामा नागरिकको पहुँच र राज्यको दायित्व**
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| 45 |
+
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+
**३. शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार:**
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| 47 |
+
(१) प्रत्येक नागरिकलाई गुणस्तरीय शिक्षामा समतामूलक पहुँचको अधिकार हुनेछ। शिक्षा प्राप्त गर्न कसैलाई कुनै पनि आधारमा भेदभाव गरिने छैन।
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| 48 |
+
(२) नेपालमा बसोबास गर्ने प्रत्येक नेपाली समुदायलाई मातृभाषामा शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 49 |
+
(३) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि प्रत्येक नागरिकलाई यो ऐन वा प्रचलित कानूनबमोजिम साक्षर हुने, प्रारम्भिक बाल विकास तथा शिक्षा, आधारभूत शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा तथा उच्च शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 50 |
+
(४) शिक्षा प्राप्त गर्ने प्रत्येक नागरिकलाई यो ऐन वा प्रचलित कानून बमोजिम विद्यालय वा शिक्षण संस्थामा प्रवेश पाउने, अध्ययन गर्ने, अनुसन्धान गर्ने, परीक्षामा सहभागी हुने वा शैक्षिक प्रमाणपत्र प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 51 |
+
(५) प्रत्येक निरक्षर नागरिकलाई तोकिए बमोजिम साक्षर हुने अधिकार हुनेछ।
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| 52 |
+
(६) प्रत्येक नागरिकलाई प्रचलित कानून बमोजिमको शर्त तथा मापदण्ड पूरा गरी आफ्नो योग्यता, क्षमता तथा रुची अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 53 |
+
(७) अपाङ्गता भएका नागरिकहरूलाई विशेष शिक्षाको माध्यमबाट समेत शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 54 |
+
(८) आर्थिक रूपमा बिपन्न, अपाङ्गता भएका र दलित नागरिकलाई निःशुल्क उच्च शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 55 |
+
(९) जनआन्दोलन, सशस्त्र संघर्ष, क्रान्तिका क्रममा जीवन उत्सर्ग गर्ने सहिद, बेपत्ता पारिएका व्यक्ति, द्वन्द्व पीडित, घाइते तथा अपाङ्गता भएका व्यक्तिका छोरा छोरीहरूलाई तोकिए बमोजिम विशेष अवसर पाउने अधिकार हुनेछ।
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| 56 |
+
(१०) प्रत्येक बालबालिकालाई प्रचलित कानूनमा व्यवस्था भए बमोजिमको योग्यताप्राप्त शिक्षकबाट गुणस्तरीय शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 57 |
+
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| 58 |
+
**४. शिक्षा प्रदान गर्ने राज्यको दायित्व हुने:**
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| 59 |
+
(१) प्रत्येक नागरिकलाई आधारभूत तहसम्मको शिक्षा प्रदान गर्ने दायित्व र तत् सम्बन्धी आवश्यक व्यवस्था मिलाउने जिम्मेवारी नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार र स्थानीय तहको हुनेछ।
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| 60 |
+
(२) प्रत्येक नागरिकलाई माध्यमिक तहसम्मको शि��्षा प्रदान गर्ने दायित्व राज्यको हुनेछ।
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| 61 |
+
(३) उपदफा (१) र (२) को प्रयोजनको लागि नेपाल सरकारले आवश्यक समन्वय र नेतृत्व गर्नेछ।
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| 62 |
+
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| 63 |
+
**५. नागरिकको कर्तव्य:**
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| 64 |
+
(१) आधारभूत तहको शिक्षा हासिल गर्नु प्रत्येक नागरिकको कर्तव्य हुनेछ।
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| 65 |
+
(२) आधारभूत शिक्षा प्राप्त गर्ने उमेर समूहका आफ्ना बालबालिकाहरूलाई नियमित रूपमा विद्यालय पठाउनु प्रत्येक नागरिकको कर्तव्य हुनेछ।
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| 66 |
+
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| 67 |
+
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| 68 |
+
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+
## परिच्छेद-३
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| 70 |
+
**अनिबार्य तथा निःशुल्क शिक्षा**
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| 71 |
+
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| 72 |
+
**६. अनिबार्य शिक्षा प्रदान गर्नु पर्ने:**
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| 73 |
+
(१) यो ऐन प्रारम्भ भएपछि प्रत्येक स्थानीय तह मार्फत् राज्यले चार वर्ष पूरा भई तेह्र वर्ष उमेर पूरा नभएको प्रत्येक बालबालिकालाई आधारभूत तहसम्म अनिबार्य शिक्षा प्रदान गर्ने व्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
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| 74 |
+
(२) उपदफा (१) मा उल्लेखित शिक्षाका अतिरिक्त चार वर्षको उमेर पूरा भएपछि कम्तीमा एक वर्षको प्रारम्भिक बाल विकास तथा शिक्षा प्रदान गर्नु पर्नेछ।
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| 75 |
+
(३) स्थानीय तहले प्राकृतिक बिपद्, दुर्घटना, आकस्मिक घटना लगायतका अन्य कारणबाट प्रभावित बालबालिकालाई सुरक्षित रूपमा आधारभूत तहसम्मको शिक्षा प्रदान गर्ने व्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
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| 76 |
+
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| 77 |
+
**७. बालबालिका भर्ना गराउनु पर्नेः**
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| 78 |
+
(१) यो ऐन प्रारम्भ भएपछि आधारभूत तहमा प्रत्येक बालबालिकालाई निजको उमेर अनुसारको कक्षामा निजलाई पायक पर्ने विद्यालयमा सम्बन्धित अभिभावकले भर्ना गराउनु पर्नेछ।
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| 79 |
+
स्पष्टीकरणः यस परिच्छेदको प्रयोजनका लागि "पायक पर्ने विद्यालय" भन्नाले सम्बन्धित बालबालिकाको अभिभावक रहेको बासस्थानबाट सामान्यतया दुई किलोमिटरसम्मको दूरीमा रहेको विद्यालय सम्झनु पर्छ।
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| 80 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सम्बन्धित जिल्लाको भौगोलिक स्थिति, जनघनत्व, विद्यालय जाने उमेरका बालबालिकाको संख्या समेतलाई ध्यान दिई सामान्यतया दुई किलोमिटरभित्रको दूरीमा विद्यालय खोल्न बाधा परेको मानिने छैन।
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| 81 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम विद्यालयमा भर्ना भएको बालबालिकाले आधारभूत तहसम्मको शिक्षा पूरा नगरी निजलाई पठनपाठनबाट वञ्चित गर्ने उद्देश्यले अभिभावकले विद्यालयबाट छुटाउनु वा विद्यालय जानबाट रोक लगाउनु हुँदैन।
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| 82 |
+
(४) आर्थिक, भौगोलिक वा शारीरिक, मानसिक अवस्था वा अन्य कुनै प्रतिकूलताका कारणले बालबालिकाहरू विद्यालय जान नसक्ने भएमा तोकिए बमोजिम आवासीय विद्यालयमा अध्ययन गर्ने व्यवस���था गर्न सकिनेछ।
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| 83 |
+
(५) विद्यालय जाने उमेरका बालबालिकालाई विद्यालयमा भर्ना नगराउने वा भर्ना भएपछि पनि आधारभूत तहसम्मको शिक्षा पूरा नगरी बालबालिकालाई विद्यालयबाट छुटाउने अभिभावकलाई स्थानीय तहबाट प्रदान गरिने सुविधा प्राप्त गर्न वञ्चित गर्न सकिनेछ।
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| 84 |
+
(६) उपदफा (५) बमोजिम सुविधाबाट वञ्चित गर्नु अघि सम्बन्धित अभिभावकसँग आवश्यक परामर्श गरी बालबालिकालाई विद्यालय पठाउन उत्प्रेरित गर्न व्यवस्था गरिनेछ।
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| 85 |
+
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| 86 |
+
**८. पायक पर्ने विद्यालयबाट शिक्षा प्राप्त गर्नेः**
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| 87 |
+
(१) प्रत्येक बालबालिकालाई निजको अभिभावकको बासस्थानबाट पायक पर्ने विद्यालयबाट आधारभूत तह वा माध्यमिक तहसम्मको शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 88 |
+
(२) आधारभूत तहको शिक्षा प्राप्त गर्ने उमेरको कुनै बालबालिकाको हकमा उपदफा (१) बमोजिमको विद्यालय उपलब्ध हुन नसकेमा सम्बन्धित स्थानीय तहले यो ऐन प्रारम्भ भएको तीन वर्षभित्र त्यस्तो टाउँमा विद्यालय स्थापना गर्ने वा त्यस्तो बालबालिकाका लागि आधारभूत तहसम्मको शिक्षा प्राप्त गर्न सक्ने वैकल्पिक व्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
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| 89 |
+
(३) यस दफामा लेखिएका कुनै पनि कुराले सम्बन्धित अभिभावकले आफूले चाहेको अन्य विद्यालयमा आफ्ना बालबालिका भर्ना गराउन वा सम्बन्धित बालबालिकाले रोजेको अन्य विद्यालयमा भर्ना भई शिक्षा प्राप्त गर्न रोक लगाउने छैन।
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| 90 |
+
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| 91 |
+
**९. भर्ना गर्न इन्कार गर्न नहुने:**
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| 92 |
+
(१) कुनै अभिभावकले आफ्नो बालबालिकालाई आधारभूत तहसम्मको शिक्षा प्राप्त गर्न निजलाई पायक पर्ने विद्यालयमा वा अन्य कुनै विद्यालयमा भर्ना गर्न अनुरोध गरेमा देहायको अवस्थामा बाहेक त्यस्तो विद्यालयको प्रधानाध्यापकले भर्ना गर्न इन्कार गर्नु हुँदैनः
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| 93 |
+
(क) कुनै कक्षाको लागि अध्यापन गराउने विद्यार्थी जति संख्या निर्धारण गरिएको हो त्यति नै संख्यामा बालबालिका भर्ना भइसकेको भएमा,
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| 94 |
+
(ख) जुन कक्षामा निज भर्ना हुन चाहेको हो निजले त्यस्तो कक्षाको न्यूनतम स्तर पूरा नगरेमा,
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| 95 |
+
(ग) विद्यालयको भौतिक अवस्थाको कारणले थप बालबालिका भर्ना गर्न नसकिने भएमा।
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| 96 |
+
(२) उपदफा (१) का खण्ड (क), (ख) र (ग) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए पनि अपाङ्गता भएका वा आर्थिक रूपले बिपन्न बालबालिकालाई निजहरूकै पायक पर्ने विद्यालयले भर्ना गर्नु पर्नेछ।
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| 97 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम बालबालिका भर्ना गर्न इन्कार गर्नु परेमा सम्बन्धित प्रधाना���्यापकले त्यस्तो विद्यालयको नजिकमा रहेको अन्य उपयुक्त विद्यालय भए सम्बन्धित बालबालिकालाई त्यस्तो विद्यालयमा भर्ना गर्न सिफारिस गर्नु पर्नेछ।
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| 98 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम कुनै बालबालिका भर्ना गर्न नसकेमा त्यसको कारण लिखित रूपमा अभिभावकलाई दिई सम्बन्धित वडा कार्यालयमा जानकारी गराउनु पर्नेछ र त्यस्तो कार्यालयले सम्बन्धित वडाभित्र वा अन्यत्र रहेका विद्यालयमा त्यस्तो बालबालिकाको भर्नाको सहजीकरण गर्नु पर्नेछ।
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| 99 |
+
(५) उपदफा (१) को खण्ड (ख) को अवस्थामा भर्ना गर्न नसकिने भएमा निजले आधारभूत तहको जुन कक्षाको स्तर पूरा गर्न सक्दछ निजको अभिभावकले चाहेमा सोही कक्षामा सोही विद्यालयमा निजलाई भर्ना गराउनु पर्नेछ।
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| 100 |
+
(६) यस दफामा लेखिएको अवस्थामा बाहेक बालबालिकालाई भर्ना गर्न इन्कार गर्ने काम दण्डनीय हुनेछ।
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| 101 |
+
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| 102 |
+
**१०. विद्यालयबाट निष्काशन गर्न नहुने:**
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| 103 |
+
(१) कुनै विद्यालयमा भर्ना भई आधारभूत तहको शिक्षा लिइरहेको कुनै पनि बालबालिकालाई विद्यालयबाट निष्काशन गर्न सकिने छैन।
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| 104 |
+
(२) विद्यालय भर्ना भएको बालबालिकाले कुनै अनुशासनहीन काम गरेको वा खराब आचरण भएको कारणले निजलाई आधारभूत शिक्षा प्राप्त गर्न वा परीक्षा दिन रोक लगाउन वा वञ्चित गर्न सकिने छैन। त्यस्ता बालबालिकालाई विद्यालयले परामर्श सेवाको सुविधा उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
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| 105 |
+
(३) आधारभूत तहको शिक्षा प्राप्त गरिरहेको कुनै बालबालिकाको अनुशासन, आचरण, पठनपाठन लगायतका विषयमा कुनै सुधार गर्नु पर्ने भएमा सम्बन्धित विद्यालयका प्रधानाध्यापकले सम्बन्धित अभिभावकसँग छलफल वा परामर्श गरी त्यस्तो बालबालिकाले आधारभूत तहसम्मको शिक्षा प्राप्त गर्ने वातावरण सिर्जना गर्न मनोसामाजिक परामर्श वा अन्य आवश्यक उपाय अवलम्बन गर्नु पर्नेछ।
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| 106 |
+
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| 107 |
+
**११. पुनः भर्ना गर्नु पर्नेः**
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| 108 |
+
(१) पाँच वर्ष पूरा भई बाह्र वर्ष उमेर पूरा नगरेको कुनै बालबालिका कुनै कारणले विद्यालयमा भर्ना हुन नसकी आधारभूत तहसम्मको अध्ययन पूरा नगरेको वा आधारभूत तहको शिक्षा पूरा नगरी विद्यालय छोडेको भएमा निजको उमेर वा स्तर अनुसार विद्यालयले दफा ९ को अधीनमा रही निजलाई पुनः भर्ना गर्नु पर्नेछ।
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| 109 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम भर्ना भएको बालबालिकालाई निज भर्ना भएको कक्षाका अन्य बालबालिकाको समान स्तरमा पुर्याउन आवश्यक भएमा सम्बन्धित विद्यालयले वैकल्पिक उपायको व्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
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| 110 |
+
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| 111 |
+
**१२. स्थानान्तरण गर्नु पर्नेः**
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| 112 |
+
(१) कुनै बालबालिका भर्ना भएको कुनै विद्यालयमा आधारभूत तहसम्मको अध्यापन गराउन स्वीकृत प्राप्त नभएको वा त्यस्तो विद्यालय अर्को विद्यालयमा गाभिएको वा कुनै कारणले विद्यालय बन्द गर्नु परेको अवस्थामा सम्बन्धित स्थानीय तहले त्यस्तो विद्यालयबाट आधारभूत तहको शिक्षा पूरा नगरेका बालबालिकालाई पायक पर्ने अर्को विद्यालयमा स्थानान्तरण गर्ने व्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
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| 113 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम स्थानान्तरण हुने बालबालिकालाई त्यस्तो विद्यालयमा पुनः भर्ना गराउनु पर्ने छैन।
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| 114 |
+
(३) यस दफामा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि उपदफा (१) बमोजिमको विद्यार्थी वा निजको अभिभावकले रोजेको अन्य कुनै विद्यालयमा भर्ना हुन यस दफाले बाधा पुर्याउने छैन।
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| 115 |
+
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| 116 |
+
**१३. स्थानान्तरण प्रमाणपत्र दिनु पर्नेः**
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| 117 |
+
(१) आधारभूत तहसम्मको शिक्षा पूरा नगरेको कुनै बालबालिका वा निजको अभिभावकले कुनै कारण देखाई निजले अध्ययन गरिरहेको विद्यालय छोडी त्यस्तो शिक्षा प्राप्त गर्न अर्को कुनै विद्यालयमा भर्ना हुन स्थानान्तरण प्रमाणपत्र माग गरेमा निजले पूरा गरेको अध्ययनको विवरण खुलाई सम्बन्धित प्रधानाध्यापकले निजलाई अबिलम्ब स्थानान्तरण प्रमाणपत्र दिनु पर्नेछ।
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| 118 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको प्रमाणपत्र पेस गरेपछि दफा ९ को अधीनमा रही बालबालिकाले भर्ना हुन चाहेको विद्यालयले निजलाई अबिलम्ब भर्ना गर्नु पर्नेछ।
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| 119 |
+
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| 120 |
+
**१४. वैकल्पिक शिक्षाको व्यवस्था गर्न सकिनेः**
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| 121 |
+
(१) पायक पर्ने विद्यालय उपलब्ध नभएको वा अन्य कुनै कारणले विद्यालयमा भर्ना भई पूरा समय अध्ययन गरी आधारभूत तहको शिक्षा प्राप्त गर्न नसक्ने बालबालिकालाई त्यस्तो तहसम्मको वैकल्पिक शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 122 |
+
(२) आधारभूत तहसम्मको वैकल्पिक शिक्षा सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 123 |
+
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| 124 |
+
**१५. अनौपचारिक तथा खुला शिक्षा प्रदान गर्नेः**
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| 125 |
+
(१) विद्यालयमा भर्ना भई नियमित रूपमा अध्ययन गर्न नसक्ने बालबालिकालाई माध्यमिक तहको शिक्षा अनौपचारिक वा खुला विद्यालयबाट प्रदान गर्न सकिनेछ।
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| 126 |
+
(२) नेपाल सरकारले स्थानीय तह मार्फत् माध्यमिक शिक्षा प्रदान गर्नका लागि आवश्यकताको आधारमा अनौपचारिक र खुला विद्यालय स्थापना एवं सञ्चालन गर्ने व्यवस्था गर्नेछ।
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| 127 |
+
(३) अनौपचारिक तथा खुला विद्यालय सम्बन्धी अन्य व्��वस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 128 |
+
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| 129 |
+
**१६. परम्परागत शिक्षा प्रदान गर्न सकिनेः**
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| 130 |
+
(१) परम्परादेखि चलीआएका शिक्षा सम्बन्धी मूल्य, मान्यता, संस्कृति, रीतिरिवाज र अभ्यासको संरक्षण र जगेर्ना गर्न र त्यसलाई समय सापेक्ष परिमार्जन गरी निरन्तरता दिन गुरुकुल, गुम्बा वा मदरसा जस्ता संस्था सञ्चालन गरी बालबालिकालाई शिक्षा प्रदान गर्न सकिनेछ।
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| 131 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको शिक्षा प्रदान गर्नको लागि सञ्चालन गरिने गुरुकुल, गुम्बा वा मदरसा सम्बन्धित स्थानीय तहमा दर्ता गर्नु पर्नेछ।
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| 132 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम दर्ता भई सञ्चालन हुने गुरुकुल, गुम्बा वा मदरसाले बालबालिकालाई शिक्षा प्रदान गर्दा स्थानीय तहले कानून बमोजिम निर्धारण गरेको र तोकिए बमोजिमको अन्य शर्त तथा मापदण्ड पालना गर्नु पर्नेछ।
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| 133 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम दर्ता गरी सञ्चालनमा रहेका गुरुकुल, गुम्बा र मदरसा जस्ता शैक्षिक संस्थाले प्रदान गर्ने शिक्षाका अतिरिक्त नेपाल सरकारले निर्धारण गरेको पाठ्यक्रम बमोजिमको शिक्षा प्रदान गर्नु पर्नेछ।
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| 134 |
+
(५) परम्परागत शिक्षा प्रदान गर्ने सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 135 |
+
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| 136 |
+
**१७. प्राविधिक शिक्षा सम्बन्धी व्यवस्थाः**
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| 137 |
+
(१) आधारभूत तह पूरा गरेको प्रत्येक नागरिकलाई प्रचलित कानून बमोजिम माध्यमिक शिक्षा वा सो सरहको प्राविधिक शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 138 |
+
(२) यस दफामा लेखिएदेखि बाहेक आधारभूत तहपछि प्रदान गरिने प्राविधिक शिक्षा सम्बन्धी व्यवस्था प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
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| 139 |
+
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| 140 |
+
**१८. अभिभावकको पहिचान नभएका बालबालिकाको शिक्षाः**
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| 141 |
+
(१) कुनै स्थानीय तहको भौगोलिक क्षेत्रभित्र अभिभावक पहिचान नभएका वा पत्ता नलागेका बालबालिका भएमा त्यस्ता बालबालिकाको आधारभूत तहसम्मको शिक्षा उपलब्ध गराउने, पठनपाठन तथा त्यससँग सम्बन्धित अन्य कुराको व्यवस्था गर्ने जिम्मेवारी सम्बन्धित स्थानीय तहको हुनेछ।
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| 142 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको शिक्षा प्रदान गर्ने व्यवस्था गर्न स्थानीय तहको सम्बन्धित वडा समिति जिम्मेवार हुनेछ।
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| 143 |
+
(३) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सम्बन्धित बालबालिकाको अभिभावकको पहिचान भएमा वा पत्ता लागेमा अभिभावकले नै त्यसको जिम्मेवारी लिनु पर्नेछ।
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| 144 |
+
(४) अभिभावक पहिचान नभएका बालबालिकाको पठनपाठन सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 145 |
+
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| 146 |
+
**१९. योग्य नहुने:**
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| 147 |
+
(१) प्रचलित कानूनमा ��ुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सम्पूर्ण नागरिकले आधारभूत शिक्षा अनिबार्य रूपमा प्राप्त गर्ने वातावरण सिर्जना गर्ने प्रयोजनका लागि सम्वत् २०६४ साल वैशाख १ गतेपछि आधारभूत शिक्षा प्राप्त नगरेको व्यक्ति देहायको कुनै अवसर प्राप्त गर्न योग्य मानिने छैनः
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| 148 |
+
(क) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहको कुनै पनि सरकारी सेवामा वा नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहको पूर्ण वा आंशिक स्वामित्व, अनुदान वा नियन्त्रणमा रहेको कुनै संस्थाको सेवामा प्रवेश गर्न वा कुनै पनि सरकारी, गैरसरकारी वा निजी क्षेत्रमा स्थापित कुनै पनि संस्थामा कुनै पनि पदमा निर्वाचित, नियुक्ति वा मनोनयन हुन वा कुनै रोजगारी प्राप्त गर्न,
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| 149 |
+
(ख) कुनै पनि कम्पनी, फर्म, सहकारी संस्था वा गैरसरकारी संस्थाको संस्थापन गर्न वा त्यस्तो कम्पनी फर्म वा संस्थाको संस्थापक सेयरधनी, सञ्चालक वा सदस्य वा कुनै पदाधिकारी हुन,
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| 150 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि उपदफा (१) को व्यवस्था प्रारम्भ हुनु अघि नै बाह्र वर्ष उमेर पूरा भइसकेको वा कुनै पदमा बहाल भइसकेको, निर्वाचित, मनोनयन वा नियुक्त भई सकेको वा कार्यरत रहेको वा प्राप्त गरिसकेको वा भोगिसकेको सुविधाको हकमा सो उपदफामा लेखिएको कुनै कुराले असर पुर्याउने छैन।
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| 151 |
+
(३) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कमजोर स्वास्थ्य वा बहुअपाङ्गता वा यस्तै अन्य कुनै जटिल कारणले शिक्षा लिन नसकेका व्यक्तिको हकमा यो उपदफा लागू हुने छैन।
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| 152 |
+
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| 153 |
+
**२०. माध्यमिक तहसम्मको शिक्षा नि:शुल्क हुने:**
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| 154 |
+
(१) प्रत्येक नागरिकलाई राज्यबाट माध्यमिक तहसम्मको शिक्षा नि:शुल्क प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ।
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| 155 |
+
(२) नि:शुल्क शिक्षा प्राप्त गर्दा प्रत्येक नागरिकले यो ऐन तथा अन्य प्रचलित कानून बमोजिमका शर्त पालना गर्नु पर्नेछ।
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| 156 |
+
(३) नि:शुल्क शिक्षा सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 157 |
+
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| 158 |
+
**२१. पाठ्यपुस्तक उपलब्ध गराउनु पर्नेः**
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| 159 |
+
(१) नेपाल सरकारले आधारभूत तह वा माध्यमिक तहसम्मको शिक्षा प्राप्त गर्ने प्रत्येक सार्वजनिक विद्यालयका बालबालिकालाई पाठ्यपुस्तक बापतको रकम तोकिए बमोजिम स्थानीय तहलाई उपलब्ध गराउनेछ।
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| 160 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको रकम प्राप्त भएपछि सम्बन्धित स्थानीय तहले पाठ्यपुस्तक खरिद बापतको रकम शैक्षिक सत्र प्रारम्भ हुनुभन्दा कम्तीमा तीन महिना अघि नै सम्बन्धित वि��्यालयलाई उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
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| 161 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम रकम प्राप्त गरेपछि विद्यालयले पाठ्यपुस्तक खरिद गरी विद्यार्थी भर्नाको समयमा विद्यार्थीलाई उपलब्ध गराउनेछ।
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| 162 |
+
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| 163 |
+
**२२. शैक्षिक सामग्री प्रदान गर्नेः**
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| 164 |
+
(१) स्थानीय तहले आधारभूत तहसम्मको शिक्षा प्राप्त गर्न सार्वजनिक विद्यालयमा भर्ना भएका आर्थिक रूपमा बिपन्न बालबालिकालाई आवश्यक पर्ने कापी, कलम लगायतका शैक्षिक सामग्री प्रदान गर्न सक्नेछ।
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| 165 |
+
(२) स्थानीय तहले आधारभूत तहसम्मका शिक्षा प्रदान गर्ने सार्वजनिक विद्यालयका लागि तोकिए बमोजिम आवश्यक प्रयोगशाला, अतिरिक्त क्रियाकलाप सामग्री, खेल सामग्री, खेलकुदको पूर्वाधार, कम्प्युटर तथा सूचना प्रविधिको पँडुचको व्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
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| 166 |
+
(३) शैक्षिक सामग्री प्रदान गर्ने सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 167 |
+
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| 168 |
+
**२३. छात्रवृत्ति प्रदान गर्न सक्नेः**
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| 169 |
+
(१) मानव विकास सूचकाङ्कको दृष्टिकोणले तोकिएको सूचकाङ्कभन्दा पछाडि परेका क्षेत्रका तोकिएका समुदाय वा आर्थिक रूपले बिपन्न वा अपाङ्गता भएका नागरिकको परिवारका बालबालिकालाई सम्बन्धित स्थानीय तहले आधारभूत तहसम्मको शिक्षा प्राप्त गर्न तोकिए बमोजिम मासिक छात्रवृत्ति प्रदान गर्न सक्नेछ।
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| 170 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त छात्रवृत्ति शैक्षिक सामग्री वा विद्यार्थीको सिकाइमा मद्दत पुग्ने अन्य कुनै सामग्री व्यवस्थाका निम्ति खर्च गर्नु पर्नेछ।
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| 171 |
+
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| 172 |
+
**२४. स्वास्थ्य उपचारको प्रबन्ध गर्नेः**
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| 173 |
+
(१) स्थानीय तहले सार्वजनिक विद्यालयमा अध्ययनरत विद्यार्थीलाई प्रचलित कानून बमोजिम सञ्चालित स्वास्थ्य संस्थासँग सहकार्य गरी स्वास्थ्य परामर्श तथा उपचार सम्बन्धी आवश्यक प्रबन्ध मिलाउन सक्नेछ।
|
| 174 |
+
(२) निजी लगानी तथा सार्वजनिक शैक्षिक गुठीका विद्यालयमा तोकिए बमोजिमको निःशुल्क स्वास्थ्य उपचारको व्यवस्था गर्ने दायित्व सम्बन्धित विद्यालयको हुनेछ।
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| 175 |
+
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| 176 |
+
**२५. दिवा खाजा सम्बन्धी व्यवस्थाः**
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| 177 |
+
मानव विकास सूचकाङ्कको दृष्टिकोणले तोकिएको सूचकाङ्कभन्दा तल परेका क्षेत्रका तोकिएका समुदाय वा आर्थिक रूपले बिपन्न वा अपाङ्गता भएका नागरिकको परिवारका बालबालिकाहरूलाई पठनपाठनमा निरन्तरता दिनका लागि नेपाल सरकारले स्थानीय तह मार्फत् तोकिए बमोजिम दिवा खाजा वा दिवा खाजा खर्च उपलब्ध गराउन सक्नेछ।
|
| 178 |
+
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| 179 |
+
**२६. शिक्षणको माध्यम भाषा:**
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| 180 |
+
(१) विद���यालयले प्रदान गर्ने शिक्षणको माध्यम नेपाली भाषा, अङ्ग्रेजी भाषा वा दुवै भाषा वा सम्बन्धित नेपाली समुदायको मातृभाषा हुन सक्नेछ।
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| 181 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै विदेशीले नेपालमा अध्ययन गर्दा अनिबार्य नेपाली विषय अध्ययन गर्नु पर्ने अवस्थामा निजले चाहेमा त्यसको सट्टा अन्य कुनै भाषागत विषय अध्ययन गर्न सक्नेछ।
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| 182 |
+
|
| 183 |
+
**२७. निजी लगानीका विद्यालय सेवामूलक हुने:**
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| 184 |
+
(१) निजी लगानीका विद्यालयले प्रारम्भिक बाल विकास तथा शिक्षा र आधारभूत शिक्षा सेवामूलक तथा लोककल्याणकारी हुने गरी सञ्चालन गर्नु पर्नेछ।
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| 185 |
+
(२) निजी लगानीका विद्यालयलाई सेवामूलक र लोककल्याणकारी बनाउने सम्बन्धी बिस्तृत व्यवस्था नेपाल सरकारले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
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| 186 |
+
(३) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यो ऐन प्रारम्भ भएपछि प्रत्येक निजी लगानीका विद्यालय र सार्वजनिक शैक्षिक गुठी अन्तर्गत सञ्चालन गरेका सो विद्यालयको विद्यार्थी संख्याको आधारमा विद्यालयले प्रारम्भिक बाल विकास तथा शिक्षादेखि बाह्र कक्षासम्मका कुल विद्यार्थी संख्याको देहायबमोजिम विद्यार्थीहरूलाई निःशुल्क शिक्षा प्रदान गर्न स्थान आरक्षण गर्नु पर्नेछ।
|
| 187 |
+
(क) पाँच सय जनासम्म विद्यार्थी भएका विद्यालयले कम्तीमा दश प्रतिशत।
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| 188 |
+
(ख) पाँच सयदेखि आठ सय जनासम्म विद्यार्थी भएका विद्यालयले कम्तीमा बाह्र प्रतिशत।
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| 189 |
+
(ग) आठ सयभन्दा बढी विद्यार्थी संख्या भएका विद्यालयले कम्तीमा पन्ध्र प्रतिशत।
|
| 190 |
+
(४) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यो दफा प्रारम्भ हुँदाका बखत कुनै विद्यालयले उपलब्ध गराउँदै आएको छात्रवृत्ति घटाउन पाइने छैन।
|
| 191 |
+
(५) उपदफा (२) बमोजिम आरक्षण गरिएको स्थानमा छनौट प्रक्रिया अवलम्बन गरी तोकिएका समूहबीचको प्रतिस्पर्धाको आधारमा योग्य र सक्षम बालबालिकालाई भर्ना गर्नु पर्नेछ।
|
| 192 |
+
(६) उपदफा (१) मा आरक्षित स्थानका निम्ति छनौट भई भर्ना भएका विद्यार्थीहरूलाई निजी लगानीका विद्यालयले उपलब्ध गराउने सुविधा तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 193 |
+
(७) उपदफा (१) बमोजिम आरक्षण गरिएको स्थानमा उपदफा (२) बमोजिम छनौट भई निःशुल्क अध्ययन गर्ने विद्यार्थीहरूले जुन कक्षामा निःशुल्क शिक्षा लिएको हो, सोभन्दा माथिल्लो कक्षा, तह वा प्रचलित कानून बमोजिम प्राप्त हुने निःशुल्क अध्ययन वा छात्रवृत्ति प्राप्त गर्ने प्र��ोजनका लागि आवेदन गर्न पाउनेछ।
|
| 194 |
+
|
| 195 |
+
---
|
| 196 |
+
|
| 197 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 198 |
+
**मातृ भाषामा दिइने शिक्षा तथा विद्यालय सञ्चालन**
|
| 199 |
+
|
| 200 |
+
**२८. मातृभाषी शिक्षा सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 201 |
+
(१) नेपालमा बसोबास गर्ने प्रत्येक नेपाली समुदायका नागरिकलाई आफ्नो मातृभाषामा आधारभूत तह वा माध्यमिक तहसम्मको शिक्षा प्राप्त गर्ने अधिकार हुनेछ। तर त्यस्तो शिक्षा प्रचलित कानून बमोजिम निर्धारण भएको पाठ्यक्रम बमोजिम हुनु पर्नेछ।
|
| 202 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको शिक्षा प्रदान गर्न त्यस्तो समुदायले माध्यमिक तहसम्मको शिक्षा भए छुट्टै विद्यालय वा शिक्षण संस्था स्थापना तथा सञ्चालन गर्न सक्नेछ।
|
| 203 |
+
(३) नेपाल सरकारले मातृभाषी शिक्षा प्रदान गर्नका लागि विद्यालय वा शिक्षण संस्था स्थापना र सञ्चालन गर्ने व्यवस्था मिलाउन सक्नेछ।
|
| 204 |
+
(४) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहले सञ्चालन गरेका वा अनुदान दिएका शिक्षण संस्था वा सार्वजनिक विद्यालयमा नेपाली नागरिकलाई कुनै खास विषयमा निजको माग बमोजिमको मातृभाषी शिक्षा प्रदान गर्न सकिनेछ।
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| 205 |
+
|
| 206 |
+
**२९. विद्यालय वा शिक्षण संस्था सञ्चालन गर्नु पर्नेः**
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| 207 |
+
(१) दफा २८ को उपदफा (२) बमोजिमको विद्यालय वा शिक्षण संस्था जुन समुदायबाट स्थापना गरिएको हो सोही समुदायबाट सञ्चालन र व्यवस्थापन गर्नु पर्नेछ।
|
| 208 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहले त्यस्तो शिक्षण संस्था वा मातृभाषी शिक्षा दिने विद्यालय सञ्चालन गर्न त्यस्तो समुदायको अनुरोध बमोजिम सञ्चालन र व्यवस्थापनमा सहयोग पुर्याउन निश्चित रकम प्रत्येक वर्ष अनुदानको रूपमा प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 209 |
+
(३) मातृभाषी शिक्षा प्रदान गर्ने सम्बन्धमा प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहले स्थानीय विशेषता र आवश्यकता अनुसार थप प्रबन्ध गर्न सक्नेछ।
|
| 210 |
+
|
| 211 |
+
---
|
| 212 |
+
|
| 213 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 214 |
+
**शिक्षाका लागि बजेट विनियोजन तथा अनुदान**
|
| 215 |
+
|
| 216 |
+
**३०. बजेट विनियोजन तथा अनुदान:**
|
| 217 |
+
(१) नेपाल सरकारले प्रत्येक वर्ष आफ्नो बजेटमार्फत् प्रत्येक स्थानीय तहलाई विद्यालय तथा विद्यार्थी संख्या र विद्यार्थीले प्राप्त गरेको नतिजाका आधारमा आधारभूत तथा माध्यमिक शिक्षाको प्रयोजनका लागि अनुदान रकम विनियोजन गर्नु पर्नेछ।
|
| 218 |
+
(२) प्रदेश सरकारले प्रत्येक वर्ष आफ्नो बजेट मार्फत् प्रत्येक स्थानीय तहलाई माध्यमिक तहसम्मको शिक्षाको लागि प्रदेश कानून बमोजिम निश्चित रकम अनुदानको रूपमा विनियोजन गर्नु पर्नेछ।
|
| 219 |
+
(३) नेपाल सरकार तथा प्रदेश सरकार आफैले सञ्चालन गरेका वा अनुदान प्रदान गरेका शिक्षण संस्थालाई नेपाल सरकार वा प्रदेश सरकारले सङ्घीय कानून वा प्रदेश कानून बमोजिम आवश्यक अनुदान रकम विनियोजन गर्नु पर्नेछ।
|
| 220 |
+
(४) स्थानीय तहले आफ्नो वार्षिक बजेटमा आधारभूत तह तथा माध्यमिक तहको शिक्षा प्रदान गर्ने प्रयोजनका लागि आवश्यक बजेट विनियोजन गर्नु पर्नेछ।
|
| 221 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिम बजेट विनियोजन गर्दा आधारभूत तह वा माध्यमिक तहको शिक्षा प्रदान गर्ने सार्वजनिक विद्यालय तथा स्थानीय तहले सञ्चालन गरेका प्रत्येक विद्यालयलाई बजेट प्राप्त हुन गरी गर्नु पर्नेछ।
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
**३१. अन्य व्यक्ति वा संस्थाले सहायता दिन सक्नेः**
|
| 224 |
+
(१) यस परिच्छेदमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तहका अतिरिक्त अन्य कुनै व्यक्ति, संस्था, संगठनले पनि आधारभूत तह वा माध्यमिक तहको शिक्षा प्रदान गर्ने सार्वजनिक विद्यालय, सार्वजनिक शैक्षिक गुठी वा मुनाफा नलिने गरी स्थापना र सञ्चालन भएका विद्यालयलाई कुनै किसिमको आर्थिक सहायता, सहयोग वा अनुदान रकम उपलब्ध गराउन सक्नेछ।
|
| 225 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सहायता, सहयोग वा रकम उपलब्ध गराउँदा स्थानीय तह मार्फत् वा स्थानीय तहको स्वीकृति प्राप्त गरी गर्नु पर्नेछ।
|
| 226 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम सहायता, सहयोग वा रकम उपलब्ध गराउने कार्यविधि र ढाँचा स्थानीय तहले बनाएको कानून बमोजिम हुनेछ। तर गैरआवासीय नेपाली बाहेक विदेशी व्यक्ति, संस्था वा सरकारबाट कुनै सहायता, सहयोग वा रकम प्राप्त गर्नु अघि नेपाल सरकार, अर्थ मन्त्रालयको पूर्वसहमति लिनु पर्नेछ।
|
| 227 |
+
|
| 228 |
+
---
|
| 229 |
+
|
| 230 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 231 |
+
**कसुर तथा जरिबाना**
|
| 232 |
+
|
| 233 |
+
**३२. कसुर तथा जरिबानाः**
|
| 234 |
+
(१) कसैले देहायको कार्य गरेमा यस ऐन बमोजिम कसुर गरेको मानिनेछः
|
| 235 |
+
(क) दफा ९ को उपदफा (१) बमोजिम बालबालिकालाई भर्ना गर्न इन्कार गरेमा वा उपदफा (४) बमोजिम लिखित जानकारी नदिएमा,
|
| 236 |
+
(ख) दफा १० को उपदफा (१) बमोजिम निष्काशन गरेमा वा उपदफा (२) बमोजिमको आधारभूत शिक्षा प्राप्त गर्न वा परीक्षा दिन रोक लगाउने वा वञ्चित गरेमा,
|
| 237 |
+
(ग) दफा ११ बमोजिम पुनः भर्ना गर्न इन्कार गरेमा वा दफा १३ बमोजिम स्थानान्तरण प्रमाणपत्र दिन इन्कार गरेमा,
|
| 238 |
+
(घ) दफा १६ बमोजिम विपरीतका कुनै कार्य गरेमा,
|
| 239 |
+
(ङ) दफा २७ विपरीतको कुनै कार्य गरेमा।
|
| 240 |
+
(२) कसैले उपदफा (१) बमोजिमको कसुर गरेमा सम्बन्धित बालबालिकाको अभिभावकले त्यस्तो कसुर गरेको पन्ध्र दिनभित्र सम्बन्धित स्थानीय तहको न्यायिक समितिमा निवेदन दिन सक्नेछ।
|
| 241 |
+
स्पष्टीकरणः यस दफाको प्रयोजनको लागि "न्यायिक समिति" भन्नाले नेपालको संविधानको धारा २१७ बमोजिमको न्यायिक समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 242 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको कसुर गरेमा न्यायिक समितिले सम्बन्धित प्रधानाध्यापकलाई देहाय बमोजिम जरिबाना गर्न सक्नेछः
|
| 243 |
+
(क) खण्ड (क) र (ग) बमोजिमको कसुर गर्नेलाई पाँच हजार रूपैयाँसम्म,
|
| 244 |
+
(ख) खण्ड (ख) र (घ) बमोजिमको कसुर गर्नेलाई तीन हजार रूपैयाँसम्म,
|
| 245 |
+
(ग) खण्ड (ङ) बमोजिमको कसुर गर्नेलाई बिगो बमोजिमको रकम वा पच्चीस हजार रूपैयाँमध्ये जुन बढी हुन्छ सो रकम।
|
| 246 |
+
(४) दफा २७ को प्रतिकूल हुने गरी कुनै रकम असुल उपर गरेको रहेछ भने त्यस्तो रकम समेत सम्बन्धित व्यक्तिलाई फित्ता गराउनु पर्नेछ।
|
| 247 |
+
(५) उपदफा (३) वा (४) बमोजिम न्यायिक समितिले गरेको निर्णय उपर सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा पुनरावेदन गर्न सकिनेछ।
|
| 248 |
+
|
| 249 |
+
---
|
| 250 |
+
|
| 251 |
+
## परिच्छेद-७
|
| 252 |
+
**विविध व्यवस्था**
|
| 253 |
+
|
| 254 |
+
**३३. अपाङ्गता तथा दलित नागरिकको विशेष अधिकार:**
|
| 255 |
+
(१) दृष्टिविहीन नागरिकलाई ब्रेललिपि र बहिरा र स्वर वा बोलाई सम्बन्धी अपाङ्गता भएका नागरिकलाई साइनेटिक भाषाका माध्यमबाट तोकिए बमोजिम निःशुल्क शिक्षा पाउने अधिकार हुनेछ।
|
| 256 |
+
(२) अपाङ्गता भएका तथा बिपन्न दलित नागरिकलाई शिक्षा प्राप्त गर्ने सम्बन्धमा यस ऐनमा लेखिएका अधिकारका अतिरिक्त प्रचलित कानून बमोजिम थप विशेष अधिकार प्राप्त हुनेछ।
|
| 257 |
+
(३) विद्यालय बाहिर रहेका दलित, अपाङ्गता भएका र आर्थिक रूपले बिपन्न बालबालिकाहरूलाई विद्यालय भर्ना गराउन र सिकाइमा निरन्तरता दिन विशेष व्यवस्था गरिनेछ।
|
| 258 |
+
|
| 259 |
+
**३४. सुविधा सम्पन्न नमूना, विशिष्टीकृत तथा घुम्ती विद्यालय सञ्चालन गर्न सक्नेः**
|
| 260 |
+
(१) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहले सुविधा सम्पन्न नमूना विद्यालय वा विशिष्टीकृत विद्यालय वा घुम्ती विद्यालय वा यस्तै अन्य विशेष प्रकारको विद्यालय स्थापना र सञ्चालन गर्न सक्नेछ।
|
| 261 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम खोलिएका वा सञ्चालन गरिएका विद्यालय जुन तहमा खोलिएको हो सोही तहको सरकारको अनुमतिमा स्थापना गर्नु पर्नेछ।
|
| 262 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम खोलिएका वा सञ्चालन गरिएका विद्यालयले प्रचलित कानूनले तोकेको मापदण्�� पूरा गर्नु पर्नेछ।
|
| 263 |
+
|
| 264 |
+
**३५. अनुगमन व्यवस्था र अनुगमन सूचकाङ्क:**
|
| 265 |
+
(१) यो ऐनको कार्यान्वयनका निम्ति अनुगमन गर्न तोकिए बमोजिमको संयन्त्र निर्माण गरिनेछ।
|
| 266 |
+
(२) नेपाल सरकारको शिक्षा सम्बन्धी विषय हेर्ने मन्त्रालयले यस ऐन बमोजिम व्यवस्था भएको शिक्षाको अधिकारको कार्यान्वयनका लागि अनुगमन सूचकाङ्क तयार गर्नेछ।
|
| 267 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको अनुगमन सूचकाङ्क सर्वसाधारणको जानकारीका लागि सार्वजनिक गर्नु पर्नेछ।
|
| 268 |
+
(४) अनुगमन सूचकाङ्क बमोजिम कार्यान्वयन भए नभएको सम्बन्धमा उपदफा (१) बमोजिमको संयन्त्रले मापन गर्नेछ।
|
| 269 |
+
(५) अनुगमन संयन्त्र र सूचकाङ्क सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 270 |
+
|
| 271 |
+
**३६. प्रतिवेदन पेश गर्नेः**
|
| 272 |
+
(१) प्रत्येक गाउँ कार्यपालिका वा नगर कार्यपालिकाले प्रत्येक वर्ष गाउँ सभा वा नगर सभामा देहायको विवरण सहितको प्रतिवेदन पेस गर्नु पर्नेछः
|
| 273 |
+
(क) सम्बन्धित स्थानीय तहमा सञ्चालनमा रहेका सार्वजनिक तथा निजी विद्यालय र त्यस्ता विद्यालयमा अध्ययन गर्ने बालबालिकाको संख्या,
|
| 274 |
+
(ख) आधारभूत तहसम्म विद्यालयमा भर्ना भएका बालबालिकाको संख्या,
|
| 275 |
+
(ग) विद्यालयमा भर्ना भई आधारभूत तहको शिक्षा पूरा गरेका बालबालिकाको संख्या,
|
| 276 |
+
(घ) विद्यालयमा भर्ना भई त्यस वर्ष आधारभूत तहको शिक्षा पूरा नगरी विद्यालय छाडेका विद्यार्थीको संख्या,
|
| 277 |
+
(ङ) आधारभूत तह, माध्यमिक शिक्षाको लागि विनियोजित रकम र त्यसको स्रोत,
|
| 278 |
+
(च) अन्य आवश्यक कुरा।
|
| 279 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको प्रतिवेदन जानकारीको लागि वार्षिक रूपमा नेपाल सरकारको शिक्षा सम्बन्धी विषय हेर्ने मन्त्रालय र प्रदेश सरकारको शिक्षा सम्बन्धी विषय हेर्ने मन्त्रालयमा पठाउनु पर्नेछ।
|
| 280 |
+
|
| 281 |
+
**३७. विवरण उपलब्ध गराउनु पर्नेः**
|
| 282 |
+
(१) यस ऐनको प्रयोजनको लागि प्रत्येक स्थानीय तहले आफ्नो क्षेत्रभित्र भएका मातृभाषी, दलित, अपाङ्गता भएका र आर्थिक रूपले बिपन्न व्यक्तिको विवरण अद्यावधिक गरी राख्नु पर्नेछ।
|
| 283 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको विवरण नेपाल सरकारको शिक्षा सम्बन्धी विषय हेर्ने मन्त्रालय, प्रदेश सरकारको शिक्षा सम्बन्धी विषय हेर्ने मन्त्रालय र सम्बन्धित विद्यालयलाई उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 284 |
+
|
| 285 |
+
**३८. साझेदारी वा सहकार्य गर्न सकिनेः**
|
| 286 |
+
(१) विद्यालय व्यवस्थापनमा सुधार, गुणस्तरयुक्त शिक्षाको विकास तथा विद्यार्थीहरूको सिकाई अभिवृद्धि सम्बन्धी कार्य गर्नका लागि विद्याल��� तथा प्रचलित कानून बमोजिम सञ्चालनमा रहेका गैरसरकारी संस्था र स्थानीय तहबीच समेत पारस्परिक साझेदारी वा सहकार्य गर्न सक्ने गरी आवश्यक प्रबन्ध गर्न सकिनेछ।
|
| 287 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको साझेदारी तथा सहकार्य सम्बन्धी व्यवस्थाको कार्यान्वयन प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 288 |
+
|
| 289 |
+
**३९. यसै ऐन बमोजिम हुने:**
|
| 290 |
+
यो ऐन प्रारम्भ भएका बखत सञ्चालनमा रहेका विद्यालय वा शिक्षण संस्था यसै ऐन बमोजिम स्थापना र सञ्चालन भएको मानिनेछ।
|
| 291 |
+
|
| 292 |
+
**४०. नियम बनाउने अधिकार:**
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| 293 |
+
नेपाल सरकारले यो ऐनको कार्यान्वयन गर्न आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
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| 294 |
+
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| 295 |
+
**४१. मापदण्ड बनाउने अधिकार:**
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| 296 |
+
(१) नेपाल सरकारको शिक्षा सम्बन्धी विषय हेर्ने मन्त्रालयले यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही आवश्यक मापदण्ड बनाउन सक्नेछ।
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| 297 |
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(२) उपदफा (१) बमोजिम बनाएको मापदण्ड सार्वजनिक गर्नु पर्नेछ।
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| 1 |
+
# सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय ऐन, २०६७
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 5 |
+
२०६७।०३।०३
|
| 6 |
+
१. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 7 |
+
२०७२।११।१३
|
| 8 |
+
२. शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७
|
| 9 |
+
२०७७।०३।११
|
| 10 |
+
३. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 11 |
+
२०६२।०४।१४
|
| 12 |
+
|
| 13 |
+
---
|
| 14 |
+
|
| 15 |
+
## सम्बत् २०६७ सालको ऐन नं. १
|
| 16 |
+
|
| 17 |
+
## सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालयको सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 18 |
+
|
| 19 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 20 |
+
कला, विज्ञान, चिकित्साशास्त्र, कानून, व्यवस्थापन, शिक्षा, प्राविधिक तथा अन्य व्यावसायिक विषयमा अध्ययन, अध्यापन र अनुसन्धानद्वारा गुणात्मक र स्तरयुक्त उच्च शिक्षाको अवसर सबै क्षेत्रका जनतालाई सुलभ रूपमा उपलब्ध गराई राष्ट्रिय विकासमा दक्ष जनशक्तिको आपूर्ति गर्न र बहुविश्वविद्यालयको अवधारणा अनुरूप प्रतिस्पर्धाको आधारमा उच्च शिक्षाको गुणस्तरमा अभिबृद्धि गर्दै देशको शैक्षिक तथा प्राज्ञिक वातावरणलाई अझ बढी स्वच्छ, मर्यादित र उपलब्धिमूलक बनाउन नेपाल सरकारको लगानीमा सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालयको स्थापना र सञ्चालन गर्ने सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
नेपालको अन्तरिम संविधान, २०६३ को धारा ६३ को उपधारा (१) बमोजिम संविधान सभाले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
---
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
## परिच्छेद-१
|
| 27 |
+
**प्रारम्भिक**
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
१. **संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
|
| 30 |
+
(१) यस ऐनको नाम "सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय ऐन, २०६७" रहेको छ।
|
| 31 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
२. **परिभाषा:**
|
| 34 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 35 |
+
(क) "विश्वविद्यालय" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(ख) "सभा" भन्नाले दफा ७ बमोजिमको विश्वविद्यालय सभा सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
(ग) "प्राज्ञिक परिषद्" भन्नाले दफा १० बमोजिमको प्राज्ञिक परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(घ) "कार्यकारी परिषद्" भन्नाले दफा १२ बमोजिमको कार्यकारी परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
(ङ) "सेवा आयोग" भन्नाले दफा २१ बमोजिमको सेवा आयोग सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
(च) "संकाय" भन्नाले दफा १४ बमोजिमको संकाय सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
(छ) "अनुसन्धान केन्द्र" भन्नाले दफा १४ बमोजिमको अनुसन्धान केन्द्र सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(ज) "विद्यापरिषद्" भन्नाले दफा १६ बमोजिमको विद्यापरिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 43 |
+
(झ) "क्याम्पस" भन्नाले विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पस सम्झनु पर्छ र सो शब्दले विश्वविद्यालयबाट सम्बन्���न प्राप्त क्याम्पसलाई समेत जनाउँछ।
|
| 44 |
+
(ज) "पाठ्यक्रम विकास केन्द्र" भन्नाले दफा १६ बमोजिमको पाठ्यक्रम विकास केन्द्र सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
(ट) "कुलपति" भन्नाले दफा २२ बमोजिमको कुलपति सम्झनु पर्छ।
|
| 46 |
+
(ट) "सह-कुलपति" भन्नाले दफा २३ बमोजिमको सह-कुलपति सम्झनु पर्छ।
|
| 47 |
+
(ड) "उप-कुलपति" भन्नाले दफा २४ बमोजिमको उप-कुलपति सम्झनु पर्छ।
|
| 48 |
+
(ड) "रजिष्ट्रार" भन्नाले दफा २४ बमोजिमको रजिष्ट्रार सम्झनु पर्छ।
|
| 49 |
+
(ण) "डीन" भन्नाले संकायका प्रमुख सम्झनु पर्छ।
|
| 50 |
+
(त) "निर्देशक" भन्नाले दफा २७ बमोजिमको निर्देशक सम्झनु पर्छ।
|
| 51 |
+
(थ) "शिक्षक" भन्नाले विश्वविद्यालयमा शिक्षा प्रदान गर्ने बा अनुसन्धान गर्ने गराउने प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, उप-प्राध्यापक तथा सहायक प्राध्यापक सम्झनु पर्छ र सो शब्दले विश्वविद्यालयका विभिन्न तहका प्रशिक्षक तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा शिक्षक भनी तोकिएका व्यक्तिलाई समेत जनाउँछ।
|
| 52 |
+
(द) "कर्मचारी" भन्नाले विश्वविद्यालय सञ्चालन सम्बन्धमा व्यवस्थापकीय एवं सहयोगीको कार्य गर्ने गराउने शिक्षक बाहेकका व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 53 |
+
(ध) "विद्यार्थी" भन्नाले क्याम्पसमा भर्ना भई अध्ययन बा अनुसन्धान गर्ने छात्रा तथा छात्र सम्झनु पर्छ।
|
| 54 |
+
(न) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
---
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 59 |
+
**विश्वविद्यालयको स्थापना**
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
३. **विश्वविद्यालयको स्थापना:**
|
| 62 |
+
(१) कला, विज्ञान, चिकित्साशास्त्र, कानून, व्यवस्थापन, शिक्षा, प्राविधिक तथा अन्य व्यावसायिक विषयमा अध्ययन, अध्यापन र अनुसन्धान गर्ने काम समेतको लागि सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय स्थापना गरिएको छ।
|
| 63 |
+
(२) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत नेपाल सरकारबाट अनुदान प्राप्त गरी त्रिभुवन विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको रूपमा कञ्चनपुर जिल्लाको भीमदत्त नगरपालिकामा सञ्चालित सिद्धनाथ विज्ञान क्याम्पस, भीमदत्तनगर र सम्बन्धन प्राप्त सिद्धनाथ बहुमुखी क्याम्पस, भीमदत्तनगरलाई संयुक्त रूपमा समावेश गरी सोही परिसरमा यो विश्वविद्यालयको स्थापना गरिनेछ।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
४. **विश्वविद्यालय स्वशासित र सङ्गठित संस्था हुने:**
|
| 66 |
+
(१) विश्वविद्यालय अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र सङ्गठित संस्था हुनेछ।
|
| 67 |
+
(२) विश्वविद्यालयको सबै काम कारबाहीको निमित्त आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 68 |
+
(३) विश्वविद्या��यले व्यक्ति सरह चल, अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न बा अन्य किसिमले व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 69 |
+
(४) विश्वविद्यालयले व्यक्ति सरह नालिस उजूर गर्न र विश्वविद्यालय उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजूर लारन सक्नेछ।
|
| 70 |
+
(४) विश्वविद्यालयले व्यक्ति सरह करार गर्न, करार बमोजिमको अधिकार प्रयोग गर्न तथा दायित्व निर्वाह गर्न सक्नेछ।
|
| 71 |
+
|
| 72 |
+
---
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 75 |
+
**विश्वविद्यालयको सङ्गठन तथा पदाधिकारी**
|
| 76 |
+
|
| 77 |
+
४. **विश्वविद्यालयको सङ्गठन:**
|
| 78 |
+
विश्वविद्यालयको सङ्गठन देहाय बमोजिम हुनेछ र यिनीहरूको सामूहिक रूप नै विश्वविद्यालयको स्वरूप हुनेछ:-
|
| 79 |
+
(क) सभा
|
| 80 |
+
(ख) प्राज्ञिक परिषद्
|
| 81 |
+
(ग) कार्यकारी परिषद्
|
| 82 |
+
(घ) सेवा आयोग
|
| 83 |
+
(ङ) संकाय
|
| 84 |
+
(च) अनुसन्धान केन्द्र
|
| 85 |
+
(छ) विद्यापरिषद्
|
| 86 |
+
(ज) क्याम्पस
|
| 87 |
+
(झ) तोकिए बमोजिमका अन्य निकायहरू।
|
| 88 |
+
|
| 89 |
+
६. **विश्वविद्यालयका पदाधिकारीहरू:**
|
| 90 |
+
विश्वविद्यालयमा देहायका पदाधिकारीहरू रहनेछन्:-
|
| 91 |
+
(क) कुलपति
|
| 92 |
+
(ख) सह-कुलपति
|
| 93 |
+
(ग) उप-कुलपति
|
| 94 |
+
(घ) सेवा आयोगको अध्यक्ष
|
| 95 |
+
(ङ) रजिष्ट्रार
|
| 96 |
+
(च) डीन
|
| 97 |
+
(छ) निर्देशक
|
| 98 |
+
(ज) क्याम्पस प्रमुख
|
| 99 |
+
(झ) तोकिए बमोजिमका अन्य पदाधिकारीहरू।
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
---
|
| 102 |
+
|
| 103 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 104 |
+
**सभाको गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
७. **सभाको गठन:**
|
| 107 |
+
(१) विश्वविद्यालयमा सर्वोच्च निकायको रूपमा एक सभा रहनेछ।
|
| 108 |
+
(२) सभाको गठन देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 109 |
+
(क) कुलपति - अध्यक्ष
|
| 110 |
+
(ख) सह-कुलपति - उपाध्यक्ष
|
| 111 |
+
(ग) उप-कुलपति - सदस्य
|
| 112 |
+
(घ) सदस्य, राष्ट्रिय योजना आयोग (शिक्षा हेर्ने) - सदस्य
|
| 113 |
+
(ङ) अध्यक्ष, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग - सदस्य
|
| 114 |
+
(च) अन्य विश्वविद्यालयका उपकुलपतिहरूमध्येवाट दुईजना - सदस्य
|
| 115 |
+
(छ) सचिव, शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय - सदस्य
|
| 116 |
+
(ज) सचिव, अर्थ मन्त्रालय - सदस्य
|
| 117 |
+
(झ) सम्बन्धित प्रदेश सरकारको प्रमुख सचिव - सदस्य
|
| 118 |
+
(ज) डीन - सदस्य
|
| 119 |
+
(ट) निर्देशक - सदस्य
|
| 120 |
+
(ट) क्याम्पस प्रमुखहरूमध्येवाट दुईजना - सदस्य
|
| 121 |
+
(ड) शिक्षकहरूमध्येवाट समावेश आधारमा दुईजना - सदस्य
|
| 122 |
+
(ण) विश्वविद्यालय रहेको क्षेत्रको नगरपालिकाको प्रमुख - सदस्य
|
| 123 |
+
(त) नेपाल प्राध्यापक संघको केन्द्रीय अध्यक्ष - सदस्य
|
| 124 |
+
(थ) विश्वविद्यालय प्राध्यापक संघको सभापति - सदस्य
|
| 125 |
+
(द) विश्वविद्यालय स्वतन्त्र विद्यार्थी युनियनको सभापति - सदस्य
|
| 126 |
+
(ध) चन्दादाताहरूमध्येवाट समावेश आधारमा कम्तीमा एकजना महिला सहित तीनजना - सदस्य
|
| 127 |
+
(न) शिक्षाप्रेमी तथा समाजसेवीहरूमध्येवाट एकजना - सदस्य
|
| 128 |
+
(प) कर्मचारी प्रतिनिधिमध्येवाट एक��ना - सदस्य
|
| 129 |
+
(न) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिव
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमका पदेन सदस्य बाहेक अन्य सदस्यको मनोनयन कार्यकारी परिषद्को सिफारिसमा कुलपतिबाट हुनेछ।
|
| 132 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिमका मनोनीत सदस्यहरूको पदावधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 133 |
+
(४) कुनै कारणले मनोनीत सदस्यहरूको पद रिक्त हुन गएमा बाँकी अबधिको लागि उपदफा (३) बमोजिमको प्रक्रिया पूरा गरी अर्को व्यक्तिलाई मनोनयन गरिनेछ।
|
| 134 |
+
|
| 135 |
+
८. **सभाको बैठक:**
|
| 136 |
+
(१) सभाको बैठक बर्षको कम्तीमा दुई पटक अनिबार्य रूपमा बस्नेछ।
|
| 137 |
+
(२) सभाको बैठक सभाको अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 138 |
+
(३) सभाको बैठक हुनुभन्दा कम्तीमा पन्ध्र दिन अगावै बैठकमा छलफल हुने बिषयको कार्यसूची सहितको सूचना सभाको सदस्य-सचिवले सभाका सबै सदस्यहरूलाई दिनेछ।
|
| 139 |
+
(४) सभामा तत्काल कायम रहेका कूल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्यहरू उपस्थित भएमा बैठकका लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 140 |
+
(५) सभाको बैठकको अध्यक्षता सभाको अध्यक्षले, निजको अनुपस्थितिमा सभाको उपाध्यक्षले र अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष दुबैको अनुपस्थितिमा उप-कुलपतिले गर्नेछ।
|
| 141 |
+
(६) सभाको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकमा अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णायक मत दिनेछ।
|
| 142 |
+
(७) सभाको अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले सभाको बैठकको निर्णय प्रमाणित गर्नेछ।
|
| 143 |
+
(८) रजिष्ट्रारले सभाको निर्णय बा आदेशको अभिलेख गरी राख्नु पर्नेछ। सो निर्णय बा आदेशको एक प्रति कुलपति समक्ष पठाउनु पर्नेछ।
|
| 144 |
+
(९) सभाको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यविधि सभा आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 145 |
+
|
| 146 |
+
९. **सभाको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 147 |
+
सभाको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 148 |
+
(क) विश्वविद्यालयको नीति निर्धारण गर्ने,
|
| 149 |
+
(ख) विश्वविद्यालय र सो अन्तर्गतका निकायलाई मार्गदर्शन गर्ने,
|
| 150 |
+
(ग) विश्वविद्यालयबाट प्रदान गरिने उपाधि निर्धारण गर्ने र त्यस्तो उपाधि प्रदान गर्ने,
|
| 151 |
+
(घ) विश्वविद्यालयको द्वीर्घकालीन योजना, बार्षिक बजेट र कार्यक्रम स्वीकृत गर्ने,
|
| 152 |
+
(ङ) विश्वविद्यालय सम्बन्धी नियम पारित गर्ने,
|
| 153 |
+
(च) विश्वविद्यालय अन्तर्गतका निकायको बार्षिक प्रतिवेदनमाथि छलफल गर्ने र त्यस्ता निकायको कार्यक्रमको मूल्याङ्कन गर्ने,
|
| 154 |
+
(छ) विश्वविद्यालयको लेखापरीक्षण प्रतिवेदनमाथि छलफल गर्ने र स्वीकृति दिने,
|
| 155 |
+
(ज) आवश्यकतानुसार विभिन्न समिति, उप-समिति बा का��्य टोलीको गठन गर्ने,
|
| 156 |
+
(झ) तोकिए बमोजिम अन्य कामहरू गर्ने।
|
| 157 |
+
|
| 158 |
+
---
|
| 159 |
+
|
| 160 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 161 |
+
**प्राज्ञिक परिषद्को गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 162 |
+
|
| 163 |
+
१०. **प्राज्ञिक परिषद्को गठन:**
|
| 164 |
+
(१) विश्वविद्यालयको शैक्षिक तथा प्राज्ञिक कार्यलाई व्यवस्थित गर्ने निकायको रूपमा काम गर्न एक प्राज्ञिक परिषद् रहनेछ।
|
| 165 |
+
(२) प्राज्ञिक परिषद्को गठन देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 166 |
+
(क) उप-कुलपति
|
| 167 |
+
(ख) रजिष्ट्रार
|
| 168 |
+
(ग) डीन
|
| 169 |
+
(घ) विश्वविद्यालयका विभिन्न विषय समितिका अध्यक्षहरूमध्येवाट तीनजना
|
| 170 |
+
(ङ) क्याम्पस प्रमुखहरूमध्येवाट एकजना
|
| 171 |
+
(च) शिक्षकहरूमध्येवाट एकजना
|
| 172 |
+
(छ) लब्धप्रतिष्ठित विद्वानहरूमध्येवाट दुईजना
|
| 173 |
+
(ज) डीनहरूमध्येवाट उप-कुलपतिले तोकेको डीन - सदस्य-सचिव
|
| 174 |
+
|
| 175 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमका पदेन सदस्य बाहेक अन्य सदस्यको मनोनयन उप-कुलपतिवाट हुनेछ।
|
| 176 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिमका मनोनीत सदस्यको पदावधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 177 |
+
(४) कुनै कारणले प्राज्ञिक परिषद्का मनोनीत सदस्यको पद रिक्त हुन गएमा बाँकी अबधिको लागि उपदफा (३) बमोजिमको प्रक्रिया पूरा गरी अर्को व्यक्तिलाई मनोनयन गरिनेछ।
|
| 178 |
+
(६) प्राज्ञिक परिषद्को बैठक सम्बन्धी कार्यविधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्मको लागि बैठक सम्बन्धी कार्यविधि प्राज्ञिक परिषद् आफैले निर्धारण गर्न सक्नेछ।
|
| 179 |
+
|
| 180 |
+
११. **प्राज्ञिक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 181 |
+
प्राज्ञिक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 182 |
+
(क) विश्वविद्यालयको पाठ्यक्रम निर्धारण तथा स्वीकृत गर्ने,
|
| 183 |
+
(ख) विश्वविद्यालय अन्तर्गत सञ्चालन हुने परीक्षाको किसिम तोक्ने,
|
| 184 |
+
(ग) विश्वविद्यालयको शैक्षिक गुणस्तर निर्धारण तथा कायम गर्ने,
|
| 185 |
+
(घ) अनुसन्धान सम्बन्धी नीति तर्जुमा गर्ने र अनुसन्धान कार्यक्रमलाई स्वीकृति प्रदान गर्ने,
|
| 186 |
+
(ङ) विश्वविद्यालयमा अध्ययन, अध्यापन गरिने विषयहरूमा भर्ना हुन चाहिने योग्यता, विद्यार्थी भर्ना संख्या र भर्ना हुन चाहिने आधार तोक्ने,
|
| 187 |
+
(च) प्राज्ञिक विषयमा कार्यकारी परिषद्लाई राय सल्लाह दिने,
|
| 188 |
+
(छ) विश्वविद्यालयबाट दिइने मानार्थ उपाधिहरूको लागि सभामा सिफारिस गर्ने,
|
| 189 |
+
(ज) तोकिए बमोजिम अन्य कामहरू गर्ने।
|
| 190 |
+
|
| 191 |
+
---
|
| 192 |
+
|
| 193 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 194 |
+
**कार्यकारी परिषद्को गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 195 |
+
|
| 196 |
+
१२. **कार्यकारी परिषद्को गठन:**
|
| 197 |
+
(१) विश्वविद्यालयको कार्यकारी निकायको रूपमा काम गर्न एक कार्यकारी परिषद् रहनेछ।
|
| 198 |
+
(२) कार्यकारी परिषद्को ��ठन देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 199 |
+
(क) उप-कुलपति - अध्यक्ष
|
| 200 |
+
(ख) डीनहरूमध्येबाट एकजना - सदस्य
|
| 201 |
+
(ग) सभाका सदस्य रहेका क्याम्पस प्रमुखहरूमध्येबाट एकजना - सदस्य
|
| 202 |
+
(घ) शिक्षकहरूमध्येबाट एकजना - सदस्य
|
| 203 |
+
(ङ) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिब
|
| 204 |
+
|
| 205 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमका पदेन सदस्य बाहेक अन्य सदस्यको मनोनयन उप-कुलपतिको सिफारिसमा सभाबाट हुनेछ।
|
| 206 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिमका मनोनीत सदस्यको पदाबधि तीन बर्षको हुनेछ।
|
| 207 |
+
(४) कुनै कारणले मनोनीत सदस्यको पद रिक्त भएमा बाँकी अबधिको लागि उपदफा (३) बमोजिमको प्रक्रिया पूरा गरी अर्को व्यक्तिलाई मनोनयन गरिनेछ।
|
| 208 |
+
(६) कार्यकारी परिषद्को बैठक सम्बन्धी कार्यविधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्मको लागि बैठक सम्बन्धी कार्यविधि कार्यकारी परिषद् आफैले निर्धारण गर्न सक्नेछ।
|
| 209 |
+
|
| 210 |
+
१३. **कार्यकारी परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 211 |
+
कार्यकारी परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 212 |
+
(क) सभाको निर्णय र निर्देशनहरू कार्यान्वयन गर्ने, गराउने,
|
| 213 |
+
(ख) विश्वविद्यालयको वार्षिक कार्यक्रम, बजेट, प्रगति विवरण, लेखापरीक्षण प्रतिवेदन र अन्य प्रस्तावहरू तयार गरी स्वीकृतिको लागि सभामा पेश गर्ने,
|
| 214 |
+
(ग) विश्वविद्यालयको कोष तथा चल, अचल सम्पत्तिको सञ्चालन, रेखदेख र संरक्षण गर्ने,
|
| 215 |
+
(घ) सभाको नीति निर्देशनको अधीनमा रही विश्वविद्यालयको चल, अचल सम्पत्ति बेचविखन गर्ने, टेक्कापट्टामा दिने, लिने काम गर्ने,
|
| 216 |
+
(ङ) विश्वविद्यालयद्वारा सञ्चालित कार्यक्रमहरूको समन्वय, रेखदेख तथा निरीक्षण गर्ने र सोको प्रतिवेदन सभामा पेश गर्ने,
|
| 217 |
+
(च) विश्वविद्यालय सम्बन्धी नियमहरूको मस्योदा तयार गरी स्वीकृतिको लागि सभामा पेश गर्ने,
|
| 218 |
+
(छ) सेवा आयोगको सिफारिसमा विश्वविद्यालयको लागि आवश्यक शिक्षक तथा कर्मचारीहरूको नियुक्ति र बढुवा गर्ने,
|
| 219 |
+
(ज) विद्यार्थी शुल्क निर्धारण गर्ने,
|
| 220 |
+
(झ) विश्वविद्यालयको लागि प्रदान गरिएका आर्थिक तथा अन्य सहयोग ग्रहण गर्ने,
|
| 221 |
+
(अ) तोकिए बमोजिम अन्य कामहरू गर्ने।
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
---
|
| 224 |
+
|
| 225 |
+
## परिच्छेद-७
|
| 226 |
+
**संकाय, अनुसन्धान केन्द्र तथा अन्य निकाय**
|
| 227 |
+
|
| 228 |
+
१४. **संकाय:**
|
| 229 |
+
(१) विश्वविद्यालयबाट सञ्चालन गरिने उच्च शिक्षाको लागि कला, विज्ञान, चिकित्साशास्त्र, कानून, व्यवस्थापन, शिक्षा लगायत तोकिएका विषयमा तोकिए बमोजिमका संकायहरू रहनेछन्।
|
| 230 |
+
(२) संकायको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 231 |
+
|
| 232 |
+
१४. **अनुसन्धान केन्द्र:**
|
| 233 |
+
(१) विश्वविद्यालयले कला, विज्ञान, चिकित्साशास्त्र, कानून, व्यवस्थापन, शिक्षा लगायतका विषयमा अनुसन्धान गर्नको लागि आवश्यकतानुसार अनुसन्धान केन्द्रको स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 234 |
+
(२) अनुसन्धान केन्द्रको स्थापना, काम, कर्तव्य र अधिकार तथा सञ्चालन सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 235 |
+
|
| 236 |
+
१६. **विद्यापरिषद्:**
|
| 237 |
+
(१) प्रत्येक संकायमा शैक्षिक तथा प्राज्ञिक कार्यक्रमहरूको सञ्चालनको लागि तोकिए बमोजिम एक विद्यापरिषद् रहनेछ।
|
| 238 |
+
(२) विद्यापरिषद् अन्तर्गत तोकिए बमोजिमका विषय समितिहरू रहनेछन्।
|
| 239 |
+
(३) विद्यापरिषद् र सो अन्तर्गत रहने समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा बैठक सम्बन्धी कार्यविधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 240 |
+
|
| 241 |
+
१७. **क्याम्पस:**
|
| 242 |
+
(१) विश्वविद्यालयले विभिन्न विषयमा उच्च शिक्षा प्रदान गर्नको लागि आवश्यकतानुसार क्याम्पसको स्थापना तथा सञ्चालन गर्न सक्नेछ।
|
| 243 |
+
