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|---|---|---|---|---|
== आर्थिक व राजनीतिक विचार == ह्युअर्टा डि सोटो के प्रमुख बौद्धिक योगदानों में सबसे अधिक सम्मानित कार्य उनकी उद्यमिता और सोश्यलिज़्म की असम्भवता के अध्ययन जो उनकी पुस्तक, सोश्यलिज्म, इकॉनोमिक कैल्क्युलेशन, एन्ड ऑन्ट्रिप्रिनियरशिप (२०१०) में प्रस्तुत हुये, आर्थिक चक्रों के ऑस्ट्रियन सिद्धांत का विकास जोकि उनकी पुस्तक, म... | अर्थशास्त्र | 4,300 | null | 385 |
== पुस्तकें == प्लेन्स डि पेन्सिओन्स प्रिवाडोस [प्रायवेट पेन्शन बेनिफ़िट] (स्पेनिश में). मैड्रिड: एडिटोरिअल सैन मार्टिन. १९८४. पृ॰ 294. OCLC 11783782. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788471402226. लैक्च्युरास डि इकॉनोमिआ पॉलिटिका [रीडिंग्स इन पॉलिटिकल इकॉनोमी] (स्पेनिश में). मैड्रिड: युनिअन एडिटोरिअल. 1986–1987. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 97884720920... | अर्थशास्त्र | 4,301 | null | 378 |
ह्युअर्टा डि सोटो की आधिकारिक वैबसाइट लुड्विग वॉन मिसेस इंस्टिट्यूट की वैबसाइट पर जीसस ह्युअर्टा डि सोटो की सुची: Author listing; मिसेस के रोजाना लेखों की सुची; फ़ैक्लटी मैम्बर का विशिष्ट इंटरव्यू. ह्युअर्टा डि सोटो के साथ एक इंटरव्यू जो "द ऑस्ट्रियन इकॉनोमिक्स न्यूजलैटर" मे प्रकाशित हुआ। (समर १९९७; वोल. १७, नंबर २।) ऑ... | अर्थशास्त्र | 4,302 | null | 85 |
मार्शल के शिष्य जान मेनार्ड कीन्स (1883) का 'रोजगार, ब्याज एवं मुद्रा का सामान्य सिद्धांत' (सन् 1936) नामक ग्रंथ अर्थशास्त्र की विशेष महत्वपूर्ण पुस्तक है। वास्तव में इस ग्रंथ ने पाश्चात्य अर्थशास्त्रियों की विचारधारा को आमूल परिवर्तित कर दिया है। इसी पर हेराड डोमर का सुप्रसिद्ध विकास माडल, लियोंतिफ का इन-पुट आउटपुट म... | अर्थशास्त्र | 4,303 | null | 511 |
== बाहरी कड़ियाँ == Keynesians - Introduction The Keynesian Theory | अर्थशास्त्र | 4,304 | null | 10 |
ज्ञान अर्थव्यवस्था या ज्ञान अर्थतंत्र या नॉलेज एकनॉमी (knowledge economy) उस अर्थव्यवस्था को इंगित करता है जिसमें ज्ञान का महत्व अधिकाधिक है। इसके अलावा इससे ज्ञान के सृजन (उत्पादन) एवं ज्ञान के प्रबन्धन का भी बोध होता है। वर्तमान समय में अर्तहोत्पत्ति के लिये ज्ञान का महत्व अधिकाधिक बढ़ता जा रहा है। अधिकांश अर्थशास्त्... | अर्थशास्त्र | 4,305 | null | 92 |
== बाहरी कड़ियाँ == नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिग (पत्रिका) menuPK:461238~pagePK:64156143~piPK:64154155~theSitePK:461198,00.html Knowledge for Development Program, World Bank Colloquium IS-Driven Organizational Responsiveness in a Knowledge Economy Public Service Modernization Act - Canada MTI EnterWeb BOOK: The Knowledge-B... | अर्थशास्त्र | 4,306 | null | 63 |
=== विकिपुस्तकें === Legal and Regulatory Issues in the Information Economy | अर्थशास्त्र | 4,307 | null | 11 |
टकसाल (Mint) उस कारखाने को कहते हैं जहाँ देश की सरकार द्वारा, या उसके दिए अधिकार से, मुद्राओं का निर्माण होता है। भारत में टकसालें कलकत्ता, मुंबई, हैदराबाद और नोएडा, उ॰प्र॰ में हैं। | अर्थशास्त्र | 4,308 | null | 33 |
== इतिहास == मुद्राओं का सर्वप्रथम निर्माण संभवत: ईसा पूर्व आठवीं शताब्दी में लघु एशिया के लिडिया प्रदेश में हुआ। लगभग इसी काल में इनका चलन चीन में आरंभ हुआ और वहाँ से इनकी प्रथा जापान और कोरिया में फैली। निश्चित रूप से कहना कठिन है कि भारत में इनका निर्माण कब प्रारंभ हुआ, किंतु चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में अवश्य हो गया ... | अर्थशास्त्र | 4,309 | null | 635 |
प्राचीन काल में मुद्राएँ उत्कीर्णित ठप्पों के बीच रखकर और हथौड़े की चोट देकर बनाई जाती थीं। भारत के देशी राज्यों में यह रीति 19वीं शती तक प्रचलित थी। कहीं-कहीं सिक्के ढाले भी जाते थे। आधुनिक टकसालों में निर्माणकार्य मुख्यत: मशीनों द्वारा संपादित होता है। यह आठ पदों में पूरा किया जात है- (1) मुद्रानिर्माण के लिए धातु का... | अर्थशास्त्र | 4,310 | null | 474 |
== सिक्कों का आमापन (Assaying of Coins) == वह विधि है जिसके द्वारा यह जाँच की जाती है कि सिक्कों की मिश्रधातुओं में भिन्न भिन्न धातुओं का अनुपात निर्धारित सीमा के अनुसार है या नहीं। दो या अधिक धातुओं की मिश्रधातु से साधारणतया सिक्कों का निर्माण होता है। मिश्रधातु की अवयव धातुओं का अनुपात निश्चित रूप से निर्धारित रहता ह... | अर्थशास्त्र | 4,311 | null | 261 |
