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एक सारांश बनाओ: देश का औद्योगिक उत्पादन पिछले कारोबारी साल 2012-13 में एक फीसदी बढ़ा, जो पिछले दो दशकों से कुछ अधिक समय में सबसे कम है। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह बात सामने आई।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में वर्ष की समाप्ति की तरफ कुछ सुधार नजर आया, पर औसत दर कम ही रही।
केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक औद्योगिक उत्पादन में मार्च 2013 में 2.5 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। पिछले साल मार्च में औद्योगिक उत्पादन में 2.8 फीसदी गिरावट रही थी।
31 मार्च को समाप्त कारोबारी वर्ष के लिए दर्ज एक फीसदी औद्योगिक उत्पादन विकास दर 1991-92 के बाद से सबसे कम है, जब यह दर 0.6 फीसदी रही थी। 2011-12 में यह दर 2.9 फीसदी थी।
आईआईपी में तीन-चौथाई योगदान करने वाले विनिर्माण क्षेत्र सबसे बड़ा खेल बिगाड़ने वाला साबित हुआ। इसने आर्थिक विकास को काफी प्रभावित किया है। 2012-13 में आर्थिक विकास दर करीब पांच फीसदी रहने का अनुमान है, जो एक दशक का निचला स्तर है। पिछले कारोबारी वर्ष में विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि दर सिर्फ 1.2 फीसदी रही।
क्रिसिल रिसर्च ने एक बयान में कहा, "मौजूदा स्थिति 1991-92 की यादा ताजा करती है, जब औद्योगिक विकास दर सिर्फ 0.6 फीसदी रही थी और विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर 0.8 फीसदी थी।"
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा कि मार्च के आंकड़े से पता चलता है कि स्थिति मौजूदा कारोबारी साल में बेहतर हो जाएगी।
रंगराजन ने कहा, "साल-दर-साल आधार पर यह उल्लेखनीय वृद्धि है। आर्थिक गिरावट ने निचला स्तर चूम लिया है।"
आलोच्य अवधि में विनिर्माण क्षेत्र में 3.2 फीसदी तेजी रही, जबकि एक साल पहले इसमें 3.6 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। फरवरी में इसमें 2.2 फीसदी तेजी रही थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता मांग में सुस्ती विनिर्माण क्षेत्र के विकास को लगातार प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन वृद्धि 2012-13 में सबसे तेज विकास वाले पांच कारोबारी गतिविधियों तक ही सिमटी रही। इसलिए निकट भविष्य में विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास की कोई संभावना नहीं है।" मार्च में बिजली क्षेत्र में भी स्वस्थ्य विकास देखा गया, जबकि खनन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में वर्ष की समाप्ति की तरफ कुछ सुधार नजर आया, पर औसत दर कम ही रही।
केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक औद्योगिक उत्पादन में मार्च 2013 में 2.5 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। पिछले साल मार्च में औद्योगिक उत्पादन में 2.8 फीसदी गिरावट रही थी।
31 मार्च को समाप्त कारोबारी वर्ष के लिए दर्ज एक फीसदी औद्योगिक उत्पादन विकास दर 1991-92 के बाद से सबसे कम है, जब यह दर 0.6 फीसदी रही थी। 2011-12 में यह दर 2.9 फीसदी थी।
आईआईपी में तीन-चौथाई योगदान करने वाले विनिर्माण क्षेत्र सबसे बड़ा खेल बिगाड़ने वाला साबित हुआ। इसने आर्थिक विकास को काफी प्रभावित किया है। 2012-13 में आर्थिक विकास दर करीब पांच फीसदी रहने का अनुमान है, जो एक दशक का निचला स्तर है। पिछले कारोबारी वर्ष में विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि दर सिर्फ 1.2 फीसदी रही।
क्रिसिल रिसर्च ने एक बयान में कहा, "मौजूदा स्थिति 1991-92 की यादा ताजा करती है, जब औद्योगिक विकास दर सिर्फ 0.6 फीसदी रही थी और विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर 0.8 फीसदी थी।"
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा कि मार्च के आंकड़े से पता चलता है कि स्थिति मौजूदा कारोबारी साल में बेहतर हो जाएगी।
रंगराजन ने कहा, "साल-दर-साल आधार पर यह उल्लेखनीय वृद्धि है। आर्थिक गिरावट ने निचला स्तर चूम लिया है।"
आलोच्य अवधि में विनिर्माण क्षेत्र में 3.2 फीसदी तेजी रही, जबकि एक साल पहले इसमें 3.6 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। फरवरी में इसमें 2.2 फीसदी तेजी रही थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता मांग में सुस्ती विनिर्माण क्षेत्र के विकास को लगातार प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन वृद्धि 2012-13 में सबसे तेज विकास वाले पांच कारोबारी गतिविधियों तक ही सिमटी रही। इसलिए निकट भविष्य में विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास की कोई संभावना नहीं है।" मार्च में बिजली क्षेत्र में भी स्वस्थ्य विकास देखा गया, जबकि खनन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक औद्योगिक उत्पादन में मार्च 2013 में 2.5 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। पिछले साल मार्च में औद्योगिक उत्पादन में 2.8 फीसदी गिरावट रही थी।
31 मार्च को समाप्त कारोबारी वर्ष के लिए दर्ज एक फीसदी औद्योगिक उत्पादन विकास दर 1991-92 के बाद से सबसे कम है, जब यह दर 0.6 फीसदी रही थी। 2011-12 में यह दर 2.9 फीसदी थी।
आईआईपी में तीन-चौथाई योगदान करने वाले विनिर्माण क्षेत्र सबसे बड़ा खेल बिगाड़ने वाला साबित हुआ। इसने आर्थिक विकास को काफी प्रभावित किया है। 2012-13 में आर्थिक विकास दर करीब पांच फीसदी रहने का अनुमान है, जो एक दशक का निचला स्तर है। पिछले कारोबारी वर्ष में विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि दर सिर्फ 1.2 फीसदी रही।
क्रिसिल रिसर्च ने एक बयान में कहा, "मौजूदा स्थिति 1991-92 की यादा ताजा करती है, जब औद्योगिक विकास दर सिर्फ 0.6 फीसदी रही थी और विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर 0.8 फीसदी थी।"
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा कि मार्च के आंकड़े से पता चलता है कि स्थिति मौजूदा कारोबारी साल में बेहतर हो जाएगी।
रंगराजन ने कहा, "साल-दर-साल आधार पर यह उल्लेखनीय वृद्धि है। आर्थिक गिरावट ने निचला स्तर चूम लिया है।"
आलोच्य अवधि में विनिर्माण क्षेत्र में 3.2 फीसदी तेजी रही, जबकि एक साल पहले इसमें 3.6 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। फरवरी में इसमें 2.2 फीसदी तेजी रही थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता मांग में सुस्ती विनिर्माण क्षेत्र के विकास को लगातार प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन वृद्धि 2012-13 में सबसे तेज विकास वाले पांच कारोबारी गतिविधियों तक ही सिमटी रही। इसलिए निकट भविष्य में विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास की कोई संभावना नहीं है।" मार्च में बिजली क्षेत्र में भी स्वस्थ्य विकास देखा गया, जबकि खनन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
31 मार्च को समाप्त कारोबारी वर्ष के लिए दर्ज एक फीसदी औद्योगिक उत्पादन विकास दर 1991-92 के बाद से सबसे कम है, जब यह दर 0.6 फीसदी रही थी। 2011-12 में यह दर 2.9 फीसदी थी।
आईआईपी में तीन-चौथाई योगदान करने वाले विनिर्माण क्षेत्र सबसे बड़ा खेल बिगाड़ने वाला साबित हुआ। इसने आर्थिक विकास को काफी प्रभावित किया है। 2012-13 में आर्थिक विकास दर करीब पांच फीसदी रहने का अनुमान है, जो एक दशक का निचला स्तर है। पिछले कारोबारी वर्ष में विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि दर सिर्फ 1.2 फीसदी रही।
क्रिसिल रिसर्च ने एक बयान में कहा, "मौजूदा स्थिति 1991-92 की यादा ताजा करती है, जब औद्योगिक विकास दर सिर्फ 0.6 फीसदी रही थी और विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर 0.8 फीसदी थी।"
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा कि मार्च के आंकड़े से पता चलता है कि स्थिति मौजूदा कारोबारी साल में बेहतर हो जाएगी।
रंगराजन ने कहा, "साल-दर-साल आधार पर यह उल्लेखनीय वृद्धि है। आर्थिक गिरावट ने निचला स्तर चूम लिया है।"
आलोच्य अवधि में विनिर्माण क्षेत्र में 3.2 फीसदी तेजी रही, जबकि एक साल पहले इसमें 3.6 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। फरवरी में इसमें 2.2 फीसदी तेजी रही थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता मांग में सुस्ती विनिर्माण क्षेत्र के विकास को लगातार प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन वृद्धि 2012-13 में सबसे तेज विकास वाले पांच कारोबारी गतिविधियों तक ही सिमटी रही। इसलिए निकट भविष्य में विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास की कोई संभावना नहीं है।" मार्च में बिजली क्षेत्र में भी स्वस्थ्य विकास देखा गया, जबकि खनन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
आईआईपी में तीन-चौथाई योगदान करने वाले विनिर्माण क्षेत्र सबसे बड़ा खेल बिगाड़ने वाला साबित हुआ। इसने आर्थिक विकास को काफी प्रभावित किया है। 2012-13 में आर्थिक विकास दर करीब पांच फीसदी रहने का अनुमान है, जो एक दशक का निचला स्तर है। पिछले कारोबारी वर्ष में विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि दर सिर्फ 1.2 फीसदी रही।
क्रिसिल रिसर्च ने एक बयान में कहा, "मौजूदा स्थिति 1991-92 की यादा ताजा करती है, जब औद्योगिक विकास दर सिर्फ 0.6 फीसदी रही थी और विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर 0.8 फीसदी थी।"
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा कि मार्च के आंकड़े से पता चलता है कि स्थिति मौजूदा कारोबारी साल में बेहतर हो जाएगी।
रंगराजन ने कहा, "साल-दर-साल आधार पर यह उल्लेखनीय वृद्धि है। आर्थिक गिरावट ने निचला स्तर चूम लिया है।"
आलोच्य अवधि में विनिर्माण क्षेत्र में 3.2 फीसदी तेजी रही, जबकि एक साल पहले इसमें 3.6 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। फरवरी में इसमें 2.2 फीसदी तेजी रही थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता मांग में सुस्ती विनिर्माण क्षेत्र के विकास को लगातार प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन वृद्धि 2012-13 में सबसे तेज विकास वाले पांच कारोबारी गतिविधियों तक ही सिमटी रही। इसलिए निकट भविष्य में विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास की कोई संभावना नहीं है।" मार्च में बिजली क्षेत्र में भी स्वस्थ्य विकास देखा गया, जबकि खनन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
क्रिसिल रिसर्च ने एक बयान में कहा, "मौजूदा स्थिति 1991-92 की यादा ताजा करती है, जब औद्योगिक विकास दर सिर्फ 0.6 फीसदी रही थी और विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर 0.8 फीसदी थी।"
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा कि मार्च के आंकड़े से पता चलता है कि स्थिति मौजूदा कारोबारी साल में बेहतर हो जाएगी।
रंगराजन ने कहा, "साल-दर-साल आधार पर यह उल्लेखनीय वृद्धि है। आर्थिक गिरावट ने निचला स्तर चूम लिया है।"
आलोच्य अवधि में विनिर्माण क्षेत्र में 3.2 फीसदी तेजी रही, जबकि एक साल पहले इसमें 3.6 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। फरवरी में इसमें 2.2 फीसदी तेजी रही थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता मांग में सुस्ती विनिर्माण क्षेत्र के विकास को लगातार प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन वृद्धि 2012-13 में सबसे तेज विकास वाले पांच कारोबारी गतिविधियों तक ही सिमटी रही। इसलिए निकट भविष्य में विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास की कोई संभावना नहीं है।" मार्च में बिजली क्षेत्र में भी स्वस्थ्य विकास देखा गया, जबकि खनन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा कि मार्च के आंकड़े से पता चलता है कि स्थिति मौजूदा कारोबारी साल में बेहतर हो जाएगी।
रंगराजन ने कहा, "साल-दर-साल आधार पर यह उल्लेखनीय वृद्धि है। आर्थिक गिरावट ने निचला स्तर चूम लिया है।"
आलोच्य अवधि में विनिर्माण क्षेत्र में 3.2 फीसदी तेजी रही, जबकि एक साल पहले इसमें 3.6 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। फरवरी में इसमें 2.2 फीसदी तेजी रही थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता मांग में सुस्ती विनिर्माण क्षेत्र के विकास को लगातार प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन वृद्धि 2012-13 में सबसे तेज विकास वाले पांच कारोबारी गतिविधियों तक ही सिमटी रही। इसलिए निकट भविष्य में विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास की कोई संभावना नहीं है।" मार्च में बिजली क्षेत्र में भी स्वस्थ्य विकास देखा गया, जबकि खनन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
रंगराजन ने कहा, "साल-दर-साल आधार पर यह उल्लेखनीय वृद्धि है। आर्थिक गिरावट ने निचला स्तर चूम लिया है।"
आलोच्य अवधि में विनिर्माण क्षेत्र में 3.2 फीसदी तेजी रही, जबकि एक साल पहले इसमें 3.6 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। फरवरी में इसमें 2.2 फीसदी तेजी रही थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता मांग में सुस्ती विनिर्माण क्षेत्र के विकास को लगातार प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन वृद्धि 2012-13 में सबसे तेज विकास वाले पांच कारोबारी गतिविधियों तक ही सिमटी रही। इसलिए निकट भविष्य में विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास की कोई संभावना नहीं है।" मार्च में बिजली क्षेत्र में भी स्वस्थ्य विकास देखा गया, जबकि खनन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
आलोच्य अवधि में विनिर्माण क्षेत्र में 3.2 फीसदी तेजी रही, जबकि एक साल पहले इसमें 3.6 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। फरवरी में इसमें 2.2 फीसदी तेजी रही थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता मांग में सुस्ती विनिर्माण क्षेत्र के विकास को लगातार प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन वृद्धि 2012-13 में सबसे तेज विकास वाले पांच कारोबारी गतिविधियों तक ही सिमटी रही। इसलिए निकट भविष्य में विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास की कोई संभावना नहीं है।" मार्च में बिजली क्षेत्र में भी स्वस्थ्य विकास देखा गया, जबकि खनन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता मांग में सुस्ती विनिर्माण क्षेत्र के विकास को लगातार प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन वृद्धि 2012-13 में सबसे तेज विकास वाले पांच कारोबारी गतिविधियों तक ही सिमटी रही। इसलिए निकट भविष्य में विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास की कोई संभावना नहीं है।" मार्च में बिजली क्षेत्र में भी स्वस्थ्य विकास देखा गया, जबकि खनन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
बिजली क्षेत्र में उत्पादन आलोच्य महीने में 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी वृद्धि रही थी। फरवरी में इसमें 3.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी।
खनन उत्पादन हालांकि मार्च में 2.9 फीसदी कम रहा, जबकि एक साल पहले भी इसमें 1.1 फीसदी गिरावट रही थी। | संक्षिप्त सारांश: देश का औद्योगिक उत्पादन पिछले कारोबारी साल 2012-13 में एक फीसदी बढ़ा, जो पिछले दो दशकों से कुछ अधिक समय में सबसे कम है। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह बात सामने आई। | 8 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री के दफ़्तर में जब घाटी के हालात को लेकर बैठक हो रही थी, अफ़सर इस बात से ख़ुश थे कि पीछले 24 घंटों में किसी की जान जाने की ख़बर नहीं आई है। तभी सूचना मिली कि काजीगुंड के चुरूट के पास तीन लोग सेना की फायरिंग में मारे गए हैं।
एनडीटीवी को पता चला है कि सेना की बटालियन अपने हेडक्वॉर्टर लौट रही थी जब क़ाफ़िला रुक गया क्योंकि सड़क को ब्लॉक किया गया था। सड़क पर पत्थर रखे हुए थे। उन्हें हटाने के लिए जब सेना के जवान नीचे उतरे, उनपर कुछ लोगों ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। सेना ने अपने बचाव में फायरिंग की जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। मारे जाने वालों में एक महिला भी शामिल है। ये ख़बर मिलते ही सभी अफ़सरों ने अपने अपने इलाक़ों में सुरक्षा बलों को एहतियात बरतने को कहा।
दरअसल ये हादसा तब हुआ जब संसद में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी राजनीतिक पार्टियों को भरोसा दिलाया था कि उन्होंने सभी सुरक्षा बलों को संयम बरतने को कहा है। टिप्पणियां
उधर घाटी में सुरक्षा बलों का कहना है कि सत्ता में बैठे लोगों से उन्हें मिलेजुले संकेत मिल रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, "कभी कहते हैं संयम बरतो, कभी कहते हैं एहतियात बरतो तो कभी कहते हैं गोलियों की परवाह मत करो।" दरअसल घाटी में बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन को लेकर अलग अलग आवाज़ें सुनाई देने लगी हैं जिसे लेकर सुरक्षा बलों में काफ़ी उलझन है।
उधर अलगावादी नेताओं ने घाटी में बंद के ऐलान को 22 जुलाई तक बढ़ा दिया है। हालत ख़राब ना हों इसलिए सुरक्षा बल काफ़ी सचेत रहे हैं। केंद्र ने भी सुरक्षा बलों को अलर्ट रहने को कहा है।
एनडीटीवी को पता चला है कि सेना की बटालियन अपने हेडक्वॉर्टर लौट रही थी जब क़ाफ़िला रुक गया क्योंकि सड़क को ब्लॉक किया गया था। सड़क पर पत्थर रखे हुए थे। उन्हें हटाने के लिए जब सेना के जवान नीचे उतरे, उनपर कुछ लोगों ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। सेना ने अपने बचाव में फायरिंग की जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। मारे जाने वालों में एक महिला भी शामिल है। ये ख़बर मिलते ही सभी अफ़सरों ने अपने अपने इलाक़ों में सुरक्षा बलों को एहतियात बरतने को कहा।
दरअसल ये हादसा तब हुआ जब संसद में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी राजनीतिक पार्टियों को भरोसा दिलाया था कि उन्होंने सभी सुरक्षा बलों को संयम बरतने को कहा है। टिप्पणियां
उधर घाटी में सुरक्षा बलों का कहना है कि सत्ता में बैठे लोगों से उन्हें मिलेजुले संकेत मिल रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, "कभी कहते हैं संयम बरतो, कभी कहते हैं एहतियात बरतो तो कभी कहते हैं गोलियों की परवाह मत करो।" दरअसल घाटी में बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन को लेकर अलग अलग आवाज़ें सुनाई देने लगी हैं जिसे लेकर सुरक्षा बलों में काफ़ी उलझन है।
उधर अलगावादी नेताओं ने घाटी में बंद के ऐलान को 22 जुलाई तक बढ़ा दिया है। हालत ख़राब ना हों इसलिए सुरक्षा बल काफ़ी सचेत रहे हैं। केंद्र ने भी सुरक्षा बलों को अलर्ट रहने को कहा है।
दरअसल ये हादसा तब हुआ जब संसद में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी राजनीतिक पार्टियों को भरोसा दिलाया था कि उन्होंने सभी सुरक्षा बलों को संयम बरतने को कहा है। टिप्पणियां
उधर घाटी में सुरक्षा बलों का कहना है कि सत्ता में बैठे लोगों से उन्हें मिलेजुले संकेत मिल रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, "कभी कहते हैं संयम बरतो, कभी कहते हैं एहतियात बरतो तो कभी कहते हैं गोलियों की परवाह मत करो।" दरअसल घाटी में बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन को लेकर अलग अलग आवाज़ें सुनाई देने लगी हैं जिसे लेकर सुरक्षा बलों में काफ़ी उलझन है।
उधर अलगावादी नेताओं ने घाटी में बंद के ऐलान को 22 जुलाई तक बढ़ा दिया है। हालत ख़राब ना हों इसलिए सुरक्षा बल काफ़ी सचेत रहे हैं। केंद्र ने भी सुरक्षा बलों को अलर्ट रहने को कहा है।
उधर घाटी में सुरक्षा बलों का कहना है कि सत्ता में बैठे लोगों से उन्हें मिलेजुले संकेत मिल रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, "कभी कहते हैं संयम बरतो, कभी कहते हैं एहतियात बरतो तो कभी कहते हैं गोलियों की परवाह मत करो।" दरअसल घाटी में बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन को लेकर अलग अलग आवाज़ें सुनाई देने लगी हैं जिसे लेकर सुरक्षा बलों में काफ़ी उलझन है।
उधर अलगावादी नेताओं ने घाटी में बंद के ऐलान को 22 जुलाई तक बढ़ा दिया है। हालत ख़राब ना हों इसलिए सुरक्षा बल काफ़ी सचेत रहे हैं। केंद्र ने भी सुरक्षा बलों को अलर्ट रहने को कहा है।
उधर अलगावादी नेताओं ने घाटी में बंद के ऐलान को 22 जुलाई तक बढ़ा दिया है। हालत ख़राब ना हों इसलिए सुरक्षा बल काफ़ी सचेत रहे हैं। केंद्र ने भी सुरक्षा बलों को अलर्ट रहने को कहा है। | सत्ता में बैठे लोगों से सुरक्षा बलों को मिलेजुले संकेत मिल रहे हैं
अलगावादी नेताओं ने घाटी में बंद के ऐलान को 22 जुलाई तक बढ़ाया
बीजेपी-पीडीपी के गठबंधन को लेकर अलग अलग आवाज़ें सुनाई देने लगी हैं | 6 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन ने हाल ही में अभिनेत्री जिया खान द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि वह कभी नहीं समझ सकीं कि आखिर लोग अपने ही जीवन की आहूति क्यों दे देते हैं।टिप्पणियां
अपनी आगामी फिल्म 'घनचक्कर' का प्रचार करने गुरुवार को यहां के पार्क होटल में आईं विद्या बालन ने कार्यक्रम से इतर कहा, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं आशा करती हूं कि अब किसी को अपना जीवन देने की जरूरत न पड़े। मैं कभी नहीं समझ सकी कि लोगों के पास इतनी हिम्मत आती कैसे है या कोई अपनी हिम्मत इस कदर कैसे हार सकता है, क्योंकि मैं कभी नहीं समझ पाई कि आखिर लोग आत्महत्या क्यों करते हैं.. मैं इसको लेकर बहुत दुखी हूं।
उल्लेखनीय है कि इंग्लैंड में जन्मी और पली बढ़ीं 25 वर्षीय अभिनेत्री जिया खान मुंबई के जुहू इलाके में अपने फ्लैट के कमरे में तीन जून को मृत पाई गई थीं।
अपनी आगामी फिल्म 'घनचक्कर' का प्रचार करने गुरुवार को यहां के पार्क होटल में आईं विद्या बालन ने कार्यक्रम से इतर कहा, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं आशा करती हूं कि अब किसी को अपना जीवन देने की जरूरत न पड़े। मैं कभी नहीं समझ सकी कि लोगों के पास इतनी हिम्मत आती कैसे है या कोई अपनी हिम्मत इस कदर कैसे हार सकता है, क्योंकि मैं कभी नहीं समझ पाई कि आखिर लोग आत्महत्या क्यों करते हैं.. मैं इसको लेकर बहुत दुखी हूं।
उल्लेखनीय है कि इंग्लैंड में जन्मी और पली बढ़ीं 25 वर्षीय अभिनेत्री जिया खान मुंबई के जुहू इलाके में अपने फ्लैट के कमरे में तीन जून को मृत पाई गई थीं।
उल्लेखनीय है कि इंग्लैंड में जन्मी और पली बढ़ीं 25 वर्षीय अभिनेत्री जिया खान मुंबई के जुहू इलाके में अपने फ्लैट के कमरे में तीन जून को मृत पाई गई थीं। | विद्या बालन ने कहा, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं आशा करती हूं कि अब किसी को अपना जीवन देने की जरूरत न पड़े। | 1 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बहुप्रतीक्षित लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक 2011 मंगलवार को लोकसभा में देर रात तक चली बहस के बाद संशोधनों के साथ ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसपर मतदान से पहले समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और वामपंथी दलों के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। लोकसभा में लोकपाल विधेयक पारित कराने के लिए मंगलवार रात होने वाले मतदान से पूर्व समाजवादी पार्टी (सपा) के 43 सदस्यों और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सदस्यों ने सदन से बहिगर्मन किया। दोनों पार्टियों के सदस्यों ने सदन से बहिगर्मन के दौरान कहा कि भ्रष्टाचार से सख्ती से निपटने के लिए प्रभावी लोकपाल विधेयक के लिए सरकार उनके सुझावों पर तवज्जो नहीं दे रही है। अब इस विधेयक पर बुधवार को राज्यसभा में चर्चा होगी। राज्यसभा से इस विधेयक के पारित होने के बाद इसे कानून का रूप दिए जाने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद ही यह विधेयक कानून का रूप ले सकेगा। | यह एक सारांश है: बहुप्रतीक्षित लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक 2011 लोकसभा में देर रात तक चली बहस के बाद संशोधनों के साथ ध्वनिमत से पारित कर दिया। | 16 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तरी इराकी शहर किरकुक में रविवार को एक आत्मघाती हमलावर ने कार बम विस्फोट कर दिया और फिर बंदूकधारियों ने पुलिस मुख्यालय में घुसने की कोशिश की, जिससे करीब 30 लोग मारे गए तथा लगभग 70 घायल हो गए।
शहर के आपात सेवा विभाग के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल नाताह मोहम्मद साबर ने कहा कि आतंकवादियों ने परिसर को नियंत्रण में लेने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे। उन्होंने बताया कि हमलावर सुबह शहर के मध्य में पहुंचे। आतंकवादियों के पास बंदूकें, ग्रेनेड और आत्मघाती जैकेट थे।टिप्पणियां
कार बम विस्फोट के बाद जब वहां अफरातफरी मच गई, तो आतंकियों ने पुलिस मुख्यालय में घुसने की कोशिश की। साबर ने कहा कि हमले में जहां कई लोग हताहत हुए हैं, वहीं आसपास की इमारतों को भी काफी नुकसान हुआ है।
इस हमले से इराक में पिछले कुछ दिनों से फैली शांति खत्म हो गई है। किसी भी गुट ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इराक में अल कायदा के मुख्य गुट सहित सुन्नी आतंकवादी अक्सर सुरक्षा बलों और सरकार को निशाना बनाते रहते हैं।
शहर के आपात सेवा विभाग के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल नाताह मोहम्मद साबर ने कहा कि आतंकवादियों ने परिसर को नियंत्रण में लेने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे। उन्होंने बताया कि हमलावर सुबह शहर के मध्य में पहुंचे। आतंकवादियों के पास बंदूकें, ग्रेनेड और आत्मघाती जैकेट थे।टिप्पणियां
कार बम विस्फोट के बाद जब वहां अफरातफरी मच गई, तो आतंकियों ने पुलिस मुख्यालय में घुसने की कोशिश की। साबर ने कहा कि हमले में जहां कई लोग हताहत हुए हैं, वहीं आसपास की इमारतों को भी काफी नुकसान हुआ है।
इस हमले से इराक में पिछले कुछ दिनों से फैली शांति खत्म हो गई है। किसी भी गुट ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इराक में अल कायदा के मुख्य गुट सहित सुन्नी आतंकवादी अक्सर सुरक्षा बलों और सरकार को निशाना बनाते रहते हैं।
कार बम विस्फोट के बाद जब वहां अफरातफरी मच गई, तो आतंकियों ने पुलिस मुख्यालय में घुसने की कोशिश की। साबर ने कहा कि हमले में जहां कई लोग हताहत हुए हैं, वहीं आसपास की इमारतों को भी काफी नुकसान हुआ है।
इस हमले से इराक में पिछले कुछ दिनों से फैली शांति खत्म हो गई है। किसी भी गुट ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इराक में अल कायदा के मुख्य गुट सहित सुन्नी आतंकवादी अक्सर सुरक्षा बलों और सरकार को निशाना बनाते रहते हैं।
इस हमले से इराक में पिछले कुछ दिनों से फैली शांति खत्म हो गई है। किसी भी गुट ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इराक में अल कायदा के मुख्य गुट सहित सुन्नी आतंकवादी अक्सर सुरक्षा बलों और सरकार को निशाना बनाते रहते हैं। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: उत्तरी इराकी शहर किरकुक में रविवार को एक आत्मघाती हमलावर ने कार बम विस्फोट कर दिया और फिर बंदूकधारियों ने पुलिस मुख्यालय में घुसने की कोशिश की, जिससे करीब 30 लोग मारे गए तथा लगभग 70 घायल हो गए। | 19 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: जम्मू कश्मीर की एक अदालत ने कठुआ में 2018 में एक बालिका के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले की जांच करने वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) के छह सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किये जाने के मंगलवार को पुलिस को निर्देश दिये. अदालत ने पुलिस को एसआईटी के उन छह सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किये जाने के निर्देश दिये जिन्होंने 2018 में कठुआ के एक गांव में आठ वर्षीय एक बालिका के साथ बलात्कार और हत्या मामले की जांच की थी और गवाहों को झूठे बयान देने के लिए कथित तौर पर उनका शोषण किया था और उन्हें विवश किया.
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रेम सागर ने मामले के गवाहों सचिन शर्मा, नीरज शर्मा और साहिल शर्मा की एक याचिका पर जम्मू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को निर्देश देते हुए कहा कि इन छह लोगों के खिलाफ संज्ञेय अपराध बनता है. अदालत ने तत्कालीन एसएसपी आर के जल्ला (अब सेवानिवृत्त), एएसपी पीरजादा नाविद, पुलिस उपाधीक्षकों शतम्बरी शर्मा और निसार हुसैन, पुलिस की अपराध शाखा के उप निरीक्षक उर्फन वानी और केवल किशोर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिये और जम्मू के एसएसपी से 11 नवम्बर को मामले की अगली सुनवाई पर अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा.
जिला एवं सत्र न्यायाधीश तेजविंदर सिंह ने इस वर्ष जून में तीन मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी जबकि मामले में सबूत मिटाने के लिए अन्य तीन को पांच वर्ष जेल की सजा सुनाई थी. | यहाँ एक सारांश है:कठुआ केस की जांच करने वाली SIT टीम पर उठे
आरोप है कि गवाहों को झूठे बयान देने के लिए किया विवश
छह सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज | 15 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: राष्ट्रीय राजधानी के एक सरकारी पुनर्वास केंद्र से शुक्रवार को फरार हुए कम से कम 33 किशोरों में से 14 किशोरों को पकड़कर वापस सुधार पहुंचा दिया गया है। गृह पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि किशोर अपराधी शनिवार को उत्तरी दिल्ली के मुखर्जी नगर स्थित सरकारी पुनर्वास केंद्र से फरार हो गए थे। पुनर्वास केंद्र में कुल 127 किशोर थे।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "उनमें से हम 14 किशोरों को दबोचने में कामयाब रहे। कम से कम 19 किशोर अभी भी फरार हैं, और हम उनकी तलाश कर रहे हैं।"
पुलिस अधिकारी ने बताया कि किशोरों ने शनिवार को देर शाम लगभग 8.30 बजे उग्र हो उठे और तोड़फोड़ करनी शुरू कर दी तथा रातभर उपद्रव मचाते रहे।
अधिकारी ने बताया कि किशोर पहले रसोईघर में गए और वहां आग लगा दी। इसके बाद वे रसोई गैस सिलेंडर लेकर छत पर गए और पुलिस दल पर पथराव करना शुरू कर दिया। टिप्पणियां
पुलिस अधिकारी ने बताया, "वे सिलेंडर में आग लगा देने की धमकी दे रहे थे। हम किसी तरह रविवार की सुबह तक स्थिति पर नियंत्रण पा सके।"
अधिकारी के अनुसार, कुछ किशोरों को मजनूं का टीला स्थिति किशोर सुधार गृह से एक महीने पहले यहां लाया गया था, क्योंकि वे वहां अपने साथी किशोरों को कथित तौर पर उत्पीड़ित कर रहे थे।
पुलिस ने बताया कि किशोर अपराधी शनिवार को उत्तरी दिल्ली के मुखर्जी नगर स्थित सरकारी पुनर्वास केंद्र से फरार हो गए थे। पुनर्वास केंद्र में कुल 127 किशोर थे।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "उनमें से हम 14 किशोरों को दबोचने में कामयाब रहे। कम से कम 19 किशोर अभी भी फरार हैं, और हम उनकी तलाश कर रहे हैं।"
पुलिस अधिकारी ने बताया कि किशोरों ने शनिवार को देर शाम लगभग 8.30 बजे उग्र हो उठे और तोड़फोड़ करनी शुरू कर दी तथा रातभर उपद्रव मचाते रहे।
अधिकारी ने बताया कि किशोर पहले रसोईघर में गए और वहां आग लगा दी। इसके बाद वे रसोई गैस सिलेंडर लेकर छत पर गए और पुलिस दल पर पथराव करना शुरू कर दिया। टिप्पणियां
पुलिस अधिकारी ने बताया, "वे सिलेंडर में आग लगा देने की धमकी दे रहे थे। हम किसी तरह रविवार की सुबह तक स्थिति पर नियंत्रण पा सके।"
अधिकारी के अनुसार, कुछ किशोरों को मजनूं का टीला स्थिति किशोर सुधार गृह से एक महीने पहले यहां लाया गया था, क्योंकि वे वहां अपने साथी किशोरों को कथित तौर पर उत्पीड़ित कर रहे थे।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "उनमें से हम 14 किशोरों को दबोचने में कामयाब रहे। कम से कम 19 किशोर अभी भी फरार हैं, और हम उनकी तलाश कर रहे हैं।"
पुलिस अधिकारी ने बताया कि किशोरों ने शनिवार को देर शाम लगभग 8.30 बजे उग्र हो उठे और तोड़फोड़ करनी शुरू कर दी तथा रातभर उपद्रव मचाते रहे।
अधिकारी ने बताया कि किशोर पहले रसोईघर में गए और वहां आग लगा दी। इसके बाद वे रसोई गैस सिलेंडर लेकर छत पर गए और पुलिस दल पर पथराव करना शुरू कर दिया। टिप्पणियां
पुलिस अधिकारी ने बताया, "वे सिलेंडर में आग लगा देने की धमकी दे रहे थे। हम किसी तरह रविवार की सुबह तक स्थिति पर नियंत्रण पा सके।"
अधिकारी के अनुसार, कुछ किशोरों को मजनूं का टीला स्थिति किशोर सुधार गृह से एक महीने पहले यहां लाया गया था, क्योंकि वे वहां अपने साथी किशोरों को कथित तौर पर उत्पीड़ित कर रहे थे।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि किशोरों ने शनिवार को देर शाम लगभग 8.30 बजे उग्र हो उठे और तोड़फोड़ करनी शुरू कर दी तथा रातभर उपद्रव मचाते रहे।
अधिकारी ने बताया कि किशोर पहले रसोईघर में गए और वहां आग लगा दी। इसके बाद वे रसोई गैस सिलेंडर लेकर छत पर गए और पुलिस दल पर पथराव करना शुरू कर दिया। टिप्पणियां
पुलिस अधिकारी ने बताया, "वे सिलेंडर में आग लगा देने की धमकी दे रहे थे। हम किसी तरह रविवार की सुबह तक स्थिति पर नियंत्रण पा सके।"
अधिकारी के अनुसार, कुछ किशोरों को मजनूं का टीला स्थिति किशोर सुधार गृह से एक महीने पहले यहां लाया गया था, क्योंकि वे वहां अपने साथी किशोरों को कथित तौर पर उत्पीड़ित कर रहे थे।
अधिकारी ने बताया कि किशोर पहले रसोईघर में गए और वहां आग लगा दी। इसके बाद वे रसोई गैस सिलेंडर लेकर छत पर गए और पुलिस दल पर पथराव करना शुरू कर दिया। टिप्पणियां
पुलिस अधिकारी ने बताया, "वे सिलेंडर में आग लगा देने की धमकी दे रहे थे। हम किसी तरह रविवार की सुबह तक स्थिति पर नियंत्रण पा सके।"
अधिकारी के अनुसार, कुछ किशोरों को मजनूं का टीला स्थिति किशोर सुधार गृह से एक महीने पहले यहां लाया गया था, क्योंकि वे वहां अपने साथी किशोरों को कथित तौर पर उत्पीड़ित कर रहे थे।
पुलिस अधिकारी ने बताया, "वे सिलेंडर में आग लगा देने की धमकी दे रहे थे। हम किसी तरह रविवार की सुबह तक स्थिति पर नियंत्रण पा सके।"
अधिकारी के अनुसार, कुछ किशोरों को मजनूं का टीला स्थिति किशोर सुधार गृह से एक महीने पहले यहां लाया गया था, क्योंकि वे वहां अपने साथी किशोरों को कथित तौर पर उत्पीड़ित कर रहे थे।
अधिकारी के अनुसार, कुछ किशोरों को मजनूं का टीला स्थिति किशोर सुधार गृह से एक महीने पहले यहां लाया गया था, क्योंकि वे वहां अपने साथी किशोरों को कथित तौर पर उत्पीड़ित कर रहे थे। | सारांश: राष्ट्रीय राजधानी के एक सरकारी पुनर्वास केंद्र से शुक्रवार को फरार हुए कम से कम 33 किशोरों में से 14 किशोरों को पकड़कर वापस सुधार पहुंचा दिया गया है। गृह पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। | 31 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली ने शुक्रवार को कहा कि यदि उनकी पार्टी अगले लोकसभा चुनाव में सत्ता में आई तो हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को आफसेट साझेदार के तौर पर समायोजित किया जाएगा और अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस को राफेल सौदे से बाहर कर दिया जाएगा. मोइली ने कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने पर राफेल सौदा रद्द किए जाने से इनकार किया.
मोइली ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जब हमारी सरकार आएगी, हम आफसेट साझेदार के तौर पर एचएएल का समर्थन करेंगे...निश्चित तौर पर हम इसको लेकर प्रतिबद्ध हैं.'' उन्होंने कहा, ‘‘राफेल जेट में हमारा भरोसा है...यह अच्छा है...इसे रद्द नहीं किया जा सकता...यह हमारी ही संकल्पना है, हमने उसे एचएएल के साथ ही अंतिम रूप दिया था.''
उन्होंने रक्षा सौदे पर पार्टी के रुख को लेकर यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी लड़ाकू विमान के खिलाफ नहीं बल्कि रक्षा सौदे की आड़ में किसी के द्वारा ‘‘गैरकानूनी लाभ'' के खिलाफ है. यह पूछे जाने पर कि क्या रिलायंस राफेल में आफसेट साझेदार के तौर पर बाहर होगी, उन्होंने उल्टा सवाल किया, ‘‘वह कंपनी अंदर कैसे रह सकती है?'' उच्चतम न्यायालय जाने के सवाल पर क्योंकि कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार ने अदालत को ‘‘झूठी सूचना'' दी, मोइली ने कहा कि उनकी मांग एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की है. उन्होंने कहा,‘‘कांग्रेस बहुत स्पष्ट है कि मात्र एक संयुक्त संसदीय समिति राफेल सौदे में जांच पड़ताल करने में सक्षम होगी...हम उच्चतम न्यायालय नहीं जा रहे हैं...हमने पूर्व में भी न्यायालय में अर्जी दायर नहीं की थी.''
पूर्व में कांग्रेस नीत सरकारों द्वारा संयुक्त संसदीय समिति गठित किये जाने और उनका सामना करने को याद करते हुए मोइली ने कहा कि भाजपा सरकार सच्चाई छुपाना चाहती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस पर भारत में प्रत्येक संस्थान को कमजोर करने का आरोप लगाए जाने पर मोइली ने कहा कि यह एक ‘‘बड़ा मजाक'' है. भाजपा की संसद में चर्चा की मांग पर कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा संसदीय प्रक्रियाओं की मूलभूत विशेषताएं नहीं जानती. उन्होंने कहा, ‘‘एक जेपीसी मामले की जांच कर सकती है. सौदे पर चर्चा पहले ही हो चुकी है. वे और क्या चर्चा चाहते हैं?''
भारतीय वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ के खिलाफ उनके आरोपों पर मोइली ने कहा, ‘‘यह कहना सही नहीं है कि मैंने उन्हें झूठा कहा...एक टेलीविजन चैनल ने उसे संदर्भ से बाहर लिया.'' मोइली ने कहा, ‘‘मैंने उनसे पूछा कि क्या अच्छा है...मेरा मानना है कि ऐसे किसी मामले में सशस्त्र बलों या प्रमुखों किसी को भी, उन्हें राजनीतिक विवादों में अनावश्यक नहीं पड़ना चाहिए.'' उन्होंने सौदे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से काफी कुछ उद्धृत किया और कहा कि वह ‘‘भाजपा सरकार को क्लीन चिट नहीं था.''
(इनपुट भाषा से) | कहा- राफेल जेट में हमारा भरोसा, इसे रद्द नहीं किया जा सकता
कांग्रेस लड़ाकू विमान के खिलाफ नहीं, गैरकानूनी लाभ के खिलाफ
मात्र एक संयुक्त संसदीय समिति सौदे की जांच पड़ताल करने में सक्षम | 1 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं द्वारा अर्थव्यवस्था के उत्प्रेरक उपायों के महीने भर के भीतर कम किए जाने की संभावना व्यक्त करने से वैश्विक बाजार में सोने में गिरावट आने के बाद स्थानीय बाजारों में भी बिकवाली दबाव बढ़ गया और लगातार आठवें दिन पीली धातु में गिरावट जारी रही।टिप्पणियां
इस साल सोने की कीमतों में अब तक 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। एमसीएक्स पर सोमवार दोपहर में सोना 1.5 फीसदी से ज्यादा कमजोर होकर 25,420 रुपये के आसपास पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमत चार फीसदी टूटकर 41,000 रुपये के नीचे पहुंच गई।
टेक्निकल एनालिस्ट चिराग कबानी ने एनडीटीवी प्रॉफिट को बताया कि सोना 25,400 के अहम सपोर्ट लेवल पर कारोबार कर रहा है और यदि यह इससे नीचे जाता है, तो फिर इसकी कीमतें मध्यम अवधि में 24,600-23,500 के बीच बनी रह सकती हैं।
इस साल सोने की कीमतों में अब तक 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। एमसीएक्स पर सोमवार दोपहर में सोना 1.5 फीसदी से ज्यादा कमजोर होकर 25,420 रुपये के आसपास पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमत चार फीसदी टूटकर 41,000 रुपये के नीचे पहुंच गई।
टेक्निकल एनालिस्ट चिराग कबानी ने एनडीटीवी प्रॉफिट को बताया कि सोना 25,400 के अहम सपोर्ट लेवल पर कारोबार कर रहा है और यदि यह इससे नीचे जाता है, तो फिर इसकी कीमतें मध्यम अवधि में 24,600-23,500 के बीच बनी रह सकती हैं।
टेक्निकल एनालिस्ट चिराग कबानी ने एनडीटीवी प्रॉफिट को बताया कि सोना 25,400 के अहम सपोर्ट लेवल पर कारोबार कर रहा है और यदि यह इससे नीचे जाता है, तो फिर इसकी कीमतें मध्यम अवधि में 24,600-23,500 के बीच बनी रह सकती हैं। | यहाँ एक सारांश है:एमसीएक्स पर सोमवार दोपहर में सोना 1.5 फीसदी से ज्यादा कमजोर होकर 25,420 रुपये के आसपास पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमत चार फीसदी टूटकर 41,000 रुपये के नीचे पहुंच गई। | 15 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: माकपा से निष्काषित नेता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि मतगणना के प्रारंभिक रुझानों से मिले संकेतों के अनुसार पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस गठबंधन सत्ता में आ रही है। सोमनाथ ने कहा, रुझान स्पष्ट हैं और ऐसा लगता है कि विपक्ष सत्ता में आ रहा है। उन्होंने कहा कि रुझानों से परिणाम प्रदर्शित हो रहे हैं और माकपा नीत वाममोर्चा का इससे उबर पाना कठिन है। 2008 में मनमोहन सिंह सरकार के विश्वास मत के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए माकपा के इस वरिष्ठ नेता को पार्टी से निष्काषित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, यह बात पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ही साफ हो गई थी, हालांकि वाममोर्चा ने इसको पाटने का काफी प्रयास किया। पार्टी से निकाले जाने के बावजूद सोमनाथ ने दमदम सीट पर राज्य के आवास मंत्री गौतम देव के अलावा माकपा उम्मीदवार फौद हलीम और सतरूप घोष के लिए चुनाव प्रचार किया था। | यहाँ एक सारांश है:माकपा से निष्काषित नेता सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि रुझानों से परिणाम प्रदर्शित हो रहे हैं और माकपा नीत वाममोर्चा का इससे उबर पाना कठिन है। | 15 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: विश्व की तीसरी वरीयता प्राप्त महिला स्टार भारत की सायना नेहवाल और पुरुष खिलाड़ी पारुपल्ली कश्यप शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप के एकल वर्ग के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गए हैं। साथ ही भारतीय खिलाड़ी पीवी संधु ने भी क्वार्टर-फाइनल में जगह बनाई है। संधु ने पूर्व विश्व नंबर एक खिलाड़ी यिहान वैंग को हराया।
टूर्नामेंट की तीसरी वरीय खिलाड़ी सायना ने गुरुवार को टियांगे इंडोर स्टेडियम में खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मैच में 15वीं वरीय थाईलैंड की बी पोर्नटिप को 52 मिनट में 18-21, 21-16, 21-14 से हराया। कश्यप ने तीसरे दौर के मुकाबले में छठे वरीय हांगकांग के यू हू को पराजित किया।
सायना को पहले दौर में बाई मिला था और दूसरे दौर में सायना ने बुधवार को रूस की ओग्ला गोलोवानोवा को 21-5, 21-4 से हराया था। अपने दूसरे मैच में सायना ने शानदार खेल दिखाया था, लेकिन पोर्नटिप के खिलाफ वह पहले गेम में अपने खेल का स्तर बरकरार नहीं रख सकीं और हार को मजबूर हुईं।
इसके बाद सायना ने अपना स्तर सुधार लिया और उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए अगले दो गेम जीतकर मैच अपने नाम किया। अंतिम-8 दौर में सायना का सामना कोरिया की इयोन जू बेई से होगा। बेई ने तीसरे दौर में जापान की सायाकी ताकाहाशी को हराया।
टूर्नामेंट की 13वीं वरीय बेई और सायना के बीच इससे पहले सात बार भिड़ंत हुई है। पांच बार सायना विजयी रही हैं जबकि दो बार बेई ने जीत हासिल की है। अंतिम बार सायना ने बेई को 2012 डेनमार्क ओपन में हराया था।
बीते साल लंदन ओलिम्पिक में कांस्य जीत चुकीं सायना अब विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने से मात्र एक कदम दूर हैं। सायना 2009, 2010 और 2011 में विश्व चैम्पियनशिप में अंतिम-8 दौर तक का सफर तय कर चुकी हैं।टिप्पणियां
कश्यप ने टूर्नामेंट उलटफेर करते हुए हू को 21-13, 21-16 से हराया। यह मैच 37 मिनट चला। 13वें वरीय कश्यप और हू के बीच यह तीसरी भिड़ंत थी। बीते दो मौकों पर हू ने बाजी मारी थी।
अगले दौर में कश्यप का सामना तीसरे वरीय चीन के पेंग दू के साथ होगा। पेंग को हराने की सूरत में कश्यप भी अपने लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेंगे। पेंग और कश्यप के बीच दूसरी भिड़ंत होगी। बीती मुलाकात में पेंग की जीत हुई है।
टूर्नामेंट की तीसरी वरीय खिलाड़ी सायना ने गुरुवार को टियांगे इंडोर स्टेडियम में खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मैच में 15वीं वरीय थाईलैंड की बी पोर्नटिप को 52 मिनट में 18-21, 21-16, 21-14 से हराया। कश्यप ने तीसरे दौर के मुकाबले में छठे वरीय हांगकांग के यू हू को पराजित किया।
सायना को पहले दौर में बाई मिला था और दूसरे दौर में सायना ने बुधवार को रूस की ओग्ला गोलोवानोवा को 21-5, 21-4 से हराया था। अपने दूसरे मैच में सायना ने शानदार खेल दिखाया था, लेकिन पोर्नटिप के खिलाफ वह पहले गेम में अपने खेल का स्तर बरकरार नहीं रख सकीं और हार को मजबूर हुईं।
इसके बाद सायना ने अपना स्तर सुधार लिया और उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए अगले दो गेम जीतकर मैच अपने नाम किया। अंतिम-8 दौर में सायना का सामना कोरिया की इयोन जू बेई से होगा। बेई ने तीसरे दौर में जापान की सायाकी ताकाहाशी को हराया।
टूर्नामेंट की 13वीं वरीय बेई और सायना के बीच इससे पहले सात बार भिड़ंत हुई है। पांच बार सायना विजयी रही हैं जबकि दो बार बेई ने जीत हासिल की है। अंतिम बार सायना ने बेई को 2012 डेनमार्क ओपन में हराया था।
बीते साल लंदन ओलिम्पिक में कांस्य जीत चुकीं सायना अब विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने से मात्र एक कदम दूर हैं। सायना 2009, 2010 और 2011 में विश्व चैम्पियनशिप में अंतिम-8 दौर तक का सफर तय कर चुकी हैं।टिप्पणियां
कश्यप ने टूर्नामेंट उलटफेर करते हुए हू को 21-13, 21-16 से हराया। यह मैच 37 मिनट चला। 13वें वरीय कश्यप और हू के बीच यह तीसरी भिड़ंत थी। बीते दो मौकों पर हू ने बाजी मारी थी।
अगले दौर में कश्यप का सामना तीसरे वरीय चीन के पेंग दू के साथ होगा। पेंग को हराने की सूरत में कश्यप भी अपने लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेंगे। पेंग और कश्यप के बीच दूसरी भिड़ंत होगी। बीती मुलाकात में पेंग की जीत हुई है।
सायना को पहले दौर में बाई मिला था और दूसरे दौर में सायना ने बुधवार को रूस की ओग्ला गोलोवानोवा को 21-5, 21-4 से हराया था। अपने दूसरे मैच में सायना ने शानदार खेल दिखाया था, लेकिन पोर्नटिप के खिलाफ वह पहले गेम में अपने खेल का स्तर बरकरार नहीं रख सकीं और हार को मजबूर हुईं।
इसके बाद सायना ने अपना स्तर सुधार लिया और उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए अगले दो गेम जीतकर मैच अपने नाम किया। अंतिम-8 दौर में सायना का सामना कोरिया की इयोन जू बेई से होगा। बेई ने तीसरे दौर में जापान की सायाकी ताकाहाशी को हराया।
टूर्नामेंट की 13वीं वरीय बेई और सायना के बीच इससे पहले सात बार भिड़ंत हुई है। पांच बार सायना विजयी रही हैं जबकि दो बार बेई ने जीत हासिल की है। अंतिम बार सायना ने बेई को 2012 डेनमार्क ओपन में हराया था।
बीते साल लंदन ओलिम्पिक में कांस्य जीत चुकीं सायना अब विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने से मात्र एक कदम दूर हैं। सायना 2009, 2010 और 2011 में विश्व चैम्पियनशिप में अंतिम-8 दौर तक का सफर तय कर चुकी हैं।टिप्पणियां
कश्यप ने टूर्नामेंट उलटफेर करते हुए हू को 21-13, 21-16 से हराया। यह मैच 37 मिनट चला। 13वें वरीय कश्यप और हू के बीच यह तीसरी भिड़ंत थी। बीते दो मौकों पर हू ने बाजी मारी थी।
अगले दौर में कश्यप का सामना तीसरे वरीय चीन के पेंग दू के साथ होगा। पेंग को हराने की सूरत में कश्यप भी अपने लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेंगे। पेंग और कश्यप के बीच दूसरी भिड़ंत होगी। बीती मुलाकात में पेंग की जीत हुई है।
इसके बाद सायना ने अपना स्तर सुधार लिया और उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए अगले दो गेम जीतकर मैच अपने नाम किया। अंतिम-8 दौर में सायना का सामना कोरिया की इयोन जू बेई से होगा। बेई ने तीसरे दौर में जापान की सायाकी ताकाहाशी को हराया।
टूर्नामेंट की 13वीं वरीय बेई और सायना के बीच इससे पहले सात बार भिड़ंत हुई है। पांच बार सायना विजयी रही हैं जबकि दो बार बेई ने जीत हासिल की है। अंतिम बार सायना ने बेई को 2012 डेनमार्क ओपन में हराया था।
बीते साल लंदन ओलिम्पिक में कांस्य जीत चुकीं सायना अब विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने से मात्र एक कदम दूर हैं। सायना 2009, 2010 और 2011 में विश्व चैम्पियनशिप में अंतिम-8 दौर तक का सफर तय कर चुकी हैं।टिप्पणियां
कश्यप ने टूर्नामेंट उलटफेर करते हुए हू को 21-13, 21-16 से हराया। यह मैच 37 मिनट चला। 13वें वरीय कश्यप और हू के बीच यह तीसरी भिड़ंत थी। बीते दो मौकों पर हू ने बाजी मारी थी।
अगले दौर में कश्यप का सामना तीसरे वरीय चीन के पेंग दू के साथ होगा। पेंग को हराने की सूरत में कश्यप भी अपने लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेंगे। पेंग और कश्यप के बीच दूसरी भिड़ंत होगी। बीती मुलाकात में पेंग की जीत हुई है।
टूर्नामेंट की 13वीं वरीय बेई और सायना के बीच इससे पहले सात बार भिड़ंत हुई है। पांच बार सायना विजयी रही हैं जबकि दो बार बेई ने जीत हासिल की है। अंतिम बार सायना ने बेई को 2012 डेनमार्क ओपन में हराया था।
बीते साल लंदन ओलिम्पिक में कांस्य जीत चुकीं सायना अब विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने से मात्र एक कदम दूर हैं। सायना 2009, 2010 और 2011 में विश्व चैम्पियनशिप में अंतिम-8 दौर तक का सफर तय कर चुकी हैं।टिप्पणियां
कश्यप ने टूर्नामेंट उलटफेर करते हुए हू को 21-13, 21-16 से हराया। यह मैच 37 मिनट चला। 13वें वरीय कश्यप और हू के बीच यह तीसरी भिड़ंत थी। बीते दो मौकों पर हू ने बाजी मारी थी।
अगले दौर में कश्यप का सामना तीसरे वरीय चीन के पेंग दू के साथ होगा। पेंग को हराने की सूरत में कश्यप भी अपने लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेंगे। पेंग और कश्यप के बीच दूसरी भिड़ंत होगी। बीती मुलाकात में पेंग की जीत हुई है।
बीते साल लंदन ओलिम्पिक में कांस्य जीत चुकीं सायना अब विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने से मात्र एक कदम दूर हैं। सायना 2009, 2010 और 2011 में विश्व चैम्पियनशिप में अंतिम-8 दौर तक का सफर तय कर चुकी हैं।टिप्पणियां
कश्यप ने टूर्नामेंट उलटफेर करते हुए हू को 21-13, 21-16 से हराया। यह मैच 37 मिनट चला। 13वें वरीय कश्यप और हू के बीच यह तीसरी भिड़ंत थी। बीते दो मौकों पर हू ने बाजी मारी थी।
अगले दौर में कश्यप का सामना तीसरे वरीय चीन के पेंग दू के साथ होगा। पेंग को हराने की सूरत में कश्यप भी अपने लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेंगे। पेंग और कश्यप के बीच दूसरी भिड़ंत होगी। बीती मुलाकात में पेंग की जीत हुई है।
कश्यप ने टूर्नामेंट उलटफेर करते हुए हू को 21-13, 21-16 से हराया। यह मैच 37 मिनट चला। 13वें वरीय कश्यप और हू के बीच यह तीसरी भिड़ंत थी। बीते दो मौकों पर हू ने बाजी मारी थी।
अगले दौर में कश्यप का सामना तीसरे वरीय चीन के पेंग दू के साथ होगा। पेंग को हराने की सूरत में कश्यप भी अपने लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेंगे। पेंग और कश्यप के बीच दूसरी भिड़ंत होगी। बीती मुलाकात में पेंग की जीत हुई है।
अगले दौर में कश्यप का सामना तीसरे वरीय चीन के पेंग दू के साथ होगा। पेंग को हराने की सूरत में कश्यप भी अपने लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेंगे। पेंग और कश्यप के बीच दूसरी भिड़ंत होगी। बीती मुलाकात में पेंग की जीत हुई है। | यह एक सारांश है: विश्व की तीसरी वरीयता प्राप्त महिला स्टार भारत की सायना नेहवाल और पुरुष खिलाड़ी पारुपल्ली कश्यप शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप के एकल वर्ग के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गए हैं। साथ ही भारतीय खिलाड़ी पीवी संधु ने भी क्वार्टर-फाइनल में जग | 2 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: Weight Loss: गाजर और टमाटर का सूप घटाएगा आपका वजन! जानें कैसे
चुकंदर आयरन, एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन सी से भरपूर होता है. यह शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखने के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार चुकंदर को डीएनए क्षति को रोकने (Prevent DNA Damage), चयापचय को बढ़ावा देने (Boost Metabolism) और पाचन तंत्र (Digestive System) को मजबूत करने के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. चुकुंदर को यह ठंडी हवाओं से बचने और शरीर में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सर्दियों में डाइट में शामिल करना चाहिए. और हां हम इसे सलाद में इस्तेमाल करने के लिए नहीं कह रहे हैं बल्कि आप इसका हरे सेब के साथ सूप बनाकर पिएं.
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यहां हम आपको बता रहे हैं चुकंदर और हरे सेब से झटपट बनने वाले सूप की रेसिपी. इस सूप को आप सर्दियों के मौसम में तैयार कर सकते हैं और कंबल के साथ इस स्वादिष्ट सूप का आनंद ले सकते हैं. यह फाइबर और विटामिन सी जैसे खनिजों से भरपूर है. यह सूप न केवल आपको लंबे समय तक तृप्त रखेगा. बल्कि कई स्वास्थ्य लाभ भी देगा. इस सूप को बनाने के लिए चुकंदर, प्याज, हरे सेब, पेपरकॉर्न, मक्खन के साथ बनाया जा सकता है. इसे मिर्च के गुच्छे और अजमोद (Parsley) के टॉपिंग के साथ परोसा जाता है. चुकंदर और हरे सेब के सूप की एक गर्म कटोरी इस मौसम में आपकी सर्दियों को खास बना सकती है. इस स्वादिष्ट सूप रेसिपी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. यहां रेसिपी पढें और घर पर इस स्वादिष्ट सूप को बनाना न भूलें.
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चुकंदर का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है.
