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== स्वतंत्रता के बाद समाजवाद == 1947 में भारत की आजादी के बाद प्रधान मंत्री नेहरू और इंदिरा गांधी के तहत भारत सरकार ने भूमि सुधार और प्रमुख उद्योगों और बैंकिंग क्षेत्र के राष्ट्रीयकरण पर नजर डाली। स्वतंत्र रूप से, कार्यकर्ता विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण ने सर्वोदय आंदोलन के तहत शांतिपूर्ण भूमि पुनर्वितरण के लिए काम क...
अर्थशास्त्र
4,500
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278
वर्तमान में, मार्क्सवाद विशेष रूप से केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में प्रचलित है। भारतीय राजनीति में दो कम्युनिस्ट पार्टियां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख हैं। आरएसपी और फॉरवर्ड ब्लॉक कुछ राज्यों में उनका समर्थन करते हैं। ये चार पार्टियां वाम डेमोक्रेटिक फ्रंट का गठन करती ह...
अर्थशास्त्र
4,501
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153
== इन्हें भी देखें == समाजवादी पार्टी राममनोहर लोहिया केरल में साम्यवाद भारत में राजनीतिक दलों की सूची मार्क्सवादी इतिहासलेखन भारत की राजनीति भारत में धर्मनिरपेक्षता भारत में साम्यवाद
अर्थशास्त्र
4,502
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29
== और पढ़ें == एमवीएस कोटेश्वर राव। कम्युनिस्ट पार्टियां और संयुक्त मोर्चा - केरल और पश्चिम बंगाल में अनुभव। हैदराबाद: प्रजसक्ति बुक हाउस, 2003। गोयल, एसआर (1955)। नेताजी और सीपीआई। कलकत्ता: सोसाइटी फॉर डिफेंस ऑफ डिफेंस इन एशिया। गोयल, एसआर (1953)। सीपीआई नागरिक युद्ध के लिए तैयार है: एक गुप्त दस्तावेज का विश्लेषण। कलक...
अर्थशास्त्र
4,503
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140
== बाहरी कड़ियाँ == इतिहास पर पुनर्दृष्टि Where We Stand, by Mazdoor Mukti Socialism Kills: The Human Cost of Delayed Economic Reform in India
अर्थशास्त्र
4,504
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24
भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व में सातवें स्थान पर है, जनसंख्या में भारत का स्थान दूसरा था, किंतु वर्ष 2023 के मध्य से प्रथम स्थान पर है और केवल 2.4% क्षेत्रफल के साथ भारत विश्व की जनसंख्या के 17.76% भाग को शरण प्रदान करता है। 1991 से भारत में बहुत तेज...
अर्थशास्त्र
4,505
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163
== पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था == 2017 में भारतीय अर्थव्यवस्था मानक मूल्यों (सांकेतिक) के आधार पर विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अप्रैल २०१४ में जारी रिपोर्ट में वर्ष २०११ के विश्लेषण में विश्व बैंक ने "क्रयशक्ति समानता" (परचेज़िंग पावर पैरिटी) के आधार पर भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था घोष...
अर्थशास्त्र
4,506
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161
आर्थिक इतिहासकार एंगस मैडिसन के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था पहली शताब्दी से दसवीं शताब्दी तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। पहली सदी में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) दुनिया की कुल जीडीपी का 32.9% था; 1000 में यह 28.9% था; और 1700 में 24.4% लेकिन उस दौरान आर्थिक प्रगति जनसंख्या वृद्धि से जुड़ी हुई थी क्योंकि वे...
अर्थशास्त्र
4,507
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331
2013-14 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद भारतीय रूपयों में - 113550.73 अरब रुपये था।
अर्थशास्त्र
4,508
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15
=== विभिन्न क्षेत्रों का योगदान === किसी समय में भारत कृषि प्रधान देश था किंतु नए आँकड़े बताते हैं कि यह देश अपनी विकास की यात्रा में काफी आगे निकल गया है तथा विकसित देशों के इतिहास को दोहराते हुए द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों का योगदान जीडीपी में बढ़ोतरी का रुझान दर्शा रहा है।
अर्थशास्त्र
4,509
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54
भारत बहुत से उत्पादों के सबसे बड़े उत्पादको में से है। इनमें प्राथमिक और विनिर्मित दोनों ही आते हैं। भारत दूध का सबसे बडा उत्पादक है ओर गेंहू, चावल, चाय,चीनी, और मसालों के उत्पादन में अग्रणियों मे से एक है यह लौह अयस्क, वाक्साईट, कोयला और टाईटेनियम के समृद्ध भंडार हैं। यहाँ प्रतिभाशाली जनशक्ति का सबसे बडा पूल है। लगभग ...
अर्थशास्त्र
4,510
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246
== विदेशी मुद्रा भंडार == जून २०२१ तक भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार 605.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो गया। अमेरिकी डॉलर की कीमत 75 रुपए के स्तर पर जा पहुँची
अर्थशास्त्र
4,511
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30
== अंतर्राष्ट्रीय व्यापार == वैश्विक निर्यातों और आयातों में भारत का हिस्सा वर्ष 2000 में क्रमशः 0.7 प्रतिशत और 0.8 प्रतिशत से बढ़ता हुआ वर्ष 2013 में क्रमशः 1.7 प्रतिशत और 2.5 प्रतिशत हो गया। भारत के कुल वस्तु व्यापार में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है जिसका सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सा 2000-01 के 21.8 प्रतिशत से बढ़कर 2013...