=== ताँबे के आगणन (estimation) === ताँबे के आगणन की दो विधियाँ हैं, आयतनमितीय विधि और भारमितीय विधि। | अर्थशास्त्र | 4,312 | null | 18 |
आयतनमितीय आगणन इसमें तापन द्वारा मिश्रधातु या सिक्के के तुले हुए भाग को तनु नाइट्रिक अम्ल में विलीन किया जाता है। अभिक्रिया की समाप्ति और सिक्के के टुकड़े के पूर्णत: विलीन होने पर विलयन को वाष्म्पीकरण द्वारा लगभग सुखा लेते हैं। काँसे का सिक्का होन पर, उत्मुक्त टिन आँक्साइड को छानकर, जल से भली प्रकार धो लेते हैं और विलय... | अर्थशास्त्र | 4,313 | null | 127 |
भारमितीय आगणन इसमें सिक्के या मिश्रधातु के तुले हुए परिमाण को तनु सल्फूरिक और नाइट्रिक अम्ल के मिश्रण में विलीन करते हैं। यदि आवश्यक हो तो मिश्रधातु के पूर्णत: विलीन होने पर विलयन को छान लेते है और उसका तनूकरण करके, उसके अंदर तुला हुआ प्लैटिनम गाँज़ ओर प्लैटिनम तार रखकर, बैटरी के ऋण तथा धन ध्रुवों से जोड़कर विलयन का वि... | अर्थशास्त्र | 4,314 | null | 123 |
=== टिन का आगणन === इसमें मिश्रधातु या सिक्के के तुले हुए परिमाण को तनु नाइट्रिक अम्ल में, आवश्यक हुआ तो तापन द्वारा, विलीन करते हैं। मिश्रधातु के पूर्णतया विलीन होने पर विलयन को गरम धातु पट्ट पर रखकर, कुछ सांद्र करके एवं पुन- तनु करके, फिर से उसे गरम धातु पट्ट पर रख देते हैं, ताकि उत्मुक्त टिन आँक्साइड नीचे बैठ जाए। ट... | अर्थशास्त्र | 4,315 | null | 128 |
=== निकल का आगणन === यदि सिक्के या मिश्रधातु में ताँबा और टिन हो, तो उसे अलग करने के बाद अवशिष्ट विलयन में उपस्थित निकल का भारमितीय आगणन मिम्नलिखित प्रकार से किया जाता हैं। (क) डाइ-मेथिल ग्लाइ ऑक्सिम लवण के रूप में, सिक्के या मिश्रधातु को उपयुक्त रीति से अम्ल में विलीन किया जाता है। विलयन की उचित मात्रा को तनु करके तनु... | अर्थशास्त्र | 4,316 | null | 272 |
=== जस्ते का आगणन === मिश्रधातु या सिक्के से ताँबा, निकल आदि अन्य धातुओं को अलग करने के बाद उसे जस्ते के लिए आमापित करते हैं। अन्य धातुओं को अलग करने के बाद विलयन की आवश्यक मात्रा को उदासीन करके उसमें इतना सल्फयूरिक अम्ल मिलाते हैं कि विलयन की अंतिम अम्लीय सांद्रता 0.1 नार्मल हो जाय। विलयन में हाइड्रोजन सल्फाइड गैस की ... | अर्थशास्त्र | 4,317 | null | 139 |
=== चाँदी का आगणन === यद्यपि अब भारतीय सिक्कों में चाँदी का प्रयोग पूर्णत: समाप्त हो गया है और सन् 1946 के पूर्व जिन सिक्कों में मुख्य धातु चाँदी होती थी उनमें चाँदी का स्थान शुद्ध निकल ने ले लिया है, फिर भी भारतीय टकसालों में प्रयुक्त चाँदी के आमापन की विधि का उल्लेख कर देना आवश्यक है। 1851 ई0 में कलकत्ते की टकसाल में... | अर्थशास्त्र | 4,318 | null | 434 |
== बाहरी कड़ियाँ == Coins of Quietus Robert Morris Ancient Minting Process | अर्थशास्त्र | 4,319 | null | 12 |
वित्तीय मामलों में तकनीकी विश्लेषण अथवा टेक्निकल एनालिसिस (अंग्रेज़ी: Technical analysis) विभिन्न प्रतिभूतियों का विश्लेषण करने की विधा है। यह बाज़ार के पिछले आँकड़ों के अध्ययन से कीमत के प्रभाव की दिशा के विश्लेषण और पूर्वानुमान करने की कार्यप्रणाली है जिसमें मुख्य कारक प्रतिभूति की कीमत और मात्रा हैं। सक्रिय प्रबंध क... | अर्थशास्त्र | 4,320 | null | 125 |
== बाहरी कड़ियाँ == तकनीकी विश्लेषण : कारोबार के संपूर्ण आयाम को जानने की विधा (हिन्दी बिजनेस स्टैण्डर्ड) | अर्थशास्त्र | 4,321 | null | 18 |
तुलनात्मक सुलाभ (comparative advantage) की संकल्पना के अनुसार, कुछ व्यक्ति, फर्म या राष्ट्र अन्य व्यक्तियों, फर्मों या राष्ट्रों की अपेक्षा कम मूल्य में उत्पादित कर सकते हैं। तुलनात्मक सुलाभ का सिद्धान्त (principle of comparative advantage) अन्तरराष्ट्रीय व्यापार की मूलभूत संकल्पना है जो कहती है कि राष्ट्र उन वस्तुओं क... | अर्थशास्त्र | 4,322 | null | 141 |
अर्थशास्त्र में, त्रिक्षेत्रकीय व्यवस्था आर्थिक गतिविधियों को तीन विभिन्न क्षेत्रकों में वर्गीकृत करता है: | अर्थशास्त्र | 4,323 | null | 14 |
== प्राथमिक आर्थिक क्षेत्रक == प्राथमिक क्षेत्रक में वे सभी गतिविधियाँ अन्तर्गत हैं जो प्राकृतिक संसाधनों के प्रत्यक्ष उपयोग द्वारा की जाती हैं। यह अन्य सभी उत्पादों का आधार है, जिन्हें क्रमशः निर्मित किया जाता है। इस क्षेत्रक में कृषि, वानिकी, पशुपालन, दुग्ध कृषि , मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, खनन और उत्खनन शामिल हैं। | अर्थशास्त्र | 4,324 | null | 54 |