यहां जानें चुकंदर का सूप बनाने की आसान रेसिपी. | 21 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: सरकार ने शुक्रवार को कहा कि पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह द्वारा गुप्तचरी के लिए आवंटित कोष की बंदरबांट करने पर एक आंतरिक रिपोर्ट को 'भलीभांति परखने' के बाद कार्रवाई करेगी। विपक्षी भाजपा ने आरोप लगाया है कि सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करने के कारण निशाना बनाया जा रहा है।
जनरल सिंह पर की गई सेना की एक जांच के हवाले से मीडिया में रिपोर्ट आई है। मीडिया में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने कोष का दुरुपयोग जम्मू एवं कश्मीर सरकार को अस्थिर करने में किया। इस मामले में चुप्पी साधे रहने के बाद रक्षा मंत्रालय ने चार पैरा का एक बयान जारी किया।
इस मुद्दे को लेकर अनुमान के मुताबिक कांग्रेस और संसद में मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने आ गई है। भाजपा ने इसे राजनीतिक हथकंडा करार दिया और कांग्रेस ने विपक्ष के आरोप को सिरे से खारिज किया है। वामपंथियों ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है।
अपने बयान में रक्षा मंत्री ने कहा है, "सरकार को सेना मुख्यालय से कुछ मुद्दों पर रिपोर्ट मिली है जिससे संबंधित एक पर शुक्रवार को मीडिया के कुछ हिस्सों में खबर आई है।"
रक्षा मंत्रालय ने कहा है, "रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा पर आघात को उजागर किया गया है इसलिए सरकार रिपोर्ट का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद ही कोई फैसला लेगी और आगे की कार्रवक्ष्र अमल में लाएगी।"
बयान में आगे कहा गया है, "सरकार ऐसी अवांछित गतिविधियों को रोकने के उपाय अमल में ला रही है।" बयान में यह भी साफ किया गया है कि मंत्रालय ने 'सेना की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है।'
मीडिया में आई खबर अधिकारियों के एक बोर्ड की जनरल सिंह के कार्यकाल के दौरान सैन्य खुफिया के तकनीकी सेवा प्रभाग (टीएसडी) की जांच रिपोर्ट पर आधारित है।
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि रिपोर्ट में टीडीएस को सीबीआई की निगरानी के दायरे में लाने की मांग की गई है।
समाचार पत्र में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने सेना में शीर्ष स्तर पर उत्तराधिकार में बदलाव लाने के लिए एक एनजीओ को भी पैसे दिए थे।
जनरल सिंह के करीबी लोगों ने इसके बचाव में दलील दी है कि वे इस मुद्दे पर कानूनी उपाय की तलाश कर रहे थे।
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
जनरल सिंह पर की गई सेना की एक जांच के हवाले से मीडिया में रिपोर्ट आई है। मीडिया में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने कोष का दुरुपयोग जम्मू एवं कश्मीर सरकार को अस्थिर करने में किया। इस मामले में चुप्पी साधे रहने के बाद रक्षा मंत्रालय ने चार पैरा का एक बयान जारी किया।
इस मुद्दे को लेकर अनुमान के मुताबिक कांग्रेस और संसद में मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने आ गई है। भाजपा ने इसे राजनीतिक हथकंडा करार दिया और कांग्रेस ने विपक्ष के आरोप को सिरे से खारिज किया है। वामपंथियों ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है।
अपने बयान में रक्षा मंत्री ने कहा है, "सरकार को सेना मुख्यालय से कुछ मुद्दों पर रिपोर्ट मिली है जिससे संबंधित एक पर शुक्रवार को मीडिया के कुछ हिस्सों में खबर आई है।"
रक्षा मंत्रालय ने कहा है, "रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा पर आघात को उजागर किया गया है इसलिए सरकार रिपोर्ट का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद ही कोई फैसला लेगी और आगे की कार्रवक्ष्र अमल में लाएगी।"
बयान में आगे कहा गया है, "सरकार ऐसी अवांछित गतिविधियों को रोकने के उपाय अमल में ला रही है।" बयान में यह भी साफ किया गया है कि मंत्रालय ने 'सेना की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है।'
मीडिया में आई खबर अधिकारियों के एक बोर्ड की जनरल सिंह के कार्यकाल के दौरान सैन्य खुफिया के तकनीकी सेवा प्रभाग (टीएसडी) की जांच रिपोर्ट पर आधारित है।
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि रिपोर्ट में टीडीएस को सीबीआई की निगरानी के दायरे में लाने की मांग की गई है।
समाचार पत्र में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने सेना में शीर्ष स्तर पर उत्तराधिकार में बदलाव लाने के लिए एक एनजीओ को भी पैसे दिए थे।
जनरल सिंह के करीबी लोगों ने इसके बचाव में दलील दी है कि वे इस मुद्दे पर कानूनी उपाय की तलाश कर रहे थे।
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
इस मुद्दे को लेकर अनुमान के मुताबिक कांग्रेस और संसद में मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने आ गई है। भाजपा ने इसे राजनीतिक हथकंडा करार दिया और कांग्रेस ने विपक्ष के आरोप को सिरे से खारिज किया है। वामपंथियों ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है।
अपने बयान में रक्षा मंत्री ने कहा है, "सरकार को सेना मुख्यालय से कुछ मुद्दों पर रिपोर्ट मिली है जिससे संबंधित एक पर शुक्रवार को मीडिया के कुछ हिस्सों में खबर आई है।"
रक्षा मंत्रालय ने कहा है, "रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा पर आघात को उजागर किया गया है इसलिए सरकार रिपोर्ट का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद ही कोई फैसला लेगी और आगे की कार्रवक्ष्र अमल में लाएगी।"
बयान में आगे कहा गया है, "सरकार ऐसी अवांछित गतिविधियों को रोकने के उपाय अमल में ला रही है।" बयान में यह भी साफ किया गया है कि मंत्रालय ने 'सेना की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है।'
मीडिया में आई खबर अधिकारियों के एक बोर्ड की जनरल सिंह के कार्यकाल के दौरान सैन्य खुफिया के तकनीकी सेवा प्रभाग (टीएसडी) की जांच रिपोर्ट पर आधारित है।
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि रिपोर्ट में टीडीएस को सीबीआई की निगरानी के दायरे में लाने की मांग की गई है।
समाचार पत्र में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने सेना में शीर्ष स्तर पर उत्तराधिकार में बदलाव लाने के लिए एक एनजीओ को भी पैसे दिए थे।
जनरल सिंह के करीबी लोगों ने इसके बचाव में दलील दी है कि वे इस मुद्दे पर कानूनी उपाय की तलाश कर रहे थे।
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
अपने बयान में रक्षा मंत्री ने कहा है, "सरकार को सेना मुख्यालय से कुछ मुद्दों पर रिपोर्ट मिली है जिससे संबंधित एक पर शुक्रवार को मीडिया के कुछ हिस्सों में खबर आई है।"
रक्षा मंत्रालय ने कहा है, "रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा पर आघात को उजागर किया गया है इसलिए सरकार रिपोर्ट का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद ही कोई फैसला लेगी और आगे की कार्रवक्ष्र अमल में लाएगी।"
बयान में आगे कहा गया है, "सरकार ऐसी अवांछित गतिविधियों को रोकने के उपाय अमल में ला रही है।" बयान में यह भी साफ किया गया है कि मंत्रालय ने 'सेना की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है।'
मीडिया में आई खबर अधिकारियों के एक बोर्ड की जनरल सिंह के कार्यकाल के दौरान सैन्य खुफिया के तकनीकी सेवा प्रभाग (टीएसडी) की जांच रिपोर्ट पर आधारित है।
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि रिपोर्ट में टीडीएस को सीबीआई की निगरानी के दायरे में लाने की मांग की गई है।
समाचार पत्र में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने सेना में शीर्ष स्तर पर उत्तराधिकार में बदलाव लाने के लिए एक एनजीओ को भी पैसे दिए थे।
जनरल सिंह के करीबी लोगों ने इसके बचाव में दलील दी है कि वे इस मुद्दे पर कानूनी उपाय की तलाश कर रहे थे।
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
रक्षा मंत्रालय ने कहा है, "रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा पर आघात को उजागर किया गया है इसलिए सरकार रिपोर्ट का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद ही कोई फैसला लेगी और आगे की कार्रवक्ष्र अमल में लाएगी।"
बयान में आगे कहा गया है, "सरकार ऐसी अवांछित गतिविधियों को रोकने के उपाय अमल में ला रही है।" बयान में यह भी साफ किया गया है कि मंत्रालय ने 'सेना की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है।'
मीडिया में आई खबर अधिकारियों के एक बोर्ड की जनरल सिंह के कार्यकाल के दौरान सैन्य खुफिया के तकनीकी सेवा प्रभाग (टीएसडी) की जांच रिपोर्ट पर आधारित है।
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि रिपोर्ट में टीडीएस को सीबीआई की निगरानी के दायरे में लाने की मांग की गई है।
समाचार पत्र में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने सेना में शीर्ष स्तर पर उत्तराधिकार में बदलाव लाने के लिए एक एनजीओ को भी पैसे दिए थे।
जनरल सिंह के करीबी लोगों ने इसके बचाव में दलील दी है कि वे इस मुद्दे पर कानूनी उपाय की तलाश कर रहे थे।
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
बयान में आगे कहा गया है, "सरकार ऐसी अवांछित गतिविधियों को रोकने के उपाय अमल में ला रही है।" बयान में यह भी साफ किया गया है कि मंत्रालय ने 'सेना की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है।'
मीडिया में आई खबर अधिकारियों के एक बोर्ड की जनरल सिंह के कार्यकाल के दौरान सैन्य खुफिया के तकनीकी सेवा प्रभाग (टीएसडी) की जांच रिपोर्ट पर आधारित है।
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि रिपोर्ट में टीडीएस को सीबीआई की निगरानी के दायरे में लाने की मांग की गई है।
समाचार पत्र में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने सेना में शीर्ष स्तर पर उत्तराधिकार में बदलाव लाने के लिए एक एनजीओ को भी पैसे दिए थे।
जनरल सिंह के करीबी लोगों ने इसके बचाव में दलील दी है कि वे इस मुद्दे पर कानूनी उपाय की तलाश कर रहे थे।
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
मीडिया में आई खबर अधिकारियों के एक बोर्ड की जनरल सिंह के कार्यकाल के दौरान सैन्य खुफिया के तकनीकी सेवा प्रभाग (टीएसडी) की जांच रिपोर्ट पर आधारित है।
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि रिपोर्ट में टीडीएस को सीबीआई की निगरानी के दायरे में लाने की मांग की गई है।
समाचार पत्र में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने सेना में शीर्ष स्तर पर उत्तराधिकार में बदलाव लाने के लिए एक एनजीओ को भी पैसे दिए थे।
जनरल सिंह के करीबी लोगों ने इसके बचाव में दलील दी है कि वे इस मुद्दे पर कानूनी उपाय की तलाश कर रहे थे।
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि रिपोर्ट में टीडीएस को सीबीआई की निगरानी के दायरे में लाने की मांग की गई है।
समाचार पत्र में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने सेना में शीर्ष स्तर पर उत्तराधिकार में बदलाव लाने के लिए एक एनजीओ को भी पैसे दिए थे।
जनरल सिंह के करीबी लोगों ने इसके बचाव में दलील दी है कि वे इस मुद्दे पर कानूनी उपाय की तलाश कर रहे थे।
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
समाचार पत्र में आई रिपोर्ट के मुताबिक जनरल सिंह ने सेना में शीर्ष स्तर पर उत्तराधिकार में बदलाव लाने के लिए एक एनजीओ को भी पैसे दिए थे।
जनरल सिंह के करीबी लोगों ने इसके बचाव में दलील दी है कि वे इस मुद्दे पर कानूनी उपाय की तलाश कर रहे थे।
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
जनरल सिंह के करीबी लोगों ने इसके बचाव में दलील दी है कि वे इस मुद्दे पर कानूनी उपाय की तलाश कर रहे थे।
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
ले. जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियां ने इस मुद्दे को पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ 'व्यक्तिगत दुश्मनी' साधना करार दिया है।टिप्पणियां
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि गुप्तचरी सेवा के आवंटित कोष का जनरल सिंह द्वारा दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्ट पर 'सरकार सक्रियता से विचार कर रही है' और दोषी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।"
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, "उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि रेवाड़ी की रैली में वे नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर जा बैठे।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है और गलत परंपरा स्थापित कर रही है। पहले से विश्वास टूटा हुआ है और पार्टी को निशाना बनाने की चालाकी छोड़ देनी चाहिए।" | संक्षिप्त पाठ: सरकार ने शुक्रवार को कहा कि पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह द्वारा गुप्तचरी के लिए आवंटित कोष की बंदरबांट करने पर एक आंतरिक रिपोर्ट को 'भलीभांति परखने' के बाद कार्रवाई करेगी। | 30 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी ने बीतते हुए सर्दी के मौसम को रोक लिया है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जहां जोरदार बारिश हुई है वहीं हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में जोरदार बर्फबारी का सिलसिला जारी है. मौसम के इस मिजाज से समूचे उत्तर भारत में तापमान नीचे आ गया है.
दिल्ली में मंगलवार को सुबह कई हिस्सों में भारी बारिश होने की वजह से शहर में जल भराव और प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो गई.
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला समेत राज्य के कई पर्यटन स्थलों जैसे मनाली, कुफरी और नारकंडा में देर रात से मंगलवार सुबह तक कई घंटे बर्फबारी हुई. मौसम विभाग के शिमला के निदेशक मनमोहन सिंह ने कहा कि शिमला में सुबह 8.30 बजे तक पांच सेंटीमीटर बर्फ गिरी. सुबह 8.30 बजे तक मनाली में 5 सेमी, कोठी में 20 सेमी, सलोनी में 6 सेमी और कल्पा में 7.4 सेमी बर्फ गिरी है.
पर्यटक बर्फबारी का लुत्फ लेने के लिए शिमला के ऐतिहासिक रिज और माल रोड पर जमा हो गए. इस बीच राज्य में बीते 24 घंटे के दौरान हुई बारिश और बर्फबारी के चलते शीतलहर तेज हो गई है. घरमूर में सबसे ज्यादा 62.8 मिलीमीटर बारिश हुई. इसके बाद धर्मशाला में 47.4 मिमी, कांगड़ा में 39.6 मिमी, पालमपुर में 32 मिमी, सनौली में 25 मिमी बारिश हुई.
मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को भी कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी होने का अनुमान है. ताजा बर्फबारी और बारिश की वजह से राज्य के ज्यादातर इलाकों में तापमान में गिरावट आई है. डलहौजी और मनाली में न्यूनतम तापमान क्रमश: शून्य से नीचे 1.8 डिग्री सेल्सियस और शून्य से नीचे 1.2 प्रतिशत नीचे पहुंच गया है. मौसम विभाग ने कहा कि शिमला में न्यूनतम तापमान 0.7 डिग्री सेल्सियस और कल्पा में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है.
कश्मीर में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश हुई. इस बीच बर्फबारी और खराब मौसम के चलते जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में वैष्णो देवी तीर्थस्थल में हेलीकॉप्टर और रोपवे सेवाएं मंगलवार को बंद कर दी गईं.
मौसम विभाग के अनुसार श्रीनगर में बीती रात न्यूनतम तापमान शून्य से 0.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया है. दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड में न्यूनतम तापमान 0.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है जबकि नजदीकी कोकेरनाग कस्बे में भी पारा शून्य से नीचे 0.3 डिग्री दर्ज किया गया है. उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा कस्बे में पारा गिरकर शून्य से 0.4 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया है. उत्तरी कश्मीर में स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग में बीती रात तापमान गिरकर शून्य से 4 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा जबकि पहलगाम पर्यटन स्थल में तापमान शून्य से 0.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया.
इस बीच बर्फबारी और खराब मौसम के चलते जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में वैष्णो देवी तीर्थस्थल में हेलीकॉप्टर और रोपवे सेवाएं मंगलवार को बंद कर दी गईं. श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी सिमरनदीप सिंह ने बताया, "बर्फबारी और खराब मौसम की वजह से हेलीकॉप्टर और रोपवे सेवाएं मंगलवार को बंद कर दी गई हैं.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार की सुबह कई हिस्सों में भारी बारिश होने की वजह से शहर में जल भराव और प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो गई. कल रात और आज सुबह भी बारिश होने की वजह से कार्यालय जाने वालों को समस्याओं का सामना करना पड़ा.
उत्तर रेलवे के अनुसार करीब 15 ट्रेनें दो या तीन घंटे के विलंब से चल रही थीं. इसमें हावड़ा-नई दिल्ली पूर्वा एक्सप्रेस, मालदा-दिल्ली जंक्शन फरक्का एक्सप्रेस और मुंबई अमृतसर एक्सप्रेस शामिल है. वहीं पुरी-नई दिल्ली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस छह घंटे के विलंब से चल रही थी.
बारिश से दिल्ली की सड़कें बेहद प्रभावित हुईं. कई स्थानों पर जलभराव की वजह से यातायात का परिचालन प्रभावित हो रहा था. दिल्ली यातायात पुलिस अधिकारी ने बताया कि यातायात निगमबोध घाट से हनुमान मंदिर की ओर जाने वाले सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ. वहीं दक्षिणी दिल्ली में एसएस मार्ग से भाटी माइन्स की ओर जाने वाली सड़क पर भी यातायात प्रभावित रहा.
मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी के अनुसार सफदरजंग वेधशाला में 14.8 मिमी, पालम वेधशाला में 22.8 मिमी, लोधी वेधशाला में 15 मिमी और आया नगर में 26.1 मिमी बारिश दर्ज की गई. अधिकारी ने कहा, ‘‘न्यूनतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री अधिक 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.'' सुबह साढ़े आठ बजे हवा में आर्द्रता का स्तर 100 प्रतिशत दर्ज किया गया.
मौसम वैज्ञानिक ने बुधवार को दिनभर बारिश होने का पूर्वानुमान भी लगाया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार शहर में कुल वायु गुणवत्ता 133 दर्ज किया गया, जो कि ‘मध्यम' श्रेणी में है.
(इनपुट भाषा से) | सारांश: कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में जमकर बर्फबारी
बारिश और बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट
दिल्ली के कई हिस्सों में भारी बारिश, ट्रैफिक जाम | 33 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार को विपक्षी दलों के बीच एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए लिहाज से सोनिया गांधी की लंच पार्टी में तो नहीं पहुंच सके लेकिन उसके एक दिन बाद ही शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी के साथ लंच करने के लिए दिल्ली आ रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लंच पार्टी में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने जदयू प्रतिनिधि भेजा था और पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को शिरकत नहीं कर पाने की वजह बताई थी. दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी मॉरीशस के प्रधानमंत्री अनिरूद्ध जगन्नाथ के सम्मान में लंच का आयोजन करेंगे और उन्होंने इसमें शामिल होने के लिए नीतीश कुमार जैसे वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया है.
शुक्रवार को मोदी सरकार के तीन साल होने पर विपक्षी एकजुटता दिखाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष की तरफ से रखी गई लंच पार्टी में नीतीश कुमार की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी है. उसके बाद पीएम मोदी के कार्यक्रम में शिरकत करने के उनके फैसले के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. दरअसल यह ऐसे समय पर हो रहा है जब कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी दलों के साथ एक महागठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है.
हालांकि पटना में कैबिनेट की बैठक के बाद नीतीश ने कहा कि शुक्रवार के भोज में शामिल न होने का लोग अनावश्यक ही गलत अर्थ लगा रहे हैं जबकि कांग्रेस महासचिव अहमद पटेल को उन्होंने पांच दिन पहले ही बता दिया था कि उनकी पार्टी की तरफ से पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव शामिल होंगे और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा आयोजित बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उसपर उन्होंने अपनी राय बता दी थी. नीतीश कुमार ने कुछ दिनों पूर्व ही ये घोषणा कर दी थी कि राष्ट्रपति चुनाव पर वर्तमान मोदी सरकार को आम सहमति बनाने के लिए पहल करनी चाहिए. और शुक्रवार को बैठक में भी इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया. लेकिन नीतीश ने कहा कि महागठबंधन के सभी फैसले का वो आदर करते हैं.
लेकिन शनिवार को दोपहर के भोजन के बाद नीतीश कुमार ने माना कि उन्होंने अलग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गंगा नदी में गाद की समस्या पर चर्चा के लिए समय मांगा है और उन्हें सूचना दी गयी है कि ये बैठक शनिवार को भोज के बाद होगी. नीतीश ने कहा कि इस बैठक में उनके साथ बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह भी मौजूद रहेंगे. इस बैठक के एजेंडा को साफ़ करते हुए नीतीश ने कहा कि वो गंगा नदी की गाद को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जिस गंगा की अविरलता की बात कर रही है वो गंगा में गाद के जमा होने तक संभव नहीं. नीतीश चाहते हैं कि केंद्र एक बार फिर इस समस्या के अध्ययन के लिए स्थल के निरीक्षण के लिए एक टीम भेजे.टिप्पणियां
शनिवार को प्रधान मंत्री मोदी के साथ बैठक पर राजैनतिक अटकलें होंगी, इसपर नीतीश ने सफाई दी कि जब यूपीए की सरकार थी तब भी मॉरिशस के प्रधानमंत्री हों या जापान के प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें निमंत्रण दिए जाने की परंपरा रही है. लेकिन मॉरिशस के साथ बिहार का भावनातमक लगाव है. वहां की 52 प्रतिशत आबादी का मूल बिहार है. अभी के प्रधानमंत्री बिहार मूल के हैं. इस अवसर पर नीतीश ने कहा कि इसी पृष्ठभूमि में वो जा रहे हैं. हालांकि राजैनतिक जानकार मानते हैं कि शुक्रवार को अगर सोनिया गांधी के भोज में नीतीश नहीं गए तो उसके पीछे उनका अपना कोई विचार रहा होगा और प्रधानमंत्री के भोज में 24 घंटे के अंदर जाने के लिए उन्होंने सहमति दी है तो उसके पीछे भी उनकी कोई रणनीति जरूर रही होगी. लेकिन घोटाले के आरोपों में घिरे अपने सहयोगी लालू यादव के साथ फ़िलहाल वो किसी सार्वजनिक मंच पर नहीं आना चाहते.
नीतीश कुमार हालिया वर्षों में पीएम नरेंद्र मोदी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं और जब नरेंद्र मोदी को 2014 के आम चुनावों से पहले पार्टी का पीएम पद के लिए चेहरा बनाया गया तो नीतीश कुमार ने तकरीबन दो दशक पुराने अपनी पार्टी के गठबंधन को बीजेपी के साथ समाप्त कर दिया था. हालांकि हालिया दौर में दोनों तरफ से कुछ गर्मजोशी देखने को मिल रही है. इसकी बानगी इस बात से समझी जा सकती है कि जब पिछले साल नोटबंदी की घोषणा हुई थी तो सभी दलों ने पीएम मोदी के इस फैसले की आलोचना की थी लेकिन नीतीश कुमार ने उस कदम का समर्थन किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उसके बाद नीतीश कुमार द्वारा बिहार में शराबबंदी की घोषणा के कदम की सराहना की थी.
शुक्रवार को मोदी सरकार के तीन साल होने पर विपक्षी एकजुटता दिखाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष की तरफ से रखी गई लंच पार्टी में नीतीश कुमार की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी है. उसके बाद पीएम मोदी के कार्यक्रम में शिरकत करने के उनके फैसले के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. दरअसल यह ऐसे समय पर हो रहा है जब कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी दलों के साथ एक महागठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है.
हालांकि पटना में कैबिनेट की बैठक के बाद नीतीश ने कहा कि शुक्रवार के भोज में शामिल न होने का लोग अनावश्यक ही गलत अर्थ लगा रहे हैं जबकि कांग्रेस महासचिव अहमद पटेल को उन्होंने पांच दिन पहले ही बता दिया था कि उनकी पार्टी की तरफ से पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव शामिल होंगे और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा आयोजित बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उसपर उन्होंने अपनी राय बता दी थी. नीतीश कुमार ने कुछ दिनों पूर्व ही ये घोषणा कर दी थी कि राष्ट्रपति चुनाव पर वर्तमान मोदी सरकार को आम सहमति बनाने के लिए पहल करनी चाहिए. और शुक्रवार को बैठक में भी इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया. लेकिन नीतीश ने कहा कि महागठबंधन के सभी फैसले का वो आदर करते हैं.
लेकिन शनिवार को दोपहर के भोजन के बाद नीतीश कुमार ने माना कि उन्होंने अलग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गंगा नदी में गाद की समस्या पर चर्चा के लिए समय मांगा है और उन्हें सूचना दी गयी है कि ये बैठक शनिवार को भोज के बाद होगी. नीतीश ने कहा कि इस बैठक में उनके साथ बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह भी मौजूद रहेंगे. इस बैठक के एजेंडा को साफ़ करते हुए नीतीश ने कहा कि वो गंगा नदी की गाद को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जिस गंगा की अविरलता की बात कर रही है वो गंगा में गाद के जमा होने तक संभव नहीं. नीतीश चाहते हैं कि केंद्र एक बार फिर इस समस्या के अध्ययन के लिए स्थल के निरीक्षण के लिए एक टीम भेजे.टिप्पणियां
शनिवार को प्रधान मंत्री मोदी के साथ बैठक पर राजैनतिक अटकलें होंगी, इसपर नीतीश ने सफाई दी कि जब यूपीए की सरकार थी तब भी मॉरिशस के प्रधानमंत्री हों या जापान के प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें निमंत्रण दिए जाने की परंपरा रही है. लेकिन मॉरिशस के साथ बिहार का भावनातमक लगाव है. वहां की 52 प्रतिशत आबादी का मूल बिहार है. अभी के प्रधानमंत्री बिहार मूल के हैं. इस अवसर पर नीतीश ने कहा कि इसी पृष्ठभूमि में वो जा रहे हैं. हालांकि राजैनतिक जानकार मानते हैं कि शुक्रवार को अगर सोनिया गांधी के भोज में नीतीश नहीं गए तो उसके पीछे उनका अपना कोई विचार रहा होगा और प्रधानमंत्री के भोज में 24 घंटे के अंदर जाने के लिए उन्होंने सहमति दी है तो उसके पीछे भी उनकी कोई रणनीति जरूर रही होगी. लेकिन घोटाले के आरोपों में घिरे अपने सहयोगी लालू यादव के साथ फ़िलहाल वो किसी सार्वजनिक मंच पर नहीं आना चाहते.
नीतीश कुमार हालिया वर्षों में पीएम नरेंद्र मोदी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं और जब नरेंद्र मोदी को 2014 के आम चुनावों से पहले पार्टी का पीएम पद के लिए चेहरा बनाया गया तो नीतीश कुमार ने तकरीबन दो दशक पुराने अपनी पार्टी के गठबंधन को बीजेपी के साथ समाप्त कर दिया था. हालांकि हालिया दौर में दोनों तरफ से कुछ गर्मजोशी देखने को मिल रही है. इसकी बानगी इस बात से समझी जा सकती है कि जब पिछले साल नोटबंदी की घोषणा हुई थी तो सभी दलों ने पीएम मोदी के इस फैसले की आलोचना की थी लेकिन नीतीश कुमार ने उस कदम का समर्थन किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उसके बाद नीतीश कुमार द्वारा बिहार में शराबबंदी की घोषणा के कदम की सराहना की थी.
हालांकि पटना में कैबिनेट की बैठक के बाद नीतीश ने कहा कि शुक्रवार के भोज में शामिल न होने का लोग अनावश्यक ही गलत अर्थ लगा रहे हैं जबकि कांग्रेस महासचिव अहमद पटेल को उन्होंने पांच दिन पहले ही बता दिया था कि उनकी पार्टी की तरफ से पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव शामिल होंगे और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा आयोजित बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उसपर उन्होंने अपनी राय बता दी थी. नीतीश कुमार ने कुछ दिनों पूर्व ही ये घोषणा कर दी थी कि राष्ट्रपति चुनाव पर वर्तमान मोदी सरकार को आम सहमति बनाने के लिए पहल करनी चाहिए. और शुक्रवार को बैठक में भी इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया. लेकिन नीतीश ने कहा कि महागठबंधन के सभी फैसले का वो आदर करते हैं.
लेकिन शनिवार को दोपहर के भोजन के बाद नीतीश कुमार ने माना कि उन्होंने अलग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गंगा नदी में गाद की समस्या पर चर्चा के लिए समय मांगा है और उन्हें सूचना दी गयी है कि ये बैठक शनिवार को भोज के बाद होगी. नीतीश ने कहा कि इस बैठक में उनके साथ बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह भी मौजूद रहेंगे. इस बैठक के एजेंडा को साफ़ करते हुए नीतीश ने कहा कि वो गंगा नदी की गाद को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जिस गंगा की अविरलता की बात कर रही है वो गंगा में गाद के जमा होने तक संभव नहीं. नीतीश चाहते हैं कि केंद्र एक बार फिर इस समस्या के अध्ययन के लिए स्थल के निरीक्षण के लिए एक टीम भेजे.टिप्पणियां
शनिवार को प्रधान मंत्री मोदी के साथ बैठक पर राजैनतिक अटकलें होंगी, इसपर नीतीश ने सफाई दी कि जब यूपीए की सरकार थी तब भी मॉरिशस के प्रधानमंत्री हों या जापान के प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें निमंत्रण दिए जाने की परंपरा रही है. लेकिन मॉरिशस के साथ बिहार का भावनातमक लगाव है. वहां की 52 प्रतिशत आबादी का मूल बिहार है. अभी के प्रधानमंत्री बिहार मूल के हैं. इस अवसर पर नीतीश ने कहा कि इसी पृष्ठभूमि में वो जा रहे हैं. हालांकि राजैनतिक जानकार मानते हैं कि शुक्रवार को अगर सोनिया गांधी के भोज में नीतीश नहीं गए तो उसके पीछे उनका अपना कोई विचार रहा होगा और प्रधानमंत्री के भोज में 24 घंटे के अंदर जाने के लिए उन्होंने सहमति दी है तो उसके पीछे भी उनकी कोई रणनीति जरूर रही होगी. लेकिन घोटाले के आरोपों में घिरे अपने सहयोगी लालू यादव के साथ फ़िलहाल वो किसी सार्वजनिक मंच पर नहीं आना चाहते.
नीतीश कुमार हालिया वर्षों में पीएम नरेंद्र मोदी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं और जब नरेंद्र मोदी को 2014 के आम चुनावों से पहले पार्टी का पीएम पद के लिए चेहरा बनाया गया तो नीतीश कुमार ने तकरीबन दो दशक पुराने अपनी पार्टी के गठबंधन को बीजेपी के साथ समाप्त कर दिया था. हालांकि हालिया दौर में दोनों तरफ से कुछ गर्मजोशी देखने को मिल रही है. इसकी बानगी इस बात से समझी जा सकती है कि जब पिछले साल नोटबंदी की घोषणा हुई थी तो सभी दलों ने पीएम मोदी के इस फैसले की आलोचना की थी लेकिन नीतीश कुमार ने उस कदम का समर्थन किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उसके बाद नीतीश कुमार द्वारा बिहार में शराबबंदी की घोषणा के कदम की सराहना की थी.
लेकिन शनिवार को दोपहर के भोजन के बाद नीतीश कुमार ने माना कि उन्होंने अलग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गंगा नदी में गाद की समस्या पर चर्चा के लिए समय मांगा है और उन्हें सूचना दी गयी है कि ये बैठक शनिवार को भोज के बाद होगी. नीतीश ने कहा कि इस बैठक में उनके साथ बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह भी मौजूद रहेंगे. इस बैठक के एजेंडा को साफ़ करते हुए नीतीश ने कहा कि वो गंगा नदी की गाद को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जिस गंगा की अविरलता की बात कर रही है वो गंगा में गाद के जमा होने तक संभव नहीं. नीतीश चाहते हैं कि केंद्र एक बार फिर इस समस्या के अध्ययन के लिए स्थल के निरीक्षण के लिए एक टीम भेजे.टिप्पणियां
शनिवार को प्रधान मंत्री मोदी के साथ बैठक पर राजैनतिक अटकलें होंगी, इसपर नीतीश ने सफाई दी कि जब यूपीए की सरकार थी तब भी मॉरिशस के प्रधानमंत्री हों या जापान के प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें निमंत्रण दिए जाने की परंपरा रही है. लेकिन मॉरिशस के साथ बिहार का भावनातमक लगाव है. वहां की 52 प्रतिशत आबादी का मूल बिहार है. अभी के प्रधानमंत्री बिहार मूल के हैं. इस अवसर पर नीतीश ने कहा कि इसी पृष्ठभूमि में वो जा रहे हैं. हालांकि राजैनतिक जानकार मानते हैं कि शुक्रवार को अगर सोनिया गांधी के भोज में नीतीश नहीं गए तो उसके पीछे उनका अपना कोई विचार रहा होगा और प्रधानमंत्री के भोज में 24 घंटे के अंदर जाने के लिए उन्होंने सहमति दी है तो उसके पीछे भी उनकी कोई रणनीति जरूर रही होगी. लेकिन घोटाले के आरोपों में घिरे अपने सहयोगी लालू यादव के साथ फ़िलहाल वो किसी सार्वजनिक मंच पर नहीं आना चाहते.
नीतीश कुमार हालिया वर्षों में पीएम नरेंद्र मोदी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं और जब नरेंद्र मोदी को 2014 के आम चुनावों से पहले पार्टी का पीएम पद के लिए चेहरा बनाया गया तो नीतीश कुमार ने तकरीबन दो दशक पुराने अपनी पार्टी के गठबंधन को बीजेपी के साथ समाप्त कर दिया था. हालांकि हालिया दौर में दोनों तरफ से कुछ गर्मजोशी देखने को मिल रही है. इसकी बानगी इस बात से समझी जा सकती है कि जब पिछले साल नोटबंदी की घोषणा हुई थी तो सभी दलों ने पीएम मोदी के इस फैसले की आलोचना की थी लेकिन नीतीश कुमार ने उस कदम का समर्थन किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उसके बाद नीतीश कुमार द्वारा बिहार में शराबबंदी की घोषणा के कदम की सराहना की थी.
शनिवार को प्रधान मंत्री मोदी के साथ बैठक पर राजैनतिक अटकलें होंगी, इसपर नीतीश ने सफाई दी कि जब यूपीए की सरकार थी तब भी मॉरिशस के प्रधानमंत्री हों या जापान के प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें निमंत्रण दिए जाने की परंपरा रही है. लेकिन मॉरिशस के साथ बिहार का भावनातमक लगाव है. वहां की 52 प्रतिशत आबादी का मूल बिहार है. अभी के प्रधानमंत्री बिहार मूल के हैं. इस अवसर पर नीतीश ने कहा कि इसी पृष्ठभूमि में वो जा रहे हैं. हालांकि राजैनतिक जानकार मानते हैं कि शुक्रवार को अगर सोनिया गांधी के भोज में नीतीश नहीं गए तो उसके पीछे उनका अपना कोई विचार रहा होगा और प्रधानमंत्री के भोज में 24 घंटे के अंदर जाने के लिए उन्होंने सहमति दी है तो उसके पीछे भी उनकी कोई रणनीति जरूर रही होगी. लेकिन घोटाले के आरोपों में घिरे अपने सहयोगी लालू यादव के साथ फ़िलहाल वो किसी सार्वजनिक मंच पर नहीं आना चाहते.
नीतीश कुमार हालिया वर्षों में पीएम नरेंद्र मोदी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं और जब नरेंद्र मोदी को 2014 के आम चुनावों से पहले पार्टी का पीएम पद के लिए चेहरा बनाया गया तो नीतीश कुमार ने तकरीबन दो दशक पुराने अपनी पार्टी के गठबंधन को बीजेपी के साथ समाप्त कर दिया था. हालांकि हालिया दौर में दोनों तरफ से कुछ गर्मजोशी देखने को मिल रही है. इसकी बानगी इस बात से समझी जा सकती है कि जब पिछले साल नोटबंदी की घोषणा हुई थी तो सभी दलों ने पीएम मोदी के इस फैसले की आलोचना की थी लेकिन नीतीश कुमार ने उस कदम का समर्थन किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उसके बाद नीतीश कुमार द्वारा बिहार में शराबबंदी की घोषणा के कदम की सराहना की थी.
नीतीश कुमार हालिया वर्षों में पीएम नरेंद्र मोदी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं और जब नरेंद्र मोदी को 2014 के आम चुनावों से पहले पार्टी का पीएम पद के लिए चेहरा बनाया गया तो नीतीश कुमार ने तकरीबन दो दशक पुराने अपनी पार्टी के गठबंधन को बीजेपी के साथ समाप्त कर दिया था. हालांकि हालिया दौर में दोनों तरफ से कुछ गर्मजोशी देखने को मिल रही है. इसकी बानगी इस बात से समझी जा सकती है कि जब पिछले साल नोटबंदी की घोषणा हुई थी तो सभी दलों ने पीएम मोदी के इस फैसले की आलोचना की थी लेकिन नीतीश कुमार ने उस कदम का समर्थन किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उसके बाद नीतीश कुमार द्वारा बिहार में शराबबंदी की घोषणा के कदम की सराहना की थी. | सारांश: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को लंच पार्टी दी
विपक्षी दलों के बीच एकजुटता दिखाना था मकसद
नीतीश कुमार ने इस कार्यक्रम में शिरकत नहीं की | 31 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: तृणमूल कांग्रेस के नेता इकबाल अहमद आज नारदा स्टिंग मामले में 'खराब सेहत' का हवाला देते हुए पूछताछ के लिए सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हुए. उन्होंने जांच एंजेसी से और समय की मांग की. तृणमूल कांग्रेस के विधायक को सीबीआई ने आठ जून को सम्मन किया था. उन्होंने पहले इसकी पुष्टि की थी कि वह शनिवार को पूछताछ के लिए उपलब्ध होंगे. उनके वकील शनिवार को निजाम पैलेस स्थित सीबीआई कार्यालय पहुंचे और अहमद का पत्र का सौंपा जिसमें उन्होंने सीबीआई से और समय की मांग की है.
उनके वकील ने कहा, 'वह बहुत बीमार हैं और रमजान का महीना चल रहा है. ऐसे में उन्होंने सीबीआई से और समय की मांग की है. जब वह ठीक हो जाएंगे तो वह पूछताछ के लिए आएंगे.' सीबीआई अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अहमद का पत्र मिला है लेकिन उन्होंने मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मार्च महीने में नारदा स्टिंग मामले में सीबीआई द्वारा शुरूआती जांच का आदेश दिया था.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | सारांश: तृणमूल कांग्रेस के नेता इकबाल अहमद को CBI के समक्ष होना था पेश
इकबाल अहमद ने सीबीआई से और समय की मांग की है
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दिए हैं मामले में जांच के आदेश | 5 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में सरकार ने बच्चों के बस्ते के बोझ को कम करने के लिए कवायद शुरू कर दी है. राज्य में शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बुधवार को राजकीय विद्यालयों में बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत जयपुर से की है. डोटासरा ने इस संबंध में वाटिका के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बताया कि पाठ्यपुस्तकों का दो- तिहाई वजन कम किया गया है. अब बच्चों को वर्तमान पुस्तकों के एक तिहाई भार के रूप में अलग- अलग पुस्तकों के स्थान पर एक ही पुस्तक स्कूल लेकर जानी होगी.
डोटासरा ने कहा कि राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां बस्ते के बोझ को कम करने के लिए यह पहल की गई है. उन्होंने बताया कि कक्षा एक के विद्यार्थियों की पुरानी किताबों का वजन 900 ग्राम था जो अब 400 ग्राम किया गया है. इस प्रकार कक्षा एक से पांच तक की किताबों के वजन को पांच किलो 900 ग्राम से घटाकर दो किलो 200 ग्राम तक कर दिया गया है. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: जयपुर के स्कूल से शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
सफल रहने पर पूरे देश में होगा लागू
घटकर करीब आधा रह गया है किताबों का वजन | 11 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट के लिए 24 जून को हो रहे उपचुनाव में जहां कांग्रेस और भाजपा ने सपा उम्मीदवार एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव को 'वाकओवर' दे दिया है, वहीं प्रदेश की राजनीति में सपा की धुर प्रतिद्वन्द्वी बसपा भी डिम्पल को कोई चुनौती देने के मूड में नहीं दिख रही है।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने दिन में ही साफ कर दिया था कि पार्टी कन्नौज उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारेगी, वहीं शाम होते-होते भाजपा ने भी इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारने की घोषणा कर दी है।
दिग्विजय सिंह ने नई दिल्ली में कहा, 'कांग्रेस ने वर्ष 2009 में हुए आम चुनाव में भी कन्नौज सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा था और पार्टी यहां हो रहे उपचुनाव में भी उम्मीदवार नहीं उतारेगी।'
देश की राजनीति में कांग्रेस की प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी पार्टी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने देर शाम बताया है कि उनकी पार्टी कन्नौज लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
कन्नौज लोकसभा सीट पर उम्मीदवार को लेकर आज पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक में गहन मंथन किया गया।
बैठक में नेताओं ने सर्वसम्मति से इस बात पर फैसला किया कि भाजपा निकाय चुनाव पर पूरा जोर लगाएगी और कन्नौज लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।टिप्पणियां
प्रदेश अध्यक्ष वाजपेयी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी (बसपा) की सरकार के कुप्रबंधन से जनता त्रस्त है इसीलिए वह अपने चुनाव चिह्न पर निकाय चुनाव नहीं लड़ना चाहती है।
दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी अराजकता और अपने घोटालों की वजह से मैदान में उतरने से डर रही है। महंगाई, लूट और घोटालों के चलते कांग्रेस के पक्ष में माहौल नहीं है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि निकाय चुनाव को लेकर पार्टी के पक्ष में जबरदस्त लहर है इसीलिए पार्टी पूरा जोर निकाय चुनाव में ही लगाना चाहती है।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने दिन में ही साफ कर दिया था कि पार्टी कन्नौज उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारेगी, वहीं शाम होते-होते भाजपा ने भी इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारने की घोषणा कर दी है।
दिग्विजय सिंह ने नई दिल्ली में कहा, 'कांग्रेस ने वर्ष 2009 में हुए आम चुनाव में भी कन्नौज सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा था और पार्टी यहां हो रहे उपचुनाव में भी उम्मीदवार नहीं उतारेगी।'
देश की राजनीति में कांग्रेस की प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी पार्टी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने देर शाम बताया है कि उनकी पार्टी कन्नौज लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
कन्नौज लोकसभा सीट पर उम्मीदवार को लेकर आज पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक में गहन मंथन किया गया।
बैठक में नेताओं ने सर्वसम्मति से इस बात पर फैसला किया कि भाजपा निकाय चुनाव पर पूरा जोर लगाएगी और कन्नौज लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।टिप्पणियां
प्रदेश अध्यक्ष वाजपेयी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी (बसपा) की सरकार के कुप्रबंधन से जनता त्रस्त है इसीलिए वह अपने चुनाव चिह्न पर निकाय चुनाव नहीं लड़ना चाहती है।
दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी अराजकता और अपने घोटालों की वजह से मैदान में उतरने से डर रही है। महंगाई, लूट और घोटालों के चलते कांग्रेस के पक्ष में माहौल नहीं है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि निकाय चुनाव को लेकर पार्टी के पक्ष में जबरदस्त लहर है इसीलिए पार्टी पूरा जोर निकाय चुनाव में ही लगाना चाहती है।
दिग्विजय सिंह ने नई दिल्ली में कहा, 'कांग्रेस ने वर्ष 2009 में हुए आम चुनाव में भी कन्नौज सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा था और पार्टी यहां हो रहे उपचुनाव में भी उम्मीदवार नहीं उतारेगी।'
देश की राजनीति में कांग्रेस की प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी पार्टी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने देर शाम बताया है कि उनकी पार्टी कन्नौज लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
कन्नौज लोकसभा सीट पर उम्मीदवार को लेकर आज पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक में गहन मंथन किया गया।
बैठक में नेताओं ने सर्वसम्मति से इस बात पर फैसला किया कि भाजपा निकाय चुनाव पर पूरा जोर लगाएगी और कन्नौज लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।टिप्पणियां
प्रदेश अध्यक्ष वाजपेयी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी (बसपा) की सरकार के कुप्रबंधन से जनता त्रस्त है इसीलिए वह अपने चुनाव चिह्न पर निकाय चुनाव नहीं लड़ना चाहती है।
दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी अराजकता और अपने घोटालों की वजह से मैदान में उतरने से डर रही है। महंगाई, लूट और घोटालों के चलते कांग्रेस के पक्ष में माहौल नहीं है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि निकाय चुनाव को लेकर पार्टी के पक्ष में जबरदस्त लहर है इसीलिए पार्टी पूरा जोर निकाय चुनाव में ही लगाना चाहती है।
देश की राजनीति में कांग्रेस की प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी पार्टी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने देर शाम बताया है कि उनकी पार्टी कन्नौज लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
कन्नौज लोकसभा सीट पर उम्मीदवार को लेकर आज पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक में गहन मंथन किया गया।
बैठक में नेताओं ने सर्वसम्मति से इस बात पर फैसला किया कि भाजपा निकाय चुनाव पर पूरा जोर लगाएगी और कन्नौज लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।टिप्पणियां
प्रदेश अध्यक्ष वाजपेयी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी (बसपा) की सरकार के कुप्रबंधन से जनता त्रस्त है इसीलिए वह अपने चुनाव चिह्न पर निकाय चुनाव नहीं लड़ना चाहती है।
दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी अराजकता और अपने घोटालों की वजह से मैदान में उतरने से डर रही है। महंगाई, लूट और घोटालों के चलते कांग्रेस के पक्ष में माहौल नहीं है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि निकाय चुनाव को लेकर पार्टी के पक्ष में जबरदस्त लहर है इसीलिए पार्टी पूरा जोर निकाय चुनाव में ही लगाना चाहती है।
कन्नौज लोकसभा सीट पर उम्मीदवार को लेकर आज पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक में गहन मंथन किया गया।
बैठक में नेताओं ने सर्वसम्मति से इस बात पर फैसला किया कि भाजपा निकाय चुनाव पर पूरा जोर लगाएगी और कन्नौज लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।टिप्पणियां
प्रदेश अध्यक्ष वाजपेयी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी (बसपा) की सरकार के कुप्रबंधन से जनता त्रस्त है इसीलिए वह अपने चुनाव चिह्न पर निकाय चुनाव नहीं लड़ना चाहती है।
दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी अराजकता और अपने घोटालों की वजह से मैदान में उतरने से डर रही है। महंगाई, लूट और घोटालों के चलते कांग्रेस के पक्ष में माहौल नहीं है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि निकाय चुनाव को लेकर पार्टी के पक्ष में जबरदस्त लहर है इसीलिए पार्टी पूरा जोर निकाय चुनाव में ही लगाना चाहती है।
बैठक में नेताओं ने सर्वसम्मति से इस बात पर फैसला किया कि भाजपा निकाय चुनाव पर पूरा जोर लगाएगी और कन्नौज लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।टिप्पणियां
प्रदेश अध्यक्ष वाजपेयी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी (बसपा) की सरकार के कुप्रबंधन से जनता त्रस्त है इसीलिए वह अपने चुनाव चिह्न पर निकाय चुनाव नहीं लड़ना चाहती है।
दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी अराजकता और अपने घोटालों की वजह से मैदान में उतरने से डर रही है। महंगाई, लूट और घोटालों के चलते कांग्रेस के पक्ष में माहौल नहीं है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि निकाय चुनाव को लेकर पार्टी के पक्ष में जबरदस्त लहर है इसीलिए पार्टी पूरा जोर निकाय चुनाव में ही लगाना चाहती है।
प्रदेश अध्यक्ष वाजपेयी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी (बसपा) की सरकार के कुप्रबंधन से जनता त्रस्त है इसीलिए वह अपने चुनाव चिह्न पर निकाय चुनाव नहीं लड़ना चाहती है।
दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी अराजकता और अपने घोटालों की वजह से मैदान में उतरने से डर रही है। महंगाई, लूट और घोटालों के चलते कांग्रेस के पक्ष में माहौल नहीं है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि निकाय चुनाव को लेकर पार्टी के पक्ष में जबरदस्त लहर है इसीलिए पार्टी पूरा जोर निकाय चुनाव में ही लगाना चाहती है।
दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी अराजकता और अपने घोटालों की वजह से मैदान में उतरने से डर रही है। महंगाई, लूट और घोटालों के चलते कांग्रेस के पक्ष में माहौल नहीं है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि निकाय चुनाव को लेकर पार्टी के पक्ष में जबरदस्त लहर है इसीलिए पार्टी पूरा जोर निकाय चुनाव में ही लगाना चाहती है। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट के लिए 24 जून को हो रहे उपचुनाव में जहां कांग्रेस और भाजपा ने सपा उम्मीदवार एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव को 'वाकओवर' दे दिया है, वहीं प्रदेश की राजनीति में सपा की धुर प्रतिद्वन्द्वी बसपा भी डिम्पल को क | 19 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ को देशद्रोह के केस में अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई है. यह जानकारी पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों में दी गई है. नवंबर, 2007 में देश में आपातकाल लागू कर देने के लिए पाकिस्तान के पूर्व सेनाप्रमुख रहे जनरल परवेज़ मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने शुरू किया था. यह केस वर्ष 2013 से लम्बित था.
लाहौर स्थित एक विशेष अदालत ने 76-वर्षीय परवेज़ मुशर्रफ को राजद्रोह के इस केस में 5 दिसंबर तक बयान दर्ज कराने का आदेश दिया था. फिलहाल दुबई में बसे हुए मुशर्रफ ने विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी थी, और उनकी गैरमौजूदगी में सुनवाई को स्थगित कर दिए जाने की अपील की थी. परवेज़ मुशर्रफ ने लाहौर हाईकोर्ट से आग्रह किया था कि विशेष अदालत के सुरक्षित रखे गए फैसले को तब तक के लिए निलंबित कर दिया जाए, जब तक वह कोर्ट में पेश होने लायक स्वस्थ न हो जाएं.
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की पुत्री मरियम नवाज़ ने कहा था, परवेज़ मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला शुरू करने का फैसला करते ही उनके पिता के खिलाफ साज़िश शुरू हो गई थी. भ्रष्टाचार के मामले में सात साल की कैद की सज़ा काट रहे नवाज़ शरीफ को स्वास्थ्य कारणों से ज़मानत मिल गई थी, और वह फिलहाल लंदन में इलाज करवा रहे हैं. | परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा
देशद्रोह के मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा
अभी यूएई में रह रहे हैं परवेज मुशर्रफ | 34 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: कज़ाकिस्तान के अस्ताना में शंघाई को-ऑपरेशन की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के बीच डिनर में मुलाकात हुई है. इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने नवाज़ शरीफ़ से उनकी तबीयत के बारे में पूछा. सूत्रों ने यह जानकारी दी.
दरअसल, नवाज़ शरीफ़ का हाल ही में दिल का ऑपरेशन हुआ था. सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने नवाज़ शरीफ़ से उनकी मां और परिवार का हाल-चाल भी पूछा.
उल्लखेनीय है कि कज़ाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पहुंचे हुए हैं. दोनों के बीच किसी आधिकारिक मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय सिरे से मना कर चुका है.. फिर भी दोनों पड़ोसियों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और नवाज शरीफ के बीच संभावित बैठक के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, "उनकी और हमारी ओर से कोई बैठक तय नहीं की गई है".
शंघाई कोऑपरेटिव ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) की यहां दो दिवसीय शिखर बैठक में भारत और पाकिस्तान को पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा दे दिया जाएगा. इसकी प्रक्रिया पिछले साल जून से शुरू हुई थी. दोनों देशों ने इसके लिए मेमोरेंडम ऑफ ऑब्लिगेशन पर दस्तखत किए हैं. इसमें सभी सदस्य देशों का आपस में सहयोग बड़ी शर्त है. टिप्पणियां
हालांकि ये शर्त दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर बाध्यकारी नहीं है पर एससीओ के सभी पुराने देश चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान अपने रिश्तों पर ज़मीं बर्फ़ पिघलाएं. याद हो कि उफ़ा में 2015 में भी दोनों प्रधानमंत्री एससीओ बैठक के दौरान ही मिले थे और बातचीत के पटरी पर लाने की कोशिश की शुरुआत की थी, लेकिन पाकिस्तान की तरफ़ से लगातार आतंकी वारदातों की वजह से ये पटरी पर लौट न सकीं.
भारत दो टूक लहजे में साफ़ कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. इसलिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी कह चुकी हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी और नवाज़ शरीफ की यहां अस्ताना में कोई नहीं मुलाक़ात होगी, लेकिन पाकिस्तान से मिल रही जानकारी के मुताबिक़ कुलभूषण जाधव ICJ में शुरुआती हार का मुंह देख चुके पाकिस्तान पर बातचीत की पहल का भारी दबाव है. समस्या ये है कि वह बातचीत का अनुरोध खुलकर नहीं करना चाहता.
दरअसल, नवाज़ शरीफ़ का हाल ही में दिल का ऑपरेशन हुआ था. सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने नवाज़ शरीफ़ से उनकी मां और परिवार का हाल-चाल भी पूछा.
उल्लखेनीय है कि कज़ाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पहुंचे हुए हैं. दोनों के बीच किसी आधिकारिक मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय सिरे से मना कर चुका है.. फिर भी दोनों पड़ोसियों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और नवाज शरीफ के बीच संभावित बैठक के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, "उनकी और हमारी ओर से कोई बैठक तय नहीं की गई है".
शंघाई कोऑपरेटिव ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) की यहां दो दिवसीय शिखर बैठक में भारत और पाकिस्तान को पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा दे दिया जाएगा. इसकी प्रक्रिया पिछले साल जून से शुरू हुई थी. दोनों देशों ने इसके लिए मेमोरेंडम ऑफ ऑब्लिगेशन पर दस्तखत किए हैं. इसमें सभी सदस्य देशों का आपस में सहयोग बड़ी शर्त है. टिप्पणियां
हालांकि ये शर्त दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर बाध्यकारी नहीं है पर एससीओ के सभी पुराने देश चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान अपने रिश्तों पर ज़मीं बर्फ़ पिघलाएं. याद हो कि उफ़ा में 2015 में भी दोनों प्रधानमंत्री एससीओ बैठक के दौरान ही मिले थे और बातचीत के पटरी पर लाने की कोशिश की शुरुआत की थी, लेकिन पाकिस्तान की तरफ़ से लगातार आतंकी वारदातों की वजह से ये पटरी पर लौट न सकीं.
भारत दो टूक लहजे में साफ़ कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. इसलिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी कह चुकी हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी और नवाज़ शरीफ की यहां अस्ताना में कोई नहीं मुलाक़ात होगी, लेकिन पाकिस्तान से मिल रही जानकारी के मुताबिक़ कुलभूषण जाधव ICJ में शुरुआती हार का मुंह देख चुके पाकिस्तान पर बातचीत की पहल का भारी दबाव है. समस्या ये है कि वह बातचीत का अनुरोध खुलकर नहीं करना चाहता.
उल्लखेनीय है कि कज़ाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पहुंचे हुए हैं. दोनों के बीच किसी आधिकारिक मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय सिरे से मना कर चुका है.. फिर भी दोनों पड़ोसियों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और नवाज शरीफ के बीच संभावित बैठक के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, "उनकी और हमारी ओर से कोई बैठक तय नहीं की गई है".
शंघाई कोऑपरेटिव ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) की यहां दो दिवसीय शिखर बैठक में भारत और पाकिस्तान को पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा दे दिया जाएगा. इसकी प्रक्रिया पिछले साल जून से शुरू हुई थी. दोनों देशों ने इसके लिए मेमोरेंडम ऑफ ऑब्लिगेशन पर दस्तखत किए हैं. इसमें सभी सदस्य देशों का आपस में सहयोग बड़ी शर्त है. टिप्पणियां
हालांकि ये शर्त दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर बाध्यकारी नहीं है पर एससीओ के सभी पुराने देश चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान अपने रिश्तों पर ज़मीं बर्फ़ पिघलाएं. याद हो कि उफ़ा में 2015 में भी दोनों प्रधानमंत्री एससीओ बैठक के दौरान ही मिले थे और बातचीत के पटरी पर लाने की कोशिश की शुरुआत की थी, लेकिन पाकिस्तान की तरफ़ से लगातार आतंकी वारदातों की वजह से ये पटरी पर लौट न सकीं.
भारत दो टूक लहजे में साफ़ कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. इसलिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी कह चुकी हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी और नवाज़ शरीफ की यहां अस्ताना में कोई नहीं मुलाक़ात होगी, लेकिन पाकिस्तान से मिल रही जानकारी के मुताबिक़ कुलभूषण जाधव ICJ में शुरुआती हार का मुंह देख चुके पाकिस्तान पर बातचीत की पहल का भारी दबाव है. समस्या ये है कि वह बातचीत का अनुरोध खुलकर नहीं करना चाहता.
शंघाई कोऑपरेटिव ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) की यहां दो दिवसीय शिखर बैठक में भारत और पाकिस्तान को पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा दे दिया जाएगा. इसकी प्रक्रिया पिछले साल जून से शुरू हुई थी. दोनों देशों ने इसके लिए मेमोरेंडम ऑफ ऑब्लिगेशन पर दस्तखत किए हैं. इसमें सभी सदस्य देशों का आपस में सहयोग बड़ी शर्त है. टिप्पणियां
हालांकि ये शर्त दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर बाध्यकारी नहीं है पर एससीओ के सभी पुराने देश चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान अपने रिश्तों पर ज़मीं बर्फ़ पिघलाएं. याद हो कि उफ़ा में 2015 में भी दोनों प्रधानमंत्री एससीओ बैठक के दौरान ही मिले थे और बातचीत के पटरी पर लाने की कोशिश की शुरुआत की थी, लेकिन पाकिस्तान की तरफ़ से लगातार आतंकी वारदातों की वजह से ये पटरी पर लौट न सकीं.
भारत दो टूक लहजे में साफ़ कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. इसलिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी कह चुकी हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी और नवाज़ शरीफ की यहां अस्ताना में कोई नहीं मुलाक़ात होगी, लेकिन पाकिस्तान से मिल रही जानकारी के मुताबिक़ कुलभूषण जाधव ICJ में शुरुआती हार का मुंह देख चुके पाकिस्तान पर बातचीत की पहल का भारी दबाव है. समस्या ये है कि वह बातचीत का अनुरोध खुलकर नहीं करना चाहता.
हालांकि ये शर्त दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर बाध्यकारी नहीं है पर एससीओ के सभी पुराने देश चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान अपने रिश्तों पर ज़मीं बर्फ़ पिघलाएं. याद हो कि उफ़ा में 2015 में भी दोनों प्रधानमंत्री एससीओ बैठक के दौरान ही मिले थे और बातचीत के पटरी पर लाने की कोशिश की शुरुआत की थी, लेकिन पाकिस्तान की तरफ़ से लगातार आतंकी वारदातों की वजह से ये पटरी पर लौट न सकीं.
भारत दो टूक लहजे में साफ़ कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. इसलिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी कह चुकी हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी और नवाज़ शरीफ की यहां अस्ताना में कोई नहीं मुलाक़ात होगी, लेकिन पाकिस्तान से मिल रही जानकारी के मुताबिक़ कुलभूषण जाधव ICJ में शुरुआती हार का मुंह देख चुके पाकिस्तान पर बातचीत की पहल का भारी दबाव है. समस्या ये है कि वह बातचीत का अनुरोध खुलकर नहीं करना चाहता.
भारत दो टूक लहजे में साफ़ कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. इसलिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी कह चुकी हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी और नवाज़ शरीफ की यहां अस्ताना में कोई नहीं मुलाक़ात होगी, लेकिन पाकिस्तान से मिल रही जानकारी के मुताबिक़ कुलभूषण जाधव ICJ में शुरुआती हार का मुंह देख चुके पाकिस्तान पर बातचीत की पहल का भारी दबाव है. समस्या ये है कि वह बातचीत का अनुरोध खुलकर नहीं करना चाहता. | सारांश: मुलाकात के दौरान पीएम ने नवाज़ शरीफ़ से उनकी तबीयत के बारे में पूछा- सूत्र
पीएम ने नवाज़ शरीफ़ से उनकी मां और परिवार का हाल-चाल भी पूछा- सूत्र
भारत साफ़ कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. | 5 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारतीय क्रिकेट टीम के वर्तमान गेंदबाजी कोच और पूर्व दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी एरिक सिमन्स को दिल्ली डेयरडेविल्स ने अगले आईपीएल के लिए अपना मुख्य कोच नियुक्त किया। सिमन्स के अलावा टीए शेखर ने फिर से डेयरडेविल्स की टीम में वापसी की है। उन्हें मेंटोर बनाया गया है। सिमन्स को डेयरडेविल्स का मुख्य कोच नियुक्त करने की घोषणा करते हुए फ्रेंचाइजी के मालिक जीएमआर स्पोर्ट्स ने कहा कि इससे टीम को अपनी खोई प्रतिष्ठा हासिल करने में मदद मिलेगी। वीरेंद्र सहवाग की अगुवाई वाली टीम इस साल आईपीएल में तालिका में सबसे निचले पायदान पर रही थी। उसने 14 मैच में से केवल चार में जीत दर्ज की थी। अभी ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर गए सहवाग ने कहा कि सिमन्स के जुड़ने से काफी फायदा होगा। उन्होंने कहा, एरिक ने गेंदबाजी कोच के तौर पर अच्छा काम किया है और वह अब मुख्य कोच के रूप में भी ऐसा कर सकता है। वह अंतर पैदा कर सकते हैं, क्योंकि वह पिछले दो साल से टीम से जुड़े हैं। यदि कोई दूसरा आता, तो हमें शुरू से शुरुआत करनी होती। यह अच्छा है कि एरिक ने यह पद संभाला है और मुझे उम्मीद है कि वह अपनी भूमिका अच्छी तरह से निभाएंगे। सिमन्स ने इस नियुक्ति के बारे में कहा, यह सम्मान और नए सत्र के लिए बड़ी चुनौती है। आईपीएल इसमें शामिल किसी भी क्रिकेटर के लिए अहम स्थान रखता है। मुझमें जो विश्वास और भरोसा दिखाया गया है मैं उसका आभारी हूं। | भारतीय टीम के वर्तमान गेंदबाजी कोच एरिक सिमन्स को दिल्ली डेयरडेविल्स ने अगले आईपीएल के लिए अपना मुख्य कोच नियुक्त किया। | 28 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: गौरतलब है कि एक जून को गठबंधन समझौते के अनुसार कांग्रेस के पास मंत्रिमंडल में 22 सीटें और जेडीएस के पास 12 सीटें की हैं. कांग्रेस को गृह, सिंचाई, स्वास्थ्य, कृषि और महिला बाल कल्याण विभाग मिले हैं, जबकि जेडीएस को वित्त एवं आबकारी, लोक निर्माण विभाग, शिक्षा, पर्यटन और परिवहन मंत्रालय दिए गए. दोनों दल गठबंधन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए समन्वय और निगरानी समिति गठित करने पर भी सहमत हुए. समिति का नेतृत्व वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया करेंगे जबकि जेडीएस के दानिश अली इसके संयोजक होंगे.
इस बीच, बुधवार को होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार के मद्देनजर राज्य के कांग्रेस नेता मंत्रियों की सूची और विभागों के आवंटन पर पार्टी आलाकमान के साथ चर्चा करने के लिए नई दिल्ली जा सकते हैं.