अर्थशास्त्र
4,512
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226
=== चालू खाता घाटा === 2012-13 में कैड में भारी वृद्धि हुई और यह 2011-12 के 78.2 बिलियन अमरीकी डॉलर से कहीं अधिक 88.2 बिलियन अमरीकी डॉलर (स.घ.उ. का 4.7 प्रतिशत) के रिकार्ड स्तर पर जा पहुंचा। सरकार द्वारा शीघ्रतापूर्वक किए गए कई उपायों जैसे सोने के आयात पर प्रतिबंध आदि के परिणामस्वरूप, व्यापार घाटा 2012-13 के 10.5 प्रति...
अर्थशास्त्र
4,513
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71
== विदेशी ऋण == भारत का विदेशी ऋण स्टॉक मार्चांत 2012 के 360.8 बिलियन अमरीकी डॉलर के मुकाबले मार्चांत 2013 में 404.9 बिलियन अमरीकी डॉलर था। दिसम्बर 2013 के अंत तक यह बढ़कर 426.0 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया। चूंकि एक बिलियन डॉलर = एक अरब डॉलर इसलिए 426 बिलियन डॉलर = 426अरब डॉलर अब चूंकि एक डाॅलर= 60 रुपये इसलिए 426 अरब डॉ...
अर्थशास्त्र
4,514
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85
== रोजगार == भारत में रोजगार देने में विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिशत योगदान :
अर्थशास्त्र
4,515
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14
== कर प्रणाली == भारत के केन्द्र सरकार द्वारा अर्जित आय : आँकड़े करोड़ रुपयों में नोट: १ करोड़ = १० मिलियन
अर्थशास्त्र
4,516
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22
== राजसहायता (सब्सिडी) == भारत में राजसहायता प्राप्त प्रमुख मदों की सूची तथा 2013-14 के आँकड़े व 2014-15 के बजट प्रावधान इस प्रकार हैं:
अर्थशास्त्र
4,517
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24
2008-09 के बाद से केन्द्रीय राजस्व घाटे में बढ़त कराने वाले प्रधान कारणों में से एक कारण सब्सिडियों का उत्तरोत्तर बढ़ते जाना रहा है। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के अनंतिम वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, 2013-14 में प्रधान सब्सिडियों का योग 2,47,596 करोड़ रुपए था। सब्सिडियों में तीव्र वृद्धि हुई है जो 2007-08 में स.घ.उ. के 1.4...
अर्थशास्त्र
4,518
null
111
== लॉकडाउन अथर्व्यवस्था प्रभाव == अप्रैल-दिसम्बर 2021 तक की अवधि में भारत से वस्तुओं एवं सेवाओं के हुए निर्यात के वास्तविक आंकड़ों को देखते हुए अब यह कहा जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत से वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात 65,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के पार हो जाने की प्रबल सम्भावना है। जिस गति से वित्तीय वर्ष 20...
अर्थशास्त्र
4,519
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111
== भारतीय अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित आंकड़े == नीचे दी गयी सारणी में १९८० से लेकर २०२३ तक के भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख आर्थिक संसूचक (इंडिकेटर्स) को दर्शाया गया है। जहाँ मुद्रास्फीति ५% से कम है उसे हरे रंग में दर्शाया गया है। वार्षिक बेरोजगारी की दर विश्व बैंक के आकड़ों से लिया गया है, यद्यपि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा ...
अर्थशास्त्र
4,520
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64
== इन्हें भी देखें == भारत का आर्थिक इतिहास भारतीय अर्थव्यवस्था की समयरेखा ब्रिटिश काल में भारत की अर्थव्यवस्था भारत का आर्थिक विकास भारत का विदेश व्यापार दस खरब डॉलर क्लब
अर्थशास्त्र
4,521
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31
== बाहरी कड़ियाँ == भारत के वित्त मंत्रालय का आधिकारिक जालस्थल ब्रिटिश शासन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (स्टेट ट्रेडिंग कारपोरेशन) भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बना Archived 2020-05-22 at the वेबैक मशीन (फरवरी २०२०) आईएचएस मार्किट का दावा: भारत 2030 तक एशिया की दूसरी ...
अर्थशास्त्र
4,522
null
167
भारतीय म्यूचुअल फंड भारत का म्यूचुअल फंड उद्योग है। इसकी शुरूआत भारत में 1964 में भारत सरकार द्वारा यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया की स्थापना से हुई। यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया अभी भी भारत का एक अग्रिणी म्यूच्युअल फंड कंपनी है। इसका नियंत्रण एक खास कानून, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया एक्ट, 1963 के द्वारा होता है। इस उद्योग को 1987 में स...
अर्थशास्त्र
4,523
null
140
सभी विकसित देशो की तरह भारत मे भी म्यूच्युअल फंड में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। इसके कई कारण है। म्यूच्युअल फंड निवेशकों को शेयर बाज़ार में निवेश का एक सस्ता और आसान तरीका प्रदान करते है, म्यूच्युअल फंड के माध्यम से आम निवेशकों को विविधीकरण (diversification) और वित्तीय नियंत्रण (money management) का फायदा आसानी से मिल ज...
अर्थशास्त्र
4,524
null
98
== उद्योग के दौर == भारतीय म्यूच्युअल फंड उद्योग तीन दौरो से गुज़र चुका है।
अर्थशास्त्र
4,525
null
15
=== 1964 से 1987 === पहला दौर था 1964 से 1987 का जब यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया ही बाज़ार में अकेला खिलाडी था। दूसरा, 1988 के अंत तक इसके पास रु 6,700 करोड की सम्पत्ति थी।
अर्थशास्त्र
4,526
null
36
=== 1993 से अबतक === तीसरे दौऱ की शुरुआत 1993 में निजी और विदेशी बैंकोँ के आने से हुई। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India - SEBI) ने 1993 में भारत में पहली बार Mutual Fund and Asset Management Companies के लिये ढाचा परिभाषित किया। कई निजी म्यूच्युअल फंड की स्थापना 1993 और 1994 में ...