(२) क्याम्पसको स्थापना र सञ्चालन सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 244 |
+
|
| 245 |
+
१६. **पाठ्यक्रम विकास केन्द्र:**
|
| 246 |
+
(१) विश्वविद्यालयमा अध्ययन र अध्यापन गरिने विभिन्न विषयहरूको पाठ्यक्रमको निर्धारण तथा विकासको लागि एक पाठ्यक्रम विकास केन्द्र रहनेछ।
|
| 247 |
+
(२) पाठ्यक्रम विकास केन्द्रको स्थापना र काम, कर्तव्य तथा अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 248 |
+
|
| 249 |
+
१९. **विश्वविद्यालयसँग सम्बन्धन गर्न सक्ने:**
|
| 250 |
+
(१) निजी क्षेत्रका कुनै क्याम्पसले विश्वविद्यालयसँग सम्बन्धन प्राप्त गरी सञ्चालन हुन चाहेमा विश्वविद्यालयले तोकिए बमोजिम त्यस्ता क्याम्पसलाई सम्बन्धन प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 251 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसले विश्वविद्यालयद्वारा तोकिएका शर्तहरूको पालना गर्नु पर्नेछ।
|
| 252 |
+
|
| 253 |
+
२०. **अन्य विश्वविद्यालयका क्याम्पसको सञ्चालन सम्बन्धी विशेष व्यवस्था:**
|
| 254 |
+
(१) कुनै विश्वविद्यालयको आङ्गिक तथा सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसले विश्वविद्यालयसँग आवद्ध भई आङ्गिक तथा सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसको रूपमा रहन सञ्चालक समितिको सिफारिस सहित निवेदन गरेमा सो क्याम्पसलाई विश्वविद्यालयको आङ्गिक तथा सम्बन्धन प्राप्त क्याम्पसको रूपमा मान्यता दिन प्रक्रिया अगाडि बढाइनेछ।
|
| 255 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको प्रक्रिया विश्वविद्यालयले तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 256 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम कुनै क्याम्पस विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको रूपमा सञ्चालन भएपछि त्यस्तो क्याम्पसको न��ममा रहेको सम्पत्ति समेत विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसमा सर्नेछ।
|
| 257 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिम कुनै क्याम्पस विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको रूपमा सञ्चालन भएपछि सो क्याम्पसमा कार्यरत शिक्षक तथा कर्मचारीहरू विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको शिक्षक तथा कर्मचारीको रूपमा रहनेछन्।
|
| 258 |
+
(४) उपदफा (४) बमोजिम कुनै शिक्षक तथा कर्मचारी विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको शिक्षक तथा कर्मचारीको रूपमा रहन नचाहेमा सभाले निर्धारण गरेको बा सम्बन्धित विश्वविद्यालयको स्वीकृति लिएको एक बर्षभित्र सो कुराको जानकारी सम्बन्धित विश्वविद्यालयलाई गराउनु पर्नेछ र त्यस्तो अवस्थामा विश्वविद्यालयले सम्बन्धित विश्वविद्यालयसँग परामर्श गरी त्यस्ता शिक्षक तथा कर्मचारीलाई विश्वविद्यालयको शिक्षक तथा कर्मचारीको रूपमा काममा लगाउन सक्नेछ।
|
| 259 |
+
(६) उपदफा (४) बमोजिम विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसको शिक्षक तथा कर्मचारीको रूपमा रहने शिक्षक तथा कर्मचारीले सम्बन्धित क्याम्पसमा गरेको स्थायी सेवा विश्वविद्यालय अन्तर्गतको आङ्गिक क्याम्पसमा गरेको मानिनेछ र सोही बमोजिम निजहरूको सेवा अवधि गणना हुनेछ।
|
| 260 |
+
(७) उपदफा (४) बा (४) बमोजिम कुनै शिक्षक तथा कर्मचारी विश्वविद्यालयको आङ्गिक क्याम्पसमा बहाल रहेमा निजहरूलाई मर्का पर्ने गरी साबिकको पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेवा शर्तमा कुनै परिवर्तन गरिने छैन।
|
| 261 |
+
|
| 262 |
+
---
|
| 263 |
+
|
| 264 |
+
## परिच्छेद-८
|
| 265 |
+
**सेवा आयोग**
|
| 266 |
+
|
| 267 |
+
२१. **सेवा आयोग:**
|
| 268 |
+
(१) विश्वविद्यालयको शिक्षक तथा कर्मचारीहरूको नियुक्ति तथा बढुवाको लागि सिफारिस गर्न एक सेवा आयोग रहनेछ।
|
| 269 |
+
(२) सेवा आयोगको गठन देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 270 |
+
(क) कुलपतिबाट नियुक्त व्यक्ति - अध्यक्ष
|
| 271 |
+
(ख) लोक सेवा आयोगको सदस्य - सदस्य
|
| 272 |
+
(ग) शिक्षकहरूमध्येबाट एकजना - सदस्य
|
| 273 |
+
|
| 274 |
+
(३) उपदफा (१) को खण्ड (क) र (ग) बमोजिमका अध्यक्ष र सदस्यको नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्न कुलपतिबाट सह-कुलपतिको अध्यक्षतामा सभाका दुईजना सदस्यहरू रहेको एक समिति गठन हुनेछ र सो समितिको सिफारिसमा कुलपतिबाट अध्यक्ष र सदस्यको नियुक्ति हुनेछ।
|
| 275 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम नियुक्त अध्यक्ष तथा सदस्यको पदावधि चार वर्षको हुनेछ।
|
| 276 |
+
(४) सेवा आयोगको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 277 |
+
(६) सेवा आयोगका अध्यक्ष र सदस्यको पारिश्रमिक, सुविधा र सेवाका अन्य शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 278 |
+
(७) सेवा आयोगको बैठक सम्बन्धी कार्यविधि तोकिए बमोजिम हुनेछ र त्यसरी नतोकिएसम्मको लागि बैठक सम्बन्धी कार्यविधि सेवा आयोग आफैले निर्धारण गर्न सक्नेछ।
|
| 279 |
+
|
| 280 |
+
---
|
| 281 |
+
|
| 282 |
+
## परिच्छेद-९
|
| 283 |
+
**विश्वविद्यालयका पदाधिकारी, शिक्षक तथा कर्मचारी**
|
| 284 |
+
|
| 285 |
+
२२. **कुलपति:**
|
| 286 |
+
(१) प्रधानमन्त्री विश्वविद्यालयको कुलपति हुनेछ।
|
| 287 |
+
(२) कुलपति विश्वविद्यालयको प्रमुख हुनेछ। कुलपति उपस्थित रहेको अवस्थामा निजले विश्वविद्यालयको दीक्षान्त समारोहमा अध्यक्षको आसन ग्रहण गर्नेछ।
|
| 288 |
+
(३) कुलपतिले आवश्यकतानुसार विश्वविद्यालयको निरीक्षण गरी विश्वविद्यालयलाई निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 289 |
+
|
| 290 |
+
२३. **सह-कुलपति:**
|
| 291 |
+
(१) शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्री वा राज्यमन्त्री विश्वविद्यालयको सह-कुलपति हुनेछ।
|
| 292 |
+
(२) कुलपतिको अनुपस्थितिमा सह-कुलपतिले विश्वविद्यालयको दीक्षान्त समारोहमा अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 293 |
+
(३) सह-कुलपतिले आवश्यकतानुसार विश्वविद्यालयको निरीक्षण गरी विश्वविद्यालयलाई निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 294 |
+
|
| 295 |
+
२४. **उप-कुलपति:**
|
| 296 |
+
(१) उप-कुलपति विश्वविद्यालयमा पूरा समय काम गर्ने प्रमुख पदाधिकारी हुनेछ।
|
| 297 |
+
(२) उप-कुलपतिको पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्न कुलपतिले सभाका सदस्यहरूमध्येबाट शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालयको सचिव समेत रहने गरी तीन सदस्यीय एक समिति गठन गर्नेछ।
|
| 298 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको समितिले उप-कुलपतिको पदमा नियुक्त हुने योग्य तीनजना व्यक्तिको नाम सिफारिस गर्नु पर्नेछ र यसरी सिफारिस भएका व्यक्तिहरूमध्येबाट कुलपतिले उप-कुलपतिको नियुक्ति गर्नेछ।
|
| 299 |
+
(४) विश्वविद्यालयको सबै काम कारबाही उपर उप-कुलपतिको सामान्य नियन्त्रण रहनेछ र निजले विश्वविद्यालयको काम कारबाहीमा निर्देशन दिन र रेखदेख गर्न सक्नेछ।
|
| 300 |
+
(४) उप-कुलपतिको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 301 |
+
(६) कुलपति र सह-कुलपतिको अनुपस्थितिमा विश्वविद्यालयको दीक्षान्त समारोहमा उप-कुलपतिले अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 302 |
+
(७) उप-कुलपतिले सभाको निर्णय र निर्देशनहरू कार्यान्वयन गर्नु गराउनु पर्नेछ।
|
| 303 |
+
(८) यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा कुनै निकाय बा अधिकारीले गर्ने भनी उल्लेख भएका कामहरू बाहेक अन्य कामहरू उप-कुलपतिले गर्नेछ। त्यस्तो कामको जानकारी उप-कुलपतिले तुरुन्त कुलपतिलाई गराउनु पर्नेछ र लगत्तै बस्ने सभाको बैठकद्वारा अनुमोदन गराउनु पर्नेछ।
|
| 304 |
+
(९) उप-कुलपतिको अनुपस्थितिमा निजको काम कुलपतिबाट व्यवस्था भए बमोजिम हुनेछ।
|
| 305 |
+
(१०) उप-कुलपतिको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार, पारिश्रमिक, सुविधा र सेवाका अन्य शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 306 |
+
|
| 307 |
+
२४. **रजिष्ट्रार:**
|
| 308 |
+
रजिष्ट्रारको नियुक्ति उप-कुलपतिको सिफारिसमा कुलपतिबाट हुनेछ।
|
| 309 |
+
|
| 310 |
+
२६. **डीन:**
|
| 311 |
+
डीनका नियुक्ति कार्यकारी परिषद्बाट हुनेछ।
|
| 312 |
+
|
| 313 |
+
२७. **निर्देशक:**
|
| 314 |
+
(१) अनुसन्धान केन्द्र तथा पाठ्यक्रम विकास केन्द्रको प्रमुखको रूपमा काम गर्ने छुट्टाछुट्टै निर्देशक रहनेछन्।
|
| 315 |
+
(२) निर्देशकको नियुक्ति कार्यकारी परिषद्ले गर्नेछ।
|
| 316 |
+
|
| 317 |
+
२६. **रजिष्ट्रार, डीन र निर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार, पारिश्रमिक, सुविधा र सेवाका शर्तहरू:**
|
| 318 |
+
(१) रजिष्ट्रार, डीन र निर्देशक विश्वविद्यालयको पूरा समय काम गर्ने पदाधिकारी हुनेछन्।
|
| 319 |
+
(२) रजिष्ट्रार, डीन र निर्देशकको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 320 |
+
(३) रजिष्ट्रार, डीन र निर्देशकको काम, कर्तव्य, अधिकार, पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेवाका अन्य शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 321 |
+
|
| 322 |
+
२९. **अन्य पदाधिकारीहरू:**
|
| 323 |
+
(१) विश्वविद्यालयमा तोकिए बमोजिमका अन्य पदाधिकारीहरू रहनेछन्।
|
| 324 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका पदाधिकारीको नियुक्ति, काम, कर्तव्य र अधिकार, पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेवाका शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 325 |
+
|
| 326 |
+
३०. **पदबाट हटाउन सकिने:**
|
| 327 |
+
(१) उप-कुलपति, सेवा आयोगको अध्यक्ष वा रजिष्ट्रारले आफ्नो पद अनुरूपको जिम्मेवारी पूरा नगरेको, इमानदारीपूर्वक काम नगरेको वा निजले पद अनुकूलको आचरण नगरेको भनी सभामा तत्काल रहेका एक चौथाई सदस्यहरूले निजलाई पदबाट हटाउन कुलपति समक्ष लिखित निवेदन दिएमा कुलपतिले सभाको कुनै सदस्यको अध्यक्षतामा विश्वविद्यालय अनुदान आयोगको सदस्य र शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालयको सचिव रहेको तीन सदस्यीय एक छानबिन समिति गठन गर्नेछ।
|
| 328 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठित छानबिन समितिले सो सम्बन्धमा आवश्यक छानबिन गरी तीस दिनभित्र आफ्नो प्रतिवेदन कुलपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 329 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको प्रतिवेदन प्राप्त भएपछि कुलपतिले सो प्रतिवेदन सभा समक्ष पेश गर्नेछ।
|
| 330 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम पेश भएको प्रतिवेदन उपर छलफल हुँदा सभाले उप-कुलपति, सेवा आयोगको अध्यक्ष वा रजिष्ट्रारलाई पदबाट हटाउन निर्णय गरेमा कुलपतिले त्यस्तो उप-कुलपति, सेवा आयोगको अध्यक्ष वा रजिष्ट्रारलाई पदबाट हटाउनेछ। तर त्यसरी हटाउनु अघि निजलाई सफाई पेश गर्ने मौकाबाट बञ्चित गरिने छैन।
|
| 331 |
+
(५) उप-कुलपति, सेवा आयोगको अध्यक्ष वा रजिष्ट्रार बाहेक विश्वविद्यालयका अन्य पदाधिकारीलाई उपदफा (१) बमोजिमको आरोपमा छानबिन गर्दा वा पदबाट हटाउँदा अपनाउनु पर्ने प्रक्रिया तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 332 |
+
(६) यस दफा बमोजिम कुनै पदाधिकारी उपर छानबिन शुरु भएमा त्यसको अन्तिम निर्णय नभएसम्मको लागि निजले आफू बहाल रहेको पदको काम गर्न पाउने छैन।
|
| 333 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजिमको पदाधिकारीले गर्ने दैनिक काम सम्पादन गर्नका लागि कुलपतिले विश्वविद्यालयको कुनै पदाधिकारीलाई जिम्मेवारी तोक्न सक्नेछ।
|
| 334 |
+
|
| 335 |
+
३१. **शिक्षक तथा कर्मचारी सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 336 |
+
(१) विश्वविद्यालयमा आवश्यक संख्यामा शिक्षक तथा कर्मचारी रहनेछन्।
|
| 337 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका शिक्षक तथा कर्मचारीको नियुक्ति, काम, कर्तव्य र अधिकार, पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेवाका शर्तहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 338 |
+
|
| 339 |
+
---
|
| 340 |
+
|
| 341 |
+
## परिच्छेद-१०
|
| 342 |
+
**विश्वविद्यालयको कोष, लेखा तथा लेखापरीक्षण**
|
| 343 |
+
|
| 344 |
+
३२. **विश्वविद्यालयको कोष:**
|
| 345 |
+
(१) विश्वविद्यालयको आफ्नो एउटा छुट्टै कोष हुनेछ र सो कोषमा देहायका रकमहरू रहनेछन्:-
|
| 346 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम,
|
| 347 |
+
(ख) विश्वविद्यालय अनुदान आयोगबाट प्राप्त रकम,
|
| 348 |
+
(ग) स्थानीय तहबाट प्राप्त रकम,
|
| 349 |
+
(घ) कुनै व्यक्ति बा संस्थाले चन्दा, दान, दातव्य र आर्थिक सहायता स्वरूप प्रदान गरेको रकम,
|
| 350 |
+
(ङ) उद्योग, व्यापार व्यवसायसँग सम्बद्ध व्यक्ति बा संस्थाबाट सहयोग बा अनुदान स्वरूप प्राप्त रकम,
|
| 351 |
+
(च) अन्तर्राष्ट्रिय संघ, संस्था, विदेशी व्यक्ति, सरकार, एजेन्सी बा वित्तीय संस्थाहरूबाट सहयोग बा ऋण स्वरूप प्राप्त रकम,
|
| 352 |
+
(छ) शुल्क तथा अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त रकम।
|
| 353 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (च) बमोजिम विश्वविद्यालयले कुनै रकम प्राप्त गर्दा नेपाल सरकारको पूर्वस्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 354 |
+
(३) विश्वविद्यालयको कोषको रकम कार्यकारी परिषद्ले तोकेको कुनै बाणिज्य बैङ्कमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
|
| 355 |
+
(४) विश्वविद्यालयको कोष र खाताको सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 356 |
+
(४) विश्वविद्यालयको सबै खर्चहरू सभाबाट स्वीकृत भए अनुसार उपदफा (१) बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ।
|
| 357 |
+
|
| 358 |
+
३३. **लेखा र लेखापरीक्षण:**
|
| 359 |
+
(१) विश्वविद्यालयले आफ्नो आय-व्ययको लेखा नेपाल सरकारले अपनाएको लेखाप्रणाली अनुसार राख्नु पर्नेछ।
|
| 360 |
+
(२) विश्वविद्यालयले लेखाको तोकिए बमोजिम आन्तरिक नियन्त्रण प्रणालीको ��्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
|
| 361 |
+
(३) विश्वविद्यालयको लेखापरीक्षण महालेखा परीक्षकबाट हुनेछ।
|
| 362 |
+
|
| 363 |
+
---
|
| 364 |
+
|
| 365 |
+
## परिच्छेद-११
|
| 366 |
+
**विविध**
|
| 367 |
+
|
| 368 |
+
३४. **प्रमाणपत्र र उपाधि तथा मान्यता दिने:**
|
| 369 |
+
(१) तोकिएको विषयमा उच्च शिक्षा हासिल गर्ने विद्यार्थी, प्रशिक्षार्थी बा अनुसन्धानकर्तालाई विश्वविद्यालयले तोकिए बमोजिमको प्रमाणपत्र र उपाधि दिन र अनुसन्धानात्मक कार्य गर्ने तथा प्राज्ञिक क्षेत्रमा प्रशंसनीय कार्य गर्ने व्यक्तिलाई मानार्थ उपाधि प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 370 |
+
(२) विश्वविद्यालयले अन्य विश्वविद्यालय बा शैक्षिक संस्थाको शैक्षिक उपाधिलाई मान्यता दिन सक्नेछ।
|
| 371 |
+
|
| 372 |
+
३५. **विश्वविद्यालयमा भर्ना हुन चाहिने योग्यता:**
|
| 373 |
+
(१) विश्वविद्यालयमा भर्ना हुन चाहिने विद्यार्थी बा अनुसन्धानकर्ताको योग्यता तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 374 |
+
(२) विश्वविद्यालयले विद्यार्थी भर्ना गर्दा नेपाल सरकारको नीति अनुरूप महिला, आदिबासी/जनजाति, मधेशी, दलित, अपाङ्ग, पिछडिएको बर्ग बा समुदायका विद्यार्थीलाई तोकिएको प्रतिशतको आधारमा भर्नाको लागि स्थान सुरक्षित गर्नु पर्नेछ।
|
| 375 |
+
|
| 376 |
+
३४क. **नि:शुल्क उच्च शिक्षा तथा छात्रवृत्ति:**
|
| 377 |
+
(१) विश्वविद्यालयले तोकेको मापदण्ड पूरा गरी विश्वविद्यालय बा मातहतका आङ्गिक तथा सामुदायिक शैक्षिक संस्थामा भर्ना भएका दलित, सिमान्तीकृत, अपाङ्ग र आर्थिक रूपले बिपन्न विद्यार्थीको लागि उच्च शिक्षा नि:शुल्क हुनेछ।
|
| 378 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि आधार, मापदण्ड, वर्गीकरण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 379 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको सुविधा एक विद्यार्थीले प्रत्येक तहमा एकपटक मात्र उपभोग गर्न पाउनेछ।
|
| 380 |
+
(४) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दलित विद्यार्थीको लागि प्राविधिक तथा व्यावसायिक उच्च शिक्षामा भर्नाका लागि तोकिए बमोजिमको सिट सुरक्षित गरिनेछ।
|
| 381 |
+
(४) विश्वविद्यालयले शहिद, बेपत्ता पारिएका र अपाङ्गता भएका व्यक्तिका छोरा, छोरीको लागि प्रचलित कानूनमा व्यवस्था भए बमोजिम उच्च शिक्षाको व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 382 |
+
(६) कक्षा छ देखि कक्षा दशसम्म सामुदायिक विद्यालयमा अध्ययन गरेको विद्यार्थीले उच्च शिक्षामा प्रचलित कानून बमोजिम छात्रवृत्ति पाउनेछ।
|
| 383 |
+
|
| 384 |
+
३६. **राष्ट्रिय शिक्षा नीति अनुरूप कार्य गर्ने:**
|
| 385 |
+
नेपाल सरकारको राष्ट्रिय शिक्षा नीति अनुरूप कार्य सञ्चालन गर्नु विश्वविद्यालयको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 386 |
+
|
| 387 |
+
३७. **काम कारबाही बदर नहुने:**
|
| 388 |
+
विश्वविद्यालयको कुनै पदाधिकारी बा सदस्यको स्थान रिक्त भई बा कुनै पदाधिकारी बा सदस्यको नियुक्ति बा मनोनयनमा त्रुटि भएको कारणले मात्र त्यस्तो काम कारबाही बदर हुने छैन।
|
| 389 |
+
|
| 390 |
+
३८. **असल नियतले गरेको काममा बचाउ:**
|
| 391 |
+
यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम असल नियत लिई गरेको बा गर्न खोजेको कुनै कामको सम्बन्धमा विश्वविद्यालय बा विश्वविद्यालयको कुनै पदाधिकारी उपर मुद्दा चलाउने बा अन्य कारबाही गरिने छैन।
|
| 392 |
+
|
| 393 |
+
३९. **नेपाल सरकारको पूर्वस्वीकृति लिनु पर्ने:**
|
| 394 |
+
विश्वविद्यालयले नेपाल सरकारलाई आर्थिक दायित्व पर्ने गरी कुनै पदाधिकारी, शिक्षक तथा कर्मचारीको दरबन्दी स्वीकृत गर्दा बा त्यस्ता पदाधिकारी, शिक्षक तथा कर्मचारीको पारिश्रमिक तथा सेवा सुविधा थप गर्नु अघि नेपाल सरकार, अर्थ मन्त्रालयको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 395 |
+
|
| 396 |
+
४०. **अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 397 |
+
(१) सभाले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त भएको अधिकारहरूमध्ये आवश्यकतानुसार केही अधिकार प्राज्ञिक परिषद्, कार्यकारी परिषद् बा उप-कुलपतिलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 398 |
+
(२) प्राज्ञिक परिषद्ले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरूमध्ये आवश्यकतानुसार केही अधिकार विद्यापरिषद्लाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 399 |
+
(३) कार्यकारी परिषद्ले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरूमध्ये आवश्यकतानुसार केही अधिकार विश्वविद्यालयका कुनै पदाधिकारी बा समितिलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 400 |
+
(४) सेवा आयोगले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरूमध्ये आवश्यकतानुसार केही अधिकार विश्वविद्यालयको कुनै समिति बा पदाधिकारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 401 |
+
|
| 402 |
+
४१. **नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 403 |
+
विश्वविद्यालयले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय मार्फत् राख्नेछ।
|
| 404 |
+
|
| 405 |
+
४२. **विश्वविद्यालय बिघटन सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 406 |
+
(१) कुनै कारणले विश्वविद्यालय सञ्चालन हुन नसक्ने भएमा नेपाल सरकारले सभाको सिफारिसमा विश्वविद्यालय बिघटन गर्न सक्नेछ।
|
| 407 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम विश्वविद्यालय बिघटन भएमा विश्वविद्यालयको चल, अचल जायजेथा नेपाल सरकारको हुनेछ���
|
| 408 |
+
|
| 409 |
+
४३. **नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 410 |
+
यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न विश्वविद्यालयले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 411 |
+
|
| 412 |
+
---
|
| 413 |
+
|
| 414 |
+
**द्रष्टव्य:**
|
| 415 |
+
(१) केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा रूपान्तरित भएका शब्दहरू: "नगरपालिका प्रमुख" को सट्टा "नगर कार्यपालिकाको प्रमुख"।
|
| 416 |
+
(२) शिक्षा सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्न बनेको ऐन, २०७७ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरू: "सुदूरपश्चिमाञ्चल विश्वविद्यालय" को सट्टा "सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय"।
|
section_14_pdf_8.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,250 @@
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| 1 |
+
# सुपुर्दगी ऐन, २०७०
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
## प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
|
| 5 |
+
२०७२।१२।१२
|
| 6 |
+
संबत् २०७० सालको ऐन नं. ११
|
| 7 |
+
|
| 8 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 9 |
+
सुपुर्दगी गर्न सकिने कसूरको फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई कानून बमोजिम सुपुर्दगी सम्बन्धी कारबाही गर्ने सम्बन्धमा प्रचलित सुपुर्दगी सम्बन्धी कानूनलाई संशोधन र एकीकरण गरी समयानुकूल बनाउन बाञ्छुनीय भएकाले, नेपालको अन्तरिम संविधान, २०६३ को धारा ६३ बमोजिम व्यवस्थापिका-संसदको हैसियतमा संविधान सभाले यो ऐन बनाएको छ ।
|
| 10 |
+
|
| 11 |
+
---
|
| 12 |
+
|
| 13 |
+
### १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः
|
| 14 |
+
(१) यस ऐनको नाम "सपुर्दगी ऐन, २०७०" रहेको छ ।
|
| 15 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ ।
|
| 16 |
+
|
| 17 |
+
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|
| 18 |
+
|
| 19 |
+
### २. परिभाषाः
|
| 20 |
+
बिषय बा प्रसंगले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा-
|
| 21 |
+
(क) "कसूर" भन्नाले दफा ४ बमोजिमको कसूर सम्झनु पर्छ ।
|
| 22 |
+
(ख) "फरार अभियुक्त बा कसूरदार" भन्नाले बिदेशी राज्यमा कुनै कसूरको आरोप लागी बा कुनै कसूरमा सजाय पाई नेपालमा रहे बसेको बा नेपालमा कुनै कसूरको आरोप लागी बा कुनै कसूरमा सजाय पाई बिदेशी राज्यमा गई बसेको अभियुक्त बा कसूरदार सम्झनु पर्छ ।
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| 23 |
+
(ग) "मन्त्रालय" भन्नाले नेपाल सरकार, गृह मन्त्रालय सम्झनु पर्छ ।
|
| 24 |
+
(घ) "माग गर्ने राज्य" भन्नाले फरार अभियुक्त बा कसूरदारको सुपुर्दगीको लागि नेपाल सरकार समक्ष अनुरोध गर्ने बिदेशी राज्य सम्झनु पर्छ ।
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| 25 |
+
(ड) "सपुर्दगी" भन्नाले माग गर्ने राज्यको अनुरोधमा फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई त्यस्तो राज्य समक्ष सुम्पिने कार्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई नेपालको अनुरोधमा सम्बन्धित बिदेशी राज्यले नेपाल समक्ष सुम्पिने कार्य समेतलाई जनाउँछ ।
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| 26 |
+
(च) "सपुर्दगी सन्धि" भन्नाले फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सुपुर्दगी गर्न सकिने गरी नेपालले कुनै बिदेशी राज्यसँग गरेको सन्धि सम्झनु पर्छ र सो शब्दले सुपुर्दगीको प्रयोजनको लागि भएको समझदारी समेतलाई जनाउँछ ।
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| 27 |
+
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| 28 |
+
---
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| 29 |
+
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| 30 |
+
### ३. सुपुर्दगी गर्न सकिने अवस्थाः
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| 31 |
+
कुनै बिदेशी राज्यले फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सुपुर्दगीको लागि नेपाल सरकार समक्ष अनुरोध गरेमा नेपाल सरकारले देहायका अवस्थामा त्यस्तो अभियुक्त बा कसूरदारलाई यस ऐनको अधीनमा रही त्यस्तो राज्य समक्ष सुपुर्दगी गर्न सक्नेछ :
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| 32 |
+
(क) सुपुर्दगी सन्धि भएको,
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| 33 |
+
(ख) दफा ४ बमोजिमको सुपुर्दगी गर्न सकिने कसूर भएको ।
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| 34 |
+
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| 35 |
+
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| 36 |
+
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| 37 |
+
### ४. सुपुर्दगी गर्न सकिने कसूर:
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| 38 |
+
देहायका कसूरलाई सुपुर्दगी गर्न सकि���े कसूर मानिनेछः-
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| 39 |
+
(क) नेपालको कानून बमोजिम कम्तीमा तीन बर्षको कैद सजाय हुन सक्ने कसूर,
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| 40 |
+
(ख) माग गर्ने राज्यको कानून बमोजिम कम्तीमा तीन बर्षको कैद सजाय हुन सक्ने कसूर,
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| 41 |
+
(ग) खण्ड (क) र (ख) मा लेखिएको भन्दा कम सजाय हुने भए तापनि कर, राजस्व, बैङ्गि कारोबार बा त्यस्तै किसिमको अन्य कुनै पनि किसिमका आर्थिक बा बित्तीय सम्बन्धी कसूर,
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| 42 |
+
(घ) खण्ड (क), (ख) बा (ग) बमोजिमको कसूर गर्न उद्योग गर्ने, मतियार हुने बा त्यस्तो कसूर गर्न पड्यन्ब गर्ने बा त्यस्तो कसूर गर्न कसैलाई दुरुत्साहन गर्ने कसूर ।
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| 43 |
+
|
| 44 |
+
---
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| 45 |
+
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| 46 |
+
### ५. सुपुर्दगी गर्न इन्कार गरिने अवस्थाः
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| 47 |
+
दफा ३ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायका अवस्थामा कुनै पनि फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सुपुर्दगी गरिने छैनः-
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| 48 |
+
(क) फरार अभियुक्त बा कसूरदारले गरेको कसूर राजनीतिक प्रकृतिको भएमा,
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| 49 |
+
(ख) जात, जाति, बर्ण, धर्म, राष्ट्रियता बा राजनीतिक बिचारधाराको आधारमा कुनै कसूरका सम्बन्धमा कारबाही चलाइएको बा कारबाही चलाइने सम्भाबना भएमा,
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| 50 |
+
(ग) जात, जाति, बर्ण, धर्म, राष्ट्रियता बा राजनीतिक बिचारधाराबाट पूर्वाग्रही भई मुदाको सुनुबाई गरिएको बा सुनुबाई गरी सजाय गरिने सम्भाबना भएमा,
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| 51 |
+
(घ) मृत्युदण्डको सजाय भएको बा मृत्युदण्डको सजाय हुन सक्ने गरी अभियोग लागेको भएमा,
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| 52 |
+
(ङ) नेपालको नागरिक भएमा,
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| 53 |
+
(च) माग गर्ने राज्यको सैनिक कानून अन्तर्गत सजाय हुने कसूर भएमा,
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| 54 |
+
(छ) माग गर्ने राज्यमा फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई शारीरिक बा मानसिक यातना दिने पर्याप्त सम्भाबना भएमा,
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| 55 |
+
(ज) जुन कसूरको सम्बन्धमा सपुर्दगीको माग गरिएको हो सोही कसूरमा नेपालको अदालतले निर्णय गरिसकेको भएमा,
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| 56 |
+
(झ) फरार अभियुक्त बा कसूरदार विरुद्ध नेपालको कुनै अदालतमा कुनै फौजदारी कसूरमा मुद्दाको कारबाही भईरहेको बा निज कसूरदार टहरिई सजाय भुक्तान भई नसकेको भएमा,
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| 57 |
+
(ज) माग गर्ने राज्यको अधिकार प्राप्त अधिकारीले मुद्दा बा सजायको कारबाही नचलाउने बा सजाय माफी गर्न निर्णय गरिसकेको भएमा,
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| 58 |
+
(ट) माग गर्ने राज्यको कानून बमोजिम कारबाही चलाउने हदम्याद् समाप्त भइसकेको भएमा,
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| 59 |
+
(ट) माग गर्ने राज्यको कानून बमोजिम सजायको उन्मुक्तिको सुविधा प्राप्त भएको व्यक्ति भएमा ।
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| 60 |
+
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| 61 |
+
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| 62 |
+
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| 63 |
+
### ६. राजनीतिक प्रकृतिको कसूर नमानिने :
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| 64 |
+
दफा ५ को खण्ड (क) को प्रयोजनको लागि देहायका कसूरहरु राजनीतिक प्रकृतिको कसूर मानिने छैनः-
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| 65 |
+
(क) भ्रष्टाचार,
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| 66 |
+
(ख) मानव बेचविखन तथा ओसारपसार बा जीउ मास्ने बेच्ने,
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| 67 |
+
(ग) लागू पदार्थको उत्पादन सञ्चय, ओसारपसार बा कारोबार,
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| 68 |
+
(घ) कर, राजस्व, बँड्रिग कारोबार बा त्यस्तै किसिमको अन्य कुनै पनि किसिमका आर्थिक बा बित्तीय सम्बन्धी कसूर,
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| 69 |
+
(ङ) सम्पत्ति शुद्धिकरण,
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| 70 |
+
(च) जबर्जस्ती करणी,
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| 71 |
+
(छ) बाल यौन दुराचार,
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| 72 |
+
(ज) बन्यजन्तु बा वन पैदाबारको अबैध हानी नोक्सानी बा अबैध ओसारपसार सम्बन्धी कसूर,
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| 73 |
+
(झ) जातीय हत्या (जेनोसाइड) सम्बन्धी कसूर,
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| 74 |
+
(ज) मानवता विरुद्धको कसूर,
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| 75 |
+
(ट) संगठित रुपमा गरेको कुनै कसूर बा बहुराष्ट्रिय संगठित कसूर,
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| 76 |
+
(ट) बिमान अपहरण बा नागरिक उड्ययनको सुरक्षा विरुद्धका कसूर,
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| 77 |
+
(ड) कूटनीतिक निकाय बा कुटनीतिक सुविधा प्राप्त व्यक्ति विरुद्धको कुनै कसूर,
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| 78 |
+
(ड) खण्ड (क) देखि (ड) सम्मको कसूर गर्न उद्योग, दुरुत्साहन बा षडयन्त्र गरेको बा त्यस्तो कसूर गर्ने कार्यमा मतियार भएको बा अन्य कुनै किसिमले संलग्नता रहेको कसूर ।
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| 79 |
+
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| 80 |
+
---
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| 81 |
+
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| 82 |
+
### ७. सपुर्दगीको लागि अनुरोध गर्नु पर्नेः
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| 83 |
+
(१) नेपालमा रहे बसेको बा तेस्रो मुलुकमा जाने क्रममा नेपालभित्र पारबहनमा रहेको फरार अभियुक्त बा कसूरदारको सपुर्दगीको लागि माग गर्ने राज्यले नेपाल सरकार समक्ष अनुरोध गर्नु पर्नेछ ।
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| 84 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम अनुरोध गर्दा माग गर्ने राज्यले कूटनीतिक माध्यम मार्फत अनुरोध गर्नु पर्नेछ ।
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| 85 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि तत्काल पक्राउ गरी नियन्त्रणमा नलिएमा फरार अभियुक्त बा कसूरदार भागी बेपत्ता हुन सम्भाबना भएमा त्यस्तो फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई तत्काल पक्राउ गरी नियन्त्रणमा लिइदिन माग गर्ने राज्यले सोझै मन्त्रालय समक्ष अनुरोध गर्न सक्नेछ ।
|
| 86 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम अनुरोध गर्दा फरार अभियुक्तको हकमा प्रथम दृष्टिमा नै अभियुक्त देखिने प्रमाण र कसूरदारको हकमा निज कसूरदार टहरिएको सक्षम अदालतको फैसला उपलब्ध गराउनु पर्नेछ ।
|
| 87 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिमको प्रमाण बा फैसलाको आधारमा फरार अभियुक्त बा कसूरदार पक्राउ भएमा मन्त्रालयले सोको जानकारी माग गर्ने राज्यलाई तीन दिनभित्र दिनु पर्नेछ ।
|
| 88 |
+
(६) उपदफा (४) बमोजिम फरार अभियुक्त बा कसूरदार पक्राउ भएमा माग गर्ने राज्यले पक्राउ परेको जानकारी पाएको मितिले सात दिनभित्र त्यस्तो फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगीको लागि कूटनीतिक माध्यम मार्फत नेपाल सरकार समक्ष अनुरोध गर्नु पर्नेछ ।
|
| 89 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजि��� अनुरोध नगरेमा पक्राउ परेको फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई मन्त्रालयले तत्काल थुनाबाट मुक्त गर्नु पर्नेछ ।
|
| 90 |
+
|
| 91 |
+
---
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| 92 |
+
|
| 93 |
+
### ८. सपुर्दगीको लागि अनुरोध गर्दा खुलाउनु पर्ने बिबरण तथा संलग्न गर्नु पर्ने कागजातः
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| 94 |
+
(१) दफा ७ बमोजिम सपुर्दगीको लागि अनुरोध गर्दा माग गर्ने राज्यले देहायका बिबरण खुलाउनु पर्नेछ:-
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| 95 |
+
(क) फरार अभियुक्त बा कसूरदारको हुलिया, राष्ट्रियता, राष्ट्रिय परिचयपत्र नम्बर लगायत पहिचान हुन सक्ने यथार्थ बिबरण र यथासम्भव हाल बसोबास गरिरहेको स्थान सम्बन्धी जानकारी,
|
| 96 |
+
(ख) कसूर भएको स्थान, मिति र कसूरको विवरण,
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| 97 |
+
(ग) कसूरका सम्बन्धमा माग गर्ने राज्यको प्रचलित कानूनी व्यवस्था र कसूर टहरेमा बा कसूर टहरी सकेकोमा हुन सक्ने बा भएको अधिकतम सजाय।
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| 98 |
+
(२) दफा ७ बमोजिम सपुर्दगीको लागि अनुरोध गर्दा माग गर्ने राज्यले देहायका कागजात संलग्न गर्नु पर्नेछ:-
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| 99 |
+
(क) कसूरसँग सम्बन्धित प्रमाण कागजात,
|
| 100 |
+
(ख) अधिकार प्राप्त अधिकारीबाट त्यस्तो अभियुक्त बा कसूरदार पक्राउ गर्नको लागि जारी गरिएको बारेण्ट,
|
| 101 |
+
(ग) कसूरदारको सपुर्दगीको सम्बन्धमा सक्षम अदालत बा अन्य सक्षम निकायले गरेको फैसलाको प्रतिलिपि,
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| 102 |
+
(घ) सपुर्दगीका लागि अनुरोध गर्दाका बखत उल्लेख गरिएको कसूर बाहेक अन्य कसूरमा कारबाही नचलाइने प्रतिबद्धता,
|
| 103 |
+
(ङ) सपुर्दगीका लागि अनुरोध गर्दाका बखत उल्लेख गरिएको कसूर बापत हुन सक्ने सजाय भन्दा कम सजाय हुन सक्ने कसूरमा कारबाही नचलाइने प्रतिबद्धता,
|
| 104 |
+
(च) सपुर्दगी गरिएको फरार अभियुक्त बा कसूरदार अन्य कुनै राज्यलाई पुनः सपुर्दगी नगर्ने प्रतिबद्धता,
|
| 105 |
+
(छ) खण्ड (च) बमोजिम सपुर्दगी नगरी नहुने अवस्थामा नेपाल सरकारको पूर्व सहमति लिने प्रतिबद्धता ।
|
| 106 |
+
|
| 107 |
+
---
|
| 108 |
+
|
| 109 |
+
### ९. सपुर्दगी सम्बन्धी अनुरोध मन्त्रालयमा पठाउनु पर्नेः
|
| 110 |
+
दफा ७ बमोजिम सपुर्दगीको अनुरोध प्राप्त भएमा नेपाल सरकार, परराष्ट्र मन्त्रालयले सो अनुरोध साथ प्राप्त विवरण, कागजात तथा प्रमाण सहित सपुर्दगी सम्बन्धमा आवश्यक कारबाहीको लागि मन्त्रालय समक्ष पठाउनु पर्नेछ ।
|
| 111 |
+
|
| 112 |
+
---
|
| 113 |
+
|
| 114 |
+
### १०. सपुर्दगी सम्बन्धी कारबाही अघि बढाउनु पर्नेः
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| 115 |
+
(१) दफा ९ बमोजिम अनुरोध प्राप्त भएमा मन्त्रालयले त्यस्तो अनुरोध साथ संलग्न विवरण, कागजात, प्रमाण र कसूरको तथ्यहरुको अध्ययन र जाँचबुझ गरी सपुर्दगीको कारबाही अघि बढाउने बा नबढाउने सम्बन्धमा पन्ध्र दिनभित्र निर्णय गर्नु पर्���ेछ ।
|
| 116 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम अध्ययन र जाँचबुझ गर्दा अनुरोध साथ प्राप्त विवरण, कागजात तथा प्रमाण सपुर्दगीको लागि कारबाही अघि बढाउन पर्याप्त नदेखिएमा मन्त्रालयले थप बिबरण, कागजात तथा प्रमाण पेश गर्नको लागि कूटनीतिक माध्यम मार्फत माग गर्ने राज्यलाई लेखी पटाउन सक्नेछ ।
|
| 117 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम सपुर्दगीको कारबाही अघि बढाउने निर्णय भएमा मन्त्रालयले सम्बन्धित जिल्ला सरकारी बकील मार्फत् फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न अदालतको अनुमतिको लागि सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा प्रतिबेदन पेश गर्न लगाउन सम्बन्धित प्रमुख जिल्ला अधिकारीलाई आदेश दिनु पर्नेछ ।
|
| 118 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम सम्बन्धित प्रमुख जिल्ला अधिकारीलाई आदेश दिंदा फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई पक्राउ गर्नको लागि माग गर्ने राज्यको अधिकार प्राप्त अधिकारीबाट जारी गरिएको बारेण्ट समेत पटाई त्यस्तो फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई पक्राउ गर्न लगाउनु पर्नेछ ।
|
| 119 |
+
(५) उपदफा (१) बमोजिम सपुर्दगीको कारबाही अघि नबढाउने गरी निर्णय भएमा मन्त्रालयले सो निर्णयको व्यहोरा तथा फरार अभियुक्त बा कसूरदार पक्राउ भए बा नभएको जानकारी कूटनीतिक माध्यम मार्फत माग गर्ने राज्यलाई तुरुन्त दिनु पर्नेछ ।
|
| 120 |
+
|
| 121 |
+
---
|
| 122 |
+
|
| 123 |
+
### ११. पक्राउ पुर्जी जारी गर्ने:
|
| 124 |
+
दफा १० को उपदफा (४) बमोजिमको बारेण्ट प्राप्त भएपछि फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई पक्राउ गर्न सम्बन्धित प्रमुख जिल्ला अधिकारीले प्रचलित कानून बमोजिम पक्राउ पुर्जी जारी गर्नु पर्नेछ ।
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
---
|
| 127 |
+
|
| 128 |
+
### १२. फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई अदालत समक्ष पेश गर्ने:
|
| 129 |
+
दफा ११ बमोजिम जारी भएको पक्राउ पुर्जीको आधारमा पक्राउ परेको फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई प्रहरीले बाटोको म्याद बाहेक पक्राउ परेको चौबीस घण्टाभित्र सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा पेश गरी सो अदालतको आदेश बमोजिम थुनामा राख्नु पर्नेछ ।
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
---
|
| 132 |
+
|
| 133 |
+
### १३. प्रतिबेदन पेश गर्नु पर्ने:
|
| 134 |
+
(१) दफा १२ बमोजिम थुनामा रहेको फरार अभियुक्त बा कसूरदार माग गर्ने राज्यलाई सपुर्दगी गर्ने अनुमतिको लागि प्रमुख जिल्ला अधिकारीले त्यसरी थुनामा परेको मितिले सात दिनभित्र जिल्ला सरकारी बकील मार्फत सम्बन्धित जिल्ला अदालत समक्ष प्रतिबेदन पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 135 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्रतिबेदन पेश गर्दा थुनामा रहेको अभियुक्त बा कसूरदारलाई समेत जिल्ला अदालत समक्ष उपस्थित गराउनु पर्���ेछ ।
|
| 136 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम जिल्ला अदालत समक्ष पेश गरेको प्रतिबेदनको एकप्रति प्रमुख जिल्ला अधिकारीले मन्त्रालयमा पटाउनु पर्नेछ ।
|
| 137 |
+
|
| 138 |
+
---
|
| 139 |
+
|
| 140 |
+
### १४. अदालतको क्षेत्राधिकारः
|
| 141 |
+
(१) सपुर्दगी गर्ने अनुमतिको लागि दफा १३ बमोजिम प्रतिबेदन प्राप्त भएमा जिल्ला अदालतले फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न सकिने बा नसकिने सम्बन्धमा देहायका बिषयहरू बुझ्न सक्नेछः-
|
| 142 |
+
(क) माग गर्ने राज्यले दफा ७ र ८ बमोजिमको प्रक्रिया पूरा गरी बा खुलाउनु पर्ने बिबरण खुलाई बा संलग्न गर्नु पर्ने कागजात संलग्न गरी फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न अनुरोध गरेको छ बा छैन,
|
| 143 |
+
(ख) माग गर्ने राज्यले फरार अभियुक्त बा कसूरदार पकाउ गर्नको लागि जारी गरेको बारेण्ट सोही व्यक्ति पकाउ गर्नको लागि जारी भएको हो बा होइन,
|
| 144 |
+
(ग) फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई दफा ३ बमोजिम सपुर्दगी गर्न सकिने हो बा होइन,
|
| 145 |
+
(घ) फरार अभियुक्त बा कसूरदार दफा ४ बमोजिम सपुर्दगी गर्न सकिने कसूरसँग सम्बन्धित हो बा होइन,
|
| 146 |
+
(ङ) फरार अभियुक्त बा कसूरदार दफा ५ बमोजिम सपुर्दगी गर्न इन्कार गर्न सकिने हो बा होइन,
|
| 147 |
+
(च) फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई माग गर्ने राज्यको अनुरोध बमोजिम सपुर्दगी गर्न सकिने हो बा होइन ।
|
| 148 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न सकिने बा नसकिने सम्बन्धमा आदेश गर्नु अघि जिल्ला अदालतले त्यस्तो अभियुक्त बा कसूरदारको भनाई र सो कसूरसँग सम्बन्धित थप प्रमाण बुझ्न सक्नेछ ।
|
| 149 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम बुझ्दा तथा माग गर्ने राज्यले पेश गरेको बिबरण, कागजात तथा प्रमाणबाट फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई यस ऐन बमोजिम सपुर्दगी गर्न सकिने देखिएमा जिल्ला अदालतले सपुर्दगी गर्ने आदेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 150 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम आदेश गर्दा फरार अभियुक्त बा कसूरदार थुनामा रहेको भए सपुर्दगी सम्बन्धी काम पूरा नभएसम्मको लागि त्यस्तो फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई बढीमा पैतालीस दिनसम्म थुनामा राख्ने आदेश दिनु पर्नेछ ।
|
| 151 |
+
(५) यस ऐन बमोजिम माग गर्ने राज्यले पेश गरेको बिबरण, कागजात तथा प्रमाणबाट फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न सकिने नदेखिएमा सम्बन्धित जिल्ला अदालतले त्यस्तो अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न नसकिने आदेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 152 |
+
(६) उपदफा (५) बमोजिम आदेश गर्दा फरार अभियुक्त बा ��सूरदार थुनामा रहेको भए निजलाई थुनाबाट मुक्त गर्ने आदेश समेत दिनु पर्नेछ ।
|
| 153 |
+
(७) यस दफा बमोजिम फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न सकिने बा नसकिने सम्बन्धमा दिएको आदेशको जानकारी जिल्ला अदालतले सम्बन्धित जिल्ला सरकारी बकील मार्फत प्रमुख जिल्ला अधिकारीलाई दिनु पर्नेछ ।
|
| 154 |
+
(८) उपदफा (७) बमोजिम प्राप्त आदेशको जानकारी प्रमुख जिल्ला अधिकारीले अबिलम्ब मन्त्रालयलाई दिनु पर्नेछ ।
|
| 155 |
+
|
| 156 |
+
---
|
| 157 |
+
|
| 158 |
+
### १५. सपुर्दगी गर्नु पर्नेः
|
| 159 |
+
(१) दफा १४ को उपदफा (८) बमोजिम फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न सकिने आदेशको जानकारी प्राप्त भएमा त्यस्तो जानकारी प्राप्त भएको मितिले तीन दिनभित्र मन्त्रालयले कूटनैतिक माध्यम मार्फत माग गर्ने राज्यलाई सोको जानकारी दिई तीस दिनभित्र त्यस्तो फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्ने ब्यबस्था मिलाउनु पर्नेछ ।
|
| 160 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सपुर्दगी गर्ने ब्यबस्था मिलाउँदा मन्त्रालयले फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्ने स्थान, मिति र समय निर्धारण गरी सोको जानकारी माग गर्ने राज्यलाई दिनु पर्नेछ ।
|
| 161 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम जानकारी गराइएको स्थान, मिति र समयमा फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न नसकिने कुनै कारण भई सपुर्दगी गर्न नसकिने भएमा मन्त्रालयले तुरुन्त सपुर्दगी गर्ने अर्को मिति, समय र स्थान निर्धारण गरी माग गर्ने राज्यलाई जानकारी गराउनु पर्नेछ ।
|
| 162 |
+
|
| 163 |
+
---
|
| 164 |
+
|
| 165 |
+
### १६. सपुर्दगी गर्न नसकिने कुराको जानकारी गराउनु पर्नेः
|
| 166 |
+
(१) दफा १४ को उपदफा (८) बमोजिम फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न नसकिने आदेशको जानकारी प्राप्त भएमा मन्त्रालयले तीन दिनभित्र कूटनैतिक माध्यम मार्फत माग गर्ने राज्यलाई सोही ब्यहोराको जानकारी गराउनु पर्नेछ ।
|
| 167 |
+
(२) फरार अभियुक्त बा कसूरदार नेपाली नागरिक भएको कारणबाट सपुर्दगी गर्न नसकिने भएमा त्यस्तो अभियुक्त बा कसूरदारलाई कानून बमोजिम कारबाही चलाइने ब्यहोराको जानकारी मन्त्रालयले कुटनैतिक माध्यम मार्फत माग गर्ने राज्यलाई गराउनु पर्नेछ ।
|
| 168 |
+
|
| 169 |
+
---
|
| 170 |
+
|
| 171 |
+
### १७. कानून बमोजिम कारबाही चलाउनु पर्नेः
|
| 172 |
+
(१) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा १४ को उपदफा (५) बा दफा १६ को उपदफा (२) बमोजिम कुनै फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्न नसकिने भएमा जुन कसूरका सम्बन्धमा सपुर्दगीको माग गरिएको हो त्यस्तो ���सूर नेपाल कानून बमोजिम पनि कसूर मानिने रहेछ भने मन्त्रालयले त्यस्तो अभियुक्त उपर कानून बमोजिम कारबाही चलाउनु पर्नेछ ।
|
| 173 |
+
(२) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि उपदफा (१) बमोजिम फरार अभियुक्त उपर कारबाही चलाउनु पर्ने भएमा सम्बन्धित जिल्ला सरकारी बकीलले अदालत बा अन्य सक्षम निकाय समक्ष मुद्दा दायर गर्नु पर्नेछ ।
|
| 174 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम फरार कसूरदार उपर कारबाही चलाउँदा त्यस्तो कसूरदार माग गर्ने राज्यको अदालत बा अन्य सक्षम निकायबाट कसूरदार टहर भइसकेको भए प्रचलित कानून बमोजिम सजायको कार्यान्वयन गरिनेछ ।
|
| 175 |
+
(४) यस दफा बमोजिम फरार अभियुक्त बा कसूरदारका सम्बन्धमा अदालत बा अन्य सक्षम निकायले गरेको फैसला तथा भएको सजायको जानकारी मन्त्रालयले माग गर्ने राज्यलाई गराउनु पर्नेछ ।
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| 176 |
+
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| 177 |
+
---
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| 178 |
+
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| 179 |
+
### १८. बुझी नलिए थुनाबाट मुक्त गर्नेः
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| 180 |
+
दफा १४ को उपदफा (५) बमोजिम जिल्ला अदालतको आदेशले थुनामा रहेको अभियुक्त बा कसूरदारलाई बुझिलिनको लागि नेपाल सरकारले सूचना दिएको मितिले तीस दिनभित्र माग गर्ने राज्यले बुझी नलगेमा अदालतले अन्यथा आदेश दिएकोमा बाहेक त्यस्तो फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई मन्त्रालयले थुनाबाट मुक्त गर्नु पर्नेछ ।
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| 181 |
+
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| 182 |
+
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| 183 |
+
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| 184 |
+
### १९. एकभन्दा बढी राज्यबाट सपुर्दगीको माग भएमाः
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| 185 |
+
एउटै फरार अभियुक्त बा कसूरदारका सम्बन्धमा एकभन्दा बढी राज्यले सपुर्दगीको माग गरेकोमा दफा १४ को उपदफा (३) बमोजिम जिल्ला अदालतले सपुर्दगी गर्न सकिने गरी आदेश गरेमा नेपाल सरकारले सबैभन्दा पहिले माग गर्ने राज्यलाई त्यस्तो अभियुक्त बा कसूरदार सपुर्दगी गर्न सक्नेछ ।
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| 186 |
+
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| 187 |
+
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| 188 |
+
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+
### २०. विदेशी राज्यसँग सपुर्दगीको लागि माग गर्नेः
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| 190 |
+
(१) नेपालभित्र कुनै कसूरको अभियोग लागेको बा कसूर गरेको टहरिएको कुनै व्यक्ति भागी कुनै विदेशी राज्यको अधिकार क्षेत्रभित्रको कुनै इलाकामा बसेको रहेछ बा तेस्रो मुलुकमा जाने क्रममा सो राज्यको पारबहनमा रहेछ भने त्यस्तो फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगी गर्नको लागि मन्त्रालयले कूटनैतिक माध्यम मार्फत सम्बन्धित विदेशी राज्यलाई अनुरोध गर्नु पर्नेछ ।
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| 191 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि तत्काल पक्राउ गरी नियन्त्रणमा नलिएमा फरार अभियुक्त बा कसूरदार भागी बेपत्ता हुने सम्भावना भएमा त्यस्तो फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई तत्काल पक्राउ गरी नियन्त्रणमा लिन मन्त्रालयले सोझै बिदेशी राज्य समक्ष अनुरोध गर्न सक्नेछ ।
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| 192 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम अनुरोध गर्दा फरार अभियुक्तको हकमा प्रथम दृष्टिमा नै अभियुक्त देखिने प्रमाण र कसूरदारको हकमा अदालत बा अन्य सक्षम निकायले गरेको फैसला समेत संलग्न गर्नु पर्नेछ ।
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| 193 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिमको प्रमाण र फैसलाको आधारमा फरार अभियुक्त बा कसूरदार सम्बन्धित बिदेशी राज्यबाट पक्राउ गरिएकोमा पक्राउ परेको जानकारी प्राप्त भएको मितिले सात दिनभित्र यथाशक्य छिटो त्यस्तो फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सपुर्दगीको लागि मन्त्रालयले कूटनीतिक माध्यम मार्फत सम्बन्धित राज्य समक्ष अनुरोध गर्नु पर्नेछ ।
|
| 194 |
+
(५) उपदफा (१) बमोजिम सपुर्दगीको लागि अनुरोध गर्दा दफा ८ बमोजिम खुलाउनु पर्ने तथा संलग्न गर्नु पर्ने बिबरण र कागजात खुलाउनु तथा संलग्न गर्नु पर्नेछ ।
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| 195 |
+
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| 196 |
+
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| 197 |
+
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| 198 |
+
### २१. सपुर्दगी सम्बन्धमा लागू हुने विशेष व्यवस्थाः
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| 199 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सपुर्दगीको लागि अनुरोध गर्दाका बखत उल्लेख गरिएको कसूरको सम्बन्धमा कारबाही चलाउने बाहेक फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई अन्य कुनै कसूरमा अभियोग लगाउन बा सजाय गर्न पाइने छैन ।
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| 200 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सपुर्दगीका लागि अनुरोध गर्दाका बखत उल्लेख गरिएको कसूरसँग सम्बन्धित सानो प्रकृतिको अन्य कसूरमा समेत कारबाही चलाउनु परेमा नेपाल सरकारको सहमति लिई माग गर्ने राज्यले त्यस्ता अभियुक्त बा कसूरदारको बिरुद्धमा कारबाही चलाउन सक्नेछ ।
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| 201 |
+
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| 202 |
+
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| 203 |
+
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| 204 |
+
### २२. कसूरसँग सम्बन्धित सम्पत्ति फिर्ता गर्नु पर्नेः
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| 205 |
+
(१) फरार अभियुक्त बा कसूरदार सपुर्दगी गर्दा त्यस्तो अभियुक्त बा कसूरदारलाई नेपालमा पक्राउ गर्दाका बखत नियन्त्रणमा लिएको कसूरसँग सम्बन्धित सम्पत्ति र सोबाट आर्जित अन्य सम्पत्ति नेपाल सरकारले माग गर्ने राज्यलाई फिर्ता गर्न सक्नेछ । तर अन्य कसैको हक, दाबी बा अन्य कुनै पनि किसिमको दायित्व कायम हुने देखिएको सम्पत्ति फिर्ता गर्ने छैन ।
|
| 206 |
+
(२) नेपाल सरकारले माग गर्ने राज्यलाई सपुर्दगी गरेको फरार अभियुक्त बा कसूरदारको कसूरसँग सम्बन्धित अचल सम्पत्तिको हकमा सम्बन्धित सक्षम अदालतबाट जफत हुने ठहर भएमा त्यस्तो सम्पत्ति फिर्ता गर्ने कारबाही हुनेछ ।
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| 207 |
+
(३) यस दफा बमोजिम फिर्ता गर्नु पर्ने सम्पत्ति नगद बाहेक अन्य कुनै रुपमा रहेको भएम��� त्यसलाई प्रचलित बजार मूल्यमा बिक्री गरी नगदीमा फिर्ता गरिनेछ । तर कसूरसँग दशी प्रमाणको रुपमा पेश हुने बा माग गर्ने राज्यले जिन्सीमा नै फिर्ता गर्न माग गरेको सम्पत्ति जिन्सीमा नै फिर्ता गरिनेछ ।
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| 208 |
+
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| 209 |
+
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| 210 |
+
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| 211 |
+
### २३. माग गर्ने राज्यले खर्च व्यहोर्नु पर्नेः
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| 212 |
+
(१) सुपुर्दगीका सम्बन्धमा लागेको खर्च माग गर्ने राज्यले व्यहोर्नु पर्नेछ ।
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| 213 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि अदालती कारबाहीका सम्बन्धमा लाग्ने खर्च माग गर्ने राज्यले व्यहोर्नु पर्ने छैन ।
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| 214 |
+
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| 215 |
+
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| 216 |
+
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| 217 |
+
### २४. सुपुर्दगी भई आएको अभियुक्त बा कसूरदार उपर कारबाही:
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| 218 |
+
(१) नेपाल सरकारको अनुरोधमा कुनै विदेशी राज्यबाट सुपुर्दगी भई आएको फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई प्रचलित कानून बमोजिम कारबाही चलाउनु पर्नेछ ।
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| 219 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम कारबाही चलाइएको व्यहोराको जानकारी नेपाल सरकारले त्यस्तो विदेशी राज्यलाई दिनु पर्नेछ ।
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| 220 |
+
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+
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+
### २५. पुनः सुपुर्दगी गर्न नहुने:
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| 224 |
+
सुपुर्दगी भएको कुनै फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई अन्य कुनै तेस्रो राज्यमा सुपुर्दगी गर्न हुँदैन ।
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+
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+
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| 228 |
+
### २६. प्रमाण सम्बन्धी विशेष व्यवस्थाः
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| 229 |
+
प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यस ऐन बमोजिम कारबाही चलाइएको सुपुर्दगी गर्न सकिने कसूरको मुदाको सम्बन्धमा माग गर्ने राज्यबाट प्राप्त हुन आएको सबुत प्रमाण तथा लिखतहरु अदालतले प्रमाणमा लिन सक्नेछ ।
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| 230 |
+
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+
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+
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| 233 |
+
### २७. संक्षिप्त कार्यबिधि अपनाउनु पर्नेः
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| 234 |
+
यस ऐन बमोजिम फरार अभियुक्त बा कसूरदारको सुपुर्दगी सम्बन्धी कारबाही गर्दा सम्बन्धित अदालतले संक्षिप्त कार्यबिधि सम्बन्धी प्रचलित कानून बमोजिमको कार्यबिधि अपनाउनु पर्नेछ ।
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| 235 |
+
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+
### २८. कानूनी सहायता उपलब्ध गराउने:
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| 239 |
+
फरार अभियुक्त बा कसूरदारलाई सुपुर्दगी गर्ने प्रयोजनको लागि अदालतले कारबाही चलाउँदा त्यस्तो अभियुक्त बा कसूरदारले कानून व्यवसायी नियुक्त गर्न असमर्थ भएमा र त्यस्तो फरार अभियुक्त बा कसूरदारले चाहेमा अदालतले बैतनिक कानून व्यवसायीको सुबिधा उपलब्ध गराउन सक्नेछ ।
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| 240 |
+
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+
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+
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+
### २९. बाधा अड्काउ फुकाउने अधिकार:
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| 244 |
+
यस ऐनको कार्यान्वयनमा कुनै बाधा अड्काउ उत्पन्न भएमा नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी त्यस्तो बाधा अड्काउ फुकाउन सक्नेछ ।
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| 245 |
+
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| 246 |
+
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+
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| 248 |
+
### ३०. खारेजी र बचाउ:
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| 249 |
+
(१) सुपुर्दगी ऐन, २०४४ खारेज गरिएकोछ ।
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| 250 |
+
(२) यो ऐन प्रारम्भ हुनु अघि सुपुर्दगी���ो कारवाही शुरु भईसकेको अवस्थामा सुपुर्दगी ऐन, २०४४ बमोजिमको कार्यविधि अपनाउनु पर्नेछ ।
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section_17_pdf_2.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,160 @@
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| 1 |
+
**स्थानीय विकास प्रशिक्षण प्रतिष्ठान ऐन, २०४९**
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०४०।०२।३२
|
| 5 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
|
| 6 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 7 |
+
१. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 8 |
+
२०६६।१०।०७
|
| 9 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 10 |
+
२०७२।११।१३
|
| 11 |
+
३. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 12 |
+
२०७४।११।१९
|
| 13 |
+
४. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 14 |
+
२०६२।०४।१४
|
| 15 |
+
२०४० सालको ऐन नं. १२
|
| 16 |
+
|
| 17 |
+
**प्रस्तावनाः**
|
| 18 |
+
स्थानीय विकासको कार्यसँग सम्बन्धित स्थानीय तहहरूको प्रशासनिक एवं व्यवस्थापन सम्बन्धी दक्षता अभिबुद्धि गर्ने उद्देश्यले त्यस्ता निकायहरूमा संलग्न व्यक्तिहरूलाई योजनाबद्ध तरीकाले प्रशिक्षणको व्यवस्था गर्न स्थानीय विकास प्रशिक्षण प्रतिष्ठानको स्थापना र सञ्चालन गर्ने सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 19 |
+
|
| 20 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको बाइसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएकोछ।
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
|
| 23 |
+
(१) यस ऐनको नाम "स्थानीय विकास प्रशिक्षण प्रतिष्ठान ऐन, २०४९" रहेकोछ।
|
| 24 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
**२. परिभाषाः**
|
| 27 |
+
विषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 28 |
+
(क) "प्रतिष्ठान" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको स्थानीय विकास प्रशिक्षण प्रतिष्ठान सम्झनु पर्छ।
|
| 29 |
+
(ख) "परिषद्" भन्नाले दफा ७ बमोजिम गठन भएको परिषद् सम्झनु पर्छ।
|
| 30 |
+
(ग) "समिति" भन्नाले दफा १० बमोजिम गठन भएको सञ्चालक समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 31 |
+
(घ) "कार्यकारी निर्देशक" भन्नाले दफा १२ बमोजिम नियुक्त भएको बा तोकिएको प्रतिष्ठानको कार्यकारी निर्देशक सम्झनु पर्छ।
|
| 32 |
+
(ङ) "प्रशिक्षण केन्द्र" भन्नाले ग्रामीण विकास प्रशिक्षण केन्द्र, नगर विकास प्रशिक्षण केन्द्र तथा महिला विकास प्रशिक्षण केन्द्र सम्झनु पर्छ।
|
| 33 |
+
(च) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यो ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिएबमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 34 |
+
|
| 35 |
+
**३. प्रतिष्ठानको स्थापनाः**
|
| 36 |
+
स्थानीय विकास कार्यसँग सम्बन्धित स्थानीय तहहरूको प्रशासनिक एवं व्यवस्थापकीय विषयमा उच्चस्तरीय प्रशिक्षणको व्यवस्था गरी स्थानीय स्तरमा ती निकायहरूको संस्थागत विकासमा सघाउ पुए्याउन स्थानीय विकास प्रशिक्षण प्रतिष्ठानको स्थापना गरिएको छ।
|
| 37 |
+
|
| 38 |
+
**४. प्रत���ष्ठान सङ्गठित संस्था हुने:**
|
| 39 |
+
(१) प्रतिष्ठान अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र सङ्गठित संस्था हुनेछ।
|
| 40 |
+
(२) प्रतिष्ठानको सबै काम कारबाहीको निमित्त एउटै छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 41 |
+
(३) प्रतिष्ठानले व्यक्ति सरह चल अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न बा अन्य किसिमले व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 42 |
+
(४) प्रतिष्ठानले व्यक्ति सरह आफ्नो नामबाट नालिस उजुर गर्न र प्रतिष्ठान उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजुर लाग्न सक्नेछ।
|
| 43 |
+
|
| 44 |
+
**५. प्रतिष्ठानको कार्यालय:**
|
| 45 |
+
(१) प्रतिष्ठानको मुख्य कार्यालय काठमाडौं उपत्यकामा रहनेछ।
|
| 46 |
+
(२) प्रतिष्ठानले आवश्यकता अनुसार नेपालको कुनै स्थानमा ग्रामीण विकास प्रशिक्षण केन्द्र, नगर विकास प्रशिक्षण केन्द्र तथा महिला विकास प्रशिक्षण केन्द्र स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 47 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमका प्रशिक्षण केन्द्र र त्यसको लागि आवश्यक पर्ने जग्गा नेपाल सरकारले सम्बन्धित प्रदेशमा हस्तान्तरण गर्न सक्नेछ।
|
| 48 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम हस्तान्तरण भएका प्रशिक्षण केन्द्र सञ्चालनको लागि प्रदेश सरकारले आवश्यक व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 49 |
+
|
| 50 |
+
**६. प्रतिष्ठानको उद्देश्यः**
|
| 51 |
+
प्रतिष्ठानको उद्देश्य देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 52 |
+
(क) स्थानीय विकास कार्यसँग सम्बन्धित स्थानीय तहका व्यक्तिहरूको लागि आवश्यक पर्ने प्रशिक्षणको व्यवस्था गर्ने,
|
| 53 |
+
(ख) प्रशिक्षण केन्द्रद्वारा सञ्चालन गरिने प्रशिक्षण कार्यकम सम्बन्धी अनुसन्धान गर्ने,
|
| 54 |
+
(ग) प्रशिक्षण केन्द्रद्वारा सञ्चालन गरिने प्रशिक्षण कार्यकमलाई बढी उपयोगी तुल्याउन तथा प्रशिक्षण सामग्री तयार गर्नको लागि समस्यामूलक अनुसन्धान, परामर्श सेवा तथा सूचना सेवा सम्बन्धी कार्यकमहरू सञ्चालन गर्ने।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
**७. परिषद्को गठनः**
|
| 57 |
+
(१) प्रतिष्ठानको सर्वोच्च निकायको रूपमा देहाय बमोजिमका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्यहरू रहेको परिषद्को गठन हुनेछ:-
|
| 58 |
+
(क) म्सड्घीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्री बा राज्य मन्त्री - अध्यक्ष
|
| 59 |
+
(ख) म्सड्घीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन सहायक मन्त्री - उपाध्यक्ष
|
| 60 |
+
(ग) राष्ट्रिय योजना आयोगका सदस्य (स्थानीय विकास हेर्ने) - सदस्य
|
| 61 |
+
(घ) सचिव, अर्थ मन्त्रालय - सदस्य
|
| 62 |
+
(ङ) सचिव, शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय - सदस्य
|
| 63 |
+
(च) सचिव, भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मन्त्रालय - सदस्य
|
| 64 |
+
(छ) सचिव, सङ्घीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय - सदस्य
|
| 65 |
+
(ज) न��रपालिकाका प्रमुखहरू मध्ये सात प्रदेशबाट एक एकजना गरी नेपाल सरकारबाट मनोनीत सात जना प्रमुखहरू - सदस्य
|
| 66 |
+
(झ) नेपालको हिमाल पहाड र तराई क्षेत्रको प्रतिनिधित्व हुने गरी नेपाल सरकारबाट मनोनीत गाउँपालिकाका तीनजना अध्यक्षहरू - सदस्य
|
| 67 |
+
(ट) कार्यकारी निर्देशक, प्रतिष्ठान - सदस्य-सचिव
|
| 68 |
+
|
| 69 |
+
(२) नेपाल सरकारले आवश्यक देखेमा नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी परिषद्का सदस्यहरूमा आवश्यक थपघट बा हेरफेर गर्न सक्नेछ।
|