इस बीच, बुधवार को होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार के मद्देनजर राज्य के कांग्रेस नेता मंत्रियों की सूची और विभागों के आवंटन पर पार्टी आलाकमान के साथ चर्चा करने के लिए नई दिल्ली जा सकते हैं. | सारांश: कांग्रेस के पास मंत्रिमंडल में 22 सीटें और जेडीएस के पास 12 सीटें की हैं
कांग्रेस को गृह, सिंचाई, स्वास्थ्य, कृषि और महिला बाल कल्याण विभाग मिले
जेडीएस को वित्त एवं आबकारी, लोक निर्माण विभाग, शिक्षा, पर्यटन विभाग मिले | 5 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: पाकिस्तान की एक अदालत में आज एक याचिका दायर की गई, जिसमें 'निर्दोष कश्मीरियों की हत्या' के सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई।
एडवोकेट अब्दुल हमीद ने यह याचिका लाहौर उच्च न्यायालय में इस आधार पर दायर की कि मोदी के 'आदेश' पर कश्मीर में 'निर्दोष' लोगों की हत्या की गई। हमीद ने बताया कि अदालत से आग्रह किया गया है कि 'पाकिस्तान दंड संहिता और आतंकवाद-निरोधी अधिनियम की धाराओं के तहत मोदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया जाए।'
यह याचिका 'जम्मू-कश्मीर में दंगा भड़काने की साजिश रचने' के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ एक भारतीय अदालत में दायर एक याचिका की काट रूप में दायर की गई प्रतीत होती है।टिप्पणियां
उल्लेखनीय है कि 'ऐंटी-टेररिस्ट फ्रंट ऑफ इंडिया' के अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने अंबाला के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका दायर की है। (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
एडवोकेट अब्दुल हमीद ने यह याचिका लाहौर उच्च न्यायालय में इस आधार पर दायर की कि मोदी के 'आदेश' पर कश्मीर में 'निर्दोष' लोगों की हत्या की गई। हमीद ने बताया कि अदालत से आग्रह किया गया है कि 'पाकिस्तान दंड संहिता और आतंकवाद-निरोधी अधिनियम की धाराओं के तहत मोदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया जाए।'
यह याचिका 'जम्मू-कश्मीर में दंगा भड़काने की साजिश रचने' के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ एक भारतीय अदालत में दायर एक याचिका की काट रूप में दायर की गई प्रतीत होती है।टिप्पणियां
उल्लेखनीय है कि 'ऐंटी-टेररिस्ट फ्रंट ऑफ इंडिया' के अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने अंबाला के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका दायर की है। (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
यह याचिका 'जम्मू-कश्मीर में दंगा भड़काने की साजिश रचने' के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ एक भारतीय अदालत में दायर एक याचिका की काट रूप में दायर की गई प्रतीत होती है।टिप्पणियां
उल्लेखनीय है कि 'ऐंटी-टेररिस्ट फ्रंट ऑफ इंडिया' के अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने अंबाला के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका दायर की है। (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उल्लेखनीय है कि 'ऐंटी-टेररिस्ट फ्रंट ऑफ इंडिया' के अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने अंबाला के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका दायर की है। (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यह एक सारांश है: पीएम मोदी के 'आदेश' पर कश्मीर में 'निर्दोष' लोगों की हत्या की गई : वकील
पीपीसी, आतंकवाद-निरोधी अधिनियम की धाराओं के तहत FIR दर्ज करने की मांग।
कश्मीर के हालातों को लेकर लगाई गई अर्जी। | 9 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: चक्का फेंक की एथलीट कृष्णा पूनिया का नाम खेल रत्न की सूची में शामिल करने को लेकर भ्रम की स्थिति लगभग समाप्त हो गई क्योंकि खेल मंत्रालय ने मंगलवार को संकेत दिए कि वह पुरस्कार विजेताओं की मूल सूची में कोई बदलाव नहीं करेगा। पूनिया के नाम पर विचार करने के आग्रह के बाद खेलमंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को अपने सचिव पीके देब के साथ बैठक की थी। उस बैठक में फैसला नहीं हो पाया था इसलिए अंतिम निर्णय करने के लिए आज फिर बैठक हुई।
जितेंद्र को हालांकि मूल सूची पर कायम रहने के फैसले को अभी अपनी अंतिम मंजूरी देनी है, लेकिन खेल मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि खेल रत्न के साथ-साथ अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित 15 खिलाड़ियों की मूल सूची में किसी तरह का बदलाव किे जाने की संभावना नहीं है।
अधिकारी ने कहा, ‘खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित खिलाड़ियों की मूल सूची में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सब कुछ पहले जैसा ही है।’ डबल ट्रैप के निशानेबाज रंजन सोढ़ी के नाम की खेल रत्न के लिए सिफारिश किए जाने से विवाद पैदा हो गया था क्योंकि चयन पैनल के कुछ सदस्यों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। टिप्पणियां
एक अन्य सदस्य और पूर्व निशानेबाज के आने के बाद परिदृश्य बदल गया था और गिरिशा को हटाकर सोढ़ी और पूनिया के बीच मतदान किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार चयन पैनल ने अर्जुन पुरस्कार के लिए शुरू में जोसेफ के नाम को भी मंजूरी दे दी थी, लेकिन बाद में साई अधिकारी की अनुपस्थिति में उसे हटा दिया गया।
ऐसे भी संकेत मिले थे कि 2012 के लंदन परालिम्पिक के रजत पदक विजेता गिरिशा को खेल रत्न के बजाय अर्जुन पुरस्कार देने पर विचार किया जा सकता है। गिरिशा ने 13 अगस्त को खेल मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि उनके नाम पर खेल रत्न के लिए विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके नाम पर कम से कम इस साल अर्जुन पुरस्कार और अगले साल खेल रत्न के लिए विचार किया जाना चाहिए।
जितेंद्र को हालांकि मूल सूची पर कायम रहने के फैसले को अभी अपनी अंतिम मंजूरी देनी है, लेकिन खेल मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि खेल रत्न के साथ-साथ अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित 15 खिलाड़ियों की मूल सूची में किसी तरह का बदलाव किे जाने की संभावना नहीं है।
अधिकारी ने कहा, ‘खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित खिलाड़ियों की मूल सूची में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सब कुछ पहले जैसा ही है।’ डबल ट्रैप के निशानेबाज रंजन सोढ़ी के नाम की खेल रत्न के लिए सिफारिश किए जाने से विवाद पैदा हो गया था क्योंकि चयन पैनल के कुछ सदस्यों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। टिप्पणियां
एक अन्य सदस्य और पूर्व निशानेबाज के आने के बाद परिदृश्य बदल गया था और गिरिशा को हटाकर सोढ़ी और पूनिया के बीच मतदान किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार चयन पैनल ने अर्जुन पुरस्कार के लिए शुरू में जोसेफ के नाम को भी मंजूरी दे दी थी, लेकिन बाद में साई अधिकारी की अनुपस्थिति में उसे हटा दिया गया।
ऐसे भी संकेत मिले थे कि 2012 के लंदन परालिम्पिक के रजत पदक विजेता गिरिशा को खेल रत्न के बजाय अर्जुन पुरस्कार देने पर विचार किया जा सकता है। गिरिशा ने 13 अगस्त को खेल मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि उनके नाम पर खेल रत्न के लिए विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके नाम पर कम से कम इस साल अर्जुन पुरस्कार और अगले साल खेल रत्न के लिए विचार किया जाना चाहिए।
अधिकारी ने कहा, ‘खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित खिलाड़ियों की मूल सूची में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सब कुछ पहले जैसा ही है।’ डबल ट्रैप के निशानेबाज रंजन सोढ़ी के नाम की खेल रत्न के लिए सिफारिश किए जाने से विवाद पैदा हो गया था क्योंकि चयन पैनल के कुछ सदस्यों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। टिप्पणियां
एक अन्य सदस्य और पूर्व निशानेबाज के आने के बाद परिदृश्य बदल गया था और गिरिशा को हटाकर सोढ़ी और पूनिया के बीच मतदान किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार चयन पैनल ने अर्जुन पुरस्कार के लिए शुरू में जोसेफ के नाम को भी मंजूरी दे दी थी, लेकिन बाद में साई अधिकारी की अनुपस्थिति में उसे हटा दिया गया।
ऐसे भी संकेत मिले थे कि 2012 के लंदन परालिम्पिक के रजत पदक विजेता गिरिशा को खेल रत्न के बजाय अर्जुन पुरस्कार देने पर विचार किया जा सकता है। गिरिशा ने 13 अगस्त को खेल मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि उनके नाम पर खेल रत्न के लिए विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके नाम पर कम से कम इस साल अर्जुन पुरस्कार और अगले साल खेल रत्न के लिए विचार किया जाना चाहिए।
एक अन्य सदस्य और पूर्व निशानेबाज के आने के बाद परिदृश्य बदल गया था और गिरिशा को हटाकर सोढ़ी और पूनिया के बीच मतदान किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार चयन पैनल ने अर्जुन पुरस्कार के लिए शुरू में जोसेफ के नाम को भी मंजूरी दे दी थी, लेकिन बाद में साई अधिकारी की अनुपस्थिति में उसे हटा दिया गया।
ऐसे भी संकेत मिले थे कि 2012 के लंदन परालिम्पिक के रजत पदक विजेता गिरिशा को खेल रत्न के बजाय अर्जुन पुरस्कार देने पर विचार किया जा सकता है। गिरिशा ने 13 अगस्त को खेल मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि उनके नाम पर खेल रत्न के लिए विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके नाम पर कम से कम इस साल अर्जुन पुरस्कार और अगले साल खेल रत्न के लिए विचार किया जाना चाहिए।
ऐसे भी संकेत मिले थे कि 2012 के लंदन परालिम्पिक के रजत पदक विजेता गिरिशा को खेल रत्न के बजाय अर्जुन पुरस्कार देने पर विचार किया जा सकता है। गिरिशा ने 13 अगस्त को खेल मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि उनके नाम पर खेल रत्न के लिए विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके नाम पर कम से कम इस साल अर्जुन पुरस्कार और अगले साल खेल रत्न के लिए विचार किया जाना चाहिए। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: पूनिया के नाम पर विचार करने के आग्रह के बाद खेलमंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को अपने सचिव पीके देब के साथ बैठक की थी। उस बैठक में फैसला नहीं हो पाया था इसलिए अंतिम निर्णय करने के लिए आज फिर बैठक हुई। | 11 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में कथित अनियमितताओं पर शुंगलू समिति की रिपोर्ट पर सभी संबंधित मंत्रालयों से कहा कि वे रिपोर्ट को दबाकर नहीं बैठें बल्कि इसमें सामने आने वाले उन तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करें जो उन्हें सही लगते हों। प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों को जारी सीधे निर्देश में उनसे कहा है कि रिपोर्ट के जो तथ्य उन्हें सही लगे उनके आधार पर उन्हें आगे बढ़ते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री का संदेश है कि यदि रिपोर्ट को लेकर कोई असहमति है तो मंत्रालयों को रिपोर्ट को दबाना नहीं चाहिए बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय से सम्पर्क करना चाहिए। यह निर्देश दिल्ली सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा समिति की कुछ सिफारिशों को यह कहते हुए खारिज करने के मद्देनजर जारी किया गया है कि उसने दबावों को नजरंदाज किया। इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय ने राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति की ओर से जारी ठेकों में कथित अनियमितताओं को लेकर शुंगलू समिति की रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए खेल मंत्रालय को सलाह दी थी कि वह सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराए। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: प्रधानमंत्री ने कहा है कि रिपोर्ट के जो तथ्य सही लगें उनके आधार पर आगे बढ़ते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। | 11 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: ट्रंप प्रशासन का भारत-अमेरिकी संबंधों को लेकर ‘काफी सकारात्मक नज़रिया’ है. यह कहना है भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर का जिनका कहना है कि अमेरिका की भारत के साथ संबंधों को आगे ले जाने में काफी रूचि है. जयशंकर ने यह बात वरिष्ठ कैबिनेट सदस्यों और शीर्ष अधिकारियों के साथ व्यापक बातचीत के बाद कही है. द्विपक्षीय संबंधों को आगे ले जाने को लेकर ‘आशावादी’ रूख जताते हुए यशंकर ने वॉशिंगटन में भारतीय पत्रकारों को बताया कि ओबामा प्रशासन के दौरान शुरू हुई भारत-अमेरिकी कूटनीतिक और वाणिज्यिक वार्ता इस साल भी आयोजित होगी.टिप्पणियां
उन्होंने कहा ‘कुल मिलाकर यह दिख रहा है कि प्रशासन का भारत और उसके साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक नजरिया है.’ वॉशिंगटन में अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने विदेश मंत्री टिलरसन, वाणिज्य मंत्री रॉस, होमलैंड सुरक्षा मंत्री जनरल (रिटायर्ड) जॉन कैली, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आर मैकमास्टर और राष्ट्रपति के उप सहायक केन जस्टर से मुलाकात की. टिलरसन के साथ जयशंकर ने द्विपक्षीय कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ अफगानिस्तान और एशिया प्रशांत क्षेत्र में स्थिति पर चर्चा की.
वाणिज्य मंत्री के साथ चर्चा द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग पर केंद्रित रही जबकि होमलैंड सुरक्षा मंत्री के साथ आव्रजन तथा भारतीयों और अमेरिका में भारतीय अमेरिकी समुदाय के कल्याण से संबंधित मुद्दों पर बातचीत की गई. पूर्व अमेरिकी नौसैनिक द्वारा भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचीभोटला की हत्या के परिदृश्य में होमलैंड सुरक्षा मंत्री के साथ जयशंकर की बातचीत को अहम माना जा रहा है.
उन्होंने कहा ‘कुल मिलाकर यह दिख रहा है कि प्रशासन का भारत और उसके साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक नजरिया है.’ वॉशिंगटन में अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने विदेश मंत्री टिलरसन, वाणिज्य मंत्री रॉस, होमलैंड सुरक्षा मंत्री जनरल (रिटायर्ड) जॉन कैली, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आर मैकमास्टर और राष्ट्रपति के उप सहायक केन जस्टर से मुलाकात की. टिलरसन के साथ जयशंकर ने द्विपक्षीय कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ अफगानिस्तान और एशिया प्रशांत क्षेत्र में स्थिति पर चर्चा की.
वाणिज्य मंत्री के साथ चर्चा द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग पर केंद्रित रही जबकि होमलैंड सुरक्षा मंत्री के साथ आव्रजन तथा भारतीयों और अमेरिका में भारतीय अमेरिकी समुदाय के कल्याण से संबंधित मुद्दों पर बातचीत की गई. पूर्व अमेरिकी नौसैनिक द्वारा भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचीभोटला की हत्या के परिदृश्य में होमलैंड सुरक्षा मंत्री के साथ जयशंकर की बातचीत को अहम माना जा रहा है.
वाणिज्य मंत्री के साथ चर्चा द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग पर केंद्रित रही जबकि होमलैंड सुरक्षा मंत्री के साथ आव्रजन तथा भारतीयों और अमेरिका में भारतीय अमेरिकी समुदाय के कल्याण से संबंधित मुद्दों पर बातचीत की गई. पूर्व अमेरिकी नौसैनिक द्वारा भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचीभोटला की हत्या के परिदृश्य में होमलैंड सुरक्षा मंत्री के साथ जयशंकर की बातचीत को अहम माना जा रहा है. | संक्षिप्त सारांश: विदेश सचिव जयशंकर को उम्मीद है भारत-अमेरिका के रिश्ते बेहतर दिशा लेंगे
उन्होंने कहा ट्रंप का भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर सकारात्मक नजरिया है
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री के साथ चर्चा द्विपक्षीय व्यापार पर केंद्रित रही | 23 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: मौजूदा चैम्पियन भारत के डबल ट्रैप निशानेबाज रंजन सोढ़ी ने वर्ल्ड कप शूटिंग फाइनल में चीन के हू बिनयुआन को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया है। सोढ़ी ने मंगलवार को टाईब्रेकर तक खिंचे फाइनल में बिनयुआन को हराया। सोढ़ी और बिनयुआन ने फाइनल में 200 में से 187 अंक हासिल किए। टाई शॉट में सोढ़ी ने बाजी मारी। सोढ़ी निशानेबाजी विश्व कप में अपने खिताब की रक्षा करने वाले पहले भारतीय हैं। सोढ़ी ने जीत के बाद कहा, "एक के बाद एक खिताब जीतना शानदार अनुभव है। प्रतिस्पर्धा कठिन थी। मैं आशा करता हूं कि मेरा यह प्रदर्शन आगे भी बरकरार रहेगा।" क्वालीफायर में सोढ़ी बिनयुआन के बाद दूसरे स्थान पर थे लेकिन फाइनल में सोढ़ी ने अपने प्रदर्शन का स्तर उठाया। पंजाब के सोढ़ी बीती 26 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते आ रहे हैं। सोढ़ी ने इस दौरान 150 में से औसतन 142.6 अंक हासिल किए हैं। मित्तल चैम्पियंस ट्रस्ट, खेल मंत्रालय और सहारा इंडिया समूह से वित्तीय मदद हासिल करने वाले सोढ़ी ने हाल ही में पंजाब पुलिस में डीएसपी पद पर कार्य करना शुरू किया है। | यह एक सारांश है: सोढ़ी और बिनयुआन ने फाइनल में 200 में से 187 अंक हासिल किए। टाई शॉट में सोढ़ी ने बाजी मारी। | 24 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: शांतिनिकेतन में छात्रा को जबरदस्ती मूत्र पिलाने की घटना के बाद इसी तरह की एक और घटना तमिलनाडु के एक निजी स्कूल में सामने आई है। पेरमबलूर में स्कूल के 14 साल के एक छात्र को तीन शिक्षकों ने अपना मूत्र पीने के लिए मजबूर किया।
इस छात्र ने शिक्षकों से शौचालय जाने की अनुमति मांगी थी, जिससे गुस्साए शिक्षकों ने उसे यह सजा दी। लड़के के अभिभावकों ने कहा कि स्कूल में पेड़ की छांव में छात्रों की कक्षा चल रही थी। उनसे पढ़ने के लिए कहा गया था। कक्षा शुरू होने के साथ ही लड़के ने तीन शिक्षकों से टॉयलेट जाने की अनुमति मांगी, जिसके लिए शिक्षकों ने उसे मना कर दिया।टिप्पणियां
स्कूल प्रशासन के समक्ष शिकायत में अभिभावकों ने कहा कि लड़के ने जब बार-बार इसकी अनुमति मांगी, तो नाराज शिक्षकों ने उससे पेड़ के पास पेशाब करने और अपना मूत्र पीने के लिए कहा। इसके बाद छात्र की पिटाई भी की गई। अपने साथ हुए इस दुर्व्यवहार से दुखी छात्र वहां से भागकर कुंभकोणम के पास स्थित अपने मूल गांव शोलनमलाई पहुंच गया।
शुक्रवार को हुई घटना को लेकर उसके अभिभावकों ने अभी पुलिस के समक्ष कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। वहीं अगरम सीकुर सिरूमलार हाईस्कूल के प्रबंधन ने शिक्षकों पर लगे आरोपों से इनकार किया है, लेकिन विभागीय जांच को देखते हुए शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को मामले की जांच के लिए स्कूल का दौरा किया।
इस छात्र ने शिक्षकों से शौचालय जाने की अनुमति मांगी थी, जिससे गुस्साए शिक्षकों ने उसे यह सजा दी। लड़के के अभिभावकों ने कहा कि स्कूल में पेड़ की छांव में छात्रों की कक्षा चल रही थी। उनसे पढ़ने के लिए कहा गया था। कक्षा शुरू होने के साथ ही लड़के ने तीन शिक्षकों से टॉयलेट जाने की अनुमति मांगी, जिसके लिए शिक्षकों ने उसे मना कर दिया।टिप्पणियां
स्कूल प्रशासन के समक्ष शिकायत में अभिभावकों ने कहा कि लड़के ने जब बार-बार इसकी अनुमति मांगी, तो नाराज शिक्षकों ने उससे पेड़ के पास पेशाब करने और अपना मूत्र पीने के लिए कहा। इसके बाद छात्र की पिटाई भी की गई। अपने साथ हुए इस दुर्व्यवहार से दुखी छात्र वहां से भागकर कुंभकोणम के पास स्थित अपने मूल गांव शोलनमलाई पहुंच गया।
शुक्रवार को हुई घटना को लेकर उसके अभिभावकों ने अभी पुलिस के समक्ष कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। वहीं अगरम सीकुर सिरूमलार हाईस्कूल के प्रबंधन ने शिक्षकों पर लगे आरोपों से इनकार किया है, लेकिन विभागीय जांच को देखते हुए शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को मामले की जांच के लिए स्कूल का दौरा किया।
स्कूल प्रशासन के समक्ष शिकायत में अभिभावकों ने कहा कि लड़के ने जब बार-बार इसकी अनुमति मांगी, तो नाराज शिक्षकों ने उससे पेड़ के पास पेशाब करने और अपना मूत्र पीने के लिए कहा। इसके बाद छात्र की पिटाई भी की गई। अपने साथ हुए इस दुर्व्यवहार से दुखी छात्र वहां से भागकर कुंभकोणम के पास स्थित अपने मूल गांव शोलनमलाई पहुंच गया।
शुक्रवार को हुई घटना को लेकर उसके अभिभावकों ने अभी पुलिस के समक्ष कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। वहीं अगरम सीकुर सिरूमलार हाईस्कूल के प्रबंधन ने शिक्षकों पर लगे आरोपों से इनकार किया है, लेकिन विभागीय जांच को देखते हुए शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को मामले की जांच के लिए स्कूल का दौरा किया।
शुक्रवार को हुई घटना को लेकर उसके अभिभावकों ने अभी पुलिस के समक्ष कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। वहीं अगरम सीकुर सिरूमलार हाईस्कूल के प्रबंधन ने शिक्षकों पर लगे आरोपों से इनकार किया है, लेकिन विभागीय जांच को देखते हुए शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को मामले की जांच के लिए स्कूल का दौरा किया। | संक्षिप्त पाठ: शांतिनिकेतन में छात्रा को जबरदस्ती मूत्र पिलाने की घटना के बाद तमिलनाडु के पेरमबलूर में स्कूल के 14 साल के एक छात्र को तीन शिक्षकों ने अपना मूत्र पीने के लिए मजबूर किया। | 22 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: बिहार में बारिश भले ही रुक गई हो लेकिन अब जगह-जगह बारिश की वजह से हुआ जलजमाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती की तरह है. राज्य के अलग-अलग जिलों में हुई बीते कुछ दिनों में हुई मुसलाधार बारिश की वजह से मौत का आंकड़ा 42 हो गया है, जबकि नौ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. सीएम नीतीश कुमार ने बाढ़ के बाद बने हालात का मंगलवार रात को निरीक्षण किया. बता दें कि भारी बारिश से मरने वाले 42 लोगों में भागलपुर में दस, गया में छह, पटना एवं कैमूर में चार-चार, खगड़िया एवं भोजपुर में तीन-तीन, बेगूसराय, नालंदा एवं नवादा में दो-दो, पूर्णिया, जमुई, अरवल, बांका, सीतामढी और कटिहार में एक-एक व्यक्ति शामिल हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को इलाके का निरीक्षण के बाद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये.
पटना के एक अणे मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास से गांधी मैदान होते हुये नीतीश ने मंगलवार को शहर के जलजमाव वाले क्षेत्रों का मुआयना किया. मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में चलाये जा रहे आपदा राहत बचाव कार्य के लिये राहत सामग्री आपूर्ति, भंडारण, पैकेटिंग एवं निर्गत केन्द्र का भी जायजा लिया. उन्होंने इसके पश्चात सैदपुर के जलजमाव वाले क्षेत्रों का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी व उनके निदान के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. मुख्यमंत्री ने जल निकासी के कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया. उधर, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सचिवालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में मंत्रियों, स्थानीय विधायकों व पटना नगर निगम, बुडको तथा नगर विकास विभाग के आला अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर जलमग्न इलाकों में उच्च क्षमता के पम्प लगा कर जमे हुए पानी में अगले 48 घंटे में निकालने का निर्देश दिया.
उन्होंने बताया कि कोल इंडिया, एनटीपीसी और कल्याणपुर सीमेंट से मंगाए गए उच्च क्षमता के पम्पों के जरिए कंकड़बाग और राजेन्द्र नगर जैसे सर्वाधिक प्रभावित इलाकों से पानी को निकाला जायेगा. इस बैठक में अलग-अलग मोहल्लों में जमे पानी को 50 नए पम्पों के जरिए युद्ध स्तर पर निकालने के साथ ही जल संसाधन विभाग से भी पम्प मंगाने का निर्णय लिया गया. वहीं, राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी ने पटना में खराब जल निकाली प्रणाली के लिए सीएम नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को जिम्मेदार ठहराया है.
उन्होंने मंगलवार को कहा कि उनके शासन काल में भारी बारिश के कारण जब इस शहर में कुछ इंच पानी जमा हो जाता था तो सुशील धरने पर बैठ जाते थे. आज से 20 वर्ष पूर्व हमारी सरकार में सीवरों की नियमित सफ़ाई होती थी. भारी बारिश के कारण अगर 1-2 घंटे शहर के कुछ हिस्सों में यदि कुछ इंच जलजमाव होता भी था तो उसी 2-3 इंच पानी में सुशील मोदी नौटंकी करने धरने पर बैठ जाते थे. हमारे शासन में कभी भी गंदा पानी कई-कई दिनों तक जमा नहीं रहा. राबड़ी देवी ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार और सुशील मोदी के 15 वर्ष के राज में 4 दिन से 5-6 फुट गंदा पानी जमा है. क्यों नहीं सुशील मोदी अब नौटंकी कर धरना देते? काहे मुँह छिपाए घुम रहे हैं? ये तो नगर विकास मंत्री भी रहे हैं.
बताए सारा पैसा कौन, कैसे, किसलिए, कहाँ और क्यों खा गया''? वहीं माकपा की जिला समिति की सदस्य एवं महिला नेत्री सरिता पांडेय के नेतृत्व में मंगलवार को पटना के बाइपास पर सड़क जाम की गई. माकपा के सचिव मनोज कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि पटना के सांसद रविशंकर प्रसाद और विधायक नितिन नवीन के आश्वासन पर सड़क जाम समाप्त हुआ. | पटना में जलजमाव ने बढ़ाई दिक्कत
जलजमाव को निकालने के लिए कोशिशें जारी
उप मुख्यमंत्री ने भी दिया बयान | 6 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: कुछ दिन पहले ही करण जौहर के चर्चित शो 'कॉफी विद करण' पर आए खिलाड़ी कुमार और अपने सेंस ऑफ ह्यूमर के लिए प्रसिद्ध उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना की जोड़ी ने अपने दिल की कई बातें रखी और अब इस शो पर जल्द ही एक और शादीशुदा जोड़ा आने जा रहा है. हम बात कर रहे हैं शाहिद और उनकी पत्नी मीरा की जो जल्द ही करण के शो के महमान बन कर आने वाले हैं.टिप्पणियां
'कॉफी विद करण' के हर सीजन में शाहिद कपूर करण के महमान बन कर आते रहे हैं, लेकिन 5वें सीजन में पहली बार मीरा टीवी के किसी शो में दिखाई देंगी. इसी साल अगस्त में माता-पिता बने इस जोड़े में मीरा यूं तो कई मौकों पर लोगों के सामने आई हैं लेकिन मीडिया से उन्होंने कभी बात नहीं की है.
शुक्रवार को सुबह शाहिद कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक सेल्फी पोस्ट की जिसमें मीरा और शाहिद करण के सेट पर दिखाई दे रहे हैं. इस पोस्ट पर शाहिद ने कैप्शन दिया 'ऑन द काउच विद माई लव'.
कुछ समय पहले ही शाहिद ने मीडिया से कहा था कि मीरा को इस बात से सबसे ज्यादा तकलीफ होती है कि अब लोग उसे पहचान जाते हैं. बता दें कि इससे पहले के सीजन्स में शाहिद ईशा देओल, करीना और करिश्मा कपूर, प्रियंका चोपड़ा और सोनाक्षी सिन्हा के साथ 'कॉफी विद करण' के चार सीजन्स में नजर आ चुके हैं.
'कॉफी विद करण' के हर सीजन में शाहिद कपूर करण के महमान बन कर आते रहे हैं, लेकिन 5वें सीजन में पहली बार मीरा टीवी के किसी शो में दिखाई देंगी. इसी साल अगस्त में माता-पिता बने इस जोड़े में मीरा यूं तो कई मौकों पर लोगों के सामने आई हैं लेकिन मीडिया से उन्होंने कभी बात नहीं की है.
शुक्रवार को सुबह शाहिद कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक सेल्फी पोस्ट की जिसमें मीरा और शाहिद करण के सेट पर दिखाई दे रहे हैं. इस पोस्ट पर शाहिद ने कैप्शन दिया 'ऑन द काउच विद माई लव'.
कुछ समय पहले ही शाहिद ने मीडिया से कहा था कि मीरा को इस बात से सबसे ज्यादा तकलीफ होती है कि अब लोग उसे पहचान जाते हैं. बता दें कि इससे पहले के सीजन्स में शाहिद ईशा देओल, करीना और करिश्मा कपूर, प्रियंका चोपड़ा और सोनाक्षी सिन्हा के साथ 'कॉफी विद करण' के चार सीजन्स में नजर आ चुके हैं.
कुछ समय पहले ही शाहिद ने मीडिया से कहा था कि मीरा को इस बात से सबसे ज्यादा तकलीफ होती है कि अब लोग उसे पहचान जाते हैं. बता दें कि इससे पहले के सीजन्स में शाहिद ईशा देओल, करीना और करिश्मा कपूर, प्रियंका चोपड़ा और सोनाक्षी सिन्हा के साथ 'कॉफी विद करण' के चार सीजन्स में नजर आ चुके हैं. | संक्षिप्त पाठ: पहली बार किसी शो में शामिल होंगी शाहिद की पत्नी मीरा
'कॉफी विद करण' के सभी शो में आए हैं शाहिद पर पहली बार होंगे पत्नी के साथ
इंस्टग्राम पर शेयर की है शाहिद ने सेट से ली गई सेल्फी | 14 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: पटना के फतूहा थाना अंतर्गत कच्ची दरगाह के समीप एक पीपा पुल को पार करते समय वाहन के सामने का शीशा टूटने से उसमें बैठे राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद घायल हो गए।
राजद के मीडिया प्रभारी रणधीर कुमार ने बताया कि राजद प्रमुख के साथ यह हादसा राघोपुर जाने के क्रम में हुआ। उन्होंने बताया कि पीपा पुल पर वाहन का अगला शीशा टूट गया और इस कारण आगे की सीट पर बैठे लालू के सिर में चोटें आईं। उन्हें इलाज के लिए पटना के राजेश्वर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उनके सर में दो टांके लगाए। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें घर जाने की अनुमति दे दी।
राजद के मीडिया प्रभारी रणधीर कुमार ने बताया कि राजद प्रमुख के साथ यह हादसा राघोपुर जाने के क्रम में हुआ। उन्होंने बताया कि पीपा पुल पर वाहन का अगला शीशा टूट गया और इस कारण आगे की सीट पर बैठे लालू के सिर में चोटें आईं। उन्हें इलाज के लिए पटना के राजेश्वर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उनके सर में दो टांके लगाए। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें घर जाने की अनुमति दे दी। | संक्षिप्त पाठ: पटना के फतूहा थाना अंतर्गत कच्ची दरगाह के समीप एक पीपा पुल को पार करते समय वाहन के सामने का शीशा टूटने से उसमें बैठे राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद घायल हो गए। | 22 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: भारतीय टेनिस तारिका सानिया मिर्जा और चीन की उनकी जोड़ीदार झी झेंग महिला युगल में सीधे सेटों में जीत दर्ज करके यहां अमेरिकी ओपन टेनिस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं।टिप्पणियां
सानिया और झेंग की 10वीं वरीयता प्राप्त जोड़ी ने ताइपेई की सु वेई हेस और चीन की पेंग शुहाई की वर्तमान विम्बलडन चैम्पियन जोड़ी को 110 मिनट तक चले मैच में 6-4, 7-6 से हराया। सेमीफाइनल में सानिया और झेंग का मुकाबला एशलीग बार्टी और कैसे डेलेक्वा की आठवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी से होगा।
सानिया और झेंग ने हेस और शुहाई की चौथी वरीय जोड़ी के खिलाफ जल्द ही लय हासिल कर ली थी। पहले सेट में उन्होंने एक ब्रेक प्वाइंट लिया, जो यह सेट जीतने के लिए पर्याप्त साबित हुआ। दूसरा सेट टाईब्रेकर तक गया, जिसमें सानिया और झेंग ने अपनी सर्विस बचाए रखकर मैच अपने नाम किया। रिकार्ड के लिए बता दें कि सानिया मिर्जा अमेरिकी ओपन में पहली बार सेमीफाइनल में पहुंची है। वैसे, ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंटों में उन्होंने कुल चौथी बार अंतिम चार में जगह बनाई है। यह भारतीय खिलाड़ी अब चारों ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी हैं।
सानिया और झेंग की 10वीं वरीयता प्राप्त जोड़ी ने ताइपेई की सु वेई हेस और चीन की पेंग शुहाई की वर्तमान विम्बलडन चैम्पियन जोड़ी को 110 मिनट तक चले मैच में 6-4, 7-6 से हराया। सेमीफाइनल में सानिया और झेंग का मुकाबला एशलीग बार्टी और कैसे डेलेक्वा की आठवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी से होगा।
सानिया और झेंग ने हेस और शुहाई की चौथी वरीय जोड़ी के खिलाफ जल्द ही लय हासिल कर ली थी। पहले सेट में उन्होंने एक ब्रेक प्वाइंट लिया, जो यह सेट जीतने के लिए पर्याप्त साबित हुआ। दूसरा सेट टाईब्रेकर तक गया, जिसमें सानिया और झेंग ने अपनी सर्विस बचाए रखकर मैच अपने नाम किया। रिकार्ड के लिए बता दें कि सानिया मिर्जा अमेरिकी ओपन में पहली बार सेमीफाइनल में पहुंची है। वैसे, ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंटों में उन्होंने कुल चौथी बार अंतिम चार में जगह बनाई है। यह भारतीय खिलाड़ी अब चारों ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी हैं।
सानिया और झेंग ने हेस और शुहाई की चौथी वरीय जोड़ी के खिलाफ जल्द ही लय हासिल कर ली थी। पहले सेट में उन्होंने एक ब्रेक प्वाइंट लिया, जो यह सेट जीतने के लिए पर्याप्त साबित हुआ। दूसरा सेट टाईब्रेकर तक गया, जिसमें सानिया और झेंग ने अपनी सर्विस बचाए रखकर मैच अपने नाम किया। रिकार्ड के लिए बता दें कि सानिया मिर्जा अमेरिकी ओपन में पहली बार सेमीफाइनल में पहुंची है। वैसे, ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंटों में उन्होंने कुल चौथी बार अंतिम चार में जगह बनाई है। यह भारतीय खिलाड़ी अब चारों ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी हैं। | यह एक सारांश है: सानिया और झेंग की 10वीं वरीयता प्राप्त जोड़ी ने ताइपेई की सु वेई हेस और चीन की पेंग शुहाई की वर्तमान विम्बलडन चैम्पियन जोड़ी को 110 मिनट तक चले मैच में 6-4, 7-6 से हराया। | 24 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: ब्राजील के स्टार मिडफील्डर काका के इटली के अग्रणी फुटबाल क्लब एसी मिलान के साथ फिर जुड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक रियल मेड्रिड की ओर से खेल रहे काका के पिता एसी मिलान में अपने बेटे की वापसी के लिए बातचीत कर रहे हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, काका के पिता बॉस्को लेइट इस सम्बंध में क्लब के उपाध्यक्ष एड्रियानो गालियानी से अपने 30 वर्षीय बेटे के बारे में वापसी के लिए बातचीत कर रहे हैं।टिप्पणियां
ब्राजील के समाचार पत्र 'ब्राजील ओ ग्लोबो' के मुताबिक, वर्ष 2009 में काका के इस क्लब को छोड़ने के बाद भी उनके परिवार वालों ने इस क्लब के साथ घनिष्ठ सम्बंध बनाए हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रियल मेड्रिड ने अन्य क्लब से बातचीत करने की सहमति दे दी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में काका को 'फीफा वर्ल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर' चुना गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक रियल मेड्रिड की ओर से खेल रहे काका के पिता एसी मिलान में अपने बेटे की वापसी के लिए बातचीत कर रहे हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, काका के पिता बॉस्को लेइट इस सम्बंध में क्लब के उपाध्यक्ष एड्रियानो गालियानी से अपने 30 वर्षीय बेटे के बारे में वापसी के लिए बातचीत कर रहे हैं।टिप्पणियां
ब्राजील के समाचार पत्र 'ब्राजील ओ ग्लोबो' के मुताबिक, वर्ष 2009 में काका के इस क्लब को छोड़ने के बाद भी उनके परिवार वालों ने इस क्लब के साथ घनिष्ठ सम्बंध बनाए हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रियल मेड्रिड ने अन्य क्लब से बातचीत करने की सहमति दे दी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में काका को 'फीफा वर्ल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर' चुना गया था।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, काका के पिता बॉस्को लेइट इस सम्बंध में क्लब के उपाध्यक्ष एड्रियानो गालियानी से अपने 30 वर्षीय बेटे के बारे में वापसी के लिए बातचीत कर रहे हैं।टिप्पणियां
ब्राजील के समाचार पत्र 'ब्राजील ओ ग्लोबो' के मुताबिक, वर्ष 2009 में काका के इस क्लब को छोड़ने के बाद भी उनके परिवार वालों ने इस क्लब के साथ घनिष्ठ सम्बंध बनाए हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रियल मेड्रिड ने अन्य क्लब से बातचीत करने की सहमति दे दी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में काका को 'फीफा वर्ल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर' चुना गया था।
ब्राजील के समाचार पत्र 'ब्राजील ओ ग्लोबो' के मुताबिक, वर्ष 2009 में काका के इस क्लब को छोड़ने के बाद भी उनके परिवार वालों ने इस क्लब के साथ घनिष्ठ सम्बंध बनाए हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रियल मेड्रिड ने अन्य क्लब से बातचीत करने की सहमति दे दी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में काका को 'फीफा वर्ल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर' चुना गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रियल मेड्रिड ने अन्य क्लब से बातचीत करने की सहमति दे दी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में काका को 'फीफा वर्ल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर' चुना गया था। | यह एक सारांश है: ब्राजील के स्टार मिडफील्डर काका के इटली के अग्रणी फुटबाल क्लब एसी मिलान के साथ फिर जुड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। | 24 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन हाल में शुरू हुआ है, लेकिन इतिहास गवाह है कि यह समस्या कोई नयी नहीं है और इस मुद्दे को लेकर पहले भी छत्रपति शिवाजी जैसे कई शासकों ने कड़ा रूख अख्तियार किया था।
अनिल माधव दवे ने अपनी पुस्तक ‘शिवाजी एंड सुराज’ में लिखा है, ‘‘महाराज को राज व्यवहार में भ्रष्टाचार, चाहे वह आचरण में हो या अर्थतंत्र में, बिल्कुल अस्वीकार्य था। उनके सौतेले मामा मोहिते ने रिश्वत ली, यह जानकारी महाराज को मिली तो उन्होंने तत्काल उसे कारागार में डाल दिया और छूटने पर पिता शाह जी के पास भेज दिया।’’
बीते दिनों रिलीज हुई पुस्तक के अनुसार, ‘‘इसी प्रकार एक दबंग ने गरीब किसान की भूमि हड़पने की कोशिश की। शिवाजी ने अपने पद एवं शक्ति का गलत प्रयोग करने वाले उस बड़े किसान को न केवल दंडित किया, बल्कि गरीब की भूमि भी सुरक्षित करवा दी।’’
अपने अधिकारियों को लिखे 13 मई 1671 के एक पत्र में शिवाजी लिखते हैं, ‘‘अगर आप जनता को तकलीफ देंगे और कार्य संपादन हेतु रिश्वत मांगेंगे तो लोगों को लगेगा कि इससे तो मुगलों का शासन ही अच्छा था और लोग परेशानी का अनुभव करेंगे।’’
राज्यसभा सदस्य दवे ने कहा, ‘‘छत्रपति शिवाजी भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ थे। इसमें केवल आर्थिक नहीं, बल्कि चारित्रिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार भी शामिल था। उनकी भ्रष्टाचार की परिभाषा बेहद व्यापक थी, जिसकी हिमायत सभी देश भक्त नागरिक कर रहे हैं।’’
पुर्तगाल के वायसराय कॉल डे सेंट विंसेंट ने 20 सितंबर 1667 के पत्र में लिखा है, ‘‘धूर्तता, साहस, संचालन और सैन्य सूझबूझ में शिवाजी की तुलना सीजर एवं अलेक्जेंडर से की जा सकती है।’’
किताब में दवे ने लिखा है, ‘‘शिवाजी जानते थे कि भ्रष्टाचार एक तरह से विषकन्या है और विरोधी अपने हित साधने के लिए इस मार्ग का भरपूर प्रयोग करते हैं। राजमहल में सेंध एवं राज्यकर्ताओं का व्याभिचार अंत में राज्य की पराजय का कारण बनता है। अत: इस तरह के भ्रष्टाचार के प्रति उन्होंने अत्यंत कठोर व्यवहार रखा।’’
किताब के मुताबिक, ‘‘शिवाजी सर्वत्यागी सन्यासी नहीं थे। वे शासक थे। उन्होंने अपने राज्य विस्तार के लिए युद्ध लड़े, हमले किए, दुर्गों को जीता और अन्य राज्यों से संधि तथा वार्ताएं कीं। ऐसा करते समय उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद का भरपूर प्रयोग किया। उन्होंने विजय प्राप्ति हेतु दुश्मनों को जहां आवश्यक लगा, सभी प्रकार के प्रलोभन दिए लेकिन स्वयं को नारी एवं किसी भी प्रकार के प्रलोभन से न केवल मुक्त रखा बल्कि अपने सहयोगी को भी ऐसा नहीं करने दिया।’’टिप्पणियां
उन्होंने लिखा है, ‘‘शिवाजी का स्वराज्य हो या गांधी का स्वदेशी। भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो या फ्रांस की क्रांति। रूस में मिखाइल गोर्बाचोव द्वारा प्रारंभ ग्लासनॉट अथवा पेरेस्त्रोइका का सुधार आंदोलन हो या अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, सभी समाज में घुमड़ती ‘स्व’ के भाव की अभिव्यक्तियां ही हैं, जिसका जन्म किसी नायक से या नायक के बगैर हुआ।’’
मुगल दरबार के इतिहासकार गफी खान जैसा उनका विरोधी भी लिखता है, ‘‘शिवाजी अपनी प्रजा में मान मर्यादा बनाए रखने के लिए हमेशा सावधान रहे। वे दुश्मन को लूटते और उनके क्षेत्रों में विद्रोह खड़ा करते थे, लेकिन अशोभनीय कामों से वह हमेशा दूर रहते थे। जब भी कोई मुस्लिम महिला या बच्चे युद्ध या मुहिम में उनके कब्जे में आते तो वह उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखते थे। उनकी यह दृष्टि राजदर्शन का अंग थी।’’
अनिल माधव दवे ने अपनी पुस्तक ‘शिवाजी एंड सुराज’ में लिखा है, ‘‘महाराज को राज व्यवहार में भ्रष्टाचार, चाहे वह आचरण में हो या अर्थतंत्र में, बिल्कुल अस्वीकार्य था। उनके सौतेले मामा मोहिते ने रिश्वत ली, यह जानकारी महाराज को मिली तो उन्होंने तत्काल उसे कारागार में डाल दिया और छूटने पर पिता शाह जी के पास भेज दिया।’’
बीते दिनों रिलीज हुई पुस्तक के अनुसार, ‘‘इसी प्रकार एक दबंग ने गरीब किसान की भूमि हड़पने की कोशिश की। शिवाजी ने अपने पद एवं शक्ति का गलत प्रयोग करने वाले उस बड़े किसान को न केवल दंडित किया, बल्कि गरीब की भूमि भी सुरक्षित करवा दी।’’
अपने अधिकारियों को लिखे 13 मई 1671 के एक पत्र में शिवाजी लिखते हैं, ‘‘अगर आप जनता को तकलीफ देंगे और कार्य संपादन हेतु रिश्वत मांगेंगे तो लोगों को लगेगा कि इससे तो मुगलों का शासन ही अच्छा था और लोग परेशानी का अनुभव करेंगे।’’
राज्यसभा सदस्य दवे ने कहा, ‘‘छत्रपति शिवाजी भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ थे। इसमें केवल आर्थिक नहीं, बल्कि चारित्रिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार भी शामिल था। उनकी भ्रष्टाचार की परिभाषा बेहद व्यापक थी, जिसकी हिमायत सभी देश भक्त नागरिक कर रहे हैं।’’
पुर्तगाल के वायसराय कॉल डे सेंट विंसेंट ने 20 सितंबर 1667 के पत्र में लिखा है, ‘‘धूर्तता, साहस, संचालन और सैन्य सूझबूझ में शिवाजी की तुलना सीजर एवं अलेक्जेंडर से की जा सकती है।’’
किताब में दवे ने लिखा है, ‘‘शिवाजी जानते थे कि भ्रष्टाचार एक तरह से विषकन्या है और विरोधी अपने हित साधने के लिए इस मार्ग का भरपूर प्रयोग करते हैं। राजमहल में सेंध एवं राज्यकर्ताओं का व्याभिचार अंत में राज्य की पराजय का कारण बनता है। अत: इस तरह के भ्रष्टाचार के प्रति उन्होंने अत्यंत कठोर व्यवहार रखा।’’
किताब के मुताबिक, ‘‘शिवाजी सर्वत्यागी सन्यासी नहीं थे। वे शासक थे। उन्होंने अपने राज्य विस्तार के लिए युद्ध लड़े, हमले किए, दुर्गों को जीता और अन्य राज्यों से संधि तथा वार्ताएं कीं। ऐसा करते समय उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद का भरपूर प्रयोग किया। उन्होंने विजय प्राप्ति हेतु दुश्मनों को जहां आवश्यक लगा, सभी प्रकार के प्रलोभन दिए लेकिन स्वयं को नारी एवं किसी भी प्रकार के प्रलोभन से न केवल मुक्त रखा बल्कि अपने सहयोगी को भी ऐसा नहीं करने दिया।’’टिप्पणियां
उन्होंने लिखा है, ‘‘शिवाजी का स्वराज्य हो या गांधी का स्वदेशी। भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो या फ्रांस की क्रांति। रूस में मिखाइल गोर्बाचोव द्वारा प्रारंभ ग्लासनॉट अथवा पेरेस्त्रोइका का सुधार आंदोलन हो या अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, सभी समाज में घुमड़ती ‘स्व’ के भाव की अभिव्यक्तियां ही हैं, जिसका जन्म किसी नायक से या नायक के बगैर हुआ।’’
मुगल दरबार के इतिहासकार गफी खान जैसा उनका विरोधी भी लिखता है, ‘‘शिवाजी अपनी प्रजा में मान मर्यादा बनाए रखने के लिए हमेशा सावधान रहे। वे दुश्मन को लूटते और उनके क्षेत्रों में विद्रोह खड़ा करते थे, लेकिन अशोभनीय कामों से वह हमेशा दूर रहते थे। जब भी कोई मुस्लिम महिला या बच्चे युद्ध या मुहिम में उनके कब्जे में आते तो वह उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखते थे। उनकी यह दृष्टि राजदर्शन का अंग थी।’’
बीते दिनों रिलीज हुई पुस्तक के अनुसार, ‘‘इसी प्रकार एक दबंग ने गरीब किसान की भूमि हड़पने की कोशिश की। शिवाजी ने अपने पद एवं शक्ति का गलत प्रयोग करने वाले उस बड़े किसान को न केवल दंडित किया, बल्कि गरीब की भूमि भी सुरक्षित करवा दी।’’
अपने अधिकारियों को लिखे 13 मई 1671 के एक पत्र में शिवाजी लिखते हैं, ‘‘अगर आप जनता को तकलीफ देंगे और कार्य संपादन हेतु रिश्वत मांगेंगे तो लोगों को लगेगा कि इससे तो मुगलों का शासन ही अच्छा था और लोग परेशानी का अनुभव करेंगे।’’
राज्यसभा सदस्य दवे ने कहा, ‘‘छत्रपति शिवाजी भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ थे। इसमें केवल आर्थिक नहीं, बल्कि चारित्रिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार भी शामिल था। उनकी भ्रष्टाचार की परिभाषा बेहद व्यापक थी, जिसकी हिमायत सभी देश भक्त नागरिक कर रहे हैं।’’
पुर्तगाल के वायसराय कॉल डे सेंट विंसेंट ने 20 सितंबर 1667 के पत्र में लिखा है, ‘‘धूर्तता, साहस, संचालन और सैन्य सूझबूझ में शिवाजी की तुलना सीजर एवं अलेक्जेंडर से की जा सकती है।’’
किताब में दवे ने लिखा है, ‘‘शिवाजी जानते थे कि भ्रष्टाचार एक तरह से विषकन्या है और विरोधी अपने हित साधने के लिए इस मार्ग का भरपूर प्रयोग करते हैं। राजमहल में सेंध एवं राज्यकर्ताओं का व्याभिचार अंत में राज्य की पराजय का कारण बनता है। अत: इस तरह के भ्रष्टाचार के प्रति उन्होंने अत्यंत कठोर व्यवहार रखा।’’
किताब के मुताबिक, ‘‘शिवाजी सर्वत्यागी सन्यासी नहीं थे। वे शासक थे। उन्होंने अपने राज्य विस्तार के लिए युद्ध लड़े, हमले किए, दुर्गों को जीता और अन्य राज्यों से संधि तथा वार्ताएं कीं। ऐसा करते समय उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद का भरपूर प्रयोग किया। उन्होंने विजय प्राप्ति हेतु दुश्मनों को जहां आवश्यक लगा, सभी प्रकार के प्रलोभन दिए लेकिन स्वयं को नारी एवं किसी भी प्रकार के प्रलोभन से न केवल मुक्त रखा बल्कि अपने सहयोगी को भी ऐसा नहीं करने दिया।’’टिप्पणियां
उन्होंने लिखा है, ‘‘शिवाजी का स्वराज्य हो या गांधी का स्वदेशी। भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो या फ्रांस की क्रांति। रूस में मिखाइल गोर्बाचोव द्वारा प्रारंभ ग्लासनॉट अथवा पेरेस्त्रोइका का सुधार आंदोलन हो या अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, सभी समाज में घुमड़ती ‘स्व’ के भाव की अभिव्यक्तियां ही हैं, जिसका जन्म किसी नायक से या नायक के बगैर हुआ।’’
मुगल दरबार के इतिहासकार गफी खान जैसा उनका विरोधी भी लिखता है, ‘‘शिवाजी अपनी प्रजा में मान मर्यादा बनाए रखने के लिए हमेशा सावधान रहे। वे दुश्मन को लूटते और उनके क्षेत्रों में विद्रोह खड़ा करते थे, लेकिन अशोभनीय कामों से वह हमेशा दूर रहते थे। जब भी कोई मुस्लिम महिला या बच्चे युद्ध या मुहिम में उनके कब्जे में आते तो वह उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखते थे। उनकी यह दृष्टि राजदर्शन का अंग थी।’’
अपने अधिकारियों को लिखे 13 मई 1671 के एक पत्र में शिवाजी लिखते हैं, ‘‘अगर आप जनता को तकलीफ देंगे और कार्य संपादन हेतु रिश्वत मांगेंगे तो लोगों को लगेगा कि इससे तो मुगलों का शासन ही अच्छा था और लोग परेशानी का अनुभव करेंगे।’’
राज्यसभा सदस्य दवे ने कहा, ‘‘छत्रपति शिवाजी भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ थे। इसमें केवल आर्थिक नहीं, बल्कि चारित्रिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार भी शामिल था। उनकी भ्रष्टाचार की परिभाषा बेहद व्यापक थी, जिसकी हिमायत सभी देश भक्त नागरिक कर रहे हैं।’’
पुर्तगाल के वायसराय कॉल डे सेंट विंसेंट ने 20 सितंबर 1667 के पत्र में लिखा है, ‘‘धूर्तता, साहस, संचालन और सैन्य सूझबूझ में शिवाजी की तुलना सीजर एवं अलेक्जेंडर से की जा सकती है।’’
किताब में दवे ने लिखा है, ‘‘शिवाजी जानते थे कि भ्रष्टाचार एक तरह से विषकन्या है और विरोधी अपने हित साधने के लिए इस मार्ग का भरपूर प्रयोग करते हैं। राजमहल में सेंध एवं राज्यकर्ताओं का व्याभिचार अंत में राज्य की पराजय का कारण बनता है। अत: इस तरह के भ्रष्टाचार के प्रति उन्होंने अत्यंत कठोर व्यवहार रखा।’’
किताब के मुताबिक, ‘‘शिवाजी सर्वत्यागी सन्यासी नहीं थे। वे शासक थे। उन्होंने अपने राज्य विस्तार के लिए युद्ध लड़े, हमले किए, दुर्गों को जीता और अन्य राज्यों से संधि तथा वार्ताएं कीं। ऐसा करते समय उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद का भरपूर प्रयोग किया। उन्होंने विजय प्राप्ति हेतु दुश्मनों को जहां आवश्यक लगा, सभी प्रकार के प्रलोभन दिए लेकिन स्वयं को नारी एवं किसी भी प्रकार के प्रलोभन से न केवल मुक्त रखा बल्कि अपने सहयोगी को भी ऐसा नहीं करने दिया।’’टिप्पणियां
उन्होंने लिखा है, ‘‘शिवाजी का स्वराज्य हो या गांधी का स्वदेशी। भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो या फ्रांस की क्रांति। रूस में मिखाइल गोर्बाचोव द्वारा प्रारंभ ग्लासनॉट अथवा पेरेस्त्रोइका का सुधार आंदोलन हो या अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, सभी समाज में घुमड़ती ‘स्व’ के भाव की अभिव्यक्तियां ही हैं, जिसका जन्म किसी नायक से या नायक के बगैर हुआ।’’
मुगल दरबार के इतिहासकार गफी खान जैसा उनका विरोधी भी लिखता है, ‘‘शिवाजी अपनी प्रजा में मान मर्यादा बनाए रखने के लिए हमेशा सावधान रहे। वे दुश्मन को लूटते और उनके क्षेत्रों में विद्रोह खड़ा करते थे, लेकिन अशोभनीय कामों से वह हमेशा दूर रहते थे। जब भी कोई मुस्लिम महिला या बच्चे युद्ध या मुहिम में उनके कब्जे में आते तो वह उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखते थे। उनकी यह दृष्टि राजदर्शन का अंग थी।’’
राज्यसभा सदस्य दवे ने कहा, ‘‘छत्रपति शिवाजी भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ थे। इसमें केवल आर्थिक नहीं, बल्कि चारित्रिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार भी शामिल था। उनकी भ्रष्टाचार की परिभाषा बेहद व्यापक थी, जिसकी हिमायत सभी देश भक्त नागरिक कर रहे हैं।’’
पुर्तगाल के वायसराय कॉल डे सेंट विंसेंट ने 20 सितंबर 1667 के पत्र में लिखा है, ‘‘धूर्तता, साहस, संचालन और सैन्य सूझबूझ में शिवाजी की तुलना सीजर एवं अलेक्जेंडर से की जा सकती है।’’
किताब में दवे ने लिखा है, ‘‘शिवाजी जानते थे कि भ्रष्टाचार एक तरह से विषकन्या है और विरोधी अपने हित साधने के लिए इस मार्ग का भरपूर प्रयोग करते हैं। राजमहल में सेंध एवं राज्यकर्ताओं का व्याभिचार अंत में राज्य की पराजय का कारण बनता है। अत: इस तरह के भ्रष्टाचार के प्रति उन्होंने अत्यंत कठोर व्यवहार रखा।’’
किताब के मुताबिक, ‘‘शिवाजी सर्वत्यागी सन्यासी नहीं थे। वे शासक थे। उन्होंने अपने राज्य विस्तार के लिए युद्ध लड़े, हमले किए, दुर्गों को जीता और अन्य राज्यों से संधि तथा वार्ताएं कीं। ऐसा करते समय उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद का भरपूर प्रयोग किया। उन्होंने विजय प्राप्ति हेतु दुश्मनों को जहां आवश्यक लगा, सभी प्रकार के प्रलोभन दिए लेकिन स्वयं को नारी एवं किसी भी प्रकार के प्रलोभन से न केवल मुक्त रखा बल्कि अपने सहयोगी को भी ऐसा नहीं करने दिया।’’टिप्पणियां
उन्होंने लिखा है, ‘‘शिवाजी का स्वराज्य हो या गांधी का स्वदेशी। भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो या फ्रांस की क्रांति। रूस में मिखाइल गोर्बाचोव द्वारा प्रारंभ ग्लासनॉट अथवा पेरेस्त्रोइका का सुधार आंदोलन हो या अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, सभी समाज में घुमड़ती ‘स्व’ के भाव की अभिव्यक्तियां ही हैं, जिसका जन्म किसी नायक से या नायक के बगैर हुआ।’’
मुगल दरबार के इतिहासकार गफी खान जैसा उनका विरोधी भी लिखता है, ‘‘शिवाजी अपनी प्रजा में मान मर्यादा बनाए रखने के लिए हमेशा सावधान रहे। वे दुश्मन को लूटते और उनके क्षेत्रों में विद्रोह खड़ा करते थे, लेकिन अशोभनीय कामों से वह हमेशा दूर रहते थे। जब भी कोई मुस्लिम महिला या बच्चे युद्ध या मुहिम में उनके कब्जे में आते तो वह उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखते थे। उनकी यह दृष्टि राजदर्शन का अंग थी।’’
पुर्तगाल के वायसराय कॉल डे सेंट विंसेंट ने 20 सितंबर 1667 के पत्र में लिखा है, ‘‘धूर्तता, साहस, संचालन और सैन्य सूझबूझ में शिवाजी की तुलना सीजर एवं अलेक्जेंडर से की जा सकती है।’’
किताब में दवे ने लिखा है, ‘‘शिवाजी जानते थे कि भ्रष्टाचार एक तरह से विषकन्या है और विरोधी अपने हित साधने के लिए इस मार्ग का भरपूर प्रयोग करते हैं। राजमहल में सेंध एवं राज्यकर्ताओं का व्याभिचार अंत में राज्य की पराजय का कारण बनता है। अत: इस तरह के भ्रष्टाचार के प्रति उन्होंने अत्यंत कठोर व्यवहार रखा।’’
किताब के मुताबिक, ‘‘शिवाजी सर्वत्यागी सन्यासी नहीं थे। वे शासक थे। उन्होंने अपने राज्य विस्तार के लिए युद्ध लड़े, हमले किए, दुर्गों को जीता और अन्य राज्यों से संधि तथा वार्ताएं कीं। ऐसा करते समय उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद का भरपूर प्रयोग किया। उन्होंने विजय प्राप्ति हेतु दुश्मनों को जहां आवश्यक लगा, सभी प्रकार के प्रलोभन दिए लेकिन स्वयं को नारी एवं किसी भी प्रकार के प्रलोभन से न केवल मुक्त रखा बल्कि अपने सहयोगी को भी ऐसा नहीं करने दिया।’’टिप्पणियां
उन्होंने लिखा है, ‘‘शिवाजी का स्वराज्य हो या गांधी का स्वदेशी। भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो या फ्रांस की क्रांति। रूस में मिखाइल गोर्बाचोव द्वारा प्रारंभ ग्लासनॉट अथवा पेरेस्त्रोइका का सुधार आंदोलन हो या अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, सभी समाज में घुमड़ती ‘स्व’ के भाव की अभिव्यक्तियां ही हैं, जिसका जन्म किसी नायक से या नायक के बगैर हुआ।’’
मुगल दरबार के इतिहासकार गफी खान जैसा उनका विरोधी भी लिखता है, ‘‘शिवाजी अपनी प्रजा में मान मर्यादा बनाए रखने के लिए हमेशा सावधान रहे। वे दुश्मन को लूटते और उनके क्षेत्रों में विद्रोह खड़ा करते थे, लेकिन अशोभनीय कामों से वह हमेशा दूर रहते थे। जब भी कोई मुस्लिम महिला या बच्चे युद्ध या मुहिम में उनके कब्जे में आते तो वह उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखते थे। उनकी यह दृष्टि राजदर्शन का अंग थी।’’
किताब में दवे ने लिखा है, ‘‘शिवाजी जानते थे कि भ्रष्टाचार एक तरह से विषकन्या है और विरोधी अपने हित साधने के लिए इस मार्ग का भरपूर प्रयोग करते हैं। राजमहल में सेंध एवं राज्यकर्ताओं का व्याभिचार अंत में राज्य की पराजय का कारण बनता है। अत: इस तरह के भ्रष्टाचार के प्रति उन्होंने अत्यंत कठोर व्यवहार रखा।’’
किताब के मुताबिक, ‘‘शिवाजी सर्वत्यागी सन्यासी नहीं थे। वे शासक थे। उन्होंने अपने राज्य विस्तार के लिए युद्ध लड़े, हमले किए, दुर्गों को जीता और अन्य राज्यों से संधि तथा वार्ताएं कीं। ऐसा करते समय उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद का भरपूर प्रयोग किया। उन्होंने विजय प्राप्ति हेतु दुश्मनों को जहां आवश्यक लगा, सभी प्रकार के प्रलोभन दिए लेकिन स्वयं को नारी एवं किसी भी प्रकार के प्रलोभन से न केवल मुक्त रखा बल्कि अपने सहयोगी को भी ऐसा नहीं करने दिया।’’टिप्पणियां
उन्होंने लिखा है, ‘‘शिवाजी का स्वराज्य हो या गांधी का स्वदेशी। भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो या फ्रांस की क्रांति। रूस में मिखाइल गोर्बाचोव द्वारा प्रारंभ ग्लासनॉट अथवा पेरेस्त्रोइका का सुधार आंदोलन हो या अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, सभी समाज में घुमड़ती ‘स्व’ के भाव की अभिव्यक्तियां ही हैं, जिसका जन्म किसी नायक से या नायक के बगैर हुआ।’’
मुगल दरबार के इतिहासकार गफी खान जैसा उनका विरोधी भी लिखता है, ‘‘शिवाजी अपनी प्रजा में मान मर्यादा बनाए रखने के लिए हमेशा सावधान रहे। वे दुश्मन को लूटते और उनके क्षेत्रों में विद्रोह खड़ा करते थे, लेकिन अशोभनीय कामों से वह हमेशा दूर रहते थे। जब भी कोई मुस्लिम महिला या बच्चे युद्ध या मुहिम में उनके कब्जे में आते तो वह उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखते थे। उनकी यह दृष्टि राजदर्शन का अंग थी।’’
उन्होंने लिखा है, ‘‘शिवाजी का स्वराज्य हो या गांधी का स्वदेशी। भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो या फ्रांस की क्रांति। रूस में मिखाइल गोर्बाचोव द्वारा प्रारंभ ग्लासनॉट अथवा पेरेस्त्रोइका का सुधार आंदोलन हो या अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, सभी समाज में घुमड़ती ‘स्व’ के भाव की अभिव्यक्तियां ही हैं, जिसका जन्म किसी नायक से या नायक के बगैर हुआ।’’
मुगल दरबार के इतिहासकार गफी खान जैसा उनका विरोधी भी लिखता है, ‘‘शिवाजी अपनी प्रजा में मान मर्यादा बनाए रखने के लिए हमेशा सावधान रहे। वे दुश्मन को लूटते और उनके क्षेत्रों में विद्रोह खड़ा करते थे, लेकिन अशोभनीय कामों से वह हमेशा दूर रहते थे। जब भी कोई मुस्लिम महिला या बच्चे युद्ध या मुहिम में उनके कब्जे में आते तो वह उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखते थे। उनकी यह दृष्टि राजदर्शन का अंग थी।’’
मुगल दरबार के इतिहासकार गफी खान जैसा उनका विरोधी भी लिखता है, ‘‘शिवाजी अपनी प्रजा में मान मर्यादा बनाए रखने के लिए हमेशा सावधान रहे। वे दुश्मन को लूटते और उनके क्षेत्रों में विद्रोह खड़ा करते थे, लेकिन अशोभनीय कामों से वह हमेशा दूर रहते थे। जब भी कोई मुस्लिम महिला या बच्चे युद्ध या मुहिम में उनके कब्जे में आते तो वह उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखते थे। उनकी यह दृष्टि राजदर्शन का अंग थी।’’ | सारांश: छत्रपति शिवाजी के सौतेले मामा मोहिते ने रिश्वत ली, यह जानकारी महाराज को मिली तो उन्होंने तत्काल उसे कारागार में डाल दिया और छूटने पर पिता शाह जी के पास भेज दिया। | 31 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि मुद्रास्फीति के आंकड़े लक्ष्य के ऊपरी दायरे में बनी हुई है और नीतिगत ब्याज दरों में आगे कटौती केवल तभी की जा सकती है जब कि महंगाई दर और कम हो. खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 6.07 प्रतिशत हो गई थी. यह पिछले करीब दो साल में इसका उच्चस्तर है.
इसी तरह थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति पिछले 23 माह के उच्चस्तर 3.55 प्रतिशत पर पहुंच गई. राजन ने यहां जारी रिजर्व बैंक की 2015-16 की वाषिर्क रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा है, "मुद्रास्फीति अभी भी रिजर्व बैंक के मुद्रास्फीति के लक्ष्य के ऊपरी दायरे में बनी हुई है.टिप्पणियां
जमाकर्ताओं की धनात्मक वास्तविक ब्याज दर (जमाओं पर मुद्रास्फीति से ऊपर की दर) प्राप्त करने की इच्छा और कॉर्पोरेट निवेशकों तथा खुदरा कर्ज लेने वालों की ऋण पर निम्न घोषित ब्याज दर की जरूरत के बीच संतुलन बनाने की रिजर्व बैंक की आवश्यकता को देखते हुए नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश केवल तभी बन हो सकती है जब मुद्रास्फीति में आगे और गिरावट आए."
उन्होंनेकहा कि मुद्रास्फीति को सरकार द्वारा निर्धारित चार प्रतिशत के स्तर पर लाना रिजर्व बैंक की अल्पकालिक वृहदआर्थिक प्राथमिकताओं में है. राजन ने कहा कि अब रिजर्व बैंक इस मामले में मुद्रास्फीति को धीरे-धीरे नीचे लाने के रास्ते पर चलता आ रहा है. इसके तहत इसे जनवरी 2016 में छह प्रतिशत से नीचे लाने के बाद अब मार्च 2017 तक इसे पांच प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है.
इसी तरह थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति पिछले 23 माह के उच्चस्तर 3.55 प्रतिशत पर पहुंच गई. राजन ने यहां जारी रिजर्व बैंक की 2015-16 की वाषिर्क रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा है, "मुद्रास्फीति अभी भी रिजर्व बैंक के मुद्रास्फीति के लक्ष्य के ऊपरी दायरे में बनी हुई है.टिप्पणियां
जमाकर्ताओं की धनात्मक वास्तविक ब्याज दर (जमाओं पर मुद्रास्फीति से ऊपर की दर) प्राप्त करने की इच्छा और कॉर्पोरेट निवेशकों तथा खुदरा कर्ज लेने वालों की ऋण पर निम्न घोषित ब्याज दर की जरूरत के बीच संतुलन बनाने की रिजर्व बैंक की आवश्यकता को देखते हुए नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश केवल तभी बन हो सकती है जब मुद्रास्फीति में आगे और गिरावट आए."
उन्होंनेकहा कि मुद्रास्फीति को सरकार द्वारा निर्धारित चार प्रतिशत के स्तर पर लाना रिजर्व बैंक की अल्पकालिक वृहदआर्थिक प्राथमिकताओं में है. राजन ने कहा कि अब रिजर्व बैंक इस मामले में मुद्रास्फीति को धीरे-धीरे नीचे लाने के रास्ते पर चलता आ रहा है. इसके तहत इसे जनवरी 2016 में छह प्रतिशत से नीचे लाने के बाद अब मार्च 2017 तक इसे पांच प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है.
जमाकर्ताओं की धनात्मक वास्तविक ब्याज दर (जमाओं पर मुद्रास्फीति से ऊपर की दर) प्राप्त करने की इच्छा और कॉर्पोरेट निवेशकों तथा खुदरा कर्ज लेने वालों की ऋण पर निम्न घोषित ब्याज दर की जरूरत के बीच संतुलन बनाने की रिजर्व बैंक की आवश्यकता को देखते हुए नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश केवल तभी बन हो सकती है जब मुद्रास्फीति में आगे और गिरावट आए."