अर्थशास्त्र
4,527
null
120
== बहारी कडियाँ == भारत में पंजीकृत म्यूचुअल फ़ंड कंपनी (SEBI) Best Mutual Funds To Invest In 2025 : निवेश के लिये सबसे बेस्ट म्युचुअल फंड
अर्थशास्त्र
4,528
null
26
किसी व्यक्ति द्वारा कुछ काम करने के बदले, काम कराने वाला व्यक्ति उसे जो कुछ (रुपया-पैसा, अनाज, या श्रम pavva) देता है उसे मजदूरी या मजूरी कहते हैं। मजदूरी की गणना प्रति दिन, प्रति घण्टा, या प्रति काम के अनुसार की जाती है (जैसा पहले से तय होता है।)।
अर्थशास्त्र
4,529
null
49
== परिभाषा == (१) श्रम की सेवा के लिए दिया गया मूल्य (कीमत) मजदूरी है। (मार्शल) (२) श्रम का वेतन मजदूरी है। (सेलिगमैन)
अर्थशास्त्र
4,530
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23
== प्रकार == नकद मजदूरी-नकद मजदूरी वह मजदूरी होती है जो श्रमिक को एक निश्चित समय में कार्य करने के लिए दी जाती है।एक मजदूर नकद मजदूरी इसलिए स्वीकार करता है कि वह उसके माद्यम से अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकता है। असल मजदूरी (वास्तविक मजदूरी (नकद + कुछ सुविधाएँ)-एक मजदूर अपनी नकद मजदूरी में जो वस्तुए एवं सेवाय...
अर्थशास्त्र
4,531
null
96
मध्यम आय जाल या मिडिल इंकम ट्रैप किसी देश के आर्थिक विकास की ऐसी स्थिति है, जिसमें वह देश जो एक निश्चित आय प्राप्त कर लेता है (अपने तुलनात्मक लाभ के कारण), किंतु उससे निकल नहीं पाता है। अन्य शब्दों में कहें तो ऐसे देश की प्रति व्यक्ति आय एक मध्य स्तर पर फंस जाती है, जहाँ वह न तो बहुत ग़रीब है, और न ही उसके भविष्य में स...
अर्थशास्त्र
4,532
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113
== गतिकी == ऐसा माना जाता है मध्यम आय वाले देशों ने बढ़ती मजदूरी (पगार) के कारण विनिर्मित वस्तुओं के निर्यात में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त खो दी है। अब जो देश इनसे ज़्यादा ग़रीब हैं, उत्पाद बनाना वहाँ तुलनात्मक रूप से सस्ता पड़ेगा। साथ ही साथ ये देश उच्च कोटि के उत्पाद बनाने में विकसित देशों से मुक़ाबला करने में असमर्...
अर्थशास्त्र
4,533
null
162
== जाल से बचाव == मध्य आय के जाल से बचने के लिए नई प्रक्रियाओं को शुरू करने और निर्यात वृद्धि को बनाए रखने की आवश्यकता है, जिसलिए निर्यात के लिए नए बाजार ढूँढना ज़रूरी है। घरेलू मांग को पूरा करना भी महत्वपूर्ण है — एक विस्तृत मध्यम वर्ग अपनी बढ़ती क्रय शक्ति का उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले नवीन उत्पादों को खरीदने और विकास ...
अर्थशास्त्र
4,534
null
160
== यह सभी देखें == दोहरे क्षेत्र का मॉडल मानव पूंजी
अर्थशास्त्र
4,535
null
11
== आगे की पढाई == एशिया 2050: एशियाई सदी को साकार करना इंडोनेशिया जोखिम मध्य आय जाल में गिर रहा है फिलीपींस मिडिल इनकम ट्रैप का सामना करता है रूस के 'मिडिल इनकम ट्रैप' में फंस गए हैं लैटिन अमेरिका की मिडिल इनकम ट्रैप चीन मध्य आय के जाल से कैसे बच सकता है “मिडिल-इनकम ट्रैप। मिश्रित-आय मिथक, " द इकोनॉमिस्ट 17 अक्टूबर - 1...
अर्थशास्त्र
4,536
null
94
इतिहास में महामंदी या भीषण मन्दी (द ग्रेट डिप्रेशन) (1928-1934) के नाम से जानी जाने वाली यह घटना एक विश्वव्यापी आर्थिक मंदी थी। यह सन १९२९ के लगभग शुरू हुई और १९३९-४० तक जारी रही। विश्व के आधुनिक इतिहास में यह सबसे बड़ी और सर्वाधिक महत्व की मंदी थी। इस घटना ने पूरी दुनिया में ऐसा कहर मचाया था कि उससे उबरने में कई साल ल...
अर्थशास्त्र
4,537
null
124
== महामंदी की समयावली == आरम्भ 29 अक्टूबर 1929 को अमेरिका में शेयर बाजार में गिरावट से।
अर्थशास्त्र
4,538
null
17
=== प्रस्थान === 1930 से 1933 के बीच यह दुनिया के सभी प्रमुख देशों में फैल गई।
अर्थशास्त्र
4,539
null
17
=== अंत === 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू होने के साथ ही यह काबू में आने लगी।
अर्थशास्त्र
4,540
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17
== विकास पर प्रभाव == 1930 के दशक की महामंदी को दुनिया की अब तक की सर्वाधिक विध्वंसक आर्थिक त्रासदी माना जाता है जिसने लाखों लोगों की जिंदगी नरक बना दी। इसकी शुरुआत 29 अक्टूबर 1929 को अमेरिका में शेयर मार्केट के गिरने से हुई थी। इस दिन मंगलवार था। इसलिए इसे काला मंगलवार (ब्लैक टच्यूसडे) भी कहा जाता है। इसके बाद अगले एक...