| 70 |
+
(३) उपदफा (१) को खण्ड (ग), (ट) र (ठ) बमोजिमका सदस्यहरूको पंचावधि दुई बर्षको हुनेछ।
|
| 71 |
+
(४) परिषद्ले आवश्यक देखेमा स्वदेशी तथा विदेशी विशेषज्ञहरूलाई परिषद्को बैठकमा पर्यवेक्षकको रूपमा भाग लिन आमन्त्रण गर्न सक्नेछ।
|
| 72 |
+
|
| 73 |
+
**८. परिषद्को बैठक र निर्णय:**
|
| 74 |
+
(१) परिषद्को बैठक परिषद्को अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 75 |
+
(२) परिषद्को बैठक साधारणतया बर्षको दुई पटक बस्नेछ।
|
| 76 |
+
(३) परिषद्को बैठकको अध्यक्षता परिषद्को अध्यक्षले गर्नेछ र निजको अनुपस्थितिमा उपाध्यक्षले गर्नेछ। अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष दुबैको अनुपस्थितिमा बैठकमा उपस्थित सदस्यहरूले आफूमध्येवाट छानेको सदस्यले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 77 |
+
(४) परिषद्को कूल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशत सदस्यहरू उपस्थित भएमा बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 78 |
+
(५) बहुमतको निर्णय बैठकको निर्णय हुनेछ। बैठकमा बहुमत कायम हुन नसकेमा अध्यक्षले निर्णयात्मक मत दिन सक्नेछ।
|
| 79 |
+
(६) बैठकको निर्णय परिषद्को सदस्य-सचिबबाट प्रमाणित गरिनेछ।
|
| 80 |
+
(७) परिषद्को बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि पुरिषद् आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 81 |
+
|
| 82 |
+
**९. परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार:**
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| 83 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएदेखि बाहेक परिषद्को अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 84 |
+
(क) प्रशिक्षण केन्द्रद्वारा सञ्चालन गरिने प्रशिक्षण तथा अनुसन्धान कार्यकम सम्बन्धी नीति निर्धारण गर्ने,
|
| 85 |
+
(ख) प्रतिष्ठानको नियम बनाउने,
|
| 86 |
+
(ग) प्रतिष्ठानको योजना तथा कार्यकमहरू स्वीकृत गर्ने,
|
| 87 |
+
(घ) प्रतिष्ठानको वार्षिक कार्यकमको प्रगति सम्बन्धी समीक्षा एवं मूल्यांकन गर्ने र वार्षिक बजेट स्वीकृत गर्ने,
|
| 88 |
+
(ड) कार्यकारी निर्देशक र समितिलाई आवश्यक निर्देशन दिने,
|
| 89 |
+
(च) प्रतिष्ठानको लागि आवश्यक पर्ने कर्मचारीहरूको दरबन्दी सिर्जना गर्ने,
|
| 90 |
+
(छ) प्रतिष्ठानको लागि आवश्यक पर्ने कर्मचारीहरू नियुक्त गर्ने,
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| 91 |
+
(ज) तोकिए बमोजिमका अन्य कामहरू गर्ने।
|
| 92 |
+
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| 93 |
+
**१२. प्रतिष्ठानका कर्मचारीहरू सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 94 |
+
(१) प्रतिष्ठानमा निम्न किसिमका कर्मचारीहरू रहनेछन्:-
|
| 95 |
+
(क) प्रशासकीय,
|
| 96 |
+
(ख) प्राध्यापन तथा अनुसन्धान।
|
| 97 |
+
(२) प्रतिष्ठानको प्रमुखको रूपमा एकजना कार्यकारी निर्देशक रहनेछ। नेपाल सरकारले प्रशिक्षण सम्बन्धी काममा विशेष अनुभव प्राप्त व्यक्तिलाई कार्यकारी निर्देशकको पदमा नियुक्त गर्न बा तोक्न सक्नेछ। निजको कार्याबधि पाँच बर्षको हुनेछ र नेपाल सरकारले चाहेमा निजको कार्याबधि पुनः बढीमा दुई बर्षका लागि थप गर्न सक्नेछ।
|
| 98 |
+
(३) प्रतिष्ठानमा आवश्यकता अनुसार अन्य कर्मचारीहरू रहनेछन्।
|
| 99 |
+
(३क) प्रतिष्ठानको कार्य सञ्चालनको लागि नेपाल सरकारले निजामती कर्मचारीलाई बढीमा एक बर्षको लागि कामकाजमा खटाउन सक्नेछ।
|
| 100 |
+
(४) कार्यकारी निर्देशक र प्रतिष्ठानका अन्य कर्मचारीहरूको पारिश्रमिक, सेबाको शर्त एवं सुबिधा सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 101 |
+
|
| 102 |
+
**१३. कार्यकारी निर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
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| 103 |
+
(१) कार्यकारी निर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 104 |
+
(क) परिषद्को निर्णय एवं निर्देशनहरू कार्यान्वयन गर्ने, गराउने,
|
| 105 |
+
(ख) प्रतिष्ठानको दीर्घकालीन योजना, बार्षिक कार्यकम तथा बजेट स्वीकृतिको लागि परिषद्मा पेश गर्ने,
|
| 106 |
+
(ग) परिषद्वाट स्वीकृत योजना तथा बार्षिक कार्यकमहरू कार्यान्वयन गराउने,
|
| 107 |
+
(घ) प्रशिक्षण केन्द्रको लागि स्वीकृत बजेट रकम निकासा दिने।
|
| 108 |
+
(२) कार्यकारी निर्देशकको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 109 |
+
|
| 110 |
+
**१४. प्रतिष्ठानको कोष:**
|
| 111 |
+
(१) प्रतिष्ठानको एउटा छुट कोष हुनेछ।
|
| 112 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा देहायका रकमहरू रहनेछन्:-
|
| 113 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त अनुदान रकम,
|
| 114 |
+
(ख) कुनै बिदेशी सरकार, अन्तर्राहिय संघ, संस्था बा बिदेशी संस्थाबाट प्राप्त अनुदान रकम,
|
| 115 |
+
(ग) कुनै व्यक्ति, संस्था बा सरकारबाट प्राप्त ऋण, चन्दा, सहायता, अनुदान बा दान दातव्यको रकम,
|
| 116 |
+
(घ) नगरपालिकाबाट प्राप्त अनुदान रकम,
|
| 117 |
+
(ङ) अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त रकम।
|
| 118 |
+
(३) प्रतिष्ठानले कुनै बिदेशी सरकार, अन्तर्राहिय संघ, संस्था बा बिदेशी संस्थाबाट अनुदान रकम प्राप्त गर्नु अघि नेपाल सरकारको पूर्व स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 119 |
+
(४) प्रतिष्ठानलाई जुन कार्यकम बा कामको लागि रकम प्राप्त भएको छ सो रकम सोही कार्यकम बा काम���ा खर्च गर्नु पर्नेछ।
|
| 120 |
+
(५) प्रतिष्ठानले गर्नु पर्ने सबै खर्चहरू उपदफा (२) बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ।
|
| 121 |
+
(६) सम्बन्धित प्रशिक्षण केन्द्रले आर्जन गरेको रकम तोकिए बमोजिम सोही प्रशिक्षण केन्द्रले पाउने गरी निकासा दिइनेछ।
|
| 122 |
+
(७) प्रतिष्ठानलाई प्राप्त हुने सबै रकम प्रतिष्ठानको नाममा नेपालको कुनै बैंकमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
|
| 123 |
+
(८) प्रतिष्ठानको कोष र खाताको सञ्चालन कार्यकारी निर्देशक र लेखा प्रमुखको संयुक्त दस्तखतबाट हुनेछ।
|
| 124 |
+
|
| 125 |
+
**१५. लेखा र लेखापरीक्षण:**
|
| 126 |
+
(१) प्रतिष्ठानको आय व्ययको लेखा नेपाल सरकारले अपनाएको तरिका बमोजिम राखिनेछ।
|
| 127 |
+
(२) प्रतिष्ठानको लेखापरीक्षण महालेखा परीक्षक बा निजले तोकेको कुनै दर्ताबाला लेखापरीक्षकद्वारा हुनेछ।
|
| 128 |
+
(३) नेपाल सरकारले चाहेमा प्रतिष्ठानको हिसाब किताब सम्बन्धी कागजात र नगदी जिन्सी समेत जुनसुकै बखत जाँच्न बा जचाउन सक्नेछ।
|
| 129 |
+
|
| 130 |
+
**१६. बार्षिक प्रतिबेदन:**
|
| 131 |
+
कार्यकारी निर्देशकले प्रतिष्ठानको बार्षिक प्रतिबेदन प्रत्येक आर्थिक वर्ष समाप्त भएको मितिले तीन महिनाभित्र परिषद् समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 132 |
+
|
| 133 |
+
**१७. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 134 |
+
(१) परिषद्ले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरू मध्ये सबै बा केही अधिकार आवश्यकतानुसार परिषद्को कुनै सदस्य, समिति, कार्यकारी निर्देशक बा कुनै अधिकृत कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 135 |
+
(२) कार्यकारी निर्देशकले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरू मध्ये सबै बा केही अधिकार प्रतिष्ठानको कुनै कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 136 |
+
|
| 137 |
+
**१८. प्रतिबेदन प्रकाशित गरिनेः**
|
| 138 |
+
प्रत्येक वर्ष प्रतिष्ठानको क्रियाकलाप सम्बन्धी प्रतिबेदन सार्वजनिक रूपमा प्रकाशित गरिनेछ।
|
| 139 |
+
|
| 140 |
+
**१९. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
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| 141 |
+
प्रतिष्ठानले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा नेपाल सरकार, सङ्घीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
|
| 142 |
+
|
| 143 |
+
**२०. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 144 |
+
यस ऐनको उद्देश्य पूर्तिको लागि परिषद्ले आवश्यक नियमहरू बनाउन सक्नेछ। यसरी बनाएको नियम नेपाल सरकारबाट स्वीकृत हुनु पर्नेछ।
|
| 145 |
+
|
| 146 |
+
**२०क. प्रदेश सरकारले नियम बनाउन सक्नेः**
|
| 147 |
+
(१) प्रदेश सरकारमा हस्तान्तरण भएका प्रशिक्षण केन्द्र सञ्चालन सम्बन्धमा यस ऐनको अधीनमा रही प्रदेश सरकारले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 148 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्रदेश सरकारले बनाएका नियमहरू प्रदेश राजपत्रमा प्रकाशन भए पछि मात्र लागू हुनेछन्।
|
| 149 |
+
|
| 150 |
+
**२०ख. अन्तरिम व्यवस्थापन:**
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| 151 |
+
दफा ४ को उपदफा (३) बमोजिम प्रदेश सरकारमा हस्तान्तरण भएका प्रशिक्षण केन्द्रमा कार्यरत कर्मचारीलाई सम्बन्धित प्रदेशमा कामकाज गर्न खटाउन सकिनेछ।
|
| 152 |
+
|
| 153 |
+
**२१. बचाउ:**
|
| 154 |
+
(१) नेपाल सरकार, स्थानीय विकास मन्त्रालय अन्तर्गतका स्थानीय विकास प्रशिक्षण केन्द्र, स्थानीय तथा नगर विकास प्रशिक्षण केन्द्र, महिला विकास प्रशिक्षण केन्द्र र तालीम सामग्री उत्पादन केन्द्रले गरी आएको काम कारबाही यसै ऐन बमोजिम भए गरेको मानिनेछ।
|
| 155 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका केन्द्रहरूको सबै हक र दायित्व प्रतिष्ठानमा सर्नेछ।
|
| 156 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमका केन्द्रहरूमा कार्यरत कर्मचारीहरू प्रतिष्ठानमा सर्नेछन्।
|
| 157 |
+
|
| 158 |
+
**द्वष्टव्य:**
|
| 159 |
+
केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन,२०६३ बमोजिम रूपान्तर भएका शब्दहरू:-
|
| 160 |
+
"थी ४ को सरकार" भन्ने शब्दको सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
section_17_pdf_3.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,175 @@
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| 1 |
+
# जातीय तथा अन्य छुवाछूत र भेदभाव (कसूर र सजाय) ऐन, २०६६
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
## प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०६६।२।१६
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
### संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
1. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 8 |
+
२०७२।११।१३
|
| 9 |
+
|
| 10 |
+
2. जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत तथा भेदभाव (कसूर र सजाय) (पहिलो संशोधन) ऐन, २०७४
|
| 11 |
+
२०७४।६।२
|
| 12 |
+
|
| 13 |
+
3. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 14 |
+
२०७४।११।१९
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
---
|
| 17 |
+
|
| 18 |
+
## संबत् २०६६ को ऐन नं. ४
|
| 19 |
+
जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत तथा भेदभावको कसूर र सजायको सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 20 |
+
|
| 21 |
+
### प्रस्तावनाः
|
| 22 |
+
प्रत्येक व्यक्तिको अधिकार र मानवीय मर्यादामा समान हुने सिद्धान्तलाई आत्मसात् गर्दै प्रथा, परम्परा, धर्म, संस्कृति, रीतिरिवाज वा अन्य कुनै नाममा जात, जाति, वंश, समुदाय, पेशा वा व्यवसाय वा शारीरिक अवस्थाका आधारमा जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत तथा भेदभाव नहुने अवस्था सिर्जना गरी प्रत्येक व्यक्तिको समानता, स्वतन्त्रता र सम्मानपूर्वक बाँच्न पाउने अधिकारको संरक्षण गर्न तथा कुनै पनि स्थानमा गरिने छुवाछूत, बहिष्कार, प्रतिबन्ध, निष्काशन, अबहेलना वा त्यस्तै अन्य मानवता विरोधी भेदभावजन्य कार्यलाई दण्डनीय बनाई त्यस्तो कार्यवाट पीडित व्यक्तिलाई क्षतिपूर्तिको व्यवस्था गरी सर्वसाधारणवीच सुसम्बन्ध सुदृढ गरी राष्ट्रिय एकता अक्षुण्ण राखी समतामूलक समाजको सिर्जना गर्ने सम्बन्धमा समयानुकूल व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
नेपालको अन्तरिम संविधान २०६३ को धारा ६३ बमोजिमको व्यवस्थापिका-संसदको हैसियतमा संविधान सभाले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
---
|
| 27 |
+
|
| 28 |
+
### १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः
|
| 29 |
+
(१) यस ऐनको नाम "जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत तथा भेदभाव (कसूर र सजाय) ऐन, २०६६" रहेको छ।
|
| 30 |
+
(२) यो ऐन नेपालभर लागू हुनेछ र नेपालबाहिर बसी नेपाली नागरिक विरुद्ध यस ऐन बमोजिमको कसूर गर्ने नेपाली नागरिकलाई समेत लागू हुनेछ।
|
| 31 |
+
(३) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
---
|
| 34 |
+
|
| 35 |
+
### २. परिभाषाः
|
| 36 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 37 |
+
(क) "जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत र भेदभाव" भन्नाले दफा ४ बमोजिमको कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(ख) "कसूर" भन्नाले दफा ३ बमोजिमको कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
(ग) "सार्वजनिक स्थान" भन्नाले सरकारी बा गैर सरकारी कार्यालय, शैक्षिक बा औद्योगिक प्रतिष्ठान, प्राचीन स्मारक, पाटी-पौबा, धारा, इनार, कुवा, पोखरी, चौतारी, सडक ब��� बाटो, सार्वजनिक यातायातका साधन, मसानघाट, उथानबगैंचा, कुनै पनि किसिमको धार्मिक स्थल जस्ता सार्वजनिक प्रयोजनमा रहेका स्थान सम्झनु पर्छ र सो शब्दले सार्वजनिक रुपमा बस्तु बा सेबा बिक्री बितरण गर्ने अन्य कुनै पनि स्थान समेतलाई जनाउनेछ।
|
| 40 |
+
(घ) "सार्वजनिक सेबा" भन्नाले सरकारी बा गैर सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक संस्था, यातायात, औद्योगिक बा शैक्षिक प्रतिष्ठान, कम्पनी, फर्म, पसल, होटल, रिसोर्ट, लज, रेइरेण्ट, क्वाफे, सिनेमा हल बा नाचघर सम्झनु पर्छ र सो शब्दले कुनै पनि सरकारी बा गैर सरकारी निकायबाट प्रदान गरिने सार्वजनिक प्रयोग बा उपयोगका कुनै पनि सेबा र सुबिधा समेतलाई जनाउनेछ।
|
| 41 |
+
(ङ) "सार्वजनिक समारोह" भन्नाले सार्वजनिक रुपमा आयोजना गरिएको भोजभत्तर, पूजा-पाठ, यज्ञ, अनुष्ठान, जन्म, नामाकरण, बिबाह, मृत्यु जस्ता जुनसुकै प्रकारका धार्मिक, सामाजिक बा साँस्कृतिक समारोह सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(च) "सार्वजनिक पद धारण गरेको व्यक्ति" भन्नाले संबिधान, अन्य प्रचलित कानून बा सम्बन्धित निकाय बा अधिकारीको निर्णय बा आदेश बमोजिम कुनै सार्वजनिक अद्लियारी प्रयोग गर्न पाउने बा कुनै कर्तव्य पालन गर्नु पर्ने बा दायित्व निर्बाह गर्नु पर्ने पदमा बहाल रहेको व्यक्ति सम्झनु पर्छ र सो शब्दले सार्वजनिक संस्थाको कुनै पदमा बहाल रहेको पदाधिकारी बा कर्मचारी समेतलाई जनाउनेछ।
|
| 43 |
+
(छ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 44 |
+
|
| 45 |
+
---
|
| 46 |
+
|
| 47 |
+
### २ क. जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत र भेदभाव विरुद्धको अधिकार:
|
| 48 |
+
(१) प्रत्येक व्यक्तिलाई जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत तथा भेदभाव विरुद्धको अधिकार हुनेछ।
|
| 49 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्रत्येक व्यक्तिलाई देहायको अधिकार प्राप्त हुनेछः
|
| 50 |
+
(क) अदालत बा अन्य न्यायिक निकायबाट समान व्यवहार पाउने अधिकार,
|
| 51 |
+
(ख) कुनै सरकारी निकायबाट उपलब्ध गराइने सेवा तथा सुविधामा समान संरक्षणको अधिकार,
|
| 52 |
+
(ग) सार्वजनिक सेबामा समान पहुँचको अधिकार,
|
| 53 |
+
(घ) नेपालभित्र र बाहिर आबत जाबत र बसोबास गर्न पाउने अधिकार,
|
| 54 |
+
(ङ) साँस्कृतिक कृयाकलापमा समान सहभागिताको अधिकार,
|
| 55 |
+
(च) बिबाह गर्ने तथा बरबध छान्ने अधिकार,
|
| 56 |
+
(छ) शान्तिपूर्वक भेला हुन तथा सड्टन गर्न पाउने अधिकार,
|
| 57 |
+
(ज) रोजगारी छुनेट गर्न तथा काम गर्न पाउने अधिकार,
|
| 58 |
+
(झ) समान काम गरे बापत समान तलब पाउने अधिकार,
|
| 59 |
+
(ज) सार्वजनिक स्थानमा समान पहुँचको अधिकार,
|
| 60 |
+
(ट) जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत तथा भेदभाव विरुद्ध शीघ्र न्यायिक उपचार र उचित क्षतिपूर्ति पाउने अधिकार।
|
| 61 |
+
|
| 62 |
+
---
|
| 63 |
+
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| 64 |
+
### ३. जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत र भेदभाव गर्न नहुने:
|
| 65 |
+
(१) कसैले पनि जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत तथा भेदभाव गर्न बा गराउन हुँदैन।
|
| 66 |
+
(२) कसैले जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत र भेदभाव गर्ने कार्य गर्न कुनै प्रकारको मद्दत गर्न, दुरुत्साहन गर्न, उक्साउन बा त्यस्तो कार्यको उद्योग गर्न हुँदैन।
|
| 67 |
+
(३) कसैले उपदफा (१) बा (२) बमोजिमको कुनै कार्य गरेमा यस ऐन बमोजिमको कसूर गरेको मानिनेछ।
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| 68 |
+
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+
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| 70 |
+
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| 71 |
+
### ४. जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत तथा भेदभाव गरेको मानिनेः
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| 72 |
+
(१) कसैले कुनै पनि व्यक्तिलाई प्रथा, परम्परा, धर्म, संस्कृति, रीतिरिवाज, जात, जाति, वंश, समुदाय, पेशा वा व्यवसाय वा शारीरिक अवस्था आधारमा यस दफा बमोजिमको कुनै काम गरे वा गराएमा जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत तथा भेदभाव गरेको मानिनेछ।
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| 73 |
+
(२) कसैले कुनै पनि व्यक्तिलाई प्रथा, परम्परा, धर्म, संस्कृति, रीतिरिवाज, जात, जाति, वंश, समुदाय, पेशा वा व्यवसाय वा शारीरिक अवस्था आधारमा जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत र भेदभाव गरी सार्वजनिक वा निजी स्थानमा देहायको कुनै पनि कार्य गर्न वा गराउन हुँदैनः
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| 74 |
+
(क) प्रवेश गर्न, उपस्थित हुन वा भाग लिन निषेध गर्न वा कुनै किसिमले रोक, नियन्त्रण वा प्रतिबन्ध लगाउने,
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| 75 |
+
(ख) व्यक्तिगत वा सामूहिक रुपमा सार्वजनिक स्थान वा समारोहबाट निष्काशन, सामाजिक बहिष्कार वा कुनै प्रकारको भेदभाव गर्ने वा त्यस्तो कार्यमा प्रतिबन्ध लगाउने वा अन्य कुनै किसिमको असहिष्णु व्यवहार प्रदर्शन गर्ने।
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| 76 |
+
(३) कसैले कुनै पनि व्यक्तिलाई जात, जाति, वंश, समुदाय, पेशा वा व्यवसाय वा शारीरिक अवस्थाका आधारमा सार्वजनिक सेवाको प्रयोग गर्न वा उपभोग गर्नबाट बञ्चित गर्न हुँदैन।
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| 77 |
+
(४) कसैले कुनै पनि व्यक्तिलाई जात, जाति, वंश, समुदाय, पेशा वा व्यवसाय वा शारीरिक अवस्थाका आधारमा सार्वजनिक समारोह आयोजना गर्न वा सार्वजनिक रुपमा आयोजना हुने कुनै कार्य गर्नबाट बञ्चित गर्न हुँदैन।
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| 78 |
+
(५) कसैले पनि जातीय छुवाछूत वा भेदभाव हुने कार्य गर्न कसैलाई भड्काउने, उक्साउने वा त्यस्तो कार्य गर्न दुरुत्साहन हुने कुनै कार्य गर्न वा त्यस्तो कुनै क्रियाकलापमा जानी जानी सहभागी हुनु हुँदैन।
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| 79 |
+
(६) कसैले कुनै पन�� व्यक्तिलाई जात, जाति, वंश, समुदाय, पेशा वा व्यवसाय वा शारीरिक अवस्थाका आधारमा कुनै पेशा वा व्यवसाय गर्न प्रतिबन्ध वा रोक लगाउने वा कुनै पनि व्यक्तिलाई कुनै पेशा वा व्यवसाय गर्न बाध्य पार्न हुँदैन।
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| 80 |
+
(७) कसैले कुनै पनि व्यक्तिलाई जात, जाति, बंश, समुदाय, पेशा वा व्यवसाय वा शारीरिक अवस्थाका आधारमा कुनै धार्मिक कार्य गर्नबाट बञ्चित गर्न वा गराउन हुँदैन।
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| 81 |
+
(८) कसैले कुनै पनि व्यक्तिलाई जात, जाति, बंश, समुदाय, पेशा वा व्यवसाय वा शारीरिक अवस्थाका आधारमा कुनै वस्तु, सेवा वा सुविधा उत्पादन, बिक्री वा वितरण गर्नबाट रोक्न वा रोक लगाउन हुँदैन।
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| 82 |
+
(९) कसैले कुनै वस्तु, सेवा वा सुविधा उत्पादन, बिक्री वा वितरण गर्दा त्यस्तो वस्तु, सेवा वा सुविधा कुनै खास जात वा जातिको व्यक्तिलाई खरिद वा प्राप्त गर्नबाट रोक लगाउने वा कुनै खास जात वा जातिको व्यक्तिलाई मात्र बिक्री वितरण गर्ने गरी उत्पादन, बिक्री वा वितरण गर्न वा गराउन हुँदैन।
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| 83 |
+
(१०) कसैले जात वा जातिका आधारमा परिवारका कुनै सदस्यलाई बहिष्कार गर्ने, घरभित्र प्रवेश गर्न नदिने वा घर वा गाउँबाट निकाल्ने वा निस्कन बाध्य तुल्याउने कार्य गर्न वा गराउन हुँदैन।
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| 84 |
+
(११) कसैले प्रचलित कानून बमोजिम उमेर पुगेका बर-वधुवाट मञ्जूर भएको अन्तरजातीय विवाह गर्नबाट कुनै पनि व्यक्तिलाई जात, जाति, बंश, समुदाय, पेशा वा व्यवसायका आधारमा रोक लगाउन, त्यस्तो विवाहबाट जन्मिएका सन्तानको न्वारान नगराउन वा भइसकेको विवाह विच्छेद गराउन कुनै किसिमले कर गर्न वा गर्न लगाउन हुँदैन।
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| 85 |
+
(१२) कसैले कुनै पनि व्यक्ति वा समुदायलाई श्रव्यदृष्य सामग्री, लेख रचना, चित्र, आकार, कार्टुन, पोष्टर, पुस्तक वा साहित्यको प्रसारण, प्रकाशन वा प्रदर्शन गरेर वा विद्युतीय माध्यमबाट वा अन्य कुनै तरिकाले कुनै व्यक्ति वा समुदायलाई त्यस्तो व्यक्ति वा समुदायको उत्पत्ति, जात वा जातिको आधारमा उच्च वा नीच दर्शाउन, जात, जाति वा छुवाछूतको आधारमा सामाजिक भेदभावलाई न्यायोचित ठहन्याउन वा छुवाछूत तथा जातीय उच्चता वा घृणामा आधारित विचारको प्रचार प्रसार गर्न वा जातीय विभेदलाई कुनै पनि किसिमले प्रोत्साहन गर्न वा गराउन हुँदैन।
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| 86 |
+
(१३) कसैले उत्पत्ति, जात, जाति, बंश, समुदाय, पेशा बा व्यवसायका आधारमा कुनै पनि व्यक्तिलाई कुनै प्रकारको श्रममा लगाउन इन्कार गर्ने बा श्रमबाट निष्काशन गर्ने बा पारिश्रमिकमा भेदभाव गर्न बा गराउन हुँदैन।
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| 87 |
+
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| 88 |
+
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+
### ५. उजुर गर्नेः
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| 91 |
+
(१) दफा ४ बमोजिमको कसूर कसैले गरेको बा गर्न लागेको थाहा पाउने व्यक्तिले नजिकको प्रहरी कार्यालयमा तोकिए बमोजिम उजुर गर्न सक्नेछ।
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| 92 |
+
(२) उपदफा (१) मा जनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कसैले दफा ४ बमोजिमको कसूर नेपाल बाहिर गरेमा निज बसोबास गरेको बा प्रतिबादी रहेको जिल्लाको नजिकको प्रहरी कार्यालयमा उजुर गर्नु पर्नेछ।
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| 93 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम प्राप्त भएको उजुरी सम्बन्धित प्रहरी कार्यालयले दर्ता नगरेमा बा प्रचलित कानून बमोजिम आवश्यक कारबाही नगरेमा सम्बन्धित व्यक्तिले सो कुराको उजुरी तोकिए बमोजिम राष्ट्रिय दलित आयोग बा स्थानीय तहमा समेत गर्न सक्नेछ।
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| 94 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम प्राप्त उजुरी राष्ट्रिय दलित आयोग बा स्थानीय तहले सम्बन्धित प्रहरी कार्यालयमा तोकिए बमोजिम लेखी पठाउनेछ।
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| 95 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिम लेखी आएमा सम्बन्धित प्रहरी कार्यालयले सो सम्बन्धमा आवश्यक जाँचबुझ गरी त्यस्तो उजुरी उपर प्रचलित कानून बमोजिम आवश्यक कारबाही अगाडि बढाउनु पर्नेछ।
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+
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### ६. मुद्दाको अनुसन्धानमा सहयोग लिन सक्नेः
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| 100 |
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यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दाको अनुसन्धान गर्दा अनुसन्धान गर्ने अधिकारीले आवश्यकता अनुसार दलित समुदाय लगायत जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत र भेदभावबाट पीडित व्यक्तिको हक अधिकार बा उत्थान सम्बन्धी कार्यमा संलग्न रहेका स्थानीय अगुबा, नागरिक समाज बा संघ संस्थाका प्रतिनिधिको सहयोग लिन सक्नेछ।
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| 101 |
+
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### ७. सजायः
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(१) कसैले देहायको कसूर गरेमा देहाय बमोजिम सजाय हुनेछः
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| 106 |
+
(क) दफा ४ को उपदफा (२), (३), (४), (६) बा (७) बमोजिमको कसूर गर्ने व्यक्तिलाई तीन महिनादेखि तीन बर्षसम्म कैद र पचास हजार रुपैयाँदेखि दुई लाख रुपैयाँसम्म जरिवाना,
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| 107 |
+
(ख) दफा ४ को उपदफा (८), (९), (१०), (११), (१२) बा (१३) बमोजिमको कसूर गर्ने व्यक्तिलाई दुई महिना देखि दुई बर्षसम्म कैद र बीस हजार रुपैयाँदेखि एक लाख रुपैयाँसम्म जरिवाना,
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| 108 |
+
(ग) जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत तथा भेदभाव गर्न मद्दत गर्ने, दुरुत्साहन गर्ने, उक्साउने बा त्यस्तो कार्य गर्न उद्योग गर्ने व्यक्तिलाई मुख्य कसूरदारलाई हुने सजायको आधा सजाय।
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| 109 |
+
(क१) दफा ४ बमोजिमको कुनै कसूरमा सजाय पाएको व्यक्तिले पुनः सोही दफा बमोजिमको कसूर गरेमा त्यस्तो व्यक्तिलाई पटकै पिच्छे उपदफा (१) को खण्ड (क) बा (ख) मा उल्लिखित सजायको दोब्बर सजाय हुनेछ।
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| 110 |
+
(२) सार्वजनिक पद धारण गरेको व्यक्तिले उपदफा (१) बमोजिमको कसूर गरेमा निजलाई सो उपदफामा उल्लिखित सजायमा पचास प्रतिशत थप सजाय हुनेछ।
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| 111 |
+
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### ८. बाधा विरोध गर्नेलाई सजाय:
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+
यस ऐन अन्तर्गत सजाय हुने कसूरको अनुसन्धान बा तहकिकातको काममा कसैले बाधा विरोध गरेमा निजलाई अनुसन्धान तथा तहकिकात गर्ने अधिकारीको प्रतिबेदनको आधारमा अदालतले कसूरदारलाई हुने सजायको आधा सजाय गर्न सक्नेछ।
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| 116 |
+
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+
### ९. क्षतिपूर्ति:
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| 120 |
+
(१) कसैले यस ऐन बमोजिम कसूर गरेको ठहरेमा अदालतले कसूरदारबाट पीडितलाई दुई लाख रुपैयाँसम्म क्षतिपूर्ति भराइदिनु पर्नेछ।
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| 121 |
+
(२) कसूरदारले पीडितलाई कुनै शारीरिक हानि, नोक्सानी पु¥याएको रहेछ भने अदालतले सोको प्रकृतिको आधारमा उपचार खर्च बा थप हानि, नोक्सानी बापत कसूरदारबाट पीडितलाई मनासिब रकम भराउने आदेश दिनु पर्नेछ।
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| 122 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिमको रकम कसूरदारबाट तत्काल भराउन नसकिने भएमा त्यस्तो रकम प्रचलित कानून बमोजिम पीडित राहत कोषबाट भराइदिनु पर्नेछ र त्यसरी भराइएको रकम सम्बन्धित कसूरदारबाट असुल उपर गरी सो कोषमा शोधभर्ना गर्नुपर्नेछ।
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| 123 |
+
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+
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+
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+
### १०. हदम्याद:
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| 127 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको कसूरमा कसूर भए गरेको मितिले तीन महिनाभित्र मुद्दा दायर गर्नु पर्नेछ।
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| 128 |
+
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| 130 |
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+
### ११. सरकारबादी हुने:
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| 132 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दा सरकारबादी हुनेछ र त्यस्तो मुद्दा मुलुकी फौजदारी कार्यबिधि संहिता, २०७४ को अनुसूची-१ मा समाबेश भएको मानिनेछ।
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| 133 |
+
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+
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### १२. संक्षिप्त कार्यबिधि अपनाउनु पर्ने:
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| 137 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दाको कारबाही र किनारा गर्दा संक्षिप्त कार्यबिधि ऐन, २०२६ बमोजिमको कार्यबिधि अपनाउनु पर्नेछ।
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+
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+
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### १३. प्रचलित कानून बमोजिम सजाय हुने:
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+
यस ऐन अन्तर्गत कसूर मानिने कुनै कार्य अन्य प्रचलित कानून बमोजिम समेत कसूर हुने रहेछ भने त्यस्तो कसूरमा प्रचलित कानून बमोजिम मुद्दा चलाइ कारबाही गर्न यस ऐनमा लेखिएको कुनै कुराले बाधा पन्याएको मानिने छैन।
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| 143 |
+
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+
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### १४. यसै ऐन बमोजिम हुने:
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यस ऐनमा लेखिएको बिषयमा यसै ऐन बमोजिम र अन्य कुरामा प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
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### १५. सहयोग गर्नु पर्ने:
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यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दामा अनुसन्धान तथा तहकिकातको कार्यमा सहयोग गर्नु सम्बन्धित सबैको कर्तव्य हुनेछ।
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### १६. नियम बनाउन सक्ने:
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+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले ���वश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
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### १७. खारेजी:
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मुलुकी ऐन, अदलको महलको १०क. नं. खारेज गरिएको छ।
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### द्रष्टव्य:
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| 167 |
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१. केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४ द्वारा रुपान्तर भई मुलुकी संहिता सम्बन्धी केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४ द्वारा संशोधित शब्दहरः
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| 168 |
+
"सरकारी मुद्रा सम्बन्धी ऐन, २०४९ को अनुसूची-१" को सट्टा "मुलुकी फौजदारी कार्यबिधि संहिता, २०७४ को अनुसूची-१"।
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| 169 |
+
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+
२. पहिलो संशोधनद्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरः
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+
"जातीय भेदभाव तथा छुवाछूत" भन्ने शब्दहरूको सट्टा "छुवाछूत तथा भेदभाव"।
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| 172 |
+
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| 173 |
+
३. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरः
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| 174 |
+
(लामो शीर्षक, संक्षिप्त नाम र प्रारम्भमा समेत रुपान्तर गरिएको।)
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| 175 |
+
"जातीय भेदभाव तथा छुवाछूत", "छुवाछूत तथा भेदभाव", "जातीय भेदभाव बा छुवाछूत" तथा "जातीय छुवाछूत बा भेदभाव" को सट्टा "जातीय तथा अन्य सामाजिक छुवाछूत र भेदभाव"।
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section_1_pdf_11.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,183 @@
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| 1 |
+
# केही सार्वजनिक लिखत प्रमाणीकरण (कार्यविधि) ऐन, २०६३
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०६३।६।४
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| 5 |
+
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| 6 |
+
---
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| 7 |
+
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| 8 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
|
| 9 |
+
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| 10 |
+
१. केही सार्वजनिक लिखत प्रमाणीकरण (कार्यविधि) (पहिलो संशोधन) ऐन, २०६४
|
| 11 |
+
२०६४।९।२
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| 12 |
+
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| 13 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 14 |
+
२०७२।११।१३
|
| 15 |
+
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| 16 |
+
३. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 17 |
+
२०७४।११।१९
|
| 18 |
+
|
| 19 |
+
२०६३ सालको ऐन न. ७
|
| 20 |
+
केही सार्वजनिक लिखत प्रमाणीकरण कार्यविधिको संशोधन र एकीकरणका सम्बन्धमा व्यवस्था गर्ने बनेको ऐन
|
| 21 |
+
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| 22 |
+
---
|
| 23 |
+
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| 24 |
+
### प्रस्तावना
|
| 25 |
+
केही सार्वजनिक लिखतहरूको प्रमाणीकरण कार्यविधि सम्बन्धी प्रचलित कानूनलाई समयानुकूल संशोधन र एकीकरण गर्न बाञ्छुनीय भएकोले, प्रतिनिधि सभाको घोषणा, २०६३ जारी भएको पहिलो बर्षमा प्रतिनिधि सभाले यो ऐन बनाएकोछ।
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
---
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
### १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ
|
| 30 |
+
(१) यस ऐनको नाम "केही सार्वजनिक लिखत प्रमाणीकरण (कार्यविधि) ऐन, २०६३" रहेकोछ।
|
| 31 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
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| 32 |
+
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| 33 |
+
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| 34 |
+
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| 35 |
+
### २. परिभाषा
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| 36 |
+
बिषय बा प्रसंगले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 37 |
+
(क) "सार्वजनिक लिखत" भन्नाले देहायका लिखत सम्झनु पर्छ:
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| 38 |
+
(१) ऐन,
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| 39 |
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(२) अध्यादेश,
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| 40 |
+
(३) नेपाल सरकारले बनाएको नियम,
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| 41 |
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(४) संवैधानिक निकायले बनाएको नियम,
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| 42 |
+
(५) नेपाल सरकारले जारी गरेको आदेश,
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| 43 |
+
*(५क) प्रदेश सरकारले बनाएको नियम, जारी गरेको आदेश बा अधिकार पत्र बा प्रदेश सरकार, मन्त्रिपरिषद्को निर्णय,
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| 44 |
+
*(५ख) स्थानीय तहले बनाएको ऐन, नियम तथा जारी गरेको आदेश,
|
| 45 |
+
*(६) संविधान सभा, व्यवस्थापिका—संसद बा सङ्घीय संसदद्वारा पारित प्रस्ताव,
|
| 46 |
+
*(६क) प्रदेश सभा, नगर सभा बा गाउँ सभाबाट पारित प्रस्ताव,
|
| 47 |
+
(७) नेपाल सरकारले जारी गरेको अधिकारपत्र,
|
| 48 |
+
(८) नेपाल सरकार, मन्त्रिपरिषद्को निर्णय,
|
| 49 |
+
(९) संविधान बमोजिम नियुक्ति हुने पदको नियुक्तिपत्र,
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| 50 |
+
(१०) प्रचलित कानून बमोजिम नेपाल सरकारले दिने नियुक्ति, सरुवा र अवकाशपत्र,
|
| 51 |
+
(११) प्रचलित कानून बमोजिम प्रमाणीकरण गर्नु पर्ने अन्य लिखत,
|
| 52 |
+
*(११क) प्रचलित कानून बमोजिम प्रदेश सरकारले दिने नियुक्ति, सरूवा बा अवकाशपत्र,
|
| 53 |
+
(१२) तोकिए बमोजिमका अन्य लिखत।
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
(ख) "प्रामाणिक प्रति" भन्नाले सार्वजनिक लिखत प्रमाणित गर्ने अधिकारीले हस्ताक्षर गरेको सकल प्रति सम्झनु पर्छ।
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| 56 |
+
(ग) "सचिब" भन्नाले नेपाल सरकारको सचिब सम्झनु पर्छ र सो शब्दले नेपाल सरकारको राजपत्राहित्त विशिष्ट श्रेणीको अन्य अधिकृत समेतलाई जनाउँछ।
|
| 57 |
+
(घ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
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| 58 |
+
|
| 59 |
+
---
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| 60 |
+
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| 61 |
+
### २३. ऐनको प्रमाणीकरण कार्यविधि
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| 62 |
+
(१) "सङ्घीय—संसदबाट विधेयक पारित भएपछि "सङ्घीय—संसद सचिबालयले त्यस्तो विधेयक नेपाली कागजमा चार प्रति तयार गरी प्रमाणीकरणको लागि राष्ट्रपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 63 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश गरिने विधेयकका प्रतिहरुमा विधेयक उत्पत्ति भएको सदनको सभामुख बा अध्यक्षले सङ्घीय संसदबाट विधेयक पारित भएको मिति उल्लेख गरी हस्ताक्षर गरेको हुनु पर्नेछ।
|
| 64 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम पेश भएका विधेयकका प्रतिहरुमा राष्ट्रपतिले मिति उल्लेख गरी हस्ताक्षर गरेपछि त्यस्तो विधेयक प्रमाणीकरण हुनेछ र ऐन बन्नेछ।
|
| 65 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिमका प्रामाणिक प्रतिहरुमध्ये एक प्रति राष्ट्रपतिको कार्यालयमा राखी अन्य एक/एक प्रति प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय, कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालय र "सङ्घीय—संसद सचिबालयमा पठाउनु पर्नेछ र त्यस्ता प्रत्येक कार्यालयले त्यसरी प्राप्त प्रामाणिक प्रति सुरक्षितसाथ राख्नु पर्नेछ।
|
| 66 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिम प्राप्त भएको प्रामाणिक प्रतिको आधारमा कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालयका सचिबले ऐन प्रमाणीकरण भएको मिति राखी सो ऐन नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 67 |
+
|
| 68 |
+
---
|
| 69 |
+
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| 70 |
+
### ४. सङ्घीय—संसदद्वारा पारित प्रस्तावको प्रमाणीकरण
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| 71 |
+
(१) नेपालको संविधान तथा अन्य प्रचलित कानून बमोजिम सङ्घीय संसदद्वारा पारित प्रस्तावको प्रमाणीकरण त्यस्तो प्रस्ताव उत्पत्ति भएको सदनको सभामुख बा अध्यक्षको हस्ताक्षरबाट हुनेछ।
|
| 72 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको प्रमाणिक प्रतिको आधारमा सङ्खीय संसदका महासचिव बा सचिब बा महासचिवले तोकेको राजपत्राहित अधिकृतले सो प्रस्ताव कार्यान्वयन गर्ने बा गराउनेछ।
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
---
|
| 75 |
+
|
| 76 |
+
### ४क. अध्यादेश प्रमाणीकरणको कार्यविधि
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| 77 |
+
(१) नेपालको संविधानको धारा ११४ को उपधारा (१) बमोजिम मन्त्रिपरिषद्वाट अध्यादेश जारी गर्ने सिफारिस भएपछि कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालयले त्यस्तो अध्यादेशको मस्यौदाको तीन प्रति नेपाली कागजमा तयार गर्नु पर्नेछ।
|
| 78 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम तयार भएको अध्यादेशको मस्यौदामा देहायका पदाधिकारीहरुले हस्ताक्षर गर्नु पर्नेछ:
|
| 79 |
+
(क) प्रधानमन्त्री,
|
| 80 |
+
(ख) सम्बन्धित विभागीय मन्त्री,
|
| 81 |
+
(ग) कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन��त्रालय मन्त्री,
|
| 82 |
+
(घ) नेपाल सरकारको मुख्य सचिब, र
|
| 83 |
+
(ङ) कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालयको सचिब।
|
| 84 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम हस्ताक्षर भएको अध्यादेशको मस्यौदा कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालयले प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय समक्ष पठाउनु पर्नेछ र प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालयले त्यस्तो मस्यौदा प्रमाणीकरणको लागि राष्ट्रपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 85 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम प्राप्त अध्यादेशको मस्यौदाका प्रतिहरुमा राष्ट्रपतिले मिति उल्लेख गरी हस्ताक्षर गरेपछि अध्यादेश प्रमाणीकरण हुनेछ।
|
| 86 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिम प्रमाणीकरण भएपछि सो अध्यादेश ऐन सरह लागू हुनेछ।
|
| 87 |
+
(६) उपदफा (४) बमोजिम अध्यादेश प्रमाणीकरण भएपछि त्यस्ता प्रामाणिक प्रतिहरुमध्ये एक प्रति राष्ट्रपतिको कार्यालयमा राखी अन्य एक/एक प्रति प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय र कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालयमा पठाउनु पर्नेछ र त्यस्ता प्रत्येक कार्यालयले त्यसरी प्राप्त प्रामाणिक प्रति सुरक्षितसाथ राख्नु पर्नेछ।
|
| 88 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजिम प्राप्त भएको प्रामाणिक प्रतिको आधारमा कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालयको सचिबले अध्यादेश प्रमाणीकरण भएको मिति राखी सो अध्यादेश नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
---
|
| 91 |
+
|
| 92 |
+
### ४ख. राष्ट्रपतिबाट जारी हुने आदेश, अधिकारपत्र, सूचनाको प्रमाणीकरण
|
| 93 |
+
(१) नेपालको संविधान तथा अन्य प्रचलित कानून बमोजिम राष्ट्रपतिबाट जारी हुने आदेश, अधिकारपत्र, सूचना बा अन्य कुनै लिखतको प्रमाणीकरण राष्ट्रपतिको हस्ताक्षरबाट हुनेछ।
|
| 94 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्रमाणीकरण भएपछि राष्ट्रपतिको कार्यालयले एक प्रति आफ्नो कार्यालयमा सुरक्षित राखी त्यस्तो आदेश, अधिकारपत्र, सूचना बा अन्य लिखत प्रमाणीकरण भएको जानकारी तथा कार्यान्वयनको लागि प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालयमा र नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गर्नु पर्ने विषय प्रकाशनको लागि कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालयमा लेखी पठाउनु पर्नेछ।
|
| 95 |
+
|
| 96 |
+
---
|
| 97 |
+
|
| 98 |
+
### ६. नियम, आदेश, अधिकारपत्रको प्रमाणीकरण
|
| 99 |
+
(१) देहायका सार्वजनिक लिखतहरु जारी गर्ने सम्बन्धमा नेपाल सरकार, मन्त्रिपरिषद्ले निर्णय गरेपछि सोको आधारमा मुख्य सचिबले त्यस्तो लिखत प्रमाणीकरणका लागि दुई प्रतिमा हस्ताक्षर गरी एक प्रति प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालयमा राखी अर्को प्रति सम्बन्धित मन्त्रालयमा पठाउनु पर्नेछ:
|
| 100 |
+
(क) नेपाल सरकारले बनाएको नियम,
|
| 101 |
+
(ख) नेपाल सरकारले जारी गरेको आदेश,
|
| 102 |
+
(ग) नेपाल सरकारले जारी गरेको अधिकारपत्र,
|
| 103 |
+
(घ) प्रचलित कानून बमोजिम नेपाल सरकार, मन्त्रिपरिषद्ले गर्नु पर्ने निर्णय, जारी गर्नु पर्ने निर्देशिका बा अन्य सार्वजनिक लिखत।
|
| 104 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त प्रामाणिक प्रति सम्बन्धित मन्त्रालयले सुरक्षित राखी सोको आधारमा कार्यान्वयन गर्नु पर्नेछ।
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
---
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| 107 |
+
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| 108 |
+
### ७. नेपाल सरकारको अन्य सार्वजनिक लिखतको प्रमाणीकरण
|
| 109 |
+
दफा २३, ४, ४क, ४ख र ६ मा लेखिएदेखि बाहेकका नेपाल सरकारको अन्य सार्वजनिक लिखतको प्रमाणीकरण सम्बन्धित सचिब बा निजले तोकेको अन्य राजपत्राहित अधिकृतबाट हुनेछ।
|
| 110 |
+
|
| 111 |
+
---
|
| 112 |
+
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| 113 |
+
### ८. संविधान तथा अन्य प्रचलित कानून बमोजिम हुने नियुक्तिको प्रमाणीकरण
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| 114 |
+
(१) नेपालको संविधान, तथा अन्य प्रचलित कानून बमोजिम राष्ट्रपतिबाट नियुक्ति हुने पदको नियुक्तिपत्र राष्ट्रपतिको हस्ताक्षरद्वारा प्रमाणीकरण हुनेछ।
|
| 115 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको नियुक्तिपत्रको प्रामाणिक प्रति राष्ट्रपतिको कार्यालयले सुरक्षित राखी त्यस्तो प्रमाणीकरणको जानकारी तथा कार्यान्वयनको लागि प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालयमा र नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गर्नु पर्ने विषय प्रकाशनको लागि कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालयमा लेखी पठाउनु पर्नेछ।
|
| 116 |
+
(३) उपदफा (१) मा लेखिएदेखि बाहेक नेपालको संविधान बमोजिम नियुक्ति हुने अन्य पदको नियुक्ति तोकिएको अधिकारीद्वारा तोकिए बमोजिम प्रमाणीकरण भई तोकिए बमोजिम कार्यान्वयन हुनेछ।
|
| 117 |
+
|
| 118 |
+
---
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| 119 |
+
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| 120 |
+
### ९. आदेशको प्रमाणीकरण
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| 121 |
+
दफा ६ मा लेखिएदेखि बाहेक नेपाल सरकारको अन्य आदेश तोकिए बमोजिमको पदाधिकारीबाट तोकिए बमोजिम प्रमाणीकरण हुनेछ।
|
| 122 |
+
|
| 123 |
+
---
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| 124 |
+
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| 125 |
+
### १०. संबैधानिक निकायले बनाउने नियम, विनियम बा निर्देशिकाको प्रमाणीकरण
|
| 126 |
+
(१) प्रचलित कानून बमोजिम संबैधानिक निकायले बनाउने नियम, विनियम बा निर्देशिकाको दुई प्रति त्यस्तो निकायका प्रमुख पदाधिकारीको हस्ताक्षरद्वारा प्रमाणीकरण हुनेछ।
|
| 127 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका प्रामाणिक प्रतिहरुमध्ये एक प्रति सम्बन्धित संबैधानिक निकाय र अर्को प्रति सम्बन्धित मन्त्रालयमा सुरक्षित साथ राख्नु पर्नेछ।
|
| 128 |
+
|
| 129 |
+
---
|
| 130 |
+
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| 131 |
+
### ११. अन्य सार्वजनिक लिखतको प्रमाणीकरण
|
| 132 |
+
दफा २३, ४, ४क, ४ख, ६, ७, ८, ९, र १० मा उल्लेख भएदेखि बाहेकका तोकिए बमोजिमका अन्य सार्वजनिक लिखतको प्रमाणीकरण तोकिएको अधिकारीद्वारा तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 133 |
+
*तर प्रदेश र स्थानीय तहका सार्वजनिक लिखतको हकमा सम्बन्धित प्रदेश बा स्थानीय तहको कानूनमा व्यवस्था भए बमोजिम हुनेछ।
|
| 134 |
+
|
| 135 |
+
---
|
| 136 |
+
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| 137 |
+
### १२. अन्य प्रचलित कानून बमोजिम प्रमाणीकरण हुने विषयमा असर नपर्ने
|
| 138 |
+
कुनै सार्वजनिक लिखत प्रमाणीकरण सम्बन्धमा प्रचलित कानूनमा छुट्टै व्यवस्था भएकोमा त्यस्तो विषयमा यस ऐनमा लेखिएको कुनै कुराले असर पार्ने छैन।
|
| 139 |
+
|
| 140 |
+
---
|
| 141 |
+
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| 142 |
+
### १३. सार्वजनिक लिखतको राष्ट्रिय अभिलेख राख्नु पर्ने
|
| 143 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम प्रमाणीकरण भएको सार्वजनिक लिखत तोकिएको अबधि पूरा भएपछि तोकिएको कार्यबिधि पूरा गरी राष्ट्रिय अभिलेखालयमा राखिनेछ।
|
| 144 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम राष्ट्रिय अभिलेखालयमा राख्दा तोकिए बमोजिमका सार्वजनिक लिखतको माइको फिल्म तयार गरी राख्नु पर्नेछ।
|
| 145 |
+
|
| 146 |
+
---
|
| 147 |
+
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| 148 |
+
### १४. दण्ड सजाय
|
| 149 |
+
(१) कसैले सार्वजनिक लिखत कितें गरेमा, नभएको कुरा प्रमाणीकरण बा प्रमाणित गरेमा बा केरमेट गरेमा मुलुकी अपराध (संहिता) ऐन, २०७४ को दफा २७६ को उपदफा (३) बमोजिम सजाय हुनेछ।
|
| 150 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कसूरमा कसूरदारलाई हुने सजायको आधा सजाय हुनेछ।
|
| 151 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम कसूर गर्न उद्योग बा दुरूत्साहन गर्ने बा मतियारलाई मुख्य कसूरदारलाई हुने सजायको आधा सजाय हुनेछ।
|
| 152 |
+
(४) यस दफा बमोजिम कसूर गरेको कारणबाट कसैलाई कुनै किसिमको हानि नोक्सानी भएको रहेछ भने सो बापत क्षतिपूर्ति समेत कसूरदारबाट भराउनु पर्नेछ।
|
| 153 |
+
|
| 154 |
+
---
|
| 155 |
+
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| 156 |
+
### १५. सरकारबादी मुद्दा हुने
|
| 157 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दा मुलुकी फौजदारी कार्यबिधि संहिता, २०७४ को अनुसूची - १ मा समावेश भएको मानिनेछ।
|
| 158 |
+
|
| 159 |
+
---
|
| 160 |
+
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| 161 |
+
### १६. नियम बनाउने अधिकार
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| 162 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्नका लागि नेपाल सरकारले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 163 |
+
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| 164 |
+
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| 165 |
+
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| 166 |
+
### १७. खारेजी र बचाउ
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| 167 |
+
(१) देहायका कानून खारेज गरिएका छन्:
|
| 168 |
+
(क) लालमोहर ऐन, २०१४,
|
| 169 |
+
(ख) लालमोहर (दण्ड सदर गर्ने) कार्यबिधि सम्बन्धित नियमहरु, २०१६,
|
| 170 |
+
(ग) श्री ४ को सरकारको आदेश प्रमाणित गर्ने नियमहरु, २०२३,
|
| 171 |
+
(घ) श्री ४ को आदेश प्रमाणित गर्ने नियमहरु, २०४६,
|
| 172 |
+
(ङ) लालमोहर (कार्यबिधि) नियमाबली, २०४४।
|
| 173 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम खारेज भएका कानूनहरु बमोजिम भए गरेका काम कारबाहीहरुलाई यस ऐनले प्रतिकूल असर पारेको मानिने छैन।
|
| 174 |
+
(३) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत प्रतिनिधि सभा नियमाबली, २०६३ बमोजिम प्रतिनिधि सभाका सभामुखबाट प्रमाणीकरण भइसकेका विधेयकहरू यसै ऐन अनुसार प्रमाणीकरण भएको मानिनेछ।
|
| 175 |
+
|
| 176 |
+
---
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| 177 |
+
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| 178 |
+
**द्वष्टव्य:**
|
| 179 |
+
(१) केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा रुपान्तर गरिएका शब्दहरू:
|
| 180 |
+
"कानून, न्याय तथा संविधान सभा व्यवस्था मन्त्रालय" को सट्टा "कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालय"
|
| 181 |
+
(२) केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खरिज गर्ने ऐन, २०७४ द्वारा रुपान्तर गरिएका शब्दहरू:
|
| 182 |
+
"सरकारी मुद्रा सम्बन्धी ऐन, २०४९, को अनुसूची - १" को सट्टा "मुलुकी फौजदारी कार्यबिधि (संहिता) ऐन, २०७४ को अनुसूची - १"
|
| 183 |
+
(३) मुलुकी फौजदारी कार्यबिधि (संहिता) ऐन, २०७४ को नाम हालत मुलुकी फौजदारी कार्यबिधि (संहिता), २०७४ रहेको।
|
section_1_pdf_12.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,356 @@
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+
# लोक सेवा आयोग ऐन, २०७९
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| 2 |
+
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| 3 |
+
## प्रमाणीकरण मिति
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| 4 |
+
२०७९।०३।३१
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| 5 |
+
संबत् २०७९ सालको ऐन नं. ३
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| 6 |
+
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| 7 |
+
## लोक सेवा आयोग सम्बन्धी कानूनलाई संशोधन र एकीकरण गर्न बनेको ऐन
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| 8 |
+
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| 9 |
+
**प्रस्तावना:**
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| 10 |
+
सङ्घीय निजामती सेवा, सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा र सङ्गठित संस्थाको सेवाको पदमा उपयुक्त उम्मेदवार छनौटमा स्वच्छता, निष्पक्षता र योग्यता प्रणालीलाई प्रवर्द्धन गरी सार्वजनिक प्रशासनलाई सक्षम, सुदृढ, सेवामुखी बनाउन लोक सेवा आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार सम्बन्धी कानूनलाई समयानुकूल संशोधन र एकीकरण गर्न आवश्यक भएकोले,
|
| 11 |
+
सङ्घीय संसद्ले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 12 |
+
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| 13 |
+
---
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| 14 |
+
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| 15 |
+
## परिच्छेद-१
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| 16 |
+
### प्रारम्भिक
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| 17 |
+
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| 18 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
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| 19 |
+
(१) यस ऐनको नाम "लोक सेवा आयोग ऐन, २०७९" रहेको छ।
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| 20 |
+
(२) यो ऐन प्रमाणीकरण भएको मितिले एकतीसौं दिनदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
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| 21 |
+
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| 22 |
+
**२. परिभाषाः**
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| 23 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 24 |
+
(क) "अख्तियारबाला" भन्नाले कानून बमोजिम कुनै पदमा नियुक्ति गर्न बा विभागीय सजाय गर्न अख्तियारप्राप्त अधिकारी सम्झनु पर्छ।
|
| 25 |
+
(ख) "अध्यक्ष" भन्नाले आयोगको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
|
| 26 |
+
(ग) "अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा" भन्नाले सङ्घीय निजामती सेवा र सुरक्षा निकायको पद बाहेकको सङ्घीय कानूनद्वारा गठन भएको नेपाल सरकारको अन्य सेवा सम्झनु पर्छ।
|
| 27 |
+
(घ) "आयोग" भन्नाले संविधानको धारा २४२ बमोजिमको लोक सेवा आयोग सम्झनु पर्छ।
|
| 28 |
+
(इ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 29 |
+
(च) "संबिधान" भन्नाले नेपालको संविधान सम्झनु पर्छ।
|
| 30 |
+
(छ) "सङ्गठित संस्था" भन्नाले विश्वविद्यालय र शिक्षक सेवा आयोग बाहेकका पचास प्रतिशत बा सोभन्दा बढी शेयर बा जायजेथामा नेपाल सरकारको स्वामित्व बा नियन्त्रण भएको संस्थान, कम्पनी, बैङ, समिति बा सङ्घीय कानून बमोजिम स्थापित बा नेपाल सरकारद्वारा गठित आयोग, संस्थान, प्राधिकरण, निगम, प्रतिष्ठान, बोर्ड, केन्द्र, परिषद् र यस्तै प्रकृतिका अन्य सङ्गठित संस्था सम्झनु पर्छ।
|
| 31 |
+
(ज) "सङ्घीय निजामती सेवाको पद" भन्नाले सुरक्षा निकायको कर्मचारीको सेवाको पद बा निजामती सेवाको पद होइन भनी ऐनद्वारा तोकिएको अन्य सङ्घीय सरकारी सेवाको पद बाहेक नेपाल सरकारका अरु सबै सेवाको पद सम्झनु पर्छ।
|
| 32 |
+
(झ) "सदस्य" भन्नाले आयोगको सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अध्यक्षलाई समेत ज��ाउँछ।
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| 33 |
+
(ज) "सामान्य सिद्धान्त" भन्नाले संविधानको धारा २४३ को उपधारा (३) र (४) बमोजिम परामर्श प्रदान गर्ने प्रयोजनका लागि आयोगले जारी गरेको सामान्य सिद्धान्त सम्झनु पर्छ।
|
| 34 |
+
(ट) "सुरक्षा निकाय" भन्नाले नेपाली सेना, नेपाल प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी बल, नेपाल र राष्ट्रिय अनुसन्धान विभाग सम्झनु पर्छ।
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| 35 |
+
|
| 36 |
+
---
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| 37 |
+
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| 38 |
+
## परिच्छेद-२
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| 39 |
+
### आयोगको कार्य सञ्चालन तथा व्यवस्थापन
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| 40 |
+
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| 41 |
+
**३. आयोगको कार्यालय:**
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| 42 |
+
(१) आयोगको कार्य सञ्चालन तथा व्यवस्थापनको लागि आयोगको एक केन्द्रीय कार्यालय रहनेछ।
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| 43 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कार्यालय काठमाडौं उपत्यकामा रहनेछ।
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| 44 |
+
(३) आयोगको सङ्गठन संरचना र कर्मचारीको दरबन्दी कार्यबोझ तथा औचित्यताको आधारमा आयोगको सिफारिसमा नेपाल सरकारले स्वीकृत गरे बमोजिम हुनेछ।
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| 45 |
+
(४) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत कायम रहेका आयोगका कार्यालयहरु अर्को व्यवस्था नभएसम्म यथावत रहनेछन्।
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| 46 |
+
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| 47 |
+
**४. आयोगको बैठक:**
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| 48 |
+
(१) संविधान, यो ऐन र अन्य प्रचलित कानूनबमोजिम आयोगले गर्नुपर्ने सबै काम आयोगको निर्णयबमोजिम हुनेछ।
|
| 49 |
+
(२) आयोगको बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ।
|
| 50 |
+
(३) आयोगको तत्काल कायम रहेको सदस्य सङ्ख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्य उपस्थित भएमा आयोगको बैठक बस्न सक्नेछ।
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| 51 |
+
(४) आयोगको बैठकमा बहुमतको निर्णय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकको अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णायक मत दिनेछ।
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| 52 |
+
(५) आयोगको निर्णय आयोगको सचिवले प्रमाणित गर्नेछ।
|
| 53 |
+
(६) आयोगको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यविधि आयोगले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
**५. कार्यविभाजन:**
|
| 56 |
+
अध्यक्ष र सदस्यको कार्यविभाजन आयोगले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
**६. कार्यबाहक भई काम गर्ने:**
|
| 59 |
+
कुनै कारणले अध्यक्षको पद रिक्त भएमा, निज विदा बसेमा, संविधानको धारा १०१ को उपधारा (६) बमोजिमको अवस्था परी निजले कार्यसम्पादन गर्न नपाउने भएमा बा अन्य कुनै कारणले निज आयोगमा अनुपस्थित रहेको अवस्थामा आयोगको बरिष्ठतम् सदस्यले आयोगको कार्यबाहक अध्यक्ष भई काम गर्नेछ।
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
**७. कर्मचारी सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 62 |
+
(१) आयोगको कार्य सञ्चालन तथा व्यवस्थापनको लागि स्वीकृत दरबन्दी अनुसारका कर्मचारी नेपाल सरकारले उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 63 |
+
(२) आयोगमा कार्यरत कुनै विशिष्टीकृत कामको विशेषज्ञता हासिल गरेका बा विशेष गोपनीयता कायम गर्नु पर्ने बा कुनै विशेष जिम्मेवारीमा रहेका कर्मचारीलाई अन्य कार्याल��मा सरुवा गर्दा आयोगसँग परामर्श गरी गर्नु पर्नेछ।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
**८. राय, परामर्श लिन सक्नेः**
|
| 66 |
+
आयोगले आफ्नो कामको सम्बन्धमा कुनै संवैधानिक निकाय, नेपाल सरकारको कुनै मन्त्रालय, विभाग, कार्यालय बा कुनै सङ्गठित संस्थासँग परामर्श गर्न बा राय लिन सक्नेछ।
|
| 67 |
+
|
| 68 |
+
**९. प्रतिरक्षाः**
|
| 69 |
+
आयोगले आफ्नो तर्फबाट कुनै अड्डा अदालतमा निवेदन दिन, मुद्दा दायर गर्न बा मुद्दा सम्बन्धी आवश्यक लिखत तयार गर्न, प्रतिरक्षा गर्न महान्यायाधिबक्ता बा सरकारी बकीलको सेवा लिन बा महान्यायाधिबक्ताको परामर्शमा अन्य कानून व्यवसायीको सेवा लिन सक्नेछ।
|
| 70 |
+
|
| 71 |
+
---
|
| 72 |
+
|
| 73 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 74 |
+
### शैक्षिक योग्यता तथा पाठ्यक्रम
|
| 75 |
+
|
| 76 |
+
**१०. शैक्षिक योग्यता निर्धारणः**
|
| 77 |
+
(१) सङ्घीय निजामती सेवा, सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा र सङ्गठित संस्थामा पूर्ति गरिने पदको लागि आवश्यक पर्ने न्यूनतम शैक्षिक योग्यता सम्बन्धित सेवा, शर्त सम्बन्धी कानूनमा उल्लेख भए बमोजिम हुनेछ।
|
| 78 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सङ्घीय निजामती सेवा, सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा र सङ्गठित संस्थामा पूर्ति गरिने पदको लागि आवश्यक पर्ने न्यूनतम शैक्षिक योग्यता तोक्नुअघि सम्बन्धित निकायले आयोगको परामर्श लिनु पर्नेछ।
|
| 79 |
+
(३) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै उम्मेदवारले कुनै विश्वविद्यालय बा शिक्षण संस्थाबाट प्राप्त गरेको शैक्षिक योग्यता सम्बन्धित सेवा, समूह बा उपसमूहको कुनै पदको लागि निर्धारण गरिएको शैक्षिक योग्यता सरह भए नभएको भन्ने विषयमा आयोगले निर्णय गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 80 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम आयोगले गरेको निर्णय समान शैक्षिक योग्यता भएको अन्य उम्मेदवारको हकमा समेत लागू हुनेछ।
|
| 81 |
+
|
| 82 |
+
**११. पाठ्यक्रम र परीक्षण विधिः**
|
| 83 |
+
(१) सङ्घीय निजामती सेवाको रिक्त पद पूर्ति गर्नको लागि आयोगले लिने परीक्षाको पाठ्यक्रम, अङ्कभार, उत्तीर्णाइ, परीक्षण विधि र नतिजा प्रकाशन सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 84 |
+
(२) सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा बा सङ्गठित संस्थाका रिक्त पदपूर्ति गर्नको लागि आयोगले लिने लिखित परीक्षाको पाठ्यक्रम, अङ्कभार, उत्तीर्णाइ, परीक्षण विधि र नतिजा प्रकाशन सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 85 |
+
|
| 86 |
+
---
|
| 87 |
+
|
| 88 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 89 |
+
### उम्मेदवार छनौट सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 90 |
+
|
| 91 |
+
**१२. उम्मेदवार छनौट गर्ने तरिकाः**
|
| 92 |
+
सङ्घीय निजामती सेवाको रिक्त पदपूर्तिको लागि उपयुक्त उम्मेदवारको छनौट गर्दा पदको कार्यप्रकृति अनुसार आयोगले लिखित परीक्षाको अतिरिक्त देहाय बमोजिमका परीक्षाको तरिका अपनाउन सक्नेछः