उन्होंनेकहा कि मुद्रास्फीति को सरकार द्वारा निर्धारित चार प्रतिशत के स्तर पर लाना रिजर्व बैंक की अल्पकालिक वृहदआर्थिक प्राथमिकताओं में है. राजन ने कहा कि अब रिजर्व बैंक इस मामले में मुद्रास्फीति को धीरे-धीरे नीचे लाने के रास्ते पर चलता आ रहा है. इसके तहत इसे जनवरी 2016 में छह प्रतिशत से नीचे लाने के बाद अब मार्च 2017 तक इसे पांच प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है.
उन्होंनेकहा कि मुद्रास्फीति को सरकार द्वारा निर्धारित चार प्रतिशत के स्तर पर लाना रिजर्व बैंक की अल्पकालिक वृहदआर्थिक प्राथमिकताओं में है. राजन ने कहा कि अब रिजर्व बैंक इस मामले में मुद्रास्फीति को धीरे-धीरे नीचे लाने के रास्ते पर चलता आ रहा है. इसके तहत इसे जनवरी 2016 में छह प्रतिशत से नीचे लाने के बाद अब मार्च 2017 तक इसे पांच प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है. | खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 6.07 प्रतिशत थी
मुद्रास्फीति को मार्च 2017 तक पांच प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य
राजन ने जारी के 2015-16 की वाषिर्क रिपोर्ट की प्रस्तावना | 34 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने मंगलवार को सतर्कता विभाग छोड़ दिया। अदालत द्वारा वर्ष 1992 में पॉमोलिन आयात के मामले में चांडी की भूमिका की नए सिरे से जांच का आदेश देने के बाद मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाया है। वह उस समय राज्य के वित्त मंत्री थे। चांडी ने संवाददाताओं से कहा, "मैंने सतर्कता विभाग को राजस्व मंत्री तिरुवंचूर राधाकृष्णन को सौंप दिया है।" उन्होंने कहा, "मेरे मन में न्यायापालिका के प्रति पूरा सम्मान है और फैसला आने के बाद भी यह ऐसा ही बना रहेगा।" सतर्कता विभाग की विशेष अदालत के न्यायाधीश ने सोमवार को राज्य के सतर्कता विभाग को मामले की दोबारा जांच करने का आदेश दिया था। गौरतलब है कि वर्ष 1999 में राज्य में ईके नयनार के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार थी। सतर्कता विभाग इससे पहले भी अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुका है, जिसमें कहा गया है कि इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि चांडी इसमें शामिल थे। पूर्व मुख्यमंत्री के.करुणाकरन, खाद्य मंत्री टी.एच.मुस्तफा और प्रशासनिक अधिकारियों पी.जे.थॉमस और जिजी थाम्पसन के खिलाफ मलेशिया से बढ़ी हुई कीमतों पर तेल आयात कर 2.32 करोड़ रुपये का नुकसान करने का आरोप है। वीएस अच्युतानंदन के नेतृत्व वाली सरकार ने इस मामले को दोबारा खोला था। मामले के एक आरोपी मुस्तफा ने अदालत को बताया था कि चांडी का नाम इस मामले में शामिल नहीं है इसलिए उन्हें भी मुक्त कर देना चाहिए। | अदालत द्वारा वर्ष 1992 में पॉमोलिन आयात के मामले में चांडी की भूमिका की नए सिरे से जांच का आदेश देने के बाद मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाया है। | 6 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: वित्तमंत्री पी चिदम्बरम को जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री बनाए जाने की संभावना को लेकर मीडिया में आ रही खबरों पर चुटकी लेते हुए राजद नेता लालू प्रसाद ने गुरुवार को कहा कि चिदम्बरम ‘एमरजेंसी रिजर्व’ में हैं।
लालू ने लोकसभा में वर्ष 2013-14 के आम बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि संप्रग सरकार के वित्तमंत्री बहुत काबिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक वित्तमंत्री मनमोहन सिंह थे जो आज प्रधानमंत्री हैं। एक वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी थे जिन्हें देश का राष्ट्रपति बनाया गया है।टिप्पणियां
चिदम्बरम को जरूरत पड़ने की सूरत में प्रधानमंत्री बनाए जाने की संभावना को लेकर आ रही रिपोटरे की पृष्ठभूमि में उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘एक वित्तमंत्री चिदम्बरम हैं जो एमरजेंसी रिजर्व में हैं।’’ उनकी इस बात पर चिदम्बरम भी मंद-मंद मुस्कुराते देखे गए।
लालू ने विपक्षी भाजपा से मुखातिब होते हुए कहा कि एक राजग सरकार के वित्तमंत्री थे जसवंत सिंह, जिन्हें भाजपा ने पार्टी से ही निकाल दिया। दूसरे राजग के वित्तमंत्री थे यशवंत सिन्हा। उन पर भी तलवार लटक रही है।
लालू ने लोकसभा में वर्ष 2013-14 के आम बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि संप्रग सरकार के वित्तमंत्री बहुत काबिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक वित्तमंत्री मनमोहन सिंह थे जो आज प्रधानमंत्री हैं। एक वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी थे जिन्हें देश का राष्ट्रपति बनाया गया है।टिप्पणियां
चिदम्बरम को जरूरत पड़ने की सूरत में प्रधानमंत्री बनाए जाने की संभावना को लेकर आ रही रिपोटरे की पृष्ठभूमि में उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘एक वित्तमंत्री चिदम्बरम हैं जो एमरजेंसी रिजर्व में हैं।’’ उनकी इस बात पर चिदम्बरम भी मंद-मंद मुस्कुराते देखे गए।
लालू ने विपक्षी भाजपा से मुखातिब होते हुए कहा कि एक राजग सरकार के वित्तमंत्री थे जसवंत सिंह, जिन्हें भाजपा ने पार्टी से ही निकाल दिया। दूसरे राजग के वित्तमंत्री थे यशवंत सिन्हा। उन पर भी तलवार लटक रही है।
चिदम्बरम को जरूरत पड़ने की सूरत में प्रधानमंत्री बनाए जाने की संभावना को लेकर आ रही रिपोटरे की पृष्ठभूमि में उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘एक वित्तमंत्री चिदम्बरम हैं जो एमरजेंसी रिजर्व में हैं।’’ उनकी इस बात पर चिदम्बरम भी मंद-मंद मुस्कुराते देखे गए।
लालू ने विपक्षी भाजपा से मुखातिब होते हुए कहा कि एक राजग सरकार के वित्तमंत्री थे जसवंत सिंह, जिन्हें भाजपा ने पार्टी से ही निकाल दिया। दूसरे राजग के वित्तमंत्री थे यशवंत सिन्हा। उन पर भी तलवार लटक रही है।
लालू ने विपक्षी भाजपा से मुखातिब होते हुए कहा कि एक राजग सरकार के वित्तमंत्री थे जसवंत सिंह, जिन्हें भाजपा ने पार्टी से ही निकाल दिया। दूसरे राजग के वित्तमंत्री थे यशवंत सिन्हा। उन पर भी तलवार लटक रही है। | सारांश: वित्तमंत्री पी चिदम्बरम को जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री बनाए जाने की संभावना को लेकर मीडिया में आ रही खबरों पर चुटकी लेते हुए राजद नेता लालू प्रसाद ने गुरुवार को कहा कि चिदम्बरम ‘एमरजेंसी रिजर्व’ में हैं। | 7 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: केंद्रीय गृह मंत्रालय अक्सर किसी ना किसी कारण से सुर्खियों में रहता है लेकिन, मंगलवार को मंत्रालय द्वारा की गई गड़बड़ी के कारण वह सोशल मीडिया में छाया रहा. गड़बड़ी भी कोई छोटी-मोटी नहीं, बल्कि अपनी सालाना रिपोर्ट में मंत्रालय ने स्पेन-मोरक्को की सीमा को भारत और पाकिस्तान की सीमा बता दिया.
मामले के सामने आने के बाद गृह सचिव ने अधिकारियों से सफ़ाई मांगी है और कहा कि अगर मंत्रालय की ओर से यह गलती हुई है तो वह उसके लिए माफी मांगेंगे.
केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने कहा कि कोई ज़रूरत नहीं थी इन तस्वीरों के इस्तेमाल करने की. हमारी सीमा की भी कई अच्छी तस्वीरें हैं. उन्होंने कहा कि वे पता लगा रहे हैं कि ये तस्वीर कहां से ली गईं और अगर ग़लत हुई तो माफ़ी मांग लेंगे.
गृह सचिव ने इस मामले पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से भी सफाई मांगी है. दरअसल, भारत-पाकिस्तान सीमा की तस्वीरें अक्सर बीएसएफ ही मुहैया करवाती है.
पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही घुसपैठ को रोकने के लिए भारत ने अपनी सरहद पर फ़्लड लाइट्स लगाई हैं. मंत्रालय की ओर से इन फ्लड लाइट्स के बारे में 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट में जानकारी दी गई. लेकिन सीमा पर फ्लड लाइट्स की जानकारी देने के लिए जिन तस्वीरों का इस्तेमाल किया वे स्पेन-मोरक्को सीमा की हैं.टिप्पणियां
मंत्रालय की किरकरी इसलिए भी हुई क्योंकि, जिस तस्वीर को भारत-पाकिस्तान सीमा बताया गया है, वह फोटो 2006 में स्पैनिश फोटोग्राफर जेवियर मोरयानो द्वारा ली थी. यह तस्वीर अफ्रीका के नॉर्थ कोस्ट पर मोरक्को और स्पेन सीमा पर फ्लड लाइट्स और फेंसिंग को दिखाते हुए खींची गई थी.
अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मंत्रालय ने लिखा है कि भारतीय क्षेत्र में आतंकियों और अप्रवासियों की घुसपैठ को रोकने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती हुई भारत की 647 किलोमीटर की सीमा पर फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं.
मामले के सामने आने के बाद गृह सचिव ने अधिकारियों से सफ़ाई मांगी है और कहा कि अगर मंत्रालय की ओर से यह गलती हुई है तो वह उसके लिए माफी मांगेंगे.
केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने कहा कि कोई ज़रूरत नहीं थी इन तस्वीरों के इस्तेमाल करने की. हमारी सीमा की भी कई अच्छी तस्वीरें हैं. उन्होंने कहा कि वे पता लगा रहे हैं कि ये तस्वीर कहां से ली गईं और अगर ग़लत हुई तो माफ़ी मांग लेंगे.
गृह सचिव ने इस मामले पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से भी सफाई मांगी है. दरअसल, भारत-पाकिस्तान सीमा की तस्वीरें अक्सर बीएसएफ ही मुहैया करवाती है.
पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही घुसपैठ को रोकने के लिए भारत ने अपनी सरहद पर फ़्लड लाइट्स लगाई हैं. मंत्रालय की ओर से इन फ्लड लाइट्स के बारे में 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट में जानकारी दी गई. लेकिन सीमा पर फ्लड लाइट्स की जानकारी देने के लिए जिन तस्वीरों का इस्तेमाल किया वे स्पेन-मोरक्को सीमा की हैं.टिप्पणियां
मंत्रालय की किरकरी इसलिए भी हुई क्योंकि, जिस तस्वीर को भारत-पाकिस्तान सीमा बताया गया है, वह फोटो 2006 में स्पैनिश फोटोग्राफर जेवियर मोरयानो द्वारा ली थी. यह तस्वीर अफ्रीका के नॉर्थ कोस्ट पर मोरक्को और स्पेन सीमा पर फ्लड लाइट्स और फेंसिंग को दिखाते हुए खींची गई थी.
अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मंत्रालय ने लिखा है कि भारतीय क्षेत्र में आतंकियों और अप्रवासियों की घुसपैठ को रोकने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती हुई भारत की 647 किलोमीटर की सीमा पर फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं.
केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने कहा कि कोई ज़रूरत नहीं थी इन तस्वीरों के इस्तेमाल करने की. हमारी सीमा की भी कई अच्छी तस्वीरें हैं. उन्होंने कहा कि वे पता लगा रहे हैं कि ये तस्वीर कहां से ली गईं और अगर ग़लत हुई तो माफ़ी मांग लेंगे.
गृह सचिव ने इस मामले पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से भी सफाई मांगी है. दरअसल, भारत-पाकिस्तान सीमा की तस्वीरें अक्सर बीएसएफ ही मुहैया करवाती है.
पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही घुसपैठ को रोकने के लिए भारत ने अपनी सरहद पर फ़्लड लाइट्स लगाई हैं. मंत्रालय की ओर से इन फ्लड लाइट्स के बारे में 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट में जानकारी दी गई. लेकिन सीमा पर फ्लड लाइट्स की जानकारी देने के लिए जिन तस्वीरों का इस्तेमाल किया वे स्पेन-मोरक्को सीमा की हैं.टिप्पणियां
मंत्रालय की किरकरी इसलिए भी हुई क्योंकि, जिस तस्वीर को भारत-पाकिस्तान सीमा बताया गया है, वह फोटो 2006 में स्पैनिश फोटोग्राफर जेवियर मोरयानो द्वारा ली थी. यह तस्वीर अफ्रीका के नॉर्थ कोस्ट पर मोरक्को और स्पेन सीमा पर फ्लड लाइट्स और फेंसिंग को दिखाते हुए खींची गई थी.
अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मंत्रालय ने लिखा है कि भारतीय क्षेत्र में आतंकियों और अप्रवासियों की घुसपैठ को रोकने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती हुई भारत की 647 किलोमीटर की सीमा पर फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं.
गृह सचिव ने इस मामले पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से भी सफाई मांगी है. दरअसल, भारत-पाकिस्तान सीमा की तस्वीरें अक्सर बीएसएफ ही मुहैया करवाती है.
पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही घुसपैठ को रोकने के लिए भारत ने अपनी सरहद पर फ़्लड लाइट्स लगाई हैं. मंत्रालय की ओर से इन फ्लड लाइट्स के बारे में 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट में जानकारी दी गई. लेकिन सीमा पर फ्लड लाइट्स की जानकारी देने के लिए जिन तस्वीरों का इस्तेमाल किया वे स्पेन-मोरक्को सीमा की हैं.टिप्पणियां
मंत्रालय की किरकरी इसलिए भी हुई क्योंकि, जिस तस्वीर को भारत-पाकिस्तान सीमा बताया गया है, वह फोटो 2006 में स्पैनिश फोटोग्राफर जेवियर मोरयानो द्वारा ली थी. यह तस्वीर अफ्रीका के नॉर्थ कोस्ट पर मोरक्को और स्पेन सीमा पर फ्लड लाइट्स और फेंसिंग को दिखाते हुए खींची गई थी.
अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मंत्रालय ने लिखा है कि भारतीय क्षेत्र में आतंकियों और अप्रवासियों की घुसपैठ को रोकने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती हुई भारत की 647 किलोमीटर की सीमा पर फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं.
पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही घुसपैठ को रोकने के लिए भारत ने अपनी सरहद पर फ़्लड लाइट्स लगाई हैं. मंत्रालय की ओर से इन फ्लड लाइट्स के बारे में 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट में जानकारी दी गई. लेकिन सीमा पर फ्लड लाइट्स की जानकारी देने के लिए जिन तस्वीरों का इस्तेमाल किया वे स्पेन-मोरक्को सीमा की हैं.टिप्पणियां
मंत्रालय की किरकरी इसलिए भी हुई क्योंकि, जिस तस्वीर को भारत-पाकिस्तान सीमा बताया गया है, वह फोटो 2006 में स्पैनिश फोटोग्राफर जेवियर मोरयानो द्वारा ली थी. यह तस्वीर अफ्रीका के नॉर्थ कोस्ट पर मोरक्को और स्पेन सीमा पर फ्लड लाइट्स और फेंसिंग को दिखाते हुए खींची गई थी.
अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मंत्रालय ने लिखा है कि भारतीय क्षेत्र में आतंकियों और अप्रवासियों की घुसपैठ को रोकने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती हुई भारत की 647 किलोमीटर की सीमा पर फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं.
मंत्रालय की किरकरी इसलिए भी हुई क्योंकि, जिस तस्वीर को भारत-पाकिस्तान सीमा बताया गया है, वह फोटो 2006 में स्पैनिश फोटोग्राफर जेवियर मोरयानो द्वारा ली थी. यह तस्वीर अफ्रीका के नॉर्थ कोस्ट पर मोरक्को और स्पेन सीमा पर फ्लड लाइट्स और फेंसिंग को दिखाते हुए खींची गई थी.
अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मंत्रालय ने लिखा है कि भारतीय क्षेत्र में आतंकियों और अप्रवासियों की घुसपैठ को रोकने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती हुई भारत की 647 किलोमीटर की सीमा पर फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं.
अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मंत्रालय ने लिखा है कि भारतीय क्षेत्र में आतंकियों और अप्रवासियों की घुसपैठ को रोकने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती हुई भारत की 647 किलोमीटर की सीमा पर फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: रिपोर्ट में Indo-Pak सीमा पर लगी फ्लड लाइट्स की तस्वीर
यह तस्वीर भारत-पाक सीमा की नहीं बल्कि स्पेन की सीमा की है
केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने मामले की जांच के आदेश दिए | 11 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: जम्मू-कश्मीर में लगभग 20 सालों से सक्रिय आतंकवादी मेहराजुद्दीन डांड उर्फ जावेद को पुलिस ने किश्तवाड़ जिले में गिरफ्तार कर लिया है। कंधार विमान अपहरण कांड सहित देश भर में हुए कई बम धमाकों में उसके शामिल होने की आशंका है।
कंधार हाईजैक मामले में कथित तौर पर उसने विमान अपहर्ताओं को नकली दस्तावेज और अन्य कागजात मुहैया कराए थे। इंडियन एयरलाइंस के इस विमान ने 24 दिसंबर, 1999 को नेपाल से उड़ान भरी था। जैसे ही वह भारत की सीमा में पहुंचा कुछ आतंकवादियों ने उसका अपहरण कर लिया और विमान को कंधार ले गए। विमान में सवार ज्यादातर यात्री भारतीय थे। आतंकवादियों ने एक यात्री की हत्या भी कर दी थी। भारत सरकार ने यात्रियों को सुरक्षित वापस लाने के लिए मौलाना मसूद अजहर और अहमद उमर सईद शेख समेत तीन आतंकवादियों को छोड़ा था।टिप्पणियां
मेहराजुद्दीन को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का एक बड़ा जासूस माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक मेहराजुद्दीन, हिजबुल मुजाहिदीन के उस पहले समूह का हिस्सा था, जो ट्रेनिंग के लिए सीमा पारकर पाकिस्तान गया था।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक मेहराजुद्दीन किसी खास आतंकवादी संगठन का सदस्य नहीं है, बल्कि वह विभिन्न आतंकी संगठनों के बीच तालमेल बनाए रखने का काम देखता था। मेहराजुद्दीन कथित तौर पर नेपाल में भी रहा था और वहां उसने पहचान छिपाने के लिए अपना एक हिन्दू नाम रख लिया था और वहां उसने शादी भी रचाई थी।
कंधार हाईजैक मामले में कथित तौर पर उसने विमान अपहर्ताओं को नकली दस्तावेज और अन्य कागजात मुहैया कराए थे। इंडियन एयरलाइंस के इस विमान ने 24 दिसंबर, 1999 को नेपाल से उड़ान भरी था। जैसे ही वह भारत की सीमा में पहुंचा कुछ आतंकवादियों ने उसका अपहरण कर लिया और विमान को कंधार ले गए। विमान में सवार ज्यादातर यात्री भारतीय थे। आतंकवादियों ने एक यात्री की हत्या भी कर दी थी। भारत सरकार ने यात्रियों को सुरक्षित वापस लाने के लिए मौलाना मसूद अजहर और अहमद उमर सईद शेख समेत तीन आतंकवादियों को छोड़ा था।टिप्पणियां
मेहराजुद्दीन को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का एक बड़ा जासूस माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक मेहराजुद्दीन, हिजबुल मुजाहिदीन के उस पहले समूह का हिस्सा था, जो ट्रेनिंग के लिए सीमा पारकर पाकिस्तान गया था।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक मेहराजुद्दीन किसी खास आतंकवादी संगठन का सदस्य नहीं है, बल्कि वह विभिन्न आतंकी संगठनों के बीच तालमेल बनाए रखने का काम देखता था। मेहराजुद्दीन कथित तौर पर नेपाल में भी रहा था और वहां उसने पहचान छिपाने के लिए अपना एक हिन्दू नाम रख लिया था और वहां उसने शादी भी रचाई थी।
मेहराजुद्दीन को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का एक बड़ा जासूस माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक मेहराजुद्दीन, हिजबुल मुजाहिदीन के उस पहले समूह का हिस्सा था, जो ट्रेनिंग के लिए सीमा पारकर पाकिस्तान गया था।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक मेहराजुद्दीन किसी खास आतंकवादी संगठन का सदस्य नहीं है, बल्कि वह विभिन्न आतंकी संगठनों के बीच तालमेल बनाए रखने का काम देखता था। मेहराजुद्दीन कथित तौर पर नेपाल में भी रहा था और वहां उसने पहचान छिपाने के लिए अपना एक हिन्दू नाम रख लिया था और वहां उसने शादी भी रचाई थी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक मेहराजुद्दीन किसी खास आतंकवादी संगठन का सदस्य नहीं है, बल्कि वह विभिन्न आतंकी संगठनों के बीच तालमेल बनाए रखने का काम देखता था। मेहराजुद्दीन कथित तौर पर नेपाल में भी रहा था और वहां उसने पहचान छिपाने के लिए अपना एक हिन्दू नाम रख लिया था और वहां उसने शादी भी रचाई थी। | संक्षिप्त सारांश: जम्मू-कश्मीर में सालों से सक्रिय आतंकवादी मेहराजुद्दीन डांड उर्फ जावेद को पुलिस ने किश्तवाड़ में गिरफ्तार कर लिया। कंधार विमान अपहरण सहित कई बम धमाकों में उसके शामिल होने की आशंका है। | 23 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: मुंबई में एक बार फिर बीएमसी की लापरवाही से दो साल का मासूम हादसे का शिकार हो गया. गोरेगांव पूर्व में बुधवार की रात खुले गटर में गिरे मासूम का अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है. जानकारी के मुताबिक 2 साल का दिव्यांश गोरेगांव पूर्व में अपने घर से निकलकर सड़क पर गया तो फिर वापस नही आया. इसके बाद जब दिव्यांश की तलाश शुरू हुई तो सीसीटीवी से राज़ खुला. सीसीटीवी फुटेज में 2 साल का मासूम गली के सामने ही खुले गटर में गिरता दिखा. आसपास के लोग, दमकलकर्मियों , बीएमसी और पुलिस वालों ने रात भर उसे खोजने की कोशिश की, लेकिन सुबह तक मासूम का कुछ पता नही चल पाया.
दुखी पिता ने बताया कि गटर 5 साल से खुला पड़ा है. इस हादसे के बाद बीएमसी की लापरवाही पर एक बार फिर सवाल उठा है. विपक्षी पार्टियों ने भी बीएमसी को आड़े हाथों लिय. बच्चे के पिता और स्थानीय लोगों ने कुछ देर के लिए सड़क पर आंदोलन भी किया. दोपहर तक मेयर भी पहुंचे और जांच के बाद कार्रवाई की बात कही. आपको बता दें कि मुंबई में खुले गटर में गिरने का ये कोई पहला मामला नहीं है. एक आरटीआई से मिले आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 साल में 639 हादसों में 328 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, लेकिन बी एम सी प्रशासन को कोई फिक्र नहीं है. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: मुंबई के गोरेगांव में सामने आया मामला
2 साल का मासूम अचानक गटर में गिर पड़ा
अबतक नहीं चला पता, बचाव कार्य जारी | 3 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भाजपा के महासचिव राम माधव ने कहा है कि पार्टी मणिपुर में सरकार के गठन की खातिर जरूरी संख्या के लिए समर्थन जुटाएगी. उन्होंने कहा कि ‘भाजपा को पहले ही कुछ समर्थन मिला है और मणिपुर में सरकार के गठन के लिए जरूरी संख्या हासिल करने के लिए अन्य का भी सहयोग मिलने की उम्मीद है.’ माधव ने कहा कि चुनाव नतीजे कांग्रेस और इबोबी सिंह सरकार के खिलाफ स्पष्ट जनादेश है.
मणिपुर और पिछले साल असम में भाजपा के शानदार प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भाजपा महासचिव ने कहा कि वोट हासिल करने वाले सभी राजनीतिक दलों का जनता के प्रति एक दायित्व है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि पूर्वोत्तर के राज्य में सरकार के गठन में भाजपा की मदद के लिए सभी निर्वाचित प्रतिनिधि साथ आएंगे और उसे समर्थन देंगे. मणिपुर में विधानसभा चुनाव के नतीजे में खंडित जनादेश आया है जहां सत्तारूढ़ कांग्रेस को राज्य की 60 सीटों में से 28 सीटें मिलीं, वहीं भाजपा के खाते में 21 सीटें गयीं.टिप्पणियां
नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) और नगा पीपुल्स पार्टी (NPP) को चार-चार सीटें मिली हैं. लोक जनशक्ति पार्टी, तृणमूल कांग्रेस को एक-एक सीट मिली है जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा है. 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 42 सीटें जीती थीं, दूसरी तरफ मौजूदा सदन में भाजपा के एक भी सदस्य नहीं हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
मणिपुर और पिछले साल असम में भाजपा के शानदार प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भाजपा महासचिव ने कहा कि वोट हासिल करने वाले सभी राजनीतिक दलों का जनता के प्रति एक दायित्व है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि पूर्वोत्तर के राज्य में सरकार के गठन में भाजपा की मदद के लिए सभी निर्वाचित प्रतिनिधि साथ आएंगे और उसे समर्थन देंगे. मणिपुर में विधानसभा चुनाव के नतीजे में खंडित जनादेश आया है जहां सत्तारूढ़ कांग्रेस को राज्य की 60 सीटों में से 28 सीटें मिलीं, वहीं भाजपा के खाते में 21 सीटें गयीं.टिप्पणियां
नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) और नगा पीपुल्स पार्टी (NPP) को चार-चार सीटें मिली हैं. लोक जनशक्ति पार्टी, तृणमूल कांग्रेस को एक-एक सीट मिली है जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा है. 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 42 सीटें जीती थीं, दूसरी तरफ मौजूदा सदन में भाजपा के एक भी सदस्य नहीं हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) और नगा पीपुल्स पार्टी (NPP) को चार-चार सीटें मिली हैं. लोक जनशक्ति पार्टी, तृणमूल कांग्रेस को एक-एक सीट मिली है जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा है. 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 42 सीटें जीती थीं, दूसरी तरफ मौजूदा सदन में भाजपा के एक भी सदस्य नहीं हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | संक्षिप्त सारांश: बीजेपी ने कहा मणिपुर में सरकार गठन के लिए जरूरी संख्या हासिल कर लेंगे
माधव ने कहा कि नतीजे कांग्रेस सरकार के खिलाफ स्पष्ट जनादेश हैं
नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) और नगा पीपुल्स पार्टी (NPP) को चार-चार सीटें मिली | 23 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: विश्व में थिएटर के बड़े आयोजनों में से एक थिएटर ओलम्पिक के आठवें संस्करण का आयोजन भारत में होगा. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में हुए एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने की. अगले साल यानी 2018 में 17 फरवरी से 8 अप्रैल के बीच एक साथ देश के कई शहरों में इस ओलम्पिक का आयोजन किया जाएगा.
थिएटर ओलम्पिक में देश-विदेश की 500 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियां और 700 से अधिक एम्बिएंस परफार्मेंस होंगी. इसके साथ थिएटर से जुड़ी कार्यशालाएं व्याख्यान और सेमीनार भी होंगे. ओलम्पिक में विश्व रंगमंच की हस्तियां और थिएटर समूह भाग लेंगे. भारत के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का यह आयोजन भारत को रंगमंच के मानचित्र पर एक नई पहचान देगा.
संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि “आठवां थिएटर ओलम्पिक भारत के सांस्कृतिक इतिहास में मील का पत्थर होगा, संस्कृति मंत्रालय इस आयोजन के लिए हर सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है. हम पीएम से इसके उद्घाटन समारोह में भाग लेने का आग्रह भी करेंगे.”
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष रतन थियम ने कहा कि यह आनंददायक अनुभव है कि भारत में यह प्रतिष्ठित समारोह होगा. भारत रंगमंच में अपने नवाचारों और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. यह मंच दुनिया और भारत के रंग समूहों को एक-दूसरे को देखने के लिए एक मंच उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा कि रंगमंच ऐसा आधुनिक सेतु बन सकता है जहां अतीत, वर्तमान और भविष्य मिले और महत्त्वपूर्ण मुद्दों, जीवन की जटिलताओं, सौंदर्य और दार्शनिक चिंताओं पर बहस संभव हो सके.
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक वामने केंद्रे ने कहा कि इतने बड़े उत्सव का आयोजन गर्व का विषय है. हम एक बेहतर मेजबान बनने की कोशिश करेंगे और इसे सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे.
थिएटर ओलम्पिक की परिकल्पना ग्रीक निर्देशक थिएडोरस टेरजोपोलोस ने की थी जो इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के अध्यक्ष भी हैं. ओलम्पिक की शुरुआत वैसे तो ग्रीस के डेल्फी में अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य थिएटर की विविधता और उसकी समृद्ध धरोहर, पारम्परिक और प्रयोगात्मक रंगमंच को एक जगह एक मंच पर उपलब्ध कराना था. पहले थिएटर ओलम्पिक का विधिवत आयोजन 1995 ग्रीस में हुआ था. सन 1999 में दूसरे ओलम्पिक की मेजबानी की थी जापान ने. उसके बाद से यह ओलम्पिक इस्तांबुल, तुर्की, सिओल, चीन और पोलैंड में हो चुका है. भारत इस सूची में अगली कड़ी है. सन 2016 में पोलैंड में हुए ओलम्पिक की थीम ‘द वर्ल्ड ऐज प्लेस ऑफ ट्रुथ’थी.टिप्पणियां
यह भी पढ़ें - एनएसडी में आने के बाद मेरी बोलती बंद हो जाती है : एक्टर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी
रतन थियम और वामन केंद्रे लंबे अरसे से इस आयोजन के लिए प्रयासरत थे. अब उन्हें अपने प्रयासों में सफलता मिली है. रतन थियम इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के सदस्य भी हैं जो कि यह आयोजन करती है. वैसे इस आयोजन में समूहों के भाग लेने की प्रक्रिया क्या होगी, वे कौन से शहर होंगे जहां इसका आयोजन होगा, प्रस्तुतियों का चयन कैसे होगा, इत्यादि बातें अभी स्पष्ट नहीं हुईं हैं.
थिएटर ओलम्पिक में देश-विदेश की 500 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियां और 700 से अधिक एम्बिएंस परफार्मेंस होंगी. इसके साथ थिएटर से जुड़ी कार्यशालाएं व्याख्यान और सेमीनार भी होंगे. ओलम्पिक में विश्व रंगमंच की हस्तियां और थिएटर समूह भाग लेंगे. भारत के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का यह आयोजन भारत को रंगमंच के मानचित्र पर एक नई पहचान देगा.
संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि “आठवां थिएटर ओलम्पिक भारत के सांस्कृतिक इतिहास में मील का पत्थर होगा, संस्कृति मंत्रालय इस आयोजन के लिए हर सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है. हम पीएम से इसके उद्घाटन समारोह में भाग लेने का आग्रह भी करेंगे.”
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष रतन थियम ने कहा कि यह आनंददायक अनुभव है कि भारत में यह प्रतिष्ठित समारोह होगा. भारत रंगमंच में अपने नवाचारों और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. यह मंच दुनिया और भारत के रंग समूहों को एक-दूसरे को देखने के लिए एक मंच उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा कि रंगमंच ऐसा आधुनिक सेतु बन सकता है जहां अतीत, वर्तमान और भविष्य मिले और महत्त्वपूर्ण मुद्दों, जीवन की जटिलताओं, सौंदर्य और दार्शनिक चिंताओं पर बहस संभव हो सके.
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक वामने केंद्रे ने कहा कि इतने बड़े उत्सव का आयोजन गर्व का विषय है. हम एक बेहतर मेजबान बनने की कोशिश करेंगे और इसे सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे.
थिएटर ओलम्पिक की परिकल्पना ग्रीक निर्देशक थिएडोरस टेरजोपोलोस ने की थी जो इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के अध्यक्ष भी हैं. ओलम्पिक की शुरुआत वैसे तो ग्रीस के डेल्फी में अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य थिएटर की विविधता और उसकी समृद्ध धरोहर, पारम्परिक और प्रयोगात्मक रंगमंच को एक जगह एक मंच पर उपलब्ध कराना था. पहले थिएटर ओलम्पिक का विधिवत आयोजन 1995 ग्रीस में हुआ था. सन 1999 में दूसरे ओलम्पिक की मेजबानी की थी जापान ने. उसके बाद से यह ओलम्पिक इस्तांबुल, तुर्की, सिओल, चीन और पोलैंड में हो चुका है. भारत इस सूची में अगली कड़ी है. सन 2016 में पोलैंड में हुए ओलम्पिक की थीम ‘द वर्ल्ड ऐज प्लेस ऑफ ट्रुथ’थी.टिप्पणियां
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रतन थियम और वामन केंद्रे लंबे अरसे से इस आयोजन के लिए प्रयासरत थे. अब उन्हें अपने प्रयासों में सफलता मिली है. रतन थियम इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के सदस्य भी हैं जो कि यह आयोजन करती है. वैसे इस आयोजन में समूहों के भाग लेने की प्रक्रिया क्या होगी, वे कौन से शहर होंगे जहां इसका आयोजन होगा, प्रस्तुतियों का चयन कैसे होगा, इत्यादि बातें अभी स्पष्ट नहीं हुईं हैं.
संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि “आठवां थिएटर ओलम्पिक भारत के सांस्कृतिक इतिहास में मील का पत्थर होगा, संस्कृति मंत्रालय इस आयोजन के लिए हर सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है. हम पीएम से इसके उद्घाटन समारोह में भाग लेने का आग्रह भी करेंगे.”
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष रतन थियम ने कहा कि यह आनंददायक अनुभव है कि भारत में यह प्रतिष्ठित समारोह होगा. भारत रंगमंच में अपने नवाचारों और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. यह मंच दुनिया और भारत के रंग समूहों को एक-दूसरे को देखने के लिए एक मंच उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा कि रंगमंच ऐसा आधुनिक सेतु बन सकता है जहां अतीत, वर्तमान और भविष्य मिले और महत्त्वपूर्ण मुद्दों, जीवन की जटिलताओं, सौंदर्य और दार्शनिक चिंताओं पर बहस संभव हो सके.
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक वामने केंद्रे ने कहा कि इतने बड़े उत्सव का आयोजन गर्व का विषय है. हम एक बेहतर मेजबान बनने की कोशिश करेंगे और इसे सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे.
थिएटर ओलम्पिक की परिकल्पना ग्रीक निर्देशक थिएडोरस टेरजोपोलोस ने की थी जो इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के अध्यक्ष भी हैं. ओलम्पिक की शुरुआत वैसे तो ग्रीस के डेल्फी में अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य थिएटर की विविधता और उसकी समृद्ध धरोहर, पारम्परिक और प्रयोगात्मक रंगमंच को एक जगह एक मंच पर उपलब्ध कराना था. पहले थिएटर ओलम्पिक का विधिवत आयोजन 1995 ग्रीस में हुआ था. सन 1999 में दूसरे ओलम्पिक की मेजबानी की थी जापान ने. उसके बाद से यह ओलम्पिक इस्तांबुल, तुर्की, सिओल, चीन और पोलैंड में हो चुका है. भारत इस सूची में अगली कड़ी है. सन 2016 में पोलैंड में हुए ओलम्पिक की थीम ‘द वर्ल्ड ऐज प्लेस ऑफ ट्रुथ’थी.टिप्पणियां
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रतन थियम और वामन केंद्रे लंबे अरसे से इस आयोजन के लिए प्रयासरत थे. अब उन्हें अपने प्रयासों में सफलता मिली है. रतन थियम इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के सदस्य भी हैं जो कि यह आयोजन करती है. वैसे इस आयोजन में समूहों के भाग लेने की प्रक्रिया क्या होगी, वे कौन से शहर होंगे जहां इसका आयोजन होगा, प्रस्तुतियों का चयन कैसे होगा, इत्यादि बातें अभी स्पष्ट नहीं हुईं हैं.
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष रतन थियम ने कहा कि यह आनंददायक अनुभव है कि भारत में यह प्रतिष्ठित समारोह होगा. भारत रंगमंच में अपने नवाचारों और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. यह मंच दुनिया और भारत के रंग समूहों को एक-दूसरे को देखने के लिए एक मंच उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा कि रंगमंच ऐसा आधुनिक सेतु बन सकता है जहां अतीत, वर्तमान और भविष्य मिले और महत्त्वपूर्ण मुद्दों, जीवन की जटिलताओं, सौंदर्य और दार्शनिक चिंताओं पर बहस संभव हो सके.
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक वामने केंद्रे ने कहा कि इतने बड़े उत्सव का आयोजन गर्व का विषय है. हम एक बेहतर मेजबान बनने की कोशिश करेंगे और इसे सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे.
थिएटर ओलम्पिक की परिकल्पना ग्रीक निर्देशक थिएडोरस टेरजोपोलोस ने की थी जो इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के अध्यक्ष भी हैं. ओलम्पिक की शुरुआत वैसे तो ग्रीस के डेल्फी में अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य थिएटर की विविधता और उसकी समृद्ध धरोहर, पारम्परिक और प्रयोगात्मक रंगमंच को एक जगह एक मंच पर उपलब्ध कराना था. पहले थिएटर ओलम्पिक का विधिवत आयोजन 1995 ग्रीस में हुआ था. सन 1999 में दूसरे ओलम्पिक की मेजबानी की थी जापान ने. उसके बाद से यह ओलम्पिक इस्तांबुल, तुर्की, सिओल, चीन और पोलैंड में हो चुका है. भारत इस सूची में अगली कड़ी है. सन 2016 में पोलैंड में हुए ओलम्पिक की थीम ‘द वर्ल्ड ऐज प्लेस ऑफ ट्रुथ’थी.टिप्पणियां
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रतन थियम और वामन केंद्रे लंबे अरसे से इस आयोजन के लिए प्रयासरत थे. अब उन्हें अपने प्रयासों में सफलता मिली है. रतन थियम इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के सदस्य भी हैं जो कि यह आयोजन करती है. वैसे इस आयोजन में समूहों के भाग लेने की प्रक्रिया क्या होगी, वे कौन से शहर होंगे जहां इसका आयोजन होगा, प्रस्तुतियों का चयन कैसे होगा, इत्यादि बातें अभी स्पष्ट नहीं हुईं हैं.
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक वामने केंद्रे ने कहा कि इतने बड़े उत्सव का आयोजन गर्व का विषय है. हम एक बेहतर मेजबान बनने की कोशिश करेंगे और इसे सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे.
थिएटर ओलम्पिक की परिकल्पना ग्रीक निर्देशक थिएडोरस टेरजोपोलोस ने की थी जो इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के अध्यक्ष भी हैं. ओलम्पिक की शुरुआत वैसे तो ग्रीस के डेल्फी में अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य थिएटर की विविधता और उसकी समृद्ध धरोहर, पारम्परिक और प्रयोगात्मक रंगमंच को एक जगह एक मंच पर उपलब्ध कराना था. पहले थिएटर ओलम्पिक का विधिवत आयोजन 1995 ग्रीस में हुआ था. सन 1999 में दूसरे ओलम्पिक की मेजबानी की थी जापान ने. उसके बाद से यह ओलम्पिक इस्तांबुल, तुर्की, सिओल, चीन और पोलैंड में हो चुका है. भारत इस सूची में अगली कड़ी है. सन 2016 में पोलैंड में हुए ओलम्पिक की थीम ‘द वर्ल्ड ऐज प्लेस ऑफ ट्रुथ’थी.टिप्पणियां
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रतन थियम और वामन केंद्रे लंबे अरसे से इस आयोजन के लिए प्रयासरत थे. अब उन्हें अपने प्रयासों में सफलता मिली है. रतन थियम इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के सदस्य भी हैं जो कि यह आयोजन करती है. वैसे इस आयोजन में समूहों के भाग लेने की प्रक्रिया क्या होगी, वे कौन से शहर होंगे जहां इसका आयोजन होगा, प्रस्तुतियों का चयन कैसे होगा, इत्यादि बातें अभी स्पष्ट नहीं हुईं हैं.
थिएटर ओलम्पिक की परिकल्पना ग्रीक निर्देशक थिएडोरस टेरजोपोलोस ने की थी जो इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के अध्यक्ष भी हैं. ओलम्पिक की शुरुआत वैसे तो ग्रीस के डेल्फी में अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य थिएटर की विविधता और उसकी समृद्ध धरोहर, पारम्परिक और प्रयोगात्मक रंगमंच को एक जगह एक मंच पर उपलब्ध कराना था. पहले थिएटर ओलम्पिक का विधिवत आयोजन 1995 ग्रीस में हुआ था. सन 1999 में दूसरे ओलम्पिक की मेजबानी की थी जापान ने. उसके बाद से यह ओलम्पिक इस्तांबुल, तुर्की, सिओल, चीन और पोलैंड में हो चुका है. भारत इस सूची में अगली कड़ी है. सन 2016 में पोलैंड में हुए ओलम्पिक की थीम ‘द वर्ल्ड ऐज प्लेस ऑफ ट्रुथ’थी.टिप्पणियां
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रतन थियम और वामन केंद्रे लंबे अरसे से इस आयोजन के लिए प्रयासरत थे. अब उन्हें अपने प्रयासों में सफलता मिली है. रतन थियम इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के सदस्य भी हैं जो कि यह आयोजन करती है. वैसे इस आयोजन में समूहों के भाग लेने की प्रक्रिया क्या होगी, वे कौन से शहर होंगे जहां इसका आयोजन होगा, प्रस्तुतियों का चयन कैसे होगा, इत्यादि बातें अभी स्पष्ट नहीं हुईं हैं.
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रतन थियम और वामन केंद्रे लंबे अरसे से इस आयोजन के लिए प्रयासरत थे. अब उन्हें अपने प्रयासों में सफलता मिली है. रतन थियम इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के सदस्य भी हैं जो कि यह आयोजन करती है. वैसे इस आयोजन में समूहों के भाग लेने की प्रक्रिया क्या होगी, वे कौन से शहर होंगे जहां इसका आयोजन होगा, प्रस्तुतियों का चयन कैसे होगा, इत्यादि बातें अभी स्पष्ट नहीं हुईं हैं.
रतन थियम और वामन केंद्रे लंबे अरसे से इस आयोजन के लिए प्रयासरत थे. अब उन्हें अपने प्रयासों में सफलता मिली है. रतन थियम इंटरनेशनल कमेटी ऑफ थिएटर ओलम्पिक के सदस्य भी हैं जो कि यह आयोजन करती है. वैसे इस आयोजन में समूहों के भाग लेने की प्रक्रिया क्या होगी, वे कौन से शहर होंगे जहां इसका आयोजन होगा, प्रस्तुतियों का चयन कैसे होगा, इत्यादि बातें अभी स्पष्ट नहीं हुईं हैं. | संक्षिप्त सारांश: विभिन्न शहरों में देश-विदेश की 500 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियां होंगी
थिएटर से जुड़ी कार्यशालाएं व्याख्यान और सेमीनार भी होंगे
विश्व रंगमंच की दिग्गज हस्तियां और थिएटर समूह भाग लेंगे | 29 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के संसदीय सचिव बनने पर लाभ के पद के आरोप में चुनाव आयोग बुधवार को सुनवाई करेगा. चुनाव आयोग में आज केवल इस मामले के याचिकाकर्ता, 21 विधायक और उनके वकील आमने-सामने खड़े होकर अपना पक्ष रखेंगे.टिप्पणियां
इस मामले की दो बार सुनवाई हुई जिसमें कांग्रेस, बीजेपी और दिल्ली सरकार ने आयोग को बताया कि आखिर क्यों उनको इस मामले में पार्टी बनाया जाना चाहिए. लेकिन आयोग ने इन तीनों की मांग को खारिज कर दिया जिससे अब याचिकाकर्ता और 21 विधायक आमने-सामने होंगे. आप विधायकों को आज आयोग को समझाना होगा कि आखिर कैसे उनकी संसदीय सचिव के पद हुई नियुक्ति लाभ के पद के दायरे में नहीं आती और क्यों उनकी विधायकी रद्द न की जाए.
हालांकि आप विधायकों की मुश्किलें पहले ही बढ़ी हुई हैं क्योंकि राष्ट्रपति उस बिल को पहले ही लौटा चुके हैं जिसके जरिए दिल्ली सरकार 21 संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद के दायरे से बाहर निकालने का प्रयास कर रही थी. लेकिन अब चुनाव आयोग को तय करना है कि यह 21 विधायक लाभ के पद पर हैं या नहीं.
इस मामले की दो बार सुनवाई हुई जिसमें कांग्रेस, बीजेपी और दिल्ली सरकार ने आयोग को बताया कि आखिर क्यों उनको इस मामले में पार्टी बनाया जाना चाहिए. लेकिन आयोग ने इन तीनों की मांग को खारिज कर दिया जिससे अब याचिकाकर्ता और 21 विधायक आमने-सामने होंगे. आप विधायकों को आज आयोग को समझाना होगा कि आखिर कैसे उनकी संसदीय सचिव के पद हुई नियुक्ति लाभ के पद के दायरे में नहीं आती और क्यों उनकी विधायकी रद्द न की जाए.
हालांकि आप विधायकों की मुश्किलें पहले ही बढ़ी हुई हैं क्योंकि राष्ट्रपति उस बिल को पहले ही लौटा चुके हैं जिसके जरिए दिल्ली सरकार 21 संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद के दायरे से बाहर निकालने का प्रयास कर रही थी. लेकिन अब चुनाव आयोग को तय करना है कि यह 21 विधायक लाभ के पद पर हैं या नहीं.
हालांकि आप विधायकों की मुश्किलें पहले ही बढ़ी हुई हैं क्योंकि राष्ट्रपति उस बिल को पहले ही लौटा चुके हैं जिसके जरिए दिल्ली सरकार 21 संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद के दायरे से बाहर निकालने का प्रयास कर रही थी. लेकिन अब चुनाव आयोग को तय करना है कि यह 21 विधायक लाभ के पद पर हैं या नहीं. | संक्षिप्त सारांश: याचिकाकर्ता, 21 विधायक और उनके वकील होंगे आमने-सामने
राष्ट्रपति लौटा चुके हैं दिल्ली सरकार का बिल
चुनाव आयोग तय करेगा कि विधायक लाभ के पद पर हैं या नहीं | 10 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: ऊंचे चालू खाते के घाटे (कैड) के बीच सोने के भारी आयात के दुष्परिणामों की चिंताओं के बीच अनिल अंबानी समूह की वित्तीय सेवा कंपनी रिलायंस कैपिटल ने सोने का कारोबार निलंबित कर दिया है। ऐसा करने वाली यह पहली कंपनी है।
कंपनी ने कहा है कि इस फैसले में सोने के सिक्के और अन्य रूपों में सोने की बिक्री शामिल है। कंपनी ने निवेश उत्पाद के रूप में भी इसका कारोबार रोक दिया है और इसी अनुषंगी कंपनियां भी ऐसा ही कर रही हैं।
कंपनी ने कहा कि सरकार द्वारा सोने के आयात को कम करने के संबंध में तय उद्देश्य के मद्देनजर यह फैसला किया गया है। सोने का आयात बढ़ने से देश के आर्थिक हितों को गंभीर नुकसान हो रहा है।टिप्पणियां
इसके अलावा रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट (आरकैम) ने रिलायंस गोल्ड सेविंग्स फंड में नई खरीदारी निलंबित करने का फैसला किया है। मौजूदा निवेशक इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे।
इस पहल के संबंध में रिलायंस कैपिटल के मुख्य कार्यकारी सैम घोष ने कहा, रिलायंस कैपिटल सरकार और आरबीआई के सभी नीतिगत उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कंपनी ने कहा है कि इस फैसले में सोने के सिक्के और अन्य रूपों में सोने की बिक्री शामिल है। कंपनी ने निवेश उत्पाद के रूप में भी इसका कारोबार रोक दिया है और इसी अनुषंगी कंपनियां भी ऐसा ही कर रही हैं।
कंपनी ने कहा कि सरकार द्वारा सोने के आयात को कम करने के संबंध में तय उद्देश्य के मद्देनजर यह फैसला किया गया है। सोने का आयात बढ़ने से देश के आर्थिक हितों को गंभीर नुकसान हो रहा है।टिप्पणियां
इसके अलावा रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट (आरकैम) ने रिलायंस गोल्ड सेविंग्स फंड में नई खरीदारी निलंबित करने का फैसला किया है। मौजूदा निवेशक इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे।
इस पहल के संबंध में रिलायंस कैपिटल के मुख्य कार्यकारी सैम घोष ने कहा, रिलायंस कैपिटल सरकार और आरबीआई के सभी नीतिगत उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कंपनी ने कहा कि सरकार द्वारा सोने के आयात को कम करने के संबंध में तय उद्देश्य के मद्देनजर यह फैसला किया गया है। सोने का आयात बढ़ने से देश के आर्थिक हितों को गंभीर नुकसान हो रहा है।टिप्पणियां
इसके अलावा रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट (आरकैम) ने रिलायंस गोल्ड सेविंग्स फंड में नई खरीदारी निलंबित करने का फैसला किया है। मौजूदा निवेशक इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे।
इस पहल के संबंध में रिलायंस कैपिटल के मुख्य कार्यकारी सैम घोष ने कहा, रिलायंस कैपिटल सरकार और आरबीआई के सभी नीतिगत उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसके अलावा रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट (आरकैम) ने रिलायंस गोल्ड सेविंग्स फंड में नई खरीदारी निलंबित करने का फैसला किया है। मौजूदा निवेशक इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे।
इस पहल के संबंध में रिलायंस कैपिटल के मुख्य कार्यकारी सैम घोष ने कहा, रिलायंस कैपिटल सरकार और आरबीआई के सभी नीतिगत उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस पहल के संबंध में रिलायंस कैपिटल के मुख्य कार्यकारी सैम घोष ने कहा, रिलायंस कैपिटल सरकार और आरबीआई के सभी नीतिगत उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: कंपनी ने कहा है कि इस फैसले में सोने के सिक्के और अन्य रूपों में सोने की बिक्री शामिल है। कंपनी ने निवेश उत्पाद के रूप में भी इसका कारोबार रोक दिया है। | 32 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के आश्वासनों के बावजूद अमेरिकी शेयर बाजारों में सोमवार को आई ऐतिहासिक गिरावट के कारण दुनिया में आर्थिक संकट के बादल और गहरा गए हैं। अमेरिकी बाजार में गिरावट का असर मंगलवार को एशियाई बाजारों पर भी पड़ा और यहां के सभी प्रमुख सूचकांकों में चार से नौ फीसदी तक की गिरावट देखी गई। सोमवार को अमेरिका के तीनों प्रमुख सूचकांकों में पांच से सात फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रपति बराक ओबामा के आश्वासनों का बाजार पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ा और डाउ जोंस इंडस्ट्रीयल एवरेज सोमवार को 634 अंक यानी 5.6 फीसदी गिरकर 11 हजार के नीचे पहुंच गया, जो अक्टूबर 2008 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट थी। स्टैंडर्ड एंड पुअर्स 500 सूचकांक 6.7 प्रतिशत और नास्डैक 175 अंक यानी 6.9 फीसदी गिरकर 2358 पर पहुंच गया। अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले दो सप्ताहों के दौरान 15 फीसदी की गिरावट आई है। व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत में ओबामा ने कहा, "यह कोई मायने नहीं रखता कि कुछ एजेंसियां क्या कह रही हैं। हम हमेशा से 'एएए' अर्थव्यवस्था रहे हैं और रहेंगे।" उन्होंने कहा कि अमेरिका मजबूत वित्तीय स्थिति को हासिल करने का रास्ता खोज लेगा। साख रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स द्वारा शुक्रवार को अमेरिका की साख रेटिंग कम किए जाने के संदर्भ ने उन्होंने कहा कि यह देश की 'समाधान की जा सकने वाली' आर्थिक समस्या है और इसके लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों में राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह कर्ज की सीमा बढ़ाने को लेकर हुई चर्चाओं के बाद उन्होंने हमारी राजनीतिक व्यवस्था की ताकत पर अविश्वास किया इसलिए रेटिंग में कमी की। उन्होंने कहा कि ऐसे खतरे यूरोप, जापान और मध्यपूर्व में आर्थिक अस्थिरता के कारण पैदा हुए, जिसने अब बाजार को प्रभावित किया है और उपभोक्ताओं में विश्वास को कम किया है। इससे सुधार की गति धीमी हो गई है। ओबामा ने ताजा आर्थिक संकट के बारे में स्पेन के प्रधानमंत्री जोस लुइस जापाटेरो और इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी से अलग-अलग फोन पर बात की। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया है, "राष्ट्रपति ने स्पेन और इटली द्वारा अपनी मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से निपटने और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने के लिए अपनाए गए उपायों का स्वागत किया।" पर्यवेक्षकों का कहना है कि एस एंड पी द्वारा अमेरिका की साख रेटिंग कम किए जाने से इतना असर नहीं पड़ना चाहिए, लेकिन बाजार में खरीददारी नहीं हो रही है। आईएनजी निवेश प्रबंधन के संपत्ति आवंटन के प्रमुख पॉल जेमस्की के हवाले से सीएनएन ने कहा, "रेटिंग में कमी को लेकर निवेशकों में एक ही धारणा है पहले शेयर बेचो फिर सवाल करो।" इस गिरावट की आंधी से कुछ शेयर से बच सके हैं। डाउ जोंस 30 और एस एंड पी 500 के सभी शेयरों में गिरावट देखी गई। बैंक ऑफ अमेरिका के शेयरों में 20 फीसदी और सिटी समूह और मोर्गन स्टैनले के शेयरों में 15-15 फीसदी की गिरावट आई। अमेरिकी बाजारों में गिरावट का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों पर भी देखा गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 472.31 अंक गिरकर 16517.87 पर जबकि निफ्टी 170.60 अंक गिरकर 4947.90 पर खुला। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में जापान का निक्केई 4.8 फीसदी, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7.3 फीसदी और हांगकांग का हांग सेंग करीब छह फीसदी गिर गए। | संक्षिप्त सारांश: अमेरिकी संकट का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों में दिख रहा है। अमेरिका के फिर से मंदी में चले जाने के डर से निवेशक जमकर बिकवाली कर रहे हैं। | 29 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के मद्देनजर पार्टी के भीतर से सतह पर उठ रही आवाजों को नजरअंदाज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को कहा कि वह अपने अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ खड़ी है और उसे उनपर पूरा भरोसा है।
पार्टी ने साथ ही अपने नेताओं को हिदायत दी कि वे इस मसले पर सार्वजनिक चर्चा न करें।
पार्टी ने गडकरी पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने न तो कानूनी तौर पर और न ही नैतिक आधार पर कुछ गलत किया है।
गडकरी पर लगे आरोपों और जाने-माने अधिवक्ता राम जेठमलानी की ओर से उठाए गए मुद्दों पर भाजपा नेताओं की दिन भर चली आपसी मुलाकातों के दौर के बाद शाम को मुख्यालय में पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक बैठक हुई। पार्टी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी इस बैठक से दूर रहे।
बैठक के बाद प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा, "लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसके मुताबिक पूर्ति समूह की जिन 18 कम्पनियों को लेकर गडकरी पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें गडकरी ने कानूनी या नैतिक रूप से कुछ भी गलत नहीं किया है।"
बयान में कहा गया, "पार्टी को गडकरी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने खुद आगे आकर जांच की बात कही है।"
भाजपा नेताओं की इस बैठक में एस. गुरुमूर्ति विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक के दौरान उन्होंने गडकरी पर लगे आरोपों से सभी भाजपा नेताओं को अवगत कराया।
प्रसाद ने कहा, "गुरुमूर्ति एक जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेट और वित्तीय विश्लेषक हैं। वह गडकरी पर लगे आरोपों को कानूनी रूप से देख रहे हैं। गडकरी की अनुपस्थिति में उन्होंने पूरे मामले से भाजपा नेताओं को अवगत कराया। पार्टी उनके तर्को से सहमत हुई।"
प्रसाद के मुताबिक गुरुमूर्ति इस बारे में सुबह ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को अवगत करा चुके थे इसलिए वह शाम की बैठक में उपस्थिति नहीं हुए जबकि मामला गडकरी से जुड़ा था, इसलिए वह जानबूझकर इस बैठक से दूर रहे।
इससे पहले, दिनभर इस प्रकार की खबरें उड़ती रही कि गडकरी किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों को जाने-माने अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के बगावती तेवरों ने बल दिया जिसमें उन्होंने सीधे गडकरी के इस्तीफे की मांग की थी।
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
पार्टी ने साथ ही अपने नेताओं को हिदायत दी कि वे इस मसले पर सार्वजनिक चर्चा न करें।
पार्टी ने गडकरी पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने न तो कानूनी तौर पर और न ही नैतिक आधार पर कुछ गलत किया है।
गडकरी पर लगे आरोपों और जाने-माने अधिवक्ता राम जेठमलानी की ओर से उठाए गए मुद्दों पर भाजपा नेताओं की दिन भर चली आपसी मुलाकातों के दौर के बाद शाम को मुख्यालय में पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक बैठक हुई। पार्टी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी इस बैठक से दूर रहे।
बैठक के बाद प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा, "लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसके मुताबिक पूर्ति समूह की जिन 18 कम्पनियों को लेकर गडकरी पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें गडकरी ने कानूनी या नैतिक रूप से कुछ भी गलत नहीं किया है।"
बयान में कहा गया, "पार्टी को गडकरी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने खुद आगे आकर जांच की बात कही है।"
भाजपा नेताओं की इस बैठक में एस. गुरुमूर्ति विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक के दौरान उन्होंने गडकरी पर लगे आरोपों से सभी भाजपा नेताओं को अवगत कराया।
प्रसाद ने कहा, "गुरुमूर्ति एक जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेट और वित्तीय विश्लेषक हैं। वह गडकरी पर लगे आरोपों को कानूनी रूप से देख रहे हैं। गडकरी की अनुपस्थिति में उन्होंने पूरे मामले से भाजपा नेताओं को अवगत कराया। पार्टी उनके तर्को से सहमत हुई।"
प्रसाद के मुताबिक गुरुमूर्ति इस बारे में सुबह ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को अवगत करा चुके थे इसलिए वह शाम की बैठक में उपस्थिति नहीं हुए जबकि मामला गडकरी से जुड़ा था, इसलिए वह जानबूझकर इस बैठक से दूर रहे।
इससे पहले, दिनभर इस प्रकार की खबरें उड़ती रही कि गडकरी किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों को जाने-माने अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के बगावती तेवरों ने बल दिया जिसमें उन्होंने सीधे गडकरी के इस्तीफे की मांग की थी।
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
पार्टी ने गडकरी पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने न तो कानूनी तौर पर और न ही नैतिक आधार पर कुछ गलत किया है।
गडकरी पर लगे आरोपों और जाने-माने अधिवक्ता राम जेठमलानी की ओर से उठाए गए मुद्दों पर भाजपा नेताओं की दिन भर चली आपसी मुलाकातों के दौर के बाद शाम को मुख्यालय में पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक बैठक हुई। पार्टी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी इस बैठक से दूर रहे।
बैठक के बाद प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा, "लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसके मुताबिक पूर्ति समूह की जिन 18 कम्पनियों को लेकर गडकरी पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें गडकरी ने कानूनी या नैतिक रूप से कुछ भी गलत नहीं किया है।"
बयान में कहा गया, "पार्टी को गडकरी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने खुद आगे आकर जांच की बात कही है।"
भाजपा नेताओं की इस बैठक में एस. गुरुमूर्ति विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक के दौरान उन्होंने गडकरी पर लगे आरोपों से सभी भाजपा नेताओं को अवगत कराया।
प्रसाद ने कहा, "गुरुमूर्ति एक जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेट और वित्तीय विश्लेषक हैं। वह गडकरी पर लगे आरोपों को कानूनी रूप से देख रहे हैं। गडकरी की अनुपस्थिति में उन्होंने पूरे मामले से भाजपा नेताओं को अवगत कराया। पार्टी उनके तर्को से सहमत हुई।"
प्रसाद के मुताबिक गुरुमूर्ति इस बारे में सुबह ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को अवगत करा चुके थे इसलिए वह शाम की बैठक में उपस्थिति नहीं हुए जबकि मामला गडकरी से जुड़ा था, इसलिए वह जानबूझकर इस बैठक से दूर रहे।
इससे पहले, दिनभर इस प्रकार की खबरें उड़ती रही कि गडकरी किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों को जाने-माने अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के बगावती तेवरों ने बल दिया जिसमें उन्होंने सीधे गडकरी के इस्तीफे की मांग की थी।
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
गडकरी पर लगे आरोपों और जाने-माने अधिवक्ता राम जेठमलानी की ओर से उठाए गए मुद्दों पर भाजपा नेताओं की दिन भर चली आपसी मुलाकातों के दौर के बाद शाम को मुख्यालय में पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक बैठक हुई। पार्टी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी इस बैठक से दूर रहे।
बैठक के बाद प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा, "लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसके मुताबिक पूर्ति समूह की जिन 18 कम्पनियों को लेकर गडकरी पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें गडकरी ने कानूनी या नैतिक रूप से कुछ भी गलत नहीं किया है।"
बयान में कहा गया, "पार्टी को गडकरी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने खुद आगे आकर जांच की बात कही है।"
भाजपा नेताओं की इस बैठक में एस. गुरुमूर्ति विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक के दौरान उन्होंने गडकरी पर लगे आरोपों से सभी भाजपा नेताओं को अवगत कराया।
प्रसाद ने कहा, "गुरुमूर्ति एक जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेट और वित्तीय विश्लेषक हैं। वह गडकरी पर लगे आरोपों को कानूनी रूप से देख रहे हैं। गडकरी की अनुपस्थिति में उन्होंने पूरे मामले से भाजपा नेताओं को अवगत कराया। पार्टी उनके तर्को से सहमत हुई।"
प्रसाद के मुताबिक गुरुमूर्ति इस बारे में सुबह ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को अवगत करा चुके थे इसलिए वह शाम की बैठक में उपस्थिति नहीं हुए जबकि मामला गडकरी से जुड़ा था, इसलिए वह जानबूझकर इस बैठक से दूर रहे।
इससे पहले, दिनभर इस प्रकार की खबरें उड़ती रही कि गडकरी किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों को जाने-माने अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के बगावती तेवरों ने बल दिया जिसमें उन्होंने सीधे गडकरी के इस्तीफे की मांग की थी।
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
बैठक के बाद प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा, "लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसके मुताबिक पूर्ति समूह की जिन 18 कम्पनियों को लेकर गडकरी पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें गडकरी ने कानूनी या नैतिक रूप से कुछ भी गलत नहीं किया है।"
बयान में कहा गया, "पार्टी को गडकरी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने खुद आगे आकर जांच की बात कही है।"
भाजपा नेताओं की इस बैठक में एस. गुरुमूर्ति विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक के दौरान उन्होंने गडकरी पर लगे आरोपों से सभी भाजपा नेताओं को अवगत कराया।
प्रसाद ने कहा, "गुरुमूर्ति एक जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेट और वित्तीय विश्लेषक हैं। वह गडकरी पर लगे आरोपों को कानूनी रूप से देख रहे हैं। गडकरी की अनुपस्थिति में उन्होंने पूरे मामले से भाजपा नेताओं को अवगत कराया। पार्टी उनके तर्को से सहमत हुई।"
प्रसाद के मुताबिक गुरुमूर्ति इस बारे में सुबह ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को अवगत करा चुके थे इसलिए वह शाम की बैठक में उपस्थिति नहीं हुए जबकि मामला गडकरी से जुड़ा था, इसलिए वह जानबूझकर इस बैठक से दूर रहे।
इससे पहले, दिनभर इस प्रकार की खबरें उड़ती रही कि गडकरी किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों को जाने-माने अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के बगावती तेवरों ने बल दिया जिसमें उन्होंने सीधे गडकरी के इस्तीफे की मांग की थी।
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
बयान में कहा गया, "पार्टी को गडकरी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने खुद आगे आकर जांच की बात कही है।"
भाजपा नेताओं की इस बैठक में एस. गुरुमूर्ति विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक के दौरान उन्होंने गडकरी पर लगे आरोपों से सभी भाजपा नेताओं को अवगत कराया।
प्रसाद ने कहा, "गुरुमूर्ति एक जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेट और वित्तीय विश्लेषक हैं। वह गडकरी पर लगे आरोपों को कानूनी रूप से देख रहे हैं। गडकरी की अनुपस्थिति में उन्होंने पूरे मामले से भाजपा नेताओं को अवगत कराया। पार्टी उनके तर्को से सहमत हुई।"
प्रसाद के मुताबिक गुरुमूर्ति इस बारे में सुबह ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को अवगत करा चुके थे इसलिए वह शाम की बैठक में उपस्थिति नहीं हुए जबकि मामला गडकरी से जुड़ा था, इसलिए वह जानबूझकर इस बैठक से दूर रहे।
इससे पहले, दिनभर इस प्रकार की खबरें उड़ती रही कि गडकरी किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों को जाने-माने अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के बगावती तेवरों ने बल दिया जिसमें उन्होंने सीधे गडकरी के इस्तीफे की मांग की थी।
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
भाजपा नेताओं की इस बैठक में एस. गुरुमूर्ति विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक के दौरान उन्होंने गडकरी पर लगे आरोपों से सभी भाजपा नेताओं को अवगत कराया।
प्रसाद ने कहा, "गुरुमूर्ति एक जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेट और वित्तीय विश्लेषक हैं। वह गडकरी पर लगे आरोपों को कानूनी रूप से देख रहे हैं। गडकरी की अनुपस्थिति में उन्होंने पूरे मामले से भाजपा नेताओं को अवगत कराया। पार्टी उनके तर्को से सहमत हुई।"
प्रसाद के मुताबिक गुरुमूर्ति इस बारे में सुबह ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को अवगत करा चुके थे इसलिए वह शाम की बैठक में उपस्थिति नहीं हुए जबकि मामला गडकरी से जुड़ा था, इसलिए वह जानबूझकर इस बैठक से दूर रहे।
इससे पहले, दिनभर इस प्रकार की खबरें उड़ती रही कि गडकरी किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों को जाने-माने अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के बगावती तेवरों ने बल दिया जिसमें उन्होंने सीधे गडकरी के इस्तीफे की मांग की थी।
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
प्रसाद ने कहा, "गुरुमूर्ति एक जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेट और वित्तीय विश्लेषक हैं। वह गडकरी पर लगे आरोपों को कानूनी रूप से देख रहे हैं। गडकरी की अनुपस्थिति में उन्होंने पूरे मामले से भाजपा नेताओं को अवगत कराया। पार्टी उनके तर्को से सहमत हुई।"
प्रसाद के मुताबिक गुरुमूर्ति इस बारे में सुबह ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को अवगत करा चुके थे इसलिए वह शाम की बैठक में उपस्थिति नहीं हुए जबकि मामला गडकरी से जुड़ा था, इसलिए वह जानबूझकर इस बैठक से दूर रहे।
इससे पहले, दिनभर इस प्रकार की खबरें उड़ती रही कि गडकरी किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों को जाने-माने अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के बगावती तेवरों ने बल दिया जिसमें उन्होंने सीधे गडकरी के इस्तीफे की मांग की थी।
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
प्रसाद के मुताबिक गुरुमूर्ति इस बारे में सुबह ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को अवगत करा चुके थे इसलिए वह शाम की बैठक में उपस्थिति नहीं हुए जबकि मामला गडकरी से जुड़ा था, इसलिए वह जानबूझकर इस बैठक से दूर रहे।
इससे पहले, दिनभर इस प्रकार की खबरें उड़ती रही कि गडकरी किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों को जाने-माने अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के बगावती तेवरों ने बल दिया जिसमें उन्होंने सीधे गडकरी के इस्तीफे की मांग की थी।
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
इससे पहले, दिनभर इस प्रकार की खबरें उड़ती रही कि गडकरी किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों को जाने-माने अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के बगावती तेवरों ने बल दिया जिसमें उन्होंने सीधे गडकरी के इस्तीफे की मांग की थी।
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
गडकरी के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झंडा बुलंद करते हुए जेठमलानी ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा भी उनके साथ हैं। जेठमलानी के मुताबिक ये सभी चाहते हैं कि गडकरी अपना पद छोड़ दें।
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
जेठमलानी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे भी वैसा ही कदम उठाएंगे। हम एकमत हैं और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने अपने विचार सार्वजनिक नहीं किए हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वे जल्द ही अपने विचार प्रकट करेंगे।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
जेठमलानी ने इस सिलसिले में आडवाणी को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा है कि गडकरी का अध्यक्ष पद पर बने रहना भाजपा और देश के लिए एक त्रासदी है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि गडकरी को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि पार्टी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने तक इंतजार करती है तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेह होने लगा है कि भाजपा के प्रमुख नेता भ्रष्ट सत्ताधारियों से मिले हुए हैं।
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
जानेमाने अधिवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "इसके अलावा, लोकसेवकों के इस्तीफे का दर्शन सरकारी कर्मचारियों के जीवन से मेल खाता है। यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई जांच चल रही होती है तो आमतौर पर उसे निलंबित कर दिया जाता है और दोषमुक्त हो जाने पर इज्जत के साथ उसे बुला लिया जाता है, गडकरी के साथ ठीक ऐसा ही होना चाहिए।"
इसके कुछ घंटों बाद ही भाजपा में बैठकों और मिलने जुलने का दौर शुरू हो गया।
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
गडकरी ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से अलग-अलग मुलाकात की। उधर कुछ नेताओं ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की। इस बीच, गुरुमूर्ति यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह से भी मिले। गुरुमर्ति ने आडवाणी से उनके आवास पर भी मुलाकात की।
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
इन मेल-मुलाकातों के बीच, सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, "इस तरह की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है कि मैं नितिन गडकरी का समर्थन नहीं कर रही हूं। मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं एक बार फिर उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर करती हूं।"टिप्पणियां
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
गडकरी की एक कम्पनी पर हाल ही में वित्तीय गड़बड़झाला का आरोप लगा है। उनके खिलाफ जांच चल ही रही है, इस बीच रविवार को बुद्धिमत्ता के स्तर पर स्वामी विवेकानंद और भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तुलना कर वह एक नए विवाद में फंस गए।
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।"
विवेकानंद पर की गई टिप्पणी पर खेद जताते हुए गडकरी ने एक बयान में कहा, "मैं दोहराना चाहता हूं कि मैंने कभी भी स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। स्वामी विवेकानंद को उनकी छवि से किसी भी रूप में कमतर दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। यदि स्वामी विवेकानंद के सम्बंध में मेरे शब्दों से किसी भी रूप में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।" | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के मद्देनजर पार्टी के भीतर से सतह पर उठ रही आवाजों को नजरअंदाज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को कहा कि वह अपने अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ खड़ी है और उसे उनपर पूरा भरोसा है। | 3 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: महानायक अमिताभ बच्चन हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में गैंग वार के चित्रण से खासे प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि निर्देशक अनुराग कश्यप ने दृश्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की है और उन्हें उनके कम्र में चलने दिया है।
फिल्म की कहानी जीशान कादरी ने लिखी है। यह फिल्म स्क्रैप के कारोबार को लेकर गैंगस्टर फाहीमा खान और व्यवसायी शबीर आलम के बीच हुए गैंग वार के लिए मशहूर झारखंड के वासेपुर पर आधारित है।
शक्रवार को प्रदर्शित होने के बाद यह फिल्म अधिकतर जगह हाउसफुल रही।
अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखा, "इसमें कोई शक नहीं कि आज का दिन गैंग्स ऑफ वासेपुर के नाम रहा। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे इसे देखने का मौका मिला। भारतीय सिनेमा अपनी श्रेष्ठता पर है।"टिप्पणियां
उन्होंने कहा, "अनुराग कश्यप ने कोई भी बनावटी शॉट नहीं लिया और दृश्य से छेडछाड़ किए बिना उन्हें अपने क्रम में चलने दिया है।"
अमिताभ ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दकी, रिचा चड्ढ़ा और पीयूष मिश्रा की भी जमकर तारीफ की।
फिल्म की कहानी जीशान कादरी ने लिखी है। यह फिल्म स्क्रैप के कारोबार को लेकर गैंगस्टर फाहीमा खान और व्यवसायी शबीर आलम के बीच हुए गैंग वार के लिए मशहूर झारखंड के वासेपुर पर आधारित है।
शक्रवार को प्रदर्शित होने के बाद यह फिल्म अधिकतर जगह हाउसफुल रही।
अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखा, "इसमें कोई शक नहीं कि आज का दिन गैंग्स ऑफ वासेपुर के नाम रहा। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे इसे देखने का मौका मिला। भारतीय सिनेमा अपनी श्रेष्ठता पर है।"टिप्पणियां
उन्होंने कहा, "अनुराग कश्यप ने कोई भी बनावटी शॉट नहीं लिया और दृश्य से छेडछाड़ किए बिना उन्हें अपने क्रम में चलने दिया है।"
अमिताभ ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दकी, रिचा चड्ढ़ा और पीयूष मिश्रा की भी जमकर तारीफ की।
शक्रवार को प्रदर्शित होने के बाद यह फिल्म अधिकतर जगह हाउसफुल रही।
अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखा, "इसमें कोई शक नहीं कि आज का दिन गैंग्स ऑफ वासेपुर के नाम रहा। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे इसे देखने का मौका मिला। भारतीय सिनेमा अपनी श्रेष्ठता पर है।"टिप्पणियां
उन्होंने कहा, "अनुराग कश्यप ने कोई भी बनावटी शॉट नहीं लिया और दृश्य से छेडछाड़ किए बिना उन्हें अपने क्रम में चलने दिया है।"
अमिताभ ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दकी, रिचा चड्ढ़ा और पीयूष मिश्रा की भी जमकर तारीफ की।
अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखा, "इसमें कोई शक नहीं कि आज का दिन गैंग्स ऑफ वासेपुर के नाम रहा। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे इसे देखने का मौका मिला। भारतीय सिनेमा अपनी श्रेष्ठता पर है।"टिप्पणियां
उन्होंने कहा, "अनुराग कश्यप ने कोई भी बनावटी शॉट नहीं लिया और दृश्य से छेडछाड़ किए बिना उन्हें अपने क्रम में चलने दिया है।"
अमिताभ ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दकी, रिचा चड्ढ़ा और पीयूष मिश्रा की भी जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा, "अनुराग कश्यप ने कोई भी बनावटी शॉट नहीं लिया और दृश्य से छेडछाड़ किए बिना उन्हें अपने क्रम में चलने दिया है।"
अमिताभ ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दकी, रिचा चड्ढ़ा और पीयूष मिश्रा की भी जमकर तारीफ की।
अमिताभ ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दकी, रिचा चड्ढ़ा और पीयूष मिश्रा की भी जमकर तारीफ की। | सारांश: अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखा, इसमें कोई शक नहीं कि आज का दिन गैंग्स ऑफ वासेपुर के नाम रहा। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे इसे देखने का मौका मिला। भारतीय सिनेमा अपनी श्रेष्ठता पर है। | 33 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: राजधानी के लोगों को अब बिजली के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। बिजली क्षेत्र के नियामक डीईआरसी ने वितरण कंपनियों की बिजली खरीद लागत को समायोजित करने के लिए दरों में 5 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। यह वृद्धि 1 फरवरी से तीन माह की अवधि के लिए रहेगी। उसके बाद डीईआरसी वितरण कंपनियों की खरीद लागत के आधार पर वृद्धि की समीक्षा करेगा।
डीईआरसी सचिव जयश्री रघुरमन ने कहा, ‘‘हमने तीन माह की अवधि के लिए प्रति यूनिट 5 प्रतिशत का ईंधन मूल्य समायोजन अधिभार लागू किया है।’’ इससे पांच माह पूर्व डीईआरसी ने सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 22 प्रतिशत की वृद्धि की थी। बिजली वितरण कंपनियों- एनडीपीएल, बीआरपीएल और बीवाईपीएल ने दरों में क्रमश: 9.12 प्रतिशत, 10.75 प्रतिशत और 12.43 प्रतिशत की वृद्धि की मांग की थी।
डीईआरसी सचिव जयश्री रघुरमन ने कहा, ‘‘हमने तीन माह की अवधि के लिए प्रति यूनिट 5 प्रतिशत का ईंधन मूल्य समायोजन अधिभार लागू किया है।’’ इससे पांच माह पूर्व डीईआरसी ने सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 22 प्रतिशत की वृद्धि की थी। बिजली वितरण कंपनियों- एनडीपीएल, बीआरपीएल और बीवाईपीएल ने दरों में क्रमश: 9.12 प्रतिशत, 10.75 प्रतिशत और 12.43 प्रतिशत की वृद्धि की मांग की थी। | संक्षिप्त सारांश: बिजली क्षेत्र के नियामक डीईआरसी ने वितरण कंपनियों की बिजली खरीद लागत को समायोजित करने के लिए दरों में 5 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। | 23 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: रेलवे भर्ती बोर्ड (Railway Recruitment Board) के अधिकारी ने NDTV को बताया, ''आरआरबी ग्रुप डी परीक्षा का रिजल्ट (RRB Group D Result) फरवरी के मध्य में किसी भी समय जारी कर दिया जाएगा. अधिकारी ने कहा कि आरआरबी ग्रुप सी एएलपी, टेक्नीशियन की दूसरी स्टेज की आंसर-की (RRB ALP 2nd Stage Answer Key) भी फरवरी के मध्य में ही जारी की जाएगी. बता दें कि आरआरबी ने ग्रुप डी के 60 हजार पदों पर भर्ती परीक्षा पिछले साल सितंबर से दिसंबर तक आयोजित की थी. पहले स्टेज की परीक्षा का रिजल्ट आरआरबी की सभी वेबसाइट्स पर जारी किया जाएगा. उम्मीदवार अपना रिजल्ट (RRB Group D Result) अपने रीजन की आरआरबी वेबसाइट पर जाकर चेक कर पाएंगे. उम्मीदवारों को अपना रिजल्ट चेक करने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि की मदद से लॉग इन करना होगा. पहले स्टेज की परीक्षा में पास होने वाले उम्मीदवारों को दूसरे स्टेज की परीक्षा देनी होगी. दूसरे स्टेज में शारीरिक दक्षता परीक्षा होगी. ग्रुप डी शारीरिक दक्षता परीक्षा से जुड़ी जानकारी नीचे दी गई है. | संक्षिप्त पाठ: ग्रुप डी का रिजल्ट जल्द जारी होगा.
