raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
[भाग II-खंड 3 (i) ]
3. कृषि और सहकारिता विभाग का एक ऐसा अधिकारी, जो भारत सरकार के भबर सचिव के नीचे की पंक्ति काम हो
4. सचिन, नारियल विकास बोर्ड
5. बोर्ड का उचित प्रास्थिति का एक अधिकारी या उसकी प्रमुपस्थिति में केन्द्रीय सरकार का स्थानीय रूप से स्थित एक अधिकारी जो मनुसूचितजाति / अनुसूचित जनजाति का हो
"" कार्यालय सहायक के पद से संबंधित क्रम संख्यांक 20 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित क्रम संख्यांक और प्रविष्टियां प्रस्तःस्थापित की जाएंगी ; अर्थात् :6
30 वर्ष से अधिक नहीं (सरकारी सेबकों और भोर्ड के कर्मचारियों के लिए शिथिल को आ सकती है। )
भारत का राजपल सितम्बर 26, 1987 / आश्विम 4, 1909
प्रीमति द्वारा, जिसके न हो सकने पर प्रतिनियुक्ति पर स्थानान्तरण द्वारा और दोनों के म हो सकने पर सीधी भर्ती द्वारा ।
-- सदस्य -- सदस्य
भावश्यक : विज्ञान / कला / वाणिज्य में डिग्री और साथ ही किसी सरकारी कार्यालय / स्वशासी निकाय / उपक्रम में लेखा कार्य का न्यूनतम तीन वर्ष का प्रमुभव हो ।
यो वर्ष
प्रोन्नति : ऐसे उच्च श्रेणी लिपिक / कनिष्ठ आशुलिपिक जिन्हें लेखा कार्यों का तीन वर्ष का अनुभव है । प्रतिनियुक्ति पर स्थानान्तरण : केन्द्रीय सरकार / राज्य सरकारों/ विश्वविद्यालयों/मान्यताप्राप्त संगठनों और स्वशासी निकायों के ऐसे अधिकारियों में से :
( क ) ( 1 ) जो सबैमा प धारण करते हैं ।
(ii) जिन्होंने अधिमानतः महालेखाकार के कार्यालय में लेखा में प्रशिक्षण केय उच्च श्रेणी लिपिक के पद पर 3 वर्ष नियमित सेवा की है ।
1. मुख्य नारियल विकास अधिकारी/निवेशक मारियल विकास बोर्ड
2. सचिव, नारियल विकास बोर्ड
3. उस एकक का भारसाधक अधिकारी जिसमें नियुक्ति को जानी
(ब) जिसके पास सोधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए स्तम्भ 7 में उल्लिस्थित शैक्षिक और अन्य अहंताएं हैं । ( प्रतिनियुक्ति की भवधि, जिसके अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार के उसी या किसी अन्य संगठन । विभाग में इस नियुक्ति से ठीक पहले धारित किसी अन्य काडर बाह्र पद पर प्रति नियुक्ति की अवधि, है, साधारणतया तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी 1 )
4. बोर्ड का उचित प्रास्थित का एक अधिकारी या उसकी अनु पस्थिति में केन्द्रीय सरकार का स्थानीय रूप में स्थिति एक अधिकारी जो अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति का हो -- सदस्य
[सं. 14/18/87-सीए-1] टी. सी. सूद, जैस्क म धकारी
( 2 ) सा. का. नि.
मूल विनियमन, भारत के राजपत्न, भाग 2, खंड 3, उपखंड ( i ) तारीख 10-1-1984 में पृष्ठ 1-29 पर भारत सरकार, कृषि मंत्रालय की अधिसूचना सं. सा. का. मि. 13 ( 4 ) तारीख 10-1-1984 द्वारा प्रकाशित किए गए थे और उनका पश्चातवर्ती संशोधन निम्नलिखित द्वारा किया गया : -
-सदस्य -सदस्य
(3) सा. का. नि. सं.
(4) सा. का. नि. सं.
( 6 ) सा. का. मि. सं. 568 तारीख 25-7-87 पृष्ठ
G.S.R 723 - In exercise of the powers conferred by sub-section (1) read with clause (b) of sub-section ( 2 ) of section 20 of the Coconut Development Board Act, 1979 (5 of 1979), the Coconut Development Board, with the previous sanction of the Central Government, hereby makes the following regulations further to amend the Coconut Development Board Recruitment Regulations, 1984, namely : -
1. (1) These regulations may be called the Coconut Development Board Recruitment (Amendment) Regulations, 1987.
|
[भाग II-खंड तीन ] तीन. कृषि और सहकारिता विभाग का एक ऐसा अधिकारी, जो भारत सरकार के भबर सचिव के नीचे की पंक्ति काम हो चार. सचिन, नारियल विकास बोर्ड पाँच. बोर्ड का उचित प्रास्थिति का एक अधिकारी या उसकी प्रमुपस्थिति में केन्द्रीय सरकार का स्थानीय रूप से स्थित एक अधिकारी जो मनुसूचितजाति / अनुसूचित जनजाति का हो "" कार्यालय सहायक के पद से संबंधित क्रम संख्यांक बीस और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित क्रम संख्यांक और प्रविष्टियां प्रस्तःस्थापित की जाएंगी ; अर्थात् :छः तीस वर्ष से अधिक नहीं भारत का राजपल सितम्बर छब्बीस, एक हज़ार नौ सौ सत्तासी / आश्विम चार, एक हज़ार नौ सौ नौ प्रीमति द्वारा, जिसके न हो सकने पर प्रतिनियुक्ति पर स्थानान्तरण द्वारा और दोनों के म हो सकने पर सीधी भर्ती द्वारा । -- सदस्य -- सदस्य भावश्यक : विज्ञान / कला / वाणिज्य में डिग्री और साथ ही किसी सरकारी कार्यालय / स्वशासी निकाय / उपक्रम में लेखा कार्य का न्यूनतम तीन वर्ष का प्रमुभव हो । यो वर्ष प्रोन्नति : ऐसे उच्च श्रेणी लिपिक / कनिष्ठ आशुलिपिक जिन्हें लेखा कार्यों का तीन वर्ष का अनुभव है । प्रतिनियुक्ति पर स्थानान्तरण : केन्द्रीय सरकार / राज्य सरकारों/ विश्वविद्यालयों/मान्यताप्राप्त संगठनों और स्वशासी निकायों के ऐसे अधिकारियों में से : जो सबैमा प धारण करते हैं । जिन्होंने अधिमानतः महालेखाकार के कार्यालय में लेखा में प्रशिक्षण केय उच्च श्रेणी लिपिक के पद पर तीन वर्ष नियमित सेवा की है । एक. मुख्य नारियल विकास अधिकारी/निवेशक मारियल विकास बोर्ड दो. सचिव, नारियल विकास बोर्ड तीन. उस एकक का भारसाधक अधिकारी जिसमें नियुक्ति को जानी जिसके पास सोधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए स्तम्भ सात में उल्लिस्थित शैक्षिक और अन्य अहंताएं हैं । चार. बोर्ड का उचित प्रास्थित का एक अधिकारी या उसकी अनु पस्थिति में केन्द्रीय सरकार का स्थानीय रूप में स्थिति एक अधिकारी जो अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति का हो -- सदस्य [सं. चौदह अट्ठारह सत्तासी-सीए-एक] टी. सी. सूद, जैस्क म धकारी सा. का. नि. मूल विनियमन, भारत के राजपत्न, भाग दो, खंड तीन, उपखंड तारीख दस जनवरी एक हज़ार नौ सौ चौरासी में पृष्ठ एक-उनतीस पर भारत सरकार, कृषि मंत्रालय की अधिसूचना सं. सा. का. मि. तेरह तारीख दस जनवरी एक हज़ार नौ सौ चौरासी द्वारा प्रकाशित किए गए थे और उनका पश्चातवर्ती संशोधन निम्नलिखित द्वारा किया गया : - -सदस्य -सदस्य सा. का. नि. सं. सा. का. नि. सं. सा. का. मि. सं. पाँच सौ अड़सठ तारीख पच्चीस जुलाई सत्तासी पृष्ठ G.S.R सात सौ तेईस - In exercise of the powers conferred by sub-section read with clause of sub-section of section बीस of the Coconut Development Board Act, एक हज़ार नौ सौ उन्यासी , the Coconut Development Board, with the previous sanction of the Central Government, hereby makes the following regulations further to amend the Coconut Development Board Recruitment Regulations, एक हज़ार नौ सौ चौरासी, namely : - एक. These regulations may be called the Coconut Development Board Recruitment Regulations, एक हज़ार नौ सौ सत्तासी.
|
इंडिया ए बीच दो मैचों की अनाधिकारी टेस्ट सीरीज का पहला मैच तिरुवनंतपुरम में खेला जा रहा है। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने पहले दिन गेंदबाजी करने का फैसला किया था और दक्षिण अफ्रीका ए की पहली पारी सिर्फ 164 रनों पर सिमट गयी थी। इंडिया ए ने पहली पारी में 303 रन बना लिए थे। दूसरे दिन के खेल की समाप्ति पर दक्षिण अफ्रीका ने 5 विकेट पर 125 रन बना लिए थे।
मैच के तीसरे दिन बारिश की वजह से काफी खेल प्रभावित रहा। बारिश और मैदान गिला होने की वजह से दिन के पहले दो सत्र में एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी। इससे पहले इसी मैदान पर खेले गये वनडे सीरीज में भी कुछ ऐसा ही रहा था।
सीरीज का लगभग हर मैच बारिश से प्रभावित रहा था। सीरीज के चौथे मैच का फैसला एक दिन में नहीं निकल पाने के बाद उन्हें रिजर्व डे में ले जाने का फैसला किया गया था।
मैच के अंतिम सत्र में 20 ओवर के खेल हो पाया। 125/5 के स्कोर के बाद दक्षिण अफ्रीका के नाबाद बल्लेबाज हेनरिच क्लासेन और वियम मुल्डर ने अच्छी बल्लेबाजी की। दोनों ने टीम को 168 रनों तक पहुंचा दिया। हालाँकि दोनों अर्धशतक से चूक गये।
क्लासेन 48 रन बनाकर जलज सक्सेना की गेंद पर आउट हो गये। मुल्डर बदकिस्मत रहे और 46 रनों की पारी खेलने के बाद रन आउट हो गये। दोनों ने 6वें विकेट के लिए 74 रनों की साझेदारी बनाई।
छठवां विकेट गिरने के बाद दक्षिण अफ्रीका के विकेट गिरने का सिलसिला शरू हो गया। 168/5 से टीम का स्कोर 178/9 हो गया। दिन के खेल की समाप्ति पर दक्षिण अफ्रीका ए का स्कोर 9 विकेट पर 179 रन था।
लुथो सिपामला 5 और लुंगी एंगीदी बिना खाता खोले पिच पर टिके हैं। दक्षिण अफ्रीका के पास दूसरी पारी में सिर्फ 40 रनों की बढत है। इंडिया ए के लिए शाहबाज नदीम ने तीन, जलज सक्सेना ने दो जबकि सिराज, शार्दुल और गौतम ने एक- एक विकेट लिये।
देखें स्कोरकार्डः
|
इंडिया ए बीच दो मैचों की अनाधिकारी टेस्ट सीरीज का पहला मैच तिरुवनंतपुरम में खेला जा रहा है। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने पहले दिन गेंदबाजी करने का फैसला किया था और दक्षिण अफ्रीका ए की पहली पारी सिर्फ एक सौ चौंसठ रनों पर सिमट गयी थी। इंडिया ए ने पहली पारी में तीन सौ तीन रन बना लिए थे। दूसरे दिन के खेल की समाप्ति पर दक्षिण अफ्रीका ने पाँच विकेट पर एक सौ पच्चीस रन बना लिए थे। मैच के तीसरे दिन बारिश की वजह से काफी खेल प्रभावित रहा। बारिश और मैदान गिला होने की वजह से दिन के पहले दो सत्र में एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी। इससे पहले इसी मैदान पर खेले गये वनडे सीरीज में भी कुछ ऐसा ही रहा था। सीरीज का लगभग हर मैच बारिश से प्रभावित रहा था। सीरीज के चौथे मैच का फैसला एक दिन में नहीं निकल पाने के बाद उन्हें रिजर्व डे में ले जाने का फैसला किया गया था। मैच के अंतिम सत्र में बीस ओवर के खेल हो पाया। एक सौ पच्चीस/पाँच के स्कोर के बाद दक्षिण अफ्रीका के नाबाद बल्लेबाज हेनरिच क्लासेन और वियम मुल्डर ने अच्छी बल्लेबाजी की। दोनों ने टीम को एक सौ अड़सठ रनों तक पहुंचा दिया। हालाँकि दोनों अर्धशतक से चूक गये। क्लासेन अड़तालीस रन बनाकर जलज सक्सेना की गेंद पर आउट हो गये। मुल्डर बदकिस्मत रहे और छियालीस रनों की पारी खेलने के बाद रन आउट हो गये। दोनों ने छःवें विकेट के लिए चौहत्तर रनों की साझेदारी बनाई। छठवां विकेट गिरने के बाद दक्षिण अफ्रीका के विकेट गिरने का सिलसिला शरू हो गया। एक सौ अड़सठ/पाँच से टीम का स्कोर एक सौ अठहत्तर/नौ हो गया। दिन के खेल की समाप्ति पर दक्षिण अफ्रीका ए का स्कोर नौ विकेट पर एक सौ उन्यासी रन था। लुथो सिपामला पाँच और लुंगी एंगीदी बिना खाता खोले पिच पर टिके हैं। दक्षिण अफ्रीका के पास दूसरी पारी में सिर्फ चालीस रनों की बढत है। इंडिया ए के लिए शाहबाज नदीम ने तीन, जलज सक्सेना ने दो जबकि सिराज, शार्दुल और गौतम ने एक- एक विकेट लिये। देखें स्कोरकार्डः
|
मुंबई : बॉलीवुड दुनिया के सबसे चर्चित डायरेक्टर करण जौहर के प्रोडक्शन में बनी मल्टीस्टारर ने उम्मीद के मुताबिक़ ही बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन किया है। जहां फिल्म ने 2019 में अब तक पहले दिन कमाई करने के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वरुण धवन और आलिया भट्ट स्टारर ने भारतीय बाजार में पहले दिन यानी बुधवार को 21. 60 करोड़ रुपये की कमाई की गई हैं।
बता दें की ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक़ कलंक ने एक और दिलचस्प रिकॉर्ड बनाया गया हैं। लेकिन ये फिल्म और वरुण धवन के करियर में अब तक पहले दिन कमाई करने वाली सबसे बड़ी फिल्म बन गई है।
जहां इस साल पहले दिन सबसे ज्यादा कमाई करने का रिकॉर्ड करण जौहर के ही प्रोडक्शन में बनी अक्षय कुमार स्टारर केसरी के नाम था। लेकिन केसरी ने पहले दिन 21. 06 करोड़ रुपये कमाए थे। जहां सर्वाधिक कमाई के मामले में तीसरे नंबर पर आलिया भट्ट और रणवीर सिंह की फिल्म गली बॉय (19. 40 करोड़ रुपये) है. जबकि कॉमेडी ड्रामा टोटल धमाल (16. 50 करोड़ रुपये) चौथे नंबर पर है।
कलंक कलंक को बुधवार को महावीर जयंती की छुट्टी के मौके पर रिलीज किया गया था. कलंक भारत में करीब 4000 स्क्रीन्स पर है। ऐसा माना जा रहा है कि फिल्म को पांच दिनों का लंबा वीकेंड मिलेगा। ये फिल्म अपने पहले वीकेंड में ही 100 करोड़ की कमाई का आंकड़ा पार कर सकती है।
कलंक करण जौहर का ड्रीम प्रोजेक्ट है , इसका निर्देशन अभिशेल वर्मन ने किया है। फिल्म को लेकर क्रिटिक्स ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। वहीं फिल्म में वरुण आलिया के अलावा संजय दत्त, माधुरी दीक्षित, आदित्य रॉय कपूर और सोनाक्षी सिन्हा भी अहम भूमिकाओं में हैं।
|
मुंबई : बॉलीवुड दुनिया के सबसे चर्चित डायरेक्टर करण जौहर के प्रोडक्शन में बनी मल्टीस्टारर ने उम्मीद के मुताबिक़ ही बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन किया है। जहां फिल्म ने दो हज़ार उन्नीस में अब तक पहले दिन कमाई करने के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वरुण धवन और आलिया भट्ट स्टारर ने भारतीय बाजार में पहले दिन यानी बुधवार को इक्कीस. साठ करोड़ रुपये की कमाई की गई हैं। बता दें की ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक़ कलंक ने एक और दिलचस्प रिकॉर्ड बनाया गया हैं। लेकिन ये फिल्म और वरुण धवन के करियर में अब तक पहले दिन कमाई करने वाली सबसे बड़ी फिल्म बन गई है। जहां इस साल पहले दिन सबसे ज्यादा कमाई करने का रिकॉर्ड करण जौहर के ही प्रोडक्शन में बनी अक्षय कुमार स्टारर केसरी के नाम था। लेकिन केसरी ने पहले दिन इक्कीस. छः करोड़ रुपये कमाए थे। जहां सर्वाधिक कमाई के मामले में तीसरे नंबर पर आलिया भट्ट और रणवीर सिंह की फिल्म गली बॉय है. जबकि कॉमेडी ड्रामा टोटल धमाल चौथे नंबर पर है। कलंक कलंक को बुधवार को महावीर जयंती की छुट्टी के मौके पर रिलीज किया गया था. कलंक भारत में करीब चार हज़ार स्क्रीन्स पर है। ऐसा माना जा रहा है कि फिल्म को पांच दिनों का लंबा वीकेंड मिलेगा। ये फिल्म अपने पहले वीकेंड में ही एक सौ करोड़ की कमाई का आंकड़ा पार कर सकती है। कलंक करण जौहर का ड्रीम प्रोजेक्ट है , इसका निर्देशन अभिशेल वर्मन ने किया है। फिल्म को लेकर क्रिटिक्स ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। वहीं फिल्म में वरुण आलिया के अलावा संजय दत्त, माधुरी दीक्षित, आदित्य रॉय कपूर और सोनाक्षी सिन्हा भी अहम भूमिकाओं में हैं।
|
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने आवेदकों से यूजीसी फेलोशिप या स्कॉलरशिप के लिए आवेदन देते समय आधार क्रमांक देने को कहा है।
नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने आवेदकों से यूजीसी फेलोशिप या स्कॉलरशिप के लिए आवेदन देते समय आधार क्रमांक देने को कहा है। सार्वजनिक नोटिस में यूजीसी ने कहा है कि आधार यूजीसी स्कॉलरशिप, फेलोशिप योजनाओं का लाभ उठाने के लिए पहचान के रूप में उपयोग किया जाएगा।
साथ ही ये भी कहा गया है कि आवेदकों से यूजीसी फेलोशिप या स्कॉलरशिप के लिए आवेदन देते समय आधार क्रमांक देने का अनुरोध किया गया है। जिन आवेदकों ने 2017-18 के लिए पहले ही आवेदन दे दिए हैं, उनसे अपना आवेदन फॉर्म अद्यतन करने का अनुरोध किया गया है।
.
सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
|
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने आवेदकों से यूजीसी फेलोशिप या स्कॉलरशिप के लिए आवेदन देते समय आधार क्रमांक देने को कहा है। नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने आवेदकों से यूजीसी फेलोशिप या स्कॉलरशिप के लिए आवेदन देते समय आधार क्रमांक देने को कहा है। सार्वजनिक नोटिस में यूजीसी ने कहा है कि आधार यूजीसी स्कॉलरशिप, फेलोशिप योजनाओं का लाभ उठाने के लिए पहचान के रूप में उपयोग किया जाएगा। साथ ही ये भी कहा गया है कि आवेदकों से यूजीसी फेलोशिप या स्कॉलरशिप के लिए आवेदन देते समय आधार क्रमांक देने का अनुरोध किया गया है। जिन आवेदकों ने दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के लिए पहले ही आवेदन दे दिए हैं, उनसे अपना आवेदन फॉर्म अद्यतन करने का अनुरोध किया गया है। . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
|
iQOO Neo 7 SE Price and Specifications: iQOO Neo 7 SE का अनावरण 2 दिसंबर को चीन में लांच किया जाएगा। हैंडसेट मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8200 ऑक्टा-कोर SoC द्वारा संचालित होगा।
iQOO Neo 7 SE Price And Specifications: अगले महीने 2 दिसम्बर को iQOO Neo 7 SE 2 चीन में डेब्यू करेगा। कंपनी ने इस साल मई में iQOO Neo 6 SE का अनावरण किया और छह महीने बाद ही यह मिड-रेंज फोन का उन्नत संस्करण लॉन्च कर रही है। आगामी स्मार्टफोन मीडियाटेक डायमेंसिटी 8200 ऑक्टा-कोर SoC द्वारा संचालित होगा। iQOO Neo 7 का भी पिछले महीने चीन में अनावरण किया गया था। हालांकि, इन दोनों फोन के भारत में लॉन्च होने को लेकर फिलहाल कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि, यह माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में यह दोनों में स्मार्टफोन भारत में लॉन्च किए जा सकते हैं।
फोन के संभावित विनिर्देशों की बात करें तो स्मार्टफोन मिड-रेंज 5G फोन मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8200 ऑक्टा-कोर SoC द्वारा संचालित होगा, जिसकी पुष्टि कंपनी पहले ही कर चुकी है। इसे 16GB LPDDR5 रैम और 512GB UFS 3. 1 स्टोरेज तक सपोर्ट किया जा सकता है। iQOO Neo 7 SE को TENAA लिस्टिंग पर देखा गया है, जिससे पता चलता है कि iQOO Neo 7 SE में 6. 78 इंच का AMOLED डिस्प्ले होगा जो फुल HD+ रेजोल्यूशन पर काम करेगा और 120Hz पर रिफ्रेश होगा।
प्रकाशिकी के संदर्भ में, 64-मेगापिक्सल के प्राथमिक कैमरे सहित एक ट्रिपल कैमरा सेटअप हो सकता है। इस बार, 8-मेगापिक्सेल सेंसर के बजाय 2-मेगापिक्सेल कैमरा हो सकता है, जो एक डाउनग्रेड है। इसके अलावा एक 2 मेगापिक्सल का सेंसर है, जो मैक्रो शॉट्स के लिए हो सकता है। iQOO Neo 7 SE अपने पूर्ववर्ती की तुलना में हुड के नीचे थोड़ी बड़ी बैटरी पैक कर सकता है। लिस्टिंग से पता चलता है कि मिड-रेंज फोन में 4,700mAh की बैटरी से बढ़कर 4,880mAh यूनिट होगी। कहा जाता है कि कंपनी 120W फास्ट चार्जिंग के लिए समर्थन प्रदान करती है और यह फास्ट चार्जर बंडल करने की भी उम्मीद है।
|
iQOO Neo सात SE Price and Specifications: iQOO Neo सात SE का अनावरण दो दिसंबर को चीन में लांच किया जाएगा। हैंडसेट मीडियाटेक डाइमेंसिटी आठ हज़ार दो सौ ऑक्टा-कोर SoC द्वारा संचालित होगा। iQOO Neo सात SE Price And Specifications: अगले महीने दो दिसम्बर को iQOO Neo सात SE दो चीन में डेब्यू करेगा। कंपनी ने इस साल मई में iQOO Neo छः SE का अनावरण किया और छह महीने बाद ही यह मिड-रेंज फोन का उन्नत संस्करण लॉन्च कर रही है। आगामी स्मार्टफोन मीडियाटेक डायमेंसिटी आठ हज़ार दो सौ ऑक्टा-कोर SoC द्वारा संचालित होगा। iQOO Neo सात का भी पिछले महीने चीन में अनावरण किया गया था। हालांकि, इन दोनों फोन के भारत में लॉन्च होने को लेकर फिलहाल कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि, यह माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में यह दोनों में स्मार्टफोन भारत में लॉन्च किए जा सकते हैं। फोन के संभावित विनिर्देशों की बात करें तो स्मार्टफोन मिड-रेंज पाँचG फोन मीडियाटेक डाइमेंसिटी आठ हज़ार दो सौ ऑक्टा-कोर SoC द्वारा संचालित होगा, जिसकी पुष्टि कंपनी पहले ही कर चुकी है। इसे सोलहGB LPDDRपाँच रैम और पाँच सौ बारहGB UFS तीन. एक स्टोरेज तक सपोर्ट किया जा सकता है। iQOO Neo सात SE को TENAA लिस्टिंग पर देखा गया है, जिससे पता चलता है कि iQOO Neo सात SE में छः. अठहत्तर इंच का AMOLED डिस्प्ले होगा जो फुल HD+ रेजोल्यूशन पर काम करेगा और एक सौ बीस हर्ट्ज़ पर रिफ्रेश होगा। प्रकाशिकी के संदर्भ में, चौंसठ-मेगापिक्सल के प्राथमिक कैमरे सहित एक ट्रिपल कैमरा सेटअप हो सकता है। इस बार, आठ-मेगापिक्सेल सेंसर के बजाय दो-मेगापिक्सेल कैमरा हो सकता है, जो एक डाउनग्रेड है। इसके अलावा एक दो मेगापिक्सल का सेंसर है, जो मैक्रो शॉट्स के लिए हो सकता है। iQOO Neo सात SE अपने पूर्ववर्ती की तुलना में हुड के नीचे थोड़ी बड़ी बैटरी पैक कर सकता है। लिस्टिंग से पता चलता है कि मिड-रेंज फोन में चार,सात सौmAh की बैटरी से बढ़कर चार,आठ सौ अस्सीmAh यूनिट होगी। कहा जाता है कि कंपनी एक सौ बीस वाट फास्ट चार्जिंग के लिए समर्थन प्रदान करती है और यह फास्ट चार्जर बंडल करने की भी उम्मीद है।
|
गुड़गांव की प्रोफेशनल मिसेज गॉर्जियस 2018 नेहा वर्मा गंडोत्रा ने बताई अपनी जर्नी और सफलता की पूरी कहानी। जानें कैसा था उनका सफर।
पढ़ाई, शादी और बच्चे, एक लड़की एक लड़की की जींदगी इन सबके बीच रह जाती है। कहां रह जाता है टाइम अपने लिए, खुद के सपनों के लिए। लेकिन आज हर जिंदगी के सुपर स्त्री सीरीज में मिलिएं देश भर के 45 प्रतियोगियों को पीछे छोड़ते 'श्रीमती गॉर्जियस 2018' में 'मिसेज इंडिया शी इज इंडिया' का ताज अपने नाम करने वाली सुपर वुमेन नेहा वर्मा गंडोत्रा से। नेहा ने अपने घर परिवार के जिम्मेदारियों की वजह से अपने सपनों को दफन होने नहीं दिया बल्कि उसको अपनी ताकत बनाते हुए अपने करियर को एक नई उड़ान दी।
जजों के कॉस्ट्यूम थीम, एथनिक वियर, ईवनिंग गाउन जैसे अलग-अलग राउंड से गुजरते हूए नेहा ने यह ताज अपने नाम किया। नेहा ने बताया की वो हाल ही में मां बनी है और जब उन्होंने इस पेजेंट के लिए अप्लाई किया अब उनकी बेटी सिर्फ 6 महिने की थी। ऐसे में अपनी बेटी रिद्धि को छोड़ना उनके लिए बहुत मुशकिल था। नेहा ने अपनी सफलता के पीछे अपने पति के सपोर्ट का भी जिक्र किया। नेहा ने कहा कि उनके पति इस मामले में बहुत सहयोगी रहे हैं और जिसकी वजह से वो इस तरह का खिताब हासिल कर पाई है और मैं साथ ही उन्होंने अपने पिता और परिवार के सहयोग का भी जिक्र किया।
इसी के साथ नेहा सफलता की सीढ़ियां चढ़ती जा रही है और अब वो अपना ब्यूटी कांटेस्ट लेकर आ रही है जिसका नाम 'मिस्टर एंड मिसेज इंटरनेशनल इंडियन 2019' है। नेहा इस ब्यूटी कांटेस्ट की आर्गेनाइजर हैं।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
|
गुड़गांव की प्रोफेशनल मिसेज गॉर्जियस दो हज़ार अट्ठारह नेहा वर्मा गंडोत्रा ने बताई अपनी जर्नी और सफलता की पूरी कहानी। जानें कैसा था उनका सफर। पढ़ाई, शादी और बच्चे, एक लड़की एक लड़की की जींदगी इन सबके बीच रह जाती है। कहां रह जाता है टाइम अपने लिए, खुद के सपनों के लिए। लेकिन आज हर जिंदगी के सुपर स्त्री सीरीज में मिलिएं देश भर के पैंतालीस प्रतियोगियों को पीछे छोड़ते 'श्रीमती गॉर्जियस दो हज़ार अट्ठारह' में 'मिसेज इंडिया शी इज इंडिया' का ताज अपने नाम करने वाली सुपर वुमेन नेहा वर्मा गंडोत्रा से। नेहा ने अपने घर परिवार के जिम्मेदारियों की वजह से अपने सपनों को दफन होने नहीं दिया बल्कि उसको अपनी ताकत बनाते हुए अपने करियर को एक नई उड़ान दी। जजों के कॉस्ट्यूम थीम, एथनिक वियर, ईवनिंग गाउन जैसे अलग-अलग राउंड से गुजरते हूए नेहा ने यह ताज अपने नाम किया। नेहा ने बताया की वो हाल ही में मां बनी है और जब उन्होंने इस पेजेंट के लिए अप्लाई किया अब उनकी बेटी सिर्फ छः महिने की थी। ऐसे में अपनी बेटी रिद्धि को छोड़ना उनके लिए बहुत मुशकिल था। नेहा ने अपनी सफलता के पीछे अपने पति के सपोर्ट का भी जिक्र किया। नेहा ने कहा कि उनके पति इस मामले में बहुत सहयोगी रहे हैं और जिसकी वजह से वो इस तरह का खिताब हासिल कर पाई है और मैं साथ ही उन्होंने अपने पिता और परिवार के सहयोग का भी जिक्र किया। इसी के साथ नेहा सफलता की सीढ़ियां चढ़ती जा रही है और अब वो अपना ब्यूटी कांटेस्ट लेकर आ रही है जिसका नाम 'मिस्टर एंड मिसेज इंटरनेशनल इंडियन दो हज़ार उन्नीस' है। नेहा इस ब्यूटी कांटेस्ट की आर्गेनाइजर हैं। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
|
केंद्रीय दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि जिन 118 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाये गये हैं, उनके साथ सुरक्षा, निगरानी और भारतीय उपयोक्ताओं (यूजरों) की सूचनाओं की गोपनीयता से संबंधित दिक्कतें थीं।
सरकार ने लोकप्रिय गेमिंग ऐप पबजी सहित चीन की कंपनियों से जुड़े 118 अन्य मोबाइल ऐप पर बुधवार को प्रतिबंध लगा दिया। इन्हें भारत की संप्रभुता, अखंडत, सुरक्षा और शांति-व्यवस्था के लिये खतरनाक मानते हुए इन पर पाबंदी लगायी गयी है।
इससे चीन की कंपनियों से संबंधित जिन ऐप पर भारत में प्रतिबंध लगाया गया है, उनकी संख्या बढ़कर अब 224 हो गयी है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बुधवार को प्रतिबंधित ऐप में बायदू, बायदू एक्सप्रेस एडिशन, अलीपे, टेनसेंट वॉचलिस्ट, फेसयू, वीचैट रीडिंग, गवर्नमेंट वीचैट, टेनसेंट वेयुन, आपुस लांचर प्रो, आपुस सिक्योरिटी, कट कट, शेयरसेवा बाइ श्याओमी और कैमकार्ड के अलावा पबजी मोबाइल और पबजी मोबाइल लाइट शामिल हैं।
बयान में कहा गया कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय को विभिन्न स्रोतों से कई शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों में एंड्रॉयड व आईओएस जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ मोबाइल ऐप के उपयोक्ताओं (यूजरों) का डेटा चुराकर देश से बाहर के सर्वरों पर भंडारित किये जाने की रपटें भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा, जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, हम अगले एक हजार दिन के भ्रीमर छह लाख गांवों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक लाख गांवों को डिजिटल गांव के रूप में तैयार करना चाहती है। उन्होंने अमेरिका की कंपनियों से कुछ गांवों का चयन करने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में उनका सलाह देने का भी अनुरोध किया।
|
केंद्रीय दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि जिन एक सौ अट्ठारह मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाये गये हैं, उनके साथ सुरक्षा, निगरानी और भारतीय उपयोक्ताओं की सूचनाओं की गोपनीयता से संबंधित दिक्कतें थीं। सरकार ने लोकप्रिय गेमिंग ऐप पबजी सहित चीन की कंपनियों से जुड़े एक सौ अट्ठारह अन्य मोबाइल ऐप पर बुधवार को प्रतिबंध लगा दिया। इन्हें भारत की संप्रभुता, अखंडत, सुरक्षा और शांति-व्यवस्था के लिये खतरनाक मानते हुए इन पर पाबंदी लगायी गयी है। इससे चीन की कंपनियों से संबंधित जिन ऐप पर भारत में प्रतिबंध लगाया गया है, उनकी संख्या बढ़कर अब दो सौ चौबीस हो गयी है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बुधवार को प्रतिबंधित ऐप में बायदू, बायदू एक्सप्रेस एडिशन, अलीपे, टेनसेंट वॉचलिस्ट, फेसयू, वीचैट रीडिंग, गवर्नमेंट वीचैट, टेनसेंट वेयुन, आपुस लांचर प्रो, आपुस सिक्योरिटी, कट कट, शेयरसेवा बाइ श्याओमी और कैमकार्ड के अलावा पबजी मोबाइल और पबजी मोबाइल लाइट शामिल हैं। बयान में कहा गया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को विभिन्न स्रोतों से कई शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों में एंड्रॉयड व आईओएस जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ मोबाइल ऐप के उपयोक्ताओं का डेटा चुराकर देश से बाहर के सर्वरों पर भंडारित किये जाने की रपटें भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, हम अगले एक हजार दिन के भ्रीमर छह लाख गांवों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक लाख गांवों को डिजिटल गांव के रूप में तैयार करना चाहती है। उन्होंने अमेरिका की कंपनियों से कुछ गांवों का चयन करने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में उनका सलाह देने का भी अनुरोध किया।
|
के हितो की रक्षा की । बाप मर गया, कोद्रात बडा हो गया और सन् १६२० मे उमने अपनी सोवियत सत्ता की रक्षा करते हुए मिल-मालिको और उनके भड़ैतो से इवानोवो-वोजनेसेस्क के उन्ही कपडा-मजदूरो की मत्ता की रक्षा करते हुए श्वेतपोलो और वागेल के सैनिको को खूब मारा काटा।
भगवान पर से कोद्रान का विश्वास उठ गया, वह कम्युनिस्ट पार्टी मे आस्था रखता है जो विश्व भर के श्रमजीवियो को मुक्ति की ओर ले जा रही है। वह अपने सारे पशु-पक्षियों को सामूहिक फार्म मे ले गया । वह तो इसके पक्ष मे है कि सिर्फ उसी को रोटी खाने और जमीन पर पाव रखने का अधिकार होना चाहिये, जो काम करता है। उसके रोम-रोम मे सोवियत सत्ता पर असीम आस्था भरी थी । पर कोद्रात को रातो नीद नही आती इसलिये नही आती कि उसके मन मे अपनी सपनि, अपने मवेशियो का दुख लुक छिपकर कसक उठना हालाकि उसने स्वेच्छा से उनसे इकार किया पर कुडली मारकर बेठी कसक से मन में विषाद-सा भर जाता
पहले सुबह से शाम तक वह व्यस्त रहता था पौ फटते ही गायबैलो, भेडो और घोडे को चाग डालता, पानी पिलाता, दोपहर को फिर खलिहान से घास और भूगा ढोकर लाता, रास्ते मे यह खयाल रखता कि एक भी तिनका बेकार न जाये, रात से पहले फिर मफाई
करता । और रात को भी कई-कई बार जाकर मवेशी के बाड़े मे ढोगे को देखता नाद से गिरी घास को समेटकर वापस डालता । उसे अपने काम से आनद मिलता । पर अब कोद्रात के बाडे मे मनहूस मन्नाटा छाया रहता है। अब देख-भाल के लिये कुछ नही रहा । नादे खाली पड़ी है, बाडे का फाटक खुला रहता है, और गत भर मे एक बार भी मुर्गे की बाग नही सुनायी पडती, समय का अदाजा लगाने के लिये कुछ भी नही है ।
जब सामूहिक फार्म के अस्तबल में ड्यूटी देने की बारी होती है तभी उसकी ऊब मिटती है। दिन में वह जल्दी से घर से जाने की ताक मे रहता है ताकि काटने को दौडते खाली बाडे और पत्नी की विषाद भरी आखो को देखने से बच सके ।
इस समय वह उसकी बगल में लेटी निश्चित सो रही है। अलावघर के ऊपर बनी टाड पर ख्रिस्तीका नीद मे हाथ-पाव चलाती,
|
के हितो की रक्षा की । बाप मर गया, कोद्रात बडा हो गया और सन् एक हज़ार छः सौ बीस मे उमने अपनी सोवियत सत्ता की रक्षा करते हुए मिल-मालिको और उनके भड़ैतो से इवानोवो-वोजनेसेस्क के उन्ही कपडा-मजदूरो की मत्ता की रक्षा करते हुए श्वेतपोलो और वागेल के सैनिको को खूब मारा काटा। भगवान पर से कोद्रान का विश्वास उठ गया, वह कम्युनिस्ट पार्टी मे आस्था रखता है जो विश्व भर के श्रमजीवियो को मुक्ति की ओर ले जा रही है। वह अपने सारे पशु-पक्षियों को सामूहिक फार्म मे ले गया । वह तो इसके पक्ष मे है कि सिर्फ उसी को रोटी खाने और जमीन पर पाव रखने का अधिकार होना चाहिये, जो काम करता है। उसके रोम-रोम मे सोवियत सत्ता पर असीम आस्था भरी थी । पर कोद्रात को रातो नीद नही आती इसलिये नही आती कि उसके मन मे अपनी सपनि, अपने मवेशियो का दुख लुक छिपकर कसक उठना हालाकि उसने स्वेच्छा से उनसे इकार किया पर कुडली मारकर बेठी कसक से मन में विषाद-सा भर जाता पहले सुबह से शाम तक वह व्यस्त रहता था पौ फटते ही गायबैलो, भेडो और घोडे को चाग डालता, पानी पिलाता, दोपहर को फिर खलिहान से घास और भूगा ढोकर लाता, रास्ते मे यह खयाल रखता कि एक भी तिनका बेकार न जाये, रात से पहले फिर मफाई करता । और रात को भी कई-कई बार जाकर मवेशी के बाड़े मे ढोगे को देखता नाद से गिरी घास को समेटकर वापस डालता । उसे अपने काम से आनद मिलता । पर अब कोद्रात के बाडे मे मनहूस मन्नाटा छाया रहता है। अब देख-भाल के लिये कुछ नही रहा । नादे खाली पड़ी है, बाडे का फाटक खुला रहता है, और गत भर मे एक बार भी मुर्गे की बाग नही सुनायी पडती, समय का अदाजा लगाने के लिये कुछ भी नही है । जब सामूहिक फार्म के अस्तबल में ड्यूटी देने की बारी होती है तभी उसकी ऊब मिटती है। दिन में वह जल्दी से घर से जाने की ताक मे रहता है ताकि काटने को दौडते खाली बाडे और पत्नी की विषाद भरी आखो को देखने से बच सके । इस समय वह उसकी बगल में लेटी निश्चित सो रही है। अलावघर के ऊपर बनी टाड पर ख्रिस्तीका नीद मे हाथ-पाव चलाती,
|
रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से चलने वाली एक ट्रेन रद्द कर दी गई है, जबकि एक नई विशेष ट्रेन 2 जून से शुरू होगी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के लमडिंग मंडल में बीते दिनों हुई भारी बारिश के चलते विभिन्न स्थानों पर ट्रैक पर जल भराव एवं भूस्खलन (लैंडस्लाइड) होने के कारण प्रभावित रेल खंड पर चलने वाली कई गाड़ियों को निरस्त किया गया है। जिनमें से गाड़ी संख्या 01665 रानी कमलापति-अगरतला एक्सप्रेस स्पेशल 2 जून, 9 जून, 16 जून, 23 एवं 30 जून को प्रारंभिक स्टेशन (रानी कमलापति स्टेशन) से निरस्त कर दी गई है। इससे पहले यह 19 मई और 26 मई को भी निरस्त की जा चुकी है। इसके साथ ही रानी कमलापति-कामाख्या-रानी कमलापति के मध्य 5-5 ट्रिप साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है।
1.
2.
हाल्ट : होशंगाबाद, इटारसी, पिपरिया, गाडरवारा, नसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर, आरा, दानापुर, पाटलियत्र, हाजीपुर, बरौनी, बेगूसराय, खगड़िया, नौगचिया, कटिहार, किशनगंज, न्यू जलपाईगुड़ी, न्यू कूच बिहार, न्यू बोंगाईगांव एवं रंगिया स्टेशनों पर रुकेगी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से चलने वाली एक ट्रेन रद्द कर दी गई है, जबकि एक नई विशेष ट्रेन दो जून से शुरू होगी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के लमडिंग मंडल में बीते दिनों हुई भारी बारिश के चलते विभिन्न स्थानों पर ट्रैक पर जल भराव एवं भूस्खलन होने के कारण प्रभावित रेल खंड पर चलने वाली कई गाड़ियों को निरस्त किया गया है। जिनमें से गाड़ी संख्या एक हज़ार छः सौ पैंसठ रानी कमलापति-अगरतला एक्सप्रेस स्पेशल दो जून, नौ जून, सोलह जून, तेईस एवं तीस जून को प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त कर दी गई है। इससे पहले यह उन्नीस मई और छब्बीस मई को भी निरस्त की जा चुकी है। इसके साथ ही रानी कमलापति-कामाख्या-रानी कमलापति के मध्य पाँच-पाँच ट्रिप साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। एक. दो. हाल्ट : होशंगाबाद, इटारसी, पिपरिया, गाडरवारा, नसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर, आरा, दानापुर, पाटलियत्र, हाजीपुर, बरौनी, बेगूसराय, खगड़िया, नौगचिया, कटिहार, किशनगंज, न्यू जलपाईगुड़ी, न्यू कूच बिहार, न्यू बोंगाईगांव एवं रंगिया स्टेशनों पर रुकेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
ऊपर दी गई प्रोफाइल उन दो बदमाशों की है जिनको लंका पुलिस ने सोमवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में लूटपाट, चेन स्नेचिंग, अपहरण करने के आरोप में इनके एक अन्य साथी के साथ गिरफ्तार किया है। ये तीनों जब पुलिस के हत्थे चढ़े और पूछताछ में इनके पढ़े लिखे होने की जानकारी पुलिस को लगी तो उसके भी होश उड़ गए। पकड़ा गया राहुल अच्छे परिवार से बिलॉन्ग करता है। खुद की स्कार्पियो से वो अपने गैंग के साथ शहर में वारदातों को अंजाम देता था।
एसपी सिटी सुधाकर यादव ने सोमवार को मीडिया को अपने चेतगंज स्थित ऑफिस पर बताया कि गैंग लीडर शहजाद उर्फ शहरे आलम समेत आशीष यादव व राहुल उपाध्याय को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से एक स्कार्पियो के अलावा ग्यारह मोबाइल हैंडसेट, दो असलहे व लूट के पंद्रह हजार रुपये बरामद किए हैं। सीओ भेलूपुर राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गैंग में लगभग 20 बदमाश और हैं। सभी भेलूपुर, लंका और रोहनिया थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है।
एसपी सिटी सुधाकर यादव ने बताया कि बरामद स्कार्पियो अरेस्ट बदमाश राहुल की है। गैंग का सरगना शहजाद, राहुल और आशीष के अलावा अन्य गुर्गे गाड़ी से घूमकर अपना शिकार तलाशते थे। पंद्रह जनवरी को लंका थाना क्षेत्र स्थित एक महिला कॉलेज के पास इन लोगों ने मुगलसराय के युवराज की बाइक में पहले टक्कर मारी और फिर असलहे के बल पर स्कार्पियो से उसे अगवा कर लिया। अगवा करने के बाद वाराणसी- इलाहाबाद हाईवे ले गए और युवराज से जबरन उसके खाते से एटीएम से रुपये निकलवाने के बाद उसे वहीं छोड़ दिया।
पढ़े लिखे बदमाश राहुल और आशीष क्यों इस ओर आ गए? इस बारे में उनका कहना था कि घर से मिलने वाले रुपये उनके लिए पूरे नहीं पड़ते थे। इस कारण वो अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते थे। कॉलेज में सभी लोग अच्छे ब्रांडेड कपड़े पहनते थे और रुपये खर्च करते थे। बस इन सब चीजों को देखकर ही दोनों ने गलत राह चुनी और स्टूडेंट से क्रिमिनल बन गए।
गैंग में राहुल को एक क्राइम ब्रांच ऑफिसर की तरह प्रेजेंट किया जाता था। पूछताछ में बातचीत का लहजा और पहनावा भी राहुल क्राइम ब्रांच के अधिकारी जैसा ही रखता था। सूट बूट में स्कार्पियो से ये गैंग सुनसान स्थानों पर जाता था और गाड़ी रोड किनारे लगाकर ये लोग गाडि़यों को रोकते थे। कोई कार सवार जैसे ही गाड़ी रोकता ये खुद को क्राइम ब्रांच का बताकर उसे उठा लेते और पूछताछ के बहाने लूटपाट कर उसे छोड़ देते थे। लंका, भेलूपुर, रोहनिया इलाके को इन लोगों ने अपना गढ़ बनाया था। चेन स्नेचिंग के बाबत पूछने पर एसपी सिटी ने कहा कि गैंग के गुर्गे चेन स्नेचिंग में माहिर हैं और इन लोगों ने शहर, देहात में चेन स्नेचिंग की कितनी वारदात की हैं ये इन लोगों को भी नहीं पता।
|
ऊपर दी गई प्रोफाइल उन दो बदमाशों की है जिनको लंका पुलिस ने सोमवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में लूटपाट, चेन स्नेचिंग, अपहरण करने के आरोप में इनके एक अन्य साथी के साथ गिरफ्तार किया है। ये तीनों जब पुलिस के हत्थे चढ़े और पूछताछ में इनके पढ़े लिखे होने की जानकारी पुलिस को लगी तो उसके भी होश उड़ गए। पकड़ा गया राहुल अच्छे परिवार से बिलॉन्ग करता है। खुद की स्कार्पियो से वो अपने गैंग के साथ शहर में वारदातों को अंजाम देता था। एसपी सिटी सुधाकर यादव ने सोमवार को मीडिया को अपने चेतगंज स्थित ऑफिस पर बताया कि गैंग लीडर शहजाद उर्फ शहरे आलम समेत आशीष यादव व राहुल उपाध्याय को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से एक स्कार्पियो के अलावा ग्यारह मोबाइल हैंडसेट, दो असलहे व लूट के पंद्रह हजार रुपये बरामद किए हैं। सीओ भेलूपुर राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गैंग में लगभग बीस बदमाश और हैं। सभी भेलूपुर, लंका और रोहनिया थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है। एसपी सिटी सुधाकर यादव ने बताया कि बरामद स्कार्पियो अरेस्ट बदमाश राहुल की है। गैंग का सरगना शहजाद, राहुल और आशीष के अलावा अन्य गुर्गे गाड़ी से घूमकर अपना शिकार तलाशते थे। पंद्रह जनवरी को लंका थाना क्षेत्र स्थित एक महिला कॉलेज के पास इन लोगों ने मुगलसराय के युवराज की बाइक में पहले टक्कर मारी और फिर असलहे के बल पर स्कार्पियो से उसे अगवा कर लिया। अगवा करने के बाद वाराणसी- इलाहाबाद हाईवे ले गए और युवराज से जबरन उसके खाते से एटीएम से रुपये निकलवाने के बाद उसे वहीं छोड़ दिया। पढ़े लिखे बदमाश राहुल और आशीष क्यों इस ओर आ गए? इस बारे में उनका कहना था कि घर से मिलने वाले रुपये उनके लिए पूरे नहीं पड़ते थे। इस कारण वो अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते थे। कॉलेज में सभी लोग अच्छे ब्रांडेड कपड़े पहनते थे और रुपये खर्च करते थे। बस इन सब चीजों को देखकर ही दोनों ने गलत राह चुनी और स्टूडेंट से क्रिमिनल बन गए। गैंग में राहुल को एक क्राइम ब्रांच ऑफिसर की तरह प्रेजेंट किया जाता था। पूछताछ में बातचीत का लहजा और पहनावा भी राहुल क्राइम ब्रांच के अधिकारी जैसा ही रखता था। सूट बूट में स्कार्पियो से ये गैंग सुनसान स्थानों पर जाता था और गाड़ी रोड किनारे लगाकर ये लोग गाडि़यों को रोकते थे। कोई कार सवार जैसे ही गाड़ी रोकता ये खुद को क्राइम ब्रांच का बताकर उसे उठा लेते और पूछताछ के बहाने लूटपाट कर उसे छोड़ देते थे। लंका, भेलूपुर, रोहनिया इलाके को इन लोगों ने अपना गढ़ बनाया था। चेन स्नेचिंग के बाबत पूछने पर एसपी सिटी ने कहा कि गैंग के गुर्गे चेन स्नेचिंग में माहिर हैं और इन लोगों ने शहर, देहात में चेन स्नेचिंग की कितनी वारदात की हैं ये इन लोगों को भी नहीं पता।
|
तोक्यो-फुकुशिमा ,(एजेंसी)। एक महीने पहले भूकंप के साथ आयी आपदा के बाद सुनामी फ्रभावित पूर्वोत्तर जापान का तीसरी बार दौरा करते हुए फ्रधानमंत्री नाओतो कान ने आज क्षेत्र के पुनर्निर्माण में पूरी मदद देने का वादा किया। कान की दुनिया भर को आभार संदेश देने की भी योजना है। इस क्षेत्र में विकिरण की समस्या से जूझ रहे फुकुशिमा परमाणु संयंत्र की अब तक मरम्मत नहीं हो पायी है। कान ने मियागी के इशिनोमाकी में मत्स्यपालन वाले क्षेत्र का दौरा किया जो 11 मार्च को 9 तीव्रता के साथ आये भूकंप और सुनामी से बदतर तरीके से फ्रभावित हुआ है। यहां करीब 30,000 लोगों की या तो मौत हो गयी या फिर वे लापता हो गये हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों से वादा किया कि सरकार क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिये हरसंभव मदद करेगी और मछली पालन दोबारा शुरू करायेगी। फ्रशांत महासागर में निम्न रेडियोधर्मी पानी छोड़े जाने को लेकर दक्षिण कोरिया के चिंता जताये जाने के बीच कान ने स्वीकार किया कि जापान को अपने पड़ोसियों को अधिक दृढ़ स्पष्टीकरण देना चाहिये। फ्रधानमंत्री ने सेंदाई स्थित आत्म रक्षा बल के मुख्यालय का दौरा किया जहां बल तथा अमेरिकी सेना ने राहत कार्य के लिये संयुक्त कार्यालय स्थापित किया है। कान ने सहयोग के लिये अमेरिकी सेना का शुकिया भी अदा किया। शहर में तबाह हो चुके एक बंदरगाह पर आये कान ने स्थानीय मछुआरा उद्योग के सदस्यों से कहा कि सरकार उन बंदरगाहों को चुनेगी जिनका पुनर्वास कार्पाम के तहत फ्राथमिकता के आधार पर पुनर्निर्माण किया जाना है। फ्रधानमंत्री ने मियागी फ्रांत के गवर्नर योशिहिरो मुराई से कहा कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द 70,000 अस्थायी आवासों का निर्माण करेगी। आत्म रक्षा बल के विमान पर सवार होकर इस फ्रांत में पहुंचे कान ने इशिनोमाकी शहर के महापौर हिरोशी कामेयामा से भी बातचीत की। गवर्नर मुराई ने भूकंप तथा सुनामी से फ्रभावित लोगों के लिये पर्याप्त मदद मांगी, जबकि महापौर ने जितने जल्द संभव हो सके अस्थायी घरों का निर्माण करने का अनुरोध किया। कान ने कहा कि सरकार इस सप्ताह विशेषज्ञों की एक समिति बनायेगी ताकि पुनर्निर्माण का खाका तैयार किया जा सके। राष्ट्रीय फ्रसारक एनएचके ने खबर दी कि फ्रधानमंत्री बाद में एक पर्वत पर दौरा करने गये जो सुनामी के बाद भी बच गया और जहां पनाहगाह बनाये गये हैं। उधर, जापानी अधिकारियों ने कहा कि कान इस आपदा के बाद दुनिया भर से मिली मदद के लिये अखबारों में एक आभार संदेश देंगे। इस संदेश का फ्रकाशन सोमवार को होगा जब आपदा आये एक महीना पूरा हो जायेगा। इस बीच, संभावना है कि फुकुशिमा फ्रांत के कर्मी संयंत्र कमांक-2 की टर्बाइन इमारत के तलघर में भरे अत्यधिक रेडियोधर्मी पानी को बाहर निकालने का काम जल्द ही शुरू करेंगे।
|
तोक्यो-फुकुशिमा ,। एक महीने पहले भूकंप के साथ आयी आपदा के बाद सुनामी फ्रभावित पूर्वोत्तर जापान का तीसरी बार दौरा करते हुए फ्रधानमंत्री नाओतो कान ने आज क्षेत्र के पुनर्निर्माण में पूरी मदद देने का वादा किया। कान की दुनिया भर को आभार संदेश देने की भी योजना है। इस क्षेत्र में विकिरण की समस्या से जूझ रहे फुकुशिमा परमाणु संयंत्र की अब तक मरम्मत नहीं हो पायी है। कान ने मियागी के इशिनोमाकी में मत्स्यपालन वाले क्षेत्र का दौरा किया जो ग्यारह मार्च को नौ तीव्रता के साथ आये भूकंप और सुनामी से बदतर तरीके से फ्रभावित हुआ है। यहां करीब तीस,शून्य लोगों की या तो मौत हो गयी या फिर वे लापता हो गये हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों से वादा किया कि सरकार क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिये हरसंभव मदद करेगी और मछली पालन दोबारा शुरू करायेगी। फ्रशांत महासागर में निम्न रेडियोधर्मी पानी छोड़े जाने को लेकर दक्षिण कोरिया के चिंता जताये जाने के बीच कान ने स्वीकार किया कि जापान को अपने पड़ोसियों को अधिक दृढ़ स्पष्टीकरण देना चाहिये। फ्रधानमंत्री ने सेंदाई स्थित आत्म रक्षा बल के मुख्यालय का दौरा किया जहां बल तथा अमेरिकी सेना ने राहत कार्य के लिये संयुक्त कार्यालय स्थापित किया है। कान ने सहयोग के लिये अमेरिकी सेना का शुकिया भी अदा किया। शहर में तबाह हो चुके एक बंदरगाह पर आये कान ने स्थानीय मछुआरा उद्योग के सदस्यों से कहा कि सरकार उन बंदरगाहों को चुनेगी जिनका पुनर्वास कार्पाम के तहत फ्राथमिकता के आधार पर पुनर्निर्माण किया जाना है। फ्रधानमंत्री ने मियागी फ्रांत के गवर्नर योशिहिरो मुराई से कहा कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द सत्तर,शून्य अस्थायी आवासों का निर्माण करेगी। आत्म रक्षा बल के विमान पर सवार होकर इस फ्रांत में पहुंचे कान ने इशिनोमाकी शहर के महापौर हिरोशी कामेयामा से भी बातचीत की। गवर्नर मुराई ने भूकंप तथा सुनामी से फ्रभावित लोगों के लिये पर्याप्त मदद मांगी, जबकि महापौर ने जितने जल्द संभव हो सके अस्थायी घरों का निर्माण करने का अनुरोध किया। कान ने कहा कि सरकार इस सप्ताह विशेषज्ञों की एक समिति बनायेगी ताकि पुनर्निर्माण का खाका तैयार किया जा सके। राष्ट्रीय फ्रसारक एनएचके ने खबर दी कि फ्रधानमंत्री बाद में एक पर्वत पर दौरा करने गये जो सुनामी के बाद भी बच गया और जहां पनाहगाह बनाये गये हैं। उधर, जापानी अधिकारियों ने कहा कि कान इस आपदा के बाद दुनिया भर से मिली मदद के लिये अखबारों में एक आभार संदेश देंगे। इस संदेश का फ्रकाशन सोमवार को होगा जब आपदा आये एक महीना पूरा हो जायेगा। इस बीच, संभावना है कि फुकुशिमा फ्रांत के कर्मी संयंत्र कमांक-दो की टर्बाइन इमारत के तलघर में भरे अत्यधिक रेडियोधर्मी पानी को बाहर निकालने का काम जल्द ही शुरू करेंगे।
|
रामगंगानगर आवासीय परियोजना में जल शक्ति योजना के तहत जल संरक्षण प्रोजेक्ट तैयार किया जाना है। इसके लिए बीडीए ने प्रशासन से ड्रोन से सर्वे करने की अनुमति मांगी है। यह परमिशन मिल जाने के बाद बीडीए सचिव ने इंदौर की एक संस्था को इसका कांट्रेक्ट दिया है।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
रामगंगानगर आवासीय परियोजना में जल शक्ति योजना के तहत जल संरक्षण प्रोजेक्ट तैयार किया जाना है। इसके लिए बीडीए ने प्रशासन से ड्रोन से सर्वे करने की अनुमति मांगी है। यह परमिशन मिल जाने के बाद बीडीए सचिव ने इंदौर की एक संस्था को इसका कांट्रेक्ट दिया है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
कार्तिक आर्यन की फैन फॉलोइंग का कोई जवाब नहीं है। भूल भुलैया 2 की सक्सेस के बाद से कार्तिक के चाहने वालों की लिस्ट लंबी होती जा रही है। खासकर लड़कियों के बीच कार्तिक को लेकर अलग ही क्रेज देखने को मिलता है। कार्तिक आर्यन भी हमेशा अपने फैंस का दिल जीतने का एक भी मौका नहीं छोड़ते हैं।
भूल भुलैया 2 की सफलता के बाद कार्तिक के पास कई सारे प्रोजेक्ट्स है हालांकि इतना बिजी होने के बाद भी अभिनेता अपने फैंस का खास ख्याल रखत है। कार्तिक अपने फैंस की बहुत कदर भी करते है और इस बार भी कुछ ऐसा किया है जिसे देखने के बाद उनके चाहने वालें एक बार फिर उनके दीवाने हो गए है। वहीं वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स एक्टर की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
दरअसल, सोशल मीडिया पर एक क्यूट वीडियो वायरल हो रहा है, जो इस वक्त चर्चा में छाया हुआ है। इस वीडियो में एक शख्स अपनी दोस्त को एयरपोर्ट पर कार्तिक आर्यन के पोस्टर को लेकर उसे रिसीव करने पहुंचता है। क्लिप के टेक्स्ट में लिखा है, मुंबई में मेरे पहले दिन इस तरह मेरा स्वागत किया गया। मैं कार्तिक आर्यन का बहुत बड़ी फैन हूं। वो एयरपोर्ट पर मेरे लिए कार्तिक आर्यन लेकर आ गया।
वीडियो के बैकग्राउंड में कार्तिक की फैन की आवाज आ रही है वो अपने दोस्त से कहती है कि 'तू सीरियसली कार्तिक आर्यन का बोर्ड उठा के लाया है? ' जिसके बाद वो लड़का अपनी दोस्त को जवाब देते हुए कहता है कि, 'वो गुलाब भी लाया है तेरे लिए। ' इस क्यूट वीडियो को देखने के बाद कार्तिक भी खुद को इस पर रिएक्ट करने से नहीं रोक पाए।
कार्तिक ने इस वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है और साथ ही उसके कैप्शन में अपने फैन को जवाब देते हुए लिखा, 'मुझे ही बुलाया लिया होता, कटआउट की क्या जरूरत थी। लेकिन बहुत सोच-समझकर स्वागत किया गया। ' कार्तिक की पोस्ट को उनके फैंस काफी पसंद कर रहे हैं और कार्तिक के इस स्वीट जेस्चर पर अपने रिएक्शन भी दे रहे हैं।
वीडियो पर कॉमेंट करते हुए एक फैन ने लिखा, 'आप इसी कारण से सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले और विनम्र सुपरस्टार हैं। ' दूसरे फैन ने लिखा, ' कितना प्यारा है। ' वहीं वीडियो में नजर आ रही लड़की ने भी कार्तिक के वीडियो पर कॉमेंट कर लिखा, 'ओह। मेरे। भगवान! सपना सच होना! ! ! धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद। ' एक अन्य यूजर ने लिखा, वाह भाई।
|
कार्तिक आर्यन की फैन फॉलोइंग का कोई जवाब नहीं है। भूल भुलैया दो की सक्सेस के बाद से कार्तिक के चाहने वालों की लिस्ट लंबी होती जा रही है। खासकर लड़कियों के बीच कार्तिक को लेकर अलग ही क्रेज देखने को मिलता है। कार्तिक आर्यन भी हमेशा अपने फैंस का दिल जीतने का एक भी मौका नहीं छोड़ते हैं। भूल भुलैया दो की सफलता के बाद कार्तिक के पास कई सारे प्रोजेक्ट्स है हालांकि इतना बिजी होने के बाद भी अभिनेता अपने फैंस का खास ख्याल रखत है। कार्तिक अपने फैंस की बहुत कदर भी करते है और इस बार भी कुछ ऐसा किया है जिसे देखने के बाद उनके चाहने वालें एक बार फिर उनके दीवाने हो गए है। वहीं वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स एक्टर की जमकर तारीफ कर रहे हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक क्यूट वीडियो वायरल हो रहा है, जो इस वक्त चर्चा में छाया हुआ है। इस वीडियो में एक शख्स अपनी दोस्त को एयरपोर्ट पर कार्तिक आर्यन के पोस्टर को लेकर उसे रिसीव करने पहुंचता है। क्लिप के टेक्स्ट में लिखा है, मुंबई में मेरे पहले दिन इस तरह मेरा स्वागत किया गया। मैं कार्तिक आर्यन का बहुत बड़ी फैन हूं। वो एयरपोर्ट पर मेरे लिए कार्तिक आर्यन लेकर आ गया। वीडियो के बैकग्राउंड में कार्तिक की फैन की आवाज आ रही है वो अपने दोस्त से कहती है कि 'तू सीरियसली कार्तिक आर्यन का बोर्ड उठा के लाया है? ' जिसके बाद वो लड़का अपनी दोस्त को जवाब देते हुए कहता है कि, 'वो गुलाब भी लाया है तेरे लिए। ' इस क्यूट वीडियो को देखने के बाद कार्तिक भी खुद को इस पर रिएक्ट करने से नहीं रोक पाए। कार्तिक ने इस वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है और साथ ही उसके कैप्शन में अपने फैन को जवाब देते हुए लिखा, 'मुझे ही बुलाया लिया होता, कटआउट की क्या जरूरत थी। लेकिन बहुत सोच-समझकर स्वागत किया गया। ' कार्तिक की पोस्ट को उनके फैंस काफी पसंद कर रहे हैं और कार्तिक के इस स्वीट जेस्चर पर अपने रिएक्शन भी दे रहे हैं। वीडियो पर कॉमेंट करते हुए एक फैन ने लिखा, 'आप इसी कारण से सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले और विनम्र सुपरस्टार हैं। ' दूसरे फैन ने लिखा, ' कितना प्यारा है। ' वहीं वीडियो में नजर आ रही लड़की ने भी कार्तिक के वीडियो पर कॉमेंट कर लिखा, 'ओह। मेरे। भगवान! सपना सच होना! ! ! धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद। ' एक अन्य यूजर ने लिखा, वाह भाई।
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
Terrorists Attacks: एक बार फिर भाजपा के नेता आतंकियों के निशाने पर हैं।
Terrorists Attacks: कल की खबरों से ज्ञात है कि एक बार फिर भाजपा के नेता आतंकियों के निशाने पर हैं। लश्कर ए तैयबा के आतंकियों ने जम्मू कश्मीर में भाजपा के सरपंच और उनकी पत्नि का कत्ल कर दिया। सोमवार की दोपहर 4 बजे के करीब लाल चौक इलाके से दो आतंकी घर में घुसे और सरपंच गुलाम रसूल डार और उनकी पत्नी जवाहरा बेगम को गोलियों से उड़ा दिया।
जवाहरा ने बिसह में आकर अपने पति को बचाने की कोशिश की तो आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दी। यह घटना अनन्तनाग में हुई। इस साल ऐसी यह चौथी घटना है। जिसमें भाजपा नेता की मौत हुई है। घटना के समय सरपंच का बेटा श्रीनगर में था। इसके अलावा सुरक्षा कर्मी भी मौजूद नहीं था।
दोनो आतंकी घटना के बाद फरार हो गये। गुलाम डार कुलगाम जिले के रेड़वानी के सरपंच थे। उनकी पत्नी भी पंच थीं। कुलगाम में आतंकियों के निशाने से बचने के लिए वे अनन्तनाग में किराए के मकान में रह रहे थे। गुलाम डार आतंकियों के खिलाफ मुखर थे। वे किसान मोर्चा के सदस्य भी रहे हैं। गौरतलब है कि 05 अगस्त को गुलाम डार ने लालचौक पर तिरंगा फहराया था।
अक्सर आतंक के खिलाफ बोलने वाले नेताओं की हत्या कर दी जाती है। पिछले सालों में कुछ ऐसी ही घटनाओं के माध्यम से ये अंदाज लगाया जा सकता है। जैसे कि अप्रेल 2021 में बीजेपी नेता मोहम्मद अनवर ख़ान के श्रीनगर के नौगाम स्थित घर पर इसी साल अप्रैल को चरमपंथी हमला हुआ था। हमले के समय अनवर ख़ान घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे इसलिए वो बच गए लेकिन हमले में उनके एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई। पुलिस ने इस हमले के लिए चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को ज़िम्मेदार ठहराया।
जून 2021 - भाजपा पार्षद राकेश पंडिता की हत्या कर दी जाती है। जम्मू और कश्मीर से बीजेपी काउंसिलर राकेश पंडिता पुलवामा के त्राल इलाक़े में अपने मित्र से मुलाक़ात कर पहुंचे थे। रात क़रीब 10. 15 बजे तीन अज्ञात बंदूकधारियों ने उन पर गोलियां चलाई। इस हमले में राकेश पंडिता बुरी तरह घायल हुए। बाद में अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई।
जुलाई 2020- कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले में संदिग्ध चरमपंथियों ने 22 जुलाई 2020 को बीजेपी के पूर्व ज़िला अध्यक्ष शेख़ वसीम बारी, उनके पिता और भाई की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
अक्तूबर 2020 में तीन बीजेपी कार्यकर्ता फ़िदा हुसैन याटू, उमर सिंह राशिद और उमर रमज़ान हजाम की मौत एक चरमपंथी हमले में हो गई थी। कुलगाम के वाईके पुरा के इलाक़े में शाम के वक़्त उनकी कार पर हमला हुआ था, जिसमें तीनों की मौत हो गई.
