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इस पाठ का सारांश बनाएं: चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि चीन और श्रीलंका के बीच घनिष्ठ संबंध का अन्य देशों के साथ उनके रिश्तों पर कोई प्रभाव नहीं होगा। यी इस महीने बाद में होने जा रही श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना की चीन यात्रा से पहले श्रीलंका की तीन दिवसीय सरकारी यात्रा पर हैं। यी ने भारत की ओर इशारा करते हुए कहा, 'चीन और श्रीलंका के बीच इस बात की सहमति है कि हमारे सहयोग में कोई भी तीसरा देश निशाने पर नहीं है और न ही यह अन्य देशों के साथ हमारे अपने संबंधों को प्रभावित करेगा। हम साझे विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ घनिष्ठता के साथ काम करने को तैयार हैं।' निकट अतीत में भारत ने 1.5 अरब डॉलर की कोलंबो बंदरगाह शहर परियोजना को लेकर चिंता जताई थी। यह परियोजना समुद्र में चीन द्वारा बनाई जानी है।टिप्पणियां चीन के विदेश मंत्री ने कहा, 'इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति और घरेलू एजेंडे में क्या बदलाव आता है, हमारी रणनीतिक और सहयोगपरक साझेदारी विकसित होती रहेगी।' उन्होंने कहा कि चीन की 21 वीं सदी के समुद्री रेशम मार्ग को प्राथमिकता बनाने की मंशा है और वह श्रीलंका को हिंद महासागर में नौवहन केंद्र बनने में मदद पहुंचाना चाहता है। श्रीलंका के विदेश मंत्री मंगला समरवीरा ने कहा कि उनका देश श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था के विकास में चीनी उपक्रमों के योगदान के प्रति आशाभरी निगाहों से देख रहा है।   (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) यी ने भारत की ओर इशारा करते हुए कहा, 'चीन और श्रीलंका के बीच इस बात की सहमति है कि हमारे सहयोग में कोई भी तीसरा देश निशाने पर नहीं है और न ही यह अन्य देशों के साथ हमारे अपने संबंधों को प्रभावित करेगा। हम साझे विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ घनिष्ठता के साथ काम करने को तैयार हैं।' निकट अतीत में भारत ने 1.5 अरब डॉलर की कोलंबो बंदरगाह शहर परियोजना को लेकर चिंता जताई थी। यह परियोजना समुद्र में चीन द्वारा बनाई जानी है।टिप्पणियां चीन के विदेश मंत्री ने कहा, 'इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति और घरेलू एजेंडे में क्या बदलाव आता है, हमारी रणनीतिक और सहयोगपरक साझेदारी विकसित होती रहेगी।' उन्होंने कहा कि चीन की 21 वीं सदी के समुद्री रेशम मार्ग को प्राथमिकता बनाने की मंशा है और वह श्रीलंका को हिंद महासागर में नौवहन केंद्र बनने में मदद पहुंचाना चाहता है। श्रीलंका के विदेश मंत्री मंगला समरवीरा ने कहा कि उनका देश श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था के विकास में चीनी उपक्रमों के योगदान के प्रति आशाभरी निगाहों से देख रहा है।   (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) चीन के विदेश मंत्री ने कहा, 'इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति और घरेलू एजेंडे में क्या बदलाव आता है, हमारी रणनीतिक और सहयोगपरक साझेदारी विकसित होती रहेगी।' उन्होंने कहा कि चीन की 21 वीं सदी के समुद्री रेशम मार्ग को प्राथमिकता बनाने की मंशा है और वह श्रीलंका को हिंद महासागर में नौवहन केंद्र बनने में मदद पहुंचाना चाहता है। श्रीलंका के विदेश मंत्री मंगला समरवीरा ने कहा कि उनका देश श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था के विकास में चीनी उपक्रमों के योगदान के प्रति आशाभरी निगाहों से देख रहा है।   (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
सारांश: श्रीलंका की तीन दिन की यात्रा पर हैं चीन के विदेश मंत्री वांग यी चीन के मंत्री बोले, अन्‍य देशों से हमारे रिश्ते नहीं होंगे प्रभावित कोलंबो बंदरगाह शहर परियोजना में चीन कर रहा है मदद
7
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: गुजरात सरकार के टूरिज्म विभाग के विज्ञापन में  जंगल के राजा को तो आपने देखा होगा, लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर इस राज्य का एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें तीन शेर दिख रहे हैं. यह वीडियो अमरेली के गीगासण गांव की है, जहां 4 मार्च को तीन शेर आ गए. बताया जा रहा है कि ये तीनों शेर गिर के जंगल से यहां पहुंचे थे. गांव में घर की छत पर खड़े एक लड़के ने मोबाइल से शेरों को वीडियो बनाया है. टिप्पणियां इस घटना के बाद से गांव के लोगों में दशहत का माहौल है. लोगों का कहना है कि शेर गांव में कुछ देर घुमने के बाद वापस जंगल में लौट गया था. अमरेली जिला गिर क्षेत्र के नजदीक है. यहां एशिया महादेश में सबसे ज्यादा शेर पाए जाते हैं. इस जंगल के आसपास के गांवों में अक्सर शेर आ जाते हैं.  पिछले महीने सामने आए एक वीडियो में दो शेर सड़क के बीचों बीच में आकर आराम फरमाते हुए देखे गए थे. शाम होते ही लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं और कोई काम होता है तो भी घर के बाहर निकलने की हिम्मत नहीं होती है. गिर के जंगलों के यह शेर हर रोज किसी न किसी मवेशी का शिकार कर रहे हैं. इस घटना के बाद से गांव के लोगों में दशहत का माहौल है. लोगों का कहना है कि शेर गांव में कुछ देर घुमने के बाद वापस जंगल में लौट गया था. अमरेली जिला गिर क्षेत्र के नजदीक है. यहां एशिया महादेश में सबसे ज्यादा शेर पाए जाते हैं. इस जंगल के आसपास के गांवों में अक्सर शेर आ जाते हैं.  पिछले महीने सामने आए एक वीडियो में दो शेर सड़क के बीचों बीच में आकर आराम फरमाते हुए देखे गए थे. शाम होते ही लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं और कोई काम होता है तो भी घर के बाहर निकलने की हिम्मत नहीं होती है. गिर के जंगलों के यह शेर हर रोज किसी न किसी मवेशी का शिकार कर रहे हैं. पिछले महीने सामने आए एक वीडियो में दो शेर सड़क के बीचों बीच में आकर आराम फरमाते हुए देखे गए थे. शाम होते ही लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं और कोई काम होता है तो भी घर के बाहर निकलने की हिम्मत नहीं होती है. गिर के जंगलों के यह शेर हर रोज किसी न किसी मवेशी का शिकार कर रहे हैं.
संक्षिप्त पाठ: ये तीनों शेर गिर के जंगल से यहां पहुंचे थे. गांव में घर की छत पर खड़े एक लड़के ने मोबाइल से शेरों को वीडियो बनाया है. इस घटना के बाद से गांव के लोगों में दशहत का माहौल है.
14
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा है कि मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन को लेकर भारत को राष्ट्रमंडल से श्रीलंका के निलंबन की मांग करनी चाहिए थी।टिप्पणियां सिन्हा ने बुधवार को पार्टी की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भारत को इस मामले को राष्ट्रमंडल देशों के मंत्री स्तर के कार्रवाई को समूह के संज्ञान में लाना चाहिए था और श्रीलंका के निलंबन की मांग करनी चाहिए थी।’’ श्रीलंकाई तमिल मुद्दे से निपटने में केंद्र सरकार के नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए सिन्हा ने कहा कि भारत ने श्रीलंका के निलंबन की मांग को लेकर कुछ नहीं किया। सिन्हा ने बुधवार को पार्टी की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भारत को इस मामले को राष्ट्रमंडल देशों के मंत्री स्तर के कार्रवाई को समूह के संज्ञान में लाना चाहिए था और श्रीलंका के निलंबन की मांग करनी चाहिए थी।’’ श्रीलंकाई तमिल मुद्दे से निपटने में केंद्र सरकार के नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए सिन्हा ने कहा कि भारत ने श्रीलंका के निलंबन की मांग को लेकर कुछ नहीं किया। श्रीलंकाई तमिल मुद्दे से निपटने में केंद्र सरकार के नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए सिन्हा ने कहा कि भारत ने श्रीलंका के निलंबन की मांग को लेकर कुछ नहीं किया।
संक्षिप्त पाठ: भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा है कि मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन को लेकर भारत को राष्ट्रमंडल से श्रीलंका के निलंबन की मांग करनी चाहिए थी।
22
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: 'कोका कोला' फेम सिंगर टोनी कक्कड़ (Tony Kakkar) के नए सॉन्ग 'बिजली की तार (Bijli Ki Taar)' ने रिलीज होते ही यूट्यूब (YouTube) पर तहलका मचा दिया है. टोनी कक्कड़ के इस सॉन्ग को टी-सीरीज (T-Series) ने रिलीज किया है. टोनी कक्कड़ (Tony Kakkar) के सॉन्ग 'बिजली की तार' को टोनी कक्कड़ ने गाया है, और इसको कंपोज और लिखा भी उन्होंने ही है. 'बिजली की तार (Bijli Ki Taar)' सॉन्ग को डायरेक्टर शैबी ने डायरेक्ट किया है. इस सॉन्ग में बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला (Urvashi Rautela) उनके साथ नजर आ रही हैं, और कमाल का स्वैग दिखा रही हैं. टोनी कक्कड़ अकसर अपने सॉन्ग से सोशल मीडिया पर धूम मचाने में कामयाब रहते हैं.   इस नए गाने में उर्वशी रौतेला (Urvashi Rautela) बाइक पर स्टंट भी करती नजर आ रही हैं. टोनी कक्कड़ (Tony Kakkar) और उर्वशी रौतेला का ये गाना आते ही यूट्यूब (YouTube) पर छा गया है. रिलीज होते ही इस गाने को 16 लाख व्यूज मिल चुके हैं. फैन्स को भी टोनी कक्कड़ (Tony Kakkar) का ये नया गाना काफी पसंद आ रहा है. टोनी कक्कड़ (Tony Kakkar) बॉलीवुड की कई फिल्मों में सॉन्ग गा चुके हैं. उनके सॉन्ग को लोग खूब पसंद भी करते हैं. हाल ही में टोनी का गाना 'धीमे-धीमे (Dheeme Dheeme)' रिलीज हुआ था. इस गाने ने भी यूट्यूब पर खूब धूम मचाई थी. टोनी कक्कड़ के इस गाने में उनके साथ एक्ट्रेस नेहा शर्मा (Neha Sharma) नजर आईं थीं. .
यहाँ एक सारांश है:टोनी कक्कड़ का नया गाना हुआ रिलीज उर्वशी रौतेला ने यूं लगाया स्वैग का तड़का यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है वीडियो
18
['hin']
एक सारांश बनाओ: गृह मंत्रालय के एक सीनियर अफ़सर ने एनडीटीवी से कहा कि "क्रॉस LoC ट्रेड एक बहुत बड़ा फ़ैसला है, जोकि कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेज़र के तहत लिया गया है, इसे बंद नहीं किया जा सकता". टिप्पणियां दरअसल, हाल में ऐसे कई क़िस्से आए हैं, जिसके चलते इस व्यापार पर सवाल उठाए जा रहे है. हालांकि राज्य की मुख्यमंत्री ने इस बात की ख़िलाफ़त की है कि ये व्यापार बंद किया जाना चाहिए. महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि "हम रास्ते खोलने के बंद करने के हक़ में नहीं हैं". कश्मीर डेस्क से जुड़े एक अफ़सर का कहना है कि वैसे बीती 11 जुलाई से पुंछ वाले रास्ते से ये व्यापार गोलाबारी के चलते बंद हो गया है. इस इलाक़े में इतनी ज़्यादा गोलाबारी हो रही थी कि सब वर्कर अपनी पोस्ट छोड़ कर भाग गए. इसीलिए व्यापार बंद है. उनके मुताबिक़, जब हालत यहां सामान्य हो जाएंगे तो यह शुरू हो जाएगा. टिप्पणियां दरअसल, हाल में ऐसे कई क़िस्से आए हैं, जिसके चलते इस व्यापार पर सवाल उठाए जा रहे है. हालांकि राज्य की मुख्यमंत्री ने इस बात की ख़िलाफ़त की है कि ये व्यापार बंद किया जाना चाहिए. महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि "हम रास्ते खोलने के बंद करने के हक़ में नहीं हैं". कश्मीर डेस्क से जुड़े एक अफ़सर का कहना है कि वैसे बीती 11 जुलाई से पुंछ वाले रास्ते से ये व्यापार गोलाबारी के चलते बंद हो गया है. इस इलाक़े में इतनी ज़्यादा गोलाबारी हो रही थी कि सब वर्कर अपनी पोस्ट छोड़ कर भाग गए. इसीलिए व्यापार बंद है. उनके मुताबिक़, जब हालत यहां सामान्य हो जाएंगे तो यह शुरू हो जाएगा. दरअसल, हाल में ऐसे कई क़िस्से आए हैं, जिसके चलते इस व्यापार पर सवाल उठाए जा रहे है. हालांकि राज्य की मुख्यमंत्री ने इस बात की ख़िलाफ़त की है कि ये व्यापार बंद किया जाना चाहिए. महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि "हम रास्ते खोलने के बंद करने के हक़ में नहीं हैं". कश्मीर डेस्क से जुड़े एक अफ़सर का कहना है कि वैसे बीती 11 जुलाई से पुंछ वाले रास्ते से ये व्यापार गोलाबारी के चलते बंद हो गया है. इस इलाक़े में इतनी ज़्यादा गोलाबारी हो रही थी कि सब वर्कर अपनी पोस्ट छोड़ कर भाग गए. इसीलिए व्यापार बंद है. उनके मुताबिक़, जब हालत यहां सामान्य हो जाएंगे तो यह शुरू हो जाएगा. कश्मीर डेस्क से जुड़े एक अफ़सर का कहना है कि वैसे बीती 11 जुलाई से पुंछ वाले रास्ते से ये व्यापार गोलाबारी के चलते बंद हो गया है. इस इलाक़े में इतनी ज़्यादा गोलाबारी हो रही थी कि सब वर्कर अपनी पोस्ट छोड़ कर भाग गए. इसीलिए व्यापार बंद है. उनके मुताबिक़, जब हालत यहां सामान्य हो जाएंगे तो यह शुरू हो जाएगा.
केंद्र ने जम्मू-कश्मीर सरकार को ये बात साफ़ कर दी है. केन्द्रीय गृह सचिव ने ये बात राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती से कही. केंद्र जल्द ही फ़ुल ट्रक बॉडी स्कैनर ख़रीदने जा रहा है- राजीव महर्षि
26
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट मंगलवार को भैयादूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए. अब श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास स्थल उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में करेंगे. श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष अशोक खत्री ने बताया कि भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ मंदिर के कपाट परम्परागत विधिविधान व पूजा अर्चना के साथ सुबह साढ़े आठ बजे शीतकाल हेतु बन्द कर दिए गए.  बता दें, मुख्य पुजारी केदार लिंग ने कपाट बंद होने की पूजा संपन्न करायी. इस मौके पर मंदिर परिसर में करीब 1200 श्रद्धालुओं के साथ ही मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, रूद्रप्रयाग के पुलिस अधीक्षक अजय सिंह भी मौजूद रहे. इस दौरान जम्मू-कश्मीर लाईट इन्फैंट्री बैंड की धुनों से केदारपुरी गुंजायमान रही. जय बाबा केदारनाथ, बम—बम भोले के उदघोष के साथ श्री केदारनाथजी की पंचमुखी विग्रह मूर्ति को लेकर डोली ने मंदिर से प्रस्थान किया जो विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए 31 अक्टूबर को उनके शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी.
सारांश: मंगलवार को भैयादूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए शीतकालीन प्रवास स्थल उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में करेंगे पूजा अर्चना के साथ सुबह साढ़े आठ बजे शीतकाल हेतु बन्द कर दिए गए
20
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: बांग्लादेश ने इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक के बारे में भारत से पूरी जानकारी मांगी है. हालांकि उसने यह भी कहा है कि पिछले महीने हुए गुलशन हमले के काफी पहले से कई प्रतिष्ठित उलेमा नाईक के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे. भारत की छह दिवसीय यात्रा पर आए बांग्लादेश के सूचना मंत्री हसनुल हक इनू ने कहा कि उनके देश ने कार्रवाई करते हुए नाईक की ‘पीस टीवी’ का प्रसारण बांग्लादेश में प्रतिबंधित कर दिया है. इनू ने संकेत दिया कि अब उन्हें विवादित उपदेश के खिलाफ भारत की कार्रवाई का इंतजार है. इनू ने कहा कि उनके देश के पास बांग्लादेशी सीमा में पनपे आतंकवादियों और भारत में मौजूद चरमपंथी संगठनों के बीच संबंधों का कोई साक्ष्य नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने 'आतंकवादियों को शरण देने' के लिए पाकिस्तान की आलोचना भी की. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में चिंतकों, ब्लॉगर्स और सूफी पंथ के लोगों पर 43 से ज्यादा हमले हुए हैं. जांच में यह बात सामने आई है कि लगभग 90 प्रतिशत मामलों में हमलावर प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी से जुड़े हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान जमात-ए-इस्लामी संगठन पाकिस्तान के पक्ष में लड़ रहा था.टिप्पणियां इनू ने संवाददाताओं से कहा, 'बांग्लादेश की ओर से जाकिर नाईक का मामला समाप्त हो गया है. हमने ‘पीस टीवी’ का प्रसारण रोक दिया है. पिछले एक वर्ष में उलेमाओं ने नाईक के खिलाफ लिखित शिकायत की है. हम उनकी जांच कर रहे हैं. हमें लगता है कि कुछ मामलों में उनके उपदेश कुरान से मेल नहीं खाते हैं. इसलिए, उससे भ्रम पैदा हो रहा है.' उन्होंने कहा, 'कुछ मामलों में वह भड़काउ हैं इसलिए हमने अपना फैसला लिया है. हमने भारतीय पक्ष से अपना फैसला लेने और हमें जरूरी सूचनाएं मुहैया कराने को कहा है.' (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) भारत की छह दिवसीय यात्रा पर आए बांग्लादेश के सूचना मंत्री हसनुल हक इनू ने कहा कि उनके देश ने कार्रवाई करते हुए नाईक की ‘पीस टीवी’ का प्रसारण बांग्लादेश में प्रतिबंधित कर दिया है. इनू ने संकेत दिया कि अब उन्हें विवादित उपदेश के खिलाफ भारत की कार्रवाई का इंतजार है. इनू ने कहा कि उनके देश के पास बांग्लादेशी सीमा में पनपे आतंकवादियों और भारत में मौजूद चरमपंथी संगठनों के बीच संबंधों का कोई साक्ष्य नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने 'आतंकवादियों को शरण देने' के लिए पाकिस्तान की आलोचना भी की. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में चिंतकों, ब्लॉगर्स और सूफी पंथ के लोगों पर 43 से ज्यादा हमले हुए हैं. जांच में यह बात सामने आई है कि लगभग 90 प्रतिशत मामलों में हमलावर प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी से जुड़े हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान जमात-ए-इस्लामी संगठन पाकिस्तान के पक्ष में लड़ रहा था.टिप्पणियां इनू ने संवाददाताओं से कहा, 'बांग्लादेश की ओर से जाकिर नाईक का मामला समाप्त हो गया है. हमने ‘पीस टीवी’ का प्रसारण रोक दिया है. पिछले एक वर्ष में उलेमाओं ने नाईक के खिलाफ लिखित शिकायत की है. हम उनकी जांच कर रहे हैं. हमें लगता है कि कुछ मामलों में उनके उपदेश कुरान से मेल नहीं खाते हैं. इसलिए, उससे भ्रम पैदा हो रहा है.' उन्होंने कहा, 'कुछ मामलों में वह भड़काउ हैं इसलिए हमने अपना फैसला लिया है. हमने भारतीय पक्ष से अपना फैसला लेने और हमें जरूरी सूचनाएं मुहैया कराने को कहा है.' (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इनू ने कहा कि उनके देश के पास बांग्लादेशी सीमा में पनपे आतंकवादियों और भारत में मौजूद चरमपंथी संगठनों के बीच संबंधों का कोई साक्ष्य नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने 'आतंकवादियों को शरण देने' के लिए पाकिस्तान की आलोचना भी की. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में चिंतकों, ब्लॉगर्स और सूफी पंथ के लोगों पर 43 से ज्यादा हमले हुए हैं. जांच में यह बात सामने आई है कि लगभग 90 प्रतिशत मामलों में हमलावर प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी से जुड़े हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान जमात-ए-इस्लामी संगठन पाकिस्तान के पक्ष में लड़ रहा था.टिप्पणियां इनू ने संवाददाताओं से कहा, 'बांग्लादेश की ओर से जाकिर नाईक का मामला समाप्त हो गया है. हमने ‘पीस टीवी’ का प्रसारण रोक दिया है. पिछले एक वर्ष में उलेमाओं ने नाईक के खिलाफ लिखित शिकायत की है. हम उनकी जांच कर रहे हैं. हमें लगता है कि कुछ मामलों में उनके उपदेश कुरान से मेल नहीं खाते हैं. इसलिए, उससे भ्रम पैदा हो रहा है.' उन्होंने कहा, 'कुछ मामलों में वह भड़काउ हैं इसलिए हमने अपना फैसला लिया है. हमने भारतीय पक्ष से अपना फैसला लेने और हमें जरूरी सूचनाएं मुहैया कराने को कहा है.' (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इनू ने संवाददाताओं से कहा, 'बांग्लादेश की ओर से जाकिर नाईक का मामला समाप्त हो गया है. हमने ‘पीस टीवी’ का प्रसारण रोक दिया है. पिछले एक वर्ष में उलेमाओं ने नाईक के खिलाफ लिखित शिकायत की है. हम उनकी जांच कर रहे हैं. हमें लगता है कि कुछ मामलों में उनके उपदेश कुरान से मेल नहीं खाते हैं. इसलिए, उससे भ्रम पैदा हो रहा है.' उन्होंने कहा, 'कुछ मामलों में वह भड़काउ हैं इसलिए हमने अपना फैसला लिया है. हमने भारतीय पक्ष से अपना फैसला लेने और हमें जरूरी सूचनाएं मुहैया कराने को कहा है.' (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
यहाँ एक सारांश है:जाकिर नाईक ढाका आतंकी हमले के बाद से विवादों में घिरे हैं हमले में शामिल कुछ आतंकियों ने खुद को उनके उपदेशों से प्रभावित बताया था बांग्लादेश ने नाईक की ‘पीस टीवी’ का प्रसारण प्रतिबंधित कर रखा है
4
['hin']
एक सारांश बनाओ: मेघालय में विधानसभा चुनाव के नतीजे सत्तारूढ़ दल के पक्ष में आने के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। निवर्तमान मुख्यमंत्री मुकुल संगमा शुक्रवार को राज्यपाल आरएस मूशाहारी से मिले और सरकार गठन का दावा पेश किया। संभावना है कि संगमा पांच मार्च को अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेंगे। संगमा ने राज्यपाल को एक पत्र सौंपा जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दो विधायक और आठ निर्दलीय विधायक सरकार को बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हैं।टिप्पणियां इससे पहले, संगमा को कांग्रेस विधासक दल का नेता चुना गया। 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। राज्यपाल के साथ बैठक के बाद संगमा ने संवाददाताओं से कहा, "निर्वाचन आयोग से अधिसूचना जारी होने के बाद संभवत: मंगलवार (पांच मार्च) तक शपथ ग्रहण समारोह होगा। इससे पहले मंत्रिमंडल गठन की तैयारी पूरी कर ली जाएगी।" निवर्तमान मुख्यमंत्री मुकुल संगमा शुक्रवार को राज्यपाल आरएस मूशाहारी से मिले और सरकार गठन का दावा पेश किया। संभावना है कि संगमा पांच मार्च को अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेंगे। संगमा ने राज्यपाल को एक पत्र सौंपा जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दो विधायक और आठ निर्दलीय विधायक सरकार को बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हैं।टिप्पणियां इससे पहले, संगमा को कांग्रेस विधासक दल का नेता चुना गया। 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। राज्यपाल के साथ बैठक के बाद संगमा ने संवाददाताओं से कहा, "निर्वाचन आयोग से अधिसूचना जारी होने के बाद संभवत: मंगलवार (पांच मार्च) तक शपथ ग्रहण समारोह होगा। इससे पहले मंत्रिमंडल गठन की तैयारी पूरी कर ली जाएगी।" संगमा ने राज्यपाल को एक पत्र सौंपा जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दो विधायक और आठ निर्दलीय विधायक सरकार को बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हैं।टिप्पणियां इससे पहले, संगमा को कांग्रेस विधासक दल का नेता चुना गया। 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। राज्यपाल के साथ बैठक के बाद संगमा ने संवाददाताओं से कहा, "निर्वाचन आयोग से अधिसूचना जारी होने के बाद संभवत: मंगलवार (पांच मार्च) तक शपथ ग्रहण समारोह होगा। इससे पहले मंत्रिमंडल गठन की तैयारी पूरी कर ली जाएगी।" इससे पहले, संगमा को कांग्रेस विधासक दल का नेता चुना गया। 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। राज्यपाल के साथ बैठक के बाद संगमा ने संवाददाताओं से कहा, "निर्वाचन आयोग से अधिसूचना जारी होने के बाद संभवत: मंगलवार (पांच मार्च) तक शपथ ग्रहण समारोह होगा। इससे पहले मंत्रिमंडल गठन की तैयारी पूरी कर ली जाएगी।" राज्यपाल के साथ बैठक के बाद संगमा ने संवाददाताओं से कहा, "निर्वाचन आयोग से अधिसूचना जारी होने के बाद संभवत: मंगलवार (पांच मार्च) तक शपथ ग्रहण समारोह होगा। इससे पहले मंत्रिमंडल गठन की तैयारी पूरी कर ली जाएगी।"
यह एक सारांश है: मेघालय में कांग्रेस को सत्ता बरकरार रखने में अहम भूमिका निभाने वाले मुकुल संगमा का लगातार दूसरी बार राज्य का मुख्यमंत्री बनना तय हो गया है क्योंकि उन्हें कांग्रेस विधायक दल का नेता चुन लिया गया।
21
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: 'बाहुबली: द बिगनिंग' के रिलीज के बाद से ही हर कोई यह जानना चाहता था कि आखिर कटप्‍पा ने बाहुबली को क्‍यों मारा और इस सवाल को जानने के लिए हर कोई कोशिश कर रहा था. 2015 में रिलीज हुई इस‍ फिल्‍म का दूसरा भाग 2 साल बाद 28 अप्रैल को रिलीज हुआ है और रिलीज के बाद से ही यह फिल्‍म लोगों की तारीफ के साथ करोड़ों की कमाई का रिकॉर्ड बना रही है. इस फिल्‍म के इस सबसे बड़े सवाला कि 'कटप्‍पा ने बाहुबली को क्‍यों मारा...?' का जवाब आखिरकार लोगों को मिल गया. लेकिन जिस राज को 2 सालों तक दबाए रखने और इस कहानी का ट्विस्‍ट बनाए रखने के लिए फिल्‍म के डायरेक्‍टर राजामौली ने इतनी मेहनत की वहीं एक लड़के ने 2 साल पहले ही यह अनुमान लगा लिया था कि आखिर कटप्‍पा, बाहुबली को क्‍यों मारेगा. सुनने में यह भले ही अजीब लगे लेकिन सुशांत दहल नाम के इस शख्‍स ने जुलाई, 2015 में ही अपने अनुमान में फिल्‍म की एकदम सही स्‍टोरी बता दी थी. दरअसल, इस लड़के को करोड़ों रुपए के सवाल का जवाब पता था और  जिसका जवाब उन्‍होंने 'क्‍यूरा' (Quora) पर दिया था. क्‍यूरा पर यह सवाल पोस्‍ट किया गया कि ' कटप्‍पा ने बाहुबली को क्‍यों मारा?' इस सवाल के जवाब में कई जवाब आए लेकिन सुशांत दहल का 2 साल पहले दिया गया जवाब एकदम सटीक था. सुशांत ने अपने जवाब में लिखा था, ' मेरा अनुमान है, अमरेंद्र बाहुबली और भल्लादेव को एक ही लड़की देवसेना से प्यार हो जाता है. देवसेना भल्लालदेव की जगह अमरेंद्र को उसके दयालु स्वभाव की वजह से चुनती है. अपना राज्या और प्रेमिका को खोने की वजह से भल्लादेव निराश हो जाता है. अपेन पिता के समर्थन से भल्लालदेव अमरेंद्र के खिलाफ जाल बनाता है और राजमाता शिवगामी को किसी तरह मना लेता है और वो अमरेंद्र बाहुबली को मारने का आदेश देती हैं. हालांकि कटप्पा को अमरेंद्र पसंद होता है, इसके बावजूद वो रानी का आदेश मानता है और बाहुबली को मार देता है. उसे इस बात का ताउम्र पछतावा होता है और वो अपनी गलती को सही करने का एक मौका ढूंढता है.'   28 अप्रैल को रिलीज हुई यह फिल्‍म देशभर में 8000 स्‍क्रीन्‍स पर रिलीज की गई है. अपने पहले दिन ही कमाई का 100 करोड़ का छूने वाली यह फिल्म, भारतीय सिनेमा के इतिहास में 1000 करोड़ की कर्मा करने वाली  पहली फिल्‍म बन गई है. कुछ दिनों पहले फिल्‍म में बाहुबली बने एक्‍टर प्रभास ने खुलासा किया था कि फिल्‍म देखने से पहले तक खुद उन्‍हें भी नहीं पता था कि उन्‍हें कटप्‍पा ने क्‍यों मारा था क्‍योंकि शूटिंग के दौरान भी इस बात का डायरेक्‍टर ने काफी ख्‍याल रखा था.   खबरें थी कि अपनी फिल्‍म के सस्‍पेंस को लेकर राजामौली इतने सचेत थे कि एडिटिंग करने वाले लोगों को रूम में मोबाइल ले जाने की परमिशन नहीं थी और वहां से निकलने वाले हर शख्‍स की चैकिंग होती थी. लेकिन इतने पहरे में बनी इस फिल्‍म के इस इतने बड़े सवाल का जवाब 2 साल पहले देने वाले सुशांत को इस काम के लिए डायरेक्‍टर राजामौली की एक शाबाशी तो मिलनी ही चाहिए. दरअसल, इस लड़के को करोड़ों रुपए के सवाल का जवाब पता था और  जिसका जवाब उन्‍होंने 'क्‍यूरा' (Quora) पर दिया था. क्‍यूरा पर यह सवाल पोस्‍ट किया गया कि ' कटप्‍पा ने बाहुबली को क्‍यों मारा?' इस सवाल के जवाब में कई जवाब आए लेकिन सुशांत दहल का 2 साल पहले दिया गया जवाब एकदम सटीक था. सुशांत ने अपने जवाब में लिखा था, ' मेरा अनुमान है, अमरेंद्र बाहुबली और भल्लादेव को एक ही लड़की देवसेना से प्यार हो जाता है. देवसेना भल्लालदेव की जगह अमरेंद्र को उसके दयालु स्वभाव की वजह से चुनती है. अपना राज्या और प्रेमिका को खोने की वजह से भल्लादेव निराश हो जाता है. अपेन पिता के समर्थन से भल्लालदेव अमरेंद्र के खिलाफ जाल बनाता है और राजमाता शिवगामी को किसी तरह मना लेता है और वो अमरेंद्र बाहुबली को मारने का आदेश देती हैं. हालांकि कटप्पा को अमरेंद्र पसंद होता है, इसके बावजूद वो रानी का आदेश मानता है और बाहुबली को मार देता है. उसे इस बात का ताउम्र पछतावा होता है और वो अपनी गलती को सही करने का एक मौका ढूंढता है.'   28 अप्रैल को रिलीज हुई यह फिल्‍म देशभर में 8000 स्‍क्रीन्‍स पर रिलीज की गई है. अपने पहले दिन ही कमाई का 100 करोड़ का छूने वाली यह फिल्म, भारतीय सिनेमा के इतिहास में 1000 करोड़ की कर्मा करने वाली  पहली फिल्‍म बन गई है. कुछ दिनों पहले फिल्‍म में बाहुबली बने एक्‍टर प्रभास ने खुलासा किया था कि फिल्‍म देखने से पहले तक खुद उन्‍हें भी नहीं पता था कि उन्‍हें कटप्‍पा ने क्‍यों मारा था क्‍योंकि शूटिंग के दौरान भी इस बात का डायरेक्‍टर ने काफी ख्‍याल रखा था.   खबरें थी कि अपनी फिल्‍म के सस्‍पेंस को लेकर राजामौली इतने सचेत थे कि एडिटिंग करने वाले लोगों को रूम में मोबाइल ले जाने की परमिशन नहीं थी और वहां से निकलने वाले हर शख्‍स की चैकिंग होती थी. लेकिन इतने पहरे में बनी इस फिल्‍म के इस इतने बड़े सवाल का जवाब 2 साल पहले देने वाले सुशांत को इस काम के लिए डायरेक्‍टर राजामौली की एक शाबाशी तो मिलनी ही चाहिए.
सारांश: क्‍यूरा पर सुशांत दहल ने 2 साल पहले ही बता दिया था फिल्‍म का ट्विस्‍ट क्‍यूरा पर पूछे गए सवाल के जावाब में दिया था इस लड़के ने अपना जवाब अभी तक करोड़ों कमा कर कई रिकॉर्ड तोड़ चुकी है य‍ह फिल्‍म
31
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: राजद प्रमुख लालू प्रसाद (Lalu Prasad Yadav) के दोनों बेटों के बीच शीतयुद्ध के बाद अब पार्टी के पुराने नेता रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) द्वारा नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह (Jagada Nand Singh) पर प्रहार किए जाने के कारण बुधवार को दल की फजीहत हुई . राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने जगदानंद सिंह पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि यहां पार्टी मुख्यालय "सरकारी कार्यालय" की तरह हो गया है. रघुवंश और जगदानंद दोनों राजद की 1997 में स्थापना के बाद से ही उससे जुड़े रहे हैं.  रघुवंश ने पत्रकारों से बातचीत में बिना अनुमति के राजद के प्रदेश अध्यक्ष के कक्ष में आगंतुकों के प्रवेश पर प्रतिबंध के संदर्भ में जगदानंद का नाम लिए बिना उनपर प्रहार करते हुए कहा “हरेक को अनुशासन अपने भी स्वयं ही लागू करना चाहिए. इसे बाहर से लागू नहीं किया जाना चाहिए. हमारी पार्टी के कार्यकर्ता वैसे कर्मचारी नहीं हैं जो वेतन पाते हैं. उसकी सराहना की जानी चाहिए . हमें पार्टी कार्यालय को सरकारी कार्यालय के सदृश बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए ”.  राजद के सूत्रों के अनुसार रघुवंश, जगदानंद की कार्यशैली से नाखुश हैं. रघुवंश की नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर, जगदानंद ने चतुराई से कहा, “मैं पार्टी की राज्य इकाई का प्रमुख हूं. वे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के नाते हमसे उंचे पद पर आसीन हैं. मैं उनसे सलाह लूंगा और मेरी कार्यशैली में यदि कोई कमी है, जिससे मैं अनभिज्ञ हूं, तो मैं उसके बारे पता लगाने की कोशिश करूंगा ”.  ऐसी भी अटकलें हैं कि रघुवंश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजग विरोधी मोर्चे में वापसी को लेकर दिए गए बयान के एक दिन बाद जगदानंद ने कहा था “तेजस्वी के नेतृत्व पर कोई समझौता नहीं होने जा रहा है”. इस बीच, नीतीश की पार्टी जदयू के प्रवक्ता निखिल मंडल ने रघुवंश के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने मन की बात कहने से नहीं कतराते.
सारांश: जगदानंद पर बिना नाम लिए साधा निशाना जगदानंद की कार्यशैली से नाखुश हैं रघुवंश: सूत्र जगदानंद ने नहीं की कोई सीधी टिप्पणी
7
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने सोमवार को कहा कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्या के तीन दोषियों की मृत्युदंड की सजा को बदलने का अधिकार नहीं है। राज्य विधानसभा में सोमवार को जयललिता ने कहा, "मेरे पास तीनों दोषियों के मृत्युदंड को बदलने का अधिकार नहीं है। उन्हें दोबारा राष्ट्रपति के यहां अपील करनी चाहिए।" राष्ट्रपति ने राजीव गांधी की हत्या के लिए दोषी ठहराए गए मुरुगन, सनथन और पेरारिवलन की दया याचिकाएं 11 अगस्त को खारिज कर दी थीं। ये तीनों लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) से सम्बंधित है। उन्हें नौ सितम्बर को फांसी होनी है। बहुत से राजनीतिक दल और संगठन मृत्युदंड की सजा को बदलने के लिए अभियान चला रहे हैं। जयललिता ने इस सिलसिले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के अध्यक्ष एम. करुणानिधि पर भी इसे लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। डीएमके सजा बदलने की मांग कर रही है। जयललिता ने तीनों दोषियों के मृत्युदंड को बदलने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से रविवार को आत्मदाह करने वाली सेनकोदी के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और लोगों से अपील की कि वे इस तरह का कदम न उठाएं। एक महिला आत्मघाती हमलावर ने 21 मई, 1991 को श्रीपेरम्बदूर में एक चुनावी रैली के दौरान राजीव गांधी के निकट जाकर खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था। वह 1984 से 1989 तक देश के प्रधानमंत्री थे। मामले की सुनवाई टाडा अदालत में हुई, जिसमें 26 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने पेरारिवलन, सनथन, मुरुगन और उसकी पत्नी नलिनी की मौत की सजा बरकरार रखी, जबकि तीन अन्य दोषियों की सजा आजीवन कारावास में बदल दी और अन्य को बरी कर दिया।
संक्षिप्त सारांश: जयललिता ने कहा कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्या के तीन दोषियों की मृत्युदंड की सजा को बदलने का अधिकार नहीं है।
10
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: उतर प्रदेश के सहारनपुर जिले में थाना रामपुर मनिहारान क्षेत्र में पुलिस चौकी के पास मृत गोवंश से भरी गाड़ी में आक्रोशित लोगों ने आग लगा दी. अपर पुलिस अधीक्षक संजय सिंह ने मंगलवार को बताया कि थाना रामपुर मनिहारान के अंतर्गत ग्राम मल्हीपुर पुलिस चौकी के पास गौवंश से भरी पिकअप गाड़ी में मंगलवार को मृत पशुओं को देखकर लोग आक्रोशित हो गये. उत्तेजित लोगों ने बीच सड़क पर हंगामा कर दिया.टिप्पणियां सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को शांत करने का प्रयास किया लेकिन जब वे शांत नहीं हुए तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया. इस घटना के बाद एक बारगी क्षेत्र में तनाव का माहौल भी बना. सुरक्षा की दृष्टि से मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है. थाने मे गोवंश तस्करों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को शांत करने का प्रयास किया लेकिन जब वे शांत नहीं हुए तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया. इस घटना के बाद एक बारगी क्षेत्र में तनाव का माहौल भी बना. सुरक्षा की दृष्टि से मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है. थाने मे गोवंश तस्करों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: एक पिकअप गाड़ी में मृत पशुओं को देखकर लोग भड़क गए उत्तेजित लोगों ने बीच सड़क पर हंगामा कर दिया एकबारगी क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया
11
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने एंबर ब्लाइंडफोल्ड एंड रैपिड शतरंज टूर्नामेंट के पहले दौर में बुल्गारिया के वेसेलीन टोपालोव को 1.5-0.5 से हराया। आनंद ने इस टूर्नामेंट के अंतिम सत्र में सफेद मोहरों के साथ ब्लाइंडफोल्ड बाजी में जीत दर्ज करके बेहतरीन शुरुआत की। हालांकि उन्होंने टोपालोव के खिलाफ रैपिड बाजी ड्रा खेली। टोपालोव कई महीनों से किसी बड़े टूर्नामेंट में शामिल नहीं हुए हैं। उधर, रूस के एलेक्जेंडर ग्रीस्चुक ने पहले दौर में पूर्व विश्व चैंपियन व्लादिमीर क्रामनिक को दोनों बाजियों में हराकर उलटफेर किया। इस जीत के साथ ग्रीस्चुक ने संयुक्त बढ़त हासिल कर ली। अर्मेनिया के लेवोन अरोनियन, अजरबेजान के वुगार गाशीमोव, इस्रायल के बोरिस गेलफांड ने भी पहले दौर में 2-0 से जीत दर्ज की और वे ग्रीस्चुक के साथ संयुक्त बढ़त पर बने हुए हैं। 12 खिलाड़ियों के डबल राउंड रोबिन टूर्नामेंट में 20 मैच बचे हैं और चार खिलाड़ी शीर्ष स्थान पर काबिज हैं। नार्वे के मैग्नस कार्लसन के साथ आनंद पांचवें स्थान पर हैं।
यह एक सारांश है: विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने एंबर ब्लाइंडफोल्ड एंड रैपिड शतरंज टूर्नामेंट के पहले दौर में बुल्गारिया के वेसेलीन टोपालोव को 1.5-0.5 से हराया।
2
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पाकिस्तान के क्वेटा शहर में शुक्रवार सुबह हुए विस्फोट में पांच लोगों की मौत हो गई. वहीं, 14 अन्य लोग घायल हो गए. मरने वाले में एक पुलिसकर्मी भी शामिल है. स्थानीय समाचार पत्र डॉन के मुताबिक, विस्फोट अशांत बलूचिस्तान प्रांत के गुलिस्तान रोड पर स्थित पुलिस महानिरीक्षक एहसान महबूब के कार्यालय के पास हुआ. यहां कई महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर है. पुलिस उप महानिरीक्षक अब्दुल रज्जाक चीमा ने मीडिया को बताया कि हम हमले की प्रकृति के बारे में कुछ नहीं कह सकते। फिलहाल जांच जारी है. घायलों को क्वेटा स्थित सिविल अस्पताल ले जाया गया है. इलाके में राहत एवं बचाव कार्य जारी है. टिप्पणियां मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विस्फोट इतना धमाकेदार था कि आसपास के घरों की खिड़की में लगे शीशे के परखच्चे उड़ गए. हालांकि अभी तक किसी भी आतकंवादी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. बलूचिस्तान बलूच राष्ट्रवादियों और इस्लामी चरमपंथियों के उग्रवाद का सामना कर रहा है.   मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विस्फोट इतना धमाकेदार था कि आसपास के घरों की खिड़की में लगे शीशे के परखच्चे उड़ गए. हालांकि अभी तक किसी भी आतकंवादी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. बलूचिस्तान बलूच राष्ट्रवादियों और इस्लामी चरमपंथियों के उग्रवाद का सामना कर रहा है.
संक्षिप्त सारांश: विस्फोट इतना धमाकेदार था कि आसपास के घरों के शीशे चकनाचूर हो गए अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है हादसे में घायल हुए लोगों का क्वेटा के सिविल अस्पताल में इलाज कराया जा रहा
23
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही ने 16 साल की लड़की दीक्षा शर्मा की जान ले ली है। रविवार को दीक्षा को निमोनिया की शिकायत के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार सुबह जब डॉक्टर राउंड पर आया तो दीक्षा की तबीयत बिगड़ने लगी और डॉक्टर ने उसे आईसीयू में शिफ्ट करने को कहा लेकिन सुपरिटेंडेंट डॉक्टर एलसी शर्मा ने दीक्षा के घरवालों को इसके लिए डॉक्टर से फोन कराने को कहा। इसके बाद डॉक्टर के फोन करने के बावजूद दीक्षा को आईसीयू में शिफ्ट नहीं किया गया। अस्पताल के डॉक्टर मानवाधिकार आयोग की बैठक में चले गए और 2 घंटे बाद इलाज के इंतजार में दीक्षा ने दम तोड़ दिया।टिप्पणियां उधर, राजस्थान के ही जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से एक तीन साल का बच्चा आईसीयू में है। तीन साल के आदित्य को Bronchopneumonia नाम की बीमारी थी। इस बीमारी के इलाज के चलते डॉक्टरो नें उसे उसके ब्लड ग्रुप से मैच नहीं करता हुआ बल्ड दे दिया और बच्चे की हालत बिगड़ गई। आदित्य नाम का यह बच्चा अभी भी आईसीयू में है लेकिन अब उसे खतरे से बाहर बताया जा रहा है। जोधपुर का उम्मेद अस्पताल तब सुर्खियों में आया था जब पिछले साल खराब फ्लुइड की वजह से 17 गर्भवती औरतों की मौत हो गई थी। उधर, राजस्थान के ही जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से एक तीन साल का बच्चा आईसीयू में है। तीन साल के आदित्य को Bronchopneumonia नाम की बीमारी थी। इस बीमारी के इलाज के चलते डॉक्टरो नें उसे उसके ब्लड ग्रुप से मैच नहीं करता हुआ बल्ड दे दिया और बच्चे की हालत बिगड़ गई। आदित्य नाम का यह बच्चा अभी भी आईसीयू में है लेकिन अब उसे खतरे से बाहर बताया जा रहा है। जोधपुर का उम्मेद अस्पताल तब सुर्खियों में आया था जब पिछले साल खराब फ्लुइड की वजह से 17 गर्भवती औरतों की मौत हो गई थी। आदित्य नाम का यह बच्चा अभी भी आईसीयू में है लेकिन अब उसे खतरे से बाहर बताया जा रहा है। जोधपुर का उम्मेद अस्पताल तब सुर्खियों में आया था जब पिछले साल खराब फ्लुइड की वजह से 17 गर्भवती औरतों की मौत हो गई थी।
सारांश: जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही ने 16 साल की लड़की दीक्षा शर्मा की जान ले ली है।
7
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: परगट सिंह ने भारत के मुख्य हॉकी कोच के रूप में माइकल नोब्स की नियुक्ति में अहम भूमिका अदा की थी लेकिन इसी पूर्व कप्तान ने कहा कि अब समय आ गया है कि नतीजे नहीं देने वाले इस ऑस्ट्रेलियाई कोच को ‘बाहर करने का आदेश’ दे देना चाहिए। परगट ने हॉकी इंडिया की तकनीकी समिति के अध्यक्ष के तौर पर नोब्स के चयन को तरजीह दी थी। उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह नतीजे देने में कामयाबी हासिल करते हैं तो उन्हें रुकना चाहिए, लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो अधिकारियों को उन्हें बाहर करने का आदेश देने में हिचकना नहीं चाहिए। अगर वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं तो उन्हें उनकी जिम्मेदारियों से तुंरत प्रभाव से हटा देना चाहिए।’’ अब तक दो साल के कार्यकाल में नोब्स भारतीय हॉकी का भाग्य बदलने में असफल रहे हैं। इस ऑस्ट्रेलियाई के नेतृत्व में आठ बार की चैम्पियन भारतीय टीम पिछले साल लंदन ओलिंपिक में निचले पायदान पर रही थी। नोब्स पर भारत को हॉलैंड के हेग में मई-जून 2014 में होने वाले विश्वकप के लिए क्वालीफाई कराने का दबाव बना हुआ है क्योंकि सरदार सिंह की कप्तानी वाली टीम पिछले महीने रोटरडम में एफआईएच विश्वलीग सेमी-फाइनल में सीधे प्रवेश पाने में असफल रही थी। परगट अब तकनीकी समिति का हिस्सा नहीं हैं, उन्होंने हाकी इंडिया के काम करने के तरीके की भी आलोचना की।टिप्पणियां अगर भारतीय टीम 24 अगस्त से 1 सितंबर तक मलेशिया के इपोह में होने वाले आठ देशों के एशिया कप में जीत दर्ज कर विश्वकप के लिए क्वालीफाई करने में असफल रहते हैं तो नोब्स को उनके पद से बख्रास्त किया जा सकता है। परगट ने कहा, ‘‘उन्हें (नोब्स) को पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपने पद के दो साल पूरे कर लिए हैं लेकिन क्या हॉकी इंडिया कभी भी उनके प्रदर्शन का आकलन करती है? क्या महासंघ खिलाड़ियों से या अन्य कोचों से उनके काम करने के स्टाइल पर प्रतिक्रिया लेता है।’’ वर्ष 1992 बार्सिलोना ओलिंपिक और 1996 अटलांटा ओलिंपिक में भारत की कप्तानी करने वाले परगट ने कहा, ‘‘हॉकी इंडिया को उनके प्रदर्शन की हर साल समीक्षा करने की जरूरत है। अगर किसी को लंबे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह बिना परिणाम दिए अपना कार्यकाल पूरा कर सकता है।’’ परगट ने हॉकी इंडिया की तकनीकी समिति के अध्यक्ष के तौर पर नोब्स के चयन को तरजीह दी थी। उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह नतीजे देने में कामयाबी हासिल करते हैं तो उन्हें रुकना चाहिए, लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो अधिकारियों को उन्हें बाहर करने का आदेश देने में हिचकना नहीं चाहिए। अगर वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं तो उन्हें उनकी जिम्मेदारियों से तुंरत प्रभाव से हटा देना चाहिए।’’ अब तक दो साल के कार्यकाल में नोब्स भारतीय हॉकी का भाग्य बदलने में असफल रहे हैं। इस ऑस्ट्रेलियाई के नेतृत्व में आठ बार की चैम्पियन भारतीय टीम पिछले साल लंदन ओलिंपिक में निचले पायदान पर रही थी। नोब्स पर भारत को हॉलैंड के हेग में मई-जून 2014 में होने वाले विश्वकप के लिए क्वालीफाई कराने का दबाव बना हुआ है क्योंकि सरदार सिंह की कप्तानी वाली टीम पिछले महीने रोटरडम में एफआईएच विश्वलीग सेमी-फाइनल में सीधे प्रवेश पाने में असफल रही थी। परगट अब तकनीकी समिति का हिस्सा नहीं हैं, उन्होंने हाकी इंडिया के काम करने के तरीके की भी आलोचना की।टिप्पणियां अगर भारतीय टीम 24 अगस्त से 1 सितंबर तक मलेशिया के इपोह में होने वाले आठ देशों के एशिया कप में जीत दर्ज कर विश्वकप के लिए क्वालीफाई करने में असफल रहते हैं तो नोब्स को उनके पद से बख्रास्त किया जा सकता है। परगट ने कहा, ‘‘उन्हें (नोब्स) को पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपने पद के दो साल पूरे कर लिए हैं लेकिन क्या हॉकी इंडिया कभी भी उनके प्रदर्शन का आकलन करती है? क्या महासंघ खिलाड़ियों से या अन्य कोचों से उनके काम करने के स्टाइल पर प्रतिक्रिया लेता है।’’ वर्ष 1992 बार्सिलोना ओलिंपिक और 1996 अटलांटा ओलिंपिक में भारत की कप्तानी करने वाले परगट ने कहा, ‘‘हॉकी इंडिया को उनके प्रदर्शन की हर साल समीक्षा करने की जरूरत है। अगर किसी को लंबे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह बिना परिणाम दिए अपना कार्यकाल पूरा कर सकता है।’’ अब तक दो साल के कार्यकाल में नोब्स भारतीय हॉकी का भाग्य बदलने में असफल रहे हैं। इस ऑस्ट्रेलियाई के नेतृत्व में आठ बार की चैम्पियन भारतीय टीम पिछले साल लंदन ओलिंपिक में निचले पायदान पर रही थी। नोब्स पर भारत को हॉलैंड के हेग में मई-जून 2014 में होने वाले विश्वकप के लिए क्वालीफाई कराने का दबाव बना हुआ है क्योंकि सरदार सिंह की कप्तानी वाली टीम पिछले महीने रोटरडम में एफआईएच विश्वलीग सेमी-फाइनल में सीधे प्रवेश पाने में असफल रही थी। परगट अब तकनीकी समिति का हिस्सा नहीं हैं, उन्होंने हाकी इंडिया के काम करने के तरीके की भी आलोचना की।टिप्पणियां अगर भारतीय टीम 24 अगस्त से 1 सितंबर तक मलेशिया के इपोह में होने वाले आठ देशों के एशिया कप में जीत दर्ज कर विश्वकप के लिए क्वालीफाई करने में असफल रहते हैं तो नोब्स को उनके पद से बख्रास्त किया जा सकता है। परगट ने कहा, ‘‘उन्हें (नोब्स) को पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपने पद के दो साल पूरे कर लिए हैं लेकिन क्या हॉकी इंडिया कभी भी उनके प्रदर्शन का आकलन करती है? क्या महासंघ खिलाड़ियों से या अन्य कोचों से उनके काम करने के स्टाइल पर प्रतिक्रिया लेता है।’’ वर्ष 1992 बार्सिलोना ओलिंपिक और 1996 अटलांटा ओलिंपिक में भारत की कप्तानी करने वाले परगट ने कहा, ‘‘हॉकी इंडिया को उनके प्रदर्शन की हर साल समीक्षा करने की जरूरत है। अगर किसी को लंबे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह बिना परिणाम दिए अपना कार्यकाल पूरा कर सकता है।’’ नोब्स पर भारत को हॉलैंड के हेग में मई-जून 2014 में होने वाले विश्वकप के लिए क्वालीफाई कराने का दबाव बना हुआ है क्योंकि सरदार सिंह की कप्तानी वाली टीम पिछले महीने रोटरडम में एफआईएच विश्वलीग सेमी-फाइनल में सीधे प्रवेश पाने में असफल रही थी। परगट अब तकनीकी समिति का हिस्सा नहीं हैं, उन्होंने हाकी इंडिया के काम करने के तरीके की भी आलोचना की।टिप्पणियां अगर भारतीय टीम 24 अगस्त से 1 सितंबर तक मलेशिया के इपोह में होने वाले आठ देशों के एशिया कप में जीत दर्ज कर विश्वकप के लिए क्वालीफाई करने में असफल रहते हैं तो नोब्स को उनके पद से बख्रास्त किया जा सकता है। परगट ने कहा, ‘‘उन्हें (नोब्स) को पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपने पद के दो साल पूरे कर लिए हैं लेकिन क्या हॉकी इंडिया कभी भी उनके प्रदर्शन का आकलन करती है? क्या महासंघ खिलाड़ियों से या अन्य कोचों से उनके काम करने के स्टाइल पर प्रतिक्रिया लेता है।’’ वर्ष 1992 बार्सिलोना ओलिंपिक और 1996 अटलांटा ओलिंपिक में भारत की कप्तानी करने वाले परगट ने कहा, ‘‘हॉकी इंडिया को उनके प्रदर्शन की हर साल समीक्षा करने की जरूरत है। अगर किसी को लंबे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह बिना परिणाम दिए अपना कार्यकाल पूरा कर सकता है।’’ परगट अब तकनीकी समिति का हिस्सा नहीं हैं, उन्होंने हाकी इंडिया के काम करने के तरीके की भी आलोचना की।टिप्पणियां अगर भारतीय टीम 24 अगस्त से 1 सितंबर तक मलेशिया के इपोह में होने वाले आठ देशों के एशिया कप में जीत दर्ज कर विश्वकप के लिए क्वालीफाई करने में असफल रहते हैं तो नोब्स को उनके पद से बख्रास्त किया जा सकता है। परगट ने कहा, ‘‘उन्हें (नोब्स) को पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपने पद के दो साल पूरे कर लिए हैं लेकिन क्या हॉकी इंडिया कभी भी उनके प्रदर्शन का आकलन करती है? क्या महासंघ खिलाड़ियों से या अन्य कोचों से उनके काम करने के स्टाइल पर प्रतिक्रिया लेता है।’’ वर्ष 1992 बार्सिलोना ओलिंपिक और 1996 अटलांटा ओलिंपिक में भारत की कप्तानी करने वाले परगट ने कहा, ‘‘हॉकी इंडिया को उनके प्रदर्शन की हर साल समीक्षा करने की जरूरत है। अगर किसी को लंबे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह बिना परिणाम दिए अपना कार्यकाल पूरा कर सकता है।’’ अगर भारतीय टीम 24 अगस्त से 1 सितंबर तक मलेशिया के इपोह में होने वाले आठ देशों के एशिया कप में जीत दर्ज कर विश्वकप के लिए क्वालीफाई करने में असफल रहते हैं तो नोब्स को उनके पद से बख्रास्त किया जा सकता है। परगट ने कहा, ‘‘उन्हें (नोब्स) को पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपने पद के दो साल पूरे कर लिए हैं लेकिन क्या हॉकी इंडिया कभी भी उनके प्रदर्शन का आकलन करती है? क्या महासंघ खिलाड़ियों से या अन्य कोचों से उनके काम करने के स्टाइल पर प्रतिक्रिया लेता है।’’ वर्ष 1992 बार्सिलोना ओलिंपिक और 1996 अटलांटा ओलिंपिक में भारत की कप्तानी करने वाले परगट ने कहा, ‘‘हॉकी इंडिया को उनके प्रदर्शन की हर साल समीक्षा करने की जरूरत है। अगर किसी को लंबे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह बिना परिणाम दिए अपना कार्यकाल पूरा कर सकता है।’’ वर्ष 1992 बार्सिलोना ओलिंपिक और 1996 अटलांटा ओलिंपिक में भारत की कप्तानी करने वाले परगट ने कहा, ‘‘हॉकी इंडिया को उनके प्रदर्शन की हर साल समीक्षा करने की जरूरत है। अगर किसी को लंबे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह बिना परिणाम दिए अपना कार्यकाल पूरा कर सकता है।’’
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: परगट सिंह ने भारत के मुख्य हॉकी कोच के रूप में माइकल नोब्स की नियुक्ति में अहम भूमिका अदा की थी लेकिन इसी पूर्व कप्तान ने कहा कि अब समय आ गया है कि नतीजे नहीं देने वाले इस ऑस्ट्रेलियाई कोच को ‘बाहर करने का आदेश’ दे देना चाहिए।
11
['hin']
एक सारांश बनाओ: साल के पहले ग्रैंडस्‍लैम ऑस्ट्रेलियाई ओपन के दूसरे दौर में बाहर होने के बाद पहली बार किसी टूर्नामेंट में खेल रहे नोवाक जोकोविच को अकापुल्को टेनिस टूर्नामेंट के पहले दौर में जीत दर्ज करने के लिए अच्‍छा खासा संघर्ष करना पड़ा.  जोकोविच ने सर्बिया के मार्टिन क्लिजान को भले ही सीधे सेटों में 6-3, 7-6 से हराया लेकिन दूसरे सेट में जीत हासिल करने के लिए उन्‍हें एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा. उन्होंने टाईब्रेकर में इसे 7-4 से अपने नाम किया.टिप्पणियां मैच के बाद जोकोविच ने कहा, ‘यह आसान मैच नहीं था. यहां मुकाबला काफी कड़ा है और मेरा पहले दौर में ही ऐसे खिलाड़ी से मुकाबला था जिसे बड़े टूर्नामेंट में अच्छी टेनिस खेलने के लिये जाना जाता है.’ दुनिया के एक अन्य पूर्व नंबर एक खिलाड़ी राफेल नडाल ने हालांकि जर्मनी के मिशा जेवरेव को एक घंटे 17 मिनट तक चले मैच में 6-4, 6-3 से पराजित किया. ऑस्ट्रेलिया के बर्नार्ड टोमिच अमेरिका के डोनाल्ड यंग के खिलाफ पहला सेट गंवाने के बाद तेज गर्मी के कारण हट गए. क्रोएशिया के तीसरी वरीयता प्राप्त मारिन सिलिच ने उक्रेन के अलेक्सांद्र दोलगोपोलोव को 6-3, 4-6, 6-0 से हराया. ऑस्ट्रेलिया के निक किर्गियोस को भी तीन सेट तक जूझना पड़ा. इस छठी वरीय खिलाड़ी ने इस्राइल के डुडी सेला को 3-6, 6-3, 6-3 से हराया. ऑस्ट्रिया के चौथी वरीय डोमिनिक थीम ने फ्रांस के जाइल्स सिमोन को 7-6, 6-3 से शिकस्त दी. महिलाओं के वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त क्रोएशियाई मिरजाना लुसिक बारोनी ने स्विस खिलाड़ी बेलिंडा बेनसिच को 7-5, 6-4 से हराया. कनाडा की इयुगेनी बूचार्ड को हालांकि पहले दौर में हार का सामना करना पड़ा. उन्हें क्रोएशिया की अजला टोमालजानोविच ने 7-6, 6-1 से पराजित किया. मैच के बाद जोकोविच ने कहा, ‘यह आसान मैच नहीं था. यहां मुकाबला काफी कड़ा है और मेरा पहले दौर में ही ऐसे खिलाड़ी से मुकाबला था जिसे बड़े टूर्नामेंट में अच्छी टेनिस खेलने के लिये जाना जाता है.’ दुनिया के एक अन्य पूर्व नंबर एक खिलाड़ी राफेल नडाल ने हालांकि जर्मनी के मिशा जेवरेव को एक घंटे 17 मिनट तक चले मैच में 6-4, 6-3 से पराजित किया. ऑस्ट्रेलिया के बर्नार्ड टोमिच अमेरिका के डोनाल्ड यंग के खिलाफ पहला सेट गंवाने के बाद तेज गर्मी के कारण हट गए. क्रोएशिया के तीसरी वरीयता प्राप्त मारिन सिलिच ने उक्रेन के अलेक्सांद्र दोलगोपोलोव को 6-3, 4-6, 6-0 से हराया. ऑस्ट्रेलिया के निक किर्गियोस को भी तीन सेट तक जूझना पड़ा. इस छठी वरीय खिलाड़ी ने इस्राइल के डुडी सेला को 3-6, 6-3, 6-3 से हराया. ऑस्ट्रिया के चौथी वरीय डोमिनिक थीम ने फ्रांस के जाइल्स सिमोन को 7-6, 6-3 से शिकस्त दी. महिलाओं के वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त क्रोएशियाई मिरजाना लुसिक बारोनी ने स्विस खिलाड़ी बेलिंडा बेनसिच को 7-5, 6-4 से हराया. कनाडा की इयुगेनी बूचार्ड को हालांकि पहले दौर में हार का सामना करना पड़ा. उन्हें क्रोएशिया की अजला टोमालजानोविच ने 7-6, 6-1 से पराजित किया. महिलाओं के वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त क्रोएशियाई मिरजाना लुसिक बारोनी ने स्विस खिलाड़ी बेलिंडा बेनसिच को 7-5, 6-4 से हराया. कनाडा की इयुगेनी बूचार्ड को हालांकि पहले दौर में हार का सामना करना पड़ा. उन्हें क्रोएशिया की अजला टोमालजानोविच ने 7-6, 6-1 से पराजित किया.