ग्रुप डी का रिजल्ट फरवरी के मध्य में जारी किया जाएगा.
रिजल्ट आरआरबी वेबसाइट्स पर जारी किया जाएगा. | 13 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: पाकिस्तान ने पेट्रोलियम ईंधन के आयात की इच्छा जाहिर कर दी है, पर वह अभी भरोसा जमने तक इस मामले में भारत पर ज्यादा निर्भर होने के बजाय फिलहाल अपनी कुल जरूरत का 5-10 फीसदी तेल ही भारत से आयात करना चाहता है।टिप्पणियां
पाकिस्तान सरकार के एक सरकारी अधिकारी ने ‘डॉन’ अखबार से कहा कि शुरुआती चरण में भारत से वार्षिक 1.5 अरब डॉलर से अधिक ईंधन नहीं लिया जाएगा। पाकिस्तान सालाना करीब 14.5 अरब डॉलर मूल्य का ईंधन आयात करता है। दोनों देश पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें भारत से तरलीकृत प्राकृतिक गैस का आयात शामिल है।
अधिकारी ने कहा ‘‘ भारत से शुरूआत में कुल जरूरत के पांच से 10 फीसद के बराबर आयात करने का प्रस्ताव है क्योंकि हमें तेल आपूर्ति सुरक्षा और निर्भरता मामले पर सतर्क और चौकस रहना है।’’ अखबार में इस अधिकारी का नाम नहीं बताया गया है।
पाकिस्तान सरकार के एक सरकारी अधिकारी ने ‘डॉन’ अखबार से कहा कि शुरुआती चरण में भारत से वार्षिक 1.5 अरब डॉलर से अधिक ईंधन नहीं लिया जाएगा। पाकिस्तान सालाना करीब 14.5 अरब डॉलर मूल्य का ईंधन आयात करता है। दोनों देश पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें भारत से तरलीकृत प्राकृतिक गैस का आयात शामिल है।
अधिकारी ने कहा ‘‘ भारत से शुरूआत में कुल जरूरत के पांच से 10 फीसद के बराबर आयात करने का प्रस्ताव है क्योंकि हमें तेल आपूर्ति सुरक्षा और निर्भरता मामले पर सतर्क और चौकस रहना है।’’ अखबार में इस अधिकारी का नाम नहीं बताया गया है।
अधिकारी ने कहा ‘‘ भारत से शुरूआत में कुल जरूरत के पांच से 10 फीसद के बराबर आयात करने का प्रस्ताव है क्योंकि हमें तेल आपूर्ति सुरक्षा और निर्भरता मामले पर सतर्क और चौकस रहना है।’’ अखबार में इस अधिकारी का नाम नहीं बताया गया है। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: पाकिस्तान ने पेट्रोलियम ईंधन के आयात की इच्छा जाहिर कर दी है लेकिन वह भारत से अपनी जरूरत का 10 फीसदी तेल ही आयात करना चाहता है। | 32 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर से लेकर डीसीपी रैंक के ऐसे 41 पुलिसकर्मी हैं जिन लोगों ने दिन रात एक कर निर्भया केस की जांच की और आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद फांसी के फंदे तक पहुंचाया. इनकी जांच की तारीफ निचली अदालत, हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तीनों ने अपने अपने फैसलों में की. सोमवार को पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने इन्हें दिल्ली पुलिस मुख्यालय बुलाकर इनकी हौसला अफजाई की. वो 16 दिसम्बर 2012 की रात थी जब निर्भया के साथ एक चलती बस में गैंगरेप हुआ था. उसके साथ 6 लोगों ने ऐसी हैवानियत की कि 29 दिसम्बर को उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई. इस मामले में पुलिस ने एक हफ्ते के अंदर न सिर्फ सभी आरोपियों को पकड़ लिया बल्कि महज़ 19 दिन के अंदर कोर्ट में 1000 पन्नों की चार्जशीट भी पेश कर दी.टिप्पणियां
इस केस में ऐसा कोई सबूत, ऐसा कोई गवाह नहीं था जिसे पुलिस ने अपनी जांच में शामिल न किया हो. पुलिस ने आरोपियों के पकड़ने के साथ-साथ जिस रास्ते से बस गई थी उसका cctv फुटेज बरामद किया. आरोपियों के पास से पीड़ित का मोबाइल फ़ोन, उनके एटीएम कार्ड, सोने की चेन और दूसरा सामान बरामद किया. आरोपियों और पीड़ित की डीएनए जांच कराई जिसका मिलान भी सही हुआ, दांतों के काटने के निशान की फॉरेंसिक जांच कराई गई, 50 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज कराए गए. यही नहीं, जांच में उस हर छोटे से छोटे बिंदु को शामिल किया गया जो आरोपियों को कोर्ट में खड़ा कर सकता था.
पुलिस ने महज़ एक दिन के अंदर सिंगापुर ले जाने के लिए निर्भया के मां-बाप का पासपोर्ट बनवाया, सरोजिनी नगर मार्किट से उनके लिए शॉपिंग तक की. टीम में 2 डीसीपी के अलावा कई तेजतर्रार इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर शामिल रहे. इसके अलावा दर्जनों सिपाही भी रात दिन मामले की जांच से जुड़े रहे. पुलिस अधिकारी लगातार निर्भया के मां बाप को धीरज बंधाते रहे, शायद यही वजह है कि केस की शुरुआत से लेकर कोर्ट के फैसले आने तक निर्भया के मां बाप पुलिस की तारीफ करते रहे.
इस केस में ऐसा कोई सबूत, ऐसा कोई गवाह नहीं था जिसे पुलिस ने अपनी जांच में शामिल न किया हो. पुलिस ने आरोपियों के पकड़ने के साथ-साथ जिस रास्ते से बस गई थी उसका cctv फुटेज बरामद किया. आरोपियों के पास से पीड़ित का मोबाइल फ़ोन, उनके एटीएम कार्ड, सोने की चेन और दूसरा सामान बरामद किया. आरोपियों और पीड़ित की डीएनए जांच कराई जिसका मिलान भी सही हुआ, दांतों के काटने के निशान की फॉरेंसिक जांच कराई गई, 50 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज कराए गए. यही नहीं, जांच में उस हर छोटे से छोटे बिंदु को शामिल किया गया जो आरोपियों को कोर्ट में खड़ा कर सकता था.
पुलिस ने महज़ एक दिन के अंदर सिंगापुर ले जाने के लिए निर्भया के मां-बाप का पासपोर्ट बनवाया, सरोजिनी नगर मार्किट से उनके लिए शॉपिंग तक की. टीम में 2 डीसीपी के अलावा कई तेजतर्रार इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर शामिल रहे. इसके अलावा दर्जनों सिपाही भी रात दिन मामले की जांच से जुड़े रहे. पुलिस अधिकारी लगातार निर्भया के मां बाप को धीरज बंधाते रहे, शायद यही वजह है कि केस की शुरुआत से लेकर कोर्ट के फैसले आने तक निर्भया के मां बाप पुलिस की तारीफ करते रहे.
पुलिस ने महज़ एक दिन के अंदर सिंगापुर ले जाने के लिए निर्भया के मां-बाप का पासपोर्ट बनवाया, सरोजिनी नगर मार्किट से उनके लिए शॉपिंग तक की. टीम में 2 डीसीपी के अलावा कई तेजतर्रार इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर शामिल रहे. इसके अलावा दर्जनों सिपाही भी रात दिन मामले की जांच से जुड़े रहे. पुलिस अधिकारी लगातार निर्भया के मां बाप को धीरज बंधाते रहे, शायद यही वजह है कि केस की शुरुआत से लेकर कोर्ट के फैसले आने तक निर्भया के मां बाप पुलिस की तारीफ करते रहे. | संक्षिप्त पाठ: मामले की जांच में हर छोटे से छोटे बिंदु को शामिल किया गया
2 डीसीपी के अलावा कई तेजतर्रार इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर शामिल रहे
टीम ने महज़ 19 दिन के अंदर कोर्ट में चार्जशीट भी पेश कर दी | 14 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर यह कहते हुए खाद्य सुरक्षा कानून पर मुख्यमंत्रियों की एक बैठक बुलाने का प्रस्ताव किया है कि यह एक ऐसा मुद्दा है कि जिससे केंद्र और राज्य सरकारों दोनों का वास्ता है।टिप्पणियां
मोदी ने पत्र में आरोप लगाया है कि गरीब परिवारों को अध्यादेश के जरिये ‘खाद्य आरक्षित’ बना दिया गया है जो ‘खाद्य सुरक्षा के मूल उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करता।’ उन्होंने सात अगस्त की तिथि वाले पत्र में आरोप लगाया है कि अध्यादेश के तहत ‘अव्यवहार्य वैधानिक जिम्मेदारियां केंद्र और राज्य सरकारों को दी गई हैं’ और ‘लाभार्थियों की संख्या पात्रता के मानदंड और व्यक्तिगत अधिकार तय किए बिना तय कर दी गई है। विभिन्न राज्यों के बीच व्यापक क्षेत्रीय असमानताएं हो सकती हैं।’
मोदी के अनुसार संसद की स्थायी समिति ने जनवरी 2013 में सिफारिश की थी कि सरकार को राज्य सरकार से सलाह मशविरा करके पात्रता मानदंड तय करने चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यादेश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों का हक 35 किलोग्राम प्रति परिवार से घटाकर औसत पांच व्यक्ति के परिवार को 25 किलोग्राम करने का प्रस्ताव है। ‘यह खाद्य सुरक्षा विधेयक का उद्देश्य नहीं हो सकता जो उन लोगों का हक घटाता है जिनकी पहचान गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले के रूप में हुई है।’ उन्होंने कहा कि दूसरी ओर योजना आयोग यह दावा कर रहा है बीपीएल परिवारों की संख्या में कमी हुई है लेकिन अध्यादेश के तहत जनसंख्या के दो तिहाई लोगों को खाद्य सहायता देने की बात है। इस पर राज्यों से चर्चा होनी चाहिए।
मोदी ने पत्र में आरोप लगाया है कि गरीब परिवारों को अध्यादेश के जरिये ‘खाद्य आरक्षित’ बना दिया गया है जो ‘खाद्य सुरक्षा के मूल उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करता।’ उन्होंने सात अगस्त की तिथि वाले पत्र में आरोप लगाया है कि अध्यादेश के तहत ‘अव्यवहार्य वैधानिक जिम्मेदारियां केंद्र और राज्य सरकारों को दी गई हैं’ और ‘लाभार्थियों की संख्या पात्रता के मानदंड और व्यक्तिगत अधिकार तय किए बिना तय कर दी गई है। विभिन्न राज्यों के बीच व्यापक क्षेत्रीय असमानताएं हो सकती हैं।’
मोदी के अनुसार संसद की स्थायी समिति ने जनवरी 2013 में सिफारिश की थी कि सरकार को राज्य सरकार से सलाह मशविरा करके पात्रता मानदंड तय करने चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यादेश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों का हक 35 किलोग्राम प्रति परिवार से घटाकर औसत पांच व्यक्ति के परिवार को 25 किलोग्राम करने का प्रस्ताव है। ‘यह खाद्य सुरक्षा विधेयक का उद्देश्य नहीं हो सकता जो उन लोगों का हक घटाता है जिनकी पहचान गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले के रूप में हुई है।’ उन्होंने कहा कि दूसरी ओर योजना आयोग यह दावा कर रहा है बीपीएल परिवारों की संख्या में कमी हुई है लेकिन अध्यादेश के तहत जनसंख्या के दो तिहाई लोगों को खाद्य सहायता देने की बात है। इस पर राज्यों से चर्चा होनी चाहिए।
मोदी के अनुसार संसद की स्थायी समिति ने जनवरी 2013 में सिफारिश की थी कि सरकार को राज्य सरकार से सलाह मशविरा करके पात्रता मानदंड तय करने चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यादेश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों का हक 35 किलोग्राम प्रति परिवार से घटाकर औसत पांच व्यक्ति के परिवार को 25 किलोग्राम करने का प्रस्ताव है। ‘यह खाद्य सुरक्षा विधेयक का उद्देश्य नहीं हो सकता जो उन लोगों का हक घटाता है जिनकी पहचान गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले के रूप में हुई है।’ उन्होंने कहा कि दूसरी ओर योजना आयोग यह दावा कर रहा है बीपीएल परिवारों की संख्या में कमी हुई है लेकिन अध्यादेश के तहत जनसंख्या के दो तिहाई लोगों को खाद्य सहायता देने की बात है। इस पर राज्यों से चर्चा होनी चाहिए। | गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर यह कहते हुए खाद्य सुरक्षा कानून पर मुख्यमंत्रियों की एक बैठक बुलाने का प्रस्ताव किया है कि यह एक ऐसा मुद्दा है कि जिससे केंद्र और राज्य सरकारों दोनों का वास्ता है। | 26 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में करंट लगने के कारण मर गई एक गाय की खाल उतारने पर भीड़ ने दो दलित भाइयों की कथित तौर पर पिटाई कर दी. पुलिस ने मंगलवार को बताया कि यह घटना आंध्र प्रदेश में जिले के अमलापुरम शहर में जानकीपेटा में हुई.
पुलिस के मुताबिक, करंट लगने के कारण गाय के मर जाने पर इसके मालिक ने सोमवार रात जानवर को दफनाए जाने से पहले दो दलित भाइयों - मोकाती एलिशा और लाजर को खाल उतारने के काम में लगाया.
पुलिस के मुताबिक खाल उतारने के बारे में सूचना मिलने पर स्वयंभू गो-रक्षक वहां पर पहुंचे और जानवर की हत्या का आरोप लगाते हुए दोनों की पिटाई कर दी.टिप्पणियां
दोनों को इलाज के लिए अमलापुरम के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और एलिशा की स्थिति गंभीर बतायी गई है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पुलिस के मुताबिक, करंट लगने के कारण गाय के मर जाने पर इसके मालिक ने सोमवार रात जानवर को दफनाए जाने से पहले दो दलित भाइयों - मोकाती एलिशा और लाजर को खाल उतारने के काम में लगाया.
पुलिस के मुताबिक खाल उतारने के बारे में सूचना मिलने पर स्वयंभू गो-रक्षक वहां पर पहुंचे और जानवर की हत्या का आरोप लगाते हुए दोनों की पिटाई कर दी.टिप्पणियां
दोनों को इलाज के लिए अमलापुरम के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और एलिशा की स्थिति गंभीर बतायी गई है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पुलिस के मुताबिक खाल उतारने के बारे में सूचना मिलने पर स्वयंभू गो-रक्षक वहां पर पहुंचे और जानवर की हत्या का आरोप लगाते हुए दोनों की पिटाई कर दी.टिप्पणियां
दोनों को इलाज के लिए अमलापुरम के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और एलिशा की स्थिति गंभीर बतायी गई है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
दोनों को इलाज के लिए अमलापुरम के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और एलिशा की स्थिति गंभीर बतायी गई है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यहाँ एक सारांश है:आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में करंट लगने के कारण गाय मर गई थी
गाय के मालिक ने गाय दफनाने से पहले इसकी खाल उतरवाई
स्वयंभू गो-रक्षकों ने खाल उतारने वाले दलितों की पिटाई कर दी | 4 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बॉलीवुड की बहुत सी अभिनेत्रियां बड़े पर्दे पर एक्शन करती नजर आती हैं लेकिन दीपिका पादुकोण ने पिछले दिनों जम्मू में सेना के जवानों के साथ असल एक्शन करने की कोशिश की।
26 वर्षीय दीपिका एनडीटीवी इंडिया के शो 'जय जवान' की शूटिंग के लिए जम्मू गई थी और उन्होंने बख्तरबंद रेजिमेंट और जम्मू एवं कश्मीर राइफल के जवानों के साथ कुछ रोमांचक करतब किए।टिप्पणियां
दीपिका ने कहा, "उन्होंने छह फुट की दीवार से छलांग लगाई, टी 72 टैंक में सवारी की, राइफल चलाई और जवानों के साथ बास्केटबॉल और बैडमिंटन भी खेला।"
उनकी खेल भावना से जवानों का उत्साह भी बढ़ा। यह कड़ी बुधवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रसारित की जाएगी।
26 वर्षीय दीपिका एनडीटीवी इंडिया के शो 'जय जवान' की शूटिंग के लिए जम्मू गई थी और उन्होंने बख्तरबंद रेजिमेंट और जम्मू एवं कश्मीर राइफल के जवानों के साथ कुछ रोमांचक करतब किए।टिप्पणियां
दीपिका ने कहा, "उन्होंने छह फुट की दीवार से छलांग लगाई, टी 72 टैंक में सवारी की, राइफल चलाई और जवानों के साथ बास्केटबॉल और बैडमिंटन भी खेला।"
उनकी खेल भावना से जवानों का उत्साह भी बढ़ा। यह कड़ी बुधवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रसारित की जाएगी।
दीपिका ने कहा, "उन्होंने छह फुट की दीवार से छलांग लगाई, टी 72 टैंक में सवारी की, राइफल चलाई और जवानों के साथ बास्केटबॉल और बैडमिंटन भी खेला।"
उनकी खेल भावना से जवानों का उत्साह भी बढ़ा। यह कड़ी बुधवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रसारित की जाएगी।
उनकी खेल भावना से जवानों का उत्साह भी बढ़ा। यह कड़ी बुधवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रसारित की जाएगी। | यह एक सारांश है: बॉलीवुड की बहुत सी अभिनेत्रियां बड़े पर्दे पर एक्शन करती नजर आती हैं लेकिन दीपिका पादुकोण ने पिछले दिनों जम्मू में सेना के जवानों के साथ असल एक्शन करने की कोशिश की। | 16 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: देश में ऐसे वाहन क्रेताओं की संख्या बढ़ रही है जो पहले नए के बजाय कोई पुराना वाहन खरीदना चाहते हैं। एक अध्ययन के अनुसार तीन साल में ऐसे ग्राहकों की संख्या 10 प्रतिशत बढ़ी है।
कार कंपनियां देश में पुराने या सेकंड हैंड कार कारोबार पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।टिप्पणियां
सिंगापुर की फर्म जेडी पावर ने अपने अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला है। इसमें कहा गया है कि नया वाहन खरीदने वाले लगभग 13 प्रतिशत लोग खरीद का फैसला करने से पहले पुरान या सेकंड हैंड वाहन खरीदने पर विचार करते हैं। इनमें से 37 प्रतिशत अपनी खरीदारी के लिए इंटरनेट को माध्यम बनाते हैं।
जेडी पावर के कार्यकारी निदेशक मोहित अरोरा ने कहा, वाहन कंपनियां भारत में इस्तेमाल शुदा कारों के कारोबार पर पहले से अधिक ध्यान दे रही हैं। कंपनियों की वेबसाइटों की जानकारी अधिक पारदर्शी हुई है।
कार कंपनियां देश में पुराने या सेकंड हैंड कार कारोबार पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।टिप्पणियां
सिंगापुर की फर्म जेडी पावर ने अपने अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला है। इसमें कहा गया है कि नया वाहन खरीदने वाले लगभग 13 प्रतिशत लोग खरीद का फैसला करने से पहले पुरान या सेकंड हैंड वाहन खरीदने पर विचार करते हैं। इनमें से 37 प्रतिशत अपनी खरीदारी के लिए इंटरनेट को माध्यम बनाते हैं।
जेडी पावर के कार्यकारी निदेशक मोहित अरोरा ने कहा, वाहन कंपनियां भारत में इस्तेमाल शुदा कारों के कारोबार पर पहले से अधिक ध्यान दे रही हैं। कंपनियों की वेबसाइटों की जानकारी अधिक पारदर्शी हुई है।
सिंगापुर की फर्म जेडी पावर ने अपने अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला है। इसमें कहा गया है कि नया वाहन खरीदने वाले लगभग 13 प्रतिशत लोग खरीद का फैसला करने से पहले पुरान या सेकंड हैंड वाहन खरीदने पर विचार करते हैं। इनमें से 37 प्रतिशत अपनी खरीदारी के लिए इंटरनेट को माध्यम बनाते हैं।
जेडी पावर के कार्यकारी निदेशक मोहित अरोरा ने कहा, वाहन कंपनियां भारत में इस्तेमाल शुदा कारों के कारोबार पर पहले से अधिक ध्यान दे रही हैं। कंपनियों की वेबसाइटों की जानकारी अधिक पारदर्शी हुई है।
जेडी पावर के कार्यकारी निदेशक मोहित अरोरा ने कहा, वाहन कंपनियां भारत में इस्तेमाल शुदा कारों के कारोबार पर पहले से अधिक ध्यान दे रही हैं। कंपनियों की वेबसाइटों की जानकारी अधिक पारदर्शी हुई है। | संक्षिप्त पाठ: देश में ऐसे वाहन क्रेताओं की संख्या बढ़ रही है जो पहले नए के बजाय कोई पुराना वाहन खरीदना चाहते हैं। एक अध्ययन के अनुसार तीन साल में ऐसे ग्राहकों की संख्या 10 प्रतिशत बढ़ी है। | 30 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: समाजवादी पार्टी (सपा) में अपने दल के विलय को खारिज किये जाने से नाराज कौमी एकता दल (कौएद) के अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने इसे सपा के प्रान्तीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘अहंकार’ का नतीजा बताया है। उन्होंने सोमवार को कहा कि अपनी ‘ब्रांडिंग’के लिये उनका अपमान करने वाले अखिलेश ने सपा को ‘हाईजैक’ कर लिया है।
अंसारी ने गत शनिवार को कौमी एकता दल के सपा में विलय को निरस्त किये जाने के बाद पहली बार संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी अपनी इस बेइज्जती का बदला आगामी विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल में सपा को उसकी ‘हैसियत’ बताकर लेगी। उन्होंने कौमी एकता दल के सपा में विलय का फैसला रद्द करने के लिये मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सपा को हाईजैक कर चुके अखिलेश के अहंकार के आगे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के संघर्ष और उनके भाई शिवपाल सिंह यादव की सकारात्मक कोशिशों का कोई मोल नहीं है।
अंसारी ने कहा कि सपा ने ही उनके सामने विलय का प्रस्ताव रखा था और वह कौएद के सपा में विलय को रद्द किये जाने से खुद को बहुत बेइज्जत और आहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, महासचिव शिवपाल यादव और पूर्वाचल के तमाम सपा नेता और मतदाता इस विलय के रद्द होने से बेहद दुखी हैं लेकिन अखिलेश को इसका ख्याल नहीं है। टिप्पणियां
अफजाल ने कहा कि उनकी पार्टी पूर्वांचल में आगामी विधानसभा चुनाव में अपने संगठन की मौजूदगी वाले 18 जिलों की 44 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी और सपा को उसकी ‘औकात’ दिखायेगी। अगर पश्चिम में उपयुक्त सियासी साझीदार मिलता है तो कौएद वहां भी चुनाव लड़ने से गुरेज नहीं करेगी।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अंसारी ने गत शनिवार को कौमी एकता दल के सपा में विलय को निरस्त किये जाने के बाद पहली बार संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी अपनी इस बेइज्जती का बदला आगामी विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल में सपा को उसकी ‘हैसियत’ बताकर लेगी। उन्होंने कौमी एकता दल के सपा में विलय का फैसला रद्द करने के लिये मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सपा को हाईजैक कर चुके अखिलेश के अहंकार के आगे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के संघर्ष और उनके भाई शिवपाल सिंह यादव की सकारात्मक कोशिशों का कोई मोल नहीं है।
अंसारी ने कहा कि सपा ने ही उनके सामने विलय का प्रस्ताव रखा था और वह कौएद के सपा में विलय को रद्द किये जाने से खुद को बहुत बेइज्जत और आहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, महासचिव शिवपाल यादव और पूर्वाचल के तमाम सपा नेता और मतदाता इस विलय के रद्द होने से बेहद दुखी हैं लेकिन अखिलेश को इसका ख्याल नहीं है। टिप्पणियां
अफजाल ने कहा कि उनकी पार्टी पूर्वांचल में आगामी विधानसभा चुनाव में अपने संगठन की मौजूदगी वाले 18 जिलों की 44 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी और सपा को उसकी ‘औकात’ दिखायेगी। अगर पश्चिम में उपयुक्त सियासी साझीदार मिलता है तो कौएद वहां भी चुनाव लड़ने से गुरेज नहीं करेगी।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अंसारी ने कहा कि सपा ने ही उनके सामने विलय का प्रस्ताव रखा था और वह कौएद के सपा में विलय को रद्द किये जाने से खुद को बहुत बेइज्जत और आहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, महासचिव शिवपाल यादव और पूर्वाचल के तमाम सपा नेता और मतदाता इस विलय के रद्द होने से बेहद दुखी हैं लेकिन अखिलेश को इसका ख्याल नहीं है। टिप्पणियां
अफजाल ने कहा कि उनकी पार्टी पूर्वांचल में आगामी विधानसभा चुनाव में अपने संगठन की मौजूदगी वाले 18 जिलों की 44 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी और सपा को उसकी ‘औकात’ दिखायेगी। अगर पश्चिम में उपयुक्त सियासी साझीदार मिलता है तो कौएद वहां भी चुनाव लड़ने से गुरेज नहीं करेगी।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अफजाल ने कहा कि उनकी पार्टी पूर्वांचल में आगामी विधानसभा चुनाव में अपने संगठन की मौजूदगी वाले 18 जिलों की 44 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी और सपा को उसकी ‘औकात’ दिखायेगी। अगर पश्चिम में उपयुक्त सियासी साझीदार मिलता है तो कौएद वहां भी चुनाव लड़ने से गुरेज नहीं करेगी।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | अफजाल बोले, सीएम ने अपनी ब्रांडिंग के लिए किया हमारा अपमान
समाजवादी पार्टी ने ही हमारे सामने रखा था विलय का प्रस्ताव
पूर्वांचल में 18 जिलों की 44 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगा कौमी एकता दल | 26 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: विश्व के सर्वोच्च वरीयता प्राप्त टेनिस स्टार सर्बिया नोवाक जोकोविक मेड्रिड मास्टर्स टूर्नामेंट के दूसरे दौर में हार गए हैं।
जोकोविक को बेल्जियम के ग्रिगोर दिमित्रोव ने तीन घंटे पांच मिनट तक चले मुकाबले में 6-7 (6), 7-6 (8), 3-6 से हराया।
जोकोविक के देशवासी जानको टिपसारेविक को भी चौंकाने वाली हार मिली है। टिपसारेविक को अर्जेंटीना के जुआन मोनाको से 6-7 (5), 3-6 के अंतर से हार मिली। नौवें वरीय टिपसारेकि की चुनौती एक घंटे 41 मिनट में खत्म हो गई।टिप्पणियां
विश्व के तीसरे वरीय ब्रिटेन के एंडी मरे को जर्मनी के फ्लोरियन मायेर के खिलाफ जीत हासिल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। मरे ने यह मैच 7-6 (11), 7-6 (3) से जीता।
मरे और जोकोविक के उलट मौजूदा चैम्पियन स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर को आसान जीत मिली। फेडरर ने राडेक स्टेपानेक पर 6-3, 6-3 से सीधे सेटों में जीत हासिल की।
जोकोविक को बेल्जियम के ग्रिगोर दिमित्रोव ने तीन घंटे पांच मिनट तक चले मुकाबले में 6-7 (6), 7-6 (8), 3-6 से हराया।
जोकोविक के देशवासी जानको टिपसारेविक को भी चौंकाने वाली हार मिली है। टिपसारेविक को अर्जेंटीना के जुआन मोनाको से 6-7 (5), 3-6 के अंतर से हार मिली। नौवें वरीय टिपसारेकि की चुनौती एक घंटे 41 मिनट में खत्म हो गई।टिप्पणियां
विश्व के तीसरे वरीय ब्रिटेन के एंडी मरे को जर्मनी के फ्लोरियन मायेर के खिलाफ जीत हासिल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। मरे ने यह मैच 7-6 (11), 7-6 (3) से जीता।
मरे और जोकोविक के उलट मौजूदा चैम्पियन स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर को आसान जीत मिली। फेडरर ने राडेक स्टेपानेक पर 6-3, 6-3 से सीधे सेटों में जीत हासिल की।
जोकोविक के देशवासी जानको टिपसारेविक को भी चौंकाने वाली हार मिली है। टिपसारेविक को अर्जेंटीना के जुआन मोनाको से 6-7 (5), 3-6 के अंतर से हार मिली। नौवें वरीय टिपसारेकि की चुनौती एक घंटे 41 मिनट में खत्म हो गई।टिप्पणियां
विश्व के तीसरे वरीय ब्रिटेन के एंडी मरे को जर्मनी के फ्लोरियन मायेर के खिलाफ जीत हासिल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। मरे ने यह मैच 7-6 (11), 7-6 (3) से जीता।
मरे और जोकोविक के उलट मौजूदा चैम्पियन स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर को आसान जीत मिली। फेडरर ने राडेक स्टेपानेक पर 6-3, 6-3 से सीधे सेटों में जीत हासिल की।
विश्व के तीसरे वरीय ब्रिटेन के एंडी मरे को जर्मनी के फ्लोरियन मायेर के खिलाफ जीत हासिल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। मरे ने यह मैच 7-6 (11), 7-6 (3) से जीता।
मरे और जोकोविक के उलट मौजूदा चैम्पियन स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर को आसान जीत मिली। फेडरर ने राडेक स्टेपानेक पर 6-3, 6-3 से सीधे सेटों में जीत हासिल की।
मरे और जोकोविक के उलट मौजूदा चैम्पियन स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर को आसान जीत मिली। फेडरर ने राडेक स्टेपानेक पर 6-3, 6-3 से सीधे सेटों में जीत हासिल की। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: जोकोविक को बेल्जियम के ग्रिगोर दिमित्रोव ने तीन घंटे पांच मिनट तक चले मुकाबले में 6-7 (6), 7-6 (8), 3-6 से हराया। | 32 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: किंग्स इलेवन पंजाब के कप्तान एडम गिलक्रिस्ट ने यहां रॉयल चैलेंजर्स बैंगलौर को 111 रन से हराने के बाद कहा कि यह जीत टीम के लिए काफी अहम है, क्योंकि इससे उनका रन रेट सुधर गया है। गिलक्रिस्ट की 55 गेंद में 106 रन और शान मार्श की 49 गेंद में नाबाद 79 रन की आक्रामक पारी से पंजाब ने दो विकेट पर 232 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में बैगलौर की टीम 17 ओवर में 121 रन पर सिमट गई। इस जीत से किंग्स इलेवन पंजाब का रन रेट माइनस 0.183 से सुधर कर प्लस 0.273 हो गया। मैन ऑफ द मैच गिलक्रिस्ट ने कहा, यह जीत हमारे लिए काफी अहम है, क्योंकि इससे हमारा रन रेट सुधरेगा और प्ले ऑफ की दौड़ में हमें इसकी जरूरत पड़ सकती है, लेकिन हमें अगला मैच जीतना होगा। हमने इस मैच में रन रेट में सुधार कर आधी बाधा पार कर ली है। अपनी विस्फोटक पारी के बारे में उन्होंने कहा, सच कहूं तो यह थोड़ी हैरानी भरी थी। लेकिन आपको खुद पर विश्वास करना जरूरी होता है। ट्वेंटी-20 रोमांचक खेल है। इस ऑस्ट्रेलियाई ने कहा, आज पिच बल्लेबाजी के मुफीद थी, हमें लगा कि यह छोटा मैदान है और हम शुरू में धीमे ओवरों की भरपायी कर लेंगे। | संक्षिप्त पाठ: किंग्स इलेवन पंजाब के कप्तान गिलक्रिस्ट ने बैंगलौर को हराने के बाद कहा कि यह जीत टीम के लिए काफी अहम है, क्योंकि इससे उनका रन रेट सुधर गया है। | 22 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: बिहार के भागलपुर जिला के इशाकचक रेलवे क्रॉसिंग के निकट स्थित जेडीयू की राज्यसभा सदस्य कहकशां परवीन के घर के बाहर कथित तौर पर रंगदारी की मांग को लेकर असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए बम से हमले में सांसद के पति के बड़े भाई और अंगरक्षक सहित चार व्यक्ति घायल हो गए.
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ने सोमवार को बताया कि रविवार को हुए इस हमले में सांसद के पति के बड़े भाई और अंगरक्षक सहित चार व्यक्ति घायल हो गए.टिप्पणियां
उन्होंने बताया कि इस मामले में इशाकचक थाना अध्यक्ष राम इकबाल प्रसाद के बयान पर 10 लोगों के खिलाफ नामजद प्रथमिकी दर्ज कराई गई है, जिनमें से एक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. अन्य की गिरफ्तारी के लिए सघन छापेमारी जारी है. मनोज ने बताया कि पहली नजर में यह वारदात सांसद और उनके पति मोहम्मद नसीमुद्दीन से रंगदारी की मांग को लेकर किया जाना प्रतीत होता है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ने सोमवार को बताया कि रविवार को हुए इस हमले में सांसद के पति के बड़े भाई और अंगरक्षक सहित चार व्यक्ति घायल हो गए.टिप्पणियां
उन्होंने बताया कि इस मामले में इशाकचक थाना अध्यक्ष राम इकबाल प्रसाद के बयान पर 10 लोगों के खिलाफ नामजद प्रथमिकी दर्ज कराई गई है, जिनमें से एक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. अन्य की गिरफ्तारी के लिए सघन छापेमारी जारी है. मनोज ने बताया कि पहली नजर में यह वारदात सांसद और उनके पति मोहम्मद नसीमुद्दीन से रंगदारी की मांग को लेकर किया जाना प्रतीत होता है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उन्होंने बताया कि इस मामले में इशाकचक थाना अध्यक्ष राम इकबाल प्रसाद के बयान पर 10 लोगों के खिलाफ नामजद प्रथमिकी दर्ज कराई गई है, जिनमें से एक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. अन्य की गिरफ्तारी के लिए सघन छापेमारी जारी है. मनोज ने बताया कि पहली नजर में यह वारदात सांसद और उनके पति मोहम्मद नसीमुद्दीन से रंगदारी की मांग को लेकर किया जाना प्रतीत होता है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यह एक सारांश है: जेडीयू सांसद कहकशां परवीन के घर पर हुआ हमला
सांसद के पति के बड़े भाई, अंगरक्षक सहित 4 लोग घायल
10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज, एक गिरफ्तार | 9 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: केंद्र सरकार और सीबीआई आज सुप्रीम कोर्ट में पथरीबल फर्जी मुठभेड़ मामले में अपनी बात रखेंगी। इससे पहले कोर्ट ने सरकार और सीबीआई से पूछा था कि क्या वह इस मामले की सुनवाई डिफेंस कोर्ट को सौंपना चाहती हैं।टिप्पणियां
जम्मू-कश्मीर के पथरीबल में सैनिक और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पांच लोगों को मार गिराया गया था। कहा गया कि मारे गए लोग छत्तीसिंहपोरा में हुए नरसंहार के आरोपी हैं। इस मामले में सीबीआई और सेना आमने-सामने है। सेना का कहना है कि उसके एक ब्रिगेडियर सहित आठ सैनिकों की जांच सीबीआई नहीं कर सकती, क्योंकि सैनिकों को आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट के तहत छूट मिली हुई है और सरकार की इजाजत के बगैर उनकी जांच नहीं की जा सकती।
वहीं सीबीआई चाहती है कि स्टे हटे ताकि इस मामले में अपनी जांच आगे बढ़ा सके। सेना की एक याचिका के बाद जम्मू-कश्मीर के ट्रायल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पर 2007 में रोक लगा दी गई थी।
जम्मू-कश्मीर के पथरीबल में सैनिक और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पांच लोगों को मार गिराया गया था। कहा गया कि मारे गए लोग छत्तीसिंहपोरा में हुए नरसंहार के आरोपी हैं। इस मामले में सीबीआई और सेना आमने-सामने है। सेना का कहना है कि उसके एक ब्रिगेडियर सहित आठ सैनिकों की जांच सीबीआई नहीं कर सकती, क्योंकि सैनिकों को आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट के तहत छूट मिली हुई है और सरकार की इजाजत के बगैर उनकी जांच नहीं की जा सकती।
वहीं सीबीआई चाहती है कि स्टे हटे ताकि इस मामले में अपनी जांच आगे बढ़ा सके। सेना की एक याचिका के बाद जम्मू-कश्मीर के ट्रायल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पर 2007 में रोक लगा दी गई थी।
वहीं सीबीआई चाहती है कि स्टे हटे ताकि इस मामले में अपनी जांच आगे बढ़ा सके। सेना की एक याचिका के बाद जम्मू-कश्मीर के ट्रायल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पर 2007 में रोक लगा दी गई थी। | इससे पहले कोर्ट ने सरकार और सीबीआई से पूछा था कि क्या वह इस मामले की सुनवाई डिफेंस कोर्ट को सौंपना चाहती हैं। | 1 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: वर्ष 2006 के एक ‘हिट एंड रन’ मामले में दोषी ठहराए जाने के फैसले को उच्चतम न्यायालय द्वारा बरकरार रखने और जमानत रद्द किए जाने के बाद एलिस्टर परेरा ने बॉम्बे हाई कोर्ट में सोमवार को आत्मसमर्पण कर दिया।
मुंबई पुलिस का कहना है कि कि उन्हें उच्चतम न्यायालय के आदेश की प्रति नहीं मिली है इसलिए वह परेरा को गिरफ्तार नहीं कर सकती।
पुलिस उपायुक्त प्रताप दिघावकर ने रविवार को कहा ‘आदेश की प्रति पुलिस को मिलने के बाद ही हम कार्रवाई कर सकते हैं।’
12 नवंबर 2006 को शराब के नशे में तेज रफ्तार से कार चलाते हुए सात लोगों को कुचल कर मार डालने के मामले में मुंबई के व्यवसायी परेरा को बंबई उच्च न्यायालय ने 2007 में दोषी ठहराया था और उसे तीन साल की सजा सुनाई थी।
उच्चतम न्यायालय ने 12 जनवरी को इस फैसले को बरकरार रखा लेकिन कहा अपराध को देखते हुए सजा बहुत कम है। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा था कि परेरा की सजा इसलिए नहीं बढ़ाई जा सकती क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने इसे चुनौती नहीं दी है। टिप्पणियां
न्यायालय ने परेरा की जमानत रद्द कर उसे उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई शेष सजा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
निचली अदालत ने परेरा को छह माह की सजा सुनाई थी लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे बढ़ा कर तीन साल कर दिया था और परेरा को पांच लाख रूपये जुर्माने की सजा भी सुनाई थी।
मुंबई पुलिस का कहना है कि कि उन्हें उच्चतम न्यायालय के आदेश की प्रति नहीं मिली है इसलिए वह परेरा को गिरफ्तार नहीं कर सकती।
पुलिस उपायुक्त प्रताप दिघावकर ने रविवार को कहा ‘आदेश की प्रति पुलिस को मिलने के बाद ही हम कार्रवाई कर सकते हैं।’
12 नवंबर 2006 को शराब के नशे में तेज रफ्तार से कार चलाते हुए सात लोगों को कुचल कर मार डालने के मामले में मुंबई के व्यवसायी परेरा को बंबई उच्च न्यायालय ने 2007 में दोषी ठहराया था और उसे तीन साल की सजा सुनाई थी।
उच्चतम न्यायालय ने 12 जनवरी को इस फैसले को बरकरार रखा लेकिन कहा अपराध को देखते हुए सजा बहुत कम है। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा था कि परेरा की सजा इसलिए नहीं बढ़ाई जा सकती क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने इसे चुनौती नहीं दी है। टिप्पणियां
न्यायालय ने परेरा की जमानत रद्द कर उसे उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई शेष सजा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
निचली अदालत ने परेरा को छह माह की सजा सुनाई थी लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे बढ़ा कर तीन साल कर दिया था और परेरा को पांच लाख रूपये जुर्माने की सजा भी सुनाई थी।
पुलिस उपायुक्त प्रताप दिघावकर ने रविवार को कहा ‘आदेश की प्रति पुलिस को मिलने के बाद ही हम कार्रवाई कर सकते हैं।’
12 नवंबर 2006 को शराब के नशे में तेज रफ्तार से कार चलाते हुए सात लोगों को कुचल कर मार डालने के मामले में मुंबई के व्यवसायी परेरा को बंबई उच्च न्यायालय ने 2007 में दोषी ठहराया था और उसे तीन साल की सजा सुनाई थी।
उच्चतम न्यायालय ने 12 जनवरी को इस फैसले को बरकरार रखा लेकिन कहा अपराध को देखते हुए सजा बहुत कम है। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा था कि परेरा की सजा इसलिए नहीं बढ़ाई जा सकती क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने इसे चुनौती नहीं दी है। टिप्पणियां
न्यायालय ने परेरा की जमानत रद्द कर उसे उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई शेष सजा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
निचली अदालत ने परेरा को छह माह की सजा सुनाई थी लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे बढ़ा कर तीन साल कर दिया था और परेरा को पांच लाख रूपये जुर्माने की सजा भी सुनाई थी।
12 नवंबर 2006 को शराब के नशे में तेज रफ्तार से कार चलाते हुए सात लोगों को कुचल कर मार डालने के मामले में मुंबई के व्यवसायी परेरा को बंबई उच्च न्यायालय ने 2007 में दोषी ठहराया था और उसे तीन साल की सजा सुनाई थी।
उच्चतम न्यायालय ने 12 जनवरी को इस फैसले को बरकरार रखा लेकिन कहा अपराध को देखते हुए सजा बहुत कम है। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा था कि परेरा की सजा इसलिए नहीं बढ़ाई जा सकती क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने इसे चुनौती नहीं दी है। टिप्पणियां
न्यायालय ने परेरा की जमानत रद्द कर उसे उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई शेष सजा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
निचली अदालत ने परेरा को छह माह की सजा सुनाई थी लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे बढ़ा कर तीन साल कर दिया था और परेरा को पांच लाख रूपये जुर्माने की सजा भी सुनाई थी।
उच्चतम न्यायालय ने 12 जनवरी को इस फैसले को बरकरार रखा लेकिन कहा अपराध को देखते हुए सजा बहुत कम है। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा था कि परेरा की सजा इसलिए नहीं बढ़ाई जा सकती क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने इसे चुनौती नहीं दी है। टिप्पणियां
न्यायालय ने परेरा की जमानत रद्द कर उसे उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई शेष सजा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
निचली अदालत ने परेरा को छह माह की सजा सुनाई थी लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे बढ़ा कर तीन साल कर दिया था और परेरा को पांच लाख रूपये जुर्माने की सजा भी सुनाई थी।
न्यायालय ने परेरा की जमानत रद्द कर उसे उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई शेष सजा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
निचली अदालत ने परेरा को छह माह की सजा सुनाई थी लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे बढ़ा कर तीन साल कर दिया था और परेरा को पांच लाख रूपये जुर्माने की सजा भी सुनाई थी।
निचली अदालत ने परेरा को छह माह की सजा सुनाई थी लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे बढ़ा कर तीन साल कर दिया था और परेरा को पांच लाख रूपये जुर्माने की सजा भी सुनाई थी। | सारांश: वर्ष 2006 के एक ‘हिट एंड रन’ मामले में दोषी ठहराए जाने के फैसले को उच्चतम न्यायालय द्वारा बरकरार रखने और जमानत रद्द किए जाने के बाद एलिस्टर परेरा ने बॉम्बे हाई कोर्ट में सोमवार को आत्मसमर्पण कर दिया। | 31 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: विश्व कप क्रिकेट के लिए मैदान सज चुका है और सभी 14 सेनाएं तैयार हैं, लेकिन सह मेजबान भारत को छोड़कर बाकी सभी टीमों ने अपने पंद्रह सदस्यीय दल में इस खेल के मुख्य पात्र विकेटकीपर के लिए विकल्प जरूर रखा है। भारत ने विकेटकीपिंग में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर पूरा भरोसा दिखाया है, लेकिन यदि वह चोट के कारण किसी मैच में नहीं खेल पाते हैं तो फिर भारतीय टीम के पास इसका कोई विकल्प नहीं है। भारत की जो 15 सदस्यीय टीम 19 फरवरी से दो अप्रैल के बीच होने वाले विश्व कप में भाग लेगी उसमें धोनी के अलावा कोई भी ऐसा खिलाड़ी नहीं है जो जरूरत पड़ने पर विकेट के पीछे की जिम्मेदारी निभा पाए। चयनकर्ताओं के इस फैसले से पूर्व क्रिकेटर भी हैरान हैं, क्योंकि इससे पहले 2003 में राहुल द्रविड़ के साथ पार्थिव पटेल और 2007 में धोनी के साथ द्रविड़ को वैकल्पिक विकेटकीपर के तौर पर टीम में रखा गया था। इस बार भारत की तरह अन्य किसी भी टीम ने हालांकि विकेटकीपिंग जैसे महत्वपूर्ण स्थान के लिए ऐसा जोखिम नहीं उठाया है। चार बार के चैंपियन आस्ट्रेलिया ने अपनी टीम में ब्रैड हाडिन और टिम पेन के रूप में दो विशेषज्ञ विकेटकीपर रखे हैं। अन्य टीमों में भी कम से कम दो ऐसे खिलाड़ी जरूर हैं जिन्होंने अपने कैरियर में कभी ने कभी विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाली है। | संक्षिप्त पाठ: भारत ने विकेटकीपिंग में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर पूरा भरोसा दिखाया है, लेकिन यदि वह चोट के कारण नहीं खेल पाते हैं तो कोई विकल्प नहीं है। | 14 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: नई दिल्ली के पॉश मानसिंह रोड पर बने ताज मानसिंह होटल की ई-नीलामी को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने NDMC को कहा है कि अगर नीलामी में टाटा ग्रुप को सफलता नहीं मिलती तो उसे होटल खाली करने के लिए 6 महीने का वक्त दिया जाए. इससे पहले NDMC ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा था कि वो ई-ऑक्शन कराना चाहती है.
कोर्ट ने टाटा ग्रुप की इंडियन होटल कंपनी लिमिटेड IHCL को कहा था अगर उन्हें कोई आपत्ति है तो वो एक हफ्ते में जवाब दाखिल करें. इसी साल 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने NDMC को टाटा ग्रुप की लीज ना बढ़ाने के फैसले पर फिर से विचार करने को कहा था.
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में NDMC ने सही से कारवाई नहीं की और कानूनी अधिकारियों की राय को दबाया, जिसमें टाटा ग्रुप को लीज बढ़ाने को कहा गया था.
NDMC छह हफ्ते में फैसला लें और कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करे. अब होटल की नीलामी के लिए टाटा ग्रुप को पहले मौका दिया जाए. अगर वह लाइसेंस के लिए नीलामी में तय रकम नहीं दे पाए तो इसके बाद ही जो बड़ी बोली लगाए, उसे लीज दी जाये.
गौरतलब है कि मानसिंह रोड पर बने ताज होटल की नीलामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए थे जिससे नीलामी रुक गई थी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टाटा ग्रुप की इंडियन होटल कंपनी को राहत मिली थी और कोर्ट ने NDMC की मांग को दरकिनार कर दिया था जिसमें उन्होंने 31 मार्च से बाद होटल में कंपनी कोई बुकिंग ना ले. कोर्ट ने कहा था कि चलते हुए बिजनेस पर रोक नहीं लगा सकते.
दिल्ली हाईकोर्ट मे टाटा ग्रुप की इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) ने इस नीलामी के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसे 27 अक्तूबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था और न्यू दिल्ली म्यूनिसिपल कोरपोरेशन NDMC को होटल की नीलामी करने को हरी झंडी दे दी थी. कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. टाटा ग्रुप की IHCL ही ताज मानसिंह होटल चलाती है. दिल्ली हाईकोर्ट ने ये भी आदेश दिया था कि कंपनी को लाइसेंस में एक्सटेंशन पाने का कोई अधिकार नहीं है बल्कि ये अधिकार NDMC के पास है.टिप्पणियां
दरअसल एनडीएमसी के स्वामित्व वाली इस संपत्ति को 1976 में आईएचसीएल को 33 साल के पट्टे पर दिया गया था और एग्रीमेंट के तहत 11 मंजिला होटल तैयार कर चलाया जा रहा था. यह पट्टा 2011 में समाप्त हो गया. इसके बाद विभिन्न आधार पर कंपनी को इसका नौ बार अस्थायी विस्तार दिया गया.
इसमें से तीन विस्तार तो अकेले पिछले साल दिए गए. एनडीएमसी ने इस साल जनवरी में कहा था कि वह होटल की नीलामी के लिए संपत्तियों का आकलन कर रही है. इस संपत्ति की नीलामी में पहले ही काफी देरी हो चुकी है.
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में NDMC ने सही से कारवाई नहीं की और कानूनी अधिकारियों की राय को दबाया, जिसमें टाटा ग्रुप को लीज बढ़ाने को कहा गया था.