अगस्त 2020 में बड़गाम में बीजेपी कार्यकर्ता अब्दुल हामिद नजर पर अज्ञात लोगों ने गालियां चलाई थीं। अब्दुल हामिद को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के कुछ दिन पहले सज्जाद अहमद खांडे नाम के एक सरपंच और बीजेपी कार्यकर्ता की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।
अगस्त 2018 में पुलवामा में बंदूकधारियों ने बीजेपी नेता शब्बीर अहमद बट की गोली मारकर हत्या कर दी थी। चरमपंथियों ने उनके घर के पास से अगवा कर लिया था। जिसके बाद गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गई। उनका शव बाद में रख-ए-लित्तर गांव के पास मिला।
नवंबर 2017 में बीजेपी के शोपियां ज़िले के अध्यक्ष और बीजेपी यूथ विंग के नेता गौहर अहमद बट की गला काट कर हत्या कर दी गई थी। 30 साल के गौहर का शव दो नवंबर 2017 को किलूरा के एक बागीचे से मिला था। पुलिस के अनुसार उनके घर से बाहर से उन्हें अगवा कर उनकी हत्या की गई थी।
शोपियां के बोनगाम के रहने वाले गौहर बट तीन साल पहले ही बीजेपी में शामिल हुए थे। साल 2014 में कुलगाम ज़िले के नूराबाद के निवासी मुश्ताक़ के घर पर साल 2014 में हमला किया गया था। हमले के बाद मुश्ताक़ परिवार समेत श्रीनगर में रहने लगे। हमले के वक़्त मुश्ताक़ घर पर मौजूद नहीं थे। मुश्ताक 22 साल के थे जबसे भाजपा से जुड़े थे।
घाटी में बीजेपी की लोकप्रियता बढ़ रही है और अब कश्मीर में कई पंचायतों में पार्टी के पंच हैं। डीडीसी और बीडीसी चुनावों में भी पार्टी के कार्यकर्ता जीते हैं। इसके पीछे एक कारण अनुच्छेद 370 को हटाना हो। चरमपंथी भी नहीं चाहते थे कि आर्टिकल 370 हटे। आर्टिकल हटने के बाद हमारे लोगों के लिए ख़तरा और भी बढ़ गया है।
कुछ लोग का मानना है की बीजेपी नेताओं को सुरक्षा अच्छे ढंग से नहीं दी जा रही है। घाटी इलाकों में कुछ ऐसी भी पार्टियां हैं जो मिलकर 370 के खत्म होने का विरोध करती है। जिससे चरमपंथियों को बल मिलता है। और भाजपा नेताओं के खिलाफ आक्रोश हत्या के रूप में बाहर आता है। अन्य कई मामले में चरमपंथी केंद्र सरकार की तब्दीलियों से नाराज है। जिसकी वजह से भी ये हत्याएं होती रही हैं।
आतंकी चाहते हैं कि केंद्र की सरकार जम्मू कश्मीर पर अपनी हुकूमत नहीं फैलाये। जिसके लिए वे ऐसी कायराना हरकत करके दहशत फैलाने की कोशिश करते हैं।
हालांकि बीजेपी के अलावा पीडीपी के नेताओं को भी निशाना बनाया जाता है। आतंकवादी इन दिनों रोज ही जम्मू कश्मीर के इलाकों में हमला करके अपनी उपस्थिति सक्रिय रूप से फिर से दर्ज कर रहे हैं। जिससे हमारी सेना मिलकर मुकाबला करते हुए उनके मंसूबो को नाकाम कर रही है।
|
Terrorists Attacks: एक बार फिर भाजपा के नेता आतंकियों के निशाने पर हैं। Terrorists Attacks: कल की खबरों से ज्ञात है कि एक बार फिर भाजपा के नेता आतंकियों के निशाने पर हैं। लश्कर ए तैयबा के आतंकियों ने जम्मू कश्मीर में भाजपा के सरपंच और उनकी पत्नि का कत्ल कर दिया। सोमवार की दोपहर चार बजे के करीब लाल चौक इलाके से दो आतंकी घर में घुसे और सरपंच गुलाम रसूल डार और उनकी पत्नी जवाहरा बेगम को गोलियों से उड़ा दिया। जवाहरा ने बिसह में आकर अपने पति को बचाने की कोशिश की तो आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दी। यह घटना अनन्तनाग में हुई। इस साल ऐसी यह चौथी घटना है। जिसमें भाजपा नेता की मौत हुई है। घटना के समय सरपंच का बेटा श्रीनगर में था। इसके अलावा सुरक्षा कर्मी भी मौजूद नहीं था। दोनो आतंकी घटना के बाद फरार हो गये। गुलाम डार कुलगाम जिले के रेड़वानी के सरपंच थे। उनकी पत्नी भी पंच थीं। कुलगाम में आतंकियों के निशाने से बचने के लिए वे अनन्तनाग में किराए के मकान में रह रहे थे। गुलाम डार आतंकियों के खिलाफ मुखर थे। वे किसान मोर्चा के सदस्य भी रहे हैं। गौरतलब है कि पाँच अगस्त को गुलाम डार ने लालचौक पर तिरंगा फहराया था। अक्सर आतंक के खिलाफ बोलने वाले नेताओं की हत्या कर दी जाती है। पिछले सालों में कुछ ऐसी ही घटनाओं के माध्यम से ये अंदाज लगाया जा सकता है। जैसे कि अप्रेल दो हज़ार इक्कीस में बीजेपी नेता मोहम्मद अनवर ख़ान के श्रीनगर के नौगाम स्थित घर पर इसी साल अप्रैल को चरमपंथी हमला हुआ था। हमले के समय अनवर ख़ान घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे इसलिए वो बच गए लेकिन हमले में उनके एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई। पुलिस ने इस हमले के लिए चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को ज़िम्मेदार ठहराया। जून दो हज़ार इक्कीस - भाजपा पार्षद राकेश पंडिता की हत्या कर दी जाती है। जम्मू और कश्मीर से बीजेपी काउंसिलर राकेश पंडिता पुलवामा के त्राल इलाक़े में अपने मित्र से मुलाक़ात कर पहुंचे थे। रात क़रीब दस. पंद्रह बजे तीन अज्ञात बंदूकधारियों ने उन पर गोलियां चलाई। इस हमले में राकेश पंडिता बुरी तरह घायल हुए। बाद में अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। जुलाई दो हज़ार बीस- कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले में संदिग्ध चरमपंथियों ने बाईस जुलाई दो हज़ार बीस को बीजेपी के पूर्व ज़िला अध्यक्ष शेख़ वसीम बारी, उनके पिता और भाई की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अक्तूबर दो हज़ार बीस में तीन बीजेपी कार्यकर्ता फ़िदा हुसैन याटू, उमर सिंह राशिद और उमर रमज़ान हजाम की मौत एक चरमपंथी हमले में हो गई थी। कुलगाम के वाईके पुरा के इलाक़े में शाम के वक़्त उनकी कार पर हमला हुआ था, जिसमें तीनों की मौत हो गई. अगस्त दो हज़ार बीस में बड़गाम में बीजेपी कार्यकर्ता अब्दुल हामिद नजर पर अज्ञात लोगों ने गालियां चलाई थीं। अब्दुल हामिद को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के कुछ दिन पहले सज्जाद अहमद खांडे नाम के एक सरपंच और बीजेपी कार्यकर्ता की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। अगस्त दो हज़ार अट्ठारह में पुलवामा में बंदूकधारियों ने बीजेपी नेता शब्बीर अहमद बट की गोली मारकर हत्या कर दी थी। चरमपंथियों ने उनके घर के पास से अगवा कर लिया था। जिसके बाद गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गई। उनका शव बाद में रख-ए-लित्तर गांव के पास मिला। नवंबर दो हज़ार सत्रह में बीजेपी के शोपियां ज़िले के अध्यक्ष और बीजेपी यूथ विंग के नेता गौहर अहमद बट की गला काट कर हत्या कर दी गई थी। तीस साल के गौहर का शव दो नवंबर दो हज़ार सत्रह को किलूरा के एक बागीचे से मिला था। पुलिस के अनुसार उनके घर से बाहर से उन्हें अगवा कर उनकी हत्या की गई थी। शोपियां के बोनगाम के रहने वाले गौहर बट तीन साल पहले ही बीजेपी में शामिल हुए थे। साल दो हज़ार चौदह में कुलगाम ज़िले के नूराबाद के निवासी मुश्ताक़ के घर पर साल दो हज़ार चौदह में हमला किया गया था। हमले के बाद मुश्ताक़ परिवार समेत श्रीनगर में रहने लगे। हमले के वक़्त मुश्ताक़ घर पर मौजूद नहीं थे। मुश्ताक बाईस साल के थे जबसे भाजपा से जुड़े थे। घाटी में बीजेपी की लोकप्रियता बढ़ रही है और अब कश्मीर में कई पंचायतों में पार्टी के पंच हैं। डीडीसी और बीडीसी चुनावों में भी पार्टी के कार्यकर्ता जीते हैं। इसके पीछे एक कारण अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को हटाना हो। चरमपंथी भी नहीं चाहते थे कि आर्टिकल तीन सौ सत्तर हटे। आर्टिकल हटने के बाद हमारे लोगों के लिए ख़तरा और भी बढ़ गया है। कुछ लोग का मानना है की बीजेपी नेताओं को सुरक्षा अच्छे ढंग से नहीं दी जा रही है। घाटी इलाकों में कुछ ऐसी भी पार्टियां हैं जो मिलकर तीन सौ सत्तर के खत्म होने का विरोध करती है। जिससे चरमपंथियों को बल मिलता है। और भाजपा नेताओं के खिलाफ आक्रोश हत्या के रूप में बाहर आता है। अन्य कई मामले में चरमपंथी केंद्र सरकार की तब्दीलियों से नाराज है। जिसकी वजह से भी ये हत्याएं होती रही हैं। आतंकी चाहते हैं कि केंद्र की सरकार जम्मू कश्मीर पर अपनी हुकूमत नहीं फैलाये। जिसके लिए वे ऐसी कायराना हरकत करके दहशत फैलाने की कोशिश करते हैं। हालांकि बीजेपी के अलावा पीडीपी के नेताओं को भी निशाना बनाया जाता है। आतंकवादी इन दिनों रोज ही जम्मू कश्मीर के इलाकों में हमला करके अपनी उपस्थिति सक्रिय रूप से फिर से दर्ज कर रहे हैं। जिससे हमारी सेना मिलकर मुकाबला करते हुए उनके मंसूबो को नाकाम कर रही है।
|
बिटकॉइन को कानूनी मान्यता देने वाला अल-साल्वाडोर दुनिया का पहला देश है। हाल में यह देश क्रिप्टो से जुड़े मामलों का सामना कर रहा है। देश के लोगों ने सरकार की ओर से जारी किए गए चिवो Chivo वॉलेट में फ्रॉड लेनदेन की शिकायत की है। अल-साल्वाडोर के कई लोगों ने शिकायत की है कि उनके चिवो वॉलेट से रहस्यमयी तरीके से बिटकॉइन गायब हो रहे हैं। सितंबर में अल-साल्वाडोर ने बिटकॉइन को लीगल करेंसी के रूप में अपनाया था। उसके बाद से ही देश के राष्ट्रपति नायब बुकेले, सोशल मीडिया पर बिटकॉइन का सपोर्ट करते रहते हैं।
पीड़ित लोग अपना पक्ष रखने के लिए ट्विटर पर स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे हैं। कई लोग सरकार के अलावा चिवो वॉलेट अधिकारियों से मदद के लिए संपर्क कर रहे हैं। उनसे जवाब भी मांग रहे हैं। लोगों ने आरोप लगाया है कि 'अनधिकृत लेनदेन' के बदले उन्हें बिटकॉइन टोकन की कीमत चुकानी पड़ी है।
एक यूजर ने अल साल्वाडोर से होने का दावा करते हुए Gadgets 360 को बताया कि शिकायत करने पर भी लोगों को कोई जवाब नहीं मिलता। शख्स अपना नाम नहीं बताना चाहता है।
उस व्यक्ति ने Gadgets 360 के साथ एक स्प्रेडशीट भी शेयर की, जिसमें यूजर्स की शिकायतों के ट्वीट के लिंक हैं। कुछ ट्वीट्स में चिवो वॉलेट पर लेन-देन के स्क्रीनशॉट हैं।
अल साल्वाडोर सरकार के सपोर्ट के साथ चिवो वॉलेट को दुनिया भर में USD और बिटकॉइन में लेनदेन की सुविधा देने के लिए बनाया गया था। मैक्सिकन क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज Bitso इसका सर्विस प्रोवाइडर है। अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति बुकेले के अनुसार 20 लाख से ज्यादा लोग चिवो वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं।
का अनुमान है कि अल साल्वाडोर में चिवो वॉलेट से लगभग 16,000 डॉलर (लगभग 12 लाख रुपये) कीमत के बिटकॉइन गायब हो गए हैं। दूसरी ओर एक अन्य ट्विटर थ्रेड का दावा है कि $120,000 (लगभग 90 लाख रुपये) कीमत के बिटकॉइन गायब हो गए हैं।
इस मामले पर अल-साल्वाडोर की ओर से कोई ऑफिशियल बयान नहीं आया है। चिवो वॉलेट के ट्विटर अकाउंट पर भी 2 नवंबर के बाद कोई एक्टिविटी नहीं हुई है। इस बीच, अल साल्वाडोर में बिटकॉइन के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है।
CryptoWhale के अनुसार, देश में बिटकॉइन ट्रांजैक्शंस में 89 फीसदी की कमी आई है, जब से इसे करेंसी का दर्जा दिया गया है। इसके बावजूद राष्ट्रपति बुकेले का दृष्टिकोण क्रिप्टो के समर्थन में है।
|
बिटकॉइन को कानूनी मान्यता देने वाला अल-साल्वाडोर दुनिया का पहला देश है। हाल में यह देश क्रिप्टो से जुड़े मामलों का सामना कर रहा है। देश के लोगों ने सरकार की ओर से जारी किए गए चिवो Chivo वॉलेट में फ्रॉड लेनदेन की शिकायत की है। अल-साल्वाडोर के कई लोगों ने शिकायत की है कि उनके चिवो वॉलेट से रहस्यमयी तरीके से बिटकॉइन गायब हो रहे हैं। सितंबर में अल-साल्वाडोर ने बिटकॉइन को लीगल करेंसी के रूप में अपनाया था। उसके बाद से ही देश के राष्ट्रपति नायब बुकेले, सोशल मीडिया पर बिटकॉइन का सपोर्ट करते रहते हैं। पीड़ित लोग अपना पक्ष रखने के लिए ट्विटर पर स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे हैं। कई लोग सरकार के अलावा चिवो वॉलेट अधिकारियों से मदद के लिए संपर्क कर रहे हैं। उनसे जवाब भी मांग रहे हैं। लोगों ने आरोप लगाया है कि 'अनधिकृत लेनदेन' के बदले उन्हें बिटकॉइन टोकन की कीमत चुकानी पड़ी है। एक यूजर ने अल साल्वाडोर से होने का दावा करते हुए Gadgets तीन सौ साठ को बताया कि शिकायत करने पर भी लोगों को कोई जवाब नहीं मिलता। शख्स अपना नाम नहीं बताना चाहता है। उस व्यक्ति ने Gadgets तीन सौ साठ के साथ एक स्प्रेडशीट भी शेयर की, जिसमें यूजर्स की शिकायतों के ट्वीट के लिंक हैं। कुछ ट्वीट्स में चिवो वॉलेट पर लेन-देन के स्क्रीनशॉट हैं। अल साल्वाडोर सरकार के सपोर्ट के साथ चिवो वॉलेट को दुनिया भर में USD और बिटकॉइन में लेनदेन की सुविधा देने के लिए बनाया गया था। मैक्सिकन क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज Bitso इसका सर्विस प्रोवाइडर है। अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति बुकेले के अनुसार बीस लाख से ज्यादा लोग चिवो वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं। का अनुमान है कि अल साल्वाडोर में चिवो वॉलेट से लगभग सोलह,शून्य डॉलर कीमत के बिटकॉइन गायब हो गए हैं। दूसरी ओर एक अन्य ट्विटर थ्रेड का दावा है कि एक सौ बीस डॉलर,शून्य कीमत के बिटकॉइन गायब हो गए हैं। इस मामले पर अल-साल्वाडोर की ओर से कोई ऑफिशियल बयान नहीं आया है। चिवो वॉलेट के ट्विटर अकाउंट पर भी दो नवंबर के बाद कोई एक्टिविटी नहीं हुई है। इस बीच, अल साल्वाडोर में बिटकॉइन के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। CryptoWhale के अनुसार, देश में बिटकॉइन ट्रांजैक्शंस में नवासी फीसदी की कमी आई है, जब से इसे करेंसी का दर्जा दिया गया है। इसके बावजूद राष्ट्रपति बुकेले का दृष्टिकोण क्रिप्टो के समर्थन में है।
|
एकीकृत फ्री स्ट्रीम (free stream) में या फ्री स्ट्रीम (free stream) के निकट गायब हो जाता है। चूंकि हमारी अधिकांश त्रुटियां फ्री स्ट्रीम (free stream) के निकट सटीक वेग के मूल्यांकन से जुड़ी थीं, इसलिए हमारे पास एक ऐसी विधि है जिसमें एकीकृत स्वयं फ्री स्ट्रीम (free stream) के पास गायब हो जाता है। इसलिए किसी भी संभावना, कोई भी त्रुटि जो आपको फ्री स्ट्रीम (free stream) के करीब की दूरी पर वेग के सही मूल्यांकन में हो सकती है, उस त्रुटि का प्रभाव अंतिम रूप में महत्वहीन होगा। तो यह इंटीग्रल थिकनेस (Integral Thickness) की एक सुंदरता है ठ पर डिफरेंशियल अप्रोच (differential approach) में से । तो 6° आपको ठ की तुलना में पर्याप्त विश्रंभ के साथ अधिक सटीक मूल्य देने जा रहा है जो स्वभाव में डिफरेंशियल ( differential) है।
इसलिए डिस्प्लेसमेंट थिकनेस (Displacement Thickness) हमेशा बाउंड्री लेयर (boundary layer) की थिकनेस (Thickness) या डिस्टर्बेस थिकनेस (Disturbance Thickness) की तुलना में उपयोग करने के लिए सुरक्षित होती है। तब भी लोग बाउंड्री लेयर (boundary layer) की थिकनेस (Thickness) 8 का उपयोग करेंगे क्योंकि यह आपको बाउंड्री लेयर (boundary layer) के अंदर क्या होता है इसका एक अच्छा चित्रमय दृश्य देता है। बाउंड्री लेयर (boundary layer) के अंदर वेग 0 से फ्री स्ट्रीम (free stream) के वेग में बदल जाता है। यह आपको एक ऐसी तस्वीर देता है जिसे समझना बहुत आसान है। दूसरी ओर इसमें त्रुटि की संभावना होती है लेकिन वैकल्पिक 8* स्ववाव में इंटीग्रल (integral) है। 6" की उपयोगिता की सही मायने में सराहना करने से पहले आपको अवधारणा को जानना होगा। तो बाउंड्री लेयर (boundary layer) का अधिक सामान्य प्रतिनिधित्व हमेशा 8 के संदर्भ में होता है, की 8 * लेकिन यदि आप कुछ सटीकता के लिए जाते हैं और हम बाद की कक्षाओं में देखेंगे कि हम अपनी गणना में भी उपयोग करते हैं।
(Refer Slide Time: 22:38)
MOMENTUM THICKNESS (6)
एक और परिभाषा है जिसे हमें कवर (cover) करने की आवश्यकता है जिसे मोमेंटम थिकनेस (Momentum Thickness) के रूप में जाना जाता है, जिसे 0 द्वारा निरूपित किया जाता है और मोमेंटम थिकनेस (Momentum Thickness) भी एक इंटीग्रल थिकनेस (Integral Thickness) है। हम सबसे पहले यह पता लगाने जा रहे हैं कि वास्तविक फ्लो (Flow) क्या है जो बाउंड्री लेयर(boundary layer) के अंदर हो रहा है। तो वास्तविक फ्लो (Flow) जो बाउंड्री लेयर (boundary
गणितीय रूप से यह अनंत दूरी पर एकमात्र वेग फ्री स्ट्रीम (free stream) वेग के बराबर हो जाता है। लेकिन हम कृत्रिम रूप से एक शर्त रखते हैं जहां वेग फ्री स्ट्रीम (free stream) वेग के 99% तक पहुंच जाता है। तो हम बाद में इस इंटीग्रल (integral) को लगभग 0.99 में बदल सकते हैं। हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि
C CET I.I.T. KGP
Flow) में मास फ्लो(Mass Flow) से जुड़ा संवेग
बाउंड्री लेयर(boundary layer) के अंदर मास फ्लो रेट (Mass Flow rate) क्या है। तो मास फ्लो रेट (Mass Flow rate) बाउंड्री लेयर (boundary layer) के अंदर होनी चाहिए। फ्लो(Flow) की इस मात्रा की मास फ्लो (Mass Flow) दर में कमी क्या है क्योंकि हमारे पास बाउंड्री लेयर (boundary layer) के अंदर चिपचिपा फ्लो (Flow) है? इनविसिड फ्लो (Inviscid
होता है जहाँ U फ्री स्टीम (free
|
एकीकृत फ्री स्ट्रीम में या फ्री स्ट्रीम के निकट गायब हो जाता है। चूंकि हमारी अधिकांश त्रुटियां फ्री स्ट्रीम के निकट सटीक वेग के मूल्यांकन से जुड़ी थीं, इसलिए हमारे पास एक ऐसी विधि है जिसमें एकीकृत स्वयं फ्री स्ट्रीम के पास गायब हो जाता है। इसलिए किसी भी संभावना, कोई भी त्रुटि जो आपको फ्री स्ट्रीम के करीब की दूरी पर वेग के सही मूल्यांकन में हो सकती है, उस त्रुटि का प्रभाव अंतिम रूप में महत्वहीन होगा। तो यह इंटीग्रल थिकनेस की एक सुंदरता है ठ पर डिफरेंशियल अप्रोच में से । तो छः° आपको ठ की तुलना में पर्याप्त विश्रंभ के साथ अधिक सटीक मूल्य देने जा रहा है जो स्वभाव में डिफरेंशियल है। इसलिए डिस्प्लेसमेंट थिकनेस हमेशा बाउंड्री लेयर की थिकनेस या डिस्टर्बेस थिकनेस की तुलना में उपयोग करने के लिए सुरक्षित होती है। तब भी लोग बाउंड्री लेयर की थिकनेस आठ का उपयोग करेंगे क्योंकि यह आपको बाउंड्री लेयर के अंदर क्या होता है इसका एक अच्छा चित्रमय दृश्य देता है। बाउंड्री लेयर के अंदर वेग शून्य से फ्री स्ट्रीम के वेग में बदल जाता है। यह आपको एक ऐसी तस्वीर देता है जिसे समझना बहुत आसान है। दूसरी ओर इसमें त्रुटि की संभावना होती है लेकिन वैकल्पिक आठ* स्ववाव में इंटीग्रल है। छः" की उपयोगिता की सही मायने में सराहना करने से पहले आपको अवधारणा को जानना होगा। तो बाउंड्री लेयर का अधिक सामान्य प्रतिनिधित्व हमेशा आठ के संदर्भ में होता है, की आठ * लेकिन यदि आप कुछ सटीकता के लिए जाते हैं और हम बाद की कक्षाओं में देखेंगे कि हम अपनी गणना में भी उपयोग करते हैं। MOMENTUM THICKNESS एक और परिभाषा है जिसे हमें कवर करने की आवश्यकता है जिसे मोमेंटम थिकनेस के रूप में जाना जाता है, जिसे शून्य द्वारा निरूपित किया जाता है और मोमेंटम थिकनेस भी एक इंटीग्रल थिकनेस है। हम सबसे पहले यह पता लगाने जा रहे हैं कि वास्तविक फ्लो क्या है जो बाउंड्री लेयर के अंदर हो रहा है। तो वास्तविक फ्लो जो बाउंड्री लेयर वेग के बराबर हो जाता है। लेकिन हम कृत्रिम रूप से एक शर्त रखते हैं जहां वेग फ्री स्ट्रीम वेग के निन्यानवे% तक पहुंच जाता है। तो हम बाद में इस इंटीग्रल को लगभग शून्य.निन्यानवे में बदल सकते हैं। हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि C CET I.I.T. KGP Flow) में मास फ्लो से जुड़ा संवेग बाउंड्री लेयर के अंदर मास फ्लो रेट क्या है। तो मास फ्लो रेट बाउंड्री लेयर के अंदर होनी चाहिए। फ्लो की इस मात्रा की मास फ्लो दर में कमी क्या है क्योंकि हमारे पास बाउंड्री लेयर के अंदर चिपचिपा फ्लो है? इनविसिड फ्लो (Inviscid होता है जहाँ U फ्री स्टीम (free
|
Aryan Khan Drugs Case: सीबीआई दफ्तर पहुंचने से पहले पूर्व NCB चीफ समीर वानखेड़े बोले, 'सत्यमेव जयते'
Aryan Khan drugs on cruise case नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) मुंबई के जोनल अधिकारी समीर वानखेड़े आर्यन खान ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए CBI कार्यालय पहुंचे। सीबीआई कार्यलाय पहुचंने से पहले उन्होंने मीडिया के सामने सत्यमेव जयते (सत्य की जीत होती है) कहा है।
मुंबई, एजेंसी। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) मुंबई के जोनल अधिकारी समीर वानखेड़े आर्यन खान ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए CBI कार्यालय पहुंचे। समीर से यहां सुबह 11 बजे से पूछताछ शुरू होगी। सीबीआई कार्यलाय पहुचंने से पहले उन्होंने मीडिया के सामने सत्यमेव जयते (सत्य की जीत होती है) कहा है।
सीबीआई ने समीर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बॉलीवुड बादशाह शाहरुख खान के बेटे आर्यन को छोड़ने के लिए रिश्वत मांगी थी। इसकी रकम लगभग 25 करोड़ रुपये थे। इसके अलावा एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि समीर ने इस केस की जानकारी अपने सीनियर्स को नहीं दी थी। इससे पहले, सीबीआई को पूछताछ के लिए 18 मई को बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं पहुंचे थे।
सीबीआई समन के खिलाफ समीर ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिट पिटीशन फाइल की थी, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली थी। इसके बाद समीर ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 19 मई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI को निर्देश दिया था कि 22 मई तक वानखेड़े पर कोई भी एक्शन न लें।
CBI ने 11 मई को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी से संबंधित प्रावधानों के तहत एनसीबी की एक शिकायत पर समीर वानखेड़े और चार अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उल्लेखनीय है कि आर्यन खान को एनसीबी ने 3 अक्टूबर, 2021 को यहां कॉर्डेलिया क्रूज जहाज पर कथित तौर पर ड्रग जब्ती के बाद गिरफ्तार किया था। उन्हें तीन सप्ताह बाद उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी थी क्योंकि एंटी-ड्रग्स एजेंसी उनके खिलाफ अपने आरोपों को साबित करने में विफल हो गई थी।
|
Aryan Khan Drugs Case: सीबीआई दफ्तर पहुंचने से पहले पूर्व NCB चीफ समीर वानखेड़े बोले, 'सत्यमेव जयते' Aryan Khan drugs on cruise case नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मुंबई के जोनल अधिकारी समीर वानखेड़े आर्यन खान ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए CBI कार्यालय पहुंचे। सीबीआई कार्यलाय पहुचंने से पहले उन्होंने मीडिया के सामने सत्यमेव जयते कहा है। मुंबई, एजेंसी। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मुंबई के जोनल अधिकारी समीर वानखेड़े आर्यन खान ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए CBI कार्यालय पहुंचे। समीर से यहां सुबह ग्यारह बजे से पूछताछ शुरू होगी। सीबीआई कार्यलाय पहुचंने से पहले उन्होंने मीडिया के सामने सत्यमेव जयते कहा है। सीबीआई ने समीर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बॉलीवुड बादशाह शाहरुख खान के बेटे आर्यन को छोड़ने के लिए रिश्वत मांगी थी। इसकी रकम लगभग पच्चीस करोड़ रुपये थे। इसके अलावा एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि समीर ने इस केस की जानकारी अपने सीनियर्स को नहीं दी थी। इससे पहले, सीबीआई को पूछताछ के लिए अट्ठारह मई को बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं पहुंचे थे। सीबीआई समन के खिलाफ समीर ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिट पिटीशन फाइल की थी, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली थी। इसके बाद समीर ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्नीस मई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI को निर्देश दिया था कि बाईस मई तक वानखेड़े पर कोई भी एक्शन न लें। CBI ने ग्यारह मई को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी से संबंधित प्रावधानों के तहत एनसीबी की एक शिकायत पर समीर वानखेड़े और चार अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उल्लेखनीय है कि आर्यन खान को एनसीबी ने तीन अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को यहां कॉर्डेलिया क्रूज जहाज पर कथित तौर पर ड्रग जब्ती के बाद गिरफ्तार किया था। उन्हें तीन सप्ताह बाद उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी थी क्योंकि एंटी-ड्रग्स एजेंसी उनके खिलाफ अपने आरोपों को साबित करने में विफल हो गई थी।
|
यूरोपीय संघ ने एक एकीकृत सशस्त्र बलों के निर्माण की दिशा में एक और कदम उठाया हैः शनिवार को, जर्मनी और चेक गणराज्य के रक्षा मंत्रियों ने एक इरादे के समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो एक एकल इकाई के निर्माण में पहला चरण बन गया . . . ।
|
यूरोपीय संघ ने एक एकीकृत सशस्त्र बलों के निर्माण की दिशा में एक और कदम उठाया हैः शनिवार को, जर्मनी और चेक गणराज्य के रक्षा मंत्रियों ने एक इरादे के समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो एक एकल इकाई के निर्माण में पहला चरण बन गया . . . ।
|
- नहीं रहा सेना का 'जूम'
जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में इस हफ्ते की शुरुआत में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल सेना के 'असॉल्ट डॉग' 'जूम' ने गुरुवार को दम तोड़ दिया। अधिकारियों ने बताया कि जूम को यहां एडवांस फील्ड वेटरेनरी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, लेकिन दोपहर में उसने दम तोड़ दिया। अधिकारियों ने कहा, "जूम की हालत में सुधार हो रहा था और उस पर इलाज का असर हो रहा था। दोपहर तक जूम बेहतर लग रहा था, लेकिन अचानक उसने हांफना शुरू कर दिया और इसके बाद उसने दम तोड़ दिया। "
जूम की उम्र दो साल एक महीने थी और वह बेल्जियम मूल का शेफर्ड नस्ल का कुत्ता था, जो पिछले आठ महीने से सेवा में था। वह बेहतर तरीके से प्रशिक्षित, बहादुर और सेवा के लिए प्रतिबद्ध था। उसे मुख्य रूप से आतंकवादियों का पता लगाने और उन्हें मार गिराने के काम के लिए प्रशिक्षित किया गया था। सोमवार को दक्षिण कश्मीर के जिले में तंगपावा इलाके में मुठभेड़ के दौरान वह घायल हो गया था। सुरक्षा बलों ने तंगपावा इलाके में आतंकवादियां की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद तलाशी एवं घेराबंदी अभियान शुरू किया था।
इस पूरे मामले भारतीय सेना के एक अधिकारी ने कहा, "आर्मी डॉग जूम हमारी टीम का एक अमूल्य हिस्सा था। 2 साल की छोटी उम्र के बावजूद, जूम कई सीटी ऑपरेशन का अनुभवी था, जहां उसने अपनी ऊर्जा और साहस से खुद को साबित किया था। 9 अक्टूबर को अनंतनाग में जो ऑपरेशन हुआ था उसके दौरान ज़ूम ने अहम भूमिका निभाई थी। " अधिकारी ने बताया कि जूम ने ना सिर्फ आतंकियों की लोकेशन की पहचान की, बल्कि उनमें से एक को डिसेबल भी कर दिया। हालांकि, इस दौरान उसे 2 गोलियां लगीं। घायल होने के बावजूद, ज़ूम ने अन्य छिपे हुए आतंकवादियों का पता लगाया।
घायल होने के बाद जूम को तुरंत सेना के एनिमल हॉस्पिटल, श्रीनगर ले जाया गया जहां उसने आखिरी तक संघर्ष किया। हालांकि आज सुबह 11:50 पे उसने अंतिम सांस ली। जूम जैसा हमने एक बहादुर टीम सदस्य खो दिया है जो हमें समर्पण और साहस के साथ अपना काम करने के लिए हमेशा प्रेरित करेगा।
|
- नहीं रहा सेना का 'जूम' जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में इस हफ्ते की शुरुआत में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल सेना के 'असॉल्ट डॉग' 'जूम' ने गुरुवार को दम तोड़ दिया। अधिकारियों ने बताया कि जूम को यहां एडवांस फील्ड वेटरेनरी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, लेकिन दोपहर में उसने दम तोड़ दिया। अधिकारियों ने कहा, "जूम की हालत में सुधार हो रहा था और उस पर इलाज का असर हो रहा था। दोपहर तक जूम बेहतर लग रहा था, लेकिन अचानक उसने हांफना शुरू कर दिया और इसके बाद उसने दम तोड़ दिया। " जूम की उम्र दो साल एक महीने थी और वह बेल्जियम मूल का शेफर्ड नस्ल का कुत्ता था, जो पिछले आठ महीने से सेवा में था। वह बेहतर तरीके से प्रशिक्षित, बहादुर और सेवा के लिए प्रतिबद्ध था। उसे मुख्य रूप से आतंकवादियों का पता लगाने और उन्हें मार गिराने के काम के लिए प्रशिक्षित किया गया था। सोमवार को दक्षिण कश्मीर के जिले में तंगपावा इलाके में मुठभेड़ के दौरान वह घायल हो गया था। सुरक्षा बलों ने तंगपावा इलाके में आतंकवादियां की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद तलाशी एवं घेराबंदी अभियान शुरू किया था। इस पूरे मामले भारतीय सेना के एक अधिकारी ने कहा, "आर्मी डॉग जूम हमारी टीम का एक अमूल्य हिस्सा था। दो साल की छोटी उम्र के बावजूद, जूम कई सीटी ऑपरेशन का अनुभवी था, जहां उसने अपनी ऊर्जा और साहस से खुद को साबित किया था। नौ अक्टूबर को अनंतनाग में जो ऑपरेशन हुआ था उसके दौरान ज़ूम ने अहम भूमिका निभाई थी। " अधिकारी ने बताया कि जूम ने ना सिर्फ आतंकियों की लोकेशन की पहचान की, बल्कि उनमें से एक को डिसेबल भी कर दिया। हालांकि, इस दौरान उसे दो गोलियां लगीं। घायल होने के बावजूद, ज़ूम ने अन्य छिपे हुए आतंकवादियों का पता लगाया। घायल होने के बाद जूम को तुरंत सेना के एनिमल हॉस्पिटल, श्रीनगर ले जाया गया जहां उसने आखिरी तक संघर्ष किया। हालांकि आज सुबह ग्यारह:पचास पे उसने अंतिम सांस ली। जूम जैसा हमने एक बहादुर टीम सदस्य खो दिया है जो हमें समर्पण और साहस के साथ अपना काम करने के लिए हमेशा प्रेरित करेगा।
|
हांगकांग के समाचार पत्र साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, चीनी पक्ष ने ऑस्ट्रेलिया से कोयले की खेप भेजने का आदेश दिया है, जो इस बात का संकेत है कि देशों के बीच तनाव कम हो रहा है।
प्रकाशन के अनुसार, हम कोकिंग कोल खरीदने के बारे में बात कर रहे हैं, जो चीन के इस्पात उत्पादन का एक प्रमुख घटक है, जिसे थर्मल कोयले की तुलना में उत्पादन में बदलना अधिक कठिन है।
चीन ने क्वींसलैंड में मोरनबाह नॉर्थ माइन से 80 टन कोकिंग कोल का ऑर्डर दिया है। एक चीनी प्रकाशन के अनुसार फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में कोयला चीन में आ जाना चाहिए। प्रकाशन के अनुसार, चीनियों को यह कोयला 000 डॉलर प्रति टन की कीमत पर प्राप्त हुआ।
जनवरी में, चीनियों ने ऑस्ट्रेलिया से थर्मल कोयले का भी ऑर्डर दिया, जिसका इस्तेमाल बिजली पैदा करने के लिए किया जाता है। हालाँकि, जब कोयले के ये शिपमेंट वास्तव में चीन में समाप्त हो जाते हैं, तो यह कहना संभव होगा कि देशों के बीच संबंध पिघलना शुरू हो गए हैं, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट नोट करता है।
प्रकाशन याद करता है कि 80 टन का नवीनतम ऑर्डर कोकिंग कोयले की मात्रा की तुलना में एक छोटा बैच है जिसे चीन ने पहले मासिक आधार पर ऑस्ट्रेलिया से खरीदा था - 000-2 मिलियन टन।
दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक और कोयले के उपभोक्ता चीन ने 2020 के अंत से राजनयिक संघर्ष के बीच ऑस्ट्रेलियाई कोयले का आयात नहीं किया है, जो कि कैनबरा द्वारा बीजिंग से परामर्श किए बिना 2020 की शुरुआत में कोरोनोवायरस की उत्पत्ति की स्वतंत्र जांच के लिए बुलाए जाने के बाद तेज हो गया था।
- लेखकः
- इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
|
हांगकांग के समाचार पत्र साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, चीनी पक्ष ने ऑस्ट्रेलिया से कोयले की खेप भेजने का आदेश दिया है, जो इस बात का संकेत है कि देशों के बीच तनाव कम हो रहा है। प्रकाशन के अनुसार, हम कोकिंग कोल खरीदने के बारे में बात कर रहे हैं, जो चीन के इस्पात उत्पादन का एक प्रमुख घटक है, जिसे थर्मल कोयले की तुलना में उत्पादन में बदलना अधिक कठिन है। चीन ने क्वींसलैंड में मोरनबाह नॉर्थ माइन से अस्सी टन कोकिंग कोल का ऑर्डर दिया है। एक चीनी प्रकाशन के अनुसार फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में कोयला चीन में आ जाना चाहिए। प्रकाशन के अनुसार, चीनियों को यह कोयला शून्य डॉलर प्रति टन की कीमत पर प्राप्त हुआ। जनवरी में, चीनियों ने ऑस्ट्रेलिया से थर्मल कोयले का भी ऑर्डर दिया, जिसका इस्तेमाल बिजली पैदा करने के लिए किया जाता है। हालाँकि, जब कोयले के ये शिपमेंट वास्तव में चीन में समाप्त हो जाते हैं, तो यह कहना संभव होगा कि देशों के बीच संबंध पिघलना शुरू हो गए हैं, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट नोट करता है। प्रकाशन याद करता है कि अस्सी टन का नवीनतम ऑर्डर कोकिंग कोयले की मात्रा की तुलना में एक छोटा बैच है जिसे चीन ने पहले मासिक आधार पर ऑस्ट्रेलिया से खरीदा था - शून्य-दो मिलियन टन। दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक और कोयले के उपभोक्ता चीन ने दो हज़ार बीस के अंत से राजनयिक संघर्ष के बीच ऑस्ट्रेलियाई कोयले का आयात नहीं किया है, जो कि कैनबरा द्वारा बीजिंग से परामर्श किए बिना दो हज़ार बीस की शुरुआत में कोरोनोवायरस की उत्पत्ति की स्वतंत्र जांच के लिए बुलाए जाने के बाद तेज हो गया था। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
|
कोरोना से अब तक विश्वभर में 2,70,000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। दुनिया भर में 11,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में भी अब तक पाँच मौतें हो चुकी है और करीब 300 लोग संक्रमित हैं।
दिल्ली सरकार के रेवेन्यू विभाग ने इसकी जानकारी दी है। ओखला से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए अमानतुल्लाह को मुख्यमंत्री केजरीवाल का क़रीबी माना जाता है। उस पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।
"हमारा रुख स्पष्ट है कि हम सभी राष्ट्रों से मौत की सजा का इस्तेमाल बंद करने या इस पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान करते हैं। " - संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि वैश्विक संगठन सभी देशों से मौत की सजा का इस्तेमाल बंद करने या इस पर प्रतिबंध लगाने की अपील करता है।
कनिका की जाँच रिपोर्ट में भी भारी लापरवाही सामने आई थी। 20 तारीख को सामने आई जाँच रिपोर्ट में कनिका की उम्र 28 साल बताई गई थी, जबकि उनकी उम्र 40 साल है। वहीं कनिका को रिपोर्ट में 'पुरुष' भी बताया गया था।
5 जिलों के अलावा 7 शहरों में भी 22 मार्च की सुबह 7 बजे से लेकर 29 मार्च के रात 9 बजे तक लॉकडाउन की घोषणा की गई है। कोरोना वायरस के ओडिशा में अब तक 2 मामले आ चुके हैं लेकिन महाराष्ट्र व केरल जैसे राज्यों में स्थिति भयावह है।
21 साल की तानिया ने 10 साल पहले घुसपैठ किया। अरबी लिटरेचर की एमए फाइनल ईयर की यह छात्रा दो साल से लश्कर के लिए सक्रिय तौर पर काम कर रही थी। आतंकी संगठन के लिए भर्तियॉं करने से लेकर संवेदनशील सूचनाएँ जुटाने तक हर काम में वह संलिप्त थी।
"COVID-19 संकट रचनात्मक क्षेत्र सहित कई उद्योगों के लिए विनाशकारी है। लगभग सभी टेलीविजन और फिल्म निर्माण अब वैश्विक रूप से बंद हो गए हैं। इस वर्ग ने अच्छे समय में नेटफ्लिक्स की मदद की है। हम इस कठिन समय में उनकी मदद करना चाहते हैं। "
"पूरे देश में कोरोना वायरस सेकंड स्टेज पर है और अगर हम इसे यहीं रोकने में कामयाब होते है तो ये पूरी दुनिया के लिए एक मैसेज होगा। संक्रमण को रोकने के लिए हमारी तैयारी युद्धस्तर पर चल रही है। सभी जिलों के अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बनाए गए है और पर्याप्त चिकित्साकर्मी तैनात किए गए हैं। "
|
कोरोना से अब तक विश्वभर में दो,सत्तर,शून्य से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। दुनिया भर में ग्यारह,शून्य से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में भी अब तक पाँच मौतें हो चुकी है और करीब तीन सौ लोग संक्रमित हैं। दिल्ली सरकार के रेवेन्यू विभाग ने इसकी जानकारी दी है। ओखला से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए अमानतुल्लाह को मुख्यमंत्री केजरीवाल का क़रीबी माना जाता है। उस पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। "हमारा रुख स्पष्ट है कि हम सभी राष्ट्रों से मौत की सजा का इस्तेमाल बंद करने या इस पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान करते हैं। " - संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि वैश्विक संगठन सभी देशों से मौत की सजा का इस्तेमाल बंद करने या इस पर प्रतिबंध लगाने की अपील करता है। कनिका की जाँच रिपोर्ट में भी भारी लापरवाही सामने आई थी। बीस तारीख को सामने आई जाँच रिपोर्ट में कनिका की उम्र अट्ठाईस साल बताई गई थी, जबकि उनकी उम्र चालीस साल है। वहीं कनिका को रिपोर्ट में 'पुरुष' भी बताया गया था। पाँच जिलों के अलावा सात शहरों में भी बाईस मार्च की सुबह सात बजे से लेकर उनतीस मार्च के रात नौ बजे तक लॉकडाउन की घोषणा की गई है। कोरोना वायरस के ओडिशा में अब तक दो मामले आ चुके हैं लेकिन महाराष्ट्र व केरल जैसे राज्यों में स्थिति भयावह है। इक्कीस साल की तानिया ने दस साल पहले घुसपैठ किया। अरबी लिटरेचर की एमए फाइनल ईयर की यह छात्रा दो साल से लश्कर के लिए सक्रिय तौर पर काम कर रही थी। आतंकी संगठन के लिए भर्तियॉं करने से लेकर संवेदनशील सूचनाएँ जुटाने तक हर काम में वह संलिप्त थी। "COVID-उन्नीस संकट रचनात्मक क्षेत्र सहित कई उद्योगों के लिए विनाशकारी है। लगभग सभी टेलीविजन और फिल्म निर्माण अब वैश्विक रूप से बंद हो गए हैं। इस वर्ग ने अच्छे समय में नेटफ्लिक्स की मदद की है। हम इस कठिन समय में उनकी मदद करना चाहते हैं। " "पूरे देश में कोरोना वायरस सेकंड स्टेज पर है और अगर हम इसे यहीं रोकने में कामयाब होते है तो ये पूरी दुनिया के लिए एक मैसेज होगा। संक्रमण को रोकने के लिए हमारी तैयारी युद्धस्तर पर चल रही है। सभी जिलों के अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बनाए गए है और पर्याप्त चिकित्साकर्मी तैनात किए गए हैं। "
|
चंडीगढ़ः शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता हरसिमरत कौर बादल को शनिवार को चंडीगढ़ के पीजीआई में भर्ती कराया गया था और कोरोना टेस्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें देर रात अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। नए कृषि कानूनों के विरोध में पीएम नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाली पूर्व केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।
फिलहाल उन्हें पीजीआई के आपातकालीन वार्ड में एक अलग कमरे में रखा गया था। तब डॉक्चरों ने बताया था उनकी हालत स्थिर हैं और कोविड -19 प्रोटोकॉल के अनुसार उनके स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। किसान आंदोलन को लेकर लगातार मुखर रही हरसिमरत कौर ने शनिवार को ही केंद्र सरकार पर हमला करते हुए किसानों की दुर्दशा का शोषण करने का आरोप लगाया था। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा" बताते हुए किसानों के विरोध पर चिंता व्यक्त की।
किसान आंदोलन को लेकर अकाली दल लगातार केंद्र के साथ - साथ राज्य सरकार पर भी हमले कर रही है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की हाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात को लेकर शनिवार को उनकी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमरिंदर सिंह किसानों के आंदोलन को राष्ट्रीय सुरक्षा से कथित रूप से जोड़कर "भाजपा की पटकथा को दोहरा" रहे हैं।
इससे पहले अकाली दल के कद्दावर नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में बृहस्पतिवार को अपना पद्म विभूषण पुरस्कार लौटा दिया था। वहीं असंतुष्ट अकाली नेता और राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी कहा है कि वह अपना पद्म भूषण पुरस्कार लौटा देंगे जो उन्हें पिछले साल दिया गया था।
Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
|
चंडीगढ़ः शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल को शनिवार को चंडीगढ़ के पीजीआई में भर्ती कराया गया था और कोरोना टेस्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें देर रात अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। नए कृषि कानूनों के विरोध में पीएम नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाली पूर्व केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। फिलहाल उन्हें पीजीआई के आपातकालीन वार्ड में एक अलग कमरे में रखा गया था। तब डॉक्चरों ने बताया था उनकी हालत स्थिर हैं और कोविड -उन्नीस प्रोटोकॉल के अनुसार उनके स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। किसान आंदोलन को लेकर लगातार मुखर रही हरसिमरत कौर ने शनिवार को ही केंद्र सरकार पर हमला करते हुए किसानों की दुर्दशा का शोषण करने का आरोप लगाया था। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा" बताते हुए किसानों के विरोध पर चिंता व्यक्त की। किसान आंदोलन को लेकर अकाली दल लगातार केंद्र के साथ - साथ राज्य सरकार पर भी हमले कर रही है। शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की हाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात को लेकर शनिवार को उनकी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमरिंदर सिंह किसानों के आंदोलन को राष्ट्रीय सुरक्षा से कथित रूप से जोड़कर "भाजपा की पटकथा को दोहरा" रहे हैं। इससे पहले अकाली दल के कद्दावर नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में बृहस्पतिवार को अपना पद्म विभूषण पुरस्कार लौटा दिया था। वहीं असंतुष्ट अकाली नेता और राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी कहा है कि वह अपना पद्म भूषण पुरस्कार लौटा देंगे जो उन्हें पिछले साल दिया गया था। Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
|
हनुमान के वचन सुनकर सीता को बहुत सांत्वना मिली। तब हनुमान ने स्निग्ध स्वर में कहा, 'मातः यह मेरे पास श्रीराम के नाम की अंकित मुद्रिका है। ' मुद्रिका को देख और पहचानकर सीता आनंदविभोर हो उठीं।
प्रबल पराक्रम मारुति ने भगवती सीता को देख लिया, उन्हें आश्वासन भी दे दिया, उनका संदेश और चिन्ह भी प्राप्त कर लिया। परन्तु अभी उनका कार्य पूरा नहीं हुआ। उन्होंने विचार किया कि अब मुझे अपने बल से शत्रु के पराक्रम का संतुलन भी करना चाहिए। परन्तु यह कैसे हो?
आगा-पीछा विचार अब वे प्रकट रूप से अशोक वन में विचरण करने लगे। इतना ही नहीं वे फूलों को तोड़कर फेंकने, क्यारियों को बिगाड़ने, फलों को खाने और सरोवरों को दूषित करने लगे। अशोक वन के इस उत्पात का समाचार शीघ्र ही लंका में फैल गया। यह सूचना युवराज मेघनाद को दी गई तो उसने विरूपाक्ष, दुर्घर्ष, प्रप्यस और भासकर्ण महारथियों तथा सात मंत्रीपुत्रों के साथ सैन्य सहित राजपुत्र अक्षयकुमार को अशोक वन भेजा।
अक्षयकुमार बड़ा धनुर्धर था। उसने तीन बाण हनुमान के मस्तक पर मारे। अनेक राक्षस भटों के संरक्षण में रहते हुए भी उन्होंने अक्षयकुमार को रथ से खींचकर भूमि पर ला पटका। मुहूर्त भर दोनों योद्धाओं में मल्ल युद्ध हुआ। अंत में हनुमान ने अक्षयकुमार के वक्ष को लातों से रौंद डाला, जिससे वह छटपटाता हुआ मर गया। सारी लंका में वानर का आतंक छा गया। मेघनाद स्वयं रथ पर चढ़ अशोक वन में आया।
रावण की इस आज्ञा का तुरंत पालन हुआ। हनुमान को इससे अपार लाभ हुआ। लंका से सब घर-घाट उन्होंने देख लिए। दिन भर उन्हें घुमाया गया। संध्या होने पर उनके दोनों हाथों को वस्त्र से लपेट और तेल से तर करके, उनमें आग लगा, उन्हें लंका से बाहर फेंक दिया गया।
हनुमान ने तुरंत ही अपने हाथों को मुक्त किया। अदूरदर्शी राक्षसों ने फिर उनकी ओर ध्यान ही नहीं दिया। इसके बाद वे सावधानी से फिर लंका में प्रविष्ट हो गए। फिर वे छिपते हुए धीरे-धीरे रावण के मणिमहल की ड्योढ़ियों में पहुंच छद्मवेश में हर्म्य में घुस गए। उनके पास तेल से भीगा हुआ ज्वलनशील बहुत सा वस्त्र था, जो राक्षसों ने उनके हाथ में लपेट दिया था। उसी को उपयुक्त स्थान में रख और उसके निकट बहुत सा काष्ठ एकत्र कर उन्होंने उसमें आग लगा दी। शीघ्र ही अनुकूल वायु पाकर आग की लपटें आकाश को छूने लगीं। महालय में भगदड़ मच गई।
|
हनुमान के वचन सुनकर सीता को बहुत सांत्वना मिली। तब हनुमान ने स्निग्ध स्वर में कहा, 'मातः यह मेरे पास श्रीराम के नाम की अंकित मुद्रिका है। ' मुद्रिका को देख और पहचानकर सीता आनंदविभोर हो उठीं। प्रबल पराक्रम मारुति ने भगवती सीता को देख लिया, उन्हें आश्वासन भी दे दिया, उनका संदेश और चिन्ह भी प्राप्त कर लिया। परन्तु अभी उनका कार्य पूरा नहीं हुआ। उन्होंने विचार किया कि अब मुझे अपने बल से शत्रु के पराक्रम का संतुलन भी करना चाहिए। परन्तु यह कैसे हो? आगा-पीछा विचार अब वे प्रकट रूप से अशोक वन में विचरण करने लगे। इतना ही नहीं वे फूलों को तोड़कर फेंकने, क्यारियों को बिगाड़ने, फलों को खाने और सरोवरों को दूषित करने लगे। अशोक वन के इस उत्पात का समाचार शीघ्र ही लंका में फैल गया। यह सूचना युवराज मेघनाद को दी गई तो उसने विरूपाक्ष, दुर्घर्ष, प्रप्यस और भासकर्ण महारथियों तथा सात मंत्रीपुत्रों के साथ सैन्य सहित राजपुत्र अक्षयकुमार को अशोक वन भेजा। अक्षयकुमार बड़ा धनुर्धर था। उसने तीन बाण हनुमान के मस्तक पर मारे। अनेक राक्षस भटों के संरक्षण में रहते हुए भी उन्होंने अक्षयकुमार को रथ से खींचकर भूमि पर ला पटका। मुहूर्त भर दोनों योद्धाओं में मल्ल युद्ध हुआ। अंत में हनुमान ने अक्षयकुमार के वक्ष को लातों से रौंद डाला, जिससे वह छटपटाता हुआ मर गया। सारी लंका में वानर का आतंक छा गया। मेघनाद स्वयं रथ पर चढ़ अशोक वन में आया। रावण की इस आज्ञा का तुरंत पालन हुआ। हनुमान को इससे अपार लाभ हुआ। लंका से सब घर-घाट उन्होंने देख लिए। दिन भर उन्हें घुमाया गया। संध्या होने पर उनके दोनों हाथों को वस्त्र से लपेट और तेल से तर करके, उनमें आग लगा, उन्हें लंका से बाहर फेंक दिया गया। हनुमान ने तुरंत ही अपने हाथों को मुक्त किया। अदूरदर्शी राक्षसों ने फिर उनकी ओर ध्यान ही नहीं दिया। इसके बाद वे सावधानी से फिर लंका में प्रविष्ट हो गए। फिर वे छिपते हुए धीरे-धीरे रावण के मणिमहल की ड्योढ़ियों में पहुंच छद्मवेश में हर्म्य में घुस गए। उनके पास तेल से भीगा हुआ ज्वलनशील बहुत सा वस्त्र था, जो राक्षसों ने उनके हाथ में लपेट दिया था। उसी को उपयुक्त स्थान में रख और उसके निकट बहुत सा काष्ठ एकत्र कर उन्होंने उसमें आग लगा दी। शीघ्र ही अनुकूल वायु पाकर आग की लपटें आकाश को छूने लगीं। महालय में भगदड़ मच गई।
|
ग्रेटर नोएडा /जेवर : आज युवाओं की एक बैठक आहूत की गई जिसमें क्षेत्र के कुछ अहम मुद्दों को प्रिंस भारद्वाज मंडल उपाध्यक्ष युवा मोर्चा भाजपा द्वारा बताया गया "कस्बा जेवर में किसी भी सरकारी संस्था में चाहे वह तहसील स्तर पर है, कोतवाली स्तर या अन्य किसी भी सरकारी विभाग में आम जनमानस से कोई भी सरकारी कर्मचारी काम करने के एवज में सुविधा शुल्क की पेशकश करता है तो वह तत्काल हमसे संपर्क करें एवं साथ ही साथ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत समस्त राशन कार्ड धारकों को मानक के अनुसार राशन उपलब्ध कराने का कार्य शासन द्वारा किया जा रहा है. इस संबंध में किसी भी कार्ड धारकों अपने राशन विक्रेता से कोई भी परेशानी होती है तो वह तत्काल हमसे इस नंबर 9997633545 पर संपर्क करें. जिस विभाग के कर्मचारी द्वारा सुविधा शुल्क की मांग की जाएगी उसी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को मामला संज्ञान में लाकर उक्त कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करवाई जाएगी.
प्रिंस भरद्वाज ने कहा मैं आपको आश्वस्त करता हूं उस व्यक्ति,सरकारी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कराने का काम हम करेंगे सरकार की ना गुंडाराज ना भ्रष्टाचार की नीति को सफल बनाना ही हमारा एक मात्र लक्ष्य है सभी युवा साथियों से मेरा निवेदन है आप भी हमारी इस मुहिम से जुड़ कर देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाएं.
इस मौके पर रिंकू शर्मा,अजय,प्रदीप, टिंकू,हिमांशु, विष्णु , प्रशांत, रामभक्त गोपाल,गौरव,मयंक ,सलीम,
कुलदीप,अनुज आदि लोग मौजूद रहे।
|
ग्रेटर नोएडा /जेवर : आज युवाओं की एक बैठक आहूत की गई जिसमें क्षेत्र के कुछ अहम मुद्दों को प्रिंस भारद्वाज मंडल उपाध्यक्ष युवा मोर्चा भाजपा द्वारा बताया गया "कस्बा जेवर में किसी भी सरकारी संस्था में चाहे वह तहसील स्तर पर है, कोतवाली स्तर या अन्य किसी भी सरकारी विभाग में आम जनमानस से कोई भी सरकारी कर्मचारी काम करने के एवज में सुविधा शुल्क की पेशकश करता है तो वह तत्काल हमसे संपर्क करें एवं साथ ही साथ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत समस्त राशन कार्ड धारकों को मानक के अनुसार राशन उपलब्ध कराने का कार्य शासन द्वारा किया जा रहा है. इस संबंध में किसी भी कार्ड धारकों अपने राशन विक्रेता से कोई भी परेशानी होती है तो वह तत्काल हमसे इस नंबर नौ नौ नौ सात छः तीन तीन पाँच चार पाँच पर संपर्क करें. जिस विभाग के कर्मचारी द्वारा सुविधा शुल्क की मांग की जाएगी उसी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को मामला संज्ञान में लाकर उक्त कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करवाई जाएगी. प्रिंस भरद्वाज ने कहा मैं आपको आश्वस्त करता हूं उस व्यक्ति,सरकारी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कराने का काम हम करेंगे सरकार की ना गुंडाराज ना भ्रष्टाचार की नीति को सफल बनाना ही हमारा एक मात्र लक्ष्य है सभी युवा साथियों से मेरा निवेदन है आप भी हमारी इस मुहिम से जुड़ कर देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाएं. इस मौके पर रिंकू शर्मा,अजय,प्रदीप, टिंकू,हिमांशु, विष्णु , प्रशांत, रामभक्त गोपाल,गौरव,मयंक ,सलीम, कुलदीप,अनुज आदि लोग मौजूद रहे।
|
Mathura Child Kidnapping मथुरा जंक्शन से सात माह का बच्चा चोरी करने के मामले में डाक्टर दंपती समेत आठ गिरफ्तार किए गए हैं। फिरोजाबाद की महिला पार्षद ने बच्चा न होने पर लिया था गोद पति समेत पकड़ा। पुलिस ने मां को सौंपा बच्चा।
आगरा, जागरण टीम। यूपी के मथुरा जंक्शन से छह दिन पहले चोरी किए गए सात माह के बच्चे को पुलिस ने फिरोजाबाद की महिला पार्षद विनीता अग्रवाल के घर से बरामद कर लिया। कोई संतान न होने पर पार्षद ने ये बच्चा दो लाख में खरीदा था। 1. 80 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया। हाथरस के निजी हास्पिटल के संचालक डाक्टर दंपती मानव तस्करी का धंधा कर रहे थे। अब तक ये लोग छह बच्चों को चोरी कर बेच चुके हैं। पुलिस ने आठ लोगों को दबोच लिया।
23 अगस्त को मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से परखम निवासी राधा पत्नी करन का सोते समय सात माह का बच्चे चोरी हो गया था। इस मामले में एक सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हाथ लगा, इसमें बच्चा चोरी करते हुए एक व्यक्ति दिखाई दिया। पुलिस ने सीसीटीवी और सर्विलांस का सहारा लेकर रविवार रात फिरोजाबाद की भाजपा पार्षद विनीता अग्रवाल के कटरा पठानान स्थित घर से चोरी किया गया बच्चा बरामद कर लिया। पुलिस ने उनके पति कृष्ण मुरारी अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया।
ये बच्चा हाथरस के नवल नगर निवासी दीप कुमार शर्मा ने चुराया था। दीप मानव तस्करी के गिरोह में काम करता है। इस गैंग की संचालक हाथरस के बांकेबिहारी चिकित्सालय के संचालक डा, प्रेम बिहारी और डा, दयावती चला रही थीं। उनके साथ ही पुलिस ने इस अस्पताल में कार्यरत एएनएम पूनम निवासी बंका और विमलेश निवासी नगला अलगर्जी हाथरस को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने पूनम के पति मंजीत को भी इस गिरोह में शामिल पाया है।
एसपी जीआरपी मुश्ताक खान ने बताया कि सभी गिरफ्तार आठ लोगों के खिलाफ मानव तस्करी की धारा में रिपोर्ट दर्ज की गई है। इन्हें जेल भेजा जा रहा है।
|
Mathura Child Kidnapping मथुरा जंक्शन से सात माह का बच्चा चोरी करने के मामले में डाक्टर दंपती समेत आठ गिरफ्तार किए गए हैं। फिरोजाबाद की महिला पार्षद ने बच्चा न होने पर लिया था गोद पति समेत पकड़ा। पुलिस ने मां को सौंपा बच्चा। आगरा, जागरण टीम। यूपी के मथुरा जंक्शन से छह दिन पहले चोरी किए गए सात माह के बच्चे को पुलिस ने फिरोजाबाद की महिला पार्षद विनीता अग्रवाल के घर से बरामद कर लिया। कोई संतान न होने पर पार्षद ने ये बच्चा दो लाख में खरीदा था। एक. अस्सी लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया। हाथरस के निजी हास्पिटल के संचालक डाक्टर दंपती मानव तस्करी का धंधा कर रहे थे। अब तक ये लोग छह बच्चों को चोरी कर बेच चुके हैं। पुलिस ने आठ लोगों को दबोच लिया। तेईस अगस्त को मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से परखम निवासी राधा पत्नी करन का सोते समय सात माह का बच्चे चोरी हो गया था। इस मामले में एक सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हाथ लगा, इसमें बच्चा चोरी करते हुए एक व्यक्ति दिखाई दिया। पुलिस ने सीसीटीवी और सर्विलांस का सहारा लेकर रविवार रात फिरोजाबाद की भाजपा पार्षद विनीता अग्रवाल के कटरा पठानान स्थित घर से चोरी किया गया बच्चा बरामद कर लिया। पुलिस ने उनके पति कृष्ण मुरारी अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया। ये बच्चा हाथरस के नवल नगर निवासी दीप कुमार शर्मा ने चुराया था। दीप मानव तस्करी के गिरोह में काम करता है। इस गैंग की संचालक हाथरस के बांकेबिहारी चिकित्सालय के संचालक डा, प्रेम बिहारी और डा, दयावती चला रही थीं। उनके साथ ही पुलिस ने इस अस्पताल में कार्यरत एएनएम पूनम निवासी बंका और विमलेश निवासी नगला अलगर्जी हाथरस को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने पूनम के पति मंजीत को भी इस गिरोह में शामिल पाया है। एसपी जीआरपी मुश्ताक खान ने बताया कि सभी गिरफ्तार आठ लोगों के खिलाफ मानव तस्करी की धारा में रिपोर्ट दर्ज की गई है। इन्हें जेल भेजा जा रहा है।
|
कितना भोला कितना सादा ;
देखिये पंजाब है .
कटता आया बंटता आया ,
देखिये पंजाब है.
भोलेपन की इंतिहा है ,
सोच के देखे कोई ;
लीडरों की घर की मुर्गी ,
देखिये पंजाब है.
डालरों की धौंस सहता ,
देखिये पंजाब है..
उनमें पागल दिखने वाला ;
देखिये पंजाब है.;
सर्वाधिक अनुपात है .
जब कटा ये देश था .
घाव खाए बांगला ने ;
या मरा पंजाब है .
स्वार्थ के लिए ;
दोनों जानिब सरहदों के ;
धडकता पंजाब है .
दीप जी ,
|
कितना भोला कितना सादा ; देखिये पंजाब है . कटता आया बंटता आया , देखिये पंजाब है. भोलेपन की इंतिहा है , सोच के देखे कोई ; लीडरों की घर की मुर्गी , देखिये पंजाब है. डालरों की धौंस सहता , देखिये पंजाब है.. उनमें पागल दिखने वाला ; देखिये पंजाब है.; सर्वाधिक अनुपात है . जब कटा ये देश था . घाव खाए बांगला ने ; या मरा पंजाब है . स्वार्थ के लिए ; दोनों जानिब सरहदों के ; धडकता पंजाब है . दीप जी ,
|
दक्षिणी तटों के पास भूमि के इस हिस्से को भ्रमित न करेंक्रेते में एक ही नाम समुद्र तट के साथ पेलोपोनिज़ "एलरफोनिसोस" नाम का अनुवाद "हिरण का द्वीप" है। लंबे समय तक यहां कोई जानवर नहीं हैं, लेकिन बहुत से पर्यटकों में विशेष रूप से "उच्च" मौसम में हैं द्वीप पर ग्रीस के ऐसे अच्छे समुद्र तट हैं जैसे "सरकिनीको", "सिमॉस" और "पानियागिया"। Oleny द्वीप सुविधाजनक है क्योंकि यह राजधानी से अब तक नहीं है, इसलिए सप्ताहांत में, पर्यटकों के घनत्व में दोगुना हो जाता है। लेकिन यह एलाफोनीस रूसी क्रिस्टन सहयोगी के विपरीत पूरी तरह से रूसी पर्यटक से अपरिचित है।
इस दक्षिणी देश में पोस्टकार्ड, पोस्टर औरपुस्तिकाएं आमतौर पर ग्रीस के सुंदर समुद्र तटों द्वारा विज्ञापित कर रहे हैं और यहां तक कि अगर आप इस धन्य भगवान के लिए कभी नहीं किया है, तो आप शायद पहले से ही Navagio देखा समुद्र तट सेंटोरिनी के रूप में लोकप्रिय है यह ज़किनथोस के द्वीप पर स्थित है (रूसी पर्यटकों को इसे जैकंथोस कहते हैं)। यह दुनिया के सबसे खूबसूरत समुद्र तटों में से एक है। लेकिन यहां आप यहां "बालोस" के रूप में, केवल नाव में ही प्राप्त कर सकते हैं शायद इस परिस्थिति में समुद्र तट पर इसकी असमय सौंदर्य भी है। इसलिए, पानी स्कूटर के प्रशंसकों, "केले" और अन्य मोटर चालित जल क्रीड़ा गतिविधियों पर सवार होकर, चिंता न करें। "नेविगियो" में यह सब नहीं है, लेकिन अन्यथा पर्यटक इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छी तरह से विकसित होता है।
अगर हम "सर्वश्रेष्ठ समुद्र तटों" का मूल्यांकन करना चाहते हैंलाइफगार्ड्स, बारिश, उपकरण किराए पर लेने बच्चे रेत के साथ परिवार के लिए Elafonisos वांछनीय बनाने गुलाबी अद्भुत है :. - ग्रीस, बच्चों के लिए, "यह क्रेते के द्वीप पर एक जगह छोटे और शांत समुद्र, किसी भी चट्टान समुद्र तट की पूरी तरह से रहित है, उत्कृष्ट सेवा के पहले स्थान ले जाएगा है। मार्शमेलो की तरह। वे कहते हैं कि यह सहारा सही से हवाओं लाता है। सब के बाद, इस महान अफ्रीकी रेगिस्तान क्रेते के दक्षिणी तट के सामने बिल्कुल निहित है। समुद्र तट के केवल दोष यह कोई प्राकृतिक छाया शोर सैरगाह से इसलिए इसकी दूरी है। हमेशा पकड़ Elafonisos सड़क के लिए एक सूर्य छाता के साथ ite लंबा है, लेकिन बहुत सुरम्य भोजन दूर से "हिरण" समुद्र तट पर स्थित है और "Balos" -... हमारी सूची में नंबर एक है पड़ोसी गांव में उपलब्ध हैं।
यह सबसे सफेद समुद्र तट है ग्रीस उनमें से बहुत कुछ है, लेकिन दुनिया के सबसे खूबसूरत तटों की हालिया रेटिंग में, "एग्रेमेनी" ने प्रमुख पदों में से एक को चुना है। और यह केवल एक था जो रिसोर्ट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। यह "Egremni" कुछ पता है की वजह से काफी अजीब है। इस समुद्र तट पर अधिक परिष्कृत जनता इकट्ठा करती है सब कुछ पूरी तरह से युवा और स्वस्थ लोग हैं फिर भी - एक हज़ार चरणों के बारे में, क्रीटेशस चट्टानों से उतरते हुए, और फिर ऊपर की ओर बढ़ने के लिए - हर कोई नहीं कर सकता लेकिन गंभीर शारीरिक परीक्षण के लिए इनाम फ़िरोज़ा समुद्र और बर्फ के रूप में सफेद और मखमल रेत के रूप में नरम हो जाएगा। समुद्र तट पर केवल एक छोटा सा कैफे वहाँ है, लेकिन भोजन वहाँ बस दिव्य है। समुद्र तट कभी भी इसकी दुर्गमता के कारण नहीं होता है यह रोमांटिक स्वभावों द्वारा पसंद किया गया है। ये सभी इंद्रियों में एक आदर्श स्थान है जो लेफ़कादा के दक्षिण में केवल 30 किलोमीटर दूर है। इस रिसोर्ट के होटल से आप एगली होटल की सिफारिश कर सकते हैं।
कुछ साल पहले ग्रीस ही, फोटो समुद्र तटोंजो उसे सर्वश्रेष्ठ प्रतिष्ठा बनाते हैं, इस क्षेत्र को देश के सबसे सुंदर तट के रूप में मान्यता देते हैं। और इसका कुछ मतलब है! यह स्वर्ग कैफलोनिया के पश्चिमी तट पर स्थित है "मायर्टोस" वास्तव में कल्पना को आकर्षित करता है फ़िरोज़ा पानी इतना पारदर्शी है कि 5-7 मीटर की गहराई पर भी प्रत्येक पत्थर दिखाई दे रहा है। पेइन के पेड़ों के साथ आसपास के परिदृश्य, सुइयों के स्वादों से भरा हवा, कहने लगता हैः "यह ग्रीक रंगमंच का सार है"। शायद, यही वजह है कि फिल्म "कैप्टन कोरली की च्वाइस" की शूटिंग के लिए "मायटोस" अग्रभूमि बन गई। लेकिन खानों, जैसे फिल्मों में, यहाँ, बिल्कुल, विस्फोट नहीं करते। हेलैस के सपने के इस अवतार पर आप सभी श्रेणियों के पर्यटकों को आराम कर सकते हैं, लेकिन यहां पर अधिकांश आप चुप या रोमांटिक स्वभाव पसंद करेंगे।
Cycladic में Pano Koufonisi के छोटे से द्वीपआर्किपेलगो में मेहमानों को आश्चर्यचकित करने के लिए कुछ है ग्रीस के अच्छे समुद्र तट मुख्य रूप से पार्टियों और डिस्को के साथ जुड़े हुए हैं आप "मैकोनोस" की सिफारिश कर सकते हैं, यह असामान्य नहीं है, लेकिन एक सुखद पैटर्न हालांकि, हर कोई एक सिर शुरू "Finikas" देता है, या पास के शहर, प्रीवेली के नाम से। कारों पर चट्टानों के बीच घुमावने वाली संकीर्ण सड़क पर और फिर एक ढलान पर पैर पर काबू पाने के बाद, आप स्वर्ग में दिखाई देंगे। यदि आप खड़ी चट्टानों की सवारी करने के लिए भौतिक रूप में नहीं हैं, तो आप नाव द्वारा "फीनिक्स" तक पहुंच सकते हैं इस एडेन में, एक पहाड़ी की धारा लीबिया सागर में बहती है, जिसमें एक छोटा कोव होता है। तट के पास एक चट्टान है, दिल की तरह आकार। यदि आप हनीमून में खर्च करने के लिए ग्रीस आए, तो सुनिश्चित करें कि आप यहां हैं तिथि हथेलियों का ग्रोव एक प्राकृतिक छाया बनाता है। हवा गर्मियों में गर्मी फैलती है और रस्तामैन, जो इस नखलिस्तान के हथेलियों के नीचे नहीं पकड़ रहे हैं, केवल इस जगह के आराम और रोमांटिक वातावरण पर जोर देते हैं।
"सुपर स्वर्ग"
|
दक्षिणी तटों के पास भूमि के इस हिस्से को भ्रमित न करेंक्रेते में एक ही नाम समुद्र तट के साथ पेलोपोनिज़ "एलरफोनिसोस" नाम का अनुवाद "हिरण का द्वीप" है। लंबे समय तक यहां कोई जानवर नहीं हैं, लेकिन बहुत से पर्यटकों में विशेष रूप से "उच्च" मौसम में हैं द्वीप पर ग्रीस के ऐसे अच्छे समुद्र तट हैं जैसे "सरकिनीको", "सिमॉस" और "पानियागिया"। Oleny द्वीप सुविधाजनक है क्योंकि यह राजधानी से अब तक नहीं है, इसलिए सप्ताहांत में, पर्यटकों के घनत्व में दोगुना हो जाता है। लेकिन यह एलाफोनीस रूसी क्रिस्टन सहयोगी के विपरीत पूरी तरह से रूसी पर्यटक से अपरिचित है। इस दक्षिणी देश में पोस्टकार्ड, पोस्टर औरपुस्तिकाएं आमतौर पर ग्रीस के सुंदर समुद्र तटों द्वारा विज्ञापित कर रहे हैं और यहां तक कि अगर आप इस धन्य भगवान के लिए कभी नहीं किया है, तो आप शायद पहले से ही Navagio देखा समुद्र तट सेंटोरिनी के रूप में लोकप्रिय है यह ज़किनथोस के द्वीप पर स्थित है । यह दुनिया के सबसे खूबसूरत समुद्र तटों में से एक है। लेकिन यहां आप यहां "बालोस" के रूप में, केवल नाव में ही प्राप्त कर सकते हैं शायद इस परिस्थिति में समुद्र तट पर इसकी असमय सौंदर्य भी है। इसलिए, पानी स्कूटर के प्रशंसकों, "केले" और अन्य मोटर चालित जल क्रीड़ा गतिविधियों पर सवार होकर, चिंता न करें। "नेविगियो" में यह सब नहीं है, लेकिन अन्यथा पर्यटक इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छी तरह से विकसित होता है। अगर हम "सर्वश्रेष्ठ समुद्र तटों" का मूल्यांकन करना चाहते हैंलाइफगार्ड्स, बारिश, उपकरण किराए पर लेने बच्चे रेत के साथ परिवार के लिए Elafonisos वांछनीय बनाने गुलाबी अद्भुत है :. - ग्रीस, बच्चों के लिए, "यह क्रेते के द्वीप पर एक जगह छोटे और शांत समुद्र, किसी भी चट्टान समुद्र तट की पूरी तरह से रहित है, उत्कृष्ट सेवा के पहले स्थान ले जाएगा है। मार्शमेलो की तरह। वे कहते हैं कि यह सहारा सही से हवाओं लाता है। सब के बाद, इस महान अफ्रीकी रेगिस्तान क्रेते के दक्षिणी तट के सामने बिल्कुल निहित है। समुद्र तट के केवल दोष यह कोई प्राकृतिक छाया शोर सैरगाह से इसलिए इसकी दूरी है। हमेशा पकड़ Elafonisos सड़क के लिए एक सूर्य छाता के साथ ite लंबा है, लेकिन बहुत सुरम्य भोजन दूर से "हिरण" समुद्र तट पर स्थित है और "Balos" -... हमारी सूची में नंबर एक है पड़ोसी गांव में उपलब्ध हैं। यह सबसे सफेद समुद्र तट है ग्रीस उनमें से बहुत कुछ है, लेकिन दुनिया के सबसे खूबसूरत तटों की हालिया रेटिंग में, "एग्रेमेनी" ने प्रमुख पदों में से एक को चुना है। और यह केवल एक था जो रिसोर्ट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। यह "Egremni" कुछ पता है की वजह से काफी अजीब है। इस समुद्र तट पर अधिक परिष्कृत जनता इकट्ठा करती है सब कुछ पूरी तरह से युवा और स्वस्थ लोग हैं फिर भी - एक हज़ार चरणों के बारे में, क्रीटेशस चट्टानों से उतरते हुए, और फिर ऊपर की ओर बढ़ने के लिए - हर कोई नहीं कर सकता लेकिन गंभीर शारीरिक परीक्षण के लिए इनाम फ़िरोज़ा समुद्र और बर्फ के रूप में सफेद और मखमल रेत के रूप में नरम हो जाएगा। समुद्र तट पर केवल एक छोटा सा कैफे वहाँ है, लेकिन भोजन वहाँ बस दिव्य है। समुद्र तट कभी भी इसकी दुर्गमता के कारण नहीं होता है यह रोमांटिक स्वभावों द्वारा पसंद किया गया है। ये सभी इंद्रियों में एक आदर्श स्थान है जो लेफ़कादा के दक्षिण में केवल तीस किलोग्राममीटर दूर है। इस रिसोर्ट के होटल से आप एगली होटल की सिफारिश कर सकते हैं। कुछ साल पहले ग्रीस ही, फोटो समुद्र तटोंजो उसे सर्वश्रेष्ठ प्रतिष्ठा बनाते हैं, इस क्षेत्र को देश के सबसे सुंदर तट के रूप में मान्यता देते हैं। और इसका कुछ मतलब है! यह स्वर्ग कैफलोनिया के पश्चिमी तट पर स्थित है "मायर्टोस" वास्तव में कल्पना को आकर्षित करता है फ़िरोज़ा पानी इतना पारदर्शी है कि पाँच-सात मीटर की गहराई पर भी प्रत्येक पत्थर दिखाई दे रहा है। पेइन के पेड़ों के साथ आसपास के परिदृश्य, सुइयों के स्वादों से भरा हवा, कहने लगता हैः "यह ग्रीक रंगमंच का सार है"। शायद, यही वजह है कि फिल्म "कैप्टन कोरली की च्वाइस" की शूटिंग के लिए "मायटोस" अग्रभूमि बन गई। लेकिन खानों, जैसे फिल्मों में, यहाँ, बिल्कुल, विस्फोट नहीं करते। हेलैस के सपने के इस अवतार पर आप सभी श्रेणियों के पर्यटकों को आराम कर सकते हैं, लेकिन यहां पर अधिकांश आप चुप या रोमांटिक स्वभाव पसंद करेंगे। Cycladic में Pano Koufonisi के छोटे से द्वीपआर्किपेलगो में मेहमानों को आश्चर्यचकित करने के लिए कुछ है ग्रीस के अच्छे समुद्र तट मुख्य रूप से पार्टियों और डिस्को के साथ जुड़े हुए हैं आप "मैकोनोस" की सिफारिश कर सकते हैं, यह असामान्य नहीं है, लेकिन एक सुखद पैटर्न हालांकि, हर कोई एक सिर शुरू "Finikas" देता है, या पास के शहर, प्रीवेली के नाम से। कारों पर चट्टानों के बीच घुमावने वाली संकीर्ण सड़क पर और फिर एक ढलान पर पैर पर काबू पाने के बाद, आप स्वर्ग में दिखाई देंगे। यदि आप खड़ी चट्टानों की सवारी करने के लिए भौतिक रूप में नहीं हैं, तो आप नाव द्वारा "फीनिक्स" तक पहुंच सकते हैं इस एडेन में, एक पहाड़ी की धारा लीबिया सागर में बहती है, जिसमें एक छोटा कोव होता है। तट के पास एक चट्टान है, दिल की तरह आकार। यदि आप हनीमून में खर्च करने के लिए ग्रीस आए, तो सुनिश्चित करें कि आप यहां हैं तिथि हथेलियों का ग्रोव एक प्राकृतिक छाया बनाता है। हवा गर्मियों में गर्मी फैलती है और रस्तामैन, जो इस नखलिस्तान के हथेलियों के नीचे नहीं पकड़ रहे हैं, केवल इस जगह के आराम और रोमांटिक वातावरण पर जोर देते हैं। "सुपर स्वर्ग"
|
केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने पहले बताया था कि सितंबर में सरकार ने योजना की समय सीमा को 3 महीने के लिए 31 दिसंबर 2022 तक बढ़ा दिया है. कोरोना के समय गरीब लोगों को राहत पहुंचाने के लिए इस योजना को लाया गया था. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीते 28 महीने में भारत सरकार ने गरीबों के मुफ्त राशन पर 1. 80 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना की शुरुआत मार्च 2020 में कोरोना संकट के दौरान हुई थी. इस योजना का लाभ देश के 80 करोड़ लोग उठा रहे हैं. इसके तहत बीपीएल कार्ड वाले परिवारों को हर महीने प्रति व्यक्ति 4 किलो गेहूं और 1 किलो चावल मुफ्त दिया जाता है.
