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मुझे देखकर उसने दूर से सलाम किया और पास आकर ज़रा संकोच के साथ कहा, “माफ कीजिएगा, मैं एक बाबू का सामान मोटर-अड्डे तक छोडऩे चला गया था। | 4 |
हांगकांग दो घंटे में चीन के पास जा सकता है। | 2 |
उन दिनों मैं पाकिस्तान में इस तरह के फंसे हुए लोगों को निकालने में लगा हुआ था। | 1 |
फ़र्ख़ंदा को वो इस लिबास में बहुत प्यारी लगी। | 4 |
चतुरी हमारा गोश्त उनके हाथ भेज देना। | 2 |
दो-चार साल सबके पास पैसा हो जाता है, फिर एकदम सब के सब भूखे-नंगे हो जाते हैं! जैसे पैसों पर किसी ने बाँध बाँधकर रखा है। | 2 |
हवा का एक हलका झोंका आया, खुले रेशमी बाल, सिर से साड़ी को उड़ाकर, गुदगुदाकर, चला गया। | 4 |
क़हबाख़ाना की लड़की अब हंस रही थी। | 1 |
बड़ी बहुरिया बथुआ साग उबालकर खा रही होगी। | 4 |
कई स्त्रियों ने जब यह सुना कि श्रीकंठ पत्नी के पीछे पिता से लड़ने की तैयार हैं, तो उन्हें बड़ा हर्ष हुआ। | 4 |
सबसे बाद में उठता था वहां।" इस बात से भी किसी में उत्साह नहीं जगा . | 2 |
बेचारा सचिव उसी वक्त अपनी गाड़ी में सवार होकर सेक्रेटेरिएट पहुंचा और दबे हुए आदमी से इंटरव्यू लेने लगा। | 4 |
हाँ, उसके पेट में पोथियों के सूखे पत्ते खड़खड़ाने जरूर लगे। | 4 |
पंडित जी समय काटने के विचार से आप ही कन्या को शिक्षा देते थे, फलस्वरूप कन्या भी उनके साथ समय काटती गई और पंद्रह साल की अवस्था तक सारस्वत में हिलती रही। | 4 |
शाम तक लौट आने के इरादे से वह मुँह-अँधेरे ही घर से चल पड़ा था। | 1 |
एक मियाँ जी बोले, ‘बाबू जी, घर में तरह-तरह के खाने पकते हैं, मगर इसकी तकदीर में वही रोटी और दाल लिखी है और कुछ नहीं। | 2 |
उसके दिमाग में आया ही नहीं था कि गाड़ी से इतनी जल्दी पहुँच जाएगा। | 1 |
घृणा से गौरी का जी भर जाता, किन्तु उसके इन मनोभावों को जानने वाला यहाँ कोई भी न था। | 1 |
उस को अपने वालिद की मौत का दुख हुआ। | 4 |
इतना ही नहीं हमारे दूरस्थ प्रियजनों को भी अपने आने का मधु संदेश इनके कर्कश स्वर में ही देना पड़ता है . | 3 |
इसमें कोई मिलावट नहीं है- ऐसे सोने का आजकल व्यवहार ही नहीं होता। | 2 |
अबदुल्लाह नीचा बंद का लड़का जो कबूतर पालने का शौक़ीन था दूसरे रोज़ ही आ धमकता था और मुंशी करीम बख़्श की बीवी से कहता था। | 1 |
पन्ना— जब तुम्हें अपने मन से नहीं जाना है, तो फिर मैं जाने को क्यों कहूँ? | 2 |
दिन भर उसने न कुछ खाया न बाहर गया . | 4 |
तब मैंने खलील से कहा आपने इस बनिये की जान बचा ली नहीं तो बेचारा बेगुनाह पुलिस के पंजे में फँस जाता। | 2 |
ज़रा हलवाई को डांटो तो... ए देखतीं नहीं। कितना घी बह रहा है जमीन पर। | 2 |
बूढ़ी माता ने पूछा, ‘‘क्या है बबुआ, कुछ कहोगे ?’’ | 2 |
यहां ये कान्फ़्रैंस शुरू हुई कि लड़की को छोड़ दिया जाये या मार दिया जाये। | 4 |
अगरचे भोला मेरी लंबी और घुन्नी दाढ़ी से घबरा कर मुझे अपना मुँह चूमने की इजाज़त न देता था | 1 |
यह मूक स्नेह था, खूब ठोस, रस और स्वाद से भरा हुआ। | 1 |
आख़िर वो मर क्यूँ न गईं? | 0 |
' क्या काम है।'' मेरी तुमसे एक विनती है। | 2 |
अगर्चे आज उन औरतों में से एक ख़ुद ब-ख़ुद बहन और दूसरी भावज बन गई है। | 1 |
उसमें अपनी गमछी डुबा कर छोड़ देता हूँ। | 2 |
इसी कुँए से इस दिन सतरह गागरें पानी की खींची थीं। | 2 |