NDMC छह हफ्ते में फैसला लें और कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करे. अब होटल की नीलामी के लिए टाटा ग्रुप को पहले मौका दिया जाए. अगर वह लाइसेंस के लिए नीलामी में तय रकम नहीं दे पाए तो इसके बाद ही जो बड़ी बोली लगाए, उसे लीज दी जाये.
गौरतलब है कि मानसिंह रोड पर बने ताज होटल की नीलामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए थे जिससे नीलामी रुक गई थी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टाटा ग्रुप की इंडियन होटल कंपनी को राहत मिली थी और कोर्ट ने NDMC की मांग को दरकिनार कर दिया था जिसमें उन्होंने 31 मार्च से बाद होटल में कंपनी कोई बुकिंग ना ले. कोर्ट ने कहा था कि चलते हुए बिजनेस पर रोक नहीं लगा सकते.
दिल्ली हाईकोर्ट मे टाटा ग्रुप की इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) ने इस नीलामी के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसे 27 अक्तूबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था और न्यू दिल्ली म्यूनिसिपल कोरपोरेशन NDMC को होटल की नीलामी करने को हरी झंडी दे दी थी. कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. टाटा ग्रुप की IHCL ही ताज मानसिंह होटल चलाती है. दिल्ली हाईकोर्ट ने ये भी आदेश दिया था कि कंपनी को लाइसेंस में एक्सटेंशन पाने का कोई अधिकार नहीं है बल्कि ये अधिकार NDMC के पास है.टिप्पणियां
दरअसल एनडीएमसी के स्वामित्व वाली इस संपत्ति को 1976 में आईएचसीएल को 33 साल के पट्टे पर दिया गया था और एग्रीमेंट के तहत 11 मंजिला होटल तैयार कर चलाया जा रहा था. यह पट्टा 2011 में समाप्त हो गया. इसके बाद विभिन्न आधार पर कंपनी को इसका नौ बार अस्थायी विस्तार दिया गया.
इसमें से तीन विस्तार तो अकेले पिछले साल दिए गए. एनडीएमसी ने इस साल जनवरी में कहा था कि वह होटल की नीलामी के लिए संपत्तियों का आकलन कर रही है. इस संपत्ति की नीलामी में पहले ही काफी देरी हो चुकी है.
NDMC छह हफ्ते में फैसला लें और कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करे. अब होटल की नीलामी के लिए टाटा ग्रुप को पहले मौका दिया जाए. अगर वह लाइसेंस के लिए नीलामी में तय रकम नहीं दे पाए तो इसके बाद ही जो बड़ी बोली लगाए, उसे लीज दी जाये.
गौरतलब है कि मानसिंह रोड पर बने ताज होटल की नीलामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए थे जिससे नीलामी रुक गई थी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टाटा ग्रुप की इंडियन होटल कंपनी को राहत मिली थी और कोर्ट ने NDMC की मांग को दरकिनार कर दिया था जिसमें उन्होंने 31 मार्च से बाद होटल में कंपनी कोई बुकिंग ना ले. कोर्ट ने कहा था कि चलते हुए बिजनेस पर रोक नहीं लगा सकते.
दिल्ली हाईकोर्ट मे टाटा ग्रुप की इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) ने इस नीलामी के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसे 27 अक्तूबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था और न्यू दिल्ली म्यूनिसिपल कोरपोरेशन NDMC को होटल की नीलामी करने को हरी झंडी दे दी थी. कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. टाटा ग्रुप की IHCL ही ताज मानसिंह होटल चलाती है. दिल्ली हाईकोर्ट ने ये भी आदेश दिया था कि कंपनी को लाइसेंस में एक्सटेंशन पाने का कोई अधिकार नहीं है बल्कि ये अधिकार NDMC के पास है.टिप्पणियां
दरअसल एनडीएमसी के स्वामित्व वाली इस संपत्ति को 1976 में आईएचसीएल को 33 साल के पट्टे पर दिया गया था और एग्रीमेंट के तहत 11 मंजिला होटल तैयार कर चलाया जा रहा था. यह पट्टा 2011 में समाप्त हो गया. इसके बाद विभिन्न आधार पर कंपनी को इसका नौ बार अस्थायी विस्तार दिया गया.
इसमें से तीन विस्तार तो अकेले पिछले साल दिए गए. एनडीएमसी ने इस साल जनवरी में कहा था कि वह होटल की नीलामी के लिए संपत्तियों का आकलन कर रही है. इस संपत्ति की नीलामी में पहले ही काफी देरी हो चुकी है.
गौरतलब है कि मानसिंह रोड पर बने ताज होटल की नीलामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए थे जिससे नीलामी रुक गई थी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टाटा ग्रुप की इंडियन होटल कंपनी को राहत मिली थी और कोर्ट ने NDMC की मांग को दरकिनार कर दिया था जिसमें उन्होंने 31 मार्च से बाद होटल में कंपनी कोई बुकिंग ना ले. कोर्ट ने कहा था कि चलते हुए बिजनेस पर रोक नहीं लगा सकते.
दिल्ली हाईकोर्ट मे टाटा ग्रुप की इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) ने इस नीलामी के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसे 27 अक्तूबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था और न्यू दिल्ली म्यूनिसिपल कोरपोरेशन NDMC को होटल की नीलामी करने को हरी झंडी दे दी थी. कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. टाटा ग्रुप की IHCL ही ताज मानसिंह होटल चलाती है. दिल्ली हाईकोर्ट ने ये भी आदेश दिया था कि कंपनी को लाइसेंस में एक्सटेंशन पाने का कोई अधिकार नहीं है बल्कि ये अधिकार NDMC के पास है.टिप्पणियां
दरअसल एनडीएमसी के स्वामित्व वाली इस संपत्ति को 1976 में आईएचसीएल को 33 साल के पट्टे पर दिया गया था और एग्रीमेंट के तहत 11 मंजिला होटल तैयार कर चलाया जा रहा था. यह पट्टा 2011 में समाप्त हो गया. इसके बाद विभिन्न आधार पर कंपनी को इसका नौ बार अस्थायी विस्तार दिया गया.
इसमें से तीन विस्तार तो अकेले पिछले साल दिए गए. एनडीएमसी ने इस साल जनवरी में कहा था कि वह होटल की नीलामी के लिए संपत्तियों का आकलन कर रही है. इस संपत्ति की नीलामी में पहले ही काफी देरी हो चुकी है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टाटा ग्रुप की इंडियन होटल कंपनी को राहत मिली थी और कोर्ट ने NDMC की मांग को दरकिनार कर दिया था जिसमें उन्होंने 31 मार्च से बाद होटल में कंपनी कोई बुकिंग ना ले. कोर्ट ने कहा था कि चलते हुए बिजनेस पर रोक नहीं लगा सकते.
दिल्ली हाईकोर्ट मे टाटा ग्रुप की इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) ने इस नीलामी के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसे 27 अक्तूबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था और न्यू दिल्ली म्यूनिसिपल कोरपोरेशन NDMC को होटल की नीलामी करने को हरी झंडी दे दी थी. कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. टाटा ग्रुप की IHCL ही ताज मानसिंह होटल चलाती है. दिल्ली हाईकोर्ट ने ये भी आदेश दिया था कि कंपनी को लाइसेंस में एक्सटेंशन पाने का कोई अधिकार नहीं है बल्कि ये अधिकार NDMC के पास है.टिप्पणियां
दरअसल एनडीएमसी के स्वामित्व वाली इस संपत्ति को 1976 में आईएचसीएल को 33 साल के पट्टे पर दिया गया था और एग्रीमेंट के तहत 11 मंजिला होटल तैयार कर चलाया जा रहा था. यह पट्टा 2011 में समाप्त हो गया. इसके बाद विभिन्न आधार पर कंपनी को इसका नौ बार अस्थायी विस्तार दिया गया.
इसमें से तीन विस्तार तो अकेले पिछले साल दिए गए. एनडीएमसी ने इस साल जनवरी में कहा था कि वह होटल की नीलामी के लिए संपत्तियों का आकलन कर रही है. इस संपत्ति की नीलामी में पहले ही काफी देरी हो चुकी है.
दिल्ली हाईकोर्ट मे टाटा ग्रुप की इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) ने इस नीलामी के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसे 27 अक्तूबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था और न्यू दिल्ली म्यूनिसिपल कोरपोरेशन NDMC को होटल की नीलामी करने को हरी झंडी दे दी थी. कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. टाटा ग्रुप की IHCL ही ताज मानसिंह होटल चलाती है. दिल्ली हाईकोर्ट ने ये भी आदेश दिया था कि कंपनी को लाइसेंस में एक्सटेंशन पाने का कोई अधिकार नहीं है बल्कि ये अधिकार NDMC के पास है.टिप्पणियां
दरअसल एनडीएमसी के स्वामित्व वाली इस संपत्ति को 1976 में आईएचसीएल को 33 साल के पट्टे पर दिया गया था और एग्रीमेंट के तहत 11 मंजिला होटल तैयार कर चलाया जा रहा था. यह पट्टा 2011 में समाप्त हो गया. इसके बाद विभिन्न आधार पर कंपनी को इसका नौ बार अस्थायी विस्तार दिया गया.
इसमें से तीन विस्तार तो अकेले पिछले साल दिए गए. एनडीएमसी ने इस साल जनवरी में कहा था कि वह होटल की नीलामी के लिए संपत्तियों का आकलन कर रही है. इस संपत्ति की नीलामी में पहले ही काफी देरी हो चुकी है.
दरअसल एनडीएमसी के स्वामित्व वाली इस संपत्ति को 1976 में आईएचसीएल को 33 साल के पट्टे पर दिया गया था और एग्रीमेंट के तहत 11 मंजिला होटल तैयार कर चलाया जा रहा था. यह पट्टा 2011 में समाप्त हो गया. इसके बाद विभिन्न आधार पर कंपनी को इसका नौ बार अस्थायी विस्तार दिया गया.
इसमें से तीन विस्तार तो अकेले पिछले साल दिए गए. एनडीएमसी ने इस साल जनवरी में कहा था कि वह होटल की नीलामी के लिए संपत्तियों का आकलन कर रही है. इस संपत्ति की नीलामी में पहले ही काफी देरी हो चुकी है.
इसमें से तीन विस्तार तो अकेले पिछले साल दिए गए. एनडीएमसी ने इस साल जनवरी में कहा था कि वह होटल की नीलामी के लिए संपत्तियों का आकलन कर रही है. इस संपत्ति की नीलामी में पहले ही काफी देरी हो चुकी है. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: टाटा ग्रुप को सफलता नहीं मिलती तो उसे होटल खाली करने के लिए 6 महीने का वक
NDMC ने कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा था कि वो ई-ऑक्शन कराना चाहती है
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में NDMC ने सही से कारवाई नहीं की | 25 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: मुंबई क्रिकेट संघ के पांच साल के प्रतिबंध में किसी तरह की नरमी बरतने से इनकार के कारण कोलकाता नाइटराइडर्स के मालिक शाहरुख खान वानखेड़े स्टेडियम में नहीं आए।
इंडियन प्रीमियर लीग के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने ट्वीट करके इसपर अपनी निराशा जताई। उन्होंने लिखा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि टीम का मालिक आईपीएल का मैच नहीं देख पाया।’टिप्पणियां
पता चला है कि मैच से पहले शाहरुख ने टीम होटल जाकर खिलाड़ियों से मुलाकात की और उन्हें शुभकामनाएं दी। एमसीए ने सोमवार को ही स्थानीय पुलिस स्टेशन से कहा था कि वह शाहरुख को स्टेडियम में नहीं घुसने दें।
पिछले साल सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प के बाद एमसीए ने शाहरुख पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया था। इस वजह से वह वानखेड़े स्टेडियम सहित एमसीए के अन्य परिसरों में नहीं जा सकते हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने ट्वीट करके इसपर अपनी निराशा जताई। उन्होंने लिखा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि टीम का मालिक आईपीएल का मैच नहीं देख पाया।’टिप्पणियां
पता चला है कि मैच से पहले शाहरुख ने टीम होटल जाकर खिलाड़ियों से मुलाकात की और उन्हें शुभकामनाएं दी। एमसीए ने सोमवार को ही स्थानीय पुलिस स्टेशन से कहा था कि वह शाहरुख को स्टेडियम में नहीं घुसने दें।
पिछले साल सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प के बाद एमसीए ने शाहरुख पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया था। इस वजह से वह वानखेड़े स्टेडियम सहित एमसीए के अन्य परिसरों में नहीं जा सकते हैं।
पता चला है कि मैच से पहले शाहरुख ने टीम होटल जाकर खिलाड़ियों से मुलाकात की और उन्हें शुभकामनाएं दी। एमसीए ने सोमवार को ही स्थानीय पुलिस स्टेशन से कहा था कि वह शाहरुख को स्टेडियम में नहीं घुसने दें।
पिछले साल सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प के बाद एमसीए ने शाहरुख पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया था। इस वजह से वह वानखेड़े स्टेडियम सहित एमसीए के अन्य परिसरों में नहीं जा सकते हैं।
पिछले साल सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प के बाद एमसीए ने शाहरुख पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया था। इस वजह से वह वानखेड़े स्टेडियम सहित एमसीए के अन्य परिसरों में नहीं जा सकते हैं। | मुंबई क्रिकेट संघ के पांच साल के प्रतिबंध में किसी तरह की नरमी बरतने से इनकार के कारण कोलकाता नाइटराइडर्स के मालिक शाहरुख खान वानखेड़े स्टेडियम में नहीं आए। | 34 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: 'मैन आफ द मैच' तेंडाई चिसोरो के बल्ले और गेंद से अच्छे प्रदर्शन और सिकंदर रजा के नाबाद अर्धशतक की बदौलत जिम्बाब्वे ने बारिश से प्रभावित लीग मैच में यहां वेस्टइंडीज को डकवर्थ लुईस पद्धति के तहत पांच रन से हराकर त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल में जगह बनाई जहां उसका सामना श्रीलंका से होगा.
जिम्बाब्वे के 219 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज ने जब 27.3 ओवर में पांच विकेट पर 124 रन बनाए थे तब बारिश के कारण खेल रोकना पड़ा जो दोबारा शुरू नहीं हो पाया। इस समय डकवर्थ लुईस पद्धति के तहत बराबरी का स्कोर 129 रन था जिसके बाद जिम्बाब्वे को पांच रन से विजेता घोषित किया गया. मैच जब रोका गया तब जोनाथन कार्टर 43 जबकि कप्तान जेसन होल्डर 22 रन बनाकर खेल रहे थे. दोनों ने छठे विकेट के लिए 4.4 ओवर में 31 रन जोड़े लेकिन टीम को हार से नहीं बचा पाए.
चिसोरो ने 23 जबकि सीन विलियम्स ने 18 रन देकर दो-दो विकेट चटकाए. इससे पहले देवेंद्र बिशू (30 रन पर तीन विकेट) और एश्ले नर्स (27 रन पर तीन विकेट) की फिरकी के जादू के सामने जिम्बाब्वे ने 89 रन पर सात विकेट गंवा दिए थे लेकिन रजा (नाबाद 76) और चिसोरो (नाबाद 42) ने नौवें विकेट के लिए 91 रन की अटूट साझेदारी करते हुए बारिश के विलंब के कारण 49 ओवर के कर दिए गए मैच में टीम का स्कोर आठ विकेट पर 218 रन तक पहुंचाया. रजा ने डोनाल्ड तिरिपानो (15) के साथ भी आठवें विकेट के लिए 38 रन जोड़े. टिप्पणियां
रजा ने 103 गेंद की अपनी पारी के दौरान तीन चौके मारे जबकि चिसोरो ने 35 गेंद का सामना करते हुए दो छक्के और दो चौके जड़े. इस जीत से जिम्बाब्वे को चार अंक मिले और वह लीग तालिका में आठ अंक के साथ श्रीलंका के बाद दूसरे स्थान पर रहा. वेस्टइंडीज की टीम सात अंक के साथ अंतिम स्थान पर रही और टूर्नामेंट से बाहर हो गई. फाइनल अब रविवार को इसी मैदान पर खेला जाएगा.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
जिम्बाब्वे के 219 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज ने जब 27.3 ओवर में पांच विकेट पर 124 रन बनाए थे तब बारिश के कारण खेल रोकना पड़ा जो दोबारा शुरू नहीं हो पाया। इस समय डकवर्थ लुईस पद्धति के तहत बराबरी का स्कोर 129 रन था जिसके बाद जिम्बाब्वे को पांच रन से विजेता घोषित किया गया. मैच जब रोका गया तब जोनाथन कार्टर 43 जबकि कप्तान जेसन होल्डर 22 रन बनाकर खेल रहे थे. दोनों ने छठे विकेट के लिए 4.4 ओवर में 31 रन जोड़े लेकिन टीम को हार से नहीं बचा पाए.
चिसोरो ने 23 जबकि सीन विलियम्स ने 18 रन देकर दो-दो विकेट चटकाए. इससे पहले देवेंद्र बिशू (30 रन पर तीन विकेट) और एश्ले नर्स (27 रन पर तीन विकेट) की फिरकी के जादू के सामने जिम्बाब्वे ने 89 रन पर सात विकेट गंवा दिए थे लेकिन रजा (नाबाद 76) और चिसोरो (नाबाद 42) ने नौवें विकेट के लिए 91 रन की अटूट साझेदारी करते हुए बारिश के विलंब के कारण 49 ओवर के कर दिए गए मैच में टीम का स्कोर आठ विकेट पर 218 रन तक पहुंचाया. रजा ने डोनाल्ड तिरिपानो (15) के साथ भी आठवें विकेट के लिए 38 रन जोड़े. टिप्पणियां
रजा ने 103 गेंद की अपनी पारी के दौरान तीन चौके मारे जबकि चिसोरो ने 35 गेंद का सामना करते हुए दो छक्के और दो चौके जड़े. इस जीत से जिम्बाब्वे को चार अंक मिले और वह लीग तालिका में आठ अंक के साथ श्रीलंका के बाद दूसरे स्थान पर रहा. वेस्टइंडीज की टीम सात अंक के साथ अंतिम स्थान पर रही और टूर्नामेंट से बाहर हो गई. फाइनल अब रविवार को इसी मैदान पर खेला जाएगा.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
चिसोरो ने 23 जबकि सीन विलियम्स ने 18 रन देकर दो-दो विकेट चटकाए. इससे पहले देवेंद्र बिशू (30 रन पर तीन विकेट) और एश्ले नर्स (27 रन पर तीन विकेट) की फिरकी के जादू के सामने जिम्बाब्वे ने 89 रन पर सात विकेट गंवा दिए थे लेकिन रजा (नाबाद 76) और चिसोरो (नाबाद 42) ने नौवें विकेट के लिए 91 रन की अटूट साझेदारी करते हुए बारिश के विलंब के कारण 49 ओवर के कर दिए गए मैच में टीम का स्कोर आठ विकेट पर 218 रन तक पहुंचाया. रजा ने डोनाल्ड तिरिपानो (15) के साथ भी आठवें विकेट के लिए 38 रन जोड़े. टिप्पणियां
रजा ने 103 गेंद की अपनी पारी के दौरान तीन चौके मारे जबकि चिसोरो ने 35 गेंद का सामना करते हुए दो छक्के और दो चौके जड़े. इस जीत से जिम्बाब्वे को चार अंक मिले और वह लीग तालिका में आठ अंक के साथ श्रीलंका के बाद दूसरे स्थान पर रहा. वेस्टइंडीज की टीम सात अंक के साथ अंतिम स्थान पर रही और टूर्नामेंट से बाहर हो गई. फाइनल अब रविवार को इसी मैदान पर खेला जाएगा.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
रजा ने 103 गेंद की अपनी पारी के दौरान तीन चौके मारे जबकि चिसोरो ने 35 गेंद का सामना करते हुए दो छक्के और दो चौके जड़े. इस जीत से जिम्बाब्वे को चार अंक मिले और वह लीग तालिका में आठ अंक के साथ श्रीलंका के बाद दूसरे स्थान पर रहा. वेस्टइंडीज की टीम सात अंक के साथ अंतिम स्थान पर रही और टूर्नामेंट से बाहर हो गई. फाइनल अब रविवार को इसी मैदान पर खेला जाएगा.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: डकवर्थ लुईस नियम से हुआ मैच का फैसला, जिम्बाब्वे 5 रन से जीता
बारिश के कारण खेल जब रुका तो इंडीज का स्कोर था 124/5
पहले बैटिंग करते हुए जिम्बाब्वे ने बनाए थे 48 ओवर में 218 रन | 3 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: मुलायम सिंह ने एमएलसी उदयवीर को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है. शुक्रवार को ही खबर आई थी अखिलेश के करीबी माने जेने वाले उदयवीर सिंह ने मुलायम को चिट्ठी लिखकर अखिलेश और मुलायम के बीच मतभेदों के पीछे अखिलेश की सौतेली मां साधना गुप्ता को ज़िम्मेदार ठहराया था. यहां यह साफ कर दिया गया है कि अनुशासनहीनता को पार्टी में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
इस फैसले पर सपा नेता अंबिका चौधरी ने कहा कि 'पार्टी पच्चीस सालों में जहां तक पहुंची है, अपने अनुशासन की वजह से पहुंची है. इसलिए किसी भी तरह का अमर्यादित व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उदयवीर सिंह के आचरण के कारण पार्टी से उनको छह सालों के लिए निष्कासित कर दिया गया है.'
बता दें कि उदयवीर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को चिट्ठी लिखकर इस बात की मांग की है कि वे खुद पार्टी के संरक्षक बनें और अपनी कुर्सी (वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष) अपने बेटे सीएम अखिलेश को सौंप दें. उदयवीर ने अपनी चिट्ठी में यह भी लिखा कि परिवार के भीतर से भी अखिलेश यादव के खिलाफ साजिश हो रही है और शिवपाल यादव इसमें शामिल हैं. टिप्पणियां
यही नहीं इस खत में सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना अपने सौतेले बेटे अखिलेश यादव के प्रति द्वेष की भावना रखती हैं और शिवपाल यादव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पॉपुलेरिटी से जलते हैं. उदयवीर सिंह ने शिवपाल यादव और साधना पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा इन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नुकसान पहुंचाने के लिए काले जादू का सहारा लिया.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में यादव परिवार के झगड़े में बीच-बचाव के लिए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आगे आए हैं. शनिवार को ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलने नरेश अग्रवाल, बेनी प्रसाद वर्मा, विधानसभा स्पीकर माता प्रसाद पांडे उनके घर पहुंचे जहां पार्टी के मौजूदा हालात पर बैठक हुई जिसके बाद बेनी प्रसाद ने कहा कि चुनाव में बहुत कम वक्त बचा है ऐसे में परिवार में मौजूदा मतभेद जल्द खत्म हो जाना चाहिए. शनिवार को ही लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ़्तर में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें अखिलेश यादव और उनके समर्थक नेता, राम गोपाल यादव और मुलायम सिंह यादव भी शामिल भी नहीं हुए.
इस फैसले पर सपा नेता अंबिका चौधरी ने कहा कि 'पार्टी पच्चीस सालों में जहां तक पहुंची है, अपने अनुशासन की वजह से पहुंची है. इसलिए किसी भी तरह का अमर्यादित व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उदयवीर सिंह के आचरण के कारण पार्टी से उनको छह सालों के लिए निष्कासित कर दिया गया है.'
बता दें कि उदयवीर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को चिट्ठी लिखकर इस बात की मांग की है कि वे खुद पार्टी के संरक्षक बनें और अपनी कुर्सी (वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष) अपने बेटे सीएम अखिलेश को सौंप दें. उदयवीर ने अपनी चिट्ठी में यह भी लिखा कि परिवार के भीतर से भी अखिलेश यादव के खिलाफ साजिश हो रही है और शिवपाल यादव इसमें शामिल हैं. टिप्पणियां
यही नहीं इस खत में सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना अपने सौतेले बेटे अखिलेश यादव के प्रति द्वेष की भावना रखती हैं और शिवपाल यादव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पॉपुलेरिटी से जलते हैं. उदयवीर सिंह ने शिवपाल यादव और साधना पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा इन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नुकसान पहुंचाने के लिए काले जादू का सहारा लिया.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में यादव परिवार के झगड़े में बीच-बचाव के लिए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आगे आए हैं. शनिवार को ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलने नरेश अग्रवाल, बेनी प्रसाद वर्मा, विधानसभा स्पीकर माता प्रसाद पांडे उनके घर पहुंचे जहां पार्टी के मौजूदा हालात पर बैठक हुई जिसके बाद बेनी प्रसाद ने कहा कि चुनाव में बहुत कम वक्त बचा है ऐसे में परिवार में मौजूदा मतभेद जल्द खत्म हो जाना चाहिए. शनिवार को ही लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ़्तर में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें अखिलेश यादव और उनके समर्थक नेता, राम गोपाल यादव और मुलायम सिंह यादव भी शामिल भी नहीं हुए.
बता दें कि उदयवीर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को चिट्ठी लिखकर इस बात की मांग की है कि वे खुद पार्टी के संरक्षक बनें और अपनी कुर्सी (वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष) अपने बेटे सीएम अखिलेश को सौंप दें. उदयवीर ने अपनी चिट्ठी में यह भी लिखा कि परिवार के भीतर से भी अखिलेश यादव के खिलाफ साजिश हो रही है और शिवपाल यादव इसमें शामिल हैं. टिप्पणियां
यही नहीं इस खत में सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना अपने सौतेले बेटे अखिलेश यादव के प्रति द्वेष की भावना रखती हैं और शिवपाल यादव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पॉपुलेरिटी से जलते हैं. उदयवीर सिंह ने शिवपाल यादव और साधना पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा इन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नुकसान पहुंचाने के लिए काले जादू का सहारा लिया.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में यादव परिवार के झगड़े में बीच-बचाव के लिए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आगे आए हैं. शनिवार को ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलने नरेश अग्रवाल, बेनी प्रसाद वर्मा, विधानसभा स्पीकर माता प्रसाद पांडे उनके घर पहुंचे जहां पार्टी के मौजूदा हालात पर बैठक हुई जिसके बाद बेनी प्रसाद ने कहा कि चुनाव में बहुत कम वक्त बचा है ऐसे में परिवार में मौजूदा मतभेद जल्द खत्म हो जाना चाहिए. शनिवार को ही लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ़्तर में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें अखिलेश यादव और उनके समर्थक नेता, राम गोपाल यादव और मुलायम सिंह यादव भी शामिल भी नहीं हुए.
यही नहीं इस खत में सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना अपने सौतेले बेटे अखिलेश यादव के प्रति द्वेष की भावना रखती हैं और शिवपाल यादव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पॉपुलेरिटी से जलते हैं. उदयवीर सिंह ने शिवपाल यादव और साधना पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा इन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नुकसान पहुंचाने के लिए काले जादू का सहारा लिया.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में यादव परिवार के झगड़े में बीच-बचाव के लिए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आगे आए हैं. शनिवार को ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलने नरेश अग्रवाल, बेनी प्रसाद वर्मा, विधानसभा स्पीकर माता प्रसाद पांडे उनके घर पहुंचे जहां पार्टी के मौजूदा हालात पर बैठक हुई जिसके बाद बेनी प्रसाद ने कहा कि चुनाव में बहुत कम वक्त बचा है ऐसे में परिवार में मौजूदा मतभेद जल्द खत्म हो जाना चाहिए. शनिवार को ही लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ़्तर में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें अखिलेश यादव और उनके समर्थक नेता, राम गोपाल यादव और मुलायम सिंह यादव भी शामिल भी नहीं हुए.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में यादव परिवार के झगड़े में बीच-बचाव के लिए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आगे आए हैं. शनिवार को ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलने नरेश अग्रवाल, बेनी प्रसाद वर्मा, विधानसभा स्पीकर माता प्रसाद पांडे उनके घर पहुंचे जहां पार्टी के मौजूदा हालात पर बैठक हुई जिसके बाद बेनी प्रसाद ने कहा कि चुनाव में बहुत कम वक्त बचा है ऐसे में परिवार में मौजूदा मतभेद जल्द खत्म हो जाना चाहिए. शनिवार को ही लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ़्तर में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें अखिलेश यादव और उनके समर्थक नेता, राम गोपाल यादव और मुलायम सिंह यादव भी शामिल भी नहीं हुए. | सारांश: एमएलसी उदयवीर सिंह को मुलायम सिंह ने पार्टी से निकाला
उदयवीर सिंह ने मुलायम की दूसरी पत्नी पर साज़िश का आरोप लगाया था
उदय के मुताबिक अखिलेश पर उनकी सौतेली मां ने काला जादू किया था | 5 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: विमान निर्माता कंपनी एयरबस की ओर से ध्वनिरहित विमान विकसित करने के लिए उपयुक्त टीम चुनने की प्रतियोगिता के फाइनल में भारतीय एयरोस्पेस-इंजीनियरिंग छात्रों का एक दल भी पहुंचा है।
चेन्नई के एसआरएम विश्वविद्यालय के छात्रों का दल उन आखिरी पांच प्रतियोगी टीमों में शामिल है जो ऐसे पहले विमान को विकसित करने की क्षमता का प्रदर्शन कर रही है जिसमें बिल्कुल भी आवाज नहीं होगी।
इस भारतीय टीम में अनीता मोहिल, बालकृष्णन सोलाराजू मुरली और माइकल थॉमस हैं। इनका मार्गदर्शन शिक्षक शक्विेल काशीनाथ कर रहे हैं।टिप्पणियां
‘फ्लाई योर आइडियाज’ नामक प्रतियोगिता का आयोजन एयरबस और यूनेस्को द्वारा किया गया है। इस प्रतियोगिता की शुरुआत साल 2008 में की गई थी। इस प्रतियोगिता का मकसद दुनिया भर के छात्रों के समक्ष विमानन उद्योग के लिए नए विचार सामने लाने की चुनौती प्रस्तुत करना है।
इस प्रतियोगिता के ताजा संस्करण में दुनिया के 82 देशों की 618 टीमों ने हिस्सा लिया है जिनमें 6000 से अधिक छात्र शामिल थे। प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इटली और मलेशिया से हैं।
चेन्नई के एसआरएम विश्वविद्यालय के छात्रों का दल उन आखिरी पांच प्रतियोगी टीमों में शामिल है जो ऐसे पहले विमान को विकसित करने की क्षमता का प्रदर्शन कर रही है जिसमें बिल्कुल भी आवाज नहीं होगी।
इस भारतीय टीम में अनीता मोहिल, बालकृष्णन सोलाराजू मुरली और माइकल थॉमस हैं। इनका मार्गदर्शन शिक्षक शक्विेल काशीनाथ कर रहे हैं।टिप्पणियां
‘फ्लाई योर आइडियाज’ नामक प्रतियोगिता का आयोजन एयरबस और यूनेस्को द्वारा किया गया है। इस प्रतियोगिता की शुरुआत साल 2008 में की गई थी। इस प्रतियोगिता का मकसद दुनिया भर के छात्रों के समक्ष विमानन उद्योग के लिए नए विचार सामने लाने की चुनौती प्रस्तुत करना है।
इस प्रतियोगिता के ताजा संस्करण में दुनिया के 82 देशों की 618 टीमों ने हिस्सा लिया है जिनमें 6000 से अधिक छात्र शामिल थे। प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इटली और मलेशिया से हैं।
इस भारतीय टीम में अनीता मोहिल, बालकृष्णन सोलाराजू मुरली और माइकल थॉमस हैं। इनका मार्गदर्शन शिक्षक शक्विेल काशीनाथ कर रहे हैं।टिप्पणियां
‘फ्लाई योर आइडियाज’ नामक प्रतियोगिता का आयोजन एयरबस और यूनेस्को द्वारा किया गया है। इस प्रतियोगिता की शुरुआत साल 2008 में की गई थी। इस प्रतियोगिता का मकसद दुनिया भर के छात्रों के समक्ष विमानन उद्योग के लिए नए विचार सामने लाने की चुनौती प्रस्तुत करना है।
इस प्रतियोगिता के ताजा संस्करण में दुनिया के 82 देशों की 618 टीमों ने हिस्सा लिया है जिनमें 6000 से अधिक छात्र शामिल थे। प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इटली और मलेशिया से हैं।
‘फ्लाई योर आइडियाज’ नामक प्रतियोगिता का आयोजन एयरबस और यूनेस्को द्वारा किया गया है। इस प्रतियोगिता की शुरुआत साल 2008 में की गई थी। इस प्रतियोगिता का मकसद दुनिया भर के छात्रों के समक्ष विमानन उद्योग के लिए नए विचार सामने लाने की चुनौती प्रस्तुत करना है।
इस प्रतियोगिता के ताजा संस्करण में दुनिया के 82 देशों की 618 टीमों ने हिस्सा लिया है जिनमें 6000 से अधिक छात्र शामिल थे। प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इटली और मलेशिया से हैं।
इस प्रतियोगिता के ताजा संस्करण में दुनिया के 82 देशों की 618 टीमों ने हिस्सा लिया है जिनमें 6000 से अधिक छात्र शामिल थे। प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इटली और मलेशिया से हैं। | चेन्नई के एसआरएम विश्वविद्यालय के छात्रों का दल उन आखिरी पांच प्रतियोगी टीमों में शामिल है जो ऐसे पहले विमान को विकसित करने की क्षमता का प्रदर्शन कर रही है जिसमें बिल्कुल भी आवाज नहीं होगी। | 6 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अपनी ही बेटी के गर्भपात के आरोप में पांच साल की सजा झेल रही पूर्व कैबिनेट मंत्री के लिए सरकार ने जेल को ही बीबी जागीर कौर की जागीर बना दिया है। शुक्रवार देर रात कपूरथला की जेल में पहुंची जागीर कौर की आव भगत में जहाँ शनिवार पूरा दिन जेल मंत्री से लेकर जेल स्टाफ तक लगा रहा वहीँ रविवार को छुटी का दिन होने के बावजूद जेल में अकाली दल के कार्यकर्ता और अन्य वीआईपी बीबी जागीर कौर से मुलाकात करते रहे।टिप्पणियां
जेल नियमों के मुताबिक रविवार के दिन कैदियों के परिजनों तथा दोस्तों को किसी कैदी से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती लेकिन जब कैदी कैबिनेट मंत्री रहा हो तो फिर नियम कहाँ मायने रखते हैं। रविवार को मीडिया के कैमरे ने जेल से कई अकाली नेताओं और जागीर कौर के करीबियों को बाहर निकलते देखा और जेल के भीतर इन लोगों की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद की।
रविवार को मीडिया में बीबी जागीर कौर के जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट कि ख़बरों के बावजूद जेल प्रशासन और सरकार के कान पर जूं नहीं सरकी है और बीबी को वीआईपी ट्रीटमेंट देने का सिलसिला जारी है। अकाली दल के कार्यकर्ता और उनके परिजन बेरोकटोक कल उसे मिलते रहे। बीबी जागीर कौर अपने बेटी हरप्रीत का अपहरण कर उसका गर्भपात कराने की दोषी हैं।
जेल नियमों के मुताबिक रविवार के दिन कैदियों के परिजनों तथा दोस्तों को किसी कैदी से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती लेकिन जब कैदी कैबिनेट मंत्री रहा हो तो फिर नियम कहाँ मायने रखते हैं। रविवार को मीडिया के कैमरे ने जेल से कई अकाली नेताओं और जागीर कौर के करीबियों को बाहर निकलते देखा और जेल के भीतर इन लोगों की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद की।
रविवार को मीडिया में बीबी जागीर कौर के जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट कि ख़बरों के बावजूद जेल प्रशासन और सरकार के कान पर जूं नहीं सरकी है और बीबी को वीआईपी ट्रीटमेंट देने का सिलसिला जारी है। अकाली दल के कार्यकर्ता और उनके परिजन बेरोकटोक कल उसे मिलते रहे। बीबी जागीर कौर अपने बेटी हरप्रीत का अपहरण कर उसका गर्भपात कराने की दोषी हैं।
रविवार को मीडिया में बीबी जागीर कौर के जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट कि ख़बरों के बावजूद जेल प्रशासन और सरकार के कान पर जूं नहीं सरकी है और बीबी को वीआईपी ट्रीटमेंट देने का सिलसिला जारी है। अकाली दल के कार्यकर्ता और उनके परिजन बेरोकटोक कल उसे मिलते रहे। बीबी जागीर कौर अपने बेटी हरप्रीत का अपहरण कर उसका गर्भपात कराने की दोषी हैं। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: जेल नियमों के मुताबिक रविवार के दिन कैदियों के परिजनों तथा दोस्तों को किसी कैदी से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती लेकिन जब कैदी कैबिनेट मंत्री रहा हो तो फिर नियम कहाँ मायने रखते हैं। | 19 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: झारखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद झामुमो के नेतृत्व में भाजपा विरोधी सभी प्रमुख विपक्षी पार्टियां महागठबंधन के प्रयास में जुट गई हैं. बता दें, विपक्षी दलों के इस महागठबंधन में बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) को शामिल करने की भी कोशिशें हो रही हैं. वहीं झाविमो के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने महागठबंधन में सम्मानजनक सीटें नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए सभी सीटों पर लड़ने की घोषणा कर दी है, जिसके बाद उन्हें मनाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं.
दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता और महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि झामुमो का पूरा प्रयास है कि अन्य विपक्षी दलों कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल एवं वामपंथी दलों के साथ बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा भी भाजपा के खिलाफ महागठबंधन में शामिल हो. हालांकि झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के अनेक बार प्रयास के बावजूद मरांडी से संपर्क नहीं हो सका है. उन्होंने कहा कि अब महागठबंधन सहयोगी कांग्रेस को बाबूलाल मरांडी से संपर्क करने को कहा गया है. इसके साथ ही सुप्रियो ने कहा कि बाबूलाल मरांडी बहुत परिपक्व एवं वरिष्ठ नेता हैं और गठबंधन बनाने के लिए उन्हें कुछ त्याग करने के लिए तैयार होना चाहिए. सुप्रियो ने कहा कि उनकी पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक छह नवंबर को है जिसमें पार्टी के उम्मीदवारों की पहली सूची तय की जाएगी और वह आठ नवंबर को जारी कर दी जाएगी.
इस बीच कांग्रेस के झारखंड प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने दोहराया कि राज्य में महागठबंधन के लिए बातचीत अंतिम दौर में है और सात-आठ नवंबर तक इसका स्वरूप तय कर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि इस महागठबंधन में झामुमो, राजद एवं वामपंथी दलों के अलावा बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा भी शामिल हो. समझा जाता है कि महागठबंधन में शामिल दलों में लड़ने वाली सीटों की हिस्सेदारी तय हो गई है. यहां महागठबंधन में झाविमो के शामिल होने की स्थिति में जहां झामुमो 35 से 40 सीटों पर चुनाव लड़ेगा वहीं कांग्रेस 25 से 30 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. शेष 20 से 25 सीटों में पांच से सात सीटों पर लालू प्रसाद यादव की राजद और अन्य पर झाविमो एवं वामपंथी दल चुनाव लड़ेंगे.
बता दें, महागठबंधन को अंतिम रूप देने के लिए ही झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन दो दिनों पूर्व न्यायिक हिरासत में बंद राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मिले थे. झारखंड में 81 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव पांच चरण में होंगे. मतदान का पहला दौर 30 नवंबर को और अंतिम तथा पांचवां चरण 20 दिसंबर को होगा. मतगणना 23 दिसंबर को होगी. | सभी प्रमुख विपक्षी पार्टियां महागठबंधन के प्रयास में जुट गई हैं
महागठबंधन में सम्मानजनक सीटें नहीं दिए जाने नाराज हुए बाबूलाल
हिरासत में बंद राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मिले थे हेमंत सोरेना | 1 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: भोजपुरी सिनेमा (Bhojpuri Cinema) की पॉपुलर एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) का कहना है कि खुद पर अत्याचार को कोई नहीं सहता है. इसके खिलाफ आवाज भी उठाता है, लेकिन उसमें सच्चाई का होना जरूरी है. एक इंटरव्यू में आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) ने कहा, "आजकल मीटू (MeToo) अभियान चल रहा है. कुछ जगहों से आवाजें भी उठी हैं. शायद उनके साथ वैसा बर्ताव हुआ होगा, लेकिन भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री (Bhojpuri Film industry) इससे बिलकुल अछूती है. अब तक ऐसा कोई प्रकरण सामने नहीं आया है." आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) ने कहा, "जहां तक मेरी जानकारी है, भोजपुरी इंडस्ट्री में कहीं भी ऐसी आवाज नहीं उठी है. भोजपुरी इंडस्ट्री अभी साफ-सुथरी है. इतने दिनों तक मेरे साथ भी कोई ऐसी घटना नहीं हुई है. मेरे जैसी कई अन्य अभिनेत्रियां भी अब तक इससे अनटच हैं."
आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) ने कहा कि स्त्री हो या पुरुष, दोनों को संघर्ष करना पड़ता है. इससे कोई अछूता नहीं है. जो अपने काम में निपुण हैं, आज उन्हीं को काम मिल रहा है. जो काम नहीं जानते, वे काम न मिलने का शोर मचाते घूम रहे हैं. भोजपुरी इंडस्ट्री (Bhojpuri Film industry) अपने काम में महारत वाले सख्श को बिना भेदभाव के काम देती है. आम्रपाली ने कहा, "हां, यह जरूर है कि कुछ एल्बम गानों की वजह से भोजपुरी फिल्में (Bhojpuri Cinema) बदनाम हुई हैं. बावजूद इसके ज्यादातर परिवार के साथ बैठकर फिल्म देख सकते हैं. ज्यादातर फैमिली ड्रामा हैं. कई फिल्मों को सेंसर बोर्ड ने यू/ए सर्टिफिकेट भी दिया है." उन्होंने भोजपुरी फिल्मों (Bhojpuri Cinema) को हेयदृष्टि से देखे जाने की बात पर कहा, "मेरी पूरी कोशिश रहती है कि दर्शकों के बीच ऐसी फिल्में दूं, जिसे देखकर मुझे प्यार मिले, नफरत नहीं. ऐसी फिल्म हो, जिसे पूरा परिवार एक साथ बैठकर देख सके."
आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) ने कहा, "भोजपुरी भाषा बहुत मीठी है. हमारी संस्कृति में रची-बसी है. उप्र, बिहार और झारखंड में बहुत मजबूत है. यहां भोजपुरी फिल्में खूब देखी जाती हैं. बीते पांच सालों में एक-आध फिल्म को छोड़कर मेरी हर फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट मिला है. हमारी फिल्मों में अश्लीलता नहीं है. लोगों को बिना देखे सवाल नहीं करना चाहिए." भोजपुरी सिनेमा भी बॉलीवुड की तरह सशक्त बनेगा? इस सवाल पर आम्रपाली ने कहा कि आज भोजपुरी फिल्में लोग देश-विदेश में देख रहे हैं. बॉलीवुड फिल्म कम से कम 10 करोड़ रुपये के बजट वाली होती है, मगर भोजपुरी फिल्म महज कुछ लाख के बजट में बन जाती है. कम बजट के बावजूद फिल्में हिट होती हैं. इंटरनेट की दुनिया में भी भोजपुरी फिल्में तहलका मचा रही है. एक वीडियो को कई करोड़ लोग देख रहे हैं. इससे हमारी मजबूती सिद्ध होती है. कहानी और कान्सेप्ट अच्छी होती है तो लोग फिल्म जरूर देखते हैं.
आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) ने कहा कि भोजपुरी फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए मल्टीप्लेक्स में भी जगह दी जानी चाहिए. व्यापार और प्रसार दोनों बढ़ेगा. सरकार को ध्यान देने की जरूरत है. भाषा और बजट दोनों मजबूत होंगे. राजनीति में रुचि के सवाल पर आम्रपाली ने कहा, "मुझे राजनीति बिल्कुल समझ में नहीं आती है. पिछले पांच सालों में देश का विकास बहुत तेजी से हुआ है. मोदी को पांच साल और देने की जरूरत है." एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसी पार्टी ने स्टार प्रचारक के रूप में अब तक नहीं बुलाया है, अगर संपर्क करेंगे तो वह प्रचार में जा सकती हैं. चुनाव आचार संहिता को दरकिनार करते हुए और बिल्कुल भाजपा की लाइन बोलते हुए आम्रपाली ने कहा, "हमारी सेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक सरकार के मजबूत कदम को दर्शाती है. सबूत मांगने की बजाय, राजनीतिक दलों को सेना के पराक्रम पर विश्वास करना चाहिए. बार-बार सबूत मांगेंगे तो सेना का मनोबल कमजोर होगा. प्रधानमंत्री की बातों का भी भरोसा किया जाना चाहिए."
आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) मूलरूप उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के चनहर गांव में पैदा हुई हैं. उन्होंने भवन कॉलेज, मुंबई से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. अपनी पढ़ाई के दौरान प्रारंभ में वह एक डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपने करियर को अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ाया. उन्होंने 'रहना है तेरी पलकों की छांव में' में सुमन के रूप में मुख्य भूमिका निभाई. उन्हें 2014 में भोजपुरी सिनेमा में दिनेश लाल यादव की फिल्म 'निरहुआ रिक्शावाला' से प्रसिद्धि मिली. वर्ष 2015 में उन्हें भोजपुरी इंटरनेशनल फिल्म अवार्डस (बीआईएफए) में फिल्म 'निरहुआ हिंदुस्तानी' के लिए सर्वश्रेष्ठ डेब्यू अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वर्ष 2017 में भोजपुरी सिनेमा इंडस्ट्री के इतिहास में पहली बार 'राते दीया बुताके' गाने को साढ़े 10 करोड़ से ज्यादा यूट्यूब पर देखने वाले मिले हैं. अभी तक उन्होंने कुल 25 फिल्में की हैं जो ज्यादातर हिट रही हैं. | यह एक सारांश है: आम्रपाली ने मीटू कैंपेन पर दिया बयान
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में मीटू कैंपेन पर दिया बयान
उन्होंने एक इंटरव्यू में यह बातें कही | 24 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: युवराज सिंह - यह ऐसा नाम है, जिसने क्रिकेट के मैदान पर भारत के लिए कई बार हार के मुंह से जीत को छीना, छह गेंदों पर छह छक्के ठोकने का कारनामा भी किया, और भारत की 2011 क्रिकेट विश्वकप की जीत युवराज के बिना संभवतः संभव ही नहीं थी... लेकिन अब उसी युवराज को ज़िन्दगी के मैच में जीत हासिल करनी है। प्यार से युवी कहकर पुकारे जाने वाले युवराज सिंह को कैंसर है। इस खबर के आने के बाद से ही दुनिया-भर में फैले उनके फैन्स बेहद दुखी हैं और दुआएं कर रहे हैं। युवराज इस वक्त अमेरिका में फेफड़ों कैंसर का इलाज करा रहे हैं। हालांकि कैंसर के बारे में पहले स्टेज में ही पता चल गया है, और माना जा रहा है कि डरने की ज्यादा ज़रूरत नहीं है।
युवी की बीमारी के बारे में जानकर देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियां दुआएं कर रही हैं। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट टि्वटर पर भी उन्हें शुभकामना संदेश भेजने का सिलसिला लगातार जारी है।
बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया है, युवराज की बीमारी के बारे में जानकर मैं सकते में हूं और हम दुआ कर रहे हैं कि वह जल्दी फिट हो जाएं।
युवराज के दोस्त और क्रिकेट के मैदान पर साथी हरभजन सिंह ने भी ट्वीट किया है, युवराज जिस भी चीज़ का सामना कर रहे हैं, हमें उन्हें अकेला छोड़ देना चाहिए, ताकि वह जल्दी ठीक हो सकें। वह एक फाइटर है और ज़रूर वापसी करेगा।
उद्योगपति विजय माल्या ने ट्वीट किया है, मैं अपने दोस्त युवी के बारे में सुनकर बेहद दुखी हूं। मैं भगवान बालाजी से प्रार्थना करता हूं कि वह जल्दी से ठीक हो जाएं।टिप्पणियां
क्रिकेट जगत और बॉलीवुड़ हस्तियों के अलावा युवराज के जल्दी फिट हो जाने की दुआ राजनेता भी कर रहे हैं। केन्द्रीय खेलमंत्री अजय माकन ने सोमवार को ट्वीट किया, मैंने अधिकारियों को युवराज की बीमारी के बारे में और जानकारी लेने को कहा है। सरकार को युवराज की मदद करनी चाहिए और सरकार ऐसा करेगी भी।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया है, युवराज की सेहत के बारे में सुनकर दुख हुआ। वह एक फाइटर है और मुझे यकीन है कि वह इससे उभरकर दोबारा मैदान पर भारत के लिए खेलेगा।
युवी की बीमारी के बारे में जानकर देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियां दुआएं कर रही हैं। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट टि्वटर पर भी उन्हें शुभकामना संदेश भेजने का सिलसिला लगातार जारी है।
बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया है, युवराज की बीमारी के बारे में जानकर मैं सकते में हूं और हम दुआ कर रहे हैं कि वह जल्दी फिट हो जाएं।
युवराज के दोस्त और क्रिकेट के मैदान पर साथी हरभजन सिंह ने भी ट्वीट किया है, युवराज जिस भी चीज़ का सामना कर रहे हैं, हमें उन्हें अकेला छोड़ देना चाहिए, ताकि वह जल्दी ठीक हो सकें। वह एक फाइटर है और ज़रूर वापसी करेगा।
उद्योगपति विजय माल्या ने ट्वीट किया है, मैं अपने दोस्त युवी के बारे में सुनकर बेहद दुखी हूं। मैं भगवान बालाजी से प्रार्थना करता हूं कि वह जल्दी से ठीक हो जाएं।टिप्पणियां
क्रिकेट जगत और बॉलीवुड़ हस्तियों के अलावा युवराज के जल्दी फिट हो जाने की दुआ राजनेता भी कर रहे हैं। केन्द्रीय खेलमंत्री अजय माकन ने सोमवार को ट्वीट किया, मैंने अधिकारियों को युवराज की बीमारी के बारे में और जानकारी लेने को कहा है। सरकार को युवराज की मदद करनी चाहिए और सरकार ऐसा करेगी भी।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया है, युवराज की सेहत के बारे में सुनकर दुख हुआ। वह एक फाइटर है और मुझे यकीन है कि वह इससे उभरकर दोबारा मैदान पर भारत के लिए खेलेगा।
बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया है, युवराज की बीमारी के बारे में जानकर मैं सकते में हूं और हम दुआ कर रहे हैं कि वह जल्दी फिट हो जाएं।
युवराज के दोस्त और क्रिकेट के मैदान पर साथी हरभजन सिंह ने भी ट्वीट किया है, युवराज जिस भी चीज़ का सामना कर रहे हैं, हमें उन्हें अकेला छोड़ देना चाहिए, ताकि वह जल्दी ठीक हो सकें। वह एक फाइटर है और ज़रूर वापसी करेगा।
उद्योगपति विजय माल्या ने ट्वीट किया है, मैं अपने दोस्त युवी के बारे में सुनकर बेहद दुखी हूं। मैं भगवान बालाजी से प्रार्थना करता हूं कि वह जल्दी से ठीक हो जाएं।टिप्पणियां
क्रिकेट जगत और बॉलीवुड़ हस्तियों के अलावा युवराज के जल्दी फिट हो जाने की दुआ राजनेता भी कर रहे हैं। केन्द्रीय खेलमंत्री अजय माकन ने सोमवार को ट्वीट किया, मैंने अधिकारियों को युवराज की बीमारी के बारे में और जानकारी लेने को कहा है। सरकार को युवराज की मदद करनी चाहिए और सरकार ऐसा करेगी भी।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया है, युवराज की सेहत के बारे में सुनकर दुख हुआ। वह एक फाइटर है और मुझे यकीन है कि वह इससे उभरकर दोबारा मैदान पर भारत के लिए खेलेगा।
युवराज के दोस्त और क्रिकेट के मैदान पर साथी हरभजन सिंह ने भी ट्वीट किया है, युवराज जिस भी चीज़ का सामना कर रहे हैं, हमें उन्हें अकेला छोड़ देना चाहिए, ताकि वह जल्दी ठीक हो सकें। वह एक फाइटर है और ज़रूर वापसी करेगा।
उद्योगपति विजय माल्या ने ट्वीट किया है, मैं अपने दोस्त युवी के बारे में सुनकर बेहद दुखी हूं। मैं भगवान बालाजी से प्रार्थना करता हूं कि वह जल्दी से ठीक हो जाएं।टिप्पणियां
क्रिकेट जगत और बॉलीवुड़ हस्तियों के अलावा युवराज के जल्दी फिट हो जाने की दुआ राजनेता भी कर रहे हैं। केन्द्रीय खेलमंत्री अजय माकन ने सोमवार को ट्वीट किया, मैंने अधिकारियों को युवराज की बीमारी के बारे में और जानकारी लेने को कहा है। सरकार को युवराज की मदद करनी चाहिए और सरकार ऐसा करेगी भी।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया है, युवराज की सेहत के बारे में सुनकर दुख हुआ। वह एक फाइटर है और मुझे यकीन है कि वह इससे उभरकर दोबारा मैदान पर भारत के लिए खेलेगा।
उद्योगपति विजय माल्या ने ट्वीट किया है, मैं अपने दोस्त युवी के बारे में सुनकर बेहद दुखी हूं। मैं भगवान बालाजी से प्रार्थना करता हूं कि वह जल्दी से ठीक हो जाएं।टिप्पणियां
क्रिकेट जगत और बॉलीवुड़ हस्तियों के अलावा युवराज के जल्दी फिट हो जाने की दुआ राजनेता भी कर रहे हैं। केन्द्रीय खेलमंत्री अजय माकन ने सोमवार को ट्वीट किया, मैंने अधिकारियों को युवराज की बीमारी के बारे में और जानकारी लेने को कहा है। सरकार को युवराज की मदद करनी चाहिए और सरकार ऐसा करेगी भी।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया है, युवराज की सेहत के बारे में सुनकर दुख हुआ। वह एक फाइटर है और मुझे यकीन है कि वह इससे उभरकर दोबारा मैदान पर भारत के लिए खेलेगा।
क्रिकेट जगत और बॉलीवुड़ हस्तियों के अलावा युवराज के जल्दी फिट हो जाने की दुआ राजनेता भी कर रहे हैं। केन्द्रीय खेलमंत्री अजय माकन ने सोमवार को ट्वीट किया, मैंने अधिकारियों को युवराज की बीमारी के बारे में और जानकारी लेने को कहा है। सरकार को युवराज की मदद करनी चाहिए और सरकार ऐसा करेगी भी।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया है, युवराज की सेहत के बारे में सुनकर दुख हुआ। वह एक फाइटर है और मुझे यकीन है कि वह इससे उभरकर दोबारा मैदान पर भारत के लिए खेलेगा।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया है, युवराज की सेहत के बारे में सुनकर दुख हुआ। वह एक फाइटर है और मुझे यकीन है कि वह इससे उभरकर दोबारा मैदान पर भारत के लिए खेलेगा। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: युवी की बीमारी के बारे में जानकर देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियां दुआएं कर रही हैं, और टि्वटर पर उन्हें शुभकामना संदेश भेजने का सिलसिला लगातार जारी है। | 25 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: मध्य प्रदेश के मंदसौर में छह किसानों की मौत के बाद सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज मंदसौर में पीड़ित किसानों से मिले. सीएम ने कहा कि वह संवेदना प्रकट करने आए थे. इसके साथ ही मंदसौर से धारा 144 हटा ली गई है. इससे पहले मुख्यमंत्री ने मृतक किसानों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवज़े का ऐलान किया था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है. इधर, इस मामले में राजनीति तेज़ होती जा रही है. कांग्रेस किसानों की महापंचायत करने वाली है. इधर, भोपाल में कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया किसानों पर पुलिस बर्बरता के खिलाफ बुधवार से 72 घंटे के सत्याग्रह पर बैठेंगे.
इस बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया के मंदसौर जाते वक्त का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ता सरकार पर तंज कसते हुए नारेबाज़ी कर रहे हैं. गोली मारो, 1 करोड़ दो. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार मुआवज़ा नहीं दे रही है, बल्कि किसानों की जान की कीमत लगा रही है.
मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों में तीन और परेशान किसानों द्वारा आत्महत्या करने के बाद गत एक सप्ताह में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है. मंदसौर जिले में 6 मई को किसान आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में पांच किसानों के मारे जाने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हित में कई घोषणाएं करने के बावजूद भी इन पांच किसानों ने खुदकुशी की.
पिछले 24 घंटों में कर्ज में फंसे दो किसानों ने आत्महत्या की है. इनमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के रेहटी पुलिस थाना क्षेत्र के जानना गांव का किसान दुलचंद कीर :55: और होशंगाबाद जिले के भैरोपुर गांव का रहने वाला किसान कृपाराम :68: शामिल है. इनके अलावा जमीन के सीमांकन विवाद में जहर खाकर खुदकुशी करने वाला विदिशा जिले का किसान हरीसिंह जाटव :40: भी शामिल है, जिसकी कल शाम भोपाल में इलाज के दौरान मौत हो गई. सीहोर जिले का दुलचंद छह लाख रुपये के कर्ज से परेशान था और उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी.
रेहटी पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक पंकज गीते ने कहा, दुलचंद पर छह लाख रपये का कर्ज था, लेकिन उसने आत्महत्या क्यों की इसकी जांच की जा रही है. दुलचंद के पुत्र शेर सिंह ने कहा कि घटना के वक्त उसके पिता घर पर अकेले थे. उसने जब पिता को अचेत देखा तो वह उन्हें तुरंत रेहटी के अस्पताल में ले गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
शेरसिंह ने भी यह कहा कि उसके पिता पर चार लाख रुपये बैंक का तथा दो लाख रुपये अन्य स्त्रोत का कर्ज था. इससे परेशान होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया. जिला कलेक्टर सुदाम खाड़े ने कहा कि खुदकुशी का कारण फिलहाल स्प्ष्ट नहीं है. मामले में जांच की जा रही है. होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील के शिवपुर पुलिस थाना क्षेत्र के भैरोपुर गांव के किसान कृपाराम ने आज सुबह पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. कृपाराम के परिजन ने बताया कि वह अपने कर्ज की अदायगी को लेकर व्यथित थे और उन्होंने इसको लेकर अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा भी बेच दिया था.
शिवपुर थाना प्रभारी मोनिष बैस ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी मिली है कि मृतक किसान अवसाद ग्रस्त था, लेकिन फिलहाल आत्महत्या का कारण सामने नहीं आ सका है. मामले की जांच के बाद ही सही कारण मालूम हो सकेगा. विदिशा जिले के शमशाबाद पुलिस थाना क्षेत्र के गांव जीरापुर के एक अन्य परेशानहाल किसान हरीसिंह जाटव ने कीटनाशक गोलियां खा ली थीं. गंभीर हालत में जाटव को पहले विदिशा के अस्पताल में ले जाया गया बाद में उसे भोपाल में भर्ती किया गया, जहां कल रात उसकी मौत हो गई.टिप्पणियां
शमशाबाद के तहसीलदार इसरार खान ने बताया कि भूमि सीमांकन को लेकर जाटव का अपने परिवार के सदस्यों से विवाद चल रहा था. इससे पहले 8 जून को रायसेन जिले के सागोनिया गांव के किसान किशनलाल मीणा :45: ने कर्ज से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के अनुसार, किशनलाल ने मृत्यु पूर्व अपने परिजनों को बताया कि उस पर एक निजी बैंक का 10 लाख रुपये सहित कुल 17 लाख रुपए का कर्ज था तथा वह अपनी तीन बेटियों के विवाह को लेकर भी चिंतित था.
आठ जून को ही सीहोर जिले के जोगड़खेड़ी गांव के बीएएमएस (आयुर्वेद डॉक्टर) डिग्री धारी किसान बिशन सिंह राजपूत (42) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. राजपूत के छोटे भाई प्रवीण राजपूत ने कहा कि भोपाल से बीएएमएस की डिग्री लेने के बाद उसका बड़ा भाई यहां खेती करने लगा लेकिन पिछले 34 साल में उसे इसमें भारी घाटा हुआ. प्रवीण ने बताया कि करीब 10 लाख रुपये के घाटे के कारण बड़े भाई ने यह आत्मघाती कदम उठाया.(इनपुट्स भाषा से भी)
इस बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया के मंदसौर जाते वक्त का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ता सरकार पर तंज कसते हुए नारेबाज़ी कर रहे हैं. गोली मारो, 1 करोड़ दो. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार मुआवज़ा नहीं दे रही है, बल्कि किसानों की जान की कीमत लगा रही है.
मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों में तीन और परेशान किसानों द्वारा आत्महत्या करने के बाद गत एक सप्ताह में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है. मंदसौर जिले में 6 मई को किसान आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में पांच किसानों के मारे जाने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हित में कई घोषणाएं करने के बावजूद भी इन पांच किसानों ने खुदकुशी की.
पिछले 24 घंटों में कर्ज में फंसे दो किसानों ने आत्महत्या की है. इनमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के रेहटी पुलिस थाना क्षेत्र के जानना गांव का किसान दुलचंद कीर :55: और होशंगाबाद जिले के भैरोपुर गांव का रहने वाला किसान कृपाराम :68: शामिल है. इनके अलावा जमीन के सीमांकन विवाद में जहर खाकर खुदकुशी करने वाला विदिशा जिले का किसान हरीसिंह जाटव :40: भी शामिल है, जिसकी कल शाम भोपाल में इलाज के दौरान मौत हो गई. सीहोर जिले का दुलचंद छह लाख रुपये के कर्ज से परेशान था और उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी.
रेहटी पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक पंकज गीते ने कहा, दुलचंद पर छह लाख रपये का कर्ज था, लेकिन उसने आत्महत्या क्यों की इसकी जांच की जा रही है. दुलचंद के पुत्र शेर सिंह ने कहा कि घटना के वक्त उसके पिता घर पर अकेले थे. उसने जब पिता को अचेत देखा तो वह उन्हें तुरंत रेहटी के अस्पताल में ले गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
शेरसिंह ने भी यह कहा कि उसके पिता पर चार लाख रुपये बैंक का तथा दो लाख रुपये अन्य स्त्रोत का कर्ज था. इससे परेशान होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया. जिला कलेक्टर सुदाम खाड़े ने कहा कि खुदकुशी का कारण फिलहाल स्प्ष्ट नहीं है. मामले में जांच की जा रही है. होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील के शिवपुर पुलिस थाना क्षेत्र के भैरोपुर गांव के किसान कृपाराम ने आज सुबह पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. कृपाराम के परिजन ने बताया कि वह अपने कर्ज की अदायगी को लेकर व्यथित थे और उन्होंने इसको लेकर अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा भी बेच दिया था.
शिवपुर थाना प्रभारी मोनिष बैस ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी मिली है कि मृतक किसान अवसाद ग्रस्त था, लेकिन फिलहाल आत्महत्या का कारण सामने नहीं आ सका है. मामले की जांच के बाद ही सही कारण मालूम हो सकेगा. विदिशा जिले के शमशाबाद पुलिस थाना क्षेत्र के गांव जीरापुर के एक अन्य परेशानहाल किसान हरीसिंह जाटव ने कीटनाशक गोलियां खा ली थीं. गंभीर हालत में जाटव को पहले विदिशा के अस्पताल में ले जाया गया बाद में उसे भोपाल में भर्ती किया गया, जहां कल रात उसकी मौत हो गई.टिप्पणियां
शमशाबाद के तहसीलदार इसरार खान ने बताया कि भूमि सीमांकन को लेकर जाटव का अपने परिवार के सदस्यों से विवाद चल रहा था. इससे पहले 8 जून को रायसेन जिले के सागोनिया गांव के किसान किशनलाल मीणा :45: ने कर्ज से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के अनुसार, किशनलाल ने मृत्यु पूर्व अपने परिजनों को बताया कि उस पर एक निजी बैंक का 10 लाख रुपये सहित कुल 17 लाख रुपए का कर्ज था तथा वह अपनी तीन बेटियों के विवाह को लेकर भी चिंतित था.