== द्वितीय आर्थिक क्षेत्रक == द्वितीय क्षेत्रक के अन्तर्गत उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के द्वारा अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। चूँकि यह क्षेत्रक क्रमशः संवर्धित विभिन्न प्रकार के उद्योगों से जुड़ा है, इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहा जाता है। | अर्थशास्त्र | 4,325 | null | 41 |
== तृतीयक आर्थिक क्षेत्रक == तृतीयक क्षेत्रक में वे सभी गतिविधियाँ अंतर्गत हैं जो प्राथमिक और द्वितीय क्षेत्रकों के विकास में सहायक हैं। यह गतिविधियाँ स्वतः वस्तुओं को उत्पादित नहीं, बल्कि उत्पादन में मदद करते हैं। जैसे: उत्पादित वस्तुओं को विक्रेताओं को बेचने के लिए ट्रकों और ट्रेनों द्वारा परिवहन करने की आवश्यकता होत... | अर्थशास्त्र | 4,326 | null | 105 |
== सामाजिक विकास == फ़ुरास्तये के अनुसार जैसे-जैसे समाज तीन चरणों से विकसित होकर गुज़रता है, उस समाज में इन तीन भिन्न क्षेत्रों में जुटे हुई जनसंख्या का प्रतिशत बदलता है। | अर्थशास्त्र | 4,327 | null | 31 |
=== प्रथम चरण: पारम्परिक सभ्यताएँ === प्रथम विकास चरण में: | अर्थशास्त्र | 4,328 | null | 10 |
=== द्वितीय चरण: संक्रमण काल === द्वितीय विकास चरण में: | अर्थशास्त्र | 4,329 | null | 10 |
=== तृतीय चरण: तृतीय सभ्यताएँ === द्वितीय विकास चरण में: | अर्थशास्त्र | 4,330 | null | 10 |
अर्थशास्त्र के सन्दर्भ में त्वरक प्रभाव (accelerator effect) वह सिद्धान्त है जो आय में होने वाले परिवर्तनों के फलस्वरुप बाजारवादी अर्थव्यवस्था में होने वाले धनात्मक परिवर्तन (positive effect) को बताता है। बाजारवादी अर्थव्यवस्था की वृद्धि को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में हुई वृद्धि की मात्रा से नापा जाता है। त्वरक के सिद्ध... | अर्थशास्त्र | 4,331 | null | 213 |
== त्वरक सिद्धान्त की मान्यताएँ == त्वरक का सिद्धान्त कुछ मान्यताओं पर आधारित है जो इस प्रकार हैः 1. अर्थव्यवस्था की सभी फर्में अपनी पूर्ण क्षमता तक उत्पादन कर रही है। इसलिए उद्योगों में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का अभाव पाया जाता है। 2. त्वरक का सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि त्वरक या पूंजी-उत्पाद अनुपात स्थिर है।... | अर्थशास्त्र | 4,332 | null | 145 |
== त्वरक सिद्धान्त की आलोचनाएँ == 1. त्वरक सिद्धान्त की यह आलोचना की जाती है कि यह स्थिर पूंजी-उत्पाद अनुपात की मान्यता पर आधारित है। 2. त्वरक सिद्धान्त एक अव्यवहारिक धारणा है क्योंकि यह इस मान्यता पर आधारित है कि अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त क्षमता का अभाव है। 3. त्वरक के सिद्धान्त की यह धारणा भी व्यवहारिक नहीं है कि पूं... | अर्थशास्त्र | 4,333 | null | 123 |
दक्षता (Efficiency) का सामान्य अर्थ यह है कि किसी कार्य या उद्देश्य को पूरा करने में लगाया गया समय या श्रम या ऊर्जा कितनी अच्छी तरह काम में आती है। 'दक्षता' का विभिन्न क्षेत्रों एवं विषयों में उपयोग किया जाता है और विभिन्न सन्दर्भों में इसके अर्थ में भी काफी भिन्नता पायी जाती है। दक्षता एक मापने योग्य राशि है। ऊर्जा के... | अर्थशास्त्र | 4,334 | null | 77 |
उदाहरण कोई ट्रांसफॉर्मर १००० किलोवाट विद्युत ऊर्जा लेकर अपने आउटपुट में जुड़े लोड को ९८० किलोवाट विद्युत ऊर्जा देता है, तो इसकी दक्षता | अर्थशास्त्र | 4,335 | null | 23 |
दलाल (broker) उस व्यक्ति या संस्था को कहते हैं जो क्रेता एवं विक्रेता के बीच सौदा तय कराने में मदद करता है। जब यह सौदा पक्का हो जाता है तो इसके बदले में दलाल को दलाली (commission) मिलती है। दलाल भांति-भांति के होते हैं। गाय-भैंस की बिक्री से लेकर घर, जमीन, शेयर, कमोडिटी, हथियार, विवाह आदि सभी के दलाल होते हैं। एक दलाल ... | अर्थशास्त्र | 4,336 | null | 139 |
== परिभाषा == दलाल एक स्वतंत्र पार्टी है, जिनकी सेवाओं का उपयोग कुछ उद्योगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। दलाल की मुख्य ज़िम्मेदारी विक्रेताओं और खरीदारों को एक साथ लाना है और इस प्रकार एक दलाल खरीदार और विक्रेता के बीच तीसरा-व्यक्ति समन्वयक प्रदान करता है। एक उदाहरण रियल एस्टेट दलाल होगा जो संपत्ति की बिक्री को सु... | अर्थशास्त्र | 4,337 | null | 309 |