आपको मालूम हो कि इस योजना को सबसे पहले मार्च 2020 में पहले चरण तीन महीनों यानी अप्रैल से जून 2020 के लिए लागू किया गया था. वहीं, अब तक इस योजना के सात चरण हो चुके हैं. मार्च 2022 में इसे 6 महीने के लिए यानी सितंबर तक बढ़ाया गया था. उसके बाद 3 महीनों के लिए यानी दिसंबर और अब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार इस योजना को दिसंबर 2023 तक के लिए बढ़ा दिया गया है.
|
केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने पहले बताया था कि सितंबर में सरकार ने योजना की समय सीमा को तीन महीने के लिए इकतीस दिसंबर दो हज़ार बाईस तक बढ़ा दिया है. कोरोना के समय गरीब लोगों को राहत पहुंचाने के लिए इस योजना को लाया गया था. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीते अट्ठाईस महीने में भारत सरकार ने गरीबों के मुफ्त राशन पर एक. अस्सी लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना की शुरुआत मार्च दो हज़ार बीस में कोरोना संकट के दौरान हुई थी. इस योजना का लाभ देश के अस्सी करोड़ लोग उठा रहे हैं. इसके तहत बीपीएल कार्ड वाले परिवारों को हर महीने प्रति व्यक्ति चार किलो गेहूं और एक किलो चावल मुफ्त दिया जाता है. आपको मालूम हो कि इस योजना को सबसे पहले मार्च दो हज़ार बीस में पहले चरण तीन महीनों यानी अप्रैल से जून दो हज़ार बीस के लिए लागू किया गया था. वहीं, अब तक इस योजना के सात चरण हो चुके हैं. मार्च दो हज़ार बाईस में इसे छः महीने के लिए यानी सितंबर तक बढ़ाया गया था. उसके बाद तीन महीनों के लिए यानी दिसंबर और अब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार इस योजना को दिसंबर दो हज़ार तेईस तक के लिए बढ़ा दिया गया है.
|
Anuppur Son Nadi News: अनूपपुर जिले (Anuppur District) के सोन नदी में गुरूवार को विद्यार्थियों से भरी नाव पलट गई। नाव में सवार विद्यार्थी नदी पार कर स्कूल जा रहे थे। नदी के दूसरे छोर पहुंचते ही नाव पलट गई। गनीमत तो यह रही कि नाव नदी के किनारे पलटी, जिससे सभी विद्यार्थी नदी में गिर गए और नाव पानी में डूब गई। हालांकि नदी के किनारे नाव पलटने से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि नाव पलटने की यह घटना अगर नदी के बीच में होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। नाव में 18 छात्राओं सहित 2 छात्रों को मिला कर कुल 20 विद्यार्थी बैठे हुए थे।
गौरतलब है कि यह हादसा जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर ग्राम पंचायत कैल्होरी के चचाई में हुआ। यहां शासकीय हायर सेकेण्ड्री स्कूल में पढ़ने के लिए विद्यार्थी सोन नदी को पार करके आते हैं। गुरूवार को भी बकेली, पोड़ी, कोदयली, खाड़ा, मानपुर सहित अन्य गांव के विद्यार्थी स्कूल जा रहे थे।
नाव में सवार छात्रा खुशबू पटेल ने बताया कि नदी के दूसरे किनारे पहुंचते ही नाव पलट गई। नाव पलटते ही चीख पुकार की स्थिति निर्मित हो गई। किनारे पर गहराई कम थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। नाविक और अन्य लोगां ने हमें बाहर निकाला। दो दिन से हो रही बारिस के कारण जल स्तर भी बढ़ा हुआ है।
नाविक जगदीश ने बताया कि रोज की तरह मैं नाव लेकर बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहा था। बकेली गांव से चल कर जैसे ही नाव दूसरे छोर में पहुंची, जल्दबाजी में विद्यार्थियों ने नाव से उतरने की कोशिस की, इसी हड़बड़ाहट में नाव पलट गई। किसी भी विद्यार्थी को चोंट नहीं आई है।
ग्रामीणों की माने तो जान जोखिम में डाल कर नाव से हमें और बच्चों को चचाई जाना पड़ता है। 10 गांव के विद्यार्थी पढ़ाई करने चचाई जाते हैं। यहां नदी पार करने के लिए पिछले सात साल से पुल निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। लेकिन पुल का निर्माण कार्य पूरा ही नहीं हो पा रहा। चार साल से पुल का 20 फीसदी का काम रूका हुआ है।
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर एसपी अखिल पटेल, एसडीओपी कीर्ति बघेल, जिला पंचायत प्रतिनिधि प्रीति रमेश सिंह, कोतवाली थाना प्रभारी अमर सिंह पहुंच गए। एसपी द्वारा छात्रों के नाव से नदी पार कराने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने तक बच्चों को बस से स्कूल भेजवाने की व्यवस्था प्रशासन करवाए। अगर बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे तो उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी। इस संबंध में ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन देने की बात कही है।
|
Anuppur Son Nadi News: अनूपपुर जिले के सोन नदी में गुरूवार को विद्यार्थियों से भरी नाव पलट गई। नाव में सवार विद्यार्थी नदी पार कर स्कूल जा रहे थे। नदी के दूसरे छोर पहुंचते ही नाव पलट गई। गनीमत तो यह रही कि नाव नदी के किनारे पलटी, जिससे सभी विद्यार्थी नदी में गिर गए और नाव पानी में डूब गई। हालांकि नदी के किनारे नाव पलटने से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि नाव पलटने की यह घटना अगर नदी के बीच में होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। नाव में अट्ठारह छात्राओं सहित दो छात्रों को मिला कर कुल बीस विद्यार्थी बैठे हुए थे। गौरतलब है कि यह हादसा जिला मुख्यालय से बीस किमी दूर ग्राम पंचायत कैल्होरी के चचाई में हुआ। यहां शासकीय हायर सेकेण्ड्री स्कूल में पढ़ने के लिए विद्यार्थी सोन नदी को पार करके आते हैं। गुरूवार को भी बकेली, पोड़ी, कोदयली, खाड़ा, मानपुर सहित अन्य गांव के विद्यार्थी स्कूल जा रहे थे। नाव में सवार छात्रा खुशबू पटेल ने बताया कि नदी के दूसरे किनारे पहुंचते ही नाव पलट गई। नाव पलटते ही चीख पुकार की स्थिति निर्मित हो गई। किनारे पर गहराई कम थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। नाविक और अन्य लोगां ने हमें बाहर निकाला। दो दिन से हो रही बारिस के कारण जल स्तर भी बढ़ा हुआ है। नाविक जगदीश ने बताया कि रोज की तरह मैं नाव लेकर बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहा था। बकेली गांव से चल कर जैसे ही नाव दूसरे छोर में पहुंची, जल्दबाजी में विद्यार्थियों ने नाव से उतरने की कोशिस की, इसी हड़बड़ाहट में नाव पलट गई। किसी भी विद्यार्थी को चोंट नहीं आई है। ग्रामीणों की माने तो जान जोखिम में डाल कर नाव से हमें और बच्चों को चचाई जाना पड़ता है। दस गांव के विद्यार्थी पढ़ाई करने चचाई जाते हैं। यहां नदी पार करने के लिए पिछले सात साल से पुल निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। लेकिन पुल का निर्माण कार्य पूरा ही नहीं हो पा रहा। चार साल से पुल का बीस फीसदी का काम रूका हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर एसपी अखिल पटेल, एसडीओपी कीर्ति बघेल, जिला पंचायत प्रतिनिधि प्रीति रमेश सिंह, कोतवाली थाना प्रभारी अमर सिंह पहुंच गए। एसपी द्वारा छात्रों के नाव से नदी पार कराने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने तक बच्चों को बस से स्कूल भेजवाने की व्यवस्था प्रशासन करवाए। अगर बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे तो उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी। इस संबंध में ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन देने की बात कही है।
|
काफी राजनीतिक खींचतान के बीच आज शहबाज़ शरीफ को पाकिस्तान का 23वां प्रधानमंत्री चुन लिया गया।
पाकिस्तान में देर रात तक चले सियासी ड्रामे के बाद आखिरकार PM इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास हो ही गया।
बिलावल भुट्टो ने मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) को विपक्ष के साथ हाथ मिलाने और अविश्वास प्रस्ताव में इमरान खान को बाहर करने के लिए उनका समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।
पाकिस्तान में प्रमुख विपक्षी नेता शहबाज़ शरीफ़ को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया है।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री और मुस्लिम लीग एन के प्रमुख शहबाज़ शरीफ़ को आशियाना हाउसिंग स्कैंडल की जांच के संबंध में 10 दिनों के रिमांड पर नेश्नल अकैउन्टबिलिटी ब्यूरो नैब के हवाले कर दिया गया।
पाकिस्तान के नेश्नल अकैउन्टबिलिटी ब्यूरो नैब ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और मुस्लिम लीग एन के प्रमुख शहबाज़ शरीफ़ को आशियाना हाउसिंग स्कैंडल में आधिकारिक रूप से गिरफ़्तार कर लिया।
पाकिस्तान के सुप्रिम कोर्ट की ओर से अयोग्य घोषित होने के बाद प्रधानमंत्री के पद से त्यागपत्र देने वाले नवाज़ शरीफ़ इस्लामाबाद से लाहौर की ओर रवाना हैं।
|
काफी राजनीतिक खींचतान के बीच आज शहबाज़ शरीफ को पाकिस्तान का तेईसवां प्रधानमंत्री चुन लिया गया। पाकिस्तान में देर रात तक चले सियासी ड्रामे के बाद आखिरकार PM इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास हो ही गया। बिलावल भुट्टो ने मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान को विपक्ष के साथ हाथ मिलाने और अविश्वास प्रस्ताव में इमरान खान को बाहर करने के लिए उनका समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। पाकिस्तान में प्रमुख विपक्षी नेता शहबाज़ शरीफ़ को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री और मुस्लिम लीग एन के प्रमुख शहबाज़ शरीफ़ को आशियाना हाउसिंग स्कैंडल की जांच के संबंध में दस दिनों के रिमांड पर नेश्नल अकैउन्टबिलिटी ब्यूरो नैब के हवाले कर दिया गया। पाकिस्तान के नेश्नल अकैउन्टबिलिटी ब्यूरो नैब ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और मुस्लिम लीग एन के प्रमुख शहबाज़ शरीफ़ को आशियाना हाउसिंग स्कैंडल में आधिकारिक रूप से गिरफ़्तार कर लिया। पाकिस्तान के सुप्रिम कोर्ट की ओर से अयोग्य घोषित होने के बाद प्रधानमंत्री के पद से त्यागपत्र देने वाले नवाज़ शरीफ़ इस्लामाबाद से लाहौर की ओर रवाना हैं।
|
में सात चौके और एक छक्का मारने वाले पृथ्वी को ठाकरे ने अपना शिकार बनाया।
इसके बाद दिन का खेल खत्म होने तक विहारी और जयंत ने टीम को कोई और झटका नहीं लगने दिया। इससे पहले, अपने तीसरे दिन के स्कोर पांच विकेट के नुकसान पर 702 रनों से आगे खेलने उतरी विदर्भ ने चौथे दिन अपने खाते में 98 रन जोड़े। तीसरे दिन अपने शतक से एक रन दूर रहते हुए पवेलियन लौटने वाले अपूर्व वानखेड़े ने अपना शतक पूरा किया। वे 157 रनों पर नाबाद लौटे। इसके लिए उन्होंने 221 गेंदें लीं और 16 चौके और छह छक्के लगाए।
मोहित शर्मा ने CSK के खिलाफ दिल दहलाने वाले आखिरी ओवर पर किया खुलासाः "मैं सो नहीं पाया"
|
में सात चौके और एक छक्का मारने वाले पृथ्वी को ठाकरे ने अपना शिकार बनाया। इसके बाद दिन का खेल खत्म होने तक विहारी और जयंत ने टीम को कोई और झटका नहीं लगने दिया। इससे पहले, अपने तीसरे दिन के स्कोर पांच विकेट के नुकसान पर सात सौ दो रनों से आगे खेलने उतरी विदर्भ ने चौथे दिन अपने खाते में अट्ठानवे रन जोड़े। तीसरे दिन अपने शतक से एक रन दूर रहते हुए पवेलियन लौटने वाले अपूर्व वानखेड़े ने अपना शतक पूरा किया। वे एक सौ सत्तावन रनों पर नाबाद लौटे। इसके लिए उन्होंने दो सौ इक्कीस गेंदें लीं और सोलह चौके और छह छक्के लगाए। मोहित शर्मा ने CSK के खिलाफ दिल दहलाने वाले आखिरी ओवर पर किया खुलासाः "मैं सो नहीं पाया"
|
CUCET Entrance Result 2020: राजस्थान की केंद्रीय विश्वविद्यालय ने शनिवार, 17 अक्टूबर को केंद्रीय विश्वविद्यालयों के सामान्य प्रवेश परीक्षा (Central Universities Common Entrance Test, CUCET-2020) के परिणाम घोषित किए गए हैं। जो उम्मीदवार CUCET 2020 की परीक्षा में शामिल हुए थे वे अब आधिकारिक वेबसाइट http://www. cucetexam. in पर जाकर अपना स्कोरकार्ड चेक कर सकते हैं। स्कोरकार्ड चेक करने के लिए उम्मीदवारों को प्रोग्राम एप्लाइड रोल नंबर, जन्म तिथि और वेरिफिकेशन कोड़ दर्ज करना होगा। अगर आप अपना रोल नंबर भूल गए हैं, तो उसे फिर से प्राप्त करने के लिए एक विकल्प होमपेज पर ही मिल जाएगा।
दरअसल, अंडर-ग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट और रिसर्च प्रोग्राम में एडमिशन के लिए CUCET 2020 की परीक्षा 18, 19 और 20 सितंबर को दो शिफ्ट में आयोजित की गई थी। पहले शिफ्ट सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक चली थी।
चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट cucetexam. in पर जाएं।
चरण 2: होमपेज पर, "View Score card" के लिंक पर क्लिक करें।
चरण 3: कंप्यूटर स्क्रीन पर एक नया पेज खुल जाएगा।
चरण 4: अब आपको क्रेडेंशियल्स की मदद से लॉग-इन करना होगा।
चरण 5: CUCET परिणाम 2020 स्क्रीन पर खुल जाएगा।
चरण 6: इसे डाउनलोड करें और भविष्य के उपयोग के लिए उसका प्रिंट आउट लें।
बता दें कि, CUCET 2020 एक अखिल भारतीय परीक्षा है जो 14 केंद्रीय विश्वविद्यालयों और 4 राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित की जाती है। केंद्रीय विश्वविद्यालय सामान्य प्रवेश परीक्षा (CUCET-2020) 14 केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विभिन्न कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जा रही है। 14 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में असम, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, जम्मू, झारखंड, कर्नाटक, कश्मीर, केरल, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, दक्षिण बिहार, तमिलनाडु और चार राज्य विश्वविद्यालय हैं बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय, राजौरी, बेंगलुरु डॉ. बी. आर. अंबेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स यूनिवर्सिटी, खल्लोटे विश्वविद्यालय ( बेरहामपुर), सरदार पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ़ पुलिस सिक्योरिटी एंड क्रिमिनल जस्टिस, जोधपुर शामिल है।
|
CUCET Entrance Result दो हज़ार बीस: राजस्थान की केंद्रीय विश्वविद्यालय ने शनिवार, सत्रह अक्टूबर को केंद्रीय विश्वविद्यालयों के सामान्य प्रवेश परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए हैं। जो उम्मीदवार CUCET दो हज़ार बीस की परीक्षा में शामिल हुए थे वे अब आधिकारिक वेबसाइट http://www. cucetexam. in पर जाकर अपना स्कोरकार्ड चेक कर सकते हैं। स्कोरकार्ड चेक करने के लिए उम्मीदवारों को प्रोग्राम एप्लाइड रोल नंबर, जन्म तिथि और वेरिफिकेशन कोड़ दर्ज करना होगा। अगर आप अपना रोल नंबर भूल गए हैं, तो उसे फिर से प्राप्त करने के लिए एक विकल्प होमपेज पर ही मिल जाएगा। दरअसल, अंडर-ग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट और रिसर्च प्रोग्राम में एडमिशन के लिए CUCET दो हज़ार बीस की परीक्षा अट्ठारह, उन्नीस और बीस सितंबर को दो शिफ्ट में आयोजित की गई थी। पहले शिफ्ट सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर तीन बजे से शाम पाँच बजे तक चली थी। चरण एक: आधिकारिक वेबसाइट cucetexam. in पर जाएं। चरण दो: होमपेज पर, "View Score card" के लिंक पर क्लिक करें। चरण तीन: कंप्यूटर स्क्रीन पर एक नया पेज खुल जाएगा। चरण चार: अब आपको क्रेडेंशियल्स की मदद से लॉग-इन करना होगा। चरण पाँच: CUCET परिणाम दो हज़ार बीस स्क्रीन पर खुल जाएगा। चरण छः: इसे डाउनलोड करें और भविष्य के उपयोग के लिए उसका प्रिंट आउट लें। बता दें कि, CUCET दो हज़ार बीस एक अखिल भारतीय परीक्षा है जो चौदह केंद्रीय विश्वविद्यालयों और चार राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित की जाती है। केंद्रीय विश्वविद्यालय सामान्य प्रवेश परीक्षा चौदह केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विभिन्न कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जा रही है। चौदह केंद्रीय विश्वविद्यालयों में असम, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, जम्मू, झारखंड, कर्नाटक, कश्मीर, केरल, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, दक्षिण बिहार, तमिलनाडु और चार राज्य विश्वविद्यालय हैं बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय, राजौरी, बेंगलुरु डॉ. बी. आर. अंबेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स यूनिवर्सिटी, खल्लोटे विश्वविद्यालय , सरदार पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ़ पुलिस सिक्योरिटी एंड क्रिमिनल जस्टिस, जोधपुर शामिल है।
|
द्वार खुलना
द्वार खुलना - उपाय निकालना । उ० कोई द्वार खुले तो तुम्हारा ठिकाना लगा दूं । द्वारचार होना- वरात का बेटी वाले के दरवाजे पर विवाह के पहले जाना । द्वारपूजा होना । द्वार लगना -१. म- १. दरवाजा वद होना। २. दरवाजे
धंधले आना- छल-छद का अभ्यास होना । उ० आपको धँधले खूब आते हैं ।
धंधले मे आना- किसी की धोखाधडी मे आना या फँसना । उ० मैं आपके धँधले मे नही आ
धक-धक करना - १. दिल का धडकना । २ वेचैन होना । ३. डरना ।
धक-धक जो करना- डर से हृदय की गति बढ जाना, डर के मारे बेचैन होना । उ० मेरा जी धक-धक कर रहा है, पता नही मास्टर साहब परीक्षा मे क्या पूछेगे ?
धक-से हो जाना--आश्चर्यचकित और सन्न हो जाना । उ० यह बात सुन कर मैं धक से रह
धकापेल करना - १ बहुत तेज़ी से करना । उ० जो भी काम दे दो, वह धकापेल करता है । २ विना सोचे-समझे करना ।
धकेल देना - १ धक्का देना, गिरा देना । २ ढकेलना ।
धक्कम धक्का करना - १ भीड मे बहुत धक्का देना । २ वहुत भीड का इकट्ठा करना या होना । ३ मार-पीट करना । उ० यहां धक्कमधक्का न करो ।
धक्का खाते फिरना - इधर उधर मारा-मारा घूमना । उ० तुम्हारे घर दूसरे मौज उडाते है और तुम धक्का खाते फिर रहे हो । धक्का खाना-१ हानि उठाना । उ० इस व्यापार में जितना धक्का खाना होगा, वह तो अव खाना ही पडेगा, उससे जान नही बच सकती । २ ठोकर खाना । उ० मेरी जिन्दगी धक्के खाते बीती ।
धक्का देकर निकालना- वेइज्जती से बाहर करना । उ० अगर सभा मे अधिक अड-वड वकोगे तो धक्के देकर निकाले जाओगे । धक्का देना - दे० 'धकेल देना' ।
धडक खुलना
के पीछे छिप कर सुनना या देखना । उ० कोई द्वार लगा है, जरा धीरे वोलो । ३ रास्ता बद होना ।
द्वार लगाना - दरवाजा बंद करना । द्विशिर होना - दे० 'दो सिर होना' ।
धक्का पहुँचाना-१ नुकसान पहुँचाना । उ० इससे तुम्हारे रोजगार को धक्का पहुँचेगा । २ सदमा पहुँचना । उ० इस समाचार से दिल को धक्का पहुँचेगा ।
धक्का पहुँचाना-१ हानि पहुँचाना । २ सदमा पहुँचाना ।
धक्का लगना - १ नुकसान होना । उ० इस वार उसे सोने मे ऐसा धक्का लगा कि सारी कमायी खतम हो गयी । २ आघात, चोट या ठेस लगना । उ० गाडी का इतने ज़ोर से धक्का लगा कि मैं गिर गया ।
धज्जा उड़ जाना-दे० 'धज्जा हो जाना' ।
धज्जा हो जाना-१ दुबला-पतला हो जाना । उ० आपको कौन-सी बीमारी है कि आप धज्जे हो गये । २ टुकडे-टुकडे हो जाना । उ० वह कपडा तो धज्जा हो गया । ३ बर्बाद या नष्ट-भ्रष्ट हो जाना ।
धज्जियाँ उड़ना - १ दुर्दशा होना । उ० वह बेचारा जब से यहाँ आया, उसकी धज्जियाँ उड रही है । २ वेइज्जती होना ।
धज्जियाँ उडाना - १ निंदा करना । वेइज्जत करना । उ० सबके सामने किसी की धज्जियाँ उड़ाना ठीक नही । २ टुकडे करना । उ० इस कोट की तो तुमने धज्जियाँ उडा दी । उ० नष्ट-भ्रष्ट करना बर्बाद करना । उ० धज्जियाँ न उडा तो कहना ।
धज्जियाँ लगना या लग जाना-फटे-पुराने कपडे पहनने की नौबत आना । उ० इस ज़माने मे वडो की धज्जियाँ लग गईं ।
धज्जियाँ लेना- १ दुर्दशा करना । उ० उसकी धज्जियाँ मत लो । २ ऐव निकालना ।
धज्जी हो जाना- १ टुकडे-टुकडे हो जाना । २ कमज़ोर हो जाना ।
धड़क खुलना - हिचक दूर होना ।
|
द्वार खुलना द्वार खुलना - उपाय निकालना । उशून्य कोई द्वार खुले तो तुम्हारा ठिकाना लगा दूं । द्वारचार होना- वरात का बेटी वाले के दरवाजे पर विवाह के पहले जाना । द्वारपूजा होना । द्वार लगना -एक. म- एक. दरवाजा वद होना। दो. दरवाजे धंधले आना- छल-छद का अभ्यास होना । उशून्य आपको धँधले खूब आते हैं । धंधले मे आना- किसी की धोखाधडी मे आना या फँसना । उशून्य मैं आपके धँधले मे नही आ धक-धक करना - एक. दिल का धडकना । दो वेचैन होना । तीन. डरना । धक-धक जो करना- डर से हृदय की गति बढ जाना, डर के मारे बेचैन होना । उशून्य मेरा जी धक-धक कर रहा है, पता नही मास्टर साहब परीक्षा मे क्या पूछेगे ? धक-से हो जाना--आश्चर्यचकित और सन्न हो जाना । उशून्य यह बात सुन कर मैं धक से रह धकापेल करना - एक बहुत तेज़ी से करना । उशून्य जो भी काम दे दो, वह धकापेल करता है । दो विना सोचे-समझे करना । धकेल देना - एक धक्का देना, गिरा देना । दो ढकेलना । धक्कम धक्का करना - एक भीड मे बहुत धक्का देना । दो वहुत भीड का इकट्ठा करना या होना । तीन मार-पीट करना । उशून्य यहां धक्कमधक्का न करो । धक्का खाते फिरना - इधर उधर मारा-मारा घूमना । उशून्य तुम्हारे घर दूसरे मौज उडाते है और तुम धक्का खाते फिर रहे हो । धक्का खाना-एक हानि उठाना । उशून्य इस व्यापार में जितना धक्का खाना होगा, वह तो अव खाना ही पडेगा, उससे जान नही बच सकती । दो ठोकर खाना । उशून्य मेरी जिन्दगी धक्के खाते बीती । धक्का देकर निकालना- वेइज्जती से बाहर करना । उशून्य अगर सभा मे अधिक अड-वड वकोगे तो धक्के देकर निकाले जाओगे । धक्का देना - देशून्य 'धकेल देना' । धडक खुलना के पीछे छिप कर सुनना या देखना । उशून्य कोई द्वार लगा है, जरा धीरे वोलो । तीन रास्ता बद होना । द्वार लगाना - दरवाजा बंद करना । द्विशिर होना - देशून्य 'दो सिर होना' । धक्का पहुँचाना-एक नुकसान पहुँचाना । उशून्य इससे तुम्हारे रोजगार को धक्का पहुँचेगा । दो सदमा पहुँचना । उशून्य इस समाचार से दिल को धक्का पहुँचेगा । धक्का पहुँचाना-एक हानि पहुँचाना । दो सदमा पहुँचाना । धक्का लगना - एक नुकसान होना । उशून्य इस वार उसे सोने मे ऐसा धक्का लगा कि सारी कमायी खतम हो गयी । दो आघात, चोट या ठेस लगना । उशून्य गाडी का इतने ज़ोर से धक्का लगा कि मैं गिर गया । धज्जा उड़ जाना-देशून्य 'धज्जा हो जाना' । धज्जा हो जाना-एक दुबला-पतला हो जाना । उशून्य आपको कौन-सी बीमारी है कि आप धज्जे हो गये । दो टुकडे-टुकडे हो जाना । उशून्य वह कपडा तो धज्जा हो गया । तीन बर्बाद या नष्ट-भ्रष्ट हो जाना । धज्जियाँ उड़ना - एक दुर्दशा होना । उशून्य वह बेचारा जब से यहाँ आया, उसकी धज्जियाँ उड रही है । दो वेइज्जती होना । धज्जियाँ उडाना - एक निंदा करना । वेइज्जत करना । उशून्य सबके सामने किसी की धज्जियाँ उड़ाना ठीक नही । दो टुकडे करना । उशून्य इस कोट की तो तुमने धज्जियाँ उडा दी । उशून्य नष्ट-भ्रष्ट करना बर्बाद करना । उशून्य धज्जियाँ न उडा तो कहना । धज्जियाँ लगना या लग जाना-फटे-पुराने कपडे पहनने की नौबत आना । उशून्य इस ज़माने मे वडो की धज्जियाँ लग गईं । धज्जियाँ लेना- एक दुर्दशा करना । उशून्य उसकी धज्जियाँ मत लो । दो ऐव निकालना । धज्जी हो जाना- एक टुकडे-टुकडे हो जाना । दो कमज़ोर हो जाना । धड़क खुलना - हिचक दूर होना ।
|
२ यापनीय सम्प्रदाय श्वेताम्बरोंके समान स्त्रियोंका उसी भवमें मोक्ष होना और केवलियोंका आहार करना मानता था जो दिगम्बर सम्प्रदायक सिद्धान्तोंसे विरुद्ध है। इन दोनों विषयोंपर शाकटायनका बनाया हुआ 'स्त्रीनिर्वारण के वलिमुक्तिप्रकरण' नामका एक छोटा-सा ग्रन्थ उपलब्ध हुआ है और वह प्रकाशित भी हो चुका है। * उसमें स्त्रीमुक्तिपर ५५ और केवलिभुक्तिपर ३४ कारिकायें हैं। इनमें वे सब युक्तियाँ दी गई हैं जो इन बातों को माननेवालों की ओरसे दिगम्बरों के प्रति उपस्थित की जाती हैं। इसका कुछ अंश इस प्रकार है :भास्कर
प्रारम्भ - प्रणिपत्य भुक्तिमुक्तिप्रदममलं धर्ममर्हतो दिशतः । वक्ष्ये स्त्रीनिर्वाणं केवलिभुक्ति च संक्षेपात् ॥१॥ अस्ति स्त्रीनिर्वाणं पुंवद्यदविकलहेतुकं स्त्रीषु । न विरुद्धयते हि रत्नत्रय सन्पन्निवृ तर्हेतु ।।२।। रत्नत्रयं विरुद्ध स्त्रीत्वेन यथामरादिभावन । इति वाङ्मात्रं नात्र प्रमाण माप्तागमोऽन्यद्वा ॥३॥ अन्त - विग्रहगतिमापन्नाद्यागमवचनं सर्वमेतस्मिन ।
मुक्तिं ब्रवीति तस्माद्रष्टव्या केवलिनि भुक्तिः ॥ ३२ ॥ नानाभोगाहारो निरन्तरः सो विशेषतो नाभूत (?) युक्त्या भेदेनाङ्गस्थितिपुष्टिक्षुच्छ मास्तेन ।।३३।। नास्य विशिष्टस्य स्थितिरभविष्यत्तेन सविशिष्टेन । यद्यभविष्यदिहैषां सालीतरभोजनेनेव ।।३४।।
इति स्त्रीनिर्वाण-केवलिभुक्तिप्रकरणं भगवदाचार्यशाकटायनकृदन्तपादानामिति ।
पन्द्रहवीं शताब्दिमें एक विद्वान्ने अपने समय में उपलब्ध जैनग्रन्थौकी एक सूची बड़ी खोजके साथ संस्कृत लिखी थी । उसमें कौन ग्रन्थ, किस भाषा में, किसने, किस समय, किस विषयपर, कितने परिमाणका लिखा है इसका संक्षिप्त विवरण जहाँ तक उपलब्ध हो सका, दिया है। इस सूचीका नाम बृहट्टपरिणका है। उसमें भी इस प्रकरण का विवरण इस प्रकार दिया है - "केवलिभुक्तिस्त्री मुक्ति प्रकरणम् । शब्दानुशासनकृतशाकटायनाचार्यकृतं तत्संग्रहश्लोकाची ९४ ।"
वादिवेताल शान्तिसूरिने उत्तराध्ययन टीकाके २६ वें अध्याय, रत्नप्रभने रत्नाकरावतारिकामें और यशोविजय उपाध्यायने अध्यात्ममतपरीक्षा तथा शास्त्रवार्ता समुच्चयमें इस प्रकरण की अनेक • देखो 'जैनसाहित्यसंशोधक + यह संख्या अनुष्टुप् श्लोकों के
कारिकायें उद्धृत की हैं। इसी तरह आचार्य प्रभाचन्द्र ने अपने प्रमेयकमलमार्तण्ड और न्यायकुमुदचन्द्र में स्त्रो मुक्ति और केबलि-भुक्तिका पूर्वपक्ष इसी प्रकरणसं लिया है और इसकी एक-एक दलोलका खण्डन किया है।
३ शाकटायनकी अमोघवृत्तिमें, छेदसूत्र, नियुक्ति, कालिक सूत्र आदि प्रन्थोंका जिस तरह उल्लेख किया है उससे ऐसा मालूम होता है कि उनके सम्प्रदायमें इन ग्रन्थोंके पठनपाठनका प्रचार था और ये ग्रन्थ दिगम्बर सम्प्रदायके नहीं हैं जब कि यापनोयसंघ इन ग्रन्थोंको मानता था।
४ अमोघवृत्तिमें 'उपसर्वगुप्तं व्याख्यातार : ' कहकर शाकटायनने सर्वगुप्त आचार्यको सबसे बड़ा व्याख्याता बतलाया है और ये सर्वगुप्त वही जान पड़ते हैं जिनके चरणोंके समीप बैठकर आराधना कर्त्ता शिवार्यने सूत्र और अर्थको अच्छी तरह समझा था। और चूँकि शिवार्य भी बहुत करके यापनीय सम्प्रदायके थे अतएव उनके गुरुको श्रेष्ठ व्याख्याता बतलानेवाले शाकटायन भी यापनीय होंगे ।
५ शाकटायनको 'श्रुतकेलिदेशीयाचार्य' लिखा है और चिन्तामणि - टीकाके कर्त्ता यज्ञवर्माने तो उन्हें 'सकलज्ञ नसाम्राज्यपदमाप्तवान्' माना है । परन्तु दिगम्बर-सम्प्रदायक अनुसार वीर- निर्वाण ६८३ वर्षके लगभग ही श्रुतकेलियों या एकदेशश्रुतकेवलियोंका विच्छेद हो गया था। अतएव उनका श्रुतकेवलिदेशीय होना यापनीयसंघकी मान्यताके अनुसार ही ठीक बैठ सकता है ।
शाकटायन की रचनायें शाकटायनकी इस समय तीन ही रचनायें उपलब्ध हैं, शब्दानुशासनका मूल सूत्रपाठ, उसकी अमोघवृत्ति और ऊपर जिसका जिक्र आ चुका है, वह 'स्त्रीमुक्तिकेवलिभुक्तिप्रकरण' । इनके सिवाय संस्कृत के सुप्रसिद्ध आचार्य राजशेखरने अपनी काव्य मीमांसा में पाल्यकीर्तिके मतका उल्लेख करते हुए लिखा है - "यथा तथा वास्तु वस्तुनो रूपं वक्तृप्रकृतिविशेषायत्तातु रसवत्ता । तथा च यमर्थ रक्तः स्तौति तं विरक्तो विनिन्दति मध्यस्थस्तु तत्रोदास्ते, इति पाल्यकीर्तिः ।" इससे मालूम होता है कि पाल्यकीर्ति या शाकटायनका कोई साहित्य विषयक ग्रन्थ भी था जो अभी तक कहीं मिला नहीं है। क्या आश्चर्य जो उनके और भी ग्रन्थ हों, जिन्हें हम नहीं जानते। 'स्त्रीमुक्ति केवलिमुक्ति प्रकरणसे मालूम होता है कि वे बड़े भारी तार्किक और सिद्धान्तज्ञ भी थे ।
* देखो पृ० ४४ में ' यापनीय साहित्यको खोज' शीर्षक लेख की टिप्पणियाँ
शब्दानुशासन की टीकायें
शाकटायनके शब्दानुशासनपर अब तक नीचे लिखी सात टीकार्ये प्राप्त हुई है
१ अमोघवृत्ति - स्वयं सूत्रकार की ही लिखी हुई है और यही उसकी सबसे बड़ी टीका है। राष्ट्रकूटनरेश अमोघवर्षको लक्ष्य करके उसका यह नामकरण किया गया था। क्योंकि मोघवर्षके समय में हो शाकटायन हुए है जैसा कि आगे चलकर बतलाया जायगा ।
२ शाकटायन-न्यास - यह मोघवृत्तिपर प्रभाचन्द्राचार्यकृत न्यास है। * इस ग्रन्थके सिर्फ दो अध्याय उपलब्ध हैं। परन्तु उनसे टीकाकारके सम्बन्धमें कुछ विशेष प्रकाश नहीं पड़ता। पं० महेन्द्रकुमार न्यायाचार्यकं खयालमें ये प्रभाचन्द्र न्यायकुमुदचन्द्र आदिके कर्त्तासे भिन्न कोई दूसरे ही प्रभाचन्द्र हैं। संमत्र है कि वे यापनीय संघके ही हों ।
३ चिन्तामणि टोका ( लघीयसी वृत्ति ) - यह अमोघवृत्तिको ही संक्षिप्त करके रची गई है। इसके कर्त्ताका नाम यक्षत्रर्मा है। इनके विषय में और कुछ मालूम नहीं हैं। ये कोई गृहस्थ विद्वान् थे ।
४ मणिप्रकाशिका - 'मणि' अर्थात् 'चिन्तामणि' को प्रकाशित करनेवाली टीका । इसके कर्ता अजितसनाचार्य हैं 1
५ प्रक्रिया संग्रह - यह पाणिनि की सिद्धान्तकौमुदीके ढंगकी प्रक्रिया - टीका है। इसके कर्ता अभयचन्द्राचार्य हैं ।
६ शाकटायन टीका-भावमेन त्रेविद्यदेवकृत कातन्त्रको रूपमाला टीकाके कर्त्ता भी यही मालूम होते हैं। ये 'वादिपर्वतवत्र' कहलाते थे। इनका बनाया हुआ एक 'विश्वतत्त्वप्रकाश ' नामका ग्रन्थ भी उपलब्ध }
७ रूपसिद्धि - यह लघुकौमुदाके समान छोटी टीका है। इसके कर्त्ता दयापाल मुनि 1↑ ये द्रविड़संघर्क थे । इनके गुरुका नाम मतिसागर था । ये पार्श्वनाथ-वरित और न्याय-विनिश्चय आदिके कर्त्ता वादिराजमूरिक सधर्मा थे। पार्श्वनाथचरितकी रचना श० सं० ९४७ ( वि० सं० १०५२ ) में हुई थी, अतएव इनका भी यही समय समझना चाहिए । यह टीका प्रकाशित हो चुकी है ।
* शब्दानां शासनाख्वस्य शास्त्रस्यान्वर्धनामतः । प्रसिद्धस्य महामोघवृत्तेरपि विशेषतः ।
सूत्राणां च विवृतिर्विख्याते (?) च यथामतिः । ग्रन्थस्यास्य च न्यासेति (?) क्रियते नाम नामतः ॥
+ हितैषिणां यस्य नृणामुदात्तवाचा निबन्छा हित रूपसिद्धिः । वन्द्यो दयापालमुनिः स वाचा सिद्धस्सताम्मूर्द्धनि यः प्रभावैः ॥१५॥
- श्रवणबेलगोलका ५४ वाँ शिलालेख
किरम १ ]
अमोघवृत्ति खोपज्ञ है
अमोघवृत्ति स्वयं शाकटायन या पाल्यकोर्तिकी है, इसे स्व० डा० के० बी० पाठकने बहुत अच्छी तरह प्रतिपादित किया है। वे कहते हैंश्रीवीरममृतं ज्योतिर्नत्वादि सर्ववेधसां शब्दानुशासनस्येयममोघावृत्तिरुच्यते । अविघ्नेनेष्टप्रसिद्धयर्थं मंगलमारभ्यतेनमः श्रीवर्द्ध मानाय प्रबुद्धाशेषवस्तवे । येन शब्दार्थसम्बन्धाः सार्वेण सुनिरूपिताः ॥
शब्दो वाचकः अर्थो वाच्यः तयोः सम्बन्धी योग्यता अथवा शब्दो आगमः अर्थः प्रयोजनं । अभ्युदयो निःश्रेयसं च । तयोः सम्बन्ध उपायोपेयभावः । ते येन सर्वसत्त्वहितेन सता तत्त्वत प्रज्ञापिताः तस्मै परमार्हत्यमहिम्ना विराजमानाय भगवते वर्द्ध मानाय षडपि द्रव्याणि अनन्तपर्यायरूपाणि साकल्येन साक्षात्कुर्वते नमः कुर्वे इत्युपस्कारः । एवं कृतमंगलरक्षाविधानः, परिपूर्णमल्पग्रंथं लघूपायं शब्दानुशासनशास्त्रमिदं महाश्रमणसंधाधिपतिर्भगवान!चार्यः शाकटायनः प्रारभते । शब्दार्थज्ञानपूर्वकं च सन्मार्गानुष्ठानं । अइड ऋलृक् । । एप्रोड़ । हल् ॥ १३॥ इति वर्णसमानायः क्रमानुवन्धोपादानः प्रत्याहारयन् शास्त्रस्य लाघवार्थः । सामान्याश्रयणाहीर्घप्लुतानुनासिकानां ग्रहणं ।
श्रियं क्रियाद्वः सर्वज्ञानज्योतिरनीश्वरीं । विश्वं प्रकाशयचिन्तामरिणश्चिन्तार्थसाधनः ॥ १ ॥ नमस्तमः प्रभावाभिभूतभूयोतहेतवे । लोकोपकारिणे शब्दब्रह्मणे द्वादशात्मने ॥ २ ॥ स्वस्ति श्रीसकलज्ञानसाम्राज्यपदमाप्तवान् । महाश्रमरणसंघाधिपतिर्यः शाकटायनः ॥ ३ ॥ एकः शब्दाम्बुधिं बुद्धिमन्दरेण प्रमध्ययः । सयशः श्रीः समुधं विश्वं व्याकरणामृतम् ॥ ४॥ स्त्रल्पप्रन्थं सुखोपायं सम्पूर्ण यदुपक्रमं । शब्दानुशासनं सार्वमर्हच्छात्परम् ॥ ५ ॥ इष्टिर्नेष्टा न वक्तव्यं वक्तव्यं सूत्रतः पृथक् । संख्यातं नोपसंख्यानं यस्य शब्दानुशासने ॥ ६॥ तस्यातिमहतीं वृत्तिं संहृत्येयं लघीयसी । सम्पूर्णलक्षणा वृत्तिर्वक्ष्यते यक्षवर्मणा ।। ७ ।। मन्थविस्तर मीरूणां सुकुमारधियामयं । शुश्रूषादिगुणाकर्तु शास्त्रे संहरणोद्यमः ॥ ८ ॥
शब्दानुशासनस्यान्वर्थायाश्चिन्तामणेरिदं । वृत्तेप्रेन्थप्रमाणं (हि.) षट्सहस्रं निरूपितं ॥ ९॥ इन्द्र चन्द्रादिभिः शाब्दैर्यदुक्तं शब्दलक्षणं । तदिहारित समस्तं च यन्नेहास्ति न तत्कचित् ॥ १० ॥ गरणधातुपाठयोगेण धातून लिंगानुशासने लिङ्गगतं । औरणादाद शेषं निःशेषमत्र वृत्तौ विद्यात् ॥ ११ ॥ बालाबलाजनोप्यस्या वृत्तेरभ्यासवृत्तित ।
समस्तं वाड्मयं वेत्ति वर्षेौकन निश्चयात् ॥ १२ ॥
तत्र सूत्रस्य दावयं मङ्गलश्लोकः । नमः श्रीवर्द्ध मानायेत्यादि । शब्दार्थसम्बन्धार्था वाचकवाच्य योग्यता अथवा आगमप्रयोजनोपायोपयभावाः ते येन सर्वमत्त्वहितंन तत्त्वतः प्रज्ञापिताः तरमै श्रीमते महावीराय साक्षात्कृत्सकलद्रव्याय नमः करोमीत्यध्याहारः । विन्नप्रशमनार्थमर्हहे वतानमस्कारं परममङ्गलमारभ्य भगवानाचार्यः शाकटायनः शब्दानुशासनं शास्त्रमिदं प्रारभते । धर्मार्थकाममोक्षेषु तत्त्वार्थावगतिर्थतः । शब्दार्थज्ञानपूर्वेति वेद्य' व्याकरणं बुधैः ।। अ इ उ । ऋक् । ए ओ ङ् । हल् इति वर्णसमाम्नायः क्रमानुबाधोपादानः प्रत्याहारयन् शास्त्रस्य लाघवार्थः । सामान्यग्रहरणाहीर्घ लूनानुनासिकानां ग्रहणम् ।
- चिन्तामरिण टीका चिन्तामरिएके कर्त्ता यक्षवर्माने उपरिलिखित सातवें श्लोक में कहा है कि "यह उसकी छोटी वृत्ति है जिसे मैंने उसकी ( शाकटायनकी) बहुत बड़ी वृत्तिसं संक्षिप्त करके बनाया है ।" वे यह नहीं कहते कि यह मेरी स्वतन्त्र रचना है। अब यह देखना चाहिये कि वह अति महती या बहुत बड़ी वृत्ति कौन-सी है जिसको संक्षिप्त करके यह लिखी गई है। विचार करके देखा जाय तो मालूम होगा कि वह वृत्ति और कोई नहीं, अमोघवृत्ति ही है। क्योंकि एक तो उपलब्ध वृत्तियों में वही सबसे बड़ी है। दूसरे ऊपर लिखी हुई दोनों प्रशस्तियोंके कुछ भाग समान है, जो यह बतलाते हैं कि एक वृत्ति दूसरीको देखकर या उसीको संक्षेप करके बनाई गई है। 'इति वर्णसमाम्नायः' आदि पाठ दोनोंके मिलते-जुलते हुए हैं। अन्तर केल यह है कि जहाँ अमोघवृत्तिमें 'सामान्याश्रयणात्' लिखा गया है वहाँ चिन्तामरिण में 'सामान्यप्रहरणात् ' है। तीसरे यक्षवर्माने जिस मंगलश्लोककी 'नमः श्रीवर्द्धमानायेत्यादि ' प्रतीक दी है वह अमोघवृत्तिमें ही मिलती है । मूलका या अन्य किसी वृत्तिका यह श्लोक नहीं है। इस इलोकके उत्तरार्द्ध की व्याख्या भी अमोघवृत्तिसे थोड़ा बहुत इधर-उधर करके नकल कर दी गई है। इन सब बातोंसे यह निश्चय हो जाता है कि चिन्तामणि-टीका अमोघवृत्ति पीछे बनी है और वह अमोघवृत्तिका ही संक्षेप है ।
|
दो यापनीय सम्प्रदाय श्वेताम्बरोंके समान स्त्रियोंका उसी भवमें मोक्ष होना और केवलियोंका आहार करना मानता था जो दिगम्बर सम्प्रदायक सिद्धान्तोंसे विरुद्ध है। इन दोनों विषयोंपर शाकटायनका बनाया हुआ 'स्त्रीनिर्वारण के वलिमुक्तिप्रकरण' नामका एक छोटा-सा ग्रन्थ उपलब्ध हुआ है और वह प्रकाशित भी हो चुका है। * उसमें स्त्रीमुक्तिपर पचपन और केवलिभुक्तिपर चौंतीस कारिकायें हैं। इनमें वे सब युक्तियाँ दी गई हैं जो इन बातों को माननेवालों की ओरसे दिगम्बरों के प्रति उपस्थित की जाती हैं। इसका कुछ अंश इस प्रकार है :भास्कर प्रारम्भ - प्रणिपत्य भुक्तिमुक्तिप्रदममलं धर्ममर्हतो दिशतः । वक्ष्ये स्त्रीनिर्वाणं केवलिभुक्ति च संक्षेपात् ॥एक॥ अस्ति स्त्रीनिर्वाणं पुंवद्यदविकलहेतुकं स्त्रीषु । न विरुद्धयते हि रत्नत्रय सन्पन्निवृ तर्हेतु ।।दो।। रत्नत्रयं विरुद्ध स्त्रीत्वेन यथामरादिभावन । इति वाङ्मात्रं नात्र प्रमाण माप्तागमोऽन्यद्वा ॥तीन॥ अन्त - विग्रहगतिमापन्नाद्यागमवचनं सर्वमेतस्मिन । मुक्तिं ब्रवीति तस्माद्रष्टव्या केवलिनि भुक्तिः ॥ बत्तीस ॥ नानाभोगाहारो निरन्तरः सो विशेषतो नाभूत युक्त्या भेदेनाङ्गस्थितिपुष्टिक्षुच्छ मास्तेन ।।तैंतीस।। नास्य विशिष्टस्य स्थितिरभविष्यत्तेन सविशिष्टेन । यद्यभविष्यदिहैषां सालीतरभोजनेनेव ।।चौंतीस।। इति स्त्रीनिर्वाण-केवलिभुक्तिप्रकरणं भगवदाचार्यशाकटायनकृदन्तपादानामिति । पन्द्रहवीं शताब्दिमें एक विद्वान्ने अपने समय में उपलब्ध जैनग्रन्थौकी एक सूची बड़ी खोजके साथ संस्कृत लिखी थी । उसमें कौन ग्रन्थ, किस भाषा में, किसने, किस समय, किस विषयपर, कितने परिमाणका लिखा है इसका संक्षिप्त विवरण जहाँ तक उपलब्ध हो सका, दिया है। इस सूचीका नाम बृहट्टपरिणका है। उसमें भी इस प्रकरण का विवरण इस प्रकार दिया है - "केवलिभुक्तिस्त्री मुक्ति प्रकरणम् । शब्दानुशासनकृतशाकटायनाचार्यकृतं तत्संग्रहश्लोकाची चौरानवे ।" वादिवेताल शान्तिसूरिने उत्तराध्ययन टीकाके छब्बीस वें अध्याय, रत्नप्रभने रत्नाकरावतारिकामें और यशोविजय उपाध्यायने अध्यात्ममतपरीक्षा तथा शास्त्रवार्ता समुच्चयमें इस प्रकरण की अनेक • देखो 'जैनसाहित्यसंशोधक + यह संख्या अनुष्टुप् श्लोकों के कारिकायें उद्धृत की हैं। इसी तरह आचार्य प्रभाचन्द्र ने अपने प्रमेयकमलमार्तण्ड और न्यायकुमुदचन्द्र में स्त्रो मुक्ति और केबलि-भुक्तिका पूर्वपक्ष इसी प्रकरणसं लिया है और इसकी एक-एक दलोलका खण्डन किया है। तीन शाकटायनकी अमोघवृत्तिमें, छेदसूत्र, नियुक्ति, कालिक सूत्र आदि प्रन्थोंका जिस तरह उल्लेख किया है उससे ऐसा मालूम होता है कि उनके सम्प्रदायमें इन ग्रन्थोंके पठनपाठनका प्रचार था और ये ग्रन्थ दिगम्बर सम्प्रदायके नहीं हैं जब कि यापनोयसंघ इन ग्रन्थोंको मानता था। चार अमोघवृत्तिमें 'उपसर्वगुप्तं व्याख्यातार : ' कहकर शाकटायनने सर्वगुप्त आचार्यको सबसे बड़ा व्याख्याता बतलाया है और ये सर्वगुप्त वही जान पड़ते हैं जिनके चरणोंके समीप बैठकर आराधना कर्त्ता शिवार्यने सूत्र और अर्थको अच्छी तरह समझा था। और चूँकि शिवार्य भी बहुत करके यापनीय सम्प्रदायके थे अतएव उनके गुरुको श्रेष्ठ व्याख्याता बतलानेवाले शाकटायन भी यापनीय होंगे । पाँच शाकटायनको 'श्रुतकेलिदेशीयाचार्य' लिखा है और चिन्तामणि - टीकाके कर्त्ता यज्ञवर्माने तो उन्हें 'सकलज्ञ नसाम्राज्यपदमाप्तवान्' माना है । परन्तु दिगम्बर-सम्प्रदायक अनुसार वीर- निर्वाण छः सौ तिरासी वर्षके लगभग ही श्रुतकेलियों या एकदेशश्रुतकेवलियोंका विच्छेद हो गया था। अतएव उनका श्रुतकेवलिदेशीय होना यापनीयसंघकी मान्यताके अनुसार ही ठीक बैठ सकता है । शाकटायन की रचनायें शाकटायनकी इस समय तीन ही रचनायें उपलब्ध हैं, शब्दानुशासनका मूल सूत्रपाठ, उसकी अमोघवृत्ति और ऊपर जिसका जिक्र आ चुका है, वह 'स्त्रीमुक्तिकेवलिभुक्तिप्रकरण' । इनके सिवाय संस्कृत के सुप्रसिद्ध आचार्य राजशेखरने अपनी काव्य मीमांसा में पाल्यकीर्तिके मतका उल्लेख करते हुए लिखा है - "यथा तथा वास्तु वस्तुनो रूपं वक्तृप्रकृतिविशेषायत्तातु रसवत्ता । तथा च यमर्थ रक्तः स्तौति तं विरक्तो विनिन्दति मध्यस्थस्तु तत्रोदास्ते, इति पाल्यकीर्तिः ।" इससे मालूम होता है कि पाल्यकीर्ति या शाकटायनका कोई साहित्य विषयक ग्रन्थ भी था जो अभी तक कहीं मिला नहीं है। क्या आश्चर्य जो उनके और भी ग्रन्थ हों, जिन्हें हम नहीं जानते। 'स्त्रीमुक्ति केवलिमुक्ति प्रकरणसे मालूम होता है कि वे बड़े भारी तार्किक और सिद्धान्तज्ञ भी थे । * देखो पृशून्य चौंतालीस में ' यापनीय साहित्यको खोज' शीर्षक लेख की टिप्पणियाँ शब्दानुशासन की टीकायें शाकटायनके शब्दानुशासनपर अब तक नीचे लिखी सात टीकार्ये प्राप्त हुई है एक अमोघवृत्ति - स्वयं सूत्रकार की ही लिखी हुई है और यही उसकी सबसे बड़ी टीका है। राष्ट्रकूटनरेश अमोघवर्षको लक्ष्य करके उसका यह नामकरण किया गया था। क्योंकि मोघवर्षके समय में हो शाकटायन हुए है जैसा कि आगे चलकर बतलाया जायगा । दो शाकटायन-न्यास - यह मोघवृत्तिपर प्रभाचन्द्राचार्यकृत न्यास है। * इस ग्रन्थके सिर्फ दो अध्याय उपलब्ध हैं। परन्तु उनसे टीकाकारके सम्बन्धमें कुछ विशेष प्रकाश नहीं पड़ता। पंशून्य महेन्द्रकुमार न्यायाचार्यकं खयालमें ये प्रभाचन्द्र न्यायकुमुदचन्द्र आदिके कर्त्तासे भिन्न कोई दूसरे ही प्रभाचन्द्र हैं। संमत्र है कि वे यापनीय संघके ही हों । तीन चिन्तामणि टोका - यह अमोघवृत्तिको ही संक्षिप्त करके रची गई है। इसके कर्त्ताका नाम यक्षत्रर्मा है। इनके विषय में और कुछ मालूम नहीं हैं। ये कोई गृहस्थ विद्वान् थे । चार मणिप्रकाशिका - 'मणि' अर्थात् 'चिन्तामणि' को प्रकाशित करनेवाली टीका । इसके कर्ता अजितसनाचार्य हैं एक पाँच प्रक्रिया संग्रह - यह पाणिनि की सिद्धान्तकौमुदीके ढंगकी प्रक्रिया - टीका है। इसके कर्ता अभयचन्द्राचार्य हैं । छः शाकटायन टीका-भावमेन त्रेविद्यदेवकृत कातन्त्रको रूपमाला टीकाके कर्त्ता भी यही मालूम होते हैं। ये 'वादिपर्वतवत्र' कहलाते थे। इनका बनाया हुआ एक 'विश्वतत्त्वप्रकाश ' नामका ग्रन्थ भी उपलब्ध } सात रूपसिद्धि - यह लघुकौमुदाके समान छोटी टीका है। इसके कर्त्ता दयापाल मुनि एक↑ ये द्रविड़संघर्क थे । इनके गुरुका नाम मतिसागर था । ये पार्श्वनाथ-वरित और न्याय-विनिश्चय आदिके कर्त्ता वादिराजमूरिक सधर्मा थे। पार्श्वनाथचरितकी रचना शशून्य संशून्य नौ सौ सैंतालीस में हुई थी, अतएव इनका भी यही समय समझना चाहिए । यह टीका प्रकाशित हो चुकी है । * शब्दानां शासनाख्वस्य शास्त्रस्यान्वर्धनामतः । प्रसिद्धस्य महामोघवृत्तेरपि विशेषतः । सूत्राणां च विवृतिर्विख्याते च यथामतिः । ग्रन्थस्यास्य च न्यासेति क्रियते नाम नामतः ॥ + हितैषिणां यस्य नृणामुदात्तवाचा निबन्छा हित रूपसिद्धिः । वन्द्यो दयापालमुनिः स वाचा सिद्धस्सताम्मूर्द्धनि यः प्रभावैः ॥पंद्रह॥ - श्रवणबेलगोलका चौवन वाँ शिलालेख किरम एक ] अमोघवृत्ति खोपज्ञ है अमोघवृत्ति स्वयं शाकटायन या पाल्यकोर्तिकी है, इसे स्वशून्य डाशून्य केशून्य बीशून्य पाठकने बहुत अच्छी तरह प्रतिपादित किया है। वे कहते हैंश्रीवीरममृतं ज्योतिर्नत्वादि सर्ववेधसां शब्दानुशासनस्येयममोघावृत्तिरुच्यते । अविघ्नेनेष्टप्रसिद्धयर्थं मंगलमारभ्यतेनमः श्रीवर्द्ध मानाय प्रबुद्धाशेषवस्तवे । येन शब्दार्थसम्बन्धाः सार्वेण सुनिरूपिताः ॥ शब्दो वाचकः अर्थो वाच्यः तयोः सम्बन्धी योग्यता अथवा शब्दो आगमः अर्थः प्रयोजनं । अभ्युदयो निःश्रेयसं च । तयोः सम्बन्ध उपायोपेयभावः । ते येन सर्वसत्त्वहितेन सता तत्त्वत प्रज्ञापिताः तस्मै परमार्हत्यमहिम्ना विराजमानाय भगवते वर्द्ध मानाय षडपि द्रव्याणि अनन्तपर्यायरूपाणि साकल्येन साक्षात्कुर्वते नमः कुर्वे इत्युपस्कारः । एवं कृतमंगलरक्षाविधानः, परिपूर्णमल्पग्रंथं लघूपायं शब्दानुशासनशास्त्रमिदं महाश्रमणसंधाधिपतिर्भगवान!चार्यः शाकटायनः प्रारभते । शब्दार्थज्ञानपूर्वकं च सन्मार्गानुष्ठानं । अइड ऋलृक् । । एप्रोड़ । हल् ॥ तेरह॥ इति वर्णसमानायः क्रमानुवन्धोपादानः प्रत्याहारयन् शास्त्रस्य लाघवार्थः । सामान्याश्रयणाहीर्घप्लुतानुनासिकानां ग्रहणं । श्रियं क्रियाद्वः सर्वज्ञानज्योतिरनीश्वरीं । विश्वं प्रकाशयचिन्तामरिणश्चिन्तार्थसाधनः ॥ एक ॥ नमस्तमः प्रभावाभिभूतभूयोतहेतवे । लोकोपकारिणे शब्दब्रह्मणे द्वादशात्मने ॥ दो ॥ स्वस्ति श्रीसकलज्ञानसाम्राज्यपदमाप्तवान् । महाश्रमरणसंघाधिपतिर्यः शाकटायनः ॥ तीन ॥ एकः शब्दाम्बुधिं बुद्धिमन्दरेण प्रमध्ययः । सयशः श्रीः समुधं विश्वं व्याकरणामृतम् ॥ चार॥ स्त्रल्पप्रन्थं सुखोपायं सम्पूर्ण यदुपक्रमं । शब्दानुशासनं सार्वमर्हच्छात्परम् ॥ पाँच ॥ इष्टिर्नेष्टा न वक्तव्यं वक्तव्यं सूत्रतः पृथक् । संख्यातं नोपसंख्यानं यस्य शब्दानुशासने ॥ छः॥ तस्यातिमहतीं वृत्तिं संहृत्येयं लघीयसी । सम्पूर्णलक्षणा वृत्तिर्वक्ष्यते यक्षवर्मणा ।। सात ।। मन्थविस्तर मीरूणां सुकुमारधियामयं । शुश्रूषादिगुणाकर्तु शास्त्रे संहरणोद्यमः ॥ आठ ॥ शब्दानुशासनस्यान्वर्थायाश्चिन्तामणेरिदं । वृत्तेप्रेन्थप्रमाणं षट्सहस्रं निरूपितं ॥ नौ॥ इन्द्र चन्द्रादिभिः शाब्दैर्यदुक्तं शब्दलक्षणं । तदिहारित समस्तं च यन्नेहास्ति न तत्कचित् ॥ दस ॥ गरणधातुपाठयोगेण धातून लिंगानुशासने लिङ्गगतं । औरणादाद शेषं निःशेषमत्र वृत्तौ विद्यात् ॥ ग्यारह ॥ बालाबलाजनोप्यस्या वृत्तेरभ्यासवृत्तित । समस्तं वाड्मयं वेत्ति वर्षेौकन निश्चयात् ॥ बारह ॥ तत्र सूत्रस्य दावयं मङ्गलश्लोकः । नमः श्रीवर्द्ध मानायेत्यादि । शब्दार्थसम्बन्धार्था वाचकवाच्य योग्यता अथवा आगमप्रयोजनोपायोपयभावाः ते येन सर्वमत्त्वहितंन तत्त्वतः प्रज्ञापिताः तरमै श्रीमते महावीराय साक्षात्कृत्सकलद्रव्याय नमः करोमीत्यध्याहारः । विन्नप्रशमनार्थमर्हहे वतानमस्कारं परममङ्गलमारभ्य भगवानाचार्यः शाकटायनः शब्दानुशासनं शास्त्रमिदं प्रारभते । धर्मार्थकाममोक्षेषु तत्त्वार्थावगतिर्थतः । शब्दार्थज्ञानपूर्वेति वेद्य' व्याकरणं बुधैः ।। अ इ उ । ऋक् । ए ओ ङ् । हल् इति वर्णसमाम्नायः क्रमानुबाधोपादानः प्रत्याहारयन् शास्त्रस्य लाघवार्थः । सामान्यग्रहरणाहीर्घ लूनानुनासिकानां ग्रहणम् । - चिन्तामरिण टीका चिन्तामरिएके कर्त्ता यक्षवर्माने उपरिलिखित सातवें श्लोक में कहा है कि "यह उसकी छोटी वृत्ति है जिसे मैंने उसकी बहुत बड़ी वृत्तिसं संक्षिप्त करके बनाया है ।" वे यह नहीं कहते कि यह मेरी स्वतन्त्र रचना है। अब यह देखना चाहिये कि वह अति महती या बहुत बड़ी वृत्ति कौन-सी है जिसको संक्षिप्त करके यह लिखी गई है। विचार करके देखा जाय तो मालूम होगा कि वह वृत्ति और कोई नहीं, अमोघवृत्ति ही है। क्योंकि एक तो उपलब्ध वृत्तियों में वही सबसे बड़ी है। दूसरे ऊपर लिखी हुई दोनों प्रशस्तियोंके कुछ भाग समान है, जो यह बतलाते हैं कि एक वृत्ति दूसरीको देखकर या उसीको संक्षेप करके बनाई गई है। 'इति वर्णसमाम्नायः' आदि पाठ दोनोंके मिलते-जुलते हुए हैं। अन्तर केल यह है कि जहाँ अमोघवृत्तिमें 'सामान्याश्रयणात्' लिखा गया है वहाँ चिन्तामरिण में 'सामान्यप्रहरणात् ' है। तीसरे यक्षवर्माने जिस मंगलश्लोककी 'नमः श्रीवर्द्धमानायेत्यादि ' प्रतीक दी है वह अमोघवृत्तिमें ही मिलती है । मूलका या अन्य किसी वृत्तिका यह श्लोक नहीं है। इस इलोकके उत्तरार्द्ध की व्याख्या भी अमोघवृत्तिसे थोड़ा बहुत इधर-उधर करके नकल कर दी गई है। इन सब बातोंसे यह निश्चय हो जाता है कि चिन्तामणि-टीका अमोघवृत्ति पीछे बनी है और वह अमोघवृत्तिका ही संक्षेप है ।
|
31 जुलाई 2022 को दुनिया के मोस्ट वॉन्टेड टेररिस्ट अल जवाहिरी को काबुल में मार गिराया गया। हैरानी की बात यह रही कि जवाहिरी पर इस हमले की भनक न अफगानिस्तान को लगी और न ही उसकी सीमा से लगते किसी देश को। इस सीक्रेट हमले को अंजाम दिया अमेरिका के हंटर किलर, यानी MQ-9B रीपर ड्रोन ने।
अब भारत भी इस ड्रोन को खरीदने की तैयारी कर रहा है। इसे तैयार करने वाली कंपनी जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉर्पोरेशन के मुख्य कार्यकारी डॉक्टर विवेक लाल ने कहा है कि खरीदारी को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है।
भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे कि MQ-9B ड्रोन में ऐसी क्या खासियत है कि ये भारत की पहली पसंद बन गया?
ऊपर के दो ग्राफिक्स में आपने MQ-9B रीपर ड्रोन की खासियत पढ़ी। अब आगे जानते हैं कि ये खासियत भारत के कितनी काम आ सकती हैं।
भारत थल, जल और वायु तीनों सेना के बेड़े में MQ-9B ड्रोन को तैनात करना चाहता है। इसके लिए करीब 23. 96 हजार करोड़, यानी 3 बिलियन डॉलर की लागत से ड्रोन को खरीदने की बातचीत हो रही है। भारत फिलहाल 30 MQ-9B ड्रोन खरीदना चाहता है।
इस ड्रोन को बनाने वाली कंपनी जनरल एटॉमिक्स, इसके मल्टीटैलेंटेड होने का दावा करती है। कंपनी का कहना है कि जासूसी, सर्विलांस, इन्फॉर्मेशन कलेक्शन के अलावा एयर सपोर्ट बंद करने, राहत-बचाव अभियान और हमला करने के लिए इसका इस्तेमाल हो सकता है।
पहलाः LAC से लगे एरिया में चीन को भनक हुए बिना उसकी निगरानी करने के लिए।
अब जानते हैं कि अमेरिकी MQ-9B रीपर ड्रोन के मुकाबले चीन के पास क्या है?
अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक एयरोनॉटिकल के मुताबिक 2001 में MQ-9A ड्रोन ने पहली बार उड़ान भरी थी। इस ड्रोन का अपडेटेड वर्जन ही MQ-9B है। 2000 के बाद अमेरिकी सेना को चालक रहित एक ऐसे एयरक्राफ्ट की जरूरत हुई, जिसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सके। इसी के फलस्वरूप MQ-9A बना था। यह लगातार 27 घंटे तक उड़ान भर सकता था।
इसके बाद इसी ड्रोन का अपडेटेड वर्जन MQ-9B SkyGuardian और MQ-9B SeaGuardian बना। मई 2021 तक अमेरिका के पास 300 से ज्यादा ऐसे ड्रोन थे।
फ्रांस, बेल्जियम, डोमिनिकन गणराज्य, भारत, जर्मनी, ग्रीस, इटली, नीदरलैंड, स्पेन, यूके, यूएई, ताइवान, जपान, मोरक्को जैसे दुनिया के 13 से ज्यादा देश इसका इस्तेमाल करते हैं।
अमेरिका ने 'वॉर ऑन टेरर' के दौरान प्रिडेटर और रीपर ड्रोन अफगानिस्तान के साथ ही पाकिस्तान के उत्तरी कबाइली इलाकों में भी तैनात किए थे। अमेरिका के ही ड्रोन इराक, सोमालिया, यमन, लीबिया और सीरिया में भी तैनात हैं। रीपर ड्रोन ही था, जिससे US ने अलकायदा के ओसामा बिन लादेन की निगरानी की थी। जिसके बाद नेवी सील्स ने 2 मई 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद में लादेन को मार गिराया था।
मिलिट्री इंफॉर्मेशन ग्रुप जेन्स के मुताबिक भारत के पास 90 इजराइली ड्रोन हैं, जिनमें से 75 का ऑपरेशन एयरफोर्स के पास और 10 का इंडियन नेवी के पास है। यही नहीं, भारतीय सेना के पास इस वक्त 180 ड्रोन का बेड़ा है, जबकि 400 से ज्यादा ड्रोन की जरूरत है। इंडियन नेवी बिना हथियारों वाले 2 सी गार्जियन ड्रोन्स का लीज पर इस्तेमाल कर रही है। यह अमेरिकी ड्रोन प्रिडेटर का ही वैरिएंट है।
हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL इस समय कम्बाइंड एयर टीमिंग सिस्टम (CATS) ड्रोन बना रहा है। इस ड्रोन को तेजस और जगुआर जैसे फाइटर प्लेन से भी ऑपरेट करने की तैयारी हो रही है। ये ड्रोन रडार को चकमा देने में सक्षम होगा।
HAL ने दावा किया है कि 2-3 सालों में भारतीय सेना के बेड़े में CATS ड्रोन के 4 वैरिएंट शामिल हो जाएगा। जिनके नाम इस तरह से हैं. .