|
| 93 |
+
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा,
|
| 94 |
+
(ख) अन्तर्वार्ता,
|
| 95 |
+
(ग) आयोगले समय समयमा तोकेका अन्य तरिका।
|
| 96 |
+
|
| 97 |
+
**१३. पदपूर्तिको मागः**
|
| 98 |
+
(१) सङ्घीय निजामती सेवाको रिक्त पद पूर्तिको लागि सम्बन्धित निकायले तोकिए बमोजिमको माग फाराममा सम्बन्धित सेवा, समूह, उपसमूह, श्रेणी, पदसङ्ख्या, कार्य विवरण र न्यूनतम योग्यता समेत उल्लेख गरी आयोगमा पठाउनु पर्नेछ।
|
| 99 |
+
(२) पदपूर्तिको माग सम्बन्धी कार्यविधि आयोगले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
**१४. सहमति लिनु पर्नेः**
|
| 102 |
+
सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा र सङ्गठित संस्थाको रिक्त पदमा पदपूर्तिको लागि विज्ञापन प्रकाशन गर्नुअघि सम्बन्धित निकायले आयोगको सहमति लिनु पर्नेछ।
|
| 103 |
+
|
| 104 |
+
**१५. पद सङ्ख्या निर्धारणः**
|
| 105 |
+
(१) आयोगले सङ्घीय निजामती सेवाको रिक्त पद पूर्ति गर्दा त्यस्तो सेवाको शर्त सम्बन्धी कानूनमा उल्लेख भएको प्रतिशत बमोजिम खुला प्रतियोगिता, बढुवा बा त्यस्तो कानूनमा उल्लेख भए बमोजिमको अन्य तरिकाद्वारा पूर्ति गरिने पदसङ्ख्या निर्धारण गर्नु पर्नेछ।
|
| 106 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम आयोगले खुला प्रतियोगिताद्वारा पदपूर्ति हुने गरी पदसङ्ख्या निर्धारण गर्दा सेवाको शर्त सम्बन्धी कानूनमा उल्लेख भए बमोजिम समानुपातिक समावेशी सिद्धान्त बमोजिम हुने गरी निर्धारण गर्नु पर्नेछ।
|
| 107 |
+
|
| 108 |
+
**१६. विज्ञापन प्रकाशन गर्नेः**
|
| 109 |
+
दफा १५ बमोजिम पद सङ्ख्या निर्धारण भएपछि आयोगले खुला प्रतियोगिता, बढुवा बा अन्य तरिकाद्वारा पदपूर्ति गर्न छुट्टाछुट्टै विज्ञापन प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 110 |
+
|
| 111 |
+
**१७. दरखास्त अस्वीकृत गर्न सक्नेः**
|
| 112 |
+
(१) दफा १६ बमोजिम आयोगले प्रकाशन गरेको विज्ञापन बमोजिम कुनै उम्मेदवारले पेश गरेको दरखास्त तोकिएको ढाँचा बमोजिम नभएको, रित नपुगेको बा आयोगले निर्धारण गरे बमोजिमको योग्यता नभएको देखिएमा आयोगले अन्तिम नतिजा प्रकाशन हुनुअघि जुनसुकै बखत त्यस्तो दरखास्त अस्वीकृत गर्न सक्नेछ।
|
| 113 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दरखास्तको ढाँचा नमिलेको बा रीत नपुगेको दरखास्त पेश गर्ने सम्बन्धित उम्मेदवारलाई आयोगले सो कुराको सूचना दिनेछ र सम्बन्धित उम्मेदवारले दरखास्त बुझाउन तोकिएको म्याद समाप्त भएको सात दिनभित्र ढाँचा मिलाई बा रित पुऱ्याई ल्याएमा आयोगले त्यस्तो दरखास्त स्वीकृत गर्न सक्नेछ।
|
| 114 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम दरखास्त अस्वीकृत भएको कारण सहितको जानकारी त्यस्तो उम्मेदवारलाई दिई सोको सूचना आयोगले आफ्नो वेबसाइटमा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 115 |
+
|
| 116 |
+
**१८. विज्ञापन बा परीक्षा रद्द बा संशोधन गर्न सक्ने:**
|
| 117 |
+
(१) आयोगले प्रकाशन गरेको विज्ञापन अनुसारको पदपूर्ति गर्नु नपर्ने बा पद आवश्यक नभएको भनी परीक्षा सञ्चालन हुनु अगाडि सम्बन्धित निकायले त्यस्तो विज्ञापन रद्द बा संशोधन गर्न मनासिब कारण सहित लिखित अनुरोध गरेमा आयोगले त्यस्तो विज्ञापन रद्द बा संशोधन गर्न बा गराउन सक्नेछ।
|
| 118 |
+
(२) आयोगले परीक्षा सञ्चालन गरेको केन्द्रमा कुनै किसिमको अनियमितता भएमा बा कुनै बाधा अवरोध उत्पन्न भई आंशिक बा पूर्णरूपले परीक्षा सञ्चालन हुन नसकेमा आयोगले त्यसको कारण खुलाई सम्बन्धित विज्ञापनको आंशिक बा सम्पूर्ण परीक्षा रद्द बा स्थगन गर्न सक्नेछ।
|
| 119 |
+
|
| 120 |
+
**१९. परीक्षा दस्तुर फिर्ता पाउने:**
|
| 121 |
+
(१) दफा १७ बमोजिम दरखास्त अस्वीकृत भएमा बा दफा १८ को उपदफा (१) बमोजिम विज्ञापन रद्द भएमा त्यस्तो विज्ञापनको लागि आयोगले लिएको परीक्षा दस्तुर सम्बन्धित व्यक्तिले फिर्ता पाउनेछ।
|
| 122 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परीक्षा दस्तुर फिर्ता पाउने व्यक्तिले तोकिएको अवधिभित्र आवश्यक कागजात सहित विज्ञापन प्रकाशन गर्ने निकायमा निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 123 |
+
|
| 124 |
+
**२०. प्रश्नपत्र निर्माण:**
|
| 125 |
+
(१) आयोगले सञ्चालन गर्ने परीक्षाको लागि आवश्यक पर्ने प्रश्नपत्रको निर्माण बा परिमार्जन (मोडरेशन) आयोगले निर्धारण गरेको मापदण्ड बमोजिम हुनेछ।
|
| 126 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्रश्नपत्र निर्माण बा परिमार्जन गर्ने विषय विज्ञको योग्यता, निजले पालना गर्नु पर्ने शर्त एवम् अन्य व्यवस्था आयोगले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 127 |
+
|
| 128 |
+
**२१. विभिन्न चरणमा परीक्षा लिन सकिने:**
|
| 129 |
+
आयोगले सङ्घीय निजामती सेवाका पदमध्ये आयोगले तोकेको कुनै सेवा, समूह तथा उपसमूहको कुनै पदको लागि संयुक्त बा छुट्टाछुट्टै बा विभिन्न चरणमा परीक्षा लिन सक्नेछ।
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
**२२. सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा बा सङ्गठित संस्थाको लिखित परीक्षा:**
|
| 132 |
+
(१) आयोगले सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा बा सङ्गठित संस्थाको पदमा पदपूर्ति गर्न लिइने लिखित परीक्षा सञ्चालन गरी सोको नतिजा प्रकाशन गर्नेछ।
|
| 133 |
+
(२) सङ्गठित संस्थाको रिक्त ���दपूर्तिका लागि आयोगले लिने लिखित परीक्षामा उम्मेदवार सङ्ख्याका आधारमा आयोगले पूर्व योग्यता परीक्षा लिन सक्नेछ।
|
| 134 |
+
|
| 135 |
+
**२३. परीक्षा सम्बन्धी विशेष व्यवस्थाः**
|
| 136 |
+
अपाङ्गता भएको बा शारीरिक अशक्तताको कारण आयोगबाट सञ्चालन हुने परीक्षामा सहभागी हुन कठिनाई हुने परीक्षार्थीले परीक्षा सञ्चालन हुनुअघि सो व्यहोराको जानकारी गराएमा आयोगले त्यस्तो परीक्षार्थीलाई परीक्षामा सहभागी हुन अनुकूल हुने गरी विशेष व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 137 |
+
|
| 138 |
+
**२४. उत्तरपुस्तिकाको ढाँचा र उम्मेदवारले पालना गर्नु पर्ने शर्तहरु:**
|
| 139 |
+
उत्तरपुस्तिकाको ढाँचा र उम्मेदवारले पालना गर्नु पर्ने शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
**२५. उत्तरपुस्तिकामा सङ्केत नम्बर:**
|
| 142 |
+
(१) आयोगले लिने लिखित बा प्रयोगात्मक परीक्षा सम्पन्न भएपछि तोकिएको प्रक्रिया बमोजिम उत्तरपुस्तिकामा सङ्केत नम्बर राख्नु पर्नेछ।
|
| 143 |
+
(२) बिघुतीय प्रणालीबाट उत्तरपुस्तिका परीक्षण गर्ने प्रयोजनको लागि उत्तरपुस्तिकामा बारकोडको प्रयोग गर्न सकिनेछ।
|
| 144 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम बारकोडको प्रयोग गरिएकोमा छुट्टै सङ्केत नम्बर राख्नु पर्ने छैन।
|
| 145 |
+
|
| 146 |
+
**२६. उत्तरपुस्तिका परीक्षण:**
|
| 147 |
+
(१) दफा २५ बमोजिम उत्तरपुस्तिकामा सङ्केत नम्बर राखी सकपछि विषय विज्ञ बा दक्षद्वारा उत्तरपुस्तिकाको परीक्षण गराउनु पर्नेछ।
|
| 148 |
+
(२) उत्तरपुस्तिकाको परीक्षण गर्ने विषय विज्ञ बा दक्षको योग्यता, पालना गर्नु पर्ने शर्त बा उत्तरपुस्तिका परीक्षण गर्ने स्थान सम्बन्धी व्यवस्था आयोगले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 149 |
+
(३) आयोगले दिएको निर्देशन बा दफा २५ बमोजिम तोकिएको उत्तरपुस्तिकाको ढाँचा र शर्तको बिपरीत हुने गरी लेखिएको उत्तरपुस्तिका परीक्षण गरिने छैन।
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| 150 |
+
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| 151 |
+
**२७. लिखित बा प्रयोगात्मक परीक्षाको नतिजाः**
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| 152 |
+
(१) आयोगले लिखित बा प्रयोगात्मक परीक्षाको नतिजा प्रकाशन गर्दा दफा १२ बमोजिमको त्यस्तो परीक्षामा उत्तीर्ण भएका उम्मेदवारमध्ये रिक्त पदको अनुपातमा तोकिए बमोजिमको सङ्ख्यामा सबैभन्दा बढी अङ्क प्राप्त गर्ने उम्मेदवारको वर्णानुक्रम अनुसार नाम, थर र रोल नम्बर समेत उल्लेख गरी नतिजा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
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| 153 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नतिजा प्रकाशन गर्दा अन्तर्वार्ता तथा विभिन्न चरणमा लिइने अन्य परीक्षाको कार्यक्रम र मिति समेत उल्लेख गर्नु पर्नेछ।
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| 154 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा बा सङ्गठित संस्थाको लिखित परीक्षाको नतिजा प्रकाशन गर्दा उम्मेदवारले प्राप्त गरेको अङ्क सिलबन्दी गरिसकेपछि आयोगको वेबसाइट मार्फत् नतिजा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ र प्रयोगात्मक परीक्षा बा अन्तर्वार्ताको लागि उपदफा (१) बमोजिम उत्तीर्ण उम्मेदवारको नामावली सम्बन्धित निकायमा पठाउनु पर्नेछ।
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| 155 |
+
(४) आयोगले प्रयोगात्मक परीक्षा बा अन्तर्वार्ता सम्पन्न भई सकेपछि मात्र उपदफा (३) बमोजिमको सिलबन्दी प्राम्राइ अन्तिम नतिजा प्रकाशनको लागि सम्बन्धित निकायमा पठाउनु पर्नेछ।
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| 156 |
+
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| 157 |
+
**२८. अन्तर्वार्ता समिति गठन:**
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| 158 |
+
(१) आयोगले सङ्घीय निजामती सेवाको रिक्त पदमा पदपूर्तिको लागि उम्मेदवारको छनौट गर्न तोकिए बमोजिम अन्तर्वार्ता समिति गठन गर्नेछ।
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| 159 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम अन्तर्वार्ता समिति गठन गर्दा केन्द्रीय कार्यालयको हकमा अध्यक्ष बा निजले तोकेको सदस्यको अध्यक्षतामा गठन गरिनेछ।
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| 160 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको अन्तर्वार्ता समिति गठन गर्दा अन्तर्वार्ता समितिमा सम्बन्धित क्षेत्रमा तोकिए बमोजिमको योग्यता भएको कम्तीमा एक जना विषय विज्ञ रहने गरी गठन गर्नु पर्नेछ।
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| 161 |
+
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| 162 |
+
**२९. अन्तिम नतिजा प्रकाशन:**
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| 163 |
+
(१) आयोगले सङ्घीय निजामती सेवामा पदपूर्तिका लागि उम्मेदवारको छनौट सम्बन्धी परीक्षामा सम्पूर्ण प्रक्रिया सम्पन्न भएपछि सबैभन्दा बढी अङ्क प्राप्त गर्ने उम्मेदवारको रोल नम्बर, नाम, थर, ठेगाना र सिफारिस गरिएको निकाय समेत उल्लेख गरी योग्यताक्रम अनुसार अन्तिम नतिजा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
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| 164 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम अन्तिम नतिजा प्रकाशन गर्दा खुला र समावेशी तर्फ विज्ञापन भएको पदको हकमा पहिले खुला र त्यसपछि समावेशी तर्फको नतिजा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ र यसरी नतिजा प्रकाशन गर्दा उम्मेदवारले प्राप्त गरेको कूल अङ्कको आधारमा एकीकृत योग्यताक्रमसमेत प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
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| 165 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम नतिजा प्रकाशन गर्दा तोकिए बमोजिमको सङ्ख्यामा बैकल्पिक उम्मेदवारको सूची र अन्तर्वार्तामा छनौट हुन नसकेका न्यूनतम उत्तीर्णाङ्क प्राप्त गरेका उम्मेदवारमध्ये तोकिएको सङ्ख्यामा अस्थायी उम्मेदवारको सूची प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 166 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिमको बैकल्पिक सूची प्रकाशन भएको मितिले एक वर्षसम्म र अस्थायी सूची सोही पदको अर्को अस्थायी सूची प्रकाशन नभएसम्म का��म रहनेछ।
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| 167 |
+
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| 168 |
+
**३०. नियुक्तिको सिफारिस:**
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| 169 |
+
(१) दफा २९ को उपदफा (१) बमोजिमका उम्मेदवारलाई आयोगले योग्यताक्रम अनुसार नियुक्तिको लागि अख्तियारबालासमक्ष सिफारिस गर्नु पर्नेछ।
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| 170 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सिफारिस गरिएको उम्मेदवारमध्ये कुनै उम्मेदवारको नियुक्तिको सिफारिस दफा ३६ को उपदफा (३) बमोजिम बदर भएमा बा अन्य कुनै कारणले उक्त पद एक वर्षभित्र रिक्त भएमा आयोगले योग्यताक्रम अनुसार बैकल्पिक उम्मेदवारलाई नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्नु पर्नेछ।
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| 171 |
+
(३) दफा २९ को उपदफा (३) बमोजिमको सूचीबाट अस्थायी नियुक्तिका लागि सिफारिस गर्दा बैकल्पिक सूचीमा समावेश भई स्थायी नियुक्ति हुन नसकेका उम्मेदवारलाई पहिलो योग्यताक्रमको सूचीमा समावेश गर्नु पर्नेछ।
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| 172 |
+
(४) यस दफा बमोजिम नियुक्तिको लागि सिफारिस भएको उम्मेदवारले दुई बा सोभन्दा बढी पटक नियुक्तिपत्र नलिएमा आयोगले त्यस्तो व्यक्तिलाई आयोगबाट सञ्चालन हुन परीक्षामा दुई वर्षसम्म सहभागी हुन रोक लगाउन सक्नेछ।
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| 173 |
+
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| 174 |
+
**३१. आयोगलाई सहयोग गर्नु पर्नेः**
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| 175 |
+
(१) आयोगले परीक्षा सञ्चालन र व्यवस्थापन सम्बन्धी कार्यका लागि संवैधानिक निकाय, सरकारी निकाय, शिक्षण संस्था बा सङ्गठित संस्थाका कर्मचारीलाई काममा लगाउन सक्नेछ।
|
| 176 |
+
(२) आयोगको परीक्षा सञ्चालन र व्यवस्थापन सम्बन्धी कामको लागि संवैधानिक निकाय, सरकारी निकाय, शिक्षण संस्था बा सङ्गठित संस्थाले कर्मचारी बा भवन उपलब्ध गराई सहयोग गर्नु पर्नेछ।
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| 177 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम परीक्षा सञ्चालन र व्यवस्थापन सम्बन्धी कार्यका लागि त्यस्तो कर्मचारी उपलब्ध नभएमा बा पर्याप्त नभएमा आयोगले अन्य उपयुक्त व्यक्तिको समेत सहयोग लिन सक्नेछ।
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| 178 |
+
(४) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि आयोगको कार्य सम्पादन गर्नको लागि आयोगको कर्मचारीबाट मात्र सम्भव हुने नदेखिएमा आयोगले अन्य कार्यालयमा कार्यरत कर्मचारीलाई काजमा खटाई पठाउन सेवा सञ्चालन गर्ने निकायलाई लेखी पठाउन सक्नेछ।
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| 179 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिम आयोगबाट लेखी आए बमोजिम सम्बन्धित निकायले कर्मचारी खटाई सहयोग गर्नु पर्नेछ।
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| 180 |
+
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| 181 |
+
**३२. बिघुतीय माध्यमको प्रयोग:**
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| 182 |
+
आयोगले रिक्त पदको माग, पदपूर्तिको विज्ञापन, परीक्षा सञ्चालन, नतिजा प्रकाशन जस्ता काममा बिघुतीय माध्यमको प्रयोग गर्न सक्नेछ।
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| 183 |
+
|
| 184 |
+
---
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| 185 |
+
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| 186 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 187 |
+
### परामर्श सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 188 |
+
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| 189 |
+
**३३. परामर्श दिनेः**
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| 190 |
+
(१) आयो��ले सुरक्षा निकाय र अन्य सङ्घीय सरकारी सेवाको पदमा बढुवा गर्दा अपनाउनु पर्ने सामान्य सिद्धान्तको विषयमा परामर्श दिनेछ।
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| 191 |
+
(२) आयोगले कुनै सङ्गठित संस्थाको कर्मचारीको सेवाका शर्त सम्बन्धी कानून बनाउँदा, त्यस्तो सेवाको पदमा बढुवा गर्दा र कर्मचारीलाई विभागीय कारबाही गर्दा अपनाउनु पर्ने सामान्य सिद्धान्तका विषयमा परामर्श दिनेछ।
|
| 192 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम परामर्श दिने प्रयोजनका लागि आयोगले सम्बन्धित निकाय र कर्मचारीको सेवाको प्रकृति अनुसार समान बा पृथक-पृथक रुपमा लागू हुने गरी सामान्य सिद्धान्त निर्धारण गर्न सक्नेछ।
|
| 193 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम आयोगले निर्धारण गरेको सामान्य सिद्धान्त सार्वजनिक गर्नु पर्नेछ।
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| 194 |
+
|
| 195 |
+
**३४. आयोगको परामर्श लिँदा अपनाउनु पर्ने कार्यविधिः**
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| 196 |
+
संबिधान बा अन्य प्रचलित कानून बमोजिम आयोगको परामर्श लिँदा अपनाउनु पर्ने कार्यविधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 197 |
+
|
| 198 |
+
**३५. आयोगले परामर्श दिंदा अपनाउनु पर्ने कार्यविधिः**
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| 199 |
+
(१) सङ्घीय निजामती सेवाका कर्मचारीको सेवा शर्त सम्बन्धी कानूनको विषयमा आयोगको परामर्श माग भई आएमा सङ्घीय निजामती सेवाको कामको प्रकृति र अवस्था अनुसार समान बा पृथक-पृथक रुपमा परामर्श दिन सक्नेछ।
|
| 200 |
+
(२) सङ्घीय निजामती सेवाको पदमा नियुक्ति, बढुवा बा त्यस्तो सेवाका कर्मचारीलाई विभागीय कारबाही गर्दा अपनाउनु पर्ने सामान्य सिद्धान्तको विषयमा आयोगको परामर्श माग भएमा आयोगले सो सम्बन्धी निर्धारित सिद्धान्त समेतलाई विचार गरी परामर्श दिनेछ।
|
| 201 |
+
(३) सङ्घीय निजामती सेवाको कर्मचारीलाई विभागीय सजाय गर्ने विषयमा आयोगको परामर्श माग भएमा आयोगले सेवा शर्त सम्बन्धी प्रचलित कानून बमोजिम तोकिएको प्रक्रिया पूरा भए नभएको हेरी तीस दिनभित्र परामर्श दिनेछ।
|
| 202 |
+
(४) उम्मेदवारको उपयुक्तता सम्बन्धी देहायका विषयमा परामर्श माग भई आएमा आयोगले सम्बन्धित सेवाको कार्य प्रकृति समेतलाई विचार गरी दफा १२ मा उल्लिखित कुनै एक बा एकभन्दा बढी तरिकाद्वारा आवश्यकता अनुसार उम्मेदवारको उपयुक्तताको परीक्षण गरी परामर्श दिनेछ:-
|
| 203 |
+
(क) सङ्घीय निजामती सेवाको पदमा छ महिनाभन्दा बढी अवधिको लागि नियुक्ति गर्दा,
|
| 204 |
+
(ख) कुनै एक प्रकारको सङ्घीय निजामती सेवाको पदबाट अर्को प्रकारको सङ्घीय निजामती सेवाको पदमा सरुवा बा बढुवा गर्दा बा सङ्घीय निजामती सेवा अन्तर्गतको कुनै से���ाको एक समूह बा उपसमूहको पदबाट अर्को समूह बा उपसमूहको पदमा सरुवा बा बढुवा गर्दा,
|
| 205 |
+
(ग) अन्य सरकारी सेवाबाट सङ्घीय निजामती सेवामा सरुवा बा बढुवा गर्दा,
|
| 206 |
+
(घ) कुनै प्रदेशको निजामती सेवाको पदबाट सङ्घीय निजामती सेवाको पदमा बा सङ्घीय निजामती सेवाको पदबाट प्रदेश निजामती सेवाको पदमा सेवा परिवर्तन बा स्थानान्तरण गर्दा,
|
| 207 |
+
(ड) आयोगको परामर्श लिनु नपर्ने अवस्थाको पदमा बहाल रहेको कर्मचारीलाई आयोगको परामर्श लिनु पर्ने अवस्थाको पदमा सरूवा बा बढुवा गर्दा।
|
| 208 |
+
|
| 209 |
+
**३६. आयोगको परामर्श कार्यान्वयन:**
|
| 210 |
+
(१) दफा ३३ बा दफा ३५ को उपदफा (२), (३) बा (४) बमोजिमको परामर्श कार्यान्वयन गर्ने गराउने दायित्व परामर्श माग गर्ने अधिकारीको हुनेछ।
|
| 211 |
+
(२) कुनै विशेष कारण बा परिस्थिति सृजना भई आयोगले दिएको परामर्श कार्यान्वयन गर्न सकिने अवस्था नभएमा त्यसको मनासिब कारण खोली परामर्श माग गर्ने अधिकारीले पुनर्विचारको लागि आयोग समक्ष लेखी पठाउन सक्नेछ।
|
| 212 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम पुनर्विचारको लागि लेखी आएमा पुनर्विचार गर्नुपर्ने कारण बा परिस्थिति आधारयुक्त र औचित्यपूर्ण रहेको भन्ने लागेमा आयोगले तत्सम्बन्धमा पुनः परामर्श दिन सक्नेछ।
|
| 213 |
+
(४) विभागीय सजाय सम्बन्धमा आयोगबाट प्राप्त परामर्श सम्बन्धित अधिकारीले आयोगले तोकेको अवधिभित्र कार्यान्वयन गरी आयोगलाई जानकारी दिनु पर्नेछ।
|
| 214 |
+
|
| 215 |
+
**३७. अनुगमन तथा निरीक्षण:**
|
| 216 |
+
(१) आयोगले वार्षिक कार्ययोजना बनाई देहायका विषयमा अनुगमन तथा निरीक्षण गर्नेछ:-
|
| 217 |
+
(क) संवैधानिक निकाय बा नेपाल सरकारका विभिन्न मन्त्रालय, सचिवालय, विभाग, कार्यालयले नियुक्ति, बढुवा र विभागीय कारबाही गर्दा संविधान तथा प्रचलित कानून र आयोगले दिएको परामर्श पालना गरेको बा नगरेको,
|
| 218 |
+
(ख) सुरक्षा निकाय र अन्य सङ्घीय सरकारी सेवाका पदमा बढुवा गर्दा अपनाउनु पर्ने सामान्य सिद्धान्तको विषयमा आयोगले दिएको परामर्श पालना भए नभएको,
|
| 219 |
+
(ग) सङ्गठित संस्थाको कर्मचारीको सेवाका शर्त सम्बन्धी कानून बनाउँदा, तथा त्यस्तो सेवाका पदमा बढुवा गर्दा र कर्मचारीलाई विभागीय कारबाही गर्दा अपनाउनु पर्ने सामान्य सिद्धान्तको विषयमा आयोगले दिएको परामर्श पालना भए नभएको।
|
| 220 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम आयोगले अनुगमन तथा निरीक्षण गर्ने प्रयोजनको लागि आयोग बा नेपाल सरकारका अधिकृतस्तरका कर्मचारीलाई खटाउन सक्नेछ।
|
| 221 |
+
|
| 222 |
+
**३८. काम कारबाही सच��याउन बा बदर गर्न सक्ने:**
|
| 223 |
+
(१) संविधान, यो ऐन र अन्य प्रचलित कानून बमोजिम आयोगको परामर्श लिनु पर्ने विषयमा आयोगको परामर्श नलिई कुनै काम कारबाही भए गरेमा आयोगले त्यस्तो काम कारबाही बदर गर्न सक्नेछ।
|
| 224 |
+
(२) दफा ३७ बमोजिम अनुगमन बा निरीक्षण गर्दा बा गराउँदा संविधान, यो ऐन, अन्य प्रचलित कानून तथा आयोगले निर्धारण गरे बमोजिमको कार्यविधि र शर्त पूरा नगरी कुनै कर्मचारीलाई नियुक्ति, बढुवा बा विभागीय कारबाही गरेको पाइएमा त्यस्तो नियुक्ति, बढुवा बा विभागीय कारबाही सच्याउन बा बदर गर्न आदेश दिन सक्नेछ।
|
| 225 |
+
(३) आयोगले प्रकाशन गरेको विज्ञापन बमोजिमको परीक्षामा बा आयोगले सञ्चालन गरेको परीक्षामा उम्मेदवार हुन कुनै व्यक्तिले पेश गरेको शैक्षिक योग्यता, उमेर समावेशिताको आधार लगायतका कुनै विवरण झूठा बा गलत देखिन आएमा आयोगले त्यस्तो उम्मेदवारको दरखास्त, परीक्षा, अन्तर्वार्ता बा नियुक्तिको सिफारिस बदर गर्नेछ र निजले नियुक्ति पाइसकेको भए प्रचलित कानून बमोजिम आवश्यक कारबाही चलाउन सम्बन्धित निकायमा लेखी पठाउनेछ।
|
| 226 |
+
(४) आयोगद्वारा प्रत्यायोजित अधिकार बमोजिम नियुक्त हुने पदमा यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा कार्यविधि बा आयोगले तोकेको शर्त पूरा नगरी कुनै व्यक्तिलाई नियुक्ति गरेको पाइएमा आयोगले त्यस्तो नियुक्तिलाई जुनसुकै बखत बदर गर्न सक्नेछ।
|
| 227 |
+
|
| 228 |
+
---
|
| 229 |
+
|
| 230 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 231 |
+
### कसूर र सजाय
|
| 232 |
+
|
| 233 |
+
**३९. कामबाट हटाउने:**
|
| 234 |
+
(१) यस ऐन बमोजिमको परीक्षा सञ्चालनमा संलग्न कर्मचारी बा व्यक्तिले परीक्षा केन्द्रमा कुनै अनियमित काम कारबाही गरेमा त्यस्तो कर्मचारी बा व्यक्तिलाई तत्काल कामबाट हटाउनु पर्नेछ।
|
| 235 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम कामबाट हटाइएको कर्मचारी बा व्यक्तिलाई आयोगले अभिलेख राखी भविष्यमा आयोगबाट सञ्चालन हुने कुनै पनि परीक्षा सम्बन्धी काममा संलग्न हुन नपाउने गरी रोक लगाउन सक्नेछ।
|
| 236 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम कामबाट हटाइएको कर्मचारी बा व्यक्तिको विवरण आयोगले आफ्नो वेबसाइटमा प्रकाशन गर्नेछ।
|
| 237 |
+
|
| 238 |
+
**४०. निष्काशन गर्न सक्ने:**
|
| 239 |
+
कुनै उम्मेदवारले परीक्षामा चिट चोरेमा बा चोराएमा, अर्काको नक्कल गरेमा बा गराएमा, बिघुतीय उपकरण प्रयोग गरी परीक्षामा अनियमित काम गरेमा, परीक्षा केन्द्रमा होहल्ला गरी परीक्षा सञ्चालनमा अवरोध पु¥याएमा, परीक्षा सम्बन्धी शर्त र मर्यादाको उल्लङ्घन गरेमा त्यस्तो उम्मेद��ारलाई केन्द्राध्यक्षले तत्काल परीक्षा केन्द्रबाट निष्काशन गर्न सक्नेछ।
|
| 240 |
+
|
| 241 |
+
**४१. कसूर र सजाय:**
|
| 242 |
+
(१) कसैले देहाय बमोजिमको काम गरेमा यस ऐन बमोजिम कसूर गरेको मानिनेछ:-
|
| 243 |
+
(क) परीक्षामा चिट चोरेमा बा चोराएमा, अर्काको नक्कल गरेमा बा गराएमा बा बिघुतीय उपकरण प्रयोग गरी परीक्षामा अनियमित काम गरेमा,
|
| 244 |
+
(ख) परीक्षार्थीले आफ्नो उत्तरपुस्तिका नबुझाई आफूसाथ लिई गएमा, आयोगले फिर्ता गर्नु पर्ने भनी तोकेका प्रश्नपत्र फिर्ता नबुझाएमा, त्यस्तो प्रश्नको प्रतिलिपि बनाई बा बिघुतीय उपकरणबाट सार्वजनिक गरेमा बा गराएमा,
|
| 245 |
+
(ग) आयोगले परीक्षा सञ्चालन गरिरहेको परीक्षा केन्द्रमा आयोगले तोकेको परीक्षा समयमा सम्बन्धित पदाधिकारीको स्वीकृति बिना प्रवेश गरेमा बा प्रवेश गर्न प्रयत्न गरेमा बा परीक्षा केन्द्रमा होहल्ला गरी परीक्षा सञ्चालनमा अवरोध पु¥याएमा,
|
| 246 |
+
(घ) अर्काको नामबाट परीक्षा दिएमा बा दिन लगाएमा,
|
| 247 |
+
(ङ) परीक्षा सञ्चालन गर्ने परीक्षा केन्द्र नियन्त्रणमा लिएमा बा लिन प्रयत्न गरेमा बा परीक्षा केन्द्रमा हुलहुज्जत बा अन्य कुनै काम गरी परीक्षा सञ्चालनमा बाधा अवरोध पु¥याएमा बा पु¥याउने प्रयत्न गरेमा,
|
| 248 |
+
(च) कुनै किसिमले परीक्षाको गोपनीयता भङ्ग गरेमा बा गराएमा।
|
| 249 |
+
(२) कसैले देहाय बमोजिमको काम गरेमा आयोगले आयोगबाट लिइने परीक्षामा देहाय बमोजिमको अवधिसम्म उम्मेदवार हुन नपाउने गरी रोक लगाउन सक्नेछ:-
|
| 250 |
+
(क) उपदफा (१) को खण्ड (क) विपरीतको काम गरेमा दुई वर्षसम्म,
|
| 251 |
+
(ख) उपदफा (१) को खण्ड (ख) विपरीतको काम गरेमा तीन वर्षसम्म,
|
| 252 |
+
(ग) उपदफा (१) को खण्ड (ग) विपरीतको काम गरेमा चार वर्षसम्म,
|
| 253 |
+
(घ) उपदफा (१) को खण्ड (घ), (ङ) बा (च) विपरीतको काम गरेमा पाँच वर्षसम्म।
|
| 254 |
+
(३) कसैले उपदफा (१) को खण्ड (क) विपरीत परीक्षामा चिट चोराउने काम गरेमा बा खण्ड (ग) विपरीतको काम गरेमा एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना बा छ महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ।
|
| 255 |
+
(४) कसैले उपदफा (१) को खण्ड (घ), (ङ) बा (च) विपरीतको काम गरेमा पचास हजार रुपैयाँदेखि एक लाख रुपैयाँसम्म जरिवाना र तीन महिनादेखि छ महिनासम्म कैद हुनेछ।
|
| 256 |
+
(५) उपदफा (२) को खण्ड (क), (ग) बा (घ) बमोजिम परीक्षामा रोक लगाइएको कुनै व्यक्तिको विरुद्ध उपदफा (३) बा (४) बमोजिमको कसूरमा चलेको मुद्दामा अदालतबाट सफाई पाएमा त्यस्तो रोक्का स्वतः फुकुवा हुनेछ।
|
| 257 |
+
|
| 258 |
+
**४२. नेपाल सरकार बादी हुने:**
|
| 259 |
+
दफा ४१ को उपदफा (३) बा (४) बमोजिमको मु��्दा सरकार बादी हुनेछ र त्यस्तो मुद्दा मुलुकी फौजदारी कार्यविधि संहिता, २०७४ को अनुसूची-१ मा समावेश भएको मानिनेछ।
|
| 260 |
+
|
| 261 |
+
---
|
| 262 |
+
|
| 263 |
+
## परिच्छेद-७
|
| 264 |
+
### विविध
|
| 265 |
+
|
| 266 |
+
**४३. वार्षिक प्रतिवेदन:**
|
| 267 |
+
(१) आयोगले आफूले गरेको काम कारबाहीको वार्षिक प्रतिवेदन आर्थिक वर्ष समाप्त भएको मितिले तीन महिनाभित्र राष्ट्रपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 268 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश गरिने प्रतिवेदनमा देहायका कुराहरु उल्लेख गर्नु पर्नेछ:-
|
| 269 |
+
(क) उम्मेदवार छनौट गर्न लिएको परीक्षा र परीक्षामा संलग्न भएका तथा उत्तीर्ण भएका परीक्षार्थीको सङ्ख्यात्मक विवरण,
|
| 270 |
+
(ख) विभिन्न निकायलाई आयोगले दिएको परामर्श र त्यस्तो परामर्श कार्यान्वयनको अवस्था,
|
| 271 |
+
(ग) सङ्घीय निजामती सेवाका कर्मचारीलाई विभागीय कारबाही र सजाय गर्दा दिएको परामर्श र त्यस्तो परामर्श कार्यान्वयनको अवस्था,
|
| 272 |
+
(घ) विभिन्न सेवाको पदमा नियुक्ति, बढुवा र विभागीय कारबाही गर्दा अपनाउनु पर्ने सामान्य सिद्धान्तको विषयमा दिएको परामर्श र त्यस्तो परामर्श कार्यान्वयनको अवस्था,
|
| 273 |
+
(ङ) सङ्घीय निजामती सेवा तथा अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा र सङ्गठित संस्थाको सेवामा सुधार गर्नुपर्ने विषय लगायत आयोगले आवश्यक देखेका अन्य विषय।
|
| 274 |
+
|
| 275 |
+
**४४. सुझाव दिन सक्ने:**
|
| 276 |
+
(१) आयोगको काम कारबाहीको सिलसिलामा बा आयोगले गरेको अध्ययन बा अनुसन्धानको आधारमा सङ्घीय निजामती सेवा, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा बा सङ्गठित संस्थाको सेवाका कर्मचारीको सेवाको शर्त सम्बन्धी कानूनमा सुधार गर्न आवश्यक देखिएमा आयोगले सम्बन्धित निकायलाई सुझाव दिन सक्नेछ।
|
| 277 |
+
(२) आयोगले सङ्घीय निजामती सेवा, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा बा सङ्गठित संस्थाको सेवासँग सम्बन्धित निकायको व्यवस्थापनलाई स्वच्छ, निष्पक्ष, सक्षम, कार्यमूलक र प्रभावकारी बनाउन सम्बन्धित निकायलाई समय-समयमा आवश्यक सुझाव दिन सक्नेछ।
|
| 278 |
+
|
| 279 |
+
**४५. विभागीय सजायका लागि लेखी पठाउन सक्ने:**
|
| 280 |
+
(१) दफा ३९, को उपदफा (१) बमोजिम कामबाट हटाइएको कर्मचारीलाई आयोगले विभागीय कारबाहीको लागि सम्बन्धित निकायमा लेखी पठाउन सक्नेछ।
|
| 281 |
+
(२) दफा ४० बमोजिमको कसूर निजामती सेवा, सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा बा सङ्गठित संस्थाका कर्मचारीले गरेमा त्यस्तो कर्मचारीलाई विभागीय कारबाहीका लागि आयोगले सम्बन्धित निकायमा लेखी पठाउन सक्नेछ।
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| 282 |
+
(३) दफा ४१ को उपदफा (१) बमोजिमको कसूर कुनै कर्मचारीले गरेमा त्यस्तो कर्मचारीलाई सो दफा बमोजिमको सजायको अतिरिक्त प्रचलित कानून बमोजिम विभागीय कारबाही समेत हुनेछ र सो प्रयोजनको लागि आयोगले सम्बन्धित निकायमा लेखी पठाउनेछ।
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| 283 |
+
(४) उपदफा (१), (२) बा (३) बमोजिम विभागीय कारबाहीको लागि लेखी आएमा अख्तियारबालाले तीन महिना भित्र सम्बन्धित कर्मचारीलाई निजको सेवा शर्त सम्बन्धी कानून बमोजिम विभागीय कारबाही गरी सोको जानकारी आयोगलाई दिनु पर्नेछ।
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| 284 |
+
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| 285 |
+
**४६. नियुक्ति रद्द हुने:**
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| 286 |
+
(१) संविधानको धारा २४३ को उपधारा (५) विपरीत लोक सेवा आयोगको परामर्श बिना नेपाल सरकारबाट निवृत्तभरण पाउने पदमा कुनै व्यक्तिले स्थायी नियुक्ति पाएको भएमा त्यस्तो नियुक्ति जुनसुकै बखत रद्द हुनेछ।
|
| 287 |
+
(२) कसैले आफ्नो सट्टा अन्य कुनै व्यक्तिलाई परीक्षा दिन लगाएमा निजले परीक्षा दिएको सम्बन्धित विज्ञापनको सम्पूर्ण विषयको परीक्षा निजको हकमा स्वतः रद्द हुनेछ र त्यसरी दिएको परीक्षाको आधारमा सिफारिस भई कुनै व्यक्तिले नियुक्ति पाएको भएमा त्यस्तो नियुक्ति जुनसुकै बखत रद्द हुनेछ।
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| 288 |
+
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| 289 |
+
**४७. विषय विज्ञ बा दक्षको सेवा लिन सक्नेः**
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| 290 |
+
(१) आयोगले सम्पादन गर्नु पर्ने कामको लागि सम्बन्धित विषयको विषय विज्ञ, दक्ष बा विशिष्टीकृत निकायको सेवा लिन सकिनेछ।
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| 291 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सेवा लिने प्रयोजनको लागि विषयविज्ञ, दक्ष बा विशिष्टीकृत निकायको मनोनयन बा छनौट अध्यक्षले गर्नेछ।
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| 292 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम सेवा लिए बापत सम्बन्धित विषय विज्ञ, दक्ष बा विशिष्टीकृत निकायलाई आयोगले निर्धारण गरे बमोजिमको पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेवा शुल्क दिइनेछ।
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| 293 |
+
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| 294 |
+
**४८. विविध शीर्षकमा रहेको खर्च स्वीकृत कार्यविधि बमोजिम गर्नेः**
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| 295 |
+
प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल सरकारले आयोगको लागि बजेटमा छुट्याएको विविध शीर्षक अन्तर्गतको रकमको खर्च नेपाल सरकार, अर्थ मन्त्रालयको सहमतिमा आयोगले बनाएको कार्यविधिको आधारमा गर्नु पर्नेछ।
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| 296 |
+
तर परीक्षा सञ्चालन सम्बन्धी कुनै आकस्मिक कार्यको लागि रकम खर्च गर्नु पर्ने भएमा आयोगको निर्णय बमोजिम खर्च गर्न सकिनेछ।
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| 297 |
+
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| 298 |
+
**४९. दस्तुर बा शुल्क:**
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| 299 |
+
(१) सङ्घीय निजामती सेवामा खुला प्रतियोगिता, बढुवा बा सेवा शर्त सम्बन्धी कानूनमा उल्लेख भए बमोजिमको अन्य तरिकाद्वारा पदपूर्ति गर्दा लिइने परीक्षाको दस्तुर आयोगले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
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| 300 |
+
(२) यस ऐनमा अन्���त्र उल्लेख गरिएको अतिरिक्त आयोगको काम कारबाहीका सम्बन्धमा आयोगले आवश्यक दस्तुर बा शुल्क तोक्न सक्नेछ।
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| 301 |
+
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| 302 |
+
**५०. समन्वय र सहयोग:**
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| 303 |
+
आयोगले समान उद्देश्यले स्थापना भएका राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय संस्थासँग समन्वय बा आपसी सम्बन्ध र सहयोग अभिवृद्धि गर्न सक्नेछ।
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| 304 |
+
तर सो प्रयोजनको लागि आयोगले कुनै अन्तर्राष्ट्रिय संस्थासँग सम्पर्क गर्दा नेपाल सरकार, परराष्ट्र मन्त्रालय मार्फत् गर्नु पर्नेछ।
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| 305 |
+
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| 306 |
+
**५१. आयोगको प्रतिनिधिः**
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| 307 |
+
सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा र सङ्गठित संस्थाको सेवामा पदपूर्तिको लागि गठन हुने सेवा आयोग बा समितिमा आयोगको प्रतिनिधि रहनेछ।
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| 308 |
+
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| 309 |
+
**५२. लिखतको गोपनीयताः**
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| 310 |
+
(१) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि आयोगले सञ्चालन गर्ने परीक्षासँग सम्बन्धित लिखत तथा कागजात गोप्य रहनेछन् र अदालतको आदेश भएकोमा बाहेक त्यस्ता कागजात सार्वजनिक गर्न आयोग बाध्य हुने छैन।
|
| 311 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि आयोगले निर्धारण गरे बमोजिमका परीक्षा सम्बन्धी कागजात बा विवरण सम्बन्धित व्यक्तिलाई दिन बा सार्वजनिक गर्न बा धुल्याउन सकिनेछ।
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| 312 |
+
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| 313 |
+
**५३. अधिकार प्रत्यायोजन:**
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| 314 |
+
(१) आयोगले संविधानको धारा २४३ को उपधारा (द) बमोजिम आफ्नो काम, कर्तव्य र अधिकारमध्ये कुनै काम, कर्तव्य र अधिकार अध्यक्ष, कुनै सदस्य बा नेपाल सरकारको कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्नु पर्ने भएमा त्यस्तो अधिकारको प्रयोग र पालना गर्नु पर्ने शर्त निर्धारण गरी तोकिए बमोजिम प्रत्यायोजन गर्नु पर्नेछ।
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| 315 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्रत्यायोजन गरिएको अधिकार आयोगले जुनसुकै बखत फिर्ता लिन सक्नेछ।
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| 316 |
+
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| 317 |
+
**५४. उजूरी:**
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| 318 |
+
(१) आयोगद्वारा प्रत्यायोजित अधिकार बमोजिम काम गर्ने अधिकारीले गरेको काम कारबाहीमा चित्त नबुझ्ने व्यक्तिले सो काम कारबाही भए गरेको मितिले पैतीस दिनभित्र आधार र कारण खोली आयोग समक्ष उजूरी गर्न सक्नेछ।
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| 319 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम उजूरी पर्न आएमा आयोगले तत्सम्बन्धमा आवश्यक जाँचबुझ गरी बढीमा साठी दिनभित्र उपयुक्त निर्णय गर्नेछ।
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| 320 |
+
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| 321 |
+
**५५. आयोग र प्रदेश लोक सेवा आयोगको सम्बन्ध:**
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| 322 |
+
(१) आयोग र प्रदेश लोक सेवा आयोगबीच समन्वयात्मक सम्बन्ध रहनेछ।
|
| 323 |
+
(२) आयोगले प्रदेश लोक सेवा आयोगको कामकारबाहीलाई प्रभावकारी बनाउन आयोग र प्रदेश लोक सेवा आयोगका अध्यक्ष र सदस्यबीच समय-समयमा आवश्यक छलफल गराउन सक्नेछ।
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| 324 |
+
(३) कुनै प्रदेश लोक सेवा आयोगले पाठ्यक्रम तर्जुमा, प्रश्नपत्र निर्माण बा परीक्षा सम्बन्धी कुनै पनि विषयका सम्बन्धमा आयोगको सहयोग माग गरेमा आयोगले आवश्यक सहयोग उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 325 |
+
(४) कुनै प्रदेश लोक सेवा आयोगले उपयुक्त उम्मेदवार छनौट सम्बन्धी काम आयोगबाट सम्पन्न गराउन चाहेमा सम्बन्धित प्रदेश सरकारबाट नेपाल सरकार मार्फत् अनुरोध भई आएमा आयोगले सो प्रदेशको परीक्षा सञ्चालन सम्बन्धी काम कारबाही गर्न सक्नेछ। यसरी सञ्चालन गरिएको परीक्षा सम्बन्धी काम सम्पन्न भएपछि आयोगले सो सम्बन्धी कागजातहरु सम्बन्धित प्रदेश लोक सेवा आयोगमा पठाउनु पर्नेछ।
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| 326 |
+
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| 327 |
+
**५६. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
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| 328 |
+
आयोगले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय मार्फत् राख्नु पर्नेछ।
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| 329 |
+
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| 330 |
+
**५७. प्रतिकूल असर नपर्ने:**
|
| 331 |
+
यस ऐनमा लेखिएको कुनै कुराले न्याय सेवा आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार क्षेत्रभित्र पर्ने विषयमा कुनै असर पर्ने छैन।
|
| 332 |
+
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| 333 |
+
**५८. अनुसन्धानात्मक र प्रबद्र्धनात्मक कार्य गर्न सक्ने:**
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| 334 |
+
आयोगले आफूले सम्पादन गर्ने कार्यलाई थप सक्षम र प्रभावकारी बनाउन समय-समयमा अनुसन्धानात्मक र प्रबद्र्धनात्मक कार्यहरु गर्न सक्नेछ।
|
| 335 |
+
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| 336 |
+
**५९. नियम बनाउने अधिकार:**
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| 337 |
+
(१) यो ऐन कार्यान्वयन गर्न आयोगले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 338 |
+
(२) उपदफा (१) को सर्वसामान्यतामा कुनै प्रतिकूल प्रभाव नपारी सो नियमद्वारा खास गरी देहायका विषयमा व्यवस्था गर्न सकिनेछ:-
|
| 339 |
+
(क) आयोगले लिने परीक्षाको तरिका, परीक्षा दस्तुर, दरखास्तको ढाँचा सम्बन्धी,
|
| 340 |
+
(ख) पदपूर्तिको लागि विभिन्न चरणमा लिने परीक्षा सम्बन्धी,
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| 341 |
+
(ग) सुरक्षा निकाय, अन्य सङ्घीय सरकारी सेवा बा सङ्गठित संस्थाको पदपूर्तिको लागि लिइने लिखित परीक्षा सम्बन्धी,
|
| 342 |
+
(घ) उत्तरपुस्तिकामा सङ्केत नम्बर राखे सम्बन्धी,
|
| 343 |
+
(ङ) अन्तर्वार्ता सम्बन्धी,
|
| 344 |
+
(च) उम्मेदवार नियुक्तिको सिफारिस सम्बन्धी,
|
| 345 |
+
(छ) आयोगको परामर्श माग गर्ने तथा आयोगले परामर्श दिने कार्यविधि सम्बन्धी,
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| 346 |
+
(ज) आयोगले गर्ने अनुगमन तथा निरीक्षण सम्बन्धी।
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| 347 |
+
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| 348 |
+
**६०. निर्देशिका बा कार्यविधि बा मापदण्ड बनाउन सक्नेः**
|
| 349 |
+
यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही आयोगले आफूले सम्पादन गर्नु पर्ने काम सुचारू रुपले सञ्चालन गर्न बा गराउनको लागि आवश्यकता अनुसार निर्देशिका बा कार्यविधि बा मापदण्ड बनाउन सक्नेछ।
|
| 350 |
+
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| 351 |
+
**६१. प्रचलित कानून बमोजिम हुने:**
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| 352 |
+
यस ऐनमा लेखिएका कुरामा यसै ऐन बमोजिम र अन्य कुरामा प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
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| 353 |
+
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| 354 |
+
**६२. खारेजी र बचाउ:**
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| 355 |
+
(१) लोक सेवा आयोग ऐन, २०६६ खारेज गरिएको छ।
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| 356 |
+
(२) लोक सेवा आयोग ऐन, २०६६ बमोजिम भए गरेका काम कारबाही यसै ऐन बमोजिम भए गरेको मानिनेछ।
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section_1_pdf_13.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,167 @@
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| 1 |
+
# थारु आयोग ऐन, २०७४
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| 2 |
+
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| 3 |
+
## प्रमाणीकरण मिति
|
| 4 |
+
२०७४।६।२९
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 8 |
+
२०७४।११।१९
|
| 9 |
+
|
| 10 |
+
## संबत् २०७४ सालको ऐन नं. २७
|
| 11 |
+
|
| 12 |
+
प्रस्तावना : थारु समुदायको इतिहास र संस्कृतिको पहिचान, हक, हितको संरक्षण र सम्बद्धन तथा थारु समुदायको सशक्तीकरण गर्नको लागि थारु आयोगको सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्न बाज्छुनीय भएकोले,
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
नेपालको संविधानको धारा २९६ को उपधारा (१) बमोजिमको व्यवस्थापिका-संसदले यो ऐन बनाएको छ ।
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
---
|
| 17 |
+
|
| 18 |
+
## परिच्छेद-१
|
| 19 |
+
|
| 20 |
+
## प्रारम्भिक
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ : (१) यस ऐनको नाम "थारु आयोग ऐन, २०७४" रहेको छ ।
|
| 23 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ ।
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
२. परिभाषा : विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा-
|
| 26 |
+
(क) "अध्यक्ष" भन्नाले आयोगको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ र सो शब्दले कार्यबाहक अध्यक्षलाई समेत जनाउँछ ।
|
| 27 |
+
(ख) "आयोग" भन्नाले संविधानको धारा २६३ बमोजिमको थारु आयोग सम्झनु पर्छ ।
|
| 28 |
+
(ग) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ ।
|
| 29 |
+
(घ) "थारु समुदाय" भन्नाले थारु आयोगको सिफारिसमा नेपाल सरकारले परिभाषित गरेको आदिबासी थारु समुदाय सम्झनु पर्छ ।
|
| 30 |
+
(ङ) "सदस्य" भन्नाले आयोगको सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अध्यक्षलाई समेत जनाउँछ ।
|
| 31 |
+
(च) "संविधान" भन्नाले नेपालको संविधान सम्झनु पर्छ ।
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
---
|
| 34 |
+
|
| 35 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 36 |
+
|
| 37 |
+
अध्यक्ष तथा सदस्यको योग्यता तथा पद रिक्त हुने अवस्था
|
| 38 |
+
|
| 39 |
+
३. अध्यक्ष तथा सदस्यको योग्यता : देहायको व्यक्ति आयोगको अध्यक्ष तथा सदस्यको पदमा नियुक्त हुन योग्य हुनेछ :-
|
| 40 |
+
(क) कम्तीमा दश बर्ष थारु समुदायको हक हितको संरक्षण, सम्बद्धन तथा थारु समुदायको सशक्तीकरण, विकास बा मानव अधिकारको क्षेत्रमा महत्वपूर्ण योगदान पुर्याएको थारु समुदायको व्यक्ति,
|
| 41 |
+
(ख) मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयबाट स्नातक उपाधि हासिल गरेको,
|
| 42 |
+
(ग) नियुक्त हुँदाका बखत कुनै राजनीतिक दलको सदस्य नरहेको,
|
| 43 |
+
(घ) पैतालीस बर्ष उमेर पूरा भएको,
|
| 44 |
+
(ङ) उच्च नैतिक चरित्र भएको ।
|
| 45 |
+
|
| 46 |
+
४. पद रिक्त हुने अवस्था : देहायको कुनै अवस्थामा आयोगका अध्यक्ष बा सदस्यको पद रिक्त हुनेछ :-
|
| 47 |
+
(क) निजले राष्ट्रपति समक्ष लिखित राजीनामा दिएमा,
|
| 48 |
+
(ख) निजको उमेर पैंसट्टी बर्ष पूरा भएमा,
|
| 49 |
+
(ग) संविधानको धारा २६३ को उपधारा (३) बमोजिमको पदावधि समाप्त भएमा,
|
| 50 |
+
(घ) निजको विरुद्ध संविधानको धारा १०१ बमोजिम महाभियोगको प्रस्ताव पारित भएमा,
|
| 51 |
+
(ड) शारीरिक बा मानसिक अस्वस्थताका कारण सेवामा रही कार्य सम्पादन गर्न असमर्थ रहेको भनी संवैधानिक परिषद्को सिफारिस बमोजिम राष्ट्रपतिले पदमुक्त गरेमा,
|
| 52 |
+
(च) निजको मृत्यु भएमा ।
|
| 53 |
+
|
| 54 |
+
५. पुनः नियुक्ति हुन नसक्ने : आयोगमा नियुक्त अध्यक्ष तथा सदस्यको पुनः नियुक्ति हुन सक्ने छैन ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
६. अन्य सरकारी सेवामा नियुक्ति हुन नसक्ने : अध्यक्ष बा सदस्य भइसकेको व्यक्ति अन्य सरकारी सेवामा नियुक्तिका लागि ग्राह्य हुने छैन ।
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
---
|
| 59 |
+
|
| 60 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 61 |
+
|
| 62 |
+
आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 63 |
+
|
| 64 |
+
७. आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार : आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुन्छ :-
|
| 65 |
+
(क) थारु समुदायको समग्र स्थितिको अध्ययन गरी तत्सम्बन्धमा गर्नु पर्ने नीतिगत, कानूनी र संस्थागत सुधारका विषयमा नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 66 |
+
(ख) थारु समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्बर्धन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणका लागि राष्ट्रिय नीति तथा कार्यक्रम तर्जुमा गरी कार्यान्वयनका लागि नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 67 |
+
(ग) थारु समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्बर्धन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणका सम्बन्धमा भएका व्यवस्था प्रभावकारी रूपमा कार्यान्वयन भए नभएको विषयमा अध्ययन अनुसन्धान गरी प्रभावकारी कार्यान्वयन गर्न चाल्नु पर्ने कदमका सम्बन्धमा नेपाल सरकारलाई सुझाव दिने,
|
| 68 |
+
(घ) थारु समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्बर्धन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणका सम्बन्धमा भइरहेका कानून, नीतिगत तथा संस्थागत व्यवस्थामा गर्नु पर्ने सुधारका सम्बन्धमा नेपाल सरकारलाई सुझाव दिने,
|
| 69 |
+
(ङ) थारु समुदायसँग सम्बन्धित नीति तथा कार्यक्रम कार्यान्वयनको समीक्षा, अनुगमन तथा मूल्याङ्कन गर्ने,
|
| 70 |
+
(च) आयोगले गरेका सिफारिस बा दिएका सुझाव कार्यान्वयनको सम्बन्धमा अनुगमन गर्ने बा गराउने,
|
| 71 |
+
(छ) थारु समुदायभित्र आर्थिक बा सामाजिक रूपमा पछाडि परेका व्यक्तिको विकास र सशक्तीकरणको लागि विशेष कार्यक्रम तर्जुमा गरी कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 72 |
+
(ज) थारु समुदायको भाषा, लिपि, संस्कृति, इतिहास, परम्परा, साहित्य, कलाको अध्ययन अनुसन्धान गरी त्यस्तो भाषा, लिपि, संस्कृति, इतिहास, परम्परा, साहित्य, कलाको संरक्षण र विकासको लागि कार्यक्रम तर्जुमा गरी नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 73 |
+
(झ) थारु समुदायको ��क हितको संरक्षण र सम्बर्धन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणको लागि चेतनामूलक कार्यक्रम सञ्चालन गर्ने,
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| 74 |
+
(ञ) थारु समुदायमा बिघमान कुरीति, अन्धविश्वास तथा सबै प्रकारको शोषणको अन्त्य गरी थारु समुदायको सशक्तीकरणको लागि कार्यक्रम तर्जुमा गरी नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
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| 75 |
+
(ट) थारु समुदायमा रहेका परम्परागत सीप, प्रविधि र विशिष्ट ज्ञानको संरक्षण र प्रबद्र्धन गरी व्यावसायिक प्रयोगमा ल्याउन सहयोग गर्ने,
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| 76 |
+
(ठ) थारु समुदायको सम्बन्धमा नेपाल पक्ष भएको अन्तराष्ट्रिय सन्धि सम्झौता कार्यान्वयन भए नभएको अनुगमन गरी नेपाल सरकारलाई कार्यान्वयनको लागि आवश्यक सिफारिस गर्ने बा सुझाब दिने,
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| 77 |
+
(ड) थारु समुदायको अधिकार उल्लङ्घन गर्ने व्यक्ति बा संस्थाका विरुद्ध उजुरी संकलन गरी सो उपर छानबिन तथा तहकिकात गर्न सम्बन्धित निकायमा सिफारिस गर्ने,
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| 78 |
+
(ढ) थारु समुदायको पहिचानका सम्बन्धमा बिस्तृत अध्ययन र अनुसन्धान गरी थर सूचीकृत गर्न नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
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| 79 |
+
(ण) थारु समुदायको भौतिक, अभौतिक संस्कृति संरक्षण र सम्बर्धनका लागि जीवित संग्रहालय स्थापना र परिचालनका लागि नीति तथा कार्यक्रम तर्जुमा गर्ने र कार्यान्वयनका लागि नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
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| 80 |
+
(त) थारु समुदायको उद्गम स्थलको खोज अनुसन्धान गरी त्यस्ता पुरातात्विक र ऐतिहासिक संरचना, वस्तु र स्थलहरूको संरक्षण र सम्बर्धन गर्न नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
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| 81 |
+
(थ) थारु समुदायको हक हितको संरक्षण, सम्बर्धन र सशक्तीकरणका लागि नेपाल सरकार र अन्य सङ्घ संस्थाहरूले सञ्चालन गर्ने चेतनामुलक कार्यक्रमहरूको समीक्षा, अनुगमन तथा मूल्याङ्कन गर्ने,
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| 82 |
+
(द) आयोगका अध्यक्ष, सदस्य तथा कर्मचारीको लागि आचारसंहिता बनाई लागू गर्ने,
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| 83 |
+
(ध) आयोगको वार्षिक योजना र कार्यक्रम स्वीकृत गर्ने ।
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| 84 |
+
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| 85 |
+
८. राय परामर्श लिन सक्ने : आयोगले आफ्नो काम कारबाहीको सम्बन्धमा अन्य संवैधानिक निकाय, सरकारी कार्यालय बा सार्वजनिक संस्थासँग समन्वय गर्न तथा परामर्श गर्न बा राय लिन सक्नेछ् ।
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| 86 |
+
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| 87 |
+
९. विशेषज्ञको सेवा लिन सक्ने : आयोगले यो ऐन र प्रचलित संघीय कानून बमोजिम सम्पादन गर्नु पर्ने कुनै काम आयोगमा कार्यरत जनशक्तिबाट सम्पादन हुन नसक्ने भएमा त्यसको कारण खुलाई प्रचलित संघीय कानून बमोजिम विशेषज्ञको सेवा लिन सक्नेछ ।
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| 88 |
+
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| 89 |
+
१०. समिति बा कार्यदल गठन गर्न सक्ने : (���) आयोगसँग सम्बन्धित कुनै विशेष प्रकृतिको कार्य सम्पादन गर्ने प्रयोजनको लागि आयोगले कार्यावधि तोकी कुनै समिति बा कार्यदल गठन गर्न सक्नेछ् ।
|
| 90 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको समिति बा कार्यदलको काम बा कार्यक्षेत्रगत शर्त त्यस्तो समिति बा कार्यदल गठन गर्दाका बखत आयोगले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ ।
|
| 91 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम समिति बा कार्यदल गठन गर्दा संविधानमा व्यवस्था भए बमोजिम समानुपातिक समावेशी सिद्धान्तको आधारमा प्रतिनिधित्व हुनु पर्नेछ ।
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| 92 |
+
|
| 93 |
+
११. समन्वय तथा सहकार्य गर्न सक्ने : आयोगले आवश्यकता अनुसार सरकारी निकाय बा सार्वजनिक संस्थासँग आवश्यक समन्वय तथा सहकार्य गर्न सक्नेछ ।
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| 94 |
+
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| 95 |
+
---
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| 96 |
+
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| 97 |
+
## परिच्छेद-४
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| 98 |
+
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| 99 |
+
आयोगको कार्य सञ्चालन
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| 100 |
+
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| 101 |
+
१२. आयोगको कार्यालय : (१) आयोगको कार्य सञ्चालनको लागि काठमाडौं उपत्यकामा आयोगको कार्यालय रहनेछ ।
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| 102 |
+
(२) आयोगले आवश्यकता अनुसार प्रदेश तहमा समेत कार्यालय स्थापना गर्न सक्नेछ ।
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| 103 |
+
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| 104 |
+
१३. आयोगको बैठक : (१) आयोगले यस ऐन बमोजिम गर्नु पर्ने काम आयोगको बैठकको निर्णय बमोजिम हुनेछ ।
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| 105 |
+
(२) आयोगको बैठक आवश्यकता अनुसार अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ ।
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| 106 |
+
(३) आयोगको सचिबले आयोगको बैठक बस्ने मिति, समय र स्थान तोकी बैठकमा छलफल हुने विषयसूची सहितको सूचना बैठक बस्ने समयभन्दा साधारणतया अट्चालीस घण्टा अगाबै सबै सदस्यले पाउने गरी पठाउनु पर्नेछ ।
|
| 107 |
+
(४) कुनै सदस्यले उपदफा (३) बमोजिम बैठकमा छलफल हुने विषयसूचीमा उल्लिखित विषयको अतिरिक्त अन्य कुनै विषयमा छलफल गराउन चाहेमा त्यसरी छलफल गर्न चाहेको विषय र कारण सहितको सूचना बैठक बस्नुभन्दा कम्तीमा चौबीस घण्टा अगाबै आयोगको सचिबलाई दिनु पर्नेछ । त्यसरी सूचना प्राप्त हुनासाथ आयोगको सचिबले त्यसको जानकारी सबै सदस्यलाई दिनेछ र सो विषय आयोगको बैठकको कार्यसूचीमा परेको मानिनेछ ।
|
| 108 |
+
(५) उपदफा (३) र (४) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि आयोगको बैठकमा उपस्थित सबै सदस्यको सहमतिले विषयसूचीमा नपरेको विषयमा पनि छलफल गरी निर्णय गर्न सकिनेछ ।
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| 109 |
+
(६) आयोगमा तत्काल कायम रहेका पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्य उपस्थित भएमा आयोगको बैठकको लागि गणपुरक संख्या पुगेको मानिनेछ ।
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| 110 |
+
(७) आयोगको बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ ।
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| 111 |
+
(८) आयोगको निर्णय बहुमतद्वारा हुनेछ र मत बराबर भएमा अध्यक्षले निर्णायक मत दिनेछ ।
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| 112 |
+
(९) आयोगको निर्णयको अभिलेख आयोगको स���िबले तयार गरी अध्यक्ष तथा सदस्यको दस्तखत गराई राख्नेछ ।
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| 113 |
+
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| 114 |
+
(१०) नेपाल निजामती सेवाको राजपत्रांकित प्रथम श्रेणीको अधिकृतले आयोगको सचिवको रूपमा काम गर्नेछ । त्यस्तो कर्मचारी नियुक्ति नभएसम्म आयोगको बरिष्ठतम् कर्मचारीले आयोगको सचिव भई काम गर्नेछ ।
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| 115 |
+
(११) आयोगको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यविधि आयोगले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ ।
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| 116 |
+
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+
१४. स्वार्थ बाझिएमा निर्णय प्रक्रियामा भाग लिन नहुने : आयोगमा विचाराधीन कुनै विषयमा आयोगको कुनै सदस्यको हित, सरोकार वा स्वार्थ रहेको वा निजको नजिकको नातेदार प्रत्यक्ष प्रभावित हुने भएमा त्यस्तो सदस्यले आयोगलाई त्यस्तो कुराको पूर्वजानकारी दिई त्यस्तो विषयमा आयोगबाट गरिने निर्णय प्रक्रियामा भाग लिन सक्ने छैन ।
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| 118 |
+
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| 119 |
+
१५. कार्य विभाजन : अध्यक्ष र सदस्यको कार्य विभाजन आयोगले तोके बमोजिम हुनेछ ।
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| 120 |
+
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| 121 |
+
१६. कार्यबाहक भई काम गर्ने : कुनै कारणवश अध्यक्षको पद रिक्त भएमा, निज संविधानको धारा १०१ को उपधारा (६) बमोजिम आफ्नो पदको कार्यसम्पादन गर्न नपाउने भएमा, विदेश भ्रमणमा गएकोमा वा सात दिनभन्दा बढी समयसम्म विदामा रहेकोमा आयोगको बरिष्ठतम् सदस्यले आयोगको कार्यबाहक अध्यक्ष भई काम गर्नेछ ।
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| 122 |
+
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| 123 |
+
१७. आयोगको काम कारबाहीमा बाधा नपर्ने : कुनै सदस्यको स्थान रिक्त रहेको कारणले मात्र आयोगको काम कारबाहीमा बाधा पर्ने छैन ।
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| 124 |
+
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+
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+
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+
## परिच्छेद-५
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+
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+
विविध
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| 130 |
+
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| 131 |
+
१८. आयोगको सङ्गठनात्मक संरचना र कर्मचारी : (१) आयोगको सङ्गठनात्मक संरचना र कर्मचारीको दरबन्दी नेपाल सरकारले स्वीकृत गरे बमोजिम हुनेछ ।
|
| 132 |
+
(२) आयोगको कार्य सञ्चालनको लागि आवश्यक पर्ने कर्मचारी नेपाल सरकारले उपलब्ध गराउनेछ ।
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| 133 |
+
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| 134 |
+
१९. पदीय मर्यादा तथा आचरण पालना गर्नु पर्ने : (१) आयोगको अध्यक्ष तथा सदस्यले देहाय बमोजिमको पदीय मर्यादाको पालना गर्नु पर्नेछ :-
|
| 135 |
+
(क) थारु समुदायको हक, हितको संरक्षण र सम्बर्धन गर्न तथा थारु समुदायको सशक्तीकरणको लागि स्वतन्त्र, निष्पक्ष र इमान्दारीपूर्वक आफ्नो पदीय दायित्व निर्वाह गर्ने,
|
| 136 |
+
(ख) विभिन्न जातजाति, समुदाय तथा सम्प्रदाय बीचको सम्बन्धमा खलल पर्ने कुनै काम नगर्ने,
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| 137 |
+
(२) आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यले यो ऐन बा प्रचलित संघीय कानून बमोजिमको पदीय आचरणको पालना गर्नु पर्नेछ ।
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| 138 |
+
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| 139 |
+
२०. काम कारबाहीमा सहयोग गर्नु पर्ने : आयोगले आफ्नो कार्य सम्पादनको सिलसिलामा कुनै निकाय बा पदाधिकारीको सहयोग माग गरेमा त्यस्तो सहयोग उपलब्ध गराउनु त्यस्तो निकाय बा पदाधिकारीको कर्तव्य हुनेछ ।
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
२१. कार्यान्वयनका लागि लेखी पठाउन सक्ने : कुनै निकाय बा पदाधिकारीले आयोगलाई आवश्यक सहयोग उपलब्ध नगराएमा आयोगले सहयोगको लागि त्यस्तो निकाय बा अधिकारीको तालुक निकाय बा अधिकारी समक्ष लेखी पठाउन सक्नेछ ।
|
| 142 |
+
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| 143 |
+
२२. वार्षिक प्रतिवेदन : (१) आयोगले आफूले गरेको काम कारबाहीको वार्षिक प्रतिवेदन आर्थिक वर्ष समाप्त भएको मितिले तीन महिनाभित्र राष्ट्रपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 144 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको वार्षिक प्रतिवेदनमा अन्य विषयको अतिरिक्त देहायका विषय समेत समावेश गर्नु पर्नेछ :-
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| 145 |
+
(क) आयोगको वार्षिक कार्यक्रमको कार्यान्वयनको विवरण तथा लागत खर्च,
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| 146 |
+
(ख) आयोगले नेपाल सरकार बा अन्य कुनै निकायलाई दिएको सिफारिस तथा सुझावको विवरण,
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| 147 |
+
(ग) खण्ड (ख) बमोजिमको सिफारिस तथा सुझाव कार्यान्वयनको अवस्था,
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| 148 |
+
(घ) आयोगको आर्थिक तथा भौतिक स्रोत साधन तथा त्यसको उपयोगको अवस्था,
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| 149 |
+
(ङ) यस ऐन बमोजिम आयोगले पूरा गर्नु पर्ने दायित्व निर्वाहका सम्बन्धमा गरिएको अन्य काम कारबाहीको विवरण ।
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| 150 |
+
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| 151 |
+
२३. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क : आयोगले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ ।
|
| 152 |
+
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| 153 |
+
२४. अधिकार प्रत्यायोजन : आयोगले यस ऐन बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारमध्ये आवश्यकता अनुसार कुनै अधिकार तोकिएको शर्तको अधीनमा रही प्रयोग र पालना गर्ने गरी अध्यक्ष, सदस्य, नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार कुनै निकाय बा स्थानीय सरकारको कुनै अधिकृत कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ ।
|
| 154 |
+
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| 155 |
+
२५. असल नियतले गरेको कामको बचाउ : आयोगका पदाधिकारी, कर्मचारी बा आयोगले खटाएको कुनै पनि व्यक्तिले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेका नियमहरू बमोजिम असल नियतले गरेको कुनै काम कारबाहीका सम्बन्धमा निजहरू उपर कुनै कानूनी कारबाही चलाइने छैन ।
|
| 156 |
+
|
| 157 |
+
२६. नियम बनाउने अधिकार : (१) यो ऐन कार्यान्वयन गर्नको लागि आयोगले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ ।
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| 158 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बनाउने नियममा नेपाल सरकारलाई आर्थिक भार बा दायित्व पर्ने विषय समावेश भएमा आयोगले नेपाल सरकार अर्थ मन्त्रालयको सहमति लिनु पर्नेछ ।
|
| 159 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम आयोगले बनाएको नियम नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन भएको मितिबाट प्रारम्भ हुनेछ ।
|
| 160 |
+
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| 161 |
+
२७. निर्देशिका बनाउने अधिकार : आय���गले सम्पादन गर्नु पर्ने काम सुचारू रूपले सञ्चालन गर्न बा गराउनको लागि यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधिनमा रही आवश्यक निर्देशिका बनाउन सक्नेछ ।
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| 162 |
+
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| 163 |
+
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| 164 |
+
*अनुसूची
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| 165 |
+
.............