संक्षिप्त पाठ: सर्बिया के मार्टिन क्लिजान को 6-3, 7-6 से हराया स्‍पेन के नडाल ने जर्मन खिलाड़ी पर जीत दर्ज की महिला वर्ग में कनाडा की इयुगेनी बूचार्ड बाहर हुईं
30
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) की सक्रिय राजनीति में आने के फैसले की तारीफ की है. इतना ही नहीं शिवसेना (Shiv Sena) ने प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से तुलना की है. शिवसेना (Shiv Sena) के नेता मनीष कयांदे ने कहा कि आज लोग उनमें इंदिरा गांधी की छवि देखते हैं. प्रियंका (Priyanka Gandhi) के सक्रिया राजनीति में आने से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को फायदा होगा. कयांदे ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि कांग्रेस को प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) के अच्छे व्यक्तित्तव का फायदा जरूर मिलेगा. वह मतदाताओं में को अपने पक्ष में कर सकती है. उनकी यही अच्छाई उनकी दादी (इंदिरा गांधी ) से मेल खाती है. पहले भी प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) की वजह से कांग्रेस को कई चुनाव में बड़ा फायदा पहुंचा है. उन्होंने कहा कि प्रियंका युवाओं के बीच सबसे ज्यादा प्रचलित हैं.    जब उनसे पूछा गया था कि क्या प्रियंका गांधी चुनाव भी लड़ेंगी तो उन्होंने कहा, 'चुनाव लड़ना प्रियंका पर है. हम कहीं पर भी बैकफुट पर नहीं खेलेंगे. हम राजनीति जनता और विकास के लिए करते हैं. हमारे इस फैसले से यूपी में नई तरह की राजनीति आएगी और इससे यूपी में नया उत्साह देखा जाएगा. हम मायावती जी और अखिलेश जी के साथ कहीं भी सहयोग करने को तैयार हैं. कांग्रेस पार्टी की जगह बनाने का काम हमारा है. मुझे खुशी है कि मेरी बहन जो बहुत कर्मठ है कि वह अब वह मेरे साथ काम करेंगी. ज्योतिरादित्य भी बहुत डायनेमिक नेता है. यूपी के युवाओं से अनुरोध है कि आपने बीजेपी के पीछे अपना समय खराब किया है. उन्होंने आपको बर्बाद दिया. हम आपको नया डायरेक्शन देंगे. हम यूपी नंबर वन बनाएंगे. हमारे इस फैसले से भाजपा घबराई हुई है.' बता दें, लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने एक बड़ा दांव चला है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बहन और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा भी सक्रिय राजनीति में उतर गई हैं. कांग्रेस ने उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया है, उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई है. वे फरवरी के पहले सप्ताह से जिम्मेदारी संभालेंगी. इसके अलावा कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को तुरंत प्रभाव से महासचिव नियुक्त करके पश्चिमी यूपी की कमान सौंपी गई है. कांग्रेस ने इसका ऐलान बुधवार को किया था. पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल को संगठन महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है जो पहले की तरह कर्नाटक के प्रभारी की भूमिका निभाते रहेंगे. संगठन महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे अशोक गहलोत के राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने के बाद वेणुगोपाल की नियुक्ति की गई है. उत्तर प्रदेश के लिए प्रभारी-महासचिव की भूमिका निभा रहे गुलाम नबी आजाद को अब हरियाणा की जिम्मेदारी दी गयी है.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: प्रियंका गांधी को कांग्रेस ने दिया है पूर्वी यूपी प्रभार राहुल गांधी ने बुधवार को कहा - बहन को मिशन को भेजा है बीजेपी ने कांग्रेस के फैसले पर जताई हैरानी
25
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: केरल के कन्नूर में लगातार जारी राजनैतिक हिंसा के हल ढूंढने की एक पहल की गई है. इस मुद्दे पर रविवार को एक ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई है जिसमें सीपीएम स्टेट सचिव कोडियारी बालाकृष्णन और  बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष कुमानाम राजशेखरन भी शामिल होंगे. यह भी पढ़ें- केरल में आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्याएं हो रही हैं, सीपीएम कर रही है गुंडागर्दी: दत्तात्रेय होसबोले क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर नज़र डालें तो 1991 से लेकर अब तक सिर्फ़ किन्नूर में 45 सीपीएम और 44 आरएसएस-बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है. इन सब के बीच एक हफ़्ते पहले मारे गए आरएसएस कार्यकर्ता राजेश के परिवार से मिलने वित्त मंत्री अरुण जेटली आज तिरुअनंतपुरम पहुंचेंगे.टिप्पणियां बीजेपी-आरएसएस का आरोप है कि ये हत्या सीपीएम के लोगों ने की है जबकि सीपीएम की तरफ़ से इन आरोपों के बेबुनियाद बताया गया है.  पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले ने केरल में हुई आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप सीपीएम पर लगाया है. होसबोले ने कहा कि पिछले 13 महीने में 14 आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या की गई हैं. उन्होंने मामले में राज्य सरकार पर आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने पर सवाल उठाया है. उन्होंने आरएसएस नेताओं की हत्या के पीछे सीपीएम का हाथ का दावा किया है. यह भी पढ़ें- केरल में आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्याएं हो रही हैं, सीपीएम कर रही है गुंडागर्दी: दत्तात्रेय होसबोले क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर नज़र डालें तो 1991 से लेकर अब तक सिर्फ़ किन्नूर में 45 सीपीएम और 44 आरएसएस-बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है. इन सब के बीच एक हफ़्ते पहले मारे गए आरएसएस कार्यकर्ता राजेश के परिवार से मिलने वित्त मंत्री अरुण जेटली आज तिरुअनंतपुरम पहुंचेंगे.टिप्पणियां बीजेपी-आरएसएस का आरोप है कि ये हत्या सीपीएम के लोगों ने की है जबकि सीपीएम की तरफ़ से इन आरोपों के बेबुनियाद बताया गया है.  पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले ने केरल में हुई आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप सीपीएम पर लगाया है. होसबोले ने कहा कि पिछले 13 महीने में 14 आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या की गई हैं. उन्होंने मामले में राज्य सरकार पर आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने पर सवाल उठाया है. उन्होंने आरएसएस नेताओं की हत्या के पीछे सीपीएम का हाथ का दावा किया है. क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर नज़र डालें तो 1991 से लेकर अब तक सिर्फ़ किन्नूर में 45 सीपीएम और 44 आरएसएस-बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है. इन सब के बीच एक हफ़्ते पहले मारे गए आरएसएस कार्यकर्ता राजेश के परिवार से मिलने वित्त मंत्री अरुण जेटली आज तिरुअनंतपुरम पहुंचेंगे.टिप्पणियां बीजेपी-आरएसएस का आरोप है कि ये हत्या सीपीएम के लोगों ने की है जबकि सीपीएम की तरफ़ से इन आरोपों के बेबुनियाद बताया गया है.  पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले ने केरल में हुई आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप सीपीएम पर लगाया है. होसबोले ने कहा कि पिछले 13 महीने में 14 आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या की गई हैं. उन्होंने मामले में राज्य सरकार पर आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने पर सवाल उठाया है. उन्होंने आरएसएस नेताओं की हत्या के पीछे सीपीएम का हाथ का दावा किया है. बीजेपी-आरएसएस का आरोप है कि ये हत्या सीपीएम के लोगों ने की है जबकि सीपीएम की तरफ़ से इन आरोपों के बेबुनियाद बताया गया है.  पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले ने केरल में हुई आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप सीपीएम पर लगाया है. होसबोले ने कहा कि पिछले 13 महीने में 14 आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या की गई हैं. उन्होंने मामले में राज्य सरकार पर आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने पर सवाल उठाया है. उन्होंने आरएसएस नेताओं की हत्या के पीछे सीपीएम का हाथ का दावा किया है. बीजेपी-आरएसएस का आरोप है कि ये हत्या सीपीएम के लोगों ने की है जबकि सीपीएम की तरफ़ से इन आरोपों के बेबुनियाद बताया गया है.  पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले ने केरल में हुई आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप सीपीएम पर लगाया है. होसबोले ने कहा कि पिछले 13 महीने में 14 आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या की गई हैं. उन्होंने मामले में राज्य सरकार पर आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने पर सवाल उठाया है. उन्होंने आरएसएस नेताओं की हत्या के पीछे सीपीएम का हाथ का दावा किया है.
यह एक सारांश है: केरल में रविवार को एक ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई है बीजेपी और सीपीएम के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे राजनैतिक हिंसा के हल ढूंढने की एक पहल के तौर पर बैठक
16
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चम्बल अंचल की पहचान बागी तेवरों के कारण पूरी दुनिया में है। डकैतों का 'साम्राज्य' भले ही अब इस इलाके से खत्म हो गया हो, मगर यहां के लोगों के बगावती तेवर अब भी बरकरार हैं। इस बार महिलाओं ने बागी तेवर अपनाते हुए बेटियों को बचाने की मुहिम छेड़ दी है। मध्य प्रदेश के चम्बल इलाके के मुरैना तथा भिंड जिले में बेटियों के जन्म को वर्षों से अभिशाप माना जाता रहा है। यहां आलम यह है कि बेटियों का या तो जन्म से पहले गर्भपात करा दिया जाता है या उन्हें जन्म के बाद मार दिया जाता है। यही कारण है कि यहां बेटियों की संख्या का अनुपात राज्य के अन्य जिलों के मुकाबले सबसे कम है। राज्य में शिशु लिंगानुपात 1000 बालकों पर 912 लड़कियां हैं, तो मुरैना में यह आंकड़ा 825 तथा भिंड में 835 है। यह स्थिति हर किसी को चिंता में डाल देने वाली है। सरकार की ओर से जारी कोशिशें भी अपना असर नहीं दिखा पाई हैं। बालिकाओं की कम होती संख्या से चिंतित महिलाएं ही बेटियों को बचाने के लिए आगे आई हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर महिलाओं को जागरूक कर रही हैं, वे गीत-संगीत व नाटकों के जरिए महिलाओं को बेटी का महत्व बता रही हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 'मुट्ठी बांधो बहना' नाम से भिंड व मुरैना जिले में जनजागृति लाने वाले दल बनाए गए हैं। ये दल महिलाओं को बता रहे हैं कि बालिकाएं रहेंगी तो सृष्टि बचेगी। वे महिलाओं को संदेश दे रही हैं कि किसी भी सूरत में बेटियों को न मारें और न ही ऐसा करने वालों का साथ दें। अगर ऐसा करने को कोई मजबूर करता है, उसके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराएं। भिंड जिले के सिंघवारी गांव की बुजुर्ग महिला नारायणी बताती हैं कि किसी दौर में यहां बेटियों को जन्म के साथ ही मारने की कोशिश शुरू हो जाती थी। नवजात के मुंह में तम्बाकू देकर मार दिया जाता था। जब ऐसा करने में सफलता नहीं मिलती थी तो उसकी गर्दन दबा दी जाती थी। वह बताती हैं कि पहले से यह प्रवृत्ति कम तो हुई है, मगर पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। बेटियों को मारने की प्रवृत्ति का खुलासा अभी हाल ही में भिंड के खरउआ गांव में हुआ, जहां पूर्व सरपंच ने कथित तौर पर अपनी बेटी की हत्या कर दी। महिला बाल विकास के संयुक्त संचालक सुरेश तोमर बताते हैं कि बेटी की हत्या करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वह आगे बताते हैं कि सरकार की 'लाडली लक्ष्मी' जैसी योजना बेटियों को समस्या मानने वालों की सोच में बदलाव लाने में मददगार बन रही है। महिलाओं में जागृति लाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के भिंड व मुरैना में दल बनाए गए हैं। ये दल जब भिंड जिले के सिंघवारी गांव में नाटक प्रस्तुत कर रहे थे तो महिलाएं व बच्चियां इसके गीत-संगीत से प्रभावित नजर आईं। साथ ही उन्होंने बेटियों को बचाने का संकल्प भी लिया, मगर गांव के पुरुष वर्ग के लिए ये महज मनोरंजन से ज्यादा कुछ नहीं थे।  दल की सदस्य भी यह बात मानती हैं कि उन्हें कई दफा विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, मगर आखिर में वे अपना संदेश पहुंचाने मे सफल हो ही जाती हैं। वे हर रोज दो गांवों में जाकर गीत-संगीत के जरिए महिलाओं को उनका अधिकार भी बता रही हैं और बेटियों को बचाने का संदेश भी दे रही हैं।
सारांश: चम्बल में महिलाओं ने बागी तेवर अपनाते हुए बेटियों को बचाने की मुहिम छेड़ दी है। यहां बेटियों को अभिशाप माना जाता है।
31
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: इस बैठक में आरएसएस ने कहा कि शिक्षा आचार्य केंद्रित, अध्ययन केंद्रित और आनंद केंद्रित होनी चाहिये। संघ ये भी चाहता है कि पूर्व सरकारों की ओर से आज़ादी के बाद से अब तक की गई 'गलतियों' को दुरुस्‍त किया जाये। कार्यक्रम में शामिल हुये वक्ता और वाजपेयी सरकार के वक्त मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सचिव रह चुके जे एस राजपूत का कहना था कि नैतिक और चारित्रिक विकास के लिये पाठ्यक्रम में तुरंत बदलाव किये जाने की ज़रूरत है। ये बैठक शिक्षा नीति पर चर्चा के लिये थी लेकिन राजपूत ने कहा कि शिक्षा नीति तो 10 से 15 सालों में बनती है लेकिन पाठ्यक्रम हर 5 साल में बदलना चाहिये।टिप्पणियां उधर वामपंथी और कांग्रेसी, सरकार पर नये सिरे से शिक्षा का भगवाकरण का आरोप लगा रहे हैं। पारंपरिक मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में शिक्षा मंत्री के आरएसएस के साथ हुये इस संवाद को लेकर कई लोगों ने आलोचना की। लेकिन जावड़ेकर ने कहा कि उनके दरवाज़े हर किसी के लिये खुले हैं और वह शिक्षा के मामले में सबसे संवाद और विमर्श करने को तैयार हैं।   हाल में हुये कैबिनेट फेरबदल में स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्री के पद से हटाये जाने को लेकर कई अनुमान लगाये गये जिसमें एक कयास ये भी था कि क्या उन्हें आरएसएस के दबाव में हटाया गया। अब नई शिक्षा नीति तैयार करने के सिलसिले में संघ के साथ हुई इस बैठक के मद्देनज़र ये सवाल अहम रहेगा कि शिक्षा नीति पर संघ की कितनी छाप दिखती है। उधर वामपंथी और कांग्रेसी, सरकार पर नये सिरे से शिक्षा का भगवाकरण का आरोप लगा रहे हैं। पारंपरिक मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में शिक्षा मंत्री के आरएसएस के साथ हुये इस संवाद को लेकर कई लोगों ने आलोचना की। लेकिन जावड़ेकर ने कहा कि उनके दरवाज़े हर किसी के लिये खुले हैं और वह शिक्षा के मामले में सबसे संवाद और विमर्श करने को तैयार हैं।   हाल में हुये कैबिनेट फेरबदल में स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्री के पद से हटाये जाने को लेकर कई अनुमान लगाये गये जिसमें एक कयास ये भी था कि क्या उन्हें आरएसएस के दबाव में हटाया गया। अब नई शिक्षा नीति तैयार करने के सिलसिले में संघ के साथ हुई इस बैठक के मद्देनज़र ये सवाल अहम रहेगा कि शिक्षा नीति पर संघ की कितनी छाप दिखती है। हाल में हुये कैबिनेट फेरबदल में स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्री के पद से हटाये जाने को लेकर कई अनुमान लगाये गये जिसमें एक कयास ये भी था कि क्या उन्हें आरएसएस के दबाव में हटाया गया। अब नई शिक्षा नीति तैयार करने के सिलसिले में संघ के साथ हुई इस बैठक के मद्देनज़र ये सवाल अहम रहेगा कि शिक्षा नीति पर संघ की कितनी छाप दिखती है।
संक्षिप्त सारांश: आरएसएस का शिक्षा पद्धति के भारतीयकरण पर ज़ोर स्‍वतंत्र शिक्षा आयोग बनाने की मांग शिक्षक बनने के लिए पांच साल की अनिर्वाय ट्रेनिंग
0
['hin']
एक सारांश बनाओ: कई विकसित देशों में बेरोजगारी की दर धीरे-धीरे घट रही है। 2008 की वैश्विक मंदी के बाद संभवत: पहली बार बेरोजगारी का आंकड़ा नीचे आ रहा है। पेरिस के आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के ताजा आकड़ों के अनुसार फरवरी में क्षेत्र में बेरोजगारी की दर घटकर 8.2 प्रतिशत पर आ गई है। यह लगातार चौथा माह है जब बेरोजगारी का आंकड़ा नीचे आया है। ओईसीडी विकसित औद्योगिक देशों का समूह है और इसके सदस्यों में अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, और फ्रांस जैसे 20 से अधिक औद्योगिक देश शामिल हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में ओईसीडी के देशों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत की है। जनवरी में ओईसीडी क्षेत्र में बेरोजगारी की दर 8.3 प्रतिशत रही थी। पूरे साल के दौरान इस क्षेत्र की बेरोजगारी की दर लगभग 8.5 प्रतिशत रही है। यूरो क्षेत्र में बेरोजगारी की दर दिसंबर, 2009 के बाद पहली बार एक अंक यानी 9.9 प्रतिशत पर आ गई है। यूरो क्षेत्र के देशों में एक ही मुद्रा यूरो का इस्तेमाल होता है।
कई विकसित देशों में बेरोजगारी की दर धीरे-धीरे घट रही है। 2008 की मंदी के बाद संभवत: पहली बार बेरोजगारी का आंकड़ा नीचे आ रहा है।
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['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज न्यायमूर्ति पी सदाशिवम को देश के 40वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति सदाशिवम (64) ने न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर का स्थान लिया है, जिन्होंने नौ महीने तक प्रधान न्यायाधीश के पद पर अपनी सेवाएं दीं। राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली, राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, भाकपा नेता डी राजा और कई केंद्रीय मंत्री शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थे। अगस्त, 2007 में न्यायमूर्ति सदाशिवम को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था और वह प्रधान न्यायाधीश के पद पर 26 अप्रैल, 2014 तक कार्यरत रहेंगे। न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर की तरह न्यायमूर्ति सदाशिवम भी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कोलेजियम व्यवस्था को खत्म करने के विरोध में हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया है कि कोलेजियम व्यवस्था में कमियां हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। न्यायमूर्ति सदाशिवम का जन्म 27 अप्रैल, 1949 को हुआ था। उन्होंने जुलाई, 1973 में मद्रास में बतौर वकील पंजीकरण करवाया और जनवरी, 1996 में मद्रास उच्च न्यायालय के स्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। इसके बाद अप्रैल, 2007 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया। प्रधान न्यायाधीश के तौर पर अपनी योजना के बारे में उन्होंने गुरुवार को कहा था, मामलों के निपटारे में विलंब एक बड़ा मुद्दा है। न्याय की गुणवत्ता और मात्रा में इजाफा कर इस परेशानी से उबरा जा सकता है। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा कि वह दलीलों और लिखित बयानों को जमा कराने की समयसीमा तय करने का प्रयास करेंगे ताकि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम किया जा सके । न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कई बड़े फैसले दिए हैं, जिनमें मुंबई विस्फोटों का मामला और पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। न्यायमूर्ति सदाशिवम (64) ने न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर का स्थान लिया है, जिन्होंने नौ महीने तक प्रधान न्यायाधीश के पद पर अपनी सेवाएं दीं। राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली, राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, भाकपा नेता डी राजा और कई केंद्रीय मंत्री शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थे। अगस्त, 2007 में न्यायमूर्ति सदाशिवम को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था और वह प्रधान न्यायाधीश के पद पर 26 अप्रैल, 2014 तक कार्यरत रहेंगे। न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर की तरह न्यायमूर्ति सदाशिवम भी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कोलेजियम व्यवस्था को खत्म करने के विरोध में हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया है कि कोलेजियम व्यवस्था में कमियां हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। न्यायमूर्ति सदाशिवम का जन्म 27 अप्रैल, 1949 को हुआ था। उन्होंने जुलाई, 1973 में मद्रास में बतौर वकील पंजीकरण करवाया और जनवरी, 1996 में मद्रास उच्च न्यायालय के स्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। इसके बाद अप्रैल, 2007 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया। प्रधान न्यायाधीश के तौर पर अपनी योजना के बारे में उन्होंने गुरुवार को कहा था, मामलों के निपटारे में विलंब एक बड़ा मुद्दा है। न्याय की गुणवत्ता और मात्रा में इजाफा कर इस परेशानी से उबरा जा सकता है। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा कि वह दलीलों और लिखित बयानों को जमा कराने की समयसीमा तय करने का प्रयास करेंगे ताकि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम किया जा सके । न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कई बड़े फैसले दिए हैं, जिनमें मुंबई विस्फोटों का मामला और पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली, राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, भाकपा नेता डी राजा और कई केंद्रीय मंत्री शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थे। अगस्त, 2007 में न्यायमूर्ति सदाशिवम को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था और वह प्रधान न्यायाधीश के पद पर 26 अप्रैल, 2014 तक कार्यरत रहेंगे। न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर की तरह न्यायमूर्ति सदाशिवम भी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कोलेजियम व्यवस्था को खत्म करने के विरोध में हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया है कि कोलेजियम व्यवस्था में कमियां हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। न्यायमूर्ति सदाशिवम का जन्म 27 अप्रैल, 1949 को हुआ था। उन्होंने जुलाई, 1973 में मद्रास में बतौर वकील पंजीकरण करवाया और जनवरी, 1996 में मद्रास उच्च न्यायालय के स्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। इसके बाद अप्रैल, 2007 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया। प्रधान न्यायाधीश के तौर पर अपनी योजना के बारे में उन्होंने गुरुवार को कहा था, मामलों के निपटारे में विलंब एक बड़ा मुद्दा है। न्याय की गुणवत्ता और मात्रा में इजाफा कर इस परेशानी से उबरा जा सकता है। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा कि वह दलीलों और लिखित बयानों को जमा कराने की समयसीमा तय करने का प्रयास करेंगे ताकि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम किया जा सके । न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कई बड़े फैसले दिए हैं, जिनमें मुंबई विस्फोटों का मामला और पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली, राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, भाकपा नेता डी राजा और कई केंद्रीय मंत्री शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थे। अगस्त, 2007 में न्यायमूर्ति सदाशिवम को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था और वह प्रधान न्यायाधीश के पद पर 26 अप्रैल, 2014 तक कार्यरत रहेंगे। न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर की तरह न्यायमूर्ति सदाशिवम भी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कोलेजियम व्यवस्था को खत्म करने के विरोध में हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया है कि कोलेजियम व्यवस्था में कमियां हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। न्यायमूर्ति सदाशिवम का जन्म 27 अप्रैल, 1949 को हुआ था। उन्होंने जुलाई, 1973 में मद्रास में बतौर वकील पंजीकरण करवाया और जनवरी, 1996 में मद्रास उच्च न्यायालय के स्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। इसके बाद अप्रैल, 2007 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया। प्रधान न्यायाधीश के तौर पर अपनी योजना के बारे में उन्होंने गुरुवार को कहा था, मामलों के निपटारे में विलंब एक बड़ा मुद्दा है। न्याय की गुणवत्ता और मात्रा में इजाफा कर इस परेशानी से उबरा जा सकता है। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा कि वह दलीलों और लिखित बयानों को जमा कराने की समयसीमा तय करने का प्रयास करेंगे ताकि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम किया जा सके । न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कई बड़े फैसले दिए हैं, जिनमें मुंबई विस्फोटों का मामला और पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। अगस्त, 2007 में न्यायमूर्ति सदाशिवम को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था और वह प्रधान न्यायाधीश के पद पर 26 अप्रैल, 2014 तक कार्यरत रहेंगे। न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर की तरह न्यायमूर्ति सदाशिवम भी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कोलेजियम व्यवस्था को खत्म करने के विरोध में हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया है कि कोलेजियम व्यवस्था में कमियां हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। न्यायमूर्ति सदाशिवम का जन्म 27 अप्रैल, 1949 को हुआ था। उन्होंने जुलाई, 1973 में मद्रास में बतौर वकील पंजीकरण करवाया और जनवरी, 1996 में मद्रास उच्च न्यायालय के स्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। इसके बाद अप्रैल, 2007 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया। प्रधान न्यायाधीश के तौर पर अपनी योजना के बारे में उन्होंने गुरुवार को कहा था, मामलों के निपटारे में विलंब एक बड़ा मुद्दा है। न्याय की गुणवत्ता और मात्रा में इजाफा कर इस परेशानी से उबरा जा सकता है। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा कि वह दलीलों और लिखित बयानों को जमा कराने की समयसीमा तय करने का प्रयास करेंगे ताकि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम किया जा सके । न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कई बड़े फैसले दिए हैं, जिनमें मुंबई विस्फोटों का मामला और पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर की तरह न्यायमूर्ति सदाशिवम भी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कोलेजियम व्यवस्था को खत्म करने के विरोध में हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया है कि कोलेजियम व्यवस्था में कमियां हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। न्यायमूर्ति सदाशिवम का जन्म 27 अप्रैल, 1949 को हुआ था। उन्होंने जुलाई, 1973 में मद्रास में बतौर वकील पंजीकरण करवाया और जनवरी, 1996 में मद्रास उच्च न्यायालय के स्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। इसके बाद अप्रैल, 2007 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया। प्रधान न्यायाधीश के तौर पर अपनी योजना के बारे में उन्होंने गुरुवार को कहा था, मामलों के निपटारे में विलंब एक बड़ा मुद्दा है। न्याय की गुणवत्ता और मात्रा में इजाफा कर इस परेशानी से उबरा जा सकता है। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा कि वह दलीलों और लिखित बयानों को जमा कराने की समयसीमा तय करने का प्रयास करेंगे ताकि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम किया जा सके । न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कई बड़े फैसले दिए हैं, जिनमें मुंबई विस्फोटों का मामला और पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया है कि कोलेजियम व्यवस्था में कमियां हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। न्यायमूर्ति सदाशिवम का जन्म 27 अप्रैल, 1949 को हुआ था। उन्होंने जुलाई, 1973 में मद्रास में बतौर वकील पंजीकरण करवाया और जनवरी, 1996 में मद्रास उच्च न्यायालय के स्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। इसके बाद अप्रैल, 2007 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया। प्रधान न्यायाधीश के तौर पर अपनी योजना के बारे में उन्होंने गुरुवार को कहा था, मामलों के निपटारे में विलंब एक बड़ा मुद्दा है। न्याय की गुणवत्ता और मात्रा में इजाफा कर इस परेशानी से उबरा जा सकता है। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा कि वह दलीलों और लिखित बयानों को जमा कराने की समयसीमा तय करने का प्रयास करेंगे ताकि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम किया जा सके । न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कई बड़े फैसले दिए हैं, जिनमें मुंबई विस्फोटों का मामला और पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। न्यायमूर्ति सदाशिवम का जन्म 27 अप्रैल, 1949 को हुआ था। उन्होंने जुलाई, 1973 में मद्रास में बतौर वकील पंजीकरण करवाया और जनवरी, 1996 में मद्रास उच्च न्यायालय के स्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। इसके बाद अप्रैल, 2007 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया। प्रधान न्यायाधीश के तौर पर अपनी योजना के बारे में उन्होंने गुरुवार को कहा था, मामलों के निपटारे में विलंब एक बड़ा मुद्दा है। न्याय की गुणवत्ता और मात्रा में इजाफा कर इस परेशानी से उबरा जा सकता है। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा कि वह दलीलों और लिखित बयानों को जमा कराने की समयसीमा तय करने का प्रयास करेंगे ताकि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम किया जा सके । न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कई बड़े फैसले दिए हैं, जिनमें मुंबई विस्फोटों का मामला और पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। प्रधान न्यायाधीश के तौर पर अपनी योजना के बारे में उन्होंने गुरुवार को कहा था, मामलों के निपटारे में विलंब एक बड़ा मुद्दा है। न्याय की गुणवत्ता और मात्रा में इजाफा कर इस परेशानी से उबरा जा सकता है। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा कि वह दलीलों और लिखित बयानों को जमा कराने की समयसीमा तय करने का प्रयास करेंगे ताकि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम किया जा सके । न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कई बड़े फैसले दिए हैं, जिनमें मुंबई विस्फोटों का मामला और पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कई बड़े फैसले दिए हैं, जिनमें मुंबई विस्फोटों का मामला और पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। न्यायमूर्ति सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीसी चौहान ने मुंबई विस्फोटों के मामले में अभिनेता संजय दत्त और कई दूसरे अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। इनकी पीठ ने 1993 के विस्फोटों के मामले में पाकिस्तान की इस बात के लिए भर्त्सना की थी कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने इन विस्फोटों को अंजाम देने वालों को प्रशिक्षण मुहैया कराया और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है।टिप्पणियां पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। पाकिस्तानी वैज्ञानिक चिश्ती की सजा को रद्द करने वाला फैसला भी न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था। न्यायमूर्ति सदाशिवम ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस से जुड़े तिहरे हत्याकांड के मामले में भी फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में दारा सिंह की सजा को बरकरार रखा था।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: न्यायमूर्ति सदाशिवम (64) ने न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर का स्थान लिया है, जिन्होंने नौ महीने तक प्रधान न्यायाधीश के पद पर अपनी सेवाएं दीं।
19
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: सेना में कुछ टैंकों के गोला-बारूद की कमी से जुड़ी खबरों को अफवाह करार देते हुए रक्षामंत्री ए के एंटनी ने कहा है कि ‘कमियां’ हमेशा लगी रहती हैं, लेकिन देश पहले से कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है।टिप्पणियां एंटनी ने कहा, ‘‘ये सब अफवाह है। मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि देश पूरी तरह तैयार है। अतीत के मुकाबले भारत आज कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है।’’ उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कुछ न कुछ कमियां हमेशा रहती हैं और यह भी प्रक्रिया का एक हिस्सा है। हम यह उम्मीद नहीं कर सकते कि 100 फीसदी जरूरतें पूरी हो जाएंगी और यह भी है कि सारी सेना मोर्चे पर तैनात नहीं है। सबकुछ बहुत विस्तृत है।’’ रक्षा मंत्री उन खबरों पर टिप्पणी कर रहे थे, जिनमें कहा गया था कि सेना के बख्तरबंद रेजीमेंट में सिर्फ चार दिनों का गोला-बारूद बचा हुआ है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे अपने पत्र में सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह ने भी गोला-बारूद की गंभीर कमी का उल्लेख किया गया था। सेना की तैयारियों के संदर्भ में रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने तीनों अंगों के प्रमुखों को बुलाया है। इस पर एंटनी ने कहा, ‘‘मैं इस बारे में फैसला करने वाला नहीं हूं। यह मामला स्थायी समिति से जुड़ा हुआ है।’’ एंटनी ने कहा, ‘‘ये सब अफवाह है। मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि देश पूरी तरह तैयार है। अतीत के मुकाबले भारत आज कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है।’’ उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कुछ न कुछ कमियां हमेशा रहती हैं और यह भी प्रक्रिया का एक हिस्सा है। हम यह उम्मीद नहीं कर सकते कि 100 फीसदी जरूरतें पूरी हो जाएंगी और यह भी है कि सारी सेना मोर्चे पर तैनात नहीं है। सबकुछ बहुत विस्तृत है।’’ रक्षा मंत्री उन खबरों पर टिप्पणी कर रहे थे, जिनमें कहा गया था कि सेना के बख्तरबंद रेजीमेंट में सिर्फ चार दिनों का गोला-बारूद बचा हुआ है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे अपने पत्र में सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह ने भी गोला-बारूद की गंभीर कमी का उल्लेख किया गया था। सेना की तैयारियों के संदर्भ में रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने तीनों अंगों के प्रमुखों को बुलाया है। इस पर एंटनी ने कहा, ‘‘मैं इस बारे में फैसला करने वाला नहीं हूं। यह मामला स्थायी समिति से जुड़ा हुआ है।’’ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे अपने पत्र में सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह ने भी गोला-बारूद की गंभीर कमी का उल्लेख किया गया था। सेना की तैयारियों के संदर्भ में रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने तीनों अंगों के प्रमुखों को बुलाया है। इस पर एंटनी ने कहा, ‘‘मैं इस बारे में फैसला करने वाला नहीं हूं। यह मामला स्थायी समिति से जुड़ा हुआ है।’’
यहाँ एक सारांश है:सेना में कुछ टैंकों के गोला-बारूद की कमी से जुड़ी खबरों को अफवाह करार देते हुए रक्षामंत्री ए के एंटनी ने कहा है कि ‘कमियां’ हमेशा लगी रहती हैं, लेकिन देश पहले से कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है।
17
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और उनके बालसखा विनोद कांबली ने 25 वर्ष पहले एक विश्वरिकॉर्ड बनाया था, लेकिन अब उसका कोई दस्तावेजी सबूत नहीं बचा है... मुंबई में 24 फरवरी, 1988 को सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने मिलकर हैरिस शील्ड टूर्नामेंट के दौरान 664 रनों की साझेदारी कर सारी दुनिया की नज़रें अपनी ओर खींच ली थीं, क्योंकि वह उस समय किसी भी तरह के क्रिकेट के लिए नया रिकॉर्ड था...टिप्पणियां इन रिकॉर्ड्स को संभालकर रखने की जिम्मेदारी मुंबई स्कूल स्पोर्ट्स एसोसिएशन की थी, लेकिन अब उसका कहना है कि वे 25 साल पुराने कागज़ात संभालकर नहीं रख सकती... दरअसल, असलियत यह है कि कुछ साल पहले ही उस मैच के स्कोरकार्ड को सफेद चीटियां खा चुकी हैं... हालांकि सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली का रिकॉर्ड वर्ष 2006 में हैदराबाद के मोहम्मद शाइबाज और मनोज कुमार ने 721 रनों की साझेदारी कर तोड़ दिया था, लेकिन बेहद सम्मानित क्रिकेटर सचिन से जुड़े इस रिकॉर्ड के बारे में जब एनडीटीवी ने मुंबई स्कूल स्पोर्ट्स एसोसिएशन के क्रिकेट सेक्रेटरी एचएस भोर से इस बाबत सवाल किया, तो उन्होंने टका-सा जवाब देते हुए कहा कि इससे पहले दूसरी कमेटी थी, और वैसे भी 25 साल पुराने दस्तावेजों को संभालकर नहीं रखा जा सकता... उल्लेखनीय है कि मुंबई के मैदानों से हमेशा महान क्रिकेटर निकलते रहे हैं... हैरिस शील्ड और जाइल्स शील्ड जैसे टूर्नामेंट न सिर्फ उदीयमान खिलाड़ियों को नए रिकॉर्ड बनाने का मौका देते रहे हैं, बल्कि यह एक शानदार प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराते रहे हैं... लेकिन ऐसे रिकॉर्ड्स को सहेजकर रखने में बरती गई लापरवाही दर्शाती है कि इन नन्हे सितारों की अनदेखी की जाती है, भले ही उन्हीं में से कुछ में आगे चलकर सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली बनने का माद्दा होता है... इन रिकॉर्ड्स को संभालकर रखने की जिम्मेदारी मुंबई स्कूल स्पोर्ट्स एसोसिएशन की थी, लेकिन अब उसका कहना है कि वे 25 साल पुराने कागज़ात संभालकर नहीं रख सकती... दरअसल, असलियत यह है कि कुछ साल पहले ही उस मैच के स्कोरकार्ड को सफेद चीटियां खा चुकी हैं... हालांकि सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली का रिकॉर्ड वर्ष 2006 में हैदराबाद के मोहम्मद शाइबाज और मनोज कुमार ने 721 रनों की साझेदारी कर तोड़ दिया था, लेकिन बेहद सम्मानित क्रिकेटर सचिन से जुड़े इस रिकॉर्ड के बारे में जब एनडीटीवी ने मुंबई स्कूल स्पोर्ट्स एसोसिएशन के क्रिकेट सेक्रेटरी एचएस भोर से इस बाबत सवाल किया, तो उन्होंने टका-सा जवाब देते हुए कहा कि इससे पहले दूसरी कमेटी थी, और वैसे भी 25 साल पुराने दस्तावेजों को संभालकर नहीं रखा जा सकता... उल्लेखनीय है कि मुंबई के मैदानों से हमेशा महान क्रिकेटर निकलते रहे हैं... हैरिस शील्ड और जाइल्स शील्ड जैसे टूर्नामेंट न सिर्फ उदीयमान खिलाड़ियों को नए रिकॉर्ड बनाने का मौका देते रहे हैं, बल्कि यह एक शानदार प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराते रहे हैं... लेकिन ऐसे रिकॉर्ड्स को सहेजकर रखने में बरती गई लापरवाही दर्शाती है कि इन नन्हे सितारों की अनदेखी की जाती है, भले ही उन्हीं में से कुछ में आगे चलकर सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली बनने का माद्दा होता है... उल्लेखनीय है कि मुंबई के मैदानों से हमेशा महान क्रिकेटर निकलते रहे हैं... हैरिस शील्ड और जाइल्स शील्ड जैसे टूर्नामेंट न सिर्फ उदीयमान खिलाड़ियों को नए रिकॉर्ड बनाने का मौका देते रहे हैं, बल्कि यह एक शानदार प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराते रहे हैं... लेकिन ऐसे रिकॉर्ड्स को सहेजकर रखने में बरती गई लापरवाही दर्शाती है कि इन नन्हे सितारों की अनदेखी की जाती है, भले ही उन्हीं में से कुछ में आगे चलकर सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली बनने का माद्दा होता है...
यहाँ एक सारांश है:इन रिकॉर्ड्स को संभालने की जिम्मेदारी मुंबई स्कूल स्पोर्ट्स एसोसिएशन की है, लेकिन उसका कहना है कि 25 साल पुराने कागज़ात संभाले नहीं जा सकते... दरअसल, असलियत यह है कि उस मैच के स्कोरकार्ड को सफेद चीटियां खा चुकी हैं...
18
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: ओसामा बिन लादेन सहित कई शीर्ष आतंकवादियों के खात्मे के बाद पाकिस्तान में कमजोर होते आतंकवादी संगठन अलकायदा के अब उत्तरी अफ्रीका को अपना ठिकाना बनाने का संदेह है। सोमवार को एक मीडिया रपट में यह बात कही गई। समाचार पत्र 'द गार्जियन' के मुताबिक ब्रिटिश अधिकारियों का मानना है कि साल 2012 की अंतिम कार्रवाइयों में पाकिस्तान में अलकायदा के बचे-खुचे आतंकवादी भी समाप्त हो जाएंगे। एक अधिकारी ने कहा कि अलकायदा के ज्यादातर बड़े आतंकवादी मानवरहित ड्रोन हमलों में मारे गए थे और अब कुछ मुट्ठीभर आतंकवादी ही जीवित बचे हैं। अलकायदा के शीर्ष आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को दो मई को पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया गया था। अमेरिकी कमांडो ने विशेष कार्रवाई में उसे मार गिराया था। सूत्रों का कहना है कि अलकायदा के दो बड़े नेता लीबिया की ओर बढ़े हैं जबकि अन्य भी मार्ग में हैं। इससे यह डर पनपने लगा है कि उत्तरी अफ्रीका जिहाद का नया अखाड़ा बन सकता है। एक सूत्र ने बताया, "उत्तर अफ्रीका के कुछ बेहद अनुभवी लोगों के समूह ने पूर्वोत्तर अफगानिस्तान के कुनार प्रांत को छोड़ दिया है। वे बरसों से वहां अपना ठिकाना बनाए हुए थे। अब वे वापस मध्यपूर्व लौट आए हैं।" मीडिया रपट में कहा गया है कि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि गठबंधन सेनाओं के अफगानिस्तान से हटने की वजह से अधिक सुरक्षा के लिए अफगानिस्तान व पाकिस्तान छोड़कर उत्तर अफ्रीका का रुख किया गया है या यह अरब में वसंतु ऋतु समाप्त होने के बाद उसका फायदा उठाने की रणनीति है। पाकिस्तान के कबायली इलाकों में अस्थायी ठिकानों तक छोटे-छोटे समूह में पहुंचना अलकायदा आतंकवादियों के लिए मुश्किल हो गया था। एक अधिकारी ने कहा, "मुझे लगता है कि वे वास्तव में बहुत कमजोर हो गए हैं।" उन्होंने कहा, "आप यह नहीं कह सकते कि उनसे खतरा नहीं है, वे खतरनाक हो सकते हैं लेकिन यह खतरा बहुत थोड़ा है।" खुफिया सूत्रों ने 'द गार्जियन' को बताया कि उनके अनुमान के मुताबिक अफगानिस्तान में अलकायदा या अलकायदा से जुड़े आतंकवादी संगठनों के 100 से भी कम आतंकी हैं। एक अधिकारी ने कहा कि इस बात के प्रमाण मिले हैं कि हक्कानी नेटवर्क पाकिस्तानी खुफिया सेवाओं व आतंकवादी समूहों के बीच मध्यस्थ का काम करता है। अधिकारी ने कहा, "यदि पाकिस्तानी सेना हक्कानी के खिलाफ कार्रवाई करती है तो इससे उसे कोई फायदा नहीं होना है। यदि हक्कानी के खिलाफ कार्रवाई में सेना को भारी नुकसान होता है और फिर भी इस समूह को समाप्त करने में कामयाबी नहीं मिलती तो सेना उस पर से अपना अधिकार खो देगी और उसका एक मजबूत मध्यस्थ भी खो जाएगा। यदि उसे सफलता मिलती है तो भी वह एक मुख्य सहयोगी खो देगी।"
यह एक सारांश है: लादेन सहित कई शीर्ष आतंकवादियों के खात्मे के बाद पाकिस्तान में कमजोर होते अलकायदा के अब उत्तरी अफ्रीका को अपना ठिकाना बनाने का संदेह है।
9
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: मुंबई के सीएसटी स्टेशन से तीन साल की बच्ची को अगवा किए जाने के सीसीटीवी फुटेज टीवी चैनलों पर दिखाए जाने के दो दिन बाद हरिद्वार पुलिस ने दावा किया कि उसने आरोपी राजू को गिरफ्तार कर बच्ची को बरामद कर लिया है। आरोपी राजू ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसने भीख मंगवाने के लिए बच्ची का अपहरण किया था। यह बच्ची 10 दिन से हरिद्वार में थी। हरिद्वार बस अड्डे पर पुलिस ने राजू को देखा। पुलिसवालों ने टीवी पर सीसीटीवी फुटेज देखी थी, जिसके बाद उन्हें राजू की चाल देखकर कुछ शक हुआ। बच्चे की बरामदगी के बाद हरिद्वार के एसपी ने बताया कि किस तरह दो कांस्टेबलों ने बच्ची को मीडिया की दिखाई गई खबर के आधार पर बरामद किया और आरोपी से पूछताछ कर इसकी शिनाख्त की।टिप्पणियां मुंबई रेलवे पुलिस के कमिश्नर ने कहा है कि रेलवे पुलिस की एक टीम हरिद्वार भेजी जा रही है। यह वारदात 10 जून की है। आरोपी ने इस घटना को प्लेटफार्म नंबर 15 पर अंजाम दिया। यह चोर प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर उतरा था और बच्ची को लेने के बाद प्लेटफॉर्म नंबर 15 सीएसटीएम−नागपुर स्पेशल से भाग भी गया। सीसीटीवी में साफ दिखा कि चोर लंगड़ाते हुए आता है। गहरी नींद मे सोई बच्ची के बाजू में बैठता है और 40 सेकेंड के अंदर बच्ची को चुरा कर भाग खड़ा होता है। आरोपी राजू ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसने भीख मंगवाने के लिए बच्ची का अपहरण किया था। यह बच्ची 10 दिन से हरिद्वार में थी। हरिद्वार बस अड्डे पर पुलिस ने राजू को देखा। पुलिसवालों ने टीवी पर सीसीटीवी फुटेज देखी थी, जिसके बाद उन्हें राजू की चाल देखकर कुछ शक हुआ। बच्चे की बरामदगी के बाद हरिद्वार के एसपी ने बताया कि किस तरह दो कांस्टेबलों ने बच्ची को मीडिया की दिखाई गई खबर के आधार पर बरामद किया और आरोपी से पूछताछ कर इसकी शिनाख्त की।टिप्पणियां मुंबई रेलवे पुलिस के कमिश्नर ने कहा है कि रेलवे पुलिस की एक टीम हरिद्वार भेजी जा रही है। यह वारदात 10 जून की है। आरोपी ने इस घटना को प्लेटफार्म नंबर 15 पर अंजाम दिया। यह चोर प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर उतरा था और बच्ची को लेने के बाद प्लेटफॉर्म नंबर 15 सीएसटीएम−नागपुर स्पेशल से भाग भी गया। सीसीटीवी में साफ दिखा कि चोर लंगड़ाते हुए आता है। गहरी नींद मे सोई बच्ची के बाजू में बैठता है और 40 सेकेंड के अंदर बच्ची को चुरा कर भाग खड़ा होता है। मुंबई रेलवे पुलिस के कमिश्नर ने कहा है कि रेलवे पुलिस की एक टीम हरिद्वार भेजी जा रही है। यह वारदात 10 जून की है। आरोपी ने इस घटना को प्लेटफार्म नंबर 15 पर अंजाम दिया। यह चोर प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर उतरा था और बच्ची को लेने के बाद प्लेटफॉर्म नंबर 15 सीएसटीएम−नागपुर स्पेशल से भाग भी गया। सीसीटीवी में साफ दिखा कि चोर लंगड़ाते हुए आता है। गहरी नींद मे सोई बच्ची के बाजू में बैठता है और 40 सेकेंड के अंदर बच्ची को चुरा कर भाग खड़ा होता है। यह वारदात 10 जून की है। आरोपी ने इस घटना को प्लेटफार्म नंबर 15 पर अंजाम दिया। यह चोर प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर उतरा था और बच्ची को लेने के बाद प्लेटफॉर्म नंबर 15 सीएसटीएम−नागपुर स्पेशल से भाग भी गया। सीसीटीवी में साफ दिखा कि चोर लंगड़ाते हुए आता है। गहरी नींद मे सोई बच्ची के बाजू में बैठता है और 40 सेकेंड के अंदर बच्ची को चुरा कर भाग खड़ा होता है।
मुंबई के सीएसटी स्टेशन से तीन साल की बच्ची को अगवा किए जाने के सीसीटीवी फुटेज टीवी चैनलों पर दिखाए जाने के दो दिन बाद हरिद्वार पुलिस ने दावा किया है कि राजू नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर बच्ची को बरामद कर लिया है।
6
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों ने गत दिसम्बर में कनेक्टिकट के एक स्कूल में हुई नरसंहार की घटना के मद्देनजर राष्ट्रपति बराक ओबामा के बंदूक कानूनों को कड़ा करने के प्रयास की सराहना की है। सिख काउंसिल ऑन रिलिजन एंड एजूकेशन (एससीओआरई) के अध्यक्ष राजवंत सिंह ने बताया कि सिख समुदाय अमेरिकी समाज में घातक हथियारों का प्रसार रोकने के लिए ओबामा द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन करता हैं। व्हाइट हाऊस में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम के मेहमानों में शामिल समुदाय के नेता ने कहा, "बहुत सारे निर्दोष लोग इन मूर्खतापूर्ण हत्याओं का शिकार बन रहे हैं।" इस अवसर पर राष्ट्रपति ने दो दशकों के सबसे व्यापक बंदूक नियंत्रण कानून का प्रस्ताव रखा। राजवंत सिंह ने अमेरिकी संसद से इस जरूरत के वक्त एकजुट होकर वास्तविक नेतृत्व दिखाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, "यह हम सब, विशेष रूप से युवा लोगों की सुरक्षा के लिए नैतिक दायित्व है।" टिप्पणियां सिख समुदाय 5 फरवरी को विस्कॉन्सिन राज्य के ओक क्रीक स्थित गुरुद्वारा में बीते वर्ष अगस्त में हुई गोलीबारी की घटना की याद में एक शोक सभा का आयोजन करेगा। इस घटना में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। सिख समुदाय ने धार्मिक सभाओं से अपने प्रतिनिधियों से बंदूक नियंत्रण कानून का समर्थन करने का आग्रह भी किया है। सिख काउंसिल ऑन रिलिजन एंड एजूकेशन (एससीओआरई) के अध्यक्ष राजवंत सिंह ने बताया कि सिख समुदाय अमेरिकी समाज में घातक हथियारों का प्रसार रोकने के लिए ओबामा द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन करता हैं। व्हाइट हाऊस में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम के मेहमानों में शामिल समुदाय के नेता ने कहा, "बहुत सारे निर्दोष लोग इन मूर्खतापूर्ण हत्याओं का शिकार बन रहे हैं।" इस अवसर पर राष्ट्रपति ने दो दशकों के सबसे व्यापक बंदूक नियंत्रण कानून का प्रस्ताव रखा। राजवंत सिंह ने अमेरिकी संसद से इस जरूरत के वक्त एकजुट होकर वास्तविक नेतृत्व दिखाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, "यह हम सब, विशेष रूप से युवा लोगों की सुरक्षा के लिए नैतिक दायित्व है।" टिप्पणियां सिख समुदाय 5 फरवरी को विस्कॉन्सिन राज्य के ओक क्रीक स्थित गुरुद्वारा में बीते वर्ष अगस्त में हुई गोलीबारी की घटना की याद में एक शोक सभा का आयोजन करेगा। इस घटना में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। सिख समुदाय ने धार्मिक सभाओं से अपने प्रतिनिधियों से बंदूक नियंत्रण कानून का समर्थन करने का आग्रह भी किया है। व्हाइट हाऊस में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम के मेहमानों में शामिल समुदाय के नेता ने कहा, "बहुत सारे निर्दोष लोग इन मूर्खतापूर्ण हत्याओं का शिकार बन रहे हैं।" इस अवसर पर राष्ट्रपति ने दो दशकों के सबसे व्यापक बंदूक नियंत्रण कानून का प्रस्ताव रखा। राजवंत सिंह ने अमेरिकी संसद से इस जरूरत के वक्त एकजुट होकर वास्तविक नेतृत्व दिखाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, "यह हम सब, विशेष रूप से युवा लोगों की सुरक्षा के लिए नैतिक दायित्व है।" टिप्पणियां सिख समुदाय 5 फरवरी को विस्कॉन्सिन राज्य के ओक क्रीक स्थित गुरुद्वारा में बीते वर्ष अगस्त में हुई गोलीबारी की घटना की याद में एक शोक सभा का आयोजन करेगा। इस घटना में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। सिख समुदाय ने धार्मिक सभाओं से अपने प्रतिनिधियों से बंदूक नियंत्रण कानून का समर्थन करने का आग्रह भी किया है। राजवंत सिंह ने अमेरिकी संसद से इस जरूरत के वक्त एकजुट होकर वास्तविक नेतृत्व दिखाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, "यह हम सब, विशेष रूप से युवा लोगों की सुरक्षा के लिए नैतिक दायित्व है।" टिप्पणियां सिख समुदाय 5 फरवरी को विस्कॉन्सिन राज्य के ओक क्रीक स्थित गुरुद्वारा में बीते वर्ष अगस्त में हुई गोलीबारी की घटना की याद में एक शोक सभा का आयोजन करेगा। इस घटना में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। सिख समुदाय ने धार्मिक सभाओं से अपने प्रतिनिधियों से बंदूक नियंत्रण कानून का समर्थन करने का आग्रह भी किया है। सिख समुदाय 5 फरवरी को विस्कॉन्सिन राज्य के ओक क्रीक स्थित गुरुद्वारा में बीते वर्ष अगस्त में हुई गोलीबारी की घटना की याद में एक शोक सभा का आयोजन करेगा। इस घटना में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। सिख समुदाय ने धार्मिक सभाओं से अपने प्रतिनिधियों से बंदूक नियंत्रण कानून का समर्थन करने का आग्रह भी किया है। सिख समुदाय ने धार्मिक सभाओं से अपने प्रतिनिधियों से बंदूक नियंत्रण कानून का समर्थन करने का आग्रह भी किया है।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों ने गत दिसम्बर में कनेक्टिकट के एक स्कूल में हुई नरसंहार की घटना के मद्देनजर राष्ट्रपति बराक ओबामा के बंदूक कानूनों को कड़ा करने के प्रयास की सराहना की है।
19
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: उसको 70 हजार रुपये में बंधुआ मजूदर के रूप में बेच दिया गया. पराए शहर में दो साल का बेटा बिछड़ गया. इन घटनाओं ने उसको तोड़ दिया लेकिन हिम्‍मत, हौसले और लोगों की मदद से उसने अपनी गुलामी से आजादी पाई और उसके बाद बच्‍चे को खोजने में भी कामयाब रही. अंग्रेजी अखबार 'द टाइम्‍स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक असम में गुवाहाटी के नूनमती इलाके से ताल्‍लुक रखने वाली इस महिला का पति दिहाड़ी मजदूर है. गरीबी से तंग इस महिला ने एक मित्र से काम के लिए मदद मांगी. वहां पर इसको एक मानव तस्‍कर मुहाजिर अली मिला. उसने नौकरी देने का वादा किया. नतीजतन महिला अगले ही दिन अली और अपने दो साल के बेटे को लेकर दिल्‍ली आ गई. इनके साथ अली के दो साथी भी थे. नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर अली उसको नौकरी के लिए नियोक्‍ता के पास मिलवाने के लिए चल दिया और उसके बेटे को साथियों के पास छोड़ गया. इसके बाद जब वह लौटकर आई तो उसने देखा कि उसका बच्‍चा लापता है. अली भी फरार हो गया और उसको जबर्दस्‍ती एक वैन में बैठा दिया गया. वहां से उसे राजस्‍थान के एक गांव में एक बिजनेसमैन के घर पहुंचाया गया. मालिक ने उसे घरेलू काम में लगा दिया. चंद घंटों के भीतर ही उसने वहां से निकल भागने का विफल प्रयास किया लेकिन उसको कमरे में बंद कर दिया गया. इधर दिल्‍ली में निजामुद्दीन दरगाह के पास झुग्‍गी-झोपडि़यों में रहने वाले लोगों को वहां छोड़ा हुआ बच्‍चा मिला. दरगाह के निकट एक कूड़ा बीनने वाले परिवार ने उसे अपना लिया. उन्‍होंने पुलिस को इत्‍तला भी दी लेकिन माता-पिता का कुछ पता नहीं चला.टिप्पणियां उधर राजस्‍थान के गांव में उसको एकांत में बंद करके रखा जाता. जब पता चला कि वह गर्भवती है तो उसको खाना-पानी भी दिया जाने लगा लेकिन कमरे से बाहर नहीं निकलने देते. इससे हताश और निराश इस महिला ने खुदकुशी करने का फैसला किया. लेकिन बिजनेसमैन की पत्‍नी इसी बीच आई और उसने तरस खाते हुए 50 रुपये देकर जाने के लिए कहा. लिहाजा वहां से निकलकर वह निकटवर्ती रेलवे स्‍टेशन पहुंची. टिकट परीक्षक को अपनी व्‍यथा बताई. उसने गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन में एक बर्थ दिलाई. इस तरह वह असम में अपने घर नूनमती पहुंची. वहां उसने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई. असम और दिल्‍ली पुलिस ने जांच शुरू की एवं नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर मुहाजिर अली को पकड़ा. उसने अपना गुनाह कबूला. उसके बाद पुलिस और एनजीओ के सामूहिक प्रयासों से कई दिनों की मशक्‍कत के बाद बच्‍चे को खोज लिया गया. इस तरह एक महीने और दो दिन के बाद उसको फिर से अपना बच्‍चा मिला. इस तरह एक दुखद कहानी का सुखद अंत हुआ. अंग्रेजी अखबार 'द टाइम्‍स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक असम में गुवाहाटी के नूनमती इलाके से ताल्‍लुक रखने वाली इस महिला का पति दिहाड़ी मजदूर है. गरीबी से तंग इस महिला ने एक मित्र से काम के लिए मदद मांगी. वहां पर इसको एक मानव तस्‍कर मुहाजिर अली मिला. उसने नौकरी देने का वादा किया. नतीजतन महिला अगले ही दिन अली और अपने दो साल के बेटे को लेकर दिल्‍ली आ गई. इनके साथ अली के दो साथी भी थे. नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर अली उसको नौकरी के लिए नियोक्‍ता के पास मिलवाने के लिए चल दिया और उसके बेटे को साथियों के पास छोड़ गया. इसके बाद जब वह लौटकर आई तो उसने देखा कि उसका बच्‍चा लापता है. अली भी फरार हो गया और उसको जबर्दस्‍ती एक वैन में बैठा दिया गया. वहां से उसे राजस्‍थान के एक गांव में एक बिजनेसमैन के घर पहुंचाया गया. मालिक ने उसे घरेलू काम में लगा दिया. चंद घंटों के भीतर ही उसने वहां से निकल भागने का विफल प्रयास किया लेकिन उसको कमरे में बंद कर दिया गया. इधर दिल्‍ली में निजामुद्दीन दरगाह के पास झुग्‍गी-झोपडि़यों में रहने वाले लोगों को वहां छोड़ा हुआ बच्‍चा मिला. दरगाह के निकट एक कूड़ा बीनने वाले परिवार ने उसे अपना लिया. उन्‍होंने पुलिस को इत्‍तला भी दी लेकिन माता-पिता का कुछ पता नहीं चला.टिप्पणियां उधर राजस्‍थान के गांव में उसको एकांत में बंद करके रखा जाता. जब पता चला कि वह गर्भवती है तो उसको खाना-पानी भी दिया जाने लगा लेकिन कमरे से बाहर नहीं निकलने देते. इससे हताश और निराश इस महिला ने खुदकुशी करने का फैसला किया. लेकिन बिजनेसमैन की पत्‍नी इसी बीच आई और उसने तरस खाते हुए 50 रुपये देकर जाने के लिए कहा. लिहाजा वहां से निकलकर वह निकटवर्ती रेलवे स्‍टेशन पहुंची. टिकट परीक्षक को अपनी व्‍यथा बताई. उसने गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन में एक बर्थ दिलाई. इस तरह वह असम में अपने घर नूनमती पहुंची. वहां उसने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई. असम और दिल्‍ली पुलिस ने जांच शुरू की एवं नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर मुहाजिर अली को पकड़ा. उसने अपना गुनाह कबूला. उसके बाद पुलिस और एनजीओ के सामूहिक प्रयासों से कई दिनों की मशक्‍कत के बाद बच्‍चे को खोज लिया गया. इस तरह एक महीने और दो दिन के बाद उसको फिर से अपना बच्‍चा मिला. इस तरह एक दुखद कहानी का सुखद अंत हुआ. नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर अली उसको नौकरी के लिए नियोक्‍ता के पास मिलवाने के लिए चल दिया और उसके बेटे को साथियों के पास छोड़ गया. इसके बाद जब वह लौटकर आई तो उसने देखा कि उसका बच्‍चा लापता है. अली भी फरार हो गया और उसको जबर्दस्‍ती एक वैन में बैठा दिया गया. वहां से उसे राजस्‍थान के एक गांव में एक बिजनेसमैन के घर पहुंचाया गया. मालिक ने उसे घरेलू काम में लगा दिया. चंद घंटों के भीतर ही उसने वहां से निकल भागने का विफल प्रयास किया लेकिन उसको कमरे में बंद कर दिया गया. इधर दिल्‍ली में निजामुद्दीन दरगाह के पास झुग्‍गी-झोपडि़यों में रहने वाले लोगों को वहां छोड़ा हुआ बच्‍चा मिला. दरगाह के निकट एक कूड़ा बीनने वाले परिवार ने उसे अपना लिया. उन्‍होंने पुलिस को इत्‍तला भी दी लेकिन माता-पिता का कुछ पता नहीं चला.टिप्पणियां उधर राजस्‍थान के गांव में उसको एकांत में बंद करके रखा जाता. जब पता चला कि वह गर्भवती है तो उसको खाना-पानी भी दिया जाने लगा लेकिन कमरे से बाहर नहीं निकलने देते. इससे हताश और निराश इस महिला ने खुदकुशी करने का फैसला किया. लेकिन बिजनेसमैन की पत्‍नी इसी बीच आई और उसने तरस खाते हुए 50 रुपये देकर जाने के लिए कहा. लिहाजा वहां से निकलकर वह निकटवर्ती रेलवे स्‍टेशन पहुंची. टिकट परीक्षक को अपनी व्‍यथा बताई. उसने गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन में एक बर्थ दिलाई. इस तरह वह असम में अपने घर नूनमती पहुंची. वहां उसने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई. असम और दिल्‍ली पुलिस ने जांच शुरू की एवं नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर मुहाजिर अली को पकड़ा. उसने अपना गुनाह कबूला. उसके बाद पुलिस और एनजीओ के सामूहिक प्रयासों से कई दिनों की मशक्‍कत के बाद बच्‍चे को खोज लिया गया. इस तरह एक महीने और दो दिन के बाद उसको फिर से अपना बच्‍चा मिला. इस तरह एक दुखद कहानी का सुखद अंत हुआ. मालिक ने उसे घरेलू काम में लगा दिया. चंद घंटों के भीतर ही उसने वहां से निकल भागने का विफल प्रयास किया लेकिन उसको कमरे में बंद कर दिया गया. इधर दिल्‍ली में निजामुद्दीन दरगाह के पास झुग्‍गी-झोपडि़यों में रहने वाले लोगों को वहां छोड़ा हुआ बच्‍चा मिला. दरगाह के निकट एक कूड़ा बीनने वाले परिवार ने उसे अपना लिया. उन्‍होंने पुलिस को इत्‍तला भी दी लेकिन माता-पिता का कुछ पता नहीं चला.टिप्पणियां उधर राजस्‍थान के गांव में उसको एकांत में बंद करके रखा जाता. जब पता चला कि वह गर्भवती है तो उसको खाना-पानी भी दिया जाने लगा लेकिन कमरे से बाहर नहीं निकलने देते. इससे हताश और निराश इस महिला ने खुदकुशी करने का फैसला किया. लेकिन बिजनेसमैन की पत्‍नी इसी बीच आई और उसने तरस खाते हुए 50 रुपये देकर जाने के लिए कहा. लिहाजा वहां से निकलकर वह निकटवर्ती रेलवे स्‍टेशन पहुंची. टिकट परीक्षक को अपनी व्‍यथा बताई. उसने गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन में एक बर्थ दिलाई. इस तरह वह असम में अपने घर नूनमती पहुंची. वहां उसने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई. असम और दिल्‍ली पुलिस ने जांच शुरू की एवं नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर मुहाजिर अली को पकड़ा. उसने अपना गुनाह कबूला. उसके बाद पुलिस और एनजीओ के सामूहिक प्रयासों से कई दिनों की मशक्‍कत के बाद बच्‍चे को खोज लिया गया. इस तरह एक महीने और दो दिन के बाद उसको फिर से अपना बच्‍चा मिला. इस तरह एक दुखद कहानी का सुखद अंत हुआ. इधर दिल्‍ली में निजामुद्दीन दरगाह के पास झुग्‍गी-झोपडि़यों में रहने वाले लोगों को वहां छोड़ा हुआ बच्‍चा मिला. दरगाह के निकट एक कूड़ा बीनने वाले परिवार ने उसे अपना लिया. उन्‍होंने पुलिस को इत्‍तला भी दी लेकिन माता-पिता का कुछ पता नहीं चला.टिप्पणियां उधर राजस्‍थान के गांव में उसको एकांत में बंद करके रखा जाता. जब पता चला कि वह गर्भवती है तो उसको खाना-पानी भी दिया जाने लगा लेकिन कमरे से बाहर नहीं निकलने देते. इससे हताश और निराश इस महिला ने खुदकुशी करने का फैसला किया. लेकिन बिजनेसमैन की पत्‍नी इसी बीच आई और उसने तरस खाते हुए 50 रुपये देकर जाने के लिए कहा. लिहाजा वहां से निकलकर वह निकटवर्ती रेलवे स्‍टेशन पहुंची. टिकट परीक्षक को अपनी व्‍यथा बताई. उसने गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन में एक बर्थ दिलाई. इस तरह वह असम में अपने घर नूनमती पहुंची. वहां उसने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई. असम और दिल्‍ली पुलिस ने जांच शुरू की एवं नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर मुहाजिर अली को पकड़ा. उसने अपना गुनाह कबूला. उसके बाद पुलिस और एनजीओ के सामूहिक प्रयासों से कई दिनों की मशक्‍कत के बाद बच्‍चे को खोज लिया गया. इस तरह एक महीने और दो दिन के बाद उसको फिर से अपना बच्‍चा मिला. इस तरह एक दुखद कहानी का सुखद अंत हुआ. उधर राजस्‍थान के गांव में उसको एकांत में बंद करके रखा जाता. जब पता चला कि वह गर्भवती है तो उसको खाना-पानी भी दिया जाने लगा लेकिन कमरे से बाहर नहीं निकलने देते. इससे हताश और निराश इस महिला ने खुदकुशी करने का फैसला किया. लेकिन बिजनेसमैन की पत्‍नी इसी बीच आई और उसने तरस खाते हुए 50 रुपये देकर जाने के लिए कहा. लिहाजा वहां से निकलकर वह निकटवर्ती रेलवे स्‍टेशन पहुंची. टिकट परीक्षक को अपनी व्‍यथा बताई. उसने गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन में एक बर्थ दिलाई. इस तरह वह असम में अपने घर नूनमती पहुंची. वहां उसने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई. असम और दिल्‍ली पुलिस ने जांच शुरू की एवं नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर मुहाजिर अली को पकड़ा. उसने अपना गुनाह कबूला. उसके बाद पुलिस और एनजीओ के सामूहिक प्रयासों से कई दिनों की मशक्‍कत के बाद बच्‍चे को खोज लिया गया. इस तरह एक महीने और दो दिन के बाद उसको फिर से अपना बच्‍चा मिला. इस तरह एक दुखद कहानी का सुखद अंत हुआ. लिहाजा वहां से निकलकर वह निकटवर्ती रेलवे स्‍टेशन पहुंची. टिकट परीक्षक को अपनी व्‍यथा बताई. उसने गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन में एक बर्थ दिलाई. इस तरह वह असम में अपने घर नूनमती पहुंची. वहां उसने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई. असम और दिल्‍ली पुलिस ने जांच शुरू की एवं नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर मुहाजिर अली को पकड़ा. उसने अपना गुनाह कबूला. उसके बाद पुलिस और एनजीओ के सामूहिक प्रयासों से कई दिनों की मशक्‍कत के बाद बच्‍चे को खोज लिया गया. इस तरह एक महीने और दो दिन के बाद उसको फिर से अपना बच्‍चा मिला. इस तरह एक दुखद कहानी का सुखद अंत हुआ.