== शब्द-व्युपत्ति == "दलाल" शब्द, अनिश्चित उत्पत्ति का पुरानी फ्रांसीसी ब्रोसेर "छोटे व्यापारी", से व्युत्पन्न है, लेकिन संभवतः पुराने फ्रांसीसी ब्रोशर से "वाइन रिटेलर" का अर्थ है, जो क्रिया ब्रोशियर से आता है, या "टू ब्रोच (एक केग)"। | अर्थशास्त्र | 4,338 | null | 38 |
दास कैपिटल (जर्मन: Das Kapital; अर्थ - पूँजी) एक पुस्तक है जिसकी रचना कार्ल मार्क्स ने 1867 ई. में की थी। इसमें पूँजी एवं पूँजीवाद का विश्लेषण है तथा मजदूरवर्ग को शोषण से मुक्त करने के उपाय बताये गए हैं। इस पुस्तक के द्वारा एक सर्वथा नवीन विचारधारा प्रवाहित हुई जिसने संपूर्ण प्राचीन मान्यताओं को झकझोर कर हिला दिया। इस ... | अर्थशास्त्र | 4,339 | null | 75 |
== विषयवस्तुएँ == दास कैपिटल: राजनीतिक अर्थव्यवस्था (1867) की आलोचना, कार्ल मार्क्स का प्रस्ताव है कि पूंजीवाद के प्रेरित बल श्रम, जिसका काम अवैतनिक लाभ और अधिशेष मूल्य के परम स्रोत के शोषण करने में है। नियोक्ता लाभ (नई उत्पादन मूल्य) के अधिकार का दावा कर सकते हैं, क्योंकि वह या वह उत्पादक पूँजी (उत्पादन के साधन) संपत्... | अर्थशास्त्र | 4,340 | null | 147 |
== प्रकाशन == Kapital, प्रथम खंड (1867) मार्क्स जीवनकाल में प्रकाशित किया गया था, लेकिन मार्क्स की 1883 में मृत्यु हो गई। कैपिटल, खंड द्वितीय (1885) और कैपिटल, खंड III (1894), जिसका संपादन दोस्त एवं सहयोगी फ्रेडरिक एंगेल्स ने किया और मार्क्स के काम के रूप में प्रकाशित किया। कैपिटल पहले का अनुवाद प्रकाशन: राजनीतिक अर्थव... | अर्थशास्त्र | 4,341 | null | 105 |
== बाहरी कड़ियाँ == Capital, Volume I - 1906 का संस्करण गूगल से डाउनलोड करने योग्य | अर्थशास्त्र | 4,342 | null | 16 |
जब कोई व्यक्ति या संस्था कानूनी रूप से घोषणा करती है कि वह अपने द्वारा लिये गये ऋण को चुकाने में असमर्थ है तो इसे दिवाला (bankruptcy) कहते हैं तथा उस व्यक्ति/संस्था को दिवालिया (bankrupt) कहा जाता है। कुछ स्थितियों में स्वयं ऋणदाता (creditors) ही अपने ऋणी को दिवालिया घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया आरम्भ करते हैं। | अर्थशास्त्र | 4,343 | null | 57 |
दुश्चक्र एक ऐसा काल्पनिक या आभासी चक्र है जिसमें एक बार घुस जाने पर बाहर निकलना सम्भव नहीं होता। इस चक्र में एक तरह का धनात्मक पुनर्भरण काम करता है जो घटनाओं एवं उनके परिणामों को इस चक्र के अन्दर बने रहने के लिए बाध्य करता है। समाज में, अर्थतंत्र, मनोविज्ञान आदि में दुश्चक्र इतस्ततः देखने को मिलता है। | अर्थशास्त्र | 4,344 | null | 59 |
== अर्थशास्त्र में दुष्चक्र के कुछ उदाहरण == आर्थिक उन्नति को भी एक दुष्चक्र (virtuous circle) की तरह देखा जा सकता है। एक बार आर्थिक उन्नति शुरू हो गयी (जैसे किसी तकनीकी नवाचार के परिणामस्वरूप) तो यह और अधिक उन्नति को जन्म देती है। इसका कारण यह हो सकता है कि जब अधिक लोग नयी तकनीक से परिचित होजाते हैं तो हो सकता है की द... | अर्थशास्त्र | 4,345 | null | 181 |
== दुष्चक्र की विशेषताएँ == दुष्चक्र की अवस्था को कारण और प्रभाव के रूप में अलग करके देखना/समझना सम्भव नहीं होता। इसमें एक ही चीज कारण भी है और प्रभाव भी। एक अन्य विचार के अनुसार, दुष्चक्र अपने को बार बार दोहराने वाली वह प्रक्रिया है जिसका कोई आदि या अन्त न हो। दुष्चक्र के कुछ लक्षण/विशेषताएँ हैं- | अर्थशास्त्र | 4,346 | null | 58 |
किसी क्रिया का बार-बार दोहराया जाना किसी बुराई या दुखद स्थिति का बने रहना अन्त न होने वाले चक्र का बने रहना | अर्थशास्त्र | 4,347 | null | 22 |
== बाहरी कड़ियाँ == Schlesinger, L. and Heskett, J. (1991) Breaking the cycle of failure in services, Sloan Management Review, vol. 31, spring 1991, pp. 17 – 28. https://web.archive.org/web/20031224203444/http://william-king.www.drexel.edu/top/Prin/txt/gro/gro21b.html - An introduction to 20th century virtuous circle t... | अर्थशास्त्र | 4,348 | null | 151 |
नवशास्त्रीय अर्थशास्त्र की आपूर्ति और मांग के माध्यम से बाजार में माल, आउटपुट और आय वितरण के निर्धारण पर ध्यान केंद्रित कर अर्थशास्त्र के समाधान का एक सेट है। नवशास्त्रीय अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र के लिए एक दृष्टिकोण है कि एक व्यक्ति की समझदारी और उपयोगिता या लाभ को अधिकतम करने के लिए अपनी क्षमता को आपूर्ति और मांग से सं... | अर्थशास्त्र | 4,349 | null | 116 |