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| 166 |
+
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| 167 |
+
*केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७५ द्वारा खारेज ।
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section_1_pdf_20.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,189 @@
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| 1 |
+
**आदिवासी जनजाति आयोग ऐन, २०७४**
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
**प्रमाणीकरण मिति**
|
| 4 |
+
२०७४।६।२७
|
| 5 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 6 |
+
केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 7 |
+
२०७४।११।१९
|
| 8 |
+
|
| 9 |
+
संबत् २०७४ सालको ऐन नं. १९
|
| 10 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 11 |
+
आदिवासी जनजाति समुदायको गौरबमय इतिहास र संस्कृतिको पहिचान हक, हितको संरक्षण र सम्वर्द्धन तथा आदिवासी जनजाति समुदायको सशक्तीकरण गर्नको लागि आदिवासी जनजाति आयोगको सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 12 |
+
|
| 13 |
+
नेपालको संविधानको धारा २९६ को उपधारा (१) बमोजिमको व्यवस्थापिका-संसदले यो ऐन बनाएको छ ।
|
| 14 |
+
|
| 15 |
+
---
|
| 16 |
+
|
| 17 |
+
### **परिच्छेद-१**
|
| 18 |
+
### **प्रारम्भिक**
|
| 19 |
+
|
| 20 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
|
| 21 |
+
(१) यस ऐनको नाम "आदिवासी जनजाति आयोग ऐन, २०७४" रहेको छ।
|
| 22 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
**२. परिभाषा:**
|
| 25 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 26 |
+
(क) "अध्यक्ष" भन्नाले आयोगको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ र सो शब्दले कार्यबाहक अध्यक्षलाई समेत जनाउँछ।
|
| 27 |
+
(ख) "आदिवासी जनजाति" भन्नाले आयोगको सिफारिसमा नेपाल सरकारले तोकेको जाति बा समुदाय सम्झनु पर्छ।
|
| 28 |
+
(ग) "आयोग" भन्नाले संविधानको धारा २६१ बमोजिमको आदिबासी जनजाति आयोग सम्झनु पर्छ।
|
| 29 |
+
(घ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 30 |
+
(ङ) "सदस्य" भन्नाले आयोगको सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अध्यक्षलाई समेत जनाउँछ।
|
| 31 |
+
(च) "संविधान" भन्नाले नेपालको संविधान सम्झनु पर्छ।
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
---
|
| 34 |
+
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| 35 |
+
### **परिच्छेद-२**
|
| 36 |
+
### **अध्यक्ष तथा सदस्यको योग्यता तथा पद रिक्त हुने अवस्था**
|
| 37 |
+
|
| 38 |
+
**३. अध्यक्ष तथा सदस्यको योग्यता:**
|
| 39 |
+
देहायको व्यक्ति आयोगको अध्यक्ष तथा सदस्यको पदमा नियुक्त हुन योग्य हुनेछ:
|
| 40 |
+
(क) आदिबासी जनजाति समुदायको हक हितको संरक्षण, सम्बर्पन तथा आदिबासी जनजाति समुदायको सशक्तीकरण बा मानब अधिकार बा कानूनको क्षेत्रमा कम्तीमा दश बर्ष योगदान गरेको आदिबासी जनजाति,
|
| 41 |
+
(ख) मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयबाट स्नातक उपाधि हासिल गरेको,
|
| 42 |
+
(ग) नियुक्त हुँदाका बखत कुनै राजनीतिक दलको सदस्य नरहेको,
|
| 43 |
+
(घ) पैतालीस बर्ष उमेर पूरा भएको,
|
| 44 |
+
(ङ) उच्च नैतिक चरित्र भएको।
|
| 45 |
+
|
| 46 |
+
**४. पद रिक्त हुने अवस्था:**
|
| 47 |
+
देहायको कुनै अवस्थामा आयोगका अध्यक्ष बा सदस्यको पद रिक्त हुनेछ:
|
| 48 |
+
(क) निजले राष्ट्रपति समक्ष लिखित राजीनामा दिएमा,
|
| 49 |
+
(ख) निजको उमेर पैंसट्टी बर्ष पूरा भएमा,
|
| 50 |
+
(ग) संविधानको धारा २६१ को उपधारा (३) बमोजिमको पदावधि समाप्त भएमा,
|
| 51 |
+
(घ) निजको विरुद्ध संविधानको धारा १०१ बमोजिम महाभियोगको प्रस्ताव पारित भएमा,
|
| 52 |
+
(ङ) शारीरिक बा मानसिक अस्वस्थताका कारण सेवामा रही कार्य सम्पादन गर्न असमर्थ रहेको भनी संबैधानिक परिषद्को सिफारिस बमोजिम राष्ट्रपतिले पदमुक्त गरेमा,
|
| 53 |
+
(च) निजको मृत्यु भएमा।
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
**५. पुनः नियुक्ति हुन नसक्ने:**
|
| 56 |
+
आयोगमा नियुक्त अध्यक्ष तथा सदस्यको पुनः नियुक्ति हुन सक्ने छैन।
|
| 57 |
+
तर सदस्यलाई अध्यक्षको पदमा नियुक्ति गर्न सकिनेछ र त्यस्तो सदस्य अध्यक्षको पदमा नियुक्त भएमा निजको पदावधि गणना गर्दा सदस्य भएको अवधिलाई समेत जोडी गणना गरिनेछ।
|
| 58 |
+
|
| 59 |
+
**६. अन्य सरकारी सेवामा नियुक्ति हुन नसक्ने:**
|
| 60 |
+
अध्यक्ष बा सदस्य भइसकेको व्यक्ति अन्य सरकारी सेवामा नियुक्तिका लागि ग्राह्य हुने छैन।
|
| 61 |
+
तर कुनै राजनीतिक पदमा बा कुनै बिषयको अनुसन्धान, जाँचबुझ बा छानबिन गर्ने बा कुनै बिषयको अध्ययन बा अन्वेषण गरी राय, मन्तव्य बा सिफारिस पेश गर्ने कुनै पदमा नियुक्त भई काम गर्न यस दफामा लेखिएको कुनै कुराले बाधा पु¥याएको मानिने छैन।
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
---
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
### **परिच्छेद-३**
|
| 66 |
+
### **आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 67 |
+
|
| 68 |
+
**९. आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 69 |
+
आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
|
| 70 |
+
(क) आदिवासी जनजाति समुदायको समग्र स्थितिको अध्ययन गरी तत्सम्बन्धमा गर्नु पर्ने नीतिगत, कानूनी र संस्थागत सुधारका विषयमा नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 71 |
+
(ख) आदिवासी जनजाति समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्बर्पन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणका लागि राष्ट्रिय नीति तथा कार्यक्रमको तर्जुमा गरी कार्यान्वयनका लागि नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 72 |
+
(ग) आदिवासी जनजाति समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्बर्पन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणका सम्बन्धमा भएका व्यवस्था प्रभावकारी रूपमा कार्यान्वयन भए नभएको विषयमा अध्ययन अनुसन्धान गरी प्रभावकारी कार्यान्वयन गर्न चाल्नु पर्ने कदमका सम्बन्धमा नेपाल सरकारलाई सुझाव दिने,
|
| 73 |
+
(घ) आदिवासी जनजाति समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्बर्पन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणका सम्बन्धमा भइरहेका कानूनी, नीतिगत तथा संस्थागत व्यवस्थामा गर्नुपर्ने सुधारका सम्बन्धमा नेपाल सरकारलाई सुझाव दिने,
|
| 74 |
+
(ङ) आदिवासी जनजाति समुदायसँग सम्बन्धित नीति तथा कार्यक्रम कार्यान्वयनको समीक्षा, अनुगमन तथा मूल्या���्कन गर्ने,
|
| 75 |
+
(च) आयोगले गरेका सिफारिस बा दिएका सुझाव कार्यान्वयनको सम्बन्धमा अनुगमन गर्ने बा गराउने,
|
| 76 |
+
(छ) आदिवासी जनजाति समुदायभित्र आर्थिक वा सामाजिक रूपमा पछाडि परेका व्यक्तिको विकास र सशक्तीकरणको लागि विशेष कार्यक्रम तर्जुमा गरी कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 77 |
+
(ज) आदिवासी जनजाति समुदायभित्रका विभिन्न भाषा, लिपि, संस्कृति, इतिहास, परम्परा, साहित्य, कलाको अध्ययन अनुसन्धान गरी त्यस्तो भाषा, लिपि, संस्कृति, इतिहास, परम्परा, साहित्य, कलाको संरक्षण र विकासको लागि कार्यक्रम तर्जुमा गरी नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 78 |
+
(झ) आदिवासी जनजाति समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्वर्द्धन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणको लागि चेतनामूलक कार्यक्रम सञ्चालन गर्ने,
|
| 79 |
+
(ज) आदिवासी जनजाति समुदायमा विद्यमान कुरीति, अन्धविश्वास तथा सवै प्रकारको शोषणको अन्त्य गर्न र आदिवासी जनजाति समुदायको सशक्तीकरणको लागि कार्यक्रम तर्जुमा गरी नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 80 |
+
(ट) आदिवासी जनजाति समुदायमा रहेका परम्परागत सीप, प्रविधि र विशिष्ट ज्ञानको संरक्षण र प्रवद्र्धन गरी व्यावसायिक प्रयोगमा ल्याउन सहयोग गर्ने,
|
| 81 |
+
(ट) आदिवासी जनजाति समुदायको सम्बन्धमा नेपाल पक्ष भएको अन्तर्राष्ट्रिय सन्धि सम्झौता कार्यान्वयन भए नभएको अनुगमन गरी नेपाल सरकारलाई कार्यान्वयनको लागि आवश्यक सिफारिस गर्ने वा सुझाव दिने,
|
| 82 |
+
(ड) आदिबासी जनजाति समुदायको अधिकार उल्लङ्घन गर्ने व्यक्ति बा संस्थाका बिरुद्ध उजुरी सङ्गलन गरी सो उपर छानबिन तथा तहकिकात गर्न सम्बन्धित निकायमा सिफारिस गर्ने,
|
| 83 |
+
(ड) आदिबासी जनजाति समुदायको पहिचानका सम्बन्धमा बिस्तृत अध्ययन र अनुसन्धान गरी थर सूचीकृत गर्न नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 84 |
+
(ण) आदिबासी जनजाति समुदायको भौतिक, अभौतिक संस्कृति संरक्षण र सम्बर्पनका लागि जीवित सङ्ग्रहालय स्थापना र परिचालनका लागि नीति तथा कार्यक्रम तर्जुमा गर्ने र कार्यान्वयनका लागि नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 85 |
+
(त) आदिबासी जनजातिको उद्गम स्थलको खोज अनुसन्धान गरी त्यस्ता पुरातात्विक र ऐतिहासिक संरचना बस्तु र स्थलहरूको संरक्षण र सम्बर्पन गर्न नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 86 |
+
(थ) आदिबासी जनजाति समुदायको हक हितको संरक्षण, सम्बर्पन र सशक्तीकरणका लागि नेपाल सरकार र अन्य सङ्, संस्थाहरूले सञ्चालन गर्ने चेतनामूलक कार्यक्रमहरूको समीक्षा, अनुगमन तथा मूल्याङ्कन गर्ने,
|
| 87 |
+
(द) आयोगका अध्यक्ष, सदस्य तथा कर्मचारीको लागि आचारसंहिता बनाई लागू गर्ने,
|
| 88 |
+
(ध) आयोगको बार्षिक योजना र कार्यक्रम स्वीकृत गर्ने।
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
**१०. राय परामर्श लिन सक्ने:**
|
| 91 |
+
आयोगले आफ्नो काम कारबाहीको सम्बन्धमा अन्य संबैधानिक निकाय, सरकारी कार्यालय बा सार्वजनिक संस्थासँग समन्वय गर्न तथा परामर्श गर्न बा राय लिन सक्नेछ।
|
| 92 |
+
|
| 93 |
+
**११. विशेषज्ञको सेवा लिन सक्ने:**
|
| 94 |
+
आयोगले यो ऐन र प्रचलित सङ्घीय कानून बमोजिम सम्पादन गर्नुपर्ने कुनै काम आयोगमा कार्यरत जनशक्तिबाट सम्पादन हुन नसक्ने भएमा त्यसको कारण खुलाई प्रचलित सङ्घीय कानून बमोजिम विशेषज्ञको सेवा लिन सक्नेछ।
|
| 95 |
+
|
| 96 |
+
**१२. समिति बा कार्यदल गठन गर्न सक्ने:**
|
| 97 |
+
(१) आयोगसँग सम्बन्धित कुनै विशेष प्रकृतिको कार्य सम्पादन गर्ने प्रयोजनको लागि आयोगले कार्यावधि तोकी कुनै समिति बा कार्यदल गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 98 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको समिति बा कार्यदलको काम बा कार्यक्षेत्रगत शर्त त्यस्तो समिति बा कार्यदल गठन गर्दाका बखत आयोगले निर्धारण गर बमोजिम हुनेछ।
|
| 99 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम समिति बा कार्यदल गठन गर्दा संविधानमा व्यवस्था भए बमोजिम समानुपातिक समावेशी सिद्धान्तको आधारमा प्रतिनिधित्व हुनु पर्नेछ।
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
**१३. समन्वय तथा सहकार्य गर्न सक्ने:**
|
| 102 |
+
आयोगले आवश्यकता अनुसार सरकारी निकाय बा सार्वजनिक संस्थासँग आवश्यक समन्वय तथा सहकार्य गर्न सक्नेछ।
|
| 103 |
+
|
| 104 |
+
---
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
### **परिच्छेद-४**
|
| 107 |
+
### **आयोगको कार्य सञ्चालन**
|
| 108 |
+
|
| 109 |
+
**१४. आयोगको कार्यालय:**
|
| 110 |
+
(१) आयोगको कार्य सञ्चालनको लागि काठमाडौं उपत्यकामा आयोगको कार्यालय रहनेछ।
|
| 111 |
+
(२) आयोगले आवश्यकता अनुसार प्रदेश स्तरमा कार्यालय स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 112 |
+
|
| 113 |
+
**१५. आयोगको बैठक:**
|
| 114 |
+
(१) आयोगले यस ऐन बमोजिम गर्नु पर्ने काम आयोगको बैठकको निर्णय बमोजिम हुनेछ।
|
| 115 |
+
(२) आयोगको बैठक आवश्यकता अनुसार अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 116 |
+
(३) आयोगको सचिबले आयोगको बैठक बस्ने मिति, समय र स्थान तोकी बैठकमा छलफल हुने बिषय सूची सहितको सूचना बैठक बस्ने समयभन्दा साधारणतया अट्चालीस घण्टा अगाबै सबै सदस्यले पाउने गरी पठाउनु पर्नेछ।
|
| 117 |
+
(४) कुनै सदस्यले उपदफा (३) बमोजिम बैठकमा छलफल हुने बिषय सूचीमा उल्लिखित बिषयको अतिरिक्त अन्य कुनै बिषयमा छलफल गराउन चाहेमा त्यसरी छलफल गर्न चा���ेको बिषय र कारण सहितको सूचना बैठक बस्नुभन्दा कम्तीमा चौबीस घण्टा अगाबै आयोगको सचिबलाई दिनु पर्नेछ। त्यसरी सूचना प्राप्त हुनासाथ आयोगको सचिबले त्यसको जानकारी सबै सदस्यलाई दिनेछ र सो बिषय आयोगको कार्यसूचीमा परेको मानिनेछ।
|
| 118 |
+
(५) उपदफा (३) र (४) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि आयोगको बैठकमा उपस्थित सबै सदस्यको सहमतिले बिषय सूचीमा नपरेको बिषयमा पनि छलफल गरी निर्णय गर्न सकिनेछ।
|
| 119 |
+
(६) आयोगमा तत्काल कायम रहेका पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्य उपस्थित भएमा आयोगको बैठकको लागि गणपूरक सङ्ख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 120 |
+
(७) आयोगको बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ।
|
| 121 |
+
(८) आयोगको निर्णय बहुमतद्वारा हुनेछ र मत बराबर भएमा अध्यक्षले निर्णायक मत दिनेछ।
|
| 122 |
+
(९) आयोगको निर्णयको अभिलेख आयोगको सचिबले तयार गरी अध्यक्ष तथा सदस्यको दस्तखत गराई राख्नेछ।
|
| 123 |
+
|
| 124 |
+
**१६. सचिवको व्यवस्था:**
|
| 125 |
+
नेपाल निजामती सेवाको राजपत्रांकित प्रथम श्रेणीको अधिकृतले आयोगको सचिवको रूपमा काम गर्नेछ। त्यस्तो कर्मचारी नियुक्ति नभएसम्म आयोगको बरिष्ठतम् कर्मचारीले आयोगको सचिव भई काम गर्नेछ।
|
| 126 |
+
|
| 127 |
+
**१७. स्वार्थ बाझिएमा निर्णय प्रक्रियामा भाग लिन नहुने:**
|
| 128 |
+
आयोगमा विचाराधीन कुनै विषयमा आयोगको कुनै सदस्यको हित, सरोकार वा स्वार्थ रहेको वा निजको नजिकको नातेदार प्रत्यक्ष प्रभावित हुने भएमा त्यस्तो सदस्यले आयोगलाई त्यस्तो कुराको पूर्व जानकारी दिई त्यस्तो विषयमा आयोगबाट गरिने निर्णय प्रक्रियामा भाग लिन सक्ने छैन।
|
| 129 |
+
|
| 130 |
+
**१८. कार्य विभाजन:**
|
| 131 |
+
अध्यक्ष र सदस्यको कार्य विभाजन आयोगले तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 132 |
+
|
| 133 |
+
**१९. कार्यवाहक भई काम गर्ने:**
|
| 134 |
+
कुनै कारणवश अध्यक्षको पद रिक्त भएमा, निज संविधानको धारा १०१ को उपधारा (६) बमोजिम आफ्नो पदको कार्यसम्पादन गर्न नपाउने भएमा, विदेश भ्रमणमा गएकोमा वा सात दिनभन्दा बढी समयसम्म विदामा रहेकोमा आयोगको बरिष्ठतम् सदस्यले आयोगको कार्यवाहक अध्यक्ष भई काम गर्नेछ।
|
| 135 |
+
|
| 136 |
+
**२०. आयोगको काम कारबाहीमा बाधा नपर्ने:**
|
| 137 |
+
कुनै सदस्यको स्थान रिक्त रहेको कारणले मात्र आयोगको काम कारबाहीमा बाधा पर्ने छैन।
|
| 138 |
+
|
| 139 |
+
---
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
### **परिच्छेद-५**
|
| 142 |
+
### **विविध**
|
| 143 |
+
|
| 144 |
+
**२१. आयोगको सङ्गठनात्मक संरचना र कर्मचारी:**
|
| 145 |
+
(१) आयोगको सङ्गठनात्मक संरचना र कर्मचारीको दरबन्दी नेपाल सरकारले स्वीकृत गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 146 |
+
(२) आयोगको कार्य सञ्चालनको लागि आवश्यक पर्ने कर्मचारी नेपाल सरकारले उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 147 |
+
|
| 148 |
+
**२२. पदीय मर्यादा तथा आचरण पालना गर्नु पर्ने:**
|
| 149 |
+
(१) आयोगको अध्यक्ष तथा सदस्यले देहाय बमोजिमको पदीय मर्यादाको पालना गर्नु पर्नेछ:
|
| 150 |
+
(क) आदिबासी जनजाति समुदायको हक, हितको संरक्षण र सम्बर्द्धन गर्न तथा आदिबासी जनजाति समुदायको सशक्तीकरणको लागि स्वतन्त्र, निष्पक्ष र इमान्दारीपूर्वक आफ्नो पदीय दायित्व निर्वाह गर्ने,
|
| 151 |
+
(ख) विभिन्न जातजाति, समुदाय तथा सम्प्रदाय बीचको सम्बन्धमा खलल् पर्ने कुनै काम नगर्ने,
|
| 152 |
+
(२) आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यले यो ऐन बा प्रचलित सङ्घीय कानून बमोजिमको पदीय आचरणको पालना गर्नु पर्नेछ।
|
| 153 |
+
|
| 154 |
+
**२३. काम कारबाहीमा सहयोग गर्नुपर्ने:**
|
| 155 |
+
आयोगले आफ्नो कार्य सम्पादनको सिलसिलामा कुनै निकाय बा पदाधिकारीको सहयोग माग गरेमा त्यस्तो सहयोग उपलब्ध गराउनु त्यस्तो निकाय बा पदाधिकारीको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 156 |
+
|
| 157 |
+
**२४. कार्यान्वयनका लागि लेखी पठाउन सक्ने:**
|
| 158 |
+
कुनै निकाय बा पदाधिकारीले आयोगलाई आवश्यक सहयोग उपलब्ध नगराएमा आयोगले सहयोगको लागि त्यस्तो निकाय बा अधिकारीको तालुक निकाय बा अधिकारी समक्ष लेखी पठाउन सक्नेछ।
|
| 159 |
+
|
| 160 |
+
**२५. बार्षिक प्रतिवेदन:**
|
| 161 |
+
(१) आयोगले आफूले गरेको काम कारबाहीको बार्षिक प्रतिवेदन आर्थिक बर्ष समाप्त भएको मितिले तीन महिनाभित्र राष्ट्रपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 162 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको बार्षिक प्रतिवेदनमा अन्य बिषयको अतिरिक्त देहायका बिषय समेत समावेश गर्नु पर्नेछ:
|
| 163 |
+
(क) आयोगको बार्षिक कार्यक्रमको कार्यान्वयनको बिबरण तथा लागत खर्च,
|
| 164 |
+
(ख) आयोगले नेपाल सरकार बा अन्य कुनै निकायलाई दिएको सिफारिस तथा सुझाबको बिबरण,
|
| 165 |
+
(ग) खण्ड (ख) बमोजिमको सिफारिस तथा सुझाब कार्यान्वयनको अवस्था,
|
| 166 |
+
(घ) आयोगको आर्थिक तथा भौतिक स्रोत साधन तथा त्यसको उपयोगको अवस्था,
|
| 167 |
+
(ङ) यस ऐन बमोजिम आयोगले पूरा गर्नु पर्ने दायित्व निर्बाहका सम्बन्धमा गरिएको अन्य काम कारबाहीको बिबरण।
|
| 168 |
+
|
| 169 |
+
**२६. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 170 |
+
आयोगले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा सङ्घीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
|
| 171 |
+
|
| 172 |
+
**२७. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 173 |
+
आयोगले यस ऐन बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारमध्ये आवश्यकता अनुसार कुनै अधिकार तोकिएको शर्तको अधीनमा रही प्रयोग र पालना गर्ने गरी अध्यक्ष, सदस्य, नेपाल सरकार प्रदेश सरकार, कुनै निकाय बा स्थानीय सरकारको कुनै अधिकृत कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 174 |
+
|
| 175 |
+
**२८. असल नियतले गरेको कामको बचाउ:**
|
| 176 |
+
आयोगका पदाधिकारी, कर्मचारी बा आयोगले खटाएको कुनै पनि व्यक्तिले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेका नियमहरू बमोजिम असल नियतले गरेको कुनै काम कारबाहीका सम्बन्धमा निजहरूउपर कुनै कानूनी कारबाही चलाइने छैन।
|
| 177 |
+
|
| 178 |
+
**२९. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 179 |
+
(१) यो ऐन कार्यान्वयन गर्न आयोगले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 180 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बनाउने नियममा नेपाल सरकारलाई आर्थिक भार बा दायित्व पर्ने बिषय समावेश भएमा आयोगले नेपाल सरकार अर्थ मन्त्रालयको सहमति लिनु पर्नेछ।
|
| 181 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम आयोगले बनाएको नियम नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन भएको मितिबाट प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 182 |
+
|
| 183 |
+
**३०. निर्देशिका बनाउने अधिकार:**
|
| 184 |
+
आयोगले सम्पादन गर्नु पर्ने काम सुचारू रूपले सञ्चालन गर्न बा गराउनको लागि यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही आवश्यक निर्देशिका बनाउन सक्नेछ।
|
| 185 |
+
|
| 186 |
+
---
|
| 187 |
+
|
| 188 |
+
×*अनुसूची*
|
| 189 |
+
**× केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७५, द्वारा खारेज ।**
|
section_1_pdf_22.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,190 @@
|
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| 1 |
+
**मुस्लिम आयोग ऐन, २०७४**
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**प्रमाणीकरण मिति**
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| 4 |
+
२०७४।६।२९
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| 5 |
+
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| 6 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
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| 7 |
+
केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
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| 8 |
+
२०७४।११।१९
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| 9 |
+
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| 10 |
+
**सम्बत् २०७४ सालको ऐन नं. ३१**
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| 11 |
+
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| 12 |
+
**प्रस्तावना:**
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| 13 |
+
मुस्लिम समुदायको इतिहास र संस्कृतिको पहिचान, हक, हितको संरक्षण र सम्बद्र्धन तथा मुस्लिम समुदायको सशक्तीकरण गर्नको लागि मुस्लिम आयोगको सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 14 |
+
नेपालको संविधानको धारा २९६ को उपधारा (१) बमोजिमको व्यवस्थापिका-संसदले यो ऐन बनाएको छ ।
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| 15 |
+
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| 16 |
+
---
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| 17 |
+
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| 18 |
+
### **परिच्छेद-१**
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| 19 |
+
### **प्रारम्भिक**
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| 20 |
+
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| 21 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
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| 22 |
+
(१) यस ऐनको नाम "मुस्लिम आयोग ऐन, २०७४" रहेको छ ।
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| 23 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ ।
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| 24 |
+
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| 25 |
+
**२. परिभाषा:**
|
| 26 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 27 |
+
(क) "अध्यक्ष" भन्नाले आयोगको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ र सो शब्दले कार्यबाहक अध्यक्षलाई समेत जनाउँछ ।
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| 28 |
+
(ख) "आयोग" भन्नाले संविधानको धारा २६४ बमोजिमको मुस्लिम आयोग सम्झनु पर्छ ।
|
| 29 |
+
(ग) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ ।
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| 30 |
+
(घ) "मुस्लिम" भज्ञाले मुस्लिम आयोगको सिफारिसमा नेपाल सरकारले परिभाषित गरेको समुदाय सम्झनु पर्छ ।
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| 31 |
+
(ङ) "सदस्य" भज्ञाले आयोगको सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अध्यक्षलाई समेत जनाउँछ ।
|
| 32 |
+
(च) "संविधान" भज्ञाले नेपालको संविधान सम्झनु पर्छ ।
|
| 33 |
+
|
| 34 |
+
---
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| 35 |
+
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| 36 |
+
### **परिच्छेद-२**
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| 37 |
+
### **अध्यक्ष तथा सदस्यको योग्यता तथा पद रिक्त हुने अवस्था**
|
| 38 |
+
|
| 39 |
+
**३. अध्यक्ष तथा सदस्यको योग्यता:**
|
| 40 |
+
देहायको व्यक्ति आयोगको अध्यक्ष तथा सदस्यको पदमा नियुक्त हुन योग्य हुनेछ:-
|
| 41 |
+
(क) कम्तीमा दश बर्ष मुस्लिम समुदायको हक हितको संरक्षण, सम्बद्र्धन, सामाजिक क्षेत्रमा योगदान दिएको तथा मुस्लिम समुदायको सशक्तीकरण बा विकास बा मानब अधिकारको क्षेत्रमा महत्वपूर्ण योगदान पुर्याएको मुस्लिम समुदायको व्यक्ति,
|
| 42 |
+
(ख) मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयबाट स्नातक उपाधि हासिल गरेको,
|
| 43 |
+
(ग) नियुक्त हुँदाका बखत कुनै राजनीतिक दलको सदस्य नरहेको,
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| 44 |
+
(घ) चैतालीस बर्ष उमेर पूरा भएको,
|
| 45 |
+
(ङ) उच्च नैतिक चरित्र भएको ।
|
| 46 |
+
|
| 47 |
+
**४. पद रिक्त हुने अवस्था:**
|
| 48 |
+
देहायको कुनै अवस्थामा आयोगका अध्यक्ष बा सदस्यको पद रिक्त हुनेछ:-
|
| 49 |
+
(क) निजले राष्ट्रपति समक्ष लिखित राजीनामा दिएमा,
|
| 50 |
+
(ख) निजको उमेर पैंसही बर्ष पूरा भएमा,
|
| 51 |
+
(ग) संविधानको धारा २६४ को उपधारा (३) बमोजिमको पदाबधि समाप्त भएमा,
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| 52 |
+
(घ) निजको विरुद्ध संविधानको धारा १०१ बमोजिम महाभियोगको प्रस्ताव पारित भएमा,
|
| 53 |
+
(ङ) शारीरिक बा मानसिक अस्वस्थताका कारण सेवामा रही कार्य सम्पादन गर्न असमर्थ रहेको भनी संबैधानिक परिषद्को सिफारिस बमोजिम राष्ट्रपतिले पदमुक्त गरेमा,
|
| 54 |
+
(च) निजको मृत्यु भएमा ।
|
| 55 |
+
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| 56 |
+
**५. पुनः नियुक्ति हुन नसक्ने:**
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| 57 |
+
आयोगमा नियुक्त अध्यक्ष तथा सदस्यको पुनः नियुक्ति हुन सक्ने छैन ।
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| 58 |
+
तर सदस्यलाई अध्यक्षको पदमा नियुक्ति गर्न सकिनेछ र त्यस्तो सदस्य अध्यक्षको पदमा नियुक्त भएमा निजको पदाबधि गणना गर्दा सदस्य भएको अबधिलाई समेत जोडी गणना गरिनेछ ।
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| 59 |
+
|
| 60 |
+
**६. अन्य सरकारी सेवामा नियुक्ति हुन नसक्ने:**
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| 61 |
+
अध्यक्ष बा सदस्य भइसकेको व्यक्ति अन्य सरकारी सेवामा नियुक्तिका लागि ग्राह्य हुने छैन ।
|
| 62 |
+
तर कुनै राजनीतिक पदमा बा कुनै बिषयको अनुसन्धान, जाँचबुझ बा छानबिन गर्ने बा कुनै बिषयको अध्ययन बा अन्वेषण गरी राय, मन्तव्य बा सिफारिस पेश गर्ने कुनै पदमा नियुक्त भई काम गर्न यस दफामा लेखिएको कुनै कुराले बाधा पुर्याएको मानिने छैन ।
|
| 63 |
+
|
| 64 |
+
---
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| 65 |
+
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| 66 |
+
### **परिच्छेद-३**
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| 67 |
+
### **आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 68 |
+
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| 69 |
+
**७. आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 70 |
+
आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 71 |
+
(क) मुस्लिम समुदायको समग्र स्थितिको अध्ययन गरी तत्सम्बन्धमा गर्नु पर्ने नीतिगत, कानूनी र संस्थागत सुधारका बिषयमा नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 72 |
+
(ख) मुस्लिम समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्बद्र्धन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणका लागि राष्ट्रिय नीति तथा कार्यक्रमको तर्जुमा गरी कार्यान्वयनका लागि नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 73 |
+
(ग) मुस्लिम समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्बद्र्धन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणका सम्बन्धमा भएका व्यवस्था प्रभावकारी रूपमा कार्यान्वयन भए नभएको विषयमा अध्ययन अनुसन्धान गरी प्रभावकारी कार्यान्वयन गर्न चाल्नु पर्ने कदमका सम्बन्धमा नेपाल सरकारलाई सुझाव दिने,
|
| 74 |
+
(घ) मुस्लिम समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्बद्र्धन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणका सम्बन्धमा भइरहेका नीतिगत, कानूनी तथा संस्थागत व्यवस्थामा गर्नु पर्ने सुधारका सम्बन्धमा नेपाल सरकारलाई सुझाव दिने,
|
| 75 |
+
(ङ) मुस्लिम समुदायसँग सम्बन्धित नीति तथा कार्यक्रम कार्यान्वयनको समीक्षा, अनुगमन तथा मूल्याङ्कन गर्ने,
|
| 76 |
+
(च) आय��गले गरेका सिफारिस बा दिएका सुझाव कार्यान्वयनको सम्बन्धमा अनुगमन गर्ने बा गराउने,
|
| 77 |
+
(छ) मुस्लिम समुदायभित्र आर्थिक बा सामाजिक रूपमा पछाडि परेका व्यक्तिको विकास र सशक्तीकरणका लागि विशेष कार्यक्रम तर्जुमा गरी कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 78 |
+
(ज) मुस्लिम समुदायको भाषा, लिपि, संस्कृति, इतिहास, परम्परा, साहित्य, कलाको अध्ययन अनुसन्धान गरी त्यस्तो भाषा, लिपि, संस्कृति, इतिहास, परम्परा, साहित्य, कलाको संरक्षण र विकासको लागि कार्यक्रम तर्जुमा गरी नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 79 |
+
(झ) मुस्लिम समुदायको हक हितको संरक्षण र सम्बद्र्धन तथा त्यस्तो समुदायको सशक्तीकरणको लागि चेतनामूलक कार्यक्रम सञ्चालन गर्ने,
|
| 80 |
+
(अ) सबै प्रकारको शोषणको अन्त्य गर्न र मुस्लिम समुदायको सशक्तीकरणको लागि कार्यक्रम तर्जुमा गरी नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 81 |
+
(ट) मुस्लिम समुदायको सम्बन्धमा नेपाल पक्ष भएको अन्तरराष्ट्रिय सन्धि सम्झौता कार्यान्वयन भए नभएको अनुगमन गरी नेपाल सरकारलाई कार्यान्वयनको लागि आवश्यक सिफारिस गर्ने बा सुझाब दिने,
|
| 82 |
+
(ट) मुस्लिम समुदायको अधिकार उल्लङ्घन गर्ने व्यक्ति बा संस्थाका विरुद्ध उजुरी सङ्कलन गरी सो उपर छानबिन तथा तहकिकात गर्न सम्बन्धित निकायमा सिफारिस गर्ने,
|
| 83 |
+
(ड) मुस्लिम समुदायको पहिचानका सम्बन्धमा विस्तृत अध्ययन र अनुसन्धान गरी थर सूचीकृत गर्न नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 84 |
+
(ढ) मुस्लिम समुदायको भौतिक, अभौतिक संस्कृतिको संरक्षण र सम्बद्र्धनका लागि जीवित संग्रहालय स्थापना तथा उद्गम स्थलको खोज अनुसन्धान गरी त्यस्ता पुरातात्विक र ऐतिहासिक संरचना, वस्तु र स्थलहरूको संरक्षण र सम्बद्र्धनका लागि नीति तथा कार्यक्रम तर्जुमा गर्ने र कार्यान्वयनका लागि नेपाल सरकारलाई सिफारिस गर्ने,
|
| 85 |
+
(ण) मुस्लिम समुदायको हक हितको संरक्षण, सम्बद्र्धन र सशक्तीकरणका लागि नेपाल सरकार र अन्य सङ्घ संस्थाहरूले सञ्चालन गर्ने चेतनामूलक कार्यक्रमहरूको समीक्षा, अनुगमन तथा मूल्याङ्कन गर्ने,
|
| 86 |
+
(त) मुस्लिम समुदायको पिछडिएको अवस्था र हालको शैक्षिक, राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक दुरावस्थाको अध्ययन अनुसन्धान गरी समुदायको विकासका लागि नेपाल सरकारलाई सुझाब दिने,
|
| 87 |
+
(थ) आयोगका अध्यक्ष, सदस्य तथा कर्मचारीको लागि आचारसंहिता बनाई लागू गर्ने,
|
| 88 |
+
(द) आयोगको वार्षिक योजना र कार्यक्रम स्वीकृत गर्ने ।
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
**८. राय परामर्श लिन सक्ने:**
|
| 91 |
+
आयोगले आफ्नो काम कारबाहीको सम्बन्धमा अन्य संवैधानिक निकाय, सरकारी कार्यालय बा सार्वजनिक संस्थासँग समन्वय तथा परामर्श गर्न बा राय लिन सक्नेछ ।
|
| 92 |
+
|
| 93 |
+
**९. विशेषज्ञको सेवा लिन सक्ने:**
|
| 94 |
+
आयोगले यो ऐन र प्रचलित सङ्घीय कानून बमोजिम सम्पादन गर्नु पर्ने कुनै काम आयोगमा कार्यरत जनशक्तिबाट सम्पादन हुन नसक्ने भएमा त्यसको कारण खुलाई प्रचलित सङ्घीय कानून बमोजिम विशेषज्ञको सेवा लिन सक्नेछ ।
|
| 95 |
+
|
| 96 |
+
**१०. समिति बा कार्यदल गठन गर्न सक्ने:**
|
| 97 |
+
(१) आयोगसँग सम्बन्धित कुनै विशेष प्रकृतिको कार्य सम्पादन गर्ने प्रयोजनको लागि आयोगले कार्याबधि तोकी कुनै समिति बा कार्यदल गठन गर्न सक्नेछ ।
|
| 98 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको समिति बा कार्यदलको काम बा कार्यक्षेत्रगत शर्त त्यस्तो समिति बा कार्यदल गठन गर्दाका बखत आयोगले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ ।
|
| 99 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम समिति बा कार्यदल गठन गर्दा संविधानमा व्यवस्था भए बमोजिम समानुपातिक समावेशी सिद्धान्तको आधारमा प्रतिनिधित्व हुनु पर्नेछ ।
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
**११. समन्वय तथा सहकार्य गर्न सक्ने:**
|
| 102 |
+
आयोगले आवश्यकता अनुसार सरकारी निकाय बा सार्वजनिक संस्थासँग आवश्यक समन्वय तथा सहकार्य गर्न सक्नेछ ।
|
| 103 |
+
|
| 104 |
+
---
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
### **परिच्छेद-४**
|
| 107 |
+
### **आयोगको कार्य सञ्चालन**
|
| 108 |
+
|
| 109 |
+
**१२. आयोगको कार्यालय:**
|
| 110 |
+
(१) आयोगको कार्य सञ्चालनको लागि काठमाडौं उपत्यकामा आयोगको कार्यालय रहनेछ ।
|
| 111 |
+
(२) आयोगले आवश्यकता अनुसार प्रदेश तहमा समेत कार्यालय स्थापना गर्न सक्नेछ ।
|
| 112 |
+
|
| 113 |
+
**१३. आयोगको बैठक:**
|
| 114 |
+
(१) आयोगले यस ऐन बमोजिम गर्नु पर्ने काम आयोगको बैठकको निर्णय बमोजिम हुनेछ ।
|
| 115 |
+
(२) आयोगको बैठक आवश्यकता अनुसार अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ ।
|
| 116 |
+
(३) आयोगको सचिवले आयोगको बैठक बस्ने मिति, समय र स्थान तोकी बैठकमा छलफल हुने विषयसूची सहितको सूचना बैठक बस्ने समयभन्दा साधारणतया अट्चालीस घण्टा अगावै सबै सदस्यले पाउने गरी पठाउनु पर्नेछ ।
|
| 117 |
+
(४) कुनै सदस्यले उपदफा (३) बमोजिम बैठकमा छलफल हुने विषयसूचीमा उल्लिखित विषयको अतिरिक्त अन्य कुनै विषयमा छलफल गराउन चाहेमा त्यसरी छलफल गर्न चाहेको विषय र कारण सहितको सूचना बैठक बस्नुभन्दा कम्तीमा चौबीस घण्टा अगावै आयोगको सचिवलाई दिनु पर्नेछ । त्यसरी सूचना प्राप्त हुनासाथ आयोगको सचिवले त्यसको जानकारी सबै सदस्यलाई दिनेछ र सो विषय आयोगको बैठकको कार्यसूचीमा परेको मानिनेछ ।
|
| 118 |
+
(५) उपदफा (३) र (४) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि आयोगको बैठकमा उपस्थित सबै सदस्यको सहमतिले विषयसूचीमा नपरेको विषयमा पनि छलफल गरी निर्णय गर्न सकिनेछ ।
|
| 119 |
+
(६) आयोगमा तत्काल कायम रहेका पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्य उपस्थित भएमा आयोगको बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ ।
|
| 120 |
+
(७) आयोगको बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ ।
|
| 121 |
+
(८) आयोगको निर्णय बहुमतद्वारा हुनेछ र मत बराबर भएमा अध्यक्षले निर्णायक मत दिनेछ ।
|
| 122 |
+
(९) आयोगको निर्णयको अभिलेख आयोगको सचिवले तयार गरी अध्यक्ष तथा सदस्यको दस्तखत गराई राख्नेछ ।
|
| 123 |
+
|
| 124 |
+
**१४. स्वार्थ बाझिएमा निर्णय प्रक्रियामा भाग लिन नहुने:**
|
| 125 |
+
आयोगमा विचाराधीन कुनै विषयमा आयोगको कुनै सदस्यको हित, सरोकार वा स्वार्थ रहेको वा निजको नजिकको नातेदार प्रत्यक्ष प्रभावित हुने भएमा त्यस्तो सदस्यले आयोगलाई त्यस्तो कुराको पूर्वजानकारी दिई त्यस्तो विषयमा आयोगबाट गरिने निर्णय प्रक्रियामा भाग लिन सक्ने छैन ।
|
| 126 |
+
|
| 127 |
+
**१५. कार्य विभाजन:**
|
| 128 |
+
अध्यक्ष र सदस्यको कार्य विभाजन आयोगले तोके बमोजिम हुनेछ ।
|
| 129 |
+
|
| 130 |
+
**१६. कार्यवाहक भई काम गर्ने:**
|
| 131 |
+
कुनै कारणवश अध्यक्षको पद रिक्त भएमा, निज संविधानको धारा १०१ को उपधारा (६) बमोजिम आफ्नो पदको कार्यसम्पादन गर्न नपाउने भएमा, विदेश भ्रमणमा गएकोमा वा सात दिनभन्दा बढी समयसम्म विदामा रहेकोमा आयोगको वरिष्ठतम् सदस्यले आयोगको कार्यवाहक अध्यक्ष भई काम गर्नेछ ।
|
| 132 |
+
|
| 133 |
+
**१७. आयोगको काम कारबाहीमा बाधा नपर्ने:**
|
| 134 |
+
कुनै सदस्यको स्थान रिक्त रहेको कारणले मात्र आयोगको काम कारबाहीमा बाधा पर्ने छैन ।
|
| 135 |
+
|
| 136 |
+
---
|
| 137 |
+
|
| 138 |
+
### **परिच्छेद-५**
|
| 139 |
+
### **विविध**
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
**१८. आयोगको सङ्गठनात्मक संरचना र कर्मचारी:**
|
| 142 |
+
(१) आयोगको सङ्गठनात्मक संरचना र कर्मचारीको दरबन्दी नेपाल सरकारले स्वीकृत गरे बमोजिम हुनेछ ।
|
| 143 |
+
(२) आयोगको कार्य सञ्चालनको लागि आवश्यक पर्ने कर्मचारी नेपाल सरकारले उपलब्ध गराउनेछ ।
|
| 144 |
+
|
| 145 |
+
**१९. पदीय मर्यादा तथा आचरण पालना गर्नु पर्ने:**
|
| 146 |
+
(१) आयोगको अध्यक्ष तथा सदस्यले देहाय बमोजिमको पदीय मर्यादाको पालना गर्नु पर्नेछ:-
|
| 147 |
+
(क) मुस्लिम समुदायको हक, हितको संरक्षण र सम्बद्र्धन गर्न तथा मुस्लिम समुदायको सशक्तीकरणको लागि स्वतन्त्र, निष्पक्ष र इमान्दारीपूर्वक आफ्नो पदीय दायित्व निर्वाह गर्ने,
|
| 148 |
+
(ख) विभिन्न जातजाति समुदाय तथा सम्प्रदाय बीचको स���्बन्धमा खलल पर्ने कुनै काम नगर्ने,
|
| 149 |
+
(२) आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यले यो ऐन बा प्रचलित सङ्घीय कानून बमोजिमको पदीय आचरणको पालन गर्नु पर्नेछ ।
|
| 150 |
+
|
| 151 |
+
**२०. काम कारबाहीमा सहयोग गर्नु पर्ने:**
|
| 152 |
+
आयोगले आफ्नो कार्य सम्पादनको सिलसिलामा कुनै निकाय बा पदाधिकारीको सहयोग माग गरेमा त्यस्तो सहयोग उपलब्ध गराउनु त्यस्तो निकाय बा पदाधिकारीको कर्तव्य हुनेछ ।
|
| 153 |
+
|
| 154 |
+
**२१. कार्यान्वयनका लागि लेखी पठाउन सक्ने:**
|
| 155 |
+
कुनै निकाय बा पदाधिकारीले आयोगलाई आवश्यक सहयोग उपलब्ध नगराएमा आयोगले सहयोगको लागि त्यस्तो निकाय बा अधिकारीको तालुक निकाय बा अधिकारी समक्ष लेखी पठाउन सक्नेछ ।
|
| 156 |
+
|
| 157 |
+
**२२. वार्षिक प्रतिवेदन:**
|
| 158 |
+
(१) आयोगले आफूले गरेको काम कारबाहीको वार्षिक प्रतिवेदन आर्थिक वर्ष समाप्त भएको मितिले तीन महिनाभित्र राष्ट्रपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 159 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको वार्षिक प्रतिवेदनमा अन्य विषयको अतिरिक्त देहायका विषय समेत समावेश गर्नु पर्नेछ:-
|
| 160 |
+
(क) आयोगको वार्षिक कार्यक्रमको कार्यान्वयनको विवरण तथा लागत खर्च,
|
| 161 |
+
(ख) आयोगले नेपाल सरकार बा अन्य कुनै निकायलाई दिएको सिफारिस तथा सुझाबको विवरण,
|
| 162 |
+
(ग) खण्ड (ख) बमोजिमको सिफारिस तथा सुझाब कार्यान्वयनको अवस्था,
|
| 163 |
+
(घ) आयोगको आर्थिक तथा भौतिक स्रोत साधन तथा त्यसको उपयोगको अवस्था,
|
| 164 |
+
(ङ) यस ऐन बमोजिम आयोगले पूरा गर्नु पर्ने दायित्व निर्वाहका सम्बन्धमा गरिएको अन्य काम कारबाहीको विवरण ।
|
| 165 |
+
|
| 166 |
+
**२३. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 167 |
+
आयोगले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा सङ्घीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय मार्फत् राख्नु पर्नेछ ।
|
| 168 |
+
|
| 169 |
+
**२४. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 170 |
+
आयोगले यस ऐन बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारमध्ये आवश्यकता अनुसार कुनै अधिकार तोकिएको शर्तको अधीनमा रही प्रयोग र पालन गर्ने गरी अध्यक्ष, सदस्य, नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार, कुनै निकाय बा स्थानीय सरकारको कुनै अधिकृत कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ ।
|
| 171 |
+
|
| 172 |
+
**२५. असल नियतले गरेको कामको बचाउ:**
|
| 173 |
+
आयोगका पदाधिकारी, कर्मचारी बा आयोगले खटाएको कुनै पनि व्यक्तिले यस ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेका नियमहरू बमोजिम असल नियतले गरेको कुनै काम कारबाहीका सम्बन्धमा निजहरू उपर कुनै कानूनी कारबाही चलाइने छैन ।
|
| 174 |
+
|
| 175 |
+
**२६. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 176 |
+
(१) यो ऐन कार्यान्वयन गर्नको लागि आयोगले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ ।
|
| 177 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बनाउने नियममा नेपाल सरकारलाई आर्थिक भार बा दायित्व पर्ने विषय समावेश भएमा आयोगले नेपाल सरकार अर्थ मन्त्रालयको सहमति लिनु पर्नेछ ।
|
| 178 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम आयोगले बनाएको नियम नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन भएको मितिबाट प्रारम्भ हुनेछ ।
|
| 179 |
+
|
| 180 |
+
**२७. निर्देशिका बनाउने अधिकार:**
|
| 181 |
+
आयोगले सम्पादन गर्नु पर्ने काम सुचारू रूपले सञ्चालन गर्न बा गराउनको लागि यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही आवश्यक निर्देशिका बनाउन सक्नेछ ।
|
| 182 |
+
|
| 183 |
+
**२८. खारेजी र बचाउ:**
|
| 184 |
+
(१) सम्वत् २०६९ साल जेठ २ गते नेपाल राजपत्रमा प्रकाशित सूचना बमोजिम गठित राष्ट्रिय मुस्लिम आयोग बिघटन गरिएको छ ।
|
| 185 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको आयोगबाट भए गरेका काम कारबाही यसै ऐन बमोजिम भए गरेको मानिनेछ ।
|
| 186 |
+
(३) यो ऐन लागू हुँदाका बखत उपदफा (१) बमोजिमको राष्ट्रिय मुस्लिम आयोगमा बहाल रहेका पदाधिकारीहरू यो ऐन लागू भएपछि स्वतः पदमुक्त हुनेछन् ।
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+
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+
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| 189 |
+
×*अनुसूची*
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| 190 |
+
**केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७५ द्वारा खारेज ।**
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section_1_pdf_23.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,149 @@
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Here is the exact text extracted from the provided PDF document:
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| 3 |
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**राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिको पारिश्रमिक तथा सुविधा सम्बन्धी ऐन, २०७४**
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+
**प्रमाणीकरण मिति**
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+
२०७४।६।२७
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| 9 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
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| 10 |
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केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
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| 11 |
+
२०७४।११।१९
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| 12 |
+
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| 13 |
+
### सम्बत् २०७४ सालको ऐन नं. २२
|
| 14 |
+
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+
**राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिको पारिश्रमिक तथा सुविधा सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन**
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| 16 |
+
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| 17 |
+
**प्रस्ताबनाः**
|
| 18 |
+
राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिको पारिश्रमिक तथा सुविधा सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 19 |
+
नेपालको संविधानको धारा २९६ को उपधारा (१) बमोजिमको व्यवस्थापिका-संसदले यो ऐन बनाएको छ ।
|
| 20 |
+
|
| 21 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
|
| 22 |
+
(१) यस ऐनको नाम "राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिको पारिश्रमिक तथा सुविधा सम्बन्धी ऐन, २०७४" रहेको छ ।
|
| 23 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ ।
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
**२. पारिश्रमिक:**
|
| 26 |
+
(१) राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिलाई अनुसूची-१ मा उल्लेख भए बमोजिमको मासिक पारिश्रमिक दिइनेछ ।
|
| 27 |
+
(२) राष्ट्रपति बा उपराष्ट्रपति संविधानको धारा १०१ को उपधारा (१) बमोजिमको अवस्थामा बाहेक अन्य जुनसुकै अवस्थामा पदबाट निवृत्त भएमा निजलाई एक महिनाको पारिश्रमिक बराबरको रकम थप सुविधाको रूपमा दिइनेछ ।
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
**३. आवास सुविधाः**
|
| 30 |
+
(१) राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिको आवासको लागि नेपाल सरकारबाट सरकारी घरको बन्दोबस्त गरिनेछ ।
|
| 31 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको घरको मर्मत र सम्भार नेपाल सरकारबाट हुनेछ ।
|
| 32 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको घरको लागि उपयुक्त फर्निचरको व्यवस्था नेपाल सरकारबाट हुनेछ ।
|
| 33 |
+
|
| 34 |
+
**४. सबारी तथा इन्धन सुविधा:**
|
| 35 |
+
(१) राष्ट्र्पति र उपराष्ट्र्पतिको लागि नेपाल सरकारले सबारी साधन उपलब्ध गराउनेछ ।
|
| 36 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम उपलब्ध गराइएको सबारी साधनलाई आवश्यक पर्ने इन्धन, मोबिल तथा मर्मत सम्भारको व्यवस्था नेपाल सरकारले गर्नेछ ।
|
| 37 |
+
|
| 38 |
+
**५. सज्चार सुविधा:**
|
| 39 |
+
राष्ट्र्पति र उपराष्ट्र्पतिको आवासको लागि टेलिफोन, कम्प्यूटर, इन्टरनेट, फ्याक्स, पत्रपत्रिका जस्ता सज्चार सुविधा नेपाल सरकारले व्यवस्था गर्नेछ ।
|
| 40 |
+
|
| 41 |
+
**६. पोशाक सुविधा:**
|
| 42 |
+
राष्ट्र्पति र उपराष्ट्र्पतिलाई प्रत्येक वर्ष अनुसूची-१ मा उल्लेख भए बमोजिमको रकम पोशाक भत्ता बापत दिइनेछ ।
|
| 43 |
+
|
| 44 |
+
**७. अतिथि सत्कार तथा भैपरी खर्च:**
|
| 45 |
+
(१) राष्ट्र्पति र उपराष्ट्र्पतिलाई प्रत्येक महिना मासिक पारिश्रमिक बराबरको रकम अतिथि सत्कार तथा भैपरी खर्च बापत दिइनेछ ।
|
| 46 |
+
(२) उपदफा (१) बमोज��मको खर्चको बिल भरपाई पेश गर्नु पर्ने छैन ।
|
| 47 |
+
|
| 48 |
+
**८. निजी चिकित्सक सम्बन्धी सुविधा:**
|
| 49 |
+
राष्ट्र्पति र उपराष्ट्र्पतिको लागि नेपाल सरकारले एक/एक जना निजी चिकित्सकको व्यवस्था गर्नेछ ।
|
| 50 |
+
|
| 51 |
+
**९. उपचार खर्च:**
|
| 52 |
+
(१) राष्ट्र्पति बा उपराष्ट्रपति स्वदेशमा अस्पताल भर्ना भई उपचार गराउँदा बा नेपालमा उपचार हुन नसक्ने भई मेडिकल बोर्डको सिफारिसमा विदेशमा गई उपचार गराउँदा लागेको उपचार खर्च नेपाल सरकारले व्यहोर्नेछ ।
|
| 53 |
+
(२) राष्ट्र्पति बा उपराष्ट्रपति अस्पताल भर्ना भई उपचार गराउँदा कुरुवा बस्नु पर्ने भएमा कुरुवा खर्च बापत तीन जना सम्मको मनासिब खर्च नेपाल सरकारले उपलब्ध गराउनेछ ।
|
| 54 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको उपचार खर्च बापतको रकम प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालयले राष्ट्रपति बा उपराष्ट्रपति भर्ना भएको अस्पताललाई भुक्तानी गर्नेछ ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
**१०. चाडपर्व खर्च:**
|
| 57 |
+
(१) राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिले आफ्नो धर्म, संस्कृति र परम्परा अनुसार मनाइने चाडपर्वको लागि आफूले खाईपाई आएको एक महिनाको पारिश्रमिक बराबरको रकम प्रत्येक बर्ष चाडपर्व खर्चको रूपमा पाउनेछन् ।
|
| 58 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको रकम राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिले एक आर्थिक बर्षमा एक पटक लिन सक्नेछन् ।
|
| 59 |
+
|
| 60 |
+
**११. दैनिक भत्ता तथा भ्रमण खर्च:**
|
| 61 |
+
(१) राष्ट्रपति बा उपराष्ट्रपति आफ्नो ओहोदा सम्बन्धी कामको सिलसिलामा स्वदेश बा विदेशको भ्रमण गर्दाको सम्पूर्ण खर्च नेपाल सरकारले व्यहोर्नेछ ।
|
| 62 |
+
(२) राष्ट्रपति बा उपराष्ट्रपति स्वदेश तथा विदेशको भ्रमण गर्दा अनुसूची-२ मा उल्लेख भए बमोजिमको दैनिक भत्ता पाउनेछन् ।
|
| 63 |
+
|
| 64 |
+
**१२. बीमा सुविधा:**
|
| 65 |
+
राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिलाई सरकारी कामको सिलसिलामा स्वदेश तथा विदेशको भ्रमण गर्दा अनुसूची-२ मा उल्लेख भए बमोजिमको बीमा सुविधा प्राप्त हुनेछ ।
|
| 66 |
+
|
| 67 |
+
**१३. विज्ञ सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 68 |
+
(१) राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिले आफ्नो पदीय काममा सहयोग पुन्याउन बढीमा क्रमशः सात र पाँच जना विज्ञ नियुक्त गर्न सक्नेछन् ।
|
| 69 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नियुक्त हुने विज्ञले पाउने मासिक पारिश्रमिक तथा सुविधा नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोके बमोजिम हुनेछ ।
|
| 70 |
+
(३) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिले नियुक्त गरेका विज्ञ यसै ऐन बमोजिम नियुक्त गरेको मानिनेछ ।
|
| 71 |
+
|
| 72 |
+
**१४. निजी सचिवालय सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 73 |
+
(१) राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिको निजी सचिवालयको लागि अनुसूची-३ बमोजिमका कर्मचारीहरू रहनेछन् ।
|
| 74 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निजी सचिवालयमा काम गर्ने कर्मचारीले नेपाल सरकारले तोके बमोजिमको पारिश्रमिक तथा सुविधा पाउनेछन् ।
|
| 75 |
+
(३) यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिको निजी सचिवालयमा नियुक्त भई कार्यरत कर्मचारीहरू यसै ऐन बमोजिम नियुक्त भएको मानिनेछ ।
|
| 76 |
+
(४) राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिको निजी सचिवालयको लागि आवश्यक पर्ने फर्निचर तथा अन्य भौतिक स्रोत र साधनको व्यवस्था नेपाल सरकारले गर्नेछ ।
|
| 77 |
+
|
| 78 |
+
**१५. शपथः**
|
| 79 |
+
आफ्नो कार्यभार सम्हाल्नु अघि राष्ट्रपतिले प्रधान न्यायाधीश समक्ष र उपराष्ट्रपतिले राष्ट्रपति समक्ष अनुसूची-४ बमोजिमको ढाँचामा पद तथा गोपनीयताको शपथ लिनु पर्नेछ ।
|
| 80 |
+
|
| 81 |
+
**१६. मुद्दा नचलाइने:**
|
| 82 |
+
राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिले आफ्नो पदीय हैसियतले सम्पादन गरेका काम कारबाहीको बिषयमा निज पदमा रहँदा बा सेबा निवृत्त भएपछि निज उपर कुनै अदालतमा मुद्दा चलाइने छैन ।
|
| 83 |
+
|
| 84 |
+
**१७. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 85 |
+
राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिको कार्यालयले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय मार्फत राख्नु पर्नेछ ।
|
| 86 |
+
|
| 87 |
+
**१८. अनुसूचीमा संशोधन:**
|
| 88 |
+
नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी अनुसूचीमा आवश्यक संशोधन गर्न सक्नेछ ।
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
---
|
| 91 |
+
|
| 92 |
+
### अनुसूची-१
|
| 93 |
+
(दफा २ को उपदफा (१) र दफा ६ सँग सम्बन्धित)
|
| 94 |
+
**राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिले पाउने पारिश्रमिक तथा पोशाक सुविधा**
|
| 95 |
+
|
| 96 |
+
| क.सं. | विषय | राष्ट्रपतिको लागि | उपराष्ट्रपतिको लागि |
|
| 97 |
+
| :-- | :-- | :-- | :-- |
|
| 98 |
+
| १. | पारिश्रमिक | प्रति महिना रु. १,४०,४४०।- | प्रति महिना रु. १,०६,०३०।- |
|
| 99 |
+
| २. | पोशाक सुविधा | प्रति बर्ष रु. २४,०००।- | प्रति बर्ष रु. २०,०००।- |
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
---
|
| 102 |
+
|
| 103 |
+
### अनुसूची-२
|
| 104 |
+
(दफा ११ को उपदफा (२) र दफा १२ सँग सम्बन्धित)
|
| 105 |
+
**राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिले पाउने दैनिक भत्ता तथा बीमा**
|
| 106 |
+
|
| 107 |
+
| क्र.सं. | विवरण | रकम |
|
| 108 |
+
| :-- | :-- | :-- |
|
| 109 |
+
| १. | स्वदेशमा भ्रमण गर्दा पाउने दैनिक भत्ता दर | ३,३००।- रुपैयाँ |
|
| 110 |
+
| २. | विदेशमा भ्रमण गर्दा पाउने दैनिक भत्ता दर | २४०।- अमेरिकी डलर |
|
| 111 |
+
| ३. | बीमा | २४,००,०००।- रुपैयाँ |
|
| 112 |
+
|
| 113 |
+
**द्रष्टव्य:**
|
| 114 |
+
१. यूरोपियन मुलुकहरू, अष्ट्रेलिया, न्यूजिल्याण्ड, अमेरिका, क्यानाडा, कुवेत, कोरिया, जापान, हङकङ्ग, रुस, कतार, जाम्बिया, यु. ए. ई., सिङ्गापुर, लेबनान, बहराइनको भ्रमणमा उल्लिखित दरमा तेत��तीस प्रतिशत थप रकम दिइनेछ ।
|
| 115 |
+
|
| 116 |
+
---
|
| 117 |
+
|
| 118 |
+
### अनुसूची-३
|
| 119 |
+
(दफा १४ को उपदफा (१) सँग सम्बन्धित)
|
| 120 |
+
**राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिको निजी सचिवालयका कर्मचारी**
|
| 121 |
+
|
| 122 |
+
| कर्मचारीको पद विवरण | राष्ट्रपति | उपराष्ट्रपति |
|
| 123 |
+
| :-- | :-- | :-- |
|
| 124 |
+
| (क) प्रमुख स्वकीय सचिव (रा. प. विशिष्ट श्रेणी सरह) | १ | १ |
|
| 125 |
+
| (ख) स्वकीय प्रेस सचिव (रा. प. विशिष्ट श्रेणी सरह) | १ | - |
|
| 126 |
+
| (ग) सह स्वकीय सचिव (रा. प. प्रथम श्रेणी सरह) | ३ | १ |
|
| 127 |
+
| (घ) स्वकीय प्रेस संयोजक (रा. प. प्रथम श्रेणी सरह) | - | १ |
|
| 128 |
+
| (ङ) उप स्वकीय सचिव (रा. प. द्वितिय श्रेणी सरह) | २ | १ |
|
| 129 |
+
| (च) स्वकीय अधिकृत (रा. प. तृतीय श्रेणी सरह) | ६ | २ |
|
| 130 |
+
| (च) स्टाफ नर्स (स्वास्थ्य सेवा पाँचौ तह सरह) | २ | - |
|
| 131 |
+
| (ज) कम्प्यूटर सहायक (रा.प. अनडित प्रथम श्रेणी सरह) | २ | १ |
|
| 132 |
+
| (झ) फोटोग्राफर (रा.प. अनडित प्रथम श्रेणी सरह) | १ | १ |
|
| 133 |
+
| (ट) टेलिफोन अपरेटर (रा.प. अनडित द्वितिय श्रेणी सरह) | २ | - |
|
| 134 |
+
| (ठ) सवारी चालक (श्रेणी विहीन) | ४ | ३ |
|
| 135 |
+
| (ड) कार्यालय सहयोगी | ७ | ३ |
|
| 136 |
+
|
| 137 |
+
---
|
| 138 |
+
|
| 139 |
+
### अनुसूची-४
|
| 140 |
+
(दफा १४ सँग सम्बन्धित)
|
| 141 |
+
**शपथ ग्रहणको ढाँचा**
|
| 142 |
+
|
| 143 |
+
म.... ... ... ... ... ... ... मुलुक र जनताप्रति पूर्ण बफादार रही सत्य निष्ठापूर्वक प्रतिज्ञा गर्दछु/ईश्वरको नाममा शपथ लिन्छु कि नेपालको राजकीयसत्ता र सार्वभौमसत्ता नेपाली जनतामा रहेको नेपालको संविधान प्रति पूर्ण बफादार रही पदको कामकाज प्रचलित कानूनको अधीनमा रही मुलुक र जनताको सोझो चिताई, कसैको डर नमानी, पक्षपात नगरी, पूर्वाग्रह बा खराब भावना नलिई इमान्दारिताका साथ सम्पादन गर्नेछु र आफ्नो कर्तव्य पालनको सिलसिलामा आफूलाई जानकारीमा आएको प्रचलित कानून बमोजिम गोप्य राख्नु पर्ने कुरा म पदमा बहाल रहँदा बा नरहँदा जुनसुकै अबस्थामा पनि कानूनको पालना गर्दा बाहेक अरु अबस्थामा कुनै पनि किसिमबाट प्रकट बा सडैत गर्ने छैन ।
|
| 144 |
+
|
| 145 |
+
नाम:
|
| 146 |
+
मितिः
|
| 147 |
+
दस्तखतः
|
| 148 |
+
|
| 149 |
+
**केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७५ द्वारा खारेज ।**
|
section_2_pdf_10.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,256 @@
|
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| 1 |
+
# मेलमिलाप सम्बन्धी ऐन, २०६६
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
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| 4 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
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| 5 |
+
२०६६।०१।२६
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| 6 |
+
१. मेलमिलाप सम्बन्धी (पहिलो संशोधन) ऐन, २०७२
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| 7 |
+
२०७२।१०।१२
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| 8 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
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| 9 |
+
२०७२।११।१३
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| 10 |
+
संबत् २०६६ सालको ऐन नं. २
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| 11 |
+
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| 12 |
+
---
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| 13 |
+
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| 14 |
+
## मेलमिलापको कार्यविधिका सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
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| 15 |
+
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| 16 |
+
**प्रस्तावनाः**
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| 17 |
+
मेलमिलापको माध्यमबाट छिटो, छरितो तथा सरल प्रक्रियाबाट बिबादको समाधान गर्न र बिबाद समाधानको प्रक्रियालाई कम खर्चिलो बनाई न्यायमा सर्वसाधारणको पहुँच बृद्धि गराई सर्वसाधारणको हित र सुविधा कायम गर्न मेलमिलापको कार्यविधिका सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाज्छुनीय भएकोले,
|
| 18 |
+
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| 19 |
+
नेपालको अन्तरिम संविधान, २०६३ को धारा ६३ को उपधारा (१) बमोजिम संविधान सभाले यो ऐन बनाएको छ ।
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| 20 |
+
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| 21 |
+
---
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| 22 |
+
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| 23 |
+
## परिच्छेद-१
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| 24 |
+
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| 25 |
+
### प्रारम्भिक
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| 26 |
+
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| 27 |
+
**१. संक्षित नाम र प्रारम्भः**
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| 28 |
+
(१) यस ऐनको नाम "मेलमिलाप सम्बन्धी ऐन, २०६६" रहेको छ।
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| 29 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको मितिदेखि सोही सूचनामा तोकिएको जिल्लामा प्रारम्भ हुनेछु ।
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| 30 |
+
|
| 31 |
+
**२. परिभाषा:**
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| 32 |
+
बिषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 33 |
+
(क) "अर्धन्यायिक निकाय" भन्नाले अदालत बाहेक मुदाको कारबाही र किनारा गर्न अधिकार पाएको अन्य निकाय सम्झनु पर्छ ।
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| 34 |
+
(ख) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ ।
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| 35 |
+
(ग) "परिषद्" भन्नाले दफा २६ बमोजिम गठन भएको मेलमिलाप परिषद् सम्झनु पर्छ ।
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| 36 |
+
(घ) "पक्ष" भन्नाले बिबादको पक्ष सम्झनु पर्छ र सो शब्दले मुदाको सन्दर्भमा बादी र प्रतिबादी समेतलाई जनाउनेछ ।
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| 37 |
+
(ङ) "प्रमाणपत्र" भन्नाले मेलमिलापकर्ताको रुपमा काम गर्न दफा २१ को उपदफा (१) बमोजिम प्रदान गरिएको प्रमाणपत्र सम्झनु पर्छ ।
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| 38 |
+
(च) "मुद्दा" भन्नाले मुद्दा हेर्ने निकायमा विचाराधीन रहेको बिबाद सम्झनु पर्छ ।
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| 39 |
+
(छ) "मुद्दा हेर्ने निकाय" भन्नाले अदालत सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अर्धन्यायिक निकाय समेतलाई जनाउँछ ।
|
| 40 |
+
(ज) "मेलमिलाप" भन्नाले पक्षहरुले मेलमिलापकर्ताको सहयोगमा बिबाद बा मुदाको निरुपण गर्न अपनाइने प्रक्रिया सम्झनु पर्छ ।
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| 41 |
+
(झ) "मेलमिलापकर्ता" भन्नाले पक्षहरु बीचको बिबादलाई छलफल गराई सहज बाताबरण सृजना गर्न तथा सो विषयमा सहमति कायम गर्नका लागि उत्प्रेरित गर्न यस ऐन बमोजिम नियुक्त मेलमिलापकर्ता सम्���नु पर्छ ।
|
| 42 |
+
(ज) "स्थानीय तह" भन्नाले गाउँपालिका बा नगरपालिका सम्झनु पर्छ ।
|
| 43 |
+
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| 44 |
+
---
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| 45 |
+
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| 46 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 47 |
+
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| 48 |
+
### मेलमिलापद्वारा विवादको समाधान
|
| 49 |
+
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| 50 |
+
**३. मेलमिलापद्वारा विवादको निरुपण हुन सक्ने:**
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| 51 |
+
(१) कुनै सम्झौतामा मेलमिलापद्वारा विवादको समाधान गरिने व्यवस्था भएकोमा त्यस्तो सम्झौता बा सो अन्तर्गत उत्पन्न हुने विवाद सोही सम्झौतामा उल्लेख भएको कार्यविधि पूरा गरी निरुपण गराउनु पर्नेछ ।
|
| 52 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि मुद्दा हेर्ने निकाय समक्ष दायर भएको बा नभएको प्रचलित कानून बमोजिम मिलापत्र हुन सक्ने विवादलाई पक्षहरुले मेलमिलापद्वारा समाधान गर्न चाहेमा यस ऐन बमोजिमको कार्यविधि अपनाई समाधान गर्न सकिनेछ।
|
| 53 |
+
(३) पक्षहरुले मुद्दा हेर्ने निकायमा दायर भएको मुद्दालाई उपदफा (२) बमोजिम मेलमिलापद्वारा समाधान गर्न चाहेमा सोही व्यहोरा उल्लेख गरी जुनसुकै बखत सम्बन्धित मुद्दा हेर्ने निकाय समक्ष निवेदन दिन सक्नेछुन् र त्यस्तो निवेदन प्राप्त हुन आएमा मुद्दा हेर्ने निकायले त्यस्तो मुद्दा जुनसुकै तहमा रहेको भए पनि मेलमिलापबाट निरुपण गर्न आदेश दिनेछ ।
|
| 54 |
+
(४) मुद्दा हेर्ने निकाय समक्ष दायर भएको कुनै मुद्दा मेलमिलापको कार्यविधिबाट निरुपण हुन उपयुक्त छ भन्ने मुद्दा हेर्ने निकायलाई लागेमा मुद्दा हेर्ने निकायले मेलमिलापद्वारा विवादको निरुपण गर्ने आदेश दिन सक्नेछ ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
**४. मेलमिलापकर्ताको नियुक्ति:**
|
| 57 |
+
(१) सम्झौतामा मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्ने व्यवस्था भएकोमा सोही बमोजिम र त्यस्तो व्यवस्था नभएकोमा यस ऐन बमोजिम मेलमिलापकर्ताको नियुक्ति गर्नु पर्नेछ।
|
| 58 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम मेलमिलापकर्ता नियुक्ति गर्दा पक्षहरुले आपसी सहमतिबाट नियुक्ति गर्नु पर्नेछ ।
|
| 59 |
+
|
| 60 |
+
**५. मेलमिलापकर्ताको संख्या:**
|
| 61 |
+
(१) सम्झौतामा मेलमिलापकर्ताको संख्या तोकिएकोमा सोही बमोजिम र नतोकिएकोमा पक्षहरुको सहमतिबाट एकजना बा तीनजना मेलमिलापकर्ताको संख्या निर्धारण गरी नियुक्त गरिनेछ ।
|
| 62 |
+
(२) एकजना मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्न पक्षहरु सहमत भएकोमा दुबै पक्षको सहमतिबाट र तीनजना मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्नु परेमा प्रत्येक पक्षले एकजना र पक्षहरु आफैले बा त्यसरी नियुक्ति भएका दुईजना मेलमिलापकर्ताले तेस्रो मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्नेछन् ।
|
| 63 |
+
(३) तीनजना मेलमिलापकर्ता नियुक्त भएकोमा तेस्रो मेलमिलापकर्ताले संयोजक भई काम गर्नेछ ।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
**६. मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्न सहायता लिन सकिने:**
|
| 66 |
+
(१) मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्नको लागि मेलमिलाप सम्बन्धी काम गर्ने कुनै संस्थाले छुट्टै नियमावली बा कार्यविधिको व्यवस्था गरेकोमा पक्षहरुले त्यस्तो नियमावली बा कार्यविधि बमोजिम मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्न सक्नेछन् ।
|
| 67 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्न पक्षहरुले आफैले बा अदालतको आदेश बमोजिम मेलमिलापकर्ता हुने व्यक्तिको नाम नियुक्तिका लागि सिफारिस गरी पठाउन त्यस्तो संस्थालाई अनुरोध गर्न सक्नेछन् ।
|
| 68 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम अनुरोध भएकोमा त्यस्तो संस्थाले बिबादको प्रकृति र मेलमिलाप गर्नु पर्ने बिषय, मेलमिलापकर्ता हुने व्यक्तिको योग्यता, दक्षता र निष्पक्षता बहन गर्न सक्ने क्षमता र अन्तर्राष्ट्रिय प्रकृतिको बिबाद भए मेलमिलापकर्ता हुने व्यक्तिको राष्ट्रियता समेत बिचार गरी उपयुक्त व्यक्तिको नाम सिफारिस गर्न बा उपयुक्त व्यक्तिलाई नियुक्त गर्नेछ।
|
| 69 |
+
(४) यस दफामा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि बिबादका पक्षहरुले मेलमिलापकर्ता नियुक्तिका सम्बन्धमा स्थानीय तहको सहायता लिन चाहमा सम्बन्धित स्थानीय तहको सहायता लिन सक्नेछन्।
|
| 70 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिम सहायता दिने प्रयोजनका लागि स्थानीय तहले यस ऐन बमोजिम योग्यता पुगेका मेलमिलापकर्ताको सूची तयार गरी राख्नेछ र त्यस्तो सूचीमा समावेश भएका व्यक्तिहरुमध्येबाट पक्षहरुसँग परामर्श गरी उपयुक्त व्यक्तिलाई मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्न सहायता गर्नेछ।
|
| 71 |
+
|
| 72 |
+
**७. मुद्दा हेर्ने निकायबाट मेलमिलापकर्ता नियुक्ति हुने:**
|
| 73 |
+
(१) दफा ५ बा ६ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा ३ को उपदफा (४) बमोजिम मुद्दा हेर्ने निकायबाट मेलमिलापको कार्यबिधि पूरा गरी बिबादको समाधान गर्न आदेश भएकोमा बा दफा ५ बमोजिम मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्न पक्षहरु असमर्थ भएकोमा मेलमिलापकर्ताको नाम पेश गर्न मुद्दा हेर्ने निकायले निश्चित समयावधि तोकी सम्बन्धित पक्षलाई आदेश दिनेछ ।
|
| 74 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम आदेश भएकोमा सोही आदेशमा तोकिएको अबधिभित्र सम्बन्धित पक्षहरुले आपसी सहमतिबाट मेलमिलापकर्ताको नाम मुद्दा हेर्ने निकाय समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ र पक्षहरुबीच सहमति भई नाम पेश गरेको व्यक्तिलाई मुद्दा हेर्ने निकायले मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्नेछ् ।
|
| 75 |
+
|
| 76 |
+
**८. विशेष परिस्थितिमा मेलमिलापकर्ताको नियुक्ति:**
|
| 77 |
+
(१) मेलमिलापकर्ताको रुपमा नियुक्त भएको कुनै व्यक्तिले मेलमिलापकर्ताको रुपमा काम गर्न इन्कार गरेमा, काम गर्न असमर्थ भएमा, निजले राजीनामा दिएमा, निजको मृत्यु भएमा बा अन्य कुनै कारणबाट मेलमिलापकर्ताको स्थान रिक्त हुन गएमा जुन प्रक्रियाबाट मेलमिलापकर्ता नियुक्त भएको हो सोही प्रक्रिया पूरा गरी पक्षहरुले सहमति कायम गरेको अबधिभित्र अर्को मेलमिलापकर्ता नियुक्त गरिनेछ ।