यहाँ एक सारांश है:असम की इस महिला को एक महीना पहले बेचा गया बदमाशों ने इसके बच्‍चे को दिल्‍ली में छोड़ा हजरत निजामुद्दीन दरगाह के पास रहने वाले परिवार ने उसे पाला
17
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: रूस की सेना ने आज कहा है कि इस हफ्ते सीरिया में किए गए उसके एक हमले में सीरिया में अल कायदा से संबद्ध एक समूह के कम से कम 30 सदस्य मारे गए हैं जिनमें उसके कुछ नेता भी शामिल हैं. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल इगोर कोनशेनकोव ने बताया कि हवाई हमला मंगलवार को सीरिया के उत्तरी प्रांत इदलीब में किया गया था. उन्होंने कहा कि यह भूमध्यसागर में एक रूसी विमानवाहक पोत से किया गया था और इसने अल कायदा से जुड़े एक आतंकी समूह को निशाना बनाया जिसे अब फतह अल-शाम फ्रंट के नाम से जाना जाता है.टिप्पणियां कोनशेनकोव ने आज कहा कि रूस की खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टरों ने पुष्टि की है कि अल कायदा शाखा के तीन महत्वपूर्ण नेता मोहम्मद हलाला, अबु जाबिर हरमुजा और अबुल बहा अल-असफरी मारे गए हैं. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल इगोर कोनशेनकोव ने बताया कि हवाई हमला मंगलवार को सीरिया के उत्तरी प्रांत इदलीब में किया गया था. उन्होंने कहा कि यह भूमध्यसागर में एक रूसी विमानवाहक पोत से किया गया था और इसने अल कायदा से जुड़े एक आतंकी समूह को निशाना बनाया जिसे अब फतह अल-शाम फ्रंट के नाम से जाना जाता है.टिप्पणियां कोनशेनकोव ने आज कहा कि रूस की खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टरों ने पुष्टि की है कि अल कायदा शाखा के तीन महत्वपूर्ण नेता मोहम्मद हलाला, अबु जाबिर हरमुजा और अबुल बहा अल-असफरी मारे गए हैं. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उन्होंने कहा कि यह भूमध्यसागर में एक रूसी विमानवाहक पोत से किया गया था और इसने अल कायदा से जुड़े एक आतंकी समूह को निशाना बनाया जिसे अब फतह अल-शाम फ्रंट के नाम से जाना जाता है.टिप्पणियां कोनशेनकोव ने आज कहा कि रूस की खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टरों ने पुष्टि की है कि अल कायदा शाखा के तीन महत्वपूर्ण नेता मोहम्मद हलाला, अबु जाबिर हरमुजा और अबुल बहा अल-असफरी मारे गए हैं. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) कोनशेनकोव ने आज कहा कि रूस की खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टरों ने पुष्टि की है कि अल कायदा शाखा के तीन महत्वपूर्ण नेता मोहम्मद हलाला, अबु जाबिर हरमुजा और अबुल बहा अल-असफरी मारे गए हैं. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
यहाँ एक सारांश है:मारे गए लोगों में अल कायदा के कुछ नेता भी शामिल हवाई हमला सीरिया के उत्तरी प्रांत इदलीब में किया गया अब फतह अल-शाम फ्रंट नामक समूह को बनाया निशाना
17
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: संसद की वित्तीय मामलों की स्थायी समिति ने सरकार की नोटबंदी के बाद देश के हालात की समीक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर तथा वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी को बुलाने का गुरुवार को फैसला किया. एक सूत्र के मुताबिक, "नोटबंदी के बाद के हालात की समीक्षा करने के लिए आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल तथा आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास को 15 दिसंबर को बुलाया जा सकता है." सूत्र ने कहा, "अगर 15 दिसंबर को वे नहीं आ पाए, तो समिति के समक्ष उनकी उपस्थिति उनकी उपलब्धता पर निर्भर करती है." वित्तीय मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली हैं.टिप्पणियां उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते आठ नवंबर की आधी रात से 500 तथा 1,000 रुपये के नोटों को लीगल टेंडर से बाहर कर दिया था. इसके बाद पूरे देश में नकदी की भारी समस्या पैदा हो गई है. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) एक सूत्र के मुताबिक, "नोटबंदी के बाद के हालात की समीक्षा करने के लिए आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल तथा आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास को 15 दिसंबर को बुलाया जा सकता है." सूत्र ने कहा, "अगर 15 दिसंबर को वे नहीं आ पाए, तो समिति के समक्ष उनकी उपस्थिति उनकी उपलब्धता पर निर्भर करती है." वित्तीय मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली हैं.टिप्पणियां उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते आठ नवंबर की आधी रात से 500 तथा 1,000 रुपये के नोटों को लीगल टेंडर से बाहर कर दिया था. इसके बाद पूरे देश में नकदी की भारी समस्या पैदा हो गई है. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) सूत्र ने कहा, "अगर 15 दिसंबर को वे नहीं आ पाए, तो समिति के समक्ष उनकी उपस्थिति उनकी उपलब्धता पर निर्भर करती है." वित्तीय मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली हैं.टिप्पणियां उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते आठ नवंबर की आधी रात से 500 तथा 1,000 रुपये के नोटों को लीगल टेंडर से बाहर कर दिया था. इसके बाद पूरे देश में नकदी की भारी समस्या पैदा हो गई है. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते आठ नवंबर की आधी रात से 500 तथा 1,000 रुपये के नोटों को लीगल टेंडर से बाहर कर दिया था. इसके बाद पूरे देश में नकदी की भारी समस्या पैदा हो गई है. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
सारांश: नोटबंदी के बाद देश के हालात की समीक्षा के लिए समिति ने लिया फैसला. दोनों अधिकारियों को 15 दिसंबर को बुलाया जा सकता है- सूत्र समिति के समक्ष उनकी उपस्थिति उनकी उपलब्धता पर निर्भर करती है- सूत्र
33
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा पेश 2012-13 के बजट को निवेशकों ने कर जुटाने वाला तथा महंगाई बढ़ाने वाला करार दिया है। इससे बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 210 अंक की गिरावट के साथ 17,466.20 अंक पर आ गया। हालांकि, वैश्विक बाजारों में मजबूती का रुख रहा, लेकिन बाजार पर ऊंचे कर प्रस्तावों का असर ज्यादा रहा। उतार-चढ़ाव वाले कारोबार के बीच बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स एक समय सेंसेक्स 17,871 अंक के उच्च स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किए जाने के साथ ही इसमें गिरावट आनी शुरू हो गई और यह 209.65 अंक या 1.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,466.20 अंक पर गया। इसी तरह, नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी 62.60 अंक या 1.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,317.90 अंक रह गया। रिफाइनरी, पूंजीगत सामान, बैंकिंग, पीएसयू और धातु वर्ग के शेयर बिकवाली दबाव में रहे। वित्त मंत्री ने बजट में सेवा कर और उत्पाद शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 फीसद करने का प्रस्ताव किया है। इससे कारें, फ्रिज, दोपहिया, एसी और वॉशिंग मशीन के दाम बढ़ जाएंगे।टिप्पणियां इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.9 रहने के अनुमान से भी कई सकारात्मक बातों का लाभ ‘लुप्त’ हो गया। हालांकि बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सकारात्मक चीजें भी हैं, लेकिन इसका लाभ बाजार को नहीं मिल पाया। उतार-चढ़ाव वाले कारोबार के बीच बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स एक समय सेंसेक्स 17,871 अंक के उच्च स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किए जाने के साथ ही इसमें गिरावट आनी शुरू हो गई और यह 209.65 अंक या 1.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,466.20 अंक पर गया। इसी तरह, नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी 62.60 अंक या 1.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,317.90 अंक रह गया। रिफाइनरी, पूंजीगत सामान, बैंकिंग, पीएसयू और धातु वर्ग के शेयर बिकवाली दबाव में रहे। वित्त मंत्री ने बजट में सेवा कर और उत्पाद शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 फीसद करने का प्रस्ताव किया है। इससे कारें, फ्रिज, दोपहिया, एसी और वॉशिंग मशीन के दाम बढ़ जाएंगे।टिप्पणियां इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.9 रहने के अनुमान से भी कई सकारात्मक बातों का लाभ ‘लुप्त’ हो गया। हालांकि बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सकारात्मक चीजें भी हैं, लेकिन इसका लाभ बाजार को नहीं मिल पाया। इसी तरह, नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी 62.60 अंक या 1.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,317.90 अंक रह गया। रिफाइनरी, पूंजीगत सामान, बैंकिंग, पीएसयू और धातु वर्ग के शेयर बिकवाली दबाव में रहे। वित्त मंत्री ने बजट में सेवा कर और उत्पाद शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 फीसद करने का प्रस्ताव किया है। इससे कारें, फ्रिज, दोपहिया, एसी और वॉशिंग मशीन के दाम बढ़ जाएंगे।टिप्पणियां इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.9 रहने के अनुमान से भी कई सकारात्मक बातों का लाभ ‘लुप्त’ हो गया। हालांकि बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सकारात्मक चीजें भी हैं, लेकिन इसका लाभ बाजार को नहीं मिल पाया। रिफाइनरी, पूंजीगत सामान, बैंकिंग, पीएसयू और धातु वर्ग के शेयर बिकवाली दबाव में रहे। वित्त मंत्री ने बजट में सेवा कर और उत्पाद शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 फीसद करने का प्रस्ताव किया है। इससे कारें, फ्रिज, दोपहिया, एसी और वॉशिंग मशीन के दाम बढ़ जाएंगे।टिप्पणियां इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.9 रहने के अनुमान से भी कई सकारात्मक बातों का लाभ ‘लुप्त’ हो गया। हालांकि बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सकारात्मक चीजें भी हैं, लेकिन इसका लाभ बाजार को नहीं मिल पाया। वित्त मंत्री ने बजट में सेवा कर और उत्पाद शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 फीसद करने का प्रस्ताव किया है। इससे कारें, फ्रिज, दोपहिया, एसी और वॉशिंग मशीन के दाम बढ़ जाएंगे।टिप्पणियां इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.9 रहने के अनुमान से भी कई सकारात्मक बातों का लाभ ‘लुप्त’ हो गया। हालांकि बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सकारात्मक चीजें भी हैं, लेकिन इसका लाभ बाजार को नहीं मिल पाया। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.9 रहने के अनुमान से भी कई सकारात्मक बातों का लाभ ‘लुप्त’ हो गया। हालांकि बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सकारात्मक चीजें भी हैं, लेकिन इसका लाभ बाजार को नहीं मिल पाया। हालांकि बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सकारात्मक चीजें भी हैं, लेकिन इसका लाभ बाजार को नहीं मिल पाया।
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा पेश 2012-13 के बजट को निवेशकों ने कर जुटाने वाला तथा महंगाई बढ़ाने वाला करार दिया है।
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['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: एन श्रीनिवासन के बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में दिन-गिने चुने ही दिखते हैं, क्योंकि बोर्ड का एक गुट उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई शुरू करने की योजना बना रहा है। अगर श्रीनिवासन आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण को लेकर पद से हटने से इनकार करते हैं, तो गुट निलंबन की कार्रवाई कर सकता है। श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मय्यप्पन को शुक्रवार रात सट्टेबाजी में कथित लिप्तता के लिए गिरफ्तार किया गया। इसके बाद श्रीनिवासन अलग-थलग पड़ गए हैं और उनके शीर्ष पद से हटाए जाने की हलचल बढ़ गई है। हालांकि श्रीनिवासन ने पद से हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। उनके इस रवैये से खफा बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें निलंबित कर हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, इसके लिए वे पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष शंशाक मनोहर की सेवाएं इस्तेमाल करेंगे, जिनकी छवि काफी साफ है। बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी के अनुसार जब तक नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं होता, तब तक मनोहर ने अंतरिम आधार पर इस पद की जिम्मेदारी संभालने की सहमति दे दी है। जब संपर्क किया गया, तो कोई भी बीसीसीआई अधिकारी इस योजना के बारे में बताने का इच्छुक नहीं था। श्रीनिवासन का कार्यकाल बोर्ड संविधान में नए संशोधन के अनुसार सितंबर, 2014 में समाप्त होगा। संशोधन में अध्यक्ष पद के लिए 'दो प्लस एक' साल का कार्यकाल है। पता चला है कि चार शीर्ष बीसीसीआई अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर पहले ही मनोहर से बात कर ली है।  एक शीर्ष अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, जब तक सारी समस्याएं खत्म नहीं हो जातीं, तब तक मनोहर ने अंतरिम अध्यक्ष बनने के लिए सहमति दे दी है, लेकिन वह लंबे समय तक इस पद पर नहीं बने रहना चाहते। वह सिर्फ देखरेख करने के लिए इस पद की जिम्मेदारी लेंगे।टिप्पणियां बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए राज्य इकाइयों से संपर्क बना रहे हैं। जरूरत के अनुसार राज्य इकाइयों की दो-तिहाई इकाइयों को आपात बैठक बुलाने के लिए बीसीसीआई सचिव संजय जगदाले को पत्र लिखना होगा। विशेष आम बैठक इसके बाद एक प्रस्ताव पारित करेगी, जिसमें श्रीनिवासन को निलंबित करने के लिए दो-तिहाई मत होने चाहिए, जिसके बाद ही अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। बीसीसीआई के कई शीर्ष अधिकारी पहले ही कोलकाता में हैं, जहां चेन्नई सुपरकिंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच रविवार को आईपीएल फाइनल खेला जाएगा। अधिकारी ने कहा, बोर्ड के कई शीर्ष अधिकारी आईपीएल फाइनल के लिए यहां इकट्ठे हो रहे हैं, इसलिए सलाह-मश्विरे की प्रक्रिया शुरू करना आसान होगा। अगर श्रीनिवासन आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण को लेकर पद से हटने से इनकार करते हैं, तो गुट निलंबन की कार्रवाई कर सकता है। श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मय्यप्पन को शुक्रवार रात सट्टेबाजी में कथित लिप्तता के लिए गिरफ्तार किया गया। इसके बाद श्रीनिवासन अलग-थलग पड़ गए हैं और उनके शीर्ष पद से हटाए जाने की हलचल बढ़ गई है। हालांकि श्रीनिवासन ने पद से हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। उनके इस रवैये से खफा बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें निलंबित कर हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, इसके लिए वे पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष शंशाक मनोहर की सेवाएं इस्तेमाल करेंगे, जिनकी छवि काफी साफ है। बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी के अनुसार जब तक नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं होता, तब तक मनोहर ने अंतरिम आधार पर इस पद की जिम्मेदारी संभालने की सहमति दे दी है। जब संपर्क किया गया, तो कोई भी बीसीसीआई अधिकारी इस योजना के बारे में बताने का इच्छुक नहीं था। श्रीनिवासन का कार्यकाल बोर्ड संविधान में नए संशोधन के अनुसार सितंबर, 2014 में समाप्त होगा। संशोधन में अध्यक्ष पद के लिए 'दो प्लस एक' साल का कार्यकाल है। पता चला है कि चार शीर्ष बीसीसीआई अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर पहले ही मनोहर से बात कर ली है।  एक शीर्ष अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, जब तक सारी समस्याएं खत्म नहीं हो जातीं, तब तक मनोहर ने अंतरिम अध्यक्ष बनने के लिए सहमति दे दी है, लेकिन वह लंबे समय तक इस पद पर नहीं बने रहना चाहते। वह सिर्फ देखरेख करने के लिए इस पद की जिम्मेदारी लेंगे।टिप्पणियां बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए राज्य इकाइयों से संपर्क बना रहे हैं। जरूरत के अनुसार राज्य इकाइयों की दो-तिहाई इकाइयों को आपात बैठक बुलाने के लिए बीसीसीआई सचिव संजय जगदाले को पत्र लिखना होगा। विशेष आम बैठक इसके बाद एक प्रस्ताव पारित करेगी, जिसमें श्रीनिवासन को निलंबित करने के लिए दो-तिहाई मत होने चाहिए, जिसके बाद ही अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। बीसीसीआई के कई शीर्ष अधिकारी पहले ही कोलकाता में हैं, जहां चेन्नई सुपरकिंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच रविवार को आईपीएल फाइनल खेला जाएगा। अधिकारी ने कहा, बोर्ड के कई शीर्ष अधिकारी आईपीएल फाइनल के लिए यहां इकट्ठे हो रहे हैं, इसलिए सलाह-मश्विरे की प्रक्रिया शुरू करना आसान होगा। इसके बाद श्रीनिवासन अलग-थलग पड़ गए हैं और उनके शीर्ष पद से हटाए जाने की हलचल बढ़ गई है। हालांकि श्रीनिवासन ने पद से हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। उनके इस रवैये से खफा बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें निलंबित कर हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, इसके लिए वे पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष शंशाक मनोहर की सेवाएं इस्तेमाल करेंगे, जिनकी छवि काफी साफ है। बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी के अनुसार जब तक नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं होता, तब तक मनोहर ने अंतरिम आधार पर इस पद की जिम्मेदारी संभालने की सहमति दे दी है। जब संपर्क किया गया, तो कोई भी बीसीसीआई अधिकारी इस योजना के बारे में बताने का इच्छुक नहीं था। श्रीनिवासन का कार्यकाल बोर्ड संविधान में नए संशोधन के अनुसार सितंबर, 2014 में समाप्त होगा। संशोधन में अध्यक्ष पद के लिए 'दो प्लस एक' साल का कार्यकाल है। पता चला है कि चार शीर्ष बीसीसीआई अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर पहले ही मनोहर से बात कर ली है।  एक शीर्ष अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, जब तक सारी समस्याएं खत्म नहीं हो जातीं, तब तक मनोहर ने अंतरिम अध्यक्ष बनने के लिए सहमति दे दी है, लेकिन वह लंबे समय तक इस पद पर नहीं बने रहना चाहते। वह सिर्फ देखरेख करने के लिए इस पद की जिम्मेदारी लेंगे।टिप्पणियां बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए राज्य इकाइयों से संपर्क बना रहे हैं। जरूरत के अनुसार राज्य इकाइयों की दो-तिहाई इकाइयों को आपात बैठक बुलाने के लिए बीसीसीआई सचिव संजय जगदाले को पत्र लिखना होगा। विशेष आम बैठक इसके बाद एक प्रस्ताव पारित करेगी, जिसमें श्रीनिवासन को निलंबित करने के लिए दो-तिहाई मत होने चाहिए, जिसके बाद ही अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। बीसीसीआई के कई शीर्ष अधिकारी पहले ही कोलकाता में हैं, जहां चेन्नई सुपरकिंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच रविवार को आईपीएल फाइनल खेला जाएगा। अधिकारी ने कहा, बोर्ड के कई शीर्ष अधिकारी आईपीएल फाइनल के लिए यहां इकट्ठे हो रहे हैं, इसलिए सलाह-मश्विरे की प्रक्रिया शुरू करना आसान होगा। बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी के अनुसार जब तक नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं होता, तब तक मनोहर ने अंतरिम आधार पर इस पद की जिम्मेदारी संभालने की सहमति दे दी है। जब संपर्क किया गया, तो कोई भी बीसीसीआई अधिकारी इस योजना के बारे में बताने का इच्छुक नहीं था। श्रीनिवासन का कार्यकाल बोर्ड संविधान में नए संशोधन के अनुसार सितंबर, 2014 में समाप्त होगा। संशोधन में अध्यक्ष पद के लिए 'दो प्लस एक' साल का कार्यकाल है। पता चला है कि चार शीर्ष बीसीसीआई अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर पहले ही मनोहर से बात कर ली है।  एक शीर्ष अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, जब तक सारी समस्याएं खत्म नहीं हो जातीं, तब तक मनोहर ने अंतरिम अध्यक्ष बनने के लिए सहमति दे दी है, लेकिन वह लंबे समय तक इस पद पर नहीं बने रहना चाहते। वह सिर्फ देखरेख करने के लिए इस पद की जिम्मेदारी लेंगे।टिप्पणियां बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए राज्य इकाइयों से संपर्क बना रहे हैं। जरूरत के अनुसार राज्य इकाइयों की दो-तिहाई इकाइयों को आपात बैठक बुलाने के लिए बीसीसीआई सचिव संजय जगदाले को पत्र लिखना होगा। विशेष आम बैठक इसके बाद एक प्रस्ताव पारित करेगी, जिसमें श्रीनिवासन को निलंबित करने के लिए दो-तिहाई मत होने चाहिए, जिसके बाद ही अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। बीसीसीआई के कई शीर्ष अधिकारी पहले ही कोलकाता में हैं, जहां चेन्नई सुपरकिंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच रविवार को आईपीएल फाइनल खेला जाएगा। अधिकारी ने कहा, बोर्ड के कई शीर्ष अधिकारी आईपीएल फाइनल के लिए यहां इकट्ठे हो रहे हैं, इसलिए सलाह-मश्विरे की प्रक्रिया शुरू करना आसान होगा। श्रीनिवासन का कार्यकाल बोर्ड संविधान में नए संशोधन के अनुसार सितंबर, 2014 में समाप्त होगा। संशोधन में अध्यक्ष पद के लिए 'दो प्लस एक' साल का कार्यकाल है। पता चला है कि चार शीर्ष बीसीसीआई अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर पहले ही मनोहर से बात कर ली है।  एक शीर्ष अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, जब तक सारी समस्याएं खत्म नहीं हो जातीं, तब तक मनोहर ने अंतरिम अध्यक्ष बनने के लिए सहमति दे दी है, लेकिन वह लंबे समय तक इस पद पर नहीं बने रहना चाहते। वह सिर्फ देखरेख करने के लिए इस पद की जिम्मेदारी लेंगे।टिप्पणियां बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए राज्य इकाइयों से संपर्क बना रहे हैं। जरूरत के अनुसार राज्य इकाइयों की दो-तिहाई इकाइयों को आपात बैठक बुलाने के लिए बीसीसीआई सचिव संजय जगदाले को पत्र लिखना होगा। विशेष आम बैठक इसके बाद एक प्रस्ताव पारित करेगी, जिसमें श्रीनिवासन को निलंबित करने के लिए दो-तिहाई मत होने चाहिए, जिसके बाद ही अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। बीसीसीआई के कई शीर्ष अधिकारी पहले ही कोलकाता में हैं, जहां चेन्नई सुपरकिंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच रविवार को आईपीएल फाइनल खेला जाएगा। अधिकारी ने कहा, बोर्ड के कई शीर्ष अधिकारी आईपीएल फाइनल के लिए यहां इकट्ठे हो रहे हैं, इसलिए सलाह-मश्विरे की प्रक्रिया शुरू करना आसान होगा। बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए राज्य इकाइयों से संपर्क बना रहे हैं। जरूरत के अनुसार राज्य इकाइयों की दो-तिहाई इकाइयों को आपात बैठक बुलाने के लिए बीसीसीआई सचिव संजय जगदाले को पत्र लिखना होगा। विशेष आम बैठक इसके बाद एक प्रस्ताव पारित करेगी, जिसमें श्रीनिवासन को निलंबित करने के लिए दो-तिहाई मत होने चाहिए, जिसके बाद ही अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। बीसीसीआई के कई शीर्ष अधिकारी पहले ही कोलकाता में हैं, जहां चेन्नई सुपरकिंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच रविवार को आईपीएल फाइनल खेला जाएगा। अधिकारी ने कहा, बोर्ड के कई शीर्ष अधिकारी आईपीएल फाइनल के लिए यहां इकट्ठे हो रहे हैं, इसलिए सलाह-मश्विरे की प्रक्रिया शुरू करना आसान होगा। बीसीसीआई के कई शीर्ष अधिकारी पहले ही कोलकाता में हैं, जहां चेन्नई सुपरकिंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच रविवार को आईपीएल फाइनल खेला जाएगा। अधिकारी ने कहा, बोर्ड के कई शीर्ष अधिकारी आईपीएल फाइनल के लिए यहां इकट्ठे हो रहे हैं, इसलिए सलाह-मश्विरे की प्रक्रिया शुरू करना आसान होगा।
सारांश: एन श्रीनिवासन के बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में दिन-गिने चुने ही दिखते हैं, क्योंकि बोर्ड का एक गुट उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई शुरू करने की योजना बना रहा है।
31
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को मामूली तेजी का रुख रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 42.80 अंकों की तेजी के साथ 19,348.12 पर और निफ्टी 18.30 अंकों की तेजी के साथ 5,889.25 पर बंद हुआ।         बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 27.74 अंकों की गिरावट के साथ 19,277.58 पर खुला और 42.80 अंकों यानी 0.22 फीसदी की तेजी के साथ 19,348.12 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 19,373.94 के ऊपरी और 19,263.71 के निचले स्तर को छुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 4.15 अंकों की गिरावट के साथ 5,866.80 पर खुला और 18.30 अंकों यानी 0.31 फीसदी की तेजी के साथ 5,889.25 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी ने 5,894.95 के ऊपरी और 5,859.00 के निचले स्तर को छुआ।टिप्पणियां मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी का रुख रहा। मिडकैप 6.79 अंकों की तेजी के साथ 6,992.27 पर और स्मॉलकैप 43.60 अंकों की तेजी के साथ 7,381.73 पर बंद हुआ। बीएसई के 13 में से 7 सेक्टरों में तेजी दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (0.72 फीसदी), सूचना प्रौद्योगिकी (0.68 फीसदी), वाहन (0.43 फीसदी), धातु (0.35 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (0.27 फीसदी) में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 4.15 अंकों की गिरावट के साथ 5,866.80 पर खुला और 18.30 अंकों यानी 0.31 फीसदी की तेजी के साथ 5,889.25 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी ने 5,894.95 के ऊपरी और 5,859.00 के निचले स्तर को छुआ।टिप्पणियां मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी का रुख रहा। मिडकैप 6.79 अंकों की तेजी के साथ 6,992.27 पर और स्मॉलकैप 43.60 अंकों की तेजी के साथ 7,381.73 पर बंद हुआ। बीएसई के 13 में से 7 सेक्टरों में तेजी दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (0.72 फीसदी), सूचना प्रौद्योगिकी (0.68 फीसदी), वाहन (0.43 फीसदी), धातु (0.35 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (0.27 फीसदी) में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी का रुख रहा। मिडकैप 6.79 अंकों की तेजी के साथ 6,992.27 पर और स्मॉलकैप 43.60 अंकों की तेजी के साथ 7,381.73 पर बंद हुआ। बीएसई के 13 में से 7 सेक्टरों में तेजी दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (0.72 फीसदी), सूचना प्रौद्योगिकी (0.68 फीसदी), वाहन (0.43 फीसदी), धातु (0.35 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (0.27 फीसदी) में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। बीएसई के 13 में से 7 सेक्टरों में तेजी दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (0.72 फीसदी), सूचना प्रौद्योगिकी (0.68 फीसदी), वाहन (0.43 फीसदी), धातु (0.35 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (0.27 फीसदी) में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को मामूली तेजी का रुख रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 42.80 अंकों की तेजी के साथ 19,348.12 पर और निफ्टी 18.30 अंकों की तेजी के साथ 5,889.25 पर बंद हुआ।
11
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: न्यायिक अवमानना के आरोपों का सामना कर रहे कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस सी एस कर्णन ने सोमवार को भारत के प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर और उच्चतम न्यायालय के सात अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. उच्चतम न्यायालय से टकराव को बढ़ाते हुए जस्टिस कर्णन ने कहा कि आठ न्यायाधीशों ने "संयुक्त रूप से 1989 के अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अत्याचार रोकथाम अधिनियम और 2015 के संशोधित कानून के तहत दंडनीय अपराध किया है." उन्होंने शीर्ष अदालत की सात न्यायाधीशों की पीठ के सदस्यों के नाम लिए जिनमें प्रधान न्यायाधीश, जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष और जस्टिस कुरियन जोसफ हैं. पीठ ने जस्टिस कर्णन के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना कार्यवाही शुरू की थी और उनके न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज पर रोक लगा दी थी. जस्टिस कर्णन ने सूची में उच्चतम न्यायालय की एक और न्यायाधीश जस्टिस आर भानुमति का नाम भी जोड़ा जिनके खिलाफ इसलिए आदेश जारी किया गया क्योंकि उन्होंने जस्टिस कर्णन को न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज से रोका था. जस्टिस कर्णन ने चार मई को उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार मानसिक स्वास्थ्य जांच कराने से इनकार कर दिया था. उन्होंने डॉक्टरों के एक दल से कहा कि वह पूरी तरह सामान्य हैं और मानसिक रूप से स्थिर हैं. जस्टिस कर्णन ने कहा कि शीर्ष अदालत के आठों न्यायाधीशों ने जातिगत भेदभाव किया है. उन्होंने कहा, "उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम, 1989 के तहत दंडित किया जाएगा." उन्होंने कहा कि आठ न्यायाधीशों ने एक सार्वजनिक संस्थान में मुझे अपमानित करने के अलावा एक दलित न्यायाधीश का उत्पीड़न किया है. उनके आदेशों से सभी संदेह से परे यह साबित हो गया है. जस्टिस कर्णन ने यहां न्यू टाउन में रोजडेल टॉवर स्थित अपने आवास पर अस्थाई अदालत से जारी अपने आदेश में कहा, "इसलिए इस मामले में अदालत का फैसला जरूरी नहीं है." उन्होंने अपने आदेश में प्रत्येक के लिए पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई और एससी-एसटी कानून के तहत तीन आधार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया. जस्टिस कर्णन ने निर्देश दिया कि तीनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और यदि जुर्माना अदा नहीं किया गया तो उन्हें छह महीने की कैद और काटनी होगी. उन्होंने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि आदेश प्राप्त होने के एक सप्ताह के अंदर नयी दिल्ली के खान मार्केट स्थित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग में जमा की जाए. जस्टिस कर्णन ने यह भी कहा कि उनके द्वारा 13 अप्रैल को जारी आदेश अभी प्रभावी है जिसमें उन्होंने सात न्यायाधीशों की पीठ के सदस्यों को 14 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया था. उन्होंने निर्देश दिया था, "उच्चतम न्यायालय से संबद्ध रजिस्ट्रार जनरल प्रत्येक के वेतन से यह राशि वसूल करेंगे." उन्होंने जस्टिस भानुमति को दो करोड़ रुपये का मुआवजा अदा करने का निर्देश भी दिया.टिप्पणियां शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ लिखे गये जस्टिस कर्णन के अनेक पत्रों का स्वत: संज्ञान लिया है और आठ फरवरी से उनके प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों के उपयोग पर रोक लगा रखी है. जस्टिस कर्णन अवमानना कार्यवाही के सिलसिले में 31 मार्च को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए थे. वह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा करने वाले उच्च न्यायालय के पहले न्यायाधीश हैं.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उन्होंने शीर्ष अदालत की सात न्यायाधीशों की पीठ के सदस्यों के नाम लिए जिनमें प्रधान न्यायाधीश, जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष और जस्टिस कुरियन जोसफ हैं. पीठ ने जस्टिस कर्णन के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना कार्यवाही शुरू की थी और उनके न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज पर रोक लगा दी थी. जस्टिस कर्णन ने सूची में उच्चतम न्यायालय की एक और न्यायाधीश जस्टिस आर भानुमति का नाम भी जोड़ा जिनके खिलाफ इसलिए आदेश जारी किया गया क्योंकि उन्होंने जस्टिस कर्णन को न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज से रोका था. जस्टिस कर्णन ने चार मई को उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार मानसिक स्वास्थ्य जांच कराने से इनकार कर दिया था. उन्होंने डॉक्टरों के एक दल से कहा कि वह पूरी तरह सामान्य हैं और मानसिक रूप से स्थिर हैं. जस्टिस कर्णन ने कहा कि शीर्ष अदालत के आठों न्यायाधीशों ने जातिगत भेदभाव किया है. उन्होंने कहा, "उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम, 1989 के तहत दंडित किया जाएगा." उन्होंने कहा कि आठ न्यायाधीशों ने एक सार्वजनिक संस्थान में मुझे अपमानित करने के अलावा एक दलित न्यायाधीश का उत्पीड़न किया है. उनके आदेशों से सभी संदेह से परे यह साबित हो गया है. जस्टिस कर्णन ने यहां न्यू टाउन में रोजडेल टॉवर स्थित अपने आवास पर अस्थाई अदालत से जारी अपने आदेश में कहा, "इसलिए इस मामले में अदालत का फैसला जरूरी नहीं है." उन्होंने अपने आदेश में प्रत्येक के लिए पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई और एससी-एसटी कानून के तहत तीन आधार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया. जस्टिस कर्णन ने निर्देश दिया कि तीनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और यदि जुर्माना अदा नहीं किया गया तो उन्हें छह महीने की कैद और काटनी होगी. उन्होंने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि आदेश प्राप्त होने के एक सप्ताह के अंदर नयी दिल्ली के खान मार्केट स्थित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग में जमा की जाए. जस्टिस कर्णन ने यह भी कहा कि उनके द्वारा 13 अप्रैल को जारी आदेश अभी प्रभावी है जिसमें उन्होंने सात न्यायाधीशों की पीठ के सदस्यों को 14 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया था. उन्होंने निर्देश दिया था, "उच्चतम न्यायालय से संबद्ध रजिस्ट्रार जनरल प्रत्येक के वेतन से यह राशि वसूल करेंगे." उन्होंने जस्टिस भानुमति को दो करोड़ रुपये का मुआवजा अदा करने का निर्देश भी दिया.टिप्पणियां शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ लिखे गये जस्टिस कर्णन के अनेक पत्रों का स्वत: संज्ञान लिया है और आठ फरवरी से उनके प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों के उपयोग पर रोक लगा रखी है. जस्टिस कर्णन अवमानना कार्यवाही के सिलसिले में 31 मार्च को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए थे. वह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा करने वाले उच्च न्यायालय के पहले न्यायाधीश हैं.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) जस्टिस कर्णन ने सूची में उच्चतम न्यायालय की एक और न्यायाधीश जस्टिस आर भानुमति का नाम भी जोड़ा जिनके खिलाफ इसलिए आदेश जारी किया गया क्योंकि उन्होंने जस्टिस कर्णन को न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज से रोका था. जस्टिस कर्णन ने चार मई को उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार मानसिक स्वास्थ्य जांच कराने से इनकार कर दिया था. उन्होंने डॉक्टरों के एक दल से कहा कि वह पूरी तरह सामान्य हैं और मानसिक रूप से स्थिर हैं. जस्टिस कर्णन ने कहा कि शीर्ष अदालत के आठों न्यायाधीशों ने जातिगत भेदभाव किया है. उन्होंने कहा, "उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम, 1989 के तहत दंडित किया जाएगा." उन्होंने कहा कि आठ न्यायाधीशों ने एक सार्वजनिक संस्थान में मुझे अपमानित करने के अलावा एक दलित न्यायाधीश का उत्पीड़न किया है. उनके आदेशों से सभी संदेह से परे यह साबित हो गया है. जस्टिस कर्णन ने यहां न्यू टाउन में रोजडेल टॉवर स्थित अपने आवास पर अस्थाई अदालत से जारी अपने आदेश में कहा, "इसलिए इस मामले में अदालत का फैसला जरूरी नहीं है." उन्होंने अपने आदेश में प्रत्येक के लिए पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई और एससी-एसटी कानून के तहत तीन आधार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया. जस्टिस कर्णन ने निर्देश दिया कि तीनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और यदि जुर्माना अदा नहीं किया गया तो उन्हें छह महीने की कैद और काटनी होगी. उन्होंने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि आदेश प्राप्त होने के एक सप्ताह के अंदर नयी दिल्ली के खान मार्केट स्थित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग में जमा की जाए. जस्टिस कर्णन ने यह भी कहा कि उनके द्वारा 13 अप्रैल को जारी आदेश अभी प्रभावी है जिसमें उन्होंने सात न्यायाधीशों की पीठ के सदस्यों को 14 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया था. उन्होंने निर्देश दिया था, "उच्चतम न्यायालय से संबद्ध रजिस्ट्रार जनरल प्रत्येक के वेतन से यह राशि वसूल करेंगे." उन्होंने जस्टिस भानुमति को दो करोड़ रुपये का मुआवजा अदा करने का निर्देश भी दिया.टिप्पणियां शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ लिखे गये जस्टिस कर्णन के अनेक पत्रों का स्वत: संज्ञान लिया है और आठ फरवरी से उनके प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों के उपयोग पर रोक लगा रखी है. जस्टिस कर्णन अवमानना कार्यवाही के सिलसिले में 31 मार्च को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए थे. वह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा करने वाले उच्च न्यायालय के पहले न्यायाधीश हैं.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) जस्टिस कर्णन ने कहा कि शीर्ष अदालत के आठों न्यायाधीशों ने जातिगत भेदभाव किया है. उन्होंने कहा, "उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम, 1989 के तहत दंडित किया जाएगा." उन्होंने कहा कि आठ न्यायाधीशों ने एक सार्वजनिक संस्थान में मुझे अपमानित करने के अलावा एक दलित न्यायाधीश का उत्पीड़न किया है. उनके आदेशों से सभी संदेह से परे यह साबित हो गया है. जस्टिस कर्णन ने यहां न्यू टाउन में रोजडेल टॉवर स्थित अपने आवास पर अस्थाई अदालत से जारी अपने आदेश में कहा, "इसलिए इस मामले में अदालत का फैसला जरूरी नहीं है." उन्होंने अपने आदेश में प्रत्येक के लिए पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई और एससी-एसटी कानून के तहत तीन आधार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया. जस्टिस कर्णन ने निर्देश दिया कि तीनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और यदि जुर्माना अदा नहीं किया गया तो उन्हें छह महीने की कैद और काटनी होगी. उन्होंने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि आदेश प्राप्त होने के एक सप्ताह के अंदर नयी दिल्ली के खान मार्केट स्थित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग में जमा की जाए. जस्टिस कर्णन ने यह भी कहा कि उनके द्वारा 13 अप्रैल को जारी आदेश अभी प्रभावी है जिसमें उन्होंने सात न्यायाधीशों की पीठ के सदस्यों को 14 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया था. उन्होंने निर्देश दिया था, "उच्चतम न्यायालय से संबद्ध रजिस्ट्रार जनरल प्रत्येक के वेतन से यह राशि वसूल करेंगे." उन्होंने जस्टिस भानुमति को दो करोड़ रुपये का मुआवजा अदा करने का निर्देश भी दिया.टिप्पणियां शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ लिखे गये जस्टिस कर्णन के अनेक पत्रों का स्वत: संज्ञान लिया है और आठ फरवरी से उनके प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों के उपयोग पर रोक लगा रखी है. जस्टिस कर्णन अवमानना कार्यवाही के सिलसिले में 31 मार्च को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए थे. वह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा करने वाले उच्च न्यायालय के पहले न्यायाधीश हैं.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) जस्टिस कर्णन ने यहां न्यू टाउन में रोजडेल टॉवर स्थित अपने आवास पर अस्थाई अदालत से जारी अपने आदेश में कहा, "इसलिए इस मामले में अदालत का फैसला जरूरी नहीं है." उन्होंने अपने आदेश में प्रत्येक के लिए पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई और एससी-एसटी कानून के तहत तीन आधार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया. जस्टिस कर्णन ने निर्देश दिया कि तीनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और यदि जुर्माना अदा नहीं किया गया तो उन्हें छह महीने की कैद और काटनी होगी. उन्होंने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि आदेश प्राप्त होने के एक सप्ताह के अंदर नयी दिल्ली के खान मार्केट स्थित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग में जमा की जाए. जस्टिस कर्णन ने यह भी कहा कि उनके द्वारा 13 अप्रैल को जारी आदेश अभी प्रभावी है जिसमें उन्होंने सात न्यायाधीशों की पीठ के सदस्यों को 14 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया था. उन्होंने निर्देश दिया था, "उच्चतम न्यायालय से संबद्ध रजिस्ट्रार जनरल प्रत्येक के वेतन से यह राशि वसूल करेंगे." उन्होंने जस्टिस भानुमति को दो करोड़ रुपये का मुआवजा अदा करने का निर्देश भी दिया.टिप्पणियां शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ लिखे गये जस्टिस कर्णन के अनेक पत्रों का स्वत: संज्ञान लिया है और आठ फरवरी से उनके प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों के उपयोग पर रोक लगा रखी है. जस्टिस कर्णन अवमानना कार्यवाही के सिलसिले में 31 मार्च को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए थे. वह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा करने वाले उच्च न्यायालय के पहले न्यायाधीश हैं.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) जस्टिस कर्णन ने यह भी कहा कि उनके द्वारा 13 अप्रैल को जारी आदेश अभी प्रभावी है जिसमें उन्होंने सात न्यायाधीशों की पीठ के सदस्यों को 14 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया था. उन्होंने निर्देश दिया था, "उच्चतम न्यायालय से संबद्ध रजिस्ट्रार जनरल प्रत्येक के वेतन से यह राशि वसूल करेंगे." उन्होंने जस्टिस भानुमति को दो करोड़ रुपये का मुआवजा अदा करने का निर्देश भी दिया.टिप्पणियां शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ लिखे गये जस्टिस कर्णन के अनेक पत्रों का स्वत: संज्ञान लिया है और आठ फरवरी से उनके प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों के उपयोग पर रोक लगा रखी है. जस्टिस कर्णन अवमानना कार्यवाही के सिलसिले में 31 मार्च को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए थे. वह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा करने वाले उच्च न्यायालय के पहले न्यायाधीश हैं.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ लिखे गये जस्टिस कर्णन के अनेक पत्रों का स्वत: संज्ञान लिया है और आठ फरवरी से उनके प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों के उपयोग पर रोक लगा रखी है. जस्टिस कर्णन अवमानना कार्यवाही के सिलसिले में 31 मार्च को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए थे. वह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा करने वाले उच्च न्यायालय के पहले न्यायाधीश हैं.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
संक्षिप्त सारांश: जस्टिस कर्णन ने बढ़ाया उच्चतम न्यायालय से टकराव सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस कर्णन के खिलाफ अवमानना कार्यवाही जारी है न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज पर रोक लगा दी थी
29
['hin']
एक सारांश बनाओ: देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 4 मार्च से 1 अप्रैल के बीच 1,08,488.41 करोड़ रुपये बढ़ा है। इस दौरान सबसे शानदार प्रदर्शन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) का रहा। इस दौरान ओएनजीसी का बाजार पूंजीकरण 20,747.04 करोड़ रुपये बढ़कर 2,50,547.23 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 4 मार्च से 1 अप्रैल के दौरान 17,528.9 करोड़ रुपये बढ़कर 3,38,892 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं आईटी क्षेत्र की दो कंपनियों- टीसीएस और इंफोसिस टेक्नोलॉजीज को कुल मिलाकर 17,759.28 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। इस दौरान टीसीएस का बाजार पूंजीकरण बढ़कर 2,30,881.1 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि इंफोसिस का बाजार पूंजीकरण शुक्रवार को कारोबार बंद होने के समय 1,84,769.73 करोड़ रुपये पर था। सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लिमिटेड का बाजार पूंजीकरण इस अवधि में 14,148.64 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ 2,19,398.76 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं बिजली कंपनी एनटीपीसी के बाजार पूंजीकरण में 8,163.01 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ और यह 1,55,756.74 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। देश के दो सबसे बड़े बैंकों भारतीय स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के बाजार पूंजीकरण में कुल मिलाकर 11,151.45 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। एसबीआई का बाजार पूंजीकरण जहां 1,72,685.53 करोड़ रुपये पर तथा आईसीआईसीआई बैंक का 1,26,690.31 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनी आईटीसी के बाजार पूंजीकरण में इस अवधि में 8,129.19 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह 1,41,375.09 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 10,860.9 करोड़ रुपये के इजाफे के साथ 1,34,944.87 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। मार्च के महीने में बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 973.89 अंक या 5.27 प्रतिशत मजबूत हुआ।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 4 मार्च से 1 अप्रैल के बीच 1,08,488.41 करोड़ रुपये बढ़ा है।
32
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: एक बड़े से हवाई जहाज में आप अकेले हों और चारों ओर घुप्‍प अंधेरा हो. सोचिए कैसा महसूस करेंगे आप? और तो और प्‍लेन बंद भी हो तो आपकी हालत क्‍या होगी? जी हां, यह कोई कहानी नहीं बल्‍कि एयर कनाडा फ्लाइट से टोरंटो जा रही महिला टिफिनी एडम्‍स के साथ ऐसा सच में हुआ है. फ्लाइट के दौरान वह सो गईं थीं और जब कई घंटों बाद उठीं तो पूरा प्‍लेन खाली थी और चारों ओर अंधेरा था. यही नहीं प्‍लेन टोरंटो इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पार्किंग में खड़ा था और बंद भी था. महिला ने फेसबुक पर आपबीती बताते हुए लिखा है, "मैं लगभग आधी रात को उठी (फ्लाइट लैंड होने के कुछ घंटों बाद ), अंदर भयानक ठंड थी और मैं घनघोर अंधेरे में अभी भी अपनी सीट पर ही फंसी हुई थी. मैं बता नहीं सकती कि वो पल कितना भयानक था. मुझे लगा कि मैं कोई बुरा सपना देख रही हूं क्‍योंकि मैं यह समझ नहीं पा रही थी कि ऐसा कैसे हो रहा है." यही नहीं महिला के फोन की बैटरी चार्ज नहीं थी और वह मदद के लिए कॉल भी नहीं कर सकती थी. किस्‍मत से महिला को कॉकपटि में टॉर्च मिल गया जिसकी मदद से वह किसी तरह प्‍लेन के मुख्‍य दरवाजे तक पहुंच पाई." दरवाजा खोलने के बाद महिला ने देखा कि वज जमीन से से 50 फीट ऊपर है और उसे अब तक यह समझ आ गया था कि वो कूद नहीं सकती. अब उसके पास कोई दूसरा विकल्‍प नहीं बचा था. ऐसे में वह दरवाजे पर बैठी गई और टॉर्च की मदद से अपनी मौजूदगी का सिग्‍नल देती रही. फिर कुछ देर बाद एक एयरपोर्ट कर्मचारी की नजर उस पर पड़ी और फिर उन्‍हें सुरक्षित वापस लाया गया. एयर कनाडा ने घटना के लिए महिला से माफी मांगी है. हालांकि महिला का कहना है क‍ि घटना के बाद से वह सदमे में है और ठीक से सो नहीं पा रही है.