रूस्तम 2 और घातकः इन घरेलू ड्रोन को भारतीय सेना के बेड़े में शामिल करने के लिए भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं। 2025 से पहले सेना इन ड्रोन का इस्तेमाल करने लगेगी ऐसी संभावना है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
इकतीस जुलाई दो हज़ार बाईस को दुनिया के मोस्ट वॉन्टेड टेररिस्ट अल जवाहिरी को काबुल में मार गिराया गया। हैरानी की बात यह रही कि जवाहिरी पर इस हमले की भनक न अफगानिस्तान को लगी और न ही उसकी सीमा से लगते किसी देश को। इस सीक्रेट हमले को अंजाम दिया अमेरिका के हंटर किलर, यानी MQ-नौB रीपर ड्रोन ने। अब भारत भी इस ड्रोन को खरीदने की तैयारी कर रहा है। इसे तैयार करने वाली कंपनी जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉर्पोरेशन के मुख्य कार्यकारी डॉक्टर विवेक लाल ने कहा है कि खरीदारी को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है। भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे कि MQ-नौB ड्रोन में ऐसी क्या खासियत है कि ये भारत की पहली पसंद बन गया? ऊपर के दो ग्राफिक्स में आपने MQ-नौB रीपर ड्रोन की खासियत पढ़ी। अब आगे जानते हैं कि ये खासियत भारत के कितनी काम आ सकती हैं। भारत थल, जल और वायु तीनों सेना के बेड़े में MQ-नौB ड्रोन को तैनात करना चाहता है। इसके लिए करीब तेईस. छियानवे हजार करोड़, यानी तीन बिलियन डॉलर की लागत से ड्रोन को खरीदने की बातचीत हो रही है। भारत फिलहाल तीस MQ-नौB ड्रोन खरीदना चाहता है। इस ड्रोन को बनाने वाली कंपनी जनरल एटॉमिक्स, इसके मल्टीटैलेंटेड होने का दावा करती है। कंपनी का कहना है कि जासूसी, सर्विलांस, इन्फॉर्मेशन कलेक्शन के अलावा एयर सपोर्ट बंद करने, राहत-बचाव अभियान और हमला करने के लिए इसका इस्तेमाल हो सकता है। पहलाः LAC से लगे एरिया में चीन को भनक हुए बिना उसकी निगरानी करने के लिए। अब जानते हैं कि अमेरिकी MQ-नौB रीपर ड्रोन के मुकाबले चीन के पास क्या है? अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक एयरोनॉटिकल के मुताबिक दो हज़ार एक में MQ-नौ एम्पीयर ड्रोन ने पहली बार उड़ान भरी थी। इस ड्रोन का अपडेटेड वर्जन ही MQ-नौB है। दो हज़ार के बाद अमेरिकी सेना को चालक रहित एक ऐसे एयरक्राफ्ट की जरूरत हुई, जिसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सके। इसी के फलस्वरूप MQ-नौ एम्पीयर बना था। यह लगातार सत्ताईस घंटाटे तक उड़ान भर सकता था। इसके बाद इसी ड्रोन का अपडेटेड वर्जन MQ-नौB SkyGuardian और MQ-नौB SeaGuardian बना। मई दो हज़ार इक्कीस तक अमेरिका के पास तीन सौ से ज्यादा ऐसे ड्रोन थे। फ्रांस, बेल्जियम, डोमिनिकन गणराज्य, भारत, जर्मनी, ग्रीस, इटली, नीदरलैंड, स्पेन, यूके, यूएई, ताइवान, जपान, मोरक्को जैसे दुनिया के तेरह से ज्यादा देश इसका इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका ने 'वॉर ऑन टेरर' के दौरान प्रिडेटर और रीपर ड्रोन अफगानिस्तान के साथ ही पाकिस्तान के उत्तरी कबाइली इलाकों में भी तैनात किए थे। अमेरिका के ही ड्रोन इराक, सोमालिया, यमन, लीबिया और सीरिया में भी तैनात हैं। रीपर ड्रोन ही था, जिससे US ने अलकायदा के ओसामा बिन लादेन की निगरानी की थी। जिसके बाद नेवी सील्स ने दो मई दो हज़ार ग्यारह को पाकिस्तान के एबटाबाद में लादेन को मार गिराया था। मिलिट्री इंफॉर्मेशन ग्रुप जेन्स के मुताबिक भारत के पास नब्बे इजराइली ड्रोन हैं, जिनमें से पचहत्तर का ऑपरेशन एयरफोर्स के पास और दस का इंडियन नेवी के पास है। यही नहीं, भारतीय सेना के पास इस वक्त एक सौ अस्सी ड्रोन का बेड़ा है, जबकि चार सौ से ज्यादा ड्रोन की जरूरत है। इंडियन नेवी बिना हथियारों वाले दो सी गार्जियन ड्रोन्स का लीज पर इस्तेमाल कर रही है। यह अमेरिकी ड्रोन प्रिडेटर का ही वैरिएंट है। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL इस समय कम्बाइंड एयर टीमिंग सिस्टम ड्रोन बना रहा है। इस ड्रोन को तेजस और जगुआर जैसे फाइटर प्लेन से भी ऑपरेट करने की तैयारी हो रही है। ये ड्रोन रडार को चकमा देने में सक्षम होगा। HAL ने दावा किया है कि दो-तीन सालों में भारतीय सेना के बेड़े में CATS ड्रोन के चार वैरिएंट शामिल हो जाएगा। जिनके नाम इस तरह से हैं. . रूस्तम दो और घातकः इन घरेलू ड्रोन को भारतीय सेना के बेड़े में शामिल करने के लिए भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं। दो हज़ार पच्चीस से पहले सेना इन ड्रोन का इस्तेमाल करने लगेगी ऐसी संभावना है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
भगवद्गीता में एक कहानी है। जब भगवान कृष्ण को भोजन परोसा जा रहा था, वे खड़े हुये और बोले, "नही, मुझे जाना है। " गोपियों ने उन्हें समझाने की कोशिस की। "पहले अपना भोजन तो करलो, "उन्होने विनती की। लेकिन वे बोले, "नही। मेरा एक भक्त मुश्किल में है और मुझे पुकार रहा है।
यह कहानी बताती है प्रार्थना की तीव्रता के बारे में। एक प्रार्थना का जन्म तब होता है जब आप पूर्णरुप से निसहाय अनुभव करते हो या पूर्ण रुप से कृतज्ञ हो। तीसरे तरह की प्रार्थना भी होती है जब आप पूर्ण विवेक में हो। तब आपको यह पता चलता है कि चेतना की गुणवत्ता अपनी सभी सीमाओं के परे चली गई है और बहुत ऊपर उठ गई है, उसकी दिशा पूर्णरुप से बदल गयी है जो कि पूर्णता देने वाली है, संपूर्ण ज्ञान से भरपूर है और पूरे विवेक और प्रेम से ओत-प्रोत हैं।
प्रायः लोग कहते हैं, "हृदय से प्रार्थना करो। " इससे काम नही चलने वाला जब आप बैचेनी में हो, इच्छा से भरे हुऐ हो और बिखरे हुये हो। आपको अपने अस्तित्व से प्रार्थना करनी होगी, दूसरे चक्र से। जब पूर्ण कृतज्ञ हो तब आप हृदय से प्रार्थना करो, लेकिन जब आप दयनीयता की स्थिति में हो तब आप हृदय से प्रार्थना नही कर सकते।
एक बार जब आप यह कहते हो, "ठीक है, मैनें सबकुछ छोड़ दिया, "तब आपकी प्रार्थना की तीव्रता पूर्ण हो जाती है। इसी तरह से इच्छा के ज्वर से बाहर निकला जा सकता है। आप अपने अस्तित्व से प्रार्थना करें। ये ही आपको सशक्त बनाती है, क्योंकि दिव्यता कमजोर के लिये बनी है।
इसीलिये उसे 'दीनबंधु' कहते हैं। दीन का अर्थ है कमजोर, दयनीय, शक्तिहीन और निसहाय और बंधु का अर्थ है मित्र। इसीलिये आप प्रार्थना करते हैं, "अब मेरे पास कोई रास्ता नही है और मैं तनाव छोड़ देता हूं। मुझे सहायता की आवश्यकता है। "तभी आपके चारों ओर परिवर्तन होने लगते हैं।
प्रायः लोग पूछते हैं, "हम इतने सारे देवी देवताओं से प्रार्थना क्यों करते हैं? "दिव्यता (परमात्मा) एक ही है, लेकिन अनेक नामों से पुकारा जाता है। बस यही कारण है कि यही परमात्मा को भिन्न-भिन्न नामों, रुप, और रंगों से जगाया जाता है।
ईश्वर सबके हृदय में है, सब जगह है, आपके चारों ओर है और आपमें भी है। वह जानता है कि आपके लिये सबसे उत्तम क्या है और आपको जो सबसे अच्छा लगता है वही आपको देता है। प्रार्थना का अर्थ है दिल की गहराइयों से पुकारना। एक बच्चा रोता है तो कैसे रोता है? बच्चे अपनी मां के लिये पूरे शरीर से रोता है। उसके शरीर का एक एक कण और दिल का एक एक कोना कुछ मांगता है। पुकारना, पूरे दिल से पुकारना ही प्रार्थना है। जब हम अपने हृदय से कुछ करते है तो यही प्रार्थना होती है।
प्रार्थना की उच्च अवस्था ही ध्यान है। प्रार्थना का अर्थ है मांगना, ध्यान का अर्थ है सुनना। प्रार्थना आप कहते हैं, "मुझे ये दो, वो दो। " निर्देष देते हो, मांग करते हो। ध्यान में आप कहते हैं, "मै यहां पर हूं सुनने के लिये, जो कुछ भी आप बताना चाहते हैं मुझे बताएं। "
जब प्रार्थना अपने शिखर की ओर जाती है तब वह ध्यान हो जाता है। मौन प्रार्थना से बेहतर है। प्रायः प्रार्थना किसी भाषा में होती है-जर्मन, हिंदी, स्पेनिश, इंग्लिश। वास्तव में, इन सबका एक ही अर्थ है। लेकिन मौन इससे एक कदम आगे है, यह एक कदम भाषा की सीमा से परे हैं जिसे पूरा ब्रह्मांड समझता है। प्रकृति इसी से ही प्रदर्शित होती है।
प्रार्थना शब्द शक्ति है जो आपको हृदय के मौन की ओर ले जाती है। शब्द का उद्देश्य मौन का सृजन करना है। कर्म का उद्देश्य है गहन विश्राम प्राप्त करना। गहन विश्राम का उद्देश्य है आपको पूर्ण करना। पूर्णता में ही आपको प्रसन्नता, आनंद की प्राप्ति होती है। प्रेम का उद्देश्य आनंद को अपने भीतर जन्म लेने देना है।
मानवीय मूल्यवादी, शांतीदूत और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर, का जन्म 13 मई 1956 को तमिलनाडु के पापानासम में हुआ था। इनके पिता आरएसवी रत्नम ने इनकी आध्यात्मिक रुचि को देखते हुए इन्हें महर्षि महेश योगी के सान्निध्य में भेज दिया।
महर्षि के अनेकों शिष्यों में से रवि उनके सबसे प्रिय थे। 1982 में रवि शंकर दस दिन के मौन में चले गए। कुछ लोगों का मानना है कि इस दौरान वे परम ज्ञाता हो गए और उन्होंने सुदर्शन क्रिया (श्वास लेने की तकनीक) की खोज की।
|
भगवद्गीता में एक कहानी है। जब भगवान कृष्ण को भोजन परोसा जा रहा था, वे खड़े हुये और बोले, "नही, मुझे जाना है। " गोपियों ने उन्हें समझाने की कोशिस की। "पहले अपना भोजन तो करलो, "उन्होने विनती की। लेकिन वे बोले, "नही। मेरा एक भक्त मुश्किल में है और मुझे पुकार रहा है। यह कहानी बताती है प्रार्थना की तीव्रता के बारे में। एक प्रार्थना का जन्म तब होता है जब आप पूर्णरुप से निसहाय अनुभव करते हो या पूर्ण रुप से कृतज्ञ हो। तीसरे तरह की प्रार्थना भी होती है जब आप पूर्ण विवेक में हो। तब आपको यह पता चलता है कि चेतना की गुणवत्ता अपनी सभी सीमाओं के परे चली गई है और बहुत ऊपर उठ गई है, उसकी दिशा पूर्णरुप से बदल गयी है जो कि पूर्णता देने वाली है, संपूर्ण ज्ञान से भरपूर है और पूरे विवेक और प्रेम से ओत-प्रोत हैं। प्रायः लोग कहते हैं, "हृदय से प्रार्थना करो। " इससे काम नही चलने वाला जब आप बैचेनी में हो, इच्छा से भरे हुऐ हो और बिखरे हुये हो। आपको अपने अस्तित्व से प्रार्थना करनी होगी, दूसरे चक्र से। जब पूर्ण कृतज्ञ हो तब आप हृदय से प्रार्थना करो, लेकिन जब आप दयनीयता की स्थिति में हो तब आप हृदय से प्रार्थना नही कर सकते। एक बार जब आप यह कहते हो, "ठीक है, मैनें सबकुछ छोड़ दिया, "तब आपकी प्रार्थना की तीव्रता पूर्ण हो जाती है। इसी तरह से इच्छा के ज्वर से बाहर निकला जा सकता है। आप अपने अस्तित्व से प्रार्थना करें। ये ही आपको सशक्त बनाती है, क्योंकि दिव्यता कमजोर के लिये बनी है। इसीलिये उसे 'दीनबंधु' कहते हैं। दीन का अर्थ है कमजोर, दयनीय, शक्तिहीन और निसहाय और बंधु का अर्थ है मित्र। इसीलिये आप प्रार्थना करते हैं, "अब मेरे पास कोई रास्ता नही है और मैं तनाव छोड़ देता हूं। मुझे सहायता की आवश्यकता है। "तभी आपके चारों ओर परिवर्तन होने लगते हैं। प्रायः लोग पूछते हैं, "हम इतने सारे देवी देवताओं से प्रार्थना क्यों करते हैं? "दिव्यता एक ही है, लेकिन अनेक नामों से पुकारा जाता है। बस यही कारण है कि यही परमात्मा को भिन्न-भिन्न नामों, रुप, और रंगों से जगाया जाता है। ईश्वर सबके हृदय में है, सब जगह है, आपके चारों ओर है और आपमें भी है। वह जानता है कि आपके लिये सबसे उत्तम क्या है और आपको जो सबसे अच्छा लगता है वही आपको देता है। प्रार्थना का अर्थ है दिल की गहराइयों से पुकारना। एक बच्चा रोता है तो कैसे रोता है? बच्चे अपनी मां के लिये पूरे शरीर से रोता है। उसके शरीर का एक एक कण और दिल का एक एक कोना कुछ मांगता है। पुकारना, पूरे दिल से पुकारना ही प्रार्थना है। जब हम अपने हृदय से कुछ करते है तो यही प्रार्थना होती है। प्रार्थना की उच्च अवस्था ही ध्यान है। प्रार्थना का अर्थ है मांगना, ध्यान का अर्थ है सुनना। प्रार्थना आप कहते हैं, "मुझे ये दो, वो दो। " निर्देष देते हो, मांग करते हो। ध्यान में आप कहते हैं, "मै यहां पर हूं सुनने के लिये, जो कुछ भी आप बताना चाहते हैं मुझे बताएं। " जब प्रार्थना अपने शिखर की ओर जाती है तब वह ध्यान हो जाता है। मौन प्रार्थना से बेहतर है। प्रायः प्रार्थना किसी भाषा में होती है-जर्मन, हिंदी, स्पेनिश, इंग्लिश। वास्तव में, इन सबका एक ही अर्थ है। लेकिन मौन इससे एक कदम आगे है, यह एक कदम भाषा की सीमा से परे हैं जिसे पूरा ब्रह्मांड समझता है। प्रकृति इसी से ही प्रदर्शित होती है। प्रार्थना शब्द शक्ति है जो आपको हृदय के मौन की ओर ले जाती है। शब्द का उद्देश्य मौन का सृजन करना है। कर्म का उद्देश्य है गहन विश्राम प्राप्त करना। गहन विश्राम का उद्देश्य है आपको पूर्ण करना। पूर्णता में ही आपको प्रसन्नता, आनंद की प्राप्ति होती है। प्रेम का उद्देश्य आनंद को अपने भीतर जन्म लेने देना है। मानवीय मूल्यवादी, शांतीदूत और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर, का जन्म तेरह मई एक हज़ार नौ सौ छप्पन को तमिलनाडु के पापानासम में हुआ था। इनके पिता आरएसवी रत्नम ने इनकी आध्यात्मिक रुचि को देखते हुए इन्हें महर्षि महेश योगी के सान्निध्य में भेज दिया। महर्षि के अनेकों शिष्यों में से रवि उनके सबसे प्रिय थे। एक हज़ार नौ सौ बयासी में रवि शंकर दस दिन के मौन में चले गए। कुछ लोगों का मानना है कि इस दौरान वे परम ज्ञाता हो गए और उन्होंने सुदर्शन क्रिया की खोज की।
|
नई दिल्ली, 23 दिसंबर (आईएएनएस)।राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार सुबह कोहरा छाया हुआ है। यहां न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक 10. 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अधिकारी ने बताया, सुबह हल्का कुहासा रहा। आज आसमान साफ रहेगा।
सुबह 8. 30 बजे वायुमंडल में आद्र्रता 77 फीसदी रही जबकि दृश्यता अच्छी रही।
दिल्ली में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री नीचे 25. 3 डिग्री सेल्सियस रहा।
|
नई दिल्ली, तेईस दिसंबर ।राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार सुबह कोहरा छाया हुआ है। यहां न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक दस. छः डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारी ने बताया, सुबह हल्का कुहासा रहा। आज आसमान साफ रहेगा। सुबह आठ. तीस बजे वायुमंडल में आद्र्रता सतहत्तर फीसदी रही जबकि दृश्यता अच्छी रही। दिल्ली में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक ग्यारह डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री नीचे पच्चीस. तीन डिग्री सेल्सियस रहा।
|
भाजपा सांसद सुब्रत पाठक का कहना है कि पुलिस सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने एसपी अनुपम सिंह को हिंदू विरोधी करार दिया है।
कन्नौज से भाजपा सांसद सुब्रत पाठक और पुलिस के बीच चल रहे टकराव में पार्टी अपने सांसद के साथ खड़ी हो गई है। पाठक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर पार्टी व सरकार में हलचल है। भाजपा महाजनसंपर्क अभियान के जरिये लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। इस बीच पुलिस ने सांसद सुब्रत पाठक व उनके समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इससे पार्टी असहज नजर आने लगी है। पर, अपनी सरकार में एफआईआर होने से भाजपा के बड़े नेता खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं। हालांकि मामले की गंभीरता को समझते हुए क्षेत्रीय संगठन सांसद के साथ खुलकर खड़ा है। वहीं, सुब्रत पाठक का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इशारे पर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
कन्नौज लोकसभा क्षेत्र भाजपा के संगठनात्मक कानपुर क्षेत्र में है। कानपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल ने कहा कि पुलिस ने सांसद सुब्रत पाठक व कार्यकर्ताओं के खिलाफ गलत मुकदमा दर्ज किया है। निष्पक्ष जांच कराकर मुकदमा वापस होना चाहिए।
उन्नाव की औरास थाना पुलिस ने गत दिनों अपहरण के एक मामले में कन्नौज में स्थानीय कोतवाली पुलिस की मदद से आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि सुब्रत पाठक ने समर्थकों के साथ पहुंचकर पुलिस की कार्रवाई में बाधा डाली। मामले में पुलिस ने पाठक सहित दस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। प्रदेश में भाजपा की सरकार होते हुए भी पार्टी के सांसद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज होने से मामले ने तूल पकड़ लिया है। सोमवार को कन्नौज के विधायकों ने सांसद के साथ इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक भी की।
सुब्रत पाठक का कहना है कि कन्नौज के एसपी अनुपम सिंह हिंदू विरोधी हैं। हिंदूवादी नेता होने के कारण एसपी उन्हें फंसा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनुपम सिंह ने आगरा में पोस्टिंग के दौरान आरएसएस की शाखाओं को बंद कराया था। उन्होंने यह भी कहा कि घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए। पुलिस वालों ने खुद ही अपने शरीर पर चाबी रगड़कर खरोंच के निशान बनाए हैं। जिन पुलिस वालों से मारपीट की बात की जा रही है, वे मौके पर नहीं थे। मैं दोषी हूं तो मेरे खिलाफ कार्रवाई और मैं दोषी नहीं हूं तो एसपी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अगर पुलिस ने जल्द सीसीटीवी फुटेज जारी नहीं किए तो एक-दो दिन में वह खुद गिरफ्तारी देंगे।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
भाजपा सांसद सुब्रत पाठक का कहना है कि पुलिस सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने एसपी अनुपम सिंह को हिंदू विरोधी करार दिया है। कन्नौज से भाजपा सांसद सुब्रत पाठक और पुलिस के बीच चल रहे टकराव में पार्टी अपने सांसद के साथ खड़ी हो गई है। पाठक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर पार्टी व सरकार में हलचल है। भाजपा महाजनसंपर्क अभियान के जरिये लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। इस बीच पुलिस ने सांसद सुब्रत पाठक व उनके समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इससे पार्टी असहज नजर आने लगी है। पर, अपनी सरकार में एफआईआर होने से भाजपा के बड़े नेता खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं। हालांकि मामले की गंभीरता को समझते हुए क्षेत्रीय संगठन सांसद के साथ खुलकर खड़ा है। वहीं, सुब्रत पाठक का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इशारे पर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। कन्नौज लोकसभा क्षेत्र भाजपा के संगठनात्मक कानपुर क्षेत्र में है। कानपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल ने कहा कि पुलिस ने सांसद सुब्रत पाठक व कार्यकर्ताओं के खिलाफ गलत मुकदमा दर्ज किया है। निष्पक्ष जांच कराकर मुकदमा वापस होना चाहिए। उन्नाव की औरास थाना पुलिस ने गत दिनों अपहरण के एक मामले में कन्नौज में स्थानीय कोतवाली पुलिस की मदद से आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि सुब्रत पाठक ने समर्थकों के साथ पहुंचकर पुलिस की कार्रवाई में बाधा डाली। मामले में पुलिस ने पाठक सहित दस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। प्रदेश में भाजपा की सरकार होते हुए भी पार्टी के सांसद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज होने से मामले ने तूल पकड़ लिया है। सोमवार को कन्नौज के विधायकों ने सांसद के साथ इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक भी की। सुब्रत पाठक का कहना है कि कन्नौज के एसपी अनुपम सिंह हिंदू विरोधी हैं। हिंदूवादी नेता होने के कारण एसपी उन्हें फंसा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनुपम सिंह ने आगरा में पोस्टिंग के दौरान आरएसएस की शाखाओं को बंद कराया था। उन्होंने यह भी कहा कि घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए। पुलिस वालों ने खुद ही अपने शरीर पर चाबी रगड़कर खरोंच के निशान बनाए हैं। जिन पुलिस वालों से मारपीट की बात की जा रही है, वे मौके पर नहीं थे। मैं दोषी हूं तो मेरे खिलाफ कार्रवाई और मैं दोषी नहीं हूं तो एसपी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अगर पुलिस ने जल्द सीसीटीवी फुटेज जारी नहीं किए तो एक-दो दिन में वह खुद गिरफ्तारी देंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
जब पीड़िता के परिजनों ने जबरन उसकी छानबीन की तो तलाशी में युवक की जेब से आधार कार्ड बरामद हुआ। जिस पर युवक का नाम 27 वर्षीय अताबुद्दीन अंसारी, पिता हामित अंसारी होने का खुलासा हुआ।
बिहार के कहलगाँव में राहुल गाँधी द्वारा एक चुनावी रैली का उल्लेख करते हुए, अंसारी ने कहा था कि पूर्व पार्टी प्रमुख लोगों को प्रभावित करने में विफल रहे क्योंकि वे समझ नहीं पाए कि उन्हें क्या बोलना था।
झारखण्ड में अबकी तालाबों और नदियों के किनारे छठ महापर्व के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने ये आदेश जारी किया।
रांची में नाबालिग छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना सामने आई है। आरोपित सरफराज और अमानुल्लाह को गिरफ्तार कर लिया गया है।
हज़रत खान लंबे समय से युवती पर निकाह करने का दबाव बना रहा था। इंकार करने से नाराज होकर हजरत खान ने ने उसे जान से मारने की प्लानिंग की।
झारखंड की राजधानी राँची के अपर बाजार की रंगरेज गली में स्थित मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। अराजक तत्वों ने यहाँ मंदिर में बने शिवलिंग को ही पूरा उखाड़ दिया।
राँची प्रशासन ने 22 अक्टूबर को पंडाल पहुँच कर पेंटिंग्स के कारण भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए इसे काले पर्दे से ढकने का निर्देश दिया।
मृतक की माँ ने बताया कि उनका बेटा आसपास के लोगों को गोहत्या करने से मना करता था, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई।
अपनी दादी की लिंचिंग के मामले में निरंजन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर गरवा पुलिस ने 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया। वहीं 5 के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज की गई है।
|
जब पीड़िता के परिजनों ने जबरन उसकी छानबीन की तो तलाशी में युवक की जेब से आधार कार्ड बरामद हुआ। जिस पर युवक का नाम सत्ताईस वर्षीय अताबुद्दीन अंसारी, पिता हामित अंसारी होने का खुलासा हुआ। बिहार के कहलगाँव में राहुल गाँधी द्वारा एक चुनावी रैली का उल्लेख करते हुए, अंसारी ने कहा था कि पूर्व पार्टी प्रमुख लोगों को प्रभावित करने में विफल रहे क्योंकि वे समझ नहीं पाए कि उन्हें क्या बोलना था। झारखण्ड में अबकी तालाबों और नदियों के किनारे छठ महापर्व के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने ये आदेश जारी किया। रांची में नाबालिग छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना सामने आई है। आरोपित सरफराज और अमानुल्लाह को गिरफ्तार कर लिया गया है। हज़रत खान लंबे समय से युवती पर निकाह करने का दबाव बना रहा था। इंकार करने से नाराज होकर हजरत खान ने ने उसे जान से मारने की प्लानिंग की। झारखंड की राजधानी राँची के अपर बाजार की रंगरेज गली में स्थित मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। अराजक तत्वों ने यहाँ मंदिर में बने शिवलिंग को ही पूरा उखाड़ दिया। राँची प्रशासन ने बाईस अक्टूबर को पंडाल पहुँच कर पेंटिंग्स के कारण भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए इसे काले पर्दे से ढकने का निर्देश दिया। मृतक की माँ ने बताया कि उनका बेटा आसपास के लोगों को गोहत्या करने से मना करता था, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई। अपनी दादी की लिंचिंग के मामले में निरंजन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर गरवा पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार किया। वहीं पाँच के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज की गई है।
|
कैथल, 13 मई (हि. स. )। विधायक लीलाराम ने रविवार को कैथल शहर के वार्ड नंबर 20 में पट्टी चौधरी में 15 लाख रुपए से निर्मित गलियों का उद्घाटन किया। विधायक ने सबसे पहले शक्तिनगर में बनी गलियों का उद्घाटन किया। उसके बाद कुतुबपुर रोड पर हरी नगर में विधायक लीलाराम ने बनाई गई सड़क का उद्घाटन किया ।
वार्ड नंबर-20 में ही चंदाना रोड पर चौधरी अर्जुन सिंह के डेरे में पहुंचे विधायक लीलाराम का फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। उन लोगों की मांग थी कि हमारे यहां कई परिवार इकट्ठा रहते हैं जोकि आने जाने के लिए कोई उचित रास्ता नहीं है। उन्होंने मांग की है कि सबसे पहले हमारा रास्ते को पक्का किया जाए और डेरे की पानी निकासी के लिए नाले की व्यवस्था की जाए। विधायक लीलाराम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के काम करने का तरीका बहुत ही अच्छा है। हरियाणा एक हरियाणवी एक, सबका साथ सबका विकास नीति के तहत काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल सभी का समान रूप से विकास करवा रहे हैं और लोगों के विकास कार्यों के लिए रिकॉर्ड तोड़ पैसा हलकों में दे रहे हैं। विधायक ने कहा कि कैथल शहर के और गांव के सभी क्षेत्रों में विकास कार्य चले हुए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद से कैथल हल्के में गांव के ऐसे रास्ते बनाए गए हैं। जो पिछले 20 सालों से लंबित थे। जिन रास्तों को कांग्रेस सरकार भी नहीं बनवा पाई थी ।
इस मौके पर सुमित गर्ग, मुकेश जैन, राम कुमार नैन, नरेश मित्तल, रिंकू सैनी पार्षद, बिरेंद्र बत्रा, लीलू सैनी पार्षद , राज सैनी पार्षद, केके आनंद, विक्की धीमान पार्षद प्रतिनिधि, जग्गा सैनी, ज्योति जांगड़ा पार्षद प्रतिनिधि, दीपक शर्मा पार्षद, प्रवेश शर्मा पार्षद, राम सिंह खेड़ा, सुभाष शर्मा सत्यवान माजरा, सोनू मेहरा , प्रदीप यादव, राजेंद्र ठाकुर, कुशलपाल सैन, रोबिन राठी, दीवाल गांव के सरपंच बलबीर सिंह, सरपंच सोमनाथ कंबोज, संजीव कांगड़ा, धर्मवीर सैनी, सुधीर सैनी भी मौजूद रहे।
|
कैथल, तेरह मई । विधायक लीलाराम ने रविवार को कैथल शहर के वार्ड नंबर बीस में पट्टी चौधरी में पंद्रह लाख रुपए से निर्मित गलियों का उद्घाटन किया। विधायक ने सबसे पहले शक्तिनगर में बनी गलियों का उद्घाटन किया। उसके बाद कुतुबपुर रोड पर हरी नगर में विधायक लीलाराम ने बनाई गई सड़क का उद्घाटन किया । वार्ड नंबर-बीस में ही चंदाना रोड पर चौधरी अर्जुन सिंह के डेरे में पहुंचे विधायक लीलाराम का फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। उन लोगों की मांग थी कि हमारे यहां कई परिवार इकट्ठा रहते हैं जोकि आने जाने के लिए कोई उचित रास्ता नहीं है। उन्होंने मांग की है कि सबसे पहले हमारा रास्ते को पक्का किया जाए और डेरे की पानी निकासी के लिए नाले की व्यवस्था की जाए। विधायक लीलाराम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के काम करने का तरीका बहुत ही अच्छा है। हरियाणा एक हरियाणवी एक, सबका साथ सबका विकास नीति के तहत काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल सभी का समान रूप से विकास करवा रहे हैं और लोगों के विकास कार्यों के लिए रिकॉर्ड तोड़ पैसा हलकों में दे रहे हैं। विधायक ने कहा कि कैथल शहर के और गांव के सभी क्षेत्रों में विकास कार्य चले हुए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद से कैथल हल्के में गांव के ऐसे रास्ते बनाए गए हैं। जो पिछले बीस सालों से लंबित थे। जिन रास्तों को कांग्रेस सरकार भी नहीं बनवा पाई थी । इस मौके पर सुमित गर्ग, मुकेश जैन, राम कुमार नैन, नरेश मित्तल, रिंकू सैनी पार्षद, बिरेंद्र बत्रा, लीलू सैनी पार्षद , राज सैनी पार्षद, केके आनंद, विक्की धीमान पार्षद प्रतिनिधि, जग्गा सैनी, ज्योति जांगड़ा पार्षद प्रतिनिधि, दीपक शर्मा पार्षद, प्रवेश शर्मा पार्षद, राम सिंह खेड़ा, सुभाष शर्मा सत्यवान माजरा, सोनू मेहरा , प्रदीप यादव, राजेंद्र ठाकुर, कुशलपाल सैन, रोबिन राठी, दीवाल गांव के सरपंच बलबीर सिंह, सरपंच सोमनाथ कंबोज, संजीव कांगड़ा, धर्मवीर सैनी, सुधीर सैनी भी मौजूद रहे।
|
बादशाह को बडी चिन्ता हुई और उसने अपने अनुचरों से सम्मति करके यह निश्चय किया कि मजूर अली जो को भेजा जाय, जो स्वय गुलाम कादिर और इस्माइल वेग के पास जाकर उनके मन की बात पूछे । मजूर झली बॉ यादशाह को सावा पाकर उनके पास गया और उसने यह प्रश्न किया कि वर तुम्हारे क्या विचार है ? उन्होंने यह उत्तर दिया कि दास तो अपने शरीर से केवल राज राजेन्यवर की सेवा करने के लिये आया है। मजूर अली ने कहा कि अच्छा, ऐसा ही करो; परन्तु लाल किले में अपने साथ अपनी सेना न लाभो, कुछ थर्टली लेकर चले थायो । थोर नहीं तो तुम्हें देखकर राजद्वाराध्यक्ष द्वार बन्द कर देगा । इसी आदेश का दोनो सरदारो ने पालन किया और दूसरे दिन तारीख १८ जुलाई सन् १७८८ को उन्होंने ग्राम खास में प्रवेश किया। प्रत्येक को तलवार और अन्य पारितोषिकों के समेत सात मोहरों को खिलयत प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त गुलाम कादिर को एक रत जटित ढाल
उपरान्त वे नगर में अपने निवास स्थान को श्री गए, जहाँ इस्मा इल रेग ने शेष दिन नगर वासियों की रक्षा और विश्वास के हित प्रबन्ध करने में बिताया। अगले दिन उसने अपना निवास तो उस हवेली में किया, जिसमें पहले मुहम्मद शाह का मंत्री कमर उद्दोन खां रहता था, थोर अपनी सेना का डेरा उसने दो मील पर प्रसिद्ध निजाम उद्दान श्रोलिया के मकबरे के
|
बादशाह को बडी चिन्ता हुई और उसने अपने अनुचरों से सम्मति करके यह निश्चय किया कि मजूर अली जो को भेजा जाय, जो स्वय गुलाम कादिर और इस्माइल वेग के पास जाकर उनके मन की बात पूछे । मजूर झली बॉ यादशाह को सावा पाकर उनके पास गया और उसने यह प्रश्न किया कि वर तुम्हारे क्या विचार है ? उन्होंने यह उत्तर दिया कि दास तो अपने शरीर से केवल राज राजेन्यवर की सेवा करने के लिये आया है। मजूर अली ने कहा कि अच्छा, ऐसा ही करो; परन्तु लाल किले में अपने साथ अपनी सेना न लाभो, कुछ थर्टली लेकर चले थायो । थोर नहीं तो तुम्हें देखकर राजद्वाराध्यक्ष द्वार बन्द कर देगा । इसी आदेश का दोनो सरदारो ने पालन किया और दूसरे दिन तारीख अट्ठारह जुलाई सन् एक हज़ार सात सौ अठासी को उन्होंने ग्राम खास में प्रवेश किया। प्रत्येक को तलवार और अन्य पारितोषिकों के समेत सात मोहरों को खिलयत प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त गुलाम कादिर को एक रत जटित ढाल उपरान्त वे नगर में अपने निवास स्थान को श्री गए, जहाँ इस्मा इल रेग ने शेष दिन नगर वासियों की रक्षा और विश्वास के हित प्रबन्ध करने में बिताया। अगले दिन उसने अपना निवास तो उस हवेली में किया, जिसमें पहले मुहम्मद शाह का मंत्री कमर उद्दोन खां रहता था, थोर अपनी सेना का डेरा उसने दो मील पर प्रसिद्ध निजाम उद्दान श्रोलिया के मकबरे के
|
माधुनिक भारत में मुस्लिम राजनीतिक विचारकः
मे भी जबकि सिवापत मोर धमहयोग मान्दोलन के कारण विमुग्लिम मद्भावना मे बड़ा गई अनुभव दिया कि हमारे ही
प्रयत्नों से बहुत से स्यानो पर गुगलमान पवित में सम्मिलित होने से रोके जा सके।" १६२६ ६० में भी उन्होंने मुगनमानी से अनुरोग दिया था कि वे निर समिति में ५ सास सदस्य तथा ५० हजार स्याहार (स्वयं सेवक) और बढ़ायें । इस प्रकार उनके राजा हो जाने से दूसरे सोग भी उनके पति को स्वीपर कर लेंगे और उनका सम्मान करेंगे। बिना इसर के नृपर गंगठन के उनकेत मधीन सोगो जैसी ही रह जायगी ।७३ नेहरू रिपोर्ट को मरलो कर देने के था कि यह "जीवन के प्रत्येक भाग में सुधार करें। मुसमन रागटन करे और रायगे दकर यह कि उनमें एकता और पविश्याग पैदा करे" तिलाशन समिति वाली थी हि मुगलमान अपने पैरों पर माप गड़े हो तथा उसका उद्देश्य था कि "जिन प्रकार गिलाफा समिति मुगलमान को इंगण्डको दासता में रहने से मना करती है दीक उसी प्रकार यह अपनी कौन को दूसरे राम्प्रदाय वा दारा बन जाने से भी रोकती है। यह स्वान्त्रता की भूगो है किन्तु स्वामियो का परिवर्तन नहीं चाहती है ।"७३
मोहम्मद अली का हिन्दुमी के प्रति दृष्टिकोणः
मोहम्मद अली द्वारा हिन्दू मुस्लिम एकता का समर्थन उन अवसरों पर किया गया था जहाँ उन्हें मुसलमानों के हितों के लिये हिन्दुओं के समर्थन से कुछ लाभ पहुँचने यी माणा थी भथवा भग्रेजी पर अधिक दबाव डाला जा सकता था। १९२० ई० में पेरिस में भाषण देने समय उन्होंने मिलान के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा :
"हम यहाँ तुर्की का प्रतिनिधित्व करने नहीं भाग है। हम केवल अपने मोर अपने देश अर्थात भारत के प्रतिनिधि हैं। भाज हिन्दू, मुगलमान, पारसी सबके सब इस समस्या में सम्मिलित है जो केवल एक धार्मिक समस्या है। मैं तोस करोड़ लोगो को और से ग्रामसे कहता हूँ कि ये लोग इस सन्धि (सेत्र की सन्धि ) को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने आगे बताया कि अपने अधिकारों की सुरक्षा कर लेने के बाद भारत की स्वतन्त्रता के लिये भी मुसलमान प्रयत्नशील थे १७५ यूरोप से लौटने के पश्चात् बम्बई से अक्टूबर १९२० में उन्होंने कहा था "वर्तमान स्थिति पर दृष्टि डालकर में इस स्पष्ट परिणाम पर पहुँचा हूँ कि इस्लाम की स्वतन्त्रता के
७४. तकारीर पू० २१
|
माधुनिक भारत में मुस्लिम राजनीतिक विचारकः मे भी जबकि सिवापत मोर धमहयोग मान्दोलन के कारण विमुग्लिम मद्भावना मे बड़ा गई अनुभव दिया कि हमारे ही प्रयत्नों से बहुत से स्यानो पर गुगलमान पवित में सम्मिलित होने से रोके जा सके।" एक हज़ार छः सौ छब्बीस साठ में भी उन्होंने मुगनमानी से अनुरोग दिया था कि वे निर समिति में पाँच सास सदस्य तथा पचास हजार स्याहार और बढ़ायें । इस प्रकार उनके राजा हो जाने से दूसरे सोग भी उनके पति को स्वीपर कर लेंगे और उनका सम्मान करेंगे। बिना इसर के नृपर गंगठन के उनकेत मधीन सोगो जैसी ही रह जायगी ।तिहत्तर नेहरू रिपोर्ट को मरलो कर देने के था कि यह "जीवन के प्रत्येक भाग में सुधार करें। मुसमन रागटन करे और रायगे दकर यह कि उनमें एकता और पविश्याग पैदा करे" तिलाशन समिति वाली थी हि मुगलमान अपने पैरों पर माप गड़े हो तथा उसका उद्देश्य था कि "जिन प्रकार गिलाफा समिति मुगलमान को इंगण्डको दासता में रहने से मना करती है दीक उसी प्रकार यह अपनी कौन को दूसरे राम्प्रदाय वा दारा बन जाने से भी रोकती है। यह स्वान्त्रता की भूगो है किन्तु स्वामियो का परिवर्तन नहीं चाहती है ।"तिहत्तर मोहम्मद अली का हिन्दुमी के प्रति दृष्टिकोणः मोहम्मद अली द्वारा हिन्दू मुस्लिम एकता का समर्थन उन अवसरों पर किया गया था जहाँ उन्हें मुसलमानों के हितों के लिये हिन्दुओं के समर्थन से कुछ लाभ पहुँचने यी माणा थी भथवा भग्रेजी पर अधिक दबाव डाला जा सकता था। एक हज़ार नौ सौ बीस ईशून्य में पेरिस में भाषण देने समय उन्होंने मिलान के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा : "हम यहाँ तुर्की का प्रतिनिधित्व करने नहीं भाग है। हम केवल अपने मोर अपने देश अर्थात भारत के प्रतिनिधि हैं। भाज हिन्दू, मुगलमान, पारसी सबके सब इस समस्या में सम्मिलित है जो केवल एक धार्मिक समस्या है। मैं तोस करोड़ लोगो को और से ग्रामसे कहता हूँ कि ये लोग इस सन्धि को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने आगे बताया कि अपने अधिकारों की सुरक्षा कर लेने के बाद भारत की स्वतन्त्रता के लिये भी मुसलमान प्रयत्नशील थे एक सौ पचहत्तर यूरोप से लौटने के पश्चात् बम्बई से अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ बीस में उन्होंने कहा था "वर्तमान स्थिति पर दृष्टि डालकर में इस स्पष्ट परिणाम पर पहुँचा हूँ कि इस्लाम की स्वतन्त्रता के चौहत्तर. तकारीर पूशून्य इक्कीस
|
शहर के जीटी रोड हाइवे पर बाइक से जा रही किशोरी से डीसीएम सवार युवक ने अभद्रता कर दी। इस पर बाइक सवार लोगों ने डीसीएम को रुकवाकर पत्थर चला दिया, जिससे डीसीएम का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया।
कांशीराम कॉलोनीके पास हाइवे पर डीसीएम सवार युवक ने बाइक से अपने परिजनों के साथ जा रही किशोरी से अभद्रता कर दी। इस पर बाइक सवार लोगों ने जनता कोल्ड स्टोरेज के पास डीसीएम को रुकवा लिया। इस दौरान डीसीएम सवार युवक और चालक के साथ बाइक सवार लोगों की तीखी नोंकझोक हुई। इस दौरान किसी युवक ने डीसीएम में पत्थर चला दिया, जिससे शीशा क्षतग्रिस्त हो गया। आस-पड़ोस के लोगों ने किसी तरह मामला शांत करा दिया।
|
शहर के जीटी रोड हाइवे पर बाइक से जा रही किशोरी से डीसीएम सवार युवक ने अभद्रता कर दी। इस पर बाइक सवार लोगों ने डीसीएम को रुकवाकर पत्थर चला दिया, जिससे डीसीएम का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया। कांशीराम कॉलोनीके पास हाइवे पर डीसीएम सवार युवक ने बाइक से अपने परिजनों के साथ जा रही किशोरी से अभद्रता कर दी। इस पर बाइक सवार लोगों ने जनता कोल्ड स्टोरेज के पास डीसीएम को रुकवा लिया। इस दौरान डीसीएम सवार युवक और चालक के साथ बाइक सवार लोगों की तीखी नोंकझोक हुई। इस दौरान किसी युवक ने डीसीएम में पत्थर चला दिया, जिससे शीशा क्षतग्रिस्त हो गया। आस-पड़ोस के लोगों ने किसी तरह मामला शांत करा दिया।
|
London: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वेस्टमिंस्टर हॉल लंदन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को अपनी और भारत के लोगों की तरफ से श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 17-19 सितंबर तक महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने और भारत सरकार की ओर से संवेदना व्यक्त करने के लिए लंदन के दौरे पर हैं। यूनाइटेड किंगडम महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का 96 वर्ष की आयु में 8 सितंबर को स्कॉटलैंड में उनके बाल्मोरल कैसल ग्रीष्मकालीन निवास में निधन हो गया था। राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महारानी एलिजाबेथ के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
महारानी एलिजाबेथ का अंतिम संस्कार 19 सितंबर की सुबह 11 बजे वेस्टमिंस्टर एब्बे में होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और जापान के सम्राट नारुहितो ने अंतिम संस्कार में शामिल होने की पुष्टि की है। नॉर्वे, स्पेन, बेल्जियम, स्वीडन, डेनमार्क, नीदरलैंड्स सहित पूरे यूरोप के शाही परिवारों के सदस्यों के शामिल होने की संभावना है। कई देशों के राष्ट्रध्यक्ष भी ब्रिटेन पहुंचेंगे।
महारानी एलिजाबेथ II 70 सालों से ब्रिटेन में शासन कर रही थीं। एलिजाबेथ 1952 में अपने पिता जॉर्ज षष्टम की मौत के बाद महारानी बनीं थी, तब उनकी उम्र महज 25 साल थी। वह ब्रिटेन की सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली शासक रहीं। उनके शासनकाल में ब्रिटेन को 15 प्रधानमंत्री मिले। एलिजाबेथ II सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं बल्कि 14 और देशों की रानी रहीं। उनके निधन के बाद उनके बेटे चार्ल्स ब्रिटेन के नए राजा बनाए गए हैं।
|
London: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वेस्टमिंस्टर हॉल लंदन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को अपनी और भारत के लोगों की तरफ से श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सत्रह-उन्नीस सितंबर तक महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने और भारत सरकार की ओर से संवेदना व्यक्त करने के लिए लंदन के दौरे पर हैं। यूनाइटेड किंगडम महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का छियानवे वर्ष की आयु में आठ सितंबर को स्कॉटलैंड में उनके बाल्मोरल कैसल ग्रीष्मकालीन निवास में निधन हो गया था। राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महारानी एलिजाबेथ के निधन पर शोक व्यक्त किया है। महारानी एलिजाबेथ का अंतिम संस्कार उन्नीस सितंबर की सुबह ग्यारह बजे वेस्टमिंस्टर एब्बे में होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और जापान के सम्राट नारुहितो ने अंतिम संस्कार में शामिल होने की पुष्टि की है। नॉर्वे, स्पेन, बेल्जियम, स्वीडन, डेनमार्क, नीदरलैंड्स सहित पूरे यूरोप के शाही परिवारों के सदस्यों के शामिल होने की संभावना है। कई देशों के राष्ट्रध्यक्ष भी ब्रिटेन पहुंचेंगे। महारानी एलिजाबेथ II सत्तर सालों से ब्रिटेन में शासन कर रही थीं। एलिजाबेथ एक हज़ार नौ सौ बावन में अपने पिता जॉर्ज षष्टम की मौत के बाद महारानी बनीं थी, तब उनकी उम्र महज पच्चीस साल थी। वह ब्रिटेन की सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली शासक रहीं। उनके शासनकाल में ब्रिटेन को पंद्रह प्रधानमंत्री मिले। एलिजाबेथ II सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं बल्कि चौदह और देशों की रानी रहीं। उनके निधन के बाद उनके बेटे चार्ल्स ब्रिटेन के नए राजा बनाए गए हैं।
|
पंचकूला (ट्रिन्यू):
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में हरियाणा योग आयोग द्वारा आयुष विभाग के सानिध्य में योगासन खेल में अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस दौरान 18 वर्ष से कम आयु वर्ग में दीपांशु व प्रेरणा प्रथम, अर्णव व भूमिका द्वितीय स्थान एवं प्रभात व करुणा तीसरे स्थान पर रहे। वहीं 18-27 आयु वर्ग में अरुण व साधना कुमारी प्रथम, शिवम राज मौर्य व स्नेहलता द्वितीय एवं अभिषेक व सीमा तीसरे स्थान पर रहे। 27-40 आयु वर्ग में अंकुर व विजेता प्रथम, यादराम व यशोदा रानी द्वितीय एवं कुलदीप व रेखा रानी तीसरे स्थान पर रहे। 40 से ऊपर आयु वर्ग में कर्ण देव व सुरक्षा रानी प्रथम, अनील कुमार व अनिता द्वितीय स्थान पर एवं सुरेंद्र सिंह व कविता रानी तीसरे स्थान पर रहे। वहीं गीता श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता का आयोजन दो वर्गों में किया गया। जिसमें पावनी शर्मा व हेमंत गुरुग्राम से प्रथम, नंदिनी शर्मा व ऋषि क्रमशः झज्जर एवं गुरुग्राम द्वितीय स्थान एवं रिदम, सोनीपत व राहुल नूंह तीसरे स्थान पर रहे। योग प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन 21 जून को किया जाएगा। इसमें लगभग एक लाख प्रतिभागियों के भाग लेने की सम्भावना है। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में डीएवी संस्थाओं मुख्यतः जींद जोन के विद्यार्थी प्रिंसिपल डाॅ. धर्मदेव विद्यार्थी के निर्देशन में भाग लेंगे।
|
पंचकूला : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में हरियाणा योग आयोग द्वारा आयुष विभाग के सानिध्य में योगासन खेल में अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस दौरान अट्ठारह वर्ष से कम आयु वर्ग में दीपांशु व प्रेरणा प्रथम, अर्णव व भूमिका द्वितीय स्थान एवं प्रभात व करुणा तीसरे स्थान पर रहे। वहीं अट्ठारह-सत्ताईस आयु वर्ग में अरुण व साधना कुमारी प्रथम, शिवम राज मौर्य व स्नेहलता द्वितीय एवं अभिषेक व सीमा तीसरे स्थान पर रहे। सत्ताईस-चालीस आयु वर्ग में अंकुर व विजेता प्रथम, यादराम व यशोदा रानी द्वितीय एवं कुलदीप व रेखा रानी तीसरे स्थान पर रहे। चालीस से ऊपर आयु वर्ग में कर्ण देव व सुरक्षा रानी प्रथम, अनील कुमार व अनिता द्वितीय स्थान पर एवं सुरेंद्र सिंह व कविता रानी तीसरे स्थान पर रहे। वहीं गीता श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता का आयोजन दो वर्गों में किया गया। जिसमें पावनी शर्मा व हेमंत गुरुग्राम से प्रथम, नंदिनी शर्मा व ऋषि क्रमशः झज्जर एवं गुरुग्राम द्वितीय स्थान एवं रिदम, सोनीपत व राहुल नूंह तीसरे स्थान पर रहे। योग प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन इक्कीस जून को किया जाएगा। इसमें लगभग एक लाख प्रतिभागियों के भाग लेने की सम्भावना है। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में डीएवी संस्थाओं मुख्यतः जींद जोन के विद्यार्थी प्रिंसिपल डाॅ. धर्मदेव विद्यार्थी के निर्देशन में भाग लेंगे।
|
आईपीएल 2024 सीजन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड आईपीएल के अगले यानी 2024 सीजन को जल्दी आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा अगला आईपीएल भी विदेश में आयोजित होने की संभावना है. इसका मुख्य कारण अगले साल होने वाला लोकसभा चुनाव है.
जल्दी शुरू हो सकता है आईपीएल!
बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा कि अगले साल लोकसभा चुनाव के कारण आईपीएल 2024 के लिए टूर्नामेंट पहले शुरू हो सकता है। हम जानते हैं कि चुनाव होने वाले हैं और ये सभी चीजें हमारी योजना में शामिल हैं. सूत्रों ने आगे कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो आईपीएल अगले साल मार्च की शुरुआत में आयोजित किया जा सकता है। साथ ही यह मई के मध्य में खत्म हो सकता है. हालाँकि, अभी हमारा पूरा ध्यान इस साल भारत में होने वाले वनडे विश्व कप 2023 पर है। आईपीएल को अभी लंबा सफर तय करना है. आइए देखें कि चीजें कैसे आगे बढ़ती हैं।
आईपीएल को विदेश में आयोजित करने को लेकर बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा, "हमने पहले भी चुनाव और टूर्नामेंट दोनों को बहुत अच्छे से प्रबंधित किया है." जरूरत पड़ने पर आईपीएल 2024 को विदेश में भी आयोजित किया जा सकता है. हालाँकि, हमारी पहली प्राथमिकता टूर्नामेंट को भारत में ही आयोजित करना होगा। मौजूदा हालात के मुताबिक फैसला लिया जाएगा. हालाँकि, अभी भी बहुत समय है, इसलिए हमें अभी इस बारे में बात नहीं करनी चाहिए।
लोकसभा चुनाव के कारण आईपीएल अब तक दो बार भारत से बाहर आयोजित किया जा चुका है। 2009 के लोकसभा चुनाव के कारण आईपीएल का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में किया गया था। इसके बाद साल 2014 में लोकसभा चुनाव के चलते आईपीएल को दो हिस्सों में आयोजित किया गया. तब टूर्नामेंट का आधा हिस्सा भारत में जबकि बाकी मैच यूएई में आयोजित किए गए थे.
|
आईपीएल दो हज़ार चौबीस सीजन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड आईपीएल के अगले यानी दो हज़ार चौबीस सीजन को जल्दी आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा अगला आईपीएल भी विदेश में आयोजित होने की संभावना है. इसका मुख्य कारण अगले साल होने वाला लोकसभा चुनाव है. जल्दी शुरू हो सकता है आईपीएल! बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा कि अगले साल लोकसभा चुनाव के कारण आईपीएल दो हज़ार चौबीस के लिए टूर्नामेंट पहले शुरू हो सकता है। हम जानते हैं कि चुनाव होने वाले हैं और ये सभी चीजें हमारी योजना में शामिल हैं. सूत्रों ने आगे कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो आईपीएल अगले साल मार्च की शुरुआत में आयोजित किया जा सकता है। साथ ही यह मई के मध्य में खत्म हो सकता है. हालाँकि, अभी हमारा पूरा ध्यान इस साल भारत में होने वाले वनडे विश्व कप दो हज़ार तेईस पर है। आईपीएल को अभी लंबा सफर तय करना है. आइए देखें कि चीजें कैसे आगे बढ़ती हैं। आईपीएल को विदेश में आयोजित करने को लेकर बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा, "हमने पहले भी चुनाव और टूर्नामेंट दोनों को बहुत अच्छे से प्रबंधित किया है." जरूरत पड़ने पर आईपीएल दो हज़ार चौबीस को विदेश में भी आयोजित किया जा सकता है. हालाँकि, हमारी पहली प्राथमिकता टूर्नामेंट को भारत में ही आयोजित करना होगा। मौजूदा हालात के मुताबिक फैसला लिया जाएगा. हालाँकि, अभी भी बहुत समय है, इसलिए हमें अभी इस बारे में बात नहीं करनी चाहिए। लोकसभा चुनाव के कारण आईपीएल अब तक दो बार भारत से बाहर आयोजित किया जा चुका है। दो हज़ार नौ के लोकसभा चुनाव के कारण आईपीएल का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में किया गया था। इसके बाद साल दो हज़ार चौदह में लोकसभा चुनाव के चलते आईपीएल को दो हिस्सों में आयोजित किया गया. तब टूर्नामेंट का आधा हिस्सा भारत में जबकि बाकी मैच यूएई में आयोजित किए गए थे.
|
मेरे एक मित्र की पत्नी को अपने पति पर ऐसा पूर्ण विश्वास था कि घर में घाटिन न रखने की उसने प्रतिज्ञा कर ली थी। बम्बई में रहते हों और वह बाहर ही बाहर मौज मार लें, तो आँखें मूँदी जा सकती हैं; पर घर में किसी समय वह ऐसा दृश्य दिखा सकती है कि देखकर आँखें फूट जायँ । एक वाटिन तो हमारे चिस्तरे का पूरा उपयोग करते पकड़ी गईं थी । परन्तु बम्बई की घाटिन पंचगनी रहने को आती है, तो हमारे मिर पर उपकार का हिमालय ही लाट देती है। जरा-जरा सी बात में "मैं यहाँ से चली" तो सुनना ही पड़ता है। पंचगनी में एक घाटिन के लिए दो नौकरों ने एक-दूसरे के सिर फोड़ डाले। दूसरी ने गर्भ गिरा दिया। तीसरी ने नौकरों की कोठरी में बच्चा जना, और खुद विधवा होने के कारण, उसका क्या किया जाय, इसका निर्णय जीजी माँ पर डाल दिया ।
मंगलोर की नौकरानियाँ पारसी और ईसाइयों के घर में काम करती हैं । उनको रीति-भाँति जुदा ही होती है। मंगलोर से नौकरी के लिए छोटीछोटी ग़रीब लड़कियों को लेने का बम्बई में व्यापार चलता है। व्यापार करने वाले उन्हें अपने गाँव से ले आते हैं, बम्बई की भाषा सिखाते हैं, और किसी घर में नौकर करा देते हैं । हिन्दू माताओं की अपेक्षा पारसी माताएँ, अंग्रेजों की तरह, बच्चों पर कम ध्यान देती हैं, इसलिए यह या अपने को सौंपे उनके माँ-बाप पर और नौकरों पर, एकछत्र राज करती है। इसका स्वभाव संस्कारहीन और प्रशिष्ट होता है। इसे सौंपे हुए बच्चों को किसी भी बग़ीचे या पार्क में भटकते हुए हम नित्य देख सकते हैं, या उसे नौकर के साथ घण्टों असभ्य और गन्दी बातें करते भी सुन सकते हैं। मंगलोरी की अपेक्षा घाटिन स्नेहशीला, घर सँभालने वाली होती है। जो इसका दोष है, वह इसका नहीं है, जिस कृत्रिम वातावरण में इसे रखा जाता है, उसका है। इन्हें अपनी दुनिया से नौकरों की जमात के किराये वाले वातावरण में पुरुषों के बीच अकेली रखा जाता है, और शिक्षा तो होती ही नहीं। इनमें से बहुत सी विधवाएँ या त्यागी हुई स्त्रियाँ होती हैं। परन्तु क्या किया जाय ? पारिवारिक बन्धन
|
मेरे एक मित्र की पत्नी को अपने पति पर ऐसा पूर्ण विश्वास था कि घर में घाटिन न रखने की उसने प्रतिज्ञा कर ली थी। बम्बई में रहते हों और वह बाहर ही बाहर मौज मार लें, तो आँखें मूँदी जा सकती हैं; पर घर में किसी समय वह ऐसा दृश्य दिखा सकती है कि देखकर आँखें फूट जायँ । एक वाटिन तो हमारे चिस्तरे का पूरा उपयोग करते पकड़ी गईं थी । परन्तु बम्बई की घाटिन पंचगनी रहने को आती है, तो हमारे मिर पर उपकार का हिमालय ही लाट देती है। जरा-जरा सी बात में "मैं यहाँ से चली" तो सुनना ही पड़ता है। पंचगनी में एक घाटिन के लिए दो नौकरों ने एक-दूसरे के सिर फोड़ डाले। दूसरी ने गर्भ गिरा दिया। तीसरी ने नौकरों की कोठरी में बच्चा जना, और खुद विधवा होने के कारण, उसका क्या किया जाय, इसका निर्णय जीजी माँ पर डाल दिया । मंगलोर की नौकरानियाँ पारसी और ईसाइयों के घर में काम करती हैं । उनको रीति-भाँति जुदा ही होती है। मंगलोर से नौकरी के लिए छोटीछोटी ग़रीब लड़कियों को लेने का बम्बई में व्यापार चलता है। व्यापार करने वाले उन्हें अपने गाँव से ले आते हैं, बम्बई की भाषा सिखाते हैं, और किसी घर में नौकर करा देते हैं । हिन्दू माताओं की अपेक्षा पारसी माताएँ, अंग्रेजों की तरह, बच्चों पर कम ध्यान देती हैं, इसलिए यह या अपने को सौंपे उनके माँ-बाप पर और नौकरों पर, एकछत्र राज करती है। इसका स्वभाव संस्कारहीन और प्रशिष्ट होता है। इसे सौंपे हुए बच्चों को किसी भी बग़ीचे या पार्क में भटकते हुए हम नित्य देख सकते हैं, या उसे नौकर के साथ घण्टों असभ्य और गन्दी बातें करते भी सुन सकते हैं। मंगलोरी की अपेक्षा घाटिन स्नेहशीला, घर सँभालने वाली होती है। जो इसका दोष है, वह इसका नहीं है, जिस कृत्रिम वातावरण में इसे रखा जाता है, उसका है। इन्हें अपनी दुनिया से नौकरों की जमात के किराये वाले वातावरण में पुरुषों के बीच अकेली रखा जाता है, और शिक्षा तो होती ही नहीं। इनमें से बहुत सी विधवाएँ या त्यागी हुई स्त्रियाँ होती हैं। परन्तु क्या किया जाय ? पारिवारिक बन्धन
|
Biparjoy Cyclone : भारी बारिश के बाद Delhi-Gurugram एक्सप्रेसवे पर भरा पानी, 5 KM तक ट्रैफिक जैमBiparjoy Cyclone : गुरुग्राम में भारी बारिश के कारण कई हिस्सों में पानी भरने की वजह से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर 5 किमी तक ट्रैफिक जाम हो गया है। लोगों को अपने ऑफिस पहुचने में काफी देरी हो रही है और कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। Biparjoy Cyclone: Due to heavy rains in Gurugram, there has been a traffic jam of up to 5 km on the Delhi-Gurugram Expressway due to water-logging in many parts. People are facing a lot of delay in reaching their offices and are also facing many problems.
|
Biparjoy Cyclone : भारी बारिश के बाद Delhi-Gurugram एक्सप्रेसवे पर भरा पानी, पाँच KM तक ट्रैफिक जैमBiparjoy Cyclone : गुरुग्राम में भारी बारिश के कारण कई हिस्सों में पानी भरने की वजह से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर पाँच किमी तक ट्रैफिक जाम हो गया है। लोगों को अपने ऑफिस पहुचने में काफी देरी हो रही है और कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। Biparjoy Cyclone: Due to heavy rains in Gurugram, there has been a traffic jam of up to पाँच किलोमीटर on the Delhi-Gurugram Expressway due to water-logging in many parts. People are facing a lot of delay in reaching their offices and are also facing many problems.
|
मुंबई. यश राज फिल्म्स के बैनर तले इस साल रिलीज हुई एक्शन फिल्म पठान दर्शकों को बेइंतहा पसंद आई थी। फिल्म ने न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई कर सबको हैरान कर दिया था। शाहरुख खान को पूरे चार साल बाद रुपहले पर्दे पर लाने वाली इस एक्शन थ्रिलर फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था। दुनिया के कई देशों में धमाल मचाने के बाद बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान स्टारर पठान अब 12 मई को बांग्लादेश में रिलीज हो रही है। इस बीच खबर है कि फिल्म की रिलीज से पहले ही इसके शो हाउसफुल हो गए हैं।
पठान अब बांग्लादेश में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए रिलीज हो रही है। जहां इस खबर से शाहरुख खान के फैंस बहुत खुश हैं, वहीं पड़ोसी मुल्क में कुछ ऐसे भी हैं जो पठान की रिलीज का विरोध कर रहे हैं। लोगों द्वारा किए जा रहे विरोध के बीच भी पठान ने रिलीज से पहले ही बांग्लादेश में अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया है। दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश के एक नामी थिएटर में पठान के दो दिन के एडवांस टिकट्स बिक चुके हैं। मतलब साफ है फिल्म के शो हाउसफुल हो गए हैं।
इंपोर्टर और वितरक अनन्या मामून ने कहा कि विभिन्न चर्चाओं के बाद, फिल्म की रिलीज के लिए मंत्रालय से अनुमति, सेंसर की मंजूरी सहित सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। अनन्या मामून कंपनी एक्शन कट एंटरटेनमेंट से हैं और उन्होंने ही खुलासा किया है कि पठान बांग्लादेश के 41 सिनेमा हॉल में रिलीज होगी और इसके हर दिन 198 शो दिखाए जाएंगे। रिलीज के पहले दिन और दूसरे दिन के टिकट पहले ही बिक चुके हैं।
कुछ साल पहले, सलमान खान अभिनीत बॉलीवुड फिल्म वांटेड को बांग्लादेश के सिनेमा हॉल में रिलीज की गई थी। इस फिल्म को दर्शकों का ज्यादा प्यार नहीं मिला था। तब से अब तक दोबारा कोई भी भारतीय फिल्म बांग्लादेश में रिलीज नहीं हुई है। हालांकि, अब बांग्लादेशी सरकार ने फैसला किया है कि वे हर साल 10 भारतीय फिल्मों को रिलीज करेंगे। पठान ही नहीं, बल्कि सलमान खान स्टारर फिल्म किसी का भाई किसी की जान भी कुछ दिनों में बांग्लादेश में रिलीज होगी।
पठान की बात करें तो फिल्म की कहानी भारतीय एजेंट पठान की है, जो अपनी टीम के साथ देश को बचाने एक हैरतअंगेज मिशन पर जाता है। इस मिशन पर उसकी मुलाकात एक पाकिस्तानी एजेंट से होती है, जिससे वह प्यार कर बैठता है। यह किरदार दीपिका पादुकोण ने निभाया है और वहीं विलेन के रोल में जॉन अब्राहम नजर आए हैं। फिल्म में डिंपल कपाड़िया और आशुतोष राणा जैसे मंझे हुए कलाकार भी शामिल हैं। पठान ने दुनियाभर में 1000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा का कारोबार किया था।
|
मुंबई. यश राज फिल्म्स के बैनर तले इस साल रिलीज हुई एक्शन फिल्म पठान दर्शकों को बेइंतहा पसंद आई थी। फिल्म ने न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई कर सबको हैरान कर दिया था। शाहरुख खान को पूरे चार साल बाद रुपहले पर्दे पर लाने वाली इस एक्शन थ्रिलर फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था। दुनिया के कई देशों में धमाल मचाने के बाद बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान स्टारर पठान अब बारह मई को बांग्लादेश में रिलीज हो रही है। इस बीच खबर है कि फिल्म की रिलीज से पहले ही इसके शो हाउसफुल हो गए हैं। पठान अब बांग्लादेश में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए रिलीज हो रही है। जहां इस खबर से शाहरुख खान के फैंस बहुत खुश हैं, वहीं पड़ोसी मुल्क में कुछ ऐसे भी हैं जो पठान की रिलीज का विरोध कर रहे हैं। लोगों द्वारा किए जा रहे विरोध के बीच भी पठान ने रिलीज से पहले ही बांग्लादेश में अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया है। दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश के एक नामी थिएटर में पठान के दो दिन के एडवांस टिकट्स बिक चुके हैं। मतलब साफ है फिल्म के शो हाउसफुल हो गए हैं। इंपोर्टर और वितरक अनन्या मामून ने कहा कि विभिन्न चर्चाओं के बाद, फिल्म की रिलीज के लिए मंत्रालय से अनुमति, सेंसर की मंजूरी सहित सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। अनन्या मामून कंपनी एक्शन कट एंटरटेनमेंट से हैं और उन्होंने ही खुलासा किया है कि पठान बांग्लादेश के इकतालीस सिनेमा हॉल में रिलीज होगी और इसके हर दिन एक सौ अट्ठानवे शो दिखाए जाएंगे। रिलीज के पहले दिन और दूसरे दिन के टिकट पहले ही बिक चुके हैं। कुछ साल पहले, सलमान खान अभिनीत बॉलीवुड फिल्म वांटेड को बांग्लादेश के सिनेमा हॉल में रिलीज की गई थी। इस फिल्म को दर्शकों का ज्यादा प्यार नहीं मिला था। तब से अब तक दोबारा कोई भी भारतीय फिल्म बांग्लादेश में रिलीज नहीं हुई है। हालांकि, अब बांग्लादेशी सरकार ने फैसला किया है कि वे हर साल दस भारतीय फिल्मों को रिलीज करेंगे। पठान ही नहीं, बल्कि सलमान खान स्टारर फिल्म किसी का भाई किसी की जान भी कुछ दिनों में बांग्लादेश में रिलीज होगी। पठान की बात करें तो फिल्म की कहानी भारतीय एजेंट पठान की है, जो अपनी टीम के साथ देश को बचाने एक हैरतअंगेज मिशन पर जाता है। इस मिशन पर उसकी मुलाकात एक पाकिस्तानी एजेंट से होती है, जिससे वह प्यार कर बैठता है। यह किरदार दीपिका पादुकोण ने निभाया है और वहीं विलेन के रोल में जॉन अब्राहम नजर आए हैं। फिल्म में डिंपल कपाड़िया और आशुतोष राणा जैसे मंझे हुए कलाकार भी शामिल हैं। पठान ने दुनियाभर में एक हज़ार करोड़ रुपए से भी ज्यादा का कारोबार किया था।
|
कमलनयन जी ने पत्रकारिता के माध्यम से जिस प्रकार गगानगर क्षेत्र एवं राजस्थान प्रदेश की सेवा की, उसे कभी भुलाया नही जा सकता। वे निर्भव पत्रकार के अलावा समाज सेवी सत भी थे ।
के० सी० बिश्नोई
विधायक एव अध्यक्ष, राजस्थान प्रदेश युवक काग्रेस जयपुर
श्री कमलनयन शर्मा मेरे मित्र और पुराने साथी थे । स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानी साथी वे नाते और मेरे साथ पत्रकारिता के क्षेत्र मे सहयोगी के नाते इनका बिछुडना मेरे लिए बहुत ही दुखद है ।
सूरजप्रकाश पापा अध्यक्ष राज्य स्त्रतत्रता सेनानी समिति जयपुर ।
पंडित कमलनयन को में तबसे जानता हूँ जब ये 15 16 वर्ष के थे। मैं और वे हम उम्र
थे । मुझ से वे 7-8 महीने हो बड़े थे । जीवन के किसी वाल मे वे नास्तिक भले रहे हो, मगर उनके मन के कोने मे आस्तिक्ता जरूर छिपी थी क्योंकि वे लगभग नियमित रूप से दुर्गा पाठ करते थे । हा उनकी आस्तिकता में आडम्बर व दिखावा नही था । सबसे उल्लेखनीय बात है यह है कि ईश्वर से भी अधिक विश्वास उह मानव सेवा मे था और वे इससे कभी विमुख नही हुए ।
कत्तव्य परायणता उनका दूसरा प्रमुख गुण था। अखबार में उन्होंने वही छापा जिसे उन्होने सही समझा । न तो किसी धमकी के आगे झुके और न किसी प्रलोभन के लिए अपने माग से विचलित हुए । आज के भौतिक युग मे अपने क्त्तव्य का इस प्रकार निर्विवाद भाव से पालन कर पाना बहुत कठिन है। कही न वही समझौता करना ही पड़ता है मगर कष्ट सहकर व आर्थिक विपन्नता सहकर भी उन्होने पत्रकार के अपने दायित्व को निभाया । ससार मे जो व्यक्ति व्यक्तिगत लाभ हानि से ऊपर उठ जाता है वही समाज के बारे मे सोचता है और कुछ करता है । भाई कमलनयन का व्यक्तित्व भी ऐसा ही था। तभी वे आज भी याद किये जाते हैं ।
५० रामेश्वरदत्त वैद्य
पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष व प्रमुख चिकित्सक
राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार श्री कमलनयन जी से मेरे व्यक्तिगत सम्बन्ध थे तथा
सार्वजनिक जीवन मे हमेशा ही उनका बडा योगदान रहा था ।
भवानी शकर शर्मा
महामन्त्री राजस्थान प्रदेश कांग्रेस (आई) कमेटी, जयपुर
|
कमलनयन जी ने पत्रकारिता के माध्यम से जिस प्रकार गगानगर क्षेत्र एवं राजस्थान प्रदेश की सेवा की, उसे कभी भुलाया नही जा सकता। वे निर्भव पत्रकार के अलावा समाज सेवी सत भी थे । केशून्य सीशून्य बिश्नोई विधायक एव अध्यक्ष, राजस्थान प्रदेश युवक काग्रेस जयपुर श्री कमलनयन शर्मा मेरे मित्र और पुराने साथी थे । स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानी साथी वे नाते और मेरे साथ पत्रकारिता के क्षेत्र मे सहयोगी के नाते इनका बिछुडना मेरे लिए बहुत ही दुखद है । सूरजप्रकाश पापा अध्यक्ष राज्य स्त्रतत्रता सेनानी समिति जयपुर । पंडित कमलनयन को में तबसे जानता हूँ जब ये पंद्रह सोलह वर्ष के थे। मैं और वे हम उम्र थे । मुझ से वे सात-आठ महीने हो बड़े थे । जीवन के किसी वाल मे वे नास्तिक भले रहे हो, मगर उनके मन के कोने मे आस्तिक्ता जरूर छिपी थी क्योंकि वे लगभग नियमित रूप से दुर्गा पाठ करते थे । हा उनकी आस्तिकता में आडम्बर व दिखावा नही था । सबसे उल्लेखनीय बात है यह है कि ईश्वर से भी अधिक विश्वास उह मानव सेवा मे था और वे इससे कभी विमुख नही हुए । कत्तव्य परायणता उनका दूसरा प्रमुख गुण था। अखबार में उन्होंने वही छापा जिसे उन्होने सही समझा । न तो किसी धमकी के आगे झुके और न किसी प्रलोभन के लिए अपने माग से विचलित हुए । आज के भौतिक युग मे अपने क्त्तव्य का इस प्रकार निर्विवाद भाव से पालन कर पाना बहुत कठिन है। कही न वही समझौता करना ही पड़ता है मगर कष्ट सहकर व आर्थिक विपन्नता सहकर भी उन्होने पत्रकार के अपने दायित्व को निभाया । ससार मे जो व्यक्ति व्यक्तिगत लाभ हानि से ऊपर उठ जाता है वही समाज के बारे मे सोचता है और कुछ करता है । भाई कमलनयन का व्यक्तित्व भी ऐसा ही था। तभी वे आज भी याद किये जाते हैं । पचास रामेश्वरदत्त वैद्य पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष व प्रमुख चिकित्सक राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार श्री कमलनयन जी से मेरे व्यक्तिगत सम्बन्ध थे तथा सार्वजनिक जीवन मे हमेशा ही उनका बडा योगदान रहा था । भवानी शकर शर्मा महामन्त्री राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी, जयपुर
|
१०२. महात्मा गांधी की ओर से
खानसाहब को बम्बई की बैठको मे आने के लिए साधारण सूचना मिल गई है। उनकी इच्छा आने की नही है और मैं उन्हे दबाना नही चाहता । बम्बई मे उन्हे सभाओ और समारोहो मे शरीक होने को कहा जायगा और बोलने का अनुरोध किया जायगा । मै नही चाहता कि अभी वह ऐसा करे । मै यह चाहता हू कि वह यह साल मेरे साथ बिताये । दूसरे, बीमारी के हमलो को रोकने की भी उनमे बहुत शक्ति नही है । इसलिए उन्हें सम्मिलित होने से माफ कर दोगे ?
[खानसाहब से यहां मतलब खान अब्दुल गफ्फार खां से है ]
१०३. महात्मा गांधी के नाम
[ अपनी पत्नी की कड़ी बीमारी के कारण मै अचानक जेल से रिहा कर दिया गया था । यह रिहाई थोड़े समय की थी और दरअसल दस दिन के भीतर ही में फिर जेल में पहुंचा दिया गया। अपनी रिहाई के ठीक बाद मैने यह खत गांधीजी को लिखा था।]
आनंदभवन, इलाहाबाद १३ अगस्त १९३४
छ महीने बिल्कुल अकेले रहने और कुछ भी न करने के बाद पिछले २७ घटो की चिता, उत्तेजना और भाग-दौड मे मै खो-सा गया हू । मैं बहुत थकान महसूस कर रहा हू । आधी रात गये मै यह पत्र आपको लिख रहा हू । सारे दिन लोगो की भीड़ आती रही है । मौका मिला तो आपको फिर लिखूगा, लेकिन कई महीने तक ऐसा कर भी सकूगा, इसमे मुझे शक है । इसलिए मै थोडे मे बताना चाहूंगा कि पिछले कोई पाच महीनो मे काग्रेस के जो बड़े फैसले हुए है, उनके प्रति मेरी क्या प्रतिक्रिया रही है । मेरी जान१४८
कारी के जरिये स्वभावत बहुत सीमित रहे है, लेकिन मै समझता हू कि वे इतने काफी है कि मै घटनाओ की आम धारा का बहुत-कुछ सही अदाज कर सकता है ।
जब मैने सुना कि आपने सत्याग्रह आदोलन बन्द कर दिया है, तो मुझे दु ख हुआ । पहले छोटा-सा ऐलान मुझे मिला । उसके बहुत बाद मैने आपका बयान पढा और उससे मुझे इतना जबरदस्त धक्का लगा, जितना शायद पहले कभी नही लगा होगा । सत्याग्रह - आदोलन को बद कर देने से मै अपने मन को तैयार कर सकता था, लेकिन ऐसा करने के जो कारण आपने वताये और आगे के काम के लिए जो सुझाव आपने दिये, उसने मुझे हैरत में डाल दिया । मैने अचानक और जोरो से महसूस किया, मानो मेरे भीतर की कोई चीज टूट गई, ऐसा कोई बधन टूट गया, जिसकी मेरे लिए वडी कीमत थी मैने अपनेको इस लबी-चौडी दुनिया मे भयानक रूप से अकेला महसूस किया । मैने लगभग बचपन से ही अपनेको हमेशा कुछ अकेला ही अनुभव किया है। लेकिन कुछ लगाव मुझे ताकत देते रहे है, कुछ मजबूत सहारे मुझे थामे रहे है। वह अकेलापन कभी गया तो नही, लेकिन कम होगया था पर अब मैंने अपनेको बिल्कुल अकेला समझा, ऐसा जैसे किसी रेगिस्तानी टापू पर पटक दिया गया है ।
लोगो में हालात के मुताबिक अपनेको ढालने की जबरदस्त ताकत होती है और मैने भी कुछ हद तक नये हालात के मुताबिक अपनेको बना लिया इस बारे मे मेरी भावनाओ की तेजी जो बहुत कुछ जिस्मानी दर्द बन गई थी ठडी पड गई । उसकी धार मोथरी होगई । लेकिन धक्के-पर-धक्के लगने और एक के बाद एक घटनाओ के होने से वह तेज होगई और मेरे मन और भाव नाओ को उसने चैन और आराम न लेने दिया। फिर मुझे आध्यात्मिक अकेलापन महसूस हुआ, मानो मै न सिर्फ अपने सामने से गुजरती भीड से बल्कि जिन्हे मै अपना प्यारा और नजदीकी साथी मानता था, उनसे भी बिल्कुल अजनबी हू, और उनके साथ मेरा कोई मेल नही है । इस बार का मेरा जेल में रहना मेरे ततुओ के लिए जितना ज्यादा तकलीफ देनेवाला रहा उतना पहले किसी बार का जेल जाना नही हुआ था । मै करीब-करीब यह चाहने लगा कि सभी अखबार मुझसे दूर रक्खे जाय, जिससे कि मै इन
बार-बार लगनेवाले धक्को से बच सकू ।
शरीर से मै ठीक ही रहा । जेल मे मै हमेशा ऐसा ही रहता हू । मेरे गरीर ने मेरा अच्छा साथ दिया है और वह बहुत दुर्व्यवहार और बोझ सह सकता है और यह सोचने की ढिठाई करके कि शायद मै उस भूमि के लिए, जिससे कि मेरा भाग्य बधा हुआ है, अब भी कुछ खास काम कर सकू, मै अपने जिस्म की हमेशा अच्छी तरह देखभाल करता रहा हू ।
लेकिन मैंने अक्सर यह सोचा है कि गोल सूराख मे मै चौकोर खूटी के जैसा तो कही नही हू, या घमड के बुदबुदे के मानिद तो मै नही हू, जो मेरा तिरस्कार करते समुद्र मे जहा- तहा उठ रहे थे । लेकिन घमड और गर्व की जीत हुई और उस बौद्धिक यत्र ने, जो मेरे भीतर चलता रहता है, हार मानने से इन्कार कर दिया । अगर वे आदर्श, जिन्होने मुझे काम करने को उकसाया और तूफानी मौसम मे भी उमग मे रक्खा, ठीक थे - और उनके ठीक होने का यकीन मुझमे हमेशा बढता रहा है -- तो उनकी जरूर जीत होगी, चाहे हमारी पीढी उस जीत को देखने के लिए जिदा न रहे ।
लेकिन इस साल के इन लबे और थकानेवाले महीनो मे उन आदर्शों का क्या हुआ, जबकि मै एक मौन और दूर के दर्शक की तरह अपनी लाचारी पर बेचैन था ? रुकावटो का आना और थोडे समय की हार सभी बड़े सघर्षो मे काफी आम बाते है । उनसे दु ख तो होता है, लेकिन आदमी जल्दी ही सभल जाता है। अगर उन आदर्शों की रोशनी को मद्धिम पडने से बचाया जाय और उसूलो का लगर मजबूत रहे तो सभाल जल्दी हो जाती है । लेकिन जो मैने देखा वह रुकावट और हार नही थी, बल्कि आध्यात्मिक हार थी, जो कि सबसे अधिक भयकर है । ऐसा न समझिये कि मेरा इशारा कौसिल मे प्रवेश के सवाल की ओर है । उसे मै बहुत महत्व नही देता । किन्ही हालात मे इन व्यवस्थापिका सभाओ मे खुद जाने की कल्पना कर सकता हू । लेकिन मै चाहे व्यवस्थापिका सभा में प्रवेश करके काम करू चाहे बाहर से, मै सिर्फ एक क्रांतिकारी के तौर पर काम कर सकता है, जिसका मतलब ऐसे इन्सान से है, जो कि बुनियादी और क्रांतिकारी परिवर्तन चाहता है, वह चाहे राजनैतिक हो या सामाजिक, क्योकि मुझे विश्वास होगया है कि किन्ही और तरह की तब्दीलियो से हिन्दुस्तान और दुनिया को न गाति मिल सकती
कुछ पुरानी चिठिया
है, न सतोष ।
ऐसा मैने सोचा । जाहिर है कि जो नेता बाहर काम कर रहे थे वे कुछ और ही ढंग से सोचते थे । उन्होने ऐसे जमाने की भाषा बोलना शुरू किया, जो बीत चुका था और जो असहयोग और सत्याग्रह के हमपर चढे नशे से पहले का था । कभी-कभी वे उन्ही शब्दो और मुहावरो का इस्तेमाल करते थे, लेकिन वे बेजान और बेमानी होते थे । कांग्रेस के मुखिया अचानक वे ही लोग बन बैठे, जिन्होने हमारे आगे रोढे अटकाये थे, हमे रोका था, सघर्ष से दूर रक्खा था, बल्कि हमारी बडी जरूरत के वक्त विरोधी दल के साथ सहयोग किया था । अब हमारे स्वतंत्रता के मंदिर के वे बड़े पुजारी बन बैठे, और बहुत से बहादुर सिपाही, जिन्होने युद्ध की गर्मी और धूल - मे बोझ को कधा लगाया था, मंदिर के अहाते मे घुस भी नही पाते । वे और उन-जैसे लोग अछूत और पास न आने लायक होगये थे और अगर वे अपनी आवाज बुलद करते और उन नये पुजारियो की टीका-टिप्पणी करते तो चीखकर उन्हे बैठा दिया जाता और कहा जाता कि वे लक्ष्य के प्रति विद्रोही है, क्योकि वे मंदिर के पवित्र अहाते की एकरसता को भग करते है ।
और इस तरह भारतीय स्वतंत्रता का झडा बडे आडवर और घटाटोप के साथ उन्हे सौप दिया गया, जिन्होने दरअसल दुश्मन के कहने पर, उसे तब नीचे झुकाया था, जबकि हमारी राष्ट्रीय लडाई बडे जोरो पर थी, उन लोगो को, जिन्होने घर की छतो पर चढकर यह ऐलान किया था कि वे राजनीति से नाता तोड बैठे है --क्योकि राजनीति उस समय खतरे से खाली नही थीलेकिन जो कूदकर आगे की पक्ति मे आ गये थे, क्योकि अब राजनीति मे खतरा नहीं था ।
और उनके सामने आदर्श क्या थे, जबकि वे काग्रेस और राष्ट्र की ओर से बोल रहे थे ? आदर्श के नाम पर उनके यहा एक बडी ही बेहिसाब हालत थी, जिसमे असली मुद्दो से कतराना होता, काग्रेस के राजनैतिक मकसदो तक को, जहातक उनकी हिम्मत पडती, नरम करना होता, हरेक निहित स्वार्थ के प्रति कोमल चिता प्रकट करना होता, स्वतंत्रता के माने हुए बहुत-से दुश्मनो के आगे झुकना होता, लेकिन काग्रेसी फौज के जान कुरबान करनेवाले
|
एक सौ दो. महात्मा गांधी की ओर से खानसाहब को बम्बई की बैठको मे आने के लिए साधारण सूचना मिल गई है। उनकी इच्छा आने की नही है और मैं उन्हे दबाना नही चाहता । बम्बई मे उन्हे सभाओ और समारोहो मे शरीक होने को कहा जायगा और बोलने का अनुरोध किया जायगा । मै नही चाहता कि अभी वह ऐसा करे । मै यह चाहता हू कि वह यह साल मेरे साथ बिताये । दूसरे, बीमारी के हमलो को रोकने की भी उनमे बहुत शक्ति नही है । इसलिए उन्हें सम्मिलित होने से माफ कर दोगे ? [खानसाहब से यहां मतलब खान अब्दुल गफ्फार खां से है ] एक सौ तीन. महात्मा गांधी के नाम [ अपनी पत्नी की कड़ी बीमारी के कारण मै अचानक जेल से रिहा कर दिया गया था । यह रिहाई थोड़े समय की थी और दरअसल दस दिन के भीतर ही में फिर जेल में पहुंचा दिया गया। अपनी रिहाई के ठीक बाद मैने यह खत गांधीजी को लिखा था।] आनंदभवन, इलाहाबाद तेरह अगस्त एक हज़ार नौ सौ चौंतीस छ महीने बिल्कुल अकेले रहने और कुछ भी न करने के बाद पिछले सत्ताईस घटो की चिता, उत्तेजना और भाग-दौड मे मै खो-सा गया हू । मैं बहुत थकान महसूस कर रहा हू । आधी रात गये मै यह पत्र आपको लिख रहा हू । सारे दिन लोगो की भीड़ आती रही है । मौका मिला तो आपको फिर लिखूगा, लेकिन कई महीने तक ऐसा कर भी सकूगा, इसमे मुझे शक है । इसलिए मै थोडे मे बताना चाहूंगा कि पिछले कोई पाच महीनो मे काग्रेस के जो बड़े फैसले हुए है, उनके प्रति मेरी क्या प्रतिक्रिया रही है । मेरी जानएक सौ अड़तालीस कारी के जरिये स्वभावत बहुत सीमित रहे है, लेकिन मै समझता हू कि वे इतने काफी है कि मै घटनाओ की आम धारा का बहुत-कुछ सही अदाज कर सकता है । जब मैने सुना कि आपने सत्याग्रह आदोलन बन्द कर दिया है, तो मुझे दु ख हुआ । पहले छोटा-सा ऐलान मुझे मिला । उसके बहुत बाद मैने आपका बयान पढा और उससे मुझे इतना जबरदस्त धक्का लगा, जितना शायद पहले कभी नही लगा होगा । सत्याग्रह - आदोलन को बद कर देने से मै अपने मन को तैयार कर सकता था, लेकिन ऐसा करने के जो कारण आपने वताये और आगे के काम के लिए जो सुझाव आपने दिये, उसने मुझे हैरत में डाल दिया । मैने अचानक और जोरो से महसूस किया, मानो मेरे भीतर की कोई चीज टूट गई, ऐसा कोई बधन टूट गया, जिसकी मेरे लिए वडी कीमत थी मैने अपनेको इस लबी-चौडी दुनिया मे भयानक रूप से अकेला महसूस किया । मैने लगभग बचपन से ही अपनेको हमेशा कुछ अकेला ही अनुभव किया है। लेकिन कुछ लगाव मुझे ताकत देते रहे है, कुछ मजबूत सहारे मुझे थामे रहे है। वह अकेलापन कभी गया तो नही, लेकिन कम होगया था पर अब मैंने अपनेको बिल्कुल अकेला समझा, ऐसा जैसे किसी रेगिस्तानी टापू पर पटक दिया गया है । लोगो में हालात के मुताबिक अपनेको ढालने की जबरदस्त ताकत होती है और मैने भी कुछ हद तक नये हालात के मुताबिक अपनेको बना लिया इस बारे मे मेरी भावनाओ की तेजी जो बहुत कुछ जिस्मानी दर्द बन गई थी ठडी पड गई । उसकी धार मोथरी होगई । लेकिन धक्के-पर-धक्के लगने और एक के बाद एक घटनाओ के होने से वह तेज होगई और मेरे मन और भाव नाओ को उसने चैन और आराम न लेने दिया। फिर मुझे आध्यात्मिक अकेलापन महसूस हुआ, मानो मै न सिर्फ अपने सामने से गुजरती भीड से बल्कि जिन्हे मै अपना प्यारा और नजदीकी साथी मानता था, उनसे भी बिल्कुल अजनबी हू, और उनके साथ मेरा कोई मेल नही है । इस बार का मेरा जेल में रहना मेरे ततुओ के लिए जितना ज्यादा तकलीफ देनेवाला रहा उतना पहले किसी बार का जेल जाना नही हुआ था । मै करीब-करीब यह चाहने लगा कि सभी अखबार मुझसे दूर रक्खे जाय, जिससे कि मै इन बार-बार लगनेवाले धक्को से बच सकू । शरीर से मै ठीक ही रहा । जेल मे मै हमेशा ऐसा ही रहता हू । मेरे गरीर ने मेरा अच्छा साथ दिया है और वह बहुत दुर्व्यवहार और बोझ सह सकता है और यह सोचने की ढिठाई करके कि शायद मै उस भूमि के लिए, जिससे कि मेरा भाग्य बधा हुआ है, अब भी कुछ खास काम कर सकू, मै अपने जिस्म की हमेशा अच्छी तरह देखभाल करता रहा हू । लेकिन मैंने अक्सर यह सोचा है कि गोल सूराख मे मै चौकोर खूटी के जैसा तो कही नही हू, या घमड के बुदबुदे के मानिद तो मै नही हू, जो मेरा तिरस्कार करते समुद्र मे जहा- तहा उठ रहे थे । लेकिन घमड और गर्व की जीत हुई और उस बौद्धिक यत्र ने, जो मेरे भीतर चलता रहता है, हार मानने से इन्कार कर दिया । अगर वे आदर्श, जिन्होने मुझे काम करने को उकसाया और तूफानी मौसम मे भी उमग मे रक्खा, ठीक थे - और उनके ठीक होने का यकीन मुझमे हमेशा बढता रहा है -- तो उनकी जरूर जीत होगी, चाहे हमारी पीढी उस जीत को देखने के लिए जिदा न रहे । लेकिन इस साल के इन लबे और थकानेवाले महीनो मे उन आदर्शों का क्या हुआ, जबकि मै एक मौन और दूर के दर्शक की तरह अपनी लाचारी पर बेचैन था ? रुकावटो का आना और थोडे समय की हार सभी बड़े सघर्षो मे काफी आम बाते है । उनसे दु ख तो होता है, लेकिन आदमी जल्दी ही सभल जाता है। अगर उन आदर्शों की रोशनी को मद्धिम पडने से बचाया जाय और उसूलो का लगर मजबूत रहे तो सभाल जल्दी हो जाती है । लेकिन जो मैने देखा वह रुकावट और हार नही थी, बल्कि आध्यात्मिक हार थी, जो कि सबसे अधिक भयकर है । ऐसा न समझिये कि मेरा इशारा कौसिल मे प्रवेश के सवाल की ओर है । उसे मै बहुत महत्व नही देता । किन्ही हालात मे इन व्यवस्थापिका सभाओ मे खुद जाने की कल्पना कर सकता हू । लेकिन मै चाहे व्यवस्थापिका सभा में प्रवेश करके काम करू चाहे बाहर से, मै सिर्फ एक क्रांतिकारी के तौर पर काम कर सकता है, जिसका मतलब ऐसे इन्सान से है, जो कि बुनियादी और क्रांतिकारी परिवर्तन चाहता है, वह चाहे राजनैतिक हो या सामाजिक, क्योकि मुझे विश्वास होगया है कि किन्ही और तरह की तब्दीलियो से हिन्दुस्तान और दुनिया को न गाति मिल सकती कुछ पुरानी चिठिया है, न सतोष । ऐसा मैने सोचा । जाहिर है कि जो नेता बाहर काम कर रहे थे वे कुछ और ही ढंग से सोचते थे । उन्होने ऐसे जमाने की भाषा बोलना शुरू किया, जो बीत चुका था और जो असहयोग और सत्याग्रह के हमपर चढे नशे से पहले का था । कभी-कभी वे उन्ही शब्दो और मुहावरो का इस्तेमाल करते थे, लेकिन वे बेजान और बेमानी होते थे । कांग्रेस के मुखिया अचानक वे ही लोग बन बैठे, जिन्होने हमारे आगे रोढे अटकाये थे, हमे रोका था, सघर्ष से दूर रक्खा था, बल्कि हमारी बडी जरूरत के वक्त विरोधी दल के साथ सहयोग किया था । अब हमारे स्वतंत्रता के मंदिर के वे बड़े पुजारी बन बैठे, और बहुत से बहादुर सिपाही, जिन्होने युद्ध की गर्मी और धूल - मे बोझ को कधा लगाया था, मंदिर के अहाते मे घुस भी नही पाते । वे और उन-जैसे लोग अछूत और पास न आने लायक होगये थे और अगर वे अपनी आवाज बुलद करते और उन नये पुजारियो की टीका-टिप्पणी करते तो चीखकर उन्हे बैठा दिया जाता और कहा जाता कि वे लक्ष्य के प्रति विद्रोही है, क्योकि वे मंदिर के पवित्र अहाते की एकरसता को भग करते है । और इस तरह भारतीय स्वतंत्रता का झडा बडे आडवर और घटाटोप के साथ उन्हे सौप दिया गया, जिन्होने दरअसल दुश्मन के कहने पर, उसे तब नीचे झुकाया था, जबकि हमारी राष्ट्रीय लडाई बडे जोरो पर थी, उन लोगो को, जिन्होने घर की छतो पर चढकर यह ऐलान किया था कि वे राजनीति से नाता तोड बैठे है --क्योकि राजनीति उस समय खतरे से खाली नही थीलेकिन जो कूदकर आगे की पक्ति मे आ गये थे, क्योकि अब राजनीति मे खतरा नहीं था । और उनके सामने आदर्श क्या थे, जबकि वे काग्रेस और राष्ट्र की ओर से बोल रहे थे ? आदर्श के नाम पर उनके यहा एक बडी ही बेहिसाब हालत थी, जिसमे असली मुद्दो से कतराना होता, काग्रेस के राजनैतिक मकसदो तक को, जहातक उनकी हिम्मत पडती, नरम करना होता, हरेक निहित स्वार्थ के प्रति कोमल चिता प्रकट करना होता, स्वतंत्रता के माने हुए बहुत-से दुश्मनो के आगे झुकना होता, लेकिन काग्रेसी फौज के जान कुरबान करनेवाले
|
शिवपुरी-भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा निर्वाचन 2013 के अंतर्गत जिले की सभी 5 विधानसभाओं क्षेत्रों 23 करैरा, 24 पोहरी, 25 शिवपुरी, 26 पिछोर, 27 कोलारस के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 नवम्बर 2013 को सभी 5 विधानसभा क्षेत्रों के लिए अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही प्रातः 11 बजे से नाम निर्देशन पत्र भरे जाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जावेगी। नाम निर्देशन पत्र नवम्बर 2013 तक प्रतिदिन प्रातः 11 से 3 बजे तक संबंधित विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग आफिसर के कार्यालय शिवपुरी, पोहरी, करैरा, पिछोर, कोलारस में जमा कराये जा सकते है।
दीपावली के बाद चार नवम्बर को स्थानीय अवकाश घोषित होने के बावजूद चार नवम्बर को भी नाम निर्देश पत्र जमा कराये जा सकेगे। नाम निर्देशन पत्रों की जांच 9 नवम्बर को रिटर्निंग आफिसर स्तर पर की जावेगी। अभ्यर्थी 11 नवम्बर को नाम वापिस ले सकेगें तथा जिसके प्रत्याशियों की अंतिम सूची का प्रकाशन किया जा सकेगा और अगर आवश्यक हुआ तो 25 नवम्बर को प्रातः 8 बजे से अपरान्ह 5 बजे तक मतदान कराया जावेगा।
शिवपुरी/करैरा-शिवपुरी, करैरा विधान सभा चुनाव 2013 में राजनैतिक दलों एवं उम्मीदवारों को आमसभा, जुलूस, वाहन अनुमति आदि हेतु 'सिंगल विन्डोÓ की व्यवस्था की गई है जानकारी देते हुये रिटर्निंग ऑफिसर ऐ. के. चांदिल ने बताया कि तहसील कार्यालय में स्थिति स्टेनों कक्ष पर राजनैतिक दलों व उम्मीदवारों को अनुमति हेतु कक्ष प्रभारी आर. के. कुशवाह स्टेनो जिनका मोबाईल नं0 9406584665 एवं 07493-253331 पर संपर्क कर सिंगल विन्डो पर सभी अनुमतियां प्राप्त कर सकते हैं। इस कक्ष से आमसभा, जलूस, वाहन आदि की अनुमति दी जावेगी।
|
शिवपुरी-भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा निर्वाचन दो हज़ार तेरह के अंतर्गत जिले की सभी पाँच विधानसभाओं क्षेत्रों तेईस करैरा, चौबीस पोहरी, पच्चीस शिवपुरी, छब्बीस पिछोर, सत्ताईस कोलारस के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एक नवम्बर दो हज़ार तेरह को सभी पाँच विधानसभा क्षेत्रों के लिए अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही प्रातः ग्यारह बजे से नाम निर्देशन पत्र भरे जाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जावेगी। नाम निर्देशन पत्र नवम्बर दो हज़ार तेरह तक प्रतिदिन प्रातः ग्यारह से तीन बजे तक संबंधित विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग आफिसर के कार्यालय शिवपुरी, पोहरी, करैरा, पिछोर, कोलारस में जमा कराये जा सकते है। दीपावली के बाद चार नवम्बर को स्थानीय अवकाश घोषित होने के बावजूद चार नवम्बर को भी नाम निर्देश पत्र जमा कराये जा सकेगे। नाम निर्देशन पत्रों की जांच नौ नवम्बर को रिटर्निंग आफिसर स्तर पर की जावेगी। अभ्यर्थी ग्यारह नवम्बर को नाम वापिस ले सकेगें तथा जिसके प्रत्याशियों की अंतिम सूची का प्रकाशन किया जा सकेगा और अगर आवश्यक हुआ तो पच्चीस नवम्बर को प्रातः आठ बजे से अपरान्ह पाँच बजे तक मतदान कराया जावेगा। शिवपुरी/करैरा-शिवपुरी, करैरा विधान सभा चुनाव दो हज़ार तेरह में राजनैतिक दलों एवं उम्मीदवारों को आमसभा, जुलूस, वाहन अनुमति आदि हेतु 'सिंगल विन्डोÓ की व्यवस्था की गई है जानकारी देते हुये रिटर्निंग ऑफिसर ऐ. के. चांदिल ने बताया कि तहसील कार्यालय में स्थिति स्टेनों कक्ष पर राजनैतिक दलों व उम्मीदवारों को अनुमति हेतु कक्ष प्रभारी आर. के. कुशवाह स्टेनो जिनका मोबाईल नंशून्य नौ चार शून्य छः पाँच आठ चार छः छः पाँच एवं सात हज़ार चार सौ तिरानवे-दो लाख तिरेपन हज़ार तीन सौ इकतीस पर संपर्क कर सिंगल विन्डो पर सभी अनुमतियां प्राप्त कर सकते हैं। इस कक्ष से आमसभा, जलूस, वाहन आदि की अनुमति दी जावेगी।
|
हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी आईं रीम ने आईएएनएस से बात की। कम उम्र में अभिनय में आ जाने वालीं रीम खुद को ड्रामा क्वीन मानती हैं।
ड्रीम रोल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि 'बेहद' का माया का किरदार मुझे बहुत पसंद है और मैं ऐसा किरदार निभाना चाहूंगी। यह शानदार है जिस तरह की वह सनकी है लेकिन फिर भी बहुत ग्लैमरस है. . . इस किरदार ने एक छाप छोड़ी है और मुझे यह किरदार बहुत प्यारा है।
|
हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी आईं रीम ने आईएएनएस से बात की। कम उम्र में अभिनय में आ जाने वालीं रीम खुद को ड्रामा क्वीन मानती हैं। ड्रीम रोल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि 'बेहद' का माया का किरदार मुझे बहुत पसंद है और मैं ऐसा किरदार निभाना चाहूंगी। यह शानदार है जिस तरह की वह सनकी है लेकिन फिर भी बहुत ग्लैमरस है. . . इस किरदार ने एक छाप छोड़ी है और मुझे यह किरदार बहुत प्यारा है।
|
हमने लोगों को झल्लाहट में कहते सुना है कि गाड़ी में पेट्रोल की जगह पानी डालकर चलाएं क्या? अब पानी तो नहीं लेकिन शराब डालकर गाड़ी ज़रूर चलाकर दिखाई है एक अमेरिकन इनवेंटर ने. इनका नाम काई माइकलसन. अपने अजीबोगरीब आविष्कारों के लिए मशहूर माइकलसन ने इस बार कमाल कर दिखाया है और बियर से बाइक दौड़ा दी है.