अर्थशास्त्र
4,541
null
133
== कारण == अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट का इतना मनोवैज्ञानिक असर पड़ा कि वहां के लोगों ने अपने खर्चो में दस फीसदी तक की कमी कर दी जिससे मांग प्रभावित हुई। लोगों ने बैंकों के कर्ज पटाने बंद कर दिए जिससे बैंकिंग ढांचा चरमरा गया। कर्ज मिलने बंद हो गए, लोगों ने बैंकों में जमा पैसा निकालना शुरू कर दिया। इससे कई बैंक दिवालि...
अर्थशास्त्र
4,542
null
121
== महामंदी का महाप्रभाव == 1 करोड़ 30 लाख लोग बेरोजगार हो गए। 1929 से 1932 के दौरान औद्योगिक उत्पादन की दर में 45 फीसदी की गिरावट आई। 1929 से 1932 के दौरान आवास निर्माण की दर में 80 फीसदी तक की कमी हो गई। इस दौरान 5 हजार से भी अधिक बैंक बंद हो गए।
अर्थशास्त्र
4,543
null
56
=== साम्यवाद के प्रति बढ़ा रुझान === साम्यवादी राष्ट्र होने के नाते सोवियत संघ ने खुद को पूंजीवादी व्यवस्था से काटकर रखा था। पूंजीवादी देश भी उसके साथ संबंध नहीं रखना चाहते थे। लेकिन इससे सोवियत संघ को फायदा ही हुआ और वह उस महामंदी से बच निकला जिसने पूंजीवादी देशों की कमर तोड़कर रख दी थी। इस दौरान सोवियत संघ में औद्योग...
अर्थशास्त्र
4,544
null
99
=== फासीवाद को बढ़ावा === कई विशेषज्ञों का मानना है कि फासीवाद को बढ़ावा देने में इस महामंदी का भी हाथ रहा। फासीवादी नेताओं ने संबंधित देशों में इस बात का प्रचार शुरू कर दिया कि लोगों की खराब स्थिति के लिए उनके पूंजीवादी नेता ही जिम्मेदार है जिनसे फासीवाद ही बचा सकता है। जर्मनी में हिटलर ने इसी महामंदी के बहाने अपनी पक...
अर्थशास्त्र
4,545
null
97
=== शस्त्र अर्थव्यवस्था का उदय === इस महामंदी का सबसे बड़ा नतीजा यह हुआ कि अमेरिका जैसे देशों को अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए एक बड़ा फंडा हाथ लग गया। अमेरिका सहित विभिन्न देशों में सैन्य प्रसार-प्रचार से न केवल नौकरियों के द्वार खुले, बल्कि हथियारों के उत्पादन से अर्थव्यवस्थाओं में भी जान आ गई। इससे 1930 के दशक...
अर्थशास्त्र
4,546
null
94
=== पूंजीवाद मजबूत हुआ === महामंदी के दौर में पूंजीवाद से मोहभ्रम की स्थिति को समझते हुए अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पश्चिमी देशों को मजबूत बनाने की योजना क्रियान्वित की। ‘मार्शल प्लान’ नामक इस योजना का कागजों पर उद्देश्य तो विश्व युद्ध से पीड़ित देशों के पुनर्निर्माण में मदद करना था, लेकिन असली मकसद साम्यवाद ...
अर्थशास्त्र
4,547
null
90
== आर्थिक संकट का विश्व पर प्रभाव == जर्मनी पर प्रभाव आर्थिक संकट के परिणामस्वरूप जर्मनी में बेरोजगारी अत्यधिक बढ़ी। 1932 ई. तक 60 लाख लोग बेरोजगार हो गये। इससे जर्मनी में बाह्य गणतंत्र की स्थिति दुर्बल हुईं हिटलर इसका फायदा उठाकर सत्ता में आ गया। इस प्रकार आर्थिक मंदी में जर्मनी ने नाजीवाद का शासन स्थापित किया।
अर्थशास्त्र
4,548
null
58
ब्रिटेन पर प्रभाव 1931 ई. में आर्थिक मंदी के कारण ब्रिटेन को स्वर्णमान का परित्याग करना पड़ा। सरकार ने सोने का निर्यात बंद कर दिया। सरकार ने आर्थिक स्थिरीकरण की नीति अपनाई। इससे आर्थिक मंदी से उबरने में ब्रिटेन को मदद मिली। व्यापार में संरक्षण की नीति अपनाने से भी व्यापार संतुलन ब्रिटेन के पक्ष में हो गया। ब्रिटिश सरका...
अर्थशास्त्र
4,549
null
78
फ्रांस पर प्रभाव जर्मनी से अत्यधिक क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के कारण फ्रांस की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ थी, अतः आर्थिक मंदी का उस पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ा। फ्रांस की मुद्रा फ्रेंक अपनी साख बचाये रखने में सफल रही।
अर्थशास्त्र
4,550
null
38
रूस पर प्रभाव रूस में स्टालिन की आर्थिक नीतियों एवं पंचवर्षीय योजनाओं से आर्थिक स्थिति सुदृढ़ थी। अतः वह भी आर्थिक मंदी से प्रभावित नहीं हुआ। इससे विश्व के समक्ष साम्यवादी व्यवस्था की मजबूती एवं पूँजीवादी व्यवस्था का खोखलापन उजागर हुआ।
अर्थशास्त्र
4,551
null
41
अमेरिका पर प्रभाव अमेरिका में बेरोजगारी 15 लाख से बढ़कर 1 करोड़ 30 लाख हो गई। यूरोप में आर्थिक मंदी के कारण अमेरिका का यूरोपीय ऋण डूबने की स्थिति में आ गया। 1932 ई. के चुनाव में आर्थिक संकट के कारण रिपब्लिक पार्टी का हूवर पराजित हुआ। डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार रूसवेल्ट ने आर्थिक सुधार कार्यक्रम की घोषणा के बल पर ह...