== नवशास्त्रीय अर्थशास्त्र के खिलाफ तर्क == अपनी स्थापना के बाद से, नवशास्त्रीय अर्थशास्त्र आधुनिक दिन अर्थशास्त्र पर प्राथमिक ले हो हो गया है। हालांकि यह अब अर्थशास्त्र के सबसे व्यापक रूप से सिखाया रूप है, सोचा था की इस स्कूल अभी भी अपने आलोचकों की है। सबसे अधिक आलोचना बताते हैं कि नवशास्त्रीय अर्थशास्त्र कई निराधार औ... | अर्थशास्त्र | 4,350 | null | 178 |
== नवशास्त्रीय विकास सिद्धांत == श्रम, पूंजी और प्रौद्योगिकी: नवशास्त्रीय विकास सिद्धांत एक आर्थिक सिद्धांत की रूपरेखा है कि कैसे एक स्थिर आर्थिक विकास दर तीन ड्राइविंग बलों की उचित मात्रा के साथ पूरा किया जा सकता है। सिद्धांत में कहा गया है कि श्रम और उत्पादन समारोह में राजधानी के अलग मात्रा के अनुसार, एक संतुलन राज्य... | अर्थशास्त्र | 4,351 | null | 98 |
गरीबी रेखा या निर्धनता रेखा (poverty line) आय के उस स्तर को कहते हैं जिससे कम आमदनी होने पे इंसान अपनी आर्थिक ज़रूरतों को पूरा करने में असमर्थ होता है। गरीबी रेखा अलग अलग देशों में अलग अलग होती है। उदहारण के लिये अमरीका में निर्धनता रेखा भारत में मान्य निर्धनता रेखा से काफी ऊपर है। औसत आय का आकलन विभिन्न तरीकों से किया... | अर्थशास्त्र | 4,352 | null | 494 |
== इन्हें भी देखें == राशन स्टांप मध्याह्न भोजन योजना | अर्थशास्त्र | 4,353 | null | 10 |
== बाहरी कड़ियाँ == अनर्थशास्त्र: 32 रुपये में गुजारा करने वाला गरीब नहीं! मोंटेक सिंह को उपहार गरीब की गड़बड़ गणना गरीबी की सही परिभाषा अमीरी रेखा की जरूरत (जनसत्ता) | अर्थशास्त्र | 4,354 | null | 30 |
निर्धनता सीमा एक पारिभाषिक-शब्द है जो एक व्यक्ति या परिवार की वार्षिक आय को परिभाषित करता है, जितने में कि वह व्यक्ति या परिवार जीवन के सभी आवश्यक संसाधनों का लाभ नहीं उठा सकता। निर्धनता सीमा आमतौर पर प्रति व्यक्ति के आधार पर मापी जाती है और विभिन्न धड़े, चाहे राष्ट्रीय हो या अन्तर्राष्ट्रीय, निर्धनता सीमा के लिए दरें ... | अर्थशास्त्र | 4,355 | null | 62 |
== निर्धनता के लिए सूचकांक == इस पर पर कोई आमराय नहीं है की निर्धनता सीमा के लिए क्या पैमाना माना जाए। वर्तमान पैमाना, विश्व बैंक का है, जिसने अपने १९९० के विश्व विकास प्रतिवेदन में १ अमेरिकी डॉलर (लगभग ४८ भारतीय रुपये) को निर्धनता सीमा का पैमाना माना है। लेकिन, विश्व बैंक की कार्यशील पत्र संख्या ४६२० के अनुसार, हाल ही... | अर्थशास्त्र | 4,356 | null | 96 |
== भारत में निर्धनता सीमा == अधिक विस्तार से पढ़े: भारतीय अर्थव्यवस्था | अर्थशास्त्र | 4,357 | null | 12 |
== बाहरी कडियाँ == भारत में निर्धनता (अंग्रेज़ी) देशवार निर्धनता सीमा से नीचे की जनसंख्या सौजन्य से: नेशन मास्टर (अंग्रेज़ी) | अर्थशास्त्र | 4,358 | null | 20 |
निवेश या विनियोग (investment) का सामान्य आशय ऐसे व्ययों से है जो उत्पादन क्षमता में वृद्धि लायें। या अपने पैसों को एक ऐसी जगह डालना जो आपको भविष्य में कुछ रिटर्न कमा कर दें सके, निवेश कहलाता है | यह तात्कालिक उपभोग व्यय या ऐसे व्ययों संबंधित नहीं है जो उत्पादन के दौरान समाप्त हो जाए। निवेश शब्द का कई मिलते जुलते अर्थों... | अर्थशास्त्र | 4,359 | null | 286 |
== प्रेरित निवेश और स्वचालित निवेश == निवेश को कई श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। लेकिन आर्थिक दृष्टिकोण से निवेश को दो भागों में बांटा जा सकता हैः | अर्थशास्त्र | 4,360 | null | 30 |
=== प्रेरित निवेश === प्रेरित निवेश वह निवेश है जो आय तथा लाभ की मात्रा पर निर्भर करता है। यह निवेश आय तथा लाभ में होने वाले परिवर्तनों से प्रेरणा प्राप्त करता है। आय तथा लाभ के बढ़ने की सम्भावना से यह बढ़ता है तथा इसमें होने वाली कमी से यह कम होता जाता है। प्रेरित निवेश लाभ या आय सापेक्ष होता है। प्रेरित निवेश प्रायः ... | अर्थशास्त्र | 4,361 | null | 72 |
=== स्वचालित निवेश === स्वचालित निवेश वह निवेश है जो आय तथा उत्पादन की मात्रा के स्थान पर बाहरी तत्वों पर निर्भर करता है। यह निवेश आय प्रेरित नहीं होता। इस प्रकार यह निवेश आय में होने वाले परिवर्तन के आधार पर नहीं किया जाता है। इससे अभिप्राय उस निवेश से है जो नई तकनीकों, नये आविष्कारों को लागू करने के लिये लगाया जाता ह... | अर्थशास्त्र | 4,362 | null | 136 |