संक्षिप्त सारांश: एक महिला फ्लाइट में बंद हो गई, दरवाजा बाहर से बंद था महिला फ्लाइट में सो गई थी और जब उठी तो वहां कोई नहीं था एयर कनाडा ने इस घटना के लिए महिला से माफी मांगी है
23
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: पिछले दोनों मैचों में बड़ी जीत से उत्साहित भारत बुधवार को इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले चौथे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में ही पांच मैचों की शृंखला अपने नाम करने के लिए मैदान पर उतरेगा। दूसरी तरफ खराब प्रदर्शन से परेशान इंग्लैंड विजयी लय में लौटने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा। हाल के दिनों में लगातार लचर प्रदर्शन के बाद टीम ने लगातार दो बड़ी जीत से खुद को साबित करने की शुरुआत कर रही है तथा कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को उम्मीद होगी कि उनके युवा खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन जारी रखकर लगातार तीसरी जीत दर्ज करके शृंखला में अजेय बढ़त हासिल करने में सफल रहेगी। भारत के युवा और अनुभवहीन गेंदबाजों ने पिछले दो मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया और जीत की नींव रखने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा खराब फॉर्म में चल रहे शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने वापसी के संकेत दिए हैं। दबाव निश्चिततौर पर इंग्लैंड की टीम पर रहेगा, जिन्हें भारतीयों को पीसीए स्टेडियम में शृंखला जीतने से रोकने के लिए प्रेरणादायी प्रदर्शन करना होगा। दोनों टीमों के लिए यह मैच बहुत महत्वपूर्ण है और इसलिए मुकाबला रोमांचक होने की संभावना है।टिप्पणियां दो बड़ी जीतों के बाजवूद कुछ विभाग ऐसे हैं, जो भारतीयों के लिए चिंता का विषय है। इनमें सलामी जोड़ी को नहीं चल पाना भी शामिल है। गौतम गंभीर ने हालांकि अच्छी शुरुआत कर रहे हैं, लेकिन वह इसे बड़ी पारी में बदलने में नाकाम रहे हैं। दूसरे सलामी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे अच्छी टच में नहीं हैं और कम स्कोर पर आउट हुए हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत शृंखला में अभी तक अच्छी शुरुआत हासिल नहीं कर पाया।   भारतीय टीम प्रबंधन संभवत: पिछले दो मैचों में जीत दर्ज करने वाली टीम में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। रविंदर जडेजा ने पिछले दो मैचों में बल्ले और गेंद से शानदार प्रदर्शन किया जिससे अंतर पैदा हुआ। भारतीयों को टीम में संतुलन पैदा करने के लिए अदद आलराउंडर की सख्त जरूरत है और जडेजा इस स्थान को अच्छी तरह से भर रहा है। सौराष्ट्र के इस युवा ऑलराउंडर को हालांकि निरंतर अच्छा प्रदर्शन करना होगा। जडेजा की फॉर्म से कप्तान धोनी भी खुश हैं, क्योंकि एकदिवसीय मैचों के वर्तमान नियमों युवराज सिंह और सुरेश रैना जैसे पार्टटाइम गेंदबाजों से अधिक ओवर नहीं कराए जा सकते हैं। धोनी ने कहा, वह (जडेजा) निश्चित तौर पर हमें संतुलन प्रदान करता है। वह इस लिहाज से जडेजा हमारे पास सही खिलाड़ी है। हम गेंदबाजी आलराउंडर के साथ संघर्ष कर रहे थे। हमारे पास इरफान (पठान) ही अकेला ऐसा खिलाड़ी था। उन्होंने कहा, नए नियमों से पहले हम युवराज सिंह और अन्य पार्टटाइम गेंदबाजों से दस ओवर करवाते थे। नए नियम आने के बाद युवी को गेंदबाज के तौर पर उनसे सामंजस्य बिठाने में थोड़ा समय लगेगा। विराट कोहली की फॉर्म में वापसी भारतीयों के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि हाल के टूर्नामेंटों में मध्यक्रम का लगातार असफल रहा भारतीयों पर भारी पड़ा था। हाल के दिनों में लगातार लचर प्रदर्शन के बाद टीम ने लगातार दो बड़ी जीत से खुद को साबित करने की शुरुआत कर रही है तथा कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को उम्मीद होगी कि उनके युवा खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन जारी रखकर लगातार तीसरी जीत दर्ज करके शृंखला में अजेय बढ़त हासिल करने में सफल रहेगी। भारत के युवा और अनुभवहीन गेंदबाजों ने पिछले दो मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया और जीत की नींव रखने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा खराब फॉर्म में चल रहे शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने वापसी के संकेत दिए हैं। दबाव निश्चिततौर पर इंग्लैंड की टीम पर रहेगा, जिन्हें भारतीयों को पीसीए स्टेडियम में शृंखला जीतने से रोकने के लिए प्रेरणादायी प्रदर्शन करना होगा। दोनों टीमों के लिए यह मैच बहुत महत्वपूर्ण है और इसलिए मुकाबला रोमांचक होने की संभावना है।टिप्पणियां दो बड़ी जीतों के बाजवूद कुछ विभाग ऐसे हैं, जो भारतीयों के लिए चिंता का विषय है। इनमें सलामी जोड़ी को नहीं चल पाना भी शामिल है। गौतम गंभीर ने हालांकि अच्छी शुरुआत कर रहे हैं, लेकिन वह इसे बड़ी पारी में बदलने में नाकाम रहे हैं। दूसरे सलामी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे अच्छी टच में नहीं हैं और कम स्कोर पर आउट हुए हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत शृंखला में अभी तक अच्छी शुरुआत हासिल नहीं कर पाया।   भारतीय टीम प्रबंधन संभवत: पिछले दो मैचों में जीत दर्ज करने वाली टीम में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। रविंदर जडेजा ने पिछले दो मैचों में बल्ले और गेंद से शानदार प्रदर्शन किया जिससे अंतर पैदा हुआ। भारतीयों को टीम में संतुलन पैदा करने के लिए अदद आलराउंडर की सख्त जरूरत है और जडेजा इस स्थान को अच्छी तरह से भर रहा है। सौराष्ट्र के इस युवा ऑलराउंडर को हालांकि निरंतर अच्छा प्रदर्शन करना होगा। जडेजा की फॉर्म से कप्तान धोनी भी खुश हैं, क्योंकि एकदिवसीय मैचों के वर्तमान नियमों युवराज सिंह और सुरेश रैना जैसे पार्टटाइम गेंदबाजों से अधिक ओवर नहीं कराए जा सकते हैं। धोनी ने कहा, वह (जडेजा) निश्चित तौर पर हमें संतुलन प्रदान करता है। वह इस लिहाज से जडेजा हमारे पास सही खिलाड़ी है। हम गेंदबाजी आलराउंडर के साथ संघर्ष कर रहे थे। हमारे पास इरफान (पठान) ही अकेला ऐसा खिलाड़ी था। उन्होंने कहा, नए नियमों से पहले हम युवराज सिंह और अन्य पार्टटाइम गेंदबाजों से दस ओवर करवाते थे। नए नियम आने के बाद युवी को गेंदबाज के तौर पर उनसे सामंजस्य बिठाने में थोड़ा समय लगेगा। विराट कोहली की फॉर्म में वापसी भारतीयों के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि हाल के टूर्नामेंटों में मध्यक्रम का लगातार असफल रहा भारतीयों पर भारी पड़ा था। भारत के युवा और अनुभवहीन गेंदबाजों ने पिछले दो मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया और जीत की नींव रखने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा खराब फॉर्म में चल रहे शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने वापसी के संकेत दिए हैं। दबाव निश्चिततौर पर इंग्लैंड की टीम पर रहेगा, जिन्हें भारतीयों को पीसीए स्टेडियम में शृंखला जीतने से रोकने के लिए प्रेरणादायी प्रदर्शन करना होगा। दोनों टीमों के लिए यह मैच बहुत महत्वपूर्ण है और इसलिए मुकाबला रोमांचक होने की संभावना है।टिप्पणियां दो बड़ी जीतों के बाजवूद कुछ विभाग ऐसे हैं, जो भारतीयों के लिए चिंता का विषय है। इनमें सलामी जोड़ी को नहीं चल पाना भी शामिल है। गौतम गंभीर ने हालांकि अच्छी शुरुआत कर रहे हैं, लेकिन वह इसे बड़ी पारी में बदलने में नाकाम रहे हैं। दूसरे सलामी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे अच्छी टच में नहीं हैं और कम स्कोर पर आउट हुए हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत शृंखला में अभी तक अच्छी शुरुआत हासिल नहीं कर पाया।   भारतीय टीम प्रबंधन संभवत: पिछले दो मैचों में जीत दर्ज करने वाली टीम में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। रविंदर जडेजा ने पिछले दो मैचों में बल्ले और गेंद से शानदार प्रदर्शन किया जिससे अंतर पैदा हुआ। भारतीयों को टीम में संतुलन पैदा करने के लिए अदद आलराउंडर की सख्त जरूरत है और जडेजा इस स्थान को अच्छी तरह से भर रहा है। सौराष्ट्र के इस युवा ऑलराउंडर को हालांकि निरंतर अच्छा प्रदर्शन करना होगा। जडेजा की फॉर्म से कप्तान धोनी भी खुश हैं, क्योंकि एकदिवसीय मैचों के वर्तमान नियमों युवराज सिंह और सुरेश रैना जैसे पार्टटाइम गेंदबाजों से अधिक ओवर नहीं कराए जा सकते हैं। धोनी ने कहा, वह (जडेजा) निश्चित तौर पर हमें संतुलन प्रदान करता है। वह इस लिहाज से जडेजा हमारे पास सही खिलाड़ी है। हम गेंदबाजी आलराउंडर के साथ संघर्ष कर रहे थे। हमारे पास इरफान (पठान) ही अकेला ऐसा खिलाड़ी था। उन्होंने कहा, नए नियमों से पहले हम युवराज सिंह और अन्य पार्टटाइम गेंदबाजों से दस ओवर करवाते थे। नए नियम आने के बाद युवी को गेंदबाज के तौर पर उनसे सामंजस्य बिठाने में थोड़ा समय लगेगा। विराट कोहली की फॉर्म में वापसी भारतीयों के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि हाल के टूर्नामेंटों में मध्यक्रम का लगातार असफल रहा भारतीयों पर भारी पड़ा था। दो बड़ी जीतों के बाजवूद कुछ विभाग ऐसे हैं, जो भारतीयों के लिए चिंता का विषय है। इनमें सलामी जोड़ी को नहीं चल पाना भी शामिल है। गौतम गंभीर ने हालांकि अच्छी शुरुआत कर रहे हैं, लेकिन वह इसे बड़ी पारी में बदलने में नाकाम रहे हैं। दूसरे सलामी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे अच्छी टच में नहीं हैं और कम स्कोर पर आउट हुए हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत शृंखला में अभी तक अच्छी शुरुआत हासिल नहीं कर पाया।   भारतीय टीम प्रबंधन संभवत: पिछले दो मैचों में जीत दर्ज करने वाली टीम में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। रविंदर जडेजा ने पिछले दो मैचों में बल्ले और गेंद से शानदार प्रदर्शन किया जिससे अंतर पैदा हुआ। भारतीयों को टीम में संतुलन पैदा करने के लिए अदद आलराउंडर की सख्त जरूरत है और जडेजा इस स्थान को अच्छी तरह से भर रहा है। सौराष्ट्र के इस युवा ऑलराउंडर को हालांकि निरंतर अच्छा प्रदर्शन करना होगा। जडेजा की फॉर्म से कप्तान धोनी भी खुश हैं, क्योंकि एकदिवसीय मैचों के वर्तमान नियमों युवराज सिंह और सुरेश रैना जैसे पार्टटाइम गेंदबाजों से अधिक ओवर नहीं कराए जा सकते हैं। धोनी ने कहा, वह (जडेजा) निश्चित तौर पर हमें संतुलन प्रदान करता है। वह इस लिहाज से जडेजा हमारे पास सही खिलाड़ी है। हम गेंदबाजी आलराउंडर के साथ संघर्ष कर रहे थे। हमारे पास इरफान (पठान) ही अकेला ऐसा खिलाड़ी था। उन्होंने कहा, नए नियमों से पहले हम युवराज सिंह और अन्य पार्टटाइम गेंदबाजों से दस ओवर करवाते थे। नए नियम आने के बाद युवी को गेंदबाज के तौर पर उनसे सामंजस्य बिठाने में थोड़ा समय लगेगा। विराट कोहली की फॉर्म में वापसी भारतीयों के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि हाल के टूर्नामेंटों में मध्यक्रम का लगातार असफल रहा भारतीयों पर भारी पड़ा था। सौराष्ट्र के इस युवा ऑलराउंडर को हालांकि निरंतर अच्छा प्रदर्शन करना होगा। जडेजा की फॉर्म से कप्तान धोनी भी खुश हैं, क्योंकि एकदिवसीय मैचों के वर्तमान नियमों युवराज सिंह और सुरेश रैना जैसे पार्टटाइम गेंदबाजों से अधिक ओवर नहीं कराए जा सकते हैं। धोनी ने कहा, वह (जडेजा) निश्चित तौर पर हमें संतुलन प्रदान करता है। वह इस लिहाज से जडेजा हमारे पास सही खिलाड़ी है। हम गेंदबाजी आलराउंडर के साथ संघर्ष कर रहे थे। हमारे पास इरफान (पठान) ही अकेला ऐसा खिलाड़ी था। उन्होंने कहा, नए नियमों से पहले हम युवराज सिंह और अन्य पार्टटाइम गेंदबाजों से दस ओवर करवाते थे। नए नियम आने के बाद युवी को गेंदबाज के तौर पर उनसे सामंजस्य बिठाने में थोड़ा समय लगेगा। विराट कोहली की फॉर्म में वापसी भारतीयों के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि हाल के टूर्नामेंटों में मध्यक्रम का लगातार असफल रहा भारतीयों पर भारी पड़ा था।
यहाँ एक सारांश है:पिछले दोनों मैचों में बड़ी जीत से उत्साहित भारत बुधवार को इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले चौथे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में ही पांच मैचों की शृंखला अपने नाम करने के लिए मैदान पर उतरेगा।
18
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: शरद पवार की पार्टी एनसीपी की आज दिल्ली में एक अहम बैठक होने जा रही है जिसमें यूपीए सरकार के साथ संबंधों पर अहम फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है।टिप्पणियां दरअसल, एनसीपी पिछले कुछ वक्त से कांग्रेस पार्टी से नाराज चल रही है। इससे पहले खबर आई थी कि शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल ने अपने इस्तीफे की पेशकश की थी लेकिन एनसीपी ने बाद में साफ कर दिया था कि न तो किसी ने इस्तीफा दिया है और न ही वे यूपीए छोड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि पवार लोकसभा में सदन के नेता के लिए शिंदे के नाम से भी खुश नहीं हैं और वह अपनी बेटी सुप्रिया सुले के लिए भी अच्छी जगह चाहते हैं। साथ ही एनसीपी के मुताबिक उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री से साफ कह दिया है कि सरकार को अपना प्रदर्शन हर कीमत पर सुधारना होगा और सरकार और उसके सहयोगी दलों के बीच संबंधों को भी नया आयाम देना होगा। दरअसल, एनसीपी पिछले कुछ वक्त से कांग्रेस पार्टी से नाराज चल रही है। इससे पहले खबर आई थी कि शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल ने अपने इस्तीफे की पेशकश की थी लेकिन एनसीपी ने बाद में साफ कर दिया था कि न तो किसी ने इस्तीफा दिया है और न ही वे यूपीए छोड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि पवार लोकसभा में सदन के नेता के लिए शिंदे के नाम से भी खुश नहीं हैं और वह अपनी बेटी सुप्रिया सुले के लिए भी अच्छी जगह चाहते हैं। साथ ही एनसीपी के मुताबिक उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री से साफ कह दिया है कि सरकार को अपना प्रदर्शन हर कीमत पर सुधारना होगा और सरकार और उसके सहयोगी दलों के बीच संबंधों को भी नया आयाम देना होगा। माना जा रहा है कि पवार लोकसभा में सदन के नेता के लिए शिंदे के नाम से भी खुश नहीं हैं और वह अपनी बेटी सुप्रिया सुले के लिए भी अच्छी जगह चाहते हैं। साथ ही एनसीपी के मुताबिक उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री से साफ कह दिया है कि सरकार को अपना प्रदर्शन हर कीमत पर सुधारना होगा और सरकार और उसके सहयोगी दलों के बीच संबंधों को भी नया आयाम देना होगा।
संक्षिप्त पाठ: शरद पवार की पार्टी एनसीपी की आज दिल्ली में एक अहम बैठक होने जा रही है जिसमें यूपीए सरकार के साथ संबंधों पर अहम फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है।
13
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: भारत को अंतरिक्ष तक पहुंचाने वाले वैज्ञानिक विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 में अहमदाबाद में हुआ था. पूरा देश उन्हें और उनके कार्यों को कभी भुला नहीं सकता. डॉ.साराभाई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक के रूप में जाने जाते हैं. भारत ने आज तक अंतरिक्ष के क्षेत्र में जो कुछ भी हासिल किया है उसके पीछे साराभाई (Vikram Sarabhai) का बेहद खास योगदान है. डॉ. विक्रम साराभाई की याद में अंतरराष्ट्रीय खगोल संघ ने वर्ष 1974 में अंतरिक्ष में 'सी ऑफ सेरनिटी' पर स्थित बेसल नाम के मून क्रेटर को साराभाई क्रेटर नाम दिया था. इसरो ने भी चंद्रयान-दो के लैंडर का नाम विक्रम रखकर उन्हें याद किया. उनकी सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता यह थी कि वे एक ऐसे उच्च कोटि के इन्सान थे जिसके मन में दूसरों के प्रति असाधारण सहानुभूति थी. वह एक ऐसे व्यक्ति थे कि जो भी उनके संपर्क में आता, उनसे प्रभावित हुए बिना न रहता.    विक्रम साराभाई की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना थी. विक्रम साराभाई ने कहा था, ''कुछ लोग प्रगतिशील देशों में अंतरिक्ष क्रियाकलाप की प्रासंगिकता के बारे में प्रश्न चिन्ह लगाते हैं. हमें अपने लक्ष्य पर कोई संशय नहीं है. हम चन्द्र और उपग्रहों के अन्वेषण के क्षेत्र में विकसित देशों से होड़ का सपना नहीं देखते. किंतु राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अर्थपूर्ण भूमिका निभाने के लिए मानव समाज की कठिनाइयों के हल में अति-उन्नत तकनीक के प्रयोग में किसी से पीछे नहीं रहना चाहते." -भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद -भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), अहमदाबाद -कम्यूनिटी साइंस सेंटर, अहमदाबाद -कला प्रदर्शन के लिए दर्पण अकादमी, अहमदाबाद (अपनी पत्नी के साथ) -विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम -अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद (साराभाई द्वारा स्थापित छह संस्थानों/ केन्द्रों के विलय के बाद यह संस्था अस्तित्व में आई) -फास्टर ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर), कलपक्कम -परिवर्ती ऊर्जा साइक्लोट्रॉन परियोजना, कलकत्ता -भारतीय इलेक्ट्रॉनकी निगम लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद -भारतीय यूरेनियम निगम लिमिटेड (यूसीआईएल), जादुगुडा, बिहार
विक्रम साराभाई वैज्ञानिक थे. साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक के रूप में जाना जाता हैं. उन्होंने इसरो की स्थापना की थी.
6
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सहित भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ियों ने सचिन तेंदुलकर के लिए विश्व कप जीतने की भावनाएं व्यक्त की थी, लेकिन पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि टीम को इससे अपना ध्यान नहीं बंटाना चाहिए। भारत की विश्व चैंपियन टीम के सदस्य रहे सैयद किरमानी ने कहा, भारतीय टीम यदि सचिन को विश्व कप समर्पित करती है तो यह उनकी तरफ से बहुत बड़ा आदर होगा, लेकिन उनका ध्यान नहीं बंटना चाहिए। उन्होंने कहा, टीम का ध्यान सचिन पर नहीं बल्कि विश्व कप पर होना चाहिए। उन्हें देश की तरफ से खेलना अपना लक्ष्य रखना होगा। आप सचिन या धोनी के लिए नहीं खेलते हो। आप देश के लिए खेलते हो। भारतीय कप्तान धोनी, गौतम गंभीर और विराट कोहली उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने तेंदुलकर के लिये विश्व कप जीतने की बात कही थी। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और 2007 की विश्व ट्वेंटी-20 चैंपियन टीम के कोच रहे लालचंद राजपूत ने कहा कि विश्व कप जीतने से पहले इस तरह की भावनाएं व्यक्त करना सही नहीं है। उन्होंने कहा, ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए थी। विश्व कप जीतने के बाद वे उसे समपिर्त कर सकते हैं लेकिन अभी सभी का ध्यान विश्व कप जीतने पर होना चाहिए।
किरमानी ने कहा, "भारतीय टीम यदि सचिन को विश्व कप समर्पित करती है तो यह उनका बहुत बड़ा आदर होगा, लेकिन उनका ध्यान नहीं बंटना चाहिए।"
6
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: सीरिया में विपक्ष की मजबूत पकड़ वाले होम्स में सीरियाई सुरक्षा बलों की गोलाबारी में एक ब्रिटिश अखबार से जुड़े फोटो पत्रकार और जाने माने युद्ध संवाददाता की मौत हो गई। होम्स में कई सप्ताह से जारी विध्वंसकारी गोलाबारी के बावजूद विपक्षी गुट वहां से नहीं हटे हैं। इन गुटों में राष्ट्रपति बशर असद के सैन्यबल से हट गए लोग शामिल हैं।टिप्पणियां सैन्य बलों की इस घेराबंदी में सैकड़ों लोगों की जान चली गई और हाल की मौतों के बाद असद पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है, लेकिन उसके बाद भी असद अपना सैन्य अभियान का विस्तार करने पर अड़े नजर आ रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नूलैंड ने मारे गए पत्रकारों के बारे में कहा, ‘‘यह दुखद घटना असद शासन की बेशर्म क्रूरता का एक और उदाहरण है।’’ फ्रांस सरकार की ओर से इन दोनों मौतों की पुष्टि के बाद वहां के राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी ने कहा, ‘‘अब काफी हो चुका है। इस शासन को जाना ही होगा।’’ इसी बीच, सीरियाई कार्यकर्ताओं ने कहा है कि इस गोलाबारी में दो अन्य पश्चिमी पत्रकार 'ला फिगारो' के फ्रांसीसी रिपोर्टर एडिथ बोवियर तथा 'संडे टाइम्स' के ब्रिटिश छाया पत्रकार पॉल कानरॉय घायल हुए। इस गोलीबारी में कम से कम 13 लोगों की जान चली गई। सैन्य बलों की इस घेराबंदी में सैकड़ों लोगों की जान चली गई और हाल की मौतों के बाद असद पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है, लेकिन उसके बाद भी असद अपना सैन्य अभियान का विस्तार करने पर अड़े नजर आ रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नूलैंड ने मारे गए पत्रकारों के बारे में कहा, ‘‘यह दुखद घटना असद शासन की बेशर्म क्रूरता का एक और उदाहरण है।’’ फ्रांस सरकार की ओर से इन दोनों मौतों की पुष्टि के बाद वहां के राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी ने कहा, ‘‘अब काफी हो चुका है। इस शासन को जाना ही होगा।’’ इसी बीच, सीरियाई कार्यकर्ताओं ने कहा है कि इस गोलाबारी में दो अन्य पश्चिमी पत्रकार 'ला फिगारो' के फ्रांसीसी रिपोर्टर एडिथ बोवियर तथा 'संडे टाइम्स' के ब्रिटिश छाया पत्रकार पॉल कानरॉय घायल हुए। इस गोलीबारी में कम से कम 13 लोगों की जान चली गई। फ्रांस सरकार की ओर से इन दोनों मौतों की पुष्टि के बाद वहां के राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी ने कहा, ‘‘अब काफी हो चुका है। इस शासन को जाना ही होगा।’’ इसी बीच, सीरियाई कार्यकर्ताओं ने कहा है कि इस गोलाबारी में दो अन्य पश्चिमी पत्रकार 'ला फिगारो' के फ्रांसीसी रिपोर्टर एडिथ बोवियर तथा 'संडे टाइम्स' के ब्रिटिश छाया पत्रकार पॉल कानरॉय घायल हुए। इस गोलीबारी में कम से कम 13 लोगों की जान चली गई।
संक्षिप्त पाठ: विपक्ष की मजबूत पकड़ वाले होम्स में सीरियाई सुरक्षा बलों की गोलाबारी में एक ब्रिटिश अखबार से जुड़े फोटो पत्रकार और जाने माने युद्ध संवाददाता की मौत हो गई।
22
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: सचिन तेंदुलकर भले ही पिछले कुछ समय से फार्म में नहीं हों लेकिन इस सीनियर भारतीय बल्लेबाज ने गुरुवार को कहा कि वह अपने संन्यास के बारे में दूसरे लोगों की राय से परेशान नहीं हैं और वह अपना काम जारी रखेंगे। तेंदुलकर ने भारत के पहले ई-न्यूजपेपर ‘डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट ईन्यूजपेपरआफइंडिया डाट काम’ को लांच के मौके पर कहा, ‘‘काफी लोग इस सवाल (संन्यास के बारे में) पर काफी बात कर रहे हैं। अगर मैं सही हूं तो यह सवाल 2005 से शुरू हुआ था और तब से यह सिलसिला जारी है। लेकिन मेरा जवाब यही रहा है कि मैं अपने काम पर अडिग रहूंगा और आप अपना काम करो।’’ जब उनसे पूछा गया कि उनके संन्यास को लेकर लगातार चर्चाओं से क्या उन्हें कभी झल्लाहट हुई है या इससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ा है तो उन्होंने कहा, ‘‘इससे मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता।’’ संचार एवं सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री कपिल सिब्बल और सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी भी इस ई-न्यूजपेपर के लांच के मौके पर मौजूद थे। लांच के बाद तेंदुलकर ने चर्चा में यह बात कही। उन्होंने इस बारे में भी बात की कि 2001 विश्व कप के दौरान 99वां शतक जड़ने के बाद किस तरह मीडिया ने उनके 100वें अंतरराष्ट्रीय सैकड़े की अटकलें लगाई थीं। तेंदुलकर ने कहा, ‘‘मैंने विश्व कप के दौरान अपना 99वां अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा था, जिसके बाद मीडिया की अटकलबाजियां शुरू हो गई। आप (मीडिया) विश्व कप के दौरान चुप रहे और मेरे 100वें शतक के बारे में बात नहीं कर रहे थे क्योंकि सबसे अहम हमने विश्व कप जीतना था। विश्व कप के बाद फिर से ध्यान मेरे 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक पर चला गया।’’ यह पूछने पर कि क्या वह रोज अखबार पढ़ते हैं तो तेंदुलकर ने जवाब दिया, ‘‘मैं न्यूजपेपर पढ़ता रहूंगा तो खेलेगा कौन?’’ पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की उनके बारे में राय (हालांकि ये नकारात्मक नहीं हैं) के संबंध में सवाल पूछने पर तेंदुलकर ने पूछा, ‘‘आप सोचते हैं कि वे मेरे बारे में गलत चीजें कह रहे थे?’’ तेंदुलकर ने गंभीरता से कहा कि वह दूसरे लोगों की राय से परेशान नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘‘लोग अपनी राय देने के लिए स्वतंत्र हैं। काफी लोग मेरे बारे में राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट खेल चुके हैं और वे अपनी राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट नहीं खेले हैं और वे भी राय दे रहे हैं। लेकिन मैं उनकी राय के बारे में चिंतित नहीं होता।’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘यह एक ‘पैकेज डील’ है। आप जब भी बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर जाते हो तो हमेशा शतक नहीं बना सकते। इसी तरह से आपको हमेशा सकारात्मक टिप्पणी नहीं मिल सकती। इसलिए दूसरे लोग क्या कहते हैं, मैं इस पर नियंत्रण नहीं कर सकता। मैं सिर्फ इतना ही कर सकता हूं कि मैं अपना ध्यान उन चीजों पर लगाऊं जो मेरे हाथ में हैं यानी अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाऊं।’’ इस मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि उनका परिवार क्रिकेट पर चर्चा नहीं करता इसलिए यह खेल उनके घर में मुख्य मुद्दा नहीं होता।टिप्पणियां राज्यसभा के सदस्य ने कहा, ‘‘हम क्रिकेट पर चर्चा नहीं करते। मेरा परिवार दिन के अन्य मुद्दों पर चर्चा करता है, लेकिन क्रिकेट पर नहीं। जब मैं क्रिकेट पर बात करना चाहता हूं तो मैं अपने भाई के साथ इस पर चर्चा करता हूं।’’ तेंदुलकर के सोशल मीडिया ट्विटर पर 32 लाख लोग फॉलोअर बन चुके हैं, उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि वह इस मंच के जरिये चैरीटी के लिए धन जुटा सके। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जब ट्विटर शुरू किया जब मेरे दोस्तों ने बताया कि मेरे नाम के कई नकली अकाउंट खुले हुए हैं और ऐसी चीजें कहते हैं तो मैंने कभी नहीं कहीं और की। इन चीजों को रोकने के लिए ही मैंने ट्विटर अंकाउट शुरू किया। इसके जरिये मैं युवा कैंसर मरीजों के लिए धन राशि इकट्टा कर सका।’’ तेंदुलकर ने भारत के पहले ई-न्यूजपेपर ‘डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट ईन्यूजपेपरआफइंडिया डाट काम’ को लांच के मौके पर कहा, ‘‘काफी लोग इस सवाल (संन्यास के बारे में) पर काफी बात कर रहे हैं। अगर मैं सही हूं तो यह सवाल 2005 से शुरू हुआ था और तब से यह सिलसिला जारी है। लेकिन मेरा जवाब यही रहा है कि मैं अपने काम पर अडिग रहूंगा और आप अपना काम करो।’’ जब उनसे पूछा गया कि उनके संन्यास को लेकर लगातार चर्चाओं से क्या उन्हें कभी झल्लाहट हुई है या इससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ा है तो उन्होंने कहा, ‘‘इससे मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता।’’ संचार एवं सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री कपिल सिब्बल और सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी भी इस ई-न्यूजपेपर के लांच के मौके पर मौजूद थे। लांच के बाद तेंदुलकर ने चर्चा में यह बात कही। उन्होंने इस बारे में भी बात की कि 2001 विश्व कप के दौरान 99वां शतक जड़ने के बाद किस तरह मीडिया ने उनके 100वें अंतरराष्ट्रीय सैकड़े की अटकलें लगाई थीं। तेंदुलकर ने कहा, ‘‘मैंने विश्व कप के दौरान अपना 99वां अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा था, जिसके बाद मीडिया की अटकलबाजियां शुरू हो गई। आप (मीडिया) विश्व कप के दौरान चुप रहे और मेरे 100वें शतक के बारे में बात नहीं कर रहे थे क्योंकि सबसे अहम हमने विश्व कप जीतना था। विश्व कप के बाद फिर से ध्यान मेरे 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक पर चला गया।’’ यह पूछने पर कि क्या वह रोज अखबार पढ़ते हैं तो तेंदुलकर ने जवाब दिया, ‘‘मैं न्यूजपेपर पढ़ता रहूंगा तो खेलेगा कौन?’’ पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की उनके बारे में राय (हालांकि ये नकारात्मक नहीं हैं) के संबंध में सवाल पूछने पर तेंदुलकर ने पूछा, ‘‘आप सोचते हैं कि वे मेरे बारे में गलत चीजें कह रहे थे?’’ तेंदुलकर ने गंभीरता से कहा कि वह दूसरे लोगों की राय से परेशान नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘‘लोग अपनी राय देने के लिए स्वतंत्र हैं। काफी लोग मेरे बारे में राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट खेल चुके हैं और वे अपनी राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट नहीं खेले हैं और वे भी राय दे रहे हैं। लेकिन मैं उनकी राय के बारे में चिंतित नहीं होता।’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘यह एक ‘पैकेज डील’ है। आप जब भी बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर जाते हो तो हमेशा शतक नहीं बना सकते। इसी तरह से आपको हमेशा सकारात्मक टिप्पणी नहीं मिल सकती। इसलिए दूसरे लोग क्या कहते हैं, मैं इस पर नियंत्रण नहीं कर सकता। मैं सिर्फ इतना ही कर सकता हूं कि मैं अपना ध्यान उन चीजों पर लगाऊं जो मेरे हाथ में हैं यानी अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाऊं।’’ इस मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि उनका परिवार क्रिकेट पर चर्चा नहीं करता इसलिए यह खेल उनके घर में मुख्य मुद्दा नहीं होता।टिप्पणियां राज्यसभा के सदस्य ने कहा, ‘‘हम क्रिकेट पर चर्चा नहीं करते। मेरा परिवार दिन के अन्य मुद्दों पर चर्चा करता है, लेकिन क्रिकेट पर नहीं। जब मैं क्रिकेट पर बात करना चाहता हूं तो मैं अपने भाई के साथ इस पर चर्चा करता हूं।’’ तेंदुलकर के सोशल मीडिया ट्विटर पर 32 लाख लोग फॉलोअर बन चुके हैं, उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि वह इस मंच के जरिये चैरीटी के लिए धन जुटा सके। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जब ट्विटर शुरू किया जब मेरे दोस्तों ने बताया कि मेरे नाम के कई नकली अकाउंट खुले हुए हैं और ऐसी चीजें कहते हैं तो मैंने कभी नहीं कहीं और की। इन चीजों को रोकने के लिए ही मैंने ट्विटर अंकाउट शुरू किया। इसके जरिये मैं युवा कैंसर मरीजों के लिए धन राशि इकट्टा कर सका।’’ जब उनसे पूछा गया कि उनके संन्यास को लेकर लगातार चर्चाओं से क्या उन्हें कभी झल्लाहट हुई है या इससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ा है तो उन्होंने कहा, ‘‘इससे मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता।’’ संचार एवं सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री कपिल सिब्बल और सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी भी इस ई-न्यूजपेपर के लांच के मौके पर मौजूद थे। लांच के बाद तेंदुलकर ने चर्चा में यह बात कही। उन्होंने इस बारे में भी बात की कि 2001 विश्व कप के दौरान 99वां शतक जड़ने के बाद किस तरह मीडिया ने उनके 100वें अंतरराष्ट्रीय सैकड़े की अटकलें लगाई थीं। तेंदुलकर ने कहा, ‘‘मैंने विश्व कप के दौरान अपना 99वां अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा था, जिसके बाद मीडिया की अटकलबाजियां शुरू हो गई। आप (मीडिया) विश्व कप के दौरान चुप रहे और मेरे 100वें शतक के बारे में बात नहीं कर रहे थे क्योंकि सबसे अहम हमने विश्व कप जीतना था। विश्व कप के बाद फिर से ध्यान मेरे 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक पर चला गया।’’ यह पूछने पर कि क्या वह रोज अखबार पढ़ते हैं तो तेंदुलकर ने जवाब दिया, ‘‘मैं न्यूजपेपर पढ़ता रहूंगा तो खेलेगा कौन?’’ पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की उनके बारे में राय (हालांकि ये नकारात्मक नहीं हैं) के संबंध में सवाल पूछने पर तेंदुलकर ने पूछा, ‘‘आप सोचते हैं कि वे मेरे बारे में गलत चीजें कह रहे थे?’’ तेंदुलकर ने गंभीरता से कहा कि वह दूसरे लोगों की राय से परेशान नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘‘लोग अपनी राय देने के लिए स्वतंत्र हैं। काफी लोग मेरे बारे में राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट खेल चुके हैं और वे अपनी राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट नहीं खेले हैं और वे भी राय दे रहे हैं। लेकिन मैं उनकी राय के बारे में चिंतित नहीं होता।’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘यह एक ‘पैकेज डील’ है। आप जब भी बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर जाते हो तो हमेशा शतक नहीं बना सकते। इसी तरह से आपको हमेशा सकारात्मक टिप्पणी नहीं मिल सकती। इसलिए दूसरे लोग क्या कहते हैं, मैं इस पर नियंत्रण नहीं कर सकता। मैं सिर्फ इतना ही कर सकता हूं कि मैं अपना ध्यान उन चीजों पर लगाऊं जो मेरे हाथ में हैं यानी अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाऊं।’’ इस मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि उनका परिवार क्रिकेट पर चर्चा नहीं करता इसलिए यह खेल उनके घर में मुख्य मुद्दा नहीं होता।टिप्पणियां राज्यसभा के सदस्य ने कहा, ‘‘हम क्रिकेट पर चर्चा नहीं करते। मेरा परिवार दिन के अन्य मुद्दों पर चर्चा करता है, लेकिन क्रिकेट पर नहीं। जब मैं क्रिकेट पर बात करना चाहता हूं तो मैं अपने भाई के साथ इस पर चर्चा करता हूं।’’ तेंदुलकर के सोशल मीडिया ट्विटर पर 32 लाख लोग फॉलोअर बन चुके हैं, उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि वह इस मंच के जरिये चैरीटी के लिए धन जुटा सके। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जब ट्विटर शुरू किया जब मेरे दोस्तों ने बताया कि मेरे नाम के कई नकली अकाउंट खुले हुए हैं और ऐसी चीजें कहते हैं तो मैंने कभी नहीं कहीं और की। इन चीजों को रोकने के लिए ही मैंने ट्विटर अंकाउट शुरू किया। इसके जरिये मैं युवा कैंसर मरीजों के लिए धन राशि इकट्टा कर सका।’’ लांच के बाद तेंदुलकर ने चर्चा में यह बात कही। उन्होंने इस बारे में भी बात की कि 2001 विश्व कप के दौरान 99वां शतक जड़ने के बाद किस तरह मीडिया ने उनके 100वें अंतरराष्ट्रीय सैकड़े की अटकलें लगाई थीं। तेंदुलकर ने कहा, ‘‘मैंने विश्व कप के दौरान अपना 99वां अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा था, जिसके बाद मीडिया की अटकलबाजियां शुरू हो गई। आप (मीडिया) विश्व कप के दौरान चुप रहे और मेरे 100वें शतक के बारे में बात नहीं कर रहे थे क्योंकि सबसे अहम हमने विश्व कप जीतना था। विश्व कप के बाद फिर से ध्यान मेरे 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक पर चला गया।’’ यह पूछने पर कि क्या वह रोज अखबार पढ़ते हैं तो तेंदुलकर ने जवाब दिया, ‘‘मैं न्यूजपेपर पढ़ता रहूंगा तो खेलेगा कौन?’’ पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की उनके बारे में राय (हालांकि ये नकारात्मक नहीं हैं) के संबंध में सवाल पूछने पर तेंदुलकर ने पूछा, ‘‘आप सोचते हैं कि वे मेरे बारे में गलत चीजें कह रहे थे?’’ तेंदुलकर ने गंभीरता से कहा कि वह दूसरे लोगों की राय से परेशान नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘‘लोग अपनी राय देने के लिए स्वतंत्र हैं। काफी लोग मेरे बारे में राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट खेल चुके हैं और वे अपनी राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट नहीं खेले हैं और वे भी राय दे रहे हैं। लेकिन मैं उनकी राय के बारे में चिंतित नहीं होता।’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘यह एक ‘पैकेज डील’ है। आप जब भी बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर जाते हो तो हमेशा शतक नहीं बना सकते। इसी तरह से आपको हमेशा सकारात्मक टिप्पणी नहीं मिल सकती। इसलिए दूसरे लोग क्या कहते हैं, मैं इस पर नियंत्रण नहीं कर सकता। मैं सिर्फ इतना ही कर सकता हूं कि मैं अपना ध्यान उन चीजों पर लगाऊं जो मेरे हाथ में हैं यानी अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाऊं।’’ इस मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि उनका परिवार क्रिकेट पर चर्चा नहीं करता इसलिए यह खेल उनके घर में मुख्य मुद्दा नहीं होता।टिप्पणियां राज्यसभा के सदस्य ने कहा, ‘‘हम क्रिकेट पर चर्चा नहीं करते। मेरा परिवार दिन के अन्य मुद्दों पर चर्चा करता है, लेकिन क्रिकेट पर नहीं। जब मैं क्रिकेट पर बात करना चाहता हूं तो मैं अपने भाई के साथ इस पर चर्चा करता हूं।’’ तेंदुलकर के सोशल मीडिया ट्विटर पर 32 लाख लोग फॉलोअर बन चुके हैं, उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि वह इस मंच के जरिये चैरीटी के लिए धन जुटा सके। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जब ट्विटर शुरू किया जब मेरे दोस्तों ने बताया कि मेरे नाम के कई नकली अकाउंट खुले हुए हैं और ऐसी चीजें कहते हैं तो मैंने कभी नहीं कहीं और की। इन चीजों को रोकने के लिए ही मैंने ट्विटर अंकाउट शुरू किया। इसके जरिये मैं युवा कैंसर मरीजों के लिए धन राशि इकट्टा कर सका।’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘मैंने विश्व कप के दौरान अपना 99वां अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा था, जिसके बाद मीडिया की अटकलबाजियां शुरू हो गई। आप (मीडिया) विश्व कप के दौरान चुप रहे और मेरे 100वें शतक के बारे में बात नहीं कर रहे थे क्योंकि सबसे अहम हमने विश्व कप जीतना था। विश्व कप के बाद फिर से ध्यान मेरे 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक पर चला गया।’’ यह पूछने पर कि क्या वह रोज अखबार पढ़ते हैं तो तेंदुलकर ने जवाब दिया, ‘‘मैं न्यूजपेपर पढ़ता रहूंगा तो खेलेगा कौन?’’ पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की उनके बारे में राय (हालांकि ये नकारात्मक नहीं हैं) के संबंध में सवाल पूछने पर तेंदुलकर ने पूछा, ‘‘आप सोचते हैं कि वे मेरे बारे में गलत चीजें कह रहे थे?’’ तेंदुलकर ने गंभीरता से कहा कि वह दूसरे लोगों की राय से परेशान नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘‘लोग अपनी राय देने के लिए स्वतंत्र हैं। काफी लोग मेरे बारे में राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट खेल चुके हैं और वे अपनी राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट नहीं खेले हैं और वे भी राय दे रहे हैं। लेकिन मैं उनकी राय के बारे में चिंतित नहीं होता।’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘यह एक ‘पैकेज डील’ है। आप जब भी बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर जाते हो तो हमेशा शतक नहीं बना सकते। इसी तरह से आपको हमेशा सकारात्मक टिप्पणी नहीं मिल सकती। इसलिए दूसरे लोग क्या कहते हैं, मैं इस पर नियंत्रण नहीं कर सकता। मैं सिर्फ इतना ही कर सकता हूं कि मैं अपना ध्यान उन चीजों पर लगाऊं जो मेरे हाथ में हैं यानी अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाऊं।’’ इस मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि उनका परिवार क्रिकेट पर चर्चा नहीं करता इसलिए यह खेल उनके घर में मुख्य मुद्दा नहीं होता।टिप्पणियां राज्यसभा के सदस्य ने कहा, ‘‘हम क्रिकेट पर चर्चा नहीं करते। मेरा परिवार दिन के अन्य मुद्दों पर चर्चा करता है, लेकिन क्रिकेट पर नहीं। जब मैं क्रिकेट पर बात करना चाहता हूं तो मैं अपने भाई के साथ इस पर चर्चा करता हूं।’’ तेंदुलकर के सोशल मीडिया ट्विटर पर 32 लाख लोग फॉलोअर बन चुके हैं, उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि वह इस मंच के जरिये चैरीटी के लिए धन जुटा सके। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जब ट्विटर शुरू किया जब मेरे दोस्तों ने बताया कि मेरे नाम के कई नकली अकाउंट खुले हुए हैं और ऐसी चीजें कहते हैं तो मैंने कभी नहीं कहीं और की। इन चीजों को रोकने के लिए ही मैंने ट्विटर अंकाउट शुरू किया। इसके जरिये मैं युवा कैंसर मरीजों के लिए धन राशि इकट्टा कर सका।’’ तेंदुलकर ने गंभीरता से कहा कि वह दूसरे लोगों की राय से परेशान नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘‘लोग अपनी राय देने के लिए स्वतंत्र हैं। काफी लोग मेरे बारे में राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट खेल चुके हैं और वे अपनी राय दे रहे हैं। कुछ क्रिकेट नहीं खेले हैं और वे भी राय दे रहे हैं। लेकिन मैं उनकी राय के बारे में चिंतित नहीं होता।’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘यह एक ‘पैकेज डील’ है। आप जब भी बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर जाते हो तो हमेशा शतक नहीं बना सकते। इसी तरह से आपको हमेशा सकारात्मक टिप्पणी नहीं मिल सकती। इसलिए दूसरे लोग क्या कहते हैं, मैं इस पर नियंत्रण नहीं कर सकता। मैं सिर्फ इतना ही कर सकता हूं कि मैं अपना ध्यान उन चीजों पर लगाऊं जो मेरे हाथ में हैं यानी अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाऊं।’’ इस मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि उनका परिवार क्रिकेट पर चर्चा नहीं करता इसलिए यह खेल उनके घर में मुख्य मुद्दा नहीं होता।टिप्पणियां राज्यसभा के सदस्य ने कहा, ‘‘हम क्रिकेट पर चर्चा नहीं करते। मेरा परिवार दिन के अन्य मुद्दों पर चर्चा करता है, लेकिन क्रिकेट पर नहीं। जब मैं क्रिकेट पर बात करना चाहता हूं तो मैं अपने भाई के साथ इस पर चर्चा करता हूं।’’ तेंदुलकर के सोशल मीडिया ट्विटर पर 32 लाख लोग फॉलोअर बन चुके हैं, उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि वह इस मंच के जरिये चैरीटी के लिए धन जुटा सके। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जब ट्विटर शुरू किया जब मेरे दोस्तों ने बताया कि मेरे नाम के कई नकली अकाउंट खुले हुए हैं और ऐसी चीजें कहते हैं तो मैंने कभी नहीं कहीं और की। इन चीजों को रोकने के लिए ही मैंने ट्विटर अंकाउट शुरू किया। इसके जरिये मैं युवा कैंसर मरीजों के लिए धन राशि इकट्टा कर सका।’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘यह एक ‘पैकेज डील’ है। आप जब भी बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर जाते हो तो हमेशा शतक नहीं बना सकते। इसी तरह से आपको हमेशा सकारात्मक टिप्पणी नहीं मिल सकती। इसलिए दूसरे लोग क्या कहते हैं, मैं इस पर नियंत्रण नहीं कर सकता। मैं सिर्फ इतना ही कर सकता हूं कि मैं अपना ध्यान उन चीजों पर लगाऊं जो मेरे हाथ में हैं यानी अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाऊं।’’ इस मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि उनका परिवार क्रिकेट पर चर्चा नहीं करता इसलिए यह खेल उनके घर में मुख्य मुद्दा नहीं होता।टिप्पणियां राज्यसभा के सदस्य ने कहा, ‘‘हम क्रिकेट पर चर्चा नहीं करते। मेरा परिवार दिन के अन्य मुद्दों पर चर्चा करता है, लेकिन क्रिकेट पर नहीं। जब मैं क्रिकेट पर बात करना चाहता हूं तो मैं अपने भाई के साथ इस पर चर्चा करता हूं।’’ तेंदुलकर के सोशल मीडिया ट्विटर पर 32 लाख लोग फॉलोअर बन चुके हैं, उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि वह इस मंच के जरिये चैरीटी के लिए धन जुटा सके। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जब ट्विटर शुरू किया जब मेरे दोस्तों ने बताया कि मेरे नाम के कई नकली अकाउंट खुले हुए हैं और ऐसी चीजें कहते हैं तो मैंने कभी नहीं कहीं और की। इन चीजों को रोकने के लिए ही मैंने ट्विटर अंकाउट शुरू किया। इसके जरिये मैं युवा कैंसर मरीजों के लिए धन राशि इकट्टा कर सका।’’ इस मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि उनका परिवार क्रिकेट पर चर्चा नहीं करता इसलिए यह खेल उनके घर में मुख्य मुद्दा नहीं होता।टिप्पणियां राज्यसभा के सदस्य ने कहा, ‘‘हम क्रिकेट पर चर्चा नहीं करते। मेरा परिवार दिन के अन्य मुद्दों पर चर्चा करता है, लेकिन क्रिकेट पर नहीं। जब मैं क्रिकेट पर बात करना चाहता हूं तो मैं अपने भाई के साथ इस पर चर्चा करता हूं।’’ तेंदुलकर के सोशल मीडिया ट्विटर पर 32 लाख लोग फॉलोअर बन चुके हैं, उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि वह इस मंच के जरिये चैरीटी के लिए धन जुटा सके। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जब ट्विटर शुरू किया जब मेरे दोस्तों ने बताया कि मेरे नाम के कई नकली अकाउंट खुले हुए हैं और ऐसी चीजें कहते हैं तो मैंने कभी नहीं कहीं और की। इन चीजों को रोकने के लिए ही मैंने ट्विटर अंकाउट शुरू किया। इसके जरिये मैं युवा कैंसर मरीजों के लिए धन राशि इकट्टा कर सका।’’ राज्यसभा के सदस्य ने कहा, ‘‘हम क्रिकेट पर चर्चा नहीं करते। मेरा परिवार दिन के अन्य मुद्दों पर चर्चा करता है, लेकिन क्रिकेट पर नहीं। जब मैं क्रिकेट पर बात करना चाहता हूं तो मैं अपने भाई के साथ इस पर चर्चा करता हूं।’’ तेंदुलकर के सोशल मीडिया ट्विटर पर 32 लाख लोग फॉलोअर बन चुके हैं, उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि वह इस मंच के जरिये चैरीटी के लिए धन जुटा सके। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जब ट्विटर शुरू किया जब मेरे दोस्तों ने बताया कि मेरे नाम के कई नकली अकाउंट खुले हुए हैं और ऐसी चीजें कहते हैं तो मैंने कभी नहीं कहीं और की। इन चीजों को रोकने के लिए ही मैंने ट्विटर अंकाउट शुरू किया। इसके जरिये मैं युवा कैंसर मरीजों के लिए धन राशि इकट्टा कर सका।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जब ट्विटर शुरू किया जब मेरे दोस्तों ने बताया कि मेरे नाम के कई नकली अकाउंट खुले हुए हैं और ऐसी चीजें कहते हैं तो मैंने कभी नहीं कहीं और की। इन चीजों को रोकने के लिए ही मैंने ट्विटर अंकाउट शुरू किया। इसके जरिये मैं युवा कैंसर मरीजों के लिए धन राशि इकट्टा कर सका।’’
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: सचिन तेंदुलकर भले ही पिछले कुछ समय से फार्म में नहीं हों लेकिन इस सीनियर भारतीय बल्लेबाज ने गुरुवार को कहा कि वह अपने संन्यास के बारे में दूसरे लोगों की राय से परेशान नहीं हैं और वह अपना काम जारी रखेंगे।
3
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: पश्चिम बंगाल के बारानगर में दो स्कूली छात्राओं के साथ हो रही छेड़खानी का विरोध करने वाले युवक को गोली मार दी गई। 21 साल का मंगल सरदार साइकिल पर अपने दोस्त के साथ जा रहा था, जब उसने दो लोगों को स्कूली छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार करते देखा। जब उसने इसका विरोध किया तो उनमें से एक ने बंदूक निकाल ली।टिप्पणियां लेकिन इसके बावजूद जब मंगल ने वहां से जाने से इनकार कर दिया, तो आरोपी ने मंगल पर गोली चला दी। पुलिस के मुताबिक, मंगल फिलहाल अस्पताल में भर्ती है, जहां उसके कंधे से गोली बाहर निकाल दी गई है। इसके साथ ही चश्मदीदों की मदद से आरोपियों के स्कैच तैयार किए जा रहे हैं। 21 साल का मंगल सरदार साइकिल पर अपने दोस्त के साथ जा रहा था, जब उसने दो लोगों को स्कूली छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार करते देखा। जब उसने इसका विरोध किया तो उनमें से एक ने बंदूक निकाल ली।टिप्पणियां लेकिन इसके बावजूद जब मंगल ने वहां से जाने से इनकार कर दिया, तो आरोपी ने मंगल पर गोली चला दी। पुलिस के मुताबिक, मंगल फिलहाल अस्पताल में भर्ती है, जहां उसके कंधे से गोली बाहर निकाल दी गई है। इसके साथ ही चश्मदीदों की मदद से आरोपियों के स्कैच तैयार किए जा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद जब मंगल ने वहां से जाने से इनकार कर दिया, तो आरोपी ने मंगल पर गोली चला दी। पुलिस के मुताबिक, मंगल फिलहाल अस्पताल में भर्ती है, जहां उसके कंधे से गोली बाहर निकाल दी गई है। इसके साथ ही चश्मदीदों की मदद से आरोपियों के स्कैच तैयार किए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, मंगल फिलहाल अस्पताल में भर्ती है, जहां उसके कंधे से गोली बाहर निकाल दी गई है। इसके साथ ही चश्मदीदों की मदद से आरोपियों के स्कैच तैयार किए जा रहे हैं।
संक्षिप्त सारांश: 21 साल का मंगल सरदार साइकिल पर अपने दोस्त के साथ जा रहा था, जब उसने दो लोगों को स्कूली छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार करते देखा। जब उसने इसका विरोध किया तो उनमें से एक ने बंदूक निकाल ली।
10
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: किंगफिशर एयरलाइन ने तत्काल प्रभाव से आंशिक तालाबंदी की घोषणा कर दी और बृहस्पतिवार तक सभी उड़ानों का संचालन निलंबित कर दिया गया है।टिप्पणियां किंगफिशर के कर्मचारियों के एक वर्ग की हड़ताल के बाद यह फैसला किया गया है। विजय माल्या के स्वामित्व वाली निजी एयरलाइन ने एक बयान में कहा है कि कुछ कर्मचारियों की हिंसा, आपराधिक धमकी, हमले और काम पर आने वालों को रोके जाने सहित अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के चलते वह आंशिक तालाबंदी की घोषणा करने के लिए बाध्य हुई है। किंगफिशर के कर्मचारियों के एक वर्ग की हड़ताल के बाद यह फैसला किया गया है। विजय माल्या के स्वामित्व वाली निजी एयरलाइन ने एक बयान में कहा है कि कुछ कर्मचारियों की हिंसा, आपराधिक धमकी, हमले और काम पर आने वालों को रोके जाने सहित अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के चलते वह आंशिक तालाबंदी की घोषणा करने के लिए बाध्य हुई है। विजय माल्या के स्वामित्व वाली निजी एयरलाइन ने एक बयान में कहा है कि कुछ कर्मचारियों की हिंसा, आपराधिक धमकी, हमले और काम पर आने वालों को रोके जाने सहित अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के चलते वह आंशिक तालाबंदी की घोषणा करने के लिए बाध्य हुई है।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: किंगफिशर एयरलाइन ने तत्काल प्रभाव से आंशिक तालाबंदी की घोषणा कर दी और बृहस्पतिवार तक सभी उड़ानों का संचालन निलंबित कर दिया गया है।
25