अर्थशास्त्र
4,552
null
64
आर्थिक मंदी से उबरने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने न्यू डील की घोषणा की। न्यू डील के उद्देश्यों का सार उन्होंने इन शब्दों में बताया,
अर्थशास्त्र
4,553
null
25
हम अपनी अर्थव्यवस्था द्वारा कृषि और उद्योगों में संतुलन लाना चाहते हैं। हम मजदूरी करने वालों, रोजगार देने वालों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन कायम करना चाहते हैं। हमारा यह भी उद्देश्य है कि हमारे आंतरिक बाजार समृद्ध और विशाल बने रहे और अन्य देशों के साथ हमारा व्यापार बढ़े। रूजवेल्ट की न्यू डील से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में...
अर्थशास्त्र
4,554
null
104
== महामंदी पर पुस्तकें == महामंदी पर कई किताबें लिखी गईं। इनमें सबसे प्रसिद्ध हुई जॉन स्टीनबेक लिखित ‘द ग्रेप्स ऑफ राथ’ जो 1939 में प्रकाशित हुई थी। इसे साहित्य का नोबेल पुरस्कार भी मिला। उसी दौर में आईं पुस्तकें द ग्रेट डिप्रेशन (एलॉन बर्शेडर), ऑफ माइस एंड मैन (जॉन स्टीनबेक), टु किल ए मॉकिंगबर्ड (हार्पर ली) भी महामंदी...
अर्थशास्त्र
4,555
null
98
== फिल्में == हार्ड टाइम्स गोल्ड डिगर्स ऑफ 1933 इट इज ए वंडरफुल लाइफ क्रेडल विल रॉक ओ ब्रदर, व्हेअर आर यू? द पर्पल रोज ऑफ काइरो
अर्थशास्त्र
4,556
null
27
== इन्हें भी देखें == व्यापार चक्र (Business cycle) मंदी (डिप्रेसन)
अर्थशास्त्र
4,557
null
11
== बाहरी कड़ियाँ == Great Depressions of the Twentieth Century, edited by T. J. Kehoe and E. C. Prescott Theories of the Great Depression, R. L. Norman, Jr. America in the 1930s. Very large multi-mediated project on America in the Great Depression Recession? Depression? What's the difference? (About.com) An Overview of...
अर्थशास्त्र
4,558
null
133
अर्थशास्त्र में माँग और आपूर्ति की सहायता से पूर्णतः प्रतिस्पर्धी बाजार में बेचे गये वस्तुओं कीमत और मात्रा की विवेचना, व्याख्या और पुर्वानुमान लगाया जाता है। यह अर्थशास्त्र के सबसे मुलभूत प्रारुपों में से एक है। क्रमश: बड़े सिद्धान्तों और प्रारूपों के विकास के लिए इसका विशद रूप से प्रयोग होता है। माँग किसी नियत समयकाल...
अर्थशास्त्र
4,559
null
165
आम भारतीय नागरिक अपनी आमदनी में से इंश्योरेंस, सी॰पी॰एफ॰, जी॰पी॰एफ॰, पी॰पी॰एफ॰, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एन॰एस॰सी॰), टैक्स बचाने वाले म्यूचुअल फंड, पाँच साल से ज़्यादा की एफ़॰डी॰, होम लोन के प्रिंसिपल (मूलधन) जैसे निवेशों में लगा सकता है और ऐसे ही निवेशों को जोड़कर एक लाख रुपए तक के निवेश पर टैक्स में छूट दी जाती है।...
अर्थशास्त्र
4,560
null
78
मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) जीवन प्रत्याशा, शिक्षा (शिक्षा प्रणाली में प्रवेश करने पर स्कूली शिक्षा के पूरे वर्ष और स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष), और प्रति व्यक्ति आय संकेतक का एक सांख्यिकीय समग्र सूचकांक है, जिसका उपयोग देशों को मानव विकास के चार स्तरों में क्रमबद्ध करने के लिए किया जाता है। एक देश उच्च स्तर का एचडी...
अर्थशास्त्र
4,561
null
230
एचडीआई की के अंश संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के मानव विकास रिपोर्ट कार्यालय द्वारा उत्पादित वार्षिक मानव विकास रिपोर्ट में सम्मलित हैं। जिसे 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक द्वारा तैयार किए गया और सम्मलित किया गया था। उनका उद्देश्य "विकास अर्थशास्त्र का केंद्र-बिंदु, राष्ट्रीय आय लेखा से मान...
अर्थशास्त्र
4,562
null
154
== भारत == यह ठाकुर सुरेंद्र सिंह का देश है
अर्थशास्त्र
4,563
null
10
माल (Goods) वस्तुएँ होती हैं जिन्हें ग्राहकों के प्रयोगों के लिए बनाया जाता है, जैसे कि नमक, सेब या वाहन। सेवाएँ (Services) क्रियाएँ होती हैं जिन्हें ग्राहकों के लिए अन्य व्यक्ति करते हैं, जैसे कि चिकित्सा, बाल काटना या खाना बनाना। माल और सेवाओं का उत्पादन, वितरण और उपभोग सभी आर्थिक प्रक्रियाओं और व्यापार का मूल है। आर...
अर्थशास्त्र
4,564
null
72
मुक्त व्यापार क्षेत्र (अंग्रेज़ी: फ्री ट्रेड एरिया; एफटीए) को परिवर्तित कर मुक्त व्यापार संधि का सृजन हुआ है। विश्व के दो राष्ट्रों के बीच व्यापार को और उदार बनाने के लिए मुक्त व्यापार संधि की जाती है। इसके तहत एक दूसरे के यहां से आयात-निर्यात होने वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क, सब्सिडी, नियामक कानून, ड्यूटी, कोटा और कर क...