== निवेश को प्रभावित करने वाले तत्व == एक अर्थव्यवस्था में निवेश को प्रभावित करने वाले प्रमुख तत्व इस प्रकार से हैः 1. तकनीकि विकास तथा नये आविष्कार 2. प्राकृतिक साधनों की खोज 3. सरकारी नीतियां 4. विदेशी व्यापार 5. राजनीतिक वातावरण 6. भविष्य में लाभ प्राप्ति की सम्भावनाएं 7. जनसंख्या वृद्धि की दर 8. क्षेत्रीय विस्तार 9... | अर्थशास्त्र | 4,363 | null | 90 |
== निवेश गुणक == अर्थशास्त्र में गुणक का प्रयोग सबसे पहले 1931 में आर. एफ. काहन ने अपने लेख 'The Relation for Home Investment to Unemployment' में किया था जिसे रोजगार गुणक कहा जाता है। केन्ज ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'The General Theory of Employment, Interest and Money' (1936) में निवेश गुणक का प्रतिपादन किया है। गुणक स... | अर्थशास्त्र | 4,364 | null | 197 |
=== निवेश गुणक की प्रक्रिया === गुणक की प्रक्रिया का विश्लेषण दो प्रकार से किया जा सकता हैः | अर्थशास्त्र | 4,365 | null | 18 |
==== तुलनात्मक स्थैतिक विश्लेषण ==== केन्ज की गुणक की धारणा तुलनात्मक स्थैतिक धारणा है जो बताती है कि निवेश में होने वाले परिवर्तन के कारण आय में अन्तिम रूप से कितना परिवर्तन होगा। तुलनात्मक स्थैतिक विश्लेषण में गुणक प्रक्रिया दो प्रकार होती हैः | अर्थशास्त्र | 4,366 | null | 43 |
(१) गुणक की अनुकूल प्रक्रिया (Forward Action of the Multiplier) गुणक की अनुकूल प्रक्रिया के अन्तर्गत निवेश में होने वाली वृद्धि के कारण आय में कई गुणा अधिक वृद्धि होती है। (२) गुणक की प्रतिकूल प्रक्रिया (Backard Action fo the Multiplier) गुणक की प्रतिकूल प्रक्रिया के अन्तर्गत निवेश में प्रारम्भिक कमी के कारण आय में कई ... | अर्थशास्त्र | 4,367 | null | 107 |
==== गत्यात्मक विश्लेषण ==== केन्ज की गुणक धारणा से यह तो पता चलता है कि निवेश में वृद्धि होने से आय में कितने गुणा वृद्धि होती है। लेकिन यह पता नहीं चलता कि यह वृद्धि कैसे और किस समय अन्तर से होती है। आधुनिक अर्थशास्त्री गुणक का गत्यात्मक रुप में अध्ययन करते हैं। निवेश में परिवर्तन से आय में परिवर्तन के बीच जो समय अन्... | अर्थशास्त्र | 4,368 | null | 110 |
=== गुणक के सिद्धान्त का महत्व === गुणक के सिद्धान्त का सैद्धान्तिक महत्व के साथ-साथ व्यावहारिक महत्व भी काफी अधिक है। रोजगार के सिद्धान्त में इस धारणा का महत्व निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता हैः 1. आय प्रजननः गुणक की धारणा से यह पता चलता है कि आय प्रजनन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और रोजगार, आय और उत्पादन मे... | अर्थशास्त्र | 4,369 | null | 220 |
=== गुणक की आलोचनाएं === गुणक के सिद्धान्त की मुख्य आलोचनाओं की व्याख्या इस प्रकार की जा सकती हैः 1. निवेश और आय में कोई स्पष्ट, पूर्वनिश्चित या यान्त्रिक सम्बन्ध नहीं है जैसा कि केन्ज की गुणक धारणा में माना गया है। 2. गुणक के सिद्धान्त की इसलिए भी आलोचना की है क्योंकि गलत है और निवेश की समानता के सम्बन्ध में केन्ज के ... | अर्थशास्त्र | 4,370 | null | 154 |
== निवेश के सिद्धान्त == निवेश के सिद्धान्तों के रुप में यहां पर पूंजी की सीमान्त उत्पादकता और निवेश के त्वरक सिद्धान्त का वर्णन भी आवश्यक हो जाता है। | अर्थशास्त्र | 4,371 | null | 29 |
==== पूंजी की सीमान्त उत्पादकता ==== इरविंग फिशर नें 1930 में पूंजी की सीमान्त उत्पादकता का प्रयोग ‘लागत पर प्राप्त प्रतिफल की दर’ के रुप में किया। पूंजी की सीमान्त उत्पादकता से अभिप्राय नए निवेश से प्राप्त होने वाले लाभ की अनुमानित दर से है। डिल्लर्ड के अनुसार, "किसी पूंजीगत पदार्थ की अतिरिक्त या सीमान्त इकाई के लगाने... | अर्थशास्त्र | 4,372 | null | 136 |
अनुमानित आय अनुमानित आय से अभिप्राय उस कुल आय से होता है जिसका किसी पूंजीगत पदार्थ का प्रयोग करने से उसके कार्य की कुल अवधि में प्राप्त होने का अनुमान होता है। | अर्थशास्त्र | 4,373 | null | 32 |
पूर्ति कीमत पूर्ति कीमत से अभिप्राय वर्तमान पूंजीगत पदार्थ की कीमत से नहीं है। इसका अभिप्राय यह है कि वर्तमान पूंजीगत पदार्थ अर्थात् मशीन के स्थान पर बिल्कुल उसी प्रकार की नई मशीन की लागत क्या होगी। किसी विशेष पूंजीगत पदार्थ की सीमान्त उत्पादकता से अभिप्राय उस अनुमानित आय की दर से है जो पूंजी पदार्थ की एक नई या अतिरिक्... | अर्थशास्त्र | 4,374 | null | 117 |