|
| 78 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम मेलमिलापकर्ता नियुक्त हुन नसकेमा दफा ७ बमोजिमको प्रक्रिया पूरा गरी मेलमिलापकर्ता नियुक्त गरिनेछ ।
|
| 79 |
+
|
| 80 |
+
**९. मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्न आदेश दिने:**
|
| 81 |
+
(१) यस परिच्छेदमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा ३ को उपदफा (३) बा (४) बमोजिम मेलमिलापद्वारा बिबादको समाधान गर्नु पर्दा त्यस्तो मुद्दा हेर्ने निकायले मेलमिलापकर्ता नियुक्त गर्न आदेश दिनेछ ।
|
| 82 |
+
|
| 83 |
+
**१०. मेलमिलापकर्ता भई काम गर्न नचाहेमा सूचना दिनु पर्ने:**
|
| 84 |
+
यस परिच्छेद बमोजिम मेलमिलापकर्ताको रुपमा नियुक्त भएको व्यक्तिले मेलमिलापकर्ता भई काम गर्न नचाहेमा आफूले नियुक्तिको सूचना पाएको सात दिनभित्र सोको लिखित जानकारी मुद्दा हेर्ने निकायलाई दिनु पर्नेछ ।
|
| 85 |
+
|
| 86 |
+
**११. मेलमिलापकर्ताले जानकारी गराउने:**
|
| 87 |
+
(१) यस परिच्छेद बमोजिम मेलमिलापकर्ता नियुक्त भएको व्यक्तिले स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष रुपमा काम गर्न नसक्ने प्रकृतिको बिबाद भएमा बा त्यसरी काम गर्न नसक्ने मनासिब शङ्गा गर्न सकिने कुनै परिस्थिति भएमा निजले यथाशीघ्र लिखित रुपमा सो कुराको जानकारी बिबादका पक्ष र मुद्दा हेर्ने निकायबाट आदेश भएको बिबादका हकमा त्यस्तो मुद्दा हेर्ने निकायलाई गराउनु पर्नेछ ।
|
| 88 |
+
|
| 89 |
+
**१२. मेलमिलापकर्ताले पालना गर्नु पर्ने कुराहरु:**
|
| 90 |
+
मेलमिलापकर्ताले आफ्नो काम कारबाहीको सिलसिलामा देहायका कुराहरु पालना गर्नु पर्नेछ:-
|
| 91 |
+
(क) मेलमिलाप सम्बन्धी काम कारबाही निष्पक्ष रुपले गर्नु पर्ने,
|
| 92 |
+
(ख) कुनै पक्षप्रति झुकाव, आग्रह, पूर्वाग्रह बा सो देखिने कुनै व्यवहार गर्न नहुने,
|
| 93 |
+
(ग) कुनै पक्षलाई डर, बास, झुक्यान बा प्रलोभनमा पारी मेलमिलाप गराउन नहुने,
|
| 94 |
+
(घ) बिबादका कुनै पक्षसँग बिबाद कायम रहेको बखत आर्थिक लेनदेन भएको हुन नहुने,
|
| 95 |
+
(ङ) मेलमिलाप गराउने सम्बन्धमा यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत कुन��� काम गर्न नहुने,
|
| 96 |
+
(च) मेलमिलाप सम्बन्धी काम कारबाहीको सिलसिलामा पक्षसँग आर्थिक तथा अन्य स्वार्थजन्य कुनै काम कारबाही बा लेनदेन व्यवहार गर्न नहुने,
|
| 97 |
+
(छ) मेलमिलापको कार्य सम्पादन गर्दा पालना गर्नु पर्ने आचारसंहिता पालना गर्ने ।
|
| 98 |
+
|
| 99 |
+
**१३. मेलमिलापकर्तालाई हटाउन सकिने:**
|
| 100 |
+
(१) मेलमिलापकर्ताको रुपमा नियुक्त भएको व्यक्ति दफा २२ बमोजिम योग्य नभएको कुरा निज नियुक्त भएपछि थाहा हुन आएमा पक्षहरु आफैले मेलमिलापकर्ता नियुक्त गरेको भए आफैले, कुनै संस्थाद्वारा मेलमिलापकर्ता नियुक्त गरेको भए सो संस्था मार्फत् र मुद्दा हेर्ने निकायले नियुक्त गरेको भए त्यस्तो निकायले सो मेलमिलापकर्तालाई तुरुन्त हटाउनु पर्नेछ।
|
| 101 |
+
(२) कुनै मेलमिलापकर्ताले देहाय बमोजिमको कुनै काम गरेको कुरा कुनै पक्षले दिएको उजूरीबाट देखिएमा बा मुद्दा हेर्ने निकाय स्वयंलाई कुनै स्रोतबाट सो कुराको जानकारी हुन आएमा मुद्दा हेर्ने निकायले त्यस्तो मेलमिलापकर्तालाई जुनसुकै बखत हटाउन सक्नेछ:-
|
| 102 |
+
(क) निजले दफा १२ बमोजिमका कुराहरु पालना नगरेमा,
|
| 103 |
+
(ख) निजले बिबादको बिषयवस्तु बा बिबादका पक्षहरुसँग अनुचित बा जालसाजपूर्ण तबरले कुनै काम कारबाही गरेमा,
|
| 104 |
+
(ग) निजको काम कारबाही बा मेलमिलापको प्रक्रियामा बराबर बुटि बा अनियमितता देखिएमा,
|
| 105 |
+
(घ) निजले मेलमिलाप सम्बन्धी काम कारबाही अनावश्यक रुपमा लम्ब्याएमा, ढिलो गरेमा बा मेलमिलाप सम्बन्धी काम कारबाहीमा अभिरुची नदेखाएमा,
|
| 106 |
+
(ड) पक्षहरुको अनुमति बिना निजहरुको हित प्रतिकूल हुने गरी मेलमिलापको प्रक्रियागत बिषयमा भएका कुराहरुको गोपनीयता भङ्ग गरेमा ।
|
| 107 |
+
|
| 108 |
+
---
|
| 109 |
+
|
| 110 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 111 |
+
|
| 112 |
+
### मेलमिलाप सम्बन्धी कार्यबिधि
|
| 113 |
+
|
| 114 |
+
**१४. मेलमिलापको कार्यबिधि प्रारम्भ हुने:**
|
| 115 |
+
(१) अदालतमा दायर नभएको बिबादको सम्बन्धमा कुनै एक पक्षले अर्को पक्षलाई सूचना दिएमा, दफा ३ को उपदफा (३) बमोजिमको बिबादको सम्बन्धमा त्यस्तो बिबादका पक्षहरुले सम्बन्धित मुद्दा हेर्ने निकाय समक्ष निबेदन दिएमा बा दफा ३ को उपदफा (४) को बिबादको सम्बन्धमा मुद्दा हेर्ने निकायले मेलमिलापद्वारा बिबादको समाधान गर्न आदेश दिएमा मेलमिलापको कार्यबिधि प्रारम्भ भएको मानिनेछ ।
|
| 116 |
+
|
| 117 |
+
**१५. बिबाद समाधान सम्बन्धी कार्यबिधि:**
|
| 118 |
+
(१) मेलमिलापद्वारा बिबाद समाधान गर्ने कार्यबिधि सम्बन्धित पक्षहरुले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ ।
|
| 119 |
+
(२) मेलमिलाप सम्��न्धी कार्य गर्ने कुनै संस्थाले बनाएको नियमाबली बा अपनाएको कार्यबिधि बमोजिम मेलमिलापद्वारा बिबाद समाधान गर्ने सम्बन्धमा पक्षहरुबीच सहमति भएकोमा त्यस्तो नियमाबली बा कार्यबिधि बमोजिम बिबादको समाधान गरिनेछ ।
|
| 120 |
+
(३) दफा ३ को उपदफा (४) बमोजिम मुद्दा हेर्ने निकायको आदेश बमोजिम मेलमिलापद्वारा बिबादको समाधान गर्दा सम्बन्धित मुद्दा हेर्ने निकायले कुनै कार्यबिधि निर्धारण गरेको बा त्यस्तो कार्यबिधि अपनाउन आदेश गरेको रहेछ भने त्यस्तो कार्यबिधि बमोजिम मेलमिलापद्वारा बिबादको समाधान गरिनेछ ।
|
| 121 |
+
|
| 122 |
+
**१६. बिबादको निरुपण:**
|
| 123 |
+
(१) दफा १४ बमोजिमको कार्यबिधि अपनाउँदा पक्षहरु बिबादको मेलमिलाप गर्न सहमत भएमा मेलमिलापकर्ताले सो ब्यहोरा उल्लेख गरी मेलमिलापको लिखत खडा गरी सो कागजमा पक्षहरुको सहीछाप गर्न लगाई आफ्नो समेत सही गर्नु पर्नेछ।
|
| 124 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको लिखत प्रत्येक पक्षलाई एक/एक प्रति उपलब्ध गराउनु पर्नेछ ।
|
| 125 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम मेलमिलापको लिखत भएकोमा बिबादको निरुपण भएको मानिनेछ् ।
|
| 126 |
+
|
| 127 |
+
**१७. मेलमिलापको कार्यबिधि अन्त्य हुने:**
|
| 128 |
+
देहायको अबस्थामा मेलमिलापको कार्यबिधि अन्त्य हुनेछ:-
|
| 129 |
+
(क) दफा १४ बमोजिम मेलमिलाप सम्बन्धी कार्यबिधि अपनाउँदा पक्षहरु मेलमिलाप गर्न मञ्जूर नभएमा,
|
| 130 |
+
(ख) मुद्दा हेर्ने निकायले तोकेको मितिमा पक्षहरु मेलमिलापकर्ता समक्ष उपस्थित नभएमा,
|
| 131 |
+
(ग) मेलमिलापकर्ताद्वारा छलफलको लागि तोकिएको मितिमा कुनै पक्ष उपस्थित नभई मेलमिलापको कार्य अघि बढ्न नसकेमा,
|
| 132 |
+
(घ) मेलमिलापको शर्तसँग पक्षहरु मञ्जूर भई लिखत खडा भएमा ।
|
| 133 |
+
|
| 134 |
+
**१८. प्रतिवेदन दिनु पर्ने:**
|
| 135 |
+
(१) दफा १७ को खण्ड (क), (ख) बा (ग) को अवस्थामा दफा ३ को उपदफा (३) बा (४) बमोजिम नियुक्त भएको मेलमिलापकर्ताले सात दिनभित्र सो व्यहोराको प्रतिवेदन मुद्दा हेर्ने निकाय समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 136 |
+
|
| 137 |
+
**१९. विवाद हेर्न नहुने:**
|
| 138 |
+
यस ऐन बमोजिम कुनै विवादमा मेलमिलापकर्ता भई कार्य गरेको व्यक्ति सोही पक्षहरुबीच सोही विवादमा कानून व्यवसायी, मध्यस्थकर्ता बा न्यायाधीशको रुपमा विवादको सुनुवाई गर्न योग्य मानिने छैन ।
|
| 139 |
+
|
| 140 |
+
---
|
| 141 |
+
|
| 142 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 143 |
+
|
| 144 |
+
### मेलमिलापकर्ताको प्रमाणपत्र तथा त्यसको नियमन सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 145 |
+
|
| 146 |
+
**२०. प्रमाणपत्रको लागि निवेदन दिनु पर्ने:**
|
| 147 |
+
(१) दफा ३ को उपदफा (४) बा दफा ९ को उपदफा (२) को प्रयोजनको लागि मेलमिलापकर्ताको रुपमा काम गर्�� चाहने व्यक्तिले प्रमाणपत्रको लागि तोकिए बमोजिमको ढाँचामा परिषद् समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ ।
|
| 148 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निवेदन दिने व्यक्तिले निवेदन साथ नागरिकताको प्रमाणपत्र र मेलमिलापकर्ता हुनको लागि आवश्यक योग्यताको प्रमाणपत्रको प्रतिलिपि संलग्न गर्नु पर्नेछ।
|
| 149 |
+
|
| 150 |
+
**२१. प्रमाणपत्र सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 151 |
+
(१) दफा २० बमोजिम प्राप्त भएको निवेदन जाँचबुझ गर्दा निवेदन दिने व्यक्तिलाई मेलमिलापकर्ताको प्रमाणपत्र दिन मनासिब देखिएमा परिषद्ले तोकिएको ढाँचामा प्रमाणपत्र दिनेछ् ।
|
| 152 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दिइएको प्रमाणपत्र तीन बर्षका लागि कायम रहनेछ र त्यस्तो प्रमाणपत्र तोकिए बमोजिम नवीकरण हुन सक्नेछ ।
|
| 153 |
+
|
| 154 |
+
**२२. मेलमिलापकर्ताको योग्यता:**
|
| 155 |
+
(१) देहायको व्यक्ति मेलमिलापकर्ता हुन योग्य हुनेछ:-
|
| 156 |
+
(क) नेपाली नागरिक,
|
| 157 |
+
(ख) पच्चीस बर्ष उमेर पूरा भएको,
|
| 158 |
+
(ग) मान्यता प्राप्त शैक्षिक संस्थाबाट कम्तीमा स्नातक गरेको,
|
| 159 |
+
(घ) मेलमिलाप सम्बन्धी तोकिएको अबधिको तालीम लिएको,
|
| 160 |
+
(ङ) होस ठेगानमा रहेको,
|
| 161 |
+
(च) नैतिक पतन देखिने फौजदारी अभियोगमा अदालतबाट सजाय नपाएको,
|
| 162 |
+
(छ) साहूको दामासाहीमा नपरेको,र
|
| 163 |
+
(ज) यस ऐन बिपरीत कुनै काम गरेको कारण मेलमिलापकर्ताको सूचीबाट नाम नहटाइएको ।
|
| 164 |
+
|
| 165 |
+
---
|
| 166 |
+
|
| 167 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 168 |
+
|
| 169 |
+
### परिषद्को गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 170 |
+
|
| 171 |
+
**२६. परिषद्को गठन:**
|
| 172 |
+
(१) मेलमिलापबाट विवाद समाधान गर्ने कार्यविधिको नियमित सुधार, परिमार्जन, नियमन तथा नियन्त्रण गर्ने कार्य समेतको लागि देहाय बमोजिमको एक मेलमिलाप परिषद् गठन हुनेछ:-
|
| 173 |
+
(क) न्याय परिषद्को सिफारिसमा प्रधान न्यायाधीशले तोकेको सर्वोच्च अदालतको बहालबाला न्यायाधीश - अध्यक्ष
|
| 174 |
+
(ख) सचिव, कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालय - सदस्य
|
| 175 |
+
(ग) सचिव, सड्डीय मामिला तथा स्थानीय विकास मन्त्रालय - सदस्य
|
| 176 |
+
(घ) नायब महान्यायाधिवक्ता, महान्यायाधिवक्ताको कार्यालय - सदस्य
|
| 177 |
+
(ङ) महासचिव, नेपाल बार एशोसिएशन - सदस्य
|
| 178 |
+
(च) उद्योग बाणिज्य क्षेत्रमा कार्यरत संघ संस्थाका प्रतिनिधिहरुमध्येबाट परिषद्ले तोकेको एकजना - सदस्य
|
| 179 |
+
(छ) मेलमिलापकर्ता बा मेलमिलाप कार्यमा संलग्न संस्थाका प्रतिनिधि बा मेलमिलापका क्षेत्रमा कार्य गर्ने व्यत्तिहरुमध्येबाट परिषद्ले तोकेको दुईजना महिला - सदस्य
|
| 180 |
+
(ज) समाजसेवी तथा नागरिक समाजका प्रतिनिधिहरुमध्येबाट परिषद्ले तोकेका कम्तीमा एकजना महिला सहित दुईजना - सद���्य
|
| 181 |
+
(झ) रजिष्ट्रार, सर्वोच्च अदालत - सदस्य-सचिव
|
| 182 |
+
|
| 183 |
+
**२७. परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 184 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएदेखि बाहेक परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 185 |
+
(क) मेलमिलापद्वारा बिबादको निरुपण गर्न प्रोत्साहन हुने बिभिन्न कार्यकमहरु सञ्चालन गर्ने बा गराउने,
|
| 186 |
+
(ख) मेलमिलापद्वारा बिबाद समाधानको कार्यबिधिको सरलीकरण गरी त्यस्तो कार्यबिधिको व्यापक प्रयोगका लागि प्रचलित कानूनमा सुधार गर्न नेपाल सरकारलाई सुझाव दिने,
|
| 187 |
+
(ग) मेलमिलापकर्ताको लागि दिइने तालीमको पाठ्यकम स्बीकृत गर्ने तथा त्यस्तो तालीम सञ्चालन गर्न संस्था तोक्ने,
|
| 188 |
+
(घ) मेलमिलाप सम्बन्धी सेबा प्रदान गर्ने संस्थाको संस्थागत क्षमता एवं तालीमको गुणस्तरको अनुगमन र मूल्याइन गर्ने,
|
| 189 |
+
(ङ) मेलमिलापकर्ताको दक्षता अभिबुद्धिको लागि तालीम तथा अन्तरक्रिया कार्यकम सञ्चालन गराउने,
|
| 190 |
+
(च) स्थानीय स्तरमा सामुदायिक मेलमिलापको स्थायी संरचनाको प्रारुप तयार गरी कार्यान्वयनको लागि नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 191 |
+
(छ) मेलमिलापकर्ताको काम कारबाहीको अनुगमन गर्ने बा गराउने,
|
| 192 |
+
(ज) मेलमिलापकर्ताले आचारसंहिता पालना गरे बा नगरेको सम्बन्धमा ज्ञानबिन गराउने र पालना नगरेको अवस्थामा कारबाही गर्ने,
|
| 193 |
+
(झ) मेलमिलाप सम्बन्धी अन्य काम कारबाही गर्ने बा गराउने ।
|
| 194 |
+
|
| 195 |
+
---
|
| 196 |
+
|
| 197 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 198 |
+
|
| 199 |
+
### सामुदायिक मेलमिलाप सम्बन्धी विशेष व्यवस्था
|
| 200 |
+
|
| 201 |
+
**३३. समुदायमा आधारित विवाद समाधान:**
|
| 202 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम मेलमिलापद्वारा निरुपण हुन सक्ने विवादको समुदायमा आधारित मेलमिलाप सम्बन्धी संयन्त्रद्वारा पनि समाधान गर्न सकिनेछ।
|
| 203 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम विवाद समाधान गर्न सहज पुन्याउन सम्बन्धित समुदायले विवाद उत्पन्न भएपछि बा विवाद उत्पन्न हुनु अघि नै मेलमिलापकर्ताको समूह तयार गर्न सक्नेछ ।
|
| 204 |
+
|
| 205 |
+
**३४. सामुदायिक मेलमिलाप:**
|
| 206 |
+
(१) समुदायमा आधारित मेलमिलापद्वारा बिबादको निरुपण गर्न सहज पुर्याउँदा आवश्यक संख्यामा मेलमिलापकर्ता रहनेछन् ।
|
| 207 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका मेलमिलापकर्ताले पक्षहरुलाई बिबाद समाधान गर्न सहायता पुर्याउनेछन् ।
|
| 208 |
+
|
| 209 |
+
---
|
| 210 |
+
|
| 211 |
+
## परिच्छेद-७
|
| 212 |
+
|
| 213 |
+
### विविध
|
| 214 |
+
|
| 215 |
+
**३६. पक्षको कर्तव्य:**
|
| 216 |
+
मुद्दा हेर्ने निकायको आदेश बमोजिम तोकिएको मिति र समयमा मेलमिलापकर्ता समक्ष उपस्थित हुनु तथा मेलमिलाप सम्बन्धी कारबाहीको सिलसिलामा मेलमिलापकर्ताले उपस्थित हुन तोकेको स्थ���न र मितिमा उपस्थित भई मेलमिलापको कारबाहीमा भाग लिनु पक्षको कर्तव्य हुनेछ ।
|
| 217 |
+
|
| 218 |
+
**३७. मेलमिलाप सम्बन्धी प्रक्रिया गोप्य राख्नु पर्ने:**
|
| 219 |
+
पक्षहरुले अन्यथा व्यवस्था गरेको वा प्रचलित कानूनमा अन्यथा व्यवस्था भएकोमा बाहेक मेलमिलापकर्ताले गरेको मेलमिलाप सम्बन्धी सबै प्रक्रिया गोप्य राख्नु पर्नेछ ।
|
| 220 |
+
|
| 221 |
+
**३८. प्रमाण नलाग्ने:**
|
| 222 |
+
प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यस ऐन बमोजिम मेलमिलापबाट बिबाद निरुपण गर्ने सिलसिलामा कुनै पक्षले व्यक्त गरेको कुरा त्यस्तो पक्ष बादी बा प्रतिबादी भई चलेको मुद्दामा प्रमाण लाग्ने छैन ।
|
| 223 |
+
|
| 224 |
+
**३९. मेलमिलापको परिणाम बाध्यात्मक हुने:**
|
| 225 |
+
यस ऐन बमोजिम मेलमिलापबाट बिबाद निरुपण भएकोमा सोको परिणाम पक्षहरुलाई बाध्यात्मक हुनेछ र पक्षहरुले कार्यान्वयन गर्नु पर्नेछ।
|
| 226 |
+
|
| 227 |
+
**४०. मिलापत्रको कार्यान्वयन:**
|
| 228 |
+
(१) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा ३ को उपदफा (३) बा (४) बमोजिमको बिबादका सम्बन्धमा यस ऐन बमोजिम मिलापत्र भएको मितिले पैतालीस दिनभित्र सम्बन्धित पक्षले त्यस्तो मिलापत्र कार्यान्वयन गर्नु पर्नेछ ।
|
| 229 |
+
|
| 230 |
+
**४१. सहजकर्ताको भूमिका निर्वाह गर्नु पर्ने:**
|
| 231 |
+
(१) मेलमिलापकर्ताले बिबादको समाधान गर्दा मैत्रीपूर्ण तबरबाट बिबाद समाधान गर्न पक्षहरुलाई स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष तरिकाले सहयोग गर्नु पर्नेछ।
|
| 232 |
+
|
| 233 |
+
**४२. मेलमिलापकर्ताले जानकारी प्रकट गर्न नहुने:**
|
| 234 |
+
मेलमिलापका प्रक्रियाको सिलसिलामा पक्षले दिएको कुनै जानकारी बा मेलमिलापको क्रममा मेलमिलापकर्तालाई जानकारी हुन आएको कुनै व्यहोरा बा तथ्य कुनै पनि पक्षहरुको हित प्रतिकूल हुने गरी प्रकट गर्नु हुँदैन ।
|
| 235 |
+
|
| 236 |
+
**४३. पारिश्रमिक:**
|
| 237 |
+
(१) कुनै मेलमिलापकर्ताले मेलमिलापकर्ताको रुपमा काम गरे बापत दुवै पक्षको मञ्जूरी भएमा तोकिएको रकममा नबढाई पारिश्रमिक लिन सक्नेछ।
|
| 238 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पक्षको मञ्जूरी नभएमा मेलमिलापकर्ताले मेलमिलाप गरे बापत परिषद्ले निर्धारण गरे बमोजिमको पारिश्रमिक पाउनेछ् ।
|
| 239 |
+
|
| 240 |
+
**४४. मेलमिलापकर्ता उपर कारबाही नगरिने:**
|
| 241 |
+
कुनै मेलमिलापकर्ताले आफ्नो कर्तव्य पालनको सिलसिलामा असल नियत लिई गरेको काम कारबाहीको सम्बन्धमा त्यस्तो मेलमिलापकर्ता उपर कुनै कानूनी कारबाही चलाइने छैन ।
|
| 242 |
+
|
| 243 |
+
**४५. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 244 |
+
परिषद्ले यस ऐन बमोजिम आफूलाई प्राप्त भएको अधिकारमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार कुनै निकाय बा अधिकारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 245 |
+
|
| 246 |
+
**४६. मेलमिलापको लागि स्थानीय तह समक्ष मुद्दा पठाउन सक्ने:**
|
| 247 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि स्थानीय स्वायत्त शासन ऐन, २०४४ बमोजिम मध्यस्थताद्वारा बिबाद समाधान गर्ने विषयमा यस ऐनमा लेखिएको कुनै कुराले बाधा पुए्याएको मानिने छैन।
|
| 248 |
+
|
| 249 |
+
**४७. आचारसंहिता बनाई लागू गर्न सक्ने:**
|
| 250 |
+
परिपद्ले मेलमिलापकर्ताले पालना गर्नु पर्ने आचारसंहिता बनाई लागू गर्न सक्नेछु ।
|
| 251 |
+
|
| 252 |
+
**४८. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 253 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्नको लागि नेपाल सरकारले सर्वोच्च अदालतसँग परामर्श गरी आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछु।
|
| 254 |
+
|
| 255 |
+
केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा संशोधित।
|
| 256 |
+
यो ऐन हाल खारेज भएको ।
|
section_2_pdf_11.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,404 @@
|
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# न्याय परिषद ऐन, २०७३
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## प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
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| 4 |
+
२०७३।०४।२७
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| 5 |
+
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| 6 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
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| 7 |
+
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| 8 |
+
केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
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| 9 |
+
२०६२।०४।१४
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| 10 |
+
संबत् २०७३ को ऐन नं. ६
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| 11 |
+
न्याय परिषदको काम, कर्तव्य र अधिकार सम्बन्धी कानूनलाई संशोधन र एकीकरण गर्न बनेको ऐन
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| 12 |
+
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| 13 |
+
### प्रस्तावना
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| 14 |
+
न्यायाधीशको नियुक्ति, सरुवा, अनुशासन सम्बन्धी कारबाही, बर्खासी र न्याय प्रशासन सम्बन्धी अन्य बिषयमा सिफारिस गर्ने बा परामर्श दिने सम्बन्धमा न्याय परिषदको काम, कर्तव्य र अधिकार सम्बन्धी प्रचलित कानूनलाई संशोधन र एकीकरण गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
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| 15 |
+
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| 16 |
+
नेपालको संविधानको धारा २९६ को उपधारा (१) बमोजिमको व्यवस्थापिका-संसद्ले यो ऐन बनाएको छ।
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| 17 |
+
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| 18 |
+
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+
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| 20 |
+
### १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ
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| 21 |
+
(१) यस ऐनको नाम "न्याय परिषद ऐन, २०७३" रहेको छ।
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| 22 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
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+
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| 24 |
+
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| 25 |
+
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| 26 |
+
### २. परिभाषा
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| 27 |
+
बिषय र प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 28 |
+
(क) "अदालत" भन्नाले सर्वोच्च अदालत, उच्च अदालत र जिल्ला अदालत सम्झनु पर्छ।
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| 29 |
+
(ख) "अध्यक्ष" भन्नाले न्याय परिषदको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
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| 30 |
+
(ग) "जाँचबुझ समिति" भन्नाले दफा १९. बमोजिमको जाँचबुझ समिति सम्झनु पर्छ।
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| 31 |
+
(घ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
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| 32 |
+
(ङ) "न्याय परिषद" भन्नाले संविधानको धारा १४३ बमोजिमको न्याय परिषद सम्झनु पर्छ।
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| 33 |
+
(च) "न्यायाधीश" भन्नाले अदालतको न्यायाधीश सम्झनु पर्छ।
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| 34 |
+
(छ) "सदस्य" भन्नाले न्याय परिषदको सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले न्याय परिषदको अध्यक्षलाई समेत जनाउँछ।
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| 35 |
+
(ज) "संविधान" भन्नाले नेपालको संविधान सम्झनु पर्छ।
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| 36 |
+
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| 37 |
+
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| 38 |
+
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| 39 |
+
### ३. अभिलेख तयार गर्ने
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| 40 |
+
(१) न्याय परिषदले संविधान बमोजिम न्यायाधीशको पदमा नियुक्ति हुन योग्यता पुगेका नेपाली नागरिकहरुको अभिलेख तयार गरी राख्नु पर्नेछ।
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| 41 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि न्याय परिषदले सर्वोच्च अदालत, न्याय सेवा आयोग, कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालय, महान्यायाधिवक्ताको कार्यालय, नेपाल कानून व्यवसायी परिषद लगायतका अन्य उपयुक्त संस्था समेतबाट संविधान बमोजिम न्यायाधीशको पदमा नियुक्त हुन योग्यता पुगेका व्यक्तिको विवरण माग गर्न सक्नेछ।
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| 42 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम प्राप्त हुने विवरणका अतिरिक्त न्याय परिषदले सार्वजनिक स��चना प्रकाशन गरी संविधान बमोजिम न्यायाधीशको पदमा नियुक्त हुन योग्यता पुगेका व्यक्ति र यो ऐन प्रारम्भ हुनु अगाडि कुनै अदालतको न्यायाधीश बा पुनरावेदन अदालतको अतिरिक्त न्यायाधीश भई काम गरेका संविधान बमोजिम न्यायाधीशको पदमा नियुक्ति हुन सक्ने व्यक्तिको विवरण सङ्कलन गर्नेछ।
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| 43 |
+
(४) यस दफा बमोजिमको अभिलेख न्याय परिषदको सचिवको जिम्मामा रहनेछ।
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| 44 |
+
(५) यस दफा बमोजिमको अभिलेख गोप्य रहनेछ र न्याय परिषदको काममा बाहेक अन्य काममा प्रयोग गरिने छैन।
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| 45 |
+
(६) यस दफा बमोजिम अभिलेख राख्ने सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 46 |
+
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| 47 |
+
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| 48 |
+
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| 49 |
+
### ४. नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्ने अबधि
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| 50 |
+
(१) न्याय परिषदले उमेरको हदबाट अबकाश हुने सर्वोच्च अदालतका न्यायाधीशको पद यकिन गरी त्यस्तो पद रिक्त हुनुभन्दा कम्तीमा एक महिना अगाडि नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्नेछ।
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| 51 |
+
(२) उमेरको हदबाट अबकाश भएकोमा बाहेक अन्य कारणबाट सर्वोच्च अदालतको न्यायाधीशको पद रिक्त हुन आएमा न्याय परिषदले त्यस्तो पद रिक्त भएको मितिले एक महिनाभित्र नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्नेछ।
|
| 52 |
+
(३) उच्च अदालतको मुख्य न्यायाधीश बा न्यायाधीशको पद रिक्त हुन आएमा न्याय परिषदले त्यस्तो पद रिक्त भएको मितिले तीन महिनाभित्र नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्नेछ।
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| 53 |
+
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| 54 |
+
---
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| 55 |
+
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| 56 |
+
### ५. नियुक्तिको लागि सिफारिसका आधार
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| 57 |
+
(१) न्याय परिषदले संविधानको अधीनमा रही समानुपातिक समावेशी सिद्धान्त बमोजिम दहायका आधारमा कुनै नेपाली नागरिकलाई न्यायाधीशको पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्नेछ:
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| 58 |
+
(क) संविधान र यस ऐन बमोजिम न्यायाधीशको पदमा नियुक्त हुन योग्यता पुगेको,
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| 59 |
+
(ख) बरिष्ठता, अनुभव, विषयवस्तुको ज्ञान, कार्यकुशलता, द्रमान्दारी, निष्पक्षता, पेशागत तथा नैतिक आचरण, सार्वजनिक जीवनमा आर्जन गरेको ख्याति, न्याय र कानूनको क्षेत्रमा गरेको योगदान समेतका दृष्टिकोणबाट न्यायाधीशको पदमा नियुक्त गर्न उपयुक्त भएको,
|
| 60 |
+
(ग) दफा ३ बमोजिमको अभिलेखमा नाम समावेश भएको,
|
| 61 |
+
(घ) संविधानको धारा १४९, को उपधारा (२) को खण्ड (ख) बा (ग) बमोजिम नियुक्त हुने जिल्ला न्यायाधीशको हकमा न्याय सेवा आयोगले सोही धाराको उपधारा (३) बमोजिम सिफारिस गरेको।
|
| 62 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ग) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा ३ बमोजिमको अभिलेखमा नाम समावेश नभएको कारणले मात्र त्यस्तो व्यक्तिलाई न्यायाधीशको पदमा नियुक्त ग���्न बाधा पर्ने छैन।
|
| 63 |
+
(३) न्यायाधीशको पदमा बहाल रहेको बा कुनै अदालतको न्यायाधीश बा पुनरावेदन अदालतको अतिरिक्त न्यायाधीश भई काम गरिसकेको व्यक्ति बा न्याय सेबाको अधिकृतलाई सर्वोच्च अदालत बा उच्च अदालतको न्यायाधीशको पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्दा उपदफा (१) मा लेखिएका आधारका अतिरिक्त न्याय परिपदले देहायका कुरालाई समेत विचार गर्नु पर्नेछ:
|
| 64 |
+
(क) सर्वोच्च अदालत बा उच्च अदालतले मातहतका अदालतको आबधिक बा आकस्मिक निरीक्षण गरी पेश गरेको मूल्याङ्कन प्रतिवेदनमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्न खोजिएको व्यक्तिको सम्बन्धमा उल्लेख भएका कुराहरू,
|
| 65 |
+
(ख) सम्बन्धित व्यक्तिको जेष्टता, योग्यता र कार्य सम्पादन मूल्याङ्कन,
|
| 66 |
+
(ग) उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको बहालबाला न्यायाधीश बा कुनै अदालतको न्यायाधीश बा पुनरावेदन अदालतको अतिरिक्त न्यायाधीश भई काम गरिसकेको व्यक्ति भएमा निजले बार्पिक रूपमा फैसला गरेको मुद्दाको अनुपात र फैसला गरेको मुद्दाको अनुपातमा माथिल्लो अदालतमा अन्तिम निर्णय हुँदा सदर बा आंशिक बा पूरै बदर भएको बिबरण।
|
| 67 |
+
(४) न्याय परिषदले कुनै कानून व्यवसायी बा न्याय र कानूनको क्षेत्रमा काम गरेको व्यक्तिलाई न्यायाधीशको पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्दा उपदफा (१) मा लेखिएको कुराको अतिरिक्त व्यावसायिक निरन्तरता तथा न्याय र कानूनको क्षेत्रमा गरेको योगदानको मूल्याङ्कन र निजको अघिल्लो सेवा सम्बन्धी कुनै विवरण भए सो समेतलाई विचार गर्नु पर्नेछ।
|
| 68 |
+
(५) न्याय परिषदले उपदफा (१) को खण्ड (ख) र उपदफा (३) को प्रयोजनको लागि निरीक्षण प्रतिवेदन, कार्य सम्पादन सम्बन्धी प्रतिवेदन बा मूल्याङ्कन तथा सेवा सम्बन्धी अन्य विवरण सम्बन्धित अदालत बा कार्यालयबाट झिकाई हेर्न सक्नेछ।
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| 69 |
+
|
| 70 |
+
---
|
| 71 |
+
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| 72 |
+
### ६. संसदीय सुनुवाईको लागि लेखी पटाउने
|
| 73 |
+
(१) न्याय परिषदले कुनै व्यक्तिलाई सर्वोच्च अदालतको न्यायाधीशको पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गरेमा न्याय परिषदको सचिवले संविधानको धारा २९२ बमोजिम हुने संसदीय सुनुवाईको लागि त्यस्तो सिफारिस सङ्घीय संसद् सचिवालयमा पटाउनु पर्नेछ।
|
| 74 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम संसदीय सुनुवाईको लागि पटाईएकोमा संसदीय सुनुवाई भई सङ्घीय संसद् सचिवालयबाट सर्वोच्च अदालतको न्यायाधीशको पदमा नियुक्तिको लागि योग्य टहरिएको भनी लेखी आएको बा त्यस्तो सुनुवाई सम्बन्धी निर्णय हुन नसकेको अवस्थामा प्रचलित कानून बमोजिम नियुक्तिको लागि बाधा नपर्ने अवस्थामा सर्वोच्च अदालतको न्यायाधीशको पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गरेको व्यक्तिलाई न्याय परिषदको सचिवले नियुक्तिको लागि राष्ट्रपति समक्ष पेश गर्न राष्ट्रपतिको कार्यालयमा पटाउनु पर्नेछ।
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| 75 |
+
|
| 76 |
+
---
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| 77 |
+
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| 78 |
+
### ७. न्यायाधीश पदमा नियुक्त हुन नसक्ने
|
| 79 |
+
देहायको व्यक्ति न्यायाधीशको पदमा नियुक्त हुन सक्ने छैन:
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| 80 |
+
(क) भ्रष्टाचार, जबरजस्ती करणी, मानव बेचबिखन तथा ओसारपसार, लागु औषध बिकी बितरण बा ओसार पसार, सम्पत्ति शुद्धीकरण, राहदानी दुरुपयोग, अपहरण बा नैतिक पतन देखिने अन्य फौजदारी कसूरमा अदालतबाट सजाय पाएको,
|
| 81 |
+
(ख) व्यावसायिक आचार संहिता उल्लङ्घन गरे बापत सम्बन्धित निकायबाट सजाय पाएको दुई वर्ष पूरा नभएको,
|
| 82 |
+
(ग) भविष्यमा सरकारी बा सार्वजनिक संस्थाको सेबाको निमित्त अयोग्य ठहरिने गरी पदबाट बर्खास्त गर्ने गरी विभागीय सजाय पाएको,
|
| 83 |
+
(घ) सम्बन्धित सेबा सम्बन्धी कानून बमोजिम नसिहत पाएकोमा त्यस्तो नसिहत पाएको एक वर्ष पूरा नभएको बा बढ़ुवा रोक्का बा तलब बुद्धि रोक्का भएकोमा सो रोक्का भएको अबधि पूरा नभएको,
|
| 84 |
+
(ङ) संविधानको धारा २९१ बमोजिम अयोग्य भएको,
|
| 85 |
+
(च) प्रचलित सङ्घीय कानून बमोजिम निलम्बनमा रहेको,
|
| 86 |
+
(छ) दफा १४ बमोजिम सचेत गराइएको मितिले दुई वर्ष पूरा नभएको,
|
| 87 |
+
(ज) प्रचलित कानून बमोजिम कालो सूचीमा परेको,
|
| 88 |
+
(झ) नियुक्ति हुँदाका बखत कुनै राजनीतिक दलको सदस्य रहेको,
|
| 89 |
+
(ज) दामासाहीमा परेको, बा
|
| 90 |
+
(ट) मानसिक सन्तुलन ठीक नभएको।
|
| 91 |
+
|
| 92 |
+
---
|
| 93 |
+
|
| 94 |
+
### ८. जिल्ला न्यायाधीशको पदपूर्ति सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 95 |
+
(१) न्याय परिषदले जिल्ला अदालतमा रिक्त न्यायाधीशको पद संविधानको धारा १४९, को उपधारा (२) बमोजिम पूर्ति गर्नेछ।
|
| 96 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पदपूर्तिको लागि न्याय परिषद्ले जिल्ला न्यायाधीशको तत्काल रिक्त पद र प्रत्येक बर्षको चैत्र मसान्तभित्र रिक्त हुन आउने पद समेत यकिन गरी संविधानको धारा १४९ को उपधारा (२) को खण्ड (क), (ख) र (ग) बमोजिमको पदपूर्तिको प्रतिशत निर्धारण गर्नेछ।
|
| 97 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम प्रतिशत निर्धारण भएपछि संविधानको धारा १४९, को उपधारा (२) को खण्ड (ख) र (ग) बमोजिम पदपूर्ति गरिने जिल्ला न्यायाधीशको पदमा उपयुक्त व्यक्ति छनौट गरी सिफारिस गर्न न्याय परिपद्ले न्याय सेवा आयोगमा लेखी पटाउनेछ।
|
| 98 |
+
(४) न्याय परिषद्ले प्रत्येक बर्षको चैत्र मसान्त भित्र यस द��ा बमोजिम जिल्ला न्यायाधीशको पदपूर्ति गर्ने समयतालिका बनाउनु पर्नेछ।
|
| 99 |
+
|
| 100 |
+
---
|
| 101 |
+
|
| 102 |
+
### ९. उम्मेदवार हुन नसक्ने
|
| 103 |
+
दफा ७ बमोजिम न्यायाधीशको पदमा नियुक्ति हुन नसक्ने व्यक्ति संविधानको धारा १४९, को उपधारा (२) बमोजिम जिल्ला न्यायाधीशको पदपूर्ति गर्दा लिइने परीक्षामा उम्मेदवार हुन सक्ने छैन।
|
| 104 |
+
|
| 105 |
+
---
|
| 106 |
+
|
| 107 |
+
### १०. कार्यक्षमताको अभाव
|
| 108 |
+
देहायको अवस्थामा न्यायाधीशमा कार्यक्षमताको अभाव रहेको मानिनेछ:
|
| 109 |
+
(क) उचित कारण बिना कानूनद्वारा निर्धारित अवधिभित्र मुद्दाको कारबाही र किनारा नगरेमा,
|
| 110 |
+
(ख) मुद्दामा एकै पटक गर्न सकिने आदेश बा निर्णय एकै पटक नगरी बा कानून बमोजिम मुलतबी राख्नु नपर्ने मुद्दा मुलतबी राखी बा मुलतबी रहेको मुद्दा नजगाई असान्दर्भिक बा कानून प्रतिकूल कारबाही बा आदेश गरी मुद्दालाई अनावश्यक रूपमा लम्ब्याएमा,
|
| 111 |
+
(ग) मुद्दाको कारबाही र किनारा गर्दा स्वभाविक रूपमा भन्दा कम मात्रामा कार्यसम्पादन गरेमा,
|
| 112 |
+
(घ) मुद्दाको कारबाही र किनारा गर्दा असान्दर्भिक कानूनको प्रयोग गरी बा कानूनको स्पष्ट र असंदिग्ध व्याख्या बा अर्थलाई उपेक्षा गरी अर्के व्याख्या बा अर्थ गरी कारबाही र किनारा गरेमा,
|
| 113 |
+
(ङ) एकै किसिमको कानूनी प्रश्न रहेको भिन्न भिन्न मुद्दामा भिन्न भिन्न राय कायम गरी कारबाही बा निर्णय गरेमा,
|
| 114 |
+
(च) मुद्दाका पक्षलाई उपस्थित गराएको बा तारिखका दिन मनासिब कारण बिना गर्नु पर्ने काम नगरी पन्द्राएकोमा,
|
| 115 |
+
(छ) प्रमाण बुझ्ने आदेश गर्दा पक्षहरूको मुख मिलेको र नमिलेको तथ्य बा प्रश्न स्पष्ट नगरी प्रमाण बुझ्ने मात्र आदेश गरेमा,
|
| 116 |
+
(ज) सबीच्च अदालतबाट प्रतिपादित कानूनी सिद्धान्तको प्रतिकूल निर्णय गरेमा,
|
| 117 |
+
(झ) पदीय दायित्व निर्बाह गर्नका लागि अपेक्षित स्तरको कार्यक्षमता नरहेको पुष्टि हुने अन्य कुनै काम गरेमा।
|
| 118 |
+
|
| 119 |
+
---
|
| 120 |
+
|
| 121 |
+
### ११. खराब आचरण बा आचार संहिताको गम्भीर उल्लंघन
|
| 122 |
+
(१) देहायको अवस्थामा न्यायाधीशले खराब आचरण गरेको मानिनेछ:
|
| 123 |
+
(क) भ्रष्टाचार, जबरजस्ती करणी, मानव बेचबिखन तथा ओसारपसार, लागु औषध बिक्री बितरण बा ओसार पसार, सम्पत्ति शुद्धीकरण, राहदानी दुरुपयोग, अपहरण बा नैतिक पतन देखिने अन्य फौजदारी कसूर गरेमा,
|
| 124 |
+
(ख) लागू औषधको सेवन गरेमा,
|
| 125 |
+
(ग) अदालतको समयमा मादक पदार्थ सेवन गरेमा,
|
| 126 |
+
(घ) सार्वजनिक स्थल वा समारोहमा अशिष्ट वा उच्छुड़ल व्यवहार गरेमा,
|
| 127 |
+
(ङ) राजनीतिमा भाग लिएमा,
|
| 128 |
+
(च) अनुचित प्रभावमा परी वा कानून विपरीत मुद्दामा कारबाही र किनारा गरेमा,
|
| 129 |
+
(छ) सरकारी वा सार्वजनिक सम्पत्ति वा आफूलाई प्राप्त कुनै सुविधाको दुरुपयोग गरेमा, वा
|
| 130 |
+
(ज) इजलासमा रहँदा अदालतको मर्यादा भड़ हुने वा पदीय अनुशासन वा मर्यादाको प्रतिकूल हुने कुनै आचरण गरेमा।
|
| 131 |
+
(२) न्यायाधीशले यस ऐन बमोजिम बनाएको आचार संहिताको गम्भीर उल्लंघन हुने कार्य गरेमा वा त्यस्तो आचार संहिताको पटक पटक उल्लंघन गरेमा आचार संहिताको गम्भीर उल्लङ्घन गरेको मानिनेछ।
|
| 132 |
+
|
| 133 |
+
---
|
| 134 |
+
|
| 135 |
+
### १२. इमान्दारीपूर्वक कर्तव्य पालन नगरेको वा बढियत पूर्वकको काम कारबाही
|
| 136 |
+
देहायको अवस्थामा न्यायाधीशले आफ्नो कर्तव्य इमान्दारीपूर्वक पालन नगरेको वा बद्नितपूर्वक काम कारबाही गरेको मानिनेछ:
|
| 137 |
+
(क) मुद्दालाई पन्छाउने, लम्ब्याउने वा अनुचित रूपमा प्रभाव पार्ने मनसायले कुनै काम गरेमा,
|
| 138 |
+
(ख) मनासिब कारण बिना निर्धारित समयमा इजलासमा नबस्ने वा मुद्दाको सुनुवाई नगरेमा,
|
| 139 |
+
(ग) मनासिब कारण बिना निर्धारित समयभित्र फैसला वा आदेश नलेखेमा,
|
| 140 |
+
(घ) विदा स्वीकृत नगराई पटक पटक अदालतमा अनुपस्थित हुने गरेमा, बा
|
| 141 |
+
(ङ) माथिल्लो अदालतले दिएको आदेश बा प्रशासकीय बिषयमा प्रधान न्यायाधीश, उच्च अदालतको मुख्य न्यायाधीश बा निरीक्षण गर्ने न्यायाधीशले दिएको निर्देशनको मनासिब अबधिभित्र पालन नगरेमा।
|
| 142 |
+
|
| 143 |
+
---
|
| 144 |
+
|
| 145 |
+
### १३. कार्य सम्पादन गर्न असमर्थ मानिने
|
| 146 |
+
(१) कुनै न्यायाधीश संबिधानको धारा १३१ को खण्ड (घ), धारा १४२ को उपधारा (१) को खण्ड (घ) बा धारा १४९, को उपधारा (६) को खण्ड (घ) बमोजिम शारीरिक बा मानसिक अस्वस्थताको कारणले सेबामा रही कार्य सम्पादन गर्न असमर्थ रहे नरहेको यकिन गर्न न्याय परिषदले नेपाल सरकारद्वारा गठित मेडिकल बोर्डमा लेखी पठाउनेछ।
|
| 147 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम लेखी पठाइएकोमा मेडिकल बोर्डले कुनै न्यायाधीशलाई शारीरिक बा मानसिक कारणले कार्य सम्पादन गर्न असमर्थ भएको भनी सिफारिस गरेमा त्यस्तो न्यायाधीश शारीरिक बा मानसिक रूपले कार्य सम्पादन गर्न असमर्थ भएको मानिनेछ।
|
| 148 |
+
(३) कुनै न्यायाधीशले यस दफा बमोजिम मेडिकल बोर्डबाट शारीरिक बा मानसिक अबस्थाको परीक्षण गराउन इन्कार गरेमा निज शारीरिक बा मानसिक रूपमा कार्य सम्पादन गर्न असमर्थ भएको मानिनेछ।
|
| 149 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम शारीरिक बा मानसिक रूपले कार्य सम्पादन गर्न असमर्थ भएको न्यायाधीशलाई पदमुक्त गर्न न्याय परिषदले प्रधान न्यायाधीश समक्ष ���िफारिस गर्नेछ।
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| 150 |
+
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| 151 |
+
---
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| 152 |
+
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| 153 |
+
### १४. कारबाही गर्ने
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| 154 |
+
(१) न्याय परिषदले दफा १० बा १२ बमोजिमको अवस्थामा पहिलो पटक सम्बन्धित न्यायाधीशलाई सचेत गराउन सक्नेछ।
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| 155 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सचेत गराउँदा पनि दफा १० बा १२ बमोजिमको अवस्थामा सुधार नभएमा बा दफा ११ बमोजिम खराब आचरण बा आचार संहिताको गम्भीर उल्लंघन गरेमा त्यस्तो न्यायाधीश उपर न्याय परिषदले संविधानको धारा १४२ को उपधारा (१) को खण्ड (ग) बा धारा १४९ को उपधारा (६) को खण्ड (ग) बमोजिम कारबाही गर्नु पर्नेछ।
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| 156 |
+
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| 157 |
+
---
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| 158 |
+
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| 159 |
+
### १५. निरीक्षण सम्बन्धी व्यवस्था
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| 160 |
+
(१) उच्च अदालतको मुख्य न्यायाधीशले प्रत्येक बर्ष सम्बन्धित उच्च अदालत बा मातहतका जिल्ला अदालतका न्यायाधीशको काम कारबाहीको सम्बन्धमा निरीक्षण गरी न्याय परिषदमा प्रतिबेदन दिनु पर्नेछ।
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| 161 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको प्रतिबेदनमा अन्य कुराका अतिरिक्त देहायका बिबरण उल्लेख गर्नु पर्नेछ:
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| 162 |
+
(क) सम्बन्धित न्यायाधीशलाई खटाइएको स्थानमा रहेको बार्पिक रुजु हाजिरीको बिबरण,
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| 163 |
+
(ख) सम्बन्धित अदालतमा रहेको मुद्दाको अनुपातमा बर्षभरिमा न्यायाधीशले गरेको फैसलाको बिबरण,
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| 164 |
+
(ग) सम्बन्धित न्यायाधीशले गरेको फैसला माथिल्लो अदालतबाट सदर बा बदर भएकोमा सोको बिबरण,
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| 165 |
+
(घ) अदालत व्यवस्थापन तथा सज्ञान सम्बन्धी अन्य काम कारबाहीको बिबरण।
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| 166 |
+
(३) न्याय परिषदले न्यायाधीशको मूल्याड्कन बा निज उपर कारबाही गर्दा उपदफा (१) बमोजिमको प्रतिबेदनलाई आधार लिन सक्नेछ।
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| 167 |
+
(४) निरीक्षण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 168 |
+
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| 169 |
+
---
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| 170 |
+
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| 171 |
+
### १६. अनुगमन तथा निगरानी सम्बन्धी व्यवस्था
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| 172 |
+
(१) न्याय परिषदले न्यायाधीशको काम कारबाही तथा आचरणको नियमित अनुगमन गर्न बा निगरानी राख्न न्याय परिषदको कुनै सदस्यको संयोजकत्वमा एक बा तीन सदस्यीय न्यायिक अनुगमन तथा निगरानी समिति गठन गर्न सक्नेछ।
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| 173 |
+
(२) न्याय परिषदको सचिबले उपदफा (१) बमोजिमको समितिको सचिवको रूपमा काम गर्नेछ।
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| 174 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम गठित समितिले संविधान र कानून बमोजिम न्यायाधीशले पालन गर्नु पर्ने कर्तव्य बा पदीय आचरण पालन गरे बा नगरेको बिषयमा बा न्याय परिषदले तोकेको अन्य काम कारबाहीको अनुगमन गर्न बा निगरानी राख्न सक्नेछ।
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| 175 |
+
(४) उपदफा (३) को प्रयोजनको लागि आवश्यकता अनुसार सम्बन्धित उच्च अदालतका मुख्य न्यायाधीश, सम्बन्धित न्यायाधीश बहाल रहेको अदालतको अन्य न्यायाधीश, कर्मचारी, त्यस्तो अदालतमा कानून व्यवसाय गर्ने कानून व्यवसायी बा सेवाग्राहीसँग सम्बन्धित न्यायाधीशका सम्बन्धमा रहेको धारणा बुझ्न सक्नेछ।
|
| 176 |
+
(५) उपदफा (३) बमोजिम अनुगमन तथा निगरानीको काम गर्दा न्यायिक अनुगमन तथा निगरानी समितिले आवश्यकता अनुसार न्याय परिषदका राजपत्राहित कर्मचारीको सहयोग लिन सक्नेछ।
|
| 177 |
+
(६) उपदफा (३) बमोजिम अनुगमन तथा निगरानीको काम गर्दा गोप्य रूपमा गर्नु पर्नेछ।
|
| 178 |
+
(७) न्यायिक अनुगमन तथा निगरानी समितिले आफूले सम्पादन गरेको काम कारबाहीको प्रतिबेदन न्याय परिषदले तोकेको अबधिभित्र न्याय परिषद समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 179 |
+
(८) न्याय परिषदले न्यायाधीशको मूल्याङ्कन गर्दा बा निज उपर कारबाही गर्दा उपदफा (७) बमोजिमको प्रतिवेदनलाई आधार लिन सक्नेछ।
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| 180 |
+
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| 181 |
+
---
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| 182 |
+
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| 183 |
+
### १७. उजूरीसँग सम्बद्ध मुद्दाको अध्ययन
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| 184 |
+
(१) कुनै मुद्दाको सम्बन्धमा कुनै न्यायाधीश बिरुद्ध न्याय परिषदमा उजूरी परेमा न्याय परिषदले त्यस्तो मुद्दाको अध्ययन गर्न कुनै सदस्यलाई तोक्न सक्नेछ।
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| 185 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि सम्बन्धित अदालतले सदस्यले माग गरेको कागजात बा फाइल उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
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| 186 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम तोकिएको सदस्यले उजूरीसँग सम्बद्ध मुद्दाको अध्ययन गरी न्याय परिषदले तोकेको अबधिभिब आफ्नो राय सहितको प्रतिवेदन न्याय परिषदमा पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 187 |
+
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| 188 |
+
---
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| 189 |
+
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| 190 |
+
### १८. प्रारम्भिक ज्ञानबिन
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| 191 |
+
(१) न्याय परिषद्मा प्राप्त उजूरी बा अनुगमन बा निरीक्षण प्रतिवेदनको आधारमा बा न्याय परिषद आफैले उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको कुनै न्यायाधीशको बिरुद्धमा ज्ञानबिन गर्न आवश्यक देखेमा न्याय परिषदले कुनै सदस्य बा सबोंच्च अदालतको कुनै न्यायाधीशलाई त्यसको प्रारम्भिक ज्ञानबिन गर्नको लागि तोक्न सक्नेछ।
|
| 192 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम तोकेको सदस्य बा न्यायाधीशले सम्बन्धित न्यायाधीश बा अन्य सम्बद्ध व्यक्तिसँग सोधपुछ गर्न सक्नेछ।
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| 193 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम तोकेको सदस्य बा न्यायाधीशले प्रारम्भिक ज्ञानबिनको बिषयसँग सम्बन्धित कुनै कागजात माग गर्न सक्नेछ। त्यसरी माग गरिएको कागजात उपलब्ध गराउनु त्यस्तो अदालत बा निकायको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 194 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिम तोकेको सदस्य बा न्यायाधीशले न्याय परिषदले तोकेको अबधिभिब आफ्नो राय सहितको प्रारम्भिक ज्ञानबिन प्रतिवेदन न्याय परिषदमा पेश गर्नु पर्नेछ।
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| 195 |
+
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| 196 |
+
---
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| 197 |
+
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| 198 |
+
### १९. जाँचबुझ समिति
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| 199 |
+
(१) दफा १७ बा १६ बमोजिम प्राप्त प���रतिबेदनबाट बा न्याय परिषद आफैले उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको कुनै न्यायाधीशको बिरुद्धमा जाँचबुझ गराउन आवश्यक देखेमा न्याय परिषदको कुनै सदस्य बा सबोच्च अदालतको न्यायाधीशको अध्यक्षतामा सम्बन्धित क्षेत्रको बिज्ञ सहितको तीन सदस्यीय जाँचबुझ समिति गठन गरी तत्सम्बन्धी सूचना नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 200 |
+
(२) जाँचबुझ समितिले न्याय परिषदले तोकेको अबधिभित्र जाँचबुझ सम्पन्न गरी न्याय परिषदमा प्रतिबेदन पेश गर्नु पर्नेछ।
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| 201 |
+
(३) जाँचबुझ समितिको कार्यालय न्याय परिषद्को सचिबालयमा रहनेछ र जाँचबुझ समितिको लागि आवश्यक पर्ने कर्मचारी र स्रोत साधन न्याय परिषदले उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 202 |
+
(४) जाँचबुझ समितिको सचिबको काम न्याय परिषदको सचिब बा न्याय परिषदले तोकेको सड्घीय न्याय सेबाको राजपत्रांकित कर्मचारीले गर्नेछ।
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| 203 |
+
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| 204 |
+
---
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| 205 |
+
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| 206 |
+
### २०. जाँचबुझ समितिको अधिकार
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| 207 |
+
(१) जाँचबुझ समितिले उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको जाँचबुझ गर्न लागिएको न्यायाधीशलाई सूचना दिने, सूचना तामेल गर्ने, बयान गराउने बा साक्षी प्रमाण बुझ्ने सम्बन्धमा जाँचबुझ आयोग ऐन, २०२६ बमोजिम गठित आयोगले प्रयोग गर्ने अधिकार प्रयोग गर्न सक्नेछ।
|
| 208 |
+
(२) यस दफा अन्तर्गत हुने जाँचबुझ समितिको काम कारबाही गोप्य हुनेछ।
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| 209 |
+
(३) जाँचबुझ समितिले जाँचबुझको कारबाही भएको टाउँमा आरोप लागेको उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको न्यायाधीश, सम्बन्धित कानून ब्यबसायी तथा उजूरबाला बाहेक अरू कुनै ब्यक्तिलाई उपस्थित हुने बा कारबाहीमा भाग लिने अनुमति दिने छैन।
|
| 210 |
+
(४) जाँचबुझ समितिले दिएको आदेशको अबहेलना गर्ने बा जाँचबुझको कारबाहीमा बाधा पुए्याउने ब्यक्तिलाई जाँचबुझ समितिले तीन हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना बा एक महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय गर्न सक्नेछ।
|
| 211 |
+
(५) जाँचबुझ समितिले उपदफा (४) बमोजिम सजायको आदेश नदिदै सम्बन्धित व्यक्तिले जाँचबुझ समिति समक्ष क्षमा माग्न सक्नेछ। त्यसरी क्षमा मागेको कुरामा जाँचबुझ समिति सन्तुष्ट भएमा जाँचबुझ समितिले कुनै सजाय गर्ने छैन।
|
| 212 |
+
(६) उपदफा (४) बमोजिम जाँचबुझ समितिले सजाय गरेको व्यक्तिले जाँचबुझ समितिलाई सन्तोष हुने गरी क्षमा मागेमा जाँचबुझ समितिले आफुले गरेको सजाय कार्यान्वयन नगर्न सक्नेछ।
|
| 213 |
+
(७) जाँचबुझ समितिले जाँचबुझको काम समाप्त भएपछि आफ्नो राय सहित जाँचबुझको प्रतिवेदन र तत्सँग सम्बन्धित का���जात न्याय परिषद्को सचिवालयमा बुझाउनु पर्नेछ।
|
| 214 |
+
|
| 215 |
+
---
|
| 216 |
+
|
| 217 |
+
### २१. सफाईको मौका दिने
|
| 218 |
+
(१) दफा १७, १६ वा १९ बमोजिम प्राप्त प्रतिवेदन अध्ययन गर्दा आरोपित उच्च अदालत वा जिल्ला अदालतको न्यायाधीशलाई संविधान, यस ऐन वा अन्य प्रचलित कानून बमोजिम कारबाही गर्नु पर्ने देखिएमा न्याय परिषदले कारण र आधार खुलाई मनासिब अबधि तोकी सफाई पेश गर्ने मौका दिनु पर्नेछ।
|
| 219 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अबधिभित्र सफाई पेश नगरेमा वा पेश गरेको सफाई सन्तोषजनक नदेखिएमा आरोपित न्यायाधीशलाई यस ऐन बमोजिमको कुनै सजाय गर्न वा न्याय परिषदले उच्च अदालत वा जिल्ला अदालतको आरोपित न्यायाधीशलाई संविधानको धारा १४२ को उपधारा (१) को खण्ड (ग) तथा धारा १४९, को उपधारा (६) को खण्ड (ग) बमोजिम गर्न प्रधान न्यायाधीश समक्ष सिफारिस गर्नेछ।
|
| 220 |
+
|
| 221 |
+
---
|
| 222 |
+
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| 223 |
+
### २२. भ्रष्टाचारको कसूरमा अनुसन्धान तथा मुद्दा दायर
|
| 224 |
+
(१) संविधानको धारा १४३ को उपधारा (६) बमोजिमको विषयमा अनुसन्धान गर्न न्याय परिषदले सर्वोच्च अदालत वा उच्च अदालतको कुनै न्यायाधीशलाई अनुसन्धान अधिकृतको रूपमा काम गर्न तोक्नेछ।
|
| 225 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अनुसन्धान अधिकृतले उच्च अदालतको न्यायाधीश बा जिल्ला अदालतको न्यायाधीश उपर अनुसन्धान गर्दा भ्रष्टाचार निवारण ऐन, २०४९ बमोजिमको अनुसन्धान अधिकारीले प्रयोग गर्ने अधिकार प्रयोग गर्न सक्नेछ।
|
| 226 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको अनुसन्धान गर्दा अनुसन्धान अधिकारीले उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको कुनै न्यायाधीश उपर भ्रष्टाचार गरी अद्व्तियारको दुरुपयोग गरेको अभियोगमा मुद्दा चलाउनु पर्ने देखेमा सोही व्यहोराको प्रतिवेदन न्याय परिषदमा पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 227 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम प्राप्त भएको प्रतिवेदनको आधारमा न्याय परिषदले मुद्दा चलाउनु पर्ने देखेमा त्यस्तो विषयमा निर्णय गरी भ्रष्टाचार सम्बन्धी मुद्दाको कारबाही र किनारा गर्न प्रचलित कानून बमोजिम नेपाल सरकारले तोकेको अदालतमा न्याय परिषदको तर्फबाट मुद्दा दायर गर्न न्याय परिषदको सचिव बा न्याय परिषदको कुनै राजपत्रांकित अधिकृतलाई तोक्नेछ।
|
| 228 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिम मुद्दा दायर गर्ने निर्णय गर्नु अघि न्याय परिषदले त्यस्तो विषयमा महान्यायाधिवक्तासँग परामर्श लिन सक्नेछ।
|
| 229 |
+
(६) यस दफा बमोजिम दायर भएको मुद्दामा महान्यायाधिवक्ता बा मातहतको सरकारी बकीलबाट प्रतिरक्षा हुनेछ।
|
| 230 |
+
(७) यस दफा बमोजिम म��द्दा चलेको विषयमा न्यायाधीश बाहेक अन्य व्यक्ति समेत संलग्न भएको देखिएमा न्याय परिषदले त्यस्तो व्यक्ति उपर प्रचलित कानून बमोजिम मुद्दा चलाउन सम्बन्धित निकायमा लेखी पठाउनेछ।
|
| 231 |
+
|
| 232 |
+
---
|
| 233 |
+
|
| 234 |
+
### २३. स्वतः निलम्बन हुने
|
| 235 |
+
भ्रष्टाचार निवारण ऐन, २०४९ बमोजिम स्वतः निलम्बन हुने अवस्थामा बा खराब आचरणको आधारमा प्रचलित कानून बमोजिम उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको कुनै न्यायाधीश विरुद्ध मुद्दा दायर भएकोमा मुद्दा दायर भएको मितिदेखि त्यस्तो न्यायाधीश आफ्नो पदबाट स्वतः निलम्बन हुनेछ।
|
| 236 |
+
|
| 237 |
+
---
|
| 238 |
+
|
| 239 |
+
### २४. निलम्बनको समाप्ति
|
| 240 |
+
उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको कुनै न्यायाधीश बिरुद्ध यस ऐन बमोजिम दायर भएको मुद्दामा त्यस्तो न्यायाधीशले सफाई पाएमा सफाई पाएको मितिबाट निजको निलम्बन स्वतः समाप्त हुनेछ।
|
| 241 |
+
|
| 242 |
+
---
|
| 243 |
+
|
| 244 |
+
### २५. कार्यसम्पादन गर्न नपाउने
|
| 245 |
+
उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको कुनै न्यायाधीश बिरुद्ध जाँचबुझ गर्न जाँचबुझ समिति गठन भएको बा दफा २२ बमोजिम अनुसन्धान प्रारम्भ भएमा त्यस्तो न्यायाधीशले त्यस्तो कारबाहीको टुंगो नलागेसम्म आफ्नो पदको कार्यसम्पादन गर्न पाउने छैन।
|
| 246 |
+
|
| 247 |
+
---
|
| 248 |
+
|
| 249 |
+
### २६. तामेलीमा राख्ने
|
| 250 |
+
दफा १७, १६ बा १९ बमोजिमको प्रतिवेदनबाट उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको कुनै न्यायाधीश बिरुद्धको आरोप तथ्यहीन देखिएमा पछि प्रमाण प्राप्त भएको अबस्थामा कानून बमोजिम हुने गरी न्याय परिषदले त्यस्तो कारबाहीलाई तामेलीमा राखी सोको जानकारी सम्बन्धित न्यायाधीशलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 251 |
+
|
| 252 |
+
---
|
| 253 |
+
|
| 254 |
+
### २७. न्यायाधीशको सरुवा तथा काज
|
| 255 |
+
(१) साधारणतया एक अदालतमा दुई बर्षको कार्यकाल पूरा गरी नसकेका उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको न्यायाधीशलाई सरुवा गरिने छैन।
|
| 256 |
+
(२) उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतका न्यायाधीशलाई सरुवा गर्दा साधारणतया हिमाली क्षेत्र, पहाडी क्षेत्र, तराई क्षेत्र र काठमाडौं उपत्यकाको अनुभव हुने गरी सुगम क्षेत्रको अदालतमा कार्यरत न्यायाधीशलाई दुर्गम क्षेत्रको अदालतमा र दुर्गम क्षेत्रको अदालतमा कार्यरत न्यायाधीशलाई सुगम क्षेत्रको अदालतमा पर्ने गरी सरुवा गरिनेछ।
|
| 257 |
+
(३) साधारणतया उच्च अदालत बा जिल्ला अदालतको कुनै न्यायाधीशलाई एउटै अदालतमा एक पटकभन्दा बढी हुने गरी सरुवा गरिने छैन।
|
| 258 |
+
(४) प्रधान न्यायाधीशले न्याय परिषदको सिफारिसमा आवश्यकता अनुसार एक उच्च अदालतको न्यायाधीशलाई अर्को उच्च अदालतको न्यायाधीशमा ���ाजमा खटाउन सक्नेछ।
|
| 259 |
+
(५) प्रधान न्यायाधीशले आवश्यकता अनुसार एक जिल्ला अदालतको न्यायाधीशलाई निश्चित अबधिको लागि अर्को जिल्ला अदालतको न्यायाधीशमा काजमा खटाउन सक्नेछ।
|
| 260 |
+
|
| 261 |
+
---
|
| 262 |
+
|
| 263 |
+
### २८. वैयक्तिक विवरण राख्ने
|
| 264 |
+
(१) न्याय परिषदले न्यायाधीशको वैयक्तिक विवरण (सिटरोल) तोकिए बमोजिम अद्यावधिक गरी राख्नु पर्नेछ।
|
| 265 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि न्याय परिषद्ले निजामती किताबखाना लगायत सम्बन्धित निकायसँग विवरण माग गर्न सक्नेछ।
|
| 266 |
+
(३) पहिलो पटक न्यायाधीशको पदमा नियुक्त भएको व्यक्तिले आफू नियुक्ति भएको मितिले एक महिनाभित्र तोकिएको ढाँचाको वैयक्तिक विवरण फाराम (सिटरोल) भरी न्याय परिषद समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 267 |
+
(४) न्यायाधीशको वैयक्तिक विवरण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 268 |
+
|
| 269 |
+
---
|
| 270 |
+
|
| 271 |
+
### २९. सम्पत्ति विवरण पेश गर्नु पर्ने
|
| 272 |
+
(१) सदस्य र न्यायाधीशले आफ्नो र आफ्नो परिवारको नाममा रहेको सम्पत्तिको विवरण प्रत्येक आर्थिक वर्ष समाप्त भएको मितिले साठी दिनभित्र तोकिए बमोजिमको ढाँचामा न्याय परिषद समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 273 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि उपदफा (१) बमोजिमको अबधि समाप्त भएपछि नियुक्ति भएको सदस्य र न्यायाधीशले आफू नियुक्त भएको मितिले साठी दिनभित्र उपदफा (१) बमोजिम सम्पत्ति विवरण न्याय परिषद समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 274 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिमको सम्पत्ति विवरण गोप्य राखिनेछ।
|
| 275 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिमको अबधिभित्र सम्पत्ति विवरण पेश नगर्ने न्यायाधीशहरुको विवरण न्याय परिषदको सचिबले तयार गरी न्याय परिषदमा पेश गर्नेछ।
|
| 276 |
+
(५) उपदफा (१) बमोजिमको अबधिभित्र सम्पत्ति विवरण पेश नगर्ने न्यायाधीशलाई न्याय परिषदले पाँच हजार रूपैयाँ जरिबाना गरी सम्पत्ति विवरण पेश गर्ने आदेश दिनेछ।
|
| 277 |
+
(६) उपदफा (५) बमोजिम न्याय परिषदको आदेश बमोजिम सम्पत्ति विवरण पेश नगर्ने न्यायाधीशले दफा ११ बमोजिम खराब आचरण गरेको मानिनेछ।
|
| 278 |
+
|
| 279 |
+
---
|
| 280 |
+
|
| 281 |
+
### ३०. एकीकृत अभिलेख तयार गर्ने
|
| 282 |
+
(१) न्याय परिषदले देहायको विवरण सहित प्रत्येक न्यायाधीशको एकीकृत अभिलेख तयार गरी राख्नु पर्नेछ:
|
| 283 |
+
(क) न्यायाधीश पदमा नियुक्ति भएको र अबकाश हुने मिति, निजको योग्यता, अनुभव र विशेषज्ञता सम्बन्धी विवरण,
|
| 284 |
+
(ख) निजमाथि कुनै उजूरी परेको भए त्यस्तो उजूरीमा न्याय परिषदबाट भएको निर्णयको संक्षिप्त विवरण,
|
| 285 |
+
(ग) संविधान र यस ऐन बमोजिम निज उपर कुनै कारबाही भएको भए त्यसको विवरण,
|
| 286 |
+
(ध) निजले गरेको फैसला बा आदेश माथिल्लो अदालतबाट सदर बा बदर भएको विवरण,
|
| 287 |
+
(ङ) निजले प्रत्येक अदालतमा गरेको फैसला र आदेशको संख्यात्मक विवरण,
|
| 288 |
+
(च) तोकिए बमोजिमको अन्य विवरण।
|
| 289 |
+
(२) न्याय परिषदले उपदफा (१) बमोजिमको अभिलेख राख्ने प्रयोजनको लागि आबश्यकता अनुसार छुट्टै सफ्टवेयरको निर्माण गरी सूचना प्रबिधिको समेत उपयोग गर्न सक्नेछ।
|
| 290 |
+
|
| 291 |
+
---
|
| 292 |
+
|
| 293 |
+
### ३१. पदमा नरहेको जानकारी गराउने
|
| 294 |
+
(१) कुनै न्यायाधीश उमेरका कारणले अबकाश हुने भएमा न्याय परिषदले निज अबकाश हुनुभन्दा कम्तीमा साठी दिन अगावै सोको जानकारी सम्बन्धित न्यायाधीश र निकायलाई गराउनु पर्नेछ।
|
| 295 |
+
(२) उपदफा (१) मा लेखिएदेखि बाहेक अन्य कारणबाट कुनै न्यायाधीश पदमा नरहेमा न्याय परिषदले सोको जानकारी त्यस्तो न्यायाधीश र सम्बन्धित निकायलाई तुरून्त गराउनु पर्नेछ।
|
| 296 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम अबकाश सम्बन्धी जानकारी गराउने प्रयोजनको लागि न्याय परिषदले देहायको आधारमा न्यायाधीशको उमेर गणना गर्दा जुन उमेरबाट निज पहिले अबकाश हुन्छ सोही आधारमा उमेर गणना गरी निजको उमेर अग्राबधिक गराई राख्नु पर्नेछ:
|
| 297 |
+
(क) निजले पेश गरेको शिक्षण संस्थाको प्रमाणपत्रमा किटिएको जन्मदिन बा बर्षबाट हुन आउने उमेर,
|
| 298 |
+
(ख) निजको नागरिकताको प्रमाणपत्रमा किटिएको जन्म दिन बा बर्षबाट हुन आउने उमेर,
|
| 299 |
+
(ग) निजको वैयक्तिक बिबरणमा लेखिएको जन्म दिन बा बर्षबाट हुन आउने उमेर।
|
| 300 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम न्यायाधीशको उमेर गणना गर्दा शैक्षिक योग्यता बा नागरिकताको प्रमाणपत्र र वैयक्तिक बिबरणमा जन्म मिति, बर्ष, महिना र गते समेत खुलेको र सबैमा एउटै मिति नरहेमा निज जुन मितिबाट पहिले अबकाश हुन्छ सोही मिति अनुसार निजको उमेर गणना गरिनेछ।
|
| 301 |
+
(५) कुनै न्यायाधीशको शैक्षिक योग्यता बा नागरिकताको प्रमाणपत्र र बैयक्तिक बिबरणमा बर्ष बा संबत् मात्र उल्लेख भएकोमा देहायको आधारमा जन्म मिति कायम गरिनेछ:
|
| 302 |
+
(क) नागरिकताको प्रमाणपत्रको हकमा प्रमाणपत्र प्राप्त गरेको मितिको आधारमा,
|
| 303 |
+
(ख) शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्रको हकमा प्रमाणपत्र जारी भएको मितिको आधारमा,
|
| 304 |
+
(ग) बैयक्तिक बिबरणको हकमा शुरु नियुक्ति भएको मितिको आधारमा।
|
| 305 |
+
(६) न्यायाधीशले पेश गरेको कुनै प्रमाणपत्रमा बर्ष मात्र उल्लेख भएको र अर्को प्रमाणपत्रमा पूरा जन्म मिति खुलेको भएमा र सो प्रमाणपत्रमा उल्लिखित जन्म मितिहरूको बीचमा एक बर्षसम्मको अन्तर देखिएमा पूरा जन्म मिति खुलेकोलाई आधार लिइनेछ।
|
| 306 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजिम छुट्टा छुट्टै प्रमाणपत्रमा उल्लेख भएको जन्म मितिको अन्तर एक बर्ष भन्दा बढी देखिएमा बर्ष मात्र उल्लेख भएको प्रमाणपत्रको आधारमा उपदफा (३) बमोजिम जन्म मिति कायम गरिनेछ।
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| 307 |
+
(८) परिपदले यो दफा लागू भएपछि तीन महिनाभित्र यस दफा बमोजिम न्यायाधीशको उमेर यकिन गरी अभिलेख व्यवस्थित गर्नेछ।
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| 308 |
+
(९) उपदफा (१) बमोजिम जानकारी नदिएको भएपनि कुनै न्यायाधीश अवकाश हुने उमेर पुगेपछि त्यस्तो पदबाट अवकाश हुनेछ।
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| 309 |
+
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| 310 |
+
---
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| 311 |
+
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| 312 |
+
### ३२. पदबाट हटाउने
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| 313 |
+
(१) कुनै व्यक्तिले आफ्नो योग्यता बा अयोग्यता लुकाई न्यायाधीशको पदमा नियुक्ति भएको कुरा जानकारीमा आएमा बा कुनै न्यायाधीश पदमा बहाल रहेको अवस्थामा दफा ७ को खण्ड (क), (ङ), (ज), (झ), (ञ) बा (ट) बमोजिमको अवस्था भएमा न्याय परिषदले त्यस्तो न्यायाधीशलाई तुरून्त पदबाट हटाउन प्रधान न्यायाधीश समक्ष सिफारिस गर्नेछ।
|
| 314 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सिफारिस भएमा प्रधान न्यायाधीशले अबिलम्ब पदबाट हटाउनु पर्नेछ।
|
| 315 |
+
(३) आफ्नो योग्यता बा अयोग्यता लुकाई न्यायाधीशको पदमा नियुक्त भएको न्यायाधीश उपदफा (२) बमोजिम पदबाट हटाइएमा त्यस्तो न्यायाधीशले प्रचलित सङ्घीय कानून बमोजिमको सञ्चय कोषको रकम र बीमा बाहेकको अन्य कुनै पनि सुबिधा पाउने छैन।
|
| 316 |
+
(४) परिषदले आफ्नो योग्यता बा अयोग्यता लुकाएको कारण उपदफा (२) बमोजिम पदबाट हटाइएको न्यायाधीशलाई प्रचलित सङ्घीय कानून बमोजिम भ्रष्टाचारको कसूरमा मुद्दा चलाउन सम्बन्धित निकायमा लेखी पठाउनेछ।
|
| 317 |
+
|
| 318 |
+
---
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| 319 |
+
|
| 320 |
+
### ३३. न्याय परिषदको काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 321 |
+
संबिधान र यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएका काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त न्याय परिषद्को अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
|
| 322 |
+
(क) न्याय प्रशासन सम्बन्धी बिषयमा सिफारिस गर्ने बा परामर्श दिने,
|
| 323 |
+
(ख) न्याय प्रशासन सम्बन्धी बिषयमा अध्ययन तथा अनुसन्धान गर्ने, गराउने,
|
| 324 |
+
(ग) न्यायाधीशको तालीम तथा प्रशिक्षणका सम्बन्धमा सम्बन्धित निकायलाई पाठ्यक्रम लगायतका बिषयमा आवश्यक निर्देशन दिने,
|
| 325 |
+
(घ) न्यायाधीशले पालन गर्नु पर्ने आचार संहिता बनाई लागू गर्ने,
|
| 326 |
+
(ङ) तोकिए बमोजिम अन्य काम गर्ने।
|
| 327 |
+
|
| 328 |
+
---
|
| 329 |
+
|
| 330 |
+
### ३४. न्याय परिषद्को सचिबालय
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| 331 |
+
(१) न्याय परिषदको एउटा छुट्टै सचिबालय रहनेछ।
|
| 332 |
+
(२) न्याय परिषदको सचिबालय काठमाडौं उपत���यकामा रहनेछ।
|
| 333 |
+
|
| 334 |
+
---
|
| 335 |
+
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| 336 |
+
### ३५. न्याय परिषदको बैठक
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| 337 |
+
(१) न्याय परिषदको बैठक आवश्यकता अनुसार अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र टाउँमा बस्नेछ।
|
| 338 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दुईजना सदस्यले संयुक्त रूपमा बिषय सूची समेत समावेश गरी न्याय परिषदको बैठक बोलाउन अध्यक्ष समक्ष लिखित अनुरोध गरेमा अध्यक्षले यथाशीघ्र बैठक बोलाउनु पर्नेछ।
|
| 339 |
+
(३) न्याय परिषदको सचिबले न्याय परिषदको बैठक बस्ने मिति र समय तोकी बैठकमा छलफल हुने बिषय सूची सहितको सूचना बैठक बस्ने समय भन्दा साधारणतया अट्चालीस घण्टा अगावै सबै सदस्यहरूले पाउने गरी पटाउनु पर्नेछ।
|
| 340 |
+
(४) कुनै सदस्यले उपदफा (३) बमोजिम बैठकमा छलफल हुने बिषय सूचीमा उल्लिखित बिषयको अतिरिक्त अन्य कुनै बिषयमा छलफल गराउन चाहेमा त्यसरी छलफल गर्न चाहेको बिषय र कारण सहितको सूचना बैठक बस्नु भन्दा कम्तीमा चौंवीस घण्टा अगावै न्याय परिषदको सचिवलाई दिनु पर्नेछ। त्यसरी सूचना प्राप्त हुनासाथ न्याय परिषदको सचिवले त्यस्तो बिषय छलफल हुने बिषय सूचीमा समावेश गरी त्यसको जानकारी सदस्यहरुलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 341 |
+
(५) उपदफा (३) र (४) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि न्याय परिषद्को बैठकमा उपस्थित सबै सदस्यको सहमतिले बिषय सूचीमा नपरेको बिषयमा पनि छलफल गरी निर्णय गर्न सकिनेछ।
|
| 342 |
+
(६) अध्यक्ष र अन्य दुईजना सदस्य उपस्थित भएमा न्याय परिषदको बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 343 |
+