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी ने बुधवार को कहा कि उन्होंने कार्टून बनाकर कोई गलती नहीं की इसलिए वह कोई माफी नहीं मांगेंगे क्योंकि उन्होंने कोई गलती नहीं की। राजद्रोह के आरोप में जेल में बंद कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को बुधवार को रिहा कर दिया गया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ता त्रिवेदी पर लगाए गए आरोपों पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया के बाद मंगलवार को उन्हें जमानत दी गई थी। त्रिवेदी को आर्थर रोड जेल में रखा गया था। उन्होंने जेल से रिहाई के तुरंत बाद कहा, "मैं कानून का सम्मान करता हूं लेकिन मैं उस कानून का सम्मान नहीं करता जो हमें यह महसूस कराता हो कि हम एक स्वतंत्र देश में नहीं रह रहे हैं।" उनसे जब यह पूछा गया कि क्या ऐसा कार्टून बनाना उचित है कि 26/11 हमले के दोषी आतंकवादी अजमल कसाब को भारतीय संविधान पर पेशाब करते दिखाया जाए, त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने वही किया जो उन्होंने देखा और इसे अन्य तरीके से देखने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "यह लड़ाई मेरी लड़ाई है, जो यहां समाप्त नहीं होती। हम तब तक लड़ाई जारी रखेंगे जब तक कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत लगाए गए राजद्रोह के आरोप निरस्त नहीं किए जाते।" उन्होंने कहा, "हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए यह लड़ाई जारी रखेंगे।" त्रिवेदी की रिहाई के समय उनके स्वागत के लिए जेल के बाहर आईएसी कार्यकर्ता मयंक गांधी सहित करीब 50 लोग मौजूद थे। आईएसी सदस्य करीब 10 मिनट तक जेल के बाहर नारे लगाते रहे और फिर त्रिवेदी की रिहाई के बाद एक छोटे जुलूस के रूप में वहां से रवाना हुए। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। इसी जेल में 26/11 के आतंकवादी हमले का दोषी अजमल कसाब बंद है। त्रिवेदी ने बाद में उनकी लड़ाई में मीडिया से मिले समर्थन के लिए उसे धन्यवाद दिया। त्रिवेदी ने कहा कि वह उनका समर्थन करने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं। पहले जमानत पर रिहा होने से इनकार कर दिए जाने के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि सबसे पहले सरकार उन पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप हटाए। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि यह संदेश जाए कि मैं सहयोग नहीं कर रहा हूं लेकिन मैं यह भी चाहता था कि सरकार स्वीकार करे कि उसने मुझ पर राजद्रोह के आरोप लगाकर गलती की है। इसीलिए मैंने पहले जमानत पर रिहा होने से इंकार कर दिया था।" उन्होंने कहा, "मैं सहयोग न करने वाला व्यक्ति नहीं हूं और जब आईएसी सदस्यों ने इस सम्बंध में मुझसे बात की तो मैंने जमानत स्वीकार कर ली।" बम्बई उच्च न्यायालय ने संस्कार मराठे नाम के एक वकील द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला सुनाया था। त्रिवेदी को पिछले शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और 24 सितम्बर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। उनपर दिसम्बर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कार्टून बनाकर संविधान सहित राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। राजद्रोह के आरोप में जेल में बंद कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को बुधवार को रिहा कर दिया गया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ता त्रिवेदी पर लगाए गए आरोपों पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया के बाद मंगलवार को उन्हें जमानत दी गई थी। त्रिवेदी को आर्थर रोड जेल में रखा गया था। उन्होंने जेल से रिहाई के तुरंत बाद कहा, "मैं कानून का सम्मान करता हूं लेकिन मैं उस कानून का सम्मान नहीं करता जो हमें यह महसूस कराता हो कि हम एक स्वतंत्र देश में नहीं रह रहे हैं।" उनसे जब यह पूछा गया कि क्या ऐसा कार्टून बनाना उचित है कि 26/11 हमले के दोषी आतंकवादी अजमल कसाब को भारतीय संविधान पर पेशाब करते दिखाया जाए, त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने वही किया जो उन्होंने देखा और इसे अन्य तरीके से देखने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "यह लड़ाई मेरी लड़ाई है, जो यहां समाप्त नहीं होती। हम तब तक लड़ाई जारी रखेंगे जब तक कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत लगाए गए राजद्रोह के आरोप निरस्त नहीं किए जाते।" उन्होंने कहा, "हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए यह लड़ाई जारी रखेंगे।" त्रिवेदी की रिहाई के समय उनके स्वागत के लिए जेल के बाहर आईएसी कार्यकर्ता मयंक गांधी सहित करीब 50 लोग मौजूद थे। आईएसी सदस्य करीब 10 मिनट तक जेल के बाहर नारे लगाते रहे और फिर त्रिवेदी की रिहाई के बाद एक छोटे जुलूस के रूप में वहां से रवाना हुए। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। इसी जेल में 26/11 के आतंकवादी हमले का दोषी अजमल कसाब बंद है। त्रिवेदी ने बाद में उनकी लड़ाई में मीडिया से मिले समर्थन के लिए उसे धन्यवाद दिया। त्रिवेदी ने कहा कि वह उनका समर्थन करने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं। पहले जमानत पर रिहा होने से इनकार कर दिए जाने के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि सबसे पहले सरकार उन पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप हटाए। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि यह संदेश जाए कि मैं सहयोग नहीं कर रहा हूं लेकिन मैं यह भी चाहता था कि सरकार स्वीकार करे कि उसने मुझ पर राजद्रोह के आरोप लगाकर गलती की है। इसीलिए मैंने पहले जमानत पर रिहा होने से इंकार कर दिया था।" उन्होंने कहा, "मैं सहयोग न करने वाला व्यक्ति नहीं हूं और जब आईएसी सदस्यों ने इस सम्बंध में मुझसे बात की तो मैंने जमानत स्वीकार कर ली।" बम्बई उच्च न्यायालय ने संस्कार मराठे नाम के एक वकील द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला सुनाया था। त्रिवेदी को पिछले शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और 24 सितम्बर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। उनपर दिसम्बर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कार्टून बनाकर संविधान सहित राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। त्रिवेदी को आर्थर रोड जेल में रखा गया था। उन्होंने जेल से रिहाई के तुरंत बाद कहा, "मैं कानून का सम्मान करता हूं लेकिन मैं उस कानून का सम्मान नहीं करता जो हमें यह महसूस कराता हो कि हम एक स्वतंत्र देश में नहीं रह रहे हैं।" उनसे जब यह पूछा गया कि क्या ऐसा कार्टून बनाना उचित है कि 26/11 हमले के दोषी आतंकवादी अजमल कसाब को भारतीय संविधान पर पेशाब करते दिखाया जाए, त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने वही किया जो उन्होंने देखा और इसे अन्य तरीके से देखने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "यह लड़ाई मेरी लड़ाई है, जो यहां समाप्त नहीं होती। हम तब तक लड़ाई जारी रखेंगे जब तक कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत लगाए गए राजद्रोह के आरोप निरस्त नहीं किए जाते।" उन्होंने कहा, "हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए यह लड़ाई जारी रखेंगे।" त्रिवेदी की रिहाई के समय उनके स्वागत के लिए जेल के बाहर आईएसी कार्यकर्ता मयंक गांधी सहित करीब 50 लोग मौजूद थे। आईएसी सदस्य करीब 10 मिनट तक जेल के बाहर नारे लगाते रहे और फिर त्रिवेदी की रिहाई के बाद एक छोटे जुलूस के रूप में वहां से रवाना हुए। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। इसी जेल में 26/11 के आतंकवादी हमले का दोषी अजमल कसाब बंद है। त्रिवेदी ने बाद में उनकी लड़ाई में मीडिया से मिले समर्थन के लिए उसे धन्यवाद दिया। त्रिवेदी ने कहा कि वह उनका समर्थन करने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं। पहले जमानत पर रिहा होने से इनकार कर दिए जाने के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि सबसे पहले सरकार उन पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप हटाए। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि यह संदेश जाए कि मैं सहयोग नहीं कर रहा हूं लेकिन मैं यह भी चाहता था कि सरकार स्वीकार करे कि उसने मुझ पर राजद्रोह के आरोप लगाकर गलती की है। इसीलिए मैंने पहले जमानत पर रिहा होने से इंकार कर दिया था।" उन्होंने कहा, "मैं सहयोग न करने वाला व्यक्ति नहीं हूं और जब आईएसी सदस्यों ने इस सम्बंध में मुझसे बात की तो मैंने जमानत स्वीकार कर ली।" बम्बई उच्च न्यायालय ने संस्कार मराठे नाम के एक वकील द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला सुनाया था। त्रिवेदी को पिछले शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और 24 सितम्बर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। उनपर दिसम्बर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कार्टून बनाकर संविधान सहित राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। त्रिवेदी की रिहाई के समय उनके स्वागत के लिए जेल के बाहर आईएसी कार्यकर्ता मयंक गांधी सहित करीब 50 लोग मौजूद थे। आईएसी सदस्य करीब 10 मिनट तक जेल के बाहर नारे लगाते रहे और फिर त्रिवेदी की रिहाई के बाद एक छोटे जुलूस के रूप में वहां से रवाना हुए। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। इसी जेल में 26/11 के आतंकवादी हमले का दोषी अजमल कसाब बंद है। त्रिवेदी ने बाद में उनकी लड़ाई में मीडिया से मिले समर्थन के लिए उसे धन्यवाद दिया। त्रिवेदी ने कहा कि वह उनका समर्थन करने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं। पहले जमानत पर रिहा होने से इनकार कर दिए जाने के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि सबसे पहले सरकार उन पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप हटाए। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि यह संदेश जाए कि मैं सहयोग नहीं कर रहा हूं लेकिन मैं यह भी चाहता था कि सरकार स्वीकार करे कि उसने मुझ पर राजद्रोह के आरोप लगाकर गलती की है। इसीलिए मैंने पहले जमानत पर रिहा होने से इंकार कर दिया था।" उन्होंने कहा, "मैं सहयोग न करने वाला व्यक्ति नहीं हूं और जब आईएसी सदस्यों ने इस सम्बंध में मुझसे बात की तो मैंने जमानत स्वीकार कर ली।" बम्बई उच्च न्यायालय ने संस्कार मराठे नाम के एक वकील द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला सुनाया था। त्रिवेदी को पिछले शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और 24 सितम्बर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। उनपर दिसम्बर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कार्टून बनाकर संविधान सहित राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। त्रिवेदी ने बाद में उनकी लड़ाई में मीडिया से मिले समर्थन के लिए उसे धन्यवाद दिया। त्रिवेदी ने कहा कि वह उनका समर्थन करने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं। पहले जमानत पर रिहा होने से इनकार कर दिए जाने के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि सबसे पहले सरकार उन पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप हटाए। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि यह संदेश जाए कि मैं सहयोग नहीं कर रहा हूं लेकिन मैं यह भी चाहता था कि सरकार स्वीकार करे कि उसने मुझ पर राजद्रोह के आरोप लगाकर गलती की है। इसीलिए मैंने पहले जमानत पर रिहा होने से इंकार कर दिया था।" उन्होंने कहा, "मैं सहयोग न करने वाला व्यक्ति नहीं हूं और जब आईएसी सदस्यों ने इस सम्बंध में मुझसे बात की तो मैंने जमानत स्वीकार कर ली।" बम्बई उच्च न्यायालय ने संस्कार मराठे नाम के एक वकील द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला सुनाया था। त्रिवेदी को पिछले शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और 24 सितम्बर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। उनपर दिसम्बर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कार्टून बनाकर संविधान सहित राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। पहले जमानत पर रिहा होने से इनकार कर दिए जाने के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि सबसे पहले सरकार उन पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप हटाए। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि यह संदेश जाए कि मैं सहयोग नहीं कर रहा हूं लेकिन मैं यह भी चाहता था कि सरकार स्वीकार करे कि उसने मुझ पर राजद्रोह के आरोप लगाकर गलती की है। इसीलिए मैंने पहले जमानत पर रिहा होने से इंकार कर दिया था।" उन्होंने कहा, "मैं सहयोग न करने वाला व्यक्ति नहीं हूं और जब आईएसी सदस्यों ने इस सम्बंध में मुझसे बात की तो मैंने जमानत स्वीकार कर ली।" बम्बई उच्च न्यायालय ने संस्कार मराठे नाम के एक वकील द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला सुनाया था। त्रिवेदी को पिछले शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और 24 सितम्बर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। उनपर दिसम्बर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कार्टून बनाकर संविधान सहित राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। बम्बई उच्च न्यायालय ने संस्कार मराठे नाम के एक वकील द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला सुनाया था। त्रिवेदी को पिछले शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और 24 सितम्बर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। उनपर दिसम्बर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कार्टून बनाकर संविधान सहित राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। त्रिवेदी को पिछले शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और 24 सितम्बर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। उनपर दिसम्बर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कार्टून बनाकर संविधान सहित राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। उनपर दिसम्बर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कार्टून बनाकर संविधान सहित राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे। उन्होंने कहा, "लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।" त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की। उन्होंने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है। उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।टिप्पणियां खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। खुद भी कार्टूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए। ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी ने बुधवार को कहा कि उन्होंने कार्टून बनाकर कोई गलती नहीं की इसलिए वह कोई माफी नहीं मांगेंगे क्योंकि उन्होंने कोई गलती नहीं की।
25
['hin']
एक सारांश बनाओ: पंजाब और उत्तराखंड विधानसभाओं के लिए हुए चुनाव में भारी संख्या में मतदान हुआ और दोनों ही राज्यों में चुनाव कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहा। इस बार पिछले चुनाव की तुलना में अधिक मतदान होने की संभावना है।टिप्पणियां उप निर्वाचन अधिकारी आलोक शुक्ल और सुधीर त्रिपाठी ने चुनाव संपन्न होने के बाद बताया कि शाम पांच बजे तक पंजाब में 70 प्रतिशत से अधिक मतदान होने की खबरें आई हैं और इसके 77 प्रतिशत से अधिक तक जाने की संभावना है। वहीं उत्तराखंड में शाम पांच बजे तक 65 प्रतिशत मतदान होने की खबर मिली है और वहां भी 70 प्रतिशत से अधिक मतदान होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पंजाब में 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में 75.36 प्रतिशत और 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में 70.04 प्रतिशत मतदान हुआ था। वहीं उत्तराखंड में पिछले विधानसभा चुनाव में 63.96 मतदाताओं ने मतदान किया था और 2009 के लोकसभा चुनाव में 53.96 प्रतिशत मतदान हुआ था। शुक्ल ने बताया कि पंजाब में इस दौरान चुनाव से पहले तक 12 करोड़ 13 लाख रुपये की नकदी, 32,758 लीटर गैरकानूनी शराब, 7188 विदेशी शराब की बोतलें, 37.4 किलोग्राम हेरोइन, 2696 किलोग्राम डोडा चूरा, 99.9 किलोग्राम अफीम के साथ भारी मात्रा में स्मैक, इसके 2896 कैप्सूल और 18,312 किलो नशीला पाउडर पकड़ा गया। वहीं, उत्तराखंड में 1.36 करोड़ रुपये की नकदी और 16,241.23 लीटर अवैध शराब पकड़ी गई। उप निर्वाचन अधिकारी आलोक शुक्ल और सुधीर त्रिपाठी ने चुनाव संपन्न होने के बाद बताया कि शाम पांच बजे तक पंजाब में 70 प्रतिशत से अधिक मतदान होने की खबरें आई हैं और इसके 77 प्रतिशत से अधिक तक जाने की संभावना है। वहीं उत्तराखंड में शाम पांच बजे तक 65 प्रतिशत मतदान होने की खबर मिली है और वहां भी 70 प्रतिशत से अधिक मतदान होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पंजाब में 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में 75.36 प्रतिशत और 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में 70.04 प्रतिशत मतदान हुआ था। वहीं उत्तराखंड में पिछले विधानसभा चुनाव में 63.96 मतदाताओं ने मतदान किया था और 2009 के लोकसभा चुनाव में 53.96 प्रतिशत मतदान हुआ था। शुक्ल ने बताया कि पंजाब में इस दौरान चुनाव से पहले तक 12 करोड़ 13 लाख रुपये की नकदी, 32,758 लीटर गैरकानूनी शराब, 7188 विदेशी शराब की बोतलें, 37.4 किलोग्राम हेरोइन, 2696 किलोग्राम डोडा चूरा, 99.9 किलोग्राम अफीम के साथ भारी मात्रा में स्मैक, इसके 2896 कैप्सूल और 18,312 किलो नशीला पाउडर पकड़ा गया। वहीं, उत्तराखंड में 1.36 करोड़ रुपये की नकदी और 16,241.23 लीटर अवैध शराब पकड़ी गई। शुक्ल ने बताया कि पंजाब में इस दौरान चुनाव से पहले तक 12 करोड़ 13 लाख रुपये की नकदी, 32,758 लीटर गैरकानूनी शराब, 7188 विदेशी शराब की बोतलें, 37.4 किलोग्राम हेरोइन, 2696 किलोग्राम डोडा चूरा, 99.9 किलोग्राम अफीम के साथ भारी मात्रा में स्मैक, इसके 2896 कैप्सूल और 18,312 किलो नशीला पाउडर पकड़ा गया। वहीं, उत्तराखंड में 1.36 करोड़ रुपये की नकदी और 16,241.23 लीटर अवैध शराब पकड़ी गई।
यहाँ एक सारांश है:पंजाब और उत्तराखंड विधानसभाओं के लिए हुए चुनाव में भारी संख्या में मतदान हुआ और दोनों ही राज्यों में चुनाव कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहा।
15
['hin']
एक सारांश बनाओ: दिल्ली में एमसीडी चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. बवाना से आम आदमी पार्टी विधायक वेद प्रकाश ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है. वेद प्रकाश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मैं किसी लालच में बीजेपी में नहीं आया. साफ-सुथरी राजनीति करने आया हूं. दिल्ली हर जगह रिश्वत चल रही है. नाकाम और बड़बोले लोगों में फंस गया हूं. अभी मेरे पास तीन साल का समय है. मैं बीजेपी में कोई पद नहीं लूंगा और पीएम मोदी की नीति से जुड़कर काम करूंगा और चाहूंगा कि पीएम मोदी का आशीर्वाद मिलता रहे. मैं विधानसभा से इस्तीफा देने जा रहा हूं. दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 सीटें हैं. आम आदमी पार्टी ने 67 सीटें जीती थी. 23 अप्रैल को 272 पार्षदों का चुनाव होना है. फिलहाल पिछले एक दशक एमसीडी पर बीजेपी का कब्जा है. पंजाब में अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद आप आदमी पार्टी एमसीडी में बेहतर प्रदर्शन करके अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पाना चाहती है.वहीं, उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहमत मिलने के बाद बीजेपी आत्मविश्वास से लवरेज है और मोदी लहर के सहारे एमसीडी पर अपना राज बनाए रखने की कोशिश में है.    टिप्पणियां वेद प्रकाश ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल को कुछ लोगों ने घेर रखा है. जो उन्हें कानों में बता दिया जाता है, वे यकीन कर लेते हैं. केजरीवाल को नहीं पता कि क्या चल रहा है. वह सिर्फ यही देखते हैं कि पीएम मोदी को और उप राज्यपाल को कैसे बदनाम किया जाए. आज तक जो भी काम हुआ है क्या उसे प्रोपर तरीके से ऊपर भेजा गया. सिर्फ यही नहीं चलेगा कि वे (केंद्र) काम नहीं करने देते. हम भी तो ठीक होने चाहिए. दिल्ली का हर आदमी ठगा हुआ महसूस कर रहा है.  मैं जाली खेल दिखाने वालों में फंस गया था. वेद प्रकाश ने यह भी कहा कि मैं काम करना चाहता हूं ताकि अपनी शक्ल अपने लोगों को दिखा सकूं. वेदप्रकाश ने कहा कि मैं आम आदमी पार्टी में घुटन महसूस कर रहा था. वे विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए वादों को पूरा करने में असफल रहे. करीब 35 विधायक आम आदमी पार्टी के नेतृत्व से खुश नहीं हैं. सूत्रों के मुताबिक नाराजगी की खबर मिलने के बाद दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने वेद प्रकाश से संपर्क साधने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने केजरीवाल का कॉल नहीं उठाया और थोड़ी ही देर बाद भाजपा हेडक्वार्टर पर नजर आए. दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 सीटें हैं. आम आदमी पार्टी ने 67 सीटें जीती थी. 23 अप्रैल को 272 पार्षदों का चुनाव होना है. फिलहाल पिछले एक दशक एमसीडी पर बीजेपी का कब्जा है. पंजाब में अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद आप आदमी पार्टी एमसीडी में बेहतर प्रदर्शन करके अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पाना चाहती है.वहीं, उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहमत मिलने के बाद बीजेपी आत्मविश्वास से लवरेज है और मोदी लहर के सहारे एमसीडी पर अपना राज बनाए रखने की कोशिश में है.    टिप्पणियां वेद प्रकाश ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल को कुछ लोगों ने घेर रखा है. जो उन्हें कानों में बता दिया जाता है, वे यकीन कर लेते हैं. केजरीवाल को नहीं पता कि क्या चल रहा है. वह सिर्फ यही देखते हैं कि पीएम मोदी को और उप राज्यपाल को कैसे बदनाम किया जाए. आज तक जो भी काम हुआ है क्या उसे प्रोपर तरीके से ऊपर भेजा गया. सिर्फ यही नहीं चलेगा कि वे (केंद्र) काम नहीं करने देते. हम भी तो ठीक होने चाहिए. दिल्ली का हर आदमी ठगा हुआ महसूस कर रहा है.  मैं जाली खेल दिखाने वालों में फंस गया था. वेद प्रकाश ने यह भी कहा कि मैं काम करना चाहता हूं ताकि अपनी शक्ल अपने लोगों को दिखा सकूं. वेदप्रकाश ने कहा कि मैं आम आदमी पार्टी में घुटन महसूस कर रहा था. वे विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए वादों को पूरा करने में असफल रहे. करीब 35 विधायक आम आदमी पार्टी के नेतृत्व से खुश नहीं हैं. सूत्रों के मुताबिक नाराजगी की खबर मिलने के बाद दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने वेद प्रकाश से संपर्क साधने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने केजरीवाल का कॉल नहीं उठाया और थोड़ी ही देर बाद भाजपा हेडक्वार्टर पर नजर आए. वेद प्रकाश ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल को कुछ लोगों ने घेर रखा है. जो उन्हें कानों में बता दिया जाता है, वे यकीन कर लेते हैं. केजरीवाल को नहीं पता कि क्या चल रहा है. वह सिर्फ यही देखते हैं कि पीएम मोदी को और उप राज्यपाल को कैसे बदनाम किया जाए. आज तक जो भी काम हुआ है क्या उसे प्रोपर तरीके से ऊपर भेजा गया. सिर्फ यही नहीं चलेगा कि वे (केंद्र) काम नहीं करने देते. हम भी तो ठीक होने चाहिए. दिल्ली का हर आदमी ठगा हुआ महसूस कर रहा है.  मैं जाली खेल दिखाने वालों में फंस गया था. वेद प्रकाश ने यह भी कहा कि मैं काम करना चाहता हूं ताकि अपनी शक्ल अपने लोगों को दिखा सकूं. वेदप्रकाश ने कहा कि मैं आम आदमी पार्टी में घुटन महसूस कर रहा था. वे विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए वादों को पूरा करने में असफल रहे. करीब 35 विधायक आम आदमी पार्टी के नेतृत्व से खुश नहीं हैं. सूत्रों के मुताबिक नाराजगी की खबर मिलने के बाद दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने वेद प्रकाश से संपर्क साधने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने केजरीवाल का कॉल नहीं उठाया और थोड़ी ही देर बाद भाजपा हेडक्वार्टर पर नजर आए. वेदप्रकाश ने कहा कि मैं आम आदमी पार्टी में घुटन महसूस कर रहा था. वे विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए वादों को पूरा करने में असफल रहे. करीब 35 विधायक आम आदमी पार्टी के नेतृत्व से खुश नहीं हैं. सूत्रों के मुताबिक नाराजगी की खबर मिलने के बाद दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने वेद प्रकाश से संपर्क साधने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने केजरीवाल का कॉल नहीं उठाया और थोड़ी ही देर बाद भाजपा हेडक्वार्टर पर नजर आए.
यह एक सारांश है: दिल्ली में एमसीडी चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है बवाना से आप विधायक वेद प्रकाश ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है वेद प्रकाश ने कहा कि मैं किसी लालच में बीजेपी में नहीं आया
21
['hin']
एक सारांश बनाओ: पांचवें भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (इब्सा) शिखर सम्मेलन में जहां बहुपक्षीय व्यापार की बाधाओं पर प्रमुखता से बातचीत हो सकती है, वहीं भारत को उम्मीद है कि दोनों देशों के साथ इसका व्यापार जल्दी ही 25 अरब डॉलर को पार कर सकता है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा, "दक्षिण अफ्रीका के साथ हमारा व्यापार अभी 11 अरब डॉलर से अधिक है। ब्राजील के साथ यह पांच अरब डॉलर से ऊपर है। हमें उम्मीद है कि जल्दी ही यह 25 अरब डॉलर को पार कर जाएगा।" प्रकाश ने कहा कि वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा पहले से ही डरबन में मौजूद हैं जहां वह व्यापार फोरम की बैठक में हिस्सा लेंगे। उनके प्रयासों से भी तीनों देशों के साथ मजबूत आर्थिक सम्बंध बनाने में मदद मिलेगी। पांचवां इब्सा शिखर सम्मेलन मंगलवार से शुरू हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा और ब्राजील के राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ से कई विषयों पर चर्चा करेंगे। प्रवक्ता के मुताबिक अगले माह कान्स में भी जी20 देशों की बैठक होने वाली है, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था को पुन: सामान्य बनाने पर चर्चा होगी। इसके अलावा उम्मीद की जा रही है कि यहां यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कनवेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज की नवम्बर में डरबन में होने वाले 17वें कान्फ्रेंस ऑफ पार्टीज के मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। प्रिटोरिया शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि इब्सा मंच की 2003 में स्थापना के बाद से यह लगातार परिपक्व  होता गया और 2006 में यह शिखर सम्मेलन के स्तर पर आ गया। मनमोहन सिंह ने पहले के सभी इब्सा शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया है।
सारांश: वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा पहले से ही डरबन में मौजूद हैं जहां वह व्यापार फोरम की बैठक में हिस्सा लेंगे।
5
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: डीएसपी हत्याकांड में सीबीआई ने यूपी सरकार के मंत्री राजा भैया के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। डीएसपी की हत्या के मामले में चार एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें से चौथी एफआईआर में राजा भैया और चार अन्य लोगों के नाम हैं। इससे पहले केन्द्र ने उत्तर प्रदेश सरकार के आग्रह पर प्रतापगढ़ के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) जिया उल हक और दो अन्य की हत्याओं की जांच आज केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी थी। दिवंगत पुलिस अधिकारी की पत्नी परवीन आजाद द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का नाम भी शामिल है। परवीन ने सीबीआई जांच की भी मांग की थी।टिप्पणियां कुंडा के क्षेत्राधिकारी पद पर तैनात जिया उल हक की प्रतापगढ़ में भीड़ ने कथित रूप से हत्या कर दी थी। भूमि विवाद को लेकर प्रधान नन्हें यादव की गोली मारकर हत्या करने के बाद हक वहां पहुंचे थे। गोलीबारी में प्रधान के भाई सुरेश की भी मौत हुई थी। इस मामले में नाम आने के बाद इस्तीफा देने वाले राजा भैया ने आरोपों को खारिज किया है। इससे पहले केन्द्र ने उत्तर प्रदेश सरकार के आग्रह पर प्रतापगढ़ के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) जिया उल हक और दो अन्य की हत्याओं की जांच आज केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी थी। दिवंगत पुलिस अधिकारी की पत्नी परवीन आजाद द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का नाम भी शामिल है। परवीन ने सीबीआई जांच की भी मांग की थी।टिप्पणियां कुंडा के क्षेत्राधिकारी पद पर तैनात जिया उल हक की प्रतापगढ़ में भीड़ ने कथित रूप से हत्या कर दी थी। भूमि विवाद को लेकर प्रधान नन्हें यादव की गोली मारकर हत्या करने के बाद हक वहां पहुंचे थे। गोलीबारी में प्रधान के भाई सुरेश की भी मौत हुई थी। इस मामले में नाम आने के बाद इस्तीफा देने वाले राजा भैया ने आरोपों को खारिज किया है। दिवंगत पुलिस अधिकारी की पत्नी परवीन आजाद द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का नाम भी शामिल है। परवीन ने सीबीआई जांच की भी मांग की थी।टिप्पणियां कुंडा के क्षेत्राधिकारी पद पर तैनात जिया उल हक की प्रतापगढ़ में भीड़ ने कथित रूप से हत्या कर दी थी। भूमि विवाद को लेकर प्रधान नन्हें यादव की गोली मारकर हत्या करने के बाद हक वहां पहुंचे थे। गोलीबारी में प्रधान के भाई सुरेश की भी मौत हुई थी। इस मामले में नाम आने के बाद इस्तीफा देने वाले राजा भैया ने आरोपों को खारिज किया है। कुंडा के क्षेत्राधिकारी पद पर तैनात जिया उल हक की प्रतापगढ़ में भीड़ ने कथित रूप से हत्या कर दी थी। भूमि विवाद को लेकर प्रधान नन्हें यादव की गोली मारकर हत्या करने के बाद हक वहां पहुंचे थे। गोलीबारी में प्रधान के भाई सुरेश की भी मौत हुई थी। इस मामले में नाम आने के बाद इस्तीफा देने वाले राजा भैया ने आरोपों को खारिज किया है। इस मामले में नाम आने के बाद इस्तीफा देने वाले राजा भैया ने आरोपों को खारिज किया है।
सीबीआई ने यूपी सरकार के मंत्री राजा भैया के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। डीएसपी की हत्या के मामले में चार एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें से चौथी एफआईआर में राजा भैया और चार अन्य लोगों के नाम हैं।
28
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: रक्षा मंत्री एके एंटनी ने सोमवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर सीमा पर जब पाकिस्तानी सेना संघर्षविराम का उल्लंघन करे तो भारतीय सेना को 'उपयुक्त' जवाब देने की पूरी छूट है। एंटनी ने संवाददाताओं से कहा, "सेना को उत्पन्न होने वाली स्थिति के हिसाब से उपयुक्त जवाब देने की स्वतंत्रता है।" भारत के प्रथम स्वदेशी तकनीक से निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के उद्घाटन के लिए एंटनी कोच्चि आए थे। युद्धपोत का जलावतरण उनकी पत्नी एलिजाबेथ ने किया। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सैनिकों के हमले में पांच सैनिकों की मौत हो गई थी।टिप्पणियां रक्षा प्रवक्ता के अनुसार रविवार से पाकिस्तानी सैनिकों ने द्विपक्षीय युद्ध विराम समझौते का तीन बार उल्लंघन किया है। पाकिस्तानी रेंजरों ने सीमा सुरक्षा बल की जम्मू जिले में स्थित कनचक चौकी पर गोलीबारी करके एक भारतीय जवान को घायल कर दिया। एंटनी ने संवाददाताओं से कहा, "सेना को उत्पन्न होने वाली स्थिति के हिसाब से उपयुक्त जवाब देने की स्वतंत्रता है।" भारत के प्रथम स्वदेशी तकनीक से निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के उद्घाटन के लिए एंटनी कोच्चि आए थे। युद्धपोत का जलावतरण उनकी पत्नी एलिजाबेथ ने किया। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सैनिकों के हमले में पांच सैनिकों की मौत हो गई थी।टिप्पणियां रक्षा प्रवक्ता के अनुसार रविवार से पाकिस्तानी सैनिकों ने द्विपक्षीय युद्ध विराम समझौते का तीन बार उल्लंघन किया है। पाकिस्तानी रेंजरों ने सीमा सुरक्षा बल की जम्मू जिले में स्थित कनचक चौकी पर गोलीबारी करके एक भारतीय जवान को घायल कर दिया। भारत के प्रथम स्वदेशी तकनीक से निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के उद्घाटन के लिए एंटनी कोच्चि आए थे। युद्धपोत का जलावतरण उनकी पत्नी एलिजाबेथ ने किया। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सैनिकों के हमले में पांच सैनिकों की मौत हो गई थी।टिप्पणियां रक्षा प्रवक्ता के अनुसार रविवार से पाकिस्तानी सैनिकों ने द्विपक्षीय युद्ध विराम समझौते का तीन बार उल्लंघन किया है। पाकिस्तानी रेंजरों ने सीमा सुरक्षा बल की जम्मू जिले में स्थित कनचक चौकी पर गोलीबारी करके एक भारतीय जवान को घायल कर दिया। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सैनिकों के हमले में पांच सैनिकों की मौत हो गई थी।टिप्पणियां रक्षा प्रवक्ता के अनुसार रविवार से पाकिस्तानी सैनिकों ने द्विपक्षीय युद्ध विराम समझौते का तीन बार उल्लंघन किया है। पाकिस्तानी रेंजरों ने सीमा सुरक्षा बल की जम्मू जिले में स्थित कनचक चौकी पर गोलीबारी करके एक भारतीय जवान को घायल कर दिया। रक्षा प्रवक्ता के अनुसार रविवार से पाकिस्तानी सैनिकों ने द्विपक्षीय युद्ध विराम समझौते का तीन बार उल्लंघन किया है। पाकिस्तानी रेंजरों ने सीमा सुरक्षा बल की जम्मू जिले में स्थित कनचक चौकी पर गोलीबारी करके एक भारतीय जवान को घायल कर दिया। पाकिस्तानी रेंजरों ने सीमा सुरक्षा बल की जम्मू जिले में स्थित कनचक चौकी पर गोलीबारी करके एक भारतीय जवान को घायल कर दिया।
यह एक सारांश है: रक्षा मंत्री एके एंटनी ने सोमवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर सीमा पर जब पाकिस्तानी सेना संघर्षविराम का उल्लंघन करे तो भारतीय सेना को 'उपयुक्त' जवाब देने की पूरी छूट है।
16
['hin']
एक सारांश बनाओ: जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल भारत की दो दिवसीय यात्रा पर बृहस्पतिवार को नई दिल्ली पहुंचीं. इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई द्विपक्षीय मुद्दों पर बात करेंगी और दोनों देशों के बीच करीब 20 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. हवाईअड्डे पर चांसलर मर्केल के स्वागत के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह पहुंचे. चांसलर मर्केल अपने दौरे पर कारोबार जगत के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के अलावा भारतीय नेतृत्व से मिलेंगी. शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति भवन में उनका रस्मी स्वागत किया जाएगा और बाद में वह राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगी. जर्मन चांसलर की भारत यात्रा के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया, 'हमारे संबंध की रणनीतिक संरचना को समृद्ध करते हुए. एंजेला मर्केल भारत दौरे की शुरुआत करते हुए दिल्ली पहुंचीं. इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 5वें अंतर सरकारी विमर्श (IGC) की सहअध्यक्षता करेंगी. यह एक साल में दोनों नेताओं के बीच पांचवीं बैठक होगी.' बता दें, मर्केल 5वें IGC की प्रधानमंत्री के साथ सह-अध्यक्षता करेंगी जिसके बाद दोनों नेता प्रेस के लिए बयान जारी करेंगे. साथ ही दोनों पक्षों के कई समझौतों पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है. इसके बाद शाम को वह राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करेंगी और प्रधानमंत्री के साथ लोक कल्याण मार्ग स्थित उनके आवास पर भी बैठक करेंगी. शनिवार को जर्मन नेता कारोबारी जगत के प्रतिनिधिमंडल से मिलेंगी और मानेसर, गुड़गांव में कॉन्टिनेंटल ऑटोमोटिव कम्पोनेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का दौरा करेंगी. जर्मनी लौटने से पहले चांसलर द्वारका सेक्टर 21 मेट्रो स्टेशन भी जाएंगी. दौरे से पहले भारत में जर्मनी के दूत वाल्टर जे लिंडनर ने कहा था कि मोदी और मर्केल के रिश्ते बहुत अच्छे हैं और दोनों किसी भी मुद्दे पर बातचीत कर सकते हैं. वह दोनों के बीच कश्मीर मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे.
संक्षिप्त सारांश: मर्केल भारत की दो दिवसीय यात्रा पर बृहस्पतिवार को नई दिल्ली पहुंचीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई द्विपक्षीय मुद्दों पर बात करेंगी मर्केल दोनों देशों के बीच करीब 20 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है
8
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: देश में संस्कृत, पाली और प्राकृत भाषा में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट करने वाले स्टूडेंट नौकरी और भविष्य को लेकर असमंजस में हैं. विद्वानों का मानना है कि स्कॉलरशिप का प्रावधान कर इन भाषाओं को फिर से जीवित करने में मदद मिल सकती है. पूजा ने अपनी उच्च शिक्षा संस्कृत में हासिल की है, लेकिन वह अपने करियर को लेकर चिंतित हैं. 23 साल की पूजा इतिहास के पाठ्यक्रम में एडमिशन लेना चाहती थी लेकिन कम अंकों की वजह से उन्हें उसमें एडमिशन नहीं मिला और उन्हें संस्कृत लेनी पड़ी.  दिल्ली यूनिवर्सिटी और अन्य यूनिवर्सिटियों में नए बैच शुरू होने वाले हैं. वहीं इन भाषाओं की उपयोगिता और व्यावहारिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. गलत ब्रांडिंग करने पर हाईकोर्ट ने दिल्‍ली मेट्रो को फटकारा, कहा- बड़े फॉन्‍ट में बताओ FIIT-JEE और IIT दिल्ली के बीच कोई संबंध नहीं पूजा संस्कृत में डिग्री हासिल करने के बाद सीमित करियर विकल्पों को लेकर अफसोस जताती हैं, लेकिन उन्हें संस्कृत बहुत पसंद है. उन्होंने कहा, 'लोग मुझसे पूछते रहते हैं कि आज के समय में मैं संस्कृत की डिग्री का क्या करूंगी. कोई व्यक्ति शिक्षाविद्,अनुवादक या मीडिया उद्योग में काम कर सकता है.' उन्होंने कहा, 'जब मैंने विषय को पढ़ना शुरू किया तो मुझे अहसास हुआ कि संस्कृत एक खूबसूरत और उदार भाषा है.' पूजा दिल्ली यूनिवर्सिटी से संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएट कर रही हैं. उन्होंने ग्रेजुएशन भी संस्कृत से किया है. सेंट स्टीफंस कॉलेज में संस्कृत के एसोसिएट प्रोफेसर पंकज मिश्रा के मुताबिक, नौकरी के कम अवसर और कम भुगतान की वजह से भाषा में स्टूडेंट्स की दिलचस्पी कम हो रही है. मिश्रा ने कहा, 'अनुवादकों को एक पन्ने के 200 से 300 रुपये दिए जाते हैं, जो दिहाड़ी मजदूर की मजदूरी से भी कम है.' दिल्ली यूनिवर्सिटी के सिर्फ 29 कॉलेज संस्कृत में पाठ्यक्रम कराते हैं. कलकत्ता यूनिवर्सिटी में संस्कृत के प्रोफेसर दीपांकर मुखोपाध्याय ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में कोष उपलब्ध कराने और स्कॉलरशिप के जरिए भाषा में रुचि को फिर पैदा किया जा सकता है.IIM बोधगया ने 24 लाख रुपये के पैकेज के साथ बनाया 100 फीसदी प्लेसमेंट का रिकॉर्डटिप्पणियां पाली और प्राकृत जैसी प्रचीन भाषाओं का भी यही हाल है, दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट स्टडीज के मुताबिक पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में 234 सीटों में से हर साल 125 सीटें खाली रह जाती हैं. विभागाध्यक्ष के टी एस साराओ ने कहा कि धार्मिक भाषा संगठन भी कोई विषय पढ़ने को लेकर स्टूडेंट्स के फैसले को प्रभावित करते हैं. (इनपुट- भाषा) गलत ब्रांडिंग करने पर हाईकोर्ट ने दिल्‍ली मेट्रो को फटकारा, कहा- बड़े फॉन्‍ट में बताओ FIIT-JEE और IIT दिल्ली के बीच कोई संबंध नहीं पूजा संस्कृत में डिग्री हासिल करने के बाद सीमित करियर विकल्पों को लेकर अफसोस जताती हैं, लेकिन उन्हें संस्कृत बहुत पसंद है. उन्होंने कहा, 'लोग मुझसे पूछते रहते हैं कि आज के समय में मैं संस्कृत की डिग्री का क्या करूंगी. कोई व्यक्ति शिक्षाविद्,अनुवादक या मीडिया उद्योग में काम कर सकता है.' उन्होंने कहा, 'जब मैंने विषय को पढ़ना शुरू किया तो मुझे अहसास हुआ कि संस्कृत एक खूबसूरत और उदार भाषा है.' पूजा दिल्ली यूनिवर्सिटी से संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएट कर रही हैं. उन्होंने ग्रेजुएशन भी संस्कृत से किया है. सेंट स्टीफंस कॉलेज में संस्कृत के एसोसिएट प्रोफेसर पंकज मिश्रा के मुताबिक, नौकरी के कम अवसर और कम भुगतान की वजह से भाषा में स्टूडेंट्स की दिलचस्पी कम हो रही है. मिश्रा ने कहा, 'अनुवादकों को एक पन्ने के 200 से 300 रुपये दिए जाते हैं, जो दिहाड़ी मजदूर की मजदूरी से भी कम है.' दिल्ली यूनिवर्सिटी के सिर्फ 29 कॉलेज संस्कृत में पाठ्यक्रम कराते हैं. कलकत्ता यूनिवर्सिटी में संस्कृत के प्रोफेसर दीपांकर मुखोपाध्याय ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में कोष उपलब्ध कराने और स्कॉलरशिप के जरिए भाषा में रुचि को फिर पैदा किया जा सकता है.IIM बोधगया ने 24 लाख रुपये के पैकेज के साथ बनाया 100 फीसदी प्लेसमेंट का रिकॉर्डटिप्पणियां पाली और प्राकृत जैसी प्रचीन भाषाओं का भी यही हाल है, दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट स्टडीज के मुताबिक पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में 234 सीटों में से हर साल 125 सीटें खाली रह जाती हैं. विभागाध्यक्ष के टी एस साराओ ने कहा कि धार्मिक भाषा संगठन भी कोई विषय पढ़ने को लेकर स्टूडेंट्स के फैसले को प्रभावित करते हैं. (इनपुट- भाषा) पूजा संस्कृत में डिग्री हासिल करने के बाद सीमित करियर विकल्पों को लेकर अफसोस जताती हैं, लेकिन उन्हें संस्कृत बहुत पसंद है. उन्होंने कहा, 'लोग मुझसे पूछते रहते हैं कि आज के समय में मैं संस्कृत की डिग्री का क्या करूंगी. कोई व्यक्ति शिक्षाविद्,अनुवादक या मीडिया उद्योग में काम कर सकता है.' उन्होंने कहा, 'जब मैंने विषय को पढ़ना शुरू किया तो मुझे अहसास हुआ कि संस्कृत एक खूबसूरत और उदार भाषा है.' पूजा दिल्ली यूनिवर्सिटी से संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएट कर रही हैं. उन्होंने ग्रेजुएशन भी संस्कृत से किया है. सेंट स्टीफंस कॉलेज में संस्कृत के एसोसिएट प्रोफेसर पंकज मिश्रा के मुताबिक, नौकरी के कम अवसर और कम भुगतान की वजह से भाषा में स्टूडेंट्स की दिलचस्पी कम हो रही है. मिश्रा ने कहा, 'अनुवादकों को एक पन्ने के 200 से 300 रुपये दिए जाते हैं, जो दिहाड़ी मजदूर की मजदूरी से भी कम है.' दिल्ली यूनिवर्सिटी के सिर्फ 29 कॉलेज संस्कृत में पाठ्यक्रम कराते हैं. कलकत्ता यूनिवर्सिटी में संस्कृत के प्रोफेसर दीपांकर मुखोपाध्याय ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में कोष उपलब्ध कराने और स्कॉलरशिप के जरिए भाषा में रुचि को फिर पैदा किया जा सकता है.IIM बोधगया ने 24 लाख रुपये के पैकेज के साथ बनाया 100 फीसदी प्लेसमेंट का रिकॉर्डटिप्पणियां पाली और प्राकृत जैसी प्रचीन भाषाओं का भी यही हाल है, दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट स्टडीज के मुताबिक पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में 234 सीटों में से हर साल 125 सीटें खाली रह जाती हैं. विभागाध्यक्ष के टी एस साराओ ने कहा कि धार्मिक भाषा संगठन भी कोई विषय पढ़ने को लेकर स्टूडेंट्स के फैसले को प्रभावित करते हैं. (इनपुट- भाषा) उन्होंने ग्रेजुएशन भी संस्कृत से किया है. सेंट स्टीफंस कॉलेज में संस्कृत के एसोसिएट प्रोफेसर पंकज मिश्रा के मुताबिक, नौकरी के कम अवसर और कम भुगतान की वजह से भाषा में स्टूडेंट्स की दिलचस्पी कम हो रही है. मिश्रा ने कहा, 'अनुवादकों को एक पन्ने के 200 से 300 रुपये दिए जाते हैं, जो दिहाड़ी मजदूर की मजदूरी से भी कम है.' दिल्ली यूनिवर्सिटी के सिर्फ 29 कॉलेज संस्कृत में पाठ्यक्रम कराते हैं. कलकत्ता यूनिवर्सिटी में संस्कृत के प्रोफेसर दीपांकर मुखोपाध्याय ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में कोष उपलब्ध कराने और स्कॉलरशिप के जरिए भाषा में रुचि को फिर पैदा किया जा सकता है.IIM बोधगया ने 24 लाख रुपये के पैकेज के साथ बनाया 100 फीसदी प्लेसमेंट का रिकॉर्डटिप्पणियां पाली और प्राकृत जैसी प्रचीन भाषाओं का भी यही हाल है, दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट स्टडीज के मुताबिक पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में 234 सीटों में से हर साल 125 सीटें खाली रह जाती हैं. विभागाध्यक्ष के टी एस साराओ ने कहा कि धार्मिक भाषा संगठन भी कोई विषय पढ़ने को लेकर स्टूडेंट्स के फैसले को प्रभावित करते हैं. (इनपुट- भाषा) IIM बोधगया ने 24 लाख रुपये के पैकेज के साथ बनाया 100 फीसदी प्लेसमेंट का रिकॉर्डटिप्पणियां पाली और प्राकृत जैसी प्रचीन भाषाओं का भी यही हाल है, दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट स्टडीज के मुताबिक पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में 234 सीटों में से हर साल 125 सीटें खाली रह जाती हैं. विभागाध्यक्ष के टी एस साराओ ने कहा कि धार्मिक भाषा संगठन भी कोई विषय पढ़ने को लेकर स्टूडेंट्स के फैसले को प्रभावित करते हैं. (इनपुट- भाषा) पाली और प्राकृत जैसी प्रचीन भाषाओं का भी यही हाल है, दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट स्टडीज के मुताबिक पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में 234 सीटों में से हर साल 125 सीटें खाली रह जाती हैं. विभागाध्यक्ष के टी एस साराओ ने कहा कि धार्मिक भाषा संगठन भी कोई विषय पढ़ने को लेकर स्टूडेंट्स के फैसले को प्रभावित करते हैं. (इनपुट- भाषा) (इनपुट- भाषा)
सारांश: संस्कृत भाषा में ग्रेजुएट करने वाले स्टूडेंट नौकरी को लेकर चिंतित हैं. संस्कृत पढने के लिए एडमिशन कम होते जा रहे हैं. संस्कृत की उपयोगिता और व्यवहार्यता को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
31
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान का कहना है कि वह और सलमान खान अब पहले से परिपक्व हो चुके हैं और उन दोनों का संबंध एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ से परे है।टिप्पणियां शाहरुख ने कहा, हमारा संबंध (एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़) से परे है। उनके आगे झुकना या उन्हें झुकाने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। ऐसा हो सकता है कि दो-तीन साल पहले इस प्रकार की प्रतिद्वंद्विता रही हो, लेकिन अब हम अधिक समझदार हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि दोनों अभिनेताओं के बीच सलमान की पूर्व गर्लफ्रेंड कैटरीना कैफ के जन्मदिन के मौके पर 2008 में आयोजित एक समारोह में झगड़ा हो गया था, लेकिन इस वर्ष जुलाई में विधायक बाबा सिद्दीकी की इफ्तार पार्टी में दोनों एक-दूसरे को गले लगाते हुए देखे गए। इसके बाद दोनों के बीच फिर दोस्ती होने की अटकलों को हवा मिली। शाहरुख ने कहा, हमारा संबंध (एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़) से परे है। उनके आगे झुकना या उन्हें झुकाने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। ऐसा हो सकता है कि दो-तीन साल पहले इस प्रकार की प्रतिद्वंद्विता रही हो, लेकिन अब हम अधिक समझदार हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि दोनों अभिनेताओं के बीच सलमान की पूर्व गर्लफ्रेंड कैटरीना कैफ के जन्मदिन के मौके पर 2008 में आयोजित एक समारोह में झगड़ा हो गया था, लेकिन इस वर्ष जुलाई में विधायक बाबा सिद्दीकी की इफ्तार पार्टी में दोनों एक-दूसरे को गले लगाते हुए देखे गए। इसके बाद दोनों के बीच फिर दोस्ती होने की अटकलों को हवा मिली। उल्लेखनीय है कि दोनों अभिनेताओं के बीच सलमान की पूर्व गर्लफ्रेंड कैटरीना कैफ के जन्मदिन के मौके पर 2008 में आयोजित एक समारोह में झगड़ा हो गया था, लेकिन इस वर्ष जुलाई में विधायक बाबा सिद्दीकी की इफ्तार पार्टी में दोनों एक-दूसरे को गले लगाते हुए देखे गए। इसके बाद दोनों के बीच फिर दोस्ती होने की अटकलों को हवा मिली।
संक्षिप्त पाठ: शाहरुख ने कहा, उनके (सलमान के) आगे झुकना या उन्हें झुकाने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। ऐसा हो सकता है कि दो-तीन साल पहले इस प्रकार की प्रतिद्वंद्विता रही हो, लेकिन अब हम अधिक समझदार हो गए हैं।
22
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: पंजाब के मोगा जिले से रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक घटना सामने आई हैं. मोगा के हिम्मतपुर गांव में एक युवक ने अपनी मां की हत्या कर मौके से फरार हो गया है. पुलिस को घटना की जानकारी दी गई है. पुलिस फिलहाल आरोपी की तलाश कर रही है. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक ड्रग एडिक्ट ने शुक्रवार सुबह अपनी मां की कथित तौर पर हत्या कर दी है. मृतक की पहचान करमजीत कौर के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, हमले में महिला को कई गहरी चोटें आईं और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया. पुलिस ने आरोपी युवक की पहचान सतविंदर सिंह के रूप में की है. पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह ने कहा कि शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी सतविंदर सिंह स्वीडन में रह रहा था, लेकिन वह हाल के महीनों में यहां लौट आया था. वह मानसिक तनाव में था और उसने अपनी मां पर कुदाल से हमला किया.' वहीं, पुलिस की शुरुआती पूछताछ में  स्थानीय लोगों ने बताया कि करमजीत कौर एक विधवा थीं और उन्होंने सतविंदर को काम के लिए स्वीडन भेजने के लिए पैसे जुटाने के लिए अपने घर को गिरवी रख दिया था. आरोपी पिछले महीने स्वीडन से लौटा था और उसने वहां ड्रग्स लेना शुरू कर दिया था. खास बात यह है कि सतविंदर के छोटे भाई वरिंदर सिंह ने पुलिस को पहले ही इस बात की सूचना दी थी कि सतविंदर मां की हत्या कर सकता है, बावजूद इसके पुलिस इस हत्या को नहीं रोक पाई. पुलिस ने फिलहाल आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज मामले की जांच शुरू कर दी है.  बता दें कि पंजाब में ड्रग समस्या एक प्रमुख चुनावी मुद्दा रहा है. इस साल की शुरुआत में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा था कि उनकी सरकार राज्य में नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है. उन्होंने कहा था कि 28,000 से अधिक ड्रग पैडलर्स को विशेष टास्क फोर्स की मदद से गिरफ्तार किया गया है. उस दौरान उन्होंने दावा किया था कि 'प्रवर्तन और उपचार' की दोहरी पहल से ड्रग की लत को खत्म किया जा रहा है. पंजाब में पिछले ढाई साल में अधिक मात्रा में ड्रग लेने के चलते 160 से अधिक लोगों की मौत हुई है.