===== पूंजी की सीमान्त उत्पादकता को प्रभावित करने वाले तत्व ===== पूंजी की सीमान्त उत्पादकताको प्रभावित करने वाले तत्वों को मुख्य रुप से दो भागों में बाटा जा सकता हैः | अर्थशास्त्र | 4,375 | null | 30 |
अल्पकालीन तत्व पूंजी की सीमान्त उत्पादकताको प्रभावित करने वालेतत्वों में अल्पकालीन तत्व इस प्रकार हैः 1. बाजार का आकार 2. लागत तथा कीमत सम्बन्धी भावी सम्भावनाएं 3. उपभोग प्रवृति में परिवर्तन 4. उद्यमियों की मनोवैज्ञानिक अवस्था 5. आय में परिवर्तन 6. कर नीति में सुधार 7. पूंजी पदार्थों का वर्तमान भण्डार 8. तरल परिसम्पत्त... | अर्थशास्त्र | 4,376 | null | 83 |
दीर्घकालीन तत्व पूंजी की सीमान्त उत्पादकताको प्रभावित करने वाले तत्वों में दीर्घकालीन तत्व इस प्रकार हैः 1. जनसंख्या 2. सरकार की आर्थिक नीति 3. तकनीकी विकास 4. असामान्य परिस्थितियां 5. नये क्षेत्रों का विकास 6. पूंजी उपकरण की पूर्ति में परिवर्तन 7. मांग में दीर्घकालीन वृद्धि | अर्थशास्त्र | 4,377 | null | 46 |
===== पूंजी की सीमान्त उत्पादकता की आलोचनाएँ ===== पूंजी की सीमान्त उत्पादकता की धारणा की आलोचना निम्नलिखित आधारों पर की जा सकती हैः 1. केन्ज ने पूंजी की सीमान्त उत्पादकता का प्रयोग इतने विभिन्न अर्थों में किया है किपूंजी की सीमान्त उत्पादकताको एक अस्पष्ट और जटिल धारणा बना दिया है। 2. केन्ज के इस विचार की भी आलोचना की ... | अर्थशास्त्र | 4,378 | null | 151 |
=== त्वरक सिद्धान्त === साँचा:मुख्य:त्वरक प्रभाव (अर्थशास्त्र) त्वरक के सिद्धान्त का अर्थशास्त्र में सबसे पहले 1907 में अफ्तालियन ने प्रयोग किया। त्वरक सिद्धान्त वह सिद्धान्त है जो आय में होने वाले परिवर्तनों के फलस्वरुप शुद्ध निवेश या पूंजी में होने वाले परिवर्तन को बताता है अर्थात् त्वरक पूंजी में होने वाले परिवर्तन ... | अर्थशास्त्र | 4,379 | null | 90 |
== बाहरी कड़ियाँ == निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि पैसा प्लानर (वित्तीय नियोजन एवं निवेश की हिन्दी वेबसाइट) क्या है निवेश की गाडी के विभिन्न गियर? निवेश के विकल्पों के बारें में जाने | अर्थशास्त्र | 4,380 | null | 33 |
अर्थशास्त्र में, बाजार पारदर्शी होता है यदि बहुत से लोग इसके बारे में बहुत कुछ जानते हैं कि कौन से उत्पाद और सेवाएं या पूंजीगत संपत्ति उपलब्ध हैं, बाजार की गहराई (उपलब्ध मात्रा), कहां और क्या कीमत है। पारदर्शिता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसी मुक्त बाजार के कुशल होने के लिए आवश्यक सैद्धांतिक शर्तों में से एक है। हालाँकि... | अर्थशास्त्र | 4,381 | null | 288 |
== महत्वपूर्ण पारदर्शिता == लेखांकन में एक समृद्ध साहित्य है जो बारीकियों और सीमाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए बाजार पारदर्शिता के लिए एक महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य लेता है। उदाहरण के लिए, कुछ शोधकर्ता इसकी उपयोगिता पर सवाल उठाते हैं (जैसे एट्ज़ियोनी)। यह मात्रात्मक मॉडल या "प्रतिक्रियाशीलता" के प्रदर्शन से भी जुड़ता है। ... | अर्थशास्त्र | 4,382 | null | 238 |
== विदेशी मुद्रा बाजार में == ऐसे कुछ बाजार हैं जिन्हें विदेशी मुद्रा (एफएक्स) बाजार के रूप में अपने प्रतिभागियों के बीच गोपनीयता, ईमानदारी और विश्वास के स्तर की आवश्यकता होती है। यह व्यापारियों, निवेशकों और संस्थानों को दूर करने के लिए बड़ी बाधाएं पैदा करता है क्योंकि पारदर्शिता की कमी है, जिससे व्यापारिक भागीदारों के... | अर्थशास्त्र | 4,383 | null | 230 |
पूँजी (Capital) साधारणतया उस धनराशि को कहते हैं जिससे कोई व्यापार चलाया जाए। किंतु कंपनी अधिनियम के अंतर्गत इसका अभिप्राय अंशपूँजी से हैं; न कि उधार राशि से, जिसे कभी कभी उधार पूँजी भी कहते हैं। प्रत्येक कंपनी के लिए यह अनिवार्य है कि वह अपने सीमानियम में अंशपूँजी, जिसे रजिस्टर्ड, प्राधिकृत अथवा अंकित पूँजी कहते हैं, त... | अर्थशास्त्र | 4,384 | null | 486 |
== इन्हें भी देखें == पूँजीवाद अंश (शेयर) लाभांश (डिविडेण्ड) | अर्थशास्त्र | 4,385 | null | 10 |
शेयर, बॉण्ड, अचल सम्पत्ति आदि के विक्रय से प्राप्त लाभ को पूँजीगत लाभ (capital gain) कहते हैं। पूंजीगत लाभ वह आय है जो पूँजीगत निवेश के विक्रय से व्युत्पन्न होती है। पूंजीगत निवेश घर, कृषि भूमि, खेत, पारिवारिक व्यवसाय, कलात्मक कार्य इत्यादि हो सकता है। | अर्थशास्त्र | 4,386 | null | 45 |