एकान्त कुंज की कली-सी प्रणय के वासन्ती मलयस्पर्श से हिल उठती,विकास के लिए व्याकुल हो रही है। | 1 |
काला भैरव शिवजी महाराज के अवतार गिने जाते हैं। | 4 |
हामिद इसका रहस्य क्या समझता! | 1 |
दूर पार तंगों से परे बस्ती में कोई बीवी अपने ख़ावंद को आवाज़ दे रही है। | 1 |
उसने धीरे-से अपने बैलों के गले की रस्सियाँ खोल लीं। | 4 |
मगर मुराद बर न आई। ज़ुबेदा ............। | 4 |
बिलआख़िर पारो उसे धमकाती," तो चल जल्दी से आलू की छः टिकियां तल दे और ख़ूब गर्म-गर्म मसालहे वाले चने देना और अद्रक भी, नहीं तो ये पटा करी अभी जाएगी | 2 |
मैं बैठा-बैठा इधर-उधर की गप्पें उड़ाया करता। | 1 |
ऐसा क्यों है और ऐसा क्यों नहीं है और जो है वो कब क्यों और कैसे बेहतर हो सकता है? | 1 |
हाथ बढ़ाकर अपना लोभ क्यों नहीं स्वीकार किया। | 0 |
मेरे-जैसा असमर्थ दुनिया में कोई न होगा। | 1 |
राधाकृष्ण ने कहा," रूप-रंग नहीं, रहन-सहन बहुत खराब है। | 2 |
सीमा का लहजा और ज़्यादा ख़ुश्क हो गया “औरतों को मर्द के सहारे की ज़रूरत होगी | 2 |
मेरा उर्फ बौड़म है। | 2 |
इससे आपकी इज्जत बढ़ेगी, और आखिर हमें बढ़कर उनसे कहना भी तो है कि बराबर की जगह है? | 2 |
लोगों ने शमशान में एक बड़े पुराने पीपल के पेड़ तले नौजवान लक्षमण को रख दिया। | 4 |
फ़रमाईए मिज़ाज कैसा है। ” “ अल्लाह का लाख लाख शुक्र है ........आपकी दुआ से बड़े मज़े में गुज़र रही है, मेरे लायक़ कोई ख़िदमत?” “आप मुझे क्यों शर्मिंदा करते हैं। | 2 |
तक्षिला के अजाइबघर में इतने ख़ूबसूरत बुत थे, इतने हुस्न संग तराशी के नादिर नमूने, क़दीम तहज़ीब के झिलमिलाते हुए चिराग़। पच्चास और मारे गए। | 4 |
ज्यों ही जरा सयाने हुए, पर झाड़कर निकल जायेंगे, बात भी न पूछेंगे। | 2 |
वह सब मैंने मांस में डाल दिया। | 2 |
क्या एक लम्बे-तगड़े काबुली के लिए एक छोटे बच्चे का उठा ले जाना असम्भव है? | 2 |
..!'' भा-इ-यो, आज रात! दि रौता संगीत कंपनी के स्टेज पर! गुलबदन देखिए, गुलबदन! आपको यह जान कर खुशी होगी कि मथुरामोहन कंपनी की मशहूर एक्ट्रेस मिस हीरादेवी, जिसकी एक-एक अदा पर हजार जान फिदा हैं, इस बार हमारी कंपनी में आ गई हैं। | 2 |
जिठानियाँ बात-बात पर घमाघम पीटी-कूटी जातीं; पर उसके पति ने उसे कभी उँगली भी नहीं छुआई। | 1 |
और गंतव्य था कि तेजी से करीब आता जा रहा था। | 1 |
यकायक बाबू को सुखी के जन्म-दिन की बात याद आ गई। | 4 |
न पन्ना ही इसकी इच्छुक थी। | 1 |
उस दिन मेरे चिड़ियाघर में मानो भूचाल आ गया। | 4 |
देश की परिस्थिति, गवर्नमेंट का रुख, और महात्माजी के वक्तव्यों को पढ़कर, वे जानते थे कि निकट भविष्य में फिर सत्याग्रह-संग्राम छिड़ने बाला है। | 1 |
ज़ुबेदा ने फुल्का चंगेर में रखा “ मैं क्या करूं ....... ....... . | 4 |
क्रोध के मारे हवा से हिलते पत्ते की भॉँति कॉँपती हुई अपने कमरे में आ कर खड़ी हो गयी। | 4 |
तब से यह नृत्य-भंगिमा नृत्य का क्रम बन गयी। | 4 |
रगों और नसों में ख़ून गूँजने लगा। | 4 |
मित्र उठकर हाथ जोड़कर खड़ा हो गया, उंगली के इशारे पं. रामखेलावन जी को खड़े हो जाने के लिए कहकर। | 4 |
परसों से उसे बुख़ार आ रहा है। | 2 |
कोई उससे ऐसी बातें किया करे तो रात की रात बैठा रहे। | 4 |
‘धागिड़गिड़ धागिड़गिड़चकैके चकधुम चकैके चकधुम-चकधुम चकधुम !’ कीचड़-पानी में लथपथ भूखे-प्यासे नर-नारियों के झुंड में मुक्त खिलखिलाहट लहरें लेने लगती है। | 4 |