यह एक सारांश है: मृतक की पहचान करमजीत कौर के रूप में हुई है महिला को कई गहरी चोटें आईं और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया आरोपी सतविंदर सिंह स्वीडन में रह रहा था, लेकिन वह लौट आया था
24
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पिछले दो सप्ताह से गिरावट में चल रहे देश के शेयर बाजारों के लिए झटकों का दौर अभी समाप्त होने की उम्मीद नहीं दिख रही है और गिरावट का सिलसिला अगले सप्ताह भी जारी रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी बाजारों में अनिश्चिता के मद्देनजर आने वाले दिनों में अभी स्थानीय बाजारों पर दबाव बना रह सकता है। पिछले दो सप्ताह में भारतीय बाजार का दबावमापक यंत्र कहे जाने वाले बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स में 567.69 अंक अथवा 3.07 प्रतिशत गिर चुका है। यह निवेशकों के विश्वास में कमी को दर्शाता है। विश्लेषक फर्म आईआईएफएल के शोध प्रमुख अमर अंबानी ने कहा कि भारतीय बाजार के लिए थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति हमेशा एक महत्वपूर्ण बात मानी जाती रही है। कच्चे तेल मूल्यों में तेजी के बीच मुद्रास्फीति अब भी ऊंची बनी हुई है। विदेशी बाजारों से उत्साहजनक संकेत आने लगें तो दिशा बदल सकती है।
संक्षिप्त पाठ: पिछले दो सप्ताह से गिरावट में चल रहे देश के शेयर बाजारों के लिए झटकों का दौर अभी समाप्त होने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
14
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: बीजेपी में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम को लेकर आवाजें उठनी बंद नहीं हो रही हैं। भले ही पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया है कि संसदीय समिति ही उम्मीदवार का नाम तय करेगी, लेकिन पार्टी के भीतर मोदी के नाम पर गोलबंदी जारी है। यशवंत सिन्हा के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने भी कहा है कि नरेंद्र मोदी का नाम बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों में सबसे आगे है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि बीजेपी और आरएसएस नेताओं की बैठक में पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर कोई नाम तय नहीं किया गया है।टिप्पणियां गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बीजेपी में दबे-छिपे उठ रही मांगों को आवाज देते हुए पार्टी नेता यशवंत सिन्हा ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाने की खुलकर वकालत की थी, जिस पर एनडीए के प्रमुख घटक दल जेडीयू ने साफ तौर पर नाखुशी जताई थी। यशवंत सिन्हा ने कहा था, "गंभीरता से विचार करने के बाद मैंने महसूस किया है कि अगर बीजेपी मोदी को अपना प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित करती है, तो बीजेपी को चुनाव में बड़े स्तर पर फायदा होगा। मतदाताओं पर इसका व्यापक असर पड़ेगा। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है।" पूर्व विदेशमंत्री सिन्हा ने कहा था कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में निर्णय पार्टी को लेना है, लेकिन कार्यकर्ताओं और जनता की भावना यही है। उन्होंने कहा था कि हालिया सर्वेक्षणों में मोदी को प्रधानमंत्री पद के अन्य सभी दावेदारों से काफी आगे बताया गया है और उन्हें इस तरह पेश करने का यह सही वक्त है। यशवंत सिन्हा के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने भी कहा है कि नरेंद्र मोदी का नाम बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों में सबसे आगे है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि बीजेपी और आरएसएस नेताओं की बैठक में पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर कोई नाम तय नहीं किया गया है।टिप्पणियां गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बीजेपी में दबे-छिपे उठ रही मांगों को आवाज देते हुए पार्टी नेता यशवंत सिन्हा ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाने की खुलकर वकालत की थी, जिस पर एनडीए के प्रमुख घटक दल जेडीयू ने साफ तौर पर नाखुशी जताई थी। यशवंत सिन्हा ने कहा था, "गंभीरता से विचार करने के बाद मैंने महसूस किया है कि अगर बीजेपी मोदी को अपना प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित करती है, तो बीजेपी को चुनाव में बड़े स्तर पर फायदा होगा। मतदाताओं पर इसका व्यापक असर पड़ेगा। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है।" पूर्व विदेशमंत्री सिन्हा ने कहा था कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में निर्णय पार्टी को लेना है, लेकिन कार्यकर्ताओं और जनता की भावना यही है। उन्होंने कहा था कि हालिया सर्वेक्षणों में मोदी को प्रधानमंत्री पद के अन्य सभी दावेदारों से काफी आगे बताया गया है और उन्हें इस तरह पेश करने का यह सही वक्त है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बीजेपी में दबे-छिपे उठ रही मांगों को आवाज देते हुए पार्टी नेता यशवंत सिन्हा ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाने की खुलकर वकालत की थी, जिस पर एनडीए के प्रमुख घटक दल जेडीयू ने साफ तौर पर नाखुशी जताई थी। यशवंत सिन्हा ने कहा था, "गंभीरता से विचार करने के बाद मैंने महसूस किया है कि अगर बीजेपी मोदी को अपना प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित करती है, तो बीजेपी को चुनाव में बड़े स्तर पर फायदा होगा। मतदाताओं पर इसका व्यापक असर पड़ेगा। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है।" पूर्व विदेशमंत्री सिन्हा ने कहा था कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में निर्णय पार्टी को लेना है, लेकिन कार्यकर्ताओं और जनता की भावना यही है। उन्होंने कहा था कि हालिया सर्वेक्षणों में मोदी को प्रधानमंत्री पद के अन्य सभी दावेदारों से काफी आगे बताया गया है और उन्हें इस तरह पेश करने का यह सही वक्त है। पूर्व विदेशमंत्री सिन्हा ने कहा था कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में निर्णय पार्टी को लेना है, लेकिन कार्यकर्ताओं और जनता की भावना यही है। उन्होंने कहा था कि हालिया सर्वेक्षणों में मोदी को प्रधानमंत्री पद के अन्य सभी दावेदारों से काफी आगे बताया गया है और उन्हें इस तरह पेश करने का यह सही वक्त है।
संक्षिप्त सारांश: बीजेपी में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम को लेकर आवाजें उठनी बंद नहीं हो रही हैं। यशवंत सिन्हा के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने भी कहा है कि नरेंद्र मोदी का नाम बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों में सबसे आगे है।
10
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा कि बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार कांड की जांच मेरठ के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुजीत पांडेय की देखरेख में होगी. उन्होंने प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को जांच के काम में गति लाने के निर्देश दिये हैं. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘बुलंदशहर मामले की जांच मेरठ के पुलिस महानिरीक्षक सुजीत पांडेय की देखरेख में होगी.’’ अखिलेश ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव (देवाशीष पांडा) और पुलिस महानिदेशक (जावीद अहमद) से कहा है कि प्रकरण की जांच तेजी से करवाई जाये और पीड़ि‍तों को यथाशीघ्र न्याय दिलाया जाये. गौरतलब है कि शुक्रवार की रात नोएडा से शाहजहांपुर जा रहे एक परिवार की गाड़ी रुकवाकर सात आठ डकैतों ने लूटपाट की थी और एक महिला तथा उसकी 13 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किया था, जिसके बाद कानून एवं व्यवस्था को मुद्दा बनाकर विपक्षी दलों ने अखिलेश सरकार पर हमला तेज कर दिया है.टिप्पणियां इस मामले में पुलिस ने अब तक तीन अभियुक्तों नरेश (25), बबलू (22) और रईस (28) को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लगभग एक दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर बाकी अभियुक्तों की गिरफ्तारी की कोशिश चल रही है. घटनास्थल का दौरा कर चुके पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने भरोसा जताया है कि शीघ्र ही बाकी अभियुक्तों को भी गिरफ्तार कर लिया जायेगा. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उन्होंने प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को जांच के काम में गति लाने के निर्देश दिये हैं. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘बुलंदशहर मामले की जांच मेरठ के पुलिस महानिरीक्षक सुजीत पांडेय की देखरेख में होगी.’’ अखिलेश ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव (देवाशीष पांडा) और पुलिस महानिदेशक (जावीद अहमद) से कहा है कि प्रकरण की जांच तेजी से करवाई जाये और पीड़ि‍तों को यथाशीघ्र न्याय दिलाया जाये. गौरतलब है कि शुक्रवार की रात नोएडा से शाहजहांपुर जा रहे एक परिवार की गाड़ी रुकवाकर सात आठ डकैतों ने लूटपाट की थी और एक महिला तथा उसकी 13 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किया था, जिसके बाद कानून एवं व्यवस्था को मुद्दा बनाकर विपक्षी दलों ने अखिलेश सरकार पर हमला तेज कर दिया है.टिप्पणियां इस मामले में पुलिस ने अब तक तीन अभियुक्तों नरेश (25), बबलू (22) और रईस (28) को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लगभग एक दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर बाकी अभियुक्तों की गिरफ्तारी की कोशिश चल रही है. घटनास्थल का दौरा कर चुके पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने भरोसा जताया है कि शीघ्र ही बाकी अभियुक्तों को भी गिरफ्तार कर लिया जायेगा. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) अखिलेश ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव (देवाशीष पांडा) और पुलिस महानिदेशक (जावीद अहमद) से कहा है कि प्रकरण की जांच तेजी से करवाई जाये और पीड़ि‍तों को यथाशीघ्र न्याय दिलाया जाये. गौरतलब है कि शुक्रवार की रात नोएडा से शाहजहांपुर जा रहे एक परिवार की गाड़ी रुकवाकर सात आठ डकैतों ने लूटपाट की थी और एक महिला तथा उसकी 13 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किया था, जिसके बाद कानून एवं व्यवस्था को मुद्दा बनाकर विपक्षी दलों ने अखिलेश सरकार पर हमला तेज कर दिया है.टिप्पणियां इस मामले में पुलिस ने अब तक तीन अभियुक्तों नरेश (25), बबलू (22) और रईस (28) को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लगभग एक दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर बाकी अभियुक्तों की गिरफ्तारी की कोशिश चल रही है. घटनास्थल का दौरा कर चुके पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने भरोसा जताया है कि शीघ्र ही बाकी अभियुक्तों को भी गिरफ्तार कर लिया जायेगा. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इस मामले में पुलिस ने अब तक तीन अभियुक्तों नरेश (25), बबलू (22) और रईस (28) को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लगभग एक दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर बाकी अभियुक्तों की गिरफ्तारी की कोशिश चल रही है. घटनास्थल का दौरा कर चुके पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने भरोसा जताया है कि शीघ्र ही बाकी अभियुक्तों को भी गिरफ्तार कर लिया जायेगा. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
संक्षिप्त सारांश: मामले में पुलिस ने अब तक तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को जांच में तेजी लाने के निर्देश कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष ने अखिलेश सरकार पर हमला तेज किया
23
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बलात्कार के आरोपों में गिरफ्तार दिल्ली के बर्खास्त मंत्री संदीप कुमार को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी. अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करें. विशेष न्यायाधीश पूनम चौधरी ने आप विधायक को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही रकम की जमानत राशि पर जमानत दे दी. अदालत ने कुमार को निर्देश दिया कि वह अपना पासपोर्ट जमा करें और गवाहों को प्रभावित नहीं करें. उन्हें तीन सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में थे. कुमार ने इस आधार पर जमानत की मांग की थी कि मामले में जांच पूरी हो चुकी है और उनसे हिरासत में पूछताछ करने की और आवश्यकता नहीं है. पुलिस ने उनकी जमानत याचिका का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि वह प्रभावशाली व्यक्ति हैं और जांच को प्रभावित कर सकते हैं. पुलिस ने दावा किया था कि पीड़िता उसी इलाके में रहती है जिसका कुमार प्रतिनिधित्व करते हैं और अगर उन्हें जेल से रिहा किया जाता है तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. टिप्पणियां कुमार ने राहत की मांग की. उन्होंने कहा कि वह पिछले दो महीने से हिरासत में हैं और प्राथमिकी दर्ज किए जाने के समय से उनका आचरण सही रहा है और उन्होंने खुद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) विशेष न्यायाधीश पूनम चौधरी ने आप विधायक को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही रकम की जमानत राशि पर जमानत दे दी. अदालत ने कुमार को निर्देश दिया कि वह अपना पासपोर्ट जमा करें और गवाहों को प्रभावित नहीं करें. उन्हें तीन सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में थे. कुमार ने इस आधार पर जमानत की मांग की थी कि मामले में जांच पूरी हो चुकी है और उनसे हिरासत में पूछताछ करने की और आवश्यकता नहीं है. पुलिस ने उनकी जमानत याचिका का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि वह प्रभावशाली व्यक्ति हैं और जांच को प्रभावित कर सकते हैं. पुलिस ने दावा किया था कि पीड़िता उसी इलाके में रहती है जिसका कुमार प्रतिनिधित्व करते हैं और अगर उन्हें जेल से रिहा किया जाता है तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. टिप्पणियां कुमार ने राहत की मांग की. उन्होंने कहा कि वह पिछले दो महीने से हिरासत में हैं और प्राथमिकी दर्ज किए जाने के समय से उनका आचरण सही रहा है और उन्होंने खुद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) कुमार ने इस आधार पर जमानत की मांग की थी कि मामले में जांच पूरी हो चुकी है और उनसे हिरासत में पूछताछ करने की और आवश्यकता नहीं है. पुलिस ने उनकी जमानत याचिका का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि वह प्रभावशाली व्यक्ति हैं और जांच को प्रभावित कर सकते हैं. पुलिस ने दावा किया था कि पीड़िता उसी इलाके में रहती है जिसका कुमार प्रतिनिधित्व करते हैं और अगर उन्हें जेल से रिहा किया जाता है तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. टिप्पणियां कुमार ने राहत की मांग की. उन्होंने कहा कि वह पिछले दो महीने से हिरासत में हैं और प्राथमिकी दर्ज किए जाने के समय से उनका आचरण सही रहा है और उन्होंने खुद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) पुलिस ने दावा किया था कि पीड़िता उसी इलाके में रहती है जिसका कुमार प्रतिनिधित्व करते हैं और अगर उन्हें जेल से रिहा किया जाता है तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. टिप्पणियां कुमार ने राहत की मांग की. उन्होंने कहा कि वह पिछले दो महीने से हिरासत में हैं और प्राथमिकी दर्ज किए जाने के समय से उनका आचरण सही रहा है और उन्होंने खुद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) कुमार ने राहत की मांग की. उन्होंने कहा कि वह पिछले दो महीने से हिरासत में हैं और प्राथमिकी दर्ज किए जाने के समय से उनका आचरण सही रहा है और उन्होंने खुद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अदालत ने निर्देश दिया कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करें संदीप कुमार को अपना पासपोर्ट जमा करने के निर्देश पुलिस ने जताई सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की आशंका
28
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: अमेरिका ने उत्तरी कोरिया से उसके परमाणु शस्त्रों को रद्द करने की इच्छा पर वार्ता की, जिसे उत्तरी कोरिया के एक शीर्ष अधिकारी ने सकारात्मक बताया है।  अमेरिका के विशेष दूत स्टीफन बॉसवर्थ और उत्तरी कोरिया के उप-विदेशमंत्री किम काय ग्वान के बीच करीब साढ़े चार घंटे लंबी बातचीत चली। भोज के दौरान कोरियाई उप विदेशमंत्री किम काय ग्वान ने कहा कि वहां माहौल अच्छा था और बातचीत रोचक व सकारात्मक रही। हांलाकि वार्ता के खत्म होने पर किसी भी पक्ष ने कोई टिप्पणी नहीं की और अमेरिका ने ऐसी वार्ताओं को शुरुआती करार दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पिछले हफ्ते बाली में हुई उत्तरी और दक्षिणी कोरिया के परमाणु दूतों से मुलाकात के बाद उत्तरी कोरिया के अधिकारियों को न्यूयॉर्क आमंत्रित किया था। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें उत्तरी कोरिया की छह देशों की परमाणु नि:शस्त्रीकरण वार्ता में वापसी पर है।  2005 में उ. कोरिया ने वायदा किया था कि वह अपने शस्त्र कार्यक्रम रद्द करेगा पर 2006 और 2009 में उसने परमाणु परीक्षण किए। गुरुवार को अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि कोरिया 2005 में किये वायदे को निभाए।
संक्षिप्त सारांश: अमेरिका ने उ.कोरिया से उसके परमाणु शस्त्रों को रद्द करने की इच्छा पर वार्ता की, जिसे उ. कोरिया के एक शीर्ष अधिकारी ने सकारात्मक बताया है।
0
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने सोमवार को कहा कि राज्य में पिछले महीने भारी वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ के कारण अब भी 5,700 से अधिक लोग लापता हैं। बहुगुणा ने संवाददाताओं से कहा, "बाढ़ के कारण अब भी 5,748 लोग लापता हैं, जिनमें दूसरे राज्यों से आए पर्यटक एवं श्रद्धालु भी शामिल हैं।" उन्होंने कहा, "राज्य मंत्रिमंडल ने उन परिवारों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है, जिनके सदस्य अब भी लापता हैं। सहायता राशि का वितरण मंगलवार से शुरू होगा।" मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को लापता लोगों की सूची मिली है, जिनमें विभिन्न अन्य राज्यों के लोग भी हैं।टिप्पणियां उत्तराखंड सरकार राज्य में आई आपदा में जान गंवाने वालों और लापता होने वालों के परिजनों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की सहायता देगी। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा घोषित साढ़े तीन लाख रुपये की सहायता राशि के अतिरिक्त होगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "लापता लोगों को मृत नहीं घोषित किया जाएगा। उनकी खोज जारी रहेगी।" बहुगुणा ने संवाददाताओं से कहा, "बाढ़ के कारण अब भी 5,748 लोग लापता हैं, जिनमें दूसरे राज्यों से आए पर्यटक एवं श्रद्धालु भी शामिल हैं।" उन्होंने कहा, "राज्य मंत्रिमंडल ने उन परिवारों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है, जिनके सदस्य अब भी लापता हैं। सहायता राशि का वितरण मंगलवार से शुरू होगा।" मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को लापता लोगों की सूची मिली है, जिनमें विभिन्न अन्य राज्यों के लोग भी हैं।टिप्पणियां उत्तराखंड सरकार राज्य में आई आपदा में जान गंवाने वालों और लापता होने वालों के परिजनों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की सहायता देगी। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा घोषित साढ़े तीन लाख रुपये की सहायता राशि के अतिरिक्त होगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "लापता लोगों को मृत नहीं घोषित किया जाएगा। उनकी खोज जारी रहेगी।" मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को लापता लोगों की सूची मिली है, जिनमें विभिन्न अन्य राज्यों के लोग भी हैं।टिप्पणियां उत्तराखंड सरकार राज्य में आई आपदा में जान गंवाने वालों और लापता होने वालों के परिजनों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की सहायता देगी। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा घोषित साढ़े तीन लाख रुपये की सहायता राशि के अतिरिक्त होगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "लापता लोगों को मृत नहीं घोषित किया जाएगा। उनकी खोज जारी रहेगी।" उत्तराखंड सरकार राज्य में आई आपदा में जान गंवाने वालों और लापता होने वालों के परिजनों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की सहायता देगी। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा घोषित साढ़े तीन लाख रुपये की सहायता राशि के अतिरिक्त होगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "लापता लोगों को मृत नहीं घोषित किया जाएगा। उनकी खोज जारी रहेगी।" मुख्यमंत्री ने कहा, "लापता लोगों को मृत नहीं घोषित किया जाएगा। उनकी खोज जारी रहेगी।"
सारांश: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने सोमवार को कहा कि राज्य में पिछले महीने भारी वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ के कारण अब भी 5,700 से अधिक लोग लापता हैं।
20
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारत की सानिया मिर्जा और रूस की यारोस्लावा श्वेदोवा की शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन कर डब्ल्यूटीए हार्ड कोर्ट सिटी ओपन टूर्नामेंट का युगल खिताब जीत लिया है। सानिया और श्वेदोवा ने रविवार को खेले गए महिलाओं की युगल स्पर्धा के खिताबी मुकाबले में बेलारूस की ओल्गा गोवारत्सोवा और रूस की आला कुर्दियावत्सेवा की दूसरी वरीयता प्राप्त जोड़ी को 6-3, 6-3 से शिकस्त दी। 22,0000 डॉलर इनामी राशि वाले इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में सानिया और श्वेदोवा ने शनिवार को इजराइल की शहर पीर और अमेरिका की स्लोआन स्टीफंस की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी को एकतरफा मुकाबले में 6-0, 6-1 से पराजित किया था। इस मुकाबले में पीर और स्टीफंस की जोड़ी केवल एक गेम ही जीत पाई थी। सानिया और श्वेदोवा की जोड़ी ने पहले दौर के मुकाबले में स्थानीय खिलाड़ी बी.कोपरा और ए.मोहम्मद की गैरवरीयता प्राप्त जोड़ी को 6-1, 6-2 से शिकस्त देकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी जबकि क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने अमेरिका की ली-वाटर्स और मॉल्टन-लेवी की जोड़ी को एकतरफा मुकाबले में 6-3, 6-4 से मात देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। उल्लेखनीय है कि एकल स्पर्धा में सानिया की चुनौती पहले दौर में ही खत्म हो चुकी थी।
यहाँ एक सारांश है:सानिया और यारोस्लावा की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन कर डब्ल्यूटीए हार्ड कोर्ट सिटी ओपन टूर्नामेंट का युगल खिताब जीत लिया है।
17
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता पिंकी प्रमाणिक ने पूर्वी रेलवे द्वारा उनका निलंबन रद्द किए जाने के बाद सियालदाह रेलवे स्टेशन पर अपना काम फिर से संभाल लिया है। उनपर गलत लैंगिक पहचान प्रस्तुत करने और अपनी एक साथी से बलात्कार करने का आरोप था। पूर्व धावक पिंकी ने 2006 के एशियाड में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने स्टेशन पर टिकट कलेक्टर के रूप में अपना काम फिर से संभाल लिया।टिप्पणियां पिंकी ने कहा, ‘सदमे से गुजरने के बाद मैं राहत महसूस कर रही हूं। मैं खुद को बहाल किए जाने के लिए रेलवे की आभारी हूं... मैंने नौकरी वापस पाने के लिए आठ अगस्त को अपील की थी और मुझे तत्काल आदेश मिल गया। मैंने गुरुवार को काम संभाल लिया।’ उन्होंने बताया कि रेलवे सहकर्मी उनके प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे थे और बहुत से लोग उनके साथ फोटो खिंचवा रहे थे। पूर्वी रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि पिंकी द्वारा जमानत आदेश की प्रति सौंपे जाने के बाद उनका निलंबन रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार के नियम के अनुसार हिरासत के 48 घंटे बाद किसी को निलंबित माना जाता है लेकिन जमानत मिलने के बाद उन्होंने अपील की और निलंबन रद्द कर दिया गया।’ पूर्व धावक पिंकी ने 2006 के एशियाड में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने स्टेशन पर टिकट कलेक्टर के रूप में अपना काम फिर से संभाल लिया।टिप्पणियां पिंकी ने कहा, ‘सदमे से गुजरने के बाद मैं राहत महसूस कर रही हूं। मैं खुद को बहाल किए जाने के लिए रेलवे की आभारी हूं... मैंने नौकरी वापस पाने के लिए आठ अगस्त को अपील की थी और मुझे तत्काल आदेश मिल गया। मैंने गुरुवार को काम संभाल लिया।’ उन्होंने बताया कि रेलवे सहकर्मी उनके प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे थे और बहुत से लोग उनके साथ फोटो खिंचवा रहे थे। पूर्वी रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि पिंकी द्वारा जमानत आदेश की प्रति सौंपे जाने के बाद उनका निलंबन रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार के नियम के अनुसार हिरासत के 48 घंटे बाद किसी को निलंबित माना जाता है लेकिन जमानत मिलने के बाद उन्होंने अपील की और निलंबन रद्द कर दिया गया।’ पिंकी ने कहा, ‘सदमे से गुजरने के बाद मैं राहत महसूस कर रही हूं। मैं खुद को बहाल किए जाने के लिए रेलवे की आभारी हूं... मैंने नौकरी वापस पाने के लिए आठ अगस्त को अपील की थी और मुझे तत्काल आदेश मिल गया। मैंने गुरुवार को काम संभाल लिया।’ उन्होंने बताया कि रेलवे सहकर्मी उनके प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे थे और बहुत से लोग उनके साथ फोटो खिंचवा रहे थे। पूर्वी रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि पिंकी द्वारा जमानत आदेश की प्रति सौंपे जाने के बाद उनका निलंबन रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार के नियम के अनुसार हिरासत के 48 घंटे बाद किसी को निलंबित माना जाता है लेकिन जमानत मिलने के बाद उन्होंने अपील की और निलंबन रद्द कर दिया गया।’ पूर्वी रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि पिंकी द्वारा जमानत आदेश की प्रति सौंपे जाने के बाद उनका निलंबन रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार के नियम के अनुसार हिरासत के 48 घंटे बाद किसी को निलंबित माना जाता है लेकिन जमानत मिलने के बाद उन्होंने अपील की और निलंबन रद्द कर दिया गया।’
सारांश: एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता पिंकी प्रमाणिक ने पूर्वी रेलवे द्वारा उनका निलंबन रद्द किए जाने के बाद सियालदाह रेलवे स्टेशन पर अपना काम फिर से संभाल लिया है। उनपर गलत लैंगिक पहचान प्रस्तुत करने और अपनी एक साथी से बलात्कार करने का आरोप था।
7
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: सामाजिक मुद्दों पर आधारित अपने टीवी शो 'सत्यमेव जयते' के जरिये सामाजिक भेदभाव के खिलाफ जागरुकता फैलाने के लिए अभिनेता आमिर खान और स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पुरस्कृत किया। अंतरराष्ट्रीय वाल्मिकी दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में आयोग ने छुआछूत के कारणों को उजागर करने के लिए आमिर के योगदान को सराहा। आमिर ने कहा, 'सत्यमेव जयते' भारतीय लोगों के मसलों को सार्वजनिक मंच देने का एक प्रयास था। आज मुझे खुशी है कि शो के बाद युवाओं समेत कई लोग आगे आए हैं और उन्होंने अपनी बातें रखी हैं। यह पूरी टीम का प्रयास था और लोगों तक पहुंचने का माध्यम मुहैया कराने के लिए मैं उदय शंकर का धन्यवाद देता हूं।टिप्पणियां स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर ने कहा, टेलीविजन सिर्फ मनोरंजन का स्रोत नहीं है और 'सत्यमेव जयते' के साथ हमने यह सिद्ध कर दिखाया कि टीवी के पास देश की प्रगति में योगदान और लोगों की मानसिकता बदलने की ताकत है। पुरस्कार समारोह में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, सामाजिक न्याय मंत्री मुकुल वासनिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया भी मौजूद थे। अंतरराष्ट्रीय वाल्मिकी दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में आयोग ने छुआछूत के कारणों को उजागर करने के लिए आमिर के योगदान को सराहा। आमिर ने कहा, 'सत्यमेव जयते' भारतीय लोगों के मसलों को सार्वजनिक मंच देने का एक प्रयास था। आज मुझे खुशी है कि शो के बाद युवाओं समेत कई लोग आगे आए हैं और उन्होंने अपनी बातें रखी हैं। यह पूरी टीम का प्रयास था और लोगों तक पहुंचने का माध्यम मुहैया कराने के लिए मैं उदय शंकर का धन्यवाद देता हूं।टिप्पणियां स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर ने कहा, टेलीविजन सिर्फ मनोरंजन का स्रोत नहीं है और 'सत्यमेव जयते' के साथ हमने यह सिद्ध कर दिखाया कि टीवी के पास देश की प्रगति में योगदान और लोगों की मानसिकता बदलने की ताकत है। पुरस्कार समारोह में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, सामाजिक न्याय मंत्री मुकुल वासनिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया भी मौजूद थे। स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर ने कहा, टेलीविजन सिर्फ मनोरंजन का स्रोत नहीं है और 'सत्यमेव जयते' के साथ हमने यह सिद्ध कर दिखाया कि टीवी के पास देश की प्रगति में योगदान और लोगों की मानसिकता बदलने की ताकत है। पुरस्कार समारोह में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, सामाजिक न्याय मंत्री मुकुल वासनिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया भी मौजूद थे। पुरस्कार समारोह में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, सामाजिक न्याय मंत्री मुकुल वासनिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया भी मौजूद थे।
सारांश: अपने टीवी शो 'सत्यमेव जयते' के जरिये सामाजिक भेदभाव के खिलाफ जागरुकता फैलाने के लिए अभिनेता आमिर खान को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पुरस्कृत किया।
31
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: मध्यप्रदेश के सागर जिले की रहली तहसील के टिकीटोरिया मंदिर में हुई चोरी के मामले में पुलिस ने बारह वर्षीय बालिका को गिरफ्तार करके किशोर न्यायालय में पेश किया जहां से उसे बाल सुधार गृह शहडोल भेज दिया गया है. बालिका ने महज दस किलो गेंहू खरीदने के लिए मंदिर की दानपेटी से ढाई सौ रुपये निकाले थे. बालिका के बाल सुधारगृह जाने के उसका आठ वर्षीय भाई और छह वर्षीय बहिन मायूस है, क्योंकि इन तीनों भाई-बहिनों के सर से मां का साया भी उठ चुका है. ऐसे में बहिन की आंखों में ही दोनों छोटे भाई-बहिन को ममता दिखती थी. हालांकि मंदिर की इस चोरी का खुलासा नादान बालिका की नादानी से ही हो सका है, वरना कुछ दिन पहले ही श्रीदेव पंढरीनाथ मंदिर में सेंध लगाने वाले अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. टिकीटोरिया मंदिर में इसके पहले भी चोरी के मामले सामने आए लेकिन इन चोरों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी. रहली नगर की बाहरी सीमा स्थित साढ़े चार सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर विगत शनिवार को दानपेटी से रुपये निकाले चोरी होने का मामला सामने आने पर मंदिर प्रबंधन की रिपोर्ट पर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था. मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के आधार पर पुलिस ने बारह वर्षीय किशोरी से पूछताछ की. किशोरी ने दानपेटी से रुपये निकाले जाना कबूल किया. जब बालिका के पिता ने किशोरी का स्कूल बेग देखा तो उसमें सत्तर रुपये निकले. किशोरी एक सौ अस्सी रुपये व्यय करके दस किलो गेहूं घर लाई थी. किशोरी ने अपने पिता को बताया था कि मंदिर की पेटी का कुंदा जरा सा घुमाने पर पेटी खुल गई जिसमें से उसने सौ रुपये का एक नोट तथा एक सौ पचास रुपये के सिक्के निकाले थे. मासूम बच्ची में पिता की नाराजगी का डर इस चोरी का कारण बना. बताया जाता है कि किशोरी गेहूं पिसाने गई थी. आटा चक्की पर उसके दस किलो गेंहू गुम हो गए. घर पहुंचने पर पिता के गुस्से से डरी बच्ची ने यह कहकर मामला टाल दिया कि गेंहू आटा चक्की पर ही रखे हैं. लेकिन सच्चाई सामने आने पर डांट खाने की आशंका में चिंतित बच्ची ने दूसरे दिन गेहूं खरीदने के लिए पैसे जुटाने की सोची और बिना चप्पल पहने मंदिर पहुंच गई. वहां पर उसने मौका देखकर मंदिर की दानपेटी से कुल ढाई सौ रुपये निकाल लिए. इसमें से 180 रुपये के गेहूं खरीदकर बाकी 70 रुपये उसने स्कूल बैग में रख लिए. पुलिस ने जब पूछताछ की तो बच्ची ने सारी कहानी सुना दी. कक्षा सातवीं में पढ़ने वाली बारह वर्षीय किशोरी पर भले ही परिवार के भरण-पोषण का जिम्मा न हो लेकिन चार सदस्यीय परिवार के लिए भोजन बनाने का जिम्मा वह तीन साल से निभा रही है. दरअसल तीन साल पहले प्रसव के दौरान किशोरी की मां का निधन हो गया था. इसके बाद उसके पिता पर खाना बनाने का जिम्मा आ गया. आठ वर्षीय भाई और छह वर्षीय बहिन किशोरी से ही खाना मांगते हैं. किशोरी के पिता बताते हैं कि 'सब्जी मैं बनाता हूं. उससे अभी ठीक से रोटी बनाते तो नहीं बनती लेकिन खाने लायक रोटी बना देती है.' इस परिवार के आवास में न दरवाजा है, न दीवारें हैं. गरीब परिवार जिस तरह के मकान में रहता है उससे अच्छी जगह तो मवेशियों के रहने की होती है. दस फुट बाई दस फुट की जगह में घासपूस की झोपड़ा बनी हुई है. इसमें किशोरी अपने भाई बहिन और पिता के साथ हंसती खेलती रहती थी. अचानक बदली परिस्थितियों के कारण छोटे भाई बहिन अब अपनी मां समान बड़ी बहिन के दूर होने से मायूस हैं. हालांकि इस परिस्थिति में कई लोगों ने परिवार की मदद करने की बात कही है.
यहाँ एक सारांश है:मंदिर के सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से पुलिस बालिका तक पहुंच गई लड़की की मां का देहांत हो चुका है, दो छोटे भाई-बहन उसी के आसरे सागर के किशोर न्यायालय ने बच्ची को शहडोल के बाल सुधार गृह भेजा
17
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: अहमदाबाद शहर के पुलिस सीआईडी कार्यालय के पास घटी एक दिल दहला देने वाली घटना में पांच बेटियों के पिता ने अपनी दो पुत्रियों पर पेट्रोल छिड़ककर उन्हें जिंदा जला दिया। मेघाणीनगर पुलिस थाने के निरीक्षण डीए देसाई ने कहा, ‘‘हमने गोविंद राठौड़ के खिलाफ अपनी दो पुत्रियों पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाकर हत्या करने के लिए मामला दर्ज किया है। यह पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है इस कृत्य के पीछे उद्देश्य क्या था।’’ प्राथमिकी के अनुसार नरोदा क्षेत्र केडी कालोनी निवासी गोविंद राठौड़ अपनी दो पुत्रियों नेहा (07) और पूनम (06) को अपनी ऑटोरिक्शा में लेकर गया। उसने अपनी पत्नी इंदू से कहा कि वह उन्हें उनके विद्यालय छोड़ देगा। देसाई ने कहा, ‘‘वह उन्हें विद्यालय ले जानी की बजाय ऑटोरिक्शा मेघाणीनगर क्षेत्र स्थित पुलिस सीआईडी कार्यालय लेकर गया वाहन पर पेट्रोल छिड़का और उसे आग लगा दी जबकि उसकी पुत्रियां उसके भीतर थीं।’’ टिप्पणियां उन्होंने बताया कि दोनों लड़कियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहां पर मौजूद लोगों ने भागने का प्रयास कर रहे गोविंद को धर दबोचा और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कहा, ‘‘हमने गोविंद को गिरफ्तार कर लिया है और इस बात की जांच कर रहे हैं कि उसने अपनी ही पुत्रियों को क्यों मारा।’’ मेघाणीनगर पुलिस थाने के निरीक्षण डीए देसाई ने कहा, ‘‘हमने गोविंद राठौड़ के खिलाफ अपनी दो पुत्रियों पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाकर हत्या करने के लिए मामला दर्ज किया है। यह पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है इस कृत्य के पीछे उद्देश्य क्या था।’’ प्राथमिकी के अनुसार नरोदा क्षेत्र केडी कालोनी निवासी गोविंद राठौड़ अपनी दो पुत्रियों नेहा (07) और पूनम (06) को अपनी ऑटोरिक्शा में लेकर गया। उसने अपनी पत्नी इंदू से कहा कि वह उन्हें उनके विद्यालय छोड़ देगा। देसाई ने कहा, ‘‘वह उन्हें विद्यालय ले जानी की बजाय ऑटोरिक्शा मेघाणीनगर क्षेत्र स्थित पुलिस सीआईडी कार्यालय लेकर गया वाहन पर पेट्रोल छिड़का और उसे आग लगा दी जबकि उसकी पुत्रियां उसके भीतर थीं।’’ टिप्पणियां उन्होंने बताया कि दोनों लड़कियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहां पर मौजूद लोगों ने भागने का प्रयास कर रहे गोविंद को धर दबोचा और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कहा, ‘‘हमने गोविंद को गिरफ्तार कर लिया है और इस बात की जांच कर रहे हैं कि उसने अपनी ही पुत्रियों को क्यों मारा।’’ प्राथमिकी के अनुसार नरोदा क्षेत्र केडी कालोनी निवासी गोविंद राठौड़ अपनी दो पुत्रियों नेहा (07) और पूनम (06) को अपनी ऑटोरिक्शा में लेकर गया। उसने अपनी पत्नी इंदू से कहा कि वह उन्हें उनके विद्यालय छोड़ देगा। देसाई ने कहा, ‘‘वह उन्हें विद्यालय ले जानी की बजाय ऑटोरिक्शा मेघाणीनगर क्षेत्र स्थित पुलिस सीआईडी कार्यालय लेकर गया वाहन पर पेट्रोल छिड़का और उसे आग लगा दी जबकि उसकी पुत्रियां उसके भीतर थीं।’’ टिप्पणियां उन्होंने बताया कि दोनों लड़कियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहां पर मौजूद लोगों ने भागने का प्रयास कर रहे गोविंद को धर दबोचा और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कहा, ‘‘हमने गोविंद को गिरफ्तार कर लिया है और इस बात की जांच कर रहे हैं कि उसने अपनी ही पुत्रियों को क्यों मारा।’’ देसाई ने कहा, ‘‘वह उन्हें विद्यालय ले जानी की बजाय ऑटोरिक्शा मेघाणीनगर क्षेत्र स्थित पुलिस सीआईडी कार्यालय लेकर गया वाहन पर पेट्रोल छिड़का और उसे आग लगा दी जबकि उसकी पुत्रियां उसके भीतर थीं।’’ टिप्पणियां उन्होंने बताया कि दोनों लड़कियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहां पर मौजूद लोगों ने भागने का प्रयास कर रहे गोविंद को धर दबोचा और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कहा, ‘‘हमने गोविंद को गिरफ्तार कर लिया है और इस बात की जांच कर रहे हैं कि उसने अपनी ही पुत्रियों को क्यों मारा।’’ उन्होंने बताया कि दोनों लड़कियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहां पर मौजूद लोगों ने भागने का प्रयास कर रहे गोविंद को धर दबोचा और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कहा, ‘‘हमने गोविंद को गिरफ्तार कर लिया है और इस बात की जांच कर रहे हैं कि उसने अपनी ही पुत्रियों को क्यों मारा।’’ पुलिस ने कहा, ‘‘हमने गोविंद को गिरफ्तार कर लिया है और इस बात की जांच कर रहे हैं कि उसने अपनी ही पुत्रियों को क्यों मारा।’’
यह एक सारांश है: अहमदाबाद शहर के पुलिस सीआईडी कार्यालय के पास घटी एक दिल दहला देने वाली घटना में पांच बेटियों के पिता ने अपनी दो पुत्रियों पर पेट्रोल छिड़ककर उन्हें जिंदा जला दिया।
2
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ने तथा शराब के प्रति समाज का नजरिया बदलने से देश के अल्कोहल बाजार के 2014 तक 39 अरब डॉलर :1,75,950 करोड़ रुपये: के आंकड़े को पार कर जाने की उम्मीद है। अनुसंधान फर्म डाटामॉनिटर के अध्ययन में यह बात कही गई है। अध्ययन के अनुसार, यह क्षेत्र 2004 से 2009 के बीच सालाना 12 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। 2009 में इस उद्योग का कारोबार 21.7 अरब डालर :97,910 करोड़ रुपये: था। डाटामॉनिटर कंज्जूमर मार्केट के विश्लेषक अमित श्रीवास्तव ने कहा कि वैश्विक कंपनियों के लिए भारत अल्कोहल का एक आकर्षक बाजार है। अल्कोहल के परंपरागत बाजार यूरोप में जहां गिरावट आई है, वहीं भारत में यह बाजार तेजी से बढ़ रहा है। श्रीवास्तव ने कहा कि समाज में अल्कोहल को लेकर अब स्वीकार्यता बढ़ रही है। साथ ही लोगों की खर्च करने की क्षमता में भी इजाफा हो रहा है, जिससे इस क्षेत्र के तेजी से बढ़ने की संभावनाएं हैं।
संक्षिप्त पाठ: अमित श्रीवास्तव ने कहा कि अल्कोहल के परंपरागत बाजार यूरोप में जहां गिरावट आई है, वहीं भारत में यह बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
14
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: सुप्रीम कोर्ट ने सिंगूर मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने टाटा को नोटिस भी जारी किया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने टाटा से जमीन वापस लेने के लिए बने नए कानून को असंवैधानिक करार दिया था, जिसके खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पेटिशन दायर की थी, दरअसल पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार के समय टाटा को नैनो का कारखाना लगाने के लिए जमीन दी गई थी, लेकिन ममता ने सत्ता में आने के बाद नया कानून पास करके टाटा से वह जमीन वापस लौटाने को कहा। चुनावों से पहले ममता ने सिंगूर के किसानों से वादा किया था कि वह सत्ता में आने पर उनकी जमीनें लौटा देंगी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने टाटा से जमीन वापस लेने के लिए बने नए कानून को असंवैधानिक करार दिया था, जिसके खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पेटिशन दायर की थी, दरअसल पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार के समय टाटा को नैनो का कारखाना लगाने के लिए जमीन दी गई थी, लेकिन ममता ने सत्ता में आने के बाद नया कानून पास करके टाटा से वह जमीन वापस लौटाने को कहा। चुनावों से पहले ममता ने सिंगूर के किसानों से वादा किया था कि वह सत्ता में आने पर उनकी जमीनें लौटा देंगी।
संक्षिप्त पाठ: सुप्रीम कोर्ट ने सिंगूर मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने टाटा को नोटिस भी जारी किया है।
13
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संप्रग सरकार के नौ साल पूरे होने के मौके पर बुधवार को जब रिपोर्ट कार्ड पेश किया तो मशहूर शायर अल्लामा इकबाल की शायरी कहना नहीं भूले और कहा, ‘‘सितारों से आगे जहां और भी हैं, अभी इश्क के इम्तिहान और भी हैं।’’ प्रधानमंत्री ने यह शायरी उस वक्त की जब पत्रकारों ने उनसे यह पूछा कि संप्रग सरकार के नौ साल और संप्रग-दो के चार साल पूरे होने के बाद क्या वह खुश महसूस कर रहे हैं।टिप्पणियां इकबाल की शायरी पत्रकारों को सुनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सितारों से आगे जहां और भी हैं, अभी इश्क के इम्तिहान और भी हैं।’’ सिंह की ओर से कही गयी यह शायरी इसलिए भी अहम है क्योंकि कुछ समय पहले उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर अपने तीसरे कार्यकाल से इनकार नहीं किया था। जब उनसे यह पूछा गया कि अपनी सरकार के कामकाज को 10 में से कितने नंबर देंगे, इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह तय करना लोगों का काम है।’’ प्रधानमंत्री ने यह शायरी उस वक्त की जब पत्रकारों ने उनसे यह पूछा कि संप्रग सरकार के नौ साल और संप्रग-दो के चार साल पूरे होने के बाद क्या वह खुश महसूस कर रहे हैं।टिप्पणियां इकबाल की शायरी पत्रकारों को सुनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सितारों से आगे जहां और भी हैं, अभी इश्क के इम्तिहान और भी हैं।’’ सिंह की ओर से कही गयी यह शायरी इसलिए भी अहम है क्योंकि कुछ समय पहले उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर अपने तीसरे कार्यकाल से इनकार नहीं किया था। जब उनसे यह पूछा गया कि अपनी सरकार के कामकाज को 10 में से कितने नंबर देंगे, इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह तय करना लोगों का काम है।’’ इकबाल की शायरी पत्रकारों को सुनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सितारों से आगे जहां और भी हैं, अभी इश्क के इम्तिहान और भी हैं।’’ सिंह की ओर से कही गयी यह शायरी इसलिए भी अहम है क्योंकि कुछ समय पहले उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर अपने तीसरे कार्यकाल से इनकार नहीं किया था। जब उनसे यह पूछा गया कि अपनी सरकार के कामकाज को 10 में से कितने नंबर देंगे, इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह तय करना लोगों का काम है।’’ जब उनसे यह पूछा गया कि अपनी सरकार के कामकाज को 10 में से कितने नंबर देंगे, इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह तय करना लोगों का काम है।’’
प्रधानमंत्री ने यह शायरी उस वक्त की जब पत्रकारों ने उनसे यह पूछा कि संप्रग सरकार के नौ साल और संप्रग-दो के चार साल पूरे होने के बाद क्या वह खुश महसूस कर रहे हैं।
34
['hin']
एक सारांश बनाओ: संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने में हुई देरी के कारण पदक लौटाने वाले शहीद जवानों के परिजनों ने कहा कि न्याय होने के बाद वे पदक लेने को तैयार हैं। शहीदों के परिजनों ने भावुक होते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलकर उन्हें अफजल की दया याचिका खारिज करने के लिए धन्यवाद देंगे जिसके चलते शनिवार सुबह उसे फांसी दी गई और 11 साल का इंतजार खत्म हुआ। 13 दिसंबर को संसद भवन की सुरक्षा में ड्यूटी पर तैनात मातबर सिंह नेगी के पुत्र गौतम ने अफजल को फांसी दिए जाने पर कहा, ‘देर आए दुरुस्त आए।’ गौतम नेगी ने कहा, ‘सरकार का यह अच्छा फैसला है और यह कदम उन आतंकवादी संगठनों को कड़ा संदेश भेजेगा जो भारत में समस्या पैदा करने की सोच रहे हैं।’ परिजनों ने कहा कि वे सरकार द्वारा शहीद जवानों के सम्मान में दिए गए बहादुरी पदकों को स्वीकार कर लेंगे जो उन्होंने 2006 में न्याय में देरी के विरोध स्वरूप लौटा दिए थे। टिप्पणियां 13 दिसंबर, 2001 को आतंकवादियों के साथ गोलीबारी में शहादत देने वाले राज्यसभा के सहायक सुरक्षा अधिकारी जेपी यादव की पत्नी प्रेम और मां सिमली देवी ने कहा कि टीवी से संसद पर हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी देने की खबर से मन को तसल्ली पहुंची और खुशी हुई। प्रेम ने कहा, ‘आज का दिन मेरे और मेरे परिवार के लिए खुशियां लेकर आया है क्योंकि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को देर से ही सही लेकिन फांसी दे दी गई।’ शहीदों के परिजनों ने भावुक होते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलकर उन्हें अफजल की दया याचिका खारिज करने के लिए धन्यवाद देंगे जिसके चलते शनिवार सुबह उसे फांसी दी गई और 11 साल का इंतजार खत्म हुआ। 13 दिसंबर को संसद भवन की सुरक्षा में ड्यूटी पर तैनात मातबर सिंह नेगी के पुत्र गौतम ने अफजल को फांसी दिए जाने पर कहा, ‘देर आए दुरुस्त आए।’ गौतम नेगी ने कहा, ‘सरकार का यह अच्छा फैसला है और यह कदम उन आतंकवादी संगठनों को कड़ा संदेश भेजेगा जो भारत में समस्या पैदा करने की सोच रहे हैं।’ परिजनों ने कहा कि वे सरकार द्वारा शहीद जवानों के सम्मान में दिए गए बहादुरी पदकों को स्वीकार कर लेंगे जो उन्होंने 2006 में न्याय में देरी के विरोध स्वरूप लौटा दिए थे। टिप्पणियां 13 दिसंबर, 2001 को आतंकवादियों के साथ गोलीबारी में शहादत देने वाले राज्यसभा के सहायक सुरक्षा अधिकारी जेपी यादव की पत्नी प्रेम और मां सिमली देवी ने कहा कि टीवी से संसद पर हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी देने की खबर से मन को तसल्ली पहुंची और खुशी हुई। प्रेम ने कहा, ‘आज का दिन मेरे और मेरे परिवार के लिए खुशियां लेकर आया है क्योंकि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को देर से ही सही लेकिन फांसी दे दी गई।’ 13 दिसंबर को संसद भवन की सुरक्षा में ड्यूटी पर तैनात मातबर सिंह नेगी के पुत्र गौतम ने अफजल को फांसी दिए जाने पर कहा, ‘देर आए दुरुस्त आए।’ गौतम नेगी ने कहा, ‘सरकार का यह अच्छा फैसला है और यह कदम उन आतंकवादी संगठनों को कड़ा संदेश भेजेगा जो भारत में समस्या पैदा करने की सोच रहे हैं।’ परिजनों ने कहा कि वे सरकार द्वारा शहीद जवानों के सम्मान में दिए गए बहादुरी पदकों को स्वीकार कर लेंगे जो उन्होंने 2006 में न्याय में देरी के विरोध स्वरूप लौटा दिए थे। टिप्पणियां 13 दिसंबर, 2001 को आतंकवादियों के साथ गोलीबारी में शहादत देने वाले राज्यसभा के सहायक सुरक्षा अधिकारी जेपी यादव की पत्नी प्रेम और मां सिमली देवी ने कहा कि टीवी से संसद पर हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी देने की खबर से मन को तसल्ली पहुंची और खुशी हुई। प्रेम ने कहा, ‘आज का दिन मेरे और मेरे परिवार के लिए खुशियां लेकर आया है क्योंकि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को देर से ही सही लेकिन फांसी दे दी गई।’ परिजनों ने कहा कि वे सरकार द्वारा शहीद जवानों के सम्मान में दिए गए बहादुरी पदकों को स्वीकार कर लेंगे जो उन्होंने 2006 में न्याय में देरी के विरोध स्वरूप लौटा दिए थे। टिप्पणियां 13 दिसंबर, 2001 को आतंकवादियों के साथ गोलीबारी में शहादत देने वाले राज्यसभा के सहायक सुरक्षा अधिकारी जेपी यादव की पत्नी प्रेम और मां सिमली देवी ने कहा कि टीवी से संसद पर हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी देने की खबर से मन को तसल्ली पहुंची और खुशी हुई। प्रेम ने कहा, ‘आज का दिन मेरे और मेरे परिवार के लिए खुशियां लेकर आया है क्योंकि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को देर से ही सही लेकिन फांसी दे दी गई।’ 13 दिसंबर, 2001 को आतंकवादियों के साथ गोलीबारी में शहादत देने वाले राज्यसभा के सहायक सुरक्षा अधिकारी जेपी यादव की पत्नी प्रेम और मां सिमली देवी ने कहा कि टीवी से संसद पर हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी देने की खबर से मन को तसल्ली पहुंची और खुशी हुई। प्रेम ने कहा, ‘आज का दिन मेरे और मेरे परिवार के लिए खुशियां लेकर आया है क्योंकि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को देर से ही सही लेकिन फांसी दे दी गई।’ प्रेम ने कहा, ‘आज का दिन मेरे और मेरे परिवार के लिए खुशियां लेकर आया है क्योंकि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को देर से ही सही लेकिन फांसी दे दी गई।’
यहाँ एक सारांश है:संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने में हुई देरी के कारण पदक लौटाने वाले शहीद जवानों के परिजनों ने कहा कि न्याय होने के बाद वे पदक लेने को तैयार हैं।
15
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर मुद्दे पर बहस के एक हफ्ते बाद भारत और पाकिस्तान इस मुद्दे पर फिर से शब्दयुद्ध में उलझ गए। संयुक्त राष्ट्र में इस्लामाबाद द्वारा ‘अप्रासंगिक जिक्र’ के बाद दोनों पक्ष भिड़ गए। स्पेशल पॉलीटिकल एवं डिकॉलोनाइजेशन कमिटी की यहां हुई आम बहस के दौरान पाकिस्तान के स्थायी उपप्रतिनिधि रजा बशीर तरार ने कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान के बगैर संयुक्त राष्ट्र का गैर उपनिवेशवाद का एजेंडा अधूरा रहेगा।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान को प्रतिबद्ध है जो ‘सभी पक्षों को स्वीकार्य हो खासकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को।’ भारत की ओर से इसका जवाब देते हुए भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव प्रकाश गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ तरीके से फिर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया है जो भारत का अभिन्न हिस्सा है। टिप्पणियां गुप्ता ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की तरफ से इस अवांछनीय टिप्पणी को हम पूरी तरह से खारिज करते हैं जिसमें जम्मू-कश्मीर का जिक्र है। यह टिप्पणी इस समिति के संदर्भ से इतर है।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मूलभूत अधिकार प्रदान करता है। जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी स्वतंत्र इच्छा का इजहार करते हैं और शांतिपूर्ण तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी करते हैं और वे ऐसा लगातार कर रहे हैं।’ इसके जवाब में तरार ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधि ने ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर की टिप्पणी’ की है कि जम्मू-कश्मीर का विवाद गैर उपनिवेशवाद पर चर्चा के लिए अप्रासांगिक है। उन्होंने दावा किया, ‘..जम्मू-कश्मीर न तो भारत का अभिन्न अंग है और न ही कभी रहा है।’ स्पेशल पॉलीटिकल एवं डिकॉलोनाइजेशन कमिटी की यहां हुई आम बहस के दौरान पाकिस्तान के स्थायी उपप्रतिनिधि रजा बशीर तरार ने कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान के बगैर संयुक्त राष्ट्र का गैर उपनिवेशवाद का एजेंडा अधूरा रहेगा।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान को प्रतिबद्ध है जो ‘सभी पक्षों को स्वीकार्य हो खासकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को।’ भारत की ओर से इसका जवाब देते हुए भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव प्रकाश गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ तरीके से फिर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया है जो भारत का अभिन्न हिस्सा है। टिप्पणियां गुप्ता ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की तरफ से इस अवांछनीय टिप्पणी को हम पूरी तरह से खारिज करते हैं जिसमें जम्मू-कश्मीर का जिक्र है। यह टिप्पणी इस समिति के संदर्भ से इतर है।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मूलभूत अधिकार प्रदान करता है। जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी स्वतंत्र इच्छा का इजहार करते हैं और शांतिपूर्ण तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी करते हैं और वे ऐसा लगातार कर रहे हैं।’ इसके जवाब में तरार ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधि ने ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर की टिप्पणी’ की है कि जम्मू-कश्मीर का विवाद गैर उपनिवेशवाद पर चर्चा के लिए अप्रासांगिक है। उन्होंने दावा किया, ‘..जम्मू-कश्मीर न तो भारत का अभिन्न अंग है और न ही कभी रहा है।’ भारत की ओर से इसका जवाब देते हुए भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव प्रकाश गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ तरीके से फिर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया है जो भारत का अभिन्न हिस्सा है। टिप्पणियां गुप्ता ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की तरफ से इस अवांछनीय टिप्पणी को हम पूरी तरह से खारिज करते हैं जिसमें जम्मू-कश्मीर का जिक्र है। यह टिप्पणी इस समिति के संदर्भ से इतर है।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मूलभूत अधिकार प्रदान करता है। जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी स्वतंत्र इच्छा का इजहार करते हैं और शांतिपूर्ण तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी करते हैं और वे ऐसा लगातार कर रहे हैं।’ इसके जवाब में तरार ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधि ने ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर की टिप्पणी’ की है कि जम्मू-कश्मीर का विवाद गैर उपनिवेशवाद पर चर्चा के लिए अप्रासांगिक है। उन्होंने दावा किया, ‘..जम्मू-कश्मीर न तो भारत का अभिन्न अंग है और न ही कभी रहा है।’ गुप्ता ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की तरफ से इस अवांछनीय टिप्पणी को हम पूरी तरह से खारिज करते हैं जिसमें जम्मू-कश्मीर का जिक्र है। यह टिप्पणी इस समिति के संदर्भ से इतर है।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मूलभूत अधिकार प्रदान करता है। जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी स्वतंत्र इच्छा का इजहार करते हैं और शांतिपूर्ण तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी करते हैं और वे ऐसा लगातार कर रहे हैं।’ इसके जवाब में तरार ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधि ने ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर की टिप्पणी’ की है कि जम्मू-कश्मीर का विवाद गैर उपनिवेशवाद पर चर्चा के लिए अप्रासांगिक है। उन्होंने दावा किया, ‘..जम्मू-कश्मीर न तो भारत का अभिन्न अंग है और न ही कभी रहा है।’ इसके जवाब में तरार ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधि ने ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर की टिप्पणी’ की है कि जम्मू-कश्मीर का विवाद गैर उपनिवेशवाद पर चर्चा के लिए अप्रासांगिक है। उन्होंने दावा किया, ‘..जम्मू-कश्मीर न तो भारत का अभिन्न अंग है और न ही कभी रहा है।’
संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर मुद्दे पर बहस के एक हफ्ते बाद भारत और पाकिस्तान इस मुद्दे पर फिर से शब्दयुद्ध में उलझ गए। संयुक्त राष्ट्र में इस्लामाबाद द्वारा ‘अप्रासंगिक जिक्र’ के बाद दोनों पक्ष भिड़ गए।
34
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में मदरसे के एक शिक्षक को एक छात्र को बंधक बनाकर उसका यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जिले के इनायतनगर स्थित मदरसा इस्लामिया अहले सुन्नत के शिक्षक शाकिब खान (25) के खिलाफ 13 वर्षीय छात्र द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद कारवाई की गई। पीड़ित छात्र कोलकाता का निवासी है और कुछ समय पहले ही मदरसे में पढ़ने आया था। पुलिस के मुताबिक पीड़ित छात्र का आरोप है कि शिक्षक पिछले तीन दिन से मदरसे के एक कमरे में उसे बंधक बनाकर उसका यौन शोषण कर रहा था। किसी तरह मौका पाकर वह मंगलवार को वहां से भाग निकला और पास के गांव के लोगों को इसकी जानकारी दी जिसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस से संपर्क किया। इनायतनगर थाना प्रभारी अखिलेश पांडे ने बुधवार को संवाददाताओं को बताया कि प्रारम्भिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद मंगलवार देर रात आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच की जा रही है।
यहाँ एक सारांश है:उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में मदरसे के एक शिक्षक को एक छात्र को बंधक बनाकर उसका यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
12
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल के शुद्ध लाभ में लगातार दसवीं तिमाही में गिरावट दर्ज की गई है। 30 जून, 2012 को समाप्त हुई तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 37 प्रतिशत घटकर 762.2 करोड़ रुपये पर आ गया। भारती एयरटेल ने एक बयान में कहा कि बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में उसे 1,215.2 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी की कुल आय हालांकि 14 प्रतिशत बढ़कर 19,350 करोड़ रुपये रही जो बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में 16,975 करोड़ रुपये थी। कंपनी की आय अफ्रीका में 31.5 प्रतिशत बढ़ी, जबकि भारत में मोबाइल डाटा आय में 44.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।टिप्पणियां भारती एयरटेल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक सुनील भारती मित्तल ने कहा, जबरदस्त प्रतिस्पर्धा और हाल ही में नियामकीय एवं कर घटनाक्रमों से भारत में दूरसंचार आय घटी है। इन प्रतिकूल घटनाक्रमों के बावजूद एयरटेल ने नेटवर्क विस्तार, निवेश, ग्राहक संतुष्टि और नए उत्पादों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया। कंपनी ने कहा कि समीक्षाधीन तिमाही में भारत में दो महत्वपूर्ण बदलावों से आय प्रभावित हुई। पहला घटनाक्रम प्रोसेसिंग शुल्क को लेकर ट्राई के दिशानिर्देशों का रहा जिसमें ‘कांबो पैक’ की बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई, जबकि दूसरा सेवाकर बढ़ाकर 12.36 प्रतिशत किया जाना है जो एक अप्रैल, 2012 से प्रभावी हुआ। इस वृद्धि से सभी दूरसंचार सेवाएं करीब दो प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि संपूर्ण अतिरिक्त शुल्क सरकार के पास जा रहा है। भारती एयरटेल ने एक बयान में कहा कि बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में उसे 1,215.2 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी की कुल आय हालांकि 14 प्रतिशत बढ़कर 19,350 करोड़ रुपये रही जो बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में 16,975 करोड़ रुपये थी। कंपनी की आय अफ्रीका में 31.5 प्रतिशत बढ़ी, जबकि भारत में मोबाइल डाटा आय में 44.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।टिप्पणियां भारती एयरटेल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक सुनील भारती मित्तल ने कहा, जबरदस्त प्रतिस्पर्धा और हाल ही में नियामकीय एवं कर घटनाक्रमों से भारत में दूरसंचार आय घटी है। इन प्रतिकूल घटनाक्रमों के बावजूद एयरटेल ने नेटवर्क विस्तार, निवेश, ग्राहक संतुष्टि और नए उत्पादों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया। कंपनी ने कहा कि समीक्षाधीन तिमाही में भारत में दो महत्वपूर्ण बदलावों से आय प्रभावित हुई। पहला घटनाक्रम प्रोसेसिंग शुल्क को लेकर ट्राई के दिशानिर्देशों का रहा जिसमें ‘कांबो पैक’ की बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई, जबकि दूसरा सेवाकर बढ़ाकर 12.36 प्रतिशत किया जाना है जो एक अप्रैल, 2012 से प्रभावी हुआ। इस वृद्धि से सभी दूरसंचार सेवाएं करीब दो प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि संपूर्ण अतिरिक्त शुल्क सरकार के पास जा रहा है। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी की कुल आय हालांकि 14 प्रतिशत बढ़कर 19,350 करोड़ रुपये रही जो बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में 16,975 करोड़ रुपये थी। कंपनी की आय अफ्रीका में 31.5 प्रतिशत बढ़ी, जबकि भारत में मोबाइल डाटा आय में 44.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।टिप्पणियां भारती एयरटेल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक सुनील भारती मित्तल ने कहा, जबरदस्त प्रतिस्पर्धा और हाल ही में नियामकीय एवं कर घटनाक्रमों से भारत में दूरसंचार आय घटी है। इन प्रतिकूल घटनाक्रमों के बावजूद एयरटेल ने नेटवर्क विस्तार, निवेश, ग्राहक संतुष्टि और नए उत्पादों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया। कंपनी ने कहा कि समीक्षाधीन तिमाही में भारत में दो महत्वपूर्ण बदलावों से आय प्रभावित हुई। पहला घटनाक्रम प्रोसेसिंग शुल्क को लेकर ट्राई के दिशानिर्देशों का रहा जिसमें ‘कांबो पैक’ की बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई, जबकि दूसरा सेवाकर बढ़ाकर 12.36 प्रतिशत किया जाना है जो एक अप्रैल, 2012 से प्रभावी हुआ। इस वृद्धि से सभी दूरसंचार सेवाएं करीब दो प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि संपूर्ण अतिरिक्त शुल्क सरकार के पास जा रहा है। भारती एयरटेल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक सुनील भारती मित्तल ने कहा, जबरदस्त प्रतिस्पर्धा और हाल ही में नियामकीय एवं कर घटनाक्रमों से भारत में दूरसंचार आय घटी है। इन प्रतिकूल घटनाक्रमों के बावजूद एयरटेल ने नेटवर्क विस्तार, निवेश, ग्राहक संतुष्टि और नए उत्पादों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया। कंपनी ने कहा कि समीक्षाधीन तिमाही में भारत में दो महत्वपूर्ण बदलावों से आय प्रभावित हुई। पहला घटनाक्रम प्रोसेसिंग शुल्क को लेकर ट्राई के दिशानिर्देशों का रहा जिसमें ‘कांबो पैक’ की बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई, जबकि दूसरा सेवाकर बढ़ाकर 12.36 प्रतिशत किया जाना है जो एक अप्रैल, 2012 से प्रभावी हुआ। इस वृद्धि से सभी दूरसंचार सेवाएं करीब दो प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि संपूर्ण अतिरिक्त शुल्क सरकार के पास जा रहा है। इस वृद्धि से सभी दूरसंचार सेवाएं करीब दो प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि संपूर्ण अतिरिक्त शुल्क सरकार के पास जा रहा है।
सारांश: 30 जून, 2012 को समाप्त हुई तिमाही में भारती एयरटेल का शुद्ध लाभ 37 प्रतिशत घटकर 762.2 करोड़ रुपये पर आ गया।
20
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: माइक्रोसॉफ्ट ने अगली पीढ़ी की कंप्यूटर परिचालन प्रणाली विंडोज-8 26 अक्टूबर को बाजार में पेश करने की घोषणा की है। दुनिया अब पर्सनल कंप्यूटर से स्मार्टफोन तथा टैबलेट की ओर जा रही है और इस ऑपरेटिंग सिस्टम को इसी बात को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।टिप्पणियां माइक्रोसॉफ्ट के प्रबंधक (संचार) ब्रान्डोन ली ब्लांक ने बुधवार को एक ब्लॉग पर कहा कि माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज विभाग के प्रमुख स्टीवन सिनोफस्काई ने विंडोज-8 पेश किए जाने की तारीख की घोषणा एक बैठक में की। इसके तहत 26 अक्टूबर को इसे पेश किया जाएगा। ली ब्लांक के अनुसार विंडोज-8 109 भाषाओं में दुनिया के 231 बाजारों में उपलब्ध होगा। माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने विंडोज-7 की 63 करोड़ इकाई बेची है। विंडोज-7 को लोगों के लिए अक्टूबर, 2009 में पेश किया गया था। नई माइक्रोसॉफ्ट सिस्टम का उपयोग टच तथा स्मार्टफोन एवं टैबलेट पीसी के साथ डेस्कटाप और लैपटाप में किया जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट के प्रबंधक (संचार) ब्रान्डोन ली ब्लांक ने बुधवार को एक ब्लॉग पर कहा कि माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज विभाग के प्रमुख स्टीवन सिनोफस्काई ने विंडोज-8 पेश किए जाने की तारीख की घोषणा एक बैठक में की। इसके तहत 26 अक्टूबर को इसे पेश किया जाएगा। ली ब्लांक के अनुसार विंडोज-8 109 भाषाओं में दुनिया के 231 बाजारों में उपलब्ध होगा। माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने विंडोज-7 की 63 करोड़ इकाई बेची है। विंडोज-7 को लोगों के लिए अक्टूबर, 2009 में पेश किया गया था। नई माइक्रोसॉफ्ट सिस्टम का उपयोग टच तथा स्मार्टफोन एवं टैबलेट पीसी के साथ डेस्कटाप और लैपटाप में किया जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने विंडोज-7 की 63 करोड़ इकाई बेची है। विंडोज-7 को लोगों के लिए अक्टूबर, 2009 में पेश किया गया था। नई माइक्रोसॉफ्ट सिस्टम का उपयोग टच तथा स्मार्टफोन एवं टैबलेट पीसी के साथ डेस्कटाप और लैपटाप में किया जाएगा।