अर्थशास्त्र
4,565
null
384
== समस्याएँ और सीमाएँ == मुक्त व्यापार क्षेत्र में कंपनियों को मानवाधिकार एवं श्रम संबंधी कानूनों से मुक्ति मिल जाती है। इसका अर्थ होता है श्रमिकों के बुनियादी अधिकारों का हनन और शोषण। वास्तव में मुक्त व्यापार क्षेत्र की अवधारणा का विकास बहुराष्ट्रीय औद्योगिक घरानों द्वारा श्रम कानूनों एवं सामाजिक और पर्यावरणिय दायित्व...
अर्थशास्त्र
4,566
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85
== बाहरी कड़ियाँ == वैश्विक संकट का कारण मुक्त व्यापार नहीं: बुश मुक्त व्यपार के निःशुल्क वीडियो देखें
अर्थशास्त्र
4,567
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18
मुद्रा (currency, करन्सी) पैसे या धन के उस रूप को कहते हैं जिस से दैनिक जीवन में क्रय और विक्रय होती है। इसमें सिक्के और काग़ज़ के नोट दोनों आते हैं। आमतौर से किसी देश में प्रयोग की जाने वाली मुद्रा उस देश की सरकारी व्यवस्था द्वारा बनाई जाती है। मसलन भारत में रुपया व पैसा मुद्रा है। मुद्रा के बारे में हम उसके द्वारा कि...
अर्थशास्त्र
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185
== परिभाषा == मुद्रा की कोई भी ऐसी परिभाषा नहीं है जो सर्वमान्य हो। विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने मुद्रा की अलग-अलग परिभाषाएँ दी है। प्रो. जॉनसन ने मुद्रा की परिभाषाओं की चार अलग-अलग भागों में अपनी पुस्तक 'एस्सेज ऑन मॉनेतरी इकनॉमिक्स' ( 'Essays on Monetary Economics') में बताया है जो इस प्रकार है :
अर्थशास्त्र
4,569
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53
परम्परागत दृष्टिकोण इस दृष्टिकोण में मुद्रा की परिभाषाएँ उसके द्वारा किये गये कार्यों के आधार पर दी गई है।
अर्थशास्त्र
4,570
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1. क्राउथर के अनुसार, "मुद्रा वह चीज है जो विनिमय के माध्यम के रूप में सामान्यतया स्वीकार की जाती है और साथ में मुद्रा के माप तथा मुद्रा के संग्रह का भी कार्य करे।" 2. हार्टले विदर्स तथा वाकर के अनुसार, ”मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करे।“ 3. जे. एम. केन्ज के अनुसार, "मुद्रा में उन सब चीजों को शामिल किया जाता है जो ब...
अर्थशास्त्र
4,571
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126
शिकागो विचारधारा शिकागो दृष्टिकोण में मिल्टन फ्रीडमैन का ही नाम सामने आता है। शिकागो दृष्टिकोण परम्परागत दृष्टिकोण से बहुत अधिक विस्तृत है। इस दृष्टिकोण के अनुसार मुद्रा में समय जमा को भी शामिल किया जाता है।
अर्थशास्त्र
4,572
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36
मुद्रा = नोट + सिक्के + बैंको में मांग जमा + समय जमा परम्परागत दृष्टिकोण में मुद्रा के संचय कार्य को बिल्कुल भी ध्यान में नही रखा। वे केवल मुद्रा के विनिमय कार्य के बारे में बात करते है जबकि शिकागो विचारधारा में मुद्रा के संचय कार्य को अधिक महत्व दिया गया है।
अर्थशास्त्र
4,573
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53
गुरले तथा शॉ दृष्टिकोण गुरले तथा शॉ ने अपनी पुस्तक 'Money in a Theory of Finance' में मुद्रा के बारे में बताया है। गुरले एवं शॉ ने मुद्रा में उसके सभी निकट प्रतिस्थापनों को शामिल किया है। यह दृष्टिकोण शिकागो दृष्टिकोण से भी विस्तृत है इस दृष्टिकोण में मुद्रा में बचत बैंक जमा, शेयर, बॉण्ड तथा साख पत्र आदि को शामिल करते ...
अर्थशास्त्र
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मुद्रा = नोट + सिक्के + मांग जमा + समय जमा + बचत बैंक जमा + शेयर + बाण्ड + साख पत्र रैडक्लिफ दृष्टिकोण केन्द्रीय बैंकिग दृष्टिकोण को ही हम रैडक्लिफ दृष्टिकोण कहते है। इस दृष्टिकोण में हम मुद्रा की विभिन्न एजेन्सियों द्वारा दी गई साख को शामिल करते है। केन्द्रीय बैकिग दृष्टिकोण में मुद्रा में नोट, सिक्के, मांग जमा, समय ज...
अर्थशास्त्र
4,575
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77
मुद्रा = नोट + सिक्के + मांग जमा + समय जमा + बचत बैंक जमा + शेयर बाण्ड + असंगाठित क्षेत्रों द्वारा जारी की गई साख इरंविग फिशर ने सन् 1911 में अपनी पुस्तक The Purchasing Power of Money में मुद्रा के परिमाण सिद्धान्त के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि मुद्र की पूर्ति तथा कीमत स्तर के बीच प्रत्यक्ष तथा आनुपातिक सम्बन्ध ...