आठ जून को ही सीहोर जिले के जोगड़खेड़ी गांव के बीएएमएस (आयुर्वेद डॉक्टर) डिग्री धारी किसान बिशन सिंह राजपूत (42) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. राजपूत के छोटे भाई प्रवीण राजपूत ने कहा कि भोपाल से बीएएमएस की डिग्री लेने के बाद उसका बड़ा भाई यहां खेती करने लगा लेकिन पिछले 34 साल में उसे इसमें भारी घाटा हुआ. प्रवीण ने बताया कि करीब 10 लाख रुपये के घाटे के कारण बड़े भाई ने यह आत्मघाती कदम उठाया.(इनपुट्स भाषा से भी)
मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों में तीन और परेशान किसानों द्वारा आत्महत्या करने के बाद गत एक सप्ताह में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है. मंदसौर जिले में 6 मई को किसान आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में पांच किसानों के मारे जाने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हित में कई घोषणाएं करने के बावजूद भी इन पांच किसानों ने खुदकुशी की.
पिछले 24 घंटों में कर्ज में फंसे दो किसानों ने आत्महत्या की है. इनमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के रेहटी पुलिस थाना क्षेत्र के जानना गांव का किसान दुलचंद कीर :55: और होशंगाबाद जिले के भैरोपुर गांव का रहने वाला किसान कृपाराम :68: शामिल है. इनके अलावा जमीन के सीमांकन विवाद में जहर खाकर खुदकुशी करने वाला विदिशा जिले का किसान हरीसिंह जाटव :40: भी शामिल है, जिसकी कल शाम भोपाल में इलाज के दौरान मौत हो गई. सीहोर जिले का दुलचंद छह लाख रुपये के कर्ज से परेशान था और उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी.
रेहटी पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक पंकज गीते ने कहा, दुलचंद पर छह लाख रपये का कर्ज था, लेकिन उसने आत्महत्या क्यों की इसकी जांच की जा रही है. दुलचंद के पुत्र शेर सिंह ने कहा कि घटना के वक्त उसके पिता घर पर अकेले थे. उसने जब पिता को अचेत देखा तो वह उन्हें तुरंत रेहटी के अस्पताल में ले गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
शेरसिंह ने भी यह कहा कि उसके पिता पर चार लाख रुपये बैंक का तथा दो लाख रुपये अन्य स्त्रोत का कर्ज था. इससे परेशान होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया. जिला कलेक्टर सुदाम खाड़े ने कहा कि खुदकुशी का कारण फिलहाल स्प्ष्ट नहीं है. मामले में जांच की जा रही है. होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील के शिवपुर पुलिस थाना क्षेत्र के भैरोपुर गांव के किसान कृपाराम ने आज सुबह पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. कृपाराम के परिजन ने बताया कि वह अपने कर्ज की अदायगी को लेकर व्यथित थे और उन्होंने इसको लेकर अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा भी बेच दिया था.
शिवपुर थाना प्रभारी मोनिष बैस ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी मिली है कि मृतक किसान अवसाद ग्रस्त था, लेकिन फिलहाल आत्महत्या का कारण सामने नहीं आ सका है. मामले की जांच के बाद ही सही कारण मालूम हो सकेगा. विदिशा जिले के शमशाबाद पुलिस थाना क्षेत्र के गांव जीरापुर के एक अन्य परेशानहाल किसान हरीसिंह जाटव ने कीटनाशक गोलियां खा ली थीं. गंभीर हालत में जाटव को पहले विदिशा के अस्पताल में ले जाया गया बाद में उसे भोपाल में भर्ती किया गया, जहां कल रात उसकी मौत हो गई.टिप्पणियां
शमशाबाद के तहसीलदार इसरार खान ने बताया कि भूमि सीमांकन को लेकर जाटव का अपने परिवार के सदस्यों से विवाद चल रहा था. इससे पहले 8 जून को रायसेन जिले के सागोनिया गांव के किसान किशनलाल मीणा :45: ने कर्ज से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के अनुसार, किशनलाल ने मृत्यु पूर्व अपने परिजनों को बताया कि उस पर एक निजी बैंक का 10 लाख रुपये सहित कुल 17 लाख रुपए का कर्ज था तथा वह अपनी तीन बेटियों के विवाह को लेकर भी चिंतित था.
आठ जून को ही सीहोर जिले के जोगड़खेड़ी गांव के बीएएमएस (आयुर्वेद डॉक्टर) डिग्री धारी किसान बिशन सिंह राजपूत (42) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. राजपूत के छोटे भाई प्रवीण राजपूत ने कहा कि भोपाल से बीएएमएस की डिग्री लेने के बाद उसका बड़ा भाई यहां खेती करने लगा लेकिन पिछले 34 साल में उसे इसमें भारी घाटा हुआ. प्रवीण ने बताया कि करीब 10 लाख रुपये के घाटे के कारण बड़े भाई ने यह आत्मघाती कदम उठाया.(इनपुट्स भाषा से भी)
पिछले 24 घंटों में कर्ज में फंसे दो किसानों ने आत्महत्या की है. इनमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के रेहटी पुलिस थाना क्षेत्र के जानना गांव का किसान दुलचंद कीर :55: और होशंगाबाद जिले के भैरोपुर गांव का रहने वाला किसान कृपाराम :68: शामिल है. इनके अलावा जमीन के सीमांकन विवाद में जहर खाकर खुदकुशी करने वाला विदिशा जिले का किसान हरीसिंह जाटव :40: भी शामिल है, जिसकी कल शाम भोपाल में इलाज के दौरान मौत हो गई. सीहोर जिले का दुलचंद छह लाख रुपये के कर्ज से परेशान था और उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी.
रेहटी पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक पंकज गीते ने कहा, दुलचंद पर छह लाख रपये का कर्ज था, लेकिन उसने आत्महत्या क्यों की इसकी जांच की जा रही है. दुलचंद के पुत्र शेर सिंह ने कहा कि घटना के वक्त उसके पिता घर पर अकेले थे. उसने जब पिता को अचेत देखा तो वह उन्हें तुरंत रेहटी के अस्पताल में ले गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
शेरसिंह ने भी यह कहा कि उसके पिता पर चार लाख रुपये बैंक का तथा दो लाख रुपये अन्य स्त्रोत का कर्ज था. इससे परेशान होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया. जिला कलेक्टर सुदाम खाड़े ने कहा कि खुदकुशी का कारण फिलहाल स्प्ष्ट नहीं है. मामले में जांच की जा रही है. होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील के शिवपुर पुलिस थाना क्षेत्र के भैरोपुर गांव के किसान कृपाराम ने आज सुबह पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. कृपाराम के परिजन ने बताया कि वह अपने कर्ज की अदायगी को लेकर व्यथित थे और उन्होंने इसको लेकर अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा भी बेच दिया था.
शिवपुर थाना प्रभारी मोनिष बैस ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी मिली है कि मृतक किसान अवसाद ग्रस्त था, लेकिन फिलहाल आत्महत्या का कारण सामने नहीं आ सका है. मामले की जांच के बाद ही सही कारण मालूम हो सकेगा. विदिशा जिले के शमशाबाद पुलिस थाना क्षेत्र के गांव जीरापुर के एक अन्य परेशानहाल किसान हरीसिंह जाटव ने कीटनाशक गोलियां खा ली थीं. गंभीर हालत में जाटव को पहले विदिशा के अस्पताल में ले जाया गया बाद में उसे भोपाल में भर्ती किया गया, जहां कल रात उसकी मौत हो गई.टिप्पणियां
शमशाबाद के तहसीलदार इसरार खान ने बताया कि भूमि सीमांकन को लेकर जाटव का अपने परिवार के सदस्यों से विवाद चल रहा था. इससे पहले 8 जून को रायसेन जिले के सागोनिया गांव के किसान किशनलाल मीणा :45: ने कर्ज से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के अनुसार, किशनलाल ने मृत्यु पूर्व अपने परिजनों को बताया कि उस पर एक निजी बैंक का 10 लाख रुपये सहित कुल 17 लाख रुपए का कर्ज था तथा वह अपनी तीन बेटियों के विवाह को लेकर भी चिंतित था.
आठ जून को ही सीहोर जिले के जोगड़खेड़ी गांव के बीएएमएस (आयुर्वेद डॉक्टर) डिग्री धारी किसान बिशन सिंह राजपूत (42) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. राजपूत के छोटे भाई प्रवीण राजपूत ने कहा कि भोपाल से बीएएमएस की डिग्री लेने के बाद उसका बड़ा भाई यहां खेती करने लगा लेकिन पिछले 34 साल में उसे इसमें भारी घाटा हुआ. प्रवीण ने बताया कि करीब 10 लाख रुपये के घाटे के कारण बड़े भाई ने यह आत्मघाती कदम उठाया.(इनपुट्स भाषा से भी)
रेहटी पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक पंकज गीते ने कहा, दुलचंद पर छह लाख रपये का कर्ज था, लेकिन उसने आत्महत्या क्यों की इसकी जांच की जा रही है. दुलचंद के पुत्र शेर सिंह ने कहा कि घटना के वक्त उसके पिता घर पर अकेले थे. उसने जब पिता को अचेत देखा तो वह उन्हें तुरंत रेहटी के अस्पताल में ले गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
शेरसिंह ने भी यह कहा कि उसके पिता पर चार लाख रुपये बैंक का तथा दो लाख रुपये अन्य स्त्रोत का कर्ज था. इससे परेशान होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया. जिला कलेक्टर सुदाम खाड़े ने कहा कि खुदकुशी का कारण फिलहाल स्प्ष्ट नहीं है. मामले में जांच की जा रही है. होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील के शिवपुर पुलिस थाना क्षेत्र के भैरोपुर गांव के किसान कृपाराम ने आज सुबह पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. कृपाराम के परिजन ने बताया कि वह अपने कर्ज की अदायगी को लेकर व्यथित थे और उन्होंने इसको लेकर अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा भी बेच दिया था.
शिवपुर थाना प्रभारी मोनिष बैस ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी मिली है कि मृतक किसान अवसाद ग्रस्त था, लेकिन फिलहाल आत्महत्या का कारण सामने नहीं आ सका है. मामले की जांच के बाद ही सही कारण मालूम हो सकेगा. विदिशा जिले के शमशाबाद पुलिस थाना क्षेत्र के गांव जीरापुर के एक अन्य परेशानहाल किसान हरीसिंह जाटव ने कीटनाशक गोलियां खा ली थीं. गंभीर हालत में जाटव को पहले विदिशा के अस्पताल में ले जाया गया बाद में उसे भोपाल में भर्ती किया गया, जहां कल रात उसकी मौत हो गई.टिप्पणियां
शमशाबाद के तहसीलदार इसरार खान ने बताया कि भूमि सीमांकन को लेकर जाटव का अपने परिवार के सदस्यों से विवाद चल रहा था. इससे पहले 8 जून को रायसेन जिले के सागोनिया गांव के किसान किशनलाल मीणा :45: ने कर्ज से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के अनुसार, किशनलाल ने मृत्यु पूर्व अपने परिजनों को बताया कि उस पर एक निजी बैंक का 10 लाख रुपये सहित कुल 17 लाख रुपए का कर्ज था तथा वह अपनी तीन बेटियों के विवाह को लेकर भी चिंतित था.
आठ जून को ही सीहोर जिले के जोगड़खेड़ी गांव के बीएएमएस (आयुर्वेद डॉक्टर) डिग्री धारी किसान बिशन सिंह राजपूत (42) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. राजपूत के छोटे भाई प्रवीण राजपूत ने कहा कि भोपाल से बीएएमएस की डिग्री लेने के बाद उसका बड़ा भाई यहां खेती करने लगा लेकिन पिछले 34 साल में उसे इसमें भारी घाटा हुआ. प्रवीण ने बताया कि करीब 10 लाख रुपये के घाटे के कारण बड़े भाई ने यह आत्मघाती कदम उठाया.(इनपुट्स भाषा से भी)
शेरसिंह ने भी यह कहा कि उसके पिता पर चार लाख रुपये बैंक का तथा दो लाख रुपये अन्य स्त्रोत का कर्ज था. इससे परेशान होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया. जिला कलेक्टर सुदाम खाड़े ने कहा कि खुदकुशी का कारण फिलहाल स्प्ष्ट नहीं है. मामले में जांच की जा रही है. होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील के शिवपुर पुलिस थाना क्षेत्र के भैरोपुर गांव के किसान कृपाराम ने आज सुबह पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. कृपाराम के परिजन ने बताया कि वह अपने कर्ज की अदायगी को लेकर व्यथित थे और उन्होंने इसको लेकर अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा भी बेच दिया था.
शिवपुर थाना प्रभारी मोनिष बैस ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी मिली है कि मृतक किसान अवसाद ग्रस्त था, लेकिन फिलहाल आत्महत्या का कारण सामने नहीं आ सका है. मामले की जांच के बाद ही सही कारण मालूम हो सकेगा. विदिशा जिले के शमशाबाद पुलिस थाना क्षेत्र के गांव जीरापुर के एक अन्य परेशानहाल किसान हरीसिंह जाटव ने कीटनाशक गोलियां खा ली थीं. गंभीर हालत में जाटव को पहले विदिशा के अस्पताल में ले जाया गया बाद में उसे भोपाल में भर्ती किया गया, जहां कल रात उसकी मौत हो गई.टिप्पणियां
शमशाबाद के तहसीलदार इसरार खान ने बताया कि भूमि सीमांकन को लेकर जाटव का अपने परिवार के सदस्यों से विवाद चल रहा था. इससे पहले 8 जून को रायसेन जिले के सागोनिया गांव के किसान किशनलाल मीणा :45: ने कर्ज से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के अनुसार, किशनलाल ने मृत्यु पूर्व अपने परिजनों को बताया कि उस पर एक निजी बैंक का 10 लाख रुपये सहित कुल 17 लाख रुपए का कर्ज था तथा वह अपनी तीन बेटियों के विवाह को लेकर भी चिंतित था.
आठ जून को ही सीहोर जिले के जोगड़खेड़ी गांव के बीएएमएस (आयुर्वेद डॉक्टर) डिग्री धारी किसान बिशन सिंह राजपूत (42) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. राजपूत के छोटे भाई प्रवीण राजपूत ने कहा कि भोपाल से बीएएमएस की डिग्री लेने के बाद उसका बड़ा भाई यहां खेती करने लगा लेकिन पिछले 34 साल में उसे इसमें भारी घाटा हुआ. प्रवीण ने बताया कि करीब 10 लाख रुपये के घाटे के कारण बड़े भाई ने यह आत्मघाती कदम उठाया.(इनपुट्स भाषा से भी)
शिवपुर थाना प्रभारी मोनिष बैस ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी मिली है कि मृतक किसान अवसाद ग्रस्त था, लेकिन फिलहाल आत्महत्या का कारण सामने नहीं आ सका है. मामले की जांच के बाद ही सही कारण मालूम हो सकेगा. विदिशा जिले के शमशाबाद पुलिस थाना क्षेत्र के गांव जीरापुर के एक अन्य परेशानहाल किसान हरीसिंह जाटव ने कीटनाशक गोलियां खा ली थीं. गंभीर हालत में जाटव को पहले विदिशा के अस्पताल में ले जाया गया बाद में उसे भोपाल में भर्ती किया गया, जहां कल रात उसकी मौत हो गई.टिप्पणियां
शमशाबाद के तहसीलदार इसरार खान ने बताया कि भूमि सीमांकन को लेकर जाटव का अपने परिवार के सदस्यों से विवाद चल रहा था. इससे पहले 8 जून को रायसेन जिले के सागोनिया गांव के किसान किशनलाल मीणा :45: ने कर्ज से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के अनुसार, किशनलाल ने मृत्यु पूर्व अपने परिजनों को बताया कि उस पर एक निजी बैंक का 10 लाख रुपये सहित कुल 17 लाख रुपए का कर्ज था तथा वह अपनी तीन बेटियों के विवाह को लेकर भी चिंतित था.
आठ जून को ही सीहोर जिले के जोगड़खेड़ी गांव के बीएएमएस (आयुर्वेद डॉक्टर) डिग्री धारी किसान बिशन सिंह राजपूत (42) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. राजपूत के छोटे भाई प्रवीण राजपूत ने कहा कि भोपाल से बीएएमएस की डिग्री लेने के बाद उसका बड़ा भाई यहां खेती करने लगा लेकिन पिछले 34 साल में उसे इसमें भारी घाटा हुआ. प्रवीण ने बताया कि करीब 10 लाख रुपये के घाटे के कारण बड़े भाई ने यह आत्मघाती कदम उठाया.(इनपुट्स भाषा से भी)
शमशाबाद के तहसीलदार इसरार खान ने बताया कि भूमि सीमांकन को लेकर जाटव का अपने परिवार के सदस्यों से विवाद चल रहा था. इससे पहले 8 जून को रायसेन जिले के सागोनिया गांव के किसान किशनलाल मीणा :45: ने कर्ज से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के अनुसार, किशनलाल ने मृत्यु पूर्व अपने परिजनों को बताया कि उस पर एक निजी बैंक का 10 लाख रुपये सहित कुल 17 लाख रुपए का कर्ज था तथा वह अपनी तीन बेटियों के विवाह को लेकर भी चिंतित था.
आठ जून को ही सीहोर जिले के जोगड़खेड़ी गांव के बीएएमएस (आयुर्वेद डॉक्टर) डिग्री धारी किसान बिशन सिंह राजपूत (42) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. राजपूत के छोटे भाई प्रवीण राजपूत ने कहा कि भोपाल से बीएएमएस की डिग्री लेने के बाद उसका बड़ा भाई यहां खेती करने लगा लेकिन पिछले 34 साल में उसे इसमें भारी घाटा हुआ. प्रवीण ने बताया कि करीब 10 लाख रुपये के घाटे के कारण बड़े भाई ने यह आत्मघाती कदम उठाया.(इनपुट्स भाषा से भी)
आठ जून को ही सीहोर जिले के जोगड़खेड़ी गांव के बीएएमएस (आयुर्वेद डॉक्टर) डिग्री धारी किसान बिशन सिंह राजपूत (42) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. राजपूत के छोटे भाई प्रवीण राजपूत ने कहा कि भोपाल से बीएएमएस की डिग्री लेने के बाद उसका बड़ा भाई यहां खेती करने लगा लेकिन पिछले 34 साल में उसे इसमें भारी घाटा हुआ. प्रवीण ने बताया कि करीब 10 लाख रुपये के घाटे के कारण बड़े भाई ने यह आत्मघाती कदम उठाया.(इनपुट्स भाषा से भी) | संक्षिप्त पाठ: फायरिंग में हुई थी 6 किसानों की मौत
कांग्रेस किसानों की महापंचायत करने वाली है
मध्य प्रदेश में किसान लगातार कर रहे हैं खुदकुशी | 13 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: चीन अपनी एक अदालत में भारतीय राजनयिक के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की जांच करेगा। यह बात एक वरिष्ठ सूत्र ने एनडीटीवी से कही है। उल्लेखनीय है कि शंघाई की एक अदालत में किए गए बुरे बर्ताव के कारण भारतीय राजनयिक 46-वर्षीय एस बालाचंद्रन बेहोश हो गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। भारत सरकार ने इस घटना को लेकर चीनी अधिकारियों के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
बालाचंद्रन शंघाई के निकट युवू शहर की एक अदालत में 31 दिसंबर को पेश हुए थे। मधुमेह के मरीज बालाचंद्रन को अदालती कार्यवाही पूरी होने तक बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई और कुछ वक्त के बाद वह अदालत में ही बेहोश होकर गिर गए। अधिकारियों का कहना है कि बालाचंद्रन की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। भारतीय राजनयिक दो भारतीय कारोबारियों के अपहरण के मामले में अदालत में पेश हुए थे।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार ने बीजिंग, शंघाई और दिल्ली में चीन के अधिकारियों के समक्ष विरोध दर्ज कराया। दिल्ली में चीनी दूतावास के उप प्रमुख झांग यूए को विदेश मंत्रालय ने तलब किया और उनसे कहा कि किसी भी राजनयिक के साथ व्यवहार करने का यह तरीका नहीं है।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि झांग को बताया गया कि बालाचंद्रन मधुमेह के मरीज हैं और ऐसे में उन्हें खाने और आने-जाने की इजाजत दी जानी चाहिए थी। विदेश मंत्रालय से बाहर निकलते समय झांग ने कहा, यह नागरिक-वाणिज्यिक विवाद है। हम इस मामले को सही ढंग से निपटाने का पूरा प्रयास करेंगे। मैंने यहां के अधिकारियों से इस घटना के बारे में सुना। हम वास्तविक स्थिति के बारे में पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं। शंघाई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। बीजिंग में भारतीय दूतावास की ओर से भी ऐतराज जताया गया है।
भारतीय राजनयिक दो भारतीयों को रिहा कराने का प्रयास कर रहे थे, जिन्हें स्थानीय लोगों ने बंधक बनाया हुआ था। ये कारोबारी यिवू में भारतीयों से अपने बकाये की मांग कर रहे थे। इससे पहले शंघाई में वाणिज्य दूत रीवा गांगुली दास ने बताया कि बालाचंद्रन दो भारतीय कारोबारियों दीपक रहेजा और श्यामसुंदर अग्रवाल को रिहा कराने गए थे और इस दौरान उनके साथ बदसलूकी की गई।
उनके मुताबिक वहां मौजूद भीड़ ने रहेजा और अग्रवाल को घूंसे मारे और उन्हें बालाचंद्रन से छुड़ा लिया। इस दौरान बालाचंद्रन बेहोश हो गए। स्थानीय अधिकारियों ने बालाचंद्रन से इस घटना के लिए माफी मांगी है। दास ने बताया कि बालाचंद्रन की हालत अब ठीक है और उनके विभिन्न टेस्ट कराए जा रहे हैं। | यहाँ एक सारांश है:अदालत में बड़ी संख्या में चीनी कारोबारियों ने एक भारतीय राजनयिक पर हमला बोल दिया, जिसमें वह घायल हो गए। वह दो भारतीयों को रिहा कराने का प्रयास कर रहे थे। | 18 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: अंतरिक्ष संबंधी नीति-निर्माण के लिए देश की सर्वोच्च इकाई अंतरिक्ष आयोग ने इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स कॉरपोरेशन में शीर्ष स्तर पर पुनर्गठन की तैयारी शुरू कर दी। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन निजी कंपनी देवास मल्टीमीडिया के साथ दोहरे उपग्रह समझौते को लेकर विवादों के घेरे में है। के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में हुई बैठक में आयोग को देवास के साथ एंट्रिक्स के करार को रद्द करने संबंधी कार्रवाइयों के बारे अवगत कराया गया। माना जा रहा है कि इस करार से सरकारी खजाने को संभवत: करीब दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अंतरिक्ष आयोग ने एंट्रिक्स के लिए नए पूर्णकालिक अध्यक्ष की पहचान के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी गठित की है। एंट्रिक्स का नए अध्यक्ष इसरो के अध्यक्ष से अलग होंगे। अंतरिक्ष विभाग के सचिव ही अंतरिक्ष आयोग, इसरो और एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के भी अध्यक्ष हैं। के राधाकृष्णन वर्तमान में चारों पदों पर काबिज हैं। बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि एंट्रिक्स को हाल ही में मिले मिनी रत्न के दर्जे पर विचार करते हुए यह फैसला किया गया कि इसरो की वाणिज्यिक शाखा का नया अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हो। | अंतरिक्ष संबंधी नीति-निर्माण के लिए सर्वोच्च इकाई अंतरिक्ष आयोग ने इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स कॉरपोरेशन में पुनर्गठन की तैयारी शुरू कर दी है। | 1 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: विश्व बलूच महिला फोरम की अध्यक्ष नाएला कादिर बलूच ने भारत सरकार से आजाद बलूचिस्तान की मांग पर अपनी सहमति व्यक्त करने की मांग की है.
वाराणसी में गंगा महासभा और एक स्थानीय समाचारपत्र की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने आईं नाएला ने कहा, ‘‘पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई लड़ रहे बलूचों को भारत से बहुत उम्मीदें हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘दुनियाभर में रह रहे बलूचों की मदद के लिए भारत के आगे आने से हिंदुस्तानियों और बलूचों में संवाद कायम होगा. हम नजदीक आकर यह तय कर सकेंगे कि बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार का स्वरूप कैसा हो.’’टिप्पणियां
नाएला ने कहा, ‘‘बलूचों को भारत सरकार से हर प्रकार की मदद की उम्मीद है. लेकिन आजाद बलूचिस्तान की मांग पर अब तक भारत सरकार से हमें समर्थन नहीं मिला है. हालांकि यहां की सिविल सोसाइटी और विभिन्न संगठनों के लोग हमारे साथ हैं.’’ आजाद बलूचिस्तान के लिए भारत सरकार क्या कर सकती है? इस सवाल पर नाएला का सुझाव था, ‘‘दुनिया के जितने देशों में भारतीय दूतावास हैं, वे बलूचों को हिन्दुस्तान आने और यहां बसने में मदद करें. वीजा देते वक्त बलूचों को पाकिस्तानी न समझा जाए. जिस तरह पाकिस्तान से आने वाले हिन्दू समुदाय के लोगों को यहां विशेष सुविधाएं मिली हुई हैं, वैसा ही सलूक बलूचों के साथ हो.’’ उन्होंने कहा, ‘‘बलूचिस्तान न कभी पाकिस्तान का हिस्सा था और न रहेगा.’’ (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
वाराणसी में गंगा महासभा और एक स्थानीय समाचारपत्र की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने आईं नाएला ने कहा, ‘‘पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई लड़ रहे बलूचों को भारत से बहुत उम्मीदें हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘दुनियाभर में रह रहे बलूचों की मदद के लिए भारत के आगे आने से हिंदुस्तानियों और बलूचों में संवाद कायम होगा. हम नजदीक आकर यह तय कर सकेंगे कि बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार का स्वरूप कैसा हो.’’टिप्पणियां
नाएला ने कहा, ‘‘बलूचों को भारत सरकार से हर प्रकार की मदद की उम्मीद है. लेकिन आजाद बलूचिस्तान की मांग पर अब तक भारत सरकार से हमें समर्थन नहीं मिला है. हालांकि यहां की सिविल सोसाइटी और विभिन्न संगठनों के लोग हमारे साथ हैं.’’ आजाद बलूचिस्तान के लिए भारत सरकार क्या कर सकती है? इस सवाल पर नाएला का सुझाव था, ‘‘दुनिया के जितने देशों में भारतीय दूतावास हैं, वे बलूचों को हिन्दुस्तान आने और यहां बसने में मदद करें. वीजा देते वक्त बलूचों को पाकिस्तानी न समझा जाए. जिस तरह पाकिस्तान से आने वाले हिन्दू समुदाय के लोगों को यहां विशेष सुविधाएं मिली हुई हैं, वैसा ही सलूक बलूचों के साथ हो.’’ उन्होंने कहा, ‘‘बलूचिस्तान न कभी पाकिस्तान का हिस्सा था और न रहेगा.’’ (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
नाएला ने कहा, ‘‘बलूचों को भारत सरकार से हर प्रकार की मदद की उम्मीद है. लेकिन आजाद बलूचिस्तान की मांग पर अब तक भारत सरकार से हमें समर्थन नहीं मिला है. हालांकि यहां की सिविल सोसाइटी और विभिन्न संगठनों के लोग हमारे साथ हैं.’’ आजाद बलूचिस्तान के लिए भारत सरकार क्या कर सकती है? इस सवाल पर नाएला का सुझाव था, ‘‘दुनिया के जितने देशों में भारतीय दूतावास हैं, वे बलूचों को हिन्दुस्तान आने और यहां बसने में मदद करें. वीजा देते वक्त बलूचों को पाकिस्तानी न समझा जाए. जिस तरह पाकिस्तान से आने वाले हिन्दू समुदाय के लोगों को यहां विशेष सुविधाएं मिली हुई हैं, वैसा ही सलूक बलूचों के साथ हो.’’ उन्होंने कहा, ‘‘बलूचिस्तान न कभी पाकिस्तान का हिस्सा था और न रहेगा.’’ (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | सारांश: पाक से आजादी की लड़ाई लड़ रहे बलूचों को भारत से बहुत उम्मीदें
बलूचों को हिन्दुस्तान आने और यहां बसने में मदद करें
वीजा देते वक्त बलूचों को पाकिस्तानी न समझा जाए | 20 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: अब तक दुनिया भर पत्रकार खबरें लिखते हैं, लेकिन जल्द ही ये काम सॉफ्टवेयर करते दिख सकते हैं. इस सॉफ्टवेयर के ऑविष्कार के लिए सर्च ईंजन गूगल (Google) ब्रिटेन की न्यूज एजेंसी 'प्रेस एसोसिएशन' को 8.05 लाख डॉलर (करीब 5.20 करोड़ रुपये) का अनुदान दे रहा है. इस खास सॉफ्टवेयर का नाम रडार Radar (रिपोर्टर्स एंड डाटा एंड रोबोट्स) है. अब तक के शोध के मुताबिक यह सॉफ्टवेयर सरकारी एजेंसियों, स्थानीय कानून प्रवर्तन इकाइयों और अन्य स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर खबर लिखने में सक्षम है. खबर लिखने में यह और कैसे उपयोगी हो सकता है, इसके लिए शोध जारी है. 'द गार्जियन' की खबर के मुताबिक फिलहाल यह सॉफ्टवेयर एक महीने में 30 हजार से ज्यादा खबरें लिखने में सक्षम है. उम्मीद की जा रही है कि इस सॉफ्टवेयर को 2018 तक पूरी तरह टेस्टिंग कर लांच कर दिया जाएगा.
हालांकि इस सॉफ्टवेयर की लिखी हुई खबरों की गलतियों को सुधारने और संपादन के लिए पत्रकारों की जरूरत बनी रहेगी. टिप्पणियां
प्रेस एसोसिएशन के प्रधान संपादक पीटर क्लिफ्टन ने कहा, 'इस सॉफ्टवेयर के आ जाने के बाद पत्रकारों की उपयोगिता खत्म नहीं होगी, हां, ये जरूर है कि संख्या में कटौती की जाएगी. इस सॉफ्टवेयर की मदद से कम पत्रकारों से भी ज्यादा खबरें लिखी जा सकेंगी.'
फिलहाल ये भी शोध जारी है कि यह सॉफ्टवेयर खबरें लिखने के साथ तस्वीर और ग्राफिक्स लगाने में भी सक्षम हो जाए.
हालांकि इस सॉफ्टवेयर की लिखी हुई खबरों की गलतियों को सुधारने और संपादन के लिए पत्रकारों की जरूरत बनी रहेगी. टिप्पणियां
प्रेस एसोसिएशन के प्रधान संपादक पीटर क्लिफ्टन ने कहा, 'इस सॉफ्टवेयर के आ जाने के बाद पत्रकारों की उपयोगिता खत्म नहीं होगी, हां, ये जरूर है कि संख्या में कटौती की जाएगी. इस सॉफ्टवेयर की मदद से कम पत्रकारों से भी ज्यादा खबरें लिखी जा सकेंगी.'
फिलहाल ये भी शोध जारी है कि यह सॉफ्टवेयर खबरें लिखने के साथ तस्वीर और ग्राफिक्स लगाने में भी सक्षम हो जाए.
प्रेस एसोसिएशन के प्रधान संपादक पीटर क्लिफ्टन ने कहा, 'इस सॉफ्टवेयर के आ जाने के बाद पत्रकारों की उपयोगिता खत्म नहीं होगी, हां, ये जरूर है कि संख्या में कटौती की जाएगी. इस सॉफ्टवेयर की मदद से कम पत्रकारों से भी ज्यादा खबरें लिखी जा सकेंगी.'
फिलहाल ये भी शोध जारी है कि यह सॉफ्टवेयर खबरें लिखने के साथ तस्वीर और ग्राफिक्स लगाने में भी सक्षम हो जाए.
फिलहाल ये भी शोध जारी है कि यह सॉफ्टवेयर खबरें लिखने के साथ तस्वीर और ग्राफिक्स लगाने में भी सक्षम हो जाए. | यह एक सारांश है: यह सॉफ्टवेयर मिली जानकारी के आधार पर खबर लिखने में सक्षम
इस सॉफ्टवेयर के आ जाने के बाद पत्रकारों की उपयोगिता खत्म नहीं होगी
यह सॉफ्टवेयर एक महीने में 30 हजार से ज्यादा खबरें लिखने में सक्षम है | 2 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: गौरतलब है कि अयोध्या मामले की नई संवैधानिक 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ सुनवाई कर रही है. न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर इसमें शामिल हैं. ये दोनों राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर सुनवाई के लिये पूर्व में गठित तीन सदस्यीय पीठ का हिस्सा थे. न्यायमूर्ति भूषण और न्यायमूर्ति नजीर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा (अब सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली उस तीन सदस्यीय पीठ का हिस्सा थे, जिसने 27 सितंबर 2018 को 2:1 के बहुमत से शीर्ष अदालत के 1994 के एक फैसले में की गई एक टिप्पणी को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास पुनर्विचार के लिये भेजने से मना कर दिया था.
शीर्ष अदालत ने 1994 के अपने फैसले में कहा था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. यह मामला अयोध्या भूमि विवाद मामले पर सुनवाई के दौरान उठा था. न्यायमूर्ति नजीर ने बहुमत के फैसले से अलग राय जताई थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपील दायर हैं. चार दीवानी मुकदमों पर सुनाए गए अपने फैसले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2.77 एकड़ जमीन को तीन पक्षों--सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था. अयोध्या मामले पर सुनवाई के लिये इस साल आठ जनवरी को गठित पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ में न्यायमूर्ति भूषण और न्यायमूर्ति नजीर शामिल नहीं थे. पीठ का पुनर्गठन इसलिये किया गया क्योंकि मूल पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति यू यू ललित ने 10 जनवरी को मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. उन्होंने मामले की सुनवाई में आगे हिस्सा लेने से मना कर दिया था क्योंकि वह 1997 में एक संबंधित मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की तरफ से एक वकील के तौर पर पेश हुए थे. नयी पीठ में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ भी शामिल हैं. | मोदी सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट
जमीन के लिए दी याचिका
अधिग्रहीत जमीन वापस मांगी | 6 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि इतना सब होने के बाजवूद किसी ने उसकी मदद नहीं की और इसके बजाय तमाशबीन बने रहे. महिला ने कहा, ‘‘जब व्यक्ति ने भागने की कोशिश की तो मैंने उसका कॉलर पकड़ा और उसे धकेलकर अपनी सीट पर बैठा दिया. मैंने उसे सबक सिखाने के लिए उसे चप्पल से मारा. उसने सार्वजनिक वाहन में ऐसा करने की हिमाकत की. मैं आमतौर पर इस बस से आती-जाती हूं लेकिन मैंने ऐसा पहली बार देखा.''महिला ने 100 नंबर पर फोन किया और पुलिस को घटना के बारे सूचना दी जिसके बाद वे घटनास्थल पर पहुंचे.पुलिस ने बताया कि उन्हें छत्तरपुर बस स्टैंड पर झगड़े के बारे में महिला से सूचना मिली जिसके बाद वे घटनास्थल पर पहुंचे.आरोपी को चिकित्सा जांच के लिए भेज दिया गया है.उन्होंने बताया कि बदरपुर निवासी कुमार रंगपुरी में एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम करता है और घटना के समय नशे में था.टिप्पणियां
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | संक्षिप्त सारांश: दिल्ली के क्लस्टर बस में महिला के सामने हस्तमैथुन की घटना
महिला पत्रकार ने नशे में गंदी हरकत कर रहे शख्स को चप्पलों से पीटा
पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार | 8 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: केंद्रीय कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूडी बुधवार को खुद ही विमान उड़ाकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे. उन्होंने यहां कौशल विकास कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में भाग लिया. वह स्वयं नई दिल्ली से सुबह 6.45 बजे इंडिगो की नियमित विमान उड़ाकर 8.45 बजे रायपुर पहुंचे.
दरअसल, रूडी कमर्शियल पायलट रह चुके हैं, लेकिन उनका छत्तीसगढ़ पहुंचने का यह अंदाज चर्चा का विषय बना हुआ है. उनके बारे में कहा जाता है कि वह कई मौकों पर खुद ही विमान उड़ाकर अपनी यात्राएं करते हैं.
उनके साथ एक और पायलट भी मौजूद थे. बुधवार सुबह राजधानी पहुंचे रूडी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले हैं. रमन सिंह ने बुधवार सुबह अपने निवास पर रूडी का स्वागत किया. विमानतल से रूडी राज्य अतिथि गृह पहुना पहुंचे और मुख्यमंत्री से मुलाकात की.टिप्पणियां
इसके बाद रूडी ने मंत्रालय में कौशल विकास कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में भाग लिया. रूडी बुधवार शाम 7.25 नियमित विमान से नई दिल्ली रवाना होंगे.
(इनपुट आईएएनएस से)
दरअसल, रूडी कमर्शियल पायलट रह चुके हैं, लेकिन उनका छत्तीसगढ़ पहुंचने का यह अंदाज चर्चा का विषय बना हुआ है. उनके बारे में कहा जाता है कि वह कई मौकों पर खुद ही विमान उड़ाकर अपनी यात्राएं करते हैं.
उनके साथ एक और पायलट भी मौजूद थे. बुधवार सुबह राजधानी पहुंचे रूडी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले हैं. रमन सिंह ने बुधवार सुबह अपने निवास पर रूडी का स्वागत किया. विमानतल से रूडी राज्य अतिथि गृह पहुना पहुंचे और मुख्यमंत्री से मुलाकात की.टिप्पणियां
इसके बाद रूडी ने मंत्रालय में कौशल विकास कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में भाग लिया. रूडी बुधवार शाम 7.25 नियमित विमान से नई दिल्ली रवाना होंगे.
(इनपुट आईएएनएस से)
उनके साथ एक और पायलट भी मौजूद थे. बुधवार सुबह राजधानी पहुंचे रूडी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले हैं. रमन सिंह ने बुधवार सुबह अपने निवास पर रूडी का स्वागत किया. विमानतल से रूडी राज्य अतिथि गृह पहुना पहुंचे और मुख्यमंत्री से मुलाकात की.टिप्पणियां
इसके बाद रूडी ने मंत्रालय में कौशल विकास कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में भाग लिया. रूडी बुधवार शाम 7.25 नियमित विमान से नई दिल्ली रवाना होंगे.
(इनपुट आईएएनएस से)
इसके बाद रूडी ने मंत्रालय में कौशल विकास कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में भाग लिया. रूडी बुधवार शाम 7.25 नियमित विमान से नई दिल्ली रवाना होंगे.
(इनपुट आईएएनएस से)
(इनपुट आईएएनएस से) | यह एक सारांश है: रूडी ने रायपुर में कौशल विकास कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में भाग लिया.
रूडी कई मौकों पर खुद ही विमान उड़ाकर अपनी यात्राएं करते हैं.
इंडिगो की नियमित विमान उड़ाकर 8.45 बजे रायपुर पहुंचे. | 21 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: अमेरिका के एक प्रमुख मुस्लिम संगठन ने पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों में 11 वर्षीय एक लड़की की गिरफ्तारी की आलोचना की है और उसे तुरंत रिहा करने की मांग की है।
लड़की की पहचान रिमशा मसीह के रूप में हुई है और बताया जाता है कि वह डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है। कुरान की आयत के पन्ने जलाने के आरोप में वह मौत की सजा का सामना कर रही है।टिप्पणियां
वॉशिंगटन स्थित काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस ने कहा, यह आवश्यक है पाकिस्तान रिमशा मसीह को तुरंत रिहा करे और उसकी एवं उसके परिवार और समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करे। ऐसी बच्ची खासकर जब वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है तो उसकी गिरफ्तारी इस्लामी सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है। सीएआईआर ने कहा कि इस तरह के मानवाधिकारों के उल्लंघन की निंदा होनी चाहिए और इसे सिर्फ इसलिए चुनौती नहीं दी जानी चाहिए कि कमजोर लोगों के खिलाफ यह बड़ा अन्याय है, बल्कि इसलिए भी दी जानी चाहिए कि इस्लाम के नाम पर उन्हें गलत फंसाया जा रहा है।
सीएआईआर ने कहा, खबर है कि इस गिरफ्तारी के पीछे एक क्रुद्ध भीड़ है और हम पाकिस्तानी अधिकारियों से कहते हैं कि उन घटनाओं की जांच करें। मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की खबरों से पता चलता है कि स्थानीय अधिकारियों एवं चरमपंथी नेताओं की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है और इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है। इसने कहा कि उस लड़की ने इस्लाम के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं किया, बल्कि उन चरमपंथियों ने किया।
लड़की की पहचान रिमशा मसीह के रूप में हुई है और बताया जाता है कि वह डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है। कुरान की आयत के पन्ने जलाने के आरोप में वह मौत की सजा का सामना कर रही है।टिप्पणियां
वॉशिंगटन स्थित काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस ने कहा, यह आवश्यक है पाकिस्तान रिमशा मसीह को तुरंत रिहा करे और उसकी एवं उसके परिवार और समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करे। ऐसी बच्ची खासकर जब वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है तो उसकी गिरफ्तारी इस्लामी सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है। सीएआईआर ने कहा कि इस तरह के मानवाधिकारों के उल्लंघन की निंदा होनी चाहिए और इसे सिर्फ इसलिए चुनौती नहीं दी जानी चाहिए कि कमजोर लोगों के खिलाफ यह बड़ा अन्याय है, बल्कि इसलिए भी दी जानी चाहिए कि इस्लाम के नाम पर उन्हें गलत फंसाया जा रहा है।
सीएआईआर ने कहा, खबर है कि इस गिरफ्तारी के पीछे एक क्रुद्ध भीड़ है और हम पाकिस्तानी अधिकारियों से कहते हैं कि उन घटनाओं की जांच करें। मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की खबरों से पता चलता है कि स्थानीय अधिकारियों एवं चरमपंथी नेताओं की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है और इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है। इसने कहा कि उस लड़की ने इस्लाम के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं किया, बल्कि उन चरमपंथियों ने किया।
वॉशिंगटन स्थित काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस ने कहा, यह आवश्यक है पाकिस्तान रिमशा मसीह को तुरंत रिहा करे और उसकी एवं उसके परिवार और समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करे। ऐसी बच्ची खासकर जब वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है तो उसकी गिरफ्तारी इस्लामी सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है। सीएआईआर ने कहा कि इस तरह के मानवाधिकारों के उल्लंघन की निंदा होनी चाहिए और इसे सिर्फ इसलिए चुनौती नहीं दी जानी चाहिए कि कमजोर लोगों के खिलाफ यह बड़ा अन्याय है, बल्कि इसलिए भी दी जानी चाहिए कि इस्लाम के नाम पर उन्हें गलत फंसाया जा रहा है।
सीएआईआर ने कहा, खबर है कि इस गिरफ्तारी के पीछे एक क्रुद्ध भीड़ है और हम पाकिस्तानी अधिकारियों से कहते हैं कि उन घटनाओं की जांच करें। मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की खबरों से पता चलता है कि स्थानीय अधिकारियों एवं चरमपंथी नेताओं की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है और इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है। इसने कहा कि उस लड़की ने इस्लाम के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं किया, बल्कि उन चरमपंथियों ने किया।
सीएआईआर ने कहा, खबर है कि इस गिरफ्तारी के पीछे एक क्रुद्ध भीड़ है और हम पाकिस्तानी अधिकारियों से कहते हैं कि उन घटनाओं की जांच करें। मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की खबरों से पता चलता है कि स्थानीय अधिकारियों एवं चरमपंथी नेताओं की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है और इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है। इसने कहा कि उस लड़की ने इस्लाम के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं किया, बल्कि उन चरमपंथियों ने किया। | अमेरिका के एक प्रमुख मुस्लिम संगठन ने पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों में 11 वर्षीय एक लड़की की गिरफ्तारी की आलोचना की है और उसे तुरंत रिहा करने की मांग की है। | 34 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: संसद में मंगलवार को असम व मुम्बई हिंसा और काले धन को लेकर जहां हंगामा हुआ और वहीं नक्सल समस्या पर चर्चा भी हुई और अमरनाथ यात्रा का मुद्दा भी गम्भीरता से उठा। लेकिन दिन की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री के निधन की सूचना आई।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सदस्यों ने असम हिंसा और मुम्बई में उसकी अनुगूंज तथा विदेशी बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने के मुद्दे को लेकर लोकसभा की कार्यवाही में बाधा पहुंचाई, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने उस समय सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में राजग सदस्यों ने सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी और वे अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए।
राजग सहयोगी शिवसेना ने केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुम्बई हिंसा पर बयान की मांग की, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे। भाजपा ने बाबा रामदेव के अनिश्चितकालीन अनशन का समर्थन किया और काले धन का मुद्दा उठाया।
हंगामे के बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य सदन के बीचों-बीच पहुंच गए और खाद्य सुरक्षा विधेयक को सदन में पेश करने की मांग करने लगे।
असम हिंसा के विरोध में आयोजित एक रैली के दौरान मुम्बई में भड़की हिंसा का मुद्दा राज्यसभा में भी उठा। भाजपा ने इस विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर सवाल उठाया।
भाजपा नेता बलबीर पुंज ने पूछा, "उनकी सहानुभूति अवैध प्रवासियों के प्रति है, असम के बोडो भाइयों के प्रति नहीं।
बांग्लादेशियों के साथ उनका क्या रिश्ता है, यदि बांग्लादेश में रोहिंगया मुसलमानों के खिलाफ जुल्म हो रहे हैं तो इसमें भारत की क्या गलती है।"
पुंज ने कहा, "यह विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर एक सवाल खड़े करता है।"
शिव सेना नेता संजय राउत ने भी मुम्बई हिंसा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर का जीवन दो दिनों तक प्रभावित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमर जवान ज्योति स्मारक पर जूते फेंके गए।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सदस्यों ने असम हिंसा और मुम्बई में उसकी अनुगूंज तथा विदेशी बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने के मुद्दे को लेकर लोकसभा की कार्यवाही में बाधा पहुंचाई, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने उस समय सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में राजग सदस्यों ने सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी और वे अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए।
राजग सहयोगी शिवसेना ने केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुम्बई हिंसा पर बयान की मांग की, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे। भाजपा ने बाबा रामदेव के अनिश्चितकालीन अनशन का समर्थन किया और काले धन का मुद्दा उठाया।
हंगामे के बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य सदन के बीचों-बीच पहुंच गए और खाद्य सुरक्षा विधेयक को सदन में पेश करने की मांग करने लगे।
असम हिंसा के विरोध में आयोजित एक रैली के दौरान मुम्बई में भड़की हिंसा का मुद्दा राज्यसभा में भी उठा। भाजपा ने इस विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर सवाल उठाया।
भाजपा नेता बलबीर पुंज ने पूछा, "उनकी सहानुभूति अवैध प्रवासियों के प्रति है, असम के बोडो भाइयों के प्रति नहीं।
बांग्लादेशियों के साथ उनका क्या रिश्ता है, यदि बांग्लादेश में रोहिंगया मुसलमानों के खिलाफ जुल्म हो रहे हैं तो इसमें भारत की क्या गलती है।"
पुंज ने कहा, "यह विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर एक सवाल खड़े करता है।"
शिव सेना नेता संजय राउत ने भी मुम्बई हिंसा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर का जीवन दो दिनों तक प्रभावित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमर जवान ज्योति स्मारक पर जूते फेंके गए।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने उस समय सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में राजग सदस्यों ने सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी और वे अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए।
राजग सहयोगी शिवसेना ने केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुम्बई हिंसा पर बयान की मांग की, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे। भाजपा ने बाबा रामदेव के अनिश्चितकालीन अनशन का समर्थन किया और काले धन का मुद्दा उठाया।
हंगामे के बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य सदन के बीचों-बीच पहुंच गए और खाद्य सुरक्षा विधेयक को सदन में पेश करने की मांग करने लगे।
असम हिंसा के विरोध में आयोजित एक रैली के दौरान मुम्बई में भड़की हिंसा का मुद्दा राज्यसभा में भी उठा। भाजपा ने इस विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर सवाल उठाया।
भाजपा नेता बलबीर पुंज ने पूछा, "उनकी सहानुभूति अवैध प्रवासियों के प्रति है, असम के बोडो भाइयों के प्रति नहीं।
बांग्लादेशियों के साथ उनका क्या रिश्ता है, यदि बांग्लादेश में रोहिंगया मुसलमानों के खिलाफ जुल्म हो रहे हैं तो इसमें भारत की क्या गलती है।"
पुंज ने कहा, "यह विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर एक सवाल खड़े करता है।"
शिव सेना नेता संजय राउत ने भी मुम्बई हिंसा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर का जीवन दो दिनों तक प्रभावित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमर जवान ज्योति स्मारक पर जूते फेंके गए।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
राजग सहयोगी शिवसेना ने केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुम्बई हिंसा पर बयान की मांग की, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे। भाजपा ने बाबा रामदेव के अनिश्चितकालीन अनशन का समर्थन किया और काले धन का मुद्दा उठाया।
हंगामे के बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य सदन के बीचों-बीच पहुंच गए और खाद्य सुरक्षा विधेयक को सदन में पेश करने की मांग करने लगे।
असम हिंसा के विरोध में आयोजित एक रैली के दौरान मुम्बई में भड़की हिंसा का मुद्दा राज्यसभा में भी उठा। भाजपा ने इस विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर सवाल उठाया।
भाजपा नेता बलबीर पुंज ने पूछा, "उनकी सहानुभूति अवैध प्रवासियों के प्रति है, असम के बोडो भाइयों के प्रति नहीं।
बांग्लादेशियों के साथ उनका क्या रिश्ता है, यदि बांग्लादेश में रोहिंगया मुसलमानों के खिलाफ जुल्म हो रहे हैं तो इसमें भारत की क्या गलती है।"
पुंज ने कहा, "यह विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर एक सवाल खड़े करता है।"
शिव सेना नेता संजय राउत ने भी मुम्बई हिंसा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर का जीवन दो दिनों तक प्रभावित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमर जवान ज्योति स्मारक पर जूते फेंके गए।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
हंगामे के बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य सदन के बीचों-बीच पहुंच गए और खाद्य सुरक्षा विधेयक को सदन में पेश करने की मांग करने लगे।
असम हिंसा के विरोध में आयोजित एक रैली के दौरान मुम्बई में भड़की हिंसा का मुद्दा राज्यसभा में भी उठा। भाजपा ने इस विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर सवाल उठाया।
भाजपा नेता बलबीर पुंज ने पूछा, "उनकी सहानुभूति अवैध प्रवासियों के प्रति है, असम के बोडो भाइयों के प्रति नहीं।
बांग्लादेशियों के साथ उनका क्या रिश्ता है, यदि बांग्लादेश में रोहिंगया मुसलमानों के खिलाफ जुल्म हो रहे हैं तो इसमें भारत की क्या गलती है।"
पुंज ने कहा, "यह विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर एक सवाल खड़े करता है।"
शिव सेना नेता संजय राउत ने भी मुम्बई हिंसा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर का जीवन दो दिनों तक प्रभावित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमर जवान ज्योति स्मारक पर जूते फेंके गए।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
असम हिंसा के विरोध में आयोजित एक रैली के दौरान मुम्बई में भड़की हिंसा का मुद्दा राज्यसभा में भी उठा। भाजपा ने इस विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर सवाल उठाया।
भाजपा नेता बलबीर पुंज ने पूछा, "उनकी सहानुभूति अवैध प्रवासियों के प्रति है, असम के बोडो भाइयों के प्रति नहीं।
बांग्लादेशियों के साथ उनका क्या रिश्ता है, यदि बांग्लादेश में रोहिंगया मुसलमानों के खिलाफ जुल्म हो रहे हैं तो इसमें भारत की क्या गलती है।"
पुंज ने कहा, "यह विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर एक सवाल खड़े करता है।"
शिव सेना नेता संजय राउत ने भी मुम्बई हिंसा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर का जीवन दो दिनों तक प्रभावित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमर जवान ज्योति स्मारक पर जूते फेंके गए।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
भाजपा नेता बलबीर पुंज ने पूछा, "उनकी सहानुभूति अवैध प्रवासियों के प्रति है, असम के बोडो भाइयों के प्रति नहीं।
बांग्लादेशियों के साथ उनका क्या रिश्ता है, यदि बांग्लादेश में रोहिंगया मुसलमानों के खिलाफ जुल्म हो रहे हैं तो इसमें भारत की क्या गलती है।"
पुंज ने कहा, "यह विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर एक सवाल खड़े करता है।"
शिव सेना नेता संजय राउत ने भी मुम्बई हिंसा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर का जीवन दो दिनों तक प्रभावित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमर जवान ज्योति स्मारक पर जूते फेंके गए।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
बांग्लादेशियों के साथ उनका क्या रिश्ता है, यदि बांग्लादेश में रोहिंगया मुसलमानों के खिलाफ जुल्म हो रहे हैं तो इसमें भारत की क्या गलती है।"
पुंज ने कहा, "यह विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर एक सवाल खड़े करता है।"
शिव सेना नेता संजय राउत ने भी मुम्बई हिंसा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर का जीवन दो दिनों तक प्रभावित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमर जवान ज्योति स्मारक पर जूते फेंके गए।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
पुंज ने कहा, "यह विरोध प्रदर्शन के पीछे की मानसिकता पर एक सवाल खड़े करता है।"
शिव सेना नेता संजय राउत ने भी मुम्बई हिंसा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर का जीवन दो दिनों तक प्रभावित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमर जवान ज्योति स्मारक पर जूते फेंके गए।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
शिव सेना नेता संजय राउत ने भी मुम्बई हिंसा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर का जीवन दो दिनों तक प्रभावित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमर जवान ज्योति स्मारक पर जूते फेंके गए।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध प्रदर्शन करने लगे और उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष से नोटिस देने के लिए कहा। लेकिन वे तत्काल सरकार से जवाब की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
बाद में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। इसके बाद सदस्य शांत हो गए।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
इस बीच कार्यवाही जब सुचारू हुई तो लोकसभा ने नक्सली हिंसा में वृद्धि की निंदा की और इस बुराई को राष्ट्रीय समस्या बताया। सांसदों ने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य बासुदेब आचार्य ने देश में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि पर बहस की शुरुआत की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त रूप से इससे निपटना होगा।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
आचार्य ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे से लम्बी अवधि के लिए निपटने के लिए जनजातीय इलाकों में भूमि सुधार को बढ़ावा दिया जाए, जहां 90 प्रतिशत लोग गरीब हैं। उन्होंने कहा, "यह एक राष्ट्रीय समस्या है।"
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
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जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
कांग्रेस सदस्य भक्त चरण दास ने नक्सलियों से राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने और गरीब जनजातियों की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकर को वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू करना चाहिए, ताकि जनजातीय लोग सशक्त हों और स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण बंद हो। दास ने कहा, "इस समस्या का समाधान कोई आसान नहीं है।"
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
भाजपा की सरोज पांडे ने कहा कि किसी को भी लाशों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मृत्यु चाहे किसी पुलिसकर्मी की हो या किसी जनजाति की, पीड़ादायक है।"
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य भर्तृहरि महताब ने कहा कि सरकार को जनजातीय इलाकों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि नक्सली विकास के अभाव का फायदा उठाते हैं।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
राज्यसभा में अमरनाथ यात्रा से जुड़े मुद्दे की गम्भीरता भी देखने को मिली। भाजपा ने मांग की कि केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा की समय सीमा बढ़ाए और तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में वृद्धि करे।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने सरकार पर इन वर्षो के दौरान यात्रा अवधि घटाने का आरोप लगाया।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
जेटली ने कहा, "हर वर्ष यात्रा की अवधि घटाई जा रही है, और तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।"
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में अमरनाथ यात्रा चार महीने की थी। उन्होंने कहा, "2009 में यह 60 दिनों की थी, 2010 में यह 55 दिनों की हुई, 2011 में इसे 45 दिनों का किया गया और 2012 में 39 दिनों की यात्रा हुई।"
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हालांकि कहा कि यात्रा की शुरुआत बर्फ पिघलने के समय पर निर्भर करती है और यह रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
शिंदे ने कहा, "यात्रा की शुरुआत उस तारीख से तय होती है, जब यात्रा मार्ग से बर्फ साफ कर लिया जाता है। यात्रा मार्ग जून
अंत तक या जुलाई के पहले दिन तक साफ कर लिया जाता है। इस वर्ष यह 25 जून को शुरू हुई। इन प्रत्येक अवसरों पर.. यात्रा रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है।"
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
जेटली ने हालांकि कहा कि हिमालय में 22,000 फुट की ऊंचाई पर होने वाली एक अन्य तीर्थयात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा अमरनाथ यात्रा से बहुत पहले ही शुरू होती है। जबकि अमरनाथ यात्रा लगभग 13,000 फुट की ही ऊंचाई पर है।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
जेटली ने कहा, "आधिकारिक तौर पर आपने यह तर्क दिया है कि अमरनाथ यात्रा जुलाई से पहले नहीं शुरू हो सकती।"
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
जेटली ने अमरनाथ यात्रियों को कथितरूप से पर्याप्त सुविधाएं न मुहैया कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि प्रशासन राज्य सरकार से जमीन पट्टे पर लेकर स्थायी सुविधाएं तैयार करे।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों जिसमें की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें देशमुख के निधन की सूचना आई। राज्यसभा में उस वक्त भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने से सम्बंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता तारिक अनवर उस समय कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।टिप्पणियां
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
लोकसभा में पीठासीन अधिकारी पी. सी. चाको ने देशमुख के निधन की सूचना दी, जो कांग्रेस के सांसद हैं। सदन में उस वक्त नक्सल हिंसा पर चर्चा हो रही थी।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था।
देशमुख (67) का चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका गुर्दा एवं लीवर प्रत्यारोपण किया जाना था। | संक्षिप्त पाठ: संसद में मंगलवार को असम व मुम्बई हिंसा और काले धन को लेकर जहां हंगामा हुआ और वहीं नक्सल समस्या पर चर्चा भी हुई और अमरनाथ यात्रा का मुद्दा भी गम्भीरता से उठा। लेकिन दिन की कार्यवाही का समापन उस दुखद समाचार से हुआ जिसमें केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत | 30 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: एयर इंडिया में जारी गतिरोध को दूर करने के प्रयास के तहत शुक्रवार को नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने पहली बार हड़ताली पायलटों से मुलाकात की। मंत्री ने पायलटों को आश्वस्त किया कि यदि वे काम पर लौटते हैं, तो उनको किसी भी तरीके से परेशान नहीं किया जाएगा और साथ ही उनकी समस्याओं पर भी विचार किया जाएगा। एयर इंडिया पायलटों की 18 दिन पुरानी हड़ताल के दौरान पहली बार इंडियन पायलट गिल्ड (आईपीजी) से संबद्ध पांच पायलटों ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुख्यालय में अजित सिंह के साथ मुलाकात की। मंत्री और पायलटों के बीच बैठक डेढ़ घंटे चली।
बैठक के अंत में एयर इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रोहित नंदन को भी इसमें शामिल होने के लिए बुलाया गया। बैठक के बाद सिंह ने संवाददाताओं से कहा, हम सरकार के इस रुख पर कायम हैं कि यह हड़ताल गैर-कानूनी है। इससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई है। एयर इंडिया को काफी नुकसान झेलना पड़ा है, ऐसे में उन्हें तत्काल काम पर लौटना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या पायलट काम पर लौटने को तैयार हैं, सिंह ने कहा, यह आप उनसे पूछिए। सिंह ने बताया कि उन्होंने संसद में कहा था कि हम प्रतिशोधी कदम नहीं उठाएंगे। उनकी समस्याओं के बारे में जानते हैं। उनमें काफी युवा लोग हैं। वे चिंतित हैं। हम भी इस बात को जानते हैं और चाहते हैं कि वे वापस लौटें। पर इसका निर्णय उन्हें खुद करना है।
बैठक के अंत में एयर इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रोहित नंदन को भी इसमें शामिल होने के लिए बुलाया गया। बैठक के बाद सिंह ने संवाददाताओं से कहा, हम सरकार के इस रुख पर कायम हैं कि यह हड़ताल गैर-कानूनी है। इससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई है। एयर इंडिया को काफी नुकसान झेलना पड़ा है, ऐसे में उन्हें तत्काल काम पर लौटना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या पायलट काम पर लौटने को तैयार हैं, सिंह ने कहा, यह आप उनसे पूछिए। सिंह ने बताया कि उन्होंने संसद में कहा था कि हम प्रतिशोधी कदम नहीं उठाएंगे। उनकी समस्याओं के बारे में जानते हैं। उनमें काफी युवा लोग हैं। वे चिंतित हैं। हम भी इस बात को जानते हैं और चाहते हैं कि वे वापस लौटें। पर इसका निर्णय उन्हें खुद करना है। | यह एक सारांश है: मंत्री ने पायलटों को आश्वस्त किया कि यदि वे काम पर लौटते हैं, तो उनको किसी भी तरीके से परेशान नहीं किया जाएगा और साथ ही उनकी समस्याओं पर भी विचार किया जाएगा। | 9 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: शेयर बाजार ने नववर्ष का स्वागत मजबूती के साथ किया। निचले स्तर पर उपलब्ध दिग्गज शेयरों में लिवाली से 2012 के प्रथम कारोबारी सत्र में बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 63 अंक, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 12.45 अंक चढ़कर बंद हुआ।
पिछले चार कारोबारी सत्रों में 515 अंक गंवा चुका सेंसेक्स सोमवार को 63 अंक की बढ़त के साथ 15,517.92 अंक पर बंद हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 2.03 प्रतिशत और इंफोसिस का शेयर 1.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स में दोनों शेयरों का करीब 20 प्रतिशत भारांश है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 4,645.95 अंक और 4,588.05 अंक के दायरे में घूमने के बाद 12.45 अंक की मामूली बढ़त के साथ 4,636.75 अंक पर बंद हुआ। ब्रोकरों ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों में पात्र विदेशी निवेशकों को सीधा प्रवेश की अनुमति देने के सरकार के निर्णय से निवेशक उत्साहित नहीं थे। वहीं, दूसरी ओर, क्रिसमस और नववर्ष की छुट्टियों के चलते ज्यादातर विदेशी बाजार बंद होने से निवेशक दिशाहीन रहे। | संक्षिप्त पाठ: दिग्गज शेयरों में लिवाली से 2012 के प्रथम कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 63 अंक, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 12.45 अंक चढ़कर बंद हुआ। | 22 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संबंधों में सभी समस्याओं के लिए मुशर्रफ की सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के बीच जल्दी ही आरंभ होने वाली वार्ता में उसके साथ नए संबंध जोड़ने से पहले पाकिस्तान अपनी संप्रभुता की गारंटी चाहेगा। पेशावर में संघीय कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में गिलानी ने कहा, मैं अपने देश की संप्रभुता की गारंटी चाहता हूं और भविष्य में ऐसा (नाटो हमलों जैसा) कोई एकतरफा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। गिलानी ने 26 नवंबर को नाटों के हमलों में कम से कम 24 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत के बाद नाटो और अमेरिका के साथ अपने संबंधों को चुस्त-दुरूस्त करने के लिए विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा पर संसदीय समिति के सुझाव मांगे हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों में पाकिस्तान राजदूतों और संसदीय समितियों की ओर से दिए गए सुझावों पर दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में बहस की जाएगी। हालांकि गिलानी ने कहा कि उनकी सरकार ने अमेरिका से यह कहने का निर्णय लिया है कि बस अब बहुत हो गया और पाकिस्तान की संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अमेरिका के साथ रिश्तों में आए तनाव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, हम अभी निराश हैं। जब वार्ता आरंभ होगी तब इन मुद्दों पर विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही आतंकवादियों से बातचीत के बारे में गिलानी ने कहा कि कोई आतंकवादी नहीं हैं और जो हैं उसके साथ वह या उनकी सरकार कोई बातचीत नहीं करेगी। | संक्षिप्त सारांश: गिलानी ने कहा कि अमेरिका के बीच जल्दी ही आरंभ होने वाली वार्ता में उसके साथ नए संबंध जोड़ने से पहले पाकिस्तान अपनी संप्रभुता की गारंटी चाहेगा। | 0 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: पिछले एक सप्ताह से जुहू बीच पर फंसे मालवाहक पोत एम विजडम को बचाने के प्रयास तीसरे दिन भी शुरू नहीं हो सके। अधिकारियों का कहना है कि अभियान में कम से कम एक पखवाड़े की देरी होगी। जहाजरानी मामलों के महानिदेशक एसबी अग्निहोत्री ने बताया, आज का बचाव अभियान बंद कर दिया गया है और दोबारा प्रयास शुरू करने के लिए हमें पखवाड़े भर तक इंतजार करना होगा। अधिकारियों के अनुसार, बचाव कार्य में लगे पोत के इंजन में परेशानी आने के कारण बचाव अभियान में बाधा आई है। इसके चलते अगला ज्वार भाटा आने तक बचाव अभियान शुरू करने के लिए एक पखवाड़े तक इंतजार करना होगा। ज्वार भाटा आने पर पोत को फिर से गहरे पानी में ले जाने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों ने इसके साथ ही इस आशंका से भी इनकार किया कि पोत से किसी प्रकार का तेल या माल संबंधी प्रदूषण फैलने का कोई खतरा है। अधिकारियों ने जनता से भी अपील की है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए पोत से दूर रहें तथा बचावकर्मियों को अपने उपकरण तथा अन्य साजो सामान बिना किसी बाधा के निकालने दें। इस पोत को कोलंबो से गुजरात के पोतभंजक अलंग यार्ड में भेजा जा रहा था कि इसकी लंगर नौका के तार टूटने के कारण यह बहकर किनारे पर आ गया। शुरुआत में आशंका थी कि यह बांद्रा वर्ली सीलिंग से टकरा जाएगा, लेकिन बाद में यह उत्तर की ओर जुहू बीच पर जाकर अटक गया। इस पर किसी प्रकार का माल या ईंधन नहीं है। | संक्षिप्त पाठ: जुहू बीच पर फंसे मालवाहक पोत एम विजडम को बचाने के प्रयास तीसरे दिन भी शुरू नहीं हो सके। अब अभियान में एक पखवाड़े की देरी होगी। | 13 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: नोवाक जोकोविच ने बेहतरीन खेल का नजारा पेश करते हुए एंडी मर्रे का 75 साल बाद ग्रैंडस्लैम विजेता ब्रिटिश खिलाड़ी बनने का सपना तोड़कर ऑस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस टूर्नामेंट में पुरुष एकल का खिताब जीता। दुनिया के नंबर तीन सर्बियाई जोकोविच ने खिताबी मुकाबले में मर्रे को लगातार सेट में 6-4, 6-2, 6-3 से हराकर अपना दूसरा ग्रैंडस्लैम खिताब हासिल किया। इससे पहले उन्होंने 2008 में ऑस्ट्रेलियाई ओपन के रूप में ही पहला ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट जीता था। यह पिछले तीन साल में पहला ग्रैंडस्लैम फाइनल था, जिसमें रोजर फेडरर या राफेल नडाल में से कोई नहीं था। जोकोविच ने पांचवीं वरीय मर्रे पर शुरू से दबदबा बनाए रखा और आखिर में जीत की खुशी में अपनी हाफपैंट निकाल दी। मर्रे इस हार से बेहद निराश थे, क्योंकि तीसरी बार वह किसी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के फाइनल में पराजित हुए हैं। इससे पहले भी दोनों अवसरों पर लगातार सेट में हार गए थे। ब्रिटेन के लिए फ्रेड पैरी ने आखिरी बार 1936 में ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट जीता था और मर्रे की हार से ब्रिटिशवासियों को फिर से निराशा ही हाथ लगी। मर्रे हालांकि मैच में किसी भी समय खिताब जीतने की स्थिति में नहीं दिखे। जोकोविच ने उन पर शुरू से दबाव बना दिया और 2 घंटे 39 मिनट तक चले मैच में आसान जीत दर्ज की। यह जोकोविच का लगातार दूसरा ग्रैंडस्लैम फाइनल था। वह पिछले साल अमेरिकी ओपन के फाइनल में नडाल से हार गए थे। दिलचस्प बात यह है कि 2007 में भी जब जोकोविच अमेरिकी ओपन में उप विजेता रहे, तो उन्होंने इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई ओपन का खिताब जीता था। तब उन्होंने फ्रांसीसी जो विल्फ्रेड सोंगा को हराया था। जोकोविच और मर्रे जब से जूनियर सर्किट में खेलते थे, तभी से अच्छे मित्र हैं। यह ग्रैंडस्लैम में उनका पहला मुकाबला था। सर्बियाई खिलाड़ी ने कहा, हम लंबे समय से एक-दूसरे को जानते हैं और उसके खिलाफ खेलना वास्तव में मुश्किल था। आशा है कि आपको (मर्रे) ग्रैंडस्लैम जीतने का अगला मौका मिलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि आपके पास प्रतिभा है और आप यह मुकाम जरूर हासिल करोगे। मर्रे ने बाद में कहा कि जोकोविच ने बेहतरीन खेल दिखाया और वह जीत का हकदार था। उन्होंने कहा, पिछले साल की तुलना में मेरा खेल अच्छा था, लेकिन आज नोवाक ने अविश्वसनीय रूप से बेहतरीन खेल का नजारा पेश किया। यह हार बहुत निराशाजनक है, लेकिन आपको इसे स्वीकार करना होगा। | यहाँ एक सारांश है:जोकोविच ने एंडी मर्रे का 75 साल बाद ग्रैंडस्लैम विजेता ब्रिटिश खिलाड़ी बनने का सपना तोड़कर ऑस्ट्रेलियाई ओपन में पुरुष एकल का खिताब जीता। | 17 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: जेल में बंद अपराधियों द्वारा लूट, हत्या और अपराध की किसी वारदात की साजिश रचने के किस्से तो आपने कई बार सुने होंगे, लेकिन क्या आपने किसी ऐसी वारदात के बारे में सुना है जिसको जेल में बंद किसी अपराधी ने खुद अंजाम दिया हो. वारदात का एक ऐसा खुलासा जिसको सुनकर आप न केवल हैरान रह जाएंगे, बल्कि पुलिसिया व्यवस्था पर आपका भरोसा उठ जाएगा. यह दिनदहाड़े देश की अब तक की सबसे बड़ी लूट की वारदात है.