संक्षिप्त पाठ: दुनिया अब पर्सनल कंप्यूटर से स्मार्टफोन तथा टैबलेट की ओर जा रही है और इस ऑपरेटिंग सिस्टम को इसी बात को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
13
['hin']
एक सारांश बनाओ: इराक में गुरुवार को बम धमाकों और गोलीबारी की घटनाओं में कम से कम 32 लोग मारे गए हैं। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि बगदाद में हुए हमलों में 22 लोगों की मौत हो गई। वहीं सलाहिद्दीन प्रांत में चार लोग इन हमलों का शिकार हुए। राज्य के एक पुलिस अधिकारी ने मारे गए लोगों की जानकारी दी। वहीं दियाला प्रांत की पुलिस के अनुसार वहां छह लोग मारे गए। ये दोनों प्रांत राजधानी बगदाद के उत्तर में स्थित हैं। दियाला इराक के सबसे अशांत इलाकों में से एक है। सलाहिद्दीन प्रांत की राजधानी तिकरित इराक के पूर्व तानाशाह राष्ट्राध्यक्ष सद्दाम हुसैन का गृहनगर है। राज्य के एक पुलिस अधिकारी ने मारे गए लोगों की जानकारी दी। वहीं दियाला प्रांत की पुलिस के अनुसार वहां छह लोग मारे गए। ये दोनों प्रांत राजधानी बगदाद के उत्तर में स्थित हैं। दियाला इराक के सबसे अशांत इलाकों में से एक है। सलाहिद्दीन प्रांत की राजधानी तिकरित इराक के पूर्व तानाशाह राष्ट्राध्यक्ष सद्दाम हुसैन का गृहनगर है।
बगदाद में हुए हमलों में 22 लोगों की मौत हो गई। वहीं सलाहिद्दीन प्रांत में चार लोग इन हमलों का शिकार हुए। दियाला प्रांत की पुलिस के अनुसार वहां छह लोग मारे गए।
26
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: Haryana  Assembly Election: कांग्रेस के पूर्व नेता अशोक तंवर ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में दुष्यंत चौटाला की पार्टी का समर्थन करने का ऐलान किया है. बुधवार को तंवर ने कहा, 'हमने अपने सभी साथियों से चर्चा की. हम लोगों ने फैसला किया है कि हम हरियाणा चुनाव में जेजेपी यानी दुष्यंत चौटाला की पार्टी का समर्थन करेंगे. हमने यह सर्जिकल स्ट्राइक आज से शुरू की है. मेरी कांग्रेस पार्टी से कोई दुश्मनी नहीं, लेकिन कुछ लोगों को सबक सिखाना जरूरी है.' साथ ही उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि दुष्यंत चौटाला मुख्यमंत्री बनें और आज से कांग्रेस तीसरे और चौथे नंबर की लड़ाई लड़ेगी. गौरतलब है कि हरियाणा की कांग्रेस (Congress) इकाई के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) ने पार्टी का दामन छोड़ने के बाद 21 अक्टूबर को राज्य के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में कांग्रेस की हार के लिए पूरा जोर लगाने का फैसला किया है. उनकी योजना हर निर्वाचन क्षेत्र में किसी भी पार्टी के प्रत्याशी, यहां तक कि निर्दलीय उम्मीदवारों को भी समर्थन देने की है, ताकि कांग्रेस को हराया जा सके. उन्होंने हालांकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एकतरफा समर्थन नहीं देने का फैसला किया है. तंवर ने कहा था कि वह यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि कांग्रेस हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में पांच से अधिक सीटें न जीत पाए. बता दें, अशोक तंवर ने इसी महीने की शुरुआत में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने विधानसभा चुनाव को लेकर बांटे जा रहे टिकटों की खरीद-बिक्री का आरोप लगाया था. अशोक तंवर की काफी दिनों से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से तनातनी चल रही थी. हाल में अशोक तंवर से प्रदेश की कमान छीनकर कुमारी शैलजा को दी गई है. हरियाणा में बीच चुनाव के बीच अशोक तंवर का इस्तीफा कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है. तंवर ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे त्यागपत्र में आरोप लगाया कि पार्टी को खत्म करने की साजिश रची जा रही है. कुछ दिनों पहले ही उन्होंने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए बनी विभिन्न समितियों से इस्तीफा दे दिया था.  तंवर ने इस्तीफा देते हुए कहा था कि उनके सामने पार्टी छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था और वह फिलहाल भाजपा या किसी अन्य पार्टी में शामिल होने नहीं जा रहे हैं. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राहुल गांधी के करीबियों की ''राजनीतिक हत्या'' की जा रही है.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: अशोक तंवर का बड़ा ऐलान चुनाव में जेजेपी का करेंगे समर्थन कहा- कांग्रेस से बैर नहीं, कुछ लोगों को सिखाना है सबक
11
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की ओर से बुलायी गई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा रही। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधेयक पर सहमति बनाने के लिए आगे विचार विमर्श जारी रखा जायेगा और संसद के मानसून सत्र से पहले एक और बैठक बुलाई जायेगी। बैठक में सपा और बसपा ने भाग नहीं लिया। बैठक के दौरान शिवसेना ने मांग की कि राजनीतिक दलों को महिलाओं के लिए टिकट आरक्षित करना चाहिए, वहीं राजद ने अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए कोटा के भीतर कोटा पर जोर दिया।  मीरा की ओर से महिला आरक्षण विधेयक पर आमसहमति बनाने के लिए बुलाई गई बैठक में भाजपा, वामदल, अन्नाद्रमुक, द्रमुक, अकाली दल, तृणमूल कांग्रेस एवं अन्य दल शामिल हुए। बैठक में विधेयक के प्रारूप के विरोधियों में शामिल सपा और बसपा शामिल नहीं हुए। इस विषय पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, मैं सपा और बसपा को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अलग से आमंत्रित करूंगी। इस मुद्दे पर आमसहमति बनाने तक प्रयास जारी रहेंगे। कुमार ने कहा कि विधेयक पर सहमति नहीं बन पाने के मद्देनजर संसद के मानसून सत्र से पहले वह सभी राजनीतिक दलों की एक और बैठक बुलायेंगी। ऐसी संभावना है कि वह विधेयक के प्रारूप पर असहमत होने वाले राजनीति दलों से अलग से बाजचीत करेंगी। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने बैठक के दौरान लोकसभा अध्यक्ष से आमसहमति बनाने का आग्रह किया ताकि कोई अप्रिय स्थिति पैदा नहीं हो। सुषमा ने कहा, जो सदस्य विधेयक के मसौदे से असहमत हैं उन्हें अपना विचार रखने का मौका दिया जाना चाहिए और संशोधन पेश करने की अनुमति दी जानी चाहिए। लेकिन मार्शल के इस्तेमाल जैसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
सारांश: महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की ओर से बुलायी गई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा रही।
20
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त सलमान बशीर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास की तारीफ करते हुए बुधवार को कहा कि बहुत ही कम समय में राज्य में सामाजिक आर्थिक क्षेत्र में आए बदलाव से पाकिस्तान के लोग बहुत अभिभूत हैं और बिहार के विकास से सीखने के इच्छुक हैं। आगामी नौ से 16 नवंबर तक नीतीश कुमार की पाकिस्तान यात्रा के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए यहां आए उच्चायुक्त बशीर ने कहा, ‘‘बिहार पाकिस्तान के लिए विशेष राज्य है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में विकास के डग भरते हुए बहुत ही कम समय में सामाजिक आर्थिक क्षेत्र में जो बदलाव आए हैं उससे पाकिस्तान के लोग बहुत अभिभूत हैं। पाकिस्तान के लोग बिहार के विकास के मॉडल से सीखने के लिए मुख्यमंत्री की यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की पाकिस्तान यात्रा से पाकिस्तान और भारत के बीच संबंधों और सहयोग को एक नया आयाम मिलेगा। यह यात्रा पाकिस्तान के नेतृत्व के लिए भी बहुत अहम है। बशीर ने कहा, ‘‘बिहार की सफलता की कहानी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान के लोगों में बहुत रुचि है। मुख्यमंत्री की यात्रा से न सिर्फ सांसदों के बीच संपर्क बढ़ेगा बल्कि नेतृत्व स्तर पर भी संबंध आगे बढ़ेंगे। इस यात्रा से पाकिस्तान और बिहार के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करने में मदद मिलेगी।’’ उपउच्चायुक्त बब्बर अमीन के साथ पटना आए बशीर ने कहा कि बिहार में उनकी यह पहली यात्रा है। वह बिहार से बहुत प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आशा है कि हम बिहार के विकास के मॉडल से बहुत कुछ सीखेंगे। मुख्यमंत्री की यात्रा भारत पाकिस्तान के बीच संबंधों में एक अन्य महत्वपूर्ण कदम होगा।’’ उल्लेखनीय है कि बीते 25 अगस्त को पाकिस्तान से आए सांसदों के एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री को अपने अपने प्रांतों की ओर से पाकिस्तान आने का न्यौता दिया था। इससे पहले बशीर ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर नीतीश कुमार के साथ करीब एक घंटे बातचीत की और पाकिस्तान के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी और अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों के 12 सदस्यीय एक शिष्टमंडल के साथ पाकिस्तान का दौरा करेंगे। नीतीश कुमार का कराची, लाहौर और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जाने का कार्यक्रम है। वह वाघा सीमा के रास्ते भारत लौटेंगे। वर्ष 2003 में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पाकिस्तान की यात्रा की थी। वह उस समय अपने हास्यबोध के कारण पड़ोसी देश में काफी चर्चित हुए थे। बिहार और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढने के संबंध में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बिहार और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के बीच कई महत्वपूर्ण चीजें उभर कर आएंगी।’’ मुंबई पर 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के बारे में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘यह एक न्यायिक प्रक्रिया है।’’टिप्पणियां पाकिस्तान में हिंदुओं की बेटियों और पाकिस्तानी लडकों के बीच विवाह के बाद उन्हें छोड देने और पाकिस्तान से पीडितों के पलायन के संबंध में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘अब भी कई चिंताजनक चीजें हैं जिनसे निपटने की दरकार है।’’ बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है। आगामी नौ से 16 नवंबर तक नीतीश कुमार की पाकिस्तान यात्रा के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए यहां आए उच्चायुक्त बशीर ने कहा, ‘‘बिहार पाकिस्तान के लिए विशेष राज्य है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में विकास के डग भरते हुए बहुत ही कम समय में सामाजिक आर्थिक क्षेत्र में जो बदलाव आए हैं उससे पाकिस्तान के लोग बहुत अभिभूत हैं। पाकिस्तान के लोग बिहार के विकास के मॉडल से सीखने के लिए मुख्यमंत्री की यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की पाकिस्तान यात्रा से पाकिस्तान और भारत के बीच संबंधों और सहयोग को एक नया आयाम मिलेगा। यह यात्रा पाकिस्तान के नेतृत्व के लिए भी बहुत अहम है। बशीर ने कहा, ‘‘बिहार की सफलता की कहानी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान के लोगों में बहुत रुचि है। मुख्यमंत्री की यात्रा से न सिर्फ सांसदों के बीच संपर्क बढ़ेगा बल्कि नेतृत्व स्तर पर भी संबंध आगे बढ़ेंगे। इस यात्रा से पाकिस्तान और बिहार के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करने में मदद मिलेगी।’’ उपउच्चायुक्त बब्बर अमीन के साथ पटना आए बशीर ने कहा कि बिहार में उनकी यह पहली यात्रा है। वह बिहार से बहुत प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आशा है कि हम बिहार के विकास के मॉडल से बहुत कुछ सीखेंगे। मुख्यमंत्री की यात्रा भारत पाकिस्तान के बीच संबंधों में एक अन्य महत्वपूर्ण कदम होगा।’’ उल्लेखनीय है कि बीते 25 अगस्त को पाकिस्तान से आए सांसदों के एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री को अपने अपने प्रांतों की ओर से पाकिस्तान आने का न्यौता दिया था। इससे पहले बशीर ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर नीतीश कुमार के साथ करीब एक घंटे बातचीत की और पाकिस्तान के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी और अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों के 12 सदस्यीय एक शिष्टमंडल के साथ पाकिस्तान का दौरा करेंगे। नीतीश कुमार का कराची, लाहौर और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जाने का कार्यक्रम है। वह वाघा सीमा के रास्ते भारत लौटेंगे। वर्ष 2003 में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पाकिस्तान की यात्रा की थी। वह उस समय अपने हास्यबोध के कारण पड़ोसी देश में काफी चर्चित हुए थे। बिहार और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढने के संबंध में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बिहार और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के बीच कई महत्वपूर्ण चीजें उभर कर आएंगी।’’ मुंबई पर 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के बारे में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘यह एक न्यायिक प्रक्रिया है।’’टिप्पणियां पाकिस्तान में हिंदुओं की बेटियों और पाकिस्तानी लडकों के बीच विवाह के बाद उन्हें छोड देने और पाकिस्तान से पीडितों के पलायन के संबंध में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘अब भी कई चिंताजनक चीजें हैं जिनसे निपटने की दरकार है।’’ बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की पाकिस्तान यात्रा से पाकिस्तान और भारत के बीच संबंधों और सहयोग को एक नया आयाम मिलेगा। यह यात्रा पाकिस्तान के नेतृत्व के लिए भी बहुत अहम है। बशीर ने कहा, ‘‘बिहार की सफलता की कहानी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान के लोगों में बहुत रुचि है। मुख्यमंत्री की यात्रा से न सिर्फ सांसदों के बीच संपर्क बढ़ेगा बल्कि नेतृत्व स्तर पर भी संबंध आगे बढ़ेंगे। इस यात्रा से पाकिस्तान और बिहार के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करने में मदद मिलेगी।’’ उपउच्चायुक्त बब्बर अमीन के साथ पटना आए बशीर ने कहा कि बिहार में उनकी यह पहली यात्रा है। वह बिहार से बहुत प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आशा है कि हम बिहार के विकास के मॉडल से बहुत कुछ सीखेंगे। मुख्यमंत्री की यात्रा भारत पाकिस्तान के बीच संबंधों में एक अन्य महत्वपूर्ण कदम होगा।’’ उल्लेखनीय है कि बीते 25 अगस्त को पाकिस्तान से आए सांसदों के एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री को अपने अपने प्रांतों की ओर से पाकिस्तान आने का न्यौता दिया था। इससे पहले बशीर ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर नीतीश कुमार के साथ करीब एक घंटे बातचीत की और पाकिस्तान के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी और अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों के 12 सदस्यीय एक शिष्टमंडल के साथ पाकिस्तान का दौरा करेंगे। नीतीश कुमार का कराची, लाहौर और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जाने का कार्यक्रम है। वह वाघा सीमा के रास्ते भारत लौटेंगे। वर्ष 2003 में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पाकिस्तान की यात्रा की थी। वह उस समय अपने हास्यबोध के कारण पड़ोसी देश में काफी चर्चित हुए थे। बिहार और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढने के संबंध में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बिहार और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के बीच कई महत्वपूर्ण चीजें उभर कर आएंगी।’’ मुंबई पर 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के बारे में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘यह एक न्यायिक प्रक्रिया है।’’टिप्पणियां पाकिस्तान में हिंदुओं की बेटियों और पाकिस्तानी लडकों के बीच विवाह के बाद उन्हें छोड देने और पाकिस्तान से पीडितों के पलायन के संबंध में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘अब भी कई चिंताजनक चीजें हैं जिनसे निपटने की दरकार है।’’ बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है। बशीर ने कहा, ‘‘बिहार की सफलता की कहानी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान के लोगों में बहुत रुचि है। मुख्यमंत्री की यात्रा से न सिर्फ सांसदों के बीच संपर्क बढ़ेगा बल्कि नेतृत्व स्तर पर भी संबंध आगे बढ़ेंगे। इस यात्रा से पाकिस्तान और बिहार के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करने में मदद मिलेगी।’’ उपउच्चायुक्त बब्बर अमीन के साथ पटना आए बशीर ने कहा कि बिहार में उनकी यह पहली यात्रा है। वह बिहार से बहुत प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आशा है कि हम बिहार के विकास के मॉडल से बहुत कुछ सीखेंगे। मुख्यमंत्री की यात्रा भारत पाकिस्तान के बीच संबंधों में एक अन्य महत्वपूर्ण कदम होगा।’’ उल्लेखनीय है कि बीते 25 अगस्त को पाकिस्तान से आए सांसदों के एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री को अपने अपने प्रांतों की ओर से पाकिस्तान आने का न्यौता दिया था। इससे पहले बशीर ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर नीतीश कुमार के साथ करीब एक घंटे बातचीत की और पाकिस्तान के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी और अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों के 12 सदस्यीय एक शिष्टमंडल के साथ पाकिस्तान का दौरा करेंगे। नीतीश कुमार का कराची, लाहौर और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जाने का कार्यक्रम है। वह वाघा सीमा के रास्ते भारत लौटेंगे। वर्ष 2003 में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पाकिस्तान की यात्रा की थी। वह उस समय अपने हास्यबोध के कारण पड़ोसी देश में काफी चर्चित हुए थे। बिहार और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढने के संबंध में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बिहार और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के बीच कई महत्वपूर्ण चीजें उभर कर आएंगी।’’ मुंबई पर 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के बारे में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘यह एक न्यायिक प्रक्रिया है।’’टिप्पणियां पाकिस्तान में हिंदुओं की बेटियों और पाकिस्तानी लडकों के बीच विवाह के बाद उन्हें छोड देने और पाकिस्तान से पीडितों के पलायन के संबंध में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘अब भी कई चिंताजनक चीजें हैं जिनसे निपटने की दरकार है।’’ बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है। उपउच्चायुक्त बब्बर अमीन के साथ पटना आए बशीर ने कहा कि बिहार में उनकी यह पहली यात्रा है। वह बिहार से बहुत प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आशा है कि हम बिहार के विकास के मॉडल से बहुत कुछ सीखेंगे। मुख्यमंत्री की यात्रा भारत पाकिस्तान के बीच संबंधों में एक अन्य महत्वपूर्ण कदम होगा।’’ उल्लेखनीय है कि बीते 25 अगस्त को पाकिस्तान से आए सांसदों के एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री को अपने अपने प्रांतों की ओर से पाकिस्तान आने का न्यौता दिया था। इससे पहले बशीर ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर नीतीश कुमार के साथ करीब एक घंटे बातचीत की और पाकिस्तान के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी और अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों के 12 सदस्यीय एक शिष्टमंडल के साथ पाकिस्तान का दौरा करेंगे। नीतीश कुमार का कराची, लाहौर और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जाने का कार्यक्रम है। वह वाघा सीमा के रास्ते भारत लौटेंगे। वर्ष 2003 में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पाकिस्तान की यात्रा की थी। वह उस समय अपने हास्यबोध के कारण पड़ोसी देश में काफी चर्चित हुए थे। बिहार और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढने के संबंध में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बिहार और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के बीच कई महत्वपूर्ण चीजें उभर कर आएंगी।’’ मुंबई पर 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के बारे में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘यह एक न्यायिक प्रक्रिया है।’’टिप्पणियां पाकिस्तान में हिंदुओं की बेटियों और पाकिस्तानी लडकों के बीच विवाह के बाद उन्हें छोड देने और पाकिस्तान से पीडितों के पलायन के संबंध में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘अब भी कई चिंताजनक चीजें हैं जिनसे निपटने की दरकार है।’’ बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है। उल्लेखनीय है कि बीते 25 अगस्त को पाकिस्तान से आए सांसदों के एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री को अपने अपने प्रांतों की ओर से पाकिस्तान आने का न्यौता दिया था। इससे पहले बशीर ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर नीतीश कुमार के साथ करीब एक घंटे बातचीत की और पाकिस्तान के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी और अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों के 12 सदस्यीय एक शिष्टमंडल के साथ पाकिस्तान का दौरा करेंगे। नीतीश कुमार का कराची, लाहौर और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जाने का कार्यक्रम है। वह वाघा सीमा के रास्ते भारत लौटेंगे। वर्ष 2003 में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पाकिस्तान की यात्रा की थी। वह उस समय अपने हास्यबोध के कारण पड़ोसी देश में काफी चर्चित हुए थे। बिहार और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढने के संबंध में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बिहार और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के बीच कई महत्वपूर्ण चीजें उभर कर आएंगी।’’ मुंबई पर 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के बारे में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘यह एक न्यायिक प्रक्रिया है।’’टिप्पणियां पाकिस्तान में हिंदुओं की बेटियों और पाकिस्तानी लडकों के बीच विवाह के बाद उन्हें छोड देने और पाकिस्तान से पीडितों के पलायन के संबंध में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘अब भी कई चिंताजनक चीजें हैं जिनसे निपटने की दरकार है।’’ बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है। मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों के 12 सदस्यीय एक शिष्टमंडल के साथ पाकिस्तान का दौरा करेंगे। नीतीश कुमार का कराची, लाहौर और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जाने का कार्यक्रम है। वह वाघा सीमा के रास्ते भारत लौटेंगे। वर्ष 2003 में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पाकिस्तान की यात्रा की थी। वह उस समय अपने हास्यबोध के कारण पड़ोसी देश में काफी चर्चित हुए थे। बिहार और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढने के संबंध में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बिहार और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के बीच कई महत्वपूर्ण चीजें उभर कर आएंगी।’’ मुंबई पर 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के बारे में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘यह एक न्यायिक प्रक्रिया है।’’टिप्पणियां पाकिस्तान में हिंदुओं की बेटियों और पाकिस्तानी लडकों के बीच विवाह के बाद उन्हें छोड देने और पाकिस्तान से पीडितों के पलायन के संबंध में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘अब भी कई चिंताजनक चीजें हैं जिनसे निपटने की दरकार है।’’ बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है। वर्ष 2003 में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पाकिस्तान की यात्रा की थी। वह उस समय अपने हास्यबोध के कारण पड़ोसी देश में काफी चर्चित हुए थे। बिहार और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढने के संबंध में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बिहार और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के बीच कई महत्वपूर्ण चीजें उभर कर आएंगी।’’ मुंबई पर 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के बारे में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘यह एक न्यायिक प्रक्रिया है।’’टिप्पणियां पाकिस्तान में हिंदुओं की बेटियों और पाकिस्तानी लडकों के बीच विवाह के बाद उन्हें छोड देने और पाकिस्तान से पीडितों के पलायन के संबंध में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘अब भी कई चिंताजनक चीजें हैं जिनसे निपटने की दरकार है।’’ बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है। बिहार और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढने के संबंध में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बिहार और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के बीच कई महत्वपूर्ण चीजें उभर कर आएंगी।’’ मुंबई पर 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के बारे में पूछे जाने पर बशीर ने कहा, ‘‘यह एक न्यायिक प्रक्रिया है।’’टिप्पणियां पाकिस्तान में हिंदुओं की बेटियों और पाकिस्तानी लडकों के बीच विवाह के बाद उन्हें छोड देने और पाकिस्तान से पीडितों के पलायन के संबंध में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘अब भी कई चिंताजनक चीजें हैं जिनसे निपटने की दरकार है।’’ बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है। पाकिस्तान में हिंदुओं की बेटियों और पाकिस्तानी लडकों के बीच विवाह के बाद उन्हें छोड देने और पाकिस्तान से पीडितों के पलायन के संबंध में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘अब भी कई चिंताजनक चीजें हैं जिनसे निपटने की दरकार है।’’ बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है। बाद में बशीर और उनके सहयोगी ने राज्यसभा सदस्य एनके सिंह के साथ पटना संग्रहालय, बुद्ध स्मृति संग्रहालय, खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी का दौरा किया। लाइब्रेरी 21 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और ढाई लाख पुस्तकों का संग्रह है।
संक्षिप्त पाठ: आगामी 9 से 16 नवंबर तक नीतीश कुमार की पाकिस्तान यात्रा के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए यहां आए उच्चायुक्त बशीर ने कहा, ‘बिहार पाकिस्तान के लिए विशेष राज्य है।'
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['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने मंगलवार को कहा कि देश को एक 'कमजोर' प्रधानमंत्री मिला है, जो हर दूसरे दिन अपना फैसला बदल लेता है. आप नेता आशुतोष ने यहां कहा कि बीते आठ नवंबर को की गई नोटबंदी के बाद से लेकर अब तक पुराने नोटों को जमा करने या बदलने के मामले में सरकार कुल 59 अधिसूचनाएं जारी कर चुकी हैं. आशुतोष ने कहा, "मुझे लगता है कि किसी और प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सरकार ने अपना फैसला इतनी जल्दी-जल्दी नहीं बदला है." उन्होंने कहा, "देश को एक मजबूत प्रधानमंत्री की जरूरत थी, लेकिन हमें एक ऐसा कमजोर प्रधानमंत्री मिला, जो हर दिन अपना फैसला बदल देता है." आप नेता ने कहा, "इससे यही साबित होता है कि या तो प्रधानमंत्री देशवासियों से झूठ बोलते हैं या उनकी बातों का कोई अर्थ नहीं होता है." भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को एक नई अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि लोग 500 रुपये तथा 1,000 रुपये के नोटों के रूप में 5,000 से अधिक की रकम केवल एक बार ही बैंक में जमा करा सकते हैं. अधिक बार रकम जमा करने पर उनसे पूछताछ होगी. बीते 12 नवंबर को सरकार के एक बयान का हवाला देते हुए आप नेता ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोगों से पुराने नोटों को जमा कराने को लेकर बैंकों में भीड़ लगाने के लिए नहीं कहा था. आप नेता ने कहा, "उन्होंने कहा था कि लोगों के पास अपने पैसे जमा कराने के लिए 30 दिसंबर तक का समय है. क्या वित्त मंत्री ने देशवासियों से झूठ बोला था?" आशुतोष ने कहा, "क्या यह उन लोगों से विश्वासघात है, जिन्होंने जेटली और मोदी पर विश्वास किया और अपने पैसे जमा कराने के लिए इंतजार किया?"टिप्पणियां आप नेता दिलीप पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि कब बिना किसी पाबंदी के लोग अपना पैसा बैंकों से निकालने में सक्षम होंगे, क्योंकि मोदी द्वारा दी गई 50 दिनों की समय सीमा अब खत्म होने वाली है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) आशुतोष ने कहा, "मुझे लगता है कि किसी और प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सरकार ने अपना फैसला इतनी जल्दी-जल्दी नहीं बदला है." उन्होंने कहा, "देश को एक मजबूत प्रधानमंत्री की जरूरत थी, लेकिन हमें एक ऐसा कमजोर प्रधानमंत्री मिला, जो हर दिन अपना फैसला बदल देता है." आप नेता ने कहा, "इससे यही साबित होता है कि या तो प्रधानमंत्री देशवासियों से झूठ बोलते हैं या उनकी बातों का कोई अर्थ नहीं होता है." भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को एक नई अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि लोग 500 रुपये तथा 1,000 रुपये के नोटों के रूप में 5,000 से अधिक की रकम केवल एक बार ही बैंक में जमा करा सकते हैं. अधिक बार रकम जमा करने पर उनसे पूछताछ होगी. बीते 12 नवंबर को सरकार के एक बयान का हवाला देते हुए आप नेता ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोगों से पुराने नोटों को जमा कराने को लेकर बैंकों में भीड़ लगाने के लिए नहीं कहा था. आप नेता ने कहा, "उन्होंने कहा था कि लोगों के पास अपने पैसे जमा कराने के लिए 30 दिसंबर तक का समय है. क्या वित्त मंत्री ने देशवासियों से झूठ बोला था?" आशुतोष ने कहा, "क्या यह उन लोगों से विश्वासघात है, जिन्होंने जेटली और मोदी पर विश्वास किया और अपने पैसे जमा कराने के लिए इंतजार किया?"टिप्पणियां आप नेता दिलीप पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि कब बिना किसी पाबंदी के लोग अपना पैसा बैंकों से निकालने में सक्षम होंगे, क्योंकि मोदी द्वारा दी गई 50 दिनों की समय सीमा अब खत्म होने वाली है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) आप नेता ने कहा, "इससे यही साबित होता है कि या तो प्रधानमंत्री देशवासियों से झूठ बोलते हैं या उनकी बातों का कोई अर्थ नहीं होता है." भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को एक नई अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि लोग 500 रुपये तथा 1,000 रुपये के नोटों के रूप में 5,000 से अधिक की रकम केवल एक बार ही बैंक में जमा करा सकते हैं. अधिक बार रकम जमा करने पर उनसे पूछताछ होगी. बीते 12 नवंबर को सरकार के एक बयान का हवाला देते हुए आप नेता ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोगों से पुराने नोटों को जमा कराने को लेकर बैंकों में भीड़ लगाने के लिए नहीं कहा था. आप नेता ने कहा, "उन्होंने कहा था कि लोगों के पास अपने पैसे जमा कराने के लिए 30 दिसंबर तक का समय है. क्या वित्त मंत्री ने देशवासियों से झूठ बोला था?" आशुतोष ने कहा, "क्या यह उन लोगों से विश्वासघात है, जिन्होंने जेटली और मोदी पर विश्वास किया और अपने पैसे जमा कराने के लिए इंतजार किया?"टिप्पणियां आप नेता दिलीप पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि कब बिना किसी पाबंदी के लोग अपना पैसा बैंकों से निकालने में सक्षम होंगे, क्योंकि मोदी द्वारा दी गई 50 दिनों की समय सीमा अब खत्म होने वाली है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को एक नई अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि लोग 500 रुपये तथा 1,000 रुपये के नोटों के रूप में 5,000 से अधिक की रकम केवल एक बार ही बैंक में जमा करा सकते हैं. अधिक बार रकम जमा करने पर उनसे पूछताछ होगी. बीते 12 नवंबर को सरकार के एक बयान का हवाला देते हुए आप नेता ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोगों से पुराने नोटों को जमा कराने को लेकर बैंकों में भीड़ लगाने के लिए नहीं कहा था. आप नेता ने कहा, "उन्होंने कहा था कि लोगों के पास अपने पैसे जमा कराने के लिए 30 दिसंबर तक का समय है. क्या वित्त मंत्री ने देशवासियों से झूठ बोला था?" आशुतोष ने कहा, "क्या यह उन लोगों से विश्वासघात है, जिन्होंने जेटली और मोदी पर विश्वास किया और अपने पैसे जमा कराने के लिए इंतजार किया?"टिप्पणियां आप नेता दिलीप पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि कब बिना किसी पाबंदी के लोग अपना पैसा बैंकों से निकालने में सक्षम होंगे, क्योंकि मोदी द्वारा दी गई 50 दिनों की समय सीमा अब खत्म होने वाली है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) बीते 12 नवंबर को सरकार के एक बयान का हवाला देते हुए आप नेता ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोगों से पुराने नोटों को जमा कराने को लेकर बैंकों में भीड़ लगाने के लिए नहीं कहा था. आप नेता ने कहा, "उन्होंने कहा था कि लोगों के पास अपने पैसे जमा कराने के लिए 30 दिसंबर तक का समय है. क्या वित्त मंत्री ने देशवासियों से झूठ बोला था?" आशुतोष ने कहा, "क्या यह उन लोगों से विश्वासघात है, जिन्होंने जेटली और मोदी पर विश्वास किया और अपने पैसे जमा कराने के लिए इंतजार किया?"टिप्पणियां आप नेता दिलीप पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि कब बिना किसी पाबंदी के लोग अपना पैसा बैंकों से निकालने में सक्षम होंगे, क्योंकि मोदी द्वारा दी गई 50 दिनों की समय सीमा अब खत्म होने वाली है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) आप नेता ने कहा, "उन्होंने कहा था कि लोगों के पास अपने पैसे जमा कराने के लिए 30 दिसंबर तक का समय है. क्या वित्त मंत्री ने देशवासियों से झूठ बोला था?" आशुतोष ने कहा, "क्या यह उन लोगों से विश्वासघात है, जिन्होंने जेटली और मोदी पर विश्वास किया और अपने पैसे जमा कराने के लिए इंतजार किया?"टिप्पणियां आप नेता दिलीप पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि कब बिना किसी पाबंदी के लोग अपना पैसा बैंकों से निकालने में सक्षम होंगे, क्योंकि मोदी द्वारा दी गई 50 दिनों की समय सीमा अब खत्म होने वाली है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) आशुतोष ने कहा, "क्या यह उन लोगों से विश्वासघात है, जिन्होंने जेटली और मोदी पर विश्वास किया और अपने पैसे जमा कराने के लिए इंतजार किया?"टिप्पणियां आप नेता दिलीप पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि कब बिना किसी पाबंदी के लोग अपना पैसा बैंकों से निकालने में सक्षम होंगे, क्योंकि मोदी द्वारा दी गई 50 दिनों की समय सीमा अब खत्म होने वाली है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) आप नेता दिलीप पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि कब बिना किसी पाबंदी के लोग अपना पैसा बैंकों से निकालने में सक्षम होंगे, क्योंकि मोदी द्वारा दी गई 50 दिनों की समय सीमा अब खत्म होने वाली है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
सारांश: पीएम के रूप में मोदी हर दूसरे दिन अपना फैसला बदल लेते हैं : आशुतोष आशुतोष ने कहा, देश को एक मजबूत प्रधानमंत्री की जरूरत थी. क्या वित्त मंत्री ने देशवासियों से झूठ बोला था? : आप नेता
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश के विधायक दलबीर सिंह ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. दरअसल, उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी में कार्यरत स्टॉफ ने जानबूझकर उनकी कार के आगे लगे BJP के झंडे को हटवा दिया था. इसे लेकर दलबीर सिंह ने डीएम और एसपी को भी शिकायत दी है. पुलिस फिलहाल इस पूरे मामले की जांच कर रही है. दलबीर सिंह के ड्राइवर ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि वह जैसे ही अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में प्रवेश करने वाले थे उससे ठीक पहले उसे रोक दिया गया और पहले उसकी कार के आगे लगे झंडे को जबरदस्ती उतरवाया गया. बता दें दलबीर सिंह ने यूनिवर्सिटी से एक छात्र को लेने गई थी.  इस पूरे मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि यूनिवर्सिटी में उन वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाता है जिसपर किसी पार्टी का झंड लगा हो. ऐसे वाहनों को तभी अंदर जाने दिया जाता है जबतक गाड़ी के अंदर कोई गणमान्य व्यक्ति न बैठा हो. किसी भी छात्र या अन्य व्यक्तिविशेष के लिए ऐसी गाड़ियों का प्रवेश यहां वर्जित है, ऐसा इसलिए भी क्योंकि यह एक शैक्षिणिक संस्था है.  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पहले भी विवादों में रहा है. इससे पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मोहम्मद अली जिन्ना की फोटो को लेकर विवाद हुआ था. रात भर छात्र यूनिवर्सिटी कैंपस में धरने पर बैठे रहे और शुक्रवार को भी क्लास को सस्पेंड कर दिया था. इस पूरे मामले को समझाते हुए एएमयू के कुलपति तारिक मंसूर ने एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा था कि ''जिन्ना की तस्वीर का मामला काफी पुराना है. यह फोटो 1938 से लगी हुई है. ये कोई नई चीज नहीं है और इतने साल हो गये, किसी ने इस पर ऑब्जेक्ट नहीं किया. मगर अब एक नई चीज क्यों स्टार्ट हो रही है. यह तो एक अर्काइव है, बहुत से पोर्ट्रेट लगी हुई हैं, वो भी वहां लगी हुई है. यह कोई बहुत बड़ा इश्यू नहीं है.'' अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में तस्वीर विवाद: यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य बोले- जिन्ना देश के दुश्मन थे कुलपति तारिक मंसूर ने कहा था कि 'हिंदू वाहिनी के लोग आ गये और ये ऑब्जेक्शनेबल नारे लगाए और प्रोवोक किया. यूनिवर्सिटी के गेट तक आ गये. हम इसकी निंदा करते हैं. हमने डीएम से कहा था है कि जिन लोगों ने यूनिवर्सिटी के अंदर घुसने की कोशिश की और जिन्होंने शांति भंग करने की कोशिश की, उन पर कानून के हिसाब से कार्रवाई होनी चाहिए.'' साथ ही उन्होंने कहा था कि ''जहां तक छात्रों के चोट की बात है, तो मेरी उनके साथ सहानुभूति है. मैं उन्हें देखने भी गया था. मैं स्टूडेंट्स से, हर आदमी से अपील करता हूं कि वो प्रोवोक न हों और शांति और सौहार्द्र बनाए रखें. जो भी उनके और यूनिवर्सिटी के सेंटिमेंट्स है, वो हम स्टेट और केंद्र सरकार को कन्वे कर रहे हैं.''तस्वीर हटाने के सवाल पर उन्होंने कहा था कि यह तस्वीर हमने नहीं लगाई है. यह तस्वीर तो 1938 से लगी है. आज तक किसी ने ऑब्जेक्ट नहीं किया.  जब सवाल किया गया कि क्या आपको नहीं लगता कि विवाद के बाद अब इसे हटा देना चाहिए, तो इस पर उन्होंने कहा था कि ''स्टूडेंट्स यूनियन, टीचर एसोसिएशन और कई की अपनी एक मैनेजमेंट कमेटी है, जो इस बात को देखती है कि किसकी फोटो लगी है और किसकी लगेगी और नहीं, ये उनका मसला है. यूनिवर्सिटी प्रशासन का इससे प्रत्यक्ष तौर पर कोई ताल्लुक नहीं है. अगर वीसी ऑफिस, एडमिनिस्ट्रेटिव, प्रिंसिपल या फिर रजिस्ट्रार ऑफिस में लगी हो तो वहां से वाइस चांसलर हटा सकता है, मगर यूनिवर्सिटी के अंदर ऐसे संगठन हैं, जो सेमी ऑटोनोमस बॉडी हैं, जिनकी अपनी मैनेजमेंट कमेटी है, इसका फैसला उन्हें करना है.'' कहीं न कहीं यूनिवर्सिटी से बदनाम करने की साजिश है? इस सवाल पर वीसी तारिक मंसूर ने कहा था कि ''जो चीज 1938 से लगी है, जिस पर किसी ने ऑब्जेक्ट नहीं किया, यहां तक की अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कभी ऑब्जेक्ट नहीं किया, उस पर विवाद अब क्यों? अगर हमने लगाई होती तो हमारी जिम्मेवारी होती. मगर यह तो 1938 से लगी है. हमारे टाइम में लगी होती तो हमारी जिम्मवारी होती.'' जब पूछा गया कि थाने से एएमयू कैंपस में घुसने पर क्या आप पुलिस की निष्क्रियता मानते हैं तो इस पर उन्होंने कहा कि वो लोग (हिंदू वाहिनी के लोग) आए, पहले प्रॉक्टर ऑफिस वालों ने पकड़ा. उसके बाद थाने में भेजा गया. स्थानीय पुलिस को सावधानी बरतनी चाहिए. ताकि ये लोग दोबारा नहीं आएं. आगे से ऐसी परिस्थिति न पैदा हो. हालांकि, उन्होंने किसी तरह की साजिश से इनकार किया. पुलिस इस बात की जांच करे कि यह साजिश थी या नहीं. पुलिस की रिपोर्ट से ही यह बात सामने आएगी. बता दें कि रात भर छात्र युनिवर्सिटी कैंपस में धरने पर बैठे रहे. धरना अब भी जारी है और आज भी क्लासेस नहीं चलेंगी. बताया जा रहा था कि कुछ इंटरनल परीक्षाएं भी रद्द की गई हैं. धरने पर बैठे छात्र हिंदू संगठन के लोगों की गिरफ़्तारी की मांग कर रहे हैं, जिनके ख़िलाफ़ मुकद्दमा दर्ज हुआ है. साथ ही आज भी शहर मे धारा 144 लागू रहेगी.
यह एक सारांश है: विधायक ने एएमयू में भेजी थी अपनी कार किसी छात्र को लेने गया था विधायक का ड्राइवर पुलिस ने दर्ज किया मामला
2
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कैदियों ने गुरुवार को बलात्कार के एक आरोपी की कथित रूप से पीट-पीट कर हत्या कर दी। दुर्ग क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक दीपांशु काबरा ने बताया कि दुर्ग जिला मुख्यालय स्थित केंद्रीय जेल में कैदियों ने बलात्कार के एक आरोपी अजय देवांगन की कथित रूप से पीट-पीट कर हत्या कर दी। काबरा ने बताया कि मां के साथ बलात्कार के आरोपी अजय को बुधवार को गिरफ्तार किया गया था और उसे जेल भेज दिया गया था। आज सुबह जेल के बैरक में अजय का शव बरामद किया गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस को शुरुआती जांच में जानकारी मिली है कि युवक की कुछ कैदियों ने पिटाई कर दी थी। इस मामले में दो कैदियों का नाम सामने आ रहा है। मामले की जांच जारी है।टिप्पणियां पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि युवक की मौत के बारे में सही जानकारी पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगी। मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद घटना के लिए दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) काबरा ने बताया कि मां के साथ बलात्कार के आरोपी अजय को बुधवार को गिरफ्तार किया गया था और उसे जेल भेज दिया गया था। आज सुबह जेल के बैरक में अजय का शव बरामद किया गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस को शुरुआती जांच में जानकारी मिली है कि युवक की कुछ कैदियों ने पिटाई कर दी थी। इस मामले में दो कैदियों का नाम सामने आ रहा है। मामले की जांच जारी है।टिप्पणियां पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि युवक की मौत के बारे में सही जानकारी पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगी। मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद घटना के लिए दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस को शुरुआती जांच में जानकारी मिली है कि युवक की कुछ कैदियों ने पिटाई कर दी थी। इस मामले में दो कैदियों का नाम सामने आ रहा है। मामले की जांच जारी है।टिप्पणियां पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि युवक की मौत के बारे में सही जानकारी पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगी। मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद घटना के लिए दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि युवक की मौत के बारे में सही जानकारी पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगी। मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद घटना के लिए दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
सारांश: मृतक मां के साथ बलात्‍कार का आरोपी था एक दिन पहले ही जेल भेजा गया था पिटाई में दो कैदियों का नाम सामने आ रहा
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['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अभिनेता-गायक आयुष्मान खुराना ने इंटरनेट पर आ रही अपने मौत की अफवाहों को ‘अजीब’ बताया है। ‘विकी डोनर’ फेम आयुष्मान खुराना इंटरनेट पर इस तरह की अफवाहों के शिकार बनने वाली नई सेलिब्रिटी हैं।टिप्पणियां कुछ वेबसाइटों ने दावा किया था कि स्विटजरलैंड के जेरमट में कल एक दुर्घटना में आयुष्मान की मौत हो गई। खुराना ने ट्विटर पर पोस्ट डालकर इन अफवाहों की हवा निकाल दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, मुझे अपनी मौत को लेकर कुछ अजीब अफवाहें सुनने को मिल रही हैं। अफवाह फैलाने वालों की आत्मा को शांति मिले। धन्यवाद। कुछ वेबसाइटों ने दावा किया था कि स्विटजरलैंड के जेरमट में कल एक दुर्घटना में आयुष्मान की मौत हो गई। खुराना ने ट्विटर पर पोस्ट डालकर इन अफवाहों की हवा निकाल दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, मुझे अपनी मौत को लेकर कुछ अजीब अफवाहें सुनने को मिल रही हैं। अफवाह फैलाने वालों की आत्मा को शांति मिले। धन्यवाद। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, मुझे अपनी मौत को लेकर कुछ अजीब अफवाहें सुनने को मिल रही हैं। अफवाह फैलाने वालों की आत्मा को शांति मिले। धन्यवाद।
सारांश: आयुष्मान खुराना इंटरनेट पर इस तरह की अफवाहों के शिकार बनने वाली नई सेलिब्रिटी हैं। कुछ वेबसाइटों ने दावा किया था कि स्विटजरलैंड के जेरमट में एक दुर्घटना में आयुष्मान की मौत हो गई।
20
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: ब्राजील की मेजबानी में चल रहे ओलिंपिक खेलों के चौथे दिन बुधवार को जूडो में पुरुषों के 90 किलोग्राम भार वर्ग के इलिमिनेशन राउंड ऑफ 32 में एकमात्र भारतीय दावेदार अवतार सिंह को हार का सामना करना पड़ा. अवतार रिफ्यूजी ओलिंपिक टीम की ओर से खेल रहे पोपोल मिसेंगा के हाथों 1-0 से हारे. अवतार सिंह पर मुकाबले की शुरुआत में ही नियमों के उल्लंघन के लिए दो बार एक-एक अंक की पेनल्टी शीडो लगाई गई. अवतार पर यह पेनाल्टी मुकाबले के एक मिनट 39वें सेकेंड और तीन मिनट 21वें सेकेंड में लगाई गई.टिप्पणियां मुकाबले के आखिरी मिनट में पोपोल ने अवतार को पटखनी देकर सीओई नागे से एक अंक भी हासिल कर लिया और मुकाबला अपने नाम करते हुए अगले दौर में प्रवेश किया. अवतार सिंह की हार के साथ ही जूडो में भारतीय दावेदारी भी समाप्त हो गई. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) अवतार सिंह पर मुकाबले की शुरुआत में ही नियमों के उल्लंघन के लिए दो बार एक-एक अंक की पेनल्टी शीडो लगाई गई. अवतार पर यह पेनाल्टी मुकाबले के एक मिनट 39वें सेकेंड और तीन मिनट 21वें सेकेंड में लगाई गई.टिप्पणियां मुकाबले के आखिरी मिनट में पोपोल ने अवतार को पटखनी देकर सीओई नागे से एक अंक भी हासिल कर लिया और मुकाबला अपने नाम करते हुए अगले दौर में प्रवेश किया. अवतार सिंह की हार के साथ ही जूडो में भारतीय दावेदारी भी समाप्त हो गई. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) मुकाबले के आखिरी मिनट में पोपोल ने अवतार को पटखनी देकर सीओई नागे से एक अंक भी हासिल कर लिया और मुकाबला अपने नाम करते हुए अगले दौर में प्रवेश किया. अवतार सिंह की हार के साथ ही जूडो में भारतीय दावेदारी भी समाप्त हो गई. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
संक्षिप्त सारांश: रिफ्यूजी ओलिंपिक टीम के पोपोल मिसेंगो से हारे 90 किलो भार वर्ग में भाग ले रहे थे अवतार सिंह अवतार पर नियमों के उल्‍लंघन के लिए दो बार पेनल्‍टी लगी
29
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: भारत पर अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से घोटालों के प्रकाश में आने से कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार की छवि धूमिल हुई है और 2014 के चुनावों के लिए विपक्षी पार्टी बीजेपी बेहतर स्थिति में आ गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि अन्ना हजारे को जेल भेजकर सरकार ने अपना अनाड़ीपन और अलोकतांत्रिक तौर-तरीका दिखाया है। भारत : घरेलू मुद्दे, सामरिक नीति और अमेरिकी संबंध नामक इस रिपोर्ट में कांग्रेस शोध सेवा (सीआरएस) ने कहा, हजारे को जेल भेजकर सरकार अनाड़ी और अलोकतांत्रिक दोनों दिखी और इसने हजारे के आंदोलन के लिए उन लोगों को खड़ा कर दिया, जो अन्यथा विमुख थे। सीआरएस अमेरिकी कांग्रेस की स्वतंत्र शाखा है, जिसमें दोनों दलों के सदस्य होते हैं। यह समिति अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों की दिलचस्पी के मुद्दों पर नियमित रिपोर्ट तैयार करती है। रिपोर्ट में भारत में हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का ब्यौरा दिया गया है। 94 पन्नों वाली इस रिपोर्ट को सीआरएस ने 1 सितंबर को अमेरिकी कानून निर्माताओं को सौंपा, जिसे अमेरिकी वैज्ञानिक फेडेरेशन ने मंगलवार को सार्वजनिक किया।
भारत पर अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 के चुनावों के लिए विपक्षी पार्टी बीजेपी बेहतर स्थिति में आ गई है।
6
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 449.22 अंकों की गिरावट के साथ 18,733.04 पर तथा निफ्टी 143.15 अंकों की गिरावट के साथ 5,542.25 पर बंद हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 55.16 अंकों की गिरावट के साथ 19,127.10 पर खुला और 449.22 अंकों या 2.34 फीसदी की गिरावट के साथ 18,733.04 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 19,131.92 के ऊपरी और 18,667.30 के निचले स्तर को छुआ। सेंसेक्स के 30 में से सिर्फ तीन शेयरों -टाटा मोटर्स (0.97 फीसदी), विप्रो (0.37 फीसदी) और टीसीएस (0.21 फीसदी) में तेजी दर्ज की गई। गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे टाटा पॉवर (14.76 फीसदी), भेल (6.58 फीसदी), एचडीएफसी (5.90 फीसदी), स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (5.18 फीसदी) और टाटा स्टील (4.47 फीसदी)।   नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 20.50 अंकों की गिरावट के साथ 5,664.90 पर खुला और 143.15 अंकों यानी 2.52 फीसदी की गिरावट के साथ 5,542.25 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 5,664.90 के ऊपरी और 5,521.80 के निचले स्तर को छुआ।   बीएसई के मिडकैप और स्मालकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप 141.78 अंकों की गिरावट के साथ 5,301.78 पर और स्मॉलकैप 92.37 अंकों की गिरावट के साथ 5,101.24 पर बंद हुआ।टिप्पणियां बीएसई के सभी 13 सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (5.55 फीसदी), रियल्टी (4.45 फीसदी), बैंकिंग (3.90 फीसदी), धातु (3.24 फीसदी) और बिजली (3.21 फीसदी) में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 655 शेयरों में तेजी और 1599 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 124 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 55.16 अंकों की गिरावट के साथ 19,127.10 पर खुला और 449.22 अंकों या 2.34 फीसदी की गिरावट के साथ 18,733.04 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 19,131.92 के ऊपरी और 18,667.30 के निचले स्तर को छुआ। सेंसेक्स के 30 में से सिर्फ तीन शेयरों -टाटा मोटर्स (0.97 फीसदी), विप्रो (0.37 फीसदी) और टीसीएस (0.21 फीसदी) में तेजी दर्ज की गई। गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे टाटा पॉवर (14.76 फीसदी), भेल (6.58 फीसदी), एचडीएफसी (5.90 फीसदी), स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (5.18 फीसदी) और टाटा स्टील (4.47 फीसदी)।   नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 20.50 अंकों की गिरावट के साथ 5,664.90 पर खुला और 143.15 अंकों यानी 2.52 फीसदी की गिरावट के साथ 5,542.25 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 5,664.90 के ऊपरी और 5,521.80 के निचले स्तर को छुआ।   बीएसई के मिडकैप और स्मालकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप 141.78 अंकों की गिरावट के साथ 5,301.78 पर और स्मॉलकैप 92.37 अंकों की गिरावट के साथ 5,101.24 पर बंद हुआ।टिप्पणियां बीएसई के सभी 13 सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (5.55 फीसदी), रियल्टी (4.45 फीसदी), बैंकिंग (3.90 फीसदी), धातु (3.24 फीसदी) और बिजली (3.21 फीसदी) में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 655 शेयरों में तेजी और 1599 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 124 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। सेंसेक्स के 30 में से सिर्फ तीन शेयरों -टाटा मोटर्स (0.97 फीसदी), विप्रो (0.37 फीसदी) और टीसीएस (0.21 फीसदी) में तेजी दर्ज की गई। गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे टाटा पॉवर (14.76 फीसदी), भेल (6.58 फीसदी), एचडीएफसी (5.90 फीसदी), स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (5.18 फीसदी) और टाटा स्टील (4.47 फीसदी)।   नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 20.50 अंकों की गिरावट के साथ 5,664.90 पर खुला और 143.15 अंकों यानी 2.52 फीसदी की गिरावट के साथ 5,542.25 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 5,664.90 के ऊपरी और 5,521.80 के निचले स्तर को छुआ।   बीएसई के मिडकैप और स्मालकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप 141.78 अंकों की गिरावट के साथ 5,301.78 पर और स्मॉलकैप 92.37 अंकों की गिरावट के साथ 5,101.24 पर बंद हुआ।टिप्पणियां बीएसई के सभी 13 सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (5.55 फीसदी), रियल्टी (4.45 फीसदी), बैंकिंग (3.90 फीसदी), धातु (3.24 फीसदी) और बिजली (3.21 फीसदी) में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 655 शेयरों में तेजी और 1599 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 124 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे टाटा पॉवर (14.76 फीसदी), भेल (6.58 फीसदी), एचडीएफसी (5.90 फीसदी), स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (5.18 फीसदी) और टाटा स्टील (4.47 फीसदी)।   नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 20.50 अंकों की गिरावट के साथ 5,664.90 पर खुला और 143.15 अंकों यानी 2.52 फीसदी की गिरावट के साथ 5,542.25 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 5,664.90 के ऊपरी और 5,521.80 के निचले स्तर को छुआ।   बीएसई के मिडकैप और स्मालकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप 141.78 अंकों की गिरावट के साथ 5,301.78 पर और स्मॉलकैप 92.37 अंकों की गिरावट के साथ 5,101.24 पर बंद हुआ।टिप्पणियां बीएसई के सभी 13 सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (5.55 फीसदी), रियल्टी (4.45 फीसदी), बैंकिंग (3.90 फीसदी), धातु (3.24 फीसदी) और बिजली (3.21 फीसदी) में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 655 शेयरों में तेजी और 1599 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 124 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। बीएसई के सभी 13 सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (5.55 फीसदी), रियल्टी (4.45 फीसदी), बैंकिंग (3.90 फीसदी), धातु (3.24 फीसदी) और बिजली (3.21 फीसदी) में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 655 शेयरों में तेजी और 1599 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 124 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 655 शेयरों में तेजी और 1599 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 124 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
यहाँ एक सारांश है:देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 449.22 अंकों की गिरावट के साथ 18,733.04 पर तथा निफ्टी 143.15 अंकों की गिरावट के साथ 5,542.25 पर बंद हुआ।
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: बॉलीवुड गायक मीका सिंह को कथित तौर पर सीमा से ज्यादा भारतीय और विदेशी मुद्रा रखने के मामले में मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोका गया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।टिप्पणियां मीका शाम करीब साढ़े सात बजे बैंकॉक से एक निजी कंपनी के विमान से उतरे जिसके बाद सीमाशुल्क विभाग के अधिकारियों ने उन्हें रोका। सीमाशुल्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान मिका के पास से 12,000 डॉलर और तीन लाख रुपये नकद मिले। उन्होंने बताया कि मिका पूछताछ के दौरान कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। उनका बयान दर्ज किया जा रहा है। मीका शाम करीब साढ़े सात बजे बैंकॉक से एक निजी कंपनी के विमान से उतरे जिसके बाद सीमाशुल्क विभाग के अधिकारियों ने उन्हें रोका। सीमाशुल्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान मिका के पास से 12,000 डॉलर और तीन लाख रुपये नकद मिले। उन्होंने बताया कि मिका पूछताछ के दौरान कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। उनका बयान दर्ज किया जा रहा है। सीमाशुल्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान मिका के पास से 12,000 डॉलर और तीन लाख रुपये नकद मिले। उन्होंने बताया कि मिका पूछताछ के दौरान कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। उनका बयान दर्ज किया जा रहा है।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: बॉलीवुड गायक मीका सिंह को कथित तौर पर सीमा से ज्यादा भारतीय और विदेशी मुद्रा रखने के मामले में मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोका गया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।
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['hin']
एक सारांश बनाओ: रेलवे ने निर्देश जारी किया है कि इस साल दो अक्टूबर से उसके परिसरों में एक बार प्रयोग में लाई जाने वाली प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं होगा. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने कहा है कि स्टेशनों पर बोतलों को नष्ट करने वाली 400 मशीनें लगाई जाएंगी. इसका इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को मशीन में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा और इसके बाद उनका मोबाइल फोन रिचार्ज हो जाएगा. हालांकि, रिचार्ज के विवरण फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान में 128 स्टेशनों पर बोतल नष्ट करने वाली 160 मशीनें लगाई गई हैं. उन्होंने कहा कि रेलवे कर्मचारियों को स्टेशनों पर इस्तेमाल हो चुकी प्लास्टिक बोतलों को जमा करने और उन्हें पुनर्चक्रण के लिए भेजने का निर्देश दिया है. इससे पहले, मंत्रालय ने सभी विक्रेताओं और कर्मचारियों को प्लास्टिक का इस्तेमाल घटाने के लिए फिर इस्तेमाल होने वाले बैग के प्रयोग का निर्देश दिया था.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: दो अक्टूबर से रेलवे परिसरों में सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं होगा स्टेशनों पर बोतलों को नष्ट करने वाली 400 मशीनें लगाई जाएंगी फिलहाल 128 स्टेशनों पर बोतल नष्ट करने वाली 160 मशीनें लगाई गईं
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: चुनाव के लिए खड़ा होना आसान काम नहीं है, खासतौर पर तब जब आपके सामने उत्तरप्रदेश जैसे विशाल राज्य की नामी और बाहूबली हस्तियां खड़ी हुई हैं जिनके पास पैसा, ताकत और पार्टी काडर सब कुछ है. इसके बावजूद 25 साल की वंदना शर्मा पीछे नहीं हटी और जनवरी की एक सर्द भरी सुबह घर से 10 हज़ार रुपये लेकर निकल पड़ी नामांकन भरने. वंदना ने फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार का नामांकन भरा है. चुनावी हलफनामे में उन्होंने 32 हज़ार रुपये की संपत्ति की घोषणा की है जिसमें से एक तिहाई यानि करीब 10 हज़ार रुपये उन्होंने सेक्योरिटी डिपोज़िट के लिए जमा किये हैं. वंदना बताती हैं कि चुनाव में खड़े होने के लिए उन्हें अपने परिवार से भी समर्थन हासिल करने में खासा संघर्ष करना पड़ा. वंदना इस वक्त आगरा कॉलेज से आर्ट्स में स्नातक कर रही हैं और उन्होंने NDTV से बातचीत में कहा 'मेरे माता-पिता मेरी शादी करवा देना चाहते हैं लेकिन मैं अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं.' वंदना की लड़ाई सिर्फ अपने घर तक की नहीं है, उनके उठाए गए मुद्दे सीकरी से 40 किलोमीटर दूर उनके गांव से जुड़े हुए हैं. एक किसान की बेटी वंदना बताती हैं 'गांव में कोई सुविधा ही नहीं है. पास में कोई कॉलेज नहीं है. लड़की को बाहर निकलना है तो साथ में कोई लड़का होना चाहिए. छह बजे के बाद तो हम घर से बाहर ही नहीं निकल सकते. 21वीं सदी के भारत में यह सब बदलना होगा.' टिप्पणियां अपने स्कूटर पर हेलमेट लगाकर गांव गांव घूमकर चुनावी अभियान चला रही वंदना औरतों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर बात करती दिखती हैं. वंदना से मिलने के बाद गांव की सरला देवी कहती हैं 'मैं इन्हें ही वोट दूंगी, हमने तो पूरी जिंदगी घर के भीतर बिता दी है, अब हमारी बेटियां बाहर निकलेगीं.' फतेहपुर सीकरी में 11 फरवरी को पहले चरण में ही मतदान हो जाएगा. हालांकि वंदना इस चुनावी संघर्ष में अकेली ही हैं, सिर्फ उनके छोटे भाई सुशील शर्मा ही उनके साथ खड़े दिखाई देते हैं. सुशील कहते हैं 'शुरू में तो किसी ने उसका साथ नहीं दिया, किसी ने उससे बात नहीं की, वह अकेले ही नामांकन दाखिल करके आ गई. लेकिन अब जब मैं उसे मेहनत करते हुए देखता हूं तो मैंने सोचा कि मैं भी उसका साथ दूंगा.' गुरुवार को चुनावी अभियान खत्म हो गया है और वंदना मानती हैं कि यूपी के 403 विधानसभा सीटों में उसको जगह मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. लेकिन वह खुश हैं कि उन्होंने यह कदम उठाया और वो काम किया जो वो करना चाहती थीं. वंदना बताती हैं कि चुनाव में खड़े होने के लिए उन्हें अपने परिवार से भी समर्थन हासिल करने में खासा संघर्ष करना पड़ा. वंदना इस वक्त आगरा कॉलेज से आर्ट्स में स्नातक कर रही हैं और उन्होंने NDTV से बातचीत में कहा 'मेरे माता-पिता मेरी शादी करवा देना चाहते हैं लेकिन मैं अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं.' वंदना की लड़ाई सिर्फ अपने घर तक की नहीं है, उनके उठाए गए मुद्दे सीकरी से 40 किलोमीटर दूर उनके गांव से जुड़े हुए हैं. एक किसान की बेटी वंदना बताती हैं 'गांव में कोई सुविधा ही नहीं है. पास में कोई कॉलेज नहीं है. लड़की को बाहर निकलना है तो साथ में कोई लड़का होना चाहिए. छह बजे के बाद तो हम घर से बाहर ही नहीं निकल सकते. 21वीं सदी के भारत में यह सब बदलना होगा.' टिप्पणियां अपने स्कूटर पर हेलमेट लगाकर गांव गांव घूमकर चुनावी अभियान चला रही वंदना औरतों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर बात करती दिखती हैं. वंदना से मिलने के बाद गांव की सरला देवी कहती हैं 'मैं इन्हें ही वोट दूंगी, हमने तो पूरी जिंदगी घर के भीतर बिता दी है, अब हमारी बेटियां बाहर निकलेगीं.' फतेहपुर सीकरी में 11 फरवरी को पहले चरण में ही मतदान हो जाएगा. हालांकि वंदना इस चुनावी संघर्ष में अकेली ही हैं, सिर्फ उनके छोटे भाई सुशील शर्मा ही उनके साथ खड़े दिखाई देते हैं. सुशील कहते हैं 'शुरू में तो किसी ने उसका साथ नहीं दिया, किसी ने उससे बात नहीं की, वह अकेले ही नामांकन दाखिल करके आ गई. लेकिन अब जब मैं उसे मेहनत करते हुए देखता हूं तो मैंने सोचा कि मैं भी उसका साथ दूंगा.' गुरुवार को चुनावी अभियान खत्म हो गया है और वंदना मानती हैं कि यूपी के 403 विधानसभा सीटों में उसको जगह मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. लेकिन वह खुश हैं कि उन्होंने यह कदम उठाया और वो काम किया जो वो करना चाहती थीं. अपने स्कूटर पर हेलमेट लगाकर गांव गांव घूमकर चुनावी अभियान चला रही वंदना औरतों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर बात करती दिखती हैं. वंदना से मिलने के बाद गांव की सरला देवी कहती हैं 'मैं इन्हें ही वोट दूंगी, हमने तो पूरी जिंदगी घर के भीतर बिता दी है, अब हमारी बेटियां बाहर निकलेगीं.' फतेहपुर सीकरी में 11 फरवरी को पहले चरण में ही मतदान हो जाएगा. हालांकि वंदना इस चुनावी संघर्ष में अकेली ही हैं, सिर्फ उनके छोटे भाई सुशील शर्मा ही उनके साथ खड़े दिखाई देते हैं. सुशील कहते हैं 'शुरू में तो किसी ने उसका साथ नहीं दिया, किसी ने उससे बात नहीं की, वह अकेले ही नामांकन दाखिल करके आ गई. लेकिन अब जब मैं उसे मेहनत करते हुए देखता हूं तो मैंने सोचा कि मैं भी उसका साथ दूंगा.' गुरुवार को चुनावी अभियान खत्म हो गया है और वंदना मानती हैं कि यूपी के 403 विधानसभा सीटों में उसको जगह मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. लेकिन वह खुश हैं कि उन्होंने यह कदम उठाया और वो काम किया जो वो करना चाहती थीं. गुरुवार को चुनावी अभियान खत्म हो गया है और वंदना मानती हैं कि यूपी के 403 विधानसभा सीटों में उसको जगह मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. लेकिन वह खुश हैं कि उन्होंने यह कदम उठाया और वो काम किया जो वो करना चाहती थीं.