अर्थशास्त्र
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293
=== मुद्रा के प्राथमिक कार्य === प्राथमिक कार्यां में मुद्रा के उन सब कार्यों को शामिल करते है जो प्रत्येक देश में प्रत्येक समय मुद्रा द्वारा किये जाते हैं इसमें केवल दो कार्यों को शामिल किया जाता है।
अर्थशास्त्र
4,577
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38
1. विनिमय का माध्यम विनिमय के माध्यम का अर्थ होता है कि मुद्रा द्वारा कोई भी व्यक्ति अपनी वस्तुओं को बेचता है तथा उसके स्थान में दूसरी वस्तुओं को खरीदता है। मुद्रा क्रय तथा विक्रय दोनों को बहुत आसान बना देती है। जबसे व्यक्ति ने विनिमय के माध्यम के रूप में मुद्रा का प्रयोग किया है, तभी से मनुष्य की समय तथा शक्ति की बहुत...
अर्थशास्त्र
4,578
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87
2. मूल्य का मापक मुद्रा के द्वारा हम वस्तुओं तथा सेवाओं के मूल्यों को माप सकते हैं बहुत समय पहले जब वस्तु विनिमय प्रणाली होती थी उसमें वस्तुओं के मूल्यों को मापने में बहुत कठिनाई होती थी। अब वर्तमान में हम मुद्रा का प्रयोग करते है तो वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यों को मापने ये कोई कठिनाई नहीं आती है क्योंकि मुद्रा का मूल्...
अर्थशास्त्र
4,579
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117
=== गौण कार्य === गौण कार्य वे कार्य होते हैं जो प्राथमिक कार्यों की सहायता करते है। धीरे -धीरे जब अर्थव्यवस्था विकसित होती है तो सहायक कार्यों की भूमिका बढ़ जाती है सहायक कार्यों में हम निम्नलिखित कार्यो को शामिल करते हैं।
अर्थशास्त्र
4,580
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42
1. स्थगित भुगतानों का मान मुद्रा के इस कार्य में हम उन भुगतानों को शामिल करते है जिनका भुगतान वर्तमान में न करके भविष्य के लिए स्थगित कर दिया जाता है। स्थगित भुगतानों में ऋणों के भुगतानों को भी शामिल किया जाता है, वस्तु विनिमय प्रणाली में जब हम ऋण लेते थे उसमें मूलधन तथा ऋण का निर्धारण करना बहुत मुश्किल होता था परन्तु ...
अर्थशास्त्र
4,581
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129
2. मूल्य का संचय जब वस्तु विनिमय प्रणाली प्रचलित थी उस समय केवल वस्तुओं को आपस में विनिमय कर सकते थे वस्तुओं को संचयित नहीं कर सकते है, परन्तु अगर आपको मुद्रा का खर्च करने का विचार न हो तो आप मुद्रा को संचय भी कर सकते है। जब हम मुद्रा के रूप में बचत करते है तो हमें बहुत कम स्थान की आवश्यकता पड़ती है और मुद्रा को सब लोग...
अर्थशास्त्र
4,582
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111
3. मूल्य का हस्तांतरण मुद्रा के द्वारा मूल्य का हस्तांतरण आसानी से हो जाता है मुद्रा में सामान्य स्वीकृति तथा तरलता का गुण होने के कारण हम इसको आसानी से हस्तांतरित कर पाते है। वस्तु विनिमय प्रणाली में वस्तुओं का हस्तांतरण करना बहुत मुश्किल कार्य होता था जब लोगों के पास ज्यादा धन होता है तो वे इसको उधार देकर ऋण के रूप म...
अर्थशास्त्र
4,583
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88
=== आकस्मिक कार्य === आकस्मिक कार्यो की भूमिका देश के आर्थिक विकास के साथ बढ़ती जाती है। आकस्मिक कार्य निम्नलिखित है।
अर्थशास्त्र
4,584
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21
1. अधिकतम सन्तुष्टि मुद्रा को खर्च करके एक व्यक्ति अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त करता है क्योंकि मुद्रा से वह वस्तुएं तथा सेवायें खरीदता है तथा उससे उपयोगिता प्राप्त करता है। इसी प्रकार उत्पादक भी अधिकतम लाभ प्राप्त करता है तथा समाज मुद्रा से अपने कल्याण को भी बढ़ा सकता है। मुद्रा के द्वारा हम वस्तुओं को उनकी सीमान्त तथा को...
अर्थशास्त्र
4,585
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74
2. राष्ट्रीय आय का वितरण मुद्रा के द्वारा राष्ट्रीय आय का वितरण करना भी बहुत आसान हो गया है प्रत्येक साधन को उसकी सीमान्त उत्पादकता के बराबर कीमत देकर राष्ट्रीय आय का विवरण कर सकते है परन्तु जब वस्तु विनिमय प्रणाली प्रचलित थी उस समय राष्ट्रीय आय का वितरण तथा माप करना बहुत कठिन था । मुद्रा के द्वारा हम मूल्य को माप भी स...
अर्थशास्त्र
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94
3. पूंजी की तरलता में वृद्धि वस्तु विनिमय प्रणाली में वस्तुओं में तरलता का गुण नहीं होता था परन्तु मुद्रा में सामान्य स्वीकृति होने के कारण मुद्रा हमारी पूंजी को तरल बनाये रखती है। हम वस्तुओं के रूप में पूँजी को लेने से मना कर सकते है परन्तु मुद्रा में सामान्य स्वीकृति होने से उसे आसानी से ग्रहण कर लेते हैं। केन्ज ने ब...
अर्थशास्त्र
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4. साख का आधार वस्तु विनिमय प्रणाली में साख का निर्माण संभव नहीं था परन्तु जबसे मुद्रा का प्रचलन हुआ है। मुद्रा द्वारा हम साख का निर्माण भी कर सकते है। वर्तमान समय में विश्व के लगभग सभी देशों में चेक ड्राफ्ट, विनिमय पत्र इत्यादि साख पत्रों का प्रयोग किया जाता है। लोग अपनी अतिरिक्त आय को बैंकों में जमा करवाते है और इन्ह...