बिहार के हाजीपुर में अब तक की देश की सबसे बड़ी लूट के मामले में जो खुलासा हुआ है वह बिहार पुलिस की उस लचर व्यवस्था की हकीकत को उजागर करने वाला है जिसकी वजह बिहार की सुशासन वाली छवि टूटती दिख रही है.
हाजीपुर में 23 नवंबर 2019 को दोपहर 12 बजे सबसे व्यस्त बाजार सिनेमा रोड के जगदम्बा स्टेट अपार्टमेंट में गोल्ड लोन कंपनी मुथूट फाइनेंस के आफिस में ग्राहक की शक्ल में एक लड़का पहुंचा. आफिस का दरवाजा खोलने से पहले सिक्युरिटी में तैनात गार्ड ने लड़के की पूरी तलाशी ली. जांच के बाद गार्ड ने लड़के को अंदर जाने की इजाजत दी. आफिस के अंदर मौजूद गार्ड ने गेट खोला लेकिन लुटेरा आफिस में दाखिल होने के बजाय गेट पर इस तरह खड़ा हो गया कि गार्ड गेट बंद नहीं कर सके. तभी धड़ाधड़ छह लुटेरे दौड़ते हुए पहुंचे. उन्होंने गार्ड को पकड़ लिया और फाइनेंस आफिस के अंदर दाखिल हो गए. सभी के हाथों में पिस्तौलें थीं. आफिस में मौजूद एक अन्य गार्ड, कंपनी के कर्मचारियों और ग्राहकों को पिस्तौल की नोक पर लेने के बाद बेखौफ लुटेरों ने गोल्ड फर्म के स्ट्रॉन्ग रूम से सोने के पैकेट निकाले और बैगों में भरे. महज 20 मिनट के अंदर लुटेरे 55 किलो सोना लेकर निकल भागे.
मुथूट फाइनेंस के आफिस से सोना लेकर भागने के लिए भी लुटेरों ने शातिराना तरीका अपनाया. वे लूट के बाद एक साथ नहीं भागे बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में एक-एक कर निकले, ताकि भीड़भाड़ वाले इस बाजार में किसी को लूट जैसी किसी बात का शक न हो. एक लुटेरा सर पर बोरे में लूट का सोना लेकर इस तरह निकलता दिखा मानो कोई आम आदमी हो. लूट की वारदात को बैंक के अंदर पहुंचे सात लुटेरों ने अंजाम दिया तो बाहर लुटेरों के कई साथी सीसीटीवी कैमरों की जद में आए. यह लुटेरों के साथियों की बैकअप टीम थी. लूट की इस वारदात को करीब 15 से 20 अपराधियों ने अंजाम दिया था.
दिनदहाड़े लूट की इस वारदात ने पूरे बिहार पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया था. आनन फानन में लूट की इस वारदात की जांच के लिए अब तक की सबसे बड़ी एसआईटी टीम बनाई गई. बिहार पुलिस के बड़े अधिकारियों की टीम हाजीपुर में कैम्प कर वारदात की जड़ों को तलाशने में जुट गई.
जांच शुरू हुई लेकिन बजाए लुटेरों का खुलासा होने के पुलिस की ही कलई खुलनी शुरू हो गई. पुलिस की जांच ने ही पुलिस की नाकामियों को उजागर करना शुरू कर दिया. खुलासा हुआ कि पुलिस की लापरवाही ने ही इस बड़ी लूट को अंजाम तक पहुंचने का रास्ता बनाया था.
इस वारदात में किसी भी लुटेरे ने अपना चेहरा छुपाने की कोशिश नहीं की थी. सीसीटीवी में लुटेरों के साफ़ साफ़ चेहरे दिख रहे थे. सो पुलिस को लुटेरों की पहचान करने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई. अगले ही दिन पुलिस ने 6 लुटेरों का पोस्टर जारी कर दिया. सीसीटीवी की तस्वीरों से पता चला कि बैंक के अंदर जिस लुटेरे ने लूट को लीड किया था वह वैशाली जिले का ही दुर्दांत मुकुल राय उर्फ़ प्रियरंजन है. लूट के दौरान मिली तस्वीरों से सात लुटेरों में से जिन तीन लुटेरों की पहचान कर ली गई थी, उसमें टीम लीडर मुकुल के अलावा, सोना लूट के मामले में पहले से फरार वैशाली जिले का ही वीरेंदर शर्मा और समस्तीपुर का कुख्यात विकाश झा निकला. वीरेंदर और विकास झा फरवरी 2019 में मुजफ्फरपुर में 32 किलो सोने की लूट के मामले में शामिल थे और पुलिस की पकड़ से बाहर थे. महज 17 साल का नाबालिग मुकुल उर्फ़ प्रियरंजन इलाके में दर्जनों आपराधिक मामलों की वजह से कुख्यात था.
पुलिस ने लुटेरों पर इनाम का ऐलान कर दिया. लेकिन पुलिस ने जैसे ही जांच आगे बढ़ाई, एक ऐसा खुलासा हुआ जिस पर खुद पुलिस को यकीन कर पाना मुश्किल था. जिस मुकुल राय उर्फ़ प्रियरंजन को लूट का टीम लीडर बताकर पुलिस ने पोस्टर जारी किया था वह जेल के अंदर था. जिस लुटेरे को पुलिस ढूंढ रही थी, पूरा पुलिस महकमा दिन-रात एक किए था वह तीन महीने से मुजफ्फरपुर के रिमांड होम में बंद था.
रिमांड होम में बंद इस शातिर लुटेरे की लूट के दौरान की तस्वीर सामने आने के बाद पुलिस भागी भागी मुजफ्फरपुर पहुंची लेकिन यहां पुलिस के हाथ जो जानकारी लगी उससे बिहार पुलिस के होश उड़ गए. पता चला कि लूट के ठीक 17 दिन पहले शातिर मुकुल को उसके साथी छुड़ा ले गए थे. खुलासा हुआ कि 6 नवंबर को ही अपराध के एक मामले में पेशी के लिए पुलिस मुकुल को हाजीपुर कोर्ट लेकर पहुंची थी. हाजीपुर से मुजफ्फरपुर लौटने के दौरान मुकुल के चार लुटेरे साथी बीच सड़क पर पुलिस की गाड़ी रोककर पिस्टल की नोक पर मुकुल को छुड़ा ले गए थे. पुलिस के सामने बड़ा सवाल यह था कि आखिर कैसे फरार होने के बावजूद किसी को भी मुकुल के फरार होने की जानकारी नहीं थी. क्यों इतने दुर्दांत अपराधी के फरार हो जाने के बाद भी कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई थी. जिस लुटेरे की तस्वीर का पोस्टर बनवाकर बिहार पुलिस लोगों को इनाम देने की घोषणा कर रही थी, वह लूट के दौरान पुलिस की फाइलों में सलाखों के पीछे था.
दरअसल लूट की इस बड़ी वारदात की प्लानिंग के तहत मुकुल के साथियों ने लूट के करीब 15 दिन पहले मुकुल को पुलिस के चंगुल से निकालने की प्लानिंग की. यह प्लान सफल रहा. रिमांड होम के चार जवान जो मुकुल को पेशी से लेकर मुजफ्फरपुर रिमांड होम लौट रहे थे, कैदी मुकुल के फरार होने के बाद चुपचाप मुजफ्फरपुर लौट गए. मुजफ्फरपुर रिमांड होम के सुप्रिंटेंडेंट ने मुकुल के फरार होने को लेकर वैशाली पुलिस को एक चिट्ठी लिख डाक में डाल दी. डाक जब तक वैशाली पुलिस को मिलती और मुकुल की फरारी की जानकारी मिलती तब तक मुकुल और उसके साथियों ने इस लूट की वारदात को अंजाम दे दिया था.
इस खुलासे के बाद सकते में आई बिहार पुलिस ने लूट के इस मास्टरमाइंड के फरार होने के 20 दिनों बाद और लूट की वारदात को अंजाम देने के 3 दिन बाद उसके फरार होने की एफआईआर दर्ज कराई.
इस लूट कांड ने बिहार पुलिस की पूरी कलई खोल दी. दूसरे लुटेरे वीरेंदर शर्मा का पोस्टर पुलिस ने जारी किया था. वह पहले से मुजफ्फरपुर में हुए सोना लूट मामले में आरोपी है और पुलिस शायद उसकी खोज खबर लेना भूल गई थी. दूसरी वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस को उसकी पहली वारदात की याद आई और मुजफ्फरपुर पुलिस लुटेरे वीरेंदर शर्मा के घर 9 महीने पहले के लूट मामले का इश्तेहार लेकर पहुंची. यानी पुलिस लुटेरों से महीनों पीछे थी और लुटेरे एक के बाद एक लूट की वारदातें करके पुलिस को खुली चुनौती देते दिख रहे हैं.
इसी मामले में एक अन्य लुटेरे की पहचान किशलय के तौर पर हुई, जिसने इस लूट से ठीक नौ महीने पहले मुजफ्फरपुर में 32 किलो सोना लूट था. आरोपी किशलय मुजफ्फरपुर भगवानपुर के अपने मकान जमीन को बेचकर अपने परिवार के साथ भाग निकला. | यह एक सारांश है: हाजीपुर में 23 नवंबर को दोपहर में 12 बजे हुई थी वारदात
लुटेरे मुथूट फाइनेंस से 55 किलोग्राम सोना लूटकर फरार
सीसीटीवी में जेल में बंद लुटेरा दिखा तो पुलिस के होश उड़ गए | 24 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: शनिवार यानि अप्रैल फूल के दिन पाकिस्तान के पूर्व गृहमंत्री रहमान मलिक एक वेबसाइट की उस फर्ज़ी खबर के झांसे में आ गए जिसे अप्रैल फूल प्रैंक की तरह छापा गया था. एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने 'अप्रैल फूल' के मौके पर एक खबर छापी जिसमें लिखा गया कि पाकिस्तान सरकार ने तय किया है कि इस्लामाबाद के एयरपोर्ट का नाम बदलकर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नाम पर रखा जाएगा.टिप्पणियां
इस प्रैंक के कई घंटों बाद सिनेटर रहमान मिलक की एक गंभीर प्रतिक्रिया आई जिसमें उन्होंने एयरपोर्ट के नए नामकरण पर 'चिंता' जताई. उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट का नाम पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो पर रखा गया है और अगर इसे बदला गया तो उनकी पार्टी इस मुद्दे को बहुत दूर तक ले जाएगी. उन्होंने सरकार को चेतावनी भी दे डाली कि वह एयरपोर्ट का नाम बदलने के बारे में सोचे भी नहीं.
इस 'अप्रैल फूल' के मज़ाक से अनजान मलिक ने मीडिया को एक बयान जारी कर दिया जिसमें उन्होंने लिखा कि 'सरकार को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जिससे जनता की भावनाएं आहत हो जाएं. पहले भी ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब राष्ट्रीय हीरो के नाम से सजी संस्थाओं को फिर से नामकरण किया गया हो.' एकस्प्रेस ट्रिब्यून ने अपनी वेबसाइट में साफ किया है कि बार बार संपर्क करने पर भी इस खबर को लेकर वह मलिक से संपर्क नहीं कर पाए हैं.
इस प्रैंक के कई घंटों बाद सिनेटर रहमान मिलक की एक गंभीर प्रतिक्रिया आई जिसमें उन्होंने एयरपोर्ट के नए नामकरण पर 'चिंता' जताई. उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट का नाम पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो पर रखा गया है और अगर इसे बदला गया तो उनकी पार्टी इस मुद्दे को बहुत दूर तक ले जाएगी. उन्होंने सरकार को चेतावनी भी दे डाली कि वह एयरपोर्ट का नाम बदलने के बारे में सोचे भी नहीं.
इस 'अप्रैल फूल' के मज़ाक से अनजान मलिक ने मीडिया को एक बयान जारी कर दिया जिसमें उन्होंने लिखा कि 'सरकार को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जिससे जनता की भावनाएं आहत हो जाएं. पहले भी ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब राष्ट्रीय हीरो के नाम से सजी संस्थाओं को फिर से नामकरण किया गया हो.' एकस्प्रेस ट्रिब्यून ने अपनी वेबसाइट में साफ किया है कि बार बार संपर्क करने पर भी इस खबर को लेकर वह मलिक से संपर्क नहीं कर पाए हैं.
इस 'अप्रैल फूल' के मज़ाक से अनजान मलिक ने मीडिया को एक बयान जारी कर दिया जिसमें उन्होंने लिखा कि 'सरकार को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जिससे जनता की भावनाएं आहत हो जाएं. पहले भी ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब राष्ट्रीय हीरो के नाम से सजी संस्थाओं को फिर से नामकरण किया गया हो.' एकस्प्रेस ट्रिब्यून ने अपनी वेबसाइट में साफ किया है कि बार बार संपर्क करने पर भी इस खबर को लेकर वह मलिक से संपर्क नहीं कर पाए हैं. | सारांश: पाकिस्तान के पूर्व गृहमंत्री रहमान मलिक अप्रैल फूल के शिकार बने
एक न्यूज़ वेबसाइट पर छपी फर्ज़ी खबर पर विश्वास किया
प्रैंक से अनजान मलिक ने मीडिया को बयान भी जारी किया | 5 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: बंबई शेयर बाजार में लगातार छठे दिन तेजी दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमत घटने के बाद मुद्रास्फीति को लेकर आशंका कम होने तथा संस्थागत निवेशकों की ओर से पूंजी प्रवाह बढ़ने से बंबई शेयर बाजार का सूचकांक 178 अंक चढ़कर 19,000 के स्तर को पार कर गया। नौ सप्ताह के बाद सेंसेक्स 19,000 अंक पर पहुंचा है। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 177.66 अंक की तेजी के साथ 19,120.80 अंक पर बंद हुआ। यह लगातार छठा सत्र है जब सेंसेक्स में तेजी दर्ज की गई है। पिछले पांच सत्रों में इसमें 1,100 अंक की तेजी दर्ज की गई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 49.10 अंक चढ़कर 5,736.35 अंक पर बंद हुआ। एक समय यह 5,770.35 अंक तक चला गया था। लीबिया में विद्रोहियों के मुअम्मर गद्दाफी के जन्म स्थान तक पहुंचने की खबर से न्यूयार्क में कच्चे तेल कीमत नीचे आई है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि मसले का जल्दी हल निकल आएगा। कच्चे तेल की कीमत 0.8 प्रतिशत घटकर 103.18 डालर प्रति बैरल हो गई। कारोबारियों के मुताबिक तेल की कीमत में लगातार चौथे दिन गिरावट से मुद्रास्फीति को लेकर आशंका कम हुई है। इससे बाजार धारणा पर असर पड़ा है। सर्वाधिक वृद्धि वाहन सूचकांक में दर्ज की गई। इस खंड में मारूति सुजुकी (3.12 प्रतिशत), टाटा मोटर्स (1.55 प्रतिशत), हीरो होंडा मोटर्स (3.02 प्रतिशत) के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। सेंसेक्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद सबसे अधिक भारांश रखने वाली इंफोसिस टेक्नोलॉजीज का शेयर 32.50 प्रतिशत चढ़कर 3,172.05 रुपये पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश से बाजार में तेजी आई है। पूंजी प्रवाह इतना अधिक रहा कि एशियाई और यूरोपीय बाजारों के कमजोर रुख के की खबरों के बावजूद स्थानीय शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक ऊपर बने रहे। | यहाँ एक सारांश है:30 शेयरों वाला सेंसेक्स 177.66 अंक की तेजी के साथ 19,120.80 अंक पर बंद हुआ। यह लगातार छठा सत्र है जब सेंसेक्स में तेजी दर्ज की गई है। | 4 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजक और आईपीएल पुणे वारियर्स फ्रेंचाइजी के मालिक के तौर पर सहारा समूह के पीछे हटने से स्तब्ध बीसीसीआई ने कहा कि वह इस कारपोरेट समूह से बातचीत करके मसलों का हल निकालने को तैयार है।
सहारा ने दो दिन पहले बीसीसीआई से पूरी तरह से नाता तोड़ने का ऐलान किया था। बोर्ड अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने कहा कि वह इस मसले पर सहारा समूह से बातचीत को तैयार हैं।
आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने भी कहा कि मामला सुलझाने के लिए वह बातचीत को तैयार हैं।टिप्पणियां
श्रीनिवासन ने कहा,‘हम बातचीत करके मसले का हल निकालने को तैयार हैं। हमें इसमें कोई ऐतराज नहीं है। सहारा ने जो किया, हम उसका सम्मान करते हैं। उन्हें आईपीएल से वह नहीं मिला होगा जो वह चाहते थे। हमारे आपसी संबंध अच्छे रहे हैं लिहाजा हम मसला सुलझाना चाहते हैं।’ यह पूछने पर कि क्या वह बातचीत के जरिये समाधान का पैगाम दे रहे हैं, श्रीनिवासन ने कहा,‘निजी तौर पर हां। मैं बातचीत को तैयार हूं और बीसीसीआई भी। हम समझते हैं कि उनकी कुछ शिकायतें थी लेकिन अचानक हटने का कोई कारण नहीं था।’
श्रीनिवासन ने कहा कि बीसीसीआई और सहारा के संबंधों में उतार-चढ़ाव आए लेकिन उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि यदि ऐसी कोई बैठक होती है तो किन मसलों पर बात होगी। उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा,‘संबंधों में उतार-चढ़ाव आए हैं लेकिन उम्मीद है कि जब बैठक होगी तो मसले सुलझ जाएंगे। सहारा के साथ बातचीत की संभावना है। सभी मसलों पर बात होगी लेकिन अभी उन मसलों के बारे में कहना जल्दबाजी होगी।’
सहारा ने दो दिन पहले बीसीसीआई से पूरी तरह से नाता तोड़ने का ऐलान किया था। बोर्ड अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने कहा कि वह इस मसले पर सहारा समूह से बातचीत को तैयार हैं।
आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने भी कहा कि मामला सुलझाने के लिए वह बातचीत को तैयार हैं।टिप्पणियां
श्रीनिवासन ने कहा,‘हम बातचीत करके मसले का हल निकालने को तैयार हैं। हमें इसमें कोई ऐतराज नहीं है। सहारा ने जो किया, हम उसका सम्मान करते हैं। उन्हें आईपीएल से वह नहीं मिला होगा जो वह चाहते थे। हमारे आपसी संबंध अच्छे रहे हैं लिहाजा हम मसला सुलझाना चाहते हैं।’ यह पूछने पर कि क्या वह बातचीत के जरिये समाधान का पैगाम दे रहे हैं, श्रीनिवासन ने कहा,‘निजी तौर पर हां। मैं बातचीत को तैयार हूं और बीसीसीआई भी। हम समझते हैं कि उनकी कुछ शिकायतें थी लेकिन अचानक हटने का कोई कारण नहीं था।’
श्रीनिवासन ने कहा कि बीसीसीआई और सहारा के संबंधों में उतार-चढ़ाव आए लेकिन उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि यदि ऐसी कोई बैठक होती है तो किन मसलों पर बात होगी। उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा,‘संबंधों में उतार-चढ़ाव आए हैं लेकिन उम्मीद है कि जब बैठक होगी तो मसले सुलझ जाएंगे। सहारा के साथ बातचीत की संभावना है। सभी मसलों पर बात होगी लेकिन अभी उन मसलों के बारे में कहना जल्दबाजी होगी।’
आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने भी कहा कि मामला सुलझाने के लिए वह बातचीत को तैयार हैं।टिप्पणियां
श्रीनिवासन ने कहा,‘हम बातचीत करके मसले का हल निकालने को तैयार हैं। हमें इसमें कोई ऐतराज नहीं है। सहारा ने जो किया, हम उसका सम्मान करते हैं। उन्हें आईपीएल से वह नहीं मिला होगा जो वह चाहते थे। हमारे आपसी संबंध अच्छे रहे हैं लिहाजा हम मसला सुलझाना चाहते हैं।’ यह पूछने पर कि क्या वह बातचीत के जरिये समाधान का पैगाम दे रहे हैं, श्रीनिवासन ने कहा,‘निजी तौर पर हां। मैं बातचीत को तैयार हूं और बीसीसीआई भी। हम समझते हैं कि उनकी कुछ शिकायतें थी लेकिन अचानक हटने का कोई कारण नहीं था।’
श्रीनिवासन ने कहा कि बीसीसीआई और सहारा के संबंधों में उतार-चढ़ाव आए लेकिन उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि यदि ऐसी कोई बैठक होती है तो किन मसलों पर बात होगी। उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा,‘संबंधों में उतार-चढ़ाव आए हैं लेकिन उम्मीद है कि जब बैठक होगी तो मसले सुलझ जाएंगे। सहारा के साथ बातचीत की संभावना है। सभी मसलों पर बात होगी लेकिन अभी उन मसलों के बारे में कहना जल्दबाजी होगी।’
श्रीनिवासन ने कहा,‘हम बातचीत करके मसले का हल निकालने को तैयार हैं। हमें इसमें कोई ऐतराज नहीं है। सहारा ने जो किया, हम उसका सम्मान करते हैं। उन्हें आईपीएल से वह नहीं मिला होगा जो वह चाहते थे। हमारे आपसी संबंध अच्छे रहे हैं लिहाजा हम मसला सुलझाना चाहते हैं।’ यह पूछने पर कि क्या वह बातचीत के जरिये समाधान का पैगाम दे रहे हैं, श्रीनिवासन ने कहा,‘निजी तौर पर हां। मैं बातचीत को तैयार हूं और बीसीसीआई भी। हम समझते हैं कि उनकी कुछ शिकायतें थी लेकिन अचानक हटने का कोई कारण नहीं था।’
श्रीनिवासन ने कहा कि बीसीसीआई और सहारा के संबंधों में उतार-चढ़ाव आए लेकिन उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि यदि ऐसी कोई बैठक होती है तो किन मसलों पर बात होगी। उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा,‘संबंधों में उतार-चढ़ाव आए हैं लेकिन उम्मीद है कि जब बैठक होगी तो मसले सुलझ जाएंगे। सहारा के साथ बातचीत की संभावना है। सभी मसलों पर बात होगी लेकिन अभी उन मसलों के बारे में कहना जल्दबाजी होगी।’
श्रीनिवासन ने कहा कि बीसीसीआई और सहारा के संबंधों में उतार-चढ़ाव आए लेकिन उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि यदि ऐसी कोई बैठक होती है तो किन मसलों पर बात होगी। उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा,‘संबंधों में उतार-चढ़ाव आए हैं लेकिन उम्मीद है कि जब बैठक होगी तो मसले सुलझ जाएंगे। सहारा के साथ बातचीत की संभावना है। सभी मसलों पर बात होगी लेकिन अभी उन मसलों के बारे में कहना जल्दबाजी होगी।’ | भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजक और आईपीएल पुणे वारियर्स फ्रेंचाइजी के मालिक के तौर पर सहारा समूह के पीछे हटने से स्तब्ध बीसीसीआई ने कहा कि वह इस कारपोरेट समूह से बातचीत करके मसलों का हल निकालने को तैयार है। | 34 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: यूरोप एक बार फिर आर्थिक मंदी की चपेट में आ गया है। साल 2009 के बाद एक बार फिर यूरो जोन के 17 देश मंदी की मार झेल रहे हैं। जुलाई से सितंबर के आंकड़े बता रहे हैं कि यूरोजोन के देशों की अर्थव्यवस्था में लगातार छह महीने गिरावट दर्ज की गई।टिप्पणियां
जर्मनी और फ्रांस में मामूली बढ़त देखी गई है, लेकिन नीदरलैंड, इटली, स्पेन और ऑस्ट्रिया की अर्थव्यवस्था में गिरावट देखी गई है। यूरोप के कई देशों में लाखों मजदूर खर्चों में कटौती के सरकारी फैसलों का भारी विरोध कर रहे हैं।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अर्थशास्त्री पॉल ग्रोव का मानना है कि तीन साल में दूसरी आर्थिक मंदी के लिए यूरोपीय देशों की सरकारें ही जिम्मेदार हैं। इससे पहले 70 आर्थिक जानकारों के एक सर्वे के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि यूरोजोन को 2013 के अंत से पहले आर्थिक मंदी से छुटकारा नहीं मिल पाएगा।
जर्मनी और फ्रांस में मामूली बढ़त देखी गई है, लेकिन नीदरलैंड, इटली, स्पेन और ऑस्ट्रिया की अर्थव्यवस्था में गिरावट देखी गई है। यूरोप के कई देशों में लाखों मजदूर खर्चों में कटौती के सरकारी फैसलों का भारी विरोध कर रहे हैं।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अर्थशास्त्री पॉल ग्रोव का मानना है कि तीन साल में दूसरी आर्थिक मंदी के लिए यूरोपीय देशों की सरकारें ही जिम्मेदार हैं। इससे पहले 70 आर्थिक जानकारों के एक सर्वे के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि यूरोजोन को 2013 के अंत से पहले आर्थिक मंदी से छुटकारा नहीं मिल पाएगा।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अर्थशास्त्री पॉल ग्रोव का मानना है कि तीन साल में दूसरी आर्थिक मंदी के लिए यूरोपीय देशों की सरकारें ही जिम्मेदार हैं। इससे पहले 70 आर्थिक जानकारों के एक सर्वे के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि यूरोजोन को 2013 के अंत से पहले आर्थिक मंदी से छुटकारा नहीं मिल पाएगा। | आंकड़े बता रहे हैं कि यूरोजोन के देशों की अर्थव्यवस्था में लगातार छह महीने गिरावट दर्ज की गई। जर्मनी और फ्रांस में मामूली बढ़त रही, लेकिन नीदरलैंड, इटली, स्पेन और ऑस्ट्रिया की अर्थव्यवस्था में गिरावट देखी गई है। | 34 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: Pati Patni Aur Woh Box Office Collection Day 3: कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan), अनन्या पांडेय (Ananya Panday) और भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) की फिल्म 'पति पत्नी और वो (Pati Patni Aur Woh)' रिलीज हो चुकी है. रिलीज होते ही फिल्म ने दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों का भी दिल जीत लिया. 'पति पत्नी और वो' को लेकर दर्शकों में खूब क्रेज देखने को मिल रहा है. बॉक्स ऑफिस इंडिया की वेबसाइट के मुताबिक कार्तिक आर्यन की 'पति पत्नी और वो' ने बीते रविवार दमदार प्रदर्शन करते हुए 13.5-14 करोड़ रुपये कमाए हैं. इस लिहाज से फिल्म ने तीन दिनों में ही 34 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है.
बॉक्स ऑफिस इंडिया की वेबसाइट के मुताबिक कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) की 'पति पत्नी और वो (Pati Patni Aur Woh)' ने उनकी पिछली फिल्म 'लुका छुपी' की मुकाबले तीन दिनों में ही काफी शानदार प्रदर्शन किया है. इतना ही नहीं, फिल्म ने अपने साथ रिलीज हुई 'पानीपत' (Panipat) को भी कड़ी टक्कर देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. कार्तिक आर्यन, भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) और अनन्या पांडे (Ananya Panday) की पति पत्नी और वो ने पहले दिन 8.75 करोड़, दूसरे दिन 11.50 करोड़ और तीसरे दिन 14 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया.
बता दें कि 'पति पत्नी और वो (Pati Patni Aur Woh)' में कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) एक आज्ञाकारी बेटे और सरकारी नौकर हैं. कार्तिक आर्यन की शादी वेदिका यानी भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) के साथ हो जाती है, और शादी के कुछ समय बाद कार्तिक आर्यन को जिंदगी बेरस लगने लगती है. इसी के साथ कार्तिक आर्यन की जिंदगी में एंट्री होती है जिंदादिल तपस्या यानी अनन्या पांडेय (Ananya Panday) की. कार्तिक अपने जीवन के खोते हुए रोमांच को अनन्या के साथ दोबारा जिंदा करने की कोशिश करते हैं, और इस तरह पति और पत्नी की सिंपल लाइफ में वो की एंट्री हो जाती है. फिल्म में एक्टिंग के मोर्चे पर सभी कलाकार खरे उतरते हैं. कार्तिक आर्यन ने चिंटू त्यागी का किरदार पूरी शिद्दत से निभाया है, हालांकि कहीं थोड़ा सा वह अटकते जरूर हैं, लेकिन डायरेक्टर ने उनके मोनोलॉग स्किल भी फायदा लिया है. | कार्तिक आर्यन और भूमि पेडनेकर की फिल्म ने मचाया धमाल
रविवार को बॉक्स ऑफिस पर दिखा फिल्म का दमदार प्रदर्शन
दर्शकों को भी खूब पसंद आ रही है फिल्म | 1 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: टैक्सी सेवा प्रदाता कंपनी उबर ने अपने उस वरिष्ठ अधिकारी को हटा दिया है, जिसने 2014 में बलात्कार की शिकार हुई 26 वर्षीय एक युवती के मेडिकल रिकॉर्ड को कथित तौर पर हासिल कर लिया था. टेक्नोलॉजी न्यूज वेबसाइट रेकोड की एक रिपोर्ट के अनुसार- कंपनी के एशिया प्रशांत के अध्यक्ष एरिक एलेक्जेंडर को मंगलवार को नौकरी से निकाल दिया गया है ठीक उसी प्रकार से जैसे उन्होंने पिछले कुछ महीनों में अपने 20 कर्मचारियों को उत्पीड़न, भेदभाव और अनुचित व्यवहार के आरोपों पर निकाला था.टिप्पणियां
रिपोर्ट के अनुसार- एलेक्जेंडर ने उस महिला के मेडिकल रिकॉर्ड हासिल कर लिए थे, जिसके साथ उबर चालक शिव कुमार यादव ने दिसंबर 2014 में बलात्कर किया था.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि एलेक्जेंडर ने यह मेडिकल रिपोर्ट उबर के सीईओ ट्राविस क्लानिक और वरिष्ठ उपाध्यक्ष एमिल माइकल को दिखाई थी. इसके बाद कंपनी के अनेक अधिकारियों को या तो ये रिकॉर्ड दिखा गए या उसके बारे में बताया गया था. न्यूज वेबसाइट ने एलेक्जेंडर की इस हरकत के बारे में पूछने के लिए कंपनी से संपर्क किया तो उसे बताया कि एलेक्जेंडर अब उनकी कंपनी में नहीं है.
रिपोर्ट के अनुसार- एलेक्जेंडर ने उस महिला के मेडिकल रिकॉर्ड हासिल कर लिए थे, जिसके साथ उबर चालक शिव कुमार यादव ने दिसंबर 2014 में बलात्कर किया था.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि एलेक्जेंडर ने यह मेडिकल रिपोर्ट उबर के सीईओ ट्राविस क्लानिक और वरिष्ठ उपाध्यक्ष एमिल माइकल को दिखाई थी. इसके बाद कंपनी के अनेक अधिकारियों को या तो ये रिकॉर्ड दिखा गए या उसके बारे में बताया गया था. न्यूज वेबसाइट ने एलेक्जेंडर की इस हरकत के बारे में पूछने के लिए कंपनी से संपर्क किया तो उसे बताया कि एलेक्जेंडर अब उनकी कंपनी में नहीं है.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि एलेक्जेंडर ने यह मेडिकल रिपोर्ट उबर के सीईओ ट्राविस क्लानिक और वरिष्ठ उपाध्यक्ष एमिल माइकल को दिखाई थी. इसके बाद कंपनी के अनेक अधिकारियों को या तो ये रिकॉर्ड दिखा गए या उसके बारे में बताया गया था. न्यूज वेबसाइट ने एलेक्जेंडर की इस हरकत के बारे में पूछने के लिए कंपनी से संपर्क किया तो उसे बताया कि एलेक्जेंडर अब उनकी कंपनी में नहीं है. | बलात्कार पीड़िता के मेडिकल रिकॉर्डस हासिल किए
एरिक ने पिछले महीने 20 कर्मचारियों को निकाला था
एरिक ने अन्य अधिकारियों से भी रिपोर्ट को शेयर किया | 28 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: पूरे देश में डॉक्टर्स पानी की कमी से जूझ रहे हैं. ऐसे में टी एन रविशंकर चेन्नई में जल्द बारिश होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. ब्लूमबर्ग के मुताबिक सुदर हॉस्पिटल के चेयरमैन रविशंकर ने कहा, 'अगर पानी की समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो मरीजों का इलाज करना भगवान की दया पर ही निर्भर करेगा.' रविशंकर 150 बेडों के चार क्लीनिक की चेन वाले सुदर हॉस्पिटल के चेयरमैन हैं. रविशंकर के हॉस्पिटल्स भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं. उन्होंने आशंका जताई है कि जो महंगे पानी के ट्रक वह मंगाते हैं, वह तमिलनाडु में आना बंद हो सकते हैं.
रविशंकर ने बताया, 'अगर यही हालात बने रहेंगे तो हम मरीजों की सेवा नहीं कर सकेंगे.' साउथ एशिया ड्रॉट मॉनीटर के मुताबिक बीते साल बारिश कम होने और इस साल देर से होने की वजह से देश का आधा हिस्सा सूखे से जूझ रहा है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र की तरह तमिलनाडु भी सूखे से पीड़ित है.
देश की राजधानी दिल्ली ने बीते 45 सालों में पहली बार मॉनसून को इतना देर से आता देखा. वाटर सप्लाई का मुद्दा यहां राजनीतिक पार्टियों के बीच मुद्दा भी बना. पानी की समस्या देश के लिए एक गंभीर आर्थिक समस्या बनती जा रही है. बीते साल 2014-15 में मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखा लागत सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 2.54% रहा. बीते साल पर्यावरण मंत्रालय की स्टडी में यह बात सामने आई. बीते 4-5 सालों में भारत में व्यापक रूप से सूखा पड़ा है.
मोदी सरकार ने हेल्थ सेक्टर का विकास करने की बात कही थी. उन्होंने पानी को लेकर एक जागरुकता अभियान भी चलाया था. लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि बनाए गए पैमाने सभी को साफ पानी मुहैया कराना सुनिश्चित करेंगे.
वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट में इंडिया एडप्शन स्ट्रेटजी के प्रमुख अरिवुदई नांबी अप्पादुरई ने कहा, 'लोगों को पता ही नहीं है कि वो कितने बड़े खतरे में हैं. सूखे से प्रभावित इलाकों में जो पानी प्रयोग किया जा रहा है उससे एलर्जी हो रही है और ज्यादा मरीज हॉस्पिटल्स आ रहे हैं.'
तमिलनाडु प्राइवेट वाटर टैंकर लॉरी ओनर एसोसिएशन के अध्यक्ष एन निजालिंगम ने कहा, चेन्नई के लगभग सभी हॉस्पिटल्स 5000 प्राइवेट टैंकर्स पर निर्भर हैं. लेकिन 100 किलोमीटर दूर पानी पहुंचाना बहुत मुश्किल काम है. अगर एक महीने बाद भी समस्या यही बनी रही तो उन लोगों को भी पानी मुहैया कराना बहुत मुश्किल होगा जो इसके लिए ज्यादा पैसे चुकाते हैं.' पानी की कमी होने की वजह से वाटर ट्रक की कीमतें भी बढ़ गई हैं. 12 हजार लीटर वाटर ट्रक की कीमत अप्रैल में 1200 रुपए बढ़ी. अधिकतम बढो़तरी 6 हजार रुपए तक है.
चेन्नई के अपोलो हॉस्पिटल में सर्जन बालादी वेनू गोपाल के मुताबिक, चेन्नई के छोटे नर्सिंग होम और क्लीनिक इस समस्या के सबसे बड़े शिकार हैं. क्योंकि बड़े हॉस्पिटल के पास पैसे हैं. कोई भी इस मामले को खुलकर सामने नहीं उठा रहा और सरकार का समर्थन भी नहीं मांग रहा. लेकिन पानी की कमी की वजह से मेडिकल सेक्टर के लाभ मार्जिन में वास्तव में कमी आई है.
WHO के मुताबिक भारत अपनी जीडीपी का केवल एक फीसदी ही हेल्थकेयर पर खर्च करता है और उसका लक्ष्य 2025 तक इसे 2.5 फीसदी तक बढ़ाना है. वहीं बाकी देश 6 फीसदी तक हेल्थकेयर पर खर्च करते हैं. महाराष्ट्र के बीड में राज्य स्तरीय हॉस्पिटल के चीफ मेडिकल ऑफीसर ने बताया, 'जब भी सूखा पड़ता है तो इसका दवाब हम पर आता है. ज्यादातर लोग सरकारी हॉस्पिटल की तरफ रुख करते हैं क्योंकि प्राइवेट की तुलना में यहां कम खर्च करना पड़ता है. हम म्युनिसिपल कारपोरेशन से कुछ फ्री पानी तो उपलब्ध करा सकते हैं लेकिन उसकी भी सीमाएं हैं.
थोराट ने कहा, मुंबई में उन्हें मई के महीने में 10 हजार लीटर के 2 ट्रक खरीदने पड़ते हैं. जून में भी उन्हें कई ट्रकों की जरूरत होगी. रविशंकर ने बताया, 'चेन्नई में एक ऐसे उपाय की जरूरत है जो लंबे समय तक कारगर हो. मौसम विज्ञान के मुताबिक साउथ इंडिया में बारिश इस हफ्ते केवल 30 फीसदी रही.'
रविशंकर ने कहा, 'इस समय आपातकाल की स्थिति है इसलिए सरकार ट्रेन से पानी ला रही है. लेकिन इसके बाद क्या होगा. सब प्रकृति पर छोड़ दिया है.' | संक्षिप्त पाठ: पूरे देश में पानी की कमी से जूझ रहे डॉक्टर्स
सर्जरी के लिए भी पानी खरीदने को मजबूर चेन्नई के डॉक्टर
पानी की समस्या देश के लिए एक गंभीर आर्थिक समस्या | 22 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: टिप्पणियां
प्रधानमंत्री देउबा ने कहा, आतंकवाद, सीमापार अपराध, मानव एवं मादक पदार्थ तस्करी ने हमारे समाज में शांति एवं सद्भाव को बहुत बाधा नुकसान पहुंचाया है. बिम्सटेक में भारत, बांग्लादेश, म्यामांर, श्रीलंका, थाइलैंड, भूटान और नेपाल हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
प्रधानमंत्री देउबा ने कहा, आतंकवाद, सीमापार अपराध, मानव एवं मादक पदार्थ तस्करी ने हमारे समाज में शांति एवं सद्भाव को बहुत बाधा नुकसान पहुंचाया है. बिम्सटेक में भारत, बांग्लादेश, म्यामांर, श्रीलंका, थाइलैंड, भूटान और नेपाल हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यह एक सारांश है: बिम्सटेक बैठक को संबोधित कर रहे थे नेपाल के प्रधानमंत्री
नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा, बिम्सटेक क्षेत्र भी आतंकवाद से अछूता नहीं
बिम्सटेक में भारत,बांग्लादेश,म्यामांर, श्रीलंका, थाइलैंड,भूटान, नेपाल हैं | 2 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: दिल्ली में एक निवेश की एक फर्जी कंपनी का पर्दाफ़ाश हुआ है। इस कंपनी का नाम स्टॉक गुरु इंडिया बताया जा रहा है।टिप्पणियां
स्टॉक गुरु इंडिया नाम की एक कंपनी ने करीब एक लाख निवेशकों को धोखा दिया है। इस कंपनी ने अपने निवेशकों को करीब 500 करोड़ का चूना लगाया है।
फिलहाल इस कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर फरार है। ये कंपनी लोगों को सौ फ़ीसदी से भी ज़्यादा के फ़ायदे का झांसा देती थी ऐसे में लोगों ने जमकर इस कंपनी में अपना पैसा लगाया।
स्टॉक गुरु इंडिया नाम की एक कंपनी ने करीब एक लाख निवेशकों को धोखा दिया है। इस कंपनी ने अपने निवेशकों को करीब 500 करोड़ का चूना लगाया है।
फिलहाल इस कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर फरार है। ये कंपनी लोगों को सौ फ़ीसदी से भी ज़्यादा के फ़ायदे का झांसा देती थी ऐसे में लोगों ने जमकर इस कंपनी में अपना पैसा लगाया।
फिलहाल इस कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर फरार है। ये कंपनी लोगों को सौ फ़ीसदी से भी ज़्यादा के फ़ायदे का झांसा देती थी ऐसे में लोगों ने जमकर इस कंपनी में अपना पैसा लगाया। | स्टॉक गुरु इंडिया नाम की एक कंपनी ने करीब एक लाख निवेशकों को धोखा दिया है। इस कंपनी ने अपने निवेशकों को करीब 500 करोड़ का चूना लगाया है। | 28 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: शेयर बाजारों में सोमवार को गिरावट का रुख रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 37.02 अंकों की गिरावट के साथ 19,646.21 पर और निफ्टी 3.35 अंकों की गिरावट के साथ 5,942.35 पर बंद हुआ।
बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 3.35 अंकों की गिरावट के साथ सुबह 19679.88 पर खुला और 37.02 अंकों यानी 0.19 फीसदी की गिरावट के साथ 19,646.21 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 19,754.66 के ऊपरी और 19,602.71 के निचले स्तर को छुआ।
सेंसेक्स के 30 में से 10 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। टाटा पॉवर (2.28 फीसदी), एचडीएफसी (1.91 फीसदी), सन फार्मा (1.79 फीसदी) महिंद्रा एंड महिंद्रा (1.10 फीसदी) और गेल इंडिया (0.97 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी दर्ज की गई।
सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे हीरो मोटोकॉर्प (2.51 फीसदी), विप्रो (1.35 फीसदी), बजाज आटो (1.33 फीसदी), जिंदल स्टील (1.24 फीसदी) और टीसीएस (1.05 फीसदी)।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.40 अंकों की तेजी के साथ 5,946.10 पर खुला और 3.35 अंकों यानी 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 5,942.35 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी ने 5,971.20 के ऊपरी और 5,930.35 के निचले स्तर को छुआ।
बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई। मिडकैप सूचकांक 14.35 अंकों की तेजी के साथ 6,501.50 पर और स्मालकैप 17.56 अंकों की तेजी के साथ 6,351.34 पर बंद हुआ।
बीएसई के सभी 13 में से चार सेक्टरों रियल्टी (1.32 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (0.59 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (0.53 फीसदी), बिजली (0.52 फीसदी) में तेजी दर्ज की गई।टिप्पणियां
गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.38 फीसदी) सूचना प्रौद्योगिकी (0.67 फीसदी), धातु (0.56 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.53 फीसदी) और तेल एवं गैस (0.45 फीसदी)।
बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1395 शेयरों में तेजी और 1474 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 134 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 3.35 अंकों की गिरावट के साथ सुबह 19679.88 पर खुला और 37.02 अंकों यानी 0.19 फीसदी की गिरावट के साथ 19,646.21 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 19,754.66 के ऊपरी और 19,602.71 के निचले स्तर को छुआ।
सेंसेक्स के 30 में से 10 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। टाटा पॉवर (2.28 फीसदी), एचडीएफसी (1.91 फीसदी), सन फार्मा (1.79 फीसदी) महिंद्रा एंड महिंद्रा (1.10 फीसदी) और गेल इंडिया (0.97 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी दर्ज की गई।
सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे हीरो मोटोकॉर्प (2.51 फीसदी), विप्रो (1.35 फीसदी), बजाज आटो (1.33 फीसदी), जिंदल स्टील (1.24 फीसदी) और टीसीएस (1.05 फीसदी)।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.40 अंकों की तेजी के साथ 5,946.10 पर खुला और 3.35 अंकों यानी 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 5,942.35 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी ने 5,971.20 के ऊपरी और 5,930.35 के निचले स्तर को छुआ।
बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई। मिडकैप सूचकांक 14.35 अंकों की तेजी के साथ 6,501.50 पर और स्मालकैप 17.56 अंकों की तेजी के साथ 6,351.34 पर बंद हुआ।
बीएसई के सभी 13 में से चार सेक्टरों रियल्टी (1.32 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (0.59 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (0.53 फीसदी), बिजली (0.52 फीसदी) में तेजी दर्ज की गई।टिप्पणियां
गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.38 फीसदी) सूचना प्रौद्योगिकी (0.67 फीसदी), धातु (0.56 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.53 फीसदी) और तेल एवं गैस (0.45 फीसदी)।
बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1395 शेयरों में तेजी और 1474 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 134 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
सेंसेक्स के 30 में से 10 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। टाटा पॉवर (2.28 फीसदी), एचडीएफसी (1.91 फीसदी), सन फार्मा (1.79 फीसदी) महिंद्रा एंड महिंद्रा (1.10 फीसदी) और गेल इंडिया (0.97 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी दर्ज की गई।
सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे हीरो मोटोकॉर्प (2.51 फीसदी), विप्रो (1.35 फीसदी), बजाज आटो (1.33 फीसदी), जिंदल स्टील (1.24 फीसदी) और टीसीएस (1.05 फीसदी)।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.40 अंकों की तेजी के साथ 5,946.10 पर खुला और 3.35 अंकों यानी 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 5,942.35 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी ने 5,971.20 के ऊपरी और 5,930.35 के निचले स्तर को छुआ।
बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई। मिडकैप सूचकांक 14.35 अंकों की तेजी के साथ 6,501.50 पर और स्मालकैप 17.56 अंकों की तेजी के साथ 6,351.34 पर बंद हुआ।
बीएसई के सभी 13 में से चार सेक्टरों रियल्टी (1.32 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (0.59 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (0.53 फीसदी), बिजली (0.52 फीसदी) में तेजी दर्ज की गई।टिप्पणियां
गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.38 फीसदी) सूचना प्रौद्योगिकी (0.67 फीसदी), धातु (0.56 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.53 फीसदी) और तेल एवं गैस (0.45 फीसदी)।
बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1395 शेयरों में तेजी और 1474 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 134 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे हीरो मोटोकॉर्प (2.51 फीसदी), विप्रो (1.35 फीसदी), बजाज आटो (1.33 फीसदी), जिंदल स्टील (1.24 फीसदी) और टीसीएस (1.05 फीसदी)।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.40 अंकों की तेजी के साथ 5,946.10 पर खुला और 3.35 अंकों यानी 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 5,942.35 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी ने 5,971.20 के ऊपरी और 5,930.35 के निचले स्तर को छुआ।
बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई। मिडकैप सूचकांक 14.35 अंकों की तेजी के साथ 6,501.50 पर और स्मालकैप 17.56 अंकों की तेजी के साथ 6,351.34 पर बंद हुआ।
बीएसई के सभी 13 में से चार सेक्टरों रियल्टी (1.32 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (0.59 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (0.53 फीसदी), बिजली (0.52 फीसदी) में तेजी दर्ज की गई।टिप्पणियां
गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.38 फीसदी) सूचना प्रौद्योगिकी (0.67 फीसदी), धातु (0.56 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.53 फीसदी) और तेल एवं गैस (0.45 फीसदी)।
बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1395 शेयरों में तेजी और 1474 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 134 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.40 अंकों की तेजी के साथ 5,946.10 पर खुला और 3.35 अंकों यानी 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 5,942.35 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी ने 5,971.20 के ऊपरी और 5,930.35 के निचले स्तर को छुआ।
बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई। मिडकैप सूचकांक 14.35 अंकों की तेजी के साथ 6,501.50 पर और स्मालकैप 17.56 अंकों की तेजी के साथ 6,351.34 पर बंद हुआ।
बीएसई के सभी 13 में से चार सेक्टरों रियल्टी (1.32 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (0.59 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (0.53 फीसदी), बिजली (0.52 फीसदी) में तेजी दर्ज की गई।टिप्पणियां
गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.38 फीसदी) सूचना प्रौद्योगिकी (0.67 फीसदी), धातु (0.56 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.53 फीसदी) और तेल एवं गैस (0.45 फीसदी)।
बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1395 शेयरों में तेजी और 1474 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 134 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई। मिडकैप सूचकांक 14.35 अंकों की तेजी के साथ 6,501.50 पर और स्मालकैप 17.56 अंकों की तेजी के साथ 6,351.34 पर बंद हुआ।
बीएसई के सभी 13 में से चार सेक्टरों रियल्टी (1.32 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (0.59 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (0.53 फीसदी), बिजली (0.52 फीसदी) में तेजी दर्ज की गई।टिप्पणियां
गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.38 फीसदी) सूचना प्रौद्योगिकी (0.67 फीसदी), धातु (0.56 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.53 फीसदी) और तेल एवं गैस (0.45 फीसदी)।
बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1395 शेयरों में तेजी और 1474 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 134 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
बीएसई के सभी 13 में से चार सेक्टरों रियल्टी (1.32 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (0.59 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (0.53 फीसदी), बिजली (0.52 फीसदी) में तेजी दर्ज की गई।टिप्पणियां
गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.38 फीसदी) सूचना प्रौद्योगिकी (0.67 फीसदी), धातु (0.56 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.53 फीसदी) और तेल एवं गैस (0.45 फीसदी)।
बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1395 शेयरों में तेजी और 1474 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 134 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.38 फीसदी) सूचना प्रौद्योगिकी (0.67 फीसदी), धातु (0.56 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.53 फीसदी) और तेल एवं गैस (0.45 फीसदी)।
बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1395 शेयरों में तेजी और 1474 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 134 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1395 शेयरों में तेजी और 1474 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 134 शेयरों के भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। | शेयर बाजारों में सोमवार को गिरावट का रुख रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 37.02 अंकों की गिरावट के साथ 19,646.21 पर और निफ्टी 3.35 अंकों की गिरावट के साथ 5,942.35 पर बंद हुआ। | 26 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: यूपी पुलिस और सरकार के अधिकारी इन दिनों कांवड़ियों की सेवा का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते. अब इस कड़ी में गाजियाबाद प्रशासन भी शामिल हो गया है. गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पांडे और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने जिले से गुजर रहे कांवड़ियों पर हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए. राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराये गये हेलीकॉप्टर ने हडसन पुलिस लाइन मैदान से उड़ान भरने के बाद रास्ते से गुजरने वाले कांवड़ियों पर फूल बरसाना शुरू किया. जिलाधिकारी ने बताया कि फूल बरसाए जाने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी पूरी नजर रखी गयी. इससे पहले, भाजपा के बागपत से सांसद सत्यपाल सिंह ने लोनी के विधायक किशोर गुर्जर के साथ रविवार को गाजियाबाद में कांवड़ियों पर फूल बरसाए थे.
कांवड़ियों पर फूल बरसाने की कोई यह पहली घटना नहीं है.इससे पहले सुरक्षा हालात का हवाई जायज़ा लेने के लिए इलाके के हवाई सर्वेक्षण पर निकले उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा कांवड़ियों का गुलाब के फूलों की पत्तियां फेंककर स्वागत करने से सोशल मीडिया पर बवाल मचा था.और इसे 'करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग' करार दिया गया था. एक वीडियो सामने आया है, जिसमें मेरठ ज़ोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार हेलीकॉप्टर में सवार होकर कांवड़ियों पर फूल बरसाते दिखाई दिए थे. चॉपर में उनके साथ कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी भी सवार थे.
पुलिस ने इसे हल्की-फुल्की 'PR' कवायद बताया था, लेकिन सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले इससे नाराज़ थे. यूज़रों का मानना है कि भीड़ को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए किए जाने वाले हवाई सर्वेक्षण का दुरुपयोग किया गया था. इस वीडियो पर ढेरों कमेंट - 'इस बकवास को देखकर नाराज़ हूं...', 'इस मौज की सवारी का खर्चा कौन उठा रहा था...', 'ताकत का दुरुपयोग' - लिखे गए थे.
यह वीडियो ऐसे वक्त पर सामने आया था,जब कांवड़ियों द्वारा किए जा रहे हंगामों और तोड़फोड़ की ख़बरें लगातार पढ़ने को मिल रही थी. कुछ दिन पहले ही दिल्ली के मोती नगर इलाके में कांवड़ियों ने सड़क पर एक कार के उन्हें सिर्फ छू जाने के बाद उसे बुरी तरह तोड़फोड़ डाला था, जिसका वीडियो काफी वायरल हुआ था. इस वीडियो की भी सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना की गई थी. उत्तर प्रदेश के ही बुलंदशहर से एक और वीडियो सामने आया था, जिसमें कांवड़ियों ने पुलिस वाहन को बुरी तरह तोड़फोड़ डाला था.
कांवड़ यात्रा एक वार्षिक तीर्थयात्रा है, जिसमें भगवान शिव के भक्त अपने घरों से पावन मानी जाने वाली गंगा नदी तक जाते हैं, और गंगाजल भरकर लाते हैं, ताकि भगवान शिव के प्रतिरूप शिवलिंग पर उसे चढ़ सकें. यह यात्रा श्रावण मास में की जाती है, जो हिन्दू कैलेंडर का पांचवां महीना होता है.
. मंगलवार को ही दिल्ली के मोती नगर इलाके में कांवड़ियों ने सड़क पर एक कार के उन्हें सिर्फ छू जाने के बाद उसे बुरी तरह तोड़फोड़ डाला था, जिसका वीडियो काफी वायरल हुआ. इस वीडियो की भी सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना की गई. गुरुवार को भी उत्तर प्रदेश के ही बुलंदशहर से एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें कांवड़ियों ने पुलिस वाहन को बुरी तरह तोड़फोड़ डाला है.
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कांवड़ यात्रा एक वार्षिक तीर्थयात्रा है, जिसमें भगवान शिव के भक्त अपने घरों से पावन मानी जाने वाली गंगा नदी तक जाते हैं, और गंगाजल भरकर लाते हैं, ताकि भगवान शिव के प्रतिरूप शिवलिंग पर उसे चढ़ सकें. यह यात्रा श्रावण मास में की जाती है, जो हिन्दू कैलेंडर का पांचवां महीना होता है. | संक्षिप्त पाठ: गाजियाबाद के डीएम ने की फूल वर्षा
हेलीकॉप्टर से कांवड़ियों पर बरसाए फूल
कांवड़ियों पर फूल बरसाने की यह कोई पहली घटना नहीं | 27 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: सीबीएसई बोर्ड (CBSE Board) की परीक्षाएं चल रही हैं. 10वीं की साइंस (CBSE Class 10 Science Paper) की परीक्षा 13 मार्च को आयोजित की जाएगी. साइंस का पेपर अनिवार्य होता है ऐसे में इस दिन अधिक संख्या में स्टूडेंट पेपर देंगे. साइंस एक ऐसा सब्जेक्ट है जिसमें अच्छी तैयारी के लिए ज्यादा से ज्यादा समय देना पड़ता है. कई बार स्टूडेंट्स घंटों पढ़ने के बाद भी इस सब्जेक्ट में अच्छे नंबर नहीं ला पाते हैं, क्योंकि वे सही तरीके से तैयारी नहीं करते. बता दें कि साइंस के पेपर (CBSE Science Paper) में 5 सेक्शन होंगे. पेपर 80 नंबर का होगा और पेपर को पूरा करने के लिए स्टूडेंट्स को 3 घंटे का समय मिलेगा.
-सेक्शन ए में क्वेश्चन नंबर 1 और 2 1 नंबर के होंगे.
-सेक्शन बी में क्वेश्चन नंबर 3 से 5 2 नंबर के होंगे.
-सेक्शन सी में क्वेश्चन नंबर 6 से 15 3 नंबर के होंगे.
-सेक्शन डी में क्वेश्चन नंबर 16 से 21 5 नंबर के होंगे.
-सेक्शन ई में क्वेश्चन नंबर 22 से 27 2 नंबर के होंगे. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: 10वीं का साइंस पेपर 13 मार्च को होना है.
स्टूडेंट्स को ज्यादा से ज्यादा रिवीजन करने पर फोकस करना चाहिए.
अच्छी तैयारी के लिए पिछले साल के पेपर हल करने चाहिए. | 11 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: केंद्र सरकार ने आज स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडीयुक्त सुविधाओं जैसे एलपीजी सिलेंडरों, निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश, बचत खाता खोलने इत्यादि का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है।
संसदीय कार्य और योजना राज्यमंत्री राजीव शुक्ल ने लोकसभा में रूद्रमाधव राय के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।टिप्पणियां
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडीयुक्त सुविधाओं जैसे एलपीजी सिलेंडरों, निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश, बचत खाता खोलने इत्यादि का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है।
शुक्ला ने बताया कि दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आधार कार्ड के नामांकन के लिए 195 केंद्र प्रचालित हैं।
संसदीय कार्य और योजना राज्यमंत्री राजीव शुक्ल ने लोकसभा में रूद्रमाधव राय के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।टिप्पणियां
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडीयुक्त सुविधाओं जैसे एलपीजी सिलेंडरों, निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश, बचत खाता खोलने इत्यादि का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है।
शुक्ला ने बताया कि दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आधार कार्ड के नामांकन के लिए 195 केंद्र प्रचालित हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडीयुक्त सुविधाओं जैसे एलपीजी सिलेंडरों, निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश, बचत खाता खोलने इत्यादि का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है।
शुक्ला ने बताया कि दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आधार कार्ड के नामांकन के लिए 195 केंद्र प्रचालित हैं।
शुक्ला ने बताया कि दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आधार कार्ड के नामांकन के लिए 195 केंद्र प्रचालित हैं। | यहाँ एक सारांश है:केंद्र सरकार ने आज स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडीयुक्त सुविधाओं जैसे एलपीजी सिलेंडरों, निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश, बचत खाता खोलने इत्यादि का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है। | 18 | ['hin'] |
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