अमेरिका के मिशिगन के रहने वाले माइकलसन हमेशा ही ऐसे अजीबोगरीब आविष्कार करते रहे हैं. चाहे वो रॉकेट पावर्ड टॉयलेट हो या फिर जेट पावर्ड कॉफी पॉट. इस बार उन्होंने अपने गैरेज में लगातार काम करने के बाद 14 गैलन के पीपे में पेट्रोल की जगह बियर से चलने वाला इंजन बना लिया है. खुद वे बियर नहीं पीते हैं लेकिन उन्होंने कहा कि गैस के बढ़ते हुए दाम को देखने के बाद वे इसके ज़रिये बाइक ज़रूर चला सकते हैं. इस बाइक की रफ्तार 150 मीटर/घंटा के हिसाब से होगी, जो काफी अच्छी है.
|
हमने लोगों को झल्लाहट में कहते सुना है कि गाड़ी में पेट्रोल की जगह पानी डालकर चलाएं क्या? अब पानी तो नहीं लेकिन शराब डालकर गाड़ी ज़रूर चलाकर दिखाई है एक अमेरिकन इनवेंटर ने. इनका नाम काई माइकलसन. अपने अजीबोगरीब आविष्कारों के लिए मशहूर माइकलसन ने इस बार कमाल कर दिखाया है और बियर से बाइक दौड़ा दी है. अमेरिका के मिशिगन के रहने वाले माइकलसन हमेशा ही ऐसे अजीबोगरीब आविष्कार करते रहे हैं. चाहे वो रॉकेट पावर्ड टॉयलेट हो या फिर जेट पावर्ड कॉफी पॉट. इस बार उन्होंने अपने गैरेज में लगातार काम करने के बाद चौदह गैलन के पीपे में पेट्रोल की जगह बियर से चलने वाला इंजन बना लिया है. खुद वे बियर नहीं पीते हैं लेकिन उन्होंने कहा कि गैस के बढ़ते हुए दाम को देखने के बाद वे इसके ज़रिये बाइक ज़रूर चला सकते हैं. इस बाइक की रफ्तार एक सौ पचास मीटर/घंटा के हिसाब से होगी, जो काफी अच्छी है.
|
पानी में, शरीर वसाहीनता में है। इस वजह से, भविष्य की माताओं को मजबूत शारीरिक गतिविधि का अनुभव नहीं है यहां तक कि तैराकी के दौरान न्यूनतम गतिविधि के साथ, शरीर एक टनस में रहेगा और एक ही समय में आराम से राज्य होगा इससे कमर, पीठ और थोरैसिक क्षेत्र से भार को हटा दिया जाता है, और मांसपेशियों को मजबूत किया जाता है। पूल के नियमित दौरे के साथ, वैरिकाज़ नसों की अभिव्यक्तियां और सूजन धीरे-धीरे शून्य से आती है।
पानी में, भविष्य की मां व्यायाम कर सकते हैं,जो भूमि पर contraindicated हैं। पहले की स्थिति में एक महिला पूल की यात्रा करना शुरू कर देती है, बच्चे की प्रतीक्षा अवधि के दौरान उसका स्वास्थ्य बेहतर होगा। गर्भवती महिलाओं के लिए तैरना फार्म और स्वास्थ्य का सर्वश्रेष्ठ प्रकार का रखरखाव है।
भविष्य की मां को पसंद को गंभीरता से लेना चाहिएस्विमिंग पूल, साथ ही प्रशिक्षक की पसंद के अनुसार। यह व्यक्ति एक उच्च स्तरीय पेशेवर होना चाहिए और इस तरह के कार्य का अनुभव होना चाहिए। गर्भवती महिलाओं के साथ तैरने के बाद - एक विशेष प्रक्रिया जिसे प्रशिक्षक से विशेष प्रशिक्षण और ज्ञान की आवश्यकता होती है।
तैराकी के लिए जगह कैसे चुनें? निस्संदेह, ध्यान देना आवश्यक है कि पूल में पानी कीटाणुशोधन कैसे किया जाता है। कीटाणुशोधन की विधि भविष्य की मां के लिए सुरक्षित होना चाहिए।
क्लोरिनेटेड पानी में, महिलाओं को तैरने की सर्वोत्तम स्थिति में, स्विमिंग पूल चुनते समय ध्यान देना उचित होता है। इसमें बहने या समुद्र का पानी होना सबसे अच्छा है।
एक नियम के रूप में आधुनिक स्विमिंग पूल हैपानी कीटाणुशोधन के वैकल्पिक तरीकों से क्लोरीन नहीं है। ये सिस्टम ओजोन, पराबैंगनी पर आधारित हैं, आयनकारी पौधों या ऑक्सीजन युक्त अभिकर्मकों का उपयोग करना भी संभव है।
गर्भवती महिलाओं में एक तैराकी संस्थान में, सामान्य आगंतुकों के साथ, आपको कोज़वेन्दिसपांसेरा से स्वास्थ्य के प्रमाण पत्र के लिए जरूरी रूप से पूछना चाहिए।
तैरना बहुत फायदेमंद हैव्यक्ति के लिए, और भविष्य के पक्षपातपूर्ण महिलाओं और भ्रूण के लिए यह लाभ दोगुना है। पानी की प्रक्रियाओं के माता और उसके बच्चे के शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तो, गर्भवती महिलाओं के लिए तैराकी कितनी अच्छी है? पूल में अभ्यास करते समय, आप इस तरह के परिवर्तनों को देख सकते हैंः
जाहिर है, गर्भवती महिलाओं के लिए तैराकी उनके शरीर की सभी प्रणालियों और भविष्य के बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अच्छी है।
पूल में जाकर, न केवलशरीर और आत्मा, लेकिन प्रतिरक्षा भी बढ़ जाती है। जल प्रक्रियाओं को कड़ी मेहनत के लिए जाना जाता है, और गर्भवती महिलाएं एक अलग प्रकृति के संक्रमण के लिए कमजोर होती हैं। इस प्रकार, प्रतिरक्षा विकसित करने के लिए शरीर की अतिरिक्त उत्तेजना एक और प्लस है।
पूल में किसी भी शारीरिक गतिविधि के साथगर्भवती महिलाओं के लिए तैयारी की जा सकती है। प्रशिक्षण के लाभ और नुकसान प्रत्येक महिला की व्यक्तिगत विशेषताओं और स्वास्थ्य की स्थिति में निर्भर हो सकते हैं। यह एक नियम के रूप में, गर्भावस्था को समाप्त करने का खतरा हो सकता है। इस मामले में, महिला को बिस्तर आराम दिखाया जाएगा, और बहाली पूरी होने तक कक्षाओं को स्थगित कर दिया जाना चाहिए।
ऐसी कई बीमारियां हैं जो तैराकी के लिए contraindications हैंः
स्विमिंग पूल जाने से पहले, अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
तैराकी सबक पूरे भर में उपयोगी हैंगर्भावस्था। आप किसी भी समय पूल में अभ्यास करना शुरू कर सकते हैं, लेकिन पहले सप्ताह में इस उपयोगी प्रक्रिया को शुरू करना बेहतर है। गर्भवती महिलाओं के लिए पूल में तैरना भी शुरू करने में बहुत देर नहीं है, अगर कोई विरोधाभास नहीं है और आपका डॉक्टर आपके निर्णय के बारे में जानता है।
डॉल्फ़िन के साथ गर्भवती महिलाओं के लिए तैरना, या, जैसाइसे "गर्भवती माताओं के डॉल्फ़िन थेरेपी" भी कहा जाता है, यह एक प्रकार का ध्यान है जो भविष्य की मां के मनोवैज्ञानिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। डॉल्फ़िन उन जानवरों के लिए जाने जाते हैं जिनके पास पहले दिनों से महिलाओं में गर्भावस्था की स्थिति को पहचानने की अनूठी क्षमता होती है। वे पानी में इसका समर्थन करते हुए सावधानीपूर्वक मां का इलाज करते हैं। यह स्तनपायी पेट को कभी नहीं छूएगा और असुविधा या दर्द नहीं करेगा।
नवीनतम शोध के अनुसार डॉल्फिन थेरेपीवैज्ञानिक, उपयोगी है क्योंकि गर्भवती महिलाओं के साथ स्नान के दौरान डॉल्फ़िन अल्ट्रासाउंड संकेत उत्पन्न करते हैं, जो बदले में, मां और बच्चे पर लाभकारी प्रभाव डालते हैं। ऐसी लहरें भ्रूण में हृदय दोषों की शुरुआत को रोक सकती हैं, साथ ही भविष्य के बच्चे के विकास में कई विचलन भी रोक सकती हैं। उदाहरण के लिए, डॉल्फ़िन के "अल्ट्रासोनिक गीत" के प्रभाव में एक बच्चे में श्रवण अंगों का गठन बेहतर होता है। डॉल्फिन के साथ गर्भवती महिलाओं की तैराकी भी मां के मनोवैज्ञानिक अवस्था के लिए फायदेमंद है। चिंता कम हो जाती है, मनोदशा में सुधार होता है, मांसपेशी तनाव और सामान्य अतिवृद्धि हटा दी जाती है। भविष्य की मां अधिक शांत, आत्मविश्वास और नकारात्मक विचारों और भावनाओं से बोझ नहीं बन जाती है।
एक्वा एरोबिक्स एक पानी फिटनेस व्यायाम हैलयबद्ध संगीत के साथ। इस तरह का शारीरिक प्रशिक्षण शरीर के जन्म के लिए तैयार करने के लिए शरीर पर सबसे अच्छा भार है। एक्वा एरोबिक्स शक्ति, स्वास्थ्य और मनोदशा के प्रवाह को बढ़ावा देता है।
पानी में प्रशिक्षण करते समय, सभी मांसपेशियों का अनुभव होता हैभार, जबकि जलीय माध्यम उन्हें सुविधा प्रदान करता है। गर्भवती महिलाओं के लिए फिटनेस तैराकी में प्रकाश या हल्के वजन के साथ अभ्यास होता है, इसलिए आपको ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए।
पानी एरोबिक्स के दौरान, शरीर सक्रिय रूप सेऑक्सीजन के साथ संतृप्त है, और कार्डियक प्रणाली पूरे शरीर में रक्त फैलाने, कड़ी मेहनत करने लगती है। इस प्रकार, भ्रूण आवश्यक राशि में महत्वपूर्ण माइक्रोलेमेंट्स और ऑक्सीजन प्राप्त करता है। यह इसके उचित विकास में योगदान देता है और पैथोलॉजी की घटना को छोड़ देता है। मां की सक्रिय गतिविधि के दौरान, बच्चा भी अपने शरीर को चलाता है और मजबूत करता है।
गर्भवती महिलाओं का पालन करना चाहिएकुछ कार्यक्रम, अनुभवी कोच द्वारा ऐसी सलाह दी जाती है। पूल में गर्भवती महिलाओं के लिए तैराकी विशेष पाठ्यक्रम हो सकते हैं। इस मामले में व्यायाम उचित मिलान किया जाएगा।
पानी की सतह पर अपनी पढ़ाई शुरू करेंआसान और सरल सबक। उदाहरण के लिए, यह अभ्यास खींच सकता है। यह पक्षों और पूल की दीवार का सामना करने के द्वारा किया जाता है। सत्र के दौरान, भविष्य की मां तथाकथित अनुदैर्ध्य या अनुप्रस्थ जुड़वां पर बैठने की कोशिश करती है। इस तरह के व्यायामों को सभी नियमों के अनुसार पूर्ति की आवश्यकता नहीं है, आपको केवल अपने लिए अधिकतम आराम के साथ इसे पूरा करने की कोशिश करनी होगी।
रिम के बगल में खड़े होकर, आप बदल सकते हैंअलग-अलग पक्ष ये झुका हुआ पैर, पानी में विभिन्न स्क्वाट, तथाकथित "साइकिल" मोड़ और अन्य समान अभ्यास के साथ अभ्यास कर सकते हैं।
आराम करने की क्षमता भविष्य में मां के लिए उपयोगी होगीश्रम का समय आखिरकार, झगड़े के बीच, एक औरत को आराम करने में सक्षम होना चाहिए। इसके अलावा, प्रशिक्षण के इस पाठ्यक्रम से पीठ से तनाव मुक्त करना संभव हो जाता है। आप बस पानी पर झूठ बोल सकते हैं, अपनी बाहों को अलग-अलग दिशाओं में खींच सकते हैं, या श्वसन जिमनास्टिक के साथ अभ्यास के साथ। पानी की सतह पर झूठ बोलने और लहरों पर बहने के लिए आराम करना सीखें।
अगर पूल में अन्य गर्भवती महिलाएं हैंमहिलाओं, आप समूह सबक व्यवस्थित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप एक प्रकार का "ट्रिकल" खेल सकते हैं। सभी प्रतिभागी एक पंक्ति में खड़े हैं और अपने पैरों को चौड़ा कर देते हैं। फिर प्रत्येक भविष्य की मां बदले में एक सुधारित सुरंग के साथ तैरती है। ऐसी महिलाएं की जा सकती हैं यदि किसी महिला के पास एक उत्कृष्ट स्वास्थ्य स्थिति हो।
स्विमिंग पूल प्रशिक्षण के लिए एक उत्कृष्ट जगह हैश्वसन तंत्र। उचित श्वास के लिए व्यायाम समूह या अकेले में किया जा सकता है। आप कुछ सेकंड के लिए अपनी सांस पकड़ सकते हैं। ऐसा अभ्यास प्रसव में मदद करेगा और ऑक्सीजन के प्रवाह में देरी या कम करने की संभावना के लिए बच्चे के जीव को तैयार करेगा। ऐसी परिस्थितियां श्रम के दौरान हो सकती हैं और जन्म नहर के माध्यम से बच्चे को गुजरती हैं।
प्रत्येक अभ्यास किया या सरलगर्भवती महिलाओं के लिए तैरना सबसे अच्छा व्यायाम है। सरल अभ्यास से शुरू करना बेहतर होता है, जिसका प्रदर्शन समय की छोटी अवधि के लिए तैयार किया जाता है, धीरे-धीरे उनकी तीव्रता में वृद्धि होती है। अगर पानी में कोई भी क्रिया असुविधा का कारण बनती है, तो आपको रोकना और आराम करना चाहिए।
नियमों के अनुसार, हवा का तापमान होना चाहिएपानी के तापमान से 2-3 डिग्री ऊपर हो। जमीन पर पूल छोड़ते समय यह अनुपात बेहद आरामदायक है। इस मामले में, गर्भवती महिलाओं द्वारा तैरने के लिए पानी के तापमान संकेतक 21-26 डिग्री सेल्सियस हैं।
एक नियम के रूप में, बेसिन में पानी के अधीन हैव्यवस्थित सफाई और कीटाणुशोधन। लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए सफाई यौगिकों के कुछ सूत्र हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए, उदाहरण के लिए, गर्भावस्था के दौरान क्लोरीन युक्त contraindicated हैं, और भविष्य की मां उन्हें टालना चाहिए। पूल में जल स्वच्छता के लिए आधुनिक मिश्रण में चांदी आयनों, ऑक्सीजन यौगिकों और अन्य हानिरहित और गैर विषैले घटक होते हैं। पराबैंगनी जल शोधन के लिए भी सिस्टम हैं। कीटाणुशोधन के इस तरीके तरल की संरचना को नहीं बदलते हैं, इसलिए, आगंतुकों में एलर्जी प्रतिक्रियाएं नहीं होती हैं। उनके शरीर पर जहरीले प्रभाव नहीं होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित तैराकी प्रदान करते हैं।
मिन्स्क में, उदाहरण के लिए, प्रत्येक बेसिन स्टैंड मेंपानी की गुणवत्ता के लिए सभी मानदंड और मानकों, और इसके तापमान शासन का सख्ती से पालन किया जाता है। यही कारण है कि बेलारूस की राजधानी के बेसिन सबसे अच्छी जगह हैं, गर्भवती महिलाओं के लिए आरामदायक तैराकी प्रदान करते हैं। इस संबंध में क्रास्नोडार भी अपवाद नहीं है। शहर में, प्रत्येक पूल व्यवस्थित निगरानी सावधानी से गुजरता है।
अंत में, यह ध्यान दिया जा सकता है कि एक औरत,मां बनने की तैयारी, गर्भावस्था की अवधि में पूल जा सकती है। अपवाद भविष्य की मां के स्वास्थ्य की स्थिति और डॉक्टरों के निषेध की स्थिति में गिरावट की अवधि है। पानी पर व्यवहार के सभी नियमों का पालन करना और प्रशिक्षक द्वारा तैयार प्रशिक्षण कार्यक्रम का पालन करना, आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि एक महिला के लिए तैराकी सुरक्षित है और उसके भविष्य के बच्चे।
|
पानी में, शरीर वसाहीनता में है। इस वजह से, भविष्य की माताओं को मजबूत शारीरिक गतिविधि का अनुभव नहीं है यहां तक कि तैराकी के दौरान न्यूनतम गतिविधि के साथ, शरीर एक टनस में रहेगा और एक ही समय में आराम से राज्य होगा इससे कमर, पीठ और थोरैसिक क्षेत्र से भार को हटा दिया जाता है, और मांसपेशियों को मजबूत किया जाता है। पूल के नियमित दौरे के साथ, वैरिकाज़ नसों की अभिव्यक्तियां और सूजन धीरे-धीरे शून्य से आती है। पानी में, भविष्य की मां व्यायाम कर सकते हैं,जो भूमि पर contraindicated हैं। पहले की स्थिति में एक महिला पूल की यात्रा करना शुरू कर देती है, बच्चे की प्रतीक्षा अवधि के दौरान उसका स्वास्थ्य बेहतर होगा। गर्भवती महिलाओं के लिए तैरना फार्म और स्वास्थ्य का सर्वश्रेष्ठ प्रकार का रखरखाव है। भविष्य की मां को पसंद को गंभीरता से लेना चाहिएस्विमिंग पूल, साथ ही प्रशिक्षक की पसंद के अनुसार। यह व्यक्ति एक उच्च स्तरीय पेशेवर होना चाहिए और इस तरह के कार्य का अनुभव होना चाहिए। गर्भवती महिलाओं के साथ तैरने के बाद - एक विशेष प्रक्रिया जिसे प्रशिक्षक से विशेष प्रशिक्षण और ज्ञान की आवश्यकता होती है। तैराकी के लिए जगह कैसे चुनें? निस्संदेह, ध्यान देना आवश्यक है कि पूल में पानी कीटाणुशोधन कैसे किया जाता है। कीटाणुशोधन की विधि भविष्य की मां के लिए सुरक्षित होना चाहिए। क्लोरिनेटेड पानी में, महिलाओं को तैरने की सर्वोत्तम स्थिति में, स्विमिंग पूल चुनते समय ध्यान देना उचित होता है। इसमें बहने या समुद्र का पानी होना सबसे अच्छा है। एक नियम के रूप में आधुनिक स्विमिंग पूल हैपानी कीटाणुशोधन के वैकल्पिक तरीकों से क्लोरीन नहीं है। ये सिस्टम ओजोन, पराबैंगनी पर आधारित हैं, आयनकारी पौधों या ऑक्सीजन युक्त अभिकर्मकों का उपयोग करना भी संभव है। गर्भवती महिलाओं में एक तैराकी संस्थान में, सामान्य आगंतुकों के साथ, आपको कोज़वेन्दिसपांसेरा से स्वास्थ्य के प्रमाण पत्र के लिए जरूरी रूप से पूछना चाहिए। तैरना बहुत फायदेमंद हैव्यक्ति के लिए, और भविष्य के पक्षपातपूर्ण महिलाओं और भ्रूण के लिए यह लाभ दोगुना है। पानी की प्रक्रियाओं के माता और उसके बच्चे के शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तो, गर्भवती महिलाओं के लिए तैराकी कितनी अच्छी है? पूल में अभ्यास करते समय, आप इस तरह के परिवर्तनों को देख सकते हैंः जाहिर है, गर्भवती महिलाओं के लिए तैराकी उनके शरीर की सभी प्रणालियों और भविष्य के बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अच्छी है। पूल में जाकर, न केवलशरीर और आत्मा, लेकिन प्रतिरक्षा भी बढ़ जाती है। जल प्रक्रियाओं को कड़ी मेहनत के लिए जाना जाता है, और गर्भवती महिलाएं एक अलग प्रकृति के संक्रमण के लिए कमजोर होती हैं। इस प्रकार, प्रतिरक्षा विकसित करने के लिए शरीर की अतिरिक्त उत्तेजना एक और प्लस है। पूल में किसी भी शारीरिक गतिविधि के साथगर्भवती महिलाओं के लिए तैयारी की जा सकती है। प्रशिक्षण के लाभ और नुकसान प्रत्येक महिला की व्यक्तिगत विशेषताओं और स्वास्थ्य की स्थिति में निर्भर हो सकते हैं। यह एक नियम के रूप में, गर्भावस्था को समाप्त करने का खतरा हो सकता है। इस मामले में, महिला को बिस्तर आराम दिखाया जाएगा, और बहाली पूरी होने तक कक्षाओं को स्थगित कर दिया जाना चाहिए। ऐसी कई बीमारियां हैं जो तैराकी के लिए contraindications हैंः स्विमिंग पूल जाने से पहले, अपने डॉक्टर से परामर्श लें। तैराकी सबक पूरे भर में उपयोगी हैंगर्भावस्था। आप किसी भी समय पूल में अभ्यास करना शुरू कर सकते हैं, लेकिन पहले सप्ताह में इस उपयोगी प्रक्रिया को शुरू करना बेहतर है। गर्भवती महिलाओं के लिए पूल में तैरना भी शुरू करने में बहुत देर नहीं है, अगर कोई विरोधाभास नहीं है और आपका डॉक्टर आपके निर्णय के बारे में जानता है। डॉल्फ़िन के साथ गर्भवती महिलाओं के लिए तैरना, या, जैसाइसे "गर्भवती माताओं के डॉल्फ़िन थेरेपी" भी कहा जाता है, यह एक प्रकार का ध्यान है जो भविष्य की मां के मनोवैज्ञानिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। डॉल्फ़िन उन जानवरों के लिए जाने जाते हैं जिनके पास पहले दिनों से महिलाओं में गर्भावस्था की स्थिति को पहचानने की अनूठी क्षमता होती है। वे पानी में इसका समर्थन करते हुए सावधानीपूर्वक मां का इलाज करते हैं। यह स्तनपायी पेट को कभी नहीं छूएगा और असुविधा या दर्द नहीं करेगा। नवीनतम शोध के अनुसार डॉल्फिन थेरेपीवैज्ञानिक, उपयोगी है क्योंकि गर्भवती महिलाओं के साथ स्नान के दौरान डॉल्फ़िन अल्ट्रासाउंड संकेत उत्पन्न करते हैं, जो बदले में, मां और बच्चे पर लाभकारी प्रभाव डालते हैं। ऐसी लहरें भ्रूण में हृदय दोषों की शुरुआत को रोक सकती हैं, साथ ही भविष्य के बच्चे के विकास में कई विचलन भी रोक सकती हैं। उदाहरण के लिए, डॉल्फ़िन के "अल्ट्रासोनिक गीत" के प्रभाव में एक बच्चे में श्रवण अंगों का गठन बेहतर होता है। डॉल्फिन के साथ गर्भवती महिलाओं की तैराकी भी मां के मनोवैज्ञानिक अवस्था के लिए फायदेमंद है। चिंता कम हो जाती है, मनोदशा में सुधार होता है, मांसपेशी तनाव और सामान्य अतिवृद्धि हटा दी जाती है। भविष्य की मां अधिक शांत, आत्मविश्वास और नकारात्मक विचारों और भावनाओं से बोझ नहीं बन जाती है। एक्वा एरोबिक्स एक पानी फिटनेस व्यायाम हैलयबद्ध संगीत के साथ। इस तरह का शारीरिक प्रशिक्षण शरीर के जन्म के लिए तैयार करने के लिए शरीर पर सबसे अच्छा भार है। एक्वा एरोबिक्स शक्ति, स्वास्थ्य और मनोदशा के प्रवाह को बढ़ावा देता है। पानी में प्रशिक्षण करते समय, सभी मांसपेशियों का अनुभव होता हैभार, जबकि जलीय माध्यम उन्हें सुविधा प्रदान करता है। गर्भवती महिलाओं के लिए फिटनेस तैराकी में प्रकाश या हल्के वजन के साथ अभ्यास होता है, इसलिए आपको ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। पानी एरोबिक्स के दौरान, शरीर सक्रिय रूप सेऑक्सीजन के साथ संतृप्त है, और कार्डियक प्रणाली पूरे शरीर में रक्त फैलाने, कड़ी मेहनत करने लगती है। इस प्रकार, भ्रूण आवश्यक राशि में महत्वपूर्ण माइक्रोलेमेंट्स और ऑक्सीजन प्राप्त करता है। यह इसके उचित विकास में योगदान देता है और पैथोलॉजी की घटना को छोड़ देता है। मां की सक्रिय गतिविधि के दौरान, बच्चा भी अपने शरीर को चलाता है और मजबूत करता है। गर्भवती महिलाओं का पालन करना चाहिएकुछ कार्यक्रम, अनुभवी कोच द्वारा ऐसी सलाह दी जाती है। पूल में गर्भवती महिलाओं के लिए तैराकी विशेष पाठ्यक्रम हो सकते हैं। इस मामले में व्यायाम उचित मिलान किया जाएगा। पानी की सतह पर अपनी पढ़ाई शुरू करेंआसान और सरल सबक। उदाहरण के लिए, यह अभ्यास खींच सकता है। यह पक्षों और पूल की दीवार का सामना करने के द्वारा किया जाता है। सत्र के दौरान, भविष्य की मां तथाकथित अनुदैर्ध्य या अनुप्रस्थ जुड़वां पर बैठने की कोशिश करती है। इस तरह के व्यायामों को सभी नियमों के अनुसार पूर्ति की आवश्यकता नहीं है, आपको केवल अपने लिए अधिकतम आराम के साथ इसे पूरा करने की कोशिश करनी होगी। रिम के बगल में खड़े होकर, आप बदल सकते हैंअलग-अलग पक्ष ये झुका हुआ पैर, पानी में विभिन्न स्क्वाट, तथाकथित "साइकिल" मोड़ और अन्य समान अभ्यास के साथ अभ्यास कर सकते हैं। आराम करने की क्षमता भविष्य में मां के लिए उपयोगी होगीश्रम का समय आखिरकार, झगड़े के बीच, एक औरत को आराम करने में सक्षम होना चाहिए। इसके अलावा, प्रशिक्षण के इस पाठ्यक्रम से पीठ से तनाव मुक्त करना संभव हो जाता है। आप बस पानी पर झूठ बोल सकते हैं, अपनी बाहों को अलग-अलग दिशाओं में खींच सकते हैं, या श्वसन जिमनास्टिक के साथ अभ्यास के साथ। पानी की सतह पर झूठ बोलने और लहरों पर बहने के लिए आराम करना सीखें। अगर पूल में अन्य गर्भवती महिलाएं हैंमहिलाओं, आप समूह सबक व्यवस्थित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप एक प्रकार का "ट्रिकल" खेल सकते हैं। सभी प्रतिभागी एक पंक्ति में खड़े हैं और अपने पैरों को चौड़ा कर देते हैं। फिर प्रत्येक भविष्य की मां बदले में एक सुधारित सुरंग के साथ तैरती है। ऐसी महिलाएं की जा सकती हैं यदि किसी महिला के पास एक उत्कृष्ट स्वास्थ्य स्थिति हो। स्विमिंग पूल प्रशिक्षण के लिए एक उत्कृष्ट जगह हैश्वसन तंत्र। उचित श्वास के लिए व्यायाम समूह या अकेले में किया जा सकता है। आप कुछ सेकंड के लिए अपनी सांस पकड़ सकते हैं। ऐसा अभ्यास प्रसव में मदद करेगा और ऑक्सीजन के प्रवाह में देरी या कम करने की संभावना के लिए बच्चे के जीव को तैयार करेगा। ऐसी परिस्थितियां श्रम के दौरान हो सकती हैं और जन्म नहर के माध्यम से बच्चे को गुजरती हैं। प्रत्येक अभ्यास किया या सरलगर्भवती महिलाओं के लिए तैरना सबसे अच्छा व्यायाम है। सरल अभ्यास से शुरू करना बेहतर होता है, जिसका प्रदर्शन समय की छोटी अवधि के लिए तैयार किया जाता है, धीरे-धीरे उनकी तीव्रता में वृद्धि होती है। अगर पानी में कोई भी क्रिया असुविधा का कारण बनती है, तो आपको रोकना और आराम करना चाहिए। नियमों के अनुसार, हवा का तापमान होना चाहिएपानी के तापमान से दो-तीन डिग्री ऊपर हो। जमीन पर पूल छोड़ते समय यह अनुपात बेहद आरामदायक है। इस मामले में, गर्भवती महिलाओं द्वारा तैरने के लिए पानी के तापमान संकेतक इक्कीस-छब्बीस डिग्री सेल्सियस हैं। एक नियम के रूप में, बेसिन में पानी के अधीन हैव्यवस्थित सफाई और कीटाणुशोधन। लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए सफाई यौगिकों के कुछ सूत्र हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए, उदाहरण के लिए, गर्भावस्था के दौरान क्लोरीन युक्त contraindicated हैं, और भविष्य की मां उन्हें टालना चाहिए। पूल में जल स्वच्छता के लिए आधुनिक मिश्रण में चांदी आयनों, ऑक्सीजन यौगिकों और अन्य हानिरहित और गैर विषैले घटक होते हैं। पराबैंगनी जल शोधन के लिए भी सिस्टम हैं। कीटाणुशोधन के इस तरीके तरल की संरचना को नहीं बदलते हैं, इसलिए, आगंतुकों में एलर्जी प्रतिक्रियाएं नहीं होती हैं। उनके शरीर पर जहरीले प्रभाव नहीं होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित तैराकी प्रदान करते हैं। मिन्स्क में, उदाहरण के लिए, प्रत्येक बेसिन स्टैंड मेंपानी की गुणवत्ता के लिए सभी मानदंड और मानकों, और इसके तापमान शासन का सख्ती से पालन किया जाता है। यही कारण है कि बेलारूस की राजधानी के बेसिन सबसे अच्छी जगह हैं, गर्भवती महिलाओं के लिए आरामदायक तैराकी प्रदान करते हैं। इस संबंध में क्रास्नोडार भी अपवाद नहीं है। शहर में, प्रत्येक पूल व्यवस्थित निगरानी सावधानी से गुजरता है। अंत में, यह ध्यान दिया जा सकता है कि एक औरत,मां बनने की तैयारी, गर्भावस्था की अवधि में पूल जा सकती है। अपवाद भविष्य की मां के स्वास्थ्य की स्थिति और डॉक्टरों के निषेध की स्थिति में गिरावट की अवधि है। पानी पर व्यवहार के सभी नियमों का पालन करना और प्रशिक्षक द्वारा तैयार प्रशिक्षण कार्यक्रम का पालन करना, आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि एक महिला के लिए तैराकी सुरक्षित है और उसके भविष्य के बच्चे।
|
मुंबई। बॉलीवुड एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी कुछ ही घंटों में सात फेरे लेकर हमेशा के लिए एक दूजे के हो जाएंगे। जैसलमेर के सूर्यगढ़ पैलेस में होने वाली इस शादी के लिए फैंस बेहद एक्साइटेड हैं। शादी के वेन्यू से लेकर कियारा और सिद्धार्थ का लुक भी काफी खास होने वाला है।
बता दें कि बी-टाउन के मशहूर कपल सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी एक दूसरे को काफी वक़्त से डेट कर रहे थे। इसके बाद आज दोनों शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। हालांकि दोनों ने कभी भी अपनी शादी को लेकर मीडिया के सामने खुलकर बात नहीं की, लेकिन शादी की सभी तैयारियां हो चुकी हैं। सभी मेहमान सूर्यगढ़ पैलेस, जैसलमेर पहुंच चुके हैं और प्री-वेडिंग फंक्शन्स की भी शुरुआत हो चुकी है। वहीं संगीत की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है।
इस शादी में शामिल होने कई सितारे जैसलमेर पहुंच चुके हैं, जिनमें करण जौहर, शाहिद कपूर, उनकी पत्नी मीरा राजपूत, कियारा की फैमिली फ्रेंड जूही चावला, किआरा की खास दोस्त ईशा अंबानी और डिजाइनर मनीष मल्होत्रा शामिल हैं। कियारा-सिद्धार्थ की शादी के फंक्शन की तस्वीरों का फैंस काफी बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।
कियारा की पिंक ड्रेस का राज?
गौरतलब है कि कुछ ही देर पहले ही कियारा आडवाणी की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई है, जिसमें वह काफी एन्जॉय करती नजर आ रही हैं। यह तस्वीर प्री-वेडिंग फंक्शन की बताई जा रही है। वहीं बाद में पता चला कि यह तस्वीर पुरानी है। नई और वेडिंग फंक्शन की लेटेस्ट तस्वीरें अभी सामने नहीं आई हैं।
|
मुंबई। बॉलीवुड एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी कुछ ही घंटों में सात फेरे लेकर हमेशा के लिए एक दूजे के हो जाएंगे। जैसलमेर के सूर्यगढ़ पैलेस में होने वाली इस शादी के लिए फैंस बेहद एक्साइटेड हैं। शादी के वेन्यू से लेकर कियारा और सिद्धार्थ का लुक भी काफी खास होने वाला है। बता दें कि बी-टाउन के मशहूर कपल सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी एक दूसरे को काफी वक़्त से डेट कर रहे थे। इसके बाद आज दोनों शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। हालांकि दोनों ने कभी भी अपनी शादी को लेकर मीडिया के सामने खुलकर बात नहीं की, लेकिन शादी की सभी तैयारियां हो चुकी हैं। सभी मेहमान सूर्यगढ़ पैलेस, जैसलमेर पहुंच चुके हैं और प्री-वेडिंग फंक्शन्स की भी शुरुआत हो चुकी है। वहीं संगीत की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। इस शादी में शामिल होने कई सितारे जैसलमेर पहुंच चुके हैं, जिनमें करण जौहर, शाहिद कपूर, उनकी पत्नी मीरा राजपूत, कियारा की फैमिली फ्रेंड जूही चावला, किआरा की खास दोस्त ईशा अंबानी और डिजाइनर मनीष मल्होत्रा शामिल हैं। कियारा-सिद्धार्थ की शादी के फंक्शन की तस्वीरों का फैंस काफी बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। कियारा की पिंक ड्रेस का राज? गौरतलब है कि कुछ ही देर पहले ही कियारा आडवाणी की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई है, जिसमें वह काफी एन्जॉय करती नजर आ रही हैं। यह तस्वीर प्री-वेडिंग फंक्शन की बताई जा रही है। वहीं बाद में पता चला कि यह तस्वीर पुरानी है। नई और वेडिंग फंक्शन की लेटेस्ट तस्वीरें अभी सामने नहीं आई हैं।
|
मंडी - अालोक भारती विद्यालय कोटली के चार होनहार विद्यार्थियों ने एमबीबीएस व पोलीटेक्नीक प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। इसमें स्कूल के छात्र सुनील कुमार व धमंर्ेद्र जम्वाल का एनईईटी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मेडिकल कालेज हमीरपुर के लिए चयन हुआ है, जबकि विवेक वर्मा व देवांशु का पैट की परीक्षा पास कर पोलीटेक्नीक कालेज के लिए चयन हुआ है। छात्रों के चयन होने पर स्कूल में खुशी का माहौल है। बता दें कि इससे पूर्व स्कूल के छात्र धमंर्ेद्र जम्वाल ने बागबानी विश्व विद्यालय नौणी से बीएससी कर रहे थे और साथ ही एनईईटी परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत करके एमबीबीएस में दाखिल हुए हंै। इसके अलावा उक्त विद्यार्थी ने दसवीं कक्षा की बोर्ड कर परीक्षा में दसवां रैंक, जमा दो कक्षा में 14 रैंक सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षा में प्रथम स्थान प्र्राप्त किया है। छात्रों द्वारा सफलता प्राप्त करने पर स्कूल प्रबंधक हरि सिंह ठाकुर, प्रधानाचार्य विक्रम सिंह ठाकुर व स्टाफ ने छात्रों व अभिभावकांें को बधाई दी है।
|
मंडी - अालोक भारती विद्यालय कोटली के चार होनहार विद्यार्थियों ने एमबीबीएस व पोलीटेक्नीक प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। इसमें स्कूल के छात्र सुनील कुमार व धमंर्ेद्र जम्वाल का एनईईटी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मेडिकल कालेज हमीरपुर के लिए चयन हुआ है, जबकि विवेक वर्मा व देवांशु का पैट की परीक्षा पास कर पोलीटेक्नीक कालेज के लिए चयन हुआ है। छात्रों के चयन होने पर स्कूल में खुशी का माहौल है। बता दें कि इससे पूर्व स्कूल के छात्र धमंर्ेद्र जम्वाल ने बागबानी विश्व विद्यालय नौणी से बीएससी कर रहे थे और साथ ही एनईईटी परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत करके एमबीबीएस में दाखिल हुए हंै। इसके अलावा उक्त विद्यार्थी ने दसवीं कक्षा की बोर्ड कर परीक्षा में दसवां रैंक, जमा दो कक्षा में चौदह रैंक सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षा में प्रथम स्थान प्र्राप्त किया है। छात्रों द्वारा सफलता प्राप्त करने पर स्कूल प्रबंधक हरि सिंह ठाकुर, प्रधानाचार्य विक्रम सिंह ठाकुर व स्टाफ ने छात्रों व अभिभावकांें को बधाई दी है।
|
वाराणसी में निर्माणाधीन मकान पर बड़ा हादसा हो गया। छज्जा गिरने से चार मजदूर घायल हो गए। चारों को सदर अस्पताल में पहुंचाया गया। एक की हालत गंभीर होने पर बीएचयू ट्रामा सेंटर भेजा गया है।
हादसा कैंट थाना क्षेत्र के छावनी के सदर बाजार में हुआ है। निर्माण कार्य के दौरान छज्जा गिरने से अंदर दबे मजदूरों को स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला। घटना की सूचना के बाद मौके पर कैंट क्षेत्राधिकारी और पुलिस पहुंच गई।
जानकारी के अनुसार, छावनी के सदर बाजार में शीतला प्रसाद के मकान में निर्माण कार्य चल रहा है। इसी दौरान सोमवार की दोपहर छज्जा गिर पड़ा। इससे कार्य कर रहे चार मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।
तीन का उपचार छावनी अस्पताल में चल रहा है, जबकि एक को बीएचयू ट्रामा सेंटर में भेज दिया है। हादसे में घायल मजदूर नरायनपुर चौबेपुर के हैं। उनका नाम आदित्य (21), आकाश (16) और गौरव (20) है।
|
वाराणसी में निर्माणाधीन मकान पर बड़ा हादसा हो गया। छज्जा गिरने से चार मजदूर घायल हो गए। चारों को सदर अस्पताल में पहुंचाया गया। एक की हालत गंभीर होने पर बीएचयू ट्रामा सेंटर भेजा गया है। हादसा कैंट थाना क्षेत्र के छावनी के सदर बाजार में हुआ है। निर्माण कार्य के दौरान छज्जा गिरने से अंदर दबे मजदूरों को स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला। घटना की सूचना के बाद मौके पर कैंट क्षेत्राधिकारी और पुलिस पहुंच गई। जानकारी के अनुसार, छावनी के सदर बाजार में शीतला प्रसाद के मकान में निर्माण कार्य चल रहा है। इसी दौरान सोमवार की दोपहर छज्जा गिर पड़ा। इससे कार्य कर रहे चार मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। तीन का उपचार छावनी अस्पताल में चल रहा है, जबकि एक को बीएचयू ट्रामा सेंटर में भेज दिया है। हादसे में घायल मजदूर नरायनपुर चौबेपुर के हैं। उनका नाम आदित्य , आकाश और गौरव है।
|
अमेरिकी सिनेट में सशस्त्र सेना की समिति ने गुरूवार को नये रक्षामंत्री के रूप में जेम्स मैटिस के नाम के प्रति अपनी सहमति की घोषणा की।
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित रक्षामंत्री ने कहा है कि अमेरिका का विश्वास उसके घटकों के मध्य सुरक्षित रखने का एकमात्र मार्ग परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहना है।
प्राप्त समाचारों के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित रक्षामंत्री जेम्स मैटिस ने गुरूवार को कहा कि अमेरिका अपने घटकों के मध्य केवल उसी स्थिति में अपना विश्वास सुरक्षित कर सकता है जब वह परमाणु समझौते में अपने वचनों के प्रतिकटिबद्ध रहे।
उन्होंने बल देकर कहा कि हालिया वर्षों में विश्व में अमेरिका ने अपना विश्वास खो दिया है और इस विश्वास को वापस लाने का एकमात्र मार्ग यह है कि उनके देश को चाहिये कि वह अपने वचनों के प्रति वचनबद्ध रहे।
अमेरिकी सिनेट में सशस्त्र सेना की समिति ने गुरूवार को नये रक्षामंत्री के रूप में जेम्स मैटिस के नाम के प्रति अपनी सहमति की घोषणा की।
|
अमेरिकी सिनेट में सशस्त्र सेना की समिति ने गुरूवार को नये रक्षामंत्री के रूप में जेम्स मैटिस के नाम के प्रति अपनी सहमति की घोषणा की। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित रक्षामंत्री ने कहा है कि अमेरिका का विश्वास उसके घटकों के मध्य सुरक्षित रखने का एकमात्र मार्ग परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहना है। प्राप्त समाचारों के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित रक्षामंत्री जेम्स मैटिस ने गुरूवार को कहा कि अमेरिका अपने घटकों के मध्य केवल उसी स्थिति में अपना विश्वास सुरक्षित कर सकता है जब वह परमाणु समझौते में अपने वचनों के प्रतिकटिबद्ध रहे। उन्होंने बल देकर कहा कि हालिया वर्षों में विश्व में अमेरिका ने अपना विश्वास खो दिया है और इस विश्वास को वापस लाने का एकमात्र मार्ग यह है कि उनके देश को चाहिये कि वह अपने वचनों के प्रति वचनबद्ध रहे। अमेरिकी सिनेट में सशस्त्र सेना की समिति ने गुरूवार को नये रक्षामंत्री के रूप में जेम्स मैटिस के नाम के प्रति अपनी सहमति की घोषणा की।
|
स्वय सुसज्जित कर के क्षण में,
प्रियतम को, प्राणों के पण में, द्दमीं भेज देती हैं रण मे,
के नाते ।
'अमृत-पुत्र' बुद्ध ने नारी को सिद्धिं-मार्ग की बाधा मान कर
मानों संपूर्ण नारीत्व पर एक कलंक का टीका लगाया, किन्तु यशोधरा वह नारी नहीं है जो कलंक के टीके को अपने माथे पर हँसी-खुशी लगाए रहे। वह यह कबूल नहीं कर सकती कि केवल पुरुष ही मोक्ष का अधिकारी है, और न यही की मोक्ष गार्हस्थ्य के परे जंगल में ही मिला करता है।' ३ यहीं मे यशोधरा के मानिनो रूप का आरंभ होता है । जिस नारी ने / सुख-दुःख हर्ष-विषाद, जन्म-मरण, मंगल-श्रमंगल, संयोगवियोग, राग-रोग आदि में साथ दिया है, उसी के प्रति य अविश्वास । इसी की कलक यशोधरा के हृदय में है और स्थान-स्थान पर यही कहानी यशोधरा की वाणी में अभिव्यक्त होती है। यशोधरा के अनुसार दारी विश्व के कल्याण मे
बाधक नही, सायंक है। पुरुप की अहमन्यता ने स्त्रीत्व के
अभिमान ने यशोधरा के सम्मुख एक विषम प्रश्न प्रस्तुत कर
दिया है
मेरे श्रद्धोगि-भाव, क्या विषय-मात्र थे तेरे ?
हाँ ! अपने अचल में किसने ये अंगार बिखेरे ?