अर्थशास्त्र
4,588
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74
5. शोधन क्षमता की गारन्टी मुद्रा का एक कार्य यह भी है कि यह किसी फर्म संस्था या व्यक्ति की शोधन क्षमता की गारन्टी भी देती है। प्रत्येक व्यक्ति, फर्म संस्था आदि को अपनी शोधन क्षमता की गारन्टी बनाये रखने के लिए अपने पास कुछ न कुछ मुद्रा जरूर रखनी पड़ती है। अगर उस व्यक्ति संस्था अथवा फर्म के पास मुद्रा नहीं है तो उसे दिवा...
अर्थशास्त्र
4,589
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== मुद्रा का महत्व == वर्तमान समय में मुद्रा इतनी आवश्यक तथा महत्वपूर्ण हो गई है कि मुद्रा के गुण व दोषों का अध्ययन ही अर्थशास्त्र के अध्ययन का प्रमुख भाग बन गया है। मुद्रा के महत्व को हम निम्नलिखित तीन भागों में बांट सकते हैं।
अर्थशास्त्र
4,590
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46
=== आर्थिक क्षेत्र में मुद्रा का प्रत्यक्ष महत्व === वर्तमान समय में मुद्रा का अर्थशास्त्र के प्रत्येक क्षेत्र में बहुत महत्व है बिना मुद्रा के हम वर्तमान समय में एक दिन भी नहीं गुजार सकते। आर्थिक क्षेत्रों में मुद्रा का प्रत्यक्ष महत्व निम्नलिखित हैः
अर्थशास्त्र
4,591
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44
उपभोग क्षेत्र में महत्व अर्थशास्त्र में अगर किसी व्यक्ति के पास मुद्रा नहीं है तो वह अपनी इच्छानुसार वस्तुएं नहीं खरीद सकता है। व्यक्ति को जो आय काम करने से प्राप्त होती है वह मुद्रा के रूप में होती है और इसी आय को वह अपनी इच्छानुसार खर्च करके अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त करता है एक उपभोक्ता विभिन्न वस्तुओं अपनी आय को इस प...
अर्थशास्त्र
4,592
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उत्पादन के क्षेत्र में महत्व उत्पादन के क्षेत्र में यदि उत्पादक के पास मुद्रा है तो वह बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकता है। उत्पादन के क्षेत्र में मुद्रा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उत्पादक उसी वस्तु का उत्पादन करता है जिसकी बाजार में मांग हो तभी वह अपने लाभ को अधिकतम कर सकता है। अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए प्रत्येक ...
अर्थशास्त्र
4,593
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विनिमय के क्षेत्र में महत्व वस्तु विनिमय प्रणाली में हम प्रत्येक वस्तु की कीमत तथा लागत का अनुमान नहीं लगा पाते थे परन्तु जब से मुद्रा का प्रचलन हुआ है तब से मुद्रा ने वस्तु विनिमय प्रणाली के दोषों को दूर कर दिया है। मुद्रा के द्वारा हम प्रत्येक वस्तु की कीमत, लागत तथा उत्पादक की आय को अनुमान लगा सकते है वर्तमान समय मे...
अर्थशास्त्र
4,594
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75
व्यापार के क्षेत्र में महत्व मुद्रा के विकास के कारण अन्तर्क्षेत्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में बहुत अधिक वृद्धि हुई है। वस्तु विनिमय प्रणाली में व्यापार करते समय हमें बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और हमारे व्यापार का क्षेत्र बहुत सीमित होता था। मुद्रा के विकास के कारण उत्पादन का पैमाना भी बढ़ गया है।...
अर्थशास्त्र
4,595
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74
वितरण के क्षेत्र में महत्व मुद्रा के आविष्कार के कारण राष्ट्रीय आय के वितरण में उत्पादन के साधनों को उनका भाग देना बहुत आसान हो गया है। मुद्रा के रूप में पूंजी को ब्याज, श्रम को मजदूरी, भूमि को लगान तथा उद्यमी को लाभ देना सरल होता है। वस्तु विनिमय प्रणाली में उत्पादन के साधनों को उनका भाग देना इतना सरल काम नहीं था।
अर्थशास्त्र
4,596
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64
पूंजी निर्माण वस्तु विनिमय प्रणाली में बचत और निवेश करना संभव नहीं था। मुद्रा के आविष्कार के कारण हम आसानी से बचत तथा निवेश कर सकते है। व्यक्ति की आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद जो आय बच जाती है उसे बचत कहते है। इसी बचत से निवेश हो पाता है और निवेश के द्वारा ही पूंजी निर्माण संभव हो पाता है।
अर्थशास्त्र
4,597
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61
=== आर्थिक क्षेत्र में मुद्रा का अप्रत्यक्ष महत्व === अप्रत्यक्ष रूप से मुद्रा हमारे दिन प्रतिदिन के जीवन को बहुत अधिक प्रभावित करती है। आर्थिक क्षेत्र में मुद्रा का अप्रत्यक्ष महत्व निम्नलिखित है।
अर्थशास्त्र
4,598
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33
वस्तु विनिमय की असुविधाओं से छुटकारा वस्तु विनिमय प्रणाली के अन्तर्गत मूल्य का मापन तथा संचय करना संभव नहीं था। परन्तु मुद्रा के विकास के कारण अब हम मूल्य को माप भी सकते है तथा मुद्रा को संचय भी कर सकते है और मुद्रा के प्रचलन के बाद हमारे समय तथा धन की बचत संभव हुई है और इसी धन को हम आगे निवेश करते है।
अर्थशास्त्र
4,599
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