(७) न्याय परिषदको निर्णय बहुमतको आधारमा हुनेछ र मत बराबर भएमा अध्यक्षले निर्णायक मत दिनेछ।
|
| 344 |
+
(८) न्याय परिषदको निर्णयको अभिलेख न्याय परिषदको सचिवले तयार गरी अध्यक्ष तथा सदस्यको सही गराई राख्नेछ।
|
| 345 |
+
(९) न्याय परिषदको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि न्याय परिषद आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
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| 346 |
+
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| 347 |
+
---
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| 348 |
+
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| 349 |
+
### ३६. न्याय परिषदको सचिव
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| 350 |
+
(१) न्याय परिषदको प्रशासकीय प्रमुखको रूपमा नेपाल न्याय सेबाको राजपत्रांकित विशिष्ट श्रेणीको एकजना सचिव रहनेछ।
|
| 351 |
+
(२) यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएका काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त न्याय परिषदको सचिवको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
|
| 352 |
+
(क) न्याय परिषदले गरेको निर्णय कार्यान्वयन गर्ने गराउने,
|
| 353 |
+
(ख) न्याय परिषदको सचिवालयमा रहने अभिलेख प्रमाणित गरी अघाबधिक, व्यवस्थित र सुरक्षित राख्ने,
|
| 354 |
+
(ग) न्याय परिषदको कर्मचारीलाई कार्यविभाजन गरी काममा लगाउने,
|
| 355 |
+
(घ) न्याय परिषदको सचिवालयको काम कारबाहीको अनुगमन, नियन्त्रण, सुपरीवेक्षण गर्ने,
|
| 356 |
+
(ङ) न्याय परिषदको निर्णय सम्बन्धित व्यक्ति बा निकायलाई जानकारी गराउने,
|
| 357 |
+
(च) नेपाल सरकार र अन्य सम्बन्धित निकायसँग आवश्यकता अनुसार सम्पर्क र समन्वय गर्ने,
|
| 358 |
+
(छ) न्याय परिषदले तोकेको अन्य काम गर्ने।
|
| 359 |
+
(३) न्याय परिषदको सचिवले आफूलाई प्राप्त अधिकारमध्ये आवश्यकता अनुसार कुनै अधिकार आफू मातहतको कुनै राजपत्रांकित अधिकृतलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 360 |
+
|
| 361 |
+
---
|
| 362 |
+
|
| 363 |
+
### ३७. शपथ
|
| 364 |
+
संविधानको धारा १४३ को उपधारा (१) को खण्ड (घ) र (ङ) बमोजिमका सदस्यले अध्यक्ष समक्ष अनुसूचीमा तोकिए बमोजिम शपथ लिनु पर्नेछ।
|
| 365 |
+
|
| 366 |
+
---
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| 367 |
+
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| 368 |
+
### ३८. बार्षिक प्रतिवेदन पेश गर्नु पर्ने
|
| 369 |
+
(१) न्याय परिषदले प्रत्येक बर्ष आफूले गरेको काम कारबाहीको बार्षिक प्रतिवेदन आर्थिक बर्ष पूरा भएको तीन महिनाभित्र राष्ट्रपति समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 370 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश भएको प्रतिवेदन राष्ट्रपतिले प्रधानमन्त्री मार्फत सङ्घीय संसद् समक्ष पेश गर्न लगाउनेछ।
|
| 371 |
+
|
| 372 |
+
---
|
| 373 |
+
|
| 374 |
+
### ३९. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क
|
| 375 |
+
न्याय परिषदले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालय मार्फत् राख्नु पर्नेछ।
|
| 376 |
+
|
| 377 |
+
---
|
| 378 |
+
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| 379 |
+
### ४०. नियम बनाउने अधिकार
|
| 380 |
+
न्याय परिषदले यस ऐनको कार्यान्वयनको लागि आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 381 |
+
|
| 382 |
+
---
|
| 383 |
+
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| 384 |
+
### ४१. निर्देशिका बा कार्यबिधि बनाउने अधिकार
|
| 385 |
+
न्याय परिषदले सम्पादन गर्नु पर्ने काम सुचारू रूपले सज्ञान गर्न बा गराउनको लागि यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही आवश्यक निर्देशिका बा कार्यबिधि बनाउन सक्नेछ।
|
| 386 |
+
|
| 387 |
+
---
|
| 388 |
+
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| 389 |
+
### ४२. खारेजी र बचाउ
|
| 390 |
+
(१) न्याय परिषद ऐन, २०४७ खारेज गरिएको छ।
|
| 391 |
+
(२) न्याय परिषद ऐन, २०४७ बमोजिम भए गरेका काम कारबाही यसै ऐन बमोजिम भए गरेको मानिनेछ।
|
| 392 |
+
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| 393 |
+
---
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| 394 |
+
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| 395 |
+
### अनुसूची
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| 396 |
+
(दफा ३७ सैंग सम्बन्धित)
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| 397 |
+
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| 398 |
+
#### शपथ
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| 399 |
+
म
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| 400 |
+
म.मुत्तुक र जनताप्रति पूर्ण बफादार रही सत्य निष्टापूर्वक प्रतिज्ञा गर्हुर्हृशबरदेश र जनताको नाममा शपथ लिन्छु कि नेपालको राजकीय सत्ता र सार्वभौमसत्ता नेपाली जनतामा निहित रहेको नेपालको संविधान प्रति पूर्ण बफादार रही. पदको कामकाज प्रचलित कानूनको अधीनमा रही, कसैको डर नमानी, पक्षपात नगरी, कसैप्रति पूर्वाग्रह बा खराब भावना नलिई, दुमानदारीसाथ गर्नेछु र आफ्नो कर्तव्य पालनाको सिलसिलामा आफूलाई जानकारी भएको कुरा म पदमा बहाल रहँदा बा नरहँदा जुनसुकै अवस्थामा पनि प्रचलित कानूनको पालना गर्दा बाहेक अरु अवस्थामा कुनै किसिमबाट पनि प्रकट बा संकेत गर्ने छैन।
|
| 401 |
+
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| 402 |
+
मितिः-
|
| 403 |
+
नाम:-
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| 404 |
+
दस्तखत:-
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section_2_pdf_12.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,224 @@
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| 1 |
+
# पारस्परिक कानूनी सहायता ऐन, २०७०
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| 2 |
+
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| 3 |
+
## प्रमाणीकरण र प्रकाशित मिति
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| 4 |
+
२०७०।१२।१२
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| 5 |
+
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| 6 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
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| 7 |
+
१. सम्पत्ति शुद्धीकरण (मनी लाउण्डरिङ) निवारण तथा व्यावसायिक बातावरण प्रवर्द्धन सम्बन्धी केही ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०६०
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| 8 |
+
२०६०।१२।३०
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| 9 |
+
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| 10 |
+
संबत् २०७० को ऐन नं. ७
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| 11 |
+
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| 12 |
+
## पारस्परिक कानूनी सहायता सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 13 |
+
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| 14 |
+
**प्रस्तावनाः**
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| 15 |
+
न्यायिक कारबाहीका विषयमा नेपाल र विदेशी राज्यबीच पारस्परिक कानूनी सहायता आदान प्रदान गर्ने सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले, नेपालको अन्तरिम संविधान, २०६३ को धारा ६३ बमोजिम व्यवस्थापिका-संसद्को हैसियतमा संविधान सभाले यो ऐन बनाएको छ ।
|
| 16 |
+
|
| 17 |
+
---
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| 18 |
+
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| 19 |
+
## परिच्छेद-१
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| 20 |
+
### प्रारम्भिक
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| 21 |
+
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| 22 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ :**
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| 23 |
+
(१) यस ऐनको नाम "पारस्परिक कानूनी सहायता ऐन, २०७०" रहेको छ ।
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| 24 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ ।
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| 25 |
+
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| 26 |
+
**२. परिभाषाः**
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| 27 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 28 |
+
(क) "अदालत" भन्नाले सर्वोच्च अदालत, पुनरावेदन अदालत र जिल्ला अदालत सम्झनुपर्छ र सो शब्दले न्यायिक कारबाही गर्ने अन्य अधिकारी बा निकाय समेतलाई जनाउँछ ।
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| 29 |
+
(ख) "आदेश" भन्नाले अदालतले जारी गरेको आदेश सम्झनुपर्छ र सो शब्दले अदालतको निर्णय बा फैसला समेतलाई जनाउँछ।
|
| 30 |
+
(ग) "कसूर" भन्नाले कानून बमोजिम कम्तीमा एक बर्ष कैद सजाय बा पचास हजार रुपैयाँ जरिबाना हुने कसूर सम्झनु पर्छ र सो शब्दले विदेशी राज्यको कानून बमोजिम कम्तीमा एक बर्षको कैद सजाय बा पचास हजार रुपैयाँ जरिबाना हुने कसूर समेतलाई जनाउँछ।
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| 31 |
+
(घ) "केन्द्रीय अधिकारी" भन्नाले दफा ६ बमोजिमको निकाय बा अधिकारी सम्झनु पर्छ।
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| 32 |
+
(ङ) "न्यायिक कारबाही" भन्नाले मुदाको दायरीदेखि फैसला कार्यान्वयनसम्मको कारबाही सम्झनु पर्छ र सो शब्दले कुनै कसूरको सम्बन्धमा गरिने अनुसन्धान बा तहकिकात समेतलाई जनाउँछ।
|
| 33 |
+
(च) "न्यायिक लिखत" भन्नाले अदालतमा दर्ता भएको फिरादपत्र, दाबी पत्र, निवेदन बा पुनरावेदन सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अदालतबाट जारी भएको आदेश समेतलाई जनाउँछ।
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| 34 |
+
(छ) "पारस्परिक कानूनी सहायता" भन्नाले दफा ४ मा उल्लिखित बिषयसँग सम्बन्धित काम कारबाही सम्झनु पर्छ।
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| 35 |
+
(ज) "म्याद" भन्नाले मुदाको रोहमा कुनै व्यत्किको नाममा जारी गरिने सूचना, समाव्हान बा इतलायनामा सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(झ) "विदेशी राज्य" भन्नाले नेपालसँग पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि अनुरोध गर्ने विदेशी राज्य सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
|
| 38 |
+
---
|
| 39 |
+
|
| 40 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 41 |
+
### पारस्परिक कानूनी सहायता प्राप्त गर्ने अबस्था र बिषय
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| 42 |
+
|
| 43 |
+
**३. पारस्परिक कानूनी सहायता आदान प्रदान गर्न सकिने अबस्था :**
|
| 44 |
+
(१) नेपाल र विदेशी राज्य बीच पारस्परिक कानूनी सहायता आदान प्रदान गर्ने सम्बन्धमा द्विपक्षीय सन्धि भएको रहेछु भने नेपाल र त्यस्तो विदेशी राज्य बीच पारस्परिक कानूनी सहायता आदान प्रदान गर्न सकिनेछ।
|
| 45 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै न्यायिक कारबाहीको सम्बन्धमा कुनै विदेशी राज्यले भविष्यमा त्यस्तै प्रकारको न्यायिक कारबाहीमा पारस्परिक कानूनी सहायता प्रदान गर्ने आश्वासन दिई नेपाल सरकार समक्ष पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि अनुरोध गरेमा पारस्परिकताको आधारमा कानूनी सहायता प्रदान गर्न बाधा पर्नेछुंन ।
|
| 46 |
+
|
| 47 |
+
**४. पारस्परिक कानूनी सहायता आदान प्रदान नगरिने अबस्था :**
|
| 48 |
+
दफा ३ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायको अबस्थामा पारस्परिक कानूनी सहायता आदान प्रदान गरिने छैनः-
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| 49 |
+
(क) देबानी प्रकृतिको बिषयमा एक लाख रूपैयाँ भन्दा कम बिगो कायम रहेको न्यायिक कारवाही भएमा,
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| 50 |
+
(ख) फौजदारी प्रकृतिको बिषयमा एक वर्ष भन्दा कम कैद सजाय बा पचास हजार रुपैयाँभन्दा कम जरिबाना हुने कसूर भएमा,
|
| 51 |
+
(ग) विदेशी राज्यको अनुरोध बमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायता प्रदान गर्दा बा सोको कारणबाट सार्वजनिक व्यवस्था (पब्लिक अर्डर) बा नेपालको सार्वभौमसत्ता प्रतिकूल हुने भएमा ।
|
| 52 |
+
|
| 53 |
+
**५. पारस्परिक कानूनी सहायताका बिषय :**
|
| 54 |
+
नेपाल र विदेशी राज्यबीच न्यायिक कारबाहीसँग सम्बन्धित देहायका बिषयमा पारस्परिक कानूनी सहायता आदान प्रदान गर्न सकिनेछ:-
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| 55 |
+
(क) कुनै कागज बा प्रमाण बुझ्ने, सङ्लन गर्ने बा प्राप्त गर्ने,
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| 56 |
+
(ख) कुनै सम्बद्ध वस्तु बा ठाउँको जाँच गरी सोको सूचना र प्रमाण उपलब्ध गराउने,
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| 57 |
+
(ग) बैङ्गि, बित्तीय, कर बा व्यापारिक कारोबारसँग सम्बन्धित अभिलेख बा कागजातको सङ्लन बा प्रमाणित प्रति उपलब्ध गराउने,
|
| 58 |
+
(घ) खानतलासी गर्ने, वस्तु बरामद गर्ने, व्यक्ति रहेको स्थान पत्ता लगाउने बा मानिसको सनाखत गर्ने,
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| 59 |
+
(ङ) फौजदारी प्रकृतिको बिषयमा सहयोग पुर्याउन सक्ने व्यक्तिको उपस्थिति गराउने,
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| 60 |
+
(च) म्याद तामेली गर्ने,
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| 61 |
+
(छ) चल बा अचल सम्पत्ति रोका राखे बा जफत गर्ने,
|
| 62 |
+
(छ१) विदेशी राज्यमा जफत भएको नेपालको सम्पत्ति प्राप्त गर्ने बा ने���ालमा जफत भएको सम्पत्ति विदेशी राज्यको भए त्यस्तो सम्पत्ति सो मुलुकलाई उपलब्ध गराउने,
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| 63 |
+
(ज) फैसला कार्यान्वयन गर्ने ।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
**६. केन्द्रीय अधिकारी तोक्ने :**
|
| 66 |
+
(१) नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी नेपाल र विदेशी राज्य बीच पारस्परिक कानूनी सहायता आदान प्रदान सम्बन्धी काम गर्न कुनै निकाय बा अधिकारीलाई नेपाल सरकारको केन्द्रीय अधिकारी तोक्नेछ ।
|
| 67 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम तोकिएको अधिकारीले यस ऐन बमोजिमको कार्य सम्पादन गर्नेछ ।
|
| 68 |
+
|
| 69 |
+
---
|
| 70 |
+
|
| 71 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 72 |
+
### पारस्परिक कानूनी सहायता प्राप्त गर्ने प्रक्रिया
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
**७. प्रमाण उपलब्ध गराउन अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 75 |
+
(१) प्रचलित कानून बमोजिम अनुसन्धान बा अभियोजन गर्न अधिकार प्राप्त अधिकारीले कुनै कसूरको अनुसन्धान बा अभियोजनमा सहयोग पुग्ने बैङ्ग, बित्तीय बा व्यापारिक अभिलेख समेतको कुनै कागज, प्रमाण, सूचना बा वस्तु विदेशी राज्यमा रहेको भन्ने कुरामा बिच्रास गर्नु पर्ने पर्याप्त आधार भएमा त्यस्तो कागज, प्रमाण, सूचना बा वस्तु उपलब्ध गराई दिन केन्द्रीय अधिकारी समक्ष अनुरोध गर्न सक्नेछ ।
|
| 76 |
+
(२) न्यायिक कारबाहीमा सहयोग पुग्ने बैङ्ग, बित्तीय बा व्यापारिक अभिलेख समेतको कुनै कागज, प्रमाण, सूचना बा वस्तु विदेशी राज्यमा रहेको भन्ने कुरामा बिच्रास गर्नु पर्ने पर्याप्त आधार भएमा अदालतले सो प्रयोजनको लागि आदेश गर्न सक्नेछ ।
|
| 77 |
+
|
| 78 |
+
**८. व्यक्ति उपस्थित गराउने तथा व्यक्ति रहेको स्थान पत्ता लगाउन अनुरोध गर्न सक्नेः**
|
| 79 |
+
(१) न्यायिक कारबाहीमा सहयोग गर्न सक्ने कुनै व्यक्ति बिदेशी राज्यमा रहेको कुरामा बिश्वास गर्नु पर्ने पर्याप्त आधार भएमा अदालतले सो प्रयोजनको लागि आदेश गर्न सक्नेछ।
|
| 80 |
+
(२) कुनै न्यायिक कारबाहीसँग सम्बन्धित कुनै व्यक्ति रहेको बिदेशी राज्यको स्थान पत्ता लगाउनु पर्ने बा व्यक्ति सनाखत गर्नु पर्ने भएमा अदालतले सो प्रयोजनको लागि आदेश गर्न सक्नेछ ।
|
| 81 |
+
|
| 82 |
+
**९. म्याद बा न्यायिक लिखत तामेल गर्न अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 83 |
+
(१) अदालतमा दायर भएको कुनै मुद्दामा बिदेशी राज्यमा रहे बसेको कुनै व्यक्तिको नाममा कुनै म्याद बा न्यायिक लिखत तामेल गर्नु पर्ने भएमा अदालतले सो प्रयोजनको लागि आदेश गर्न सक्नेछ ।
|
| 84 |
+
|
| 85 |
+
**१०. प्रमाण बुझ्न अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 86 |
+
(१) अदालतमा विचाराधीन रहेको कुनै मुद्दाको सम्बन्धमा विदेशी राज्यमा कुनै प्रमाण बुझ्न आवश्यक देखेमा अद���लतले सो प्रयोजनको लागि आदेश गर्न सक्नेछ ।
|
| 87 |
+
|
| 88 |
+
**११. साक्षी परीक्षण र बन्द सवाल जारी गर्न अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 89 |
+
(१) कुनै न्यायिक कारबाहीको सिलसिलामा विदेशमा रहे बसेको कुनै व्यक्तिलाई साक्षीको रुपमा बुझ्नु पर्ने देखिएमा र त्यस्तो व्यक्ति नेपालमा आउन नचाहेमा बा नसक्ने भएमा त्यस्तो व्यक्तिलाई विदेशी राज्यको अदालतबाट साक्षीको रुपमा बुझ्न अदालतले आदेश गर्न सक्नेछ ।
|
| 90 |
+
|
| 91 |
+
**१२. सम्पत्ति रोका बा जफत गर्न अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 92 |
+
(१) न्यायिक कारबाहीसँग सम्बन्धित सम्पत्ति बा त्यसको केही अंश विदेशी राज्यमा रहेको छ भन्ने कुरामा बिश्रास गर्ने पर्याप्त आधार देखिएमा अदालतले त्यस्तो सम्पत्ति रोका राखे बा जफत गर्ने आदेश गर्न सक्नेछ।
|
| 93 |
+
|
| 94 |
+
**१३. फैसला कार्यान्वयन गरी दिन अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 95 |
+
(१) नेपालको अदालतबाट भएको कुनै फैसलाको कार्यान्वयन विदेशी अदालतमा गर्नु पर्ने देखिएमा अदालतले सो प्रयोजनको लागि आदेश गर्न सक्नेछ ।
|
| 96 |
+
|
| 97 |
+
**१४. केन्द्रीय अधिकारी समक्ष लेखी पटाउँदा खुलाउनु पर्ने बिबरण बा संलग्न गर्नु पर्ने कागजात:**
|
| 98 |
+
(१) दफा ७, ६, ९, १०, ११, १२ बा १३ बमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि केन्द्रीय अधिकारी समक्ष लेखी पटाउँदा सम्बन्धित अधिकारी बा अदालतले देहायका बिबरण खुलाउनु पर्नेछ:-
|
| 99 |
+
(क) न्यायिक कारबाही माग गर्ने अदालत, न्यायिक कारबाहीको संक्षिप्त व्यहोरा तथा सम्बद्ध कानून,
|
| 100 |
+
(ख) माग गरिएको पारस्परिक कानूनी सहायताको बिषय,
|
| 101 |
+
(ग) न्यायिक कारबाही फौजदारी प्रकृतिको भए सो कारबाहीमा हुन सक्ने अधिकतम सजाय र देबानी प्रकृतिको भए दाबी लिद्वएको अधिकतम बिगो,
|
| 102 |
+
(घ) न्यायिक कारबाहीसँग सम्बन्धित कागज, प्रमाण, सूचना, बस्तु बा सम्पत्ति रहेको स्थान र त्यसको प्रकृति,
|
| 103 |
+
(ङ) खानतलासी लिनु पर्ने भए सो बस्तुको बिबरण र त्यस्तो स्थानको पूरा ठेगाना,
|
| 104 |
+
(च) न्यायिक कारबाहीमा सहयोग गर्न सक्ने व्यक्तिका सम्बन्धमा निजको नाम, हुलिया र राष्ट्रियता लगायत पहिचान हुन सक्ने राहदानी बा राष्ट्रिय परिचयपत्र नम्बर भए सो लगायत आवश्यक अन्य बिबरण र यथासम्भब हाल बसोबास गरिरहेको स्थान सम्बन्धी जानकारी,
|
| 105 |
+
(छ) माग गरिएको कागजात, प्रमाण, सूचना, बस्तु बा व्यक्ति न्यायिक कारबाहीको निमित्त तात्विक सम्बन्ध भएको पुष्टवाई,
|
| 106 |
+
(ज) सम्बन्धित प्रमाण कागजात सकल प्रति नै आवश्यक पर्ने भए त्यसको पुष्टवाई र फिर्ता गर्नु पर्ने भए फि��्ता गरिने कुराको आश्वासन,
|
| 107 |
+
(झ) पारस्परिक कानूनी सहायता प्रदान गर्न अनुरोध गरिएको विदेशी मुलुकको सम्बन्धित अधिकारी,
|
| 108 |
+
(ज) पारस्परिक कानूनी सहायता प्रदान गर्नु पर्ने अबधि,
|
| 109 |
+
(ट) कुनै बस्तु खानतलासी लिन बा जफत गर्न लेखी पठाउने भए त्यस्तो बस्तुमा स्वामित्व रहेको व्यक्तिले नेपालमा कसूर गरेको बा त्यस्तो कसूरबाट सम्पत्ति बढे बढाएको पुष्टि हुने आधार,
|
| 110 |
+
(ठ) म्याद बा न्यायिक लिखत तामेल गर्न माग गरेको भए,
|
| 111 |
+
(१) म्याद बा न्यायिक लिखत तामेल गर्नु पर्ने व्यक्तिको पूरा नाम,
|
| 112 |
+
(२) उपखण्ड (१) बमोजिमको व्यक्ति रहे बसेको मुलुक, राहदानी बा राष्ट्रिय परिचयपत्र नम्बर भए सोको बिबरण,
|
| 113 |
+
(३) उपखण्ड (२) बमोजिमको व्यत्तिको ठेगानामा म्याद बा न्यायिक लिखत तामेल हुन नसक्ने भएमा निजले काम गर्ने बा व्यवसाय सज्ञान गर्ने प्रतिष्ठानको मुलुक र टेगाना ।
|
| 114 |
+
|
| 115 |
+
**१५. पारस्परिक कानूनी सहायता प्राप्त गर्न विदेशी राज्यलाई अनुरोध गर्नु पर्ने :**
|
| 116 |
+
(१) दफा ७, ६, ९, १०, ११, १२ बा १३ बमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि लेखी आएमा केन्द्रीय अधिकारीले त्यस्तो कानूनी सहायता प्राप्त गर्न विदेशी राज्य समक्ष अनुरोध गर्नु पर्नेछ् ।
|
| 117 |
+
|
| 118 |
+
---
|
| 119 |
+
|
| 120 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 121 |
+
### विदेशी राज्यले पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि अनुरोध गर्ने प्रक्रिया
|
| 122 |
+
|
| 123 |
+
**१९. कागज, प्रमाण, सूचना बा बस्तु उपलब्ध गराउन अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 124 |
+
(१) बिदेशी मुलुकमा कुनै मुद्दाको अनुसन्धान गर्दा बा न्यायिक कारबाही बा फैसला कार्यान्वयन गर्दा सो कार्यमा सहयोग पुग्ने कुनै कागज, प्रमाण, सूचना बा बस्तु नेपालभित्र भएको कुरामा बिश्वास गर्नु पर्ने पर्याप्त आधार भएमा सम्बन्धित विदेशी राज्यले पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि नेपाल सरकार समक्ष अनुरोध गर्न सक्नेछ।
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
**२०. व्यक्ति उपस्थित गराउन तथा व्यक्ति रहेको स्थान पत्ता लगाउन अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 127 |
+
(१) नेपालमा रहेको कुनै व्यक्तिले विदेशी राज्यमा विचाराधीन कुनै न्यायिक कारबाहीमा सहयोग गर्न सक्ने कारण देखाई विदेशी राज्यले त्यस्तो व्यक्तिलाई उपस्थित गराई दिन नेपाल सरकार समक्ष अनुरोध गर्न सक्नेछ ।
|
| 128 |
+
|
| 129 |
+
**२१. म्याद बा न्यायिक लिखत तामेल गर्न अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 130 |
+
विदेशी अदालतमा विचाराधीन रहेको न्यायिक कारबाहीसँग सम्बन्धित व्यक्ति बा निकाय नेपालमा रहेकोले त्यस्तो व्यक्ति बा निकायको नाममा कुनै म्याद बा न्यायिक लिखत जारी गर���नु पर्ने भएमा त्यस्तो विदेशी राज्यको अदालतको आदेश बमोजिम सो अदालतबाट जारी भएको कुनै म्याद बा न्यायिक लिखत तामेल गर्न विदेशी राज्यले नेपाल सरकार समक्ष अनुरोध गर्न सक्नेछ ।
|
| 131 |
+
|
| 132 |
+
**२२. साक्षी बा प्रमाण बुझ्न अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 133 |
+
(१) कुनै विदेशी अदालत बा निकायमा विचाराधीन रहेको कुनै न्यायिक कारबाहीका सिलसिलामा नेपालमा रहे बसेको कुनै व्यक्तिलाई साक्षीको रुपमा बुझ्नु पर्ने देखिएमा त्यस्तो विदेशी राज्यको अदालत बा निकायको आदेश बमोजिम विदेशी राज्यले नेपाल सरकार समक्ष अनुरोध गर्न सक्नेछ् ।
|
| 134 |
+
|
| 135 |
+
**२३. सम्पत्ति रोका बा जफत सम्बन्धी आदेश कार्यान्वयनको लागि अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 136 |
+
विदेशी अदालतमा विचाराधीन रहेको कुनै न्यायिक कारबाहीसँग सम्बन्धित सम्पत्ति बा त्यसको केही अंश नेपालमा रहेकोले त्यस्तो सम्पत्ति रोका बा जफत गर्न विदेशी राज्यको अदालतले गरेको आदेश कार्यान्वयन गर्नु परेमा विदेशी राज्यले नेपाल सरकार समक्ष अनुरोध गर्न सक्नेछ् ।
|
| 137 |
+
|
| 138 |
+
**२४. फैसला मान्यता दिन बा कार्यान्वयन गर्न अनुरोध गर्न सक्ने :**
|
| 139 |
+
न्यायिक कारबाहीसँग सम्बन्धित कुनै विदेशी अदालतको फैसला मान्यता दिनु बा कार्यान्वयन गर्नु पर्ने भएमा त्यस्तो विदेशी राज्यले नेपाल सरकार समक्ष अनुरोध गर्न सक्नेछ् ।
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
**२५. खुलाउनु पर्ने विवरण बा संलग्न गर्नु पर्ने कागजात :**
|
| 142 |
+
यस परिच्छेद बमोजिम विदेशी राज्यले नेपाल सरकार समक्ष पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि अनुरोध गर्दा आवश्यक हेरफेर सहित दफा १४ र १४ बमोजिमका व्यवस्थाहरु लागू हुनेछन् र सोही बमोजिम सम्बन्धित विदेशी राज्यले आवश्यक विवरण खुलाउनु बा सम्बन्धित कागजात संलग्न गर्नु पर्नेछ ।
|
| 143 |
+
|
| 144 |
+
**२६. पारस्परिक कानूनी सहायता सम्बन्धी अनुरोध केन्द्रीय अधिकारी समक्ष पठाउनु पर्ने :**
|
| 145 |
+
दफा १९, २०, २१, २२, २३ र २४ बमोजिम विदेशी राज्यबाट पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि अनुरोध प्राम्र भएपछि नेपाल सरकार, परराष्ट्र मन्त्रालयले त्यस्तो अनुरोध र सो साथ संलग्न विवरण, कागजात र प्रमाण पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि केन्द्रीय अधिकारी समक्ष पठाउनु पर्नेछ ।
|
| 146 |
+
|
| 147 |
+
**२७. केन्द्रीय अधिकारीले आवश्यक अध्ययन र जाँचबुझ गर्नु पर्ने :**
|
| 148 |
+
(१) दफा २६ बमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि अनुरोध, विवरण, कागजात र प्रमाण प्राप्त भएमा केन्द्रीय अधिकारीले सो उपर आवश्यक अध्ययन र जाँचबुझ ��री पारस्परिक कानूनी सहायता प्रदान गर्ने कारबाही अघि बढाउने बा नबढाउने सम्बन्धमा पन्ध्र दिनभित्र निर्णय गर्नु पर्नेछ ।
|
| 149 |
+
|
| 150 |
+
**२८. पारस्परिक कानूनी सहायता उपलब्ध गराउन इन्कार गर्न सक्नेः**
|
| 151 |
+
दफा २७ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायको अवस्थामा केन्द्रीय अधिकारीले पारस्परिक कानूनी सहायता उपलब्ध गराउन इन्कार गर्न सक्नेछ:-
|
| 152 |
+
(क) दफा ४ बमोजिमको अबस्था भएमा,
|
| 153 |
+
(ख) द्विपक्षीय सन्धि बमोजिम अनुरोध भई नआएको भएमा,
|
| 154 |
+
(ग) कुनै कसूरसँग सम्बन्धित विषयमा पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि अनुरोध गरिएकोमा त्यस्तो कसूर राजनीतिक प्रकृतिको भएमा,
|
| 155 |
+
(घ) दफा २७ को उपदफा (२) बमोजिम माग गरिएको बिबरण, कागजात बा प्रमाण सम्बन्धित विदेशी मुलुकबाट प्राप्त हुन नआएमा,
|
| 156 |
+
(ङ) अनुरोध गरिएको बिषय सैनिक ऐन अन्तर्गतको कसूरसँग सम्बन्धित भएको देखिएमा,
|
| 157 |
+
(च) जात, धर्म, लिङ्ग, जातीय उत्पत्ति, राष्ट्रियता बा राजनीतिक बिचारको आधारमा कुनै व्यक्ति बिरूद्ध अनुसन्धान, कानूनी कारबाही बा सजाय गर्न खोजिएको देखिएमा,
|
| 158 |
+
(छ) अनुरोध गरिएको बिषय अनुसन्धानको लागि महत्वहीन भएको बा अन्य तरिकाबाट सो सम्बन्धमा जानकारी प्राप्त गर्न सकिने देखिएमा,
|
| 159 |
+
(ज) जुन बिषयमा पारस्परिक कानूनी सहायताको माग गरिएको हो सो बिषय बाहक अन्य काम कारबाहीमा त्यसको प्रयोग नहुने कुराको सुनिश्चितता प्राप्त नभएमा,
|
| 160 |
+
(झ) पारस्परिक कानूनी सहायता उपलब्ध गराउँदा सार्वजनिक व्यवस्था (पब्लिक अर्डर) प्रतिकूल हुने भएमा ।
|
| 161 |
+
|
| 162 |
+
**२९. अदालतमा निबेदन दिनु पर्ने :**
|
| 163 |
+
(१) दफा २७ को उपदफा (३) बमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायता उपलब्ध गराउनको लागि केन्द्रीय अधिकारीबाट आदेश प्राप्त भएमा सम्बन्धित जिल्ला सरकारी बकीलले विदेशी राज्यबाट प्राप्त बिबरण, कागजात तथा प्रमाण सहित सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा निबेदन दिनु पर्नेछ् ।
|
| 164 |
+
|
| 165 |
+
**३०. पारस्परिक कानूनी सहायता इन्कार गरिएको जानकारी दिनु पर्ने :**
|
| 166 |
+
दफा २६ बा २९ बमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायता प्रदान गर्न इन्कार गरिएमा सोको जानकारी केन्द्रीय अधिकारीले सात दिनभित्र विदेशी राज्यलाई दिनु पर्नेछु ।
|
| 167 |
+
|
| 168 |
+
---
|
| 169 |
+
|
| 170 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 171 |
+
### पारस्परिक कानूनी सहायता उपलब्ध गराउने
|
| 172 |
+
|
| 173 |
+
**३१. पारस्परिक कानूनी सहायता उपलब्ध गराउन आदेश गर्ने :**
|
| 174 |
+
दफा २७ को उपदफा (३) बमोजिम केन्द्रीय निकायबाट पारस्परिक कानूनी सहायता उपलब्ध गराउन सम्बन्धित अनुसन्धान अधिकारी��ाई आदेश भएमा बा त्यस्तो पारस्परिक कानूनी सहायता उपलब्ध गराउन दफा २९, बमोजिम अदालतबाट इन्कार नभएमा सम्बन्धित अनुसन्धान अधिकारी बा अदालतले विदेशी राज्यको माग बमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायता उपलब्ध गराउनको लागि सो सम्बन्धमा आवश्यक कारबाही अघि बढ़ाउने आदेश दिनु पर्नेछ ।
|
| 175 |
+
|
| 176 |
+
**३२. प्रमाण उपलब्ध गराउने :**
|
| 177 |
+
(१) विदेशी राज्यले दफा १९, बमोजिम कुनै कागज, प्रमाण, सूचना बा बस्तु उपलब्ध गराउन अनुरोध गरेको भए र कानून बमोजिम त्यस्तो कागज, प्रमाण, सूचना बा बस्तु उपलब्ध गराउन सकिने भएमा सम्बन्धित अधिकारी बा अदालतले त्यस्तो कागजात, प्रमाण, सूचना बा बस्तुको प्रमाणित प्रति पटाउने आदेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 178 |
+
|
| 179 |
+
**३३. व्यक्ति उपस्थित गराउने, व्यक्ति रहेको स्थान पत्ता लगाउने बा व्यक्ति सनाखत गर्ने:**
|
| 180 |
+
(१) विदेशी राज्यले दफा २० बमोजिम कुनै व्यक्तिको उपस्थितिको लागि अनुरोध गरेको भए केन्द्रीय अधिकारीले विदेशी राज्यसँग समन्वय गरी त्यस्तो व्यक्ति नेपालबाट पटाउने र नेपालमा फिर्ता ल्याउने व्यवस्था मिलाउनु पर्नेछ।
|
| 181 |
+
|
| 182 |
+
**३४. म्याद बा न्यायिक लिखत तामेल गर्ने :**
|
| 183 |
+
(१) विदेशी राज्यले दफा २१ बमोजिम म्याद बा न्यायिक लिखत तामेल गर्न अनुरोध गरेको भए सम्बन्धित अदालतले सो अदालतमा नै न्यायिक कारबाही बिचाराधीन रहेको सरह मानी कानून बमोजिम त्यस्तो म्याद बा न्यायिक लिखत तामेल गर्नु पर्नेछ ।
|
| 184 |
+
|
| 185 |
+
**३५. साक्षी बा प्रमाण बुझ्ने :**
|
| 186 |
+
(१) विदेशी राज्यको अदालतले दफा २२ बमोजिम साक्षी बा प्रमाण बुझ्न अनुरोध गरेको भएमा सम्बन्धित अदालतले त्यस्तो अदालतमा बिचाराधीन रहेको मुद्दाको कारबाहीमा प्रमाण बुझे सरह मानी प्रमाण बुझ्नु पर्नेछ ।
|
| 187 |
+
|
| 188 |
+
**३६. सम्पत्ति रोका बा जफत गर्ने :**
|
| 189 |
+
(१) विदेशी राज्यबाट दफा २३ बमोजिम नेपालमा रहेको कुनै सम्पत्ति रोका बा जफत गर्न अनुरोध भई आएमा अदालतले प्रचलित नेपाल कानून बमोजिम सम्पत्ति रोका बा जफत गर्न सम्बन्धित निकायलाई आदेश दिनु पर्नेछ ।
|
| 190 |
+
|
| 191 |
+
**३७. विदेशी अदालतबाट भएको फैसलाको कार्यान्वयन सम्बन्धी विशेष व्यवस्था :**
|
| 192 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यब जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि विदेशी अदालतबाट भएको देबानी प्रकृतिको फैसलाको मान्यता पाउन बा त्यस्तो फैसला नेपालमा कार्यान्वयन गराउन चाहने विदेशी राज्य बा विदेशी पक्षले देहायका कागजात संलग्न गरी सम्बन्धित पुनराबेदन अदालतमा निबेदन दिनु पर्नेछ:-
|
| 193 |
+
(क) प���रमाणीकरण गरिएको फैसलाको पूर्ण प्रति,
|
| 194 |
+
(ख) कुनै पक्षको अनुपस्थितिमा मुदाको फैसला भएको रहेछ भने त्यस्तो पक्षलाई रीतपूर्वक म्याद जारी गरिएको कुरा स्थापित गर्ने कागजातको सकल बा प्रमाणित प्रतिलिपि,
|
| 195 |
+
(ग) फैसलाले उपदफा (२) को खण्ड (ख) र (ग) बमोजिमका शर्त पूरा गरेको कुरा स्थापित गर्ने सम्पूर्ण कागजातहरु,
|
| 196 |
+
(घ) सम्बन्धित कूटनैतिक बा बाणिज्यदूत सम्बन्धी प्रतिनिधि बा आधिकारिक अनुबाद गर्न अस्तियारी पाएको व्यक्तिबाट प्रमाणित भएको नेपाली भाषामा अनुबाद गरिएको फैसलाको पूर्णपाठ सहितको प्रतिलिपि ।
|
| 197 |
+
|
| 198 |
+
---
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| 199 |
+
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| 200 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 201 |
+
### विविध
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| 202 |
+
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| 203 |
+
**३९. प्रमाण कागज प्रमाणीकरण गर्नु पर्ने :**
|
| 204 |
+
(१) यस ऐनबमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि अनुरोध गर्दा संलग्न गरी पटाइएको प्रमाण कागजहरु न्यायाधीश बा अधिकार प्राप्त सरकारी अधिकृतले प्रमाणित गरी कार्यालयको छाप लगाइएको हुनु पर्नेछ।
|
| 205 |
+
|
| 206 |
+
**४०. पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि पठाइएको अनुरोधपत्र नेपाली भाषामा हुनु पर्ने :**
|
| 207 |
+
(१) यस ऐनबमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायताको लागि विदेशी राज्यले नेपाल सरकार समक्ष गरिएको अनुरोधपत्र नेपाली भाषामा लेखिएको हुनु पर्नेछ ।
|
| 208 |
+
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| 209 |
+
**४१. ***
|
| 210 |
+
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| 211 |
+
**४२. यस ऐन बमोजिम हुने :**
|
| 212 |
+
यस ऐनमा लेखिएका कुरामा यसै ऐन बमोजिम र अन्यमा प्रचलित नेपाल कानून बमोजिम हुनेछ ।
|
| 213 |
+
|
| 214 |
+
**४३. सहयोग तथा समन्वय गर्नु पर्ने :**
|
| 215 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायता आदानप्रदान गर्ने बा नगर्ने सम्बन्धमा निर्णय गर्नुअघि केन्द्रीय अधिकारीले परराष्ट्र मन्त्रालयसँग आवश्यक परामर्श गर्नु पर्नेछ।
|
| 216 |
+
|
| 217 |
+
**४४. प्रतिवेदन दिनु पर्ने :**
|
| 218 |
+
केन्द्रीय अधिकारीले देहायको विवरण उल्लेख गरी वार्षिक रूपमा नेपाल सरकार समक्ष प्रतिवेदन दिनु पर्नेछ:-
|
| 219 |
+
(क) विदेशी राज्यसँग माग गरिएको र प्राप्त गरिएको पारस्परिक कानूनी सहायता,
|
| 220 |
+
(ख) विदेशी राज्यको अनुरोधमा त्यस्तो राज्यलाई नेपालले उपलब्ध गराएको पारस्परिक कानूनी सहायता,
|
| 221 |
+
(ग) पारस्परिक कानूनी सहायता सम्बन्धमा भविष्यमा गर्नु पर्ने सुधार ।
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
**४५. नियम बनाउने अधिकार :**
|
| 224 |
+
यस ऐनको कार्यान्वयनको लागि नेपाल सरकारले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ ।
|
section_2_pdf_20.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,96 @@
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| 1 |
+
# न्यायिक कोष ऐन, २०४३
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
## लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०४३। ७। २४। २
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
|
| 8 |
+
## प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 9 |
+
गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 10 |
+
२०४३ सालको ऐन नं. १२
|
| 11 |
+
|
| 12 |
+
---
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
## न्यायिक कोषको स्थापना गर्न बनेको ऐन
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 17 |
+
फिर्ता गर्नु पर्ने अदालती शुल्क, दण्ड जरिवाना, धर्रोटी वा जमानतको रकम फिर्ता गर्ने काम छिटोछरितो गराउन, अदालत-भवन र न्यायाधीश तथा अदालतमा कार्यरत अन्य कर्मचारीहरूको आवासभवन बनाउन, त्यस्ता भवनहरूको विस्तार, मर्मत र स्याहार-सम्भार गर्न तथा न्याय सम्बन्धी अरू आवश्यक कार्यहरू गर्न समेत आबर्ती कोष (रिभर्ल्बिङ्ग फण्ड) को रूपमा एक न्यायिक कोषको स्थापना गर्न बाज्छुनीय भएकोले,
|
| 18 |
+
|
| 19 |
+
थी ४ महाराजाधिराज बीरन्द्र वीर विक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्भतिले यो ऐन बनाइबक्सेको छ ।
|
| 20 |
+
|
| 21 |
+
---
|
| 22 |
+
|
| 23 |
+
### १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:
|
| 24 |
+
(१) यस ऐनको नाम "न्यायिक कोष ऐन, २०४३" रहेको छ।
|
| 25 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकेको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
---
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
### २. परिभाषा:
|
| 30 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 31 |
+
(क) "कोष" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको न्यायिक कोष सम्झनु पर्छ।
|
| 32 |
+
(ख) "समिति" भन्नाले दफा ७ बमोजिम गठित सञ्चालक समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 33 |
+
(ग) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यो ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 34 |
+
|
| 35 |
+
---
|
| 36 |
+
|
| 37 |
+
### ३. कोषको स्थापना:
|
| 38 |
+
(१) न्यायिक कोष नामको एक कोषको स्थापना गरिएको छ।
|
| 39 |
+
(२) कोषलाई आबर्ती कोष (रिभल्बिङ्ग फण्ड) को रूपमा सञ्चालन गरिनेछ।
|
| 40 |
+
|
| 41 |
+
---
|
| 42 |
+
|
| 43 |
+
### ४. कोषमा रहने रकम:
|
| 44 |
+
कोषमा देहायका रकमहरु रहने छन्:-
|
| 45 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट समय-समयमा प्राप्त अनुदान,
|
| 46 |
+
(ख) मुद्दाका पक्षले राखेको धरौटी बा जमानतको रकम।
|
| 47 |
+
|
| 48 |
+
---
|
| 49 |
+
|
| 50 |
+
### ५. कोषको प्रयोग:
|
| 51 |
+
कोषको रकम देहायका कार्यहरुमा खर्च गरिनेछ:--
|
| 52 |
+
(क) कानून बा अदालतको फैसला बा आदेशबमोजिम फिर्ता गर्नु पर्ने अदालती शुल्क, दण्ड जरिबाना बा अन्य रकम फिर्ता गर्न,
|
| 53 |
+
(ख) अदालतको फैसला बा आदेश बमोजिम फिर्ता गर्नु पर्ने धरौटी बा जमानत रकम फिर्ता दिन,
|
| 54 |
+
(ग) कानून बा अदालतको फैसला बा आदेश बमोजिम दिनु पर्ने पुरस्कार र अन्य रकम दिन,
|
| 55 |
+
(घ) अदालत भवन, न्यायाधीश र अदालतका अन्य कर्मचारीको आवास-भवन बनाउन र त्यस्ता भवनहरूको विस्तार, मर्मत एवं स्याहार-सम्भार गर्न र आवश्��क भएमा त्यसको लागि जग्गा खरिद गर्न,
|
| 56 |
+
(ङ) कानून बमोजिम अदालतले गर्नु पर्ने अन्य कुनै न्यायिक कार्यमा खर्च गर्न।
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
---
|
| 59 |
+
|
| 60 |
+
### ६. सोध भर्ना गर्ने:
|
| 61 |
+
दफा ५ को खण्ड (क) बा (ग) बमोजिम दिएको बा फिर्ता गरेको रकम नेपाल सरकारबाट कोषमा सोधभर्ना गरिनेछ्।
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
---
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
### ७. सञ्चालक समितिको गठन:
|
| 66 |
+
(१) कोषको सम्पूर्ण काम कारबाहीको सञ्चालन र रेखदेख गर्न देहाय बमोजिमको सञ्चालक समिति रहनेछ:-
|
| 67 |
+
(क) प्रधान न्यायाधीश - अध्यक्ष
|
| 68 |
+
(ख) सर्वोच्च अदालतका बरिष्ठ न्यायाधीश - सदस्य
|
| 69 |
+
(ग) महान्यायाधिबक्ता - सदस्य
|
| 70 |
+
(घ) नेपाल सरकारको सचिब, कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालय - सदस्य
|
| 71 |
+
(ङ) रजिष्ट्रार, सर्वोच्च अदालत - सदस्य-सचिब
|
| 72 |
+
(२) सञ्चालक समितिले आफनो कार्यबिधि आफै व्यवस्थित गर्नेछ्।
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
---
|
| 75 |
+
|
| 76 |
+
### ८. कोषको व्यवस्था र सञ्चालन:
|
| 77 |
+
(१) कोषमा जम्मा हुने रकम तोकिएको बैङ्कमा तोकिएको खातामा जम्मा गरिनेछ।
|
| 78 |
+
(२) कोषको खाताको सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 79 |
+
|
| 80 |
+
---
|
| 81 |
+
|
| 82 |
+
### ९. अधिकार प्रत्यायोजन:
|
| 83 |
+
समितिले आफ्नो अधिकार अदालतका न्यायाधीश बा कर्मचारीलाई सुम्पन सक्नेछ्।
|
| 84 |
+
|
| 85 |
+
---
|
| 86 |
+
|
| 87 |
+
### १०. नियम बनाउने अधिकार:
|
| 88 |
+
यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्नको लागि समितिको सिफारिसमा नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
---
|
| 91 |
+
|
| 92 |
+
**द्वष्टस्य:**
|
| 93 |
+
(१) केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रुपान्तर भएको शब्दहरु:-
|
| 94 |
+
"थी ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
| 95 |
+
(२) केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४ द्वारा रुपान्तरण भएका शब्दहरु:-
|
| 96 |
+
"कोर्ट फी" को सट्टा "अदालती शुल्क"।
|
section_2_pdf_21.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,117 @@
|
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| 1 |
+
**सर्वोच्च अदालत ऐन, २०४६**
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
---
|
| 4 |
+
|
| 5 |
+
### लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 6 |
+
२०४६। ७। २६
|
| 7 |
+
|
| 8 |
+
---
|
| 9 |
+
|
| 10 |
+
### संशोधन गर्ने ऐन
|
| 11 |
+
|
| 12 |
+
### प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 13 |
+
1. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६*
|
| 14 |
+
२०६६। १०। ०७
|
| 15 |
+
२०७२। ११। १३
|
| 16 |
+
2. सर्वोच्च अदालत (पहिलो संशोधन) ऐन, २०७३
|
| 17 |
+
२०७३। ४। २७
|
| 18 |
+
3. न्याय प्रशासन ऐन, २०७३*
|
| 19 |
+
२०७३। ४। २७
|
| 20 |
+
4. केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४*
|
| 21 |
+
२०७४। ६। ३०
|
| 22 |
+
|
| 23 |
+
---
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
### सर्वोच्च अदालतको सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 28 |
+
सर्वोच्च अदालतको सम्बन्धमा केही कानुनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 29 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको वीसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएकोछ।
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
---
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
### १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:
|
| 34 |
+
(१) यस ऐनको नाम "सर्वोच्च अदालत ऐन, २०४६" रहेकोछ।
|
| 35 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 36 |
+
|
| 37 |
+
---
|
| 38 |
+
|
| 39 |
+
### २. परिभाषा:
|
| 40 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 41 |
+
(क) "संविधान" भन्नाले नेपालको संविधान सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(ख) "प्रधान न्यायाधीश" भन्नाले नेपालको प्रधान न्यायाधीश सम्झनु पर्छ र सो शब्दले कायम मुकायम प्रधान न्यायाधीश समेतलाई जनाउँछ।
|
| 43 |
+
(ग) "न्यायाधीश" भन्नाले सर्वोच्च अदालतको न्यायाधीश सम्झनु पर्छ र सो शब्दले प्रधान न्यायाधीश समेतलाई जनाउँछ।
|
| 44 |
+
(घ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
|
| 46 |
+
---
|
| 47 |
+
|
| 48 |
+
### ३. सर्वोच्च अदालत रहने स्थान:
|
| 49 |
+
सर्वोच्च अदालत काठमाडौंमा रहनेछ।
|
| 50 |
+
तर, नेपाल सरकारसँग परामर्श गरी प्रधान न्यायाधीशले तोकेको स्थानमा पनि सर्वोच्च अदालतले इजलास कायम गरी आफ्नो अधिकार क्षेत्रको प्रयोग गर्न बा अन्य काम कारबाही गर्न सक्नेछ।
|
| 51 |
+
|
| 52 |
+
---
|
| 53 |
+
|
| 54 |
+
### ४. सर्वोच्च अदालतको अधिकारक्षेत्रको प्रयोग:
|
| 55 |
+
(१) सर्वोच्च अदालतबाट मुद्दा मामिलाको सुनबाई र किनारा गर्ने अधिकारको प्रयोग संवैधानिक इजलास, तोकिएबमोजिम एक जना न्यायाधीशको इजलासबाट बा एक भन्दा बढी न्यायाधीशहरूको संयुक्त इजलास, पूर्ण इजलास बा बहत पूर्ण इजलास र संवैधानिक इजलासबाट हुनेछ।
|
| 56 |
+
|
| 57 |
+
(२) उपदफा (१) मा लेखिएदेखि बाहेक सर्वोच्च अदालतलाई भएको अन्य अधिकारको प्रयोग तोकिएबमोजिम सर्वोच्च अदालतका न्यायाधीशहरूको पूर्ण बैठक, समिति बा सर्वोच्च अदालतको मुख्य रजिष्ट्रारबाट हुनेछ।
|
| 58 |
+
|
| 59 |
+
---
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
### ४ क. आदेश जारी गर्ने:
|
| 62 |
+
सर्��ोच्च अदालतले संविधानको धारा १३३ को उपधारा (१) बमोजिम कुनै कानूनलाई प्रारम्भ देखिनै बा निर्णय भएको मिति देखि अमान्य बा बदर घोषित गर्दा उपयुक्त आदेश जारी गर्न सक्नेछ।
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| 64 |
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### ४ ख. समिति बा कार्यदल गठन गर्न सक्ने:
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सर्वोच्च अदालतका न्यायाधीशहरूको पूर्ण बैठक बा प्रधान न्यायाधीशले दफा ४ मा उल्लिखित काम बाहेक अन्य कामको लागि आवश्यकता अनुसार समिति बा कार्यदल गठन गरी त्यस्तो समिति बा कार्यदलको काम, कर्तव्य तथा कार्यबधि तोक्न सक्नेछ।
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### ५. सर्वोच्च अदालत अभिलेख अदालतको रुपमा रहने:
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सर्वोच्च अदालत अभिलेख अदालत हुनेछ। सर्वोच्च अदालतले गरेको फैसला, अन्तिम आदेश तथा तोकिएका न्यायिक कारबाही सम्बन्धी लिखत तोकिए बमोजिम सधैंका लागि सुरक्षित राखिनेछ।
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| 73 |
+
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| 75 |
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### ६. शपथ:
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| 77 |
+
प्रधान न्यायाधीशको पदमा नियुक्त व्यक्तिले राष्ट्रपति समक्ष र न्यायाधीशको पदमा नियुक्त व्यक्तिले प्रधान न्यायाधीश समक्ष अनुसूचीमा तोकिए बमोजिम शपथ लिनु पर्नेछ।
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| 78 |
+
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+
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| 80 |
+
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### ९. मुख्य रजिष्ट्रार:
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| 82 |
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(१) सर्वोच्च अदालतमा एक जना मुख्य रजिष्ट्रार रहनेछ।
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| 83 |
+
(२) मुख्य रजिष्ट्रारले प्रधान न्यायाधीशको सामान्य निर्देशन र नियन्त्रमा रही सर्वोच्च अदालतको प्रशासकीय प्रमुखको रुपमा काम गर्नेछ।
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| 84 |
+
(३) मुख्य रजिष्ट्रारको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 85 |
+
(४) मुख्य रजिष्ट्रारले आफूलाई प्राप्त अधिकारमध्ये आवश्यकता अनुसार र केही अधिकार रजिष्ट्रार बा मातहतका अधिकृत कर्मचारीहरुलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
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| 86 |
+
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+
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| 88 |
+
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+
### ११. नियम बनाउने अधिकार:
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| 90 |
+
(१) सर्वोच्च अदालतले आफ्नो अधिकारक्षेत्रको प्रयोग तथा कार्यबिधि व्यवस्थित गर्न आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
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| 91 |
+
(२) उपदफा (१) ले दिएको अधिकारको सर्वसामान्यतामा कुनै प्रतिकूल प्रभाव नपर्ने गरी देहायका बिषयहरूमा नियम बनाउन सकिनेछ:
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| 92 |
+
(क) सर्वोच्च अदालतको अधिकारक्षेत्रको प्रयोग एक जना न्यायाधीशको इजलासबाट बा एक भन्दा बढी न्यायाधीशको संयुक्त इजलास, पूर्ण इजलास, बृहत पूर्ण इजलास बा संवैधानिक इजलासबाट गर्ने बिषय।
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| 93 |
+
(ख) सर्वोच्च अदालतमा पुनराबेदन, साधक, पुनराबलोकन र मुद्दा दोहन्याउनको लागि दिइने निबेदनहरू सम्बन्धी बिषय।
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| 94 |
+
(ग) संविधानको धारा १३३ को उपधारा (१) र (२) अन्तर्गत पर्ने निवेदनपत्रहरू सम्बन्धी बिषय।
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| 95 |
+
(घ) फौजदारी मुद्दामा तल्लो अदालतबाट कसुरदार ठहर भएको फैसला उपर सर्���ोच्च अदालतमा पुनरावेदन दिने व्यक्तिलाई थुना बा कैदमा राख्ने बा धरौटी बा जमानतमा छाड्ने बिषय।
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| 96 |
+
(ङ) अदालतको अवहेलना सम्बन्धी कार्यबिधि।
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| 97 |
+
(च) अदालतको प्रशासनिक काम कारबाही एवं न्यायिक कार्यबिधि सम्बन्धी अन्य बिषय।
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| 98 |
+
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+
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| 100 |
+
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| 101 |
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### १२. खारेजी:
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| 102 |
+
सर्वोच्च अदालत ऐन, २०१९ खारेज गरिएको छु।
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+
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+
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### अनुसूची
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(दफा ६ सँग सम्बन्धित)
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+
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+
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### शपथ
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म सत्य निष्ठापूर्वक प्रतिज्ञा गर्छु / ईश्वरको नाममा शपथ लिन्छु कि नेपाली जनता, प्रचलित संविधान तथा अन्य कानूनप्रति पूर्ण निष्ठावान रही आफूले ग्रहण गरेको पदको जिम्मेबारी न्यायपालिकाको स्वच्छता र मर्यादा बिपरीत नहुने गरी, कसैको डर, मोलाहिजा, पक्षपात, द्वेष वा लोभमा नपरी इमान्दारीताका साथ पालना गर्नेछु र आफ्नो कर्तव्य पालनाको सिलसिलामा आफूलाई ज्ञात हुन आएको कुरा प्रचलित कानूनको पालना गर्दा बाहेक म पदमा बहाल रहेको वा नरहेको कुनै पनि अवस्थामा प्रकट गर्ने छैन।
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| 113 |
+
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+
मिति:
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+
हस्ताक्षर
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| 116 |
+
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+
गणतन्त्र सदृुढीकरण तथा केही नेपाल काननु संशोधन गनेऐन, २०६६ द्वारा संशोमधत।
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section_2_pdf_23.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,176 @@
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# राजस्व न्यायाधीकरण ऐन, २०३१
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| 2 |
+
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| 3 |
+
## लालमोहर र प्रकाशन मिति
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| 4 |
+
२०३१।४।१६
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| 5 |
+
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| 6 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
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| 7 |
+
१. राजस्व न्यायाधिकरण (पहिलो संशोधन) ऐन, २०३३
|
| 8 |
+
२०३३।४।१०
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| 9 |
+
२. राजस्व न्यायाधिकरण (दोस्रो संशोधन) ऐन, २०३६
|
| 10 |
+
२०३६।६।११
|
| 11 |
+
३. न्याय प्रशासन ऐन, २०४६
|
| 12 |
+
२०४६।२।१६
|
| 13 |
+
४. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०४६
|
| 14 |
+
२०४९।१।६
|
| 15 |
+
५. अदालत व्यवस्थापन तथा न्याय प्रशासन सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०५६
|
| 16 |
+
२०५९।५।२७
|
| 17 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 18 |
+
६. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६*
|
| 19 |
+
२०६६।१०।०७
|
| 20 |
+
७. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 21 |
+
२०७२।११।१३
|
| 22 |
+
६. केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४
|
| 23 |
+
२०७४।६।३०
|
| 24 |
+
९. आर्थिक तथा व्यावसायिक वातावरण सुधार र लगानी अभिबुद्धि सम्बन्धी केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०६१
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| 25 |
+
२०६१।१२।१६
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
२०३१ सालको ऐन नं. ३
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
- यो ऐन संवत् २०६५ साल जेठ १५ गतेदेखि लागू भएको।
|
| 30 |
+
- यो ऐन संवत् २०७५ साल भाद्र १ गतेदेखि लागू भएको।
|
| 31 |
+
- गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोध गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा झिकिएको।
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
# राजस्व सम्बन्धी न्याय व्यवस्थामा सुधार गर्न बनेको ऐन
|
| 34 |
+
|
| 35 |
+
प्रस्तावना: सर्वसाधारण जनताको सुविधा र आर्थिक हित कायम राख्न राजस्वसम्बन्धी न्याय व्यवस्थामा सामयिक सुधार गर्न आवश्यक भएकोले,
|
| 36 |
+
|
| 37 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्भतिले यो ऐन बनाइबक्सेकोछ।
|
| 38 |
+
|
| 39 |
+
## १. संक्षिप्त नाम, विस्तार र प्रारम्भ:
|
| 40 |
+
(१) यो ऐनको नाम "राजस्व न्यायाधिकरण ऐन, २०३१" रहेकोछ।
|
| 41 |
+
(२) यो ऐनको विस्तार नेपाल भर हुनेछ।
|
| 42 |
+
(३) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 43 |
+
|
| 44 |
+
## २. परिभाषा:
|
| 45 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा "न्यायाधिकरण" भन्नाले दफा ३ अन्तर्गत स्थापित राजस्व न्यायाधिकरणलाई सम्झन पर्छ।
|
| 46 |
+
|
| 47 |
+
## ३. राजस्व न्यायाधिकरणको स्थापना र गठन:
|
| 48 |
+
(१) राजस्व न्यायाधिकरण अध्यादेश, २०३० अन्तर्गत स्थापना भएका राजस्व न्यायाधिकरणहरू यसै ऐन अन्तर्गत स्थापना भएको मानिनेछ।
|
| 49 |
+
(२) प्रत्येक न्यायाधिकरणको इलाका र सदरमुकाम नेपाल सरकारले समय समयमा नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकिदिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 50 |
+
(३) प्रत्येक न्यायाधिकरणमा नेपाल सरकारले नियुक्त गरेका देहायका सदस्यहरू रहने छन्:-
|
| 51 |
+
(क) कानून सदस्य,
|
| 52 |
+
(ख) राजस्व सदस्य, र
|
| 53 |
+
(ग) लेखा सदस्य।
|
| 54 |
+
(���) उपदफा (३) बमोजिम नियुक्त गर्दा दफा ४ बमोजिम योग्यता पुगेका कुनै पदाधिकारीलाई कुनै न्यायाधिकरणको बा एकै समयमा एकभन्दा बढी न्यायाधिकरणको सदस्य तोक्न सकिनेछ।
|
| 55 |
+
(५) कानून सदस्य न्यायाधिकरणको अध्यक्ष हुनेछ र निजको अनुपस्थितिमा राजस्व सदस्यले अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 56 |
+
|
| 57 |
+
## ४. न्यायाधिकरणको सदस्य हुन योग्यता:
|
| 58 |
+
न्यायाधिकरणको सदस्य नियुक्त हुनको लागि देहायको योग्यता आवश्यक हुनेछ:-
|
| 59 |
+
(क) कानून सदस्यको लागि उच्च अदालतको न्यायाधीश भई रहेको बा हुन योग्यता पुगेको।
|
| 60 |
+
(ख) राजस्व सदस्यको लागि स्नातक भएको र राजस्व प्रशासनमा सात बर्प अनुभव प्राप्त गरेको।
|
| 61 |
+
(ग) लेखा सदस्यको लागि स्नातक भएको र लेखाको क्षेत्रमा सात बर्प अनुभव प्राप्त गरेको।
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
## ५. न्यायाधिकरणको अधिकारक्षेत्रको प्रयोग:
|
| 64 |
+
(१) न्यायाधिकरणको अधिकारक्षेत्रको प्रयोग तीनै सदस्यले सामूहिक रूपले गर्नेछन् र बहुमतको राय न्यायाधिकरणको निर्णय मानिनेछ।
|
| 65 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कानून सदस्य र अर्को एकजना सदस्यको उपस्थिति भएमा मुद्दाको कारबाई र किनारा गर्न सकिनेछ। कानून सदस्य बाहेक अरू दुईजना सदस्यको उपस्थितिमा मुद्दाको फैसला गर्न बा अन्तिम आदेश दिन बाहेक अरू कारबाई गर्न सकिनेछ। अरू सदस्यहरूको अनुपस्थितिमा कानून सदस्यले मुद्दाको फैसला गर्न बा अन्तिम आदेश दिन बाहेक अरू कारबाही गर्न बाधा पर्ने छैन।
|
| 66 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम दुईजना सदस्यको उपस्थितिमा मुद्दाको कारबाही बा किनारा गर्दा दुईजनाको मतैक्य हुन नसकेमा कारबाहीको हकमा अध्यक्षता गर्ने सदस्यको रायबमोजिम गर्नुपर्छ र फैसला बा अन्तिम आदेशको हकमा पहिले अनुपस्थित रहेको सदस्य समक्ष पेश गरी निजले समर्थन गरेको राय न्यायाधिकरणको राय मानिनेछ।
|
| 67 |
+
(४) तीनजना सदस्यको उपस्थितिमा मुद्दाको कारबाही गर्दा तीनजनाको भिन्दाभिन्दै राय भएमा अध्यक्षको राय बमोजिम गर्नुपर्छ र मुद्दाको किनारा गर्दा तीनै जनाको भिन्दाभिन्दै राय भएमा बा उपदफा (३) बमोजिम दुईजना सदस्यको उपस्थितिमा मुद्दाको किनारा गर्दा मतैक्य हुन नसकी पहिले अनुपस्थिति रहेको सदस्य समक्ष पेश हुँदा तीन राय भएमा उच्च अदालतमा साधक जाहेर गर्नु पर्नेछ र सो अदालतको डिभिजन बेन्चबाट भएको निर्णय अन्तिम हुनेछ।
|
| 68 |
+
|
| 69 |
+
## ६. न्यायाधिकरणको अधिकारक्षेत्र:
|
| 70 |
+
(१) राजस्वसम्बन्धी मुद्दामा न्यायाधिकरणको पु���राबेदन र निबेदन सुन्ने अधिकारक्षेत्र यो ऐन र प्रचलित अन्य नेपाल कानूनबमोजिम हुनेछ।
|
| 71 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पुनराबेदन सुन्दा न्यायाधिकरणलाई देहायको अधिकार हुनेछ:-
|
| 72 |
+
(क) मुद्दाको अन्तिम निर्णय गर्ने,
|
| 73 |
+
(ख) मुद्दामा मुख्य टहन्याउनु पर्ने कुरा खुलाई मुनासिब समय तोकी मुद्दाको लगत कायमै राखी सो विषयमा कारबाई र किनारा गर्न शुरु किनारा गर्ने अड्डा बा अधिकारी छेउ फिर्ता पटाउने,
|
| 74 |
+
(ग) शुरु किनारा गर्ने अड्डा बा अधिकारीले गरेको फैसला बा आदेशलाई सदर उल्टी बा केही उल्टी गर्ने र सो तल्लो अड्डा बा अधिकारीले गर्न पाउने कारबाई बा निर्णय गर्ने,
|
| 75 |
+
(घ) आफैले बढी प्रमाण बुझ्ने र तल्लो अड्डा बा अधिकारीबाट पनि बुझ्न लगाउने, र
|
| 76 |
+
(ङ) पक्ष र साक्षी झिकाउने, बयान लिने, प्रमाण बुझ्ने, कागजपत्र दाखिल गराउने र दण्ड सजाय गर्ने समेत प्रचलित नेपाल कानूनबमोजिम अदालतलाई भए सरहको अधिकार प्रयोग गर्ने।
|
| 77 |
+
|
| 78 |
+
## ७. न्यायाधिकरणको अबहेलना:
|
| 79 |
+
न्यायाधिकरणले आफ्नो अबहेलनामा कारबाई चलाउन सक्नेछ र अबहेलना गरेको टहराएमा न्यायाधिकरणले दुई महीनासम्म कैद बा पाँचसय रूपैयाँसम्म जरिबाना बा दुबै सजाय गर्न सक्नेछ।
|
| 80 |
+
तर न्यायाधिकरणलाई सन्तोष हुने गरी अभियुक्तले क्षमा याचना गरेमा न्यायाधिकरणले निजलाई क्षमा गर्न बा सजाय तोकिसकेको भए सो सजाय माफ गर्न बा घटाउन सक्नेछ।
|
| 81 |
+
|
| 82 |
+
## ८. सर्वोच्च अदालतमा पुनरावेदन लाग्ने:
|
| 83 |
+
देहायको कुनै प्रभमा प्रत्यक्ष कानूनी बुटी भई न्यायाधिकरणको निर्णय पूर्ण बा आंशिक रूपमा उल्टिने देखी सर्वोच्च अदालतले आफू समक्ष पुनरावेदन गर्न अनुमति दिएकोमा मात्र न्यायाधिकरणको फैसला बा अन्तिम आदेश उपर सर्वोच्च अदालतमा पुनरावेदन लाग्नेछ:-
|
| 84 |
+
(क) अधिकारक्षेत्रको प्रभ,
|
| 85 |
+
(ख) बुझ्नु पर्ने प्रमाण नबुझेको बा बुझ्नु नहुने प्रमाण बुझेको प्रभ बा
|
| 86 |
+
(ग) बाध्यात्मक रूपमा पालन गर्नु पर्ने कार्यविधिसम्बन्धी कानूनको उल्लेघन भएको प्रभ,
|
| 87 |
+
(घ) गम्भीर कानूनी बुटी सम्बन्धी प्रश्न।
|
| 88 |
+
|
| 89 |
+
## ९. पुनरावेदन सम्बन्धमा धरौट राख्ने र म्याद:
|
| 90 |
+
(१) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यस ऐन अन्तर्गत न्यायाधिकरण बा उच्च अदालतमा पुनरावेदन गर्दा देहाय बमोजिम धरौट बा शर्त विनाको मुदाको अवधिसम्म अघाबधिक हुन सक्ने बैड जमानत नराखी पुनरावेदन लाग्ने छैन:-
|
| 91 |
+
(क) कर निर्धारण भएकोमा निर्धारित करको पचास प्रतिशत रकम र जरिबाना भएको��ा जरिबानाको रकम र दुबै भएकोमा निर्धारित करको पचास प्रतिशत रकम र जरिबानाको रकम त्यस्तो निर्धारण गर्ने बा जरिबाना गर्ने अधिकृतले तोकिदिएको कार्यालयमा,
|
| 92 |
+
(ख) भन्सार महसूल बा अन्तःशुल्क निर्धारण भएकोमा निर्धारित भन्सार महसूल बा अन्तःशुल्कको रकम र जरिबाना भएकोमा जरिबानाको रकम र दुवै भएकोमा दुवै रकम त्यस्तो निर्धारण गर्ने बा जरिबाना गर्ने अधिकृतले तोकिदिएको कार्यालयमा।
|
| 93 |
+
(२)
|
| 94 |
+
(३) मुद्दा कारबाई किनारा हुँदा कब्जामा लिएको बा जफत गरिएको माल बस्तु सडी गली जाने बा त्यसको गुण ह्रास भई मोल घट्न जाने भएमा प्रचलित नेपाल कानूनबमोजिम लिलाम बिकी गरी आएको मोल धरौटीमा राखी मुद्दामा ठहरे बमोजिम गर्नु पर्छ। सबारीको साधन बा मेशिनरी सामान भए मोल बापत धरौट, ज्यथा जमानी बा माथबर धन जमानी लिई मालधनी जिम्मा दिन सकिनेछ।
|
| 95 |
+
(४) यस ऐन अन्तर्गत न्यायाधिकरणमा पुनराबेदन गर्दा शुरु कारबाही र किनारा गर्ने अधिकारीले गरेको निर्णय सुनिपाएको बा त्यस्को सूचना तामेल भएको पैतीस दिनभित्र पुनराबेदन गर्नु पर्नेछ।
|
| 96 |
+
|
| 97 |
+
## १०. राजस्व न्यायाधिकरण अध्यादेश, २०३० जारी हुनु अगाडि निर्णय भएका मुद्दाहरू:
|
| 98 |
+
राजस्व न्यायाधिकरण अध्यादेश, २०३० प्रारम्भ भएको अधिल्लो दिनसम्म तत्काल प्रचलित नेपाल कानून बमोजिम:-
|
| 99 |
+
(क) आय र कर अदालतमा पुनरावेदन लाग्ने गरी अञ्चलाधीश, प्रमुख जिल्ला अधिकारी, कर अधिकृतहरू बा तोकिएको अधिकारीहरूबाट फैसला बा अन्तिम आदेश भएकोमा प्रचलित नेपाल कानूनको म्यादभित्र क्षेत्रीय अदालतमा पुनरावेदन लागनेछ।
|
| 100 |
+
(ख) आय र कर अदालत, अञ्चलाधीश, प्रमुख जिल्ला अधिकारी बा अञ्चल अदालतमा पुनरावेदन लागने गरी भन्सार अड्डाको हाकिम, अन्तःशुल्क अधिकारी, कर अधिकृतहरू बा तोकिएको अधिकारीहरूबाट फैसला बा अन्तिम आदेश भएको तर यो ऐनले न्यायाधिकरणमा पुनरावेदन लागने मुद्दामा प्रचलित नेपाल कानूनको म्यादभित्र न्यायाधिकरणमा पुनरावेदन लागनेछ।
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| 101 |
+
|
| 102 |
+
## ११. निरीक्षण र निर्देशन दिने अधिकार:
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| 103 |
+
आफ्नो अधिकारक्षेत्रभित्रको मुद्दाका सम्बन्धमा न्यायाधिकरणले भन्सार अड्डा, अन्तःशुल्क कार्यालय, कर कार्यालय तथा त्यस्तो मुद्दाको शुरु किनारा गर्ने अरू राजस्वसम्बन्धी कार्यालयहरूको निरीक्षण गर्न बा तिनबाट आवश्यक बिबरण प्राप्त गर्न बा तिनलाई निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 104 |
+
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| 105 |
+
## १२. भूमि प्रशासकले शुरु कारबाही र किनारा ���र्ने अधिकारक्षेत्र:
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| 106 |
+
(१) आफ्नो इलाकाभित्रको देहायका मुद्दाको शुरु कारबाही र किनारा गर्ने अधिकारक्षेत्र भूमि प्रशासकको हुनेछ:-
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| 107 |
+
(क) जग्गा बा तिरो दपोट,
|
| 108 |
+
(ख) मालपोतसम्बन्धी,
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| 109 |
+
(ग) जिमिदार, तालुकदार, पटबारी, बहाली, बर्खासी,
|
| 110 |
+
(घ) मर्ता पर्ता भई उकास भएको जग्गासम्बन्धी,
|
| 111 |
+
(ङ) हाल आबादी र सो सम्बन्धित सन्धिसर्पन,
|
| 112 |
+
(च) जग्गा भोगेको नाताले लागेको रकमसम्बन्धी,
|
| 113 |
+
(छ) भूमि प्रशासन कार्यालयसम्बन्धी टेक्का-पट्टाको नोक्सानी असुल उपर गर्ने बिषय र
|
| 114 |
+
(ज) नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकेको भूमि प्रशासन कार्यालय सम्बन्धी अन्य बिषय।
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| 115 |
+
(२) उपदफा (१) अन्तर्गत भूमि प्रशासकले गरेको निर्णय उपर पैतीस दिनभित्र उच्च अदालतमा पुनरावेदन लाग्नेछ।
|
| 116 |
+
(३) यस दफामा "भूमि प्रशासक वा भूमि प्रशासन कार्यालय" भन्नाले भूमि प्रशासन ऐन, २०२४ लागू नभएको टाउँमा क्रमशः माल अड्डाको हाकिम वा माल अड्डा सम्झनु पर्छ।
|
| 117 |
+
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| 118 |
+
## १३. कारबाही गर्ने अड्डा वा अधिकारीको अधिकार:
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| 119 |
+
दफा १३ अन्तर्गतका मुद्दाहरू र न्यायाधिकरणमा पुनरावेदन लाग्ने मुद्दाहरूमा शुरु कारबाही र किनारा गर्ने अड्डा वा अधिकारीलाई पक्ष र साक्षी झिकाउने, बयान लिने, प्रमाण बुझ्ने, कागजपत्र दाखिल गराउने र दण्ड सजाय गर्न समेत प्रचलित नेपाल कानूनबमोजिम अदालतलाई भए सरहको अधिकार हुनेछ।
|
| 120 |
+
|
| 121 |
+
## १४. नियम बनाउने अधिकार:
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| 122 |
+
यो ऐनको उद्देश्य पूर्ति गर्नको लागि नेपाल सरकारले नियम बनाउन सक्नेछ, र त्यस्तो नियम नेपाल राजपत्रमा प्रकाशित गरी लागू गरिनेछ।
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| 123 |
+
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| 124 |
+
## १५. बाधा अड्काउ हटाउने अधिकार:
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| 125 |
+
यो ऐन कार्यान्वित गर्न कुनै बाधा अड्काउ परेमा नेपाल सरकारले सो बाधा अड्काउ हटाउनको लागि नेपाल राजपत्रमा प्रकाशित गरी आवश्यक आदेश जारी गर्न सक्नेछ, र त्यस्तो आदेश यस ऐनमा परे सरह मानिनेछ।
|
| 126 |
+
|
| 127 |
+
## १६. खारेजी र संशोधन:
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| 128 |
+
(१) आय र कर न्याय व्यवस्था ऐन, २०१६ र आय र कर अदालत नियमावली, २०२४ खारेज गरिएकोछ।
|
| 129 |
+
(२) अनुसूचीमा लेखिएको ऐनहरूमा अनुसूचीमा लेखिए बमोजिम संशोधन गरिएकोछ।
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
## १७. राजस्व न्यायाधिकरण अध्यादेश, २०३० निष्क्रिय भएपछि त्यसको परिणाम:
|
| 132 |
+
राजस्व न्यायाधिकरण अध्यादेश, २०३० निष्क्रिय भएपछि अर्को अभिप्राय नदेखिएमा सो निष्क्रियताले:-
|
| 133 |
+
(क) सो अध्यादेशवमोजिम चालू भएको कुरा वा सोबमोजिम रीत पन्याई अघि नै गरिएको कुनै काम वा भोगी सकेको कुनै कुरालाई असर पानें छैन,
|
| 134 |
+
(ख) सो अध्यादेशवमोजिम पाएको, हासिल गरेको वा भोगेको कुनै हक सुविधा, कर्तव्य वा दायित्वमा असर पानें छैन,
|
| 135 |
+
(ग) सो अध्यादेश बमोजिम गरिएको कुनै दण्ड सजाय वा जफतलाई असर पानें छैन,
|
| 136 |
+
(घ) माथि लेखिएको कुनै त्यस्तो हक सुविधा, कर्तव्य, दायित्व, दण्ड सजायका सम्बन्धमा गरिएको कुनै कानूनी कारबाई वा उपायलाई असर पानें छैन र उक्त अध्यादेश कायम रहे सरह त्यस्तो कुनै कानूनी कारबाई वा उपायलाई सुरु गर्न, चालु राख्न वा लागू गर्न सकिनेछ र त्यस्तो दण्ड सजाय पनि गर्न सकिनेछ।
|
| 137 |
+
|
| 138 |
+
---
|
| 139 |
+
|
| 140 |
+
# अनुसूची-१
|
| 141 |
+
(दफा १७ सैंग सम्बन्धित)
|
| 142 |
+
|
| 143 |
+
## क.सं. ऐनको संक्षिप्त नाम
|
| 144 |
+
## संशोधन
|
| 145 |
+
|
| 146 |
+
१.