संक्षिप्त सारांश: वंदना शर्मा फतेहपुर सीकरी से निर्दलीय खड़ी हुई हैं उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए हैं वंदना को सिर्फ अपने भाई का साथ हासिल है
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['hin']
एक सारांश बनाओ: बॉलीवुड एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह (Rakul Preet Singh) की अजय देवगन के साथ 'दे दे प्यार दे (De De Pyaar De)' 17 मई को रिलीज होने जा रही है. रकुल प्रीत (Rakul Preet) और अजय देवगन (Ajay Devgn) की फिल्म के सॉन्ग और ट्रेलर सभी सोशल मीडिया पर धूम मचाए हुए है. लेकिन रकुल प्रीत का एक वीडियो यूट्यूब (YouTube) पर धूम मचाए हुए है. इस वीडियो में रकुल प्रीत (Rakul Preet) कोरियोग्राफर मेल्विन लुईस (Melvin Louis) के साथ अपनी ही फिल्म के सॉन्ग 'हौली हौली (Hauli Hauli)' डांस कर रही हैं. दोनों ही बहुत गजब का डांस कर रहे हैं. वैसे भी मेल्विन लुईस की स्टार्स के साथ जुगलबंदी को खूब पसंद किया जाता है. मेल्विन और राकुल का ये वीडियो भी कुछ ऐसा ही है. कोरियोग्राफर मेल्विन लुईस (Melvin Louis) का इससे पहले नेहा कक्कड़ के साथ डांस वीडियो भी खूब वायरल हुआ था. रकुल प्रीत सिंह इस सॉन्ग में 'हौली हौली' सॉन्ग पर थिरक रही हैं. 'दे दे प्यार दे (De De Pyaar De)' को आकिव अली ने डायरेक्ट किया है और फिल्म के ट्रेलर से ही जाहिर हो गया था कि यह बहुत ही मजेदार कॉमेडी फिल्म है.   'दे दे प्यार दे (De De Pyaar De)'में अजय देवगन (Ajay Devgan) एक शादी-शुदा शख्स का किरदार निभा रहे हैं. जिसे अपने से आधी उम्र की लड़की से प्यार हो जाता है. फिल्म में तब्बू (Tabbu), अजय देवगन (Ajay Devgan) की पहली पत्नी का रोल कर रही हैं तो रकुल प्रीत  (Rakul Preet Singh) उस लड़की का जिससे अजय देवगन  को प्यार होता है. फिल्म का ट्रेलर भी हाल ही में रिलीज हुआ था जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया था.
रकुल प्रीत का डांस वीडियो हुआ वायरल 'दे दे प्यार दे' के सॉन्ग पर किया डांस मेल्विन लुईस के साथ है वीडियो
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['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन पर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को नोएडा में कथित तौर पर अवैध रेत खनन की जांच के लिए समिति गठित कर दी। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पर्यावरण मंत्रालय के निदेशक सरोज के निर्देशन में गठित यह तीन सदस्यीय जांच समिति शुक्रवार तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। मंत्रालय ने कहा कि समिति रेत खनन की वास्तविक स्थिति का पता लगाएगी तथा जरूरी कार्रवाई के लिए सुझाव देगी।टिप्पणियां वर्ष 2009 बैच की आईएएस अधिकारी नागपाल को कथित तौर पर रेत खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने पर उप्र सरकार ने 29 जुलाई को निलंबित कर दिया। राज्य सरकार का कहना है कि उन्हें एक मस्जिद की दीवार ढहाए जाने का आदेश देने के लिए निलंबित किया गया है, जिसके कारण सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन सकती थी। नागपाल ने इन आरोपों का खंडन किया है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पर्यावरण मंत्रालय के निदेशक सरोज के निर्देशन में गठित यह तीन सदस्यीय जांच समिति शुक्रवार तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। मंत्रालय ने कहा कि समिति रेत खनन की वास्तविक स्थिति का पता लगाएगी तथा जरूरी कार्रवाई के लिए सुझाव देगी।टिप्पणियां वर्ष 2009 बैच की आईएएस अधिकारी नागपाल को कथित तौर पर रेत खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने पर उप्र सरकार ने 29 जुलाई को निलंबित कर दिया। राज्य सरकार का कहना है कि उन्हें एक मस्जिद की दीवार ढहाए जाने का आदेश देने के लिए निलंबित किया गया है, जिसके कारण सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन सकती थी। नागपाल ने इन आरोपों का खंडन किया है। मंत्रालय ने कहा कि समिति रेत खनन की वास्तविक स्थिति का पता लगाएगी तथा जरूरी कार्रवाई के लिए सुझाव देगी।टिप्पणियां वर्ष 2009 बैच की आईएएस अधिकारी नागपाल को कथित तौर पर रेत खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने पर उप्र सरकार ने 29 जुलाई को निलंबित कर दिया। राज्य सरकार का कहना है कि उन्हें एक मस्जिद की दीवार ढहाए जाने का आदेश देने के लिए निलंबित किया गया है, जिसके कारण सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन सकती थी। नागपाल ने इन आरोपों का खंडन किया है। वर्ष 2009 बैच की आईएएस अधिकारी नागपाल को कथित तौर पर रेत खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने पर उप्र सरकार ने 29 जुलाई को निलंबित कर दिया। राज्य सरकार का कहना है कि उन्हें एक मस्जिद की दीवार ढहाए जाने का आदेश देने के लिए निलंबित किया गया है, जिसके कारण सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन सकती थी। नागपाल ने इन आरोपों का खंडन किया है। राज्य सरकार का कहना है कि उन्हें एक मस्जिद की दीवार ढहाए जाने का आदेश देने के लिए निलंबित किया गया है, जिसके कारण सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन सकती थी। नागपाल ने इन आरोपों का खंडन किया है।
सारांश: उत्तर प्रदेश की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन पर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को नोएडा में कथित तौर पर अवैध रेत खनन की जांच के लिए समिति गठित कर दी।
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['hin']
एक सारांश बनाओ: सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन अगले सप्ताह होने वाली आईसीसी की बैठक में बोर्ड का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पहले ही हितों के टकराव का दोषी पाया जा चुका है. शीर्ष अदालत ने बोर्ड के कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी को 24 को होने वाली आईसीसी की बैठक में बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दे दी है. न्यायालय ने निर्देश दिया कि उनके साथ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जौहरी जाएंगे. न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि चूंकि श्रीनिवासन को शीर्ष अदालत हितों के टकराव का दोषी ठहरा चुकी है, इसलिए उन्हें आईसीसी की बैठक में बीसीसीआई का प्रतिनिधित्व करने की इजाजत नहीं दी सकती. 24 अप्रैल को ICC की मीटिंग में क्या BCCI की ओर से कोई अयोग्य व्यक्ति भाग ले सकता है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक BCCI और राज्य संघ के पदाधिकारी नहीं हो सकते वो क्या ICC जा सकते हैं?टिप्पणियां इनपुट: भाषा(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि चूंकि श्रीनिवासन को शीर्ष अदालत हितों के टकराव का दोषी ठहरा चुकी है, इसलिए उन्हें आईसीसी की बैठक में बीसीसीआई का प्रतिनिधित्व करने की इजाजत नहीं दी सकती. 24 अप्रैल को ICC की मीटिंग में क्या BCCI की ओर से कोई अयोग्य व्यक्ति भाग ले सकता है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक BCCI और राज्य संघ के पदाधिकारी नहीं हो सकते वो क्या ICC जा सकते हैं?टिप्पणियां इनपुट: भाषा(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) 24 अप्रैल को ICC की मीटिंग में क्या BCCI की ओर से कोई अयोग्य व्यक्ति भाग ले सकता है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक BCCI और राज्य संघ के पदाधिकारी नहीं हो सकते वो क्या ICC जा सकते हैं?टिप्पणियां इनपुट: भाषा(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इनपुट: भाषा(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
यह एक सारांश है: एसजीएम में हिस्सा लेने पहुंचे थे एन श्रीनिवासन पत्रकार ने पूछा, किस हैसियत से आप एसजीएम में आए हैं श्रीनिवासन बोले, 'तुम कहां से आये हो, किस चैनल से हो.'
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['hin']
एक सारांश बनाओ: भारत के दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने अपनी सुषमा स्‍वराज की प्रशंसा करते हुए कहा, ''वह भारत और यहां के लोगों की जबर्दस्‍त पैरोकार हैं.'' इसके साथ ही यह भी जोड़ा कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती के महत्‍व पर सुषमा हमेशा अपने विश्‍वास पर कायम रही हैं. दूसरी भारत-अमेरिका रणनीतिक डॉयलाग के सिलसिले में यहां आए केरी ने सुषमा स्‍वराज के साथ संयुक्‍त प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ये बातें कहीं. इस दौरान केरी ने उनको एक से अधिक बार सुषमा कहकर संबोधित किया और उनके ''गंभीर विमर्श और साझेदारी के लिए'' आभार प्रकट किया.  टिप्पणियां इस दौरान जॉन केरी ने कहा, ''दो साल साथ काम करने के बाद मैं यह कहना चाहूंगा कि आप भारत और यहां के नागरिकों के हितों के मसले की हमेशा अपनी प्रतिष्‍ठा के अनुरूप जबर्दस्‍त पैरोकार रही हैं. इसके साथ ही द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती के महत्‍व पर हमेशा कायम रही हैं और इसको लेकर आपमें कोई हिचकिचाहट नहीं रही है.'' अपनी चौथी भारत यात्रा पर आए जॉन केरी (72) ने कहा कि वह जब 1990 के दशक में भारत आए थे, उसकी तुलना में अब दोनों देशों के बीच संबंध एकदम अलग हैं. उन्‍होंने कहा ''उस दौर में हम लोग शीत युद्ध के दौर से उबरने और संबंध विकसित करने की दिशा में कोशिश कर रहे थे. लेकिन इन दो वर्षों में मैं यह कह सकता हूं कि अब वह भावना नहीं रही.'' अब हमारे संबंध मजबूत और गर्मजोशी से भरे हैं. दूसरी भारत-अमेरिका रणनीतिक डॉयलाग के सिलसिले में यहां आए केरी ने सुषमा स्‍वराज के साथ संयुक्‍त प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ये बातें कहीं. इस दौरान केरी ने उनको एक से अधिक बार सुषमा कहकर संबोधित किया और उनके ''गंभीर विमर्श और साझेदारी के लिए'' आभार प्रकट किया.  टिप्पणियां इस दौरान जॉन केरी ने कहा, ''दो साल साथ काम करने के बाद मैं यह कहना चाहूंगा कि आप भारत और यहां के नागरिकों के हितों के मसले की हमेशा अपनी प्रतिष्‍ठा के अनुरूप जबर्दस्‍त पैरोकार रही हैं. इसके साथ ही द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती के महत्‍व पर हमेशा कायम रही हैं और इसको लेकर आपमें कोई हिचकिचाहट नहीं रही है.'' अपनी चौथी भारत यात्रा पर आए जॉन केरी (72) ने कहा कि वह जब 1990 के दशक में भारत आए थे, उसकी तुलना में अब दोनों देशों के बीच संबंध एकदम अलग हैं. उन्‍होंने कहा ''उस दौर में हम लोग शीत युद्ध के दौर से उबरने और संबंध विकसित करने की दिशा में कोशिश कर रहे थे. लेकिन इन दो वर्षों में मैं यह कह सकता हूं कि अब वह भावना नहीं रही.'' अब हमारे संबंध मजबूत और गर्मजोशी से भरे हैं. इस दौरान जॉन केरी ने कहा, ''दो साल साथ काम करने के बाद मैं यह कहना चाहूंगा कि आप भारत और यहां के नागरिकों के हितों के मसले की हमेशा अपनी प्रतिष्‍ठा के अनुरूप जबर्दस्‍त पैरोकार रही हैं. इसके साथ ही द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती के महत्‍व पर हमेशा कायम रही हैं और इसको लेकर आपमें कोई हिचकिचाहट नहीं रही है.'' अपनी चौथी भारत यात्रा पर आए जॉन केरी (72) ने कहा कि वह जब 1990 के दशक में भारत आए थे, उसकी तुलना में अब दोनों देशों के बीच संबंध एकदम अलग हैं. उन्‍होंने कहा ''उस दौर में हम लोग शीत युद्ध के दौर से उबरने और संबंध विकसित करने की दिशा में कोशिश कर रहे थे. लेकिन इन दो वर्षों में मैं यह कह सकता हूं कि अब वह भावना नहीं रही.'' अब हमारे संबंध मजबूत और गर्मजोशी से भरे हैं. अपनी चौथी भारत यात्रा पर आए जॉन केरी (72) ने कहा कि वह जब 1990 के दशक में भारत आए थे, उसकी तुलना में अब दोनों देशों के बीच संबंध एकदम अलग हैं. उन्‍होंने कहा ''उस दौर में हम लोग शीत युद्ध के दौर से उबरने और संबंध विकसित करने की दिशा में कोशिश कर रहे थे. लेकिन इन दो वर्षों में मैं यह कह सकता हूं कि अब वह भावना नहीं रही.'' अब हमारे संबंध मजबूत और गर्मजोशी से भरे हैं.
संक्षिप्त पाठ: सुषमा भारतीय हितों की जबर्दस्‍त पैरोकार हैं वह द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की इच्‍छुक हैं केरी चौथी बार भारत आए हैं
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सक्कर शहर में आईएसआई के एक दफ्तर पर आत्मघाती हमलावरों के एक समूह ने धावा बोल दिया। इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 40 से अधिक घायल हो गए। यह हमला बुधवार शाम इफ्तार के ठीक बाद हुआ। समाचार चैनल जियो न्यूज के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने बताया कि विस्फोटक के साथ कम चार आतंकवादियों ने हमला किया। एक हमलावर ने सक्कर की बैरक कोलोनी स्थित आईएसआई दफ्तर की दीवार से विस्फोटकों से लदे वाहन से टक्कर मार दी। दूसरा दफ्तर के अंदर घुस गया और भीतर सुरक्षा बलों के साथ उसकी गोलीबारी हुई। दो हमलावरों ने इमारत के भीतर खुद को उड़ा लिया।टिप्पणियां हमले में दो लोगों की मौत और 40 से अधिक के घायल होने की सूचना दी गई है। पहले मीडिया की खबरों में कहा गया था कि हमले में सात लोग मारे गए हैं। अभी तक किसी समूह ने विस्फोटों की जिम्मेदारी नहीं ली है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हमले की निंदा की है। यह हमला बुधवार शाम इफ्तार के ठीक बाद हुआ। समाचार चैनल जियो न्यूज के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने बताया कि विस्फोटक के साथ कम चार आतंकवादियों ने हमला किया। एक हमलावर ने सक्कर की बैरक कोलोनी स्थित आईएसआई दफ्तर की दीवार से विस्फोटकों से लदे वाहन से टक्कर मार दी। दूसरा दफ्तर के अंदर घुस गया और भीतर सुरक्षा बलों के साथ उसकी गोलीबारी हुई। दो हमलावरों ने इमारत के भीतर खुद को उड़ा लिया।टिप्पणियां हमले में दो लोगों की मौत और 40 से अधिक के घायल होने की सूचना दी गई है। पहले मीडिया की खबरों में कहा गया था कि हमले में सात लोग मारे गए हैं। अभी तक किसी समूह ने विस्फोटों की जिम्मेदारी नहीं ली है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हमले की निंदा की है। एक हमलावर ने सक्कर की बैरक कोलोनी स्थित आईएसआई दफ्तर की दीवार से विस्फोटकों से लदे वाहन से टक्कर मार दी। दूसरा दफ्तर के अंदर घुस गया और भीतर सुरक्षा बलों के साथ उसकी गोलीबारी हुई। दो हमलावरों ने इमारत के भीतर खुद को उड़ा लिया।टिप्पणियां हमले में दो लोगों की मौत और 40 से अधिक के घायल होने की सूचना दी गई है। पहले मीडिया की खबरों में कहा गया था कि हमले में सात लोग मारे गए हैं। अभी तक किसी समूह ने विस्फोटों की जिम्मेदारी नहीं ली है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हमले की निंदा की है। हमले में दो लोगों की मौत और 40 से अधिक के घायल होने की सूचना दी गई है। पहले मीडिया की खबरों में कहा गया था कि हमले में सात लोग मारे गए हैं। अभी तक किसी समूह ने विस्फोटों की जिम्मेदारी नहीं ली है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हमले की निंदा की है। अभी तक किसी समूह ने विस्फोटों की जिम्मेदारी नहीं ली है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हमले की निंदा की है।
यह हमला बुधवार शाम इफ्तार के ठीक बाद हुआ। समाचार चैनल जियो न्यूज के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने बताया कि विस्फोटक के साथ कम चार आतंकवादियों ने हमला किया।
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['hin']
एक सारांश बनाओ: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा मुंबई में चल रही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। येदियुरप्पा ने पत्रकारों से कहा कि पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी को लगातार दूसरी बार अध्यक्ष बनने पर बधाई देने के लिए वह मुंबई आए हैं। उन्होंने कहा, मैं गडकरी जी को दोबारा अध्यक्ष बनने पर बधाई देने के लिए मुंबई जा रहा हूं। वह मेरे साथ हर परिस्थिति में चट्टान की तरह खड़े रहे हैं। इसलिए मैं उनसे अवश्य मुलाकात करूंगा। हालांकि उन्होंने पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता अनंत कुमार पर अपनी अप्रसन्नता भी जाहिर की और कहा कि वह राज्य में बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए कार्य करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मैं पार्टी को पिछले कुछ दिनों की घटनाओं के विषय में अवगत कराऊंगा। मैं राज्य में पार्टी को मजबूत को बनाने के लिए काम करूंगा। भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुख्यमंत्री पद गंवाने के बाद येदियुरप्पा एवं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के मध्य संबंधों में तनाव चल रहा है। येदियुरप्पा का राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री एवं अपने उत्तराधिकारी सदानंद गौड़ा से भी मनमुटाव हो गया है, जिनका चयन उन्होंने खुद किया था। टिप्पणियां इससे पहले, गुरुवार को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ताकत दिखाते हुए अपने धुर विरोधी संजय जोशी को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्यता से इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू होने से पहले जोशी के इस्तीफे को मोदी को शांत रखने के बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। जोशी के इस्तीफे ने बैठक में मोदी की मौजूदगी सुनिश्चित करने का रास्ता साफ कर दिया। मोदी और जोशी एक दूसरे के विरोधी रहे हैं और जोशी को कार्यकारिणी में शामिल करने का गडकरी के हालिया फैसले से गुजरात के मुख्यमंत्री काफी नाराज चल रहे थे। मोदी ने धमकी दी थी कि यदि जोशी बैठक के दौरान मौजूद रहे, तो वह इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। कार्यकारिणी में जोशी को वापस लाने वाले गडकरी ने छोटे से विवाद के अंत की घोषणा की और ऐलान किया कि वह और मोदी पार्टी की मजबूती के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा, मैं गडकरी जी को दोबारा अध्यक्ष बनने पर बधाई देने के लिए मुंबई जा रहा हूं। वह मेरे साथ हर परिस्थिति में चट्टान की तरह खड़े रहे हैं। इसलिए मैं उनसे अवश्य मुलाकात करूंगा। हालांकि उन्होंने पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता अनंत कुमार पर अपनी अप्रसन्नता भी जाहिर की और कहा कि वह राज्य में बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए कार्य करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मैं पार्टी को पिछले कुछ दिनों की घटनाओं के विषय में अवगत कराऊंगा। मैं राज्य में पार्टी को मजबूत को बनाने के लिए काम करूंगा। भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुख्यमंत्री पद गंवाने के बाद येदियुरप्पा एवं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के मध्य संबंधों में तनाव चल रहा है। येदियुरप्पा का राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री एवं अपने उत्तराधिकारी सदानंद गौड़ा से भी मनमुटाव हो गया है, जिनका चयन उन्होंने खुद किया था। टिप्पणियां इससे पहले, गुरुवार को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ताकत दिखाते हुए अपने धुर विरोधी संजय जोशी को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्यता से इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू होने से पहले जोशी के इस्तीफे को मोदी को शांत रखने के बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। जोशी के इस्तीफे ने बैठक में मोदी की मौजूदगी सुनिश्चित करने का रास्ता साफ कर दिया। मोदी और जोशी एक दूसरे के विरोधी रहे हैं और जोशी को कार्यकारिणी में शामिल करने का गडकरी के हालिया फैसले से गुजरात के मुख्यमंत्री काफी नाराज चल रहे थे। मोदी ने धमकी दी थी कि यदि जोशी बैठक के दौरान मौजूद रहे, तो वह इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। कार्यकारिणी में जोशी को वापस लाने वाले गडकरी ने छोटे से विवाद के अंत की घोषणा की और ऐलान किया कि वह और मोदी पार्टी की मजबूती के लिए काम करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मैं पार्टी को पिछले कुछ दिनों की घटनाओं के विषय में अवगत कराऊंगा। मैं राज्य में पार्टी को मजबूत को बनाने के लिए काम करूंगा। भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुख्यमंत्री पद गंवाने के बाद येदियुरप्पा एवं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के मध्य संबंधों में तनाव चल रहा है। येदियुरप्पा का राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री एवं अपने उत्तराधिकारी सदानंद गौड़ा से भी मनमुटाव हो गया है, जिनका चयन उन्होंने खुद किया था। टिप्पणियां इससे पहले, गुरुवार को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ताकत दिखाते हुए अपने धुर विरोधी संजय जोशी को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्यता से इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू होने से पहले जोशी के इस्तीफे को मोदी को शांत रखने के बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। जोशी के इस्तीफे ने बैठक में मोदी की मौजूदगी सुनिश्चित करने का रास्ता साफ कर दिया। मोदी और जोशी एक दूसरे के विरोधी रहे हैं और जोशी को कार्यकारिणी में शामिल करने का गडकरी के हालिया फैसले से गुजरात के मुख्यमंत्री काफी नाराज चल रहे थे। मोदी ने धमकी दी थी कि यदि जोशी बैठक के दौरान मौजूद रहे, तो वह इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। कार्यकारिणी में जोशी को वापस लाने वाले गडकरी ने छोटे से विवाद के अंत की घोषणा की और ऐलान किया कि वह और मोदी पार्टी की मजबूती के लिए काम करेंगे। इससे पहले, गुरुवार को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ताकत दिखाते हुए अपने धुर विरोधी संजय जोशी को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्यता से इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू होने से पहले जोशी के इस्तीफे को मोदी को शांत रखने के बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। जोशी के इस्तीफे ने बैठक में मोदी की मौजूदगी सुनिश्चित करने का रास्ता साफ कर दिया। मोदी और जोशी एक दूसरे के विरोधी रहे हैं और जोशी को कार्यकारिणी में शामिल करने का गडकरी के हालिया फैसले से गुजरात के मुख्यमंत्री काफी नाराज चल रहे थे। मोदी ने धमकी दी थी कि यदि जोशी बैठक के दौरान मौजूद रहे, तो वह इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। कार्यकारिणी में जोशी को वापस लाने वाले गडकरी ने छोटे से विवाद के अंत की घोषणा की और ऐलान किया कि वह और मोदी पार्टी की मजबूती के लिए काम करेंगे। मोदी और जोशी एक दूसरे के विरोधी रहे हैं और जोशी को कार्यकारिणी में शामिल करने का गडकरी के हालिया फैसले से गुजरात के मुख्यमंत्री काफी नाराज चल रहे थे। मोदी ने धमकी दी थी कि यदि जोशी बैठक के दौरान मौजूद रहे, तो वह इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। कार्यकारिणी में जोशी को वापस लाने वाले गडकरी ने छोटे से विवाद के अंत की घोषणा की और ऐलान किया कि वह और मोदी पार्टी की मजबूती के लिए काम करेंगे।
येदियुरप्पा ने कहा, मैं गडकरी जी को दोबारा अध्यक्ष बनने पर बधाई देने के लिए मुंबई जा रहा हूं। वह मेरे साथ हर परिस्थिति में चट्टान की तरह खड़े रहे हैं, इसलिए मैं उनसे अवश्य मुलाकात करूंगा।
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['hin']
एक सारांश बनाओ: सर्वोच्च न्यायालय ने स्विस दवा कंपनी नोवार्टिस एजी की एक कैंसररोधी दवा के पेटेंट दावे को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले की स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सराहना की। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक अहम फैसला देते हुए कैंसर की दवा ग्लिवेक (इमैटिनिब मेसिलेट) पर स्विस कंपनी नोवार्टिस एजी के पेटेंट का दावा खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि कंपनी पेटेंट की जांच पर खरी नहीं उतरी। न्यायमूर्ति आफताब आलम तथा न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की पीठ ने बौद्धिक संपदा अपीली बोर्ड के निर्णय को चुनौती देने वाली स्विट्जरलैंड की कंपनी नोवार्टिस की याचिका खारिज कर दी। चेन्नई स्थिति बौद्धिक संपदा अपीली बोर्ड ने वर्ष 2006 में दवा पेटेंट करवाने से संबंधित नोवार्टिस की याचिका खारिज कर दी थी, जिसे कंपनी ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। नोवार्टिस एजी ने दावा किया था कि इमैटिनिब मेसिलेट के बीटा क्रिस्टलाइन रूप का अविष्कार उसी ने किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि इससे मरीजों को सस्ती जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। मुंबई के कैंसर रोगी सहायता संगठन से जुड़ी वाईके सप्रू ने कहा, "यह ऐतिहासिक निर्णय है। इस फैसले का दूरगामी और व्यापक प्रभाव होगा, क्योंकि जेनरिक दवाओं के उत्पादन से गरीब मरीजों को उपचार में सहूलियत होगी।" सप्रू ने आगे बताया, "इस फैसले के बाद जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें घटकर 160,000 रुपया प्रति महीना से 6,000 रुपया महीना तक आ जाएंगी।" सप्रू के अतिरिक्त इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कैंसर के वरिष्ठ चिकित्सक समीर कौल तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चिकित्सक पीके जुल्का ने भी न्यायालय के इस फैसले की तारीफ की। न्यायमूर्ति आलम ने नोवार्टिस के दावे को 'पेटेंट के अधिकार क्षेत्र से इतर' बताया। उन्होंने कहा, "भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) का चाहे जिस तरह से विश्लेषण किया जाए, नोवार्टिस यह दावा नहीं कर सकती कि यह कोई पेटेंट है। यह पेटेंट की योग्यता की जांच में विफल हुई।" भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने कहा कि इस धारा का संशोधित पक्ष केवल उचित अविष्कारों के लिए है। रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक अहम फैसला देते हुए कैंसर की दवा ग्लिवेक (इमैटिनिब मेसिलेट) पर स्विस कंपनी नोवार्टिस एजी के पेटेंट का दावा खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि कंपनी पेटेंट की जांच पर खरी नहीं उतरी। न्यायमूर्ति आफताब आलम तथा न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की पीठ ने बौद्धिक संपदा अपीली बोर्ड के निर्णय को चुनौती देने वाली स्विट्जरलैंड की कंपनी नोवार्टिस की याचिका खारिज कर दी। चेन्नई स्थिति बौद्धिक संपदा अपीली बोर्ड ने वर्ष 2006 में दवा पेटेंट करवाने से संबंधित नोवार्टिस की याचिका खारिज कर दी थी, जिसे कंपनी ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। नोवार्टिस एजी ने दावा किया था कि इमैटिनिब मेसिलेट के बीटा क्रिस्टलाइन रूप का अविष्कार उसी ने किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि इससे मरीजों को सस्ती जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। मुंबई के कैंसर रोगी सहायता संगठन से जुड़ी वाईके सप्रू ने कहा, "यह ऐतिहासिक निर्णय है। इस फैसले का दूरगामी और व्यापक प्रभाव होगा, क्योंकि जेनरिक दवाओं के उत्पादन से गरीब मरीजों को उपचार में सहूलियत होगी।" सप्रू ने आगे बताया, "इस फैसले के बाद जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें घटकर 160,000 रुपया प्रति महीना से 6,000 रुपया महीना तक आ जाएंगी।" सप्रू के अतिरिक्त इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कैंसर के वरिष्ठ चिकित्सक समीर कौल तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चिकित्सक पीके जुल्का ने भी न्यायालय के इस फैसले की तारीफ की। न्यायमूर्ति आलम ने नोवार्टिस के दावे को 'पेटेंट के अधिकार क्षेत्र से इतर' बताया। उन्होंने कहा, "भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) का चाहे जिस तरह से विश्लेषण किया जाए, नोवार्टिस यह दावा नहीं कर सकती कि यह कोई पेटेंट है। यह पेटेंट की योग्यता की जांच में विफल हुई।" भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने कहा कि इस धारा का संशोधित पक्ष केवल उचित अविष्कारों के लिए है। रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" न्यायमूर्ति आफताब आलम तथा न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की पीठ ने बौद्धिक संपदा अपीली बोर्ड के निर्णय को चुनौती देने वाली स्विट्जरलैंड की कंपनी नोवार्टिस की याचिका खारिज कर दी। चेन्नई स्थिति बौद्धिक संपदा अपीली बोर्ड ने वर्ष 2006 में दवा पेटेंट करवाने से संबंधित नोवार्टिस की याचिका खारिज कर दी थी, जिसे कंपनी ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। नोवार्टिस एजी ने दावा किया था कि इमैटिनिब मेसिलेट के बीटा क्रिस्टलाइन रूप का अविष्कार उसी ने किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि इससे मरीजों को सस्ती जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। मुंबई के कैंसर रोगी सहायता संगठन से जुड़ी वाईके सप्रू ने कहा, "यह ऐतिहासिक निर्णय है। इस फैसले का दूरगामी और व्यापक प्रभाव होगा, क्योंकि जेनरिक दवाओं के उत्पादन से गरीब मरीजों को उपचार में सहूलियत होगी।" सप्रू ने आगे बताया, "इस फैसले के बाद जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें घटकर 160,000 रुपया प्रति महीना से 6,000 रुपया महीना तक आ जाएंगी।" सप्रू के अतिरिक्त इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कैंसर के वरिष्ठ चिकित्सक समीर कौल तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चिकित्सक पीके जुल्का ने भी न्यायालय के इस फैसले की तारीफ की। न्यायमूर्ति आलम ने नोवार्टिस के दावे को 'पेटेंट के अधिकार क्षेत्र से इतर' बताया। उन्होंने कहा, "भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) का चाहे जिस तरह से विश्लेषण किया जाए, नोवार्टिस यह दावा नहीं कर सकती कि यह कोई पेटेंट है। यह पेटेंट की योग्यता की जांच में विफल हुई।" भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने कहा कि इस धारा का संशोधित पक्ष केवल उचित अविष्कारों के लिए है। रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" चेन्नई स्थिति बौद्धिक संपदा अपीली बोर्ड ने वर्ष 2006 में दवा पेटेंट करवाने से संबंधित नोवार्टिस की याचिका खारिज कर दी थी, जिसे कंपनी ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। नोवार्टिस एजी ने दावा किया था कि इमैटिनिब मेसिलेट के बीटा क्रिस्टलाइन रूप का अविष्कार उसी ने किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि इससे मरीजों को सस्ती जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। मुंबई के कैंसर रोगी सहायता संगठन से जुड़ी वाईके सप्रू ने कहा, "यह ऐतिहासिक निर्णय है। इस फैसले का दूरगामी और व्यापक प्रभाव होगा, क्योंकि जेनरिक दवाओं के उत्पादन से गरीब मरीजों को उपचार में सहूलियत होगी।" सप्रू ने आगे बताया, "इस फैसले के बाद जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें घटकर 160,000 रुपया प्रति महीना से 6,000 रुपया महीना तक आ जाएंगी।" सप्रू के अतिरिक्त इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कैंसर के वरिष्ठ चिकित्सक समीर कौल तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चिकित्सक पीके जुल्का ने भी न्यायालय के इस फैसले की तारीफ की। न्यायमूर्ति आलम ने नोवार्टिस के दावे को 'पेटेंट के अधिकार क्षेत्र से इतर' बताया। उन्होंने कहा, "भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) का चाहे जिस तरह से विश्लेषण किया जाए, नोवार्टिस यह दावा नहीं कर सकती कि यह कोई पेटेंट है। यह पेटेंट की योग्यता की जांच में विफल हुई।" भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने कहा कि इस धारा का संशोधित पक्ष केवल उचित अविष्कारों के लिए है। रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि इससे मरीजों को सस्ती जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। मुंबई के कैंसर रोगी सहायता संगठन से जुड़ी वाईके सप्रू ने कहा, "यह ऐतिहासिक निर्णय है। इस फैसले का दूरगामी और व्यापक प्रभाव होगा, क्योंकि जेनरिक दवाओं के उत्पादन से गरीब मरीजों को उपचार में सहूलियत होगी।" सप्रू ने आगे बताया, "इस फैसले के बाद जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें घटकर 160,000 रुपया प्रति महीना से 6,000 रुपया महीना तक आ जाएंगी।" सप्रू के अतिरिक्त इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कैंसर के वरिष्ठ चिकित्सक समीर कौल तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चिकित्सक पीके जुल्का ने भी न्यायालय के इस फैसले की तारीफ की। न्यायमूर्ति आलम ने नोवार्टिस के दावे को 'पेटेंट के अधिकार क्षेत्र से इतर' बताया। उन्होंने कहा, "भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) का चाहे जिस तरह से विश्लेषण किया जाए, नोवार्टिस यह दावा नहीं कर सकती कि यह कोई पेटेंट है। यह पेटेंट की योग्यता की जांच में विफल हुई।" भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने कहा कि इस धारा का संशोधित पक्ष केवल उचित अविष्कारों के लिए है। रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" मुंबई के कैंसर रोगी सहायता संगठन से जुड़ी वाईके सप्रू ने कहा, "यह ऐतिहासिक निर्णय है। इस फैसले का दूरगामी और व्यापक प्रभाव होगा, क्योंकि जेनरिक दवाओं के उत्पादन से गरीब मरीजों को उपचार में सहूलियत होगी।" सप्रू ने आगे बताया, "इस फैसले के बाद जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें घटकर 160,000 रुपया प्रति महीना से 6,000 रुपया महीना तक आ जाएंगी।" सप्रू के अतिरिक्त इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कैंसर के वरिष्ठ चिकित्सक समीर कौल तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चिकित्सक पीके जुल्का ने भी न्यायालय के इस फैसले की तारीफ की। न्यायमूर्ति आलम ने नोवार्टिस के दावे को 'पेटेंट के अधिकार क्षेत्र से इतर' बताया। उन्होंने कहा, "भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) का चाहे जिस तरह से विश्लेषण किया जाए, नोवार्टिस यह दावा नहीं कर सकती कि यह कोई पेटेंट है। यह पेटेंट की योग्यता की जांच में विफल हुई।" भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने कहा कि इस धारा का संशोधित पक्ष केवल उचित अविष्कारों के लिए है। रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" सप्रू ने आगे बताया, "इस फैसले के बाद जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें घटकर 160,000 रुपया प्रति महीना से 6,000 रुपया महीना तक आ जाएंगी।" सप्रू के अतिरिक्त इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कैंसर के वरिष्ठ चिकित्सक समीर कौल तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चिकित्सक पीके जुल्का ने भी न्यायालय के इस फैसले की तारीफ की। न्यायमूर्ति आलम ने नोवार्टिस के दावे को 'पेटेंट के अधिकार क्षेत्र से इतर' बताया। उन्होंने कहा, "भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) का चाहे जिस तरह से विश्लेषण किया जाए, नोवार्टिस यह दावा नहीं कर सकती कि यह कोई पेटेंट है। यह पेटेंट की योग्यता की जांच में विफल हुई।" भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने कहा कि इस धारा का संशोधित पक्ष केवल उचित अविष्कारों के लिए है। रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" सप्रू के अतिरिक्त इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कैंसर के वरिष्ठ चिकित्सक समीर कौल तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चिकित्सक पीके जुल्का ने भी न्यायालय के इस फैसले की तारीफ की। न्यायमूर्ति आलम ने नोवार्टिस के दावे को 'पेटेंट के अधिकार क्षेत्र से इतर' बताया। उन्होंने कहा, "भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) का चाहे जिस तरह से विश्लेषण किया जाए, नोवार्टिस यह दावा नहीं कर सकती कि यह कोई पेटेंट है। यह पेटेंट की योग्यता की जांच में विफल हुई।" भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने कहा कि इस धारा का संशोधित पक्ष केवल उचित अविष्कारों के लिए है। रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" न्यायमूर्ति आलम ने नोवार्टिस के दावे को 'पेटेंट के अधिकार क्षेत्र से इतर' बताया। उन्होंने कहा, "भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) का चाहे जिस तरह से विश्लेषण किया जाए, नोवार्टिस यह दावा नहीं कर सकती कि यह कोई पेटेंट है। यह पेटेंट की योग्यता की जांच में विफल हुई।" भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने कहा कि इस धारा का संशोधित पक्ष केवल उचित अविष्कारों के लिए है। रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा तीन (डी) को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने कहा कि इस धारा का संशोधित पक्ष केवल उचित अविष्कारों के लिए है। रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" रक्त कैंसर की इस दवा पर पेटेंट को लेकर जारी कानूनी जंग पर कई अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नजर टिकी हुई थी। नोवार्टिस, ग्लिवेक जैसी सस्ती दवा के पेटेंट के लिए लंबे समय से प्रयासरत थी। यदि कंपनी को इसमें कामयाबी मिल जाती तो भारतीय कंपनियों को जेनरिक दवाओं के निर्माण से प्रतिबंधित कर दिया जाता।टिप्पणियां दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नोवार्टिस के भारत के प्रबंध निदेशक रंजीत शाहनी ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।" रंजीत शाहनी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह निर्णय मरीजों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चिकित्सा के विकास में बाधा पहुंचेगी और बीमारियों के लिए बेहतर उपचार का विकल्प प्रदान करने में अवरोध उत्पन्न होगा।"
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: सर्वोच्च न्यायालय ने स्विस दवा कंपनी नोवार्टिस एजी की एक कैंसररोधी दवा के पेटेंट दावे को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले की स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सराहना की।
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['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: फिल्म 7 खून माफ में अपने सात पतियों को किनारे लगाने वाली प्रियंका चोपड़ा का कहना है कि कहानी में दुष्टता होने के बावजूद प्यार की कभी न खत्म होने वाली उनके किरदार की तलाश से दर्शक सहानुभूति रखेंगे। असल में विशाल भारद्वाज अंदाज में फिल्म अपनी नकारात्मक कहानी और अपने गाने डार्लिंग के लिए चर्चा में है। यह गाना तुरंत ही लोगों के दिलों पर छा गया है। कमीने के बाद प्रियंका दूसरी बार विशाल के साथ काम कर रही थी। प्रियंका ने बताया, विशाल सर ने जब मुझे कहानी पढ़ने को दी तो मुझे उस महिला के दर्द और त्रासदी का अहसास हुआ। वह अपने जीवन में केवल प्यार की तलाश में थी और यही उससे दूर भाग रहा था। आशुतोष की वाट्स योर राशि में 12 अलग-अलग किरदारों को निभाने वाली अदाकारा ने कहा, मुझे कहानी में दर्द और तन्हाई पसंद आई जिसने उसे उस तरह की महिला बना डाला। उपन्यासकार रस्किन बांड की कहानी पर बनी इस फिल्म की पटकथा भी बांड ने विशाल के साथ लिखी है। फिल्म सुजाना की कहानी है जो एक के बाद एक अपने सात पतियों को मार डालती है।
संक्षिप्त पाठ: प्रियंका ने बताया, विशाल सर ने जब मुझे कहानी पढ़ने को दी तो मुझे उस महिला के दर्द और त्रासदी का अहसास हुआ।
22
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पत्रकार ने बाद में लोकसभा सदस्य के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. एक स्थानीय टीवी चैनल के पत्रकार ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर गठजोड़ की एआईयूडीएफ की योजना के बारे में सवाल किया. लोकसभा सदस्य ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा, ‘हम दिल्ली में महागठबंधन (विपक्ष) के साथ हैं.' इसके बाद पत्रकार ने पूछा कि चुनाव के बाद कौन सी पार्टी जीतती है, क्या एआईयूडीएफ इसको देखकर अपना रूख बदलेगी. इस पर अजमल भड़क गए और कहा, ‘तुम कितना करोड़ रुपए दोगे? (अपशब्द).. यह पत्रकारिता है? तुम जैसे लोग पत्रकारिता को बदनाम कर रहे हैं. यह व्यक्ति पहले से ही हमारे खिलाफ है.' इसके बाद अजमल ने और भी अपशब्द कहे और दूसरे पत्रकार का माइक छीनकर सवाल पूछने वाले पत्रकार को मारने की कोशिश की. बता दें, ऐसा ही मामला हालही में बंगाल में देखने को मिला था, जहां पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रमुख दिलीप घोष ने कोलकाता पुलिस को वर्दी उतार देने की धमकी दी थी. उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा था कि अगर राज्य में बीजेपी सत्ता में आई तो वह उनकी वर्दी उतार देंगे. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि ये पुलिसकर्मी अब इस वर्दी के लायक नहीं रहे हैं. उन्होंने कहा था कि हम हर चीज को रिकॉर्ड कर रहे हैं. हम सत्ता में आने के बाद उन अधिकारियों की भी पहचान करेंगे जिन्होंने हमारे कार्यकर्ताओं और नेताओं पर फर्जी मामले दर्ज किए. इन सबकों इसका खामियाजा भुगतना होगा.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: बदरूद्दीन अजमल ने की पत्रकार से बदसलूकी सवाल पूछने पर फेंका माइक सिर फोड़ने की दी धमकी
3
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने ज्यूरिख शतरंज चैलेंज टूर्नामेंट के पहले दौर में इटली के फैबियाना करूआना से आसान ड्रॉ खेला।टिप्पणियां साल के अपने तीसरे सुपर टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में आनंद काले मोहरों से खेले। इस भारतीय खिलाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन किया और करूआना को रक्षात्मक खेलने पर मजबूर किया। हालांकि इटली का खिलाड़ी मुकाबला ड्रॉ कराकर बराबर अंक हासिल करने में सफल रहा। चार खिलाड़ियों के इस डबल राउंड रोबिन टूर्नामेंट के एक अन्य मुकाबले में रूस के व्लादिमीर क्रामनिक और इस्राइल के बोरिस गेलफैंड के बीच मुकाबला भी ड्रॉ रहा जिससे पहले दौर के बाद चारों खिलाड़ियों के आधा आधा अंक हैं। साल के अपने तीसरे सुपर टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में आनंद काले मोहरों से खेले। इस भारतीय खिलाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन किया और करूआना को रक्षात्मक खेलने पर मजबूर किया। हालांकि इटली का खिलाड़ी मुकाबला ड्रॉ कराकर बराबर अंक हासिल करने में सफल रहा। चार खिलाड़ियों के इस डबल राउंड रोबिन टूर्नामेंट के एक अन्य मुकाबले में रूस के व्लादिमीर क्रामनिक और इस्राइल के बोरिस गेलफैंड के बीच मुकाबला भी ड्रॉ रहा जिससे पहले दौर के बाद चारों खिलाड़ियों के आधा आधा अंक हैं। चार खिलाड़ियों के इस डबल राउंड रोबिन टूर्नामेंट के एक अन्य मुकाबले में रूस के व्लादिमीर क्रामनिक और इस्राइल के बोरिस गेलफैंड के बीच मुकाबला भी ड्रॉ रहा जिससे पहले दौर के बाद चारों खिलाड़ियों के आधा आधा अंक हैं।
संक्षिप्त पाठ: विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने ज्यूरिख शतरंज चैलेंज टूर्नामेंट के पहले दौर में इटली के फैबियाना करूआना से आसान ड्रॉ खेला।
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['hin']
एक सारांश बनाओ: अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को छिपने के लिए सुरक्षित स्थान मुहैया कराने में पाकिस्तान की कोई भूमिका न होने का दावा करते हुए प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा है कि दुनियाभर की खुफिया एजेंसियों की नाकामी की वजह से लादेन उनके देश में छिपा रहा।टिप्पणियां पांच दिवसीय दौरे पर ब्रिटेन आए गिलानी ने ‘द गार्डियन’ को दिए साक्षात्कार में इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि ऐबटाबाद में लादेन के छिपे होने के बारे में खुफिया जानकारी थी। उन्होंने कहा, ‘इसमें छिपाने वाली कोई बात नहीं है। मुझे लगता है कि यह दुनियाभर की खुफिया एजेंसियों की असफलता थी।’ गिलानी ने इस बात से भी इंकार किया कि पाकिस्तानी सेना के कुछ तत्वों को लादेन के ठिकाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐसा क्यों करना चाहिए? हमने सर्वाधिक पीड़ा सही है।’’ प्रधानमंत्री के अनुसार, जब आतंकवाद से मुकाबले के वैश्विक मुद्दे की बात आती है तो पाकिस्तान समाधान का हिस्सा है, समस्या का नहीं। पांच दिवसीय दौरे पर ब्रिटेन आए गिलानी ने ‘द गार्डियन’ को दिए साक्षात्कार में इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि ऐबटाबाद में लादेन के छिपे होने के बारे में खुफिया जानकारी थी। उन्होंने कहा, ‘इसमें छिपाने वाली कोई बात नहीं है। मुझे लगता है कि यह दुनियाभर की खुफिया एजेंसियों की असफलता थी।’ गिलानी ने इस बात से भी इंकार किया कि पाकिस्तानी सेना के कुछ तत्वों को लादेन के ठिकाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐसा क्यों करना चाहिए? हमने सर्वाधिक पीड़ा सही है।’’ प्रधानमंत्री के अनुसार, जब आतंकवाद से मुकाबले के वैश्विक मुद्दे की बात आती है तो पाकिस्तान समाधान का हिस्सा है, समस्या का नहीं। उन्होंने कहा, ‘इसमें छिपाने वाली कोई बात नहीं है। मुझे लगता है कि यह दुनियाभर की खुफिया एजेंसियों की असफलता थी।’ गिलानी ने इस बात से भी इंकार किया कि पाकिस्तानी सेना के कुछ तत्वों को लादेन के ठिकाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐसा क्यों करना चाहिए? हमने सर्वाधिक पीड़ा सही है।’’ प्रधानमंत्री के अनुसार, जब आतंकवाद से मुकाबले के वैश्विक मुद्दे की बात आती है तो पाकिस्तान समाधान का हिस्सा है, समस्या का नहीं।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा है कि दुनियाभर की खुफिया एजेंसियों की नाकामी की वजह से लादेन उनके देश में छिपा रहा।
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: आईसीसी क्रिकेट विश्वकप-2011 के आधिकारिक शुभंकर 'स्टम्पी' को दुनिया के सामने लाया जा चुका है। 'स्टम्पी' काफी हद तक 1982 एशियाई खेलों के शुभंकर 'अप्पू' जैसा ही है, लेकिन देखने की बात यह होगी कि स्टम्पी को अप्पू जैसी लोकप्रियता मिल पाती है या नहीं। अप्पू देशवासियों की जुबान पर चढ़ गया था। उसके नाम पर दिल्ली में प्रगति मैदान परिसर में अप्पू-घर का निर्माण किया गया था, जहां बच्चे अपने माता-पिता के साथ आकर मौज-मस्ती किया करते थे। अप्पू-घर अब नहीं है। उसे उच्चतम न्यायालय के वकीलों के केबिन बनाने के लिए तोड़ा जा चुका है। अप्पू का भी इंतकाल हो चुका है, लेकिन देशवासी अब तक न तो अप्पू को भूले हैं और न ही अप्पू-घर को। स्टम्पी के सामने अप्पू जैसा लोकप्रिय बनने की चुनौती है। क्रिकेट की लोकप्रियता की आंधी में इस शुभंकर को लोकप्रियता मिल सकती है, लेकिन क्रिकेट मुकाबले जिस तेजी से खेले जा रहे हैं, उन्हें देखते हुए स्टम्पी कुछ वर्षों बाद किताबों में खोकर रह सकता है। ऐसा हो सकता है कि उसे क्रिकेट के जुनूनी भारतीय लोगों के दिलों पर राज करने का मौका न मिल सके। राष्ट्रमंडल खेलों के शुभंकर शेरा को लोगों ने 11 दिनों तक खूब याद किया, लेकिन उसके बाद खेलों से जुड़ी भ्रष्टाचार की खबरों के बीच शेरा कहीं गुम हो गया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भ्रष्टाचार के लिए फिलहाल कोई जगह नहीं और इस कारण स्टम्पी का हश्र शेरा जैसा होने की आशंका नहीं दिखती, लेकिन वह अप्पू जैसी लोकप्रियता हासिल कर सकेगा, इस पर प्रश्नचिह्न है। स्टम्पी के रूप में आईसीसी ने एक 10 वर्ष के काल्पनिक हाथी को दुनिया के सामने पेश किया है। यह बहुत युवा, दृढ़निश्चयी और उत्साह से भरा है। इसकी जो आधिकारिक तस्वीर जारी की गई है, उसमें इसे क्रिकेट गेंद के साथ दिखाया गया है। इसका अनावरण 2 अप्रैल, 2010 को श्रीलंका में किया गया था। उस समय इसका नामकरण नहीं किया गया था। स्टम्पी नाम, आईसीसी द्वारा दुनिया भर में कराए गए ऑनलाइन सर्वेक्षण के माध्यम से सामने आया था। आईसीसी ने जुलाई, 2010 में एक ऑनलाइन प्रतियोगिता कराई थी, जिसके माध्यम से प्रशंसकों को अपने शुभंकर का नाम सुझाने को कहा गया था। इसके लिए प्रशंसकों को एक महीने का वक्त दिया गया था। इसके बाद 2 अगस्त, 2010 को आईसीसी न अपने शुभंकर का नाम स्टम्पी रखे जाने की घोषणा की। आईसीसी का मानना है कि स्टम्पी क्रिकेट को दुनिया का सबसे अच्छा खेल मानता है और हमेशा इसी के बारे में सोचता रहता है। इसे गलियों और चौराहों पर क्रिकेट खेलना ज्यादा पसंद है। कोई इसे इजाजत दे तो यह चौबीसों घंटे क्रिकेट में डूबा रह सकता है। यह क्रिकेटरों का बहुत सम्मान करता है। इसके लिए क्रिकेटर हीरो होते हैं और यह उनकी तकनीक और क्षमताओं की बहुत कद्र करता है। महज 10 वर्ष का होने के कारण यह देश और दुनिया के दूसरे बच्चों की तरह एक दिन क्रिकेट विश्व कप में खेलने का सपना संजोता है। कुल मिलाकर यह उन बच्चों का प्रतिनिधित्व करता है, जिनके बूते आज के खिलाड़ियों की लोकप्रियता कायम है और जो एक दिन खुद क्रिकेटर बनकर इस खेल को आगे बढ़ाना चाहते हैं। आईसीसी क्रिकेट विश्व कप की आयोजन समिति ने स्टम्पी को लोकप्रिय बनाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। रिटेल स्टोर बिग-बाजार और अपनी एक खास वेबसाइट के माध्यम से आयोजन समिति ने स्टम्पी सहित विश्व कप से जुड़ी तमाम तरह की मर्चेटाइजिंग की मार्केटिंग शुरू कर दी है। इन स्टोरों और वेबसाइट के माध्यम से अलग-अलग देशों की जर्सियां खरीदने के अलावा प्रशंसक स्टम्पी को भी हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा आयोजन समिति ने विश्व कप के सभी आयोजन स्थलों के हवाई अड्डों पर स्टम्पी की मौजूदगी सुनिश्चित करने का फैसला किया है, जो दुनिया भर से आने वाले क्रिकेट प्रशंसकों का स्वागत करेगा। विश्व कप का आयोजन 19 फरवरी से भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होना है और स्टम्पी इन तीनों देशों में मौजूद रहकर क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने का काम करेगा।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: क्रिकेट विश्वकप का शुभंकर 'स्टम्पी' काफी हद तक 1982 एशियाई खेलों के शुभंकर 'अप्पू' जैसा है, लेकिन क्या स्टम्पी को अप्पू जैसी लोकप्रियता मिलेगी...
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['hin']