दिल पर जो कुछ बीतती थी, वह दिल में ही सहती थी ओर जब न सहा गया, . | 4 |
“जल्दी कैसी?” रसीला पेट की तरफ़ इशारा करते हुए बोला। “यही ... . | 4 |
इस सुधार के लिए हम पं. रामखेलावन जी को धन्यवाद देते हैं। | 1 |
दोनों बैठकर वहां से निकल जाने की तरकीबें सोचते रहते। | 1 |
नहीं। वो मोटी हो गई थी — | 1 |
एक दिन सन्ध्या के डूबते सूर्य के सुनहले प्रकाश में, निरभ्र नील आकाश के नीचे, छत पर, दो कुर्सियाँ डलवा माता और कन्या गंगा का रजत-सौन्दर्य एकटक देख रही थी। | 1 |
कारण, प्रमाणित हो गया था, मैं कुछ भी नहीं था। | 1 |
जब ख़ूबानीयाँ पक जाती हैं तो मेरी सारी सहेलियाँ इकट्ठी हो जाती हैं और ख़ूबानीयाँ खिलाने को कहती हैं। | 2 |
हर महीने दस दस के पाँच नोट वो अपने ख़फ़ीफ़ तौर पर काँपते हुए हाथों से पकड़ता और अपने पुराने वज़ा के लंबे कोट की अंदरूनी जेब में रख लेता। | 1 |
उसकी लाठी के वार से एक सुकुमार बालक की खोपड़ी फट गई थी। | 1 |
वहीं मैंने वह डिब्बी खोली। | 4 |
जंगल के फल खा जाता है, जिससे राजा-मण्डी के फल-ब़ाजार में टोटा पड़ जाता है। | 2 |
होली ने भागना चाहा मगर वो भाग भी तो न सकती थी। | 1 |
खूब हँस रहे हैं। | 4 |
मालकिन ... | 2 |
मैं भूल गया था कि मुझे एक जगह जाना है ...। ” “ मगर...” मैं इतना ही कह पाया। | 2 |
भीतर बरामदे से नौ- दस वर्ष के एक बालक ने बाहर निकलकर उत्तर दिया-'' अभी कुछ नहीं लेना है, जाओ!" पर खान भला क्यों जाने लगा? | 4 |
बेचारा गुलफाम! तीनों को दुआली वापस देते हुए पुलिस के सिपाही ने कहा,' लाठी-दुआली ले कर नाच देखने आते हो?' दूसरे दिन मेले-भर में यह बात फैल गई- मथुरामोहन कंपनी से भाग कर आई है हीराबाई, इसलिए इस बार मथुरामोहन कंपनी नहीं आई हैं। | 4 |
क्या वे मुझसे नहीं मिल सकती' पूछने पर वह मुँह में कपड़ा ठूँस कर हँसी रोकने लगी। | 4 |
“ अल्लाह बख़्शे मरहूम फ़िरिश्ता खस्लत इंसान थे। | 2 |
उसने यह भी बताया कि वह उसी थाने के एक गांव के नम्बरदार की पुत्रवधू थी। | 1 |
" नहीं"" हैरत है!" सचिव जोर से चीखा। | 2 |
मुसावात और अखुत और इन्सानियत का पर्चम। सब मर गए। | 4 |
उस का दुबलापन उस की सेहत के ख़राब होने की दलील न थी, एक सेहत मंदी की निशानी थी जिसे देख कर भारी भरकम सुंदर लाल पहले तो घबराया, लेकिन जब उसने देखा कि लाजो हर क़िस्म का बोझ, हर क़िस्म का सदमा, हत्ता कि मारपीट तक सह गुज़रती है तो वो अपनी बद-सुलूकी को ब-तदरीज बढ़ाता गया और उस ने इन हदों का ख़याल ही न किया, जहाँ पहुँच जाने के बाद किसी भी इन्सान का सब्र टूट सकता है। | 1 |
वजह यह थी कि इस पेड़ को दस साल पहले पिटोनिया के प्रधानमंत्री ने सेक्रेटेरिएट के लॉन में लगाया था। | 1 |
मैं उसे बचाऊंगी, बचाऊंगी, अवश्य बचाऊंगी।" जयगोपाल बाबू भावावेश में आकर बोले- "तो तुम यहीं रहो, मेरे घर अब कदापि मत आना।" शशि ने उसी क्षण तपाक से कहा- "तुम्हारा घर कहां से आया? | 2 |
विजय की तलवार का पहिला वार कान्ती पर ही हुआ, उसने कान्ती की ओर गुस्से से देखते हुए कहा-" देख लेना किसी दिन फांसी पर न लटक जाऊं तो कहना। | 4 |
कौन बलाय मोल लेने जाए! ...ब्याह करके फिर गाड़ीवानी क्या करेगा कोई! और सब कुछ छूट जाए, गाड़ीवानी नहीं छोड़ सकता हिरामन। | 4 |
हँसकर कहने लगे—बेटा, अल्लाह देता है। | 2 |
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