३. गुप्तजी को कारुण्य-धार। डा० धर्मेन्द्र ब्रह्मचारी शास्त्रो
एम० ए० ( त्रितिय ), डी० फिल०
|
स्वय सुसज्जित कर के क्षण में, प्रियतम को, प्राणों के पण में, द्दमीं भेज देती हैं रण मे, के नाते । 'अमृत-पुत्र' बुद्ध ने नारी को सिद्धिं-मार्ग की बाधा मान कर मानों संपूर्ण नारीत्व पर एक कलंक का टीका लगाया, किन्तु यशोधरा वह नारी नहीं है जो कलंक के टीके को अपने माथे पर हँसी-खुशी लगाए रहे। वह यह कबूल नहीं कर सकती कि केवल पुरुष ही मोक्ष का अधिकारी है, और न यही की मोक्ष गार्हस्थ्य के परे जंगल में ही मिला करता है।' तीन यहीं मे यशोधरा के मानिनो रूप का आरंभ होता है । जिस नारी ने / सुख-दुःख हर्ष-विषाद, जन्म-मरण, मंगल-श्रमंगल, संयोगवियोग, राग-रोग आदि में साथ दिया है, उसी के प्रति य अविश्वास । इसी की कलक यशोधरा के हृदय में है और स्थान-स्थान पर यही कहानी यशोधरा की वाणी में अभिव्यक्त होती है। यशोधरा के अनुसार दारी विश्व के कल्याण मे बाधक नही, सायंक है। पुरुप की अहमन्यता ने स्त्रीत्व के अभिमान ने यशोधरा के सम्मुख एक विषम प्रश्न प्रस्तुत कर दिया है मेरे श्रद्धोगि-भाव, क्या विषय-मात्र थे तेरे ? हाँ ! अपने अचल में किसने ये अंगार बिखेरे ? तीन. गुप्तजी को कारुण्य-धार। डाशून्य धर्मेन्द्र ब्रह्मचारी शास्त्रो एमशून्य एशून्य , डीशून्य फिलशून्य
|
भारतीय टीम के ओपनर बाए-हाथ के बल्लेबाज शिखर धवन एक बार फिर शानदार फॉर्म में लौटे। रविवार को मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए चौथे वनडे में धवन ने 115 गेंदो में 143 रन की आतिशी पारी खेली। उनकी पारी में 18 छक्के और 3 छक्के शामिल थे। मैच खत्म होने के बाद इस ओपनर बल्लेबाज ने कहा खराब फॉर्म ने उनकी चिंता नही बढ़ाई और वह हमेशा सकारत्मक मानसिकता के साथ प्रयास करते रहे।
धवन का शतक पानी में गया क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने चौथा वनडे 4 विकेट से अपने नाम कर लिया।
धवन ने कहा कि वह जब खराब फॉर्म से जुझ रहे थे तो उन्होने नकारत्मक सोच अपने अंदर आने ही नही दी और केवल अपने खेल पर सुधार करने पर ध्यान दे रहे थे।
ऋषभ पंत ने मोहाली वनडे मैच में दो तीन स्टंपिंग करने से चूक गए जिसकी वजह से भारत को 4 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। धवन ने कहा ऋषभ को समायोजित होने में समय लगेगा लेकिन वह निश्चित रूप से यहा पर अच्छा कर सकता है।
पांच वनडे मैचो की सीरीज में अब दोनो टीमे 2-2 से बराबरी पर है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज का निर्णायक वनडे मैच 13 तारीख को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में खेला जाएगा।
|
भारतीय टीम के ओपनर बाए-हाथ के बल्लेबाज शिखर धवन एक बार फिर शानदार फॉर्म में लौटे। रविवार को मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए चौथे वनडे में धवन ने एक सौ पंद्रह गेंदो में एक सौ तैंतालीस रन की आतिशी पारी खेली। उनकी पारी में अट्ठारह छक्के और तीन छक्के शामिल थे। मैच खत्म होने के बाद इस ओपनर बल्लेबाज ने कहा खराब फॉर्म ने उनकी चिंता नही बढ़ाई और वह हमेशा सकारत्मक मानसिकता के साथ प्रयास करते रहे। धवन का शतक पानी में गया क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने चौथा वनडे चार विकेट से अपने नाम कर लिया। धवन ने कहा कि वह जब खराब फॉर्म से जुझ रहे थे तो उन्होने नकारत्मक सोच अपने अंदर आने ही नही दी और केवल अपने खेल पर सुधार करने पर ध्यान दे रहे थे। ऋषभ पंत ने मोहाली वनडे मैच में दो तीन स्टंपिंग करने से चूक गए जिसकी वजह से भारत को चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा। धवन ने कहा ऋषभ को समायोजित होने में समय लगेगा लेकिन वह निश्चित रूप से यहा पर अच्छा कर सकता है। पांच वनडे मैचो की सीरीज में अब दोनो टीमे दो-दो से बराबरी पर है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज का निर्णायक वनडे मैच तेरह तारीख को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में खेला जाएगा।
|
यसराम और रेवत। इनमें घालनरसिंह सब से बड़े थे और इन्हीं की द्वितीय पक्षी से वीर : गवहादुर का जन्म हुआ। यालनरसिंह अपने पिता के जीवन काल में ही अपनी क्षत्रियोचित वीरता के कारण काजी पद पर नियुक्त हुए। एक दिन की बात है कि बालनरसिंह दर्बार में बैठे हुए थे। उन्हें पास के एक दीवानखाने से किसी के चीखने का शब्द सुनाई पड़ा। बालनरसिंह उस थार्त नाद को सुन कर येघड़क अपनी तलवार लिए उस दीवानखाने में घुस गए। दीवानखाने में घुसने पर उन्हें एक अत्यंत भीषण घटना दिखाई पड़ी । महा राज रणबहादुरशाह छाती में कटार खाए हुए रक्त में पड़े लोइलोहान लोट रहे थे और उनका घातक उन्हीं का वैमात्रिक भाई शेरबहादुर भागने का प्रयत्न कर रहा था। ऐसे समय पर भला बालनरसिंह से कप चुप रहा जाता, उन्होंने झपट कर शेरवहादुर की टाँग पकड़ कर उसे वहीं घर पटका और अपनी तलवार से उस पर आघात किया। पर दीवानखाने की छत बहुत ही नीची थो और तलवार छत में अटक गई, और उनका पहला वार खाली गया। जब बालनरसिंह ने शेरयहादुर पर दूसरा घार किया तो शेरबहादुर ने फुर्ती से उनकी तलवार छीन कर अलग फेंक दी और वह गिर कर में टूक टूक हो गई। फिर तो बालनरसिंह र शेरबहादुर में कुश्ती होने लगी जिसमें घलिनरसिंह ने शेरबहादुर को घर पछाड़ा और वे उसे पटक कर उसकी छाती पर चढ़ बैठे तथा
गला घोट कर वहीं उन्होंने उसे मार डाला। चालनरसिंह की इस वीरता से प्रसन्न हो महाराज रणबहादुरशाह के भरने पर उनके पुत्र महाराज गीर्वाणयुद्धविक्रमशाह ने उन्हें प्राधन काजो नियत किया ।
बालनरसिंह वीर होने के अतिरिक्त एक तपस्वी और धर्मपरायण पुरुष थे। उनका यह नित्य नियम था कि वे सूर्योदय के पहले उठते थे और बागमती नदी में स्नान कर छाती भर जल में खड़े रह कर दो घड़ी संध्या और जप किया करते थे। कठिन से कठिन जाड़े में भी वे इस नित्य नियमं को अविच्छिन रूप से सदा पालन करते थे 1
बालनरसिंह के दो स्त्रियाँ थीं । ज्येष्ठा से उनके केवल एक ही पुत्र था जिसका नाम बरनवीर था और दूसरी स्त्री से, जो थापा भीमसेन के भाई नैनसिंह की पुत्री और मातवरसिंह की वहन थी, जंगवहादुर, बंबहादुर, बद्रीनरसिंह, कृष्णबहादुर, रणोद्दीपसिंह, जगतशमशेर और धीरशमशेर सात लड़के और लक्ष्मीश्वरी और रणोद्दीपेश्वरी दो कन्याएँ थीं ।
२थालचरित्र ।
जंगवहादुर का जन्म काजी यासनरसिंह की दूसरी पत्नी के गर्भ से १८ जून सन् १८१७ को बुध के दिन हुआ। पिता ने पुत्र के जन्म पर घड़ा उत्सव मनाया और पुरोहित से उसका जातकर्म संस्कार करा कर अनेक दान पुग्य किए, सैकड़ों भूखों और ब्राह्मणों को भोजन कराया, भिक्षुकों और गरीयों को लोटे कंपल थादि घाँटे और अनेकों को कपड़े लचे दिए । बधावा यजा और कई दिन तक महफ़िल रही जिसमें यहाँ के चड़े बड़े राजकर्मचारी आमंत्रित और सम्मिलित हुए।
जन्म के छठे दिन बच्चे की छुट्टी पूजी गई और बहुत कुछ दान पुण्य किया गया । नेपाल में ज्योतिष विद्या का बड़ा महत्व है और वहाँ के लोगों की इस विद्या पर बहुत धद्धा और विश्वास है । ज्योतिषियों ने जंगवहादुर की कुंडली बना कर बालनरसिंह से कहा कि आप को यह पुत्र एक वीर पुरुष होगा और अपने भाग्य से राजा होगा। बालनरसिंह अपने पुत्र के भाग्य को सुन अत्यंत आनंदित हुए और उन्होंने ज्योतिथियों को पुष्कल दक्षिणा दे विदा किया ।
ग्यारहवें दिन सूतिका स्नान कराया गया और होनहार यच्चे का नाम वीरनरसिंह रखा गया। पर उस के कई दिन याद एक दिन जंगबहादुर के मामा जनरल मातवरसिंह श्राप
और लड़के को देख कर उन्होंने उसका नाम जंगबहादुर रक्खा और उसी दिन से यह इस नाम से प्रसिद्ध हुआ। छ महीने अन्नप्राशन संस्कार किया गया और यहाँ की रीति के अनुसार उसे अच्छे कपड़े और गहने पहना घोड़े पर चढ़ा कर घुमाया गया और बहुत कुछ दान पुण्य किया गया ।
जब जंगवहादुर तीन वर्ष का हुआ तो उसका चूडाकर्म और कर्णवेध संस्कार किया गया जिसमें राजमाता महाराणी ललितत्रिपुरसुन्दरी ने उसे सोने की कंडल प्रदान किया । पाँच चर्ष की अवस्था में बालक का विधारंभ संस्कार हुआ और गुरु के पास विद्या पढ़ने के लिये उसे बैठाया गया । गुरु ने अक्षराभ्यास कराकर संस्कृत भाषा के प्रारंभिक ग्रंथों को उसे पढ़ाया। पर बालक जंगबहादुर का जन्म पंडित होने के लिये नहीं हुआ था, प्रकृति ने उसे वीर बनने के लिये उत्पन्न किया था । यह स्वभाव से ही । खेलाड़ी था और उसका मन वीरोचित कामों में बहुत लगता था। वह बचपन ही से बड़ा ढीट, साहसी और मनचला था अतः वह पढ़ने लिखने की अपेक्षा खेल कूद में अधिक लगा रहता था।
बालक जंगवहादुर अपने पिता का अत्यंत प्यारा था, और वह प्रायः उनके साथ दर्बार में जाया करता था। जब वह आउ वर्ष का हुआ तो एक दिन की बात है कि जब वह दर अपने घर आया तो उसने देखा कि उसके पिता का
हुआ एक पेड़ में बँधा है। उसने अवसर पाकर चुपके से मोड़े को पेड़ से खोल लिया और येन केन प्रकारेण घोड़े की पीठ पर यह सवार हो गया। यह अच्छी तरह लगाम भी न पकड़ पाया था कि घोड़ा उसे ले कर येतदाशा भागा। घालक जंगवहादुर के हाथ जय लगाम न भाई तो यद उसकी गर्दन पकड़ कर चिमट गया और चारजाने पर राज जमाए बैठा रहा। घोड़ा थोड़ी दूर तक तो भागा पर अंत को अपने थान पर लौट साया और वहां चुप चाप खड़ा हो गया। बालनरसिंह ने जय इस हाल को सुना तो उसने उसकी बड़ी डाँट उपट की। इस घटना के थोड़े ही दिनों बाद उसी साल में एक दिन वह थापाथाली में अपने पिता के बाग में खेल रहा था कि अचानक उसकी दृष्टि एक साँप पर पड़ी जो एक मंदिर के पास पेड़ के नीचे बैठा था। चालक जंगबहादुर उस विषधर साँप को देख कर भागा नहीं घरन् उसने साहसपूर्वक उसके सिर को पकड़ लिया और उसे पकड़े हुए वह अपने पिता के पास दिखाने के लिये दौड़ा । साँप उसके हाथ में लपट गया पर वीर बालक उसका सिर अपनी मुट्ठी में दवाए हुए अपने पिता के पास पहुँचा । पिता बालक के इस साहस को देख बहुत डरा और उसने साँप की पूँछ पकड़ छुड़ा कर उसे मार डाला । जब जंगबहादुर दस वर्ष का था तो एक दिन वह अचानक बागमती नदी में बाढ़ के समय कूद पड़ा । नदी बड़े वेग से बहती थी और वह उसके बहाव में यह चला
और डूबने लगा। लोग उसके निकालने के लिये दौड़े श्रीर उन्होंने उसे इसते इयते निकाला।
ग्यारहवें वर्ष जंगबहादुर का यशोषयीत संस्कार किया गया और इसी साल मई १८२८ में उसका विवाह एक थापा सदार की कन्या से हुआ । इसके बाद ही उसी साल बालनरसिंह धनकुटा के दरकिम नियत हुए और विवश है। उन्हें थापाथाली से धनकुटा जाना पड़ा। बालक जंग बहादुर भी अपने पिता के साथ धनकुटा गया। उन दिनों जंगबहादुर कसरत, डैंड, मुगदर और कुश्ती में बहुत दत्त चित्त था और दाँव पेच में वह इतना बढ़ा हुआ था कि अपने से ड्योढ़े दुने तक का वह द्वंद युद्ध में चित कर देता था। धनकुटा में उसे कसरत कुश्ती के अतिरिक्त शिकार खेलने का भी अच्छा अवसर प्राप्त हुआ । यहाँ उसे कुछ युद्ध शिक्षा भी मिली और उसने गतका, फरी और धनुष वाण चलाने का भी अभ्यास किया ।
चार वर्ष बाद काजी बालनरसिंह धनकुटा से दानिलघुरा में तैनात हुए। यहाँ जंगबहादुर को शस्त्र प्रयोगप्रणाली की उचित शिक्षा दी गई और उसे उस समय के अनुसार शांकर, बाना, लेजिम और बक्शी के हाथों की शिक्षा मिली और यहाँ उसे बंदूक चलाने और निशाना लगाने का
भी अभ्यास कराया गया ।
यहाँ दानिलघुरा में जंगबहादुर सेना में भरती
हुआ ।
उस समय उसकी अवस्था केवल सेलिह, घर्ष की थी पर थोड़े ही दिनों के अभ्यास में यह निशाना भारने में इतना कुशल हो गया कि चाँदमारी में उसने प्रथम श्रेणी का पुर स्कार प्राप्त किया। वह निशाना लगाने का बड़ा व्यसनी था और प्रायः ढालू स्थान में ऊपर से चक्र लुढ़का कर उस पर दहने बाएँ आगे पीछे सब ओर से गोली का निशाना लगाता था । उसका लक्ष्य इतना सच्चा औौर तुला हुआ होता था कि वह उड़ती चिड़िया और दौड़ते हिरन पर येचूक निशाना
लगा सकता था ।
साल डेढ़ साल के बाद जंगवहादुर घुड़सवार सेना के लफ्टेनेंट बनाए गए और उसके बाद ही सन् १८३५ के प्रारंभ में फाजी बालनरसिंह की बदली दानिलघुरा से जुमला को दुई। जंगबहादुर भी अपने पिता के साथ जुमला गए और यहाँ उनके साथ रह कर उन्हें जुमला के प्रबंध में सहायता देते रहे ।
३- बुरे दिन ।
नेपाल एक विलक्षण राज्य है जहाँ सदा से मंत्री सब कुछ कर्ता धर्ता रहा है। महाराज रणवहादुरशाह के समय से ही मंत्री का अधिकार प्रवल होता आया था । १८३३ के पूर्व नेपाल के मंत्रिमंडल में दो प्रधान दल थे। एक तो पांडे का, दूसरा थापा लोगों का । उस समय थापा दल प्रवल था और इस दल के मुखिया भीमसेन थापा वहाँ के प्रधान मंत्री थे । महाराज राजेंद्रविक्रम ने रानी के बहकाने में आकर सन् १८३३ में अपने बूढ़े मंत्री भीमसेन थापा को अधिकार से व्युत करने की चेष्टा को, पर उनकी सब चेष्टा निरर्थक हुई। उस समय तो वे चुप रहे पर चार वर्ष बाद सन् १८३७ में उन्होंने अपने बूढ़े मंत्री को, उस पर अपने एक बच्चे को विष देने का मिथ्या दोप लगा कर, कैद कर दिया। तब उनके विरोधी काला पांडे के दल की प्रधानता हुई और चौतुरिया दल के फतेहजंगशाह को मंत्री का पद मिला । भीमसेन थापा का सब धन छीन लिया गया और उसके सम संबंधी पदों से अलग कर दिए गए। भीमसेन थापा ने यह सब कुछ सहन किया पर जब बंदीगृह में उन्हें यह धमकी दी गई कि उनकी स्त्रियों को जनसाधारण के सामने दंड दे कर उनकी इतक
इज्जत की जायगी तो गूदे थापा ने कारागार दो में मन् १८३६ में आत्मघात कर माल में दिए ।
थापा भीमसेन के कंद होने पर उनका भतीजा जनरल मातरसिंह भाग कर हिंदुस्तान में चला थापा । काज बालनरसिंह श्रीर जंगबहादुर भी थापा के संबंधी होने के कारण अपने पड़ों से च्युत किए गए। थालनरसिंह अपने पुत्र अंगपहादुर के साथ जुमला से काठमांडय आए।
यह कहने की आवश्यकता नहीं कि जंगबहादुर ने अब तक दुर्दिन का स्वप्न भी नहीं देखा था। उनका जन्म एक सम्पन्न कुल में हुआ था और उनका समय अप तक सेल कूद सैर शिकार में ही बीतता रहा। अब उन्हें निठल्ला यन घर में बैठना पड़ा । बहुधा बड़े श्रादमी जिन्हें कुछ काम काज नहीं रहता बैठे बैठे अपना समय ताश गंजीफा शतरंज आदि के खेलों में काटा करते हैं और धीरे धीरे अभ्यास पड़ते पड़ते उन्हें उन की लत पड़ जाती है। मनुष्य का स्वभाव है कि वह कुछ न कुछ किया हो करता है। जागने की अवस्था बिना काम किए भती नहीं मालूम पड़ती अतः उसे विवश हो शारीरिक वा मान. सिक व्यापारों में निरत होना पड़ता है। बुद्धिमान् का काम हूँ कि वह अपने अवयवों औरमन को अच्छे व्यापारों में लगाए रहे और उन्हें पड़े पड़े बेकार न होने दे और व्यापार भी ऐसे हां जो उसे बुराइयों से बचायें ।
इस अवस्था में जब जंगबहादुर को घेकार हो घर बैठना
पड़ा तो उन्हें जुए की लत लगी और वे दिन रात अपना समय काटने के लिये जय कुछ न रहता तो जुआ खेला करते थे । जुनी खेलनां भारतवर्ष में नया नहीं है, अति प्राचीन काल से यहाँ के लोगों में यह दुर्भ्यसन चला श्राता है। स्वयं वेदों के कितने ऐसे मंत्र हैं जिनमें यह प्रार्थना की गई है कि हम जुए का दाँव जीतें, हमारे सामने सब खेलनेवाले हार जाँय । पर विचारशील इस दुर्व्यसन की सदा निदा करते आए हैं। जिन वेदों में जुए में जीतने के लिए प्रार्थना है उन्हीं में, अक्षसूक्त में, जुप्प की खूब निंदा की गई है और खेती की प्रशंसा और उत्कृष्टता दिखलाई गई है। पुराणों में भी लिखा है कि नल युधिष्ठिरादि की दुर्दशा इसी जुए ही के कारण हुई। पर अनादि काल से अनेक महानुभावों और विचारशीलों के निंदा करने पर भी यह पिशाच हमारे देश से न गया । घृत क्रीड़ा की प्रथा किसी न किसी रूप से सभी जातियों में, चाहे वे किसी देश की क्यों न हो, पाई जाती है। पाश्चात्य सभ्य जाति के लोग इसे नियमबद्ध लाटरी के नाम से खेलते हैं, गरीब लोग इसे की ड़ियों से खेलते हैं। पर चाहे जिस रूप में हो बाजी लगाना ही जुए का उद्देश्य है । यद्यपि हिंदुस्तान में नियमित रूप से सदा जुधा, नहीं खेला जाता और साल भर में केवल कार्तिक की श्रामावास्था के लगभग दिवाली में ही लोग उसे खेलते हैं पर इन्हीं दो ढाई दिनों में सैकड़ों का बनना बिगड़ना हो जाता है।
कहते हैं कि एक दिन जंगबहादुर जुए में ११००) रुपया ऋण लेकर हार गए। उनके पास एक पैसा भी न रह गया कि वे उस ऋण को चुकाते । इनके पिता की भो आर्थिक अवस्था उस समय अच्छी न थी । उन्होंने इस वेकारी के समय यागमती पर एक पुल बनवाना प्रारंभ किया था जिसमें उनकी सारी कमाई लग गई थी। इसके अतिरिक्त उनका कुटुंब भी घड़ा था । जंगबहादुर इस रुपए के लिये पिता से भी नहीं कह सकते थे और कहने पर उन्हें मिलने की आशा भी न थी । थापाथाली में उन्हें एक पैसा नहीं मिल सकता था क्योंकि स्वयं उनके पितृव्य वीरभद्र ने, उनके पिता को एक चार, बागमती का पुल तैयार करने के लिये १५०००) कर्ज माँगने पर टका सा यह कह कर जवाब दे दिया था कि श्रापके पास थाठ पुत्रों के सिवाय और है ही क्या जिस के विते पर मैं श्राप को १५०००) कर्ज दूं ।
निदान रुपप के तगादे से तंग आकर वे थापाथाली से ललितापडन आए और वहाँ एक भैंस के व्यापारी धनसुंदर से उन्होंने ११००] कर्ज माँगे धनसुंदर ने तुरंत उन्हें रुपए निकाल कर दे दिए। चे रुपयों को अपनी पीठ पर लादकर थापाथाली थाप और उन्होंने अपना सय ऋण चुका दिया। इस बार तो काम चल गया पर उनकी श्रार्थिक अवस्था दिनों दिन होन होती गई और उनपर ऋण का भार बढ़ता गया और अंत को वे थापा थाली से भाग कर तराई में इस विचार से आप कि दो एक
जंगली हाथी फँसा कर उन्हें बेच किसी तरह अपने ऋण को चुकायें । इस प्रकार आकाश-कुसुम की आशा में वे अकेले तराई में एक छोर से दूसरी छोर तक हाथी फँसाने का आशा मैं फिरते रहे । अकेले असहाय जंगली हाथियों का पकड़ना शेखचिल्ली के स्थाल से कुछ कम न था, जिसे अंत को उन्हें कृतकार्य होने की आशा न देख छोड़ना ही पड़ा।
हाथों पकड़ने की आशा को छोड़ ये तराई से काशी 'आप । काशी साधुओं और संन्यासियों का घर है, यह भारत के सभी प्रांतों में प्रसिद्ध है। साधारण हिंदु से लेकर बड़े बड़े पंडितों तक का यह विश्वास है कि साधुओं में कितने साधु रसायन वा कीमिया जानते हैं और वे इस प्रयोग से ताँबे का सोना बनाते हैं। इस प्रकार की झूठी कथाएँ नेपाल की तराई में बहुधा सुनी जाती हैं कि अमुक साधु ने एक चुटकी राख वा एक जड़ी की पत्तियाँ निचोड़ कर ताँबे का सोना बना दिया और कितने ही लोग इन गप्पों की साक्षी भी देने को मिल जाते हैं। इस प्रकार की कथाओं से उत्तेजित हो कितने ही लोग साधुओं के पीछे अपना सर्वस्व खो डालते हैं। ऐसे लोग लाख समझाने पर भी अपने इस भ्रम को त्याग नहीं सकते। उनका दृढ़ विश्वास है कि जंगलों में ऐसी बूटियाँ और पहाड़ों में ऐसे पत्थर हैं जिनके संयोग से ताँबा वा लोहा सोना हो सकता है और ऐसी जड़ी बूढ़ी और पत्थर सिवाय
साधुओं के दूसरे लोग नहीं जानते । चे जिन पर कृपा करें उसे दे सकते हैं ।
जंगबहादुर भी इसी विचार से काठमांडव से काशी में आए थे कि काशी में साधु संन्यासी बहुत रहते हैं, उनकी सेवा सुश्रूषा से यदि उन्हें पारस पत्थर या रसायन बूटी हाथ लग जाय तो ये सोना बना उसे वेच कर अपना ऋण चुका और शेष जीवन श्राराम से काटें । पर उन्हें वहां महीनों रहने और साधु के पास इधर से उधर मारे मारे फिरने पर भी कुछ हाथ न लगा और जब वे अत्यंत निराश हो गए तो फिर उन्हें विवश हो जनवरी सन् १८३६ में काशी से नेपाल जाना पड़ा।
कई महीने तराई और हिंदुस्तान में इधर उधर मारे मारे फिरने से जंगवहादुर को द्रव्य तो न मिला पर संसार का कुछ अनुमय हो गया और वे स्वात्मावलंयन सीघ्र गए ।
नेपाल पहुँचने पर एक मास के भीतर उनको प्यारी सह धमिलो का देहांत हो गया। यह उन पर अंतिम विपत्ति थी,
मानों उनकी प्यारी उनको सारी विपत्ति अपने सिर पर उन्हें अपने वियोग का अंतिम दुःख दे स्वर्गलोक सिधारी ।
मीका में हिने हो बूर वर्तमान गमर देगा था। ये गंगा और अपने साथियों को विजाने थे
|
यसराम और रेवत। इनमें घालनरसिंह सब से बड़े थे और इन्हीं की द्वितीय पक्षी से वीर : गवहादुर का जन्म हुआ। यालनरसिंह अपने पिता के जीवन काल में ही अपनी क्षत्रियोचित वीरता के कारण काजी पद पर नियुक्त हुए। एक दिन की बात है कि बालनरसिंह दर्बार में बैठे हुए थे। उन्हें पास के एक दीवानखाने से किसी के चीखने का शब्द सुनाई पड़ा। बालनरसिंह उस थार्त नाद को सुन कर येघड़क अपनी तलवार लिए उस दीवानखाने में घुस गए। दीवानखाने में घुसने पर उन्हें एक अत्यंत भीषण घटना दिखाई पड़ी । महा राज रणबहादुरशाह छाती में कटार खाए हुए रक्त में पड़े लोइलोहान लोट रहे थे और उनका घातक उन्हीं का वैमात्रिक भाई शेरबहादुर भागने का प्रयत्न कर रहा था। ऐसे समय पर भला बालनरसिंह से कप चुप रहा जाता, उन्होंने झपट कर शेरवहादुर की टाँग पकड़ कर उसे वहीं घर पटका और अपनी तलवार से उस पर आघात किया। पर दीवानखाने की छत बहुत ही नीची थो और तलवार छत में अटक गई, और उनका पहला वार खाली गया। जब बालनरसिंह ने शेरयहादुर पर दूसरा घार किया तो शेरबहादुर ने फुर्ती से उनकी तलवार छीन कर अलग फेंक दी और वह गिर कर में टूक टूक हो गई। फिर तो बालनरसिंह र शेरबहादुर में कुश्ती होने लगी जिसमें घलिनरसिंह ने शेरबहादुर को घर पछाड़ा और वे उसे पटक कर उसकी छाती पर चढ़ बैठे तथा गला घोट कर वहीं उन्होंने उसे मार डाला। चालनरसिंह की इस वीरता से प्रसन्न हो महाराज रणबहादुरशाह के भरने पर उनके पुत्र महाराज गीर्वाणयुद्धविक्रमशाह ने उन्हें प्राधन काजो नियत किया । बालनरसिंह वीर होने के अतिरिक्त एक तपस्वी और धर्मपरायण पुरुष थे। उनका यह नित्य नियम था कि वे सूर्योदय के पहले उठते थे और बागमती नदी में स्नान कर छाती भर जल में खड़े रह कर दो घड़ी संध्या और जप किया करते थे। कठिन से कठिन जाड़े में भी वे इस नित्य नियमं को अविच्छिन रूप से सदा पालन करते थे एक बालनरसिंह के दो स्त्रियाँ थीं । ज्येष्ठा से उनके केवल एक ही पुत्र था जिसका नाम बरनवीर था और दूसरी स्त्री से, जो थापा भीमसेन के भाई नैनसिंह की पुत्री और मातवरसिंह की वहन थी, जंगवहादुर, बंबहादुर, बद्रीनरसिंह, कृष्णबहादुर, रणोद्दीपसिंह, जगतशमशेर और धीरशमशेर सात लड़के और लक्ष्मीश्वरी और रणोद्दीपेश्वरी दो कन्याएँ थीं । दोथालचरित्र । जंगवहादुर का जन्म काजी यासनरसिंह की दूसरी पत्नी के गर्भ से अट्ठारह जून सन् एक हज़ार आठ सौ सत्रह को बुध के दिन हुआ। पिता ने पुत्र के जन्म पर घड़ा उत्सव मनाया और पुरोहित से उसका जातकर्म संस्कार करा कर अनेक दान पुग्य किए, सैकड़ों भूखों और ब्राह्मणों को भोजन कराया, भिक्षुकों और गरीयों को लोटे कंपल थादि घाँटे और अनेकों को कपड़े लचे दिए । बधावा यजा और कई दिन तक महफ़िल रही जिसमें यहाँ के चड़े बड़े राजकर्मचारी आमंत्रित और सम्मिलित हुए। जन्म के छठे दिन बच्चे की छुट्टी पूजी गई और बहुत कुछ दान पुण्य किया गया । नेपाल में ज्योतिष विद्या का बड़ा महत्व है और वहाँ के लोगों की इस विद्या पर बहुत धद्धा और विश्वास है । ज्योतिषियों ने जंगवहादुर की कुंडली बना कर बालनरसिंह से कहा कि आप को यह पुत्र एक वीर पुरुष होगा और अपने भाग्य से राजा होगा। बालनरसिंह अपने पुत्र के भाग्य को सुन अत्यंत आनंदित हुए और उन्होंने ज्योतिथियों को पुष्कल दक्षिणा दे विदा किया । ग्यारहवें दिन सूतिका स्नान कराया गया और होनहार यच्चे का नाम वीरनरसिंह रखा गया। पर उस के कई दिन याद एक दिन जंगबहादुर के मामा जनरल मातवरसिंह श्राप और लड़के को देख कर उन्होंने उसका नाम जंगबहादुर रक्खा और उसी दिन से यह इस नाम से प्रसिद्ध हुआ। छ महीने अन्नप्राशन संस्कार किया गया और यहाँ की रीति के अनुसार उसे अच्छे कपड़े और गहने पहना घोड़े पर चढ़ा कर घुमाया गया और बहुत कुछ दान पुण्य किया गया । जब जंगवहादुर तीन वर्ष का हुआ तो उसका चूडाकर्म और कर्णवेध संस्कार किया गया जिसमें राजमाता महाराणी ललितत्रिपुरसुन्दरी ने उसे सोने की कंडल प्रदान किया । पाँच चर्ष की अवस्था में बालक का विधारंभ संस्कार हुआ और गुरु के पास विद्या पढ़ने के लिये उसे बैठाया गया । गुरु ने अक्षराभ्यास कराकर संस्कृत भाषा के प्रारंभिक ग्रंथों को उसे पढ़ाया। पर बालक जंगबहादुर का जन्म पंडित होने के लिये नहीं हुआ था, प्रकृति ने उसे वीर बनने के लिये उत्पन्न किया था । यह स्वभाव से ही । खेलाड़ी था और उसका मन वीरोचित कामों में बहुत लगता था। वह बचपन ही से बड़ा ढीट, साहसी और मनचला था अतः वह पढ़ने लिखने की अपेक्षा खेल कूद में अधिक लगा रहता था। बालक जंगवहादुर अपने पिता का अत्यंत प्यारा था, और वह प्रायः उनके साथ दर्बार में जाया करता था। जब वह आउ वर्ष का हुआ तो एक दिन की बात है कि जब वह दर अपने घर आया तो उसने देखा कि उसके पिता का हुआ एक पेड़ में बँधा है। उसने अवसर पाकर चुपके से मोड़े को पेड़ से खोल लिया और येन केन प्रकारेण घोड़े की पीठ पर यह सवार हो गया। यह अच्छी तरह लगाम भी न पकड़ पाया था कि घोड़ा उसे ले कर येतदाशा भागा। घालक जंगवहादुर के हाथ जय लगाम न भाई तो यद उसकी गर्दन पकड़ कर चिमट गया और चारजाने पर राज जमाए बैठा रहा। घोड़ा थोड़ी दूर तक तो भागा पर अंत को अपने थान पर लौट साया और वहां चुप चाप खड़ा हो गया। बालनरसिंह ने जय इस हाल को सुना तो उसने उसकी बड़ी डाँट उपट की। इस घटना के थोड़े ही दिनों बाद उसी साल में एक दिन वह थापाथाली में अपने पिता के बाग में खेल रहा था कि अचानक उसकी दृष्टि एक साँप पर पड़ी जो एक मंदिर के पास पेड़ के नीचे बैठा था। चालक जंगबहादुर उस विषधर साँप को देख कर भागा नहीं घरन् उसने साहसपूर्वक उसके सिर को पकड़ लिया और उसे पकड़े हुए वह अपने पिता के पास दिखाने के लिये दौड़ा । साँप उसके हाथ में लपट गया पर वीर बालक उसका सिर अपनी मुट्ठी में दवाए हुए अपने पिता के पास पहुँचा । पिता बालक के इस साहस को देख बहुत डरा और उसने साँप की पूँछ पकड़ छुड़ा कर उसे मार डाला । जब जंगबहादुर दस वर्ष का था तो एक दिन वह अचानक बागमती नदी में बाढ़ के समय कूद पड़ा । नदी बड़े वेग से बहती थी और वह उसके बहाव में यह चला और डूबने लगा। लोग उसके निकालने के लिये दौड़े श्रीर उन्होंने उसे इसते इयते निकाला। ग्यारहवें वर्ष जंगबहादुर का यशोषयीत संस्कार किया गया और इसी साल मई एक हज़ार आठ सौ अट्ठाईस में उसका विवाह एक थापा सदार की कन्या से हुआ । इसके बाद ही उसी साल बालनरसिंह धनकुटा के दरकिम नियत हुए और विवश है। उन्हें थापाथाली से धनकुटा जाना पड़ा। बालक जंग बहादुर भी अपने पिता के साथ धनकुटा गया। उन दिनों जंगबहादुर कसरत, डैंड, मुगदर और कुश्ती में बहुत दत्त चित्त था और दाँव पेच में वह इतना बढ़ा हुआ था कि अपने से ड्योढ़े दुने तक का वह द्वंद युद्ध में चित कर देता था। धनकुटा में उसे कसरत कुश्ती के अतिरिक्त शिकार खेलने का भी अच्छा अवसर प्राप्त हुआ । यहाँ उसे कुछ युद्ध शिक्षा भी मिली और उसने गतका, फरी और धनुष वाण चलाने का भी अभ्यास किया । चार वर्ष बाद काजी बालनरसिंह धनकुटा से दानिलघुरा में तैनात हुए। यहाँ जंगबहादुर को शस्त्र प्रयोगप्रणाली की उचित शिक्षा दी गई और उसे उस समय के अनुसार शांकर, बाना, लेजिम और बक्शी के हाथों की शिक्षा मिली और यहाँ उसे बंदूक चलाने और निशाना लगाने का भी अभ्यास कराया गया । यहाँ दानिलघुरा में जंगबहादुर सेना में भरती हुआ । उस समय उसकी अवस्था केवल सेलिह, घर्ष की थी पर थोड़े ही दिनों के अभ्यास में यह निशाना भारने में इतना कुशल हो गया कि चाँदमारी में उसने प्रथम श्रेणी का पुर स्कार प्राप्त किया। वह निशाना लगाने का बड़ा व्यसनी था और प्रायः ढालू स्थान में ऊपर से चक्र लुढ़का कर उस पर दहने बाएँ आगे पीछे सब ओर से गोली का निशाना लगाता था । उसका लक्ष्य इतना सच्चा औौर तुला हुआ होता था कि वह उड़ती चिड़िया और दौड़ते हिरन पर येचूक निशाना लगा सकता था । साल डेढ़ साल के बाद जंगवहादुर घुड़सवार सेना के लफ्टेनेंट बनाए गए और उसके बाद ही सन् एक हज़ार आठ सौ पैंतीस के प्रारंभ में फाजी बालनरसिंह की बदली दानिलघुरा से जुमला को दुई। जंगबहादुर भी अपने पिता के साथ जुमला गए और यहाँ उनके साथ रह कर उन्हें जुमला के प्रबंध में सहायता देते रहे । तीन- बुरे दिन । नेपाल एक विलक्षण राज्य है जहाँ सदा से मंत्री सब कुछ कर्ता धर्ता रहा है। महाराज रणवहादुरशाह के समय से ही मंत्री का अधिकार प्रवल होता आया था । एक हज़ार आठ सौ तैंतीस के पूर्व नेपाल के मंत्रिमंडल में दो प्रधान दल थे। एक तो पांडे का, दूसरा थापा लोगों का । उस समय थापा दल प्रवल था और इस दल के मुखिया भीमसेन थापा वहाँ के प्रधान मंत्री थे । महाराज राजेंद्रविक्रम ने रानी के बहकाने में आकर सन् एक हज़ार आठ सौ तैंतीस में अपने बूढ़े मंत्री भीमसेन थापा को अधिकार से व्युत करने की चेष्टा को, पर उनकी सब चेष्टा निरर्थक हुई। उस समय तो वे चुप रहे पर चार वर्ष बाद सन् एक हज़ार आठ सौ सैंतीस में उन्होंने अपने बूढ़े मंत्री को, उस पर अपने एक बच्चे को विष देने का मिथ्या दोप लगा कर, कैद कर दिया। तब उनके विरोधी काला पांडे के दल की प्रधानता हुई और चौतुरिया दल के फतेहजंगशाह को मंत्री का पद मिला । भीमसेन थापा का सब धन छीन लिया गया और उसके सम संबंधी पदों से अलग कर दिए गए। भीमसेन थापा ने यह सब कुछ सहन किया पर जब बंदीगृह में उन्हें यह धमकी दी गई कि उनकी स्त्रियों को जनसाधारण के सामने दंड दे कर उनकी इतक इज्जत की जायगी तो गूदे थापा ने कारागार दो में मन् एक हज़ार आठ सौ छत्तीस में आत्मघात कर माल में दिए । थापा भीमसेन के कंद होने पर उनका भतीजा जनरल मातरसिंह भाग कर हिंदुस्तान में चला थापा । काज बालनरसिंह श्रीर जंगबहादुर भी थापा के संबंधी होने के कारण अपने पड़ों से च्युत किए गए। थालनरसिंह अपने पुत्र अंगपहादुर के साथ जुमला से काठमांडय आए। यह कहने की आवश्यकता नहीं कि जंगबहादुर ने अब तक दुर्दिन का स्वप्न भी नहीं देखा था। उनका जन्म एक सम्पन्न कुल में हुआ था और उनका समय अप तक सेल कूद सैर शिकार में ही बीतता रहा। अब उन्हें निठल्ला यन घर में बैठना पड़ा । बहुधा बड़े श्रादमी जिन्हें कुछ काम काज नहीं रहता बैठे बैठे अपना समय ताश गंजीफा शतरंज आदि के खेलों में काटा करते हैं और धीरे धीरे अभ्यास पड़ते पड़ते उन्हें उन की लत पड़ जाती है। मनुष्य का स्वभाव है कि वह कुछ न कुछ किया हो करता है। जागने की अवस्था बिना काम किए भती नहीं मालूम पड़ती अतः उसे विवश हो शारीरिक वा मान. सिक व्यापारों में निरत होना पड़ता है। बुद्धिमान् का काम हूँ कि वह अपने अवयवों औरमन को अच्छे व्यापारों में लगाए रहे और उन्हें पड़े पड़े बेकार न होने दे और व्यापार भी ऐसे हां जो उसे बुराइयों से बचायें । इस अवस्था में जब जंगबहादुर को घेकार हो घर बैठना पड़ा तो उन्हें जुए की लत लगी और वे दिन रात अपना समय काटने के लिये जय कुछ न रहता तो जुआ खेला करते थे । जुनी खेलनां भारतवर्ष में नया नहीं है, अति प्राचीन काल से यहाँ के लोगों में यह दुर्भ्यसन चला श्राता है। स्वयं वेदों के कितने ऐसे मंत्र हैं जिनमें यह प्रार्थना की गई है कि हम जुए का दाँव जीतें, हमारे सामने सब खेलनेवाले हार जाँय । पर विचारशील इस दुर्व्यसन की सदा निदा करते आए हैं। जिन वेदों में जुए में जीतने के लिए प्रार्थना है उन्हीं में, अक्षसूक्त में, जुप्प की खूब निंदा की गई है और खेती की प्रशंसा और उत्कृष्टता दिखलाई गई है। पुराणों में भी लिखा है कि नल युधिष्ठिरादि की दुर्दशा इसी जुए ही के कारण हुई। पर अनादि काल से अनेक महानुभावों और विचारशीलों के निंदा करने पर भी यह पिशाच हमारे देश से न गया । घृत क्रीड़ा की प्रथा किसी न किसी रूप से सभी जातियों में, चाहे वे किसी देश की क्यों न हो, पाई जाती है। पाश्चात्य सभ्य जाति के लोग इसे नियमबद्ध लाटरी के नाम से खेलते हैं, गरीब लोग इसे की ड़ियों से खेलते हैं। पर चाहे जिस रूप में हो बाजी लगाना ही जुए का उद्देश्य है । यद्यपि हिंदुस्तान में नियमित रूप से सदा जुधा, नहीं खेला जाता और साल भर में केवल कार्तिक की श्रामावास्था के लगभग दिवाली में ही लोग उसे खेलते हैं पर इन्हीं दो ढाई दिनों में सैकड़ों का बनना बिगड़ना हो जाता है। कहते हैं कि एक दिन जंगबहादुर जुए में एक हज़ार एक सौ) रुपया ऋण लेकर हार गए। उनके पास एक पैसा भी न रह गया कि वे उस ऋण को चुकाते । इनके पिता की भो आर्थिक अवस्था उस समय अच्छी न थी । उन्होंने इस वेकारी के समय यागमती पर एक पुल बनवाना प्रारंभ किया था जिसमें उनकी सारी कमाई लग गई थी। इसके अतिरिक्त उनका कुटुंब भी घड़ा था । जंगबहादुर इस रुपए के लिये पिता से भी नहीं कह सकते थे और कहने पर उन्हें मिलने की आशा भी न थी । थापाथाली में उन्हें एक पैसा नहीं मिल सकता था क्योंकि स्वयं उनके पितृव्य वीरभद्र ने, उनके पिता को एक चार, बागमती का पुल तैयार करने के लिये पंद्रह हज़ार) कर्ज माँगने पर टका सा यह कह कर जवाब दे दिया था कि श्रापके पास थाठ पुत्रों के सिवाय और है ही क्या जिस के विते पर मैं श्राप को पंद्रह हज़ार) कर्ज दूं । निदान रुपप के तगादे से तंग आकर वे थापाथाली से ललितापडन आए और वहाँ एक भैंस के व्यापारी धनसुंदर से उन्होंने एक हज़ार एक सौ] कर्ज माँगे धनसुंदर ने तुरंत उन्हें रुपए निकाल कर दे दिए। चे रुपयों को अपनी पीठ पर लादकर थापाथाली थाप और उन्होंने अपना सय ऋण चुका दिया। इस बार तो काम चल गया पर उनकी श्रार्थिक अवस्था दिनों दिन होन होती गई और उनपर ऋण का भार बढ़ता गया और अंत को वे थापा थाली से भाग कर तराई में इस विचार से आप कि दो एक जंगली हाथी फँसा कर उन्हें बेच किसी तरह अपने ऋण को चुकायें । इस प्रकार आकाश-कुसुम की आशा में वे अकेले तराई में एक छोर से दूसरी छोर तक हाथी फँसाने का आशा मैं फिरते रहे । अकेले असहाय जंगली हाथियों का पकड़ना शेखचिल्ली के स्थाल से कुछ कम न था, जिसे अंत को उन्हें कृतकार्य होने की आशा न देख छोड़ना ही पड़ा। हाथों पकड़ने की आशा को छोड़ ये तराई से काशी 'आप । काशी साधुओं और संन्यासियों का घर है, यह भारत के सभी प्रांतों में प्रसिद्ध है। साधारण हिंदु से लेकर बड़े बड़े पंडितों तक का यह विश्वास है कि साधुओं में कितने साधु रसायन वा कीमिया जानते हैं और वे इस प्रयोग से ताँबे का सोना बनाते हैं। इस प्रकार की झूठी कथाएँ नेपाल की तराई में बहुधा सुनी जाती हैं कि अमुक साधु ने एक चुटकी राख वा एक जड़ी की पत्तियाँ निचोड़ कर ताँबे का सोना बना दिया और कितने ही लोग इन गप्पों की साक्षी भी देने को मिल जाते हैं। इस प्रकार की कथाओं से उत्तेजित हो कितने ही लोग साधुओं के पीछे अपना सर्वस्व खो डालते हैं। ऐसे लोग लाख समझाने पर भी अपने इस भ्रम को त्याग नहीं सकते। उनका दृढ़ विश्वास है कि जंगलों में ऐसी बूटियाँ और पहाड़ों में ऐसे पत्थर हैं जिनके संयोग से ताँबा वा लोहा सोना हो सकता है और ऐसी जड़ी बूढ़ी और पत्थर सिवाय साधुओं के दूसरे लोग नहीं जानते । चे जिन पर कृपा करें उसे दे सकते हैं । जंगबहादुर भी इसी विचार से काठमांडव से काशी में आए थे कि काशी में साधु संन्यासी बहुत रहते हैं, उनकी सेवा सुश्रूषा से यदि उन्हें पारस पत्थर या रसायन बूटी हाथ लग जाय तो ये सोना बना उसे वेच कर अपना ऋण चुका और शेष जीवन श्राराम से काटें । पर उन्हें वहां महीनों रहने और साधु के पास इधर से उधर मारे मारे फिरने पर भी कुछ हाथ न लगा और जब वे अत्यंत निराश हो गए तो फिर उन्हें विवश हो जनवरी सन् एक हज़ार आठ सौ छत्तीस में काशी से नेपाल जाना पड़ा। कई महीने तराई और हिंदुस्तान में इधर उधर मारे मारे फिरने से जंगवहादुर को द्रव्य तो न मिला पर संसार का कुछ अनुमय हो गया और वे स्वात्मावलंयन सीघ्र गए । नेपाल पहुँचने पर एक मास के भीतर उनको प्यारी सह धमिलो का देहांत हो गया। यह उन पर अंतिम विपत्ति थी, मानों उनकी प्यारी उनको सारी विपत्ति अपने सिर पर उन्हें अपने वियोग का अंतिम दुःख दे स्वर्गलोक सिधारी । मीका में हिने हो बूर वर्तमान गमर देगा था। ये गंगा और अपने साथियों को विजाने थे
|
गीता में समाजवादी आदर्श
भगवद्गीता को वेदान्त - सम्प्रदायों के प्रस्थानत्रय में से एक स्थान दिया गया है । वेदान्त के समस्त आचार्यों ने इस महान ग्रन्थ को अपने प्रस्थान बिन्दु के रूप में स्वीकार किया है। गीता का प्रमुख प्रतिपाद्य क्या है ? इस प्रश्न पर आचार्यों में विवाद है। जगदगुरू शंकराचार्य ज्ञानयोग को गीता का प्रमुख प्रतिपाय मानते हैं । आचार्य रामानुज ने गीता के प्रमुख प्रतिपाय के रूप में भक्ति-योग को सिद्ध करने का प्रयास किया है। किन्तु इन आचार्यों के प्रयास का उद्देशय केवल यह था कि गीता जैसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ का प्रयोग अपनी व्याख्यावैचित्र्य के द्वारा अपने सिद्धान्त के पक्ष में प्रमाण के रूप में कर सकें । प्रयास में वे कुछ सीमा तक ही सफल हो सकें । स्पष्ट तथ्य को प्रमाणों की अपेक्षा नहीं होती, इसीलिए गीता को नीतिशास्त्र का ग्रन्थ सिद्ध करने के लिये भी कोई प्रमाण आवश्यक नहीं है । धर्मसमूढ़ चित्त अर्जुन को कर्तव्य पालन के लिए प्रेरित करने वाले भगवद्गीता के उपदेश को नैतिक एवं सामाजिक दर्शन के अतिरिक्त अन्य कुछ समझना स्पष्ट तथ्य पर पर्दा डालना ही कहा जायेगा । गीता को धर्म अथवा दर्शन तत्वमीमांसा के साथ जोड़ने के एक दूसरे कारण का उल्लेख डॉ० राधापन ने किया है जिसके अनुसार आत्माभिव्यक्ति के लिए सम्पत्ति एवं सत्ता के महत्व को सिद्धान्ततः स्वीकार करके भी भारतीय संस्कृति में उसे व्यावहारिक महत्व नहीं दिया गया । आधुनिक युग में महात्मा गांधी का प्रयास इस दिशा में उल्लेख है । उनकी * अनासक्तियोग नामक गीता की टीका एकमात्र टीका है, जो सामाजिक
प्रणाली के निर्माण के लिए एक सबल दार्शनिक आधार बनने में समर्थ है । अपनी टीका मैं गांधी जी ने यह प्रदर्शित किया है कि अनासक्तियोग इत बात को स्वीकार करता है कि कर्म किए बिना सिद्धि नहीं मिल सकती । इसमें विशिष्टता केवल यह जुड़ जाती है, कि कर्म का सम्पादन फल को हेतु मानकर नहीं करना चाहिए । लोकमान्य तिलक ने अपने ग्रन्थ गीता रहत्य मैं गीता को कर्म-योग का प्रवर्तक स्वीकार किया है, जो इस पक्ष में एक सबल प्रमाण है कि गीता समाज के कर्मक्षेत्र से सम्बदा है, परलोक से सम्बद्ध नहीं ।
गीता में जिन सिद्धान्तों को प्रतिपादित किया गया है, उनका अवलोकन करने पर इस बात की और अधिक बल मिलता है, कि गीता वास्तव में समाज दर्शन है, धर्मदर्शन अथवा तत्वमीमांसा नहीं 12 संन्यास के विषय में कही गयी बातों को उदाहरणस्वरूप लिया जा सकता है। गीता में वर्णित संन्यास अपना अलग अर्थ रखता है, जो सामान्यतया प्रचलित अर्थ से न केवल भिन्न है, अपितु अधिकांशतः विरुद्ध भी । वास्तविक संन्यासी कर्म का नहीं, अपितु कर्मफल का त्याग करता है- यह है गीता का मत और यदि इस मत को स्वीकार किया जाय, तो संन्यासी सर्वोत्तम सामाजिक कार्यकर्ता माना जायेगा । गीता घोषणा करती है
अनाप्रितः कर्मफलं कार्य कर्म करोति यः ।
स संन्यासी व योगी वन निर ग्निर्न चाक्रियः 113
कर्मों के फल से अनासका योगी अथवा संन्यासी जो कुछ भी कार्यसम्पादन करेगा, वह समाज तथा मानवता के लिये होगा । सामाजिक
कर्मों का परित्याग सच्चा संन्यास नहीं कहा जा सकता । वह पलायन है । त्याग और त्याग के लिए बल होने पर ही सच्चा संन्यास संभव है । गीता कहती है -
काम्यानां कर्मणां न्यासः संन्यास कवयो विदुः । सर्व कर्म फलत्यागं प्रहुस्त्यागं विवक्षणाः ।।
समस्त सांसारिक दुःखों का मूल आसक्ति में निहित है, और अनासक्ति समस्त दुःखों का अकेला निदान है । सच्चा संन्यास स्वार्थपूर्ण कर्मों के त्याग में निहित है, और सच्चा त्याग समस्त कर्मों के फलों का त्याग है । अतरव कर्मफल का त्याग ही संन्यास है, ऊर्म का त्याग नहीं
गीता उपनिषद् आदि भारतीय शात्रों के साथ इस सिद्धान्त को स्वीकार करती है कि आत्मा और ब्रह्मतत्वतः एक हैं । बृहदारण्यकोपनिषद् घोषणा करती है कि वह ज्ञानी विश्व विश्वात्मा को अपनी आत्मा के रूप में देखता है। 5 गीता व्यक्ति को सम्पूर्ण मानवता के साथ जोड़ने की दिशा में एक क्रान्ति है, जो आसक्ति से उद्भूत समस्त स्वार्थी को समाप्त करके व्यक्ति को सम्पूर्ण मानवता के साथ जोड़ने का प्रयास करती है । यह सामाजिक संबंधों के मानवीकरण का आदर्श है।" यह ज्ञात हो जाने पर कि मानव जाति के समस्त दुःखों का मूलभूत कारण आसक्ति है, और अनासक्ति ही एक मात्र मार्ग है, जो दुःखों से छुटकार ।
दिला सकता है, लोग अनासपत का पालन अवश्य करेंगें, और इसके परिणामस्वरूप जिस समाज की रचना होगी वह आदर्श समाजवादी समाज होगा, इसमें कोई संदेह नहीं । विज्ञान लेखक डT०एच०एस० सिन्हा ने इस बात को बड़ी स्पष्टता के साथ स्वीकार किया है कि गीता की समस्या आसक्ति एवं लोन की शक्तियों से प्रभावित मानव की समस्या है, जो अपने सामाजिक परिप्रेक्ष्य से भटक गया है । 7 इस समस्या का एकमात्र समाधान अनासक्ति योग को उन्होंने स्वीकार किया है ।
दूसरी और आधुनिक काल में समाजवाद की पृष्ठभूमि में स्थित मूल्यों की मीमांसा भी तीव्र गति से हो रही है । मार्क्स की मान्यता अब खण्डित हो चली है, क्योंकि आधुनिक युग भौतिकवाद को मानने को तैयार नहीं है । बट्रैण्ड रसेल के एक वाक्य का उदधरण देते हुए STD 1कु01 एस0एच0 दिवेतिया ने अपने लेख • गीता और आधुनिक समाजवाद में इस बात पर जोर दिया है, कि आधुनिक विज्ञान भी जड़ द्रव्य की स्वतंत्र सत्ता को नहीं मानता 18 इसी संदर्भ में आइन्स्टाइन का प्रसिद्ध समीकरण ।। भी उद्धृत किया गया है जिसके अनुसार जड़ द्रव्य शक्ति के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है। ऐसी स्थिति में भौतिकवाद की मान्यता अर्थहीन हो जाती है। निष्कर्ष यही निकलता है कि समाजवाद का आधार भौतिकवाद नहीं हो सकता । अतः इसकी पृष्ठभूमि में स्थित अभौतिक मूल्यों को ही इसका आधार मानना पड़ेगा । ऐसे अनेक अभौतिक मूल्य गीता में प्रतिपादित हैं, जो समाजवाद को आधार प्रदान करने में समर्थ हैं ।
भौतिकवादी समाजवाद भी इन अभौतिक आधारों को मान्यता प्रदान करता है । इसकी पुष्टि स्वयं मार्क्स के विचारों के अध्ययन से होती है । मार्क्सवाद को प्रायः लोग राजनैतिक एवं अर्थशास्त्रीय सिद्धान्त स्वीकार करते हैं और मार्क्सवादी सिद्धान्तों के अन्य दृष्टिकोणों से किये गये अध्ययन को अनुचित और व्यर्थ प्रयास की भी संज्ञा देते हैं । किन्तु कुछ प्रमाण ऐसे हैं, जो सिद्ध करते हैं कि मार्क्सवाद वास्तव में नैतिकता का सिद्धान्त हैं । STO एच०एस० सिन्हा के अनुसार मार्क्सवाद मौलिक रूप से नैतिकता का सिद्धान्त है और दास - कैपिटल अर्थशास्त्रीय प्रदमवेश में नीतिशास्त्र का एक ग्रन्थ है । १
आसक्ति की आलोचना न केवल गीता ने की है, अपितु मार्क्स ने भी की है । यह वास्तव में एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि भौतिकवादी मार्क्स भी बैन्थम तथा मिल के उपयोगितावादी सिद्धान्त का विरोधी है। उसने उपयोगितावाद की आलोचना करते हुए कहा है कि सुखवादी दर्शन समाज के लाभान्वित वर्ग का दर्शन है । 10 आधुनिक युग में इसे विकसित कर बुर्जुआ उपयोगितावाद का नाम दिया गया है । सुखवादी अथवा उपयोगितावादी सिद्धान्तों की आलोचना भगवदगीता एवं मावर्त दोनों ही समान रूप से करते हैं । गीता की नैतिकता तो उसके ठीक विरोध में है, क्योंकि सुखवाद । उपयोगितावाद । जहाँ फल को ही सर्वप्रमुख एवं सर्वोच्च स्वीकार करता है, वहीं गीता उस फल को यहाँ तक कि उसकी इच्छा तक को त्याज्य मानती है, क्योंकि ये फल बन्धनकारी है तथा कर्तव्य पालन में बाधक हैं ।
मार्क्सवाद में की गई सुख्वाद उपयोगितावाद की आलो ना भी लगभग इन्हीं आधारों पर है । उसके अनुसार सुखवाद उपयोगिता अधिकतम सुख को ही अपना आदर्श मानता है, चाहे वह अपना हो अथवा अन्य का । इस आदर्श की प्राप्ति के लिए उपयोगितावादी किसी भी साधन का प्रयोग वैध बताता है । संभव है इस प्रकार के प्रयास में ऐसे साधनों का प्रयोग हो, जिनसे समाजवाद की स्थापना में बाधा पड़े । पुनश्च सुखवाद पूँजीवाद को उचित मान सकता है, यदि यह उसके लिए हितकर होऔर तथ्य तो यह है कि सुख्खादी पूँजीवाद को उचित मानते भी हैं । मार्क्सवादी उपयोगितावाद का खण्डन इस आधार पर भी करते हैं, कि यह सिद्धान्त मानवता को सुख का साधन मान लेता है, और यह निश्चय ही नैतिक पतन का घोतक है उपयोगितावाद के लिये अधिकतम लोगों का अधिकतम सुख ही साध्य है, वशेष समस्त विश्व की सत्ताएं साधन मात्र हैं। ऐसी स्थिति में मानवता के प्रति उपयोगितावाद का न्यायपूर्ण होना असंभव ही है।
मार्क्स जब लोभ को धन की लिप्सा के रूप में परिभाषित कर उसकी भर्त्सना करता है, तब वह वस्तुतः गीता के उन सिद्धान्तों के अत्यन्त निकट पहुँच जाता है जहाँ लोभ, धन, मान, मद, और परिग्रह की ही हैयता और निस्तारता प्रदर्शित की गई है । 12 विषयों के
निरन्तर चिन्तन से लिप्सा उत्पन्न होती है, लिप्सा से क्रमशः काम, क्रोध, मोह, स्मृतिविभ्रम, बुद्धिनाश और सर्वनाश स्वभावतः उत्पन्न होते हैं
|
गीता में समाजवादी आदर्श भगवद्गीता को वेदान्त - सम्प्रदायों के प्रस्थानत्रय में से एक स्थान दिया गया है । वेदान्त के समस्त आचार्यों ने इस महान ग्रन्थ को अपने प्रस्थान बिन्दु के रूप में स्वीकार किया है। गीता का प्रमुख प्रतिपाद्य क्या है ? इस प्रश्न पर आचार्यों में विवाद है। जगदगुरू शंकराचार्य ज्ञानयोग को गीता का प्रमुख प्रतिपाय मानते हैं । आचार्य रामानुज ने गीता के प्रमुख प्रतिपाय के रूप में भक्ति-योग को सिद्ध करने का प्रयास किया है। किन्तु इन आचार्यों के प्रयास का उद्देशय केवल यह था कि गीता जैसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ का प्रयोग अपनी व्याख्यावैचित्र्य के द्वारा अपने सिद्धान्त के पक्ष में प्रमाण के रूप में कर सकें । प्रयास में वे कुछ सीमा तक ही सफल हो सकें । स्पष्ट तथ्य को प्रमाणों की अपेक्षा नहीं होती, इसीलिए गीता को नीतिशास्त्र का ग्रन्थ सिद्ध करने के लिये भी कोई प्रमाण आवश्यक नहीं है । धर्मसमूढ़ चित्त अर्जुन को कर्तव्य पालन के लिए प्रेरित करने वाले भगवद्गीता के उपदेश को नैतिक एवं सामाजिक दर्शन के अतिरिक्त अन्य कुछ समझना स्पष्ट तथ्य पर पर्दा डालना ही कहा जायेगा । गीता को धर्म अथवा दर्शन तत्वमीमांसा के साथ जोड़ने के एक दूसरे कारण का उल्लेख डॉशून्य राधापन ने किया है जिसके अनुसार आत्माभिव्यक्ति के लिए सम्पत्ति एवं सत्ता के महत्व को सिद्धान्ततः स्वीकार करके भी भारतीय संस्कृति में उसे व्यावहारिक महत्व नहीं दिया गया । आधुनिक युग में महात्मा गांधी का प्रयास इस दिशा में उल्लेख है । उनकी * अनासक्तियोग नामक गीता की टीका एकमात्र टीका है, जो सामाजिक प्रणाली के निर्माण के लिए एक सबल दार्शनिक आधार बनने में समर्थ है । अपनी टीका मैं गांधी जी ने यह प्रदर्शित किया है कि अनासक्तियोग इत बात को स्वीकार करता है कि कर्म किए बिना सिद्धि नहीं मिल सकती । इसमें विशिष्टता केवल यह जुड़ जाती है, कि कर्म का सम्पादन फल को हेतु मानकर नहीं करना चाहिए । लोकमान्य तिलक ने अपने ग्रन्थ गीता रहत्य मैं गीता को कर्म-योग का प्रवर्तक स्वीकार किया है, जो इस पक्ष में एक सबल प्रमाण है कि गीता समाज के कर्मक्षेत्र से सम्बदा है, परलोक से सम्बद्ध नहीं । गीता में जिन सिद्धान्तों को प्रतिपादित किया गया है, उनका अवलोकन करने पर इस बात की और अधिक बल मिलता है, कि गीता वास्तव में समाज दर्शन है, धर्मदर्शन अथवा तत्वमीमांसा नहीं बारह संन्यास के विषय में कही गयी बातों को उदाहरणस्वरूप लिया जा सकता है। गीता में वर्णित संन्यास अपना अलग अर्थ रखता है, जो सामान्यतया प्रचलित अर्थ से न केवल भिन्न है, अपितु अधिकांशतः विरुद्ध भी । वास्तविक संन्यासी कर्म का नहीं, अपितु कर्मफल का त्याग करता है- यह है गीता का मत और यदि इस मत को स्वीकार किया जाय, तो संन्यासी सर्वोत्तम सामाजिक कार्यकर्ता माना जायेगा । गीता घोषणा करती है अनाप्रितः कर्मफलं कार्य कर्म करोति यः । स संन्यासी व योगी वन निर ग्निर्न चाक्रियः एक सौ तेरह कर्मों के फल से अनासका योगी अथवा संन्यासी जो कुछ भी कार्यसम्पादन करेगा, वह समाज तथा मानवता के लिये होगा । सामाजिक कर्मों का परित्याग सच्चा संन्यास नहीं कहा जा सकता । वह पलायन है । त्याग और त्याग के लिए बल होने पर ही सच्चा संन्यास संभव है । गीता कहती है - काम्यानां कर्मणां न्यासः संन्यास कवयो विदुः । सर्व कर्म फलत्यागं प्रहुस्त्यागं विवक्षणाः ।। समस्त सांसारिक दुःखों का मूल आसक्ति में निहित है, और अनासक्ति समस्त दुःखों का अकेला निदान है । सच्चा संन्यास स्वार्थपूर्ण कर्मों के त्याग में निहित है, और सच्चा त्याग समस्त कर्मों के फलों का त्याग है । अतरव कर्मफल का त्याग ही संन्यास है, ऊर्म का त्याग नहीं गीता उपनिषद् आदि भारतीय शात्रों के साथ इस सिद्धान्त को स्वीकार करती है कि आत्मा और ब्रह्मतत्वतः एक हैं । बृहदारण्यकोपनिषद् घोषणा करती है कि वह ज्ञानी विश्व विश्वात्मा को अपनी आत्मा के रूप में देखता है। पाँच गीता व्यक्ति को सम्पूर्ण मानवता के साथ जोड़ने की दिशा में एक क्रान्ति है, जो आसक्ति से उद्भूत समस्त स्वार्थी को समाप्त करके व्यक्ति को सम्पूर्ण मानवता के साथ जोड़ने का प्रयास करती है । यह सामाजिक संबंधों के मानवीकरण का आदर्श है।" यह ज्ञात हो जाने पर कि मानव जाति के समस्त दुःखों का मूलभूत कारण आसक्ति है, और अनासक्ति ही एक मात्र मार्ग है, जो दुःखों से छुटकार । दिला सकता है, लोग अनासपत का पालन अवश्य करेंगें, और इसके परिणामस्वरूप जिस समाज की रचना होगी वह आदर्श समाजवादी समाज होगा, इसमें कोई संदेह नहीं । विज्ञान लेखक डTशून्यएचशून्यएसशून्य सिन्हा ने इस बात को बड़ी स्पष्टता के साथ स्वीकार किया है कि गीता की समस्या आसक्ति एवं लोन की शक्तियों से प्रभावित मानव की समस्या है, जो अपने सामाजिक परिप्रेक्ष्य से भटक गया है । सात इस समस्या का एकमात्र समाधान अनासक्ति योग को उन्होंने स्वीकार किया है । दूसरी और आधुनिक काल में समाजवाद की पृष्ठभूमि में स्थित मूल्यों की मीमांसा भी तीव्र गति से हो रही है । मार्क्स की मान्यता अब खण्डित हो चली है, क्योंकि आधुनिक युग भौतिकवाद को मानने को तैयार नहीं है । बट्रैण्ड रसेल के एक वाक्य का उदधरण देते हुए STD एककुएक एसशून्यएचशून्य दिवेतिया ने अपने लेख • गीता और आधुनिक समाजवाद में इस बात पर जोर दिया है, कि आधुनिक विज्ञान भी जड़ द्रव्य की स्वतंत्र सत्ता को नहीं मानता अट्ठारह इसी संदर्भ में आइन्स्टाइन का प्रसिद्ध समीकरण ।। भी उद्धृत किया गया है जिसके अनुसार जड़ द्रव्य शक्ति के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है। ऐसी स्थिति में भौतिकवाद की मान्यता अर्थहीन हो जाती है। निष्कर्ष यही निकलता है कि समाजवाद का आधार भौतिकवाद नहीं हो सकता । अतः इसकी पृष्ठभूमि में स्थित अभौतिक मूल्यों को ही इसका आधार मानना पड़ेगा । ऐसे अनेक अभौतिक मूल्य गीता में प्रतिपादित हैं, जो समाजवाद को आधार प्रदान करने में समर्थ हैं । भौतिकवादी समाजवाद भी इन अभौतिक आधारों को मान्यता प्रदान करता है । इसकी पुष्टि स्वयं मार्क्स के विचारों के अध्ययन से होती है । मार्क्सवाद को प्रायः लोग राजनैतिक एवं अर्थशास्त्रीय सिद्धान्त स्वीकार करते हैं और मार्क्सवादी सिद्धान्तों के अन्य दृष्टिकोणों से किये गये अध्ययन को अनुचित और व्यर्थ प्रयास की भी संज्ञा देते हैं । किन्तु कुछ प्रमाण ऐसे हैं, जो सिद्ध करते हैं कि मार्क्सवाद वास्तव में नैतिकता का सिद्धान्त हैं । STO एचशून्यएसशून्य सिन्हा के अनुसार मार्क्सवाद मौलिक रूप से नैतिकता का सिद्धान्त है और दास - कैपिटल अर्थशास्त्रीय प्रदमवेश में नीतिशास्त्र का एक ग्रन्थ है । एक आसक्ति की आलोचना न केवल गीता ने की है, अपितु मार्क्स ने भी की है । यह वास्तव में एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि भौतिकवादी मार्क्स भी बैन्थम तथा मिल के उपयोगितावादी सिद्धान्त का विरोधी है। उसने उपयोगितावाद की आलोचना करते हुए कहा है कि सुखवादी दर्शन समाज के लाभान्वित वर्ग का दर्शन है । दस आधुनिक युग में इसे विकसित कर बुर्जुआ उपयोगितावाद का नाम दिया गया है । सुखवादी अथवा उपयोगितावादी सिद्धान्तों की आलोचना भगवदगीता एवं मावर्त दोनों ही समान रूप से करते हैं । गीता की नैतिकता तो उसके ठीक विरोध में है, क्योंकि सुखवाद । उपयोगितावाद । जहाँ फल को ही सर्वप्रमुख एवं सर्वोच्च स्वीकार करता है, वहीं गीता उस फल को यहाँ तक कि उसकी इच्छा तक को त्याज्य मानती है, क्योंकि ये फल बन्धनकारी है तथा कर्तव्य पालन में बाधक हैं । मार्क्सवाद में की गई सुख्वाद उपयोगितावाद की आलो ना भी लगभग इन्हीं आधारों पर है । उसके अनुसार सुखवाद उपयोगिता अधिकतम सुख को ही अपना आदर्श मानता है, चाहे वह अपना हो अथवा अन्य का । इस आदर्श की प्राप्ति के लिए उपयोगितावादी किसी भी साधन का प्रयोग वैध बताता है । संभव है इस प्रकार के प्रयास में ऐसे साधनों का प्रयोग हो, जिनसे समाजवाद की स्थापना में बाधा पड़े । पुनश्च सुखवाद पूँजीवाद को उचित मान सकता है, यदि यह उसके लिए हितकर होऔर तथ्य तो यह है कि सुख्खादी पूँजीवाद को उचित मानते भी हैं । मार्क्सवादी उपयोगितावाद का खण्डन इस आधार पर भी करते हैं, कि यह सिद्धान्त मानवता को सुख का साधन मान लेता है, और यह निश्चय ही नैतिक पतन का घोतक है उपयोगितावाद के लिये अधिकतम लोगों का अधिकतम सुख ही साध्य है, वशेष समस्त विश्व की सत्ताएं साधन मात्र हैं। ऐसी स्थिति में मानवता के प्रति उपयोगितावाद का न्यायपूर्ण होना असंभव ही है। मार्क्स जब लोभ को धन की लिप्सा के रूप में परिभाषित कर उसकी भर्त्सना करता है, तब वह वस्तुतः गीता के उन सिद्धान्तों के अत्यन्त निकट पहुँच जाता है जहाँ लोभ, धन, मान, मद, और परिग्रह की ही हैयता और निस्तारता प्रदर्शित की गई है । बारह विषयों के निरन्तर चिन्तन से लिप्सा उत्पन्न होती है, लिप्सा से क्रमशः काम, क्रोध, मोह, स्मृतिविभ्रम, बुद्धिनाश और सर्वनाश स्वभावतः उत्पन्न होते हैं
|
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर। आस्ट्रेलिया के स्टार क्रिकेटर डेविड वार्नर और स्टीव स्मिथ ने रविवार की सुबह भारत में मौजूद प्रशंसकों को दिवाली की बधाई दी। स्मिथ ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया, "भारत में मौजूद सभी दोस्तों को दिवाली की शुभकामनाएं।"
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में स्मिथ राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हैं और उन्हें भारतीय संस्कृति बहुत पसंद हैं।
वार्नर का इस शुभ अवसर पर जन्मदिन भी है और उन्होंने भी इंस्टाग्राम पर सभी को 'दिवाली की शुभकामनाएं' दी।सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हुए वार्नर ने आईपीएल में पिछले सीजन 692 रन बनाए थे।
इसके अलावा, वेस्टइंडीज के बल्लेबाज क्रिस गेल ने भी प्रशंसकों को दिवाली की बधाई दी।
|
नई दिल्ली, सत्ताईस अक्टूबर। आस्ट्रेलिया के स्टार क्रिकेटर डेविड वार्नर और स्टीव स्मिथ ने रविवार की सुबह भारत में मौजूद प्रशंसकों को दिवाली की बधाई दी। स्मिथ ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया, "भारत में मौजूद सभी दोस्तों को दिवाली की शुभकामनाएं।" इंडियन प्रीमियर लीग में स्मिथ राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हैं और उन्हें भारतीय संस्कृति बहुत पसंद हैं। वार्नर का इस शुभ अवसर पर जन्मदिन भी है और उन्होंने भी इंस्टाग्राम पर सभी को 'दिवाली की शुभकामनाएं' दी।सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हुए वार्नर ने आईपीएल में पिछले सीजन छः सौ बानवे रन बनाए थे। इसके अलावा, वेस्टइंडीज के बल्लेबाज क्रिस गेल ने भी प्रशंसकों को दिवाली की बधाई दी।
|
Quick links:
Anil Kapoor Gifts: बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर (Anupam Kher) इन दिनों अपने कई प्रोजेक्ट्स को लेकर व्यस्त हैं। इस बीच उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें एक्टर अनिल कपूर ( Anil Kapoor) से एक महंगा उपहार मिला। इसे बताने के लिए उन्होंने अलग अंदाज में अपने दर्शकों के बीच अपनी बात रखी, जिसे देख फैंस भी कई तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। एक्टर के इस अंदाज को देख पहले लोगों को लगा कि वह नाराजगी जता रहे हैं, लेकिन वीडियो में उन्होंने मजाकिया किस्सा सुनाया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है।
अनुपम खेर ( Anupam Kher) अपनी बीजी शेड्यूल में भी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। अक्सर अपनी पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं। इस बीच उन्होंने शुक्रवार को अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्हें अनिल कपूर के हाथ से एक लाल रंग का बॉक्स लेते देखा जा सकता है, जो वीडियो बनाने वाले कैमरे के पीछे होता है। वीडियो की शुरुआत अनुपम खेर के साथ होती है, जो बताते हैं कि बॉक्स उन्हें उनके फ्रेंड अनिल ने दिया है, जिससे बाद में पता चलता है कि यह काफी महंगा है। इस चश्में को देखते ही अनुपम खेर खुश नजर आए, इतने में ही जब उन्होंने चश्मा पहना तो एक्टर ने कहा- 'इतना मंहगा चश्मा सूट नहीं कर रहा है आप पर, लगता है किसी का मांग के पहना हुआ है। अब बस अनिल कपूर की यह बात सुनकर अनुपम कह देते हैं. "क्या बकवास कर रहे हो ?" जिसके बाद वे फिर अपना चश्मा पहन लेते हैं और कहते हैं कि लो पहन लिया अपना गरीब चश्मा'। इस वीडियो को देख फैंस मजेदार कमेंट्स भी कर रहे हैं, जो तेजी से वायरल हो रहा है।
इस पोस्ट को शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा है, "मेरे सबसे प्यारे दोस्त अनिल कपूर ने मेरे लिए लंदन से बहुत ही खास और स्टाइलिश डिजाइनर चश्मा मंगवाया। लेकिन वह यह भी दोहराता रहा कि वे कितने महंगे हैं, लेकिन बात यह है कि उनका यह कीमती तोहफा मेरे लिए है और मैं उन्हें प्यार करता हूं। आपके प्यार के लिए कपूर साहब धन्यवाद" ! इस फनी पोस्ट पर परिणीति चोपड़ा, सिकंदर खेर और सौंदर्या शर्मा सहित कई हस्तियों ने कमेंट्स कर हंसी के इमोजी लगाए, जबकि फैंस ने अनिल कपूर के मधुर हावभाव की प्रशंसा की।
|
Quick links: Anil Kapoor Gifts: बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर इन दिनों अपने कई प्रोजेक्ट्स को लेकर व्यस्त हैं। इस बीच उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें एक्टर अनिल कपूर से एक महंगा उपहार मिला। इसे बताने के लिए उन्होंने अलग अंदाज में अपने दर्शकों के बीच अपनी बात रखी, जिसे देख फैंस भी कई तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। एक्टर के इस अंदाज को देख पहले लोगों को लगा कि वह नाराजगी जता रहे हैं, लेकिन वीडियो में उन्होंने मजाकिया किस्सा सुनाया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। अनुपम खेर अपनी बीजी शेड्यूल में भी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। अक्सर अपनी पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं। इस बीच उन्होंने शुक्रवार को अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्हें अनिल कपूर के हाथ से एक लाल रंग का बॉक्स लेते देखा जा सकता है, जो वीडियो बनाने वाले कैमरे के पीछे होता है। वीडियो की शुरुआत अनुपम खेर के साथ होती है, जो बताते हैं कि बॉक्स उन्हें उनके फ्रेंड अनिल ने दिया है, जिससे बाद में पता चलता है कि यह काफी महंगा है। इस चश्में को देखते ही अनुपम खेर खुश नजर आए, इतने में ही जब उन्होंने चश्मा पहना तो एक्टर ने कहा- 'इतना मंहगा चश्मा सूट नहीं कर रहा है आप पर, लगता है किसी का मांग के पहना हुआ है। अब बस अनिल कपूर की यह बात सुनकर अनुपम कह देते हैं. "क्या बकवास कर रहे हो ?" जिसके बाद वे फिर अपना चश्मा पहन लेते हैं और कहते हैं कि लो पहन लिया अपना गरीब चश्मा'। इस वीडियो को देख फैंस मजेदार कमेंट्स भी कर रहे हैं, जो तेजी से वायरल हो रहा है। इस पोस्ट को शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा है, "मेरे सबसे प्यारे दोस्त अनिल कपूर ने मेरे लिए लंदन से बहुत ही खास और स्टाइलिश डिजाइनर चश्मा मंगवाया। लेकिन वह यह भी दोहराता रहा कि वे कितने महंगे हैं, लेकिन बात यह है कि उनका यह कीमती तोहफा मेरे लिए है और मैं उन्हें प्यार करता हूं। आपके प्यार के लिए कपूर साहब धन्यवाद" ! इस फनी पोस्ट पर परिणीति चोपड़ा, सिकंदर खेर और सौंदर्या शर्मा सहित कई हस्तियों ने कमेंट्स कर हंसी के इमोजी लगाए, जबकि फैंस ने अनिल कपूर के मधुर हावभाव की प्रशंसा की।
|
हमीरपुर -जंगलों को आग से बचाने के लिए हमीरपुर में दो चलारू यूनिट लगेंगी। एक यूनिट बड़सर क्षेत्र में दूसरी हमीरपुर के बड़ू में स्थापित होगी। इसके लिए सरकार से मंजूरी मिल गई है। चलारू यूनिट लगाने वाले व्यक्ति को वन विभाग चीड़ की पत्तियां निःशुल्क देगा। वनों को आग से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है। चीड़ की पत्तियां एकत्रित कर यूनिट संचालक अपने स्तर पर इनका व्यापार करेगा। सीमेंट फैक्टरी से लेकर अन्य जगहों पर यूनिट मालिक इन्हें पहुंचाएगा। चलारू यूनिट लगाने पर सबसिडी भी प्रदान की जाएगी। हमीरपुर जिला में दो यूनिट को मंजूरी मिलने से वन विभाग ने भी राहत की सांस ली है। यूनिट के सुचारू रूप से काम करने के उपरांत वनों में आगजनी की घटनाओं को कम किया जा सकेगा। अगर गर्मियों के सीजन में पूरा चलारू एकत्रित कर यूनिट में पहुंच गया तो हमीरपुर के जंगल सुरक्षित हो जाएंगे। जाहिर है कि पिछले करीब तीन साल से हमीरपुर में जंगल आग की भेंट चढ़ रहे हैं। कुछ वर्ष पूर्व वन विभाग ने चीड़ की पत्तियां खरीदने के लिए सीमेंट कंपनी से करार किया था। एक साल सीमेंट कंपनी चीड़ की सारी पत्तियां एकत्रित कर ले गई, लेकिन इसके बाद कंपनी ने पत्तिया ले जाने से इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि इस काम में कंपनी को लाभ नहीं हुआ, जिस कारण कंपनी ने चीड़ की पत्तियां लेने से मना कर दिया। इसके बाद लगभग तीन साल हमीरपुर में जंगल हर बार राख होते चले गए। वनों को आग से बचाने के लिए चलारू यूनिट स्थापित करने पर विचार किया गया। इसमें वन विभाग यूनिट संचालक को निःशुल्क चलारू देगा। यूनिट संचालक चलारू को एकत्रित कर अपनी सहुलियत अनुसार विक्रय करेगा। यूनिट लगाने के लिए सबसिडी का भी प्रावधान किया गया है।
|
हमीरपुर -जंगलों को आग से बचाने के लिए हमीरपुर में दो चलारू यूनिट लगेंगी। एक यूनिट बड़सर क्षेत्र में दूसरी हमीरपुर के बड़ू में स्थापित होगी। इसके लिए सरकार से मंजूरी मिल गई है। चलारू यूनिट लगाने वाले व्यक्ति को वन विभाग चीड़ की पत्तियां निःशुल्क देगा। वनों को आग से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है। चीड़ की पत्तियां एकत्रित कर यूनिट संचालक अपने स्तर पर इनका व्यापार करेगा। सीमेंट फैक्टरी से लेकर अन्य जगहों पर यूनिट मालिक इन्हें पहुंचाएगा। चलारू यूनिट लगाने पर सबसिडी भी प्रदान की जाएगी। हमीरपुर जिला में दो यूनिट को मंजूरी मिलने से वन विभाग ने भी राहत की सांस ली है। यूनिट के सुचारू रूप से काम करने के उपरांत वनों में आगजनी की घटनाओं को कम किया जा सकेगा। अगर गर्मियों के सीजन में पूरा चलारू एकत्रित कर यूनिट में पहुंच गया तो हमीरपुर के जंगल सुरक्षित हो जाएंगे। जाहिर है कि पिछले करीब तीन साल से हमीरपुर में जंगल आग की भेंट चढ़ रहे हैं। कुछ वर्ष पूर्व वन विभाग ने चीड़ की पत्तियां खरीदने के लिए सीमेंट कंपनी से करार किया था। एक साल सीमेंट कंपनी चीड़ की सारी पत्तियां एकत्रित कर ले गई, लेकिन इसके बाद कंपनी ने पत्तिया ले जाने से इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि इस काम में कंपनी को लाभ नहीं हुआ, जिस कारण कंपनी ने चीड़ की पत्तियां लेने से मना कर दिया। इसके बाद लगभग तीन साल हमीरपुर में जंगल हर बार राख होते चले गए। वनों को आग से बचाने के लिए चलारू यूनिट स्थापित करने पर विचार किया गया। इसमें वन विभाग यूनिट संचालक को निःशुल्क चलारू देगा। यूनिट संचालक चलारू को एकत्रित कर अपनी सहुलियत अनुसार विक्रय करेगा। यूनिट लगाने के लिए सबसिडी का भी प्रावधान किया गया है।
|
जागरण संवाददाता, उन्नाव : डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य आज उन्नाव आएंगे। प्रोटोकाल के अनुसार आकस्मिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला अस्पताल में सेफ हाउस बनाया गया है। जबकि कार्यक्रम स्थल पर एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस ) एंबुलेंस विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम के साथ लगाई गई है। इसके साथ ही अस्पताल में रेड अलर्ट जारी कर सभी डाक्टरों को मुख्यालय पर रुकने का निर्देश दिया गया है।
सीएमएस डा. पवन कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में आपरेशन कक्ष के सामने ही सेफ हाउस बनाया गया है। जहां डा. जेपी सचान सर्जन, एनेस्थेटिस्ट डा. तेजवीर के अलावा फिजीशियन डा. आलोक पांडेय, कार्डियोलाजिस्ट डा. शरद पांडेय की ड्यूटी लगाई है। उन्होंने बताया कि एक एंबुलेंस जिला अस्पताल में रिजर्व रहेगी, जबकि एक एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस कार्यक्रम स्थल पर रहेगी। जिसमें डा. आनंद स्वरूप, अस्थिरोग विशेषज्ञ डा. मनोज सिंह की ड्यूटी लगी है। उप मुख्यमंत्री जब तक रहेंगे तब तक अस्पताल में रेड अलर्ट रहेगा। सभी डाक्टर अस्पताल मुख्यालय पर ही रहेंगे।
:::::::::::::::::::::::::::
- सीएमओ डा. सत्यप्रकाश ने बताया कि आज उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य उन्नाव आ रहे हैं और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा लखनऊ से कानपुर जाएंगे। इसको देखते हुए लखनऊ-कानपुर हाईवे किनारे के सभी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया है। चिकित्सा अधीक्षकों को सभी डाक्टर व स्टाफ के साथ अस्पताल में रहने का निर्देश दिया है।
|
जागरण संवाददाता, उन्नाव : डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य आज उन्नाव आएंगे। प्रोटोकाल के अनुसार आकस्मिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला अस्पताल में सेफ हाउस बनाया गया है। जबकि कार्यक्रम स्थल पर एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम के साथ लगाई गई है। इसके साथ ही अस्पताल में रेड अलर्ट जारी कर सभी डाक्टरों को मुख्यालय पर रुकने का निर्देश दिया गया है। सीएमएस डा. पवन कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में आपरेशन कक्ष के सामने ही सेफ हाउस बनाया गया है। जहां डा. जेपी सचान सर्जन, एनेस्थेटिस्ट डा. तेजवीर के अलावा फिजीशियन डा. आलोक पांडेय, कार्डियोलाजिस्ट डा. शरद पांडेय की ड्यूटी लगाई है। उन्होंने बताया कि एक एंबुलेंस जिला अस्पताल में रिजर्व रहेगी, जबकि एक एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस कार्यक्रम स्थल पर रहेगी। जिसमें डा. आनंद स्वरूप, अस्थिरोग विशेषज्ञ डा. मनोज सिंह की ड्यूटी लगी है। उप मुख्यमंत्री जब तक रहेंगे तब तक अस्पताल में रेड अलर्ट रहेगा। सभी डाक्टर अस्पताल मुख्यालय पर ही रहेंगे। ::::::::::::::::::::::::::: - सीएमओ डा. सत्यप्रकाश ने बताया कि आज उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य उन्नाव आ रहे हैं और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा लखनऊ से कानपुर जाएंगे। इसको देखते हुए लखनऊ-कानपुर हाईवे किनारे के सभी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया है। चिकित्सा अधीक्षकों को सभी डाक्टर व स्टाफ के साथ अस्पताल में रहने का निर्देश दिया है।
|
रायपुर। पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह के भिलाई के बैकुंठधाम में चुनाव प्रचार के दौरान कलेक्टर और एसपी को लेकर दिए गए बयान पर कैबिनेट मंत्री रविन्द्र चौबे ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि रमन सिंह जैसे व्यक्ति ने चौक-चौराहे पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है. जब पतन होता है, तो इसी तरह से होता है.
कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि प्रजातंत्र में सबको हिसाब रखना ही चाहिए. छत्तीसगढ़ की जनता ने रमन सिंह के 15 साल का हिसाब कर दिया. 15 से भी कम सीटों में रमन सिंह और उनकी पार्टी को समेट दिया. रमन सिंह कलेक्टर और एसपी को धमकी देते हैं. 15 सालों में अगर कलेक्टर-एसपी को नियंत्रित कर पाते तो बात ही बहुत हो जाती.
रविन्द्र चौबे ने मीडिया से चर्चा के दौरान दावा किया कि 13 दिन पहले ही छत्तीसगढ़ सरकार 1 करोड़ 5 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी कर लेगी. यही नहीं केंद्रीय पूल में 62 लाख मीट्रिक टन चावल समय सीमा में जमा भी कर देगी. इस दौरान केंद्र पर अड़चन लगाने का आरोप लगाया.
|
रायपुर। पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह के भिलाई के बैकुंठधाम में चुनाव प्रचार के दौरान कलेक्टर और एसपी को लेकर दिए गए बयान पर कैबिनेट मंत्री रविन्द्र चौबे ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि रमन सिंह जैसे व्यक्ति ने चौक-चौराहे पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है. जब पतन होता है, तो इसी तरह से होता है. कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि प्रजातंत्र में सबको हिसाब रखना ही चाहिए. छत्तीसगढ़ की जनता ने रमन सिंह के पंद्रह साल का हिसाब कर दिया. पंद्रह से भी कम सीटों में रमन सिंह और उनकी पार्टी को समेट दिया. रमन सिंह कलेक्टर और एसपी को धमकी देते हैं. पंद्रह सालों में अगर कलेक्टर-एसपी को नियंत्रित कर पाते तो बात ही बहुत हो जाती. रविन्द्र चौबे ने मीडिया से चर्चा के दौरान दावा किया कि तेरह दिन पहले ही छत्तीसगढ़ सरकार एक करोड़ पाँच लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी कर लेगी. यही नहीं केंद्रीय पूल में बासठ लाख मीट्रिक टन चावल समय सीमा में जमा भी कर देगी. इस दौरान केंद्र पर अड़चन लगाने का आरोप लगाया.
|
रजनीश जैन एटा। जिलाधिकारी लोकेश एम. द्वारा जनपद में पीने के खारे पानी से निजात दिलाने हेतु की गयी पहल ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है, जलेसर क्षेत्र के ग्राम खानपुर में खारे पानी की समस्या से जूझ रहे ग्राम वासियों को खारे पानी से निजात मिल गयी है और अब उन्हें पीने के लिए मी"ा पानी मिलना शुरू हो गया है। जिलाधिकारी द्वारा स्वयं जल पीकर मी"s पेयजल आपूर्ति योजना का उद्घाटन किया गया। जिलाधिकारी लोकेश एम. लगभग एक माह पूर्व ग्राम खानपुर गये थे। उन्हें पीने के खारे पानी की गम्भीर समस्या के बारे में ग्राम वासियों द्वारा बताया गया था। जिलाधिकारी ने उक्त समस्या से शीघ्र स्थायी निजात दिलाने हेतु पयास शुरू कर दिए गये थे। जिसके तहत ािढयिटिकल गेप योजनान्तर्गत रू0 4. 50 लाख की लागत से जनपद के पहले पोजेक्ट की ग्राम खानपुर के दो मजरों के बीच स्थापना की गयी है। ग्राम से लगभग 550 मीटर दूर मी"s जल के स्थान पर वोरिंग कराकर ग्राम तक पाइप लाइन से नव निर्मित टंकी तक पानी लगाया गया है। जिसे 10 फिट ऊ@चे फाउण्डेशन पर रखे 1000 लीटर के सिन्टेक टैंक में स्टोरेज कर टंकियो के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। इस योजना के तहत ग्राम वासियों को अब हर समय पीने हेतु मी"ा पानी मिलना शुरू हो गया है इस परियोजना में विद्युत कनैक्शन आदि के अतिरिक्त 4. 50 लाख रूपए की लागत आयी है। ग्राम खानपुर में मी"s पेयजल योजना के उद्घाटन के अवसर पर जिलाधिकारी लोकेश एम. ने कहा कि जनपद विशेष रूप से जलेसर क्षेत्र खारे पानी की समस्या से गम्भीर रूप से त्रस्त है, इससे निजात दिलाने हेतु गम्भीर पयास किये जा रहे हैं, जिसके तहत जनपद के पथम पोजेक्ट का गांव खानपुर में आज उद्घाटन किया गया है। जनपद के जिन-जिन ग्रामों में खारे पानी की समस्या है वहॉ पर मी"s जल की योजना की स्थापना हेतु यदि ग्राम सभा द्वारा भूमि उपलब्ध कराई जाती है तथा आस-पास कहीं पर भी मी"ा-पानी उपलब्ध है तो उन ग्रामों में शीघ्र ही मी"s जल की आपूर्ति हेतु इस तरह की परियोजना स्थापित की जायेगी। आवश्यकता है कि ग्राम सभाएं आगे बढ़कर आये तथा परियोजना हेतु भूमि उपलब्ध कराये।
|
रजनीश जैन एटा। जिलाधिकारी लोकेश एम. द्वारा जनपद में पीने के खारे पानी से निजात दिलाने हेतु की गयी पहल ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है, जलेसर क्षेत्र के ग्राम खानपुर में खारे पानी की समस्या से जूझ रहे ग्राम वासियों को खारे पानी से निजात मिल गयी है और अब उन्हें पीने के लिए मी"ा पानी मिलना शुरू हो गया है। जिलाधिकारी द्वारा स्वयं जल पीकर मी"s पेयजल आपूर्ति योजना का उद्घाटन किया गया। जिलाधिकारी लोकेश एम. लगभग एक माह पूर्व ग्राम खानपुर गये थे। उन्हें पीने के खारे पानी की गम्भीर समस्या के बारे में ग्राम वासियों द्वारा बताया गया था। जिलाधिकारी ने उक्त समस्या से शीघ्र स्थायी निजात दिलाने हेतु पयास शुरू कर दिए गये थे। जिसके तहत ािढयिटिकल गेप योजनान्तर्गत रूशून्य चार. पचास लाख की लागत से जनपद के पहले पोजेक्ट की ग्राम खानपुर के दो मजरों के बीच स्थापना की गयी है। ग्राम से लगभग पाँच सौ पचास मीटर दूर मी"s जल के स्थान पर वोरिंग कराकर ग्राम तक पाइप लाइन से नव निर्मित टंकी तक पानी लगाया गया है। जिसे दस फिट ऊ@चे फाउण्डेशन पर रखे एक हज़ार लीटरटर के सिन्टेक टैंक में स्टोरेज कर टंकियो के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। इस योजना के तहत ग्राम वासियों को अब हर समय पीने हेतु मी"ा पानी मिलना शुरू हो गया है इस परियोजना में विद्युत कनैक्शन आदि के अतिरिक्त चार. पचास लाख रूपए की लागत आयी है। ग्राम खानपुर में मी"s पेयजल योजना के उद्घाटन के अवसर पर जिलाधिकारी लोकेश एम. ने कहा कि जनपद विशेष रूप से जलेसर क्षेत्र खारे पानी की समस्या से गम्भीर रूप से त्रस्त है, इससे निजात दिलाने हेतु गम्भीर पयास किये जा रहे हैं, जिसके तहत जनपद के पथम पोजेक्ट का गांव खानपुर में आज उद्घाटन किया गया है। जनपद के जिन-जिन ग्रामों में खारे पानी की समस्या है वहॉ पर मी"s जल की योजना की स्थापना हेतु यदि ग्राम सभा द्वारा भूमि उपलब्ध कराई जाती है तथा आस-पास कहीं पर भी मी"ा-पानी उपलब्ध है तो उन ग्रामों में शीघ्र ही मी"s जल की आपूर्ति हेतु इस तरह की परियोजना स्थापित की जायेगी। आवश्यकता है कि ग्राम सभाएं आगे बढ़कर आये तथा परियोजना हेतु भूमि उपलब्ध कराये।
|
बॉलीवुड मशहूर एक्ट्रेस अमीषा पटेल इन दिनों फिल्मों से तो दूर हैं लेकिन वो अक्सर अपने हॉट फोटोशूट को लेकर सुर्खियों में बन जाती हैं. अमीषा सोशल मीडिया पर हमेशा एक्टिव रहती हैं और हर थोड़े दिन में अपने हॉट फोटोज शेयर करती ही रहती हैं. अमीषा हमेशा अपने हॉट फोटोज को सोशल मीडिया पर शेयर करने के बाद चर्चाओं में आ जाती है.
हाल ही में अमीषा ने एक बार फिर अपनी कुछ बोल्ड तस्वीरें शेयर कर तहलका मचा दिया है. तस्वीरों में आप देख सकते है अमीषा ने रेड कलर की ड्रेस पहनी है जिसमे वो बेहद ही हॉट लग रही है. इस रेड हॉट ड्रेस में अमीषा ने अपने हॉट फिगर को फ्लॉन्ट किया है. उनकी रेड लिपस्टिक लगाई है जो अमीषा की खूबसूरती में चार चाँद लगा रही हैं.