|
| 147 |
+
२.
|
| 148 |
+
३.
|
| 149 |
+
४.
|
| 150 |
+
५.
|
| 151 |
+
६.
|
| 152 |
+
७.
|
| 153 |
+
८.
|
| 154 |
+
९. दघर जग्गा कर ऐन, २०१९
|
| 155 |
+
दफा ९. को सट्टा देहायको दफा ९. राखिएको छ:
|
| 156 |
+
९. पुनराबेदन: दफा ४, ४, ६ बा ७ अन्तर्गत कर अधिकृतले गरेको आदेश उपर राजस्व न्यायाधिकरणमा पुनराबेदन लाग्नेछ।
|
| 157 |
+
|
| 158 |
+
१०. विदेशी लगानी कर ऐन, २०१९
|
| 159 |
+
दफा ९. को सट्टा देहायको दफा ९. राखिएको छ:-
|
| 160 |
+
१. पुनरावेदन: दफा ४, ४, ६ बा ७ अन्तर्गत कर अधिकृतले गरेको आदेश उपर राजस्व न्यायाधिकरणमा पुनरावेदन लाग्नेछ।
|
| 161 |
+
|
| 162 |
+
११.
|
| 163 |
+
१२.
|
| 164 |
+
१३.
|
| 165 |
+
१४. पानी कर ऐन, २०२३
|
| 166 |
+
दफा ११ को सट्टा देहायको दफा ११ राखिएको छ:-
|
| 167 |
+
११. पुनरावेदन: दफा १० अन्तर्गत तोकिएको अधिकारीले सजाय गरेको आदेश उपर राजस्व न्यायाधिकरणमा पुनरावेदन लाग्नेछ।
|
| 168 |
+
|
| 169 |
+
---
|
| 170 |
+
|
| 171 |
+
# इष्टव्य:
|
| 172 |
+
(१) केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ बमोजिम रूपान्तर भएका शब्दहरू:-
|
| 173 |
+
"श्री ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
| 174 |
+
(२) न्याय प्रशासन ऐन, २०७३ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरु:
|
| 175 |
+
(क) "पुनरावेदन अदालत" को सट्टा "उच्च अदालत"।
|
| 176 |
+
(ख) "पुनरावेदन अदालतको न्यायाधीश" को सट्टा "उच्च अदालतको न्यायाधीश"।
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|
|
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|
|
| 1 |
+
**लिखतहरूको गोप्यता सम्बन्धी ऐन, २०३९**
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
---
|
| 4 |
+
|
| 5 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
|
| 6 |
+
संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
२०३९। ट। ६
|
| 8 |
+
१. न्याय प्रशासन सुधार (चौथो संशोधन) ऐन, २०४३
|
| 9 |
+
२०४३।७।२४
|
| 10 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 11 |
+
२. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 12 |
+
२०६६। १०। ७
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
---
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
**२०३९ सालको ऐन नं.१ट**
|
| 17 |
+
लिखतहरूको गोप्यतासम्बन्धी व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 18 |
+
|
| 19 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 20 |
+
नेपालको सुरक्षा, शान्ति तथा व्यवस्था कायम राख्नुको लागि सरकारी तथा सार्वजनिक कार्यालयको महत्वपूर्ण कागजातहरू, अभिलेखहरू, सन्धिपत्रहरू जस्ता संरक्षणीय लिखतहरूको वर्गीकरण गर्न र गोप्यताको संरक्षण गर्ने सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले श्री ४ महाराजाधिराज वीरन्दे और विक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्भतिले यो ऐन बनाइएको छ।
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
---
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
|
| 25 |
+
(१) यस ऐनको नाम "लिखतहरूको गोप्यता सम्बन्धी ऐन, २०३९" रहेको छ।
|
| 26 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकिए बमोजिम प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 27 |
+
|
| 28 |
+
---
|
| 29 |
+
|
| 30 |
+
**२. परिभाषा:**
|
| 31 |
+
विषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 32 |
+
(क) "कार्यालय" भन्नाले सरकारी तथा सार्वजनिक कार्यालय सम्झनुपर्छ र सो शब्दले नेपाल सरकारबाट समय समयमा गठन गरिएका अस्थायी वा आबधिक आयोग वा समितिको कार्यालयलाई समेत जनाउँछ।
|
| 33 |
+
स्पष्टीकरण :- यस खण्डको प्रयोजनको लागि "सार्वजनिक कार्यालय" भन्नाले नेपाल सरकारले समय समयमा नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकिदिएको सार्वजनिक संस्थाको कार्यालय सम्झनु पर्छ।
|
| 34 |
+
(ख) "बर्गीकृत लिखत" भन्नाले दफा ३ बमोजिम बर्गीकरण गरिएको लिखत सम्झनु पर्छ।
|
| 35 |
+
(ग) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यो ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा बा जारी गरिएको आदेशमा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
|
| 37 |
+
---
|
| 38 |
+
|
| 39 |
+
**३. लिखतको बर्गीकरण:**
|
| 40 |
+
(१) लिखतहरूको गोप्यताको प्रयोजनको लागि लिखतहरूलाई देहाय बमोजिम बर्गीकरण गरिनेछ:
|
| 41 |
+
(क) सख्त निषेधित लिखत,
|
| 42 |
+
(ख) अति गोप्य लिखत,
|
| 43 |
+
(ग) गोप्य लिखत
|
| 44 |
+
(२) लिखतहरूको गोप्यताको बाधि कुनै कार्यालयको कुनै लिखतलाई कुन बर्गमा राख्ने भन्ने कुरा छुट्याउने जिम्मेमारी मुख्य सचिवको अध्यक्षतामा सम्बन्धित मन्त्रालयको सचिव समेत भएको समितिको हुनेछ।
|
| 45 |
+
तर नेपाल सरकारले गरेका सामान्य निर्णय तथा आदेशहरूलाई बर्गीकृत लिखतमा पारिने छैन।
|
| 46 |
+
(३) लिखत गोप्य रहने बर्ग छुट्याउने आधारहरू तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 47 |
+
(४) यस दफा बमोजिम बर्गीकृत नगरिएको लिखत गोप्य मानिने छैन।
|
| 48 |
+
|
| 49 |
+
---
|
| 50 |
+
|
| 51 |
+
**४. बर्ग जनाउनु पर्ने:**
|
| 52 |
+
दफा ३ बमोजिम लिखतहरूको बर्गीकरण गरिसकेपछि त्यस्तो लिखतमा तोकिए बमोजिम सम्बन्धित बर्ग जनाउने छाप लगाउनु पर्नेछ।
|
| 53 |
+
|
| 54 |
+
---
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
**५. सख्त निषेधित लिखत:**
|
| 57 |
+
(१) सख्त निषेधित लिखत एक पटकमा तीस वर्षमा नबढाई गोप्य रहनेछ र कसैले पनि त्यस्तो लिखत बा त्यसको व्यहोरा पूर्ण बा आंशिक रूपमा प्रकाशमा ल्याउन बा उल्लेख गर्न बा सम्बन्धित व्यक्ति बाहेक नेपाल सरकारको अनुमति बेगर अन्य कुनै व्यक्तिले हेर्न पनि पाउने छैन।
|
| 58 |
+
(२) सदन निषेधित लिखत अनिबार्य रूपले सिलबन्दी गरी राख्नु पर्नेछ र त्यस्तो लिखतको स्थानान्तरण बा आदान प्रदान सिलबन्दी रूपमा गर्नु पर्नेछ।
|
| 59 |
+
|
| 60 |
+
---
|
| 61 |
+
|
| 62 |
+
**६. अति गोप्य लिखत:**
|
| 63 |
+
(१) अति गोप्य लिखत एक पटकमा बीस बर्षमा नवढाई र आवश्यकता अनुसार पछि नेपाल सरकारले चाहेमा प्रत्येक पटकमा दश बर्षमा नवढाई गोप्य रहनेछ र सो अबधिभित्र कसैले पनि त्यस्तो लिखत बा त्यसको व्यहोरा पूर्ण बा आंशिक रूपमा प्रकाशनमा ल्याउन बा उल्लेख गर्न बा सम्बन्धित व्यक्ति बाहेक नेपाल सरकारको अनुमति बेगर अन्य कुनै ब्यक्तिले हेर्न पनि पाउने छैन।
|
| 64 |
+
(२) अति गोप्य लिखत अनिबार्य रूपले सिलबन्दी बा खामबन्दी गरी राख्नु पर्नेछ र त्यस्तो लिखतको स्थानान्तरण बा आदान प्रदान सिलबन्दी बा खामबन्दी रूपमा गर्नु पर्नेछ।
|
| 65 |
+
|
| 66 |
+
---
|
| 67 |
+
|
| 68 |
+
**७. गोप्य लिखत:**
|
| 69 |
+
(१) गोप्य लिखत पाँच बर्षसम्म गोप्य रहनेछ र सो अबधि भित्र कसैले पनि त्यस्तो लिखत बा त्यसको व्यहोरा पूर्ण बा आंशिक रूपमा प्रकाशमा ल्याउन बा उल्लेख गर्न बा सम्बन्धित व्यक्ति बाहेक नेपाल सरकारको अनुमति बेगर अन्य कुनै ब्यक्तिले हेर्न पनि पाउने छैन।
|
| 70 |
+
(२) गोप्य लिखतको स्थानान्तरण बा आदान प्रदान सामान्यतया खामबन्दी रूपमा गर्नु पर्नेछ।
|
| 71 |
+
|
| 72 |
+
---
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
**८. लिखतको बर्गीकरण दोहोम्याउन सकिने:**
|
| 75 |
+
नेपाल सरकारले बर्गीकृत लिखतहरूलाई आवश्यकता अनुसार एक बर्गबाट अर्को बर्गमा सार्न बा कुनै पनि बर्गमा नपार्न सक्नेछ।
|
| 76 |
+
|
| 77 |
+
---
|
| 78 |
+
|
| 79 |
+
**९. प्रमाणको रूपमा पेश गर्न नसकिने:**
|
| 80 |
+
बर्गीकृत लिखत दफा ४, ६ बा ७ बमोजिम निर्धारित अबधिसम्म कुनै पनि अदालत बा कानुनी कारबाहीमा प्रमाणको रूपमा पेश गर्न सकिने छैन।
|
| 81 |
+
तर यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दामा त्यस्तो बर्गीकृत लिखतको नाम र प्रकृतिसम्म उल्लेख गर्न बाधा पर्ने छैन।
|
| 82 |
+
|
| 83 |
+
---
|
| 84 |
+
|
| 85 |
+
**१०. लिखतको स्रोत बताउन कर लाग्ने:**
|
| 86 |
+
कसैले कुनै बर्गीकृत लिखतको पूर्ण बा आंशिक व्यहोरा प्रकाशित गरेमा बा उल्लेख गरेमा यो ऐन अन्तर्गतको मुद्वाको कारबाही, अनुसन्धान बा तहकिकात गर्ने अधिकारीलाई त्यस्तो व्यहोराको स्रोत बताउन कर लाग्नेछ।
|
| 87 |
+
|
| 88 |
+
---
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
**११. खानतलासी र पकाउ गर्ने अधिकार:**
|
| 91 |
+
(१) कुनै व्यत्किले यस ऐन अन्तर्गत कसुर गरेको छ वा निजसँग बर्गीकृत लिखत अनधिकृत तबरले रहेकोछ भन्ने विश्वास गर्नु पर्ने मनासिब माफिकको कारण भएमा नेपाल सरकारले वारेण्ट जारी गरी त्यस्तो व्यत्किलाई गिरफ्तार गर्न बा जुनसुकै समय त्यस्तो व्यत्किको घर जग्गामा प्रवेश गरी खानतलासी गर्न बा निजको जिउ बा निजको मालसामानको खानतलासी गर्न र सोसँग सम्बन्धित मालसामान कब्जा गर्न सक्नेछ।
|
| 92 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अबस्थामा कसुरदार भागी जाने बा कसुरको सबूद गायब गरिने सम्भाबना देखिएमा नेपाल सरकारले त्यस्तो व्यत्किलाई वारेण्ट जारी हुनु अघि पनि गिरफ्तार गर्न र सो कामको लागि कुनै पनि घर जग्गामा कुनै समयमा पनि प्रवेश गर्न सक्नेछ। त्यस्तो कसुरदार कुनै सबारी साधनद्वारा उम्कन काममा नेपाल सरकारले त्यस्तो सबारीलाई कुनै टाउँमा रोक्न बा उतार्य बगाउन सक्नेछ।
|
| 93 |
+
|
| 94 |
+
---
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| 95 |
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**१२. दण्ड सजाय:**
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| 97 |
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(१) कसैले यो ऐन उल्लइन गरेमा त्यस्तो उल्लइन गर्ने र सो काममा मदत गर्ने बा दुरुस्तहन दिने व्यत्किलाई कसुरको मात्रा अनुसार देहाय बमोजिम सजाय हुन्छ:
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| 98 |
+
(क) दफा ५ उल्लइन गरेमा दश बर्ष देखि पन्थ्र बर्षसम्म कैद बा पचास हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना बा दुबै सजाय,
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| 99 |
+
(ख) दफा ६ उल्लइन गरेमा ५ बर्ष देखि १० बर्षसम्म कैद बा पच्चीस हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना बा दुबै सजाय,
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| 100 |
+
(ग) दफा ७ उल्लइन गरेमा १ बर्ष देखि ५ बर्षसम्म कैद बा दश हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना बा दुबै सजाय,
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| 101 |
+
(घ) अन्य दफा उल्लइन गरेमा पाँचहजार रूपैयाँसम्म जरिबाना।
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| 102 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (क), (ख) बा (ग) बमोजिम सजाय पाउने ठहरिएको कुनै व्यत्कि सरकारी बा सार्वजनिक संस्थाको कर्मचारी भै आफ्नो जिम्मामा बा कार्यालयमा रहेको लिखतको सम्बन्धमा सजायभागी ठहरिएको रहेछ भने निजले नैतिक पतन देखिने अभियोगमा सजाय पाएको मानिनेछ र निज आफ्नो सेवाको पदबाट भविष्यको लागि अयोग्य ठहरिने गरी स्वतः बर्खास्त हुनेछ।
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| 103 |
+
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+
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**१३. मुद्दा हेर्ने अधिकार र कार्यविधि:**
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+
(१) ...
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| 108 |
+
(२) ...
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| 109 |
+
(३) यस ऐन अन्तर्गतको मुद्द��� सरकारी गुमुलुकी फौजदारी कार्यविधि संहिता, २०७४ को अनुसूची-१ मा समावेश भएको मानिनेछ।
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| 110 |
+
(४) ...
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| 111 |
+
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+
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| 114 |
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**१४. अन्य कानुन बमोजिम कारबाही गर्न बाधा नपर्ने:**
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+
यस ऐन अन्तर्गतको कसुरमा अन्य प्रचलित कानुन बमोजिम पनि सजाय हुने रहेछ भने सो कानुन बमोजिम समेत कारबाही गर्न यस ऐनमा लेखिएको कुनै पनि कुराले बाधा पुए्याएको मानिने छैन।
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| 116 |
+
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**१५. थप सजाय र मुद्दा हेर्ने:**
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| 120 |
+
कसैले यस ऐन अन्तर्गत कसुर ठहरिने कुनै कार्य गरेकोमा त्यस्तो कार्य अन्य प्रचलित कानुन बमोजिम पनि कसुर ठहरिने रहेछ बा यस ऐन अन्तर्गतको कसुरको सिलसिलामा अन्य प्रचलित कानुन अन्तर्गतको कसुर पनि गरेको रहेछ भने त्यस्तो कसुर सम्बन्धी मुद्दामा पनि दफा १३ अन्तर्गतको भदालतले कारबाही र किनारा गर्नेछ र कसुरदारलाई प्रचलित कानुन बमोजिम हुने सजायमा यस ऐन बमोजिमको समेत थप सजाय हुनेछ।
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| 121 |
+
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**१६. कारबाही नहुने:**
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| 125 |
+
यस ऐन अन्तर्गत बर्गीकरण गरिएको लिखत आफ्नो जिम्मामा हुने व्यक्तिले अरू कुनै व्यक्तिलाई अधिकृत व्यक्ति सम्झी त्यस्तो लिखत देखाएको बा अन्य कुनै प्रकारले प्रकाश गरेको रहेछ भने निजलाई यस ऐन बमोजिम कारबाही गरिने छैन।
|
| 126 |
+
तर निजले जानी जानी अनधिकृत व्यक्तिलाई बर्गीकृत लिखत देखाएको बा प्रकाश गरेको रहेछ भने निजलाई यस ऐन बमोजिम कारबाही गर्न बाधा पर्ने छैन।
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+
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+
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**१७. अधिकार प्रत्यायोजन:**
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| 131 |
+
नेपाल सरकारले दफा ११ बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकार नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी कुनै कार्यालय बा पदाधिकारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
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+
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+
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+
**१८. नियम बनाउने अधिकार:**
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| 136 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले नियमहरू बनाउन सक्नेछ।
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+
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**१९. बचाउ:**
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+
यो ऐन प्रारम्भ हुनुभन्दा अघि अति गोप्य, गोप्य बा यस्तै अन्य कुनै प्रकृति जनाउने गरी छाप लगाई राखेको कार्यालयको लिखतलाई यस ऐन अन्तर्गत बर्गीकरण नगरिएमा त्यस्तो लिखतलाई यस ऐनको प्रयोजनको लागि बर्गीकृत लिखत मानिने छैन।
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| 142 |
+
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+
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+
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+
**द्वष्टव्य:**
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| 146 |
+
(१) केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०४४ द्वारा रूपमान्तर भएका शब्दहरू:
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| 147 |
+
"सरकारी मुद्रा सम्बन्धी ऐन, २०१७" भन्ने शब्दको सट्टा "सरकारी मुद्रा सम्बन्धी ऐन, २०४९।"
|
| 148 |
+
(२) केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ बमोजिम रूपान्तर भएका शब्दहरू:
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| 149 |
+
"थी ४ को सरकार" भन्ने शब्दको सट्टा "नेपाल सरकार"।
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section_4_pdf_15.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,218 @@
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| 1 |
+
**नेपाल प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठान ऐन, २०३९**
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०३९।६।११
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
|
| 7 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 8 |
+
१. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 9 |
+
२०६६।१०।७
|
| 10 |
+
२. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 11 |
+
|
| 12 |
+
२०३९ सालको ऐन नं. ४
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
---
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
**नेपाल प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठान सम्बन्धी व्यवस्था गर्न बनेको ऐन**
|
| 17 |
+
|
| 18 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 19 |
+
सरकारी निकाय र संस्थानहरुको प्रशासनिक एवं व्यवस्थापन सम्बन्धी दक्षता अभिवृद्धि गर्ने उद्देश्यले त्यस्ता निकाय र संस्थानहरुको जनशक्तिलाई योजनाबद्ध तरिकाले प्रशिक्षणको व्यवस्था गर्न नेपाल प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठान स्थापना र सञ्चालन गर्नको लागि कानूनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 20 |
+
|
| 21 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरेन्द्र वीर बिक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्भतिले यो ऐन बनाइबक्सेकोछ।
|
| 22 |
+
|
| 23 |
+
---
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
**परिच्छेद-१**
|
| 26 |
+
**प्रारम्भिक**
|
| 27 |
+
|
| 28 |
+
१. **संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
|
| 29 |
+
(१) यस ऐनको नाम "नेपाल प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठान ऐन, २०३९" रहेको छ।
|
| 30 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 31 |
+
|
| 32 |
+
२. **परिभाषा:**
|
| 33 |
+
विषय वा प्रसंगले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 34 |
+
(क) "प्रतिष्ठान" भन्नाले दफा ३ बमोजिमको नेपाल प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठान सम्झनु पर्छ।
|
| 35 |
+
(ख) "परिषद्" भन्नाले दफा ७ बमोजिमको प्रशिक्षण परिषद् (गभर्निङ्ग काउन्सिल) सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(ग) "समिति" भन्नाले दफा ९ बमोजिमको कार्यकारी समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
(घ) "कार्यकारी निर्देशक" भन्नाले दफा ११ को उपदफा (२) बमोजिम नियुक्त कार्यकारी निर्देशक सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(ङ) "संस्थान" भन्नाले नेपाल सरकारको स्वामित्व बा नियन्त्रण भएको संगठित संस्था बा त्यस्तो संस्थाको स्वामित्व बा नियन्त्रण भएको अन्य संस्थासमेत सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
(च) "तोकिएको" बा "तोकिएबमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमावलीमा तोकिएको बा तोकिएबमोजिम सम्झनुपर्छ।
|
| 40 |
+
|
| 41 |
+
---
|
| 42 |
+
|
| 43 |
+
**परिच्छेद-२**
|
| 44 |
+
**नेपाल प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठानको स्थापना, उद्देश्य र नीति**
|
| 45 |
+
|
| 46 |
+
३. **नेपाल प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठानको स्थापना:**
|
| 47 |
+
(१) नेपालमा प्रशासन एवं व्यवस्थापनसम्बन्धी बिषयमा उच्चस्तरीय प्रशिक्षणको व्यवस्था गर्नको लागि नेपाल प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठानको स्थापना गरिएकोछ।
|
| 48 |
+
(२) प्रतिष्ठानलाई अंग्रेजी भाषामा "नेपाल एडमिनिष्ट्रेटिभ स्टाफ कलेज" भनिनेछ।
|
| 49 |
+
(३) यो ऐन प्रारम्भ हुनुभन्दा अघि स्थापना भएको नेपाल प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठान यसै ऐन बमोजिम स्थापना भएको मानिनेछ।
|
| 50 |
+
|
| 51 |
+
४. **प्रतिष्ठान संगठित संस्था हुने:**
|
| 52 |
+
(१) प्रतिष्ठान अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला स्वशासित र सङ्गठित संस्था हुनेछ।
|
| 53 |
+
(२) प्रतिष्ठानको आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 54 |
+
(३) प्रतिष्ठानले व्यक्ति सरह चल, अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न र बेचबिखन बा अन्य किसिमले बन्दोबस्त गर्न सक्नेछ।
|
| 55 |
+
(४) प्रतिष्ठानले व्यक्ति सरह आफ्नो नामबाट नालिस उजूर गर्न र प्रतिष्ठान उपर पनि व्यक्ति सरह नालिस उजूर लाग्न सक्नेछ।
|
| 56 |
+
(५) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि प्रतिष्ठानको आफ्नो कार्य सञ्चालन र व्यवस्थापनको सम्बन्धमा यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा विनियमद्वारा व्यवस्थित कार्य प्रणाली अनुसार हुनेछ।
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
५. **प्रतिष्ठानको उद्देश्य:**
|
| 59 |
+
प्रतिष्ठानको उद्देश्य देहायबमोजिम हुनेछ:
|
| 60 |
+
(क) नेपाल सरकार प्रदेश सरकार स्थानीय तहको र संस्थानको कर्मचारीको लागि आवश्यक पर्ने प्रशिक्षणको व्यवस्था गर्ने।
|
| 61 |
+
(ख) देशको विकास कार्यकममा सघाउ पुन्याउन नेपाल सरकारको प्रशासन र संस्थानको व्यवस्थापन क्षेत्रलाई सक्षम बनाउने उपाय गर्ने।
|
| 62 |
+
(ग) प्रशिक्षणलाई बढी उपयोगी तुल्याउन तथा प्रशिक्षण सामग्री तयार गर्नका निमित्त समस्यामूलक अनुसन्धान, परामर्श सेवा तथा सूचना सेवा सम्बन्धी कार्यकमहरु सञ्चालन गर्ने।
|
| 63 |
+
|
| 64 |
+
६. **प्रशिक्षण सम्बन्धी नीति:**
|
| 65 |
+
प्रतिष्ठानबाट सञ्चालन गरिने प्रशिक्षण सम्बन्धी नीति देहायबमोजिम हुनेछ:
|
| 66 |
+
(क) प्रशिक्षण कार्यकमलाई कर्मचारी प्रशासनको अभिस्त अड्को रुपमा आबद्ध गर्ने।
|
| 67 |
+
(ख) प्रशिक्षण कार्यकमलाई नेपाल सरकार र संस्थानको विकास कार्यकमसँग आबद्ध गर्ने।
|
| 68 |
+
(ग) नेपाल सरकार र संस्थानको कर्मचारीहरुमा विकासमूलक ज्ञान र सीप बृद्धि गरी प्रशिक्षणलाई बृत्ति विकाससँग आबद्ध गर्ने।
|
| 69 |
+
|
| 70 |
+
---
|
| 71 |
+
|
| 72 |
+
**परिच्छेद-३**
|
| 73 |
+
**प्रशिक्षण परिषद् र कार्यकारी समितिको गठन, काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 74 |
+
|
| 75 |
+
७. **प्रशिक्षण परिषद्को गठन:**
|
| 76 |
+
(१) प्रतिष्ठानको सर्वोच्च निकायको रुपमा देहाय बमोजिमका सदस्यहरु भएको प्रशिक्षण परिषद्को गठन हुनेछ:
|
| 77 |
+
(क) संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्री - अध्यक्ष
|
| 78 |
+
(ख) माननीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रिय योजना आयोग - सदस्य
|
| 79 |
+
(ग) अध्यक्ष, लोकसेवा आयोग - सदस्य
|
| 80 |
+
(घ) उप-कुलपति, त्रिभुवन विश्वविद्यालय - सदस्य
|
| 81 |
+
(ङ) मुख्य सचिव, नेपाल सरकार प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय - सदस्य
|
| 82 |
+
(च) सचिव, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय - सदस्य
|
| 83 |
+
(छ) सचिव, अर्थ मन्त्रालय - सदस्य
|
| 84 |
+
(ज) प्रतिष्ठानको कार्यकारी निर्देशक - सदस्य-सचिव
|
| 85 |
+
|
| 86 |
+
(२) परिषद्को बैठक बर्षमा कम्तीमा दुई पटक बस्नेछ।
|
| 87 |
+
(३) परिषद्को बैठकको कार्यबिधि तोकिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 88 |
+
|
| 89 |
+
८. **परिषद्को काम कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 90 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएको कामको अतिरिक्त परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहायबमोजिम हुनेछ:
|
| 91 |
+
(क) प्रतिष्ठानबाट सञ्चालन गरिने प्रशिक्षण तथा अनुसन्धान कार्यकम सम्बन्धी नीति निर्धारण गर्ने।
|
| 92 |
+
(ख) प्रतिष्ठानको नियमावली बनाउने र विनियम स्वीकृत गर्ने।
|
| 93 |
+
(ग) प्रतिष्ठानको दीर्घकालीन योजना स्वीकृत गर्ने।
|
| 94 |
+
(घ) प्रतिष्ठानको बार्षिक कार्यकमको प्रगति सम्बन्धी समीक्षा एवं मूल्याङ्कन गर्ने र बजेट स्वीकृत गर्ने।
|
| 95 |
+
(ङ) समितिलाई आबश्यक निर्देशन दिने।
|
| 96 |
+
|
| 97 |
+
९. **कार्यकारी समितिको गठन:**
|
| 98 |
+
(१) प्रतिष्ठानको उद्देश्य एवं नीति अनुरूप प्रशिक्षण एवं अनुसन्धान कार्यकमलाई सुव्यस्थित रुपले सञ्चालन गर्न गराउन देहाय बमोजिमका सदस्यहरु भएको कार्यकारी समितिको गठन हुनेछ:
|
| 99 |
+
(क) प्रतिष्ठानको कार्यकारी निर्देशक
|
| 100 |
+
(ख) सचिव, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय
|
| 101 |
+
(ग) सचिव, कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालय
|
| 102 |
+
(घ) सचिव, अर्थ मन्त्रालय
|
| 103 |
+
(ङ) सचिव, लोकसेवा आयोग
|
| 104 |
+
(च) सचिव, राष्ट्रिय योजना आयोग
|
| 105 |
+
(छ) नेपाल सरकारबाट मनोनीत तीन जना व्यक्ति
|
| 106 |
+
(ज) परिषद्ले तोकेको प्रतिष्ठानको उप-कार्यकारी निर्देशक - सदस्य-सचिव
|
| 107 |
+
|
| 108 |
+
(२) समितिले आबश्यक देखेमा विशेषज्ञलाई समितिको बैठकमा पर्यवेक्षकको रुपमा भाग लिनका लागि आमन्त्रण गर्न सक्नेछ।
|
| 109 |
+
(३) समितिको मनोनीत सदस्यहरुको पदावधि दुई वर्षको हुनेछ। त्यस्ता मनोनीत सदस्यहरुले पाउने पारिश्रमिक तथा अन्य सुविधा तोकिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 110 |
+
(४) समितिको बैठक आवश्यकता अनुसार बस्नेछ।
|
| 111 |
+
(५) समितिको बैठकको गणपूरक सङ्ख्या तथा अन्य कार्यबिधि तोकिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 112 |
+
|
| 113 |
+
१०. **समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 114 |
+
समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार देहायबमोजिम हुनेछ:
|
| 115 |
+
(क) नेपाल सरकार र संस्थानहरुको कर्मचारीहरुको लागि उपयुक्त प्रशिक्षण कार्यकमहरु सञ्चालन गर्ने।
|
| 116 |
+
(ख) प्रशासकीय समस्याहरु तथा तिनका समाधानका उपायहर बारेमा समय समयमा सभा र गोष्ठी एवं सम्मेलनको आयोजना गर्ने।
|
| 117 |
+
(ग) अनुसन्धान, परामर्श सेवा एवं सूचना सेवा सम्बन्धी कार्यकमहरु सञ्चालन गर्ने।
|
| 118 |
+
(घ) अन्य मुलुकका प्रशिक्षण सम्बन्धी संस्थानहरु र अन्तर्राष्ट्रिय संस्थाहरु सित सम्पर्क राखी आफ्नो प्रशिक्षण कार्यमा सघाउ पन्याउने।
|
| 119 |
+
(ङ) परिषद् मार्फत नेपाल सरकारलाई राष्ट्रिय स्तरमा प्रशिक्षण सम्बन्धी नीति तर्जुमा गर्न राय सल्लाह दिने।
|
| 120 |
+
(च) प्रतिष्ठानको प्रशिक्षण तथा अनुसन्धान कार्यकम सम्बन्धी नीति तर्जुमा गर्ने।
|
| 121 |
+
(छ) परिषद् मार्फत नेपाल सरकार र संस्थानहरुको विभिन्न क्षेत्रसित सम्बन्धित प्रशिक्षण कार्यकमहरुको बीचमा समन्वय ल्याउन नेपाल सरकारलाई आवश्यक राय सल्लाह दिने।
|
| 122 |
+
(ज) प्रतिष्ठानको दीर्घकालीन योजना तर्जुमा गर्ने।
|
| 123 |
+
(झ) प्रतिष्ठानको वार्षिक कार्यकम र बजेट तयार गर्ने।
|
| 124 |
+
(ज) प्रतिष्ठानको लागि आवश्यक कर्मचारीहरुको दरबन्दी सूजना गर्ने र तिनीहरुको नियुक्ति गर्ने।
|
| 125 |
+
(ट) प्रशिक्षण कार्यकमहरुको मूल्याङ्कन गर्ने, गराउने।
|
| 126 |
+
(ठ) प्रशिक्षणको क्षेत्रमा नेपाल सरकार र अन्तर्राष्ट्रिय संस्थाहरुको बीच सम्पर्क माध्यमको रुपमा काम गर्ने।
|
| 127 |
+
(ड) प्रशिक्षणलाई कार्यकम मूलक तथा व्यवहारिक बनाउन बिभिन्न क्षेत्रमा अनुभवी व्यक्तिहरुको सेवा आबधिक रुपमा आदान प्रदान गर्ने व्यवस्था मिलाउने।
|
| 128 |
+
(ढ) प्रतिष्ठानको तोकिएको रकम भन्दा बढीको सम्पत्ति बेचबिखन गर्नु पर्दा परिषद्को स्वीकृति लिने।
|
| 129 |
+
(ण) ऐन, नियम वा विनियमको अधीनमा रही प्रशिक्षण सम्बन्धी अन्य आवश्यक कार्य गर्ने।
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
---
|
| 132 |
+
|
| 133 |
+
**परिच्छेद-४**
|
| 134 |
+
**प्रतिष्ठानका कर्मचारीहरु एव निजहरुको सेवा शर्तसम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 135 |
+
|
| 136 |
+
११. **प्रतिष्ठानका कर्मचारीहरु सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 137 |
+
(१) प्रतिष्ठानमा निम्न किसिमका कर्मचारीहरु रहनेछन्:
|
| 138 |
+
(क) प्रशासकीय,
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| 139 |
+
(ख) प्राध्यापन तथा अनुसन्धान।
|
| 140 |
+
(२) प्रतिष्ठानको प्रमुखको रुपमा एक जना कार्यकारी निर्देशक रहनेछ। निजको नियुक्ति नेपाल सरकारबाट हुनेछ। निजको कार्याबधि पौंच बर्षको हुनेछ र नेपाल सरकारले चाहेमा निजको कार्याबधि पुनः बढीमा पौंच बर्षको लागि थप गर्न सक्नेछ।
|
| 141 |
+
(३) प्रतिष्ठानमा अन्य कर्मचारीहरु आवश्यकतानुसार रहनेछन्।
|
| 142 |
+
(४) प्रतिष्ठानका कर्मचारीहरुको पारिश्रमिक, सेबाको शर्त एव सुविधा तोकिएबमोजिम हुने���।
|
| 143 |
+
|
| 144 |
+
१२. **कार्यकारी निर्देशक र अन्य कर्मचारीहरुको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
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| 145 |
+
(१) कार्यकारी निर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार देहायबमोजिम हुनेछ:
|
| 146 |
+
(क) परिषद् तथा समितिको निर्णय एव निर्देशनहरु कार्यान्वयन गर्ने, गराउने।
|
| 147 |
+
(ख) प्रतिष्ठानको दीर्घकालीन योजना र बार्षिक कार्यकम तथा बजेट समिति मार्फत परिषद्मा स्वीकृतिको लागि पेश गर्ने।
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| 148 |
+
(ग) परिषद्बाट स्वीकृत प्रतिष्ठानको दीर्घकालीन योजना र बार्षिक कार्यकमको कार्यान्वयन गर्ने।
|
| 149 |
+
(घ) प्रतिष्ठानका प्रगति बिबरणहरु समय समयमा समितिमा प्रस्तुत गर्ने, गराउने।
|
| 150 |
+
(ङ) प्रतिष्ठानको प्रशिक्षण कार्यकमको आन्तरिक मूल्याङ्गन गर्ने, गराउने।
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| 151 |
+
(च) राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय संस्थाहरुसँग अनुबन्धित कार्यकम तथा अन्य सहयोगबारे सम्बन्धित पक्षसँग आवश्यक छलफल गरी समितिमा स्वीकृतिको लागि पेश गर्ने, गराउने।
|
| 152 |
+
(छ) प्रतिष्ठान सम्बन्धी अन्य कार्यहरु गर्ने, गराउने।
|
| 153 |
+
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| 154 |
+
(२) कार्यकारी निर्देशक बाहेक अन्य कर्मचारीहरुको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 155 |
+
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| 156 |
+
---
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| 157 |
+
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| 158 |
+
**परिच्छेद-५**
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| 159 |
+
**कोष, हिसाब र लेखापरीक्षण**
|
| 160 |
+
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| 161 |
+
१३. **प्रतिष्ठानको कोष:**
|
| 162 |
+
(१) प्रतिष्ठानको आफ्नो एउटा छुट्टै कोष हुनेछ।
|
| 163 |
+
(२) प्रतिष्ठानको कोषमा निम्नलिखित रकमहरु रहनेछन्:
|
| 164 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त हुने अनुदान रकम।
|
| 165 |
+
(ख) कुनै विदेशी सरकार र अन्तर्राष्ट्रिय संघ संस्थाहरुबाट प्राप्त हुने रकम।
|
| 166 |
+
(ग) परामर्श सेबा एवं अनुसन्धान कार्य गरे बापत प्राप्त हुने रकम।
|
| 167 |
+
(घ) अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त हुने रकम।
|
| 168 |
+
(३) कोषको सबै रकम नेपालको कुनै बाणिज्य बैङ्कमा जम्मा गरिनेछ।
|
| 169 |
+
(४) प्रतिष्ठानको आफ्नो उद्देश्य अनुरुपको कार्य गर्नको लागि चाहिने खर्चको रकमहरु उपदफा (१) बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ।
|
| 170 |
+
|
| 171 |
+
१४. **हिसाब राख्ने तरीका:**
|
| 172 |
+
प्रतिष्ठानको आम्दानी खर्चको हिसाब परिषद्बाट स्वीकृत ढाँचा र तरीका बमोजिम राखिनेछ।
|
| 173 |
+
|
| 174 |
+
१५. **लेखापरीक्षण:**
|
| 175 |
+
(१) प्रतिष्ठानको हिसाबको लेखापरीक्षण परिषद्बाट नियुक्त भएको लेखा परीक्षकले गर्नेछ।
|
| 176 |
+
(२) प्रतिष्ठानको लेखापरीक्षण सम्बन्धी अन्य कुरा तोकिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 177 |
+
|
| 178 |
+
---
|
| 179 |
+
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| 180 |
+
**परिच्छेद-६**
|
| 181 |
+
**प्रशिक्षण पद्धति, प्रशिक्षण सामग्री एवं पाठ्यक्रम**
|
| 182 |
+
|
| 183 |
+
१६. **प्रशिक्षण यकीन गर्ने:**
|
| 184 |
+
(१) प्रतिष्ठानले नेपाल सरकारको प्रशासन र संस्थानहरुको व्यवस्थापन क्षेत्रको लागि आवश्यक प्रशिक्षणको यकीन गर्न समय समय��ा सर्भेक्षण गर्न सक्नेछ।
|
| 185 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम भएको सर्भेक्षणको प्रतिबेदनको आधारमा प्रशिक्षणको पाठ्यक्रम तथा कार्यकम निर्धारण गरिनेछ।
|
| 186 |
+
|
| 187 |
+
१७. **अन्य प्रशिक्षण कार्यकमको मूल्याङ्कन:**
|
| 188 |
+
(१) प्रतिष्ठानले नेपाल सरकारको प्रशासन र संस्थानहरुको व्यवस्थापन क्षेत्रमा सञ्चालन भइरहेको अन्य प्रशिक्षण कार्यकमहरुको समय समयमा मूल्याङ्कन गर्न सक्नेछ।
|
| 189 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गरिएका मूल्याङ्कनको आधारमा प्रतिष्ठानले आफ्नो प्रशिक्षण कार्यकममा आवश्यकता अनुसार संशोधन बा परिवर्तन गर्न सक्नेछ र अन्य प्रशिक्षणको हकमा त्यसरी संशोधन बा परिवर्तन गर्न परिषद् मार्फत नेपाल सरकारलाई सुझाव दिन सक्नेछ।
|
| 190 |
+
|
| 191 |
+
१८. **प्रशिक्षण पद्धति:**
|
| 192 |
+
प्रशिक्षार्थीहरुको समूह तथा बिषयको प्रकृति हेरी उपयोगी एवं प्रभावकारी आधुनिक प्रशिक्षण प्रविधिहरु प्रशिक्षण कार्यकममा प्रयोग गरिनेछ।
|
| 193 |
+
|
| 194 |
+
१९. **प्रशिक्षण सामग्री:**
|
| 195 |
+
प्रतिष्ठानको प्रशिक्षण कार्यकमहरुको लागि नेपालको आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्यमा मेल खाने र सैद्धान्तिक दृष्टिकोणबाट उपयोगी हुने प्रशिक्षण सामग्रीहरुको व्यवस्था गरिनेछ।
|
| 196 |
+
|
| 197 |
+
२०. **पाठ्यक्रम:**
|
| 198 |
+
प्रशिक्षण कार्यकमलाई बढी फलदायी एवं प्रभावकारी बनाउन पाठ्यक्रममा सैद्धान्तिक एवं व्यवहारिक दुवै पक्षमा जोड दिइनेछ।
|
| 199 |
+
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| 200 |
+
---
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| 201 |
+
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| 202 |
+
**परिच्छेद-७**
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| 203 |
+
**विविध**
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| 204 |
+
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| 205 |
+
२१. **प्रतिबेदन प्रकाशित गर्नु पर्ने:**
|
| 206 |
+
प्रतिष्ठानले प्रत्येक वर्ष प्रतिष्ठानको क्रियाकलाप सम्बन्धी प्रतिबेदन सार्वजनिक रुपमा प्रकाशित गर्नु पर्नेछ।
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| 207 |
+
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| 208 |
+
२२. **अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 209 |
+
समितिले यो ऐन बमोजिम आफूले पाएको अधिकार मध्ये सबै बा केही अधिकार प्रतिष्ठानको कार्यकारी निर्देशक बा अन्य कुनै कर्मचारीहरुलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ। कार्यकारी निर्देशकले ऐन नियम अन्तर्गत आफूले पाएको अधिकारमध्ये सबै बा केही अधिकार प्रतिष्ठानको उप कार्यकारी निर्देशक बा अन्य कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 210 |
+
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| 211 |
+
२३. **नेपाल सरकारसंग सम्पर्क:**
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| 212 |
+
प्रतिष्ठानले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय मार्फत सम्पर्क राख्नेछ।
|
| 213 |
+
|
| 214 |
+
२४. **नियम तथा विनियम बनाउने:**
|
| 215 |
+
(१) यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्नको लागि परिषद्ले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
|
| 216 |
+
(२) प्रतिष्ठानको अन्य आवश्यक काम कारबाहीको लागि उपदफा (१) अन्तर्गत बनेको नियमावलीको अधीनमा रही समितिले आवश्यक विनियम बनाउन सक्नेछ र त्यस्तो विनियम परिषद्वाट स्वीकृत भएपछि लागू हुनेछ।
|
| 217 |
+
|
| 218 |
+
नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गने ऐन, २०७५ द्वारासंशोनधि ।रिव्यः-केहीनेपालकानूनसंशोधनगनेऐन, २०६३द्वारारूपान्त्िरिएकाशब्दहरूM-“श्री५कोसरकार”िन्त्नेशब्दकोसट्टा“नेपालसरकार”।
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section_4_pdf_16.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,166 @@
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| 1 |
+
# अध्यागमन ऐन, २०४९
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
## लालमोहर प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०४९। ७। १७
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
|
| 8 |
+
१. अध्यागमन (पहिलो संशोधन) ऐन, २०४०
|
| 9 |
+
२०४०।६।२७
|
| 10 |
+
|
| 11 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०४३
|
| 12 |
+
२०४३। ६। १२
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
३. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 17 |
+
२०६६। १०। ७
|
| 18 |
+
|
| 19 |
+
४. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन,२०७२
|
| 20 |
+
२०७२। ११। १३
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
२०४९ सालको ऐन नं. ३०
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
अध्यागमन सम्बन्धी व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 27 |
+
नेपालमा भित्र विदेशीहरुको प्रवेश, उपस्थिति र प्रस्थानलाई नियमित एवं नियन्त्रण गर्न तथा नेपाली नागरिकहरुको आगमन र प्रस्थानलाई व्यवस्थित गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज बीरन्द्र बीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको एक्काइसौं बर्षमा संसदले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
---
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
### १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:
|
| 34 |
+
(१) यस ऐनको नाम "अध्यागमन ऐन, २०४९," रहेकोछ।
|
| 35 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 36 |
+
|
| 37 |
+
### २. परिभाषा:
|
| 38 |
+
विषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 39 |
+
(क) "अध्यागमन" भन्नाले नेपालमा भित्र विदेशीहरुको प्रवेश, उपस्थिति र प्रस्थान गर्ने प्रकृया सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
(ख) "विदेशी" भन्नाले तत्काल नेपालको नागरिक नभएको जुनसुकै व्यत्कि सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
(ग) "राहदानी" भन्नाले कुनै राष्ट्रको सरकारले विदेश भ्रमणको लागि जारी गरेको राहदानी, टुाभल डकुमेण्ट बा यस्तै भ्रमण गर्ने स्वीकृति प्रदान गरिएको अनुमति पत्र सम्झनु पर्छ र सो शब्दले संयुक्त राष्ट्र संघले जारी गरेको लेसेपेसे समेतलाई जनाउँछ।
|
| 42 |
+
(घ) "भिसा" भन्नाले कुनै विदेशीलाई नेपालमा भित्र प्रवेश, तथा उपस्थितिको लागि नेपाल सरकारबाट दिइने अनुमति पत्र सम्झनु पर्छ।
|
| 43 |
+
(ङ) "बिभाग" भन्नाले नेपालमा भित्र विदेशीहरुको प्रवेश, उपस्थिति र प्रस्थानलाई नियमित गर्न तथा नेपाली नागरिकहरुको आगमन र प्रस्थानलाई व्यवस्थित गर्न नेपाल सरकारले स्थापना गरेको अध्यागमन विभाग सम्झनु पर्छ।
|
| 44 |
+
(च) "कार्यालय" भन्नाले विभाग अन्तर्गतको अध्यागमन कार्यालय सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
(छ) "महानिर्देशक" भन्नाले विभागको प्रमुख सम्झनु पर्छ।
|
| 46 |
+
(ज) "अध्यागमन अधिकृत" भन्नाले विभाग र कार्यालयमा कार्यरत अधिकृत सम्झनु पर्छ र सो शब्दले कार्यालय प्रमुखलाई समेत जनाउँछ।
|
| 47 |
+
(झ) "पदयात्रा" भन्नाले कुनै विदेशीद्वारा रात बिताउने गरी गरिने पैदल भ्रमण सम्झनु पर्छ र सो शब्दले हिम शिखर आरो��ण गर्न जाने विदेशीद्वारा गरिने आधार शिबिर सम्मको पैदल भ्रमण समेतलाई जनाउँछ।
|
| 48 |
+
(ज) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 49 |
+
|
| 50 |
+
---
|
| 51 |
+
|
| 52 |
+
### ३. प्रवेश, उपस्थिति र प्रस्थान सम्बन्धी व्यवस्था:
|
| 53 |
+
(१) कुनै पनि विदेशीले राहदानी र भिसा नलिई नेपालमा भित्र प्रवेश गर्न र नेपालमा बस्न पाउने छैन।
|
| 54 |
+
(२) भिसाको प्रकार, दस्तूर तथा भिसा सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 55 |
+
(३) नेपालको तोकिएको क्षेत्रमा पदयात्रा गर्न चाहने विदेशीले भिसाको साथै तोकिए बमोजिम अनुमति लिनु पर्नेछ।
|
| 56 |
+
(४) पदयात्रा सम्बन्धी दस्तूर तथा अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 57 |
+
(५) कुनै पनि विदेशीले नेपालमा भित्र प्रवेश गर्ने र नेपालबाट प्रस्थान गर्ने स्थल तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 58 |
+
(६) नेपालबाट बिदेशी प्रस्थान गर्ने बा नेपालमा आउने नेपाली नागरिकहरुको प्रस्थान तथा आगमन सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 59 |
+
|
| 60 |
+
---
|
| 61 |
+
|
| 62 |
+
### ४. विदेशीले पालन गर्नु पर्ने शर्तहरु:
|
| 63 |
+
(१) नेपालमा बसोबास गर्ने बिदेशीहरुले पालन गर्नु पर्ने शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 64 |
+
(२) विदेशीलाई भिसा बा पदयाबाको लागि सेवा उपलब्ध गराउने ऐजन्सीले पालन गर्नु पर्ने शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 65 |
+
|
| 66 |
+
---
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| 67 |
+
|
| 68 |
+
### ५. जाली राहदानी बा भिसा प्रयोग गर्न नहुने:
|
| 69 |
+
(१) कसैले आफ्नो नाम उमेर राष्ट्रियता बा अन्य कुनै कुरा ढाँट्न, झुट्टा विवरण दिन बा जाली राहदानी बा भिसा प्रयोग गर्न गराउन हुँदैन।
|
| 70 |
+
(२) कसैले जाली राहदानी बा भिसा पेश गरी नेपालमा भित्र प्रवेश, उपस्थिति र नेपालबाट प्रस्थान गर्न हुँदैन।
|
| 71 |
+
(३) विदेशी राज्यको सरकारबाट बा त्यस्तो सरकारद्वारा अधिकार प्राप्त अधिकारीबाट जारी गरिएको राहदानी र भिसा नभएको कुनै पनि विदेशीलाई कसैले नेपालमा भित्र प्रवेश, उपस्थिति र प्रस्थान गराउन हुँदैन।
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| 72 |
+
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| 73 |
+
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| 74 |
+
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| 75 |
+
### ६. लिखत जाँच गर्न बा कब्जामा लिने सक्ने:
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| 76 |
+
विदेशीको प्रवेश, उपस्थिति र प्रस्थानसँग सम्बन्धित लिखत अध्यागमन अधिकृत बा महानिर्देशकले तोकेको कर्मचारीले जुनसुकै स्थान र समयमा पनि जाँच गर्न सक्नेछ र तत्सम्बन्धी कागजपत्र आफ्नो कब्जामा लिन सक्नेछ।
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| 77 |
+
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| 78 |
+
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| 79 |
+
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| 80 |
+
### ७. महानिर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार:
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| 81 |
+
महानिर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
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| 82 |
+
(क) नेपालमा भित्र विदेशीहरुको प्रवेश, उपस्थिति र प्रस्थानलाई नियमित, व्यवस्थित र नियन्त्रण गर्ने, गराउने।
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| 83 |
+
(ख) विदेशीहरुलाई पदयात्रा गर्न अनुमति दिने।
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| 84 |
+
(ग) तोकिए बमोजिमको भिसा जारी गर्ने तथा भिसाको म्याद थप गर्ने।
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| 85 |
+
(ग१) खण्ड (ख) बमोजिम दिइएको पदयात्रा अनुमति बा खण्ड (ग) बमोजिम जारी गरिएको बा म्याद थप गरिएको भिसा तोकिए बमोजिमको अवस्थामा रद्द गर्ने।
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| 86 |
+
(घ) नेपाली नागरिकको आगमन र प्रस्थानलाई व्यवस्थित गर्ने।
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| 87 |
+
(ङ) नेपाल सरकारले समय समयमा दिएको निर्देशन अनुसार अन्य काम गर्ने, गराउने।
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| 88 |
+
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| 89 |
+
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| 90 |
+
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| 91 |
+
### ८. अध्यागमन सम्बन्धी अपराधको तहकिकात:
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| 92 |
+
(१) यो ऐन र यस ऐन अन्तरगत बनेको नियम बिपरीत कुनै अपराध भए गरेको बा हुन लागेको कुरा प्रत्यक्ष बा अप्रत्यक्ष रुपमा विभाग बा कार्यालयलाई जानकारी हुन आएमा महानिर्देशकले तोकेको अध्यागमन अधिकृतले सो सम्बन्धी अपराधको तहकिकात र कारबाही गर्नेछ।
|
| 93 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अपराधको तहकिकात गर्दा बा सबुत प्रमाण सङलन गर्दा अपराधमा संलग्न व्यत्तिलाई गिरफ्तार गर्ने, अपराधको सम्बन्धमा जुनसुकै स्थानको खानतलासी लिन, अपराधसँग सम्बन्धित कागजात बा अन्य माल बस्तु आफ्नो जिम्मामा लिन तथा सर्जमिन मुचुल्का तयार गर्न समेत प्रबलित कानून बमोजिम प्रहरीले पाए सरहको सबै अधिकार अध्यागमन अधिकृतलाई प्राप्त हुनेछ। त्यसरी तहकिकात गर्दा अध्यागमन अधिकृतले अभियुक्तलाई बयान गराई मनासिब आधार भएमा तारेखमा राख्न धरौट बा जमानत लिई छाड्न बा अदालतको अनुमति लिई पच्चीस दिन सम्म थुनामा राख्न सक्नेछ।
|
| 94 |
+
(२क.) उपदफा (२) बमोजिम धरौट बा जमानत दिनुपर्ने अभियुक्तले धरौट बा जमानत दिन नसकेमा निजलाई थुनामा राख्न सकिनेछ।
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| 95 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम तहकिकात गर्दा अध्यागमन अधिकृतले आवश्यक परेमा सरकारी बकीलको परामर्श लिन सक्नेछ।
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| 96 |
+
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| 97 |
+
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| 98 |
+
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| 99 |
+
### ९. निष्काशन गर्न सकिने:
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| 100 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम अध्यागमन अधिकृतले कुनै विदेशीको हकमा अपराधको तहकिकात पूरा गरी महानिर्देशक समक्ष प्रतिबेदन पेश गरेपछि सो प्रतिबेदनको आधारमा महानिर्देशकले तोकिए बमोजिम नियमित गर्नु पर्ने कुराहरुको हकमा नियमित गरी त्यस्तो विदेशीलाई श्री नेपाल सरकारको स्वीकृति लिई अबधि तोकी बा नतोकी पुनः नेपालमा प्रवेश गर्न नपाउने गरी नेपालबाट निष्काशन गर्न सक्नेछ।
|
| 101 |
+
(१क) यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा प्रचलित कानून बिपरीत कार्य गरे बापत दण्ड सजाय भोगिसकेका भिसा लिनु पर्ने अबस्थाका बिदेशीलाई महा��िर्देशकले श्री नेपाल सरकारको स्वीकृति लिई अबधि तोकी बा नतोकी नेपालबाट निष्काशन गर्ने आदेश जारी गर्न सक्नेछ।
|
| 102 |
+
(२) उपदफा (१) र (१क) बमोजिम निष्काशन गरिएको बिदेशीले निष्काशन गरिएको अबधिसम्म नेपालमा भित्र पुनः प्रवेश गर्न पाउने छैन।
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| 103 |
+
(३) निष्काशन सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 104 |
+
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| 105 |
+
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| 106 |
+
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| 107 |
+
### १०. दण्ड सजाय:
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| 108 |
+
(१) कसैले दफा ५ बमोजिमको अपराध गरे गराएमा निजलाई पचास हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा पाँच बर्षसम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ।
|
| 109 |
+
(२) कसैले दफा ९ को उपदफा (२) को उल्लङ्घन गरे गराएमा निजलाई पहिलो पटक पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा दुई बर्षसम्म कैद बा त्यसपछि पुनः उल्लङ्घन गरेमा निजलाई पटकै पिच्छे पचास हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा पाँच बर्षसम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ।
|
| 110 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) अन्तर्गत सजाय हुने अपराधको मतियारलाई त्यस्तो अपराध गर्ने व्यक्तिलाई हुने सजायको आधा सजाय हुनेछ।
|
| 111 |
+
(४) माथिका उपदफाहरुमा लेखिए बाहेक यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत कसैले कुनै कार्य गरेमा निजले तिर्नु पर्ने भनी ठहर भएको बिगो रकम समेत असल गरी निजलाई महानिर्देशकले पचासहजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ।
|
| 112 |
+
|
| 113 |
+
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| 114 |
+
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| 115 |
+
### ११. पुनरावेदन दिन सक्ने:
|
| 116 |
+
दफा १० को उपदफा (४) बमोजिम सजाय भएकोमा चित्त नबुढने पक्षले पैतीस दिन भित्र उच्च अदालतमा पुनरावेदन गर्न सक्नेछ।
|
| 117 |
+
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| 118 |
+
---
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| 119 |
+
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| 120 |
+
### १२. नेपाल सरकार बादी हुने:
|
| 121 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दा नेपाल सरकार बादी हुनेछ।
|
| 122 |
+
|
| 123 |
+
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| 124 |
+
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| 125 |
+
### १३. भिसा दस्तूर नलागने:
|
| 126 |
+
यो ऐन बा प्रचलित कानून बमोजिम तहकिकातको क्रममा थुनामा परेको कुनै बिदेशीको हकमा थुनामा रहेको अबधिसम्म र मुद्दा दायर गरिएको बिदेशीको हकमा त्यस्तो मुद्दा दायर गरिएको दिनदेखि मुद्दाको फैसला भई कैदको सजाय भएकोमा कैद भुक्तान भएको दिनसम्म र जरिबाना मात्र भएकोमा जरिबाना बुझाएको दिनसम्मको भिसा दस्तूर लाग्ने छैन।
|
| 127 |
+
|
| 128 |
+
---
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| 129 |
+
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| 130 |
+
### १४. नेपाल सरकारको अधिकार:
|
| 131 |
+
(१) नेपाल सरकारले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको सबै बा केही प्राबधानहरु कुनै बर्ग, जात, जाती बा राष्ट्रियताका विदेशीहरुलाई लागू नहुने बा तोकिएका शर्तहरु बमोजिम मात्र लागू हुने व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 132 |
+
(२) नेपाल सरकारलाई नेपालमा भित्र कुनै पनि विदेशीको प्रवेश, उपस्थिति बा प्रस्थानबाट राष्ट्रिय हित प्रतिकूल हुन सक्छु भन्ने लागेमा त्यस्तो विदेशीको प्र��ेश, उपस्थिति बा प्रस्थान निषेध गर्न सक्नेछ।
|
| 133 |
+
|
| 134 |
+
---
|
| 135 |
+
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| 136 |
+
### १५. अधिकार प्रत्यायोजन गर्न सक्ने:
|
| 137 |
+
यस ऐन बमोजिम महानिर्देशकले आफूलाई प्राप्त अधिकारमध्ये सबै बा केही अधिकार आफ्नो मातहतका अन्य अधिकृत बा कर्मचारीलाई सुम्पन सक्नेछ।
|
| 138 |
+
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| 139 |
+
---
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| 140 |
+
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| 141 |
+
### १६. अन्य प्रचलित कानून अनुसार कारबाही गर्न बाधा नपर्ने:
|
| 142 |
+
यस ऐनमा लेखिएको कुनै कुराले कुनै व्यक्ति माथि अन्य प्रचलित कानून बमोजिम अदालतमा मुद्दा चलाउन बाधा पुन्याएको मानिने छैन।
|
| 143 |
+
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| 144 |
+
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| 145 |
+
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| 146 |
+
### १७. असल नियतले गरेकोमा बचाउ:
|
| 147 |
+
यो ऐन बमोजिम असल नियतले गरेको बा गर्न खोजेको कुनै कार्यको निमित्त क्षतिपूर्तिको दाबी गर्न बा कुनै कर्मचारी उपर मुद्दा चलाउन बा अन्य कुनै कानूनी कारबाही चलाउन पाइने छैन।
|
| 148 |
+
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| 149 |
+
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| 150 |
+
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| 151 |
+
### १८. नियम बनाउने अधिकार:
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| 152 |
+
यो ऐनको उद्देश्य पूर्तिको लागि श्री नेपाल सरकारले नियम बनाउन सक्नेछ।
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| 153 |
+
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| 154 |
+
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+
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| 156 |
+
### १९. खारेजी र बचाउ:
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| 157 |
+
(१) विदेशी सम्बन्धी ऐन, २०१४ खारेज गरिएको छ।
|
| 158 |
+
(२) विदेशी सम्बन्धी ऐन, २०१४ र सो ऐन अन्तर्गतका नियमहरु बमोजिम भए गरेका काम कारबाही यसै ऐन बमोजिम भए गरेको मानिनेछ।
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| 159 |
+
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| 160 |
+
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| 161 |
+
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| 162 |
+
**द्रष्टव्य:**
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| 163 |
+
(१) केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरू:
|
| 164 |
+
"श्री ४ को सरकार" भन्ने शब्दको सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
| 165 |
+
(२) न्याय प्रशासन ऐन, २०७३ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरू:
|
| 166 |
+
"पुनराबेदन अदालत" को सट्टा "उच्च अदालत"।
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section_4_pdf_17.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,110 @@
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| 1 |
+
**संस्था दर्ता ऐन, २०३४**
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०३४।४।२७
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
|
| 7 |
+
१. न्याय प्रशासन सुधार (चौथो संशोधन) ऐन, २०४३
|
| 8 |
+
२०४३।७।२४
|
| 9 |
+
२. न्याय प्रशासन ऐन, २०४६
|
| 10 |
+
२०४६।२।१६
|
| 11 |
+
३. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०४६
|
| 12 |
+
२०४९।१।६
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
|
| 15 |
+
४. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 16 |
+
२०६६।१०।७
|
| 17 |
+
४. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 18 |
+
२०७२।११।१३
|
| 19 |
+
|
| 20 |
+
२०३४ सालको ऐन नं. १०
|
| 21 |
+
संस्थाहरुको स्थापना तथा दर्ता सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 22 |
+
|
| 23 |
+
**प्रस्तावनाः**
|
| 24 |
+
सामाजिक, धार्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, शैक्षिक, बौद्धिक, शारीरिक, आर्थिक, व्यवसायिक तथा परोपकारी संस्थाहरुको स्थापना तथा दर्ता गर्ने सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
थी ४ महाराजाधिराज बीरन्ड बीर विक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्पतिले यो ऐन बनाइबक्सेकोछ।
|
| 27 |
+
|
| 28 |
+
**१. संक्षिप्त नाम, विस्तार र प्रारम्भ :**
|
| 29 |
+
(१) यस ऐनको नाम "संस्था दर्ता ऐन, २०३४" रहेकोछ।
|
| 30 |
+
(२) यो ऐनको विस्तार नेपाल भर हुनेछ।
|
| 31 |
+
(३) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
**२. परिभाषा :**
|
| 34 |
+
विषय बा प्रसंगले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 35 |
+
(क) "संस्था" भन्नाले सामाजिक, धार्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, शैक्षिक, बौद्धिक, सैद्धान्तिक, शारीरिक, आर्थिक, व्यावसायिक तथा परोपकारी कार्यहरुको विकास एवं विस्तार गर्ने उद्देश्यले स्थापना भएको संघ संस्था, क्लब, मण्डल, परिषद्, अध्ययन केन्द्र आदि सम्झनुपर्छ र सो शब्दले मैबी संघ समेतलाई जनाउँछ।
|
| 36 |
+
(ख) "स्थानीय अधिकारी" भन्नाले नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकिदिएको अधिकारी सम्झनु पर्छ र त्यसरी अधिकारी नतोकिएकोमा प्रमुख जिल्ला अधिकारी सम्झनुपर्छ।
|
| 37 |
+
(ग) "प्रबन्ध समिति" भन्नाले संस्थाको विधान अनुसार गठन भएको प्रबन्ध समिति सम्झनुपर्छ।
|
| 38 |
+
(घ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनुपर्छ।
|
| 39 |
+
|
| 40 |
+
**३. दर्ता नगरी संस्था खोल्न नहुने :**
|
| 41 |
+
यस ऐन बमोजिम दर्ता नगरी कसैले पनि संस्था स्थापना गर्न हुँदैन।
|
| 42 |
+
|
| 43 |
+
**४. संस्थाको दर्ता :**
|
| 44 |
+
(१) संस्था स्थापना गर्न चाहने कुनै सात जना बा सो भन्दा बढी व्यक्तिहरुले संस्था सम्बन्धी देहायको बिबरण खुलाई संस्थाको विधानको एक प्रति र तोकिएको दस्तुर सहित स्थानीय अधिकारी समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ :-
|
| 45 |
+
(क) संस्थाको नाम,
|
| 46 |
+
(ख) उद्देश्यहरू,
|
| 47 |
+
(ग) प्रबन्ध समितिका सदस्यहरूको नाम, ठेगाना र पेशा,
|
| 48 |
+
(घ) आर्थिक श्रोत,
|
| 49 |
+
(ङ) कार्यालयको ठेगाना।
|
| 50 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निवेदन प्राप्त भएपछि स्थानीय अधिकारीले आवश्यक जाँचबुझ गरी संस्था दर्ता गर्न उचित ठानेमा संस्था दर्ता गरी दर्ताको प्रमाणपत्र दिनेछ।
|
| 51 |
+
(३) स्थानीय अधिकारीले कुनै संस्था दर्ता नगर्ने निर्णय गरेमा त्यस्को सूचना निवेदकलाई दिनु पर्नेछ र निवेदकले सूचना प्राप्त गरेको मितिले पैंतीस दिनभित्र त्यस्तो निर्णय उपर नेपाल सरकारले तोकेको अधिकारी समक्ष उजूर गर्न सक्नेछ।
|
| 52 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिमको उजूर प्राप्त भएपछि नेपाल सरकारले तोकेको अधिकारीले आवश्यक जाँचबुझ गरी त्यस्तो संस्था दर्ता गर्न मनासिब ठहराएमा सो संस्था दर्ता गर्ने स्थानीय अधिकारीलाई आदेश दिन सक्नेछ र त्यस्तो आदेश भएपछि स्थानीय अधिकारीले संस्था दर्ता गरिदिनु पर्नेछ।
|
| 53 |
+
(५) यस दफा अन्तर्गत दिइने प्रमाणपत्रको ढाँचा, अवधि, नवीकरण र नवीकरण दस्तुर तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
**५. संगठित संस्था मानिने :**
|
| 56 |
+
(१) यस ऐन अन्तर्गत दर्ता भएको प्रत्येक संस्था अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला स्वशासित र संगठित संस्था हुनेछ। सो संस्थाको सबै कामको निमित्त आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 57 |
+
(२) संस्थाले व्यक्ति सरह चल अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न र बेचविखन गर्न सक्नेछ।
|
| 58 |
+
(३) संस्थाले व्यक्ति सरह आफ्नो नामबाट नालिस उजुर गर्न सक्नेछ र सो उपर पनि सोही नामबाट नालीस उजुर लाग्नेछ।
|
| 59 |
+
|
| 60 |
+
**६. संस्थाको सम्पत्ति :**
|
| 61 |
+
(१) संस्थाको सदस्य बा कर्मचारी लगायत कुनै व्यक्तिले संस्थाको विधान विरुद्ध संस्थाको कुनै सम्पत्ति दुरुपयोग गरेमा, कब्जा गरेमा बा रोका राखेमा स्थानीय अधिकारीले त्यस्तो सम्पत्ति दुरुपयोग गर्ने, कब्जा बा रोका राख्नेबाट लिई संस्थालाई फिर्ता बुझाई दिन सक्नेछ।
|
| 62 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको संस्थाको सम्पत्ति फिर्ता गर्ने गरी स्थानीय अधिकारीले गरेको कारबाहीमा चित्त नवुझ्ने व्यक्तिले जिल्ला अदालतमा पुनराबेदन दिन सक्नेछ।
|
| 63 |
+
(३) संस्थाको सदस्य बा कर्मचारी लगायत कुनै व्यक्तिले संस्थाको कुनै सम्पत्ति बा लिखत बा प्रतिष्ठा विरुद्ध कुनै अपराध बा विराम गरेमा संस्था, संस्थाको कुनै सदस्य बा स्थानीय अधिकारीले प्रचलित कानून बमोजिम मुदाको कारबाही चलाउन सक्नेछ।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
**७. अघि दर्ता नभई स्थापना भएका संस्थाले दर्ता गर्ने :**
|
| 66 |
+
यो ऐन प्रारम्भ हुनुभन्दा अघि तत्काल प्रचलित कानून बमोजिम दर्ता नभई स्थापना भई रहेका संस्थाले पनि यो ऐन प्रारम्भ भएको मितिले तीन महिनाभित्र यो ऐन बमोजिम दर्ता गराउनु पर्नेछ।
|
| 67 |
+
|
| 68 |
+
**८. संस्थाको उद्देश्यमा हेरफेर :**
|
| 69 |
+
(१) संस्थाको उद्देश्यमा हेरफेर गर्न आवश्यक देखेमा बा सो संस्थालाई कुनै अर्को संस्थामा गाभ्न उचित देखेमा सो संस्थाको प्रबन्ध समितिले तत्सम्बन्धी प्रस्ताव तयार गरी सो प्रस्ताव उपर छलफल गर्न संस्थाको विधान बमोजिम असाधारण सभा बोलाउनु पर्नेछ।
|
| 70 |
+
(२) असाधारण सभामा उपस्थित भएका जम्मा सदस्य सङ्ख्याको दुई तिहाई सदस्यहरुले प्रस्तावमा समर्थन जनाएमा सो प्रस्ताव असाधारण सभाबाट पारित भएको मानिनेछ।
|
| 71 |
+
(३) सो प्रस्ताव लागू गर्न स्थानीय अधिकारीको पूर्व स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 72 |
+
|
| 73 |
+
**९. हिसाबको विवरण पठाउनु पर्ने :**
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| 74 |
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प्रबन्ध समितिले आफ्नो संस्थाको हिसाबको विवरण लेखा परीक्षकको प्रतिवेदन सहित प्रत्येक वर्ष स्थानीय अधिकारीकहाँ पठाउनु पर्नेछ।
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**१०. हिसाब जाँच गर्ने :**
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(१) स्थानीय अधिकारीले आवश्यक देखेमा संस्थाको हिसाब आफूले नियुक्त गरेको कुनै अधिकृतद्वारा जाँच गराउन सक्नेछ।
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(२) उपदफा (१) बमोजिम हिसाब जाँच गराए बापत स्थानीय अधिकारीले हिसाब जाँचबाट देखिन आएको संस्थाको मौज्दात रकमको सयकडा तीन प्रतिशतमा नवढाइ आफूले निर्धारित गरेको दस्तूर असूल गरी लिन सक्नेछ।
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(३) हिसाब जाँच गर्ने अधिकृतले मागेको विवरण तथा कागजपत्रहरु बा सोधेको प्रश्नको जबाफ दिनु संस्थाको पदाधिकारी, सदस्य र कर्मचारीको कर्तव्य हुनेछ।
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(४) हिसाब जाँच गर्ने अधिकृतले स्थानीय अधिकारीले तोकिदिएको म्याद भित्र हिसाब जाँचको प्रतिवेदन स्थानीय अधिकारी समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ र सो प्रतिवेदनको आधारमा संस्थाको कुनै सम्पत्ति सो संस्थाको कुनै पदाधिकारी, सदस्य बा कर्मचारीले हिनामिना गरेको, नोक्सान गरेको बा दुरुपयोग गरेको छु भन्ने स्थानीय अधिकारीलाई लागेमा निजले त्यस्तो पदाधिकारी, सदस्य बा कर्मचारीबाट सो हानी नोक्सानी असुल गर्न प्रचलित कानून बमोजिम कारबाही चलाउन सक्नेछ।
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**११. निर्देशन दिने :**
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नेपाल सरकारले संस्थालाई आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ र त्यस्तो निर्देशनको पालना गर्नु सम्बन्धित संस्थाको कर्तव्य हुनेछ।
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**१२. दण्ड सज��य :**
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(१) दफा ३ बमोजिम दर्ता नगराई संस्था स्थापना गरेमा बा दफा ७ बमोजिम दर्ता नगरी संस्था संचालन गरेमा त्यस्ता संस्थाका प्रबन्ध समितिका सदस्यहरुलाई स्थानीय अधिकारीले जनही दुई हजार रुपैयाँसम्म जरीबाना गर्न सक्नेछ।
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(२) दफा ९, बमोजिम हिसाबको विवरण नपटाएमा प्रबन्ध समितिका सदस्यहरुलाई स्थानीय अधिकारीले जनही पाँच सय रुपैयाँसम्म जरीबाना गर्न सक्नेछ।
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(३) दफा १० को उपदफा (३) बमोजिम हिसाब जाँच गर्ने सम्बन्धित अधिकृतले मागेको विवरण तथा कागजपत्रहरु बा सोधेको प्रश्नको जबाफ नदिने सम्बन्धित पदाधिकारी, सदस्य बा कर्मचारीलाई स्थानीय अधिकारीले पाँचसय रुपैयाँसम्म जरीबाना गर्न सक्नेछ।
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(४) दफा ८ बमोजिम स्थानीय अधिकारीको स्वीकृति नलिई संस्थाको उद्देश्यमा हेरफेर गरेमा बा अर्को संस्थासित गाभेमा बा संस्थाले आफ्नो उद्देश्यको प्रतिकूल हुने गरी काम कारबाही गरेमा बा नेपाल सरकारले दिएको निर्देशन पालन नगरेमा स्थानीय अधिकारीले त्यस्तो संस्थाको दर्ता निलम्बन गर्न बा खारेज गर्न सक्नेछ।
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**१३. पुनरावेदन :**
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दफा १२ बमोजिम स्थानीय अधिकारीले गरेको अन्तिम निर्णय उपर पैतीस दिनभित्र जिल्ला अदालतमा पुनरावेदन लाग्नेछ।
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**१४. संस्थाको बिघटन र त्यस्को परिणाम :**
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(१) संस्थाको विधानबमोजिम कार्य सन्चालन गर्न नसकी बा अन्य कुनै कारणबश संस्था बिघटन भएमा त्यस्तो संस्थाको सम्पूर्ण जायजेथा नेपाल सरकारमा सर्नेछ।
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(२) उपदफा (१) बमोजिम बिघटन भएको संस्थाको दायित्वको हकमा सो संस्थाको जायजेथाले खामेसम्म त्यस्तो दायित्व नेपाल सरकारले व्यहोर्नेछ।
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**१५. नियम बनाउने अधिकार :**
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यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले नियम बनाउन सक्नेछ।
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**१६. अन्य नेपाल ऐन बमोजिम दर्ता बा स्थापना गर्नुपर्ने :**
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कुनै संस्थाको दर्ता बा स्थापना गर्ने सम्बन्धमा अर्को नेपाल ऐनमा छुट्टै व्यवस्था भएकोमा यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि त्यस्तो संस्था सोही ऐन बमोजिम दर्ता बा स्थापना गर्नु पर्नेछ।
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**१७. खारेजी र बचाउ :**
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(१) संस्था रजिष्टेशन ऐन, २०१६ खारेज गरिएको छ।
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(२) संस्था रजिष्टेशन ऐन, २०१६ अन्तर्गत दर्ता भएको संस्था यस ऐन अन्तर्गत दर्ता भए सरह मानिनेछ।
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**द्रष्टव्य:**
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केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरू:-
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"थी ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
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