== पूंजीगत लाभ कर == पूंजीगत लाभ उस राशि को कहा जाता है जो परिसंपत्तियों के विक्रय से प्राप्त राशि में से परिसंपत्ति को क्रय करने के लिए व्यय की गई राशि को घटाने से प्राप्त होती है। पूंजीगत लाभ में वह राशि भी शामिल की जाती है जो पूंजीगत परिसंपत्तियों के ‘‘हस्तांतरण’’ (इसमें विक्रय और विनिमय भी शामिल है) से प्राप्त लाभ ... | अर्थशास्त्र | 4,387 | null | 258 |
== अल्पकालीन और दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ == हस्तांतरण से पूर्व 36 महीनों से कम (किसी कंपनी के अंश भाग, या भारत के किसी मान्यताप्राप्त शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी की अन्य प्रतिभूतियों या साझा कोषों के यूनिट्स के लिए 12 महीने) समय के लिए बनाये रखी गई पूंजीगत परिसंपत्ति के हस्तांतरण से अर्जित लाभ को अल्पकालीन कहा जाता है।... | अर्थशास्त्र | 4,388 | null | 128 |
पूँजी बाजार (कैपिटल मार्केट) , प्रतिभूतियों का बाजार है, जहाँ कंपनियाँ और सरकार लंबे समय के लिए धन जुटा सकते हैं। यह वह बाजार है जहाँ पैसा एक साल या इससे अधिक समय के लिए दिया जाता है। पूँजी बाजार में शेयर बाजार और बांड बाजार भी शामिल है। जब भी किसी कंपनी को अपने व्यापार को बढ़ाने के लिये पूँजी की जरुरत होती है तो वह पू... | अर्थशास्त्र | 4,389 | null | 77 |
== इन्हें भी देखें == स्टॉक बाजार मुद्रा बाज़ार वस्तु बाजार हाट वस्तु विनिमय | अर्थशास्त्र | 4,390 | null | 14 |
== बाहरी कड़ियाँ == पूंजी बाजार (भारत का व्यापार पोर्टल) | अर्थशास्त्र | 4,391 | null | 10 |
इसमें सरकार द्वारा बाजार से लिए गए ऋण, भारतीय रिजर्व बैंक से ली गई उधारी और विनिवेश के जरिए प्राप्त आमदनी को शामिल किया जाता है। | अर्थशास्त्र | 4,392 | null | 26 |
सरकार द्वारा अधिग्रहीत विभिन्न संपत्तियों पर हुए खर्च को पूंजीगत व्यय कहा जाता है। | अर्थशास्त्र | 4,393 | null | 14 |
पूँजीवाद सामान्यत: उस आर्थिक प्रणाली या तंत्र को कहते हैं जिसमें उत्पादन के साधन पर निजी स्वामित्व होता है। इसे कभी कभी "व्यक्तिगत स्वामित्व" के पर्यायवाची के तौर पर भी प्रयुक्त किया जाता है यद्यपि यहाँ "व्यक्तिगत" का अर्थ किसी एक व्यक्ति से भी हो सकता है और व्यक्तियों के समूह से भी। मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि सरकार... | अर्थशास्त्र | 4,394 | null | 120 |
== इतिहास == पूँजीवाद का इतिहास मनुष्य के इतिहास जितना ही पुराना है; प्राचीन मिस्र, कार्थेज, रोम, बेबिलोनिया और यूनान में व्यक्तिगत संपत्ति और एकाधिकार पर आधारित समाजों का इतिहास मिलता है। दासप्रथा जैसी निजी स्वामित्व की चरम स्थिति रही है। मध्यकाल में यूरोप में इसका अधिक विकास हुआ; 21वीं शताब्दी के पश्चात पूँजीवाद ने स... | अर्थशास्त्र | 4,395 | null | 377 |
== पूँजीवाद का प्रभाव एवं इसकी प्रतिक्रिया == औद्योगिक क्रांति के आरंभिक दिनों में इंग्लैंड में ऐडम स्मिथ का अहस्तक्षेप का सिद्धांत (Laissez-Faire) वैयक्तिक स्वतंत्रता और अनियंत्रित आर्थिक व्यवस्था का आधार बन गया। किंतु इस औद्योगिक परिवर्तन से उत्पन्न परिस्थितियों ने सरकार को उद्योगपतियों और श्रमिकों की समस्याओं में हस... | अर्थशास्त्र | 4,396 | null | 257 |
प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) [Note: Capita लैटिन भाषा से लिया गया शब्द है, जिसका अर्थ per head या for each head होता है] किसी देश, राज्य, नगर, या अन्य क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की औसत आय होती है। इसका अनुमान उस क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों की आय के जोड़ को क्षेत्र की कुल जनसंख्या से विभाजित कर के लगाय... | अर्थशास्त्र | 4,397 | null | 138 |
कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ वार्षिक रूप से विश्वभर के देशों की प्रति व्यक्ति आय की सूचियाँ बनाती हैं। यह सूचियाँ दो आधारों पर बनाई जाती हैं: | अर्थशास्त्र | 4,398 | null | 25 |
अभारित सूची (Nominal) - यह सरल सूचियाँ सीधे कमाई जाने वाली मुद्रा में आय को लेकर अभारित रूप से (यानि बिना किसी फेर-बदल के) बनाई जाती है और अधिकतर इन्हीं सूचियों का प्रयोग होता है। क्रय-शक्ति समता पर आधारित सूची (PPP) - यह सूचिया क्रय-शक्ति समता के आधार पर बनती हैं और इनसे यह अंदाज़ा लगाया जाता है कि किसी क्षेत्र में लो... | अर्थशास्त्र | 4,399 | null | 82 |
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