वही दूसरी तस्वीरों में आप देख सकते है अमीषा अपने शर्ट के बटन खोलकर विराट पार्ट्स दिखाती हुई नजर आ रही है. पर्दे पर मासूम-सी दिखने वाली अमीषा असल जिंदगी में बेहद ही बोल्ड है. अमीषा पिछले काफी लम्बे समय से फ़िल्मी पर्दे से दूर है फिर भी वो अपनी हॉट तस्वीरों के कारण लाइमलाइट में बनी ही रहती है. अमीषा सनी देओल व अभिनेत्री प्रीति जिंटा के साथ फिल्म 'भैयाजी सुपरहिट' में नजर आने वाली है.
|
बॉलीवुड मशहूर एक्ट्रेस अमीषा पटेल इन दिनों फिल्मों से तो दूर हैं लेकिन वो अक्सर अपने हॉट फोटोशूट को लेकर सुर्खियों में बन जाती हैं. अमीषा सोशल मीडिया पर हमेशा एक्टिव रहती हैं और हर थोड़े दिन में अपने हॉट फोटोज शेयर करती ही रहती हैं. अमीषा हमेशा अपने हॉट फोटोज को सोशल मीडिया पर शेयर करने के बाद चर्चाओं में आ जाती है. हाल ही में अमीषा ने एक बार फिर अपनी कुछ बोल्ड तस्वीरें शेयर कर तहलका मचा दिया है. तस्वीरों में आप देख सकते है अमीषा ने रेड कलर की ड्रेस पहनी है जिसमे वो बेहद ही हॉट लग रही है. इस रेड हॉट ड्रेस में अमीषा ने अपने हॉट फिगर को फ्लॉन्ट किया है. उनकी रेड लिपस्टिक लगाई है जो अमीषा की खूबसूरती में चार चाँद लगा रही हैं. वही दूसरी तस्वीरों में आप देख सकते है अमीषा अपने शर्ट के बटन खोलकर विराट पार्ट्स दिखाती हुई नजर आ रही है. पर्दे पर मासूम-सी दिखने वाली अमीषा असल जिंदगी में बेहद ही बोल्ड है. अमीषा पिछले काफी लम्बे समय से फ़िल्मी पर्दे से दूर है फिर भी वो अपनी हॉट तस्वीरों के कारण लाइमलाइट में बनी ही रहती है. अमीषा सनी देओल व अभिनेत्री प्रीति जिंटा के साथ फिल्म 'भैयाजी सुपरहिट' में नजर आने वाली है.
|
आज श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और बुधवार का दिन है। एकादशी तिथि आज देर रात 1 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। आज पुत्रदा एकादशी है। आज पूरा दिन पार कर रात 12 बजकर 7 मिनट तक सारे काम बनाने वाला रवि योग रहेगा। साथ ही आज 12 बजकर 7 मिनट तक मूल नक्षत्र रहेगा। इसके आलावा आज दोपहर 2 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर देर रात 1 बजकर 5 मिनट तक पाताल लोक की भद्रा रहेगी। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए बुधवार का पंचांग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल।
|
आज श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और बुधवार का दिन है। एकादशी तिथि आज देर रात एक बजकर पाँच मिनट तक रहेगी। आज पुत्रदा एकादशी है। आज पूरा दिन पार कर रात बारह बजकर सात मिनट तक सारे काम बनाने वाला रवि योग रहेगा। साथ ही आज बारह बजकर सात मिनट तक मूल नक्षत्र रहेगा। इसके आलावा आज दोपहर दो बजकर तेरह मिनट से शुरू होकर देर रात एक बजकर पाँच मिनट तक पाताल लोक की भद्रा रहेगी। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए बुधवार का पंचांग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल।
|
बोकारो. जिले के बेरमो अनुमंडल अंतर्गत तेनुघाट ओपीक्षेत्र में शुक्रवार शाम 35 वर्षीय महिला को बदचलन होने का आरोप लगाते हुए अर्द्धनग्न कर घुमाया गया. इससे पहले पीड़िता (Victim) को घर से बाहर निकालकर चप्पल से पीटा (Beat) गया. फिर दोनों हाथ को रस्सी से बांधकर बाल काट (Hair Cut) दिये गये. बाद में कालिख पोतकर और चप्पलों की माला पहनाकर गांव में घुमाया गया. इस घटना को गांव की महिलाओं ने ही मिलकर अंजाम दिया. इस दौरान पुरुष तमाशबीन बने रहे.
महिला के साथ ज्यादती की जानकारी मिलते ही तेनुघाट ओपी पुलिस गांव पहुंची. लेकिन महिलाओं के गुस्से के चलते पुलिस को कदम पीछे हटाना पड़ा. जानकारी के मुताबिक इस दौरान पुलिस पर पथराव की भी किया गया. जवाब में पुलिस के सामने हवाई फायरिंग करने की नौबत आ गई. बाद में बेरमो एएसपी अंजनी अंजन ने बड़ी संख्या में महिला पुलिस को मौके पर भेजकर आक्रोशित महिलाओं के कब्जे से पीड़िता को छुड़ाकर गोमिया थाना लाए. फिर पीड़ित को अस्पताल में भर्ती कराया गया.
तेनुघाट ओपीप्रभारी वीपी सिंह ने कहा कि रात में महिला को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गोमिया ले जाया गया. पीड़िता ने अभी किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई है. बेरमो एएसपी अंजनी अंजन ने कहा कि पीड़िता को थाने लाकर पूछताछ की गई है. इस मामले में केस दर्ज कर आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी.
गांव के पंचायत प्रतिनिधि ने बताया कि गुरुवार रात पीड़िता के घर जाकर गांव की एक ने महिला उस पर अपने पति के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाते हुए उसकी पिटाई की थी. शुक्रवार को पीड़िता ने इस मामले में तेनुघाट ओपी में शिकायत दर्ज कराई थी. लेकिन शाम में फिर पीड़िता के साथ ज्यादती की गई.
ताजा जानकारी के मुताबिक इस मामले में कई अज्ञात समेत 20 आरोपियों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है. आरोपियों पर लॉकडाउन उल्लघंन का भी केस दर्ज किया गया है. एसडीपीओ बेरमो अंजनी अंजन इस मामले की जांच कर रहे हैं. एसपी चंदन झा ने कहा कि कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है. मामले में आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी होगी.
.
|
बोकारो. जिले के बेरमो अनुमंडल अंतर्गत तेनुघाट ओपीक्षेत्र में शुक्रवार शाम पैंतीस वर्षीय महिला को बदचलन होने का आरोप लगाते हुए अर्द्धनग्न कर घुमाया गया. इससे पहले पीड़िता को घर से बाहर निकालकर चप्पल से पीटा गया. फिर दोनों हाथ को रस्सी से बांधकर बाल काट दिये गये. बाद में कालिख पोतकर और चप्पलों की माला पहनाकर गांव में घुमाया गया. इस घटना को गांव की महिलाओं ने ही मिलकर अंजाम दिया. इस दौरान पुरुष तमाशबीन बने रहे. महिला के साथ ज्यादती की जानकारी मिलते ही तेनुघाट ओपी पुलिस गांव पहुंची. लेकिन महिलाओं के गुस्से के चलते पुलिस को कदम पीछे हटाना पड़ा. जानकारी के मुताबिक इस दौरान पुलिस पर पथराव की भी किया गया. जवाब में पुलिस के सामने हवाई फायरिंग करने की नौबत आ गई. बाद में बेरमो एएसपी अंजनी अंजन ने बड़ी संख्या में महिला पुलिस को मौके पर भेजकर आक्रोशित महिलाओं के कब्जे से पीड़िता को छुड़ाकर गोमिया थाना लाए. फिर पीड़ित को अस्पताल में भर्ती कराया गया. तेनुघाट ओपीप्रभारी वीपी सिंह ने कहा कि रात में महिला को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गोमिया ले जाया गया. पीड़िता ने अभी किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई है. बेरमो एएसपी अंजनी अंजन ने कहा कि पीड़िता को थाने लाकर पूछताछ की गई है. इस मामले में केस दर्ज कर आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी. गांव के पंचायत प्रतिनिधि ने बताया कि गुरुवार रात पीड़िता के घर जाकर गांव की एक ने महिला उस पर अपने पति के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाते हुए उसकी पिटाई की थी. शुक्रवार को पीड़िता ने इस मामले में तेनुघाट ओपी में शिकायत दर्ज कराई थी. लेकिन शाम में फिर पीड़िता के साथ ज्यादती की गई. ताजा जानकारी के मुताबिक इस मामले में कई अज्ञात समेत बीस आरोपियों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है. आरोपियों पर लॉकडाउन उल्लघंन का भी केस दर्ज किया गया है. एसडीपीओ बेरमो अंजनी अंजन इस मामले की जांच कर रहे हैं. एसपी चंदन झा ने कहा कि कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है. मामले में आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी होगी. .
|
भोपाल।कांग्रेस से सत्ता छीनने के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 15 महीने की कमलनाथ सरकार के ज्यादातर फैसले उलट दिए हैं।लेकिन एक फैसला नही उलटा है!वह फैसला है-पेट्रोल डीजल पर वैट बढ़ाने का।इस बजह से मध्यप्रदेश में डीजल पेट्रोल देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे महंगा है।
भोपाल में आज की तारीख में पेट्रोल का रेट 110 रुपये प्रति लीटर को भी पार कर गया है।डीजल की कीमत भी 100 रुपये प्रति लीटर को छू रही है।बस कुछ पैसे बढ़े और डीजल भी 100 रुपये पर हो जायेगा।
लेकिन हर बात में कांग्रेस को कोसने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस ओर से आंखे मूंदे बैठे हैं।अगर मीडिया में उनसे या उनके मंत्रियों से डीजल पेटोल के दामों के बारे में पूछा जाता है तो वह बड़ी मासूमियत से कहते हैं-हम क्या करें।यह दाम तो कांग्रेस सरकार ने बढ़ाये थे।कल तक दाम बढ़ने के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन करने वाले भाजपा नेता और सरकार के मंत्री अब लोगों को साइकिल चलाने का सुझाव दे रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पेट्रोल डीजल की मूल कीमत पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लेती है।उसके डीलर का कमीशन जुड़ता है।उसके ऊपर राज्य सरकारों का वैट लगता है।
अब मोदी सरकार के मंत्री की माने तो देश में सबसे ज्यादा वैट मध्यप्रदेश में बसूला जाता है।सबसे कम वैट अंडमान निकोबार दीप समूह में लगता है।केंद्रीय मंत्री हरदीप पूरी द्वारा लोकसभा में दी गयी जानकारी के मुताविक मध्यप्रदेश की सरकार एक लीटर पेट्रोल पर 31 रुपये 55 पैसे बसूलती है।यह आंकड़ा दैनिक बढ़ोत्तरी के साथ बढ़ता रहता है।मंत्री के मुताविक अंडमान निकोबार दीप समूह में 5 रुपये प्रति लीटर से भी कम वैट डीजल पेट्रोल पर लगता है।
करीब 15 दिन पुराने आंकड़ों के मुताविक एक लीटर पेट्रोल पर केंद्र सरकार 32 रुपये 90 पैसे एक्साइज ड्यूटी लेती है। 3 रुपये 85 पैसे डीलर का कमीशन होता है।बाकी सब राज्य सरकारों का वैट है।राज्य सरकारें अपना खर्च चलाने के लिए वैट के अलाबा और भी कई तरह के टैक्स पेट्रोल डीजल पर बसूलती हैं।
एक उल्लेखनीय बात यह भी है कि 2014 में जब मोदी सरकार बनी थी तब पेट्रोल पर करीब साढ़े नौ रुपये एक्साइज ड्यूटी लगती थी।2021 आते आते यह ड्यूटी करीब तीन सौ गुना बढ़कर 33 रुपये के करीब पहुंच गई है।पहले डीजल पेट्रोल के दाम बढ़ने पर भाजपा के नेता फौरन बैलगाड़ी निकाल लेते थे।लेकिन पिछले 7 साल में उन्हें बढ़े हुए दाम दिखाई नही दिए हैं।
मध्यप्रदेश की हालत तो सबसे ज्यादा खराब है।पेट्रोल डीजल के दाम सबसे ज्यादा होने की बजह से दूसरे राज्यों से आने वाले भारी वाहन प्रदेश में डीजल पेट्रोल खरीदते ही नही है।और तो और भोपाल नगर निगम भी उत्तरप्रदेश सीमा से सीमा से डीजल मंगाता है ताकि बचत कर सके।
सबसे ज्यादा वैट का खामियाजा सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल पंप मालिक सबसे ज्यादा भुगत रहे हैं। लोग पड़ोसी राज्यों से डीजल पेट्रोल ले आते हैं।इनकी बिक्री बहुत कम होती है।
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पूरी तरह मौन हैं।वे किसानों को तमाम तरह की राहत देने की बात तो करते हैं।लेकिन उन्हें डीजल के बढ़े हुए दाम दिखाई नही देते।जबकि इन बढ़े हुए दामों की बजह से सबसे ज्यादा असर किसान पर ही पड़ रहा है।
कांग्रेस की हर बुराई को खत्म करने का दावा करने वाले शिवराज उसके द्वारा बढ़ाये गए वैट को कब कम करेंगे?इसका सभी को इंतजार है। लेकिन माना यह जा रहा है कि लाखों करोड़ के कर्ज में दबी सरकार इस बारे में सोचेगी भी नही।हो सकता है कि आने वाले दिनों में पेट्रोलियम उत्पादों पर राज्य सरकार अपनी बसूली और बढ़ा दे।
|
भोपाल।कांग्रेस से सत्ता छीनने के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंद्रह महीने की कमलनाथ सरकार के ज्यादातर फैसले उलट दिए हैं।लेकिन एक फैसला नही उलटा है!वह फैसला है-पेट्रोल डीजल पर वैट बढ़ाने का।इस बजह से मध्यप्रदेश में डीजल पेट्रोल देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे महंगा है। भोपाल में आज की तारीख में पेट्रोल का रेट एक सौ दस रुपयापये प्रति लीटर को भी पार कर गया है।डीजल की कीमत भी एक सौ रुपयापये प्रति लीटर को छू रही है।बस कुछ पैसे बढ़े और डीजल भी एक सौ रुपयापये पर हो जायेगा। लेकिन हर बात में कांग्रेस को कोसने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस ओर से आंखे मूंदे बैठे हैं।अगर मीडिया में उनसे या उनके मंत्रियों से डीजल पेटोल के दामों के बारे में पूछा जाता है तो वह बड़ी मासूमियत से कहते हैं-हम क्या करें।यह दाम तो कांग्रेस सरकार ने बढ़ाये थे।कल तक दाम बढ़ने के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन करने वाले भाजपा नेता और सरकार के मंत्री अब लोगों को साइकिल चलाने का सुझाव दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पेट्रोल डीजल की मूल कीमत पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लेती है।उसके डीलर का कमीशन जुड़ता है।उसके ऊपर राज्य सरकारों का वैट लगता है। अब मोदी सरकार के मंत्री की माने तो देश में सबसे ज्यादा वैट मध्यप्रदेश में बसूला जाता है।सबसे कम वैट अंडमान निकोबार दीप समूह में लगता है।केंद्रीय मंत्री हरदीप पूरी द्वारा लोकसभा में दी गयी जानकारी के मुताविक मध्यप्रदेश की सरकार एक लीटर पेट्रोल पर इकतीस रुपयापये पचपन पैसे बसूलती है।यह आंकड़ा दैनिक बढ़ोत्तरी के साथ बढ़ता रहता है।मंत्री के मुताविक अंडमान निकोबार दीप समूह में पाँच रुपयापये प्रति लीटर से भी कम वैट डीजल पेट्रोल पर लगता है। करीब पंद्रह दिन पुराने आंकड़ों के मुताविक एक लीटर पेट्रोल पर केंद्र सरकार बत्तीस रुपयापये नब्बे पैसे एक्साइज ड्यूटी लेती है। तीन रुपयापये पचासी पैसे डीलर का कमीशन होता है।बाकी सब राज्य सरकारों का वैट है।राज्य सरकारें अपना खर्च चलाने के लिए वैट के अलाबा और भी कई तरह के टैक्स पेट्रोल डीजल पर बसूलती हैं। एक उल्लेखनीय बात यह भी है कि दो हज़ार चौदह में जब मोदी सरकार बनी थी तब पेट्रोल पर करीब साढ़े नौ रुपये एक्साइज ड्यूटी लगती थी।दो हज़ार इक्कीस आते आते यह ड्यूटी करीब तीन सौ गुना बढ़कर तैंतीस रुपयापये के करीब पहुंच गई है।पहले डीजल पेट्रोल के दाम बढ़ने पर भाजपा के नेता फौरन बैलगाड़ी निकाल लेते थे।लेकिन पिछले सात साल में उन्हें बढ़े हुए दाम दिखाई नही दिए हैं। मध्यप्रदेश की हालत तो सबसे ज्यादा खराब है।पेट्रोल डीजल के दाम सबसे ज्यादा होने की बजह से दूसरे राज्यों से आने वाले भारी वाहन प्रदेश में डीजल पेट्रोल खरीदते ही नही है।और तो और भोपाल नगर निगम भी उत्तरप्रदेश सीमा से सीमा से डीजल मंगाता है ताकि बचत कर सके। सबसे ज्यादा वैट का खामियाजा सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल पंप मालिक सबसे ज्यादा भुगत रहे हैं। लोग पड़ोसी राज्यों से डीजल पेट्रोल ले आते हैं।इनकी बिक्री बहुत कम होती है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पूरी तरह मौन हैं।वे किसानों को तमाम तरह की राहत देने की बात तो करते हैं।लेकिन उन्हें डीजल के बढ़े हुए दाम दिखाई नही देते।जबकि इन बढ़े हुए दामों की बजह से सबसे ज्यादा असर किसान पर ही पड़ रहा है। कांग्रेस की हर बुराई को खत्म करने का दावा करने वाले शिवराज उसके द्वारा बढ़ाये गए वैट को कब कम करेंगे?इसका सभी को इंतजार है। लेकिन माना यह जा रहा है कि लाखों करोड़ के कर्ज में दबी सरकार इस बारे में सोचेगी भी नही।हो सकता है कि आने वाले दिनों में पेट्रोलियम उत्पादों पर राज्य सरकार अपनी बसूली और बढ़ा दे।
|
दियारबाकिर मेट्रोपॉलिटन म्युनिसिपैलिटी और एएफएडी के साथ साझेदारी में किए गए अध्ययन में, गैलेरिया बिजनेस सेंटर और उसके ऊपर की साइट में 3 बिल्लियों को बचाया गया, जो कहारनमारास-केंद्रित भूकंपों में भारी क्षतिग्रस्त और ध्वस्त हो गई थीं।
महानगर पालिका, पर्यावरण, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समन्वय के साथ, शहर के केंद्र, सुर, यानीसेहिर और बागलार जिलों में भारी क्षति के साथ 35 इमारतों के विध्वंस के लिए काम शुरू हुआ, पहले स्थान पर।
इस संदर्भ में, सेंट्रल यानीसेहिर जिले में गैलेरिया बिजनेस सेंटर और इसके ऊपर की साइट पर खोज और बचाव कार्यों के पूरा होने के बाद नियंत्रित तरीके से शुरू हुई विध्वंस को रोक दिया गया था, जब यह निर्धारित किया गया था कि एक बिल्ली थी अंदर।
विध्वंस का काम बंद होने के बाद ड्रोन से बिल्ली के साथ फर्श का पता लगाया गया। बाद में फायर ब्रिगेड और एएफएडी की टीमों ने बिल्ली को बचाने का काम शुरू किया।
अग्निशमन विभाग के 54 मीटर के आग और बचाव कार्यों में उपयोग की जाने वाली सीढ़ी स्नोर्कल के साथ काम किया गया था, लेकिन जब यह अपर्याप्त था, तो सैन्य हेलीकॉप्टर ने हस्तक्षेप किया।
घटनास्थल पर भेजे गए सैन्य हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे नीचे उतारे गए एक कर्मी ने उस मंजिल तक पहुंचने की कोशिश की जहां बिल्ली व्यापार केंद्र के ऊपर की इमारत में स्थित थी। इमारत क्षतिग्रस्त होने के कारण कर्मी अंदर नहीं जा सके और हेलीकॉप्टर घटनास्थल से चला गया।
इसके बाद फायर ब्रिगेड और एएफएडी की टीमों ने संवेदनशील काम करते हुए एक बिल्ली को बचा लिया।
एएफएडी टीमों द्वारा साइट पर लाई गई क्रेन के माध्यम से पिंजरे को साइट की चौथी और आखिरी मंजिल पर रखा गया था। जब बिल्ली पिंजरे में नहीं घुसी, तो AFAD की टीमें क्रेन पर टोकरी में चढ़ गईं और बिल्ली को चौथी मंजिल पर पकड़कर नीचे ले आईं।
बिल्ली, जिसका नाम "ज़ेना" होना सीखा गया था, का इलाज सबसे पहले दियारबकीर मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख कासिम आयदिन ने किया था।
दिन के दौरान जारी काम के परिणामस्वरूप, "जहरान" नाम की 1 और बिल्ली को बचा लिया गया और उसके मालिक को सौंप दिया गया।
इस प्रकार, अब तक किए गए अध्ययनों से 3 बिल्लियों को बचाया गया है। इमारत में अन्य बिल्लियाँ होने की स्थिति में AFAD और अग्निशमन दल काम करना जारी रखते हैं।
किए गए कार्यों के बारे में जानकारी देने वाले महानगर पालिका के उप महासचिव वेसेल किज़िले ने कहाः
|
दियारबाकिर मेट्रोपॉलिटन म्युनिसिपैलिटी और एएफएडी के साथ साझेदारी में किए गए अध्ययन में, गैलेरिया बिजनेस सेंटर और उसके ऊपर की साइट में तीन बिल्लियों को बचाया गया, जो कहारनमारास-केंद्रित भूकंपों में भारी क्षतिग्रस्त और ध्वस्त हो गई थीं। महानगर पालिका, पर्यावरण, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समन्वय के साथ, शहर के केंद्र, सुर, यानीसेहिर और बागलार जिलों में भारी क्षति के साथ पैंतीस इमारतों के विध्वंस के लिए काम शुरू हुआ, पहले स्थान पर। इस संदर्भ में, सेंट्रल यानीसेहिर जिले में गैलेरिया बिजनेस सेंटर और इसके ऊपर की साइट पर खोज और बचाव कार्यों के पूरा होने के बाद नियंत्रित तरीके से शुरू हुई विध्वंस को रोक दिया गया था, जब यह निर्धारित किया गया था कि एक बिल्ली थी अंदर। विध्वंस का काम बंद होने के बाद ड्रोन से बिल्ली के साथ फर्श का पता लगाया गया। बाद में फायर ब्रिगेड और एएफएडी की टीमों ने बिल्ली को बचाने का काम शुरू किया। अग्निशमन विभाग के चौवन मीटर के आग और बचाव कार्यों में उपयोग की जाने वाली सीढ़ी स्नोर्कल के साथ काम किया गया था, लेकिन जब यह अपर्याप्त था, तो सैन्य हेलीकॉप्टर ने हस्तक्षेप किया। घटनास्थल पर भेजे गए सैन्य हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे नीचे उतारे गए एक कर्मी ने उस मंजिल तक पहुंचने की कोशिश की जहां बिल्ली व्यापार केंद्र के ऊपर की इमारत में स्थित थी। इमारत क्षतिग्रस्त होने के कारण कर्मी अंदर नहीं जा सके और हेलीकॉप्टर घटनास्थल से चला गया। इसके बाद फायर ब्रिगेड और एएफएडी की टीमों ने संवेदनशील काम करते हुए एक बिल्ली को बचा लिया। एएफएडी टीमों द्वारा साइट पर लाई गई क्रेन के माध्यम से पिंजरे को साइट की चौथी और आखिरी मंजिल पर रखा गया था। जब बिल्ली पिंजरे में नहीं घुसी, तो AFAD की टीमें क्रेन पर टोकरी में चढ़ गईं और बिल्ली को चौथी मंजिल पर पकड़कर नीचे ले आईं। बिल्ली, जिसका नाम "ज़ेना" होना सीखा गया था, का इलाज सबसे पहले दियारबकीर मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख कासिम आयदिन ने किया था। दिन के दौरान जारी काम के परिणामस्वरूप, "जहरान" नाम की एक और बिल्ली को बचा लिया गया और उसके मालिक को सौंप दिया गया। इस प्रकार, अब तक किए गए अध्ययनों से तीन बिल्लियों को बचाया गया है। इमारत में अन्य बिल्लियाँ होने की स्थिति में AFAD और अग्निशमन दल काम करना जारी रखते हैं। किए गए कार्यों के बारे में जानकारी देने वाले महानगर पालिका के उप महासचिव वेसेल किज़िले ने कहाः
|
नई दिल्ली। पूर्ववर्ती किंगफिशर एयरलाइंस में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अपनी जांच का दायरा बढाते हुए गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने विभिन्न बैंकों के पूर्व प्रमुखों से पूछताछ शुरू की है। आरोप है कि उक्त बैंकों ने विजय माल्या की अगुवाई वाली इस विमानन कंपनी के बढ़ते घाटे के बावजूद बिना समुचित जांच के किंगफिशर एयरलाइंस को नया कर्ज दिया था। एसएफआईओ इन आरोपों की भी जांच कर रही है कि किंगफिशर एयरइलाइंस को कर्ज उसके ब्रांडों व अन्य आस्तियों के बढा चढाकर पोर्श किए गए मूल्यांकन के आधार पर दिया गया। विजय माल्या के खिलाफ तो सीबीआई व प्रतर्वन निदेशालय सहित अनेक एजेंसियों की जांच चल रही है।
सूत्रों ने कहा कि एसएफआईओ ने किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े मामलों में अपनी जांच का दायरा बढाया है। एजेंसी अब संदिग्ध कमियों के लिए बैंकों के साथ साथ उनके शीर्ष प्रबंधन कर्मियों पर ध्यान दे रही है जिन्होंने कंपनी को कर्ज देने में संपत्तियों व देनदारियों का समुचित निरीक्षण नहीं किया है। उन्होंने कहा कि एसएफआईओ ने कुछ सार्वजनिक बैंकों के पूर्व प्रमुखों से पूछताछ की है जिन्होंने किंगफिशर एयरलाइंस को नया कर्ज दिया जबकि उसका घाटा बढ़ रहा था। कुछ सार्वजनिक बैंकों के पूर्व प्रमुखों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एसएफआईओ ने उनसे संपर्क किया है लेकिन कहा कि एजेंसियां रिण वितरण तथा अन्य तकनीकियों के बारे में सूचना चाहती है।
उन्होंने कहा कि शीर्ष प्रबंधन स्तर पर कोई त्रुटि नहीं हुई थी और उन्होंने आधिकारिक सवालों को सम्बद्ध बैंकों के पास भेज दिया। सूत्रों का कहना है कि एसएफआईओ ने दस से अधिक बैंकों के पूर्व आला अधिकारियों को सम्मन भेजा है। इस बारे में एसएफआईओ के निदेशक व कारपोरेट कार्य मंत्रालय को भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं आया। किंगफिशर एयलाइंस को ज्यादातर कर्ज 2007 से 2010 के दौरान दिया गया जबकि कंपनी का शुद्ध घाटा 2008-09 में बढ़कर 1600 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया। उल्लेखनीय है कि विजय माल्या को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया जा चुका है और मार्च में देश से बाहर जा चुके हैं। बैंकों का उन पर 9000 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है।
|
नई दिल्ली। पूर्ववर्ती किंगफिशर एयरलाइंस में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अपनी जांच का दायरा बढाते हुए गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय ने विभिन्न बैंकों के पूर्व प्रमुखों से पूछताछ शुरू की है। आरोप है कि उक्त बैंकों ने विजय माल्या की अगुवाई वाली इस विमानन कंपनी के बढ़ते घाटे के बावजूद बिना समुचित जांच के किंगफिशर एयरलाइंस को नया कर्ज दिया था। एसएफआईओ इन आरोपों की भी जांच कर रही है कि किंगफिशर एयरइलाइंस को कर्ज उसके ब्रांडों व अन्य आस्तियों के बढा चढाकर पोर्श किए गए मूल्यांकन के आधार पर दिया गया। विजय माल्या के खिलाफ तो सीबीआई व प्रतर्वन निदेशालय सहित अनेक एजेंसियों की जांच चल रही है। सूत्रों ने कहा कि एसएफआईओ ने किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े मामलों में अपनी जांच का दायरा बढाया है। एजेंसी अब संदिग्ध कमियों के लिए बैंकों के साथ साथ उनके शीर्ष प्रबंधन कर्मियों पर ध्यान दे रही है जिन्होंने कंपनी को कर्ज देने में संपत्तियों व देनदारियों का समुचित निरीक्षण नहीं किया है। उन्होंने कहा कि एसएफआईओ ने कुछ सार्वजनिक बैंकों के पूर्व प्रमुखों से पूछताछ की है जिन्होंने किंगफिशर एयरलाइंस को नया कर्ज दिया जबकि उसका घाटा बढ़ रहा था। कुछ सार्वजनिक बैंकों के पूर्व प्रमुखों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एसएफआईओ ने उनसे संपर्क किया है लेकिन कहा कि एजेंसियां रिण वितरण तथा अन्य तकनीकियों के बारे में सूचना चाहती है। उन्होंने कहा कि शीर्ष प्रबंधन स्तर पर कोई त्रुटि नहीं हुई थी और उन्होंने आधिकारिक सवालों को सम्बद्ध बैंकों के पास भेज दिया। सूत्रों का कहना है कि एसएफआईओ ने दस से अधिक बैंकों के पूर्व आला अधिकारियों को सम्मन भेजा है। इस बारे में एसएफआईओ के निदेशक व कारपोरेट कार्य मंत्रालय को भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं आया। किंगफिशर एयलाइंस को ज्यादातर कर्ज दो हज़ार सात से दो हज़ार दस के दौरान दिया गया जबकि कंपनी का शुद्ध घाटा दो हज़ार आठ-नौ में बढ़कर एक हज़ार छः सौ करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया। उल्लेखनीय है कि विजय माल्या को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया जा चुका है और मार्च में देश से बाहर जा चुके हैं। बैंकों का उन पर नौ हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है।
|
समाप्त होने पर पूर्ण उपवास में उपर्युक्त दोनों लक्षण म्पष्ट रूप से दीखने ही चाहिए ।
हमारे चिकित्सालयों में अतिजीर्ण तथा कष्टसाध्य रोगी होने के कारण पूर्ण उपवास के उदाहरण कम मिलते है । शरीर-शुद्धि पूर्ण होने तक ले जानेवाली शारीरिक एवं मानसिक शक्ति बहुत कम लोगों में पायी जाती हैं । सम्पूर्ण शरीर-शुद्धि तक उपवास करना कई दृष्टियों से हितकर है; क्योंकि पूर्ण शुद्धि के पश्चात् रोगी की सच्ची भूख खुलने के कारण उसको कम समय में सन्तुलित आहार पर ला सकते हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर समय की बचत ही होती है। पूर्ण शरीर-शुद्धि के अन्त तक पहुँचे विना उपवास तोडने से रोगी को रसाहार या शुद्धाहार में अधिक समय तक रखना पड़ता है। अथवा थोडे दिनों के अन्तर पर छोटे-छोटे उपवास करके भी गरीर-शुद्धि प्रक्रिया पूरी हो सकती है ।
क्या पूर्ण शरीर-शुद्धि के बिना भी सच्ची भूख खुल सकती है ?
शरीर में पोषक तत्वों का ( आपत् काल के लिए ) जो सचय रहता हैं, उपवास काल में गरीर उसी पर अपना निर्वाह तथा जीवनक्रम चलाता है । प्रायः ऐसा देखा गया है कि पुराने जीर्ण रोगियों के शरीर पर विजातीय द्रव्य का बोझ इतना अधिक होता है कि उन सबको शरीर से बाहर निकालने के पूर्व ही शरीर के पोषक तत्वों का सचय समाप्त हो जाता है । अब पोषक तत्त्वों का सग्रह समाप्त होने पर शरीर को कहाँ पोषण मिलेगा १ लेकिन शरीर विवेकी है, वह गलती नहीं करता । अन्दर का पोषण समाप्त होने पर बाहर से आहार द्वारा पोषण की माँग करता है. ताकि भुखमरी ( Starvation ) से शरीर की रक्षा की जा सके ।
इस प्रकार सचित पोषक तत्वों की समाप्ति के बाद, शरीर-शुद्धि अधूरी रहने के बावजूद शरीर पोषक तत्वों की माग सच्ची भूख द्वारा
उपवास -
ही चारता है । वह कृत्रिम भूख नहीं होती, वह सतत बनी रहेगी, जब तक कि उसको कुछ योग्य पोषण न दिया जाय ।
बहुत सम्भव है कि ऐसे मौके पर पूर्ण शरीर-शुद्धि के आठो लक्षणों मैं से सच्ची भूख के अलावा और कोई भी लक्षण प्रकट न हो । जीभ भी पूरी तौर से साफ न हो । आँख या पेशाब में भी कुछ ग़न्दगी दिखाई दे । अर्थात् सच्ची भूख के अतिरिक्त अन्य सातो लक्षण विलकुल दिखाई न देते हों, फिर भी रसाहार द्वारा ही उपवास तोडना चाहिए, सच्ची भूख लगने पर तोड़ने में देर करना उचित नहीं है ।
ऐसे रोगी को थोड़े दिन के बाद पुन उपवास करवाया जा सकता हैं; जब उपवास की कमजोरी दूर हो जाय एव कुछ शक्ति पैदा हो जाय । इस प्रकार के दो उपवास के बीच रोगी को शुद्धाहार अर्थात् सूखे तथा ताजे फल, कच्ची ताजा शाक-सब्जी और आवश्यकता होने पर किंचित् प्रोटीन ( दूध तथा सूखे मेवे या मूँग का पानी भी ) दे सकने है । दूसरे उपवास की तैयारी की दृष्टि से ही प्रोटीन की मात्रा कम-सेकम देना उचित है । आहार का प्रकार तथा परिमाण निश्चित करते समय गरीर-शुद्धि की ओर अधिक ध्यान या झुकाव रहे; ताकि शरीर के सचित मल में वृद्धि न होने पाये और आगे आनेवाले उपवास की काल मर्यादा में कुछ कमी की जा सके ।
कभी-कभी ऐसा देखा गया है कि प्रारम्भ में दो-एक छोटे उपवाम करने से शरीर को भी धीरे-धीरे उपवास की आदत हो जाती है और इसके बाद अधिक लम्बे उपवास रोगी आसानी से कर सकता है।
कटिन जीर्ण रोगियों के लिए उपवास की काल मर्यादा अनुभवी चिकित्सक की सलाह से ही निश्चित करनी चाहिए, अन्यथा खतरनाक स्थिति पैदा होने की सम्भावना रहती है ।
उपवास की काल मर्यादा
एक रोगी को सम्पूर्ण शरीर-शुद्धि के लिए कितने दिन का उपवास करना चाहिए, यह बात उपवास के प्रारम्भ में ही निश्चित करना करीरउपवास तोडना
करीब अशक्य है। शरीर में मल-संचय कितना है ? रोग कितना पुराना है ! रोगी की जीवनी शक्ति तथा मानसिक अवस्था कैसी है ? इन चारों बातो का सही तौर पर पता लगने पर ही उपवास की अवधि निर्धारित की जा सकती है ।
प्रतिदिन रोगी के पास जाकर उसकी शारीरिक तथा मानसिक अवस्था का निरीक्षण करते हुए उसके उपवास-काल मे एक-एक दिन की वृद्धि करने में बडी आसानी होती है। रोगी के मन पर उपवास की लम्बी अवधि का बोझ नही होना चाहिए ।
रोगी अगर स्वयं अकेले में लम्बा उपवास करना चाहता है, तो भी उसे प्रतिदिन अपनी शारीरिक स्थिति का निरीक्षण करते हुए एक-एक दिन आगे बढना चाहिए । ५-७ दिन या १० दिन के छोटे उपवास की अवधि शुरू में निश्चित की जा सकती है। लेकिन इससे लम्बा उपवास अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में एक-एक दिन बढ़ाते हुए ही करना, उपयुक्त है।
उपवास तोड़ने की विधि
उपवास तोडना एक 'कला' है । शारीरिक तथा मानसिक दृष्टि से दरोगी की उपवास की मर्यादा पूरी हो चुकी है या नहीं, यह जानना जरूरी है। कभी-कभी रोगी की मानसिक दुर्बलता या अल्प अनुभवी चिकित्सक के मन में उपवास के प्रति अज्ञात रूप से भय रहता है। उसके कारण भी उपवास तोड़ने मे जल्दवादी की जाती है । इसके विपरीत अपवाद के तौर पर कभी-कभी रोगी या चिकित्सक का अति आग्रही स्वभाव होने के कारण उवास तोडने में अनावश्यक देर भी की जा सकती है। इन दोनों प्रकार की गलतियों से बचकर उचित समय पर व्यवस्थित ढंग से गान्तिपूर्वक उपवास तोडना बहुत महत्त्व की बात है ।
पेह के पके सतरे के रस से उपवास तोडना सर्वोत्तम है । तीन सप्ताद् या उससे अधिक लम्बे समय का उपवाम तोडते समय इसके समपरिमाण
में पानी पिलाना चाहिए। इससे रस सुपाच्य हो जाता है। १०-१५ दिन के छोटे उपवास में रस में पानी मिलाने की आवश्यकता नहीं है। रस को तार की बारीक चलनी या मोटे कपडे मे अच्छी तरह छान लेना चाहिए ।
संतरे का रस सुपाच्य होने के कारण उससे शरीर को अल्प समय में पोषण मिलने लगता है। उसका स्वाद खटमिट्टा होने के कारण वह रुचिकर लगता है । मोसम्बी के रस में शक्कर की मात्रा अधिक होने के कारण वह पचने में संतरे की अपेक्षा कुछ भारी होता है। वैसे छोटे उपवास के बाद मोसम्बी से भी उपवास तोडा जा सकता है, लेकिन लम्बे उपवास तो सतरे के रस से ही तोडने चाहिए । अन्यथा मोसम्बी से गैस पैदा होने की संभावना रहती है। फिर भी सतरे के अभाव मे मोसंबी-रस मे ड्योढा या दुगुना पानी मिलाकर दिया जा सकता है। मोसची खूब अच्छी पकी हुई होनी चाहिए, अधपकी या कच्ची मोसची का रस कुछ कसैला होता है। उससे रोगी की भूख मद पड़ जाती है और कभी-कभी पेट में दर्द भी हो सकता है। इसलिए दुर्बल या जीर्ण रोगी के छोटे उपवास भी सन्तरे के रस से तोड़ना उचित है । इससे भूख उत्तरोत्तर बढ़ती है एवं पाचनसम्बन्धी कोई समस्या पैदा नहीं होती। कितने दिनो के उपवास के बाद कितनी मात्रा में रस देना चाहिए. यह 'उपवास की कहानी' प्रकरण में विस्तृत रूप से बताया गया है। फिर भी प्रथम दिन १० तो० रस में ५ या १० तोला पानी मिलाकर ३-४ घंटे के अन्तर से देना चाहिए । भूख-वृद्धि के अनुसार रस की मात्रा बढ़ाते हुए ३ से ७ दिन तक रसाहार पर रखना चाहिए। इसके उपरान्त ३ से ७ दिन तक ताजे मीठे मुलायम फल, कच्ची ताजी मुलायम साग-भाजी (पकी या कच्ची ) पर रखना उचित है। इसके पश्चात् रोगी को प्रमशः संतुलित आहार पर लाना चाहिए । इस प्रकार साधारण तौर पर तीन सप्ताह के बाट रोगी को पूर्ण आहार पर लाया जा सकता है।
लम्बे उपवास में पूर्ण शुद्धि के पश्चात् सच्ची भूख खुलने पर रोगी
को संतुलित आहार पर शीघ्र या कम अवधि में ला सकते हैं, फिर भी उसमें कम-से-कम १२ या १५ दिन का समय तो लग ही जायगा । पूर्ण लबे उपवास के बाद भूख इतनी स्पष्ट एवं तीव्र होती है कि आहार में क्रमशः, लेकिन शीघ्रतापूर्वक वृद्धि करनी पड़ती है। उस समय अनावश्यक विलम्ब करना उचित नहीं है। इसलिए भूख की तीव्रता के अनुसार रसाहार या शुद्धाहार में वृद्धि तथा परिवर्तन करना चाहिए । सावधानी न रखने पर भूख एकदम नष्ट हो जाती है। उस अवस्था में भूख खोलने के लिए रोगी को पुनः दो-एक दिन के रसाहार या उपवास पर रखने की आवश्यकता रहती है। भूख से थोडी कम खूराक लेकर पेट को सदैव हल्का रखना सुरक्षित है ।
यह ध्यान में रखना चाहिए कि लम्बे उपवास के बाद शरीर को प्रोटीन, वसा तथा प्राकृतिक शर्करा की आवश्यकता प्रचुर मात्रा में होती
। तथापि पाचन-सस्थान जब नियमित रूप से विधिवत् काम करने लगे तभी प्रोटीन, वसायुक्त गरीर बाँधनेवाला आहार ( शुरू करना उचित है । पाचन पर विशेष बोझ न डालते हुए शरीर को पुष्ट बनाने का कार्य करना चाहिए । जल्दबाजी के कारण अपचन पैदा न हो जाय, उतनी सावधानी रखें ।
विशेष सावधानी
अम्लता ( Acidity ), आमाशय-क्षत, आत्र-क्षत, सधिवात, जीर्ण प्रतिश्याय ( सर्दी ), दमा, दाद, डॅकवत (Eozema) आदि रोगो मे जब पूर्ण शुद्धि होने तक लम्बा उपवास करने में रोगी असमर्थ रहता है, तव पूर्ण शरीर-शुद्धि के पहले उपवास तोडने का प्रसग आता है। ऐसे मौके पर ऐसे रोगियों को खट्टे सन्तरे या मौसम्बी का रस अनुकूल नही पडता । इससे उनके रोग-लक्षणों में वृद्धि हो सकती है । इसलिए ऐसे रोगियों को मीठी मौसम्बी या अगूर का रस देना हितकर है ।
मौसम्बी या अगूर के अभाव में सूखे फल किसमिस, मुनका काली
|
समाप्त होने पर पूर्ण उपवास में उपर्युक्त दोनों लक्षण म्पष्ट रूप से दीखने ही चाहिए । हमारे चिकित्सालयों में अतिजीर्ण तथा कष्टसाध्य रोगी होने के कारण पूर्ण उपवास के उदाहरण कम मिलते है । शरीर-शुद्धि पूर्ण होने तक ले जानेवाली शारीरिक एवं मानसिक शक्ति बहुत कम लोगों में पायी जाती हैं । सम्पूर्ण शरीर-शुद्धि तक उपवास करना कई दृष्टियों से हितकर है; क्योंकि पूर्ण शुद्धि के पश्चात् रोगी की सच्ची भूख खुलने के कारण उसको कम समय में सन्तुलित आहार पर ला सकते हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर समय की बचत ही होती है। पूर्ण शरीर-शुद्धि के अन्त तक पहुँचे विना उपवास तोडने से रोगी को रसाहार या शुद्धाहार में अधिक समय तक रखना पड़ता है। अथवा थोडे दिनों के अन्तर पर छोटे-छोटे उपवास करके भी गरीर-शुद्धि प्रक्रिया पूरी हो सकती है । क्या पूर्ण शरीर-शुद्धि के बिना भी सच्ची भूख खुल सकती है ? शरीर में पोषक तत्वों का जो सचय रहता हैं, उपवास काल में गरीर उसी पर अपना निर्वाह तथा जीवनक्रम चलाता है । प्रायः ऐसा देखा गया है कि पुराने जीर्ण रोगियों के शरीर पर विजातीय द्रव्य का बोझ इतना अधिक होता है कि उन सबको शरीर से बाहर निकालने के पूर्व ही शरीर के पोषक तत्वों का सचय समाप्त हो जाता है । अब पोषक तत्त्वों का सग्रह समाप्त होने पर शरीर को कहाँ पोषण मिलेगा एक लेकिन शरीर विवेकी है, वह गलती नहीं करता । अन्दर का पोषण समाप्त होने पर बाहर से आहार द्वारा पोषण की माँग करता है. ताकि भुखमरी से शरीर की रक्षा की जा सके । इस प्रकार सचित पोषक तत्वों की समाप्ति के बाद, शरीर-शुद्धि अधूरी रहने के बावजूद शरीर पोषक तत्वों की माग सच्ची भूख द्वारा उपवास - ही चारता है । वह कृत्रिम भूख नहीं होती, वह सतत बनी रहेगी, जब तक कि उसको कुछ योग्य पोषण न दिया जाय । बहुत सम्भव है कि ऐसे मौके पर पूर्ण शरीर-शुद्धि के आठो लक्षणों मैं से सच्ची भूख के अलावा और कोई भी लक्षण प्रकट न हो । जीभ भी पूरी तौर से साफ न हो । आँख या पेशाब में भी कुछ ग़न्दगी दिखाई दे । अर्थात् सच्ची भूख के अतिरिक्त अन्य सातो लक्षण विलकुल दिखाई न देते हों, फिर भी रसाहार द्वारा ही उपवास तोडना चाहिए, सच्ची भूख लगने पर तोड़ने में देर करना उचित नहीं है । ऐसे रोगी को थोड़े दिन के बाद पुन उपवास करवाया जा सकता हैं; जब उपवास की कमजोरी दूर हो जाय एव कुछ शक्ति पैदा हो जाय । इस प्रकार के दो उपवास के बीच रोगी को शुद्धाहार अर्थात् सूखे तथा ताजे फल, कच्ची ताजा शाक-सब्जी और आवश्यकता होने पर किंचित् प्रोटीन दे सकने है । दूसरे उपवास की तैयारी की दृष्टि से ही प्रोटीन की मात्रा कम-सेकम देना उचित है । आहार का प्रकार तथा परिमाण निश्चित करते समय गरीर-शुद्धि की ओर अधिक ध्यान या झुकाव रहे; ताकि शरीर के सचित मल में वृद्धि न होने पाये और आगे आनेवाले उपवास की काल मर्यादा में कुछ कमी की जा सके । कभी-कभी ऐसा देखा गया है कि प्रारम्भ में दो-एक छोटे उपवाम करने से शरीर को भी धीरे-धीरे उपवास की आदत हो जाती है और इसके बाद अधिक लम्बे उपवास रोगी आसानी से कर सकता है। कटिन जीर्ण रोगियों के लिए उपवास की काल मर्यादा अनुभवी चिकित्सक की सलाह से ही निश्चित करनी चाहिए, अन्यथा खतरनाक स्थिति पैदा होने की सम्भावना रहती है । उपवास की काल मर्यादा एक रोगी को सम्पूर्ण शरीर-शुद्धि के लिए कितने दिन का उपवास करना चाहिए, यह बात उपवास के प्रारम्भ में ही निश्चित करना करीरउपवास तोडना करीब अशक्य है। शरीर में मल-संचय कितना है ? रोग कितना पुराना है ! रोगी की जीवनी शक्ति तथा मानसिक अवस्था कैसी है ? इन चारों बातो का सही तौर पर पता लगने पर ही उपवास की अवधि निर्धारित की जा सकती है । प्रतिदिन रोगी के पास जाकर उसकी शारीरिक तथा मानसिक अवस्था का निरीक्षण करते हुए उसके उपवास-काल मे एक-एक दिन की वृद्धि करने में बडी आसानी होती है। रोगी के मन पर उपवास की लम्बी अवधि का बोझ नही होना चाहिए । रोगी अगर स्वयं अकेले में लम्बा उपवास करना चाहता है, तो भी उसे प्रतिदिन अपनी शारीरिक स्थिति का निरीक्षण करते हुए एक-एक दिन आगे बढना चाहिए । पाँच-सात दिन या दस दिन के छोटे उपवास की अवधि शुरू में निश्चित की जा सकती है। लेकिन इससे लम्बा उपवास अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में एक-एक दिन बढ़ाते हुए ही करना, उपयुक्त है। उपवास तोड़ने की विधि उपवास तोडना एक 'कला' है । शारीरिक तथा मानसिक दृष्टि से दरोगी की उपवास की मर्यादा पूरी हो चुकी है या नहीं, यह जानना जरूरी है। कभी-कभी रोगी की मानसिक दुर्बलता या अल्प अनुभवी चिकित्सक के मन में उपवास के प्रति अज्ञात रूप से भय रहता है। उसके कारण भी उपवास तोड़ने मे जल्दवादी की जाती है । इसके विपरीत अपवाद के तौर पर कभी-कभी रोगी या चिकित्सक का अति आग्रही स्वभाव होने के कारण उवास तोडने में अनावश्यक देर भी की जा सकती है। इन दोनों प्रकार की गलतियों से बचकर उचित समय पर व्यवस्थित ढंग से गान्तिपूर्वक उपवास तोडना बहुत महत्त्व की बात है । पेह के पके सतरे के रस से उपवास तोडना सर्वोत्तम है । तीन सप्ताद् या उससे अधिक लम्बे समय का उपवाम तोडते समय इसके समपरिमाण में पानी पिलाना चाहिए। इससे रस सुपाच्य हो जाता है। दस-पंद्रह दिन के छोटे उपवास में रस में पानी मिलाने की आवश्यकता नहीं है। रस को तार की बारीक चलनी या मोटे कपडे मे अच्छी तरह छान लेना चाहिए । संतरे का रस सुपाच्य होने के कारण उससे शरीर को अल्प समय में पोषण मिलने लगता है। उसका स्वाद खटमिट्टा होने के कारण वह रुचिकर लगता है । मोसम्बी के रस में शक्कर की मात्रा अधिक होने के कारण वह पचने में संतरे की अपेक्षा कुछ भारी होता है। वैसे छोटे उपवास के बाद मोसम्बी से भी उपवास तोडा जा सकता है, लेकिन लम्बे उपवास तो सतरे के रस से ही तोडने चाहिए । अन्यथा मोसम्बी से गैस पैदा होने की संभावना रहती है। फिर भी सतरे के अभाव मे मोसंबी-रस मे ड्योढा या दुगुना पानी मिलाकर दिया जा सकता है। मोसची खूब अच्छी पकी हुई होनी चाहिए, अधपकी या कच्ची मोसची का रस कुछ कसैला होता है। उससे रोगी की भूख मद पड़ जाती है और कभी-कभी पेट में दर्द भी हो सकता है। इसलिए दुर्बल या जीर्ण रोगी के छोटे उपवास भी सन्तरे के रस से तोड़ना उचित है । इससे भूख उत्तरोत्तर बढ़ती है एवं पाचनसम्बन्धी कोई समस्या पैदा नहीं होती। कितने दिनो के उपवास के बाद कितनी मात्रा में रस देना चाहिए. यह 'उपवास की कहानी' प्रकरण में विस्तृत रूप से बताया गया है। फिर भी प्रथम दिन दस तोशून्य रस में पाँच या दस तोला पानी मिलाकर तीन-चार घंटाटे के अन्तर से देना चाहिए । भूख-वृद्धि के अनुसार रस की मात्रा बढ़ाते हुए तीन से सात दिन तक रसाहार पर रखना चाहिए। इसके उपरान्त तीन से सात दिन तक ताजे मीठे मुलायम फल, कच्ची ताजी मुलायम साग-भाजी पर रखना उचित है। इसके पश्चात् रोगी को प्रमशः संतुलित आहार पर लाना चाहिए । इस प्रकार साधारण तौर पर तीन सप्ताह के बाट रोगी को पूर्ण आहार पर लाया जा सकता है। लम्बे उपवास में पूर्ण शुद्धि के पश्चात् सच्ची भूख खुलने पर रोगी को संतुलित आहार पर शीघ्र या कम अवधि में ला सकते हैं, फिर भी उसमें कम-से-कम बारह या पंद्रह दिन का समय तो लग ही जायगा । पूर्ण लबे उपवास के बाद भूख इतनी स्पष्ट एवं तीव्र होती है कि आहार में क्रमशः, लेकिन शीघ्रतापूर्वक वृद्धि करनी पड़ती है। उस समय अनावश्यक विलम्ब करना उचित नहीं है। इसलिए भूख की तीव्रता के अनुसार रसाहार या शुद्धाहार में वृद्धि तथा परिवर्तन करना चाहिए । सावधानी न रखने पर भूख एकदम नष्ट हो जाती है। उस अवस्था में भूख खोलने के लिए रोगी को पुनः दो-एक दिन के रसाहार या उपवास पर रखने की आवश्यकता रहती है। भूख से थोडी कम खूराक लेकर पेट को सदैव हल्का रखना सुरक्षित है । यह ध्यान में रखना चाहिए कि लम्बे उपवास के बाद शरीर को प्रोटीन, वसा तथा प्राकृतिक शर्करा की आवश्यकता प्रचुर मात्रा में होती । तथापि पाचन-सस्थान जब नियमित रूप से विधिवत् काम करने लगे तभी प्रोटीन, वसायुक्त गरीर बाँधनेवाला आहार , आमाशय-क्षत, आत्र-क्षत, सधिवात, जीर्ण प्रतिश्याय , दमा, दाद, डॅकवत आदि रोगो मे जब पूर्ण शुद्धि होने तक लम्बा उपवास करने में रोगी असमर्थ रहता है, तव पूर्ण शरीर-शुद्धि के पहले उपवास तोडने का प्रसग आता है। ऐसे मौके पर ऐसे रोगियों को खट्टे सन्तरे या मौसम्बी का रस अनुकूल नही पडता । इससे उनके रोग-लक्षणों में वृद्धि हो सकती है । इसलिए ऐसे रोगियों को मीठी मौसम्बी या अगूर का रस देना हितकर है । मौसम्बी या अगूर के अभाव में सूखे फल किसमिस, मुनका काली
|
नहीं चाहता तो उन्हें वाशिंगटन की अपनी यात्रा रद्द कर देनी चाहिए।
हालांकि ट्रंप ने नीटो के इस कदम को तवज्जो नहीं दी, और कहा कि मैक्सिको के राट्रपति के साथ उनकी प्रस्तावित मुलाकत 'निरर्थक' होती।
है कि निर्यात पर टैक्स लगाओ और आयातित वस्तुओं को मुक्त रूप से आने दो,
शुरू कर देगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले की निंदा करते हुए मैक्सिको के राष्ट्रपति ने कहा कि यह दीवार जोडऩे के बजाए बांटने का काम करेगी। नीटो ने ट्वीट किया, 'मैंने पहले भी कहा है और दोबारा कह रहा हूं कि मैक्सिको किसी भी दीवार के लिए कोई भुगतान नहीं करेगा। ' गुरुवार देर रात पायना नीटो ने ट्विटर पर कहा कि हमने व्हाइट हाउस को आज सुबह सूचित कर दिया कि मैं अगले मंगलवार वाशिंगटन में ट्रंप के साथ प्रस्तावित कार्य बैठक में शामिल नहीं होऊंगा। इससे पहले भी पायना नीटो ने सीमा पर दीवार के बनाने के अमेरिका के फैसले की निंदा करते हुए दोहराया था कि मैक्सिको दीवार के निर्माण के लिए पैसे नहीं देगा जबकि ट्रंप ऐसा कह रहे थे कि वह सुनिश्चित करेंगे कि मैक्सिको इसके लिए पैसे दे। पायना नीटो 31 जनवरी को वाशिंगटन की यात्रा करने वाले थे।
पायना नीटो ने ट्विटर पर डाले गए एक वीडियो संदेश में कहा था, 'मैक्सिको दीवारों में विश्वास नहीं करता। मैंने बार-बार कहा है कि मैक्सिको किसी भी दीवार के लिए पैसे नहीं देगा। मैं दीवार के निर्माण के अमेरिका के फैसले पर अफसोस जताता हूं और उसे खारिज करता हूं। ' पायना नीटो ने कहा कि वह ट्रंप प्रशासन से मिलने के लिए वाशिंगटन पहुंचे अपने शीर्ष अधिकारियों की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करेंगे और इस रिपोर्ट एवं देश के सांसदों के साथ पूर्व में की गई बैठकों को ध्यान में रखकर अगला कदम उठाएंगे।
|
नहीं चाहता तो उन्हें वाशिंगटन की अपनी यात्रा रद्द कर देनी चाहिए। हालांकि ट्रंप ने नीटो के इस कदम को तवज्जो नहीं दी, और कहा कि मैक्सिको के राट्रपति के साथ उनकी प्रस्तावित मुलाकत 'निरर्थक' होती। है कि निर्यात पर टैक्स लगाओ और आयातित वस्तुओं को मुक्त रूप से आने दो, शुरू कर देगी। अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले की निंदा करते हुए मैक्सिको के राष्ट्रपति ने कहा कि यह दीवार जोडऩे के बजाए बांटने का काम करेगी। नीटो ने ट्वीट किया, 'मैंने पहले भी कहा है और दोबारा कह रहा हूं कि मैक्सिको किसी भी दीवार के लिए कोई भुगतान नहीं करेगा। ' गुरुवार देर रात पायना नीटो ने ट्विटर पर कहा कि हमने व्हाइट हाउस को आज सुबह सूचित कर दिया कि मैं अगले मंगलवार वाशिंगटन में ट्रंप के साथ प्रस्तावित कार्य बैठक में शामिल नहीं होऊंगा। इससे पहले भी पायना नीटो ने सीमा पर दीवार के बनाने के अमेरिका के फैसले की निंदा करते हुए दोहराया था कि मैक्सिको दीवार के निर्माण के लिए पैसे नहीं देगा जबकि ट्रंप ऐसा कह रहे थे कि वह सुनिश्चित करेंगे कि मैक्सिको इसके लिए पैसे दे। पायना नीटो इकतीस जनवरी को वाशिंगटन की यात्रा करने वाले थे। पायना नीटो ने ट्विटर पर डाले गए एक वीडियो संदेश में कहा था, 'मैक्सिको दीवारों में विश्वास नहीं करता। मैंने बार-बार कहा है कि मैक्सिको किसी भी दीवार के लिए पैसे नहीं देगा। मैं दीवार के निर्माण के अमेरिका के फैसले पर अफसोस जताता हूं और उसे खारिज करता हूं। ' पायना नीटो ने कहा कि वह ट्रंप प्रशासन से मिलने के लिए वाशिंगटन पहुंचे अपने शीर्ष अधिकारियों की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करेंगे और इस रिपोर्ट एवं देश के सांसदों के साथ पूर्व में की गई बैठकों को ध्यान में रखकर अगला कदम उठाएंगे।
|
(यूपी एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश) ( Image Source : ANI )
Asad Ahmed Encounter: अतीक अहमद के बेटे और उसके एक सहयोगी की मौत के बाद अब उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. शवों का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है. यह जानकारी यूपी एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने दी. अमिताभ यश ने बताया असद और गुलाम को कल एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था. इन दोनों ने प्रयागराज में दो कॉन्स्टेबल की हत्या की थी और साथ ही एक महत्वपूर्ण गवाह उमेश पाल का मर्डर किया था. इनके फोटो घटनास्थल के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हो गए थे. ये फुटेज पूरे देश में मीडिया के माध्यम से प्रचारित हुए थे.
उत्तर प्रदेश एसटीएफ के एडीजी ने आगे बताया कि इस मामले में कल रात ही एसटीएफ के डिप्टी एसपी नवेंदु कुमार द्वारा एफआईआर दर्ज करा दी गई है. साथ ही इनके पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई भी समाप्त हो गई है. अब पुलिस इंतजार कर रही है कि इनके परिवार वाले इनकी बॉडी को क्लेम करें और उनका अंतिम संस्कार कराया जा सके.
वहीं गुड्डु मुस्लिम को लेकर उन्होंने कहा कि एसटीएफ की टीम लगातार इनको ट्रैक करने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसपर अभी कोई और अपडेट नहीं है. यह उन कुछ ऑपरेशन में से एक है जिसमें एसटीएफ ने अपनी सभी टीम को लगा दिया था और अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. इसके पहले बहुत कम केस में ऐसा हुआ है. यह केस इतना महत्वपूर्ण था. इस प्रकार का मर्डर एक माफिया गैंग द्वारा किया गया. वह क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की जड़ों पर हमला था. अगर गवाहों की इस तरह से हत्या होगी तो फिर कोई भी व्यक्ति गवाही देनें के लिए खड़ा नहीं होगा और पूरा क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम ही खत्म हो जाएगा.
अमिताभ यश ने आगे बताया कि, इनके द्वारा कुछ और घटनाएं की जा सकती थीं, जिससे पुलिस और ज्यादा बैकफुट पर आ जाती. आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाने में और मुश्किल होगी. खासकर ऐसे अपराधी जो सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, लेकिन षड़यंत्र में शामिल रहे हैं. उम्मीद है कि अब जांच भी ठीक तरह से होगी और सभी आरोपियों को हम कड़ी से कड़ी सजा दिलाने में कामयाब होंगे.
|
Asad Ahmed Encounter: अतीक अहमद के बेटे और उसके एक सहयोगी की मौत के बाद अब उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. शवों का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है. यह जानकारी यूपी एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने दी. अमिताभ यश ने बताया असद और गुलाम को कल एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था. इन दोनों ने प्रयागराज में दो कॉन्स्टेबल की हत्या की थी और साथ ही एक महत्वपूर्ण गवाह उमेश पाल का मर्डर किया था. इनके फोटो घटनास्थल के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हो गए थे. ये फुटेज पूरे देश में मीडिया के माध्यम से प्रचारित हुए थे. उत्तर प्रदेश एसटीएफ के एडीजी ने आगे बताया कि इस मामले में कल रात ही एसटीएफ के डिप्टी एसपी नवेंदु कुमार द्वारा एफआईआर दर्ज करा दी गई है. साथ ही इनके पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई भी समाप्त हो गई है. अब पुलिस इंतजार कर रही है कि इनके परिवार वाले इनकी बॉडी को क्लेम करें और उनका अंतिम संस्कार कराया जा सके. वहीं गुड्डु मुस्लिम को लेकर उन्होंने कहा कि एसटीएफ की टीम लगातार इनको ट्रैक करने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसपर अभी कोई और अपडेट नहीं है. यह उन कुछ ऑपरेशन में से एक है जिसमें एसटीएफ ने अपनी सभी टीम को लगा दिया था और अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. इसके पहले बहुत कम केस में ऐसा हुआ है. यह केस इतना महत्वपूर्ण था. इस प्रकार का मर्डर एक माफिया गैंग द्वारा किया गया. वह क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की जड़ों पर हमला था. अगर गवाहों की इस तरह से हत्या होगी तो फिर कोई भी व्यक्ति गवाही देनें के लिए खड़ा नहीं होगा और पूरा क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम ही खत्म हो जाएगा. अमिताभ यश ने आगे बताया कि, इनके द्वारा कुछ और घटनाएं की जा सकती थीं, जिससे पुलिस और ज्यादा बैकफुट पर आ जाती. आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाने में और मुश्किल होगी. खासकर ऐसे अपराधी जो सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, लेकिन षड़यंत्र में शामिल रहे हैं. उम्मीद है कि अब जांच भी ठीक तरह से होगी और सभी आरोपियों को हम कड़ी से कड़ी सजा दिलाने में कामयाब होंगे.
|
नफीसा अली ने कैंसर के बाद शेयर की दिल की बात, कहा 'अब मैं कैंसर फ्री हूं'
अभिनेत्री नफीसा अली का यह संदेश कॉन्फिडेंस से भरा हुआ है। नफीसा अली ने कई बार कैंसर से जुड़ी मन की बात सोशल के जरिए शेयर की हैं ।
बॉलीवुड अभिनेत्री नफीसा अली का 2018 से कैंसर का इलाज चल रहा था। इलाज के बाद नफीसा अली ने सोशल मीडिया पर फोटो शेयर की हैं साथ में उन्होंने मोटिवेशनल संदेश लिखा हें।
अभिनेत्री नफीसा अली का यह संदेश कॉन्फिडेंस से भरा हुआ है। नफीसा अली ने कई बार कैंसर से जुड़ी मन की बात सोशल के जरिए शेयर की हैं । इस बार भी उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट कर के लिखा है कि मैं कैंसर फ्री हो गई हूं ।
मेरे सिर पर ज्यादा बाल नहीं हैं, फिर भी मैं हेयर विग नही पहंनूगी। मुझे फिल्म में कोमा पेशेंट , साधु आदि के रोल मुझे इंस्पायर करते है।
मुझे इंस्पिरेशन की जरूरत हैं साथ हि साथ मुझे सपोर्ट की जरूरत है वापस से मुझे काम कर ना है क्योकि मैं अब कैंसर पेशेंट नहीम रही हूं।
बता दें कि इस से पहले भी कई बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाली बैंदे, अभिनेता इरफान खान भी कैंसर के चपेट में आ चुके हैं। अभिनेत्री नफीसा अली की आखिरी फिल्म 'साहेब बीवी और गैंगस्टर 3' थी। अभिनेत्री नफीसा अली के एक बेटा दो बेटी हैं।
|
नफीसा अली ने कैंसर के बाद शेयर की दिल की बात, कहा 'अब मैं कैंसर फ्री हूं' अभिनेत्री नफीसा अली का यह संदेश कॉन्फिडेंस से भरा हुआ है। नफीसा अली ने कई बार कैंसर से जुड़ी मन की बात सोशल के जरिए शेयर की हैं । बॉलीवुड अभिनेत्री नफीसा अली का दो हज़ार अट्ठारह से कैंसर का इलाज चल रहा था। इलाज के बाद नफीसा अली ने सोशल मीडिया पर फोटो शेयर की हैं साथ में उन्होंने मोटिवेशनल संदेश लिखा हें। अभिनेत्री नफीसा अली का यह संदेश कॉन्फिडेंस से भरा हुआ है। नफीसा अली ने कई बार कैंसर से जुड़ी मन की बात सोशल के जरिए शेयर की हैं । इस बार भी उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट कर के लिखा है कि मैं कैंसर फ्री हो गई हूं । मेरे सिर पर ज्यादा बाल नहीं हैं, फिर भी मैं हेयर विग नही पहंनूगी। मुझे फिल्म में कोमा पेशेंट , साधु आदि के रोल मुझे इंस्पायर करते है। मुझे इंस्पिरेशन की जरूरत हैं साथ हि साथ मुझे सपोर्ट की जरूरत है वापस से मुझे काम कर ना है क्योकि मैं अब कैंसर पेशेंट नहीम रही हूं। बता दें कि इस से पहले भी कई बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाली बैंदे, अभिनेता इरफान खान भी कैंसर के चपेट में आ चुके हैं। अभिनेत्री नफीसा अली की आखिरी फिल्म 'साहेब बीवी और गैंगस्टर तीन' थी। अभिनेत्री नफीसा अली के एक बेटा दो बेटी हैं।
|
क्या आज़म खान के ख़िलाफ़ साज़िशें रुकेंगी ?
पीएम के नौ साल ,चायवाले का बेटा कहीं ग़ायब हो गया है ?
मैं तो लालू जी के साथ हूं!
कर्नाटक से अति उत्साहित तो नहीं कांग्रेस समर्थक ?
क्या कर्नाटक में 'केरला स्टोरी' की अफ़वाह हारेगी नहीं ?
सरकार का रक्षा कवच कमजोर हो चुका है ?
Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :
Copyright @ 2019 All Right Reserved । Powred by eMag Technologies Pvt. Ltd.
|
क्या आज़म खान के ख़िलाफ़ साज़िशें रुकेंगी ? पीएम के नौ साल ,चायवाले का बेटा कहीं ग़ायब हो गया है ? मैं तो लालू जी के साथ हूं! कर्नाटक से अति उत्साहित तो नहीं कांग्रेस समर्थक ? क्या कर्नाटक में 'केरला स्टोरी' की अफ़वाह हारेगी नहीं ? सरकार का रक्षा कवच कमजोर हो चुका है ? Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below : Copyright @ दो हज़ार उन्नीस All Right Reserved । Powred by eMag Technologies Pvt. Ltd.
|
मानवी भूलों का प्रतिरूप नया यह.
मनुष्य स्वभाव ऐसी जयचन्दी कहाँ थी.
इस ताप से क्या हम चौंक चुके हैं?
श्राप का क्यूँकर निदान हो जाये.
किस मतलब अब यह रोष?
प्रलय कगार पर इसका भय है.
ख़ुद तुमसे तुम्हारा नाश ही होगा.
ख़ुद तुमसे तुम्हारा नाश ही होगा.
ख़ुद तुमसे तुम्हारा नाश ही होगा.
|
मानवी भूलों का प्रतिरूप नया यह. मनुष्य स्वभाव ऐसी जयचन्दी कहाँ थी. इस ताप से क्या हम चौंक चुके हैं? श्राप का क्यूँकर निदान हो जाये. किस मतलब अब यह रोष? प्रलय कगार पर इसका भय है. ख़ुद तुमसे तुम्हारा नाश ही होगा. ख़ुद तुमसे तुम्हारा नाश ही होगा. ख़ुद तुमसे तुम्हारा नाश ही होगा.
|
पौंग झील में प्रवासी पक्षियों का बर्ड फ्लू से मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार प्रवासी पक्षियों की मौत हो रही है, लेकिन अब प्रवासी पक्षियों की मौत का ग्राफ कम होता जा रहा है। अभी तक पौंग झील में 4742 प्रवासी पक्षियों की मौत हो चुकी है। धीरे-धीरे बर्ड फ्लू कंट्रोल में आ रहा है। शुरू-शुरू में पौंग झील में 500 से एक हजार प्रवासी पक्षी बर्ड फ्लू से मौत का ग्रास बन रहे थे, लेकिन अब इनकी गिनती सैकड़ों में हो गई हैं। बुधवार को 105 प्रवासी पक्षियों की मौत हुई, जबकि 17 कौवे मौत का ग्रास बने हैं। वन्य प्राणी विभाग की टीम पीपीई किट पहनकर पूरी मुस्तैदी से मृत प्रवासी पक्षियों को उठाकर गड्ढा खोदकर उसमें दबा रही है, ताकि कोई संक्रमण न फैल सके।
वहीं दूसरी तरफ पशुपालन विभाग भी प्रवासी पक्षियों को बचाने में लगा हुआ है। पौंग झील में भोपाल की टीम भी दौरा कर चुकी है। पानी के सैंपल लिए गए थे तथा मृत पक्षियों के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट लेकर टेस्ट हेतु भोपाल ले गई थी। प्रवासी पक्षियों की लगातार हो रही मौत से पौंग झील किनारे बसे लोग सहम गए थे तथा जिला प्रशासन ने पौंग झील किनारे जाने सहित मछुआरों के मछली पकड़ने पर भी पाबंदी लगाई हुई है। पशुओं को भी पौंग झील में छोड़ने पर पाबंदी है। जिला प्रशासन ने उल्लंघना करने वालों पर केस करने सहित 50 हजार रुपए जुर्माना की सजा रखी है। पुलिस की भी ड्यूटी लगाई गई है तथा पुलिस भी लोगों को जागरूक करती रही। अब धीरे-धीरे बर्ड फ्लू कंट्रोल होने लगा है। बुद्धिजीवियों ने मांग की है कि पौंग झील किनारे खेती करने वालों पर भी कार्रवाई की जाए।
वन्य प्राणी विभाग हमीरपुर के डीएफओ राहुल एम रोहाणी ने बताया कि अब बर्ड फ्लू धीरे-धीरे थमने लगा है। प्रवासी पक्षियों की मौत का ग्राफ कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तक 4742 प्रवासी पक्षियों की मौत हो चुकी है, जिनको दबाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पौंग झील किनारे की गई खेती को हरगिज काटने नहीं दिया जाएगा।
इस बारे में जिलाधीश कांगड़ा राकेश प्रजापति ने कहा कि अभी तक पौंग झील किनारे जाने पर प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि जैसे ही बर्ड फ्लू कंट्रोल हो जाएगा, तो मछुआरों के लिए प्रतिबंध को हटा दिया जाएगा।
|
पौंग झील में प्रवासी पक्षियों का बर्ड फ्लू से मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार प्रवासी पक्षियों की मौत हो रही है, लेकिन अब प्रवासी पक्षियों की मौत का ग्राफ कम होता जा रहा है। अभी तक पौंग झील में चार हज़ार सात सौ बयालीस प्रवासी पक्षियों की मौत हो चुकी है। धीरे-धीरे बर्ड फ्लू कंट्रोल में आ रहा है। शुरू-शुरू में पौंग झील में पाँच सौ से एक हजार प्रवासी पक्षी बर्ड फ्लू से मौत का ग्रास बन रहे थे, लेकिन अब इनकी गिनती सैकड़ों में हो गई हैं। बुधवार को एक सौ पाँच प्रवासी पक्षियों की मौत हुई, जबकि सत्रह कौवे मौत का ग्रास बने हैं। वन्य प्राणी विभाग की टीम पीपीई किट पहनकर पूरी मुस्तैदी से मृत प्रवासी पक्षियों को उठाकर गड्ढा खोदकर उसमें दबा रही है, ताकि कोई संक्रमण न फैल सके। वहीं दूसरी तरफ पशुपालन विभाग भी प्रवासी पक्षियों को बचाने में लगा हुआ है। पौंग झील में भोपाल की टीम भी दौरा कर चुकी है। पानी के सैंपल लिए गए थे तथा मृत पक्षियों के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट लेकर टेस्ट हेतु भोपाल ले गई थी। प्रवासी पक्षियों की लगातार हो रही मौत से पौंग झील किनारे बसे लोग सहम गए थे तथा जिला प्रशासन ने पौंग झील किनारे जाने सहित मछुआरों के मछली पकड़ने पर भी पाबंदी लगाई हुई है। पशुओं को भी पौंग झील में छोड़ने पर पाबंदी है। जिला प्रशासन ने उल्लंघना करने वालों पर केस करने सहित पचास हजार रुपए जुर्माना की सजा रखी है। पुलिस की भी ड्यूटी लगाई गई है तथा पुलिस भी लोगों को जागरूक करती रही। अब धीरे-धीरे बर्ड फ्लू कंट्रोल होने लगा है। बुद्धिजीवियों ने मांग की है कि पौंग झील किनारे खेती करने वालों पर भी कार्रवाई की जाए। वन्य प्राणी विभाग हमीरपुर के डीएफओ राहुल एम रोहाणी ने बताया कि अब बर्ड फ्लू धीरे-धीरे थमने लगा है। प्रवासी पक्षियों की मौत का ग्राफ कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तक चार हज़ार सात सौ बयालीस प्रवासी पक्षियों की मौत हो चुकी है, जिनको दबाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पौंग झील किनारे की गई खेती को हरगिज काटने नहीं दिया जाएगा। इस बारे में जिलाधीश कांगड़ा राकेश प्रजापति ने कहा कि अभी तक पौंग झील किनारे जाने पर प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि जैसे ही बर्ड फ्लू कंट्रोल हो जाएगा, तो मछुआरों के लिए प्रतिबंध को हटा दिया जाएगा।
|
अहमदाबाद। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने कहा है कि कुरान व इस्लाम नहीं कहते कि अजान लाउडस्पीकर से देना जरूरी है।
उनका कहना है कि इसमें कोई शक नहीं कि नमाज अता करने के लिए अजान देनी जरूरी है लेकिन वह लाउडस्पीकर से हो यह जरूरी नहीं है।
पटेल ने कहा कि अजान इस तरह से दी जाए जिससे किसी को परेशानी न झेलनी पड़े। अहमदाबाद एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज तकनीक का युग है।
वह लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ नहीं हैं लेकिन हमें देखना चाहिए कि इससे किसी और को परेशानी न हो। इससे पहले मंगलवार दोपहर को उन्होंने ट्वीट भी किया।
गौरतलब है कि बीते दिन गायक सोनू निगम ने ट्वीट किया था कि वह मुस्लिम नहीं है लेकिन फिर भी रोज सुबह उनकी नींद लाउडस्पीकर पर दी जाने वाली अजान से खुलती है।
|
अहमदाबाद। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने कहा है कि कुरान व इस्लाम नहीं कहते कि अजान लाउडस्पीकर से देना जरूरी है। उनका कहना है कि इसमें कोई शक नहीं कि नमाज अता करने के लिए अजान देनी जरूरी है लेकिन वह लाउडस्पीकर से हो यह जरूरी नहीं है। पटेल ने कहा कि अजान इस तरह से दी जाए जिससे किसी को परेशानी न झेलनी पड़े। अहमदाबाद एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज तकनीक का युग है। वह लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ नहीं हैं लेकिन हमें देखना चाहिए कि इससे किसी और को परेशानी न हो। इससे पहले मंगलवार दोपहर को उन्होंने ट्वीट भी किया। गौरतलब है कि बीते दिन गायक सोनू निगम ने ट्वीट किया था कि वह मुस्लिम नहीं है लेकिन फिर भी रोज सुबह उनकी नींद लाउडस्पीकर पर दी जाने वाली अजान से खुलती है।
|
नई दिल्लीः क़त्ल के जुर्म में सजा सुंनाने का ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर किसी का दिल दहल जाए. यह फैसला किसी संगठन या समुदाय ने नही सुनाया बल्कि दुबई कोर्ट ने सुनाया है. दुबई में रहने वाले महाराष्ट्र के आतिफ पोपेरे को अपनी पत्नी के क़त्ल के जुर्म में दुबई कोर्ट ने गोलियों से भुनने का खौफनाक फरमान सुनाया है. जानकारी के मुताबिक आतिफ ने मिनी उर्फ़ बुशरा से 2007 में प्रेम विवाह किया था जिसके बाद साल 2013 आतिफ की बीवी की हत्या हो गई थी.
बताया जा रहा है की आतिफ और मिनी मुंबई के एक कॉलेज में साथ पढ़ते थे जिस दौरान दोनों के बीच प्यार हुआ और दोनों ने परिवार वालो की मर्जी के खिलाफ शादी कर ली. दोनों को एक बेटी भी हुई. शादी के कुछ दिनों बाद दोनों दुबई में रहने चले गए जहा पर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था.
विवाद इतना बढ़ा की एक दिन आतिफ ने अपनी पत्नी को मौत के घाट उत्तर दिया. इसके बाद अदालत ने उसे यह खौफनाक सजा सुनाई है. दुबई के कानून के अनुसार अगर पीड़ित पत्नी के परिजन यानी की बुशरा की मां अगर आतिफ को माफ़ कर दे तो उसकी जान बच सकती है. लेकिन फिलहाल बुशरा की मां अपनी बेटी की हत्या के लिए दुबई कोर्ट के इस फैसले को सही मान रही है.
|
नई दिल्लीः क़त्ल के जुर्म में सजा सुंनाने का ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर किसी का दिल दहल जाए. यह फैसला किसी संगठन या समुदाय ने नही सुनाया बल्कि दुबई कोर्ट ने सुनाया है. दुबई में रहने वाले महाराष्ट्र के आतिफ पोपेरे को अपनी पत्नी के क़त्ल के जुर्म में दुबई कोर्ट ने गोलियों से भुनने का खौफनाक फरमान सुनाया है. जानकारी के मुताबिक आतिफ ने मिनी उर्फ़ बुशरा से दो हज़ार सात में प्रेम विवाह किया था जिसके बाद साल दो हज़ार तेरह आतिफ की बीवी की हत्या हो गई थी. बताया जा रहा है की आतिफ और मिनी मुंबई के एक कॉलेज में साथ पढ़ते थे जिस दौरान दोनों के बीच प्यार हुआ और दोनों ने परिवार वालो की मर्जी के खिलाफ शादी कर ली. दोनों को एक बेटी भी हुई. शादी के कुछ दिनों बाद दोनों दुबई में रहने चले गए जहा पर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था. विवाद इतना बढ़ा की एक दिन आतिफ ने अपनी पत्नी को मौत के घाट उत्तर दिया. इसके बाद अदालत ने उसे यह खौफनाक सजा सुनाई है. दुबई के कानून के अनुसार अगर पीड़ित पत्नी के परिजन यानी की बुशरा की मां अगर आतिफ को माफ़ कर दे तो उसकी जान बच सकती है. लेकिन फिलहाल बुशरा की मां अपनी बेटी की हत्या के लिए दुबई कोर्ट के इस फैसले को सही मान रही है.
|
बलिया पुलिस ने रविवार को 85 लाख रुपये कीमत की अंग्रेजी शराब बरामद किया। हरियाणा निर्मित चौदह सौ लीटर अंग्रेजी शराब के साथ छह तस्कर भी गिरफ्तार किए गए हैं।
रविवार को सिधागर घाट के पास से रसड़ा के प्रभारी निरीक्षक नागेश उपाध्याय ने एसओजी टीम की मदद से एक टाटा डीसीएम गाड़ी से 564 शीशी 750 एमएल की व 4900 शीशी 180 एमएल और एक स्विफ्ट डिजायर से 180 एमएल 500 शीशी यानी 155 पेटी से 1395 लीटर हरियाणा निर्मित अंग्रेजी शराब बरामद किया।
पुलिस ने दोनों वाहनों से हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले राहुल भांटी पुत्र केन्द्रपाल और विजेन्द्र सिंह पुत्र किशनलाल के साथ जयप्रकाश पुत्र भरत सिंह निवासी अलौदा जागीर थाना ककौर बुलन्दशहर, योगेन्द्र कुमार पुत्र लख्मी सिंह निवासी कमालपुर थाना खुरजा बुलन्दशहर, काले खां पुत्र चांद खां निवासी टेगना थाना खुरजा बुलन्दशहर तथा सुरेन्द्र ठाकुर उर्फ सोनू ठाकुर पुत्र लक्ष्मीचन्द निवासी कमालपुर थाना खुरजा बुलन्दशहर को गिरफ्तार किया।
|
बलिया पुलिस ने रविवार को पचासी लाख रुपये कीमत की अंग्रेजी शराब बरामद किया। हरियाणा निर्मित चौदह सौ लीटर अंग्रेजी शराब के साथ छह तस्कर भी गिरफ्तार किए गए हैं। रविवार को सिधागर घाट के पास से रसड़ा के प्रभारी निरीक्षक नागेश उपाध्याय ने एसओजी टीम की मदद से एक टाटा डीसीएम गाड़ी से पाँच सौ चौंसठ शीशी सात सौ पचास एमएल की व चार हज़ार नौ सौ शीशी एक सौ अस्सी एमएल और एक स्विफ्ट डिजायर से एक सौ अस्सी एमएल पाँच सौ शीशी यानी एक सौ पचपन पेटी से एक हज़ार तीन सौ पचानवे लीटरटर हरियाणा निर्मित अंग्रेजी शराब बरामद किया। पुलिस ने दोनों वाहनों से हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले राहुल भांटी पुत्र केन्द्रपाल और विजेन्द्र सिंह पुत्र किशनलाल के साथ जयप्रकाश पुत्र भरत सिंह निवासी अलौदा जागीर थाना ककौर बुलन्दशहर, योगेन्द्र कुमार पुत्र लख्मी सिंह निवासी कमालपुर थाना खुरजा बुलन्दशहर, काले खां पुत्र चांद खां निवासी टेगना थाना खुरजा बुलन्दशहर तथा सुरेन्द्र ठाकुर उर्फ सोनू ठाकुर पुत्र लक्ष्मीचन्द निवासी कमालपुर थाना खुरजा बुलन्दशहर को गिरफ्तार किया।
|
अभी तक हमने केवल ऐसे शब्दों का विचार किया है जो धातु और प्रत्यय से बन जाते हैं। ऐसे शब्द भी होते हैं जिनमें धातु से पूर्व कोई दूसरा सिद्ध शब्द आता है या कोई उपसर्ग है। उपसर्ग का हाल तुम व्याकरण में पढ़ चुके होगे ।
(क) जल + जन् (धातु - पैदा होना ) + प्रत्यय = जलज (कमल) । पाद + पा (धातु - पीना) + प्रत्यय = पादप ( पैरों से अर्थात् जड़ों से पीनेवाला, वृक्ष ) । भूमि + पाल ( धातु - पालना) + प्रत्यय = भूमिपाल (राजा) । हज़ारों शब्द ऐसे होंगे जिनके अन्त में अचू, क, शतृ प्रत्ययान्त शब्द आते हैंउदाहरण - उरग, हानिकर, कृपाकारक, सृष्टिकर्त्ता, शास्त्रज्ञ, विशेषज्ञ, दैवज्ञ, फलद, सुखद, धनदायक, बुद्धिदायक, अन्नदाता, अनुज, सहज, लज्जाजनक, मनोहर, धनहारक, रोगहर्ता, धरणोधर, धर्मधारक आदि ।
(ख) उपसर्ग वह अव्यय शब्द है जो धातु और धातु से बने शब्द के पूर्व लगकर उसका अर्थ बदल देता है ।
प्र, परा, अप, समू, निः, दुः, वि, ना, नि, उप, पधि, अनु, प्रव, परि, अन्तः, आदि उपसर्ग कहलाते हैं ।
देखा कि हृ धातु से बने 'हार' या हरण शब्द में विविध उपसर्ग लगाने से विविध अर्थ हो जाते हैं -
प्रहार ( मारना), अर ( छीन लेना), संहार ( नष्ट कर देना), विहार ( आनन्द करना ), उपहार ( नज़र ),
अनुहार (नकुल), आहार (भोजन), परिहार (निवारण), प्रतिहार ( द्वारपाल ), व्याहार (वि + आ + हार = वचन ), उदाहरण, व्यवहार आदि । अन्य उदाहरण भी देखो । गम - संगम ( मिलना ), निर्गम ( निकलना), आगमन (आ), अनुगमन ( पीछे चलना ) ।
जि - जय, विजय ( जीत), पराजय ( हार ) । कृ - प्रकरण (अध्याय, प्रसंग), अपकार ( बुराई), संस्कार ( सुधार ), विकार ( बिगाड़ ), आकार ( रूप ), उपकार (भलाई), अधिकार (बल, अख्तियार) अनुकरण (नकुल), परिष्कार ( सँवारना ), पुरस्कार ( इनाम ) ।
विशू - प्रवेश (पैठना), आवेश (ताव), उपविष्ट ( बैठा ) ।
( १ ) किसी धातु का क्त प्रत्ययान्त रूप देखकर तुम प्रायः उसका क्ति प्रत्ययान्त रूप बना सकते हो; जैसे मत - मति; प्रोत - प्रोति; भक्त - भक्ति आदि। परन्तु कुछ में भिन्नता होती है, जैसे आपन आपत्ति ।
( २ ) ल्युट् प्रत्ययवाले कुछ शब्द और देखे। - भवन, चेतन, मन्थन, शोधन, पठन, लेखन, गायन, शयन, जागरण, मरण, मारण, पालन, पोषण, पान, ज्ञान, ज्ञापन आदि ।
( ३ ) कुछ घञन्त शब्द और देखे - भाव, पाठ, राग, संवार, संवाद, अभिमान, अभिाष, संसार, अहंकार, आहार, चोभ, बोध, रोग, शोक, लोभ, मोह, क्रोध, योग
भोग, मोद, तोष, शोष, संग, बन्ध, आरंभ, विलम्ब, गन्ध, शेष, उपदेश, प्रवेश द्वेष ।
( ४ ) इन शब्दों के पर्थों में भेद बताओोः
( क ) विलास, अभिलाष; ( ख ) प्रकाश, अवकाश; ( ग ) अभिमान, सम्मान; (घ ) प्रधान, व्यवधान, परिधान, सन्धान; ( ङ. ) संज्ञा, प्रतिज्ञा, प्रज्ञा, अवज्ञा, अनुज्ञा, आज्ञा; (च) आदान प्रदान; ( छ ) प्रग्रह, संग्रह, अनुग्रह, निग्रह, विग्रह, आग्रह; ( ज ) प्रभाव, अनुभाव, विभाव, आविर्भाव, तिरोभाव; ( झ ) पराभव, संभव, अनुभव, विभव, अभिभव ।
तुम अब देख चुके कि कृत् प्रत्ययों के द्वारा तथा उपसर्गों के द्वारा किस प्रकार शब्दों का भण्डार तैयार होता है। सिद्ध शब्द भी अन्य प्रत्यय ग्रहण करके अपना रूप बदलते हैं। ऐसे प्रत्ययों को तद्धित प्रत्यय कहते हैं और इनके द्वारा बने हुए शब्दों को तद्धितान्त शब्द कहते हैं । तद्धित का वर्णन तुमने व्याकरण में पढ़ा होगा; यहाँ कुछ मुख्य बातों का स्मरण कराया जाता हैः( १ ) अपत्यवाचक - दशरथ का पुत्र दाशरथि, वसुदेव का पुत्र वासुदेव, पृथा का पुत्र पार्थ, धृतराष्ट्र का पुत्र धार्तराष्ट्रि, कौशल्या का पुत्र कौशलेय, सुमित्रा का पुत्र सौमित्रि या सौमित्र, कुशिक का पुत्र कौशिक, सूर्य का पुत्र सौरि,
|
अभी तक हमने केवल ऐसे शब्दों का विचार किया है जो धातु और प्रत्यय से बन जाते हैं। ऐसे शब्द भी होते हैं जिनमें धातु से पूर्व कोई दूसरा सिद्ध शब्द आता है या कोई उपसर्ग है। उपसर्ग का हाल तुम व्याकरण में पढ़ चुके होगे । जल + जन् + प्रत्यय = जलज । पाद + पा + प्रत्यय = पादप । भूमि + पाल + प्रत्यय = भूमिपाल । हज़ारों शब्द ऐसे होंगे जिनके अन्त में अचू, क, शतृ प्रत्ययान्त शब्द आते हैंउदाहरण - उरग, हानिकर, कृपाकारक, सृष्टिकर्त्ता, शास्त्रज्ञ, विशेषज्ञ, दैवज्ञ, फलद, सुखद, धनदायक, बुद्धिदायक, अन्नदाता, अनुज, सहज, लज्जाजनक, मनोहर, धनहारक, रोगहर्ता, धरणोधर, धर्मधारक आदि । उपसर्ग वह अव्यय शब्द है जो धातु और धातु से बने शब्द के पूर्व लगकर उसका अर्थ बदल देता है । प्र, परा, अप, समू, निः, दुः, वि, ना, नि, उप, पधि, अनु, प्रव, परि, अन्तः, आदि उपसर्ग कहलाते हैं । देखा कि हृ धातु से बने 'हार' या हरण शब्द में विविध उपसर्ग लगाने से विविध अर्थ हो जाते हैं - प्रहार , अर , संहार , विहार , उपहार , अनुहार , आहार , परिहार , प्रतिहार , व्याहार , उदाहरण, व्यवहार आदि । अन्य उदाहरण भी देखो । गम - संगम , निर्गम , आगमन , अनुगमन । जि - जय, विजय , पराजय । कृ - प्रकरण , अपकार , संस्कार , विकार , आकार , उपकार , अधिकार अनुकरण , परिष्कार , पुरस्कार । विशू - प्रवेश , आवेश , उपविष्ट । किसी धातु का क्त प्रत्ययान्त रूप देखकर तुम प्रायः उसका क्ति प्रत्ययान्त रूप बना सकते हो; जैसे मत - मति; प्रोत - प्रोति; भक्त - भक्ति आदि। परन्तु कुछ में भिन्नता होती है, जैसे आपन आपत्ति । ल्युट् प्रत्ययवाले कुछ शब्द और देखे। - भवन, चेतन, मन्थन, शोधन, पठन, लेखन, गायन, शयन, जागरण, मरण, मारण, पालन, पोषण, पान, ज्ञान, ज्ञापन आदि । कुछ घञन्त शब्द और देखे - भाव, पाठ, राग, संवार, संवाद, अभिमान, अभिाष, संसार, अहंकार, आहार, चोभ, बोध, रोग, शोक, लोभ, मोह, क्रोध, योग भोग, मोद, तोष, शोष, संग, बन्ध, आरंभ, विलम्ब, गन्ध, शेष, उपदेश, प्रवेश द्वेष । इन शब्दों के पर्थों में भेद बताओोः विलास, अभिलाष; प्रकाश, अवकाश; अभिमान, सम्मान; प्रधान, व्यवधान, परिधान, सन्धान; संज्ञा, प्रतिज्ञा, प्रज्ञा, अवज्ञा, अनुज्ञा, आज्ञा; आदान प्रदान; प्रग्रह, संग्रह, अनुग्रह, निग्रह, विग्रह, आग्रह; प्रभाव, अनुभाव, विभाव, आविर्भाव, तिरोभाव; पराभव, संभव, अनुभव, विभव, अभिभव । तुम अब देख चुके कि कृत् प्रत्ययों के द्वारा तथा उपसर्गों के द्वारा किस प्रकार शब्दों का भण्डार तैयार होता है। सिद्ध शब्द भी अन्य प्रत्यय ग्रहण करके अपना रूप बदलते हैं। ऐसे प्रत्ययों को तद्धित प्रत्यय कहते हैं और इनके द्वारा बने हुए शब्दों को तद्धितान्त शब्द कहते हैं । तद्धित का वर्णन तुमने व्याकरण में पढ़ा होगा; यहाँ कुछ मुख्य बातों का स्मरण कराया जाता हैः अपत्यवाचक - दशरथ का पुत्र दाशरथि, वसुदेव का पुत्र वासुदेव, पृथा का पुत्र पार्थ, धृतराष्ट्र का पुत्र धार्तराष्ट्रि, कौशल्या का पुत्र कौशलेय, सुमित्रा का पुत्र सौमित्रि या सौमित्र, कुशिक का पुत्र कौशिक, सूर्य का पुत्र सौरि,
|
(जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में चौपाल का आयोजन हुआ, फोटो-रोहित डिमरी)
Uttarakhand News: रुद्रप्रयाग जिले के दूरस्थ गांवों में विकास की किरण पहुंचाना प्रशासन का उद्देश्य है. प्रशासन अंतिम गांवों में पहुंचकर चौपाल का आयोजन कर रहा है, जिससे जन समस्याओं का समय से समाधान हो सके. ग्रामीण जनता को भी चौपाल में आकर अपनी समस्याओं को रखना होगा, तभी क्षेत्र के साथ ही जिले का विकास संभव हो पाएगा. बता दें कि सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में समस्याओं के समाधान करने और केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सरकार सप्ताह के अंतर्गत प्रशासन आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया है.
इसी क्रम में शनिवार को जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में कालीमठ घाटी की अंतिम ग्राम पंचायत चैमासी में ग्राम चौपाल का आयोजन किया गया. इसमें क्षेत्र वासियों और जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को प्रमुखता से सुना गया. चौपाल में जिलाधिकारी ने बताया कि सुशासन सप्ताह के अंतर्गत जनपद स्तरीय अधिकारियों द्वारा ग्राम स्तर पर चौपाल कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इसी क्रम में सुदूर ग्राम पंचायत चैमासी में चौपाल आयोजित की गई. उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी समस्याएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें धनराशि की आवश्यकता होगी. ऐसे प्रस्तावों पर जनपद स्तर और आवश्यकता होने पर सरकार से धनराशि की मांग की जाएगी.
उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की मांग पर केदारघाटी अथवा रामबाड़ा, सोनप्रयाग आदि से जोड़ने की मांग पर भी वार्ता की गई. इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन पर्यटन सूचना केंद्र को पहाड़ी शैली में तैयार करने के निर्देश दिए. साथ सड़क मार्ग और प्रतीक्षालय का निरीक्षण भी किया. चौपाल के दौरान संबंधित अधिकारियों ने सरकार की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी ग्रामीणों को दी. स्थानीय लोगों की मांग पर जिलाधिकारी ने कालीमठ में शिक्षा विभाग की बिल्डिंग पर पटवारी चौकी संचालित करने के निर्देश दिए.
ग्राम चौपाल कार्यक्रम में चैमासी के प्रधान मुलायम सिंह ने ग्राम पंचायत चैमासी से रामबाड़ा सड़क मार्ग निर्माण के लिए संयुक्त निरीक्षण करने की बता की. उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में एकल अध्यापक होने, चैमासी-चिलौंड सरस्वती नदी पर पुलिया निर्माण करने और चैपाल में बन रहे पर्यटन सूचना केंद्र के निर्माण में धन का अभाव होने की समस्याएं रखी. कोटमा की प्रधान आशा देवी ने ग्राम पंचायत कोटमा में राष्ट्रीयकृत बैंक शाखा खोलने और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के दृष्टिगत प्राथमिक विद्यालय कोटमा में सुरक्षा दीवार निर्माण की मांग की. इसके अलावा ग्रामीणों ने गांव में जंगली जानवरों का आतंक होने पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की.
वहीं जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कालीमठ घाटी में महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एनआरएलएम द्वारा संचालित महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्यों का निरीक्षण किया. इस अवसर पर उन्होंने जाल-मल्ला में नारी शक्ति ग्राम संगठन द्वारा शुरू की गई डोना पत्तल और गिलास यूनिट का शुभारंभ भी किया.
जिलाधिकारी ने महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डोना पत्तल और गिलासों की बिक्री यात्रा मार्ग पर करने के लिए तैयार करें. इसमें किसी भी प्रकार से प्लास्टिक का इस्तेमाल न किया जाए. कोटमा स्थित उन्नति स्वायत सहकारिता में चल रही हैंडलूम यूनिट का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने यहां तैयार हो रहे उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग करने के निर्देश दिए. जिलाधिकारी ने सभी उत्पादों को पहाड़ी शैली में तैयार करने और उत्पादों पर जिले और समूह के टैग लगाने को भी कहा. उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग के अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी इन उत्पादों को बेचा जाना चाहिए, ताकि महिलाओं की आजीविका में वृद्धि हो सके.
|
Uttarakhand News: रुद्रप्रयाग जिले के दूरस्थ गांवों में विकास की किरण पहुंचाना प्रशासन का उद्देश्य है. प्रशासन अंतिम गांवों में पहुंचकर चौपाल का आयोजन कर रहा है, जिससे जन समस्याओं का समय से समाधान हो सके. ग्रामीण जनता को भी चौपाल में आकर अपनी समस्याओं को रखना होगा, तभी क्षेत्र के साथ ही जिले का विकास संभव हो पाएगा. बता दें कि सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में समस्याओं के समाधान करने और केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सरकार सप्ताह के अंतर्गत प्रशासन आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया है. इसी क्रम में शनिवार को जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में कालीमठ घाटी की अंतिम ग्राम पंचायत चैमासी में ग्राम चौपाल का आयोजन किया गया. इसमें क्षेत्र वासियों और जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को प्रमुखता से सुना गया. चौपाल में जिलाधिकारी ने बताया कि सुशासन सप्ताह के अंतर्गत जनपद स्तरीय अधिकारियों द्वारा ग्राम स्तर पर चौपाल कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इसी क्रम में सुदूर ग्राम पंचायत चैमासी में चौपाल आयोजित की गई. उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी समस्याएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें धनराशि की आवश्यकता होगी. ऐसे प्रस्तावों पर जनपद स्तर और आवश्यकता होने पर सरकार से धनराशि की मांग की जाएगी. उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की मांग पर केदारघाटी अथवा रामबाड़ा, सोनप्रयाग आदि से जोड़ने की मांग पर भी वार्ता की गई. इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन पर्यटन सूचना केंद्र को पहाड़ी शैली में तैयार करने के निर्देश दिए. साथ सड़क मार्ग और प्रतीक्षालय का निरीक्षण भी किया. चौपाल के दौरान संबंधित अधिकारियों ने सरकार की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी ग्रामीणों को दी. स्थानीय लोगों की मांग पर जिलाधिकारी ने कालीमठ में शिक्षा विभाग की बिल्डिंग पर पटवारी चौकी संचालित करने के निर्देश दिए. ग्राम चौपाल कार्यक्रम में चैमासी के प्रधान मुलायम सिंह ने ग्राम पंचायत चैमासी से रामबाड़ा सड़क मार्ग निर्माण के लिए संयुक्त निरीक्षण करने की बता की. उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में एकल अध्यापक होने, चैमासी-चिलौंड सरस्वती नदी पर पुलिया निर्माण करने और चैपाल में बन रहे पर्यटन सूचना केंद्र के निर्माण में धन का अभाव होने की समस्याएं रखी. कोटमा की प्रधान आशा देवी ने ग्राम पंचायत कोटमा में राष्ट्रीयकृत बैंक शाखा खोलने और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के दृष्टिगत प्राथमिक विद्यालय कोटमा में सुरक्षा दीवार निर्माण की मांग की. इसके अलावा ग्रामीणों ने गांव में जंगली जानवरों का आतंक होने पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की. वहीं जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कालीमठ घाटी में महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एनआरएलएम द्वारा संचालित महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्यों का निरीक्षण किया. इस अवसर पर उन्होंने जाल-मल्ला में नारी शक्ति ग्राम संगठन द्वारा शुरू की गई डोना पत्तल और गिलास यूनिट का शुभारंभ भी किया. जिलाधिकारी ने महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डोना पत्तल और गिलासों की बिक्री यात्रा मार्ग पर करने के लिए तैयार करें. इसमें किसी भी प्रकार से प्लास्टिक का इस्तेमाल न किया जाए. कोटमा स्थित उन्नति स्वायत सहकारिता में चल रही हैंडलूम यूनिट का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने यहां तैयार हो रहे उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग करने के निर्देश दिए. जिलाधिकारी ने सभी उत्पादों को पहाड़ी शैली में तैयार करने और उत्पादों पर जिले और समूह के टैग लगाने को भी कहा. उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग के अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी इन उत्पादों को बेचा जाना चाहिए, ताकि महिलाओं की आजीविका में वृद्धि हो सके.
|
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय नागरिक उड्यन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी को हैदराबाद -जगदलपुर -रायपुर विमान सेवा प्रारंभ किए जाने तथा इसके लिए छत्तीसगढ़ के जगदलपुर को महत्वपूर्ण सेन्टर के रूप में मान्य करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय राज्य मंत्री पुरी को प्रेषित अपने पत्र में छत्तीसगढ़ की न्यायधानी एवं महत्वपूर्ण व्यावसायिक एवं औद्योगिक शहर बिलासपुर को हवाई सेवा से देश के मेट्रोपोलियन सिटी दिल्ली, मुंबई, और कोलकोता हवाई रूट से जोड़ने का आग्रह किया है.
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि बिलासपुर छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तरी क्षेत्र का प्रमुख वाणिज्यिक एवं व्यावसायिक केन्द्र है. बिलासपुर राज्य के उत्तरी जिलों को जोड़ता है. यहां साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड का मुख्यालय और साउथ ईस्ट सेन्ट्रल रेल्वे का जोन मुख्यालय तथा बिलासपुर रेल्वे डिवीजन के अलावा यह देश में विद्युत उत्पादन का महत्वपूर्ण केन्द्रों में से एक है. इस शहर के समीप सीपत में एनटीपीसी सहित पड़ोसी जिले जांजगीर चांपा एवं कोरबा में कई विद्युत उत्पादन संयत्र संचालित हैं. इसके अलावा बिलासपुर के आस-पास कई औद्योगिक क्षेत्र हैं जिनकी राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूूर्ण भागीदारी है.
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि यदि बिलासपुर को दिल्ली, मुम्बई, कोलकोता जैसे मेट्रोपोलियन सिटी से हवाई सेवा से जोड़ दिया जाता है तो इससे रीजनल एयर कनेक्टिविटी बढ़ेगी और देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, व्यवसाय, पर्यटन स्वास्थ्य तथा सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
|
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय नागरिक उड्यन राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी को हैदराबाद -जगदलपुर -रायपुर विमान सेवा प्रारंभ किए जाने तथा इसके लिए छत्तीसगढ़ के जगदलपुर को महत्वपूर्ण सेन्टर के रूप में मान्य करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय राज्य मंत्री पुरी को प्रेषित अपने पत्र में छत्तीसगढ़ की न्यायधानी एवं महत्वपूर्ण व्यावसायिक एवं औद्योगिक शहर बिलासपुर को हवाई सेवा से देश के मेट्रोपोलियन सिटी दिल्ली, मुंबई, और कोलकोता हवाई रूट से जोड़ने का आग्रह किया है. मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि बिलासपुर छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तरी क्षेत्र का प्रमुख वाणिज्यिक एवं व्यावसायिक केन्द्र है. बिलासपुर राज्य के उत्तरी जिलों को जोड़ता है. यहां साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड का मुख्यालय और साउथ ईस्ट सेन्ट्रल रेल्वे का जोन मुख्यालय तथा बिलासपुर रेल्वे डिवीजन के अलावा यह देश में विद्युत उत्पादन का महत्वपूर्ण केन्द्रों में से एक है. इस शहर के समीप सीपत में एनटीपीसी सहित पड़ोसी जिले जांजगीर चांपा एवं कोरबा में कई विद्युत उत्पादन संयत्र संचालित हैं. इसके अलावा बिलासपुर के आस-पास कई औद्योगिक क्षेत्र हैं जिनकी राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूूर्ण भागीदारी है. मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि यदि बिलासपुर को दिल्ली, मुम्बई, कोलकोता जैसे मेट्रोपोलियन सिटी से हवाई सेवा से जोड़ दिया जाता है तो इससे रीजनल एयर कनेक्टिविटी बढ़ेगी और देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, व्यवसाय, पर्यटन स्वास्थ्य तथा सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
|
प्रधानमंत्री-किसान सम्मान निधि स्कीम (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi scheme) की अगली किश्त ठीक 21 दिन दिन बाद 1 अगस्त से आनी शुरू हो जाएगी. छठीं किश्त करीब 10 करोड़ किसानों तक पहुंचेगी. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों ने आवेदन नहीं किया है वे आवेदन करके लाभ ले सकते हैं. जबकि जिन लोगों का डेटा अप्रूव्ड है वे अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं. अब सिर्फ 4. 5 करोड़ किसानों को ही इसमें आवेदन करना है. बताया जाता है कि इस स्कीम के तहत अब तक करीब 74 हजार करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं.
जिन लोगों ने हाल ही में अप्लाई किया है वे भी अपना रिकॉर्ड चेक कर लें. आधार, अकाउंट नंबर और बैंक अकाउंट नंबर में नाम आदि चेक कर लें. ताकि पैसा मिलने में दिक्कत न हो. रिकॉर्ड में कोई भी गड़बड़ी होगी तो निश्चित तौर पर आपको योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा. पहले ही 1. 3 करोड़ किसानों को आवेदन करने के बाद भी सिर्फ इसलिए पैसा नहीं मिल सका क्योंकि या तो उनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी है या फिर आधार कार्ड नहीं है.
पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम की ऑफीशियल वेबसाइट (pmkisan. gov. in) है. बेवसाइट को लॉग इन करना होगा. इसमें दिए गए ' Farmers Corner' वाले टैब में क्लिक करना होगा.
अगर आपने पहले आवेदन किया है और आपका आधार (Aadhaar) ठीक से अपलोड नहीं हुआ है या किसी वजह से आधार नंबर गलत दर्ज हो गया है तो इसकी जानकारी इसमें मिल जाएगी.
स्टेप 1: स्टेटस जानने के लिए सबसे पहले पीएम किसान सम्मान निधि योजना के पोर्टल पर जाएं. ये पोर्टल pmkisan. gov. in है.
स्टेप 2: पोर्टल पर जाने के बाद, बार में बने "Farmer's corner" पर क्लिक करें.
स्टेप 3 :- "Farmer's corner" पर क्लिक करने के बाद आप देख पाएंगे वहां पर तीन ऑप्शन हैं. उसमें से "Benificary status" पर क्लिक करें.
स्टेप 4: "Beneficiary Status" पर क्लिक करने के बाद जो पेज खुलेगा उसमें नजर तीन चीजें नजर आएंगी.
-आधार नंबर (Check PM kisan Samman Yojna status by Aadhar Number)
-अकाउंट नंबर(Check PM kisan Samman Yojna status by Account Number)
फोन नंबर(Check PM kisan Samman Yojna status by Mobile Number)
तीनों में से जो भी इन्फॉर्मेशन डाली है उसके ऑप्शन पर टिक करके क्लिक कर दें आपका स्टेटस आ जाएगा.
यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी किसान स्कीम है इसलिए किसानों को कई तरह की सहूलियतें भी दी गईं हैं. इसी में एक है हेल्पलाइन नंबर. जिसके जरिए देश के किसी भी हिस्से का किसान सीधे कृषि मंत्रालय से संपर्क कर सकता है.
सरकार तीन किस्तों में यह पैसा ट्रांसफर करती है पहली किस्त 1 दिसंबर से 31 मार्च के बीच आती है, जबकि दूसरी किस्त 1 अप्रैल से 31 जुलाई और तीसरी किस्त 1 अगस्त से 30 नवंबर के बीच में किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है.
|
प्रधानमंत्री-किसान सम्मान निधि स्कीम की अगली किश्त ठीक इक्कीस दिन दिन बाद एक अगस्त से आनी शुरू हो जाएगी. छठीं किश्त करीब दस करोड़ किसानों तक पहुंचेगी. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों ने आवेदन नहीं किया है वे आवेदन करके लाभ ले सकते हैं. जबकि जिन लोगों का डेटा अप्रूव्ड है वे अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं. अब सिर्फ चार. पाँच करोड़ किसानों को ही इसमें आवेदन करना है. बताया जाता है कि इस स्कीम के तहत अब तक करीब चौहत्तर हजार करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं. जिन लोगों ने हाल ही में अप्लाई किया है वे भी अपना रिकॉर्ड चेक कर लें. आधार, अकाउंट नंबर और बैंक अकाउंट नंबर में नाम आदि चेक कर लें. ताकि पैसा मिलने में दिक्कत न हो. रिकॉर्ड में कोई भी गड़बड़ी होगी तो निश्चित तौर पर आपको योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा. पहले ही एक. तीन करोड़ किसानों को आवेदन करने के बाद भी सिर्फ इसलिए पैसा नहीं मिल सका क्योंकि या तो उनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी है या फिर आधार कार्ड नहीं है. पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम की ऑफीशियल वेबसाइट है. बेवसाइट को लॉग इन करना होगा. इसमें दिए गए ' Farmers Corner' वाले टैब में क्लिक करना होगा. अगर आपने पहले आवेदन किया है और आपका आधार ठीक से अपलोड नहीं हुआ है या किसी वजह से आधार नंबर गलत दर्ज हो गया है तो इसकी जानकारी इसमें मिल जाएगी. स्टेप एक: स्टेटस जानने के लिए सबसे पहले पीएम किसान सम्मान निधि योजना के पोर्टल पर जाएं. ये पोर्टल pmkisan. gov. in है. स्टेप दो: पोर्टल पर जाने के बाद, बार में बने "Farmer's corner" पर क्लिक करें. स्टेप तीन :- "Farmer's corner" पर क्लिक करने के बाद आप देख पाएंगे वहां पर तीन ऑप्शन हैं. उसमें से "Benificary status" पर क्लिक करें. स्टेप चार: "Beneficiary Status" पर क्लिक करने के बाद जो पेज खुलेगा उसमें नजर तीन चीजें नजर आएंगी. -आधार नंबर -अकाउंट नंबर फोन नंबर तीनों में से जो भी इन्फॉर्मेशन डाली है उसके ऑप्शन पर टिक करके क्लिक कर दें आपका स्टेटस आ जाएगा. यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी किसान स्कीम है इसलिए किसानों को कई तरह की सहूलियतें भी दी गईं हैं. इसी में एक है हेल्पलाइन नंबर. जिसके जरिए देश के किसी भी हिस्से का किसान सीधे कृषि मंत्रालय से संपर्क कर सकता है. सरकार तीन किस्तों में यह पैसा ट्रांसफर करती है पहली किस्त एक दिसंबर से इकतीस मार्च के बीच आती है, जबकि दूसरी किस्त एक अप्रैल से इकतीस जुलाई और तीसरी किस्त एक अगस्त से तीस नवंबर के बीच में किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है.
|
कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के टैक्स क्लेम के लिए विभिन्न योजनाओं में निवेश की समयसीमा 30 जून 2020 रखी है। इस प्रावधान के बाद कर कटौती में कमी के लिए आयकरदाता नेशनल पेंशन स्कीम (NPS), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) में 30 जून तक निवेश कर सकते हैं।
पेंशन फंड रेगुलेटर पीएफआरडीए ने एनपीएस निकासी से जुड़े नियमों में ढील दी है। निकासी एकमुश्त और आंशिक नियमों में की जा सकती है। सरकार द्वारा दी गई ढील का इस्तेमाल 30 जून 2020 तक एक बार निकासी के लिए किया जा सकता है।
नोडल कार्यालयों यानी एनपीएस सेवा प्रदाताओं को एनपीएस सब्सक्राइबर्स द्वारा फंड की निकासी के लिए डिजिटल माध्यम से भेजे गए दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित स्कैन कॉपी को स्वीकार करने के लिए कहा गया है। दस्तावेज जमा किए जाने के बाद नोडल अधिकारियों को दस्तावेज की सत्यता की जांच करनी होगी।
इसके अतिरिक्त सब्सक्राइबर्स निकासी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने से पहले सीआरए सिस्टम में निकासी से जुड़े दस्तावेज भी अपलोड कर सकते हैं। जबकि पहले अप्रैल में पीएफआरडीए ने एनपीएस सब्सक्राइबर्स को कोरोना वायरस के इलाज के लिए अपने एनपीएस खाते से फंड की निकासी की अनुमति दे दी थी।
मई के अंत में ही पीएफआरडीए ने एनपीएस के तहत खाता खोलना आसान बना दिया था। नए सब्सक्राइबर्स को खाता खोलने के लिए अब आधार बेस्ड पेपरलेस केवाईसी प्रक्रिया की मंजूरी दे दी गई थी।
नई प्रक्रिया के तहत आवेदनकर्ता यूआईडीएआई पोर्टल पर जाकर ई-एनपीएस के जरिए पासवर्ड सुरक्षित आधार XML फाइल डाउनलोड कर सकता है। केवाईसी के लिए इसे साझा किया जा सकता है। इस सुविधा का लाभ प्वाइंट ऑफ प्रजेंस के जरिए एनपीएस खाता खोलने में भी किया जा सकता है।
यह प्रक्रिया केवाईसी ब्योरा मशीन के पढ़ने वाले एक्सएमएल प्रारूप में होता है जिस पर यूआईडीएआई का डिजिटल हस्ताक्षर होता है। इससे ईएनपीएस/पीओपी उसकी जांच और सत्यापन कर सकते हैं। इसमें पहचान और पता का सत्यापन किया जा सकता है। इसके माध्यम से एनपीएस खाता तत्काल खोला जा सकता है और अंशधारक उसमें तुंरत पैसा भी जमा कर सकते हैं।
|
कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस के टैक्स क्लेम के लिए विभिन्न योजनाओं में निवेश की समयसीमा तीस जून दो हज़ार बीस रखी है। इस प्रावधान के बाद कर कटौती में कमी के लिए आयकरदाता नेशनल पेंशन स्कीम , पब्लिक प्रोविडेंट फंड और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट में तीस जून तक निवेश कर सकते हैं। पेंशन फंड रेगुलेटर पीएफआरडीए ने एनपीएस निकासी से जुड़े नियमों में ढील दी है। निकासी एकमुश्त और आंशिक नियमों में की जा सकती है। सरकार द्वारा दी गई ढील का इस्तेमाल तीस जून दो हज़ार बीस तक एक बार निकासी के लिए किया जा सकता है। नोडल कार्यालयों यानी एनपीएस सेवा प्रदाताओं को एनपीएस सब्सक्राइबर्स द्वारा फंड की निकासी के लिए डिजिटल माध्यम से भेजे गए दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित स्कैन कॉपी को स्वीकार करने के लिए कहा गया है। दस्तावेज जमा किए जाने के बाद नोडल अधिकारियों को दस्तावेज की सत्यता की जांच करनी होगी। इसके अतिरिक्त सब्सक्राइबर्स निकासी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने से पहले सीआरए सिस्टम में निकासी से जुड़े दस्तावेज भी अपलोड कर सकते हैं। जबकि पहले अप्रैल में पीएफआरडीए ने एनपीएस सब्सक्राइबर्स को कोरोना वायरस के इलाज के लिए अपने एनपीएस खाते से फंड की निकासी की अनुमति दे दी थी। मई के अंत में ही पीएफआरडीए ने एनपीएस के तहत खाता खोलना आसान बना दिया था। नए सब्सक्राइबर्स को खाता खोलने के लिए अब आधार बेस्ड पेपरलेस केवाईसी प्रक्रिया की मंजूरी दे दी गई थी। नई प्रक्रिया के तहत आवेदनकर्ता यूआईडीएआई पोर्टल पर जाकर ई-एनपीएस के जरिए पासवर्ड सुरक्षित आधार XML फाइल डाउनलोड कर सकता है। केवाईसी के लिए इसे साझा किया जा सकता है। इस सुविधा का लाभ प्वाइंट ऑफ प्रजेंस के जरिए एनपीएस खाता खोलने में भी किया जा सकता है। यह प्रक्रिया केवाईसी ब्योरा मशीन के पढ़ने वाले एक्सएमएल प्रारूप में होता है जिस पर यूआईडीएआई का डिजिटल हस्ताक्षर होता है। इससे ईएनपीएस/पीओपी उसकी जांच और सत्यापन कर सकते हैं। इसमें पहचान और पता का सत्यापन किया जा सकता है। इसके माध्यम से एनपीएस खाता तत्काल खोला जा सकता है और अंशधारक उसमें तुंरत पैसा भी जमा कर सकते हैं।
|
का इतिहास सुन चुके थे, उन्हें ख्याल था कि जब तक ये सोये हुए है, तब तक हम इनका कुछ ले जा सकते हैं; लेकिन इनके जागने पर माल ले जाना तो क्या चल्कि जान बचाना भी मुश्किल होगा और रोशनी के न होने से अगर ये जाग भी जावें तो हमारा कुछ भी न कर सकेंगे; क्योंकि वो अँधेरी रात में इनको हमारा स्वरूप ही नजर न आवेगा- दूसरे अपने खोये हुए माल का बिलकुल हाल न मालूम होगा, जिसके लिये ये हमारा पीछा करने के लिये तैयार होंगे। उनका यह इरादा था कि वह उनका माल ले जाने के बाद उनको जान से भी मार डालें; लेकिन अभी तक उसका इन्तिजाम नहीं होने पाया था कि अचानक बिजली की कड़क ने उन्हें जगा ही दिया । पुरुष ने उठते ही रोशनी की तलाश शुरू की; लेकिन रोशनी की तलाश करना भी उसके लिये मुश्किल हो रहा था; किंतु बिजली की रोशनी उसको जरा-जरा सी मदद दे रही थी, जिसके जरिये से उसने यह मालूम कर लिया था कि मेरे घर में चोरों ने बहुत से छेद कर लिये हैं और बहुत सा माल भी ले गये हैं। उसने चाहा कि उन सूराखों को बन्द करके चोरों के पीछे अपना माल छीनने के लित जावे और जिस कदर हो सके अपना माल वापस लें, उसका ख्याल था कि जब तक यह सुराख बन्द नहीं होंगे, तब तक चोरों के हाथ से माल बचाना बहुत ही मुश्किल होगा । इतने में उसकी स्त्री भी उठ खड़ी हुई और उसने पुरुप से पूछा कि तुम क्या करना चाहते हो, उसने कहा कि इन सूराखों को बन्द करके इन चोरों को पकड़ने और माल लाने की कोशिश करूँगा । स्त्री ने कहा कि में हरगिज ऐसा न करने दूँगी यह सूराख तो घर का साज व सामान दूसरों को दिखलाते हैं। क्योंकि हमारे दरवाज़े से तो बहुत से लोग हमारे घर के पदार्थों को देख नहीं सकते
|
का इतिहास सुन चुके थे, उन्हें ख्याल था कि जब तक ये सोये हुए है, तब तक हम इनका कुछ ले जा सकते हैं; लेकिन इनके जागने पर माल ले जाना तो क्या चल्कि जान बचाना भी मुश्किल होगा और रोशनी के न होने से अगर ये जाग भी जावें तो हमारा कुछ भी न कर सकेंगे; क्योंकि वो अँधेरी रात में इनको हमारा स्वरूप ही नजर न आवेगा- दूसरे अपने खोये हुए माल का बिलकुल हाल न मालूम होगा, जिसके लिये ये हमारा पीछा करने के लिये तैयार होंगे। उनका यह इरादा था कि वह उनका माल ले जाने के बाद उनको जान से भी मार डालें; लेकिन अभी तक उसका इन्तिजाम नहीं होने पाया था कि अचानक बिजली की कड़क ने उन्हें जगा ही दिया । पुरुष ने उठते ही रोशनी की तलाश शुरू की; लेकिन रोशनी की तलाश करना भी उसके लिये मुश्किल हो रहा था; किंतु बिजली की रोशनी उसको जरा-जरा सी मदद दे रही थी, जिसके जरिये से उसने यह मालूम कर लिया था कि मेरे घर में चोरों ने बहुत से छेद कर लिये हैं और बहुत सा माल भी ले गये हैं। उसने चाहा कि उन सूराखों को बन्द करके चोरों के पीछे अपना माल छीनने के लित जावे और जिस कदर हो सके अपना माल वापस लें, उसका ख्याल था कि जब तक यह सुराख बन्द नहीं होंगे, तब तक चोरों के हाथ से माल बचाना बहुत ही मुश्किल होगा । इतने में उसकी स्त्री भी उठ खड़ी हुई और उसने पुरुप से पूछा कि तुम क्या करना चाहते हो, उसने कहा कि इन सूराखों को बन्द करके इन चोरों को पकड़ने और माल लाने की कोशिश करूँगा । स्त्री ने कहा कि में हरगिज ऐसा न करने दूँगी यह सूराख तो घर का साज व सामान दूसरों को दिखलाते हैं। क्योंकि हमारे दरवाज़े से तो बहुत से लोग हमारे घर के पदार्थों को देख नहीं सकते
|
टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर चुके हनुमा विहारी का कहना है कि वह आगामी आईपीएल में उस सोच को बदलने की कोशिश करेंगे कि वह टी-20 प्रारूप के लिए इतने अच्छे खिलाड़ी नहीं है।
उनका कहना है कि वह 'कम उम्मीदो' से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
विहारी की आईपीएल में वापसी हुई है जो 23 मार्च से शुरू हो रही है। अपने अप्रभावी स्ट्राइक रेट के कारण नीलामी में तीन साल तक नहीं बिकने के बाद अब वह दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलते दिखेंगे।
दिल्ली कैपिटल्स में स्टार सुसज्जित शीर्ष क्रम में शिखर धवन, पृथ्वी शॉ, कप्तान श्रेयस अय्यर और रिषभ पंत शामिल हैं।
विहारी को पता है कि अंतिम एकादश में जगह बनाना काफी मुश्किल होगा लेकिन वह फिनिशर की भूमिका निभाने के लिये तैयार हैं, उसी तरह से जैसे उन्होंने मेलबर्न में अपरिचित परिस्थतियों के बावजूद पारी का आगाज करने पर सहमति जताई थी।
|
टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर चुके हनुमा विहारी का कहना है कि वह आगामी आईपीएल में उस सोच को बदलने की कोशिश करेंगे कि वह टी-बीस प्रारूप के लिए इतने अच्छे खिलाड़ी नहीं है। उनका कहना है कि वह 'कम उम्मीदो' से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। विहारी की आईपीएल में वापसी हुई है जो तेईस मार्च से शुरू हो रही है। अपने अप्रभावी स्ट्राइक रेट के कारण नीलामी में तीन साल तक नहीं बिकने के बाद अब वह दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलते दिखेंगे। दिल्ली कैपिटल्स में स्टार सुसज्जित शीर्ष क्रम में शिखर धवन, पृथ्वी शॉ, कप्तान श्रेयस अय्यर और रिषभ पंत शामिल हैं। विहारी को पता है कि अंतिम एकादश में जगह बनाना काफी मुश्किल होगा लेकिन वह फिनिशर की भूमिका निभाने के लिये तैयार हैं, उसी तरह से जैसे उन्होंने मेलबर्न में अपरिचित परिस्थतियों के बावजूद पारी का आगाज करने पर सहमति जताई थी।
|
"यह ठीक है दे ! किन्तु फ्रांसकी जनताका उद्देश्य प्रजातन्त्रसे भी ऊपर था, वह मनुष्यमात्र की समानता, स्वतन्त्रता, भ्रातृभावका राज्य स्थापित करना चाहती थी।"
"हमारे देशके लिए भी !" "तुम मनुष्य हो कि नहीं १"
"साहबोंकी नजरमें तो हम मनुष्य नहीं जँचते ।"
"जब तक समानता, स्वतन्त्रता, भ्रातृभावका शासन सारी पृथिवीपर, गोरे-काले सारे मनुष्योंमें नहीं क़ायम होता, तब तक मनुष्य मनुष्य नहीं हो सकता दे ! कसाई कार्नवालिस् अपने गोरे किसानोंको मनुष्य नहीं मानता । फ्रांसमें राजा, जमींदार तो गये, किन्तु, फिर बनियोंने-ईस्टइंडिया कम्पनीके भाई बन्दोंने राज्य सँभाल लिया, जिससे समानता, स्वतन्त्रता, भ्रातृभावकाली तिरंगा झंडा वहाँ नहीं फहरा सका। "तो फ्रांसमें राजा-चाबुकी जगह सेठोंका राज्य हो गया ?" "हाँ, और इंग्लैंडके सेठ भी हल्ला कर रहे हैं, कि जब हम सात समुन्दर पार हिंदुस्तानका राज्य चला सकते हैं तो इंग्लैंडमें क्यों नहीं कर सकते १ इसलिए वह राज्य शक्तिको अपने हाथ में लेना चाहते हैं, यद्यपि राजाको हटाकर नहीं।"
"राजाके हाथमें, आपने कहा, इंग्लैंड में शासन की बागडोर है ही नहीं।" "हाँ, और मैंने इन गोरे बनियोंकी करतूतें यहाँ देखीं। मुझे देश देखनेकी इच्छा थी, सुभीता देख मैंने कम्पनीकी नौकरी कर ली, नौकरी न करता, तो बनिये मुझपर सन्देह करते, और फिर मेरा पर्यटन मुश्किल हो जाता, इसीलिए दो साल तक मैं कम्पनीकी नौकरीरूपी नर्कमें रहा ।"
"भलेमानुषके लिए नर्क है साहेब ! यहाँ वही निर्वाह कर सकते हैं, जो सब पाप कमा, सारा अपमान सह धन जमा करनेके लिए तुले हुए हैं। कार्नवालिसके किसी अनुचरकी कृपासे पापकी कमाई मुझे चार गाँवोंकी जमींदारी मिली है, किन्तु, मुझे फल मिल चुका, बीबी-बच्चे
|
"यह ठीक है दे ! किन्तु फ्रांसकी जनताका उद्देश्य प्रजातन्त्रसे भी ऊपर था, वह मनुष्यमात्र की समानता, स्वतन्त्रता, भ्रातृभावका राज्य स्थापित करना चाहती थी।" "हमारे देशके लिए भी !" "तुम मनुष्य हो कि नहीं एक" "साहबोंकी नजरमें तो हम मनुष्य नहीं जँचते ।" "जब तक समानता, स्वतन्त्रता, भ्रातृभावका शासन सारी पृथिवीपर, गोरे-काले सारे मनुष्योंमें नहीं क़ायम होता, तब तक मनुष्य मनुष्य नहीं हो सकता दे ! कसाई कार्नवालिस् अपने गोरे किसानोंको मनुष्य नहीं मानता । फ्रांसमें राजा, जमींदार तो गये, किन्तु, फिर बनियोंने-ईस्टइंडिया कम्पनीके भाई बन्दोंने राज्य सँभाल लिया, जिससे समानता, स्वतन्त्रता, भ्रातृभावकाली तिरंगा झंडा वहाँ नहीं फहरा सका। "तो फ्रांसमें राजा-चाबुकी जगह सेठोंका राज्य हो गया ?" "हाँ, और इंग्लैंडके सेठ भी हल्ला कर रहे हैं, कि जब हम सात समुन्दर पार हिंदुस्तानका राज्य चला सकते हैं तो इंग्लैंडमें क्यों नहीं कर सकते एक इसलिए वह राज्य शक्तिको अपने हाथ में लेना चाहते हैं, यद्यपि राजाको हटाकर नहीं।" "राजाके हाथमें, आपने कहा, इंग्लैंड में शासन की बागडोर है ही नहीं।" "हाँ, और मैंने इन गोरे बनियोंकी करतूतें यहाँ देखीं। मुझे देश देखनेकी इच्छा थी, सुभीता देख मैंने कम्पनीकी नौकरी कर ली, नौकरी न करता, तो बनिये मुझपर सन्देह करते, और फिर मेरा पर्यटन मुश्किल हो जाता, इसीलिए दो साल तक मैं कम्पनीकी नौकरीरूपी नर्कमें रहा ।" "भलेमानुषके लिए नर्क है साहेब ! यहाँ वही निर्वाह कर सकते हैं, जो सब पाप कमा, सारा अपमान सह धन जमा करनेके लिए तुले हुए हैं। कार्नवालिसके किसी अनुचरकी कृपासे पापकी कमाई मुझे चार गाँवोंकी जमींदारी मिली है, किन्तु, मुझे फल मिल चुका, बीबी-बच्चे
|
Don't Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
Covid-19 Vaccine: कोविड-19 वैक्सीन से जुड़ी एक अहम घोषणा केंद्र सरकार द्वारा की गयी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बताया है कि कोविड-19 वैक्सीन की 400 से 500 मिलियन खुराकें, साल 2021 तक देश में आ सकती हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने मंगलवार (13 अक्टूबर) को दिल्ली में मंत्रियों के एक दल के साथ एक मीटिंग की जहां, कोविड-19 से जुड़ी चर्चा हुयी। (Covid-19 Vaccine Update)
इस मीटिंग में डॉ. हर्षवर्धन (Dr. Harsh Vardhan) ने कहा कि, 'हमें उम्मीद है कि, साल 2021 की शुरुआत में हमें एक से ज़्यादा स्रोतों से कोविड-19 की वैक्सीन्स मिल सकेंगी। हमारे एक्सपर्ट्स देश में कोरोना वैक्सीन के वितरण से जुड़ी योजनाएं और रणनीति बना रहे हैं। ' यह मीटिंग वीडियो-कॉन्फ्रेंस के जरिए की गयी ।
कोविड वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन प्रमुख डॉ. वी. के. पॉल ने जानकारी दी कि, वैक्सीन-19 (Covid-19 Vaccine in India update) सबसे पहले उन लोगों को लगायी जाएगी जिन्हें इसकी आवश्यकता है। इससे, जुड़ी एक लिस्ट भी बनायी जा रही है जो अक्टूबर के अंत या नवंबर महीने के पहले सप्ताह में पूरी हो जाएगी। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इससे पहले घोषणा की थी कि कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 Vaccine availability in India) के आते ही इसे सबसे पहले, फ्रंट लाइन कोरोना वॉरियर्स को लगाया जाएगा। जिनमें, डॉक्टर्स और हेल्थकेयर स्टाफ शामिल हैं।
मिली जानकारी के अनुसार कोविड-19 वैक्सीन एडमिनिट्रेशन का कार्य डॉ. वी. के. पॉल की अगुवाई वाली एक टीम कर रही है। एक्सपर्ट्स की इस टीम में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डायरेक्टर, डॉ. रणदीप गुलेरिया (Dr. Randeep Guleria) का एक हाई लेवल पैनल भी शामिल किया गया है। साथ ही, विदेश मामलों के मंत्रालयों के कई प्रतिनिधी, जैव प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाओं के डायरेक्टर भी इस टीम का हिस्सा हैं। जबकि, भारत के एड्स अनुसंधान संस्थान, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के साथ देश के सभी राज्यों के प्रतिनिधि भी इस वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं।
|
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! Covid-उन्नीस Vaccine: कोविड-उन्नीस वैक्सीन से जुड़ी एक अहम घोषणा केंद्र सरकार द्वारा की गयी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बताया है कि कोविड-उन्नीस वैक्सीन की चार सौ से पाँच सौ मिलियन खुराकें, साल दो हज़ार इक्कीस तक देश में आ सकती हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने मंगलवार को दिल्ली में मंत्रियों के एक दल के साथ एक मीटिंग की जहां, कोविड-उन्नीस से जुड़ी चर्चा हुयी। इस मीटिंग में डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि, 'हमें उम्मीद है कि, साल दो हज़ार इक्कीस की शुरुआत में हमें एक से ज़्यादा स्रोतों से कोविड-उन्नीस की वैक्सीन्स मिल सकेंगी। हमारे एक्सपर्ट्स देश में कोरोना वैक्सीन के वितरण से जुड़ी योजनाएं और रणनीति बना रहे हैं। ' यह मीटिंग वीडियो-कॉन्फ्रेंस के जरिए की गयी । कोविड वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन प्रमुख डॉ. वी. के. पॉल ने जानकारी दी कि, वैक्सीन-उन्नीस सबसे पहले उन लोगों को लगायी जाएगी जिन्हें इसकी आवश्यकता है। इससे, जुड़ी एक लिस्ट भी बनायी जा रही है जो अक्टूबर के अंत या नवंबर महीने के पहले सप्ताह में पूरी हो जाएगी। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इससे पहले घोषणा की थी कि कोविड-उन्नीस वैक्सीन के आते ही इसे सबसे पहले, फ्रंट लाइन कोरोना वॉरियर्स को लगाया जाएगा। जिनमें, डॉक्टर्स और हेल्थकेयर स्टाफ शामिल हैं। मिली जानकारी के अनुसार कोविड-उन्नीस वैक्सीन एडमिनिट्रेशन का कार्य डॉ. वी. के. पॉल की अगुवाई वाली एक टीम कर रही है। एक्सपर्ट्स की इस टीम में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डायरेक्टर, डॉ. रणदीप गुलेरिया का एक हाई लेवल पैनल भी शामिल किया गया है। साथ ही, विदेश मामलों के मंत्रालयों के कई प्रतिनिधी, जैव प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाओं के डायरेक्टर भी इस टीम का हिस्सा हैं। जबकि, भारत के एड्स अनुसंधान संस्थान, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के साथ देश के सभी राज्यों के प्रतिनिधि भी इस वैक्सीन कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं।
|
नई दिल्ली - स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव ने पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा से कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री पर रोज-रोज आरोप लगाना बंद किया जाना चाहिए। श्री यादव ने श्री मिश्रा को लिखे पत्र में कहा है कि वैसे आप राजनीति में मुझसे बहुत होशियार हैं, लेकिन अगर अन्यथा न लें तो एक सुझाव दूं। ये रोज-रोज श्री केजरीवाल के खिलाफ प्रेस कान्फ्रेंस करनी बंद कर दीजिए। मैं नहीं कहता कि आपके सारे आरोप गलत हैं, कुछ आरोप वजनदार हैं, हालांकि बाकी का अभी कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन दिन-रात आरोपों की झड़ी सुनने से आप तो साफ नहीं होगी।
विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
|
नई दिल्ली - स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव ने पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा से कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री पर रोज-रोज आरोप लगाना बंद किया जाना चाहिए। श्री यादव ने श्री मिश्रा को लिखे पत्र में कहा है कि वैसे आप राजनीति में मुझसे बहुत होशियार हैं, लेकिन अगर अन्यथा न लें तो एक सुझाव दूं। ये रोज-रोज श्री केजरीवाल के खिलाफ प्रेस कान्फ्रेंस करनी बंद कर दीजिए। मैं नहीं कहता कि आपके सारे आरोप गलत हैं, कुछ आरोप वजनदार हैं, हालांकि बाकी का अभी कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन दिन-रात आरोपों की झड़ी सुनने से आप तो साफ नहीं होगी। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
|
3 संबंधोंः माखनलाल चतुर्वेदी, स्वामी कर्मवीर, अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'।
माखनलाल चतुर्वेदी (४ अप्रैल १८८९-३० जनवरी १९६८) भारत के ख्यातिप्राप्त कवि, लेखक और पत्रकार थे जिनकी रचनाएँ अत्यंत लोकप्रिय हुईं। सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के वे अनूठे हिंदी रचनाकार थे। प्रभा और कर्मवीर जैसे प्रतिष्ठत पत्रों के संपादक के रूप में उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जोरदार प्रचार किया और नई पीढी का आह्वान किया कि वह गुलामी की जंज़ीरों को तोड़ कर बाहर आए। इसके लिये उन्हें अनेक बार ब्रिटिश साम्राज्य का कोपभाजन बनना पड़ा। वे सच्चे देशप्रमी थे और १९२१-२२ के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए जेल भी गए। आपकी कविताओं में देशप्रेम के साथ साथ प्रकृति और प्रेम का भी चित्रण हुआ है। .
Swami Karmveer .
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (15 अप्रैल, 1865-16 मार्च, 1947) हिन्दी के एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे। वे 2 बार हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति रह चुके हैं और सम्मेलन द्वारा विद्यावाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किये जा चुके हैं। प्रिय प्रवास हरिऔध जी का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह हिंदी खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है और इसे मंगला प्रसाद पारितोषित पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। .
|
तीन संबंधोंः माखनलाल चतुर्वेदी, स्वामी कर्मवीर, अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'। माखनलाल चतुर्वेदी भारत के ख्यातिप्राप्त कवि, लेखक और पत्रकार थे जिनकी रचनाएँ अत्यंत लोकप्रिय हुईं। सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के वे अनूठे हिंदी रचनाकार थे। प्रभा और कर्मवीर जैसे प्रतिष्ठत पत्रों के संपादक के रूप में उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जोरदार प्रचार किया और नई पीढी का आह्वान किया कि वह गुलामी की जंज़ीरों को तोड़ कर बाहर आए। इसके लिये उन्हें अनेक बार ब्रिटिश साम्राज्य का कोपभाजन बनना पड़ा। वे सच्चे देशप्रमी थे और एक हज़ार नौ सौ इक्कीस-बाईस के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए जेल भी गए। आपकी कविताओं में देशप्रेम के साथ साथ प्रकृति और प्रेम का भी चित्रण हुआ है। . Swami Karmveer . अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हिन्दी के एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे। वे दो बार हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति रह चुके हैं और सम्मेलन द्वारा विद्यावाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किये जा चुके हैं। प्रिय प्रवास हरिऔध जी का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह हिंदी खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है और इसे मंगला प्रसाद पारितोषित पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। .
|
जब गेमिंग स्मार्टफोन की बात आती है तो भारत में नियमित मोबाइल फोन गेमर्स के लिए कुछ ही विकल्प उपलब्ध हैं। यह वर्ष अलग नहीं था क्योंकि हमने देखा कि केवल कुछ ही डेडिकेटेड गेमिंग फोन देश में आए हैं। एक डेडिकेटेड गेमिंग फोन से हमारा मतलब एक ऐसे फोन से है जिसे ट्रिगर बटन, हाई टच रिस्पॉन्स रेट, गेम मोड, थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम, आरजीबी शीनिगन्स और अन्य जैसे एन्हांसमेंट के साथ उच्च रिफ्रेश रेट स्क्रीन पर गेम चलाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन और ट्यून किया गया है। ये फोन टॉप-ऑफ़-द-लाइन सुविधाएँ और एक समग्र निरंतर प्रदर्शन प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं।
Winner: Asus ROG Phone 5 (Buy here)
Asus ROG Phone 5 निर्विवाद चैंपियन है और इस पर गेम खेलते समय आपको अनुचित लाभ देता है। प्रेशर-सेंसिटिव शोल्डर ट्रिगर्स, फास्ट टच लेटेंसी रेट, 300Hz से अधिक टच सैंपलिंग रेट और X मोड के साथ, ROG फोन 5 कुछ सबसे अधिक मांग वाले गेम जैसे PUBG न्यू स्टेट, कॉल ऑफ ड्यूटीः मोबाइल, जेनशिन इम्पैक्ट और बहुत कुछ खेलने के लिए सबसे अच्छा गेमिंग स्मार्टफोन है। यह वास्तव में एक अच्छा और बड़ा डिस्प्ले है जो आपको खेलने के लिए एक विस्तृत स्क्रीन-एस्टेट देता है और स्टीरियो स्पीकर और एम्पलीफायरों की एक जोड़ी के साथ काफी अच्छी तरह से जोड़ा जाता है जो बहुत तेज़ होते हैं और आपको किसी भी इन-गेम को याद नहीं करने देते हैं ताकि आप निश्चिंत हो सकें कि आप दुश्मन के कदमों को सुनेंगे क्योंकि वे आपके स्थान पर शून्य-इन करते हैं और इसे एक सामरिक लाभ के रूप में उपयोग करते हैं। इसके अलावा, आप अपने अनुभव को अधिक संपूर्ण और आनंददायक बनाने के लिए एयरो एक्टिव कूलर, कुनाई गेमपैड और अन्य जैसे गेमिंग कॉन्ट्रैप्शन की एक श्रृंखला से चुन सकते हैं।
Runner Up: iQOO 7 Legend (Buy here)
2021 के सर्वश्रेष्ठ गेमिंग स्मार्टफोन के खिताब के लिए हमारी परीक्षण प्रक्रिया में iQOO 7 लेजेंड एक दूसरे स्थान पर था। iQOO 7 Legend ने पूरे बोर्ड में उच्च स्कोर प्राप्त किया, जो एक तेज स्पर्श नमूनाकरण दर, उच्च ताज़ा दर स्क्रीन और एक बड़े वाष्प के साथ मिलकर बना था। कुछ गेमिंग एन्हांसमेंट्स में एक प्रेशर-सेंसिटिव डिस्प्ले, हैप्टिक्स के लिए डुअल लीनियर मोटर्स और एक इमर्सिव साउंड के लिए एक डुअल स्पीकर सेटअप शामिल है जो कि न्यूनतम बेजल्स AMOLED डिस्प्ले की तारीफ करता है। जहां तक गेमिंग स्मार्टफोन्स की बात है तो iQOO 7 Legend ने हमें अपने कैमरा परफॉर्मेंस से चौंका दिया है और यह उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है जो एक शक्तिशाली डेली ड्राइवर की तलाश में हैं जो कि एक बेहतरीन गेमिंग अनुभव प्रदान करने के लिए भी होता है।
Best Buy: OnePlus 9R (Buy here)
हमारे वैल्यू फॉर मनी पिक के लिए, वनप्लस 9आर से बेहतर कोई फोन नहीं है, यह देखते हुए कि यह अन्य दो फोन की तुलना में बेहतर कीमत और प्रदर्शन अनुपात प्रदान करता है। जबकि वनप्लस 9आर गेमिंग स्मार्टफोन के रूप में योग्य नहीं है, यह एक बजट के तहत एक कार्यात्मक फोन बना हुआ है और अपने फीचर सेट के साथ एक इमर्सिव गेमिंग अनुभव प्रदान करने में सक्षम है। यह एक फोन के रूप में भी काम आता है जिसे आप अपने दैनिक चालक के रूप में उपयोग कर सकते हैं। आरओजी फोन 5 के बारे में भी ऐसा नहीं कहा जा सकता है। वनप्लस 9आर एक सहज और तरल अनुभव प्रदान करता है और यह पतला और हल्का है, जिसका अर्थ है कि आप अपने हाथों और कलाई पर बिना किसी अनावश्यक तनाव के घंटों तक इस पर खेल सकते हैं।
20 वर्षों की विरासत के साथ, डिजिट ज़ीरो 1 अवार्ड्स को उद्योग के एकमात्र प्रदर्शन-आधारित पुरस्कारों के रूप में मान्यता प्राप्त है। डिजिट अपने दर्शकों के लिए प्रदर्शन-संचालित उत्पादों को विकसित करने और पेश करने में वर्षों के शोध के लिए ब्रांडों को पुरस्कृत करता है। सभी उत्पादों को एक कठोर और वैज्ञानिक परीक्षण प्रक्रिया से गुजरने और उसी श्रेणी में प्रतिस्पर्धी ब्रांडों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए बनाया गया है। प्रत्येक श्रेणी में प्रमुख प्रदर्शन मापदंडों में, प्रत्येक श्रेणी के लिए आयोजित औसतन 56 परीक्षणों में किए गए पूर्ण प्रदर्शन विश्लेषण के बाद विजेता की घोषणा उनके कुल स्कोर के आधार पर की जाती है। ज़ीरो1 अवार्ड्स के लिए परीक्षण प्रक्रिया में फीचर्स, कीमत या डिज़ाइन के स्कोर पर विचार नहीं किया जाता है। इसका उद्देश्य उन सर्वोत्तम उत्पादों की पहचान करना है जिन्हें पैसा खरीद सकता है, उन नवाचारों का जश्न मनाएं जो उद्योग को आगे बढ़ाते हैं, और उन उत्पादों को पुरस्कृत करते हैं जो बाजार को बाधित करने का साहस करते हैं।
|
जब गेमिंग स्मार्टफोन की बात आती है तो भारत में नियमित मोबाइल फोन गेमर्स के लिए कुछ ही विकल्प उपलब्ध हैं। यह वर्ष अलग नहीं था क्योंकि हमने देखा कि केवल कुछ ही डेडिकेटेड गेमिंग फोन देश में आए हैं। एक डेडिकेटेड गेमिंग फोन से हमारा मतलब एक ऐसे फोन से है जिसे ट्रिगर बटन, हाई टच रिस्पॉन्स रेट, गेम मोड, थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम, आरजीबी शीनिगन्स और अन्य जैसे एन्हांसमेंट के साथ उच्च रिफ्रेश रेट स्क्रीन पर गेम चलाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन और ट्यून किया गया है। ये फोन टॉप-ऑफ़-द-लाइन सुविधाएँ और एक समग्र निरंतर प्रदर्शन प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं। Winner: Asus ROG Phone पाँच Asus ROG Phone पाँच निर्विवाद चैंपियन है और इस पर गेम खेलते समय आपको अनुचित लाभ देता है। प्रेशर-सेंसिटिव शोल्डर ट्रिगर्स, फास्ट टच लेटेंसी रेट, तीन सौ हर्ट्ज़ से अधिक टच सैंपलिंग रेट और X मोड के साथ, ROG फोन पाँच कुछ सबसे अधिक मांग वाले गेम जैसे PUBG न्यू स्टेट, कॉल ऑफ ड्यूटीः मोबाइल, जेनशिन इम्पैक्ट और बहुत कुछ खेलने के लिए सबसे अच्छा गेमिंग स्मार्टफोन है। यह वास्तव में एक अच्छा और बड़ा डिस्प्ले है जो आपको खेलने के लिए एक विस्तृत स्क्रीन-एस्टेट देता है और स्टीरियो स्पीकर और एम्पलीफायरों की एक जोड़ी के साथ काफी अच्छी तरह से जोड़ा जाता है जो बहुत तेज़ होते हैं और आपको किसी भी इन-गेम को याद नहीं करने देते हैं ताकि आप निश्चिंत हो सकें कि आप दुश्मन के कदमों को सुनेंगे क्योंकि वे आपके स्थान पर शून्य-इन करते हैं और इसे एक सामरिक लाभ के रूप में उपयोग करते हैं। इसके अलावा, आप अपने अनुभव को अधिक संपूर्ण और आनंददायक बनाने के लिए एयरो एक्टिव कूलर, कुनाई गेमपैड और अन्य जैसे गेमिंग कॉन्ट्रैप्शन की एक श्रृंखला से चुन सकते हैं। Runner Up: iQOO सात Legend दो हज़ार इक्कीस के सर्वश्रेष्ठ गेमिंग स्मार्टफोन के खिताब के लिए हमारी परीक्षण प्रक्रिया में iQOO सात लेजेंड एक दूसरे स्थान पर था। iQOO सात Legend ने पूरे बोर्ड में उच्च स्कोर प्राप्त किया, जो एक तेज स्पर्श नमूनाकरण दर, उच्च ताज़ा दर स्क्रीन और एक बड़े वाष्प के साथ मिलकर बना था। कुछ गेमिंग एन्हांसमेंट्स में एक प्रेशर-सेंसिटिव डिस्प्ले, हैप्टिक्स के लिए डुअल लीनियर मोटर्स और एक इमर्सिव साउंड के लिए एक डुअल स्पीकर सेटअप शामिल है जो कि न्यूनतम बेजल्स AMOLED डिस्प्ले की तारीफ करता है। जहां तक गेमिंग स्मार्टफोन्स की बात है तो iQOO सात Legend ने हमें अपने कैमरा परफॉर्मेंस से चौंका दिया है और यह उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है जो एक शक्तिशाली डेली ड्राइवर की तलाश में हैं जो कि एक बेहतरीन गेमिंग अनुभव प्रदान करने के लिए भी होता है। Best Buy: OnePlus नौR हमारे वैल्यू फॉर मनी पिक के लिए, वनप्लस नौआर से बेहतर कोई फोन नहीं है, यह देखते हुए कि यह अन्य दो फोन की तुलना में बेहतर कीमत और प्रदर्शन अनुपात प्रदान करता है। जबकि वनप्लस नौआर गेमिंग स्मार्टफोन के रूप में योग्य नहीं है, यह एक बजट के तहत एक कार्यात्मक फोन बना हुआ है और अपने फीचर सेट के साथ एक इमर्सिव गेमिंग अनुभव प्रदान करने में सक्षम है। यह एक फोन के रूप में भी काम आता है जिसे आप अपने दैनिक चालक के रूप में उपयोग कर सकते हैं। आरओजी फोन पाँच के बारे में भी ऐसा नहीं कहा जा सकता है। वनप्लस नौआर एक सहज और तरल अनुभव प्रदान करता है और यह पतला और हल्का है, जिसका अर्थ है कि आप अपने हाथों और कलाई पर बिना किसी अनावश्यक तनाव के घंटों तक इस पर खेल सकते हैं। बीस वर्षों की विरासत के साथ, डिजिट ज़ीरो एक अवार्ड्स को उद्योग के एकमात्र प्रदर्शन-आधारित पुरस्कारों के रूप में मान्यता प्राप्त है। डिजिट अपने दर्शकों के लिए प्रदर्शन-संचालित उत्पादों को विकसित करने और पेश करने में वर्षों के शोध के लिए ब्रांडों को पुरस्कृत करता है। सभी उत्पादों को एक कठोर और वैज्ञानिक परीक्षण प्रक्रिया से गुजरने और उसी श्रेणी में प्रतिस्पर्धी ब्रांडों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए बनाया गया है। प्रत्येक श्रेणी में प्रमुख प्रदर्शन मापदंडों में, प्रत्येक श्रेणी के लिए आयोजित औसतन छप्पन परीक्षणों में किए गए पूर्ण प्रदर्शन विश्लेषण के बाद विजेता की घोषणा उनके कुल स्कोर के आधार पर की जाती है। ज़ीरोएक अवार्ड्स के लिए परीक्षण प्रक्रिया में फीचर्स, कीमत या डिज़ाइन के स्कोर पर विचार नहीं किया जाता है। इसका उद्देश्य उन सर्वोत्तम उत्पादों की पहचान करना है जिन्हें पैसा खरीद सकता है, उन नवाचारों का जश्न मनाएं जो उद्योग को आगे बढ़ाते हैं, और उन उत्पादों को पुरस्कृत करते हैं जो बाजार को बाधित करने का साहस करते हैं।
|
केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार दिल्ली में रोहिणी स्थित ईएसआईसी डेंटल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के दूसरे स्नातक समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए श्री संतोष गंगवार ने स्नातक की उपाधि लेने वाले सभी छात्रों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी और उनकी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने सभी छात्रों से अपील की कि उन्हें पूरी व्यवसायिक दक्षता के साथ समाज कल्याण को ध्यान में रखते हुए देश हित में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कॉलेज के संकाय सदस्यों और अभिभावकों का छात्रों के सहयोग के लिए आभार प्रकट किया। श्री गंगवार ने जोर देते हुए कहा कि असंगठित क्षेत्रों के कामगारों और समाज के निम्न तबकों तक चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने की जरूरत है।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम सामाजिक सुरक्षा के लाभ देने वाला प्रमुख संगठन है। यह संगठन नौकरी के दौरान चोट, बीमारी और मृत्यु के समय कम खर्च में चिकित्सा सेवाएं और आर्थिक मदद प्रदान करता है। कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम ऐसे सभी संस्थानों पर लागू होता है जहां 10 या इससे अधिक कर्मचारी कार्यरत होते हैं। इस कानून के तहत 21 हजार तक मासिक वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा और अन्य लाभ प्राप्त होते हैं। देशभर में इस कानून से 3 करोड़ 18 लाख लोगों को लाभ हो रहा है।
इस अवसर पर श्रम और रोजगार और मंत्रालय की सचिव श्रीमती एस. सत्यवती कर्मचारी राज्य बीमा निगम के महानिदेशक श्री राज कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
|
केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार राज्य मंत्री श्री संतोष कुमार गंगवार दिल्ली में रोहिणी स्थित ईएसआईसी डेंटल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के दूसरे स्नातक समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। समारोह को संबोधित करते हुए श्री संतोष गंगवार ने स्नातक की उपाधि लेने वाले सभी छात्रों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी और उनकी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने सभी छात्रों से अपील की कि उन्हें पूरी व्यवसायिक दक्षता के साथ समाज कल्याण को ध्यान में रखते हुए देश हित में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कॉलेज के संकाय सदस्यों और अभिभावकों का छात्रों के सहयोग के लिए आभार प्रकट किया। श्री गंगवार ने जोर देते हुए कहा कि असंगठित क्षेत्रों के कामगारों और समाज के निम्न तबकों तक चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने की जरूरत है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम सामाजिक सुरक्षा के लाभ देने वाला प्रमुख संगठन है। यह संगठन नौकरी के दौरान चोट, बीमारी और मृत्यु के समय कम खर्च में चिकित्सा सेवाएं और आर्थिक मदद प्रदान करता है। कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम ऐसे सभी संस्थानों पर लागू होता है जहां दस या इससे अधिक कर्मचारी कार्यरत होते हैं। इस कानून के तहत इक्कीस हजार तक मासिक वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा और अन्य लाभ प्राप्त होते हैं। देशभर में इस कानून से तीन करोड़ अट्ठारह लाख लोगों को लाभ हो रहा है। इस अवसर पर श्रम और रोजगार और मंत्रालय की सचिव श्रीमती एस. सत्यवती कर्मचारी राज्य बीमा निगम के महानिदेशक श्री राज कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.